Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner

Raee Raee Ret

B. L. Mali Ashanta · 2011/03

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राई-राईरेत
( कहाणी सग्रह)
0
.
बी. एल. माली 'प्रशांत

यो० एल० मालो 'प्रशांत
..
मोल : बीस रुपिया । पलो संस्करण : 1986/प्रावरण : शशि परगनिया/
प्रमाता भूमिका प्रकाशन. 3/343 मालवीयनगर, जयपुर (राज.) मुद्रक :
हिन्दुस्तान प्रिन्टस, बुचौलपुरा, बीकानेर (राज.)
RABE-RABARET : Short Storier By B MALI 'Ashant'
Price: Rs 2000

डा०
कन्हैया लाल शर्मा ने
घण कोड सू

सरवार
1. समन्दर ५
2. पिरागो..१
3 गुदही रो दरद : १७
4. थार ब्याव रो बेस: २३
5. उणियारो: ३२
6 ग्याज पर बट्टो : ३६
7. छगजी रो बेटो.४१
8. नागळ:४७
9. हमलो : ५४
10. माटो री सोरम .६१
11. राई-राई रेत : ६६

समन्दर "मा रोटी ..." पगारे लूमतो राजू बोल्यो, "मनै भूख लाग मेलो है मा ।" सोना बी र सूर्व मुई कानी देवी, बीरी निजरया उणर मु . मार्थ लागगी रोटी रौ सलीको बीरो खेत, बीरी वा चवदा विलो दूध देवण माळी गाय, भूरती बकरी, मुडयोडा सिंगा पाळी भैस, घोळिया बळद बीरी पाख्या मे फिरै लागा। दोरी हुयोडो रोटी माथ बीरो पाखो सोध टिकग्यो भरपूर फसल भरपोडो खळो, नाज ₹ बोझ सूदबती गाडी बीरी पाख्या माकर निसरवा लागगी । बाण चूकै खुड्डी कानी खुडको हुयो । बीरो ध्यान टूट्यो का लामो सास लेपी, भर राजू ने लेपर ठुड्डी कानी चलोगी। 60 महानगर ₹ लामा-लामा हाथा नै माछी तरिया दिखावतो उपनगर मालवीय नगर । ई नुवै नगर माय उबासी लेवता कतार मे ऊभा हाऊसिंग बोर्ड रा यण्योडा मकान है-धूळ सू ऊ मा करयोडा घोळप सूधमकायोडा। बीचू बीच कठ-कठ कच्चा टापरा है, जिका रो इतियास मा मकाना तळ दब मेल्यो है .। इण बस्ती रे बीच में ग्रेक छोटी सो माटो रो घर है। सिर पर जिगर घास-फूस है। डील उद्याडो है, इण जून घर मार्य बार सभा रूख छाती दे राखी है । फळसं कनै खेजती है। मेक-पाधो पडपाडी उदास झू पडी है। झू पडी कनै खुड्डी पर टेणा री प्रेक टपरी है, सोना मा इज छान-झू पडा माथ छाती दिया वैठी है । खुड्डी में सासू पर देवर रवे । खाणो अठ सासू-बहू दोनू बणावे । टेणा री टपरी माय पाच जीव जो लुकाव-सोना उणरो घणी पर तीन टावर । क्न इज बीर जेठ जिठाणी रा छान-झू पडा है । सोना रोटी बरगा लीनी । डोकरी चू न प्रोसण रयो है । कनै जीवाराम यंटो है। डोकरी न देख गरी सवेदना मे भर वो बोल्पा -"दो रोटी डोकरी मा नै ई पोर दे देवो तो के हाथ घस जावं ?' सो कोनी बोली । जीवा- राम री निजरचा लो री परात मे चून प्रोसणती होकरी पर टिक्यो । दो दो बेटा बहुवा - कोई ताठ मू ऊपर उमर . ....

बुडापो, वारी प्रात्या सामी संग म ऊमा हा । परी भी बहू हुई पून पर जोर दे-दे मीन नरम परया में साग मेलो हो, पर जीवाराम से निजरपा मुकरता सबघा नं मोळम ही। शोना रोटपा ने पाली माय मेल टेगारी टपरी कानी चलोगी। या डोक्रो रे बोचलोई बेट री बहू हो । जीवाराम इण बस्ती में हाऊ सिंग बोर्ड र मानों ने प्रायोडो वा रोई विरादरी रो हो । वो मुद्दडी मे बैठ्यो हो । यी रे कनं डोररो रो छोटो ई छोटो बेटो ग्यारस्यो बेट्यो पापी में स्कूल रो बाम बरं हो । वो ग्यारस्या कानी निजरपो फेरी पर बुझ्यो-पुरणसी मलास में पढ़? ग्यारस्या री उमर कोई तेरा-घवदा साल री होगी ही। फीर र सू लागतो यं यचपण दोरी दियर तो मे सू निसर यो है । जीवाराम पेरू डोरो बानी जिरमा फेरी पर बुझ्पो-"खरचो किया चला, डोकरी । 'रामजी चलावं, बेटा।" रामजी पर जीवाराम ने विस्वास नी हुयो वो फेरू वाल्यो-क्यिा? -'माथगरा प्राय र भो, ग्यारस्या वानी हाथ परती वा बोली, माग-सब्जी बेचं । -पिता- पीसा बच जावं ? इतर में सोना पाछी प्रायगी । वाली इयां ई दिन तोही बरा, बर्च के । कोई दो-चार रूपिया, पण के बरा। दो-च्यार रूपिया मे काम चाल जा ।" --चाल तो कोनी पण चलाणो पढ़।" डाकरी बोली। सोना वं हो- "म्हारो कोई जीण म जीणो है -'दो-च्यार रूपिया ई. यस चोमन ई मन बोल्यो भर बोलबालो हुयभ्यो।" प्राज वो सुबै-सुवै सोना रे पाम सू ई मायो हो। उरगरी पाहोस। वों ने परेसान कर हो । जद जीवाराम री बहू दिनुग दूध लेवण न पाई तो वा उणन कया हो-राम, पिल्ली रे पापा ने पक्कायत भेजज्यो. । 00 तीन-च्यार बरसा पली तो अठं लोगा रा सेत हा, वैप मोकळा धान भर गब्जी उगावता पर मज मू गुजरान चलावता पप अव |" बादी! अंक दिन सहर ऊफण पडयो। सम दर रो दाई बुहा लेयग्यो-खेत खळा पर रिजक-रोटी । खेता पर खमा हुपग्या मकान ईमकान । हळ पर वळा दयग्या मारं त । दूर दूर ताई सेता रो नाम-निसान कोनी । हळ सोतिय री बात करें । जठं हरयाली रमती उठं प्रब सूना प्रावहीण ढू डा। धरती रा हिमायती उजाया। किरसारण साफ, जमीन साफ । इण उपनगर मे जठ मा लोगां रा छान-झू पड़ा है. बान भी उठ सू हटा- वर्ण खातर कोरट में जी तोड कोसीसा चाल रयो है । जठं नी जाणे विताई वरसा सू में लोग वस्त्रोडा है उठ पनि अब रेवण भी नहीं दिया जावला । जठे पारा पुरस्वा प्रापर मात्रै पमीन सू हेमारणी मेलो वा भव विनास मे गुम जावली सिरहार सहर पर मं लोग । पापरा घरा ने बचावरण सारू में लोग मुग्रायजो हाथ मे लिया कोरटां रं चक्कर लग य रंया है । पर भी के अंबचा सकसी प्रापरा घुरसाळा ??? पर ऊपर सू अट प्रावण पाळा पढ्या-लिख्या लोग पानं सतावै, लूण बुर। सोना प्रापरी टरबरी रो अस्तित्व बचाणे रा जतन करें । उरण रे देवर ने गरीबी मु डे मे घाल्या बैठी है । बी रो बस कोनी । जेठ भी गरीबी सू जूझ रयो है । मास कळो । पारस्पा खातर वा जीव जिए सारू भी पाडौस मे पाई छुक राणी वं (~-चार वाढ ! खाज्यावू नी । मेरो भैस रं लाठी री मारी। बन्यो गिरग्यो । विताक दिन मायने राखसी । बीरा छोरो लाठी निया फिर । ग्या-- रस्यो प्रायोड़ी भंस नं चिनेक घेर दोनो ही । देली हुवेला पण राड के कोई हाथ- पग थोडा इज हुबै । डरा र राखणं री कोणीसा । पाडोती कोई बोले कौनी। हा मे हो करण सारू बीरी जात रो अंक बोर ई डोळ रो घर । राड-गोधम । हाने लेर रा दिन याद प्राज्यावता । बौंरी पाख्या भर मावती । कदे तो या सोचती इण बरबादी सू बचर क्ठ ई ची जावै । 33 अंक दिन परा र मु डाग सू व गडब भी-भी कर परी चल्यो गयो। प्राथए रा बाबू (सोनारो घणी) पायो तो वा बोली-हाऊसिंग बोर्ड प्राळो वो नोल्यो (जे ई एन नवल) प्रायो हो । का हो- भोपडी भापडो उठा रिज्यो नही काल मै नखवा देवू ला। 'भूषो हुसी बापडा टुकडो नाख देती। कोरट मे भी तो देवा हा । प्रो मुपावनो पा ताई ई मिल्यो है । वो नितकारो नाम्यो । वायू रो मन किया ई कर लागो। यो बर्य हो-ये दिन हा, राजू री मा !.. मापू पर बंटर चिलम पीवता..मा बन बैठर बसेको घालती .पापां पारगत परा पर मारा हलो पायतो-पर पाग्यायो, गला कलेवो करल्यो . पर माज । पल र प्रादम्पो री सुणणो कोरट रं चकार लगाणो, मार्गा-माऱ्या मुह लटकाया मजूरी सातर फिरणो . 'वता-बघता बाबू रो गळा भरवाया। रू झेडे गळंगू वो बोल्यो-'क्यिा ई लाग पण ये हुवे ।" -1 फळम माथ कभी सेजष्टी बिना सं हवा र चहा सू हाल उठती । सोना रो भाव ई इसो ई हो। सदा गर-गम्भौर पर सान्त रवण माळी रं मय पदे को-यदे की री चरचावा मू वैचेनी रेयती। जिण पर माथै वा छाती दिया बैठी ही वो फगत ढाचो इज हो पण सोना रो यो मुरग हो, महल हो, स की हो नीरो। डोकरी इण माटी र घर चिनेक भी मांच नो भावरण देती। मा वीर परवार री छाया ही, बोरी सुद रो जगा ही। हाऊसिंग बोर्ड माळा भावता तो वा वान सुणा देवती-योनं चाय-पाणी रा पौसा चाये तो सीधा-सादा माग लिया करो...'मकान' गिरावण री तो बात दूर थे इण रे हाथ भी नी लगाय सको . राज ई हार रयो है ई सू" व डोकरी रं मुडे कानो देखवा लाग जावता। O प्राज पेसी ही । वायू प्राय र याद दिराई तो डोकरी बोली-बाबू देख । भगवान भी ठालो बैठ्यो पापणं मो के रोग लगायो है वेमाता रा भी प्रखर खूटग्या, बेटा इणी वास्तं ।" अंक हाथ सू प्राख पूछ र वा बोली- जमी तो माता दी बेटा । बोरे जावता ई माखो सहारो टूटग्यो । मुमीत्रता रा दूगर प्राय र ऊभा हुयग्या कंवत कता डोक्री री मारूया फेरू गोलो हुयगी। माख्या पूछ र वा बाली बाबू सू उमा नी गयो । डोकरी बोली- इया के कायरी लावै । मन ता छपन्या याद है । जीन्दा रैसी तर तो और बणासी घर । नत प्रापणा पिसरा है, बेटा। सजळ प्रास्या पूछ र बाबू गयो परो । बोरे जावता ई दुरगा प्रायगी। वायू वीन सदा ई मोणी मामी क्वतो, टावरिया दादी मा । किणी ने प्रो ठाह नी पडतो व प्रारी दा जात है । प्राक्ता ई वा बोली - दाखी काई कर है।" 'वंठी हू बाई प्राग्या । । ८ -'अब तो बैठपोई बरणो। खे तमे-म की रै चली जावा । दुरगा कयो। डोकरी वोली खेत रीता बान दूर बाइ प्रब तो टापरा री ई मड मेली है । अाज ही बाबू पसी पर गयो है ।" --"म्हारे भी वे गया है, भाण | राम जाणे प्रठ रेवणो हुसो के नी लामी सास लेयर वा बोली-अब तो राम है, के राज है। फरू लामो सास लीनी भर बात बदलतो थको कयो-सुण्यो है, ठुकराणी सोना रे लार पड मेली है । "मादमी र लारे पडवा मू का हुवे है, भारण प्रापण ता राम ई लारै पड मेत्या है।" --"काई केन है वा?" --"ये है-हथकडी पर वू ली । मार रयू म्हार प्रादम्या सू ६१८--पग तुडवावू नो ।" - --"या पण हायर से के लूडी है ? सुरजपावर । पर ई मैं हरदेवा नं बंद ली। वो राडरी भैस इज खोल लेज्यालो न रैमी बाप तो न वाजसी बासरी । जे कान्याँ होर नं कह दिन्यो तो वे राड नं समूतीनं ई उठा लेज्या- यंला ।' प्रापणो काई लंबे है बाई । क-वर पर प्रापू पाप ई ज्यासी । -~~~ही भाग, गोले रो गरू जुड़ा हुवै । ये बाता करती थी। DO भूवा गरता काई करता । खेतीबडा ने मजूरो रो प्रादत पड़ी। ज्यू -ज्यू यमती बसी बसती माटा रा दिन फिरमा समझदार लोग नुवा हजगार टूढ लिया । डोकरी रा बेटा सुबै -स्याम दूध बेच लेवता बीच म सन्नाले माता वा दही बिलोतो त। लोग छाछ भी नी छोडता घर मददणी पीसा बट जावता, वं पुराणी व ता मूलबा लागग्या । पण प्रचाणच अंक दिन वा पर गाज प्राय र पड़गी । रोवती-बिलखती साना पर बीरी ठिाणी सामान भेळो कर ही। चौक राज रा पसरा पर सिपाया सू भर मेल्यो है । अब वे कट जायला, प्रो सुवास । डोकरी ने गरी झळ प्रायी। वा चोली-हारी जमी लेयर थे म्हानं वरवाद कर दिया, फेर भी नी धाप्पा | पर थे म्हारो घर सोमवा ने माया हो। ये मांगो हो म्हारं ? के निगे है म्हे या मू ....यारी सिरकार म् ?? घर छाडर म्हे रूकना फिरा ।।। मो म्हार मुमरोमी रो घर है। मैं -

इण मे परणी माई पर पत्र माडी जालो, यय र या गोदश उई पर बोली.
पाप र घावणो जावो ही नही
से रो निजरपा होकरी मार्थ लागी । म फलिया देख रंया हा। जीवा.
राम र दीमाग में समन्दर योगा मायगो। मेरा उपळ-उप नितारा काट
सागी। वो यहो -मा! सहर र किनारं रंगो पर समन्दर किनार रेपो
दोनू' इकसार है .।
इतर में राज रा सिपाई डोकरी रं हाथ मूलाठो पर लीनी ।
( १० )

"अाज तो भौत बुरी अन्याय हुयगी बाबा !" "के रै मगतू ?" "पीरागा ने मेक साद मार गेरयो, सकीना नं हिडकायोडी गडक बाय- ग्यो पर विचार लाला कुत्ती रा कसाईडो पग काट दोन्या-तीनू अस्पताल मे "है ।" सूरजाराम रे चरं पर हैफ चढग्यो । चिलम हाथ मे पकहा वो बोल्पो, "के बात हयगी ही रे मगतू ?" "नो तो ठाह कोनी बात्रा।" "क्ट तू रिगलो तो नी कर है ?" 'बाबा, मैं पाप सू रिगली करू ?" "मैं वेरो पाएर पार्दू हूं दिखा... वैवतो थको वा चाल पडयो।" लिखमसर ! गणेसजी रो मिदर । चौरायो ! भो ही चौरस्तो है पीरागा रो ठाईचो । रेत री कुढी मार्थ काकरा पडया है । दिखणाद वानी मुह करया वो काकरा चुगया में लोग मेल्यो है-उद्याई डोल । कमरघा में लगोटी है गत । कनो कर नीसरतो परतू प्रेक डवली पोसो कुढी माथ गेर जावं । ठरण के री प्राधाज सू पोराग रो ध्यान टूट पर परतू पर जा टिक। वो पावाज देव- मो मोट्यार । पाछो भाये । पीरागा री भावाज सुण र परतू कनै मायग्यो । पीरागो वोल्यो, "तेरी पोसो पाछो लेज्या । छोरा खातर घोग ले जाई।" 'मेरै पर्ने और पीसा है, बाबा ।" "होगी।" उठतो थको वो बोल्यो, "लं !" पोस ने दो परतू रो हथेळी पर मेल दियो पर बोल्यो, "प्रव पट्टी दे ।" परतू बीर मुई कानो देखतो घल्या गयो । पीरागो पायो मापर राम में लागग्यो । घोही ताळ पदं बिहदू पन र नीसरया पोरागा ने मारा युगना देख र वो बोल्यो, "मो के वरं है पोगमा ?" 'दोस कोनी ! प्रास पुटेटी है ?" थोडो नरम पडतो को फेर बोल्यो, "भाई पाकर धरती कोल में रह! मैं सार र भेठा करहूँ । माता-जागा सावरारं पगा में नप जावै । छोरा ऊभारणा पग भागे रे भाई!" बिडदू बोरी बात ध्यान मू सुण हो । जर यात पूरी हुयो पद्धं भी उपरो ध्यान नी छुट्यो तो पोरागा वोल्यो, ' के सोच में पडगो ? घरा ना भाई, टावर रोट्या वातर उडीरता होसी ।" बिहदू चल्यो गयो । पण पोरामा री बात थी रे दिमाग मू गयो पानी। यो सोचता-सोचतो जावं हो। बिहदू रं गया पर्छ मूकळी सेठाणो राबडी मूभर्योडो बचोळो हाथ मे लिया प्रापर पड़ी हुपगी। पनं उभी का न हो, “पारागाजी, ल्यो रावही पोल्यो !" बिना वी सानी देम्याही पीरागो क्यो, "भीत रं वने पडी हाडी मे घाल सूरुळी मिंदर री पेडिया रै न पडी हाडी में राबड़ी घाल दोनी पर पाछी प्रायर बूझी, "पीरागाजी प्रवको वर तो लिछमी रे बापू ने गया भोत दिन हुयग्या । क्द प्रागी" "परम्यू पाजामी । कोई ने कहजे मना भलो ?" परसू पा जावैना ? वा मन ही मन सोचतो बोली, 'मायो" । वा भीर हुयी । गेलं चालती वा सोच रेपो हो इणरो मतलब तो 'वै भीर हुपा ! पोरागा री बात झूठी कोती हु । ....... मूळो र प, मिसगणी माई । वीर रो बाट को हाथ में लिा बा के ही "त्या रागाजी खीर पोल्यो।" "हाडी मे धाल दे।" "हाडी म पडो राबडी न देख र मिसराणी बोती." इणम तो राब ही है, पोरागाजी । पो होल्यो। काकरा तो पर्छ हो चुग लोगो।" "भाज्या ! पाई है-वीर लेर ! क्यूं चोवो हघर मिनमो जया बाता मात्रा लागगी दोस? कदै काकराप चुग लेज्यो !" ' नाराज क्यू होगा, पौरागाजी ! प्राथ्यो ठिकाणो तो प्रापरी किरपा सू मिल्यो है।" । १२ )

"रू बाही बात रामजी रे सजाग न तू मेरी किरपा कहवं । में
यो हो नी के भागज्या।"
"प्रोजू कोनी बंदू पौरागाजी !"
"तो हाडी में घालज्या ।"
खीर ने रापडी मे पाल र मिसराणी वडय डावती चलीगी । यो पीरामाजी
भी पे पतो के भादमी है ? राबडी म ही खीर ।
दोपारी हुवै लागी । तेज तावड! ! पीरागो तावडं रो शिलकी मे बूढी
सामै बन्यो राबडो पर सोर मिना हाडी नै जीब सू चाट हो।
सडक मार्थ सकीना जाच ही। कात्थ सू रग्योडा दात । साकळो चेरो।
सिर पर उलझ्योडा वाळ । कमर या मे मैली सलवार पर इसा ही मैलो कुरतो।
पोरागा देख र कैयो, "सलोन डी, चेता सं चालजे ! तू पान रो पीक थूक थूक र
सड खराब कर है।"
"क्यू ? सडक वीना रे वा री है के ''
"चोखो । तू पार बोल।"
सकीना माग चलीगी। पीरागो ग्रारं काम में लागग्यो । जद बा महाबार
पान प्राळ री दूकान माथ प्राय र खडी हुई तो महावीर बोल्यो. ' के चाये
सोना।"
'कित्ता?"
"मेक।"
चूनो र गावतो महाबीर श्यो, "कोई मेहपाणी रो भी प्रासार है,
सबीना?"
"अाज हील, खाळ-नाळ से सही ।" सकीना योल र चिमको, जाग उरण
सून कंवण पाळी बात कयो जगी हुदै । महावीर पान लगाय र देव तो कंगो,
'तो इस बात पर पान सा, सोना ।"
सकीना गुम-मुम सो चाल पड़ी । महाबीर कमीज पर झट दुकान मू
उतर्यो पर सट्टे पाळा रं वनं जाय पूग्यो । वो जी भर पीसा लगाया। विरखा
रा भाव ऊचा हा ।
सट्टे मे पीसा लगाय र ज्यू ही महावीर प्राव हा तो गेळे में उगने वाला-
पुत्ती मिलग्यो । महाबीर वोल्पो, “यसलाम वालेकुम ।"
"मालेकुम सलाम ! क्यू माज बोई विसेस वात है ?"

