Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur

Shribhagwati Sutram Bhag-1 Satak 1-2 Ka Uddesha 10 Tak

Bahadur, Ray Dhanpatsingh · 2011/07

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॥विज्ञापनम्॥ इस अनादि अनंत ससार मे अनादि काल से यारंबार जन्म मरण करते करते जीव पायर योनि मे रहा, किसी एफ अष्ठम कर्मकी लघुता से जैसे पहाडी नदी मे पत्यर गुरते गुडते आपसे चिकना और गोठ हो जाता है, तैसे जीय मी जन्म मरण करते करते पुण्यप्रकृतिरूप यथाप्रवृप्ति नाम करण से यावर पणे को छोड प्रसपने बेरिद्रियादिक में उपजता है, अथवा पचेद्रियतिपत्रयोनि मे, फेर किसी एक कर्मकी लघुता से मनप्य योनि मे पैदा होता है, उसमे भी शक ययन न्वेच्छ देशको छोड आर्य मगधादि जो साढे पचीस देश हैं उनमे जन्म होना-शार्मदेश में जन्म होने पर भी अत्यजादि जाति को छोड उत्तम जाति और कुल मे जन्म होना-उप्तम जाति मोर कुल पाने पर भी सय अगोपाग सुदर प्रमाण सहित होना-शरीर के सुदर होने पर भी दीर्घायु होना-सय अठभकर्म के कम होमाने और शुभकर्म के यजाने से होते हैं नही पोडे भायुधाला पुरुप इसलोकसयधी या परलोकसयधी काम कुछ कर सक्ता है, इसी कारण भग वान् वीतरागने भी हे आयुप्मन् (हे यहे आयुघाट) गौतम ऐसा कहके आयुको सय गुणो से यहा दिख लाया है, और भी अशुभकर्म क लघुता से और शुभकर्मके उदय से धर्मकी रुचि, धर्म का उपदेश करने DETECAR PANDESH पाखा गुरु और उनके वचन का सुनना मिलजाने पर भी देव गुरु धर्म रूप तत्व पर सच्ची श्रछा होना य हुत दुलम है , जिनोक्त तत्व पर सच्ची श्रछा होना यही सम्यक्त है, और सय तो मिथ्यादृष्टियो को भी होता , यह सब अष्ठभकर्म के कम होजाने और धमकर्म के घढने से जीयको मिलते हैं, इस हेतु अठभकर्म का क्षय और शुभकर्म के घटने मे यत्न करना अवश्य है, अष्ठभकर्मका क्षय और भको घढाने के लिये धर्मके सेवाय और कोई भी यत्र नहीं है, इस हेतु धर्म करो २ धर्म ही का सेयन करो, जैसा के घरके कार्य सिछु फरने में अनेक तरह से परिश्रम करते हो कुब काल धर्मके वास्ने भी परिश्रम करते रहो, कारण की धर्मा (धर्म सेवन करने वाले पुरुप) की इद्र आदि देवता भी केवल प्रशसा, अनुमोदना और भक्ति करके अपना जन्म सफड करते हैं, इसनी ऋछि पाफे भी उनको धर्मका सेयंन दुर्लम है, और भी धी को त्रिभुवन फी एक्ष्मी, कल्पक्ष, पितामणि और कामधेनु आप से दास हो मिलसे हैं, तो पुत्र, कलम, घर, सयारी और राज्य मिलजामा क्या घडी चीज है, धर्म साधन करनेयालेका दो घड़ी का जीना भी सफल और कार्य कारक है, परतु धर्म हीन (अर्थात् पेय, अपेय, कृत्य , अकृत्य , गम्य, अगम्य, भक्ष्य, ओ भक्ष्य हत्यादि पिधार रहित) का कोटा कोटी वर्प जीना मी निष्फठ श्री अकिचिस्कर है, पठवत अपना आयु पूर्ण कर मरता है, इंद्रिय का निग्रह करामे याला, सकल कल्याण और सुगति का कारण, भवसागर तरने लिये मीका रूप तीर्थंकरो का कहा हुमा केपठ धर्म ही है और धर्म का मूल दया "विना मतलय पराये , दुम्य को दूर करने की इच्छा,, है दया से धर्म की प्राप्ति और धर्म से जीय मुक्त होते हैं, इसलिए दया सर्यो कृष्ट पदार्थ है । जैन दर्शन मे दया के अनेक "स्वदया परदया द्रव्यदया नावदया निश्चयदया व्ययहारटया स्यरूपदया अनुयघदया ,, भेद घिस्तार से वर्णन किये हैं सर्व दर्शनी दया का उपयोग रखते है परन्तु सर्वाशे दया का उपयोग तो जैन दर्शन ही में स्यीकार है इसयास्ते जैन मत श्रेष्ठ भी कहाता है, दयाफे सर्वाश उपयोग होने की रीति यह है कि जैसे भोजन के वास्ते कोई एक पक्कास यनाया जाय तो घृत पिष्ट चीनी इत्यादि सामग्री अयश्य अपेक्षित होती है सामग्री होने पर मी यथाविधि यथार्य एकठा होने से तथाविध स्वादिष्ट पक्काल तयार होता है परन्तु हीनाधिकवस्तु हो जाने से कदापि यैसा पकान नही होता तैसेही यथाविधि दया पाठीजाय तो तथाविध धर्मोपलब्धि होय यद्यपि सर्व दशनो मे दयाका मान है परतु उस फे स्यरूप में फेरफार कर देने से गतप्राय (अर्थात् अफिचित्कर घृधा) है, जय के उसफा स्वरूपही शाखा नुसार ययाप नही जानशक्ते हैं तो पालन करना कैसे हो सके, फेरफार असा के-कोई कहते हैं पश्चमाण घात अर्थात् पठजन्मसे बोडामा दया है, फोइ जिस शरीर को धारण करके जीव सुखी न होय प्रत्युत दुखित होय व्याधिग्रस्तादि दोप युक्त होय तो जैसे प्राणीको तादृय पारीर से मुक्तकरदेना भी दया ही है, ई सूक्ष्म अपया स्यूल प्राणी जो मनुष्यको दुख देते हैं उनका नाश करना दया है, कोई वलि यागादिक में प्राणियधकरने से भी पुण्य मानते हैं और कोइ स्यूल प्राणिरक्षामान को या कहते हैं, इस तरह दया का उपयोग अन्यदर्शनी रखते हैं लेकिन यह भ्रम है, और एकरीत से-आचारधर्म दयाधर्म क्रियाधर्म और यस्तुधर्म यह चार प्रकार धर्म होता है, इन चारों धमाँ के दान शील तप और भाव धार कारण जय धनयल होय तो दान होय, मनयल होय तो शील पाला जाय, शरीर यल होय तो तप होय, और सम्यग्ज्ञान होय तो माय होय, यह भावधर्म दान शील तप से श्रेष्ठ है किसवास्ते के भावधर्म का कारण झा नयल है "जिस्से वस्तुका स्वरूप यथार्थ जानाजाय उस्को ज्ञान कहते हैं,, ज्ञानसे जैसी धात्मधर्म की वृद्धि और सरक्षण होता है उतना दान शील तपसे कदापि नही, क्योंकि नय, मिक्षेप, प्रमाण, चारो अनुयोग फा विषार, सप्तमगी, पढ्ष्यविचार, आदिक सर्व ज्ञानहीसे जीवको परिपूर्ण प्राप्त होते हैं । दशवकालिक में लिखा है के-ज्ञानहीन पुरुप की क्रिया केवल क्तेमाकप है अर्थात् क्रिया ज्ञानकी दासी है, और मरुदेयी सया मरत महाराज वैसी अवस्थासे मी रहके जो कर्म विमुक्त हुए यह ज्ञानहीका माहात्म्य है, झानकी जो तीदक्षता सो ही अयघचारित्र है, जो निक्राचित फर्म कोटियपपर्यत दानादि करनेसे भी नष्ट नही होता यह ज्ञानी के एकस्वासोत्स्वास में नष्ठ होशक्ता है इसीलिए ज्ञानीगुरु को रखाकर और क्रियागुरु को पीपल के पान जैसा कहा है, ज्ञान विना सम्यक्त अहिसा और सिझान्तोक्त समस्तक्रिया का मूठ श्रझा नही होते इस कारण ज्ञानोपार्जन के लिये अवश्य यन्न करना चाहिए ज्ञानके पाच भेद-मति श्रुत अवधि मनप र्य और केवल हैं परन्तु श्रुतज्ञान सबसे अधिकोपयोगी है क्योकि यह पदार्थमात्र लोकालोफ स्यमत . परमत का प्रकाशक अज्ञानतिमिर को दूर करने के वास्ते सूर्य और दुस्समकालमप रात्री मे दीप सदृश है, उद्देश समुद्देश भाना इत्यादि व्यवहार का लाम मी श्रुतज्ञान सेही होता है इस श्रुतज्ञान के सुनने से शुरू स्वरूप पिछछ श्रमान की प्राप्ति होती है इस्से छात्माका प्राधरण आसेवन अनुभवन होता है और इस्से परमपदप्राप्ति होती है, यही श्रुतज्ञान से पूर्वकाल मे श्रीगोतमादिक केवली हो ससार से मुक्त हुए वर्तमान मे महाविदह क्षेत्र से विरहमान जिनेन्द्रो से सुनके जीय मुक्त होते है , आगामिकालमें पानाभ मादि तीर्थकरोसे सुन अनेक जीव मुक्त होंगे, इस श्रुतज्ञान की याचना पृच्छाना परावर्तना अनुप्रेक्षा और धर्मकपा होती है, श्रीउयाई गूप्रमे धमकथा चार प्रकार की कही है-आक्षेपिणी यिक्षेपिणी निर्वेदिनी और सवेदिनी, जिस्से तत्व मार्ग में प्रप्ति होय उस्को आक्षेपिणी, जिरसे मिष्यात्व की निवृत्ति होय उस्को विज्ञपिणी, जिस्से मोक्ष की अभिलापा होय उस्को निर्वेदिनी, जिस्से घेराग्य की मायना होय उस्को सवेदिनी कहते हैं वह श्रुतज्ञान रूप कथा श्री अरिहन्त देवाधिदेव तीर्थकर परमेश्वर समयसरणमें पैठ "उप्पन्लेइया निगमेइवा धुयेइया,, त्रिपदी उच्चारण पूर्णफ फरते हैं, और प्रिपदी से ही गणधर द्वादशाग की रचना करते हैं (उस्को सूत्र कहते हैं) इस कालमें जितने सूत्र है सब श्रुतज्ञान के नेद हैं यह श्रुतज्ञान सर्वोपकारी है इसलिए इस्की पछि और सरक्षणके हेतु अयश्य यन्न करना चाहिये वर्तमान कालमे जितने ज्ञानवृद्धि के उपाय है सत्र से उत्कृष्ट मु द्रापन्स है इस कारण पुस्तक सुलमता ज्ञानदि की प्रति उत्कृष्ट अति सुगम रीति को स्वीकार करना जो asiaRORAJS050 का उपयोग अन्यदर्शनी रखते हैं लेकिन यह भ्रम हैं, और एफरीत से-आचारधर्म दयाधर्म क्रियाधर्म पौर यस्तुधर्म यह चार प्रकार धर्म होता है, इन चारी धर्मों के दान शील तप और भाय चार कारण हैं, जय धनयल होय तो दान होय, मनयरल होय तो शीठ पाला जाय, शारीर यल होय तो तप होय, और सम्यग्ज्ञान होय तो माष होय, यह भावधर्म दान शीट तप से श्रेष्ठ है फिसयास्ते के मायधर्म का कारण ज्ञा नयल है "जिस्से वस्तुका स्वरूप यथार्थ जानाजाय उस्को ज्ञान कहते हैं,, ज्ञानसे जैसी यात्मधर्म की वृद्धि और सरक्षण होता है उतना दान शील तपसे कदापि नही, पर्योकि नय , मिक्षेप, प्रमाण , चारो अनुयोग का विचार, सप्तमगी, पद्मष्यषिचार, आदिक सर्व ज्ञानहीसे जीवको परिपूर्ण प्राप्त होते हैं । दशौंकालिक में लिखा है के-ज्ञानहीन पुरुप की क्रिया फेवल क्लेशरूप है अर्थात् क्रिया ज्ञानकी दासी है, और मरुदेयी तथा भरत महाराज वैसी अवस्थासे भी रहके जो कर्म विमुक्त हुए यह ज्ञानहीका माहात्म्य है , ज्ञानकी जो तीयता सो ही अयघयारित है, जो निझाचित फर्म कोटियपपयत दानादि करनेसे भी नष्ट नही होता यह ज्ञानी के एकस्वासोत्स्वास में नष्ठ होशक्ता है इसीलिए ज्ञानीगुरु को रत्नाकर और क्रियागुरु को पीपल के पान असा कहा है, झान विना सम्यक्त अहिसा और सिमान्तोक्त समस्तक्रिया का मूल या नही होते इस कारण ज्ञानोपार्जन के लिये अवश्य यन्त्र करना चाहिए ज्ञानके पाच भेद-मति भुत अवधि मनप र्य और केवल हैं परन्तु श्रुतज्ञान सबसे अधिकोपयोगी है क्योकि यह पदायमात्र लोकाठोफ स्यमत गणधर प्राय सुधर्मास्यामी ने श्रीश्रमणसघ और अपनी सन्तति के लिए सूत्ररूप से सङ्कलित किया है। तहा अनुयोग की प्रवृत्ति, फल योग मगल समुदायार्थ द्वारनेद निरुक्तिक्रम और प्रयोजन आदिद्वारों के निरुपण करने से होती है । तहा पहले युद्धिमान् पुरुपों की प्रवृत्ति होने के लिये फल अवश्य कहना चाहिये नही तो वृथा कटक गास्वा मदन की तरह कोइ भी इस्मे प्रवृप्त न होगा, फल दो प्रकार है-प्रयम अर्य का अवगम (ज्ञान) है इस्को अनन्तर फल कहत हैं, दूसरा मर्यावगम होने के याद तत्पूर्वक अनुष्ठान से मोक्ष प्राप्ति, यह परम्पर फल कहाता है। योग अर्थात् सयन्घ, यह कई प्रकार का होता है परन्तु इहा कौन इस्के देनेका काल और कौन इस्के देने के योग्य है असा पवसर लक्षण सबध जानना चाहिये । मङ्गल जो विघ्न निप्ति के हेतु ग्रय के आदि मध्य और अत में किया जाता है । विवाह प्रज्ञप्ति उस पदका समुदायार्थ यह है कि अभिविधि करके कयचित्समस्तज्ञेयध्याप्ति अथवा मर्यादा से जो पूछे हुए जीय पजीव आदि अनेक पदार्थो का जुदे जुदे लक्षणो से कहना सो व्याख्या यही सुधर्मा स्यामीने अपने शिप्य जयू को प्ररूपण को सो इस ग्रथमे कही है, अयया विशेप तया जीप अजीय आदि अनक अभिलाप्य पदार्थो की वृत्ति इस्मे कही है, अथवा व्याख्यान का प्रष्ट ज्ञान इस ग्रयमे है , तथा PANCHAR के पूर्वाचार्योंने घटे परिश्रम से परोपकार के हेतु अथ बनाये है छपवाके प्रसिद्ध करना हर एक विद्वानोको देना इससे अधिक और कोई श्रेष्ठ कार्य नहीं है, यही सय कारण शोच श्रीमुर्शिदायाद नियासी श्रीराय धन पतिसिह यहादुर ने १५ आगम छपवाके हरेक जगे नकार स्थापन किये है आप लोग मी ययाक्ति इस्के फरने को प्रप्त होय के जिस्से पुन जैनमत युवायस्या को प्राप्त होय इति शम् ॥ बनारस जैनप्रभाकर नानक चन्द्र यती भूमिका। श्रीमगवती नामक पचम अङ्गका अनुयोग समयायाग चतुर्थ अङ्गानुयोग के अनन्तर क्रमसे प्राप्त हुआ है। विवाहपणप्ति पचम प्रगानुयोग, राग और टेप आदि विपम भायात्रुश्रो की सेना के दलन करनेसे सपा त्रिभुवन के समस्त पदार्थों को हस्तामलक समान देखना और जानना तत्पूर्वक निसयाद रहित यचन होने से प्रिनुपन दप घरके आगन में सुधासमान निर्मल जिनके यशको राशि फैल रही है ऐसे जिनेन्द्र परम करुणायन्स श्रमण भगवन्त श्रीमहावीर यईमानस्यामि पीवीसमें तीर्थकर महाराजने जैसा कहा उनके पाचये AmmOOD गणधर पाय सुधर्मास्वामी ने श्रीश्रमणसघ और अपनी सन्तति के लिए सूत्ररूप से सङ्कलित किया है। तहा अनुयोग की प्रवृत्ति, फल योग मगल समुदायार्थ द्वारनेद निरुक्तिक्रम और प्रयोजन आदिद्वारों के निरूपण करने से होती है। तहा पहले युद्धिमान् पुरुपों की प्रवृत्ति होने के लिये फल अवश्य कहना चाहिये नही तो वृथा कटक शाखा मदन की तरह कोई भी इस्में प्रगुप्त न होगा, फल दो प्रकार है-प्रयम अथ का अवगम (ज्ञान) है इस्को अनन्तर फल कहत हैं, दूसरा अर्यायगम होने के याद तत्पूयक अनुष्ठान से मोक्ष प्राप्ति, यह परम्पर फल कहाता है। योग अपात् सयन्ध, यह कई प्रकार का होता है परन्तु इहा कौन इस्के देनेका काल और कौन इस्के देने के योग्य है जैसा ऽपवसर लक्षण सबंध जानना चाहिये । मङ्गल जो विघ्न नियप्ति के हेसु ग्रय के पादि मध्य और अंत में किया जाता है। वियाह प्रज्ञप्ति इस पदका समुदायाय यह है कि-अभियिधि करके कयचित्समस्तज्ञेयव्याप्ति अयया मर्यादा से जो पूछे हुए जीय अजीव आदि अनेक पदार्थो का जुदे जुदे लक्षणो से कहना सो व्याख्या वही सुधर्मा स्वामीने अपने शिष्य जयू को प्ररूपण की सो इस ग्रघमे कही है , अयया विशेप तया जीव अजीव आदि अनक अभिलाप्य पदार्थों की शृत्ति इस्मे कही है, अथवा व्याख्यान का प्रष्ट ज्ञान इस ग्रथमे है , तथा PRMARWARomaa प्याख्या में विशेपतया युदि की प्राप्ति इस अपसे होने और विशिष्टनयमबाह अर्थप्रयाह इस ग्रथ मे कहने से व्याख्याप्रज्ञप्ति असा नाम इस्का हुप्पा । नगवती, व्यावाध प्रज्ञप्ति, यह पर्याय है। नाम यथाथ (जैसा प्रटीप) अयथार्थ (जैसा पसाग) अयशून्य (जैसा डित्य) भेद से त्रिधा होता है परन्तु शास्त्र का नाम यथार्थ ही होना चाहिये क्योकि समुदायार्थ की समाप्ति यहाई होती है। व्याख्या प्रज्ञप्ति यह नाम स्थापना द्रष्य क्षेत्रादि भेद से १५ प्रकार का होता है सो स्थानाग के समान इहानी जानना, व्याख्याप्रझप्ति इहा अन का निक्षेप झायोपशमिक भावरूप प्रनयन पुरुष के अग की तरह अग होने से छुपा है इसलिए व्याख्याप्रज्ञप्ति अग ऐसा नाम हुआ। यदापि अग निक्षेप नाम स्थापना द्रव्य और नाय भेदसे चार तरहका होता है तथापि इहा केवल मायागहीका अधिकार है क्योकि यह ग्रय दायो पमिकादि माय का कारण है।' इस व्याख्या प्रज्ञप्ति पचम अन्न का तात्पर्य शीघ्र जानने के लिए उपक्रम १ निक्षेप २ अनुगम ३ और नय ४ अनुयोग अर्थात् सूत्र का अर्थ स सबन्ध अथया सूत्र का प्रय प्रतिपादनरूप अनुकूल व्यापार अ र्याद सूत्रार्थ प्रयपणकप क्रियाविशेप कहे हैं, यही चारों जैसे नगर में सुख से प्रवेश करने को चार द्वार होते हैं तैसे इस प्रयघन में प्रवेश करने को चार अनुयोगरूप द्वार (प्रवेशमुख) है । शास्त्र को न्यासदेश के समीप फरदेना सो उपक्रम लौकिक और शाखीय भेद से दो प्रकार होके क्रमसे प्रत्येक नाम स्थापना Hindi द्रम्प क्षेत्र काल माव और आनुपूर्वा नाम प्रमाण वक्तय्यता अधिकार और समयतार भेद से छ प्रकार है, निक्षेप अथात् न्यास स्थापन, श्रोघ नाम सृषालापक से तीन मेद हैं। तहा सूघालापकनिप्पन्ननिक्षेप सुन के मालाओ का नाम देना जैसे कि व्यास्याप्रज्ञप्ति इत्यादि । अनुगम सुत्रका स्थापनार्नुकूल परिच्छेद । नय अनन्तधर्मात्मक यस्तुके एक अराफा ज्ञान का कहत हैं जो उपक्रान्त नही है उस्का निक्षेप नामादि नही हो सक्ता जिस्का निक्षेप नही हुमा नयो से विचार भी नही होता है इसलिए इन अनुयोगद्वारो से एफयुत स्कन्ध, सातिरेक अध्ययनशतस्यमाय, ४२ शतक १०००० उद्देश रूप व्याख्याप्रज्ञप्तिसूत्रकथित जीयाजीयादि पदाय ज्ञात होने से तत्यज्ञानरूप परम पुरुपाय सिछ होता है इस कारण इसके पढने पढाने में अवश्य यटा करना चाहिये । परन्तु पढ़ने का अधिकारी वही होगा जो के मोक्षमार्ग अभिलापी गुरूका प्राज्ञाकारी औदीक्षालिये जिस्व ११५ वप व्यतीत हुआ होय । व्याख्याप्रझप्ति अग सूप्रदेनेका अवसर भी वही है इति शम् । ARRCance-002 . मकसूदाबाद अजीमगज राय धनपतसिह बहादुर- Dinodieta DOORD प्यारया मे विशेपतया युदि की प्राप्ति इस ग्रपसे होने और विशिष्टनयप्रवाह अर्थप्रयाह इस ग्रंथ मे कहने से प्याख्याप्रज्ञप्ति असा नाम उस्का हुआ । जगवती , व्यायाध प्रज्ञप्ति, यह पर्याय हैं। नाम यथाथ (जैसा प्रदीप) भययार्प (जैसा पलाश) अर्यशून्य (जैसा हित्य) भेद से त्रिधा होता है परन्तु शास्त्र का नाम यथार्थ ही होना चाहिये क्योकि समुदायार्थ की समाप्ति वहाई होती है। व्याख्या प्रज्ञप्ति यह नाम स्यापना द्रव्य क्षेत्रादि भेद से १५ प्रकार का होता है सो स्थानाग के समान इद्वानी जानना, व्याख्याप्रज्ञप्ति इहा अङ्ग का निक्षेप झायोपशमिक भावरूप प्रवचन पुरुप के अग की तरह अग होने से हुआ है इसलिए घ्याख्याप्रज्ञप्ति अग ऐसा नाम हुआ। यदापि अग निक्षेप नाम स्थापना द्रव्य और नोव भेदसे चार तरहका होता है तथापि इहा केवल मायागहीका अधिकार है क्योकि यह ग्रप झायो पशमिकादि भाय का कारण इस व्याख्या प्राप्ति पघम अन का तात्पर्य शीघ्र जानने के लिए उपक्रम १ निक्षेप २ अनुगम ३ और नय १ अनुयोग अर्थात् सूत्र का अर्थ स सबन्ध अधया सूत्र का प्रर्य प्रतिपादनरूप अनुकूल व्यापार अ र्थात् सूत्रार्थ प्रयपर्णकप क्रियाविशेप कहे हैं, यही चारों जैसे नगर मे सुख से प्रवेश करने को चार द्वार होते हैं तैसे इस प्रयधन में प्रवेश करने को घार अनुयोगरूप द्वार (प्रवेशमुख ) है । शास्त्र को न्यासदेश के समीप करदेना सो उपक्रम लौकिक और शाखीय भेद से दो प्रकार होके क्रमसे प्रत्येक नाम स्थापना ॥ अथ भगवती सूत्र पंचमाङ्ग प्रारम्भ ॥ BRE ॥ विज्ञापनम् ॥ भागीदमाममोपापपुरमा भीवीरदासानिपतत्पुमोवुपसिझवाजतपझास्मूमुस्तदीयोग । स्यात घोलप्रसापसिविषयी मायातुरीयामती तस्पनीमहताबनामबिपितास्तदीपावनत् । १. ज्योतिरदारपर्मदृढी सत्मीपतेः सोदरः नामदाययहादुरोधनपतिः सिदोगुगग्रामणी । जीवनापमसहरसमबरोधोकोपळस्पैपिरम् टोबावाप्तिबमयुतलिपिमिःसमुद्रपित्वा मम् । २ । सत्यापनातस्यलपुषपुनस्तापरत्यकोपुस्तबा गा रास्पपुषपुस्तकानिसवसाम्पत्यापपत्तादरम् । पुरावागमपाठनमपठन सरसापामावकाः पित्यैचोजिनशासमस्प चपुनधि मानधर्मप्रपे ॥३॥ प्रामस्तस्पचतु पीप्रमवतासूत्राभिषामोपुना मामापुरतरूपाउनेदवासोसमप्रमादापि । दुवाच्यारासुकृत्तिवास्तिकप्तपाठतपासातनं घीमस्पूजिप्तरा मचन्द्र परिनिशातपुष्यामया ०४६ सगोप्पाविपरिममेगमितरां बाबरमपूत स्याप्तवापिपतिप्पिदोषणगतोम्मादावशुद्धपदि । पात्यायोध्यम् रारतिविमवि रूपादृष्टिवो मिप्याकुम्भवमस्तु नम्रवासासम्प्रापप सम्मनाम् ॥ ५ ॥ motcompBlaonuclosed NE धनारम अनामनाकर मानसात पती ॥ धीमदाप्ताय नमः । श्रीधिनायनमः । सर्वप्रमीयरममन्नममनमग्य सार्वायमस्मरमनीशमनीहमिलम् । सिशिवशिषवरकरव्यपेत नामलिनगि तरि{प्रपतःप्रोमि ॥ १॥ नत्यानीवदमानाय भीमतपमुधमये । सर्वानुयोगद्देन्यो वारपैमर्यविटसपा ॥ २॥ सतहीक्षापूर्वी प्रोवानिगमादित तिसाप । सपोन्सपम्पमात्र वियोमिविशेषतःगिन्धित् ॥ ३ ॥ प्यास्यात समवायास्य चतुर्पमा मपावसायातस्प वियाश्पसतिप्ति' समितस्स प समाङ्गस्य ममुन्नतमयकुमारस्पेव ससितपदपद्धतिमयुमनमगोरग्जनस्य उपसर्गनिपाताय्ययस्वरूपस्य घनोदारसदस्पलिङ्गविमत्तियुक्तस्य सदास्यात म्पमान वनस्प देवतापिठितस्प सुवयमपिरतोद्दशकस्स मानाविभागुतप्रवरचरितस्य पप्रिझरममसहस्रममायसूत्रदास्य पतुरनुयोगचरणस्प ज्ञानवरस मयनपुगसस्प इय्यास्सिम्पयापातिकनपहितयदम्तमुसलस्य निवपथ्यवहारनयसमुखतान्महपस्प योगमफययुगसस्प प्रस्तायनायधनरपमानकापाशु पादयास्स निगमनयपनातुपुष्यस्य वासाद्यप्टमकारमयवनोपचारचारूपरिकरस्य उरसर्यापवादपावसमुशसदतुष्यदायुमप्लपोपस्य यशापटप टप्रतिरयापूषदिनमवालस्प स्पादादविवादकुशवाकतस्य विविधतुरेप्तिममूसमन्वितस्य मिथ्यात्वाधानाविरमणलपपरिपुषलदसनाय श्रीमन्म भावीरमाहारामम नियुक्तस्य यसनियुकासल्पगबनापक्रमतिप्रकत्पितस्य मुनियोथै रनाषाघ मधिगमाप पूर्यममिशिल्पिफल्पितयो र्यधुमयरगुपत्येपि अभ्यतया मताभव याश्चितवनुमापनसमघया वृत्तिपिनाझिम्पो सदन्यपाश्य बोयानिगमादिविविविवरसदवरफलेशानां महाहनेन पहप्तरा प्रतण्या माता मप्पपकारिकी स्तिनापगादेगादिय गुरुजनयपना पूवमुमिशिल्पिकुलोत्पन्न रस्मानि माझिकेवय पति रारम्यत इति शाखाममा बना अप पियारपमतिति क. बादाय ? उत्पते विविघा जीवाशायादिप्रचुरतरपदापविषया था मनिविधिना कपनि निसिस यष्याप्त्या मया दयाया परस्परामहालतमामिपामहपपा स्मानि भगवतो महावीरस्प गौतमादियिनयान् प्रति प्रमितपदार्थमप्तिपादनानि प्यास्या स्ता' म पाप्यन्ते प्रहप्पस नगयता सुपमनामिना जम्धूनामान मनि यस्याम् १ । मथवा विविधतपा विझरया प्रास्यायतइति व्यारसा प्रतिसाप्यपदाथ

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- पदार-मोमवमुपमा घनतरनप्ति ॥ प्रतः भानरपा दायेव परमेष्टिपकनमस्कार मुपदर्श यभार ॥ नमोपरासायमित्यादि । तत्र नमइति मैपा तर पदं यनावालाप मान-मयाइपपदद धमाषसकोपपपपत्यो नमः परपरसमस्तकसुप्रविधानरूपी ममस्कारो प्रयस्वित्यपः । न्यइत्या पनि प्रमरयरविनिम्मिताशोकादिमामातिहायरपा पूरा मईन्ती त्यहन्तो यदा-परिहतिवदगनम सगपिपरिहतिपूपसकार । सिनिगम पंचपरहा भरतात ययाति ॥ १॥ प्रप्त सतन्य पाच सुष्यपष्ठी प्राफतीतीषशा दविद्यमामपा रह एकान्तरूपो देशो तय मध्य मिरिगुजा दीना मघवदितपा ममस्तषस्तुस्तोमगतप्रयनस्यस्पा प्रापेन येपास्ते परहोमारो त सोन्यो होतो त्यया विद्यमानो रथा स्पन्दनः सकसपरि यहोपलतपनूतो भाय यिनागो भरायुपसवबनूतो पेपति रिपाम्ता प्रत सोन्यो पिया रहताति चिद प्यासक्ति मगनमा जीवरागत्वा दप पा रापल्या माठरागादिोतुभूतमनोधेतरविपयसम्पर्केपि वीतरामस्वादिवखनाव मत्पनध्य इत्पर्षः परितापमितिपाठान्तरम् तत्र पर्माशिव ध्या भारत-प्राविपिपफम्म परिनूपहोइमपसत्रीया । तपम्ममरिहता परिहतातेति ॥१५ परहतास मित्यपि पाठान्तरम् तपा रोपड्यो निपनापमानम्या सीपकामधीजस्या दारच-दापीजेपपात्यम्त प्रादुनयतिनापुरः । कमयी नेतपादापे मरोपतिनापुरः॥१॥भमस्करबीयता पैपा प्रीमनवगानन्नमवलीसनूताना ममुपमानन्दपपरमपदपुरपपादकत्वेन परमोपबारित्वादिति ॥ नमोमिवारति । सित व मष्टप्रकार पमन्धन यात दापं जाग्यम्पमामगुरुप्यानामसेम यस्ते निरुत्तपिपिना सिहा प्रभया पिपुगता वितियचनात् सेपन्तिस्म पुनरावृत्या भिवृतिपुरी मगच्छन् ॥णा णमोश्चरहताण णमोसिहाण परिणीव भगतोवा पाया । शिवनपरमेटि नमवार ममतपवाये। ममावोये नमनारमा फोहमे परतापपाता परतनेजानते परतिगमा पन पोरे उपना पगाचादिमहापानिहायकप पूजानेवाग्म ते परतत कहोवे । तवा पटवामाप मेरो सखा से परिहत । तथा पातार इस पिपाठ । नमोकाता नमस्कारापा केम ! मिहाप सिहनशाने परमबारकर्मवध समसानप पनि करो प्वामीने जे भोपपाहता पत्तम मताः प्रज्ञाप्पो यस्पाम् २ । अपवा व्यास्यामा मर्षप्रतिपादनामा प्रष्टा चप्तयो पानानि पस्या मा ध्याग्याप्राप्ति३ । अषया व्यायापा अपापमस्य मचाया तहातनूतबोधस्य व्यास्पासुधा मचाया प्राप्तिः माप्ति प्राप्तिधा पादाम यस्पा मकामा दमो प्यारयाममाप्ति य्याग्मामशा हा भगवत समाझा दाप्ति राप्तिर्वा गपपरस्य यस्या मातथा ४ । प्रथया वियाग पियिषा दिगिटावा पप्रयाता मयमयावा प्रताप्यन्ते प्ररु प्पते प्रीमन्नेवा पस्या विवाहावा विशिष्टसनतामा वियापावा प्रमाणापापिता प्रज्ञा पाप्पन्ने यस्मा यिया पासोवा प्राप्ति पायरुपमा वि वासमाप्ति विवाहप्रचाप्ति विधायप्राप्ति विवाघमज्ञाप्तिवा ५ । इयच प्रगयसी त्यपि पूज्यत्येना मिधीपसरति सध्यान्यातारः दाराव्याम्पाना रम्भ प्रसपोनमहलममुदापार्यादीनि हारारि वर्षयन्ति तामिपाव्यास्याया विझेपावश्पकादिभ्यो विमेयानि दासफारास्तु यिनधिनायकोपरगनि मित्त विनममनप्रवत्तमाया मिष्टमनसमयममाघरपायवा मातानिधेयप्रयोजनसम्यन्धा नुदाहरनित' साप सकलकल्यायकारणतया :भिरुममारपस्प प्रेयोपूतत्वेन विना सम्मवन्तीति तदुपशमनाप मतान्तरष्यपाहम मावमङ्गत मुपादेयं मलामारस्पा नैकान्ति कस्या दमात्पतिमायाप मायमाल स्पतु तद्विपरीततपा मिसपितापमापनसमपत्वम पूसरमा दाग-किपुचतमपंगतिय मतदातनिहायार । तबिवरीपनाये तेनयिमेसेमतप १० भावमातरपत्र तप प्रमृतिमदनिबत्वेमा मेवषिपत्वेपि परमेष्ठिपप्पकनमस्कारसपं विशेषेण पादेयं परमेष्ठिना महतस्वलोकोतमस्वझर स्यात्वानिपाना दाह-तारिममसमित्यादि । तब ममस्कारस्यच सर्वपापमयाझफत्वेन सयविघ्नोपशमहेतुस्या दार-एपपचनमस्कार सयपा पप्रधाथमः । मालानारसर्वपा प्रथमन्मवतिमासम् ॥ १॥ अतएवाय समस्तश्रुतस्वघामा मादा पादीयते पतप्पाप तेपा मन्यनतरतया निधीयते - पींचोपरमामनेनम । देवरेपविमनस्वा स्वायतदेवता पात्तिकपचायत पोहच्यनमारत ।१ । समवायनामेचीरंग बानो, विपास पत्रलोनाम पचामबजोगेशे। ते विवारपबत्तो बहाये । विविधाता नानाप्रबार वोपानिपनप योमहावीर में गोतमानिगिया प्रत्रपटा तकम विवाहपक तोकहोये, प्रथमा विविधता सम्भावना प्रधानमना प्रयासपीये मेरनेवि निशानिया पतीने कभी एप भमकतो ।

मो पापिना उपाधीषा पायो लानः श्रुतस्प येपा उपाधीनांवा विशेपरानो प्रसमा योनमामा मायो सानो येन्यो :पया उपाधिरेय सन्निपिरेव मार्य इएफलदेयत्रमितस्यन प्रायाना मिष्टपलामा समूत्र सादकत्या धपा प्रथया भाषीमा मम पीठाना मायो सान पायाया अधियावा मनः फुरमापत्या मयुद्धीना मायो थापः चिम्तायामित्यस्प पाप्तोः प्रयोमा नतः कुस्सार्थत्या देय दुष्पानवा अध्याय सपश्तो ध्याय प्राध्यायोया के मते उपायापा प्रत मोम्यो नमस्पता पो मुसम्मदायासजिनवधनाध्यापनतो पिमयेम नव्याना मुपकारित्वादिति ॥ नमोसवसापति ॥ साधय स्ति पानादिशत्तिनि मौतमिति मापय ममतावा सषभूतेषु भ्यापन्तीति निरुक्तिन्पापा सापवो पदाइ-निधाणसापरजोस जहासातिसायो। ममासमवनसुतमातेनायसाहुया ॥ १५ साहायकया सपमकारिणा पारयन्तीति सापवो मिरुत्तरेय सधते सामायफादिविशेपपा प्रमतादयः पुमाका या गिगफरिपर प्रतिमाकस्पिक यमालवस्पिा परिवारयिाहिकल्पिक स्थविरकस्पिक स्थितकल्पिा स्थितास्पितमास्पिक पाल्पासीतन दा प्रत्यम्युहम्पत्यायोधितनेदा भारतादिमदा सुगमदु समादिविशपितावा सापवा सघसाघयः सवग्रामप सर्वपा पुग्यता मषिशेपनम गोपतामतिपादनार्य रदपा पदादिपदेवपि वोदय्यम् म्यायस्प ममामात्यादिति अयथा मन्यो जोवेभ्यो हिता सार्या सोध ते साघयय सावरप या तो मत पदादेः साधया साप सापयः सर्वाम्या घामयोगाम् साधयम्सि कुवन्ति सार्वाम्या हतः साधयन्ति तदाचाफरणा दारापयन्ति प्रतिष्ठा पपस्तिथा दुनयनिराकरणादिति सर्षमाधयः सार्यमाधवोया प्रयया अश्येषु अषवाई वारपेषु अथपा सय्यामि दक्षिणा म्यनुकालानि यानि कार्या णमोलाएसघसाक्षण शेरले उपाधाय पोये । ममाया नमस्कार भी करनेवाले समसार सवसाधुनेवाले पानादि गरी माघमाम साधे ते सास, सस मधेरो मामाधिपविगेप पप्रमत्तादिव पुनावाविव विनय खिच परितारविमरियसिक प्रतिमाकम्पिक यथाशिमादिपस्थिक प्रत्येकबुद्ध मय गावावितममा बोजापपिजे गुणवव सब तो प्रवियरो नमार पो। ए सवमाघमागमहागबरवरी उपगारोछे । नमो कावा नमस्खा अपवा यिपुसरामापितिवमा सिप्पम्सिस्म निष्ठिताधानवम्तिस्म यथया पिपूगाले मागस्पे चेतियचमा रमपन्तिम्म शामितारोऽनूयन् मङ्गस्यरू पता चामुनवन्तिस्मति मिदा प्रथवा सिमा निस्पा अपयवसानस्पिसिकत्या प्रत्यास्याताया भय रुपलब्धगुणसन्दाहरया दााच-प्यातसितपनपु रावसम्म योषागतोनिवृतिसौधमूदनि । स्पातामुशास्तापरिनिहितार्थो यासोस्तुमिदासतमलानोमे ॥ १॥ प्राप्त मोल्यो नमः ममस्करम्यता या म विप्रयाशिवामदमनसुखवीर्यादिगुरुयुक्ततया स्त्रविपपप्रमोदप्रकर्पोत्पादनेन प्रव्याना भतीजापझारहेतुत्यादिति ॥ नमोमायरियापति ॥ पा मयाद पा सद्विषयविरयरूपया पन्ते सेव्यम्त भिनयासनापदरास्तया तदाकाशिनि रित्यापायों उक्तम्प-मुप्तत्ययिनलयषण शुप्तोरावस्समविनूप । गपतत्तिविप्पमको प्रत्यवाएरमापरिन्ति ॥ १ ॥ अथवा प्राचारो घामाचारादि पप्पा मा मपादपा यापारो विहार अाधार साप माघय स्वयंवरमा मनापसात् प्रदर्शना ऐत्याचा प्रार-पत्रविमापार पापरिमाणातहापयासंता । पायारदसता पायरियातेयुपसि ॥१॥ पवा भाईयत् अपरिपूर्णरस्पष पारा रेरिका ये ते पाचारा धारकल्पाइत्पर्यो युत्तायुक्तपिनागनिकपणमिपुरा यिनया प्रत सोयु सापया या पचावार्योपदेशवतये त्याचार्या प्रत सोन्यो ममस्यता पा माघारोपदमफतपोपझारिस्यात् ॥ नमोउयझायापति ॥ उप समीप मागत्य अपीय ते परमप्ययमे इतिवमा त्पठनते इस्वतावितिषचना हा अपि प्राधिपेम गम्यते इस्मरसे इतिषपना द्वा स्मयते यतो विनमयचम मेम्प स्त अपामाया यदार-धारसपोविनक्साई सिकासबस्टियुरे । तउयरस्सतिमम्दा उषमायासेपयुषंति ॥१॥ प्रथया उपायान उपाधि सग्निपि ते णमोशायरियाण णमोउवम्कायाण सिपको पाम्मा ते सिवाहोये । ममाता नमझार पानपानापायरियार पाचायनेवावे किनगासमना पथ उपगि मयागदि तामे पारस दिनयाटियरी सेमी ते पापाय पहोये प्रथवा प्रामाटि पच पाचार पोते पादर उपरिण पत्ताय ते पाचाय । नगाant नमबार मा वामेवारमामान बरतां पाप्यापनेमा रप्पारेपग पाडपांग २१ भ २४ भगाये १५ पदवीमा मरिता तथा ने नमो न मो पाधिमा उपापीया थायो सामः भृतस्प येषां सपापीमावा विझेपणानां प्रक्रमा योननाना मायो सानो येन्यो थवा उपाधिरेव सविधिरेय प्राय बटपलवैवानितत्यम पापामा मिष्टपतानां समूा तदकहेतुस्या घेपा प्रथया मापीना मनःपीठाना मायो साप्न पाध्यायः अपियावा मनः फुल्मायंत्या रुपतीना मायो भायः चिम्तायामित्यस्प पातोः प्रयोगा नमः कुस्सायावा देव दुर्पानवा अध्याय उपातो पाय प्राण्यायोवा ये से उपाध्याया प्रत सोन्यो ममरयता चैपो सुसम्प्रदायातजिमवचनाध्यापनतो पिनयेम भष्याना मुपमारित्वादिति ॥ नमोसवसायति ॥ सापय न्ति पानादिमसिनि मोपमिति सापय ममताषा सर्वभूतेषु प्यायन्तीति निरुक्तिन्याया स्साघवो यदाह-मिद्यागमाहरजोर बमहासातिसारपो। ममापसचनपसु तमातेनायसाहो ॥ १७ साहायकया सपमकारिया धारयन्तीति सापको निरुक्तरेय सर्वेचते सामापशादिविशेपणा प्रमतादयः पुसामाग्यो मिमफस्पिड मतिमावस्पिक यथासदकरिपक्ष परिकारषिगुदिकम्पिक स्थविरकल्पिक स्पितकल्पिा स्थितास्पितफस्पिफ कल्पातीतन दाः प्रत्यायुास्थपयुवायोपितनेदा भारतादिलदाः सुतमदुमादिपिशपिसाया साधवः सवसाधवः सवग्रहणघ सर्यपा गुगवता मधिशेपनम मीयतामतिपादमायें रखवा दादिपदेवपि वोदय्यम् म्यायस्य ममामात्यादिति अपया सर्वेन्पो जोफेन्यो हिसा सार्या सोच से सापचय सावस्य या तो मत युहारः मापया सार्यमापयः सर्वान्या अमयोगाम् नाभयम्ति फुयन्ति सार्वाम्बा एता सापयम्ति तदानाकरमा दारापयन्ति प्रतिष्ठा पपरितवा दुनपनिराफरणादिति सर्वमापय मार्यमाघवोवा भपषा अश्येषु प्रवदाईपु धारपेषु प्रथया सय्यामि दक्षिा म्यनुकूलानि मानि कार्या णमोलाएसघसाक्षण गोरत पापाय कोये । नमामा नमस्कार पो पानेवाले समसाझा सवसाहनेवाले सानादि गोबरो मोचमाम साधे ते साठ, इस यमगरो मामाविकपविगेप पप्रमत्तादिक पुनावाटिव विनवाधिक परिवारविगरिकस्मिक प्रतिमापल्पिक पवानिगादिवस्पिक प्रत्येकमुष सय पुस्मुरारितामुप गोशापरि मुभषव सप ताने पविषेवरी नमसार पामो! ए सर्वमाषमागसहायपरवरी उपगारी । ममा काता नमस्ता ? ܝܘ रिसेपु सापयो निपुवाः सम्यसापः सव्यसापवोवा ति सभ्यः नमोसोम्सबमाइगमितिकचित्पाठः तय मवादस्य देशसर्वत्तायामपि दशमा दपरिोपसवतापर्धनाप मुच्यते सोछे ममुष्यतोच मत मचादी ये सर्वसाधव न्यो ममहति एपाच नमनीयता मोतमार्गमादायककरणेनो प कारिस्वात्' पाइप-असहारसहायन्त करेंतिमेसंधमारेतस्स । एएणकारपेग ममामहसवमाइगति ॥ १५ मनु यद्यप सत्तेपेण नमस्कार सदा सि सापूनामेव युक्त मदरसे न्येपा मप्पादादोनो पहरा धतो नंदादयो म सापुत्व प्यनचरम्ति ? पयविस्तरेण तदा थपनादिष्यक्तिममुभारण सौ वाच स्पादिति ? नेष यतो न साघुमावनमस्बारे गदादिनमस्त्रारपाल मयाप्यते मनुष्यमापनमस्कारे राजादिनमरतारपालपदिति' फात 'विशेषतो मी प्रतिव्यत्तितु मासौ वायो झाल्पवादवेति । ननु पघामपानन्याय मट्टीरुत्य सिदादि रानुपूर्या युक्ता प्र मिदामा सवथा कतर न सर्वप्रधानत्वा ? व मापदेशेन सिमाना पायमानत्या दर्यतामेवच तीयप्रवर्तनमा त्यस्तोपसारित्या दित्पादादिरव सा' मन्वय माचा दिसा प्राप्नोति ऋषिकाले भागन्या सहामा दादादीनां जायमानस्वादिति प्रतएव तेपामेव पारपतोपफारित्या ? नेष प्राचायाणा मुपदे दानसामर्थ मांदुपदमतरव महि स्वतन्वा प्राचार्यादय उपदेशसो पिचापमस्व प्रतिपद्यरत प्रतोन्तिस्य परमान सयापचापमा सया मात्र रिपपारवा पार्यादयो ति स्ता यमसत्यान्नमस्वरस मयुक्त उक्त-वपकोइपिपरिसाए पगमितापनमगरणोसि ॥ मयं तार त्परमेष्ठिनो नम रहत्या घुमातनजनामा मुतनामस्या त्पन्तोपगारित्वा तस्यप द्रव्यमायभुतपस्या गायनुतस्यष द्रव्यमतरतुफत्या त्मन्यादररूपद्रय्यतनमररुपमा ॥ नमोवत्रीयसिवीरति । सिपि पुस्तकादा वानरविन्याम' मा पाटादगमकारापि ग्रामझानेपजिनेन वसुताया प्राझीनामिझाया दगिता ततो प्राली त्यप्रिवीयत प्राहर-सेसिवीविहार मिरेपर्यनीरवाहितबरेग। इत्यतो ग्राझीप्ति स्वरूपविझेपण सिपेरिति नन्वपिरुतगासस्पैयमल्ल णमोयनीएलिपीए रामायने वभौएनियोर नामोसिपिमे पुरावादिषनेविपे पचरगापमाप से पठारेमबारे सपम पोतानोपुषी प्राचीने देशासी तेमा मामी P स्यास्किमासेनामयस्पादिदोपप्राप्तः ? सत्य सितु शिष्यमतिमतपरिग्रहार्य मङ्गलोपादान शिष्ठसमयपरिपालनाय घेत्युक्त्वमेवेति प्रनिपादयः पुनरस्प सामाम्येन व्यायामप्रप्तिरिति मात्रैवोचाइति तेपुम!च्यन्ते ततएव यावृप्रवृत्पादीएफलमिद्धे सपाहि दह नगयता :र्षष्यास्याप्रनिपेय तयोक्ता तानाच मनापना घोषा मम्तरपात परम्पराफालतु मोक्ष. सचा स्पा प्रवचनत्वादेय फसप्तपा सियो नसाप्त सापात् पारम्पयवा यत्र मोता तरप्रतिपादयितु मुत्सात पनामस्वमसङ्गा तथा यमेव सम्बन्धी यदुतास्प झातस्पेद प्रयोनममिति? तदेव मस्पझाखस्यै कमुतस्कम्पलपस्य मातिरेकाम्यमनमतस्यनायस्य उद्देशकदशसहस्तीममारस्य पझिंझरप्रमसहस्रपरिमावस्या पाशीतिमाखाधिक्लवद्वयममारपदरासे मनसादीनि दशितानि अप प्रपमे शात ग्रन्पान्तरपरितापपाध्ययमे दशो देशकामवति, पदमका थाप्पयनादेशानिपापिनो पियमविमागाः । उदिश्यते रुप पामविधिना गिप्यस्पा पाव य तावम्त मध्ययनानाग मपीधेवमुद्देगा स्तरवो एभवा तांध सुसपरसस्मरवादिनिमित माद्याग्निपयामिधामद्वा रंग मशगीत मिमागाधामाद। रायगिोत्यादि । अधिकतगाथाप यद्यपि पश्यमायोदशकदशकाभिगमे स्वपमेवावगम्पते तपापि पालामा म गाययोपाप भनिपीयते तर रापगिद्देत्यादि लुप्तसप्तम्पेकवचनस्वा दाजगहेनगरे वापमायोपपस्यार्थो भगवता श्रीमहावीरेग दर्शित इतिव्यास्मे में एय मन्यनापी अधिभक्तपम्तता बसेपा ॥ पसबत्ति ॥ चलनविपया प्रघमोद्देशकः चप्समावेचलिए इत्याद्यर्थनियार्थइत्यप । दुस्थिति ॥ दुः रायगिह घरण १ दुस्के २ लिपिकोये । पाप सेहनिपोविका निपपरभौशामियरपति । प्रामाचिपिना पप्प वियप पापबा, विपन्सनोमानसिपीए, एभगम लोम११८ गतबके, प्रत्यक्षोममाप्रमाणे, पदनात प्रवासोसमप्रमापरे । शिवप्रथमगत दश लोया योमहावीरदये रानगानगरनेविपक मा तहमा नाम मागाबरोबो, चमन । पतमापसिप इत्यादि । वम विषयपवनो निण्यरूप परिमोटोगा नव मना भरियो । दुक्ति। हेममपत योग प्रापनाबमामादकता कमवेदै । इत्यादि प्रयनो नियम पूछना ते बोबोरेया ३ । काप पामेय आधा मिष्याखमोनोववमने उद ? रितेषु मापपो निपुवाः अष्यमापय सध्यमापदोवा' ति सेन्यः नमोसोरसचमापूपमितिषित्पाठ तब मगदस्य देशमयतायामपि दर्शना दपरिशेपसक्तोपदमनाप मुचते सोचे भमुष्पलोय मत गमादी ये मवमापय सन्यो नमइति एपांच नमनीयता मोतमार्गसाहायसरयेनो प बारित्वात्' पार-प्रसहारसहायत परेंतिमेसनमबरेतस्स । एएगबारगर ममामहसबमाइति । १५ मनु यद्यप सत्तेपेय नमस्कार सादा सि इसापूनामेव च सदा न्येपा मादादीना पारा यतो दादया न सापुत्व ध्यानचरम्ति ? प्रयविस्तरेण सदा अपनादिष्यतममुबारस तो सौ वाचास्पादिति ? नेय पतो न माघुमाउनमस्कारे दादिनमस्कारपस मयाप्यते मनुष्यमात्रनमस्पारे राजादिनमरझारफलवदिति कर्म मो विधेपतो सौ प्रतिव्यक्तितु मामी वाथ्यो अन्यस्वादवेति । ननु यपाप्रधानन्याय मट्टीहत्य सिहादि रामुपूर्या युक्ता प्रसिद्वामा सवथा कता त्पत्वेन सर्वप्रधानत्वा ? मैप मईदुपदेधेम सिदाना पायमानत्वा दर्षतामेवच सीपप्रवर्तनेना त्यस्तोपकारित्वा दित्यदादिरेव सा नम्बय माषा योदो सा प्राप्नोति विकास प्राचार्यन्य सबामा दईदादीनां सायमानस्यादिति अतएव तेपामेय पारपतोपकारित्या ? नेव पापायाया मुपदे प्रदामसामय मांदुपदेमतएव नजि स्वतन्ता प्राचार्यादप उपदेतो पापक्षस्य प्रतिपद्यरत प्रतोगतएप परमान सपापनापफा सपा त्पि रिपपाग्वा पायर्यादपोत मता समस्कत्यानिमस्करण मयुक्त उत्तर-पयको विपरिसाम पगमितापनमगरलोप्ति । एव ताव स्परमेष्ठिनो नम रुत्या पुनातमजनाना मुतवानस्पा त्यस्तोपकारिस्वा तस्यच द्रव्यनावमुतापस्या झावमुतस्यप द्रव्यग्रतोसुकत्या त्सम्माधरमपद्रव्यप्तममसुचना मोवप्नीगतिवीरति सिपिः पुस्तकादा पचरविन्यासः सा पाष्टादनप्रकारापि नाममानेपजिनेम स्वसुताया ब्राझीनामिकाया दशिता ततो पनिधीयते बाह-सेप्सिवीविहार्य विनोपदाधिकारेका इत्यतो प्राझीति स्वरूपविशेपण सिपेरिति मन्वधिस्तमावस्यैषमङ्गल णमोग्नी एलिवाए नेयमोपनियोए नामोसिपिने पुम्नवादिपविष प्रपरमापनाप ते पठारेमकार नपभदे पोतामीपुत्रो वानोने देपागे तेमाटे बानी स्यालिमालेमानवत्वारिदोषप्राप्ते ? सत्य पितु शिपमत्तिमदलपरिग्रहापं मलोपादानं शिष्ठसमयपरिपातमाय चेत्युक्तमेवेत्ति पनियादयः पुमरस्य सामापेम प्याप्साप्राप्तिरिति भामेयोताइति तेपुनःच्यते ततपय प्रावमवस्यादीष्टफससिः सयादि र भगवता व्यास्यानिधेय तपोता स्तामात्र प्रतापना योघोषा मन्तरपलं परम्परापालतु मोषः सचा स्पा तवचनस्वादेव पासतपा सिदो मसाप्तः साक्षात् पारम्पर्यपवा यत्र मोता तत्प्रतिपादयितु मुस्मात धनाप्तत्यप्रसङ्गा तथा यमेव सम्बन्धी पत्तास्य झावस्पेदं प्रपोजनमिति ? तदेव मस्यज्ञातस्यै कभुतस्कम्पलपस्य मातिरेपाप्ययनगतस्थानावस्य उदेशमदवासहतीप्रमावस्य पत्रिंशत्प्रासालपरिमावस्या म्यामीतिसावापिसनद्वयममारपदराखे मसादीमि दशितानि अप प्रथमे शत ग्रन्यान्तरपरिनापपाध्ययने दगो देशवामवप्ति, उदशका याप्पपमादेशानिपापिनो पियनविभागाः । उदिश्यते उप पामविधिना शिष्यस्पा चाव पथै तावम्त मणयमनाग मधीधेवमुझेया सरयो एनका स्नाय सुखधरणस्मरवादिनिमित्त माद्यानिपयामिपानद्वा रेप मातीत मिमांगापामार ॥ रायगिहेत्यादि । अधिरुतगापार्यो यद्यपि धल्यमापोद्देशकदशकामिगमे स्वयमेवावगम्पते तथापि यालाना सु माययोपाप मनिधीपते तर रापगित्मादि सुप्तसप्तम्पवयघमत्वा द्वाजगहेनगरे वल्पमारोदेयकस्यार्थी जमवता भीमहावीरेय दर्शित तिष्यास्ये पं प्य मन्चवापी सयिमत्पम्तता पसेपा । चमपत्ति ॥ वसनविषयः प्रपमोद्देशक बलमापसिए इत्याद्ययमिर्पयार्यत्यप ॥ दुक्पित्ति ॥ दुः रायगिह घलण १ दुरके २ निपिबरोये। पास मेनिवारिता विपरमातापिपरवति । प्रामाक्षिपिना माप मिप चापमा, विपन्यनोमानमिणोर, एभगव तोम १८ गतबरे, याममहसम्मान पद सेनाप प्रयासोमहसप्रमापरे । शिव प्रथमगत दस एरेगा श्रीमहावीरदवे रावणानगरनेविषय मातेरमा नाम गाथायेंगरो काय, चमन । पनमा पेसिए रस्याटि । बम विषय पवनो निषयरूप पहिलारोगा नव प्रयमो जोपयो १ । दुपत्ति । भगत जीव पापपा पमायादशमात यामवेद रस्यादि मयना निदय पूहमा ते पोबाछोया २ । स्वप पासे य वाचा मिष्याखमोशनीयवमभेद ? ? रिसेपु सापयो निपुवाः अम्पसारव सव्यसाचवोवात सोय नमोलोयसवमासमितिषिस्पाठ ' तत्र सपादस्प देशसयतापामपि दशमी दपरिशेपसर्वतोपदर्भमा मुखते तोके मनुष्यलोके नतु गवादी ये सर्वसाधय स्तेन्यो ममाति एपाच नमनीयता मोचमार्गमानायकारपेनो प पारिस्वात्' भार-प्रसहारसहायत परेंतिमेसंजमंबरेतस्स । एएषकारोब ममामासयमाइगति ॥ ९॥ ननु या मतेपेण नमस्कार सदा सि इसापूनामेव युक्त एसद्वार पपा मप्यांदादीना यावा यतो दादपो न सापुत्वं व्यनचरम्ति ? अयविस्तरेण सदा अपनादिप्यतममुधारण तो सौ पाथ स्पादिति ? नैव पतो म मापुमाधनमस्कारे दादिनमस्कारफल मपाप्यते मनुष्यमापनमस्कारे राजादिनमस्कारफलपदिति फत्त प्यो विशेषतो सौ प्रतिव्यत्तित् नासौ पायो अल्पत्वादेवेति । मनु यपामधानन्याय मनीरुत्य सिहादि रानुपूर्या युक्ता प्रसिद्दामा सवया कतक स्पत्वेन सर्वप्रधानत्वा ? वैव मदुपदेशेम सिदाना पायमानत्वा दतामेवच सीधप्रवर्तनेना त्यस्तोपकारित्या दित्याहदादिरेव सा' नन्वय माचा योरे सा प्राप्नोति धषित्वासे प्राचार्यम्य सकामा पांदादीनां जायमानत्वादिप्ति मतपय तेपामेव पास्पतोपकारिस्वा ? मेर्व प्राचार्याणा मुपले प्रदानसामय मादुपदशतएव नविनतम्वा प्राचार्यादय उपदेगता :पचापकस्य प्रतिपद्यरत पतोम्सएप परमार्थेन सवापनापका तथा हत्प रिपदूपारवा पार्यादपी त मता बमस्कत्याईनमवारस मयुक्त उतन-पकोधिपरिसार पद्धमितापसमपरसोप्ति ॥ एवं ताय स्परमष्ठिनो नम रहत्या घुमातनजनाना मुतधानस्या त्यस्तोपगरिस्वा तस्पच दृष्यनावमुतपस्या गायमुतस्पर द्रष्य प्रप्तहेतुपस्वा त्सम्यावररूपद्रष्पश्रुतममस्रुवन्ना ॥ ममोबनीपतिवीरति । सिपिा पुस्तकादा वचरविन्यास मा पाटादशप्रकारापि त्रीमन्त्रायजिनेम नमुताया प्राप्तीनामिकाया दशिता ततो वामी त्यनिधीपते पार सेसियीविशाब विरोगवनोएवाहिकमरेव । इत्यतो ब्राह्मीति स्वरूपविशेपण सिपेरिति मम्वधिरुतमारतस्यैवमङ्गत णमोयनीएलिवीए रापावाने पभोएमियोप वामौक्षिपिने पुतबारिणविपे प्रघरमापमाप ते पठारेमवारे अषभ पोतानोपुषो ग्रामोने रेशागे सेमाटें प्राची स्यारिसमजलेनानवस्वादिदोषप्राप्तेः ? सत्य किंतु शिष्यमतिमङ्गलपरिग्रहाय मङ्गलोपादानं शिष्टसमयपरिपातनाय चेप्युक्तमेवेति प्रतिपादयः पुनरस्प सामान्येम प्यारयाप्रप्तिरिति नामेवोनाइति तेपुननायन्ते ततएव मोवप्रवृत्त्यादीप्टपससिद्दे समाधि हमगवता यष्यास्यानिधेय तपोका तामाप प्रज्ञापमा योपोवा ऽमन्तरफत परम्पराफत्ततु मोपः सचा स्पा तवचनस्वादेव प्रसतपा सिदो मसाप्त साप्तात् पारम्पयवा यत्र मोपा तत्प्रतिपारपितु मुत्सहत अनाप्तस्वनसता तथा पमेष सम्बनी पदुतास्प शातस्पेद प्रपोवनमिति ? तदेव मस्पशाखस्यै कमुतस्मन्यमुपस्य मातिरेषाप्पपनमस्तस्यनावस्प प्रदेशमदमातीप्रमावस्प पद्धिशरप्रमसहस्रपरिमावस्पा साझीतिमालाधिकप्ताद्वयप्रमाणपदराशे मङ्गलादीमि दमितानि थप प्रपमे शत ग्रन्यान्तरपरिमापपायपने दशो देशवामवति उद्देशका पाप्यफ्नार्थदशानिपापिनोग्ययमविमागाः। उदिश्यते तप पामयिधिना शिप्यस्पा चार्यय यये तावन्त मध्ययमनाम मघोघेवमुद्देशा सरवो देशका सताय सुरुधरपस्मरणादिनिमित्त माद्यानियामिपानद्वा रेप मोतु मिमांगाथामाह ॥ रायमित्यादि । अधिक्तगापापा यद्यपि वश्यमाबोदेशवदाकामिगमे स्वपमवावगम्पते तथापि वासाना सावपोपाप मनिधीयते तर रापगिदत्यादि सुप्तमातम्येकवपमत्वा द्वाजपईनमरे वक्यमायोदेशपस्या नमवता श्रीमहावीरेप रसित हतिव्यास्मे पं एय मन्यत्रापी एविमत्तपन्तता पसेपा । पलपत्ति ५ चलनविपया प्रथमोद्देसका बसमारोचलिए इत्याधर्मनिष्पापाहत्ययः ॥ दुक्पित्ति । दुः रायगिह घलण १ दुस्के २ निपि कहीये । पााच सानियोति विषवभौलागिपरप इति । वामासिपिना स्वरूप मियेप जापा, विप्रन्यनोमाममियोएछे, एमगव तोमरे११८ गतवरे, प्रयोममामामान, पदनाम प्रवासोमानप्रमाप । दिवे प्रयमगत दम सरेया श्रीमहावीरदये राजयानमरविधव मानना नाम मागविंबरो को चमार । पनमायेचलिए इत्यादि । घना विषयमर्थनो निश्यप पहिमोउरेशा नप प्रश्चना जापपा १ । दुसेत्ति । हेभगत मौष पापा ममामास महत समवेदे । इत्यादि प्रयगो निलम पूरुषो ते पोजाया २ । पपासे य कांचा मिष्यास्वमोहनीयकमनेच्द - सविपयो द्वितीयो वीवो भदन्त । स्त्रपात दु य वेदपतीत्यादि प्रमनिर्भयाधात्पर्ष । कयपठसेत्ति ॥ कापा मिपात्यमोहनीयोदयसमुत्यो न्या म्परर्शनमहरूपो पीवपरिणाम सयव प्रहप्ता दोपो मोवदूपण कांतामदोप स्तविपय स्तृतीयः बीयेन प्रदन्त ! कानामोहनीय फम्म फ़त मित्याद्य निपपापात्पः पधार समुचये । पगहत्ति । मरुतया कर्मनेदा चतुर्थीदशमस्यायः फतिमदत ! फर्मप्ररुतय पत्पादियामो? ॥ पुटवीईत्ति । रस्पनादिपपिम्प परमेवाभाः कृतितहत ! पथिध्य इत्याविच ? सूत्रमस्या बावतप्ति५ यायचटोपलखित पछ यावतीनदता पक्षाशातरा रसूर्य इत्यादिमूत्रयासी ॥ नेहरत्ति ॥ मेरपिकपदोपत्नतितः सप्तमो नैरपिको मदत ! मिरये उत्पद्यमामइत्यादिच तत्सूत्र ॥ वालेति ॥ यातशाहोपलक्षि तोटमा एकान्तवासो प्रदन्त । मनुप्पइत्यादि सूत्रयासी । गुरुरप्ति । गुरुनविपयोनवम कप भदन्त ! बीघागुरुकत्व मागच्छन्तीत्यादिध ? मूम मस्य पासमुपयाप तबाउँत्ति ॥ बहुवचननिमा पसनाद्या दामोदशकस्पाथा सासूत्र धैय मन्यपूधमा मदत । एवमास्यति चतत् प्रचलित मि त्पाहीमि प्रथमशतोद्देशम्सपापिपाभा तरेव सामाझे सतमपलादिकत्योऽपि प्रपमातरयादी विशेषतो मगलमाहा ममोसुपस्सप्ति । नमस्सा कखपठसेय ३ पगइ १ पुढयी ५ जायते ६ पेरइए ७ वाले ८ गुरुएय ९ चलणा १०॥ णमोसुचस्स ।। ये पचपन्य दशनापपरिपाम तेहिब प्रछटमाटा अपर्व दाप षोवदूपप तेकांचा पदोप भिमवन पाय बांधामोहनीयबमकी । इत्यादि । प्रमियर नोवाद पमुपया। पम । प्रति काता कमनमिट, हेममवन् केतसो कमप्रति स्यादि प्रय पोवा ४। पुठवोघोप्ति । रख प्रभा पपिपी ममवन् वेतसोशे इत्यादि पनिषम पचमा ५1 वायतेत्ति हेभमवन घेतसे पाका प्रतरे मय छगताय तेनिश्यप कहो । राए । भवन नरबमेविषे नारवो चपवेषिवा धनारको पपये इत्यादि पत्र सातमोवाचे । वरियेए वाववास भगवमनुप्पत्यादि प्रश्न पाठ मा ८ । मुगएर । रेममयन् विया पोवभारोहार इत्यादि प्रचनिपय ते नवमा सोगो । चत्तपापी। हेमममन् सम्पर्यनो इमवई, सममा प्रपसि ए प्रमादि मया नियते इसमोरया १ । स्वादिय पथमशतारेगर गामापापमोमपत्ति । नमस्कारापी कामे नुतने ! वृत पदांगोप रोस्तु भुताप द्वादशीरूपाया हरप्रवपनाय । मम्विष्टदेयतानमस्कारोमङ्गलार्पोनयति मपयुतमिष्टदेवतेतिम्पमयमलतापति? प्रोष्यते युतमि उदयते याईतां ममस्करगीपत्या रिसाव घमरस्येसिप मुप्त मातो ममस्तीर्यायेति नरनात् तीच मृत ससारसागरोप्तरवासापारगफारसत्या त दापारस्ये मयप सहस्प तीर्षशहानिघेपत्यात् तथा सिद्धानपि मल्ललार्थ महतोनमस्कृत्वत्येय-कायममोफार सिदायमनिमारंतुसोगिरहे । इतिष मादिति ग्यताय राममगतीदेशमामियापसणः प्रारदर्शित सातप पयोहे निर्देश तिन्याय मामित्यादितः प्रथमोद्देशक्षार्थमपपोयाच्य सत स्पष गुरुपर्यक्रमलाई सम्बन्ध मुपदयम् भगवान् सुधम्मस्वामी अम्यूनामिन मामित्येदमा । तेकालेपतेसमएपमित्यादि अप फप मिदमव सीपते यहुत सुभग्मयामी जम्यूस्वामिन मजिसम्यन्धगन्यमुत्तवामिति ? उच्यते सुधम्मस्वामिवाघनायाएया नुवत्तत्वा दाइच-तित्पन्पसुम्मा मिर वागणहरासेमा ॥ सुपम्मस्वामिनय बम्यूस्वाम्येव प्रपामभिप्यो त समाश्रित्ये संवाचमा प्रपतेति तथा पठारे उपोछाप्त एयदृश्यते यथाक्ति सु घामम्यामिनमति जयूनामा प्राहम बहरा मते ! पम्पमस्स प्रसस्स पियाहपमत्तीरसमपेणं प्रगवया महावीरे प्रयमठे पगते बस्स प्रती के म पपत्ति तत एष मिदापि सुपमय पम्यूनामाम प्रत्युपोहात मयश्य मनिहितवा नित्ययसीयतदति' प्रर्य चोपोहातग्रन्थो मूमटीकास्ता समसामा तमाप्रित्य घ्याग्यातो प्यस्मानिः प्रथमोद्देश्य मामित्य व्यास्यापते प्रतिशत म्प्रत्युद्देशक मुपोहातस्येश शाणे नेकपानिपानादिति अपय माग् प्यारयातो ममस्कारादिको पन्यो पतिस्ता न प्यास्यासः कुतोपि कारणादिति ॥ तेसंशातेवति ॥ इति प्राकृतशेतीवशा तस्मिम् यत्र तबगर मा सीत् पंपारो न्यापि वाक्यासकारार्थो । यया-रमा मते । पुढथी इत्यादिपु फासे अधिकतावसर्पिीचतुर्पविनागसतये ॥ तेति ॥ सस्मिन् य पा सो नगवान् पग्मकपा मफरोत् ॥ समएपंति ५ समये कास्तस्यैषविशिष्टे विप्नामे अथवा वतीर्यवेयं तत स्लेम फासेन रेतुभूतेम तेन समयेन हे तेणकालेण तेणसमएण पातराम मरपन बोये, हिये भगरत योमुधमाघामो पातानाविष वपते इमाहेशेतेरमासेष॥ पामाचंकारे ते पपसप्पियो काम्बना दुसम - ܝܘ तुभूतेनैव । रापपिडेति । रबार प्रपमैकवचनप्रनय । फपरेभागादिप्तमधेइत्यादाविव-तप्तप राबणानाम नगर ॥ होत्येति ॥ अनयत् मन्विदामी मपि तबगर मस्ती त्यतः कयमुक्त मनवरिति ? उच्यते पीकमपातविनूशियुक्त तर्दया नय अतु सुधर्मस्वामिनो वाचनादामझासे वसप्पिणी स्वा स्मासस्य तदीपमुनप्राधामा हानिनावात् । वपत्ति ५ स्थानके मगरधर्मको वाच्यः गपगौरयनपादिर तस्यालिसितस्यात् सव-रिख त्यिमियसमिम । रिस पुरनषमारिप्नि र स्तिमित रिसर स्वचक्रादिनपयजितस्यात् मसद पनपान्यापिपितियुक्तत्वा ततः पदप्रपस्य फम्मधार य. पमुइयामारवर ५ प्रमुदिता पर प्रमोदकारणवस्तूना सझाया अपनानगरवास्तष्यलोका जानपदाय जनपदनवा स्तमायाता सतो यत्रत स्प्रमुदितबनवानपदमित्यादि रौपपातिमा सभ्यास्यानो अवश्य म तस्सवति । पाठवाः पपम्पयवा सम्म दाजगृहनगरात् ॥ परियत्ति ॥ यदि स्तात् ५ उत्तरपुरधिमेति । उत्तरपौरस्त्ये । दिसोमारति ५ दियो नागो दियूपोवा नागो गगनमासस्य दिग्नाग सत्र गुपसिसकमाम ॥ श्य तिवित संप्यादिषपनस्प प्रावः कमवेति चैत्य संधायदत्वा विविधं तदामपत्वा तदृश्मपि चैत्यं तवा य्यतरायतनं मतु भगवता मईसा माप रायगिहेणाम णयरेहोत्या यणन तस्सणरायगिहस्सणयरस्स यहिया उत्तरपुरछिमेदिसीनाए गुणसिलएणामचेइएहोत्या भवमानाम गौमा परानेविवे। तपसमएप पवाबासबारे समयनेविषे ममवत वापरते समये । रायगि वामपसरोहोत्या ॥राजया, इसेमामे परवाता ममरहाता यो हो मतमानमारावयानगरशेतीपरिपतीतबाचे नमरनों धोवो वर्षकातो तेयो वत्तमानकामे नही पवस स्पिपी बाम माठे गायनो पक्षपो । पातेवपनरामपसेपोषो बापता । तमरारमिजमपयरमबपिया। पंपासासवार मसानयो ताने रावा रामग्राममान माहिर । उत्तरपुरतिमेरिसोभाए । उत्तरप्वना दिगिमा माए विभायनेविषे एतमानवोपविष पुषशिस्त सपनामे परतरयर मा नगदे विष पदमा विववव पायतन सानया मा बरसेपिपराग । hिi राजपानमरे रिनामें राना अपद बिसी एक पुसव M - नाममा...बाबाना -th तन होत्यति । यनूय पर पथ्यास्यास्सते सत्मायः मुममत्वा दित्यवसेपमिति म तेपकातेगवेग्ममरणसमति ॥ अमतपसिलेदेतियचनात् माम्पति तपस्पतीति अममा अमवा सह सोननेन ममसा वर्ततइति सममाः झोननस्वष मनसो ध्यास्यातं सवप्रस्तावाम् ममोमानसत्वमा साव यात् समतवा यया भवत्येव भगतिमापते समोवा सर्वभूतेषु समय इत्पनेणार्थत्वा ड्वातूना प्रवत्ततइति समयों निमत्तिवशात् नगवतिय नगवा मद्यपादिपुप्ता पूम्याइस्पर्षः । मावीरति वीरा शूरवीरविक्रातावित्तियवनात् रिपुनिराकररतो पित्राप्त सच चमवादिरपिस्या दतो विशि प्यात महा पासौ दुग्नपातररिपुतिरस्करणा द्वारयेति महावीर एतच देव मंगवतो गौपनाम कृतं यदा-सबसेनयनेरवार सतिसमेपरीसहोवस ग्गा देवरंकरमहावीरेति । भादिकरति भादौ प्रपमत घुत्तमम्माचारादिग्गयात्मक करोति तदर्यप्रणायमत्वेन प्रगपती त्येवशील पादिक रामादिकरस्वा वामी फिविपदत्या सित्पयरेति ॥ तरसि तेन संसारसामरमिति तीचं प्रवचम तदष्पसिरेफा हसप सतोपंच तत्वरणशी सत्या तीर्थकर तीपकरस्वच तस्य नान्योपदेशपूर्वक मित्यतभार ५ सहमयुदेति ॥ सर प्रास्मनैव साई मनन्योपदेशप्तइत्यर्पः सम्पन् यथाव हु हो रेयोपादेमापे तवीयवस्तुतस्व विदितवानित्ति सहसवुदः सहसपुदत्य चास्स नमाफप्तस्य सतः पुरुषोत्तमरवा दिस्यतमाह। पुरिसोतमेति । पु रुपा मध्ये तेन सेन रुपादिना तिशयेनोडूतत्वा पूर्ववर्तित्वा दुप्समः पुरुषाप्तमः अथ पुरुषोत्तमस्वमेवास्य सिंहायुपमानत्रयेव समर्पयवाद। तत्यणसेणिएराया चिप्लणादेवी तेणकालेण तेणसमएण समणेनगवमहायीरे शादिगरे तित्यगरे सहसयुछे मारे नमो रिनादेयो । पानामे रापोरे। तपमाप । प्रवसप्पि नोनाम चौपारामेविषे ॥ समरीभगवमहावीरे। यमरतपप्पी ऐमर्यादिगुप सुप्त पूज्य इस्यप महावीर इसेनामे । प्रादिमरे । प्रतिषमपाधारांगादिसूबनी पादिना करमहार । तित्वगरे ॥ तरी तेनेतीम प्रवचन तथा से घ जना पत्र्ता । मयसमु पापीय परउपदेश विना यापादेयपरामरूप जापर्य । परिसत्तम । पुरापाति उत्तम पादिपतिसमेवरो भयवा उच्च स्वपहिरो पुरिममोहे। पुष्पमाहिसिहनीपर सोमगुवरोमस्ति मात्रै पुरुषसिह । परिसवरपुररोए । पुरुषमाहिवरहिये प्रभान मेतकमसनो पर 1 तुभूतेनेव । रापमिति । एषारः प्रपमैक्सवनप्रसव । अपरेपागवादितसवेइत्यादाधिष-ततप राजगहनाम नगरं होत्येति । अनयत् नन्विदानी मपि तामर मस्तो त्यतः कथमुक्त मनवदिति ? सच्यते धर्मकप्राप्तविधियुक्त तवा नय नतु मुघर्मस्वामिनो धापनादामकाले विसप्पियो स्वा स्मासस्य तटीयमुननावामा हामिभावात् ॥ यत्ति स्थानके नगरवर्मको वाच्या ग्रथगौरपनयादिः तस्यालिसितस्वात् सव-रिद विमिपसमिदे । रिस पुरनवनादिधि वा स्तिमित स्थिर स्वपनादिनयमितस्वात् ममद पनपान्पादिविभूतियुक्तस्या तत पदत्रयस्य फर्मपार य॥ पमुपपनसभावपए । प्रमुदिता या प्रमोदकारण्वसूना सहावा उमनानगरवास्तव्यस्तोफा जानपदाय जनपदनवा सत्रायाता सप्तो यात प्रमुदितजममानपदमित्यादि रोपपातिका सष्यास्पानो बिवाय म तस्सयति । पष्ठा पचम्पर्यत्वा तसम्म दाबगहनगरात् ॥ वरियत्ति ॥ यहि तात् । उत्तरपुरधिमेत्ति । उत्तरपौरस्त्ये । बिसीमाएप्ति ॥ दिशा नामो दियूपोया भागो गगनमष्ठलस्य दिग्नाम सघ गुणसितम्मनाम ॥ श्य ति चित संप्पाविषयनस्स नाव कमवेति चैत्यं मन्त्रापादस्वा देववियं तदामपत्वा तदरमपि पैत्य तथा ध्यप्तरायतनं नतु भगवता महता माय रायगिहेणाम णयरेहोत्या यण तस्सणरायगिहस्सणयरस्स यहिया उत्तरपुरच्छिमेदिसीनाए गुणसिलएणामचेइएहोत्या भुषमानाम चीमा परामेरिया तरसमए । पारसबारे समयनेविषे ममयत वयाबरते समये । रायगिहेबामवयोवा ॥ रावया, इसेनामे परवाता नमरहातागोवत्तमानका राजपामगररेतोपरिपतीतकाले नमरनोंचायो पगातो तेवो तमामबानी पवस प्पिपी गामाटेमामोसमोर पपक्वपमरायपसेपोवो बारवा । तमपरायमिडसषयरमबहिया। पंवायापार मसवापयो ताने रावा राजमानमरने वारि। उत्तरपुरचिदिसीमाए । उत्तरपूर्वमा दिगिमा भाए विभामविष एत गानवोपपिप गुशिव परिनामे पगारपत्र मायदेवि पददा दिवत पायतन मानपाइया । वापसेपिएरामा ति राबगानमरे येषितमाम राबाई पद शिको एक मात्र पागमागिता प्रीपदव प्रदीपा इर्दषिोप द्रष्टुतोषमाभिस्याहमपश्यलोकमामित्माई सोगपज्जोयगरप्ति ॥ लोवस्य लोक्पतइतिलोको नया व्यत्पत्त्या लाबासोकस्यद्वपस्य समस्तषस्तुस्तामस्वनावस्या सगळमाप्तया मयासमिव मिसिलनाषस्त्रनावाषनासनसमर्थ केवसालोकपूर्वकप्रवचन मनापटसमवत्तमेनप्रद्योत प्रमाझं करोती त्येयझीलो लोकप्रद्योतकर सक्तविशेषगोपतय मिहिरररिहरपिरस्पगादिरपि ततीर्पिकमतेन नवती तिभास्पयिगप? इत्याला तहिमेपानिपामापार ॥ मनयदत्ति । ननय दयते ददाति प्रावापारपरसिक प्युपसर्गकारिपारिमी त्यानयदया मनपाया। मवमागिनपपरिवारवती दया मुकम्पा यस्य सोमयदयो गिरमिहिरादयस नैवमितिविझपः मकेवल मसावपकारि तदन्येपाया मपपरिवारमाय रोती त्यपि त्वमाप्तिमपि करोतीति दशयनाच ॥ चक्षु दयत्ति ॥ पारिवचतुः गुप्तधाम झुम्नाशुनार्थविनागोपदर्शकस्वात् पदाइ-चतुमनतम्तएका ये तानाशुपा सम्पफ्नदेवपश्यन्ति नाथानीयतरामराः ॥१॥ तापतइति पलक्ष्यः, ययाहि-लोके फान्तारगताना यो रेयिनुप्तपनाना म्यद चतुपा बरुवाटनेन धनुदस्वा वाहितमागदर्शनमो पकारी नव त्येय मपमपि ससारारस्पर्तिमा रागादिरिपुविलुप्तधर्म पनाना फुयासनाचादितममामलोचमाना तदपनपनन ग्रुतवतु इत्या निर्धारमार्ग यश झुपकारीसि दर्शयार ॥ मग्गवत्ति ॥ मार्ग सम्पग्द हामानवारित्रामा म्परमपदपुरपय म्हपतति मागदय यथाहि-लोने चतुरुनाटन मागदशनच हत्या पौरादिविलुप्ता निरुपद्रवं स्थान प्राप यन् परमोपकारी नवतो त्यवमपमपीप्ति दशपन्नाह ॥ सरमदति । शरग वार्य मानाविधोपयोपटुप्तानां तद्रषास्थान तव परमार्थतो पिर्याय लोगपोयगरे एनयदए चरफुदए मग्गदए सरणदए म एसीपममान । मागपजागर । माया गरधर ते ते पसासर्य समान लिममर्यनोषागेरचातेवार जगमाधि सघउद्यातहोय तिम पामीने उपाषा विममेवा वा पतसे लिपटीने वचनेशरी पदांगो रचे । पववा, समसाकासाचनपनेविषे प्रवातवरे । पमयदए । न पममा परमारने पविभप नदे। पथम दपामतेदोमे ते । पक्रए । एतनामरूपचन तेभमो । ममादए । मानदशनचारिताप मोघमार्गनी दा , रिसमरित्ति । मिहइव सिह पुरुप यासोसियेतिपुरुपसिंहो सो नहि सिंह मौर्य मतिप्रहट मन्युपमत मतः झीर्य स उपमान रुत शौय तु ममवतो वास्पे प्रत्यनीवरेवेन भाप्पमावस्या प्पनीतस्वात् कुप्तिमकठिनमुष्टिप्रहारमातिप्रबदमानामरगरीरसुजताकरणाधेति तपा । पुरिमव पुरीएति । परपुरीम प्रधानधवसहस्रपत्र पुरुपो घरपुटरी चमिवेति पुरुपपरपुररीक पवलस्य चास्प प्रगयतः सर्वाशुनमलीमसरीतस्वात् सवैध शुमानुभावः गुदत्वात् अथवा पुरयाबा तक्मेक्कवीवरमा वरपुमरीकमिय वरदामिय या सन्तापातपनिवारणसमस्या दूपाकारणस्वा च स पुरुपवरगरीबमिति तपा । पुरिसवरमपत्पित्ति । पुरुपएय परमपास्ती पुरुपवरगपस्ती यपागपहस्तिनो गपेमापि समतेतरसिमोन न्यत तया प्रगवत सोमविहरन ईतिपरप्रदुर्मिसमरमरकादीनि दुरितानि नश्पतीति पुरुपपरमपासीत्युध्यत इत्यत उपमात्रया पुरुपो तमो सो मचाय पुरुपोत्तमएव हितलोकस्पा प्युत्तमो लोकनाथत्वा देतदेवाह सोगवाहेति ॥ लोकस्य सचिनय्पलोफस्स मापः प्रनु सौकनायो नापत्वच योगमवारित्व पोगरेमरुवापतिवचनात् तचा स्वा प्राप्तस्प सोकस्य सम्यग्दर्शनादे योगवारगेन सव्यस्यप परिपालनेमेति लोकमा पस्वच पचावत्यिवसमस्तवस्तुस्तोमप्रदीपना देयेत्यताह । लोमवित्ति ॥ तोम्स्प विशिष्टतियग्नरामररूपस्या तरतिमिरनिराफरणेन प्रफष्ठम्र पुरिसप्तमे पुरिससीहे पुरिसवरपुरीए पुरिसवरगघहत्यी ठोगुप्तमे लोगनाहे लोगहिए लोगपदावे साभाषपरा सकतम पापरहित तमाटे । परिसरगघहत्या । पुरपमाधि प्रधान गया मोसमान जिमगधास्तोनीगन्धे पनेरा हायो नासें तिम म मयत वेयरिये विचरे वितिहां ईतिभिषादिपरचक्रमासें । सोमत्तमे। मपत्रीवनमाति प्रमावरी उत्तम । सोमनाहे । हामीलगदे। पासवसिरिय माघमामी सपसारे मयतोष वापवा तेहमको नापकहोये योगमा वरपहार विषपामे पमपानधो हने पमारे ते योम काोये पविरे पामे धमतापोहे ताने साधावबो पगबामदीये मन मिरपन् उपवायते प्रेमवतीय तेगांवाना मामीबरे तेभयोडोवनाप जोये सोच पहिरोपनिवार तने रचाने पर ति। सोगपरोपे । सानोमानवे मंत्रीरोनीष चने चमनो जमानेर ते मामिप्पोपरेशस्वा प्रोपबारीप्रवतीति निबनताप्रतिपादनायाह-प्रथया-कपमस्साप्रतिहतसवेदमत्वसम्पमम् । अवोचते प्रावरणानावा देतमे पास्सायेदयनार विपलबउमपेप्ति । ष्यावतं मिवृत्त मपगतं पर शठत्व मावररावा यस्यासी व्यावृत्तवता, बयानाष पास्प रागादिजमानात इत्या जिमेति म जयति निराकरोति रागद्वेपादिकपा मरावी नितिमिनः, रामादिनय वास्प रागादिस्वरूपातम्योपापडामपूर्वकएव भवतीत्ये तदस्पाइप वापरति । जाभाति बारिवहशानचतुष्टयेनति चायका, सायकत्यनेनास्प स्नार्यसम्पत्युपायठत्तो घुमातु नार्यसम्पत्तिपूवर्क पराप सम्पादकस्य विशेपर चतुष्टयेमा । युत्ति । युमो जीवादितत्वम्युद्धवान् तथा ॥ बोहरति । जीवादितत्त्वस्म परेपां वोपयिता, तपा n मुत्तेत्ति। मुक्ता बाचाम्यातरपन्यपन्यनेम मुक्तत्वात्, वपा ॥ मोयरत्तिा परेपा कर्मबन्पना न्मोपपिता । पप मुजावस्या माभित्र विझेपवान्याह ५ सबस पदरमोति । सर्वस्प वस्तुस्तोमस्प विपढ़पतया भापकत्वेन सर्वचः, सामान्यपतपा पुनः सर्वदा, नतुमुत्तावस्याया दर्शनानारानिमतपुरुप अविष्य ठत्व पतषपददय बपि अदृश्यतइति । तथा । सिवमयसमित्यादि । तत्र शिव सर्वबापारहितस्वा दवस स्वाभाविकमायोगिवचलन त्यनायात् अरुन मविद्यमानराम तन्भिवत्पनझरीरममसोरमावात् अनन्त मनन्ताविपपचानवानपत्वात् अक्षय मनासाद्यपवसितस्थितिकत्वात् थियहठउमे जिणे जाणए युझे बोहिए मुत्ते मोयए सहणू सइदरिसी सियमयलमरशमण तमरकयमचायाह रिवरोजनामापनमा पापा प्रधान कोषसधाम वोपसयन ताना धारबारे भगवत । विमायरमे । मिवत्तवर्गासपी वयो। विपे। रागादिक गोम्या प्रिय ने जिन शानम्पिकानागारोबो पधिक । वापर । चारों बोवादितस्व ॥ पहे। ममा पाहिए। पौवादितस्व अवरने वझये। मुत्ते॥ पाना भ्यतर पन्ययो मंगाचा । मायए । पोरबोमाने पमबन्धवो माये ॥ सम्मम् ।। सर्वभागाबरो । सम्बदरिसी । सर्वदेरे दर्शनेकरो । मुक्तिभववाभायो पोके । मिरमवममापमपतमन्सबमपामाह। मवषापावापारहित पलवानो प्रभाव रोमरक्षित पनत पवविपयसपथको मादिपपर्यवसितबको पनेरा नेपोगन करे। पपपरापत्तिया पुनरपि पापमोनको बोनापवतार नहोकरे। सिगइनामधेय॥ माचसापानी गति सकसपथपूरा बिहा प्रथमानामोहनी तहपतइति भरपदयः घरबदायमत्वमारप पर्मदेशनपैवेत्स्वपार ॥ पम्मदेसएत्ति । पम्म मुतवारिधात्मय दर्भयतीति धम्मदेशमा पम्मदएप्ति। पाठाम्त तप पर्म मुतचारिवरूपं दयत इतिपर्मादयः धर्मदेशनामात्रेवापि धर्मदेशक उच्यत इत्यतमाह पम्मसारवित्ति ॥ धर्मरपस्य प्रव तमत्वेन सारपिरिव धर्मसारपिः यथा रपस्य मारपी रप रपिक मवाय रपति एवं भगवान् पारिपपाहामा सपमात्मप्रवचनारयानां रतसो पदेशा दर्ममारपि भवतीति तीर्यान्तरीयमतेमा न्यपि पर्मसारमपः सम्तीतिविशपयवाद धम्मयरचाउरतचायतीति ॥ अप समुद्रा यतुप हिमवान् यतेचत्वारोन्ता पधिव्यता एतेषु स्वामितपा नवतीति चातुरम्तः सचासोचक्रवतीच वरचातुरन्तवमयती रामातिापो पम्मषिपये यरपा तुरन्तचक्रवाती पर्मवरचातुरन्तवाजवती, पचारि-पपियां शोपराधातिझापी वरचातुरन्त चमवासोनवत्ति तथा भगवा धम्मधिपय झेपपणेतृणा मप्ये सातिगमत्वा तपोच्चतहति । अपवा पर्मएव वर मितरचनापल्या पिलादिधम्मचकापेक्षयाया पासुरन्त मानादिनदम पतुर्थिनाग पत सुगावा नरवादिगतीना मन्तकारीत्वा पतुरन तदेवचातुरन्त यह भवारातिदा तेन वर्तित शालयस्य सतया, एप्तच पम्मदेशमत्यादिविधोप पचदम्बा प्रहरभानारियोपेतति प्रवतीत्याह । पप्पशिल्पवरनाबदसबपरेति । प्रतिहते कटकुट्यादिनि रस्ससिते प्रविसवादफेवा तमव सा विवस्वाहा वरे मपाने ज्ञानाने फेवतास विशेपसामान्यवोपात्मने धारयति या सतपा, बनवान प्पेवविधसदनसम्पदुपेतः कैपि दम्युपगम्प योहिदए घम्मदए धम्मदेसिए धम्मनायगे धम्मसारहिए धम्मयरचाउरतचक्कवही शप्पमिहय वरणाणदसणघरे तारखे। सरपहर । नानाविधउपतृत जावन चाम्बान पतसे निर्वापदीये तेमाटे सरपदए । बाहिदए । सम्यक्ष परिवरूप लेना देनहार। यमदए । पारिवरूप धमना देशार । पमरेमिए । तचारितापधर्मना उपदेमर । घमनायौ । धममा नायक ठाइरहे । धनसारपोए । ध मापरण प्रवक्तांपाने मारबोममान । पपरपाठरतायो । विम प्रवियोनेमिप ममत रावामा पर्ती प्रधान तिम धमविश्वामि गान्मत्तिा पक्षा पवाचि पारविमिनो पतपर पार मना तिम भगवत रिगतिनो तबरे । पचपिपरपावरम नपरे पतः परिकरिताति ॥ पुवायुपुतिपरमारे। नपयामुपूर्व्यादिना ॥ गामाबुगामदूरनमायेग्रामप मतीतो 'नुग्रामघ तदनन्सरग्रामो ग्रामानुग्राम तम्यन् गणम् । मुरं सुरेसं विपरमाये येय रापगि सयरे जेसेव गुरसिसर पइए तमेव उयागयर उयागरित्ता प्रहापठिसव उग्ग ठगि पार गिगिता मजमे तयमा प्रप्या मायेमाम विराप्ति। समयसरमवयकेच, समयस्म भगय प्रतेवामी यश्ये समा जगवतो अप्पेगड्या उम्गपत्याइत्यादि । मायादियहको वाष्प, सपा प्रमुरफमारा धापनवनपतयो ध्यंतरा ज्योतिषा वैमानिका देवाय , मगधत समीप मागच्छन्तो यापपितम्याः ॥ परिसासिम्पपत्ति ॥ राप्रपा द्वाजादिलोको प्रगषतो यन्दनायें निगप्त स्तलिगमयेव । सएस रायगिहे पगरे सिंपामगतिगचठकष घरपउम्मुरमहापापमु पाजको प्रहामणस्स पवमाइए ययपतु देवाणुप्पिपा समये नगव महावीर इस गुपसिलए पेहए पापभिसर्व उग्गाई मगिरिदता संममम तयसा अप्पार्य मावेमाणेविहरा त सप रातु तहामयाब परईतायं प्रमषताय मामगोपस्सविसवखयार फिमगपुर पदय यममणयापप्तिमा यहये उग्गाठणपुप्ता ॥ इत्यादियाथ्यो याय जगवत नमस्पति पपुपासतेचेति एवं राजनिगमों त पुरमिगमय तत्पर्युपासना चौपपातिकयद्वाण्या । धम्मोतिप्ति । पर्मकपेह भगवतो याच्या साय-तपत समसे भगय महावीरे सेवियस्स रणको विसवापमुहायपदेवीय ती मप मदरममाप्तियार परिसाए सघनासाबुमामिबीर सरस्सईए पम्म परिकोप तनहा भत्यिसोए भत्यिमलोए।एय । जीयामजीया यममोक्लेव त्यादि तथा जहामरगागम्मती जसेरयामायवेपणापरएसारीरमारसाहदुपातिरिक्जोगीर इत्यादि । पझिगयापरिभक्ति ॥ लोक स्वस्थान गतः प्रतिगमय तस्या एव याचा ॥ तएपसामनवमहातिया ॥ माघ परिसा ॥ महसि ॥ महती भालपप्रत्ययस्य वार्षिकत्वा दतियातिशयगुठी ममत्पपत् प्रशसातामपानपपत् । महापामावा सप्तपूजाना महावा परिपत् महार्यपपदिति समयस्स नगपाठमहावीरस्स प्रतिए घम्म सो परिसाणिग्गया पार पानेश तिम पाया।परिमारिमाया।। पपदा वारा येठो पार देवनी चारदेवोनो पतनिधसप । धमापहिपा। भगवतेधवनो तमहा पत्यि प्रतिया परिपूलत्वा पोर्टमासी चन्द्रमहलवत् मध्यावाघ परेपा मपीसाचारित्वात् । मिड्विगइनामभयति । सियन्ति निमिता नयन्ति यस्या सा सिति साचासो गम्यमानत्वा द्गतिय सिडिगति सदेव नामधेय महासतमाम यस्य ततया ॥ ठासति । तिप्रति अमवस्थाननिमन्धनकमानायेन सदावस्थितो प्रवति यत्र तत्स्थान पापकर्मको वीवस्य स्वरूप लोहारषा जावस्वरूपविक्षेपमानित लोशाग्रस्य पापपघाखा माघारे यारोपा रयतपानि तदेवभूत स्पान ॥ सपाविकामति । यातुमना नतु तत्माप्तमात्मासस्याबारबत्वेन विवदितापाना प्ररुपमासम्मवात् प्राप्नुफामहसिच पवुयते तदुपधारा वन्यपाहि निरनिसापाएव प्रगवन्तः केयतिमो नवम्ति-मोचनपसवा निरुपहोमुनिसत्तम इतिवधनादिसि ॥ भाषसमासर पति म ताव गवरको वाचो याव समवसरण समयसरपघवकरति सप प्रगवाहपसरव ॥ नुपमोपगनि गनेलकमानपानमरगपनि निकुष्य निधिपधियपपारिजावत्तमुसिरप । मुनमोषको रवविशपो, नीटविक्षेप अनारविझेपोवा नैस नीलीविकार कमल मपी,प्रहसन्धमरगप्प प्रतीत एतएव सिपः कृपयायो निलयः समूहो येपान्ते तपा तेच ते निषिताय निविका कुभिताय कुणालीभूता प्रदक्षिणायाम द्धिशिरो जापस्य सतपा एव मिरोजवर्षकादिः ॥ रतुप्पणपतमध्यमुमालशोमसतसे ॥ इति पादतलव वान्तः शरीरवरको जगवतो वाच्यः, पादतसयि क्षेपास्प चापमय रच सोहित मुत्पसपत्रव कमसदसवत् पदुकमस्तब्ध, सुकुमालामा मये कोमल, तप्त पादतल यस्य स तथा तथा प्रह सहस्सवरपुरिससक्सापरे भागासगएको भागासमरवक्ता मागासगपाहि चामराहिं प्रामासपसिहामएवं सपायपीटर सौहासरोग ५ मा बायस्कटिक मतिसम्म स्पटिकविझेप सम्मपन उपसस्पताप्तिगर्ने ॥ धम्मसरबपुरठकठिग्नमापे । देवैरितिगम्पते ॥ चठदसहि समयमाहस्सी हिबातीमाए परिज पोसाहस्सीहि सदिसपरिकुरे व सारसीयाद सहरूपर्यायः साद सह तेपा विद्यमानतयापि साहमितिस्पा दस उपसे सपरि मप्युणरायष्तिय सिझगइनामधेय ठाणसपाविउकामे जाय समोसरण । ठापसपाविठकामे । बाबापमान बोषमाधमनदयवा ते भोपनामान तिवापानाचावत । वाममोपरा मागममामामानिन- पृप्तः परिकरिताति ॥ पुवायुपुद्विपरमाणे मपयानुपूष्पादिना ।। गामा गामदूरग्समाये ग्रामय प्रतीतो ऽनुयामय तदनमारग्रामो ग्रामानुपाम तद्रवन् मपन् । मुश सुरेख विपरमारे जेय रायगिो पपरे पेव गुणसिलए चेहए तरोव उवागण्या उवागवित्ता प्रहापनिलय उम्गह उगि मार गिगिता मममे तबमा अप्पाम नावेमाम यिहरराप्ति समवसरणवाफेच, समयस्स नगयठे प्रवासी वावे समा जगवतो प्रप्पेगडया सागपाश्याइत्यादि । माप्यावियनको वाच्य, तथा असुरकुमाराः शपनपनपतयो व्यतरा ज्योतिफा वैमानिका देवाय, मगवत समीप मागचन्ता पसयितय्याः परिमाणिपति राजपा द्वामादिलोको नगपतो यन्दनाय मिगत साधिगमव । तरप रायगिहे गगरे सिंपामगतिगचकप घरपटम्मुहमहापापहेमु पालो मणमहस्स एवमाइक्या एषमस्तु देवागुप्पिया समये गय महावीर रह गुससिलए पेहए भापलिय उगई मगिविरता सममेम तवमा अप्पा मावेमाणेविहरइ त मप रानु तारवार्य परहप्तास नगवताय नामगोयस्सविसवण्याए मिमगपुग बदस पममपपातिकटु यहयेउग्गाउगपुता ॥ इत्यादिर्याप्यो याष जगवत नमस्पति पयुपासतेचेति एष राजमिगमों त पुरनिर्गमय तत्पर्युपासना चौपपातिकयद्वाप्पा । पम्मोहिठति ॥ धम्मकयेह नगवता वाच्या सारैव-तपस समये नगव महावीरे सेवियस्स रमो विवगापमुहायपदेवीण ती मय मारमहानियाए परिमाय सवनासायुगामिपीए सरस्सईए धम्म परिमोर तगहा भत्यिलोर भत्यिमलोगस्य । जीवायजीवा धमोफो॥ त्पादि सपा ॥ जानरगागम्मती मोरयाजायधेपपायरएसारीरमापसाइक्साइतिरिवाजोगाए ॥ इत्यादि । पठिगपापरिसत्ति । लोमा स्वस्थान गतः प्रतिगमए तस्पा एष धाय । समगसामहामहालिया । महच परिसा ॥ महति ॥ माती भालपप्रत्ययस्य स्वार्षिकत्या दतिझपातिशयगुवा मनत्पपत् प्रास्तताप्रपानपपत् । महायानावा सतपूजाना महा_या परिपत् महापपदिप्ति समयस्स प्रगवासमहावीरस्म प्रतिए धम्म सो परिसाणिग्गया पार पामेतिम कावा।परिसारिम्या।। पपदा गारा वेठो पार देवगो चारदेवीमो चविघसघ । घमाशियो। भगवर्वधमकयो । ता परिय मत्तिनंया परिपूयस्वा पोखमासीचनमयरलवत् अध्यावाप परेपा मपीठावारित्वात् ॥ मिष्विगहनामयति । सिध्यन्ति निप्ठिता नवम्ति यस्या मा सिद्धिः साचामो गम्यमानत्वा दतिय सिद्धिगति स्तदेव नामधेय म्प्रशस्तनाम यस्य ततया ॥ टायति ॥ तिष्ठति पनवस्यामनिवन्धनकर्मानावेम सदायस्थितो प्रवति यत्र तत्स्थाम चीपमर्मयो बीवस्य स्वरुप लोकायघा जीवस्यकपविझेपमानितु लोकायस्प प्रापयपग्माया मापारे प्यारोपा उपसयानि तवमूत त्यान । सपाविबामत्ति ॥ पातुममा नसु तत्प्राप्तस्त प्राप्तस्याकारणत्वेन विवदिनापाना प्रहपणासम्मवात् प्राप्नुफामइतिष यदुच्यत तदुपचारा दन्यपाधि निरनितापाएव भगवनमः कवसिनो नवम्ति-मोवनवेषसवय निस्पोमुनिसप्तम इतिवचनादिति । जावसमासर राति ताव अगवा पामो याव समवसरण समवसरवाइति सब नगवदरखएष ॥ मुयमोपगन्निगनेसका महनमरगनिदनिमय मिरियपुरियपाहिणावतमासिरए । मुनमोषको रणविशपो, मा विशेष प्रकारविशेपोवा नप्त मीलोविकारा, कमल मपी,प्रष्टच मरणय प्रतीत एतएव तिग्मा कप्पण्यायो निकुरुवा समूहो येपान्ते तथा तेच ते निषिताय निविझा कुभिताय काहसीनूता प्रदक्षिणावर्ताय मूद्धि शिरो बायस्प सतया एव शिरोशवर्षकादिः ॥ रतुप्पलपत्तमउयमुसमालोमलतसे ॥ इति पादतसवणशाम्त सरीरवसको प्रगयतो वाच्या, पादतप्तवि शापणस्प पायमधा, रक्त सोहित मुत्पसपश्व स्वमलदसवत् समस्तन, सुकुमासामा मध्ये कोमस,, तलं पादसत यस्प स तया तथा प्रष्ठ सहस्मपरपुरिसप्तक्सपपरे भागासगएण्यक मागासगरगरतेष भागासगयादि पामराहिं पागासपलिहामएपं सपायपीरेय माहामरोग ॥ पा बामसटिक मतिस्त्रमा स्पटिबविशेप तन्मयेन उपलश्यतइतिगम्प । पम्मसुरणपुरकरिज्माणं ॥ देवैरितिगम्पते ॥ चरस समयसाहस्सी हिवत्तीसाए परिज पासाहस्सीहि सदिसपरिपुछे ॥साइस्रायः सहसपर्यायः साद सह सपा विद्यमानतपापि भादमितिस्पा दत उच्यते सपरि मप्युणरायप्तिय सिझगइनामधेय ठाणसपाविउकामे जाव समोसरण । ठापस विउवाम । नाबापमान बेबीवनाकमचवमया ते नोवनामान विजापानाभाबत । सायसमोसर यावत्समामरपना वर्षद विम उ स्पदनियमानुन पातरमिति अन्येस्या-पिसारोत्सपयो समत्वात् समयसुरत तवतत् संस्थाममा का समचतुरस्रसस्थान तन संस्थितो ध्य परिपतो यः सतथा प्रपत्र मसंहननोऽपि स्यादित्पतमाद धनरिसाणारायसपयसप्ति दर सहननं अस्पिसम्पपविशेष यजादीना सतरा मिद-रिमनीयहोरपडो यमपुबनिसर्पवियाग्राहि । उममफापो शारापत्तवियावादिति ॥ १॥ तत्र वधम्म तत्फीलिका कीलितफाष्ठसम्पुटोपम मामध्ययुक्तस्यात् अपनय लोपादिमयपत्यकाष्ठसम्पुढोपमसामर्यान्वितत्वा द्ववर्पना सबासी नाराचम्म उनपतो मकटवन्धनियगुफाप्ठसम्पुटोपम सामोपेतत्वात् यजर्पप्रमाराच तत्सहमन मस्पिस चयषिशेपो नुत्तमसामप्ययोगा यस्यासी यमपलनाराषसहननः' अम्पेतुकी सिफादिमस्य मस्पा मेघ यसपम्ति अयप मिम्धवर्षाऽपि स्यादित्यतमा । पपयपुलपमिघसपम्हगोरे । कनकस्प सुवरस्य । पुसगत्ति ॥ यः पुलको सब सस्प योनि पापपरोरगासनमा तथा ॥ पमति पनपत्माविबेसरानि तहट्वीरो यः सप्तया। वहव्यास्यातु-कनकस्प म लोहावे या पुलक. सारो घ पातिशप सरप्रधानो यो मिफपो रेशा तस्प यत्पत्म यासत्व तहद्दौरो यः सतपा प्रथया कनकस्स या पुलको हतत्वेसति पिन्दु सस्प मिफपोय पता मदशो यः मतया ॥ पमहति ॥ पन सस्य र प्रसावा त्येसरामि समाते ततः पनवगौरो यः सप्तपा ततः पदहयस्प कमपारया' प्रय पयिनिष्ठपरवरमितापि स्पादित्यतपात उग्गसवेति ॥ उग्र ममपृप्य तपा मिशनादि यस्पसउग्रतपा' यदन्येन माफतपुमा नशक्यते चिन्तयितु यारिसहनारायसघयणे कणगपुरलगणिघसपम्हगोरे उग्गतवे ग्स मम्याने मम्पित।परिमामारायमघयने मामचारविगेप तसषयष पप्पशाव कोकिमा पभोये पाटा मारापीये विहेपासे मकटया पाया पचनपभगारापना परमहार। कागपुसमपिघमपममारे । सुपर बसोटो जिम ववोडोष पन्न पममनोपरे मोरवप नेहा गरी रना । उम्मतये । पतरे बिनही जायापुरये चीतम्या नजाय तपहनावा पतप प्रनयनादिरादित्ततये॥दोसजाय पमाम कमकपोया वनदावाभगो चम्निमरोशा वाना तप । तत्ततवे । वेतपेवरो कम तपायोवे ते तसतप साये । महातपे । भामसादिवापरहित तेमाटातप । उरासे । प्रधानत धानिसम्महतुकासमर्थ ३ तिक्मुत्तो प्रायाहिरापयाहित पकरी २ वदइनमसह २ एवंवपासी सुयक्साए प्रते । निगपेपावयये पत्थिय प्रमेमोर समवेवा मारणेवा परिसपम्ममाइक्सितर एववासा वामेवदिसि पाठवूया तामेवदिसिं पशिगयत्ति । तेपमित्यादि । तेनफासेन तेनसमपेन मम बस्स प्रमवतो महावीरस्प ॥ नेत्ति । मपमः ॥ प्रतवासिप्ति । मिष्यः अमन पदद्वयेन तस्स सबससानायकत्वमा पदभूरप्ति ॥ इन्द्रभूतिरि ति मातपितहत नामधेय नामति । वित्तिपरिशोमात् माघेत्यः प्रम्तेवासी किस विवजया प्रावकोऽपि स्पादित्पतमाह प्रयगारेति ॥ मास्यागार विद्यत इत्यनगारः, पयमा १वीतगोत्रोऽपि स्पादित्यतारा मोयममोत्तेति । गौतमसगोशात्पर्पः, अयमा तत्कालोचितदेहमा नापेषयाम्पूनारिकादेहोपि स्पादित्यतभार : सतुस्सेदेति । सप्तहसोया प्रयन सरपहीनोपि स्पादित्यतमा समघरसमठाससहिरत्ति ॥ समें माने सपरि पप समसपुरुपसपनोपेतावयवतपातुस्प तब तबतुरनाम प्रधान समचतुरस्र अथषा समा' भरीरसपरोक्तप्रमावापिसवा दिम्प पतसोमयो यस्प तत्समचतुरतं प्रमपस्त्विा चतुति ग्नागोपसपिताः परीराषपवाइति । अन्येत्वार-समा प्रन्यूनाधिका पतलो प्पमयो पत्र तत्समचतुर समपथ पर्यकासनोपविष्टस्प जानुनो रन्तर पासनस्य सत्ताटोपरिनागस्य चान्तर दपिस्कन्यस्य वामवानुम भान्तर वामस्कन्ध धम्मोकहिन परिसापफिगया। तेणकालेणं तेणसमएण समणस्सनगबठेमहायीरस्स जेठेचतेवासी इदनूतीणाम थणगारे गोयमगोत्तेण सत्तुरसेहे समचउरससठाणसहिए सोए एवं बोवा प्रमोवामधमोसेरवारि परिसापरिममा । पपदासरघोसाय प्रवदेवको पोतानो मानबरिये गया । शेषधारेण । विकासनेविषे तेसमएकतिसमरनेविया समरमभगवनो महागीरम । वमनवपनो ऐमर्यादिमुपयुक्त महायोरखामोनो । वढेधतेवासी । बडो ममोपने विषैरी पारो प्रवमशिष रमतोमा इन्द्रभूति एकमातापितानं दोघीनामवानो घररहित एतावतासाठ। गोयमगोत्तेषं पनगारे । गोवमनामा गोरनो धरसार । सत्तुरसेो । सातारघरो मरोर वोनो । समातरंससंठारसंठिए । सबरपुरुपतरात सम तब पारे प्रसाना पा समचत - तत्या दमा चतुद्दापूर्वी प्रमेन तस्य मुतमेवसितामा सपायपिशानादियिकतोपि स्यादतभार ॥ पटनावोवगरप्ति ॥ यसचानयभानचतुफ ममम्यितात्यमा उत्तपिपरपयुक्तोऽपि यदि म समग्रयुतयिपयष्यापिधानो भवति चतुर्दभपूर्व विदां पदस्थानकपतितत्वेम भवबादित्यप्तमा समानारमनियादति ॥ मर्यच ते प्रत्तरमनिपाताच तसंयोगाः सर्पपां पातराणा मधिपासा सर्वोत्तरसभिपाता सेयस्य यतया सन्ति सस पावरमषिपाती, अध्यापिया मयासुराबारीरिपारामि सामस्पेन मितरी पदितुं शीलमस्मेति मध्यावरसनिवादी सच एवमुसविणिटो भगवान् वि नमरागिरिष साधावितिसस्या शिष्यापारस्याचा समपस्सनापाठमशमोरस्सा भदूरसामते विहरतीति योग साथ दूरंप विप्ररुष्टं सामम्ता सधि रुष्टं तप्रिपेपाददूरसामन्त तत्र मातिदूरे मातिनिकट इत्या, फिविपा सस्ता विपरतीत्यसमा ५ सजावृत्ति ५ खजानुमी पस्या साईजानु हा दपपिण्यासनयनमा दीपग्रहिकमिपद्याया मनावा पोलादुकासनइत्पपा । पाहोसिरेति ॥ अमोमुसो भो तियम्या यितिष्ठि किन्तु नियतनू भागनियमितदृष्धिरितिमाघः भापकोटोवमपत्ति ॥ ध्यानं पम्पं असावा तदेय कोष्ठः प्रसूती यामकोष्ठ स्त मुपगत तत्र प्रयिष्टो धानकोष्ठोपनवो पचारि-कोठक पान्य प्रतित मविमसतं मयत्येवं समवान् यानतो विप्रयीन्द्रियान्तापरणपप्तिरिति । सप्तमेति संघरेशा तवसत्तिनममा चउणाणोयगए सवरकरसणिपाती समणस्सजगवठेमहावीरस्स ष्यदूरसामते उहजाणू श्यहोसिरे जाणकोष्ठोयगए सजमेणतवसा पमप ॥ नमानामित पारग्राममोधरारमियरमनिवाई॥मनपपाना सयाम तेरना चाप । पचवा, यवपमक्षकारी अपरनी सगायें परोने पापामा मोबप जाना ममपरे । समचम्मभगवपामहावीरम्म । यमण भगवस योमहापोरम्बामोने । प्रदूरमामते । प्रतिवेगमीनी पति अनामयो । जात्रा मान वेतो पतमे असामनताले । एकोमिरे । प्रधाइटि भूमिनेवि । सापकोशवगण । धमन्याग यमया म पो बाठा तेनिविप उपगत पैदा जिम मोठामानिमामो धाम परोपरी वोपसहो तिमथानमाहिरहता इन्द्रिवमानमापिवार पमरेनो।

मपि तहिन तपमा पुत्तात्पर्पः । दित्ततदेति ॥ रीप्त जावत्यमानदहमइव कर्मवममहनदामसमपतया स्वसित तपो धर्मभानादि यस्य सत पा तत्ततवेत्ति तप्त तपो पनासी तप्ततपा एवहि तन तत्तपतप्त येन फर्मावि सन्ताप्यन्ते न तपसा स्वास्मापि तपो रुप सन्तापितो पतो म्पस्यास्पश्यमिव बातमिप्ति । महातवेति ॥ पाशसा दोपरहितत्वात् प्रशस्ततपाः ॥ घरासेत्ति ॥ नीम समादिविछोपविशिष्ठतप करसा : त्पायम्पाना मस्पसत्वानां जयानपात्यप सम्पत्वा ॥रालेति । उदार प्रधानः ॥ घोरति ॥ घोरो निगा परीपहेन्द्रियादिरिपुगणविनाश मामित्य निदयात्पर्यः मन्ये स्वात्मनिरपेच पोरमाहुः ॥ पोरगुत्ति ॥ पोरा प्रन्यैर्दुरनुपरा गुणा मूलगुगदयो यस्य सप्तपा । पोरतवस्सित्ति ॥ पोरे सपोनि तपस्त्रीत्यर्प । पोरवनरवामिति ॥ पोर दासर मस्पसत्वे दुरनुपरत्वा अक्षत्रय तत्र पर्नु मील यस्य सतपा। उप्यूटसरीरेतिम सच उजित मिवोजित शरीरं यन तत्सस्कारस्पागा सतया । ससितविठसतेयससेप्ति ॥ सप्तिा गरीरामालीनत्वेन प्रस्खतागता वि पुसा विस्तीर्ण भनेकपोवनप्रमारक्षेत्राभितवस्तुदानसमर्पस्वा तमोलेश्या विशिष्टतपोजन्पसब्धिविनापमनवा तेजोग्याला पस्य सतपा मूमटी बाहतातु ॥ उबूरामरी रममित्तपिपुस नेपलेसेचित कर्म पारय कस्वा व्यास्पातमिति । चठदसपुष्विति ॥ चसुईभपूर्वापि विद्यन्ते यस्य तेनैव तेपा रवि दित्ततवे तप्ततवे महातवे उराले घोरे घोरगुणे घोरतवस्सी घो रयत्नधेरवासी उच्छूटसरीरे सखिप्तविउलतेउलेस्से घउद्दसपुछी पासत्यादि पन्थजीपमे मयतपणे । धोरे । निर्वप परोपा इन्द्रियादिरिपुविनाशवामी मिदय ते घोरकाोये । पोरगुपे। पनेरेखीव पाटरी नसीए । ग पाचारना ममगुपहे देशमा । धोरतमामो मारतपेवरी तपस्यो । धोरबमचेरवासो पोररामपभमेरे प्रत्यमत्व बोवे पाथरता टोहिनी यामा बचपनेविषेषमाना योग ।। उटमरोरे॥ मरोरनो भोमारहित हमि देखनो ग्यमा वि । समितविक्षततेयोने॥ शरीरमारिसबोचोछे भने समावनपमात्र पावितररहनममय ते माने यालिरे एमिमिटतपणो अपणे ॥ सहसपुग्यो । सत्पादादि पदे परना भरपसार ॥ मात्रा . उपते पत तत्पश्रमदाति हेतुत्वमदर्शन भोषितमेव वास्यासद्वारत्या त्तस्य यदायु -प्रपातदीपामप्रवचनास्करा प्रकाशचन्द्रामधेविनावरीम् । इस पदपि प्रतदीपत्यादेवा प्रवृत्तनास्वरत्व मवमत तपापि अप्रपतनास्वरत्व प्रवृत्तदीपत्वादे तुतयो पन्यस्तमिति ॥ उप्पससंसए उप्पसकोगह खेतिप्राग्यात् तथा सजायसारत्यादि पदपदक प्राम्यत् नयर मिए सम्गदः प्रकर्षादिवचनो यपा-समातकामोयसमिहिमूत्यां मानात्मवानिः मतिमाममाघ । संघमाग जातेधा वार्तवीर्यइति मन्येतु-जायसत्यादिविशेपपद्वादसम मव व्यास्पान्ति बाताबवायस्प प्रप्तुं स बासन पिमिति जाप्तमहात्मतमाए यस्मानातसंसय रद यस्स्वेवस्या देववेति अप जातसंझयोपि कपमित्पतमा यस्मा जातफुतूहल फयमा मा स्पाप मनोरस्ये इत्यभिप्रायवानिति, यतच विक्षेपणत्रय मवग्रहापत्तपा द्रष्टव्यमेव , मुत्पन्नसमातसमुत्पनरद्वस्वादय पायपारवानेदेम याचा, अन्यत्वाहा-आतमहत्याद्यपतपो स्पवमहत्वादयः समामा वियचितार्थस्य प्रकपत्तिप्रतिपादनाय स्तुतिमुशेन ग्रन्पकतोक्ता , नधैव पुनकातदोपाय पदा-यताइपानयादिनि राषितमनास्तुवसपानिन्दम् । यत्पदमसहस्ते तत्पुमसक्तनदोपायेति, ॥ १ ॥ उफाएकति ॥ 3 त्याम मुत्पा न पत्तनं तया प्रत्यया सत्तिपति छौ मयति, उदात्युक्त क्रियारम्ममात्रमपि प्रप्तीयते, यया या मुत्तिष्ठतइति, तत सहयथे दापो क्त मुत्यायेति, ५ उपयुठेइति ॥ उपागध्धती त्युत्तरक्रियापेठया उत्थाननिपापा पूर्वकालतानिपामाय उत्यायोत्यापेति, कामत्ययेन मि उप्पणससए उप्पणकोउहाले सजायसढे सजायससए सजायकोउहल्ले उठाएउठेति उठाएउठेता विरोध हने । उप्पाबा अपनायोतहसवियपहने। सपायसो । सातकहिये विशेषयो प्रबर्ती यहा बांछा गाने सजायससए। सजात बिपी प्रमत्वोद मदेवेशने । सजायफाय । विशेषको प्रवो बोतासहने । समुप्पसमडे । विशेषको वपनीछे याहने ॥ समुष्पक्षसमए । विशेषधी अपनाई मगरखाने । समुपदबोउरो ।। विपयो उपना पोतास बाने तिबार ॥ गाएतोत्ति। स्मामवयको छठे जठोने प्रभा पया । गरगोता। बठीने वभावाने ॥ वेपेवसमभगमहामोरे ॥ विहां यमपभमत योमहापौरमामोतिषच्यामच्छाउवागपाता । ति .

दिना चग समुपपायों सुप्तो मनुष्टष्या सपमतपोग्राय चानयो प्रधानमोवाङ्गस्वस्थापनार्थ प्रधानत्वम्म सयमस्प नवर्मामुपादानहेतुत्वेन त पसप पुरायकम्मनिलरपरतुत्वेन प्रतिवाभिनवकर्मानुपादामात् पुरामकर्मतपबाट समसकर्मतपत्तवसामोहइति ॥ अप्पासनाषेमावेविरात्ति पात्माम वासपं सिहतीत्यपान ततयति ततो ध्यामकोष्ठोपगतविहरणानन्तरं मिसिवाक्पालङ्कारापा । सेइति ॥ ममतपरामझाम सस्पतु सा माम्पोक्तास्य विनोपायपारमार्धमागवगोयमति ॥ सिमित्याह । जायसनात्यादि । बातमदादिविदापयः समुत्तिष्ठतीतियोग स्तन्त्र पाता प्रवृत्ता पवारणावपमापार्यतत्वधानम्प्रति यस्पासौवाप्तमः तपा प्राप्तः समया यस्य स भातसाप सापस्स्वमयधारिसापान सपैवं तस्य प्रगयतो मातो नगवतादि महावीरेश पनमायेचमियरत्पादो सूत्र चसकर्ष यतितोनिधिष्ट सत्रद पश्व चलन् सएपपसितइत्युक्त सतकापषिपया वे तो निहंगो पसमिति वर्तमामकातविपया चतिततिचा तीतशास्तविपया प्रतोत्र सशपः कथयाम मरवापोवत्तमामः सरया तीतो नयतीति वि सदस्वा दनपा पासपोरिति तपा ॥ बायकावालेति । जात कुतूहसं यस्य सजातकुतूहलो जातीत्सुपात्पर्पः कप मेतान् पदार्पान् भगवा म् प्रयापपिप्पत्तीति तथा सम्पबमति उत्पन्ना मागभूतासती भूता मदायस्प सउत्पनषदः अथ जातमाह इत्पतावदेवास्तु फिमर्थ मुत्पन्न मन त्यग्निपीयते प्रपतपरत्वेने वोत्पत्रमदयस्प सम्भवा बसनुत्पमा महा प्रवर्तताति? पहोच्यते ऐतुत्वमदनापं तपाहि-कम प्रवृत्तव शप्पाणनावेमाणे विहरइ तएण सेनगवगोयमे जायसहे जायससये संजायकोउहाले उप्पणसहे । सबमेन ॥ संवमेंबरी नपापमठपानहो। तरसा । तपेपरी पुरातनकम मिलर एरा योगौतमलामो॥पप्पाईमावेमापेविकरपामानेभावताय मातिर तपषभनयमायम । तिबारे ते भगवत गौतम । बारमो। प्रपत्तीदेवहा तत्वबागवानो पोशाने। जायससए। प्रपोंछे समय बीमहामोरदे"चनमानेपसिप पावत्तमानबार भने पतोतकाम मरोणोधिमाथा पसमय । ममावकागो । प्रपो पत्मकपची पाने पामो एपनिवपरिणवास पागतापतो । उप्प च मम्। तमामजपमोरे चाचाने विचार सपनापिनापती । सप्पचममए । अपनी नरेन .

