Sanmati Library, Jaipur
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श्रीगणाय नमः।
अथ छन्दोर्णवापिङ्गल
त्रिभङीछन्द ।।
करिवदनविमंडिताजखंडित परणपंडितज्ञानप
रोगिरिनन्दिनिनन्दनअसुरनिकन्दनसरउरचंदन कीर्ति
करीभषणमुगलक्षणवीसविचक्षणजनप्रणरक्षणपशिधर
जयजयगणनायकखलगणधायक दास सहायकबिधन
₹१॥ दण्डपाइन्छ । एकरदहेनशुभ्रशाखाबढ़िाईलंबोदर
भनिवेकतरुजोहेशुभ्रवेशको । शुंडादंडकैतवहथ्यारूहेड़
दंडयहराखतनलेशअघविधनअशेशको। मदकहौभलि
नभरतमधासारयहध्यानहींतेहिकोहढहरणकलेशको ।
दासग्रहबिजनबिचारोतिहंतापनिकोदरकरनेकोंवारोकर
पागणेशको २॥छप्पै।। श्रीविनतासुतदेखिपरमपटुताजिन्ह
कीन्हेउ। छन्दभेदप्रस्तारवरणिबातनिमनलीन्हेउ।निष्टो
द्दिष्टनिआदिरीतिबहुविधिजिनभाख्यो । जैबोचलंतज़
नायप्रथमबाचापनराख्योः । जोछन्दभुजंगप्रयातकहि
जातभयोजहँथलअभय । तिहिपिंगलनागनरेशकीसदा
जयतिजैजैतिजय ३॥ दोहा । जिनप्रकट्योजगबिबिध
छन्दनामअभिराम-॥-ताहिविष्णरथकोकरों विविकरजो
रिणाम ४ ॥ कविचे अंभिलाषाकरीसदाऐसनिकाहों
छन्द्रोणवपिङ्गल।
यन्नित्थसबठौरदिनसत्रयाहीसेवावरणाचीनि । लोभाल
ईनीचे ज्ञानहलाहलहीको अंशु अंतहै किायापचालिनिंदार
सहीकोखाति। सेनापतिदेवीकरशोभागवतीकोभषपन्नाः"
मोतीहीराहेमसौदाहासहीकोजातिकहीयपरदेचपरचय
शस्टैनाउँखगासन गधरसीतानाथकोलापानि रोहा।।
याकवित्तमंतरपरणलेत कंतहडि। दासनामकुलग्राम
कंहितामभरातिर समंडि प्राकृत भाषासंस्कृतिलखिलाह
छन्दोग्रंथ । दासकियोछन्दोरणवभाषारचिशुभपथ:७॥
पिनया ॥ दोसगुरूलघुणोद्दगनाथलिभेदनिजचरिजा
नाजानैगनागनकोफलमत्तंबरनपथारनिकोकरिजानीन
ष्टइदिष्टरु मेरुपताक़बिमर्कटिसचिनकोभरिजानीटत्ति
मौजातिसमुक्तकेंदण्डकवन्दमहोदधिसोलरिजनिः ।।
इति श्रीदासकृतछन्दोर्णवेमंगलाचरण ।
वर्णननामप्रथमस्तरंगः ।।
r: अथ गुरुलघुविचार ॥
पडफ ॥ ई ऊ आ.ये आदि स्वर वरणमिले हुएह बिंद
युक्त नौ संयुक्तपरगुरु बकखांचि अॅइ-उक कि ऐसे
घुसघे विधि कीन्होकहति अक्षरनिजोरसना बुतहिना
चि। रहलये संयुक्त बरणन्हपरेनमानिनित्यगुरुलहुलहु
गुरुकोगुरूवैबांचिाएकमत्तलहुभनिगुरु कोदुमत्तगनिया
हीमेंउदाहरण हेरिले हृदयमें यांचि.१॥ प्राकृतयथा ।। 4
रेवाहहिकान्हनावछोटि डगमगकुरातिनदेहि तैइथने
संतारिदे जोचाहहि सोलेहि २॥ दोहा । कहुँ कहुं सुकैत्रि
तुकंतमें लघुकोगुरुगनिलेत ॥ गुरुहूकोलघुप्रनंत हैं स
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oc
छन्दोणवपिङ्गला
मुझतसुमतिसंचेत ३॥ गुरुकोलघुयथा । संस्कृत इलोक।
अद्यापिनोज्झतिहर किलकालकट कम्मोविभर्तिधरणी
खलुटष्ठकेन ॥ अभोनिधिर्वहतिदुःसहवाडवाग्निमंगी
कृर्तसुकृतनः परिपालयति ४ छन्दबसंततिलकहै या
के तुकमें गुरु चाहिये लघु गुरुगनियो । लघुकोगुरुयथादेव
को | कवित्त ।। पीछेपंखांचवरवारीज्योंकीत्योसगंधवारीठा
दीवायें घायेंघनफूलनिकहारगहे । दाहिनेअतरऔरअ.
मरतमोरैलीन्हेसामहेलपेटेलाजभोजनकेथारंगहे। नितं
केनियमहितहितके विसारेदेवचित्तकेबिसारे बिसरायेस
बबारिपहें । संपाघनबीचऐसीचम्पावनवीचफूलीडारि
सीकुवैरिकुंभिलातिफूलीडारगहे ५ ॥ तिलक ॥ छन्दरूप
घनाक्षरीहयाकेतुकतमलंघुचाहियेगुरुहै सोलघुहीगनि
बो। लघुनाम ।। योहा. ॥ शंखमेरुकाहलकुसुमकरतलदण्ड
अशेख.॥ शब्दगंधवरसरपरसनामललहुकोदेख ६।। गुरु
नाम ॥ किंकिनिनपुरहारफनिकनकचौरताटंक । कोऊरो
कुण्डलबलयगोमानसगुरुबंक ७॥दुकलनाम ॥ नगनदुक
लहेभेदसोप्रथमनामगुरु जानि । निजप्रियसप्रियपरम
प्रियपियवियलघुहिवखानिsoll आदिलघुनिकलनाम तो
मरतुंमरंपत्तसरधुनचिरुचिलचिराल। पवनवलटपटआ
दिलघुविकलनूतकीमाल 151॥ आदिगुरुत्रिंकलनामः ।।
तरसमुदनिर्वान करतालोसुरपतिनन्द । नामादिगुरु
त्रिकलकोपटहतालअतचन्द १० ॥ विशनाम ॥ नारीरस
कुलभामिनीतंडवभासप्रमान ॥ नामनिलघुको जानिपु
नित्रिकलाहिटगनवखान.१०॥ दुइगुरुनाम ॥ सुनति
रसिकरसनागपनि कहिमनहरणसमान । कुन्तीप्तासु
।
छन्दोर्णबपिङ्गल रबलयकरनंदोईगुरुजान १२.० ॥ अन्तगुरुचोकलगाम ।। कमलातनकरबाहुभुज जअभरणअभिरामः ॥ गजों भरणप्रहरणअसनिचकलअंतगुरुनाम १३।। पति गजपतिअश्वपतिनायकपौनमुरारि ॥ चक्रवतीसुपयो धरों मध्यगुरूकलचारि१४ा गंडदहनबलभद्रपद नूपु रजंघापाइ । तातपितामह आदिगुरु चौकलनामसुभाइ १५॥ ॥ विप्रपंचसरपरमपद शिखरचारिलघुजाति । डगनचकलकहिचौकलहिंगजरथतुरंगपदाति १६॥॥०॥ पंचकलनाम ।।ऽऽ सुरनरिन्दउड़पति अहित दंतीदंतत लंप । मेघगगनगजआदिलघुपंचकलहिकहिप १७ पक्षिबिडालमृगेन्द्र अहि अमृतजोधलकलक्ष । बी नगरुड़कहिमध्यलघु पंचकलहिपरतक्ष १८॥ पंचकलकक्रम तेनाम । इन्द्रासनबीरोधनुष हीरोशेखर फूल । अहिपाइ कगनिक्रमहिते नामपंचकलतूल. १६ ॥ ठगनपकल चकलहिकहिठंगनषटकलहिलेखिः । ताहिछकलकेक्रम हिंतेभेदतेरहोंदेखि २० ॥ पटकलकेनामप्रतिभेद्क्रमते ॥ हरश शिसूरजशकअरु:शेषोअहिकमलाखिः । ब्रह्मकिंकिणी बंधुध्रुवधर्मशालिचरभाखि २१ ॥ अथवणगन ॥ मन य भ गण शुभचारिहैं र स ज त अगुनोचारि । मनुज कवितके प्रथमतुक कीजैइन्हें बिचारि २२॥ मतिगुरुन तिलघुभादिगुरुयादिलंघशुभदानि । महि अहिं शशि जलक्रमहिते इष्टदेवताजानि २३॥ज गुरुमध्य रो मध्य लघु स गुरु अंततलअंत । इतेअशुभगणरविअगिनि प वनखदेवकहंतः२४॥ द्विगुणबिचार ॥ मनहित यभजन ज. तहिउद रसरिपुउरअवरेखि । कवितआदिकुग्रणहिस्से
छन्दोत्रपिकला
हिंगणविचारहिदेखि:२५ जनहितअतिनीकेतक रिप
उदासमिलिमन्दारिपुउदासहीजोपर तौसबभांतिकुच
न्द:२६॥ इति श्रीदासकृतेछन्दोर्णवेगुरुलघुगणागणार
योनामद्वितीयस्तरंगाराम
अथ मात्रौप्रस्तारवर्णनम् ॥
सतकलभस्तार । सबैया ॥ढे है कलानिकोबंधवनेपहिले
बरेलधुआंदिकरोजाः। भेदबनेकोशीशकेआदिगुरू
केतरेलघुएकधरोजा औरयंथाप्रतिपंक्तिख चैवचे पीछे
गुरुलधुलेखिभरोजू। याहीविधानतेसर्वलघलगिपूरण
मत्तपथारथरोज १॥ प्राकृतेयथा ॥ पटमगुरुहेडहाणेलहुश्रा
पस्ठिवेहु । अपबुद्धियसरिसासरिसापंतीउघरियागुरु
लघू हु २ ॥ दोहा।। भयोजानिस्तारको क्रमसौदीजै
अंक्रा संख्यानष्टइदिष्ट की कीजै उदरनिर्शक३इतने कल
केभेदहें कितनोपूछैकोइ ॥ पूर्वयुगलसरिकदैजानेसं
व्याहोइ ४॥ पूर्वयुगलअंक: दिंडक ।। जैकलकोभेदकोऊपर्छ
तेतीकलाकीजैताकेपर अंकदीजैक्रमहीतेएकदोइ । एक
दोयजोरितीनलिखिली तीजेपस्तीनिदाइजोरिआगे
खेंचिलिखिजियजोह। देशपांचपीछेतीनिजोरिआगेआ
ठलिखि याहीविधिलिखेजयेकहोलोंबतावैकोइ। जितनी
कलाकेंपरजेतोअंकपरयह जानिलीजैतेतेपरप्रस्तारको
अन्तहोइ५ सप्तकलरूपेयथा ॥ १.१.१६.२४ ।।अथनष्टलक्षणं ।। दोहा ।।
इतिश्रकपरहोतभेदकहोकेहिरूप॥ उत्तरहेतयहिप्रश्न
केनष्टाच्योअहिभप ६ अंधमात्रानष्टकीअनुक्रमणी ।। दण्डकः ।।
जैकलमेंभेदपूछेतेतनीयेकलाकीजै तापैलिखिपरबगल
."
छन्दोणवपिङ्गाला :
अंकलीजिये। पछ्योअंकअन्तमेंघटाइबाकीहाथराखि
तालिखेअंकनिघटेवेरसभीजिये । जौनयामें घटेकरोता
केतरआगिलीकलालै गुरुदासबचैयोंहीफेरिकीजिये।री
तेपस्योबीतेनष्टकर्मबाकीलघुहीहै पथ्यो जिनतिनकोदे
खाइरूपदीजिये ७॥ अस्यतिलकं ॥ काहूपूछ्योसप्तकलमेंद
शोरूपकैसो ताकेप्रश्नकोअंकदशसोइकीससेघट्योबा
कीरहेग्यारहतातेरहनहीं घटे तौ आठघट्योसोतेरहती
तरकीकलालैकेगुरुभयो बाकीरहे तीनि तामेंतीनिहीं
1ऽऽ घट्यो सोपांच के तरकीकलांको लैकेगुरु
155३ भयो और रस दुहूं ओर लघुही रह्यो
55158.5510॥ अथमात्राउदिष्टलक्षणं ॥ कुण्डलिया || कहि
॥515५ ये केतेअंकपर दासरूप यहिसाज । करि
1515६ | उदिष्टताकोउतर देनकह्यो अहिराज ॥
55.७: देनकह्यो अहिराज पूर्वजुअलंककलनि
15६ पर। लघुके शीशहि शीशगुरुके ऊपरहू
55.51 तर॥ पुनिगुरुशिरको अंकजोरिके ठीकहि
Hussi:१० गहिये। अंतअंक सुघटाइब बाकीसो
।।। ११: कहिये ८॥ ॥ अस्यतिलक । सप्त
S15। १२ कलमें यहरूपलिखिपूछयोजोकौनसोहै।
1151:१३ ताकेपरअंकदियोहै: गुरुकेशिर तीनिश्री
ISS||१४ आठपखो-सो ग्यारह. इक्कीसमें घट्यो
SIS।। १५ बाकीदशयोभेदहै।। प्रथमात्रामेरुलक्षण ॥ दोहा।।
mms|| १६ कितेएक गुरुयुक्त हैं कितेहैं ति गुरुयुक्तः।
Ess।१७ ताकोउत्तरभेरुकरि देहुअहीपति उक्तः।
HIS||१८ अनुमणी चौपाईदैकोठादोहरोलिखिलीज।
१२३८२१
15.SI
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छन्दोर्णवपिङ्गल।
isingतातरदोहरोतीनठवीजातातरदोहोचा
sim२० रिबनायो। ओजितचाहोतितोबढायो १०
m२ कोठनिआदिविषमजोपैये। एकैएकआंक
लिखिये | समकोठनिकी आदि जोपरो विौतिचारि
यहिकमतभरो ११ पंक्तिअन्त इकइकलिखिआवो। तब
षष्ठमात्रामारीतनभरिबोचितलांवों । शिरअंके
तेसुशिरपरअंकोजोरिभरहुक्रमतेनि
रशके १२पहिलोकोठदुकलंकीजाने।
२१.
द्वितियधिकलकीवातत्रखाने । यहि
विधिकरै भेदसवजाहिर । चहहुतो
३. ४.३ जाहुअंकदैवाहिर ॥ छठयेचारिकोष्ठ
3.६.५१ जोपर। सप्तकलहिउलटैउद्धरै ।। सब
४१०६.१ लहएकएकगरुबहै । दशढुंगचारि
त्रिगुरुयुतरहै १३सबलहुअंतअंके अहिंउक्त। चलिगति
बामकहोगुरुयुक्त ॥ यहिविधिकरीजितेकोचहो । सकल
जोरिसंख्याइगहो १४॥ पताका ।।दोहा। कह्योजितेगुरुयुक्त
तुम तेहैंकिहिकिहिठौर। उतरहेतइहिप्रश्नकरचे पताका
डऔर १५ ॥ पताकाकी अनुक्रमणी |जैकलंकीपताकजियलायो ।
खण्डमेरुताकोअलगायो । ताहीसंख्याकोठाकरिये।
नामपताकापतिीखरिये। अरिख ॥ परुबंजअलसरिअंक
भिन्नलिखिदेखिये। अन्तंअंकइतन्तकोठतेहिरेखिये॥
तामहिंक्रमतेइकइकअङ्कघटाइये । वाढिगअधतेदुतिय
प्रतिलिखिजाइये। तृतियपंक्ति में है है जोरिकमीकरों।
चौथेपंक्तिमेतीनितीनिचित धरोग। इनभांतिनं प्रतिपं
क्लिएकबढिोंकज। घटेपताकारूपलिखोनिरशंकजू १६
2.