"प्रापरी महरवानी चाहिजे।' 'माज सामनं हा जागो। पण तरी ग पर दूध पंडा सुबाजे।" गुवल्या। 'जणा जा।' महारर नं माज माममात्र हुगा लागे । वो सडा-सडर जाय हो । भूता माटी गळी मू टावरा गे मायाज प्रा ही-लालाकुत्तो वावळाsss बादरोsss । गूरज प्रापरी । कानो जायं हो। निगमसर पर प्रा वादळी मडराध लागी । ग्य् ही हमरा बीन निचायी, घाटा चू पड़ी। भिर भिर २ री झंडी लगगी। पारागा उघळतो-यूदता घडो चौपड कानी प्राय रया हो । उगगर मूड मू प्रावाज नीसर हो-मं ही प्रोड। चौपडिय कुन री छरी में नालायुत्तो पर सबीना ऊभा छम-छम पडत पाणी यानी दगं हा । पीरागा री प्रावाज उणा र काना म पूर्ण हो। बाक्ने प्राव हो। छतरी कानी लपक पौरागाने समीना या, 'माज तो महावीर पान पाळ रंगरा होयग्या।" मरवा दिया, सकीनडी।। पण अब के हो ?' "थे दोनू वदे मरवा र रेस्यो।' "पर पीरागा। मौत सू दे डरणो ? मौत तो प्राज नी तो चाल पाणी . 'पग वेमाता वेमौत क्यू मरणो चावा 'कोई गरीब रो भलो हो ज्यावं ता प्रापणा के जावं" अं सट्टे माळा भात बुरा हुवं, सकीनडी। वदे कोई मरगो, तो समझ लीज्ये प्रापा भी मरमा । "कोई नी मार। वा देख । बरखा थमगी । प्रावो चाला ।' लालाकृती पंला नीसर्यो, उगर पर्छ सकीना पोरागो छतरो मे ही बैठ्यो रयो। O0 ग्रेक दिा पोरागा रो बान सू पर लालाकुनी पर राकोना र प्रचार मू ? - . तीन मर्या-मेक साद, अक गइक पर अन कसाई । पर अाज ? अाज ताभोत बुरी अन्याय हुयभो । सूरमाराम प्रस्ताळ ₹ प्रा खड य फूलजी कम्पाटर ने बूझ यो हो-डागदर साब पीरागोsss ?" यो पार पडयो, सूरज राम | फूलजी लामी सास लेरी । "पार पडणे ।" हा "कठे प्राप रिगली तो नी करो हो डागर साव तू केंडी बात करे, सूरजाराम ।" सकीनाsss ?" "या भी पार पडी । लालाकुत्तो ठीक है परग वीरो पर काटा पड गो।" डागदर साब, पान वानी सक्या वान ? 'बचावरण पालो तो भगवान है सूरजाराम । ' प्राप भी भगवान रो रूप हा, डागदर साब।" पण भगवान तो नी 'बडो बुरो हुयो सावsss !" उपरो गळो भग्यायो । बो बोल्यो, 'पीरागा ने लोग गैलो कैवतां पण बो गलो नी हो डागदर साच । सास ढोली छोडता वो बोल्यो, बी री कोल म धरती माथे पड या काकरा रडक्ता। वान वो सोरा भेळा करता। पण अमली काारा कर भेळा हुया प्राज भी बडके डागदर साव । आख पौछ र बो बारयो, 'भोळो हा न, इण वास्तै ई बी री बात पिल जावती । पण लोग बोर लारं पडगा।" 'पा रमते रामा रे न के धर यो हा ? पण लोग मार ‘साढा री सोई उतारण प्राळा योनी डामदर साय । सुण्यो है, बड़ा लोग तो पाळं है प्रान ।।। 'के पतो भाई" पता 1 क्यू नही डागदर साब पाव पसार र देखल्यो, सरीक प्रादमी दुखो है।" पूलनी बात बदनता थका बोल्या, "हा ग्रे वात है, पौरागो मरती टेम यो हा मेरे भाई सूरजा ने कह दीज्यो । वा मनं या नही, गाड दे। मा चाला . . सूरजाराम मू डो लटकाया फूलजी र लारं हुयग्यो । 017 फत्तं पर ग्राली सडक पर तादो बानेज है। उणरं उत्तराद वानी करता पोरागा री संनाणी अंक चू तरो है । वन ही सीना री मजार है ।

लाला गुत्तो पारागारं तर निनोनो नाइबरमा पो है । मूज प्राराम
करण सारू उत्तावळा हुय रंया है। या देगो, लिजि र बी पार ! सूरजी पग
टेक दीन्या । वा बठामो है- तळं ।
चू तरं सू ग्राबाज माई लालानो मूरजी छिपग्यो है !
हा पीरागा।"
.
मावाज वद । यधारो बढ रया है। लाला युती चू तरै र सिर लगाया
ऊ घा रयो है । चू तरो वोल-लाला वुत्ती सोय है यं ऊध है
"जाग रेयो हू , पीरागा।'
"बी तानियां रो काई हुयो
'मन डर लाग पौरागा. तू बीरा नाव मतना ले।'
इतरं से मजार बोल पडं लालाकुत्ती, प्रव डरणं गू के हुसी ? लोग
सो संतानी करना-वे रोक-टोक । ग्राज ग्रारो जमानो है । व्यवस्थाही खराब है,
?"
लालाकुत्ती ।"
"उपाय बता?"
"मय बोल मतना । मजार चुप हुयगी । पपूतरो यौन पड़ यो,
"हालताई रात बाकी है, लालाकुत्ती । सुब री लाली रो रग देख्यो है
१.
"जद अंडो हुसी तद काम बरणसी । चबूतरो कय र चुप हुयग्यो ।
लालाकुत्ती बैठ्यो सुवै री बाट उडीक रयो है पान भी । पर रात भीत
TIO

गुदड़ीरो दरद 'वस अंक हो।" सलमा रै कनै वामेक ही रोटी हो । पर वा रोटी वा हमीद री थाळी मे मेल दीनी। खुदा-ना-खास्ता वो और रोटी कोनी मागी नहीं । हमीद रोटी खायर उठग्यो । सलीमा लामो सास लेयो। वं घर में तीन जणा हा~मिया, बीबी पर मेक टावरियो । टाबरियो हालताई छोटो हो-दुध्यो पोतो । हमीद रा प्रमी-प्रना तो जद वो छोटो सो हो तद ही गुजरग्या हा अंक घर हो वीर अब्बाजान रो बायोडी, बीनं पर रो अवज मे सेठ ले लियो । वो प्रापरी फू फी रं अठ पळयो हो। जद बीरो ब्याव हुयो उरण र योई दो वरसा पर्छ फूफी भी फोत हुयगी । इण २ पर्य हमीद धक्का बस्ती मे मेष छोटे से जमी र टुकडे पर काची ईटा रो अंक ढातियो खडो कर लियो । जिरा नै फाटखडा पर पीपा सू लाद र छाया कर लीनी । मेक छोटी सी सुड्डी खडी कर लीनी पर प्रठ रेवं लागो । कमावण ने तो ब दोनू मिया बीवी हो कमावता पण कमाई रो फगत नाव हो हो । घघो कोई खास नी हो । सलमा ऊन री कोटडया मे कतर करा परती। पण लारला प द्रा बीस दिना सू ऊन कमती प्रावण सू उण ने भो पाम भी नहीं मिल रयो हो। वा घरा वठी मन मसोसबो करती। हमीद रो घधा भी मदो हो घर रीहारत खस्ता ही । रोटी खायर वो ढालिय मे प्रायम्यो । रमीज गळ माय घालतो थको वो क्व हो-वे करा अक कानी तो धयो खुस्क दूजी कानी मगाइ । काळ रो सिर फट तो प्रा मंगाई तो व मती हुवे । स चीजा मैंगी गरीन पादमी कीवर जीवं? सलमा की नो बोली । हमीद कमीज र र बोडो सिलगाई पर माचे माथे बैठ र मोवै नागो। वो कोई पच्चीस-छवीस रं गई इसी । सनमा उरण सू पाच वरस ( १७ ) - छोटी हो । पण उमर मे गरीबी रो दरद हो । सलमा ने रात राइज फगन मक ही रोटी नसीब हुपी ही पण प्राज तो वा भी नही !!! वा टावरियं ने गोदी मे लिया माचं रं कनं पागणं माथे बैठी हो। हमोद माडो हुयग्यो । वो चुप हो पण गम्भीर हुयोडो चरो की बोल हो। माथे पर खडी सळाटा कोई गरी चिन्ता री कहाणी कवै । बीडी बूझायर वो उठ्यो । ऊभा हुवतो वो के हो, "चालू , माट-दाळ रो जुगाड करू .... हमीदवार प्रायम्यो । ढाळिt at भी प्रापरी सुळी नुमा पान्नी री बण्योडी मुवेब न दुकान ने कार्य माथ लोनी। द बो चालमा लाग्यो तो लारं ऊभी सलमा कवे ही-मावती वेळा पाटो पकायत लावज्यो। पार पाया ही वा असे बोलती, हमीद बीच मे ही बोल्यो, प्राज तो पाटी ही के बेगम गोस भी लावूला ! मेळो है, सेठ सूठो कसिर सोदो लेयर निसरूला तो कैवतो केवतो वो बारे मायग्या । सलमा उणन देव ही । हमीद प्रख्या मू प्रोझ हुपग्यो हो । पण सलमा से पापा अब भी रास्ते पर लाए मेनी हो। 10 वा टाबरिय ने मार्च पर सुवाय बरतण माज्या। खुड्डी बंद कर परो वा पाछी ढाळिय माय मायर बैठगी । उपरो ढाळियो बिया तो ढाळिया रा मजाक कर ही पण वो उपरो सारो हो । वा वीर ही तळे सिर हुसती । लारल पाच छ व दिना मू वा प्रा-पेट रेयर भी चुपचाप निस्थी चलावे हो। वा इस बात रो ठाह ताई अपरै खाविन्द नै नी हुवण दियो । रूखी, सूखी पर मुखी रयर भी या दिन कार्ड ही । पण प्रब भूख बीन बस मे कर लागी, पर वा सघरत ही । चारण चूकै टाबरियो रोवै लागो । वा गोदी मे ले लील्यो योन पर वो मुह मे दे दीन्यो । गोडा हिला-हिला वा बीन जसराव हो । पण भूयो टावर फगत हिलाणू सू ही पोकर चुप हुयतो ? धोया मे दूध कोनी। खाया बिना दूध क्यानू प्रावै ? जद सलमा नै खाली बोगा रो ख्याल प्रायो तो वा दरद सू भरोजगी । वा राबरिय नं काय रं लगायर उठी। घई र कन गिल्टी र मुजोहो गिलास ने भर परी टायरिय र पुहर लगायो घर पाणी पाच लागो बीन । टायरियो सन्तोष लेयर चुप हयग्या । 'वडो स्याणो है' क्वती वीर मिर पर हाथ फेरती पनी का पाठो मायर सागो जगा ठगो। थोडी ताळ पाई टावरियो फेरू रो लागो । कोरं पाणी मूभूम कोपर यूझतो ? उपरी खुराक बोरं बोया मे कोनी हो। या पीड मे काठी भरी ( १८ ) ज्योडी बहलाव ही उपनगोर गाई- गोर गाई पीश्या! गोर गाईगोर गाई पोज्या । प्रा चिटली ! मा मिटती मा लग लगावणी ! मागेतो बतावणी भर मो ठोसो।। प्रेक-मेक मागळी रो पिछाण करावती वा पर्व ही-गोर गोई-गोर गाई पोज्या ....। टारियै री मागळया वीरं हाथ में हो । बी रो ध्यान पर हुयग्यो । वो जोरामरदी ही खेल लागो । खेलता-खेलता बीन नीद प्रायगी। पण सलमा बैठी ही।बी रो पाख्या म लबालब दरद भरीजम्यो । वा वीन बार नी निसरवा देणं रा जतन कर ही । ची ने खुद री तो चिन्ता को हो नी पण टाबर ने दिल- पता न देखर वा माय ही माय टूट जावतो, किणी ने ठाह भी नी पडतो। प्रागणं पर माख्या लगाया वा बैठी ही पर वारं पून फर-फर बैव ही । an हमोद सौदा लेयर प्रापरी 'दुकान' माय तरतीब सू जचायो । पाछो सेठ, रं कनै प्रायर वो बोल्यो, 'हा तो सेठा कित्ता रो हुमो सौदो?" सेठ कव हो, "पन्द्रा रूविया रा डम्बू तीस रूपिया रा चस्मा, बीस रूपिया री पोपाडी पर पच्चीम रूपिया रा डमरू इण तरिया कुन पिच ण मे रूपिया रो हुयो । 'प्रापरी वही बद करता का वो बोल्यो "माज तो मेळो है, इत्तो माल तो निसर हो जासी।' 'देखो, प्रल्ला-मिया प्राज तो देखेगा ही।"वतो थका वो ढब्बू फूला-- फूला र टार्ग लागो । दूकान सजगी । रग-बिरगा डब्बू ऊपर उडे हा । उणनं का रे लगाय र वो उठाई पर चाल पड़ यो । पौगाडी रो आवाज प्राव ही- पीsss पीssss प्राकास बादळा मू भरयोडो । ज्यू ही पीपाडी बजावतो वो चोपडिय कुवै वन प्रायो, जोर री प्राधी प्रायगी । पर प्राधी लारै मेह । हमीद भाज र सामने प्रेस रै दरूज माय मायर ऊभा हयग्या । प्रबार ही बीरो माल गळ जावतो कई ढब्यू फूट जावता। बरखा बरसं लागी । प्रेस रो गेट लोगा सू भरोजग्यो । प्रावण माळा पंव-योडी थारी दूकान ने तो मेव कानी कर बीरा ऊभा तो हुवा । हमीद प्रापरी दूवान ने भीत रे मडा लोनी । पर खुद बीर पाई ऊभो हुयग्यो । तर म बीगे अंक भायलो और प्रायगो।बी रं हाय में हैड -पम्प हो पर कार्घ सू हुवतो थयो गळं माय प्रेक थेलो। हाथ मे कई फूट्योडावई फूल्योडा ठल्यू हा । वो हमीद र वन प्रायर सडयो हुपम्यो । पम्प थेलं माय पाल वो गोजिय में सू बीडो-मावीस काढी पर हमीद कानी करतो यको बोल्या, त्यो हमीद भाई ।

हमीद दो बोडी सिलगाई । मेक प्रापरै सायो न दे दीनी अर दूजी प्रापर होगा रै लगा लोनी । दोनुवा रे मुंह में धु वो हो । पण हमीद रै चर पर पड़- योड़ी चिन्ता रो लकोरा मुंहई सूनिरसत धुवै माय धुवै र परवार की मोर भी बतावै हो । बोड़ी रो सुट सार र बीरो साथी उणनं कयो," माज तो हमीद भाई मेळो सूखो जातो लाग्यो ! सुगर हमीद चमक्यो । वी न लाग्यो जाएं कोई वीर देयी हुदै । की समळ परा वो बोल्यो अल्ला-मिया के सिर लाज सबीर ! मेक लामो सास लेयर वो फेरू बोल्यो, 'मेहा तो बरस्यां मला, होगी हो सो होय ! वो फेरू साम लेयो पर बोल्यो 'मटं ता हालतांई हणी ही को करी नी!" ' में काई कर लियो । मुमकिन सूप्रेक रूपिया से रेजगो वो हुमी ?" "प्रवार थम जावं है ! दिया तो प्राज पाठ नौ बज्या ताई पो हुमी।" "तकदीर मे लिख्यो है वो तो कठं जावं कोनी, सबीर भर विना लिख्योड़ो...."वो प्राग नी योल सक्यो । वीर मुहर्ड रो थूक सूखग्यो। उभा लोगा माय मूकोई बोल्यो, "रूकबा रो नाम ही मतना लेय बीरा, प्रास्या फारता-फाडता तो माज निठ पायी है । बरसवा दे। "बाबा, म्हारं रोको घोडी ही स्वं, म्हे तो पाता करी हा ...!" "कोई प्राछी बात करो, बोरा!" हमीद प्रागनी बोल्यो । वो चुप हुयग्यो । गेट मार्थ कमा लोगों को मारुया माम सडक मायं साग मेली हो। संरी निजर्या मार लग-अलग नजरियो हो हमीद सोच मे डूब मेल्यो हो, सबीर साम देने हो सिझ्या प्रायगी। वरमा बोनी थमी। गेट मांय ऊभा लोग भोजता या भी जावं लागा। थोही ताळ पाद्र नो गेट में फगत पादपी यम्या-क प्रमोद पर दूजो सयोर । सवार या हो-"हमीर भाई. पर तो मा दोरोही थमती मागी। माज वो मार्मा गया।" हमोद योन्यो, "तू तो सूवारा होगी घंघो तो कर लिगो हुगी, महंगो मात्र वो भी बोर मानी।" माम पाहो? "रमजान रोहोरो येमार हो । पZ मेयर गो हो।" "तो रमजान र?" 'यार गोरी गोपा-" गई गार पात्र मान कोरपा KR गैर भी गोनी, मी परमी भाभीही गे पाई- - । - "कोई जोर ! किरणने क्य द्या ? सुण भी कुण, हमीद माई ? हमीद पर सबीर सब्बर किया जमा हा। पण बरखा पग नी छोड़या । प्राखिर सबीर धीरज छोड दोन्यो । हमीद भाई अव तो चालण मे ही सार है ! बरखा थमैली नी।" 'तू चाल भई ! मैं तो बता बरसत मे किया चाल सकू समान खराब हयग्यो तो सेठ रा पीसा कोकर चुकला। सवीर चल्यो गयो । प्रेस रे गेट माय भो हमीद बरखा रे थमणं री बाट उदीक हो। पण प्राज तो इन्नर राजा धरती पर बंजा ही राजी हुय मेल्यो ? "पण थोडी ताळ पर्छ चौकीदार मायग्यो । प्रेक सू दोय हुयाया। चौकीदार कवे हो-बरखा माडी ही थी । लाग, प्राथणा रो मायोडा पावणो रातवासो लेयर हो जाती।" ।" हमीद न माग नी चोलोज्यो। चौकीदार के हो, "सामान तो म्हारै कनै मेलज्या, सूवारं ले जाये।" "पण चौकीदार केव हो, "जे बैम हुवे तो बात बाजी है । "नहीं चौकीदार साब ? बम तो की भी कोनी पण........। "काई ?" "प्राज........कमाई कोनी हुयी।" "पीसा पाये?" . पीसा रोकाई करसो ? दूकाना तो वद हुयगी । इया कर, चून लेज्या । पण श्यारे लेजासी ? सोचतो थको वो फेरू बोल्यो, "इया कर, पोपो ही लेज्या | रात रात तो काम चाल जानी। सू वारै री सूवार देखजे । सू थारे री सू बार देखजे कैवतो थको वो मांय सू चून माळो पोपो उठ हमोदर कनं प्रायर बोल्यो, "ल, प्रचे देर मतना कर । बरखा थमली नी। चूर रो पीपो हमीद री प्राख्या समी हो । उपर काना माय सलमा रा सन्द गूजे लागा प्रावता चूर पक यत लेयर प्रावो । मापरं पायो ही । हमीद प्रापरी पाग पोली पर चूर रो पोपो लेयर बोला, "सुवै पालो पर देवू ला। थरो काम काद।" इजरी परवा मतना कर । हमीद चल्यो गयो। OD वरखा सू गेला मे पाणी भरीजम्यो हो । कार्घ माथै चून रो पीसो लिया हमीद जावै हो पर बरम्वा राणी नाच हो-झूम-झूमर । धरती पर सगळ .

