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Chhandornapingal

Bhisharidas · 2009/09

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श्रीगणाय नमः।
अथ छन्दोर्णवापिङ्गल
त्रिभङीछन्द ।।
करिवदनविमंडिताजखंडित परणपंडितज्ञानप
रोगिरिनन्दिनिनन्दनअसुरनिकन्दनसरउरचंदन कीर्ति
करीभषणमुगलक्षणवीसविचक्षणजनप्रणरक्षणपशिधर
जयजयगणनायकखलगणधायक दास सहायकबिधन
₹१॥ दण्डपाइन्छ । एकरदहेनशुभ्रशाखाबढ़िाईलंबोदर
भनिवेकतरुजोहेशुभ्रवेशको । शुंडादंडकैतवहथ्यारूहेड़
दंडयहराखतनलेशअघविधनअशेशको। मदकहौभलि
नभरतमधासारयहध्यानहींतेहिकोहढहरणकलेशको ।
दासग्रहबिजनबिचारोतिहंतापनिकोदरकरनेकोंवारोकर
पागणेशको २॥छप्पै।। श्रीविनतासुतदेखिपरमपटुताजिन्ह
कीन्हेउ। छन्दभेदप्रस्तारवरणिबातनिमनलीन्हेउ।निष्टो
द्दिष्टनिआदिरीतिबहुविधिजिनभाख्यो । जैबोचलंतज़
नायप्रथमबाचापनराख्योः । जोछन्दभुजंगप्रयातकहि
जातभयोजहँथलअभय । तिहिपिंगलनागनरेशकीसदा
जयतिजैजैतिजय ३॥ दोहा । जिनप्रकट्योजगबिबिध
छन्दनामअभिराम-॥-ताहिविष्णरथकोकरों विविकरजो
रिणाम ४ ॥ कविचे अंभिलाषाकरीसदाऐसनिकाहों

छन्द्रोणवपिङ्गल।
यन्नित्थसबठौरदिनसत्रयाहीसेवावरणाचीनि । लोभाल
ईनीचे ज्ञानहलाहलहीको अंशु अंतहै किायापचालिनिंदार
सहीकोखाति। सेनापतिदेवीकरशोभागवतीकोभषपन्नाः"
मोतीहीराहेमसौदाहासहीकोजातिकहीयपरदेचपरचय
शस्टैनाउँखगासन गधरसीतानाथकोलापानि रोहा।।
याकवित्तमंतरपरणलेत कंतहडि। दासनामकुलग्राम
कंहितामभरातिर समंडि प्राकृत भाषासंस्कृतिलखिलाह
छन्दोग्रंथ । दासकियोछन्दोरणवभाषारचिशुभपथ:७॥
पिनया ॥ दोसगुरूलघुणोद्दगनाथलिभेदनिजचरिजा
नाजानैगनागनकोफलमत्तंबरनपथारनिकोकरिजानीन
ष्टइदिष्टरु मेरुपताक़बिमर्कटिसचिनकोभरिजानीटत्ति
मौजातिसमुक्तकेंदण्डकवन्दमहोदधिसोलरिजनिः ।।
इति श्रीदासकृतछन्दोर्णवेमंगलाचरण ।
वर्णननामप्रथमस्तरंगः ।।
r: अथ गुरुलघुविचार ॥
पडफ ॥ ई ऊ आ.ये आदि स्वर वरणमिले हुएह बिंद
युक्त नौ संयुक्तपरगुरु बकखांचि अॅइ-उक कि ऐसे
घुसघे विधि कीन्होकहति अक्षरनिजोरसना बुतहिना
चि। रहलये संयुक्त बरणन्हपरेनमानिनित्यगुरुलहुलहु
गुरुकोगुरूवैबांचिाएकमत्तलहुभनिगुरु कोदुमत्तगनिया
हीमेंउदाहरण हेरिले हृदयमें यांचि.१॥ प्राकृतयथा ।। 4
रेवाहहिकान्हनावछोटि डगमगकुरातिनदेहि तैइथने
संतारिदे जोचाहहि सोलेहि २॥ दोहा । कहुँ कहुं सुकैत्रि
तुकंतमें लघुकोगुरुगनिलेत ॥ गुरुहूकोलघुप्रनंत हैं स
raaghat

oc
छन्दोणवपिङ्गला
मुझतसुमतिसंचेत ३॥ गुरुकोलघुयथा । संस्कृत इलोक।
अद्यापिनोज्झतिहर किलकालकट कम्मोविभर्तिधरणी
खलुटष्ठकेन ॥ अभोनिधिर्वहतिदुःसहवाडवाग्निमंगी
कृर्तसुकृतनः परिपालयति ४ छन्दबसंततिलकहै या
के तुकमें गुरु चाहिये लघु गुरुगनियो । लघुकोगुरुयथादेव
को | कवित्त ।। पीछेपंखांचवरवारीज्योंकीत्योसगंधवारीठा
दीवायें घायेंघनफूलनिकहारगहे । दाहिनेअतरऔरअ.
मरतमोरैलीन्हेसामहेलपेटेलाजभोजनकेथारंगहे। नितं
केनियमहितहितके विसारेदेवचित्तकेबिसारे बिसरायेस
बबारिपहें । संपाघनबीचऐसीचम्पावनवीचफूलीडारि
सीकुवैरिकुंभिलातिफूलीडारगहे ५ ॥ तिलक ॥ छन्दरूप
घनाक्षरीहयाकेतुकतमलंघुचाहियेगुरुहै सोलघुहीगनि
बो। लघुनाम ।। योहा. ॥ शंखमेरुकाहलकुसुमकरतलदण्ड
अशेख.॥ शब्दगंधवरसरपरसनामललहुकोदेख ६।। गुरु
नाम ॥ किंकिनिनपुरहारफनिकनकचौरताटंक । कोऊरो
कुण्डलबलयगोमानसगुरुबंक ७॥दुकलनाम ॥ नगनदुक
लहेभेदसोप्रथमनामगुरु जानि । निजप्रियसप्रियपरम
प्रियपियवियलघुहिवखानिsoll आदिलघुनिकलनाम तो
मरतुंमरंपत्तसरधुनचिरुचिलचिराल। पवनवलटपटआ
दिलघुविकलनूतकीमाल 151॥ आदिगुरुत्रिंकलनामः ।।
तरसमुदनिर्वान करतालोसुरपतिनन्द । नामादिगुरु
त्रिकलकोपटहतालअतचन्द १० ॥ विशनाम ॥ नारीरस
कुलभामिनीतंडवभासप्रमान ॥ नामनिलघुको जानिपु
नित्रिकलाहिटगनवखान.१०॥ दुइगुरुनाम ॥ सुनति
रसिकरसनागपनि कहिमनहरणसमान । कुन्तीप्तासु
।

छन्दोर्णबपिङ्गल रबलयकरनंदोईगुरुजान १२.० ॥ अन्तगुरुचोकलगाम ।। कमलातनकरबाहुभुज जअभरणअभिरामः ॥ गजों भरणप्रहरणअसनिचकलअंतगुरुनाम १३।। पति गजपतिअश्वपतिनायकपौनमुरारि ॥ चक्रवतीसुपयो धरों मध्यगुरूकलचारि१४ा गंडदहनबलभद्रपद नूपु रजंघापाइ । तातपितामह आदिगुरु चौकलनामसुभाइ १५॥ ॥ विप्रपंचसरपरमपद शिखरचारिलघुजाति । डगनचकलकहिचौकलहिंगजरथतुरंगपदाति १६॥॥०॥ पंचकलनाम ।।ऽऽ सुरनरिन्दउड़पति अहित दंतीदंतत लंप । मेघगगनगजआदिलघुपंचकलहिकहिप १७ पक्षिबिडालमृगेन्द्र अहि अमृतजोधलकलक्ष । बी नगरुड़कहिमध्यलघु पंचकलहिपरतक्ष १८॥ पंचकलकक्रम तेनाम । इन्द्रासनबीरोधनुष हीरोशेखर फूल । अहिपाइ कगनिक्रमहिते नामपंचकलतूल. १६ ॥ ठगनपकल चकलहिकहिठंगनषटकलहिलेखिः । ताहिछकलकेक्रम हिंतेभेदतेरहोंदेखि २० ॥ पटकलकेनामप्रतिभेद्क्रमते ॥ हरश शिसूरजशकअरु:शेषोअहिकमलाखिः । ब्रह्मकिंकिणी बंधुध्रुवधर्मशालिचरभाखि २१ ॥ अथवणगन ॥ मन य भ गण शुभचारिहैं र स ज त अगुनोचारि । मनुज कवितके प्रथमतुक कीजैइन्हें बिचारि २२॥ मतिगुरुन तिलघुभादिगुरुयादिलंघशुभदानि । महि अहिं शशि जलक्रमहिते इष्टदेवताजानि २३॥ज गुरुमध्य रो मध्य लघु स गुरु अंततलअंत । इतेअशुभगणरविअगिनि प वनखदेवकहंतः२४॥ द्विगुणबिचार ॥ मनहित यभजन ज. तहिउद रसरिपुउरअवरेखि । कवितआदिकुग्रणहिस्से

छन्दोत्रपिकला
हिंगणविचारहिदेखि:२५ जनहितअतिनीकेतक रिप
उदासमिलिमन्दारिपुउदासहीजोपर तौसबभांतिकुच
न्द:२६॥ इति श्रीदासकृतेछन्दोर्णवेगुरुलघुगणागणार
योनामद्वितीयस्तरंगाराम
अथ मात्रौप्रस्तारवर्णनम् ॥
सतकलभस्तार । सबैया ॥ढे है कलानिकोबंधवनेपहिले
बरेलधुआंदिकरोजाः। भेदबनेकोशीशकेआदिगुरू
केतरेलघुएकधरोजा औरयंथाप्रतिपंक्तिख चैवचे पीछे
गुरुलधुलेखिभरोजू। याहीविधानतेसर्वलघलगिपूरण
मत्तपथारथरोज १॥ प्राकृतेयथा ॥ पटमगुरुहेडहाणेलहुश्रा
पस्ठिवेहु । अपबुद्धियसरिसासरिसापंतीउघरियागुरु
लघू हु २ ॥ दोहा।। भयोजानिस्तारको क्रमसौदीजै
अंक्रा संख्यानष्टइदिष्ट की कीजै उदरनिर्शक३इतने कल
केभेदहें कितनोपूछैकोइ ॥ पूर्वयुगलसरिकदैजानेसं
व्याहोइ ४॥ पूर्वयुगलअंक: दिंडक ।। जैकलकोभेदकोऊपर्छ
तेतीकलाकीजैताकेपर अंकदीजैक्रमहीतेएकदोइ । एक
दोयजोरितीनलिखिली तीजेपस्तीनिदाइजोरिआगे
खेंचिलिखिजियजोह। देशपांचपीछेतीनिजोरिआगेआ
ठलिखि याहीविधिलिखेजयेकहोलोंबतावैकोइ। जितनी
कलाकेंपरजेतोअंकपरयह जानिलीजैतेतेपरप्रस्तारको
अन्तहोइ५ सप्तकलरूपेयथा ॥ १.१.१६.२४ ।।अथनष्टलक्षणं ।। दोहा ।।
इतिश्रकपरहोतभेदकहोकेहिरूप॥ उत्तरहेतयहिप्रश्न
केनष्टाच्योअहिभप ६ अंधमात्रानष्टकीअनुक्रमणी ।। दण्डकः ।।
जैकलमेंभेदपूछेतेतनीयेकलाकीजै तापैलिखिपरबगल

."
छन्दोणवपिङ्गाला :
अंकलीजिये। पछ्योअंकअन्तमेंघटाइबाकीहाथराखि
तालिखेअंकनिघटेवेरसभीजिये । जौनयामें घटेकरोता
केतरआगिलीकलालै गुरुदासबचैयोंहीफेरिकीजिये।री
तेपस्योबीतेनष्टकर्मबाकीलघुहीहै पथ्यो जिनतिनकोदे
खाइरूपदीजिये ७॥ अस्यतिलकं ॥ काहूपूछ्योसप्तकलमेंद
शोरूपकैसो ताकेप्रश्नकोअंकदशसोइकीससेघट्योबा
कीरहेग्यारहतातेरहनहीं घटे तौ आठघट्योसोतेरहती
तरकीकलालैकेगुरुभयो बाकीरहे तीनि तामेंतीनिहीं
1ऽऽ घट्यो सोपांच के तरकीकलांको लैकेगुरु
155३ भयो और रस दुहूं ओर लघुही रह्यो
55158.5510॥ अथमात्राउदिष्टलक्षणं ॥ कुण्डलिया || कहि
॥515५ ये केतेअंकपर दासरूप यहिसाज । करि
1515६ | उदिष्टताकोउतर देनकह्यो अहिराज ॥
55.७: देनकह्यो अहिराज पूर्वजुअलंककलनि
15६ पर। लघुके शीशहि शीशगुरुके ऊपरहू
55.51 तर॥ पुनिगुरुशिरको अंकजोरिके ठीकहि
Hussi:१० गहिये। अंतअंक सुघटाइब बाकीसो
।।। ११: कहिये ८॥ ॥ अस्यतिलक । सप्त
S15। १२ कलमें यहरूपलिखिपूछयोजोकौनसोहै।
1151:१३ ताकेपरअंकदियोहै: गुरुकेशिर तीनिश्री
ISS||१४ आठपखो-सो ग्यारह. इक्कीसमें घट्यो
SIS।। १५ बाकीदशयोभेदहै।। प्रथमात्रामेरुलक्षण ॥ दोहा।।
mms|| १६ कितेएक गुरुयुक्त हैं कितेहैं ति गुरुयुक्तः।
Ess।१७ ताकोउत्तरभेरुकरि देहुअहीपति उक्तः।
HIS||१८ अनुमणी चौपाईदैकोठादोहरोलिखिलीज।
१२३८२१
15.SI

--
छन्दोर्णवपिङ्गल।
isingतातरदोहरोतीनठवीजातातरदोहोचा
sim२० रिबनायो। ओजितचाहोतितोबढायो १०
m२ कोठनिआदिविषमजोपैये। एकैएकआंक
लिखिये | समकोठनिकी आदि जोपरो विौतिचारि
यहिकमतभरो ११ पंक्तिअन्त इकइकलिखिआवो। तब
षष्ठमात्रामारीतनभरिबोचितलांवों । शिरअंके
तेसुशिरपरअंकोजोरिभरहुक्रमतेनि
रशके १२पहिलोकोठदुकलंकीजाने।
२१.
द्वितियधिकलकीवातत्रखाने । यहि
विधिकरै भेदसवजाहिर । चहहुतो
३. ४.३ जाहुअंकदैवाहिर ॥ छठयेचारिकोष्ठ
3.६.५१ जोपर। सप्तकलहिउलटैउद्धरै ।। सब
४१०६.१ लहएकएकगरुबहै । दशढुंगचारि
त्रिगुरुयुतरहै १३सबलहुअंतअंके अहिंउक्त। चलिगति
बामकहोगुरुयुक्त ॥ यहिविधिकरीजितेकोचहो । सकल
जोरिसंख्याइगहो १४॥ पताका ।।दोहा। कह्योजितेगुरुयुक्त
तुम तेहैंकिहिकिहिठौर। उतरहेतइहिप्रश्नकरचे पताका
डऔर १५ ॥ पताकाकी अनुक्रमणी |जैकलंकीपताकजियलायो ।
खण्डमेरुताकोअलगायो । ताहीसंख्याकोठाकरिये।
नामपताकापतिीखरिये। अरिख ॥ परुबंजअलसरिअंक
भिन्नलिखिदेखिये। अन्तंअंकइतन्तकोठतेहिरेखिये॥
तामहिंक्रमतेइकइकअङ्कघटाइये । वाढिगअधतेदुतिय
प्रतिलिखिजाइये। तृतियपंक्ति में है है जोरिकमीकरों।
चौथेपंक्तिमेतीनितीनिचित धरोग। इनभांतिनं प्रतिपं
क्लिएकबढिोंकज। घटेपताकारूपलिखोनिरशंकजू १६
2.

1550 छन्दोर्णवापिङ्गल। & दो० ॥ गणनाहोइनहीनकमायोअङ्कनआउ । करिप ताकप्रस्तारमेंसबगुरुयुक्तदेखाउ १७ वैकितीनिगुरुयुत पताकाप्रस्तारं ॥ 15.5.३. ४ : १०६ 1.1515.५ १३/८२१० 1515६ २५१३१ 5.1।15७ ४.६/१६, २ 8...(७/१ 1515। ११ S।। १२ 5511१४ ११/२० ।। १५ १२ १३ '5'51 १७ २१ १०/१६.५ ८ ४ १५ निजोलिखोचहौइकठौर। सिखिपताकप्रस्तारबिधिजा नाऔरोऔर १०।कुण्डलिया। सबलघुसबगुरुलिखिठयो प्रथमभेदइहिभांति। पहिलेगुरुतरलघुकरहिपनिकरिस रिसैपांति। पुनिकरिसरिसैपांतिउलटिलघुतरगुरुलिखि कैतजिमआयोगुरुआदिदासइहिरीतिहिसिखिकै । इकइ कगुरुइहिभांतिआदिदिशिल्यावहितबलहु।जबलगिस बगुरुआदिपरैआगेकरिसबलहु १६ सप्तकलभेडेगुरुयु क्तकोप्रस्तारजाकीसंख्यापताकाकेदशकोठे मेंहै।। बोहा ॥

छन्दोणवपिङ्गल।
पताकाहिकोदेखिकैयामेंदीजैअंकः। उद्दिष्टोप्रस्तारमका
जैसहीनिशंकर ॥इतिपताकाप्रस्तार]] अथमर्कटोलक्षण ||गीतिकाय
हपंक्तिकोठनिचिकैप्रतिपंक्तिकोचितुदीजियो तहत्ति
भेदरुमात्रवर्णसोलघुगुरूलिखिलीजिये॥तिनादिको
ठनिएकएकनिठानिगुरुढिगसनहै। पुनित्तिकोठदुआ
दिगनतीभरीघटियनऊनहै २१ लखिभेदपंक्तिविचारि
भरियेपूर्वजुअलैअंकही। करित्तिभेदहिगुननपुरवंहु
मात्रपंक्तिनिशंकही । लघुपंक्तिएकजुअंकलागुरुपंक्तिमें
लिखिलेहुज । तेहिमात्रपंक्तिघटाइबाकीवर्णमेधरिदेहु
जू ॥ सोइबर्णपंक्ति मेंघटैलघुपंक्तिलिखिआनिये । ते
हिआनिकैगुरुपंक्तिमेंघटनावहफिरिठानिये ॥ प्रस्तार
वृत्ति १.२३४५६ प्रति जो भेदमात्रा
भेद | १२|३.५
८१३ लघुगुरूंकी ठीकहै।
मात्रा ३/४/६/२०४०
तेहित्तिकोठनिसं
७/१५/३०/५८
अलीकहै२२॥ मर्कटो
लघु १/२५/१०/२०३८
जाल ॥ दोहा । किते में
गुरु ०१/२५
भेदगुरुअन्त । इहिपूछेप्रस्तारमें सूचीबरणसन्त २३
जितेअंकपरअन्त है तापाछेलघुअन्त । तापाछेकोम
न्तलहि गुरुअन्तहिकहितन्त २४ ॥ इति श्रीदासकृते
छन्दोणवेमात्राप्रस्तारे नष्टउद्दिष्टेमेरुमर्कटीपताकासूची
वर्णनंनामतृतीयस्तरंगः३॥
वर्ण १
गमर्कटजाल कहत
१२५ | 3.०२० दलघुअंत है किते

छन्दोर्णवपिङ्गल।
- दोहा ॥ जितनेमात्रा भेदमें प्रस्तारहिपरकार । तित
नोवर्णहुमेंकियो अहिनायकबिस्तार १ ॥ अथयण प्रस्तारको
अनुकमणी ॥ विजया ॥ आदिकोभेदसबैगुरु कैपुनिभेदबढेवे
किरीतिरचै । आदिगुरूकेतरेलिखिकैलघु आगेयथाप्र
तिपंक्तिखचै ॥ पाछेगुरूहिसोपूरणवर्णकसर्वलघलगियों
हीनचै । ऐसेपथारुकैदाइसोदूनोईदूनोकेवर्णकीसंख्या
सचै २॥ अथयणसंख्यायथा ॥ १४६९६३ ॥ इतिपंचपर्णसंख्या ॥अथनष्ट
लक्षण ॥ दोहा ॥ पूछेअंकहिअर्धकरिसमायेलघुजानि ।
विषमेंइकदैअर्धकरिगुरुलिखिपूरणठानि ३ पन्द्रहोंभेद
पूछ्यो सोपन्द्रहाधोनहींहैसक्ता एकमिलाइसोरहका
आधोकियाएकगुरुलिख्यो बाकीरहेआठ ताकोआधो
चारिपरेपस्यो लघुलिख्यो दोइकोआधोएकपरेपस्योल
धुलिख्योएकमेंएकमिलाइ आधोकियोगुरुलिख्यो।
पासबमिलाइ ॥ अथवर्णउद्दिष्टलक्षण दोहालिखिपूछेपरएकवे
दूनदूनलिखिलेहि । लघुशिरअंकनिजोरिकएकमिलैक
हिदेहि ४॥
॥ अथवर्णमेरुलक्षण | कुण्डलिया ॥ शिरपर
कोठोदोइतल तीनितासुतलचारि । अक्षरमेरुबढ़ाइयों
जतप्रस्तारनिहारिः ॥ जतप्रस्तारनिहारिपांतिकीआदि
हुअन्तहु । एकएकलिखिजाहुकह्योपन्नगभगवन्तहु ।।
गनिदैहेगुरुयुक्तसकलजियकरहुनखरको । सूनेकोठनि
भरहुजोरिद्वैिशिरपरको.५ ॥ अथवर्णपताकालक्षण ॥ दोहा ।।।
कोष्टपताकाकोकरहिखण्डमेरुकीसाखि । ताकेशिरधर
एकते दूनोदूनोराखि ६॥ दण्डक ॥ दुनोअंकराखिखरी
पांतिनलिखनलागेएक.लेतीनितीनिहलैपांचरेखिये ।
याहीक्रम उपजित अंकनिसोंआगे आगेजोरिजोरिखरी
४८१६
SIS

