Sringeri Sharada Peetham
Pramaanalakshana Tikavyakhyana Ac No 203
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2543-87 /प्रमाठालक्ष्क्षणमारः।।
रसता विपरियोजनशिश नारे पूरा प्रारदरतानतिष लक्ष श्रीदेव्यासायनमः॥श्रीमदानंद तीर्थगनतारन्योनमामानिर्विप्रमशत्र अनम्यागण्यकलयाणगगाधिपुरुषो नशार विधानपिगहन्याय ॥१॥ क्षबोइतरवल सुमन नेस्या हरवन गाँप मातदितिनिग्नेिलापेक्षित श्वर साक्षात्कार मनरेगा संत्तनास्यत्रमा पनि विनानुदाणात प्रमाणानो यथाविदितानमिवन पपत्रस्त स्व यथावदानितुकामातेगवानाच मरशेमषीननुकलपियान्वक्ष्यमाणमेवानयिति॥शेषग शनारायवाचनामय संप्रणयप्रवक्ष्यामिप्रमाणानांमुत्क्षण। पायेव समस्कार कोहरि साशक्याशेषगुरुमित्रा सहित मितिपाठे सार्वगुरुतस्यापपाटकाविचनामा स्येवारिसमर्थतेने प्रदानसेलबा तन्ततिरितिभाबना इशशामिति अपिन्या रागादिदोषरहिवाइहलोके या तीन रायवालाशेवदो वरहिततिसचयित अनामयाद निभाम नमिति पदकदोषातोपलक्षगोपियो मी तुझे नाग परिक्षा गुपयोग max- BASSAME अनुझिया क-त्यलक्षणा दिल्यान विधाविभागः। तदुकिरवान रो देश बायाः संमहायोपसर्गान हितदिनाप्रकरणानक्षयोक्तिस्वादालक्ष्यमात्रमापको लक्षणादिति व्यवहानार्थासाम्लादिमानगोरितिज्ञातल क्षगोहि दिन स्य निमेवनीशका प्रति। यदालिये गोरितिउपदेशादि दातिनिस्तपिच्यक्ति विशेषएवन सर्वतोपदे यशावावा अन्य या नकदन्यत्रापियशिलतमेव व्यवहानानालाच चातचा रणेच्य पका पहियलक्षणतमेकरहीतातहरगोश सबंधनहाति प्राची विपक्ष केबल व्यतिरे कि यात्रान्वयान्यदिगणेतिहशेबानाममावेगवस्तुसको मुडे ले लेगांति संलवार्थयुक्तापुति चिता परीक्षासोद्देशाविषया नन्तं तवतिापू लालाबना नमनाविवाहादायोगात लक्षया परीक्षातमा तस्थलि गवस्त्रनिवायार्थान संभवायो यति बोलिन क्षणस्वर पानिधि गासिधियानवालापरिहारे लि गानाविधीयतावितगपरीक्षावनाधिकार सबछेदनुवन विभागसमनाओंबुझिदापनिर तिपयता परीक्षाया. पीता मा ॥२॥ कक्ष तमोर सिध्यागडि विधा चोदशादयः।सामा तोविशेषतश्ये तिर माला || स्या परे लोकताकिमपूर्वनिमीयोनेसतेनापनमामोस अन्योकीन हर तो वक्ष्यत हिविपक्ष यावल तान्ययाम दाभावी तिओ ययथा(थुबु यो दराकानो पहिलो भोगाय जनशनी मिति प्राचीन मिवयत ये तस्यैव सानीत्रक व्यवहानी पयोगितादिति लावेलोको सलक्षण मिलतिदेवहि स्वरुप हि लक्षणीय वाकलेचा जाति प्रमाणात सुहासिनामामान्यलक्ष माह पथार्थमा बाम भाजलक्ष्या नायबानि तिलक्षाविमल र जातिज्ञालयोनभय थावरिश ताविषयरकाशिभविषधोका दिनमात्र रायविपर्यय साधार यादव शेषणापादनाविषयी कार नैवमेवादियुदासः अर्यसति व.सुचतेचतोनगन्य विषयोकारि गदा व तिव्याप्रिनिहितागमालोत चप्रमाणनामानं सोपिसंक्षातार पण याथानापनाथनयंतागः।
चमा विप्रतिपलोपासनाने हिमदमत्तोपत्त त्यातुलनेत असमाद नि देवदर्शयविधेउदिशाति केवल मनुषनागंच साक्षाययभितार्थविषयक लापरपर यातादृशमन प्रमाणामति प्राची न्यातिप्रायणप्रथममुष्टिकवले लक्षात यांपशान नलसिंज्ञानिस कोवलक्षणेस गिग्रहालयाने झापनायरल णारं तय था जो सोशदिव्यु दामअनव धारण तानसत्रायः साहिविधः दिट कोटिनिदिकोटिलोत्र काटिनामतिबाढलयो त अनिधिकोट योनामावलिमाजको यक्ष इति दिनोयो सिमानाक काटेरन्यनरतापपाना नाने कनिदेवातत्रायो पाकिमयं ब्राह्मणसदिनवितिहा.परनानाहि स्निायथा प्राणायबांअगतिप्रितेक निश्वायकाशासहलसमानासमान विप्रति पनि उस लपिनुनधिजन्मा अपमानियत सह आयो॥