-
पाणी ही पाणी हो।
जद यो परो पूग्यो तो सलमा अपरियं छ ती चेप्या डाळियं मे बैठी
हो। टावरियो बिलरा-बिलप रोये हा ! सत्रमा री प्रतिइया माय दरद भर्-
पोहो हो । हमीद द्वाळिय माय यहनो वं हो-पाज तो भल्ला मिया री मरजी
ही मंडी हुपी, बाईपरा । पर भी चूा तो ले प्रायो है ।
सलमा रे मुहं सू जबान नी उपही। पीपो मेलर हमीद मार्च माय
यंठग्या । वो वै हा, सुड्डी माय तो पाणी मरग्यो हुसी । ज्यू ही बीन चुलं
रो ध्यान पायो, यो बाल्यो, "रोटो बगणी तो दोरी है । लाग, पाज तो भूखा
ही सोवरणो पहसी।
सलमा पोती, "नही, मैं राटी पका लेवू ली। विया पकासी ? क्या सू
परासी ? चुल्लो तो भीजम्यो पर नाड या भी। वो सास लेयर बोल्यो,
"वेगम प्राज तो पून ही पाणी म घोळ र पो लवा | पला तू पोले । टावर
भूखो है।
"नहीं, मैं रोटी वरणा लगू । मठ ही ईटा मेन लेसू ।"
"पण बाळसी काई"
मा गुदडी ।
-
।
'गुदडी।
हा, पलता मिया और बणासी ! यर वा टायरिय ने मार्च पर सुवाय र
ईट लावण ने बार चलीगी।
सुवै प्रखबारा मे खबर छपी-बीवीपर में पली बरया। लोम चैन री
सास लेगी।
C13
( २२ )

थारै ब्याव रो बेस घरा जावता अंकल वैश्य-बैठ्यं रो जो प्रमूज लागो । मा तो उठ र चाकी रे कनं बैठगी, और कोई ही कोनी विण सू बात कर तो । बापू खेत गयोहा हा । मुरली भायो तो देवदास ही घरा माता, वे घेत मे ही रेवता, भोजाई भी चार साथ ही रेवती। गाव मे पादमी जावे तो फट जावं? सौ घरां री बस्ती न बजार पर न और की। जी घुटं लाग' तो सोच्यो सेनही हो पावू । बार पायो तो कोई च्यार बज्या हा । भाकास बादळा सू भर- पोडी हो । भादवे रो महीनो मनै मेक दम जवान लाग्यो । गोव-गोवे में चाल हो । सामने खेजडिया ने देख र मने टाबरपर्ण री वाता याद मावै लागी-मैं मर मुरली भायो गाय ढाडा न लेयर अठोकर ही तो ....चदी ताई पठं ही कठे भागती थकी म्हान मिलती । - राधा भुवा खारियो सिर पर लिया पठ ही प्राग चालती दीखती । प्रतीत र यथार्थ माय गुम्योडो जद मैं नरोदडा पाळी जोहडी र नेड पायो तो सामै पसरपोडी जोहडी नै देख र मनै याद पावै लागी 1-मा वा ही तो जोहडी है, जठे म्हे खेत सू पाणी रा घडो ल्यावरण र मिस अ प्राय र उहाया करता । .. प्रेक दिन सिवकोरा पकड र मन डूबोपो चायो हो नी ..मैं प्राज समझू हू के सिव- कोरी मनै क्यू डूबोवरणो चावती ही जोहडी माय गेली-गली में चाल हो। प्रचाणचक मेरी निजरया आगे चालता रिसाल माथु पडी। वा गुलाबी साडी मोढ मेली ही । मै बीन हेलो करपो-प्रो रिसालSSI वा कोनी बोली । वा लारै मुड र पकायत देखी ही । मैं खाहतो-खाहतो पग उठावं लागो । इत्ती ही वेगी मनं जूनी बाता याद आवै ही में अर रिसाल तो टाबर पणं मे प्रोबरा बरपाया करता । बीद-बीदणी रो ख्याल करता... वा प्रापरी मा रोप्रोढणी प्रोढ र बैठया करती छोटी सी बीदरणी । वा किती सोवरणी लागती। प्राज बरसा पर्छ यकायक बॉने देख में हेलो मार लिया हो । पण बा . स्यान इण वास्ते नी मौनी हुनी के प्रब वा जुवान हुयी है, का फेर - । - - में वा मंठागर री बेटी है. का फेर इण वास्त के गांव रो असर हुल मू उत्तरघो कोनी, स्यात चिप मेल्यो है । मै चाल र बोरं कनै मायग्यो । म्हारं दीमाग माय उठती अन्दाजी वाता सूमुगती पातो में बोल्यो, "रिमाल में तनं हेलो करयो हो नी, हूँ बोली क्यू योगी?" वा फेरू' कोनी बोली । मै बीरं साग चालतो थको कयो, “के गूंगी हुयगी ?" , . वा बिना म्हार कानी देख्या, रुखो सी बोली, "वो देख, थारो खेत ! जा मनै डिस्टर्व मनना कर।" "तो तू की सोचती चाल है ?" मै बोल्यो, में बतावू, तू काई सोचे है ?' मै बिना उप रो हूकारो लिया ही बोल लागो, "वा ही नो, पापणं टावर पर्ण री बाता ! भाग प्रोवरा बरपाया करता । मैं वीद वगतो परतू.......। ईडियट ।" चीर मुडे कानी देखतो थको मै बोल्यो, "मैंगरेजी मन भी प्राव है, रिसाल 1 में भी यूनियर सिटी में पढूहूं।" 'तो मैं काई करूं।" "चो ही जो सरीफ मिनख करें।" "तो के तू मन हैवान समझ मेली है ?" "मिनख तो नही । तू मेक ठाकर री बेटी है नी, इणी वास्तै थारै सब्दा माय सामन्तीपणं रीवू आवै, पर "मर थार सब्दा माय मटकां री राख, क्यूके थारो वापू मटका वणा है नी, इण वास्तै ।" "धकवास मतना कर रिसाल ।" "मै तनं बकवास करण सारू 'इनवाइट' (न्यूचो) योनी करी हो । मो पडयो गेलो, घर जा ।' मैं धन्यवाद कह दियो बीन । मै मा निसरग्यो । बा म्हारे लार-लार मावे ही घस्सू पाळी कुई र कने वीरो खेत हो-म्हारे खेत मूळगो । बाता म्हारो बीमाग भर मेल्यो हो। रिसाल बर्ड वाप री बेटी है ।... पढगी के, मपणे माप ने तीस मारवा समझवा नागगी ।...... थोथी पकड दीवावं । .. प्रब कठं है ठकुराई ! बर्ड वाप री बेटी ही तो पाळी क्यू पायी? लेय पावती सात घोडा री बग्गी ! रस्सी बळगी पण बळ कोनी गयो.... 1 ( २४ ) म्हारो खेत प्रायगो ! मै मुडापी । रिसाल भागीन निसरगी। पण उरण री गुलाबी साही री चिमक अब भी म्हारी प्राख्या माय चुभ हो । म्हारे काना माय अचाणचक सुशीज्यो~लालजी, थे कद पाया?" मैं चिमक्यो । चिनेक सभळो थको बोल्यो, "माज सू वारा हो पापो हो भाभा । पण था सिर पर बारियो लिया कठे जावो हो?" "मै पर थारो भाई माज बिडक्सर जास्या ।" १॥ "सावरिया रे छोरो हुया हैं ।" 'सावर जी रे लडको हुयो है | गई साल तो व्याव हो यो हो।" 'तो के | थारो ब्याव हुज्यावतो तो क थारे नी हुज्यावता।" "धारी भाल सू 'थारो भाई तो थारी सगाई रूकमण सू करावण री सोच रंया है ।" मेपल भर माय ही सरेबमोबा असर गबार मेरी बहु बर्णली? मैं पलट र बोल्यो, “करावो तो सरी, झूठी बाता करो।" "थे माज ताई हा ही कद करी ? प्राज वंयी हो तो समझल्यो सगाई पक्की।" "नही भाभी । मन प्रवार व्याव-सगाई सू काई लेवणो । अंक साल भौर पढल्यू , इण र पर्छ कवू ला।" 'मेक स ल हर जासां, सगाई तो कराल्यो।" 'ना भई । मन तो अं झझट माछा को लागनी ।" साम मुरली भाया ने प्रावता देख र मै बोलवालो हुपायो। भाभी भाग निसरगी।" भायो कने प्रायर कयो, 'विजू मै तो प्राज सासर जा रहयो हू, तू या ही गयो तो रान रात सेन मै रह जाजे बापू अंक दसोटण मे जावैला।" मै चिमक कर बैंबू "अठं अंकला ।" "वपू पला कोनी रेवतो" मन याद मावं, हा, पंला तो में में कलो ही सोया करतो अठ । च्यार सूटा गाड र .पास रो माचो बजार। मैं वैदू, "पण प्रब कोही यो जा भाया ।" "अब क्यू कोनी रयो जावं तने तो प्रेकलो रेवणो रो माछो अभ्यास "मैं समायो। कीनी बोल्यो। भायो भने केवता मागे जावं "वादळ- वाई होरी है, माचो मार घाल लीजे । माघ काम: पडी है, प्रोड लोजे । हा, ( २५ ) पार पामो र मामाहार पार पायो । मापस पास माam it जामी रात-रात रह गामे, गारगो पा जाएगा।" महाभी 10 सो पात पररा गरमा गया। गुरमी । सी गाणं लगी पोपोह-मिन रोटीया रे पागर राठी गे पोगी तो पाग गियरणा | Urm In भाजप utी पार I Minागर रोतीताई। णु ही पाणी गीपा मारा तो देखो परती गाणी मामी की। ही। सोहीभर र पाणीपीमा सोमपी माप ताई पायगी ।Murt गाय पागम्यो । गा मा पो futet पानाम हो। गैर रीमाटी-मोटी पा पा रही . स ...! परसी yीमगी। बीती तो पागणी मातगो। हमा गोगट हामी पाभीय गगगी। पारमा पार राम्रपती पणा Her-Hytm गाल गुगी Time मोती गणी, "भाजी | मारमा पागी पाती। भीमगी।" Fean री पानाम ही पा | मा भाग it भागी।। मापवासी मंदगो हो । गा मंगे, "गुरसी भागीली पाटीदमा को ?tify पूर्ण होगी। .... भागी | भाभी को पानी, ती - साराम। मागी गरमागरोगनीनागनालय गी। पारगावी मागी ?" "पागनी।" 'पोरणsut" "लोगी।" , "नी पाहै ?" 'शाही, शाल "हमीचीनma" (२६ ) "ौर की भी है ?" "गुदडो।" "इया कर, कामळ मने दे दे पर गुदडो काढ रतूं मोड ले।" "तू गुदडो प्रोढ ले।" मन दया मायगी । मैं कामळ दे दीनी बीनं । वा प्रोढ र नेक कानी ऊभी हयगी। मैं बीने मार्च माथ बैठण सारू कवून पण वा जबाव देव- 'अचार बरसा घम जावं है, मैं चली जासू।" "मेह तो नसाय है ! किया जासो ? प्राथण रा प्रायोड़ो पावणो जीम- जूठ रही जावे।" जीसा (बापू) टूढसी न, मनै ।" "फेर तू चली जा ।" "विरखावरस है नी!" "वा तो है।" "तू चिनेक बासते बाळ नी, मन सी लाग रयो है।" "दिया सळाई रो ठिकारणो कोनी । के ठाह, व कठे रावं ?" वा मापू पाप मार्च माथे प्रायर बैठगी पर कै लागी, “थारलो गुदडो प्रोढा दे।" "फेर में के प्रोडू ?" "प्राघो तूं मोढ लीजे । देख ! कामळ माळी हुयगी।" "तू सगळा गाभा सीला करसी । इपा कर, तेरी साडी उतार र सूखा दे, नही में रात नै भ ठह मे मर जावू ला।" रिसाल चिमकती थको बोली-"ईडियट ।" "सरदी मे कामळ देयर प्राली करायी, बी रो इनाम ईडिपट ?" या नो बोली। बीजळी रे प्रकास माय उणरं डील री कंपकंपी मन कदे दोष जावै । मैं भी काप हो । या कवं ही मन, "बिजू मने गुदडो दे दे, कामळ तू पोद ले।" "गुदडो गोलो हयग्यो तो ?" "कोनी हुवे।" में कामळ ले लीती । वा गुदझे प्रोट र बैठ जाये। में बवू, "गोली साडी उतार दे।" 20- 1 ( २७ ) "परस्यूवे?" धोजळी चिमणं रं समर्च मेरो ध्यान बापू री पाट्योडी धोती कानी गयो । में उठ र उतारू घर उरण कानी करतो कंजू , 'या बापू री धोती है, इणनं लपेट ले।" वा उठी तो मवीन वामळ दे दीनी। वा प्रापरो पेटीकोट पर साडी उतार र सूखा देव । बापू री फाट्योडो धोती माय भेळी हुय र वा गुदई माय प्राय र ल्हुक जावं ! ज्यू ही पाली कामळ म्हारै लागं, में बवू , ' इणन तो सूखा - या खाट रं पाया मार्थ गेर देव बीन । माधो-माधो गुदडो प्राढ्या म्ह वरखा रे थमण री बाट उडीक रया हा । पर बरसा ? तज हुवतो जाय हो । बार बाजरं रे बू टासू उपडतो तडा-तड रो पावाज और तावळी हुवती जावं जावं हो । ज्यू ही वीरो पालो नाऊज म्हारे डोल अर्ड, मैं बंदू, "मो गोलो कनाऊज भी खोल दें । म्हारा वुसरट परल ।' अधार माय वा म्हार सू बुसरट लेयर बनाऊज खोन देव । बारं वरखा सू साय रंसी है । काफी टम हुयग्यो । बरखा कोनो थमी। रिसाल म्हारं डील र चिपी बैठी है। मनै नीद प्राव लागी। स्यात बीन भी लटका प्रावै हा। अचाणचक वीजळी पडबा री प्रावाज सुणोजी । म्ह चिमक्या । रिसाल मन पकड़ या सुणं ही-प्राकास गूज यो हो । 'चालो बरखा थमगी। वा प्रापरी धोती लपटती थकी क्व हो, जे तू नो हुवतो तो में प्राज मर जावती विजू । तू जोवती तो बचगी।' साडी वाघ परी वा वं, "तू मनै छोड प्राव ।" मैं वीर सार्थ हो ज्वू । वा कामळ पाढया चाल हो पर में बुमरट माय का हा। जद म्हे जोहडी मे पाया तो साम बटरी रो चानणो प्रावतो दीरयो। रिसाल देव ही, स्यात जीसा माय है । मै समग्या । वेटरी निया वो मादमी ने प्रायमो। मैं पिछाण जावू धीन । वो कं, "इणने ल्हुका मेली ही तू ? मै परवा मे ढूढनो-टू ढता प्राखता हुयग्यो। । २८ ) रिसाल बीच मे ही वोलगी । मेरो पिंड छुट्यो । वा पर्व हो, जीसा माज तो बिज्ञ हो बचायो मन, नहीं ठड में मर जावती । संतानसिंघ बेटरी री चानणो मेर-गेर र रिसाल ने सावळ देख रयो हो। मैं सोच रंयो हो, को पोल नी खुल जावै ।" देख दिखाय र प्रापरं घरा घल्या गया। मै म्हारं घरा पायग्यो । किवाड खडखडाया तो बापू वारं ग्राम। किवाड खोना थका वै बूझो, 'भायायो विया ?" "बरखा में काई करतो, बापू "गाय ठाडाबडग्या तो?" "कोनी बड़।" मैं कापतो थको माय प्रायम्यो । बापू विचाड पाला जड लोया। माखो गाव सणक-पणा सो हो पण म्हारी प्रामा खुनी हो । 30 की दिन गाव रेयर में पाछो जेपुर प्रायो। कति मा माफि द माय रिसाल रो कागद मिल्यो । में उत्सुकतावश उस खोतर पई लागो । वा कै हो~-प्रिय बिजू. म्हारी कानी सू स्नेहालिंगन स्त्रीवारजे । बी दिन खेत माळी बात रे पर्छ नी जाणं क्यू वेचनी सो रखें ? की ठाह नी । पढाई में भी मन कोनी - लाग ...... तनै ठाह है राजपूणी हमेस प्रेक वर करें रिसाल भव दूनी काया रो सुख नहीं लेवेली । मैं जाणो कठण काम है। क्यू के जातिया री भीतो कभी है विचं । तू हिंग मतना जाये, नही में ......! मारा पारी ही रिसाल म्हारी माख्यो र साम गांव घूपो निज पायो । झझा लिया मैं चाल हो। होस्टल में भायर कुरमी माय बैठग्यो। सामने टेवा पडी है उगा सर- काय र लिखवा लागग्यो- प्रिय रिसाल, पारो कागद मिल्यो। तू जिसी बात लिखी वों पर विचार का तो ( २६ ) लाग, थारो बापू योनी मानला । राजपूत मापरी बेटी कुम्हार ने नही देवला । तू थारो विचार ही बदल लोजे । इण विषय पर बाकी बात तो मिल्या हो संभव हुय सके। म्हारो कागद पूग्यो वोरै दूमर ही दिन रिसाल जंपुर प्रायगी । वा मनै क्लास सू बार निसरत ने गेट माथै मिली ही । म्हे उसू एन. पार. एस. सी. प्रायम्या। बर ने कॉपी सरू कय र म्हे वाता मे लागग्या । रिसाल प्रापरी बात मार्थ अडिग हो । वा साफ कह दियो हो-जद राजपूत भापरी बेटी मुसळमान नै देय सर तो कुम्हार ने देवरण में वाई अडचण है ? बात इनी सी है विघु के व्याव गांव मे कोनी हुवे। मतना होवा यो। पण पढाई पूरी हुया पछ इरान कोई नी रोक सके । सविस कराला तो वारं ही रेवणो पडला! उही कई पर बसा लेवाला।" में कयो, "म्हार परवार कानी तो रिणी तर री बाधा नी है, रिसाल, थारा जीसा नी मनला।' "तो के व्याव नहीं हुय मकं ?" मान्याप रो मामिरवाद तो लेवणो ही चाहिजे।" "विजू. जनासमझी हद पार कर जावं, पर लक्ष्य टूटतो निजया पद, उठ ई ग्रामिरवाद से बात करणो पर कहणो समझ मू परं री बात है !" "तनं ही सोचती है वासा !" "मैं मोच नोनी है।" "तो ठीक है।" रिसाल प्राथणा री बस मू पाछी जोधपुर चलोगी । मैं बस पर छोडर माया हो वीना दीवाळी पर हे दोनू गाव प्राया। बात फूटी तो गाव में हाहो फूटायो। रिसाल पापर मापून वात रहदी हो । म्हारं बापू से जोगी दौरों हुयग्यो । राजपूत म्हानं डरा-धमका रंया हा रिसाल ने समझा पाहा। मैतानसिंघ मनं गेले में टकरग्या । वं मन बमो-क्यू राजपुरा रो जयाई पालो पार्य "यारी प्रान्या माय विरोध हो। "पाप गटन मोनो हो, ढावर गाय !" 'बातां वरणाय ? वो रो मायाज मे प्रण ती माड हो । में बोलनो हार में पीपा प्रापापा । चं बोन में पहना था, "कोई यान है, सर . सार?" "बात का है ! यो राजपूत राजयोई गरारी मोम रयो है। वारं में समभा दोशे, नहीं .......!