१ ३ १ १२ छन्दोर्णवपिङ्गल। पांति लिखि १.११ नविशेखिये। १२.१२ एकपांतिभरि दूजीपांतिवहै गीतिकरि आ. १५ १० १०५.१५ योअंकछोड़ि ।१६/१५ २० १५ ६६|| ताके आगे हैं दिलेखिये। क्रमटूटेएकैभलोचलतहिआगेहूँढि दासऐसे बरणपताकापरेपेखिये ७ ॥ दोहा ॥ बरणमत्तकोएकही हैपताकप्रस्तार । वाहीरूपनिपरधरोयाकोनामउदार अथवर्णमर्कटीलक्षण ॥ दण्डक षट्पांतिलिखिपहलीयेगनती येभरो दूजीपांतिद्वैतेदूनोदूनो अंकधरिदेहु । दुहुन सों पंचवर्णपताका ॥ १५१०१० ५.१ ।।।55 ८ 11515१२ १/२४८१६/३२.151151 ३/६१२२४... 5115 १५. ५७१४२ 1155। २० 8/१०१५/३० 1515। २२ १७११२०३१ SI151.२३ १३२२ 155२६ १८२३ s।5।।२७ १९२६ 551||२६ २१२७ पंचकलमें हेगुरुयुक्त को २५/२६ प्रस्तार " ॥ छन्दोर्णवपिङ्गल। १३ गुनिगुनिचौथीपांतिभरिताको आधो आधो पांचीचठी त्ति १२/३ ४ ५ ६।। पांतिनको भरि भेद १२३५ ८ | १३|| देहु ॥ चौथीपां चीपांतिनके मात्रा १४ ६/२०४० ७८ वर्णः |१|३७/१५/३०५८ ङ्कनकोजोरिजो रितीजी पांति लघ १.२५/१०/२०|३८ रीतीहोय पूरण गुरु ०१/२ ५.३०२० / बहै करि देहु । वृत्तिभेदमात्रधरणलघुगुरुपूछैदास ताकेागेवरणमर कटीयेधरिदेहु ॥ दोहा ॥ जिते भेदपरअन्तहै तााधो गुरुअन्त । तितनाईलघुअन्तहैअक्षरसूचीसन्त १० नष्टउदिष्टपताकहै मत्ताहकीभांति । समझिलीजिये सुमतिसजि अक्षरसंख्यापांति ११॥ इतिश्रीदासकृते छन्दोणवे नष्टउद्दिष्टमेरुम टीपताकामचीवर्णनंनामच तुर्थस्तरंगः ४॥ दोहा॥ चारिचरण चहुँकेबरणमत्तहोहिंयकरूप । वृत्त छन्दतहिलगिरच्यो प्रस्तारनिअहिभूप १ यदपिवर्ण प्रस्तारमेंसकलत्तिकोबोध। तदपिमत्तप्रस्तारहूसकल मिलैअविरोध २ ॥ छ ।मत्तछन्दकीरीतिदासबहुमां तिप्रकासे । आदिअन्तकलदुकलबढ़ेदुजोनहिंभासै ॥ चास्योतकसमकलनिपरहियहनेमनिवाहिय । कहुँगुरु थलहैलधुदियहुनहिंभ्रमगतिचाहिय ॥ बिनगनेहोत पूरणकलाजतिगतिकबिबाणीहवस । यहजानिनागना यककह्योजिहाजानेछन्दरस ३ ॥दोहा ॥ दुकलतिकल

१४
छन्दोर्णवपिङ्गल।
चौकलयकल छकलनिरखिप्रस्तार । क्रमतबरगतदास
तह उत्तिछन्दविस्तार ४ मत्तछन्दमेंशत्तिहू दरशावनइ
हिहेन । बहुछन्दनकीगतिमिले एकसुकबिंगनिलेत ५
नेमगह्योयहदासकरि हरिहरगुरुहिप्रणाम । उदाहरण
केअन्नमें परेछन्दकोनाम ६ बैंकलके भेदमें जानोश्री
मधुछन्द। महीमारअरुकमलये तीनित्रिकलकेवन्द७॥
श्रीछन्द ॥ जैहैश्रीकी ॥ मधुछन्द ॥ तियजियवघुमधु ८ ॥
महीछन्द ।। रमासमानहींमहीं ॥ सारछन्द ॥ ऐनिननिचारु
सारु । कमलकृन्द : चरणवरणअमल कमल ॥ भथचारि
मात्राकेछन्द ॥ दोहा । चारिमत्तप्रस्तार में पांचत्तिनिरधा
रिकामारपनिनरिन्दअरु मन्दरहरिहिविचारि. १०
कामाछन्द ।। रामैनामैयामैकामै ११॥ रमणोछन्द ॥ धरणी
बरणीरमणीरमनो. १२. ॥ नरिन्दछन्द ॥ सम्हारुसवारुप
रिन्दनरिन्द १३ ॥ मन्दरछन्द ॥ ध्यावतल्यावतचन्दरम
न्दर १४ ॥ हरिहन्द ।। जगमहिंसुखनहिंमतजिहरिभ
जि १५ ॥ पंचमात्राप्रस्तारकेछन्द । सोरठा ॥ पञ्चमत्तप्रस्तार
आठभेदयुतहरिप्रिया। तरणजारुपंचारवीरबुद्धिनिशिय
मकशशि १६ ॥शशिछन्दामहीमेंसहीमेंयशीसे शशीसे १७
प्रियाछन्द ॥ हैखरीपत्थरीतोहियारीप्रिया १८ ॥तरणिशाचन्द ।।
उरधरोपुरुषसोवरणिज़ातरणिजा १६ ॥ पंचालछन्द ।। ना
चतगावतदैतालपञ्चाल २० ॥ वीरछन्द ॥ हरुपीरअरु
भीरवरधीररघबीर २१ ॥ बुदिछन्द ॥ भ्रमैतजिहरैभजि
करैसुविधाबुद्धि २२ ॥ निशिछन्द ॥ सुख्यलहिदुख्यदहि
भानिरिसियाहिनिशि २३ ॥ यमकछन्द ॥ श्रुतिकहहिहरि
जनहिछुवतनहिंयमकवहिं २४ ॥ छमात्राकेछन्दः ॥ दोहा ।।

।
छन्दोर्णवपिङ्गल।
१५
तालीरमानगन्निका जानिकलाकरताहि । मद्राधारी
वाक्यंअरु कृष्णनायकोचाहि २५ हरअरुबिष्णुमदन
गनो अधिकोहोतनमित्त । षटकलतेरहभेदके प्रकट
तेरहोटत्त २६ ॥ तालोच्छन्द ॥ न चैहैशम्भूपैवेतालीदैताली
२७ ॥ रमाछन्द ॥ जगमाहींसुखनाहींतजिकामैभजिरामै
२८. ॥ गगनिकाछन्द ।। प्रसिद्धहोंअघनिकानसिहहोंनग
निका २६ ॥ कलाछन्द ॥ धीरगहोआजुल होनन्दलला
कामकला ३० ॥ करताछन्द ॥ महिधरताजगभरतादुख
हरतासुखकरता ३१. ॥ मुद्राछन्द ॥ भजैरामसरैकामन
छापाहिनमुद्राहि ३२ ॥ धारीछन्द ॥ दानवारिचित्तधारि
पापझारिकोशधारि ३३॥ वाक्यछन्द ॥ जगतनाथगहत
हाथशरणताक्यकहतवाक्य ३४ ॥ कृष्णछन्द ॥ छां हठ
एरेशठतृष्णैनजिकृष्णैभजि ३५ ॥ मायकछन्द ॥ सुखका
रनदुखटारनसवलायकरघुनायक ३६॥ हरछन्द ॥ जर्ग
जननिदुखीजननिकृपाकरहिव्यथाहरहि३७॥ विष्णुछन्द ।।
दासजगतझूठलगतयाहितजहिबिष्णुभजहि ३८ ॥
मदनकछन्दः ॥ तरुणिचरणअरुणवरणहृदयहरणमदनक
रण ३६ ॥सातमात्राप्रस्तारकेछन्द ।। दोहा । सातमत्तप्रस्तारको
शुभगतिजानोछन्द । दृतियकीसप्रस्तारहै चारिभांति
गतिबन्द ४० ॥ शुभगतिछन्द ।। कृपासिन्धोदीनबन्धोसर्व
सुरपतिदेहिशुभगति ४१॥ पुनःप्रभाधिशाल ॥ लालगोपाल
यशुमतिनन्दआनंदकन्द ४२॥ पुनः ॥ खलैघायकसर्व
लायककंसमारणजनउधारण ४३॥ पुनः ॥ दुखकोहरो
सुखविस्तरोबाधाकदनकरुणासदन ४४॥ आठमात्राकेछन्द ।
दोहा ॥ आठमत्तप्रस्तारकेतिनादिकउनमानि । सहित

१६
नुभारी। ठानेपियारी ॥ सोतसुखारी। होतीमहारी ५६
छन्दोर्णवापिङ्गला
हसमधुभारगतिचौतिसरतिबखानि ४५ ॥ लक्षणप्रतिदछ ।
कोंकों।तिर्नोब!॥ भागनुकरना। हंसबरंना ॥ नवहि
प्रशंसा कहिचोवसााहिजबरभासनाकहतसंवासन ॥ न
गननगवती कहियमधुमती ४६॥ तिन्छन्दाधर्मज्ञातानि
भयदाता|तृष्णाहिन्नोजीबैतिन्नो ४७॥इसछन्द ॥पोखर
जोऊादीहकितोऊजातनके हाहंसलटेंहू ४८॥चौबसाछन्दः ।।
उपजेपुत्ता। सुलगनजुत्ता। जगअवतंसाचिरचउबंसा॥
४६॥ सवासनछन्द ।। सुनहुबलाहकाहुजियतनाहकविरषि
हुतासनाअपयशवासन ५० ॥ मधुमतीछन्दः ।। तपनिकस
तहोधिरिकाशिरहो। बिमलबनलती।सुरभिमधुमती॥
५१॥ लक्षण' ॥ दोहा ॥बिप्रजगनकरहंतहैवाहीगतिमधुभा
र।छबित्रिपंचजतिजानिये आठमत्तप्रस्तार ५२ ।। कर
हंतछन्द ॥ यशुमतिकिशोर शशिजिमिचकोर ॥ मममुख
: लखन्त । यकटकरहन्तं ॥ मधुभारछन्दः । दक्षिणसमीर
अतिकृशशरीर। हुअमन्दभाइ। मधुभारपाइ५३ ॥छवि
छन्द ॥ मिलिहिकिमिभोर । तकतशशिओर ॥ थकित
सोविशेखि । बदनछबिदेखि ५४ ॥ अधनौमात्राचन्दादोहा।।
नौमत्ताकीअमितगतिपचपनबित्तबिचारि । कर्णपगन
- हारीगनोतसबसुमतीनिहारि ५५ ॥ हारी छन्द ॥ तोमा
बसुमती छन्द ॥ सोशुभ्रशशिलो। जोदानअसिसो ॥ सा
जैवसुमती । सारीबसुमती.५७ ॥ अथ दशमात्रा के छन्द ।।
दोहा ॥ दशमत्ताकेछन्दमें उत्तनवासीहोय । संमोहादि
कगतिनसँग बरगतहसबंकोय ५६ ॥ सोरठा ॥ संमोहा
गुरुपांच कहिकुमारललितानसँग । तयगनमध्यावांच

छन्दोर्णवपिङ्गल।
१७
तुंगाद्विजसँगभासंगहु ५६ ॥ समेहाछन्द ॥ ह्योचाहोस
न्ता । जोमेरोकन्ता ॥ तोभंजोकोहा। लोभासंमोहा६०
कुमारललिताछन्द ॥ जुराधहिमिलावै । वहेमोहिंजियावै ॥
कहतभरिउसासों । कुमारललितासों ६१ ।। मध्याचन्द ।।
तौलोंविधिजामै । लज्जाअरुकामै ॥ बांटोयहसोई।
मध्याकुचदोई ६२॥ तुंगछन्द ॥ अम्बरछबिछाजै । मुक्त
अवलिराजै ॥ मेरुशिखरनीके । तुंगउरजतीके ६३ ॥
तुंगाछन्द ॥ तुबमुखशशिऐसो। निरखतजेहिशेसो॥छ
किरहुहगुंगा। सुनहिउरजतुंगा६४ ॥ दोहा ॥ हिजबरज
गकमलहिरचो द्विजगोकमलाहि ॥ त्योरतिपदसंगना
तहै दीपकलातेचाहि ६५ ॥ कमखयथा ॥ पियचषचकोर
है। तियनयनभोरहै ॥ बिधुवदनबालको । कमलमुख
लालको ६६ ॥ कमलाछन्द ॥ कबअँखियनलखिहाँ। अरु
भुजभरिरखिहो ॥ शशिधरबिमलकला । हृदयकमल
कमला ६७ ॥ रतिपदयथा ॥ युवतिवहबरतितो । उरते
यहटरतिजो ॥ हरनिहियदरदकी । सुरतिपदपदुमकी
६८ ॥ पोषकछन्द ॥ जयजयतिजगबन्द । मुनिकौमुदीच
न्द ॥ त्रैलोक्यअवनीप। दशरथकुलदीप६६ ॥ ग्यारह
फलाकेछन्दः ।। दोहा ॥ ग्यारहकलमेएकसै चौवालिसगनि
वृत्त ॥ तहँअहीरलीलाअपर हसमालगनिमित्त ७०
सोरठा ॥ जातअहीरकहत रातप्रकटिलीलाभनो । सग
योग्यारहमत छन्दहंसमालागनो ७१ ॥ अहोरछन्र ।।
कौतुकसुनहुनबीर । न्हानर्धेसीतियनीर ।। चीरधखोल
खितीर । लैभजिगयोअहीर ७२॥ लीबाछन्द ॥ धन्यय
शोदाकही । नन्दबड़ेभागही ॥ ईश्वरहे जाघरै। अद्भुत
।
॥
३.

छन्दोणवपिङ्गल।
लीलाकरे ७३ ।। हंसमालाछन्द ॥ इहिअरण्यमाहीं । सर
मानुष्यनाहीं ॥ विकसेकंजआला । कुरै,समाला ७४
बारहमात्राकेछन्द ॥ दोहा ॥ बारहमत्ताछन्दगति बरण्योग
मितफणीश ॥ होतकियेप्रस्तारहै वृत्तदुसतेंतीस ७५
लक्षणप्रतिदल ॥ तीनोंकन शेषा । मोसोंगोमदलेषा॥ चित्र
पदाभभको। ननमहियुक्ताब! ७६ रोनसोहिहरमुख
ज्यों । अमृतगतिहिजभसत्यों । नयसहिसारंगियहो।
दशलहुगुरुदमनकहो ७७ ॥ शेपाछन्द ॥ ताकोजीमध्या
ऊँ। ताहीकोहोंगाऊँ । पीरोजाकेकेशा । कंठेजाकेशेशा
७८ ॥ मदलेनाछन्द ॥ मिथ्यावादनकोहा । निर्लज्जाअरु
मोहा ॥ जेतोऔगुणदेखो । तेतोमेंमदलेखो ७६ ॥ चित्र
यहाछन्द ॥ रामकह्योनिजधोखे । स्वर्गलह्योतिनचोखे ॥
भक्तानकोनविचारो। चित्रपदारथचारो ८० ॥ युक्ताछन्द।।
हुगयुगमनकोमोहै। तिनसँगपुतरीसोहै । लखियहउप
मायुक्ता । कमलनमरसंयुक्ता ८१ ॥ हरमुखछन्द ॥ धन्यज
न्मनिजकहती। प्राणवारतहिरहती ॥ देखिग्वारिलहि
सुखको । मैंनगर्वहरमुखको ८२॥ अमृतगतिछंद ॥ फिरि
फिरिलावतछतिया । लखतरहैदिनरतिया ॥ तुमजुलि
खीवहिपतिया । अमृतगतीमृदुवतिया ८३ ॥ सारंगिया
छन्द ॥ धनिधनिताहीतियको । बशकरतीजोपियको ।
मुरनिरमाहियको । करगहिसारंगियको ८४ ॥ दमनक
छन्द विषधरधरपरमप्रिया।जगतजननिसदैहिया। जय
जयजनदरदहरी ! प्रबलदनजदमनकरी ८५ ॥ दोहा ।।
गोसभगोनरक्रीड़है बिम्बनसोंयोंपर ॥ सजसीतोमर
जानियो त्यौतमोल है सूर ८६॥ मानवक्रोडायथा ॥ धन्य

छन्दोर्णवपिङ्गल।
१६
यशोदाहिकही। नन्दबड़ोभागसही॥ ईश्वरलैजाहिघरै।
मानवकोक्रीड़करै ८७॥विम्बछन्द । अमियमेंआशातेरो।
हरतवहचेतुमेरो ॥ मनहिंयहक्योंनमोहै । अधरतुववि
म्बसोहै ८८ ॥ तोमरछन्द ॥ असतीनकोशिखमानि । ति
यक्योंतजैकुलकानिः ॥ द्विजयामिनी अपवाद । कहुँको
इतोमर्याद ८६ ॥ सूरछन्दः ।। बधैिनबालानयन । श्रीपाइ
जेमोहैन । रागीनहींहमर । तेतोबड़ेहैसूर ९० ।। दोश ।।
लीलारबिकलजातयुत सजकरनोदिगईश ॥ तरलनय
नरबिलघुकला प्रस्ताखोफणईश ६१ ॥ लीलाछन्द ॥ अघ
धपुरीभागभारु।दशरथगृहछबिअगारु॥राजतजहँवि
श्वरूप । लीलातनुधरिअनूपह२॥दिगीशछन्द । बरमैंगोपा
लमांगों। पदपदुमप्रेमपागौ। हरध्यायजोअनन्दै । दि
गईशजाहिबन्दै ६३ ॥ तरलनयनछन्द ॥ कमलबदनिकन
कबरनि । दुरदगमनिहृदयहरनि॥ बड़ेहिसुकृतिमधुरब
यनि। मिलततरुणितरलनयनि ६४ ॥ तेरहकलकेछन्द ।।
दोहा । नराचिकादिकतेरहै कलकीगतिगनिलेहु ॥र
त्तिबूझिकेतीनिसे सतहत्तरकहिदेहु ६५ करनाजोरन
राचिका जोगोयमनमहर्ष ॥ रंगनरगनअरुनन्दतेहै
लक्ष्मीउत्कर्ष ६६॥ नराचिकाछन्द ॥ भौकरीकमानहैं । नै
नाप्रचण्डबानहैं ॥ रेखाशिरेजोतेंदई । नराचिकायही
भई १७॥ महपंछन्द्रः ॥ तमोरगुनीजतभाई। जवाहिरकी
गतिपाई ॥ जितोपरभूमिहिजाई । तितोइमहर्षबिकाई
१८ ॥ लक्ष्मीछन्द ॥ वेदपावैनजाअन्त । जाहिध्यासबै
सन्त ॥ ज्याइबोजक्तजातन्त । पाहिसोलक्ष्मीकन्तः॥
चौदहमाबाकेछन्द ॥ चौदहमत्ताछन्दगतिशिष्यादिक अवरे

२०
छन्दोर्णवपिङ्गल।
खि । भेदसैदशहोत,प्रस्तारोकरिदेखि १०० ॥ लक्षं
गमातेपदछन्द।। सातोगो शिष्याकीजै। वियदुजमगनसुबत्ती
है। पाइतामोभहिसंगनों। हैमनिबंधोभौमसको. १०१
तीनिभगगनगसारवती । सुमुखिदुजोभमहारवती ।न
रजगेमनोरमाकही। दुजसजगसमुद्रिकावही १०२ ॥
शिष्याछन्द ॥ मीचौवांधीजाकेही । नाहींबाच्योताकोनी ।
एरेभाईमेटेकोलिख्यासिख्यावन्ध्येजो१०३॥ मुवृतीछन्द
असितकुटिलअलकेंतेरी । उचितहरतमतिमेरी ।। यह
कतसुमहनैजीकोविरजहिउरजसुबत्तीको १०४पाइताछन्द
नयनालागेबिधुवदनी। बैरीजुटेप्रबलअनी॥ मांगोपासो
अरियअड़े । पाइत्ताहैकरमबड़े १:०५ ॥ मनियोछन्द ।।
आपहिराख्योजोनचहै। कर्मलिख्योतीपाइरहै। कर्महिं
लागैहाथसोऊ । जोमनिबांध्योगांठिकोऊ १०६॥सारवती
छन्द ॥ आवतीवाल शृंगारवती । पीनपयोधरभारवती॥
कुञ्जरमोतियहारवती। पुजप्रभादधिप्सारवती १०७॥
नमुखांछन्द ।। यहनघटाचहुँ ओरबनी। दशदिशिदौरति
हारनी॥ तजियहिअवसररूपसखी। चलिहरिपरज
नीसुमुखी १०८ ॥ मनोरमाछन्द । जवहिंबालपालकीच
दी । तबहिं अद्भुतैप्रभावढ़ी ॥ लखीदासपूर्णोपमा ।
कमल वसीमनोरमा १०६ ।। समुद्रिकाछन्द ।। हरीमनुहरि
गोकयोयही । नहिनहिनजूनहींनहीं। सुनिसुनिवतियां
मनोपिका । लखिलखिअंगुरीसमुद्रिका ११० ॥ लक्षण ।।
दोदा ॥ चारिदशैकलहाकली लमलमशुद्धगतंत ॥ संगन
भुजा_संयुता दुरविसरूपीमंतः १११ ॥ हाकलिकाछन्द ।।
परतियगुरुतियतूलगनै। परधनगरलसमानभने॥हिय
.