समाज धमाधी तात्या नावावेति असमानधर्मादाकारा विशेष मुसाद शनि सार्शनसीब निवप्रतिपने लौनिकानी माथिउत्तातौमिक नीति। उपुल भकिन रिदमुटूक दिति अनुपल किमत्र यक्षस्तिनने वाउपलेभानुपलक्ष्यो समानुपातमा m टी. गीत निश्चयो विपर्ययःयाक्तिकायाभिदंरजन मितितनमिसनुप्रमाणयुदासाअनुमानादेरपिस्व रपये के वलसानातिन्याप्तिअनप्रभागलक्षयामाहतितधानमनमानीनदिपियार्थज्ञी न पर माचीत तायादिनापनेद्रिय सनिक पर युदामयाजानमारने साधने यादि निरसी साधुन निति कवलप्रमाणत्यू दासतानसुमानेप्रमी प्रमेय पिप्रसंगाला धन महास तोर पिन्ट कर्मयोर्यदूतोवाला पीजावा यानंतर चासतिप्रति नवसेकायतच्या साधूनमितान्यापार वाकुडारीअतएननायादृध कसेवादोलिन बलमा दोनोने यातिाप था कि वो है केवलतिच्यात गज्ञानामती बोहे तवश यादौ वप्रेसमोरयातिन साधनमिसनले कुरा दोनोविशिरमेह #प्रमानाप्रमातीप्रमाविषयःप्रमेये। यूपापक्षान् प्रमाप्रमानु प्रमेस्लेक्निक्षी नशा पथकात के वलयामा विजनिति कितना अचमाधमहावलक्ष्यथ्य शापूना वित्तागः॥चत मोबिलामधा प्राधान्य ऋगोदिति ईशलक्ष्मी योग्य मोगिभेदेन शानिनो बक्षेदेन निमित्तेजनन स्वातविध्या सूतानपदवासंयो अनुन माणस्य केवलप्रमाण साधनते नातं तचतुर्विधूमपौदंतजन्य ततएखा निसचे तिनि मत साह पूर्वई यमना दिनिसालक्ष्मीनान पद परिणाम श निसतेको वनमहमियतआहा स्वातंत्र्यपारतव्यात्यातहिशेषः॥अनादि साम्यपि च सत्तादो स्वतंत्र मोश्चर जीनत व धान मोक्षाने मिति महाविशेषादरी मुपपद्यते अन स्वतंत्रज्ञान माये धोकाधीनहितयमितिडूयोर्लक्षणेसूचितंत्वना घे स्वतंत्र भितिलक्ष्मी ज्ञानेनितिः। नानमितिई हान्यूरोसा होतोये इशाधीनमितीबाई निकितिब्रह्मोदिज्ञानयुदासतानमितिलू नीतिनिशात या विशेषांतराह विवरग तारिख लविश पदिषया लक्ष्मीज्ञानस्यात्म तिमहतेनएनल भावात पभोवा जाती स्थविशेषदसताही हिताय मोदी न्ययोऽधिकलक्ष्मीनानमीशविहाष्थनमा ज्ञानेत्यएकधिह विषयोनि-चारइस तू श्राहा असार्वत्रिकोनतीचा सविशेषविष्य था कि मनु स्तूयोरतिविशेषगायशसा वत्रिकतामन्यापिनसाह अन्यत्रसाल का षय। किमी लक्ष्मीनान यरेन्यत्रत हि सामान्यपनेसाहास्प ते निवासी गादपत्रसविषये स्पष्टधात राज्ञाननिरतिशय पानत थालज्ञानमिलक्ष्मी विशेषःअपनापूनमिसनैन त्यनिनाविषयलक्षगातरमोशनानस्यमा अव तीन शहा शैव्यायाधिक मसार्वत्रिक निति ललानाथलक्षमा।
घना
२॥१॥ इश महर्णस्वरूपक मना)। अभाविक तासंतवेनिस च।अन्त्योऽधिकनितिबद
दिजाने युदासा असावधिकमिविज्ञाननिरासाईसेअंसानिमन्सन,
वियमितिलेक्षणतरंवादिन्यतच्या बातरिहाराभाई शेअंसाबकिनी
तिहाज्ञानयदासपअन्यस अमिस स्मादिविजातयंदविवारजनानातिन्यो दा
ईशश
रिपेरिव्यहा राया नाला र नेपलियायोतिस्थीले बने सभीषय तनपतिस्पर
तहसनेनापनिरतिशय स्पष्मादातानी जातले व तोधिक स्पूर्यत लक्ष्मी
नमिसनोमल क्षणांतूसरितलवतोगत्रतावल भतिशयोगिता में।
लिब्रिाधा रजातिकानाविक योगितान देनजनबदलाननानुनमा
जन्यमनिय बेसाहायोनिला नमजमूना टिनिस कवायोगिता जना,
तिमोज्यायोगज्ञानडात पायजनोज्ञान मिति शेषः असार्वत्रिक वाद्योगविधा
मानलक्षणमोहईश जीवस्याऽधिक विषयधिरजयतिरित शीर्वज्ञानेही
बाई ति स्वरूप देव पद धनाजोदेयोऽधिक लस्मदोदिज्ञानेन्यूदा।।
अवुधारोनालस्त्रीज्ञनि निािलक्षातर मातो. युवकालो
नेसनीवाअन्य गादितिशेषभिन्यत्रह
संत निरा४॥
T.