1550 छन्दोर्णवापिङ्गल। & दो० ॥ गणनाहोइनहीनकमायोअङ्कनआउ । करिप ताकप्रस्तारमेंसबगुरुयुक्तदेखाउ १७ वैकितीनिगुरुयुत पताकाप्रस्तारं ॥ 15.5.३. ४ : १०६ 1.1515.५ १३/८२१० 1515६ २५१३१ 5.1।15७ ४.६/१६, २ 8...(७/१ 1515। ११ S।। १२ 5511१४ ११/२० ।। १५ १२ १३ '5'51 १७ २१ १०/१६.५ ८ ४ १५ निजोलिखोचहौइकठौर। सिखिपताकप्रस्तारबिधिजा नाऔरोऔर १०।कुण्डलिया। सबलघुसबगुरुलिखिठयो प्रथमभेदइहिभांति। पहिलेगुरुतरलघुकरहिपनिकरिस रिसैपांति। पुनिकरिसरिसैपांतिउलटिलघुतरगुरुलिखि कैतजिमआयोगुरुआदिदासइहिरीतिहिसिखिकै । इकइ कगुरुइहिभांतिआदिदिशिल्यावहितबलहु।जबलगिस बगुरुआदिपरैआगेकरिसबलहु १६ सप्तकलभेडेगुरुयु क्तकोप्रस्तारजाकीसंख्यापताकाकेदशकोठे मेंहै।। बोहा ॥
छन्दोणवपिङ्गल।
पताकाहिकोदेखिकैयामेंदीजैअंकः। उद्दिष्टोप्रस्तारमका
जैसहीनिशंकर ॥इतिपताकाप्रस्तार]] अथमर्कटोलक्षण ||गीतिकाय
हपंक्तिकोठनिचिकैप्रतिपंक्तिकोचितुदीजियो तहत्ति
भेदरुमात्रवर्णसोलघुगुरूलिखिलीजिये॥तिनादिको
ठनिएकएकनिठानिगुरुढिगसनहै। पुनित्तिकोठदुआ
दिगनतीभरीघटियनऊनहै २१ लखिभेदपंक्तिविचारि
भरियेपूर्वजुअलैअंकही। करित्तिभेदहिगुननपुरवंहु
मात्रपंक्तिनिशंकही । लघुपंक्तिएकजुअंकलागुरुपंक्तिमें
लिखिलेहुज । तेहिमात्रपंक्तिघटाइबाकीवर्णमेधरिदेहु
जू ॥ सोइबर्णपंक्ति मेंघटैलघुपंक्तिलिखिआनिये । ते
हिआनिकैगुरुपंक्तिमेंघटनावहफिरिठानिये ॥ प्रस्तार
वृत्ति १.२३४५६ प्रति जो भेदमात्रा
भेद | १२|३.५
८१३ लघुगुरूंकी ठीकहै।
मात्रा ३/४/६/२०४०
तेहित्तिकोठनिसं
७/१५/३०/५८
अलीकहै२२॥ मर्कटो
लघु १/२५/१०/२०३८
जाल ॥ दोहा । किते में
गुरु ०१/२५
भेदगुरुअन्त । इहिपूछेप्रस्तारमें सूचीबरणसन्त २३
जितेअंकपरअन्त है तापाछेलघुअन्त । तापाछेकोम
न्तलहि गुरुअन्तहिकहितन्त २४ ॥ इति श्रीदासकृते
छन्दोणवेमात्राप्रस्तारे नष्टउद्दिष्टेमेरुमर्कटीपताकासूची
वर्णनंनामतृतीयस्तरंगः३॥
वर्ण १
गमर्कटजाल कहत
१२५ | 3.०२० दलघुअंत है किते
छन्दोर्णवपिङ्गल।
- दोहा ॥ जितनेमात्रा भेदमें प्रस्तारहिपरकार । तित
नोवर्णहुमेंकियो अहिनायकबिस्तार १ ॥ अथयण प्रस्तारको
अनुकमणी ॥ विजया ॥ आदिकोभेदसबैगुरु कैपुनिभेदबढेवे
किरीतिरचै । आदिगुरूकेतरेलिखिकैलघु आगेयथाप्र
तिपंक्तिखचै ॥ पाछेगुरूहिसोपूरणवर्णकसर्वलघलगियों
हीनचै । ऐसेपथारुकैदाइसोदूनोईदूनोकेवर्णकीसंख्या
सचै २॥ अथयणसंख्यायथा ॥ १४६९६३ ॥ इतिपंचपर्णसंख्या ॥अथनष्ट
लक्षण ॥ दोहा ॥ पूछेअंकहिअर्धकरिसमायेलघुजानि ।
विषमेंइकदैअर्धकरिगुरुलिखिपूरणठानि ३ पन्द्रहोंभेद
पूछ्यो सोपन्द्रहाधोनहींहैसक्ता एकमिलाइसोरहका
आधोकियाएकगुरुलिख्यो बाकीरहेआठ ताकोआधो
चारिपरेपस्यो लघुलिख्यो दोइकोआधोएकपरेपस्योल
धुलिख्योएकमेंएकमिलाइ आधोकियोगुरुलिख्यो।
पासबमिलाइ ॥ अथवर्णउद्दिष्टलक्षण दोहालिखिपूछेपरएकवे
दूनदूनलिखिलेहि । लघुशिरअंकनिजोरिकएकमिलैक
हिदेहि ४॥
॥ अथवर्णमेरुलक्षण | कुण्डलिया ॥ शिरपर
कोठोदोइतल तीनितासुतलचारि । अक्षरमेरुबढ़ाइयों
जतप्रस्तारनिहारिः ॥ जतप्रस्तारनिहारिपांतिकीआदि
हुअन्तहु । एकएकलिखिजाहुकह्योपन्नगभगवन्तहु ।।
गनिदैहेगुरुयुक्तसकलजियकरहुनखरको । सूनेकोठनि
भरहुजोरिद्वैिशिरपरको.५ ॥ अथवर्णपताकालक्षण ॥ दोहा ।।।
कोष्टपताकाकोकरहिखण्डमेरुकीसाखि । ताकेशिरधर
एकते दूनोदूनोराखि ६॥ दण्डक ॥ दुनोअंकराखिखरी
पांतिनलिखनलागेएक.लेतीनितीनिहलैपांचरेखिये ।
याहीक्रम उपजित अंकनिसोंआगे आगेजोरिजोरिखरी
४८१६
SIS
१ ३ १ १२ छन्दोर्णवपिङ्गल। पांति लिखि १.११ नविशेखिये। १२.१२ एकपांतिभरि दूजीपांतिवहै गीतिकरि आ. १५ १० १०५.१५ योअंकछोड़ि ।१६/१५ २० १५ ६६|| ताके आगे हैं दिलेखिये। क्रमटूटेएकैभलोचलतहिआगेहूँढि दासऐसे बरणपताकापरेपेखिये ७ ॥ दोहा ॥ बरणमत्तकोएकही हैपताकप्रस्तार । वाहीरूपनिपरधरोयाकोनामउदार अथवर्णमर्कटीलक्षण ॥ दण्डक षट्पांतिलिखिपहलीयेगनती येभरो दूजीपांतिद्वैतेदूनोदूनो अंकधरिदेहु । दुहुन सों पंचवर्णपताका ॥ १५१०१० ५.१ ।।।55 ८ 11515१२ १/२४८१६/३२.151151 ३/६१२२४... 5115 १५. ५७१४२ 1155। २० 8/१०१५/३० 1515। २२ १७११२०३१ SI151.२३ १३२२ 155२६ १८२३ s।5।।२७ १९२६ 551||२६ २१२७ पंचकलमें हेगुरुयुक्त को २५/२६ प्रस्तार " ॥ छन्दोर्णवपिङ्गल। १३ गुनिगुनिचौथीपांतिभरिताको आधो आधो पांचीचठी त्ति १२/३ ४ ५ ६।। पांतिनको भरि भेद १२३५ ८ | १३|| देहु ॥ चौथीपां चीपांतिनके मात्रा १४ ६/२०४० ७८ वर्णः |१|३७/१५/३०५८ ङ्कनकोजोरिजो रितीजी पांति लघ १.२५/१०/२०|३८ रीतीहोय पूरण गुरु ०१/२ ५.३०२० / बहै करि देहु । वृत्तिभेदमात्रधरणलघुगुरुपूछैदास ताकेागेवरणमर कटीयेधरिदेहु ॥ दोहा ॥ जिते भेदपरअन्तहै तााधो गुरुअन्त । तितनाईलघुअन्तहैअक्षरसूचीसन्त १० नष्टउदिष्टपताकहै मत्ताहकीभांति । समझिलीजिये सुमतिसजि अक्षरसंख्यापांति ११॥ इतिश्रीदासकृते छन्दोणवे नष्टउद्दिष्टमेरुम टीपताकामचीवर्णनंनामच तुर्थस्तरंगः ४॥ दोहा॥ चारिचरण चहुँकेबरणमत्तहोहिंयकरूप । वृत्त छन्दतहिलगिरच्यो प्रस्तारनिअहिभूप १ यदपिवर्ण प्रस्तारमेंसकलत्तिकोबोध। तदपिमत्तप्रस्तारहूसकल मिलैअविरोध २ ॥ छ ।मत्तछन्दकीरीतिदासबहुमां तिप्रकासे । आदिअन्तकलदुकलबढ़ेदुजोनहिंभासै ॥ चास्योतकसमकलनिपरहियहनेमनिवाहिय । कहुँगुरु थलहैलधुदियहुनहिंभ्रमगतिचाहिय ॥ बिनगनेहोत पूरणकलाजतिगतिकबिबाणीहवस । यहजानिनागना यककह्योजिहाजानेछन्दरस ३ ॥दोहा ॥ दुकलतिकल
१४
छन्दोर्णवपिङ्गल।
चौकलयकल छकलनिरखिप्रस्तार । क्रमतबरगतदास
तह उत्तिछन्दविस्तार ४ मत्तछन्दमेंशत्तिहू दरशावनइ
हिहेन । बहुछन्दनकीगतिमिले एकसुकबिंगनिलेत ५
नेमगह्योयहदासकरि हरिहरगुरुहिप्रणाम । उदाहरण
केअन्नमें परेछन्दकोनाम ६ बैंकलके भेदमें जानोश्री
मधुछन्द। महीमारअरुकमलये तीनित्रिकलकेवन्द७॥
श्रीछन्द ॥ जैहैश्रीकी ॥ मधुछन्द ॥ तियजियवघुमधु ८ ॥
महीछन्द ।। रमासमानहींमहीं ॥ सारछन्द ॥ ऐनिननिचारु
सारु । कमलकृन्द : चरणवरणअमल कमल ॥ भथचारि
मात्राकेछन्द ॥ दोहा । चारिमत्तप्रस्तार में पांचत्तिनिरधा
रिकामारपनिनरिन्दअरु मन्दरहरिहिविचारि. १०
कामाछन्द ।। रामैनामैयामैकामै ११॥ रमणोछन्द ॥ धरणी
बरणीरमणीरमनो. १२. ॥ नरिन्दछन्द ॥ सम्हारुसवारुप
रिन्दनरिन्द १३ ॥ मन्दरछन्द ॥ ध्यावतल्यावतचन्दरम
न्दर १४ ॥ हरिहन्द ।। जगमहिंसुखनहिंमतजिहरिभ
जि १५ ॥ पंचमात्राप्रस्तारकेछन्द । सोरठा ॥ पञ्चमत्तप्रस्तार
आठभेदयुतहरिप्रिया। तरणजारुपंचारवीरबुद्धिनिशिय
मकशशि १६ ॥शशिछन्दामहीमेंसहीमेंयशीसे शशीसे १७
प्रियाछन्द ॥ हैखरीपत्थरीतोहियारीप्रिया १८ ॥तरणिशाचन्द ।।
उरधरोपुरुषसोवरणिज़ातरणिजा १६ ॥ पंचालछन्द ।। ना
चतगावतदैतालपञ्चाल २० ॥ वीरछन्द ॥ हरुपीरअरु
भीरवरधीररघबीर २१ ॥ बुदिछन्द ॥ भ्रमैतजिहरैभजि
करैसुविधाबुद्धि २२ ॥ निशिछन्द ॥ सुख्यलहिदुख्यदहि
भानिरिसियाहिनिशि २३ ॥ यमकछन्द ॥ श्रुतिकहहिहरि
जनहिछुवतनहिंयमकवहिं २४ ॥ छमात्राकेछन्दः ॥ दोहा ।।
।
छन्दोर्णवपिङ्गल।
१५
तालीरमानगन्निका जानिकलाकरताहि । मद्राधारी
वाक्यंअरु कृष्णनायकोचाहि २५ हरअरुबिष्णुमदन
गनो अधिकोहोतनमित्त । षटकलतेरहभेदके प्रकट
तेरहोटत्त २६ ॥ तालोच्छन्द ॥ न चैहैशम्भूपैवेतालीदैताली
२७ ॥ रमाछन्द ॥ जगमाहींसुखनाहींतजिकामैभजिरामै
२८. ॥ गगनिकाछन्द ।। प्रसिद्धहोंअघनिकानसिहहोंनग
निका २६ ॥ कलाछन्द ॥ धीरगहोआजुल होनन्दलला
कामकला ३० ॥ करताछन्द ॥ महिधरताजगभरतादुख
हरतासुखकरता ३१. ॥ मुद्राछन्द ॥ भजैरामसरैकामन
छापाहिनमुद्राहि ३२ ॥ धारीछन्द ॥ दानवारिचित्तधारि
पापझारिकोशधारि ३३॥ वाक्यछन्द ॥ जगतनाथगहत
हाथशरणताक्यकहतवाक्य ३४ ॥ कृष्णछन्द ॥ छां हठ
एरेशठतृष्णैनजिकृष्णैभजि ३५ ॥ मायकछन्द ॥ सुखका
रनदुखटारनसवलायकरघुनायक ३६॥ हरछन्द ॥ जर्ग
जननिदुखीजननिकृपाकरहिव्यथाहरहि३७॥ विष्णुछन्द ।।
दासजगतझूठलगतयाहितजहिबिष्णुभजहि ३८ ॥
मदनकछन्दः ॥ तरुणिचरणअरुणवरणहृदयहरणमदनक
रण ३६ ॥सातमात्राप्रस्तारकेछन्द ।। दोहा । सातमत्तप्रस्तारको
शुभगतिजानोछन्द । दृतियकीसप्रस्तारहै चारिभांति
गतिबन्द ४० ॥ शुभगतिछन्द ।। कृपासिन्धोदीनबन्धोसर्व
सुरपतिदेहिशुभगति ४१॥ पुनःप्रभाधिशाल ॥ लालगोपाल
यशुमतिनन्दआनंदकन्द ४२॥ पुनः ॥ खलैघायकसर्व
लायककंसमारणजनउधारण ४३॥ पुनः ॥ दुखकोहरो
सुखविस्तरोबाधाकदनकरुणासदन ४४॥ आठमात्राकेछन्द ।
दोहा ॥ आठमत्तप्रस्तारकेतिनादिकउनमानि । सहित
१६
नुभारी। ठानेपियारी ॥ सोतसुखारी। होतीमहारी ५६
छन्दोर्णवापिङ्गला
हसमधुभारगतिचौतिसरतिबखानि ४५ ॥ लक्षणप्रतिदछ ।
कोंकों।तिर्नोब!॥ भागनुकरना। हंसबरंना ॥ नवहि
प्रशंसा कहिचोवसााहिजबरभासनाकहतसंवासन ॥ न
गननगवती कहियमधुमती ४६॥ तिन्छन्दाधर्मज्ञातानि
भयदाता|तृष्णाहिन्नोजीबैतिन्नो ४७॥इसछन्द ॥पोखर
जोऊादीहकितोऊजातनके हाहंसलटेंहू ४८॥चौबसाछन्दः ।।
उपजेपुत्ता। सुलगनजुत्ता। जगअवतंसाचिरचउबंसा॥
४६॥ सवासनछन्द ।। सुनहुबलाहकाहुजियतनाहकविरषि
हुतासनाअपयशवासन ५० ॥ मधुमतीछन्दः ।। तपनिकस
तहोधिरिकाशिरहो। बिमलबनलती।सुरभिमधुमती॥
५१॥ लक्षण' ॥ दोहा ॥बिप्रजगनकरहंतहैवाहीगतिमधुभा
र।छबित्रिपंचजतिजानिये आठमत्तप्रस्तार ५२ ।। कर
हंतछन्द ॥ यशुमतिकिशोर शशिजिमिचकोर ॥ मममुख
: लखन्त । यकटकरहन्तं ॥ मधुभारछन्दः । दक्षिणसमीर
अतिकृशशरीर। हुअमन्दभाइ। मधुभारपाइ५३ ॥छवि
छन्द ॥ मिलिहिकिमिभोर । तकतशशिओर ॥ थकित
सोविशेखि । बदनछबिदेखि ५४ ॥ अधनौमात्राचन्दादोहा।।
नौमत्ताकीअमितगतिपचपनबित्तबिचारि । कर्णपगन
- हारीगनोतसबसुमतीनिहारि ५५ ॥ हारी छन्द ॥ तोमा
बसुमती छन्द ॥ सोशुभ्रशशिलो। जोदानअसिसो ॥ सा
जैवसुमती । सारीबसुमती.५७ ॥ अथ दशमात्रा के छन्द ।।
दोहा ॥ दशमत्ताकेछन्दमें उत्तनवासीहोय । संमोहादि
कगतिनसँग बरगतहसबंकोय ५६ ॥ सोरठा ॥ संमोहा
गुरुपांच कहिकुमारललितानसँग । तयगनमध्यावांच
छन्दोर्णवपिङ्गल।
१७
तुंगाद्विजसँगभासंगहु ५६ ॥ समेहाछन्द ॥ ह्योचाहोस
न्ता । जोमेरोकन्ता ॥ तोभंजोकोहा। लोभासंमोहा६०
कुमारललिताछन्द ॥ जुराधहिमिलावै । वहेमोहिंजियावै ॥
कहतभरिउसासों । कुमारललितासों ६१ ।। मध्याचन्द ।।
तौलोंविधिजामै । लज्जाअरुकामै ॥ बांटोयहसोई।
मध्याकुचदोई ६२॥ तुंगछन्द ॥ अम्बरछबिछाजै । मुक्त
अवलिराजै ॥ मेरुशिखरनीके । तुंगउरजतीके ६३ ॥
तुंगाछन्द ॥ तुबमुखशशिऐसो। निरखतजेहिशेसो॥छ
किरहुहगुंगा। सुनहिउरजतुंगा६४ ॥ दोहा ॥ हिजबरज
गकमलहिरचो द्विजगोकमलाहि ॥ त्योरतिपदसंगना
तहै दीपकलातेचाहि ६५ ॥ कमखयथा ॥ पियचषचकोर
है। तियनयनभोरहै ॥ बिधुवदनबालको । कमलमुख
लालको ६६ ॥ कमलाछन्द ॥ कबअँखियनलखिहाँ। अरु
भुजभरिरखिहो ॥ शशिधरबिमलकला । हृदयकमल
कमला ६७ ॥ रतिपदयथा ॥ युवतिवहबरतितो । उरते
यहटरतिजो ॥ हरनिहियदरदकी । सुरतिपदपदुमकी
६८ ॥ पोषकछन्द ॥ जयजयतिजगबन्द । मुनिकौमुदीच
न्द ॥ त्रैलोक्यअवनीप। दशरथकुलदीप६६ ॥ ग्यारह
फलाकेछन्दः ।। दोहा ॥ ग्यारहकलमेएकसै चौवालिसगनि
वृत्त ॥ तहँअहीरलीलाअपर हसमालगनिमित्त ७०
सोरठा ॥ जातअहीरकहत रातप्रकटिलीलाभनो । सग
योग्यारहमत छन्दहंसमालागनो ७१ ॥ अहोरछन्र ।।
कौतुकसुनहुनबीर । न्हानर्धेसीतियनीर ।। चीरधखोल
खितीर । लैभजिगयोअहीर ७२॥ लीबाछन्द ॥ धन्यय
शोदाकही । नन्दबड़ेभागही ॥ ईश्वरहे जाघरै। अद्भुत
।
॥
३.
छन्दोणवपिङ्गल।
लीलाकरे ७३ ।। हंसमालाछन्द ॥ इहिअरण्यमाहीं । सर
मानुष्यनाहीं ॥ विकसेकंजआला । कुरै,समाला ७४
बारहमात्राकेछन्द ॥ दोहा ॥ बारहमत्ताछन्दगति बरण्योग
मितफणीश ॥ होतकियेप्रस्तारहै वृत्तदुसतेंतीस ७५
लक्षणप्रतिदल ॥ तीनोंकन शेषा । मोसोंगोमदलेषा॥ चित्र
पदाभभको। ननमहियुक्ताब! ७६ रोनसोहिहरमुख
ज्यों । अमृतगतिहिजभसत्यों । नयसहिसारंगियहो।
दशलहुगुरुदमनकहो ७७ ॥ शेपाछन्द ॥ ताकोजीमध्या
ऊँ। ताहीकोहोंगाऊँ । पीरोजाकेकेशा । कंठेजाकेशेशा
७८ ॥ मदलेनाछन्द ॥ मिथ्यावादनकोहा । निर्लज्जाअरु
मोहा ॥ जेतोऔगुणदेखो । तेतोमेंमदलेखो ७६ ॥ चित्र
यहाछन्द ॥ रामकह्योनिजधोखे । स्वर्गलह्योतिनचोखे ॥
भक्तानकोनविचारो। चित्रपदारथचारो ८० ॥ युक्ताछन्द।।
हुगयुगमनकोमोहै। तिनसँगपुतरीसोहै । लखियहउप
मायुक्ता । कमलनमरसंयुक्ता ८१ ॥ हरमुखछन्द ॥ धन्यज
न्मनिजकहती। प्राणवारतहिरहती ॥ देखिग्वारिलहि
सुखको । मैंनगर्वहरमुखको ८२॥ अमृतगतिछंद ॥ फिरि
फिरिलावतछतिया । लखतरहैदिनरतिया ॥ तुमजुलि
खीवहिपतिया । अमृतगतीमृदुवतिया ८३ ॥ सारंगिया
छन्द ॥ धनिधनिताहीतियको । बशकरतीजोपियको ।
मुरनिरमाहियको । करगहिसारंगियको ८४ ॥ दमनक
छन्द विषधरधरपरमप्रिया।जगतजननिसदैहिया। जय
जयजनदरदहरी ! प्रबलदनजदमनकरी ८५ ॥ दोहा ।।
गोसभगोनरक्रीड़है बिम्बनसोंयोंपर ॥ सजसीतोमर
जानियो त्यौतमोल है सूर ८६॥ मानवक्रोडायथा ॥ धन्य
छन्दोर्णवपिङ्गल।
१६
यशोदाहिकही। नन्दबड़ोभागसही॥ ईश्वरलैजाहिघरै।
मानवकोक्रीड़करै ८७॥विम्बछन्द । अमियमेंआशातेरो।
हरतवहचेतुमेरो ॥ मनहिंयहक्योंनमोहै । अधरतुववि
म्बसोहै ८८ ॥ तोमरछन्द ॥ असतीनकोशिखमानि । ति
यक्योंतजैकुलकानिः ॥ द्विजयामिनी अपवाद । कहुँको
इतोमर्याद ८६ ॥ सूरछन्दः ।। बधैिनबालानयन । श्रीपाइ
जेमोहैन । रागीनहींहमर । तेतोबड़ेहैसूर ९० ।। दोश ।।
लीलारबिकलजातयुत सजकरनोदिगईश ॥ तरलनय
नरबिलघुकला प्रस्ताखोफणईश ६१ ॥ लीलाछन्द ॥ अघ
धपुरीभागभारु।दशरथगृहछबिअगारु॥राजतजहँवि
श्वरूप । लीलातनुधरिअनूपह२॥दिगीशछन्द । बरमैंगोपा
लमांगों। पदपदुमप्रेमपागौ। हरध्यायजोअनन्दै । दि
गईशजाहिबन्दै ६३ ॥ तरलनयनछन्द ॥ कमलबदनिकन
कबरनि । दुरदगमनिहृदयहरनि॥ बड़ेहिसुकृतिमधुरब
यनि। मिलततरुणितरलनयनि ६४ ॥ तेरहकलकेछन्द ।।
दोहा । नराचिकादिकतेरहै कलकीगतिगनिलेहु ॥र
त्तिबूझिकेतीनिसे सतहत्तरकहिदेहु ६५ करनाजोरन
राचिका जोगोयमनमहर्ष ॥ रंगनरगनअरुनन्दतेहै
लक्ष्मीउत्कर्ष ६६॥ नराचिकाछन्द ॥ भौकरीकमानहैं । नै
नाप्रचण्डबानहैं ॥ रेखाशिरेजोतेंदई । नराचिकायही
भई १७॥ महपंछन्द्रः ॥ तमोरगुनीजतभाई। जवाहिरकी
गतिपाई ॥ जितोपरभूमिहिजाई । तितोइमहर्षबिकाई
१८ ॥ लक्ष्मीछन्द ॥ वेदपावैनजाअन्त । जाहिध्यासबै
सन्त ॥ ज्याइबोजक्तजातन्त । पाहिसोलक्ष्मीकन्तः॥
चौदहमाबाकेछन्द ॥ चौदहमत्ताछन्दगतिशिष्यादिक अवरे
२०
छन्दोर्णवपिङ्गल।
खि । भेदसैदशहोत,प्रस्तारोकरिदेखि १०० ॥ लक्षं
गमातेपदछन्द।। सातोगो शिष्याकीजै। वियदुजमगनसुबत्ती
है। पाइतामोभहिसंगनों। हैमनिबंधोभौमसको. १०१
तीनिभगगनगसारवती । सुमुखिदुजोभमहारवती ।न
रजगेमनोरमाकही। दुजसजगसमुद्रिकावही १०२ ॥
शिष्याछन्द ॥ मीचौवांधीजाकेही । नाहींबाच्योताकोनी ।
एरेभाईमेटेकोलिख्यासिख्यावन्ध्येजो१०३॥ मुवृतीछन्द
असितकुटिलअलकेंतेरी । उचितहरतमतिमेरी ।। यह
कतसुमहनैजीकोविरजहिउरजसुबत्तीको १०४पाइताछन्द
नयनालागेबिधुवदनी। बैरीजुटेप्रबलअनी॥ मांगोपासो
अरियअड़े । पाइत्ताहैकरमबड़े १:०५ ॥ मनियोछन्द ।।
आपहिराख्योजोनचहै। कर्मलिख्योतीपाइरहै। कर्महिं
लागैहाथसोऊ । जोमनिबांध्योगांठिकोऊ १०६॥सारवती
छन्द ॥ आवतीवाल शृंगारवती । पीनपयोधरभारवती॥
कुञ्जरमोतियहारवती। पुजप्रभादधिप्सारवती १०७॥
नमुखांछन्द ।। यहनघटाचहुँ ओरबनी। दशदिशिदौरति
हारनी॥ तजियहिअवसररूपसखी। चलिहरिपरज
नीसुमुखी १०८ ॥ मनोरमाछन्द । जवहिंबालपालकीच
दी । तबहिं अद्भुतैप्रभावढ़ी ॥ लखीदासपूर्णोपमा ।
कमल वसीमनोरमा १०६ ।। समुद्रिकाछन्द ।। हरीमनुहरि
गोकयोयही । नहिनहिनजूनहींनहीं। सुनिसुनिवतियां
मनोपिका । लखिलखिअंगुरीसमुद्रिका ११० ॥ लक्षण ।।
दोदा ॥ चारिदशैकलहाकली लमलमशुद्धगतंत ॥ संगन
भुजा_संयुता दुरविसरूपीमंतः १११ ॥ हाकलिकाछन्द ।।
परतियगुरुतियतूलगनै। परधनगरलसमानभने॥हिय
.