छन्दोर्णवपिङ्गल।
नितंरघुवरनामररै। तासुकहाकलिकाल करै ११२ ॥
शुद्धगाछन्द ।। अरीकान्हाकहांजैहै । सुतेरोदासहरैहै ॥ सि
तारालैबजावैबू । केदाराशुद्धगावैतू ११३ ॥ संयुताछन्द ।।
नहिलालकीमृदुहांसहै । मनमत्थकीयहपाशहै ॥ ध्रुव
नैनसंगनलेखिये। धनुतीरसंयुतपेखिये ११४ ॥ स्वरूपी
छन्द ॥ श्रीमनमोहनकीमरति । हैतुबसनेहकीसूरति ॥ मैं
निजमनयहअनुरूपी । तमोहनप्रेमस्वरूपी ११५ ॥
पन्द्रहमात्राकेछन्द ॥ दाहा ॥ पन्द्रहमत्ताछन्दगतिआदिचौ
पईजानि नौससत्तासीकहतवृत्तिभेदउनमानि ११६॥
लक्षण ॥ पन्द्रहकलागनौचौपई । हसीतिन्नादुजधुजठई।
तरहरिखानउपरलोकला । सकलकहत अहिपतिउज्ज्व
ला ११७ ॥ चौपाई ॥ तुवप्रसाददेख्योभरिनैन । कहीसु
नीमनभावतिन ॥ कवपरिहैमोहनगलबांह । चौपई
ठिइतनीमनमांह ११८ ॥ हंसीछन्द ॥ आईवक्षोपरिचिक
नई। छूटैलागीतनुलरिकई । लागीहांसीमनमृदुहरै।
बालाहसींगतिपगुधरै ११६ ।। उज्ज्वलाछन्द ॥ धवलजर
तपरबत्तहोतबै । अरुपयनिधिकोबरणैसबै ॥ तबहिंवि
मलहीशशिकीकला। जबनहुत्योतोजसउज्ज्वला१२०॥
दोहा । तीनितगनयकहैध्वजा हरिणीछन्दसुभाउ । ती
निरगन अहिपतिकहे महालक्ष्मीठाउ १२१ ॥ हरिणीछन्द ।।
बसैउरअन्तरनितही । मिलैकबहूँभरिअंकनही । ल
खोंसबठौरनवैनकहै । यहैहरिणीरसरीतिगहै १२२ ॥
महोलघमीछन्द ॥ शास्त्रज्ञाताबड़ोसोभनो । बुद्धिवन्तोबड़ो
सोगनो। सोइशरोसोइसन्तहै । जोमहालक्ष्मीवन्तहै
१२३ । सोरहमात्राकेछन्दः ॥ दोहा ॥ सोरहमात्रानन्दगति

२२
छन्दोर्णवपिङ्गल।
रूपचौपई लेखि । पन्द्रहसैसत्तानो जानोभेद विशेखि
१२४ ॥ रूपचौपई छन्द ॥ तुवप्रसाद देखोभरिनैनौ । कही
सनीमनभावनिवैनौ । कबपरिहमोहन गलबाहीं। चौप
ईठि इतनीमनमाही १२५ ॥ लक्षण ॥ चास्यो करना वि
द्युन्माला.। मोतीपोहै चम्पकवाला॥ कर्नासदुहै सुखमा
लसिता। तिन्नाननगो भ्रमरविलसिता ॥तिन्नानोयोस
मुकियमत्ता । कुसुमबिचित्रानयनयजत्तागोसभसोगो
हरिअनुकूले । दुजभभतामरसोगगतले॥निजभैपनेमा
लिनिनिजुमण्डी। नस्साससंगहिजियजानियचण्डीच
क्रभदुजदुजसगनहिथुलिका । ननगननगहैप्रहरनकलि
का ॥ जलोदृतगती जस जस पगनो। मनिगुनदुजपि
यदुजपियसगनो॥ऐन भागगहिस्वागतकोंछै । चन्दव
सरनभासप्रकटहवै। निजजरिपावतमालतीसदा। नभ
जरीहिपठौप्रियंबदा। रेणुरेलगहिहैरथदनो । नभसयां
हिद्भुतपाउशुद्धतो। पकअवलिभनिजोजलहीसुनि । बट
दशलघुहिअचलधृतिमनगुनि १२६ । विद्युन्मालाछन्द ।।
दूजेकोप्योवासोंभारी। नीरनाहींशृंगीधारी ॥ एरीक्यों
जीवैगीबाला। चौहानश्चेविद्युन्माला १२७॥ चम्पकमाला
छन्द ॥ देख्योवाको आननचन्दा । लुट्योप्यारे आनंद
कन्दा। आईजीकी मोहनबाला। कीजैहीकी चम्पकमा
ला १२८ ॥ सुखमायथा ॥ होतोशशिसोमान्योमनमें । जा
न्योहरिहें तापैक्षनमें । बीती सजनीबातें सुखकी। देखे
सुखमाप्यारेमुखकी १२६ ॥ भ्रमरविलसिताछन्द ॥ धीरे धीरे
डगमगधरती । रातीरातीद्युतिविस्तरती। आवै प्रावै
त्रियमदुहँसिता। आगेआगे भ्रमरविलसिता १३० ॥

छन्दोणवपिङ्गल। २३
मत्ताछन्द ॥ आयोआलींविषमबसन्ता। कैसेजीचीनिअर
नकन्ता ॥ फूलेटेसूकरिबनरत्ता। चौहाँगूंजैमधुकरमत्ता
१३१ ॥ कुसुमयिचित्रा ॥ चलनकह्योपैमोहिंडरभारी । परम
सुगन्धावहसुकुमारी । अलितहहहअधिकबिहारी।
सुमविचित्रावहफुलवारी १३२ ॥ अनुकूलछन्द ॥गोपिहु हूँ
ढाबतकतदूजा । कूबरहीकीकरहुनपूजा ॥ योगसिखा
वैमधुकरभूलो। कबरहीसोहरिअनुकूलो १३३ ॥ तोमर
छन्द ॥ तुवहगसौजननीहगतेरो । नहिंसमताहिलहैमनु
मेरो। जलचरखजपराजयसाजै । सखिनवतोमरसो
लखिलाजै १३४॥ नयमालिनीछन्द । पहिरतपादजासुशित
लाई । सखितनहोतिकम्पअधिकाई ॥ तियप्रिय स्वांग
चीन्हिवहराई।यहनयमालिनिसुमनलेआई १३५॥ घडी
यथा ॥ जयजगजननिहिमालयकन्या । जैतिजैतिज
यत्रिभुवनधन्या ॥ कलुषकुमतिमदमत्सरखण्डी। जय
तिजयतिजनतारनचण्डी १३६॥ चक्रयथा ॥ देवचतुर्भु
जचरणहपरिये । याहि बनक ममहिय थिति करिये।
शंखरुगदबियकरनिशिभरिकै। चक्रकमलत्रियकरबिच
धरिकै १३७ ।। प्रहरनकलिकाछन्द. ॥ दशरथसुतकोसुमिरन
करिये । बहुतपजपमेंभटकिनमरिये ॥ विरद बिदितहै
जिनचरणनको । प्रहरनकलिकाटनदुखगनको १३८ ।।
जलोदतिगति ॥ धनोभगरुराक्षसैकरतुहै। नरामढिगतेसही
परतहै । अगारगनवैढरेतरनितें । जलोदति गतीउठे
धरनितें १३६ ॥ मनिगुन ॥ अभिनवजलधरसमंतनल
सितं। अरुणकमलदलनैनहुलसितं ।। जयतिशरदश
शिसमबरबदन। दिनमणिकुलदिनमणिगुणसदन १४०

२४
छन्दोर्णवापिङ्गल।
स्वागता !! याहिभातितुमहूँजुखिझावै। बालबाततवक्यों
वनिश्रावै। नन्दलालमटक्योकत्रऐसे स्वागतासकरती
तुमजैसे: १४१ ॥ चदबमछन्द ॥ ऊभिश्वासलियमैदुखभ
रिक घेरिलीन्हतहँभौरनिअरिकै। औरव्योतबलिहोत
नतवहीं । चन्द्रवर्त्मबिचऊग्योजवहीं १४२ ॥ माळती
यथा ॥ सुमनलखेलतिकाअनन्तमें । सरधनकोसुखहे
वसन्तमें। मनमहमोदनभौंरकेरती खिलतिनजोलगि
मालतीलती १४३॥ प्रियंवदा ॥ नयनरेएकनजाहिकेपरें।
मरतपीरनहिंधीरसोधेरै ॥ रहतिमोदगनमेंअरीसदा ।
तियसरोजनयनीप्रियंवदारियोद्धता हैप्रभुत्वजगमध्यजो
महा । भुक्तायुक्तसुखसाततौकहा ॥रामपाइमननाहिंशुद्ध
तो। तुच्छजानिपुरुषार्थउद्दतो १४४॥ द्रुतयाछंद । जिनहि
संगसिंगरीनिशिजागे । नयनरंगजनुजाचकपागे॥ गह
रुहोतरिसतासुसँभारो। उतहि लाल द्रुतपाउँनधारो
१४५ ॥ पंकलि ॥ मोहनविरहसतावतबालहि । वाइ
वकतिनहिंजानतिहालहि।। बासरनिशिसुआवरषाव
ति। पकअवलिजहँईतहँठावति १४६ ॥ अचलधृतचन्दः ॥
कुलिशसरिसबरदशननिदरशित । परुषवचनमुखकढ़
तिकहतहित ॥ सबतोहिकहतमृदुलतनुअनुचित । ति
यतुवयुगलअचलधति उरनित १४७ ॥ पदरीलक्षण ।।
दोहा।। सोरहसोरहंचहुँचरण पगनएकदैअन्त ।। छन्दहो
तयोपदरी कह्योनागभगवन्त १४८ । यथापद्धरीछन्द ।।
नभरै निशिघनतमभयविशाल । पदअटकतकंटकदर्भ
जाल । मनसुमिरतभयभञ्जनगोपाल ॥ पद्धरिय प्रेमम
दमत्तवाल १४९ ॥ अथ सत्रहमात्रामस्तारकेछन्दः ॥दोहा॥ सत्रह

छन्दोर्णवपिङ्गल। २५
मत्ताछन्दमें धारीत्रिजयोनीक ॥ बालातिरगपचीस
सैचौरासीदेठीक १५०॥ धारीयथा ॥ मयूरपखाशिरमें
थिरकाये। सुपीतपटाउरमैउरमाये ॥ चलैमुखचन्द्रवि
लोकिकुमारी। गयेतुलसीबनगिरिधारी १५.१ ॥ बाला
यथा ॥ मोरकेपाक्षको मुकुटआला । कंठमेंसोहती मुक्तमा
ला ॥ श्यामंघनरूपतनुदृगविशाला । देखिरीदेखिगो
पालबाला १५२ ॥ अथअठारहमानाकेछंद ॥ प्रकटअठारह
मत्तकोरूपामालीहोइ। वृत्तिसुइकतालिंससैइक्यासीजि
यजोइ. १५३ नौगरुरूपामालियाअनियममालीवंस
सुयशसंगप्रतिपायमें छंदहोतकलहंस १५४ ॥ रूपामांकी
पला नेहाकावेलीबोयोंजी।छोथाल्होकैराख्योहीमें
उत्कंठापानीदेपालीहै। प्यारीजीकोरूपामालीहै. १५.५॥
मालीछन्द | मुरलीअधरमकुटशिरदीन्हेहै । कटिपटपीत
लकुटकरलीन्हेहै । कोजानैकबायोसुनिआली । उ
रतेकतनकेईवनमाली १५६॥ कलईसछंद ॥ मनवाम
शोभसरती किन्हये। मुखनयनपाणिपदपंकजईये ।।
कलधौतनूपुरनकीछबिदीसी । कलहंसचेदुअनकीभव
लीसी १५७॥ अथउनीसमाशाफैछद ॥ दोहा ।। उत्तमउनइसमत्त
मेंरतिलेखादिविचारिशतसठिसक्सठिकहतरत्तभेद
निरधारि॥ संगनइग्यारहलघुकरनरतिरेखातुकचाहि ।
गनगनगनदैकरनदैजानिइन्दुबदनाहि १५८ या रतिले
खान्द ॥ सबदेवअरुमुनिन मनतुलनितोल्यो। तवंदा
सदृढ़वचनयहप्रकटबोल्यो । इकोरमहिसकलजा
तपविशेखो। इकओरसियपतिचरणविरतिलेखो १५९॥
इन्दुधनाचन्द ॥ दोषकररंकसकलंकमंतिजोई। घाटिअरु
4.

छन्दोवपिङ्गला
बांदिपुनिमासप्रतिहोई ।। भाग अवलोकिइंहिइन्दुविच
आली। इन्दुबदनाकहतमोहिवनमाली १६० ।। अथवीस
'मायाफेछन् । योहाः ॥ होतहसगतिआदिदैछन्दनिमत्ता
बीस । दशहज़ारनौसे उपर गनोभेदयालीस-॥ बीसै
कलविननियम हंसगतिसोहै। मोभासोमोजलघरमा
लाजाहै । मोरनविप्रसाहिगजबिलसिततलुहै। हौदी
पहिदीपकिय कहतकविजनु है १६१ ॥ इंसगतियथाः।। जि
नजंघनकररूंपनियोधिनकारन । बारणकाढ़ेदन्तफिर
तदुरबारन ॥ चरणभयेहूअरुणबाजनहिआयउ । ता
सहंसगतिसीखतकिनवौसय १६२।। गजविलसितयथा ।।
नागरिकामदेवनृपकाटकप्रचलहै । भौहेकनानभालबर
तिलकसुशार है। प्रेमप्तिपाहअश्वगचपलजअतिहै।
तंबुनिजबुजानिगजबिलसितगतिह. १६३: ।। जनधरमाला
छंदः॥ चौहान वैविपुलकलापीयेरी । पीपीनोलैपपिहो
पापीबैरी॥ कैसेराविरहिनिबालाजीको । जारैका
रीजलधरमालाहीको ।। दीपकीयथा ॥ चौहोतहै
जाहिरेतोहियेड्यामः: ज्योस्वर्णसीखीमयोऐनमदनाम।
तश्यामहियवीचयोंजाहिर होतः। ज्योनीलमणिमेंलसैदी
पकीजोत:१६५ | लक्षण । विपिनतिलकोललनगनरेग
ना। गचन पियतरहिगरुप्रकटधवलहिगना। छन्दनिशि
पालकियमौनगलगौनरे। चन्द्रसबलघवरणरुद्रगुरुजो
तरे १६६|| विपिनतिलक। भुवनप्रतिरामन्नत्तिकैसकेजंगना।
अरिनबनवासलियेसंगले अंगना। जहँसत्तहँदासदमके
मनोदामिनी विपिनतिलकैसकलवैभईभामिनी १६७॥
थपळ्यथा ॥ सुरसरितजलअमल, सुचित्तमुनिवरनिको ।
...

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छन्दोर्णवपिङ्गल।
गिरिशभंगअहिअंगवसन विधिधरनिको ॥ संगलगि
रितुहिनगिरिशरदशशि नवलहै। सबउपर अधिक सिय
पतिसुयशधवल है १६८ ॥ निशिंपलियथी. ॥ लाजकुलसा
जगृहकाजविसरायके । पालगत लाल किहि जालइत
आइकै आशुचलिजाहिबलि. तासुकिनतासुके । भा
लहुअलालनिशिपालगतजासुके... १६८ ॥ चंद्रयथा ।।
कगलपरकेदलिजग तिनहिपरगिरियुगलः। तिनहिंपर
बिनहिअवलम्ब सरवलजलं । निरखिबिबिगिरिबहुरि
कम्युभेचकितमति । उपरजगमगिरह्योचन्द्रइकविमल
अति १७० ॥ रक्कीसमाचाकेछेद।। दोहा पबंगादिइकईसमें की
जैछन्दविचार । सत्रहसहसरुसातसै इग्यारहप्रस्तार।
चारिचकलइकपंचकल जानिपवंगमबंसः ॥.तीनिबेर
पियरागना छन्दहोलमनहंस १७१ ॥ प्लवंगमयथा ॥ यकको
उमलयागिरिखोदिबहावतो । तौकतदक्षिणमौनतिया
निशितावतो. ॥ ब्याकुलविरहिनिवालकखैभरिनयन
को । नितिबारहिवारपवंगमसेनको १७२ ॥ गनहंसय
था ।। वरयूथमध्यतुरंगशोभनपावई । नहिश्याममण्डल
सिंहहोसँगवावई खलसंगत्योंजियसंतकेदुःखदाँउहै ।
मनहंस के हिकांगसंगतिचाउहै १७३ ॥ अर्थ पासमात्राके
छन्दी दोहा॥ सालतीमाळा दिदैछिन्दवाइसैमत्त । भेद
अठाइससहसपर सैलत्ताव तत्त. १७४क्षण ॥ सर्वे
दोहामालतीमालासाधा मोकनॊ हि जवरप्रिथम
बाधा । द्विजवरनंदनँदनसरकर्नबानी।। जानहुवंश
पत्र भरनोभभलहुगुरुदै ॥' समदविलासिनीनिजभजे
नशंखकरहो । नलरणभागसन्तियतजान हिकोकिल

.
-
छन्दोर्णवपिङ्गल।
को ॥ मोंतोयोसौगोकरिकैमायहिपूरो । वेईवना नत्यग
तीमत्तमयूरोः १७५ ॥ माखतीमालायथा । कितीतरीभूमैहै
ज्योंकैलासा । कैलासामेजैसेशम्भकोबासा ॥ शम्भूज़
मेंगंगाजूकीधारासी । गंगाजूमें मालतीकी मालासी
१७६ ॥ असम्बाधा ॥रात्योद्योसैवामजपत अतिवैतोपें ।
लूताहीको नामकहतिमतिलेमोपैं ॥ पापीपीडावन्तजग
तजनसुनुराधा । जाके ध्यायेहोत अकलुष असम्बाधा
१७७ ॥ प्राणिनीयथा ॥. ललितदुकानढार देखशुभकोन
आवै । सुमुखिसुबोलभूलिकोउनहिं बिकाइ जावै ॥
दिनदिनहोतिदास अतिरूपखानिनी है। करि बहु भाव
सेतिमनुलेतिबानिनी है १७० ॥ वैशंपत्रयथा ॥ घूघुरवारि
श्यामअलकैंअतिछबिछलकै । चारुमुखारबिन्दुलव्ध्यो
किंभवरललके। शुभ्रवुलाकमुक्तद्युतिकैछवितिहुँपुरकी ।
दाससुवंशपत्रयहकैसोनक्तमसुरकी १७६॥ समविलासिनी
यथा ।। कुचखलिजानिऐंठिॲगिरानिभित्तिरिक लेख
तगुपाललालपटओटओटकरिकै । परशतभूमिकेश
उरलाजलेशनकहूँ। समदबिलासिनीबसनतासँभार
अजहूँ १८० कोकिलक़यथा ॥ अधरपियषपानतियकोन
करैजबलों । मधुरसिंगारउक्तिकविक्रीनलगैतबलों ॥
पियतनुभाघऔरमधुकोजवलौतिलको । तबलगिश
दहोंतमधूरीनहिकोकिलको 1030. मत्तमयुरयथा ॥ दे
ख्योवाहीअंगप्रमाकोसुनिवाला। जान्योहआवतका
रोघनमाला ।। प्रायोचाहेआधघरी मेंबनमाली । नच्चै
ककैमत्तमयरोसुनिआली. १६२॥ मायायथा । काहेको
कीजैमनपनीनुचिनाई। कहूसोबाकीलिपिमेटीनाहिंजा
।

२६
छन्दोर्णवपिङ्गल।
ई॥ताहीकोध्यविमनवाचाअरुकाया । सोईपालैंगो
जिनदेहीनिरमायां १८३॥ तेईसमात्राकेछन्द ॥ दोहा॥हीर
कदृढ़पटआदिदैतेइसमत्तअनन्त । छयालिंससहसरु
तीनिसै अड़सठभेदकहन्त ।। रलतलायकलकेमदृढ़पट
गुरुजतनित्त । तीनिटगनयकरगनदै. हीरकजानोमित्त
१८४ ॥ दृहपटयथा ॥ पहिरतजामाझीनको चहुँथालगि
झूम्यो। बन्दनिबांधतहूँदुहूँहाथनिमेंघुम्यो।डारिदयोरी
पैचमेंमेरोमनाली । दृढ़पटुकोकटिकसकतहीमोहन
बनमाली १८५॥ हीरकछन्द ॥ जाहुनपरदेशललनलालच
उरमण्डिको रतननिकीखानिसुतियमन्दिरमेंछंण्डिके।
बिद्रुमऔलालनिसमवोठनिअवरेखिये। हीरकअरुमो
तिअसनदन्तनिलखिलेखिये १८६॥चौबीसमानाफेछन्द ।।
दोहा । लोलादिकअहिपतिकह्यो छन्दमत्तचौबीस । दश
पचहत्तरसहसपर जानो वित्तपचीस १८७॥ लक्षण
पांचोपांचोगोदिजवियवासंतीको भासम्मत्तनताटके
देखोजातचकितवै।गोकोंपियमोकर्नेलोदुगलोला।
विद्याधारीसबगुरअनियमहहरोंला १८॥ बसन्तीछन्दः।
देखेमातभौरकरतयेदौरादौरी आवैगेगोपालसदन
कोजोराजोरी ॥ भैरीबैठीशोचकरतिहजीमेंभूले । लागो.
चैतोमासबिमलवासन्तीफूले.१८६ ॥ चकिताछन्द ॥ पीत
वसनकीकायासोतीमोहनिमनकी । सोहति सजनीत्यों
पाटीरीखौरनितनकी ॥ तोतनकबकेहेरेआली नेसकत
किती निश्चलअखियांसोहमानोंखञ्जनचकित १६ ॥
खोलाछन्इ ॥ आयेहूतरुणाई लीन्हेंहोलरिकाई। होती
क्योंसखिया श्रापआपहँसाई ॥ लज्जा. बैरिनि भानो

छन्दोर्णवपिङ्गला
ठानोमंजुलंबोलें । प्यारेप्रीतमजूमोंकीजै कामकलोले
१६,१॥ विद्यांधारीछन्द ॥ विद्याहोतीवमिआनन्दैकारी।
आपतकालेजीकीशिक्षादेनेवारी । सुखदुःखहीतेनाहीं
होतीन्यारी. तातेड़मेरेभाई विद्याधारी १६२॥
रोला ॥ रविछबिदेखतघूघधुसतजहाँतहबागतः । कोक
निकोताहीसोंअधिकहियो अनुरागत ॥ त्योंकारेकान्ह
हिलखिमनु तिहारोपागत हमकोतीवाहीतेजगत
उज्यारो लागत १६३ ।। पञ्चोसमात्राफेछना दोहा ।। गगन
शादिपचीसकलभेदहोत,लाख। इससहसंस्तीति
सैतिरानबेपनिभाख १४ पुगी या सौंकलचारि
पचीसकोछन्दजातिगगनंग पगपगपांचौमुदिये
तिशुभकयोभुजंग १६५ | गगनगनाछन् । निखिसौति
जनहृदयनिरहंगरउकोगना । पटतरहितसतकविके
मनकोमिटैफलंगना । बदनउघारिदुलहियाक्षण कठि
करिअंगताःचन्दपराजयसाजहि लजितकरहिगगने
ग़ना: ६६ ॥ छव्यिसमाधाछन्द ना दोहा । छब्बिसकल में
चंचरी आदिलाखगनिहु । सहसछानवेचारिसे भी
हारहकहिदेहु १६७ ॥ पुनः गातीनिसंगनापियहिंदै रात.
चञ्चरीचारुन सोरहदशजतिअन्तगुरुनामविष्णुपद्धा
रु.१६॥ चरी न्यु ॥ फागुफागुनमालवीततधामधाम
निछरिङ चैतमेवनबागवापिनिरहेबपुमरिडकै।
फुलरंगसजैलतांदुमभीरवाद्यबजावहीं । कीरकोकिलसा
रिकामिलिंचंचरीकलगावहीं वही विषणुपदवकैसे
कहाँसहससुरपतिसेसिंगरैदृष्टिपरैः। दासशेशा संतमह
सयोगकहनकोकहतडरै ।। कलोलियोचाहि अनदेखेतू