मातोशल मीान यदानः॥ सूर्वमहान महानहेगनागिरासा धीरजना नयधना निसने हिनतयोगितान यो गज हि योगिज्ञान मिस्त आहे॥॥क्रमण मानीय प्रभाव नक्षिमतनाद योगिज्ञान युक्त ऋण वर्तमान मतानपि निरिइनसाती। प्रामुक्त वामदाय अनिरपनदीवर पुन किसिभिवतीयातायातो नोय यो जाति काताति के योगिज्ञान लक्षणयुगपातमधारमेह सिरञ्जन्यामेष येगिनोलनमा जादपणेरतेरिमतभाहा।। सवितति के त्योन्यत्री विचिन्मात्रहासयु रुन्तनति नेदलूक्षायुक्त अन्योन्यून् जुजानीया बदैन लक्षमपुकी कितुताविक योगितानमा नदिना लिक योगिताने सालापर वन्यज्ञालोचनेहसितं ताजिक तान मोदिते सनी दन्यत्र विचि न्मानहाल युकाभानोविक योनिशान मिस नये गांतरंसुचित वतिना घना नोति विक योनि गिज्ञान नितिइशान्तीविषये अनोदिवसमालोचनेपिल ति ल मादिज्ञान निरनिःजज्ञानन्युदासा आनोनुने पौत्तिाह सिमिसन नैदाइशदूदाना) दितिय-सोदिलेगहनावशानन्य दोसायी किनिनाव हासे युक्तिसिसयो निशान दिलासाईशातितलेलाद सिनेताहणेनेवेरादिनाने अप्रेसंग भोग जानकि नौशादिशानदनादिनि वसं दिद्रियास निकादिनालिज्यताउत नेता 49 Ima FAS . 14 निनाशिने तिनत्राह अयोगिज्ञान मुसलिना रावतस्थल क्ष डामाह॥५॥श्रलपाशा ५ पदन्यत्रालपविषय सर्व चौपतिमत् । क बल त्रिविधाप क्षमनुमान जमा जमानजनितिक्षाला पनुमाणप्रिनिच॥ भी सरन्यान्यन मन भावाभावज्ञापना यू विभागात कौन इति॥शासक्षम्मान उहि गगइतिाशप्राय गोऽसन्नाव्य हि तवी न कतिपय गत यहिदायगावर मनुमनामी स्वातंगअवशेषार्थ विषयाग इस माह बनेगा शघिसक्षम क मेवेति ना कान थनिष्टसाध्दताना भानजीवनमेवानुपपन्ने पनाह प्रसन तेलानोपायः प्रतक्षानुमानरवेल कगादासीनताश्च नेवा क मागमदिबोधक धकेपि वान साधाय बायोपिनान्यत्राव तापक्षत्रय मधेनुनविर विजिति समक्षेत्र प्रमाणातरानुसार राजमाप मनुमानासम्यगनीदिया विराम आगमगाइतिसंज्ञानिस येवलेक्षणेसहर्ष सोनवा स्यूटिकन जानिन मानादोभी ग्गाहकतामा तदानाति पुनुलक्षगार नः तत्रसालक्षणमाह निषिाय देय सनिकषाप्रसानिषित योनिदोषणाअगोनाकशादिली क्षुगादिसू निकयुदासमान दिद्रियांवोपयउ-यते।) तनिक वनहोनात सोमीच्यादिदोषरोहा नामिदि सदिक व्यालिबाई दिनहानाथानामेवानीपस जा निकयुदामान निर्देषितमहर्णमनोनषिष्टिततादिदोषवाद दियाद छामसालिकर्षव्याची सनिक इनिइंदियात्रव्ययासः सबैणप्रमाणोतरदासअनुमानलक्षामाहानि नापतिरनुमा उपपतिलिंगउ यती सहवर्यबळेना गमकालगानिदोषमणमन मानालास उदासाचा या याद्यनुमानर्मलबाग रोहतानुमानुबदा समानअनुमा नानास का पनि यहाँ सक्षा दिव्यदासाथीपपतिसयथा ताजानेवाबोधयातीअन्यथाभी नियसंगादावविधमनुमान के वलावधीकविलयतिरेविअवयच निरकिमिति धमाध्यममान्धपक्षःसाध्यसमान पर्मवा धनसिपक्षःसाध्यतसमानधर्मरहितोष रोमानी विपक्षमासापताकोरेगसरवधर्म साध्य समानधर्मः पक्षवापसंपक्षसे विद्ध नमाविपक्षवन्यासी नटि विधी सपंलतट्रेशर नीतिनियुधा॥धर्माधीकस्य विनय पमेयतामणवादिति पक्षापूकार यमान सपविपक्षाधान केवलयतिरेको तथा ईश्वर सबैज्ञासर्वकटतादिलिपक्ष्यापकसमक्षति विपक्षाघारतिमन्नयन सपक्षनिक देवातितेदा नि धुनियाजीमोनिहोनाडाकारण न्यून लादी चेतनतादिति सर्वत्रनिदो बानुनविधि दोनयसंगतसुनौद विध।