॥ १ उपते यत उत्पप्रभाति हेतुस्वप्रदसन पोषितमेव वारपालद्वारस्वा स्पा यदा:-प्रपतदीपाममयत्तनास्सरा प्रकाशचन्द्रा ब्राम्युयुधेविनावरीम्। समयपि प्रवृत्तदीपस्यादेवा प्रवृत्तनास्थरत्व मयमत वयापि अप्रपतनास्त्रत्वं प्रवृतदीपत्वादे तुतयो पन्यस्तमिति ॥ उप्पणससए सप्पलकोतए बेतिप्राग्वत् तथा सजायसमात्यादि पदपदक प्राम्पत्, नवर मिह सम्गदः प्रकर्षादिवचनो यथा-समातफामोवलनिधिमूत्या मानात्प्रजाप्ति मतिमाननाय । पेग्नेयमकय जातका कार्तवीर्यइति अन्येतु-मायसम्ोत्यादिविदोपपद्वादशक मेव व्यास्पान्ति वातामहायस्प प्रष्टुं स जातम प्रिमिति जातमहात्मप्तमार यस्मामातसंसप इद यस्स्येवस्या देववेति प्रप बातसमयोपि कपमित्पसार यस्मा जातमुतूहलः कपना मा स्पाप मयतोत्रस्ये रस्पभिप्रायवानिति, मतप विक्षोपरप्रय मयग्रहापश्या द्रष्टव्यमेव , मुत्पन्नसमातसमुत्पन्नमहत्वादय हापायधारणानेदेन पाया, पम्येत्या-जातमनुस्यायपेजयो त्पन्न महत्वादयः समामार्या वियपितापस्य प्रापप्रकृत्तिप्रतिपादनाप स्तुतिमुसेन अन्यरुतोक्ता , मचैव पुनहातदोपाप पदार-यताइपनपादिनि राषिप्तमना स्तुवतधानिन्दन् । यत्पदमसते तत्पुनसक्तनदोपायेप्ति , ॥ उठाएकत्ति । उ त्याम मुत्मा कहें यातनं तया उत्पमा उत्तिष्ठति उद्धो भवति, सहायुक्त झियारम्ममात्रमपि प्रतीपते, यपा वातु मुत्तिष्ठतहसि, तत सहयग्य वापो त मुत्यायेति, ॥ वताएउठेप्ति ॥ उपागायती त्युत्तरक्रियापेक्षया उत्यानक्रियायाः पूर्वकासतानिधामाय प्रत्यायोत्यायेति , कामत्ययेम नि उप्पणससए उप्पणकोउहल्ले सजायसढे सजायससए सजायकोउहल्ले उठाएउठेति उठाएउठेता वियप जान । उप्पपबारा अपनाईयोसपिपाने । सघायस? । सातकहिये विशेषधो प्रवर्ती यहा बांछा हमे ।। समायससए। सनात विपकी ममत्या संदेशवहने । सजाववोरहो । विपक्षो प्रयनोई कोतासाने । ममुप्पसमडे । विमेपो उपमी वाचोने ) समुप्पससंसए । विषयो वपना सगवाने ॥ समुप्पसकोणले ॥ विमेपवो अपना पोतास पाने तिगार॥ जाएमति॥ मानवयको पठे कठोने धमा पया ॥ पोतावठीने जमावाने ॥ वेपेवसमपभगवमहापारे । विमा यमपभगवत बोमहापोरसामोहे ।।तेरेपछवागच्चाउवागच्यासा॥ति - दिना चवद ममुपपायों सुप्तो भद्रष्टव्य सममतपोग्रार पानपो प्रधानमोवाहत्यरयापनाचे प्रधानस्थम्म सयमस्य मयबमानुपादाम तुस्वेन त पसप पुरायकन्मनिचराहतुवेम प्रवतिकाभिनयकम्मानुपादानात् पुराणम्मतपणाप सफासफर्मवपप्ततगामोतइति । अप्पापनावेमापेपिरति प्रास्माम वासप स्तिष्ठतीत्यर्पः। ततरत्ति । ततो ध्यानकोष्ठोपगतविरगनन्सर अमितियारपालङ्कारापः ॥ सेइति । प्रस्ततपरामाय स्सस्पतु सा मान्योक्तस्य विधोपावपारगापमा भगवगोयमेति । विमिस्पाइजायमानत्यादि । जातमहादिविक्षपण मनुतिष्ठत्तीतियाग सत्र जाता प्रपत्ता मवारचा वापमावार्यतत्वचामम्मति यस्पासोजातमद्धः तपा बात मुशपा यस्य स भातसशप समयस्स्थमयपारितायचान भवं तस्य भगयतो । मातो नगवताति महावीरेर बनमायेचसिएरात्यादी सूत्रे घसमर्प पसितोनिदिष्ट सबष पण्य चलम् सम्वसितइत्युक्त सातयेकाचविपपा य तो निगो पसमिति वर्तमानासविषया सितइतिचा तीतकासविषयः प्रतात्र ससपा पपन्नाम यएवायोवत्तमान सम्या तीतो प्रयतीति? वि सहस्वा दनयो पालयोरिति तपा। बायकोकाहति ॥ बात कुतूपर्स पस्प सजातकुतूहतो बातीस्सुम्पहत्या कप मेताम् पदार्यान् भगवा म् प्रभापपिप्पतीति तथा ॥ उप्पसमाप्ति । उत्पना मागनूतासती मूता महायस्य सउत्पना, अथ जातमद इत्यतायदेवास्तु किमर्थ मुत्पन्न भदबत्पप्रिमीयते प्रयतमत्त्वेने वोत्पममहत्वस्य सम्मत्वा यसमुत्पता बना मवर्तताति? पोष्यते रेतुत्वमझमा तपाहि-मयं प्रयतमा शप्पाणनावेमाणे विहरइ तएण सेलगवगोयमे जायसहे जायससये संजायकोउहल्ले उप्पणसहे । सबमेन । सम्परो मयाबमठपावनहो। तबसा । तपेबरो पुरातनवम निर्षरे पापा योगौतमलामो प्रयाप्रमापेमारेविहरतापामानेमावताय मा विचरे । तपासेभमबमाषम । तिबारे ते भगवत गौतम । बारम। प्रवर्ती यहा तलमापपानो पांश जाने । जायसमए । प्रपत्यो समय बोमहापौर"चममानिए' वत्तमानवास पने प्रतोतबाम मरोमोजिमनाचा एमयम मनायो । प्रमों समयपषी नेहने पामी एपविमपरिणवामी सवारतासमो । उपपमा तपानापमोरे चावाने विचारच अपमापिनापानी पचनभए - चपभान- दिवाना स्मारजनि पनुयाममाप्ति ॥ पयुपामीन सेयमानो ऽमेनप विशेपमपदम्यफेम प्रययिपि रुपदशित भाष-सिदायिगशापरि यनियहि नुतगिजनिति । प्रप्तिमायपुष्ट उयताहिमवेयवति ॥१॥ एषयपासिप्ति । एप यक्ष्यमायप्रकार यस्तु प्रवादी दुक्तयाम् ॥ से इति ॥ तत् पल पून् पसललितमित्यादि । पूगति ॥ एय म तत्र तत्रा स्पैवष्यारयातत्वात् , प्रथया' से इति शष्दो मागप्रवेशीप्रसिद्यो या धाएँ पर्तत अपदस्त धापापन्यासापा, परिमन्नार्थीया ; यदार-अपप्रक्रियामग्नानन्तयमासोपन्यासप्रतिवरमसमुपयपु, ॥ नूनमिति निधित नंतति ॥ गुरो रामस्वयं ततय हेमदन्त ! कस्पाबम्प सुरास्यसपेतिवा प्रदिफास्यासेसुरातिवचमा त्माकृतशेस्यावा मघस्य ससारस्य नयस्यवा मी त रमारतुत्या हयानो मपानोमा सस्पाम वर्ष, रेनपान्त ! ऐनयान्त! माम् । या भानादिदीप्यमान भादोसावित्तिवचनात्, घाजमाना या दो प्पमान प्राप्तावितियचनात्, अपर प्रादित प्रारम्प नर्तक्ति पमरतो ग्रन्यो भगवता सुधम्मस्वामिना पम्ममानस्य प्रथमझतस्य प्रथमोद्देशक रुप मयधाप मनिहितः प्रथा नेनसम्बन्पना यातस्य पम्ममाङ्गप्रथमसप्तमधमोवेशकस्पे दमादिसूत्रम् । चलमाणेचलिएकत्यादि । अथ केनामिमा येच प्रगयता मुधर्म स्यामिमा पप्पमाङ्गमपममतप्रमोशफरपा पानुकपनं कुर्वत पमषवाचक सूत्र मुपन्यस्त नाम्पामीसि ? प्रश्नोष्यते इस चतुर्प पुरुपायु मोतारस पुष्पापों मुएसः सपातिझापिस्वात् तस्यष मोतरपसायस्प माघनानाच सम्पग्वीमादीना साधनस्यमा व्यनिधारिसा मुन पञ्जयाममाणे एवयथासी सेणणनते घलमाणे चलिए १ गान कमानरूप सुसम्पप एका गरमा पामत्रच मवर जामवा, पत्र परासकी यासुधर्मास्यामाये "पसमापेपनिए पावागष्द सूचनी पादि पा पापमेरागद पानपाखा रमपबा । उत्तर, पुषपाष पिyाहि मुफ्य मोच, तेहलो साधपा सार ततो कमभेषरे अपने ते कमनामनामनुक्रम व तिमी एपप्रप्तामा तेची 'चममायेचनिए चल मारपहिये अनम पापपो स्थितिववो चसवामाचा भागपा समुपवया तेवमपसिएकहिये उदे पायाजोपाते विम पमनकामको भागवरनाम्न प्रसस्यातसमयसगेछे तिहाज पहिसी पचनसमय तहनेधिम मामांचा तेषयावहीयेषि फर्म दिमतीति अवेत्यादि मास्तमयोगा रम्पयस्वादर येनेति ॥ यस्मिदेव दिग्मामे ममणो भगवान् महावीरों यतते । तेवत्ति । तस्मिमेव दिमागे सपागमति, तत्वासापेक्षया वर्तमामत्या दामममक्रियाया वर्तमानविनत्यानिर्देश हत, उपनतवानित्यप, उपागम्यप श्रमण ३ तापत्र । तिक्युत्तोति ॥ बोम् पारान् बिकत्वः । प्रायाशिवपयादिहरेइति । प्रादपि पिकासा दरम्य प्रदक्षिकः परितो घाम्पतो दति पएष पारशिवमरणियो त संकरोतीति । वदति । वन्दते वाचा सौति । ममसहति ॥ ममस्पप्ति कायेन मणमसि । मचासोति । म मेष अस्पातलो तिनिफ्टा अवपापरिहारा बास्पासबेवा स्याने पर्तमानइति गम्यम् ॥ नाइदूरेति । न नैवा तिदूरो ऽतिविम कष्टो नौचित्यपरिहा रात् मातिदूरेषा स्पाने । सुस्सूसमावेत्ति । घगववषनानि मोतु मिश्चन् । अनिमुदति । अनि भगवन्त सपोहत्य मुरामस्ये त्पनिमुसा, तपा। विपरबति । विमपेम हेतुमा । पजसिउति ॥ महष्ट प्रधानो सप्ताटतटपटितस्वेन पन्जालि ईस्तन्यासविप कतो विहितो येन सो ग्न्याशिता जेणेवसमणेनगवमहाघीरे तणेयउवागच्छइ उघागच्छिता समणनगवमहायीर तिस्कुलोछायाहिणपयाहिण करेइ करेइत्ता यदइ णमसइ यदिता णमसित्ता णच्चासणे णातिदूरे सुस्सूसमाणे णमसमाणे शनिमुहे विणएण पजलिउके अपने विपायो । समयममममहापौर ॥ बमए भगपत योमहावीर मामौमते ॥ तिमुत्तापायाहिपपयापिपरोवरात्तातोनवार साहि ममी पारमो परषिणा पउपर परेबरोमे । बंदा ।। सुतिबरे वपनेवरी ॥ ममम ।। कायायेबरो नमस्त्रारकर ।। बदित्ता यादीने ॥ पमंसि ता ॥ नमसारबरौने । पचास । प्रतिपासबर्दवानी। पातिदूरे । प्रतिदूर मेगसापपि नहो । मुम्पमा । भमपत योमहावीरणामीनाव पनामसवा बिता । चमसमारे ॥ नमस्वारपाता । पभिमुझे। भमतदिये मुपवरी। विपए । विनयधो पायातमाटाचतापवा पनि सेसमोडमारेममाणे । पनुगापमारे।। पावरताबमा एपिपपरेपामबानो पिपिकतो। एमापीरममावारा। सेचूचभते ॥ नगि पेन प्रपमममये नवसित मुत्तरेषु चततीति ? प्रतः सर्वदेया घसमप्रसङ्गः अस्ति चाम्त्ये समये पत्तम स्थितिपरिमितत्वेन कमानावाभ्युपगमात् प्रत पायलिमाकालादि समययय विधिपसित यह तरिम चलित तन्नोत्तरेषु समयेपु वसति यदितु सेवपि तदेवाय चप्सन म्मवे सदा तस्मि य रमने मर्यपा मुदपायसिमाचलनसमयामां पय स्यात् यदिशि तत् समयवसननिरपेक्षारयन्पसमयचसनानि भवन्ति तदो सरचलनानुक्रमण पुन्येत नान्यथा सदेय घसदपि तत्कर्मचसितम्भवतीति । १५ तथा ॥ उदीरिखमापदीरिएति ॥ सदीरगनाम अनुदयप्राप्त घिरेशा पामिमा फालेम पटेदितव्य कमदसिक नतस्प विगिष्टा भवसायप्तपान करणेमा कप्योदयेप्रपेपर, साचा सम्सयसमपर्या तनी तयाच पुमसदीररया उदीर पा प्रथमसमपएयो दीयमान कम्म पूर्वोत्तपटवृष्टान्तेनो दोरित म्भवतीति ॥ २५ सपा । वेदमागेवेइरत्तिवेदन कर्मो नोगो ऽनुष त्यप, सव घेदन स्पितिपया दुदयमाप्तस्म कर्मय उदीरशकरोन पोदय मुपमीतस्य प्रवति, तस्पच वेदनाफालस्या सोपसमयत्वा दायसमये वेद्यमानमेय येदित भयतीति ॥ ३॥ तपा । पहेबमापेपहीत्ति ॥ प्रहारंतु बीवप्रदेशः सह समिष्टस्य कर्मय सभ्यः पतम, एतदप्यसस्पेयसमय परिमायमेय सस्पतु प्रहारस्या दिसमपे प्रहीयमाप कर्म महील स्पादिति ॥ ४॥ तथा ॥ विनमायेविणेति ॥ वेदन तु कर्मको दीर्घकालाना उदीरिजमाणे उदीरिए २ वेदिजमाणेवेदिए ३ पहेजमाणे पहीणे ४ म पपठा युपते गरि ततु गुमा तेनुमानयहोये पशिसाततमोप्रपेशाये एपिरोपर्व ।। उदौरिखमा उदोरिए । पेवम उदय पाप्यानयो प प्रा गामो ताने वदने तहमने गुमायामायमचीकरो पावर्षी उदेपावीये तेन्दौरपाकहीये ते पसखातसमये पतं ते तिरे सदोरबायेवरी प्रथमसम य से उदोगामापा कम ते उदोरारावागाव तेप्रवमसमयगोपपेचाये प्वकामा वसनादृष्टोत तिवनीपरे जोपयो । ३। वेदिखमापेवेदिए । तवावमनी भोगवा पमुभवात्यय ते पमपातसमयमोमवत तिला प्रवमसममें पेटवामापो वेशम तेवेपोष कहोये प्रथमसमपनोपपेचाये पूर्ववत्रो वमनो इष्टोत से नोपरे । पोममारे पहोरे । तवा बोवपदेगसहितमियो कम तेहनो प्रोपादेशबको पतन ते पुप प्रसम्यातसमयेव तिला प्रषमसमवे प्रमीयमा यमिपमस्प शासना छारत सङ्गि रिप्यते उन्नयनियमरस्येव सम्पग्दर्शमादीनि मोहस्यैव साप्यस्प साधमानि नान्यस्या पस्य मोतय तेपामेषसा धमामा साप्यो मान्येपामिति, सब मोजो विपचपया तहिपचय पन्ध सधमुस्य' कम्ममि रास्मनः सम्यन्य पातु माम्ममा प्रतये यमनुभम उत्ता, बसमानेइत्यादि । तत्र पस्लमायेति ॥ चप्सत् स्थितिच्या दुरय भागवत्, विपामाप्रिमुखीमय यत्सम ति प्रमरगम्यम्, तपलिस मुदितमिति प्यपदिश्यते चसनकासो पदयावसिवा तस्पच बासस्या सप्टेपसमयत्वा दादिमभ्याम्तयोगित्व कमपुद्गलाना मप्पनन्ताः स्मन्या प्रनन्सप्रदेशा सतय ते क्रमेव प्रतिसमयमेव चलन्ति ता पोसा वाद्यधसनममय सस्मि यसदेव तपस्तित मुष्यत फयपुन स्वर्तमानम् दतीतं भवती ? त्यो पत -पथा-पर उत्पद्यमानघास मपमप्तम्तुप्रवेशे उत्पद्यमानएवो त्पखोनयप्तीति , सत्पद्यमानत्वप तस्य प्रथमत तुप्रयेशकासा दारम्य पट उत्पद्यत इत्येवं व्यपदेशदर्शना स्मसिद्धमेवो पाव तूपपत्पामसाध्यते तपादि-उत्पतिक्रियाशालएष प्रथमतरतुप्रवेशे सावुत्पको यदि पुन गौत्पमोनविष्य तदा तस्याशियाया वैपमेमनविष्य निष्पसत्वा दुत्पाद्योत्पादनाहि क्रियामपन्ति, यपाच प्रपमेझियापये मासायुत्पन्न स्तयो तरेपपि पये घनुत्पमएवासी प्राप्नोति, बोयुत्तरपभियावा मात्ममि रूपविझेपा येन प्रथमसमये नोत्पन्न तदुत्तरान्निसूत्पाद्यसे मता सर्य देषा मुत्पत्तिमस्त दृष्टाचोत्पत्ति रग्त्यतन्तुमवेझे घटस्स दर्शमात् अतः मधमतम्नुमयेशबासरव विधिदुत्पन्न पटस्स यायचोस्पय मतदुप्तरक्रिययोत्पा यते यदि पुमरुत्पाद्यत तदा तदेवदेशो त्पादनएव क्रियावां फाप्तामाप यः स्यात् , यदिहि तवशोत्पादननिरपेक्षा म्याः क्रिया भवन्ति तदोत्तरांशानुकम मुन्मेत मान्यथा, तदेव यथा पट उत्पद्यमान एवोस्पय साया सस्येयसमपपरिमाणस्वा दुदयापतिकापा प्रादिसम या त्मपति पसदेव कर्मपलित, कप यतो यदिी-सत्यम्मच मवसनाग्निमुखीनूस मुदपायतिफाया प्रादिसमपएव भवतितं स्या तदा तस्या यस्य वसनसमयस्य वैयपस्या वा चसितत्वात् यपार तस्मिन् समये नचलित तथा हितीयादिसमपेपि नपतत् कोहि तेपा मात्मनि पविणेपो मन मयमममपे मपतित मुप्तरेषु चलतीति ? प्रतः मर्व देवा घसमप्रसङ्ग प्रति चाम्त्ये समये चसन स्थितिपरिमितत्वेन कर्मानावान्युपममात् प्रत प्रायलिकामालादि समपएव किमिवसित यच्च तस्मि पलित तमोत्तरेषु समयेषु चलति यदितु तेवपि तदेवाध चसन म्भषे तदा तस्मि और चसने मर्यपा मुश्यावलिशावतमसमपानां तप स्यात्, यदिहि तत् समयचलननिरपेपाम्पन्यसमयचलनानि भवति तदो तरवसनानुनमण पुन्पेत मान्यथा तदेव सदपि तत्कम्मलितम्भवतीति ॥ १॥ तथा ॥ उदीरिज्ममारतदीरिरप्ति । उदीरशानाम अनुदयप्राप्त पिरेणा मामिमा फालेम यद्वेदितय कर्मदसिक मतस्य विशिष्टा यवसायतरातन परवेना रुप्पोदपेमक्षेपक, साधा सङ्केपसमयतिनी तयाच पुनरुदीररया उदीर मा प्रयमसमपरवो वीर्यमा बम्म पूर्वोत्तपटदृष्टान्तेनो दोरिस म्मवतीति ॥ २॥ सपा वेबमावेशरत्ति ॥ वेदमं कर्मको नोयो नुनय इत्यप, तप घेदन स्थितिषया दुदयमाप्तस्य कर्मच उदीरवाकरम धोदय मुपनोसस्य प्रवति, तस्पच वेदनाफासस्या सोपसमयत्वा दाद्यसमये येद्यमानमेव येदित भवतीति ॥ ३ ॥ तथा । पहेमापहीयत्ति ॥ महायतु वोकप्रदेशः सह सग्निष्टस्य कर्मग तेभ्यः पतम, एतदप्यसस्पेयसमय परिमाणमेव तस्यतु प्राणस्पा दिसमये महीयमार कर्म मीण स्पादिति ॥ ४ ॥ तथा परिन्जमायेषिति बेदन तु कर्मयो दीर्घकालाना उदीरिजमाणे उदीरिए २ वेदिजामाणेवेदिए ३ पहेजामाणे पहीणे ४ म कपमा पुश्ते से पहिले त मुसा तेमुनियहोये पश्चिाततमीप्रपेचाये एपिराग १॥ उदोरिखमापे उदोरिए । बेशम उदय पाण्यानवो घर्षे पा गामो वाले पेदले हमने एमाधवसायसवपवरो पावर्षी पदेपामोये दोरखाकहोये ते प्रसमातेसमये पत्ते ते विषे छोरबायेवरी प्रममसम व वेदोरखामापा कम से उदोगावागाव तेप्रबमसमयनोपपंचाये पूर्वकामा वखनोहटांत तिवनीपरे पायो । २ । वेदियमापेवेदिए । ववावमनी भामो पनुभवास्वयं ते पमप्यातसमयसोमवते तिला प्रथमसमय वेदवामापो बम तेवेघोष काहीये प्रवमसमयमोपपेषाये पूर्वकामो पसनोटांत ते मोपरे । पोजमापे परोपे ॥२॥ तवा बोषप्रदेशसहितमियो कम तेहनो जोवनदेगववो पतन ते पुप प्रसस्पातसमयेवत्तं तिहा प्रवमसमये प्रोयमा स्थितीमा प्रस्खताकरम् तापवर्तनाधिपानेन करवविदोस करोति तदपिष बेदम मसरसयसमयमेव सस्प त्यादिसमये स्थितित विद्यमान कम्म शिवमिति ५॥ तपा। मिचमारेभिक्षेति ॥ दस्तु कम्मगा शुनस्सा झुम्मम्मया तोवरमस्या पवातनाकरसेन मन्दताफरण मन्दप चोहतना परोन तीव्रता करमे मो,पिचा सस्येपसमयपब, ततप तदाद्यममय रमता नियमाम पम्मानिन्ममिति ॥ ४ ॥ तया । झमालेदति । दाह स्तु धर्मदलिकवासला ध्यानाम्निमा तपापनयन अफम्मस्य मननमित्यप तपाहि-माप्ठस्या मिना दग्मस्प बाटदपापनयन नस्मात्मनाच नव न दाह ममा कम्मपोऽपीति , तस्मा प्यन्तमुर्तयतित्वेना मस्सेपसमपस्पादिसमये दसमानदग्धमिति ॥ ७॥ तपा । मिसमारोमति । निय मात्र मायुःकम मृतमितिप्पपदिश्यते, मरस सायापुनसानाइप साधा सरत्येयसमयक्ति भवति तस्पच जन्मना प्रपमसमया दारन्यावीपिकमरगे ना नुवर्ण मरणस्पनावा रिषयमार मृतामिति ॥८॥ तथा ॥ विग्यरिग्जमाणेपिजिसेप्ति निजीपमाप मिसरामपुनमावेम तीयभारम्मनिजी बिजमाणेबिसे ५ निजामाणेनिणे दज्जमाणेदहे ७ मिजामाणेम ८ णिडारिजामाणेणिजिाणे ९ माम ते मोर हा प्रक्षेप्याबरोये पूर्गाला बाति तानोपरे । शिवमाशिले । तवा मिनदाता दोषशासखितिवर्मनो उसकामचरियों ते पपरत्तमनामपरपविशेषेपरी परतेपपिठनपसमातेसममेवात तानेपरिने समयस्मितिषको श्वान शेषावहोये. मिसमान भिमे । तमा भेदयाहि सामना पत्रमा पथम वर्मना भेरमो तोवरमन पपातमाकरबरी मदपये करवो मंदरममे सानाबरधरोपीवरसम्झरवी ते पणि प्रसपमा नसमवे पत्तविका परि समये रमको मिद्यमानकम भयोचाहिये। माटोतिमा दाहकहिये कमापियाबाहनो भानाम्नियेवरो पवम मौकरिमा दिम बाहपमिारो बाचा तमन्माप तिम बमने पपित परिपमध्यातममये वक्त परिम समये मामा मापा बमतेषापो को वे परपर होत ॥०॥ मिश्वमारमा तथा मापकाशिये पाजपापानमा पय ने मरपामारी ते मयोवाहोये तेपपि प्रफ्यातममयेवते तेना बचना प्रथम समय यो पारमी प्रायोपिमानारो प्रविषवमरसमा मागको मरमामा ते मया पर्वात पहात ८ मिचरिसमापिमि। पपमयन सीमिति म्यपदिश्यते निसरपस्या सस्पेयसमयमाविस्वेन तत्मघमसमयएव पटमिष्यत्तिदृष्टान्तेन निल्जीयत्वस्यो पपद्यमानस्वादिति, पटदृष्टान्तय सपपदय सम्मावनिमयाच्या सातदेव मेतालयप्रमाम् गौतमेननगवता भगवान् महावीरः पास बुधाच तेत्यादिप भयकमा जगवत गौतमः पति? यिरवितहादशाङ्कतया विदितमजलश्रुतविषपस्वेन निसिलसायातीतत्वेनच सर्वपत्पावा तस्य, पाह-ससाईएउनवे साहरयाप रोम्पुणेशा । पयसभपासपी वियागएसबठमत्यात्ति? ॥१॥ नैव मुक्तगुणत्वपि छटनस्पतया नानोगसम्भवात् यदापनदिनामानामोगः १ नमस्येहकरपरिवासि । यस्मागतानावर शामावरसप्रतिसम्मति ॥१॥ अथवा जानतपय तस्पप्रमः सम्भवति, स्वीयवोपसवादनार्य मश्लो मयोपनाप लिप्यासावा स्त्रवचमि प्रत्ययोत्पादनाप सूत्ररचनाकल्पसम्पादनापति, सत्र ॥ तागोयमेति ॥ तहति फोमलामयार्थो दीर्घस्वंच मागपदेशप्रनय मुनयत्रापि, पप्तमाणेइत्यादेः प्रत्युषारयन्तु बलदय घलित मित्यादीमा स्वानुमतत्वमदर्शना , पवाः पुनराहु-संतागोयमाइत्य प्रताति, मवमेतदि त्यन्युपगमवचने पदनुमत तरप्रदद्मनाप अलमासमत्यादि प्रत्युचारितमिति , र यावत्करबसन्यामि पदानि सुप्रती ताम्येय एप मेतानि मयपदानि पर्माधिकत्म वर्तमानातीतक्षाससामानापिफरएपनिप्रासया पटानि मिर्णातानिष, प्रधै सान्येय चलनादीमि प रस्परतः नितुस्यामि मियायानि वेसि पचा निशपच दायितुमा । एण्यम्भन्ते ॥ इत्यादिध्यक्त नवरम् ॥ एगति ॥ एका न्यनम्पवि हतागोयमा चलमाणेचलिएजायणिशारिआमाणेणिजिाणे एएणजतेनवपदाकिएगठा नया जीवपदेगपशी बम निबरवामाया ममाकरवामांचा ते वमनिमपा वगमावोधा बहोये तेपनि पसभ्यातसमयभावी, प्रयमममयमो पपेचाये मेवा पूलिपट जति प समारोत मापदे वाचवा ।।से गोतमेपचा ? भमय बाबा । हवायायमा । पक्षमारेपसिए जायभिजरिजमागे दिजिये । त रमा कोममामत्र, प्रवमा इतमाता गोतम ये प्रथ महोत्र नममारचसिए, चालवामापो ते पाचोषकोये मावत् निजरयामा पाते मिजाजतोये, बनोगौतमको पममपतनयमधिकारोने पत्तमानपतोतवाससमामाधिश्वरपणा तेनिपयशोधा परि। एएषमतेनवपदापि पपारि एकप्रयोवनानिवा । मावापोसधि घोपा उदातादयः । मायावऐत्तिए प्याना न्यारापि उदाति । उताहो निपातो विकल्पार्थः नासति ॥ निनानिधेयामि हाच चतुभनीपदेषु दृष्टा, तत्रच फानिधि देकार्था न्येषव्यजनानि यथा वीरपीरमित्यादीमि ॥१॥ तपा म्यानि एवार्यानि नामाव्यवनामि यथावीर पय इत्यादीनि । २॥ तथा नेका न्येकथ्यअनामि, यया पंगष्यमाधिपापि धीराणि ॥ ३ ॥ तपा न्यानि नानार्थी नि नानामन्धमानि पपा घटपटसफुटादीमि ॥४॥ तदेय धतुमट्टीसम्मवेपि द्वितीयधतुपनद्को प्रश्नसूत्रे गहीती, परिदृश्य माननामाष्यजनतया तवम्ययो रसम्भवात् , निर्वचनमधेतु पस्सनादीनि चत्वारिपदा न्यामित्य द्वितीयः, विद्यमानादीनितु पम्पपदान्याश्रित्य चतुप पति, मनु सिवादीना माना व्यक्तमेदत्वा त्वय माद्यानि वस्वारि पदा म्पेफापानी ? त्याशसार तप्पणपफास्सप्ति ॥ उत्पन्न मुत्पादो माघे णाणाघोसा णाणावजणा उदाजा णागठा एमटा पापापोसा । हेभगवन् एमवपद एहमा एव प्रधई, एवमयोवन पापगद साठदात्त पनुदात्त म्ररित एमद माप्नोत बागवा उपारण प तेवदावा, पापा तानो पदार ववषा व्यवनः । हरा निपात विषपा एतसे पथवा पापा नानाप्रकारका प्रथई । पापा. मा मामधारमा पा उपार, ना मानाप्रवारमा र यवनपचर रहा उममी बायो वे एकमर एवमय एक्यचन बिमधीरपोर इन्वादि १ तपा| एवम पनेपनमन रवा चौरपर मादि २ तवा पने पद एवयात या प्रल गार महिपीनी पौर ३ तयानाना पच नामायंजन यया पट पटारिता मनोमो मपादे तोपरि वीवो चौधोमांगो प्रया, वोवादीयामाना पसंभवषको पमूमनेवि चमनादि चारपट पायी वोजीमांगो परिशिखमारे स्वाति पचपदपायो चौबीमामो बांधवो । भगवंतको गौतम च चमकामा तेकाम पहिये एपरिमो १ । उ सदीरा मो प् तेत्रम उदोरियोगोये एमोजी २॥ तया ये दमामाची तेषम वेवरिये एपोलो ॥ कर्मोनषायामायं तेबम प निथय पहोवे एचोषी ।। राप पारिपद ए एवाधारवा । एशोनो एकोपा अमेज मकारना घो• घोप उदातादिव तथा पा मानाप्रकारमा ध्यान तब द्विपा प्रत्यपयिधामात् , तस्य पत परिग्रहोगीकारः पतपरिग्रारति पातुपाठादिति उत्पन्न पक्ष परच पाठा स्मृतीयार्थत्या दुस्पन्सपोग उस्पा दाहीकारण उत्पादाग्य पयार्य परिगसै कापा पता न्युष्यन्ते अपवा उत्पनपत्स्य उत्पादास्मवस्तुविकल्पस्या निधायकानी तिशेप , सर्वपा मे पा मुत्पाद मामित्दै कार्यकारिस्वा देशान्तमुपूर्तमप्यनावित्वन तुस्यकासत्वा चैकायिकत्व मितिमावः, स पुन सत्पादास्पः पर्यायो विशिष्टः केव मोत्पादण्य, पतः बमचिन्तायाधर्मका प्रहार पसदयं सवतमाममोजमाप्ती, तप्तानि पदानि केवसोत्पादविपयस्वा देशाम्पत्तानि , यस्मात् कयसकामपायो जीवन म कदाचिदपि प्राप्तपूर्वो यस्माघ प्रधान सतत तदर्पयव पुरुपप्रयास स्तरमा स्सरव केवलचानोत्पत्तिपर्यायो म्युपगत, एपा म पदानामेकार्यामामपि सता मयमर्यः सामर्थ्यमापितमो यदुत पूर्व तपसति उदेतीत्यर्थः उदितन वेद्यते अनुभूयत इत्पथ स्पितिया दुदपप्राप्त मुदीरखपा चोदयमुपनीतं ततपा नुनवानन्तर तत्महीपते दत्तफसत्वा नीवा दपयातीत्पर्ष एतब टीवाफारमतम व्यास्पा त मग्येतु प्याल्पान्ति रिपतियवाद्यविशपितसामान्यकम्माप्रयत्वा देवार्षिका म्येतानि फोक्सोत्पादपवस्पच साधकानीति चस्वारि चसनादीनि प दा म्येकापिकानी युक्त दोषा स्पनेकार्थिवामीति सामग्रॅदवमतमपि सुसायबोपाय साता प्रतिपादयितुमार ॥ दिनमावेदत्यादि व्यक्त भव णाणाचीसा णाणावजणा । गोयमा । चलमाणेचलिए उदी रिजमाणेउदीरिए येइज्जमाणेवेइए पहेजामाणेपहीणे एएण चन्तारिपया एगठा णाणाघोसा णाणायजणा उप्पणपरफस्स ते पचर चम्सनाटिका पठने पर मतभेदवको विम परिवा पारिपद एवापसमा सो पायकाये का। सप्पमपत्ति समारंथिए इत्यादि पारिपर उत्पापपे पत्ते जिनवारण हाविनायनको तेउत्पामनाम पयायवियेप वेबसउत्पाद व कारपयो कमचितानेवि पमने चयवे पास बाय एकसमान गौत्रामाच, fattचारिपद पवउत्पादविपयवसो एकाध बमा, बेचार वासनाम पर्यायनो पहिसे किपारे पाम्मोनको प र मायठति ॥ मानार्यानि नानार्थत्वं त्येव विद्यमान पित्रमित्येत त्पद स्थितिवन्याय यता मयोगिकवली पन्तकासे योगनिरोध फतुमामो ये दनीयनामगोबास्पाना तिसूया प्रकृतीमा दीर्घकालस्थितिझाना सर्यापयतनया नर्मीतिक स्पितिपरिमारा करोति तपा नियमाननियमित्येत त्पद ममुनायवधामयं तवत्र यस्मिन् काले त्पितिपास करोसि तसिसव कासे रसपातमपि परोति फयत रसधातः स्थितिसम्मोन्य समप्रव सेम्पो मतगुणान्यपिको तो नेम रसपातकरमेन पूर्वस्मा दियाचपदं प्रवति तथा दनमान दम्पमित्यात त्पद प्रदेभयन्याय, प्रदेययन्य स्वम तामामनन्तप्रदेशामास्कन्धानां कर्मत्वापादन तस्यच प्रदशयन्धकमयामरकामा पन्नास्वासरोधारसकासपरिमापया सट्टाससमयपा गुगप्रेणीरवनया पूर्वरपितामा मैलेरपवस्थानाविसमुशियक्रिपथ्यानाग्निमा मपमसमयादारभ्यपाषदत्पसमय साय रातिसमय प्रमेगा सप्लेयगुण्पदामा बमपुर साना रहन दाहो नेमर दानानेदं पूर्वस्मा त्पदा शिवापपदं प्रवति, दाल चाम्पा न्यपानवापी र मोतचिन्तापिशारा मोतसाधन उपकलाप समर्मविपथएव ग्रामहति तपा विपमा सतमित्येतत्पर मायु कमविपप यत प्रायुपपुद्गतामा प्रतिसमय तयोमरण मनेनच मरणार्यन पूर्वपदे म्यो निबापत्वा हिवापद प्रवति तपा नियमार सतमित्यनेना युःकर्मपोफ यतः कर्मय तिष्ठ ज्जीयती पुचते कम्मैयच जीयादपगच्छन्मियत इत्युच्यते, तपमरच सामाम्पेनो तमपि विशिष्टमेवा भ्युपगम्तव्य यतः ससारवत्तीनि मरणा न्यनेको ननृतानि दारानुपापिति किम्तमरपरिप पुमः बिजमाणेनिणे निजामाणेनिणे दज्जमाणेदहे मिजमाणेमए णिसरिजमा नेवेषमन्नान प्रधान पी वोपनो प्रयासपरि फेसनाममिमित्तव तेवारी तपन वसनामापत्ति पर्यायवमी। वमपरिसो तेसे पेचपी है| उपाये भने गदरपामा ते पेदो पनुमरिये इथप । तेवखितिपयमको उदोरपायेवरी उदय पाता ते पनुभोपाचे प्रपोपवाय, तेमाटे उत्पाद पचे पारिपदएवापामा । परमा खितिवमादि परिययित सामान्धवम पायवयनो एवापरे केरमोत्पादपचना साधवले मुत्पपपवे कमरिता ये तेजन प्रचोषपर लोगो। सि एपदनेविषे वितिनोनिगमवानो । तथा भि• रमनो विगमवाना । ६ कम दाम्प विममको । मि , पदे पुनमयं मरण मन्त्य सयममयसापरित मपवगहेतुभूतमिति वियपितमिति । तथा निनीयमायंनिर्वाणमित्येतस्पद मवफर्मानावविषय य ता मयसमनिझर न पदाचिद प्यनुभूतपूय जीवनति प्रतो मेम सर्यरानावदपनि रवान पूर्वपदेन्यो मिवायत्वा निभाष पदं भवति प्र पैतानि पदानि विझेपतो नामान्यपि सम्ति सामान्यतः कस्पपत्तस्या निपापकतमा प्रपतानी ? त्यस्सा माशङ्कायामाह । यिगयपपस्सत्ति ॥ विगत विगमो वस्तुनो वित्यान्तरापत्तयाविनामः' सरव पदी वस्तुधर्म सस्पया पत्तः परियहो यिनतपच स्तस्प विगतपरस्प पाचकानीतिशेप घिगत स्यिहा शेपवर्माप्रावो निमतो जोवेन तस्या प्राप्तपूर्वतपा त्यातमुपादेयत्वा तदपत्वाच पुरुषप्रपासस्मेति एतानि य विगमामि भवन्ति, विध मानपदेशि स्पितिरामन विगम उचो, निद्यमानपदे त्वनुभावनेदो विगमो, यसमानपदे त्वकर्मतानवन विगमो, नियमारपदे पुन रामु कानावो विगमो, मिजीपमालपदे त्वोपक्रमांजावो विगमसत्ता, सरेव मेतानि विमतपत्तस्प प्रतिपादकानी त्युचते एवण यस्पन्चमाङ्गादिसूबोपन्यासे प्रेरित पदुत नानिमायेदं सूत्र मुपन्पस्तमिति ? तत्वेवसानोत्पादसबकम्मविगमानिधानद्वपसूत्रानिप्रायथ्यास्पानेन मियोतमिति, रतत्सूपसपादि मिद्धमेनाचार्योप्यार-उप्पजमापबास उप्पयाविगपयविमझतं । दषियपसवयंतो तिकाविसपविसेसेहति ॥ १॥ सत्पद्यमानफालमित्यनेम प्राय ममया दारन्यो त्पत्पन्तसमय पाय दुत्पद्यमानत्यस्पे ठत्या इतमाननविष्यत्वालविपर्य द्रष्य मुक्त, मुरपण मित्पनेन तु प्रतीतकासविषय, मेवं वि गत विगधरि त्यनेमापीति, ततपो स्पद्यमानादिनचापयम् सनगवान् द्रष्य विक्षेपपति कप प्रिक्षालविपय यथा भवतीति सवादगाथापः भन्येत णेणिजिणे एएणपचपदा णाणठा णाणाघोसा णाणायजणा विगयपस्कस्स हो पायुखममा पमावपपिगम । तमा विमरिखमारे शासपकममा भिगमवाना कार विगतपचे एवाना ॥ ए पापे पोचे पदने पाना मानापवपहार पा मानाप्रवारमा घोसा घायदात्तादिक ॥ पापा मामामसारमा जपा पवनपचर ॥ विगवपक्समावि गतस्मनी पसम्मांतरा पेचाये विनाम नेनाविपच परिगा ते विगतपचकाये परपद विगतपचनी वापरे ए नवपदने विप पक्षपोरे॥

बतिपदस्य सूत्र मनिपाना पत्तमादिपदानि मामाम्पेन ध्यास्याम्ति म यम्मापेहयेव तपादित चप्तमारेपलियत्ति तम मस्थिरस्थपयायेस वस्तुन उत्पादः वेदज्यमारवाएति ॥ व्यज्यमान बम्पमान व्येशित कम्पित कम्पम इतिवपनात् व्येजममपि तदूपापेतयो त्पादग्य : उदारि समावेउदीरिएति पो र स्थिरस्म सतः परस तदपि चलनमेय । पत्रमाणेपरीवेति मनीयमा प्रचश्यन् परिपतदित्यप , महीप प्रनष्ट परिपतितमित्ययापि महीय वसनमेव पसनादीना पैकापर्य सर्वेपा गत्पपत्वात् । उप्यापयास्मत्ति व सस्यादिमा पयापयो स्पस त्यसपनपतस्माधिपापका न्येतामीति तपा बेदमददगहमरथमिज्जरमा न्यमायान्यपि व्यारयेयानि , तयारसानच प्रतीसमेव, मिनायता पुन रेपामव-ठारादिना सतादिविपपाद, सतोमरादिमा अरोरविपयो नेगे, मिना दावादियिपयो दाता , मरमम् प्रागरपागो, निम्सरा स्वतिपु राजीनवनमिति विगपपलस्सत्ति जिलार्पान्यपि मामाम्यता विनाशानिपायका न्यतानोत्पथ, नव वक्तव्य फिमते पलनादिनि रिपनिरूपिसे रतस्वरूपस्यादेपामिति प्रतत्वलापस्मासिस्थात् तदसिद्धिय मियपनयमतेन यस्तु स्वरूपस्प मघापयितु मारण्यस्या-तपादि-पयहारनप पसित मेव सितमितिमम्पते, निवयस्तु बलदपि चलितम् मम वावक्तव्य तप विदोपावश्पसा दिया निपारपमानजमातिपरिताबायसेपमिति, पहा ए प्रश्नोत्तरसूपये मोवतत्व पिस्तित, मोवः पुन जीवस्प, बीवाय नारकादय पतुविशतिविपा, पदार-मेरायाममुराद पुरयाइ दिपादउचय पदियतिरियनरा वतरजोइपिपवेमाको २४॥ १॥ तत्र नारको तावत् स्थित्पादिनि पिम्तयन्ना नेहयाणमित्यादि । निगत मयमिष्टफल कर्म येय ते मिरया सपुषवा मैरपिबा मारफा स्तपा नेरपिकाया र मतेति । भदन्त ॥ फेवरयंकासति ॥ मियाधामो सातयेति फिपरसात णेरइयाणन्नतेकेघश्यकालठिड पणता गोयमा। जहणेणदसवाससहस्साइटिई पाचे माधनो वार्ताको तेमाच तो जोवनेहाय बोरते मारणे पारिदो पयोमदएक वत्त तेषाम महसमा नाम । मारकी पमरादि ११ पमि मोपादि १५ बाटोमादि १८ पदो तिर्यच १ मनुष २१ तर २५ गाविपो २१ वैमानिक २४ तिरिय मारमोनो रिप्रतिपूरे ? पेरश्याव सं रियायामपायत् ॥ ठिहत्ति पत्पितिरापासम्मवशा घरके ध्यस्थानं ॥ पणप्तति ॥ प्रचप्ता प्रापिता भगवति रन्यतापकरेयोत प्रमः ॥ ना. त्पादि । निव पर्न व्यक्तमेव मवर ॥ दसवाससहस्साइति ॥ प्रथमपृथिवीमयममस्तटापेक्षया ॥ तत्तीससागरोवमाइति ॥ सप्तमपथिव्यपेतपेति मध्य मातु मपन्यापेतमा समयावधिका सामप्य गम्येति अनन्तर नारकागा स्थितिकका तेबोङ्गासादिमन्त इत्पशासादिनिरूपणापाइ ॥ रहपा पमित्यादि ।। ध्यत्व मदरं वेयरवासस्थति में प्रारूतस्या फियत् पासात् कियता पालेनेत्यर्थ । भाउमतित्ति मामन्ति अमप्रारनेतिपातुपाठा - महारस्यागमिमत्वात् पापमतिति ॥ प्रागम्ति वाशदी समुपयार्थी एतदेवपदहप कमेणापता स्पष्टयमार ॥ उसमतिवा बीमसतिवेति । पदवोक्त मामग्तितदपोत मुसम्सीति तथा यदवोक्त मादम्तितदवोक्त नि असन्तीति अथवा प्राममन्तिप्रापमम्तीति बमुमहत्वे इत्पस्या ने कापत्वेम यसमास्यात् भन्येत्वा:-प्रामम्तिवा प्रारम्तिवेत्पनना यात्मझिया परिगझते उपसम्तिवानियसम्तिवेस्पनेन याति । वहा अमासपपत्ति । गतस्प प्रमस्य निर्वचन पयोधासपटे प्रज्ञापमापाः सप्तमपदे तपावाच्य तदनोपमा सयपसतपामेष पासमतिया पारम पणता । उक्कोणतप्तीससागरोयमाइ ठिई पमता। णेरड्याणजतेकेवइयफा लरसथाणमतिया पाणमतिवा जससतिया णीससतिया ॥ जहाउस्सासपदे मारजोना। भंते । भगवन बारवाम केतसाबामनी।। यिति । पसत्ता। कहो सिति ते मर्यादाकात मयाछ प्रभवमना पाच ताने मारकीय रोपिय सत्तर, गोतम हपेपवपन्धयको दसवासमाम्सारा दशमानमो विपत्ता विधिकही। पा रखममा परियोमा प्रथम प्रवा र पायोम्पिनिमानयो । उबाप । उपरो तेत्तोस । तेवीस। सागरोवमा । सागरोपमनी । हिपपत्ता । स्विति । पतो ते सातमी पदियोनी पपेच ये जोपयो । ते पाठपो मासोलामे पुणे ते मनोपूछे । राया । नारकोने । मते । भगवन् ! बेवायचास । केतसेवासे । पापमतिया पापमति पा। पमंतर साससेगी । बसमविपानीससतिवा। वाहिरजसाससे । पथवा पापमतिपा वसतिषा पनेपापमतिवा परमो पर्याय मोसस - तिवा उससतिया नामसंतिवा इति ॥ तत्र सततं अनवरतं अतिदुःसिताहि ते तिदु सव्याप्तस्यत्र मिरम्तरमेवो कामनि घासौ हरयेते सतत त्वच मायो एस्पापि स्पादित्यतार। संप्तयामेति । सम्ततमेव मैक्समयोपि सहिरहो तोतिमाया दीर्घस्यमेर पाहतस्वात्' प्राणमम्तीत्यादे पुनरुपार शिष्यवचने पादरोपदर्भमा पुरुनि राद्रियमाववचनादि शिष्याः सम्तोपपन्तो भवम्ति तपाच पोम पुन्पेन प्रमअषणापनिणया दिपु पठन्ते सोछेपारेयवचना भवन्ति तपाष मध्योपकार सामिपद्वियति अप सेपामेवाहारमनायबार। मेरस्यागमित्यादि ॥ व्यक्त म वरम् । पाहारविति भार अर्धयन्त मार्थपन्त इत्येवशीला पौवा प्रयोजनमेपामती त्यधिन माहारेस नोजने मापिन पारस्प प्रोजन स्या थिन पाहाराधिनः । वारपसववाएप्ति ॥ पाहारकी इत्येतत्पदप्रति यया प्रचापनाया यतुर्थोपाङ्गस्य ॥ परमप्ति । पाये ॥ पाहारर इसरत्ति । माहारपदस्पा एाधिपतितमस्प रदेशका पदभादसोपा दासारोदेशम स्ता मगितम् ॥ तहानापियवति ॥ तेन मझारेप बाप्पमिति तत्र नारमाहारवतव्यवापा बनि हारारि भवम्ति तत्सङ्गाप पूर्वोक्तपित्युष्याससाणद्वारहयदानपूषिका गापामार ॥ ठिहगाहा ॥ य्या स्पा स्पितिनारबादी वाया नासपतीपोतावेव तथा । पाहारेति । पादारषिपयो विधिवोच्या मषेयम् । परापाण प्रते! पाहारको ताणाहारसी ३ राया प्रतो देवा काप्सस्स पाहारठे समुप्पज्जा ? ॥ पाहारार्थ पाहारप्रयोजम माहारास्विमित्पर्यः । गोपमा! परदयावं णेरड्याणनतेचाहारठी । जहापलवणाए पढमसए थाहारुद्देसए तहानाणियछ । गाहा ॥ ठितिउस्सासाहारे किवाहारेइसझनवाषि । कइनागसझाणिय कीसवनुजोपरिणमति ॥ १॥ तिम बहावयासपदे । पत्रिमपणा मादि सातमेंपहें कमाई तिमोरवा, ते दम । सतत सतरा । ननिरतर ममयमावनी दिरा पिनाने पर्चा दुपमाटें । रामा। नारकोनेोभते । मममम् । पासारशे। पाशारनापत्रि, पाहारमा बाबाहे। बाजिम पपरपाए । पनपानां पाबीस मा पदना । पठमसए । पपिसा मतबनोपाहापासए । पातार मामालि बिमकमाविहामाषियब । तिमझापामारातिस्थितिमारको - सिए । तत्रा मोगो निसन्धि सोन मिर्वर्तित कत पामो चा मम्तरेगापि पावसाते प्रधुरतरपस्रवणद्यमिव्यग्य भागारठे समुप्पामा । अनुसमय प्रतिवर्ष सम्सतातितीव्रतुद्वेव शीतपद भीमामारपत माहारा साततन्यापादपि म विरहिता अचवा प्रदीपकातोपनोग्याचारस्य सरुद्राणे पि प्रोगो मुममयंस्पा दतो प्राणस्यापि सातत्यप्रात नविरहितमित्याह । सत्यय से भामोगमिवत्तिए सेग प्रससेन्समपर अंतीमु दुत्तिए पाहारठे समुप्पाना असम्मातसामयिका पस्पोपमादिपरिमाणोपि स्यादतमाह। अंतोमुाप्तिरति ॥ इदमुक्तमवति माहारयामी त्यति माप यता होताहाराष्पपरियामतीव्रतरदापजममपुरस्सर मम्तर्मुत्तो निर्वतताति । विवाहारतित्ति ॥ संस्यहवा वस्तु मारका पाहारय मीति याप्प ? वामएः समुपये तबेदं प्रमनिवपनसूत्र रहपार नंते ! किमाहारमाहारेंति ? गोयमा! दाई अबतपएसियाई। प्रमन्तप्रदेशयन्ति पुद्गलद्रव्यापीत्यय , सदन्पपा मयोग्पस्वात् ॥ रोप्तष्ठ असोअपरसावगातार ५ म्यूनतरमदेझावगाहानितिन ग्रहसमायोग्यानि अनन्तप्रदेशावगाठा मितुन प्रयन्त्येव सततसोचस्पा प्यमयप्रदशप्रमाणस्वात् । फास प्रपतरहियार ॥ बपन्यमध्यमोस्सएस्पितिशामीत्ययः, स्थितिष पाहारयोग्य समन्या परिवामेश्वत्थानमिति ॥ मावळे वसमताई पपमताइ रसमतार पासमता माहारैति ५। नाई मावठ वसमतार प्राहारेति किं ताई एगय हार पाहाप्ति जाव पिचवणार प्राह रैति ? मोपमा 1 ठासमग्गा पाप रगषमाइपि पाहारेति वाष पचवणादपि पाहारेंति विहायमग पाप वासवप्माइपि पाहारेंति जावमुकिलाइपि पाहारेति । तत्र ॥ ठारमण पम्पत्ति म तिष्ठत्यस्मि वितिस्थान सामाम्प यपा- एकषर्म ट्वि यमित्यादि । विहारमग पावति । विपाम विझेपा कासादिरिति ६ । बाद वठं पालयसाद पाहारेति ताइर्षि एगमुखकासाइ पाहारें तिवा उससतिवा भीमसतिया इति । तत्र सततं भमवरतं प्रतिदु सिताहि ते तिसम्याप्तस्यप मिरम्वरमेयो काममिःयासी हश्येते सतत त्वंच प्रायो पत्यापि स्यादित्यतबार । सतयामेवति ५ सम्ततमेव नैकसमयोपि तहिरो मोतिमाया दीर्पस्यम्मेह पाहतस्वात्' पालमम्तीत्यारे पुनवचार झिप्पवबने पादरोपदर्शमा गुरुन्नि राट्रियमायवमादि शिष्याः मम्तोपवम्तो नयम्ति तपाष पोमापुन्येम मममयमानिसया दिपु पदमते सोपे वादेयवरमा भवन्ति तथा प्रम्योपकार तीर्थामिएविषति अप तेपामेषाहारममयमाद रस्यापमित्यादि ॥ व्यक्त म वरम् ॥ पाहारप्ठिति ॥ पाहार पर्पयन्ते प्रापयन्त इत्येवमीला पोया प्रपोजममेपामस्ती त्यर्पिन पाहारेब भोजने माथिन प्राधारस्य प्रोजन स्पा पिन पाहारापिमा वापसवधारति पाहारकी इत्येतत्पदम्पति रमा प्रहापमाया चतुर्थोपाङ्गस्य ॥ पामराप्ति पाये पाहारठ देसरति म पाहारपदस्या पाविपतितमस्य प्रदेशका पदहादसोपा दारोदशम सत्र मषितम् ॥ तहानापियति । तेन प्रकारेण वाध्यमिति तम नारवाहारवतव्यतापो पनि वारारि मवम्ति तत्सम पूर्णसस्वित्युमाससतमद्वारहपदशमविका मापामाह । ठिगा । प्या स्या स्पितिर्मारकाला वाचा पुकासपतीपोक्तावेव तथा : प्राहारेति ॥ पाहारविषयो विधिर्वाप्पा सोयम् मेराया भते। पाहारको ताशाहारठो पेरल्या मते! देवा पासस्स पाहतारठे समुप्पन ? पाहारा पाहारप्रयोजन माहारार्थित्वमित्पर्पः । मोपमा पेरापार्ट णेरइयाणनतेशाहारठी । जहापन्लवणाए पढमसए थाहारुद्देसए तहानाणियह ॥ गाहा ॥ हितिउस्सासाहारे किवाहारेइसघनवावि । कहनागसछाणिय कोसवनुझोपरिणमति ॥१॥ तिका बहावमामपदे । एविमपमा मालि मातमपदें समाई तिमोपवा, ते दम । सतत सतया । मनिरतर ममयमापना पिप विनामें धर्मा दुपमाटें। रागापामारकोनेभित । ममम । पासासो। पासारनावे, पाहारमा बक्षिक । वहा । जिम पपवाए । पनपाना पावोस परना पठमए । पहिण मतबना पाहारामए । पापार मायामाधि विमाना।वहामारियर्ष । तिमा। मातापिति स्थितिमारवी दुदिक्ष प्राडारे पकाते ॥ अम्मवहारम्पित्यमा । संसा प्रामोगनिवतिर मगामोगनिप्तिम् तया मौगो निसन्धि सोन निवर्तितः सत प्रामो गनिपतित पाहारयामीती भापूर्ववात्पर्ष भनानोममियतित याहारमामीति विशिष्टेहा मन्तरेणापि प्रावद्दाले प्रचुरतरपनववाघभिव्यग्य शीतपदामाद्यापारवत् । तत्पर से प्रयामोगमिवतिर से भयुसमयमपिरहिर माहारठे समुप्पज्जा । अनुसमय प्रतित सन्ततातितत्रिपुढेव मीयामादयत छगपाहारादिना प्रभारति । अविरविति । फस्पतितन्यापादपि न पिरहितः प्रथया मदीपकातोपनोग्याचारस्प सद्गाये पि मागो मुममर्पस्या दतो पापस्पापि सातत्यप्रतिपादनार्य मविरहितमित्या । तत्पर से भामोगनिधतिर से प्रससेजसमइए अंतीमु इत्तिए प्राडारले समुप्पनर । प्रसस्पातसामयिका पस्योपमादिपरिमायोपि स्थापतभार ५ संतोमुत्तिएप्ति । इदमुक्तमवति पाहारपामी त्यति माप पतपा होताहारष्पपरिणामतीतरदापवमनपुरस्सर मन्तर्मुत्ता भिवत्ततइति । विवाहाप्तित्ति ॥ किंस्यरूपंवा वस्तु नारका पाहारस नोति पाय ? यागदः समुपये तदं प्रमनियमसूध ॥ पेरापार मते । विमाहारमाहारेति ? गोयमा। दधले प्रयतपरसियाइ अनम्तप्रदेशापति पुगनप्यारीत्यप, सदम्पेषा मपोग्यत्वात् । रोतले भसमेअपएसावनाठार । म्यूनसरप्रदेवाषगारानिदिम यायमायोग्यामि प्रमन्तप्रदेशावगाडा नितुन प्रयन्त्येव समतसोखस्या प्यसपप्रपथप्रमाणत्वात् ॥ कालठ प्रणतरहियाइमपन्यमममोल्सएस्थितिमानीत्यपा, स्थितिय पाहारयोग्य रम्भा परिणामवत्पामिति ॥ प्रावन वममतार गंधमताई रसमता पासमता प्राधारेंसि ५। आई मावळे घसमसार पाहारैति फितार एगय गणार प्राडारति जाव कियसाद पाहारेति ? गोयमा। ठारमग पाच एगवरसाइपि प्राशरेंति जाव पपवणापि पाहारेंति विधायमग्गप पाम पासवरमाईपि पाहारेंति जायसुकिलादपि माहारेति ॥ तत्र ॥ ठापमण पशुपत्ति ॥ तिठत्यस्मि सितिस्थान सामान्य यथा- एमावसं द्वि यमित्यादि । विहानमगई पम्पत्ति विधान विशेषः कासादिरिति ६ । नाइ वणजे फासवसार माहारेति ताइविं एगगुनमाताई माहारें ? - ति चाष दसमुखबासार बाहाति सवेल गुमासार असोजगुपकालाई अबगुलफासलाई प्राहारेति ? गोयमा ! एकगुगकालापि भारति भाष प्रपतगुमासादपि भापति एव भावमुकिनार १११ एव गपनवि १३ । रसहविचार मावन पासमसार साइ ठायमग्गय पाच मोए पसासार भाशारेति नोदवासाद पाहारेति नोतिपासाद बारेति । एकस्पयामा मसममा दम्पेपो पाल्पप्रदेशिकतामूक्ष्मपरिणामाच्या या योग्यत्वात् । पटपासार चाहारेति वाव पपासाई पाहारेति ॥ वाप्रदेशिकतावादरपरिणामान्या द्वाणयोग्यत्वादिति । यिहासमग्गण पा पासमामि भारति राव सम्वादपि पाहारेति १६ मा पामठे बसा पाहारति ताधि एगणकासमाइ पाहारेंति पाव प्रय तगुतपठार माहारेंति ? गोयमा । गगुरसाइपि पाहारेंति जाव असतगुणसम्झाइपि पाहारेंति २२ । एव प्रावि फामा भाषियहा भक्तनुरासुम्याइपि पाहारैति २० वाहनते । अबतगुग्नुपयाई भाशारेति तादपि पुकार पाहारति अपुताई पाटारति ? गोपमा ! पुठा पापा ? 1 रैलि मो अपुहार माहारेंति २८ । पुताइति । पास्ममदेशस्पर्शवन्ति तत्पुम रात्मप्रदेशस्पशन मगाइपेश वहिरपि यति पत पुप्यते ॥ बार प्रते ! पुछार भाारेंवि तार कि बाबा पाहाति पयोगाढाइ प्रारति ? गोयमा। गाडाइ नो प्रयोगाहार प्रवगाठानीति भास्मप्रदेश रसो कोनावगामीत्यपाए जाइ मते। छमाहार प्रारति ताइ शिवतरागारात भाति परपरोगातार पाहारैति ? गोममा । म संतरोगागर मो परपरोगातार पाहारेंसि पनन्तरोवगासामीति येपु प्रदेश यास्मावगार सोधेव पान्यषगावानि वान्पनम्तरावगादामि अन्तरा प्रावेनावपादस्वात् , पामित्र-तरस्तरवतीनि ताम्पवगारसम्बन्धात् परम्पराबमावानीसि ३० ॥ पाइनते । भतरोवपादार पाहारति ताकि भी पादारति पाप पारेति ? गोममा! भारि पाहारेति यायराईपि पाहारेति ॥ तमामुत्व दादरस्व पायेविष नेपामेवा परयो म्पानो सपाना मरेशपाया पडामा भबवेप १ । बाद पते। अनूपि श्राहारेति वापरामि महारेंति ताई कि माल पाहारेंति एष अरेवि - P तिरियपि ? गोपमा! उपि पहारेंति एवं प्रोवि तिरियपि ३२ । जार मते ! सापि भाभारति प्रापि तिरियपि भाटारति ता कि भामाहा रति मजे पाहारेंसि पयसाये पाहारति? गोयमा। शिक्षावि अपमप मानोगमियतिरया हारस्पा तौर्तिकस्या दिमध्यायसामेपु स पमा कारयम्तीति ३३ मा मते! पाई मजे अधमासषि पाहारेंसि ताइ फि सयिसए पाहाति भयिसए भारति ? गोयमा । सविसर भो पथिम प्राधारेंति ॥ तत्र स्या स्वसीयो विपया स्पष्टावगाडानतरायगारास्या स्वविपय सस्मि साधारयन्ति ३४ जाग प्रते। सविसर पापा रति ताकि पापुर्वि प्राचारति प्रशानुसुधि भाारेंति ? पोपमा : पाबुपुष्छि पाहाति नोअगायुपुईि प्राधारेंसि ॥ सभा नुपूर्दा यचासत्र ना तिक्रम्प ३५ ॥ जाई प्रते । पाबुपुधि भाहारेंति साइकि तिदिसि पाहारेंति जाव पविसि पाहारेति ? गोयमा । मियमा पहिसि माहारेंसि ॥ भारफागो लोकमप्पयतिवेन पसा मप्यूविदिशा मसोवेना नायुतत्वात् पम्स दिवाहारग्रहणमस्ति तत उक्त निपमास् पदिशि दि फ्यपादिपिम्पास्तु सोप्यासयति पथियोकायिकादिपु दिशा बयस्य इपस्स एकस्पा थाप्लोकेना वरणे नवम्तीति पद्यपि वर्मत पश्ययानी त्या युत तपापि प्रापुर्पक पदम्यगन्धारियुतानि द्रव्या ययाहारयन्ति, तामि दर्शयति । ठेसणकारणं पपुवति ॥ वाइस्पतत्तयकारण मानित्य तय प्रात्यमुनानुनायएय कारणमिति । वसई पालनीताई गन्पढ़ दुन्निगंपाद रमठे तितकनुपरसाद पास फागरूयसीयलुक्याई । एनामिच मा पो मिप्याटप एया पारपन्ति नतु प्रयिष्यत्तीचवरादयाति पप तामि पचास्वरुपास्मेव नारका पाहारय न्त्यन्यथावे ? त्पस्या मायकाया म निपीपत । तेमि पोराये यमगुरे गपगुरे रसगुर पासगुरे विप्परिणामयित्ता परिपीसपिप्ता परिसामाता परिविवसाता म विपरियामादयो चिनागायत्वे मैमाएय यमपा ५ प्रमेय अपुधे वसगुणे गपगुरे रसगुणे पासगुरे उप्पाइता प्रायमरीरोगाढे पोग्गले सधप्पण्याए प्राधार माहारेति मयप्पबपापति ॥ मर्यात्ममा मा रामप्रदो रित्ययः ३६ य्यास्यात सूत्रे' सदरगापाया वियाहारेतीप्तिपद मप सबवेवावीप्ति ध्या ? स्थामते तर सर्वतः सर्वप्रदेश नरयिया पाहारयन्तीति वापीतिवचना दनील माहारयन्ती त्यपिवावं तप । मेरायाण प्रते। सबळ पाहा रति सब परिवाति मह बससति सदर नोससति प्रनिक्सय पाहारेंति पनियर परिवाति पनि कमसति प्रनिक्सर्ग मीससति भारच चाहारेति ? ४ ईता मोपमा । नरापासबठं प्राहारैति १२ सहमति ॥ सवास्मप्रदेशे ॥ अग्निजति अनवरत पर्याप्तरवसति । पार पत्ति । कदापि बसरा अपर्याप्तझावस्थायामित्ति ५ तथा बानागंति ॥ पाहारतपोपातपुतलामा कतिम भाग माहारयम्तीसिधाच्यं त करापार मतेचे पोग्नसे पाहारतार मेगाप्ति तेर तेसि पोम्पसाय सेपाससि कामार्ग प्राहारेंति कामाग प्रासापति? गोयमा प्रसरोजनाम माहारेति पतनानं पासादति सेपालसिति । एप्पत्याले पहबोतरकाल मित्यर्थः प्रसपेखानागमाहारतीत्पत्र कचि साधतते गवारिमपमवादग्रासयामव घोषित् पीतामगोपनागमानाम् पुदला नाहारयति तदन्पेतुपतन्तीप्सि' अभ्येत्वाचतते अजुसूत्रनपदर्शनात् स्वशा रीतया परिकतामा मनपनाग माहारपम्ति अबसूमोहि- गवादिमयमवादग्रामग्राणव पहीतामा शरीररवेमा परिणताना माहारसनिष्यति' शरीरतमा परिणतानामपि कोपाधिदेव घिमिष्टाहारबार्यकारिता मभ्युपमञ्चति शुनपत्वा तस्पेति अन्य पुनरित्य मनिदपति । भसरो जानागमाहारतिति । सरीरतया परिसमन्ति क्षेपास्तु विहीनूय ममुष्याम्यवातासारव म्मलीभवन्ति म शरीरत्वेन परिषमन्तीत्यर्प ॥ पण तनागपासाइतित्ति । चाहारतया पहीताना ममतमाग माखादयति' तसादीन् रसनादीन्द्रियद्वारे गोपलमन्त इत्यर्ष ३८ सवासिवत्ति । द्वार तय सस्पेवा हाराष्मा स्याहारयन्तीतिवाच्यं वाशब्दाः समुधरी तरहया मते थे पोग्गले पाहारत्ताए परिसार्मेति तेकि मचे -- नोकामो पपये तेवोस मागरोपम उम्पामाहार। मामास्वास पाया मिरतर पाहारे पहारनी पर्वी किर हारे पार पाचार परे समतावादि। मगहे प्रामाने प्ररेगेवरो पाहारसे । बतिभार्ग। पतला प्राधारे पातार मिमित्त मेतमा पुइस ग्रमा हना पसम्यातमो भा - पाहारति पोसवे माहारति ? गोपमा । म परिसेसिम् पाहारतिर विशिष्टतापपीता माहारपरिसरामयोम्याएव ग्रामा उछित्तोपा इत्यमा अन्यपा पूधापरसूत्रयो विरोपासात् इटाव भास्पा पदाइ नमसुत्तनविय तोवनइविपासवानत्यि। किकालियासुठेगो दिको दिप्पिदावरि ॥१५ कीसवनुनोपरिवमतित्ति । द्वारगापापर तब बीसत्ति ॥ पदावपवे पदसमुदामोपचारात् ॥ कीसप्ताएप्तिम दृश्य हिं स्वतया कि सनावतपा शवपावा फेनप्रशारेर विस्थापतयेत्यर्पः वाशदः समुपपे । मुम्बोति ॥ योनूपः पुमःपुनः परिणमन्ति माहारद्रव्यापीति प्रस्तं इत्येत दावार्च तचैव । नरइयार मते । पोगसे प्राहारत्ताग गयईति तेच तेसि पोग्गसा कीसतार नुमोनुग्यो परिपमति ? गोयमा ! सोरदिपतार जाव पासिंदियत्ता प्रपिठत्ताए प्रकतत्ताए पपिपत्ताए प्रमगुबताए प्रमणामत्ताए प्रशिक्षिपत्ताए पनि जिपत्ताय प्राताम् मोठातार दुसतार नोमुहताए एएसि मुजोप्नुवो परिवति ॥ तत्रा निष्टतपा सदैव तेपा सामाम्पना वासनतया तपा-साम्ततपा सदेष तावमा पममीयतया, तपा-प्रियतपा सर्वेषामेव द्वेपतया , तपा-मनोहतया कपया प्यमनोरमतया , तथा-म मोम्पतया विसपापि धमभोगम्यतया तपा-मीप्सिततपा प्राप्तुमनिष्टतया, एकार्था वैतेशवाः । प्रनिझियत्तारत्ति ॥ अनिष्पेयतया वरमुत्पा दसत्येम पुमरप्पमिलापनिमित्ततया, प्रायस्वे मेत्यन्ये अशुभत्वेनेत्यपः ॥ अहत्तारत्ति ॥ गुरुपरिणामतपा ॥ नोटताएत्ति ॥ मोसपुपरियामत येति महागापापः , इवच सहारिणायाविवरग्सूर्य चित्सूपुस्तकरय दृश्यतइति , पय नरयिबशारारिकारा तद्विषयमव प्रमचतुष्टयमार ॥ मेरहपापमित्यादि मुवाहारियत्ति ॥ ये पूर्वमाहताः पूर्वबाले एकीकताः सीता इतियावत् , अन्यवातावा ॥ पोम्गसत्ति ॥ स्कन्धाः ॥ परिय म पारे प्रनता भाग सासादें । माथिवा । सगचा पाधारना व पारेपामारपरिषम वाग पुरखोगा।पोसव । विमप्रकारेवरो। भुषोम या।पनीसमो।परिसमवि। परिसमे निसपणे इषप परिषमे पानी विस्तारपरी मारियो वोपयो। शिवनारबीना पाहाराधिवारबको य - यहि ते परिषताः पूर्वबासे शरीरेश्मर सम्पका परिगति हुता इत्पप इसिमपम प्रमाण-पत्र प्रमत्य काकुपाठा दवगम्यते , तपापा पहारियति । पूर्वचाते पाहता सारीता पम्यवहतावा पाहारिमापति । ये वत्तमानकासे पाट्रिपमाया सङ्गममाया भन्यवष्ट्रियमा पावा पदसा परिवमत्ति ते परिश्ता इतिद्वितीया २ । तया ॥ प्रयाहारियति । ये तीतकासे नाहता पाहारिखस्समापत्ति । ये पामागवेवासे पाइरिष्यमाणः पद्धता सोपरिषता दतिवतीया । तथा माहारिया प्रवाहारिसमापेत्यादि ५ असीतानागताहरपति पानिपेरा बतुप ४ । स पापि सत्तारएव प्रभा उत्ता , सपा प्येते पिपष्टिः सम्भवन्ति , यतः पूर्वाहता पानियमाया पाहरिष्यमाणा म शाता अनादिपमाला प्रमाहरिप्पमालायेति पद पदामोह सूचितामि , तेयुष एकैम्पदामपणेन पदिकयोमे पश्चदग, त्रिकयोगे विज्ञप्ति, रइयाणनतेपुवाहारियापोग्गलापरिणया १ शाहारियाशाहारिकामाणापोग्गलापरिणया २ शणा हारियाथाहारिजास्समाणापोग्गलापरिणया ३ श्रणाहारियाणाहारिझस्समाणापोग्गलापरिणया ४ पारविनय प्रगारि बरागा। मारगोने मते । मगवन् । कार पुमागारियापाप्यमापरिषया । पूर्वकामे यरोर सघाते एकोकोपार्स प्रमाण प्रामारा वेपास सन्दे मापते परिवारमा एपरिलोय! तवा पारिया पपासारिखमाण । पूर्वमासे पा सपना पाव तमामका पाहार पपवा सपोरे पोपहा । पाम परिवार परिपया ए बोजी प्रय११ तपा। पापाहारिया । पतीतका सम्मान में पाहायान पारिबसमा मागतका पाहार मपात पोमाता । पुस परिषया परिषम्मा एपोलोमन १२ तथा पपारा रिया। पतोतबासे पाहाणामहो अनुमानको पने पाहारिखम्ममा सीमसापरिषया । अनामतवाये पपि पाहारम्येनो ममुहमको ते प सपरिरमा चोमोय . सूत्रने प्रमारिवाना तथा प्रेसठिाया एजनामायते देखाये पतोतबा पहागा पक्मानवाचे प्राचार २ पायामिवार पाकार परम पनामा पनाहारो पनाहार ए ६ पदमा । तेनेविये सपामोशिकीमो १५ विषमयोगोर - . तुझ्योने परदा, पम्मकयोगे पद् पयोगे एकाति , अत्रोत्तरमाह । मोयमेत्यादि । यत नघर ये पूर्वमाइसा ने पूर्वकासरव परिरता य पानम्तरमव परिगामानावात् १ । ये पुम राहता प्राट्रियमावाय ते परिगता, भापतानो परिणाममायादेव परिषमम्तिव , माद्रियमावामा परिगामनावस्य यत्तमानत्वादिति २ । पप्तिस्तातु द्वितीयः प्रश्नोत्तरविकल्प एवंविधो दृष्टो, यदुत पाहता पाहरिष्यमावा पुद्गसाः परिगताः प रिस्पनोज पतो यं तेनैवं व्याख्यातो पदुत येपुन राहता पाहरिप्पन्ते, पुन सोपा परित्परिणताः परिगताप ये सम्पत्ताः भरीरेण सह येतु मतावत् मम्पयन्ते, वासान्तरेतु सम्पश्यन्ते , तेपरिसस्पतइति, येपुन रमाइता प्रापरिष्यन्ते, पुन से मोपरिषता , अनाहतामा सम्प नावेन परिगामाभायात् पस्मा चाहरिप्यन्ते , ततः परिसंस्मते, भारतस्या वइयंपरिणामनावादिति , ३ चतुर्थ स्स्वतीतनविष्पदाहरवानि पापा प्रमावेन परिणामानापा दयसेयाति पतदमसारेपेय प्रादभितविकरपाना मुप्तरसूचापि वाथ्यानीति, अप परीरसम्पक मतपरिणामा गोयमा णेरइयाणपुछाहारियापोग्गलापरिणया १ शाहारियाचाहारिस्समाणापोग्गला परिणयापरिणम तिय २ शगाहारियाशाहारिजस्समाणापोग्गला णोपरिणयापरिणमिस्सति ३ श्रणाहारियाणाहारिका पापसपामो १५ परस (म १६मसप ५ भगवत उत्तरका-हेगीतम । पेरामाप । नारकाने । पुमाहारिया । पूर्ववासेपाहाया सप्रमा पामापरिपया । पुरसते परिपमा पातिरेव परिसामना भावययो । । पने पासारिरा। वे पूर्वकासे पाहाया। पासारिखममाषा पोमसा पने पत्तमानबाले पासार ते पुरन । परिपया । परिषया पने परिपमेशे। परिचमतिय । २ पाशियमापने परिपमभावना वत्तमामरे २ तथा पवाहारिया। पतोतवासे पाहारारामही समाधानको पने पनागतवाये। पाहारिबममाषा पाहारले सग्रामे। पोम्पमा । ते पुरसारोपरिषया।प रितम्यानहोरे पूर्व परमुनायो भने । परिपमिग्मति। परिपम गुमाने पनतरे।। प्रवाहारा तथा प्रतोतवारे पाहायामही सगुपियानो पने पपारिबानमारा । अनामतबामे पपि भागर महो। पोपमा । तेपुरख । चोपरिषमा । परिपम्यानहीं । पापरितमिसति । परिषमस्ने पपि Kanx. त् पुनसाना भपाइयो नवन्तीति, तदर्शनाचे प्रमपमा । मेरापारमित्यादि । चपादिसूपाणि परिवामप्रसमानीति रुत्वा तिदेयतो ऽघाता नीति तपादिभापरिरमा तहा चियावीत्यादि । हाच पुस्तके वाचनानेदो दृश्यते, सत्र न सम्मोहः कार्य', सर्वामिषेयस्प सुस्पस्वात् वस म्परिपतसूबानुसारेर प्रमसूत्रावि व्याकरणानिए मतिमता थपानीति , तत्र पिताः शरीरे गमता, सपपिता पुन यश प्रदेशमामीप्येन शरीरेषिताएवेति, सरिताच स्वभावतो मुदितान् पुद्रसान् पदयमा कम्मेदसिबे करणविझेपेष प्रपिप्प या न्वेदयते , उदीरपालत पद चपरगावतिय उदरदिवाठीरगाएमा । तपा वेदिता स्वन रसविपाचन मतिसमय मनुनपमाना भपरिसमाप्ता सेपानुनावादति , तपा निजी बाम्पना नुसमपम पततिपाबाामियुत्ताप्रति । माति परिश्तादिसूपा सङ्कायाप गापा प्रयति , सावेपं परिणपत्यादि है व्यासातार्या, नवर एकस्मिन् पदे परिक्तचितोपवितादी चतुम्पिा पाहता १। पाहताः प्राद्रियमापाप , २ । आमाहता पाहरिप्यमा समाणापोमालाणोपरिणया णोपरिणमिस्सति १ णेरड्याणन्नतेपुछाहारियापोग्गठाचिया ॥ पुच्छा । जहा परिणया तहा थियायि एष चिया उयचिया उदीरिया घेइया णिझिणा गाहा॥परिणतचियायउयचिया मी ४ शिव मरोर सपकार परिणाममा पासमो पयादिवत देवापानी प्रशचरेहे-पेरायापमंते। नारपोगे भगवन् । पुप्पा रिमा । पूर्वपापारिया । पोग्यपाधिमा । पुरस ते चियासोवे पपपूपाम्यवि मरोरविषिष्या । पुचा । ए प्रश्न पूछो कि उत्तर पहरे- पा। पिम । परिषरा । परिषौ । वा । तितिम । रियापि । पयपाया। एवं रन । चिया । चम्पापा । उपरिया। गाठापियो धषि पाया। होरिंग । समाये दरानोपापा पमेते उदयपापाया। पीताने रसविपाने प्रतिसमये भोगया। निखिपा । रसपरिचामेवरो निज सा पोषपदेययो पदावोषा। माहापरिषय ।मा। बिमपरिणाम परिपापिया! चरपााहपपिया। पारिपाया। हरिग । भारी उदो रिवा रेरिगाव । माओवरोपेदिराविमिरामचरमोधा तेरनोमिहरि ने। पतितमिपदमि । एपेबापदनभिप पारिरिभरेपुरनामा . पाप ३ । मनाता प्रमारिप्पमालायें । त्येय चतूदपा पुट्सला भवन्ति , मममिर्वमविपयाः स्युरिति, पुद्गलाधिफारादेवेमा मष्टावक्षस् बीमाइ मेरहपार मते । पाविहा पोगप्तानिज्मतीत्यादि । व्यत्त नवरं । नितिति तीव्रमम्दमध्यमतया नुनागनेदेम मेदवन्तो नवन्ति उहत्तनमरणापवर्तनकरपाम्यो मन्दरमा तीव्ररसा, सीवरसास्तु मन्दरसा प्रवन्तीत्प, उत्तरं । पम्मदववग्गवमविविधति । समानजातीया प्या राशि ईष्यवगा साबौदारिवादिद्वव्यावा मप्यस्ती त्यतमाह-वर्मपा द्रव्यपग्मपा कम्मद्रष्याचांवा वर्गमा पर्मदृष्यवर्ग तामभिरुत्य तामाभित्य बर्मद्रष्यपर्मचासत्काइत्यर्थः पर्मद्रप्पागामेवर मन्नेतरामुमायपिम्तास्ति म द्रव्याम्तरापा मितिहत्वा कर्मव्यवर्गवा मधिकत्येत्युक्तं ॥ अपूर्ववयापरावति । वक्षः समुपपार्थ स्वतय अवय वारराव' सूक्ष्माय त्यूलायेत्यर्थः सूत्मत्वं स्यूसत्व पां कर्मद्रव्यापेपयवा वा तयं मान्यापेपपा, पत प्रौदारिकादिद्रव्यागा मय वर्मव्यास्पेव सूमारीति , एव चपोपचपोदीरवावेदननिळराः सदार्पनेवेन वायाः उदीरितायेइयायणिजिमणा । एक्विाक्कम्मिपदम्मि घउधिहापोग्गलाहोति ॥ १ ॥णेरइयाणनते फतियिहा पोग्गलानिजति गोयमा कम्मदशवम्गणमहिगिच्च दुयिहापोग्गठानिजाति तजहा थणूचेय यायराय १ विम । चलमिलापोम्पसानोति । पापा । पाहावे २ पापा ३ पपाहारो । एचारवाया । हिवे पुरसनो प्रषिपारवको ए पठार मनकोडे-परागते । नारदोन भमन पापितापोममा। कोतवापुस विसप्रकारे बरोने । भिव्यति। पनुमाम भेदेवरी मे भेदाम तीव्रम दमध्यभेरेवरो भेदपा पुरसभेदवार स्पर्थ, दातन प्रपत्तन परमोमदरस तोवरमवाय, तोमरस मदरसगाय इतिप्रय ! गोवमा । गौतम! समान मातीय द्रप्पानो गिते इत्यागपावसोये तिया पौदारिवारि बनेपरिश्तेमाठे बोरे-वन्मदग्पषमयनिमिधदुविधा।बमाप द्रष्यवर्ग प्रवा अमइसमोसमाते पायोने पर्मद्रप्रमेव मदतरानुभावचितारे पचिम्पांतरनेनयो तेमाटे कमद्रयवर्गरा पधिकरोगे इमफानो ए विधु प्रकारेकरोने। पो पमा भितिपुरसभेदपामे। तंगातेविमा प्रसूता प्रपते सूमपुस। मादरावा वाररते समजतकोये सूधपई सूचपए होते वर्मदृश्य अपेक्षा - . किन्तुषयसूचे उपचयो । माहारदहवामपमहिमिति यदुत धाय मनिप्राप , शरीर मामित्य भयोपच्यो माथ्याश्याती, तोपा हारमा मेन्यस्व मयतो मान्यतो साहारद्रव्यवर्गका मधिकत्ये स्युक्तमिति , उदीरमादयस्तु कर्मद्रव्याखामेव भव, मयत सत्सूत्रे पूतं कर्मष्यवग मपिकत्येति । उनिमुत्ति । अपवस्तिवम्त , हरपवन वर्मणा स्पित्यादरम्पषतापविशेपेन पीनताकरण , अपयत्तनस्य चोपलतबस्ता दुद णरझ्याणनसेकतिथिहापोम्गलाचिजाति गोषमा थाहारदधमग्गगमहिकिच्च दुयिहापोग्गलाचिजाति तजहा थणूचेय थायराचेव २ पव उयचिजति ३ णेरड्याणनंतेकतिथिहापोग्गलाउदीरति गोयमा कम्मदछयग्ग णमहिकिच दुधिहापोम्गलाउदीरति तजहा शृणूचेय यायराव ४ सेसायिएयचंय नाणिया । वदति ५ णिजारति ६ उयहिसु ७ उपहति ८ उपहिस्सति ९ सकमिसु १० सफामति ११ सकामिस्सति १२ नि ये पावापरयोमा पपेशाग्नहा, चमार पोदारिवादि शमारिसमश्यहोव सूक्ष्म । परायाषमते । मारकोने भिगवन् ! काविता । कोतसे प्रकार पोयतारियति । पुस पिरतिपय पोयमा।हेगीवमए प्रभिप्राय परोरपाययोने पर पाव पूर्व पाप्यारे ते पय उपपय पाहारदायधोखा ३, पबागायतदोव मोरे-मानारदममममदिगिए। पापारम्पपमा पायमोने पधिकरोने । दुविधापाम्पसारिति । शिप्रकारेपुर पिये। तबहा । बार-सव । परवाता मम वेस्तोसम्म शहराप । पादर वात स्पस चरमपूर्णमरत्वयं ।। एवंमाचिजति परपपा मे रिपामेशरारभते। मारपीने रे मगपन् ! वार्षिीपोपसे । केतोपचारे पुरखा उदोरेति । मोरपापामे इति प्रत्र । योषमा उत्तर रेमो तम उदोपारिप बम । रसमसमरिमिव । इसनेवरे माठे पान बमद्रप पाषा पायमोने। दुपिले पोग्यथे। रिहप्रकारे पान पोरनापामे तबारे प्रषासुमा बादराये। माठा 8 । सेमारथिएव। पहायता समत्तामात रविपरे।मानियबापावा एमावेनि बेटे ५: पिजी तिवमनितिन रोग बरस्ते विभागोये सामु अपर्तितवत प्रपत्तनतेवममिति पारिबन पभषमाय विमेपेको नया है तनमपोज दर, तप रिसत्पादे वंद्विकरपसरूपं ॥ सामेसुत्ति ।। सकमितवम्त , ससा सक्रमगं मूलमरुत्पनियामा मुतरमहतीमा मध्यवसायविझे पेप परस्परं मधारक, तपापा-मूमप्रात्यनिषा ससमयतिगुणवत्तराःमहती नस्वास्मामूतस्या दणवसायप्रयोगेष ॥ १॥ अपरस्स्वाह मोमपाउपरानु बसबमोहपरितमोहंच । सेसारंपगइर उतरविहिसकमोनपि ५१५ रतदेव निदिदर्यते यथा कस्यचि त्सद्वेष भानुभवतो शुन कम्मपरिगति रेवविपा जाता, येन तस्य सद्वेष मसउद्यतया सकामती त्सव भन्यत्रापि योम्यम् ॥ निघतेमुत्ति ॥ नियत्तान् रुतवन्त, पाच घि मिटाना परस्परता पुगताना निषय कत्या पारय अतिमदत्वेन निघत्त मुप्यते उद्वर्तनापवर्तमव्यतिरिक्तबरणाना मविपयस्वेम कम्मको वस्या ममिति । मिबाईसुत्ति । निकाचितवन्तो नितरां यद्वन्तइत्यर्थः, निकाधनम्न तपामेय पदसानां परस्परविमिष्टामा मेकीकरण मन्योम्पायगाडि ता, अग्निमतप्तप्रतिजन्यमानीचतापस्पेव सकसकरवामा मविपपतपा करमको व्यवस्थापनमिति पावत् । निवतीत्यादि । पदानां सहनी हत्तिसु १३ निहत्तति ११ निहप्तिस्सति १५ निकाइस १६ निकायति १७ निकाइस्सति १८। ससुवि पपत्तनमा उपनयमो तात्तन पपिसेव हात्तनते निम्बादिवान वधार। जयसि।मित्वादिषन् होनवर पतीतबाले १ एयोति । मित्यादिक मबरे वर्तमानवारी राज्यारसति । मित्यादिवशीन पर पनागतवासे । समामेति । मचप्रहति पमित्र उत्तरपति वोने प्रध्यवसामरिशेपेकरी मा को मार सरिगे संयामर कहोये संकमायो पवीववावे।। सत्रमा पत्तमानवाते । सत्रमावसे पनागतवासे ११ । पितिसु।गोषणा पुरसबर्म मेमानी मानिमिषा पाका पवठा पारखोलाने सठिय निधत्तवाहोये पतीतबासे एवठावाप्या १२ सितिति । २ पत्तमानवासे एकठापापेरे पिरिति । १५ पनायतवारी एकाठा वापये। मिजायसु ४।१४ निवापितवर्म निम सईना गुचा पम्मिमापि वपावीचे ठपौधे तिवारे गाठा पठिनहोय निवापा पवोतवाले। निवावति । मिकाचे पत्तमान काले । निवाइरसवि १५१८ निवाचले पनायतबारे। ससुविकन्मदम्पवयपमणि मिपा एवं सपषमपणा पगीकार वरीने पापो । गारा । माधा। मेदिन । भेदिया ।चिमा ।पिमा । स्वपिणा । पुरषोधा । सदोरिया। उदोरि ।

" , पपा । प्रेरणास्पादि । नापा मतामा मयर अपवर्चमसंबमनिपतनिकापनपदेपु विविध कालो निर्देष्टव्यः , पतिवातमानामागतकातमिदशेन तानि वामामीत्यर्थः पात्र अपवर्तनादीमामिव मेदादीमामपि त्रिकालता मुघा न्यापस्य समानत्वात् । केवन मवियतमा प्रतनिर्देशः मये बतइति अप पुदसापिबारा रिद सूत्रचतुष्टप भारत नेगमावमित्यादि व्यय अपरं । तेयाकामताएति । तेजा फार्मग शरीरतया तटूपतये त्पमा । प्रततवाससमएक्तिपासलपा समया मतु समाचाररूपा फालोपि समयरूपो नतु यक्षादिस्वरूपइति, परस्परे पिझेपणा रास समयः पतीत बाससमयो तीवबासस्स पोत्सर्पिस्पादेः समय, परमनिरुष्टों को तीतमालसमय सत्र पप्पणप्तिम प्रत्युत्पनो वर्तमानी मो कम्मददमम्गणमहिकिञ्च । गाहा । नेदियचिताउवचिता उदीरितावेदियायणिजिाणा। उन्हहणसकामण णिहप्तपिफायणेतिबिहकालो १॥ रझ्याणचतेजेपोग्गला तेया कम्मसाएगिरहति तेकि तीतकालसमए गिण्डति पमुप्पमकालसमएगिण्हति चणागयकालसमएगिरहति गोयमा णोतीतकाउसमएगिएहति प3 सारे रिमाया दिया । रिजिता निवया । बारासोनपापा । सदामच । संक्रमागितचा समापण पिकापप । निकाथा एमपपदे ति मिापारी १ । प्रतीतपनामतवमानरूप त्रिविषशासवारि पुसमा अभिवारवयो एपारसूत्रबारे धेरइयाभते । नारखो हेममयन् । जे पुषवातेगमपत्ताए । पुजह तेषस पर तवा बामपमरोर तबका बामपमरे बरीने पोछे पतापता तेबसकाम गरोररुप पुरस । गिगहति । पोर। तेति। ते पतोतवादप प्रमयपपि समापारम्प नहीं मातनो समय ते परमपपि समयपपरि वर्षादिकपनको तेमामालिपि शोषको पाससमयाति पीतवास व्यर्णिमादिषनो समर से परममिवरमय पतीतवास समयश्यि नेपत्तीतमास समये परेश। पापण पार पमए नियति । माद। पानवाससमप पितति । पागवबाससमये गोरे रतिपय गोयमा। पौतम । पोतोकाममए । पतीतवाससमरे । विगाविपोनों ।। पापपणामसमए । पत्तमानबार समय बरोने। गिलास दुरे भाव भागा। मामा - तातझालेत्यादी प्रतीतानागतमामविपपयासप्रसिपो विपयातीसत्वा विपयातीतत्वम्प तयो विमष्ठानुत्पन्नत्वेना सत्यादिति । प्रत्युत्पन्नत्वे प्पनिमुगाम् पनाति नाम्याम् ॥ गहरासमपपुरसाहेति ॥ ग्रामसमयः पुररस्तोवर्तमानसमयस्य पुरोवता येपागते ग्रहणसमयपुरस्कताः मारुतत्वा दवं निर्देझो न्यपा पुररस्तपारसमया इतिस्पात् गहीप्यमानाइत्पपा उदारवाच पूर्वबालगहीतानामेव भवति पहपूर्वगत्वा दुदीरवाया। पताल प्रतीतमाससमपणहोता नुदीरयन्तीति पसमावानां यहीप्यमासाना पापहीतस्वा दुटीरवाताव सतउत्त । नोपमुप्पोत्यादि । वद प्पणकालसमएगिराहति णोशणागयकालसमएगिएहति १ णेरइयाणनतेजेपोग्गला सेयाकम्मताएगहिएउदी रति तेकि तीतकालसमयगहिएपोग्गलेउदीरति पफुप्पणकालसमयधिप्पमाणेपोग्गले उदीरति गहणसमय पुरस्कापोग्गले उदीरति गोयमा तीतकालसमयगहिएपोग्गले उदीरति णोपमुप्पणकालसमयधिप्पमाणेपो ग्गलेउदीरति णोगहणसमयपुरस्कोपोग्गलेउदीरति २ एव वेदति ३ णिरिति १ रइयाणनतेजीवाकिच ममये करोने । मिति । गोमती । पराया भते । नारखोने भगवन् ! पापसा । पुदगा । तेबाबा पत्ताए । तेजस कामवप। उदोरेंति धोरे । तेषितोयबानममयगहोए । हेप् प्रतीतवाससमये गुमा । पोमचे । पदमस । एदोरेति । उदोरे। पायसवाससमए । वत्तमानवाससमये । पे प्पमा । नेतावना । पाग्गने । पुरगन । उठोरेति । उदोरे । मापसमय पुरष्ठो । गुपसमयबको पागसमयें । पारगचे उटोरेति । पुदगबनी र रोपावरे इतिपत्र उत्तरं गावमा । हेगोतम ! तोयबाससमय गहोए । प्रतीतवान्चसमय गीत । पोग्मसे। पुरगवाते। उठोरेति । उटोरें। गोपचुप्प मकामममए घेप्पमारे। पत्तमानपानसमये पोषमाप करता योता। पाग्मये । पुदगल तानी । उठोरेति । उदोरपायरेनी । पागापसमय परमो पागने । वेगापममयको पुढगठ पानच वेममय तेरनेविपे महो पटगस तेहनी । उदोरेति । उटीरसागकरे । एवं । हम । बैदेति । हे । पियरेति । मनमिजरे बेदनानिपरा मपचि उत्पत्तिएणीव बायो। हिये पर्माधिकारमयो एपश्मनोहे-परायापभते । नारको प्रेम - पपा प्रेमात्यादि । गापा मतापो मपरं अपवर्तमसंकमनिपातमिकापनपदेषु विविप कालो निर्देएष्यः, प्रतीतयतमामानामतकातनिर्देगेन तानि वामानीत्यर्पः बार अपवर्तनादीमाभिव नेदादीनामपि विकासता युक्ता न्यायस्य समानत्वात् । फेवल मषियगया व तन्निईशः सूत्रे स्वाति प्रप पुद्वत्तापिचारा विद सूबचतुष्टप माइ । मेरहपालमित्यादि व्यत्त अवरं । तेयाचम्मताएप्ति । तेगा फार्मव शरीरतपा तद्रूपतये स्यपः । प्रवीतवाससमएत्ति वासरूपा समयो नतु समाचारकप: पासोपि समयम्पो नतु यमादिसतपति, परस्परेग विशेपणा साप्त समयः अतीत माससमयो तीतवासस्स चोत्सर्पिसादे समयः परमनिकष्टों को तीतवाससमय ' सत्र ॥ पम्पमप्ति । मत्युत्पनो धर्तमानो' नो कम्मदछमम्गणमहिफिच्च ॥ गाहा नेदियचिताउवचिता उदीरितावेदियायणिझिणा । उहहणसफामण णिहप्तणिकायणेतियिहकालो ॥ १ ॥ णेरइयाणन्नतेजेपोग्गला तेया कम्मताएगिरहति तेफि तीतकालसमए गिद्धति पमुष्पसकालसमएगिण्हति यणागयकालसमएगिरहति गोपमा णोतीतकालसमएगिण्हति पमु | पारिमायारेरिगा । पिविमा। मिषपा । पार।होमबार । सबामर । सेवमाया। पिता समापरणागिवायर। निकाचा पसवपदे ति विचासो । पतोतपनामतपमानाप विविधमासमा । शिव पुराना परिवारको एवारसूत्रकहेरे-परश्याचभते । नारको भगवन् ! पुषहातेवायत्ताए । पुस तेवस पर तथा वार्मरमर तया पामपयरे परोने पर पतायता तनमकार्मर मरोरम्प पुस । गिति । पोर। तेषि। ते पतोतवालम्प समस्पषि समाचाररूप भी वाहनो समय ते परमपपि समयम्पपपि वर्षादिम्पनी तेमाहोमानि पि | मेवाको पारसमयाति पपोतबार पपिपारिखमो समय ते परमनियारपण ते प्रतीतबाट समवरिये तेषतोतवाद समयेपोथे। पप्पण बार समए पियति । गरे। परामरवायसमए मिति । अनामतवाससमये गये प्रतिमन । मोपमा। गोतम ! चीतीतबाबममप । पतोतबाबरमये । विगवि। पोनों ।। पदुप्पामाससमए । पत्तमानमार पम परोने। गिनि । नरे। नीचपानाम पनामतमान । । - - न्यः गातम नाच निपमा पलितस्स कम्मयो मासितस्येति इस सङ्कापीगापा पन्धोदये त्यादि मोविसापां कयन मुदयशम्दे नोदारमा परीतति उक्ता मारकशक्त पता अप चतुर्विंशतिदगाकम्मागता ममुरकुमारयत पतामाह । अमुरकुमारासमित्यादि । तत्रासुरकुमारवक्तसप्ता नारम्यतयताव या यतः ॥ ठिइसामाहारेत्यादि । पापोत्तामि सूत्रावि ४२ ॥ परिगयषिरत्यादि । गापागीतानि ६॥ हचिरत्यादि । गापा पहीतानि१८५ यपोदपेत्यादि । गापागणीतानि । तदव द्विसप्तति सूशावि नारकप्रकारकोचानि प्रपोविएता बसुरादिप्रकरणेषु समानि णिकाति ८॥ गाहा ॥ यधोदयवेदोवह सकमणणिहप्तणिकाएसु । श्रचलियकम्मतुनचे चलियजीवाउणि जारए ॥ १॥ शसुरकुमाराणनते केयइयंकाल ठिई पणता गोयमा जहरसेपदसवाससहस्साइदिई पसप्ता निजी पनि । रामचनियकम। पपसितवम । विवाति । निवरेनी एपाठवधा । समाजा। समापोगापाको बत्ति । नवाकमना गर ११। उसय । उच्यतेविपाव वेदनाम उन्मयो पायो ते पापी उदयंपाचीये तेढोरपा २ । मेट। तवा वेदयो । प्रवा । वामनाम्बित्यादि प्रसव मार पियपत्रोनबारव ते पपवतन ।। मकमे । सोचामते पमोपपणे सक्रमापे ते सामरवाहीये।ता । तपा। पित्त । पोषया पुदग मना माताहि ममहवरोधार ते निपत्त विवाए । बोपनाचे पुरमस तेमाहोमादि कीभाषकरावे एनिकापन जिमनी समा पमिस न पापे नटो खोभावेकाले तिम ए मातमे विषे । प्रतियवन्यप्तभवे । पचसितधर्मसोले भने पाठमो सूत्र निजरा । पसिय । पतितकर्म । षौवापी जोधप्रदेगयो । पिजरए । निजराकरे ८ एनारकीनी पालवतावहो । शिव पच्चीस दाय क्रमागत असुरखमारनो वालपता कोशे-पसुरकुमारा । पमरमिक्षायने लिपे अपना पने मारतो परेवो तेमा देव त पसरफुमारदेव कहोये, पमरणमारनो । भते । भगवन् ! केवइयवास। वेत माबामनो पिपत्ता । म्पिति को इतिपत्र, उत्तर । मारमा। मौतम । वामे । जपन्यता ।सवाससाम्मा । दशमानवषमो। विर पपत्ता । स्पिति पी। मासेमातिरेगसागराधम । उत्सएपदोवो रसमामरोपम झाझरी वितिही ते उत्तरयोमा यसोन्द्र ने पायोने, पापयो । वसो मी - - - मामिनासूपयो रप्प वोपपप्तिरिति अप कर्मापिकादेवेप मष्टसूत्री | मेरहपापमित्यादि । व्यक्ताय नवर ॥ जोयावकिपलियति ॥ जीयम देशेम्प पलित सेवनवस्पानझील तदितर व पलिप्त तदेव याति यदा-करनेदेश म्यकदे शास्परागादिपरिणतोयोग्य । यनातियोगरेतोफ मनोहाचावषमस ॥ १॥ एव मुदीरावेदनापवर्तनासकमबनिपतनिधापनानि जाण्यानि निजरातु पुदसानां निरसुनावीफ़ताना मास्मप्रदेदो लियकामयघति थचलियकम्मघधति गोयमा णोचलियकम्मयधति शुचलियफम्म यति १ णेरड़याणनतेजी याकिचलियकम्मउदीरति श्चलियकम्मउदीरति गोयमा णोचलियाम्मउदीरति शुचलियकम्मउढोरति २ एव वेदति ३ उपहति १ सकामति ५ निहप्तति ६ णिकायति ७ ससुश्चलियगोचरिलय ॥ रइयाणनते जीबा कि चलियकम्मणिरेंति शचठियकम्मणिद्वारेति गोयमा चलियकममणिकति णीशचलियकम्म मयन् ! जोगमा । बोवपदेपवको । विपसियामा परबम ते । यति । बधे पनपा । पचमियान्म । जोवप्रदेगधी च नमो तेबम । यति । या । रतिपय उत्तरागारमा।मौतम । भारतिवमा तेवमहमने गगेबरो चरितवम । यति । बांधना। पतियन्म । परमितकम्। ति पारे । एस्बपरितोकामो १ । विरागमते । नारपोरेममवन् ! पोवाभो । बोषप्रदेशयो। विचनियव । पमितकमनी । नदोरेति । उरोरपाकर परसिरमा पा पोषप्रदेश्यो परसितममनो। उदोरेति । उदोरवर तिमय, उत्सर । मोयमा गोतम दोषसियकर्ष छदौति पमित कम को उदोरमा गरेनहीं । पचतिवन । पचमितवमनो । उदोरेंति । उदोरपायरे एयोवोत्रपामो र । एवं । इम । बेदेति । येदे एपोलो २ । उयदि तिरोनबरया। समामेति । । संबमा । शिति ।। धारयो। विवाति । निजाये। सम्मेसु । एमवविपे। परमितं । पचमितमममेको पाक्ति । महोसितवमै । शिव पाठमो भूत्रकोहे-राया भत । नारकोने रेममयम् । मोवायो । लौषप्रदेसभो। किन मिचान्य । प्रचलित पमा रिवति । निबरे । पपनिकम । वारसितवर्म । रिजरेति । निवरे तिमाता गोतम । चनिय कर्म। पमितधर्म । पिलानि। - - - गणिप्तिएय । तत्यण जेसेपणानोगणिप्तिए सेशृणुसमययिरहिएथाहारठेसमुप्पजाइ । तत्यणजेसेष्ठा जोगणिप्तिए सेजहणेणचउत्यत्नत्तस्स उक्कोसेणसाइरेगस्सवाससहस्सस्सथाहारठसमुप्पजाइ । सुरफुमा राणजतेफिमाहारमाहारति गोयमा दधश्रणतपएसियाइदवाइ खेप्तकाउनावपखवागमेण सेसजहाणेरह याण जाय तेणतेसिपोग्गलाकीसतानुजोनुजोपरिणमति गोयमा सोइटियत्ताए सुरुषप्ताए सुयसप्ताए इछ निवर्तितबारी पभागनिवतित कहोमे । पषामोग। प्रजापता पाहार ते प्रमाभागबपी। पिबत्तिपय । मियों ते पमाभोगनिति बरिये। तत्व तिसरे पारमारे, पामे पापासबारे । जसे पराभानपिम्पत्तिरसे । मोव पराभोग पालापता पाहारनवरे ते पनामोगनिवत्तित पाहार । मे पडसमय । ते बोब ममयसमम प्रतें। परिदिए । प्रविरक्तिववा करे ताने समये २ घनाभोगनिवतित । पाहारो। पाहारनु पर्व ममपया। अपये। तत्वसमे । तित्रि। पामोमषिपत्तिप । पाभोमे बनता पाहतारनो निहात्तिकरे। सेवाग। ते बघधयोती। उत्तभत्त म्म । तयमताने एव पवाममो मा एकदिने प्रहारबरो पड़े वोबादिन प्रतिवमो पोवेटिनवसो पाधारवरे । पबोसे रसायकोती।सारे गम्म । सातिरबार पक्षिय । वासमासम्म । वपसासे। पासाये। पहारमोबांश । समुपजा। अपये पबमलते जपम्पम्निति पायो अमेसा शिवार्प मानते बितिपाययो पारयो, गसी गौतम पूरे-पसरवमागमते । पसुरखुमार भगवन् ! बिमार । कार पाहारमण पारिति । पाहारगरे रतिपम, उत्तर । गोपमा। गोवम । दम्पपी । द्रमको। परतपएसिवाटपार। पनतपदेयामक ट्रम्पमते पाहारे । सत्तकान्त भावपसमागमे पेपवास भाषदो विम योमामाचाखत पापा मापांगमारे पाप-तिम विधारणा । मेस । मेप वाचता। वहाजि मा रेस्पाप । मारबोने पूवामा विचार तिम परिबरयो । बाम। गपत् । ते । तेकारपबयो । तेसि। तपसुरखुमारदेवताने । पोग्गता । पुद गच । पापण्यपम कीमत्ता । मुयोर । विसोतरे वारपार । परिशमति । परिपमे पुटपाय । इमपा , उत्तरा मोपमा । गौतम ! मोइदियत्ताए | ।

ततः सास्पो भवर विशेषोयं । उसोते साइरेम सागरोवममिति । यदुत तालिसा मसुरकुमारराज मामित्रोक्तं यदाह-चमर १ पलि २ सार१ महिय १ तिमत्तपोवावति । सप्ताना स्तावामा मुपरी तिगम्यते सोपसव व मारते-स्सप्रस्वगलस निरुवनिस्सजतुको । मगेसासगी सास एसपायुत्तिनुषा १ दत्तपापूरिसपोवे सत्तपोवापिसेलवे । तवाससत्तहत्तरिए एसमुत्तवियापिरति ॥ २॥ इस जघन्य मुलासादित ज्यपन्यस्वितिकाना मित्या वगन्तव्य मुस्कप्ठ पोतष्टस्पितिकाना भित्येति । सत्यनत्तस्सति । चतुथप्नात मित्येशोपवासस्प सम्मा उक्कोसेणसाइरेगसागरोयम । श्वसुरकुमाराणनते केवइयकालस्सचाणमतिया पाणमतिधा ऊससतिया नी ससतिया । पुच्छा । गोयमा जहमेणसप्तरहयोयाण उक्कोसेणसाइरंगस्सपरफस्सशाणमतिया पाणमतिवा जससतिया नीससतिया । श्वसुरकुमाराणन्नतेश्याहारठी हता शाहारही। सुरकुमाराणनते केवइयकाल स्सश्चाहारठेसमुष्पज्जड गोयमा सुरकुमाराणदुबिहे थाहारे पणते तजहा थानागणिप्तिएय श्वणानो तमपूरमे । पसुरफुमाराम भते । पमरकुमार भगवन् । बायकासस । केतसेवासे । पापमतिवा। सासासास मेम्के । पुचा । सोमत्रको पातिबारे भयतबहे । मोरमा। गौतम ! बाहर । बघयायो । सत्ता वोवाद । साततीचे एनपश्यस्मिति भावगीत । रोगरहित पुरुपते सा ते सासापासे एक बाप हीरे। जोसेप । सारसको ता । सारमसपासम्म । एषपचभामरे । पापमतिवा। मासोम्पासहोम उत्खर स्विति पा को पारमा ४ । पसुरङ्गमाराप मते । असुरज्मारदेवता रेमगवन् ! पाहायो। पातारा मोल्यवाहक प्राहारनो पबवहीसे प्रयोजन मेहनेते प्राधारासमोये। इतिम, चत्तर । माबोकेरता । महानुभाष । पाशापो। पाहारनापीरिक, बडी गोतमपूर-प्रमुखमाराभते । अमरकमारने भगवन् ! बेपारकासम्म देवसेनासे। पाहाये। पाहारमोश । समुप्पच । अपवेतिबारे भगवंतवाबा-गापमा।मौतम ! असुर मारामा प्रसुरखुमार देवताने। तिहाप्रबारनो। पाहारे। पातार। पपत्ते । पी। तमहा। बहरे-पामामनिम्पत्तिएय । जापता बेहारकरी - . तर म मित्या यमपं यदा-दागिदिकरलियं दोटमाप्तरिलायमिति । मुहत्तपत्तस्मति ॥ मस्त उक्त सम्एवं धातु विप्रति रा यमा जहणणसप्तरहयोयाण उक्कोसेणमुजतपुऊप्तस्सशाणमतिवा पाणमतिया ऊससतिवा नीससतिवा । णागकुमाराणनतश्चाहारठी हता थाहारठ।। णागकुमाराणन्नतेकेवइयकालस्सयाहारठेसमुप्पजइ गोयमा णागकुमाराणदुपिहेशाहारेपणते तजहा शाजोगणित्तिएय शणानोगनितिएय । तत्यणजेसेशणानोग मागमारामभते । नागवमारदेखने ममपन् । करायवानापानमतिवा ४ । केतसेवासे सामानास प्रतिप्रश्न उत्तर । मायमा। गोतम वा नपमत्तभावान । जधले माते मताचे मामायास प्राधा वषम्वमिति पात्रयोने । उखासे पात्तात्तमभापतिवा 8 | अष्टपको तो संभोससे तिर मामापाम पय महत ते प्रषय येवो माये नबार सम्याविषमो मितिमा म सन्चाए सरकष्ट स्मिविधियोने, चो मौत म पोडे-बागवमारा लभते । नागकुमारने भगवन् । पायो । पाभरनो वशिता । धिम त बाहे ते तिमच से पता ही कोयेथे पाहायो । पाहारमोवामा बसी गौतम पूरे-पागामाराभते । नामकमारने हेभगवन् ! मोवार्य बाखममाहागे। मेतकाते पाहारनी रचा ममपत्रा । अपामे पूर्याय का उत्तर । गायमा रेमोतम ! पामकमारा दुषिो पातारे पसत्ते। नागषमारने विभेदे पाहार पायो । तपाते करव-पामागनिपत्तिएय। पर्याता परमायें तापम्बा पाता पारबरे ते प्राभानित्तित । पचाभीमनिम्पत्तिएय । जपषवाने समये प पमा चम्पा पणा नापता पाहारकरे ते पनामीमनियत्तित । तसरमेमेपामागनिम्पत्तिए । तिहा ने पनाभागनिवर्तित पाहारवर । सेपर भम यविरहिण तेत्रोष ममय समय प्रतें पविरक्तियका बरे निरंतरपरे । पाहाये। ते अविछिनपरे गिरतर पापाराभिसाप । समुप्पणा । अप जानवम जेमे पाभागनिवत्तिए । तिने पाभोगनिवतित पाहार करे। सेवासेस पछवभत्तम । ते वघव चतुवमत एकातरे पाहारनी इच्छा अपये। उसमेन दिवसपुरत्तस्म । परमवोतो दिवसपूयो देवोमांडो नवतार प्रपत्र पोजे तेतसे। पहाडे समुप्पणा । पाहारनो इलाज परि एकत्र दिने जुका शेराव मात्तिकम्प वतीये मुजतातिनावः नागकुमारवयताया ॥ उकोसेप देसगार दोपसिठेवमाइति ॥ यदुक्त सदु ताए इच्छियप्ताए शनिम्कियत्ताए उहप्ताए णोश्यहप्ताए सुहताए णोदुहताए जुजोनुजोपरिणमति । थसु रकुमाराणनतेपुवाहारियापोग्गलापरिणया सुरकुमारालिलावेण जहाणेरइयाण जावचलियकम्मणिरेतिर णागकुमाराणनते केवइयकालठिडपमता गोयमा जहणेणदसवाससहस्साइठिईपणता उक्कोसेणदेसूणाइदो पलिनुबमाइ । णागकुमाराणन्नते केवश्यकालस्सचाणमतिवा पाणमतिवा उससतिया नीससतिया। गो बारे पराविशेष प्रमाटियामद सामसिवा । सुम्पत्ताए । सर्वोस्खष्ट मनोहरप्पेबरो। सवसत्ताए । मर्वोत्बाट मनाहरपना करो।ताए । मयप्रगा पानसुपारि पोषयो। रचियत्ताए । रेपितेवरी हसत समदायोपाधी। प्रमिनिमवत्ताप । वारवारासोविधाय तोभसारसोशिये । १९ ताए। जनावे वादे प्रधानागे । बोपात्ताए । महोपयोगावपणें नारकोनीपपेवावे । मुस्ताए । सपमाये मनुबनी पपेपाये। पोदाताए । सुहत्ताए । मुखमाये मनुषमीप्रपेचामें । पोदात्ताए। नही दुपबरो सबमनसाधापनविकी । मुनोमुखोपरिपमति । वारवार परिषमे प्रयाताये नमी मये मसो मोवमो-प्रसरबमाराधमते । असुरषमारने भगवन् । पुम्वाहारिमापोग्गमापरिचया । पूर्व प्रधा पुदमम पुष्ट पपुष्टाप ते परिपया उदयभामा । असुरकमारामिक्षाये। असुरबुमारना पासापानेविषे। बहारेराव । विम नारकोने पावा पूर्वपाई तिम असुरकुमारने विषे पनि कार्य बाय गायत् पोषप्रदेसमो। पचियपियरेवि । रसितधर्म निबरे चमारे इवय , ए पमुरखुमारनी वाश्यता बमोहिये नागकुमारनी मतमता पूोले-पायवमारा भते । नागबुमारदेवने । हेभमवन् ! वेवायचासंहितोपसत्ता । चेतने वामनो म्विति कहो ? एमे प्रयको उत्तर मममान बोया मौतम । वापसमाससामा । अधमाको दम सहन वपनो । तपपत्ता । मिति पो ए सामान्यरेषनो पपेचा । बोमेष देमभाई दापसिभोरमा । बायको देवा रोग पञ्चोपमनोमिति एप उरणहमिति उत्तरवेलीना प्रभावी मानो चमी मौतम पोथे- - गरपुरया २२ । पर्णपारमोदम मोलममहारयोसप्ति ॥१॥ वमायारति ॥ विपमा विविपावा मात्रा का नविमागो विमात्रा तया ददमुन्न भयति विपममाला पपियीकापिकामा मुनामादिफिया इयत्मासा दिति म मिसपपितु अपत जहानेरहयापमित्यतिदेशात् ॥ रोप्त प्रससे जयपमो गाढाई पान प्रापरठियाइ इत्यादि ॥ दृश्य निवापाययं इविमिति । व्यापात पाहारस्प सोकान्तमिफुटेपु सम्मयत्ति मान्यत्र ततो मिफटन्यो ऽम्पर पद्सु दिनु पप पतसपु पूदिदिगु कद मपय पुद्गलयाएं करोति तस्य स्थापना ॥ याघापपघुपत्ति । व्यापाप्त प्रती त्यपापातम निफुटेषु तप । मिपतिदिमिति ः स्पारपदावित्तिसपु दिख माघारग्रहण म्भवति , कप यदा पथिवी वापिको पस्तने उपरितनेवा ससतिया नाससतिबा गोयमा घेमायाएयाणमतिवापाणमतिवा जससतियानीससतिया । पुढयिकाइयाण नतेशाहारठी हतागोयमा आहारठी । पुढविकाइयाणजतेकेयइयकालस्सथाहारठेसमुष्पजाइ गोयमा अ णुसमयविरहिएशाहारठेसमुप्पशाह । पुढविकाहयाणजतेकिमाहारमाहारेति गोयमा दक्षठजहाणेरइयाण पजिवीकारणमे एतमेशामे सासाम्बाम पहा को सवोये नती वमी गौतम पूछे । पुठविवारवाभते पाचागी । प्रवियोवावमा जोवने हम गन् । पाहारलोरपारे । भमवंत पोछे-हंतागोयमा पाहागो । गौतम प्रवियोवाया पाहारना पर्यो । पुठविवादया मते पोवाय । प पिको वारसा त्रावने भगान् । पेनस । फासम्म पाहाणे ममुपजा। कार्स पाहारनोरच्या जपले इतिप्रय उत्तर। गोयमा पासमय पविरहिए पचममये सातत्यपरे परिरक्षित निरक्षरे । पाहाणे ममुपमा । पासाराभिमाप अपने । पुठविकासाचे भते । प्रविधीकारया पाव भगवन् ! बिमाहार माहारेति । प्य पार पाहार से इस्य रतिपय उत्तर । गायमा वसोवा पेरायान । हेमौतम । ट्रस्यवो जिम नारपोमे पूर्वकाचो तिम सापनि वाया। पिम्पापाएप पदिमिवापायपटप । दाघात पाहारनो मोवोतनिष्कटनेवि समपे पोलेमानवे नहीं तेमाटे पोषना निम्यु टठामो पोजे म्यानी रहिगिता पातारपयेते गिम पर्यादि ४ जा ५ प्रधा ( एव हदिगिनो पानयार करे व्यापारापायो सोपातने सपे । सिय मवन्या महाविमेका समयेप्रसिद्ध ५ रख सुवागमारावति ॥ नागकुमारावामिय सुपणकुमाराणामपि स्थित्यादि याय' इवष्य किपर पावद्वाष्य मित्या गयपपियामारावति ॥ यावत्करबात् विद्युतमारादिपरिया ग्पा बहायकमो यसेप - प्रसुरा १ नागर सुवमा ३ विग्नू अग्गो य ५ दीप ६ दहीय । दिसि वाकई परियाविप १० दसनेपानवरयामीर १९ पर नवनपतिपक्तमतानन्तर दारफफमादेय पधिव्यादीना स्थित्यादि निपयन्नार । पुठवोत्यादि । यस मावनस्पत्तिमूत्रा अवर अतोमुत्तति । मुतस्या ना रमतर्मुदत्त निभमुहातमित्यदः । उको सेम मानीस शामसहस्साइति ॥ यात तत् सरपपिी माश्रित्या धगन्तव्य यदा- महाय१ सुद १२ वानुय १४ मपोसिला १६ सफराय ? णिकृतिए सेएणुसमयशविरहिएथाहारठेसमुप्पजाइ तत्यणजेसथानोगणितिए सेजहरमेणचउत्पन्नतस्स उक्कोसेमदिवसपुजप्तस्सशाहारछेसमुष्याइ सेसजमा सुरकुमाराण जाच घलियकम्मणिहारेति ॥ एव सु वणकुमाराणवि जाय यणियकुमाराणति ॥ पुढविकाइयाणमते केयइयकालठिईपणता गोयमा जहणणश तोमुजत्त उक्कोमेणयाधीसवाससहस्साइ । पुढयिकाइयाणनतेकेवहयकालस्साणमत्तिवा पाणमतिया ऊ पये। मम जा। बाबता मत्रिम । परनमारा । पमुरबमारने का निममयामी । नाव नसिव वर्ष । यावत् मितवम । पिजाति । नि घरे चबारे मय। एष समारावि । हम सुवरमारनेपरि कावा । नापषियकमारावति । यावत् मानिकमार तार कायो । ए भुवन पतोमो मायामो हि रावमागत प्रवियोनी याम्यता बोरे-पुठविवारपाप मते । पवियोवायमो भगवन् ! तसाबाममी स्थिति की (तिपय । उत्तर । गाममा पासेप पनामाता गौतम ! अवयवो पतर्मुइत । उयोसेपपापापीस पासमान्मार । वरवरपको पावोसमासवय पराधियोकारवारी बयो । पठविवारयापम । पविरोवाय भगवन् 1 वेवायदानास पात्रमतिया । बोनमेशाने सामोपाम में मोमे गौतम पप्रारम ममय उत्तर कोटे-माममा मापाए पापमतिमा मौतम ! मेरमा सामोपासमो मयादारी विधि मात्रा काम विभाग एतसे - - गरपुरयी २२ । मगयारमबोदस मोसमग्रकारयाधीसति ॥ १॥ वेमापारत्ति । विपमा विविपाया मात्रा का विमागो विमात्रा तया इदमुक्त प्रयति विपमासा एथियोकापिझाना मुमामादिकिया इयरफ़ासा दिति न मिरुपयितु शप्पत ॥ बहानेरस्यापमित्पतिदेशात् । रोतलं अससे गरपमो गानाई पासष्ठ अश्वपरठिईपाई इत्यादि । दृश्य ॥ निवापारग इविमिप्ति ॥ व्यापात माहारस्य सोकान्तनिफुटप सम्मवप्ति नान्यत्र ततो निफटम्यो ऽन्या पद्सु दिषु कप पतसपु पूर्णदिदिषु कद मपय पुनलगाय करोति तस्य स्थापना n यापार्यपचति ॥ व्याघात म्प्रती त्पापातम निम्प तप ॥ मियतिदिमिति । स्मात्पदावित्तिसप विशु पाहारपाय म्भवति ,कर्ष यदा पपिवीकापियो पसने सपरितमेवा ससतिया नामसतिया गोयमा येमायाएशणमतिवापाणमतिया ऊससतियानीससतिवा । पुढविकाइयाण नतेशाहारठी हतागोयमा थाहारठी । पुढविकाइयाणनतेकेवइयकालस्सथाहारठेसमुप्पजइ गोयमा अ णुसमयविरहिएशाहारठेसमुप्पाइ । पुढविकाइयाणनतेकिमाहारमाहारेति गोयमा दछजिहाणेरइयार्ण पनियोकारमाने पतमेवाम मामापाम पाया की सबोये नहीं बसो मौतम पोछे । पुठविवायाभते पाहापो । पविषीकाममा घोवमे हम पपन् । पाहारगोरभगपत पारे-हतागोसमा पाचागो । हाँगोतम परिवोवारमा पाहारना पछि। पुरविवारया मते बेवाय । प पियो वााया ओपने हेमगवन् ! बोतस । बासम्म पाहारो समुपवर । वास पाचारमोरचा धपचे तिप्रय उत्तर । मोयमा पएसमय पपिरहिए | प्रथममये मातम्यपणे पविरहित निरक्षरे । पासणे समुपमा । पापारामिनाप अपने । पुठविवागार भते । पृथिवीकारया जाप भगवम् । शिमाहार माहारेति । प पाहार पाहारे मे व तिपय उत्तर । मायमा दसपोवहा राया । गौतम । द्रवो प्रिम नारकोने पूर्वकमो निम पनि बाममा । पिनापाएपपरिमिवापारपसत्र । याघात पाहारना मावतिनिम्फटनेवि संभवे वोमेस्थानके नही तेमाटे कोषमा मिम्बु टटामो यो म्यानी दिगिमा पाशार होते प्रिम पूर्वादि ४ ५ पधा । एष एनिशिनो पुरमगार परे पापातपायो सोकांतने रुपे। सिय भोपे वरिपत स्पा तदा यस्ता रसीका पूर्वदपियो चासोक इस्पेव तिसृषा मलोवेना वतस्वा सदन्य सु तिमपु पुद्गलग्रहण मेवमुपरिसनयोग्ये पि वाम पदा पुन रप उपरि चासोको भवति तदा पतसपु दिनु यदात पूर्वादीमा पक्षां दिशा मन्पतरस्पा मलीकोनवति तदा पबस्त्रि ति पामठबामपठाइति समझादयो बचाताः स्पशा दृश्याः ॥ संमत यत्ति में शप प्रणितावझपे तपय , यथा नारमाया तया पपिवी मापिफानामपि तपद पवार प्रत सुम्लाई पाहारेंति ताइ पि पुकार अपुछार बइ पुकार बिगाढाइ इत्यादि । मागतप्ति । नामास्य नेदः पुमा पथिवीसायिकाना मारकापेकपा हार प्रतीद यथा ॥ पाइनागमित्यादि । तत्र ॥ पासाइतिप्ति र स्पा कुवन्ति स्पशयन्ति स्पर्शन्द्रि णिवाधाएणदिसियाघायपमुच्च सियतिदिसि सियचउदिसि सियपचदिसि वण कालनीलपीचलोहियहा लिइसक्किलाण गध सुम्निगधदुरनिगधाइ रस तिप्ताइ फासठे करकमाइ ८ । सेसतहेय णाणत कइनाग तिदिपि । काचित् तान दमिना पाहारसे विरविवारे पृथियोधाररा जोप नोचस तवाउपरसेप अपमे तिवारे नोचे पसाक पूर्वादि विदि गि पक्षाला तियार तोगतिशिनो पाशार तथा । सिवातदिसिसिषय चतिमि । अपरे तया नीचे पनीख मारे तिवारे पारिदियिनो पार येतबापि बठिगिमाहिलो पनेरी एपदिय पक्षावावे तिबारे पंचदिगिमा पाहार विहां साांत निप्युटवे तिहां विचारो भवनापारयो। वप शकायमोनपोपमापिसाबिसवितात। पृषिलो पाइवा पाप तेबोर-पोवामा पाक्षामतुप १ नोमा मोचकमवसरोपा २ पोमा माम मगपा १ माहित हमपानमन सिखसरोपा ४ कम्पटिक रबारिक मरोसा ए पचप्रकारे पासमाहारे। मधपामुभिगंध २१ गधववो मगध १ दु गंबर मोहाबारे पारे। रसपातित्तार । रमवी तितादि पचि मठ पादिर तेनोपरे । पासपायमा ८ । नगयो पकये पादिदै चपरत पाठोरण । मेसताहेब पारत्त । पसायो गेष मारमोनोपरे वाचवा एततावियप पारपाको पा) काभाग पावरिति । तमामाग पाहार। भाम पामाइति । तसा भाम मामाद रतिमन उत्तर । मोरमा । हेमातम । पसरेशामाग पाहारेति । परममा प्रमप्यातमीमा ५ येगाहारपुनसाना कतिनार्म स्पशन्तीत्सा, प्रथया स्पर्टेना स्वादपम्ति , मारुतशेस्या पासापन्ति स्प:नवा पाददति गए म्युपसामन्तहात फामाइति । इद मुक्त भवति यया रसमेन्द्रियपप्राप्तिपयाप्तका रसमेन्द्रियहारेगा हारमुपनुम्नाना पाखादयम्तीप्तिव्यपदिश्यते, एव मेते स्पर्शने न्द्रिपहारगति ॥ ससंमहानेरापासतिगतवैव पुटक्किाइयाग्नत ! पुवापारियापोग्मता परिसया इत्यादि माग्वष व्यास्पेयमिति ॥ एवं चाव वारमाबाहयावति ॥ अनेम पपियोकायिसूत्रमिया कायिकादि पवारि सूत्रारि समामी स्युक्त, स्पिती पुन विशेषो तम्याह मवर ठिई वनपटा जाजस्मतिपत जपम्पा सर्वेषा मन्तर्मुहूत मुरूमा त्वा सप्तवर्पसहस्रावि, सेजसा महोरात्रश्य वायूनां धीपि वर्पसहमापि वनस्पतीना शाहारेति कइनागफासाइति गोयमा श्वसखेजाइनागथाहारैति अणतनागफासाइति । जाय तेणपोग्गला कोसत्ताएनुजोनुजोपरिमति । गोयमा फासिदियवेमायाएनुजोनुोपरिणमति सेसजहाणेरझ्याण जाय गोछचलियकम्मणिरेति एषजाययणस्सइकाइयाण णवर ठितीयसेतचा जाजस्स उस्सासोवेमायाए बड़ ग एतामता प्रतिसूक्ष्म माव पारे । प्रतभाग पासादिति । पमतभाग अस यातायो पनि प्रतिमध्यतर सयपत पुरखापत पाहारवारे । चाप तेप तेमिपीपका कोमत्ताए भुवा र परिवमति । यावत् तेरियोकामिक वोवाने पास विसोरोते बार बार परिनमें पगेमागे प्रतिप्रश्न । उत्तर ।गी । पामिटिय । पय मेंद्रिये परिनोये । मायापभुज्जा २ परिपमति । विषममाश पबवा विविधमाषा पाखविभाम तिरेकरी एत मे मर्यादा का होमवाब हम बारगार परिषमे । सेसहारामाप । कमायो वापता विम नारखोने कमा तिम पाचवं तेरम । पुठविकारगार भते पुपाशारिवा पाममा परिषया । स्वादिविताव पा परसियम पिबरेति । यावत् नहीं पोधो परिवषम निवरे पयवारे पवसाता र कागा । एवंजावरण प्रापाइयार पसरं हितोकोतया । इम पृषियी सूचनोपरे अपनायादिव सरिसूत्र सरोपा दावा धावत् वनस्पतीबाय वगे एतवावियप वितिने विषे मेहमामा तेकोरे-तितो पायता सपनो पतर्मुर्तनो स्थितिरे भने उत्यष्टोतो अमायनो भातसहस्रापं ते यमा मोत - , | दझेति , उस्माचेय पषिष्यादितमेव-वाबीसाइसरस्मा सत्तसरस्सा २ तिबिहोरता ३वारतिलिसपस्मा ४ दसयाससरस्सियारुसति ॥१॥ दिपावठिनविकरसासोमायाएत्तिा पत्तथ्य इतिशेपः स्पितिय द्वीन्द्रिपारा हादशयासि वीन्द्रियाणा माहारसूत्रे, यदुक्त-तत्यान से पानोममिवतिर ५ सेप असपेकसमहर पतोमुत्तिर वेमायाए माहारठे समुप्पज्जइति ॥ तस्या यमर्थः, असलातमामपिस पाहारकासो प पति , मचा वसप्पिस्यादिडपो प्रस्ती त्यत उपते, प्रान्ती इतिक सवापि विमाप्रयान्समुइतसमपासलातत्यस्पा सङ्ग्रेपन्नेदत्वा दिति ॥ येर दियाणठितोनाणियहा कसासोमायाए । घेइदियाणयाहारेपुच्छा शुणाजोगणित्तिएतहेव । तत्यणजेसे शानोगणिप्तिए सेणचसखेजसमइए तोमुजातिएपेमायाए थाहारठेसमुप्पडाइ सेसतहेय जाय थणत नागथासायति । येइवियाणनतेजेपोग्गलेचाहारत्ताएगिरहति तेकिसवेशाहारेति णोसळेश्याहारेति गोयमा उपारनो तोन पहारापि पावबारमो तोनमानबप बमम्पतीबायनो उममानवप पवियोपादिदे पानी भेसो मिति पा-बायोमारमा म्मा १ सत्तसावार २ तिपिशोरत्ता ५ पारतिषिसामा १ ठसवामसहस्मिगारसा । वे दिशास्तिोमापियमा । पंरवापरलो पखव्यतावहो कि विवादिकोडेपोट्रोनो मिति पायरमनो बायो। अपामावेमावाए। सासो सामपनि मर्यादा रहितहीन । पेर दियान पाचारे पुच्चा।। माग्नेि पाहारनो पचा पाहारगो प्रमोधो । पनाभोगविवक्तिए कोष । भापता पातार परेते वीमाहारनो प्रपेचायका अग्यथा पोषा पार तो सममाने ताबमोम पागे । तत्व चेमे पामोगपियत्तिए मेगपसदेमसमरए । विवि पाहारपो तेपसमातसमयिस पाहारका मा तेता परमणिपोकाबपति पमपात ममणिबहे तेमाठेखोरे-प्रतीतिरपेमायाए पापेममुपला । तिपिपि बेमात्रायें अंतर्मुतने पि पे समम पसंम्बात परेंबरी । सेमेतरेव । मेषधावतो तिमहोबायो। बायपरतभानपामावति । यावत् पूर्वावममतमो प्रगतमाम भाम्बादेवाय में बायो।योरिवारमते पोप्यमें शहारचाए मिति । बेर दिप भगवम् । बेपुरमस पाचारपरे पोरामाथि पारिति । ते . रिया दुमिहे पाहारे पक्ष लोमाहारे पक्सेवाहारेपत्ति ॥ तत्र सोमाहार संस्खोपतो वर्षादिपु या पुदलप्रवेशः समूबादवगम्पतहात , पारस्तु कावलिम सब प्रक्षेपाहारे बायो रिपटाएव शरीरा रम्तबरिय विश्वसम्ते त्योस्पसौम्पान्या , प्रतरवार । पोनसे पोवाहार नाम गेराहतीत्यादि । अगाइवसं मागसहरसाइति । असलयामामा इत्यर्प । पासाहज्यमाणापति ॥ रसनेन्द्रियतः । अपाताइन्जमावाईति स्पामन्द्रियता परेत्यादि । यत्पदं तदेवं दृश्यम् । कपरकपरेरितो प्रप्यावा बायावा तुमावा विसेसाहियावति ॥ व्यत्तम चवत्योपापो घेइंदियाणदुपिहेशाहारेपसते तजहा लोमाहारेयपस्केयाहारेय जेपोग्गलेलोमाहारताएगिण्हति तेसवेशप रिसेसिएशाहारेंति जेपोग्गलेपरकेवाहारताएगिरहति तेसिणपोग्गलाणशसखेजाइनागथाहारेति थणेगाइच णनागसहस्साइशणासाइड्ामाणाइ छफासाइडामाणाइ विठसमावळाइ एएसिणनतेपोम्गलाणचणासाइमा पुरुप पाहारे। पासाबपाशाति। बिना सबपाहारनही प्रोषा उत्तर । मारमा । मौतम | मे दिखाप दुविध भागारे परते तवा । दिनने म्पयन रसमयदने प्रकार पाहारा बह-शामाशाच पसेराबार । होमाहार प्रक्षेपामार तिवामाचार निवे पोषपदो वर्यादि पानने रिपे नेपदमखमयम हार तेस्त्रसम्म प्रोगहारते कासाप तिर्श प्रक्षेपाहारनेषिपे धपा प्रपरमाया प्रेमरोरखको माहि तवा वाहिर वियंपामे खून सभाको पतपम पार-पाप्यते स्वादि । चेपागा सामाचारपरे पर। तेसम्पपरिससिए पाहाति । वेसव अपरिपेय पाहार ममतना महापरे । वेपोनपटेगाारताए गिबहति । प्रक्षेपाहारते करनाशार पुगस प्रक्षपाहारपर्षे प्रहेथे । तेसिव पोलताप प्रससेवाभाग पारिति । ते पुरखापते पपपय पत्रपेवारी पस प्यातमोभागाने पाहारगो । पपेमाभागसम्मार । पमेव पपा भागसहस। पषा माजमापार । पनाम्बापमानरसनेंद्रियेबरो पासादियानहीं। पफासारजमातार । प्रसमामामस्म ममेंद्रियेबरो मानी । विसमापबर। वि धमतेपामे। परमिषभते पामगार पासामागई। एकाने भगवन् पुावाने रसनेंद्रिये पनामापमानाने। पासारवमानापम । सपने remenyear - . . । वझेति , उसाचेर्य पषिष्यादिरमेव-याधीसाइसरस्सा १ सप्तसहस्साई २ तिनिहोरता ३।वापतिविसारमा ४ दमवाससास्सियारूपवति ५॥१॥ वादिपावठिानविपदसामोवेमापारक्ति वत्तव्य रतिक्षेप सितिष द्वीन्द्रियाणा हादग्यपाणि दीन्द्रियागा माटारमूवे, यदु- सत्यणम से पामोगनिवतिर । सेव असमञ्जसमइए घतोमुत्तिए वेमायाए पाहारछे समुप्पग्मइति । तस्मा यमपः, असहातमामयिक पादारकालो न वप्ति , नवा वसप्पिस्पादिङपो प्रस्ती त्यत उच्यते भाम्तर्मो इत्तिक स्वापि विमानपान्तमुत्तममपासलासस्यस्पा सङ्ग्रेपनेदत्या दिति ॥ या दियाणठितीनाणियचा ऊसासोवेमायाए । येह दियामशाहारेपुच्छा शृणाजोगणित्तिएतहेव । तत्यणजेसे थानोगणिप्तिए सेपश्चसखेजसमइए तोमुजप्तिएवेमायाए शाहारठेसमुप्पजइ सेसतहेव जाय शणत नागथासायति । येइदियोणनतेजेपोम्गलेशाहारत्ताएगिरहति तेकिसवेथाहारेति णोसवेशाहारेति गोयमा समापनो तोम पारापि पावकायमो तोनमासवप बनम्पतोबायनो उगसासवप पवियोपादि पचिनो भेलो स्थिति कहे-वापोमारमा पा १ सत्तामा २ तिषितरत्ता १ पाएतिपिसहम्मा ४ रमवाससहम्मियारसा । वे दिपायरितीभाषियचा। पंचधायरनी पलप्यतावाहोरि वे पर विवादियो-दोनो शिति पारेरमनो बायो। च मामामासाए । मासो प्रामपपि मर्यादा रहितहोय । वो दिगण पाहारे पच्चा। मपारिने पाहारगो पचा पाहारनो प्रयोषो । पपाभोनविपत्तिप तप । पापता पाहार बरेते नोमाचारनी अपेचायेंचाई परयया पोवा पार तो सगमाने तावतोयं पायो । तत्व मे प्राभोपनिमात्तिए मेगप्रमणेषसमाए । निवि मे पाचारपो तेपसमातममयिक पाहारवा मागे तेवा प्राणियोकामानि प्रसन्मात ममनिपाई तेमाटेगोरे-पतोमुक्तिएपेमामा पारोममुपमा । तिपिनि देमाायें अंतर्मुतने पि पे समय प्रसम्यात परो । सेनेतोष । गमवावतो तिमहोबायो। गावपतमार्गपामायति । यावत् पूर्वोत्रमपणहयो भनतमान भामादेतान में पाया। वो दिगारभते पोपसे पाहारताए मिबहति । ये दिस रेममयम् । पुराना पाहारपचे पो पाय । िपपाताति। - पर्न रियाणं दुपिरे प्राहारे पकते सोमाहारे पोषाहारेपत्ति । तत्र सोमाहारा संस्खोपतो वपादिपु या पद्समवे सनबादवसम्पतइति , प्रोपा हारसु कावसिय तब प्रक्षेपाहारे पावो स्पसारव भरोरा दम्तयषिष विष्वंसगत स्थीस्पसोल्पाम्यो , अतरवाए पोमासे पक्रवाहार ताप गेगरतीत्यादि । भयेगारपर्य मामसारमाइति । असयामागा इत्यर्पः । प्रवासाइजमावाइति ॥ रसनेन्द्रियतः ५ प्रफासाइज्वमागाईति पामन्द्रियता बपरत्यादि । यत्पदं तदेवं दरपम् ॥ परेबपरेरितो अप्पावा मापावा तुमावा विसेसापियावप्ति । व्यत्तक । वित्योवापो येइदियाणदुमिहेशाहारेपणप्ते तजहा छोमाहारेयपस्केयाहारेय जेपोग्गलेलोमाहारप्ताएगिरहति तेसवेशप रिसेसिएथाहारेति जेपोग्गलेपरकेयाहारप्ताएगिरहति तेसिणपोग्गठाणशसखेझइनागधाहारति गणेगाइच णनागसहस्साइशृणासाइजामाणाई थफासाइजमाणाइ विझसमावजाइ एएसिणंनतेपोग्गलाणचणासाइज पुम पारे। पासप प्रासाति। विवा सवपाहारमही एपौधा उत्तर । मायमा । मौतम । बे दियार दुविहे पाहारे पपत्ते तमहा । दिसने म्पयन रखनवने रेपबारे पाहार पाना बारे-सामाहारेर पसेपारे । सोमाहार प्रपामार तिहासामागार निरे पापमयो वर्यादि पामने दिपे पट मन्त्रायेम शाम तेत्रमबारे प्रषंगारते करताप तिला प्रोपागारमेरिपे घमा भबपरणावया अंगरोगको मारि तथा वाहिर विध तपामे सून सो पतपय पाr-पामधे इत्यादि । पेपगम सामाहारपरे पोरे । तेसम्मेपपरिसेसिए पारिति । येसव अपरिवेस पार ममम्तमा भमरे । पानसेपसे हारताए मिलति । मधेपाहारते वयमाहार पुदगस प्रचपाहारपरें परे। तेसिर्प पोम्मसान असलेवाभाग पागाति । तर पुरमामते अपचय उपत्रयरूपेवरी असण्यातमोभागपते पाहारपहे । पचेगारचपभागमामाइ । धमेव धनी मागसास । भषा माजमापार । पनाम्बाबमामरसनेंद्रियेकरी पानादिवानही । पपासारबमावार । प्रसनमानस्म पद्रियेवरी मानीं। विसमावबर। वि भमप्रतेपामे। एएमियभने पावसाप प्रसारमा । पहारे भगवन् पायाने रसमेंद्रिये पनास्वाधमानाने। पपासारजमापापम । मयने - स्वस्पश्प गगसा प्रशासारश्वमारेत्यादि । ये प्रमास्त्राधमानाः षस रसमेन्द्रियविपया स्ते सोझा प्रस्पायमापाना मनम्तनागवत्तिम इत्यपा, में माया केवल स्पर्मनविपपा नन्तगुणाः रसनन्द्रिययिपयेन्या सशाशादिति त तेदियपरिदियाष मापात ठियत्ति । तद ५ मास म तोमात सकोसेर तादियान र पखासराबदियारपारिदियाण दम्मामा ॥ तया पाहारेपि मामात्वं तप दिपाण प्रते। जेपोग्ग माणाण शफासाइजमाणाणय फयरेशहितोप्यावा व जलाया तुलाया विसेसाहियावा गोयमा सश्त्योवा पोग्गलाशणासाइजामाणा फासाइझमाणाचणतगुणा वेइदियाणनतेपोग्गलाशाहारताएगिरहति तेण तेसिपोग्गलाकीसताएनुजोनुझोपरिणमति गोयमा जिलिदियफासिदियवेमायाएनुजोनुोपरिणमति । वेइदियाणन्ननेपुवाहारियापोग्गलापरिणयातहेव जाव चलियकम्मणिरेति । तेइदियचउरिदियाणणाणत्त न्द्रिय प्रपसमामानाने पवितमा। कबरे २ हिता पप्पापा । वप २ को पागवार । नापा। घबाहार । तुवावा। सरोषाहीय । रिमेमाहिया पा। रिपारिवणाय तिपय उत्तर । गावमा। गोतम । समयोपापोमा पपासाश्यमापा । सरयो पास पास के पन रमनेंद्रियने विषमछे पम्पसमान पारने पमतमागवीर तेमाटे तेहपी। प्रपासाबमारा पपतपुरा । पस्सम्यमान शेषप्त भयमविपयचे ते पमंतगुणौ रमनेंद्रिय विपन पासबको। ये दिगई भते पामक्षा । बसो गोवम पशेरे- ट्रिपत्रोप मगवन् । पार्माप्रते। पाहारतापगिपति । पाहारपर्ने भत्तपणे पो। तेवतेसिपोरसावोसत्ताए। है है पानी दियोवाने विसोतरे। सभामुखापरिपमति । बारबार परिपमेए प्रय । उत्तर ममतपोरे-गो ममा । रेगोतम ! विधिदिन पासिदिसवेमागाए । रमनेंद्रिये पहिये बिमाचावे अनेक प्रकार कामविभागपणे । भुयो २ परिपमति । पारणा रपरिरमे । दिवार मते । वाणिजोबने भगवम् । पुमा शारिमा योग्य सा परिषया तो। पूर्वपातापायचापाय परिष स्यादिक पूर्व कप माथे विममायो । पापरनिर्व वर्ष रिवरेंवि । बावत् परितकम निर्भर चयबरे । तेरियारिदिया भारत दिए । तर दिन रिद्रियन - A ते माहारसाए गगति इत्यात प्रारम्प तापत् मूकं वाय यावत् ॥ प्रवेगारवर मागसहस्साइ पायापाइजमावा इत्यादि । एक हीन्द्रि पमूगपेप्नया नाप्रापमापानीति अतिरिक्त मतो नानात्व एय मस्पत्वसूत्रे परिणामसूबष चतुरिन्द्रियसूत्रेपुप्त परिणामसूत्रे । पपिस दिप साय पापिदिपताए ॥ इत्यपिडमिति नामास्वमिति पश्चन्द्रिपतिपसूत्रे पठिन प्रधिप्रति बहस मतोमुत्त उकासेप तिन्त्रिपसिठवमार हिईए जाय शणेगाइचणनागसहस्साइ थ गाघाइजमाणाइ यणासाइजमाणाइ थफासाइजामाणाइ पिछ समायजति । एएसिणनतेपोग्गलाणशणाघाइजमाणाण श्रणासाउझमाणाण थफासाइजमाणाणयपुच्छा गोयमा सहयोयापोग्गलाय गाघाइजामाणा गासाइजामाणाचणतगुणा थफासाइजामाणाशणतगुणा ते इदियाणघाणेदिय जिप्लिदियफार्सिदिय वेमायप्ताए जुझोनुजोपरिणमति । घउरिदियाणचरिकदियघाणि मानात म्पिति ते रम बारे तामात बोमेपर दियाप वापदिपार ८ दिनपरिदिया मासापासारषिपषि नानाख चाय पपेमार पसभागमरम्बार । पावत् पने पतावता मा भामसास। पपाघारबमाचार । पनामायमान ते प्राद्रिये । पासाबमापार । पनासाथ मानते रमनेंद्रिये । पपासारसमापार । पसलमानते पगमेंहिये । विष्यसमावति । nिteविनागपामे। एएसिप भते । पाने भगवम् । पोग्ग चाप पनावारजमापाच । पमनाम पनानापमानान । प्रपामाइप्समाचाए । पनामापमानाने। अपामाइबमाबापय पुचा । प्रसम्ममामामे मा नामा पप गावर रस्यादिप्रय उत्तर। गारमा । हेमोतम । समस्यामा पागला पपाषाणमारा। सवयो बारा पुस पनामायमान प्रापेंद्रि ये। प्रपामारममा पागमा । पनामापान रसनेंद्रिये ते पतगुपी । पपासारखमाबापतगुणा । पसम्ममाम पुरस गद्रिये ते पमत मना। तेदिया तिरिट्रोने । वादिव । प्राट्रियने । मिमिदिर पासिदिय । विदिवे स्मथनेद्रिये । वैमायत्ताए । अनेकविध वाचविभागपणे । भु चोर परिसमति। बारबार परिणमे । परिरियार । परिदियने । रसिदिय । परिदिये। पारिदिय । माद्रिये । पिपिदिय । जिदिये गमता प्रवासाएज्यमारस्पादि। ये अनास्वाधमामाःवस रसनेन्द्रियविपया स्ते स्तोमा प्रस्पायमापाना मनम्तनागवार्तन इत्पया, ये स्वरपश्प मावाः वसं स्पपनविपया नन्त गुमाः रसनन्द्रियघिपपेन्यः सकाशादिति ॥ हदियपरिदियार मापप्त विपत्ति । तद । महोयचं तोमुइत उफोसेर तादिपार एयूल पम्बासराइरियावारिदियाम इम्मामा n तथा प्राहारेपि मामात्य तपय सादियाण प्रते। बेपोग्ग माणाण फासाइजमाणाणय कयरेशहितोश्प्यावा व जाररावा तुल्लाया विसेसाहियाना गोयमा सइत्योवा पोग्गठायणासाइजमाणा थफासाइजामाणाशणतगुणा वेइदियाणनतेपोग्गलाशाहारसाएगिरहति तेण तेसिपोम्गलाकीसप्ताएनुजोनुझोपरिणमति गोयमा जिग्निदियफासिदिययेमायाएनुमोनुझोपरिणमति वेइदियाणजनपुवाहारियापोग्गलापरिणयातहेव जाव चलियकम्मणिारेति । तेइदियचउरिदियाणणाणत्त द्रिय परसपमानाम पनिहुमा । पयरे २ हिता पप्पापा । वर २ को बागवार । पहनावा । प्रवासाय । तपाता। सरोधाय । बिममापिया पा। रिपारितोय रतिप्रश्न उत्तर । गावमा। गोतम ! सबबीवापोम्पमा पपासारखमापा । सरयो पास पास चे केवन रमनेंद्रिस्ने विषय ते अमममान पारने पनतभामपत्तीरे तेमाटे तेयो। पासाबमारा पपतगुपा । असम्मान मेवात म्पर्शनविषयके ते पमतगो रसनेंद्रिय विषय पासययो । बेर दिगा भते पोपता । सो गौवम पूरेटे-बेट्रियोष रेमगवन् । पुरापते । पाहारत्तागिरहति । पाहारपर्ने मतपणे पहे। तेवतेमिपामाबोसत्ताए। ते ते पुारय दिवसोवाने बिमोतरे। मुबाभुयोपरिचमति । बारबार परिषमेए प्रय। उत्तर भमतकार-गो बमा । रेयोतम । विभिदिन पासिंदिग्वेमागए । रसनेंद्रिये पदिय बिमाचावे अनेक प्रकार काचविभामपणें । भुवो २ परिपर्मति । पारणा रपरिरमे। वे दिवार मते येद्रिवोपने भगमम् । पुमा गरिमा पोपमा परिपया तरेम । पूर्वपाशाप्रमापूरन परिचमें रस्मादिक पूर्वक बाके तिममगायो । वावचरित्र व पिबति । पावत् रमितकम निरे चयबरे । तेरियपारिदिया भारत शिए । तर दिप पारिद्रियने . , मित्यादि पापमतराव स्वितौ नानार्य अवसेसति । स्पितेरवाशेप मापुषवर्ज मिस्पर्पा , प्रामुक्त माहारादिवस्तु मया - नागकुमारादाना तपा दृश्य पतरामा मागकुमारापान प्रायः समानधन्मत्वा, राम ष्यन्तरागा स्पिति जपम्येम दशवर्षसहसारि, उत्कचतु पल्पोपममिति । मोइसिपापीत्यादि पन्योतिफाया मपि स्थिते रवशपं तपेव, यपा-मामतुमारामा, तप न्योतिफापा स्पिति पम्पेम पस्पोपमातनाग मरम्पैर पस्योपम वपसनापिकमिति, नषर । उस्सासत्तिोवल मुद्धास सां न नामकुमारसमामा , वितु वक्ष्यमार सापाचाह नहोस मातपातस्सेत्यादि । पपा हिमनप्ति रानयन्य, तत्र यजपन्य मुर्तपपा नतदिया मुर्ता , यशोतप्टं तदष्टी नववेति पाहारोपि म्मणिरति घाणमतराणठिईएण्णाणत अयसेसजहाणागकुमाराण एवजोइसियाणवि णवर उस्सासोजहसे णमुजप्तपुऊप्तस्सउदयोसेणधिमुजतपुजत्तस्स थाहारोजहणदिवसपुऊतस्स उक्कोसेणविदियसपुऊत्तस्स से निवरेचरपरे । पापम राप किए गपत। बापयतरने पाणु बन्च पर्वा सव सरोष नितिने पिम नानावभेद पियो । पपसेस का पागमा राप। ये पातारादिव वसु जिम मानमरने मित्रवारमा मताने नागवमारने प्रारे समानधमर पने सिति जघन्य मंतरने पससा सय र एकपचापमनोहे । एममा वि। (मनाममारनो परेवातियो पिता हिति बपग्मे पगापमनो पाठमो माग उरसर एक पचापम मार्ग पर परिवार पासा पायो मुतत्तपुपुत्तम । पवसो विमेव उत्सास नपायेपषि मुरत पमा देवकीमागे नवाई न पा ममारे परिता पाय न त पाया। मासे पविमुक्षुतात्तम ! जानामयो पपि मुहत पृषो सासा स्मास हो उस्तोमुत्त पुत्र से पाठ तमाम मुात बाषा पसारा चार दिवसपुषु तप । पाहारसपि वपन्ध दिवस पृमत यो मांगे नवा पासचा तेवपन्चे रेगा तोनदिवस वापसी । बानि दिम पातम्स उत्सरापपि दिवस पृषलते पाठ तवा नबदिन पारवा । सेसंतरे । मेधावतो ति म पूठियोपरे । मारिणी मारिव्या पारिया । मानिनो मिति वाहनो पोषिक एतसे सामान्ये सर्व पायो तरम वषन्ययो पबपनोपम म IAL । ।। । इत्पेता खिति नबिस्वा । स्वासोति ॥ सनासो विमात्रपा वाष्पाति तया तिपक्पमन्त्रि पापा माराप्रति यदुत ॥ उकोसेख छछनप्त स्सलिम तहेवन्तरकृतिपल सन्यत ममुप्पसूत्रे यदुध मष्टमन्नत्तस्येति तवकर्यादिमिपुनकनरा नाश्रित्य समवसपमिति, ॥ वाणमातराण दियजिनिदियफासिदियसाए नुजोनुोपरिणमति । पचिदियतिरिकजोणियाणठिईनणिऊण ऊसासोवे मायाए थाहारोधणानोगणिक्षतिए शृणुसमइयविरहिन शानोगनिप्ति जहमेणअतोमुजप्त उत्कोसेण उन्नत्तस्स सेसजहाचारिदियाण जाव चलियफम्मणिरेंति एवमणुस्साणयि णयर शानोगणिक्षप्तिए जह रणनतोमुजस उक्ोसेणधठमनप्तस्स सोइदिय ५ येमायाएनुजोनुमोपरिणमति सेसतहेय जारचलियक पासिदिसताए । मसद्रिये । भुनामुखापरिरमवि । वार २ परिषमे । पपिदियतिरिक्तमोरिगा। पद्रिवतिर्यपगोमियने । भत्रिए । स्वि तिप्रमाणे ते पापपवोमुत्त प्रयासेर विपिपरिपोषमार पायोमिति कहोये । समाविमाए । उरलास पिमानावें मर्यादारहित कायो । पाहारोपवाभोवरिमत्तिए । पाहारते मन ते पनामोप अमापप परता । पपुसमरा पविररिया। पमुसमय प्रतिसमय तेसावत्वनापमानेपर्व विरा बिना ते निरतरपरे । भाभोपनिमत्तिपा। पाभोमे वारपणे करे ते पामोममित्तित कही। बासे अंतामुहछ । जघन्यधी तमुहचवी बोसेर छ मत्तथ। साचो परमात ते देवपुर उत्तरमा विर्यच पायी वापरी। मेसंबा परिदिया। येप कमाची बाबी ते भिम पारि द्विव बाम निम पांच । बावासिय मार्च विवरेति । माग जोवप्रदेशको रसितकमनो निबरें पावर। एवं मम्मावि । महोन तिचनोपर मनुबनेपनि पायो । पर पामोगरिमत्तिए । एतसा वियेत वापता पाहारमित्त परे। बाप अवामुात । ते अवन्ये चतहत । यो सेपप हम भत्तय पार दिन । खाटा पामनो एपरि देवस हारकर मनुषपायोनामा युगमने ये पश्मिा श्रीष बाम गोम सोग मुषा र परिषर्मति । माषा गार र परितम मरोर पुष्टपरे । मेसमोर - . पन्या दयमेवेति , उक्ता नारकादिधमवक्तश्यते यम्बारम्भपूविकोत पारग्मनिरूपमाया ॥ जीवागमते । किं पायारनेत्यादि । भारम्भी जीवोपपात उपाययमित्या मामाम्येनवा मवद्वारमदत्ति जय मामाम मारनम्से सामनावा स्थय मारनन्ते प्रत्यास्मारम्भा तथा परमारनन्ते परेच्या रम्भपताति परारमा स्तदुनय मात्मपररुप तदुपेनवा रनन्तइति तदुनयारमा पास्मपरोपयारग्भवजिता सस्थमारम्भा इतिममः भनोत्तर स्फुटमय मवर प्रस्ति धाम स्याष्यपत्वेन पात्वाम स्वादस्ति विद्यन्ते सतीत्यर्थः अपवा। प्रति पय म्पक्षो यदुत । रगयत्ति ॥ एकका एफे केचने त्यपः जोया प्रात्मारम्भा अपीत्यादा पपिप्सप्प उत्तरपदापेनया समुपय सपामारम्भावादिधमाशा मेकाम्यतामतिपादनार्थः निवामयतामति पादमापीया। पवन सासनेरेना यगम्तव्यं तपाहि-मदाधि दामारम्माः पदाधि परारम्भाः कदापि तदुनपारम्भा प्रतएव मो अनारमा शाहारुद्दसागतहानाणयछा 'एप्तोटाढतोणेरडयाणन्नतेशाहारठी जायदुस्कप्ताएनुमोनुोपरिणमति जीवा णनतफिश्शायारना परास्ना तदुनयारला शुणारत्ना गोयमा श्रत्येगइयाजीयाशायारनाविपरारनायितकुन पापते पाहासा । नारको भगवन् । पाहारना पीथे। जाव दुक्लत्ताए मुघा २ परिषति । यावत् दुपपणे पमातिपणे पार २ परि पमे परिला नारकोनो ममताही ते पारम पूर्वमा तेमाटे पारभनिरपप करेले । मोवाच मते कि पागारभा । जोषा प इसे वायासकार भवन ! पत्रोमा पात पापपपे परे ते पामारभी थे। परारभा। प्रमेरापाम बोपधात करावे ते परारभीरे। तदुमयरमा । पापपपपि पौर घातक परापामेपपि परावे ते तनुभयारभो । अपारंभा । जीवनाघात नवरे न परावे न अनुमाः ते पवारमोरे प्रतिपय उत्तर । गोवमा । गौतम । पाय गया वोगा पानारभादि । कोइएक जीव पाताने पर्व पामारभी पपि प्रापपपन राव-पोने जीवनी घातकर के। परारंभावि। पपरभीपाप जीवपात कराये। तदुभारभावि।सदुभयारभीपनि पापपपे जोवपातपरे पनेरापासपगि नोवधात परावे । गा भवारभा। प विपनारभो नसो। परवेगायानीमा । किरएक बोत्र । शापायारभा। नपामारभी पाप रपे जोपना घातनकरे । वापरारभा। नी परार स्मास परम् विपित्तएव तपाषा पाहारोस्पादि मारियागंठिनापियवायरियत्ति । भौपिको सामान्या सापपत्योपमादिया, अपरिहारसामरी पमान्ता, तत्र अपन्या मौषम माभित्यो रुटा चामुत्तरविमामानीति , पासप्रमावंतु अपम्प नपन्यस्थितिश्चदेवा नाप्रित्ये सरतु उत्कृष्ठत्यिति का मामित्येत्यर्प पत्रगाथा-बस्समइसागराइ तस्सठिातहिरिपरि सासोदेवाए वाससहस्सा पादारोति ॥ १॥ तदेतायता - प्रन्येनोचा पूर्षिक्षतिदगत्तपता इयन केपुबित् सूत्रपुस्तये ॥ एठिामारोत्पादिमा । प्रतिदेशवास्पेन दर्शिता मानेतो विवरण सतचेय बेमाणियाणठिईनाणियछातहिया उस्सासोजहसेणमुजप्तपुजप्तस्स उक्कोसेणतेप्तीसाएपरकाण था हारोधानोगणिप्ति जहणदिवसपुज्ञप्तस्स उक्कोसेणतेप्तीसाएवाससहस्साणसेसतचेर जावणिरेति ए वठितीयाहारोयत्नाणियहो ठितीजहाठितीपदेतहानाणिया सधजीयाण थाहारोयजहापलपणाएपढमे पादित जवाहयो तेभोस मामरापम पर्वत ते चवच सौवम पायो भनट पनुत्तरपिमान पायाने पिया । उस्मासालाप मुक्तपातरम । ७ सक्त पण ते वपन्ध सौधमनीमिति पाययोने पायो। समोसेर तेत्तीसारपसाप । सरसटी तेलोसपाच ते उरष्टम्पिति पत्त र देव पायोने बाचवा । पासारापामामनिवत्तिपो जाए दिवसातस्म । इम पाहारपनि जोपर्ता नित्तित बघग्ये दिषय पृषी होय ते वाम्म मिति पायो पापको। बाब तेत्तोसाएाममामाघ । उत्पयो तेलोसमासप ए उस्मार स्थितिपायो पापो रहा गाया अमाजासाम ur fitतमातापिनेति । सामोरंग पासमाधिपाहारोति ।१ । सेमत चेष । गपसप विमल नरियो । वापपिजाति यावत् पति तबम निवर । परित्तो पाहाराव मारियथा । इम मिति पासारपनि कापयो । हितोमास्तिोपदे तहा मापियवा । बिति विम सितिपद त्रिम पनामानिसमातिम भाव । सबबोपाप । सपोरने । पाहारो वा पपा पाएपठमे पापपरसए ता भारेसमो । पार विम पवमानामे पीया उपांगनेविय परि पाहारने गरी विमानाचे तिम सपरि मानो। पचोभारत्तो । ४ नमो .