छन्दोर्णबपिङ्गल।
निजओरत कैं। हैयहसहसहजारविष्णुपदमाहिमॉलिखि
नसकै २०० ॥ सत्ताईत्तमात्राकेछन्दः ॥ दोहा ॥ हरिपदाहि
सत्ताइसैजानेछन्दअनेक । तीनिलाखसत्रहसहसआठ
सैदशटेक, २०१॥ हरिपवछन्द बिथाऔरउपचार अ
बतकरैसुकौनेज्ञानु अजानकछूनशान्योमूरुखकह्योह
मारोमानु ॥ पापविवशगौतमकीतियजोमतिकरहीपषा
न। तांसुभगतिजोदासचहैतौहरिपदउरमें आनु:२०
'चट्ठाईसमात्राफेछन्दः ॥ दोहा ॥ अट्ठाइसमेंगीतिकाआदिकक
होफणीशापांचलाखचौदहसहसबैसैपरउनतीस.२६३॥
लक्षण | चारिसुगणधजगीतिका भरननजभयनरिन्द्रा
अनियमबरमनरिन्दगतिः दोवेकह्योफणिन्द २०४॥
गीतिका ॥ यहिभांतिहोहुनबावरीवलिचेत्तजीमहँल्यावहूं।
वृषभानुकोयहभौन हैकहकान्हकान्हवतावहू।मुसुकाति
होकिहिदेखि कहिदेखिगातगोवावहू। करबीनलैअति
लीनहायहगीतिकाहिसुनावहू २०५ ॥ गरिन्दछन्त्र सिंह
विलोकिलंकमृगहगवरुचालकरीमदधारी । जानहिंआ
पुजातिनिज़मनमहँकरेंप्रीतिअधिकारी | कोलकिरात
भिल्लछबिअद्भुतदेखहिहोहिंसखारी:। समविरोधसुखहि
बनषिचरहिंशत्रुनरिन्दकुमारी, २०६:॥ : दोवैचन्द्र ।।
तुमनिछुरतगोपिनके असुवाब्रजबहिचलेपनारे । कछुदि
नगयपनारतवैडमडिचलेज्योनारे ॥ वैनारेनदरूपभये
अबकहोजाङकोइजोवे । सनियहवात अयोगयोगकी है
हैसमुदनदो २०७॥ उन्तीसगावाकें लुम्वः ॥ दोहाः । उनति
समत्ताभेद मरहट्ठादिकदेखि । आठलाखबत्तिससहस
चालिसभेदविशेखि २० मरहट्टाछन्दः ॥ सुनिमा

३२
छन्दोणवपिङ्गल।
लद्वितियउरजनकीनाई निपटहिप्रकटनहोई । अरुगु
ज्जरयुवतिपयोधरकीबिधि निपटनराखहुगोई॥ करिन
कटदुरेकेबीचराखिये योअक्षरकीचोज । ज्यहिविधिमर
हट्टबधूराखतिहें बिचकंचुकीउरोज २०६ ॥ तीसमाधाके
छन्दः ॥ दोहा ॥ तीसमत्तमेसारंगीचतुरपदीचौबोल । तेर
हलखछयालिसंसहसदुसैउन्हत्तरिडोल २१० ।। पुनः ।।
तिथिगसारंगीचतुरपद द्विकलसातचीमत्त । तीसमत्त
चौबोलहसोरहचौदहतत्त२११॥सारंगीछन्दः। देखोरेदेखो
रेकान्हादेखीदेखोघावोजू। कालिंदीमेकूचोंकालीनांगैना
थ्योलावोज । नञ्चैबालानच्चैग्वालानच्चैकान्हाकेसंगी।ब
ज्जभेरीरूदंगीतम्बूराचंगीसारंगी २१२॥ चतुष्पदच्छन्द ।।
संगरहेइन्दुकेसदातरैया तिनकेजियअभिलाषै। भुवन
जनितकटिबरषाऋतुको तिहिइन्दुबधसबभाषै।यहजी
निजगतमेरूपरूखीबासरसुमतिबतावै । अतिकूरक
काररूपबिनचीन्हेपरमचतरपदगावै २१३॥ चौधोजचन्द ।।
सुरपतिहितश्रीपतिबामनहबलिभूपतिसोंलहिचह्यो।
स्वामिकाजहितशुक्रदानह रोक्योबरुहगहानिसह्यो ।
सुमतिहोतउपकारलाखहितोभूठोकहतनशकंगहें । पर
अपकारहोतजानहिंतोकबहुँनसांचोबोलकहै २१४ ॥
इकतीसमात्राकेछन्दः ॥ दोहा इकतिसमत्ताभेदमें छन्दसबै
याजोहि । एकलाखअठहत्तरै सहसतीनिसैनोहि.२१५॥
सवैया. ॥ अरबखरबतेलाभ अधिकजहँचिनहरहासिल
लादपलानः सेतिहिलयेदेवैक्षाराजी औरहिंदनअप
नोज्यान ॥ ऐसोरामनामकोसौदातोहिंनभावतमूद
यान । निशिदिनजातमोहवशंदौरतफरतसवैयाजन्म

३
छन्दोर्णवपिङ्गल।
सिरान:२१६ ॥ रूपसवैयाछन्द ॥ दोहा॥. रूपसवैयावत्तिसे
कलालाखमैंतीस. ॥ चौबिससहसरुपांचसै "अठहत्तर
विधिदीस २१७ ॥ लक्षण प्रतितुक ॥ आठोक पायेदीन्हे
ब्रह्माछन्दैजानोधीरा। सातोहारासुप्रीमोपुनिसुप्रीमोगुर
हेमजीराकरिहाराभोंगहिकर्नापीमहिमागोशम्भूको
सी। आठोमोनोठानोंडंडोगुरयुगसहितपरमछबिहंसी।
मत्ताक्रीड़ाचारोकायकलचतुर्दशगुरुतलधरिये। साल
रकरबियगुरछब्बिसलंघुझलपरप्रकटबहुरिगुरुकरिये।
जानिकऊँचौगोलयगोलय दुजकरित्रिगुणसगुनझरप
रत्यै भोततुनीतोलानिलखिययेतन्वीकी है। गोबिन्दा
तेरीइच्छाकेतीशम्भूब्रह्माठानैजः । तहीसंसारैबिस्तारै
तूहीपालैऔज्यावैतू. २१८ ॥ मज़ीरछन्दः।। मोटोरीआली
मेरोमनश्रीचन्दाबनशोभादेखैः। देखेरीझैगीतोहूँअति
मैंहीभाषतिरेखारखे ॥ एरीकान्हातकोनिर्तनकोऊचित्त
नराखैधीरा'। जोटीजोटानच्चैग्वालिनिवज्जैझालरिऔ
मंजीरा २१६ । शम्भूछन्दः ॥ तियअरंधंगाशिरमैगंगाग
लभोगीराजाराजैज । निरखैसत्तानिजनाचत्ताडमरूडी
डोडौबाजैज । संगबेतालीकरदैतालीसुखदानीबानीगा
वैजू । धनिप्रानीतेजगुजानीजेनितऐसोशम्भूध्यावैजू
२२० ।। हंसीचन्द । जाकोजीजासोंपाग्योसोसहजउत
दपिसुखदअतिहोई। जोनाहीजीकोभावसोअतिशुभस
मुंझिचहतकिमिकोई॥कलबकी कोकैसेभावैयदपिमुकुत
अतिजगतप्रशंसी।संसारोनीकोलागेपैअनकनकबहुँच
गतिनहिंहसी:२२सामताकीदाछन्द । काइकोथोरोदोषीकैस
हनकहतप्रभुपरमविपत्तिको सोतोजानसंसारैनारदसन
५

३४
छन्दोवपिङ्गला
भगतसहउदुखअतिको ॥ काहूकाभलेभलेत्रिभुवनम
तिबकसतशुभगतिको।देखाहाथीमत्ताक्रीडाजलमहकर
तनरहेउभगतिको२२.२|| लालूछन्द ।। सौदामिनिघनजिमि
बिलसतहरिपरिहरिपियरपटसखिउहिरूखमें । देखतक
लुषभयोदिनउडुगणहुतभुकंपरियरुइयत्तदुरनमें । त्यों
होइहिरुखकुँवरियमुनतटनिरखिबरखतसुखसुखमें । सा
लरङ्गसङ्गलसतसुतनरुचिछनरुचिसरिचमकतितिमिमु
खमें २२३॥ क्रौञ्चन्द ॥ सेरनकैसीपौरुषबातेंकिमिकरिकह
उडुगणबिचवरणी । क्योंशुकसारीलौंपढिजातयत्ननिक
रिबकऔधकंघरणी ॥ ज्ञानियबिंद्याजानुजनायेनहिंजड़
कवहुँचुधनियहवरणी । तूलकोंचोक्योंकरिहसैगनिगंनि
धरतधरतपगधरणी-२२४ ॥ तन्वीन्च ।। देखिसशेकैम
लंजत्तमैलोगबखानतसहिजुठहाई ... आननशोभातरु
णिप्रगटिकैजीतनश्चेतबसनसजिआई ॥ फूलसरनिसों
मुग्धनिबसकै जाहिरभोजंगमन्मथधन्वी । जीतनताको
चितवनिशरसो धीरप्रवीनसकलकरितन्वी २२५ ॥ भु-
न्दरीछन्द ।। दौसा ॥ ससंगविप्रदुगसारवति छन्दसुन्दरीजा
न । पदपदमत्तवतीसगनि चौबिसवर्णप्रमान २२६ ॥
सुन्द्रीयथा ।। कुचकीबढ़तीयोंछिनछिनकीमेरोमनदेखतरी
भिमयों । दरकीअँगियाचारिकपहिरे अरुचारिककोटु
टिबंदगयोः॥ कटिजातपरीहैखिनखिनखीनी याविधि
यौवनजोरठयो । जवहीतबनीवीकसतहिदेखसुन्दरिको
दिनभयो २२७॥दोहा॥ इमिद्वैतेबत्तीसलगिवत्तिवान
लाख ॥ सत्ताइसहजारपर चौसैवासठिभाख २२६ ॥
इतिमात्राप्रस्तारछन्दवर्णननामपञ्चमस्तरंगः ५ ॥

छन्दोर्णवपिङ्गल।
अथमानामुलकछन्दः ॥दोहा : ॥ घटेबढ़ेकलदुकलहू वह
दभिराम ॥ तेहिगनिमत्ताछन्दके मुक्तक गुणधाम
चित्तथानीनीछन्द ॥ दोहा ॥सोरहसत्रहकलनिको चित्र
बनीनीहोय ॥ चारिचौकमेंतीसरो यगनकल्सबकोय २
यथा ॥ लीन्हीजिनमोलभायचोखे । दीन्हीतमकोबिथा
अजोखै। कीजैअखियानकीकनीनी ल्याईसुविचित्रहो
बनीनी ३ नंदलालगनेनशीतऔंघाम । सेवैतुवहार
आठहयाम ॥ कतीतुमतासुलेतहीनाम । पविचाहि
कठोरतोहियोबाम ४॥ दोहा ॥ सत्रहअट्ठारहकलनि छ
न्दहीरकीतन्तः ॥ नन्दधुजनिबिरमतिचलै दुकलत्रिक
लहमन्त.५ ॥ यथा ॥ दासकहैबुधिथकधीरकी। देखि
प्रभाअद्भुतपटीरकी ॥ बेसरिकीकेसरियाचीरकी या
रनीकी ढारनीकीहीरकी६॥ पुनः ॥ दन्तनकीचारुचमक
देखिदेखि । बिजुछटामन्दप्रभालेखिलेखि ॥ मोहित
हैदासघरीचारिचारिणकोनचलैजीवनधनवारिवारि७॥
दोहा । अट्ठारहवनइससकल छन्दभुजंगीमानि । नैन
ततगहे चन्द्रिका वाकीगतिपहिचानि ८॥ भुजंगीछन्द ।।
ललालाडिलीकालखीपीठिमें तहांश्यामबेणीपरीडी
: छिमें ॥ मनोकांचनीकेंदलीपत्रहै । भुजंगीपरीसोबतीत
है । चन्द्रिकांचन्दः ॥ कुरबकलरबोहकरेबोलिकै । द्विर
दगतिहरैमन्दहीडोलिकै ॥ दशनद्युतिलजीलीकरैदासि
नी हसनिसनजितेचन्द्रिकाभामिनी:१०॥ नादीमुनी ।।
दोहा ॥ पंचलहूपरमगनत्रय नान्दीमुखीबिचित्रः ।। गति
लीन्हीनियमोतजै वहनामहैमित्र १३ ॥ यथा । जन्म
प्रभुलियो शवधर्मेलटिमांची । लुट्योसबसबनिवस्तुए

३६ छन्दोर्णवपिङ्गल।
कौनवांची ॥ द्विजनक्रियविदावाकवादैसुखीकै । नपति
जबउठेश्राद्धनांदीमुखीके १२॥ दोहा ॥ वोनईसकैबीस
कलं छन्द्रहोतचितहंसा निन्दकरनद्वैअंतसे कैहैरल
अवतंस ॥ पद्मबैठकमुक्तभोजनछोड़ि कै । तूंसहेदुख
भूखकोपनुवोड़ि के ॥ दासहासकरैघनेबकबसरे । तोहि
ह्यावसुबासउचितनहंसरे १३॥ पुनः ॥ भौंरनाभीबीच
गोतेखाइखाइ। बूड़िगोरीचित्तमरोहाइहाइ ॥ चाहि
गिरिगिरिगाहितिरितिरिफेरिफेरि । दासमेरेनयनथाके
हेरिहेरि १४॥ उमेरेछेन्द्र ॥ दोहा ।। हलवोनइसैबीसको
छन्दसुमेरु निरिलहूमगनलहुभगनयों कहूँअन्तल
हुफेरि १५॥ यथा ॥ करेकोवाकुचरचालोगशाली। लु
गाईक्याकरेंगीकैकुचाली ॥ प्रभाजीकान्हज कोऊतरी
है। सोमेरेनयनदूकीपूनरीहै १६ ।। मियाछन्द ॥ दोहा ॥
बाईसैतेईसकल छन्दप्रियापहिचानि । चलनिचारुस
गीतकी बरणतहैं सुखदानि १७॥ यथा ॥ तोछूटतटी
सिगरीशीतलई है। योअंगसबैवादिनतेागिभईहै।
राखैरहिहैदासहमैं दूरिहियासों । योपंथीसंदेशोकहिवी
प्राणप्रियासों. १६ मा हरिप्रियाछन्द ॥ दोहा ॥ बीसइकीसौ
बाइसौ कलाहरीप्रियछन्दः ॥तीनिछकलपरदेहुगुरु न
न्दकिहेगुरुबन्दा १६ ॥ यथा ॥ हरतिजहदीननकोसकट
बहुत है । विनवततिहिचितवनिहितदासदास है। कर
निहरनिपालनितूदेवि आपुही. । शम्भुप्रियाब्रह्मप्रिया
हरिप्रियातुही २०॥ पुनः । करतिजुहैदीननिकेसंकटको
हीन । बिनवततिहँचितवनिहितदासदासंदीन ॥ करनि
हनिपालनितूदेविसर्बठौर । शम्भुप्रियाब्रह्मप्रियाहरि

छन्दोर्णवपिङ्गल।
प्रियानऔर २१ ॥ पुनः॥ हरतिजहैदीननिकोसंकटबहुने
से। बिनवततिहिचितवनिहितदासदासतेरो ॥ करनि
हरनिपालनितदेवियापही है । शम्भुप्रियाब्रह्मप्रियाह
रिप्रियातुहीहै २२॥ दिगपालछन्द ॥ दोहा ॥ होतछन्ददिग
पालकल बाईसौतेईस । चौबीसोंपरोभयो हैदूनोदि
गईस २३ ॥ यथा ॥ सोपायआजुडोलमहीशीतधप
में। बिधिबुद्धितुच्छ जाकीमहिमांअनूपमें ॥ हरजासुरू
पराखेहियेबीचसबदाहि। दिगपालभालजाकीरजराज
तीसदाहि २४ ॥ पुनः सखिप्राणकीसंघातीप्यारीनहीं
लगैरी । सुखदानिबानितेरीअंतिदुरिकोभगैरी।। अलि
कान्हप्राणमेरोनिजसाथलैगयोहै। मनुआपुनोनिमोही
वहमोहिंदैगयोहै २५ ।। अबिंधाछन्द । सरगनारंग्गनीज
गंनुलगे । रंगनारग्गनातकोरदगैः॥ अबिधालन्दपाय
नागकन्त। सोरहोसत्रहोअठारहमन्त २६॥ यथा ॥ का
न्हकीत्योंरतेगचोखीहै। सतियामेंकहाअनोखीहै । प
विसेंमोहियेजुलागिउठे। अविधाज्योंबियोगागिउठे
२७॥ सायकछन्द ॥ समनागीसगनागोसंगनी रंगनादी
हुनहींदोसंगना ॥ लहुश्राद्यन्तपरेसत्रहलेखि । नामहै
सायकयाछन्द्रहिदेखि २८ ॥ यथा ॥ अँखियांकाजरकी
कोरनहीं। भृकुटीऔतिरछीतौरनहीं ॥ दासयप्राणन के
घायकहें बिसुहँखंजर,सायक, २६ ॥ भूपचन्द ।। संग
नागोसगना। रग्गनाप्रादिभना॥ लहुवोअन्तमलोइ।
भूपंशिवसरकलोइ.३० ॥ यथा || भावतीजातिकितै।
नेकुतौताकिइते ॥ तेरोईघायलहों भपसोहायलहौं
३१॥ मोहमीछन्दः । संगनागोसगनांगोसगनागोसग

३८ छन्दोर्णवपिङ्गल।
ना। रग्गनाआदिदियेहुनकदीसगना ॥ बाईसैतेईस
कलअन्तलहूचौविसहोइ । मोहनीछन्दकहैयाहिसयाने
सबकोइ ३२॥ यथा ॥ हुँदैहुहैनतितीपंकजकेंकाननमें।
सुखमादासजितीमोहनकेआननमें ॥ नतितीजानिपरैः
मन्मथकवाननमें । मोहनीरीतिजितीहवसुरीताननमें
३३ ॥ अथगीताप्रकरण | दोहा | चौबिसकलगतिचञ्चरीरूप
मालपहिचानि। लघुदैआंदिपचीसकल सुगीतिकाउर
आनि ॥ है आदिछत्रीसकरि गीताकहौंत्रिशेखि। गुरुदै
अन्तसुगीतिके शुभगीताअवरेखि ॥ करिगीतागुरुम
न्तहरि गीताअट्ठाईस । अन्तलहूअतिगीतकरि सताइ
सौउनतीस ३४ ॥ अथरूपमालायथा ॥ जातिहबनबादिहीग
लबांधिकैबहुतंत्र। धामहीकिनजपतकामदरामनामसूम
त्रः॥ ज्ञानकीकरिगूदडीदृढ़तस्वतिलकबनाउ । दासपर
नअनपसगुनसरूपमालागाउ, ३५: ॥ सुगीतिकाछन्द ।।
हजारकोटिजुहोयरसनाएकएकमुखंग्रः । इडाअरबिन
जोवसैरसनानिमण्डिसमग्रः॥ खरोरहैदिगदासतनुधरि,
देवपरमपुनीत । कहैकअहिराजतबब्रजराजतुवजस
गीत ३६ ॥ गीताछन्दः ।। मनबावरेअजहूंसमुझिसंसार
मदरियाउः । इहितरनिकायहछोड़िकेकछुनाहिंऔरउ
पाउालेसंगभक्तिमलाहकरिारूपसोलेलाउ।श्रीराम
सीताचरितचरचाशुभ्रगीतानाउ ३७ ॥ शुभगीताछन्दः ॥ त्रि
लोकिदलहिनिवेलिकेतनफूलमालविसजई । रसालदूल
हशीशसुन्दरमौरकीचबिछाजई ॥ वसन्तकेगृहआजव्या
हउछाहपरमपुनीतहै। चकोरकोकिलकीरभामिनिगाव
तीशुभगीतहै ३८ ॥ इरिगीतछन्द ॥ बनमध्यज्योलखिसा

--
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छन्दोर्णवपिङ्गल।
जसंयुतव्याधवासहिसज्जतो । पशुपक्षिमृगयायोगनि
जनिजजीवलैलैभज्जतो ॥ त्योंमोहमदपैशुन्यमत्सर
भाजिजातसभीतहै। जबदासकेउरभक्तिसंयनज्योसतो
हरिगीतहै ३६ ।। प्रतिगीताछन्द । चैतचांदनिमें उतैमुरली
बजाईनंदनन्द । तानसोवतितानकीगलितानकियवि
धिचंदवन्दं ॥ तासमयषभानुनन्दिनिकांगई चलिर्फ
दफन्द । मोहिमोहनऊगिरेअवलोकिकैमुखचंदचन्हें
४० ॥ शुद्धगालक्षण ॥ यगनगुरूकरिचौगुनोछन्दशुद्धगाहो
इ । अन्तघटैकलदुकलहूवहै कहै सबकोइ ४१ ॥ यथा ॥
मखैबेठीकहांबौरीअरीकान्हाकहांजैहें। सुतीयाहीघ
रीमैदेखितेरेपासहीऐहैं ॥ सिखायोमानिकैमेरोंसितारा
लैबजावैत । सखीवाद्यौसकीनाईकेदाराशुद्धगावैतू
४२ ॥ सोसायतीछन्दः ॥ द्वैकलदै फिरतासकललीलावती.
अनेम । दुगुनपद्धरियकेकियेजानोवृहैसप्रेम ४३ ॥
यथा ... पीताम्बरमुकुटलकुटबनमालवैसोईदरशावै ।
मुसुकानिबिलोकनि मटकलटकबढ़िमुकुरलहितेचबिपा
वै॥ मोबिनयमानिचलिवृन्दाबनवंशीबजाइगोंधनगा
वै॥ तौलीलावतीश्याममैतोमैंने कुनउरअन्तरआवै४४
यथा ॥ जेहिमिलतनततेहिनिसाझहीतेरटलावततोहि
तोहि । अधरातउठत करिहायहायपर्यंकपरतपुनिमोहि
मोहि ॥ कबकोढिंगठाढ़ेहहाखातयहखिन्नगातगतिजो
हिजोहि । जियकेवलंतूयहलालहालदिनरैनिबिसासि
निकोहिकोहि ४५ ॥ इतिश्रीदासकृतेछन्दोर्णवेमात्राके
मुक्तछन्दवर्णनन्नामषष्ठस्तरंगः६॥
.::-