छन्दोर्णवपिङ्गल।
नितंरघुवरनामररै। तासुकहाकलिकाल करै ११२ ॥
शुद्धगाछन्द ।। अरीकान्हाकहांजैहै । सुतेरोदासहरैहै ॥ सि
तारालैबजावैबू । केदाराशुद्धगावैतू ११३ ॥ संयुताछन्द ।।
नहिलालकीमृदुहांसहै । मनमत्थकीयहपाशहै ॥ ध्रुव
नैनसंगनलेखिये। धनुतीरसंयुतपेखिये ११४ ॥ स्वरूपी
छन्द ॥ श्रीमनमोहनकीमरति । हैतुबसनेहकीसूरति ॥ मैं
निजमनयहअनुरूपी । तमोहनप्रेमस्वरूपी ११५ ॥
पन्द्रहमात्राकेछन्द ॥ दाहा ॥ पन्द्रहमत्ताछन्दगतिआदिचौ
पईजानि नौससत्तासीकहतवृत्तिभेदउनमानि ११६॥
लक्षण ॥ पन्द्रहकलागनौचौपई । हसीतिन्नादुजधुजठई।
तरहरिखानउपरलोकला । सकलकहत अहिपतिउज्ज्व
ला ११७ ॥ चौपाई ॥ तुवप्रसाददेख्योभरिनैन । कहीसु
नीमनभावतिन ॥ कवपरिहैमोहनगलबांह । चौपई
ठिइतनीमनमांह ११८ ॥ हंसीछन्द ॥ आईवक्षोपरिचिक
नई। छूटैलागीतनुलरिकई । लागीहांसीमनमृदुहरै।
बालाहसींगतिपगुधरै ११६ ।। उज्ज्वलाछन्द ॥ धवलजर
तपरबत्तहोतबै । अरुपयनिधिकोबरणैसबै ॥ तबहिंवि
मलहीशशिकीकला। जबनहुत्योतोजसउज्ज्वला१२०॥
दोहा । तीनितगनयकहैध्वजा हरिणीछन्दसुभाउ । ती
निरगन अहिपतिकहे महालक्ष्मीठाउ १२१ ॥ हरिणीछन्द ।।
बसैउरअन्तरनितही । मिलैकबहूँभरिअंकनही । ल
खोंसबठौरनवैनकहै । यहैहरिणीरसरीतिगहै १२२ ॥
महोलघमीछन्द ॥ शास्त्रज्ञाताबड़ोसोभनो । बुद्धिवन्तोबड़ो
सोगनो। सोइशरोसोइसन्तहै । जोमहालक्ष्मीवन्तहै
१२३ । सोरहमात्राकेछन्दः ॥ दोहा ॥ सोरहमात्रानन्दगति
२२
छन्दोर्णवपिङ्गल।
रूपचौपई लेखि । पन्द्रहसैसत्तानो जानोभेद विशेखि
१२४ ॥ रूपचौपई छन्द ॥ तुवप्रसाद देखोभरिनैनौ । कही
सनीमनभावनिवैनौ । कबपरिहमोहन गलबाहीं। चौप
ईठि इतनीमनमाही १२५ ॥ लक्षण ॥ चास्यो करना वि
द्युन्माला.। मोतीपोहै चम्पकवाला॥ कर्नासदुहै सुखमा
लसिता। तिन्नाननगो भ्रमरविलसिता ॥तिन्नानोयोस
मुकियमत्ता । कुसुमबिचित्रानयनयजत्तागोसभसोगो
हरिअनुकूले । दुजभभतामरसोगगतले॥निजभैपनेमा
लिनिनिजुमण्डी। नस्साससंगहिजियजानियचण्डीच
क्रभदुजदुजसगनहिथुलिका । ननगननगहैप्रहरनकलि
का ॥ जलोदृतगती जस जस पगनो। मनिगुनदुजपि
यदुजपियसगनो॥ऐन भागगहिस्वागतकोंछै । चन्दव
सरनभासप्रकटहवै। निजजरिपावतमालतीसदा। नभ
जरीहिपठौप्रियंबदा। रेणुरेलगहिहैरथदनो । नभसयां
हिद्भुतपाउशुद्धतो। पकअवलिभनिजोजलहीसुनि । बट
दशलघुहिअचलधृतिमनगुनि १२६ । विद्युन्मालाछन्द ।।
दूजेकोप्योवासोंभारी। नीरनाहींशृंगीधारी ॥ एरीक्यों
जीवैगीबाला। चौहानश्चेविद्युन्माला १२७॥ चम्पकमाला
छन्द ॥ देख्योवाको आननचन्दा । लुट्योप्यारे आनंद
कन्दा। आईजीकी मोहनबाला। कीजैहीकी चम्पकमा
ला १२८ ॥ सुखमायथा ॥ होतोशशिसोमान्योमनमें । जा
न्योहरिहें तापैक्षनमें । बीती सजनीबातें सुखकी। देखे
सुखमाप्यारेमुखकी १२६ ॥ भ्रमरविलसिताछन्द ॥ धीरे धीरे
डगमगधरती । रातीरातीद्युतिविस्तरती। आवै प्रावै
त्रियमदुहँसिता। आगेआगे भ्रमरविलसिता १३० ॥
छन्दोणवपिङ्गल। २३
मत्ताछन्द ॥ आयोआलींविषमबसन्ता। कैसेजीचीनिअर
नकन्ता ॥ फूलेटेसूकरिबनरत्ता। चौहाँगूंजैमधुकरमत्ता
१३१ ॥ कुसुमयिचित्रा ॥ चलनकह्योपैमोहिंडरभारी । परम
सुगन्धावहसुकुमारी । अलितहहहअधिकबिहारी।
सुमविचित्रावहफुलवारी १३२ ॥ अनुकूलछन्द ॥गोपिहु हूँ
ढाबतकतदूजा । कूबरहीकीकरहुनपूजा ॥ योगसिखा
वैमधुकरभूलो। कबरहीसोहरिअनुकूलो १३३ ॥ तोमर
छन्द ॥ तुवहगसौजननीहगतेरो । नहिंसमताहिलहैमनु
मेरो। जलचरखजपराजयसाजै । सखिनवतोमरसो
लखिलाजै १३४॥ नयमालिनीछन्द । पहिरतपादजासुशित
लाई । सखितनहोतिकम्पअधिकाई ॥ तियप्रिय स्वांग
चीन्हिवहराई।यहनयमालिनिसुमनलेआई १३५॥ घडी
यथा ॥ जयजगजननिहिमालयकन्या । जैतिजैतिज
यत्रिभुवनधन्या ॥ कलुषकुमतिमदमत्सरखण्डी। जय
तिजयतिजनतारनचण्डी १३६॥ चक्रयथा ॥ देवचतुर्भु
जचरणहपरिये । याहि बनक ममहिय थिति करिये।
शंखरुगदबियकरनिशिभरिकै। चक्रकमलत्रियकरबिच
धरिकै १३७ ।। प्रहरनकलिकाछन्द. ॥ दशरथसुतकोसुमिरन
करिये । बहुतपजपमेंभटकिनमरिये ॥ विरद बिदितहै
जिनचरणनको । प्रहरनकलिकाटनदुखगनको १३८ ।।
जलोदतिगति ॥ धनोभगरुराक्षसैकरतुहै। नरामढिगतेसही
परतहै । अगारगनवैढरेतरनितें । जलोदति गतीउठे
धरनितें १३६ ॥ मनिगुन ॥ अभिनवजलधरसमंतनल
सितं। अरुणकमलदलनैनहुलसितं ।। जयतिशरदश
शिसमबरबदन। दिनमणिकुलदिनमणिगुणसदन १४०
२४
छन्दोर्णवापिङ्गल।
स्वागता !! याहिभातितुमहूँजुखिझावै। बालबाततवक्यों
वनिश्रावै। नन्दलालमटक्योकत्रऐसे स्वागतासकरती
तुमजैसे: १४१ ॥ चदबमछन्द ॥ ऊभिश्वासलियमैदुखभ
रिक घेरिलीन्हतहँभौरनिअरिकै। औरव्योतबलिहोत
नतवहीं । चन्द्रवर्त्मबिचऊग्योजवहीं १४२ ॥ माळती
यथा ॥ सुमनलखेलतिकाअनन्तमें । सरधनकोसुखहे
वसन्तमें। मनमहमोदनभौंरकेरती खिलतिनजोलगि
मालतीलती १४३॥ प्रियंवदा ॥ नयनरेएकनजाहिकेपरें।
मरतपीरनहिंधीरसोधेरै ॥ रहतिमोदगनमेंअरीसदा ।
तियसरोजनयनीप्रियंवदारियोद्धता हैप्रभुत्वजगमध्यजो
महा । भुक्तायुक्तसुखसाततौकहा ॥रामपाइमननाहिंशुद्ध
तो। तुच्छजानिपुरुषार्थउद्दतो १४४॥ द्रुतयाछंद । जिनहि
संगसिंगरीनिशिजागे । नयनरंगजनुजाचकपागे॥ गह
रुहोतरिसतासुसँभारो। उतहि लाल द्रुतपाउँनधारो
१४५ ॥ पंकलि ॥ मोहनविरहसतावतबालहि । वाइ
वकतिनहिंजानतिहालहि।। बासरनिशिसुआवरषाव
ति। पकअवलिजहँईतहँठावति १४६ ॥ अचलधृतचन्दः ॥
कुलिशसरिसबरदशननिदरशित । परुषवचनमुखकढ़
तिकहतहित ॥ सबतोहिकहतमृदुलतनुअनुचित । ति
यतुवयुगलअचलधति उरनित १४७ ॥ पदरीलक्षण ।।
दोहा।। सोरहसोरहंचहुँचरण पगनएकदैअन्त ।। छन्दहो
तयोपदरी कह्योनागभगवन्त १४८ । यथापद्धरीछन्द ।।
नभरै निशिघनतमभयविशाल । पदअटकतकंटकदर्भ
जाल । मनसुमिरतभयभञ्जनगोपाल ॥ पद्धरिय प्रेमम
दमत्तवाल १४९ ॥ अथ सत्रहमात्रामस्तारकेछन्दः ॥दोहा॥ सत्रह
छन्दोर्णवपिङ्गल। २५
मत्ताछन्दमें धारीत्रिजयोनीक ॥ बालातिरगपचीस
सैचौरासीदेठीक १५०॥ धारीयथा ॥ मयूरपखाशिरमें
थिरकाये। सुपीतपटाउरमैउरमाये ॥ चलैमुखचन्द्रवि
लोकिकुमारी। गयेतुलसीबनगिरिधारी १५.१ ॥ बाला
यथा ॥ मोरकेपाक्षको मुकुटआला । कंठमेंसोहती मुक्तमा
ला ॥ श्यामंघनरूपतनुदृगविशाला । देखिरीदेखिगो
पालबाला १५२ ॥ अथअठारहमानाकेछंद ॥ प्रकटअठारह
मत्तकोरूपामालीहोइ। वृत्तिसुइकतालिंससैइक्यासीजि
यजोइ. १५३ नौगरुरूपामालियाअनियममालीवंस
सुयशसंगप्रतिपायमें छंदहोतकलहंस १५४ ॥ रूपामांकी
पला नेहाकावेलीबोयोंजी।छोथाल्होकैराख्योहीमें
उत्कंठापानीदेपालीहै। प्यारीजीकोरूपामालीहै. १५.५॥
मालीछन्द | मुरलीअधरमकुटशिरदीन्हेहै । कटिपटपीत
लकुटकरलीन्हेहै । कोजानैकबायोसुनिआली । उ
रतेकतनकेईवनमाली १५६॥ कलईसछंद ॥ मनवाम
शोभसरती किन्हये। मुखनयनपाणिपदपंकजईये ।।
कलधौतनूपुरनकीछबिदीसी । कलहंसचेदुअनकीभव
लीसी १५७॥ अथउनीसमाशाफैछद ॥ दोहा ।। उत्तमउनइसमत्त
मेंरतिलेखादिविचारिशतसठिसक्सठिकहतरत्तभेद
निरधारि॥ संगनइग्यारहलघुकरनरतिरेखातुकचाहि ।
गनगनगनदैकरनदैजानिइन्दुबदनाहि १५८ या रतिले
खान्द ॥ सबदेवअरुमुनिन मनतुलनितोल्यो। तवंदा
सदृढ़वचनयहप्रकटबोल्यो । इकोरमहिसकलजा
तपविशेखो। इकओरसियपतिचरणविरतिलेखो १५९॥
इन्दुधनाचन्द ॥ दोषकररंकसकलंकमंतिजोई। घाटिअरु
4.
छन्दोवपिङ्गला
बांदिपुनिमासप्रतिहोई ।। भाग अवलोकिइंहिइन्दुविच
आली। इन्दुबदनाकहतमोहिवनमाली १६० ।। अथवीस
'मायाफेछन् । योहाः ॥ होतहसगतिआदिदैछन्दनिमत्ता
बीस । दशहज़ारनौसे उपर गनोभेदयालीस-॥ बीसै
कलविननियम हंसगतिसोहै। मोभासोमोजलघरमा
लाजाहै । मोरनविप्रसाहिगजबिलसिततलुहै। हौदी
पहिदीपकिय कहतकविजनु है १६१ ॥ इंसगतियथाः।। जि
नजंघनकररूंपनियोधिनकारन । बारणकाढ़ेदन्तफिर
तदुरबारन ॥ चरणभयेहूअरुणबाजनहिआयउ । ता
सहंसगतिसीखतकिनवौसय १६२।। गजविलसितयथा ।।
नागरिकामदेवनृपकाटकप्रचलहै । भौहेकनानभालबर
तिलकसुशार है। प्रेमप्तिपाहअश्वगचपलजअतिहै।
तंबुनिजबुजानिगजबिलसितगतिह. १६३: ।। जनधरमाला
छंदः॥ चौहान वैविपुलकलापीयेरी । पीपीनोलैपपिहो
पापीबैरी॥ कैसेराविरहिनिबालाजीको । जारैका
रीजलधरमालाहीको ।। दीपकीयथा ॥ चौहोतहै
जाहिरेतोहियेड्यामः: ज्योस्वर्णसीखीमयोऐनमदनाम।
तश्यामहियवीचयोंजाहिर होतः। ज्योनीलमणिमेंलसैदी
पकीजोत:१६५ | लक्षण । विपिनतिलकोललनगनरेग
ना। गचन पियतरहिगरुप्रकटधवलहिगना। छन्दनिशि
पालकियमौनगलगौनरे। चन्द्रसबलघवरणरुद्रगुरुजो
तरे १६६|| विपिनतिलक। भुवनप्रतिरामन्नत्तिकैसकेजंगना।
अरिनबनवासलियेसंगले अंगना। जहँसत्तहँदासदमके
मनोदामिनी विपिनतिलकैसकलवैभईभामिनी १६७॥
थपळ्यथा ॥ सुरसरितजलअमल, सुचित्तमुनिवरनिको ।
...
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14604
छन्दोर्णवपिङ्गल।
गिरिशभंगअहिअंगवसन विधिधरनिको ॥ संगलगि
रितुहिनगिरिशरदशशि नवलहै। सबउपर अधिक सिय
पतिसुयशधवल है १६८ ॥ निशिंपलियथी. ॥ लाजकुलसा
जगृहकाजविसरायके । पालगत लाल किहि जालइत
आइकै आशुचलिजाहिबलि. तासुकिनतासुके । भा
लहुअलालनिशिपालगतजासुके... १६८ ॥ चंद्रयथा ।।
कगलपरकेदलिजग तिनहिपरगिरियुगलः। तिनहिंपर
बिनहिअवलम्ब सरवलजलं । निरखिबिबिगिरिबहुरि
कम्युभेचकितमति । उपरजगमगिरह्योचन्द्रइकविमल
अति १७० ॥ रक्कीसमाचाकेछेद।। दोहा पबंगादिइकईसमें की
जैछन्दविचार । सत्रहसहसरुसातसै इग्यारहप्रस्तार।
चारिचकलइकपंचकल जानिपवंगमबंसः ॥.तीनिबेर
पियरागना छन्दहोलमनहंस १७१ ॥ प्लवंगमयथा ॥ यकको
उमलयागिरिखोदिबहावतो । तौकतदक्षिणमौनतिया
निशितावतो. ॥ ब्याकुलविरहिनिवालकखैभरिनयन
को । नितिबारहिवारपवंगमसेनको १७२ ॥ गनहंसय
था ।। वरयूथमध्यतुरंगशोभनपावई । नहिश्याममण्डल
सिंहहोसँगवावई खलसंगत्योंजियसंतकेदुःखदाँउहै ।
मनहंस के हिकांगसंगतिचाउहै १७३ ॥ अर्थ पासमात्राके
छन्दी दोहा॥ सालतीमाळा दिदैछिन्दवाइसैमत्त । भेद
अठाइससहसपर सैलत्ताव तत्त. १७४क्षण ॥ सर्वे
दोहामालतीमालासाधा मोकनॊ हि जवरप्रिथम
बाधा । द्विजवरनंदनँदनसरकर्नबानी।। जानहुवंश
पत्र भरनोभभलहुगुरुदै ॥' समदविलासिनीनिजभजे
नशंखकरहो । नलरणभागसन्तियतजान हिकोकिल
.
-
छन्दोर्णवपिङ्गल।
को ॥ मोंतोयोसौगोकरिकैमायहिपूरो । वेईवना नत्यग
तीमत्तमयूरोः १७५ ॥ माखतीमालायथा । कितीतरीभूमैहै
ज्योंकैलासा । कैलासामेजैसेशम्भकोबासा ॥ शम्भूज़
मेंगंगाजूकीधारासी । गंगाजूमें मालतीकी मालासी
१७६ ॥ असम्बाधा ॥रात्योद्योसैवामजपत अतिवैतोपें ।
लूताहीको नामकहतिमतिलेमोपैं ॥ पापीपीडावन्तजग
तजनसुनुराधा । जाके ध्यायेहोत अकलुष असम्बाधा
१७७ ॥ प्राणिनीयथा ॥. ललितदुकानढार देखशुभकोन
आवै । सुमुखिसुबोलभूलिकोउनहिं बिकाइ जावै ॥
दिनदिनहोतिदास अतिरूपखानिनी है। करि बहु भाव
सेतिमनुलेतिबानिनी है १७० ॥ वैशंपत्रयथा ॥ घूघुरवारि
श्यामअलकैंअतिछबिछलकै । चारुमुखारबिन्दुलव्ध्यो
किंभवरललके। शुभ्रवुलाकमुक्तद्युतिकैछवितिहुँपुरकी ।
दाससुवंशपत्रयहकैसोनक्तमसुरकी १७६॥ समविलासिनी
यथा ।। कुचखलिजानिऐंठिॲगिरानिभित्तिरिक लेख
तगुपाललालपटओटओटकरिकै । परशतभूमिकेश
उरलाजलेशनकहूँ। समदबिलासिनीबसनतासँभार
अजहूँ १८० कोकिलक़यथा ॥ अधरपियषपानतियकोन
करैजबलों । मधुरसिंगारउक्तिकविक्रीनलगैतबलों ॥
पियतनुभाघऔरमधुकोजवलौतिलको । तबलगिश
दहोंतमधूरीनहिकोकिलको 1030. मत्तमयुरयथा ॥ दे
ख्योवाहीअंगप्रमाकोसुनिवाला। जान्योहआवतका
रोघनमाला ।। प्रायोचाहेआधघरी मेंबनमाली । नच्चै
ककैमत्तमयरोसुनिआली. १६२॥ मायायथा । काहेको
कीजैमनपनीनुचिनाई। कहूसोबाकीलिपिमेटीनाहिंजा
।
२६
छन्दोर्णवपिङ्गल।
ई॥ताहीकोध्यविमनवाचाअरुकाया । सोईपालैंगो
जिनदेहीनिरमायां १८३॥ तेईसमात्राकेछन्द ॥ दोहा॥हीर
कदृढ़पटआदिदैतेइसमत्तअनन्त । छयालिंससहसरु
तीनिसै अड़सठभेदकहन्त ।। रलतलायकलकेमदृढ़पट
गुरुजतनित्त । तीनिटगनयकरगनदै. हीरकजानोमित्त
१८४ ॥ दृहपटयथा ॥ पहिरतजामाझीनको चहुँथालगि
झूम्यो। बन्दनिबांधतहूँदुहूँहाथनिमेंघुम्यो।डारिदयोरी
पैचमेंमेरोमनाली । दृढ़पटुकोकटिकसकतहीमोहन
बनमाली १८५॥ हीरकछन्द ॥ जाहुनपरदेशललनलालच
उरमण्डिको रतननिकीखानिसुतियमन्दिरमेंछंण्डिके।
बिद्रुमऔलालनिसमवोठनिअवरेखिये। हीरकअरुमो
तिअसनदन्तनिलखिलेखिये १८६॥चौबीसमानाफेछन्द ।।
दोहा । लोलादिकअहिपतिकह्यो छन्दमत्तचौबीस । दश
पचहत्तरसहसपर जानो वित्तपचीस १८७॥ लक्षण
पांचोपांचोगोदिजवियवासंतीको भासम्मत्तनताटके
देखोजातचकितवै।गोकोंपियमोकर्नेलोदुगलोला।
विद्याधारीसबगुरअनियमहहरोंला १८॥ बसन्तीछन्दः।
देखेमातभौरकरतयेदौरादौरी आवैगेगोपालसदन
कोजोराजोरी ॥ भैरीबैठीशोचकरतिहजीमेंभूले । लागो.
चैतोमासबिमलवासन्तीफूले.१८६ ॥ चकिताछन्द ॥ पीत
वसनकीकायासोतीमोहनिमनकी । सोहति सजनीत्यों
पाटीरीखौरनितनकी ॥ तोतनकबकेहेरेआली नेसकत
किती निश्चलअखियांसोहमानोंखञ्जनचकित १६ ॥
खोलाछन्इ ॥ आयेहूतरुणाई लीन्हेंहोलरिकाई। होती
क्योंसखिया श्रापआपहँसाई ॥ लज्जा. बैरिनि भानो
छन्दोर्णवपिङ्गला
ठानोमंजुलंबोलें । प्यारेप्रीतमजूमोंकीजै कामकलोले
१६,१॥ विद्यांधारीछन्द ॥ विद्याहोतीवमिआनन्दैकारी।
आपतकालेजीकीशिक्षादेनेवारी । सुखदुःखहीतेनाहीं
होतीन्यारी. तातेड़मेरेभाई विद्याधारी १६२॥
रोला ॥ रविछबिदेखतघूघधुसतजहाँतहबागतः । कोक
निकोताहीसोंअधिकहियो अनुरागत ॥ त्योंकारेकान्ह
हिलखिमनु तिहारोपागत हमकोतीवाहीतेजगत
उज्यारो लागत १६३ ।। पञ्चोसमात्राफेछना दोहा ।। गगन
शादिपचीसकलभेदहोत,लाख। इससहसंस्तीति
सैतिरानबेपनिभाख १४ पुगी या सौंकलचारि
पचीसकोछन्दजातिगगनंग पगपगपांचौमुदिये
तिशुभकयोभुजंग १६५ | गगनगनाछन् । निखिसौति
जनहृदयनिरहंगरउकोगना । पटतरहितसतकविके
मनकोमिटैफलंगना । बदनउघारिदुलहियाक्षण कठि
करिअंगताःचन्दपराजयसाजहि लजितकरहिगगने
ग़ना: ६६ ॥ छव्यिसमाधाछन्द ना दोहा । छब्बिसकल में
चंचरी आदिलाखगनिहु । सहसछानवेचारिसे भी
हारहकहिदेहु १६७ ॥ पुनः गातीनिसंगनापियहिंदै रात.