प्रनाल- सोम्या २. सामान्यानुमान निति।२४ जि. दृष्ट सामान्य नोट चेति सानु मापक दृष्टायाधनोग्नेः प्रसभा योग्यानिमारक सामान्य तो यभानूपादिज्ञानचक्षरादापुन लिविध का नुिमानं कारणानुमानडाकारणानुमान कार्ण कार्यस्यानुमान छ यथावृशिरमे चोन्नति कार्यकारेंन्यानुमानोहलीययचा धूमोग्नाअकाधुकारणातुनाका कारण स्वानुमानतीयय पाारसा पूस्थत भागन लगमाह का निदाघाटीग नः अज्ञाननिषय सहायतमादीवित भाटिया तुदोषपूर्वकलामा बौनिदोषत राहीनाक्यालोस्पिता:पदा आकाक्षासा धि सोम्यं तान् ति पदादिवास्य ।। नो बुला कांक्षि नासिधा यक है पूर्वपद् साताकाक्षापूर कज दाका क्षारता तेनमिले प्रतिवाणि न्यापदै स्य गौरव पुरुषोहानसादेश्वआवाक्यत लवति। सन्निहिनावालि धायक अविलंबे मोबारिताँचसन्निहित लेननौल घुन मानता निने प्रति सुरसरि तिशीतला नीजलोवतीसुदेवास्युबिलोना छारितपदानां वाक्यत निरार साभन्योन्यान्वययास ताबनदर्थानि धायक योग्यता न था नाग्निनाति ने दिसादेना कपत निरामःनिषसागमाशासनिरास:शइति प्रसूक्षादियुदास भागनभ्या सभ्यतातरवबोधक शून्य पातिघ्रसंगासहिविधः निसेनियन निसावेदः।। अनि पुराणादिननोवतनत्र निसलेपिप्रबंध विशेषस्य नि सतानि सहाश्याम विलागः' क् साहित वर्णाश्च दाना सर्वगतार देति ननुक यंत्री प्वप्रमा यानि अपिसपमानयोर पिटाप्रमाणे नालप्रनितिर पित्तिः।। साविधाःपिान भापतिनातिना यायमाजीव प्रोग्य्हे नीरत सिंचनवतोबहिविपत्तिः।। ती यायपाजावतोह भावहरवतःस्तत्रनितिरिनिरातिबाबहिलविाप्रमोसुबती दिसा नमाने तवयि विमतो बहिर स्तिजीवनति से तोररहेमता यधाहमितिबमोग सन दादासाहपनि ति साधन पनानानविविधगलनाजस्म पैमाने प्रतियोगिनमारस्य मोसाधुन। यधागो र पाबनंग तस्यू टयूमाग गुनयेगोसाहस्यघमासा अनमुनगरप गोसोयगयइरिसमापनियोगिकरमार्यमागगतसाद स्वरमा साधनेसा की यो माया प्रति गहगत्व माटीगत सारस्य ज्ञानाय धागानुनयननंगस्य गवयगौरा सा यज्ञान भागविन्टल माणगय प्रतियोगिर्क साहवयमेप्रधान गोसशो मंग वस्तु माहवय सरशी सौगोरिति निदातव्यं सार रास्यप्रसाधनांयभागो गौरमा बस्त नितिदनंत्रकाप्रसाद्यतन विनतोगी नेवपस्टेशोगवयगरसा प्रतियोगिता यायतमा प्रतियोगिसतुसशाय भायमायन योगिनीजा असमम संतास्मरगसूहा विव्याहत वाक्यासतिज्ञापस क्षनु पानी सहासोजमवाप्रोमति स्त्र चलीम सन्ये । नत्रातिदेशका इ५३
७॥
तिप्रति
मौनत
1101
सभासपागोस्त था गरयलितातिदेशनालयस्य नागरीक स्य वनगतस्यगो सजागा
कवीपम नलानेय तो प्रत्युत लंगायपास्मरण बम्सौगोसको आने
संधान देनतस्यूरोनयमा पनि प्राप्त तिः वैध मापन न कभी गमाव
नसश्व
साधान।
चपदा तिप्रमिति धर्म मात्रापनानं या दामी गोदमान
पराइति दहा मायेचत वेतो कमेल पत्ता उपद स्मृतिमा मासोनई
मानप्रति सेवा देते नोट पदव्युतनिरितितदेयं अमानएवीन जनावमतोग
राबव च्याअगा
दिगोसशतादनाव्यतिरै पटदिया दिघयोगसाताभ के
लोनविभागानपान रिति अनापमानत्रयस्था त यिान कि रितिस्पटवनिभासमानको
वाडगूमावतलले विना दूभावेति प्रयोगपतिनै वि याद कपमान नियतहत विज मनु
तिम पारे नववपिनों ये तिर किश्यपोगप्रकार वैचित्रे पिनातु मोनान दहिती।।
नुमान विशेषतासक्षितस्वधी-सहाजावाजाधात्रा पोतिगरनापमान न्याय
निएतयापाथ यशदा पिपरास्त तोहरा प्रतिपलानु माना देव तदुपपलगानी
यो
कार्य
Samsutr