छन्दोवपिङ्गल।
अथजातिछन्दवर्णनं ।। दोहा ॥ प्रस्तारनिकीरीतिसो करिक
छुभिन्न विभाग । जांतिछन्दवर्णनकियों बहुविधिपिंगल
नाग १॥ दोहाप्रकरण ।। तेरहग्यारहतेरहे.ग्यारहदोहाचा
र । दोहाउलटेसोरठा विदितसकलसंसार. २ ॥ दोदर ।।
मनबालकसमझाइये तुम्हेंबिनयरघुनाथ।नतळंबोलाये
कौनके आवैचन्दोहाथ:३॥ दोहादोष | प्रथमतीसरेचर
णमें जगनजोहियेजास । सोदोहाचण्डालिनी बोलैवि
विधविनासु ॥ वारहलघुबाईसलघु बत्तिसलघुलेमा
नि । चारिबरणदोहाकही बाकीलघुलौंजानिः ४ ॥ सोर
डा ॥ सोवनदीजैधाई भीजेनेकुविभावरी ॥ अबैंगहो
जनिपाइ सोरठानिहमेखलो ५ ॥ अथदोद्दी ॥ दोहांकेते
रहनिमें है?कलांबढ़ाई । कीजैदोहीदोहरा एकोएकघ
टाइ । जनिबांहगहोहोजानती लालतिहारीरीति । हो
निर्मोहीनित्तके करोदोहीदिनकीप्रीतिः६ ॥ दोहा ।। जा
तनकनकतस्योना लगतचौहरोलाल । मुकतमालहियते
हरो दोहरोबेदाभालं ७॥ उल्लालाः ॥ करिविषमदलनिप
न्द्रहकलासमपायनितेरहरहै। तुकराखिअट्ठाइसकल
निपरउल्लालापिंगलकहे ८ ॥ यथा ॥ कहिकाव्यकहा.
बितरुचिरमतिमतिसुकहाबिनहींविरतिः। कहविरतिउ
लालगोपालकेचरणनिहोइजुप्रीतिप्रतिः ॥ चुरियाला ॥
दोहातल के अन्त में औरपंचकलवन्दनिहारिये। नागरा
जपिंगलकचरित्रालासोछन्दबिचारिये १० मप्रिय
मिलनअमीगुनोबलिबिसुसमुझिनतोहिनहोरति । झट
किझटकिकरलाडिलीचुरियालाखनकीकतफोरति ११॥
सुवाछन्द ॥ पहिलेहिबारहकलकरुबहुरेहुँसत्त । इहि

छन्दोवपिङ्गल।
विधिछन्दध्रुवारचुंबनइसमत्त १२ ॥ यथा ॥ ध्रुवहिलां
डिजोअध्रुवसेवनजाइ । अध्रुवतासुनशैहैध्रुवहुनशाइ
१३॥ धत्ताच्छन्दः ।। बोहा । दशवसुतेरहअई में समुझिय
घेत्ताछन्दै । ग्यारहमुनितेरहबिरति जानोघत्तानन्द १४
यथा ॥ मोहनमुखागेअतिअनुरागेमैंजुरहीशशिछबि
निदरि । दुखदेतसुआलीबिनुवनमालीपत्तालहिचकत
नअरि ॥ पत्तासखिसोबतमोहिंजानिकछरिसमानिया
इगयोगतिचोरकी । सोयोंदिगहिचुप्राइकहिनहिंजाइ
घत्तानन्दकिशोरकी १५ ॥ दोहा. ॥ हरिपददौवेचौबो
लो ढेहीद्वैतुकजानि ॥ दोहाप्रकरणरीतिमें लिख्यौदा
सउनमानि १६॥ अंथ चौपैयाप्रकरण ॥ दोहा । चारिचरण में
जतिजमक तुकवरणनिकरिनेम ।। जातिछन्दबरण्योश्र
हिप सोऊसुनीसप्रेम १७ ॥ चौपैयाछन्द । दोहों ।। दशवसु
बारहचिरतिते चौपैयापहिचानि । चारिचरण चौगुन
किये होतनिपटसुखदानि १८ ॥ चौपैयायथा ॥ तलबित
लरसातलगगनभुवनतलसृष्टिजितीजगमाहीं॥पुरराम
सुथल में काननजलमेंवाहिरहितकछुनाहीं ॥ पियमिलहि
नरामहिंतजिसियंत्रामहिनहिंबचाउक भागे । सुरप
तिसुतकांचोसबजगनाचोबांचोपैथलागे १६ ॥ क्षण
प्रतितुक: ।। दशंबसुदशचारैबिरतिबिचारैपद्मावतितलगु
रुंदोई । याहीविधिठानोदुर्मिलज़ानोअन्तसगनकरनों
होई ॥ दशवसुकरियोहीचौदहत्योंहीअन्तसंग्रनहैदण्ड
कलो । देशवसुवसुसंगीपुनिरसरंगीहोतत्रिभंगीछन्द
भलो २० ॥दोहा॥ आठआठचौकलपरैः चारैरूपनि
शंक ॥ भूलेहुजगननदीजिये होतछन्दसकलंक २१ ॥

४२
छन्दोर्णवपिङ्गलः।
पन्नाधती ॥ व्यालिनिसीबेनीलखिछबिसेनीतजतन आशा
मोरेंजः । शशिसोमुखशोभितलखिह्योलोभितलावत
टकी चकोरेंज। निकसतमुखश्वासैंपाइसुवासैंसंगनछो
इतभोरेज बाहिरआवंतिजबपद्मावतितबभीरजुरति
चहुँओर २२ । धुर्मिकछुन्छ ॥ इकत्रियव्रतधारीपरउप
कारीनितगुरुआज्ञाअनुसारीः निरसंचयदातासबर
सज्ञातासदासाधुसंगतिप्यारी ।। संगरमेशरोसबगुन
रोसरलसुभावंसत्तिक । निरदभभगतिवरविद्यनिआग
रचौदहनरजगदुर्मिलहै. २३ ॥ दण्डकलाछन्द ।। फलफूल
निल्यावहरिहिसुनावैयहहैलायकभोगनकी । अरुसब
गुनपूरीस्वादनिरूरीहरनिअनेकनिरोगनकी । हँसिले
हिपानिधिलखियोगीबिधिनिन्दहिअपनेयोगनकी ।
नभतेसुरचाहभागुसरा,फिरिफिरिदण्डकलोगनकी २४
॥ त्रिभंगीछन्दः । समझियजगमकोफलमनमें हरिसुमिरन ।
मेदिनभरिये झिगबहुतेरोघेरुघनेरोमेरोतेरोपरि
हरिये। मोहनबनवारीगिरिवरधारीकुंजबिहारीपगुपरि
ये। गोपिनकोसंगीप्रभुबहुरंगीलालत्रिभंगीउरधरिये
२५ ॥ जलहरनछन्द ।। दोहा । लघुकरिदीन्हेंबत्तिसो जलहर
नापहिचानि ॥तिरभंगीपरआठपनि मदनहराउरानि
२६॥ यथाजलहरनछन्द ।। सुदिलयउमिथुनरबिउमडिघुमड़ि
फैबिगगनसघनघतझपकिझपकि । करिचलतिनिक
टतनक्षनरुचिक्षन:-क्षनखगंप्रझरसमल पकिलप
कि । कछुकहिनसकततियबिरहअनलंहियउठतक्ष
पाहिंक्षणतपकितपकि अतिसकचतिसखियनेअधक
रिखियनलगियजलहरनटषकिटपकि २७ ॥ मदमहास

छन्दोर्णवपिङ्गल। ४३
छन्द ॥ सखिलखियदुराईछविअधिकाईभागभलाईजा
निपरैफलसुकृतफरै। अतिकान्तिसदनमुखहोतहिस
म्मुखदासहियेसुखभूरिभरैदुखदूरिकरै ।। छविमोरपख
नकीपीतवसनकीचारुभुजनकीचित्तअरसुधिबुधिविसरै।
नवनीलकलेवरसजलभुवनधरवरइन्दीवरछबिनिदरै म
दमदनहरै २८ ॥ लक्षण | दोहा ॥ एकैतुकसोरहकलनि
पायकुलकगुरु अन्त ॥ चहुँतुकभागनयमकसो अलि
लाछन्दकहन्त २६ ॥ पार्यकुलफ ॥ हंगआगेसोवतहुनिहा
रौ। हियतेक्योहरिरूपनिकारों ॥ होनिजतनसमरतन
विचारों । केहिउपायकुलकानिसँभारों ३० ॥ अलिला
छन्द ॥ भुवमटकावतिनयननचावति । सिंजितसिसकिन
शोरमचावति ॥ सुरतसमयबहुरंगरचावति । अलि
लालनहितमोदसचावति ३१ ॥ सिंहविलोकित छन्द ।।
बोहा ॥ चारिसगनकैहिजचरण सिंहविलोकितयेहुः ।।
चरणअन्तअरु आदिके मुक्तपदग्रसदेहु ३२॥ यथा ।।
मुनिआश्रमशोभधयोतियहीं । अहिकचसँगबेसरिमों
रजहीं । जहँदासअहितमतिसंकलकटी। करसिंहलिलो
किंतगतिकरटी ३३ ॥ लक्षण ॥ दोहा ॥ रोलामेलघुरुद्रपर
काव्यकहावैछन्द ।। ताआगेउल्लालदै जानछप्पैवन्द
३४ ॥ काव्यछन्द । जन्मकहाबिनयुवत्तियुवतिसुकहावि
नयौवन । कयौबनबिनधनस्किहाधनबिनअरोगतन।
तनसुकहाबिनगुणहिकहागुणज्ञानहीनक्षनः ॥ ज्ञानकि
विद्याहीनकहाविद्यासुकाव्यविन ३५ ॥ छपिचन्द ।। भा
लनयनमुखअधरचिबुकतियतुवबिलोकिअति । निर्म
लचपलप्रसन्नरत्तशुभत्तिथकीमति ।। उपमाकहशशि

छन्दोर्णवपिङ्गल।
खञ्जकञ्जबिंधियंगुलाबबर । खण्डथानथितिप्रातपक्व
प्रफुलितसुशोभधर ॥ शारदकिशोरशुभगन्धमदुनव
लदासंक्तिनचितः । जुकलंकरहितयुगसरलहितडा
रगहतषटपदसहित ३६ ॥ लक्षण ॥ सिंहबिलोकनीति
देदोहापररोलाहि ॥ कुण्डलियाउडतवरणतजतिअम
तधुनिचाहिः ३७ ॥ कुण्डलियाछन्ः ॥ साईसबसंसारको
सन्ततफिरतअसंग । कामजारिकीन्होभसममृगनैनी
अद्वैग ॥ मृगनेनीअगदासआसनमृगछाला + सुनि
येदीनदयालगलेनरशिरकीमाला ॥ सुनियेदीनदयालक
रोअजगुतसबठाई । कर्णगहेकुण्डलियविदितमयहर
गगोसाई ३८ ॥ अमृतध्वनिकुन्द ।। धुनिधुनिशिरखलत्रिय
गिरहिसुनतंरामधनुशब्दा लग्गियशरझरिगमनमहिय
थाभाद्रपदअब्द॥ अब्दनिनदकरिक्रुद्धकुटिलअरियुक्ति
मरतलरि । मण्डपरतगिरिरुण्डलड़तफिरिखनपकरि
करिऋक्षप्रबलभटउद्धतमरकटमर्दततिहिध्वनि । निर्त्त
तसुरमुनिमित्रकहतजयकृतिअमृतध्वनि ३६ ॥ दोहा ।।
पायाकुलकत्रिभंगियों होतमुक्तपदग्रस्त । छंदकहत
ल्लासहकरितुकआठसमस्त४०॥ हुल्लासच्छंद ॥ कान्हजन्म
दिनसुरनरफूले। नभधरनिशिवासरसमतले ॥ महितेम
हरिजवीरउड़ाय। दिवितेदेविसुमनबरषावै॥सुमननबर
पावहर्षबढ़ातजितजिआवेयाननको। सजितियनरमेष
निसहितअलेषनिकरहिंअशेषनिगाननको ॥ तिनलोग
निकीगतिदाननकीअतिनिरखिशचीपतिभलिरहै ।ब्रज
शोभप्रकासहिनंदविलासहिदासहुलासहिकौनकहै ४१॥
इतिश्रीमात्राजातिछन्दवर्णननामसप्तमस्तरंगः ७॥
..

छन्दोणवपिङ्गल।
४५
दोहा ॥ जातिछन्दप्राकृतनिके निपटअटपटेढंग ।
दोसकहेगाथादिदै तिनकीभिन्नतरंग ॥ विषमनिबारह
कलशमनि पन्द्रहठारहवीश ॥ समपदतीजोगनयगन
गाथाप्रकरणईशः १ ॥ लक्षण ॥ समपदगाहूपन्द्रहपन्द्र
हअठारहठारहरगाहा । अट्ठारहपन्द्रहगाहाकहिपन्द्र
हअट्ठारहबिग्गाहा ॥ बीसैबीसखन्धकलबीसैअट्ठारह
समपदसिंहिनी । सबकेरबिकलविषमदलनिसमअहा
रहबीसैगाहिनी २ ॥ गाह्वछन्दः ॥ शिवसुरमुनिचतुरानन
जाकोलहनहींथाए । पारवारकोउजाननहरिनामसमुद्र
अवगाहू ३.॥ उरगाहर ॥ शिवमुनिसुरचतुराननजाकोकबहूँ
नहींलहैथाहा । पारवारकोउजाननिहरिनामसमुद्र अव
गाहा ४ ॥ गाहा थिगाहा अर्थ में जाति ॥ बारहलहुआवित्री
वाईसाक्षत्रिनीमाहो । बत्तीसासोबैसीबाकीलहुहैशुद्रि
नीबिगाहो ५॥ सन्धाछन्द : ॥ जगनफल ।। एकज़गनकुल
वन्तीदोइजगन्नगिहिनीसुहैसुनिबन्धो । जगनविहीनीर
एडावेश्यागावोबहुजगन्नकोखन्धो ६॥ गाहिनी तथा सिहिनी ।।
सुनिसुन्दरिमृगनैनीतूप्रभासमुद्रअवगाहिनीराजे । हं
सगमनिपिकबैनीतोलंकबिलोकिसिंहिनीलाजै ७ ॥
इसटिपढ़ेगाहिनी ॥ चपलागाथा ॥ चपलागाथाजानोयहदोइज़
गन्नुहैसमेपाया । पिङ्गलनागवखानोगुरुदोइतुकंतमेठा
पा ८ ॥ दोहा । ताहिजघनचपलाक दलदूसरेजदोइ ।
प्रथमदलहिमेंजगनुदै मुखचपलाहैसोइ ६ ॥ बिपलगाथा ॥
प्रथमपायकलतेरहसत्रहमत्तहेबियनाथा ॥ तिसरेपय
यारहैचौथेसोरहैबिपुलामाथा१०॥रसिकछन्द।। दोहाः॥ ग्या
हिग्यारहकलनिको षटपदरसिकबखानि । सबलघुपहि
.
..

।
४६ छन्दोणवपिङ्गल
लेभेद गरुदेवहुविधिठानि ११॥ यथा ॥ हँसतंचखत
दुधिमुदित। झुकतमजतमुखरुदित ॥ त्रसिततियनिमि
लिरहत । रिसयुतविरतिहिगहत। अगणितछविमुखस
सिक। शशुतबनवरसरसिक १२॥ संजाछन्दः ।।दोहा । सात
पंचलघुजगनगोमत्तायकतालीश। योहींकरिदलदूसरो
खंजारच्योफणीश १३ ।। बया ॥ सुमुखितअनैनलखिद
हगह्योझखनिझख गरलमिसिभवरनिशिगिलतनित
हिकजहै। निशिनिमित्तज्योंसुरतियनिमगफिरतबनहिं
बनहुअहरुअमदनसरथिरनरहतखंज १४॥दोहा ॥
खजाकेदलअईपर गुरुदेसुखकन्द ॥ आगेगाहा
ईकरिजानहिमालाछन्द १५ ॥ मालाचन्द ।। लगतनिरख
तललितसकलतनश्रमकलितनज अधिपअंगवलित
सुरतिशयसोहतीवाला । मरकततरुजनुलबढ़ीफलि
कनकलतामुकुटमाला १६ ॥ शिष्याछन्द ॥ दोहा । पहिले
दलमेंचौबिसे लघुपरजगनहिंदेहु ॥ पुनिवत्तिसपरजग
नुदैशिष्यागतिसिखिलेहु १७ ॥ यथा ॥ शुभरदनिविध
बदनिगुणसदनिजगहदनिनहितोहिंसरिष्य । कुरिस
मविनयश्रवणसुनिसमझिपुनि मनहिंगुनिनप्रियप्रतिरि
सकुमतिशिष्यु १८ ॥ चूड़ामणिछन्दों, दोहा ।।दोहागाहाकोंकरो
मुक्तापदग्रसंबन्द ॥ नागराजपिंगलकह्यों सोचूड़ामणि
छन्द १६ ॥ यथा ॥ दिनहीं दिनकरदिपं निशिहीमेश
शिज्योति । जगदम्बाद्युतिदिवसनिशि जगमगजगम
गहोति ॥ जगमगजगमगहोतीहोरीज्योंगोरीचिनगारे।
चक्रवत्तिचूड़ामाणिजाकेपगभूतलहाजारै २० ॥ अथरता
छन्द ॥ दोहा ॥ प्रथमतीयपञ्चमचरणः पहिले जानिअखे

.
.
छन्दोर्णवापिङ्गलः।
४७
द॥ दूंजोचौथे फेरिगुनि जानहिरण्डाभेदः २.१ ॥ यथाः।।
तेरहग्यारहंकरभीबरनि । नन्दभुवनहरढरनिवोनईसरु
द्रनोहनीअरनि । चारुसेनतिथिहरनितिथिरबिमत्ताने
द्राबरनि २२॥दोहा॥ तिथिरबितिथिहरतिथि पयनि राज
सेनिड्डाहि ॥ तालकिनितिथिकलअधिक दोहांसबतल
चाहिः ।। ताकिनिराखथा ।। बालापनबीत्योबहुखेलनि । युवा
गईतियकेलनि । रह्योभलिपुनिसतबितरेलनि । जियग
लडारीते रेजेलनि। अजहुँसमुझितजिमरुखपेलनि ।
कालपहूँच्योशीशपरनाहिनकोऊअङ्क । तजिसवमाया
मोहमंदरामचरणभजुरड्डः . २३: पांचचरणरचनाउपर
दीजैदोहाअन्त । सातभेदअहिपतिकह्यो नवपदरड़ा
तन्त २४ ॥ इतिश्रीदासकृतेछन्दोवेमात्राकेजांतिक
न्दवर्णनन्नाम अष्टमस्तरंगः ।
--
अथमात्रादण्डकवर्णन ॥ दोहा | छब्बिससाबंदिवर्णजो दंडक
वर्णविशेखि॥बत्तिसतेबढ़िमत्तजो मत्तादण्डकलेखि भी
भूलनाछद । दोहा । दशदशदशमुनिजतिचरण छन्दमूल
नातत्त॥ दुकवलिरहुस्वोसैतिसो बन्तालीसौमत्त २॥
यथा ॥ पानिपीचनहींपानछीवनहींबामअरुबसनराखैन
नेरो । प्रानकेऐनमेनेननेवैरह्योरूपगणनामतेरो ॥विर
हबशऐसेहीहैवैहीकेमहीराखिहकैनहीं प्राणमेरो । तोहिं
तकियाहिसंदेहकेमलनाझुलतोचित्तगोपाल केरो३।
वीपमाला ।।दोहा।। दीपकको चौगुनकियें दीपमालसुख़दा
नि॥चालिसकलंशिरढघटें अन्तबढ़ेबिजेयानिष्ठादीपमाला
• यथा ॥ लहिकै कुहुयामिनीमत्तगजगामिनीचलीबतमिल
.

छन्दोणवपिङ्गल
नकोनन्दलालाहि । कैसुघरमन्मत्थरचिस्व कीबेलिले
चल्योगहिसहितशृंगारथालाहि ॥ संगसख़ीपरवीना
तिप्रेमसोलीनमनिआभरणज्योति छबिहोतिबालाहि
कैदासकेईशढिगजातिलीन्हे चलीभामिनीभाग्यसोंदी
पमालाहि ५ ॥ विजया || सितकमलवंशसीशीतकर
शसीविमलविधिहंसमीहीरवरहारसी । सत्यगुणसला
लीसंतरसवंशसीज्ञानगौरवसीसिद्धिविस्तारसी । कु
न्सीकाससीभारतीवाससी सुरतरुनिहारसीसुधारस
सारसी । गंगजलधारसीरजतकेतारसीकीर्तितंबविजय
कीशम्भुआगारसी ६ ॥ दोहा । तीनितीनिबारहबिरति
दशजतिदैतु कठानि । छन्दछियालिसमत्तको चञ्चरी
कपहिचाति ७ ॥ चंचरीकछन्द ।। जाकोनहिंआदिअंतज
ननिजनकदेवकंतरूपरंगरेखरहिव्यापकजगजोई । म
च्छकच्छकोलरूप बामननरहरिअनूप परशुरामराम
कृष्णबुद्धिकूकिसोई ॥ मधुरिपुमाधचमुरारिकरुणामय
कैटभारिरामादिकनामजासुजाहिरबहुतेरो । कोमलंशु
भवासमंजुसुखमासुखशीलगंज ताकोपदकंजचित्तचंच
रकमेरो ॥ इतिश्रीदासकृनेछन्दोर्णवेमात्राछन्दकेद
त्तिजातिमुक्तकदण्डकवर्णननामनवमस्तरंगः ॥
अंधवर्णवृत्तिवर्णप्रस्तारमे ।। एकवर्णकोउक्ताप्रकरणतास
भेदद्वैकीजैपाठ । बैअत्युक्ताभेदचारि हैमध्यातीनभेदहे
आठ ॥ चारिप्रतिष्ठासोरहविधिपांचैसुन्नतिष्ठाभेदच
सः । षट्गायत्रीचौंसठिसातैउष्णिकसोपरअहाईस
आठवर्णअनुष्टुपद्वैसेंछप्पनभेदकहतफणिराऊ । गर्ने

छन्दोणवपिङ्गल।
४४
अक्षरकोरहतीप्रकरणभेदपांचसौबारहठाउ ॥ दशैवर्ण
कोपंगतिप्रकरणभेदसहसऊपरचौबीस । ग्यारहकोत्रि
टुपप्रकरणगनिद्वैहज़ार रुपड़तालीस ॥ बारहकीज
गतीप्रकरणनेहिभेदहजारचारिछानबे । तेरह अक्षरको
प्रतिजगतीइक्यासीसत्तरपरबानचे ॥ चौदहकोसर्करी
सोरहैसहसतीनिचौरासीय । पन्द्रहअतिसकरीसहस
बत्तीससुसातसै अरसाठकीय : सोरहअष्टिसहसपैसठि
शतपांचछत्तीसअधिकलैधरी सत्रहकोअत्यष्टिलाख
प्रश्यकतिसतहमबहत्तरिकरीः ॥ महारहधुतिछब्बिस
ऐतुइकोससैऊपरचावालीसे । बावनऐतुबयालिससैशा
हासीनिधि अतिधतिवनईल ॥ बीसबरणकोकृतिप्रकर
हैनासुभेदगनिलेदशलाखु । अड़तालीससहस्रपांच
सेऔरछिहत्तरिऊपरराखुमा यकइसवरणप्रकृतिप्रकर
पाहैबीसलाखपहिलेसुनिमित्त । सत्तानवेसहस्त्रएकसेवा
वनऊपरदीजैचित्तः॥ बन्दहोंयबाई.सवर्णकोप्रतिकृति
प्रकरणजानिअखेद । यकतालीसलाखचौरानबेसहस
तीनिसैचारभेद । छन्दकहावैविकृतिप्रकरणतेइसवर्ण
होहिंजेहिमाह । लाखतिरासीसहसंमठासीछासाठग
नैअहिनाह । संस्कृतनामबरण चौविसकोतासुभेदहैएक
करोरि। सतसठिलाखहजारसतहत्तरिदुइसैऊपरसोरह
जोरि॥ श्रतिकृतप्रकरणवरणापचीसैतीनि करोरिलाख
पैंतीस । चौवनसहसाचारिसबत्तिसभेदविचारिकहत
फणिईस ॥ उत्कृतिहोतबरणछब्बिसकोभेदछकोटियकह
त्तरिलक्ष । आठहजार आठसैचौसठिक्रमतेदुगुणबढ़े
परितक्ष ॥ तेरहकोरिबयालिसलक्षोसत्रहसहससात
।