"नहीं काई" " "प्रास्ता काट लेवू ला ।" रूधो काको कोनी बोल्या । संतानषिध म्हारै कानी देखता यका चल्या गया । वारं गया पर्छ रुधो कोको मनै कयो, "विजू भो काम तो पटाव जगा ही मजो भावे ।" कियां काका 'मं राजपूत दूसरा री भाण-बेटिया ने भोत खराब करी है, बिजू ।" "पण मैं वाने खराब नही करू ला, काका।" "की भी हुयो, तू ब्याव कर ।" गाव नै सबळनो छोड र म्ह पायग्या । रिसाल जोधपुर चलीगी पर जैपुर पायग्यो। EIC - एम ॥ पर्यो पर्छ रिसालरी नौकरी जोधपुर विस्व विद्यालम ही लागगी। मैं भी अठ ही लाग्यो । जद म्हे 'कोर्ट मैरीज' करो तो गाव वाता सू भररयो । म्हारै कनं तर तरै रा समाचार पूर्ग लागा । जद म्हारै बापू री मौत रो समाचार पायो तो मैं रिसाल नै लेयर गाव मायग्यो । बस सू उतर र जद म्हे परा कानी जावे हा तो लुगाया म्हान बाडा चढो देखें हो, पर गाव माय अजोब सोक चुप्पी छाय मेली ही। प्रादमी प्रापर वारणा माय खडया म्हान देसं हा पर कोई को नी कै हो । म्है चाल र घरा मायग्ग्रा । घरान भाभी मिली न भाई । मैं ग्रठी-उठीन देख्या-कोई घरा कोनी । ज्यू ही मैं मोडमाळे ढालिय कोनी गयो तो किंवाड खुला हा । माय झांक्यो तो कोई पीनी दीम्यो । मैं माय मायग्यो । रिसाल भी प्रायगी। ज्यू ही कुणं मे मार्च मार्थ सूती मा पर मेरो निजर पड़ी तो मैं देखतो देखतो रेयग्या । मा रे पाखं डील माय पलास्टर बघ मेल्यो हो । म्हार मूड सू निमणे ~मा, मो के ? मा रा होठ खुल्या । वा बोली “यार व्याव रो बेस है बेटा। मा " बोलो रे साथ दरद निसर्यो । वा हो, थार बापू ने ..रिसाल रा जीसा मार दोन्गो ...विजू । . जान सू मार दीन्या ।" वा मुह फोर र रोवता थका कैयो, "मुरली पर वीरी बहू असात के में है ......रिसाल ₹ जीसा ने पुलीस पाळा लेयगया।" मा री पारयां सू दगदग पारगो वैव हो । मैं मर रिसाल देख रया हो- अब दूज ने। an .. - उणियारो तावडं मे ठड हो । घडी कानी निजर गई-जी यजण माळी हो । मचाण- घक ध्यान भायो, माज तो यूनियन री मीटिंग है । वेगो जावरण री सोचतो थको मैं हेलो करचो-पाणी तातो हुयग्यो के ? स्टोव र सू साटे में म्हारो हेलो स्यात पिल्ली रो मा नै सुखोज्यो कोनी । मैं उथले नै उडीकत्तो यो पण जवाव कोनी मिल्यो । कुडतो उतार र मैं तोळियो लपेट्यो पर बार प्रावण लाग्यो तो सुणीज्यो-हाल्यो ! सदगाणी "गरम कोनी करयो ?" मैं कने प्राय बूझ्यो । जबाव मिल्यो, “स्टोव मे रोटी बणावण जोगो हो तेल है।" "थोडी निवायो ही कर देता ।" "भाज-प्राज तो न्हाल्यो । के है प्रेग र मी लागसी फेर पाखं दिन डील सोरो रेसी। पिल्ली री मा री बोली म घर री मजबूरी बोली। मैं बोलबालो बाल्टी उठा लीनी । ज्यू ही चौक मे पायो बारं सू मावाज भाई -रोटी-पीसा देवो जीsss! सिणगारी मैतराणी री मावाज ही प्रा । पिल्ली री मा नै ठड में लिप- टयोडी मा योनी स्यात सुगीजी कोनी । जद दरूज माथ कोई भी प्रायो तो वा मोजू बोनी-थोड़ी तो म्हारो भी सुनोsss | पीसा-रोटी देवी मैं सिर पर पाणी रोलोरो गेरथो तो डील मे अंक दम घडपड़ी उठी। को तो पाणी ठडो हो प्रर को हवा हो । ज्बू ही दूसरो लोटो ऊघायण लाग्यो तो कोजी सो पावाज सुरगीजण लागी--पाई है राड रोटी-पीसा मामण नै । घर र साम तो माख दिन कूटळा पडयो रे । क्वा रा पीसा ? पिल्ली री मा इण ने की मतना दीज्यो। मन लिल्ली री मारी प्रावाज मुरगी नो-पाई बात है ? वयू सू वार- गू वारे रोळा रा हो ?' . ~ वयारारोळ बरू हूँ, वो नरम पडतो या बोली, "पा राह रोजीना रोटी तो लेज्या मर वाम कोनी करं घेल रो। "तो कुण परे ? मापा तो बरा कोनी। विधारी मैलो उठाय रोटी- पीसा तो माग हो। "इण ने कोई रोटी-पीसा नी देवणा है, हो । जे देया तो ठीक नी है,हा!" या गूजी। मैं तोळियो लपेटया ही बार प्रायम्यो । मनं देख र महान मालपण थोडी भेळी हुयी। मैं देयो, उस रा विधावापणं रा गामा सोर-लोर हुयोहा वीरें डोल र चियोडाहा। गरीवी री धूळ बीर गाभा माय रम्पोटी हो । वा मन केवण लागी-देखो नी पिल्ली रा पापा, जे पां, इण ने पीसा देया ता भाछी बात नी हुवेलो ! मैं इण ने कोई भाव ही घर में नी बहरण देवू ली। .. "ता किण में बडया देस्यो' में बीच मही बोल्यो, "भग्या में बडो मेको है । ये प्रापा ने अधाम सेवेला । पाखानाममा है, पर सिहया लाग जावलो।" "मिडो भलो हो । परा मैं इण न तो कोनी घडया द" "पण वयू . "पा राड नी तो पायी तरिया पाखा साफ परं पर भी हो झाड, का।' मैं बोलतो जि सूपला ही मकान-मालकरण रो छोरो मृळियो भायम्यो पर दूक लागो-- मास्टर जी । जे माप इण री लड सारो तो पटं मोर जगा जाप र दो । इए घर मे तो मेरी मामी उभो तरिया हुसी। मुळियं री बात म्हाने प्रखरी ! पण में ची टिंगर रे बरोबर नी हुपरणो चायो । मैं बीनं समझ तो थको बोल्यो, 'या कोई लड सारण पाळी बात कोनी मूळा । मै तो कैबू रे जे दूजी मैरागी नी पाई तो काई हाल हुवैला? यो बोनी बोल्यो। मूलियो मा मास्टरजी क्वनो जद कि में मास्टर है कोनी। सिणगारी चुपचाप प्रा री बात मुरणयो करो। अब उण सू रयो नी गयो घा रीसा बळनी वाली, "दूसरी मंतरागी लगा र ता वेरो पाडो । देखत्यू दिखा म्हार रंता कुण प्राय ? पी। देवण! पडभी । मैलो उठायो है महीने मेक ताई हम रा कोनी मागू !' थारो फार है !" मूळिप रो मा री बोली म तागो हो । सा पीसा दे | धार महीना रा तो तेरे हक रा प्राज ताई कोनी दिया पद या स्यारो बाल है । मंतरा रा पोसा खाया तो कीड़ा पहला-कोडा ! मूळिय री म सुणता हो उछली । जमी सूदगड उठा र बगावती बोली - माय माजी "सं रोट, तन सो में बतायू !" सिणगारी भाडू भूधारयो । पा पचगो । मूढिय री मा पर रारा री बाल्टी लाय र सिणगारी पर मंधा दीनी । राप सू भरिज्योडी मिणगारी छटपं मुहँ गाठ बाई । मूढ़ियो लाठी रा पूतां मू उप ने वारं वाई । मैं मान र लाठी पकड़ो पर कंयो. "इया का मोया पणो कर ! बापडी र लाग जामी!"फर भी बोनी मान्यो तो मैं लाठी सोस पर वगा दीनी। मिणगारो पर्व ही-देखल्यो, यावू मा गया-गुजरघा का करतय ! ये गत विगाडी है मेरी । वा सडी गाभा भाई ही। माय ऊभी मूळिमें रीमा चिर- ळावं ही, “गत तो रड विगाडी वे है, प्रोविगड सी । तनं भोत दिन हुग्या सिर मे राप-राबडी राधतीने?" वारं मंतराण्यां भेळी हुयगी। प्रब तेरा के मेरा ! दोनू पानी मू कोजी. मोजी गाळया बरसै लागी। माय ऊभा किरायेदार तमासो देख हा । मैं माय धायग्यो । कमरे में माय र गाभा 'र लागो । म्हारो रुग-रू ग खडयो हुयग्यो हो-सी मू। जद मैं प्रोफिस जावरा लाग्यो तो मैंतराण्या भेळी कभी सिणगारी बड- बडाटा करै हो--ई राह री तो दुरगती करणी ही है !" मैं गोजिय मे सू हाथ काढतो वीरं कनै माय र बोल्यो, "में ले थारा पीसा ! प्रबार गरमा-गरमी हुयोडी है, सिझ्या बात करूं ला। अब तू जा !" उग रो अपमान उण रं चरं पर भारतो हो। मैं प्राग निसरग्यो । परण उण री बात म्हारं दीमाग सू गयो कोनी। वर-वर उप रो चरो म्हारी ग्रास्यां साम आवै हो ।... मूख्यि री म लडोक्डी है। माये दिन वापड़ी मू लडे । ...पोसा मागे तो, नी तो खुद देव अर नी किरायेदारो ने देवण दे। छेकड तो सिणगारी रै भी पेट है। वा भी मिनख है। .. उण ₹ भी टाबर है मूळिय री मा भी गरीब है ।.. दोनू गरीब ।।! मूळिये री मा किराये सू पेट भरै । मूळियो तो काम करै न काज, पात्र साह रो ज्यू दिन भर अठी उठो नै फिरतो फिरें। सिणगारी मू भी माडी हालत है भूळिय से मारी! पण या बडो जात री है पर सिणगारी-मागा। पूरे महीने भलो उठा जद पर हाथ माडे, तो मिलं काई ? दो रूपिया । पर वे भी नहीं !।। मूछिय रीमा रो बुझ्योडी चरो म्हारो पारया सामं मायो ।....लळ लळ लुळनी चामडी। म्हारं काना मे बोरी जसो प्रावाज सुणीजण लागगो-राड गत तो विगाडी के है प्रोविगाडसू।... श्रो काई तमासो है ? गरीब-गरीब ने क्यू सावं ? क्यू सताये वो भापो मापन ? चाण चूक मनं ध्यान प्राव-मासं गरीब-गरीब री राड कोनी देखी रयात बात जरगा ही उण र ध्यान में कोनी पाई ? गरीब री फगत अंक जात है .. गरीव ! इस री जात क्यू ? माक्र्स . गरीव ! गरीब मार्स ! प्राग मोड माथं साईकिल लिया मने प्रस्थानी मिलम्पो । वो कयो-पाव कामरेड, लार बैठ! मैं भाज र साईकल र लार बैठग्यो । पण करडी सोट रो दरद हुवे हा महारं । प्रस्थानो के हो -प्राज प्रतिक्रियावादिया सू सोधो मुसाबलो है । 4 लोग प्रापा री बात रो विरोध करेला । स्साळा सरकारी टुकडा माथे पळ । .. मैं सुणतो रयो । जद मोफिस प्रायगी तो मैं उनरम्पो पर प्रस्थानो भी। वो साईरल नडी कर र म्हारे साथ हुयग्यो । प्रोफ्सि मे पाय र म्हे बासी रजि- स्टर मे दसखत करया पर भाग निसरमा । म्हारा ही साथी लोग बैठचा हा पाग । साम गरमली पुराणी फाईला पडी हो गरद चढयोटी ही पाना मार्थ । लाग ही जाए कदे पाने कोई छेडी ही कोनी । म्हारे दीमाग में प्रवे भी सिणगारी घूम हो -रास सू भरी। दिमाग में दरद सो हुवण लागग्यो। अस्थानो ये हो-प्रावो कामरेड, यूनियन कोफिस चाला।" मैं साग हुपग्यो। ज्यूही म्हे मोफिस सूचारै माया तो विरोधी यूनियन रा दो-च्यार जणा ऊभा मिल्या प्रस्थानो वान देखर मुह फुलायो तो, वा मे सूअक जपो योल्यो, "क्यू सुगन्ध भली कोनी गई दीखे !" "सुगन्ध नहीं बदबोय कयो। "अस्थानो बोल्यो । यदबोय रो नाव सुणता हो वो मे सू में क जो बोल्यो-तेरो गेलो नाप, नही बदयोय प्रबार भेळी ज्याला "पायत भेळी हुमी । घबरानो मतना, टेम प्राव है।" "टेम तो प्रायोडी है पण म्हे भेक र वस्स रंया हा।" "जादा दादागीरी में सार कोनी । प्रशर लडता युरा लागालो । थे जायो !" "जावा, ये तेर यापरी जमी है। प्रेक गलियो सो आदमी वोल्यो।" प्रस्थानो हाथ फटकारपो तो वीरें पनपटी मार्थ लागी। इतरे में तो यस्यान पर तीन-च्चार जपा में सार्थ झपटया पण कई पोर लोग बीच मे पाए । विगहती यात पपगी। -- प्रस्थानो केवं हो--सरवारी टुकड़ा पावणा पाळा भी साढ ! प्रां रो इलाज है-सोट ! स्साळा प्रतिक्रियावादी । गद्वार !! मजदूर रा दुस्- मण !!!.... म्हारे दिमाग रो दरद अब दूणो हयग्यो। वो चटका मंवतो कंचं हो- मजदूर मजदर सू लड रयो है .....गरीब सू गरीब लड रयो है ! माक्र्म कळं ऊभी है ? प्रादमी कठं ऊभो है ? माक्र्म पर मजदूर ! माक्र्म पर गरीब !! राड-पास रो राड ! चिन्तन । प्रधूरो है पो चिन्तन ! यूनियन प्रोफिम ! सामं कालं मार्म री फोटू । काली दाढो मूढी ज्योड़े चर पर चमकती क्रान्तिकारी प्रास्या । मैं प्राख्या झूका लोनी। सामै वेरी साब कुरसी माथ बैठचा हा । वा री प्राख्या में प्रनुभव रो तिरती चिन्ता मन साव लखाव हो । चरो झरिया मू लुळं हो। लिलाड पर मोकळी सळ । प्रस्थानो व्यो- 'काई मोचो हो, कामरेड ?" चिन्ता उतारण रा जतन करता वे बोल्या, सोचू हूं, मजदूर न पली मजदूर सू, कर्मचारी ने पेली कर्मचारी मू पर गरीब न पैलो गरीब मूसलटगो पडमी लामी सास लेय र वे चुप हुयग्या । मने लाग्यो, स्यात वै राख मूभरीज्योड़ी सिणगारी नै देख लोनी है प्रस्थान पर गैळिय री वात स्थान सुण लीनी है प्रस्थानो की कोती बोल्यो । सुण र चुप हुयग्यो । धेरै पर सोपण रा भाव तिरै लागा। यूनियन प्रोफिस कार्यकर्तावा सू भरोज हो । लोग मा-माय र बंटता जावं हा । मैं मेक कानी वंठयो सगळा रंगना रा भाव पढण री कुचेष्टा कर हो। वेरी साव रो प्रावाज गूप्रचाणवक म्हारो भान टूटचो। वे बोल हा- वियर कामरेडस् ! आज ग्रापा वमजोर हा, क्यू के पापा मे प्रापमरी में राड है । प्राज कर्मचारी कर्मचारी र मात खावे, मजदूर मजदूर मू मात खावं पर गरीब गरीव सू मात खावं । सरकारी दमन री बात तो अळगो है, माज प्रापा रे सामने इण योफिस मे दो यूनियन है । फररी फगत विचारधारा रा है । काम अंक है पण लई । देखल्यो, कर्मचारी कर्मचारी मू परतम्ब लड !....... गरकार नी चावै प्रागा मेक हुवा ! ग्राम कीकर के हुवा ? मैं मागं न बूझू जान बूझू ! बतायो ? के री झूठी अपवा में की नी राख्यो है । खाली नार बाजी गू मजदूर भेळा हुया हुवे, मंडी वात नी तो कदे देवी पर नी ही कदे । मुणमा में पाई । हा ला जर है। मां नाग, दुनिया रो गिाव पादमी रो ..... - सुभायव दळण में सक्षय फोनी Imm....फर्मचारी सरकार र काम मे लेवी कर भर सरकार । 'बांटो पर राज करो' रो नीति र तीखे हथियार सू पापाने लड़ाया राख । पण मापा समझो कठ? मा समझ कद मासो, किया, मासी, इसरो पडूतर ढूंढो तो ग्रनियां मागं साव मधारो प्राज्यावं ! हॉल मे बैठ्या सगळा कार्यकर्ता गुण हा-पैरो साब रो खारो अनुभव । वेरी साब बोल्या-पण व समझे कोनी ! मेक भगो योल्यो, 'तो कामरेड प्रापा ने समझ लेगो चाहिणं के........." कामरेड वेरी रा मवारा तगाया। वे बीच में ही जोर सू बोनण लाग्या- तो कर्मचारिया नै प्रतिक्रियावादिया रे हाया में सूप र मेक पार्म खडया तमामो देखा ? व्यंग्य भर यो डाग वर रो सवाल यूनियन प्रोफिप मे पडूत्तर सातर पसरग्यो । कामरेड अस्यानो बोले हा-कामरेड संघर्ष करो । गोड़ा नहीं टेकाला ॥ "सघर्ष पला सुद सू करो नही नौकरशाही गाह देवली पापा नै ।" फेलं वा हो मसाण जिसी सोती। बिडम्बना सगळा रे चैरा पर पसरगी। येसो पाख्या माय सूझाक ही। कामरेड वेरी भळे बोल्या-मेक रास्तो . "वो काई ?" कई मूडो साथ ही खुल्या । "सुणो!" फेर चुप्पी । कामरेड वेरी बोल्या, "कर्मचारिया ने प्रतिक्रिया धादिया रे खिलाफ जिहाद करणो सिखावणो पडं ला पिलो आन प्राडा नाखो। फर संघर्ष करो। मेक-ग्रेक कर्मचारी सू जोड़ो। कर्मचारी री बात वार हिरदै ताई पूगावो। कामरेड लिखमी बोल्यो, "पण यारा सगा सबधी भाई-मायला तो साग वनाही, कामरेड ।" "वाने सवधा रो साची प्ररथ बतावो। वे पाकिम मे पैला कर्मचारी है पर पछै घोर कीं।" लिखमी घुप हुयग्यो। मनै दीख 'बेरी साव रे प्रस्ताव मे भर्योडो ताव पर वमजोरी री निसाणी ! मैं सोचूं के प्रादमी लोभ न कदे छोड देसी ! मैं बोल्यो, "कामरेड पादमी लालच सूघिर मेल्यो है । प्रो लालच पीसा रो हो नी प्रपणायत रो भी है ! भादमी र माय लरडियो ल्हुक्यो वैठ्यो है कामरेड ! वो हालताई जगा फठं छोडी ? साथ ही लरडिया जलमैं भी है कामरेड वानं, इन्सानियत रो पाठ पढावरको प्रोखो है।'

"प्रपा री बात छोटो कामरेह चौहाण ! अल्पमत ने इतरो कम. जोर पर दयो के मोबो पह या मापा उणनं नागा पर सका। फेरू लडाई सह करी जावे।" यूनियन प्रोफिस में बैट्यं सगळा कार्यकर्तावों रे या बात जचगी। चिन्तनशील पेरा चमकरण लागग्या । सं उठग्या पर मैं भी। लडाई प्राज भी है। प्राज भो सिणगारी मूळिय रीमा रे हायो राख मे मरीज्योड़ी ऊभी है । पादमी र डील पर घास उग्याई है। परां मे वंठ्या लोग परेसान है पण योल होनी । मन मिनख रो उणियारो मैलो दोखे । में घर बदल लोन्यो-सा'रै हो । के करतो ! गदगो सू' जिन्दगाणी में सडाँध भरण लागगी ही ।