वनचकेवल प्रमाणेतादिष्ट भयले गतिलो लामवति तथाप्याला स्तनाप थकुमभूगल सीबत
हाला बोअनुवप्रसनचा भक्षावविषयंत्रमान जाबत त्रिविधीप्रितक्षेप्रति यो पनि
भावनमार्णयमनास्यत्र पूटता भानमानिका प्रतियोगिकाओ गयभापी
झानर हितस्पनातिनुज रिति भागोले प्रतियो नका भावप्रमाया। धोहि सानपा
ri
धननितिनतप्रभूमजतक्षानमा नयो तवितितीय मनुमा नविनन नभुर
अपून लात घुटवहिति प्रयोग न तनावमा नायलोना अ
प्रावणानुमान भावापनायताले योनिमा निमोणत्य
त्रातभा वा योनि
जात सविसंतओह ।।६० घरो नेपिरानहाविसमा । यदभिकान्ति
राम्दीप नेक गोपालपन कालावधनानवेतले तदा नमानीचटी
तिी योग्यतेसमन पलभ्यमानला गेजुवुद्धमिति संभवादा यदापुर
सतरामस्थ में इतनाति घटइति प्रनतले ते दाप्रस क्ष वाष अपंच बेहि
तागा साक्षिमायूसरवोयनान प्रमाण सक्षिण सुरवा दि चाप
ই
यवनपतेन पराशीलावावा तशवपरिशेषावपि प्रमावियतेडन
22
मनात
रिज
कनिहाभिसतआह) संसारिशेषावनुमा
सवःगधाडालमस्यास्तीनितानचाशदानापसको
त्यना
मांसाधन विशेष सहि खुधाविधिनुरबार
वार निवपश्नतिजयापाचित्रमेयो
महसते त्यति मेवमादि दोमाय भी नाय - बरस ताल देनेति सस्त पारने बयर
जापानिप्रतिपन्न चाहानूवानालात समवनापिनलौनलझने
बतानाध्यतिरेकेणचे दितिप्रयोगासनोस तेसमाधवपन्ने प्रमाणानचितान
विवादा भावातावापनाथों योगिवि लागानून नेले प्रमानवाप्रमाणनितिनग
पात्रता सततपविरचन्नाहाभानामा मात्र या कान नम्र लप
एतसंजन मिहोपन यते। या यूगी कारेशनि व्यापक प्रसजन्ती बावधनेनिया
प्रमाणिक मप्रामाणिक लपून वे तितलन पदविध आला न्योन्या प्रचार का श्रयम
सर्व स्थानिपतेपि गावलिविंद न्यायन
लप नामको नहिक बापूलाथमा मानबिनमालकातिवाहि
भडकलपतेने दावे
लपनागौरवारितेलसलनालवतस्त
S
Estametmanastanarara
की नजदत्यनसंजयेनयातिवितित गातिल तिः॥पम जिनीयस्यविपर्यविभवसा जिनीयस्यानिटता प्रतिपक्ष साधक तस्ये नोसति जतिसितिर तनि नम मायामाला भावसिंगला परत मागूधीन मदत पादितडतात याच नदाताचा क्षापा म योन्याचपत्रसंगी पडत यायधीन माइतमाथि तडस सादा पर परमार डायता मांचक नगनदत्तसादाब यातसा धुपेक्षाया अपवसा नवस्थाप्रसंगा अब बा गून्यतेनटालाधयादिप्रसंगगायनमन्यू परामसत्र नवसंगायथा मुत्राया। जमादितर्हि नै तद पनि प्रकारमा सामान्य तारवयातचिभूतहोना था। श्रीरोनस नहि जगतस्यिा दूताहान् यथा यदिपर्वतीनिर णिक स्तति नस्यादिति अतुकलप नै यथार यदी व नोजोमालिकिनस्तहिदारीस्वारतिभा रएकलपन या यदि पात मदकपूर मगर य महिमाम दबिशेषादितिम भापाक यापीको नसामानाधिकरं व्यं तत्र वान पपत्रौ पकानांतरे कोषि दिसत्र काधमायत्रवर्तित सनद विहार विबुतरेडसोशिसोबत नुनोनवाल रमा तीन प्य या तिर ति पतेगाव भीमदिदैनन स्वजन हि यज्ञदत्य पिता नजमानित गनास्यादेना नकार्नुमानपत মাসাকাবাসাহাবিরা নদী। मा
या
दि
प्रमाला
पनि चानावनामाविरुवालाच आजतागलेला शेततउहे टपणेति विविध या
धापन नाय निव अनिभूननादितिमा निरनिक कार
संगरयनिप्रसंगपणेना। नुमानेत यो तीन सगे-
साध्य यस्य प्रमाण विरोधादिर निरनपण नितिनक्ष्यतिनका दिना
निसंतीस ते आहा उपक्रमापसंहार तदैकप्यात्यातीरताप लाम्बा
अमाप सहा उपका पति
ইনসুলিম সমৗসুস:বেবর্তনবাহন।
जना प्रात्तापक्त पुल
प्यारकपकारीस
भ्यान प्रागमन