चञ्चरीचारुन सोरहदशजतिअन्तगुरुनामविष्णुपद्धा
रु.१६॥ चरी न्यु ॥ फागुफागुनमालवीततधामधाम
निछरिङ चैतमेवनबागवापिनिरहेबपुमरिडकै।
फुलरंगसजैलतांदुमभीरवाद्यबजावहीं । कीरकोकिलसा
रिकामिलिंचंचरीकलगावहीं वही विषणुपदवकैसे
कहाँसहससुरपतिसेसिंगरैदृष्टिपरैः। दासशेशा संतमह
सयोगकहनकोकहतडरै ।। कलोलियोचाहि अनदेखेतू
छन्दोर्णबपिङ्गल।
निजओरत कैं। हैयहसहसहजारविष्णुपदमाहिमॉलिखि
नसकै २०० ॥ सत्ताईत्तमात्राकेछन्दः ॥ दोहा ॥ हरिपदाहि
सत्ताइसैजानेछन्दअनेक । तीनिलाखसत्रहसहसआठ
सैदशटेक, २०१॥ हरिपवछन्द बिथाऔरउपचार अ
बतकरैसुकौनेज्ञानु अजानकछूनशान्योमूरुखकह्योह
मारोमानु ॥ पापविवशगौतमकीतियजोमतिकरहीपषा
न। तांसुभगतिजोदासचहैतौहरिपदउरमें आनु:२०
'चट्ठाईसमात्राफेछन्दः ॥ दोहा ॥ अट्ठाइसमेंगीतिकाआदिकक
होफणीशापांचलाखचौदहसहसबैसैपरउनतीस.२६३॥
लक्षण | चारिसुगणधजगीतिका भरननजभयनरिन्द्रा
अनियमबरमनरिन्दगतिः दोवेकह्योफणिन्द २०४॥
गीतिका ॥ यहिभांतिहोहुनबावरीवलिचेत्तजीमहँल्यावहूं।
वृषभानुकोयहभौन हैकहकान्हकान्हवतावहू।मुसुकाति
होकिहिदेखि कहिदेखिगातगोवावहू। करबीनलैअति
लीनहायहगीतिकाहिसुनावहू २०५ ॥ गरिन्दछन्त्र सिंह
विलोकिलंकमृगहगवरुचालकरीमदधारी । जानहिंआ
पुजातिनिज़मनमहँकरेंप्रीतिअधिकारी | कोलकिरात
भिल्लछबिअद्भुतदेखहिहोहिंसखारी:। समविरोधसुखहि
बनषिचरहिंशत्रुनरिन्दकुमारी, २०६:॥ : दोवैचन्द्र ।।
तुमनिछुरतगोपिनके असुवाब्रजबहिचलेपनारे । कछुदि
नगयपनारतवैडमडिचलेज्योनारे ॥ वैनारेनदरूपभये
अबकहोजाङकोइजोवे । सनियहवात अयोगयोगकी है
हैसमुदनदो २०७॥ उन्तीसगावाकें लुम्वः ॥ दोहाः । उनति
समत्ताभेद मरहट्ठादिकदेखि । आठलाखबत्तिससहस
चालिसभेदविशेखि २० मरहट्टाछन्दः ॥ सुनिमा
३२
छन्दोणवपिङ्गल।
लद्वितियउरजनकीनाई निपटहिप्रकटनहोई । अरुगु
ज्जरयुवतिपयोधरकीबिधि निपटनराखहुगोई॥ करिन
कटदुरेकेबीचराखिये योअक्षरकीचोज । ज्यहिविधिमर
हट्टबधूराखतिहें बिचकंचुकीउरोज २०६ ॥ तीसमाधाके
छन्दः ॥ दोहा ॥ तीसमत्तमेसारंगीचतुरपदीचौबोल । तेर
हलखछयालिसंसहसदुसैउन्हत्तरिडोल २१० ।। पुनः ।।
तिथिगसारंगीचतुरपद द्विकलसातचीमत्त । तीसमत्त
चौबोलहसोरहचौदहतत्त२११॥सारंगीछन्दः। देखोरेदेखो
रेकान्हादेखीदेखोघावोजू। कालिंदीमेकूचोंकालीनांगैना
थ्योलावोज । नञ्चैबालानच्चैग्वालानच्चैकान्हाकेसंगी।ब
ज्जभेरीरूदंगीतम्बूराचंगीसारंगी २१२॥ चतुष्पदच्छन्द ।।
संगरहेइन्दुकेसदातरैया तिनकेजियअभिलाषै। भुवन
जनितकटिबरषाऋतुको तिहिइन्दुबधसबभाषै।यहजी
निजगतमेरूपरूखीबासरसुमतिबतावै । अतिकूरक
काररूपबिनचीन्हेपरमचतरपदगावै २१३॥ चौधोजचन्द ।।
सुरपतिहितश्रीपतिबामनहबलिभूपतिसोंलहिचह्यो।
स्वामिकाजहितशुक्रदानह रोक्योबरुहगहानिसह्यो ।
सुमतिहोतउपकारलाखहितोभूठोकहतनशकंगहें । पर
अपकारहोतजानहिंतोकबहुँनसांचोबोलकहै २१४ ॥
इकतीसमात्राकेछन्दः ॥ दोहा इकतिसमत्ताभेदमें छन्दसबै
याजोहि । एकलाखअठहत्तरै सहसतीनिसैनोहि.२१५॥
सवैया. ॥ अरबखरबतेलाभ अधिकजहँचिनहरहासिल
लादपलानः सेतिहिलयेदेवैक्षाराजी औरहिंदनअप
नोज्यान ॥ ऐसोरामनामकोसौदातोहिंनभावतमूद
यान । निशिदिनजातमोहवशंदौरतफरतसवैयाजन्म
३
छन्दोर्णवपिङ्गल।
सिरान:२१६ ॥ रूपसवैयाछन्द ॥ दोहा॥. रूपसवैयावत्तिसे
कलालाखमैंतीस. ॥ चौबिससहसरुपांचसै "अठहत्तर
विधिदीस २१७ ॥ लक्षण प्रतितुक ॥ आठोक पायेदीन्हे
ब्रह्माछन्दैजानोधीरा। सातोहारासुप्रीमोपुनिसुप्रीमोगुर
हेमजीराकरिहाराभोंगहिकर्नापीमहिमागोशम्भूको
सी। आठोमोनोठानोंडंडोगुरयुगसहितपरमछबिहंसी।
मत्ताक्रीड़ाचारोकायकलचतुर्दशगुरुतलधरिये। साल
रकरबियगुरछब्बिसलंघुझलपरप्रकटबहुरिगुरुकरिये।
जानिकऊँचौगोलयगोलय दुजकरित्रिगुणसगुनझरप
रत्यै भोततुनीतोलानिलखिययेतन्वीकी है। गोबिन्दा
तेरीइच्छाकेतीशम्भूब्रह्माठानैजः । तहीसंसारैबिस्तारै
तूहीपालैऔज्यावैतू. २१८ ॥ मज़ीरछन्दः।। मोटोरीआली
मेरोमनश्रीचन्दाबनशोभादेखैः। देखेरीझैगीतोहूँअति
मैंहीभाषतिरेखारखे ॥ एरीकान्हातकोनिर्तनकोऊचित्त
नराखैधीरा'। जोटीजोटानच्चैग्वालिनिवज्जैझालरिऔ
मंजीरा २१६ । शम्भूछन्दः ॥ तियअरंधंगाशिरमैगंगाग
लभोगीराजाराजैज । निरखैसत्तानिजनाचत्ताडमरूडी
डोडौबाजैज । संगबेतालीकरदैतालीसुखदानीबानीगा
वैजू । धनिप्रानीतेजगुजानीजेनितऐसोशम्भूध्यावैजू
२२० ।। हंसीचन्द । जाकोजीजासोंपाग्योसोसहजउत
दपिसुखदअतिहोई। जोनाहीजीकोभावसोअतिशुभस
मुंझिचहतकिमिकोई॥कलबकी कोकैसेभावैयदपिमुकुत
अतिजगतप्रशंसी।संसारोनीकोलागेपैअनकनकबहुँच
गतिनहिंहसी:२२सामताकीदाछन्द । काइकोथोरोदोषीकैस
हनकहतप्रभुपरमविपत्तिको सोतोजानसंसारैनारदसन
५
३४
छन्दोवपिङ्गला
भगतसहउदुखअतिको ॥ काहूकाभलेभलेत्रिभुवनम
तिबकसतशुभगतिको।देखाहाथीमत्ताक्रीडाजलमहकर
तनरहेउभगतिको२२.२|| लालूछन्द ।। सौदामिनिघनजिमि
बिलसतहरिपरिहरिपियरपटसखिउहिरूखमें । देखतक
लुषभयोदिनउडुगणहुतभुकंपरियरुइयत्तदुरनमें । त्यों
होइहिरुखकुँवरियमुनतटनिरखिबरखतसुखसुखमें । सा
लरङ्गसङ्गलसतसुतनरुचिछनरुचिसरिचमकतितिमिमु
खमें २२३॥ क्रौञ्चन्द ॥ सेरनकैसीपौरुषबातेंकिमिकरिकह
उडुगणबिचवरणी । क्योंशुकसारीलौंपढिजातयत्ननिक
रिबकऔधकंघरणी ॥ ज्ञानियबिंद्याजानुजनायेनहिंजड़
कवहुँचुधनियहवरणी । तूलकोंचोक्योंकरिहसैगनिगंनि
धरतधरतपगधरणी-२२४ ॥ तन्वीन्च ।। देखिसशेकैम
लंजत्तमैलोगबखानतसहिजुठहाई ... आननशोभातरु
णिप्रगटिकैजीतनश्चेतबसनसजिआई ॥ फूलसरनिसों
मुग्धनिबसकै जाहिरभोजंगमन्मथधन्वी । जीतनताको
चितवनिशरसो धीरप्रवीनसकलकरितन्वी २२५ ॥ भु-
न्दरीछन्द ।। दौसा ॥ ससंगविप्रदुगसारवति छन्दसुन्दरीजा
न । पदपदमत्तवतीसगनि चौबिसवर्णप्रमान २२६ ॥
सुन्द्रीयथा ।। कुचकीबढ़तीयोंछिनछिनकीमेरोमनदेखतरी
भिमयों । दरकीअँगियाचारिकपहिरे अरुचारिककोटु
टिबंदगयोः॥ कटिजातपरीहैखिनखिनखीनी याविधि
यौवनजोरठयो । जवहीतबनीवीकसतहिदेखसुन्दरिको
दिनभयो २२७॥दोहा॥ इमिद्वैतेबत्तीसलगिवत्तिवान
लाख ॥ सत्ताइसहजारपर चौसैवासठिभाख २२६ ॥
इतिमात्राप्रस्तारछन्दवर्णननामपञ्चमस्तरंगः ५ ॥
छन्दोर्णवपिङ्गल।
अथमानामुलकछन्दः ॥दोहा : ॥ घटेबढ़ेकलदुकलहू वह
दभिराम ॥ तेहिगनिमत्ताछन्दके मुक्तक गुणधाम
चित्तथानीनीछन्द ॥ दोहा ॥सोरहसत्रहकलनिको चित्र
बनीनीहोय ॥ चारिचौकमेंतीसरो यगनकल्सबकोय २
यथा ॥ लीन्हीजिनमोलभायचोखे । दीन्हीतमकोबिथा
अजोखै। कीजैअखियानकीकनीनी ल्याईसुविचित्रहो
बनीनी ३ नंदलालगनेनशीतऔंघाम । सेवैतुवहार
आठहयाम ॥ कतीतुमतासुलेतहीनाम । पविचाहि
कठोरतोहियोबाम ४॥ दोहा ॥ सत्रहअट्ठारहकलनि छ
न्दहीरकीतन्तः ॥ नन्दधुजनिबिरमतिचलै दुकलत्रिक
लहमन्त.५ ॥ यथा ॥ दासकहैबुधिथकधीरकी। देखि
प्रभाअद्भुतपटीरकी ॥ बेसरिकीकेसरियाचीरकी या
रनीकी ढारनीकीहीरकी६॥ पुनः ॥ दन्तनकीचारुचमक
देखिदेखि । बिजुछटामन्दप्रभालेखिलेखि ॥ मोहित
हैदासघरीचारिचारिणकोनचलैजीवनधनवारिवारि७॥
दोहा । अट्ठारहवनइससकल छन्दभुजंगीमानि । नैन
ततगहे चन्द्रिका वाकीगतिपहिचानि ८॥ भुजंगीछन्द ।।
ललालाडिलीकालखीपीठिमें तहांश्यामबेणीपरीडी
: छिमें ॥ मनोकांचनीकेंदलीपत्रहै । भुजंगीपरीसोबतीत
है । चन्द्रिकांचन्दः ॥ कुरबकलरबोहकरेबोलिकै । द्विर
दगतिहरैमन्दहीडोलिकै ॥ दशनद्युतिलजीलीकरैदासि
नी हसनिसनजितेचन्द्रिकाभामिनी:१०॥ नादीमुनी ।।
दोहा ॥ पंचलहूपरमगनत्रय नान्दीमुखीबिचित्रः ।। गति
लीन्हीनियमोतजै वहनामहैमित्र १३ ॥ यथा । जन्म
प्रभुलियो शवधर्मेलटिमांची । लुट्योसबसबनिवस्तुए
३६ छन्दोर्णवपिङ्गल।
कौनवांची ॥ द्विजनक्रियविदावाकवादैसुखीकै । नपति
जबउठेश्राद्धनांदीमुखीके १२॥ दोहा ॥ वोनईसकैबीस
कलं छन्द्रहोतचितहंसा निन्दकरनद्वैअंतसे कैहैरल
अवतंस ॥ पद्मबैठकमुक्तभोजनछोड़ि कै । तूंसहेदुख
भूखकोपनुवोड़ि के ॥ दासहासकरैघनेबकबसरे । तोहि
ह्यावसुबासउचितनहंसरे १३॥ पुनः ॥ भौंरनाभीबीच
गोतेखाइखाइ। बूड़िगोरीचित्तमरोहाइहाइ ॥ चाहि
गिरिगिरिगाहितिरितिरिफेरिफेरि । दासमेरेनयनथाके
हेरिहेरि १४॥ उमेरेछेन्द्र ॥ दोहा ।। हलवोनइसैबीसको
छन्दसुमेरु निरिलहूमगनलहुभगनयों कहूँअन्तल
हुफेरि १५॥ यथा ॥ करेकोवाकुचरचालोगशाली। लु
गाईक्याकरेंगीकैकुचाली ॥ प्रभाजीकान्हज कोऊतरी
है। सोमेरेनयनदूकीपूनरीहै १६ ।। मियाछन्द ॥ दोहा ॥
बाईसैतेईसकल छन्दप्रियापहिचानि । चलनिचारुस
गीतकी बरणतहैं सुखदानि १७॥ यथा ॥ तोछूटतटी
सिगरीशीतलई है। योअंगसबैवादिनतेागिभईहै।
राखैरहिहैदासहमैं दूरिहियासों । योपंथीसंदेशोकहिवी
प्राणप्रियासों. १६ मा हरिप्रियाछन्द ॥ दोहा ॥ बीसइकीसौ
बाइसौ कलाहरीप्रियछन्दः ॥तीनिछकलपरदेहुगुरु न
न्दकिहेगुरुबन्दा १६ ॥ यथा ॥ हरतिजहदीननकोसकट
बहुत है । विनवततिहिचितवनिहितदासदास है। कर
निहरनिपालनितूदेवि आपुही. । शम्भुप्रियाब्रह्मप्रिया
हरिप्रियातुही २०॥ पुनः । करतिजुहैदीननिकेसंकटको
हीन । बिनवततिहँचितवनिहितदासदासंदीन ॥ करनि
हनिपालनितूदेविसर्बठौर । शम्भुप्रियाब्रह्मप्रियाहरि
छन्दोर्णवपिङ्गल।
प्रियानऔर २१ ॥ पुनः॥ हरतिजहैदीननिकोसंकटबहुने
से। बिनवततिहिचितवनिहितदासदासतेरो ॥ करनि
हरनिपालनितदेवियापही है । शम्भुप्रियाब्रह्मप्रियाह
रिप्रियातुहीहै २२॥ दिगपालछन्द ॥ दोहा ॥ होतछन्ददिग
पालकल बाईसौतेईस । चौबीसोंपरोभयो हैदूनोदि
गईस २३ ॥ यथा ॥ सोपायआजुडोलमहीशीतधप
में। बिधिबुद्धितुच्छ जाकीमहिमांअनूपमें ॥ हरजासुरू
पराखेहियेबीचसबदाहि। दिगपालभालजाकीरजराज
तीसदाहि २४ ॥ पुनः सखिप्राणकीसंघातीप्यारीनहीं
लगैरी । सुखदानिबानितेरीअंतिदुरिकोभगैरी।। अलि
कान्हप्राणमेरोनिजसाथलैगयोहै। मनुआपुनोनिमोही
वहमोहिंदैगयोहै २५ ।। अबिंधाछन्द । सरगनारंग्गनीज
गंनुलगे । रंगनारग्गनातकोरदगैः॥ अबिधालन्दपाय
नागकन्त। सोरहोसत्रहोअठारहमन्त २६॥ यथा ॥ का
न्हकीत्योंरतेगचोखीहै। सतियामेंकहाअनोखीहै । प
विसेंमोहियेजुलागिउठे। अविधाज्योंबियोगागिउठे
२७॥ सायकछन्द ॥ समनागीसगनागोसंगनी रंगनादी
हुनहींदोसंगना ॥ लहुश्राद्यन्तपरेसत्रहलेखि । नामहै
सायकयाछन्द्रहिदेखि २८ ॥ यथा ॥ अँखियांकाजरकी
कोरनहीं। भृकुटीऔतिरछीतौरनहीं ॥ दासयप्राणन के
घायकहें बिसुहँखंजर,सायक, २६ ॥ भूपचन्द ।। संग
नागोसगना। रग्गनाप्रादिभना॥ लहुवोअन्तमलोइ।
भूपंशिवसरकलोइ.३० ॥ यथा || भावतीजातिकितै।
नेकुतौताकिइते ॥ तेरोईघायलहों भपसोहायलहौं
३१॥ मोहमीछन्दः । संगनागोसगनांगोसगनागोसग
३८ छन्दोर्णवपिङ्गल।
ना। रग्गनाआदिदियेहुनकदीसगना ॥ बाईसैतेईस
कलअन्तलहूचौविसहोइ । मोहनीछन्दकहैयाहिसयाने
सबकोइ ३२॥ यथा ॥ हुँदैहुहैनतितीपंकजकेंकाननमें।
सुखमादासजितीमोहनकेआननमें ॥ नतितीजानिपरैः
मन्मथकवाननमें । मोहनीरीतिजितीहवसुरीताननमें
३३ ॥ अथगीताप्रकरण | दोहा | चौबिसकलगतिचञ्चरीरूप
मालपहिचानि। लघुदैआंदिपचीसकल सुगीतिकाउर
आनि ॥ है आदिछत्रीसकरि गीताकहौंत्रिशेखि। गुरुदै
अन्तसुगीतिके शुभगीताअवरेखि ॥ करिगीतागुरुम
न्तहरि गीताअट्ठाईस । अन्तलहूअतिगीतकरि सताइ
सौउनतीस ३४ ॥ अथरूपमालायथा ॥ जातिहबनबादिहीग
लबांधिकैबहुतंत्र। धामहीकिनजपतकामदरामनामसूम
त्रः॥ ज्ञानकीकरिगूदडीदृढ़तस्वतिलकबनाउ । दासपर
नअनपसगुनसरूपमालागाउ, ३५: ॥ सुगीतिकाछन्द ।।
हजारकोटिजुहोयरसनाएकएकमुखंग्रः । इडाअरबिन
जोवसैरसनानिमण्डिसमग्रः॥ खरोरहैदिगदासतनुधरि,
देवपरमपुनीत । कहैकअहिराजतबब्रजराजतुवजस
गीत ३६ ॥ गीताछन्दः ।। मनबावरेअजहूंसमुझिसंसार
मदरियाउः । इहितरनिकायहछोड़िकेकछुनाहिंऔरउ
पाउालेसंगभक्तिमलाहकरिारूपसोलेलाउ।श्रीराम
सीताचरितचरचाशुभ्रगीतानाउ ३७ ॥ शुभगीताछन्दः ॥ त्रि
लोकिदलहिनिवेलिकेतनफूलमालविसजई । रसालदूल
हशीशसुन्दरमौरकीचबिछाजई ॥ वसन्तकेगृहआजव्या
हउछाहपरमपुनीतहै। चकोरकोकिलकीरभामिनिगाव
तीशुभगीतहै ३८ ॥ इरिगीतछन्द ॥ बनमध्यज्योलखिसा
--
-
छन्दोर्णवपिङ्गल।
जसंयुतव्याधवासहिसज्जतो । पशुपक्षिमृगयायोगनि
जनिजजीवलैलैभज्जतो ॥ त्योंमोहमदपैशुन्यमत्सर
भाजिजातसभीतहै। जबदासकेउरभक्तिसंयनज्योसतो
हरिगीतहै ३६ ।। प्रतिगीताछन्द । चैतचांदनिमें उतैमुरली
बजाईनंदनन्द । तानसोवतितानकीगलितानकियवि
धिचंदवन्दं ॥ तासमयषभानुनन्दिनिकांगई चलिर्फ
दफन्द । मोहिमोहनऊगिरेअवलोकिकैमुखचंदचन्हें
४० ॥ शुद्धगालक्षण ॥ यगनगुरूकरिचौगुनोछन्दशुद्धगाहो
इ । अन्तघटैकलदुकलहूवहै कहै सबकोइ ४१ ॥ यथा ॥
मखैबेठीकहांबौरीअरीकान्हाकहांजैहें। सुतीयाहीघ
रीमैदेखितेरेपासहीऐहैं ॥ सिखायोमानिकैमेरोंसितारा
लैबजावैत । सखीवाद्यौसकीनाईकेदाराशुद्धगावैतू
४२ ॥ सोसायतीछन्दः ॥ द्वैकलदै फिरतासकललीलावती.
अनेम । दुगुनपद्धरियकेकियेजानोवृहैसप्रेम ४३ ॥
यथा ... पीताम्बरमुकुटलकुटबनमालवैसोईदरशावै ।
मुसुकानिबिलोकनि मटकलटकबढ़िमुकुरलहितेचबिपा
वै॥ मोबिनयमानिचलिवृन्दाबनवंशीबजाइगोंधनगा
वै॥ तौलीलावतीश्याममैतोमैंने कुनउरअन्तरआवै४४
यथा ॥ जेहिमिलतनततेहिनिसाझहीतेरटलावततोहि
तोहि । अधरातउठत करिहायहायपर्यंकपरतपुनिमोहि
मोहि ॥ कबकोढिंगठाढ़ेहहाखातयहखिन्नगातगतिजो
हिजोहि । जियकेवलंतूयहलालहालदिनरैनिबिसासि
निकोहिकोहि ४५ ॥ इतिश्रीदासकृतेछन्दोर्णवेमात्राके
मुक्तछन्दवर्णनन्नामषष्ठस्तरंगः६॥
.::-
छन्दोवपिङ्गल।
अथजातिछन्दवर्णनं ।। दोहा ॥ प्रस्तारनिकीरीतिसो करिक
छुभिन्न विभाग । जांतिछन्दवर्णनकियों बहुविधिपिंगल
नाग १॥ दोहाप्रकरण ।। तेरहग्यारहतेरहे.ग्यारहदोहाचा
र । दोहाउलटेसोरठा विदितसकलसंसार. २ ॥ दोदर ।।
मनबालकसमझाइये तुम्हेंबिनयरघुनाथ।नतळंबोलाये
कौनके आवैचन्दोहाथ:३॥ दोहादोष | प्रथमतीसरेचर
णमें जगनजोहियेजास । सोदोहाचण्डालिनी बोलैवि
विधविनासु ॥ वारहलघुबाईसलघु बत्तिसलघुलेमा
नि । चारिबरणदोहाकही बाकीलघुलौंजानिः ४ ॥ सोर
डा ॥ सोवनदीजैधाई भीजेनेकुविभावरी ॥ अबैंगहो
जनिपाइ सोरठानिहमेखलो ५ ॥ अथदोद्दी ॥ दोहांकेते
रहनिमें है?कलांबढ़ाई । कीजैदोहीदोहरा एकोएकघ
टाइ । जनिबांहगहोहोजानती लालतिहारीरीति । हो
निर्मोहीनित्तके करोदोहीदिनकीप्रीतिः६ ॥ दोहा ।। जा
तनकनकतस्योना लगतचौहरोलाल । मुकतमालहियते
हरो दोहरोबेदाभालं ७॥ उल्लालाः ॥ करिविषमदलनिप
न्द्रहकलासमपायनितेरहरहै। तुकराखिअट्ठाइसकल
निपरउल्लालापिंगलकहे ८ ॥ यथा ॥ कहिकाव्यकहा.