ब्याज अर बट्टो भार-पार होटल रे साम पड य बच माथ बैठ्यो मैं चाय रे कोप ने उडीवू । स्टोव री कोजी आवाज सूसिर दूवै लागो म्हारा । म्हारै मुहडे सू निसर्यो-जल्दी कर भई ! चीड रे फाटकडा मार्थ मूदा मार्योडा गदमैला गिलास । काठ री पेटी रे साम ऊभो होटल माळो । बीर पार बार ऊभा च्यार-पाच जणा। स्यात वै भा चाय री बाट उडीकता हुसी । स्टोव री आवाज धीमी पड़ी। होटल प्राळो चाय छाण लागो । सडक माथं प्रागै जुलस । अावाज सुणोज । जीत गया भई जोत गया-राम- चन्दर जीत गया ! रोळो ! म्हार काना मे दरद हुवे लागा । इतरे में होटल माळो मायर बोल्या-त्यो साब ! माफी चावू थोडी ताळ लगगी। में कप झाल लीन्यो । वो चल्यो गयो । प्रेक घूट लेयी, फेर ध्यान जुलस कानी चल्यो गयो । जुलस मब ने पायग्यो हो । ठाडी भीड हा । हाथा मे बासरी तिसळणी लाढ्या ! मैं सोच्यो, जीत मे लाठ्या कीकर ? स्यात लडाई रा मासार दीखता हुसी ........म्हारा विचार बांसा सूटकराय र टूटग्या । इतरं मे जीप मे ऊभो रामचन्दर मायो । फूल माळावा सू सद्योटो रामचन्दर' ! मन लाग्यो, जाण व्यवस्था मार्य विज हासल कर परा पायो है...। इणी वास्ते वीरा भायला खुसी मनाता हुसी ।... जुलस मेरो प्रारूपों पागोकर भाग निसरग्यो । चाण चूर्फ मेरो ध्यान टूटू यो । होटल माळं रो नौकर राधियो टूट्योडा कोप हाथा में लिया क्व सेठजी, "जूलस मे कोई धक्को दे दीन्यो" यो गोडा प्रागोन करतो वोल्यो, "देखो, गोडा फूटग्या ...गिलास भी फूटग्या....सेठजी। मैं देख्यो, वीरें टकणा पर लागी हो । लोही चिलवयाया हा । रापियो पग ने पप्पर फरयां खडयो हो । हाटल प्राळो स्टोर छोट र वीर फनं प्रायो पर म्हार देखना-देवता ही ( ३६ ) राषियं रा याळ पकड लीन्या पर झापट जडतो वोल्यो, "तने दीसं कोनी हो ? मात्या फूट्योडी ही? ?........ राधियो कनपटी हाथा सूढक्या ऊभो हो । बीनै डर लागै हो, कठे दूसरी चनपटनी पड जायं । राधिय री चनपट रो म्हारं दरद हुयो । होटळपाळो राषिर्य र देयी किया ? मारणं रो बीन काई अधिकार है ?"नौकरी करणं रो मत. सव मो तो कोनी हुवै के मालिक मार, खाल मरोई ।....मेरी प्राख्या साम दसेक साल रो राधियो रोवै हो । मैं उठ्यो । होटल माळं रै रुने प्रायो। भर घोल्यो, "सेठ,ई छोरै नै फ्यू मारो भई ? "बाबू प्रापन ठाह कोनी, वो चाय री भगोनो उठाय उफाण दावतो घाल्यो, भो....दो रूपिया रा कोष फोह लायो।" "तो के मारणं मू पोप पाछा मायग्या ?" "पाछा तो बाबू फूटतापाण ही यायरपा हा, झापट तो दूकान सूअट ताई लावण रो ब्याज है !" "काई मतलब ?" "रोजीना इया कोप फूटता रैया तो म्हे होटल माळा तो खा लिया कमाय र ! बजार मे प्रो रूल है, जे नौकर छोरो कोई कोप फोड लाय तो फूट्यो. कोपरी कीमत उगरी तनखा मे सू काटो।" म्हारे विचार प्रायो रोधियो प्राज वेगार काढसी । चोर पग रे लाग मेली है, जे फेरू पहग्यो तो विचार री काल री मजूरी और चली जावली ।. होटल ग्राळो प्रापर वाम मे लागग्यो । बात बोरी मखडता सूटक. रायोज र टूटगी । राधिय रे भाव तो बात प्राई-गई हुयगी ही । मैं कयो- "मेक चाय और दे।" होटल माळो केतली मे सू चाय रो कोप भर परो देय दीन्यो मन । मैं पीवै लागो-गम । भार-पार ने लारै छोड र मैं सडक-सडक चालू राधिय रो फाट्वोडो हाफ पैट म्हारी भारुया माय तिरै । फाटयोडो कमीज प्राख्यां चिप । मैं उतारू । होटल ग्राळो म्हारै काना मे गूज लामो-बाबू मो तो दूवान मू मट ताई लावणे रो व्याज है कोप तो टूटवा ही नुवा मायग्या... पो रूल है।"... मैं माग भिडतो-भिडतो बच्चो। मेरी प्रास्या साम राघिय री मा प्रेक मानी लभी कवं ही-"श्याम वायू, इगो किया चालो हो कोनी? मैं छुटतो ही वोल्यो-'" ... । सरधा (४०) "तो काई सोध रंपा ?" "पार रापिय री यात।" "काई यात हुयगी, वायू !" उतावळी पण बोर घेरं पर मायौं । मा ही के चेतो पारो माज सिर पर होनी चणा माज छोरं री पस सराप हुवे ।... छोरो होटल पर दुस पार्य। या सांस लेयर बोली, "स्पाम पायू. मैं लुगाई रो जात काई वह ! ऊन रा काटा कार जिन्दगानी रं चुभोदू -म्हारी जिन्दगानी । पांटा हो बाटो विसर मेल्या है भसवाई पसवा ! दरद गूसरीर रच्यो जावे, प्रा. ही बतायो मजबूरी म छोर ने भेजो पडं।" या साम लिये पर फेर योगी, "होटल- पाळो जुनमी है, बाबू। 'योकर ?" म्हारं मूड मू निसर्यो। "महीने में प्राधी सनसा देवं । पर माधी साह कह देव-कोप फोड दो-या होटल माळ रो व्याज म्हारी प्रोग्या सामी नाच लागो । राधियो पनपटी पर हाय दिया म्हारी प्राख्या पाय भो हो । राधियं री मा यै ही "कार सू छोरे ने मार पौर रामो । कार ही गाल लाल कर दीन्या ! मायण रा प्रायो तो रोवे लागो मा फ ल सू मैं होटर पर नही जावू ला ...पण में जी मोस र वोन भेज्या । काई बरू ? पर रो प्रागो योनी पाल । चार राबर, पर में प्रेपली । वाफेक साप लियो पर बोली," 'यानू प्राज महीगो हुप पाठ दिन दिग हुयम्पा पण पीमा कोनी दिया, लावण ने मजबूरी तळं राधिय रो म र ने दाव परी वा पागं निसरगी। मजबूर राधिय री मा में प्रारुपा म लिया मै च । चाण चूर्व प्राग सू लाल्या रो मावाज सुगीज । मैं दे, पुलीस प्राळा बीच बचाव कर । रामचन्दर मेरी प्रारया सामं पोटीन रेपो है। होरसिंह री ती मुगीज हार रो ब्याज समेत बदलो लेवू ना। रामचन्दर ने पुलोस प्राळा पड र लेयग्या । भीड पीडगो । मैं सडक परा कर मामने खड्य नदू कनै पायो पर पूछ यो -नदू काई व त हुयगी ?" "ठाडे रा डोस डाग फाउं', श्यामगी । हीरसिंह चुनाव में येलर पेपर फहवा दोन्या पर भी रामचन्दर जीतगी। पण वी प्रापरी हार वरदास्त कोनी हुयी। भागलो पप आळो है, साम लेपर नदू वोल्यो, 'सरव ई बल प्रॉफ दी फिरेस्ट' नाच रयो है । छोटो बद। प्रारुपा पाल्पो को मुहान नी । प्रादरो प्रादिम सम्प मेरी प्राख्यां मे प्रायम्यो । नदू क्य हो-श्यामजी जाए।

M . पादमी रो जोवरणो प्रोसो है । सरीफ लोग वदमासा सू पाखता हुयोडा जीव । लाग, धरती पर कदे सून-सच्यर हुसी। "पण हुसी कद, नदू की सोचतो वो बोल्यो-"पावस राखो।" सबर री भी सीव हुवै, नदू ! "परण पादमी ने मा लागे जद नी। संपादमी इण बात न समझ जद पार पडं । पापा रै अंकला रो काई उठ |" नद्री बोली मे भी राधियं री मा रा होश सुर सुण र मैं बोल्यो, “नदू सगळा मिनख मजबूर है, वे मजबूरी लिया ही जीवता रवला? मन लाग, मजबूरी उतारणं री कठं भी कोसीस कोनी पा कोसीस हुवणी चाये । प्राप ठीक वो, श्याम बाबू ! पण थावस राखो, पकायत हुवली!.. नदू चल्यो गयो। म्हारी प्राध्या मे राधिय रे हाथ में फूटयोहा कोप । वो रोप रयो है । होटळ माळो जाणं मार रयो है बीन - राधिय री मा मजबूर । रामचन्दर हीरसिंह ..अर नदू मैं पैटरी जेब सू बीडी काढ र सिलगा लेवू भर जवाडा भू सूट सार- सार पीवण लाग जावू-धू वो, अर घु वो ! OD मजबूरी !! ( ४२ ) छगजी रो बेटो -"बावा-बाबा, परमा भाई जी ने इनाम मिल्यो है । प्रो देखो छापो । वारी फोटू । पूरा मेंक लाख रो इनाम मिरयो है । मुह मीठो परावोला नी ।" -"जरूर करावू ला पण मनै प्रा तो सुरणा के प्रो किरण वावत मिल्यो - --"भाई जी वैज्ञानिक है नी, विज्ञान पर ई मिल्यो है ।" ---"आछया । काई खोज करी है रे !" --"परम विनासकारी परमाणु सगती र नुवै विध्वसात्मक प्रयोग साह मिल्यो है, वो छगजी र चेरंकानी देरयो पर बोल्यो-पण थे उदास कीवर हुयग्या, बाबा . -मिठाई नी देवोला बाबा । -नहीं दिवाळी प्रावली न, जणा देवू ला । भोळा भाग की नी वोत्यो । वो जाणं हो के जादा बाता बावा न पाछी नी लागे । वो छगजी री बात ने समझ्या, ना समझ्या चल्यो गयो । [NG पा वा ई नीमडी है जठे छगजी रा बेटो बैठ र पढतो । इण री छाया बी ने भोत पाछी लागती । वो इण री छाया मे तळं बोरी बिछाय र पढतो । इण नीमडी ने उण वखत प्रो क्ठ ठाह हो के प्रो लाडलो अाग जाय र इतरो बडो प्रादमी बली । फेर भी प्राज नीमडी उदास है--ससारो रे मिनख रो तरिया। उपरा पत्ता भौ सू मुडग्या है। पिलास छायग्यो है-छगजी री उदासी री तरियां । बा सोच, वो भासी मेरी छाया मे माय र पढसी। सोच सी तद म्हारी काया पलटेली। छगजी भी पाई सोच-परमा ने 'धरा' कानी बावडयो चाहिजे । उदास चित छगजी पर नीमडी दोनुवा रो दरद ग्रेक है। छगनी रो वो बेटो है, नीमडी बी पर छाया परी है । परमानन्द बरोवर परा पीसा भेजतो। जद वोई कागद प्रावतो तो बास- ( ४३ ) - पळियं रा लोग बूझ लेवता--परमै रो 'डरापट' आयो हुसो... बडो सुपातर बेटो है ...भोळो फेवं हो वे दो हजार कम रोनो भाई जो वदे ड्राफ्ट भेज ई नी... छगजी इण पर कैवता--परण म्हाने फळं इतरा पीसा री जरूरत, दो-च्यार सो भोत । म्हाने या पीसा री जरूरत नी है। फेर छगजी सू कोई मार्ग बहस नी करता। 4 वा रो सुभाव जाणता के अब प्राग बोल्या के वा न झाळ पायी। प्राज परमानन्द रो कागद मायो हो । छगजी सोल्यो। पढया पर पाछो लिफाफे में घाल दियो । वारे चेरै पर वडी-बड़ी विचार रेखावा उघड प्रायो हो । स्यात वं इण कागद ने बाच र राजी नी हुया। लिख्यो हो-माप छापा मे भी पढया हुसी । पापरं पासिरवाद सू मन 'देस रो सयमु बडो वैज्ञानिक पुरस्कार मिल्यो है । विस्वकरमा री किरपा है प्रा .. छगजी री नाड हाली ही- मा विस्ववरमा री किरपा नी है। विस्वकरमा विनास नी चावं । हा . पण . विनास तो प्रकृति रो सुभाव है....... परमो परमाणु सगती पर नुवी खोज कर र 'देस' रो मान वधायो है ।..नी- नी.. पो मान झूठो है . ससारी र प्रादमी रो अपमान है .....उणरी मौत रो अभियान है ग्रो अभियान रोक देवरपरे चाहिज ...... परमो इया नहीं करेलो। नीमडी रा पत्ता कदे हालता यदे सायत, छगजी रे दीमाग में उतार-चढाव री तरिया । अव वा थिर हुयगी ही। -ना-ना .... छगजी रो कागद परमानन्द न मिल्यो तो वो बही दोगा चित्ती मे पड-- ग्यो। प्रिय मुन्ना, थारै पुरस्कार री बात मनै सब सू पैला भोळो ग्राय र बताई, निको तने कैया कर-काका, मने इसी नोकरी दिरावो जिए सू म्हारो पेट भर जाये पर दुनिया रो पातमा नी दुखै । स्यात तू उण री बात रे मरम न पिणियो हुसी.. तू बोने कदे डरायो कोनी, इण वास्त म्हानं स्यात' सब्द नै काम म ल्यावको पडयो है । तू म्हारी वात रो दोरो मतना मानजे । हा, नी जाणं क्यू खबर सुरणता ई उदासी प्राय र मनं घेर लीन्यो हा 'सरव विनासक' भाळा र मुडं सू निसरधो सध्द मनं उथल-पुथल कर दीयो। भादमी ने दग्खत री तरिया हुवणो चाहिजं । बडो हुई, अरे पर झुक । फळ देवं । इसो फळ नी के प्रादमी साम सरव विनासकारी हुर्व साचो यूझे तो ... ४४ ) मा नीमडी भी उदास है। जग रो भेस देख र वा पोळी पडगी है । स्यात वा भी तने की लिखरगो चावै । मैं उण री भापा ने की-की मैसूस कर । स्यात वा कवणी चाव-मुन्ना, मैं थार पर छापा करी भर तू? पारी छाया बठं नी पडवा देवलो मर नी म्हारी । फेर मा घरती !....मो संयो...धारी जात खत्म हुय जासी अर म्हारी भी। मन सिकायत है यारं सू । तू वैज्ञानिक है। से की समझण पाळो घर में प्रेक रस तू जीव री बात पर विचार कर मुन्ना पिरती पर जिन्दगानी री बात कर नही में पाखी चोजा थे वैज्ञानिक बणाई हो, संमूळ खतम हुय जावी, अर प्रोग्यान भी । विनास लीला री बू मन थारं दीमाग सू पावै, मुन्ना। तू न तो म्हाने रवा देसी पर न ई अपर्ण-मापन । तू पाज्या । अठ गाव मे कोई कारोबार खातलं सो भोळो भी बोलबालो हुय जावं । प्रो । मैं सुणू । तनै माग बढावण मे म्हारो भी की है । म्हारी काया विछाय र मैं थार दीमाग नं तरोत'जा रास्पो है । पर अब भी में तने ताजगो सू पर नी देखणो चावू । अब देखले व कानी तू है, दूजी कानी पूरी सिस्टी। तू इण नीमडो री बात न समझजे, मुन्ना । थारी बापू छगजी। परमानन्द इण मोळिय ने मापरी जेब मे घाल लियो । जेब मे पडयो कागद धीर दीमाग मे कई-कई बर उथल-पुथल मचाई, कई वर धरती धूजी । जमी पसी,दरारा पडी। पण प्रप उरण र चेरै पर ताजगी है । । [] भोळो भाग्यो भाग्यो मायो पर खुसी मे भरघो दनादन बोलणों सरू कर दिन्यो-बाबा-बाबा, भाई जी गाव प्राय रेया है। अब तो भोत मजा प्रासी । नीमडी सामी सत्यो हुम र बोल्यो-मर, अम क्यू उदास हुय मेती है हास देख तेरो मुन्नी माय रयो है। पारी दिया मे वेठी-भारी गोदी मे । सुणताई नौमसी रा पान खडसडाया पर पीळा पता झड र पड्या जाणं, हासी रं मागे 'पंपरा फूल' झड र पड्या हुवं । यो बारा र सामी नो नो ताळ उछाता व हो-दाग,परमा भाई जो बी व लाख र इनाम नं दुसराय दिया। नहीं लियो । प्रो देखो अपवार । लिस्यो है-चो पिछनायो वरसो-जीव र सायं इण अपराध सारु । प्रो देयो यो असगार । रियो है-परमानन्द परमानन्द ने पिछण्यो । वैज्ञानिका मे हळचळ । मो देवो भो अखबार । लियो है-ज्ञानिका रो मारयो सुमो.....