विनि दापरको
क्यता नपैनुमानु मानत
पनिाइ र तेवा
माना
तेषान पर
निपतहारबपासा
साधाहरी
बापथ पाह
रवल्यापपगु
पना साक्ष
तो
MARRIANIMOON
दिन
ति विक यह णातन भाषकपीमित नुन्नबंटम तिमन्यभाया स्यामै चाननुमानेत
जानकारे को हरिसत आहात
लिगानिपाउलोनिती
केला पसंताराविसंत्रोपपत्र लिंग
योपकमानाचा सतोपदी
मक्तानचा लिराव्यात बुलेनै
स्वधोपमादयावि
दुप
तत्रापमा बतासचेगा व्याप्सिबल नायिकाभत
पदान गत विगासात माह
एलोमा वोरिपरी ग
गावरानन से सनपेक्ष्या बोधक दातुये
तेषामा गमाधविषया
पिनाकि गेवितागात भाविस नारयादीनि प्रमाणानि सूती सतभाहर
शासनाच्या बायकोनचायतु मेय स्यानकर्षणोकानः निगति से
निराकी पोनि बामपंचतनपानिवि को
विनिमय जात प्रक (ताडी प्रकरणाजानेलार
नाना न होबार्डरुमुपपन्न सामान्यायावान्बादेववरवापतददिसन गहना र
गतसाद
कनादीनानास
मवाक्यमा
गत बाचुनरी झापनापोकगावतानाः।
तिलि रामनाक्यात
जा
दिन
प्रमा
कनादीनानचा भाग मवेषितातलिगतालातविरोध सुनिलिंगमितिसमावच्यादी
नालिगा इथगति स्ताहिक भमियतआहाशालिगविदोषाः
अत्राचनमात क्षा
येति युदहिं निदीपत्रमितलिंगमनमान
मितियतयुक्त नारित वासिनोधमूददीनपबाहिंप्रमात तत्ते रिसतआता!
योतिरपत्निल) विविध प्रायस्यौल देखनिकला पवित्र
नितिलिनमान अनुमविजन कम गोवियते किनामनिदोषता तूति व्याप्रिमि
तार तिपूर्व मनाना नानभितिजनको श्रीविना भालोयालिमा साहिविभाएमन्वय
यातिव्यतिरेक यातिश्या साध्येन साधन स्य न्यामियर व्यन्यासियथामाया रना।
साधतावानासोबम्भिमानितिभावन साध्या गाव.स-याति यतिरेक न्यूप्तिाचा परिणनिमिन
जबति सधभनाल मनोति योजयो हिधूमपूस स्थति अमानावं पश्य
भूधमानीननिधिनोतिषिमा ग्यासती न प विनाशावई तिर हातच्या तिश्य
तिधर्मस्प नातामन स्मरे ति। ये सान्निधौ सोडेर सरस्मारक इति न्यायोट।
चितिश्वव्या
तिरादि विधमनमानीस्वा
पदेशनपेक्ष चापतिदेपेक्षेप ।
म्त्य
तिना न्यून मि
AS
पातिौलगबोधकंवा स्थपनोपदेशालस्थानांतरनाक्यावयवाशानेबजि सासरायशुम
विषयोजून संशययु दासप्रजाहेदाहरोपन निगमानानीतियोति जपूरे नया
यिका मात्र विज्ञादयः पनतिनवीनाःतिला हेनूचाहरणान्यदाहर पोषनयनिंगम
निवेनियर वेति मिमांसकाः। उदाहरकोपेन यौहावं तिलोमानित्र तीयपक्षयक्ति
नियन पक्षालावन्नोपपन्नाइसात आहासाचनलाहरशंपावासेपर
तिप्रतिज्ञापारक वास्यमुपलक्ष्यतेनइलिन सतिपादकदाहरगीप्रति झापादनायु
तवर नेत्रविका सभापती नि मानिति साधन तातिन्यजक विज नसतं निगच नेते
तुमधुनस्लोरिति सम्म यति घनिएक शतालिभानदाहरणी यातिनहाय
छातःसद्धिविधः साधम्र्यहनोध ही तिनन्दय यातिन हवी
धम्हाताच्यविनयप्तिसहयस्कुलधहटाताअनवोदाहरण
दिविधानमा मदिाहरी चाया धूमवान सावनिमल पामताना न्य
रम्य दाहरणेयाचा निमान भवतिसरेनवालतियभायरतार
पदेन वचन मात्र पक्षण ने दंपनरोउक्लन
Maation