बितरुचिरमतिमतिसुकहाबिनहींविरतिः। कहविरतिउ
लालगोपालकेचरणनिहोइजुप्रीतिप्रतिः ॥ चुरियाला ॥
दोहातल के अन्त में औरपंचकलवन्दनिहारिये। नागरा
जपिंगलकचरित्रालासोछन्दबिचारिये १० मप्रिय
मिलनअमीगुनोबलिबिसुसमुझिनतोहिनहोरति । झट
किझटकिकरलाडिलीचुरियालाखनकीकतफोरति ११॥
सुवाछन्द ॥ पहिलेहिबारहकलकरुबहुरेहुँसत्त । इहि
छन्दोवपिङ्गल।
विधिछन्दध्रुवारचुंबनइसमत्त १२ ॥ यथा ॥ ध्रुवहिलां
डिजोअध्रुवसेवनजाइ । अध्रुवतासुनशैहैध्रुवहुनशाइ
१३॥ धत्ताच्छन्दः ।। बोहा । दशवसुतेरहअई में समुझिय
घेत्ताछन्दै । ग्यारहमुनितेरहबिरति जानोघत्तानन्द १४
यथा ॥ मोहनमुखागेअतिअनुरागेमैंजुरहीशशिछबि
निदरि । दुखदेतसुआलीबिनुवनमालीपत्तालहिचकत
नअरि ॥ पत्तासखिसोबतमोहिंजानिकछरिसमानिया
इगयोगतिचोरकी । सोयोंदिगहिचुप्राइकहिनहिंजाइ
घत्तानन्दकिशोरकी १५ ॥ दोहा. ॥ हरिपददौवेचौबो
लो ढेहीद्वैतुकजानि ॥ दोहाप्रकरणरीतिमें लिख्यौदा
सउनमानि १६॥ अंथ चौपैयाप्रकरण ॥ दोहा । चारिचरण में
जतिजमक तुकवरणनिकरिनेम ।। जातिछन्दबरण्योश्र
हिप सोऊसुनीसप्रेम १७ ॥ चौपैयाछन्द । दोहों ।। दशवसु
बारहचिरतिते चौपैयापहिचानि । चारिचरण चौगुन
किये होतनिपटसुखदानि १८ ॥ चौपैयायथा ॥ तलबित
लरसातलगगनभुवनतलसृष्टिजितीजगमाहीं॥पुरराम
सुथल में काननजलमेंवाहिरहितकछुनाहीं ॥ पियमिलहि
नरामहिंतजिसियंत्रामहिनहिंबचाउक भागे । सुरप
तिसुतकांचोसबजगनाचोबांचोपैथलागे १६ ॥ क्षण
प्रतितुक: ।। दशंबसुदशचारैबिरतिबिचारैपद्मावतितलगु
रुंदोई । याहीविधिठानोदुर्मिलज़ानोअन्तसगनकरनों
होई ॥ दशवसुकरियोहीचौदहत्योंहीअन्तसंग्रनहैदण्ड
कलो । देशवसुवसुसंगीपुनिरसरंगीहोतत्रिभंगीछन्द
भलो २० ॥दोहा॥ आठआठचौकलपरैः चारैरूपनि
शंक ॥ भूलेहुजगननदीजिये होतछन्दसकलंक २१ ॥
४२
छन्दोर्णवपिङ्गलः।
पन्नाधती ॥ व्यालिनिसीबेनीलखिछबिसेनीतजतन आशा
मोरेंजः । शशिसोमुखशोभितलखिह्योलोभितलावत
टकी चकोरेंज। निकसतमुखश्वासैंपाइसुवासैंसंगनछो
इतभोरेज बाहिरआवंतिजबपद्मावतितबभीरजुरति
चहुँओर २२ । धुर्मिकछुन्छ ॥ इकत्रियव्रतधारीपरउप
कारीनितगुरुआज्ञाअनुसारीः निरसंचयदातासबर
सज्ञातासदासाधुसंगतिप्यारी ।। संगरमेशरोसबगुन
रोसरलसुभावंसत्तिक । निरदभभगतिवरविद्यनिआग
रचौदहनरजगदुर्मिलहै. २३ ॥ दण्डकलाछन्द ।। फलफूल
निल्यावहरिहिसुनावैयहहैलायकभोगनकी । अरुसब
गुनपूरीस्वादनिरूरीहरनिअनेकनिरोगनकी । हँसिले
हिपानिधिलखियोगीबिधिनिन्दहिअपनेयोगनकी ।
नभतेसुरचाहभागुसरा,फिरिफिरिदण्डकलोगनकी २४
॥ त्रिभंगीछन्दः । समझियजगमकोफलमनमें हरिसुमिरन ।
मेदिनभरिये झिगबहुतेरोघेरुघनेरोमेरोतेरोपरि
हरिये। मोहनबनवारीगिरिवरधारीकुंजबिहारीपगुपरि
ये। गोपिनकोसंगीप्रभुबहुरंगीलालत्रिभंगीउरधरिये
२५ ॥ जलहरनछन्द ।। दोहा । लघुकरिदीन्हेंबत्तिसो जलहर
नापहिचानि ॥तिरभंगीपरआठपनि मदनहराउरानि
२६॥ यथाजलहरनछन्द ।। सुदिलयउमिथुनरबिउमडिघुमड़ि
फैबिगगनसघनघतझपकिझपकि । करिचलतिनिक
टतनक्षनरुचिक्षन:-क्षनखगंप्रझरसमल पकिलप
कि । कछुकहिनसकततियबिरहअनलंहियउठतक्ष
पाहिंक्षणतपकितपकि अतिसकचतिसखियनेअधक
रिखियनलगियजलहरनटषकिटपकि २७ ॥ मदमहास
छन्दोर्णवपिङ्गल। ४३
छन्द ॥ सखिलखियदुराईछविअधिकाईभागभलाईजा
निपरैफलसुकृतफरै। अतिकान्तिसदनमुखहोतहिस
म्मुखदासहियेसुखभूरिभरैदुखदूरिकरै ।। छविमोरपख
नकीपीतवसनकीचारुभुजनकीचित्तअरसुधिबुधिविसरै।
नवनीलकलेवरसजलभुवनधरवरइन्दीवरछबिनिदरै म
दमदनहरै २८ ॥ लक्षण | दोहा ॥ एकैतुकसोरहकलनि
पायकुलकगुरु अन्त ॥ चहुँतुकभागनयमकसो अलि
लाछन्दकहन्त २६ ॥ पार्यकुलफ ॥ हंगआगेसोवतहुनिहा
रौ। हियतेक्योहरिरूपनिकारों ॥ होनिजतनसमरतन
विचारों । केहिउपायकुलकानिसँभारों ३० ॥ अलिला
छन्द ॥ भुवमटकावतिनयननचावति । सिंजितसिसकिन
शोरमचावति ॥ सुरतसमयबहुरंगरचावति । अलि
लालनहितमोदसचावति ३१ ॥ सिंहविलोकित छन्द ।।
बोहा ॥ चारिसगनकैहिजचरण सिंहविलोकितयेहुः ।।
चरणअन्तअरु आदिके मुक्तपदग्रसदेहु ३२॥ यथा ।।
मुनिआश्रमशोभधयोतियहीं । अहिकचसँगबेसरिमों
रजहीं । जहँदासअहितमतिसंकलकटी। करसिंहलिलो
किंतगतिकरटी ३३ ॥ लक्षण ॥ दोहा ॥ रोलामेलघुरुद्रपर
काव्यकहावैछन्द ।। ताआगेउल्लालदै जानछप्पैवन्द
३४ ॥ काव्यछन्द । जन्मकहाबिनयुवत्तियुवतिसुकहावि
नयौवन । कयौबनबिनधनस्किहाधनबिनअरोगतन।
तनसुकहाबिनगुणहिकहागुणज्ञानहीनक्षनः ॥ ज्ञानकि
विद्याहीनकहाविद्यासुकाव्यविन ३५ ॥ छपिचन्द ।। भा
लनयनमुखअधरचिबुकतियतुवबिलोकिअति । निर्म
लचपलप्रसन्नरत्तशुभत्तिथकीमति ।। उपमाकहशशि
छन्दोर्णवपिङ्गल।
खञ्जकञ्जबिंधियंगुलाबबर । खण्डथानथितिप्रातपक्व
प्रफुलितसुशोभधर ॥ शारदकिशोरशुभगन्धमदुनव
लदासंक्तिनचितः । जुकलंकरहितयुगसरलहितडा
रगहतषटपदसहित ३६ ॥ लक्षण ॥ सिंहबिलोकनीति
देदोहापररोलाहि ॥ कुण्डलियाउडतवरणतजतिअम
तधुनिचाहिः ३७ ॥ कुण्डलियाछन्ः ॥ साईसबसंसारको
सन्ततफिरतअसंग । कामजारिकीन्होभसममृगनैनी
अद्वैग ॥ मृगनेनीअगदासआसनमृगछाला + सुनि
येदीनदयालगलेनरशिरकीमाला ॥ सुनियेदीनदयालक
रोअजगुतसबठाई । कर्णगहेकुण्डलियविदितमयहर
गगोसाई ३८ ॥ अमृतध्वनिकुन्द ।। धुनिधुनिशिरखलत्रिय
गिरहिसुनतंरामधनुशब्दा लग्गियशरझरिगमनमहिय
थाभाद्रपदअब्द॥ अब्दनिनदकरिक्रुद्धकुटिलअरियुक्ति
मरतलरि । मण्डपरतगिरिरुण्डलड़तफिरिखनपकरि
करिऋक्षप्रबलभटउद्धतमरकटमर्दततिहिध्वनि । निर्त्त
तसुरमुनिमित्रकहतजयकृतिअमृतध्वनि ३६ ॥ दोहा ।।
पायाकुलकत्रिभंगियों होतमुक्तपदग्रस्त । छंदकहत
ल्लासहकरितुकआठसमस्त४०॥ हुल्लासच्छंद ॥ कान्हजन्म
दिनसुरनरफूले। नभधरनिशिवासरसमतले ॥ महितेम
हरिजवीरउड़ाय। दिवितेदेविसुमनबरषावै॥सुमननबर
पावहर्षबढ़ातजितजिआवेयाननको। सजितियनरमेष
निसहितअलेषनिकरहिंअशेषनिगाननको ॥ तिनलोग
निकीगतिदाननकीअतिनिरखिशचीपतिभलिरहै ।ब्रज
शोभप्रकासहिनंदविलासहिदासहुलासहिकौनकहै ४१॥
इतिश्रीमात्राजातिछन्दवर्णननामसप्तमस्तरंगः ७॥
..
छन्दोणवपिङ्गल।
४५
दोहा ॥ जातिछन्दप्राकृतनिके निपटअटपटेढंग ।
दोसकहेगाथादिदै तिनकीभिन्नतरंग ॥ विषमनिबारह
कलशमनि पन्द्रहठारहवीश ॥ समपदतीजोगनयगन
गाथाप्रकरणईशः १ ॥ लक्षण ॥ समपदगाहूपन्द्रहपन्द्र
हअठारहठारहरगाहा । अट्ठारहपन्द्रहगाहाकहिपन्द्र
हअट्ठारहबिग्गाहा ॥ बीसैबीसखन्धकलबीसैअट्ठारह
समपदसिंहिनी । सबकेरबिकलविषमदलनिसमअहा
रहबीसैगाहिनी २ ॥ गाह्वछन्दः ॥ शिवसुरमुनिचतुरानन
जाकोलहनहींथाए । पारवारकोउजाननहरिनामसमुद्र
अवगाहू ३.॥ उरगाहर ॥ शिवमुनिसुरचतुराननजाकोकबहूँ
नहींलहैथाहा । पारवारकोउजाननिहरिनामसमुद्र अव
गाहा ४ ॥ गाहा थिगाहा अर्थ में जाति ॥ बारहलहुआवित्री
वाईसाक्षत्रिनीमाहो । बत्तीसासोबैसीबाकीलहुहैशुद्रि
नीबिगाहो ५॥ सन्धाछन्द : ॥ जगनफल ।। एकज़गनकुल
वन्तीदोइजगन्नगिहिनीसुहैसुनिबन्धो । जगनविहीनीर
एडावेश्यागावोबहुजगन्नकोखन्धो ६॥ गाहिनी तथा सिहिनी ।।
सुनिसुन्दरिमृगनैनीतूप्रभासमुद्रअवगाहिनीराजे । हं
सगमनिपिकबैनीतोलंकबिलोकिसिंहिनीलाजै ७ ॥
इसटिपढ़ेगाहिनी ॥ चपलागाथा ॥ चपलागाथाजानोयहदोइज़
गन्नुहैसमेपाया । पिङ्गलनागवखानोगुरुदोइतुकंतमेठा
पा ८ ॥ दोहा । ताहिजघनचपलाक दलदूसरेजदोइ ।
प्रथमदलहिमेंजगनुदै मुखचपलाहैसोइ ६ ॥ बिपलगाथा ॥
प्रथमपायकलतेरहसत्रहमत्तहेबियनाथा ॥ तिसरेपय
यारहैचौथेसोरहैबिपुलामाथा१०॥रसिकछन्द।। दोहाः॥ ग्या
हिग्यारहकलनिको षटपदरसिकबखानि । सबलघुपहि
.
..
।
४६ छन्दोणवपिङ्गल
लेभेद गरुदेवहुविधिठानि ११॥ यथा ॥ हँसतंचखत
दुधिमुदित। झुकतमजतमुखरुदित ॥ त्रसिततियनिमि
लिरहत । रिसयुतविरतिहिगहत। अगणितछविमुखस
सिक। शशुतबनवरसरसिक १२॥ संजाछन्दः ।।दोहा । सात
पंचलघुजगनगोमत्तायकतालीश। योहींकरिदलदूसरो
खंजारच्योफणीश १३ ।। बया ॥ सुमुखितअनैनलखिद
हगह्योझखनिझख गरलमिसिभवरनिशिगिलतनित
हिकजहै। निशिनिमित्तज्योंसुरतियनिमगफिरतबनहिं
बनहुअहरुअमदनसरथिरनरहतखंज १४॥दोहा ॥
खजाकेदलअईपर गुरुदेसुखकन्द ॥ आगेगाहा
ईकरिजानहिमालाछन्द १५ ॥ मालाचन्द ।। लगतनिरख
तललितसकलतनश्रमकलितनज अधिपअंगवलित
सुरतिशयसोहतीवाला । मरकततरुजनुलबढ़ीफलि
कनकलतामुकुटमाला १६ ॥ शिष्याछन्द ॥ दोहा । पहिले
दलमेंचौबिसे लघुपरजगनहिंदेहु ॥ पुनिवत्तिसपरजग
नुदैशिष्यागतिसिखिलेहु १७ ॥ यथा ॥ शुभरदनिविध
बदनिगुणसदनिजगहदनिनहितोहिंसरिष्य । कुरिस
मविनयश्रवणसुनिसमझिपुनि मनहिंगुनिनप्रियप्रतिरि
सकुमतिशिष्यु १८ ॥ चूड़ामणिछन्दों, दोहा ।।दोहागाहाकोंकरो
मुक्तापदग्रसंबन्द ॥ नागराजपिंगलकह्यों सोचूड़ामणि
छन्द १६ ॥ यथा ॥ दिनहीं दिनकरदिपं निशिहीमेश
शिज्योति । जगदम्बाद्युतिदिवसनिशि जगमगजगम
गहोति ॥ जगमगजगमगहोतीहोरीज्योंगोरीचिनगारे।
चक्रवत्तिचूड़ामाणिजाकेपगभूतलहाजारै २० ॥ अथरता
छन्द ॥ दोहा ॥ प्रथमतीयपञ्चमचरणः पहिले जानिअखे
.
.
छन्दोर्णवापिङ्गलः।
४७
द॥ दूंजोचौथे फेरिगुनि जानहिरण्डाभेदः २.१ ॥ यथाः।।
तेरहग्यारहंकरभीबरनि । नन्दभुवनहरढरनिवोनईसरु
द्रनोहनीअरनि । चारुसेनतिथिहरनितिथिरबिमत्ताने
द्राबरनि २२॥दोहा॥ तिथिरबितिथिहरतिथि पयनि राज
सेनिड्डाहि ॥ तालकिनितिथिकलअधिक दोहांसबतल
चाहिः ।। ताकिनिराखथा ।। बालापनबीत्योबहुखेलनि । युवा
गईतियकेलनि । रह्योभलिपुनिसतबितरेलनि । जियग
लडारीते रेजेलनि। अजहुँसमुझितजिमरुखपेलनि ।
कालपहूँच्योशीशपरनाहिनकोऊअङ्क । तजिसवमाया
मोहमंदरामचरणभजुरड्डः . २३: पांचचरणरचनाउपर
दीजैदोहाअन्त । सातभेदअहिपतिकह्यो नवपदरड़ा
तन्त २४ ॥ इतिश्रीदासकृतेछन्दोवेमात्राकेजांतिक
न्दवर्णनन्नाम अष्टमस्तरंगः ।
--
अथमात्रादण्डकवर्णन ॥ दोहा | छब्बिससाबंदिवर्णजो दंडक
वर्णविशेखि॥बत्तिसतेबढ़िमत्तजो मत्तादण्डकलेखि भी
भूलनाछद । दोहा । दशदशदशमुनिजतिचरण छन्दमूल
नातत्त॥ दुकवलिरहुस्वोसैतिसो बन्तालीसौमत्त २॥
यथा ॥ पानिपीचनहींपानछीवनहींबामअरुबसनराखैन
नेरो । प्रानकेऐनमेनेननेवैरह्योरूपगणनामतेरो ॥विर
हबशऐसेहीहैवैहीकेमहीराखिहकैनहीं प्राणमेरो । तोहिं
तकियाहिसंदेहकेमलनाझुलतोचित्तगोपाल केरो३।
वीपमाला ।।दोहा।। दीपकको चौगुनकियें दीपमालसुख़दा
नि॥चालिसकलंशिरढघटें अन्तबढ़ेबिजेयानिष्ठादीपमाला
• यथा ॥ लहिकै कुहुयामिनीमत्तगजगामिनीचलीबतमिल
.