यन्पा दयमयति , Tता नारकादिधमवक्तप्यते यम्भारम्भपूर्षियोति प्रारम्भमिरूपसापार ॥ वायमत ! किं पायारनेत्यादि। प्रारम्मी जीवोपपात उपदयगामित्या मामाग्पेनवा मदारप्रति सर पाामान मारनम्से मामनावा स्त्रय मारनम्त इत्यामारम्भा, सपा परमारनम्ते परेगधा रम्मपन्तीति परारम्भा सानप मास्मपररूप तदुमपेमवा रनन्तइति तदुनयारम्मा पास्मपरोपयारम्भवजिता स्त्वनारम्मा इतिममा प्रयोत्तर रफदमव नवरं प्रति सदस्याप्ययस्वेन पात्याय स्यादति विद्यन्ते उम्तोत्यर्षः अपवा। प्रति प्रय म्पती यदुत ॥ एगपत्ति॥ एकका एफे केचने त्यपः जीया पात्लारम्भा अपीत्यादा वपिशप्द उत्तरपदापेकपा समुघय सपास्मारम्मत्वादिधर्मासा मेकाप्रयताप्रतिपादनापी निनामयताप्रति पादमापीया। मापस्वम्न कालमरेना पगन्तव्य तपादि-पदाधि दारमारम्मा पदाचि परारम्भाः कदाचितवुनपारमा अतएव नो भनारम्मा शाहारुद्दसण्तहानाणयहो 'एप्ताथाढतोणेरडयाणनतेशाहारठी जायदुरकताएनुजोनुजोपरिणमति जीवा जनतकिश्शायारना परारना तदुनयारना शणारना गोयमा शत्येगइयाजीयाशायारनाविपरारनायितदुन्न बारायानमते पाहायो । नारको भगवन् ! पाहारना पी। भाप सत्ताए मुजा र परिपतयावत् दुपपणे प्रातिपपे वार २ परि नमे परिमा नारकोनो ममतायो ते पारम पूर्वको मारे भारभनिरूपा परे । पोवार मते शिपायारमा । बोवा से वाक्यासंधारे | भमन् ! पत्रीमा पात पापर करे ते पामारभी । परारमा। पनेरापाम बोधातबारावे ते परारमी। तभयारभा । पापरपपि वीर घातको परापामेपषि फगते तदुभयाग्भो।पमारंभा । जीवनाघात नपरे न करावे न अनुमाः ते पपारमोशे इतिपय उत्तर । गोममा । गौतम । पत्ये गाया भोका पायारभापि । केहएकोष पोताने पर्व प्रामारभो पगिछ पापम्पेन सपनीने वोपमो पातवर थे। परारंभावि। पसरमापनि बोवयात करावे । तदुभयारभावि। तदुभवारभीपपिवे पापापे घोरपासको धमेरापासपरि घोषवात करावे।ा प्रचारभा। प विपनारमोनो। प्राविमाशाषीषा।पर एक पोष । पापागारभा। मनी पाप्मारभी पापमपे जोकना घातनवरे । पीपरारभा । नाही परार - स्मास वषरे विपितएव , तपाषाहापामारोत्यादि । मारियाठिनापियवाशिपत्ति । मौधिको सामान्या सापपल्पोपमादिका, पयसिंशरसागरी पमाम्ता तापम्पा सोपम माभित्यो लटा पानुत्तरविमानानीति , उशासप्रमागतु बपम्य जपम्पस्पितिदेवा मामित्ये तरतु उराष्टस्पिति का नाप्रित्येस्पर्प, पानापा-बसगासागराइ तस्सठिातातिपक्सपि । वसासोदेवाय धामसहस्सपि पाहारोप्ति ॥ १॥ तदेतायता । पन्येमोचा बर्षिपतिगत्तमता इयच के मित् सूपपुस्तकेयु ॥ एठिमाहारोत्यादिना । प्रतिदेशयामेन दर्शिता साचेतो विवरण सतचेय घेमाणियाणठिईनाणियबाहिया उस्सासोजहसेणमुजप्तपुझतस्स उक्कोसेणतेप्तीसाएपस्काण शा हारोधानोगणिप्ति जहणणदिवसपुज्ञप्तस्स उक्कोसेणतेतीसाएवाससहस्साणसेसतचेव जावणिजरेति ए वठितीचाहारोयत्नाणियो ठितीजहाठितीपटेतहाजाणियछा सहजीयाण शाहारोयजहापलरणाएपढमे पादियो तेरोस मामरापम पर्वत ते जाम मोपमपायो प्रावट पातररिमान पायाने मांगवा । सम्पासावाणेष मुरतपहुक्तपम । उ मत पण ते पपस मौषममोम्पिति पाययोने पानयो। उगोसेप तेत्तोसारपसाच । उस्सटी तेपोमपच ते सावस्थिति पमुक्त र देव पाययोगे पिला । पाहारापामामविपत्तिपो भाषेप दिवसातम्म । रम पाहारपरिव चांपा निवत्तित नाम्ये दिवस पृषीय ते परम्म मिति पायो वषियो । बासे तेत्तीसाण्याससाम्पाच । उसको तेनोससहस्राप ए सत्वर स्मितिपायी पागधी गाथा अपवासाग पा तिसतत्तिपरिपता चसामोदेगा पाममाधिपातारोति।। सेसतष । पेषमय तिमन बापा । नापपिरति यावत् पनि तपम निरे । एपरित्तो पाहारोग मापियथा । म मिति पाहारपरि पियो । हितोमहातोपदे तहा भापियवा । बिति विम सिमतिपद विम पवमामालिसमातिम माम् । सववोपराई । सर्वोक्ने । पाशारोय पहा पाएपठमे पाहापासए तहा मायनो । भावार भिम पवयरानामे पीया उपासनेरि पनि पाहारने मे बिमामा तिम सोपवि पामो । एत्तोमारतो । सांसगे भाकी बाबा - i तपार । सुन मोर्गपमुपति मुनयोगउपयुक्ततपा प्रत्युपत्यादिकरसं मानयोगस्त तदेषानुपयुसतया भाष-पुतयोमाउकार तेठवारूषणस्सा तमा । पमिसरमापमत्तो यसइंपिविरामोद ॥ १॥ तया- महोपमत्तलोगो समपस्सउहोहमारनोति । अतः शुनानौ योगावास्मारनादि तदुयिहा पणता तजहा पमप्तसजयाय शुपमतमजयाय तत्यणजेतेशपमतसजया तेणणोथायारना णोप रारना जाव शुणारना । तस्यणजेतेपमतसजया तेसुहजोगपमुच्च णोश्शायारना णोपरारना जावश्छणारजा। शसुहजोगपकुच्च शायारनाविजायणोधणारना तत्यण जेते सजया ते थविरति पञ्च थायारनायि पपगा। तिता प्रमतरेवाचा, अपच तेमाले थे सभार गति सच तोनेविषे रमावोव । तेदुविधा प त । तेषेप्रकारे भेद समा सेमोरेसनमा प पम नयाव । एकजीव मयता करता संयमो योषाजीव चारिप रहित पहिसे गुपठारे यत्ते ते । तवर्ष तेसबया तेदुविहा प त । तिहां सवतो पम यती मरिजे मयतो चारित्रवरे ते प्रकारे कमा तेकोरे-पमत्तमवभाय । प्रमत्तसंपत बामपठापनिविष यतं ते । अपमत्तसनमाय । पप्रमत्त मयत प्रमाठ रहित साधु सातमा पारिई मबारनिविवे वत्ते । तव्यपोते पपमत्तसवरा । तिहां ममत्त पममत्तथं माहेलेते प्रममत्तसयमो सम मारिगवठा यत्ते सेमाधु । तेयोपामारभा । ते साधु नही पामारभो पोते पारंभ नवरे प्रममाटो पाया । को परारंभा । ते परारंभी पपि नहीं भार पपारमा । पावत् तदभयारमोपपि मागे एतावता पनारभोई । तत्ववेतेपमत्तसवरा। ते दिपधारे में प्रमत्तसमती ते शम पभ पियोग गोय farti तमुवागरम । ते परिवार प्रादि सामधानप र ते अंगीकार करोगे । चापागारमा पीपरारमा वावधारमा । नको पामार भी नहीं परारभी नी तदभगरंभी सम पारभररित एतापता पधारभोछे । पसहवामपहुए पायारंमावि चाव पापारमा । पशिनार पा टि उपशाप रहित पसावधान पवार या-पुठोपाजवाए तेषाजपपारतसाप । परिचापमत्तो इपई पिविरामपाहीर ।। । तवा समो पमारागा ममममममारपारभाति । पायो पामारभो छ परारभो हे तदुनयारभो हे पनि पसरभोगनी एतचे पम पम्म योग को पारंभ - निमाप्रयस्व त्वेष एके जीवा असपताइस्पर्प पास्मारम्मावापरारभावत्यादि प्रयकवनायत्वात् जीयाना नेद मसन्माषयमा ॥ सोगपति । पथ मेन कारणेनत्पर्य है दुविधापसत्तति मपा वाम्मैय केवसिनि रमेन समससवविदा मतानेदमाह मतनेदेतु विरोधिषपनतया सेपा मसत्य वचनतापत्ति पाटलिपुत्रस्वरपानिपायसविरुधवनपुरुषकदम्बावदिति प्रमातसयतस्पहिशुमो भुमय योग स्पा स्सयतत्वात् ममादपरस्यारेत्य यारनाधि गोश्चगारला शत्येगइयाजीवा णोछायारना णोपरारना णोतदुनयारना शणारत्ना । सेकेणठण जतेएषयुबह छत्येगझ्याजीवाश्शायारनावि एघपफिउच्चारेयछ गोयमा जीयादुविहा पमता तजहा ससार समावरणगाय शससारसमायणगाय तस्यणजेतेष्टससारसमायणगाय तेणसिझा सिसाणणोशायारनाजाय शुणारना । तस्यणजेतेससारसमावणगा तेदुविहा पणता तजहा सजयायशसजयाय । तत्यणजेतेसजया भो पनरापाम बोरघात नवराय। पातभयारमा। नहीं तदुभवारमो पापकोषधात नकरे पमेरापासपपि नकरापे । पनारमा । एतम्मामाठे पना रभो । सेवाभते एवषया । गोतम पीछे सेमे पाममवन् ! इमबापू। परवेगहमागोवा पायारभाषि। मेहसाएन बोवपायो पामारंभी पणि पावाने प्रय पारमबरे। पवपरितवारेसम्म । इससव पूर्ववमा तिमाहिर बार इमप्रय भागसपदि सवापि का उत्तर । गोयमा । गौतम! मी गापिशापपत्ता तथा । बोर वेगवारमा मा में पवना पच वेपोयें एतपे समस्त तोवारमा मतने विपे मदनी मम तेकोरे-समारममा अपमान । एनबीष देव । मनुब र तिर्यच नाएको ४ प पारिमतिने विधे ससरपबारे तेसमारसमापथपाहिये । प्रससारसमाषणमाय । मोजा मोर पारितिस मसावे एक मतियया त पममारसमापन पिये तरस पते पससारममारपमा । तिमि मायाबारे चोय पारि मति रूप मसार विहां पनोरार भोममोनेसमन बमचमरूप मानम पार्या। रविता पनोभे२ मिा परामिषो पायारमा नाम प्रारमा। तेमिा पापारभो नी पतने परारमी पर मरी हरमणामी पपि नसी एतापता पिड पवा पारम कितने - नयमनार - मपतामयतममताप्रमत्तनेदा पूर्वोत्ताः सन्ति तत सो यथानीवा सया ध्येतव्या विन्तु ससारसमापवा इतरेप से न वाच्या प्रवत्तित्या देय तेपा मित्येतदयाह मिहविरहिएत्यादि । व्यन्तरारयो यथा मारकास्तपा ध्येया प्रसयतत्वसापादिति, पात्मारन्मकत्वादिनि धर्म जीवा निमपिता सेष सतेइया पालेश्पाय भवतीति , सम्लेश्या ता सैरेव निरुपयवाद । सलेमावाठशियति लेश्या रुमादिद्रव्यसानिध्यवनितो जीवपरिणामो पदाह- कामादिद्रष्यसाचिव्या परिवामीयमात्मम । साटिपस्पेवतप्राय लेश्यायदः प्रपुन्यते ॥१५ तत्र सोइया सेश्यावतो जीवाः .महाडशियति ॥ यपा नारकादिविपरवलिता जीवाप्रपीता जीवार मते ! कि भापारम्भा परारम्भेत्यादिना ॥ दरकमेन तपा सप्तेश्या जीपा पपि याप्पा, सस्लेश्पामा भसंसारसमापवस्वस्या सन्मवेमा संसारसमाप्पने त्यादिविशेषतवन्जितानां शपासा सयतादिविशेषताना तेवपि पुन्यमानत्वा ताप पाठकमः । मलेसार प्रसे ! वीवा सि पायारमत्यादि म तदेव सब मवर जीवस्पाने सतेइयाइति वाध्यमिति, भयमेदो याणयरसिझधिरहितानायझा वाणमतराजावयेमाणिया जहाणेरड्या सलेस्साजहानहिया किराहलेसस्स नीलठेसस्स काउलेसस्स जहाठहियाजीवा णयरपमप्तश्पमत्ताणनाणियहा तेउलेसस्सपम्हलेसस्ससुक्कलेस पारा । कारप गावाम एभाव व विरतिवत ते पपारमा हुवे पमे च प्रविरतो से प्रमारभीनको म । एवंचाच पधिदिव तिरिवाजोपिया म यापत् गर्दै प्रमररमार प्रादिदेर पदिय तियच मामिक ग वापयो प्रविरति पपानी पामारभी परारभो तदुभयारमी होव पपि प्रचारभी मोरमकागे। मधुम्मा वहावोपा पर सियविरपिया भाषेसचा । मनुषनेपिप समतासयत प्रमत्ताप्रमत्त ए चारभेर पूर्व कमाछे-तेमाटे बिमसग मुवीधावीपमा तिममनुपनारमा परेमागे एतलाविशेष मिहपारभागे रहित तेमाटे मिहविना कावा । वापमतरा नाय पेमापिया बहार या मम्मा का पोरिया विमसम्म मोमलेसम्म । वानबारपारिदो यावत् वैमानित तिम पापा विम गारपोषमा तिमव गांषवा एस प पपिरतिपरे साधम्परे तमाटे पामारभपवरो पीवकमा तिके सतपो भयौवे तमाटे सगो बारे-शासहित तेविमपोधे सामाग्येवरी कारणमिति । अविरापमुपति । यम्मावो यय प्यमयतानां सूत्मैकेन्द्रिपादीमा मात्मारम्भकादिस्य मातादति तथा प्पविरति म्प्रती त्येत दस्तितेपा नहि ते ततो मिवृत्ता प्रतो मयताना मविरति सप्र कारबमिति निवृत्तामातु कपम्मि दामाद्यारम्मकत्ये प्यमारम्भकत्वं पदार- जा जयानस्सन्नवे विराहणामुत्तवितिसमम्मस्म । साहोइरिग्जरपसा प्रश्नत्यविसोरिजुत्तस्मत्ति ॥ १५ मेतण्ठेगति ५ अप तन कारखेनेत्यय , प्रय प्रास्मारमात्वा दित्वमव मारकादि चतुर्विंशतिदाये निरूपयन्नाह ॥ नेहपामित्यादि । प्यत्त अवर ॥ ममुस्सेत्यादी । अयमपः मनुष्येषु जाय णोचणारना सेतेणठेणगोयमा एषयुच्चइ थस्येगइयाजीवा जाय थणारना । णेरडयाणनतेकिशयी रना परारला तदुनयारला शणारला गोयमा गैरइया थायारनाविजावणोशणारना सेकेणठणनतएवयु छह गोयमा विरतिपच्च सेतेणठेमजावणोचणारना एयजावपचिदियतिरिकजोणिया मणुस्साजहाजी नां वारपवायवा । तवा घेते पसबमाते पपिरति पाप । विका पर्व बना वे बेपचमहि पसयतो ते पविगति पायोने एवापता पविरतो ते पागारमापि वापरा पचारमा । पामारमोरे गाववादे तदुमवारमो के पवि पगारभी नहीं । सेतेपोष। ते फारसे करो। गायमा। गौतम ! एगा। प्रभारेगा। परवेमामापोवा वाव पवारमा । केतसाएष मोव प्रामारभी पादिव यावत् गदे पारभरहिवरे एतमातार बावा रागार भी विपापारमा परारभा तदभवारमा पसारमा । सिपामारभवादि पन तेहोस नारवादि पाउयोसदा करछे-मारको भगवन् । ४ संपामाने पर्म पाामपापपरे पापा परारभौधे पारकबाम्ते सावधवारपरे बेखने प्रवे पापवायकरे पथवा प्रचारभोछे पारभरहित तिपय भमा कोरे-भाममा। मातम । रहमा पायारभावि नाव वापचारमा । नारचो पाभापति पारभवतः म सापत् परारंभीपनि तभ वारभीपनि पनि पारमरहित नीव एतावता अपारभो नी । मेवोपभते एगबुगर । तेजिमे पच भिगमन् । रमन इतिपत्र भगवतको मारमा । गाव मान मिरतिमाने ते पविती परिव पविरति पनामी पामाएभो पानि नोने पर पनारमीनरी नेताबण-भीम नकल चिठी नकउ चिठी २ श्रीमग्मिनपरप्रसारतपनि प्रकाशितपमरपु श्री ५ रापपम पतिसिश्यहादुरपु मषिमपमावदनम् । भागे, मेंने सुमारे पाप को एसो रबारबि तालिमों जैनागम की पुसमें मम ठोका और नापाटीबा सहित पांचरसो कापीब और मापु प्रायकों के पठन पाठमरे सिप पर सौ स्थानमें पुस्तकालय स्थापित तो पह पति पानंदका पाताहै, परतु जिम महरक्षयों पा दम्परेक पुस्तक समेकरचाहो उम सोगों के निमित्तनी पदि भाप की पाया तो पेषम व पास्ते पाचौ वापी जैन व सुसाइटी की पार से प्री पपना सी बार्ये या पुलों में अजीमगज से प्रकाश पढ़गा भये नाममा, सवत् । ११ । मि० । ०। मु०।११ २० जैन एक सुसापटी पार मुरादाबार पायसम्पादन पत्रीमगन प्रसिद्ध ग्रीषिविषविद्यायिधारतत्परेपु म युफ सुसााटीकार्यसम्पादयम महाभयेषु प्रतिनिवेदनम् । खो पि पत्र पापका दृष्य देके परीदर्भयाले सोपी के लिये सुसापटी की भोर सतासिसो मागम की पाचसो पुस्तक पका लेमे की पापा के विपप में पाया सो मैं स्वीकार फरसा बिपापम युप समााटी की तरफ से, पागम पी मस्पक पाच २ सौ पुस्तकें बेचने के पास अपया सवें, परतु पाचसौ से अधिक पपमपी भाचा में नहीं दता, यदि चोर को पषामा चा तो उचित रेमि पासे मुण से प्राचा ससेवे पोधिइन ग्रन्यों पर रवस्टरी कुरी, भये शुनम् । सवत् । १३३ । मि० । ०।०। १३ ० रायपमपतिसिह यहादुर शहर मुरसीदाबाद खजीमगम - दगाक कप्पादिप्सेपानात् तदम्पेपद् , तदेव मेते सप्त, तत्र मिराहसेसस्सेत्यादि । कमसेश्यस मलितेश्यस्य पापोतसेपस्पच जीवराशे पक्षको पपौषिमनीवरगाव सपा घेतव्यः प्रमताप्रमचषिऐपयवान, कमादिपुरि प्रप्रशस्तनावसेश्याम संयतत्वं मास्ति यमो प्यते ॥ पुचपलियनठपु गश्वपीएससाएत्ति । तद् द्रव्यसेवया प्रतीस्पेति मन्तव्य , पत सामु प्रमत्तायनाय स्तन सूत्रोचारणमेघ । किपालेमार नते | नीवा कि पाया रना ? ४ मोयमा पापारमावि चाव मो प्रचारमा से साठे मते ! एयघुघर ? मोयमा प्राविर पाच ॥ एवं मीलफापोसलेइयादगमका व पीति सपा तेजोलेश्पाद विराधे दरख्या यौपिनाजीवा तपावाच्या , नयर तप सिवा नवायाः सिडाना मोश्यस्या, सेव ॥ तेउलेमाण मते ! जीवा किं पायारमा ? : पोयमा अस्पेनल्या पायारमाधि बाप मोप्रसारमा परपेगड्या नो पसारमा प्रत्पगमा मो पायारमा पाव अपारमा से क्षेबठेर मते । एवषुप ? मोपमा दुविहा तेउलेस्सा पनता तमहा संत्रयाय असमपारस्यादि । नवरेतनूत मारम्मनिरूप्य नवानाव हेतुभूत धानादिपम्मकदम्यक विरूपपमा ५ प्रविर इत्यादि । व्यत्त प्रवर बाप प्रवे यतमामजन्ममि यवर्सते मतु प्रवागतरे सदेपनविष्य मानुपाठा ममतावसेया तेन चिमहलविण खान मुत । परनविरत्ति । परनवे वर्तमामानन्तरनायि न्यनुगामितया य इत्तते सस्पारमवि स्स जहाचहियाजीया णवरसिहाणनाणियहा इहनविएनतेणाणे परनयिएणाणे तदुनयनविएणाणे गोयमा गमा सूपतिमापको पवेगो मोपोगोने पापातसेयोने। वा पारियायोगा परं पमत्त अपमत्ताप माम्पियमा । बिम पोधिक ममुपये बोनस मा तिम बांबवा पबि एतसा विशेष प्रमत्त अप्रमत्त वर्णितवावा इसमादि तीन पप्रशस्तभाव सेमाने रिपे समतप नयो भने के का पुषपरिप पायुष पराउटेयो इति । ते द्रपरमा पायो बा । तेडोमध्य पनेसम्म सुखसम्म । तेडगोने पनवेशोने सागोने। पापानियात्रीवा । जिम पोषिक पामाबी बोव बमा तिमकाया । बयर सिहाचमापियवा । एतसोवियप सिह मकामा सिहग्यारपितो तेमाटे । भनिएभतेश - परमविएगा। ममतमूत पारम पहीने भवभागोतुभूत प्रामादिमोह-पतमानमरनेपि भगवन्! बानीय तापमान महिने Yas नकल चिठी २ नफल चिठी श्रीमग्जिनवरम सादसम्वन्दुखिमकामिवषमरवेप श्री ५ रायपम पतिसिहयहादुरेपु सविनयमाव दमम् । भाने में मे सुमारे पाप को ऐसी सबारे कि तासिसों जैनागम की पुत मस दोबा और नापाटीया सहित पाप सो कापी व और मापु प्रापों के पठन पाठन के सिय पांच सौ स्थानमें पुस्तकासप स्थापित हों मो याति प्रानदी पात परतु बिन महाशयीं का द्रव्य दप पुलक सने की चाहो उन सोगों के निमित्त भी यदि पापको पाधा तो पंचम वासो पाचौ वापी बन चुक सुसाइटी भार सनी पपवा सी जावें या पुसत में अजीमनब से प्रपाश बागा भये सुनमा सवत् । १३३ । मि० । २० । शु० । ११ द० जैन दुक सुसाइटी पार मुरसादराबाद पायसम्पादक अमीममय सबसिद्ध योविविधविद्याविचारतत्परेपु बैन कुछ सुसाइटीकार्यसम्पादक महाशयेषु मतिमिवेदनम् । वो मि पर भापका दृष्य देके खरीदनेवाले सोमों के लिये मुसापटी की पोर से पैंतासिनों बेमागम की पाचसी पुसतफें छपवा लेने की पाचा के विषय में पाया सो में स्वीकार परतामिभाप जैन धुम सुमारटी की तरफ से, पायम की प्रत्यक्ष पाच २ सौ पुसाके यचने के वाले छपवा सवे परतु पांचसौ से अधिक अपनही पात्रा में महत दता यदि और बोर बपवाना चाहे तो उचित है कि पहले मुम से प्राचा ससेवे क्योंषि बम प्रन्यों पर रजस्टरी उर। भने शुभम् । सवत् । १३ । मि०।०।१०।१२ द० रापपमपतिसिह वहादुर भार मुरसीदामाद पत्रीमगम ।

वाचनाचार्यश्रीरामचन्द्र गिणिवरगुरुभ्यो नमा , क माहोस्सित् । तदुनपनयिरति तदुमपलपपो रिह परल नरपो जवयो यदनुगामितया पत्तते ततदुमपनविक इदमेव नपारमविका नियत इति परतरनयेपि पदमुपातितत्यान, प्रयव्यतिरित्तावन परतरभवस्यापि परमवत्वात् प्रखतानिर्देश येह सर्वत्र प्रारुतस्वादिति , ममनिष चनमपि मुगम नबर पहाविएवित्ति । नवितं यदिशा पीतं नानन्तरमवे ऽनुयाति , पारनधिक पदमन्तरनवे ऽमुपाति , तदुप्नपनर्विक सु य दिहापीत म्परनवे परतरनवेषानुवत्तसहति । दसरपि एवमेवत्ति ॥ दशन मिह सम्पक्ष मवसेय मोपमागोपिचारात्, यदाह- सम्पादयमचान पारिवाशिमोधमाग यत्र जानवसमपोरेव पापस्सा तब वक्षनं सामान्याववोधरूप मवसेयमिति । एवमेवेप्ति। धानव रमममिर्वचनाम्या समवसेयं पारिषमूत्र, मिर्यचने विश्नप, तपाहि, पारिश मेहमाविकमेव महि चारित्रवा निस् भूस्वा तेनैव पारिख पुम यारिवी भवति यामन्त्रीवतावपि कत्वा तस्प विप चारित्रिक समारे सर्वषिरतस्य देशविरतस्पच देवेऽधोत्पादा, तरच विरते रत्परत मनावा न्मोत्तगतावपि चारिखसम्मवानावा इहनयिएयिणाणे परलविएविणाणे तदुनवनयिएविणाणेय । दसणपिएवामेव । इहनविएनतेचरिते परनवि एचरित्ते गोयमा इहनविएचरिते णोपरनविएपरित्ते णोतठुनयनविएचरित्ते । एयतयेसजमे । शसघुझण मान पनतर भये बेचान ते पापविनामकाहीये । तदुभवविएषाचे। पमवपरभव बेजनेविषे जान ते तनुभवमवियनानवहोमे ? उत्तर । गोयमा गौतम। मवे मसं परभवे माये नवाय तेरामविकभानपरिया परभरिएविवार। मनतरभवे घामहोय तेपषि मानतीय । तदुभवविएविपाये ना भो तेपरभवे परतरपनि धनात परि मानावे । यसपपिण्वामी विमचानक तिम गनपरि वापय । रामविएभतेच रिसे। भ विबभमपन् पारिवहाय पथमा । परभपिएचरित । परमविध पारिवाय तिप्रय उत्तर । गायमा । गोतम पहभविवाहोत चारिष चाय या वनोपयभिपापको। पापरमबिएचरित। नपरभवित चारिपहाय चारिषयतमरो वनो परमव तेशाव पारितवतमहोय । पातदुभयभपिए च रिक्त पयतममम । मको तदुभयभविष पारिवार एचारिपना ते तपसपम भेदमो प्रकारचे तेमाटे म तप मोन सयमपनि पापवो । पसी - वाचनाचार्यश्रीरामचन्द्र गणिवरगुरुभ्यो नमा मे पाडोम्बित् ॥ तदुनपनयित्ति । तमपरपयो रिह परलजयपो प्रवयो यदनुमामितया पत्तते तमदुमपनवि पदव नपारमविका हियत इति परतरनवेपि यदमुपातितत्यान, हा प्रयव्यतिरिचस्वेन परतरमवस्यापि परमवत्वात् प्रस्थतानिर्देदा ये सर्वत्र प्राक्तस्वादिति , प्रग्ननिय बममपि मुगम नवरंग दालविरवित्ति ॥ रहनविय पदिका पीतं नानन्तरमये नुयाति , पारनविक यदमन्तरनवे ऽनुयाति, तवुनयनविकतु य दिशापीत म्परनवे परसरनवेषानुवरातहति ॥ दसरपि एवमेवत्ति ॥ वशन मिह सम्पक मवसेप मोधमार्गाधिकारात्, यदा- सम्यग्ददामज्ञान परिचाचि मोक्षमाग पत्र वामदशनयोरेय पारस्पा तब दर्शन सामान्यावयोधरुप मबसेयमिति एवमेधेशि घानव स्ममनिवचनाच्या समवसेय चारित्रमूग मिवषमे विशय सपाहि पारित्र मैहमविवमेव मनि शरिरवा निह भूत्वा तेनैव चारिष पुम पारित्री प्रवति यावज्जोवतापपि बत्वा तस्प किन्ध पारिदिए ससारे सर्वविरतस्य देशविरतस्पच देवेधेषोत्पादा, तप विरते रत्पम्त मन्नावा न्मोचनप्तावपि धारिप्रसम्मवानावा इहनविएयिणाणे परलविएविणाणे तदुनवनयिएविणाणेय । दसणपिएवामेय । इहनविएनतेचरिते परनवि एपरित्ते गोयमा इहनधिएचरिते णोपरनविएपरित्ते णोतदुनयनविएपरित्ते । एयतयेसजमे । श्रसवुझण मान पनतर भवे नाम है पारभविषाचामबहाये । तदुभयभविएगा। रपमवपरभव येजनेपिपे भान ते तदुभवमषिमन्नानकजीये। उत्तर । गोयमा गोतमा मरे भरलं परमये साव नवाय रामविक नामपवित्राय। परभविपविधाये। वेपमतम्भषे प्रामहोय तेपनि चानतीय । तदुभयमविएविषाणे न भय तेपरभये परतरभरेपनि अमात्त तेपनि मानवे । दसपपिण्यामय । घिमन्नानकाय तिम दगनपगि जान । पामविएभतेचरिते। राम शिव भगवन् । पारिवसाय प्राया । परभपिएचरिते। परमविक पारिपाय तिप्रश्न उत्तर | गावमा । हगोतम। पहभगिकीज चारिप हाय या | वनोपमधिपायो। पापरमपिएचरिसे। महींपरभवित पारिवहाव पारिषवतमरो वसो परभषे तेशाम पारिपवतमहाय । पातदुमयभपिए प रिले एपतयेमबमे । महो तदुभयभविष पारिषदाय एचारिपना ते तपसबम भेट्यो प्रबार तेमाटे म तप इमहोन सयमपनि गरियो । पसी पारिति धर्मपापा नुठीपते मोदेष तस्मा रिवि सरस्वात् पावभीषमिति प्रतिघासमा सदन्यस्या चापागात् ' अनुष्ठानरूपत्याच पा रिजस्म शरीरामानेच तहमोगा दतएकोप्यते ॥ मिो मोपरितो नोपपरित्ती n मोअचरित्रोतिष अविरते रनावादिति, प्रमन्तर बारिणमुक्त न्त रविमा तयः संयमनदादिति तपोनिसमवायातिदेशमाह सवतसबमेति प्रमनिय बनायो पारिवयतप संयमी घायो पारिवठपत्या | सपोरिति ननु सम्मपि चानादेनोगतत्वे दतएव परितप्प तस्यै प्रमोपातुत्वा प्रदा-प्रठेगपरिसाठ सुपरदमभंगडेयय ॥ सिझतिपर परहिया दसहरहिसारविजनीति ॥१५ पोमम्पेत तशितपितु समयमार ॥ प्रसमित्यादि ॥ व्यक्त थवरं । समुपति । असपतो ऽनिरुद्धा प्रवद्वार । प्रबगारेति । प्रविधमानपाः मारित्यर्प मिळाति सिप्पति प्राप्त परममयतया सिद्धिगमनयोग्पो प्रवति। शादत्ति प स म्य पदा ममत्परोक्तानतया सपरपर्यायोपता विखितान् जावादिपापोन् जानाति तदा पुष्यतइति आपदिश्यत ॥ मुघाति ॥ सरय सजात देवतबोपो नवोपपारिकाममिः प्रतिसमयं विमुच्यमानो मुचतात्युपते । परिमिछात्तिः सरब तपा कम मुगलाना ममुसमय यपा यथा उप माप्नोति तपादपा भीतीभवन् परिनितीति नाचते मधदुपसारमतकरहति॥ सरव परमनवायुपोन्तिमसमये सपिताशेपकम्मा मयदु साना मन परातीति प्रस्थत पतिप्रथा उत्तरगत पम्प खवर मोरासमहति ॥ नोनयरडेतिपय मननारोवत्वेन प्रत्यवोपी माया, समयों नवेशणगारे सिझति युकसि मुञ्चति परिणिवाति सहदुस्काणमतकरति गोयमा णोइणसमठे सेकेणठण २१ पसरोषमाने पषमारे। पमात वेरे पायपार मा नयो ममपन् । सो साह । सिम्पति गुम्नति मुरति पत्तिषम्माति । सिागमन माम्यहाव अवसानेवरी गोपादिपतावारी भवनमबरो ष्टे बमपुरसयारो मोतीमत परे । माबमाधमतबरेति । पानपाने वाले पर मासमा पन्च वरम मोतम पूर्धा यो तर भगवत पो-मोपमा । बोतम पारगममः । एपथ समानती पतनी। मेरी भते भावयतनवरेंतिाते चार ममाम् । गरम पानबारे भगषतरीतर गोरमा।मौतमा परेषनारे पर यनयान वापमापदूषणमुद्गरमहारबजरितवात् पाउययमति ॥ यस्मा देका नषगारे सरुदेवान्तर्मुरतमात्रकालरयायुपोवन्ध सात उत्तमा पुराग्लाइति सिरिसवरणपाठति ॥ मपबन्धन स्परतावा पड़ताया मिपहतावा तेन षडा भास्ममा सेयु सम्बन्धिताः पूर्वा वस्य या मयुनतर परिणामस्य पनि रमावारिति शिपित्तपन्धनबहा एता यामुनाएव अष्टष्याः प्रसपनमावस्य निन्दाप्रस्तावात् ताः पिभित्याइ ॥ परिपपण शाठपकरेइति गाठतरपन्धमा यडावस्यावा; निपतावस्यावा निशचितावा प्रकरोति मममस्यादिकम्मोपत्वा मर्तुमारम्पते पसंदतस्वस्या मुनयोगढ़पायन गाउतरमरुतिपन्धतस्या दाराष-जोगापपठिपपसति । पौनः पुम्पन्नावस्वसक्तत्वस ता करोतीत्यवति तथा इसमालस्थि तिमा रोपकासस्थितियार प्रमरोति तत्र स्पितिरुपात्तस्प कम्मरोवस्पाम ता मल्पनालांमहतों करोतीत्यर्प। प्रसपतत्वस्म कपायरूपत्वेन स्थिति पधातुस्था दाा-पितमानायकमापकुमति सपा ॥ मदायुमावस्यादि । रशमुनायो वियाको रसविदोपहत्यर्थः । ततष मम्दानुजाचार परिपेतवरमाः सती माडरसाः प्रमरोति प्रमदतस्यस्य पयायलपस्वा देवा मुनागमन्वयम वापप्रत्यपत्वादिति ॥ अप्परएसेत्यादि । अस्प स्तोक नते जाय श्चतनकरेति गोयमा छसयुशणगारे थाउययजाउंसप्तकम्मपगफीसिढिलयधणयझान धणिय यधणयहाठपकरेड हस्सकालठितीया दोहकालठितीयाचपकरेइ मदाणुनावाने तिवाणुनायापकरेइ थ ती पागामाधु । पाण्याबापा सत्तसम्मपगोपा मिपावरहाचा पवार साहितोयापा दावासातीपा परे। पायुबमठापान मातकमनी प्रतिधिोपुर्व प्रेमाठे एकममविषे एकबार प्रतमुहत्तवासने विडोज पासवानोबा तमाटे पात्रएपर्च लेखेको यो सिमित पपयारीने बांधीव ते गाठा पबवा निवाचितवपन करे यसो इसमास वार्ता योगासनो मितिसतो तेनो डोषवास पपावासमो सिसिमर प्रतापता पमोबिति यधारें। मारामावापातिषापमावापापकरे। वमना मन पनुभावधर्म मटरमधमनीपते तोवपनुभाव समनी तोवरमका रे। पपपदेमगापोपपदेममापापपरी पम्ममागे प्रदेग माग यमदपिक परमाएं तो पांप्रदेसभागपरे कममारे स्पष। पायरयमि - 2035 पारिमितपणापा नुतीयते मोदेग तस्या तिमि सरस्थात् पावजीयमिति प्रतिवासमा सदम्पस्या पापागात् । प्रमुधामरूपस्याम पा सिस्स घरीरामावेष तदयोगा इतरवाव्यते । सिदे मोधरित्तो मोपपरित्तो । नोअपरिधीसिप प्रविरते रनोपादिति, अनन्तर मारियमुक्त रत हिमा तप संयमसदादिति तपोनिह पायातिदयमार ॥ पवतधेसचमेहि मममिव बनान्या चारित्रवतपः सयमी घायो पारियरूपत्वा तपोरिति, 1, मनु सत्यपि पानादेनो पोतो दर्शनएव परितम्य तसे प्रमोवातुत्वा अदाल-भठेपपरिताछ मुफुपरउसागडेय । सिमातिचर गररिया दसबरहिमायसिसमीति ॥ १. पोमम्पेत तमिलपि मनपवार । प्रसगुरमित्यादि । व्या बार अस्युछेति । प्रसवतो मिरुद्धा प्रवद्वार पबगारेसिव विधमानगा साधुरित्यय । सिकात्ति। सिध्यति मवासपरममयतया सिद्विगमनयोग्पो प्रपति ।। पुझात्तिः स यय पदा समुत्पबसमानतया स्वपरपोयोपेता बिपिताम् जावादिपदायान् वानाति सदा घुपतहति ध्यपदिश्पत ॥ मुपदप्ति । सपय सम्भात देवतधोको प्रकोपमाहिवाम्ममि प्रतिसमय विमुपमानो मुच्यतइत्युपते । परिनिवाइति । सएव तेया म्म पुगताना ममुसमयं पपा या पय मनोवि तपातपा भीतीनवम् परिनिर्वातीति प्रोष्यते मधदुवागमतकरत्ति॥ सरव परमनवायुपोन्तिमसमपे पिताशेषकमाणा सपदुसाना मत करोतीसि नस्सत इतिममा उत्तररंतु पाटन प्रवर । मोरासमति मोनेव परतिपय मनन्तरोत्तस्येन प्रत्ययोर्यो माया समयों नतेशणगारे सिम्झति युज्जति मुञ्चति परिणिधाति सम्पदुकाणमतकरेंति गोयमा णोइणसमठे सेकेणठण पूवरे ? पगोषमते पगारे। पात वेरे पायवार मा यो भगवन् । रायो सातु । सिजाति पुपति मुपति परिचिमाति । सिहगमन गपाय पसनानेकरी पोरास्पिदावारे भपबमबरी कुटे पमपातपरबरो मोतसोभूत रे । ममसारमतबरेति । पाकमाने को गेषक मसिना पन्त परे म पोतम पूजा पर्वा इतर भगवत बोहे-गोममा । रेगोतम ! पापीममो । एपप समवारी समेत नौ । मेयेसो भते । पारपतनबरेंतिाते बारेममयम् । वायत्मदे प्रतनबारे भगवतको परमोयमा गौतम । अभीपणारे। परनार मा मगारः प्रमत्तमयतादिर, सब परमयरीरः सा दपरमशरीरोया, तत्र य यरमझरीर सदपेशयेद मूब, य स्वपरमशरीर स्वदपपया ५HAY मधामों धमेपो मनु पारम्पका संगतस्यापि सूत्रोत्तापस्या वापनाको यात शुलपातिकस्पापि मोसोवइयं नायी, तदेवं सपतासवृतयोः पाल तो मेदानावरवेति ? भोप्यते सत्प॑ फिन्तु परसदतस्प पारम्पय तदुपर्पत सप्ताप्तनवममा यतो वश्यति । जहनिय चारिताराहब भारा शसयुशणगारेणोसिज्जइ सयुमेण नतेशणगारेसिकइ हतासिकइ जाव तकरेइ । सेकेणठणनतेएयवु चइ गोयमा सघुझणश्शणगारे थाउयवा सप्तकम्मपगमीन धणिययधणयझा सिढिलयधणयछापक रेड दोहफालठितीया हस्सकालठितीयानपकरेइ तिष्ठाणुनायामदाणुनावापकरेइ यज्ञपदेसगा शप्प पदेसगानुपकरेइ शाउयषणकम्मनवघड शसायावेयणिजाचणकम्मणोनुजोनुजोउयचिणइ शुणादीयचण यमा पमरे अपमारेमामिम्मः । ते तेरेप रेमोतम । वसे पायवार धामको तेपपगार साप्ठ सीमेनहा रत्यादि पूर्ववत् पापा यावत् प्रतवर मी पनी गौतम पूछे-मागेवते पपगारसिया । वेरे पायदार वारे वमिकोधारे पारमा बेरे हेमगवन् ! पायो पररति अपगार साह मोझे इत्यादि मवावा इतिमय उत्तर । तासिम्मा चाप पंतबरगिोतम सात पपगार मोझे यावत् प्रतपरे म सर्वकावी । सेवेपोष भते एसमुपर। तेम्बामारे भगवन् म पार सहत पगार सोझे । गायमा । रेगौतम ! सप्तपवनार वसिषोधोरे पात्माजपे पहवासाच पाठकम माधि वो पौरमी पायुषम टासी मात पमप्रवति ते। धग्यिमापासिठिमणधपापा पपरो । मिडिचौक बंधने वापीछे तो सिविसमधनकरे लेबमोनाकर रखवा शेरवारिलोयापा । दोघवान पहुवासे वेबसितिशते । सवासातोगापो परे । अब बागकासय सिनिकरे। तिमामाषापा महासभावामा परेर । तोवरमा मदरसबरे । गएपद समापा पप्पपदेसगापा पक्षरे। पामदेम हुवे ते पममदेश परे राम पराम प्रदेगगत प्रते पन्यारेगपतपरे । भाग्य चम्म नपार । प्रतिपारिवत पायुक्म ताने नमधि । पसायावेयरिजवप पोमुखामुनी उव -- म्परेशाग्र इमदसिकपरिमाणे पासाता तथा ता याप्रदायाः प्रकरोति प्रदेशमन्यस्यापि पोगप्रत्यपत्वा दसवतस्वस्थप योगदपत्वादिति । पा उपरेत्यादि पापा पुनः कर्मस्या पदाधि माति स्थान प्राप्ति यस्मा घिमामाद्योपायुप परनवायु मकुवन्ति तेन यदा प्रिमागादि सदा ममाति अन्पदा मातीति तपा भसारत्यादि। भसातवेदनीय दु सवेदनीय हम्म पुन भूगोनूयः पुन सपचिनोति सपषित रोति ममु बत्मसप्तश्चान्तस्तित्वा दसा तवेरनीयस्य पूर्वोत्तविशेषणम्यएव तदुपश्यप्रतिपत्ते बिमतद् गहन ? त्यत्रोथत, भसंवतोत्पन्तदुःखितो भवतीति प्रति पादनेन अपनाना दमदतस्वपरितारार्थ मिर मित्यष्टमिति प्रवाश्यति । प्रमादिक भविद्यमानादिस अशातिरुवा अविद्यमामखत्रम वषषा बतीत सबसम्पाः पतातिबान्ता मतानिमित्ततपेति शशातीतं, भरवा, प्रयण पापमसिशयेनेत गत मशातीत ॥ प्रयवसम्मति । अषसम्पति वे भोवो तवाचक सात सामिपेषात् परमग्ग प्रनम्तमित्पर्य अथवा प्रवमतमासन मग्र मन्तो यस्प तत्तपा, तमिपेषा दनषमताय मतदेव सानाशा दनवतासमिति अपवा प्रवनत मपरिचला मग म्परिमाई यस्य तथषा , प्रतएव दहमदति ॥ वपार्वरीकालदीर्पायवा दीपमामं ॥ पारवत्ति । चतुरन्त रेगारिगतिनेरा त्पूर्वादिदिग्ध चतुधिनाग, तदेव वार्षिकामत्पपोपादाना चातुरम्वम् । ससारकतारति । नया रस्म पशुपरिपाधि पुन पुन धमतीति , असपतस्प तावदिदं पाल , सवतस्य तु मत्स्पा तदार समित्यादि । मत बपर, सस्तो प्पपदेसगाd घनपदेसगाउँपफरेइ छाउयचणकम्मसिययघइ सियनोयघाचसायाधेयणिजाचणकम्म नुको मुझोउयचिणइ शणाइयचणश्यणपदग्गदीहमछ चाउरतससारकतारशृणुपरियति । सेतेणठण गोयमा गाना । पुन पायामबारे भाबुबम विबारे पाघे । मियना यथा । विषारे नबध । पमायावेवरियपरम । पसासावेदनीय पपुन पंगामासका रेपम । मुम्बामना सरिता बारबार मोरमो पुष्ट बनिष्ट परे। पायपर प्रवदम्मोहम। जिन समारमी पादिनयो पपम पवाबासका पागे पतमी दोषवान । पाठरत संसारकतार पपपरियाति । पारगतिप्प भव ससार पसार पारपार परिममा करे। सेतेपो मी परमतः पाप ग्मन्नामाघरपाद्यमुन कर्म पेम स तपा ॥ सिप पत महापरप्रत्यता तिर्यग्मया न्मनुप्यनयादा तो मृत ॥ पधात जन्मा रेव्यः स्यादिसि प्रमः हमे जीवति ॥ य इम प्रत्यदासम्भाः पचन्द्रिपतियम्मी ममुप्यावा ॥गामेत्यादि ग्रामादि अधिकरणभूतपु, तत्र ग्रामी अमपदमायजमाभितस्पानविशेप, पापपरो सोहायुत्पतित्पान , नकर फररहित, नियमी वपिग्जनधानं स्पाम, राजपामो पत्र राजा स्त्रय वसति गट धूलीप्राकार', फईट कुनमर्र, मठम्य सवतो पत्ति सम्भिवनाम्तर द्रोणमुमं जलपपस्पलपयोपेतं पत्तन विविघदेशागतपस्य स्थान , तप द्विधा, जलपसन स्यसपत्तन चेति रवभूमि रित्याये , अाग्रम सापसादित्याने , सभिषेशो पोपादि रेपा इम्ब सतत पु, अथवा इएदेवेसिया ऋत्येगइएणोदेवेसिया सेकेणठण जाय इतोचुते पेञ्चाश्चत्यगइएदेवेसिया थत्येगइएणोदेवेसिया गोयमा जेइमेजीया गामागरनगरनिगमरायहाणिखेडकमायदोणमुहपट्टणासमसनिवेसेसु थकामतरहा बानमा पदयाय । परवेगमा पादेमि।। केतमाएक देवता महार । सेकेवाजापरतापते । से में प्रा भगवन् ! रमका यावत् सायको चयो मराने । पेपा परवेगाएदेनेमिया । पर हसाएन वोष देवताबाय देवतापमेजपत्रे। प्रत्येमाएपादेव मिया । कोतमाएर जोर देवता नमाय । गोयमा मौतम ! जामत्राधा । व ए प्रत्वपजीब पचेंद्रो तियेच मनुष । मामावरनगरनिममरामापिसवामस्वाप मुहपापासमस विवेमेसु । जे ए प्र पपजाय प चंद्रो नियंच मनुष गामदगमे पामरतन पायितहास शिरमा पवाटिगर ते गाम साहादि सातधातना प्रत्पच स्थानव तेपामर पर प्रितनगर जिला पाविण प्रधान तेनिगम नियमेव गजायसे कारसहित तेराजधानो जिला पूनिना वाचाकाट लेखेटव कृमितनगर तेव पा पमनाया दमाम नगरवा वामपार तथा तोन मगय हाय तेमम ममागवा नगरे असषको वन पायेई प्रापमुष पाप ते नानाप्रकारना स्मयो विरियामा पाप तपेमबारे एकानपत्तन बोवासनपत्तन पाने कारएन रमभूमिपप को-पायम तापसातिम्वान होरादिका ग्राम ते निरिपे। पशामतापपकामकाए । प्रागनिजरा मनगिमापनिमा तपा एमे मनपभिसापविमा दुधासमे भूरोपोगा कमायापहे। पका , रित्ता सतनवम्महरि सिमाति म पहा संवसस्य पारम्पर्य तदुत्पतोपापुद्रसपरावत्तमाममपि स्या द्विराषनाफ्लत्वा सस्पेति ॥ धीश्यप इति । यतिव्रजति मतित्रामातीत्या, अनगार संवतस्या रिसप्पतीत्युक्तं, यस्तु तदन्यः स विशिष्टगुवयिम्तः सन् , सिन्धे स्पा बवेति । प्रश्न यभार बोधेपमित्यादि । यत्त अवर । प्रसाएप्ति । प्रसाधुः सयमरहितोवा । प्रषिरएत्ति । प्रापातिपातादिविरतिरहिता, विशेषेण्या त पसिरतो यो म मवति सो विरतः । अप्पठिारत्यादि । मतिहत निराकत मतीतज्ञासात मिन्दादिपरखन प्रस्पास्यातम यखित प्रमागत वासविषयं पापवर्म प्रागतिपातादि येन स प्रतिहतप्रत्यास्पातापक्षम्मा, तमिपा दप्रतिहतमत्यास्यातपापकमा भनेमा तीतामागतपापम मोनिपेषसधः प्रसपतो विरत स्पनम वर्तमानपापासवरय ममिहितं, अथवा न मेव प्रतिहतं तपोविपामेन मरणकासादारात् पपित प्र त्यास्पात मरकासे प्याश्वनिरोधेन पापयर्म पेन सतपा, अपवा म नैव प्रतिहत सम्पग्दर्शनप्रतिपतित , प्रत्यास्पातम्ब, सवविरत्यागी थ्णयदग्गदीहमद चाउरसससारकतारवीईययइ सेतेणठेण गोयमा एवसयुशणगारेसिज्कइ जाय थत करेइ । जीयेपनतेश्यसजएराषिरएचप्पमिहयपञ्चरफायपायकम्मे इतोघुते पेच्चा देवेसिया गोयमा छत्येग विषा । प्रमाता बेदनोगसमयते नों वारवार पुष्टपरे । पपादोयरष पपपरम दोगमा पाउरतसधारणतार वातोषयति । इमानो पादि नमो बना पारनपो पापा दोष पातमतिय मसारणीतारमते पसिबमें पागे समार ते पमरे रतिभाव मोपजायत्त । सेोष गोगमा एषमपुर पचमार मिश्रा वावतारी । ते तेरेवारपेगौतम । वारे संवपाईदोवेरे एहयो पपगार सातु परमपरोरी सोमे मोघम तेंवार इत्या गायत् सवर पनापतकर परमार ते सातपरामो मोमेसोममो ताली बोबो तेविपिरमप विसपना का भी प्रभते पमबए प विरए पप्पतिवपपसायपापबाये । देवा पबया नावे सो प्रबरे-मगपन् पसाध सबमरक्षित प्रापातिपाताल मिरतिरक्षित मनोरमा भाप निदायहरो तथा पपतारेवरो पापकम बेचे । तोपुते । सबी भगवति .. - "बा बिना ततेपु दयनीयेषु देयाभपम् ॥ देयत्ताण्त्यवत्तारोनवत्तित्ति ॥ बामेहत्यत्र यशवोपादाना ते दषतयोपपत्तारो भयन्तीति द्रष्टष्यं ॥ तसिति ॥ क्यलोके घमामनिग्गरापम्तो देयतयो त्पद्यत तेपामिति ॥ मेगावामरति ॥ सेति । अप यथा पेनप्रकारेगा मामेति ॥ संभावने वाफ्पालका रेया ५ याति प्राममययापः अलङ्कारार्पपवया ॥ इति ॥ मत्पतोके ॥ प्रसोगवश्यति । प्रशोकवन , इतिशम्द उपप्रदर्शने, 'मुस्त्रार मोपः संघिय प्राप्तस्वात् पाइति यिस्पा, प्रथया मसोगवाहत्या प्रथमैकयचमकत एकार, इवावस्तु वास्यासकारे, प्रयोकादपस्त प्रसिदापय मयर ॥ सतयसति । सप्तपसः सप्तम्यदरत्यमा । फुसुमियति ५ सबाप्तासुम । मादयत्ति । मपूरित , सम्माप्तपुप्पविछोपमित्यर्थः । एसुदेयत्ताएउवयप्तारोनयति । केरिसाणनते तेसियाणमतराणदेवाणदेयलोगा पसत्ता गोयमा सेजहानामए इहमणुस्सठोगमि थसोगयणेइवा सत्तवणयणेइवा चपययणेइया चूययणेइया तिलगवणेइया लाउयवणेइ या निम्गोहवणेइवा ठप्तोहवणेझ्या शसणवणेइया सणवणेइवा श्यसिवणेइया कुसुनवणेइया सिछत्ययणे तर पोयेन प्यतरनेवि देवताप अपवणाराय चपास्वष । रिसाप भते तेसि वापमतराप देवाप देवनका पयत्ता । केशवादे भगवम् ! ते पकामनिराधको व्यतरदेवता माहि अपना ते पानबतरदेखताना देवमाव पाना पतम पतरीषदेवताना भवन पवाछे तिमय । गोयमा। रेमोतम ! समानामए । ते यानामेति कामसामर्थमसम्ममागमि । एरा मनुष्पसाबविधे। प्रमागवलेवा । प्रगोकामना बनेर वाक्यासबार पा पथपा । मत्तमपणेवा । मतपस माटो पुष्पजातिविशेष तेजना वन अषवा । चपयपपेवा । पपनयन प्रवधा । च्यापेरमा । मिवन । तिसग वरिया । तिसवाचनापन ! माउसगा। उचविगेप मोबन पाठांतर भोगवन । निपावरपा । बाहना बननेविप । पत्तोपवपिश्वा । सभासम । पमनपपामा । पगमा पविगेष तहमा वन । मपपपेक्षा । गचनाबम । प्रयमिपणेषा । पसमोरचनावम । इममवरवा । संभव म । मिया । धीमामरमर तेनावन । भोषणेवा । झापहिरिमाम विशेष तेइमावन । नियममिय । सदैव वारेमास मायका । मा - - सवारयति । सवितं सज्जातपलवसव , भकुरवरित्ययः ॥ पश्यति । सावकित सजातपुष्पस्तवकमित्पथ ॥ मुलापत्ति । सम्हातमुस्मुम, गु स्मुक सतासमूहः । मुभिपत्ति । सनातमुख गुजय पाटा समूहः यद्यपिच सबपगुभयो रविझेपो माम कोश पोत सपापोर पुष्पपरक तो विशेपा मावनीयः । नमसियति । यमलतपा समवितया तत्तहमा व्यवस्पितत्वा समातयमतत्वम यमलित ॥ घुपसियत्ति ॥ युगलतया तत्तयां सन्नातत्वम युगलित विरमियत्ति । विझेपेण पुप्पपलानरेग ममित मितिकस्वा विममित ॥ पपमिपत्ति । तेनैव ममयितु मारब्ध स्वात्मसमित प्रसदस्या दिवर्मापस्या दिति तपा अविनत्ता प्रतिविमत्ता मुनिप्पबतया पिवयो सुष्यो मन्जयम प्रतीता' ताएका वतसकाः मेयरका सान् पारपति यस स्तुवित्तपिसीमभयवतसमपर, तत मुमितादीना कर्मधारयति ॥ मिरीएत्ति । श्रिया वनलाम्पा । राव इया यधुजीयवणेइवा निच्चकुसुमियमाझ्यलयइयथवइयगुलुइयगोच्छियजमलियजुवलियविण मियपणमिय सुयिनप्तपिफिमजरिवमिगधर सिरीए अतीवधतीयउवसोन्नेमाणे उपसोनेमाणे पिठछ । एवामेवतेसियाण मतराणदेवापदेवलोया जहरण दसषाससहस्सठिईएहि उक्कोसेण पलियमठिईएहि यहि याणमतरेहि सिवाय । मया पक्षचपना पाप । बबरम । नियत पूर्वजाति । मुराश्य । सतासा । माचिय। परसा । वमसिय । समयेसोहचरमा । व पनिद । हामदाराय पपठाई। विरमिव । पलपलमे भारेनम्या । परमिम । मारेपरी प्रबनम्यो । मविभक्त । पतिप्रमट । पिरिमवरिपरिमपरे कृषिमा मप्रगा नबपना परपर प्रपतम मुझट तेशपते परे। मिरोए पतोष २ सयसोभमागे २ शिर । बनसभोवरी प्रतितो पतितीर हरिवनमा ते पखोरे एतमेवा महापरे रो। एवामेरोमित्रापमहरात देशप देवमोगा। मब निये तेहना गामम्मतर देताना देवलोक पर्ष जना मात्र पोषणाबाष हसबाससह मितिबायको दशसान १ अपनी खितिर्वाधवो खितिवडोये । एपोसेप परिमाव मतिमा राजपा उदयको पचापमनो खिति बोपयो । बम वागमतरेहि। बरे वापवर । देवेशिय । शेषकरो। देवोशिय। देवीय - मानेमापेक्षिा द्विवचन माजीररुप पशवे इत्यया । भाइसत्तिा कपिरादे से देवाना देवीमाप एन्दै रास्मीयालीपाषासमर्यादानुलाइमेन ध्या ता प्रायशोव मयादापतित, तपा अपितु ॥ विपत्ति ॥ तैरेय पदमिजायाससीमोनहनेम ध्याता, यिशदो विझेपणाची, ॥ उवत्यति । उपस्तीमा वपशनः मामीप्पा माल भावादनाप , सततय उत्पतति निपतशिया मवरतीहास रूपर्युपरिवादिताः । सपत्ति ॥ सस्ती ण सामः परस्परसपाय सतय हवि तैरेव कीङ्गमानै रन्पोन्पस्पत्या समन्तत घसनि राष्पादिताइति ॥ फुछत्ति ॥ स्पष्ठा प्रासनण्यमरम पपरिमोपहारेक परिणताः स्मूदाया समकामा अन्तरसरनिबारफिरविसरनिराफतान्धकारतया ॥ अयगाढगाउत्ति ॥ गार याठ मवगाता तेरे य समसजीकास्पानपरिमोममिक्षितमनोनि रघोपि व्याप्ता, गाठावमाठा इतिवाये मातत्या दवगाढगाठा, पाप देवस्वयोग्यस्य जीवस्यानि धानेन तदपापा सामप्यो दवसीयतएवेति । प्रत्यगइर मोदवेसिए प्रयातस्यादा युतस्य पपस्प मिवचन रूत इष्टप्पमिति, प्रयो देशकनिगममा दहिय देवीहिय शातिमा वितिया उपत्यका सथा फुडा श्यगाढगाढसिरीए अतीवधतीवउपसोनेमा णा उपखोजेमाणा चिठति । एरिसगाण गोयमा तेसिवाणमतराण देवाणदेवलोगा पणता सेतेणठणगोय पाराने । पानिमा वितिमा उपत्यका सधता पा पवगाठमिरोए पतोष ३ उक्साभेमाचा २ पिति । पापमो मरणादासमो देव देवोने वाबरोने स्याप्या पापमोमिको मरवादाममा थाप्या वासदेवदेो पारपाशा परस्पर घमो दूलगो रमता सधारामो परे पापा फरण्या पासन सवार रमन मागारगरो भागवत तथा पत्रकार उपात मनमोरा पभिमापा देवता नोवासगे बाप्पा गाठ प्रयपरेरमा समीरवरो प्रतीष २ माभता र वा तो। परिममाप । पाा प्रेमप्र.नाप बो। मायमा। मोतम । तेसिवागमतराप देवाप देखोगा पपतातोमा पानवतर देवना देवताक भवन मा । तेष मायमा एवमुशर । ते तेनेवारणे हेगौतम रम र प्रकारे पा। पोषेष प्रसघाए । लोव पसयतो । पापदेवेसि या । वाया देवापजपरे। सेवमते २ तिमवष गोधमे। भामै प साभगवते में सो इमना प्रवधा भयो। एतसे भगवतना इमान देखापा १ १ ॥ र्धमा सेवं प्रते ! सेवानतेत्ति । मन्मापा पार्टी सद्गयनिः प्रतिपादित तत् एव मित्यमेव प्रदन्त ! नाम्पपा, अमेन नगनुपने वामान दर्श पति विषयमा प्रत्तिसंघमन्त एव रुत्वा प्रमयाम् गौतम ममप ममवत महायीर वन्दते नमस्पतिवेति ॥ प्रथमशते प्रपमोद्देशकविव ममामिति ॥ । ध्यास्याप्तः प्रथमोद्देवाको पि द्वितीय प्रारम्यते , अस्य व सम्बन्धः प्रथमोपचे चलनादिपमई कम्म तदेवेष निलप्यते तपो वेगमार्पसहरसा । दुबलेपत्ति । यदुवं तदिहोचते तत्प्रस्तावनापन पूर्वोत्तमेष ग्रन्य स्मरयम्भार ॥ राय पादि । पूर्ववत् ॥ जोवेवमित्यादि । तप ॥ सपफळंदुषति ॥ पत्परतत तत्रवेदयतीति प्रतीतमेवातः स्वयकतमिति पयतिस्म ॥ दुषम सांसारिक सुवमपि वसप्तो दुःसमिति दुपयोतुस्वा बुक्स फर्म वेदयतीति फानुपाठा प्रमा निर्वधमतु यदुवीमें तद्वेवपत्ति अनुदो बुच्चड जीवेणधसजएजावदेवेसिया सेवनतेनतेतिनययगोयमे । समणनगवमहावीरवदइ णमसइ व णमसिप्ता सजमेणतयसा छप्पाणनावेमाणेविहरइ पढमसएपठमोउद्दोवोसम्मतो ॥ पागहेणयरेसमोसरण परिसाणिग्गया जायएयवयासी जीवेणजते सयकळंदुस्फ वेदेइ गोयमा श्रत्येगइ इमबहो ममवत मौतम । समय मगर महापोरवठा । यमप भगवत योमहाबोरम्बामोने वा। पर्मसा नमसारको पदित्ता। बादौने। पमसित्ता । नमवारपरोने । मज मे तवमानमार मारेमा विहार । मममेकरो नगवमहपानको सबरो पुगतनबम निचरे पावा योगोमम रमाने मावतायका विचरे। पठमसए पठमातोमो समता ।।। प्रामयते प्रथमसोयनो विवरा समाप्तमिति । दिव यात्रा तेवम दुपना भयो एपनो अधिकार बोहे-तबा होयवाद संपानि गावानेविषे। दुक्ति । इसापनो तेबोरे-रायगिोप मरे समोसरपं । रावमा नपरे बोमनापोरनामो समोसया । परिमाविमग चायएवमयामो। परिपदा बधिोने पापसापरे वरेगया पूर्वतोपरे गो तममामि शोमहापोरवामीने पदिौने पावत् रम पर तालगे वावो । विषमते मर्यबर दुर देर गोयमा । वोव भगवन् ! बेने जे बोवो बम ते पा ८ । - सस्पपि नामतो पैदममेय नाति सस्मा दुदीपयेत्यति नानुदास , नवधानमारमेवादेति प्रतो धइयं पेयमपि एकं वेदयति , एक मवेदय ती त्मय प्यपदिश्यते अवश्यं यद्यमेवच पम्म कायमम्माय नमोक्यो प्रवीतिवचनादिति । एव वाघ वेमारिए इत्यमन सुविंशतिदायका भूषिता मर्षव नेहमम मत ! सुपरममित्यादि । यय मेयरवेन दमश्च स्तथा त्वे मान्पः , सचैव : जीवार मंते सपकाळ दुम्स वेपत्तीत्या दि । तपा मरहमाणं प्रत । मयंका दुक्पमित्यादि । मन्येवत्वे योपो यात्वेपि सरवेति कि पास्वप्रममति ? प्रधाचते शधि वस्तु न्येपास्थया ययेटड छत्येगइयनोवेदेइ सेकेणठणनतेएववुच्चइ छत्येगइययेदेति शत्येगइयनोवेदेति गोयमा उदिसवेदे ति णोशणुदिणवेटेति । सेतेणठणएवयुच्चड गोयमा श्रत्येगहरयेदेइ श्रस्येगइमणोयदेइ एवचउयीसदएण जायवेमाणिए । जीवाणनतेसयकदुस्कयेदेति गोयमा शत्येगइयावेदेति थत्येगइयाणोवेदेति । सेकेणठण जतेएययुच्चह गोयमा उदिणयेदेति णोश्यणुदिणवेदेति एव जाय येमाणियाजीघेण नतेसयकायाउयवेदेति नवेदे माता प्रमिाहे पनि पानेकोमा दुल नवेदे प्रतिप्रश्न । गौतम ! प्रत्येगायवदेो । तसा वयोव प्रकृतवमयदे । प्ररोगासनोवेदो । केतस्साएप योग पस्तवम दुप नवे । सेनामा एक्युषा । गौतम पूजेहे-ते यामाटे भगवन् ! म माय । परगाएवेदेति । केतसापक वेदे । पस्वेग पिनायरेति । योरसाए मतदप मोदे। मायमा । ममवतबाहर-हेमोतम ! सतिस वेदेति । उदयपाप गर्म वेदे । यो प्रदिप पेदेति । नको उदार पाया तेवम पेरेनहीं। मेलेना एक्युपर। तेषवार रमवा । गोषमा । गोतम । भरगाय वेदेो । क्षेतमाएक खोप भातदुम्स वेदे। प स्वगतापदे । योतमाएलकोव मतदप नवे पदय नाप्पा तेमाटे । एव पडयोसदए । म चयीसदावविपे कायो। पाप येमापिए । याव त् मानिबममें जापपा ए एश्वपनपायी पाच शिवे यहपचन पायो माई-बोवापभतेसपारसपेदेति । बोष हेमगवन् । पोते तदसवेरे । निमत्र भगवतवरद -- गाममा । हेमोतम । प्रत्येमायावेदेति । केतचाएक जोव प्रायवम येदे। परवेगानामा बेति। तताएव जोव नक्षतदुम्स - स्वमो रविशेपो वृष्टो, पधा-सम्पमादेरे जीव मामित्य पद्धष्टिमानरोपमारि सापिानि स्पितिशास उतो नानाजीवा नामित्य पुनः पर्या देवि, एय मत्रापि सम्मवे दितिशाया म्यत्वप्रमो मदुष्टः, अत्यन्ताव्युत्पबमतिशिष्यव्युत्पादनार्थत्वा द्वेति प्रथा यु प्रधानत्वा धारादिव्यप दशस्या पुरामित्य दवाइयम् म जीवेषमित्यादि । एतस्य चेय पदोलनावना पदा सप्तमतिता घायुर्षद पुनध वासाम्तरे परिगमयि पातु तापपरीप्रायोग्य निहित वासुदेवेनेष तत्तादृा महीलत्योष्पते पूर्वषद कपि भवेदय त्यनुदीमत्ता हस्य, पदापुन पपया तो त्पा ते तदा वेदयतीत्युपते, तपैव तस्यो दितत्वादिति मथ पतुर्विंशतिदगठ माहारादिनि धिम्पयवाद । नेरात्यादि । व्यक्ति प्रदर म गोममा थत्येगइयवेदेति शत्येगइयणीवति जहादुरकेणदोदागा तहाशाएणवि एगत्त पोहत्तिया एगोण जाय घेमापिया पुऊत्तणवितहेव । णेरइयाण जते सईसमाहोरा ससमसरोरा सछेसमुस्सासणिस्सासा गो म। मेरोषमते पवपुषा । गौतमबरे ते पमिाटे मगवन् मg! गोरमा। गौतम । हरिपदेति । उत्यपाध्या ते वेटे। बोपपटिस रेति । महो उदयपारा ते नो । एक्वावर्षमापिग । म पउपौस एप सावत् मानिजमग । पोषमते सपवर पाय देति । हि भार भारिपने पातु कम प्रदानवे मारे पावणा पायी पवित्र वारे-मोव रेमगवन् पछत पायुमत वेद मगवत का गौतम । परवेगा यदेति । बेतवापर वारय पार्थ ते मे रवध । भरवेगारांचो वेदेति । तमाएक नोहें उदयपायो विना नरें। वहादुर रोदरमा बिम अपनेविषे अरवपामा एकापने मार्ग पयवा उदरपा बेर्दै उदयनायो ते वेदेनी । महा पाएपविदोदरगा। तिम पाचणाविषेपपि दीय दाकारा । एयत्त । एषपनपाचौ एकामोय । पोतिया । पचमपायो पा जोग । एपत्ते बाप मेमापिया। एषवची एकवीर पायी भाव न वैमानिबताई जाणा । पुरत्तेवि तोर । यो पषा बोव पायो परि तिमीष एतसे वैमानिया पागा पेरायापमते सम्धेसमाहारा। वियोमरण पाहारानिबरो परो-मारपी हेभमन् ! मगन्दा सरोपा पाशारराव। सभेसमसरोरा । सममा सरोप मरोरोोय । सजेसम - रामरी रापमप्पमरोरापेत्यादि शास्तत्व मायया पेधिक तर अपन्यमस्पस्व ममुतास पनागमावस्व मुररुप्यन्त महत्व म्पमरमु यतमा मत्य मतए नवभारखोयारीरापेरुमा उत्तरवैझियापनयातु बपन्यममुलसमातमागमायस्व मितरतु पनुःसासमानत्वमिति रतन फिसमस रोरा हत्या प्रम उत्तरमुक्त शरीरषियमतानिपानेसति प्रापारोलासपो वैपम्य सुपप्रतिपाद्य नयतीति शरीरमरप द्वितीयस्थानोत्तास्मामि म पर्म नियवन मुक्त प्रथा रोमासममयो मिर्यचनमाए ॥ तत्पसमित्यादि । ये यतो महाझरीरा सो तदपेक्षया पातरा पदला नाहारपन्ति महाशरीरत्यादेव दृश्यतेशि लोके यारीरी घटा इयत्पथरीरया ल्पनोली पतिराशकयत् पाहुण्यापेतं वेदमुथ्यते मन्यपा मगरीरोपि यमा णोइणठेसमठे सेकेणठण जते एवषुञ्चइ रझ्याणोसछेसमाहारा णोसछेसमसरीराणोसछेसमुस्सासणि स्सासा गोयमा णेरइयादुविहा पणता तजहा महासरीरायशप्पसरीराय तत्यणजेतेमहासरीरातेयजतराए मामरिमामा । मगलाने सरोपा जमाम नोसामकीय पापे प्रश्नोधा भगवत परे-गोरमा । योवस ! बोलोसमो। पपर्व समर्थनको उतनी रखा। भेषोभते एवषर । ते बिसेबारप हेभयवन् । रमपारेरायाचासोसमाहारा । नारको सब पता सरोपा पारवत नहीं। पश्येमममरा। मगमा मरो गरोरेनहाव । बाससमुसासचिस्मामा। सममा सरोगे छमास मोमासे नहोय इसेप्चा भमवंत करे । मोयमा । नीतमा रारा दुरिता पता तब मासरोग परीपय । नारको प्रकारे मामा ने कोरो अस्पप तथा मप्रखपभू अपेक्षा स रित निर्वा अपय पपरम पमुन घसश्चातमो भाम शरीर पे उबर महत्वपर पोचसे घपमात्र ए भपधारोष गरीरको पपेचा का उत्तर वे frमरीको अपाय माम् पगुमने प्रसस्यातमें भाम शरीर am महसपनुष ये तेमाठे नारको मायरोरपतरे बीना पसमरोरया एवं भः । तमोमहामरोरा तेराए पाम्पमे पाहारनि । तिrt पूर्वोतपघमाचे महायरोखे ते पत्थतपणा पासनो पाहारकर सीवमाशि पषिदीमहे माठामरोरी धपो पा पुरनानी पासारवर मोमोपरे तथा ययगनोपरे ते नारखो पसातावेदनीय वमसरित तेविम मोटायरी - - कपि दस्प ममाति प्रत्पमरीरोपि कपित् मूरि तपाविषममुष्यवत् मपुनरेवमिह वास्पपतस्यैषा प्रयणात् तेच मारकाटपपातादिसद्धेया नुनया दन्या सदेयोदयत्तित्वनै फान्तेन यथा-महाशरीरा दुःपिता स्तीमाहारानिलापाप भवन्तीति । बहुतराएपोग्गलेपरिणतिति । पाहारपदलानुमारित्वात् परिणामस्य मातरा नियुक्त परिणाम यापष्टो प्याहारकाय मितिकस्वोक्ता तथा ॥ यहुतराएपोम्पले उस्ससतित्ति । उग्रामसपा गवन्ति । निस्ससतित्ति । नियासतया विमुन्वन्ति महाशरीरस्वा देव दृश्यतेहि-दावरीर स्तनातीयेसरापेच्या पानासमिः पासइति, दुसितोपि तपैष दु सिसाय नारकापति , बहुतरा सानुअसन्तीति तपा हारस्पैव कालहतं वैपम्पमा पमिक्सपमाहारति त्तिा पापीरस्प पीनापुम्पन यता महाप्ररीरः स तदपेच्या शीघ्रशीघ्रतराहारग्रहवात्पर्पः । प्रमिसरावससतिपनिक्सरनीससतित्ति । एतेषि महाशरोरत्वन दुःस्थिततरत्वा दीस मनवरतमुत्रासादि कुर्वन्तीति तया ॥ जेतेइत्यादि ॥ येते पर ये इत्येतावते पार्यसिद्धी यतेरत्युष्यते तझापामात्रमेवति, । अप्पसरी रामप्पतरारपोम्मसेमाहारतिति । ये यतो पारीरा स तदाहारपीयपुगसापेक्षया स्पतरान् पुरला माहार पोग्गलेचाहारेंति यजतराएपोग्गलेपरिणामेति यऊतराएपोग्गले ऊससति यजसराएपोग्गलेणीससति शनि कणशाहारेति शनिस्कणपरिणामेति शनिस्कणजससति थनिरफणणीससति तस्यणजेतेशप्पसरीरा तेण रना धोशाय तेमहादुखोजवा तोपाहारना पभितापो । मतपए पाम्पसेपरिषावि । मोटायरोरमा नारगोने पापुरस गरोरे परिसमे पा हारपुरसमें अनुसारको परिचामने बहुतरपन । बहतराएपाम्पचे । इम नारको घापुस पारबार । जससति । जससे उन्मास योगा तराए पापम पोसमति । पव्वत पापाव पारगार मोससे निवासस्पेंपरे तवा पाहारनाप कासरतवम्य करे। अभिनयपाहारेति । गारवार भावारपडे । पभिसा परिपामेति । एमाटायरोरना धमो प्रने प्रतिक्ति या वारपार परिपमे । प्रमिसयन ससति । वसो प्रतिपयको बार बार अमास ! अभिन्तमोसमति । पारगार नोसासादिकरे । तखाते पणतरोरा । तिम पर्पोज वेपचमाहिले पखयरोरो छोटायरोरनापतीजे यन्ति प्रस्पारीरस्या देव । प्रायमाहारतिति । कदापि दाहारयन्ति कदापि साधारपतीति, महाशरीराहारयणानतरासापेक्षया वातरका मानतरालतपेत्ययः । पाप उससंति पाइप पीससतित्ति । एत सस्पारोरत्वेनैव महाशरीरापेक्षया पतरदुरात्वा दात्य कदापि स्मातर मित्यदः, उपामादिकुवन्ति, यच नारका सन्ततमे वोडामादिकुर्वन्तीति, प्रागुक्त सम्महाशरीरापेत्तये त्यवगन्तव्यमिति , पपया अपर्याप्तका से ऽल्पझरीराः संतो सोमाहारापेकपा मा हारम्ति उष्ट्रासापर्याप्तकरवेनर मोफस त्पन्पदा स्वाहारयत्युलसन्तिचे त्यात पाहत्याहारयग्त्या इत्यो सम्तीत्युक्त । सेतेबसगापमा ! एव पर नरहया समोसमाहारत्यादि ॥ निगमममिति , समकन्मसूत्रे ॥ पुटोववसगायपशोववरसगा पत्ति । पूर्योत्पप्पा मपमतरमुत्पन्ना सादग्पेतु पपादुत्पत्रा स्तन पूर्वोत्पक्षाना मायुप सादन्यकामयाब पातरवेदमा दस्पकर्मत्व , पया दुत्पदा शप्पतराएपोग्गले शाहारेति शप्पतराएपोग्गले परिणामेति थप्पतराएपोग्गले जससति शप्पतराएपोग्ग ले पीससत्ति थाहच्च थाहारेति शाहच्च परिणामति शाहच्च ऊससति शाहचणीससति सेतेणठण गोयमा नारबोहाय । तेषणपतराए पामने पारिति । तेनारपोर वाक्यासमार परपतर शठापुनबी पहारवर तेबाटा गरोरमाट महायरोरनोप पेचायें थारा दुपमा धपोतेमाटेवरम तेनारकोनें । पापतराएपामचे परिकामेति । परपतर पाहापुरास परिपमें गोरा पारमाटे मारतो।प पतराप पाम्पसे जमसति । पपतर पोगान प्रसासपचे पौ। प्रपतराएपापमोसमति । परपतर बाग पुरम गोमासपरे धरै। पापच पासारे ति। पोपाहारवर पतरामात पाहावरे । पााच परिपामेति । प्रतरासशिव परिपमें रसो २ परिषमें । पाव मसवि । पतरासहितख ममें सामघो। भारपोममति। पतरासहित गोसास पहे। सेतेवाएं गोममा । ते तपेप्रयाज गौतम ! एवंपर। इमपा। पेरायाचोसम्बे स मारा। मारको मगमा सरोगा पाहावत कोपनहीं। बावीसयेसमुपासपोसासा । यावत्म धमक्षा समगरोरमही सगवा समयसास मोसास पतमी । हि मारगोन पामस्वरूप पक्ष । पेरवापभते सम्वेसमान्मा । नारको ममनन् ! सयक्षा सरीमा कमवत उत्तर । मोवमा । हेगौत - , मात्र नारझारा मायुशादीमा मल्पतराणा वेदितत्वा महासम्मरस एतष सूध समानस्थितिका ये नारका सानङ्गीहत्य प्रणीत, मन्यपाहि रखन माया मुररुष्टस्मिते नारकस्य पाम्पायुपि पमिते पत्योपमावझेपेष तिष्ठति तस्यामेव रबमनापा वसवर्पसासस्पिति मारको म्यपि दुस्प व इतिहत्वा प्रागुत्पल पस्पोपमापुप नारक मपेश्य विवष्णु शन्य महाश्रमति , एष वर्मसूत्रे पूर्वोत्पमस्या स्प मर्म तत सस्प विगुदी वम्म एय युच्चइ णेरड्याणोसछेसमाहारा जाय णोसलेसमुस्सासणीसासा । णेरइयाण नते सधेसमकम्मा गोयमा णोइणठेसमठे सेकेणठण नते एव पुच्चइ गोयमा णेरड्यादुविहा परमप्ता तजहा पुछोयधरणगाय पच्छोवय गाय तत्यणजेतेपुछोयवलगा तेण थप्पकम्मतरागा तस्यणजेतेपच्छोवयसगा तेणमहाकम्मतरा सेतेणठण म। भारपासमा । एप ममपनौं । मेगोषमते। ते पर्व हममवन् इमबमा । एवमपर । सव नारको मरोणा कर्मवत नही उत्तर । मायमा । मौतम । राया दविता पवत्ता तव । नारको भेदे बना बार-बोषणसमाय । एक पूर्व परिसा जपना ते पूर्वोपपषष करोये । पयावरण गार । बेतारको परे अपना एवोबा भेद २ तत्व येतेपबीववसया तेष । पूर्वोत पक्षमा पूर्व अपना तनारको भरप बोण कमतरते किम बेपो सपना ते पाचम वा बोजाधम मचा वेधाशेमोगरसेप्सेमाटे। पप्पवयतरागा तत्यपवते पचावयसमा तेमाकम्मतरा । परपजी बमा तिको परमामा रेपघमाथे पोचपना तेनारको महाशमा चोममा तेविम परे नारकोने भाजपा पादिदेर कर्म घोडा पारे घना रोतेमाटे महाबों कमा एमष सरोपो मितिना धयो नारखो ते गोवारबरोने वयोरे पन्यमा रमममा प्रवियोगविय कोर एक नारव बोवनी परमटो पयसागरापमनो स्थितिमा घोसित भागवो मे एपोपमरमोदे एतचे तेव रवप्रभा नारखोगेरिये उससासम्पनो म्पिति को बामोर अपना ने तो अपनापनापमयेपपायुषनारदोनो अपचाय म महाकर्मी परिसकिये एतावता कहोनमषिये हम अपमननेवि पनि कायो सेतो गवना संगमा । ते तेषेपारप मोतम इमाचा मो गोतमपूशे-पेइमामते सप्रेममाया । मारको भगवन् ! सगसा सरोगपणे - पपादुत्पन्नस्य च पुकामस्या दविहतरायणाति पर्व लेगापि, हार सेरयाशदेग मायलेश्यायामा पासष्यलेश्यात वर्णहार वो पाति । ममयपप्ति ।। भमयदनाः समामपीमा सपिनुयत्ति ॥ सभा सम्पग्दर्शन , तदन्त सजिता , सविनोन्ता समित्वात्ता , सध्नी गोयमा एघवुच्चइ गैरइयाणनतेस समयणगा गोयमा णोइणठेसमठे सेकेणठणतहचंब गोयमा जेतेपुझोव यणगा तेणयिमुछणतरागा तहेय सेतेणठण गोयमा जेरदयाण नते ससमलेस्सा गोयमा णोइणठेस मठे सेकेणठण जाय णोसझेसमलेस्सा गोयमा णेरडयादुविहा परमप्ता तजहा पुछोयययागाय पच्छोववरण गाय तत्यणजेतेपुचोययणगा तेणयिनुहलेसतरागा तत्यणजेतेपच्छोववरणगा तेणविसुसलेसतरागा सेतेण नीय उत्तर । गोयमा । हेगातमा चारपाममा । एपद समवनमा युनगर। समाप ताप भायमा। ते नगारखे भगवन् । मका रस्मादि सप पूठिमोपर वाया से मौतम । जने पुपावरपमातेराविमापतरामा । वेव अपना ते हम अपन भाकोरमा रोमाटे भस्वावन व परे अपना ते पन घमासम तेमाटे पियापक ताने । तई । एमर तिमयमा समेत गोवमा । त पगार गोतम : नारको सप समषण नहीं। पर यामते मवेममनेसा । नारका भगाम् । मगना मरायो नेसामा पाई ससायदै भावसेना पाहयो । मायमा । गोतम । पोपीसमो। एपर्व ममनी रनमा । मकवाना ते कारण हमयवम् । म वाम। माव नासम्बमममेम्मा । यावत् कारको समसाममसेप्यानी । मोवमा । गीतमा परश्यापित पपता तजहा। नारवा दे प्रमाला का पाय- पुमाकमगाव । 0 नारका पूर्व उपनछ । पचावणगाय । योबा मारवी पछे परमा। तब मजेते पवापर नमामि पवमारि अनारका पूर्व उपमा । परिणामतरागा। ते नारको विपरखसाना की मेष पम्प बममाटे निमनमेषापतकता तत्वत्रतपणाममगा । तिहा पचमाजेल पहे अपनाछे । तेष पविसमतरागा । ते नारको प्रविशलेगौछ पाबममाटे निमनन यानही । मेला काममा । तेमाट गोतम ! मारवा मा सामे गोमहो। रमापते सोममवेदना । नारको -- भूता, अथवा प्रसभिान सलिमोमूताः सनीभूता विमत्यपयोगात् मिप्यादझन मपाय सम्पदर्शनजन्ममा समुत्पभाइतियावत् तेषा पूवरूतसम्मविपाक मनुस्मरता मोमा दुःतसकटमिद मबस्मा दस्मान मापतित , म छतो मगवदईत् प्रयोत- सबसदुःसवयहरो विपपषि पमविपपरितोगविमतव्ययेतोनि पर्म, त्यतो मह दुत मानस भुपवायते, तो महावेदमा से मीनूतास्तु मिथ्यादृसप तेतु सप्तक म्मपसमिद मित्येव मशानम्तो लपतप्तमानमा पस्यवदना स्युरित्येचे अन्येत्या समितमः सनिपमन्द्रियाः सन्तो मूता मारकस्य गताः मीनूतास्ते महावदना तीव्राशुनाप्पवसाये नाअनतरसम्मपन्धमेन महानरमपूत्पादात् प्रसनीभूतास्तु अनुभूतपूर्वासशिनवा साचा सविस्वा छेण गोयमा । णेरइयाण नत सछेसमयेदणा गोयमा णोठणठेसमठं सेकेणठण नते गोयमा णेरड्यादुविहा पणप्ता तजहा सहिनूयाय शसणिन्याय तत्यणजेतेसणिनूयानेणमहावदणा तस्यणजेतेष्ठसणिनूया तेण मगवन् । पगलासरोपा वेदनावत पोगरताय । उत्तर । गायमा । रेगौतम । पारण ममा । ए पद समबन चुननहीं। सफेोपमते । ते वार भगवा रमका उत्तर । मायमा। हेगौतम । मेरायादुपिता पवत्ता तया । नारको भेदे माथा तेको समिभूयाय । सम्यगष्टो मारक तवा मवी। पमपिम्पाय । मिथ्याहटो नारमो तथा पस्यो । तत्वमतेससिया तेप महावदना । ति वेपचाशि नारवी मिप्याटसमारो सम्पमसन उपना ताने पूर्वसत कमविपाक सभरवायी महापुष ते । बिमन। पवनात् सबटमा पपा तम परात्तापयरे में परिवारको धम मपायो तो सिपबारसे ममगोने मानसो दुहवा । तबमवेते पमसिया तेल पप्पवेरचतरामा । तिहा पूर्वोल पचति प्रसनोभत परिये मिप्यारी ते पोताना कोपराधम पामा पवारता मानसोपोज दोमवेदे तेमाटे पपवेदनापतवामा प्रवमा एक इमवार-मन्त्री पचेंद्रिम बया मरो नारचप पाम्मा ते मनोमन पहोवे ते महादेवनापत पामा तेविम तोत्रपाभपशपसाय धप पशमबममो वधवोघो तेवरो नरबविप उप ना पने पमनोभूत वे उपना ते पशिना पसनोपमा मागयो तेमाटे पव्यत पसभषयवसाय माता ते रबप्रमाने विष उपजे तेमाटे प्रसनोनो प देवा स्यम्तागुनाप्यवसापामावा राममाया मनतितीवेदननरक्षेपू त्पादा दल्पवेदमा प्रपया सम्पीनप्ताः पर्याप्तीभूसा प्रसनिरस्थपयाप्सका लेच फ्रमेय महावरमा इतरच प्रवरतीति प्रतीयतण्यति ॥ समकिरियत्ति ॥ समा तुस्याः प्रिया कम्मकन्धनिपन्यननता पारम्भिफ्पादिका येपान्ते समक्रिया पारनिपत्ति । भारमा पूपिय्यायुपमईः स प्रयोजन बारण यस्याः सा प्रारम्मिी ॥ पारिंग्गहिपत्ति । परियहोर्मोपकरणवप्लवस्तु स्वीकारो धर्मोपकरणांच, म प्रपोजन पस्याः मा पारियहिफी ॥ मायावतियत्ति । माया प्रनायव मुपसववस्वात् ग्रोधादिरपिच सा प्रत्ययः शप्पयेयणतरागा सेतेगठण गोयमा। णेरइयाण नते सऽसमकिरिया गोयमा णोइणठेसमठे सेकेणठण जते गोयमा णेरड्यातिविहा पणता तजहा सम्मदिछीय मिच्छद्दिष्ठीय सम्मामिच्छद्दिठीय तत्यणजेतेसम्म दिठी तेसिण घप्तारिकिरिया पणता तजहा शारनिया परिग्गहिया मायावप्तिया थपञ्चकाणकिरिया पेसावे पपादनापत रोष प्रयया समोभत पर्याप्ता तेजने महाबेदना हाय भने प्रसन्नोने अपर्याप्ता ताने पमवेदनाहोप ते तेरेपथ गौतम ! म कनारको मममा सरोपा बेरमाननहीं। मेले को गोरमा। बसो गोतम पूर्वरे-गारयो हेभगवन् सगसा सरोसो निया फर्मवधमहेत पारंभिको पारितोय। उतर। मोपमा । गीतम। पापाममा। एपर्व मममहो बुधनहीं । मेकेपा पमते ते प्रेम भगवन् मिया नारको समति पनहीं उतर । गोपमा । हेमोतम । बेरायातितिापग्रता । नारको तोरकारें बना। तमा समविशीय । तेवर--सम्माष्टी समवितो चौथे गुण ठा पाते। मिनपरितोय । मिप्याटी परिते गपठारे ते । मन्मामिपरिहोस । सम्मम्मियादृष्टो मियभावे वत। तत्ववेतेसम्पति। तेपोत तीनप पमारिनारको मम्यगोममवितोवे। तमियतारिधिनियापापपत्तागोताहा पारभिगा । तेशन नारकोने पारजिया वमवधमतवमा तेव हेरे-पपिपादियाने उपन्य तेजोज कारपई बहनो ते पारभियो। पारिमारिया । परिपात धौ परमपवित वसनो भगोकारवरया पबवा धर्मों पवरणवि मला ते पारिपायी दिया। मायातिमा । पनाजपचा उपसच एपो कापादिवपरि तेहोज प्रस्खयकाोये पार पहने तेमायाम । - - पारण यस्या सामायाप्रत्यया थप्पडक्याकिरियति। अप्रत्यारसामेम निकृत्पनावेन प्रियाफम्मपन्धादिपरय मप्रत्यास्यामझियति पकिरिया फचतिति । नियन्ते फम्र्मरुत्तरिमयोगोये तननवन्तीत्ययः । मिचाईमयपत्तिपति मिष्पादधान प्रत्ययो हेतु यस्या सा मिप्यादधानमत्पया ममु मिम्मावापिरतिकपायपोगाः पम्मयन्धरतय रति प्रमिड्डि रिहतु प्रारम्भादय स्ते मिरिता इति मपमविरोध? उच्यते। भारम्मपरिपहशब्दापा योपपरिपको पोगानां तपस्या शपपदेस्तु पपन्योतुपरिग्रहः प्रतीयतरवति तत्र सम्यग्दृष्टीना चतस्रएव मिथ्यात्वानावात् , अपाणास्तु पचा पि सम्पम्मियात्वस्य मिप्यास्येने वा विवक्षितत्वादिति ॥ सवेसमाठमाइत्पादि ५ प्रमस्य निर्यचनचतुलग्या प्रावमाशियप्त निपदझवपसार तत्यणजेतेमिच्छद्दिष्ठी तेसिणपचकिरियाठेकजाति तजहा थारनिया जाय मिच्छादसणयश्तिया एयसम्मामि च्छद्दिष्ठीणपि सेतणठण गोयमा। णेरड्याणनतेस समाउया सभेसमोवयसगा गोयमा णोइणठेसमठे सेके स्वमियो क्रिया होये । अपचसापदिरिया । पपपल्लाच मितिम प्रभाव वनिया कमवधादिकारण पप्रत्यासानकोविमा । तवरलेते मिष्यविही तिहा पोत तोन पचमाहि मिचाखोहे। तेसिषपविरिमापाकसति तदा पारंभिया जापमियादसमपत्तिया । तेने पाचविगामे तेकडे पारमबोगिया स्थानिय सरनो पव पूठितोपरे बहया यावत् चोचने मिषाटन कारबहे बहनो ते मिप्यादयनप्रवपिको पहिये ५। एवं समामि पशिनपि । म समगारोमेपपि पास 1 मियष्टोने मिप्यालेसरीत विषचा वोघो। सेतेगोसमासमा । तेमाटे हेगौतम मारो सगसा समति मापतमाही । बसो मौतमपद-रायाभतेससमाजवा । नारको भगवन् । सममा बरोबर पापसावंतछ । सम्वेसमोगवसगा। सगमा सरोषा जप नाश एकममें अपनदि भगवत कोहे-मायमा । गौतम पाइप ममा । एअध समबनी युतमाहीं । मेवेष मिते एवबुपा । ते मामाठे मरवन् मा नारको ममता समाउया ममावसगामी उत्तर । गोयमा । गौतम! रेरायाचमिापनतासमहा । नारको बारेमषारे समातेवाई- परगयाममाठमासमाश्ववगा । बेगनायव नारसो सरोपे पाडस प्रिम मोर मसानपने पात्र पनेअपनापरि वेज बोष एवं समज - प्रमापायुपो पुगपपोत्पना इतिप्रथमनः, तेव दमयर्पसहसस्थितिपु मारके येक प्रथमतउत्पक्षा प्रपरत पथा दिति द्वितीया, अम्प पिममा पुमिपद पेपि रायपसहरसस्पिति फैपिच परदशवपमहलस्थितिपू त्पति पुनयुगप दिप्तिवतीय , कषि सागरोपमस्पिसय , केपितु दशय पसरसस्पितप इत्येय विपमायुपो विपममेव चोत्पमा इतिचतुर्थः पर समाधा-पाहाराम ३ समा सम्मेवसेतायलेसाए । पेपरएकिरि पार पाउपश्यवत्तिपउनंगी ॥१५ प्रमुरफुमाराप मते ! इत्यादिमा असुरकुमारमकप मानारादिपदनवकोपेत सूषितं , तब नारकप्रसारणपोय , पतदवार जहानेरामइत्पादि । तत्रा पारगमूत्रे नारगमूसमानेपि नावनाविशेपेस सिरयते , असुरकुमाराका मस्पशरीरस्य भवपारसीयारी णठणनतेएयवुच्ह गोयमा णेरइयाघउचिहा पणत्ता तजहा थत्येगहयासमाउयासमोवयरमगा श्रत्येगइया समाउयाविममाववणगा थत्येगइयाविसमाउयाधिसमोषधणगा शत्येगइयाविसमाउयाविसमोवयणगा सेतेणठण गोयमा । असुरकुमाराणनतेससमाहारा सम्झेसमसरीरा जहाणेरड्यातहानाणियहा णवर कम्म पनावे ते ममामा समापपपना वहावे एपरिसभामा ।। प्रत्यगाया ममाया रिसमापनमा। पाए भारकोमा घोष सरी पावशे निम जीव दगमाम्रबपने पाउपा विपम अपना एपपहिसेसमये उपना गोवा बोजसमा पमग ममयांतरे सपनों एवोधाभांगो २ । प्रायेमया 8 विममाठया समागमणगा। सापक मारकोनाजोव विषम पाउले जिम कामोव मानापने पाउसे गोषो मारमासप पाउसेप ने ममये उपनावे एपौवामांगा है। प्रत्येममा पिसमाउदा विममाषषषमा। केतसाप मारवोगा बीप विषम पायुक्षेनिम एवादनसासव पने पापने एकसागरापममे पाबुरे उपनापपि विषम पवपहिसे समये उपना योगा ममवातरे पनी एपोषाभायो । मेरो मोयमा । पेप गौतम । नारको सगमा समाख्या समावसगा नहीं। हिये मौतम पनुवमषो पसरजमारमा प्रश्न परेरे-प्रसुरामाराव भंते सम्बेसमा पारा । पमरमार हभगन् । सगवा सरोपापातारपन्तए । सम्पेमममगेरा । मगचा सरोस गरारे त्यादि तिहां प्रसुरामार प्रबरपविणे - रापहया, अपन्यतोगुसासयमायमानत्व' महापारीरत्वम्सू कर्पत सहरमाममावत्व मुत्तरवैवियापपया स्वस्पशरीरस्य बघन्यतो गुलपयनाम मानव, महावीरस्वतू सतो योजमसमानत्वमिति तप्रेते महासरीरा बतराम् पुनसा नाहारपन्ति मनोनपरसबाहारापेषया देवा ना प्रसोस्पात्मपानव मपानरपेक्षपाच शावमिदंसो वस्तूना विधीयत ततो पझरीरमासाहारपदसापेपया पतरां सो ता माहारम्तीस्पा रिमाम्यत् अमीत्त माहारपम्ति प्रमीत मुचम्ति त्यत्र ये चतुर्यादे रुप योहारपन्ति स्तोकसप्तकादे पोपरि मन्ति तानामित्या जीव मित्युपते, उत्तपतो ये सातिरेपरपसारस्पो परिपाहारयन्ति सातिरेवपासपोपर्युनसम्ति ता मसीहत्य तेपामस्पकालीमाहारोमासस्वेन पुनः पुन राहारयन्तीत्यादि व्यपरेशविषयत्वादिति तपा अस्पगरीरा परपसरा मुद्गला माहारय स्यसम्तिचा स्पधारीरस्वादेव यत्पुम स्ते पा वादाशिवत्व माहारोगासपो सम्महा परीराहारोधासाम्तरासापेक्षया बसमान्तरालस्वा तत्र सम्तरासे सेना हारारि पूर्वन्ति , तद यणठेस्सापरिवणेयहा पुझोषवणगा महाकम्मतरा विमुख्यसतरा थपिछलेसतरा पच्छोपवणगाप सत्या सेसत्तहेय एषजायधणियकुमाराण पुढविकाइयाण नतेससमवेदणा हतासमवेदणा सेकेणठणनतेसछे गपर पापा । पहारा ता मापिरचा । मिम तेनारकोना प्रकरपनेविप पाया पनि स्वामिशेष पसुरकुमारमें घरोरनी पपपीते मय पारगोग सरोर पपसबो अमुरुमो पसबातमो भाग मान पने महायरपर्ष घटयो साताप प्रमान उत्तरक्रियगरोरनी पपेक्षा प्रापर्क पथयो युसना पसखातमाभाम महाशरोरप उत्यो सचमरावन मान विहां षे महामरिक्त ते वर्षापुरतम पाहारे मनोसचर पाहारगी प्रपेवाये। पभितर पाहाति स तुवादियोपाहार। भिन्नर चसमति । ते साततोग पारि पाहार परमो ये साधिकपषमा में पाहार मारिप बमासमें हमादिक नारकोनो प्रपेचाय पसरणमारने विपरीतकापा तानि नारकी ने पूर्व उपना तेरपरकमक सतरवण धमतरतमो गया पने प्रमुगमार नेपालपमति । महापसतरा प्रविमुवसतरा प्रविसुइसेसतरा पयोषपसगापसत्या ! मसकर्मी पगार भ . . न्यायम्तीत्यव विद्यावादिति, महाशरीरामा मप्यारोपासपो रम्तरासमस्ति। किंतु तदस्प मित्सविवराबादेया मौत मित्युक्त सिक्षम महामरी रामा तपा माहारोनासपोरस्पाम्तरत्व प्रहपशरीराणान्तु महामतरत्व' यपा-सौपर्मदेवानां सप्ताहस्तमानतया महाशरीरारा तमोरमार अमेव वषमरत्रद्वयं पत्तइपम्प, अनुप्तरसराबाद इसमानतपा पशरीरावा प्रपतिंच वर्षसासापि वपतिमदेवच पचाइति, एषाम्न महा शरीरापा ममीसाहारोजानानिपानेमा स्पस्पितिनाव मयसीमते इतरेपान्तु विपयपो वैमानिकववेवति, अषषा ; सोमाहारापेरुमा पानीपत मनुनमय माहारयन्ति महाशरीराः पर्याप्तशावत्पापा उमासस्नु पयोधमानेनापि मवन्परिपूर्णमवापतया पुना पुम रित्युच्यते, अपर्याप्सकाव स्वामा स्वरपारीरा सोमाहारतो नाहारय त्योमाहारतएवा परमादिति कदाचित माहारपती पुचते , सडासापर्याप्तकावस्थायाम्म मो म म्यन्यदातू असतीत्यतापते पाहत्योसम्मीति सम्मवमतेसाठपरिवरसेपवार्मत्तिा यादीनि मारकापेपयाविषयपेशवाभामि तपादि नारका प पूर्वोत्पन्ना लेल्पकाम धतरवर्णानतरलेदपा तत्ता प्रसुरास्तु प पूर्वोत्पधा ते महावाबो मुद्धवा पमुमतरतेमायेति कर्ष पेरि पूर्वोत्पधा भरा ते ऽतिपदामातपित्तस्था मारफान् भने प्रचारया यातनया पातयनः प्रभूत मग्मुम शर्मसम्धिन्वन्तीत्यतो निपीयात ते महाकमाणः प्रपया ये यदायुप ने तिपनादिमायोग्यसम्ममरुतिपन्धना महाकाण , सपा प्रमुवर्ण मनसेश्याय ते पूर्यो पकाना रिजोलवा चुमसम्मका मुनो वझे लश्याच प्रसतीति, पयादुत्पमा स्वमदापुपो स्पफम्मांगी पातरफर्मणा ममन्धात् शुनकम्मपाम पभरसेग्मापतर तेविम पर्व उपना त घी परपना दपको धो पसभकम संपेक्षे तेमाठे महाजी पवा तियच प्रमुखमा पायु पामो तेमा वर्मपत तया पराभवन प्रयमसेम्षा ते परिमा उपमा गुभवम शोषमा माटे पशेऽपना तेरे तिर्यपादियमा पाषु वाधीनपी प्रवका सुभषमयोगवया भयो तेमाटे वादिषगुभवेदना मारिष नारगोनो परे पस रकमारहे तपापि भावनाविप विगवशे ते सहेरे--विक्षेसनोभूत ते मापदनावत , सप्नवरेव । बाहोजतनवतो अबतकातोरसंभवा ॥ १ ॥ अस्मादिति ? दुष्यते येवात्तमानिका नारका से वायुमवासस्याम्त पहर्तन्ते भ सातमेवच तदापु रत सत्कपतोहादशमौप्तिकाशून्यकालापेपया मिनबासस्या नन्तगुरुत्वानावप्रसङ्गादिति भाष-विकाररमादिका मेरा यावहमम्मिसमयम्मि । तेष्ठिरकासस्सते नम्हासवेसविष्यति ॥ १॥ सवत्योधेप्रमुखकासप्ति ॥ मारकाणा मुत्पादोद्वर्तमाविरहवासस्पो स्कपतोपि दादशमुपूर्तममावत्वात् ॥ मीसबालेणवतगुरेति ॥ मिमास्यो वियक्तिनारपजीवमिर्लेपमाकासो शून्यकासापेपया मिनतगुवो भवति , यतो सौ मारकेतरे घागममगममदासा , सब प्रसवनस्पत्यादिस्पितिकासमिमितः सननन्तगुगोनवति प्रसवनस्पत्यादिगमनागमनाना मनम्तत्या त्मच नारबमितपमानालो वनस्पतिकायस्थिते रनामागेवर्ततइति उसम्म - पोवोपमुलाकातो सोवकासेबवारसमात्तो । सत्तोयमपत्तमुनो मीसोनि मेषशावासो ११५ प्राममपगमवकासो तसाइतहमीस्ठिपवतगुगो । प्रहनिम्लोवपक्षासो प्रगतमागेवपदाएत्ति ॥२॥ मुखकासेप्रपतमुरोति । सर्वपां विवचितकारकजीयामा मायो वनस्पति घनम्तानम्तकास मवत्पामात् एतदेव वनस्पति घनम्तानम्तकासावस्थान जीवाना नारकमवान्तरकाल मकटो रेमिता समयेइति उचा - मुझोयनपतमु सोपुणपायवरस्सत्ययार । एवषयवारय नवतरदेसियवेठति १५तिरिक्सजोरि कालस्स कयरेकयरेहिंतोश्चप्पेवा पचाएवा तुल्वेवा विसेसाहिएया ? गोयमा ! सचत्योवा सुग्णकाले, मी वा यो हारको बोहताय । गएमा । पहिोय । तवा । सरोमाहोय । विसेसारिएगा । विशेषाधिकहोय इतिपय उत्तर । मोरमा। गौत म ! भषमाया प्रमुपलासे । सो पारो भयम्बकाशनारकोना बोपना सत्पातपान हात्तनावासनो विरा प्रवृष्टी वार सुसमाचे तेमाटे सेरमो । मोमकामेपवतपुषे । मियबास प्रमतमोरे मियनामविरक्षित नारकबोवनिर्वेपनाबास ते प्रबकासको अपेक्षायें पनतमुपी माटे नारकीयो पीजोगतिविषे चाव पाप ते पार पमपनमयादि स्थितियार मिथित बयो पनतगुवो पुरे ते मित्रवासबो । सुपशावेमपतगुये। सूच बाम पनतगुवाहे ते पिम सबने विधिवनारसलीगने प्राये वनस्पतीवायनेविपे प्रमतवामरावामो तेहीच बनस्मतोनेवि भगतवासराय ते ।