छन्दोणवपिङ्गला
सैहोय । छब्बिसअधिकजोरिसबभेदनठीकदियोचाहैजो
कोय १॥ दोहा ॥ सबकेकहतउदाहरण बाढ़ेग्रंथ
पार ।। कहूँकहूँतातेकहत बरणछन्दविस्तार २॥ लभदी ।।
चोहा ॥ एकगुरुश्रीछंदहै काभाद्वैगुरुवन्दुः । ध्वजाएक
महिनंदयक सारसपियंमधुछन्द ॥तीनिबरणप्रस्तारंजो
म यरि सात जमा न पाठ आठौगातेदासभनि
छन्दहोत आठ ३ तालीससीप्रियारमनि अरुपचोल
नरिन्दः। पाठसहितमंदरकमलम य र स त ज भ न
छन्दः। चारिपरणकेछंच ॥ सोरंठा । ति क्रीड़ानंद रा
माधरानगन्निका.॥ कलातरणिजाछंद गनिगोपालमुद्रा
हिपनि । धारीबीरोकृष्ण बुद्धीनिशिहरिसोरहो ॥ भेद
कहतकत्रिजिष्ण चारिबरणप्रस्तारके ६ ॥ दोहा ॥ मत्त
पथारहुमेंपर उदाहरणयेआइ ॥ ति क्रीडानन्दअरु
धरांगोपालसेवाइ ७॥ तिर्नाछन्द । धर्मज्ञाता । निर्भय
दाता। तृष्णाहिन्नौ । जीवैतिनो ॥ क्रीड़ाचन्द् ॥ हमारी
सोहरैपीड़ा कलिन्दीजोकरैक्रीड़ा ह ॥ नन्दछन्द । योन
कीजै।जानदीजै ॥ होकन्हाई ।नन्दआई:१०॥ धराछन् ।
सोधन्य है। औगन्यहै। सीतावरें। जोहीधरै ११॥दोहा ।।
यकइसगणबाहुल्यते छन्दहोतबहुभांति ॥ दासदेखावै
भिन्न करि तेहितरंगकीप्रांति:१२॥ लक्षण ।। यारसंतजभ
गननिदुनोभरु । होछन्दकेनामसमुझिधरु शंखना
रिजोहातिलकाकरि। मंधानोमालतीदुमन्दरि १३ ॥
शंखनारीचाच ॥ लखेशुभ्रग्रीवां । महाशोभसीवां ॥ परेवा
कहारीकहाशंखनारी १४ मा जाहाछन्द ।। रूपकोगर्वछ।
भलतीपत्रवैः। सुख्यानौसाथ में। लालजोहाथ में १५॥

छन्दोर्णवपिङ्गर
तितकाछन्द ।। अधिकोमुखहो। कियवाशशखोयाजि
कैसखियों। तिलकाजरसों १६॥ मथानछन्द ॥ गोबिन्दको
ध्यानु । सारंसतूजानु ॥ विद्यामहीमानुः ।। हैज्ञानमंथानु
१७॥ मालतीचन्दः ॥ लखोबलिबाल महाविजाला
लसैउरलाल । सुमालतिमाल १८ ॥ दुमन्दरच्छन्द ।। बाल
प्रयोधरा मोहियसोहर ।। मानुसुअन्दरः ।। मानदुमन्दर
१६ ॥ लक्षणः ॥ दोहा ॥ तीनिनन्दगसमानिका चामरसात
अनूप ॥ पांचनन्दगोसैनिका धुजलसेनिकारूप २० ॥
समालकाछन् ॥ देविहारजाहितू। बोलिपाहिपाहित॥ राखि
हैकृपानिकै। खासदासमानिकै २१॥ चामरछन्दः॥ बाल
केसुदेशकेशकालिदीप्रभादली । पन्नगीकुमारकीसेवार
कीकहांचली॥ याव्यथाफिरैनिकुंजकुंजपुन भामरो का
मधेनुपायरोरहैअतेय चामरो २२ ॥ सैनिकाच ॥ चली
प्रसूनलेनद्वन्दवाल। सुमंजुगीतगावतीरसाल ॥ बिलो
कियेप्रभाअनुपलाल बनीस्वरूपसेनिकाबिशाल २३॥
लक्षण । दोहा । चारिमल्लिकांचंचला आठगन्ददशनन्द ।।
प्रमाणिकाधुजचारिको । आठनराचसुछन्दं२४॥ मक्षिका
छन्दः ॥ चित्तचोरिलेतपौन । मन्दमन्दठानिगौन ॥ मोह
नीबिचित्रपास। मल्लिकाप्रसनवास २५॥ चंचलाछन्दः ।।
श्यामश्याममेघमोघव्योममेअलीलसैन । ल्याइयो
प्रसूनबाणकालकीअपारसैन । होतिओजुकाल्हिमें बि
योगिनीनप्राणहानि। चञ्चलानचैनमीचुनाचतीचहूँदि
शानि २६ ॥ गंडतथा विवछन्द नगा रामरोषजानिहारलोभ
मानिशम्भुजोन.उताल। पाइकैमृदंगशोरावईक
मारकोमयरहाल । होइतोकुतहलेबिलोकिशुडकोचल
.

५२.
छन्दोर्णवपिङल।
डेराइव्याल । चौंकिचिरघरैगणेशगुंज़िगण्डतेउमलि
न्दजाल २७ ॥ प्रमाणिकायथा ॥ नहैसमयघटानिकी । से
लाहमानठानिकी ॥ जताइजाइदामिनी । सुक्षिप्रमानि..
कामिनी.. २८॥ नराचन्द । मंगाक्षिएकहारतेसुभावही
चितेगई । कह्योनजाइमोहियेअघाइघाइकैगई ॥ प
खोप्रतीतिआजुमोहिंदासनलांचहै । खरोनराचतेति
याकटाक्षफोनराचुहै २६ ॥ लक्षण ॥ भुजंगप्रयाललक्ष्मी
धरनाम । सतोटकसारँगमोतियदाम ॥ समोदकदास
छभेदविचारि । परोसंतजोमनचौगुणाधारि:३० ॥ भुज
गाण्यात || छुटेबारदेखेधरेमोरपाखे बिनाडीठिकीगई
वृन्दआखे । जितेसर्वश्गारवेणीप्रभासों । भुजगोन
यातोत्रपापाइजासों. ३१ । लक्ष्मीधरयथा ॥ शंखचक्रोग
सापद्मज़ाहाथमें । पक्षिराजाचढ़योवैष्णोसाथमें:॥ दास
सोदेवध्यावैसदाजीयमें।जोरहै चारुलक्ष्मीधरेहायमें३२
तोटकछन्द ॥ घरहाइनघैरवगारेनुदे । हरिरूपसुधाउरधार
नदे । तलफैखियानकिटारनदेः । अवतोटकलाइनि
हारनदे: ३३ ॥ सारंगछन्द ॥ कीजैकुहूजानियोंशशिको
भंग वगैचलोश्यामपैसाज़ियाग । कस्तूरिहीलेपकै
लेहिसर्वंगः । प्यारीस आजुसारीनिसारंग ३४ मोती
दामझन्छ । तमाल केऊपरहेंबकपीति । किनीलशिलापर
संतजमातिः। नक्षत्रनिअंकलियेघनश्याम । किश्याम
हियेपरमोतियदाम ३५ ॥ मोदकच्छन्दः ॥ नारिउरोजवती
निकुरोजनि। कान्हउचाटभरेजिउरोजनि॥ लीबेहेकवरी
कोचरणोदक । कूवरजासुवशीकरमोदक ३६ ॥ उदाय ॥
दोहा ।। अंतभुजंगप्रयातक लघुइकदीन्हेकंद । तीनिभ
।

छन्दोर्णवपिङ्गल।
५.३:
गनहेगुरुदिये बंधुदोधकोछंद ३७ मोदकशिरकैबंधुशि
र द्वौलघुतारकबंद। पंचसगनभ्रमरावली छयगणक्रीड़ा
चंद ३८ पंचभगनगरुएकको छन्दकहावैनील । तीनि
सगनशिरकरणदै हैमोटनकसुशील ३६ ॥ कन्दछन्दः ।।
चहूँओरफैलाइहैचन्द्रिकाचंद । खुलैगीसुगंधैफुलैगील
ताछंद ॥ जगत्प्राणत्योंडोलिहें मन्दहीमंद । कबैचेतुऐ
हैचिदानन्दकोकंद ४० ॥ बंधुचंद ॥ आरततेअतिआर
तहै । आरतवंतपुकारत है. ॥ दास हूकोदुखदूरि
बहायों। तोप्रभुआरतबंधकहायो ४१ ॥ तारकचन्द ।।
यैकमयंकमुखीचलिऐहै। सविलासबिलोकिहियेलगि
जैहै। बिरहागिभरोहियरोसियरहै। करतारकरवहवास
रऐहै ४२ तजिकदुखगंजहजारकजीरकः । तसोवतभ
मिभटारकटारकाभजिलेप्रहलादउबारकबारक। जराको
निस्तारकतारकतारक ४३॥ भ्रमंराधलीछन् । चलिबीस
निस्वेउहिआजहिल्यावतहीं । तुम्हरेहियकीसबंतांपबु
झावतहौं । इनकीरचकोरनदूरिकरोवनते भ्रमराव
लिवेगिबिडारहुकुञ्जनते ४४ ॥ क्रीवाछन्द ॥ दुहुँओरबै
ठीसभाशुभ्रंसोहेसुमानोकिनारा । रहीदूरिलोफेलिहै
चांदनीचारुज्योंगंगधारा सजेचनरीनीलनचंतिचं
द्राननीबारदारा। करैचंद्रक्रीड़ामनोसंगलैशर्बरीसर्चता
रा ४५ ॥ नीलछेदः ॥ मोहनाननकीमुसुकानिअनूपसु,
धा। होतबिलोकिहजारमनोभवरूपमुधा ॥ पीतपराप
रदासन्योछावरिबीजुबटा। नीलकलेवरऊपरकोटिक
नीलघटा ४६ ॥ मोटनकछन्द । मोहैमनुबेणुबीइअली।
मसैंउरअन्तरभांतिमली। कीजैकिनब्योतअगोटनको ।
-

५४
छन्दोर्णवपिङ्गल।
हैचोरयहीमनमोटनको ४७ ॥ दोहा ॥ भुजंगप्रयातहि
आदिदै संबचौगनोबनाउ । होतपरमसुखदानिहै भाषो
भोगीराउ ४८॥ इतिश्रीदासकृतेछन्दोणवेबेगनबाहुल्य
केछन्दवर्णननामदशमस्तरंगः:१०॥
अथवर्णसवैयाप्रकरणं ॥ दोहा ॥ यकइसतेछब्बीसलगि वर
पसवैयासाजु ॥ इकइकगणबाहुल्यकरि बरण्योपन्नग
राजु १॥ लक्षण ॥ सातभहैमदिरागुरुअन्तहुदैलघऔ
रचकोरकहाँगुनिः। ताहगुरूकरिमत्तमयंदलहूमदिराशि
रमानिनियेसुनि ॥ आठकरोयभुजंगरलक्षियसोदुमिला.
तहिआभारहेपुनि । जाहिसुमोतियदामबनावहुमागन
पाठकिरीटरचोचुनि। २ ॥: मंदिरांछन्द ॥ दीनअधीनकै
पायपरीहोभरीउपकारकोधावहित । मेरीदयालखिहो
हिप्रसन्नदयाउरअन्तरल्यावहित ॥ नैननकेहियकीविर
हागिनिएकहिबारवुझावहितू । श्रीमनमोहनरूपसुधी
मदिरामदमोहिंछकावहित ३॥ युक्लदूसरोमंदियः । चकोरहंद ।।
सोहत तुलसीवनमेंसमिरासमनोहरनन्दकिशोर । चा
रिहपासहगोपबधमणिदासहियेमेंहलासनथोर ॥ कंब
लउरोजवतीनको आननमोहननैनभ्रमैजिमिभार । मो
हनाननचन्दलखेबनितानकेंलोचनचारुचकोरे ४॥
मत्तगयंपच सुन्दरिशभ्रसूबेषसुकेशसुश्रोणसुठीनिसु
दन्तसुसैनी । तुगतनामदुअङ्गकृशोदरीचन्द्रमुखीम्डंग
शावकनैनी ॥ सोनेकोवासरुदासंमिलेगुनगौरिप्रियान
बलासुखदैनी । पीननितम्बवतीकरभोरुहमत्तगयन्द
गतीपिकबैनी ५ ॥ मानिनीयधा । प्रफुल्लितदासबसन्त
--

छन्दोणवपिङ्गल। ५५
किफौजशिलीमखभीरदेखावतिहै। जमोतिप्रभजनकी
गहिपत्रनिमानबिभंजनिधावनिहै ॥ नयेदलदेखिहथ्या
रनडारिभटेतियसंगतिभावतिहै। चढाइकैौहकमान
निमानिनिकाहेतूबैरबढ़ावतिहै ६ ॥ भुजंगछन्च ॥ तुम्हेंदे
खिबेकीमहाचाहबाढीमिलापैबिचारैसराहेस्मरेज । रहै
बैठिन्यारोघटादेखिकारीबिहारीबिहारीबिहारीररैजू॥भ
ईकालबौरीसीदोरीफिरैआजुबैठीदशाईशकाधौंकरैजः ।
बिथामेंगसीसीभुजंगैडसीसीछरीसीभरीसीघरीसीभरैजू
७.॥ लक्षीछन्द्र ॥ बादिहीआइकबीरमोऐनमैं बैनकेघाव
कौवोकरैथावरी । आपनीतत्वहीएकहीवाकयोकौनकी
वोकरैबातफैलावरी|दासहोकान्हदासीबिनामोलकीछां
डिदीन्ह्याँसबैशबंशावरी ज्ञानशिक्षानितासोजुदीर
क्षियेलक्षियेजाहिप्रत्यक्षहीबावरी ॥ दुमिचाछन्द ।। सखि
तोमहँयाचनआईहीम उपकारकैमोहिंजियावहितः। तो
हिंतातकीसौंनिजभ्रातकीसोयहबातनकाहूजनावहितू॥
तुवचेरीहोहोउँमीदाससदा ठकुरायनमेरीकहावहित के
रिफन्दकळूमोहियारजनीसजनीब्रजचन्दमिलावहित ह.
आभारछन्द येगेहकेलोगधौंकार्तिकीन्हानकोठानिहका
ल्हिएककहींगौन । सम्बादकैबादिहीबावरीहोयकोमा
जुआलीरहौठानेहीमौन ॥ होजानतीहानधौंसीखकौनेद
योनन्दकोलालगोपालधीकौन आभारह्यांद्वारकोता
हिकोसौंपिकमोहिऔतोहिंह्यांराखतेमौन १० ।। मुक्तह
राछन्द ॥ पठाचतधेनुदुहावनमोहिनजाउँतौदेखिकरौतुम
टेहु छुटाइभंज्योबछरायहबैरीमरूकरिहौंगहिल्याई
होंगेहु ॥ गईथकिदौरतदौरतदासखरोटलगेभइबिहल
13

५६ छन्दोवपिङ्गल। देहु । चुरीगईचरिभरीभइधूरिपयोटुटिमुक्तहरायहले हु११॥ किरीटछन्द ॥ पायनापीरियेपावरियाकटिकेशरि यादुपटाछबिछाजित । मुंजमिलेगजमोतियहारमेंरीति सितासितांतिहभाजित ॥ अंगअपारप्रभाअवलोक तहोतहजारमनोभवलाजित ।। बालयशोमतिलालयेई जिनकेशिरमोरकिरीटत्रिशजितः १२ ॥ लक्षण ।। दोहा ।। आठसगनगुरुमाधवी सुपियमालतीचाहिं । सत्यनयों मंजरिकहे सत्यभरोअलसाहि १३॥ माधवयथा ॥ बिन पण्डितनन्थ प्रकाशनहींबिनम्रन्थनपावतखण्डितभाहै। जगचन्द्रबिनानंबिराजतियामिनियामिनिहूविनचन्द्रन माहै ।। सुसमाहिकेदेखतेसाधुताहोतिऔसाधुहीतेशुभ होतिसंभाहै । छबिपावतहमधुमाधवीतेमधुको अतिमा धंवीक्सोप्रभाहै १४ महिमांगुणवंतकीदासबढ़ेवळसै जबरीशिदानजवाहिर । गुणवंतहुतेपुनिदानिहूँकोय शफैलतजातदिगंतकबाहिर । जिमिमालतीसोंअतिने हनिबाहेतेभोर भयोरसिकाईमेंजाहिर । अरुभौरहुको अतिआदरकीन्हेसुदासमेमालतियोभइमाहिर ॥ १५ ॥ मंजरीयथा, ।। बसंतसेआजुबनेब्रजराजसपल्लवलालकरी बरहाथे। सुकुण्डलके मुताबिच,मकरंदकिबुंदनकी बिनाथे । मलिंदबनेकच धंघरवारप्रसनघने पहुँचीनमें गाथे गरेजिमिकिंशुकगुंजकिमालरसालक्रिसंजुलम जिरमाथे १६ ॥ अरसातचन्दः । सातघरीहूँनहींबिल गात लजातौबातगुनेनुसुकातहैं। तेरीसौखातही लोचनरातके, सारसपातहतेसरसातहैं । राधिकामा धोउठेपरमातहैं नयनअघातपेखिप्रभातहैं । ला

मेजतिजोहै २॥ यथा । लक्ष्मीकांपनरईहै । राखतेसों
छन्दोणेवपिङल
५७
गिगरेअंगिरातभातभरेरसमातखरेअरसातहैं १७
इति श्रीदासकृतेछन्दर्णिवसवैयाप्रकरणवर्णननामएका
देशस्तरंग: ११
अथ संस्कृतयोग्य पद्यवर्णनम्
द्रोही कहाँसंस्कृतयोग्यल
खिपद्यरीतिसंचकन्द ॥ गनलक्षणगननाममेंछन्दलक्ष
छन्द मयतीछन्द रिंगनोकर्नोसंगनोगो। जानि
येसोरुकमवतीहो ॥ पायमैनौ अक्षरसोहैं। तीनिऔछी
--
जातभईहै। सोरहीनएकरतीज । लङ्कहीजोरुक्मवती
जू ३ ॥ सालिनीछन्द । कोंकनौरंगिनोरंग्गनोगी। जानी
याकोछन्दहेसालिनीहो ॥ पायेपायेवरणएकादशोहै।
चारसातैबीचबिश्रामसोहै ॥ यथा ॥ बालावेणीमद
भुतैयालिनी है। मांधोनीकेगकीघालिनी है। पीके
जीमेप्रमकीपालिनी है। सौतेकेहीसर्वदाशालिनी ५ ॥
बातोमछिन्द | गोगीको संगनोजगनों । बातोमीयहई
छन्दवनों । सातेचौथेजत्ति चारुजाय । पायवदिश
एकतामें ६क्षा यथाः ।। कैसेयांकोंकहियेनेकनाहींनी
बीबांधीरहतीयाहिमाहीं॥ तातेऐसोबरणबुद्धिमेरी। बा
तोमाहेसजनीलंकतेरी ७॥ इन्द्रबजाउपद्रयजाछन्दः ।। तकार
करनीसगनोयेगन्नों । इन्द्रबजीदशएकबन्नों ।। उपेंद्र
बजाज़गादिसोई । दुहमिलेपैउपजातिहोई ॥
इन्द्रजंना यथा ।। एरीबड़ीजोगिरिकहायो । सौचित्तपी
कोइनसोंगिरायो । सोहैअयानोमृदुजोकहैरी । है
इन्द्रबजामसकानितेरी उपेन्द्रबजाआदिको लघ
5

।
छन्दोर्णवपिङ्गल।
पढ़ेहोतहै १० उपजातिकोईतुंकआदिलघुपढ़ें११॥
उपस्थितच्छन्द ॥ कोंसगनोपियगोपगन्नो । सोपस्थितो
हैदशएकबन्नो ॥ जगन्नुसगनोतकारुकरना । पयस्थित
कहेंमनप्रसन्ना १२॥ यथा ॥ प्यारेप्रतिमानकहा
क मैं । जोआपनापनोईनरोमें ॥ आलीढ़ईबहुते
कियेह । कोपस्थितिहीसुरैरहैनकेहू १३-॥- पयास्थतछन्दः।।
दुखोरुसुखको हैदानिसोई । वहेहरंतदूजोनकोई ॥ नदा
सजीमेंहूजेनिरासी । जोपयस्थितहैवैकुण्ठवासी.-१४॥
सालीछन्दः ॥ नन्दकरनोनन्दगोरगानोगों । नामयाको
छन्दसालीकहोहो ॥ चारिसातैदासाविश्रामठानो । अ
मरायेग्यारहोजोरिआनो १५ ॥ यथा ॥ कान्हकीजो
त्योरतीखीसहोगी । मोहित्योहीधन्यप्रालीकहोगी।
शूरकैसेजोरजानेजियेमें । होइजाकेशेलसालीहियेमें
१६ । सुन्दरीछन्द, ..॥ नगनभागनुभागनुरग्गना। चरण
चारिहुसंदरिशोभना॥ दुतविलम्बितयाहिकोऊकहै ।
बरणबारहदास अंचकहै १७॥ यथा-॥ अनमनीसजनी
सबसंगकी । सुधिनतोहिरहीकछुअंगकी ॥ दुखितमो
हनलालमकुन्दरी । कुढगमानहिभानहिसुन्दरी १८ ॥
प्रमिताक्षरा ॥ प्रियनंदनंदसगनोसगनो। प्रमिताक्षराहि
पगनोपगनो । जतिबीचबीचभनिलेभनिले । दशदो
इवर्णगनिलेगनिले १६ ॥ यथाः ॥, अँगियासमाढबलंदे
जियकी । अरुनीलअंचलहुसोमढ़ीली ॥ तिनबीच
व्यक्तझलकैकुचयों । कवितानिबद्धप्रतिमाक्षरज्यों.२०॥
बंशस्थबिलचन्द ॥ जगन्नुकरनासगनोलगोलगो। सुछन्द
वंशस्थविलोपगोपगो ॥ गो आदिकोबर्णसुइन्द्रबेशुहै।