छन्दोणवपिङ्गल
नकोनन्दलालाहि । कैसुघरमन्मत्थरचिस्व कीबेलिले
चल्योगहिसहितशृंगारथालाहि ॥ संगसख़ीपरवीना
तिप्रेमसोलीनमनिआभरणज्योति छबिहोतिबालाहि
कैदासकेईशढिगजातिलीन्हे चलीभामिनीभाग्यसोंदी
पमालाहि ५ ॥ विजया || सितकमलवंशसीशीतकर
शसीविमलविधिहंसमीहीरवरहारसी । सत्यगुणसला
लीसंतरसवंशसीज्ञानगौरवसीसिद्धिविस्तारसी । कु
न्सीकाससीभारतीवाससी सुरतरुनिहारसीसुधारस
सारसी । गंगजलधारसीरजतकेतारसीकीर्तितंबविजय
कीशम्भुआगारसी ६ ॥ दोहा । तीनितीनिबारहबिरति
दशजतिदैतु कठानि । छन्दछियालिसमत्तको चञ्चरी
कपहिचाति ७ ॥ चंचरीकछन्द ।। जाकोनहिंआदिअंतज
ननिजनकदेवकंतरूपरंगरेखरहिव्यापकजगजोई । म
च्छकच्छकोलरूप बामननरहरिअनूप परशुरामराम
कृष्णबुद्धिकूकिसोई ॥ मधुरिपुमाधचमुरारिकरुणामय
कैटभारिरामादिकनामजासुजाहिरबहुतेरो । कोमलंशु
भवासमंजुसुखमासुखशीलगंज ताकोपदकंजचित्तचंच
रकमेरो ॥ इतिश्रीदासकृनेछन्दोर्णवेमात्राछन्दकेद
त्तिजातिमुक्तकदण्डकवर्णननामनवमस्तरंगः ॥
अंधवर्णवृत्तिवर्णप्रस्तारमे ।। एकवर्णकोउक्ताप्रकरणतास
भेदद्वैकीजैपाठ । बैअत्युक्ताभेदचारि हैमध्यातीनभेदहे
आठ ॥ चारिप्रतिष्ठासोरहविधिपांचैसुन्नतिष्ठाभेदच
सः । षट्गायत्रीचौंसठिसातैउष्णिकसोपरअहाईस
आठवर्णअनुष्टुपद्वैसेंछप्पनभेदकहतफणिराऊ । गर्ने
छन्दोणवपिङ्गल।
४४
अक्षरकोरहतीप्रकरणभेदपांचसौबारहठाउ ॥ दशैवर्ण
कोपंगतिप्रकरणभेदसहसऊपरचौबीस । ग्यारहकोत्रि
टुपप्रकरणगनिद्वैहज़ार रुपड़तालीस ॥ बारहकीज
गतीप्रकरणनेहिभेदहजारचारिछानबे । तेरह अक्षरको
प्रतिजगतीइक्यासीसत्तरपरबानचे ॥ चौदहकोसर्करी
सोरहैसहसतीनिचौरासीय । पन्द्रहअतिसकरीसहस
बत्तीससुसातसै अरसाठकीय : सोरहअष्टिसहसपैसठि
शतपांचछत्तीसअधिकलैधरी सत्रहकोअत्यष्टिलाख
प्रश्यकतिसतहमबहत्तरिकरीः ॥ महारहधुतिछब्बिस
ऐतुइकोससैऊपरचावालीसे । बावनऐतुबयालिससैशा
हासीनिधि अतिधतिवनईल ॥ बीसबरणकोकृतिप्रकर
हैनासुभेदगनिलेदशलाखु । अड़तालीससहस्रपांच
सेऔरछिहत्तरिऊपरराखुमा यकइसवरणप्रकृतिप्रकर
पाहैबीसलाखपहिलेसुनिमित्त । सत्तानवेसहस्त्रएकसेवा
वनऊपरदीजैचित्तः॥ बन्दहोंयबाई.सवर्णकोप्रतिकृति
प्रकरणजानिअखेद । यकतालीसलाखचौरानबेसहस
तीनिसैचारभेद । छन्दकहावैविकृतिप्रकरणतेइसवर्ण
होहिंजेहिमाह । लाखतिरासीसहसंमठासीछासाठग
नैअहिनाह । संस्कृतनामबरण चौविसकोतासुभेदहैएक
करोरि। सतसठिलाखहजारसतहत्तरिदुइसैऊपरसोरह
जोरि॥ श्रतिकृतप्रकरणवरणापचीसैतीनि करोरिलाख
पैंतीस । चौवनसहसाचारिसबत्तिसभेदविचारिकहत
फणिईस ॥ उत्कृतिहोतबरणछब्बिसकोभेदछकोटियकह
त्तरिलक्ष । आठहजार आठसैचौसठिक्रमतेदुगुणबढ़े
परितक्ष ॥ तेरहकोरिबयालिसलक्षोसत्रहसहससात
।
छन्दोणवपिङ्गला
सैहोय । छब्बिसअधिकजोरिसबभेदनठीकदियोचाहैजो
कोय १॥ दोहा ॥ सबकेकहतउदाहरण बाढ़ेग्रंथ
पार ।। कहूँकहूँतातेकहत बरणछन्दविस्तार २॥ लभदी ।।
चोहा ॥ एकगुरुश्रीछंदहै काभाद्वैगुरुवन्दुः । ध्वजाएक
महिनंदयक सारसपियंमधुछन्द ॥तीनिबरणप्रस्तारंजो
म यरि सात जमा न पाठ आठौगातेदासभनि
छन्दहोत आठ ३ तालीससीप्रियारमनि अरुपचोल
नरिन्दः। पाठसहितमंदरकमलम य र स त ज भ न
छन्दः। चारिपरणकेछंच ॥ सोरंठा । ति क्रीड़ानंद रा
माधरानगन्निका.॥ कलातरणिजाछंद गनिगोपालमुद्रा
हिपनि । धारीबीरोकृष्ण बुद्धीनिशिहरिसोरहो ॥ भेद
कहतकत्रिजिष्ण चारिबरणप्रस्तारके ६ ॥ दोहा ॥ मत्त
पथारहुमेंपर उदाहरणयेआइ ॥ ति क्रीडानन्दअरु
धरांगोपालसेवाइ ७॥ तिर्नाछन्द । धर्मज्ञाता । निर्भय
दाता। तृष्णाहिन्नौ । जीवैतिनो ॥ क्रीड़ाचन्द् ॥ हमारी
सोहरैपीड़ा कलिन्दीजोकरैक्रीड़ा ह ॥ नन्दछन्द । योन
कीजै।जानदीजै ॥ होकन्हाई ।नन्दआई:१०॥ धराछन् ।
सोधन्य है। औगन्यहै। सीतावरें। जोहीधरै ११॥दोहा ।।
यकइसगणबाहुल्यते छन्दहोतबहुभांति ॥ दासदेखावै
भिन्न करि तेहितरंगकीप्रांति:१२॥ लक्षण ।। यारसंतजभ
गननिदुनोभरु । होछन्दकेनामसमुझिधरु शंखना
रिजोहातिलकाकरि। मंधानोमालतीदुमन्दरि १३ ॥
शंखनारीचाच ॥ लखेशुभ्रग्रीवां । महाशोभसीवां ॥ परेवा
कहारीकहाशंखनारी १४ मा जाहाछन्द ।। रूपकोगर्वछ।
भलतीपत्रवैः। सुख्यानौसाथ में। लालजोहाथ में १५॥
छन्दोर्णवपिङ्गर
तितकाछन्द ।। अधिकोमुखहो। कियवाशशखोयाजि
कैसखियों। तिलकाजरसों १६॥ मथानछन्द ॥ गोबिन्दको
ध्यानु । सारंसतूजानु ॥ विद्यामहीमानुः ।। हैज्ञानमंथानु
१७॥ मालतीचन्दः ॥ लखोबलिबाल महाविजाला
लसैउरलाल । सुमालतिमाल १८ ॥ दुमन्दरच्छन्द ।। बाल
प्रयोधरा मोहियसोहर ।। मानुसुअन्दरः ।। मानदुमन्दर
१६ ॥ लक्षणः ॥ दोहा ॥ तीनिनन्दगसमानिका चामरसात
अनूप ॥ पांचनन्दगोसैनिका धुजलसेनिकारूप २० ॥
समालकाछन् ॥ देविहारजाहितू। बोलिपाहिपाहित॥ राखि
हैकृपानिकै। खासदासमानिकै २१॥ चामरछन्दः॥ बाल
केसुदेशकेशकालिदीप्रभादली । पन्नगीकुमारकीसेवार
कीकहांचली॥ याव्यथाफिरैनिकुंजकुंजपुन भामरो का
मधेनुपायरोरहैअतेय चामरो २२ ॥ सैनिकाच ॥ चली
प्रसूनलेनद्वन्दवाल। सुमंजुगीतगावतीरसाल ॥ बिलो
कियेप्रभाअनुपलाल बनीस्वरूपसेनिकाबिशाल २३॥
लक्षण । दोहा । चारिमल्लिकांचंचला आठगन्ददशनन्द ।।
प्रमाणिकाधुजचारिको । आठनराचसुछन्दं२४॥ मक्षिका
छन्दः ॥ चित्तचोरिलेतपौन । मन्दमन्दठानिगौन ॥ मोह
नीबिचित्रपास। मल्लिकाप्रसनवास २५॥ चंचलाछन्दः ।।
श्यामश्याममेघमोघव्योममेअलीलसैन । ल्याइयो
प्रसूनबाणकालकीअपारसैन । होतिओजुकाल्हिमें बि
योगिनीनप्राणहानि। चञ्चलानचैनमीचुनाचतीचहूँदि
शानि २६ ॥ गंडतथा विवछन्द नगा रामरोषजानिहारलोभ
मानिशम्भुजोन.उताल। पाइकैमृदंगशोरावईक
मारकोमयरहाल । होइतोकुतहलेबिलोकिशुडकोचल
.
५२.
छन्दोर्णवपिङल।
डेराइव्याल । चौंकिचिरघरैगणेशगुंज़िगण्डतेउमलि
न्दजाल २७ ॥ प्रमाणिकायथा ॥ नहैसमयघटानिकी । से
लाहमानठानिकी ॥ जताइजाइदामिनी । सुक्षिप्रमानि..
कामिनी.. २८॥ नराचन्द । मंगाक्षिएकहारतेसुभावही
चितेगई । कह्योनजाइमोहियेअघाइघाइकैगई ॥ प
खोप्रतीतिआजुमोहिंदासनलांचहै । खरोनराचतेति
याकटाक्षफोनराचुहै २६ ॥ लक्षण ॥ भुजंगप्रयाललक्ष्मी
धरनाम । सतोटकसारँगमोतियदाम ॥ समोदकदास
छभेदविचारि । परोसंतजोमनचौगुणाधारि:३० ॥ भुज
गाण्यात || छुटेबारदेखेधरेमोरपाखे बिनाडीठिकीगई
वृन्दआखे । जितेसर्वश्गारवेणीप्रभासों । भुजगोन
यातोत्रपापाइजासों. ३१ । लक्ष्मीधरयथा ॥ शंखचक्रोग
सापद्मज़ाहाथमें । पक्षिराजाचढ़योवैष्णोसाथमें:॥ दास
सोदेवध्यावैसदाजीयमें।जोरहै चारुलक्ष्मीधरेहायमें३२
तोटकछन्द ॥ घरहाइनघैरवगारेनुदे । हरिरूपसुधाउरधार
नदे । तलफैखियानकिटारनदेः । अवतोटकलाइनि
हारनदे: ३३ ॥ सारंगछन्द ॥ कीजैकुहूजानियोंशशिको
भंग वगैचलोश्यामपैसाज़ियाग । कस्तूरिहीलेपकै
लेहिसर्वंगः । प्यारीस आजुसारीनिसारंग ३४ मोती
दामझन्छ । तमाल केऊपरहेंबकपीति । किनीलशिलापर
संतजमातिः। नक्षत्रनिअंकलियेघनश्याम । किश्याम
हियेपरमोतियदाम ३५ ॥ मोदकच्छन्दः ॥ नारिउरोजवती
निकुरोजनि। कान्हउचाटभरेजिउरोजनि॥ लीबेहेकवरी
कोचरणोदक । कूवरजासुवशीकरमोदक ३६ ॥ उदाय ॥
दोहा ।। अंतभुजंगप्रयातक लघुइकदीन्हेकंद । तीनिभ
।
छन्दोर्णवपिङ्गल।
५.३:
गनहेगुरुदिये बंधुदोधकोछंद ३७ मोदकशिरकैबंधुशि
र द्वौलघुतारकबंद। पंचसगनभ्रमरावली छयगणक्रीड़ा
चंद ३८ पंचभगनगरुएकको छन्दकहावैनील । तीनि
सगनशिरकरणदै हैमोटनकसुशील ३६ ॥ कन्दछन्दः ।।
चहूँओरफैलाइहैचन्द्रिकाचंद । खुलैगीसुगंधैफुलैगील
ताछंद ॥ जगत्प्राणत्योंडोलिहें मन्दहीमंद । कबैचेतुऐ
हैचिदानन्दकोकंद ४० ॥ बंधुचंद ॥ आरततेअतिआर
तहै । आरतवंतपुकारत है. ॥ दास हूकोदुखदूरि
बहायों। तोप्रभुआरतबंधकहायो ४१ ॥ तारकचन्द ।।
यैकमयंकमुखीचलिऐहै। सविलासबिलोकिहियेलगि
जैहै। बिरहागिभरोहियरोसियरहै। करतारकरवहवास
रऐहै ४२ तजिकदुखगंजहजारकजीरकः । तसोवतभ
मिभटारकटारकाभजिलेप्रहलादउबारकबारक। जराको
निस्तारकतारकतारक ४३॥ भ्रमंराधलीछन् । चलिबीस
निस्वेउहिआजहिल्यावतहीं । तुम्हरेहियकीसबंतांपबु
झावतहौं । इनकीरचकोरनदूरिकरोवनते भ्रमराव
लिवेगिबिडारहुकुञ्जनते ४४ ॥ क्रीवाछन्द ॥ दुहुँओरबै
ठीसभाशुभ्रंसोहेसुमानोकिनारा । रहीदूरिलोफेलिहै
चांदनीचारुज्योंगंगधारा सजेचनरीनीलनचंतिचं
द्राननीबारदारा। करैचंद्रक्रीड़ामनोसंगलैशर्बरीसर्चता
रा ४५ ॥ नीलछेदः ॥ मोहनाननकीमुसुकानिअनूपसु,
धा। होतबिलोकिहजारमनोभवरूपमुधा ॥ पीतपराप
रदासन्योछावरिबीजुबटा। नीलकलेवरऊपरकोटिक
नीलघटा ४६ ॥ मोटनकछन्द । मोहैमनुबेणुबीइअली।
मसैंउरअन्तरभांतिमली। कीजैकिनब्योतअगोटनको ।
-
५४
छन्दोर्णवपिङ्गल।
हैचोरयहीमनमोटनको ४७ ॥ दोहा ॥ भुजंगप्रयातहि
आदिदै संबचौगनोबनाउ । होतपरमसुखदानिहै भाषो
भोगीराउ ४८॥ इतिश्रीदासकृतेछन्दोणवेबेगनबाहुल्य
केछन्दवर्णननामदशमस्तरंगः:१०॥
अथवर्णसवैयाप्रकरणं ॥ दोहा ॥ यकइसतेछब्बीसलगि वर
पसवैयासाजु ॥ इकइकगणबाहुल्यकरि बरण्योपन्नग
राजु १॥ लक्षण ॥ सातभहैमदिरागुरुअन्तहुदैलघऔ
रचकोरकहाँगुनिः। ताहगुरूकरिमत्तमयंदलहूमदिराशि
रमानिनियेसुनि ॥ आठकरोयभुजंगरलक्षियसोदुमिला.
तहिआभारहेपुनि । जाहिसुमोतियदामबनावहुमागन
पाठकिरीटरचोचुनि। २ ॥: मंदिरांछन्द ॥ दीनअधीनकै
पायपरीहोभरीउपकारकोधावहित । मेरीदयालखिहो
हिप्रसन्नदयाउरअन्तरल्यावहित ॥ नैननकेहियकीविर
हागिनिएकहिबारवुझावहितू । श्रीमनमोहनरूपसुधी
मदिरामदमोहिंछकावहित ३॥ युक्लदूसरोमंदियः । चकोरहंद ।।
सोहत तुलसीवनमेंसमिरासमनोहरनन्दकिशोर । चा
रिहपासहगोपबधमणिदासहियेमेंहलासनथोर ॥ कंब
लउरोजवतीनको आननमोहननैनभ्रमैजिमिभार । मो
हनाननचन्दलखेबनितानकेंलोचनचारुचकोरे ४॥
मत्तगयंपच सुन्दरिशभ्रसूबेषसुकेशसुश्रोणसुठीनिसु
दन्तसुसैनी । तुगतनामदुअङ्गकृशोदरीचन्द्रमुखीम्डंग
शावकनैनी ॥ सोनेकोवासरुदासंमिलेगुनगौरिप्रियान
बलासुखदैनी । पीननितम्बवतीकरभोरुहमत्तगयन्द
गतीपिकबैनी ५ ॥ मानिनीयधा । प्रफुल्लितदासबसन्त
--
छन्दोणवपिङ्गल। ५५
किफौजशिलीमखभीरदेखावतिहै। जमोतिप्रभजनकी
गहिपत्रनिमानबिभंजनिधावनिहै ॥ नयेदलदेखिहथ्या
रनडारिभटेतियसंगतिभावतिहै। चढाइकैौहकमान
निमानिनिकाहेतूबैरबढ़ावतिहै ६ ॥ भुजंगछन्च ॥ तुम्हेंदे
खिबेकीमहाचाहबाढीमिलापैबिचारैसराहेस्मरेज । रहै
बैठिन्यारोघटादेखिकारीबिहारीबिहारीबिहारीररैजू॥भ
ईकालबौरीसीदोरीफिरैआजुबैठीदशाईशकाधौंकरैजः ।
बिथामेंगसीसीभुजंगैडसीसीछरीसीभरीसीघरीसीभरैजू
७.॥ लक्षीछन्द्र ॥ बादिहीआइकबीरमोऐनमैं बैनकेघाव
कौवोकरैथावरी । आपनीतत्वहीएकहीवाकयोकौनकी
वोकरैबातफैलावरी|दासहोकान्हदासीबिनामोलकीछां
डिदीन्ह्याँसबैशबंशावरी ज्ञानशिक्षानितासोजुदीर
क्षियेलक्षियेजाहिप्रत्यक्षहीबावरी ॥ दुमिचाछन्द ।। सखि
तोमहँयाचनआईहीम उपकारकैमोहिंजियावहितः। तो
हिंतातकीसौंनिजभ्रातकीसोयहबातनकाहूजनावहितू॥
तुवचेरीहोहोउँमीदाससदा ठकुरायनमेरीकहावहित के
रिफन्दकळूमोहियारजनीसजनीब्रजचन्दमिलावहित ह.
आभारछन्द येगेहकेलोगधौंकार्तिकीन्हानकोठानिहका
ल्हिएककहींगौन । सम्बादकैबादिहीबावरीहोयकोमा
जुआलीरहौठानेहीमौन ॥ होजानतीहानधौंसीखकौनेद
योनन्दकोलालगोपालधीकौन आभारह्यांद्वारकोता
हिकोसौंपिकमोहिऔतोहिंह्यांराखतेमौन १० ।। मुक्तह
राछन्द ॥ पठाचतधेनुदुहावनमोहिनजाउँतौदेखिकरौतुम
टेहु छुटाइभंज्योबछरायहबैरीमरूकरिहौंगहिल्याई
होंगेहु ॥ गईथकिदौरतदौरतदासखरोटलगेभइबिहल
13
५६ छन्दोवपिङ्गल। देहु । चुरीगईचरिभरीभइधूरिपयोटुटिमुक्तहरायहले हु११॥ किरीटछन्द ॥ पायनापीरियेपावरियाकटिकेशरि यादुपटाछबिछाजित । मुंजमिलेगजमोतियहारमेंरीति सितासितांतिहभाजित ॥ अंगअपारप्रभाअवलोक तहोतहजारमनोभवलाजित ।। बालयशोमतिलालयेई जिनकेशिरमोरकिरीटत्रिशजितः १२ ॥ लक्षण ।। दोहा ।। आठसगनगुरुमाधवी सुपियमालतीचाहिं । सत्यनयों मंजरिकहे सत्यभरोअलसाहि १३॥ माधवयथा ॥ बिन पण्डितनन्थ प्रकाशनहींबिनम्रन्थनपावतखण्डितभाहै। जगचन्द्रबिनानंबिराजतियामिनियामिनिहूविनचन्द्रन माहै ।। सुसमाहिकेदेखतेसाधुताहोतिऔसाधुहीतेशुभ होतिसंभाहै । छबिपावतहमधुमाधवीतेमधुको अतिमा धंवीक्सोप्रभाहै १४ महिमांगुणवंतकीदासबढ़ेवळसै जबरीशिदानजवाहिर । गुणवंतहुतेपुनिदानिहूँकोय शफैलतजातदिगंतकबाहिर । जिमिमालतीसोंअतिने हनिबाहेतेभोर भयोरसिकाईमेंजाहिर । अरुभौरहुको अतिआदरकीन्हेसुदासमेमालतियोभइमाहिर ॥ १५ ॥ मंजरीयथा, ।। बसंतसेआजुबनेब्रजराजसपल्लवलालकरी बरहाथे। सुकुण्डलके मुताबिच,मकरंदकिबुंदनकी बिनाथे । मलिंदबनेकच धंघरवारप्रसनघने पहुँचीनमें गाथे गरेजिमिकिंशुकगुंजकिमालरसालक्रिसंजुलम जिरमाथे १६ ॥ अरसातचन्दः । सातघरीहूँनहींबिल गात लजातौबातगुनेनुसुकातहैं। तेरीसौखातही लोचनरातके, सारसपातहतेसरसातहैं । राधिकामा धोउठेपरमातहैं नयनअघातपेखिप्रभातहैं । ला
मेजतिजोहै २॥ यथा । लक्ष्मीकांपनरईहै । राखतेसों
छन्दोणेवपिङल
५७
गिगरेअंगिरातभातभरेरसमातखरेअरसातहैं १७
इति श्रीदासकृतेछन्दर्णिवसवैयाप्रकरणवर्णननामएका
देशस्तरंग: ११
अथ संस्कृतयोग्य पद्यवर्णनम्
द्रोही कहाँसंस्कृतयोग्यल
खिपद्यरीतिसंचकन्द ॥ गनलक्षणगननाममेंछन्दलक्ष
छन्द मयतीछन्द रिंगनोकर्नोसंगनोगो। जानि
येसोरुकमवतीहो ॥ पायमैनौ अक्षरसोहैं। तीनिऔछी
--
जातभईहै। सोरहीनएकरतीज । लङ्कहीजोरुक्मवती
जू ३ ॥ सालिनीछन्द । कोंकनौरंगिनोरंग्गनोगी। जानी
याकोछन्दहेसालिनीहो ॥ पायेपायेवरणएकादशोहै।
चारसातैबीचबिश्रामसोहै ॥ यथा ॥ बालावेणीमद
भुतैयालिनी है। मांधोनीकेगकीघालिनी है। पीके
जीमेप्रमकीपालिनी है। सौतेकेहीसर्वदाशालिनी ५ ॥
बातोमछिन्द | गोगीको संगनोजगनों । बातोमीयहई
छन्दवनों । सातेचौथेजत्ति चारुजाय । पायवदिश
एकतामें ६क्षा यथाः ।। कैसेयांकोंकहियेनेकनाहींनी
बीबांधीरहतीयाहिमाहीं॥ तातेऐसोबरणबुद्धिमेरी। बा
तोमाहेसजनीलंकतेरी ७॥ इन्द्रबजाउपद्रयजाछन्दः ।। तकार
करनीसगनोयेगन्नों । इन्द्रबजीदशएकबन्नों ।। उपेंद्र
बजाज़गादिसोई । दुहमिलेपैउपजातिहोई ॥
इन्द्रजंना यथा ।। एरीबड़ीजोगिरिकहायो । सौचित्तपी
कोइनसोंगिरायो । सोहैअयानोमृदुजोकहैरी । है
इन्द्रबजामसकानितेरी उपेन्द्रबजाआदिको लघ
5
।
छन्दोर्णवपिङ्गल।
पढ़ेहोतहै १० उपजातिकोईतुंकआदिलघुपढ़ें११॥
उपस्थितच्छन्द ॥ कोंसगनोपियगोपगन्नो । सोपस्थितो
हैदशएकबन्नो ॥ जगन्नुसगनोतकारुकरना । पयस्थित
कहेंमनप्रसन्ना १२॥ यथा ॥ प्यारेप्रतिमानकहा
क मैं । जोआपनापनोईनरोमें ॥ आलीढ़ईबहुते
कियेह । कोपस्थितिहीसुरैरहैनकेहू १३-॥- पयास्थतछन्दः।।
दुखोरुसुखको हैदानिसोई । वहेहरंतदूजोनकोई ॥ नदा
सजीमेंहूजेनिरासी । जोपयस्थितहैवैकुण्ठवासी.-१४॥
सालीछन्दः ॥ नन्दकरनोनन्दगोरगानोगों । नामयाको
छन्दसालीकहोहो ॥ चारिसातैदासाविश्रामठानो । अ
मरायेग्यारहोजोरिआनो १५ ॥ यथा ॥ कान्हकीजो
त्योरतीखीसहोगी । मोहित्योहीधन्यप्रालीकहोगी।
शूरकैसेजोरजानेजियेमें । होइजाकेशेलसालीहियेमें
१६ । सुन्दरीछन्द, ..॥ नगनभागनुभागनुरग्गना। चरण
चारिहुसंदरिशोभना॥ दुतविलम्बितयाहिकोऊकहै ।
बरणबारहदास अंचकहै १७॥ यथा-॥ अनमनीसजनी
सबसंगकी । सुधिनतोहिरहीकछुअंगकी ॥ दुखितमो
हनलालमकुन्दरी । कुढगमानहिभानहिसुन्दरी १८ ॥
प्रमिताक्षरा ॥ प्रियनंदनंदसगनोसगनो। प्रमिताक्षराहि
पगनोपगनो । जतिबीचबीचभनिलेभनिले । दशदो
इवर्णगनिलेगनिले १६ ॥ यथाः ॥, अँगियासमाढबलंदे
जियकी । अरुनीलअंचलहुसोमढ़ीली ॥ तिनबीच
व्यक्तझलकैकुचयों । कवितानिबद्धप्रतिमाक्षरज्यों.२०॥
बंशस्थबिलचन्द ॥ जगन्नुकरनासगनोलगोलगो। सुछन्द
वंशस्थविलोपगोपगो ॥ गो आदिकोबर्णसुइन्द्रबेशुहै।
छन्दोवपिङ्गल। ५६
मिलेंदुघापैउपजातिअंशुहै २१ ॥ यथा ॥ सक्योतपर
चीमहिमैनहोइन । नतोहमारेथलुलेइसोइज ॥ नटीन
बंशस्थबिलोकिसोहनी। कृतइन्द्रवंशोपरिविश्वमोहनी
२२ ॥ इन्द्रवंशायथा ॥ जान्योंतपस्वीमहिमेनहोयज । नतो
हमारोथलुलेइसोइजू ॥ नारीनबंशस्थबिलोकिसोहनी ।
कीइन्द्रवंशोपरिविश्वमोहनी २३ ।। विश्वादेवीचन्द ॥ गो
गोमोरूपोगोयगानयगान ॥ विश्वादेवीकेपायचित्तं
मानै ॥ सोहै आभैबारहोवर्णजोके ।। बोयेपांचोसात
विश्रामताके २४ ॥ यथा ॥ सेऍगौरीकेपायमेकीलला
ई। योगीकोहोतीयोगरागाधिकाई ॥ राजस्सोपावैशूर
जेहोतसेवी । सोहागैवतीसेइकैविश्वदेवी २५ ॥ प्रभाछ
न्द ॥ हिजबरपियरागिनीरागिनी । करतविमलचारुम
दाकिनी॥ बहुतकहतहैंएहीहैप्रभा। दुदशबरणऔरंधा
हैअभा २६ ॥ यथा ॥ शिवशिरपरतोढरीगंगरी। तियकु
चशिवपैत्रिवेणीढरी ।। सुरसतियमुनामनोभामिनी । मु
कुटगनप्रभासुमन्दाकिनी २७ ॥ मणिमाखाछन्द ॥ कर्नापि
यकर्नाकर्नापियकों। आधेविश्रामोहैबारहवर्ना ॥बी
सैजहँमत्तासोहअतिआला। भोगीपतिभाषायाकोमणि
माला २८ ॥ यथा ॥ चन्द्रावलिंगौरीपूजनलैजाती । की
जैकिनप्योरेंसीरीअबछाती ॥ राधावहआवैएहोनँदला
ला। जाकेहियसोहैनीकीमणिमाला २४ ॥ पुरछन्द ॥ ति
यहिजबरकोंनन्दकनों । जतिसुअरुचारैबीसबनों ।।
देशअरुविषयावर्णराख्यो। अहिपतिपुटनामेछन्दभा
स्यो ३०॥ यथा ॥ नहिब्रजपदिबातेंतसुनावै । सखिम
रतसमयमैमोहिंज्यावै अमियस्त्रवत आलीआस्यते
छन्दोर्णवपिङ्गल
रोश्रिवणपुटनपीवैप्राणमेसे ३१ ॥ ललिताछन्दः ॥ तोत्र
ग्रगैलपियनन्दनन्दगो । बिश्रामलेतपगपंचसत्तको ।।
हेमुग्धदौरुदशवर्षदेहिरी । सानन्दजानिललिताहिले
हिरी ३२ ॥ यथा ॥ बंशीचुराइस्यकन्तमेंगई। कान्हेंब
ताइइनकानमेंदई ॥ जैसीविचित्रषभानुलाड़िली । ते
सीप्रवीनललितासखीमिली ३३ ॥ इरिमुलछन्दः ।। हिज
वरनन्दजगन्ननन्दक।। हरिमुखछन्दभुजंगराजबों।
दशअरुतीनिबरणचारुसोहे । षटअरुसातबिरामचि
तमोहै ३४ ॥ यथा ॥ बन्धहिनजेमृदुहासपासमाहीं ।
विधतहियेडगबाण जासुनाहीं ॥ धनिधनितेपर्मदासदा
कहावै । हरिमुखहेरिजुफेरिचेतल्यावै३५ ॥ महर्पिणी ॥ मैं
जानोद्विजवररग्गनोयहेज । याहीकोप्रहर्षिणीसबैकहै.