पाय सवत्साये अमुसपासइति । सचाम्तमुत्तमात्रः, प्रपत्र पद्यपि भामाम्पेनतिरमा मुक्त, सपापि विक्सेन्द्रियसभूचिमामामेवा वसया, ते पामेया म्तमुत्तमानस्प विकासस्सोक्तत्वात् पदार-भिवमूडतोविगति दिमसुसमुधिमेमुविमएव । एकेन्द्रियावातू वनोपपातविरहानावे न भ्यकामानायग्य पाहप-एगोपससमागो वहाव्यहोवधायमि । एगमिगोपरि एक्सेसेसुविसरव १॥ पचिपादिपु पुन भयुसमय मर्मरोग्यप्ति यवना दिखानापति, ॥ मिस्सकाले अपतगुगेप्ति पनारमवत् शून्यकालमा तिरया नास्त्येव यतो वार्तमामिकसाधाररावनस्पती मा नसामा स्थाममध्यन्नासि ॥ ममुस्सदेवावं पारणेत्यापति । प्रशून्यबालसापि वादामुत्तममासस्वा दवगाथा -एबनरामरापवि तिरिमापनयरिमविसुभदा वनिम्गयामते मि मायबममताठपत्ति १५ एपस्सेत्यादि व्यक्त किससारएवा वस्थान वीवस्य स्या दुत मोपीति सफाखेचणतगुणे , सुणकारेश्णतगुणे , तिरिरकजोणियाणसष्ठत्योषे थसुणकाले , मीसकालेशणतगुणे मणुस्साणयदेवाणयजहाणेरडयाण, एयस्सण नते णेरड्यससारसंचिठणकालस्स जावदेवससारसचिठणका नारस भवना पनतबामराव ते नारवभवना पनतवास उलटो कामा। तिरिमजारिया रसपनाये । तिय चमानिकने सपनोव अयूबवाच ते विमपतमुत्त मात्र मत्र ययपि मामाम्मे तिय रने पनोई तवापि पिनचंद्रो भने सचिमने वारयो एगोमेव प्रतसमत्तमात्र विरावासकामो तवा एवंद्रातो न उपपात पिराने प्रभावेवरो। भसुन्धमा । पम्पकाममो प्रभावहोबछे पषियादिवविषयसोपरासमवम सरोबार तिनको विस्तापभावहे। मोमवासेपचतगुग्थे । नारमोनोपर यम्यवासमा तिय चने कोष माटे पत्तमान समय साधारण पनस्पतीना मोक्ने निधो पप्पाने बोजा स्थान पाईनमोहे । ममापय देशपय बहा रेरावाच । मनुच तवा देवने विम भारसोनवा विमनायो पाने पनि भगवान वारमुइत्तमोथे। एपष्म पमते पेरायसमारसचिानकासम्म वाष देससारसपिकासम वावबिसेसाहिएषा । पहने हेभमपन् । नारको ससारमपिानबासने यामत्सन्दें तिय पससारसविणवायने मनुषससारसचिवासने देवससारसविरमासमे दहा हा यकी पोजाहीय - तपयदेव । जइहोन्नतनवसो प्रपतकातोरसनवर ॥ ९॥ यस्मादिति चे? दुध्यते येवाप्तमामिका मारका स्ते स्थायुपकासस्याम्त सहर्तन्ते भ सवातमेषच तदायु रस उरयपतोद्वारसमौप्तिकाभून्यकालापेक्षया मिश्रकालस्पा नन्तयुगवानायप्रसङ्गादिति भाष-विकारण्मादिका मेरा यावेरमम्मिसमपम्मि । तेरिबासस्सते जम्हासवेसविनति ॥ १॥ सवत्यो अमुमकासति भारकावा मुत्पादोहर्तगाविसकासस्पो स्कपतोपि द्वारगमुममापस्यात् ॥ मीसकाप्लेअवतगुरेति ॥ मिनास्पो विषषितमारकवीवमिसेपमावासो सम्पफासापेक्षया निन्तगुमो प्रपति, पतो सौ मारकेतरे धागमनगममकासः, सच प्रसवनस्पत्यादिस्पितिकासमिश्रितः सनमन्तगुगोमवसि , प्रसवनस्पत्यादिममभागमभाना मनन्तस्या स्मथ मारपनिलेपनाचासो घमस्पतिकायस्थिते रनन्तमागेवतंतइति , उत्तम- घोषोभमुपकासो सोवकासेग्वारसमुत्तो । तत्तोयवतमुको मासोनि मेवपाकासो ॥१५ भागमवनमाकासो तसाइतमीस्टिमवतगुगो ! अहमिवसकालो पणतमागेवपहारचि ॥२॥ मुष्णमासेमपतमुरेति । सधैया विवपितमारकजीवानां प्रापो वनस्पति धनम्तानन्तकास मवमानात् एतदेव बनस्पति घनम्तानम्तबासावस्पान बीयाना नारकनवाम्तरकाल उस्कटो रेगितः समपेइति उत्तम- सुबोपनपतमुसो सोपुरापायवरस्सरगया । एवषवपसारय अवतरदेसियति ॥१॥तिरिक्यानोति कालस्स कयरेकयरेहिंतोश्चप्पेवा यचाएवा तुल्लेवा विसेसाहिएवा ? गोयमा ! सइत्योवा शुसुणकाले, मी पावसावको बोगहार । गहुएवा । पोहोर । तमेवा । मरोषाहीम । विसेसाहिएवा । विद्यमाषियोम रतिपय उत्तर । भीममा।गौत म ! ममवावा पमुफबा। सवयो धागे अगम्यवासनारकोना पोवना उत्पादकास हातनाकासनो विरा चल्नुटो बार मुत्तनाचे तेमाटे तायो । मोसमामप्रपतगुथे। मियवान पमतगुरोरे मियनामविषधित नारवमोवनिपमाकास ते अम्बबासगो प्रपेचावे अनतगुपो बेमाटै भारतीयो पौधोगतिमविप बाद पाव ते बाब समपनलम्बादि स्थिति चार मिथित बको पनतमुचो पुषे ते मियवासयो । सुसवारीपत्ततगये। गूब काम पमतमुवा ते किम सपने विवधिवनारसनोवाने प्राये वनमतोबायविष प्रमतवाचवायो तेहोष वमस्मतोमेविष प्रमतवासरह से - ति ॥ १॥ मोऽस्ति पेपा तेनवा परति य ते मियोगिका मानियोगिकावा तेच म्पयहारत परमवतएव मंत्रादिप्रयोत्तारो यदा-चोठयमूक म पमिबापसिसनिमितमाजीवा । इनिरससायगहन परितगंभावस्वरसि ॥१५ कौतुक सौनाम्पाद्य सपना पूतिषम्म परिताविभूतिदा न प्रमाप्रश्नच म्याविधादि । ससिमावति : रमाहरणादिसासियता फिविधाना मित्यार वसवधावनमारति । दशम सम्या व्यापन बष्ट येपोत तपा तेपो मिवानामित्यया ॥ एएसिब देयतोरसु उमपत्रमाणावति । अनेन देवस्वा दम्यत्रापि केचि दुस्पद्यन्तहति प्रसिपादित॥ विरादिपमजमाव जावेष मयसमासु उकोसेवं मोहम्मे कप्पा कवि दाह-विराषितसयमाना मुत्कव सौपने काप इति यदुत त स्वय पटते द्रौपद्याः मुफुपातिमानवे विरापितसपमाया ईशानउत्पादमवण ? दित्यबोध्यते, तस्सा सबमविराधनोत्तरगविपया बकुशवमात्रकारिता शानिगियाण सलिंगीदसणयावणगाण एएसिणदेवलोएस उववजमाणाणकस्सकहिउयवाए पणते ? गो यमा ! सजयत्नवियदष्वदेवाण जहणेणनवणयासीसु उक्कोसेण उवरिमगेयेजाएस, विराहियसजमाण जहोणसोहम्मेफप्पे उक्कोसेणसहठसिझविमाण , विराहियसजमाण जहणजवणधासीसु उक्कोसेणसोह रिसम्पायो भार एनसे विमान १४ । एएमुरदेवनोएसउबवनमारावसबविवाए पसत्ते। एहने हेमगवन् । देवसोवमेविषे लपवता में करने विम्याम्यानमपि वपोचायो ? पतसे देवगति टासो गोवाम्मामबनविप परियोएवाजपचे सो अपायो रतिप्रश मगवतफा--गो समा। मौतम । असत्रयमविपदबदेवा । पमयतो मषिकद्रव्यदेवने । पापेभवषयासोस् । वपन्धनको भवनपत्तोमे विर्ष अपवयोषामा । उ जामे उपरिममेवेमएम् । परसाको जरिये गयेयके एतसे नवमे पेवेरवेजपचे। पविराशियसंपमाप । पमिराधित साधने । पासोर बपे । समन्यवको मौषममामा प्रसादे पषमा होम । मासेरमवामिविमाने । वरपको सर्गपसिा विमाननेविषेषाम अपर्व। विरापिय मंत्रमा विरारित माने पारितविरा ताने । वा भवरणामोसु । परमो भवनपतोनेवि चपजवोतोय। उसेपंसोरकप्पे । घरबाट - शिपसवमासजमावति । उक्तव्यतिरेविता ॥ असमीपति । मनोलधिरहिताना मगामनिदरावतो, तपा। तावसायति । पतितपायुपमोग वां वासतपस्विमा तथा बदप्पियाति बन्द परिहासः स यपामति तेमवा ये परम्ति ते कन्दर्पिपा कादप्पिकाया व्यवहारत घरपबन्तरव बन्दाकोलचादिकारकाः तपाहि मापा-काकहकहस्सहसय पादप्पोपणियापखावा कंदप्पकहाकाय पदप्पुवएससंसाय १॥ मुममयक्रमबदसत व्यकिरपायकत्रमाई ि। ततबराबरवा इसापरोप्रत्तपापाइसं ॥ २ ॥ पायालासेपुरा सबपरमेरहस्सरग्रहो । माया वियोवरुए पुखरमुरतूरएपवेत्यादि । ३ । जोमवविएया सुधप्पसत्यासुभावपंकृण । सोतविरेसुमार सुरेसुनाइचरणी गति ४ ॥ अतो पारदर्पिकामा परगपरिवायगारति । परमपरिवावका पाटिनश्योपनीविन खिदछिन , अथवा परकाः फछोटकादयः परिमाजकास्तुक पिसमुनिसूनको तसोपा ॥ विधिसियासति । किरिव पाप तदस्ति येपा ते विस्विपिका सर व्यवहारत परमवन्तोपि सामाधवर्मवादिमी य पोत-मावस्सकोवसीय पम्मायरियस्ससाइसापूर । माईभवणवा फिनिसियमाषपंकुमत्ति ॥ १॥पत सोपी तपा ॥ तिरिझियायति । तिरो नवाबादीनां देशविरतिनाव भाजीविपावति । पासरिठविशेपा नाम्न्यपारियां गोसालबशिष्याला मित्पन्ये प्रावीवति पा ये प्रविये किसोबतो सम्भिपूजास्यात्यादिनि सापयरवादीमि वे भाजीविकास्सिात्वना प्रोविका भत्तोपां , तया ॥ पानिठगियावति ॥ भनियोषम विद्या मंशादिनि परेपावधीवरबादि पनियागः सच विषापदार-दुविहोजसुअभिगो दोनावेयहोयमायो । दवम्मियोपयोगा विन्यामतायनायमि जमाण थसमीण सायसाप कदप्पियाण घरगपरछायगाणं किछिसियाणं तिरिच्छियाण शाजीयियाण जतो हासो मसखरो पटपमानापासारने ८ । चरमपरिवारमार। रिडिमा पिसमिना सवानीयाने ८। विमिमियाप । पानादिना पापाटयाने । तिरिधिमाष। निर्मच गार प्रमादि यावकामपासे तेहने ११ । पाबीपियार । पापोषियेष पपपा पोशासाना मिष्य ताने १२ । पाभिप्रागिणार ! सारे रियत बका मंत्र मारिखना पसार १५ । समिगौदसपवावषगा। रजोरादि सास बेपछे प , ति॥१५ मोऽस्ति येषां तेमया परति य ते मियोगिवा पानियोगिताधा तेच व्यवहारत घरपवतएव मनादिप्रयोत्तारो यदाह-कोउपभूईक ग्मे पमित्रापसिएनिमिप्तमाजीथी । इमिरमसायमा प्रविसमानावबगरप्ति बौतुक सोनारपाद्ययं सपनप, भूतिकम परितादिभूतिदा में प्रमानव स्वमविवादि। सतिगाति । रगाहरणादिसामुलिवतर्ता विविधामा मित्याह दसरवावबगारति । दमन सम्पक च्यापन बष्ट पेपति तपा तेषां नितयानामित्यप । एएसियं देवसोपसु सबवजमावावति । अनेन देवत्वा दन्यत्रापि केपि दुत्पद्यन्तइति प्रतिपादित ॥ विरादिपमनमा बस्येव प्रवपदसु उकोमेयं मोहम्मे वये का कधि दाह-विराभितसयमामा मुस्कर सौपमै करपे इति यदुक्त तत्वम पटते द्रौपद्याः मुसमातिगत पिराधितसपमाया इमामवत्पादमयता ? दित्यत्रोचते, तस्याः सरमविरापमोत्तरगुपयिषपा यशस्वमानकारिंगी शानिगियाण सलिगीदसणवाघणगाण एएसिणंदेवलोएस उयवजामाणाणकस्सकहिउयवाए पणते? गो यमा ! सजयत्नवियदधदेवाण जहणेणनवणवासोसु उक्कोसेणं उपरिमगेयेजाए, विराहियसजमाण जहणेणसोहम्मेकप्पे उकोसेणसवठसिझविमाण , विराहियसजमाण जहणजयणयासीसु उक्कोसेणसोह मियायो भर निम्न ताने १४ । एएमुखदेवमीएसध्यवममापारमाविमार पपत्ते। एहने ममपन् । देवखोजनेविषे उपचता ने विणायामकरिव चपनोवो ! एव देवमति टाहो मोनाखामबनविय पपिएसपने सो पपामो इतिमा भगवतवारपो समा। गोतम । एसवयमविपदबादेवाच । पसयतो मविवादबदेवने । पासे भवनवामोस । वयसबवो भगनपतीने विष चपनवोकहा। उ पासपरिमर्गवेधएम् । रबरको परिसे गवेमय एतसे नवमे प्रवेरपेअपर्व। पविराशियसंपमापं । पपिराधित साहने । पापमोरो बपे । पन्धवषो सीधमनामा देखावे उपयवा सार । वासेपमयासिविमा । बायको सर्वावसिन रिमामनेविषवाय अपचे। विरापिय मजमार । विराजित साउने पारिवरिराधे ताने । वा भवपामोसु । अधन्दको भवनपतोनेविप वपनपोहोय । प्रोसेसोरतापे । एवष्ट हिपसनमासबमाति ॥ उत्तष्पतिरेविता । असनीवति ॥ ममोप्सम्धिरहिताना मममनिर्जरावा, तपा । तावसाति । पतितपत्रायुपमोग बता पासतपसिना तपाबंदप्पियाति बन्दपः परिक्षामा स ययामस्ति तेनवा पे परमित ते पन्दप्पिका बान्दप्पिकाया व्यवहारत परमवन्तएव बन्दर्पकौतुच्यादिकारकाः तपाधि मापा-काबबाहस्साहस कदप्यो प्रगिपापघ्यावा कंदप्पमहाकाय फरप्पुवरससंसाय १॥ गुममपनवपदसब सकिरपायकामानि । ततपरोमानद इसइपरोप्रत्तवामहस ॥ २॥ वायाकुरसेपुरा सबपदमबहस्सएचसो । माषा पिाणीवहर कुरमुत्तूरएचवेत्यादि ॥ ३॥ बोसपठविरया सुभप्पसत्यासुमावानुसइ । मोतधिमुगन्धा सुरेसुनवरगतीपोति ॥ ४ ॥ अतस्ते पाकन्दर्पिकाबा परगपरिवायनावति ॥ चरकपरिणाववा पाटिनैपयोपजीविम सिमिम, अमवा परबार माछोटकादयः परिग्राजकास्तु क पिसमुभिसूनबो तसोपा । शिद्विसिपायति । विस्विप पाप तदस्ति पेपो ते फिरिवपिपा क्षेत्र व्यवहारत घरपवन्तोपि प्रामाधवर्णवादिमो य पोच-पावसोवतीच धम्मापरिपस्ससाइसापूर । माईचवसवाई विविसिपमावरपुपात्तिा १.प्रत सोपी तपा ॥ तिरिम्भिपायति । तिरा भवाचादीनां देशविरतिमावां ॥ पानीवियावति ॥ पासकिविकोपार्ग माम्पपारियो गोमासमशिष्याणा मित्पन्पे पाजीवति था ये अविवे विलोक्तो सब्धिपूषापात्पादिनि सापपरणादीमि ते भाजीविकासितस्वमा जीविका प्रतोपो , तथा पानिठगियापति ॥ पनियोजन विद्या मधादिनि परेपावनीकरबादि प्रतियोगः सब द्विरा, यदा-सुविहोरनुअमिठमो दबनायेयहोयनायो। वधग्मिोरमोगा विज्चामंतायनायमि जमाण समीण सायसाण कदप्पियाण घरगपरायगाण किछिसियाण तिरिच्छियाण शाजीयियाण पेमतो हासो ममपरी परपबवाना पापकारने ८ । चरगपरिणादगा। चिदंडिया इपिममुनिमा सवानोसाने । बिमिसियाप । प्रामादिमा पावाटबासे ताने १ । तिरिविवार। तियर मार प्रमादि यावधमपास केरने ११ । पानीविरार । पायविशेष पथवा गोशासाना शिष्य तेहने १३ । प्राभिषागियाप । माहारे पारिवयत पवा मत्र यत्रादिवना परवार १५ । मचिगोदसवमावणगा। रमोहरपादि सानु येपछे प निमोसित येपा, तेमवा: परति य ते मियोगिता प्राप्नियोगिवाया, तेच व्यवहारत परग्यतएव मवादिमयोतारो यदा-कोयमूव म्मे पसिनापसिपेनिमितमाजीवी । बरससायगत परिसंगमावपपइसि ॥९॥ कौतुक सौप्नाग्याधर्ष सपनफ भूतिकाम ज्वरितादिभूतिदा में प्रनाममप समविद्यादि । मलिगारति ॥ रजाहरमादिसालिगयता विविपाना मित्याह ॥ दसखवावागापति ॥ वसन सम्पन व्यापर चष्ट येपात तपा तेषां निगवानामित्पर्षः परमिप देवतोपमु उववस्वमावासति । अनेन देवत्वा दम्यवापि केचि उत्पद्यन्तइति प्रतिपादित ॥ पिराहिपमत्रमाव बहर नवयवासु उकोमेर सोन्मे कप्ये पाकवि दाइ-विरापितसयमाना मुत्कर्पत सौधर्म अपे रवि यदुक्त त कर पटते द्रौपयाः मुडमालिगानवे विराभितमपमाया ईमानतत्पादययपा ? दिपत्रोच्यते, तस्याः सनमविराधमोत्तरगुणविपया धकुशास्वमात्रकारिता थानिगियाण सलिगीदसणवावरणगाण एएसिणंदेवलोएस उपयजमाणाणकस्सकहिउयवाए पणते ? गो यमा ! सजयत्नायियदधदेवाण जहणेणनयणवासीसु उक्कोसेण उपरिमगेयेजाएस, विराहियसजमाण जहणेणसोहम्मेकप्पे उक्कोसेणसछछसिझेविमाण , विराहियसजमाण जहणेणनवणधासीसु उक्कोसेणसोह विसम्मत्रायो भये एतसे निमम तेहने १४ । एएमपदेवमाएपग्यवतमागायमविवाए पपत्ते। एमने रेभमबन् । देवसोकोविये उपवता मेवानि विसापानको चपनवाकयो । पत देवमति दामो मोवापानकनेवि पपि वपश्चपर्व इसी बायो रतिपय भगवंतवा-पी यमा । गौतम ! पमवयमविरदमदेवार । पसयतो मपिबावदेवने । वासेपभवपवासोस । अपवयको भवनपतीने विप वपनवोपानो । उ बालपंडपरिमषेयरमु । जसरी परिवे गवेयके एतसे नामे प्रवेयवेनपरे । पविरारियर्सबमा । पपिराधित साप्ठने । पारेचसोहम्मे गये । बधश्वरको सोधमनामा रेपसाचे उपवमा रोय । समासेषमवासियविमा HAष्टको सबमिह विमानमेविपचाप छपथे। पिराहिय मंत्रमाप सिरित माने पारिपविरा ताने। ताप भवपदासौम् । वन्यो भपनपतोनेविषे चपजयोलोव। होसेसोमवाप्पे । सरकार - - - , प्रविण्यासताकरणस्य दयितेति कतस्पच कर्मर ययादयो भयम्तीति तान दर्शयन्माइ ॥ एवधिमत्यादि ॥ध्यक्ष अघर चय प्रदेशानुनागादे पंदन मुपचय सदेव पौन पुन्येम अन्यत्वा - चयन कर्म पुगसोपादानमात्र उपचयनम्तु चितस्पा वापाकात मुसा वेदनाम निपेक. सधै प-प्रपमस्विती बहुतर बर्मदलिय निपिबति ततो द्वितीयाया विशेपहीन एक पायदुरुष्टायो विशेपहीन मिपि प्रति उत्तान-मोत्तूपसय भवाई पढमाइठिनातरराख । समविसेसहीर वाघुकासतिसवासि ॥१॥ उदोरण मनुदितस्य परमविदशेपा दुदपप्रवेझन पदन मनुनयन, मि बर जीवप्रदोभ्य कर्मप्रदझानापातनमिति राव सूधसङ्गामापा मयति सापगाहा । कठपिएकत्यादि । माविताच नवरा माइतिरत्ति। वेमाणियाण , एषकरिस्सति , एत्यधिदक जाय वेमाणियाण, एष चिए चिणि चिणति चिणिस्सति, उपचिए उयचिणिसु उयधिणति उपचिणिस्सति , उदीरेंसु उदीरति उदीरिस्सति , घेर्देसु वेदेति येदिस्स ति , णिजरेंसु णिजारेति णिजरिरसति , गाहा ॥ कचिएयउयचिए उदीरियायेदियायणिजिणा । था परिम्पति । परिमत्तमामवापति रमवमारपीपादि पावत् पैमामिकपरन्तदाब वावा, म पागामिवाचेपपि बरसे । एत्वबिदापोवामवेमा पियाचा परिपनागतबासे नारयोपादिदो गावत् पैमानियताई दर पायो।एपपिएम पय ते प्रदेश पनुमागादिषयो पधारयो । चिगिम् । वे प्रतीतवास विमा । चिसति । वत्तमानका पियो । चिनिस्मति । प्रनागतबारे विषसे। उपपिए । उपचय तेशीष वारपार पुष्टपरयो १ उपपिपिम् । प्रतीतबासे उपचय बोगे २ । सवपिपति । वर्तमानबासे उपचम वरहे ।। उपचिनिमति । पनागतवाचे उपचय करमे ४ । उदोरेंस प्रदीरा ते पचहत्वपापाकमने करपविय उदय भागोये सतीपा १ । उदोरेति । सटोरशे। उदौरिसति । उतारने २ । पेसु वेदेति वेदिसति । पेदन अनुभवम् भागप इन्वर्य प्रतोतका वेपूर वत्तमानकासे वेदेछे २ पतीतमासे घेतले ।। पिवरेसु पिचरति पिबरिस्सति । निवरवो ते पोपपदेगयो कर्मपदेश दूरवरे, वा पतीतकासे निषया १ वत्तमानवासे निवरे २ पनागतवा निचरस्ने ३ । गाहा । हिवे पूर्वोच सयापीमाषा फतचितापविततपय । उतपत्ति । सामान्यक्रियाकालत्रयक्रियानेदात् । विमनेयप्ति । सामान्पक्रियाविरहात् ॥ पचिमति॥ उदीरितवेदितनिधी यो मारपदमाइतिमय पतिक्षितिपय विविधा मम्वाचे सूत्रय सवितोपवितान्युक्ता न्युत्तरपु पस्मानोदीरितवेदितनिधीसांनी ति ? उप्पते रुत पित मुपरित बर्म विरमप्यवतिष्ठत इति करमदीनां विकासप्रियामाधातिरित्त पिरावस्थानलघर लतवाद्यामित्य कता दो न्युत्ता म्युदोरपादीमातु मरिरावस्थाममस्तीति विकासवत्तिमा क्रिपामायव तान्यमिहितानीप्ति जीवा बाहामोहनीय कामवेदयन्तात्यु क मप ददनमारसप्रतिपादनाय प्रस्तावपप्या जीवावनतात्यादि । व्यक्त पर ननु जीवा काहामोहमीपफर्मवेदयन्तीति माग्निमीत फि पुना प्रशा? इथत पेदनोपायमतिपादनाचे उत्तन-प्रवनपिपविपन्छा बनतत्पमारप प्रत्यि। परिसेहोयप्रदुमा देउविसेसोवसनोति ॥९॥ मेदिताहिति ॥ तसी दसनातरमवरतीर्पिग्ससादिनि बिहामसिदै र्दिवचन र वीप्माया कारी शादिशतुनिः सिमित्याए सद्धि दितिएचउनेया तियनेयापच्छिमातिणि ॥ १ ॥ जीवाणनते ! कखामोहणिजाकम्म वेदेति ? हतायेदति । फहणनते ! जीवाफंखामोहणिकामयति ? गोयमा ! तेहिंतेहिंकारणेहि सकियाकखिया वितिगिच्छि परिश- पूर्वकमा कोज। कापियत्यधियाय सदोरियादिवायपिचिपा । प्रादितिएचसमेगा तिसभेनापभिमातिपि । १ । सोषी चिमो २ उपचय कोपा १ उदोरिया : वेपू निवसार पहिसा धत चित उपधित सरपत्रिवने पारभेद तोगवासपाची एक समुपये पपचार तेस्रो दि मेष पाने पिरपान पसान दीरित वेदित निवरित रतीभेदे तोमवारहोवबाग, पाने पिरवाइपवनानगरी पविष बोराचामोषमी यत्रम वदे मामा हिनिहना वेदनामारपपापानेवाले। वोवाभते पखामोहपिचं कम वेदेति । पोषोभमवन् ! माधामोहनीयकम वेहे । विषय | तावेदति । पार मोतम । पैरें। पाभते । सिप्रकारे भगवन् ! जोवानाडामाइपिल व वेदेति । भीष पांधामोहनीयकम वैद रतिपय उत्तर। गारमा । योतम । तेहितहिवारहि सबिरसवितावितिमिलिया। शिविरधारकरी मिप्पाखोमी संगतिवडो ववा परदम - प्रविप्परकास्तताकरमस्य दर्शितेति कतस्पर कर्मर ययादयो नवन्तीति सान दायमा । एवधिपत्यादि ॥ व्यक्त वापर पयः प्रदेशानुनागावे वंदन मुपपय स्तदेष पौना पुम्पेम भन्यस्वाहा - चयन कर्म पुगतोपादानमात्र उपचपनन्तु विसस्या पापाकास मुझा वेदनाय निषका सबै व-प्रथमस्थिती पातर वर्मदलिब नियिम्मति ततो द्वितीयाया विशेपटीम एव यायदुरुष्टाया विशेपहीन निपिम्पति सतप-मोत्यसग मवाई पठमावठिनावातरदख । समविसेमहीर जायुकोसतिसदासि ॥१॥ उदोरण मनुदितस्य परमविझेपा दुवपप्रवेझन बदन मनुनपन नि परम जीवादसेम्पः कर्ममदशामांशातममिति एप सूत्रसङ्गरगापा मवति साबमाहा कामपिएहत्यादि । प्राषिताच नवर पादतिरत्ति॥ येमाणियाण , एयकरिस्सति , एत्यषिदफन जाय येमाणियाणं, एष चिए चिणिसु चिणति घिणिस्सति, उपचिए उवचिणिसु उवचिणति उवचिणिस्सति , उदीरेसु उदीरति उदीरिस्सति , येसु वेदेति वेदिस्स ति , णिझरेसु मिजारेति णिजरिस्सति , गाहा ॥ कचिएयउयचिए उदीरियायेदियायणिमिणा । था परिम्मति । सोपवियत्तमानबासपचि मषनारकीपादि गावत् वैमानिकपर्यन्तमाय कावा, इम पागामिकापपि परखें। एत्वविदापोवायवेमा पिपासापरि पनामतकाचे नारयोपादिदों यावत् वैमानिकता पवावी।पपपिए। दम पय ते प्रदेश अनुभागादिषधी वधारयो । पिणिम् । से प्रोतबारिया । पितति । यत्तमानकारी पिपरे । चिनियति । पनागतवावे विषले। उवचिए । उपचय तेहोस वारवार पुटपरयो १ पपिसिम । प्रतीतबाले उपचय बोधो २ । ध्वपिरति । वतमानमा उपचय करे । उयतिथिम्मति । पनागवकासे उपचम बरमे ४ । उदोरेंस उदोरपा ते पाहदय पापावमने बरावि सरम पापोये उतीया १ । उदोरेंति । उठोरटे। उदोरिरसति । उठोरणे २ । पसु पेदेति पेदिसति । घेवम् अनुमवम् मानवव हबई पतोतबाने बेसूर वत्तमानकाले वेदेशे २ पपीता पेठ ।। बिखरसु पिबति पिजरिस्मवि । निषरको ते पोवनदेयवो कर्मदेग दूरबरे, पा पतोतवाले मिला १ वत्तमानकाचे निवरे १ अनागतबासे निवरसो ३ । गा।यि पूर्वोत सगोगापा - 7 वितोपषितसमये । पउनपत्ति । सामान्यफ्रियामाप्तापक्रियानेदात् । तियनेयति । सामान्यक्रियापिरतात् पच्छिमप्ति ॥ उदीरितवेदितनिजी यो मोपुदलाइतिशयः तिशिति पय खिविधा इत्यमा मन्वाद्य सूत्रत्रय कृतधितोपचिता-पुत्ता न्युत्तरेयु कस्मानोदीरितवेदितनिचीमा ति ? उपते रुत चित मुपषित पर्म चिरमप्पवतिष्ठत इति फरणादीनां विकासनियामाधातिरिष पिराषपानसात करात्वाधामित्य रुता दो मुक्ता मुदीरयादीनातु मपिरावस्थानमस्तीति शिवालयर्तिमा नियामाप्रेय तान्यमिशितानीति जीवाः काडामोहनीय समवेदयन्तीत्यु व मम तवेदमकारपप्रतिपादनाय प्रस्तावना | जीवापलतेइत्यादि । यात सवरं ननु जीवा कावामोहनीपफर्मवदयनीति माग्निम्मीद कि पुना प्रभा? उच्यत येदनोपापप्रतिपादनाय उत्तप-प्रधनपियविपया जनवातस्पसारसमयि । पहिसेहोपप्रणा रेउविसेसोवसनीति ॥१॥ मेरितहिति ॥ तैरने वशनातरमयणकुतीभिरमसादिनि विद्वत्प्रसिदै द्विवषर्म पर वीमाया कारण शादिशतुनि' किमित्या पद्ध दितिएचउनेया तियनेयापच्छिमातिणि ॥ १ ॥ जीवाणनते ! कखामोहणिजाकम्म वेदेति ? हतावेदेति । फहणनंते ! जीवाकखामोहणिजम्मवेदेति ? गोयमा ! तेहितेहिंकारणेहि सकियाकखिया वितिगिच्छि बीर-पर्व पूर्वधाण होणारे। पापियरुषिमाय दोरियादिमायविमिना । पादितिएलपमेगा तिमभेवापधिमातिपि । १। बोधी विषयो २ उपचय पोधा १ उठोरिमा । ये । निजया परिसा प्रत चित उपषित उपलनिकने धारभेद तीनवासमायो एक समुपये एवपार ते भी गि मेप पारिकान परवानछे दोरित वैदित मिवरित पतौनिभेदे तोनवानहोगापा, पहने चिरवासपखाननको एविशेष पोवांपामोशमी यचम मेरे मागमा । विना पेदनाकारकागानेवाले । पोषाभते वन्सामोरपिवं वन वेदेति । पोकीममवन् ! माधामोहनीयकम वेदे। तिप्रयतामेति । एत्तर मोतम ! वरें। पामते । बिसेपकार भगवन् ! बोवाक्षसामोडपिव का वेदेति । भीष पांधामोहनीमखम वेदें -तिप्रय उत्तर । गायमा । हेमोवम । हितरिवारहि सविधावसियावितिमिलिया। निविषधारपेयरो मिपावोनी संगतिपको वा परदर्भ - e. पावसिवाया प्रवेशयति तथा गरराति पास्मनैव गहते मिदती त्यत्तीतकासह कम सम्पत सत्कारवर्गारवारेसवा बातविशेपवोष सन् तथा । संपरहति ॥ सवयोति नकरोति वतमामकासिक धर्मस्खनपत स्तहेतुसवरम्हारेसवेति पहादीच यद्यपि गुर्वादीनामपि साका रित्वमस्ति तथापि न तेषा म्प्रापान्य बीववीर्यस्यैय ताकारणत्या दुर्वादीनान वीर्योमासममाएव हेतुत्वादिति अपोदीरमामेवा मित्याह । पतंनतेइत्यादि । व्यत्त सवरं प्रयो दीरपतीत्यादि पदप्रयोदेसफपि कस्मात् तबिउदिपडदीरेत्यादिना उपदस्पैव निर्देश बसा ? उच्यते नदी पादिवे वर्मविशेपरचतुष्टये उदीरवामेवा मित्य विपक्षस्य समावादितरयो स्तु तदानावा देव तमुद्दशसूत्रेगईते सपनोती त्येतत्पदद्वयं यस्मा रुपात उत्तरप्रामिपमाणस्वातस्येति ? उच्यते कम्मपाठदौरगाया गासवर प्रायठपाया वित्यनिपानाप एषमुत्तरत्रापिवाध्यमिति प्रनाथ पहो तरवव्यास्यामा दोदष्पः तत्र । नोठदिलाउरीरेइति ॥ उतीर्णत्वादेव उदीर्थस्पा प्युदीरये उदारमाविरामप्रसङ्गात् । नोअणुदिसग्दीरेइति । उच्चारेयछ । जसजसे ! चप्पणाचेवउदीरेइ थप्पणाचेवगरहइ थप्पणाचेवसवरइ, तकिउदिसउदीरइ १ शृणु दिाउदीरेइ २ थणुदिलउदीरणानषियकम्मउदीरेइ ३ उदयाणतरपच्छाकाकम्मउदीरेइ ? गोयमा ! नोउ पापहोष पवीतबाबमबोया तमरी, गारर निंदा ते मरता। पप्पचासवरऽ । पापोव संवर, पत्तमानबारे वर्म नवरं । तामीयमा। मौतम। पप्पबारेषतचेवतधारेवश्च । भामायेवरोष वर्मपरपरे म पूर्वपूर्व को, तिमन का। वर्तमतेपप्पा । घेते भमयन् । प्रापयष । पेपरदोरो । निवेदोरे । पप्पाचेवगण । पापमपंच निय गरा। पथपारेवसपररा। पापप निव संवर। विदिसन्दीर । तो मछदयमा सरोरे पबा । पपदिपठनोरो। पवउदरमाते उटोरे। प्रथमा । अपाहिउटौरचामवियत्रपटदोरो । उदयनी पाव्यं दौरवायोप्पर उदयपामबाने छ चमार को मारे गम उदौरे । परापतरपचापाकपडदोरे । बम उदयमे पनंतरसमय पिये पयावत प्रतीतपपामते पहुँतो तेफर्म छ दोरे। नोयमा। मौतम ! चोसदिचरदरिष। उदयप्राय ते न्दौरे नहीं, उदयववामा उदय पाष्यामं पदोर ते नाये । बोपणदिसउदीरे - - रहा नुवीय पिरेश भविष्यारण मनविप्पदुदीरयन तन्नो दीरपति तविषयावीरणायाः सम्प्रत्पनागतकासवामावात् । पपुविसंउदीरवानविय फम्मदीराति । अनुवीय स्वदपेय कि स्वमन्तरसमयेएव पदुदीरमामविक सदुदीरपति विषिष्टयोम्यताप्राप्तत्वात् तत्र प्रविष्यतीति प्रथा सेवन विमा उदीरवान विभास्पेति प्रात्तस्या दुदीरमानविस मन्यमा प्रवियोदीररामिति स्या दुदीरसायावा मध्य योग्य मुदीरसातव्यमिति ॥ नोट दिणउदीरेइ १ नोयणुदिनंउदीरेइ २ शृणुदिनउदीरणानवियकम्मउदीरेइ ३ नोउदयापतरपच्छाफकम्मउ दीरेइ ४॥ जतनते ! थणुदिन्न उदीरणानवियकम्म उदीरेइ तकिउठाणेण कम्मेण यलेण वीरिएण पुरिस कारपरक्कमेण शृणुदिलउदीरणानयियकम्मउदीरेइ , उदजातथणुठाणेण थकम्मेण श्यलेण अपीरिएण । उदयमाप्यं तेपरिन्दोर मनी, घरकार दरपाव तेहविप दोरपान सांप्रतिप्रमावरे। पदिसतदोरपाभरियव प्रतोरे । सस्पे पदम पाय नवी क्षित पनतरममपनेवि षे पीरपा तेवम उदोरे, विमित्वोमनी प्राप्तिमी, पवना उदौरपाने मध पाता गोप्य ते उपौरपामष्य प ये तोरपा मापे ममतदौर। पीएदगारतरपणावरचंदौरे । वामन दवने अनतरसमय तेनिविष पदावतमाम प्रवीवपणाप्रत पईतो वे तेपपि उरिनी ने पतीतपचारको पतीत ते गये, मरते प्रमुटोरीय वयो, तो अपपि सदीरपादिववि वासनमावारिको वारपणे, तवापि सामान्यपणे पुष्पवानंद भारषपपो देपावतभरीपदिशारीरशाभवितवाचदौरो। भगवम् । उदयमा नबो प्रमतरसममें ते बम उदीर तमामउदीर। तपिशात पभामा । पर। वममममादि । पयरोरनोसमा । परिपष। वोय ते जीवनो ज्या । परिमबारपरखमेध । पुषपावार अभिमानवियप पुरपक्रिमामविपेहोव नौपचाप्यो पीतामाविपर । प्रदिपउदोरणामपियक्षपदोरेर । पतसे पगरेफरी भनुदाई पर्ने उदोरगान भूत प्रेकम ते उदौरे उतच-पताकतामिवत्तावा । इतिवरमात, उदाहतपशाप । प्रभवा ते उवामावि मा। पर्ष 1 कमपिना । पसे । वपिना । प्रमोरिएप । वीर्यविना । पपुरिसबारपरसमेव ! पुरुषावार पराक्रमविमा । पणदिपंदोरणामपि - पायसिकाया प्रवेषयति तथा गराइति पात्ममेष गहते निदती त्यातीतगासहत पम स्वरूपात सास्वारगगहारेरावा वातविपरोप स्मन् तथा ॥ संवरात्ति ॥ सपोति मकराति बप्तमाममासिक धर्मखापत सादेतुसवरणहारेपवेति मादीच यद्यपि गुर्वादीमामपि सावा, रित्वमस्ति वापि म पा मापाम्य वीवीर्यस्यैय तश्कारगत्वा तुदीनान वीर्योमासममाघएष रेतुत्वादिति पयोदीरमामेवा मित्यार म पतप्रतेइत्यादि । व्यत्त प्रवर प्रपो दीरपतीस्पादि पदप्रयोद्देशकेपि यस्मात् तकिउदिसउदीरात्यादिना पदस्पैव मिया रुत ? सध्यते उदी मादिवे धर्मविशेपरचतुष्टये उदीरमामेवा मित्प विशेपरस्य सहावादितरयो स्तु तदनावा देव तसृष्ट्वासूभेगहते सपोती त्येतत्पदद्वप फरमा दुपात उत्तरपानिईश्यमानत्वातस्पेति ? उचते फम्मपदीरवायां गासवरणे मापठपाया वित्यभिधानार्थ एषमुत्तरत्रापिवासमिति प्रश्नाप मेको तरमभास्पाना दोहव्यः तत्र ॥ मोठदिसष्ठदीरोति । उदीमास्वादेव उदीर्णस्पा प्युदीरये उदारयाविरामप्रसङ्घात् ॥ नोअबुदिसउदीरेइति । उच्चारेयछ । जतनते! थप्पणाचेषउदीरेइ थप्पणाचेवगरहइ थप्पणाचेवसवरइ, तकिउदिणउदीरेइ १ शृणु दिनउदीरेइ २ घणुदिलउदीरणानषियकम्मउदीरेइ ३ उदयाणतरपच्छाकाकम्मउदीरेइ ४ ? गोयमा ! नोउ पापमोच पतीतमा सममीया वगरी, पार २ निदाते परता। पप्पणारेवसपर । पापहोच संवर, वत्तमानवास कर्म नबर। तागोयमा। गोतम। पपवाबतचेवमारियम। पामआयेवरोव वर्मपरकरे हम पूष पूर्व को, तिमज पाई। तमतेपप्पा ते भिमबन् ! पापक्ष । वदोरे । नियेउदोरे । अप्पावभरार । पापरब निवे मरा। अप्पासवरा । पापपने निव संवर । विदिसउदौर । तो मतदयमान्य दौरे। भवया । पारितदोरो। पदमपाधू ते तदौरे । पपगा। पविठोरतामविकासदोरे । उदमनीपा उठौरवायोग्य उदयपामवाने छ पमान गरे रमा तेशम उदौरे । तयाचवरंपरावासप्रदीरे । वम उपस्ने पनतरसमय ताविप पचात्त प्रतीतपत्राप्रत पर्छतो तेफर्म उ दौरे। नोवमा । मौतम ! पातदिनदरिए। सदर पायं ते उदोरे नों, उदययगमा उदव पाप्यान् उदोर ते नावे । पोषादिसउदीरे ।

- सा नदी पिरेर प्रविष्यदुदीरण मनविष्यवुदौरसम्म तमो दीरपति तविषादीरवायाः सम्प्रत्यनागतकातेवामावात् । अबुदिक्षतवीरपानवियं पम्मदीराति । अनुदान स्वरूपेण हि स्वनम्तरसमयेएव यदुदीरणामधिक तदुदीरपति, विशिष्टयोग्यताप्राप्सत्वात् तत्र भविष्यवीति प्रथा सेवन यिका उदीरमामविकास्पेति प्राप्तत्वा दुवीरगामविक मन्पया प्रविकोदीरणमिति स्या दुदीररायावा मव्य योग्य मुदीरमामय्यामिति ॥ नोट दिणउदीरेइ १ नोचणुदिवउदीरेइ २ घणुदिनउदीरणानवियकम्मउदीरेइ ३ नोउदयाणतरपच्छाककम्मर दीरेइ १॥ जतनते ! थणुदिन्नं उदीरणानवियकम्म उदीरेइ तकिउठाणेण कम्मेण घलेण वीरिएण पुरिस कारपरक्कमेण थणुदिलउदीरणानषियकम्मउदीरेइ , उदाऊतणुठाणेण थकम्मेण श्यलेण अारिएण । उदय ना तेपरि सदोर मनी, पर्षदार उदयप्रावने तानविप दोरपान समितिपभाव। परिषठदौरपामपिर्यम्मदोरो । सम्पे उदय पाम्मे नत्री वित पनतरसमयरिप ने दीरपा तेकम एदोरे, विभिश्योमनी प्रालियो, प्रथवा दोरणाने भव पाता योग्य ते उदीरामप्य क पोये उदारणा भार धर्मग्दौर। पोटदगपतरपचावायचंठटोरो। बर्मन उदयने पनतरसमय तेजविर्व पयायतकम प्रवीतपणापते पहुतो वे पपि सोरेमी ताने प्रतीतपपावको पनीत ते मम, गप ते प्रमदीरीय गयो, सो यद्यपि उदौरवादिकषिपे बासम्ममाषादिकागो कार मापि पाधापपर्ण पुस्पीयर्मल पारबपको देपावतभतेपपरिससमोरपामविर्यक्षदोरो भगवन् । उदयपार्थ नबो प्रमतरसमवें तेसम उतीर तवमदार । तजि तम धमीमारी। वो वमममनादि । बसेष । गरोरगीसमोर । पौरिए । पोम ते बोवनी उमा । परिमगारपरपमेष । पुरुषाकार पमिमानबियेप पुरपश्चिम विशोष नोपवायो पोतानोविपर । परिसदोरवाधिवपदोरो । एतचे प्रकारेपरी अनुदवई, पने दोरगर्न भूत कर्म ते उदौर सतप-प्रत्तावत्ताविबताया। तिवचनात, उदाहतपणाष । अवषा ते उत्खानवि मा। पप च । करिना। वसरिना। प्रपोरिएन । पोयविमा । पपुरिमारपरवमेव । पुरुपामार पराममविमा । भणदिसंघदौरभषि - - - -- ? यापतिकार्या प्रवेमपति तपा । पराइति ॥ भास्मनेष महते निदती त्यत्तीसवासात कम स्वरूपात स्तस्कारवगांगद्वारेनषा मातविठोपवोप सन् तथा ॥ संवरहति ॥ सदोति नकरोति वतमाममासिक धर्मखतपत सादेतुसवरबद्वारेपवेति गहादोष यद्यपि गुर्वादीनामपि सावा रिस्वमस्ति तपापि म तेषा म्मापाम्य बीवीर्यस्पैव तम्बारपत्वा पूर्वादीलाम धीर्योलासनमात्रएव तुत्वादिति प्रयोदीरणामेवा मित्याह । वर्तमतरत्मादि । अत्तबावर प्रभो दीरपतीत्यारि पदत्रयोद्देशकेपि यस्मात् तकिलदिपाउदीइत्यादिना यपदस्यैव निर्देश- रूस ? उच्यते सदी सादिक वविधपणचतुष्टये पीरनामेवा मित्य विक्षेपपस्य सहावादितरयो स्सु तदमावा देव त दशसूत्रेमाते सपपोती स्पेतत्पदद्वयं कस्मा दुपातं सत्तरवानिर्देसमागत्वातस्येत्ति ? उच्यते अम्मबन्दीरपायर्या गोसंवरये मायवपाया वित्यनिधानाप एवमुत्तरतापिपाध्यमिति प्रमा यको तरसम्पास्पाना बोदम तब नोउदिसठदीप्ति । उदीमत्वादेव उदीयस्पा प्युदीरये उदीरशाविरामप्रसङ्गात् ॥ मोचयुदिर्णउदोरेइति । उच्चारेयछ । जतनते! थप्पणाचेवउदीरेइ थप्पणाघेवगरहइ छप्पणाचेवसवरइ, तकिउदिसउदीरइ १ थणु दिसउदीरेइ २ घणुदिलउदीरणानवियकम्मउदीरेइ ३ उदयाणतरपच्छाकळकम्मउदीरेइ ४ ? गोयमा ! नोउ पापमोल पवीतबाबाममोगवमी, मारर र्निदात गरहा। पप्पणाचेपसपरर । पापीष संबर,वत्तमानवारकम मबर । लामोयमा। मिौतम। अप्पासवायच। पाबायेवरोष वर्मपयकर हम पूर्वपूर्व पो, विमम का। वर्तमतेपप्पा । घेते ममबन् ! पापरपज । पेपतो। निवेदोरे। पम्पमापार। पापच नियं मरहे। पप्पपावसवरा । पापच निवे सपर । तविदिसठोरर । तो मृदयमा उदोर भवा । अविसरुटोरो । पपउदयपाळू ते उष्टोरे। पदया। पणादिसंठदौरामविकटोरे । उदयमदीपायं उदोरमायोग्य उदयपामवाने छ समास बा रमाई गम उदोरे । उदयापतापचापपाठदौरे । जेवम उदयने पनतरसमय तेनिवि पवादसत प्रतीतपपामते पहुँतो तेवर्म छ दोरे। गोधमा । मौतम ! योउदिवउदौरे। उदयपार्थ ते उदौरे नहीं, सदयघयामा उदयद्याधान एदोर ते नाये । पोचदिसंठवीरे - । तमसः सुपगम दुर्गादित्यर्पः । यीरियतात्ति । वीपपोगा वीर्यः प्राणी, तगायो वीर्यता, अपघा वीयमेव स्थापिकमत्पपा दीयता वीर्यापापा नावो वीर्य ता सपा । पीरिपत्तापति ॥ प्रविधमानबीयतपा धीयानावेनेत्पर्ष तमोप्रवीरियत्ताराप्ति। वीयोसुकस्वा दुपस्थामस्पेति । बासीरियतारति॥ यासः मम्पगपामवयोपा रसदोपपायविरत्यनावाच मिम्पादृष्टि ससस्य या वीर्यता परिगतिविक्षेपः सा तपा तया ॥ पठियबीरियाताएप्ति । पपिता समसायद्ययस स्तदम्पस्प परमार्पवो निजामस्येना पवितत्वा पदार-तग्मानमेषमानवति यस्मिनुदितेविनाति रागगय कुतासिशत्ति दिमकरफिरणाप्रतःस्यातुमिति ॥१॥ सर्वविरतइत्यर्थः ॥ थालपठिपीरियताएत्ति । पालो देशेविरत्यनाया त्परिकतो देशरव पिरतिमझाया दिति यासपरितो दगविरत पाच मिप्यात्वे उदिते मिपादृष्टिस्वा जीवस्य थासवीर्य वोपस्थान स्या धतरान्या मेतदेवा सेनते गोयमा ! फि यीरियप्ताए उठाएका यीरियताए उपठाएजा ? गोयमा ! वीरियताए उवठाए जा , नोध्ययीरियप्ताएउवठाएका , जइ यीरियप्ताएउवठाएजा , किआठवीरियताएउवठाएजा , पमित भगवन् ! मिपाखमोनोव कोपा । बतासेष । वर्ममें उदयकरो। वडापखा । परस्साका किया प्रमोवारवर, पम्यदयमोहोम । एता गोरमा। गौतम । मारवा । परसोनिया धमोक्षारबर रो। सेमतेणियोरिवत्ताएउवाएवा । ते भगवन् । न मौयसहित अगोवारवर रा, अथवा । पोरियतापमारवा। पपोर्मपर वीवीपमा गोवारवर तिच, गोयमा पौरियताएकाएबा । हेगौतम ! वोयपः परसोवाकिया प्रगो कारवर पपि । पापमोरिमत्ताएसवारवा। पवीयप परनीकक्रिया अगोवार नकर, बसी गौतम पूणे-जापौरियतापण्याएवा। जो वोयोत पायोष पमोवारपरमा वाय । विपासपोरिमत्ताएपाण्या। तो भत्तापर्धनो भाममों पथवा विरतिरहित मिष्याष्टितानी विवा पोरता परिपतिवियप तेरेबरी पमोवारबर। परिमोरियतापउवाएगा। पंडित ने समासापाचो तेयो वौलान परमाचमको पनानप थे, पथा। पासपडिययोरियताएउपाएना। देश प्रविरतिपायो मासव काोये, देखें तोच विरविपलायो पंडितकसोये, तेमाटे पासपंडितपाता - किर्वपत्ति पहार मित्र-कार मते । बीचे प्राकम्मपमठी चंपड गोयमा ? माणावरसिमस्स कम्मस्सउदए दसपावररिज्म फम्म नि गया विशिष्टोदयावत्य जीव स दासादयतीत्पर्य दरिसमायरपिस्स कम्मस्स उदएप दससमोरपिम्म कम्म निगमा । विपासावस्य करोतीत्यर्थः ॥ रससमोरविकास मन्मस्स उदएवं मित्त विगवा मितेर सदिसा एवं सतु जीवे अफग्मपगठीठ पर । इत्यादि नय मितरतरामपदोपः कम्मबन्धप्रवाहस्सा नादिस्वारिति । काहिंच ठावरिति । द्वार तथैव-जीवेग मते ! नागावररिज्म फम्म कति ठारे अपर ? गोयमा ! दोषि ठापेहि तवहा राणेशप दोसरापे त्यादि ॥ परवेरवत्ति । द्वार मिदं व-जीयेशनते! पर कम्मपगमीट वेयर ? गोय मा । प्रवेगार वेयर मापेमार गोवएइ जे वएप से मठ इत्यादि जीवे मते । नासावरणिय बम्मयेएइ ? गोपमा ! प्रत्येगइम वह प्रत्ये मार नोवेयर वसिनो प्रवेदनात् । नेरपरमं प्रते ! मागावरगिज बम वराह ? गोपमा । नियमा घेरह इत्यादि । अधुनायो फाविहो पस्सत्ति समर्मयः पतिविधो रसबति हार रव-नाणावरपिपनस्सर जसे ! कम्मरस काविहे भयुनागे पणते ? गोयमा ! वसविहे पसते तमहा सोमावर सोपविभाडावर स्पादि । द्रष्येन्द्रियावर भावेन्द्रियापरणयेत्यर्पः अप कम्मचिन्ताधिकारा मोहनीय मामित्यार जीवेवमित्यादि । मोहरिवति ॥ मिप्यास्वमोहनीयेन । उदिसति । उदितेन । उवकारयति । सपतिप्ठेत् उपस्पाम म्परसोबक्रिया स्त्र गोसम्मप्तो । गाहा । कतिपगळीकहियघछ कतिहिंठाणेहियधएपगढी । कइयेवइयपगझी आणुनागोकति विहाकस्स ॥ १ ॥ जीवेणनते ! मोहणिोण कोण कम्मेण उदिणेणउयहाएजा ? हतागोयमा! उवठाएमा। पचनो संपहमारे तपाई-मापा। पतिपगडाबाबावितमो बममतिमा तसा भेउ १ , प्रति प्रेम वाधे, ए भोषी पर २,पतिषि शियाएपगो। बोब तो सामधि वर्मप्रति १, पतिदेवपगडो। बोये केतनो प्रचति वेटोये ४ , अपभायोतिपिशोकस्म । १ । पनमाम पात रस ते बेतवाप्रवाएना विसावर्मनी शिवमचितापभिधारणको मोहनीवपायो बोई। वौषेपमतेमोपिसकरे। जोप है प्युपगम हुयादित्यर्थः । वारिपत्ताएत्ति । वीर्यपोगा वीर्यः प्रावी, तनायो वीर्यता, अथवा वीर्यमेव स्वापिकप्रत्यया द्वीयता वीर्यापावा भावो वीर्य ता तया अपीरिपत्तापप्ति । प्रविधमानवीयतपा घीयानावेमेत्पर्पः मोमवारियताएत्ति वीपोतुकत्वा दुपस्पानस्पेति । पासवीरियतारति॥ पाला मम्पगपामययोपा रसदोपफायविरत्पमावाच मिष्यादृष्टि सस्प या वीर्यता परिगतिविझेपः सा तपा तया ॥ पंछियवीरियताएप्ति । पपिपतः समसायपयश स्तदम्पस परमार्यतो मिशामस्येना परिचतत्वा पदाह- तरधानमेवनभवति यस्मिनुदितेविनाति रागगणः । तमसः कुलोस्तिगति दिमबरकिरणापतास्पातुमिति ॥ १॥ सवविरतात्यः ॥ पासपठिपवीरियत्तारत्ति ॥ वालो देशेविरत्पन्नावा त्पविकतो देशएव विरतिमनाया दिति मालपविठतो दशविरत पाच मिथ्यात्वे उदिते मिप्यादृष्टित्वा ज्मीवस्य यातवीर्यसे वोपस्पाम स्या घेतराम्या मेतदेवा सेनते गोयमा ! कि यीरियताए उयहाएजा श्यीरियताए उपठाएमा ? गोयमा ! वीरियप्ताए उवठाए जा , नोयीरियप्ताएउपठाएजा , जइ यीरियताएउवठाएजा , किबालयीरियताएउवठाएका, पमित भमनन् । मिप्यास्वमोनोय पोधा । वप्रेषणपेप। वर्ममें उदयेवरी । प्रवाएला । परसाकक्रिया अगोवारपर, पञ्चदमनोहोर । ता गोयमा। हो गौतम । उपसारखा । परमोवानिया अगोवारकरे रो। भकियोरियताएबहाएला । ते हेभगवन् ! – गोयसहित प्रगौवारबारे रो, पथया । पपीरियताएतयारणा। पपोम्पर पोयनेपभाषे अगोवारवर तिमत्र, गायमा मोरिवत्तापवाएया । हेगौतम ! वोमपणे परसोनिमा प्रगी पारपर पपि । पापमोरियताएकाएमा। पपीरप परमोचनिया पगीवार मकर, यसो मौतम पूरप-बस्वोरिपत्ताएसवारवावो पोयोत पचायोज पगोवारपरमा वाव । विधासमोरियताएवाया। ता भसापनी गामनी पथपा विरतिरहित मियादशितानी विका वीयता परिततिबियेप तेपरी प्रगौधारक पडियवीरिकताएउपापचा। पंडित ने समयसापपक्षांचो तेसो पोवाम परमादेषको पनागपएँ कहो थे, प्रथमा । बासपरियपीरियताएउवाएबा देय पविरतिपापी मानवीये, देशहोष विरविपापो पडितकाोये, तेमाटे मासपस्तिकात - विपत्ति हार मिदव-काय मते । बीवे पाठकम्मपगमीट पर गोयमा ? नाणावरविन्स कम्मस्सठदएर दंससावरवि कम्म नि पमा विशिष्टोदयापस्य जीव मा दासारपतीत्पर्यः टरिसगावरविजस्म कम्मस्स सदएप दसपमोहपिन कम्म निगमा । विपाकायस्थ रोतीत्यर्प । इसपमोहजिस कम्मस्स उदएप मित्त पिगमा मिच्छतेग सदिसण एव सस्तु जीवे पाठकम्मपगष्ठीन वपाप इत्यादि मय मिोतरेतराप्रपदोपः पन्मवन्यप्रवाहस्या मादित्वादिति ॥ काहिंच ठारेरिति । द्वारं तवैव-जीवेग मते ! नासायरपिन्ज कम्म काहिं ठायेति वर ? मोयमा दोहि ठारेति तजहा रागेश्य दोमेखये त्यादि ५ यावेएइपत्ति । द्वार मिदं चैव-जीवेश प्रोफा कम्मपगळी वेएर ? गोय मा । प्रत्येमरर वेरा प्रत्येमाए बोवह जे धएर से पष्ठ इत्यादि । वीवेस प्रते! नावावरचिन्म पम्मवेयर । गोयमा ! प्रत्येगहरा ठेज प्रत्ये गरए नोवेएर वसिमो भवेदनात् । मेरइएक प्रते । नासायरगिज कम्म वर ? गोयमा ! मिपमा एड इत्यादि ॥ अयुनामो काविहो बस्सत्ति बस्स पर्मय पतिवियो रसहति हार दरम-जापाघरपिग्मस्सक मते । कम्मरस काविहे प्रयुनागे पणते ? गोयमा ! दसपिरे पसते तंगहा सोयावर सोपविणासापरणे इत्यारिद्रष्येन्द्रियावर मायेन्द्रिपावरपयेत्यप अप कम्मचिन्तापितारा मोहनीय माश्रित्यार जीवेवमित्यादि । मोहरिबति । मिथ्यात्वमोहमीयेन ॥ उदिति । उदितेन । वाग्मति उपतिष्ठेत् उपस्थान म्परलोकक्रिया स्त्र गोसम्मतो ॥ गाहा ॥ कतिपगळीकहिंघधइ कतिहिंठाणेहियधएपगढी । कइवेदेइचपगमी थणुलागोकति विहोकस्स ॥१॥ जीवेण वे ! मोहणिोण कण कम्मेण उदिणेणउयठाएजा ? हतागोयमा! उपठाएजा। पपनो सुपरमापारे पोरेगामापतिपमानावभाति । तमो ममसतिना वेतमा भेद १ , मति घोम वाथे, ए बोलो र २ ,पति विपरपमरे । चोय चरसे मानो गधि गर्मप्रति ३, बतिवेदेोपमो। वोवे तमो प्रति टोये ४ , प्रभुमामोतिविसोवम । । । पनमाग पाता रमते तदाप्रबारमा विसापमनो विषमचिंतापरिकारमी मोशनीय पायी कोई। बौवनमतमोरपिपकरे। वोव ~ - प्पमिति ठिइप्ति मूगना सूयमिति न्यायात स्थितिस्मानामि पायानीतिशपाय एवरग्गायति । प्रदगाहमास्पानानि, शरीरादिपदामित प्यताम्येव पवारातच पद प्रपमैकयनान्तरदृश्य इत्येव मतानि रिमत्तित्यानादीनि दण्वसूनि रहो देशके विधारयितव्यामीति गापानमा मा पिस्तरार्पन्तु ममगारा खपमेव पत्पत्तीति तत्र रबपनाएपियां स्पितिस्थामानि तावत्प्रहपपवार रमीमेपमित्यादि व्यष नवरं ॥ एगमेगंमिनिरपावाममित्ति ॥ प्रतिमरसावाममित्यपः ॥ ठिबठापत्ति प्रायुपो विनागा असंखखप्ति ॥ सनातीतानि कर्ष प्रपमपपिव्यये। पा अपन्या स्थिति दायर्पसामाणि उत्तवात सामरोपम मेतस्पा पेचकसमयमा सङ्घयानि स्पित्तिस्थानानि भवन्ति असतेयत्वात् सागरो ३ ॥ पुढयिष्ठिइनगाहण सरीरसघय गमेयसठाणे । सेस्सादिछीणाणे जोगुवढंगेयदसठाणा ॥ ४ ॥ इमीसेण नते ! रयणप्पनाएपुढयीए तीसाए निरयायाससयसहस्सेसु एगमेगसिनिरयायाससि नेरल्याण केवइया ठि ने मिमी पवमाविमान, पनत्तरविमान परमोत्र पूर्वादि विजय १ मेपयत र अपत १ अपराजित ४ विषम सामगि ५, एसर्वमिनो वह साले ८४ ०१६ विमानाश। पुठविहित्तिउमाप मरोरसंघमपमेमसाारे। सेप्मारिहोचापे वीगरपोगेवदमठाये . शिष तायकाय सपाबालेरगावा पहि-पृयिपादिकत्रोपना गासने विप सितिखान पापा २, गरोर बावा १ सध्यप वावा 8 नि सम्बाम कावा ५ पेक्षा परो, हटो' पायो , मान ते पाया ८, योम ने कामा ८ उपयोग २ ते कापा १ , च पादपूरचे ए दयमान रार पावा, पृविषो पाटि सर्वनेविपे।। मोमेभिनेरवरप्पमाएपठोर । मौतमपूरे-पने भगवन् । रमप्रभा पृमियोनेविगे। तोमाए मिरवावासमयसासेसु । पोमपाए नरवावासावि प। एमममिनिरवानाममि । एवमा एतने प्रत्येचे २ नरवावासनेवि।सयामाठिामा पपत्ता। मारकोना बेतवा सितिवाती पाच पाना म्यान वार्ता विभागकावा रतिपय गायमा पर्मचाठिा पसत्ता तमा। गोतम ! सम्बायो पतिमाम्मा सनष्पा तमाटे पसंख्याता पानपाना सानाविभाग समाधिम । पहिलो पृषियोगी प्रपेवायें जघन्य दय सासवर्पनो सितिर ते एक समय पधारतो सब एक सागरी कार्यसहाय गापा । पुरवीत्यादि । तब पुरवीति लुप्तविनात्तिकत्वा विशस्प पधितोपु उपतवणस्था वास्स पपिण्यादिषु जीवावासैधिति द्वार इसियषिमाणावाससयसहस्सा पडता । सोहम्मेणनंते ! कइविमाणायाससयसहस्सा पणता ? गोयमा ! यतीसषिमाणावाससयसहस्सा पणता , एव , यप्तीसष्ठावीसा यारसचठयउरोसयसहस्सा । पसाचनाली सा बच्चसहस्सासहस्सारे ॥ १॥ शाणयपाणयकप्पे चत्तारिसपारणचुएतिणि । सन्तविमाणसयाइ चउनुवि एएसुकप्पेसु ॥ २ ॥ एक्कारसुत्तरहे ठिमएसत्तुत्तरचमझिमए । सयमेय उपरिमए पचेययश्चणुप्तररिमाणा ॥ ससरसामा पत्ता । यावत् पचपबारमा यानिषा चद्र सूर्व प्रा नवा तारा तेजमा पिमान पापासमान प्रसप्पाता सापकमा, में अमवा पनत तोर्यकरे यसोगोतम बाररेवचाफ नवप्रया पर अनुत्तरविमान पायोने पूरेशे । सारनमतेकाविमापामासमवमनस्मा पंवत्ता । सोधमदेपो रे भगवन् ! पोततापिमानावासबानमा पाप वा तिपय । गायमा पत्तोसनिमाणमसरसहरमा पनसा । गोतम । वत्तीममाण विमान तेरेमेतर के पतरे प्रतर भिवषिमाग तेपूर्ण पोषयोए पने मामा म सवा नावापी पावा, । माहा। बत्तीसामोसा वारसप्रठाउरोमयसरमा । प भारताबोसा समापासाम्पारे । १। सौधौ छत्तीसबाप विमान पाने २८ पाए विमान, सनत्मार ११ साप विमान, माद्रे पाठसाए थि मान, परे चारसार विमान, ए पंप देशपाये वो ८४ मारा गया, तातो पाससास, समै चासीम सरस, इसास पाठमें देरलायो विमानवाण गा। पावरपानपथप्पे पत्तारिसमारपतिपि । सत्तविमा रम्बार उमविरपसापेमु । १। पानत नबमोदेवोत्र प्रापत दामोदेषतोड एवेज मिसो। रिमामहे, पारप ११ में पचाने पचत १५ मेंदेवसोने परेव मिती विमान, एमावसे विमान चारदेखी मिसोने यया १, रेठि ये गयेयकवि एतले परिसीवे पोजे पेवेश्यामसो । एपारसतरं शिमएमतत्तरसमणिमए । मरमेठबारमए पपपातरपिमापा।१। एसमोरप्पारे विमान मनम रेया एतस पोरे परमे गे पतीनेमिमी एवसोसात विमान, अपर पेयव कि एतचे सातमें पाठमें भवमें एती , १ व्यमिति ॥ ठिइति । सूचना सूप्रमिति न्यायात स्पितिस्पानानि वाचानीतिझपा । रवठग्गायप्ति ॥ अवगाहनास्थामानि शरीरादिपदानितु व्यक्तान्येय एकारान्तम पद प्रथमपषमान्तरदृश्य इत्येव मतानि स्पितित्यानादीनि दशवस्तूमि को देश के विचारयितव्यामीति गायासमा मापः विस्तरापंरतु मूत्रमार स्वयमेव वत्यतीति तप रवमनापपिर्धा त्पितिस्पानामि तावत्प्रहपयन्नाद । इमोसेपमित्यादि व्यक्त नवर। पगमेगमिमिरपावार्ममित्ति । प्रतिमरवावाममित्यर्थः । ठिकठापत्ति । पायुपो विनागाः ॥ प्रसन्नति ॥ समातीतामि कप प्रथमपपिपपेप पा अपम्या स्थिति दशवर्षमात्रापि उतशतु सागरोपम मेतस्पा पैकेगसमयदया सोयानि स्थितिस्थामानि भवन्ति असलेयस्वात् सागरी ३ ॥ पुढयिष्ठिइनगाहण सरीरसघय गमेवसठाणे । खेस्सादिष्ठीगाणे जोगुवनेंगेयदसठाणा ॥ १ ॥ इमीसेण जते । रयणप्पनाएपुढवीए तीसाए निरयायाससयसहस्सेसु एगमेगसिनिरयायाससि नेरइयाण केवइया ठि २ मिमो पवमाश्मिान पत्तरपिमान परसोज पूर्मादि विवस १ मेघयत २ पयत १ अपराजित ४ विच में सर्वोपसिस पसमिती जय सोये ८४ • १५ सिमाना । पुठपिरितिउगााप मरोरसपय पमेसहारे। वेष्मादिहोचाये जोगवयोगेबदसठारे ।४। सिमकार्य सपानेवारगामा गोरे-पृयिवादिवानोपमा वासने विष मितिमान पापा २, गरोर बावा १ सध्यप कावा ४ निवे संम्बान पामा ५ मा पापो, दृष्टी । कागो, पान ते पावाद, योम नेपापा उपयोग २ ते गावा च पादपूरणे ए एसम्मान र वारा, पृथियो पाहि सपनेविषे ।। मोमेमतेरमनप्पभाएपठयोए । गोतमपूरेडे-पाने भगवन् । रमपमा पृविषोनेपिये। तोमार मिररावासमयसास्मेसु । पोसचाप नरवानासानेवि प। एममेगंमिनिरमायाममि । परेवा पतसे प्रस्थो २ नरबावासनेविपे। रायासपश्याठिापा पसत्ता । नारखोना वेतसा शितिवात पाच पाना खान पाता विभागमाया तिपय । गायमा पर्ममाठियारा पत्ता तमा। गोतम ! सम्यायो पतिसम्मा उन्नया तेमाटे पसस्याता पानपाना मानक विभाग मा तेशिम ? पहिलो पृधिवोनी पपेचाय बबन्ध दय सहस्रवर्पनो स्वितिछे ते एक समय वधारतो डरसट एक सागरी " कार्पसाप गापार ॥ पुरवीत्यादि । तत्र पुरवीति तुप्तविभक्तिमत्वा विदेशस्य पपिवीपु उपतपयत्वा चास्स पषिष्यादिपु पोवायासेधिति द्रष्ट इसियषिमाणावाससयसहस्सा पणता । सोहम्मेणनते ! कइविमाणायाससयसहस्सा पणता ? गोयमा! पप्तीसधिमाणावाससयसहस्सा पसप्ता, एव , वप्तीसठावीसा धारसशठचउरोसयसहस्सा । पणाचप्ताली सा बञ्चसहस्सासहस्सारे ॥ १॥ शाणयपाणयकप्पे यत्तारिसयारणचुएतिणि । सन्तविमाणसयाइ चउचयि एएसुकप्येसु ॥ २ ॥ एक्कारसुत्तरहे ठिमएसत्तुत्तरचमझिमए । सयमेय उपरिमए पचेवयघणुप्तरविमाणा ॥ ससबमाया पबत्ता । बाबत् पचप्रमारना यानिषो पन सूय पा मचा तारा तेहना विमान भावासखान पसनाता सापक या, में अबया भगत तोपर गरोगोतम बारदेवसोक नवमेव पर प्रमुत्तरविमान पायोने पूर्वहे। सारपसमतेकरविमापावासमयमामा पत्ता । सोधमदेषष्ठोले में मगमन् ! बेतवाविमानावासस्थानमा पाप मा तिमय । नायमा बत्तीसपिमापावासमयसहसा पत्ता । रेगोतम ! बत्तीममाष विमान तेरेप्रतर है, पतरं प्रतर मित्रविमान तेपूर्व सीए अमे पामा म सवन गामासो पारवा, । मारा। बत्तोमाामोसा गारसमठपठरोसम्मामा । प पारतासोसा पपसहवासासारे।१ । सौधर्म रत्तीसाप पिमान, माने: साप विमान, सनत्कुमार रसाए विमान, माहेंद्र पाठवाए पि मान, वारे भारतात विमान ए पप देवतायें व ८४ सार बगा, सातो पासमान, या पापीस सास, इसास पाठमें देवता विमानवाप्प पा । पाचवपापपत्रप्पे सत्तारिसगारपतिपि । मत्तविमानसमा मुमिरपसुचप्पेमु । २ । पामत नरमोदेवसोम प्रारत दमोदेवखोष पवेल मियो विमान पारप ११ में देखोये प्रचुत १५ मेदेरसोये पोज मिसौप विमानहे एसातमे विमान पारदेवखोये मिसोम यया २, ठि में गोरगवि एनसे परि मौके पोधे प्रवामियो । पारमतर शिमएमत्तुतवमग्निमण । मममेगउपरिमए परेषपातरषिमा १५ एयसोइप्पारे विमान मधम पैरो पतचे गोरे परमें गो एतीनेमिसो एक्सोसात विमान, चपरचे गैपक कि पतचे पातमें पाठमें नामें एगो मेति । शाम शिममयान्यनतरमालले सप्तचत्वारिगतियोजनामा समेत यो शतपो खिपष्टीच सारिकाया वतमान तदये दृश्यते प्रस्तसम सप्पय , मय प्रतिमहल दशने विधेपोति सब स्थानान्तरादपमेय सबन ममतत्ति सवत सर्यामु दिगु समन्तात् विदिषु एकाविती ॥ मनाया त्यादि भामामपति पपरप्रगापति पण-त्यूनतरमेव वस्तु दृश्यते उद्योतपति भम्प्रझाशपति, यथा- स्यूनमेव दृश्यते तपति अपनीत गीत रोति पपाषा भूम पिपीसिकादि दृश्यात, तथा करोति प्रनासपाते प्रसितापयोया दिशेपत्तीपमीतीत विपते, यथावा मूलतर वस्तु दृश्पते तपारोतीति मतरतेप्रमेवा मित्याहतप्रतात्पादि। यस्य मयनामयति नरोतयति सपत्ति प्रमासपत्तिच तत्क्षेत्र फि मदन ! चेय उयासतरान चरकुष्मासे हछमागच्छइ ? हता गोयमा ! जाधइयाउण उवासतराने उदयतेसृरिए घरफुफास हछमागच्छ , श्त्यमतेयि जाय हमागच्छइ , जावइयाण जते ! खेत्त उदयते सुरिए शाय येण सह समता हासेड , उझोएइ तवेइ पनासेइ , शत्यमतेवियणसूरिए तापइयचेव खेत थायवेण सन्छ समता उनासेद उनोएइ तवेइ पनासेड ? हता गोयमा ! जायइयाण खेत्त जाय पनासेइ त ते तम । जिस परिमारयो पपकासातरको जगता य र पप गोन पाये ४०२५५ वादन २१ भाम । प्रत्वमतेविआवावमागचा । पाषमता पनि रमत्र यावत् गामा पम्पय पारे १०२५१ रामन २१ माम । जापतिगपापमतेपत्ती वेतन भमपन् । क्षेत्र । उदयतेरिएपारवेषसवो ममतापामा । अगता भूव पातकरी सूयने की सममो दिभिनेवि विदिमिनविष बारामा प्रया, विमपस रिपाई । सनोवो तो पमा मेरा पा उपाकर गौतदूरवर गिम मध्य बोटकाटि टोमै पिरोपमोतदूरवर त्रिम मूभवन पपि टिपाये। पत्वमपियसमरिए। पायमती पपि मर । तालियरेषता तेतमात्र निये पेचपते । पातवेरमनपोसगतापोभासेर । मूसने तेवेकरी सपदिपिनेवि विदिगिभविप बोचोसो प्रकाश पर ग्मोर तर पमासे।।। पर्वत प्रपाय तयातबर योगदूरबारे जावचमान तपै इतिप्रश्न उत्तर । ईता गोयमा । हा गोतम 1 वावविवपरीत। - - ॥ . . पीविजाना न्यचानानिषेति पैमामिणसूत्रारिदेवमप्पेयानि ॥ संसलेसुरा प्रते ! येमारियावाससपसास्मेसु एगभेगसि घेमापिपा वाससि देवड्या ठिबास पबत्ता । इस्पेवमादीनि । इति प्रपमझते पम्मम सद्देषः । प्रय पप्ठो व्याख्यायते तस्स चाय मजिसम्य ५ पो नन्तरोपोन्तिमपुरा पतंरव्येसुर ते बोइसियविमाणावामेसु । तया ॥ ससेन्चेसु मते । धेमारियावाससय सहस्सेस इत्येतदपीत तेपुष म्योतिविमानावासाः प्रत्पत्ताएवेति, तद्वतदर्शन प्रतीत्य तथा वावग्ते इतियदुत मादिगापायां तप दर्शपितु माह पाव इयाहत्या रिवावापाठत्ति । यत्परिमावात् ॥ सवासंतरायत्ति । प्रवाशान्तरात् प्राकाराविशेपा दवबाधावपान्तरालाद्वा याव त्यवहागान्तरेस्पित र स्या उरपतेत्ति । सरय मुद्रचन् । चक्कुप्पासति पो दृष्टे स्पर्धाइव स्पर्षो मस्त स्पर्शएव पशुपो माप्तकारित्यादिति पशुः स्पर्दा स्त णियठिइए थाहारएय असीइनगा , पाणमतरजोइसबेमाणिया जहा नयणवासी, नवर नाणत नाणियष्ठ जंजस्स, जाय थणुत्तरा, सेवनंते नसेप्ति । पढमसए पचमोउद्देसो सम्मतो ॥ ॥ जाय इयाउप्प नसे ! उषासतरा उदयते सूरिए घरकुष्कास हछमागच्छइ थत्यमतेयियण सूरिए तावतियात पठमसमपरमो प परिसा यतबना पौषमा सोमाना ठम्म सितो . । हिये शो छोगो काबे-तानो ए संबंध पाधि होये पतसून विष प्योतिपोना विमानवमा । यि तानो प्रस्वधमति बाहे-बावतियापोपमते । विष परिमायो भमवन् । प्रवाया तरबको अपवायम्प पतरामदयो । उवासंतरापाउदसतेरिएचसुप्पासाबमामला । खगवो सूर्य इष्टिमय योमपावे मोबिम विवारे सूर्य सर्व प मतरमा हार तिमारे ४०२५५ योजन पोसठीया २१ माम समता स्य हरिया। प्रवर्मतेविवर्षमरिए। पापमो पपि इमन सूर्य । तापियामो पतवासंतरापोचतुप्पासाबमामथा । तेतमाहोल बोवन १९५५ चौसठोमा २१ माग पपवायांतरची पचनम अवापसोडोग भावे वषा यो मामातनो विमतिअनेरा मूत्रामो वारली इतिप्रत उत्तर । ईता गोयमा । बापतिमायोउवासंतरापोउदयतेरिएपप्पासपमानचा । हमी - ति शी सिममयाम्पतरमालले सप्तबस्थारिगतियोजनाना सहप हपोगतयो खिपष्टीच साधिकाया पातमान उदये दृश्यले प्रस्तसम पप्पेय मयं प्रसिमाम दामे विशेषाति सब स्थानानारायसेय ॥ सब समतत्तिसक्त सर्वामु दिपु समन्तात् विविध एकार्यावेतो नासदा त्यादि । प्रामामपति पपरप्रासयति पपा-त्यूसतरमेव धस्तु दृश्यते ज्योतपति पशम्मगारापति पपा-स्पूनमेव वृश्यते, तपति अपनीत भौत राति पपाषा मूल पिपीलियादि दश्यत, तपा करोति प्रनासपात पतितापयोगा द्विशेषतीपमीतीत विधते. यथावा मूल्मतर यम्त दृश्यते तपाफरातीति मतरक्षेत्रमेवा मित्यारपतमतेइत्यादि । यस्वेत्र मवनासयप्ति ज्योतपति तपति प्रमासयतिष' तरवेश कि पदमा ! घेय उयासतरान घरनुप्फासे हमागच्छइ ? हता गोयमा ! जावइयाउण उवासतरा उदयंतेसृरिए घस्कुप्फाम हमागच्छह , स्यमतेवि जाय हमागच्छइ , जावइयाण जते ! खेत्त उदयते सूरिए थाय येण सनसमता नहासेड , उजोए तयेइ पत्नासेइ , शत्यमतेवियणसूरिए तावइयचेय खेत शाययेण सहसमता उन्नासेइ उझोएइ तवेड पनासेड ? हता गोयमा ! जावइयाण खेत्त जाय पनासेइ तनते गम ! त्रिप परिमापो परकामतिरसती प्रमता मय परिपर्य योन पाये ४०२५१ यावन २१ भाग । अन्वमतेविषायादमागपा । पाषमता पवितमा गायत् जामा रम्पय पारे ४०२५५ माजग ११ माग। प्रावतिया पानतेखत्त । बेतम् भगवन् । पेप । इदर्यतेरिएपातवेषसबभी ममतापाभामेर । मता व पातकरी भूबने की सगनो टिभिनेविष पिविभिनेपिप पागमा प्रबा, विमवस टिपाये। उखोवेर तर पमा मा। परा पातवर मोजदूरवर त्रिम मून बोटबाटि टोसे वियेपमोतदुरबार जिम मध्ययन पपिरिमाये । पत्वमतेवियरमूरिए । पाममती पपि मग नातियचेपत्ता तेतमोज नि चैत्रपते । पातवेसमोसमतापामासेइ । मूखने तेवेकरी सपरिमिवि विदिगिनेविय वोडोसो प्रयास करे उनी तपमामेर ।। पत्थत ममा उद्यातपर गोदूरबारे आव चमान त रतिपय उधर । ईता गायमा । हो मौतम । बावविपरखेत्तं ।

ܝܘ स्पष्ट मवनामपति भस्पर मनासपति स पावत् करवा दिद दृश्य-गोयमा ! पुरु सेनासेर भो पपुछ तमते ! गाठ नासेर प्रमोगा? मोयमा ! ठगाठ नासेर यो प्रयोगाउं एव प्रस्तरोगार जासर पोपरपरोगाठ तनते ! कि अपु वनासह वायर तुमासेइ ? गोयमा ! अणुपि हनासा वापरपि सनासह त नते ! रामासह तिरिय नासह पो नासा ? गोयमा ! उमपि ३ त मते ! पार नासर मके सेनासर पते सेनासा ? गोपमा ! पाइपि ३ त नत ! पाएपुष्टि नासह प्रणागुपुष्वि नासह ? गोयमा । पाणुपुष्धि सेनामा खोप्रयायुपुछि त नते ! फा दिसि मनासह ? गोयमा ! नियमा पट्विसिति । एतेपाल पदाना म्प्रथमोगरनारलाहारसूप्रध्यास्सादृश्यति ॥ जय ठेमासह इत्यनेन सर सूत्रप्रपच उत्तः सरव उज्जोयाहत्यादिमा पदप्रयेस वाच्य इतिदर्श यवाह । एष उज्मोवेदहत्यादि । स्पष्ट पत्र म्मनासपती त्युक्त मप स्पर्दानामेव दर्मपबार समित्यारि ॥ सबतित्ति । प्रारुतस्वात् सर्वात सर्वासु दिन्छु । सहायतित्ति ॥ प्राक्तस्वादेव सवात्मना सर्वेणा तपेमा पति माप्ति पस्प त्रस्प तत्सर्वाप्तिः अपवा। सर्व क्षेत्र इति शब्दो विपयनूत पत्र सर्व नतु ममसतमेवे त्यस्यो पप्रदशनाय सया मर्वेणा तपेमा पो माप्ति यस्य त्रस्य तस्मर्वाप रतिगमः सामाम्पतः सर्वेपातपेन व्याप्ति नतु प्रतिप्रदेश सर्वोत्यस्पा पस्यो पप्रदानार्थो थिया सह ध्यापे किपुठठनासेइ थपुठ उनासेइ जाय बहिसि एव उोवेइ तवेइ पन्नासेइ , जाव नियमा बदिसि सेणूग लते ! सष्ठति सहायति फुसमाणकालसमयसि जायइयखेत फुसइ तायइयफुसमाणे पुठेप्तियत सिया ? गावा प्रकारे गोवत्र पायो । मितेविपापामासेर । ये पेत्रप्रतें प्रभास उद्योतकर तप प्रभासे तेचे भगवन् । च परपो ज्यातकर अपामामासो वापसेहरिसिं । विषा विना परणे न्योतबरे यावत् छरिगि एसो पाठ तासग पायो। एपसलोपेर तर पभासेर । इम उद्योतकर तपे प्रमाये । नापषियमावरिसिं । रापत् नियर प टिगि तिम पाए । सेप्नभतेसष्यति । ते निर भगवन् सक्यो समठोदिगिनेवि । सबापति। सयसे पातकरी पत्रमा सर्वक्षेत्र । पुसमारबाससमयसि । परसता पाम समयनेविपे । वापरयोत्तफुसर । ततोच असे मय । तापश्यफुसमापे ~ मा तपप्यात्या यात रममा इनिमय त तपेय ॥ पुसमायणाससमपसित्ति । स्पश्यमानतये ज्यवा; स्पशतः गूयस्य स्पर्शनायाः काससमपा स्प गरणामममप तर प्रातपेमेति गम्यत, पावरवेट स्पशति भूपति प्ररुतं तायस्थय स्पृष्यमान स्पष्टमिति पत्तथ्य स्यादिति प्रश्न त्याद्युसर म् पापमानापटपो पैसस्य म्प्रपमधा स्वगन्तव्यमिति स्पर्शनामेवा मिहत्याः ॥ सोय ते प्रत ! यस्तोपत्तमित्यादि ॥ सोफान्त सर्वतोलोकाय माम अमोमान्तनु तदनन्तरएषति हापि पुरुषमहात्यादि मूत्रप्रपयो दृश्यो तरोता जापनियमावदिसिसि ॥ एतद्भावनाचैव स्पष्ट मतोपा गत स्पगति स्पष्टत्यश्व व्यवहारतो दूरस्पस्पापि दृष्टं यथा-चार स्पन्न प्रत्यत उच्यते भयगाउंपासबमित्पर्भः प्रवगाढत्यमा मप्तिमायमपि स्या दत उत्पते धनम्तरायमार मय्ययपानम सम्यद मतु परम्परायगा यासाफटिकाइव परम्परासम्बद तम्या पु स्पसति अत्तोकान्तस्य वचिद्धि परापा भदेममापत्यम मूत्मत्वात् यादरमपि रपति पषि द्विवस्पेय याप्रदेशस्येम पादरत्यात् त पर्व मप तिपकच स्पज्ञप्ति अदिदि मोफातस्या सोबातस्सव मापात् तम्बादो मध्येनेष स्पति पय मास्तिर्यगृहत्तोकमानाना मादिमच्यातकस्पनात् सन्प यिपये स्पति हंता गोयमा ! सहति जाय यतक्षसिया । तनते ! किं पुठ फुसइ जाप नियमा बद्दिसि । लोयतेनते ! एलोयतं फुमा थलोयतेयि लोयतं फुसइ ? हत्ता गोयमा ! लोयते थलोयत फुसइ एलोयतेवि लोयत पतिवाभिया । तेतबा परमा शेये मकामा प्रतिपय उत्तर। हता योयमा। गौवम | सम्पतिमापवत्तमंसिया। सवयो सगनी विपिपिप यावत् परम्पो रमाबामाकोव । भतेविपापमा । त भगवन् । स्यू परसा फरसे ? वापरियमादिमि । यावत् नि छरिगि परसे वापते भतेपनीपतपमः । सोयना धागे मधो सोकमा पदमाम हे भगवन् । पसोबना पंतम परसे पसोबनो पतते तीने पतरकीब । पमीपते रिमापतपमर पमा पमावना गतेपरिवानापंतप्रत फरमे रतिपय उत्तरता मोवमा । गौतम । सोपते पम्नापतफमा । सोजमा पाना पतपते परमे। पभोमतविभागंतकुम । असारमा तपदि मोगमागतपते परम तभतेविपुषामा । भमपन् । परमा १ पर - स्पष्टावगारादौ नाविषये अस्पष्टादाविति तमा नुपूर्वा स्पशति पानपूर्वाचा प्रथमे स्यामे सोकान्त सतो नन्तर द्वितीये स्थामे प्रलोमातहत्ये व मवस्थानतया स्परुति अन्यपातु स्पझनैव न स्या तम्ब पटस दिशु स्पसति लोकान्तस्य पार्यतः सन्तो लोकान्तस्य नावात् इव विदि जुन स्पसमास्ति दिशा सोबविमलप्रमावस्या विदिशाम तत्परिणारेच नावात् एव वीपान्तसागरान्तादिमूमपु स्पष्टादिपवनायनामार्या मवर द्वीपसागरान्तादिसूत्र वहिसिइत्यस्य व म्भावना योबमसासावमाढा द्वीपाय समुदाय प्रयन्ति तत योपरितना मस्तना य द्वीपसमुद्रा प्रदेशा मामित्यो धिो दिम्दयस्प रपसना वाचा पूर्वादिदिशाम्तु प्रतीतव समन्तत स्तेपा मवस्पानात् ॥ उदयंतपोपप्तति ॥ नद्याद्यदक्षान्तः पो ताम्तं नौपर्यवसाम मिहा प्युतपापेक्षया विक्रपशना वाथा जसनिमग्मनेति । विहसेसतति । विद्वान्तोदूष्यात यशान्त स्पृशत्ति रापि पदिवपसना भावना वजोनपापेच्या चिवा; कम्यप्तसूपवरापोहलिकाया सन्मध्यात्पनजीवनतणेन तन्मपरम्भापेक्षया लोगाम्त मूत्रवत पङ्दिम्पर्शना भावयितव्या बायतमामवतति का शापानदेन पदिग्मावनैव पातपे व्योमवर्तिपतिप्रसिद्रव्यस्प या छाया तदन्तमातपातमतमपु रिश स्पति तथा तस्याएव व्यायापा भूमेः सकाशा तव्यं याय दुष्योति ततय दायान्तपातपान्तमूदमयस्पश फुसइ । तनंते ! कि पुष्ठ फुसइ पुष्ठफुसइ ? जाय नियमा बदिसि फुसइ । दीवंते नते ! सागरत फुसइ सागरतेयि दीवत फुसइ ? हता जाय नियमा बद्दिसि फुसइ, एय एएण शनिलावेण उदयंतेपोययत निष्ठतेदूसत , बायतेचायवंत , जाप णियमा बहिसि फुसइ शत्यिण नते ! जीवाण पाणाइवाएण कि से। अपामुसा । पबवा अपाम्या परसे। वावनिरमाइनिसिपमा दोवतभतेसागरतफुमा । यावत् नियमम् शानिमि परसे वयोगोतम पूछेद-पी पौत होपना मत भमवन् ! मामरना अतप्रतें परसे । सागरतेविदावतफुसः । मागरना प्रतपनि पनापतमते परसे प्रतिप्रश्न उत्तर । रता गोयमा । गोतम ! वापियम परिसिपुसइ । गाव निपये हदिशि परसे ते मानधोचन होप समुद्र परे तिषियी मादिगि प्रीदिगि पूर्वादि । K ति अपवा प्रामादयरफिमादे याटाया तस्या नित्त रक्तरन्त्या प्रारोहम्त्याया अन्तमातपान्त मा मघय स्पणतीति प्रायनीय प्रथया तपारय पायातपपोः पुनमाना ममलेपप्रदेगावगाहित्या दुष्पसगाव सरसगावा चोदापोविनागस्ततय हायात प्रातपात मुटु माय स्पथती ति पदामाधिमारादय प्रामातिपातादिपापस्पानममवफम्मस्पर्शना मपिस्त्यात प्रत्यीत्यादि । पत्पित्ति ॥ प्रस्त्यपम्पमा । फिरियाबग्मइति । रिया फज्जइ ? हता शत्यि । सानते ! फि पुछा कइ थपुष्ठा कडाइ ? जाय निहाघाएण बहिसि वाघा य पाच सियतिदिसि सियचउद्दिसि सियपचदिसि । सानते ! किंककाकडाइ थकाकाइ ? गोयमा ! काकडाइ नोचकाकजाइ । सानते ! कि शप्तका कजाह परकाकजाइ तदुनयकाकाइ ? गोयमा दिमि म पदिगिनो पगमा बागो। एवं एएनभित्तावेषडदर्यतेपातं । हम प्रकारवरी पांचोगो अंत नावनात परसे। शितिसत । छेद ना पतते चपामा प्रतमते परसे। पार्वतपातपतंजावपियमारिसिपमा । छायाप्रत धूपनामतपते परसे सां अधो प्रामाद भीतनविप धूप उतरतो बायी यावत् मिले हदियि प्रगनाइवे प्रगनाना पधिवार वनोज प्रापातिपात पादिरं पठार पापस्वानव को अपनी पम स्पर्मना तेजपते पपिपरोप-प्रविभवोगावपापापाएपविरिया बजा। पमित वाताव पाति वाक्यासबारे एपच भिमवम ! धोव प्रापातिपा foया पापन जेमोजे माविया पहोये, कमबरो विगतोय इतिप्रश्न । उत्तर । हता प्रति । गौतमले । साभते िकपुरकला। तिका भग गन् । म परमीएको होय । पपाया। पवना परपरसी दास । वावनिवाघाएनशदिमि । यावत् विही पसोड मेडनमी तिला पदिगिने फरसी सिमानामे । वाषातपरम मियतिदिसि सिमरादिमि सिवपंपरिसि । म्याघात पायो प्रलोक नेटो तिला विहाँ एक तीनदिगि येपदिमि प्रचोवमाटे नए, बिगायो पारदिगि विगारो पदिमि एसव पाहारनो परे पिधारोने कायो । सामतेविसापमा । ते भिमवन् ! — प्रापातिपातिको विगायोधो दुवै पक्षा । परावयः। पयोधी दुवै प्राचातिपाविको विमा इतिपय पसर । गोवमा पठापना पोपकडायवर।गौतम ! को पटावगाडादौ नाविषये अस्पष्ठादाविति तम्मा नुपूर्वा स्पति पानपूर्वी र प्रपमे स्थाने लोकान्त स्ततो नन्तर द्वितीये स्थाने प्रतीमान्तात्रे व मवस्थानतया स्पति अन्पपातु स्पझनेव न स्पा तब पटसु दिनु स्पशति लोगान्तस्य पाधता सण्तो सोचान्तस्य भावात् इव विदि शुन स्पद्मनास्ति दिशा सोकषिमन्मप्रमावस्या विदिशाम तत्परिकारेग प्रावात् एव वीपाननसागरातादिमूत्रपु स्पृष्टादिपदनावनाकाया भवरं द्वीपमागरान्तारिसो ददिमिहत्पस्यै वन्मावमा योजनसहस्राषगाढा द्वीपाय समुद्राय नवन्ति सत योपरिसमा मपस्सना च द्वीपसमुद्रा मरता नामित्यो हांधी दिष्ट्रयस्य स्पर्धना वाच्या पूर्वादिदिक्षान्तु प्रतीतव समन्तत नेपा मवस्पानात् ॥ उदयतपोयतति ॥ मद्याद्युदयान्त पो ताम्त मौपयषसाम मिहा प्युब्यापेक्षया कईदिनपचना वाचा बलनिमज्जनेचति ॥ बिहदूसतप्ति ॥ विद्रान्तोदृप्यान्त घतान्त स्पमति रहापि पशिवपक्षमा भावना वसोनपापेचया पिवा कम्यसम्पवरतपोटलिकाया तम्मप्योत्पयजीवनातणेन तम्मप्यरन्मापेक्षया लोकान्त सूत्रवत् पदियस्पर्शमा भावयितव्या ।हायतप्रायवतति । मायाजदन पदिग्मावमेव प्रातपे व्योमवर्तिपत्तिमतिद्रष्यस्य या छाया तदन्तमातपातबतसपु दिनु रपति तथा वस्पायव शापाया भूमे सकाझा तदुय्य याव दुष्पोस्ति ततध बायान्तपातपान्तमदमयस्पृश फुसह । तनते ! फि पुठ फुसइ थपुठफुसइ ? जाव नियमा बद्दिसि फुसइ । दीवते नते ! सागरत फुसह सागरतेवि दीयत फुसइ ? हता जाय नियमा बद्दिसि फुसइ, एव एएण शनिलावेण उदयतेपोययतं बिहतेदूमत , बायतेशायवत जाय णियमा बदिसि फुसइ शत्यिण नते ! जीवाण पाणाइवाएण कि में। पपायुमा । प्रथमा पपरवा परसे। बावश्मिमारशिसिमामा गोवतभतेसागरतपमा । यावत् नियमम इदिमि फरसे पटौगोतम पदे-पी पति होपना पत भगवन् ! सागरमा पतपते फरसे । सागरतेविदोबतफुसर । सामरनी पतपनि पनामतपते परसरतिप्रश्न उत्तर । जता गोयमा । ही मौतम ! बावरियम परिसिपुमर । यावत् निपये हरिदमि परसे ते सहसयोवन दीप समुत्र वडा तिविषयो जहादिमि प्रयोरिशि प्रमादि x , - x - ति, प्रथया प्रामादयररिझमादे याटाया तस्या नित्त रखतरन्त्या भारोत्याचा प्रस्तपातपान्त मूई मपय स्पमतीति नावनीय अथवा तयोरय पायातपपोः पुदमाना ममयप्रदेगावगाहित्वा दुयसगाव तत्सङ्गाषा चोदांपोविनागस्ततय शयान्त पातपात मूई ममय स्पशती ति स्पदामाधिमारादव प्रासातिपातादिपापस्थानप्रमवयम्मस्पझना मपित्याइ । प्रत्यीत्यादि । अत्पित्ति ॥ अस्त्पपम्पत्तः ॥ पिरियावरजाति । रिया फाइ ? हता शत्यि । सानते ! कि पुठा कमा थपुष्ठा कजाइ ? जाय निछाधाएण बद्दिसि वाघा य पच्च सियतिदिसि सियचउद्दिसि सियपचदिसि । सानंते ! किकाकाइ थकाफजाइ ? गोयमा ! फाफडाइ नोयकाकजइ । सानते! कि थप्तकका कजाड परककाकजाइ तदुनयककाकजाइ ? गोयमा ! रिमि म हरि मिनी स्पसमा पायो । एकपएपभिसावेषपदसतेपात । इम रक्षेपबारवरौ पापोलो अंत नावनातपते परसे। शितेदसतं । छेद ना पतते कपडामा पतपते परसे। पावतेपातवतंबावरियमावपिसिएसा । शमानपत धूपनापतप्रतें परसे पां अधो प्रामाद भीवनविष धूप पठतो उतरतो जानपी यामत् निये इदियि पगमाहुवे नगमाना अधिकार पक्षोल मापाविपात पादिदों पठार पापमानव को अपनो कम प्रशना तरमा पधिवरोवर-पलिभतेनोगावपापापाएपविरिमा बजा। प्रप्ति वाताई पाति वावासकारे पपच भगवम ! जोव प्रातिपा निधी या पापन जे सोये सोविया काोये, कमारो विवाहोब रतिप्रय । उत्तर । ता प्रति । गौतमई ! सामतेकिावला । तिका मग गन् । म परमीपषी होय । पपडामा । पबमा अपफरमोशाय । वापिपाषाएपहिमि । यावर विहां पसीव नेडानयो तिकी छदिगिने फरसो विगमागे । वासातपरम मियतिटिसि सिमचउदिसि सिरपंचदिसि । स्याघात पायो पसाक ने तिला कि एक तोनदिमि गेपदिशि पत्तोमाटे मार, विचारधारदिगि विचारो पदिगि एसप पाहारनो पर विचारोने वायो । साभतेविंदरावला। ते भगवन् ! " प्रापातिपातियो | निराशेधों एवं प्रथपा । प्रबठाकया। पोधो दुपे प्रातातिपाविको विषा इतिपय उत्तर। मोयमा कडावया योपकमकबर । गौवम ! को पार कियतातित्रिया बमै माक्रियते प्रति, पुत्यादे यांपापूर्ववत् । कशाकश्यति ॥ रुतानव त्यातस्पफम्मको भावात् । प्रतकठानाति ॥ पास्महतमेव सम्ममवति नाम्पमा ॥ पवायुपुद्धिबळावयत्ति में पूर्वपया द्विमागा पवनास्ति तदनानुसूची झम्देनोग्यतइति ॥ बहानैराश्यातहा शतकाकज्वइ णोपरककाफजाइ णोतदुनयककाकडाइ । सानते ! कि शाणुपुछिकका कजाइ शृणाणुपुछि फमा कज्जइ ? गोयमा ! थाणुपुष्ठिकाकाह नोचणाणुपुहिककाफजाई । जायकका जायकजाइ जायक जिस्सइ सधासा थाणुपुछिका नोश्चणाणुपुधिकातिवप्तहसिया । त्यिणनते ! नेरइयाण पाणाइवाय घो विग लागे प्रबोधा बमना प्रभावमाटे, पचि पपयोगी प्रातिपातको बिया मनामे । सामतेजितकगवला । विवा भगवन् ! पापपी कोरिया सामे प्रथमा । परकावला । पारबोबोधी प्रापातिपातकोनिया नामे पषवा । तदुभएकरावणा । पासपर से वेज धत प्रापातिपाति बो दिया मागे रतिपश्न उत्तर । मोयमा पत्तकावया । हेमौवमा पापको कोषो प्रापातिपातको नियामाग पनि । कोपरकडाकमा ।पारबीवीपी मावाविपातको बिमा नसामे । चोतमयबागकया । देखमिसो त्रियाषोधी ते पकने दुपटायक नहोर बेनो मन पधिको तोने घो। मामते कि पपुग्मीबहावमा प्रचार पुग्योषारापाला । तिबा मगवन् । प्रानुपुर्षीय मनुक्रमेलोधी सागे पपिसीको पहे पापमागे अथवा पनानुपूर्वीय बोधी ते विशाखामे वेपरिने पापक्षाने पईप्रियायाने इतिप्रश्न उत्तर । गोयमा प्राणपुग्वोबरावमा रेगौतम ! पानुपीयेकोधी प्रियामा पनि पोपचापपम्मीबायया । पनामुपवितविया नसाये । धााषण । विका किया पूर्ववोधी प्रतीतकाने विषाबोधी । जारसम्म । चिया पत्तमान १ गावे बरेये। पापविमा । बिया पागामिवाने बरो। सबामापापपबिग । तेसगशो पानपूर्वीये पममेकोपी पपि । चोप्राणपुषिमाण तिवत्तमसिया । पनवमरक्षित पनामापूर्फ तेयोचो रम पहोये पत्तोमौतमपूशेश-विषमतेरेरामा । हे वाक्यानबारे भगवन् । नारगोने । पा पारगायबिरिसावया। प्रापातिपाताप चौपरिमाप दिया जाता पमनाने प्रतिमा पर मालगीतमाभनेमिना।

- गिदिपपग्मालावियद्यति ॥ मारम्ब दमुरादयोपियाप्या एपेन्द्रियवर्जा वन्यथा तेपात दिवपदे-निष्ठापारावं अदिसि दाघायं पञ्च मिपतिदिमिहत्यारे विटोपानिप्तापस्य बीवपरोक्तस्स प्राधारतएवाइ । एगिदिया महाजीवातहानापियवत्ति वाव मियादसपसमे या घरगरगात्व मासमायासोनपेग्ने, प्रममिष्यात मामासोमनमाय मनिषामात्रम्पम दोसे, अननिमतमोषमानस्वरूप ममीतिमात्रपा पसहो राटिः, अनपाये अमहोपाविफर पेसुन प्रश्न मसदोषाविफरण परपरिवाए विमकीय परेपाहुण्योपवचन' भरपरा परति फिरिया कझाइ ? हता ! त्यि । सानते ! किं पुछाक थपुछाकमइ जाव नियमावविसि कजाइ सा नते ! कि काफझइ थकाकाइ तथ्वजाय नो शृणाणुपुष्टिकातिवातहसिया । जहानेरइया तहाएगि वियवजा नाणिया जाय वेमाणिया। एगिदिया जहा जीवा तहानाणियछा , तहापाणाइवाए तहामुसा याए, तहाशदिने, मेऊणे, परिग्गहे, कोहे, जाय मिच्छादसणसल्ले। एव एएण थठारसघउछीस दफगा तिका भिमगन् । सरपको साम? पपावजः । पबना पसर धाम । वावषियमावहिसिया । यायव निये म पदिय प्रते भागे। साभते किया । तिका विगरे भमान । प वोधी साग। अपरावल । पथवा परोधी लागे। तव । तिमच सप वायो। जापचोपणारपब्धि पानिपतमसिंग । सायन पनामय नवोघो एवं बा । बाापेरामा तदा एनिरिधवलाभानियावावरमारिया । विम नारीवाना तिम एशे पर्जी पमुरखुमाराठिय मापद वेमानिक पर्यंत सव माया एवेंद्रोवल्या तमाटे एकेंद्रोने रिभिपहें। निम्मापाएर पदिसिवाघायं परुषसियतिदि मित्यादि । पपिरियणाजोगातहाभापियवा पापारावाए । एवेंदी विम घोषवानो तिम कावा, त्रिम माप दस तानो वियोम ताने मापा निपात सोये योजनाम रिमामाोये धिमप्रापातिपात। तहामुसावाए। तिम नपापाट आरपा । पापदेणादापे माने परिमो कोहे । तिमन पदत्तारान पथदीपोरानो पेषा, रमव मेपुन सोनामोग, परिपा मूर्चा, कोष पोपपद । भापमि चादसपस एव एएमाारसचउम्यौसदरगाभानियावा । - मोहमीपोपमाधितोडेग तत्पता रति पियेषु मोहमीयोदयात् पितामिरति भरतिरति मायामोसे सतीयकपापद्वितीयाणवयोः मयोगों नेमच सर्वतयोपाठपत्तपिता अपषा पान्तरमापातरकरसम यत्परवमन तम्मापासपति मियादशन सस्पमिव विविषयपानिर्यन्धनवा मिप्यादर्शनभस्वमिति एव ताव गौतमबारेष कर्म प्रहपित तामवारता भासत मित्यतः शावतानेव लोकादिनापाम् रोकानिपाम मुमि पुमबहारेर प्रहपपितु प्रस्तावमनाहा सेवावमित्यादि । पगइनएप्ति ॥ स्वमायतएष परोपकारकरणजील । पगइमठएप्ति ॥ स्वप्नावत एव मावमाईदियो तिएव ॥ पगबिडीति तथा पगाठयसपनति ॥ मोपोदयानावात् । पगरपपयुकोडमाथमायालोहे । सत्यपि कपायोदये । मतनुकोपादिनाया । मिठमपमपत्ति ॥ सदु सम्मादव प्रत्यर्ष मईकतिजप सारसम्पन्नः प्राप्तो गुरूपदेश यः सतया ॥ प्रास्त्रीयेति ॥ गुरुसमा नाणिया । सेवनते । जगवं गोयमे समण जाय विहरइ ॥ तेणकाठेण तेणसमएण समणस्स लगवन म हावीरस्स श्वेवासीरोहेणामशणगारे पगइनद्दए पगइमउए पगइविणीए पगइउबसते पगइपयणुफोहमा सवार यो मान मात्रा वाम राग रेप बता पम्मामान पैसून्य परपरमाद परतिरति मायामोस मिप्यादशमय प रमएस पठार पापमानव पोपहर गावा। सेवभते भतेति । ताति, भगवन् ! तुवा ते सबसम्परे पन्यवामहो एसाधही। मगवगोयमे ममपभमबमहापौरपदासापषि रा । भगवत गोतम वमन ममवत बीमहापोरने बादो यावत् विपानागा इम पतिमा गौतमने अधिकार कम प्रापपा कोयी ते पम प्रवाश्यो पासतारे पतमा माटेवयासता सावादिषमा भाव रोगबनामा साह तहने प्रश्नोत्तरबारदेवासे तेताननेवि । तेषममए ।ते समय समरयममधामहापौरस । यमर तपो मपर्वत मामबंद पशर्यादित बोमहापौरनी। पतिवामी रोजेपामपगारे। मिष रोजानामे पाठ पयाभार । पभाष पर उपधारी। पयरमडए । मारपो पोमनभाय । पगरपिचोए ।पमा पिनारत । पयामते ।पमा नोपरमपी। पग उपचारमारमाराम । समादे पातमा हातm mb मिसमरपडे और भाप विपीए । भारंबा - - णमायालोने मिउमद्दयसपन्ले थलीणे नद्दए विणीए समणस्सनगय महावीरस्स दूरसामते उह जाणू शहोसिरे जाणकोठोयगए सजमेण तयसा शुप्पाणनावेमाणे विहरड। तएणसे रोहे छणगार जायसहे जाय पडयासमाणे एयवयासी पुछिनते ! खोए पच्छाश्चलोए पुविचलोए पच्छालोए ? रोहा ! लोएय शूलोए य पुछिपेते पच्छापेते दोयेएसासयानाया शणाणुपुछीए सारोहा । पुधिनते ! जीवा पच्छा जीया र मपध गुवनपतगमी गुरुममोपरत्रा, पथपा समोने गात प्रताराघव नफ सवा गुणाप्रत । समनम्मममवपामहावीरम्स । श्रमण भगवंत योमहा बोरपामोने। पदरमामते । प्रतिवमतीनको पति उपयोगी। प्रष्टवायूपहोसिरे । चरा ठी मोरी मावो । मापसोडावगए । भामरूप पीठाने वि मघाम वि विररित्तवका । सबमेतवमा पथारमारेमाविहर। सतरेमेदे सक्षम तेथे नवा पायता पमवारीये पेवरी तवा तप पारे भेदे तिने मममा पम नियरिये तेच परो पामा व ते प्रतें मतो भावनाये भाववायचा विपरै । तएपसेरोगमपचमारे पावस? । तिवारे तेरोमा मामे माएउपनो वा पतसे पाम्बाये महित । पापपज्यामेमाणे। गाव मदे सेवा करतापवा एसर्व गीतमनोपरें कायो । एवमासी। रम पक्षमा माता एवा । परिषभते गाए । परिम हेभमवन् । मोकहे। पच्चासमोए । परे पसोपथे। पुखिपसोए । पचवा पूर्व पसीवा। पचासोए । पशेसो को रतिपय उत्तर। रोहा मापप प्रसोए रोहा सोल पुन पसोक । पषिपेते पणापते । पूर्व पपिए पछेपपिए । दोविएसासयाभावा । बमा तथा प्रमाण मानतामावर तो मनो। पापपुवीएमारोहा । परिम पा लिसा पतर मको एतले दोन वरावर एहमारे परिमा पापोर पाराय नमो। पविभोलीया । वमीरातोपूर्व-परिसा रेमगवन् । चोवथे। पच्छाचीवा। परे पजीवछ प्रथया। पुग्पिपत्रो पा। पूर्व पत्रोपई। परायोग पोष मारव पसोएव । पझे वोव इतिपय उत्तर कोशे-विमहोत्र सोक पने पमोक परिना पहे नवामा । तहिय जोगापमोपाप । तिमोर जोर पोप एदोन माम्यतामाको पहोनेषिय पूर्वापरविभागमानी पदि परी नसजे । एवमवमिशियाय । माये सि भॊग्नीपोत्यापित्तोटेनः तत्पत्ता रति विषयेषु मोहनीयोदयात् शिक्षामिरति परतिरतिः मायामोसे धतीयसपायद्वितीयानवयो. मयोगों जमेनच मसपोगाउपतषिता अथवा वेपान्तरजापानतरफरसेम यत्परपमान तन्मायामपति मिथ्यादयन शत्पमिव विविषयपानिर्यन्धनस्या मिप्यादर्शनभत्पमिति एव वाव ट्रौतमहारेर बम प्रहापित तपमवाहतः शास्त्रत मित्यता शावतानेव लोपादिनाधान् रोपवानिपान मुनि पुगवहारेक प्रापपितु प्रस्तावना पारमित्यादि । पमहमदरति । स्वमावतएष परोपकारवरणीत ॥ पगइमठएप्ति ॥ स्खलायत एव भावमाईविको तिरख । पपइक्विाएप्ति तपा पगावसपाति ॥ प्रोपोदयानावात् ॥ पगइसययुकोडमाघमापालो । मत्यपि पायोदये मतनुशोधादिभाव : मिउमहवसपवेत्ति । मदु परमार्दव भत्यम महकतिज्य सत्सम्पमा प्राप्ता गुरूपदेश घः सतया ॥ प्रावीणेति ॥ गुरुसमा नापियवा । सेवनते २ । नगव गोयमे समण जाव विहरद ॥ तेणकारेण तेणसमएण समणस्स नगवन म हावीरस्स यतेवासीरोडेणामशणगारे पगइनद्दए पगइमउए पगइयिणीए पगइउपसते पगइपयणुकोहमा सराव यमान मामा वाम राग वेष पसा प्रयापान पेसून्य परपरवाद परतिरति मायामास मियादमनमा भएर पठार पापमानक । पडयोसह पाया । सेवभते मतेत्ति । ताति, भगवम् ! काय ते सबसपा पयवानहो एमावती । ममवीयमे समपभगवमहापौरपदासापति राममबत मोतम यमब भगवत बोमहापौरने वाले बाबा विपरवानागा, रम पषिमा गौतमने पधिवार पम प्ररूपणा कोषो ते बम प्रायो गामताई एतवा माटेवमानता सापादिवमा भाव रोषनामा सास ताने प्रशोत्तरपर वादेष । तैवानमधिप। नेपममए । ते समरने विप समरयममधामहापौरख । म तपनो मगवत नामवंत ऐशयादिवत श्रीमहावीरनो । प्रवासी नेपामभरमारे। भिष रोहानामे पास पनामाए । सभा पर पारी। पमहमए । समारो मोमनमाय ! पगापिरोए । चमारे विनरत । पगारपसते । भारे बोपनमनो। पग पवारमापमापयामे। भावे पादमागमा मातोप मियाम पर - rafe . दिमिति पंपास्ते भवसिहिमा प्रख्या इत्यय ॥ सतमेउवासंतरत्ति ॥ सप्तमपुषिष्या अपोवाबासमिति समसएगाये॥ स्वामेत्यादिके, तत्र । जवामेति । मप्तापगागातराणि दापत्ति ॥ तनुवाता घनवाताः पदाहित्ति न पनोदपयः॥ सप्तपुरवित्ति । नरमपपिथ्य सप्तव दीवायत्ति। सम्युटीपार मईयाः एष मागरा सवपादया । वासत्ति । पर्यापि मरतादीनि सतैव प्र देहयाइयत्ति । चतुषितिपय । अत्यियत्ति । यत पच्छालोयंते ? रोहा! लोयतेय थलोयतेय जाव शणाणुपुछीए सारोहा । पुम्धिनते! लोयते पच्छा सप्त मेउयासतरे पुच्छा , रोहा ! लोयतेय सप्तमेय उयासतरे पुछिपेते जाव शृणाणुपुछीए सारोहा , एष लो यतय सप्तमेय तणुवाए एषघणयाए धणोदहिसत्तमापुढयी, एव लोयते एक्ककोणसजोएयचे, इमेहिठाणेहि तजष्ठा-उयासयायघणउदहि पुढीदीवायसागरावासा नेरइयादीचत्यिय समयकम्माइलेस्सा ॥ १॥ दि गामापतेवमत्तमउवामतरमपवितेभावपराजुप्पोपमारामारा! बाकन भते पन मातमो पवियोना । पावायने माहोमाथि पहिया पनि एप पनि यावत् अनुबमाहित परिसा पझे एपो सोनमबोये परिमाए पप इममहीं सा पूर्व पक्षात्मा पमुकाम नहोरेरोगा। एप सो चय । म मोबनापत पर्ने । सतमेपतपवाए। मातमो पवियोमा तनुपात एकगो प्रश्न वमा उत्तर बावा । एवषषवापघपादादिम जोमात प में मातमो प्रषियोना पनवात धनादपि पावा इस मोबना पत पने। मत्तमापठयो। मातमी प्रवियो बायो । एवमीपते । म सायनापतण परमप्रापयाये । पबम्मामब वाया। रमेष्ठिाति। तथापा मानबमा नाम तेबोरे- गावाबरी । उपासवातपपदापा बाम पतरा १ तनुगत पोला पनवात घनोदधि पांचो मात । पुठयोदोगरमागरायबामा । नरवमो प्रवियो सात वाप प्रादिदेर पसस्याताप पभम्याना भमुद्र मापममुद्र भारि मरतमादिषास । रासारो पत्तिय । नारको पारि पत्योसदाय पपारितकाम पपुम । समयानमार से ग्मायो । १ । बामविभाग पाठ नेता र १५ दिशीदमपणाचे सभसरोपगतोमरुपयोगे रपपएमापनप पाकि पुविखापते । २ । दृष्टि १ दमन । - श्र जया सि मित मलीनोवा । महति ॥ अनुपतापको गुरुशिधागुवात् विकीरति । गुरुसवागुणात् ॥ अवसिद्विपापत्ति प्रविष्यतीति प्रया पुछि राजीघा पच्छा जीया ? जद्देवलोएय शूलोएय तहेव जीयाय श्राजीयाय , एवजयसिझियाय छनवसि झियाय सिझीसिही सिझा सिझा। पुधिनते । शुए पच्छाकुको पुविकुझी पच्छा थए ? रोहा । सेण शकए फळ ? नयय कुक्कुझीन, माणकुक्कुहीक ? नते थम्यान एवामेय, रोहा ! सेयथए सायकुक्कुको पुहिंपेते पच्छापेते दुवेएसासयानाचा घणाणुपुछीए सारोहा । पुछिनते ! लोयते पच्छाचलोयते पुविश्लो हिमाने ते मपमितिका भवरमप्रभवसिहिमायनीय सिवानेत पभश स्वय। मिति पसिपि । मिरि मुशि पमिति ससार तमा सिग पनि । मिहामिापौष पसिष्ठा समारोबोव तेमा एसय, वसौराहो पूहे-पुग्लिभते पाए । पूर्व भगवन् । गए। पचाकुओ। पर पाई। पुम्मियागे। पनवा पूर्व परिक्षा सोई। पञ्चामडए। परे । तिपय उत्तर। राहासेच एका राश! ते पंवाक्याबारे एविसामो वयो सामामोये पूछो । मबयापुरीयो । तिबारे रोशी मार-भगवन् । यो पो, पसीभगवतबहे- माधुरोको। नमो विजयो रे तिबार रोका को--मतेपायापा। भगवन् ! यो मोहा। एषामेरोहा सेय पडए । रमज रोहा ते साय यो। तिका प्रमो। पभिपते पाते। परिता पपिए परेपपिए । दीपेसेसासयामागा। दोमए यासताभाष गामता पदाथ। पपुग्पोएमा रोश। एसा पूर्व परे पायो पामपूत रति रोहा। पम्पिमतेसोयते । यसोरोहा पूरो-रेममयन् । सोवना रहे। पणापमायते । परेप मोबनपतो पाया। पुमिपसायते । पूर्व प्रमाबगो पतो। पच्छालामते। पई तोषना पतरे तिप्राण । रोश सोमतेष पसायतेय । रोशा ! तोष गोर्पत पने पहायनो चत एम् परिया पाईनहीं। बाप पपारम्मिपरोहा । यावत् समानुपूले पाले पचिन् एषा की नसबोरे रोजा भनो रोहा पूरे-परिये भगवन् । सानोभत । पचासतमेशातापुजा परे तमो परिमोनो रेडियो भार माल गोरे - x - ।

फपदापनमाया दप गौतममुरोन सोस्पितिमापनामा काविपमित्यादि ॥ माझानप्रतिष्ठित्ती वाम सनुवातधनधातरूप सस्था घमा शान्तरीपरित्पितत्वात् प्राक्षागन्तु स्थाप्रतिष्ठितमेवेति नतत्प्रतिष्ठापिताकतति तथा यातप्रतिष्ठित उदधिर्घनोदपि सनुपनवातोपरिस्थित स्यात् २ तथा उदधिप्रतिहिता पषियी पनोरधीना मुपरिस्थितत्वात् ३ रवानादीमा वापुस्पापेच्या चेदमुल मन्यये परमाम्मारापपिवी य तेणं जोजोहेठिलो ततठातेण नेयध, जाय व्यतीययणागयझा पच्छा सधशा, जाय शृणाणुपुछीए सा रोहा , सेयनते२ जाय यिहरइ । नतेप्ति नगयं गोयमे समण जाव एवययासी , कइयिहाण नते ! लोय सिड पयत्ता ? गोयमा ! श्रष्ठयिहा लोयठिई पणता ? तंजहा ! शागासपइठिएयाए १, वायपइठि पर मातमा पनातक प्रथमा पश्विासातमा धावात पर मातमा तनुपाव। भगवंतपो-एपितहेवपेभय । पपपि तिमन जापरा परिया पर न पाया । वापसपहा । यावत् सरपणा पतसो कापी । एवठवरिपरससबाप । इम अपरितो एवेगवारवा मेवा । तेरोनोरिजो। तेश्यो जोठिमी । तंवपेपरचेयर। तेते शेषो परमिसयो, म विचारो सेवा, तासगावा। वाप प्रतीतपपागया । यावत् पहिमा पतोत पठा पर पनागपा, पपया परिमा पनागतपमा पोपतोतपक्षाापरणासम्वाइम परिसा पनागतमहाप सर्वाहा, प्रववा परिचा सर्वाहा पाई पनागतमा आरपणामुमोदमारोश। यावत् पसव पनागपूर रोहा पमर्वने परिसापरे बाहोममगये, मदा गाणता भाव रोहा । सेवभतभतेत्तिबाप बिहरा पारे-नाति । भयवन् तम्हेजमु ते मममस्यरे पन्यवानही इसोकहो यावत् विपरे । भक्तिभगवगायमे समपभमवमहापौर भावण्यव पामो । मातारि मापदार्थ प्रतारमी कमा। गौतम मुपसारे माकम्पितिना सपनाये वडे- भगवम् ! एसा मानवंत गौतम, यमय भगपत योमहावीरम्वामी प्रतवादी मार इमनाई। पाविज्ञापमतमामहिपम्पप्ता । कोतमेदे भगवन् सोवनोस्निति वही इतिमय सत्तर गोयमा पानिपत पसत्ता तपा। गोतम पाठे भेद राजद रावसाकमो स्मिति सवा कला तेकोष-प्रामासपाहिएवाए १ । पावायऊपर तमुपात - ! प्रस्तिकापा पम्म म समपत्ति ॥ सासविलागाः बर्मास्पष्टौ' नेइया पद् वृष्टयोमिप्यादृष्ट्यादय तिखा दानानिचत्वारि, धानानिपत्र, सभा पतस मरीराविपच योमालप उपयोगौद्वी माविपद् प्रदेशा पनन्ताः पर्यवा अमम्ताएव ॥प्रदत्तिा प्रतीसादा अनागताला सर्वादा चेति । किधिसोयतेत्ति । अयं सूत्रामिसापनिईस सव पयिमसूत्रालिलाप दर्भयभार पुविनसेलोयतेपण्यामधदेति ॥ एतानिष सूपाणि मून्याधानाविवादनिरासेन विचित्रषासाभ्यास्मियवस्तुसत्तानिपानानि ईश्वरादिरुतत्वनिरामेन नामादिस्वानिपानार्थानीति लोकान्तादिलो हीदसणणाणा समसरीरायजोगउवढंगे दक्षपएसापञ्जाव थक्षाकिपुछिलोयते ॥ २ ॥ पुष्ठिनते ! लोयते प च्छासहछा ? जहालोयतेण सजोवया सध्ठाणा , एते एष थलोयतेणवि सजोएयचा सछे , पुधिनते! स तमे उवासतरे पच्छा सप्तमेतणुबाए एव सप्तम उवासतरसझेहि सम सजोएयछे , जाव सध्झाए पुधिन ते ! सत्तमेतणुवाए पच्छासत्तमेघणवाए , एवपि तहेय नेयई , जाय सबछा , एव उवरिल्ल एकोक सजो शाम ! संत्रा गरोर । चपन माग ५ उपाय २ द्रश्च । प्रदेश प्रमता पर्याय प्रमता पतोतपहा पनागवपा सम्ममा एतसा मानक पूषा एवं ! पहिसा बोकाव र पबमा । पवितेतोपते। मोब पियेप सोमूत्र देसाई-पूर्व रे भगवन् ! सोपांत । पच्चाममा । पहे मवपा इस्वादि म वं वायो । वहामापतेसंबोयामध्येठापा । विम सोकनापत पं. मेधा खोपा समता मानक मातमा प्रबकातिरादिक तिम । एतेपवनभोपतप विसयोस्यमा । ए मम प्रचोकमा प्रत्ययो पपि मनोपरविवारीने बोरया मेलवा बमोरोको पूरेहे-सेधिभतेमत्तमेपासतरेपहासत्तमेतयुगाए । ते परियारे मगवन् सातमोपवियोनो पालामतिर पर मातमोपविमोमो तनवात भववा परिता सातमी पापायांतर इमपूया भगवंत बोले- जो परिमा परेको नसकोगे । एक्सत्तर्महरासतर। हम मातमो पावागांतर । सपेरिसमसपोएमापनापसनहाय । सगसे ठामे जोग्या बातमे म माग हिने पाया वसौराहोपोहे-पुषितमत्तमेतदुमाए । परिता मगर पातमी पृथियो अषमा पातमो तनुपात। पचायतमपचपाए। x . पपदापमानाया दप गौतममुरोन सोकस्थितिप्रथापनाया काविहानमित्यादि । भामाशप्रतिष्ठिती वायु सनुवातपनवासरूप स्तस्पा धका भातरोपरिस्थितस्यात्, पावागन्तु स्वप्रतिष्ठितमेयेति मतरप्रतिष्ठापितारुतति तथा वातप्रतिष्ठित उदपिनोदपि सनुपमवातोपरिस्थित स्यात् २. तपा उदधिप्रतिष्ठिता पपियी, पनोरधीमा मुपरिस्थितत्वात् ३ रवानादीमा यास्यापेतया घेदमुक्त मन्मथे परप्राग्मारापपिया य तेणं जोजोहेठिलो ततबातेण नेयह, जाय शुतीययणागयझा पच्छा सशक्षा, जाय राणाणुपुछीए सा रोहा , सेयनतेर जाव यिहरइ । नतेप्ति नगव गोयमे समण जाय एवययासी , कइयिहाण नते ! लोय हिड पणत्ता ? गोयमा ! शठविहा छोयठिई पणता ? तंजहा ! शागासपठिएवाए १, वायपइठि पः भानमा पनरात पाया परिवासातमा धनवाव परे मातमा तनुवात भगवंतकोटे-एवं पितपसन्द । एपपि तिमज जापवा पश्चिा | पर न पाया वारसपठा। यायत सबभाडा एतमी कावा । एवमरणीपसमोयं । इम बपरिता पोपवावा मेरावी। वेषजोपोटेमि । तेहमी ठिमी तपएकमेयय । ते शेग्यो परहोमसयो, म विचारो सेवा, तासगेमावी। जाप पतीवपणाममग । बापत् परिया पतोत पठा पक्ष पनामतपणा, पपा पहिला पनागपापपोतमहा पक्षासम्बहाराइम परिणापनामतमहापई सर्वावा, पयवा पहिया सर्वाना पछेषनागता भारपणानुपयोएमारोहा। यावत् एमव समानुपूर्भाव रोजा एमपने पहिसापर वोनमगोये, मदा गाशता भाव रोहा । सेवभते तेतिमाप सिराहाकारे-तात्ति। मययन तमेशन ते सपसम्परे भन्यवानहीं साकहो यावत् विपर । भतेत्तिभयपगोयमे समभगवमायोर भावपर्वप यामो। साकीतादिनाबपदार्थ प्रस्तावको कथा ।र मोतम मुहार मायमितिना सम्पप्रबाये कोरे- भगवम्। पापा मानवंत मौतम, वमप भगवत योमहागीरपामी प्रतवादी यावत् रमण । परमिहावना पठत्ता । योश्चिमेदे भगवन् साबमोखिति को इतिपय उत्तर। मोयमा पाहिमा पतातमा गौतम पाठे भेद रजाराबदोकनो मिति सपा शमा तेको-पागासपाहिएताए । पापागजपर तमुपात . मस्तिवाया पन्छ समपत्ति । वातविनागाः धर्मास्पष्टौ' सेरया पद्, वृएपोमिप्यादृष्ट्यादय स्तिस्त्रः, दर्शनानिषत्वारि धानानिपत्र, सम्मा पततः गरीराविपच योगानय उपयोनौट्ठी प्रव्यास्पिद् प्रदेशा पनन्ता पर्यवा अनम्ताएष ५ प्रदत्तिा प्रसीताप्दा भनागतादा सादा चेति । सिंधिसोयतेत्ति ॥ अय सूत्राग्निप्तापनिर्देश तथैव पथिमसूत्राणिसाप दयबाह ॥ पुविनसेतोयतेपण्यासवदेत्ति ॥ एतानिष पाणि भूम्पञ्चानादिवाइनिरामा विचित्रवानाध्यात्मिरुवस्तु सत्तानिधानामि घरादिकृतस्वनिरामन चानादित्वानिधानार्थामीति लोकान्तादिती छोदसणणाणा समसरीरायजोगउयहंगे वधपएसापजाय थक्षाकिपुछिलोयते ॥ २ ॥ पुधिनते ! लोयते प च्छासधा ? जहालोयतेण सजोषया सध्ठाणा , एते एव थलोयतेणयि सजोएयहा सछे , पुधिनते! स तमे उवासतरे पच्छा सप्तमेतणुयाए एष सप्तम उवासतरसधेहि सम सजोएयछे , जाय सहछाए पुधिन ते ! सत्तमेतणुषाए पच्छासत्तमेघणवाए , एवपि तहेव नेयछ , जाय सबछा , एव उपरिल्ल एक्कोक्क सजो पान । सत्रा र परोर । रपन गाम १ उपराम र द्रश्य । प्रदेस प्रनता पर्याय प्रमता पतोतपदा प्रनागवपमा सम्मा एतसा मानक पूरुवा परिता गेबाव २ पर्ववा । पुम्मिर्मतेचायते । एडोब विशेष शियोमत्र देपार-पूर्व भगवन् ! दोकांत । पचामबरा । पई मवपहा इस्वादि म पायो । महामापतेषस योगासवेठापा । विम सोवनापत म मेचा खोपा सगला मानब सातमा प्रवायांतरादिव तिम । एतेपवयोभतेर विसवारंवधा । ए रमज अमोबना पतषञ्चो पवि मसीपरविचारोने चोडया मेमवा, पनोरोहो पोटे-सेपधिभतेमत्तमेउवासतरेपहासत्तमेतदुगए। ते पहिला मगयन् सातमोपवियोमो पापायांतर पर मातमीपधियोनो तनवात पमया परिवा मातमो पापायांतर रमपमा भगवंत मोरे- पहिमा परेको नसचोये । एषसत्तमच्यासतर।म मातमो पाबातिर । सम्मेधिसमसबोएमानापमहाय । सग ठामे जोहयो बालम महा तरिमेमामा वोरोगोपूरेहे-पुम्निमतिमत्तमेतपुवाए । परिसा भगवान् सातमौ पृथियो अममा पातमो तनुपात। परमापत्तमभयपाए। - यो प्यूप्तरवारपे दृश्यहति सभा जीदा कम्मसङ्गीताः ससारित्रीवाना मुदपप्राप्तसम्मयमयत्तित्वात् येच यहया सोतयतिष्ठिता यपा-पटे पादप इत्पेय मिराप्यापारापयता दृश्यति ॥ सेमहामामएकत्ति । म यपानामको यरप्रकारनामा देवदत्तादिनामेत्यर्पः प्रपया : सेइति । म पति दृष्टान्नापा मामेति सम्भावनापो परतिवापाप्तङ्कारे । पत्यिति । यसिदृति ॥ प्राप्नोयेइति । पाटोपप दायना पूरयेत् ॥ उप्पिसि | यर्यपाति । उपरिमितं पिझ्यन्धन इतिवचमात् प्रत्यपस्या मावापत्वा स्कार्पवादा धम्पपिमित्यर्थः वभाति परोतोत्पर्य उप्पिमिपत्ति । उपरि समिति वस्ति । मेपाठपाएति । सो काय सास्पवायुकायस्य ।। एप्पिति । उपयुपरिनावय व्यवहारतोपिस्सा दित्पत पार ॥ उपरितले मापरीत्ययः यया-यायु रापारो जस्तस्प दृष्ट मव मापारापनावो प्रवति पाबागपनवाप्तादामामितिनावः पापा विहा जाय जीयाकम्मसगहिया? गोयमा! सेजहानामए केहपुरिसे वत्यिमाळोवेइ२ ताउप्पिसिइयधइ२ त्ता मज्जंगठियधइ २ ता उयरिलंगठिमुयइ२ ता उवरिलदेसयामेइ २ ताउवरिलदेस शाउयायस्सपूरेइरता उप्पि सिययघइ २ तामज्जिल गठिंमुयइ । सेणूण गोयमा सेयाउयाए तस्सवाउयायस्स उप्पि उपरितले चिठद? को पामत् जोवर मरमा गोतम रमे पूविधा भगर्वव कोरे-उत्तर । गायमा सेवहानामए । हेमौतम ते या दृष्टांत नामाति कोमठामंत्र ।पुने प्रविमाडापेर । बोई देवदत्तनामे पुरुष दोषोपायेबरो पूर्वररी पूरे। पत्विमाडवेत्ता । दोपहोवायेकरी पीने पर्छ। प्पिसियंबध २ ता उपरपोतनामुप पधि भूपे पंधेि पापीने । मोर्गठिपंधार ता । मध गाठि झोपडीने विचे वर्षि पाधीने । उपरिममठिमयर २ ता । पर मुखको अपरिनी गांठ म माठिणाने पानोने। उपरिमदेसवामेर २ ता । चपरिना देगयो वायरोकाठ वाठोने पई। वरिषदेसमाज्या एमपो २ चा । छ परिमारंभरिपे पाविप पानीस भरपाचोस् भरोमे । पिमितवधर २ ता। अपरसो मुसनो गाठिपधि वाधीन तिवारे पड़े। मभिमगंठिमुयर। विमोगाठि पोचे हो। मेधूप मावमा । ते निचे रेगौतम । मेपाठयाए । ते अपञ्चाय । तम्ममास प्रायम्मतप्पिऽपरिमतसेपि । तर वासवायने - प्राकाशप्रतिष्ठितव तपा पपिधीमतिष्ठिता ससपावराः प्रामा इदमपि प्रायिकमेवा न्यथा प्राकाशपर्वतविमानप्रतिष्ठितामपि तेसन्तीति । तथा मधीवा शरीरादिपुगसढ़पा जीवप्रतिष्ठिता बोधेपुतेपास्थितत्वात् ५ तपा जीवाः कर्मप्रतिष्ठिताः कर्मसु अनुदयावस्पकम्म पुगलसमुदाय इपेप ससारिबीवानामाभितत्वात् अन्यत्वाकुर-पीवाः कर्मनि प्रतिष्ठिता मारवादिनावेना वस्थापिता ६ तथा भजीया बीवमङ्गीता मनो मापाविपद्मामा जीवः सरीतत्त्वात् प्रवाधीवप्रतिष्ठिता तथा प्रजीवावीवसङ्गीता इत्येतयोः कोप्नेद ? उच्यते पूयस्मिन् वाक्पे पापाराधे यनावरच उतरेतु महायसहकनाव प्रतिमेदः यह यस्पसलाम तत्तस्पा घेयम प्पर्यापतितः स्या द्यपा-अपूपस्स तेल मित्यापाराधेपना एउदही २ , उदहिपठियापुढयी ३ , पुढयीपइठियातसायावरापाणा ४ , शुजीयाजीवपइठिया ५, जी वाकम्मपष्ठिया ६, थजीवाजीवसगहिया ७ , जीवाफम्मसगहिया ८ , सेकेणठणनते ! एवषुच्चइ थठ चनगात रमाई पाबायपातक प्रतिष्ठितरतेमाटे पावायप्रतिष्ठितमो पिता नबोधो पावागविषहीं सपर रमा नमो। वातपादिहो २ । तना न पनपात चपर बनोदधि प्रतिष्ठित पातारपा २ पनादपि पर रखप्रमादि पथियोसोधे। उदासिपापिएपठयो। तमाटे जधि प्रतिष्ठित प्रविधी नही, एखपमादिक भात प्रवियोपायमोने वार माषपामाटे, पवा पित्पाग्मारा पविमो पावाय प्रतिष्ठित।।पठोपाहिभातसबावरापापा । धियो अपरिरमा पसबापरवाप प पषि प्रावकाराने वारे पन्धवा पाबायपर्वत विमानविप परिरके ४ । पबोवा बोवपरलिया । गरोराटि पुश्कप पमोव ते चावविये प्रतिष्ठित रमाई घोपावित वेमाटे । बौवा कापावा चोष संसारो कम पुरसम्पनेविषे प्रतिष्ठितरापा, पथना पोषकम प्रतिडिव नारतो पादिभावरमा ।। मोवानोवसंगशिरा मन भाषादि पुरन जोब ग्रमा पूर्वपापा भनोवानोव परनिया तिम भलो है जाये सपना बोरावसरिया । समारोबोर पममयमा उदयपाया बर्मनेवसे प्रपती बिसने ततिको प्रतिक्षित पौधे पिम घटने विषेपादिको ८ मौतम बोई-सेमारमतेएवंपुरते में चारो भगवन् इमाण । पापिशापाचोभारम्भसंगरिया । पाठौरे भोचित - ८ C यो प्युप्तरयाप्पे दृश्याति ७ तथा जीया कम्ममाहीताः ससारिनोवामा मुदपप्राप्तसम्मयसवत्तित्वात् येच यशा सेतनप्रतिष्ठिता यपा-घटे पादप प्रत्येव मिहाप्यापारापपता दृश्येति ॥ सेजहानाममकेत्ति । स यपानामपो यत्प्रकारनामा देवदत्तादिनामेत्यर्थः, अमया ॥ सेइति ॥ म पति दृष्टान्तापः मामेति सम्भावनापा, र इतिवापासदारे । पत्यिति । वस्तिदृति । प्राशोयेइत्ति पाटोपये वायुमा पूरपेत् म उप्पिसि पर्षपत्ति । अपरिमित पिबन्धन इतिवरनात् प्रत्ययस्पच प्रावार्यत्वा रसात्वादा यधपिमित्यपः पनाति परोतोत्पर्य अपवा । उप्पिमिति उपरि तमिति वस्ति । पाठपाएत्ति । सो काय सस्यवायुवायस्प ॥ सप्पिति ॥ उपयुपरिनायय व्यवहारतोपिस्या दित्यत पार मतपरितसे सर्वोपरीत्पधः यथा-वायु रापारो जसस्प दृष्ट, एव माघारापनावो प्रवति प्राक्षाशपनवातादीनामितिनावः पापा विहा जाय जीयाफम्मसगहिया ? गोयमा! सेजहानामए केइपुरिसे वत्यिमाळोवेइ२ ताउप्पिसिइयघइ२ त्ता मज्जंगठियधइ २ ता उयरिबंगठिमुयइ२ ता उवरिखदेसवामेड २ ताउयरिखदेस थाउयायस्सपूरेइरता उप्पि सिययघइ २ तामज्जिल्ल गठिमुयड । सेणूण गोयमा! सेयाउयाए तस्सवाउयायस्स उप्पि उयरितठे चिठह? गावत् जोपक्ष मयमा मौतम रसे पर्यावा भगत कोरे-उत्तर। गायमा सेवानामए। गौतम ते यवा इष्टांत नामाति कोममार्मर थे।पुषवनिमाडाये। काई देवदत्त नामे पुरुष दोवडोमायबरी वारी पूरे। विमाडोपेत्ता । दोवडोवायेऊरो पीने पर। प्पिसियंबधर २ ता उपरणेतानासुप वधि मुणे पाभि वाधीने। मनमठिंबंधार ता । मध्य माठि रोवहोने विचे वधि पाधीमे । उपरिमगंठिमयर २ ता। पर मुपको प्रपरिको माठ मोगाठिपोसे पानोने । उपरिमदेसवामेर १ ता । चपरिना देगयो वायरोकाठे काठीने पहे। उपरिभदेसपाध्याएसपूरो २ ता । क परिमायपि पानेविप पापीस भरपोपी मरोम । उप्पिसितवंधर २ ता । उपरसो मुचनो गाठिवधि वाधीने तिवारे पछे । मभिमगठि मुयर । विरमोगाठि पोने हो। मेनन गायमा । ते मिये गोतम । मेपाठयाए । ते पपकाय । तम्ममानपावम्मउ प्पिश्वरिमतमेषिता । ताने वासवायने - - n ५ ~ भागाशमतिष्ठितेव तपा पृथिवीमतिष्ठिता ससपावरा माग पदमपि प्रायिकमेवा न्यथा पाकासपर्वतषिमामप्रतिष्ठितामपि तेसन्तीति ४ तपा अजीवा घरीरारिपुद्रसपा बीवप्रतिष्ठिता पीवेपुतेपास्थितत्वात् ५ तथा जीवाः कर्मप्रतिष्ठिताः कर्मसु अनुदयावस्पडम युगलसमुदाय रूपेषु समारिीवानामाभितत्वात् अन्यत्वाचीवाः वर्मनिः प्रतिष्ठिता मारवादिनावेना वस्पापिता ६ तपा मनीया जोयसाहीता मनो भापादिपुगताना नीः सङ्गीतत्वात् जीवादीवप्रतिष्ठिता सपा अजीवानीवसङ्गीता इत्येतयो कोप्नेद ? उच्यते पूर्वस्मिन् वाश्ये पापाराधे पानावठया उत्तरेतु माहासमाकमाव इतिमेदः पक्ष यस्यसलाम तत्तस्पा घेयम प्पर्यापतितः स्पा यथा-अपूपस्प तैल मित्याचाराधेयना एउदही २ , उदहिपठियापुढयी ३ , पुढयीपइठियातसाथावरापाणा ४ , शजीपाजीवपइठिया ५, जी चाकम्मपइठिया ६, थजीवाजीवसगहिया ७ , जीवाकरमसगहिया ८ , सेकेणठणनते ! एवषुच्चइ थठ घमात सपा पात्रामपातच प्रतिहित तमाटे पापासप्रतिष्ठितमो पिता नसोधो पाकागविहीं पर रामा नमो। वातपण्ठिदको २ । तना तपनमाव वापर घनोदधि प्रतिष्ठित पार्ता रमाई र बनोदधि पर रखप्रमारि पबिवोरहोई। उदहिपाएपुठयो । तेमाटे उटघि प्रतिहिन थियो की एरवप्रमादिक सात पवियोपावभीने पाम एमपीमाटे अथवा पिवमाम्मारा पषियो पावाम प्रतिष्ठितई। पुढयौपायातसथावरापाय : पकिरी अपरिरमा पसनावरचीप प परि प्रायकापने करे अन्यथा पाचायपर्वत विमानविय पपिरोहे ४ । पोवा पोपपरिया ५। यरोराष्टि पुरसम्म पनीष ते बोपमेविचे प्रतिष्ठित रमाई जोराचित तमाटे। वोवा वामपरहिया । वोष समारो पम पुचपमेपिये प्रतिष्ठितरपा, भषषा । जोवबम प्रतिष्ठित नारको पादिभावरमा । पौवाबोवसंगरिया । मन भावादि पुरन बोप यमाचे पूर्वपमा प्रनोवानोव पाडिया तिम प्रषो है वावे सपमा । मोवासप्रसगहिरा । ससारीखोर वमसयामा उदयपाम्या बर्मनेवसे प्रबत वेवानिवसेवे तेति प्रतिष्ठित पोये चिम पटने विष पारिष ८ मौतम बोहे-सेमारमतेएवंपुषः । ते मारो मगमन् मम । प्राविधानानोमान्मपरिया। पाठभेरे नोवामिति पत्ति । अन्योन्य जीवाः पुद्गसाना पदसाय वीवाना सम्यवाहत्ययः कर्ष बडापत्साह असमणपुठा । पूर्व स्पर्शनामात्रेणा न्योन्य स्पष्टा मत तो न्योम्प पदा गाठतर मम्बदाइत्यर्थः । प्रसमसमोगाढप्ति॥ परस्परर लोसीमाषगता पम्पोन्य रोहप्रतिवद्धा त्या रागादिसप नेहा पदार हायतारीर स्परमुमामिप्यतेपपागात्र । रागद्वेपलिन स्पसम्मयन्योजयत्ये मिति ॥१५ प्रतएव । पण ममपत्ताएप्ति ॥ अन्योन्य घटासमुदायो याय पोग्गलाय थममणयहा शणमणपुछा शणमणमोगाढा शणमणसिणेहपक्षियझा शामणघाता ए चिठंति ? हताशत्यि । सेकेणठणनते ! जाव चिठति , गोयमा ! सेजहानामए हरदेसिया पुणे पुणप्प पापनारममममह।। रे पाखामगार भगवन् । पोर भने पम गरोरादिपास चपन' मात्रामाशि वांधा जोष पइसमे पुरम घोषन । प्रथमसपुत्र । मारामाम्पियनामाबरी परखा, तिवार पहे। पममममामाठा पसमयसिमेहपबिहा । माहोमाधि पागाठा बोचोभाषे मिना पोर मोरनी परे माहामारि समादिकें पाप त्रिम गरीर पोपमा रेण विनमै तिम । पचममधरतापचिति । माहामाह समुदायमावे करी रहेतिम व उत्तर । तापयि । मौवम मव तिमहोबछ । मेवेगेवतेलावचिति । मौतम कहे-तेने बार हेभगवन् । पौष भने पुससमुदायभावे वरी परोस मागत् एतसासगे पागो इतिप्रश्न उत्तर । मायमा सेवानामएारदेसियापुम्पे । हेमौतम 1 ते बघाति, मामए इतिवाक्यासबारे, लिम कोई सपनो मरारा । पुषप्पमायोसामापे । पूरो भो समार धोनहो पायीनो सरता नसटतम उवासपामतो तसो घोगो । वोसमाए । जसना या पौधो विक्षमता । समभरपरतापचिति । विपमनको घरोपर जन समुदाय विहां चिदिगि पानी पसगा तेमाटे प्रमाणे दोसती रहे। पर सपरिमेतसिहरमि । पथ का । वि पपावासकारे, ते भरारा इहने प्रनतर वाइएक पुष्प तेरनेविष । एगमहपावसदासय । एक महयो मारो नाग, पविते केमोरे नारे मईकोशेद पांगे पापपने ते सहित। सतहिातमारला । माठाहेद विसहित एवो नाचरी तेपारोप बमारे प्रयेगा। मेष मोयमा सापाया। तेनिये हेगौतम । तेनापा । तेहिपासवदाहि । तिरे पावसार शिकरो। पापूरमाको पुषा २ । बसे - राधयनावप प्रागेय सर्वपदेपु पन्जिताति ॥ प्रत्यवाहमतारमपोससिसित्ति ॥ प्रताप मविद्यमानस्ताप मगापमित्यर्पः अस्तापोधा निरस्ताप सतलमित्ययः प्रतएवातार तरीतु मशप पाठान्तरेक अपारं पारवन्धि पुरुप प्रमागमस्पेति पौरपेय तत्प्रतिपादपौरुपेय तत कम्मपारपो त समसार येहासासनिक एव वाइत्यत्र वागब्दो दृष्टान्तान्तरतासूचमाप लोकस्पित्यधिशारा देवेदमाए । प्रत्यिसमित्यादि । चन्पस्वाहा-पत्रीवानीवपरठियाहत्यादि पदपतुष्टपस्प नावनाप मिदमा प्रत्वियमित्यादि । पोग्मसति ॥ फन्मशरीरादिपुद्गलाः पामग्छ हताचिठइ । सेतेणठणजाय जीया कम्मसगहिया, सेजहाया केडपुरिसे वस्थिमाफोयेइ २त्ता कीएपघइथ त्याहमतारमपोरिसिय उदगंसिउँग्गाहेजा। सेणूण गोयमा ! सेपुरिसे तस्स थाउयायस्स उवरिमतले चि छ ? हता चिठइ । एषया थपिहा लोयठिई पणत्ता, जाव जीया कम्मसगहिया । थस्थिणन्नते! जी अपर खपरत पायो रहे रसे योमहापौरदे पाना मौतमव । तालि। मगवन् र, तिवार भगवतकडे-सेतेपोप जापनीवाकम्पसगति या। गोतम ! विम कामुने पापार बसनेरभु टोळू तिम भाषाराधेश्मापे प्राबाय घनवातादिक पविधामा वावत् घोषयमें समया तांसगे काय पयो मोवो हष्टात यो सेवाापावोपरिसे। ते विम वोर पुरुष देवटत्तादि नाम। पत्तिमागे । दोवो वायकरीपूरे पछे से दोषी । परिएक पा। परिमेतोपांघे पथे। प्रवाह मत्तार । जापानी पमाप तगामवाय पाठांतरे पपार पाररहित। मपोरिसिमसिन्दगसि । पुरुषममापयो प विक पापोमेविषे ते पाप । उप्पाहेबा। प्रागारे पाचोमारिपसे। सेमगायमासेपुरिसे । भमबतबाई तेनिये रेगोवम 1 ते पुरुष । तस्मप्राप्ठमारमा परिमतवेगिरा तो पापोने पर रो पापो पपगाहना रहे बचा रहे इसा भगवतेबानो तिवार गौतमको । हता विकहममवन् तेपुष्प पी को अपररी । एकपापाविहाचावहित पपत्ता । तिवारी भगवतकार इम पा गप्दष्टांता तर सूचनाण, म रपैपकारे पाठभेदे सोकस्मिति को। जा पत्रीवाबमसहिमा। यावत् पाकाम पाहिएवाते इत्यादि कोवयमें सपना एतला सगे जायो, सापस्थिति प्रधिधारधोज काछे-प्रविषमतेबोवा - ।

पति । अन्योम्यं जीवाः पुनसाना पद्नसाय बोवाना सम्बदाइत्यर्थः कर्य बढाइत्याद ॥ असमणपुा । पूर्व स्पर्समामाप्रेणा म्योन्य स्पसा स्त ता न्योम्प पहा गारतर मम्बदाइत्ययः । असमसमोगाढप्ति । परस्परेप लोलीमावगता अन्योन्य सहप्रतियदा इत्पप रागादिरूपः मेषः यदा डायतशरीर स्परेलमामिप्यतेयपागात्र । रागद्वेपलिन्न स्पसम्मबन्धोनयत्वे मिति ॥१॥ प्रतएय ॥ मणमम्मपत्तारप्ति। अन्योन्य घटासमुदायो याय पोग्गलाय शणमणयहा राणमणपुठा शणमणमोगाढा शणमणसिणेहपक्षियझा शणमणघाता ए चिठति ? हताशत्यि । सेकेणठेगनते ! जाय चिठति , गोयमा ! सेजहानामए हरदेसिया पुणे पुणप्प पोपनावममममहा। हे नाबामगार हेभमनन् । बोर भने काम गरीरादिपास चपन मारामाहि गामा पोव पासमे पुरम घोषन । पलमपुश। माहामारि ममामावरी परमा, तिवार परे। पप्पमसमागाठा पपमपसिहपरिवहा । माहोमादि पागाठा सोदोभाषे मिपा पोर मोरमी परे मागामारघर रामादि बवाना जिम गरीर चोपचा रेख दिसम तिम । अममम्मघडताएचिति । माहामा समुदायभाये परो रहेतिम उत्तर। तापति। मोतम मप तिमझोपरे । मेमोनर्भतेवावचिति । गोतम वाई-तेने पार मगवन् ! पोव पने पुरखसमुदायमापे करी बरोरा मारत एतसाममे बाग रतिपय उत्तर । गायमा सेनानामगारदेसिगापथे । गौतम ! ते यवाहरति, नामर इतिवापाचवारे, विम कोई सपापो भरा । पुमप्पमापेमामामापे। पूरी भराा समार जोनको पापीमो सरता उसटतम उहासमितो तसो वानो। वोसामाप । पसना या पपनापी विषमतोहे । समभरघठत्ताएमिति । विपमनी वोपर वन समुदाय जिहां विदिगि पानी पसतो तेमाटे प्रमा दोसतो रहे। पर बसपरिसतमिहररमि। पप करतो । रिय पपायासकारे, ते भरा द्राने पनतर काइएका पुरुप तेरनेविप । एममहमामसदासव। एक महती माटो नाम, पविते कायोले नाने साकार पारी पापपने ते सहितछे। मतशिपाया । माटाछेद तिरों सहित एहयो नापरी तेपापोप गारे प्रगबरे। गायमा मापारा। तेनिये हेमौतम । तेनाना । तेहिपासवदाधितिरे पायकवार शिबरो। पापूरमापो पुसा २ । असे -- - ताववि तावन्तंबात वाइपाएत्ति । ममनादिकायदेठारूपया । पहिरगियाराप्ति ॥ अधिकरमेन फूटपाशरूपेण निता या सा तया तया॥ पाउसिपारति ॥ प्रदेपो मनेषु दुएमाव स्तेन निवंता मावपित्री तया ॥ तिहिकिरियाहिति ॥ क्रियन्तइति किया चेष्टाविशेपा । पारिवायणि पाएत्ति । परितापनमपोवना पारितापमियी साच पढे सति समे प्रवति प्रातातिपातलियाप पातितहति ॥ वसविपत्ति । तत्सर्प ॥ नसिकि- पारियावणियाए चउहिकिरियाहि पुछे जेनयिए उम्मयणयाएवि यघणयाएवि मारणयाएयि तावचणसे पु रिसे काइयाए जाव पाणाइयायकिरियाए पचहि किरियाहि पुठे। सेतेणठेण जाय पंचकिरिए । पुरिसेण नते ! कच्छसिया जाय वणविदुम्गसिया तणाइ ऊसविय २ गणिकायसि निसिरइ तायचण नते ! से पुरिसे कइकिरिए ? गोयमा ! सियतिकिरिए सियघउकिरिए सियपचकिरिए । सेकेणठण गोयमा ! जेन गाएवि । वेभषयाप्मवा वरपाय परपनो परिवर्ता । पत्रमाथि । धननी पपि बर्ता। मारमाएवि । मारपनो पपि बत्तो । ताप चपसेपुरिसे कारगाए । ततपोवास ते पुरुष कायिको निमा प्रादिदो । वावपापारवायचिरियाएपहिदिरियाहिपड़े। यावत् प्रातिपातिको विया भगवध पौसामे पापोने पातपोवे एपविग परमा, एतावता तेरने पचविपासामे । सेतेवीप गोयमा । ते ते घ डेपोतम ! पापपंचविरिए । सियचत गिरिएसिमपंचविरिए मग, बसोमौतम पोटे-पुरिसेमतेवरसिका । पुरुष भगवन् ! नदी बस वोप्या उषत प्रदेगरि । लापमपविदु मसिया । सब नानापचार उपनासमानेविषेषपदता समन बायो । तरार खसविस २ । विपाप्रत घरा परी २ ने। पषिकायनिमिरा । प्रमिवायप्रत मारधारे। तारमतेसे पुरिमेवापिरिए । तेतलावासा चपुन वाक्याबारे भगवन् । ते पुषपने घेतलीबियामागे रतिमा तर । मोममा सियतिथिरिए । मौतम ! बदाचित् तोमश्रियातामे। सियचपिरिए । पदाचित् भार शियापागे। सिमपनबिरिए । विगारेको पा रिया सामे। रेवतीरमते । तामाटे ममयम् ! रमका, गोषमा बेमविएसपरयाए। गौतम बमबमोपपता र बेतबोबार की - - .