मथ्या भाळा!"
-"हां, बाबा !"
-प्राव । म्हारे साथै चाल तनै धाप र मिठाई खुवावू'ला। प्राज ई दिवाळी
है, भोळा।
छगजो वारे भाया तो सहर सू प्रायोड़ा बडा-बडा लोग वानं घेर लिया।
भोळो ऊभो खुसी सूभरघोड़ी पाख्या सूवान सू देख हो ।
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नांगल कारणो-बारणो देखती थकी वा सोना र घरा मुडाग मायर ऊभी हुयगी- मोडs बाईजी! या सागी अावाज जिकी का बार-बारणे देती प्राव हो। रोजीना भाई अमावाज देवणं सूउपरी बोली मे लय पर लय मे करूणा रळ- मिलगी हो । सुगरण पाळो समझ जावतो के बार कोई मागण माळी ऊभी है। सोना आज छुट दी ली हो । वीरा सासू-सूसरा प्रावण पाळा हा । अावाज मुण परी वा बार प्रायो, बोली-काई चाहिजे? या ई कोई प्राटो, वोदा-पुराणा गाभा...छोरै नै सी ला कोई पुराणी सूटर . वाई सा। सोना वीरं चेहरै माय निजा गेरी-जोवन रो उजास अजेस ई बीर चेरै पर बाकी हो । वा कयो-केतू वो मजदूरण सू भी गई-गुजरी है । घर मागणं सू आछ यो है कमा भर पगा पर खडी हुव । म्हे भी तो कमावा "वाईसा मागरणा तो म्हारो जमारो है !" "ना, की पळ थम परी वा घोली, थान मागणो खुरो नी लाग" "डाह नी बाईसा । छोट थका ई म्हारा मा-बाप मागण ने निसऱ्या, उतरा छोटा म्हे" "सुभाव हुयग्यो है था लोगा रो" "हा बाईसा" "खैर, मा-बाप भिखारी हा तो पे बेटा-बेटी भी भिखारी ई हुदै ! के तू थारै ई चाद र टुकडं से बेटे ने भी भिसारी बणायली?" "तो काई करू ली, बाईसा । इण सू व बडो है वो माग परो र मापरी पेट भरे 1 वी माटो घरा ले प्राव" "कित्तोक बडो है " "भो ई कोई च्यार-पाच साल रो" "तन वीने मांगते नै देखर बुरो नी लागं ?" "नहीं, वाईसा " ( ४७ ) "तू योग मांगया ने भेजे तो थारं मन र लागे नी ?, "ता पाईसा" "ये मादमी नी हो।" "हे भिमारी हो, फालये लिपा हो, वाईगा" "धार भातमा है ?" "हे ई चाईसा।" "फेर प्रा दुसं नी ? "वाईसा, मागणी तो म्हारो जमारो वा फेलापरी बात गाई पर कयो, फेर से न ई सुरगणी पड बाईसा । मजूरी करण नै जावो माला कह देव- इयों के चाल है, धेगा पग उठा, जे इयां ई काम करणो है तो काल मनना पाजे.. कारीगर दकाल देये ...नौकरी करा तो मालिक री भी दस सुण गी पडं प्रो विया कर दीन्यो ..यारो मायो सराब है • तू वेवकूफ है...बाईसा भोफिमा में भी साब फटकार सुणा देव, दकाल देवं ...कागज वगां देखें । मैं तो म प्रेक प्रोफिस मे देखी पाप जिकी मेंक साव पर मेक साव कागजा रो पुलन्दो वगा दीन्यो--जिया मजूरण संवं विया ई म्हें सेवा, जिया माप लोग सवो बिया ई म्हे सै'वा, से पेट खातर सेवे, वाईसा ।" सोना बी भिखारण री बात में आदमी रो विवसता देखो पर कयो- "धे इण तरिया सोच र अपने पाप ने राम मतना करो । मांगगो भोत बुरा है । मजूरी रा दस रूपिया भी भोत चोखा है । तू चावं तो मैं तन कोई काम दिरा देवू।" "काई काम ?" "बरतए माद साफ करणो" "बी सूतो म्हारो मो ई काम माछ यो है" "मागणो काम है ???" "म्हे मगता-भिखारी तो इणन काम ई माना, बाईसा" सोना समझगी के मगजपच्ची मे सार नी है । इणन चून घालो पर पाग जाबा दयो । वा माय जाय र चून ल्याई पर वीरं स्टोर मे घाल दियो । वा लेयर प्राग चलीगी। DO भोत दिन बीतग्या । प्रेक दिन वा मागण माळी फेर प्रायी माज वा आवाज नी देयी, बारणो ई खडखडायो हो। सोना वार देखी । देख परी वा माय रसोई मे गई पर चून रो बाटकी लेय परी बार पायर बोली-"तूतावळ कर मन भोत काम है !" जद हाथ मागे नी पसऱ्या तो वा बोली-अरे ! माज थारो कटोरो कठ है ? तू मागया ने नी भायो !!! मैं तो धारं खातर चूरण ल्याई हूँ!" ( ४८ .. प्रो काम नी है, सोना । मो तो मागरणो है तू तो भोत जोरदार चुगाई है "नहीं, बाईसा । इया ई पाप सू मिलबा ने आयी हूँ।" "काई चाहिजे? पीसा !" 'नहीं।" "तो किया।" सोना बों कोनी देरया जाव हो वा बोली-"मवार तो प्रापरै काम है, पर्छ प्रावू ली।" "नही-नही, तूंपा।" वा प्राडो खोल दियो । वा मांय प्रायगी। सोना बोली "बंठ ! काई बात है ? छोरो तो ठीक है।" "सं ठीक है, बाईसा ।" "फर?" "इया है वाईसा, बी दिन प्राप जिको वाता बतायी ही न, में म्हार थोरै र बाप नै कंगी । मैं कपो-लुगाया काम करे, मैं काम करूं तो पाई। थे गर्न क्यू मागवा दयो "तो काई कयो वा!" "वा इज जिको बी दिन में प्रापन वंयो। पण जद में टापरा री यात क्यी तो वो चिनेक सोच्यो।" "वाई ?" नान्हा सा टावरा ने मांगा न भेज देवा, व ठंडी-वामी रोटी साय र पेट भर पावै पर अंक वाटकी चून प्रापणं तारणी ले प्राव, ये इणी सार यो जलम लियो है प्रापणो वेटो वयो है ।.....के वाप रो काम यो इन है....मा रो काम मो इज है....तो वीर वात जची।" "फेर काई हुयो ?" "अवै वो मागवा न नी जाये।" "पर तू?" "मैं भो नी जायूं।" "तो तू नी माग !!! वा याटकी वानी देवी पर यो-भोर पाछपी काम करयो तू काई नाव है यारो?" "सोना।" "सोना ! हा, पो ही नाव म्हारो है !" "सच्च, बीवोजी!" --"हा तू भोत प्राध्यो काम करयो है । सोना, मागणो भोर सुरो है । ( ६ ) -'नाच्छा र वाह प्रा बता तू करें काई ?" --' बीबीजी, तुगाया रे सिणगार रो चोजा छोरं रो बाप लायर दे देवं । मैं प्रास-पास रे गावा म अनाज र सार्ट के इया वेच प्रावू ।" । भोत पाछचो पाम है पो तो। पण गाव माळा देख र तनं अचूमानी कर " --चीबीजी पले दिन तो लोग भोत हेप करयो लुगायां भी कैयो-प्रा थार किया जची । तू तो चून गप्पा कर ही न । म थारो नाव लियो। कमो, 'अंक बीवोजी मने समझायो । व सीख देयो । इण तरिया मै मागणो छोड दियो । अब म्हे दोन जणा कमावा । म्हे जोहड म ठाव वणा लिया है धौवीजी अंक ढालियो उठ सू ई माटी खोद काची ईटा वणा र खडयो पर लियो । मेक झू पडी थए । र खुड्डी (रसाई) त्यार कर लीनी । टाबरा नै स्कूल मे घाल दिया है। पर भोत पायो सोना । तू भोत चोसो काम करपो है । मैं थार दोनू टाबरा ने वजीफो देवू नी। जदताई व पढेला वारं गाभां पर पोध्या रा पीसा मैं देवू लो आज सू चे दोनू म्हारं गोद है । "बीवीजी प्राप भोत प्राछी हो।" 'सोना तू कमाल कर दियो । काई कंवू तन । तू भोत बहो काम करयो है ।" वीबीजी म्हारै लोगां रे मोकळा टाबर हुवे । वस म्हार दो टाबर है । अब और नी हुवेळा कैय र वा मुळकी पर बोली ----ग्रासू ई म्हे बदलत्या ।' 'अरे तू तो भोत समझ री बात कवं सोना । तू नं बोता बढ़ सू सीखी। बीबीजी थे ई नो बताई । जे म्हे मागवो छोडयो तो में से बाता मैमूसयो, सोचबो भी सह कर दियो । मैं धार कनै भोत पैला पावणो चाव हो पण मैं सोचो के पला में म्हारो घर वणा लेवू फेर बीवी जी ने बुलावू ली जिका म्हान मिनख बणणं री प्रेरणा देथी। आज तो मैं मापन लेवा भापी हू। आप पर साब दोनू मावो म्हारे घरां । अाज नागळ (गृह प्रवेश) है । मिनखा मे मिलणो है बीबीजी। पाप प्रावोलीन?" पर सोना म्हे पक्कायत पावाला | तू मन भोत प्राछी लागे । मैं पाप तोही कुरस्यां भी ल्याई हू, बोबोजी। म्हारा पाच परवार है म्हारी सोभा हावली न ।

.. "भरं सोना वाह ! प्राज मने पे-ो वतासी !" "पाप जरूर माज्यो नाळ पार जोहडो है नी, उठ म्हारा ई घर है" सोना रो धणी रवि परां मायो तो सोना वी गरीष सोना री बाता पीने बताई। रवि बोल्यो-तू के यात कर है, में लोग के वेरो के कर में नी जावूला फेर दूं म्हारी पोजीसन भी तो देख ! 'मैं जाए हूँ के पाप जिलं रा वडा अधिकारी हो पण प्रापन सोना रे घरी चालगो पडसी मा थारी पत्नी रा मात्मिक इच्छा है ...रवि, जे प्रापा नी गया तो काई ठाह उणरो दीमाग झटा सा ज्यावं मर वे लोग फेरू बी ई गेले मायर पाछा ऊभा हुमाव। प्राछयो भई, मैं चालू ला, यस ! चाल चाय प्या । रवि फ्रेस हुयो । सोना बडी उमग र सार्य राजे-धज ही, जाणं वा कोई भोत बडे जळम मे जावती हुवं । रवि ने मो सो अटपटो सो लागं हो पण यो सो।। रो प्रातमा न नी दुषाणो चाप हो । वो बोल्यो-ल बपत हुयग्यो ! "मवार ई पायी, स!" सोना भोत खुस हो । ज्यूई पीरी गाडी नाळ रे साकडी पायी तो वा बोली-इणी र परले कानी गरीष सोना मापसे मजदूर महल बगायो है, रवि मैं भात राजी हूँ। रवि यस 'हू कयो । यो गाडी ड्राईव करतो चाल यो हो । नाळं ने पार कर परी गाही ज्यू ई प्राग मायी तो दूर पाई प्रोही लुगई-मोट्यार ऊभा हा । नगर विकास प्राधिकरण करमचारी विध्वस मचारया हा सोना रो देतर काळजो बैठग्यो रवि वोल्यो-प्राधिवरण प्राळा यो काई कर रैया है, सोना ! "प्राप गाडी खाहती चलावो।" सरपट भागती गाडी राबरेक सोना र घरारं सामी प्रायर लाग्या । सोना गाडी रो गेट खोलर झ्ट पार पायी सामी खड करमचारिया ने देख र बोली- पाप कुण हो ! 'नगर विकास प्राधिकरण रा कर्मचारी !" 'प्रादेस लेयर प्राया हो? "हा, पण प्राप कुण हो ?" "मैं कवू, मादेस दिखावो!" "नी दिखावा" सोना प्रादम्या पर लुगाया ने इसारो कर्यो-मां से न पकडल्यो जावण - मराना यो-म्हे भवार ई पुलोस लेयर पाया। सोना बिलख हो-"पोषीजी अब म्हे के करस्या !" दूधवरावं मतना मां लोगा ने हरजानो भरो पडला । बिना किणी प्रादेसर में गरीब लोगां री छियां ढाह नाख-माने में सबक सिसालो" सोना री पारया मे उपरी गरीद सहेली रो उजड्योहो गरीव महल तिरै हो । वा प्राधिकरण री गाडी र वन पायी अर कंयो-सोना, देख के है ! इगर च्यारू पैडा री हवा काढ दे । देखस्या ! में भागमो दिया? वा सोना चारू पईया रिता दिया प्राधिकरण रा नोकर देखता रा देवता रेयन्या । उठीने नौजु- वान वार बाथेडा करणा सरू कर दिया। रवि कार मूवार निसर्यो वा सोगा रे कनं प्रायर वोल्पो-मो बाई कर रैया हो पाप ! सं पर हुज्यायो । छोड द्यो पाने ! प्रेक करमचारो २ बन पायर वो बोल्यो-काई नाद है ? "जी!" "काई पोस्ट है मापरी ?" "जोss !" "से झूपड़ा गिरा दिया! पावो म्हारे साथ चालो थारो रामान भी लिमाचो !" वै च्यार आदमी हा रवि वाने कार मे विठा लिया और सोना ने कैयो- "अाप अठ ईरंज्यो में ग्रान छोड प्राव माखिर तो में सरकारी करमचारी - "अजी साब प्रापतो देवता हो।" व में के साथ वोल्या 'आदेस लेयर प्रायो हो?" "नही साय !" दूजो वोल्पो-मैं नट्यो हो, साब डरा-धमा यो तोडा-फोडी मता करो मिले सो लेल्यो पण मान्या ई कोनी!" "चालो कोई बात नी।" ज्यूई रवि री कार थाणे माय बडी तो वे भोचका रयग्या बोल्या-मो काई करो हो साय !! "गरीवां रा घर ढाह नाखो जिका नांगळ री स्यारी कर रया हुवै पर थार साय प्रो भी नी हुवे !!! गाडी रोकर 4 कोटवाळ नै कयो-प्रोन 'भरेस्ट' करल्यो, माई सेल्फ रवि प्रकास एम. डी. एम. (इस्ट) में लोग गरीब लोगान बरबाद कर दिया है विना कोई वजे का रा घर ढाह नास्या है गाडी में पारो सामान है वो भी कब्ज करल्यो" ( ५२ ) "मो वाक्यो कठं हुयो, हुरम !" "पावो म्हार सायं चालो।" मोटवान सिपायो न वान बन्द कर देणे रो हुक्म देपर रवि री गारी माय बैठग्यो जद में उठ पूग्या तो रोवा-यूरो माय मेल्यो हो नगर विकास प्राधि- करण री पिचक्यौडी गाडी ढह योग ठावा र सामी कमी हो । गरीव सोना रा नन्हा नान्हा टायर पनि पपलर जोय हा । रा री प्रारयो पर दूज री पाल्पा मे प्रयूझ विध्यस गै यात देस ही! सोगा री मास्यां गीली हयगी। COO हमलो प्रगार वारा वज्या हा। घो फावडा-परात में पानी मेल दिया। चार, खिडकी गमछम लिप- टथोडी रोटमा पही हो । वान हाय म लेयर वो बारं पायग्यो । कन ई मेक कुवाटर हो जिण माय पादमी रेवं हा । लॉन मे मे क पादमी कुरसी पर माय रे हाथ लगाया सोच री मुद्रा मे बैठपा हो । कनै पायर यो पाल्पो-बाबूजी, पाणी नेत्यू दीपारी करणी है । वायूजी वीर चेरं वानी देस्यो । निरमळ मुख पसीनं सू भरघोडो हो । मु डे पर तेज हो। उरण रो साहस पर हीमत ऊपर छलक हा । चेरै पर छाई उदात कार्य खिमता साव दिख ही। उण रा गढघोडा मुज सुपुस्ट वक्ष स्थल पळ मे ई माछी प्राकृति बणा दीनी । वारो निगावा वाळ माटी सू भरयोडा पगा ताई पायगी । वे बाल्या-माव, मठ छ या मे बैठ । मैं मांय सू गिलास लेयर पावू , वे उठता यका वोल्या-भाराम सू नास्तो कर | बार नळ हो। वो हाथ धोया। दोनू हाथा मे पाणी भर सजळ घोबै सू मुह घायो, अर लान मे प्राय र क कानी बंठग्यो । बाबूजी बीनं गिलास झला दियो। वो मापरो नास्तो खोल्यो। वाजर री दो मोटी-मोटी रोटया पर कोई तीन-च्यार हरी मिरच ही । रोटी र सागै हरी मिरच तोड र वो निरभाव सू खाव हो । जद मिरच खत्म हुयगी तो वो गमछो भेळो कर परो बाल्या-मडी सू पतकाळी लेयर मावू , कयर वो उठग्यो । बाबूजी बोल्या तू बैठ । मैं लाय र देवू । वं माय गया पर की हरी मिरच पर गुड लाय र घी युवक ने दे दियो। वो बोल्यो-पाप तो पतकाळी रं साग प्रोर भी भीन कुछ स्या दियो साब ! परन्तु कठं भी बीरं चेरं पर भावा मे कमजोरी नी हो । हा खावता-खावता वो मा जरूर कयो हो-गाव सू माया कई दिन हुयग्या । प्राज काम मिल्यो है । ठक- दार सू दस रुपिया ट्रोली रा बोथ्या है । दो ट्रोली तो नास दीनी । पाथण ताई दो ओर गेर देवू ला ! आप सू मिलो हुवतो रेसी । कई दिना रो काम है ।