perpunam {॥११॥ नयनिगननै दाहरणोपून यापांचोष पति लेबोधपर शंतोपमा २. ननसोल गरम लिगस्योपसंनयासालेदारानुसी हिविधातथाच बान्तरतिमा धर्मपिन्बानत या चायनिनानातिलेधधिनायः) तु पुनःसरे पक्षसाओपसेहाना निगमतीपथा धर्मवतालवतोनिमा नवनि) वि जिज्ञासादपः राधार वन संजर्वेतिक लोनालयीन य नागी कुन स्तरोत नियनः। पून बदिगमनपा प्रतिमाहें तात्यो गेनीयवातिय नादिनियमानुप्पन तिभालेना है। यतिठगनाप्रतिज्ञावलागि उप्पनि नापिके लिवोबर चाहें तो निमानिति हेतु गतिज्ञाववानरं विहायोपपत्ति का विकास बत्ती निनको विनियम क्षोपय स्यानावाने जोपपत्ति बोधेनात यवनातनी वदताआधिक्यत्रसंगानुन ब्यूयवायुपूरामघातुःशयस्येनी बतानचे पतितनिधानन्य लादा विचित्रबुद्धयोहि पुरुषारनिराइतो पिन नियम सुक्त इसा आहारासिचापीया हेतुभाष च॥णापूर्वतीदगिमान येत्रिनियत विदेते नाति मानूप्रतई निन्यसायनानितिार विवाद ने सिधौसलाकुतीतिमानितिपय दाधमाला दित्रिक पावनिदानव सेवी धूमना
नो सत्ता संगना व दोषाविरोधः॥संग सात्तावालगतिः ८५
नई ति लेनकोमपलक्षेमको धूमके महान में रसवतोनि नति
निसप्रतितेन र निर्वाचनमा जापतिता नसभानाभोनाकाक्षा
सारेणेवा नवलपनायकतंतुदन्नियति तिनिपिपिपतिरनुमोल सकी।
उतषको दोष परसेन विविध प पतिदेवा तातो हाच निके
यस्तोपत्तेरेवस घन्छ समसापादकःसाक्षापर 107 स
ज्युदर्शयति उपपति दोकविदो पास गतिी। साक्षादप
विपद्धविधःनिटी
संगहिनाअन्चोग्यताविरों होविनय अको क्षा विगहोऽसंगतिः
बाव बनयार पियसनल आप साधुवेनास्याच्या पितातादिति वचन
वासा तापादकाना चानिस्दीपत यू दीय निशानानाधिकालावनिक।
नमधी
हो जाने का दोष न वि अनिस पनि ना मापन
तेरपिटके या तामिति बलमुपपतिदोषागामेव विरो धादिति संग्रहः।
नने
द
व.
विजयः
अमा-.
1 ११२॥
विनामपरनित पिताअशेषनिमहस्वानान्यपि विधा
चांत विवानिवतो
हीशा संवादानुक्तिोनिहा।शनिमहाभियह निमूह स्थानानिमाथायरमरवा
स्थानी बोधीपनिनि
नागवानमाहासादिविधा अतिपत्तिा प्रतिपात यतिधरी के स्वर
सानमप्रतिपत्तिात पारे वापरीतलानावपूर्तिपकिनन्दिननिनस्यान निति
निवप्रेतिलाहानिप्रतिजतिरतिज्ञाविरोध-प्रतितास न्या सोहतर मी तर निन
म विज्ञाना
पत्ता थकन त्रासंकाल पूनधिक नरन्न
नमप्रतिताविक्षेप नतानुज्ञापन पोऽयोपेथी गं निरनुपाडयातुपोप
साक्षासात तिगरताचक यावाद्यानिकाधा यमय पूस्तारोन्मादादेशाला
निसन ऐनतिरोहितोड़ा
हितो डावना वसतिर स्पति कानूधिकतोडानि
तीन महस्थानी तातो लेिकालका
लिगे है पिप्रति
ग्यपक्ष प्रतिरक्षा
दितितंत्र नवयथासाध्यादिनानिर्दिष्टत
गनिर्दिष्टस्यू तथा निर्वाहादर्शने पनकतनाव
पारे साग प्रतिज्ञाहानि नानादिविधा साधनहानिदेव पहा नियोत त्राधा
पउदाहरण तासकेपरात ते४५.
FEE
तो
हाविधा॥पक्षता साध्य साधन धर्मित दिनोषण हानिदानुषप्रकार हो
निदितिया पहि विधा स्वरपूतो विशाष्तश्येनिसर्वापुनी विधाअसहिषया
विषयाच तिसावधाप्रवन्तताडतात
यास्त्रिय तितित्रासहिप यापक्ष साधूनहानिया पवनीम्निमान्यतादि
स्मिनबहे तो भादातमात साहेदु रितिधुर्मवहन तिवारा निहालियामा
नही तिने डावनमारामाचति निरग्निक स्तितिबालाधनहानिया
हदं पूर्वताबग्नि में सावित्रभागबाधा निभाने मास्तुतहि हदू पक्षीति पर्वत
नारिखतिवसाध्य विदोषणहानिपत मानिमानि सत्र न्यथोनशेष
ताई त घेतिप्रिनिमानि सेवास्तितिका साधन विडोवलाही
निर्यथा सुन निधूमवता दयूचत थैव तोलिहिते मास्तुत कमतिर
नववादिसवानितिनाधिमि विशेषणहषिर्यथाभयपनलोमिनमानिय
वदषित हि नाधानातोपर्वतइसेबास्तितिला हात साध्यही
नियुथा। पिताभिमानदेयता महान्सदिसत्रानकोत कोडानेमाने
भाहानसोमितानिति निरनिकोचितिनासाचनानि यथात
विज
१३11