- एमिएप्तिकाउ थन्लयरस्समियस्स यहाए उसुनिसिरइ, ततोण नते ! सेपुरिसे कइकिरिए ? गोयमा! सिय तिकिरिए सियचउकिरिए सियपचकिरिए, सेकेणठण गोयमा ! जेनविए निसिरणयाए तेहि जेनविए निसि रणयाएवि विदसणयाएयि नोमारणयाए घउहि जेनयिए निसिरणयाएषि विद्धसणयाएथि मारणयाएवि तावचण सेपुरिसे जाय पचहिकिरियाहि पुछे सेतेणठण गोयमा ! सियतिकिरिए सियचउकिरिए सियप चफिरिए । पुरिसेण जते ! कच्छसिधा जाय श्लयरस्समियस्स यहाए शाययकणायय उसु थायामेप्ता चि पररममियममाए । पनेरा का एक मृगमा यधभयो मममे मारवाभयो । उसनिमिरर । तोरमते काइ प्रस्वचा मेन । वतारमतेसेपरिसे । तिवारे से भमान् ! तेपाय । बाहिरिए । के तमोवियानो परवार कोये इति । गायमा सियतिथिरिए । हेगौतम ! बिगारेक वोनधियाना परपहार सोये। पिमहचिरिए। वितार चारिधियाना परपसार । सिम्पनविरिए । विवारे पाच किराना करपार, गौतम कोई-सेफेपोषभरो । तेपणा | माटे हममान् ! इमा। गापमा पविएनिमिरपसाएविति। गौवम ! वेभम्मकर्ता पापवाद सहने काधिमादि तोमवियाये फरम्मा महोवे । के मगिरमिसिरपारपि । मप्प बातो पापबाट पनि मुबार बयो । विसपगारपि । पने विषम पमा मोहापानवाये । बीमारपयाएपरि। परिमार मोरे तेतसादामबगे तेहने पापियादि चारविमाधाये । भपिएनिसिरपयाएकि । भयकता तोरपपि का। विसरमाएपि । विश्वस नाम पमारेछे। मारपगारपि । पने मारे परिशे । पापपपसेपुरिसे। ततपावास से पुरुष । वावपंचषिकिरियाहिपुरे । यावत् कारिमादि पंच किया म परणा तेरने परदिगा पाये। सेगी गोगमा। ते तेरे परमौतम ! मगा। सियतिविरिए । विगारे तोकिमा सागे। सियतसविरिए । पावित पारकियामागे । सिम्पपविरिण । पदाचित् पापवियामागे, बसोमौतम पूछेडे- । परिसेलभतेवाईसिवा । पुरप भगवन् ! कथादिकनेवि थे। बापपरमनिराहार । पावत् अनेरा का एक मृगना स्वभवो मगमारवाने पाये। पायकवायतठसुमायामेत्ता । दोष कामता ते तोर - मुपगतमेघाध मुक्तस्तया मा क्रियमार धनु पापठादिकतमिप्ति ध्यपदिवपते पतिस्तु प्राम्बत् तपा सम्धीपमाम म्प्रत्सम्बाया माराप्यमान बाफ धमुमा रोप्यमानमत्यम्न सन्धितहतसन्माम नयति तपा निर्घपमान मिप्तरा वतुतीक्रियमात्र प्रत्पम्माकपयेम नित्तित धृत्तीकत मराठ साभार कत प्रयति तथा निमग्न्यमान मितिप्यमार द्वारा निसृष्ट भवति यदाप मिसभ्यमान मिसट तदा निसन्मानपापा धनुईरेश फत स्या तन कागनिसष्ट नपति कारठनिसमा मग सनैय मारित सतत घोप्यते ॥ बेमिपमारत्यादीति ॥ष शिया प्रशाम्ता साया नन्त हिज्जा शवयरपुरिसे मग्गन शागम्मसयपाणिणा सिणा सीसनिदेजा सेयउसूताएचेय पहायामणयाए त मियविधेझा । सेण ते ! पुरिसे कि मियवरेणयपुछे पुरिसवरेणपुठे ? गोयमा ! जेमियमारेइ सेमियवेरे णपुछे, जेपुरिसमारेइ सेपुरिसयरेणपुठे। सेकेणठणनते ! एवयुच्चइ जाव सेपुरिसरेण पुठे। सेणूण गो पो पापीने पाक पीने । शिवा । पोररी पतसे। अपयरेपुरिसेमपपी। पमेरो काई एव पुरुप पठायो। पागन्ध । पापीने । सयपापिशामिषा पापणे पेरी तरमारेकरो। सोसहिरेवा । तेरमा मस्तकातें ऐ तिबारे। सेठस्ताघेष पुषागामपयाए । सेतोर प्रेसमोठामोने पूर्व पात्रों तो ते पुरमाहामको धा तिपारे निये । ममियविधेषा सेवभतेपुरिसे किमियपेरेपपुर । ते सभमतें मीधे ते चपावासबारे भगवन् पुरुषमाधानी छेउ पसाराम सममारोरते मेरमातु भयो पकाये पबवा पाप ते परमो पथमा । परिसवरेपहे। पुरपने वेर पाकरो परमो रतिमन सत्त । मागमा अमिय मारे । रेगोतम नि पुरये मग वधवानेवाचे तोर साचाता । सेमियोरेप। पुरष मगर पाप तिबरो परमो । पु रिम मारो सेपरिसपेरेपो । पमै बसे पुरुप परप मारारा तेपुरप परपमेयरबरी परमो तेहमे परुप मेरधाम । सेकेरोपभने एपपुर । तेमामाटे भम छन् । रम पममा मारपसारने सममा पापमागी। बावसेपरिसमेरेषा । यावत् पुरुपना मारहारने पुरपना पापसागो रतिप्रश्न उत्तर । सेप मोपमा बधमाको। ते निपं मातम धनुपतीर करवामाया तेकोपामीरे। सरिधमापेमथिए । धनुपपिप तोर सभामाचो तेसाया कसोये ।

रोत पमादिव यावत्यो यन्त्र या कालविनामे मपन्ति तावती सा दर्शयमा प्रतोबगमित्यादि । परमासाम् यावत्प्रहारहेतु मरण परतस्तु परिवामान्तरापादितमितिकता परमासा दूर म्प्रासातिपातकिया न स्यादिति उदय मतच मवाारमयापेक्षया माणाप्तिपातमिपाध्य यमा ! फडामाणेक सधेजमाणसधिए नितिजामाणेनिधतिए निसिरिमाणनिसिछेति यतसिया। हता नगव ! कजामाणेको जाघ निसठेप्ति वप्तक्षसिया सेतेणठण गोयमा ! जेमियमारेइ सेमियघरेणपु , जेपुरिसमारेइ सेपुरिसवरेणपुठे, तोबराहमासाणमरड , काझ्याए जाय पचहि किरियाहि पुछे पारापा बहाये तपा। निपत्तिवमाषेनिवत्तिए । धनुपनविषे पेपरच तेषाचीने पनुपासावार परपा मापा ते वोधापासीये । मिसिरिखमा पनिमित्तिपत्तमसिया । पनुपमकीनीसरपामापो पाच ते नोषमा कहोये पायो वायता पावा हुये, इसा भगवद गौतमनेक तिवारे गौतम -सा भमर्थ । भियवन् । कबमारेगा। धनपतोर परवामांपो तेवोधा कसोये । वावनिमित्तिपत्तपसिमा । यावत् अनुपयो तोरनीसरमा मा पाते भोसरा बहोये, ते नोसरगामी विमाना परपहार धनडर तेमारे बाडना मौसरपामो सग तेगोजपुरपे मायो । सेसे मोपमा घेमिय | मारे । तेमाठे रेगौवम ! म मममारे तेपुरप । सेमिनरेगपरे । तेमृगने परेवरो पापेबरो फरमो । धेपुरिसमारो । भने बेपरुप पावत ते परपे एनस र मारा । सेपरिसबरवपुः । तेहने पुरुषमा पापनामा तेमाटे पुरुपरेरकरो परमो। पोषणहमासामरावास्याए बाबपति गिरि मारिया । मामारि जामममर तो ताने बावत् परकियामामे रुमासाई मृममे प्रहार हेतुब मरबहे, तिबारपई परिणामावरमको भरप सो बरोबमासयो उपरांत प्रातिपातको वियाते धनुरपुरपने नड़ो पपरमाय वाचवा, एपषि पवारनो अपेक्षा प्रापतिपातकोविमा पदेय मार पाडाने मा, प्रश्नमा विवागो प्रहार तक मरसह तिवाती प्राचातिपातको विमा भाग पाम पारियो पादिदे पचविया मक रमाहीये। पारिवामासामधाराप चावपारिवावपिवार पहिदिरियाािषा बाहिर इमास मरता सेपुष वायिको पादि - - - पदयमाघापदमनाथ मुल मन्पपा याकदा प्पपिस्तमहारहेतुब मरण प्रवति वदेव मापातिपातफियति । सत्तीएति ॥ शासपा महरविये समनिपसेवति । इम्पात् ।। सपारित्ति बालेन । सेति । तस्प बाइयाएत्ति ॥ कापिक्पा शरीरस्पन्दनपया प्राधिकारविल्या छ तिगण्यापाररुपमा प्रादपिया ममोःमरिधानन पारितापनिरपा परितापनपया मागतिपातविपया मारबम्पया पासवेत्तिइत्यादि । याहि ठरहमासाण मरइ , काइयाए जाव पारियावणियाए चउहिकिरियाहि पुठे। पुरिसेण नते! पुरिस सत्तीए समनिधसेजा सयपाणिणाया से शसिणा सीसबिदेजा । तणनते ! सेपुरिसे कइकिरिए ? गोय मा ! जायचण सेपुरिसे तपुरिस सप्तीए समनिधसेइ , सयपाणिणाया सेशसिणा सीसनिदइ । तायचण से पुरिसे काइयाए जाष पाणाइयाए पहिकिरियाहि पुछे। थासमषहएणय गणवफखषप्तीएण पुरिस दई यावत् परितापमयो विया ताई पारविगों पर प्रतिसेमीभाव एमासपछे मरेता तेममवारको मूपामहो तेमाट मागविपातको किया सा मेनकी बसोपीतमपूर-पुरिसेपमतेपुरिस सत्तोण्यमभिधसेवा । पुरुष हेमयपन् । एकपमते मलि मासी तिचे प्रबवा यति प्रहरपविशेपेकरोग । सम्पाविसावा । पपणा पाताने शायस् । सेपसिनासोसहिदेखा। तेपुष्प तरपारबरो मापो रे। तपोपभसेपुरिसेवाकिरिए । तिवारे वाक्या मारे भिमगन् । तेपुष्पने मतमी विभागामे रविप्रम उत्तर । मायमा वावरपसेपुरिसे । मोवम । तसोबास तेपुरप । तपरिसं सत्तीए अमिपसेर । नेपामते पनि प्रहरष विमेपबरो। सयपारिता । पनपा पाताने हा करो। से पसिचासोसविता । पुरुष तरवारसपाते । तारंचसेपुरिसे । ते तसावास ते पुष्पा पारगए । बावियोनिमा । पक्षियररियाए । पपिपरकोविरा । बावपाचावायविरियाए । यावत् मापातिपातको पि मा । परतिनिरिमारियो । परनिग संघाते परमावसोये तेरने पचविगावागे। पासपमाएपय प्रहमतोएवंपुरिसोरेपपुरे। पासब ठाको पभबने बालक एतसे तमासाधा बेजोग तथा पुरुषको बधकोपोहे तेहपको भापो के पापटासिवानपि निरपेचाचि पापरा पराया प्रापनी | मा रर्मनासपनामावेना मनुभामाना पत एवा विधातानां विशिष्ठयोपाविषयीहतामा एतदेव कुसहस्पार ॥ अहोनहापति ॥ अष्याकसाना विशे पतो गुरुमिरनास्साताना । होशिमापति । विपवादष्ययवादितामा ॥ पमिउवापति ॥ महतोग्रन्पात् मुसायवोपाय सहेपनिमित ममुग्रा परसुरुनि रनुहतामा प्रतएवा स्मानिरमुपपारिताना मनवपारितामा ॥ एयमष्ठेति ॥ एवमक्षारोपों उपवा; पमर्पा । मोसहिरति ॥ ननधि त ॥ मोपतिएप्ति ॥ मो मेव । पत्तियति ॥ प्रीति रुच्यते तद्योगा त्पत्तिरत्ति । प्रीतः मोतिविपपीसतो पिया म प्रतीतो म प्रत्पपितोया रे | तुतिः ॥ नोराएहत्ति । न चिकीपितः ॥ एयमपसजोपातुभवपत्ति । अप यथा यतवस्तु यूय घरप एषमेव तस्वितिलावाय पाउज्यामाप्ति। णोसहहिए णोपत्तिइए णोरोइए, इयाणिनते ! एएसिणपयाण जाणणयाए सवणयाए वोहियाए थनिगमेण दिठाण स्सुयाण सुयाण विणायाण वोगकाण वोच्छिणाण णिजादाण उपधारियाण एयमठ सपहामि पप्ति यामि रोएमि एवमेय सेअहेय तुम्ने घयह। तएण तेथेरा नगघतो कालासवेसियपुत्त शणगार एवषयासी सदहाहि थजो , पतियाहि जो , रोएहिथजो , सेजहेय घम्हेययामो । तएणसेकालासवेसियपुते म्यादि पतये धरा पर्ने मापात् पाते पक्षको समानहो । प्रमयाच पसुपार विसाया भवामधप। विसोने समोपे सुग्रामको दमन पावरन पमाबरो तसामाटे पिपिर बाधरस्तिने रिमेपो गरे समानहो । पचाथिसाप पपिहार । मादायवी सुणाव बोधभगे गुरे कमानको। म पारिगाव । एतसा भयोग पने पूरे एप्रय पधारोनयो। एपमारोसाहिए पोपत्तिमए । प्रकारे प्रय पपया एपब सापामही प्रीति विषय न कोपा । पारोए पदाधिभते एएसिपपराग पापमा । धामी । जिरेभयपन् एष पदनापम मापा मानेपरो । समयाए बोरियाए पनि | ममे दिशाच रसपान सुपाप विषागप बारमार बाहिपाच । सुपा यब करो बाधिपाम्यो सम्यानपचे पिसारवाच बया भयो समा मुगा पर्य दमन पावर नपा वियेपे वाचा विरामको पुरेपमा विपपादि सदेश हेपा । विडार पारियाप एवमासामि पत्तियामि रोएमि । मोटा । ।

अनुमहामतान् पापनापजिनस्य हि स्वारि महाव्रतानि ना परिपरीता सीमन्यत इति मधुमस्य परिग्रहें सावादिति ॥ सपनिकमणति ॥ पा पनापधर्माधि अप्रतिमय कारणएव प्रतिक्रमसरवा दम्पपा स्वकर महावीरचिनस्य तु स प्रतिकमा कारर धिमा प्पवश्य प्रतिकमवय यणगारे धेरेजगषतो बदह नमसइ घ० प्ता णमसहत्ता एषवयासी, मुच्छामिण नते! तुम्ने छतिए चाउकामा धम्मान पचमहायडयं सपफिक्कमण धम्म उयसपजिप्ता णयिहरित्तए थहामुह देवाणुप्पिया मापमियध करेह, ताणसे फाठासयसिएपष्ते शणगारे येरेजगवते यदइ नमसह व०त्ता नमसइत्ता चाउजामाधम्मा पचम हवइय सपफिक्कामण धम्म उघसपप्तिाण विहरइ, तएणसे कालासवेसियपुप्ते शणगारे यज्ञणिवासाणि सा पायी सपाय बाबा ए पय पधारा एप सार प्रोति विषय कई राथे। एवमेते सेबडेम तमेगा नएषतेराभगवदी। प्रबषिम एवात तमा तेसप तिमजतिभाष तिबारे ते परिर भगत । वासापरेसियपुतपरमार बापाससित पुष सामते । एवषयासो सातापियो पतिमा। पिना रोपपिपला। म बार्ता इसात् । सामादि। यहावत पापो पाय प्रतिविषम परिपाय पिकरि पाय । सेवीयपम्पदामो । एपम पमे पाडू निम । तपरसेवासामवेसिमपुतेपरमारे । तिबारे तेबासाससिताब परगारसाः। मेरे भमवतेयंदा पममा २ ता। सविर भमव नप्रति बार ममवारपरबादीने ममसार करीने। एबबबासो। म पाता था। चामिपमते तमपतिए धारावामापी पमापी परमामार्य सप शिममध्यसपषिताप विहरित्तए । एभगमन् ! तुमारे समोपे पारि महामत मनोवेमाटे पासमाय मामीने पार महापर, मैमुनमा प रिपानविये पतर्भाग तेजयो परमतरूप थोपामना सामोना साहनेवारर अपना परिहमयो को पने योमहापोरसामोना साधनेवारण पमा परि पापे पतिमा परपा ते पादरोने पिहारः। पनामदेवाणप्पिया । खिम सुख अपये निमबरो देिवानुप्रिय । मापरिवधतपण्सेना मामसियपुत्ते परमारे। प्रतिबंध म्याधात मारने तिमारे तेबाबाससितपुत्र साठ । मेरेभगवते बदा पमहर २ मा । स्मविर भययंतमते पादै नम 1 रसादिति । देवासुप्पिपत्ति ॥ मियाम ॥ मापहिमपति । माष्यापात गुरुवे सियम्य ॥ मुठनावेप्ति ॥ मुन्नायो दौषितस्य । फलगसम्पत्ति । प्रतलायतयिफम्मवत्लाटरूपा । फसवति । प्रससहतकाएझयम बप्टमय्यावा अममाशा बसति ॥ सदावलमोति ॥ सम्भब साभो पिलब्धिया साना परिपूर्णसानोवा सम्पाफ्सम्मिः । उचावयति ॥ उपावचा अनुमतिकूलाः असमंजसावा ॥ गामकटपति । पामस्पेन्द्रिपसमूहस्प फट का इप फटका बाधकाः शत्रवो प्रामकटका करतहत्यार " मावीसंपरीसहोवसगति ॥ परीपहा दुपादय साएको पसर्गा उपसकना जुर्मयश मणपरियाग पाउणइ पाउणइप्ता जस्सष्ठाए फीरइ नग्गनावे मुन्नावे शकाणय श्छदंतधुवणय अच्छत्तय एणोपाहणय नमिसेजा फलहसेसा कठसेजा केसलो यनचेरवासो परधरप्पधेसो लछावालही उच्चायया गामकटया याषीसपरीसहोयसग्गा अहिया सिइ, तमठ थाराहेइ थाहेइप्ता घरमेहि उस्सासनीसा सेहि सिद्ध युद्ध मुक्त परिनिछुए सहदुरकप्पहीणे॥नतेति नगव गोयमे समणनगवमहावीर यदइ नमसइ घ०त्ता णमसइप्ता एववयासी, सेणूण नते! सेठिस्सयतणुयस्स किवणस्सय खप्तियस्सय समाय थपञ्चस्काण सारवर बाटोने नमस्कार वरोने। सब्जामाप्राधमापा पचमहम्मस्य । चार महाव्रतम्म पमो पपमहानवम्प धर्म । सपरिवमधम । परिणाम पारित धम । उपसवितावविहर। पादरोने विचरे । तएपसेकासाससिमपुत्ते प्रमगारे । विपारे तपासाससितपुत्र साप्त । मभिवासापि । को बरस । सामयपरियामपामा २ ता। साधुनो दीवानो पर्याप पारे पासोने। वहाएवीरह। दोने में कर। पम्पमापे । पसरवि परी मुरना पहावा रोषापी गरोर प्रचामबामहो । प्रशाम पापाणम भूमिसेवा । रुष नरापमा उपामा रहित पमे समापो फिरे भूमि सापामसेवा । गचा समावभरमासा । पसय पाटोवे सपा काष्ट सेवाये मावा केगमा पोचपरिवा नामषय यसमा पातयो । परघरपव | माहाको पाव गामाया। पाहारने अचं परघर प्रवेणीधे लाभे पथवा मसाभे पचमा परिपूष मताभ भन्दस्व प्रतिकूल पथवा परामवस इद्रीय म 1 मा परीपापचगा प्रपमा द्वामितिः परीपहा सपा उपसमा दिष्पादय कानास्प पेसिफपुन प्रत्यास्यानफियया सिद्वाति सद्विपययनूसा मत्यास्पामझिया निरूपमम ॥ प्रतात्पादित ॥ मतेति ॥ ऐपदम्तहति एव मामतिक्षेप अपवा' प्रदन्त इतिहस्या गुरु रितिकस्वेत्यर्पः॥ पहिस्ससि । मीदवताप्यामितमीवरपटविभूपितगिरोयेष्ठमोपतपौरबममायकस्य ॥ तपस्सति ॥ दरिद्रस्य ॥ कियपस्सति ॥ रहस्प । पत्तिपस्स फिरियाफजइ ? हता गोयमा! सेठियस्स जाव शपच्चरकाणकिरिया काइ, सेकेणठणानते ? गोयमा ! शयिरइ पमुच्च , सेतेणोण ? गोयमा ! एव बुच्चइ , सष्ठिस्सय तणु जाव कडाइ । थाहाकम्मे ण नुजमा णे समणे निग्गये कि बधइ किपफरेइ किचिणाह किउपचिणाइ ? गोयमा ! थहाकम्मे णनुजमाणे थाउ यपज्जा सप्तफम्मपगमीच सिदिलघधणबछा धणियबधणयझा पकरेइ , जाव शृणुपरियहइ । केसेण मामे जटा परे बाद बिसा तेबाहे-बाबोसपरीसहारसग्मापक्षिया सिखा । वायोसपरोसा उपारिक सेहोष धम भगको परीसहापस पपमा बायोम परोमा तमा उपसम देवादिखना शोधाते अपना बा चौम है। तमापाराहो २ ता । ते पामाने पो पारा पाराधोने। परि | मेरिखसास पोसाहिमिये दुरे मुरे परिनिपुर । होसे सास मोसासकारोने सिहवामे तस्वना बापाने कमयो रस्तियांमे मोसमीभावमाने । 1 सपोरे भत्तेत्तिभमबमासमे। सब दुपमो रहितमया माच पक्षतास्यब भगवन् सा पामर प्रथमा भदत रसो गरुपते पापकारी व मो भगवत गोतम । समबममवमहामोरं । समय भगवत चोमहायोरपामो प्रत । पटर पममा २ ता एबयासो। बाद मममारकर मादी न नमस्कार बरोन हम पातो मा सबभते सेजियममयतपरसय किमयमय पत्तियमय । ते नि भगवन् । बोदेशीनोमूर्तिमना पाटा पाने म पातेपेठ तमतमा दरिद्रोने बिरम राबाये । समाग प्रपसारबिरिमापखा। सरोपी निये प्रप्रयासाननिमा मा पमाव पबमा पम | सामानमो बपना मत परियावर। हता गोममा समिमय । हागोतम । येष्टिने। पाप प्रपतापपिरिमायबर । यावत् पप्रत्यास्यान कि - - - रमादिति ॥ देवापुप्पियति । प्रियामंपच ॥ मापठिषपति माव्यापाप्त कुरुधे तिनम्य ॥ मम्माषप्ति । मुंगनायो दीक्षित बालगसम्वति । प्रससापतविफम्मयकाएरुपा । कासम्बन्ति ॥ ससत्तकारशयन कष्टमस्यावा अमनोज वसति ॥ सहायतदोति ॥ सचम्न सामी पसधिया सानो परिपूससानोवा सम्पापसम्मिः ॥ पावति । माया प्रमुसमतिकूला असमंबठावा पामकटपति ५ ग्रामस्पेन्द्रियसमूहस्य कट का इस बटका यापकाः शादी ग्रामकटका करतरत्यार ५ बावीसपरीसदोषसम्पत्ति ॥ परीपहा दुपादय सएको पसर्गा उपसकमा दुर्मनस मणपरियाग पाउणइ पाउणइप्ता जस्सठाए कीरइ नम्गनाये मुफनावे शताणय दतधुयणय अच्छत्तय थणोयाइणय मिसेज्जा फलहसेना कठसेजा केसलो यनचेरयासो परधरप्पधेसो लछापलही उच्चायया गामकटया यायीसपरीसहोयसग्गा शहिया सिह , तमह शाराहेइ चाहेइप्ता घरमेहि उस्सासनीसा सेहि सिद्धे युझे मुक्के परिनिछुए सचदुस्कप्पहीणे॥नतेप्ति नगव गोयमे समणनगवमहावीर पदइ नमसइ यत्ता पमसइप्ता एवत्रयासी, सेणूण नते ! सेठिस्सयतणुयस्स किवणस्सय खप्तियस्सय समाचेव थपञ्चरकाण माटोम ममनार परो। वाटपामापापापा पत्रमामाय । चार महानतम पमबो परमशामताप भर्म । सपरिमाय । पश्विम भासहित धम । ससपवितावविहार । भादरोने विचरे । तएसवासामवेसियपुत्ते अपमारे । विपारे तेबासासवेसितपुर साप्त । वइपिवासापि । परसमामएपरियागपात २ ता। साधुनो दोषामो पर्याय पार पायोगे । पसाएवोरा । जाने पर्षे कर। भावे । यसरहित पपी | मुलायमापस । दोषापमों मणेर प्रचाबमानको । प्रचार प्रचावास्य भूमिसेवा । न नरापयो उपामा रहित पगे छातुर्याणा पिर भूमि गा। पागसेवा । बासेबा बेसहावभरवासा। पराग पाटोये सहा बाट सेवाये मावो केगनी सोचकारियो प्रमचर्य वसवो पारयो । परमरपष सा सहारसी उपाय परामकटया। पाहारने अपरघर प्रमशोध साभे प्रवरा नसामे प्रथा परियम नवा अन्य प्रतिपूस अथवा अगमवस रोग म - - om माणे याउपयजासत्तकम्मपगी जाव चणुपरियहइ । फासृएसणिसानंते नुजमाणेकियधइ ? ४ जाव उयचिणाइ? गोयमा! फासुएसणि नुजमाण थाउयघमा सत्तकम्मपयनी घणिययधणयझा सिढिल घघणयहा पकरेइ , जहा सेसयुझण, णयर शाउयचर्ण कम्मसियषधइ सियनोघधइ सेस तहेय जावधी इययइ। सेकेणठण जाय बीइवयइ ? गोयमा ! फासुएसणिजा जुजमाणे समणेनिग्गये शायाए धम्म नाइक धम पथमा तपम पनि में एतावता धमयोपरे। पायाधमयाममा । पाथायधर्म पतिप्रमतो उसपना बना । पुठविधायगावकर वाव मायमापनपा। प्रमिपीवासमा बीवमी पनुपापामाय झ्यापरिपाम रहितमाय, यावत् अपकाय सेवमाम वासवाय पमस्मतोकार समायोट्रि पादिपक गिमासे ताने समाना। सिपियराजोवाय सरोरार पाहारीमा पनि पुन - वाक्यासकार, पोवना अरोरमा पासारपते पा चार पाहारकर म्यय । तेविसापरावर ते बोवनो पपि पनुनपानावे । सेसे रोप गायमा एपबुर । ते तेरे को गोतम ! मवाना पाहाम नगमापारमयसापा पावसत्तापमडोभा । भाषाकर्मी पाहार मोमतामया साठ पासखा परीने यावत् सात कमनी प्रति सिषिसर्वधर गाणे तेमाटमपणे बाये। बापपपरियार । यावत् समारमा परिभमप्रपरे। पामएसपि पभते भषमारे किंवधर । मासएपपोध भगवन् ! पा पर मोमताका साप्त म मा । प्राविति । यावत् से प्रदेशमधमो म बधार इतिप्रश्न, उत्तर । गोयमा फाम्पसपिवभुवमारेपासवबापी। गौतम । पासपरकोप बीमताबका साधु पाछपाऊन । सत्तकम्पग पापियवधपणापापक्षरो । सिभिसर्वधपसातकमनी प्रति गाठ अपरें पायी होते सिविता गौधे । पासेसवुरेप बिम से सपर अपगारममा । एवर पाय पप सप सियवघर सियपोधा मेसतहव वापषि गया । एतसा मियेप प्राधाम प्रभुम बरसा पायासबारे निगरेष गधि विकार कमधि जोपासकम ना तो सम्बनुसारो वीष हुवे, पधा भावा सानोपरामापन समार तर मापवास रख च । सेवेषभतेषोपयोषयद । से में प्रय रेमगवन् ! रमवानी यावत् व्यतिक्रमे ससार - - ति । रामः । अपहसायकिरियति । प्रत्यास्सामझियाया पनावो प्रत्यास्थानमन्योवा कर्मपन्य ॥ अविरहति ॥रवाया प्रनित्तिः साहस पा समेति, अप्रत्यासामग्रिपामस्तापा दिदमाइ ॥ पाहाकम्ममित्यादि । पापाय पापुमरिधामेन यत्सपेसन मतम क्रियते भवेतनया पथ्य ते चीयतेवा गहारिक व्यूयतेवा पक्षादिक' तदापाकर्म ॥ विषपदति । प्रतिवन्धमामित्य स्पष्टावस्यापेक्ष्यावा ॥ फिपकरेइति ॥ स्थितिष शेण जाय थाहाकम्मेंण नुजमाणे जाय अणुपरियहइ ? गोयमा ! थाहाकम्म णन्नुजमाणे थायाए धम्म थइक्कमइ शायाए धम्म शहक्कममाणे पुढधिकाय णायकखइ , जाय तसकाय णायकखइ , जेसिपियण जीवाण सरीराई थाहारमाहारेइ तेबिजीधे नावकखइ सेतेणठण गोयमा ! एव पुच्चड थाहाकम्म णनुज |मा पर गोतम बार-पेमारभते । तप पाभिमबम् ! इमप इतिप्रश्न, उत्तर। मायमा पबिरा पहुच । हेगौतम ! चामी नियत्तिले सर्वमेश ने परिरति पायो । सेते पाप मायमा एव पुरा । ते ते पये मौतम ! म । मेडियमय तरसमय भावकला पाहाकम्प्रेषभुममासे । येष्टिनेद रिद्रीने यावत् पप्रम्बाम्यान विभावर प्रप्रयामाननिया प्रसारको एकाई सचित्त फेडोगे पचित्तबरोमेदेर ते पोमतोयषो। समरेपिम्गविध । साप्त मात्राभ्यार गंबरहित प्रतिषम प्रायसोने मंगधे । किपकरे । मितिबधनो अपेक्षा गरे। किंचिचा किवधिणा । अनुभागबधनी | पपेशायें तमा निधत्त सा रेपोम प्रदयवधनो प्रपेचा इतिपत्र उत्तर । गोयमा पाहावयेषमुबमारे। गौतम !पामा वर्मी प्रहार भोमतोषका पायापापा । पापा बमपरी ने। सत्तबन्धपगडोपासिठिसवधषमायो । सात पमनो प्रति सिथिस बप वांधाया । बधियबंधपापोपव सावन परिसमा बमने सभा तापाव विम प्रेममनो पाठ बांधोये । धावपापरिया । यावत् समारनेविष पमतोबार भमे। सेलेबरवा पाहायमेष भुबमारे बापपपपरिया। ते में पर्षे भयबम् रममा मावत् प्राधाकर्मी पाहार बोमतोषको साप्नु यावत् तुमतिय समारनेविष पनकोबारममै इतिप्रश्न, सत्तर । गोगमा पासावशेष भुबमारंभाताएपपयामा गौतम! भाभावी प्राचार भोमनाममोपाट पामारी गरि x माणे थाउपवजासत्तकम्मपगमीच जानधणुपरियहइ । फासुएसणिसानंते ! नुजमाणेकिबधइ ? ४ जाव उपचिणाइ ? गोयमा! फासुएसणिज नुजमाण थाउयधमा सत्तकम्मपयकी धणियषधणबछा सिढिल यधणयहा पफरेइ , जहा सेसयुझण , णवर शाउयचण कम्म सियघधइ सियनोयधइ सेस तहेय जाव वी इययइ । सेकेणठण जाध घाइवयइ ? गोयमा! फासुएसणिका नुजमाणे समणेनिग्गये थायाए धम्मं नाइक धर्म पामा म पतिकमे एतापता भमघोपरे। पायापधप पबममा । पामायधर्म पतिक्रमतो साधणे सका। पुरुविकाइयपाकया पाव नमकायापर। पविमोबासना वीवमी अनुवपामा दयापरिपाम रहितवाय, यावत् पप्काय तेखकाय वाचवाय वनमतोकाय असमाम ट्रि पादिकपनि पिनासे तामे रमाना। बेसिपियरमोवाष सरोरार पाहार।भा पपि चपुन पास्यासकारे, बौवना सरीरमा पाहारपसे पा पार पाहारकर स्वप । विनायकायकपर । त जोवनो परि अनुकपानावे। सेतेरोष गोममा एपबुधर । ते ते प्रों हेमोतम 1 रमवा । पाहाक बभत्रमापासपणापा बाबसत्तभपगरीपो । पाधाकर्मी पाशार वोमतामका सा पाळखा वर्षीमे यापत् सात बमनो प्रति सिविसरधर गांधी तमाटे याने बांध। बामपएपरिगा। गावत् समारमाहे परिधमपवर। पामएसपिये भते भवमाविया । पासपोय हेभगवन् ! पा पर वीमताका सा अधि। पानिपचिपा । यावत् पंप्रदेगबधनी म पधार इतिप्रय, उत्तर । गोयमा पाम्पसपिबभुवमापेपासवब्याभो। गातम । फासएपपाय बीमताला साप पाचपावने । सत्तकस्यपगपापियवहापापबरो । सिरिसवपसातवमनो प्रति गाठे पपरे वापी पते सिविध मधेि । बामेमरोग विम से सबा अपगारनामा । पपर प्राध्य पप काप सिमा भियगेगा संतोष पाववि मिया । एतमा वियप पाषबम चपुन पासा वायासबारे बिगारेर बांधे विवारे नबाँध पापाचवम नवांधे तो मुल्यनुसारो घोष दुवे, पया बता सतनोपराग यायत् ससार तर माचवाय रखया सेकपालभतेषावधीषयः । ते में पर्यमगवन् ! रमपागो यावत् यतिसमे समार - धपपपा पदायत्यापेक्षपावा ॥ किचिनाइधि । अनुनागपापल्या मित्तावस्पापेचपावा ॥ किंववचिनारतिय प्रदेशवधापेक्षया मिक्षाचना पध्यायति पायायति । प्रास्मना पम्मचारिखसम्म श्रुतरम्मवा ॥ पुरविकायमापकमाप्ति मा पेजते मा मुसम्पत इत्यपः भाषाकर्म विपक्ष प मासुपसीपमिति, मासु पिडीयसूत्र अमन्तरसूत्रे ससारष्यप्तिद्रवनमुच तब कर्मको स्थिरतया मलोटने सति भवती त्यस्पिरसूत्र तप पिरति ॥ अस्या द्रव्य सोप्यादि प्रतोटप्ति परिषर्तते, अध्यात्मचिन्ताया मस्पिर कर्म तस्य बीवप्रदेोभ्यः प्रतिसमयबसनेमा स्पिरत्वात् प्रलोट मइ, शायाए धम्म यणडकाममाणे पुढविफाय व्यकखइ , जाव तसकाय श्चयकखइ जेसिपियणजी याण सरीराइ थाहारेइ तेविजीवे छयकखइ सेतेणठणजावधीईवयइ । सेणण नत ! अधिरे पलोहइ नो घिरेपलोहइ धिरेनडाइ नोधिरेनझाइ सासए घालए बालियप्त थसासय सासए पशिए पक्षियन्त शसा सय ? हता गोयमा ! धिरेपलोहा जाव पमियत्त शुसासय सेव नते नतेप्ति जाय विहरइ ॥ पढम गरे। पावमा पारस विवभुबमाणे। मातम ! पासूरषपोष पाहारकरता बोमताबका साधु । समषिष्यो। यमच निम । पायाएधपनाम ।पामारी धमपारिष वृतपम नही। पाराएषअपाममाघेपरविकायमसर । पामाये तचारिपम्पम पमुबधन करतोयको, पभियोकामनी उमापाचे पोवनोरपावर । वायतमवारपवकता । मावत् पसबायमो सेंद्रियादिव बोपनी रपाकर। सिपिवण्वोवापसरीरापा गारो नेविगोरेपानापाना परि चपन समाचारमारे, बोवना मरोरनो पाहारवर तेपषि भोवनोरधावर पिनाग नहो । तेरोवोकपी विदति । ते तेरे परेमातम ! इमाम बामन समार पारपामें मोपचार दलब । सेभतेपपिरेपसोर रोपिरेपशोर प्रपिरेमबर । पाई है मार सपनबाना ते बमने अस्मिर पवाय तेरा-ते नियममबन् । प्रविरट्रम्प सोहाटि प्रपा पसटे धपाम् धाताय तबा अभ्याम चिताविप पस्निर बममोर प्रदेययो समरे २ पसे पाबरगी मिचादि पोनको प्रचारमधितानेवि बमराव जोबना उपयोग नही अमिरे अविरभावमा .

है ति पभादपनिसमादिपरिणामः परिवतते स्पिर शितादिममसोटति प्रप्यास्मचिन्तापातु स्पिरोनीया सर्मपि तस्य भयस्थितस्या मामी मलाटति, उपरागतरुवस्वप्नामा अपरियर्तते तपा अस्थिर मरस्वमाय मावि मन्यते षिदसपति प्रयात्मचिन्ताया मस्थिर कर्म तव्यते प्रवृत्ति तमा स्पिर ममगुर मप बालाकारिम मन्तप्त प्रयास्मचिन्ताया स्पिरोगीया सपन मन्यते झायतत्त्वादिति बीवप्रस्तावा दिदमाह । सासरवासर ति ५ पातमा पयहारतः मिह मिययता सपतो वोय सब भापतो द्रष्यत्वात् ॥ वास्तियत्ततिको कास्यपस्य स्थापिवस्था हालस्व व्यवहारतः मिगुस्य मिपपत स्स्यसपतत्य तथा वायत पर्यापस्वादिति एवं पठितसूत्रमपि नषर पमितो व्यवहार झालचो बीयः निषयतस्तु सपत ॥ इति प्रघमातमयमः ॥ ॥ अमातरोदेग पिर मर्मस्युक्त मादिपुष फुतीपिका विप्रतिपद्यते, प्रत सहिमतिपत्तिमिरासप्रति सए नयमो उद्देसो सम्मप्तो । ॥ शाउत्यियाण नते । एव माइस्कति जाय परवति , एय खलु चलमाणे श्चलिए जाय निअरिजामाणे थनिजिणे , दोपरमाणुपोग्गला एगय न साहणति फम्हा दोपरमाणुपोग्गलाण णत्यि सिणेहकाए तम्हा दोपरमाणुपोग्गला एगय न साहणति , तिरिसपर भाव पारितभा, पप्पामपितामपि परिवमभाष, भवन सभाव साइमा प्रस्तावादिक तेनभाष, पयामस्तिाविप नोवमानको मानत पापो । सासएगासर गमित्तपसाग्य सासएपरिए परिवत्तपसासय । प्यमहारपी पास थामता वषा निययो भाणताचीव दयनी वासामाव पमापा निपपपी पसयतभाष पमानतो पहारको परिवमापा वार मामता निवयबी संमतीवोव मापता पधी परितभाव पचासवी मि पसी भयानमा पयासता रतिपय उत्तरता गायमा पमिरेपोहरवाव पग्यित पसासर्य। गौतम ! अधिर पसटे यावत् परितपन प्रगाम MAur पेरभात र गिजागिरातातिभिगान् । किन तेस सम पयधामको मानत् बौदोंने विपरसमसकरवा । पठमसयम , पक्षयिययापभतेरवमारवि 1 मवमे सोप mulvant Nirer मा पमो नमो टप्पामो विम्यो । ८ मादिपमविवक्षया भूतारिणदपम्मपाध्यता तस्य बासमेवेन ध्यास्मेया. यदा सूजासादिधम्म युगप दसौ पियतते सदा मागे भूतो बीष स वो विधा येमिताइति एत तप्रति पाच्य स्या दवा निगममै वाक्यमेवेद मतो म युगपत्यतथ्यास्पासायति ॥ बाबीवेत्यादि । यस्मा धी पारमा सो वीवति मावान् भारयति तथा जीवाव मुपयोपसत्तर भायुफर कर्म उपजीवति अनुनयति सस्मा जीवाति वक्तव्य स्यादिति ॥ महासतमुनामुनरिकम्महिति व सध पासक्त भत्तोबा समर्थः सुम्दरा २ सुचेष्टासु पपवा सम सदः शुनाशुनैः कर्मग्नि रिति प्रनतरो या , जम्हा जी जीयइ जीवप्त शाउयच कम्म उवजीथइ तम्हाजीतिवन्तक्षसिया , जम्हासत्ते सुहासुहे हि पम्मेहि तम्हा सत्तेयिवत्तहसिया , जम्हा तित्तकटुफसायचयिलमजरेरसेजाणइ तम्हा विसूतिवन्तव सिया , घेदेइय सुहदुस्क तम्हा वेदातिवातहसिया , सेतेणठण जाव पाणेतियत्तष्ठसिया , जाव वेदाति घप्तक्षसिया । मझाइण नते ! नियठे निरुछन निरुछनवपषधे जाय निठियठकरणिजे , णोपुण रविड छप्त हव मागच्छष्ट ? इता गोयमा ! माईण नियठ जाय नोपुणरयिहस्यप्त हव यागच्छद सेण नते तपाहायो । तमा घोपम उपयोग पर पुन प्रामुखम उपयोति पनुभवे । तमाबोवेसिबत्तव्यसिया । सेमाटे बोव एसव तपमे कहो । बमाम सभामुहिमोहि । घे मारे या पाया पक्षका समयई सदर पमंदर पेटामेविषे एमापभषमन सबंधछे। तमासत्तेतिवत्सम्पसिया। ने मारे साल एवं हमे बहोये । पनातित्तारासारविहमाररसे वापर । माटे ति पो बसायो प्रविध मवर ए पपिरस वा। तम्हा मिवित्तपरिण।तेमाटे विध एरा नामे पहीये । बनावेदेश्यसुस । बेकारको बेद पनुमचे मुख मते तबादुलप्रतें। तमावरातिमत्तम् सिया। तमाटे मेद एव तामे बहोये । सेतेगमावपातिवत्तम्पसिया । ते ते भई गायत् माप एव तेहने सोये । चापबेदातिमत्तमसिमा । यावत् पद पर तर बोये गानो पेपप तेरमा पिपरोपरी मार-माईपमतेरियंठेनिपाइम निराभवपबचे । मासुबभीषो मगवन् ! नियंघसा .. - कस्से यापस्स विपर्यपमा । ममाहत्यादि । पारमएत्ति पारगतः समारसामरस्प माविनि सयदुपधारादिति । परंपरगरप्ति परंपरया मिपाध्यारिमुपस्पामबामा मनुष्यादिसुमतीमावा: पारंपर्यड गता भवाम्भोपिपार प्राप्त परम्परागत रहा मन्तरसंपतस्प ससारवद्विामी । किं घप्तइंसिया ? गोयमा । सिदेतियातक्षसिया , घुप्तिवतक्षसिया , मुप्तेति वप्तधसिया , पारगएप्ति घप्तक्षसिया , परपरगएत्ति घप्तहसिया , सिद्धे युद्धे मुप्ते परिनिकुळे शतक सहदुस्कप्पहीणे तिषप्तसि या सेय नते नतेप्ति , नगव गोयमे समण नगव महावीर पदइ नमसइ नमसइया सजमेण तवसा थप्पाण प्र.पाशे पापिता बनधाई भपना विस्तार मे। जाणिवरपिसे । शपत् निहितान करणे प्रयोजनको करपी पूरबोधी। पापुपरविर भतापमायणा । महको पपी मनुपारि भवमते जाताना पाये पामे रतिप्रश्न उत्तर । हता मोपमा । मोतम । महापिपिठे । पताटि प्रासुन भाको निगरमा । मायापुपरमिरचतापमाममा सेपमतेवियत्तम्वसिमा । मावत् नहोयसो महणादि भवमते सतारा पाये पामे, तिते बिजोपासाबारे, रेभगवन! म्बावाय इतिप्रश्न उत्तर । मोम ना सित्तियत्तम्पसिया। मौतम सिट पा सेकने पहोये । बोक्तिवत्तमसि मा । एताने बहोये । मत्तेत्तियत्तमिसरा । मझ पाताने सोये । पारमत्तिवत्तपसिना । समार सागरनेपार पड़ता ण तेहने पात्रो ये । परपरगतिमत्तमपिया । मिप्यास्वादि गुपस्मानाने तथा मनुपादि गतिने परपरायें गया गतीने पहोमे । सिहे १ बुरे १ मुत्ते ।। मित्र गुरु मा । परिनियतपरे । परि निहत बगा। संसारमा प्रतकोधा। सबसप्पडोनिवत्तवसिमा सेमते १ त्ति । मगमा दुप्स प्रयोगासाहेब ने पायाने वसीये गोतम बाधा तात्ति हममपन् तमे पाप तेमबारे पनवामहो । भगवं गायमे। भगवत गीतमा समग मग महापोर । बमप भयान भोमसापीरनामो प्रते। वदा पमसर तापदे नमस्चारकर वादीमे ममरवार परीने। सत्रमेवतवसापप्पापभाषेमा विश्रा। नपा पा पता समारो मारेकरी ते सयम कसोये मागा कमरिये बरेवरो ते तपवाहोमे ते सबम उपसपाते। वएपसममगवमहामोरे । प्रामाने भारता मादिधमविवहमा भूतादिवाएपनवाचता तस्य वासप्रेयेन ध्यास्मेया पदा सूशासादिधम्मै टुंगप दसौ विवसते तदा प्रायो भूतो पीव स स्वा विधो येरपिताइति एत तमति वाध्य स्था दयवा मिममने वाक्यमवेर मतो न युगपत्यावष्यास्याकार्यति ॥ वमहावीवेत्यादि । यस्मा जी व पास्मा मौ चीपति मायाम् धारयति तपा बीयत्व मुपयोपसावर प्रायुपत्र सम्म उपजीवति अनुभषति तस्मा जीवाति वक्तव्य स्पादिति ॥ पहासातमुपासुनरिवन्मदिति ॥ सक्त प्रासमा पक्कोवा। समर्पः सुन्दरा २ सुचेष्टासु पथवा सचः समः झुमाझुनः फर्भनि रिति प्रमन्तरो या , जम्हा जीये जीयइ जीवन्त छाउयंच कम्म उवजीयइ तम्हाजीयेतियातहसिया , जम्हासत्ते सुहासुहे हिं फम्मेहि तम्हा सत्तेयिवत्तमंसिया , जम्हा तित्तकदुकसाययिलमजारेरसेजाणइ तम्हा विसूप्तिवतच सिया , घेदेइय सहदुस्क तम्हा वेदातिवातहसिया , सतेपाछेण जाय पाणेतियत्तष्ठसिया , जाव वेदाति यातहसिया । ममाईण नंते ! नियठे निरुधनवे निरुधनवपवचे जाय निठियठकरणिज्ने , णोपुण रविइ छप्त हए मागछह ? हता गोयमा ! माईण नियठ जाव नोपुणरविइत्यत हद शागच्छद सेण नते तपाग्यायकोवेर । तया वोवस्त्र उपयोम सब चपुन भागुबम उपयोषति पनुभवे । तमानोवेतिवत्तम्पसिया । सेमाटे बोव एव तपने बहो से । मासत्तेममामुहिरहि । वे माटे मा पाया पथवा समपई सदर प्रमंदर चेष्टाविर्ष एमासभामा सबंधई। तमासक्षेतियत्तसिगा। | ते माटे साथ एक तहने वाोये । बम्हातितककसायचविसमाररसे बारा । माटे तिज पामो पसारखी प्रविस महर ए पांचरस बा। तम्हा विभूवित्तमसिगातेमाटे पिन यार तेरने पहीये । पमहायरेश्वसुदुक्स । हारपली वेद पाम सुख प्रा तबादुपाते। तनावरातिपत्तय सिया । विमा वेद एहम तेइने कहोये । सेगमावपापेतिवत्तपमिमा । ते ते भ पारत् पाप एप तेरने कोये । वायमेदारित्तबसिया । यावत् द एर नान बहोये पूर्वपापा पप तेजमा पिपरोवपरों बारे--महाभतेपियंठेमिरमनिराभवपचे । मासुबमोचो भगवन् । निर्गपसा !

परिणामस्य : रिध्येयापसामधेपभपयन पप्ति पष्ठीभयानसोपदशनास भवेदपजुमंदसामवेदाचयवेरामामितिवृदय प्रतिज्ञासा पुराण समयमा ययाप्त तथा तेपा । बगावेपायति । विशेप्यपद मिघदुरझायति । निर्घरटी मामकोशः ॥ सगोवगायति ॥ महानि शिक्षादी मि पद्, उपाङ्गामि सदुष्पपम्पमपरा प्रसपा । मरहस्सापति । एदपर्पमुताना ॥ सारयत्ति ॥ सारको स्थापनद्वारा प्रयतका स्मारको वा म्पपा विस्मृतस्प बादः मारणात् ॥ वाररति ॥ वारको ऽशुहपाठनिषेधात् । धाररति रुचि त्पाठ सत्र पारको sीतामा मपा धारणा त् । पाररति ॥ पारमामी पनगविरिति पगामि शिवादीनि वस्यमाणानि सानापानानामिति यदुच तद्ववपरिफरचापमार्थ मपवा पत्र विदि स्पन तहिवारकास्य पदीत विविधारणाविवपनादिति न पुनरुतास्वमिति ॥ सहिततविसारएत्ति ॥ वापिनीयवानपरिकतः तथा ॥ स खदएनाम कचायणसगोत्ते परिक्षायगे परिवसइ , रिउथ्य जजुश्य सामवेय यहछणवेय इतिहासप चमाण निघटुन्हाण चउराहयेयाण सगोषगाण सरहस्साण सारए वारए धारए पारए समगवी सठित तयिसारए सखाणे सिरकाकप्पे वागरणे बदे निरुत्ते जोइसामयणे शोमय यस यनणएस परिहायएसु मपि । गामासिए पासो। गाभामा समाम परिणाम तापसना शिष । परामकवायएसगोते । परन से नाम वास्थापनगोपनी परिणाममेपरिपसार । परिवानप यसो। रिसावेम । पागबेटमा । बसम्वेय । परावदमा । सामवेध । सामवेदना । पववपमेय । पप बेदमा । रति सपमाप । इतिहामनाम पराई पमा बेदम है। रिटबाप । माम सयाजाने। गया। पारि पेदना । संगोषगान सरह स्यारामियादि पग नया तनिधि वेवा पनातिनो मुलि । सारए पारए धारए पारए । तेन वार २ समर पशुपाठ निपेधारिये सोये भरे पारमामो । सगयो सतिविमारए । हगना मा कापिसोय मानना पाप । समाये मिसावप्पे वागर पटेनिरसे। मषितगासनाचा पपरसम्म मात्रमा मात्र सन्दमा पार पदम पर यासना वाप मदमो उत्पत्तिमा माममा पार । वासिमामय पसेमुरवास वभसएस परि - । को मिहत्या प्रत्यभुभात तेपा मन्येषां पार्थाना प्युत्पादनाथ स्कन्दकचरित विद्यारिदमा ते कातेस मित्यादि उप्पमनापासपघरे । समायत् करपात् ॥ घरहा मिय कयती सधा सवदरिसी भागासगएवं बसेस मित्यादि । समवसरणास्तवाव्यमिति । गहमालस्सत्ति ॥ गहमासानिधान नाये माणे विहरइ , तएण समणे नगव महावीरे रायगिहा नयराजे गुणसिला चेहया पझिनिरकम इ पफिनिकमइता यहिया जणवबिहार विहरद, तेणकालेण तेणसमएण कयगलाणाम नयरीहोत्था , व णन, तीसेण कयगलाए नयरीए यहिया उत्तरपुरच्छिमे दिसीनाए उत्तपलासए णाम चेइएहोस्या , वणने तएण समणे जगवमहायीरे उप्पलणाणदसणधर जाव समोसरण परिसा निग्गया , तीसेण कयगलाए नयरीए दूरसामते सायत्यीणाम नयरी होत्था , बरण, तत्यण सावस्यीए णयरीए गहनालिस्स थतेवासी बार विहार म भगत योमहापौरपामो। रायमिहापापसरापा गुपसिनापायापा। रावपानामा मगरको गुपपछिकनामे यच मागायो । परिषिमा २ ता परिसबमविधारबिहरनोवो नोकमोन माहिर भयोवानेवि विहारकर । तेपासेप तपसमपात समयि समयपि । कायमचानामपरोहामा एमा। पयगमामामे नगरोहये वयक सवारनो परवावा । पोपवयमसाएषयरोए । ताप बाबासबारे परममा भमरोने विप । परियारपुररिकमेट्रिमोभाए। बाहिर उत्तर पूर्वमादिमि विभाग पतचे गामणे । छत्तपक्षासपएकात्या पपासपबाम समामे बचना पत्य इमा ताना बर माईपो भाषा। तबसमये भमवमहामोरे । तिवारे यमपभगवत चोमहापोरणामी। पयापरसपपरे। अपना काममान प्रने गदर्शन तहमा भरतार । बारसमासर । यावत् समासर नायो । परिमापिणापा । परि पा बादशा मोजकी । तोसे काममवापसर रोए पदरसामते । तर पानाबारे यंगसा नमरोगी पत्र प्रहमारी र निचटपनमो। भापती पामयशायाम्पमा विा सामनोनाम नमरोमरोमा दशांगनोपर बातममायोएचपरो far । - . मावति ॥ मगपत्रमपदजातस्यात् मामघ सस्सा मब हेमागर! ॥ वळाति ससारवानात् । मायाति ॥ ससारपरिहाम्येति, एतावतायेत्या दि। एतावामममात तावास्यापि सचमाम पबमान एव मन मबारेख एतस्मि पास्माते, पुनरम्प स्पस्पामीतिहदय ॥ सकिरात्यादि । किमिर मिहोचर मिदयति सम्मातशः द मिहोत्तर साघु इदन म साधु प्रतः कप महोतर सप्से प्रत्युत्तरतामाकाहायान् पालिसो मि सरे दते किमस्य प्रतीति सत्पत्स्यते मवे. त्येव विविविस्मितो र समापनो मते प्रा किर्तव्यताब्याक्सस्पतपय मापम पसुप मापनो माग मिा विधि जानामी स्पेवं मविपर्य कातुप्प समापमइति ॥ मोसवारति । म प्रोति पमोल्पमसाइठति ॥ ममुपते पर्यनुयोमबन्धमा दने सर्थतेजीधे थणतेजीये सतासिही थणतासिही सध्यतेसिदे शणसिद्ध केणयामरणेण मरमाणे जीये यहइया हायझ्या एतावताव शाइखाहि घुश्चमाणो एव तएण से खदए कच्चायणसगोत्ते पिंगलएण निय ठेण घेसाठीसायएण छण मस्केय पुच्छिए समाणे सकिए कखिए वितिगिबिए नेदसमाव कलुससमायो णोसयाएइ , पिगलयस्स नियठस्स बेसालियसावयस्स किधिविपमोस्क मस्काइतुसिणीए सचिठह, तेएण भजवा बोष प्रारशिवाई। सपतासिनो पतामियो सममि परवासिरे। सहि मिया अंतसहित प्रथवा सिगिता पतरपित सिदमा कोष प्रतरित पषा सिबनानोम पतरहित। पामरपेका किसे मरणरो। मरमाणेबोये । मरतो बना वोष । बरवा । समारबरी हरि पामे। रातिया । ससारण हानि पामे । एतावाब पादिसापिपुरमापो। एतसा प्रश्न पूछो ते परिता पो परे गोवा प्रश्न पूछ प्रचमान । त | एपसेपरए पारपसगाचे। तिवारे सादर कामायन मोघोष । पिमसएपरिवठे। पिंगसनामे साम। मासिमसामएप । योमहापौरमा वचन स रिपाम रसिया समाहिसमापे। इस पापे पूरा पका । ससिर पधिप वितिमिहिए । पामो उत्सर कर सोमवा छपनो पानो उत्तर हिम पामिवे पाना उत्तर दोघे सने प्रतोत जपथ । भेदसमावए आतुससमापसे । मतिभेदपाम्या मविभंगपाम्मा इस मोती को नषा म ग्रामेति ॥ गपितसम्पपुपरिनिष्ठित इति योप, पावेदकत्वमेव पनधि । सिवाकप्पेति ॥ भिषा प्रपरम्मपनिस्पक धान कस्पय तपा विपसमाचारमिदपर्क भासमव ततः समाहारहदा मिलाकरपे । वामररेति ॥ सरशाखेचदेति । पद्यतनवाने ॥ निराधेति ॥ सरव्युत्प तिकारख्याक बोहसामपपत्ति । म्योतिःसावे । मनमरसुत्ति ॥ माझयसम्पन्धिपु । परिवायएमति र परिखाबवसत्पु ॥ मयेयु नीसिपु द अमेधित्पः । नियठति । मिग्रंपः अमात्पर्पः । सासियसावएत्ति ॥ विज्ञासा महावीरबननी वस्या प्रपत्पमिति, घेवासिको नमधास्त स्प वान पोति नसिकत्वा रिति वैमासिक भाषक सहबमामृतपानमिरतइत्पर्ष समवति ॥ एत भाषेप प्रम । पुतिय पसवाम् ॥ नएस सुपरिनिठिए याविहोत्या , तस्यण सायस्थीए नयरीए पिगलए नाम नियठे येसालियसायए परिव सइ , तएण से पिगलए नाम नियठे घेसालिसावए शणया कयाइ जेणेय खदए कच्चायणसगोत्ते तेणेव उवागच्छइ उवागच्छइता खदय फच्चायणसगोप्त इम मरक्रय पुच्छ , मागहा ! कि सञ्छतेलोए थर्णतेलोए पारपर मपस । न्याविप भावना पार बोवाईनेपिपे चपुन घारनविष वामर सपोनेविवे परिवाषक सवोमेवि नीतभेविष । सपरिमिएमा विसावा तपावलीएकरए । मयोपरि नियामना पार पायो पासपरिणाममा तानेविष वामाचबारे, सावनो नाम नगरो। पिमड एपामपिठसाविषसाए परिवार पिया मामे नि साह यमप सब पियाण बोमहापौरमो मावा तहनीपुष बोमहापोर तेरमा बचन मा रसिकाई एपिमएपामपिघठे। तिवारे तेपिगपनामे नि साधसासियसाबए । बीमहावीरना पचन सुविधामे रसिक । पपयावया पाए। एमा प्रसार विचार मिशा पदव परिवाचक । पपायपसगोत्ते । तरेवस्वागचा र ता। पास्वायमगोपीय तिहा पापे ति पायने । परापारमोत्त । स्वस बास्वायनगापोर मते रामशेवपुमा । स पापे प्रसपूर्ण । मागहा । मगधरेगनो सपनो ते माय । विवार परसाए सपतेबोरे पपतेयोपे । म बोस प्रत सहित एतावावरानो पापबया पतीबारे हाकमो पतनमो बोष पत पति इते २ भू मुसत्यव जीता व्यापतनानी प्रतिदिनमोबीत्यर्थ ठरासंति ॥ प्रधान ॥ सिगारति ॥ ङ्गारो ऽलशारादिरुता शोमा तद्योगा गार महारमिव पर मतिशपशोनावरित्यर्पः कात्यास श्रेय प्रिय ममुपद्रव अनुपद्रवातुर्या । पम्प पम्मपनसम्म सप्रया सापु सहा इति महत्प मासे हितापमापके साए मानपं असत मुफुटादिमि विनूपित ववादिग्नि सलिपेपा दनलकृतषिभूपित ॥ सक्सयवरमुतोषधेयति । सवय मानोन्मामादि तत्र माम बसतोसमानता बसनतकुमिकापाहि मासव्या पुरुष प्रवइयते सत्प्रवेशेष य स ततो निस्सरति त यदि द्रो पमाम मयप्ति तदा सो भानोपत सम्पते, उन्माम त्वईभारमानता मातव्यपुरुपोधि तुसारोपितो यद्यदमारमानोनयति सदो मानोपेतो सावश्य तममा पुन याहुसेना सातराष्ट्रसरातोयता पदार-असदोगमदनार समुहाइसमूसिवनोनवठं । मागोमाणपमा तिषिश्वसुनपाए ॥१. पन्नम भपतितमादिक, मघवा सहन सक्षप, पपार्य ध्याममिति, गुणा सोनाग्योदयो सत्तव्यन्जनाना था ये गुणा से रूप पत य त तपा सपप्रपद इत्येतस्य स्थामे निसतिषशा दुपपेत प्रवतीति । सिरीएति ॥ लम्या शोजयावा ॥ तुमचित्तमापदिएप्ति ॥ एतु सिगार कल्याण सिव धन मगल शणलकिययिनूसिय लरकणयजणगुणोववेय सिरीए यतीय छत्तीय उव सोजमाणे चिठह, तएण सेखदए कच्चायणसगोते समणस्सन्नगवठेमहावीरस्स वियहनोइस्स सरीरय उरा वरहित भपतिमानि । पपसविविभूसिय सबनपगुमायोय । पाभरपरतिगामे पधारपितमा पचपमान उग्मानसहित मसवित प्रमुख गुषमाभाग्यादिव तिसहित । मिरीएपनि २ उपगाभेमात्र २ चिार । मामायेषरो षषु २ पत्पत उपयोभायमानवको सरे। तरपमेयवए समार पसगाते । तिबारे पापामाबमगोपनोपरी। समपम्मममनपा महामोरम । यमप भगवंत योमहापोरसामौना । वियाभोरंययसरीरमपोरालय निम्मभावामा मरोरपतें प्रधाममतें । पावसाय र बसोभेमाघ २ पासा र ता। यावत् अम्मत २ प २ गोमायमान २ देखे ऐसीने । चित्त मापदिए पोरमापे । पपापा संतापपामो रिसमा पानदितबयो मनवेहमा प्रोतिवधोई वेरना मनविय । परमसोमसिए । परम पवार - एसयठे तताव रहस्सको इछ मरकाए, जण यह जाणामि खदया ! तएणसे खंदए कच्चायणसगोते जगय गोयम एषययासी , गच्छामोण गोयमा ! तवधम्मायरिय धम्मोवदंसय समण नगय महावीर वदा मो नमसामो जाय पञ्जघासामो, शहामुह देवाणुप्पिया! मापभियध, तएण नगव गोयमे खदएण कच्चाय णसगोत्तेण सद्धि जेणेध समणे नगव महावीरे तेणेव पहारेछगमणाए, तेणकालेण तेणसमएण समणे न गव महाधीरे पियानोजी याविहोत्या, तएण समणस्स नगवठे महावीरस्स वियहनोइस्स सरीरय उराल पए । पती मतमान अनामत एनिषिधापना विज्ञापन बाप । सथप सम्पर रिसो। सवभावभाषाच सवभावना देखनहार । भेषमएएसपी । पिये झने एपर। तपतागायोममाए । तपारे तावत् पहिया मनविपेहोष बोधा एस्यो पर्व सानो । वमोपपाषामिसदमा । माटे इ वापर। परम । तरपसेपदए । विवारे तेपदय । पहायपरमोचे । कात्यामममाषौष । भमवमीयम । भमवत मौतम। एवंबासो मरकामोष गोयमा । एक सातारा वार पमेमोतमातवमापरिम । तुमारा धर्मादाय प्रते। पम्पोषएसय । धममा उपदेयक प्रतें। समपंममपमहावीर बदामो पमसामो समय मपर्वत योमहावीरमामोपते पारीये नमसार परोये । नाप पखुवासामो । यावत् सेवापरोये रसे पचम सदव पायवा । पहासुदेवार पिण। योतम पास्या विम पपजपचे विमबरादेवानप्रिय तुमने । मापरिषधं । पपि विसवमावरफो। तरपसेभगवंमोममे सदएवाचायषसगीप्ते सति । तिगारे तेममयंत मोतम संरक वाम्बायन गोषनोधपोते सघातबारो। मरेमसमरेमगवमहावीरे। षिक्षा यमप भगवत योमसापीरनामीछे। तपेपहारेपममाए नेवासे तपसमा तिकी सवलपोधो वारपानेवाचे तेबारविप तेसमम विपे । समपेमगर्वमहामोरे । यमपभगवंत यो महाबोरनामो । बिमामाईगमिमा निम्यभावो प्रतिदिन भोगी। तएरममययभगवप्रोमहापौरम । तिकार अमर भगपत शोमहापोरणामी ना। विभाइयथरोरसारास मिया पसा सिम पर ममह निषभोजीमा मौरावा तेवीप्रधान प्रविमप मोभापत येयबारी उपद्र - पत्ते २ सूप गुरू इस्पद मासा मापनोनी प्रतिदिमनोनीत्यपं ५ रासवि ॥ प्रधान ॥ सिगारति ॥ गारो तारादिस्सा शोमा तद्योया भमार महारमिव पलार मतिपशोनावदित्यर्पः कस्पार प्रेयः शिव ममुपद्रव अनुपायहेतुपा पम्प पम्मपनसम्म सबवा ; सापु सहा इति मङ्ग महले रितापप्राप साधु महत्वं प्रसस्त मुलादिमि घिनूपित पवादिनि सयिपेपा दमसमूतपिपित ॥ समयपयवरगुशोवधेयप्ति ॥ मक मामोमानादि तक माम बतद्रोणमामता बसनतकुनिकायाधि मातव्य पुरुपः प्रयश्यते सत्मयेक्षेच य ग्नस ततो निस्सरति त यदि दो समान मपति तदा मी मानीपत सध्यते , उन्मान स्वईनारमानता मातव्यपुरुपोहि तुलारोपितो यद्यहमारमानोनयति तदो म्मानोपेतो सायुष्य त प्रमाणे पुनः स्थासना प्रातराष्ट्रसपतोग्यता पदार-वलदोपमहनार समुहासमूसिछेउमोमवछे । मागोमाजपमा तिविएससुसक्सपए ॥ मनम मपवितगदिक, मपया सहब सम पयाग व्यानमिति मुग सौभाग्योदयो सरव्यम्जनाना पा ये पत यत तथा उपपपर इत्येतस्य स्थाने मिसक्तिवसा दुपपेत भवतीति ॥ सिरीएप्ति साम्या शोप्नपावा ॥ एतुचित्तमारादिरति । एतु सिगार फल्लाण सिघ धन्न मगल आणलकिययित्नसिय उरकणवजणगुणोयवेय सिरीए यतीय श्तीय व सानेमाणे चिठइ, तएण सेखदए कच्चायणसगोते समणस्सनगवतमहाधीरस्स वियहनोइस्स सरीरय उरा परत निमामि । पयसविपविभूसिम सपबगुवामयेय । पाभरपरहितमा वारहितगाभे परपमान सम्मानसहित मसतिश प्रमुख गुपयोभायाविक तिसहित । पिरोएपनि २ एवमोभेमा २ पिशर । मोभायेबरो घ २ पत्थत उपयोभारमानवका स । तपपमेदए कमाय बममाते । तिबारे तपासवापायममोपनोएपी। समयसमगपपा महामोरम । यमर भगवंत योमहापोरणामीमा । पियाभोत्यस्मसरीरमपोरामय | निमभानोमा मरोरम प्रधामप्रते। पापपर २ हक्साभेमाप १ पासा ! माग भयत १ पार गोभाममान १ देखे देखोने । पित्त मारिए पोरमापे । पपाया मतापपामो पिताना पादितयमो मनवानी मोतिवमोचना मममेविष । परमसोमसिए । परम खट । एसध्यठे तयताव रहस्सको हछ मरकाए, जठण शहं जाणामि खदया ! तएणसे खंदए कच्चायणसगोते नगव गोयम एषययासी, गच्छामोण गोयमा ! तवधम्मायरिय धम्मोवदसय समण नगष महावीर वदा मो नमसामो जाव पजुषासामो, यहासुह देवाणुप्पिया!मापमियध, तएण नगव गोयमे खदएण कच्चाय णसगोत्तेण सद्धि जेणेय समणे नगय महावीर तेणेव पहारेच्छगमणाए, तेणकालेण तेणसमएण समणे न गय महायीरे यियहनोजी यायिहोत्या, तएण समणस्स नगवान महावीरस्स वियहनोइस्स सरीरय उराल पए । पतोव बत्तमान पनामत एपिरिवाना विधायक नाच । सम्भप्यू समदरिसो । सभाषभाषार सवभावनादेवनहार । पेपमएएसपी ।विणे म भने एपथ । तसतारापरेमसाए । उमारे तावत् परिक्षा मनविपेडोच कोधा एहयो पर्व को । पोषावाचामियदया । पेमाठे श पाए। पास ! तएक्सेपरए । विबारे तेपदक । पपासबसगोते । पाम्यापमगाभीय । भमपंगोमम । भगवव गौतम। एषवयासी मरकामोष पोयमा । एहवं पातामा पार पन मोतम! तपश्चापरिव । तुमारा धर्माचार मते । धम्मावएसव । पमना उपदेशक प्रते। समपंमगममहापौर बदामो समसामी चमब भगवंत बोमहापौरमामोप्रो पारवे नमसार परोये । बाप पपुगामामो । यावत् सेवापरोये इसे वचन सदर वधामका । मासुहदेवार | प्पिा । मौतम पाखा विम पुष छपये तिमकरा देगाप्रिय तुनने । मापरिवर्ष । परि विसपमागरमो। तएपमेभगमोयमे संदरपकचारपसगीते | पेमहि । तिबारे तेभयांत गोतम इकबाम्बाबन मावनोपयो ते सघातबरो। वरेसममगवमहापोरे। विहां यमप भगवत योमहावीरनामोछ । नगपहारेगमपार तेबासेष तेबसमए ति सपनोधो वारवानेवाचे वासनेवि तेसमम विपे । समपेमगर्वमहापोरे । श्रमबभगवंत यो महापरणामो । विगमाईयारिमाया । नियमावो प्रतिदिन भोगी। तएर समपसभगवपामहापौरण । तिवारे प्रमप भगत चोमसापीरनामी मा विशाभायपपरीरपारा सिमारं पाहार सिवपस ममह । नियमोमीनो सरोर बोगोई की प्रधान प्रविषम मोभावद चेयमारोप - - पत्ते २ मूपं मुष इत्यय शाला प्यावसनोत्री प्रतिदिननोमीत्यर्थ । रातति ॥ मपाम सिगारतिम मारो साराविकता शोमा तयोमा गार भारमिब गङ्गार मविशपयोनावदिस्पर्पः, कत्याच प्रेयः सिब मनुपद्रव अनुपद्रषासु पन्य पर्मपमतव्य तथा साधु तहा इति मनुस्प मासे हितापमापके साधु मरस्य अन्तकृत मुटादिमि विभूषित पखादिग्नि मनिपेमा दमसातविभूपित ॥ सक्सवववगुगोववेयति ॥ तपय मागोमामादि त मान बसद्रोबमानता बसन्तकृमिवायापि मातयः पुरुषः प्रयश्यते तत्मयशेष य व्यत्र ततो निस्सरति त अदि छो घमाम मयति तदा सो मानोपेत उच्यते, पम्माम स्वईनारमानता मातष्यपुरुपोषि तुसारोपितो यद्यवधारमामोनवति तदो मानोपेतो मानुष्य त प्रमाण पुनः स्यानुसेना एतरराष्ट्रसयतोट्यता पदाह-बलदोगमहनार समुहाइसमूसिमटचोनक्ट । मायोमारपमाए तिविहसलुसम्पपए । थ्यनम मपतिसकादिक मपवा सहव लापन पधाव व्यश्ननमिप्ति गुणः सोप्नाम्पोदयो सतष्पमानामा वा ये पुरा सौ रुप पत यत तपा उपप्रपा प्रत्येतस्य स्मामे नितिषमा दुपपत भवतीति ॥ सिरीएति ॥ साम्या शोनयावा ॥ तुरुचित्तमादिरति । एतु सिगार कल्याण सिव धन्न मगल यणलकियविनूसिय उरकणवजणगुणोववेय सिरीए शतीय छतीच व्य सोनमाणे चिठइ, तएण सेखदए कच्चायणसगोते समणस्सनगवळमहावीरस्स वियहनोइस्स सरीरय उरा परक्षितपय रितमाप्ति । पतनिरिभूसिम समपरगुपवयेय । पाभरपरहितमामे बसारहितया बचतमान सम्मानसहित मसतिस प्रमुख गुपमाभापारिक तिसहित । पिरोएाव र उपयोभेमार र ति। मोभायेकरी घर पस्थत उपगाभायमानवका राई । तएसेसप कपास जमगा। निगरि नेपावबाबायमगोपनोपपी। समयमभगवपा महामोरया । यमर भगवत योमहावीरमामोना । विमाभोरं यस्ममरीरमपोरामय निभायोगा गरोरपते प्रधानसें । बापत र उत्साभेमाघ १ पासा रता। यावत् प्रत्यत १ घर २ मोभायमाम र देणे देखोमे । रातापित्त मानदिए परमारे। पपापा संतापपामो चित्तवना पामदितययो ममत्रानो मोतिषधी वेदना ममनेविप । परमसोमसिए । परम स्वार . . एसथठे तयताव रहस्सको हछ मकाए, जण यह जाणामि खदया ! तएणसे खदए कच्चायणसगोप्ते नगय गोयम एषययासी , गच्छामीण गोयमा ! तवधम्मायरिय धम्मोवदेसय समण नगय महावीर वदा मो नमसामो जाव पञ्जवासामो, शहामुह देवाणुप्पिया!मापझिवध, तएण नगव गोयमे खदएण कच्चाय णसगोत्तेण सद्धि जेणेघ समणे नगघ महावीरे तेणेव पहारेछगमणाए, तेणकालेण तेणसमएण समणे न गघ महायीरे यियानोजी याषिहोत्या, तएण समणस्स नगवत महावीरस्स वियहनोइस्स सरीरय उराल ५। पतोव मत्तमान पनामत एरिषिवापना विधायक माप । सबष् सम्पदरिसो। समभावनावाप सबभावना देवमहार । बेपमएएसपढे । विषे मु भने एपथ । नसताराम साए । तमारे तावत् परिचा मनविडोष कोपा पायो भवं कानो । बभोप पहवाचामियदया । वमाटे पाए। पर तपोषदए । विवार तेपदा । पायरसगोत्ते । कावामनगाचोम । भगवमोमम । भगषत मौतम। एवमासो गलामोष मोयमा । एवं ताराबारे पन रेयोतमातबधम्मासरिय । तुमारा धर्माचाम प्रते । धन्यावएसब । घमना उपदेयक प्रते। समर्पममबमहापौर बदामो पमसामी अमर भगत बोमहापोरनामोपते पाये नमवार परोदे । बाप पखुवासामी । यावत् सेवापरोये इसे परम पदक बधामा । पशामुहदेवाण पिया । गोतम बास्या विम पुष चापचे विमबरादेगानुप्रिय तुमने । मापरिवर्ष । परि विसवमाकरमो। तएपमेममवंगोममे सदएपबचायषसगीप्ते सहि । विनारे भगवंत गोतम पंव वाम्पावन गारमाधी ते समातेबरो। वपसमपेममवमहापोरे। विहां यमर भगवत चीमशागीरनामोछ। पहारेकममपाए पवार तेबसमा तिहा सवसपोधो चारवानवाचे तेबासनेविष तेममयनविय । ममममममहापोरे। यमपभमपात यो महापोरनामो । पिपामामालिया । मिवमाषो प्रतिदिन भोगी। तएपममपपभगवनीमापोरस । सिबारे अमर भगत योमहापौरणामी ना। विवाभासपसरोरमारा सिमारं पाहावं सिप पर मगा। निमभीजीमो मरोर सेहवो तेवीरे ३-प्रधान प्रविमय गोमाषद प्रेममारोप पत्ते २ भूम मुफ रत्येय मीसा पावसनामी प्रतिदिननोनीत्यर्प । रासति ॥ प्रान ॥ सियारसि ॥ पारो ऽलङ्कारादिकता शामा पाया मार भारमिय गवार मतिमपभोनावदित्यः कस्यार मेपः पिव ममुपद्य अनुपद्रवोतु। धन्य पम्मघमसम्म समया साधु सहा इति मल्प मासे हितापमापके साधु महस्यं प्रसस्त मुटादिमि विभूपित वतादिग्नि सलिपेपा दनसतषिभूपित । सक्सपथवपमुगोववेयति ॥ तरुण मानोन्मामादि तत्र मान बसद्रोवमानता असन्तकुशिक्षायाहि मातव्या पुरुपः मवेश्यते तत्मयेझेप य जल ततो मिस्सरसि त अदि द्रो पमाम मयति सरा सौ मानोपेत सभ्यते, सम्मान त्वदनारमामता मातव्यपुरुपोषि तुलारोपितो पपक्षधारमामोनवति सदो म्मामोपेप्तो मायुष्य त प्रमा पुनः साहुसेना टोप्सरगुतशतोळ्यता पदा-त्रातदोबमहनार समुशाासमूमिध्वयोमव । मागोमाणपमाप तिविपसनुसक्सयार पं ॥१॥ प्यन्नम मपतिसमादिक, मपया। सहब सय पचाय व्यन्जनमिति, गुग सोमाग्योदयो सहयष्पम्ममामा था। ये गुरा सै रूप पत य त तमा सपथपद इत्येतस्य स्पाने मिरुतिवसा युपपत भपातीति सिरी एप्ति : साम्पा शोप्नयावा, ॥ पन्तुषित्तमारपिरति ॥ प्रस्तु सिगार कलाण सिवं धल मगल्ल थणलकियविनसिय लस्कणवजणगुणोषवेय सिरीए एतीय श्तीय उप सोनेमाणे चिठह, तएण सेखदए कच्चायणसगीप्त समणस्सनगवठेमहावीरस्स वियहनोइस्स सरीरय उरा परहित परितमानि । परमविषिभूसिय समपापा । पाभरपरहितमा वनरहितया पचपमान सम्मानसहित मसविस प्रमुख गुपयाभाग्मारिक निर्षसहित । मिरोरपान २ उपभोभेमाप २ गिर । मोमायेवरो घ५ २ पप्पत उपगाभायमानवको रमझे। सएपसेसदए कयाम पसगा। तिपरि तपसामावमयोरमोधरी। समयमगापा मावोरया। यमप भमर्वत बीमहामोरमामीमा । वियाभोरंयसरीरयोरासम निमभानोमा मरोमा प्रधान । नामपान र बसोभेमाप २ पामा १ ता । यामद् पयत १ प २ मोभायमान २ देणे देखोगे । रातापित्त मापदिए पोरमारे पापा संतापामा शिक्षामा पानदितपयो ममवेहमा प्रतिवधोई मा मननेविष । परमसोमसिए । परम एवष्ट - - ४ मत्यपंतुष्ट पार्ट पाविस्मित तुरंच तोषव वित मनो या त तत्परतुष्टचित्त यथामवति, एवं मानदित ईप म्मुससौम्पतादिनावै सम नि मुपनतः ततय । मदिरति नरित से रेव समहतरसा मुपनत । पीरमरोति । प्रीतिः मीपम माप्यायन ममसि यस्य स सपा ॥ परम मामयसिएत्ति । परमं सौमनस्य सुममस्कता सम्झात यस्प स परमसौमनस्पित तदा। स्पास्त्रीति परमसीमनस्पिकः ॥ हरिसवसविसप्पमापति पपत्ति पपशन विसर्प विस्तारं व्रज वय यस्य स तपा एबार्घिकानि तामि प्रमोदमकर्पप्रतिपादनार्यामीति ॥ दवाएगेसोएसमतेति ॥ | जाप शतीव शतीय उपसोनेमाण पासइ पासइता हरुतुरुचिप्तमाणदिए पीइमणे परमसोमणसिए रसयसयिसप्पमाणहियए जेणेष समणे नगव महावीरे तेणेव उयागच्छछ उवागच्छइस्ता समण नगव हावीर विरफुप्तो छायाहिण पपाहिण करेइ जाय पञ्जवासइ खंदयाइ, समणे नगय महावीरे खदय क । शायणसगोप्त एवषयासी , से णूण तुम खदया सावत्याए णयरीए पिगलएण नियठेणं वेसालिसावएण | समनसपमा पाम्या । रिसासविसप्पमाहियर । नेवसेबरो विखारपाम्बाई उदय नो एवा पदक । बषसमभगवमहामोरे । मिती बमा भयरत योमहामोरणामी । तेरोच्यामच्छर २ ता। तिहा पाय तितां पावोगे। समपभगवमहापौर । चमच भगवंत चोमहावीर पामोम तितापामाश्रियमाहिरो । वोनमार मोमा पासाबो मारो प्रदक्षिा करें । वामपनुवासा पदयाई । मापद बांदो नमस्कारबरो से परीपदबासे पामापे । समभगवमहामोरे । यमप ममपत योमहाशेरलामो । पदयवधामषसगोत्त । पंदवते वाचायनमोधनाधणो प्रतें। एषापासो सेमपंदया। इस बाताइया ते निये हेमादक ! सायमोएयरोए पिगमएसपियर्छ । यावती नमरोसे पिंगसनामे निर्यवसान । रेसा सिम्पाएर। बीमहामोरना यान पुरिमाने रमिक तिरे। समशेवपुहिए। इसे पापे पूयो। मागाधिपतेसोए । रेमामध ! मगधरेगना छ पना मोफ पतसरित पणा प्रतिशोए । प्रत रहितमोबा। एक्तधेष । इम तिमहीन निरे। बारबममपतिए । यावत् निको मारो - - इणमरमेघ , मागहा ! किसछतेसोए शणतेसोए एष तघेघ जाय जेणेव ममश्चतिए तेणेव इछमागए, णूण खदया ! थठे समठे , हताश्यत्यि जेयिय ते खदया ! थ्यमेयारवे यज्जस्यिए चितिए पत्यिए मणो गए सकप्ये समुप्पजित्या, फिसछतेलोए आणतेलोए तस्सयियण श्यमठे, एवस्खलु मए खदया! चउविहे लोए पण तजहा-दव खेप्तन काठन नाय । दवळण एगेलोए सचते १ खेत्तण लोए आसखेजाच जोयणफोकाफोकीच शायामविस्फोण , शसखेज्ञान जोयणकोफाफोकी परिरकेयेण पणता, थत्य पुण से शंत , फालतण लोए नकयाइनचासि नकदाइननवह नकदाइनन्नविस्सइ नविय नवतिय नयिस्स ममीप है। तेषापमागए । ति चनाखा भाप्पा । सेपपदया। तेनिय हेपदक ! पासमा । एपथ समय मुबई पदमाका । तापयि । मा मी सत्य । वियपतेपरया । बिकापनि चपुन ते तुमने पदय ! परमेमाये। एएतायष्पं । परमविए । पामविपय । चिप्लिए पथिए । घिक्षित अभीड प्राबनाप । मागसबाप्पेसमुप्पणिया । मन सधी मममेयिपे गया संकरप विचारवपनो । विस पतेसोए । म साकपतसहितई। पराते माए तपरिषपयमो । साप पतरहित तेहमापनि पुम पं वाक्यासकारे, एपपई। एससुमएसदया । इम निचे में रेसदका | पसचिसापपस तमहापार भेर पानाती -रसपा पेत्तपा बासपा भावपो । थमी। पपी २ वारपो २ भावयो । दम्पपाषएमयोप सर्पसे । प्यमो पसमितकायमय एक दम्यतत्वको घोष पंतसहित। तपार्यवाए सजापानोपपकाराबोडोपा । षषो साक मेपर्यंतबयो पसंप्यातो योजन भोपागारमा रम पिपिदिय बायो म अघोदिय प्रमादिये तेपसम्माती प्रसंस्वाती योबननी बोगकारि । पापामविस्तभर पसपेमा पामापकासकामे पापरिमोर पसत्ता पपिपरसेप्रत । पायामदीपप विपपिम्तारपरे पसरसाती पोवननी काहाबोडोडरोने बमा साम पसोतवासनात एतचे पतसहित वामपायचाएपपयापासि । पासपो साव नहीपदेर मनता एवापता पतीतपाये को माता म न - पम्पास्तिकापमयेकद्रमवा मोस्पसान्तो सौ ॥ पायामविक्सनेरति ॥ पापामो देय, विशम्भो विस्तारः ॥ परिक्षेति ॥ परिधिमा ॥ मूवि | सहति ॥ अभवत् इत्यादिनिय पदः पूर्वोचपदानामेव तात्पय मुक्त ॥ पुत्ति । ग्रुवोऽवतस्वात् सचा मियतमपोपि स्या दतमाह ॥ पिपरत्ति ॥ | मियत एकस्वरूपत्वात् निपतनपा काराधियोपिस्या दतपाइ ॥ सासरति ॥ सायतः प्रतितासगावात् सप नियतकाप्सापेपपापिस्या दित्य त पार । प्राति । प्रहयो रविनाशित्वात् प्रयच मातरप्रदेशापेक्षयापिस्सा दित्यतमा ॥ भवति ॥ भव्यय स्तरप्रदेशामा मध्ययस्वास् प्र यह ट्रय्यतपापिस्या हित्या। अवष्ठिरति ॥ अवस्थित पर्यायारामनन्ततया भवस्पिप्तस्वात् विमुक्त प्रयसि नित्यति ॥ वसपज्ववत्तिय वर्गविशेपा एल्गुषमातस्यादय' एवमन्पेपि पुरुसपुपपवा सद्विसपा वाररस्कन्धामा अनुरुलपुपमवा अबूमा सूत्मस्कन्धाना ममूर्तानाच ॥ नाणपन्नपत्ति ॥ मा इय, धुवे णियए सासए एस्कए थवए थवठिए णिच्चे णत्यिपुण से छते ३ । नावण लोए थणतायण पज्जया , गधरसफास । शणता सठाणपजवा , वणता गुरुयलयपआया , शणता शगुरुयलकायपज्ज वा , नत्यिपुण से श्रुते ४ सेत्त खदया । दब लोगे सश्यते , खेत लोए सथते , काल लोए ऋणते, मानभवर । तवा नही परे यतमानबासे नई एतापताई तथा । नकरानमविसार । महोवदा प्रनामतवासे नही में एवापता । भविसबभानिय भविपतिय मुरिवरसाए । प्रतोतबासेहता वत्तमानबाहे प्रमागतका पक्षपामो एक सम्पनी नियत गायतो। प पर पपर पगारपि। विनामको पेशमा प्रदेशापेवायें पिसतुं नमो। पासित एतसेभिपश। पयिपुरसेपते । नवो वसो तहगो प्रत एतते परयो । भावपारोए । भारयो साग परतापपरवा । धनता पपमा पर्याय एबगुषवापादिते । गधरसपास । गधरसपासमा पपिकापा पपतामठापपमा । धनता सम्मानना पर्याय । पपतागुरबारपबना । प्रमता पाएर पपने गुरखापर्वाय । पर्वतागुषणमपन्समा । ममताभ पभने तपा पमूर्ती प्रमुख पर्याय । स्लिपर सेतसेत संदा । नवो पतो तेहना पठ एतसे भागको परि पनतरे ते एपाक । पोशोएमयते ।

मपर्यापा प्रामविसपा युतिरुतापा विमामपरिमोदा मनन्तामुरुसपुपर्याया भौदारिकादिशरीरा स्यामित्य इतरेतु काम्मवादिष्यापि जीवस्वरूप भामित्यति । जेमियतरादयापुमति । धमेन समय सिद्धिामसूत्र मुपसचमत्वा घोप्तरसूबाशय सूषित सावदयमप्येष ॥ अवियतेपदपाइमेयारू नाय लोए शणते, जेयिय ते खदया ! जाव सथतेजीवे थणतेजीवे तस्सवियण श्यमछे, एवखलु जाय दवनण एगेजीवे सष्यते , खेत्तण जीये शसखेजपएसिए थसखेआपएसोगाढे , यत्यिपुणसे छते , का सण जीये नफदाइनशासि णिच्चे नत्यिपुण से आते , नायण जीवे थणतानाणपजया , थणता दस णपमया , छणताचरित्तपज्जया , धणता गुरुपराजयपजावा , गणता गुरुयलपपजवा । नस्यिपुण पंतपासोएसपते पयोहार पतसहित, पो पोवपपि प्रतसहित । कारपोशीएपपते। पासपी सोक तरहित । भाषपासोएपपते। भावपो पवि साग पतरहित । नवियरनेपरमा । परि पुन बनी प वासासकारे, रेपदक भावसमतेषोये परतेषीवे। पावत् पत सहित पाप पंत रहिवरे चोय । तस्मपिरप्रयमो। तानो पनि धपुन मासबारे, एपब बारी। एषयमबाबदवपीर । म मिये यावत् इम्योपवा यासबारे । एमेनोपेस्पते । एवमोब द्रष्य प्रवाहिता। पेत्तपोपवोरप्रसवपरसिए पसखपएसोगाठे। पयो गापासबारे, दोष पर्स माम परेमामबारे सम्मानपरेश पवगाडये। त्यिपरसेपी। वो तहमा पत, अंतसहित।कासपोरबोरे पक्यापासि।कामयो र वावासका रे बोर नहोपो महता पतायता पतोतबातो बत्तमानवास पनामवबाचामे। पिपरिपुरमते भाषपापीये। नियनको यसो तेर ना पर एतसे पनाई । भाग्यो र पाण्यासगारे, जीव । पपतापाचपखवा पर्वतादसबपनमा । पमता घाममा पर्याय पर्मता दर्शनमा पर्या । परतापरित्तपमा । पमता परिषमा पर्माय । परतामुपयायपमरा । पमता गुरमधु पर्याय ते पौरारिषमरोर पावयीने । पपता अगु पासपमा परिपुषसेपते । पमतावामनद्रव प्रयवा बोपनप पायोने । महो बसो तेनोर्मत पतापवा तहमा पतये । सेतदपपोषोरिसपते। - - . पम्पासिकायमपैकद्रम्पस्या मोबस्ससान्तो सौपायामविसनेति । भापामो देय, यिफम्भो विस्तार से परिमोयेति ॥ परिधिना ॥ मूवि माति अमषत् इत्यादिभिप पदः पूर्वाछपदामामेव तात्पप मुफ ॥ पुषेप्ति । वोऽधसस्वात्, सपा निपतरूपोपि स्सा दसमाए ॥ पियएत्ति ॥ | नियत एकमरूपत्वात् मिपतहपः पादावित्कोपिस्पा दत्तपाद ॥ सासरति ॥ साधता मतितासगायात् सघ नियतकाप्तापेपयापिस्या दित्य त पार ॥ परति ॥ पापो दविमाशिस्वात् अयंच यासरप्रदझापेक्षयापिस्सा दित्यतमाघ । प्रधरप्ति । पथ्यय स्तरप्रदेशामा मष्पयत्यात्, भ पर द्रव्यतपापिस्या दिस्पार पठिएत्ति ॥ अवस्पितः पर्यायायाममततपा पवरियतस्वात्, किमुक्त सपप्ति नित्यति॥षणपन्थयति॥षणविधोपा | एकगुणातत्यारप' एवमम्पेपि, गुरुतपुपर्पवा तविशेषा पाररस्कन्धामा अनुरुत्तघुपपषा अमां सूरमस्फन्दामा ममूर्तामाप ५ माणपत्रपति॥ धा इय, धुपे णियए सासए श्रकए थपए शवठिए णिच्चे णत्यिपुण से श्ते ३ । नायण लोए थणतावण पञ्जया , गधरसफास । शणता सठाणपजाया , शृणता गुसयलझयपजया , थणता गुरुयलायपज घा , नस्यिपूण से यंते १ सेत्त खदया । दक्षच लोगे सश्चते , खेत लोए सचते , काल खोए शणते रामभया तथा मही पदो वतमानाचे महे एतावतार तथा । मयाइनभरिया । नोबदर पनायतका महो में एतापता। भविमुबमातिय भविष्पतिय प्रवेरिपएपाए । पतीतबारता पत्तमामवायेई पनायतबासे से परसपाधी एक सम्पपी नियत मापतो। भए पमर पर रिपे । विनायनको पाना प्रदेशापेक्षाये पिम मयो । प्रसित एतोनिबाहे। पबिपुरसेपते । नयो बसी तेहमी पत पतसे पर्मतह। भावपारसोए । भाग्यो पाव । परतापवया । पमता पपना पसाय एवगुरषासादिते । गपरसफास । पपरसफासमा परियामा । पपतासठापा । पनता पसानमा पर्याप । पपतागुरसायपमा । पमता पादर परमे पुषसप्तपर्याय । अयंतागुतायपचा। ममतामूत्र पभने तया अमूर्ती भागमा पर्याय । विपुषसेतसेत परवा । मयो वसो तेहना पत पतसे भाषयो पनि धनत ते एकएक । पाखापयन । - मपर्याया नामविसपा मुदिताया विमामपरिवेदा अनमतामुरुसपुपर्याया औदारिकादिशरीरा स्वामित्य इतरेतु काम्मरादिष्यामिनीवस्त्रम्प वामित्पति मियतण्यापुति । प्रमेन समय सिद्धिममसूत्र मुपसतया घोत्तरसूपायय सूषित रूपममप्पेष ॥ अविपतेसदपाइमेपाल नाय लोए छणते, जेयिय ते खदया! जाव सश्यतेजीवे थणतेजीवे तस्सवियण अयमठे, एषखलु जाव दवण एगेजीये सचते , खेत्तःण जीधे यसखेजपएसिए शसखेजपएसोगावे , अस्थिपुणसे शते , का लनण जीवे नकदाइनशासि णिचे नत्यिपुण से श्ते , नायण जीये आणतानाणपजावा , गणता दस णपज्जया , एणताचरित्तपजवा , शणता गुरुयलजयपजाया , गणता गुरुयलमायपजाया । नत्यिपुण पंतपोषसपते । यी चाय पतसरित, पेयो सोकपषि पतक्षित। बासपोगोएमयते। बासमी रोक्ष अंतरहित । भारपोसोएपषते। | भावपो पनि साब पतरहित वेरियवतेपरया । परि पुन बमो र वासासकारे, रेसदक! पावसमतेवोये परतवोपे। पावत् पत सहिवरे भोग पंत रहितो वोव । तामपिपरपयमी । तेहगो परि पपुन बाबासबारे, एमय वारणाएपषतषापदमपोर । म निये यावत् समीप वा खादबारे, । पीपेसपी । एकचोष ट्रय भवसहित। तपारपोरे प्रसपेबपएसिए प्रसवपएमागाठे। पयो प बायासबारे, पोय पस । प्यात प्रदेमामबारे सम्मावादेय एबमाठई। पत्विपपसेपी।सो तानो पत, प्रतसक्तिहेवासमोरधोये चकमारपासि । वाममोर गाम्याचका रे भोप महो बरे माता पतायता प्रतीतबातो पत्तमानबारे पनामवनासामे । पिपरिपुरसेपसे भापपापमोरे । नित्य महो यसो तेर मा पत एसी पनत । भावी रवाशासबारे, चोप । तापापधवा भतारसबपखवा । पमता चामना पगार भता दर्शनमा पर्श या पपताच रित्तपना । पनता चारित्रमा पर्याय । पचतागुम्यायपचरा । प्रनता गुरासघु पर्याय ते पौदारिफयरोर पाचवीने । पपता प्रगु परमारपथ पमिपुषसेयते । पमताबामाम्य पापा बोपनप पाचोने । महो पक्षो तमोपंत एतापवा नो पतई । मतदम्पप्रोमोवेसयते। - चाय कि सतासिद्धी प्रतासिती तरसविप पयमएयरामुमएरादया पविशासिद्धी पणता तमहा दवले रोतन कास नायत्ति, दयप ए पासिद्धिति र सिद्धि पद्यपि परमार्थतः सस्तकर्मचयरूपा सिद्धापाराकाथादेवरूपावा: सपापि सिदाधाराकाशदेशमत्यासमस्ये म परमाम्मा रा पपिवी सिदि रुता । किषिविसमादिएपरिक्षेति । किम्भिमन्यूममध्यूपदपापिफे द्वे योधमझते एफोमपमाशदुसरे प्रयतइति ॥ यसपमरणे से यते सेप्त । दक्ष जीधे सश्चते, खेप्तरजीये सचते, कालनजीवे एणते , नायजीव शणते, जेषियण से खदया पुच्छा । शतासिही थणतासिछि, तस्सवियएण शयम, मए चउबिहासिझी पणता तजहा दवन १ दछनण एगासिझी सध्यता खेप्तण सिझी पणयालीसजोयणसयसहस्साइ यायामयिस्कनेण , ए गाजोयणकोफीयायालीससयसहस्साइ तीसचसहस्साइ दोणियउणापणे जोयणसए किचियिसेसाहिए प रिरकेयेण पणता , शत्यिपुणसेचते , कालण सिझी नकदाइ नशासि , नाघय जहा लोयस्स तहा नए इसको बार पारिता तपासते । चेपको पवि पतसरितछे। पास पानीपपते । कासपो पपिवीय अंतति । भापपोपवते । भाग यो परियोष पतति विपर्यतेपदमापुपा। परि चपन पायाकारे, पदक पूयो । सतासिदो । तसषित मिमिसाई प बा पवासिडो वर्णविनय । तरहित सिमिसाई तहमा परि धपुन । अयमोपस्या । एपर्य रेखदवा ! मएएचपनुपविकासिमीपसत्ता तवा मरम विये रारमेरे सितिमिपा को तेकाई-दबपोरपगासिहोमर्मता । द्रव्ययी एव सिदिमिता तानो पतछे तेमाटे पतसहि तई। ऐतथा सिमोपचारासीसमापवसरमापार मायामविकसभेवचेपी सिरिमिसा पतासीसमाप मापन प्रमार पापाम सौमी विकभकात पासपोरे। एया बापबागे। एक बाबननो कागे। पागावोस सपमापार । बासोसमार। तोस पसनमार । तोसमात रामिप पर पापये मापरसए । दायरे उगुरुपास पावन । विपिविमारिएपरिर पपधा। एप पिमेपाधि एतसे attest पाया विशेषाधिक परि णता, नाणियमा । तत्यदधन सिझी सथता , खेत्तसिझी सध्यता , काल सिही शणता , नाव सिमी छ जेषियते खदया ! जाय कि शणते सिछे तचेव जाव दळण एगेसिद्ध सचते, खेतण सिद्ध थ सखेजपएसिए यसखेजपएसोगाढे थत्यपुणश्चते, कालण सिद्धे सादीएथपजावसिए, नत्यिपुण सेयते, जायण सिद्धे, शणता णाणपझवा एणता दसणपझाया , शणता गुरुयायपसवा , नत्यिपुणसेचते सेप्त । दसिद्ध सचते , खेतसिदे सचते, काठन सिद्धेशणते, नाव सिद्धेशणते, जेवियते खदया! इमेयासये थप्नत्यिए चितिए जाय समुप्पजित्या । केणया मरणेण मरमाणे जीवे वहइया हायइघा तस्स थियण रायमठे एवखलु खदया ! मए दुविहे मरणे पणते तजहा-बालमरणेय पमियमरणेय , सेकित शि। । पणिपुरसेपते । यसा तसिहिनाभव एतले प्रतसहितऐ पासमोर वाक्यासबारे सिरिमिक्षा । नकयाविनासि १ । नको को ना एतापता ये । भावपापमहापापमताभाषियमा । भावयो चपन जिम सोबनेकमा तिम सिदगियावामी। तत्वदग्पोसिबोसता । तिको दृश्यमी सिरिपिता पत सहितका पत्तपोमिरिसपता । त्रयो सिरिमिसा पतसहित । वासपासिहिपनता । कारयो सिदिगिमा पंतरहिवाई। भावी मिहोपपता। भाग्यो सिमिमा प्रवरहित । पेपिसप तेपदया। विपपि चपुन हेपदक । इमेएया। एमापेकरी सघुकथे । पथिएचिति ए । पामविषम पिताम्प । वापसमुप्पविया। वायत् सवम चपनो। फेरगामरमरमापेमोवेगावाहापापा । पिसे मर मरतोषकोभोव मसारमा समाबो जीपमा बधा समारनोहानियको बोरनोहानि । तम पियपपयमा । तामे परि चपुन प पायासबारे, प्रधानो । एवंसर पदमा । म निप रेपण । मएदुपिशेमरपेपपत्तो तबहामैं पेपबार मरपकमो तेकी-वाचमररेष । बालमरप १ चपुन । परिवमरनेम । परितमरर र पुन । मेकितमासमरपेर दुवालसविपत्ते तमहा । से ममासमरस ते बासमर वारे प्रकारको कम्मो तिकी-बसयमरगे। मृ - हि वसतो पुनपापरिनतस्वेन वसवसायमामस्य सयमादा धपतो मरर वसम्मर तथा वझे भेन्द्रिपवन श्यप्तस्प पीमितस्य दीपकतिकार पाधिसबदुपा शासनस्पेव प म्मर तहमामिरर वा अन्त अस्पस्य द्रम्मतो ऽमुसवतोमरादे मावता सातिचारस्य यन्मरण तदन्त गस्यमरस त या सस्मै प्रवाप ममुप्पावे। सवो मनुष्पादावेव महापुपी यम्मरकं तत्तगय मरर मिदंच मरतिरपामेति ॥ सत्योयारेति ॥ श्रोत जुरिकादिना अवपाटन विदारण दास्प यस्मि म्मर तनावपाटन विकासति ॥ विहायस्याका नव वण्यासाघुइन्धनेम यात विरुचवमा देहानसम् ॥ | महुपति म गमी पतिविमर्प यो मासतय भगाप्तादिधिः स्पष्टस्स विदारितस्स करिबरनरासनादिशरीरान्तर्गतस्येन य मरण तत् पत्र स्पष्टवा गारपटबा। सो प्रपितपष्टस्य य तत् पापप्ठ ॥ दुवातसविरवासमरऐति । उपसवा दस्पा म्पेमापि भासमरणात पाति घाउमरणे , वालमरणे दुपालसविहे पसते तजहा–बलयमरणे वसहमरणे शतोसल्लमरणे तनवमरणे गि रिपळणे तरुपमणे जलप्पसे जलणप्पवेसे विसनस्कणे सत्योवामणे येहाणसे गिछ पिठे, इच्चएण खदया ! दुयालसबिहेण घालमरषेण मरमाणेजी थपतहि नेरइयत्नयग्गहणेहि शप्पाण सजोएइ , तिरियमणुदेव से विपिसाटबरवा मरे, पबया धर्मको पहायमर ।। बसम्मरपे २ । इन्द्रावसि पडो मरे २ । प्रतोसबमररे। समयकोमरे दमो वोमरादिक भावपी सावितर। तभमर । मनुध मरो मनुषोब तिमंचमरो विवाहाय: । मिरिपहरे ५। पपवयो पो मर ५ । तरूपापे ।। उषयो प मरे । । बसप्प से । । पारोमाधि पमपणे मरे पसरप्पवेसे ८ । पाममाति प्रमेयवरी मर ८ । पिसमाहरे। विष भचपपरो मरे । सत्यो पाप । यसरी प्रमुएमीतीने विदारे विषमरमिरे १ विहारसे सच मापारियो पासोमाय मरतेमेशापस मरे ११ । गिपिी १२ । स्तबमातिपोमर १२ । एपबाससलिए पापमरपमरमाचीवे । म्यादि पारे मेदे मासमर उपचारमी मोबाईपरि मायमरपतिक रो मरताबको पोष। परतेहिसमयप्पारहि। पर्मतबप नारको मापाबरो। पप्पारसंघोपुर । पापा पाना बीमते भोरे मेरे। तिर ना मरन मिपमायाति । पाति ॥ संसारबदनेम मृदां पदतेजीब, इददि दिर्यचनं मृशाधाति । पाठेयममति ॥ पादपस्येवो पगमम मस्पंदतपायत्यान, पादपोपयम र पतुधिपाहारपरिहारमिप्यत्रमय मयतीति ॥ माहारिमेमक्ति मिरिण निर्पतं यत्त निहारिम प्रतिमप पा पिपत तस्य तत् तरकमेवरस्प निहारणात् पमिदारिमंत योठय्या मियतइति यघा म्यप्रेए स्थाने बहिसमरय मनिधीयते, तकप्रत्यास्पा यणाइपघण शणयदग्ग दोहद चाउरतससारकतार थणुपरियहइ , सेत पालमरणेण मरमाणे घडइ बहुइ सेप्तयालमरणे । सेफित पमियमरणे, पमियमरणेदुयिहे पणत्ते तजहा- (अयसख्या १०००) पावगमणेय मत्तपच्चरकाणेय, सेर्फित पाठयगमणे पायगमणदुबिहे पणत्ते तजहा-नीहारिमेय शनीहारिमेय नियमा अपमिकमे सेत्तं पायगमणे , सेकित भत्तपञ्चकाणे , नत्तपञ्चरकाणेदुविहे पणत्ते तजहा- नीहारिमेय समपदेशपाय परवयमा दोशमा । सियर महप देवमतिसंघात पामाचा पादिमा पपुम पागे प्रतमी दोघोपा पड़ा भाम । पारत सगरमतारपपरियार । गतिसाररूप कावार प्रटयोमा परिभ्रमपम सतमासमरपेषमरमाणे ते ए वासमरकरी मरतोमवा भोर समारन धनपरो बोया । तपासमरः । तेए पासमरा सेशित परियमरणे २ दुविहे पत्ते तमहा [.. Jले स्म पंडित मरपत मरप मेदान-पापा ममय ।। पादप बोये सपनोपर यमप राया। भत्तपपठारव २ । योबा भात पप भाप रूप परितमरप। सेवितपापोषयमषे १ एपिले पपी तमा। पादपापगमम परितमरण पादपापगमनपरितमरष सेवेमवारनी जात-गोहारिमेय । मगरमारिमर तेरमा फसेपरमा नोहाराहाय मीहार मरपनाहीये १ । पनीहारिमेव । पक्तादिके मरे सेपमी नो रामाय । विपमापपतिमे। नियमो परिचमचा मबर हाव पम इसायमहो। सेतपापोरगमे।से पादपापयमन मरष वयो। से मितपसारि गिी पपत्ते तत्रहा।१।मो भवमस्याप्यान मा मत मन्मापान मरप अमवार कमा तेबर-नोहारिमेय पनी | ति । वसतो बुनुतापरिगतत्वेन बसवसायमानस्स सयमादा असतो मर घसम्मरण तथा धसे नेन्द्रियवसेम शतस्प पीमितस्प दीपकसिकार पाधिसमानुपः मत्तमस्पेव प म्मर सहयात्तमरर, सपा प्रतः सस्पस्य द्रष्यतो ऽनुदततोमरादे मावतः सातिधारस्य यन्मरपं सदम्तायस्पमरणं त पा तमे प्रवाप मनुप्पादो सतो मनुष्यादायेव पदायुपो यम्मर तप्तष मरस मिद मरतिरयामेवेति ॥ सत्योपासवेति ॥ प्रदेष रिकादिना अषपाटम विदारण दास्प यस्मि भरणे तमालावपाटनं । विशाखसति ॥ विपस्याकाशे पर्व परमासाद्युन्मनेम यत्त विकतवमा हामसम् ॥ मनुपति । सः पविविध पैदेर्वा माससम्मै प्रयासादिनि स्पष्टस्प विदारितस्य परिकरमरासनादिशरोराम्तर्गतस्येम य म्मरस तत् यम पष्टवा पदस्पष्टया पर्वा मक्षितपष्टस्य य तत् सम्पप्ठ - दुधाससपिशवासमरगति ॥ सपतचरवा दस्या म्येनापि पालमरणान्स पाति घाटमरणे , वालमरणे दुयायसविहे पणत्ते तजहा-वलयमरणे वसहमरणे श्तोसल्लमरणे तम्नवमरणे गि रिपळणे तरूपणे जलप्पयंसे जलपप्पवेसे घिसनस्कणे सत्योयाणे वेहाणसे गिछपिठे, इच्चएण खदया ! दुयालसबिहेण यालमरणेण मरमाणेजीवे थणतेहि नेरड्यन्नयम्गहणेहि थप्याण सजोएइ , तिरियमणुदेव पे वितरिवाटसरता मरे, प्रसपा वर्मयो भागारमर । बसामरम्दानेवसि पडो मर २ । पतोसन्ममरणे । गमधयोमरे द्रमो तोमरादिक भाग्यो मातिसर। तमामरा मनुष मरी मनुष्य र तिबंधमरी विसरहाम । मिरिपये । पर्वतयो परी मरे । सरुपाये।इपयो प सोमर । । वसप्पो से पाचोमोहिमसबरी मरे परप्पसे ८ । पमिमाहि प्रगवरी मरे । बिसमापे । विप मचपपरो मरे । सम्बो पार! । यस एरी प्रसयो ऐडीमे विरार विषमरमरे । विशारसेच गावादिषयी पासोमाय मरतारस मर ११ । गिरपिी १२ । मतबाहिरोमरे १२ । एषगपसगिरीष मासमररेषमरमाणेधोये । इस्मारि मारे भेदे बासमर उपहारी मोबाईपि मासमरपरे तिरेख रो मरतामको मोव । परस्मिस्माति। पर्मतक नारपो भागावरी । अप्पारमबोरा । पापा भामा जोपपते बोरे मेरे। तिरि - मा मरन प्रियमानाति वावति । ससारबई मेम सं पदतेजीव, इदहि दिवंचनं शाइति ॥ पाठवगमोति ॥ पादपस्पेवो पममम मस्पदतपायस्पानं पारपोपममम रिपबतुधियाहारपरिहारनिप्पसमव भवतीति नीहारिमेयत्ति ॥ मिहारेर नित्त यत्त विहारिम प्रतिमये यो विपत तस्पे तत् तत्कमेवरस्य मिहारचात् पमिहारिमत मोठय्या नियतइति यषा न्यप्रेड स्पामे इद्वितमरय मभिधीयते, तपप्रत्यास्पा थणाइयचण शणवदग्ग दोहद चाउरतससारफतार एणुपरियहइ , सेत घालमरणेण मरमाणे यहइ यहद सेतयालमरणे । सेफित पमियमरणे, पमियमरणेविहे परमत्ते तजहा-(प्रथसख्या १०००) पाठेघगमणेय नत्तपच्चरकाणेय, सेकित पाठयगमणे पावगमणेदुधिहे पत्ते तजहा-नीहारिमेय शनीहारिमेय नियमा थपक्किमे सेतं पाठ्यगमणे , सेकित नत्तपच्चरकाणे , नत्तपच्चरकाणेदुषिहे पाते तजहा- नीहारिमेय पमापदेवपास परवप दोरम । तियर मनुष देवगतिसपाते पामावारे पादिनहो पपुन पामे पतमी दोघापा पहा माम । पाठरत ससारखतारपपरिया । चतुमतिससारम्प कावार पटगीमारे परियमपपर। सेतवासमरपेषमरमापेबाप । तेए वासमरवरी मरवाचका मोर समारम परो घोवरध । सेतवासमर । तेए मायमरपथमा । सेवि त पहिवमरपे २ दुमि परसे तमा [म १ से परित मरप ते पति मर भेदे गाना वीर-पाप्रायममय ।। पादप पोये पच तेनोपर पनप रहवा । भत्तपवसाय २ । पोवो भात पप भाष रूप पहितमरण १ । सेवितंपापोषमम २ दुषिों पपत्ते तमा।ते में पारपोपगमन पडितमरप पादपापगमनपरितमरख तेवप्रबारनो पामा तेबाहे-गोहारिमेव । नमरमारिमर तामा कपरमा नोहारपोहाय तेनीमार मापकहीये १ । पनीहारिमेय । पवतादिके मर तानी मी सरसनहाय ३ । रियमापतिसमे। निसयसो परियमचा नकर हार पग इसाबमहो। सेतपापापगमेच । ते पादपोपसमग मरप नो । से वितभत्तपसारे दुर्मिी पपत्ते तबाहा ।। ते मी भतमम्मामान मरद तेभताप्रत्यारवान मरए । वेप्रकारे कामो तेवी-मोहारिमेय प्रमो - ।