"मैं भी वण प्राळो हो माट-दाळ रोहीसाव सान भी देवणो है। 'परग मजो नीं प्रायो, साब। माप कोई बडो काम लेवो फेर देखो सुस्ताव लागो । बाबूजो बूझ्यो-बीडी सिगरेट ? 'ना साव । प्राई प्रापन भोत तकलीफ दे दोनी। "नही मा क्या री तकलीफ 1 बैठ थोडी माराम करल पर्छ काम लागज । युवक बोल्यो-काम काई है साब । माटो गैरणो कोई काम है। मैं तो भोत बडी इच्छा लेयर सहर प्रायो हो के कोई चोखो काम करू ला भर पूरै तन मन सू करू ला । पण च्यार-पाच दिन हुयग्या, प्राज मा काम मिल्यो-माटी गेरण रो। पण तू तो इणन भी पूरं तन-मन सू कर रयो है, मैं देख रयो हू । 'तन सू कर रेयो हू , साव । मन नै तो लगा मेल्यो है। "किसोक काम करणो चावं।" "जिको मैंनत रो हुवे । पढयो निस्यो तो मैं हू नी विया फैक्ट्री मे मैनत रो काम कर लेवू । कोई रे घरा भी काम कर लेवू मोर भी कोई होवो पण तिथ वघ्यो काम हुवे । लाघा नी हुवं । मजदूर ने लापा मार देव । ठालो बैठयो आदमी बेकार हुज्यावै । इणी वास्तै मैं गाव सू प्रायो ।" युवक री आख्या मे उदात प्रासावा भरयोडी हो । पर डील पर बीर नोजुवान हिम्मत थिरक हो। की ताळ वावूजी मू याता कर परो वो पाछो प्रापर काम लागग्यो । फावड सू परात भर-भर वो बिना किरणी भार भावना ₹ मारी गेर रयो हो । बीर पगा में फुरती हो। कोई दस बारा दिनार ग्रहगई वो अवाम करयो। प्रेकदिन वीरो ठेकादार भी उठ प्रायो-छोगाराम कितरी ट्रोली नाख दिने। ट्रक्टर पाल सू बूझ लिज्यो, ठेकादार जी। वो जितरी गेरी उतरी मैं मा मकाना माय बिछा दोनो । मनं हीसाब नी प्राव । हा, रोजीना च्यार ट्रोली मैं माय गेर परो ई गयो है।" जणा तो प्राछी-खासी मजूरी कर लीनी । काम बडो काम लियो है,छोगाराम । थारै ऊपर छोडू ला वो । तू से रो ध्यान राखजे पर काम भी करजे ।" "पण मन हीसाब नी प्राव, साव "वो मैं करलेला की दाम-वाम चाहिज' १. ( --- गांव मे धीरी बूढी मा पर बापू हा । जितरा दिन यो गाव मे रंयो, खेतां काम कार र प्रापर बूढा मा-बाप री टहल-वन्दगी करो पण जद गाव में काम नी तो वो के कर? वो किया उठ रवतो ! सेत तो नाव रो हो-दो धीधा । फेर किया गुजारो चालतो । उतारण रो सस्थळ नी हुवे तो मार्थ भी कोकर फरोजे । खेत मे तो गाय-बकरी जितरो चारो भी नी हुयो हार र वो सहर पायो हो । पण गाव मे ई वो सोच लीनो ही के प्रब सहर जायर कोई तिय बध्यो काम पकडयो है सो सारो सरतर जम्मो रवं, वो इणो पास मे अठे ग्रायो हो। ठेकेदार रो नु वो काप सरू हुयग्यो । छोगाराम नं काम मिलग्यो. वो जरूत रा पीसा ई ठेफादार सू लेतो बाकी ठेकादार कन ई रासतो । बीच मे वो अंक दो बर गाव गयो तो ठेकदार माग्या जित्ता पीसा बीन दे दिया हा । गाव ज तो सो टेफादार सूपीस पर घरा नाज-पाणी रो थळ कर पावतो पर परची देपावतो। ठेकादार वीने ठेके पर ई काम दे राख्यो हो । इण वास्तं वो गाव सू प्रापर कई भायला ने भी ले पायो हो । पंला वो नीव खुदाई ठेके पर लेयो । फेर की दिना तिथ वधी काम कर्यो फेर छात-गिराई ठक पर ले गी फेर घोळप रो काम मिलग्यो, छोगा रे मजूरी पडं लागी । अंक दिन रात रा वो देख्यो-वीरो ठेकादार मकान बणाया वा मे मू अंक मकान में कई मजूरा रै साथै बैठ्यो हो । कई बीरी पावभगत मे लाग मेल्या हा । लुगाया रोट्या बरणावं ही। छोगाराम कनै पायग्यो । बोल्यो-प्राप प्राज घरानी गया, साब ?" "घरा ! प्रो घर ई तो है ! .. पापणो पर पापा बणायो है -- पला पापा इणरो मजो लेस्था फेर मालिक ! थे बगायो है मैं वगायो है इणनै । यो बहकै लागो-दारू पीसी ?" 'नहीं साब।" पील भोत मजो प्रायला ! "नही साय !" "अच्छया....तो बैठो...यह खावो....। "नही साव!" "के नही साब-नही साय लगा मैली है-बैठ में योदया अंक गिलास त्या!" ( ५८ ) "नही साव । प्रावो में धान परा छोड़या५ । प्रापरी तबियत ठीक नहीं है ! "कांई कयो, घरां! माज तो अठं महफिल है-महफिल ! तू देखजे थोड़ी देर में प्रो मकान पांच तारा होटल वणण माळो है तू चिनेक पोल ! ले" ! वो बोतल कान हाथ घालं लागो। छोगी वीरो हाथ पकड लियो-नही साय वो मार्ग बोलतो इतरं मे भरियो मेवा री छोरी नै ठहरडतो माय बड़ यो । छोगो देखर र दंग रेयग्यो भरिया री प्रारुपा छोगा ने देखर मुरझायगी ठेकादार कव हो-लेऽऽ प्रायो ! "हां, साब!" वो नीची निजऱ्या पड तर दियो। ल! वो मक सोच रो नोट बी कानी कर्यो । छोगो मो सो साग देखकर देखतो रो देखतो रेयग्यो । वो ठेकादार ने उठा लियो पर कयो-चालो थे भोन पोनी हो । पाने अठं नी रेवणो चाहिजे ! म्हार साथ चालो प्रा छोरी....मो से की ..प्राछयो नी है । छोगो ना-ना करता भी यौन वार लिमायो । ठेकादार ने की होस पक्कायत हुवैला । यो लडखडातो बीरे साग हुयग्यो, बार प्रायर वो बोल्यो-छोगा, मैं चल्यो जा स्यू। मन होस है । तू म्हारी गाडी उठाल्या ! छोगो बीनं गाडी लायर दे दी । वो गाडी पर सुधार हुयग्यो योगो पापर यांन मायग्यो । पण ठेकादार प्रापर थान-मकान नी गरी । वो हजार पाच सौ खरच कर्या हा । वो कीकर घरा जावतो वो मोटर साइकिल ने प्रठी- उडी घुमायर पाछो चिक प्रायम्पो भरियो बीने भर-भर गिलास दारू प्यावे हो, बीच-बीच मे वो कैवेहो-लतू भी पी पर से न प्या! सोढमाल थारो ई हो. ....! पण छोगा री माख्या मे नीदनी हो । .. कादार बहकै हो... छोगा रा पर वीर साध्या रा ठेकादार मे खामा पीसा चढम्मा । कई दफा छोगो चींसू माग्या पण विन पास हुवर्ण री बात कयो । छोगा ने विस्वास हो के ठेकादार बीरा पीपा नी राख नो पण जद यो 'साईट' पर प्रावणो बद कर दियो तो छोगा रे पगा तळ री जमी मरगी । वीर गाव रा बीस लायोडा धीरा सायो ठेकादार नै के जाणं ? छोगो मुसीबत मे पड़ग्यो । । छोगो ठेकादार री भोत व ट उहीको पण वो नी प्रायो। छोगो टूटपो । अक दिन माथण रा वो बाबू नो कन प्रायो। पूरी बात बताई । बाबू जी री मुगर भापणा तण गी। रोटो पर पहबोडी हरी मिरच्या वारी पापा मे घूमै लागी । व वोल्या-छोगा, तेरी मैंनत पच नी सकलो वेमौन मनोक दिन । . ( ५६ ) पण पवार तो मैं मरायो, माबूजी गांव में बदनामी हुसी । पायो हो कमा- धान पर प्रोठो करज कर लियो..बी री प्राप्या में पाणी मायग्यो । बाबूजी रो माख्या सामी उत्साही प्रोख्या जिला माय वै उभोडी माकाक्षावा देखी ही वान भव व रोवत्या नं देख हा । वारो हाथ हवळा-हवळा छोगा र काध कानी जावै हो । 07 माटी री सोरम रूगा काका र परां सूचार प्रायर मैं गोवै पडग्यो । प्रागं पण मळगो रामनियो पापर ऊ टा ने लियो जावं हो । पूर्व मे अलगोजे री मावाज तिरं ही। लटार पगा सू गयोडे गोवै री माटी पोली होयगी ही। म्हारा पग रूप्या नावं हा, पर गरद गोडा ताई पायगी ही, फेर भी मैं चाल्यो जाव हो उपर लार- लार । रामनियो अलगोजा बजावतो चाल हो । तान मे लटका वरती बी री नाड अब दिखबा लागगी ही मने । मैं माय ऊ डर हो पण वो प्रापरी धुन्न मे मस्त चाल हो । म्हारं पर रामनिय र बीच में कोई पचासे रु पावडा रो बेछ। हो। रामनिया राऊट पाग जोहडं का जावण पाळी गेनी मे मुडघा । मनै सिवाय ऊटा री मुण्ड्या रै की नी दीखे हो । ऊट जोह कानी जावं हा । निजर मागीन पसारी, तो देख्यो-लरडियां-छाळिया बोलबालो मुडा मारती जावं ही । मैं गेलो बदल लीन्यो । चूनन ळी बिरामणी र खेत री सीव रे सार-सारे ल्हुरुतो छिपतो मैं चाल हो । म्हारै काना मे रूगा काका रा सब्द - सुरणीजे हा । बैंजिया, जे तू चिनेय भी चूकम्यो तो नेरै को हाथ नी लागे लो ।। मैं प्राख्या झपकाई। चाण चूक म्हारी निजऱ्या साम जोहड माय जावती भेड़-बकरिया मा जाय लागी । सीतनी वान टोरती थकी जोहई कानी ले जाव ही। जोहडं री पाळ सू की पळगो मे सूपो जाट भो हो । रामनिगे प्रल• गोजा बजावतो उठीन हो जाये हो । तीतली लरडिया पर छाळिमा नै छोहर उए कानी चाल पडी। मैं देख्यो, वे प्रापर बो जाट तळ बंठग्या । मैं कुलब-कुलबै सरक्तो सरवतो प्रायर सीरी ग्राट म बैठग्यो । हामी खौंप मांकर मन वारी पाची देही सावीस हो। मैं देव्यो, शीतली पण र अलगोजा खोसणं रो कर हो । रामनियो काठ कर हो मा । का ही गाती यो री साथळ पर गोडो मेल र बौ र हाथ सू प्रलगो खोरमा लागी को लाभ पर न लेयग्यो । रामनियं रो सिरमौतमी री देही पनि रो छाती पर ऊधी होगी। या डॉलर म रक्ती गोगा गा माप मारवो चाव ही पण वो हाथ ऊपर-नीचे कर हो । जद सीतली री छोती राम- 'निय शे छाती पर टिकी, तो वो हाथ सीधा कर दीन्या । सीतली अलगोजा खोस ली.या पर उठ बैठी होयगी। अलगोजा प्रव सीतली रे होठा सू बतळादरण करहा। जोहडो पर जोहडं राजीव सुगै हा, सीतली री बात जिसरी अगोजा मार निसर र मोटी होवनी बार मावे ही। मन अचम्भो हो हो के सीतली इनरा ग्राछा प्रनगोजा व जागा जाएँ। मैं सीव री मोट मे बैठयो सुणं हो पर खीप मोर देसं हो । रामनियो स य त भान सू बंठ्यो सुण हो । सीतली झूम हो । जद धागा परी पर हुयी तो रामनियो अलगोजा कानी चाल्यो। मैं खकारो करघो । म्हारी आवाज वा रे काना ताई पूगगी ही स्यात । वं हााळ- वाकळ होया देख हा-अंक दूजे कानो । मन लाग्यो, सीतली रामनिय नै को केव पण मनै नी सुणीज्यो । मैं अभी होग्यो । सीव-मीव पायो चानतो थको प्राग कूच री पोट में रातो निगर परो गोरै माय प्रायम्यो। पण मन किया ई कर हो । म खुद सू हो बतळावे लागो में सीतली पर रामनिय र बीच मे क्यू प्रायू ? मन के पही। जे देरुपी है तो सरथ देवणो चाहीजे। अचाणचक मनै रूगै काकै रा ध्यान प्रायो । म अझळावं लागो.. रूगा काका री बाता मे तू क्यू पावे ?... मो तो अपरी ऊमर अंक घर रा दो घर फरया है...छोरी-छोरो दोनू स्याणा है व्याव नो दोनु वा रो होणो ई है ...जे तेरै सू की वर्ण तो तू वा रो मदद कर प्रार्ड मतना पाव । . मैं खुद नै देख्यो तो हासी प्रायगी। वेमतलब बिचारा र चिन्ता परा दोनी । व बंठ्या काई सोचता होसी । स्यात उठ र ढूढता फिरता होमो-मन ! में सोचतो थको चाल हो। रूणा काक ने चंय देवू ला, सीतली पर रामनियं रो ब्याव कर देवगो चाहीजे । ज रामनिय रो वापू नी माने तो मना लेवरको चाहीजै ।....सीतली मर रामनियं रो प्रेम साचो है। मैं चिमयो-कट वारो प्रेम ई तो म्हार चौघडदोनी फेर मेल्यो है । प्राग वडाळी प्यावू पायगी । में दमघडी ठग्यो ठडी छाव मे। पण मन नी ढयो । वो म्हारे सामी सीतली री वकालत करै हो-प्रेम करणो कोई अन्याय थोडोई हो! तू जे मिनम्न है तो वारो पक्ष ल । छोरी स्याणी है। छोरो कमाऊ है ।....पर तनै प्राई प्रावगम् मिल के जागी ? के तू पाने छटपटाता ने देख र राजी होवणी चावं? इण सोवणे प्रेम री हत्या स्तना करा..गा बाबा री रतनूजी सू खीचा ताणो है, इगा खातर वो बात उडार में भी माय धीमं । मात्र तू वह है- वाना, तू झूठी धाता उडव। . सीतळी पर रामनियं रो मेळ देख लिया है। - अब वान अलायदा करणो पाप है । .. म्हारी भांख्या मीच र खुली । चारण चूक म्हारी पाख्या सामं बड र दूध रो टोपो प्रायर पड़ यो । मैं देख्यो-कबूतर-कबू- तरी प्रेक कंवली डाळी मार्थ बठ्या बातां कर हा । मन सीतली पर रामनिये री याद मायगी। मैं ऊभो होयग्यो । गा काका र घर पूग्यो तो काको प्रापरी पोळी में चंठ्यो हुक्कै सू बतळावै हा-कुटइ-कुटह । भर धु यो निसरै हो मुडं सू । मन देखता ही वो वोल्लो-मुराग मिल्यो ? उपरो हाथ धोळी मूछ या उतरनो थको डाढी रे नाके ताई प्रायो । "काका !" खिरण माय सीतळी पर रामनियो सूख जाट तळं पसर योडो म्हारी मांख्या मे माया 1 पळ मे ही म्हारै मु . मू निसर् यो "की मी मिल्यो, काका । लोग इया ई झूठी बाता करें ।" "वैजिना, प्रा तो हो ई नी सके ।" कयर काको फूक सारी पर छोड दीनी। "म्हारो पाख्या साव भरे, काका । जे प्रापरी अणुभयो पाण्या प्रारी साच न मोळम्ब सके तो माप देवल्यो! रूगो काको म्हारी पाख्या माय देख लागो । मन डर लाग हो, कठे बौने सोत नी पर रामनियो प्रा माय मूर्ख जाट तळ पमोडानी दिख जावै । पाण्या झपकाय र मैं पूरी खोन दोनी । रूगो काको पळेक म्हारी प्राख्या कानी देख्यो पर बोल्यो, "मनं तो काळा मणिया दीव.वैजिया !" " तो थार है भी है, काका ।" "तू ठीक कैवं । सेरी भर मेरी दोनुवा री प्रारुप मे ई है. मणिया।" कैयर काको लामो सास भरी पर प्रापरा होंठ हुक्कै री नळी र लगा लीन्या । मन लाम्पो, "काको म्हारी वात जाणग्यो है । मैं की, "काका, रतनूजी रे घर रो इज्जन फर-फर उडण लाग री है । रामनिय पर सीतली रोमावर देवणो चाहीज अब । "तू वो देम्पो लाग" "ना, मैं मोहू काका।" -काळा "मैं भा सोचू ह. मै उटग्यो । घमजावणं री बजाय मै पाया गावं पडग्यो । जद में जोहई मे पूग्यो नो मनै ऊ ट लरहिया घर छळियार मियीनी दिरया ? भै पायर बी मूब जाट तळं बैठग्यो । म्हारी पाल्या मीननी पर रामनिय नै जो हो । वंनी दिल्या तो मैं सरक र वीं जगां मायग्यो, जठं वै वंठ्या हा । वीं जगारी माटी री मै लप भरी पर नाक सामी लेयग्यो। मैं सूधी तो मन पी मोय सीतली पर रामनियर प्रेम रो सोरम भायी। मचाणचक मनं गुसर-फुमर सुणीजण लागी। मैं पान पड या पर लीन्या । पावाज मठं ही बठं माम-पाम सूपाय हो-देख रामनिया, रूगा पाका री मेरै यापू मू पदावत है । वो बाता उडावं मेरी । वो बापू मू बदलो लेवगो चावं । तू कटं वदत मतना जाये । मेरी काया री सोरम लेयो है तो इणरो मिणगार भा वणजे । "मैं बापू ने बह दी.पो -मोन गो, पापण पर रो रहू वली, बापू ।" "तो तेरो बापू काई कपो?" "मुस्खन ।' "तू में पहतर दियो' "मै पूछ यो क्यू बापू तो बापू कयो -रतनूमी मूमापणो शपण नी हाय रा। क्यूरी छोगे रोमगाई जद मलासर माछ पर म होवे हो ता य भिचकी देयो हो । मुक्तडी सासरं पाळा नं को रतनूजी राई रोही । मुक्नही रे मान ने काको यदेई नी भर सबै। भायो ने बेराजी कर पापाता याय योकर । धारिता रा पाटो कोनी । पोरी ताळ योलोना । पर मोती रो पावार मुग्णीनी तू पाई पयो ? "गा बारा प्रारी जागं मारवारी राह में रयू पहो । इप पर तेरा यापू काईया?' • भाया रोगाम है।" "तू मंगेर 'तो पर पार भाया मो। मै तो हम ऊर परापू, उटही रंकू, जेधे नी मानगो ना पर उ । यो गर । पूरा पागू ! न म मो पागी। मापारी बात न ममाजी पोधोनी, गजी पापरी जाणे, पनि मतमय भारी राम पाटी है, पापा तो पाप र मायां पर या माग - Trm? मा योनी-तो होगामी! वानं मारानी पाय ।iमरामो पाप हो गर जागी । पर बारो-1-परमा-गयो पर गम में प्राय विशरमा, गम मेरा मोती। गयो रामनिया | Rat-दानामा, गोषणा- Miniatiमो परी...!"

में खांस्यो। मावाज बन्द होयगी । मेरी निजर उण जगां टिक मेली ही जठ सूमावाज प्राव ही । मन लाग्यो, उठ कोई उहो खाटो है। पर खाडो सरिणयां पर खीपा सूछायोड़ो है । खोपा माय माटी है स्यात इणी माय सीतली पर रामनिय रोप्रेमालाप घाल रैयो है। पण साम रामनिय नै माय सूवार निसरता ने देख र स्यात' सांच रे नेडी प्रायगी । मनै देखता ही वो सरमायो, पग लारं सरक्या पण किरणो तरिया चाल र वो म्हार ने मायग्यो पर बोल्यो- "वंजू भाया, किती क ताळ होयगी माया नै ?" "भोत देर सूबंठ्यो हूं।" "हे !" बोर चरै पर हैफ पसरग्यो। टूटघोडा सा सब्द बीर मुहै सू निसरया--"जरगा तो थे .।" "हां, पण तू किरण सूबतळावे हो?" 'प्र अ म..।" "बता!" "सीतली सू।" 'कठ है वा?" "खाई मे !" "खार्ड में !! बुला बीन !" वो हेलो करयो~-सीतली बैजू भायो है, प्राज्या ! मैं देख हो- सीतली सरमाती थकी खाई सूमार निसर हो । भेळी हुयीसी वा पाय र अंक कानी बैठगी । मैं वात सरू करी- 'सोतली सुण्यो है,तू अलगोजा भोत सातरा बजाणा जाएं ?" "थे कद सुण्या, भाया ?" "सु वारं बजावं हीन !" "तो थे ही खास्या हा, भाया ?" "हा।" "वा सरम सू भेळी होयगी। मैं कयो अलगोजा सुणावली ?" "क्यू?" "थे म्हानं देस्या क्यूं ?" वीरी नाड़ मज ताई भी कोनी उठी ही । म्हारी निजरमा बीर मेसा में विर ही । मैं सोचं लाग्यो-पाई जवाब देयू ? थोडी ताळ पर्छ मैं बोल्यो- इयां ई गेलं बगतो देव्यो हो । प्रोर कोई बात कोनी।" योडो ताळ चुप्पी । कोई नी बोल्या । फेर रामनियो सीतली कानी देख तो .

- बोल्यो, 'मलगोजा ल्या? सोनलोरी निजरथा ऊपर नै उठी । रामनियो देख र धारी भासा समझी पर फेर खाडे कानी चल्यो गयो। पाठो प्राय र सीतली रे हाथा मे प्रलगोजा देवतो वो बोल्यो, "बंजू भाया, म्हारा तो प्रो खाडो ही घर है। जे माप लोग प्रार्ड मास्यो तो, म्हे तो फेर मठ ही रोटी बगास्या !" मनै लाग्यो जिया वो म्हारै चनपट मेल देयो हो । मैं कयो, “तू गळत सोचें । मैं थार मार्ड नी काम पावूला । जे कोई भी 'जान नी' चढयो तो मैं चढू ला ला।" "प्राप गुणी पादमी ही, भाया।" सीतली नीची नोड करया बठी हो । छीट र घारिय री लाल मंगजी ने दोनू हाथा री प्रागळया सूपड्या वा की सोच ही । चाण चूकं प्रोढणी सिरे सू सरकी तो वा हाथ लेराने कर-कर पाछो सिर ढक्यो । रामनियो नई बैठनो कव हो-वैज़ भाया सू काई सरमावणो सीतली, अं तो 'प्रापणा बडा भायी --बाप री जगा, सुरणा सोतली रो ध्यान टूटयो । वा अलगोजा हाथा ले लीया'। मैं देखे हो सीतली रे होठा र लाग्योडा अलगोगा सुर काढं हा । जोहडो पसरयो सुणं हो-सोतनो रो प्रलगोगा मू निसरतो मन री बात ! मैं गोत मे गमग्यो ... रामनिया ई तो है ई रो भवर ..कुरजा। ..सने सो घर मैं !.. हैं !!! सीतली गीत पूरी कर हो । रामनियो बठ्यो हो । मलगोजा होठा भू पर कर र वा बोली-भाया, भने तो इसा ई प्राव ।" 'कमाल है, सीतली । इसा तो मैं पली वर सुण्या है । छोरी र मुड मू अलगोजा रोमावाज कोई जो बिरली ही सुणी हुवैला !" रामनियंरा माळा सीतली नं सीसाचण सारू मगर थपथपावतो मैं उठयो तो वे भी साथ उठा। रामनियो प्रापर कटाने पाग करया पर सीतली मापरी भेड़-बकरिया नै । मैं पिछम कानी देख्यो-मूरजी रा रग खुमी मू हिंगळ चरणो होयग्यो हो । मैं प्राग चल्यो गयो । वं लारे प्राव हा । रात नै मैं रतनूजी सू मिल्यो । रूपा काका मू बात करी पण बात चिरक कोनी पायो । मैं सुवै स्गं कार्य सू पेरू बात करो, "याका पाप क्यू पाट देवो हो?" "मुस्मडी री ल्हास तूं देवी ही न, यस इण वास्तं ६ ! वासो मेर लामो सास लेयो। मैं हामी भरी--"हा कारा।" 'तो समम ! रतनूजी ने माटी में नी मिनायो तो मेरो नदि स्गो .. " - . - । ।