ज-॥ तीनैअरुबिरतिबिचारिपांचपांचो । तीनैअरुदः
शअखरानिठीकांचो ३६ ॥ यथा ॥ पायोतरिसकरि
कौनसुखराधे । बोरीबेरीसनकोनबरसाधे ॥ तेसतन
खियनअश्रुवर्षिणीहै । सौतिनकीजनिउमहाप्रहर्षिणीहै
३७॥ निरुचिराछन्द ।। लगेलगहिजबरगैलगो। भले
लीतनुरुचिफबैलगो ॥ त्रयोदशवर्णनिसोप्रभावनी।
बिरामहेलखिनवचारिकोधनी ३८ ॥ यथा ॥ अनेकधा
मनमथवारिडारिये । कितीप्रभामरकतमॆविचारिये ॥
कहांचलैजलधरज्योतिमन्दकी । सकैतनुरुचिराम
चन्द्रकी ३६ ॥ क्षमाछन्दः॥ नगननगनक जगन्नुगोगो
बिरतिबरणआठसरेकहोहो ॥ त्रिदशबरपनीकेकरोज
माजू। भुजगपत्तियाकोकक्षमाजू:४०॥ यथानी निज़
बशवरनारीसतेजपाले। भुवितरुणधनीकै भगोपाल।।
छन्दोर्णवपिङ्गल।
तबंधनिधनिजी कह्योपरैजू। जबसमरथहवैकेक्षमाकरे
जू: ४१ ॥ मजुभाषिनी ॥ सगनोजगन्नुसगनोजगन्नुहै।
गसमेतितीनदशईवरन्नु है ॥ षटसत्त्वबीचजतिरीतिरा
खिनी। मृदुछन्दहोतहमंजभाखिनी:४२ ॥ यथा ॥ वहरै
निराजबदनानिहारिहों । तबदासजन्मसुफलीबिचारिः
हौं । अखियांविशालछबिकजनाखिनी बतियारसाल
मृदुमंजुभाखिनी ४३ ॥ मन्दापिनी ॥ ध्वजाध्वजानन्दसः
गनोलगेलगे। त्रयोदशैबरन्नधरियेपगेपगे। सातके
बीचबिरामराखिनीफणीकह्योछन्दसुमन्दभाखिनी४४॥
यथा ॥ सुनोकरैकान्हबरबीनबादको । कियोकरैबांसुरिह
केनिनादको ॥ बिनासुनैबैनतूअकन्दराखिनी।मलीलगे
कोकिलउमन्दभाखिनी ४५ ॥ प्रभावती ॥ तकारंगोद्विज
बरनन्दरागिनो । तीनैदशैचरणनिप्रख्यराभनो । चा
रैछहैतियबिषरामभावती । याकोकह्योअहिपतिप्रभा
वती ४६:॥ यथा। कैगोरसीवसनअरूदेंहसर्बको कीबो
करदिनदिनग्वारिंगर्बको ॥ जोपैनतोतजिउनचित्तमा
वती। केतीलखीशशिबदनीप्रभावती..४७॥ सततिख
कः ॥ कर्नोजगन्नुसगनोसगनोपगन्नों । सोहेबसन्ततिल
कादशचारिबन्नो ॥ आठैलहैबरणमेजतिचारुराख्यो।
भाष्योभुजंगपतिकोयहदासभाख्यो ४८ ॥ यथा ॥कारी
पलासतरुडारसवैभईहें । लालीतहांकछुककिंशुककीठ
ईहैं । कैलाजम्योमदनुपावककोविचारो। आयोबसन्त
तिलकाननतोनिहारो ४९॥ अपराजिताछंद ॥ नाननंगनः
नन्दनंदधुजाधुजा। बिरतिसंजतिचारुचारुदुजादुजा।
चतुर्दशहिवर्ण सोपगभ्राजिता । भुजंगभाषितचन्द्रहैः
।
--
६२ छन्दोणवपिङ्गल। अपराजिता ५० ॥ यथा ॥ बिनयसुनहिचण्डमुण्डबि नाशिनी। जनदुःखहरिकोटिचंद्रप्रकाशिनी ॥ शरणश- रणहैसदासुखसाजिता । द्रवहिंद्रवहिंदासकोअपराजि ता ५१ ॥ मालिनीछा नगननगनकायोग्यगनोयग नो। बिरतिरचियआठौरसातेंबरन्नों ॥ सुगनगुन निलेकेहारहीडालिनी है। सरससुरसबेलीपालिनीमालि नीहै ५२ । न्यथा ॥ रहतिउरप्रभातेस्वर्णकीकातिर्फे ली। विहँसतिनिजआभाफेरिपावैचमेली ॥ सहजहि गुहिमालाबालकेकण्ठमेली । अद्भुतछबिछाकीमालिनी स्यौसहेली ५३॥ चन्द्रलेखाछंद ॥चास्योहाराधुजैकनों रग्गनोरग्गनाहै। गोसंयुक्तोदशैपांचैअख्यरापरगना है। चारैचारैमिलेसाततीनिविश्रामदेखो। भोगीभाय कहैदशोंछन्दहै चन्द्रलेखो ५४मा यथा ।। राधाभूलेनजा नोयोहैलवन्यानमेरी । जेहातेहातिहारीसीतीप्रभाहै| नेरी भौहऐसीकमानेनैनसोकजदेखो। नासाएसों सुआतुरोडेआस्यसोचन्द्रलेखो ५५ ॥ प्रभद्रकछेद ॥ द्वि जबरगैलगैलपियननन्दनन्दहै। गुरुयुतआठसातत्रिश्रा' मबन्दहै। पन्द्रहबरनपायकरतेअनन्दहै । कहतप्रभद्र' काख्यअहिराजछन्दहै.५६॥ यथा । रिसकरिलेसहायक रिदापदांकई । तबहुँनकालदण्डप्रतिबारंबांकई । जि मिहिंसुभायभाइप्रिंयरामभद्रको । दुखहरतादयालकर ताप्रभद्रको ५७॥ चित्राछंद । जोमदीजैआठोहानगो यकारोयकारो। पाठेसातै दैबिश्रामोछन्दचित्राविचारो॥ आठोदीहामाहीजीहाआशुहीदौरिजावै । भोगीभाषे त्योहीयाकेपाठकीरीतिपावै ५८ ॥ यथा ॥ फूलेफूलैफूले --
छन्दोर्णवापिङ्गला ६३
वारीसेजमेंजोविहारैः । शीतेधूपेडाभेकांटे सुक्योंपाउँ
धारै ॥ शोभाषैरोवैझंखोकौशल्याौसुमित्रा । कैसे
सेहैदुःखैसीताकोमलांगीविचित्राः ५६ ॥ मदनललिताछंद ।।
चास्योहारानगनसगनोकर्नानगनुहै। अंतेदाहादशरु
रसईबर्नापगनहै ॥ चारै अरुहरुलहमें विश्रामलहि
ये। भोगीभाषेमदनललितायोछंदकहिये ६॥ यथा ॥
होनेलागीगतिललितऔबातेललितहैं। हावोभावॉल
लितमिसरीमानोकलित कानोलागीललितअति
हीदोऊगरी । दीन्होआलीमर्दनललितातोअंगसिग
री ६१ ॥ भयरणललिताछंद ॥ यगन्नीमोआनोनगनसगनो
गोयगन्नो। दशैकाहीज़ाकेचरणप्रतिमहोइवन्नो॥छहै
छाओचारोवरणमहियाहैविरामी । फणिन्दैभाष्यो हैन
वरणललिताछन्दनामी: ६२ ॥ यथा ॥ तिहारेजोवा
सीमिलनहित हैचित्तसाधा। कह्योमेरोमानोंचलोउतही
बेगिराधा ।। जहांगाढ़ीकुजैतरणितनयातीरराजगई
ह्यांहोदेख्योप्रवरललितान्हांनकालै ६३॥ गरुक स्वछंद ।।
द्विजवररागनोनगनरागनोराग़नो गरुड़रुतेभनो
वरणसोरहपागनो ॥ विरतिविचारकैदयसातनवठानि
ये। भुजगमहीपकोहुक्मदासजोमानिये ६४ ॥ यथा ॥
कतकिकागज्योभजतद्ध-ौचालको मृगपतिदेखि
ज्योभजतझण्डशुण्डालको । हरहर केकहेमजतपापको
व्यूहयों । गरुड़रुत्तेसुनेभजतव्यालकोजूहज्यों६४ाथ्यो
वंद ॥जगन्नुसगनाध्वजानगनरागनांदोइजू। विरामवसु
वर्णमेंबहुरिनौहिमेंहोइजः॥ चरणप्रत्तिदासजवरणसत्र
हैंठीकहैं । अहीशखगनाथसोप्रकटिछदएथ्वीकहैं ६६॥
.
'छन्दोणवपिङ्गला
यथा ॥ समर्थजनकैसेहकरतमन्दजोकाजहें । विशेषित्व
हिपालतेगहन्तछोड़तेलाजहैं। लियेअजहूँशभुजरहत
कालकूटैगरोअजीउरगनाथजरहतशीशष्टथ्वीधरदछ।
मालाधरछन् । नगनसगनाध्वजानगनरग्गनाअत्तरो।
भुजंगपत्रिभाषियोप्रकटछंदमालाधरी । विरतिवसुनों
कहसुकविसकेगोतजू । चरणगनिलीजियेबरणसत्र है
होतजू.६८ ॥ यथा ॥ युवतिगिरिराजलषणकोगईंदूल
है। विकलङरिफैभजीनिरखिशम्भुकोशलहै । उरंगते
नभूषणोबदनआकप भरे । बसनगजपालकोमनुजमु
एडमालाधरे ६६ ॥ शिखरिणीछन्द ॥ पगन्नोमोआनीनगन्न
सगनोसोदसगनों । कहभोगीराजाबरणदशौसत्त
पगनो छविश्रामोपायेबहुरिछहऔपंचकरिणी ग
नोचारिउपायेंतवकहहुजू हैशिख
खरिणी
मृगेंद्रेजीत्योहेगतिहिअरुनैनानिहरिणी । सुवेणीहीव्या
लैरुचिरंगतिहीमत्तकरिणी ॥ मिलोमाधवनसोंसुचित्त
सजनी निडरिणी । हरायेई तेरेबसतसिंगरयाशिखरि
पी ७१॥ मन्दाक्रांता यथा ॥ चास्योहारानगनसगनोरग्गं
नारग्गनगा। मंदाक्रांताभुजगभनितासत्रहैवर्णसङ्गमा
कीजैचौथेविरतिछठये फेरि कैसातयों में । किन हसतक
विन्हसोदासजूबातयोंमें ७२ ॥ यथा । कोमाधोनीनल
धरणिकोकहाकामनारी । केतीरम्भाबिमलछबिहकार्ति
लोत्ताविचारी ॥ राधाजुकेसरिसकहियेक्योनरीजोपिता
को। मंदाक्रांताकरेउजिनहैउरबशीमेनकाको ७३ ॥ हरि
णीच्छेदः ॥ नगनसंगनोकर्नातकारभागनुराधरो । बिरति
वसुमैनोमेसँभारिकैकरबो करो। बरणदशऔसातहपाय
७०
यथा-
छन्दोणवपिङ्गल।
६५
मैचित्तदैसुनो । फणिराजभाष्योयाचन्दकोहरिणीगुनो
७४-1॥ यथा । लजित करताजेहै अंभोजखंजनमीनीव
सतनिजजेहीमेंगोपाललालप्रवीनके ॥ फिरतबनवतो
पालेपरेपशुहीनके । त्रियगनसेकैसेनैनाकहोहरिणीन
के ७५ ॥ द्रोहारिणीछंद ॥ चास्योहारानगरसंगीतकार
कर्नालगे । भोगीराजाभणितदशामौहेसातबापगे ।
विश्रामोकेदिशिमुनिन्हकोआनंदवोहारिणी । दासोभा
सुनहुसुकवियोहैछंदद्रोहारिणी ७६ ॥ यथा ॥ मेघादे
बीसुचितकरनीआनन्देविस्तारिणी । प्रायश्चित्तोबहु
जनमकोदण्डाईमेंटारिणी॥ दोषखंडीदुरितहरणीसंता
पसंहारिणी । राधामाधोचरितंचरचासन्द्रोहद्रोहारिणी
७७ ॥ भाराकान्ताछन्द ।। चास्योहारानगनसगनोजगनुज
गन्नुगो । भोगीभाषेविरंतिदशौनिचारिपगन्नुजो ॥
चायोपायेगनिगनिधरियेवरणसुमत्रहै । भाराक्रांताक
हतंजगजुजनमुनत्रहै ७८ ॥ यथा ॥ नीकीलागैसरस
कविताअलंकृतसूनियों । क्रीड़ाज्योंसुखदबनितासुब
स्त्रबिहनियों ॥ नहींभावैभरसकबहूंसुधीनिएकोघरी ।
भाराक्रांताअभरननिज्योविभूषितपूनरी ७६ ।। कुसुमित
लतापलियाकुन्द ॥ कैपांचोहारामगनसगनोरग्गनागोयदी
जै। विश्रामोपांचैबहुरिछहमेंसातफेरिकीजै ॥ पायपा
ग्रमेंसमुभिधरिये वर्णअट्ठारहैत । भोगिन्द्रभाष्योकुसु
मितलताबल्लिता छन्दहेज ८० ॥ यथा ॥ बंधूपोलिंबो
कमलतिलपाटलानौचंबली । चंपाकश्मीरोघरिहि
बिचह्या फलिएकवेली ॥ दीजैआयकोसुखदृगनिकोकुं
जहोबिहारी । बैठोह्यांदेखोकुसुमितलताबल्लिताफूल
tr
६६
छन्दोर्णवपिडल।
वारी २.१॥नन्दन्छन्दः॥ दुजबररग्गनोनगनग्गनोधुजारा
गनो। जतिमुनिमेंभनोछह मेंठनोरूपाचैतनो। अहिप :
तियोंकहैचरणपाल हैसुअहार है। सबदुखकन्दनेसुकबिन
न्दनेरच्योज्योंचहै ८२॥वथा ।। मनुसुनिमोकह्योचहतजी
दस्योंबिथाकेगनै । तजिसबासरैजगतकोकरैएहीतूध
नै॥ भवभ्रमकोहनैभगतिसोसनैतनैीमनै। यशुमतिन
न्दनेगरुड़स्यन्दनेकरहिंबंदने ८३॥ नाराचच्छन्दः ॥ नगनन
गानररंगनोआगेहूतिनिदैरग्गनो । विरतिनवहिमें करीब
अठारहैपरगनो॥भणितभुजंगराजकोदासभाषैसुतों
मांच है । मदनविशंखुपांचहैषष्ठमोंछन्दनाराचहै ८४॥
यथा । परमसुभटहोगन्योभावतीतोहिसोहारियो। निपट
बिबशहूगयोहालबंदीदयोडारियो। कबहुँडरतनाहिजेते
गसोंतोपसोंकोटसों । करतबिकलताहितनैननाराचकी
चोटसौ. ८५. ॥ चित्रलेखाछन्द ।। चास्योहारनगननगनगो,
यगन्नायधारो। बिश्रामोहचतुरचरणौसातसातैबिचा
रो ॥ पायमाहींगनिगनिधरियवर्णअट्ठारहज । जीमा
नोभुजगपतियोचित्रलेखाकहैत ८६ ॥ यथा ॥ इच्छा
चारीसघनसदनकीयोबनाढ्याअरोगा। भर्त्ताहीनापरम
छनिवतीधर्तुनारीसँयोगा। भोगीदातातरुणजननके
पासमैबालदेखो। तानारीसोसकुलधरमकोराखिबोचित्र
लेखो ८७ ॥ साईलालेताछन्द ॥ मोनोसंगनोजगन्नुस
गनोतकारसगनो विश्रामोगनिवारहैबरणकोफेरिछग
नो ॥ अट्ठारहैबरणदासलखियेचौपायबलिता। याको
नामधयोभुजगपतिहीहैसाईललिता ८॥ यथा
सालस्यानैनाउठीपलंगतेपालागिरबिसों । हामतेनच
-
छन्दोर्णवपिङ्गल।
लीचलीसदनकोऐंड्राइछबिसौ ॥ सोहेतेसिगरेसुभांतिवि
गरेशृंगारबलिता। बक्ताभोजप्रफुल्लसाईललिताबेनीधि
गलिता ॥ सुभाछन्द ।। लगोचारोहारानगनसगनोत
कारसगनो। छबिश्रमैठानोछपुनिगनिकैतोफेरिछगनो॥
दशैआठैव सुकत्रिजनकोदातारंसिधिको। सुधाबिन्दो
छन्दैभजगवणेहैयाहिविधिको ६० ॥ यथा ॥ चलेंधीरे
धीरेगतिहरतिहमातेहिरदकी । उनींदेनैनासोहरतिम
रुणताकोकनदकी ॥ किनारीमुक्तासोछविबदनकीयाभां
तिछलके । सुधाबुन्दैमानोउफिनिशशिकचौफेरिझल
कै ६१॥ शार्दूलविक्रीड़िताछन् । मोबानोसगनोजगचुत
गनोकर्नायगन्नोधनों । हेरोबारहसातमेचहतहीविश्राम
कोसोधुजो ॥ देखजासुरसालचालपदकीपद्मीरहैब्रीड़ि
ते । बर्नाहैबोनई मईशसुनियेशार्दूलविक्रीड़िते ६२ ॥
यथा ॥ राजैकुंडललोलकानशशिकीसोहैललाटीकला ।
आछे अंगनिपीतवासबिलसैत्योंआँगुन्नीमेंछला ॥ ती
खेअस्त्रअनेकहाथगिरिजालीन्हेमहाईड़िते । आवैमा
तिभलीबढ़ावतिचलीशार्दूलविक्रीड़िते ६३ ॥ फुलंदाम
छन्द ।। हैपांचोहारानगननगनगोरग्गनांगोयजामे । पाये
मेंबर्नादशअरुणत्रशोजानियेफलदामे ॥ विश्रामोपां
चोपुनिमुनिमहिासातमेंफेरिदीजै। फैलापोयाकोभुज
गनृपतिही दासज जानिलीजै ६४॥ यथा ॥ ब्रह्माशंभ
स्योसुरमुनिसिगरेध्यावतेजासुनामैं । जाकेजोरेकोसुनि
यतकतहूंबीरदूजोधरामैं ॥ ताहीकोगोपीविवशकरतिह
नयनारक्तता । टेडीभौहेंबिय करगहिकमारतीफुल्ल
दामैं ५ || मेघथिस्फूर्तिसछन्दः॥ यगनोमोबानोनसनगग
६८
छन्दोणवपिङ्गलः।
नोरगगनोरगंगनोगो।जहांपायेपायेवरणसिंगरोवोनईसे
गनोहों। छविश्रामोलकैबहुरिछह औसातसोपूजितोहै।
याहीछन्दोभाष्योभुजगनृपतिकोमेघविस्फूर्जितोहे६॥
यथा ॥ थक्योंहेबासन्तीपौनबाहिऔकोकिलाकृतिहारी।।
निशानाथोहास्योहननहितुकैचन्द्रिकातीक्षणभारी ॥ न
आवैगोप्यारोकरतिसखितबांदिसन्देहवौरी । सहेगोनी
कीहीकठिनहियरामेघविस्फूर्जितौरी ६७ ॥ छायाछन्द ॥ य
गन्नामोआनोनगनसगनोक लगैगोलगे। विरामदेछा
मैबहुरिछहौसातें सुनीकोलगै॥ गनोयाभवादशन
रुनवईपायपायेबन्दु है। फणीराजाबाणीचितुवरहितोछा
यायहीछन्दहै ॥ यथा । लियोहाथवंशीबसनपहियों
गोपालकोआपुंही। नजानेक्योंपायोवर्णवहई कैशीशज्यों
जापुही ॥ हसेबोलैमानोकरति अवहींक्रीड़ाहिबिस्तार
सी । यकान्तामेंकांतालखतिनिजयोंछायालिये आरसी
RE | सुरसाछन्दः।। चस्योहारायगन्नानगननगननन्दम
गनो । सातोविश्रामकैकै पुनिकरि मुनि औपञ्च पगनों ।।
ठानीजयदासआछोदशनंवबरणोएकचरणो । भाषैश्री
नागराजाइहिबिधिसुरसाछन्दतरणो १००॥ यथा ॥ या
मैदास अकेलेपवंनतनयकेनामफलको नींदजाकैमरों
सेकलिकमलकोदुक्खदलको । फालैजानैपयोकिहिन
किजिहिकोगाइसुरसा । जानबुध्योबड़ाईबिनयलघुतई
एकसुरसा १०१ । सुधाछन्दः । यगन्नामोआनोनगनने
मनगोगोयगानो । छबिश्रामैठानीमुनिपुनिकरिकैसात
ईफरितातो ॥ गनोपायेपायेगुरुलघुमिलिकवर्णहँदा
सबीसै ,, सुधायाकोनाममधुरसमुझिकैनापुराख्यो
छन्दार्णवपिङ्गल।
६६
अहीसे १०२॥ यथा ॥ बसैशम्भुमाथेबिमलशशिकला
पेलिह्यांतेकढ़ी है । मेरेहू आणीकोअमरकरतिहलांच्या
तेबढ़ी है। कहैयाकोपानीगुनगनतनकोदास जान्योनजा
को । खसीरोसोलोसुरसरिमहिआस्वच्छसांचोसुधा
को १०३ ॥ सर्वबदनाछन्द | कोंकोंयग्गनोद्विजवरस
गनो। ठानोबिश्रामसातोपनिमुनिरसहैविश्रामपंगनो॥
बर्नाबीसैसँवारोचरणचरणमें श्रानन्दसदनै । भोगीरा
जाबखान्योसकलबदनसीहैसर्वबदनै १०४ ॥ यथा ।।
पूजाकीजयशोदाहरिहलधरकोमोसोमुनंतिही । बांधो
मारोत्थाही इनको मापनोजायोगनतिही ॥ पलिमार
पजावैसकल जगत्यहै हैदैत्यकदनै। थाकेजाकेबखान कर
तसरस्वतीस्योसर्वबदनै १०५ ॥ .नग्नराछन्द ॥ चास्यो
हारायगन्नादुवरसगनोरग्गनाद्वैबिराजै । दीजैताअन्त
हारोमुनिमुनिमुनिमें तीनिविनाममाजै ॥ दीन्हेबर्नाइकी
सचरण चरणम भाँतिकोन्दभाजै । भाष्योभोगीशज
कोसकलछविभयोग्घराछन्दछाजै. १०६ ॥ यथा ॥
ममोसिहोमयूरोडमरुषभ औव्यालहँसंगमाहीं । ती
के एकएकैअशन करनकोपावतेपातनाहीं ॥ जागेही
विचाखोकुशलरहतिहैशम्भुजघरैमें । माथेपियूषधा
रीशुभशिरनिकोस्रग्धरेहेगरेमे १०७ ॥ सरसीछन्द ।।
नगनजगन्नुनन्दसंगनोसगनोसगनोलगेलगे। 'विर
तिविवेकएकदशौकरिये पगेपगे । बरणएकीसदासद
रसीदरसीदरसीरसीरसी । तिरतिसुबुद्धिछन्दसरसी
सरसीसरसीरसारसी १०८ ॥ यथा । मैंवरसुनाभि
कोककुचहैत्रिंबलीबिमलीतरंगहै । द्विभुजमनाल ना
म.