छन्दोवपिङ्गल। ५६
मिलेंदुघापैउपजातिअंशुहै २१ ॥ यथा ॥ सक्योतपर
चीमहिमैनहोइन । नतोहमारेथलुलेइसोइज ॥ नटीन
बंशस्थबिलोकिसोहनी। कृतइन्द्रवंशोपरिविश्वमोहनी
२२ ॥ इन्द्रवंशायथा ॥ जान्योंतपस्वीमहिमेनहोयज । नतो
हमारोथलुलेइसोइजू ॥ नारीनबंशस्थबिलोकिसोहनी ।
कीइन्द्रवंशोपरिविश्वमोहनी २३ ।। विश्वादेवीचन्द ॥ गो
गोमोरूपोगोयगानयगान ॥ विश्वादेवीकेपायचित्तं
मानै ॥ सोहै आभैबारहोवर्णजोके ।। बोयेपांचोसात
विश्रामताके २४ ॥ यथा ॥ सेऍगौरीकेपायमेकीलला
ई। योगीकोहोतीयोगरागाधिकाई ॥ राजस्सोपावैशूर
जेहोतसेवी । सोहागैवतीसेइकैविश्वदेवी २५ ॥ प्रभाछ
न्द ॥ हिजबरपियरागिनीरागिनी । करतविमलचारुम
दाकिनी॥ बहुतकहतहैंएहीहैप्रभा। दुदशबरणऔरंधा
हैअभा २६ ॥ यथा ॥ शिवशिरपरतोढरीगंगरी। तियकु
चशिवपैत्रिवेणीढरी ।। सुरसतियमुनामनोभामिनी । मु
कुटगनप्रभासुमन्दाकिनी २७ ॥ मणिमाखाछन्द ॥ कर्नापि
यकर्नाकर्नापियकों। आधेविश्रामोहैबारहवर्ना ॥बी
सैजहँमत्तासोहअतिआला। भोगीपतिभाषायाकोमणि
माला २८ ॥ यथा ॥ चन्द्रावलिंगौरीपूजनलैजाती । की
जैकिनप्योरेंसीरीअबछाती ॥ राधावहआवैएहोनँदला
ला। जाकेहियसोहैनीकीमणिमाला २४ ॥ पुरछन्द ॥ ति
यहिजबरकोंनन्दकनों । जतिसुअरुचारैबीसबनों ।।
देशअरुविषयावर्णराख्यो। अहिपतिपुटनामेछन्दभा
स्यो ३०॥ यथा ॥ नहिब्रजपदिबातेंतसुनावै । सखिम
रतसमयमैमोहिंज्यावै अमियस्त्रवत आलीआस्यते

छन्दोर्णवपिङ्गल
रोश्रिवणपुटनपीवैप्राणमेसे ३१ ॥ ललिताछन्दः ॥ तोत्र
ग्रगैलपियनन्दनन्दगो । बिश्रामलेतपगपंचसत्तको ।।
हेमुग्धदौरुदशवर्षदेहिरी । सानन्दजानिललिताहिले
हिरी ३२ ॥ यथा ॥ बंशीचुराइस्यकन्तमेंगई। कान्हेंब
ताइइनकानमेंदई ॥ जैसीविचित्रषभानुलाड़िली । ते
सीप्रवीनललितासखीमिली ३३ ॥ इरिमुलछन्दः ।। हिज
वरनन्दजगन्ननन्दक।। हरिमुखछन्दभुजंगराजबों।
दशअरुतीनिबरणचारुसोहे । षटअरुसातबिरामचि
तमोहै ३४ ॥ यथा ॥ बन्धहिनजेमृदुहासपासमाहीं ।
विधतहियेडगबाण जासुनाहीं ॥ धनिधनितेपर्मदासदा
कहावै । हरिमुखहेरिजुफेरिचेतल्यावै३५ ॥ महर्पिणी ॥ मैं
जानोद्विजवररग्गनोयहेज । याहीकोप्रहर्षिणीसबैकहै.
ज-॥ तीनैअरुबिरतिबिचारिपांचपांचो । तीनैअरुदः
शअखरानिठीकांचो ३६ ॥ यथा ॥ पायोतरिसकरि
कौनसुखराधे । बोरीबेरीसनकोनबरसाधे ॥ तेसतन
खियनअश्रुवर्षिणीहै । सौतिनकीजनिउमहाप्रहर्षिणीहै
३७॥ निरुचिराछन्द ।। लगेलगहिजबरगैलगो। भले
लीतनुरुचिफबैलगो ॥ त्रयोदशवर्णनिसोप्रभावनी।
बिरामहेलखिनवचारिकोधनी ३८ ॥ यथा ॥ अनेकधा
मनमथवारिडारिये । कितीप्रभामरकतमॆविचारिये ॥
कहांचलैजलधरज्योतिमन्दकी । सकैतनुरुचिराम
चन्द्रकी ३६ ॥ क्षमाछन्दः॥ नगननगनक जगन्नुगोगो
बिरतिबरणआठसरेकहोहो ॥ त्रिदशबरपनीकेकरोज
माजू। भुजगपत्तियाकोकक्षमाजू:४०॥ यथानी निज़
बशवरनारीसतेजपाले। भुवितरुणधनीकै भगोपाल।।

छन्दोर्णवपिङ्गल।
तबंधनिधनिजी कह्योपरैजू। जबसमरथहवैकेक्षमाकरे
जू: ४१ ॥ मजुभाषिनी ॥ सगनोजगन्नुसगनोजगन्नुहै।
गसमेतितीनदशईवरन्नु है ॥ षटसत्त्वबीचजतिरीतिरा
खिनी। मृदुछन्दहोतहमंजभाखिनी:४२ ॥ यथा ॥ वहरै
निराजबदनानिहारिहों । तबदासजन्मसुफलीबिचारिः
हौं । अखियांविशालछबिकजनाखिनी बतियारसाल
मृदुमंजुभाखिनी ४३ ॥ मन्दापिनी ॥ ध्वजाध्वजानन्दसः
गनोलगेलगे। त्रयोदशैबरन्नधरियेपगेपगे। सातके
बीचबिरामराखिनीफणीकह्योछन्दसुमन्दभाखिनी४४॥
यथा ॥ सुनोकरैकान्हबरबीनबादको । कियोकरैबांसुरिह
केनिनादको ॥ बिनासुनैबैनतूअकन्दराखिनी।मलीलगे
कोकिलउमन्दभाखिनी ४५ ॥ प्रभावती ॥ तकारंगोद्विज
बरनन्दरागिनो । तीनैदशैचरणनिप्रख्यराभनो । चा
रैछहैतियबिषरामभावती । याकोकह्योअहिपतिप्रभा
वती ४६:॥ यथा। कैगोरसीवसनअरूदेंहसर्बको कीबो
करदिनदिनग्वारिंगर्बको ॥ जोपैनतोतजिउनचित्तमा
वती। केतीलखीशशिबदनीप्रभावती..४७॥ सततिख
कः ॥ कर्नोजगन्नुसगनोसगनोपगन्नों । सोहेबसन्ततिल
कादशचारिबन्नो ॥ आठैलहैबरणमेजतिचारुराख्यो।
भाष्योभुजंगपतिकोयहदासभाख्यो ४८ ॥ यथा ॥कारी
पलासतरुडारसवैभईहें । लालीतहांकछुककिंशुककीठ
ईहैं । कैलाजम्योमदनुपावककोविचारो। आयोबसन्त
तिलकाननतोनिहारो ४९॥ अपराजिताछंद ॥ नाननंगनः
नन्दनंदधुजाधुजा। बिरतिसंजतिचारुचारुदुजादुजा।
चतुर्दशहिवर्ण सोपगभ्राजिता । भुजंगभाषितचन्द्रहैः
।
--

६२ छन्दोणवपिङ्गल। अपराजिता ५० ॥ यथा ॥ बिनयसुनहिचण्डमुण्डबि नाशिनी। जनदुःखहरिकोटिचंद्रप्रकाशिनी ॥ शरणश- रणहैसदासुखसाजिता । द्रवहिंद्रवहिंदासकोअपराजि ता ५१ ॥ मालिनीछा नगननगनकायोग्यगनोयग नो। बिरतिरचियआठौरसातेंबरन्नों ॥ सुगनगुन निलेकेहारहीडालिनी है। सरससुरसबेलीपालिनीमालि नीहै ५२ । न्यथा ॥ रहतिउरप्रभातेस्वर्णकीकातिर्फे ली। विहँसतिनिजआभाफेरिपावैचमेली ॥ सहजहि गुहिमालाबालकेकण्ठमेली । अद्भुतछबिछाकीमालिनी स्यौसहेली ५३॥ चन्द्रलेखाछंद ॥चास्योहाराधुजैकनों रग्गनोरग्गनाहै। गोसंयुक्तोदशैपांचैअख्यरापरगना है। चारैचारैमिलेसाततीनिविश्रामदेखो। भोगीभाय कहैदशोंछन्दहै चन्द्रलेखो ५४मा यथा ।। राधाभूलेनजा नोयोहैलवन्यानमेरी । जेहातेहातिहारीसीतीप्रभाहै| नेरी भौहऐसीकमानेनैनसोकजदेखो। नासाएसों सुआतुरोडेआस्यसोचन्द्रलेखो ५५ ॥ प्रभद्रकछेद ॥ द्वि जबरगैलगैलपियननन्दनन्दहै। गुरुयुतआठसातत्रिश्रा' मबन्दहै। पन्द्रहबरनपायकरतेअनन्दहै । कहतप्रभद्र' काख्यअहिराजछन्दहै.५६॥ यथा । रिसकरिलेसहायक रिदापदांकई । तबहुँनकालदण्डप्रतिबारंबांकई । जि मिहिंसुभायभाइप्रिंयरामभद्रको । दुखहरतादयालकर ताप्रभद्रको ५७॥ चित्राछंद । जोमदीजैआठोहानगो यकारोयकारो। पाठेसातै दैबिश्रामोछन्दचित्राविचारो॥ आठोदीहामाहीजीहाआशुहीदौरिजावै । भोगीभाषे त्योहीयाकेपाठकीरीतिपावै ५८ ॥ यथा ॥ फूलेफूलैफूले --

छन्दोर्णवापिङ्गला ६३
वारीसेजमेंजोविहारैः । शीतेधूपेडाभेकांटे सुक्योंपाउँ
धारै ॥ शोभाषैरोवैझंखोकौशल्याौसुमित्रा । कैसे
सेहैदुःखैसीताकोमलांगीविचित्राः ५६ ॥ मदनललिताछंद ।।
चास्योहारानगनसगनोकर्नानगनुहै। अंतेदाहादशरु
रसईबर्नापगनहै ॥ चारै अरुहरुलहमें विश्रामलहि
ये। भोगीभाषेमदनललितायोछंदकहिये ६॥ यथा ॥
होनेलागीगतिललितऔबातेललितहैं। हावोभावॉल
लितमिसरीमानोकलित कानोलागीललितअति
हीदोऊगरी । दीन्होआलीमर्दनललितातोअंगसिग
री ६१ ॥ भयरणललिताछंद ॥ यगन्नीमोआनोनगनसगनो
गोयगन्नो। दशैकाहीज़ाकेचरणप्रतिमहोइवन्नो॥छहै
छाओचारोवरणमहियाहैविरामी । फणिन्दैभाष्यो हैन
वरणललिताछन्दनामी: ६२ ॥ यथा ॥ तिहारेजोवा
सीमिलनहित हैचित्तसाधा। कह्योमेरोमानोंचलोउतही
बेगिराधा ।। जहांगाढ़ीकुजैतरणितनयातीरराजगई
ह्यांहोदेख्योप्रवरललितान्हांनकालै ६३॥ गरुक स्वछंद ।।
द्विजवररागनोनगनरागनोराग़नो गरुड़रुतेभनो
वरणसोरहपागनो ॥ विरतिविचारकैदयसातनवठानि
ये। भुजगमहीपकोहुक्मदासजोमानिये ६४ ॥ यथा ॥
कतकिकागज्योभजतद्ध-ौचालको मृगपतिदेखि
ज्योभजतझण्डशुण्डालको । हरहर केकहेमजतपापको
व्यूहयों । गरुड़रुत्तेसुनेभजतव्यालकोजूहज्यों६४ाथ्यो
वंद ॥जगन्नुसगनाध्वजानगनरागनांदोइजू। विरामवसु
वर्णमेंबहुरिनौहिमेंहोइजः॥ चरणप्रत्तिदासजवरणसत्र
हैंठीकहैं । अहीशखगनाथसोप्रकटिछदएथ्वीकहैं ६६॥
.

'छन्दोणवपिङ्गला
यथा ॥ समर्थजनकैसेहकरतमन्दजोकाजहें । विशेषित्व
हिपालतेगहन्तछोड़तेलाजहैं। लियेअजहूँशभुजरहत
कालकूटैगरोअजीउरगनाथजरहतशीशष्टथ्वीधरदछ।
मालाधरछन् । नगनसगनाध्वजानगनरग्गनाअत्तरो।
भुजंगपत्रिभाषियोप्रकटछंदमालाधरी । विरतिवसुनों
कहसुकविसकेगोतजू । चरणगनिलीजियेबरणसत्र है
होतजू.६८ ॥ यथा ॥ युवतिगिरिराजलषणकोगईंदूल
है। विकलङरिफैभजीनिरखिशम्भुकोशलहै । उरंगते
नभूषणोबदनआकप भरे । बसनगजपालकोमनुजमु
एडमालाधरे ६६ ॥ शिखरिणीछन्द ॥ पगन्नोमोआनीनगन्न
सगनोसोदसगनों । कहभोगीराजाबरणदशौसत्त
पगनो छविश्रामोपायेबहुरिछहऔपंचकरिणी ग
नोचारिउपायेंतवकहहुजू हैशिख
खरिणी
मृगेंद्रेजीत्योहेगतिहिअरुनैनानिहरिणी । सुवेणीहीव्या
लैरुचिरंगतिहीमत्तकरिणी ॥ मिलोमाधवनसोंसुचित्त
सजनी निडरिणी । हरायेई तेरेबसतसिंगरयाशिखरि
पी ७१॥ मन्दाक्रांता यथा ॥ चास्योहारानगनसगनोरग्गं
नारग्गनगा। मंदाक्रांताभुजगभनितासत्रहैवर्णसङ्गमा
कीजैचौथेविरतिछठये फेरि कैसातयों में । किन हसतक
विन्हसोदासजूबातयोंमें ७२ ॥ यथा । कोमाधोनीनल
धरणिकोकहाकामनारी । केतीरम्भाबिमलछबिहकार्ति
लोत्ताविचारी ॥ राधाजुकेसरिसकहियेक्योनरीजोपिता
को। मंदाक्रांताकरेउजिनहैउरबशीमेनकाको ७३ ॥ हरि
णीच्छेदः ॥ नगनसंगनोकर्नातकारभागनुराधरो । बिरति
वसुमैनोमेसँभारिकैकरबो करो। बरणदशऔसातहपाय
७०
यथा-

छन्दोणवपिङ्गल।
६५
मैचित्तदैसुनो । फणिराजभाष्योयाचन्दकोहरिणीगुनो
७४-1॥ यथा । लजित करताजेहै अंभोजखंजनमीनीव
सतनिजजेहीमेंगोपाललालप्रवीनके ॥ फिरतबनवतो
पालेपरेपशुहीनके । त्रियगनसेकैसेनैनाकहोहरिणीन
के ७५ ॥ द्रोहारिणीछंद ॥ चास्योहारानगरसंगीतकार
कर्नालगे । भोगीराजाभणितदशामौहेसातबापगे ।
विश्रामोकेदिशिमुनिन्हकोआनंदवोहारिणी । दासोभा
सुनहुसुकवियोहैछंदद्रोहारिणी ७६ ॥ यथा ॥ मेघादे
बीसुचितकरनीआनन्देविस्तारिणी । प्रायश्चित्तोबहु
जनमकोदण्डाईमेंटारिणी॥ दोषखंडीदुरितहरणीसंता
पसंहारिणी । राधामाधोचरितंचरचासन्द्रोहद्रोहारिणी
७७ ॥ भाराकान्ताछन्द ।। चास्योहारानगनसगनोजगनुज
गन्नुगो । भोगीभाषेविरंतिदशौनिचारिपगन्नुजो ॥
चायोपायेगनिगनिधरियेवरणसुमत्रहै । भाराक्रांताक
हतंजगजुजनमुनत्रहै ७८ ॥ यथा ॥ नीकीलागैसरस
कविताअलंकृतसूनियों । क्रीड़ाज्योंसुखदबनितासुब
स्त्रबिहनियों ॥ नहींभावैभरसकबहूंसुधीनिएकोघरी ।
भाराक्रांताअभरननिज्योविभूषितपूनरी ७६ ।। कुसुमित
लतापलियाकुन्द ॥ कैपांचोहारामगनसगनोरग्गनागोयदी
जै। विश्रामोपांचैबहुरिछहमेंसातफेरिकीजै ॥ पायपा
ग्रमेंसमुभिधरिये वर्णअट्ठारहैत । भोगिन्द्रभाष्योकुसु
मितलताबल्लिता छन्दहेज ८० ॥ यथा ॥ बंधूपोलिंबो
कमलतिलपाटलानौचंबली । चंपाकश्मीरोघरिहि
बिचह्या फलिएकवेली ॥ दीजैआयकोसुखदृगनिकोकुं
जहोबिहारी । बैठोह्यांदेखोकुसुमितलताबल्लिताफूल
tr

६६
छन्दोर्णवपिडल।
वारी २.१॥नन्दन्छन्दः॥ दुजबररग्गनोनगनग्गनोधुजारा
गनो। जतिमुनिमेंभनोछह मेंठनोरूपाचैतनो। अहिप :
तियोंकहैचरणपाल हैसुअहार है। सबदुखकन्दनेसुकबिन
न्दनेरच्योज्योंचहै ८२॥वथा ।। मनुसुनिमोकह्योचहतजी
दस्योंबिथाकेगनै । तजिसबासरैजगतकोकरैएहीतूध
नै॥ भवभ्रमकोहनैभगतिसोसनैतनैीमनै। यशुमतिन
न्दनेगरुड़स्यन्दनेकरहिंबंदने ८३॥ नाराचच्छन्दः ॥ नगनन
गानररंगनोआगेहूतिनिदैरग्गनो । विरतिनवहिमें करीब
अठारहैपरगनो॥भणितभुजंगराजकोदासभाषैसुतों
मांच है । मदनविशंखुपांचहैषष्ठमोंछन्दनाराचहै ८४॥
यथा । परमसुभटहोगन्योभावतीतोहिसोहारियो। निपट
बिबशहूगयोहालबंदीदयोडारियो। कबहुँडरतनाहिजेते
गसोंतोपसोंकोटसों । करतबिकलताहितनैननाराचकी
चोटसौ. ८५. ॥ चित्रलेखाछन्द ।। चास्योहारनगननगनगो,
यगन्नायधारो। बिश्रामोहचतुरचरणौसातसातैबिचा
रो ॥ पायमाहींगनिगनिधरियवर्णअट्ठारहज । जीमा
नोभुजगपतियोचित्रलेखाकहैत ८६ ॥ यथा ॥ इच्छा
चारीसघनसदनकीयोबनाढ्याअरोगा। भर्त्ताहीनापरम
छनिवतीधर्तुनारीसँयोगा। भोगीदातातरुणजननके
पासमैबालदेखो। तानारीसोसकुलधरमकोराखिबोचित्र
लेखो ८७ ॥ साईलालेताछन्द ॥ मोनोसंगनोजगन्नुस
गनोतकारसगनो विश्रामोगनिवारहैबरणकोफेरिछग
नो ॥ अट्ठारहैबरणदासलखियेचौपायबलिता। याको
नामधयोभुजगपतिहीहैसाईललिता ८॥ यथा
सालस्यानैनाउठीपलंगतेपालागिरबिसों । हामतेनच

-
छन्दोर्णवपिङ्गल।
लीचलीसदनकोऐंड्राइछबिसौ ॥ सोहेतेसिगरेसुभांतिवि
गरेशृंगारबलिता। बक्ताभोजप्रफुल्लसाईललिताबेनीधि
गलिता ॥ सुभाछन्द ।। लगोचारोहारानगनसगनोत
कारसगनो। छबिश्रमैठानोछपुनिगनिकैतोफेरिछगनो॥
दशैआठैव सुकत्रिजनकोदातारंसिधिको। सुधाबिन्दो
छन्दैभजगवणेहैयाहिविधिको ६० ॥ यथा ॥ चलेंधीरे
धीरेगतिहरतिहमातेहिरदकी । उनींदेनैनासोहरतिम
रुणताकोकनदकी ॥ किनारीमुक्तासोछविबदनकीयाभां
तिछलके । सुधाबुन्दैमानोउफिनिशशिकचौफेरिझल
कै ६१॥ शार्दूलविक्रीड़िताछन् । मोबानोसगनोजगचुत
गनोकर्नायगन्नोधनों । हेरोबारहसातमेचहतहीविश्राम
कोसोधुजो ॥ देखजासुरसालचालपदकीपद्मीरहैब्रीड़ि
ते । बर्नाहैबोनई मईशसुनियेशार्दूलविक्रीड़िते ६२ ॥
यथा ॥ राजैकुंडललोलकानशशिकीसोहैललाटीकला ।
आछे अंगनिपीतवासबिलसैत्योंआँगुन्नीमेंछला ॥ ती
खेअस्त्रअनेकहाथगिरिजालीन्हेमहाईड़िते । आवैमा
तिभलीबढ़ावतिचलीशार्दूलविक्रीड़िते ६३ ॥ फुलंदाम
छन्द ।। हैपांचोहारानगननगनगोरग्गनांगोयजामे । पाये
मेंबर्नादशअरुणत्रशोजानियेफलदामे ॥ विश्रामोपां
चोपुनिमुनिमहिासातमेंफेरिदीजै। फैलापोयाकोभुज
गनृपतिही दासज जानिलीजै ६४॥ यथा ॥ ब्रह्माशंभ
स्योसुरमुनिसिगरेध्यावतेजासुनामैं । जाकेजोरेकोसुनि
यतकतहूंबीरदूजोधरामैं ॥ ताहीकोगोपीविवशकरतिह
नयनारक्तता । टेडीभौहेंबिय करगहिकमारतीफुल्ल
दामैं ५ || मेघथिस्फूर्तिसछन्दः॥ यगनोमोबानोनसनगग