- मस्त विपरति मेरेन दलितमिति ॥ पम्मकाहानापियवति साय-अपनीवायती मुवती लक्ष्यसकिलिस्सति । बहदुस्सारत फरि तिकदमपतिपदा अहनिपहिपचित्ता पहनीवादुम्ससापरमविति । अपरम्गमुषगया फम्मसमुम्मपिशामितीत्यादि ॥ २॥ रह ॥ अहमिय धनीहारिमेय , नियमा सपनिक्कमे सेत्तं नन्तपञ्चस्काणे । इच्छेतेण खदया ! दुविहेण पमियमरणेण मरमा णेजीये आणतेहि नेरइयत्नवग्गहणेहि छप्याण विसजोएड जाय वोयीवयइ , सेत मरमाणे हायइ , सेप्त पमियमरणे । एचएण खदया ! दुयिहेण मरणेण मरमाणे जीवे वहइया हायहवा , एत्यणसे खदए कच्चाय जसगीते सयुद्धे समणनगवमहायीर यदइ नमसष्ट , नमसइप्ता एव वयासी , इच्छामिण नते ! तुजश्य हारिमेम । उपायबमारेताना परोरना मोहाराहाय पटवोमारोहमा शरीरमा मोहारपानहाय । पियमापतिमे। नियय ए परि मनापरे पग रिसाव । सत्तभत्तपतचाप । भाताप्रस्थापमान मरषकहोये । तेषपदया। स्वादिया करो वासासकारे, खदव ! दुबिहे पहिय मरवमरमारेमोरोइविधवारने परिवार पाराधनादिकारपोकरी मरतापगोखोव । भरतेरिपरायभवम्पापप्पाविसबापनापनतरे बरो नारकोमा मापानेचरो पापा सामान विसा परमोकर एतावता पततिक्षमाप समारबो प्रापशेषोप पचगाधर । धायकोरवयर । समत समार पतसरे बोगसमवयबरी माधवाय । सेत्तमरमाषशायर र । तेए पडितमर मरवीचका समारमोहानि फरवापो मोबषय शामिपामे । सत्तपडियमरपतेषारा। तेए परितमरसको । एतसे रेपरख । दुविषमरीयमरमारबोये पहागासागरवा । प्रकारने मरकरी मर तागायोग पसारना परवाची बोगब पने समारनोहानियो घोवनोहानिहोय । एसबसपादए । पाये जमा र वासावकारे, नेपाल । पारममात्रमुरे । वाम्पायनमारोप समम्बा गुम्बा तत्नीबातायो । समय भगवमहापौर बदा घममा २ । तिगारे यमब भगवत ऐपयादिवत योमहापोरवामोने पाद ममसारवर बादीने नमकारबौने । एषयमासो । रम को। आमिषमतेतमपतिएपनिपतपम्मानिसामेत्तप । पाप । - हिपवितप्ति प्राप्त नियत्तित पित्त ये सो चपा भार्ताहा भनिवहित चित्त ये सो पातं मिवर्तितपित्ताः । सदशामिति मिग्रन्य प्रवधम म | सोति प्रतिपद्य ५ पत्तियामिति ॥ प्रीति प्रत्यय वा सत्य मिद मित्यव रुप तप करीमी त्पर्प । रोएमित्तिम चिकापामीत्यर्थः ॥ अनुमिप्ति । तिए फेयलिपत्नप्त धम्म निसामिप्तए , थहामुह देवाणुप्पिया मापमियध , तएणसमणेनगषमहायीरे खद यस्सफच्चायणसगोत्तस्स तीसेयमहइमहाठियाए परिसाए धम्म परिकहेइ , धम्मकहा नाणियछा , तएणसे खदए कच्चायणसगोते समणस्स नगवान महावीरस्स शतिए धम्म सोच्चा निसम्म हरुतुजाव हयहियए उ छाएउठेइ उठेहप्ता समणनगवमहावीर तिखुप्तो थायाहिणपयाहिण करेइ करेइता एवषयासी, सदहामि पवाक्यासबारे भगवन् । तमारे समोपे केसोवे प्रचोतवमा, धर्म ते सरिवाभयो, पदक इसेवामा बका भगवतकाई-अहामुहदेवाणप्पि या भापरिषध । बिमसपावरदेवामु प्रिय तिमबरा पनि विसरमा कारपो। तएपसमयभगवमहापोरे। तिवारे यमर भमपत योमहावीरणामो पश्यप । पंरकमे। बपायबसमातस्म । जापावनमोनीयमे। तोसेयमार महापियाए परिसाए धनपरिको । तिमी मोटी वार्ताबरोमे माटो परिपदामेबियं धमाते का। पप्पाभापियवा । ससार पनिम्म पने धमनिय स्वादि धमनमा पापो । तरसेमदएकापाय पसगो। तियार ते पावसापायम गापनापी । समयपभमवपामहावोरण । यमप भमषत योमहावीरनामोने। पतिपधामोपामि सम्म । समोपे एमसभमा चबा दयारोमे। गांजामिए जोरता । सतोपांपा गावत् पयो कीया विकमो छठेठठोने । समभगवमहावीर तिउत्तीपायाधिषपमा पिबरोबरता । यमच भमरव योमहापोरणामी मते तीनपार जोमा पासायो प्रषिरावर परोने। एवमासी। मकर। सहशामिपभतेपिम्म पावयच । साइभमपन ! समानोमाषा दयाप्पनिपयमा प्रवचममाग। पयसामिपभसेपिम्पबपावयप। प्रोतिमत पथवा प्रत्ययम एस सो भमयम् । निममना मरममाग । राएमिरमते पिम्पकपाश्यप । बौदा भगवन् ! मिर्गपना प्रबधन रमेश एवम । प्रमिभनेपिमधपावर - - - मस्पेय विपरति मा नैवेन दपितमिति ॥ पम्मकहानापियवति ॥ सायं-जानीयायनती मुपती बक्ष्यसफिलिस्सति । बरदुषणापत फार सिक अपशिषर ५१५ पानिपहिपशिता बाजीवादुम्ससामरमुविति । बयेरग्ममुघगया फम्मसमुग्गविहाहितीत्यादि ॥२॥ ॥ महनिप चनीहारिमेय , नियमा सपफिक्कमे सेत्त नप्तपशरकाणे । इच्चेतेण खदया ! दुबिहेण पमियमरणेण मरमा णेजीये थणहि नेरइयनयग्गहणेहि थाप्याण विसजोएइ जाय धीयीषयइ , सेत मरमाणे हायइ , सेप्त पफियमरणे । इच्चेएण स्वदया ! दुबिहेण मरणेण मरमाणे जीवे यहइवा हायढ़वा , एत्यणसे खदए कच्चाय णसगोत्ते सयुद्ध समणनगषमहावीर पदइ नमसइ , नमसइप्ता एव वयासी , इच्छामिण नते ! तुज्जय परिमेव । पाचवमा रातहना परोरमा मोहाराहाय पटयोमारे रई तहमा अरोरना नोहारपानहाय । पियमासपरिमे। निपय ए पति समपा बरे पर किमा। सेत्तमत्तपसारे। भतापमान मरपपाहीये । पेचपरया । सादिया करो वावासकारे हेपदया! दुरिहे पविमरमरमारेयोप। विषप्रकारने पडितमर पाराधनादिकरपोकरी मरतायबोमोष । प्रपतेरियभवम्पपिहिमापापरिसबीएडापनतरे बरो मारबोमा मापारिकरो पापा पाधान विस बार पबमाकर एतावता धतुर्गतिधमाप संमारयो पापोयोग पसगोकरे। मापवीयर । गावत् समार पतबर पोषकर्मचयबरी माधवाय । सेत्तमरमाणावर । तेए पहितमरप मरतीयका समारनोहामि करवायो मोवध शानिपामे । | सेत्तपरिवार र पतेपपरा । तेए परितमरणमा । एतदक ! दुबिहेमरपमरमारियोये बदमाशयरवा ।प्रकारने मरकरी मर तापवानोव समारना पववादी बीयप पने समारनौशानियो नोक्नोधानिहाय ! यसबसेदए । एवे सामा र पासासकारे, खरबक पापसमात्तेसपुरे । बाम्बाबनमानीय समना मना तस्वनीवातमायो । समय भगवमहापोरं वदा पर्मसर । तिबारे थमच भगवंत एमयादिवस बोमनायोरखामोने यदि ममसारसर गादीने नममारपरोने । एषयामो । म बी । रणामिषमतेतापसिएका परिपत्तभनिसामेत्तए । बार रिपवितप्ति । प्राप्त मिवत्तित वितं ये से तपा प्रार्ताहर प्रमितित चित्त पैसे पास निवाप्तिसरिताः सहशामिति ॥ निगन्य प्रयचम म सोति प्रप्तिपद्य ॥ पत्तियामिप्ति : प्रीति प्रत्यय था सत्य मिद मित्यव उप तप करोमी त्यर्प । रोएमित्ति॥ विकीमात्यः ॥ अमुछेमिप्ति ॥ तिए केयलिपत्नप्त धम्म निसामिप्तए , थहासुह देवाणुप्पिया मापविध , तएणसमणेनगवमहाघीरे खद यस्सपञ्चायणसगोत्तस्स तीसेयमहइमहालियाए परिसाए धम्म परिकहेइ , धम्मकहा नाणियहा , तएणसे खदए कच्चायणसगोप्ते समणस्स नगष महावीरस्स शतिए धम्म सोचा निसम्म हठतुम्जाव हयहियए उ छाएउठेइ उठेइप्ता समणनगवमहावीर तिखुप्ती यायाहिणपयाहिण करेइ करेइप्ता एवययासी, सदहामि समामासमारे भगवन् । तमारे समोपे कोसोये प्रपोतवमा पेधर्म ते भपिवाभयो, सदया इसे कमा बका भगवतकाई-पासुहदेवाणप्पि या मापरिषध । मिमममरेदेवगनु मिस तिमबरा पति विसरमा करप्यो । तएपसमममममहाबोरे। तिवारे यमप भयवत योमरावीरसामी। पदपम । परमे। पारपसमात्तम । कामामनगोपीयमे। तोसेममा महाभियाए परिसाए धम्मपरिवह। तिसी मोटी गायबरोने मोटो परिपदानेविप धमाल की। धवाभारियमा । ससार पमिन्य पने धमनिम्म इस्मारि धमनपा चौपयो । तपसेपदएकपासपसगोसे । तिवारे ते पाबाम्पायन मापनोपरी । समयभवपामहापोरस । यमर भगवत चीमहावीरनामीने। पतिएवम्भम्रोपानिमम । समोपे घमसाभमा वका पदभारोमे । सांगासिए नोरता ।प सतोषपायो यावत् रुपको होमा विवपो उठेउठोने । समरभगवमहावीर सित्तोपामाशिषपया रिपरोक्षरोता । यमप मम योमहापोरणामी प्रते वीनपार वोमा पासादो प्रधिमाकर करोगे। एषयमासो। दमक । महामिबभबिम्म अपारय। साहीभगवन् ! मेरमानोभाया दयाप्पनिषदमा प्रवषममाम । पपठामिषमतेविम्वपापयर। मोतिपत पवा प्रस्थयम एस | पो भयवन् । निप्रबना प्रवचममाय । रापमिषमतेविम्वचपायथ । बोक्छु भगवन् । मिर्गबना मगधन र स्वयं । भोमिभनेपियर्षपायम - - . एतदहोकरीमीत्यप अप महानाग्मुख दक्षपति, एव मेत अन्य प्रमचम सामान्यत , अप य सधूप बदघे तियोम ॥ तहमेयति ॥ वधे वैतहिपतः । प्रवितामेति ॥ सत्य मेतदिस्पप । असदहमेयति ॥ सन्देश्वर्णित मेतत् ॥ इप्रियमेयति ॥ इप्टमेतत् ॥ पहिलियमयति । म तीप्सित मातुमिष्ट परमियपमिशिपति । युनपदिशा प्रतीप्साविपयस्वात् ॥ तिकति ॥ इतितत्वेति अपवा एव मय प्रते! इत्यादीनि प णनसे ! निग्गपंपावयण , रोएमिणते ! निम्गथपाययण , पप्तियामिणजते ! निग्गय पाययण , थप्नुछे मिण नते ! निग्गंध पावयण , एवमेयत्नते ! तहमेयत्नते ! वितहमेयत्नते ! शसदिश्मेयत्नते ! इच्छिय मेयनते ! पहिच्छियमेकनते ! इच्छियपमिच्छियमेयत्नते ! सेजहेय तुज्के यदहप्तिकहु , समणनगव महावी र घदइ पमसइ , घदित्ता णमसइप्ता उत्तरपुरच्छिमदिसीनाय श्यामा शयकमइप्ता तिदळंच कुझियघ । उपमपत सगाई मममम् ! निर्षण प्रकरणमा एमभोवार पर रखा । एवमेवमते । हमव ए भगवन् ! निम तमगा। तामेयभते । तिमहो सोममपन् । पषितामेभते । सम्मा मनन् । रमप । पसदिनमेग्भते । संदेशरहित भगवन् । एक । रखियमेवमंते । ए एभगवन् एक चित। परिधिरमेवभति । पायकाने एमवीपित रेममवन् ! । वियपरिचियमेयमते । पमबार भने प्रतीसा विषयवको मगवम् ! सेब मतुम्भेषरातिया । तेगबा तुमेको तिमन इमारोने। समबम गपमहाबोरसंगपर्मसर ता । यमप भगवत मोमहापोरनामो प्रतें बारे ममता खरे पाहोने नमसारबने । उत्तरपुरचिमरिसीमार्गप्रगाम २ ताउत्तर पूर्व दिमिविभागे एतले मान रेवाय बाईने । तिदाच कुग्यिच । दोनदामात । बाबपाउरचाय । सपत् येक रपा बनते । एमतेएनविपत्ता । एकति मने बोने । बेपवसमपममपमहानी। विहां धमत्र म मवत योमहापोरणामी । तेरहवामाचारता। किपा तिकांपागोने । समयभमबमहामोर । अमर भमर्मत चौमहामोरणामीमतें । विश्वत्तो पामारिपारिवारला। वोमवार मोमा पासापो पदचिवापर बने । भापरमपित्ता! पावत्म बार नमन्चारकरे भागने नमनार - - . पानि पपायोम मबापा म्पत्पादरमदशामापो चानि म प्रातिविति । प्रनिविधिमा स्वसितः । सोएत्ति नीवसोक ॥ पसित्तेवति । प्रहर ज्यसिता एव विष पासी कासनदेनापि स्पा दव समते मादीप्तप्रदीप्ताहति । पराएमरसपत्ति पर वमिति वारपोपो हवया । क्रियायमा । पसित्ति माममामे मापतिवा। दसमाम प्रत्यर्पः । अप्पसारेत्ति ॥ भरपंच तस्सार रेस्पल्पसार पायापत्ति प्रात्ममा स्वान्त विखन पन्त पूमार्ग पचापुरापत्ति विवस्तिवासस्य पया त्पूर्वच सवदेवत्पर्य ५ पेक्ोति । स्पैर्यधर्मपोयात् पर्यो वैद्यासिको विद्यासप्रयोजमस्वात् जापधाउरताउय एगतेएक एकहप्ता जेणेव समणेनगघ महावीरे तेणेष उवागच्छद उपागच्छहप्ता समण नगय महावीर तिसुत्तो थादाहिणपयाहिण करेइ करेइप्ता जाय नमसइप्ता एवषयासी , शालिणनते ! लोए , जराए मरणेणय , सेजहानामए केइ गाहापई यागारसि जियायमाणसि जेसे तत्य नानयइ थ प्पनारे मालगुरुए तगहाय छायाए एगतमत श्रवक्कमइ, एसमेनित्यारिएसमाणे पच्छापुराए हियाए सुहा परोने । एवंपासोमा पारितपमतेखाए । समसपर भिमबम् व्यरितवमा साब एक्से घोषवाद । पदिसेरभतेसाप । पवर्षे मचायोग को भिगवन् । पारित्तपमित्तलभतेबाए । पादीत प्रदीप्त पावा पासिम प्रमित भगवन् ! साव । बराएमररीषय । परोपरा तथा मरवारोने। मेबहानामपामाहागराते पयारोतमाम इति कोमसामर, कोरण्ड पापतिसेठ घरमाधको। प्रगारहिथियायमापसि । घर पम्निवरी सामावमा पर ममता वा इत्या । अतत्यमोनवर । बिते तिको भाडा पगरपइये । पप्पसारे । वारा तदोबसार प्रधान । मानगुपएतमहाय । मास पापागे परनोपन से पते पौने । पाता एमतमतप्रवामर । पामाये पोते एकति मनुपरहित भूभागमेपिये मो। एसममित्यारिपसमाष। एमे मुझने बाटोईले । परापुराए शिवाए सहाए । पर परिसा हिताचे सपनेवाये। समाए पिमेयमार पासमामियत्ताए भविपर पमानेका मिश्रेषस दरिदमा मास पनुमामिपर पुणे । एवामेवदेवार प्पिया । इसे हटांत देवासुप्रिय ! मप्रतिभावाए । मुझने पधि पानापोते सम्मत सत्सबायोपा सम्मतत्वात् बहुमतो गयो पान्यो वा न्यन्म सकाशात् पारितिवा मतोषपुमतः, अनुमतो नु विप्रियकरणस्य प यादपि मतो ऽनुमत प्रापरंगसमावति ॥ मारकररक्षक मामरबमाबम तत्समाम पादेयत्वादिति मारसीत मित्यादी मागदो निपेचार्य पमिति वाक्याप्सराप पर स्पमत्विति यथायोन योजनीयं अपवा मारम मास्मान मितिष्यारसय ॥ याप्तत्ति ॥ व्यासा धापदनुबगाः । | मालवाहपपित्तिपसिनियसमियाइयत्ति । मपमाषचनलोपो वइयः ॥ रोमायकत्ति ॥ रोगा कालसदा व्यापय प्रातमा स्तमय सब उप पाविमः ॥परीसहोयसम्मति म अस्प मावमित्पनम सम्बन्धः स्पातु खुपम्तु भवत्वित्पर्यः तिकटु इत्यप्निसन्धाय य पातित इतिभेप ' स किमि ए खमाए निस्सयसाए शाणुगामियत्ताए नविस्सह , एषामेव देवाणुप्पिया मम्झवि शाया एगे न इठे फते पिए मणुणे मणामे पेजे विस्सासिए समए यजमए श्यणुमए नाफरमगसमाणे माणसीय माणनरह माणस्नुहा माणपिवासा मामचोरा माणयाला माणदसा माणमसया माणवाइयपिप्तियसनियसणिवाइय विषिहारोगायकापरीसहोयसम्गाफुस्तुप्तिकहु , एसनिस्यारिएसमाणे परलोयस्स हियाए सुहाए खमाए नो एगी। कठे पिए मपणे मरामेषिविसासिएसमएपमएपसमए । एकभाड रह वांत प्रोत मनोन ममगमता धमसयोगयो धेयपपी मिरपो | विमासो पासप्रशात पापना समतपपायो मामत पलमव । भाबरगसमापे । भावरक पामरए माधन ते समान पादेयपरायो । मापसीव मा पण माषपुरा । समसे मायद निमेधारोपसोबासाहकारे पुमन्तु ए सबधमत गोतमत उपमन उधामत । मारपिामा मापोरा । मावा सा माग्दमा भाषमसया । पिपासा वषा परसामा चारपरसोमो सास मापद भुममम परसोमा दंसा परसीमा मसा परसामा । मापबारव पि तिब सिभिय सचिमाश्म । पातिक परसामा पत्तिय ससेषम सविपातिय । मिनिसारोगायबापरोसोपसम्पाफुमतत्तिबा । विविधरोग बाहयाधि भातापपि ते शोष उतावसो पातबर परोमा भने उपसम एहने मात्र पदस सबंधयोन मो इमबरीने पाना रतिमेष । एपमेनपारिएपमा। - त्या रसमेइत्यादि । तरण्यामिति । ततस्मा दिशामि • सयमेषति ॥ त्रयमेव जयतेवेत्यप , प्रताड़ित रबोहरवादियेपदामेन पास्मान मितिगम्पत मायबा तप्रत्यय लेम प्रवासनमित्यप मुरिझप्त सिरोप्लुम्मनेन । सेहावियति ॥ सेपित प्रत्युपक्षणादिक्रियाकलापपाहणत शिक्षित मूपापग्रासत सपा प्राचार भुतमामारिविपप ममुष्ठान काला प्ययमादि पोचरो मिचाटन, एतयोः समाहारह तत सदास्या त मियामीति पीम सपा विमपा प्रतीतो पनयिक तत्पस, फम्मतपादिघर वातादिकरणं पिरमविमुचादि, यात्रा सयमयापा, मात्रा तापममा पारमाया तसो पिनपादीनो बन्द सततप विनयादीनो पति वर्तम यत्रा सौ विनयमयिकपरस्परण्यापामाबादतिको, SA सप सेसाए शाणुगामियप्ताए नविस्सह त इच्छामिण ठेयाणुप्पिया ! सयमेव पहाविय सयमेघ मुमात्रिय सय मेय तेहाविय सयमेव सिस्काधिय सयमेघ शायारगोयर यिणयवेणयिय चरणकरणजायामायापन्तिय धम्म माइस्कियं , तएण समन्नगवमहावीरे खदय कच्चायणसगोप्त सयमेव पहावेइ जाव धम्ममाइस्काइ, एय एक मुझमे निमारपामा एमाहरा पामा पसेर पसेकास निधामा सका । परकायसमिया समाप निरससार पपगामिमत्तार भविष्मर । परसोय नहितमाम चमानेबाब मुशिात पगामिकपरेमे ताहामियदेवाणप्पियासयमेवपचाबिया से कारप पाइप पवाक्यासबारे, परमानुप्रिय! पा ने भगतबरमाारमारि पदानेबरो रोपाभा । सम मेवमुमयि । भगवते पात सिराहपनगरा । सयमबहारिय । पातब प्राचारशियापशापग्रह । सयमप सिकाविप । पातब मिचारी सभामपापमो सयमवभागारगोमरविपर पाय परप पर जायामायापत्तियधप्पमाक्लिय। पातेल पापार शुलमानादिविपर अनुष्ठान बापाध्यममादिगापरी भिचापिरष , विनय बरवा बेहना पस बमयशेतु परमातादिया पारप पिपिण्यादिक सरमापा पाहारनोमयाट ति नित्यमत्तेतेपमरते तमेसहो इसाइ पाए। तएपसमवेभमपमहायोरे । तिवारे यमप ममवत योमहापोरनामो। पायापापमगाता पदक पते कामायनमापना पपीमते। सय मेवपमायेर । पाने दोधायमापधममारतारायामत् सर्व विषम पप को एपदेगा म्ममारयात मनिहिस मियामी तियोगः ॥ एषदवायुप्पियागतवति ॥ युगमावभून्यस्तष्टिनेत्यपः ॥ सवनिष्यिति ॥ निष्मप्रयेशादि यस्मिते स्थाने सयमम्ममयबममापापरिहारण त्याने न स्पातव्य ॥ एव । मिसीइयवति । निपतव्य मुपयेष्टष्य सदशामिप्रमावनादिन्या यनत्ययः । एक्तपष्टियवति ॥ अयितम घामापिकोधारादिपूर्वक ॥ एषनुविधवति । धूमाद्वारादिदोपवण्जमतः । एयनामिपञ्चति ॥ मधुराटि यिशपया देवाणुप्पिया ! चिठियात गतछ । एव निसीइयष्ठ , एव तुयहियक्ष , एव जुजियछ , एव नासियछ , एव उठाय उठाय पाहि एहि जीधेहि सत्तहि सजमेणसजमियछ , अस्सिचण श्यले पोकिचिपमाइयच , तएण सेखदए कच्चायणसगोते समणस्सन्नगवड महावीरस्स हम एयारूव धम्मिय उपएस सम्म सपमिया इ समाणाए तह गच्छद, तह चिठद , तह निसीयड , तह तुयहड , तहा नुजह, तह नासह, तह उठा पप्पिागतकार मदिवासि पयमापा गुम प्रमाण भूमिवाता। पचियमाम निमम प्रमेय ववितमानके भूमि पनीने मारपिया। एप | मिसोय सरवरिया इम भूमि बोने पैसिंग, म सामायिवाडि सवारस पूर्वक माया । एवमधिसम्म एवभासियम । म सागागदि दोप पति त बीमवा, पवर्जित पावित । एवंप्रचारमवाय । म अठोमे २ प्रमाठ निद्राने सधिमेबरी वागोमे२। पाक्षि भूपक्षियोवेहि मपि । प्रापेकरोने भ | तेबरीने जोयेकरोने सभेबरोमे । सबमेबसवमिव । ते मागविनेवि तानो रचावर तिरेपरोने यतकरयो । पस्मिनापामोदिपिपमारयप्प एनेविय पुन ए वाधारकारे पर्वनेवि महो मगर पनि ममाटवरवा एतने समयमा प्रमादकरयोमको । तएपणरएकपायरसमाते। विगारे पद च कामासनमाधोय । समयभमबभामहागीरथ । वमबना भगत योमभावोरखामोना । इमपयाय । एपूर्ववनो तेप । भिगठयएससश्चम पति (पया । पमप्र उपदेममतें भसोपरे परिया मोबाखर । तमाचापतामह। पनतरेख कही ते पाना मागेवरीमे तिम राममिते बाप तहाि तानिसोया वस्तुमा ताभुमा ताभासा । तिमज चमार तिमव निपक्षामे से तिमच मे तिमय परषित पाहापण तिम -- पपमतपेति ग्व प्रत्यायो त्माय प्रमादमिदाष्यपोहेम विषुप २ माशादिपु विषय यः सयमो रखा तेम सपतव्यं यत्तितष्य ५ तमायाति ॥ तबमन्तर मापा प्रादेझन । इरियासमिरप्ति याया पमने समित सम्पक प्रपत्तः दर्यासमितः सम्पमएतस्वसूपदि समितल ॥ भायाग मामातमिम्पयशासमिति : पादानन ग्रावेन सह भगठमामाया सपकरणपरिसदस्य या निषेपणा न्यास समस्या समिती य स तथा ॥ यारत्यादि । यसघि ॥ परठमुवनम्मा सिहागबम्म नासिकानेप्मा । मरममियत्ति ५ सङ्गतमनःप्रवृत्तिकः । मरगुप्तति ॥ मनोनिरो भयान् । पुतत्ति ॥ ममोमुप्तत्यादीमा मिममम रसदव विदोपेणार ५ पुतिदिरप्ति युतवनयारीप्ति । गुप्त ब्रह्म गुप्तियुक्त ग्रन धरति यः स त एइ उठाएइ तहपाणेहि नृएहि जीवेहि सत्तेहि सजमेण सजमेइ , सिचण थठे णोपमायइ । तएणसेख दए कच्चायणसगोप्ते शणगारे जाए इरियासमिए नासासमिए एसणासमिए थायाणनामातनिकेवणास मिए उच्चारपासयणसेठसिघाणजलपारिठायणियासमिए मणसमिए वयसमिए कायसमिए मणगुप्ते ययगुस्से भाष समिते मासे । ता । पानि भूपक्षि बोवेहि सत्तेहि । तिमव निहा प्रमादरहित उठोने १ प्राधे परोने भूतेबरोने पायेवरीने सध्यारो ने। मनमेषसममा । मेरो यनपरे तेभी रपाकर । पसिया पोपमाया । एहने, चपुन प मामासबारे प्रमविप प्रमाष्ट नकर । तएपसे पाए । तिबारे तेषाव । अपायपसमाते । पासायनगापोयते । परमारेनाते। यानावासोरी साधुवया । इरियासमिए । र्या मागनेवि भस प्रकारे प्रमत्त ते र्यासमित । मासाममिए । मापा गापा विधारो बाये। एसासमिए । पचा ४२ टापरहित पाहार गरे । पायाभतमत्तनिपसे पासमिए । पायेबरो भाग्माष सपकरण परिछेदने मेसवे परी उपमागसहित । उपारपासवपस्सेउवहसिधारपागिाषिगासमिप । बहरोनोतिस पुनीत कामा मषनायेम नाबमाम ते परठवता पवनावर उपयामसक्षित प्रबते । मपसमिए यसमिए कायसमिए । मनमोमवत्त उपयोगसहित, व पन नि पाप प्रयास, कापेवरी मिपाप मपत्त । मपते परयचे कायगुत्ते । मनगापावे निराधपर, वचनमानिराधकर, वायामानिरोपवर। गुधे गृत्ति - - । पा। बाइति । सत्यागवाम् ॥ सम्पुति । सयमवाम् रब्युरिव वा रकु रवाष्पयहारः ॥ पम्मेति ॥ भन्यो पम्मपनसाध्येत्यर्थ ॥पतिस्पमहि। पात्या प्रमात न स्वसमर्मतया यो सौ चाम्तिवम जितेन्द्रिय इन्द्रियविकारानावात् यच माम् गुप्तैम्प्रिपात्युस तदिम्ब्रियविकारगोपममाया पि स्पादिति विशेषः । सोहिरति । सोनितः भोमावान् घोधितोया निराहताप्तिधारत्वात् सौहद मैत्री सर्यमारिपु सद्योगा सोडदोबारा पणियावति ॥ मार्थनारहितः । सप्पस्सुरति अस्पौत्सुक्पस्स्वरारहितः । अपरिम्सेहि । अभिधमामा परि सपमा पहिला मेरमा मनो | पत्ति यस्मा मा परिसपः ॥ भुसाममरति ॥ सोप्नने अमरत्वे रतः अतिशयनवा, मामयपरत ॥ दत्तत्ति : दान्त कोषादिदममात्, पन्तो पा रामदे॒पयो रन्तापप्रवत्तत्वात् ॥ इसमेति ॥ रमेव मत्स। पुरकठति ॥ अग्रे विधाय मार्यानमिनो मामधमरमिय पुरसत्य घा: प्रधा कायगुप्ते गुप्तेलेगुप्तिदिए गुप्तधनघारी चाई लजू धन्ले खतिस्कमे जिइदिए सोहिए थणियाणे थप्युस्सुए शव हिस्से सुसमग्रए दंते इणमेवनिग्गय पावयण पुरन काउ विहरई, तएणसमणेनगवमहावीरे कयगलाने णयरा बसपलासया चेझ्याच पक्षिनिरकमइ पक्षिनिस्ममइप्ता पहिया जणवयविहार यिहरइ , तएण लिए गुप्तवमचारो चार मला मन भादि पीपये, दिगापये गुप्त, वारो प्रवचय व्रत पादरे समम्यागकर, संम्मतवासहित । पेसतिपमे नि तिदिए साहिद परिणारे पप्पसुए। धमममसहित चमायेबरोबमे परि पसमापनही रन्दोविकाररहित बितेंद्रिय पतीचार सोप्या भयमा सो र मनोभार सापाचोनेवि निदान प्रायनारक्षित । नमुनापारपित। भवशिसे सुसामपरए । सयमते तेडेशा गहिरिप्रवत्तेनही मनोत्ति धाने मला वमपो तेहनविप रखई। स्तरमेमविम्यवपावयप पुरपोकाहविरा । दाँत पोधारिखनादमवायो एप्रयच निर्मक प्रवचन भागेबरीने मा पना पदाच मायमा वार ममप तानेपामे बरोने पिपरे सिम हंटल परिविषतएषसमरेभगवमहावीरे। तिवारे भमर भगत योमहावीरता मो। बममवापायरोपा । करयतामामे नगरोयो । पक्षासयामाचरयामा । हरपसासमामा चखायो । परिधिमा र ता । मोम बोगसीन । - नीरत्यविहर त्यासाति ॥ सकारस अगाइ पहिलाहत्ति, दापि दाहम न्यमेन कादकवरिता मागेव एकादशमिष्यति रपसीपते, पम्म मातनूतन स्कन्दम्परित मिद मुपसन्यते इति कथं म विरोध ? सध्यते भीमन्महावीरती विस नव वाचमा सच सर्ववाचमासु ससन्दकाच रिता त्याले ये सम्दवपरितानिया प्रो सो परितान्तरद्वारे प्रचाप्यत, सन्दकपरितोत्पत्तोष सुषम्ममामिना बम्यूनामान झिप्य म जीहत्या पिकतयाचनाया मस्पा सन्दकपरितमेवा मित्स तदर्पमापनातेति म विरोधः । अथवा, सातिवायत्वा नरापरारा मनागतकासमाधि परितमियन्धम मदुएमिति, भाविनिप्पससानापेक्षया अतीतकासमिदेशोपिन दुष्टइति । मामिपतिमासपरिमाया म निस्पम्मिति । मिपूधित म सेखदए शणगारे समणस्स जगयन महाबीरस्स तहाम्वाण घेराण शतिए सामाइयमाइयाइ एक्कारसगाइ शहिडाइ शहिडाइप्ता जेणेव समणेनगवमहावीरे तेणेय उवागच्छद उवागच्छहप्ता समण नगव महावीर यदइ नमसइ नमसइप्ता एव घयासी, इच्छामिण नते ! तुहि थानणुणाए समाणे मासियनिस्कुपमिम बरियावविहारविरबाहिरि देसमेपि विहारकरी विचरे, विहारपरे रस्म । तपसदएपबमारे । तिवारे तपदव परमारसाधु । समय प्स भमबपामावोरस्म । यमच भमवत बामहावीरनामोना । वहावा राब पतिए । या प्रस्थानियामा करहार क्या पधे सविरमाध करने समापे पासे । मारबमाचार पधारसभमार पहिया रसा। सामायिक प्रादिदी छपाया पने पाचारामादिव इमार पग तहमसे भ भगोने । यसमभगवमहानगर। मिली यमप ममबत योमहावोरखामी । तेषेबसवामदाता। तिहां पाये ति पायोने । समपभगवमा पार पर बममा २ ता। यमर भनबत चौमहापौरखामी प्रतें बाद नमस्कारबर बादीने नममार बगेने । एपबयासी। मया कामिपभसे। बाबाई पवायासकारे, भिमवन् ! तुम्पपिपपपसाएसमारे। तमे पानादोबा ममा पतो तमारो पाना शायका । मासिमिक्सपडिम मासमी मि साधुनो प्रतिमा वित्त पभिगा रिमेप ते पानाए भरपछे गहलो नोक्सो एकमासमो महामतिमा पादर, एक दत्तमोबन भने एकदत्तपापो गरे मिग्रावि एतत्मारूपर-समाविनियमिता पशिवम्बइमासियंमहापरिम । दधेपनोयरस्सा पारस्सविरममामासमित्यादि ॥१॥ म न्ययमे बारपापारी पठित प्रतिमाए विभिटमुतषानय करोति यदाह-मशधियनिम्मा मापुवादसनवप्रसपुस्ता । मधमस्सप्तस्यवस्य छोडसामोसु पाहिनमो ॥१॥ इतिकर्ष म विरोध ? उच्यते पुरुपान्तरविषयों यंभूतनियम सस्पतु सवविदुपदेदोन प्रपतवा सादोपहति ॥ ग्रहामुत्तसि॥सा माम्पसूबानतिकमेव । महाकप्पति । प्रविमाकरपामप्तिकमेव तत्करपवस्वमतिक्रमेशवा ॥ महामम्मति ॥धानादिमोहमागानतिक्रमेण पायोप अमिफनावानतिकमेववा। पहातपति । यपातस्य तस्यामतिकमा मासिीमितुप्रतिमेति, शरार्यानप्तिसङ्कनेनेत्यर्थ ॥ महासम्मति ॥ यपासा उपसपजिताण विहरिप्तए , थहानुहं देवाणुप्पिया ! मापयिष । तएण खदए शणगारे समणेण नगय या महावीरेण थप्नणुणाए समाणे हछतुठजाय नमसिता मासिय निरकुपफ्रिम उयसपजप्ताण विहरइ तइण से खदए शणगारे मासिय निस्कुपक्षिम थहासत्त शहाकप्प शहामग्ग शहातच थहासम सम्म का रम मागत् एकमासहये रम विस्तार मन्वान्तरमो वाचवा, हा वारपक पूछस पदकता रमार श्रम भामाई, पने प्रतिमाता विशिष्ट अवयत पाद २ तेमाटे सोविराध दौसके तामा उत्तर एमृत नियम पुरुषासर विशेपर, तेवदवे सपाने उपदेशेवरो प्रतिमावती, तिदोपनही, पोसराग सेवनी पासप वारे, तएकमारिप हमी प्रतिमा पादरोमे विचासो पदक पूधामा भमर्वतकाई -महामुरदेवाणप्पिया मापरिव । दिम सुपए वे देवानुप्रिय परि विवा मारणो। तएबसेघदएपगारे। तिमारे तेपदकसानु समवर्ष भगषमामहावीरेर । यमप भगवत योमहापोरदये । पभण पाएपमारे। पासादरोधापावावधमसित्तामासियभिमपतिमहयसपचित्तारपिारा । पंपामो यावत् नमनारफराने मास प्रमाण साधुनो प्रतिमा पभिप्राविशेष तपादरीने विचरे प्रतिमा तपबर इस्मा । तपरसेपदण्परगारे। तिवारे तेपरब सा । मासिभिषमपहिर्म । मास प्रमा |प साहना प्रतिमा पनिपापिमेप। पाामुक्त पहावप्प प्रभामग्म भात प्रशासभ । बिम मूबमाधि बमोतिम पतिकमनी प्रतिमा भाचार प म्र्प समनायामप्तिम्मेस प्रकाएमति । म मोरपमाप्रेश। पाइप्ति उपिसकाले विपिना ग्रामात् ॥ पातहति ॥ प्रससदुपयोगेन प्रतिमागर पात् । मोरप्ति ॥ गोप्रपति पारपसदिमेगुवादिरतापनोजनपरणात झोपयसिधा तिवारपवाममात् ॥ तोराति ॥ पूर्वपि तदवी स्तो बमालावत्यानात् ॥ पूराति । तत्पपरिमारपूरणात् ॥ किहइति ॥ पीत्तयति । पारसमदिने इद पेद सस्या कत्य सच मयात मित्येव की समात् । प्रमुपाल इति । तत्समाप्तो तानुमोदनात् ॥ विमुच नयतीत्या भाया पारापयतीति एवमेताः सप्तमप्तमामाता सताएमी प्रपमा एण फासेइ पालेइ सोनेह तीरेइ परेइ कि घणुपालेह थाणाए शाराहेइ, सम्मं काएण फासिता जाय शाराहप्ता, जेणेव समणेनगघ महावीरे तेणेव उघागच्छइ , उप्रागच्छित्ता समण लगव जाव नमसिता एयव यासी, इच्छामिण नंते ! तुहिं छानणुणाए समाणे दोमासिय निस्कुपफिम उपसपजित्ताण विहरितए, श हासुह देवाणुप्पिया । मापमियध । तचेव एष दोमासिय तिमासिय चाउम्मासिय पचनसप्त , पढमसप्तरा तिमी मादिमाघमाम बिम तिमनरेनहो तमा चयापसम भामो समभापबरो पतिसमेनही । समाएपफासेर पाथेर सामे तोरे पू गि प्रसपामो । भसेचारे पापायेबरो परसे विधिधार परो वारपार पयाम, पारपादिमे मुगलो सभागबरोबोमे, तवा पतीचार दापटा से मपहासे परेवत हितग काम पाप, तेजमा प्रमारपराशरे पापाने दिमे गबई म्हारा पचक्याप पूगइयो अनुमादनापूर्वक पाचे। पापा पपाराए समापनपासिता आपपाराता। पात्रापाराध भमो पर बाराबरो परमौन बावत् पागधोमे । पेपसमभगवमहापारे । विही यमब भमवत यामापीरसामो । तमेवयागमा २त्ता। तिही पाय पायोने। समभगवमहायोर । यमन भगवत योमहापोरगते । वदाबावरमसि था। पाद नमधारवर धावत् बाहो ममवारपरो। एपबयासो। एमयो । शामिपभसे तोहिंसा मालाएसमा। गाय एवाश्याचबारे, हेमग न् । तगारी पानापामामा । दामामिभिपपरिमष्ठवसजितापरिकरित्तर । दिमासगो सानो प्रतिमा पादरीने विचर एनाम हिमासिकको सप्तराग्निदिवा सप्ताहोरापमामा एव मवमी दशमीचेति एता तिस्रोपि चतुथानोमा पानकेमति उप्तानकादिस्थानरुतस्तु विशेष ॥राइदियति राविदिवा एकादशी पोराजपरिमाण पत्र पटनचेन ॥ एगराइयति । एकरापिकी इपपाष्टमम भवतीति । गुमायसवम्बरति ॥ गुणाना मिराविजोपास रचर्म पर सवत्सरस सपिनागषय यस्मितपसि तद्नुपरवनसवत्सर मुशाएव वा रमानि या सतया मुखरब सयस्सरो इदिय , टोच सत्तराइदिय , तच सप्तराइदिय , शहाराइदिय , एगराइदिय। तएणसे खदए शणगारे एग राइ जिस्कूपमिम छहासुप्त जाव शाराहेप्ता जेणेव समणनगव महावीरे तेणेव उवागच्छइ उधागच्छइप्ता समणनगर्ष महायीर जाय नमसिता एवषयासी , इच्छामिण नते ! तुम्केहि थप्नणुणाए समाणे गुणरयण सयच्छर तयोकम्म उपसपडिताण यिहरित्तए , थहासुई देवाणुप्पिया ! मापकिनधातएण से खदए चण य परन्तपकान मार एकनाथ रतिप्रत। पहामुरदेवाचप्पिया । विम सुख तिम देवानुप्रिय । मापहिवतघेव । परि विधा मारणा पतिमम तिवरा पतिमासिब पाउपासिम परमासिम । म बिमासिब नामतप एकमासनान । पतमासिबमाम चौबो प्रतिमा ४ । परमासिकमाम पचमी।। पपासिम सत्तमासिन । मासिवाहा । सप्तमामिबनाम सातमी । पठमसत्तरारंदिवं । पण्य चविहार बस पारपाय पाठमो ८। दावसात रिम । मनमो मम सात पहोरापिमो प्रविमा बायो।। तसत्तरादिन । एममी सात पहाराविमो प्रतिमा १ । पोरापदिय । कातप प रात्रिकाम्सप मापारमो ११ । एमरा दिया पामतप एवराचि वाटसम्य मापारमो प्रविमा १२ । तरफसेसएपचमारे। तिवारेतेपदकसाधु । ए मरापभिपशुपडिम । एवरात्रि पाससमनो साधुनोप्रतिमा। पाासत्त । विमसूत्रमावती तिरे प्रकारे । भाव पाराता। सावत् पानायपाराधीमे । मेषवसमभनवमायोरे । विहां बमच मग चोमहापौरणामौ । तेरेपटवागच्छा र ता । तिहां पाप तिहापापोने । समयमगवमशागीर । चम भयंत योमहापोरनामोपते। पावरममित्ता । बाबत् नमस्कारवर रोने । एपपयायो। रमा राधामिणभतेतुमेलि पमपाएपमारे पर - पत्र तत् गुपरबसवत्सर तप दास प्रयोदशमासा सप्तदशदिनापिका सपःकात पिसप्ततिय दिनानि पारण्फमालइति, एवघाम-पारसवीस पठमा सवषयवोसपसवसाय । बीसएकीधा पठीसासत्तीसाय ॥१॥तीसातेत्तीसाविम पाठबीसवीसमठवीसाय । तीसापानीमाविय सोल समासमुतबरियसा ॥ २ ॥ पसरसरसवपच भरपत्रसुपतिविविसित्ति । परसुदोदोयतहा सोससमासेसुपारवगा ॥३॥ यत्र मासे प्रष्ठ मादितपमो पावन्ति दिमामि म पूर्वको ताव त्यग्रवनमासा दासम्म पूरीया न्पभिकामि चामेतनमासे ऐप्तम्पानि ॥ सत्यपउत्पवति ॥ चतुप मात पाय फक्त स्पन्सते या तरतुर्प, मिय भोपवासस्प सहा एष पठादिक मुपवासहपादेरिति ॥ परिस्थिति अविमानसेम ॥ दियति । रिया रियसहस्पपः ॥ हामुकाएत्ति स्थान मासम मुकदुक मारे पुतातमनरूप यस्पा सो स्थानोसुटुकः ॥ धीरासरेवति ॥ सिहासनोपपि गारे समणेण नगयया महावीरेण थम्नणुमाए समाणे जाव नभसिता गुणरयणसवच्छर तगोकम्म उघसपजि ताप यिहरइ , तजहा-पटममास घउत्यचउत्येण शनिस्कित्तेण तयोकम्मेण दियाठाणुक्कुकुए सूरानिमुहे या मपसारवासापासपयितावितरित्तए । पाए भगवन् ! समारो पानापामविका एव तमारो पानाहीवतो मुनिवरा विशेष तामे र तनाबरवा तरैमास सतरेरिन तपबाम पनेर दिन पारपाना एष मास १५ ते गपरख सबथर तपकर्म किग पादरीने विचर पतले तपक र निपन भमबत काई-पहापुरदेवापुषिया मापहिल। बिम समय तिम देषानुप्रिय ! पनि प्रतिमा विसब मकरो। तसेचदए । पषमारे। तिगारे ते पटक साधु । समोपममस्यामहापौरे । यमन भगवंत श्रीमहागीरमामी । पमपापसमापे। पासादोपायको पदि। पापण मंपित्ता। गवत् ममसारकरीने। मुभरपसापरतावमयसपचित्तापगिरित्तए। मुबरबसमधरनाम तपथम, तपक्रिया, भगौमारकरीमे वि परे एतसे मपरम सपचरतप पारेखमा तपटममा परमेष परिमितेषतवोवर। ते वीई-परिसेमासे पडलेते पक रुपमासमे स पा, म वाम प त उपवास, म भागे परियावा, गोसामारवि पतराषित तपबमकियावर । दियाठापुर । दिषसनेविष पासन चय . - यायणज़मीए थायावेमाणे रप्ति यारासणेण शवाउणय दोच्चमास बठबछेण शनिरिकत्तेण दिया ठाणुक्कु मुए सूरानिमुहे यायावणजूमीए थायावेमाणे रति वीरासणेण श्याउणय एव तच्चमास थठमथठमण चउत्यमास दसमदसमेण पचममास घारसमवारसमेण बहमास चोद्दसम चोद्दसमेण सन्तममास सोलसम सो लप्तमेण शठममास अठारसम २ नवममास योसम २ दसममास यावीसइमवावीसइमेण एक्कारसममास चउघीसइम २ यारसम मास बीसइम नहीसहमेण तेरसममास अठावीसडम २ चोहसममासतीसइम २ पैसे मुबबटनानोपरे । प्राभिमुहे । सूर्य साह पनिमुस । पापभूमाए पाबावेमाप रत्तियोरासपेष प्रयासरेपय । पातापनानी भमोये विहां रतपरबसे ते भूमिकाविप पातापनासतापा राषिविप वीरामन ते सिंहासमे मनुषबसोमे पग व धरतीरासे नोचास सिंहासन परतो काट ते मनुप तिमोज ठोरा त योरासनरा बखरक्षित प्रमाणे नम इसप । राधमासोत पपिक्वित्तम् । योबा मामनेवि पाश पतसे ठप बामे पारवाकर पोसामारशित पतरारक्षित रखा। दिगठाधुहुए । दिनषिये अपापासन से । मराभिमुरे । सूय साामो मुपरापे। पाया बचभूमोरपायायेमागे। पातापनानो भूमिकामेषिपै पातापना वरवाबको । रतियोरासरह । राधीने वोरासमै बसे पूर्वकालो सेरोते। पवाडेपय परिणाम माविना नग्ममा । एमतपमास पामपामेरसम। महोबक्रिमाये गोमासे तीनछपवासे पारपोकर एतरे निरवरे पामकर। पठस्यमा सरसम इसमेष । गोमासे यमदगम एतचे चारे उपवासे पारपोकरे। पपममासबारसमवारसमेष । पारमें महोने बारसबारसमें पारपीकर एत मे पार उपवास निरन्तरेबरे। मासषासमवहसमेष । होमसोने शहए उपासे निरन्तरे पारी करे। मत्तममासमोसममसोजसमे । सात ममहोने सात उपगसे पारपावर । प्राममास पारसमपारसमय । पाठमेमहोने पाठपाठ उपवासे पारपोवर एतमे । ममममासयोसरममोसा मच । नबममहोने बोमतिम पाता नबनय उपमासे पारपाकरे । दसममासवाबीसतिमवापामतिमेव । एपमे महोने वाला दमदम उपमा पार - - पारे। - पलरसममास यत्तीसइमर सोलसममासच०इम चउत्तीसइमेण शनिस्किोण तयोकम्मेण दिया ठाणुकुमुए सूरालिमुहे यायायणनूमीए यायावेमाणे रति वीरासणेण श्वाउमेण, तएणसे खदएशणगारे गुणरयणसय छर तयाकाम थहामुप्त थाहाकप्प जाय याराहिता जेणेव समणेनगव महावीरे तेणेव उवागच्छड उया गच्छइन्ता समणनगव महावीर बदइ नमसइ, यहि चउत्यबछठमदसमदुवालसहिं मासछमासखमणेहि । एबारसममास परमीमतिमरठयोमतिमेव । इप्यारमेमासे मार मार उपवासे पारपोवर । वारसममाश्मीसप्तिमंशषीमतिमेयं । भार | मे मोमे मारेगार उपवासे पारशराबर । तरसममासपणावीसतिमपीस तिमेव । तेरमेमहीने तेरेसरे उपवासे पारपावर । चउपसममामतीसतिम नोमतिमेप । पसटमेमहोमे बाद छपवासे पारखापरे। पपरसममासात्तीसतिमवतोमतिमेप । पनरमे महोमे पमर पनर उपवासे पारगोकर । सानसममामपउत्तोसतिम पहत्तोसतिमेष । मासमेमधोने सोस सास उपवासे पारपाकर । परिसितेप। वोचमे पतरारहित बियामटायो । तव असोज । तपशम जिवाबरो। दिपाठारपुर । दिपसनेवि सकपासनसे । भाभिमुझे । सूम सामे मुपे रहियो। पायायपभूमौए । पाताप मा परनामा । रक्तिमोरासपेप । राषिविप पोरासन पूर्वाधा तेराते । प्रवासमेण । पहिरप बस रहित मग्नभावे । तएगसेसदएपरमारे। ति बारे तेपदक साधु । मुभरपरसवपरमावधपहासत्त । मुपरब संवारनामे तपसमरिया बिममूत्रमाणे स्पनो मर्यादायें । पहावय। यपा सामा चारा पाचारसहित । बारपारिता । सावत् पाराधीने । बेबसमभगवमहापौरे । चित समय भगवंत श्रीमहावीरनामोहे। सेपेबच्वागह २१ तानिपातितापायोमे । समय भगवमाावोर । यमप ममपंत योमहारोरणामो प्रसे । पटर रमसा २ ता । पादे ममसारबारे दोने ममरवारपरीने पारिपत्यामम । घरे परख पक्सपास का दाम उपास पाम तीन उपपास । उसमपासहि। दसम चार उपवासाद म पांच रुपमास । मामामासपमरि विरितहि । मास तोसदिम भईमास पनरदिन तिषयरो विधिप नामा मकारना । वमोकषि। तपफर्म - - ।

एस्स मून्पसपादस्या पनीतसिंहासमस्पेय यदवस्माम तदीरासन, वेन ॥ प्रवासवचि ॥ मावरानावेनच ॥ सरासेमित्यादि ॥ उरातन पा शासारक्षिततपा प्रपामेम प्रधान पास्पमपि स्पादित्पाए ॥ विपुसेम । विस्तीन पहुविनत्वात् पिपुसप गुरुमि रमनुधाप्तमपि स्या दप्रयवस्त मा स्यादवार " पपप्तप्ति । प्रदत्तेन अनुचातेन पुरुनिः प्रपोनवा प्रपनयप्ता प्रमादरहितेनत्पर्य, एवविधमपि सामान्यतः प्रतिपक्ष स्पादि स्पाह प्रगीतन बहुमामप्रकर्षा दामितेम तथा बस्यारोन मीरोगताकारणेन शिवेन पिवहेतुना पन्येम धम्मपनसापुना मनस्येन दुरितापशम साधुमा समीकोण सम्पपासना सझोनम सदग्व समतपर्यवसानेन उत्तरोत्तर पद्धिमतेत्यप उदात्तेन तयातनावयता ॥ सप्तमपति ॥ कद त मसो ऽघाना प त तपा तन ज्ञानयुक्तने त्यर्षः उत्तमपुरुपासवितत्वा हो समेन उदारेग प्रौदार्यवता मिपास्वातिरेकात् महामुन्नायेन म रामनाये । सुकत्ति ॥ मुफो मीरसपरीरस्वात् ॥ मुक्खेत्ति । युनुचावयेम इपीनूतत्वात्, प्रत्पीनि चम्माषनहानि यस्य सो स्थिवर्मायना , कि विचिप्तेहि तबोकम्मेहि थप्पाण नावेमाणे बिहरइ , तएणसेखदए शणगारे तेण उरालेण विउलेण पयत्ते ण पग्गहिएण कलापण सिवेण घलेण मगल्लेण सस्सिरीएण उदग्गेण उदप्तेण उत्तमेण उदारेण महाणुनागेण तयोकम्मेण सुक्के लुरने निम्मसे थठिचम्मावणद्वे फिफिकिमियन्नूए किसे धमणिसतएजाएयाविहोत्या, जी लिया निबरी । पप्पामापेमारविहरा । पामापते भाग्यमान सेधन्य मानता विचरो।तएपसेपदएपमारे। तिवारे सेखरव साधु। तेषरावे पिरोष पयत्तेर परिवार शिष परेप । तिथे प्रायमाकरी रहित विधानेबरो विस्तोष घपादिममाटे गुरुसमोपेगा अमुचागुरुनी - वामानसा गरमा नोराम बारबरी मिषोतवेगरी धमपनेकरो । ममोच सस्मिरिएष सदागेप । दुरित उपसमेवरो भयो पर सामाभी समोम मेबरी दिमरिनपते वपनोपदि । रत्ते उत्तम उदारेष महाधुभामेष । पठते परिणामेकरो प्रामाणिकरो उत्तम परपसे या बहारहित निस्थाप भयो महातभा प्रमावक । तयोबशेष सुरेभुक्शेनियसे । एप तपबम प्रियायेंबरी मरोरबा निरसपानो भूपनेवरे भामरहितवया । पीपभाग यस्मति सतिस्मतेकशमियत नपेति ससेपमा तप स्वस्पा भोपमा सवा तया शुष्ट सेवितो पितोषा पपिप्तो यः स तपा तस्स ॥ प्रातपायप रिपाइपिस्सप्ति । प्रत्यास्पातनापामस्य । कासप्ति । मरग ॥ तिकटु ॥ इति रुत्वा इदविपीकत्य॥ एषसपत्ति एव मुक्ततापसमय सम्मेवत याइस्क्रियस्स पायगयस्स काल शणयकंखमाणस्स यिहरितएप्तिकह एवसंपेहेह एयसपेहेहता कल पाउप्पना याए रयणीए जाष जलत जेणेयसमणेनगधमहावीरे जाप पड्यासइ खदयादि, समणेनगवमहावीरे खदय शणगार एव ययासी, संणूण तय खदया पुष्ठरप्लायरत्त जाव जागरमाणस्स इमे यारूवे यनत्यिए जाव समु प्पजिात्या, एघखए थह इमेण एयासवेण उरालेण विउलेण तव जाय काल श्रणयकखमाणस्स यिहरित्त एप्तिफह , एव संपेहेइ २ प्ता , कस्लपाउप्पनायाए जाघ जलते जेणेव मम श्रुतिए तेणेय हछमागए, सेणूण की मचेगमा वायनाप तानोसमा तिब सेमा ताने । भत्तपापपरियारसियण भात पाचा पपसीने। पापापमया। पापापगमने । का सपषमार वितरित्तपतिया परसोरता । बासमरर पोलताका विषासोबरीन इम समनपरे पानारे पापापोन । पाटप्प भाषाएरममाए। पामामि मभातसमय प्रमटवये पोचावपति यावत् पापमान भूग चमतेवके । षषपसमभगपमहामोरे। विजा चमच भगवत यो महामोरमामा विश पारे। बाबपञ्चासे । मावत् सेवाकरे तेतसे । पश्यादिमिक स्मारिनाम पूर्वपरे समरे भगवमायोरे । यमप भगवंत योम सापामा । पार्यपगारापद चमारपत । एवासो ।मको । सेयूबवषपदया। ते मि तमने पदक ! पुग्घरचारप्त । ममराबिने। जाप आगरमागम । मामत् धमपिताप पायतापवाने । मेवाचे प्रथिए । ए एनाम रमप । पामविषय । पापस सुपविया । यावत् सबम जपमा । एस पतपारमा रमाप उरामा विचरम मिवेड परि एक पखरो उदार प्रधामेवरोपिम्सोपारो तवक्षावनाच मरवकपमाषप्मविभरि नतिका तिमव निये भापत् वासमरसते पपक्षता पकाने विष सापरोने । एव सहेर २ ता । इस समसपणे पानाचाने । कामपाठप्प - - टिविटिका निर्मासास्सिसम्बन्धी उपवेशमाविक्रियासमुत्य हविशेष सा भूतः माप्तो यः स बितिमितिकान्त , कसो दुपत्त , धमनीसम्तसो मा भोप्याप्तो मासत्या इयमाममाहोकत्वात् । जीवनीवेपति ॥ अनुस्वारस्था गमिकत्या खोवनीवेम जोषवसेन गच्चति म घरीरयसेनेत्यर्थः मा समासित्तेत्यादी कासमपमिहसः । निसाइत्ति मापत्ति मामो मवतीति । सेबहानामएप्ति सेति पार्य । यति हटान्तार्प मामेति स म्भावनार्या एहतिबापानद्वारे "पसमष्ठियति ॥ बाप्टमृप्ता समटिका वाटणकटिका ॥ पत्तसगठियति । पसादादिपप्रनृता गरी ॥ पत्ततिसम झगसमधिपति । पप्रमुखविताना भावळकामाच मन्मयमालमामा मृता मन्त्री इत्पप ॥ तितसंठगसमरियति । कचित्पाठः मतीतापय ॥ सरफरूठ घ जीयेण गच्छइ , जीवजीवेण चिठइ, नासन्नासित्ता विगिलाइ , नासन्नासमाणेगिलाइ, नासन्नासिस्सामी तिगिलाह , सेजहानामए कठसगफियाइवा पत्तसगफियाइवा पत्ततिउन्नफगसगफियाइया एरफकठसगकि याइवा इगालसगफियाझ्या उण्इदिशामुक्ासमाणी ससदगच्छइ , ससद्दचिठइ, एवामेव खदएशणगारे सस गे। रामगोये पारी मोवा एतसेहार चामडोसो। विरिचिडियाभूए । मास रहितातेमाटे बैठता छठता किटविटि सदापे । बिसे। दूष बायो। मरिसतए । मोसने पयेबरो नाटिनोबसो । वातयाविशाखा । एइमा परकसाघु बोरघाई। बोवनोबेपमहा धोवमोमेशि । बोप तिमोपने गारो मायभार पनि परोर पोखरोमही नोपमेवारी प्रभारी । मासमासित्ताविगिपाति। तोमबार निगछे प्रतीतवासे मापा बाबामामबार । भासमासमागिताति । मापागोवताबको वत्तमामवासे मसानमाय । भार्समामिम्मामोतिगिसाति । मापा प्रागामिकासे बोस ता पविमानबार । सेबहानामर । ते पवाति नाम से सभाषनाये, परतिमानारंबारे। कामगहियावा पत्तसमरिमामा । पारभरो सब रिका माउसो पसायारिपत्रमरो माउसो । पत्ततिभंडसगडियाापा । पाम सहित तिक्षामा भाग मुभम भावनपो भरी गायो। परराबासमतिमार गा। एसबारेमरो मारमी । गापाठ महिनापा । अंगाराम भरो गाडतो। दिपा पुमासमायो । एमेश विपर कार पचारिख मोबाने घंभ - - . सममिपत्ति परमकाएमयी एरवठकाटन्तावा साटिका, एररमकाप्टपाच तेपा मसारस्वेन तवकटिकायाः भुषायाः सत्या प्रतिसयेम गम मारी सगहत्य स्मादिवि शारपटिया पदारमृता गरी । दिमासुकासमानीति ॥ विपद्धय कामादोमा माद्रोगामेव सम्भवतीति, य पासमा मायोन्यमिति इतासमइव भमराक्षिाविषयः ॥ तयेयतेरवति ॥ तपोसमयेन तेबसा, अपमनिमायो पपा भस्मासोग्नि पिया योगीतो ऽन्तवृत्यातु वसति, एक सन्दको प्पपवितमासशोसितस्वा हरिनिस्तदा पतस्तु शुभयानतपसा व्यततीति उच्चमेवार्पमारत पत्तरत्यादि । पुखरतावरतकाससमपमिति । पूर्वराप्रय राधः पूर्वानागो ऽपररात्रय अपाटा राभिः पथिम सदागात्सर्प समाएको यः कासस मया कासात्म: समय स तपा सम अपवा पूर्वराबापरराषकालसमय इत्पत्र रेफलोपात् प्रवरसावरत कालसमयसित्तिस्पात् पम्मेवागरिफा गच्छइ , संसद्दपिठइ , उपचिते तवेण धवचिए मससोणिएण कयासणेवियनासरासिपमिच्छणे तवेण तएण तवतयसिरीए यतीव उयसोनेमाणे २ चिठद, तणकालेण तेणसमएण रायगिहेनयरे समोसरण जाप परिसा पझिगया, तएप तस्स खदयस्स छणगारस्स एणयाकयाइ पुष्ठरत्ताधरप्तकालसमयसि धम्मजागरि ते नासा भराती मारसो पशे तावडोदोधो बोपको । ससहयावा । पदसहित पतसे बोसतो पाये। समाधि। मप्दसहित वभोरई । एषा मेदएपगारे समानच्या समातिा। तेगाडसाने हरति इमय पदक परि नि परमार साधु मोसरीतमको मा गदसहित पाने एतचे Naat I मारामाजिपा महनमाररहे । परितेतोष । उपषितपुषयाई मेबरोने तबरोमे । अपवितमससारिएर तवेष । मेरमा प्रयासोमयमाई बरोने मांसास रोने तपेकरोने । वासपेविवभासरासिपडिसिषे ठवे तेएह । पग्नि बिम भण्ममा समायो उक्लिो सप पर तेजा ए भाषा बिम रपाये टोखा पग्निवाहिर गरक्षितषे प्रतहते होपे हम पदक परि एयरोरनेवि माममोहोचषमयो वेमाटे य परबागिर वारिस पपिमा एभयान सरो दोपछे वचोकमा तेहोव पवा-तपतेव सिरोपपतोषठवसाभेमाधिा । सपसे योभ वाग्रता पूर्वत इस्पर्पः संपत्पितामेति। तदेवमपि प्रति तास म्मम हत्यामादि न सयथा चीसमितिजावः ॥ समावतामेत्पिति । ततस्मात् पावत् ताइति नापामाथे मे ममाति ॥ चावति ॥ पायव । सुत्पित्ति । नार्या नमान्प्रति सुहनीवा पुस्पयरगन्धहस्ती एतच भगवस्सा य जागरमाणस्स इमेयारवे यनत्यिए चितिए जाव समुप्पोत्या । एवखलु यह इमेण एयारवेण उराले ण जाय किसे धमणिससए जाय जीव जीयेण गच्छामि, जीव जीवेण पिठामि, जाय गिलामि, जाय ए वामेय शहपि ससद्गच्छामि , ससद्दचिठामि , त यि तामे उठाणे कम्मे बले वीरिए पुरिसक्दयारपरक्क मे स जाय तामे स्थिउठाणे कम्मे घले पीरिए पुरिसकारपरक्कमे आप यमेधम्मायरिए धम्मोवदसए सम ताबमा रो। नेवासा तबममए । तवासमेभिवे तसमरनेवि। समय भगवमहामोरे । बमब भगवत योमहाबोरमामौ । बारायगि पयरेस मारिए । विहां रामपामामा नमरतेशनेवि समासया पाया। भाबपरिसा परिणगा। यावत् पर्मटा दिया पायोपतो तेपाोगा। वक्तप्त तिमारे ताने । परमपपगारस । दसनामा साधुने । प्रचनावमा | एका प्रस्ताचे विवारचे। पुषरतावरत्तकाससमयसि । मभराषिकासस म प्रसाबविणे एवढे पाधोराबिनविषे । प्रचापरिन भागरमायस्म । प्रममामरिता धमचिता वामतापवाने एतसे धमचिता परतायकाने । रमे गा। ए एम एतासम्म । प्रमसिए। पामविषय प्रभवसाय । विविए । पितारूप भावनाप । पावसमुप्पविता । यापद अपनो। एक्सतपा। इम निरोग। इमबएमापप । एवं इसेपेवरो। रासेच भावविसे । भागमाहित तेवरी यावत् दुबसवयो । प्रमविसंतपचाप । मौसमयेकरी ज्या नारिमविरहितमागे नोयो। बोवबोयेषयमामि । जोव बोक्मे वर्षमा बोबोशिशामि। बीवीपने पसे इपभाजए । वायगिता मि । यावत् मानवया । बामएवामेर पापिसमाहमचामि । यावत् बार मत माटो मन्दबरे मा परि सरसरितमा नाम । समाधियामि । मदरक्षित प्रभापर तपनि । तापरि पहावामेजा। तापत् मभने समान । मेमोरिए परिपारपरसमेतबापतामे। बम बम भोय - तिस ऽमझमविधि महापत्तो प्रयती त्यभिप्रायेव गवमिरे शोमनाबम मानूव मर मित्पनिमायेसमा चिन्तित मनेनेतिपथमित्यादि । फसति । यः, प्रादुः प्रापारस तत प्रमाणपनाताया रवन्या पुलोत्पतकमसकोमप्तान्मीसिते फुल विवसिप्त तव सवुत्पलप फुसोत्पस तव कम सप परिवविक्षपः पुलोत्पतकमसी तयोः फोमस मझटोर मुम्मोसित रसाना नयनयो योन्मीसन पस्मि त तथा तस्मिन् , भपति रखनीषिमा तामन्तरं पागार मनाते रत्ताशोकमकायेम किशुकास भुकमुसस्प मुहाइस्पक रागेर सदृशो यः सतपा तस्मिन् सपा बमलाकरा वादय से पु गठानि मतिमीणमामि तो योधको यः स बमसापरसम्वोधक मास्मि मुत्सिवे अभ्युदसे कस्मि मित्मार ॥ सूर । पुन किम्भूतात्यारम स णे नगवमहावीरे जिणे सुहत्यी विहरइ, ताय सामे संय कल्ल पाउप्पनायाए रयणीए फुल्लुप्पालकमलकोमलु मिलियमि शहपरे पनाए रत्तासोगप्पकासे किसुयसुयमुहगुजझागसरिसे कमलागरसम्योहए उठियमि पुरपाकार पराकम पवसे भावहमे ससानादि सर्वमा चोबरा नई मारे बासगे मुझने। परिणापे। उखान । वर्ष पने वोरिए परिसमा रपरसमे । कम पर पाय पुषपामार परामम । भावपमे पन्भापरिए धम्मावण्सए समवेभमयमहापोरे । वापत् धपुन महरा धर्माचार्य धर्मोपदेशन पमापतक अमर भगवत योमहावीरमामो । विषेमुहत्यीविकार तापतामेसेन । बौस्माई रागष विष, उमावि मधाते, अषया मुसोनोपर वि परे तेतमासगे मुझने थामगयो । बाप्पभाएरमबीए । पायामि प्रभात रापिनेविषे । फलप्पसकमसनामसमिनियमि । विगत सत्पसपूत वामपरिवानेव कोमस प्रबठार बमसना रस परिसना नव मिभाषा ते उपोसितवया । पापपुरेप्पभाए । प्रच पादुर प्रमावयवा । रतासागप्प मासे । राना पया इचना पुरुपतिसो प्रभा तिवारो। बिसुमसुममुहमवारामसरिसे। मानापन प्रबवा पजामामुप पवा पिरमोमाप तामा सगरोणाचे । बममागरमाए रियमिमरे । यमसनामागर सरापर ताविप नसिमीप ए हमे पिडामार तामेविष समतेमके सूर्य । म इस रिममिदिपपरे तेवठाबसते । सान विरष सहित दिनबरसून तेषरो माज्य पमाम एवावता प्रभातसमये । समपभगवमहावीर । यमपभगवत - - इस्मररिसमीत्यादि साहिति ॥ पोकदेमा स्पदसमुदायो दृश्य सत कतपोशादिमि रितिस्मात् सा रूता भोगा. प्रत्युपेपवादिप्पा पारा या सन्ति त कतयोगिनः पाविवश रिमपमा हामार इत्यादि यमन्तइति ॥ विसम्मति ॥ विपुस्तानिपान ॥ मेघपणासनिगासति॥ पनमेपसास सान्जसदसमान बासा मित्यर्थः । देवससिवायति । देवाना सक्षिपात समागमो रमपीयस्या पर स तथा ॥ तपुराविसिलापत्य ति॥ पपिचालिप्सासपः पाठक प्रासमणिमेपः पृथिवी पिलापतकबाटसिसापि शिला स्पा दत सध्ययच्छेदाय पपिपीग्राण ॥ सत्तापासवाझसि सूरे सहस्सरस्सिमिदिणयरे तयसाजलत समणनगय महाबीर वदिता नमसिष्ता जाव पपासेत्ता समणेण नगषया महायीरेण शम्नगुमाए समाणे सयमेव पचमहल्याणि शाराहेता समणायसमणीय खामेता त हास्वहि थेरहि कमाईहिं सद्धि विपुल पचय सणिय सणिय दुसहिप्ता मेहघणसनिगास देवसनियाय पुढ विसिटापहय पहिलेहेता दम्नसधारय सथरिप्ता दम्नसघारोवगयस्स सलेहणाकृसणासियस्स नतपाणपति बामामोरनामोपते । बरिता पमसित्ता । बादाने नमस्कारपरोने । बामपनुपासित्ता । पावत् पर्युपासना मेवाबरोने।समपेपभगवयामहापोरेप। या भया योमहापोरणामी । मापसमा । प्राचारोधाय । सयमेरपंपमापारि पारावेत्ता । पातव परमात सर्व प्रापातिपा नरमपादिक पापोने । समवायसमगोपायबामेत्ता । यमप गीतमाटिक मेकाने यमोसावी पदनामा प्रमुख रमेवाचे समायोने । त रासहिवरे बाप समोर तिरो प्रबिरेवरी । कासिदि। बोधोयाम मधुपरमादिमापार ते सतयापो तिपेष सहित । विपुर | पपांसदिय दुता । विपसनामे पगत विमवे २ चठीमे । महवपनिमार। बिसो माम मेघ तिची मिना निमरमनपर समान पाम । पठयोनिमाराय। एगि शिक्षाप्प पाममपिमेष । देवरिया। समागम रमपोषपदी । परिरिता । परिखदी पीने । भारित भय रिता । गभ वरपिपना सवारा पते पाबरीने । रासधाराममयः । भने सबारे पमत एमनि । पराभूमपाभूमिपण। धना धमकी - । - पपासावपति सतासतविनानस ॥ उदारपासममभूमिपरिहसि ॥ पादपोपगममा दारा दुधारारे सस्य कत्तम्पत्वा दुपारादिभूमिमत्यु खदया छठसमठे हताशस्यि , थहासुहदेवाणुप्पिया मापमियध, तएणस खदएशणगार समणेणनगवया महावीरेण थनणुणाए समाणे हन्तुठजायहयहियए उठाए उठेइ उठेइप्ता, समण नगव महावीर तिस्कुतो छायाहिणपयाहिण करेड, जाय नमसित्ता सयमेय पचमहयाइ थारुहेइ शासहप्ता समणायसमणीय खामेइ खामेहता तहाम्वेहि धेरेहि कमाईहिं सद्धि विपुलं पश्य सणिय सणिय दुसहेद दुलहेइत्ता मेहर णसन्निगास देयसलियाय पुढविसिलायट्टयं पफिलहेइ पहिलेहेडप्ता उच्चारपासषणनूमि पहिलेहेइ पहिले भावार पासतापागामिप्रभातम्रमय प्रगठबय मावत् पाव्यस्यमान अम्मा विषममपतिए । विहां मारा समोपतेपेगाव्यमामए। तितो सताव मी पाया । मभूपयारमा पाममो। तेमियोपरच ! पपर्म समभाई गुबई । हतापनि । हो पामोहे, तिवारे भगवतका-प्रभासुदेवातप्पिया । मिम मुपतिम देशमु प्रिय पनि । मापग्गिय । विद्या मबरनी । तपषसेसरएपपगारे। तिवारे से पदक साप । समषेपभगषयामहापोरेप । बम प भमसन योमापारम्बामो । पमपुपाए समापे । पासादोभावा मारियए । इषवा सतोपाम्या पावत् दरानो। हाए रे २ ता। |मठे घठो ने । मममममम महावोरं तिमत्ता पावापिपराविषबारे । यमय भगवत योमहापौरमामोपते तोनमार सोमनापासामो प्रदक्षिणाक । बापमसित्ता । यावत् नमधारकरीने । परमेवपरमहसयार । पातेव पचमहामतपते । पारणे १ ता । यापे पापोने । समपाय समपोषोय । मायगानमादिप्रों साधयो पदनामाप्रमुख प्रतें । यामेर २ चा। पमानौने । तथापियरेहि। तमा सर्वोत्लष्ट स्पविरसाधू । काहिहि । पेया सवकारी ने समाते । विपुसपमसपिय २ दुवीरता । विपन पषत सेहत सव २ पठे ठोगे। मेघषपसचिगास । समसमेघ सरीसी माम । देव मपियार । ममागम रममोक पायो । पुठपिपिनापटिनेवर २ ता । पधियोगिता मान पडिरोह परितहोने। उधारपासवपभूमिपरित - - - . , पेय न मिरप सपनियमिसपेत्ति । पखासमोपविष्ट ॥ सिरसावसति । शिरसा प्राप्त मस्पष्ट अथवा शिरसि यावर्स पात्ति रायत्त हेइप्ता , दम्नसपारय सथरइ सधरइप्ता, पुरत्यानिमुहे सपठियकनिसले करयलपरिग्गहिय दसनह सिरसा पच मस्यए एजलिकहु एवययासी, नमोत्युण धरहताण नगवताण जाय सपत्ताणं , नमोत्युण समणस्स जगवान महावीरस्स जाव सपाधिउकामस्स वदामिण जगवत तत्यगत इहग पासउमेसेजयष तत्यगए इह गय तिप्तिकह घटड णमसइ धदिप्ता णमसित्ता एवषयासी , पुष्ठिपि मएसमणस्स नगवळ महावीरस्स छ तिए सखे पापाइयाए पञ्चरकाए जावड़ीयाए जाय मिच्छादसणसम्ले पच्चस्काए जायजीवाए , प्रयाणपियण र २ तारभरबारसबरा २ ता । पदोनोति मनोति भूमिमतें परितो परिवहोने भवपपिसपना सपारा पायर पायरोने । पुरवाभिमपरि सपिये। पूरिमि मासुझा पयाममे से पापडपापको बाचोने से। परमसपरिम्य कियं । परतह हाय पाने। दसनासिरमावातमधएपसि बा। दयनप पनियोना मतपरिप पावत परिममवयरो एतसे येरावबारो। पक्रासो नमानप। म पाता इमा नमसारापी । परताप। तोन सुमनविम पूर्वमायाप्पनेबा । बाबस पत्ताच नमामुग। यावत् सिहमतिमान समाप्तनेकाले नमस्काराषो । समवप्नभमवधीमहावीरस्म । म | मप ममबत बोमहामोरणामोने । वावरपापिसवामण । यावत् सिहगतिनामध्येममान पामबाना बामोभे । भवामिष भगवत । नमस्सारबर भग मत बोमहामोरनामी प्रतें । तबान भपवत । तिहारमा समपास पामेसेभयवतमयागायत्तिबा।। सारधावको रिपुममिरिपबत विप २को समने भगवत योमहापोरणामो तितो रमारमाही रिपुबमिरिरमा मो पदफनामणिपाते इमबरीने। पदर धर्मसर २ ता। बाद मम भार बरे गादीने नमसारबरीने । एकसारी। म पाता था। पुलिपिमए । पशिना परिमें। समवस्मभगरपो महाबोरस । यमद भगत यो महाबोरपामोमे । पतिए सपारापाए पापाते । समीपे सर्व प्रारातिपात पिरितिरियपणे पपमा । चारखोगाए। ना पीनागे एमरोर -- समणस्स नगय महाधीरस्स शतिए सह पाणाहवायं पञ्चरकामि आयजीयाए जाव मिच्छादसणसल्ल पञ्च कामि जायजीवाए , सशसणपाणखाइमसाइम घउधिहपि शाहार पच्चरकामि जावजीघाए , जपिय इमसरीर इ० कत पिय जाय फुसतुप्तिकहु एयपिण चरिमेहि जसास नीसासेहि योसिरामिप्तिकहु , सले हणाकृसणासिए नप्तपाणपफियाइरिकए पायगए काल शणयकस्खमाणे विहरइ, तएणसेखदए शणगारे समणस्स लगयत महाधीरस्त तहारूवाण घेराण शतिए सामाइयमाइयाइ एकारसलगाइ यहिजिप्ता घऊ में बापता परत । पामि भारसमोरचन्ताए मारपोवाए । यावत् मिप्पारणममममुप पठार पापमानव पपमा भामो ताखगे। या विपिरमा सपरि। मममम ममापामहारापतिए । यमन भगवत श्रीमहावीरनामोने समीथे। मप पाचारणार्य परस्यामि । सव मापासिपा न विविध विशिरो परम् । बागयोगाए भाग मिपादमसमझ पपश्यामि । वा वो तागे मागद मिप्पादन पस्यप्रमुस पठारपापमानक प पम्। बागचीगए।मा बोय नायगे । सम्वपसमपानमा मसारम। सप पपन पाम पादिम सादिम । पम्मिापिपासारपचहामि । विधि नापार पपप्पू । बारमोबाए पिएमसरोर। मानो तालगे पेपपि एमरोर । रातपियमावफसतत्तिका र पात प्रिय सावत् रोग पातकप पमय सारिक नपरमा रमबरो । परपिपरिम। पापरि गरोर मामानकारे पणा । उपासनीयाधियोसिरामित्तिमा । सामापासेपारी पास रापूरति मारोगे। महामवासिर । मरोर एपमारोये सपना तप मेहनो सेवासहित कई भत्तपापपरियासिए । भात पाकी तामे परसोने एवरे पासिरामती। पापावमए पासपएम पबिहरर । पादपापगम प्रनयमरको पासमरयमी पपातापका विपर । सएप पाप परमारे। तिवारे तपरकमा । मममममम पामहागीरम । चमग भगवा धीमहामोररेवना । तारगप भेरापतिए । तथाविध तेच्या मसामरिने धमीप । समारमाया । शामा पारिदे बारसगार परिचिता। प्यारम भए सुधा मूना घको भगोने । वापति . पेपर म मिरप सपसिपंकमिसपेत्ति पटासनोपविष्ट ॥ सिरसावत्तति । शिरसा प्रप्राप्त मस्पष्ट भपया धिरसियावर्त पाएत्ति रावत हेइप्ता , दम्नसधारय सघरइ सघरइप्ता, पुरत्यानिमुहे सपलियफनिसने करयलपरिग्गहियं दसनह सिरसा वत्त मत्यए थंजलिकटु एवययासी , नमोत्युण धरहताण जगवताण जाय सपत्ताण , नमोत्युण समणस्स लगवान महावीरस्स जाप सपायिउकामस्स वदामिण नगवत तत्यगत इहग पासउमेसेन्नयय तत्यगए इह गय तिप्तिकह ववह णमसइ बटिप्ता णमसित्ता एवषयासी , पुधिपि भएसमणस्स नगव महावीरस्स छ तिए सछे पागाइघाए पञ्चस्काए जावजीयाए आय मिच्छादसणसाले पञ्चकाए जावीवाए , इयाणपियण रा रामबारसारा पत्ता । वदोनोति मधुमोति भूमिमा पहिरो परिच होने पराभव विसपना सबारा पाघर पायरोने । पुरवाभिमुहसपनि गाविपचे। पूरिमि मामुडा पर्यबामने मे चापटपासपो मामीने बेमे । करयसपरिम्पदिय । परतम पेशव बाडोमे। दसमहंसिरमायत्तमन्यएपनि बाहु । गाप पहिरोमा मनु बनेविप पावत परिभमपबरो पासे देगबमाणे । वनवामो नमावर्ष। म करता इसा नमस्कारापी । परताय। तीन भागवि ममापनेबाबा बावस पचाप नमानुष । सावत् सिस्यतिमान सपा ममेबारे नमसारापी । समसाभग पोमहानोरम । व मर भगवन बोमसापोरवामीने । बाबरपापितकामस्य । पावत् सिहमतिनामध्येयजान पामरामा बामोने। मंदामिष भमबत । नमस्मारकर भग बत बोमहायोरखामो प्रते। तब भगवत । तिजारमा। गापाय पामेसेभरवावगपसमायत्तिया । इसारमाबमा विपुगिरिपबतमविप षो मभने तेभनमत कोमहापौरमामो तिला रमाबाह मिममिरिरमा मा परवानामयिमत मकरोने। पदर घमसर २ ना। परि मम पार गरे गोदोमे नमबारबरीमे । एपारागे। म बाता मया। पुस्विपिमए । पहिला परिम। समषम्पमपमा मनावोरम । भमर भयात को महामोरघामाने । प्रतिए सपेपारागए पासासे । समोपे समारातिपात विविविधिकरी पचमा । बामनीमाए। ना को ताममे एरोए समणस्स नगवळ महायीरस्स थतिए सह पाणाइयाय पञ्चस्कामि जायजीवाए जाव मिच्छादसणसाल पच्च रकामि जायजीपाए , सपश्चसणपाणखाइमसाइम घउष्विपि शाहार पञ्चकामि जायजीयाए , जपिय इमसरीर इठ कर्त पिय जाय फुसतुप्तिकहु एयपिण घरिमेहि ऊसास नीसासेहि बोसिरामिप्तिकहु , सले हणाकृसणाकृसिए नप्तपाणपझियाइस्किए पायगए काल श्रणवकखमाणे यिहरह, तएणसेखदए शणगारे समणस्स नगय महावीरस्त तहारयाण घेराण यतिए सामाइयमाइयाइ एक्कारसचगाइ यहिज्जिता यह में पायता पयत । पामिशारसमस पपसाए भारयोगाए । पाप मियादगमममममुरा प्रहार पापमान पषमा माधोम ताममे । इया विपियप। पिपरि । ममप ममपभामहायोरपतिए । यमन भगवत योमहापौरपामीने समोपे। मम पापापाय पपसामि । सव मातिपा त विविध विविश्वरी परम् । बागयोगए पाप मियादसपसापरसामि । वा वो ताबमे गवत् मिप्यावसन यस्य प्रमुख पदारपापसानक प पम् । बामधीवाए। बाबी मामगे। मध्यप्रसपाषपामसारम। सष प्रसम पान धादिम पारिम । पविपिपाहारपद्यस्यामि । पारो विधि मापातार पप्पए । बाबमोबाए बापामसरीर। भाभीष तामगे पनि एमरोरा मत पियवापसंतत्तिक । पात प्रिम यावत् रोम पातब पसमा रम्मानिफरसारमबरो । पपिपरिमे । पापनि गरोर पायासंबारे, देहसा । उपासनीमासेहियोसिरामितिमा । मामासासेकरी शामरावाति रमपरोने। पसापामासिए । मरोर वनारोये तेससेसचा तप तेनो सेषापरित पई भत्तपापपरियारमिए । भात पाकी ने पथसोने एवरे पामिरावती । पापापमए बासपमपम रेविारर । पादपापगम पनयनरहो पासमरपते पाहताबको शिघर । एप पार पषमारे। तिवारे तेपदकमा । रमपम्पममबभामहाबीरम । थमा भगवा बीमहावीरदेखना । तपाई घेरातिए । तमाविध वेश्या गया पाविरमे समीपे । समारयमाशा । पामाइफ पादिदः । एवारसभंगार प्रतिबिता । ग्यारसपग घडू मधा मचाय चमो भगोमे । गापरि म परिवमय यस्पा सौ' सप्तम्पसोपा भिरस्साय स । सहिनसाइति । प्रतिदिम भोजनद्वयस्य स्यागा चियता दिमे परिनतामि त्यत्तानि भवन्ति । असमाप्ति । प्रारुतस्या इनानेन । तत्ति दिया परित्यन्म ॥ प्रासोइयपशिकतत्ति । प्रासोषित गुरुरा मिषेदित य दतिया रजात व प्रतिप्रान्त मारपबिपपीत येना सा दास्रोचितप्रतिकाम्सो ऽपवा पासोइयपछिकतति ॥ पासोषित थासा वालोचनादाना स्म तिभातप मिप्यादुमतदामा दासोषितप्रतिकान्तः ॥ परिणिधावपत्तियति ।। परिनिर्वाण मरर तत्र पथरीरस्य परिठापम तदपि परिमिरिमेय पनिपुणाइ दुवालसवासाइ सामणपरियाग पाउणिता मासियाए सलेहणाए थत्ताण ज्जूसिता सठिनताइ शणसमाए बैदिप्ता थालोडयपफिक्कते समाहिपत्ते थाणुपुछीए कालगए , तएणतेथेरानगवतो खदयछण गार कालगयं जाणिप्ता परिनिहायप्तिय काउसग्ग करेइ , पप्तचीयराणिगिरहति , यिपुला पक्ष्या सणि यसणिय पञ्चोकहति पञ्चोकहइप्ता जेणेयसमणेनगव महावीरे तेणेय उवागच्छद उयागच्छइप्ता समणनगव | पपा वाससबासाई । घर पतिपूर्व पूरा पारपरससमे । सामसपरिमागपालमत्ता । पारिष पर्याय एतसे पोषा पायोमे । मासियाएसोपाए। एब मासनो सोपा पमधमे। प्रत्तावसित्ता । प्रामाने सेमोने पादरोने। मभित्ता परसा वेदिता । डिनमरों मोवी दामना स्वागमको पोसे दिने पाठभात अनमने तबोने देदीने गुरिक बेपतमा पतोपरया । पासायपरिबतसमाहिपते । ते गुरने सभसायीने पापोरने तागो मिया इतने समाधिपामा मानसोपो रहितबमा । पारपुस्विपवासयए । पनुक्रमे वासपातो पतामता मरमपाम्यो । तएक्तेराममवतो । तिबारे ने सरिर ममर्वत । कार्यपषगारसागरबारिता । पदवसाधम मरवपामा बागोमे । परिनियापत्तियारसम्मति । मरमतरते तिला वेग रारमा परतमाते पनि परनिर्वाहोम तोतामेले माउसमको एतसे पतवारोर वासरापोगे। पत्तोषरानिमिति । पाचपरयो पासपम स पो। विपुठाभापमानासबिर ३ पवारसति । रिपुबमामा पचताको सो २ बरे पतरोने । बष समभगमम शारीरदिन मर भन - - . महावीर बदइ नमसइ वदिप्ता नमसित्ता एववयासी , एवखलु देवाणुप्पियाण शतेवासी खदएणामधण गारे पगइनइए पगइउघसते पगइपयणुकोहमाणमायालोने मिउमद्दयसपने छातीणे नद्दए विणीए सेणदे घाणुप्पिएहि यन्त्रणुणाएसमाणे सयमेघपचमहठयाणि शाराहप्ता समणाय समणीय खामेता शम्हहि सच्छि विपुल पक्ष्य तय निरवसेस जाय शाणुपुठीए कालगए , इमेयसे शायारजमए नतेत्ति, नयवगोयमे स मणलगय महावीर बदइ णमसइ वदिता णमसिप्ता एवषयासी, एषखलु देवाणुप्पियाण श्तेवासी खद मत वामहागारमामाजातवाहमामयतिरता। वि पाय तिला पामीन । समबभगममहाबीर बदर पमस ३ ता । यम भमपात योमहावीर सामोमते दिनमसारपर बदनाकरोने नमवारपरोने । एषवमासी । म माताइमा । एवमसुटेगाप्पियारा पतेवासो । म निये देवानमिन ! मगर । तमहाविप पाएकामपण्यारपमाभी। एकभामे सात महतेवरो भद्रव दुरचितारहित । पमाटवसते । प्रमों उपांत कापाय तापमापसभामाबमानसामे । प्रमाष पावापापा बाप मान माया सोभगिरें । मिउमापसपस प्रलाप । स मादा मरो सपूर्ण, बम रले पसापासी । भापविमोए । एवमा नाट महक विनमबत ता । सेरदेशएप्पिए। तेष वाम्बासगारे, देषामप्रिय । पक्षपाएसमाये । पाधारी भाषण । सबमवरमापमा पारामेत्ता । पालेर मय मापातिपातादि परमायुत मते पारोपोमे । समवाय । साधुबाये गोतमादि प्रतें । समची पारपामेत्ता । पानी परनवापामसपने पमापोगे। पमहिमाहिरिपुसपथ्यय । पम्ह समाते विपसगिरिमामा पवते इत्यादि सर्प । तपेपिरवसेस । निमय निर्षि में का।। पापमोएबासमए । यावत् अनुकमे पासमरप पाता । रमेबसपामारभरण्मत्तेत्ति। एा तहमा पाचार भारसपकरण परिभमनन । मगर यायमे । भमबत मौवम समपभगममहापौर अमर भगवंत वीमहावीरसामोमते । मार पमसाता। पदे नमनारवर बादाम नमसार करो। परमयासो। इम पाताया। एसएतदेवासपिधाव घेतेवासी । इमनिये हेदेवासु प्रिय ! तमारा मिथ । पइएबामपन म परिनमा पस्पा सो सप्तम्यसोपा चिरस्पावत स: सहिमताइति । प्रतिदिन भोजमदयस्प त्यामा धिशता दिने पष्टिनकानि त्यतानि भवति । प्रससहाएप्ति । प्राहतत्वा दनझनेन । तत्ति । शिवा परित्यय । पासोइयपशिकतत्ति ॥ प्रासाचित गुरुया मिषेदित य दतिया | राप्त त स्पतिवान्त मबरविपीकत मेमा सा वालोचितप्रतिकान्तो ऽपया पासोइयपटिकतति प्राप्तोषिस घासा वालाचनादाना त्म | तिमान्तय मिप्यादुफ्तदामा रातोचितप्रतिबाम्त । परिविवारवत्तियति ॥ परिभिर्वास मरवता यबरीरस्प परिमापन तदपि परिनिर्वायमेव पमिपुरमाइ दुवालसवासाइ सामसपरियाग पाउणिप्ता मासियाए सलेहणाए शताण ज्जूसिता सठिनताइ शुणसणाए बैदिप्ता थालोडयपमिक्कले समाहिपत्ते शाणुपुष्ठीए काठगए , तएणतेधेराजगवतो खदयश्रण गार कालगयं जाणिप्ता परिनिहायप्तिय काउसग्ग करेइ, पप्तचीयराणिगिरहति , विपुला पक्ष्या सणि यसणिय पञ्चोकहति पञ्चोहहप्ता जेणेवसमणेनगव महावीरे तेणेय उवागच्छइ उपागच्छाता समणनगव |पमा गाहसमासार । पर मतिपूर्व पूरा वारपरससमे । सामयपरिमागपाहाबत्ता । पारिप पर्याय एतले दोषा पासोने । मासियापसमाए । | एक मासमी संदेयाये पनपने। पत्तासम्मसित्ता । पामाने सेयोने पादरोने। मित्तार अबसचार दित्ता । दिनमतें मोबमे दायमा न्यागपको भीसे रिने पाठभात पनपने तबोने दोने गुर्गदिवे बेपतमा पतीधारकमा । पायपरिवर्तसमाधिपत्ते । ते गुरुने सभवावीने पागाने तेहलो मिप्पा दुष्कृताने समाधिपामा मानसोपो रहितबमा । पापपुम्मिएकापमए । पनुक्रमे कासपातो पतामता मरम्पपाम्या । तएपपराभगवतो । तिबारे ते सपिर भमयंत । कार्यपत्रमारणारगमवाषिता । परापते मरनपाम्या बापाने । परिपिनापत्तिवाससम्मबरेति । मरमतेश तिही वेग रोरना परख्याते परि परनिर्वाहोर तेरेसरवानेते बारसम्पबर एतसे पतकारोर वासराबोने । पत्तचोपराधिगिराति । पाचपरयो बमा अपम रस प्रो । विपुडापापमयापासनिय र पचाराति । पिपुलनामा परतवको रस २ खतरे भतरोन । बरेमसमममममीर । निशा चमच भम - महापौर पदइ नमसइ पदिप्ता नमसित्ता एवषयासी , एवखलु देवाणुप्पियाण शतेवासी खदएणामयण गारे पगइनहए पगइउधसते पगइपयणुकोहमाणमायालोने मिउमदवसपणे थालीणे नद्दए विणीए सेणदे घाणुप्पिएहि थम्नणुणाएसमाणे सयमेवपचमहध्याणि शाराहेता समणाय समणीय खामेप्ता शम्हहि सछि विपुल पश्यं तचेष निरवसेस जाय शाणुपुछीए कालगए , इमेयसे शायारनए नतेत्ति, नयवगोयमे स मणनगघ महावीर घदइ णमसइ यदिप्ता णमसिता एषययासी, एवखलु देवाणुप्पियाण श्तेवासी खद बत यामागारयामाई । तेगवायचतिरता। विहां पाय तिता पायोग । समभयबमहाबोर पदारमसः २ ता। यमन मगमत योमहावीर पामोपने बारे नमवारपर मदनाबरीने ममतारपरोने । एपबासी । म पातामा । एवपतदेवासप्पिसाए पतेवासी । म निये देवानुप्रिय ! भगवन् । तमारामिष । सपनाममगारपगभरे। पवनामे सात प्रचतेबरो भय दुष्ट चितारहित । पमध्यसते । प्रछा उपांत पापरति न । पमपमामामबाभे । सभाब पातमापाया का मान माया साभविरें। मिहमदपसपए पहोरे । म मादव गोकरी पानको। भारनिषोप । एवमा माट मदर पिनगमत ता । मेषदेषाप्पिएति। ते बाबासबारे देवानुप्रिय । पमपाएसमापे । पाचादो भाषा । सम्मेवपक्षमा पारावेत्ता । पातेज सप प्रापातिपातादि परमहादत प्रतें पारापोने । समभाय । साधुवावे गोत्रमादि प्रतें । समको पार पामेला | पायो पदनमाबापसपने पमापोने । पहेनिमपिपिपुसंपचय । पम सधाते विपगिरिनामा पवते इस्लादि मष । तपिरवसेस । निमम मिर्षि गेमे का। पापपुशोएबासमर । यावत् अनुक्रमे बासमरप पाता । रमेवसे पायारमरपभत्तेत्ति । एक ताना पाचार भारसपकरप देखारे भगवन । भगवगारमे । ममबत मोवम समपभमपमहापोर यमच भगवत योमहापौरमामीमते । - समसार ता। बाद नमवारकर गदिशेने ममसार रोये । एपयासो। म पाताया। एवपत्तदेवाएपिवार अंतेवासी । इमनिये हेदेवानुमिम । तमारा सिप । पदपपामपण - - म परिवमय यस्मा पौ. सप्तम्पत्तोपा चिरस्यावत सं महिनावारति ॥ मतिदिनं भोजमतपस्य त्यामा धिशता दिने पटिनतामि स्पानि | भवन्ति । अनसभाएप्ति मारुतस्या दनमनेम पाप्तत्ति विवा परित्यन्य में भालोदयपशिकतेत्ति ॥ प्रास्तावित गुसर्ग मिदिस प दतिया रमाप्त त प्रतिमामत मकरविषयीकत येना सा पासोचितप्रतिकातो, ऽपया, प्रासोइयपरिपतति प्राप्तोचित घासा यालाचमादामा रम तिकामाय मिप्यास्तदामा दासोचितप्रप्तिझाप्तः परिणिधावपत्तिपति । परिमियांच मरण ता पशरीरस्य परिठापम तदपि परिनिर्यापमेय पक्षिपुणाइ दुवालसघासाइ सामणपरियाग पाउणिप्ता मासियाए सलेहगाए थप्ताण ज्जूसिप्ता सठिनताइ शणसणाए बैदिप्ता शाठोडयपफिकते समाहिपत्ते शाणुपुछीए फालगए , तएणतेयेरालगयतो खदयशण गार कालगय जाणिता परिनिहायप्तिय काउसम्ग करेइ , पप्तचीयराणिगिएहति, विपुला पक्ष्या सणि यसणिय पञ्चोकहति पच्चोहाइप्ता जेणेयसमणेनगव महावीरे तेणेन उयागच्छद उयागच्छइप्ता समणनगव | पुथार दुवापसबासा। पप् प्रतिपूष पूरा पारेवरसबमे । सामपपरियागपापा पता शरिष पर्याय एत दोषा पासोगे । मासिमापसे पाए एक मासमी संपवाये पनमने। पत्तारसित्ता । मामाने सेबोने पादरोने भित्तार परसफाइ दित्ता । दिनमा भोवमे दायमा त्यामयको पीसे रिने साठभात अनमने तबीने रोमे गुर्वाधिक बोतमा पतोपरकपा । पापारस्परिबर्तममाधिपो । ते गुपने सभसापोने पासोनि तेहमी मिप्या दुपादाने समाधिपामा मानसोपोप रहितममा । पाचपुष्विग्वारगए । पनुश्मे वापरतो एतावता मरणपाम्या । तपतपेराभगवंता । तिबारे ते पिर भमवंत । पावनमारापमपचारित्ता । पदबसावमा भरपपामा वाधीमे । परिषिमापयत्तिबारसम्मबति। मरपकते तिको प्रेम रोरगा परमाते पनि परनिर्वापहोम तेववानेते बारसमथरे एतय पतकमरोर मामरापीने । पासपोराविभिगाति । पाचपाधी बना सप। रप पो। विपुलापापमयापासपिय र पचासति । रिपुमनामा परे । तर भतरोभ । भरथम महायो । fast प्रमच म ।

- महावीर यदइ नमसइ वदिशा नमसित्ता एवषयासी , एवखलु देवाणुप्पियाण श्तेवासी खदएणामध्यण गारे पगइनइए पगइउयसते पगइपयणुकोहमाणमायालोने मिउमद्दवसपो थालीणे नहए विणीए सेणदे याणुप्पिएहिं थानणुणाएसमाणे सयमेवपचमहछयाणि शराहेता समणाय समणीय खामेता शम्हहि सछि विपुल पक्ष्य तय निरवसेस जाय थाणुपुछीए कालगए , इमेयसे थायारनाए जतेत्ति, जयवगोयमे स मणनगव महायोर वदइ णमसइ बदिप्ता णमसिता एवषयासी, एषखलु देवाणुप्पियाण श्तेवासी खद पवनामधारयामोमा तामचतिरता । विहां पाप तिहा पामोन । समबभमबमहावीर बदर रमसर २ ता । यमय भगवत योमहापौर पामापते बारे ममवारपर पहनाकरीने समसारपरीने । एमपरासी । म पाताया। एपमाटेवाप्पिया अंतेवासो । म निदेशानुमिम । भगवन ! तम्हाराविष । पाएपामपपगारेपगामरे। पवनाम साध प्रशतेबरो भद्रप दृष्टपितारहित । पमासते । प्रत उपांत कापायरहि पमापनसभामाषमाणसाभे । सभाष पातमापापा मार मान मावा सोभनि । मिउमहसपर प्रहार । सा मादय गवरी सपूर्ण, बम रले परापानी । भाषिोए । एवमा नाटा भय दिनयत ता । सेपदेवाणप्पिए। तेस बाबामगारे, सेवामिय । प्रभाषाएसमा । पावादी पापा । सम्मेवपरमामा पापयत्ता । पाहब म प्रापातिपातादि पचमहायुत मते पारापीने । समपाय । साधुबाले गोतमादि प्रतें । समपी पायपामेता । सानो पनवासामसुमने पमापीने । अमेहिहिरिपुर्वपश्चय । पम्ह समाते विपसगिरिनामा पवते इत्यादि सर्प । तवपिरवसेस । तिम निर्षि वाया। पाठपुषोएबासमए । यावत् प्रमुझमें वासमर पाता । इमेक्स पामारमणभत्तेत्ति। एताना पापार भारतपयरष रिपारीभगवन भमबगायमे । भमकत मौषम समपभगवमहामोर अमर मगत बीमहावीरसामोपते । पर मसाता।दे नमसारकर मादाने नमसार बरोने । पयासो। म बाताया । एषपसरेवाराप्पियाच अंतेवासी । मनिये हेदेवानु प्रिय ! तमारा गिय । परपबामपर - - - वरेव प्रत्पयो रतु मेस्स स परिनिर्वाणस्पयो तसं ॥ कहिमपत्ति । कस्पा मती कपिलववमेति ॥ देवसोकादाविति ॥ एमइयापति । एकपा एणाम घणगारे कालमासे कालकिच्चा कहिंगए कहिंउययो ? गोयमादि, समणेनगव महाधीरे नगवगो यम एवषयासी, एषस्खलु गोयमा ! मम शतेवासी खदएणाम शणगारे पगइनइए जाय सेण मए शनणु पाए समाणे सयमेव पचमहधयाइ शासहेत्ता तचेव सह शवसेसय नेयछ जाय थालोइयपमिकाते समा हिपते कालमासे कालकिच्चा थक्षुएकप्पे देवताए उववरणे, तत्यण शत्येगझ्याण देवाण यावीससागरोयमा इ ठिइ पसप्ता , तस्यण खदयस्सयि देयस्स घाधीससागरीयमाइ ठिई पखप्ता, सेणनते ! खदए देवत्ता | मार। परबमाम साधु । कासमासबायविषा । बासने प्रासरे कासदराम मरमपीमोने । कहिमएपस्यिय । विमिगतिविष बिमादेवसावा | रिपरिपे जपमा रतिया भायमाठि। मोदमादिरसे मापन । सममयपमहापारे । यमप ममपात योमहागीरनामो। भगवगीयम । भगवत गोव | मपते । एवरमापी । म बाताया । एक्यतमोसमाममपतेबासो । म निय गोतम ! मारा सिप्प । मन्एबामपपगारे । पदक सेनामे साधु पयामाए पायमेवमण । राव ताने में पानादोचायना । मयमयपत्रमावमा पारोपेता । पापपपत्र परिमहायुतपते पापोने पारापोमे । तर पर्व परसेपियरतब। तिमन मिये सब रियपरक्षित बाबा । बायपासामपरिसते ममाहिपते। यावत् पासार परिमोने मिगमाधपम समाधि पामो । पावमासेमातविया । कहिन पपसर पासपते परोने। पथएवष्यदेवताएव्ययपे । बारमा अधुतमामा देवखोबनेवि देवप अपनी । तत्पर पापायापरेषाप । ते मारमा देवसोमेरिप बसाएक देवना परि सगवानोनहो । पापोससागरोषमापिता बानीस सागरोपमनो जिवि पावपामो बहो । वापरण्याविषय। तिहारक पवि विनो। बाबीसंपामरावमापत्ता । पानीस सागरोपमनो मितिमी पाचपामो विमानवामा । सेग्मतेपदपरेषतापादेपोपापा पाएसएवं भवसरिसाए । ते मालासबारे, भगवन् ! चरण देवतापो रेषतोषी पावसान १ मर्यपा ५ पाएपस्यति ॥ प्रायुपकर्मलिकमिजारपेन । यसरगति । ठेघनमियन्धनभूप्तकम्ममा गत्यादीना निवरसेन ॥ हिस्साएपति ॥ पापुभकामय स्थिते वेदनेन । तरतिरवप्रषसम्बन्धिर्म पति घरीर दत्तत्ति त्वका अपवा पयति भय व्यवन पातति भुवा कत्ला प्रमतर ममियती पेव ममम्तरपरस्य सम्बन्धी काप । इति द्वितीयण्तमपम उस समाप्त । ॥ अप द्वितीय प्रारम्पप्ते अस्पचाय मभिसम्यवः ॥ वामरमरमावेगीबेबकात्ति मागुत्त मरसंच मारगस्तिकसमुदवातेम समयहतस्या म्पपाच भवतीति समुहातस्वरूप मिहो प्यत इत्य सम्बन्धमा स्पेर मुख बातेममुग्पायाइस्पारिता इमहिसागत्योरितिवचनात् नमानि पाता म मेकीमावे तरमावस्ये तत प एबीनावम मायस्पमत्र पाताः समुद्याता अपन सौ फीनाय ? उच्यते यदा भास्मा वहमाधिसमुहातमतो भवति तदा वेदनायमुनवधानप देयछाया शाउरस्कएण अवस्कएण ठिइस्कएण थणतर थयघहत्ता कहिंगमिहिति कहिउययािहिति गोय मा. महाविदेहे सिजिहिति घुम्झिहिति मुश्चिहिति परिनिझाहिति सइदुरकाणमत करिहिति खदसम्मतो॥ पिइयसयस्स पठमो उद्धेसा सम्मतो कइणनते ! समुग्घाया पणता ? गोयमा ! मार मिबारबरी भवसायी बमयसारिबने मिरवरी पावणावममोसिविन बरवेगारो। पपसरमासा । अंतर रहित प्रहममे परी र प्रत तमोमे । बहिमिरिति । विवाठियविधिति । विहो उपनमे से प्रयबोधे । मारमा महावियोगामिसिपिमिति इति नि मुधिरिति परिचिचारिति । रेमातम ! माविबनेविय सोभम तखमा बारम्ने पमषो मचा थोतसो भाष में । सम्बोक्साबमतबारि तिमि मरोरमानस दुपमा पावर ए पंचविशेषचना पथ पूसिपमा तेइयो बिसरे परिवा । पापामग्रत्तो । एसटममा पधिकार सपूमयो । बितिमपठमा नसासमतो । पोचायतवना पहिसा मेमा पूराणया । । पाहि बिसेमारी मरतीयका बोवा सो मरहमा परिकारमा, ते मरस मारांतिक समुहाते बरोबार तेमाटे मरपसमुहात कसोयेई। पापभतेसमग्यारा पाता। योतमा भगवन् । म १ ॥ - प्रत प्राय रिखतएव प्रवतीति वेदनाद्यनुमवनामेन सरसीनावः अथ मावस्पेन पाता एप ? मुध्यत पस्मा ददनादिसमुहातपरिवतो पहम् येदनीयादिक म्ममरेगान् कामांतरामुमवयोग्या मुदीरबाबरगना रूप्प सवये प्रविप्या मुनूप मिबरपति प्रात्ममदेश मा मिष्टाम् शासपतीत्यप स्पम पाताइति ॥ सतममुग्पार्यात्त । बदमासमुहातारपा एता प्रधापनाया मिष द्रष्टष्याः प्रतएषाहमउमत्पिपदत्यादि। बाठमत्पिपसमुग्पाप पन्नति करसनत ! बाउमविपासमृन्यायाफ्ताइत्यादि सूत्रपत्रित ॥ समुग्पायपर्यति ॥ प्रधापमापा पशिसप्तमपद ममुहातार्थ मिह मेसष्य तपैप-मा मत ! समुग्पापा पसत्ता ? गोयमा ! सप्तममुग्पाया पडता समहा-यपपासमुग्पाए कसायसमुग्पार इत्यादि रसग्रहगाथा-वेय पसाय २ मरने ३ घडधिय ४ तपश्य ५ पाहारे । कपलिएचपनवे बीयमबुस्साग्रसत्तम ७५१५ वीषपद ममुप्पपदेव सप्तबाप्पा मारका सप्त समुग्धाया पणता , तजहा-येयणासमुग्घाए एव समुग्घायपय बउमत्यियसमुग्धायया नाणियह जा व येमाणियाण, कसायसमुग्छाया चप्पायऊय , शणगारस्सणनसे ! नायियप्पणो केवलीसमुग्धाय जाय सा | महात परोये प्रतिप्रय समेपाव न समजात कहानिया मम्बारिति वरमा उत्तर । मायमा सत्तममग्माया पपत्ता तमहा वेयबसमग्घाए एक्स | मुग्धावपर्व कामविससमवायव्य भारियाणवारमारिया । रेगोतम ! सात समात पमा कामदमासमात दम पयपानोपरे देषपा | एतबा माटेगार-सामबिच समुग्धाय पति । पापभते समुग्धागा पचत्ता इम्पादि, भवन, ससुग्घायपति पदमपानी हत्तीसमोपद स मुहात पापणा मामा त मेयमी देवाबर भते समुग्घाया पपत्ता सत्त समुग्वारा परता तपासषसमुग्घाए म्यादि । वेपर १ बसा २२ मरणे । बेपिरतेमण्य ! पाहार वसिम बभषे धोपमहमारसत्तेव । तिहां वेदना समुहाते करी पेरमोर पर्म गातनबारे । पपाय समुशायरी पपार पाबना मातमबर २ मारपातिक समुदधासे करो पायु कमजतना यातनवरे एशियसमुद्घातिको पोषप्रगमने मरोरयको बाहिरबाटो मरोरपिषभ वासमात्र ३ पमे पानामयो सम्पयाधम रात रचो महाब रेशियमरीरमा पुश्य पूर्णपमा प्रते मातमारे, नया - - २ रिपुतु पभामाममित्यप स्तन येहनासमुदातेन समुहत पात्मा बेदमीपसम्म पुगतानां शात करोति, कपायसमुदातेन कपायपुगतामा मारगन्ति कसमुहातम प्रायु बस्मपुटुसाना पकृषिकसमुवातम समुहतो जीवनदेशान् शरीरादशिनिझाइय शरीरविफम्मवादस्यमाघ मायामतय समयोगमा मि दप मिति मिसन्यप पपात्यूसाम् वैशियसरीरमामबमपुरताम् माग्बद्वान् पातपति यथा मूला यादते पपोत-वेरुवियसमुपाए र समोवारता चपलाई बोपदार मिसिरह पाहायापरे पोग्गले परिमार पहाइमपोम्पसे पापयत्ति एव तेबसाहारकसमुवातावपि पास्पो यतिसमुदातेनतु समुदत वेवसी घेरनीपादिकम्मपुताम् शातयतीति एवेपुत्र सर्वधपि समुहातेपु शरीराम्बीयप्रदेधामिर्ममोसित साँचते प्रतमुतमाना नवर विसिको असामयिक रत कान्त्रिपविकन्द्रियाला माहित पयो, वायुनारकामा प्रत्यारो, देवामा पम्मेन्द्रिय तिरपाप पंच, मनुष्याणातुसप्त । इतिहितोयझते द्वितीय नमः समाप्त ॥ ॥ अथ वृत्तीय पारम्यते पस्य पाय मनिसम्बन्ध हितोपोहेमके समुइपाताः प्रमपिता पुत्र मारवामितकसमुद्पात सोनच समवाताः चित्पथिवीपू स्पग्रत इती र पपिम्प प्रतिपाद्यतात्पेव सयमणागयरु चिठति, समुग्घायपय यह ॥ यिईयसए या उहेसो सम्मत्तो २ ॥ कई सूमपास प्रतेकी ४ रम तेजस पाहारक समधात परिसमापण। कतिसमधासकरो वेबमो मेदनीयादि कमपुते यातमवर ५ ए सबसमुदधात नरिपे परोपको वोवप्रसाना नियमई, मनोमान तमुत्तमा, पतरा रिपारको समधान पाठसमव प्रमापई, ए समुदपाव एकेद्रिय विक महिम परिसातीमाये, गमुबार नारयोने परितारापे, देवता पने पदोनियरने पचान, मष मनोमे प्रने गोवपर सात ममदमात परम सात समानिया का पारसमुदधात पलमान सगे बायो। प्रथयारबभतभारियप्पचावसिममुग्धाय । अषमारसाधु भययन् ! भाविदा माने परति समपात । पापमाससममानमारिदि। यारत् मानता पनायतकास से। समग्पायपदोयम । समुदपात पद पचनामा इत्तोसमो मपया वितिय समरितिपा। ए वीमा यतवना बोबा पहेया पर्वपो शिनी । । पाहिसे समुदधात कामा ने ॥ - रितपय प्रवत्तीति वेदनापामवाना पीनाया पप मावस्येग पाता म मुमत पगा गाविगावातपरिमता 4 { पदमीपादिक समरधाम् कासोतरामुभवपापा नहरीरवाकरपेगा कप पय मविप्मा एम गिजरपति पागमदो म भिम् Inयतया ना माव स्पन पाताति पतममुग्पापति पदमागमवावादमा पतम मापमापा मिव दया। पतपापियादिसामपियाम्पा५ पति परतते। बातमस्तियाणमग्पायापचतास्मादि प्रयमित ॥ समुपायपति ॥ माया पदभिशतमपर गनुपाता गिर सभ्य, तप-भार प्रत । समुपाया पणता नीपमा । पतसमुपाया पता ANNI-पायापाए कषायमुप्पाप पत्यारित मागापा ५५ १साय २ भरपाधिप । तपपप ५ भागार ६ । फयनियनया भीमपुरणावयाय ॥१॥ जीप ममृप्यपद पणा पार सप्त समुपाया पयाप्ता , तजहा-येयणासमुग्पाए एय समुग्घायपय उउमत्यियसमुग्पायथा नाणियछ जा घयमाणियाण , फसायसमुग्धाया छप्पायय, धणगारस्समजत नायियप्पणा फेयलीसमुग्पाय जाय सा मात पारे परिपथमपा A HAI viये परिपागम्यारिनि मनाए कार । भापमा भाममाया पyal nwuमम्पाय 444 | मुग्पायपालिममा भाविधायमाविया । मौतम पात मम मा iatiमामIत म पापर पंपमा एता भाग-ta-मल पमपाय पनि भने समग्माया पant runs, भूमामि, समग्यापति पाना मोसमापन स मात tet wronा पारेर भने पापापा पम पमुग्धाया पापमपाय if या य १ मारे १ पेठभिप तेवण्य पार पायोनिय भये पापमयाsuit friमा पमना गर्भामरे र पा समुपातको प्रभाव पाबना मानकर मारपति ममता पाग मना पामरे याnt witu wantual रिलायो मोवि याममाघ २ पने पाधामो याचनापते रपी, पाय HOME Use yal Run Minik Ant - २ रिपुन पपायोपमित्यप न येरमासमुदातेन समुहत पामा घेदीया पुनसानां शात करोति, पापसमुद्वाम पापपुद्गलाना मारगन्ति समुहातम भापुलम्मपदसामा यषिकसमुवातन समुहतो जीवप्रदशाम् अरोरादहिनिफाइय शरीरविफम्ममावस्यमाघ मापामतप सदुपयोखना मि दय; मिति निसन्यच यथास्पूसान् वैक्रियशरीरनामकमपदसाम् माग्यवान् शातपति यथा सूमो यादते पपोत-वेटवियसमुग्पाए समोरवारमा समवारं बोयबा मिसिरह भाडावापरे पोग्गले परिमाझा महामुहमेपोम्पसे भारयत्ति एव वैबसाहारक्समुहातावपि प्यारमेणे कयतिसमुहातमत समुहतः वेवसी वेदमीयारिकम्मपुटुसान् शातयतीति' रतेपुत्र सर्वधपि समुहासेपु शरीरानीवप्रदेशामिनमोसित सर्यरते प्रतमुत्तमामा मयर विसिको असामपिक एते कन्द्रियविकन्द्रियारा मारित आया, वायुनारकामा बत्वारो देवाना पम्मेन्द्रिय तिरपा पर, मनुप्यानतिसप्त । तिहितीयशते दिप्तीप तहसः समाप्तः ॥ ॥ अप वत्तीय पारम्पते प्रस्स पाय मन्त्रिसम्बन्ध हितीपोद्देयके समुहपाताः प्रापिता सपुत्र मारगन्तिकसमुपात स्तमच समवहता वेषि पथिधीपू स्पद्यत ती पपिच प्रतिपावसात्व सयमणागयज्ञ चिठति, समुग्धायपय णेयछ । यिईयसए या उद्देसो सम्मत्तो ॥ ॥ कद सूअपास प्रतिषी रम तेजस पाहारक समधात पनि पणापमा परखिममदृषाकरा केरमो बेदनोयादि कमपदप्रतें यातमवरे । एसबसमुधात नामरोरखको बोवपीयाना निममहे, सपनोमान अंतर्मुइतलाई, एतथा रियेपर मेरो समदधात पाठसमय प्रमापई, ए समुधात एकेंद्रिय पिक संदिर परिमातीमाये, पवाय नारयीने परिक्षा पारहवे, हेवता प्रमे पदीतिरने पचार मनुष सनोमे अने पोपपदे सात ममुद्घात इस गमत् मानिसहरमा पावसमुदपात पसबसये पाया। पथमारम्भतभारियप्पचारिसिसमुग्धाय । पषमारमाधु भगवन् ! भाविता भाने कति समयात । वापसासम्मपामांचिति । यावत् गायता पनामतकास से। समग्पायपदयमा । समुदधात पद परवधामा बत्तीसमो सपनाया। वितिसवमबितिपा। एरोमा मतबमा बोबा परया पर्वधो सिजा । , पाहिले जो समुदवात कामासान - सम्बन्धस्या स्पर मारिसूम । मा प्रते। पुरवठइत्यादि । बीबानियममारपद्वितीयोदेशके अपसग्रहगापा-पुरयीमेगाहिता निरयासठाय मेवबाइम । विपापरिक्षो वलोमोपचासोय ॥१॥ सूपपुलकेपुष पूषादमव सिमित ोपापा विवधितापांना यावादन मूषिसत्यादि ति त । पुरवित्ति " पपिम्यो वाया जायेव-पार मते ! पुढवाह पनघाट ? गायमा । सत समहा-रयसप्पनत्यादि । गाहितानिरयति । पथिबी मवगास किमारे नरका इतिवाच तबा स्पा रबप्रमाया प्रशीतिसरस्नोतरपोजमसमास्यापा मुपर्यक यामनमान्नमयगामाराप्यक य वयित्वा विभावरकसवारि प्रवन्ति एव शाराप्रमादिषु यपायाग वाच । सठानमेवसि ॥ मरकसस्थाम बाप्प सम ये प्राप्तिकामविष्टा से वता मना बतुरवाय इतरतु मामासवानाः ५ बामवि ॥ नरबारा वाहस्प वाय, तब घोरिपोजनसहस्रापि पर्य अप एक मध्ये शपिर पजते ! पुढवीन पणत्ता ? गोयमा ! जीवानिगमो नेरइयाण जो घितिन उद्देसो सो णेयहो, पुढयोगा हिप्ता निरयासठाणमेययाहाल । विस्कनपरिकयो घणोगधोयफासोय ॥ १॥ कि सछपाणा उययणपुछा ? कि बीएबमोग मारपोविक समुदघात मरोने पविमोनेवि सपणे तिहभनी पवियोमा परिकार बार-बाभते पुठपापा पयतापानीवाभिम मे पेरागार पारितिपाठासासापया । कोसी भिमवन् ! पविली कहो तिमय, बीमाभिगममे नारक बोबाणयामेविये प्रय सपागाधा कि निजी एक पुराबविणे बाबामा पूर्णवीर विमुई गेप अप यावत् गरेवायो, तर पबियो पायो, वाम कोतमी भिमवन् ! पबिोसो, गौती म सात एपिरोमो, तेवो रखममा रबारिशमारित्तापिरयामठारमेवगाविभपरिमेमोरति। पबियो पबगाडी फेतसादर मरकामासातिrt एरवप्रमावियोमेसिव एकबार प्रयोगमार गबननो पिए, तेमाहे वपरि एक सान योजन पामारी नीचे एकसान बोमन मंबायतविधिमा चोमबार भरवामा साइम परममादिव पवियोमेरिय पवायोमेछापा, सहारमेयत्ति । मरकामा सठापतित पालिका प्रतिमरबाबासा वत्तम मांग पसरपई, पने मोबानामामबार समानापति।नना चापका बिपिमानयानमामि भी एकपामाबनमय - . " . ३ ॥ मेक मुपरिष महाबएक मिति : विक्सप्रपरिपेयोति ॥ एतो पायो' सत्र सहावविस्तृतामा सहातपोजम मायामो विफम्म परिपप इतरेपा स्मन्पपति, तपा पसारपा याच्या सोचा स्यन्त मनिष्ठा' इत्यादि सहयतथ्य याय दय मुद्देषान्तो यदुत । किसबपाशाइत्यादि धस्यव म योमा , अस्पा रखममाया पिमरमसम्पु बि स मावादय उत्पवपूर्वा प्रश्नोत्तर । असइति । असा दनेवाः परच वेनाद्वपादायपिस्या दतो स्यतयास्यमविपादनापार । अदुवति म अथवा प्रवंतबुतोत्ति समन्तात्वो ऽनन्तवाराम् इतिद्वितीयमतेवसीय उद्देशः समाप्त । ३ पतीयोहरके मारा तत्ता, सच पमेन्द्रिया इती न्द्रियमरूपाय बतुपदिपक , तस्य धादिसूत्र कामिस्यादि ५ पडमिजोइदिपपमेयहोत्ति॥ मनापमाया मिन्द्रियपदानिपामस्य पम्पदयपदस्प मपमयदेपको डस नतमो ऽयेतव्य , ताप द्वारगापा-संसायाहन पोहतकापरसष्ठमारे । इतागायमा! इसति छदुधा एणतखुप्तो पुढवीउद्देसो । यिझ्यसए तइ उद्देसो सम्मप्तो । पइणनंत । इदिया पणता ? गोयमा ! पच इदिया पसत्ता, तजहा-पढमिलो इदियउद्देसो णेयहो, सठा मधेपासूबावन सरिक वपर एमासमान समाप, तग विषमपरिरमा विकास पने परिधि पारा, तिला सम्मात गोषमविसार तसंख्यातयामन पायाम पने पिधेपन परिमिक बोजा पसमाव बननाते पायाम विषार पने परिधि पसमात गोषममा जापा सबा बायपाय पामाय १ सिमपाचाडापामा तापण अदुवा प्रतिषुता पुष्पोडोसा । यदिवसावा ते भवंत अमिष्ट इस्पारिएको योगात् परेगना चतसमें प्यादि पहना रमप्रमाम पा रखममा एवियोमा चोसमाप नरवायामानविषम् समसा मांगी छपना पूति प्रत्र उत्तर एकनारमो धनोपार पबवा प्रमरोबार अपना परविपीना गावाचवा । वितिम्सयसतरपोसा। पगोवा मतबमो पोवो परया रमायोपिया। । पोरे गोरे गारगोकमा त माग्यो पद्रोसो दोना अधिकार को करपतेररिया पप पा मारमा पारिमा पनता तवा पटमिहाररियन साधयमा । बेतमा पवाबासकारे, भगान् ! रम्द्रिमकामा रविन रेमोवम ! पावन्दीक पप्पामापुष्पमि विसपश्यनारशहारे। सूरएसपु दारवपमेव मिपित, भोपासु तदपा याषमाम्देन सुधिप्ता व सस्यान योत्रा दीन्द्रिपा पायं तवेद-बोबन्द्रिय कारम्बपुष्पसंस्थित बसुरिन्द्रिय मसूरकपन्द्रसस्थित ममूरक मासमविशेष यः शमा प्रथया मसूरकचन्द्रो पा पविपदर्स प्रादेन्द्रिय मतिमुत्राचन्द्रसखितं प्रतिमुच्यचन्दक पुष्पषिक्षेपदस रसनन्द्रिप पुरमसस्थित स्पानन्द्रिय नामाकार ॥ यारतिय इंडियाको बाहत पाय तवेर-सास्ससासपनामबाहयानि । पोहत्तति ॥ पमुत्व तवेद-प्रोप्रचातुप्राणामा मलमासलेपनागा हिन्द्रिय सासरण स्पर्मनेन्द्रिपस्प र परीरमान परसत्ति धमन्तप्रदशनिप्पयामि पम्मापि ॥ छंगारक्ति ॥ पसङ्यप्रदवावगारामि । प्रप्पा तुति । सस्तोक गहरगाहते ततः मोबप्रादेन्द्रिपेक्रमेव सातगुव सता रसनन्द्रियमसतमगुण तप्त स्पशन सवयगुबमित्यादि ५ पुष्पविक मा तपाई-पावापमा पनरमा द्विपदमा पहिसा माहाकावा । संठा वाम पाहता तिहारगाथा सापपाम पासपएस पा मारे पापाय पुष्पमित पिसमापनमारपारे । सो सूत्रमारतोनारसिमा सेयोमा । आवपनामा रिय उदेसी । रमनेन्द्रो यावत् सम्हारा पाचवा तिहा पमान वाचारिखना बाबा, ते हम वादो बदम्मममे सम्माने पछी मसूरव पदने पाकार ममर से पासमरिमेप गाममहियो रतिसावभाषा पापा चन्द्रमा भवया मसूरमप्रभेमा एक माम मेधाववियेप तेहनो पतषा परिट्रिय प्रतिमाप से फम बियेपनी एमकेने पागार परप्रनेपापा ममदिन पर गणाने बारातिपद्रियगामारय कापा, ते सब मो प्रमुसनो पसम्यातमाभाग पारम्प । पारतति एका ते रम वागामार ना अगसनाधम मातमामान पषम,शिद्विय प्रगुम एमाला, ममडिय गयेरप्रमाणे । बापपत्ति । पई भमतप्रदेश गोपनाई । भोगाठचि। पसरप्रदेशावमा सव। अयाति । सवमा पराभवगाहनापो तिमारपो बोत्र मात्र रसग अनुपमे सम्मातमुको मन हिश पसंथावमुषों पक्याइनायो। पापविशति योचारिकारक्षित भागो पाप प्रविध पदने विमत्तिा सपनो समयको पाबमा पापात . हिमापारीमि भतरहितानि स्पष्टमपं प्रविष्ट पनि । सियति । सर्वमा बपन्यतो सस्पा ससपनागो विपप' सत्कयतस्तु भोप्रस्प हार योजनानि तुप सातिरेक सप पानी मबयोजनामीति ॥ प्रबगारेति । अनमारस्प समुशासगतस्प ये निम्मरापुदसा सास बनस्यो ममुष्यः पापतीति पारेति ॥ निम्मरापुरसा धारकाइपो म बानम्ति भपश्यन्ति , प्राचारयस्तिष पेवमादि पदयाच्प प्रभ किमन्ताय मुसिक रत्या - याष दसाको साकांत सपर-प्रसोग प्रते। किलापुळे काहिवा) कापि पुरु? गोपमा ! मोसम्मत्यिकायेव फुले जाव मो भागास पिसापेव फुझे पागासत्यिमापस्स रेसेप पुरे पागासपिकायस्स परसार मुझे मोपुरषिकायेय फुफ भाव मामदासमएस पुरे एगे अजीवदधदेसे घगुरुतार भगतभिमुरुलायमुनि सगुते साधानासे असमागणेति ॥ माशोको धर्मास्तिफापादिमा प्रथिव्यादिकायै समपेनच स्पृष्टो व्याप्त सतपो तमा सत्यात् मायापास्तिकामरेपादिनिय स्पष्ट स्तपां तम सत्यात्एक यासायचीवद्रव्यदेश भामाशद्रष्यदेवास्था तस्य ॥ इतिद्वितीयठते पतुपदण समाप्त ॥ अनन्सरमिन्द्रिया स्मुतामि तहमाघ परिवारणास्यादिति सविरूपवाय पम्ममोद्देशकस दमादि ण याहस पोहत जाय लोगो इदियउद्देसो । यिई यसए चउत्यो उहसो सम्मत्तो छणउच्छियाण नत ! एय माइस्कति पणवेति पधेति , एषखलु नियठ कालगएसमाण देवमूएण थप्पा माभाग विपद उसो धापना ११ मावन पर साधिकमयावन मेपना ८ सावन । पपगारित्ति । पपगार समदृयातगतना निवरापुरम तर पम्प मापनोए। पाहारेति। निचरापासप मारणादि नदेसे नजारे पातार इस्मादिक पर कपमा । हिव तसा सगे एसईया बागी ते पाई- जायभागा। मामत् पमा मनापत तरमा पसायेषभसे विषापुरेमाहिवाकापनिमारमा पापमयिकाएको स्यादिवायो। वित्तियससम्म पर त्यामाप्रा गबना यादवेगानाविवरच मिसा । । पारिसे उठेथे इन्द्रियमपाताने विप परिपारपाबर- मित एपमा उनि भासनि पति पश्यति । पन्धतीसह वालासबारे, सेभगवन् ! मकई सामान्धवो भाप मनापे प्राये। एवं समुनियठे। म ॥ १ . - मूत्र ॥ अमनस्सिएरात्यादि । देवनरबति । देवभूतेन प्रात्ममा करमतन मोपरिवारयतीतियोगः ॥ सेवप्ति । पौ ग्रिन्यदेय मात्र दयलाफ मा मेव पवति । पम्पान् धात्मव्यतिरिक्ताम् देवान् मुराम् तथा ना अन्यपा देवामा सपिनो यो पनिमुनिपति ॥ अभियुन्य पशोरुत्य प्रा 1 मिप्य मा परिचारपति परिर्नुरूप बोधप्पपिपियाति । अत्मीया ॥ प्रप्पयामेषग्रप्पारा यिधिपति सीपुरपरूपतया विरुत्य ग्यवस्पिते ॥ 5 एविपमिस्पादित परतबियबत्तयारपवति । एष पेय पातम्या । ममय इत्यियेय अमर तममप पुरिसवयवग्ण असमय पुरिमयप वेग तसमय इस्पियेयवेश इपिवेपस्स ययबयाप पुरिसषेयं पर पुरिसवपस्स घेमण्याय इत्यिषेपवा एषरानु एगे विपणमित्यादि । मिथ्यात्य णेण सेपतत्य नो शणदेवे नोयणेसि देयाण देवी शनिजुजिय थन्निजुजिय परियारेड, णो थप्पणिच्चि या देवी शनिजुजिय निजुजिय परियारेड , शप्पणामेव शप्पाण यिउछिय २ परियारेइ , एगेयिय णजीधे एगेणसमएण दोयेदं घेदेइ , तजहा-इस्यियेयच पुरिसययच, एष श्चण उच्छियवतव्या णेयधा जा घ इत्यिवेयच पुरिसवयच सेफहमेयत्नत ! एव ? गोयमा । जणते यणउच्छिया एयमाइरफति जाय इत्यौधे निरे निग्रप पाए। भाषमण्समाये । बाम पहते बने। विभएप दिवतामय पके। पमा सवतन्य मा पसदेये पमिदेवाग देगेषा अभिषिय २ प रिमापासायपरमभूतरा परिवारमा मगर रतियाम तेनिक बसाध दात देवमायनेवि महो पम्पदेवप्र तमा योमा यसो गोमा सिकरी ने पा शासितीने भामो समयविधिरापादेवीमा अभिमुभिम र परिवारो । यो पापसको सोमबमिरो पथमा पानिगो परिसराकरे भाष पापमहोभ पामायें पो पुषप पाते विनि २ परिवारसभीगकर म घारमा । एपेरियमोये । एकपनि पधपुमन पासासादको -य! मेपसमापदायरेटेर तममा । एके समये दायरे का रसोरेटप । बोबेद पायो पन। परिसर । पुलप घेद । एषपरतविपत्तमपार्ष बमा । म परतोमियर लेनो सामना बारसोबासरसोये । यावत् पोपेर पपुन पुरमदा सेवामेभीए मेरा पन्तोका रम- - - पा मपं वीरूपकरणपि तस्य देवस्य पुरुपत्या पुरुपवेदस्य का समये पदयो न खीयेदस्य वेदपरिषत्पावा तीवेदस्यैव न पुरुपवेदस्यो दय परस्परविरुहस्यादिति ॥ दवतारसुति ॥ देवनमपु मध्ये ॥ उषवत्तारा नमन्तिप्ति ॥ प्रास्मस्मा उपपता नयतीति दृदय ॥ महिनिए ॥ इत्पत्र या मत् करमा दिदास-माग्नुप महाबस मागसे महासोक्ये महामागे सरषिराइयपत्ये कम्यतुरिपथनियनुर ॥ध्रुटिका वारपिका प गपकुमसमध्ममपासपीठपारी ॥ अङ्गदामि माहामर पविलेपान् कुमसामि कामरवि पान् पटनमामि पोलिसितकपोतानि फर्मपीठानि कर्या भरबविमपान पारपती त्येमशाला य मनपा । पिषितात्यानरके विचित्तमासामससिमठेपपिचिप्रमासाथ सुमन मौसी मसक मुकुटप य यच पुरिसयेयच जेतेएवमाहसु मिच्छातेएवमाहस, यहपुण गोयमा । एवमाइस्कामि जाय पस्येमि , एव खलुनियठे काठगएसमाणे यन्लयरसु देवलोएस देवत्ताए उपवतारो नवति महिहिएस जाय महाणुनागेसु | माविमझ राममयन् । रम तेलो। गायमा पतेपपश्चिमा एपमारसति । गौतम ! बेमाटे प्रम्बतोरमकी । लामाबोवेदच परिस वेदप पते एमालम मियतेएपमाहम । मागत् प्नोट पने पापवेद एवेव पद पवार एवोव एकसमय बेदे से मौतम । रमकर है-स पम्बतोर्षी मिमा झूठ की-बिम प्रोपवई तापनि ते देवने पुरुषपामार पुरुष पेदनाम एक्सममविष उदयई पपि मोदमो उदयमयो भवा वेदपासटे ता सोरेटमोम उदय पपि पुरुपवेरमा गरमको माहामारि विभावयो। पापब मायमा एपमारथामि । ३ नमो गौतम । इमम का सा मान्यपपयो । भामि पीमि पमि । विशेपको बिरो भेटवायामो । एवपपियंठेवासमएसमार। इम नियभिपय पान प्रमंतर प्रबर हित बापगत एतमे मरवपाम्माका । अषयरस ऐक्सोएम देवत्तापहवपत्ताराभवति । पन्चतर कारक देवमाकनेविय देवतापणे अपये पवसरे । म रिडिए । मोटो सी परिवार मेहने । बाबमहाउभागेसु । यावत्यन्हें माटा पसवात गलिवंतमेविष प्रतसामगे कामा । दुर्गा दूरठिसु सेपत स्वदयभवा महिरिए । गनीमतिने पवाद अपरदेवमा कमेविप पोस्मिति पामुकमनो निति निय पवाभावकारे, तिहां देवपहुये महापरि - - स्म सतपा इत्यादि पावत् रिद्वार पुरर पनाए बापार पनीर तेरण ससाए दसदिसाठ उम्मोएमाप्ति । तत्र शदि परिधारादिका युप्ति रि | शार्पसयोगः मना पानारिहरीप्ति म्हाया सोना अधिः परीरस्परवादितजारवासा तब शरीरराषिः सस्या दायरा एफावते उद्द्योतय रमका पकरबम प्र पनासेमावति ॥ मनासपम् भोप्रपम् । यावत्करमा दिददृश्य । पासाइए ॥ दृष्ट्या पित्तप्रसादमनक. ॥ दरसणिज्य ॥ पश्यप माम्पति । अप्रिड्वे । ममोचरूपः पशिस्येति ॥ द्रप्टार इटार प्रतिरूप यस्य स तपत्ति एके मकदा सफरप पदोयेद्यस दर कारणमा । दूरगतीसु चिरठितीस सेणंसस्य देवेनयइ महिदिए जाघ दसदिसान उजोघेमाणे पन्नासेमाणे जार पफिरुवे सैणतत्यशोदेवे शोसि देवाण देवी शनिजुजिय निजुजिय परियारेइ , शप्पणिच्चियाउँदेयीन नि जुजिय थन्नि जिय परियारेष्ठ , नोशप्पणामेवश्चप्पाण येउष्ठिय परियारेइ ! एगेवियण जीवे एगेण समए ण एगवेद घेदेइ , तजहा-वृत्यिवेटवा पुरिसषदया , जसमय इत्यियेद वेएइ णोतसमय पुरिसवेद घेदेइ, मारनामा । बाग्दसदिमापाडवाबमाप पभासेमापे । यावत् मन्द तासम काग एपदिगिमेरिपे देहमोकांतिवरी तमा पाभरपमा कांतिकारी छ पात परतावमा तेबबरतामा । भाषपहिचे सेवतवपपदरे । यावत् प्रतिरूप बारपायास्य एससामगे बरवा, निज प वासासबारे, तिrt गोवादेव । परेसिदेवापदेयोपापभिषिय र परिमारो । पमरा देवनी रेको सेहने पासिगोने तथा पयिकरीमे परिचारपावर प्रथमा । पप्पपिपिया पादेयोपामित विय र परियारे । पापोहोम ऐबोहाय ते पासियोने सबा पयिरोमे परिवारमा मागकर । रापपापापापरिधिप २५ रिमारो । पपिनहो पापमपीब पामागे प्रा बिर्वी मापये, पतामतारेषता भोपनमा विर्वी भाग नबार रपव तेमाटे । एमेविषयगोपएगेप समपर एमवेदवदो बारेमा । एकोष अपि निये पुन भावामगारे, जोर एस मारपर्ती ममप विप एक दो पनमय भाग - पार्षद प्रबमा । परिसदा । पुष्प वन प्रथया । समयानोहदे । समपनर्षि प्रादेयेरे भोगपे । पातममपुरिने पमपनि छ -- पीलिवामित्यादि । परिवारमाया कित गनः स्यादिति गनमकरण सत्र ॥ उदनगनेव कषिद्दगमलेगति दृश्यते तम उदगमा कासात रस असममपातु प्रहसपरिणाम तस्स पावत्माम प्रचन्यतः समयः समपानम्तरमेध प्रषपणात् उत्पत्तस्तु परमासाम् परमासाना मुपरि पर्प जसमय पुरिसयेद घेदेष्ठ णोतसमय इत्यियेय घेएइ , इत्यिवेयस्स उदएण नोपुरिसवेद वेदेइ, पुरिसवेयस्स उदएण नोइत्यिधेय घेएइ , एयखलु एगेजीये एगेण समएण एगद येदेइ , तजहा-इस्यिवेदया पुरिसवेद या , इत्यी इत्यिएण उदिणेण पुरिस पत्येइ , पुरिसो पुरिसदेण उदिखेण इत्यि पत्येइ, दोवते शण मण पत्येइ , तजहा-इत्यीया पुरिस पुरिसोवा इत्यि , उदगगनेण नते ! उदगगनेति काल केयधिर पाते वेदनको भागबेनहो । बसमयपरिसवेरवहे । समयनेवि परुपद बेदै भागवे । पातसमय इत्यावेदबद। । नही तेसमममेविषे जोवेदातें द भाषणे। हत्यायेममा उदय । प्रोबेदन उस पे रोम । चापरिसर । महो पुषपदा बेदै भामवे, माहामा विराधषकी। परिसवेममउदए। मात्योददेर । पपवेदने दरबारोने नसो प्राधेटपते वेदै भोमवे । एवपन रगे गो एमेचसमएच। म निये एकरोष एकोसमये । एगयेदं वेदो । ए कोरपने धेरे मामये । त्योबेदमा पुरिसपेद ग । तपाई-प्रोदपते पथवा पुषथोडपते ॥ ममये एकचोम परवदे भारत वाहयोर त्योपदे रि पुरिसंपरयो । प्रोक्त प्रापेरने उसका पुरपयेदप्रते प्रा पाई। पुरिमोपरिभवटेप उटिपेपरिवपस्यो । तथा पुरुष ते पुरुष बने गार्ग सोपेदपते पाय । ठायतेपसमयपरति तमा । एपेव माहामा प्रार्थनावर तेको त्योगापुरिस पुरिसावाायिपीपुरुष प्रते पापगोपते पायें, परिधरपाबोधामका गभड, तेमाटे गभर करो-उदगगनभनेठदममम्भेतियाप्त पायघिसार । विहां एक सूत्र दगम भिषामापाठ रोसे, तिका सभकाता पाहावरे बस परसवामोहेत पुरसपरिपाम ते छदमभकासको केतसापास चिरतिमय उत्सर माममावापेपएसमयमारहमासा। गोतम ! सरयम मायाको एक समबने अमसरन परसे उबारनवीर तो हमोनाप बरसे एमग ! बात् अर्यच मार्गशीर्षपीपारिपु वैशालान्तेपु सभारानमेपोत्पादादितिको प्रयत्ति यहार-पीपेसमागशीर्ष मयारागोम्युदा सपरिवपाः । ना त्यमागिरे जीतपोपेतिहिमपात १॥ इत्यादि कायमवत्येवंचतेइत्यादि । कापे अमन्युदरमध्यध्ययस्थितनिजदेण्य या नया जन्म स फाय प्रय पत्र तिष्ठति या प फायनवस्मा सत्र मापनवस्पति एतेन पर्यायेपत्ययः ॥ चहवीससवनराइति ॥ सीमाये हादरायपासि स्थित्वा पुन म होइ ? गोयमा! जहलेण एकसमय उक्लोस ठम्मासा । तिरिरक जोणिय गनेणनत ! तिरिस्कजोणियगन्नेति फालत केधिर होइ ? गोयमा ! अहलमतोमुझत्त उक्कोस पठसयच्छराइ। मणुस्सीगण नते। मणुस्सी गप्नेतिकाल केवघिर होट ? गोयमा ! जहल तोमुजत उक्कोस बारससवच्छाइ । कायनपत्येणनते। कायनवत्येति काल केयधिर होइ ? गोयमा ! जहणमतोमुजत उक्कोसेण चउवीससवच्छाइ । मणुस्सप मिर पापारियनेविगारे, ते माप तिमविप सधाराग मेघठपवावरमा चिक एवे । हिप पपेद्रो गभमा अधिकार -तिरिकमापिगम्भेषभ ते । तिषयोनिब सवयोगमा रेममयम् ! तिरिपषमापिय । तियरमामिछ। गम्भेविकासपा पिता । मभपये कातयको सप्ताकास गर्भमा बिहाररातिप्रश्न उत्तर मारमा पापपतामुएत । हे गौतम | मपन्यवको पतमुभत्तरी पोरीयमान । समाचपासमरा । उलटपको पाठ परसा तिर्यगना यमबाणा। मरणोगाभेवमलेमधम्मोमम्मेतिवारपायपरिरसार । मनुपनो सोनागभ भमवन् ! मनुष तोमेयि मभपणे का पोचतसादाम पिरतिप्रश्न उत्तर, मारमा पापेषतामात । रेमौतम ! चम्चयको प्रतर्मुबत्तचर परोस प्रमाप । मासे व दुधासमस पथराइ । उत्कृष्टयको बार परसमगे मनुचरोमा गभारी बोध । कारभवरणमते बारभवत्पतिवारमा फेरि । बाबमेरिपे एतले माता मा परमाहिरमा पोतामोयरोर तेरनेविपन मिवामय बनते बासमय गोये विपरीतेसासभकम्प परोपे एनीष पमारे समय भवम् । वासयो पोतबाबा रतिपय तर बोपमा वारंपतोमुततधारकारपसारा मातम ! यी पासुमा पा - - - स्था तमि मेमा मसरीरे उत्पद्यत हादशाबपस्थितिकतया इत्येवं पविशतियपाणि प्रपति, कपिदाए द्वादशवापि स्थित्वा पन सषा म्य पान तशरीर उत्पयत द्वादशवपत्पितिरिति । एमबीबेरमते ! इत्यादि । ममुप्पामा सिरपाच पीज हादशमुहतो न्यायद्योमिनूप्त प्रवसि त तप गवारीमा प्रतपपकस्यापि यो मवादियोनिप्रविष्ट बीसमय तकच पीवसमुपये रको जीव तत्पद्यत सब तेपा बीजनामिना सर्वपा पुत्रोन यतो त्पत ॥ फासएसपपुस्तस्मेत्यादि । सपसास्मपुरतति ॥ मत्स्पादीना मबसयोगेपि शतसहस्रपपक गर्ने उत्पद्यते मिप्पद्यते पत्यक चिंदियतिरिरकोणिययीएण नते ! जोणियप्लूए केवइय काल सचिठइ ? गोयमा ! जहन्लेणमतोमुजप्त उ कोर्सण घारसमुत्ता। एगजीवेण नते ! एगनवग्गहणेण केवडयाण पुप्तताए हछमागच्छड ? गोयमा ! जह लेण इक्कास्सया दोरहस्सवा तिरहस्सया उक्कोस सयपुहप्तस्स जीयाणपुत्तप्ताए हदमागच्छाइ एगजीयस्सणन्नते एगनवग्गहणेण केवइया जीया पुप्तताए हदमागच्छति ? गोयमा ! जहवेण इक्कोवा दोवा तिमिया उको यो योमोबायमार र परमररी पच मरोमे पो तिनिहाय मरोरनविय सपत्र वसा बारेवरसर एव २४ बरस प्रथमा एबमोव पारेवरस ती म पाहमयमेरे मेरे बोवारोतब मरीरमाहे पाम अपने पारवरस पीरो ण्व २४ बरस एपोवायरस । मतमपचिरियतिरिक्सवाचिय । मनुष परेदि तमा तिमानिस पहिब नेहने । वीपषमतेवानिपुर केपश्यमासति । पोज वाता योरस ते रेमगवम् । योनिभूत बानि विष समाध काममामात विना उत्तर । माममा पासपामारकोसेबारसमहत्ता । हगोतम ! अषम्यबको पतमुमा बरसो सोम र समयो बारे माता से पयोमरता मोमभूत परतावामार वेता विषयमान इतपगोयेपमएगभवम्मायकेवायारा पत्तताएशष्वमा मला। एसओ पवासातबार, एक भवने याबरो वेतलाना पाप आतापमो पावे पतसे फेतता पिताना पुरावे इतिमय उत्तर ! गायमा वा पासपासमा तिया बावसम्पुसमानीवापुक्तचाएमयमागचा । गौतम ! अमन्ये एकाना प्रथमा दायनो पथपा तीनमी ४ स्प रम्मवाय मपपपक पुत्रायां भवतीति ममप्यपोनी पुनरुत्पमा अपि पावो मनिप्पयनति इत्यामपरिसस्तपात्येतस्य मेहमयप्तिम नाम सोग समुप्पणा इत्यनन सम्बन्धा फस्पा ममा पुत्पद्यत इत्या ॥ कामकलापमापीएति ॥ मामसम्म नियत्तिसाया यामी अपया कम्म मदना दीपकोण्यापार सत्कप्त पस्या सा समस्ता त सस्पा मधुमस्य पतिः प्रवृत्ति पस्मि घसौ मैपुनप्तिका मधुमया प्रत्यया मु पस्मि समी सेण सयसहस्सपुहत्त जीवाण पुप्तप्ताए हवमागच्छति । सेकेणठण नते । एव पुच्चइ जाय मागच्छ ? गोयमा। इस्पीएय पुरिसस्सय कम्मकमाए जोणीए मेजणवप्तिएनाम सजोए समुप्पसद , ते दुहन सिणेह घि स्थलो मत प्रपासनारे तेमगप्पमा तमा तिर्य पना मोम पारमयत यानिभूतभय, तिवार मायमापने गतव मवमय नापति पासवानि पविष्ट मोबाहोमसोचे तिको तेपोजमा ममुरापनेविष ए जोव छपने ति बोव धोत्रम्मामो मघमानो पुराने सेमाटे को समायो नवसयनो पुपपणे उता पा चपबति । एमत्रोवर पिय नमतेण्मभवमहमेषायामोगपुत्ततापमामयति । एकत्रीयने - पाम्यामकारे भगवन् ! एक भवने पहरो के तसाबोप पत्रप घतारापाषे पतले एक पिताना केतनापत्रहये, प्रतिपय सार । गायमा पामेवाबाटावातिपिपासपसरसहमपुरानोवा पपत्तचाणामामति । रेमोतम ! अपये क प्रममा टाय अपवा वोन सरकारसको साप पुपाल पसने नयनामाव पप सप्तायतापनि अप व मरमारिमने बने सबाभे पनि माइनोनी वानिनेपिय मापापमोर गमप में अपने पने मोपवे परि माठे एबनेभवापानवतापपुषपणे भवे, मनुष यानिने घना वपर्ष पनि धानोपनको रतिभाव बमोमौतम पृथ-पोषमतेण्यबुधर नावाप्यमागाहति । तेविसेच बिसे प्रयोयने रममा मावत् नामासमोर घतावमा मभमारपत्रपणे सपने इतिप्रश्न उत्तर। गारमा सोपरिसम्पयन महापमापीए मेहमतिमसभापम मप्प या तेरु मामिानिाति । रेमोतम । तोपरपने चपन नाम छमनियतित यानिमविप पमा मदनारोपण्यापार तेरा निर्षि निकायम पनामानि पोय ने यापारसरलेत तेहमे मैनुनाति मात्ति वापि से मैयुमतिको पथमा मेनमारत जाने नमुन Hafe में ।