-
।
।
छन्दोर्णबपिङ्गल।
निकर कोकमलैकहियेसुरंगहै ॥: लहतकपोलकम्बुस
रिकोअखियाँझखियाँअनूपहै । चिकुरोबाररूपल
जवनितासरसीस्वरूप, १०६ ।। भव ॥ गोसगनोज
गन्नुसगनो जगनुसगनोजगनुमगनों। चारिनिदैविरा
मछमनोबहोरिछगनोबहोरिछगनो। बाइसहीविचारिम
नमेंचहूंचरण में त्योचरणों । भद्रकहरसाकरणमें गुना
गरनमें सुन्योकरणमें १३० । यथा !! कीजियेजूगोपाल
अरचागोपालचर चासदाहिसुनिये । मेटनको महाकलु
घकोदरिद्रदुखकोनऔर गुनिये ।। जाहिरहैसुरासुरनिल
हुगुरनिमेंचराचरनिमें। भद्रकहैयहीअरन यहीटरनमें
यहीपरणने १११ ।। आदितनयाचन्द ।। पियसगनोजगन्नुस
गनोजगन्नुसगनोजगन्नुमगनो। जनिसरदैवहोरिछगनो
बहोरिछालोबहोरिछगनो गनिमनित्रिवीसमनच
हुचरणमेघस्योवरणमें 1 मुनिगुनिकैजुआद्रितनयासु
अक्षरनकोशरणमें ११२॥ यथा घटघट मेंतुहीवसति
हैतुहीवसतिस्वरूपमतिकेतुमहिमाझरीरहतिहल
दाहृदयमंत्रिलोकपतिके। निजज़नकोबिनाभजनहूकले
शहननीविथानिहनिनी। जयजयश्रीहिमाद्रितनयामहे
शघरनीगणेशजननी ११३॥ भुजङ्गविन्मिन्छन्द | चारोहा ?
राचारोहारादुजबरदुजसगनोजगनुजगन्नुगो । आठमै
लेतीविश्रामे पुनिबिरमतएकदश करोपुनिसातहो । पा
रामेछचीसबर्नावरणितभु जगन्नृपत्तिकोसुखाकरहैकितो ।
याकेनामेजानोचाहो चितुदैसुनोवचनताभुजगविचभिः
तो ११४॥ यथाः ।। साधू,साधापराविधिविनय करत
हूंनिरादरकीनेहूँ । जैसेवेन्दुग्वैदेतीकटुतिन अमितचर
।'
॥
छन्दोर्णवपिङ्गल।
७१
तहूंगुड़ादिकदीनेहूं ॥ मंदेसोमन्द्रीयेहोतीजबतबजगत
विदित हैउपायकरोक्तिो। जैसेमिश्रीक्षोप्याबिसमय
श्वसनबहतभुजंगबिचम्भितो ११५ ॥ इतिश्रीदासकृ
तेछन्दोर्णवर्णहत्तश्लोकरीतिवर्णनंद्वादशस्तरंगः१२१
प्रथमर्शसमति ॥ पोहा ॥' पहिलोतीजोसमचरणदूजो
चौथसमान । करोअईसमछन्दमें इहिबिधित्तिसुजान
॥ पुहपतिश्रग्रच्छन्द ।। दुजवररागनोयगन्नो। दुजबरनन्दज
गन्नुगोयगलो। पुहपतिअग्रछन्दवः। विषमदशैत्रिदशै
समेतिबों २॥ यथा ॥ फिरि फिरिश्रमिकैकहैनवेली। घि
धिषहकौनप्रकारचेमली ॥ रंगधरतिकनैलपाखुरीके।
छुवतिजिपुष्पतिअग्गआँगुरीके ३॥उपचित्रकछंद ॥ संगना
संगनासगनालगो। भागनुभागनुभागनुकों। अखरा
चहुपायनिग्यारहै। छन्दयहीउपचित्रकब! ४ ॥ यथां ।।
नउठेकर जासुसलामसोबातकहैमिल ऊतरनाहीं। नकरो
दुखमानवजानिकैमित्रसुहैउपचित्रकमाही५ ॥येगवतीछन्द।।
सगनोसगनोलयगन्नो। भागनुभागनुभागनुकों। विष
मेदशवर्णप्रपन्नो वेगवतीसमग्यारहवन्नो६॥ यथा ॥ मि
टिगोअधरारंगुक्यों है ।। बाढ़िगईबकबादघरीहै। सिंग
रोनिस्वेदसनोहै। तोडरावतवेगवतीकै हरिणलुप्तछन्द।।
विषमें अखराइकहीनहै। सुनिसुन्दरिपायनिलीनहैः ।। भ
निपनगराजप्रवीन है। हरिणलुप्तसुछंदनवीन है ॥षथा।
ब्रजकीवनितालखिपाइहै। इकहीकीइकईसलगाइहै।
मगरोंकनिकीसजिवानिको। हरिनलुप्तकरोकुलकानिको
हा अपरचक्रछन्द । दुवरसगनाजगन्नुगो । दुजवरगोस
गनाजंगगो ॥ शिवरबिअखरानिराखियो । सु
७२
छन्दोर्णपिङ्गल।
अपरचक्रभुजंगभाषियो १० ॥ यथा|| ब्रजपतिइकचक
कोधियो । त्रिभुवनकोनिजहाथमें कण्यो ॥ तुअवशशु
भयाविशेषिके। नियबियचक्रनितम्बदेखिकै ११ ॥
सुन्दरछन्द ॥ सगनासंगनाजगन्जुगो । सुगनाभागनुरग्ग
नालगो। बिव में अखगदशैधरो। समपद्ग्यारहछंदसुं
दरो १२॥ यथा ॥ पढिकढ़मोहनमंत्रको। सजनीशोधि
शिंगारतंत्रको ॥ रचनाविधनाअनंगकी । सुखमासुंदर
श्यामअंगकी १३ ॥ द्रुतमध्यकछ । भागनुतीनिगुरूंबिय
दीजै। पुनिदुजभागनुगोलयकीजै ।। ग्यारहबारहाखर
पाये । कहिदुनमध्यकछन्दसुभाये १४. ॥ यथा ॥ कौतुक
आजुकियोवनमाली। जलंबित्रकूदिपरेउसुनिआली ॥
नाथिफणिन्द्रहितोषफनिन्दी। प्रकट भयोगुतमध्यकलि
न्दी १५ ! दुमिलामुखमंदिरामुख्ख ॥ दोहा ॥ सममदिरादुमि
लाविषम दुमिलादुखपहिचानि । “उलटिसुमदिरांमुख
कहै इहिबिधि औरोजानि १६ होहिंविषमचारोंचरण
विष भत्तिहसोइ । चेदनिवीचप्रमाणनहिंभाषावरणको
इ.१७ ॥ इतिश्रीदासकृनेछन्दोर्णवेअर्द्धसमविषमछन्दवं
र्णनंतामत्रयोदशस्तरंगः १३॥
'अर्थमुलाकछंदवर्णन ॥ दोहा ।। अक्षरकागणतीयदाकहुँकहुँ
गुरुलघुनेमावरणचन्द ताहिकविमुक्तककसप्रेम ॥
अलोकतथा ।। अनुष्टु'छन्दः ॥ चारिआगेधुजाएकैदूसरेद्वैधुजा
थपो। पाठआठचहुँपायेश्लोकनामअनुष्टुपो २ ॥ यथा ॥
जनदीनदुखीकरताहरताभयभीरको । लोकतीनिहुँफै
ल्यौश्लोकश्रीरघुवीरको३॥ गधाञ्छन्दः ।। दोहा ॥ प्रथमचरण
सत्रहबरणद्वितियअठारह आन । योहीतीजोचौथऊगं
छन्दोर्णबपिङ्गल। ७३
धाछंदवस्त्रानु ४॥ यथा ॥ सुंदग्तूिघोंपहिरतिनगभूषण
आसावली । ननातितेरीसहजहीमशालप्रभावली ५
चौवाचंदनचंद्रकेचाहेकहालड़ावली । तेरेवातकहतको
सकलफिलैसुगंधावली ६ ॥ मान्य ! दादा । वसुबसु
वसुमनिजतिवरण घनाक्षरीयकतीस । चोवसुरूपघनाक्ष
वित्तिसगन्योकणीस ७॥ यथा ॥ जयहींतेदासमेरीनज
रिपरीवहनबहीने देखिबेकीभूखमरसतिहै । होनलग्यो
बाहेर कलेशको कलापउरअन्तरकीताप छिनहींछिननस
तिह ॥ चलदलपातसे उदरपरराजीरोमराजीकीवनक
मेरेमनवसनि । शृंगारमस्याहीसांलिखीहनीकी मां-
निकाहमनोयन्त्रपांतिघन अक्षरीलसनिहै = ॥ रुपयगाक्षरी
छन्द ॥ दरशिपरशिवहनापकोहरतबहप्रमदाप्रवीणनिको
मोहित करतत्रान । बहवरसावैहियप्रेमरसबदनिकोबह
मनुवेझविधेचूकतनजगजान ॥ चारुचारुविधिकोवि
लोकिनुनचारिहमेंतबदामप्यारेमविचारे उचारेउ उपमा
न । बदनसुधाधरअधरबिम्बमेरीआलीस्वच्छतनरूप
धन अक्षरीप्रबलवान ६ ॥ वर्णफुलमाछन्द ॥ दे. ॥ कहूँसगन
कहुँयगनहे चौबिसवरणप्रमान ।। गुरुद्वेराखितुकंतमेवर
मुल्लनाठान १०॥ यथा ॥ अरीपानिपीवनहींपानिकी
वैनहींबासअरुवसनराखेननेरो। भरेउप्राणकेऐनमनैन
मनमहेनगुणरूपअरुनामतेरोगविरहवशऐसेहीहैवहीं
केमहीराखिहकैनहींप्राणमेरो । नितदासजयाहिसदेहके
मुल्लनाभूलतीचित्तगोपालकेरो ११ इतिश्रीदासकृते
छंदोर्णवेमुक्तकछंदवर्णननामचतुर्दशस्तरंगः १४ ॥
१०
७४.
छन्दोणवपिङ्गल।
अथदंडकभेद ॥दोहा॥ दैनसातयग्गनरचित दण्डकचर
णनिदेखिाचरणचरणनवसगनमयकुसमस्तवकविशेखि
१ प्रचितदंडक ॥ जयतिजैसुखदानीअविद्यानिदानीसुविद्या
निधानीररैवेदबानी शरणतुवशरणवानीमहेन्द्रीमडानी
दयाशीलसानीतिहूंलोकरानी॥धनिजगतत्यहिंबखानीव
हैभाग्यमानीवहीसन्तजानीवहीधीरज्ञानी।प्रचितकहत
जुप्रानीनमस्तेभवानीनमस्तेभवानीनमस्तेभवानी २॥
कुसमस्तवंकदण्डक ॥ सखिशोभितश्री दलालभयेनिकसेत्र
नतेबनितागनसंगजबै । हरिसाथ उरोजवतीनिहाथ
नियाहिप्रभाहिंधरेगुलदस्तफबै ॥ हरिजूकेहराइवेकोंब
हुतीरतलासकरोअनुमानिकैदासबै । चितपायतले
लेमिलीहैमनोकुसमस्तवकै कुसमयखकीसैनसबै ३ ॥ अनं.
गशेषरंदण्डक । दोहा ॥ चारिदशैकैपन्द्रहै कैसोरहुधुजपाइ।
लखिअनंगशेषरकहो दण्डकभोगीराइ ४॥ यथा ॥वि
लोकिराजभवन केबनाउकोबिधातउभ्रंमैनदासचित्तधीर
कैसेहूधरेरहैं । तहांघरीघरीगोपालटन्दरन्दसुन्दरीन
जाइजाइसंगलैतमालसेंअरेर हैं। परेविचित्रछाहैवैज
हांछजेजराउसेसमूहआरसीनिकेदेवालमेंजरेरहें। प्रभा
निहारिकान्हकी छकेसकैनछांडिसंगसेनस्योचहँदिशाअ
नंगसेखरेर हैं:५॥ प्रशोकपुष्पमंजरीछन्दः ॥ दोहा॥ यामपन्द्रहब
हैं अन्तगुरूसोकाम । तादंडकहिअशोकयुत पुष्पमंज
रीनाम ६!! यथा । ऊभिऊभिश्वासलेतद्योसजोटरेउकहूँ
टरैनकालरातिसीकरालंाइशर्वरीदासईशओसतप्तत
लसीलगैशरीरसपश्वाससीलगैवयारियोंघरीघरी ॥रा
वरेबियोगरामसुक्खदानि-बस्तुसर्वदुःखदानिसीयकोप
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छन्दोणवपिङ्गल।
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कुंकुहीदईकरी।भानुसोहिमांशुभोकृशानुसोसरोजपुजशों
कभरिकोभरैअशोकपुष्पमंजरी ७ ॥ त्रिभंगदण्डक ॥ दोहा ।।
पंचविप्रभागनुद्गुरुसदोनन्दगोठाउँ।चरणचरणचौंति
सबरण बरणत्रिभंगीगाउँमा यथा ॥सजलजलदजनुलस
तबिमलतनुश्रमकनत्योझल कोहेंउमागोहैबुंदमनोहैं।
वयुगमटकनिफिरिफिरिलटकनि अनमिषनयननिजो है
हर्षोहैद्वैमनमोहैं । पगिपगिपुनिपुनिखिनखिनसुनिसुनि
मृदुमदुतालमृदंगीमुरचंगीझांझउपंगी। बरहिबरहध
रिअमितकलनिकरिनचतअहीरनसंगीबहुरंगी लालत्रि
भंगी। मत्तमातंगलीलाकरदण्डक || दोहा ॥ पायकरोनौरग'
नते चौदहलोचितंचाहि । नाममत्तमातंगकोलीलाकरक
हिताहि १०॥ यथा ]] पाइविद्यानिकोटन्दजभारतील्या
इसानन्दजूमानुषीकृत्तिसोढन्दछन्दछीलाकरैतोकहा।
कैमहीपालको मोरआखेटमेंसांझबैभोरलोलीनकरसीन
कीदौरपक्षीलजीनकरैतोकहा ॥.. शुभ्रशोभासबैअंग
मेंसुन्दरीसर्वदासंगमेंलीनकै रांगऔरंगनृत्यकीलीला
करैतौकहा । जोनहींठानिकैतत्तुभौरामलीलाहिसोरत्त
तोबाहरेसकरैमत्तमातंगलीलाकरैतोकहा ११ ॥ अथ
दण्डकभेदं ॥. कुण्डलिया ॥ दोइनगनकरितातई गनदेहु
प्रतिपाई। चण्डदृष्टिप्रयातयों दंडकरचोबनाइ ॥ दण्ड
करचोबनाइ आठरग्गनको । नौअनोंदशब्याल
रुद्रजीमूतहिवनों ॥ लीलाकरबारहउद्यामतेरहेकहों
इन । दासचतुर्दशशंखसबनिशिरचाहियदोइन । ए
कैकबितबनाइकगणगणपरतुकल्याइ । दासकहैयोंआ
ठऊउदाहरणदरसाई १२ ॥ यथा ॥ शरणशरणहीसदात
इतिश्रीदासकृतछंदोर्णवेदण्डकमेव रायामः॥
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छन्दोर्णवापिङ्गल।
हिकीनोकृपासिंधुगोपालगोबिन्ददामोदरी विष्णुजूमा
धवोश्यामजऔस्वभुसुक्खंदासनुहैदासको । सदयहृद
यहमेंपालिहेआपनोजानिकसोइविश्वेशबिश्वंभरो बि
प्णुजूराघवोरामजीप्रभूदुक्खहाहर्नुहैत्रासको। सुयश
विदित जाससंसारकेवींचमेसर्बदाईशहदेवदेवेशको ध
महपालिबोज्याइवोमारिबोजोगनोहैचहूवेदमें । भजन
करियचित्तताहिकोनित्यहीदानिहसिद्धको लोकलोके
शकोः कर्महैघालिबोज्याइवोतारिबोसोभनोक्योलहोभे
दमें १३॥ दोहा ॥ छंदनिदोहरोचौहरो करिनिजबुद्धिवि
'वेकामनरोचकतुकआनिकै दण्डकरचोअनेक ॥ रागन
केवशकीजिये ताहिप्रबंधवखानि । छंदलियेसोपचहै ग
घवंदबिनजानि ॥ग्यारहतेछब्बीसलगिवरणदुपदतुकए
का सोशिरदैबहुचंददल परेप्रबंधविवेक ॥ भेदछंददंडक
निको दोऊपारावार । बरणनपंथबताइये दीन्होंमतिअन
सार । सत्रहसैनिन्नानबे मधुबदिनवैकबिंदु दासकियो
छंदोर्णव सुमिरिसांवरोइंदु ॥ घनेदिननकोग्रंथयह बिग
योहतोबनाइ । ताहिसुधाखोशुद्धकरि दुर्गादत्तचित
लाइ॥ आदौजैपुरनगरको अबकाशीमेवास। भाषासं
स्कृतदुहुनमेंराखहुँअतिअभ्यास गौड़द्विजवरजाहिरों
दुर्गादत्तसुनाम।प्राचीननग्रंथको शोधेहुचारोयामः ।
पंचदशस्तरङ्गः १५ ॥
पिंगलग्रन्थंभिपारीदासकृतसम्पूर्णम् ॥
लकिशोर (सी,आई,ई.) के छापखाने में छापांगयां
नवम्बर सन् १९०२ ई० ।।
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