नहीं !! वो सास लेयर बोल्यो-"वदलो लेवूसा, बंजिया, लिया बिना नी रंयू।" "पण बाका सुगवा में पायी है के वे दोनू जपा ई व्याव रवाय रया -- 1 "मा पिया हो सके।" वो सोचं लागो। "मो तो ठांह यानी, यारा !" "मैं देख लेला । जे रामनियो बी मू व्याव करयो तो सोतलो रा वा ई दूरगती होवली जिको मुक्नही रो रतनूजी वरवायी हो।" "मुक्नहो री गहासिमा सू पुरी तरिया काटयोडी मिरत देही म्हारी प्राध्या मे तिरया सागगो । मैं धमक्यो पर कयो, "पुराणो बाता नै गयो देवी, पाका । या तो कोई होगहार हो सो होयगी।" "होणहार योनी ही बंजियां, ई रतनूजी रं यच्च रो करवायोडो काम . - "धे बड़ा हो, पाया।" "ना माफी नहीं दे सकू', वजिया।" मैं उठग्यो । रूगा काका र घरा मू निसर र रामनिय र परां पानी चल्यो गयो । बोरे बापू सू मिल्यो । वाता-चीता बरी । रूगो बाको पूटी दे रासी ही योन, वो टरा सू मस नी होयो। पम्पोछटी में, मैं यूयो, “जे रामनियो पार मोल सीतती गूचाव कर ले ?" 'यो म्हारं सू गयो" "मर धेवी सू! माही रात है न?" raठी रामनियरी मां कानो मुडतो थयो मैं पूरपो, " क्यूसरी पारी या राय है?' "वाहोनिको रामनिय र बापूरी है।" रामनियारीमा भी उदलगी। मैं उठग्यो । रतीनं गयो,नो यं पापरा रोजाणा गुणाद मागा-छोरी है पदनाम परम में नाग मेल्या -रिया गव होसी ?" 'मोग बदनाम नोरंगची पात" 'को!!"पेटर पर होगा। "ct ! रामनिरमाय मोननी रोपाय होना।" "यसरी रा!" "frai ! ममतो!" - मैं रतनूजी ने प्राखी बात समझाई । वं मानग्या । मैं बार मायग्यो । ज्यूही रतनूजी कन्यादान करयो के गोव कानी सूरोळा सुणीजण लाग्या । देवजी पडत रो ध्यान भी उचटग्यो । वं फटाफट काम सलटावण मे लागगा । जोहडी री रौनक मे विघन पडतो साव दिख हो। रामनियर बापू साथ दो-तीन लुगाया बुरी तरिया रोळा करती प्राव हो । वार लारं हगो यायो प्राव हो । मैं उठ र खेजड कनै पायग्यो । पण पडत जी माप वानी सू काम स्ल्टा दिन्यो हो । परं सूरोळा करतो रामनिये रो बापू म्हारं कनै प्राय र बोल्यो-म्हार वेटे रो ब्याव करावण पळो कुण है ? प्रो ब्याव अब ई हुस्ट है । "हुस्ट तो रामनिय र करया होसी कामा । मैं कोनो करयो ब्याव, राम- नियो करयो है।" "से तेरा काम है " "जे म्हारो काम है तो मैं थार सू को लियो कोनी, देय रेयो हू - सोपणी .44 "म्हाने कोनी चाये ।" इतर मे रूगो काको मायग्यो । भव तेरा के मेरा ! बडकती मावाज में घो कयो, "कुण तन चौधरी थरप्यो. पुरण कयो के तू प्रो व्याव रचाय .. लाठी फटकारता था वो बोल्यो-कमीण रो सिर भागबाद ! मैं लाठी पकड लोनी पर वोल्यो, "काका, सिर तो भलाई भाग दीज्यो पण पो घर मतना भाग दोज्यो । म्हारो हाय स्वाई कानी गयो।' "मा बदमासी बरदास्त नी हुवैली।" "माफी देवो, वाया।" "माफी !" व लाठी छुडावण री फोसीस पर लागा। पछोछडी मे मैं कयो, 'काका भो बूढो जाट ऊभा हैं नी! कितो सायत है। इस मूसीख ल्यो!" 'पण वै मान्या कोनी। मैं देखू के सोतली प्रर रामनियो पाराम मू जोहर्ड मे रेवे । कदे कदास मै मिलवा नै जावू तो रामनियो वंया बरं- गांव री गघ सूम्हे तो मठ ही ठीक हा भाया । पर वो ना कयर म्हाने झकझोर देव। मैं सोचवा लाग जावू भर देखवा लाग ज्यावू प्रेक नु को जीन- दसरण-रामनिय रीवात माय भरघोहो। C0 राई-राई रेत दोफारी ! नीम रो डाळी माथै सुळबुळाट। चिडी री प्रापरै साथी सू मुलाकात । बात ! बात मे दोफारी जितरी री जितरी गरमी। इण गिरमी माय नीम री छाया तळ अंक कानी मेंक कीडी प्रापरी घर बरणावं । मुडो भर- भर रेत लायर बार नाख । रेत रो ढिग । प्रादमी रो इण कानी पीठ है । साम बैठी ज्योत्सना कवै, "इण तरिया मतना कर अजय नही........." मुह फेऱ्या बैठ्यो अजय ज्योत्सना री बात तो समझग्यो पण वो पापरी ई गावतो बोल्यो, "म्हारे भने और उपाय कोनी।" "उपाय है अजय पण तू कर कोनी ! तू' के वेरो काई सोचे । गेल रो वात दर नी करें । जे तू इया करसी तो वता, म्हारो काई हुसी ?" "हुप्तो काई ! म्हारे बिना भी तो की हुवतो, वो ई हुय जासी ।" "वो कोनी हुवै अजय वो कोनी हुदै ।" "तू गळत सोचे।" "ना, चिनेक ठंर परी वा बोली, 'तू चिनेक थारी गळती ने भी देख, पर फेर सोच अजय के मैं गळत सोचूंहूं के ?" अजय री जीभ तालवै चिपगी। पण सरम नोखतो वो बोल्यो, "वा थारी अर म्हारी दोनुवा रो भूल ही, म्हार में कल री गळती कोनी ज्योत्सना ।" "बात बात मे गळतो भूल बरणगी अजय !!" ज्योत्सना रै चेरै पर अचम्भो हो । मजय प्रापरी गळती ने झाळ री चादर सूलुकावतो बोल्यो, "तूं फगत म्हारै कानी ई देख, थार गेल कानी कोनी देखें । जे गेल कानी देखे तो मा बात ही कोनी हुवे।" "ज्योत्सना बोली, "पण या बात माज क्यूकर हुय रयी है, इतना दिन हुयी "इतरा दिन में धारं प्रेम मे गेलो हुयो घूम हो।" " क्यू कोनी (६६) । ।' 'तू दगो कर, धोखो देव अजय ।" 'प्रो धोखो कोनी, ज्योत्सना, जिन्दगानी री जरूरत है। भावुकता म वैवरणो बुद्धिमानी कोनी।" 'तू म्हारी भावुक्ता रा गुटक्या लेयर बदल रयो है अजय।" 'नहीं मैं जिन्दगानी र साथै प्ररथ कासी जोय रेया ह । पण के प्रो म्हार सायं घोखो कानी ? अजय रं चर पर प्रापरी प्राख्या टिकायर बा बोगी 'प्रजय, थारी बात रे साथ चिनक म्हारी बात ने भी विचार । थारं साचे प्रेम री सोगन म म्हारो गलाई ने भी पार तू अब मने विसराय मतना म्हारी प्रानड या रे दरद ने समझ अजय रे ज्योत्सना री कवळ बाता कठे नी नागी । वा पोल्यो-तू भरम नै बडो वर रैयी है ज्यात्मना । इण उमर मार्थ घालतं पर घू घरी हुवं, पर वै वा हो। 'तो थारे भी हा। मैं कद नटयो। 'अब नट रया है नी। 'मैं नी नट यो जात्मना म्ह रो जिन्दगानी नट रैयो है । 'तू कोनी नी? 'म्हारी जिन्दगानी ई नटे । 'क्यू बापडा जिन्दगानी रो नाव बदनाम करै अजय । तू हा कर दिसा या बोल भीके" पानी बोन जणा ई तो मनै योनणोपर्ड ज्योत्सना।" 'तू पाटा कन्ढे ।" की मोचनी थकी व बोली 'मेक बात कंवू अजय, 'किणी री जिन्दगानी नै मोसणो माछचो वाम वोनी है, लबी माम लेपर वा भळं बोली 'लाग तू किणी चार मे है।" अजय बोजवानो रयो। ज्योत्सना बोलो जता इण तरियां ई प्राणं प्रापन गिरावणी हो तो प्रीत ने मैली नी करणं री ही अजय । तू प्रोत सार की नी आरग । मा अधार म राप र तू सुमी ढू लै तो देव ली जे अंक दिन प्रा थारी खुसी ही तन पटवा सू खावरण लाग जाती। प्रजय मुळक्यो पर बोल्शे मै म्हारो प्रागो-नारो भो माछी तरिया मू समझू, ज्योत्सना ।" 'क्यू बैतू सुगारथी है, निसरमो है। ज्योत्सना रो वान रो अजय पर की अमर नी हुयो । योत्सना बंठी के - ७० ही, "खोदे, वो ई पई प्रजय ! देव लीजै, साहो ही खोद रेयो है ।" चारणनूक नीम रे दरखत मार्थ चिडया री-चू री मावाज सुगीजी । अजय री निजर नीम कानी गई। अचाणचक वो चिमको, पर बीरे मूड सू निसर्यो- -बाड डीsss! ज्योत्सना लामो सास लेयर बोली, 'हा अजय बाडी ई है।" भचारणचक चिड या उडर चलोगी। यूनिसिटी लॉन मे शिरवाळा कभा मैंदी पर नीम देव रंया हा-वा कानी । ज्योत्सना प्रक मध्यमवर्गीय परिव र री लडकी ही। उप रा बापू बिहारी लाल लखनऊ में लेच्चरार हा । अजय रा बापू बुनकर हा । ज्योत्सना फिलोसॉफी डिपार्टमेट मे पढे हो, अजय साइकोलॉजी म पो एच डी करै हो । ज्योत्सना इण बरस फाईनल ईयर में ही। ज्योत्सना फार्ट-इयर मे पढली जद सूही अजय वीर नेड प्रामपो हो। बा वीर बर-बर मे कैवर्ण सू ई प्रापरो मनो बणायो हो पण माज तो वा घुद इज बदलायो । या प्रीत ने श्रीत तू परवार देख लागो । जिको अजय जात- पात नै झर बतावतो वो ई सागी अजय प्राज प्रापरो उरिणगरा प्रापर समाज मे देस लागो । स्पात चो कठेऊ ई उड कम्यो हो । ज्योत्सना बीन प्रापर उणियार री बात भी बनाई वो मेक नी मानी । ज्योत्सना री बात रोबी पर रत्ती भर असर नी हुयो । वो बीन प्रध्धर में छोड दीनी । जद अजय प्रापर ई समाज मे अक व्यापारी अमीलाल री बेटी रोता सू व्याव रचायो तो वा घायल सरपणी रो दाई फुफकारी पण वीरो बस नी चाल्यो । प्रापर वापूर इज्जत रे किंवाडा मे का हुघर वा बोलबाली रेयगी । बीन लाग्यो जाणं, वा म धारै सू काठी ढकी नगी है । प्रापर स्टेडी रूम में बैठी वा मन मसोस र रंगी । तर-तर रा विचार दीमाग माप निरबो कर या आज या बेटी भविम ने मोस। 30 पी करयां पर्छ अजय यूशिवालिटी में ई ले चरार लागग्यो । ज्योत्सना इण साल पी एच डी सारू प्रापरो रजिस्ट्रेसन करवायो । यूनिव- मिटी मे कदे-कदास आता-जाता व मिल जावता तो माभूनी 'हैलो' हुय जावती। पोरसा प्रापरी निजर या मू बी कानी देखती तो अजय ने लागतो के ज्योत्सना - . प्रय भी बीकानी देस। भटक्यो अजय रे मन मे भरम ।। या दुखी रीता र ऊची-ऊची जगा जावणं पर धीरं सुछ द सुभाव सूजय रो रूग-रूग दरद करे । बीन यार ठंरीता रो जायणो दर पसद कोनो पण फेर भी वो रीता ने की नी । जद रोता वीने दकियानूस बताव तो नी जाणं वो क्यू चुप हुय जावं ।" रोता रा सबध बघता ई जावं हा । लारल दिनां सुगरा मे प्राई के पर तो वोरी मिनिस्टरा ताई में भी वूझ हुवं लागी। रीता पापरा ई काम काढतो, मंडी बात नी हो, मजय सारू भी था जता करती। अजय रो इतरो वेगो रीडर वण जावणो डिपार्टमेंट में सास अचम्भ माळी वात कोनी ही । रीता अजय ने प्रोफेसर यणावण सारू प्रापर तन-मन मू जतन कर ही। अजय जद-बद भापरो उणियारा रीता मे देखतो तो नी जाणे वो क्यू नी बोलतो। रीता रा अंक इजीनियर फेड बीन फर्स्ट क्लास वगलो वणाय र दियो हो । अजय रोता र साथ इणी म.य वै । सुष्यो है, लारलं की दिना सू अजय नं वो बगलो सावरण ने प्रावं लागो । रोता री हस्ता बघगी। अवै ज्योत्सना वीरी छाती चढे लागी। व दिन अजय यूनिवासिटी लॉन म ज्योत्मना ने 'हैना' कर परो रोकी। कनै पाया पछ बी मू की नी बोल्पो गयो। जद ज्यात्सना रो बाली सुरणोजी तो वो बोल्यो, 'ज्यात्सना, जे कोई प्रादमी गेलो भूल जावे तो बी ने सिजा मिल?" ज्योत्सना मुळगी पर बोली, 'मिलं ।" काई ?" मौत।" .. ज्योत्सना यर गम्भीर हुयगी। प्रनय रे मूडै मू निमर्यो इतरी परडी सिजा 'उमरबंद।" "मन मा इज चाहिज ।" "चाहिज सो ई मिल मेली है, अजय किणी न देवणे री दरकार ई कोनी।"

अजय गम री धूट गिटी पर बोल्यो, "बडो जी अमूज ज्योत्सना, मन प्रव........!" पण मन अब रोसनी माछी नी लाग।" 'मैं उकतायोजग्यो, ज्योत्सना ।" 'तू थारी भोग प्रजय।" "पण प्रव "रीता सू पिंड छुडावरणो काई सोरो काम कोनी, बड़ी ऊ ची- ची जगा पहुबा।" अजय अतसरे गरी चोट लागी। उण रो हाथ उरण रे गाल कानी गयो । भरभरायोज्योर्ड गळे सू वो बोल्यो “इया मतना बोल, ज्योत्सना ।" " मैं घायल "पण मै डाक्टर बोती, मजम ।" ज्योत्सना कैय र मार्ग निसरगी । अजय बी कानी देखतो हो रयम्पो । दरद लिया प्रायर वो प्रापर केविन मे बैठग्यो। चाणचूक फोन री घटी वाजी । वो बिना मन सू चोगो उठायो भर बोल्यो, “हेलो।" उठी ने सू रीता री आवाज प्राई-मकिपी जरूरी काम सू मसूरी जाय रयो हू । पाप चालो तो प्रवार ई प्राज्यावो। "म्हारो मन कोनी।" 'तो मै काल भावू ली। पण तू आज मतना जा, म्हारा दोस्त घरा मासी ।" "घर म्हारा दोस्त र?" 'बासत लाग थारै दोस्तारै।" "मर थारा र?" "मैं वू . कटनी जावरणो है ।" य र बो चोगो पटर दीन्यो सर टेबल माथो लगाय र बैंठग्यो। प्रयूझ विचार अजय र माय माय तिर । पाणचूक रीता पाई। अजय ने श्ण तरिया बैठयं न देख र वा बरणावटी मचम्भो करती बोली, "अजय, काई हयो थार । सरदा तो है पजय रीता ने लाल स्पिा सू देख्यो पर बोल्यो, "म्हारं की नी हुया तू भठे करतोटो पाई है ।

"यारी परमीरान सेवण न । मेग्रेटरी साब रो मंसूरी प्रोग्राम है वं पर घाव सूसाथ चालण सारू कयो है । चालो, माध्यो रसी।" "म कोनी जादूं।" "तो में चली जावू ?" . ।' "माज धार वाई हुयग्यो, प्रजय !" "की नी हुयो।" "मैं 'यस' यह दीनी वीरो दाई इसी ?" तो जापरण.... "माई?" "उटई रंजे, मोठी पठ मतना माजे।" "तू दकियानूस है । हर बात नं गळत 'मंगल' सू सोचणो सरु कर देव । मैं कंबू सार्थ चालो, उठो।" अजय उठग्यो । रीता र सार्थ घरा प्रायो, गाभा बदरया पर अटेची माय जरूरी सामान जचाय र वीर साग हुयम्यो । गेल मे चीन ज्योत्सना मिली ही। 'हैलो !" 'बधाई हो।" "मापन भी।" ज्योत्सना पर मजय प्राप प्रापरी बधाई माय देखे । क बरणे, मेक टूट । ज्योत्सना कवं, 'वेटो हुपो है, मिठाई भी नहीं !" "वो म्हारो बेटो कोनी, ज्योत्सना । रोता रो बेटो है -रोता .... रो... बेटो! "रीता रो बेटो!!!" "हा ज्योत्सना । तू कोई दूनी बात कर।" "मंडी काई बात है "मै उप मूलायदो यग्यो हू ।" "पण बा थारे सूक्द पलायदो हुवरण माळी है। अजय, थार जंडी पादमी बीनै दूजी नी मिलणं रो।" "भलाई मतना मिलो।" " (७४) ज्योत्सना लामो सांस लेपर छोडती पकी बोली, "लुगाई पातळ हवं अजय, सोग सा पर बगा देव।" "ना ज्योत्सना, सुगाई-लुगाई इज हुने ।" "तो फेर प्रादमी गळो रो कुतो हुवती हुसो....!" "पारी बात सही है, ज्योत्सना । प्राक्षमी न माप उणिपार न समभणो पडसी।" "समझो तो मय सुगाई नं पडसी नहीं था दोगला प्रादम्यो र हापा हैरान हरती रवली पर हवती रचली अजय, मठ मन्त नी पायलो।" "पण रोता भी तो लुगाई है, ज्योत्सना..... बी सारू भी तो........" ज्योत्सना र धरै माय झेप घदगी। अजय वात बदलतो बोल्यो, "हां मापर लेक्चरार बपने रो मन मुसो है।" "मर मने प्रापरं बेटो हुवर्ण री।" ज्योत्सना र अजय ने परसाय र माग निसरगी। पजय जण कानी देख 00 प्रब को प्रेमलो हुपम्पो । ममूरी पाळी पटणा मू यो भोत दुग्पो हो । छेवर वो रोता ने बह दीन्या "रीता, प्रादमी सांसर कोनी हुवे।" "पण मादमी भी हुवे नी ! मैं तो माज ताई भादमो कोनी देख्यो । प्रजग, 'मेरीज' रो मतलब विमेन स्लिव पर'इमरजेन्सी' नी हुये । माप ई मतावो,मादमी पसार भाज? "में नी भाजू।" "आप नी भाजो ! के ज्योत्सना प्रापरा ताल्लुकात नी हा ? के पाप म्हारे साथ ब्याय नी वरपो !! माजादी भोगणियं प्रादमी ने लुगाई ने भी प्राजादी भोगण देगी पडसी । ..... किती बेजा बात है के प्रादमी पाप करें तो पाइयो पर लुगाई करें तो माडt !!! समाज मे ये दोनू रेवे, अजय ! मिनस रोप्रा के मुरखदाई है ?.... में में प्रादमी पर सौ बर थू कू , अजय ! ब्याव रो मतलव लुगाई सारू जेळ नी हुवे । ......प्रादमी पर लुगाई दोनू समाज रा प्रग है । क खुल्लो घरो पर दूजो भूखा मरं, मा भी हुप सकं !!! जिको प्रादमी पा सोचं वो फगत भापर सुख री ई सर-तर कर जिणन पर लुगाई वरदास्त नी करली । . अजय . फगा प्रादमी ई लुगाई ने 'प्रामानित' कर अर सुख भोग । लुगाई र मुख माय बुस रापणियो यादमी ......

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कायर है, जुलमी है डरपोक है .. मूरस है ।
प्रजय रीता सू मपमानित हुयो।
प्रबो प्रापन 'इजी फोर' कर हो । स्यात अट उण र काळज में ज्योत्सन
सारू क ई जमा वर्ण हो । मेक दिन वो ज्योत्सना सू मिम्यो पर क्यो,
त्सना, जिन्दगानी रो उणियारो मादमी खुद है । समाज भोत बैंकया है । पिछम
कादो इतरा लागग्यो है के अवै तो सकल ई पिछागनी मे को प्रावनी । म
थारं माय अपणेस लखाये ।'
'मा थारो बैम है, अजय ।"
'वैम दूर करणो चाहिजे नी, ज्योत्सना ! मन माफी दे दे।'
"दड बिना नी।"
'वता, काई दड देसी?"
"अग्निप्रवेस।
'मैं जळ जासू नी ।"
"इयां तपीजं कोनो।"
ज्योत्सना कयर माग निसरगी । यूनिवर्सिटी लॉन मे माज भी पलायदा
कमा मैंदो पर नीम वा कानो देखें । दोनुवा रे बीच दूरी है।
कोही क्न ई भापरो घर बणावं । राई-राई रेत मुहई सू लायर बार
नाख । रेत रो दिग । प्रादमी रो पीठ है-इण कानी ।
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बी. एल. मालो प्रशांत
गाव लक्ष्मण गढ (सी हर)
शिक्षा : एम ए (प्रयंगास्त्र) एलएल.बी.
प्रकाशित पोध्या:
किली-किलो कट तो (कहाणी संग्रह)
राई-राई रेत
मिनखरा खोज
(उपन्यास)
माटी स मजाक
(निबन्ध)
बोलता प्राखर
(नाटक)
(बाल उपन्यास)
(बाल उपन्यास)
बिलानियो दादो
कुचमादी राज
दुधिया दात
तारा छाई रात
(निबन्ध)
दसखस
(कविता सग्रह)
अनुवाद:
एलिस इन ववरलैंड
डेविड कांपरफील्ड
पिटू बाबू
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Raee Raee Ret

Author
B. L. Mali Ashanta
Title
Raee Raee Ret
File name
Raee Raee Ret
Text
OCR done
Citation
1960
Published
2011/03
Publisher
Bhumika Prakashan Jaipur
Language
Sanskrit
Pages
78
Library
Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Classification
Literature
DLI number
551443
Barcode
4990010032182.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
QDUK8LN1TCP
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