सापिफ प्रत्पपे मैपनमत्पपिक ॥ मामति ॥ माममामवप्तो रमदोपपारा देतमामेत्यथा सपोगा सम्पक ताति सीपुरुषो ॥ दुग्नशि ॥ उमय ता सा रत शारितसत्तम सचिनुतः सम्पयाति ॥ मनप्तिएमाममजोरत्ति ॥ मागुप्त मप मैपुमस्यै थासयमरतुतारूपणसूत्र ॥ रूपमामि यसि म सतवासविकार तता मासिका शुपिरथमादिरूपा दतमासिका ता एयमूरमासिकामपि मयर यूरं घनस्पतिविज्ञोपायपर्यायाप ॥ णति , तत्यण जहन्नेण एकोया दावा तिणिवा उहांसेण सयसहस्स पहात जीवाण पुप्तत्ताए हछमागच्छति सेतेणठण जाय हमागच्छइ । मेहणणनते! सेयमाणस्स केरिसेप्छसजमे काइ? गोयमा! से जहानामए फेइपुरिसे नयनालियया यूरनालियवा तऽण कणएण समनिधसेा , एरिसएण गोयमा । मेऊण सेवमा मामे सभाम मपक अपने निम्तापरप बनायो पिरमर सेहमतें पिर एकावर इस्वप । तत्यवमापावादावातिभिमा वासेपसम महम्मपुरत्तीनाम पत्तनाममायच्छति । तिही समययाविप च वायासबारे, अपम्पको एक पमया दोन प्रमया तीन जोवप गभमा उप में समा गत सहस्र पशमना ते नवमाप घोष पासासकारे पुत्रपर्षे सतायसा नपर्व पापे इत्यथ । सेतेपीपमालपमागच्छति । ते से पगातम । सावत् नापारयोग गभनविप पत्र पये वायसापाचे अपच । पिये मेयुनना पधिकारमको मेमनीष प्रसंयमपमा प्रस्पे। मेहुने चपमावस्मरिमे प्रसंवमेजवर । मेन पगवासकार, भगयन् ! सेवनायकापोप ग्रेगो पसममकर इतिप्रय, उत्तर । गाममा सेमहामामएफ परिसपनामिमापूरनामिना । हेगातम ! ते सपा ति नाम रति पामनाममा पोईपरप पपाममाविकार ते त कोये ते भरी वासनो भूम को पथमा वनस्पतो निरोपमा पबमव ते पूर महोये तेम् भरोगासमो मममो मो । ततपशपएप समभिधसेवा । तप्त आम्ब थमान पग्निकरी तपा पासोमा पोचा समाका ते भयमोमारे पे तिगर तेरुत तमा र सब विष्यमपामे बिनाशपामे इस्वध । परिमपप गारमा मेहरसेपमापमप्रसत्रमे बबरपाया म बानासबारे अंगातम । मैथुनमस्तायको यामिमाहेरपाले, बेलोप ते प्रतें मटन पुरुषतिग मेकरी विनाय पमा भएण्या प्रस - - - सममिपसेन्जति ॥ इतादिसमप्रियंसना दिड दा ये पाम्पमेपो दृश्प एव मेघुम सेवमामो योमिगतसत्या महमेमो विध्यसपे देतेप कित्त य पातरे पश्चेन्द्रियाः भूयन्तइति ॥ ररिसएपमित्यादिव ॥ नियममिति, पूर्व तियानमुप्यात्पत्ति घिचारिता ऽप देयोत्पतिषिधारणाया म णस्स श्वसममे कम्बइ, सेव नंतेनते! ति जाय यिहरइ । तएण समण नगय महावीर रायगिहान नयरान गुणसिलाच चेहया पमिनिस्कमइ पमिनिरकमहप्ता पहिया जणवयविहार विहरइ, तेणकालेण तेणसमए म तुगियानाम नयरी होत्या , यमन, तीसेण तुगियाए नयरीए यहिया उत्तरपुरच्छिमेटिसीनाए पुप्फवइ एनाम चेहए होत्या, यमन, सत्यणतुगियाएनयरीए यहयेसमणोयासया परिवसति , थहा दिसा विच्छिम गमगरे । मेरमत पति बापविरा । तत्ति भिमबन्। तमेव ते सवसलाई पम्पमानहा रमकतो यावत् नमस्कार गरी सयमेतपेपरो पामामेभारता बका विपरे । तापसम भयर्वमशागोरेरायगिहापोषरापा मुसिमापापायापा। परिसा तियंचमनुष्प उत्पत्ति विचारपाकीधी। रिये देव उत्पत्तिमा | विचारपामा प्रतापयोएपी-विषारे बमप ममवतबीमहामोरनामो रामयपनामा नगरपको गुरुशितानाम चन्यथ को । पतिपिठमा रत्तानो कसे भोरसोये । पहियानपावविहारपिारा । बाहिर बमपददेपने पि विहारेबरो विपर। तेबासेप तेलसमएए । ते परमप्पियो गोया पाराम बास मेषिय ते समपनेविषै । तविमानाम बररोजाम्यापरमा । तुमोया इसमामे नगरोगे, तानो वर्ष उवाई उमियो पापा । तोचतुंगियाएषयरोए । तोप पायातबारे तमिवामाम नयरोनेविगे । पहिबाउत्तरपुरश्मिदिसोमाए । मारि धारपूप दिगिमा विभागमेयिप एतमानपनेविगे। पापन एनाम पाया गया। पुष्षयतो सेनाम चेम्स मधाबतन यो पर पहबार उपासमाविमो तिमपायो । वन्यपतुंगिपाएपपरोए । तिहासमा भ समारे, तुमोमानाम मगरोनेविपे । बासमपावानिमापरिषति पाठा दित्ता। पर्मा यमनसा तेजना उपामय सेमय पतरे वाया बसे एक पर्व धन वापपरो परिपून प्रसि तेषा मामा पिपिपरिपहारमयनामधारमापारना । पिसार परामा पचारि मार सावनाये दमाह । तरसमात्यादि प्राप्ति । माया पनपाम्पारिनि परिपूर्ण दित्तत्ति ॥ दीक्षाः प्रसिद्धाः दृसाया एप्पिता ॥ विधि सविपुतनवयसपनासबमायापार म विस्तीर्गनि विस्तारवन्ति विपुसानि प्रपुरापि नवनानि शापि अयनासनपानवाहने राकीयामि ये पा ते तपा प्रपया विस्तीर्वानि पिपुलानि भवनामियेषां अपमासनयानषाहनानिया कीर्यानि पुरवति या त तपा तत्र याम गेम्यादि धा हम वपादिम मापण्यामापपरपया ॥ बहु प्रभूत पम गरिमादिक तमा मुदेव पाताप सुमर रजत प रूप्यं पेपाते तपा ॥ मम्मेगपळग सपडता । पायोमो दिमुपादिवया पपरान प्रयोमध कसातर वो सम्प्रमुखो व्यापारितो ये से तथा ॥ विकिपविठसप्ततपापा ॥ विष्ट हित पियिष मुम्मित पासोबमोदनत उधिष्ठावझेपसम्भवात् विदितंषा विविधविच्छित्तिम द्विपुल मका पानक मेपा ते तथा ॥ बहुदा सोरामगामसिगवेगप्पनूपा ॥ मानो हासीदासा पेपा गोमहिपमसबाय प्रभूता येपा ते तपा गवेसकातरवाः । यानरमापरिभूपा ॥ यहो विपुलनयणसयणासणजाणयाहणाहणा बजाधणयझजायस्वरयया थागपगसपउत्ता यिच्छन्यिविउल लप्तपाणायजादासीदासगोमहिसगषष्ठगप्पनूया धकजणस्सएपरिनूया थनिगयजीवाजीवा उपलहपुमपावा यासघसयरनिहारफिरियाहिगरणयधप्पमोरककु सलाचसहेजादेयासुरनागसुयणाजरकररकसफिशरकिपुरिसग पागत् मकट गारो प्रमुख पपादित करा पाकोप व्याप्त । पापा । पापन गरमादिक। यसबायस्वरयया। धो पातकप सुपच रसय पा बहाने। पापाम पयोगसपउता । विगुणा पियचा वधारमा भयो देवा धनादिक विम प्रबापापे विसयमा पारसयम दमबासी धमदेपो ते पागे मारावे मापारारिक पारी साखसहित । विपणियविपसमत्तपारा । पोसाक पोमचो पर्दा अगादिक भूठानापिये पाबा रेनाधर । पसासाराम नामरिसगोत्यप्पभूपा । पादासोरासमाने माय मेष प्रमन प्रया घडामे। पापपपपरिभया । घाँसो माने पर प्रति मतमाटे इगो परामबा मवाय । पभिमनोगावोवा । आमाहे जोव पत्रोवमा सरूप जणें । उपसापुरपावा। पासस्या वकरामागरप्रमय व्यस्त में सोफस्या परिप्रवीयाः पासवत्यादी क्रियाः कायिपादिका प्रधिकरस पीपप्रकादि ॥ सनप्ति ॥ भामयादीना सेयोपादेपतास्यरूपयेदिन ॥ असोज्वत्यादि । विद्यमान साहाणं परसाहापिक मत्पन्तसमयत्वा चपा से प्रसादाप्पा शेष रा दवादयसि यम्मधारय प्रपया षद सेम प्रसाशाप्पा प्रापद्यपि दवादिसाबायकामपचा स्रयास कमस्त्रयमय प्रोफतथ्य मित्यदानमनासयात्यपा प्रपया पासमिनि प्रारम्बा सम्पकाविषसनमति न परसाहायक मपेचत स्वपमव सरप्रतिपातसमर्पस्या मिनठासनात्यन्तनायितत्वाति तम दया येमानिका ॥ अमुर त्ति असुरकुमारा ॥ नागत्ति ॥ नामकुमारा । उनये प्यमी मवमपतियिझेपाः ॥ सुघरसत्ति ॥ सहसाः न्याशिफा यसराधसकिन्सरविपुरूपाध्यन्तर | विोपा ॥ पसमत्ति । गरुमयमाः सुपरकुमारा भषमपतिषिझेपा पन्धवा महोरगाय ध्यन्तरविज्ञापा ॥ पतिकमविग्यप्ति ॥ धनतिक्रमणीया रुलगघचमहारगादीएहि देवगणेहि निग्गधा पाययणाशणतिक्कमणिझा, निग्गथे पाययणे निस्सकिया निक्करिकया निहितिगिच्छा लच्छा गहियठा पुच्छियठा शनिगयठा येणिच्छियठा ठिमिजपेम्माणुराय बेरे पुस अभप्रबतिरूप पापमपम प्रतिरूप तहमाफम । पासबमबरविवारशिरिमारिमरपयधमाका सना । पायगकम प्रावधानाम्यामक सबर ते अमदार राबवा कमोथेरपाठप कायि माटिक्रिमा गाडोयबादिक बधप्रति वधादि पारभद माघ मषमा जयप पतमा विप पतिगहाई। पसोवया सर नाग सपन पास रस्त किमर विपरिम गएर गंधप महोरगादि एवि देवगनेहि विम्यपापा पावयपापा प पतिपमपिया । पापदाकासे परिविको देवतामे सनरेनहो पापवाबोधायम पापबमागपोये पायो मनोतिनो पथया पापो ए मारम्या समविताको बसावमा तिपारे बोधाना महार नाक, एतस पोसब तेरने पवायदेवाने समम एनायता जिमगासन पम्पन परिपम्पो बहने देवर्षमानिय प्रसरङ्गमार नामकुमार एवं भवनपतीवियप । मुवपत्ति । मार्च ते ज्योतिषी यच गास विपर पिप ए प्यतानिवास मा देवघापा मा गिराने एामा मुगबुमारपिशेप गक्षम मातरम एप्पतर पिपांना ए पारिदा रेवन गरेसमडे सापुमा प्रमपम सि प अपातनीयाः ॥ लदहति । अयमात् ॥ पहियष्ठति ॥ प्रधावपारचात् ।। पुझियाति ॥ सागपिमापमानकरमात् भनिगपठति ॥ प्रमिताप। स्पानिगमनात् । यिपिनियति । एवपर्यापस्सापसम्भात् ॥ पतएय ॥ पहिभिजपमानुरागरता ॥ अस्पोनिष सीकसानि मिसाप तन्मध्यवती धानु रथिमिम्मा स्ता प्रमामुरामेस सायरामवचनमोतिदपकुसुमादिरागेर रकाइव रचा येपा से तथा प्रयवा ऽसिमिन्मासु जिनशासनगत समानुराम रता पे ते तभा केमो मसेनस्याह ॥ अपमाठसोहत्यादि ॥ प्रयमिति मालतवा रिद ॥ भाउसात्तिा प्रामुममिति पुत्रार रामन । मसति । प नियन्यप्रयवनम्यतिरिक्त पमपान्मपुत्रकलप्रमियप्रवबमादिवमिति ॥ प्रसिपपसिहति ॥ सवित मुखतं स्कटिसमिय स्मटिक गित पात पितरूटिपा मोनीन्द्रप्रवचनावाप्त्या परितुष्टमानसाइत्पप इतिषतम्याल्पा, पम्पत्याहुः सङ्गितो अगसारपाना दपनीयो दीकतो रता श्यमाउसो निग्गपे पावयणे छठे थ्यपरमठे सेसे शणठे असियफलिहा छवंगुयदुवारा थियप्ततेउर तयको पतिकमायो नमकीय पतये ते या निवना प्रवचनबजी पतला शेवगा चमाया पमेनहो । चिम्पपापयष । निमना प्रवचननेविये नायता मामावि भावादितामहे किया महोई । विम्मबिया पिरिमापिपितिगिशा सगागक्षिणा पुचियाा । एकपो या तिवारी रहित निरस जित पन्बयनोमोबाचा तिबरोरहिन र दानादिक परमासो तिरोरधित से मिश्चितिगिया कसोये । सुरवायो सनाई प्रय पवधारयो पापमो सयमयो पो सोधाई पदको पमिगत विविधिमा । प्रसना पानापोभे चिरपरिप पौधा पयो नियममोदी पा शिम)म पाना पाम । पीमिअपेमारामरता । हाउमिनो ते पारमधर्वी धातु से सवनं वरन प्रतिष्प मुभादिरागेवरी रम्पानोपरे रम्यादामा पपा पस्थिमिवानसिप विगमासनगत प्रेमानुरागरा निक्षे। परमाएमा विम्योपाबयरेपो । ए प्रस्थप पुपाटिकना पामत्रप मापना प्रबरनमाग त प्रभाजनाईएको माघसाधनोतु परमायसे मेषधावता । पमपरम से से पभो। प्रमघ निराधमपनयो चोला धनधान्च पर सादिक मानादिकले समय मापनाममा गयो अफिलिहा । भत्ता स्पटिन प्रिम निमधित तथा दानदेवानेकाव पागसदोषो ~ तिरवीन पाटपबाहामा दपनीत इत्यय परिपो मजा येवो त उनि परिषा प्रयषा अधिमा पाद्वारा दरमप्त परिघा पग ते तख्यि तपरिपा प्रौदार्यातियया दतिपदानदापिस्वन नितुमगा गाप्रपशाप मनगलितगद्वाराइत्यर्थ. ॥ अघ गुपदुधारेप्ति । अप्रायतद्वारा फपाटा रिनि रस्पगिताधाराइत्यप सदधनसामम म तोपि पासविकका द्वित्पति सोमममापपरिपहना दादगिरस सिम्ता तिभाष रप्तिपदम्या या अन्यत्वात: मिथुप्रवेमार्य मौदापों दस्थगितगाद्वाराइत्यर्ष ५ पिपप्ततेवरपरप्पयेसापिसानोति ॥ माकामा प्रीतिकररया त पुरया पहेवा प्रवझो पेर्पा ते तपा प्रतिपार्मिस्तपा सपना मानीपा नत्यपः भन्यस्याः पियप्तोति ॥ नामोतिरा त पुरणच्या प्रवेश मिष्टवनप्रवेशन पपा त तपा अनीसुताप्रतिपादनपर पेत्य विशपसमिति प्रमया ॥ पिपतान्ति । त्यस प्रम पुरगापा परकोपयो पथा मपनि प्रदेशो पे मत तपा ॥ सत्यादि । भासवता म्पपुत्र तामि गुणा गपनतानि पिरमवानि पौषित्येन रागादिमित्तप मत्यास्पामानि पीतष्पादीमि पोपम म्पर्वदिनानुष्ठान तथो पवासो यस्पाम पीपपोपपास पतपा दम्दो ऽत सौ युक्ता इतिगम्य पोपधापया मात्सुक्त पौषपच पहा याविषय त वसो पिरति तदापखाच ॥ पाठहसत्यादि को दिया अमावास्या ॥ पमिपुप्तपासपत्ति ॥ पारा परधरप्पसा घहिं सोलधयगुणवेरमणपञ्चरफाणपोसहोययासेहि चाउदसम्मुद्दिष्ठपुणमासिणीसु पनिपुण पोसह सम्ममणुपालेमाणा समणे निम्ग फासुएसणिोण असणपाणखाइमसाइमेण यत्यपमिग्गहकरलपा नमो। मायबारा । बारा तेशामा पारवाना बिमार। रियत्ततारपरपरप्पोमा । प्रोविवारिस व पुरविणे तवा परपरनेविप प्रयेम ना एतावा विषहीने मने तेजना पश्मिासनको। वारिसोपवयमुषमयमेरमत्रपक्षमारपोपमोबमारियोसपुत परत गुजबुत बेरमच उरित तपे नानाप्रबारे रामादिक पगो निमत्त पपवार पोरमीप्रमुख पोपच परिमानहान तानविय उपवापरायोति गति एतावता गुप सहित पोपपवरना दिसते पोपपदिन करे-वारणमुगपुषमामि धीमुपरिपुष्पोनापपरपारेमाचार पाठम et सियभे - राटिपदा पतुधिपमपि सवतः ॥ यत्पपमिग्महकबसपापपुम्पेसति ॥ १r पतद्ग्रहः पात्र पारमोबम रजोहरण पीठ मासन फतर मवष्टम्भ मपना अप्पावसति वात्ससारकोया सस्तारको सपुतर एया समाहारहम्तो त साम ॥ महापभिगशिरहिति ॥ यथा प्रतिपको न पुन हां सक्षातः ॥ परत्ति । मुतबद्धाः । यसपत्ति समय मुषिधितनपम्पहरीरसुदरतावा तेम सम्पमा मुत्ता सपसम्पधा ॥ लक्षालापयसंपन्महि ॥ यपुछणेण पीढफलगसेजासधारएण सहनेसजेणं पमिलानेमाणा ग्रहापरिग्गहिएहि तवोकोहि थप्पा मनायमाणा विहरति । सेणकालण तेणसमएण पासायच्चिजा थेरानगवतो जाइसपणा कुलसपणा घलस प्रमागास्मानापूनिम ए पपरिनशिप पूरापाहार । यरोर समारपवनपर्य ५ पयापार " ए चार सयो परिवारकरता पोपच पशुपासताबाई । ममर्थ । वमन तपम्यो । विषपापमपि प्रवपापसाइममाश्मेष बत्वपरिमासपासपंरेस पोठपरगसेबासमारण भोसाभेसोप पनि मभिमाग । निर्गप बागायतर पारित तमेसाधुने पास पवाबोस दूसरहित पात्र मा सात प्रमुख वा गमावषाभेसमव से कामोपापी म परसारित १ भेट पा रुपयमा २ सापो प्रमुख साप । सूठ से पोपस घामपस प्रमुख ४ एपार पाहारकरी सो पम पम्पोपा का पमा रबार पापा पामन कठोपर पानापारोया बसति पथवा माटा सबारा मारहासबारा तिसरी पो पोषध भेपन चूरिक सिरी प्रतिमामा मिरापता वा प्रपतपासपरिपिहितावह पप्पाभावमापारिति । बेहवा पादसा तहमा पास एषा घेतपकर्म विगतेबरो पामाने पापपो पदव मुराधम पाम तोमतत्व पनुमोटता पका विचरसे याममा । तपासेव तेषममय । सेवासमेविषे ते समय नपि । पासावधिया। पाममा सामोगा पपत्यमवानिया प्रपिचारिक । पेराभमबसामातिसपना कास सपमा वरासपण संपया विपरमपमा । का मामएमय मायपच तिबरो गाभता भसा प्रबमा सहित पिताप प तिवारो माभन ममा पट समयम तिरो मुल गरीर सुदरपी न यामम भसा मुश्पनन नम सेवाबरको निबरो यामम भसा। चारमपमा यसबसपा परित्तसपमा समासपना साघरमपमा । मत्यादिक १ - सम्बा प्रसिदा सयमोवा सापक द्रव्यतो अपोपाधस्य पावतो मौरपत्याग । पसीति । मस्विनो मानसावरम्भयुका ॥ सयसीति । सेज स्त्रिम घरीरप्रमायुक्ताः ॥ वासीति । वस्निमो विशिष्टमनायोपता पसिनोया विशिष्टवचनयुत्ता ॥ बससीसि ॥ रसातिमन्तो नुस्त्रार घेतपु मारुतत्वात । जीविपासामरगनपविप्पमुकत्ति बीवितामपा मरगनयनपविनमुक्ता ये त तपाइह यावरकरपा दिदं दृश्य - तपप्पदासागुम प्पहागा युगाध सयमपुरा तपः सममग्रहमा तप सयमयो प्रधानमोपाइतानिपामा तथा करयप्पडाणा परमप्पहाणा तत्र फरणं पिठविमुगादि परर व्रतमापर्मादि मिम्महप्पाला निग्रहो ऽम्पायफारिवा दगमा मिदपप्पहासा निधयो पश्यहरयान्युपगम सत्य निवपोवा महवप्पहारा प्रसवप्पहावा मनु जितबोधादिस्वा माहुपादिप्रपामस्य मधगम्यतम्य तरिक माहवत्यादिना ? उम्पत तो दययिफ सताका माहयादिमधानत्वेतू दयानावएवेति सापवप्पहाणा सारष नियासु दधस्य खतिप्पाहाणामुतिप्पहापाएपविश्यामतपेययननपनिय | मसबसोयप्पहावाबाहम्पया सत्प्रचाः साही भुदिस्तुस्वम शोषय संपदावा मित्राणि जीवानामिति गम्प प्रणिपामा पप्पुम्सुया प्रयष्ट्रि पणा स्वसपणा विणयसपमा णाणसपणा दसणसपणा चरितसपणा लजालाघयसपणा ठयसी तेयसी यच्ची जससी जियकोहा जियमाणा जियमाया जियलाना जियनिद्दा जियइदिया जियपरासहा जीवियासा धान तिरो याभनयुब सपा तिरो गामना सामायिबादि पारिप तिहरो गाभम भसा धावपसिह साल पमा समम तदरो मुख द्रपदो पल उपधिपना मायबो भारवस्याम तेत । प्रायसो तेयसो बरसो बससी। पित्त अपरमसहित गरीरमभा सरित रिमिष्ट प्रतिययसरि त भरमा पिपिए मपपपनसक्ति पाबमानसपत । मिरवाहा वियमा वियमा विरमाभा विरपिदा । तपाई सामानोने पराभरित गा पप्पा मान पाकार, मेरे मियोपोर माग परपनमा नि बोम्मा भयोधार शाम माचच मि बोतो एपको निद्राप निणे Iffair या जिसपरोमा । बोस्यारेममादि पापादोन बोम्पा पागोस परीसचमोरियाममरनभरिमा कोरिया परबमा म - सा सुमाममरया अधिपसिलवामरगति प्रथिदा स्पविरतानि मिदूपणानिया प्रमव्यावरगामि यपात तया ॥ फुप्तिमायबनूपत्ति । कुत्रिक खगमापपातासला पूमिप्रप, तत्सम्भव वस्त्वपि कृषिक तत्सम्पादक प्रापरोक्त कुपिकापर सहताः समापिसायसम्पादनसम्भियुक्तस्येन मानगुणापतस्पेनवा : तदुपमाः ॥ मदिति । साद सत्यपः सम्परिपताः सम्यकपरिषारिताः परिकरमावेन परिकरिताइत्पयः पम्नमि मरणजयसाकविप्पमुक्का यजास्सुया यजपरिवारा पचहियणगारसएहि सछि सपरियुका शहाणुपुछि चर माणा गामाणुगामटूइजामाणा सुहसुहेण यिहरमाणा जेणेव तुगियानयरी जेणेन पुष्फवइएचेइए तेणेय उ यागच्छति उयागच्छहप्ता शहापमिलव उग्गह गिरिहप्ता सजमेण तवसा थप्पाणनावेमाणा यिहरति तएण तुगियाए नयरीए सिघाफगतिगघउक्चच्चरघउम्मुहमहापहपहेसु जाव एगदिसान्निमुहा णिज्जायति , | य प येवरकार रबित तसे समप्रकारे ममापिंग मुल । वापत्तियावअभया। यावत् नम मत्स्य पातास माहि पण ते मि बाटे शाम ते वापिका पर साये मरोपा माए समान समुलक । पारममा पापरिपारा । एका वृत्तमा धारवाई घा परिवार हामे । परिप्रमगारसएहिमपरिग । पाप मा तेसहित परिपाका भसे परिवारमषित । प्रारम्विधरमाना । यथा पूर्व पनकमे भासताबा विचरतावमा । गामास भामरयमा । एकपामधो बीमामे वातावा । सुरुसुरेपविरमारा। ससे सबरी विधरताप का सचाय प्रमतिय विशारो परपसनको गियापपरो। भिड लगियानामे नमरो। वपुष्पयतोएचए। जिला पप्पवतोनामे चन्य यचायतनई। तेषावागरह तिच्यागामाता । तिहाँ प्राय पायोम । पापहिउमाठगिणिताचा सपा प्रतिरूप यबा याप्प अभियह ग्रहाने। सममयतवसापप्पाचभाषेमाचा विपरति । पायताकम पारोय ते समम मममाबम निम रोये से सपते सय मतपेवरी पामाने भावतामा विचरहे । तएपगियाएषयरोए । तिवारे तुगिणमाम मगरीनेविषै। मिघासमतिमारपरमापा सिधारा पसने पाकारनामक तोन यसोमिचे ते मानक पारगसो मिसेत स्थानक घको गोमिने से मानक राजमार्ग - - . ममममतैरेव सिंपाझपत्तिाणाटकपताकार स्थान विक रप्यायपमीलनस्पान चतुर्फ रप्यातुममीलनस्पान घस्वर यदुतररप्यामीसनस्थाम महापपी राजमार्गः पन्भारप्पामा पावत्वरणात् गजबसद्धेश्याइत्यादिपूषष्यास्पात मनदृश्य । पक्रिसुतित्ति ॥ अभ्युपगम्यन्ति ॥ सपाइति । तएण तेसमणोयासया इमीसेकहाए लच्छासमाणा हठतुछा जाव सदावति , सदायित्ता एववयासी , एव खलु देवाणुप्पिया पासायच्छेजा घेरानगवतो जातिसपणा जाव शहापफिरुव उग्गह गिरिहप्ता सजमेण तवसा छप्पाणनायेमाणा विहरति , तमहाफल खलुदेवाणुप्पिया तहाळ्याण थैराण नगवताण नामगोय स्सयिसयणयाए फिमगपुण निगमणबदणनमसणपमिपुच्छणपजुयासणयाए जाव गहणयाए तगच्छामा एक मीमाष। बावएमरिसाभिमुहारिवाति।पावत् सदमको गावपसोवा स्वादि पूर्वपत् एकदिमि माम मुप पनी म घासाक पाये | तारतेसमपापागा। विगारे ते चमबापासष साधसेवक चापकाला मोमेका एमवी कवा यार्सा पर । मगाममापा समावसदा रेति । पापामाते पाभव हम सतोष पाम्ग सतरणमा यावत् माहामारि डाव तेगोने । एवषयासो। म काश्या । पपपसुदेवाण प्पिया। इम निये रेषताने परि गाम । पासायविना । पापनावना पपम्बगियादिक । पराभगवता । पिर मानवत । प्रातिसपपा । मातियरी समुन्न । पापमहापरिपूरपरिमितिचाच । यावत् समाप्रतिरूप अभिगा मुहाने । सबमेवतबमापार भाषेमावाविहरति तमा। मयमेरो तपेपरो पा मार्ग भागतापका विचरेर तेमाटे । महाफसबसुदेवाचप्पिया । महाफम उत्कृष्पम मोटापर निरं देवमेपनि पाभ । कार्यानवेरामभमपता ने पमा पूर्वबाट तागा मविर वाद घानवत । पाममायमयिसयषयाए । तामा नाममात्र पनि मभिवणे एतचे नामगोषमामा परि महापस निमयपुरपमिममममदरसमस बपरिमुषारपनुमासमाए । बायो प्रम इति बामसामयी बसो भाइमामई पचि अभिगम भारी बारवे नमा परसे मनोगत सरेश वार्ता पूरे गा मात्तिने परोपागारयाए । बापत् पर्वादिकमा नुनमा गाभाचरेवारपिण।

| स्मोपानि पतिसम्मति ॥ नानानन्तरं कसं पतिकामयः स्वादेवताना ते तथा ॥ कपकोठयमयमपायश्चित्तति ॥ रूतानि कौतुबमानस्था म्पर प्रापपिप्तामि दुश्मादियिपाता मवायकरसीपत्वा येते तपा अम्पेत्वारः । पायश्चितप्ति । पादेम पादेवा कुप्ता पर्दोपपरिहा राप पादपुप्ता कतकोतुमानाय त पार गुप्ता यतिषिग्रह सा कौतुबामि मपीतिसकादीमि मानानि तु सिदायकदप्पक्षतर्याङ्करादीनि सुदप्पाबमाइति ॥ मुद्धामामो वयापि वेपोषितानि अपवा। मुदामिन तानि मावेश्पानि प रावादिसनामधेशोषितामि समावेश्यानि ॥ य त्यापपराहपरिहिपप्ति हवित् पते पवित्र वत्याइपवरपरिशिपत्ति । तम प्रपमपाठो व्यक्तः द्वितीयस्तु प्रवरं यपानवती त्यष परि ण देवाणुप्पिया घेरेनगपते बदामो णमसामो आप पजुयासामो , एयणे इहनये परनवे जाय शाणुगा मियप्ताए नपिस्सइ तिकटु शणमणस्स रातिए एयमठ पमिसुणति, पमिसुणित्ता जेणेव सयाइ गेहाइ ते णेष उपागच्छति उपागच्छदत्ता एहाया कयवलिफम्मा कयकोउयमगलपायच्छिता सुरुप्पाघेसाइ मगलाइ भनी बावे यासातबारे सयाम । बरेभमते पदामा समसामा । बब त तपेयरोग मानवत मम ममावारी बाया पाकर पा मम पार पराये । घामपामामा । पावत् सेवाबरोये तेजनाकामा, परिहत प्रोत मादिपिचार पगीकारकर । परो राममेगा परभवेषा।पाप परासायबिपे पराबविप। पाउयामिमताएगावभविसतिबा । पनुमामोपचाने यावत् इसे साबरीमे । पचमसम्म प्रतिर । पा परमे पा से । एपमापरिसुति । एता पसरे पयोमारकर। वर्षय पया समार गिरा ।बिहो पाप पापण घर । तेहवागहतिसवामरणाता।तिका पाप तिला पायोने। पाया। पानकोप । कासिमपा । पापराधरनारेवता ने योषा बसिनम बेप। कामकोरगमगसपायरिहत्ता । पोधोई वात भारमाठे मगसो पचत दधादिव प्रायवित्त तिमव चाटसा बरे को कई-पस पाभरादि पम ठामें कुश पहिया विमष्टि भनागे। माप्पासा ममहार पसार पपरपरिहिया । राजसभापय सषित मगतोष पायावष प्रधाम परिया। पप्पमापाभरपासंकियसरोरा । भारयो हिताः प्रवरपरिपिताः ॥ पापविहारधारेवति ॥ पादविरेचन यामविहारेव प धारो गमन स तथा तेन । भनिगमति । प्रतिपस्या म निमश्चन्ति समीप गम्पन्ति । सचित्तावति । पुप्यताम्यमादीना ॥ मिउसरण्याएति ॥ व्यवसमनपा त्यागन । अधिप्तामति ॥ घरखमुद्रिकादीना प्रविसरबपाएप्ति । अत्मानेम । एनसारिएकति । अनकोतरीयझाटमाना मिपेघाप मुक्त ॥ उत्तरामगारपति ॥ उप्तरामा सप्तरीयस्प दरे म्यासवियप पा स्पर्म दृष्टिपात । एगप्तिकरणति ॥ प्रमेकत्वस्पा मेफानयमस्वस्स एकस्वारस एकालम्पमस्वारप एकत्योधरण तन ॥ तिथि यस्याह पवरपरिहिया थप्पमहग्यालरणालकियसरीरा सएहि सएहि गेहेहितो पमिनिस्कमति पमिनिस्कमह त्ता एगयत मेलायति , पायबिहारचारेण तुगियाए नयरीए मज्जमऊण निग्गच्छति , निग्गच्छदप्ता जेणे घ पुष्फवईएनाम घेइए होत्या तेणेव उपागच्छति , उपागच्छश्ता घेरेनगवते पचविहेण निगमेण शनि गच्छति , तजहा–सचिप्ताण दवाण घिउसरणयाए, शुचिताण दहाण विउसरणयाए, एगसाफिएण उ मुखमा एमाप पाभरप तकरो मामायमाम पियार गरिवर । समिर शनिवापरिपिसामप्ति २ सा । पापमा पापपा घर की नोक पापपारसको मोबनोगे । एमयमामिवामति । एवम एकठा सवमिसे मिनोन । पायरितारपारे । पार पासवेकरी पतमे प मारि पाय पिमा । तमिगाएषयरोएमयमगोपविम्मति १ चा । तुगियानाम मगरोपको मषे मधमागेकरोने पपमागे भोसरे नोसरोमे । अषपु मातोपोए । विहां पुपवतोनाम महा तेरेसवामहति २ चा । तिहापाचे तिर्वा पायोने। मेरेभगवतेपरविरुष अभिमभर भिगमवि। त पहा, पर भूत तप हर मरि जानबत सहमम्पद प्रत परमकारने प्रमिममेरो तेपासे पाने पमिगमकोई अपित्तामापविण्सरपमा । पुष तागारिक परित्तवप नेहमो तथा हाडवा तिरो पिचित्तामा प्रविमरवाए । बम मुदिबादिक अपिताय तेनो चरिणामहो तिरोएगायत्तरापमपाका दमापषित एकपटाबमा तरोयनो तीनो पानिपते परयो । मुफापन . पत्र मावो - - - प्तरासगकरणेण , घरफुप्फासेश्चमरिपगहेण , मणसा एगप्तीकरणेण । जेणेय धेरानगवतो तेणेय उयागच्छ ति उयागच्छन्ता तिरकुतो छायाहिणपयाहिण करेति आय तिबिहाए पछुवासणाए पयासति , तएण तेरानगघतो तैसि समणोषासयाण तीसेयमहइमहालियाए परिसाए घाउमाम धम्म परिकहति जहा के सिसामिस्स जाय समणोयासइत्ताए याणाए याराहए जवइ, जाप धम्मो कहिन । तएणतेसमणोयासया घेराण नगयंताण शतिए धम्म सोचा निसम्महतुछ जाव हियया तिरकुतो शायाहिणपयाहिण करेंति, - सिपमा टिपतिवार हावा मा पठाये । मबसाएगत्ताकरपेष । पनबारसमो मनने पपपपरयो ठामेराणया ५ मकरो। मेराभगवंताविहां सरिरममपत। तेरहवामपति २ सा । तिला पाय तिकापागोमे । तिसतोपापारिपपरेति २ ता । तोमगार वोमा पामायो जाम मन परिषदिने प तोम प्रापिपा बरे करोगे । बामतिविशाएपनयासबमाएपपासेति । पावत् विषिष मन पचन पायामी से बनाये समोरा पनुमोर एतीन भमे ऐगाये उपासनावर। तपराभमवतो तेसिसमपोवासयापतोसेममातिमहासिमाए। तिबारे ते स्वविर भाग चत ऐसयत ते तेने यमचापामबोने चापकोने ते सर्योबाट प्रतिमाटीका धमपर्चा तिरो। चाउचामधनपरिषति । चार महायुतम्पधर्म पार्ममाममा सेनानिय तमोकी । वायोमिगमिम । विम पोमोफुमार अमरेमो तिमबह । पावसमधीवासात्ता । यावत् श्रमपोपासक बार पपपासी। पापाएपाराहरभवा भावीपीपी । पात्राये पाराधन हो इसा यावत् धर्मकामा पमे धमापासले पंगोबारकोपी । वएपतेसम पापामगा। तिबारे ते यमापासव बापते पराभमवताप पतिए । सरिने प्रामवतने समापे । धणसापा। शिविधधम साभवानी । पिस पारिपा। प्रतिय सम्पक प्रबारे पपामा पहननेविष रिमामधेशमा प्रवत साभवाने पास धोनो ते यावत् सदयमेरिव साधु उपदेग समिक्षवाबी पापमपा पवमानताबका । तिमुत्तोशयाविषपमारिपकरेंति २ ता। तोमवार खोमरापासापो प्रदचिपावर यरोमे। 1 मायः ॥ पुरतवर्षति । पूर्ववप सरामावस्वाचावितपस्या धोतरानावस्यापेक्षया सरामावस्थायाः पूर्वकासमाविस्यात् , एयसयमोपि , प्रयपास्या तरारिषमित्पः तवम सरापकतेम सपमेन तपसाच देवत्वावाप्तिः रागाशस्य मर्मबन्धोतुस्वात् ॥ कन्मिपाएप्ति ॥ कम विद्यते पस्पा सो कम्मी तनाव सत्ता तपा बम्मितया अम्पत्वा कर्मा विकार काम्मिका तया पतीन कम्मोपेर देवत्वावाप्ति रित्पर्य ॥ सगियाएप्ति । महो तसममोवासए एवषयासी, पुक्ष्सजमेणधजो देवा देवलोएस उववजति , तत्यण थाणदरस्किएनामयेरे तेस मणोवासए एववयासी कम्मियाए शो! देया देवलोएस उघवमति , तस्यण कासवेनामथरे तेसमणोयासए एवषयासी सगियाए थजो ! देवा देषलोएस उयवति । पुछतवेण पुइसजमेण कम्मियाए सगियाए थ तसमभाषासर एबवासो । ते यमचोपासव यापयामते रम बाता इमा। पुपतयेप्रवादेवादेवसाएमुच्यावति । पूर्व तबरो पक्षोपायर्यो ! साधु देवावविध देशपधपचे पूर्वतप सरागभावे तपबरे, पूर्वमन्द पा मोबार वीतरागावस्यापे पाये सरामपणे ठप परिसी। तत्यपालेबाम रे। तिहा साधुना समुदायमाहे मेसनामे बगिर वृतते समगोबासएएपपयासी । ते ममोपासक याबवीमतें रम कावाइया । पुषसव संपयोरेगारेरखापसुटबावति । पूर्व सम्मेवारी पहोपार्यो ! साधु रेमसाबविप देवप धपर्व एव सरागवत सममेकरो तथा वपेवरी देवपापा | मे, रामसिमे बम बघनामको एतसे यमा मातमही सामाविकादि महामानवारितमी पूर्वई । तबपागदरक्सिएनाममेरे । ते साधुमा समुदाय मारे पानररचितमाम सविर । तेसमोवासप प्रसंगासी । ते यमनापासब याषाप्रत इम काताया। पभिमाएपबावादेपसापसठनपचति । बामपरे सममेरिकारे पहापार्यो । साथ रेपक्षाबनेपिप गप वपने एतने समसकमधम बोधामयी बोएबयम मेपरपाई तिगारो देवा । तख पासएममेरे । तिको साधुना समुदायमामि नापपनामे मदिर। ते ममावासपएपयासी । ते अमापासन बायकामत रममावावा । म | गिमाए मवादेवारपसाए सुम्पयति । सगेबरो पापार्यो । साधु देवबाबपि देशपर अपने मनुवादिबने सगे बत्तना भरापपना भयो चारिविप - एपनुशामवाति ॥ स पपुपासनाविष्यं ममोबाकायनेदारिति । मारमहासिपारति ॥ प्रासमत्ययस्प स्वामित्वात् महतिमहत्याः । परगायफ्लेप्ति ॥ म पामको नामव इविपाठोपि दृश्यते अनामयो नयकर्मानुपादाम फसमस्ये स्यमाप्रषफस सयमः ॥ वोदाखफसेति ॥ दा प्तवने अथवा दैप्सोपन इतिषषमात्, अवदाम पूयकतकम्मयनमहनस्प सषम माम्तफम्मकपपरोपमया फस यस्य तपबदामफत तपा ति विपत्तिपति क. प्रत्ययः बरस या तकि प्रत्यप निफारसमेष देवा देवताकेपू त्पद्यन्ते ? तप सयमयो इधरीत्या तदकारणत्वा दित्पनि { फरेडप्ता एषययासी , सममेण नसे! फिफले , तघेणनंत! किफले ? तएण येरा नगवतो तेसमणोवासया एघययासी , सजमेणयको ! थणराहयफले, तएण तेसमणोवासया येरेनगवते एवषयासी , जइर्णनते ! सजमेधणराहफठे , तयेयोदाणफले , किपप्तियन्नते ! टेवादेयलोएसु उपयजाति ? तत्यण कालियपुत्तेणाम शणगारेधेरे तेसमणोवासए एषवयासी, पुछतवेण राज्जो देवा देयलोएस उवषमति , तत्यण महिलेनामधेरे एक बयासी । म पातामा । सबमेषभतेविफसे । सयमना भगवन् । पूग्य मुफना। तपमतेविफथे। भने तपमो भगवन् ! फसाये रतिम प्रतएव तेराभमयतो तेममपारासए । तिबारे सेस्वपिर समबत भानयत ते पगापासक भावांपते । एवषमासो। मम है । सबमेपमवाप्रप पम्पते । पपममा पा पार्मा पनायबफस एतावता नवा पामताभ पारीये । रावाराचो । तपमा पूषशतकममो शेरका पतायता मममायाम सतेसमपोबासया। तिवारे ते अमापासबोधा प्रयना पता उत्तर भिसो । घरेभगवतेएवषयासी । मदिर ते भमवंत प्रतें माता या। परभतेसममेपपपपपरे । यो ए वायासबारे, भगवन् । सबमना पनायव पात सवरपर घे पायताकर्म मारोये । सगोदारपसे । तपना पूर्ण सचितवम देवा । विपविमभतेरेवादेवपारसुध्यावति । किसेवारप प ममपन् । देववा देवसापनेविर्ष अपमें तपसमममे छता रोत तहमा पवाररको इवभिपराव परासियपुवामपपमारे। तिहा ते साधुना समुदायमाहे बवानासंभारे, वासिषपुत्र सेनामे साधु । - . पस्पासिस स सही बनाव साता तथा संगितपा दमादिपु सत्सलोहि सपमादियुत्तोपि धर्म पनाति तत सहितया देवस्थायाप्तिरिति पाइप- पुवतवमबमोहोतिरामियोपश्चिमापरामस्स । रामोसमोवुप्तो, सगाकम्मानवोवेव।१॥ समित्यादि । सत्योयमपः कस्मा दित्याय ॥ नोषय झो! देवा देवलोएसु उययमति , सच्चेण एसथठे नोचेषण शायनायवन्तठयाए । तएण तेसमणोवासया येरेहि नगवतेहि इमाइ एयारवाइ यागरणाइ घागरिया समाणा हठतठा घेरेनगवते वदति णमसति , घदइत्ता णम प्ता पसिणाइ पुच्छति, पठाइ उवाहियति, उठाएउठेति, घेरेनगयते तिस्कुतो जाय वदति- पमसति , पदइवा णमसिता घेराणनगवताण तिया पुप्फवईयान घेइया पमिनिस्कमति , पक्षिनिरक समबरता परमादिगुणता बममा देशको माये । पुववपेल पुरसबमेष मा । म सरागवडरी सराग सयमेगारिकरी कमपेकरी । स | मियाए । मनुष धारि समेबरो। पवादगारेगमासुरुवावति । प्रहापाझे | देवपर देसाकमेबिय अपने । सबएसप । साधू व वायाकारे, एस प्रापबारे पथ बाब बनाई। पाषाभाववत्तम्बयाए । महो नियेष वायासकार पाममार यातायेवरी बचा, एतने पापी पभमाये पामार बुद्धि प्रवेनबो वमा हपथ परमापो कमाई म । तएषतेसमोवासया। निगारे ते चमयोपामक यावक । परेहिभगपते लि। परिरे ममयते । रमाएपापा । पा एतादयाप । घागरपार वागरियासमारा । प्रशनापब ताबपाम्या । भेरेभगव तो। पविर ममवतमतें। मसति बदति रिचा। बोटे नममारपर बांदीने । पमसित्ता । नमस्कार रोम । पसिधार पुति १ सा प्रश्नपते पूर्वप्रथम | पूशेमे । पारमारियति १ ता। पूर्गात प्रवण पारंपारोमे। हाति २ ता परेममयते तिमत्ताराति बमसति २ ता। छठी उभागार चमाव मे मविर भगवत तेहामतें तोमगार बार नमस्बारबर गदिशेने नमवारपरोने । परापमययताच । सपिरने ममतने। पतिमाची समोपको। पुष्प पतीयाभोरेगामी पुषपतो नाम बमो। परिधिसमति र ता । भोसरे नौसरोने । मामिमदिसिपारभूगाया। दिमित्री भागारवा । तामेबरि - पमित्यादि मेषा मनायवतम्यतया उपमर्ष प्रात्मनावएव नामिप्रापण्य म बस्तुवत्वं वाथ्यो धामो ऽनिमामा पापात्मनायवाण्या महप्ता जामयदिस पाउप्चूया तामेयदिस पझिगया । तएण तेघेरा जगवतो शपयाकयाइ तुगिया नयरी पुष्फयइयान इयान पमिनिग्गच्छति , पक्षिनिग्गच्छइप्ता बहिया जणवयविहार विहरति, तेणका लेण तणसमएण रायगिहेनाम नयरे जाय परिसापझिगया , तेणकालेण तेणसमएण समणसत्तगयन मष्ठा धीरस्स जेठेचतेयासी इदनूइणाम यणगारे जाय सस्क्रितविउठतेउलेस्से उठछठेण शनिस्कित्तेण सघोकम्मे ण सजमेण सयसा छप्पाण नाषेमाणे बिहरइ , तएण सेनगवगोयमे छठरकमणपारणयसि पढमाए पोरि सिपरिगया । तदिगिने मा पाकायमा । तपर्व तेमेरा । तिबारे ते मविरसाधु । पपराकमा । एपदा प्रस्ता। तुगियामा परीपो। तुमिया नाम ममरो मयो । पुष्पातिमापा पेयामा । पुष्पवो नाम सबको । परिसिमति १ ता । नोसरे नोसरोगे । पतिराषषवविहार विरति । वाशिर बमपद एमबि विशारेवरो बिवर एतावता योगे स्वानमेवार । तेबाकेष तेचसमए । ते वासनेरिये ते समरविष । रायमिोगमन महात्वा । राजपामामे नगर मा, तिको भोगामान मामी समासरा । वावपरिमापडिगमा । यावत् पषरापावो धर्मगनी परिषदा पाोगा त्या दिनमा तेव पासपाते बासमेबिय । तेसमए । ते सममनविर्ष। समवसममरीमहामोरम । यमप भमवंत योमहायोरखामोनोवा पतेषामो । बागिय चमा। एभूतोवाममप पारे । द्रनो सिमामे साधु स्वादि । जायसवित्तविस्तरसेमे । यावत् सपोर विपुस जोरावर नमाम्ना बेप। वाशेष। पापाट तपे पारमाबर। परिसित्तेततवोयमेव । अतरारहित निरन्तर स्वय, तपपमेंबरी । संतमेस तवसामप्पाप मा वैमापिार | सम्म मतभेद तप पारेभेदे ते सममे तपैरो प्रामामत भावतानका पिपरे । वपप सेभगवगोयमे । तिमारे भगवंत मौतम । नाममनपारगसि । भाभचना पारवामिषे । पठमाएपोरिसीए । दिवसनो पहिची पोरिसोनेविय । समायबरेश् । समायवर। बोयाएपारिसो सोपा माष प्रास्ममाधवष्यसा मामानिप्ता तथा नयप महमानितयैव झुमो पितु परमामएवा य मेवषिष रतिनायना ॥ पतुरिमति ॥ कायिक स्वरारहित । प्रवक्ततिम मामसभापत्तस्ति । प्रसंनतेति ॥ प्रसन्चान्त शामा । घरसमुदायस्स ॥ गरेपु समुदाम नव गसमुदान तस्मै गृहसमुदा सीए सज्जाय करेइ , घीयाए पोरिसीए ज्जाण कियाए , तइयाए पोरिसीए चतुरियमचवलमसन्नते मुहपो प्तिय पमिटेडेइ, पहिलेहेइप्ता नायणाइ वत्याइ पमिलेहेइ, पमिठेहेइत्ता नायणाइ पमजइ, पमजदप्ता जायणाइ उग्गाइड , उग्गाहेइप्ता जणेय समणेनगष महाधीरे तेणव उपागच्छद , उवागच्छइत्ता समण नगय महावीर बदइ णमसइ, बदइत्ता णमसइत्ता एवषयासी इच्छामिपत्नते! तुज्जेहि थप्नणुणाए समाणे उठकमणपारणयसि रायगिहे नयरे उच्चनीयमकिमाइ कुलाइ घरसमुदाणस्स निस्कायरियाए मित्तए ? |। योबो पारिसोये । स्माभिमाए । धामप्यावे पदविचार । तीयाएपारिसोए । पायो पारिसो बर तिवार। पतुरियमघवचमसमतेमापत्तियप रिसोरता। बावाम बरो उताबहानको मने पसनहो परमांसधान या एतसे वरना पूर्वक सम्म र मुए परिसमापसे परिसेरे परिसडोने। मारवार मबार परितो र ता । मावन वोनपापा व परिसरे परिसोने । भाषा पमबा २ ता । भानम पाषा प्रमाणे पूणे प्रमा:ने । भाय वा उमारे २चा। मावनपाषा गो प्रहीने । मेषसमरे भमबमहागोरे। विशे यमर भमवत चोमहावीरणामी । तेषावामथापामच्याता । तिला पाव विहां पायोने। समर ममम महापोर । यमप मगवत योमहाबोरनामोपते। वदर पर्ममा २चा। पदि ममरवार पर वादीमे भमरक्षा र बरोने । पपगायो । इम पाताया। चामिषततोषियमसाएसमापे । पछि मवयम् । दमे पानादोधारा तो हमारी प्रामा हायता । बालमरपारपर्गमि । पटभामा पारपानेविष। परमिीवररे। रायानामे ममरनेविगे । उपरोयमभिमार मार । मोर मम्म पड़ म दिपम पमपम्पापभिन्नामरिसाए । परनेवि समुरान ते भिषा तानेपो पतरे पापारनेपर्ष भिबारेमाने पति पूजा भगवान माप : निसपायारिमति ॥ निवासमापारेर घुगतरपतीयवासति । युमं यूप सरममा मन्तर प्रदेशदेशस्य दृष्टिपातदेशस्यच पक्षपान शहासुदेवाणुप्पिया मापमिवघ । तएण जगवगोयमे समणेण नगवया महायारण धम्नणुणाएसमाणे सम णस नगपठ महाबीरस्स एंतिया गुणसिला घेइया पमिनिरकमइ, पक्षिनिरफमहप्ता चतुरियमच वटमसलते जुगमतरपलोयणाए दिछीए पुरनरिय सोहेमाणे सोहेमाणे जेणेव रायगिहेनयरे तेणव उधाग च्छद उवागच्छहप्ता रायगिहेनयरे उच्चनीयमज्जिमाइ कुलाइ परघरसमुदाणस्स निस्कायरिय थइ , तए ण सेनगधगोयमे रायगिहेनयरे जाव थमाणे यऊजणसद्द निसामेइ , 'एयखलु देवाणुप्पिया तुगियाए न यरीए यहिया पुष्फयइयाए चेहयाए पासायचिजा घेराजगवंतो समणोवासएहि इमाइ एयारयाइ वागर ब-हासदेवासप्पियामापनिष । बिम सुपचपचे तिमकरा हेदेवामिय ! काईमा प्रतिवध मकरमो ग्याषात मकरणो। तरमभमवगोरमे। निमगार भम गीतम । समपममयमामहापोरे। यमपमयवत योमहानोरमामी । पम एपापसमापे । पानादोधावया । समयमभगवपोमहा गोरख । समय भमर्मत योमहापीरनामोमा । पतियापी गुपसिसापो चेरापो। समीपमको मुगिस्तानाम चेयवयो। परिविसमा २ का । नीव से मोसोने । पतरियमपक्षमसमसे । कायावरी प्रतापरानको ममेकरो पपसनको पसभात माम पा । चमतरपसोयचाएदिशीएपुरपोरियसोहे माथे । मसरातममाप प्रवर पापपायरोर रेय प्रमेष्टिपात देशमे पवधाम ऐसे एमवी परिषरो पामे समिति सोधता पासतापका । देव रायगिनिपरे । मिह रावयानामा नगर तेरेसवागणार ता । तिला पाय तिस पायोमे । रायगिपरे । रावयानामा नमरमधिप। उपपोपमधिमासमा । प्रा नीष मध्यम इतनेविप । घरसमदारसभिसामरियपार । घरनविषे समुदान भिचानेमामेभध पटे फिर । सएप सेभगवमारमे। तिबारे ते भमवत मौतम । राययिहेपयरे । राजपा ममरनेविप । वावपामा । यावत् फिरसायका । बहुपरसमिसामे । घर्ग - . सोपा माव प्राममावषसपता प्रामामिप्ता तया नवप महमानितयैव सूमो पितु परमापण्या य मयविष पसिनायना ॥ प्रसुरियति ॥ कापिक | स्वरारस्तिा प्रयासति। मानसपापसरस्ति । प्रसनतेति । असचान्न चामः ॥ परसमुदायस्स ॥ गृहपु समुदान नच गासमुदान सस्मै गपसमुदा सीए सम्झाय फरेइ , बीयाए पोरिसीए जाण जियाए , तइयाए पोरिसीए शतुरियमचवलमसन्नते मुहपो प्तिय पहिलेहेइ , पहिलेहेहता नायणाइ वत्याइ पहिलेदेइ, पमिलेहेइत्ता नायणाइ पमजइ, पमजाइता नायणाइ उम्गाहेइ , उग्गाहेइप्ता जेणेव समणेनगव महावीरे तेणेव उघागच्छइ , उवागच्छइत्ता समण नगव महावीर बदइ णमसइ, पदइत्ता णमसइप्सा एववयासी इच्छामिणनते! तुम्कोहि थप्नणुणाए समाणे ठरकमणपारणयसि रायगिहे नयरे उच्चनीयमकिमाइ कुलाइ घरसमुदाणस्स निस्कायरियाए मित्तए ? |ए । योमो पारिसोये । स्माभिमाए । पानघावे पाविचार। तयाएपारिसोए । पावो पारिमो पर तिवार। प्रसुरिवमरवतमसमतेमहपात्तियप हिसरता। बाबाय परो उतारसानहो मने चपवनहो पसातवान बा एतन्ने प्रमका पूर्वकास र मुख पसिकापते परिसे परिसडोमे । मारवाइ कसार परितो र ता । माषन तोनपापा यस परिस पडिसेडोमे । भावपार पमबा २ ता । भाजन पापा ममा पूर्व प्रमाीमे । माय भार मारता । मावनपामा यो पहोने । बर्षवसमरे मममहापोरे। मिला यमब भगवत चीमापीरनामो । वियागमासपायपासा । तिज पा विधा पायोने। समय भगव महापोर । बमप ममवत योमहायोरमामोपते । बदर पसरता। वार पमरवार पर पादोने समस्या रबरोने । एयवायो। म काताया। च्यमिव तेतहिमपाएसमाये । बाएं भगवम् ! बने पानादोधावको मासे वनारी प्राचा हायता । शम्समपारसमसि । पाठमाना पारपानविप। रारमिोपरे । राषयानामे ममरनेबिपीयमम्मिमारकमा । मौष मध्य पल म सिनापमसपरपावमिझायरिसाए । परनेपिपे ममुराम ते भिषा तेरमेपर्य एतने पापारनेपर्व भिवाबाने पक्षिा मे पूजा भमबत ।

गिरहइप्ता रायगिहा नयरान पमिनिस्कमइ धतुरिय जाव सोहेमाणे जेणेय गुणसिलए चेइए जेणेव सम णे जगवमहापोरे तेणेषउयागच्छइ २ समणस्स लगव महापीरस्स दूरसामते गमणागमणाए पफिक्क मह एसणमणेसण छाछोएइ, नप्तपाण पफिदसेइ २ समण जगष महावीर जाय एवषयासी, एयखलु नते! थाहतुम्नेहि थम्नणुमाए समाणे रायगिहे नगरे उच्चनीयमझिमाणि कुलाणि घरसमुदाणस्स जिस्कायरिया ए थममाणे धजाजणसद निसामेइ एवखलु देवाणुप्पिया तुगियाए नगरीए घहिया पुप्फयईए घेइए पासा वोगे। वारसमुपवाडा। यावत् सपना बोतुब पपरव बने। पापबत्तसमुदायमेवार र ता। यथा पाम एतले मिचा पापार सपूप से प्र पण पीने । रारगिलापोषरापापरिविसमा २ चा पतुरिमनारमोशेमापे । राजयामामा नमरबको नोबसे नोक्सोमे कायमो ज्वावधानती मनमो बसावसानको सावत्र्यासमिति साधतापता । रेवमुसिहएकरए । विहां मुषमिवानाम चम चमसमभगमहापारे । विहां यम पभमगत योमहागीरमामोथे। वहवागच्या २ ता । तिही पाय हि भागने। समपसभगवपामहामोरस्म । यमप भमरत योमहापोरनामी ने। पदरसामते । पपू गमागो पा टागमहो। ममयमाएपरिबमा २ ता । गमनागमम वामो पापियो पाती नियस पाने जोर दि राधनापार, ने सभारो परिममे परिसमीने। एसपमरेसबपासोए । पे बाई ण पबगा पड़ा धमो तापच पासो । भत्तपापरिदसे । मा त पारी निर्दीप लियो ते पार पाडोने। समपभमवमहागौर। यमर भगवंत योमहावीरनामीपते वाटो। बावएवमरासी। यानव इम का तारा एयतुभतेपातम् । म नियभिमनन् । इ तुमे। अमपाएसमापे। पाचादीधामको । रायगिरे । राजपामामा भमरनेविष । उपपोपमधिमारिनुसारि । पर मोच मधमकसनेविष । घरसमुदाराभिलायरियाए प्रामाचे। घरसमुदाय भिचा पाहारनेवि फिरताबका। बामपसानिधामेर । परा मनुषनिमुनको मद समिमाएसपदेषाधुपिया। इम निये रेदेषानुप्रिय देवताभ ? तुगिमाएषयरोएपचिया। तुंगिमा - -- मसोबपति पासा मुगान्तरमसोकमा तया प्या परिपंति पर्यागमन । सेकामेयम एवति । अथ कथमेतत् स्पषिरवपन मन्ये इति वितर्कायों णा पुच्छिया , सजमेणनंते ! फिफठे तवे किफले ? तएण तेघरा जगवतो समणोयासए एव घयासी सज़ मेणछाड्यो। यणराहयफले , तये योदाणफले , तचेय जाय पुचतयेण पुठसजमेण कम्मियाए सगियाए थ हो । देवा देयलीएम उवषजाति , सच्चेण एसमठे णोषण थायनायवतम्याए । सेकह मेय मन्ले एव ? सएण जगवायमे इमीसेकहाए लछठे समाणे जायसढे जाच समुप्पन्नकोउहले थहापजप्त समुदाण गिराहइ मतपमा मयो बचन पभिसे । एवपतरमाप्पिया । इम निये देशामुमिन । तुमिमाएपपरोए । तगियानाम नगरोगे। पहियापुप्पपतोएचए । गरि पुपरतोनामा खानेविये । पासायषिवापराभमवतो । पार्भनाबना संतानिया प्रमियादिव सबिर मगवतमते । समावासति । यमपी पासचे पायो। माइ एपामार बागरपार पुथिया । एता एताध्यप भामे कासे ते प्रयमापय पूया ने बाहे-समझते किपसे। सबमनो रेमगवत ! म फट । तबिफो। तपना म्पस ! तएपपेराममवंवो । सिपारे ते यमच भगवत । ते समपोवासए । यमपोपासक वाम पामते । पासोमपातामा। सबमेवपयो। सयमनो पहोपार्यो । परायपसे तगोदाचपते । पनायाफर नवा पावतावमवारीये त पमा मनमाबमवेदोरे वे पञ्च । तपबावपुवतवेषपुष्वसबमेषवाभिमाए । म तिमहोष पापो, यावत् सराम तकरी सरागारिरी पाय मेप रमा परो । सगिनाएमा । मनुष इप्पाने समेवरो पहापायरों ! पारेपचाएसुरवाव्यति । देवपये देवसोमनेपिप चाप । सपएसमा । सब ए पच सत्र पनि। पापायमापात्तप्पपाए । महो नि पवाबारबारे पापको वमनाये पहभापति पमेनो पमा पभव परमार्ययो पना के-सेबामेरमपम । त्रिविम र समिरमा वचनमानौथे पायो वितपतपना प्रकारे मधुमन बर्ग मापना पचन सांभया । तपषभगवगोय मे। तिबारे ते ममम गोतमा इमोसेमहापासमारेगावसठे । एपी पपानातां तेजमा पचामाबमा एतचे एमात सामगीने अपनी मा भामा -- गिराहइप्ता रायगिहा नयरा पझिनिरकमइ तुरिय आव सोहेमाणे जेणेष गुणसिलए घेइए जेणेव सम णे जगवमहावीरे तेणेषउयागच्छइ २ समणस्स नगवान महावीरस्स थदूरसामते गमणागमणाए पमिक्का मइ एसणमणेसण थालीएइ, नप्तपाण पफिदसेइ २ समण नगष महायीर जाव एवषयासी, एवखलु नते! थहंतुष्नेहि थप्नणुमाए समाणे रायगिहे नगरे उच्चनीयमम्मिाणि कुलाणि घरसमुदाणस्स जिस्कायरिया ए थममाणे यजाजणसद निसामेइ एषखलु देवाणुप्पिया तुगियाए नगरीए पहिया पुप्फबईए घेइए पासा जाने। पावसमुप्पसबारेयावत् वपना मोतुब प्रदरग माने। हापबत्तसमुदारगेगर र ता । यमा पर्याप्त पतसे भिषा पाहार सपूत्र से प्र पी पहीने । राममिहापापरापापरिविसमा २ ता परिपबाक्सो मारे। रामपामामा नमरवको नोको मोबसौने बायो वापसानको ममयो तापतामहरी मावत् धिमिवि साधताबमा । धेषगुपरिसराए । विही गुरुमिसानाम घेवहे । चेषसमममममहारे । विहां यम मगत योमहापरणामोई। तेपेबल्वामा २ ता । ति भावे तिहा प्रावौने । समपरमभगवामहागोरस । यमर भगवत योमहावोरमामो में। परसामने । पर मचानको पा महामहो । गमवाममाएपरितमर २ ता । पमनायमम पावा पापियो पासोग निबरा पनि खोप गि सपनाये, ते संभारो परिसमे परिणामोने। एसपमसपपासोए । म पन प्रणा पण बयो तापच पायो । मत्तपापछिदसे । भा त पापी बिपि वियो ते देणारे देगाने । समयभगवमहागौर । यमच भययंत योमहावीरनामीपते पाटो । वावएवषयासी । यावत् म बा नाइमा । एव पतुर्मते पहतकाम नियममबन् । । तुम । पभाषाएसमारे। पामादोधावा । रारगिहेबयरे । राबपामामा नगरविषे। होममणिमारिसारित वप नोच मध्यमसनेविष । घरसमुरारसमिसावरिमाए परमाणे। घरसमुदाय भिषा पाहारमेरिप पिरताववा। पावसानिमामे । पा मापानमसको गम्द सामना। एपदेशाधुपिया । इम निये देवानुप्रिय देवयजम तुपियारण्यरोएपहिया। तुमिया - - प्रसोकयति यासा युमातरमतोबना तया दृध्या । रियत्तिाईनमन । सेकहमेयमसेरवति ॥ अथ पपमेतत् स्थविरवचन मन्ये इति वितकापी णाइ पुच्छिया , सजमेणनंते ! किफले तवे किफले ? तएण तेघेरा नगवतो समणोयासए एष धयासी सज़ मेणथयो! अपराहयफले , तवे घोदाणफले , तचेष जाव पुश्तवेण पुठसजमेण कम्मियाए सगियाए थ सो ! देवा देयलोएसु उषयज्ञति , सच्चेण एसमठे णोचेवण शायनाववतधयाए । सेकह मेय मन्ने एव ? तएण नगधगोयमे इमीसेकहाए लछठे समाणे जायसहे जाय समुप्पन्नकोउहल्ले थहापजप्त समुदाण गिराहद मनुबना मपयो गान सांभवे । एपबदनापम्पिया । म निरे देवगनुप्रिय ! तुगियाएषयरोए । तुमियामाम नमरोने। पहियापुप्पयतोएए । माहिर पुषवतोमामा सनेविष । पासावशिवाराभगवता । पाषमावना सतानिया प्रणिपादिव बदिर भगवते । समपोवास यमों पारो भागयो। रमा एगमार चामरबार पुखिया । एषा एतासाप पागे मासे ने प्रामापय पूषा ते काहे-सजमेपमते पिफचे। सबमनो हेममाय ! म फस । तपेक्षिपसे । तपना पर । तपपवेरामगो। तिमारे ते थमा भगवत । ते समोवासए । अमपोपासक याप वामते । एपपयासी । माता । सबमेवपया। सममनो पहोपामों। पपगायफसे तयेगीदारपसे । पनायवपस ना भावतापम पारीये व पना मूमगावमहोदे व पर। तरचारपुषतर्षपुबसवमेववधिबार । म तिमहीष पायो, मावद ग्राम तपेवरो सरामपारिकरो पाम मेप रमा तेरेपरो । समिपाएपमा। मनुष द्रमाने सभेबरो पहोचारों वाहवरोएसुराबबव्यत्ति । देवपये देवशोषनेवि नपरे । सपएसमा । म ए पर सम्बरे पनि पापाचपावमाययताए। महो निये पायासबारे पापो मनाये प्रहमावलि पमेनको कामा पर्व परमाणमोकमा रे-सेबामेवमएर । हिव विम एसपिरना पचममानोये पावा वितवटपमा प्रकारे माझम बी मसुम्पनो पण सामग्री । तपपमेममयमोय में। तिबारे ते भपात गोतमा इमोसेबाएवारमारेबापसठठे। एसोभापाता ताना पायौपा एतचे एकात सामसोने अपनी चरा पाना - Ram उपपोममम्तो पानिमस्त्पपा बामस्तीतिमावा । पसिठविपति परिसममात् योमिकाः परिमानिनइत्यर्पः, परिवानन्तीतिमाव , धनमार म उशियाण नते । तेथेरानगघतो तसि समणोधासयाण इमाइ एयारुयाइ वागरणाइ वागरेप्तए । उदाना , "शणाउजिया पलिउजियाण नंते ! घेरानगवतो तेसिसमणोयासयाण इमाइ एयारवाइ वागरणाइ था गरेप्तए । उदाज, थपलिउजिया पुश्तयण थजी । देवा देवलोएसु उपयजाति, पुठसजमेण कम्मियाए सगियाए यसो ! देघा देवलोएस उघयजाति , सच्चेणं एसमठे णोघेवण शायनावषप्तध्याए पनूण गोय मा । तेथेराजगवतो तेसिसमणोयासयाण इमाइ एयारुवाइ धागरणाइ वागरेप्तए णोछप्पन तहघेव नेय भते । या उपाययत चामत बाई भगवन् । ते अगभगववो। ते मविर मययत । तसिसमभावामयाए । ते अमोपासवना । माइ एगा गार । एका तासाप । वायरपार वामरेत्तए । प्रश्न प्रतें बापदेवाने । उदाशुपवाविया । अमवा उपयागवतनको बारेनहो । पविबियाण भततेपेराभगवंता । बारपरबो नारा दिम क्षमा सम्पबभाषा पापी बार समसपना भगवन् ! ते सबिर भमवत । सेसिसमोमासया पाते यमपापासमना । मामापारमागरपारपामरेतए । पायां एतायाप प्रश प्रतें बवाबदेशने । उदाहपमिबिया। पवा शिविशेष चामपनमहो। मतपपवारवादेवसोपसयचति । पर एतठे सरागत होपार्यो ! देव देवसोवनविणे अपने। पथसममेष । पूरा सपमे सरा म सममे । पम्प्रिसार सगियाए । येष पायरो भनुप पारिसगेसरो। पवादेगादेवताएमुख्यपब्र्वति । पहोपार्यो । देव सोयनेविरे छपचे | सपेपरसमो। सांप पप। पापपपायभाषमत्तम्बमाएपभू मायमा । नही निये पवाबासबारे, पामभाव व म्यताये परिभाव पपर्य कमा हरतिमा समपरमोतम । तेराभनयता । तेस्मविर भगवद । तेसिसमपामासयाराते थमापासबमा।मार एयादवार पायरपार । पहरा एनामाप प्रग प्रते। मागरिसए । जवाब देवाने । पोपपभू तापोषण । महो पसमय इत्यादि, तिमहोय बोरसो। पवसेसिवमामपभूममिय 1 . निपातः एव ममुना प्रकारेरेति गुमनवम । पनूगवि । ममवः समर्पा से । समिपावति । सम्पगिति मासायों मिपात सोन सम्परत व्या पतु म्मतते भविपर्यासा खात्पर्ष समनातीतिबा सम्पया समितावा, सम्पन मपतय अमितावा, पासवत ॥ पातन्त्रिपत्ति ॥ प्रायोगिका धच्चिज्जा घेरा जगवतो समणोयासएहिं इमाइ एयाम्याइ वागरणाइ पुच्छिया, सजमेण नते ! फिफले तधे कि फठे? तचेय जाय सच्चेण एसमठ णोचेवण चायनाषयतचयाए तपनूण नते ! तेथेरानगवतो तेसि समणोवासयाप इमाइ एयाभ्याइ वागरणाइ वागरेत्तए । उदाऊ, थप्पनूसमियाण नंते तेथेराजगवतो सेसिं समणोबासयाण इमाइ एयारूयाइ वागरणाइ यागरेप्तए । उदाऊ, असमिया थाउजियाण नते! तेथेरानगवतो तेसि समणोयासयाण इमाई एयाख्याइ बागरणाइ वागरितए। उदाऊ, शणाउजियापलि नमरोमे पाहिर । पुष्परतोरपाए । पथमवोनामा खानविये। पासावधिवा । पाशमाघमा सतामिया । राभमवता । मदिर भगवत । समयोगास एकि । बमबापासमे। इमार एयाम्पा । मान पारित भागोना पचनतच । पसिचाइपुछिया। प्रथम मेम उपादेव परा पूर्वी संवमेपमतेवि पसे। समममो भगवम् पूछ । पं पर तकिपसे। तपना पाहे । तचेषबावसोबएसमः । तिमहोम सपकायो, गावत् एपम सब सम यो पनि। बोरेग्पावभावपक्षबगए। महो निषि वामारबारे, प्रामहि बरीने यो कमा एप्रथा तपमूतवेराभगवतो। से भयो प्रभू स मक भगवन् । ते सविर भगवंत । तेसिसमावासमाय। ते धमरोंपासक अमरोत चापबमा । माह पयाम्याइ । ए सितारोत भामो भापित रूप । बागरपार पामरेचए । प्रत्र वावदेवाने एतावता सविर त धारकांना समेटासिया समभाई रमाई । उदाभप्पम् । पथमा के समवनको पथ कामाने। समिमार्वभवेपेरामययतो । भसोमात अभ्यासवत ममनन् । मदिर प्रानबन । ते सिंसमोमासमा । तेबमोपापबना । इमारंप वापारमापरणार पागरेत्तए । पापा एतामरूप प्रय ते प्रतें बवापदेवामे । उहाअसमिया । पा समाच कामाने पममी। प्रारमिगार - . सपयोगयतो पानिमइत्यय बानम्तीतिमाः । पसिन्धियत्ति । परिसमन्तात् योगिक परिचानिमात्पर्षः परिवानम्तीतिमाषः, अनन्तर म उजियाण नते । तेथेरानगवतो तसि समणोवासयाण इमाइ एयास्याइ धागरणाइ घागरेप्तए । उदा , 'श्रणाउजिया पलिउजियाण नंते ! घेरानगवंतो सेसिसमणोवासयाण इमाइ एयारवाइ घागरणाइ घा गरेप्तए । उदाज, थपलिउजिया पुछतर्वण शो । देया देवलोएस उपवाति, पुष्ठसजमेण कम्मियाए सगियाए थो! देया देवलोएस उययजाति, सच्चेणं एसमठे णोचेयण शायनाययप्तध्याए पनूण गोय मा ! तेथेराजगवतो तेसिसमणोवासयाण इमाइ एयाख्याइ वागरणाइ वागरेतए णोशप्पन तहचेय नेय भते । D उपसागत चामतई बार भगवन् । ते पराभगवती । ते मविर भगवत । तसिसमबावामगाए । ते अमापासबाना । इमार एग बार । एका तायप । वायरपार पामरेत्तए। प्रश्न मते जवाहनाने । उदाशुपचापविग । प्रभवा रुपयामवंतमही वाचनही । परिजियाब भातेपेराभगवता । बारपायो वा बिम मा सम्पभाषा सो बाचे समतपगार भगवम् । ते स्वविर भगवंत । तेसिममोपासया पावापासबमा । मााएमापार वारपार मागरेत्तए । पाया एताप प्रय प्रतें जवाबदेगाने । राप्रपतिविया । प्रभा बिपियेष पामगवनहो । पमतमेष पवारमादेवसामध्यमवति । परत एतसे सरागत पहोपार्गे 1 देव देवसोलमविषे उपपे। पापसषमेष । पूर्व सयमे म सपमे । सम्मिमाए समिमाए । येष बाबरी मयुष इपादिसमेकरो । पवादेवादेवसाएमुख्यमयति । पहोपार्यो । देव देवताविप अपचे मपंचएसमो। मापू पर। पापारभाषवत्तम्ममाएपमूग गोबमा । महो मिये ए पाक्यासबारे, पाव्यमाय बन पताये प्राविभावे एर्ष वाया हरप्रिय समपर गोतम ! तेराभनयता । तेस्मबिर भगमय । तसिसमपारासयाप। ते यमपापासबमा। मारएमापारमागरपार । पारा एताप पर प्रते। बामरिचए । मबार देशाने । बोमपभू तापम । नहो पसमर्थ इत्यादि, तिमहोष भरियो। भवसे सियभावपभूममिय - सरा निपाता एव ममुना प्रकारेरेति बपुषनवबने । पनूवति ॥ ममयः समर्पा ते ॥ समिपावति ॥ सम्पमिति प्रासार्या निपाव सोन सम्पने व्या कन्तु म्यतते भविपर्यासा सात्पर्य समम्मचीतिवा: सम्पन समितावा सम्पर प्रदत्तयः अमितावा, म्यासयप्त ॥ पाउजिपत्ति ॥ प्रायोगिकाः यञ्चिजा घेरा जगवतो समणोयासएहिं इमाइ एयाम्याइ वागरणाइ पुच्छिया , सजमेण नते ! फिफले तधे कि फले? वचेय जाय सच्चेण एसमठ णोचेवण चायनावयत्तश्याए तपनूण नते ! तेधेराजगवतो तेसि समणोवासयाण इमाइ एयाइवाइ घागरमाइ वागरेत्तए । उदाजा, थप्पनूसमियाण नते! तेथेरानगवतो सेसि समणोयासयाण इमाइ एयाख्याइ वागरणाइ वागरेत्तए । उदाऊ, यसमिया शाउझियाण नते! तेथेरानगवतो तेसिं समणोवासयाण इमाई एयाम्वाइ वागरणाइ वागरितए। उदाजा, राणाउजियापलि | नपरोमे बाहिर । पुष्पवतोएए । पचवतोनामा विमपिये। पासापशिवा । पाचनावमा सतानिमा । पराममवता । मविर भगवत । सममागास कि । बमवापारये। मार एमापार । महन अबधित प्रामोना वचनतम । पसियारपुचिया । प्रम मेय उपादेय परा पूमा सबमेषमतेदि पथे। मममी मममम् पूछ । म फसशे तकिपसे। तपना फरहे । तवधानसोबएसमा । तिमहोब सर्पबायो, यावत् एपम सम्बई सम परे पनि । रेषापावभाववत्तपमाए । महो नियम यामाकारे, प्रामहि करोगे मधी कामा एपथ । तपभूभतराभगवतो। भषो प्रभू स मबारेमयबम् । तेसरिर भयवंत । तेसिसमपोगासराव । ते यमापासक नम्तरात यापक्षमा । इमार पयाम्पार । ए सिधान्तोल जामो भापित रूप । पापरबाइ मागरेत्तए । प्रय वनावरेगामे एतायता अविरत चापकाना सदो टारिवाने समपरम्म। उदाहप्पभू । पथवारे समवनको भष बागाने। समिमामतेमेरामभवतो । भदौमात पम्पासयत भिमवन् । मरि जानम । ते सिममरोगासमा । तेबमोपासमना । रमाईप यापार मामरवार पारेचए । एमा एताप प्रवते मते जनामदेवान । पहरा नुप्रममिया । पममा प्रमाभर्य पापाने पमर्थनको। भाविबाच - - - - वामदीसमुपसे । प्रपया प्रमः माघ महिना मायक । सवपसति । सिदान्तमवरफला मारपसेति । मुतधानपस प्रववानिमतमान, असं प्रबादि मुतन मवाप्पते । विसावप्रसत्ति । विपिष्टपानफस मुतधाना दिइयोपादेयविवेककारिविधान मुत्पयत एव : पपासारफ मत्ति यिनितिपत घिमिरचानोहि पाप म्प्रत्यास्माति : सयमपतेति । तमस्यास्यामसहि संपमो भवत्पव: असायफसति । अनामवफ सः सयमबाम् विस मव कर्म मो पारते सवफतेतिय प्रमामयोहि समर्मस्वा तपस्पतीति पोदापफोति व्यषदाम कम्ममिर्जरस वपसा एसमठे णोचेषण ायनाययत्तष्ठयाए। तहारषेण नते ! समणषा पछुवासमाणस्स किफला पमुथासणा? गोयमा ! सयणफला , सेण नसे ! सघणे किफले ? णाणफले । सेणनते ! नाणे किफले ? विणाणफले । सेण जते । यिणाणेफिफठे ? पञ्चरकाणफले , सेणनते ! पच्चरकाणे किफले ? सजमफछे । सेणनते ! सजमे फिफठे ? एणण्हयफले, एव थणराहए तवफले , तये वोदामफले , बोदाणे थकिरियाफले , सेणनते ! पासवापता । पू पसाबानो, एतसे साधुसेना वोधा पड गयो । भोयमासवरपणा । नौतम ! सिसोत सभिलवामाहुर । सेवभतेसवर विपछे पानपरे । ते प बाबासकार, भगवन् । सिद्धांत सांभमानो पर कमा ? समिधामो भूतभानामबानो पर । सेपमतेपारेकिंफो। ते | पापासबारे, रेममयम् । भान पाम्मानो पावाया। विणचपसे । भानयो रेस मेस उपादे विषकारी विधानसपुर। सेवभते विधावियो। नवायासबारे, भयान् । विमानको ५ फा पामिये । पपसारपसे । बिमिट मानपाम्पा पापनो पचवावकर ते पसार । सेवभतेपपहारेवि पसे सममपरे। ते वाघासारे, रेममयम् । परापमा पस पमा । पपसारबोधी सयम पामिये तेपावे । सेवभत्सबमेविफसे । ते या मारणारे, भगवन् ! संबमना पसबमा पासपचे। संबमबत मवाघम उपानही दे पनायवफस । एवरगायतपसे । रम पनायवनीत पफ्स गर्मपको तपमावार । तपादारपये। तदरो पुरातनवम निबरे इम्पयं । बोदापेपपिरिमापसे । पुरातन मिवगावो क्रियारहित - १ www मापयुपासनासंविधानक मुसा मप सा यत्पता तदर्शनार्थमा सहास्वमित्यादि । तपाइप मुषितस्वनाव कम्पमपुरुपं ममाया। सपोयुक मुपसात्वा दस्यो त्तरपुणवत्तमित्यर्प माहनमा सप रमननिवृत्तत्या स्परम्प्रति माइनप्ति धादिम मुपलवस्या दय मूतगुणयुक्त मिसिनाय छ, यसेसिय जाय पनूसमिय थाउडिायपलिउजिय जाव सच्चेण एसमठे णोचवण शायनायवतच्याए। थपिण गोयमा ! एवमाइस्कामि नासेमि पलवेमि परयेमि , पुश्तवेण देया देवलोएसु उययाति पुष्ठसजमेण देवा देवठोएसु उपयजाति , कम्मियाए देवा देयलोएस उपवजति , सगियाए देवा देवलो एस उयवमति , पुश्तवेण पुठसअमेण फम्मियाए सगियाए जो ! देवा देवलोएस उपवजति । सच्चेण बाबाता सम पावत् समय अभ्यासवत । पातलिय परिविका उपयोगत समसपर्ष उपयोमबतायावसषपसमझे। गाव पाच एपषं । पोषेषषपाय | भावताए । महो नियवावासकारे, पामभाष पायतायें पारिभाषे एपमा। पापियं गोममा । परि मौतम । एवमारस्तामि। रममाए । मामामि परोमि परमि । भाई विशेषेवरी बाई प्रपा । पुवतवेषदेवादेवसाएमुख्यध्यति । पूर्वत एतसे सरागसरमे देव ता देवपाविप अपवे। पुषस्वमेव रेगादेवबोगसुठवावति । पूर्वसयमे सरानपम्मे देवसामरिषे रेपप अपने । अभियापदेवादेवसोएसुस्वप पति । येष समारो देवमायनेवि देवप अपरें । समिमारवादेषपाएपुरमयति । मनुब प्यादिवमेसगे देवलोकनेवि देवपणे अपये। पुम्वत परंपमसंवमेष । पूर्वतपे पपरमे । बधिगए पगियाए । पीय पारे तेरेपरी इसमनचादि मेकरी । पोदेगादेवसोएमुख्यमवति । भोपार्यो । एतसेवामे देवता देवाबनरिपे चपथे। सपएसमा । मापूर एप। वापरपावमाववत्तम्मयाहतहासमतेसममाया पनुमाघमासान को निये एप प्रामवासनापी बना परमायो बाद अनारे साधुसेगा परयोसोहिते पानोपय देशाडमानवाने बार-बारूप यो | स्य ममावत पालापबारे, भिववम् । यमर तपत पानामो निता पनेराने पायोमत महाते पनाम मा परणाने । विपना । - पाशदौसमुपये । प्रभवा । ममा साधु मोहना मायका । सयपत्तति । मियाम्तमवरपाता । मावफातेति ॥ भुतहानफस भववादिभुतधाम, फस मनसा हि मुताम मवाप्पते में विसारपसति । विभिटनामपत मुतनामा दि इयोपादेयमिवेत्रकारिविधान मुत्पयत एव । पाल्पाव सतिमिमितिषसं विसिष्टमामोहि पाप म्प्रत्यास्पाति भयमपत्ति। हतप्रत्यास्थानस्पशि सयमो भवत्येव । प्रायपसधि मनामधफ सः सयमवान् विस भव धर्म मो पारते ॥ तवपति पनाप्रयोहि सपुषम्मत्वा तपस्पतीति वोदारपसहि व्यवदान कम्मनिचरर तपसा एसमठे णोचेषण शायनायत्तश्याए। तहाश्वेण नते ! समणया पजुधासमाणस्स फिफला पछ्यासणा ? गोयमा ! सवणफला , सेण नवे ! सवणे किफले? णाणफले । सेनते ! नाणे किफले ? पिणाणफले। सेण नते ! यिणाणेकिफले ? पञ्चकाणफले , सेणनते ! पच्चरकाणे फिफले ? सजमफले । सेणानते ! सजमे फिफले ? आणण्हयफले, एव चणराहए तपफले , तपे वोदाणफले , वोदाणे अकिरियाफले, सेणनते ! पारपापमत्ता । म पसारमामो, एतसे पापुसेवा पोधा म्पस पायो । मोसमासवरपसा । मौतम ! सिात पमिसमानोपुर । सेरमतेसवर विपरामफसे । ते पवावासकार भयान् । सिात सामभानो प्रपर पाना ! सभिभावो तमामपोमबानो पर । एभतेवाविपसे। ते। बामासारे, रेममान् । भान पाम्यामा प्यूपरवाया। विपापो । भानयो रेस मेष उपादेय विवेषवारी विधानफसछु । सेवतेविनाविमये। मापासारे, भिमनन् । विधानधो पर पामिये । पपसाबपरे। विभिटचामपाम्या पापमो परमारकर ते पार । सेवभोपपसारेषि परे सथमपी ने बाबाचकारे, मगवन् ! परसापना पर मामा ! पचहानबीधा संयम पामिये तेपछडु । मेरमतेसंवमेधिपते । ते पवा |मारवार, भगवन् । सबममा पहामोरपायमसे। संगमबत नवाबम उपावनही ते पनायबफस । परपनायतप । म पमारवमो त पर समपको तपसावतार । तपेवाराषपसे । तबरो पुरातनकर्म मिमरे दे रखा। बोदापेपपिरिमापसे । पुरातम निषपायो पियारहित Tey mms मापपुपासमासविधानव मुक्त मप सा यत्पता तदर्भमार्षमा तहाइवमित्यादि । तपारप मुचितस्त्रमाव कममपुरुष अमरवा तपोयुध मुपसरवत्ता दस्पी हरनुबन्तमिस्पर्प । माइनवा वय इनममिक्त्तस्वा परम्मति माइनेति वादिन मुपतपरत्वा देव मूसगुणयुक्त मितिनाव छ, थवसेसिय जाव पलूसमिय चाउजियपलिउजिय जाव सच्चेण एसमठे णोचेषण शायन्नाववतच्याए। शहपिण गोयमा ! एवमाइरकामि नासेमि पलयेमि परवेमि , पुश्तवेण देया देघलोएस उयवजति , पुष्ठसंजमेण देवा देवलोएसु उपयज्जति , कम्मियाए देवा देवलोएस उववजाति , सगियाए देया देयलो एस उयवजाति , पुश्ववेण पुसजमेण कम्मियाए सगियाए थजो ! देवा देवलोएस उवयजति । सच्चेण बाबता सब बाबत् समय सम्मासवत । पाविय पवितविया उपयोगबत समसपर्ष उपयोमयतापायसपएसमो। यावत् सांच एपथ । पोचेपपाय | भागवतम्याए । महो नियमामासबारे, पामभाम पायता पनिभावे एपक्षवाचा । पहपिप गोपमा । पपि मौतम ! एपमारम्सामि। म पाए । मासामि पपरेमि परमि । भावई विशेषेवरी बार मपंछ । पुचतोपदेवादेवखाएसुवववति । पूर्वत पतसे सरामसममे देव ता देवासविरे अपये। पचमचमेष रेषादेवीसुध्वमावि । पूर्वसंबमे सरागसरमे देवखाबभिप रेबपरे अपये । अभियाएदेवादेवशोएमुख्यप वति । येन बमाबरो देवशावर्गमिरे देवपचे अपरें । सपिगारदेवापाएसुधमपम्पति । मनुष यादिवमेसगे देवसोकनेवि देवपर्षे छपणे। पुष्वत रपयसकमेष । पूर्वतये पर्यसयमे । बधिमाए समिमाए । बाय रमा तेबरोएबमनुवादि संमेवरी। पयोदेवादेवसोएसुरुवाति । अहोभायौ । एतबाचे देवता देवावधिमे चपये। सबएसमो। माई एव । परिवारमावसचम्ममाएतकाम्पमतेसममारमा पनुमाघमासान को निये एपण पामबमनायो बानो परमायो मोहे पनारे साधुसेवा बरोबसी । हिने ते पेवानोपर देवामानवाने मारे-तबापूप यो म्य सभापर्वत पायावादीममपन् । अमर तपत पात सरवादो निशाचबदा पनेरामेनोपोमत देशम पक्तानि मा परवाने । विपना - वागम्दीसमुपये ॥ अथवा ममका पापु महिना मापन : सबपतत्ति ॥ सिदामामवरपसा । मारपसेति । मुसमानफलं प्रयवादिभुतधान, पनं प्रमा हिमुतवान मवाप्पते ॥ विसावपत्ति । विभिष्टचामपाल भुतघाना हि योपादेयविववकारिविशाम मुत्पयत एव । परम्पारण सति । पिनितिपत विशिष्टचामोहि पाप प्रत्यास्माति । सयमपति कतप्रत्यास्यामसहि संयमो भवत्येव । प्रहयफासति । अनामयफ सा सपमधान् पिस मवं पर्म मो पारते ॥ सवपसेतिम अमामवोहि सपुकम्मत्वा तपस्पतीति । बोदावफातेति । व्यपदानं कम्मनिन्चरर तपमा एसमठे णोचेषण छायनावयत्तध्याए। तहारुषेण नते ! समणवा पजुवासमाणस्स किफला पङ्घासणा? गोयमा ! सयणफला , सेण नसे ! सपणे किफले ? णाणफले । सेणनते ! नाणे किफले ? विणाणफले । सेण नते ! यिखाणेकिफले ? पच्चस्काणफले , सेणनते! पच्चस्काणे किंफले ? सजमफले । सेणनते ! सजमे फिफले ? आणण्हयफले, एव शणराहए तवफले , तवे वोदाणफले , घोदाणे थकिरियाफले , सेणनंते पसारमापपत्ता । म परिणामो, एतसे साधुसेना बोधाम्पस बयो। योवमासबरपसा । गौतम ! मिति सभिलवामातुर । सेपमतेसवर | बिपने पापपसे । ते पमानापना भयवन् । सिद्धांत सौभधामो प्रफर कमा ! सौभमायो प्रतनानपामवानो पर । सेप सेवाविपचे। तेर मासबरे भगवम् । भान पाम्यामा परवाया। विसारपसे । भामयो रेम गेम उपादेय विषवारी विधानपहा । सेवतेविषाविपसे । मामासबारे, भिमबम् ! विधानपी पर पामिये । पचासारफो। बिमिटचामपाम्मा पापनो पपसापकर ते पसार । सेवभतेपपाताति पाचे पामफरे। ते मायाकारे, भगवन् ! पदमापना पर कामा ? पयसापकोपा संयम पामिये तेपथापे । सेवभतेसबमेविपचे । ते पंवा भावारे, भिययम् । सबममा परगणोपरगयफसे । संयमवत नवाबम सपावनको ते मनायवफत । एवएगायतवफसे । म पनासपनो त पक्त समयको तपमावदार । तपाराषपरे । नबरो पुरातनकर्म निषदे रस्मथ । पादापनिरिमाफसे । पुरातन निघयायो वियारक्षित - - रिपुरातन कार्म मिवरपति । पकिरियापति ॥ योपनिरोपकास कम्मनिज्मरातोदि योगमिरोष कुरुते ॥ सिदिपस्यवसायमसेति। सिदिस पर पर्यवसामफस सबसवतपर्यन्तवर्तिपास पस्पा सा तपामाहति ॥ सहगापा एकल त हिपमाघरपाद वेत्यादि चन्दःशाखमसिन मिति तपासपस्यैव प्रमबादेः पर्युपासना पपोसफरता भवति मा तपारपस्या सम्पम्मापिस्या दिस्य सम्पम्मापितामेव केपालि एसयबाद । अवधिएस्पादि । पदयस्सग्रहेति ॥ प्रस्ता तस्सोपरि पवतात्पर्षः ॥ हररत्ति ॥ इदः ॥ भवति । पपानिपाम अपितु हरएप्ति । मदृश्यते' फिरिया किफला ? सिछिपावसाणफला पणता गोयमा ॥ गाहा ॥ सवणेणाणेयविणाणे पञ्चरकाणेय सजमे । अपराहएववेचेव योदाणेशकिरियासिछी ॥ १॥ शमउच्छियाण नते ! एषमाइस्कति लासति प णवति पश्यति एषखलु रायगिहस्स नयरस्स पहिया येनारस्स पचयस्स आहे एस्यण मह एगेहरए चप्पे पणत्ते, धणेगाइजोयणाइ शयामविस्कनेण नाणादुमखममफिउद्देसे सस्सिरीए जाव पफिरुवे , तस्यण यहवे उदारा घलाहया ससेयति समुच्छियंति धासति तइतिरितेवियण सयासमिउ उसिणे याउकाए समानम्। सेवभतेपपिरिवाविपाते ममन् । भावनिरूपयो पहार सिक्षिपनपसारपसापरता । सिहपचव समस्तपताहिक साप पत एतने समसबर्मचयाप मोचफमपामे। मोरमा माहा मोतम ! पोष पवनो समस्याषा कोरे-सवपापयविणारे पापा सियमे प्रभारतवशेष बोराषिपचिरिबासिहो । १ । सेवायो यसरफस १ वरनो घामपास १ जानपो विज्ञानविशेषफच विधामको विरतिरूप पर पचपरावो परमपर ५ सयमको पनावपापनावको तपप तपपी अवसानपक्ष ८ मबदामको प्रविरियासिहिफा ।। प मानोगाची मालमत्ता, परि पापारप नो सेवायो नही विपरोवभापमानो तेमाठे विपरीतमापी ईएम रेखा-प्रपाभिमानमते एम मारस्पति मासेति पति पति । भवतो मामापा मगन् । रमको सामान्यपबो को पिपपपांबी कतारो भव - अपेहत्पस्पच त्याने प्रप्पेत्ति दरपते तर पाप्या पापां मनवा इरएक्वेति ॥रातति । वस्तीमाः ॥ वसाहपत्ति ॥ मेपाः ॥ संसेपतिति । संस्त्रि पति: उत्पारानिमुखीमबम्ति । मुचविति सम्पूर्णम्त्युत्पद्यन्ने । तबइरिसेपत्ति ॥रपूरवा दतिरिक्षय सत्कासितइत्यर्थः । प्रापाएति अफायः । मिनिस्सवइति । निमिमबति परति । मितेरवमाइसतिति । मिप्यात्व चैतदास्यामस्स विधानपूर्वकत्वा प्रायः सब थनिनिस्सयह, सेकह मेयत्नते ! एष ? गोयमा ! जमते शमउच्छिया एव माइस्क्रति जाव जेते एयमा इस्कति मिच्छते एषमाइस्फति , छहपुण गोयमा ! एवमाइरकामि ना०प० परू० एवस्खलु रायगिहस्स पायेवरी । एपहराममिापयरमपरिगा। म निये राजपामामा ममरने माहिर । भारस्मपपवमपो । मारमामा पवत ठे। एस महारएपप्पयते । प वासासकारे, मोटो एक द्वारे, बसमा उत्पत्तिनो सानक मा तिहारको पारी भरकते द्रा । पपेमारवोपकार पा मामरिमेन। पनेक पाचन दोपप पिपपपरे। पापादुमसम्मडियससे । प्रमेव प्रकारको नच वनमा मंपित गाभिव सोग प्रम एडयो मो भा सरित। सपिरिए । मोभारमानई। जापपरिये । पावत् प्रतिरूप पोरया गपर एसर्व पायो । तवायेराग । विर्श पर विसोपी पक्षा या। मध पादसा । ससे यति समुच्चति पासवि। अपनपने सममुगाई चपरे बरसेहै। तिरिसेबष समासमिम ५ सिपारबाएपभिमि सिया । ते दाने भरीने पपिका पांचोपे, ते पशिडीय भवे भरे सदेव उपातयत उत्पगेनिया पवाय एतचे द्राना भरवायो अभियो महतो निवना पाया पपवाय बोभरे। सेबामेसमतेएवं । ते विम एसपनीममयम् । इम रतिपय उत्तर । गोयमा पसंतपसचिमा एवमारस्पति। याममाटते पन्यतो पााम म्वतिरिसमानताका म कार-बापषतेएवमारति मितेश्वमारसति । भावत् नि म पीछे मि था झूठा एरपनने विभम भान पूषक पत्रिी माये सबन्न परमविका पीवो ते झूठो बाई पन्यतो गोमत निरास बरमानेपर्ने प्रसने उत्तर भरबरो मातमा योमहागणामो हम कोर-पापुष मोपमा एपमारपणामि । यसो गौतम । इम काए । भासेमि परवेमि पक्ष्यमि - - - भवपनविरुदत्वा पावहारिकमत्पर मायो म्यपोपसम्माचा वनसय । प्रदूरसामसेत्ति । मातिदूरे माप्पतिसमीपरत्ययः । एत्यति ॥ मापकेमो पायमाने महातवोबतीरप्पनवेनामपासवति । प्रातपदव प्रातप समता महायासा पातपति महातपो महातपस्प सपतीर तीरसमीपे म णयरस्स थहिया घेनारपवयस्स दूरसामते एयण महातवोवतीरप्पनवे नाम पासपणे पणत्ते , पचघणु सयाइ थायामयिरकनेणं नाणादुमखमममिउद्देसे सस्सिरीए पासादीए दरिसणिज्ने शनिलवे परिये , त त्यण यह उसिणजोणिया जीयाय पोग्गलाय उदगप्ताए यक्कामति विउक्कमति चयति उपचयंति, सहति रितेवियण सयासमिय उसिणेउसिणे शाउचाए निनिस्सयइ, एसण गोयमा ! महातयोघतीरप्पनवे पा |मा म मनापन बम प्ररूपए। एतरायमिहसयराहिमा । म निये रावणानामा नमरनेवातिर । बेभारापचय । बेभार |नामा पर्वतमे। परसामते एवरमहावभावतोरपमबेनामपासवरेपचत्त । पतिदूरनहो प्रतिठाणे पषिमहो सो पमानासकारे, मातप अस्वंत ७ |पमान बियप तहमा तोरमे समोपे अपनाने से महातपापत्तोरसमबनामे प्रयार भरपोडे ते मरणो । पपपासयार पागामविरमभेष। परिये धनुष पापाम बाप पिासपो। पापामामपितासे । प्रमेवपवारनावच घममायाभित प्रदेपछे । अस्थिरोए पासाईये दरसपिये। माभावतः प्रसवपित्तमाम रेग्णामायपमित्र परि तयाये । पतिममोहर प्रतिष्प देखता वप्ति न पामोये तिरपाबासका। पिषमापिराधीषागपोमचायादयत्ताएपामति । तपसानिया भोव पपुन पुरस उदबापरे परोिपे अपवेरे। विधामति पर्यति उपचमति ।। पे रिपोप पुति पाई। वयतिरितपिपासमासमिमं । ते भरीने पारो अभियोजाय ते पागे सदासदोष समित । सिपाध्याएपभिरि पति एसब मोसमा । पावापबारे पप्पार झरे। पासायासबापे, रेयौतम ! पामा पानी निमम पाई-महातमोक्तोरप्पभषेपापमएस मोपमा । ए पम्पपूविध यमित पापमा महातपोपतीरममय प्रयबर पो तथा एहोल पमन्तरीक परिप बाधिए मारि यौतम । मात - मम हत्पाद पम्पा मी महातपोपतीरमानव. ममयति परतीति प्रश्वयः प्रस्पन्दमात्पथः । पक्रमति । उत्पद्यन्ते । यिठकमति ॥ विमश्पम्ति एप्त रख म्पत्यपमाइ पात उत्पद्यतचेति उनमेषा निगमपमा । एसपमित्यादि एपो मन्तरोत्तड़प एपया अम्पपूपिकपरिशस्पिता प्पसम्यो महातपोपत्तीरमनव प्रमवस सप्यते तपा एप पोय मनतरोक्छ । सिमजासिएत्यादि । स महातपोपतीरममवस्प समवयस्पा पो ऽनिपाना म्यपा ममतः ॥ इति द्वितीय पते पम्पम उदयः समाप्त ५ ॥ पम्चमोदेसम्पन्तेि पम्पपूधिकामियानापिय समा। अप पष्ठ प्रापास्वाप मुश्पते तत्र सू ॥'सनगनतमसमीति ॥ महारेशीनासत्ति प्र सेशाष्दो ऽपशव्दार्थ सत्र पाक्योपैम्यासे ,नून मुंपमानावपारगत फापमहतुपु हा यधारप, मदन्तइति पुर्यामम्बर मन्ये अवयुप्पइति एय अवधार्यसे अवगम्यते अनये त्येव पारची भयवोधवीजभूतत्पर्षः माप्यता प्रापा तयाग्यतया परिणामिनिसष्टनिसन्यमामध्यमहर्तिरितिपय , एप पदार्पो, ऽप पुन वांझ्यापा, अप भदन्तस्य मा मम्ये विश्पमवधारसीनापति, , एव ममुनासूमकमेवमायापद प्रापमापा मेकादश प्रसिनय्य मिइस्पामे, पाच मापाद्रष्यातप्रकासनाघेः सत्यादिमिय सवणे , एसण गोयमा ! महातयोयतीरप्पनरस्स पासवणस्स थठे पणते , सेवनतेनत ! त्ति , नगव गो यमे समणनगय महावीर वदइ नमसइ ॥ थिईयसए पचमो उद्देसो सम्मत्तो ॥ ॥ सेणूण | पातारपपपासमा पोपपत्ते । महातपापतोरप्रभव प्रयपप करपाना पथकमा । सेवभते २ त्ति । तत्ति हेभगवन् । तम्ह का री सत्वछे । म गबमाय में । भमयत मातम । समय भगव महापोर वंदा बमसा । यमप भगवत योमहावोरमामो प्रसे वाद नमस्कारकर। मितियसयमपथमपो । एपीमा पतसना पांचमामा पूराबया । । पाश्चि मेये मियामाखोकना, सेमाटे भापासप बाहे-सेपूपमते मपामो निपारिश भासा भासापद भाषियब रितियसपमाटो । ते निय भगवम् । महमान बुझोपए मापापववाध पौषभूत दस्यम, पपश्ये अपधारनी |भापा भाषा ते मायामोये प्रकारे भवानुमे परवाना ग्यारमा भाषापदनामा, भाषा दप्य घेष वाच भाव इस्मादिक भेदें करी प्रमेरे - बनविष्यत्वा पावहारिष्मस्पर मायो म्पपोपसम्मावा वमन्तव्यं ॥ प्रदूरसामसेत्ति । मातिदूरे माप्पप्तिसमीपात्यप ॥ एत्मरतिम मसापकमो परपर्यमाने । महातवोबतीरप्पचपेनामंपासवति। पातपाय प्रातप समता महापासा वातपति महातपो महातपस्प सपतीर तीरसमीपे म णयरस्स घहिया घेनारपछ्यस्स दूरसामते एत्यण महातवोयतीरप्पनघे नाम पासवणे पणत्ते , पचघणु सयाइ शायामपिस्कनेण नाणादुमखम्मझिउद्देसे सस्सिरीए पासादीए दरिसणिझे जिरुये परिये , त स्यप यहवे उसिणजोणिया जीयाय पोग्गलाय उदगप्ताए बक्कमति विउकामति चयति उयचयति , तहति रिवेषियण सयासमिय उसिणेउसिणे थाउचाए शनिनिस्सवइ, एसण गोयमा ! महातयोयतीरप्पनवे पा माएर म प्रधापन परम प्ररपूछ। एपारामिहसवयरसहिया । म निये राबपामामा ममरनेवारि । भारमपचयमा । बेभार मामा पर्मतने। परसामते एअचमहावोबतोरप्पमोनामपासवरेपचत्त । पतिदूरनको पतिठवा परिमहो रा प पायासबारे, महातप अब्बत छ बमानमा विशेष तहमा तोरने समोपे अपनाने से महातपापतोरप्रमवनामे प्रयास भरपाई से भरपी । पचपणासमा पारामपिपरभेष। पारस पतप पायाम पबिप पिपई। शपदमपाडिमहासे। पनेकप्रकारमाष्टच बममायाभित प्रदेश । ससिरोप पासाईये दरसरिये। | मामावतई प्रसवपित्तबार रेखगायोम। पभित्र पनि तमवाये । प्रतिमनोहर प्रतिपदेषता दमिन पामो तिहा पवावासका। उसिषपोषिया बोषारपोपचारतदमत्ताएपामति । उपानिमा मोष कपुन पुरस उदयपणे पापोपे अपये। पिछवमति चयति उवचयति । म पे विषसो पोई पुटि पाहे । वमतिरितवियवसमाममिय। ते मरोने के पारो पधियोसोम ते पापो सदासदोष समित । पिपेपामाएपभिषि पति एसब बोवमा । पावापबारे पवाय झरेश। पापयामासंबारे, मौतम । भामा प्रबनो निमम बाजे-महातयोवतीरप्पमपापपरसर्च मोपमा । ए पथरियमित पापमा महातपोपतोरममय प्रयासोने तथा पोम पनतरी पिप बापिए मावि गौतम । मात - ।

, ॥ प्रय उत्पादो पस्या मी महातपोपतोरमानव प्रमाप्ति तरतीति ममयपः प्रस्यन्दमहत्यपः ॥ वकमति ॥ उत्पद्यन्ते ॥ विटकमति ॥ विनश्पम्ति एत दव प्पत्यपमा पन्त उत्पातति तकमेवा निगमयमार एसपमित्यादि । एपो मन्तरोताप एपया अन्यपूपिकपरिकल्पिता प्पसम्यो महातपोपतीरममयः मम्रबर उप्यते तपा एप पोप मनस्तरोत ॥ एसिखमापिएइत्यादि । स महातपोपतीरममवस्य प्रमवस्या पो ऽनिपामा स्वपः मशतः ॥ इति द्वितीय मते पम्पम पहशः समाप्त ५ ॥ पम्बमोदेशम्स्पोन्ते सम्पयूपिकामिप्पाप्तापिर उमा अध पष्ठ भापास्सलप मुध्यत तर सूत्र में सनूगनतमसामीति व महारेशीनासत्ति । सेभब्दो ऽपशव्दा सच वाम्योपम्यासे , नून मुपमानायपारगत कमाहितुपु हा वपारस मदम्तइति गुमिम्बो मन्ये अवयुपाप्ति एष अवधार्यसे भवसम्पते अनये त्येव पारसी प्रयवोधषीयभूतत्पर्थ माप्यताति मापा तयोग्यतया परिणामिनिसष्टनिसन्ममा द्रष्यसतिरिसिहदर्य, एप पदार्पो ऽप पुन वाक्पापा आप प्रदन्तएव मह मन्ये ऽयश्पमबधारपीनापेति। एव भमुनासूबानमेषमापापर, प्रधापमाया मेकादप मसितथ्य मिएस्पामे , पाप मापाद्रष्यत्रकालनार्य सत्यादिमिय सवर्ण , एसण गोयमा ! महातयोयतीरप्पनवस्स पासवणस्स यठे पणते , सेवनतेनते ! त्ति, नगय गो यमे समणनगव महावीर घदइ नमसइ । यिईयसए पचमो उद्देसो सम्मत्तो ॥ ॥ सेणूण पामारप्पभवरापासपोपपत्ते । महातपापतौरप्रभव प्रयाप भरपाना प्रकाशा । सेवभते २ त्ति । तत्ति भगवन् । तम काधु से सस्यछे । म | गमगीयमे । भगवत गतिम। समय भयव महापोर पदा पमसर । यमप भगवत योमहावोरमामो प्रते पाद नमसारकर । विविमसयमपथमपी । |ए पोजा गतबना पांचमारेगा पूरावया । । पाश्वेि नये मिष्यामारोपमा, सेमाटे भापासप काहे-सेपूरभते मपामो निपारिती भासा भासापद भावियप पितियसयमको । ते निय हेभगवन् । महमान बुझोपए मापापववाध पोवमत रत्यम, अपों पषधारपो भापा भापोय ते भाषामोये प्रकारे सूत्रातुम मे पपपपाना प्यारमा भाषापदयारा, सीमापा द्रश्य पेत्र वास भाव प्रमादिक भेदेकरी पमेरे ५ , ॥ मेरे रन्येय पनि पर्याय विभार्यते ॥ इति द्वितीयझतेपष्ठम सग समाप्तः ६ ॥ नापाविज्ञादयस्य प्रवतीति देयो देशका समारम्यते तस्पर सूत्र नगरमित्यादि । यति । कति दया जात्पपेपये तिगम्प फतिविधा देयाइति पदप । जहाटापपत्ति ॥ पपा यत्प्रपारा यादृषी प्रजापनाया द्वितीयेस्पानपदास्से पदे वाना यतष्पता सेसि तथा प्रकारा मपित्तपसि मयर ॥ भवणापत्तप्ति ॥क चिदृश्यते तस्यच पा न सम्प मवगम्यते देववतप्यताव । प्रमोसे रयाप्पमाए पुटपीए असीठत्तरजायएसयसहस्सयामाए उवरि एग धोय नते ! मणामोति नहारणीनासा , नासापद नाणियह ॥ विइयसए छोउद्देसो सम्मत्तो ॥ कइपिहाणनते ! देवा पसता ? गोयमा ! चउधिहा देश पणता तजहा-नवणयइवाणमतर जोइसकेमा णिया । कहिणनते ! जवणवासीण देवाण ठाणा पणता ? गोयमा । इमीसेरयणप्पनाए पुढवीए जहाठा पपदे देवाण यप्तक्ष्या सा नाणियहा , नवर नवणा पणता , उयपाएण ठोयस्स ससेजइलागे , ए व पर्याबरो विरारियेाति ए पोबा मतकना हा सीमो प्रवियो । भाषा विणल्यो देवतापे तेमाटे सातमी सर मा देवना पार-बारभतेदेवापरता । बेतमा भिमवन् । वाति अपेक्षाये रेवनाकामा पर्मात् बेतभेद देषकमा इतिपय । गोयमा वसपिडादेषा | पबत्ता तवा भवषमा पारमतर वारस मारिया। गौतम चारमेदे देवबामाते वक-भवमपती १ वापपवर २ म्यातिपो वैमानिक । क हिम्मतेभववपासोर देवाप ठारा पसत्ता गारमा । किसी भगवन् ! भवभपवो दसमा मानन कामा इतिप्रश्न घेगातम ! मीरयषप्पभाएपुडयोए बाठापपरेरेगारगतमासामापिसमा परभवमा पयत्ता पाएपणापम प्रसऐवभागे एवमध्यभारिप । पोव सप्रमानाम पपियोनेवि बेरवारि, महा ठावपत्ति समाधोग परवाना पोवामान परमवि देवनीयहम्मता सेति लोपामो पार भवया पनता ए पाठ ने मापस मधोतर भारिप ते रायता म पारतप्रभा परियोनेवि एकसाप पयोमाम मामम चपर पपमानिये रेठे एबमाभयापम पीय . 1 - बमास्स माहिसा किाम चोपणसहस्सं परखता मके महासरे जोयसयसहस्से एत्य भवपवासीर देवार्य सत्तमयबमोमीठ यायत्तरियन ययाससयसहस्सा भमतीति मक्पाप इत्यादि तद्गतमेधा निधेपयिझप विझेपेर दक्षपति । उषयाएवं लोपस्स प्रससेवामागेति॥ सपपाता न धमपतिस्त्रस्पाममाप्यामिमुस्सं तेम उपपात मामित्येत्यपः सोकस्पा मयतमे मागे वतन्ते प्रषनवामिमहति । एष सव मामियधति ॥ एष मु धन्यापना न्यदपि भवितव्य तपेद-समुग्पाएवं सोपस्स प्रसरोजाइनामे मारमान्तिकादिसमुहातपर्सिमो प्रवनपतयो लोकस्पा सहयएवनागे व सते तपा ॥ सफायब सोपस्स प्रसपन मागे, स्वस्पामस्पो कनवमावासातिरेकडोटीसप्तकसमस्य सोबासडेयमागवप्तित्वादिति एष असु ररुमारापा, एम तेपामेव दाक्षिणात्पाना मोदीयाना एवमागकुमारादिनवमपतीना पपी पित्येम व्यारा पोसिधारा वैमानिकानाच स्मा मानि वाध्यानि फिपदर यावदित्याह यावस्सिमरियासिस्थामप्रतिपादनपर मकर साय पहिस भवे । सिद्धार्य ठाग पमता इत्या दिप दयस्यामाधिकार पस्सिहमतिकामिपाम सत् स्यामाधिकारपसा दित्यवसप तपेद मपरमपि बोधानिममप्रसिद्ध धाथ सयपाक यं सह नाणियछ , जाप सिझगझिया सम्मप्ता । कप्पाणपइठाण याहलुचप्तमेवसठाण ॥ जीवानिगमे जा मध्ये पसाप पक्षातर सास पायम पिस भवनपतो ऐवताना सातबारा पत्तरपार भवनामा, वो वियप कोई-पनवरायोव भवन पतो अपबचा पायो सामने पसंख्यातममामे चपनारे रम सामन्यामेकरो सपनो पवि कावो, ते इम समुग्याएन चोसम्म पसखेजाभागे, मारपी तिपसमुहात वर्ती भवनपतोनावने पसंमातमभागे वत्तरे सवा समुहासोप्रम पससेखभागे, मम्माम सातकोणे गात्तरमास भवन कमा से सा कमे अमबातमेभागे परम पसुरफमारमा रम तेपनाईष दधिषना उत्तरना इम नागकुमारादिक भवनपतीना तथा यसरना तवा यातिपो मा तपा मामिकमा साना गावा। बायसिगिरियासमता कप्पाप पार । यावत् सिडिमडियति, सिविम्बान प्रतिपादव प्रसरता कायो, नेमविवाभिमाम् । सिमाम्मामकमा इम्बादि, हा देवमामाधिवारपको सिविगछिकानाम ते मानक बागवा सोवाभिगम उपागनी ए गारा म . मैदे रन्येप पनि पर्याय पिंचायते इति द्वितीययतेषष्ठम मम समाप्तः ६ ॥ नापाविहे देवत्य नवतीति दयो देशका समारम्पते तस्पर सूत्र परवमित्यादि कारणति ॥ कति दया वात्सपेये तिगम्म, पतिविषा देयाइति पदय ॥ जहाठामपति ।। पपा परप्रकारा पादृषी प्रधापनापा द्विवीयेस्थानपदास्ये पदे देवामा यमप्यता मेति तथा प्रकारा मणितष्यति मवर ॥ भयणापमाप्ति क चिरयते, तस्पच पत म सम्प गवसम्पते दयरक्तमताय ॥ एमीसे रयणप्पमाए पुदयोए प्रसीसत्तरचायएसयसारसयाम्लाम उवरि मग बाय नते ! मणामीति हारणीलासा , नासापद नाणियछ । यिइयसए बछोउद्देसो सम्मत्तो ॥ ६ कइषिहाणजते ! देवा पमप्ता ? गोयमा ! चउचिहा देवा पणता तजहा-नवणयइवाणमतर जोइसयेमा पिया । कहिणनते ! जयणवासीण देवाण ठाणा पणता ? गोयमा ! इमीसेरयणप्पनाए पुढयाए जहाठा पपदे देवाण यतश्या सा नाणियहा , नवर नवणा पणता , उययाएण लोयस्स यसखेडाइनागे , ए घरें पर्यावरी विचारिसे । रति ए बोबा मतवाना हशा उऐगो पूरोपयो । भापा विषयी देवताहुये तेमाटे मातमोसो मा देवनार-बारभतेरेगापबत्ता । गला रेममयम् । वाति प्रपेचाये देवताका पगत् क्षेतश्चेभेर देशकमा इतिप्रय । गोषमा पसपिडादेवा परत्ता तया भवसमा मात्रमतर वारस पेमारिया गौतम चारमेरे देवबामाते की-भवमपतो। मामबंतर यातिपो र मामिव ।क विषमतेमवरपासोच देवार ठारा पत्ता गाममा । सिभिवन् । भवनपतो दरमा नामक कमा इतिप्र गौतम ! मीरयषपभाएपुगोए महाठापपरेदेवाः आरसत्तमयासामापियवा चयरमपपा पपत्ता सबपाएपसासम्म प्रसपेजभागे एकममारिया । एकीच खमभानाम पबियोनेपि पे पवाटि पाठापदेति वा बायो पाना बोभारमान पदायि ऐवनो गमता, सेत्ति यो पामो पपर भवा पनत्ता ए पाठ ते समापर मोतर म बारिये ते पायता समई पारणप्रभा प्रतियोधिप एकसाप पयोमान गोमन अपर पबमारियठे एमपरमपावन बीम 1 ७ राते नागठिमति मापस्य शप मतिरिकमानीवानिममइत्यादि । सब विमानाना प्रमाणवक्षममागंपादिप्रतिपादनार्यः ॥ इतिरित्तीय प्रतेसप्तमः ॥ भप रेवत्सानापिधारा घमरणमामिभानदेवत्यानादिमतिपादनाया एमोदेसाफ सस्प चेदं सूत्र । कहिया मिस्पारि । प्रसुरिदस्पति । असुरेन्द्रस्य स पेपरतामावापि स्पादित्याह असुरराजस्य यशवप॑सृरनिकायस्पेत्यर्पः ॥ अप्पापपपरति ॥ तिर्म य घेमाणिउद्देसो नाणियहो ॥ पिईयसए सप्तमो उद्देसो सम्मत्तो ॥ ॥ कहिणनते ! चमर स्स यसरिदस्स असुरकुमाररणो सन्नामुहम्मा पाता ? गोयमा ! जयूहीवेहीवे मदरस्स पछयस्स दाहि णेण तिरियमसखेज दीयसमुद्द पिईयइप्ता थरुणवरदीवस्स याहिरिला घेझ्यता शुरुणोदय समुष्ट वा यालीस जोयणसहस्साइ उँगाहिता एस्यण घमरस्स सुरिंदस्स शसुररमो तिगिच्छिकूनाम उप्पाय रिव सव विमानना प्रमार वषमभा गधादिप्रतिपादक मानिक सहेगा वाचवा । वितिवसमस्सयतमा । पयोमा यतकमा सासमा हेमा टल्या ची रिप्या । • पाक्षिसे सणे देवस्मानाधिार का, धमरचधाभिधान देवमानापिचार करई-पशिभसे घमरमप सरिस असरहमारपासभामुखमापसत्ता। विजार पाबासकारे, भगवन् । पम प्रसरेंद्रनो प्रसरणुमार राणा पभिवर्ती असुरनिकाय चे ने तहमा सभामुधमा होतिप्रश्न उत्तर। गारमा मन्रोवेदीवमदरसपम्पमस्मदारिऐप। रेगौतम । अपूपीपनामा पोपनेशिप मेरनामा पवतमे दपिपासे । तिरिवमसचरोमसमरगीतीरता परपदोषण । पोश प्रसंसाता पोप तथा समुद्रमा प्रतिबमोने सघोने परुषोपमो । बाहि मापातामा मारिरमी वेदिवायो । परोदयसमा । परुषोदकमामा समुद्र मेविषै। बायासोसमापसामा उम्पारिताए । वामाचीस स सामान प्रयगानिसपोने । एवर मरण परिदम पसररपा । पालापहारे, चमरेटना पसरेंद्रना पसुरखुमार राणागो। तेगिचित्र परामप्यायपाएपपतेमहमूटनामे तियम्बा घाबामे निशा पायोने क्रियारकरी अपी पावे से कयो । सहरसपबावीसवाभपसएसबुट .