६८
छन्दोणवपिङ्गलः।
नोरगगनोरगंगनोगो।जहांपायेपायेवरणसिंगरोवोनईसे
गनोहों। छविश्रामोलकैबहुरिछह औसातसोपूजितोहै।
याहीछन्दोभाष्योभुजगनृपतिकोमेघविस्फूर्जितोहे६॥
यथा ॥ थक्योंहेबासन्तीपौनबाहिऔकोकिलाकृतिहारी।।
निशानाथोहास्योहननहितुकैचन्द्रिकातीक्षणभारी ॥ न
आवैगोप्यारोकरतिसखितबांदिसन्देहवौरी । सहेगोनी
कीहीकठिनहियरामेघविस्फूर्जितौरी ६७ ॥ छायाछन्द ॥ य
गन्नामोआनोनगनसगनोक लगैगोलगे। विरामदेछा
मैबहुरिछहौसातें सुनीकोलगै॥ गनोयाभवादशन
रुनवईपायपायेबन्दु है। फणीराजाबाणीचितुवरहितोछा
यायहीछन्दहै ॥ यथा । लियोहाथवंशीबसनपहियों
गोपालकोआपुंही। नजानेक्योंपायोवर्णवहई कैशीशज्यों
जापुही ॥ हसेबोलैमानोकरति अवहींक्रीड़ाहिबिस्तार
सी । यकान्तामेंकांतालखतिनिजयोंछायालिये आरसी
RE | सुरसाछन्दः।। चस्योहारायगन्नानगननगननन्दम
गनो । सातोविश्रामकैकै पुनिकरि मुनि औपञ्च पगनों ।।
ठानीजयदासआछोदशनंवबरणोएकचरणो । भाषैश्री
नागराजाइहिबिधिसुरसाछन्दतरणो १००॥ यथा ॥ या
मैदास अकेलेपवंनतनयकेनामफलको नींदजाकैमरों
सेकलिकमलकोदुक्खदलको । फालैजानैपयोकिहिन
किजिहिकोगाइसुरसा । जानबुध्योबड़ाईबिनयलघुतई
एकसुरसा १०१ । सुधाछन्दः । यगन्नामोआनोनगनने
मनगोगोयगानो । छबिश्रामैठानीमुनिपुनिकरिकैसात
ईफरितातो ॥ गनोपायेपायेगुरुलघुमिलिकवर्णहँदा
सबीसै ,, सुधायाकोनाममधुरसमुझिकैनापुराख्यो

छन्दार्णवपिङ्गल।
६६
अहीसे १०२॥ यथा ॥ बसैशम्भुमाथेबिमलशशिकला
पेलिह्यांतेकढ़ी है । मेरेहू आणीकोअमरकरतिहलांच्या
तेबढ़ी है। कहैयाकोपानीगुनगनतनकोदास जान्योनजा
को । खसीरोसोलोसुरसरिमहिआस्वच्छसांचोसुधा
को १०३ ॥ सर्वबदनाछन्द | कोंकोंयग्गनोद्विजवरस
गनो। ठानोबिश्रामसातोपनिमुनिरसहैविश्रामपंगनो॥
बर्नाबीसैसँवारोचरणचरणमें श्रानन्दसदनै । भोगीरा
जाबखान्योसकलबदनसीहैसर्वबदनै १०४ ॥ यथा ।।
पूजाकीजयशोदाहरिहलधरकोमोसोमुनंतिही । बांधो
मारोत्थाही इनको मापनोजायोगनतिही ॥ पलिमार
पजावैसकल जगत्यहै हैदैत्यकदनै। थाकेजाकेबखान कर
तसरस्वतीस्योसर्वबदनै १०५ ॥ .नग्नराछन्द ॥ चास्यो
हारायगन्नादुवरसगनोरग्गनाद्वैबिराजै । दीजैताअन्त
हारोमुनिमुनिमुनिमें तीनिविनाममाजै ॥ दीन्हेबर्नाइकी
सचरण चरणम भाँतिकोन्दभाजै । भाष्योभोगीशज
कोसकलछविभयोग्घराछन्दछाजै. १०६ ॥ यथा ॥
ममोसिहोमयूरोडमरुषभ औव्यालहँसंगमाहीं । ती
के एकएकैअशन करनकोपावतेपातनाहीं ॥ जागेही
विचाखोकुशलरहतिहैशम्भुजघरैमें । माथेपियूषधा
रीशुभशिरनिकोस्रग्धरेहेगरेमे १०७ ॥ सरसीछन्द ।।
नगनजगन्नुनन्दसंगनोसगनोसगनोलगेलगे। 'विर
तिविवेकएकदशौकरिये पगेपगे । बरणएकीसदासद
रसीदरसीदरसीरसीरसी । तिरतिसुबुद्धिछन्दसरसी
सरसीसरसीरसारसी १०८ ॥ यथा । मैंवरसुनाभि
कोककुचहैत्रिंबलीबिमलीतरंगहै । द्विभुजमनाल ना
म.

-
।
।
छन्दोर्णबपिङ्गल।
निकर कोकमलैकहियेसुरंगहै ॥: लहतकपोलकम्बुस
रिकोअखियाँझखियाँअनूपहै । चिकुरोबाररूपल
जवनितासरसीस्वरूप, १०६ ।। भव ॥ गोसगनोज
गन्नुसगनो जगनुसगनोजगनुमगनों। चारिनिदैविरा
मछमनोबहोरिछगनोबहोरिछगनो। बाइसहीविचारिम
नमेंचहूंचरण में त्योचरणों । भद्रकहरसाकरणमें गुना
गरनमें सुन्योकरणमें १३० । यथा !! कीजियेजूगोपाल
अरचागोपालचर चासदाहिसुनिये । मेटनको महाकलु
घकोदरिद्रदुखकोनऔर गुनिये ।। जाहिरहैसुरासुरनिल
हुगुरनिमेंचराचरनिमें। भद्रकहैयहीअरन यहीटरनमें
यहीपरणने १११ ।। आदितनयाचन्द ।। पियसगनोजगन्नुस
गनोजगन्नुसगनोजगन्नुमगनो। जनिसरदैवहोरिछगनो
बहोरिछालोबहोरिछगनो गनिमनित्रिवीसमनच
हुचरणमेघस्योवरणमें 1 मुनिगुनिकैजुआद्रितनयासु
अक्षरनकोशरणमें ११२॥ यथा घटघट मेंतुहीवसति
हैतुहीवसतिस्वरूपमतिकेतुमहिमाझरीरहतिहल
दाहृदयमंत्रिलोकपतिके। निजज़नकोबिनाभजनहूकले
शहननीविथानिहनिनी। जयजयश्रीहिमाद्रितनयामहे
शघरनीगणेशजननी ११३॥ भुजङ्गविन्मिन्छन्द | चारोहा ?
राचारोहारादुजबरदुजसगनोजगनुजगन्नुगो । आठमै
लेतीविश्रामे पुनिबिरमतएकदश करोपुनिसातहो । पा
रामेछचीसबर्नावरणितभु जगन्नृपत्तिकोसुखाकरहैकितो ।
याकेनामेजानोचाहो चितुदैसुनोवचनताभुजगविचभिः
तो ११४॥ यथाः ।। साधू,साधापराविधिविनय करत
हूंनिरादरकीनेहूँ । जैसेवेन्दुग्वैदेतीकटुतिन अमितचर

।'
॥
छन्दोर्णवपिङ्गल।
७१
तहूंगुड़ादिकदीनेहूं ॥ मंदेसोमन्द्रीयेहोतीजबतबजगत
विदित हैउपायकरोक्तिो। जैसेमिश्रीक्षोप्याबिसमय
श्वसनबहतभुजंगबिचम्भितो ११५ ॥ इतिश्रीदासकृ
तेछन्दोर्णवर्णहत्तश्लोकरीतिवर्णनंद्वादशस्तरंगः१२१
प्रथमर्शसमति ॥ पोहा ॥' पहिलोतीजोसमचरणदूजो
चौथसमान । करोअईसमछन्दमें इहिबिधित्तिसुजान
॥ पुहपतिश्रग्रच्छन्द ।। दुजवररागनोयगन्नो। दुजबरनन्दज
गन्नुगोयगलो। पुहपतिअग्रछन्दवः। विषमदशैत्रिदशै
समेतिबों २॥ यथा ॥ फिरि फिरिश्रमिकैकहैनवेली। घि
धिषहकौनप्रकारचेमली ॥ रंगधरतिकनैलपाखुरीके।
छुवतिजिपुष्पतिअग्गआँगुरीके ३॥उपचित्रकछंद ॥ संगना
संगनासगनालगो। भागनुभागनुभागनुकों। अखरा
चहुपायनिग्यारहै। छन्दयहीउपचित्रकब! ४ ॥ यथां ।।
नउठेकर जासुसलामसोबातकहैमिल ऊतरनाहीं। नकरो
दुखमानवजानिकैमित्रसुहैउपचित्रकमाही५ ॥येगवतीछन्द।।
सगनोसगनोलयगन्नो। भागनुभागनुभागनुकों। विष
मेदशवर्णप्रपन्नो वेगवतीसमग्यारहवन्नो६॥ यथा ॥ मि
टिगोअधरारंगुक्यों है ।। बाढ़िगईबकबादघरीहै। सिंग
रोनिस्वेदसनोहै। तोडरावतवेगवतीकै हरिणलुप्तछन्द।।
विषमें अखराइकहीनहै। सुनिसुन्दरिपायनिलीनहैः ।। भ
निपनगराजप्रवीन है। हरिणलुप्तसुछंदनवीन है ॥षथा।
ब्रजकीवनितालखिपाइहै। इकहीकीइकईसलगाइहै।
मगरोंकनिकीसजिवानिको। हरिनलुप्तकरोकुलकानिको
हा अपरचक्रछन्द । दुवरसगनाजगन्नुगो । दुजवरगोस
गनाजंगगो ॥ शिवरबिअखरानिराखियो । सु

७२
छन्दोर्णपिङ्गल।
अपरचक्रभुजंगभाषियो १० ॥ यथा|| ब्रजपतिइकचक
कोधियो । त्रिभुवनकोनिजहाथमें कण्यो ॥ तुअवशशु
भयाविशेषिके। नियबियचक्रनितम्बदेखिकै ११ ॥
सुन्दरछन्द ॥ सगनासंगनाजगन्जुगो । सुगनाभागनुरग्ग
नालगो। बिव में अखगदशैधरो। समपद्ग्यारहछंदसुं
दरो १२॥ यथा ॥ पढिकढ़मोहनमंत्रको। सजनीशोधि
शिंगारतंत्रको ॥ रचनाविधनाअनंगकी । सुखमासुंदर
श्यामअंगकी १३ ॥ द्रुतमध्यकछ । भागनुतीनिगुरूंबिय
दीजै। पुनिदुजभागनुगोलयकीजै ।। ग्यारहबारहाखर
पाये । कहिदुनमध्यकछन्दसुभाये १४. ॥ यथा ॥ कौतुक
आजुकियोवनमाली। जलंबित्रकूदिपरेउसुनिआली ॥
नाथिफणिन्द्रहितोषफनिन्दी। प्रकट भयोगुतमध्यकलि
न्दी १५ ! दुमिलामुखमंदिरामुख्ख ॥ दोहा ॥ सममदिरादुमि
लाविषम दुमिलादुखपहिचानि । “उलटिसुमदिरांमुख
कहै इहिबिधि औरोजानि १६ होहिंविषमचारोंचरण
विष भत्तिहसोइ । चेदनिवीचप्रमाणनहिंभाषावरणको
इ.१७ ॥ इतिश्रीदासकृनेछन्दोर्णवेअर्द्धसमविषमछन्दवं
र्णनंतामत्रयोदशस्तरंगः १३॥
'अर्थमुलाकछंदवर्णन ॥ दोहा ।। अक्षरकागणतीयदाकहुँकहुँ
गुरुलघुनेमावरणचन्द ताहिकविमुक्तककसप्रेम ॥
अलोकतथा ।। अनुष्टु'छन्दः ॥ चारिआगेधुजाएकैदूसरेद्वैधुजा
थपो। पाठआठचहुँपायेश्लोकनामअनुष्टुपो २ ॥ यथा ॥
जनदीनदुखीकरताहरताभयभीरको । लोकतीनिहुँफै
ल्यौश्लोकश्रीरघुवीरको३॥ गधाञ्छन्दः ।। दोहा ॥ प्रथमचरण
सत्रहबरणद्वितियअठारह आन । योहीतीजोचौथऊगं

छन्दोर्णबपिङ्गल। ७३
धाछंदवस्त्रानु ४॥ यथा ॥ सुंदग्तूिघोंपहिरतिनगभूषण
आसावली । ननातितेरीसहजहीमशालप्रभावली ५
चौवाचंदनचंद्रकेचाहेकहालड़ावली । तेरेवातकहतको
सकलफिलैसुगंधावली ६ ॥ मान्य ! दादा । वसुबसु
वसुमनिजतिवरण घनाक्षरीयकतीस । चोवसुरूपघनाक्ष
वित्तिसगन्योकणीस ७॥ यथा ॥ जयहींतेदासमेरीनज
रिपरीवहनबहीने देखिबेकीभूखमरसतिहै । होनलग्यो
बाहेर कलेशको कलापउरअन्तरकीताप छिनहींछिननस
तिह ॥ चलदलपातसे उदरपरराजीरोमराजीकीवनक
मेरेमनवसनि । शृंगारमस्याहीसांलिखीहनीकी मां-
निकाहमनोयन्त्रपांतिघन अक्षरीलसनिहै = ॥ रुपयगाक्षरी
छन्द ॥ दरशिपरशिवहनापकोहरतबहप्रमदाप्रवीणनिको
मोहित करतत्रान । बहवरसावैहियप्रेमरसबदनिकोबह
मनुवेझविधेचूकतनजगजान ॥ चारुचारुविधिकोवि
लोकिनुनचारिहमेंतबदामप्यारेमविचारे उचारेउ उपमा
न । बदनसुधाधरअधरबिम्बमेरीआलीस्वच्छतनरूप
धन अक्षरीप्रबलवान ६ ॥ वर्णफुलमाछन्द ॥ दे. ॥ कहूँसगन
कहुँयगनहे चौबिसवरणप्रमान ।। गुरुद्वेराखितुकंतमेवर
मुल्लनाठान १०॥ यथा ॥ अरीपानिपीवनहींपानिकी
वैनहींबासअरुवसनराखेननेरो। भरेउप्राणकेऐनमनैन
मनमहेनगुणरूपअरुनामतेरोगविरहवशऐसेहीहैवहीं
केमहीराखिहकैनहींप्राणमेरो । नितदासजयाहिसदेहके
मुल्लनाभूलतीचित्तगोपालकेरो ११ इतिश्रीदासकृते
छंदोर्णवेमुक्तकछंदवर्णननामचतुर्दशस्तरंगः १४ ॥
१०

७४.
छन्दोणवपिङ्गल।
अथदंडकभेद ॥दोहा॥ दैनसातयग्गनरचित दण्डकचर
णनिदेखिाचरणचरणनवसगनमयकुसमस्तवकविशेखि
१ प्रचितदंडक ॥ जयतिजैसुखदानीअविद्यानिदानीसुविद्या
निधानीररैवेदबानी शरणतुवशरणवानीमहेन्द्रीमडानी
दयाशीलसानीतिहूंलोकरानी॥धनिजगतत्यहिंबखानीव
हैभाग्यमानीवहीसन्तजानीवहीधीरज्ञानी।प्रचितकहत
जुप्रानीनमस्तेभवानीनमस्तेभवानीनमस्तेभवानी २॥
कुसमस्तवंकदण्डक ॥ सखिशोभितश्री दलालभयेनिकसेत्र
नतेबनितागनसंगजबै । हरिसाथ उरोजवतीनिहाथ
नियाहिप्रभाहिंधरेगुलदस्तफबै ॥ हरिजूकेहराइवेकोंब
हुतीरतलासकरोअनुमानिकैदासबै । चितपायतले
लेमिलीहैमनोकुसमस्तवकै कुसमयखकीसैनसबै ३ ॥ अनं.
गशेषरंदण्डक । दोहा ॥ चारिदशैकैपन्द्रहै कैसोरहुधुजपाइ।
लखिअनंगशेषरकहो दण्डकभोगीराइ ४॥ यथा ॥वि
लोकिराजभवन केबनाउकोबिधातउभ्रंमैनदासचित्तधीर
कैसेहूधरेरहैं । तहांघरीघरीगोपालटन्दरन्दसुन्दरीन
जाइजाइसंगलैतमालसेंअरेर हैं। परेविचित्रछाहैवैज
हांछजेजराउसेसमूहआरसीनिकेदेवालमेंजरेरहें। प्रभा
निहारिकान्हकी छकेसकैनछांडिसंगसेनस्योचहँदिशाअ
नंगसेखरेर हैं:५॥ प्रशोकपुष्पमंजरीछन्दः ॥ दोहा॥ यामपन्द्रहब
हैं अन्तगुरूसोकाम । तादंडकहिअशोकयुत पुष्पमंज
रीनाम ६!! यथा । ऊभिऊभिश्वासलेतद्योसजोटरेउकहूँ
टरैनकालरातिसीकरालंाइशर्वरीदासईशओसतप्तत
लसीलगैशरीरसपश्वाससीलगैवयारियोंघरीघरी ॥रा
वरेबियोगरामसुक्खदानि-बस्तुसर्वदुःखदानिसीयकोप
.

2
छन्दोणवपिङ्गल।
७५
कुंकुहीदईकरी।भानुसोहिमांशुभोकृशानुसोसरोजपुजशों
कभरिकोभरैअशोकपुष्पमंजरी ७ ॥ त्रिभंगदण्डक ॥ दोहा ।।
पंचविप्रभागनुद्गुरुसदोनन्दगोठाउँ।चरणचरणचौंति
सबरण बरणत्रिभंगीगाउँमा यथा ॥सजलजलदजनुलस
तबिमलतनुश्रमकनत्योझल कोहेंउमागोहैबुंदमनोहैं।
वयुगमटकनिफिरिफिरिलटकनि अनमिषनयननिजो है
हर्षोहैद्वैमनमोहैं । पगिपगिपुनिपुनिखिनखिनसुनिसुनि
मृदुमदुतालमृदंगीमुरचंगीझांझउपंगी। बरहिबरहध
रिअमितकलनिकरिनचतअहीरनसंगीबहुरंगी लालत्रि
भंगी। मत्तमातंगलीलाकरदण्डक || दोहा ॥ पायकरोनौरग'
नते चौदहलोचितंचाहि । नाममत्तमातंगकोलीलाकरक
हिताहि १०॥ यथा ]] पाइविद्यानिकोटन्दजभारतील्या
इसानन्दजूमानुषीकृत्तिसोढन्दछन्दछीलाकरैतोकहा।
कैमहीपालको मोरआखेटमेंसांझबैभोरलोलीनकरसीन
कीदौरपक्षीलजीनकरैतोकहा ॥.. शुभ्रशोभासबैअंग
मेंसुन्दरीसर्वदासंगमेंलीनकै रांगऔरंगनृत्यकीलीला
करैतौकहा । जोनहींठानिकैतत्तुभौरामलीलाहिसोरत्त
तोबाहरेसकरैमत्तमातंगलीलाकरैतोकहा ११ ॥ अथ
दण्डकभेदं ॥. कुण्डलिया ॥ दोइनगनकरितातई गनदेहु
प्रतिपाई। चण्डदृष्टिप्रयातयों दंडकरचोबनाइ ॥ दण्ड
करचोबनाइ आठरग्गनको । नौअनोंदशब्याल
रुद्रजीमूतहिवनों ॥ लीलाकरबारहउद्यामतेरहेकहों
इन । दासचतुर्दशशंखसबनिशिरचाहियदोइन । ए
कैकबितबनाइकगणगणपरतुकल्याइ । दासकहैयोंआ
ठऊउदाहरणदरसाई १२ ॥ यथा ॥ शरणशरणहीसदात

इतिश्रीदासकृतछंदोर्णवेदण्डकमेव रायामः॥
७६
छन्दोर्णवापिङ्गल।
हिकीनोकृपासिंधुगोपालगोबिन्ददामोदरी विष्णुजूमा
धवोश्यामजऔस्वभुसुक्खंदासनुहैदासको । सदयहृद
यहमेंपालिहेआपनोजानिकसोइविश्वेशबिश्वंभरो बि
प्णुजूराघवोरामजीप्रभूदुक्खहाहर्नुहैत्रासको। सुयश
विदित जाससंसारकेवींचमेसर्बदाईशहदेवदेवेशको ध
महपालिबोज्याइवोमारिबोजोगनोहैचहूवेदमें । भजन
करियचित्तताहिकोनित्यहीदानिहसिद्धको लोकलोके
शकोः कर्महैघालिबोज्याइवोतारिबोसोभनोक्योलहोभे
दमें १३॥ दोहा ॥ छंदनिदोहरोचौहरो करिनिजबुद्धिवि
'वेकामनरोचकतुकआनिकै दण्डकरचोअनेक ॥ रागन
केवशकीजिये ताहिप्रबंधवखानि । छंदलियेसोपचहै ग
घवंदबिनजानि ॥ग्यारहतेछब्बीसलगिवरणदुपदतुकए
का सोशिरदैबहुचंददल परेप्रबंधविवेक ॥ भेदछंददंडक
निको दोऊपारावार । बरणनपंथबताइये दीन्होंमतिअन
सार । सत्रहसैनिन्नानबे मधुबदिनवैकबिंदु दासकियो
छंदोर्णव सुमिरिसांवरोइंदु ॥ घनेदिननकोग्रंथयह बिग
योहतोबनाइ । ताहिसुधाखोशुद्धकरि दुर्गादत्तचित
लाइ॥ आदौजैपुरनगरको अबकाशीमेवास। भाषासं
स्कृतदुहुनमेंराखहुँअतिअभ्यास गौड़द्विजवरजाहिरों
दुर्गादत्तसुनाम।प्राचीननग्रंथको शोधेहुचारोयामः ।
पंचदशस्तरङ्गः १५ ॥
पिंगलग्रन्थंभिपारीदासकृतसम्पूर्णम् ॥
लकिशोर (सी,आई,ई.) के छापखाने में छापांगयां
नवम्बर सन् १९०२ ई० ।।

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Chhandornapingal

Author
Bhisharidas
Title
Chhandornapingal
File name
Chhandornapingal
Text
OCR done
Citation
1902
Published
2009/09
Publisher
Lakhanow, Munshi Navalkishor Press
Language
Sanskrit
Pages
76
Library
Sanmati Library, Jaipur
Classification
Vyakaran
DLI number
345583
Barcode
99999990233917.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
Digital Library Of India
Rights
Copyright permitted
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RX5a7NpOlwJ
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