प्पारपाकार, कस्पविमानामा माघारी धाग्यात्पर्षः सबैव मोहम्मोसाणेसुरा मते कप्पेसु विमारपुटयो कि पहिया पसता । गोयमा । प गोदपिरहिया पबत्ता इत्यादि पाप-परसदहिपाहामा मुरमयमाहोतिदोसुकप्पेसु । तिमुवावपराया तदुनयमुपाठियासिमुय ॥१॥ तय परवरिमपा पानासतरपहियासत्ति ॥ तपा वारदेति । विमानपपिम्याः पिहोवाच्यः सर्व-सोहम्मीसापेमुख मते ! कप्पसु विमागपु खी वाय बारमेर पमता ? भोपमा ! सना वीस बोयबसपार इत्यादि । पाइप-सत्तावीससयार प्राइमकप्पमुपुरवियाइम । एककहासिमेसे दुरुपयदुमपाय ॥ १॥ प्रवेयोपु हाविपति योजनामा प्रतामि, अनुत्तरपु स्येकविशतिरिति ॥ सवसमेवति ॥ कस्पविमामाचस्य पाध्य तपेय- मोहमीसाबसु प्रते । बप्पेसु विमारा केवड्य पचप्तेष पबत्ता ? मोपमा ! पचवोयरसयाइ इत्यादि पाच-पचमठपत्त पाइमकप्पेसुहतिष्ठ विमाका । एकम्युमिसेसे पुछुनेयमेवमय ॥ १५ पैपेयकेषु दायोजनशतानि अनुत्तरपतु एकादशति ॥ सटामेति ॥ पिमामसस्पाम धाग्य तर्व-मोहमीसाबमुख भते । बप्येसु विमारा सिठिया पसत्ता ? गोयमा ! व प्रायसिया पविता ते वहा तसा परसा के प्रावतिया पाठि . पोमेरे, परिमाननो पाशापारा ते रम सोबम ईमाननेवि ममबन् । बमनेपिप दिमाम पथियो मेंप्राधारहे गौतम ! घमादपि प्रति हितमसो रबादि । बाबत्तमेवसठार । विमान परियौना पिड पायो, ते रम हेभगवन् ! सौधम गान ऐवसोवनेविषै पिमामपियो पोतने पास अपरेको मौतम ! सत्तापीससव मोचन इम्यादि उपस पावा, मौषम मान देवतापनेविषे पिमान वेतमा उपपरेशमा, गौतम पचसय योजन हमादितबा मठापत्ति विमानमा समान बावा ते इम सोधर्मीयाममा विमान में प्राचार गोतम पारिबा प्रमिते यस बारस बार सारे पापतिमा बाहिर ते नाना प्रकार संमाने । ति मा प्रर्थना मेप देशाबोवाभिममेमारमापियरेमामापियवा । बारमा , . मेस उपरि राशिमायबमास्साई रोनियबससीए बीयपसर किषिविसेसाहिर परित्यो पुसमान्तरे खेतमस मस्त्येवेति । घरवारविगत पति वरषमस्व विग्रह भाति यस स स्वापिष्प्रत्यये सति परपञ्चविपक्षिको मप्यताम इत्य एतदेवा ॥ महामवेत्यादि । मादी वा पविशपः ॥ पञ्चति तप भावायलटिकवत् यावत्रा विपरम, सो भरतः मरम्पदलनिवृत्तस्वात्, सो, मतपः पो पृष्ठा घ पृष्टः परमाण्या मप्तिमेष मष्ठे सप्टइष सप्टः मुकुमारझारपा प्रतिमप प्रमावमिकमेवा। शोभिवो, अतएष भीरए। नीरवा रचोरहित , मि म्मस बठिनमसरक्षितः मिपके पाईमसरहितः निकंपाचार, निरापरणदीप्तिः सप्पने समप्रायः समिसिए , सबिरसन्जोए प्रत्यासमवसूद्योतफ. पासाहर५॥ पठमवरवड्याए परहस्सय वसत्ति ॥ वेदिकावर्मको यपा-साय पठमबरवाया भाई बोयर सर पत्ते हस्स तिणियइगुयाले जोयणसए किचिविसेसूणे परिरकयेण , उपरि दोणियजोयणसहस्साइ दोमियबल सीए जोयणसए किचिविसेसाहिए परिवेण, जाव मूले वित्यो मज्जे सस्कित्ते उप्पि विसाले, म यरव इरविग्गहे, महामउदसठाणसठिए, सछयणामए, अच्छे जाय परिवे, सेण एगाए पउमवरवेइयाए षण म परिधिबारका विचासे एपसास तोनसे खतासोस १३४१ पावन । विषिक्सेिसूबपरियसेवेष । कारक मिषो नपरिध बापवा । परिदापि समापपसरपार । परि पाय सरस्पावन । दापियवसोएबापरसए । रामसे मासो २८५ मषन । तिरिवियेसाक्षिणपशियसेवेष । कारक वि मेया नपरि पारमा । प्राणम् शिवोम संबित मागत ममनेवि विसारयत मपभागे सांडा । उम्पिविसामवभेवरवाररिमा। पदो पर बिम्तोष विरासे प्रधान वपनोपरे प्रावारा बानो एतहरिचे सविसाएकोष देवाई। महामुठसठापमठिए । मोटाई मुकुट पाप विप वेपने | मम्मामे रमाईमपरसपामए पछेनापति। सर्वरणमय मच निमम पापाय पटिषनोपरे यावद गदको सगो पर घोरस्पारि, प्रतिष्प |ना मामा सेवएपाएपउमबरण सारवरखरसम्ममोसमतासपरिभित्ते पठमवरयोबाएरपसारमयो । तविमिथिटयरत एक पायरमेदिका - ग्लोकगमनाय या गत्यो त्पतति स सत्पासपर्वतइति । नोपूनस्सेत्यादि । तब मोस्तुमो लयवसमुद्रमध्ये पूर्व स्पा दिशि नागराजायासपवत त स्पबारिमप्यान्तेषु विकम्मममारमिद-मसाविक्समोसे दसवायीसाइबोयबसयार १ । सप्तसएतेषीसे २ तारिसएपचठयासे ३ ॥१मय विभो पमा । मवरमित्यादि । तत यव मापन भूलेदसवावीस वायरसरविक्सानप । मझेपप्तारिपट योसेउवारसत्तसेयासे ॥१॥ मसे तिमि भोपप सहस्सार दोधिप बत्तीमुत्तर घोपयसर किषिविसेमूचे परिक्रोधेन मऊ एग वायरसास्स तिलिप रगुयाते पोपपसर फिषियिमस्से परिक्रो पाइए पणत्ते , सप्तरसएक्कयीसे जोयणसए उह उच्चप्तेण घप्तारितीसे जोयणसए कोसच उचेहेण गोधून स्स छावासपश्यस्स पमाणेण णेयचं , नवर उवरिल पमाण मळे नाणियछ , मुले दसयावीसे जोवण सए पिस्कनेण, मऊ घप्तारिघउहीसे जोयणसए विस्कोण , उपरिसत्ततेवीसे जोयणसए यिस्कनेण , मू ले सिणिजोयणसहस्साइ , दोणियवत्तीमुप्तरे जोयणसए किचिविसेसूणे परिस्केषेण , मज्जे एग जोयणस पत्ते। सतरेसे रखपोसयावन १०२१ मा पपेछ । पत्तारितोसेना मापरसएश्वासपतपेहए गाभपापावासपाययसपमारे पतय । पारिसे तोस भाबम ५ पने एकवास परवीमारे घरा सरसम विर्ष पूटिशि नामराबमा पाबासपवत तेजना प्रमापसरोपी चापमा सेहमी प्रमाप पादि | एकसान वापोसमावन मध्ये सातसे पीस माजन अपर पारस पछयोस योनम से पपि षांचयो । पपरवरिखपमापमो भापियाष । पवनी वियष गोयभपर्वतनेवि ने मान छपरवाना ते माग तगिरिझाट पक्तमवि मध्य नागे बांरमा एडोब ऐसा मूसेदसमापीसेबोअपसरविभव। मचे एकमात्र बागोस यानन विस्तार १ २२ । मम्वतारिपठयोसेबोपयसपपिसभेष । मघभागे पारसे चटपीस यामन विफार ५२४ । परि सचतेगोसेवोपचमविकसभेत । त्रपरि सातसे तेगोस २२ गोषन पिसारे। शिव परिधि काये-मोतिथिमोपपसापार । मो तोगसहम बाण मा दापियोमुत्तरेषापरसए । दाबसेबत्तीम पावन । पिपिपिसेपरिमोद मम्मेएमनोमनपर तिनियममाहिनाभसए । कर पिमेमो पसति । मासादयसको पापः सम-प्रामुम्गपमूसियपहसिए, अन्यगत मनोदतवा पपा प्रम त्येग मुभितो ऽपवा मझारस्पा गमिबत्या न् भन्मुद्रत धामाबुभूित पेत्यम्मुद्रताभिवा प्रत्ययमुखात्यपः प्रपमेयचमसोप यात्र दृश्यः तथा प्रासिताव प्रमापटसपरिमततया मासि ता मनपा वासिता शुः सम्पदोषा: मनासिवइति । मरियमरपवमत्तिचित्ते ॥ मरिणामकारवानां प्रतिमि विदिप्तिनि य विधी विपिनो यः स तपा इत्यादि । सोयमूमियपत्ति म महोसवयकः प्रासादस्पो परिमागवर्मशः सचैव-तस्स पासापवभिसगस्स इमयालये उन्लोर पबत्ते प स्कनण, पासायवन्नन, उल्लोयनूमियन्नत, एजोयणाणि मणिपेठिया, चमरस्स सीहासण सपरिवार ना णियछ, तस्सण तिगिच्छिकूफस्स दाहिणेण बक्कोशिसएप णवमचफोफी पणतीसचसयसहस्साइ पसासच सहस्साइ जोयणाइ थरुणोदए समुहे तिरिय बीतिघहप्ता रयणप्पनाएपुढवीए घप्तालीस जोयणसह मठ पत्ता पठाइ गावम २५ मा परे। परयोसमोपरसय विषयमेष पासायबरपो। पयसो पावोस पावन १२५ पिपई मासा दमा गएका पानी, ते रम पभमागमूसिवपहसिप । पतिको अपो रमय, इत्यादि । बाय भूमिको पावापापिमरिपेठमा घमरपसोहासर्पस | परिवार भाषियग्य । प्रासारमा वपरिभाममा वरते हम-तसवपासायरिसमस रमेएमारे चोएपसत्ते परमसमभत्तिरिसे वापसम्पपब्लिम प पाबाबपरिणे रम्पादि, मोबास तया भूमिवरण ताम-तसवपासामरिसमस पासमरमरि भूमिमागे पपत्ते पासिंगपुनरेवा रमादि, पाठ याममनी मरिपोठिमाई, रमरसबमो परिवारमा सिहासन सहित बागा, ते इम-तमसिहासषण परत्तरेष उत्तर पुरछिमेष पखप चम सम पठाए सामापियसाारसोएप परमहोभासपसारसोपा पपत्तापा इत्यादि । तस्सरतिमिस्किारसराषिपेप। तामे, वाश्याबारे, ति । मिडिएट उत्पातपातने दधिषसिशि शाहिमपपरवषयागेभो । श्सम काचो पचायनबोडो। पचतोसत्रसमसामा । पोसताए। पपासमा पार पापा । पपास सहम पतथा मावन । अरुपादयेसमुरे। पापादयनामा समुद्र विष । तिरियमोतिवसा । सिरहा पविक्षमता वाताव - पंचपसमाई धिक्समे सपरपजामईतिमिनमउपरितनपरिम्सेवसमापरिक्रबर सीमेप पठमयरषेदपाय इमेपास्ये घणायासे पसते यसक प्यासो वसविसरा पारामपानेमाइत्यादि ॥ मेमप्ति ॥ स्तमामा मूमपादा मघर घमसावणक रुस्वय-सण यासो देपार दो बोपणार क वामनिम्यानर पठमबरवेश्यापरिक्षेबसम परिम्पोर किपर किरहोनासे इत्यादि । यसमरमनिम्नप्ति । प्रत्पमतसमा रमपीययेत्यप ॥ यस धि पाक सस्य पाच्या सभाय-से वहामामए प्राप्तिगपुस्वरोहया भासिमपुर मुरबमुख सहस्समात्यपः' मुइगपुफ्सरपया सरततच्या करवसेइवा बापसमझतेरवा पदमसावेत्यादि । पासायवमिसरतिमासादो ऽयतसकाइव शसरफरय प्रधामस्या प्रसादायप्तसका पासाय खणयससमता सपरिस्किप्ते, पउमघरवेइयाए वणवफस्सयवण, तस्सण तिगिच्छिकूफस्स उप्पाय पष्ठयस्स उप्पि यजसमरमणिले नूमिन्नागे पणते , बन्लन, तस्सण यज्ञसमरमणिजस्स घऊमऊदेसन्नाए एत्यण मह एगे पासाययफिसए पणते, शहाइज्जाइ जोयणसयाइ उह उच्चत्तेण , पणयास जोयणसयाइ वि पनवनपरनोपणापामा,तिहां पनपरपेदिचा पायामन पोपाचसे पनप तिफसगरबममते वेदिका गिचिफूट पपतमा परमा ततो तेरीप रिधिनोपरेपोटो रोके, ते पनवरदिवा यो सेपपठमबरसाए मेरमाध्येमपावासे परते। पपकयास । वर्षक विम्सार । यारामया नेमा | मारिनेमाबामामा ममपाया पनसम्परतेवनपाये वचारोष गवन पपवास विसभे, पपरोदिया वीटोरमा रम्यादि । तसविगिरि पडप्पाबपाणयम सप्पि वासमरमविभूमिमानेपथवषपोतिने तिगिचकूट पर्वतने छपर पर प्रसन्न सरोपो रमपीक मनापरभूमितम बमो तेरनोवाका रममाया, सेवाानामए पाखिम पुखरोषा मुरमवाय विशेष तहमा मुए सरोगे सम सर्म, प्यादि पर भयो । तागापमरमपि वणभूमिभायामप्रदेसभाए। ताने समाजामा, पड्सम रमको भूमिभामविषेप मघापभागनेविचे एतपेचाते रस्मय । एमएमपा सायास्सिएपपत्ते । तापमानामबार, मोटा एक प्राभारापतसब प्रामारमपि प्रभासपा मुझटारीची प्रासारण। पारमारपीभवनबार तो सबस्पो मारिममा सीपम्पमानिनिमाममाबारमातासमारिवनुमतप्रमावस्था द मैतम' तपाहि-तीपर्ममामिवामा विमानमाबारी पानमामा बोगिमता पुषत्वेन एतस्पास्तु साभतं सपा सीपमवैमानिकाना समासादा पनयोवमानां सतानि तदम्पे पवार सत्परिवार भूताः साई पते प्रस्पेवर पा चतुर्ग मम्मम्ये परिवारभूता पत्वारः सपाद शतं एव मन्ये तत्परिवारभूता सार्वा द्विपष्टि रव मम्मे सपादै कमिशत् पातु भूतमारादः साई हे पोजनझते एष मार्दवीमा पदपरे यावाम्तिमाः पनदयोधनानि पन्धक योधनस्या टासा, एतदेव या बनातरे वक्त-सारि परियान पासामवमिसना पाहीबाहति । एतेपाच मासाराना चतसपि परिपाटिपु पीरि सता न्येकचत्वारिपद पन्नास जोयणसहस्साइ पचयसप्ताणउय जोयणसए फिषिविसेसूणे परिस्फ्रेवण , सधप्पमाण पेमाणियस्स पसमाहार। ते वारस पासे पाचन बाप । एमपरयोसवापसप ११ विस भे। एकसा पोत्तर भोजन मिक्सपपरे १०५। मारिबषसाससबापवसायार पानामरियर्षभ । परना पौठ बंधारोगा . साम् योजम दोषपर्षे पिसपछे । पपासबोपवसाधार परमसत्तापरवापषसए । पंगस सहमबागन पाच सत्तापर्य मावन । पिपिषिसमर्पपरिपोषेत्र । बाप वियेपे यो परिध पायो । सम्बप्पमा पपद रामपानी विष प्राधारगड पासादर सभारिवाए, ते समो उपादिक प्रमाण ते मोधर्म पैमानिक मावार प्रासादादिमो में प्रमाणात पामाषणात देणारे-सौषम माविव पार विमानमो प्रावार तोमर्स १.. मापन घ पपई तेमाटे पानो १५ , तवा सो प्रम मानियने मूबमापार ! • पावनना तायो बोचा तानो परिभूत २५ गायन, ते पारिना प्रस्मेक बोवा चार र विमान तहमा परिवारमूत २५ गबन म बोबा ते परिवारभूत माओवासठमावन इम बोवा पपाषषीस मोमन इस विमान परिपाटो सौधर्म देवसोबनेपियरे, सा मूसमा सार २५. पाचन यो पदकोष बरा या परमानव धर्म एबगोवमना पाठभागबोपारा पौभाग प्रमाब, एहोष पाचनामारे पता रिपरिकोपापासायसिमाप पागोरावति । एरा प्रासादगी पर परिपाटोनेवि सोमसम कतापोस प्रासादाये, १२५. मो०। ४ १२५ मो.

. समसपनतिषिते प्राव महतवविक्रमए भोपापपलिये, भूमिषण वेव-सरसय पासापयहिमयस्समसमरमपि भूमिमागे पक्ष महापा | सिमपुपरेपेत्यादि सपरिवारतिवमरसम्बन्भिपरवारसिंहासनोपेतं तय-सस्सर सौहासपस्स अवारस सतरण उत्तरपुरथिमेष एत्यय चम रस्स पठसडीए साभारिप साहसी उसष्ठी प्रवासासाहसी पमताई, एव पुरथिमेष पथपा भग्गमहिस्सीप सपरिवाराम पवनदासण अपरिवाराह राशियपुरथिमे अनिवरिपार परिसाए पनीसाए पषमाइस्सीप पठीस महामसाएस्सीठ, मव दाहिर मझिमाए प्र माधीस प्रदामनमाहरसी दाहिरपवधिमे पाहिरिपाए पत्तीस पदधिमेरा सतह प्रपियापियार्स सप्तमहासकार राहिसि पापरक्सदेवा तारि महासजसास्सवसमतीति । तेतीस प्रोमति म वाचनान्तरे दृश्यते । तत्र भौमानि विशिष्टस्यानानि , मगराकारापीत्पन्ये ॥ सवरि पतसरवि पास पीठमभकर । सबप्पमा मारियपमास्स पद भयपत्ति ॥ अमममों यत्ता रावपान्या माकारमासादसमादि यस्तु तस्प स्साइ उम्गाहिता , सत्यण धमरस्स यसरिदस्स शसुररणो घमरचचानाम रायहाणी पसप्ता, एग जोय णसयसहस्स थायामयिस्कनेण अयूहीयप्यमाणा उवरियतलेण सोलसजोयणसहस्साइ थायामयिस्कनेणं, पोरसवपभाएपुमोर ।।ठे प्रप्रभा पदियो । पत्तासीरवनापरसास्माइतमाहिता । पासोस सहमसामन पयमाहौने । पत्यपमराणपसुरिंद सपमुररथाचमरपानामरायारो पत्ता बाबासंचारे, अमरेन्द्रनो प्रसुरेन्द्रनो पसुररावानो चमरपनाम राबधानी कही । पगबीप पसरसारमाबामनियमेव । एबनाए रोमन चांगपो ता पिजुसपर। चारोगप्पमाषा। पीप बेबारे प्रमा। दिबठरवोपपसय उठटर पत्ते। एक्सापास पाचन १५ चा अपपरो। मोपचासनोपचापि भेष । मममे विपे पास गोषन पिमा । हरिपारसवापार पनि | सोसमा। परि साठोपारे गावम बासीमा बापा । प्राबोपरमामामेपासबमिल भे। प्रांपाचन विप एकबोस पिपरे । रेभूभपहली परदार। देशे भरा यावन मा बापरे । एममेमाएमापनपदारसमा । पूर्वगो भाडा परिसेपासेमारमाअगलामोध . - सो माविममा सौधर्ममानिवरिमाममाबारमासादसमादिवलमतप्रमावस्या द मैतयं तयारि-पोपमामिकामा विमानमाबारी यानमा प्रमिता मुक्तेन एतस्पास्तु धापत तथा पौषममानिकाना मूतमासादा पभयोबमामा शतानि तदम्ये चत्वार तत्परिवार मूता मागते मस्पेवर ते चतुर्वा मप्यन्ये परिवारभूता प्रत्वारा सपाद हत एवं मन्ये वत्परिवारभूताः मार्दा दिपष्टि रस मम्मे सपाद पपिसत् रहतु समासादः सा योजनझते एव माशीना स्वाइपरे पावान्तिमा पनवमयोनमानि पचव योजनस्पा टासा एतदेव या मातरे उच्च-पत्तारि परियाहीठ पासापवठिसमाज पारीमति । एतेपांच प्रासारामा पतसवपि परिपाटिपु ीरि सता म्पेकपस्वारिषद पखास जोयणसहस्साइ पचयसप्ताणउय जोयणसए किचिविसेसूणे परिस्नेवण , सहप्पमाण वेमाणियस्स पसगार उटाव ते पारणा पठासे पाचन पता चपा एमपरवीसमोपवसर १० वि भे। एबमा पचोत्तर मोबन विसम्मप१०॥ मारियपणाससमापसाचा पायामविएपभेष । धरना पीठ पसरोगी १५ सास यावर दोषपरें पिसपो। पसासनोपपसापार पायसत्तापगापरसए । पास सामगोवन पाचसे सत्तारो मावन । विरिबिसेमपरिमोपेर । कवि विशेषे पो परिध पारयो । सम्बप्पमा था पपा बेते रामानोनेविष प्राचारमठ मासादार समादिबावहरेपवनो सधाविक प्रमाप ते सौधर्म पैमानिक प्रावार प्रासादादिवानो प्रमाणपातोपो पापामा ते देणार सौषम मानिव पर विमाननो प्राकार तोममे.. याचम व पपई तेमाठे एानो १५ , तवा से धम मानियने मूतप्रासाद साबममा तेयो वीमा को परिभूत २५. साधन, ते पारिना प्रत्येक गोवा पार र विमान सेना परिवारभूत २५ मापन रम होगा ले परिवारभूत साठोगामठपावन हम गोवा मबारबोस मावन म विमाम परिपाटो सौधर्म वसोवरिपर, सा मूस मा साद .बाबन तेरमो पारोन करतापरा पनरेबाचन पने एबमोचनमा पाठमायकोवे गागा पापभाय प्रमार, पदोन वाचनावरेता रिपरिणापापासारवतिसगाव पागोरावति । एमासादनी पर परिपाटोमेगिय तोनमम इकतामोस प्रासादा, १२५० यो । ४ १२५ यो . - . पिकामि भवन्ति, एवेन्य प्रासादेन्य उत्तरपूर्वस्पा दिशि समा सुधर्मा' सिद्धायवन मुपपातसना, इदो ऽनिपेक्सना, सफारसमा प्ययसापसना ति एतामिक मुपम्मसत्रादीमि सौधर्मवैमामिक्सप्नादिन्यः प्रमायतो ऽदप्रमाणानि तत योप्य रहेपा पद्मिशयोजनानि पचाश दायामो विकम्मय पम्वविधतिरिति एतेपात्र विजयदेवसम्बन्धिनामिव, अप्पगतानसपससिविता अनुग्गपसुकपवारवेदपाहत्यादि ययको याप्प सपा दा राणा उप्पिबावे पठठमगतमाळया पत्ताइयत्ता इत्यादि रसकारण सनादीमा वाच सर्वच धीयानिगमाप्त विश्पदेयसम्पन्धिवमरस्प याप्प याव दुपपातसमायां सङ्कल्प पानिनवोत्पमस्प कि मम पूर्व पाहा गर्नु मेय इत्यादिरूप अभिषेक पानिपकसनापा महर्चा सामामिरादिदे कता, विनूपशा बवासद्वारकता प्रसकारसनाया व्यवसापय व्ययसापसनाया पुस्तकवारमतो अनिकाच सिहायतने सिहमतिमादीना मुप मसभापमनच सामानिकादिपरिवारोपेतस्प चमरस्य परिवारय सामामिकादि यद्विमान्चक, एय महिमित्यादियघने याष्य मस्पति एतच या १५ ५२॥ या । ५४ २१॥ या । २५५ १५॥ ५ भाग सर्व ५४१ पया या प्रासादयो रमान कृषि सुधर्मा सभा सिहायतम उपपातसभा इदभिषेकासमा पक्षकारसमा अबसारसभा, एसुधर्मासमा पादिदा सोधम वैमानिकप्रभादिबमा प्रमार पाप्रमाए एनो नोपयो तिमारे एने छ चप ५ यो |वन । गोमन पागमे २५ गोबन विषधे एहने विचरदेशसर्वधोनोपरे पमेव पनसयमपिबिहा इम्यादि, बरा बायो एषीवाभिगमेको, विष यदेवसमधे विम सबमरने सबधे पार गाव उववाभोस बप्पा इस्मादि । अपवा प्रामबाप्पा । देवता पपात सया चपने कवच परिपीपरपी का पोवारको रमादि । पमिसेव विसपापो यवसामो पपरिवमुरमाय चमरपरिवाराडित भाविाए । अभिषेक गोवा मते ठहरा रम्मादि पण प्रकार परिया पर्वकारसमा पपसारपमा पदबावाचा मिनायतम प्रतिमादिको पूषारोपी मुधुमापमा मि परिवारमिले पामाभि - ॥ मामार पर्यंत प्रायो अमलोपत एबमति दितीयमाप्तमसः । चमरबम्पासापर न मठमोदेसो उस मप र पारिवारापय मपमे समय मुच्यतइत्येवं सम्मास्या स्पेर पूर्व विमित्यादि । तम समया बास नो पतत्तित समपत्र कालोशिदिनमासा रितुपा पमतिसमनिमम्पो मनुप्पोबएव न परतः परतोहि मादित्याः सम्बरिष्मवइति ॥ एवं वीवानिगमबत्तबयानयवति ॥रपा रेव-एम यो पासपसरस भाषामविकसनेय मित्यादि । बोइसपिपत्ति तब बम्यूहीपादिमनुष्यभवत्ताव्यतार्या जीयानिममोक्तार्यान्योतिपयशव्यता प्पति, तत सदिहीम यया भव स्पेष बोवानियमवचन्यता नेतव्येति वाचनान्तरेतु खोइसमविपत्पादि यहाश्यते, तम-मयूहीवेर मते। का दापनासिया ३ कतिमूरिपातविसुवा ३ कावसत्तावोबोईसुभेत्यादिकामि प्रत्येक न्योतिफसूमापि, तथा सकेगर्छ नत ! रथ वुद बपृष्ठीये दीये मोपमा अनाययं दी मदरस्त पवपस्स उत्तरर सवास्स दापियर वाय सत्य २ या घमुरुम्सा पयुवा वाय उषसोएमाग पिठति पमाणस्स थद्ध नेयच ॥ तुइ यिझ्यसए थष्ठमो उद्देसो सम्मतो ८ ॥ किमिद नते! समयकत्ति पधुच्चइ ? गोयमा ! यहाइजा दीया दोयसमुद्दा एसण परइए समयखेत्तेत्ति पवुच्चइ , तत्य बादि परिवारसरित पर परिवार सामामिम शरियत ए महिए स्मारि वावा, यावत् विघर। वितियस्मपामग्रो । एवोबा शतकनी पाठमो रमा पूराबमा । । तेत्रमा परिवारको नयमे गे समधन कहिय-शिमिदमतेसमय तेत्तिपवयाभगवम् ! ममम माबोर तिपत्र, उत्तर । गायमा पहारवादोबारामसमा एसबएबाएसमयपेत्तेतिपयुपा । गौतम ! पठाशीप वेसमा पचन मममक्षेत्र कोमे, समय का काम तिप उपसचितकोधा से पाम ते दिम मासाठिप्प सूय गतिकरो पापिये से मनुषवनविषय ते मागि रमजाने पर पारिवादिया सपारमको खिरमाटे । तयासमवादी २ । तिही पायाबारे, एप पीपमामारोप । सम्पहोपसमहापसम्पमा सरे एमाणाभिममा तमवाचतमा प्राव परिपुनराबोरसपिएन । सर्वोप समुन्ने सप पम्पतर मारेले एम मोवाभिगमसूत्राय पाम्यता जांभयो ते - -- सतमा मोपमा ! मय पुगा वीषेदीय इत्यादीमि प्रत्येक मपसूमारिप सन्ति सप्त पेसविराम सभा मष त्येय धीवानिगममतव्यतया नेय मस्पा मकस्य सूत्र ॥ बापरमागाइति ॥ सग्रहगापा साच-परटतसमययायर विपणियावसारगाथगयी भागरनिधिनायरा गमिम्गमेयुनिव पराच ॥ १॥ अस्पा पार्थ साधा नेम सम्ममा पातो अम्मूहीपाटीमा मानुपोत्तरामताना मामां परस्पात पदमुक्त-मायंचय मायुमुत्तरपक्षम तापप शस्सिमोएप्ति पर ॥ ममुप्पत्तोक तथ्यतात्पर्प स्तथा ॥ परतत्ति ॥ बावषय परहता चकयी जाय साथिपाठ मगया पगानदया विजया तथा परिससोपत्ति पवृषा समयत्ति भावंचय समयाच्या पायसिपाच्या चावतोत्ति पयुया ण्व बायपस थापर यिम्मुयार यापरे परिपसह भावपण याये उरामा घमाया ससेपत्ति पमणिति चावरण थायरे तठयाए बापपय पामरारया मिरीच्या नाया उयरागप्ति पदो परापाहवा सूरायरानाथा सावरण भस्सिप्तोएत्ति पयुपर उपरागोयाय निगमे युभिवपापति ॥ याय भिगमादीमा यपन प्रतापन सायन् मनु | पत्तोमरति महत ता-बावषय पदिमसूरियार पाव ताराण्याप पापमय निगमप फिनिटी पापवित्रा वायपर अस्मिताएमि पयुपर प्रतिगमन मिशातरापथ निर्ममम दक्षिणायन पनि दिनस्य पदम मिनिस्तस्यैव रानिति हितीपसते मषमउद्दश ण शय जयूद्दीयेहीधे सहटीवसमुदाण सस्मितरे एव जीयानिगमयप्तक्ष्या नेया, जाय श्यस्त्रितर पुरक रद जोहसविण ॥ इह यिहयसए नयमो उद्वेसो सम्मत्तो ९ कइण नते । शत्यि म-एबापच सयमास्स पायामणिसभेषरमा र मापत्तासमका, भामरी पम्पवर परार बोरस भोप प्रादिदेर मनुषपेष बातम्यताबोबा निगमेवगो तामबि बतियानो परिवायतालोतमारे समातिय पासता मनामी बोमोजोवाभिगमो पाप्यता सकायो । विति बस्पनरमप्रा।बोबा सतपना नबमोपगोपूराथयो । मबमेमेषमाते पहिवाय माप मारेपसिबाय निरूप पम्ममारीमावर-बापमतेपनिमाया पत्ता मारमा पनिहारा पता तबावटी सभमबम्पसिकायोनिमा पत्तरशीनम:41 ॥ ८ ॥ ॥

-- ए पनमारं प्रमुत तपातिवापरेमाप मित्पतिवापानिपानपरस्परसमोहरावस्या रिपूर्ण वसमित्यादि प्रमिशादेन प्रोपा सभ्यते प्रत नेपा पापा राममा असिनापाः प्रपया पतीपय निपातः बासत्रयानिधायी ततो असोति सन्ति प्रासन् मविप्पन्तिच यकायाः प्ररेणरामय सोऽस्ति कापारति धर्मासिफापादीनां पोपम्पास ऽपमेव सम सपाहि-पर्मासिकायादिपदम मासिवात्यात् धर्मासिकाय पादा घुष सरमन्तरच तदि फाया पणता ? गोयमा ! पचत्यिकाया पणाप्ता, सभहा-धम्मत्यिकाए अधम्मत्यिकाए छागासस्थिफा जीवत्यिकाए पोग्गलत्यिकाए । धम्मत्यिकाएण कतिषले कतिगधे कतिरसे फतिफासे ? गोयमा ! छय ने छगधे थरसे शुफासे थम्वी राजीये सासए छयाठिए लोगदछे से समास पचविहे पण तजहा- पतिगाममा पतिपदे पदमबहोतानाधाय होये राषिते पतिवार पबवा पतिपमय कासयविवतियार प्रति सवा एमे पकायादेय गिते पतिवार तेबाहे-धविवाए प्रचलिवाए पामास विवाए घोबविवाए पोम्मपत्रिकाए, धमविवाएपशवायपेपरते। धर्मासिवामने | भिमरन् । बेतवापरे । धर्माम्निमाम धारेमति परिवतोप पुरखने ममम वभाबई तेसो पम प्रतिवारिसे परेश पायम होये समूत्र , धर्मासिकाय बोयपुरम ममम बरतामेबद्रय साहाय्यदेधिम मत्मनेम तापी विपरोत ते पधर्माप्तिकाय बिरम्बभाव २ । अवकागम्प ते पावागातिवार र | मापार तेषीय सम्पनचा । परमममम ममावर वानी ते पुाताप्तिकाय५ । प्रय ममसे पूठियोपर बावा, तो धर्माधिपायादिकमा एकोष पनुक्रम पापा ममोपमास्तिपाय मयबोबईते मनो परिम का पायो विपरोत से पधर्मातिवाय २ तिवारपको से देखना प्राधार भको पाकामासिवाय ३ तिबार पक्षा पनन्त मर्त साधम्मको गोमासिबाय : विवारपछो तोमा उपभपायो पुासास्तिकाम ५ मा ए पमुझम धर्मास्तिकायनेविषेप मायामबारे रेभमाम् । कोत नाय काय कारसे पापामे गायमा पबसे प्रमधे परसे अफासे परवे पमोवे सास अपलिएमोगसम्मे। तम्ना गम कजना रस पतमा प्रम प्रतिप्रश्न उत्तर गोतम । धर्मासिवायनेविप वप५ ते माहिसा एकहोनहो, गव २ मही, रस : नही, फरस ८ मही, जेमाटे .

सत्तमष्ठे मोपमा । एप पुर सपूहीवेदीय स्यादीनि प्रत्येक मर्पसूत्रासित सम्ति त घेतविलीम पपा मय स्पेय श्रीधानिगमवक्तव्यतया मेय मस्या दृषकस्य सुप्र ॥ भावामागाइति ॥ सग्रहगापा पाच-पररातसमयवापर विभूिमियायप्ताहगापगली प्रागरनिटिनायरा गनिग्गमेयुनिव पसच ॥ १॥ अस्या धार्प सपा नेन समोना यातो धम्मूदीपादीमा मामुपोत्तरातामा मर्याना पबमस्पात परमुछ-मावर माणुसुप्तरपचर साव व परिससोएति पयुवा । ममु प्यायोक उच्चतहत्य तया ॥ परस्तति ॥ जावषय परश्ता पकाही बाय मायिपाठ मापा पगाप्नपा विषीया त पचय प्रस्सिमोरत्ति पपा समपत्ति बायंस समपाइया प्राप्तियारया वायतोएत्ति पयुपा व बायपण यापर यिम्भुपार पायरे पलियसा वाव पर पर रामा वसाइया ससेपत्ति प्रगपित्ति पाषषर यापरे तसयार कायषण भागराइषा निया मइया उयरागप्ति, पदो यरानावा सूरापरामाषा तापच अस्सितोएत्ति पधुपर उपरागोग्राय । निगमे धुयिया पति ॥ याप नियमादीमा घमम प्रचापम तायन् मनु यसाकाति मस्त ता-आवर दिमसूरियाव जाप ताराल्यास प्राममण निगम घुमिनिमुमती पापविना तापपरा अस्मितारप्ति पनुपर प्रतियमन मिशातरापर निर्भमन एपिवायन वृद्धि दिमस्म घट्न मिपनि तस्मैव निः॥प्ति हितीपमते नवमउदगः पथ्य जयूद्दीपेद्दीवे सध्दीवसमुदाण समितरे एव जीयानिगमतच्या नेयहा, जाव शनितर पुरक रद जोहसविण ॥ इट यिहयसए नवमी उद्देसो सम्मत्तो ९ ॥ कइण नते ! शत्यि |म-एयबापसासारस पायामपिसभेषमा द, यावत् तासमकामा भामरी प्रभ्यस्तर बराबोरबाप पारिर ममयशेष यसपतामोवा निगमेबहोतानविमतियानो परिकामतागोतमारेतेहपातिप पासता मदारी बोनो भावाभिगमा पसयता । मिति परममयमपास बीगायतकाना नबमोगापूरायो । । भषमेचमाते पतिवार रयप्पनेमाटे पसिबाय निष्प पनममामा-बापमते पविबापा पत्ता नाबमा पनियावा पता तबासीभमसम्पतिवापसीतिमा गौतमापन ॥ द ॥ ८ - . C गधे कइरसे कइफासे ? गोयमा ! श्वले जाय शमवी जीवे सासए शवठिए लोगदई सेसमास पष बिहे पणते तजहा-दछन जाय गुण , दधण जीघत्यिकाए थणताई जीयदहाइ , खेतन लोगप्पमा णमेप्ते, फाल्न नकयाइनछासि जाय निच्चे, नाव पुण षन्ने गधे शरसफासे, गुण उयलंगगुणे पोग्गउत्यिकारण नते! कइयणे कइगधरसफासे ? गोयमा पचवन्ने पघरसे दुगधे शठफासे रुपी राजीव सासए शवठिए लोगदधे, से समास पचविहे पणते तजहा-दछन खेत्त काल नाय गुण, दक्ष रपये। यात मुषयो वायपो वारादिवन पवागतहे। वोपविकारभतेवापस । वोवाशिवाय पवाफ्यासकार, भगवन् । तिसावर्ष । बार्ग बारसे वाफामे । बेतवा म बेतसारस बोतमा परस इतिप्रश्न उत्तर । मायमा प्रश्नावपो । हेमौतम ! पपरहित गायत् परूपो प्रमत्त । यो सामा परि मागहमे सेठमासभा पावि परते तमहा। चेतन्यरूप सदा कासीम सिर नियत भवस्थित सोवद्रम से बोवास्तिवाय सपनो पार भोरे ते बाहे-दवा बायमुरमा दयावविवाए । यो वायत् सुषमो द्रस्ययो वोमासिकाय । पपता पौवदमार पेत्तपोको गप्पमाष | मने । पमला बोपदम चेमी चोर सावममा माषमाछ। कासप्रामण्यानपासि । पासपो को बोवद्रस्य नको मनो। पावपि भावपोपुर पाये। गायत् निमा भावदो पसोपपियो बापरहित । पगधे परसे पपासे गुरपारपाममुरे । गधरहित रसरहित फरसरहित वायो उपयोग चम्प साकार पनाबार तद्रूपयोग । पाम्पबत्तिकाएपमतेकापसे। पुरसासिवाय ए बाबासबारे, भगवन् ! कोतवापर । कागंपरसफास । फेवसा मध रस परसका तिमय पत्तर । यायमा परवये । गोतम पाचपर। पंचरसे दुमधे पासासे पो प्रमोवे सामए। पाच रसई दोय मध पाठ परपरे पो परहित यामताई। परि पामधे समासधापंचबिहे पश्ते समाा दग्पा । परसित साबद्रमझे ते पुाचारिखकाय | उपेपमा पविभेरी-इयो। पेचमा वाधपो भापपा गुरुपो दमपोषपोम्यन्विबारपत्रयो कासमी भावो मुषपो, ट्रम्पची पुस्सासिकाम परत्वा दधर्मास्तिकाय' स्ततय तदापारस्वा दाकाशासिकाए, सतो ऽनन्तत्याऽमूतत्वसाधम्या जीवास्तिकाय, सत सदुपष्टम्मकत्वात् पुद्गसालिका दवन खेत्त कालने नाव गुण , वधळण धम्मत्यिकाए एगेदई, खेप्त लोगप्पमाणमेप्ते, कालन नक याइनश्यासि नकयाइनत्यि जाय निच्च , नाव चवन्ने शगधे शरसे शफासे , गुण गमणगुणे । शह म्मत्यिकाएवि एषयेय, नयर , गुण ठाणगुणे। थागासत्यिकाएवि एषचेत्र , नयर खेतण शागासत्यि फाए लोयालोयप्पमाणमेप्ते थणतेघेव जाव गुण वगाहगुणे । जीवत्यिकाएण नते ! कइयणे कइ पादि महो तमाटे पापो चेतमगुवरहित द्रधनो सासतारे प्रदेशको प्रमस्मितके, नाकामि पंचासिकायाम तेजना अंगभूत द्रवह। सेसमासपोपंच रिक पत्ते तमगा। त धर्माप्तिबाब सोपमो पघिमेरे बनो ते बार -रामपा पेतो पासपी भागपी गुपणे । पयो । यो २ सानयो । | मारयो । महो।।दवपारधमलिगाए एमेदथे । द्रमो धर्मास्तिवाय एकट्याइ । तमोडामप्पमारमेत्ते । क्षेत्रको धर्माशिवाय चन्द राजसीक पमाघरे बारमो धर्मासिवाय । वासपा नानपासिमपारनधि । प्रतोतका कदापि नईतो रममहो वत्तमामबान भामामिवासना स्ने रममहो । बामपि भावमा प्रवरे पमधे परसे पफासे गुरमोगमचमुचे । यावत् निमरे, भावभो धर्मास्तिवाय पर्याययो वरहित मभरपितरे रस रहित भयरहित मुभयो मायबो वौष पुगबने गति परिपतने मतिडपरत मिम माइसीने पर तिम । पापविधाएविण्वक । पधमालिका य पनि निर मच पच प्रकारे धर्मासिबायनो परे पापा । पर मुपपाठावगुरे । एतसामिप गुपयो कार्ययो बोयपुरमने सिविपरिपतने मितित पटप दिम मस्मने मह तिम । पागास विधामविएपरेव । पावासासिबाय पनि पत्रिभेदे रमम पारा । पसरतपोधामामयिकाएकोमा सायप नाबमचे । एवमारियष बयो पावामाशिवाय नायतमा पचाप परेड ममा मान बागी। परे । अनन्तो निरन् । बाममुपोषणा - . - - - गधे कइरसे कइफासे ? गोयमा ! शपले जाय शमवी जीवे सासए शवठिए लोगदो सेसमास पथ बिहे पण तमहा-दवन जाय गुण , दवण जीयत्यिकाए एणताइ जीयदधाइ , खेतन लोगप्पमा णमेप्ते, काट नकयाइनशासि जाय निच्चे, नाव पुण शवन्ने गधे शरसफासे, गुण उयगगुणे , पोग्गलत्यिकाएण जते! कइयणे कइगधरसफासे ? गोयमा पचवन्ने पथरसे दुगधे थठफासे सथी राजीव सासए अपठिए लोगदखे, से समास पचविहे पणते तजहा-दछन खेत्त काल नाव गुण, दमन गरे । यात गुपयो वाययो बाबारिबन पाषामहेत। घोविकाएरभतेवापस । पोवासिबाय प वाफ्यासकारे, सिमपन् । कोतवावर्ष। बाम बारसे मापासे । वेतमा गभ तसारस बेतमा फरस रविप्रय उत्तर । गाबमा पवनागभयो । मौतम ! वपरहित गावत् प्रपो प्रमत्त जो बेसामा परि चामधे से समासपा पबिहे पसते तमा। चेतन्यरूप सदा वातीन सिर निवस प्रवलित चोवद्रम ते पोवाप्तिकाय सचेपको पार मेरे ते बाहे-दसपा बामपुरपा दसपारयोरविवाए । द्रप्पयो मापद नामो द्रश्यको नोवासिवाय । पचतार जोपरवार खेत्तपोषीमप्पमाष मत्त । पमता बोबट्रम्प को चोव पाचप्रमारमाऐ। वामपामकमानपासि । वासयो को धोयट्रम्प नको रममहो। बावरिषे भावोपुष भयो। पावत् निम्मा भाषको बसोपरिषो पररहित । पगधे परसे पपासे गुरपासवोगगुषे । मपरक्षित रसरहित फरसरहित कासको उपयोग चितम्य साबार प्रमाबार तदपमोर । पाम्पसखिकाएपमतेवापसे। पुरवास्तिवाय र वासातवारे, भगवन् ! केतसावप। कागंधरसफासे। वेतसा मर रम परसमा रतिप्रश्न उत्तर । मायमा पचवणे। मोतम पांचवाई। पंचरसे दुयधे पापासे यो प्रबोये सासए। पांच रसई दोष मघई पाठ परसबे पोर मयति मामलाई । अपर पायदये सेसमासपापंचमिरे पसते तबारा दम्पमा । भवस्थितने साबमा ते पुदमासिकाव | सपेपमो मधिमेदते काहे -इयो। पेचमा वासपा मापा मुरमो दमघोषपोमयिकापाषषो पासबो भापमो मुभयो, इपयो पुस्ताखिकाय - पत्तस्वा परमातिबाप' सतय तदापारत्वा दाकामासिवाय, ततोऽनन्तस्याऽभूतत्वमापा जीवास्तिकाय, तत सदुपष्टम्मकत्वात् सुद्धसास्तिका दइन खेत्त कालन नावट गुण , दवण धम्मत्यिकाए एगेदछे, खेत लोगप्पमाणमेवे, काल नक याइनश्यासि नकयाइनत्यि जाव निच , नायन शवन्ले श्वगधं शरसे शफासे , गुण गमणगुणे । शाह म्मत्यिकाएषि एवचेय, नयर , गुण ठाणगुणे। शागासयिकाएषि एवयेय , नयर खेतमण शागासत्यि काए लोयालोयप्पमाणमेप्ते चणतेचेव आय गुण श्वगाइगुणे । जीवस्थिकाएण नते ! कइवणे कइ वर्गदि महो तमाटे भरूपोरे चेतम्धमुपरहित द्रथयो सानदाई, प्रदपमो प्रयस्मितवे लाकरे पंचारितमाम तेहनो प्रयभूत ट्रम्पले। सेसमासपापप निह पबत्तेतमा । त धर्मासिकाम सचेपछी पत्रिभेरे पायो ते बाहे-दमा चेत्तपो कामपा भावो मुषो । द्रम्पयो । चेषको २ वासयो । भारको ४ मुमहो। दबावरचलिशार एमेरो । मबी धर्मासिबाय एवंद्रशद । तमोहोगप्पमापमेत । पेषयो धर्मासिवाय घरद रामसोक |पमा बारमो धर्माठियाय । पारमा नबनानपारिमवयाइनधि । प्रतोतबासे कदापि नातो रमनहो वत्तमामबासनई पायामिकामाने मनहो । पापविणे भावमा प्रवर्षे पमधे परसे पपासे मुरपोममपगुथे। पावत् निमहे भावपो धर्मासिवाय पर्याययो यरहित मपरहित रस रहित नगरहितछे गुणमो मायको चौष पुरखने मति परिवतने गतिउपरभरेत विम मावोने पर तिम । पायिवाएविण्वचेर । पपमानिगा य पश्चि निये रमज पच प्रकारे धर्मासिबायनो परे पापा । पर गुरपाठाचमुर। एतनोबियेप गरयो वाययो पोषपासने स्मिविपरिषतमे स्मितिह पहभाविम मस्मने बर तिम । पामासखिवानिएवरे । पावायासिवाब पपि पचिमे मव बाबा । पपरसेत्तपोपपागासयिकाएकोमा सापय मापसे । एवमापिसप क्षेत्रको पावामाशिवाय बाप तथा प्रसार एवं प्रमा मार बागो। प्रपतेरे । पनन्त नियस् । बारगुपसोपवमा - गधे कइरसे कइफासे ? गोयमा ! श्यले जाय थकधी जीधे सासए श्यठिए ठोगदचे सेसमास पच बिहे पणते तजहा-दछन जाय गुण , दछनण जीयत्यिकाए आणताइ जीयदष्ठाइ , खेप्त लोगप्पमा णमेप्ते, फालच नफयाइनथासि जाय निचे, नाव पुण श्यले गधे शरसफासे , गुण उयनगगुणे पोग्गलत्यिकाएण नते! कइयणे कइगधरसफासे ? गोयमा पचयन्ले पचरसे दुगधे शहफासे स्थी राजीय सासए छायाठिए लोगदछ, से समास पचविहे पणते तजहा-दछ खेत्त काल नाव गुण, दष्ठान गरे। याम गुपका पायपी नामादिकम प्रबागोतले। भावमिकाएतकापस । बोवास्तिकाय पापयासकारे, भगयन् । फतवा । परर्ग बारसे बरपासे । केहसा गध तक्षारस वेनसा परस रतिपय उत्तर । गाबमा पपाप पो । मौतम । पररहित यावत् पो प्रमः । श्री | पेसामर पर सायरमे से समासपा परविर परते तमा। तम्वरूप सदा कासीम सिर निपल अवस्थित सोबट्रम्य ते जीवास्तिकाय भपयो पार भोरे तपाई-दममा बामगुपपाषापत्रीय विधाए । द्रवी यामत् गरोद्रव्यपो नोवामिमाय । पसार वीवदम्बार तपासोमप्यमाप | मान । पनमा मोबदम्य पेशी घोष साकामाचमारछे । पासप्रामववारनपासि । बाममो पदेप बीवदम्य नको मनको । भाषषिपे भाषणोपुष पर। । पामत् नियम भाषा सोपायमो परमि । पगंधे परसे पपा गुपपासणगगुरे । गधरक्षित रसहित परसरचित पायो उपयोग | चैतन्य साकार पनाबार तापमोद । पामविकाएषभंतेवापये। पुरसाशिवाय यामासबारे, भगवम् ! तपाय । गधरसफासे । कोतसा मप रम परममा रतिमा सत्तर । मायमा परयये। मौतम पचिपपई। पचरसे दुमधे पापासे पो पनी सासए । पाच रस होयमधळे पाठ | परसोय हित गामना । पहिए सामदधे सेपमासपापपपिर परो तवा दम्वा । पस्मिता भाजपा ने पुश्वास्तिवाय सपेपयो परिभेद तेई-ट्यो। पेतमा पासपा मारमा युरपा एम्पपीरपाम्पसचिवाए। पेषको बासी भापको गुजपो, यमी पुरमाप्तिकाम . पवस्या दपर्मातिबायः सवय तदापारवा दाकाशास्तिवाय, सतो निम्तत्याऽभूतस्यसाधा जीवासिकाय, सत सदुपष्टम्भकस्यात् पुनसासिका दक्ष खेत्तन कालच नाव गुण, दक्षण धम्मत्यिकाए एगेदई, खेप्त लोगप्यमाणमेते, कालच नक याइनथासि नकयाइनत्यि जाय निश्च , नायन शवले धगधे शरसे शफासे , गुण गमणगुणे । यह म्मत्यिकाएवि एक्चेव, नयर , गुणच ठाणगुणे। शागासत्यिकाएवि एवचेय , नवर खेप्तण थागासत्यि फाए लोपालोयप्पमाणमेप्ते शणतेधेव जाय गुणन शवगाहगुणे । जीयत्यिकारण गते ! कइयणे कइ पदि हो तमाटे पपोरे, चेतम्पगुवरशिव द्रथमो मानता प्रदायो प्रमस्मिता, पाक मे पंगसिजायाम तेहनो भयभूत दम्या ट्रम्य। सेसमामपापध लिपपत्ते तमा। त पर्माणिशान मक्षेपको पविभेरे बनो ते पाहदसपा पतपी बासी भावपो गुपयो । द्रमयो । यो बासकी। मारयो ? गरयो । बप्रावधविवार एमेदथे । इसी धर्माप्तिकार एबम पोसोमपमामेति । यो धर्मासिवाय पडद रामसीक रमाबरे बायो धर्मासिबाय । कामपा नबसा नपासिमकमाइननि । प्रतोतबासे कदापि मईता रममहो वत्तमामबालेनई पायामिक्षासेनमे बारिष भाषा पपरे पमये परसे पपासे मुरमोगमरगुरे । मावत् निम भारमो धर्माशिवाय पर्यावयो वर्षगरित मधरहित रस रहित हे प्रमादितई नभनी काययो बीय पुरातने पति परिपतने मतिरुपएभरेत धिम मारतो बस तिम । पाधिकारियो । अधमालिया व पचि नियमिक पचप्रकारे धर्मास्तिमानी परे भागा। पार गरपाठारगुः । एतताविमेष मुरमो मार्यवो वोपासने सिविपरिपतने मितिष्ठ पहा बिम मत्मने पत्त हिम । पागास विद्यारिएवरे । पावागाप्तिमाय पनि पत्रिभेदे रमन नागोबारणेत्तपापप्रामासमिकाएकोमा वामपनारमेते। एक्सपियप चषयो पाबायामिवार वाक तदा पवाद एवेश प्रमा मात्र मागी। परतेपेर । अनन्त मिस् । भारमुपपीपवमा - मनहो। - - गधे कइरसे कइफासे? गोयमा ! श्यन्ने जाय शुरूषी जीधे सासए यहिए लोगदई सेसमासह पच बिहे पणते तजहा-दछन जाय गुण , दवनण जीयत्यिकाए शणताइ जीयदहाइ , खप्त लोगप्पमा णमेप्ते, फाटच नफयाइनशासि जाय निच्चे, नाव पुण धवन्ने छगघे धरसफासे, गुण उवचंगगुणे पोग्गलत्यिकारण नते! कइयणे कइगधरसफासे ? गोयमा पचवन्ने पचरसे दुगघे यहफासे कयी राजीव सासए शवठिए लोगदछ, से समास पचविहे पणते तजहा-दछ खेत्त कालच नाव गुण , दक्षन गुथे। यामत गुपया बाययो बाबादिकन पवागतः। षाधिकारभंतेवाषष । बोवास्तिवाय ए पापाहबारे, भगवम् ! पोतसावर्ष । कार्ग बारसे परफासे । बोतमा म तसारस कोतमा परस रतिपय उत्तर । माममा अरसे बायपषो । गौतम । पपरस्ति भावत् पो प्रमत्त । जो वेसास पर सायदमे से समासपा पबिहे परते तगा। चेतन्यरूप मदा कासोन सिर नियस प्रबस्थित नोबद्रय ते पोवाप्तिकाय अपनी पाप भो त कोरे-सपा पापमुष पारस पापजोमविवाए । इप्पयो वायत् मुषयो दमयो पोवारिसमाय । पचतार जोमदवार तपोधोगप्पमाप मत्ता पमसाबोक्ट्रय चेषी चौब सावमापमा पाई। वारपानापानपासि । पासपो को बोगष्ट्रय नतो ममी। बावपि भारपोपुष पपणे । पावत् निपर भागको सीप यमो पररहित । पगधे परसे पपासे मुषमाधवपोममुचे । मधरहित रसरहित फरसरचित कायदो उपयोग पतम्प साकार प्रमाबार तल्पयोग । पाम्म माविकाएपभवापसे। पुरासिबाय बाबासबारे, भिमवन् । तसापण। पागधरसफासे । केतसा मथ रस परमकमा रतिपय सत्तर । गायमा परपरे। गोतम पांचाई। पचरसे दुगधे भापासे वो प्रयोगे सासए । पांच रसझे दोयगधरे पाठ फरस पीक तारक्षित मानता । परि हामदये सेसमासपापरविरे परते समहा दम्पपा। पयसित साकमाई ते पुरवाप्तिकार सपमो पविभेदको को-प्पयो। पेत्तमा वासपा भाषमा गुरभो एमपीडपोममयिकाए।यो पापमो भाषमो मुषमी, प्रथमो पुरातासिकाय - | पति म अक्सेस्मादि म यतश्या पर्वादि रतएवा रूपी प्रभूतः नतु निःसमाषो मन पर्युदासपत्तिस्वात् भापतो दय्यतो ऽवस्थित प्रदेशप्तः ॥ तोगद पत्ति । मोवस्य पन्नास्तिकापास्मकस्या समूत ट्रम्प सोकद्रम्प भावतइति पर्यायत : गुरम्ठति ॥ कार्यतः ॥ गमयगुणेति ॥ जीवपुर्सामा गतिपरि बताना नस्युपष्टमोतु मत्स्माना वसमिति ॥ ठारमुरेति ॥ जीवपुदसामा स्थितिपरिणतामा स्थिस्युपष्टम्भहेतु मत्स्पाना स्पप्तमिप्ति । भवगा | बागुणेति । बोबादीना मबवासोतु मंदरामा कुमिष म सक्ठेनगुरेप्ति । उपयोगपतन्य साकारामाधारपद ॥ पाहण्गुणति ॥ ग्रहण परस्परण प पोग्गलत्यिकाए आणताइ दवाइ , खेत लोयप्पमाणमेत्ते , कालच नकयाइनशासि जाय निच्चे , जायन घणमते गंधरसफास मते, गुण गहणगुणे, एगेनते । धम्मत्यिकायपदेसे धम्मत्यिकाएप्ति वप्तव सि या ? गोयमा ! णोइणठेसमठे, एव दोलियि तिलियि चप्तारि पच न सप्त छह नव दस सखेसा श्य संस्खेजा नते ! घम्मस्थिकाय प्पदेसा धम्मत्यिकाएप्ति वप्तछ सिया? गोयमा ! णोडणठे समछे, एगपदे सूणेवियण धम्मत्यिकाएप्ति यप्तव सिया ? णोइ० सेकेणठण नते ! एव युच्चइ , एगे धम्मत्यिकाय पदेसे प्रचतार एमापतपीमापप्पमारमेते। पाच द्रम पमताई पो सोचममाए मात्र पतसे चन्द राम प्रमापा । कामपानवायानपासि । वासपो पोनको मनही तोमेवाई। पापिये मानवपमते । यारत् निम्मच भावयो वषमरित। गधमते रसमते पासमते गरपोयाबमुपे। गंधदोम महिवारस पोचपिवई परम पाठसहित कामबो परमा सबध बरगी माय पोटारिवादि प्रकारे प्रमासिकामना पपिचारपोच पर-एग | भतेष अधिवायपरेसे पविकातिमत्तबसिया । एक भगवन् ! धमामिनकाम मरय तेरमते धर्माशिवाय या कापाय (तिपय उत्तर । मोपमा पाइपासमा । गौतम ! एपम समयमो बुनमहो । एपहापितिपित्तारिपचम नपाएसएपेवापसचामतपरियप्पपशाम दोयप्रदेश गौम परेममे चारप्रदेशने पाचप्रदेसने बारेमने सातप्रगने पाठप्रदेशने प्रदेसन दयप्रदेशने संसातादेमने पसभातापग भिमपन् ! धर्माप्ति सम्पधर्म मायेन या पोदारिकारिमिः प्रकाररिति । पापोत्यादि । यथा समपस पफ न भवति परक मित्येय सस्य व्यपदिश्यमानत्वा रपितु सबसमय प प ममति एब धर्मास्तिवायः प्रदेशमा प्यूमो न पालिकायइति वक्तव्या स्या देतष निषपनपदान, व्यवहारमयमत नोधम्मत्यिकायेत्ति थप्तई सिया , आय एगपदेसूणेवियर्ण धम्मत्यिकाए नोधम्मत्यिकाएति वत्तहसिया। सेणूण गोयमा । खरेचक्क सगठेचक्के ? नगव ! नोखंचक्के सगलेचक्के । एव ब धम्मे द दूसे शाउहे बामप्रस्य । विकाएतितषिया । धर्माप्तिवायरस वापरतिप्रश्न उत्तर । गायमा चोरासमा । गोतम । एप्रम समबन हो युगको। एगपरेममाविसमतेसम्म विमाए धन्धविनातिमतपसिमा । एक मरेगे मा पिच चपन पं बाबासारे, भगवन् । धमासिवाय धमाक्षिकाय रमाबाबा रतिप्रश्न उत्तर । गाबमा बाराममा । मातम । ए पबमममममो युशनको, तिवारे मोतम कोई-सेवेषाभतेवया । त में प्रयो भने समयम् । मम। एगे पविकायपदे मेलामनिवापत्तियत्तय सिमा । एष धर्मास्तिकामना प्रदेस तेस्मे धमास्तिकाय एवं पायायम | स्वादि । जायण्मपरेबावियपतिमा । यावत् एक प्ररय अपा पनि, पुन पपासासधारे, पमास्तिमाय तेरमे। पाधयिकाएत्तिपत्तप्पसिया भमातिजाम रस नगहिये प्रतिप्रश्न । सेभूष मारमा पोपले सगळे पथे । ते निपे हे गौतम । चाहनामा चा कसोये, अपवा समपा पाने का कसा पापाता ताना बरबारमा भमरनेमा तिबारे मातम पामा । भमय पासो समवे पोएप छत्ते पहले इसे पाठ मायए । भगवन् । मसीमापामे पत्रकारोये सबने पोये, इम इसना पाने कामकहोये सवभेष बोये, हम चर्ममा पग्मे चम नवोये दानासम्म ६ बनवतोये पसमा पाने पानपोये पामुपाने प्रारम भोये, माटबाना साने मादा नबोये, एतावता मय चममें धर्म म दाम पाय मादक समोचमारे हेमातम । जिम पकना पापापहोये पपि सेकने पक महावाये सगसाहोमचमातेने पाये। तप गातम । म म एस धर्माविचार प्रदेय नेहन मासिकाम नहोमे स्यादि । वायएमपदेवियपधमयिकाएमाधम शिक्षाएत्तिवाम्पसिया। - परति । अषसेनस्यादि । यतएका वर्षादि रतरबारूपी प्रमूर्त नतु मिःखमाधो नष पदासपत्तित्वात् साधता दृष्मप्तो अस्पितः प्रदेसत ॥ सोगद बत्ति ॥ लोकस्य पवास्तिवायात्मकस्मा अभूत द्रम सोफम भावतइति पर्यायतः ॥ गुण्ठति । कार्यतः ॥ गमणगुत्ति ॥ जीवपुद्गलाना गतिपरि बतानां मत्युपटमासु मत्स्याना बसमिवेति । ठारगुत्ति । बोषपुस्तामा स्पितिपरिसताना स्वित्युपष्टम्भहेतु मत्स्पाना स्पसमिति । प्रवगा सामुति । बोबादीना मबकायात बदरामा धमिव । उक्छंगगुप्ति उपयोगर्थतन्य साकारामाकारनेदं ॥ गहयगुणति ॥ ग्रहण पररपरेण ण पोग्गठस्थिकाए शणताइ दवाइ , खेत रोयप्पमाणमेत्ते , काठ नकयाइनशासि जाय निचे , लायन वसमते गघरसफास मते, गुण गहणगुणे, एगेनंते ! धम्मत्यिकायपदेसे धम्मत्यिकाएति वप्त सि या ? गोयमा ! णोइणठेसमठे, एव दोलिघि तिलिपि यतारि पच न सप्त नय दस सखेडा श संखेजा नंते ! धम्मत्यिकाय प्पदेसा धम्मत्यिकाएति वात सिया ? गोयमा ! णोइणठे समठे, एगपदे सूणेवियण धम्मत्यिकाएप्ति यप्त सिया ? णोइ० सेकेणठण नते ! एव वुच्चइ , एगे धम्मत्यिकाय पदेते प्रचतार मारपतपापापप्पमापमत्ते । पुस द्रम्प प्रमता की टोकममात्र मात्र एतले पद राष प्रमाप । कामपामकायानमामि । पासपो बोगको रमनही तोबाई। पारपि भावमवसमते । यावत् निम्बई भावपो बरसहित। यधमसे रसमते फासमते गरपोगापगुपे। गधदीय महिवारस पाचमति फरस पाठहितई बायबो परमा सबम परयो बाये पौरारिवादि प्रबारे धर्मासिकाममा पधिवारमोम बी-पग भतेरविचारपदेसे परिवायेत्तिसत्तमसिंगा। एक हेभमगन् । धमाप्तिकाय प्रदग तेजमते धर्मासिबाय पार्य करवाय तिमय उत्तर । मायमा पारा समागौतम ! पपा समबनको मुसनहो । एवदासिविपिषतारिपचम नपानबरससवाप्रपरेखाभतेपासवामपएमा । म दोयमय ने तोमारेगमे चारप्रदेमने पाचमदेयने दिमने सात प्रदेशने पाठपदेयने नमप्रदेसने दमप्रदेश सभातादेमने पसभातापदेमने भममन् ! धर्माप्ति - सम्बन्धम बीवन मा प्रौदारिकादिमिः प्रचारैरिति । कोत्यादि । यथा बम प म भवति भरचा मित्येव तस्य पदिश्यमानत्वा एपितु समसमेव पचा भवति एव धर्मास्तिकाप प्रोममा प्यूमो न पासिकायाति बत्तयः स्यादेतच निषयमयदान व्यवहारनपमतन्तु नोधम्मत्यिकायेत्ति वप्तई सिया , जाप एगपदेसूणेवियण धम्मत्यिकाएं नोधम्मत्यिकाएप्ति वन्तदसिया । सेणूण गोयमा । खोचक सगलेचक्के ? नगवं ! नाखंचक्के सगलेचक्क । एय बप्ले धम्मे दमे दूसे थाउहे बामप्ररय । प्रअविवाएत्तिमत्तम्पमिमा । धर्मास्तिवाय रस कापाय इतिप्रश्न उत्तर । माबमा पारपासमा गोतम ! एपब समर्थनको मुहानको। रंगपदेमविसमतेधाविकाए पनिकात्तिपत्त यसिया । एक प्रदेये घपा पिच चपन ए पाक्यापमरे भिमपन् ! धर्मास्तिवाय धमास्तिवाम रमाकायाम प्रतिमय उत्तर । गापमा बाराममामौतम ! ए पबममममहो सुमनको, विवारे गौतम वाई-सेवा भएपवुन । त में प्रयो भन्। । मम । एमे सनिवारपदे मेवोभवविधापत्तियत्तय सिमा । एज धौतिवारमा प्रदेश ताने प्रमानिकाय एवं पावासमोर | स्यादि । जावण्मपदेसूोरियमविकाए । सावत् एक पर सपा पनि, चपुम पमानासारे, धमासिकाय तमे। पाधवधिबाएत्तिमत्तम्पसिया धर्मास्ति माम माम् नाहिये इतिप्रया । सेन मारमा पो समसेपरे । से निये से गोतम । चक्रमापाने चमकाये, पबमा सममा पकने चक्र बहोये, सामाा ताना बटका मा भगवतेमा तिबारे गातम वामा । भगवपासपो सगरपोएव इत्ते धोद मे पास मायए । इभमवन् ! नही चानापामे पर वोये सबने पापोरे, रम चना पग्ने बनवाये सवने हर कोये, इम पर्ममा सामे चम नकोये दानापने र उनबहोये पसमा पामे बम्मनको भावुधग्ने पारध नयहोये, माटकमा पामे माटम मबोये, एतावता सवचममें पर्मम दर पण पाच मादक मनवीये माठे मोतम । भिम पक्षमा माहोये पवितेने चन्द्र नावाये समसाशोजचमा तेषामे चाहये । तेणेप जमातम ! "म सम एस धर्मास्तिवाम अरेस सोम प्रमाखिजार नसोये इत्यादि । पावएगपदेमप्रेमियपधम्मखिकाएनाधसिवाएत्तिमत्तम्पसिया। - | गाति । प्रवक्षेत्यादि । यतएवा वर्गादि रतपया इपी प्रमूतः नतु निास्थमावो नष पदासपत्तित्वात् गायतो दृष्यतो ऽवस्थित प्रदेशप्त ॥सोगद |पत्ति मोबस्प पचास्तिकायास्मकस्या अभूत द्रम्प सोकद्रय नायतइति पर्यायतः । गुण्ठति ॥ कायतः ॥ गमणगुरोति यजीवपुलामा गतिपरि बताना मस्पपटम्भासु मत्स्पामा जसमिति ५ ठारपुरोति मीरपुद्रप्सामा स्पितिपरिक्सामा स्थित्युपष्टम्मोतु मत्स्पाना स्पसमिति ॥ अवमा खानुबत्ति प्रबोबादीमा मयचाशहेतु परराणा शमिव । सवठंगगुप्ति उपपोगवन्प साकारानाकारनद । गहसगुणति ॥ ग्रहण पररपरेप ण पोग्गलस्थिकाए आणताइ दवाइ, खेत लोयप्पमाणमेत्ते , कालन नकयाइनचासि जाय निचे नाव घशमते गधरसफासमते, गुण गहणगुणे, एगेनते । धम्मत्यिकायपदेसे धम्मत्यिकाएप्ति वह सि या ? गोयमा ! णोइणठेसमठे, एव दोलियि तिलियि घसारि पच न सप्त वह नय दस सखेडा च सखेजा नंत ! धम्मत्यिकांय प्पदेसा धम्मत्यिकाएप्ति यतइ सिया ? गोयमा ! णोइणठे समठे, एगपदे सूषियण धम्मत्यिकाएप्ति यप्तव सिया ? णोइ० सेकेणछेण जते ! एष पुच्चइ , एगे धम्मत्यिकाय पदेसे अपवार एमावतपावापप्पमाषमत्ते। परवद्रप पमताई पो पाकप्रमाण माप एतचे पछद राव प्रमाप । कामपानकायानपासि । कासपो पदेनको मनमी तोमेकाहे । वामपिये भावपम । यावत् निम्बई भाषमो बरसहित । यधमते रसमते पासमते गपभोगापमुपे। गधोग सरिवारस पाचमति परम पाठसरिता बायमो परस्पर सबध करपी बोधे पौरारिवादि प्रकारे धर्माप्तिकावमा परिवारपोष वाई-एम | भतेभ अनिवाबपरेसे बम्म विकायेत्तिमत्तबमिया । एक भगवन् ! धमाप्तिबार प्रदम तेरमते धर्मासिकाय एक कापाय पतिमा उत्तर । गोरमा मापासमामोतम ! एपम समबाहो मुखमहो । एपदापिविपिपत्तारिपरम पामरससरेवापसरेबाभतेपरिवायप्पपमा । रम पायदेम ने तोगपरेसने मारप्रक्षेमने पांच प्रदेशने पादेयने सात प्रदेशने पाठप्रदेशने नमादेशने एयदेमने मातादेमने पसभाताप्रदेगमे भगवम् । पाणि - शादीमा पुनः प्ररेणा अनन्ता पाचा अनन्समदेमवत्वा धयामपोति उपयोगगुगो जीवास्तिकायः माग्दर्शितो ऽयतहमनूतो नीय उत्पामादि भुवाति दायमा । वीरमित्यारिता सम्हात्यादीमि विशेषगानि मुक्तनीयवासानि । प्रायनायेपसि । पालनाधेन उत्सानझय मममनमोजमादिद्वपमा मपरिणामविधापेव बीवनावति । वीवस्व बैतन्य मुपदमपति प्रसाशयति इतिवचव्यस्पात् विभिएस्पो स्यामाद धि फाएषि एवघेव , नवर , तिण्हपि पएमा छणता नाणियहा । सेस तथैव । जीवेण नते ! सउठाणे स कम्मे सघले सीरिए सपरिसक्कारपरक्कमे डायनायेण जीवन्नाव उबदसेईति पतसिया? हता गोयमा ! जीवेण सउठाणे जाय उवदसेईति यातहसिया । सेकेणठणजाय यतहसिया ? गोयमा ! जीवेण शानिणि हो प्रदेस पाहाहायता र धर्माणिवार नबसोये । एवमासिकाएनि । रम बर्मासिवामनी परे पधर्मासिबाय पपि पावो । पामासधिकाय । प्राकागाप्तिबार पपि। मौखिवाय। चोगासिबाय । पापलिकाएविएमचेर । पासास्तिबाम परि ए तो महोव पाचवा । बवरतिपक्ष पि पठेसापवताभारिपपा से संतापतहा विशेष धर्मासिवाय १ पधर्मासिबाय २ प्रयेसमा प्रवे पसातामवेग पाचा पमै ए तीनमा प्रम तामदेव पाया, पावत पर तिमझ पाया। बोवेवमते सहारेसबाये । माग गुरु जोमास्तिवाय पूर्वकमा । हि तोमभूत घोषने उयागादि ते देवायोपोमगवन् । सहवाम नमोबाधा ते सवि सममादि विवासहित ते सबम । सबसे सपोरिए सपरिमवारपरकम। गरोरनो समयता इसरित बोवमा उमा तेसहित पुरुषमा पभिमान ते सहित कामपूरा बोधो। पापभाषेपमोबभावेषठबद सेतोतियत्तस्यसिमा। पामभाव उबाम गरम गमनारिरूप पासपरिणाम विरोध निबरो भोवभाव बोरपणा पतायता चरमपयो देसाईप्रका इतिएको पावास प्रतिप्रश्न उत्तर । सत्ता गायमा । की मौतम । मोरपसगारेगावपातोतिषत्तम सिया । पोप ज्यान ययमादि पाभपरिपामविशेष तेरे गमत् घोषभाष चैतन्यपपी के चार-पापापा । सेनाप पावत्तमसिमा । ते में पायावत् पैतन्यपरा देणारेहेरम काग तिमय उत्सर। गोममा बोवेष पता - एकदझे मोनमपि वस्तु वस्स्षेष पपा सरसोपि घटो पटरव रिणकौपि चाथैध प्रयतिघ-एकदे मषिकसमनन्यवदिति ॥ मेफियापति प्रथमि पुनरित्पः । सवेत्ति । समता तेच देशापचयापि भवन्ति मकारकासयपि सवसदप्रयते रित्पतमात्र । सिमप्ति : फरखा मत सदेकदेवाप चया सवात्पप सब स्वस्नमावरहिता पपि नयन्तीत्यतपार प्रतिपूर्णा पास्मस्वरूपेणा विकता नेप प्रदेशान्तरापेक्षया स्यस्यमावन्यूनापित पाचन्तात्यार ॥ गिरवससत्ति । प्रदेशान्तरतोपि स्वस्वप्नाषेमा म्यूमा। तथा ॥ एगग्गवमहियति ॥ एफगाये नफगष्देन धर्मासिसापरत्येय माम सीता येते तथा एकशम्दानिया हत्पर्य एकार्या पैतेझम्दाः । पयसामवतानाणिपत्ति य प धम्मयो रसपा प्रददा सधा ग्राफा मोयए । सेतेणठण गोयमा ! एषवुच्चड एगेधम्मत्यिकायपदेसे णोधम्मत्यिकाएप्तिवातहसिया जाय एगपदे सूणेवियण धम्मत्यिकाए नोधम्मत्यिकाएप्ति वनसिया। सेकिखाइएणनत ! धम्मत्यिकाएप्ति यत्तहसिया ? गोयमा ! यसखमा धम्मत्यिकायपएसा तेसछे कसिणा पनिपुणा निरवसेसा एक्कग्गहणगहिया एसण गोयमा ! धम्मस्यिकाएप्ति वप्तधसिया । एवथहम्मत्यिकाएयि यागासत्यिफाय जीवत्यिफाय पोग्गलत्यि गावत् ण पईये असा धर्माशिवाय नकोये, एमिरे मानेमते पमा पनि पसार नयनेमसे एक देकरी न्यून पनि वस्तु से बमुशोष करोये मि माडा पनि धरा पहाड़ोग बसाये , या कामना पनि कतरो कुतरामोन पहोये हम पोरापुषय इम्मारि लापवा । सेषिपाएपभधवत्यिका एत्तिमत्तयसिमा । ते मानेष्याति प्रासाने पो भमनन् । प्राप्तिकाम मी कामाय इतिप्रान डकर । गाउमा पसवारयत्यिकारपदेसातसम्यो मासिकपडिपशागिरवसमा । मौतम असफमाता धर्माशिबावना प्रदेश ते सर्व समप प्रतिपूच पामरूपे परो किमही ते पनि प्रदमातरमी परि मधमाबरोभून नको पतपे एक प्रदेशमा पनि प्रतरनहो । एमम्मरगपिया। एक गदे धर्माठि पाये सबरी एमर मर एकाए। एसच मावमा पसिनाएवियत्तापसिया । पाने गौतम ! धर्माशिवाय बसोमे एभापा धर्माप्तिबायना पससाता प्रतिमा मलिना एक . ममार जीवधिमासूत्र मुक्त मप तदापारमा पाशविन्यासूबागि । कतिविशेष मते! इत्यादीनि । ता साफालोपाकाझयो सत्ता मिर-धमा बीमाप्ति प्रमाांनपतियत्रतत्क्षेत्र । तैसासोक सद्विपरीतससीकास्य मिति ॥ १५ मोगामासेसमित्यादि पद्ममा मात्र सोकामाझे 5 पिकरणे बीचति सम्पबामि बीवव्यापि ॥ वीयरसति जायस्यैव बुद्धिपरिफस्पिप्ता यादयो विप्रागाः ॥ जोधप्पएसति । तस्यैव पुदिकता एष महष्टादशाः प्रदमा निर्विनामा मामा इत्पः । अचीवति ॥ अम्मास्तिकायादयः मम सोकाबायो जीवा प्रवीवा येत्युधे सद्देसमदेशा समोसा ए गोयमा ! जीवे सउठाणे जाय वप्तपसिया । कइविहेणनते ! शागासे पणत्ते ? गोयमा ! दुविह यागासे प० त०-लोयागासेय घलोयागासय, शलोयागासेमनते ! किजीवा , जीवदेसा, जीवपएसा, जीया , जीवदेसा , थजीयपएसा ? गोयमा ! जीवायि जीवदेसाधि जीवपदेसावि राजीवावि राजीवदेसावि परिवासूत्रामा हिव तेषावना प्राधार भावाचितासूत्र बोरे-आसियभते पागासे परत्ते हायागामेय प्रमायागासेव । बोतसे प्रकारे भगवन पामायकमा निमय गौतम ! निभदे पाहाय बमोतेवाई-साबाकाय । पर्णकायाम २ तिहा साकावायनी एसब धर्मासिसायादि इस विमान के पाबाबाम तेली विपरोत त असावाबाय पसोये । सामायासमते विमोवाणोपदेसाभोवपदेगा । सापावायविप भगवन् । मगोप स्वादि वन तिहासावाबास पधिकारसमविष 'भोति, सपुर बोवद्रय पोषदा पावनोमवृदिखा प्रमट देय ते प्रदेयमिविभाग इस्म || पोगा पचौरदेश पोपपदेमा । पौष धर्माशिवागादिक ४ पवाबदेशवादिय विभाम ५ प्रमोपनिर्षिभाग 4 | गारमा घोबाशि। मोत म ! घोष परि।बोबसावि । बोध रेमपपिके ।। घोषपरेमावि । भोवना प्रदेम पपिक । पजोगवि । प्रयोगपपिच ४ । अषोपदेसापि पोयनादेम परिव ।। पचीवपदेसाबि । पोरना प्रदेम पगिरी । मोवातेनियमापमिटिया । वे जावई निये एवंद्रोणोष मिटिगा तो दि या परिदिया परिदिया परिदिया बीबरसा । ये रोबोय ते बद्रीयोष पारिद्रोजोग पद्रोबोष सिस्मोप घे बोपना ऐम । तेषियमा एगेंदिव - धिष्ठभेतना पूषकस्यादिति पसंतापमानिनिषोरियेत्यादि । पयवा महालता प्रषिनागाः पतिपदा, स्तेपा मन्ता पानिनियोपिकधानस्या सो नम्तामा मानिनियोपिकचामपयवा सम्बन्धिन मनन्तामिनियोपिकवानपयषात्मकमित्पर्य, उपयोग चेतनायिोप गमतीतियोगः उत्पानादा वामनावेवतमान पतिहदयस्पं अप पपुन्मानाचात्मनाने पत्तमामा बोव भामिनियोपिकतामाधुपयोगं गति सरिक मेतावसेष जीपमाष मु पदायतीति वत्तम्प स्पा दिस्पाशाए। सक्नगेत्यादि । पत सपयोगमतय बोयनाष मुत्यानापास्ममायनो पदरापतीति यतथ्य स्या दयेति, म योहियनाणपआयाण एव सुयनाणपजावाण हिनाणपजवाण मणपजावनाणपजयाण फेवलनाणपजयाण मइयवाणपङ्माण सुयष्यमाणपज्जयाण घिनगनाणपजावाण घरकुदसणपजावाण शचरकुदसणपजावाण हिदसणपज्जयाण केवलदसणपजावाण उपनगगच्छद , उपगठस्क्रणेण जीये सेएणठेण एव वुच्चइ , पामिविवाधिवरावा मोतम ! जोग पपता मविधाम पर्मामामबाई उपयाम पतना बिया मते घार, रतियाग, स्वानादिप पामभाव मविप पत्ते पाना बोचा भाग नहोय ते पर्याय बाहोगे । एवंम्पचाप पबमा म पनसा मृतधाममा पचाय । पारिवाषपसमा । पनन्ना पर | शिबानमा पर्याय । मषपणापापबमा पनसा मनपर पानमा पर्याय । विमापनवार्य । प्रनम्ता पसनाममा पर्याय । मापणापपच पाप। धनता मवि पनाममा पराय । सुपप्रचारपवार । पमस्ता दुत प्रजाममा पाप । विभगराषपवास । प्रमेता विभमनामना पर्याय सदसपथमा । मनमा पारमनमा पर्याय । पासपपवार । प्रनता पारयनमा पर्याय । पाक्षिदसमपचाप। पनता प्रधिकर्शन मा पर्याय । बरस रमपनपाप माममचा । प्रनता बरतनना पयाम उपमाग चतभार मते वाय, ज्यामादि पामभावने विप पत्तमा व । वाममय बोधे । उपयाम सबजोग पतमामाट उपसागसपन बोपपते प्रवामाश्रिय पाम्ममा पेणारे पारमाय । सतेमा चं मारमा परायुषः । ते ते भगोतम ! इमानु। गारमानाचे महाप मारबत सिमापातम ! बोध सामान पावत् पापाय पमनरेगा 4 मम्तर जीवपिनासूत्र मुख मप तदापारत्वेमा वाषिताबागि कतिविहे प्रते। इत्यादीमि । तत्र सोबासोकापाझयो संसय मिद-प्रमों बीमाप्ति प्रयासराप्नवतिपत्रतत्त्र । तमासीक सविपरीतसप्तीकास्प मिति ॥१५ सोगागासेसमित्यादि पद्ममा सम सोकाका पिचरसे चीपति सम्पूर्वामि चीवम्याति ॥ जीवदसति । जीवस्यैव बुद्धिपरिकस्मिता पादयो विभागाः जीवप्परसति । तस्यैव मुहिमता एवं मटादशाः प्ररमा मिर्मिनाया जाना इत्यर्प ॥ अजीवति । धांतिकापारमा मनु सोकाका चीवा अजीवा येत्यु तद्देशमदमा सोधाए गोयमा ! जीये सउठाणे जाय वप्तवंसिया । कइविहेणन्नते ! यागासे पणते ? गोयमा ! दुविहे यागासे प० तं०-लोयागासेय शलोयागासेय, थलोयागासेपनते ! किजीवा , जीषदेसा, जीवपएसा, राजीथा , जीषदेसा , शीघपएसा ? गोयमा ! जीवायि जीवदेसावि जीवपदेसाधि राजीयावि राजीवदेसावि गौरवासूचाना। यि तेबाब ना पाधार प्राकारितासूत्र बोर-भिते प्रामासे पलत्ते सायायाम प्रसागागामेय । केतसे प्रकारे भगवन पामामकामा रतिप्रस, मौतम ! बिभेदे पाजाय कालो ते बोर-साबाकाय । पोषावाग २ तिको खाकावायमा एमचा धर्माखिमायादि इप विशाहु ते ताबाकाय, तेहलो विपरीत त असावाबाय गोवे । सायामास लभते विमोवाकोपदेसामोयपदेया । भाषाकायनेविष भगवन् । म बोगरवादि हम तिला बाबावास पपिपरमविष 'मोति, सपूत्र बोवद्रय बोवदस पापमोमपुदि छन प्रबष्ट देय ते प्रदेश निर्विमाम रव । प्रमोगा पदोपदेपा प्रमोषपरेसा । प्रमोष पालिकामादिष : प्रवावदेयापारिक विभाग । प्रयोपनिर्षिभाग | गोयमा बोबागि । हेमोत म ! बोष परिवोपदेसागि । बोब रेपपछि २ । बोगपरेगापि । घोवमा प्रदेम पनि । प्रमोगावि । पीवपपिई ४ । प्रयोपदेसापि भगोपनारस पनि । पचीवपदेशागि । पोरना प्रदेम परियोगातेनियमापमिटिया । व चोवई निये एवंद्रोचीय । बेटिमा तेदि या परिदिया पचिरिया भनिदिमा बेबोरेसा । ये दोनोष ते रद्रीय परिद्रोमोग परेंद्रोजोब सिजोन चे बोषमा देश । तेरियमा एगेंदिर - पिठचेतना पूर्ववस्वादिति । अवतारमानिबियोपियेत्यादि । पयवा प्रदाता भविनागा पतिष्यदा, सेवा मम्ता प्रानिनिवोपिफचानस्सा तो अम्तामा मानिनिमोकिमानपपधारा सम्बन्भिन मनन्तामिनियोधिप्रामपयवास्मफमित्यप, उपपाग चेतनाविशेप गछत्तीतियाग सत्यानादा | वामनायेवतमाम इतिहदयस्प अथ यमुत्मानाद्यात्मनाये धत्तमानो नीव भामिनिबोधिकताना पयामं गति तरिक मेतावतव जीवभाव मु पदर्भपतीति वचव्य स्सा दित्साहात ठमेस्पादि । प्रत उपपोमतपय जीवनाव मुत्यामाद्यात्ममायनो पदभयतीति यशव्य स्पा दवसि प्र योहियनाणपज्जयाण एव सुयनाणपजावाण हिनाणपजवाण मणपजावनाणपजावाण केवलनाणपजायाण मइयवासपजायाण सुयश्छमाणपजायाण घिनगनाणपझवाण घरकुदसणपजायाण श्चरफुदसणपजावाण हिदसणपजायाण फेवलटसणपजधाण उपगगच्छइ , उयगठस्कणेण जीये सेएणठेण एष पुच्चइ , पामिवियाशिवानपचारमौतम ! भोप पता मतिनान पर्वामामबई उपनाम पतना विशेष मते बार, रतियाम, उत्यामादिक पामभाम निविदामा बोजा माम महोय पसरबहोये । संसपगार पवाराम पनता तमामना पमाप । पारिपापपना पनम्ता पर पिजाममा पर्याय । मपपवारपवार । पमता मनपर्यव दामना पर्याय पनवाएं। प्रमता देवसतानमा पर्याय | पाप । पमता मवि पधाममा पर्याय । सुपपवारपवार । प्रनम्ता गत पनाममा पयाय । विभगवारपवार । पमता विभगजाममा पर्याय । परमपमपाय। अमना सयममा पर्याय । पसरपवार । पनता पदमनमा पर्याय । पाशिरसपनामा पमता पथभिवर्णन मा पर्गव । बयस रसमपचवार सबभाममथा। पता करदनना पयाम उपयाग पतम्मभाव प्रतें बार उवामादि पामभावने वि पत्तमा न। सपासमारेर घोपे । उपमाग सपनोब पततामाट पनागम्म चार बोषमते उखानारिख पाममावेशी पारे पार पापाय । सेतेषा * मारमा एषदुषः । ते त पनौतम ! इमाम्। मागमामाचे मनाप जानतममिया । मातम ! भोष पनाम वापत् पापाय अनारेबी मिरपणावपळ मम्मर माचिन्तासूत्र मुख मप तदापारवेना काएपितासूत्राधि प्रतियोग प्रते! इत्यादीमि ॥ तप सोकाप्लीकाकाययो संपव मिद-पमा | दीनापति ट्रम्पासमिमतिमतत्वे । तैयै सासोक तद्विपरीतमसीवाश्य मिति ॥ १॥ सोमानासेपमित्यादि पद्ममा सर लोकाबाझे 5 भिकर वीवति सम्पूर्वामि जीवदयानि पीपदसति । वीवस्यैव पुद्विपरिकल्पिता पादयो विनामा बीपप्पएसति ॥ तस्यैव बुद्धिकता एप प्राटादशाः मरेशा निर्विघागा नागा इस्पर्ष । अवीवति । बालिकायादयः भमु लोबाकाशे जीवा अजीमा पेत्सुके तसमदया समोक्ता र गोयमा ! जीये सउठाणे आय वप्तचसिया । कइबिहेपनते ! यागासे पणते ? गोयमा ! दुबिहे शागासे प० स०-छोयागासेय थलोयागासंय, श्लोयागासणनते ! फिजीया , जीवदेसा, जीवपएसा, जीवा , थजीषदेसा , राजीयपएसा ? गोयमा ! जीवायि जीवदेसावि जीवपदेसावि यजीवावि ध्यजीवदेसावि पितासूत्रामा । हिय तेबाबमा प्राधार पापायचितासूत्र बो-गाजिभते पामासे पसत्ते सायागासेम असामागासेब । बोतसे प्रकारे भिमान पामायकमा रतिप्रश्न, रेमोतम ! बिगभदे पाहाय बनो तेस-भाकाबाय १ पक्षाबाकाम २ तिहा सामावायनी एमचम धर्मास्तिकायाधि इप मिशाहुवे ते साबाबाम, तेहलो विपरीत त प्रदाबादाय बहोये । सायागासबभते विभागावोगदेसाजोवपरेमा । सोबावायमेविष रेभगवन् । म् बोव स्वारि काग तिहासाबाबाम अधिकाररमेयिव 'मोत्ति, सप्प मोस्ट्रम घोपरम पावनोवधि का प्रबष्ट देय ते प्रदेशनिर्विभाम इत्य । प्रबोबा पोवदेसा पवारपदसा । पयोष धर्मातिवामादिक । अवाबदेशवादित विभाग ५ पोवनिर्विभाग ( । गोधमा वोगामि गोत म ! पोय पगिता जोमसावि । बीब रेपपरिक्ष ३ । घोषपदेमावि । घोरमा प्रदेभ पबिछे । अजोगवि । प्रयोगपछि ४ । पोषदेमामि प्रजोबनाम पनि। पोमपदेसामि । पचौरमा प्रदेश पपिई। बयोगातेनियमाएमिटिमा । जे जाई निये एवंद्रीयोष । बेदिया ते दि या पारिदिमा पषिदिया पपिदिय बोपदसा । ये रोबोर तेरोमीप पचरिद्रोमोष पदोषोर सिवोप वे बोपना देश । तषियमा एमदिन - . मिष्टचेतना पूर्ववत्वादिति । भवतारमानिलिवोरिपेत्यादि । पयवाः प्रचारुता भषिनागाः पतिपदा, सोचा माता पानिमियोपिकज्ञानस्या तो जमाना मापिनियोपिकचामपयवासा सम्पन्भिन ममन्तामिमिवोपिकचामपपयात्मकमित्पप, उपमोग चप्सनाविशेप गम्यतीतियाग सत्यानादा वामनावेपत्तमान पतिसत्यस्य अप यमुत्पानापास्मनाके पत्तमामो भीष भामिमियोधिकतामापुपयागं गश्चति तरिफ मेतावव बीयमाय मु पदर्भयतीति वधम्म स्सा रित्याहारवठगेत्यादि । प्रत उपयोनसमा मोषनाव मुत्थामाद्याममाघमो पदधयतीति पाकव्य स्सा दवसि भ योहियनाणपज्जयाण एव सुयनाणपजायाण सहिनाणपजवाण मणपजावनाणपजावाण फेघठनाणपजयाण मइयवाणपजाषाण सुयशनाणपशवाण घिनगनाणपळावाण चस्कुदसणपजायाण श्चरकुदसणपजावाण हिदसणपजायाण फेवलदसणपज्ञवाण उवढंगगच्छद , उवढंगलस्कणेण जीवे सेएणठेण एव पुच्चइ , प्राभिविषारियापार रेमोतम ! योग परता मतिनान पर्वापामा उपचाय पतमा पिप प्रतें पार, रतियाम, ससानादिव पाममात्र निर्षि पतंभामा बोबा भाम महीपते पर्याय हो । एवंसपचार पबमा म पनवा तनामना पर्याय । पारिपाचपाप। पनसा पर भिभाममा पर्याय । मपखवाषपचार पमता मनपर्यबामना पर्याय । पोचपापनपा। प्रमता देवनानमा पर्याय । मापणापत्र पाच । पनसा मवि पनाममा पर्वाय । सुपमवारपवार। पनम्ता शत पचानमा पार। बिमगपापपमाप । प्रमेता विभमन्नानना पयाम । यसपनगर। पमना पदयममा पर्सम । पसरपचाप । प्रनता पचारमनमा पर्याय । पाहिएमापजा। पमता पघिदर्शन | ना पर्याय । बेस रसपपजगार उसपार्मममा । प्रनता के सदनना पगार उपयाग पतम्यभार प्रतें बार उवामादि पाममापने विप बत्तमा म। सपायरसपेष बोवे । पाग सपनो पततामाट रपमागहरूप चोपपते उत्सामारित पामभावरी पार पाय बागाय । सेतेपो माममा एषयुषः । ते तपे पपीतम ! रमाम्। माघमाबाचे महाप बापमतमसिया। प्रातम ! मोर समान पायत् बरपाय अमारेमा - -- . घि पत्रीयप्पएसावि, इत्येत रमत स्या सूना संधानाचा जीवग्रहणेन ग्रहगात् ॥ अद्रवीतपंचविशेत्यादि । अन्यत्राप्यपियो दमविधा उता सायपा-पाकामाशिफाय सदेश सतत्प्रदश पेस्पेय पम्मापासिकायौ समपधेति दश पातु सनदस्या काशस्पा पारत्येम विवत्तितत्वा तदा याः सप्त वक्तव्या प्रबन्ति नब तेत्र विवपिता वरुपमाणकारा धसुविधपिता साना पचेति फयमित्या धम्मत्यिकायस्पादिनी वाना पद्मामाच बहुत्वा रेकस्यापि जोवस्य पुदतस्पवा स्थान सोपादितपाविभपरिणामवज्ञा कायो बीया पुदसाय तथा तदेभा सत्र पाय सम्भवन्ती तिरुत्वा श्रीवाय जीवदेशाध बीवप्रदेशाव तथा दपिमापेक्षया भनीवाणा जीघदेशाया बीवप्रदेशाधेति सस्त मात्रा प्यानये मदवतो वस्तुप्रपस्प सद्भावात् पम्मास्तिक्षायादीतु हितपमेव युक्छ यतो यदा सम्पूर्ण वस्तु विवश्यत तदा धर्मास्तिमायादी त्युच्यते तदशावि महापातु तरप्रदशाइति तपा मवस्पितरूपत्वात् तदेशकल्पना स्वयुक्ता तपा मनस्थितरूपत्वादिति यद्यपित्रा नवस्थितपस्य जीवादिदशा मा मप्पति तथापि तेपा मकामा भये मदेम सम्भव प्रदपणाकारस मिस्तु तथास्ति पम्मास्तिकामा रेवत्या दसङ्कोचादि धर्मस्वाप्ति, प्रत घी तेपचविहा पणता, तजहा-धम्मत्यिकाए नोधम्मत्यिकायस्सटेसे धम्मत्यिकायस्सपदेसा । अधम्मत्यि अपरेसा । तो पीरमा पुरसना मात्र पको एक ओपने तमा पासने सामो सकारादि तथाविध परिणामपणयको पायोष तया पुस तेहना म तेनाप्रदेश सभषे रमबरोने घोष १ जोवरेश २ बोषप्रदेस १ तथा पोद्रप्पनो अपचायें भोप र अनोपदेश २ पचोय प्रदेश १ हुवे, ते सांभ पी एक पासपने भेटबत वस्तु तोममा सहायो तिम धर्मासिबायाटियमविप यहोष भेद वृत्त प्रेमाठे विवारे सपृश्यतु विधिये मी धर्माप्तिकाम पापसोये अभे तेरमा मनो विवधायोखेतो तेहना प्रदेश रम बनोगे, तेहने प्रवखिताप पराषो तेपनीहानि हदिनकी परि तेहना ऐमनो वाल मा पतु ते ऐपने हानि परिपायो ग्यपि प्रमयस्मितापपया धोवादि देशने पनि तपापि एका पायये भेदेवरी सभी प्ररूपणाम् पारप तेही भको धर्मावि धर्मासिसामादिकने एकपांचो पसकोपादिपरायो एतमामाटेग धर्मासिकारादि देशनिषेधानेवाये को-रोधमयिकायमद . घ नवम्ति बीवायव्यतिरिकत्वा देवादीनां तवा जीवावीयपहरे कि देशादिगामेति? नय निरवयवायीषादयति मतव्ययम्वेदापस्या दस्पति अनोत्तरं । पोयमा ! पोषाचीत्यादि । अनेम पायमभत्रयस्य मिचम मुफ पो त्यस्य मममयस्स निवाचनमा प्रमोघेत्यादि रुवीयति ॥ मू तो पदसा इत्पथः । पदयोपत्ति म अमूर्ता पासिकायादय इत्यर्पः । सपत्ति ॥ परमाणुप्रथयात्मकाः स्कपा स्वपदणा पादयो पिनायाः स्क पप्रदमा तस्मैव मिरक्षा मंशाः परमारपद्धताः कपनाव ममापना परमायवइति तता सोकाकाचो सपिण्यापेक्षपा, अजीयावि प्रजोषदेसा यजीवपदेसायि । जेजीवा तेनियमा एगिदिया घेइदिया तेइदिया चउरिदिया पचिदिया शणिदिया जेजीयदेसा तेनियमा एगिदियदेसा जाय णिढियपदेसा । जेष्यजीया ते दुविहा पणता, तजहा-रुवी यशस्वीय, जेरुवी से घउधिहा पहप्ता , तजहा-खधा खधदेसा खधपदेसा परमाणुपोग्गठा । जेशन दिसा । ते निये एवंद्रोजोवना देस मारि। बावपिदियदेमा । सामत् विनादेय: । वसोवपदेमातविसमाएगिदियपदेसा । थे मापमा प्रदेश ते | निचे द्रोना मदेम । बागपपिदियपदेसा । मागत् पनि छोना प्रदेय मिहना प्रदे गई। वे पमोका से दुविधा पपत्ता तवा बोय पोय । प्र बोगरताना बेमेर मामा तपाई-रूपो पत्रोव प्रपो प्रबोष पत्ति धर्मास्तिकादि रम्मच। तपपिडा पसत्ता तहा। जेरूपो प्रयोग पाप तेना चारभेद बना तेबा-पा सरदेसा सपनेमा परमाणपोम्पमा । परमाए प्रचमरूप १ पाटिक बिभाग २ तेहमामिबिभाग पम पामाग प्रतें नपाम्या ते परमात्र बहोये । पतले माशावासमा पनवियरपोच पायाने पोवापि प्रमोपदेयापि पयोमपदेगानि पपप गयो पस प्रामा सामने बोवपारो ग्रमा । घेपो तपनाविका पपत्ता तवा पक्षिकाए । घे भरूपी ते पच प्रकारमा पमा ते कोकोने मानको परपो रममबारमा पाना तेषिम प्रावामाशिवाय १ तोय र तपदेस एम पमना १ प्रधमना । पहासमय १ ते हो तोनभेद सहित पापाग ने पापारपसमा तहमा पाव मात भेद पाना पनि नरामा बनमार बारपाको... TIRTHeman ---- से उपगुशिति । अमःमपर्यापपरपर्यापनप नुरे रमुरुसमुस्वनाथै रित्पर्य । सधागासे पतमानपत्ति । सोकाकाशस्मा तोकापाशापेच्या म तनामापत्वादिति प्रभा नम्तरोमान् पातिवायादी प्रमावतो निफ्यथा ॥ धम्मत्मिात्यादि । महासरति ॥ सुप्तमावप्रत्ययत्वा मिरे सस्प कि महत्व यस्पा सौ पिमहायः ॥ सोरप्ति ॥ सोको सोकप्रमितस्वात् सोमव्यपदेपा हा उच्यते। पपत्यिवायमझ्यसोपमित्यादि । सोचे पासी षतत पचा ममित मप्युत प्रियहितत्वा दाबापस्पेत्ति सोफमापो होकपरिमारः सच किम्निम्न्यूमोपि व्यवहारतः स्पा दित्सत पार सो पप्पमारसितोकामासो सोकप्रदेशप्रमावस्वा तरप्रदेशाना सवा म्योम्यानुनम स्थित इस्पेतदेषार सोयफुति । सोम सोभाकाशम सकतन प्रदी स्पष्टो सोबरपाट सतपा लोकमेवर सक्सनमदेवः स्पष्वासिष्ठतीति, पद्धसास्तिकायो खोक स्पष्टा तिठती त्पनम्तर मुच मिति स्पझनापिका गरुयलकायगुणेहि सजुप्ते सहागासे अणतनागणे । धम्मत्यिकाएण नते ! केमहालए पणते ? गोयमा! छोए लोयमेत्ते लोयप्पमाणे लोयफु लोयचेवफुसित्ता णधिष्ठइ , एव यहम्मस्थिकाए लोयाकासे , जीव बोरा रम्बादि, तमा एक प्रयोष ट्रम्पमा देम तेविम प्रसोबावामने ऐपपरा गोबाचोकम्प भावामधमाभाग पी। प्रगुपय माय अपते पगुस्य वाम गुरेशि सपत्ते सभागामे पर्वतभानूप धमविकाएरभते महासए पसत्ते । गुरु सहपायो प्रभाषयो प्रगुरुमाझ प्रनत भपर्यायरूप प्रमुख समायरो सहित सोबाबाग असावाकायनो पपेचाय पर्मतमान रूपई, ते परो असोजाबायई तेभयो सांकाममे पनवमेमागे वं गे।हिय धर्मासिवासारिख प्रमाषमी वाई-धर्मासिकामीभगवन् । बोतसो एबमोटा वमो विप्रश्न उत्तर । मोयमा चोय चोयमेत्ते कोमप्पमा गोतम । साकपचास्तिकाममय तेतबारे पोनमापसाचप्रदेय प्रमापहे। वोयफापायचेर पुसित्तापणि । धर्मासिवायनामदेम चोबाकाये व रौ सबस मपदेश सरतमा सोमप्रते समय पपदेये मी स्नोई । एषभाविकाए । इम पधर्मासिबाय परि पागे । चोपागासे खोवडियवाए पापविवार परविरामिक्षामा । रमसाबावामपचि जोपासिकार पुरसासिकार पपांना एकसरोपा पासावा पावा, अपसासिकाय चोक एव पम्माप्तिकापादिवेधनिपपाया नोपम्मविकायस्सदेसे । तपा मोअपम्मत्यिकायस्मदेसेति ॥ पूमिकारो प्यार भरविणो दया समुदय सहा मति मीसेसापरमेहि वा मीसेमानसा मो ऐसेर तस्स प्रावठियपमारत्तपछे तेए मदसेण निसो बापुरदेससहा एएमु काठ सो सवि सपगपववाारत्वं परवयफुसवादिनपषवहारत्यवति ॥ तत्र सषिषये पांतिकायादिविपप यो देशस्य व्यवहारो-पथा धर्मानिमायः स्पदशेनोई सोकाका मामोती त्यादि सरप तपा परदम्मेव वासोकाकाशादिना या स्पस्य स्पर्सनादिमतो व्यवहारो यया कटसोकाफाशेन पमास्तिका पस्य दय स्पश्यते इत्यादि सदर्पमिति । पहासमपत्ति ॥ पदाकाल समयमा समया पयो ऽहासमपा सकएव वप्तमामपणतया प्रतीतामा मतयो रसावादिति त मोबावायतमापदस्स नियपन मया सोकाकासमतिप्रमय बार ॥ पुवातावप्ति ॥ यथा तोकाकासमझे तपाहि- पतोबाकासब नत ! सि वीवा जीवनसा बीयप्पएमा प्रवीवा अमोघदसा अजीयप्पएसत्ति निर्घपम स्येपा पसामपि मिपम सपा परमेप्रमीय | वारसत्ति । असोबाबासस्य रेशत्व सोबासोरखपाकाण्द्रमस्य नागरूपत्वात् ॥ गुरुभतापप्ति । मुरुमपुत्थाम्यपदयत्वात् । पयतेहि भगुरुपत काए नोयधम्मत्यिकायस्सदेसे अधम्मत्यिकायस्सपदेसा । अछासमए । थलोयाकासेण नते ! किजीया ? पुच्छा तहचेव , गोयमा ! नोजीया जाय नोयजीवप्पदेसा । एगेशजीवदवटेसे गुरुयलाए थणतहि में नो अपमनिवामपरसेति । ते देस माद धर्मासिकारादिकने बना ते म्पविषयगतमकारने तवा परद्रम समनादियतम्यवहारमेपर्य ति | मरिमदे भयवहार ते पाई-भिम धर्माहिबार पदेशेवरो घर सोपानाममते माप, तवा परद्रम्म अर्यनापियतव्यवहार बी-बिम पाहावापामेबरो पर्मासिवाममो येममयोंमे तेरने प्रदेशवानो। पासमए प्रमोमागावतेवियोगपुचा ताय । बावने सपष समय पर ते एकहोर गत्तमान समाये पतीत पमामतनेवित्र पसमयको रोकायायमतप्रणमा तिरपामो । शिव भत्तोबावाम पते पूरे-प्रमोबावामने कि रेममयम् । बोन मारि प्राविमचा । गायमा रोबोबा बाद भी प्रबोपदेपा एमेचीबदबदेसे। गौतम एनो निदेश बायो ना यमुरिति ॥ अनन्त सपर्यायपरपर्यायह गुरे रमुखमपुरखनावै रित्यर्प ॥ सवानासे प्रवतमामेति ॥ सोफाफाशस्या लोकाक्षापारपेत्तया मतमानपत्यादिति प्रपा मन्तरोताम् पम्मासिकामादी प्रमाबप्तो निरूपयमार पन्मत्विात्यादि । महाप्सरप्ति ॥ मुप्तभावमत्यमत्वा लिई प्रस्म कि महत्व पस्पा सौ किमहल । सोएप्ति । लोको लोकप्रमितत्वात् सोकव्यपरेशादा उच्यतेच ॥ पचत्यिकायमापसोयमित्यादि । सोके पासी पक्षात इदचा प्रमित मप्पच मिष्यहितस्वा पापस्मेति सोकमाडो सोकपरिमाका सब किनिम्न्यूनोपिध्ययहारतः स्सा दित्यक्ष पालो सप्पमारतिलोकप्रमाणे मोक्षप्रदेशप्रमावस्या तत्पदेपाना सपा म्योन्यामुबोन स्थित इस्पेतदेवार ५ सोयफुझेति ॥ सोकेन सोकाबाधाम सकसस्त्र मदेशः स्पष्टो सोकरपट तपा सोनमेषच सबसस्त्रप्रदे में स्पातियतीति, पुनसास्तिकायो सोक स्पष्मा तिष्ठती पनन्तर मुक्त मिति स्पक्षनाधिका थगरुयलचायगुणेहि सजुते सहागासे अणतनागूणे । धम्मत्यिकाएण नते ! केमहालए पणते ? गोयमा! लोए लोयमेत्ते लोयप्पमाणे लोयफुझे लोयचेषफुसित्ता णपिठइ , एवं थहम्मत्यिकाए लोयाकासे , जीव गोगा मादि, तथा एक प्रयोग द्रम्पमा रेप तरिम प्रयोषावायने रेमपचा साबाचीवरुप पावापद्रवनामाग पीई । अगुष्य नाम प्रपते भगुरुय सास गुति सबसे सपागारे पषतभामूचं भत्यिवाएषभते महाबए पपते । गुरु मानुपायो प्रभावभो पगुरुसरे पमत सपर्यायाप गुरसत प्रभायेबरी सहित सोबापाय पचावाबायमो पपेचा प्रनंतभाम रूपई, ते पो पोबावापर तेमणे सर्मावायने प्रमतमभागेच गा। हिय धर्माप्तिबामादिस प्रमापी कार-पर्मासिवाय भगवन् । बैतडी एबमोटा वामो रतिप्रश्न उत्तर । माममा सोम पोयमेत्ते सोमप्पमा थे। मोतम । सापपचाम्निवायमब तेतबारे पोकमान पाकप्रदेश प्रमार। मोबपरवायचेव पुसित्तापरिण। धमास्तिवायमामध्म मोवाका रौ सबस मपदेय सरकतवा सोकमतें समस्त पदे मर्गी रोके । एवमापरिवाए । इम पपर्मास्तिवाय परि पानी । सोपामासे चोविकार | पापलिवार परविरमाभिसावा । इमनाकामायपरियोपासिकार पुरसासिबाय एपाना एकसरोमा पासावा कावा, पुपातिवाय शोक ।

एव पम्मास्तिवापादिदेशमिषेपामानोपम्मत्मिकायस्सदेसे तथा । मोप्रधम्मत्यिकायरमदेसेति ॥ भूमिकारो प्यार भरविणो दया समुदय सहर मरति मीसेसापरसहि वा मीमेमानोका नो दसेर तम्स परावठियपमायत्तण्ठे तेरा नदसेच मिष्टेसो पापुमदेससदा एएमु काठ सो सषि सपगयववहारत्य पररखपुसबादिमयववहारत्यवति ॥ तत्र स्वधिपये पम्मास्तिकायादिविपय यो देशस्य व्ययधारो-पथा घमातिमायः स्पदोनो सोकाकाम मामोती त्यादि सदय तपा परद्रष्येव नसोकाकाशादिमा यः स्वस्थ स्पर्शमादिमतो व्यवहारो यथा कटुतोफाफाशेन पमास्तिका पस्प रेया स्पायते इत्यादि तदर्पमिति ॥ महासमरत्ति ॥ भवाकाल समतयः समयः पयो ऽद्धासमयः सवरष वतमामयततया पतीतामा मतयो रसात्वादिति कत होवाकाधमतप्रापटूस्प मिवचन मपा सोफाकाप्रतिप्रमय चार ॥ पुचातायप्ति ॥ यमा तोकाफाशममे सपाधि- प्रसोकाकास प्रत ! कि बीवा बीवरेसा पीवप्पएसा प्रवीवा प्रकोषदेसा अजीवप्पएसत्ति । निर्वाचन स्पेपा पसामपि निपप सपा ॥रगेभनीय पवासत्ति । असोबावाशस्य पसत्वं सोकासोबसपाकापद्रष्यस्प नागदपस्यात् ॥ प्रगुरुमसामप्ति । पुरुतपुरवाव्यपदेशत्यात् ॥ प्रपतति प्रगुरुपत्त काए नोयधम्मत्यिकायस्सदेसे अधम्मत्यिकायस्सपदेसा। अछासमए । श्यलोयाकासेण नते ! किजीया ? पुच्छा सहयेव , गोयमा ! नोजीया जाय नोयजीवप्पदेसा । एगेशजीवदचदेसे यगुरुयलझए थणतहि से नो पानिवारपदेसेति । ते ऐम गर धर्मासिबारादिकने बामा ते पविषयमतस्यवधारने पर्षे तवा परद्रप्प प्रभमादिगतम्यवहारनेपर्य ति समविपयेमे पेममाहार ते पी-बिम धर्माधिकार प्रदेशेवरो घर शोकासाममते पाप, तया परद्रम अपनादिगतष्यवहार बोई-बिम वाताबापावरो धर्मासिवानी पेममयों तेरने पो भवनो। पासमए प्रपोमामासेच तेविनोवापुचा नाय । बार ते पपप समय पर | ते एकात्म यत्तमान सपा प्रतीत अनामतनेपिमे पसखाको रोवावायमतमममो तर पामो । शिव प्रतीवाचाय पते पूरे-प्रशोकावायने विष हेममयम् । भोप एवादि प्रतिमनमा । गायमा राघोबा पाव नो पोषपऐसा एपेपनोपरब मौतम ! एएनो निषेध वागे ना . ।

उपगमरिति । अमनपर्यापपरपर्यापट मुंगे रगुरुतपुम्ननाथै रित्यर्प । समागासे प्रवतमापूगति ॥ सोकाकायस्पा लोकाकाशापेक्षया श्रम मानानपत्यादिति प्रपा मन्तरोत्ताम् धम्मासिसायादी प्रमापतो निरुपयवाह । पम्मत्विात्यादि । महाप्सरति ॥ सुप्तमावमत्यपस्था लिई । भस वि महाल यस्पा सी बिमाया मोएप्ति । सोको तोपपमितत्वात् सोकष्यपरेवा हा उच्यतेच ॥ पत्यिकायममतोयमित्यादि । सोके पासी यातत पदचा प्रमित मप्युच मिणहितत्वा दाबायस्पेति सोममायो मोवपरिमाका सब विनिम्म्यूमोपि व्ययहारतः स्पा दित्यत पारसो | यप्पमावतिलोकप्रमाको सोमप्रदेमप्रमाणत्वा तत्मदेशानां सपा म्योम्पानुबान स्थित इत्येतदेवार ॥ सोयपुळेति ॥ लोकेन लोकायाराम सक्सस्य प्रदेधे स्पष्टो सोकस्पष्ठ स्तपा सोकमेवच सबसस्त्र प्रदेोः रपयातिष्ठतीति पुनसास्तिकायो सोक पहा तिष्ठता त्पनन्तर मुध मिति स्पशनाधिका गरुयलकायगुणेहि सजुले सधागासे अणतनागणे । धम्मत्यिकाएण नते ! केमहालए पणते ? गोयमा! लोए लोयमेत्ते लोयप्पमाणे लोयफुझे लोयचेवफुसित्ता अधिष्ठइ , एष थहम्मत्यिकाए लोयाकासे , जीय गोगा मादि, तथा एक प्रयोग ट्रम्पमा देम तेविम प्रसोकावायने रेपपना पोवाघोषःप पावागदपनामाम पोडे । अगुल्य माग पते पगुराग वाम गुपति सजते सभागारे पचतमानूब धमषिकाएभते महाबए पपत्ते । गुरु नापाको प्रभावबो अमुरुमगर प्रमत अपर्यापरूप अगुवसष्ट प्रमाबरी सहित सोबावाम प्रसादाबायनो अपेक्षायें प्रनतमाम रूपये, ते धो पसोपाबाई मो सोमायने पनवमभागे छ चा। हिम पर्मासिबायादिव ममापसी करव-धर्माशिवाय भगवन् । तयो एबमारा पो रतिमय उत्तर । मोयमा सोम पोयमेत्ते सोगप्पमा २।गीतम । पाकपचास्तिवायमर तेतचा पोवमाष साबप्रदेश प्रमार। सोमफारसोपव पुसित्तापहि । धर्माप्तिबापमाप्रदय मोवाकापेक रो बस चादेस सरतमा खोबपते समय मपणे मी रोछे । एषपापयिबाए । म पधर्मासिबाय पनि कायो । सोपागासे जोवनिपाए पाप्यविधाए परमिएकाभिटापा । रमताकाकामपरि वोगासिकाय पुरवासिवाय एपपिहना पससरोषा पासावा वावा, पुसाशिवाय पोष ।

एव धम्मासिकापादिदेपनिपेषापा ॥ भोपन्मत्यिकापस्सरेसे ॥ तपाn मोमवन्मत्यिकापरसदेसेप्ति सिकारो प्यार अलवियो दधा समुदय सदर प्रति भीमेसापरसेहि वा नासेसामरेखा नो दसेर तस्स प्रावष्ठियपमायतण्छ तेस मदसे निहुँसो जोपुरदेससही एएसु फछ सो सधि सपगपववहारत्वं पररावासबादिगयवहारत्यवेति ॥ तत्र नविपये पम्मास्तिकायादिविपप यो देगस्प स्पषहारो-पया धमातिमाय स्वदझनो सोकाकाय भानोती त्यादि तद तथा परद्रम्पेर बनसोकाकाणादिना या वस्स स्पर्शनादिगतो व्यवहारो यपा उदलोकाफाशेम धर्मासिका यस्प दया परपते इत्यादि सदर्पमिति ॥ पदासमएत्ति ॥ पदाफास समापन समयः पयो डासमय सचैकएष घातमानएप्पलक्षण । प्रतीतामा मतयो रसवादिति मत सोबाबासमतप्रमपदस्प निषषम मपा सोफाकाशमतिममय सार । पुष्पातावप्ति । यथा सोबाफाशप्रमे तपाहि- पसोबाकासस प्रत! किबोबा जीवदसा बीवप्पएसा प्रतीक्षा प्रबोपदेसा नीचप्पएसति ॥ नियंचम त्येपो पसामपि मियप सपा । रगेमजीव पवरसत्ति । असावाबापस्य रसत्व सोबाप्सोकछपाकाणद्रव्यस्प नागरूपस्यात् ॥ गुरुप्रसाहपप्ति । गुरुमपुस्वाष्पपदेशस्यात् ॥ अवतपि प्रगुरुयत काए नोवघम्मत्यिकायस्सदेसे अधम्मत्यिकायस्सपदेसा । थकासमए । थलोयाकासेण नते । किजीवा ? पुच्छा तहचेव , गोयमा ! नोजीया जाव नोश्यजीवप्पनेसा । एगेशजीवदधदेसे गुरुयलझाए थणतहि से मो अनिवारपदेसेत्ति से ऐम सद धर्मास्तिवापादिवने पाना, ते प्वरिपरगतप्पसार पर्व तवा परस्य असमादिगतम्यापारने ति रामविषयेथे रेसम्पहार ते पा-बिम धर्मातिवार मदेवरी घाट पोनावामपते स्थापे, तथा परम्प अममादिमतपणार कौर-जिम बांगावागारो धर्मास्तिबागमो देयपर्यो तेशने पो देगवाया। पनाममए प्रोपागासेमतेवियोवापुचा ताण वास ने सचच समय पर ते एकहोष गत्तमान सपये पतीत प्रमावतविष प्रसवपको शोकाबामगवमग्रभो तरको । वि पत्तोबावाम प्रतें पूरे-पोषावायने बिषे हेमममन् । म बोष इत्यादि प्रश्न विनापूधा । मारमा रोबोषा बाम नो पबोअपरेसा एगेत्रदोषावरेसे मौतम । एगो निभायो ना सखेज्जइजाग फुसइ , शमखेजाइनाग फुसइ । णोसखेडनेनाण फुसइ , णोधसखेजेनाग फुसइ , नोसछ फुसइ । इमीसेण नसे ! रयणप्यनाए पुढयीए घणोदही धम्मत्यिकायस्स कि सखेजाइनाग फुसइ ? गो यमा ! जहा रयणप्पनाए तहा घणोदहिघणवायतणुयायावि । इमीसेण नते ! रयणप्पनाए पुढवीए उया सतरे धम्मत्यिकायस्स कि सखेजाइनाग फुसइ, सखेजाइनाग फुसइ पुच्छा ? गोयमा ! सखेडाइनाग फुसइ णोश्चसखजाइनाग फुसइ नोसखेओ नोएसखेने नोसप फुसइ । उवासतराइ सघाइ जहा रयण प्पनाए पुढधीए वप्तक्षया नणिया एव जाव आहे सत्तमाए जयूहीवाझ्यादीया छयणसमुदाइया समुद्दा एष पससेवाभागफुसा । पसमातमा भागफरसे एक्साप प्रयोमास याजन पिड माटे । परोससे पीपसचे पोसवफुसा । सम्मावमाभागनिये स्म नको असमातमामानविय भयनी सब स्मनही पोपूबहे-मोसेवभतेरमप्यमाएपुठवीरपोरहो । एक भगवन् ! राप्रभा एविवोनो धनौद पि। । धविधायप विससे भागेपसा । धर्मासिवामने प समातमाभाग परसे एंपपि । बहारयणप्पभातहाघचौदह घरवाय वपवावादि। बिम रखममा पपियोमेनि कामो तिम धनावधि १ घनवात २ तमुवात १ एतोमवावा, एतसे प्रत्येक प्रसस्यातमेमामे परसे । रमोसेरभतेरयपप्पभाएप | बोएवासतरे। भगवम् । रमप्रभा परियोमा पाबामांतर ते । पविकायम विसरमाभाम फसा । धर्मासिवायनो म मख्यातमौभाग पर से लिया । पसगाभागपसरपणा । पसभातमो भाग फरसे ख्यादि पूरू । भागमा ससेवाभाग पुस । गौतम । सम्मातमें भागे फरसे ए पस मात योगनरे तेमाटे। रामसपेवामागपुसा । पसमातमो भाय फरसेनहो । पासपणे वापससेठो पासम्म पुसा । सम्मातमाभागनेविप परसनको प्रसपयातमाभामनेविष परसेनको सव परसंगहो । वासतराासमार । पापायांतर सव । महारगप्पभाए पुठवोए वत्तम्पमा भारियाया एवषावपर सत्तमाए । विम रमप्रभा पविमोना पायाांतर पापा, विम सार्ता नरक एषिमोना पावा, एतसे सरयातमोमाग फरसे इस्पष, रम यापत् नो सा - रा पोसोकादीमा धर्मासिवायारिमता स्पगना दर्सपखिदमाह पोसोएपमित्यादि । सातिरेगमदति ॥ सोकव्यापकस्वा दम्मासिकायस्प मा | तिरेकसप्तरप्रमाणत्वा पाचोसोबस्य ॥ असोजानागंति ॥ प्रसङ्घातयोवनममायस्प धर्मासिकायस्पा पादयोबनमतप्रमाण स्तिर्यम्ताको तनागवत्तीति तसा सा वसपनायं स्पमतीति ॥ देसोपवति । देशोनसप्तरन्नुप्रमाणस्वा दूरस्लोकस्येति ॥ हमारा मत ! इत्यादि । प्रतिए स्थिकाए पोग्गलस्थिकाए कालिलाधा । छहोलोएण नते ! धम्मत्यिकायस्स केवइय फुसइ , गोयमा ! सा तिरंग छद फुसइ । सिरियलोएण नते ! पुच्छा ? गोयमा ! सखेडाइनागफुसइ । उहलोएण नते! पुच्छा ? गोयमा ! देसूण थद फुसइ । इमाण नते ! रयणप्पन्नाण पुढवीधम्मत्थिकायस्स किसखेजाइ जाग फुसइ , यसखेजाइनाग फुसह , सखेजोनाग फुसइ , यसखेझेन्नाग फुसइ , सफ्फुसइ ? गोयमा ! णो | मते मर्मी ने पायो अमेतरे बाई तेमयमा निवारयो पापावारिसमे धर्मास्तिबायादिगत मयना देवा-पोसापनमंतेवावकायसवाय पति । प्रधासाक भगवम् ! धर्मासिबायने तर मय रतिप्रश्न उत्तर। योयमा सातिरंगमाह फुसा । रेगौतम ! धर्मास्तिवाय सोबम्पापक्षले भने प पासावसाधिक पाराव प्रमार तेमको साधिक प्रवमय । तिरिसप्ताएपभते पुणा । तिर्यन्चोक भगवन् ! केवखो परसे इस पृष्ठ । मोयमा प्रस सेवाभापपुसा । गौतम ! धर्मासिवाय पसम्माता गोषन प्रमाप पने मोशेसोज १८ गोषनई तिबारे पसमातमे भागे फरसे । उहखाएप | भतेपचा। वाताब रेममयम् ! वेतवा परसे रम पूची । गोपमारेपपइफमा । गौतम ! देगेवरा सातरामप्रमाप वासोक तेमारे देगान प परसे। मारमतरवरप्यभापठयोपनिनावपाविसमाभामपसा । पास वाफ्यासबारे, रखमभानामा प्रवियो धर्मासिकायना मध्य तमा माम फरसे । प्रससेवामागपसा सोभायेफुसर । भक्षवा असमातमाभाय परसे अथवा संभावमाभागभेथिमे फरसे प्रमया । पसभामफमा । पसमातमा भागविप परसे प्रथया । सम्पुमा । सर्व परसे प्रतिप्रश उत्तर गायमा पाससाभार्गपुमर । गौतम ! गहा । चप्यातमाभाग परमे।

! . सखेडाइनाग फुसइ , शसस्वेतइनाग फुसइ । णोसखेडोनाण फुसइ , णोष्ठसखोजाग फुसइ , नोसद फुसइ । इमीसेण नते ! रयणप्पनाए पुढवीए घणोदही धम्मत्यिकायस्स कि सखाइनाग फुसइ ? गो यमा ! जहा रयणप्पनाए तहा घणोदहिघणवायतणुषायावि । इमीसेण नते ! रयणप्पनाए पुढवीए उद्या सत्तरे धम्मपिकायस्स कि सखेसाइनाग फसइ, यसखेज्जइनाग फुसइ पुच्छा? गोयमा । सखेजाइनाग फुसइ णोशसखेाइनाग फुसइ नोसखेजो नोएसखेने नोसप फुसइ । उधासतराइ सहाइ जहा रयण प्पनाए पुढवीए यतचया नणिया एवं जाय आहे सत्तमाए जयूद्दीवाइयादीवा लवणसमुदाइया समुदा एष पसपेवाभामफुसा । असमातमा भागपरसे एपसाए प्रमोसास माखन पिड माटे । पोससे मसले पोसम्पफुसा । समातमाभागनेविये मर्य महो असमातमाभागविष मममी सव मगही वोपूबरे-मौसेवभोरमवप्पमाएपुठवीएषोदको । एक भगवन् ! रमप्रभा एवियोमो धनोद पिई। पतिवापस मिसंपबेभाभफसर । धर्मास्तिवारने म सम्मातमाभाग परसे एपपि । महारयच प्यभातचापोदी परवाय वरुवामावि । त्रिम रखपमा एपित्रोनेविष पायो तिम घमादपि १ पनवात २ तमुवात । एतीन मावा, एक्से प्रवेश प्रसस्मातमेमामे फरसे । एमोसेरभतेरयषप्यभाएप बोएउवासतरे। एममवन् ! रमप्रभा प्रवियोना पायावर ते । पत्विवायरम किससबभाग फसा । धर्मासिबायना म्म् समातमोभाग पर से विवा। पसंपेषाभागफसापचा । परमातमो भाम फरसे बादि पूषु । गायमा सजाभाम फुसद । गौतम । सम्मातमे भागे फरसे ए पस स्पात पावन तेमाटे । पापमपेवामामपुसा । पसमातमो माम फरसेमहो । पासपचे रोपससेवे पासय पुस । सम्मातमाभागनेविप फरसनही पसमातमाभागविप परसेनको सर्व परसेनको । सतरासपा । पासायतिर सब । वहारमपप्पभाए पुढवोए वत्तबमा भाषियग्वा एववावी सत्तमाए । बिम रखममा एवियोमा पाबायांतर कमा, विम माई नरब परिवीना पापा, एतसे सपातमोभाग परसे मध, इम यावत् मोघे सा - - - ! -- रा दमोसोकारीमा पांतिकायादिगता स्पामा दर्षापसिदमा पसाएपमित्यादि । सातिरेगमइति ॥ सोमय्यापफस्या तुम्मास्तिकायस्प सा तिरेवसप्तरन्नुममारत्वा पापीसोबस्य ॥ असरामामागति ॥ प्रसाहातपोजनममायस्य धर्मास्तिकापस्या टादण्याजनशप्तममाय सिपम्लाको महा | तनाववतति तस्या सा वसपनाग स्पषतीति पदसोपंपदति । देवोमसप्तरग्नुभमासत्या दूरसोपस्पेति ॥ इमान मत । इत्यादि । ६ए मसिए स्थिकाए पोग्गलत्यिकाए कानिलाया । यहोलोएण नते ! धम्मत्यिकायस्स केयइय फुसइ , गोयमा ! सा सिरेग थद फुसछ । तिरियलोएण नते ! पुच्छा ? गोयमा ! सखेजाइनागफुसइ । उहलोएण नते पुच्छा ? गोयमा ! देसूण थद्ध फुसइ । इमाण नते ! रयणप्पन्नाण पुढया धम्मत्यिकायस्स किसखेडाइ नाग फुसइ , यसखेजाइनाग फुसइ , सखेओनाग फुसइ , सखेजेन्नाग फुसइ , सचफुसइ ? गोयमा ! णो | मते भी नेगो एमो धमतरे गीतेसममा विचारयो पासाकारिखने धर्मास्तिकायादिगव मामा देपाछे-पोसाएपमतेपायकायमवरय पति । पभावाब भयपन ! धर्मासिवायमे पोत ममें रतिप्रश्न उत्तर । गोयमा सातिरंगपर फुसरा मातम ! भर्मास्तिकाम तोकस्यापक पने प भावाणाधिक पावराव प्रमाबाई तेभवी साधिक पायौ । तिरियताएभते पुणा । सियम्साल भगवम् ! फेतसा फरसे रमू पूपू । गायमा पसे पेघरभामपुमा । गौतम ! धर्मासिवाय पसध्याता गोबन प्रमापरेप पोकासोक १८ . योमम तिबारे पसमातमे भागे परमे । पुलाएप | मतेपणा । छालाब मनन् । क्षेतमा परमे रम पूचा । गोरमारेबपरफसर । मातम ! पेमेन पा सातराणप्रमाप साप माटे यान प सफरमे। । मामतेरगापमापुठोपायवायविसपेमभामपसः । पार पामासबारे, रमपमानामा प्रमियो धर्मास्तिकापना में मप्य तमा भाम पर । पसपेवाभामफसा परोभायेफसर । प्रपया पसनातमाभाय फरसे पवा संमातभाभामवि परमे पार पपपेपेमार्गफमः । पसमातमा भायमेपिप परसे पापा । पमपुमा । सब पर तिमयतरापमा पासषमाभागपुमा मातम ! Me माभाग । - - । सस्वेजाइनाग फुसइ, शचखेज्जइनाग फुसह । णोसखोलाण फुसइ , णोशसखेजोनाग फुसइ, नोसन्द फुसइ । इमीसेण जते ! रयणप्पनाए पुढवीए घणोदही धम्मरियकायस्स कि सखेजाइनाग फुसद ? गो यमा ! जहा रयणप्पनाए तहा घणोदहिघणवायतणुवायावि । इमीसेण नते ! रयणप्पनाए पुढवीए उद्या सतरे धम्मत्यिकायस्स कि सखेजाइनाग फुसइ, शसखेजाइनाग फुसइ पुच्छा ? गोयमा ! सखेडाइनाग फुसइ णोशसखेजाइनाग फुसइ नोसखेजो नोयसखेजो नोसष्ठ फुसइ । उवासतराइ सहाइ जहा रयण प्पनाए पुढवीए घप्तक्ष्या नणिया एवं जाव आहे सत्तमाए जयूद्दीवाझ्यादीया लयणसमुदाया समुद्दा एष पसबभामफुस । प्रसष्यातमा भागफरसे एबमाण पगोसास मापन पिड माटे । पास पीप्रससे पोसम्बफुसा । सम्यातमाभागनेवि स्प नको असन्चातमाभागनेविष मोनको सब स्मगेमही पतीपूर-मोसेम्भतेरमषप्यमाएपुछवोपधपादहो। एक भगवन् ! राप्रभा पनियोनो पनोर पि। पविगायब विसंभाभे सर । धर्मासिवामने प समातमाभाग परसे एपरि । बहारमपप्पभातहाघोदहि घरवाय वएबावापि । बिम रखप्रभा पयित्रीभविष भयो तिम बनादपि १ धनमात २ तनुबात ३ एतीन बावा, एक्से प्रोये पसरवावमेमामे परसे । रमोसेण्भतेरयचप्पभाएपु उगोएउपासतरे। एक भिगमन् । रमप्रभा पवियोगा पावावर ते । पत्रिमावस विससवाभाग पसा । धर्मासिकायगी भू सखातमाभाग पर से किया। प्रसंपेवाभागफुसइपछा। प्रसमातमो भाम परसे प्रमादि पूम् । गारमा समाभाग फुसर । हे मौतम । सम्मातमें भामे परसे ए पस स्पात मोबन तेमाटे। पापमपामार्गपुस । पसमातमो माम फरसेमहो । पासपने पोपसच्चे पासपपुसः । समातमाभागनेविप फरसनही पसमातमाभागविष परसेनहो सब परसैनहो । वासतरासपा । पाकायांतर सव । बारमप्यमाए पुठवीए पत्ताषया मापियवा एक्वायडे सत्तमाए । बिम रखममा पविषोमा पाकामांतर समा, विम साई नरम पबियोना कावा, एतसे सरवातमोभाग फरसे वध, म वापत् नोचे सा - मायामपाबनमा ५18. पियिपम्पमूमापि, देवसोमपारिद्वादस वेपकसूपापि प्रीति अनुत्तरेपरप्राग्नारासू व एव दिपम्याशास्मूषामि धर्मासिकायस्प फि पं मान रूपमम्ती त्याग्रनिसापेमा वसपानि, तथा प्रकाशातरापि मापनाग स्पयन्ति थापा स्स्वसाधेपनाममिति मियबम, एतान्येय सूमा स्य धर्मासिकापसोकाकाशयोरिति हो सासङ्गापापा प्राविताव परतिदिप्तीयशातदशमः ॥ १० ॥ समाप्त पद्वितीपहात ॥ सोहम्मेकप्पे जाय इसिपम्नाए पुढयोए तेसझवि शसखेजइ नाग फुसइ । सेसा पक्षिसेहेयहा । एघ शुध म्मस्थिकाए एव लोयागासेयि ॥ गाहा ॥ पुढयोदहीघणतणू कप्पागेवेजणुप्तरासिझी सखेजाइनागश्य तरे सुसेसाश्यसखेमा ॥ मितियस्सद्समो उद्देसोसम्मप्लो ॥ १० ॥ वितियसय सम्मप्त ।। २ | नमीमरण पूधियोतार सयामा । बहोगाचारोगा । पोप पादिदा पसपमाताप । सपषमायासमरा । सब समुद्र पादिर पसपया ता समुद्र । एवणार कप्पे । रम पोषम प्रादिदेर बार देवसोव नप प्रेषयक पर पहत्तरविमान | पायासिभभारापुढमोए । यावत् मिलि मिठा | ताई । तेसपेविप्रसवाभानं फसः । ते सगलाई धमास्तिकायना प्रसस्यातमोभाय परसः। सेमापरिमयमा । मेप सपनाममाभाग पादियो चारभागा मतिमिपेर बरपा । पव पारिवाए। रम पधर्मास्तिवायनो पषि समना दावी । एपनीयामासेपि । म पोकामायनी पनि नाम पायो। माहा । सामाषा माई-पुठमीसहिप बता पप्पागबत्तरामिहो सबभागप तरेमसेमापमपेषा । १। मात प्रधिको सात धनादपि पात पनवात पात ततवात । पार देवसोक नव पपया पर पनुसरविमाम सिहसिता एमबमारे ने पायागांसर ते धर्मास्तिकायादिक | मोसमातमोमाग परसे गापा पर पूषबामा, पथियो १ घनादपि २ घनपाव ताव ४ पाबातिर ५ विगारे माते प्रयियोमा ११ सूमपया या रदेवचाकमा १२ सूत्र मब घेवेपथना । सूत्र परमत्ताना १ मूत्र पत्माप्मारामा १ सूत्र इम ५५ सूत्र यया ने धर्मास्तिकायमा सपपातमोभाग परसे रादिपावरिकरो पापा, तिकी पासायांतर सपयातमभागे परसे बोला पव पमपमातमभागे पर। विपसयपदभमाया पन्नता । एकभी मा मतबनो समोसोमा पर्यो पस्यो । मितियधमन्यात पपीमा मत भव। पूरालिया . । .

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२ ॥ ॥ पिविषम्पसूत्राणि देवसोवसूत्रावि द्वारय पवेयकसूमारि प्रीषि, प्रमुत्तरेपरमानारासू है, एय दिपायाशास्मूपाणि धर्मास्तिकापस्प कि सारे य भाव स्पसन्ती त्याग्रनिसापेमा बसेयानि, सपा कासाम्तरादि पपनाग स्पन्ति पा स्स्यसपनागमिति निषचन, एतान्येव सूपा स्प धर्मास्तिकापसोकामामयोरिति पो कापसागापा माविताय ॥ इतिद्वितीयशवदामः ॥ ९० म समाप्त पहिसीपहास ॥ सोहम्मेकप्पे जाय इसिपनाए पुढयीए तेसऽषि शसखेजइ नाग फुसइ । सेसा पझिसेहेयचा । एष राध मयिकाए एवं लोयागासेवि । गाहा ॥ पुढयोदहीघणतणू कप्यागेवेजणुप्तरासिझी सखेजइनागय तरे सुसेसाथसखेड्मा ॥ बितियस्सदसमो उद्देसोसम्मतो ॥ ॥ वितियसय सम्मत ॥ २ तयोमरक पविलीताई सर्ववावा । योगायादोवा । बदीप पाटिदा पसपमाताप : सवयममुरायासमरा । सयप समुद्र पादि। पसपया ता समुद्र । एक्साइप्रेकप्पे । म सोधम पादिरेर मार देवलोक भय पोय पच पत्तरबिमाम । माया सिप्पभारापुठयो । गावत् मिलि मिता तर तिसम्मेविपसवाभाम पसा । ते सगधार पमास्तिकायना प्रसक्यातमाभाग फरस। सेसापरिमयमा । येप भगतमाभाग पादिर पारमागा प्रतिनिधेष परवा । एषपापसिकाए । रम पममारितवायनो पपि अममा बरगी। एपनोसामागि। म पोकाकामनी पपि नास्पप पागे । माता । संयानावा पाई-पुटगोठरिपरत बप्पामेवेबपत्तरासिदो सजाभागप तरेससेसाप्रसमा । १. सात प्रधिको मात धनादपि सात पनमात सात तनुवात । मार देवसोव मव प्रधेयक पर पनुत्तरविमान सिहमिया एसर्वमा घे पाडायतिर ते धर्मास्तिकायादिक |मा समातमोभाम परसे माषा परमूनवाला, प्रथिवी १ घनोदधि २ घनाव १ तभुवात : पाबामांतर । तिबारे साई प्रपिमोना १५ बसमा या रदेवबाबमा १२ सूत्र मय प्रेषयवना र पूष पर अनुत्तरमा १ सूत्र र पत्प्राप्मारामो १ सूत्र इम ५२ सूत्र यया ते धमास्तिकायमी अयमातमोभाग परसे मारि पासाबरीकामा, तिल भाषाांतर संपवातमागे परसेबीचा परसवात भाग पर विपरमपदममाणेपा पमतो। एसबी ना मतकमा एममो डोमा पर्यो वस्यो । . विलियंसपमा पदीमा मापा पूगाभियो । १ .

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Shribhagwati Sutram Bhag-1 Satak 1-2 Ka Uddesha 10 Tak

Author
Bahadur, Ray Dhanpatsingh
Title
Shribhagwati Sutram Bhag-1 Satak 1-2 Ka Uddesha 10 Tak
File name
Shribhagwati Sutram Bhag-1 Satak 1-2 Ka Uddesha 10 Tak
Text
OCR done
Citation
1882
Published
2011/07
Publisher
Benares, Jain Prabhakar Press
Language
Sanskrit
Pages
377
Library
Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur
DLI number
314022
Barcode
99999990312178.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
Q1zyncAX3uS
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