देवप्रयोगप्रयोगेन चैवप्रसुक्तमा-सुप्रमेमहामन्महानसा निमानिति॥धूमवलादति
हानि पाहिदव दस साध्यबैक लपादिनाप्रसक्तहिातहतियार
हुनसोचिति वा साधन कोष पाहानियथा माधवानुसाउणाग्निमान्य
हानिरस्त्रविली जावयाँ भिहितेमातुनहित ये ना सानिमानसे
स्त्रिहिन।सोधनुविशेषांहानिये भायास
चमेनानसावनि
दूस सूइसांसते मारतताह
विवामिवि पहादिय
धूमनानसा मनात
स्लिामिति महा नस दिसली तिवाट्रिबहानि वनपतीयया। पूर्व तो
ते मोहानसबंदिसूत्रतयैवषय
भावनेवलादिसूनअसिध्यान दिन कोज्यानयोगेनसते तुहि मान
दितिअनेकी तिकताभन तितिविडोष तोयाहिद पर्वत
मतोमवतारिसत्र सूचनपसिध
वनपूर्ववत सतत हिमातिवाद
डावनेत हिसास्तुपर्वतोनिमा निसायुदाहतीच्या साचपर्यनुयोध्यापन
सहचारिणीतीय पक्षयाति सजेतिसरनियहस्थानमन्तुकै
अग्नि
धानोतानत्तस्याए बनिसहहेतता असमानानपिततएखपरिहतल
हानि मन डाव्यप्राचीन दोष स्थापनानुपपत्तीन-चस्यान्ता स्वपनलिवि
प्रतिपति बाद निचेयूस्खूबचनविरोधएवाहानिननुदाय विरोधी
नानुपपत्ते नि त दोषपार जिहीषयादिदिषसाध्यागेधिक प्रक्षेप
भी दोषपरिहारतुदहेतुश्यतिदिापसूदसतमा
गोपिनाह विध
সুবাতৰি মাত্ৰীশ্ৰীঅনতিবীজ प्रक्षेपदेना
घा स्वदूपतःपक्षांतरश्यनिरवंसोध्यप्रक्षेवितिसंह।
रित नामांद्ययथा। पूनिसकृतकलादिसत्र न्यूनत याप्रस केही
यंति।हितीयथा बोनिसद्रिक सामीन्पनानकातिलकति
तूदोषपक्षइतिारतीयय यातित्रवधानमः मिसाधनतांदावना
शनिकोबडेता चतुधे यूपा रावती दिसत्र न्यूनत योप केडी
महराया पर्वत जिजास्तुनिताल सववादिस
सामथ्यन्तितसाबिमाकष्टणंगन मानिताटक येथा।
जनाले० टि-ज ॥१॥ रणपूर्वक कार्यमादित्रसिधासाधनबोलाबुपा दानादिवधिनकापानिलेश किलित उदाहरणेप्रयोज्यभागेप्रयोज्यस्वरूपतेदनरत विशेष प्रक्ष पनिटे ती यांग यूसुरतिवदारमनापासप्रति पन्लो ज्यत्तागपूनत्यान ताग्निकरीराजमदितिारतीयू यथा॥ यता काहपुनक युभाधा पूर्ववव सकैतूदुपादाना बुनिल पूर्वकालेति चतुणे या मवानार्वजि मेनि सेनाले पागिवनसते नहानसहना पूनमयया। राश निस नितराणता सूरमाणु पबूद सूबसी यूवकलपेश हितेअपाथवर मातूपा तहमा निगमेनपिप्रतिज्ञाया भिवो दोहरव्या पात्राधिli) सधी पनौग्नि मोलिनाले पूर्तत योपस के तमा न कृतीनिनितास रिहा रहेतु यथा पूर्वत बाधातावष्या प्रातितिा सद्दोष राहतुईचावा नेका तिको डावन सर्व शवःपक्षता नदीप दिया सामान्य नानक तिकोन कीतपिपाई यो दिौमनचदी काय वाति पधा नो
योति पद
व
पतिरता प्रस्तोपयोग सहावानिधनप्रतिशतिरस्येव
मातरवास्यानोच नियोन्याचात प्रतिनिरोधः। सचबहे प्रकार त प्रति
एकवक के वाक्यपदा
या नोडलेस तिबधिरती सोध्यपदय था। विमती
धिर तिघात तिधमिसा थप्योभ्यतविधः॥धमीवधानाबधा
नलतिशत निषेधाद्ययाप्रमयनुप्रमाया
धनिविधानो
तनिषेधापधारावतीमानतातोतिहिटपूटयो यथावसति
दितितिबाहेलार्याइयगया व्यतिरिकमयतिरिक तादिला उदोहरा
यो पदेन साध्यपदा प्रतिज्ञा यामिव ॥परसार प्रतितोह।
विनोधवशते धमिषिसाध्य धामावासायुधर्मिपदया-प्रतिज्ञा
मूव तु विधः।उपनय पदोहेतुपद निगमने प्रतिज्ञावाहिताना
ताहेतविरोधवता प्रतिशोदाहरणार्यााप्रविपन्लोवतोमवेदितित्रि
तितोपन्ययो प्रतिमाहेतु विरोधताप्रतिज्ञानिगमनमार्यों पर तोनिमा
न्मानिरीकदेतीहिरदाहरणयौर्यगावक्तिकताकदिति हेतूपनयोहाय था।
वर
विरोध
टि.
त
अनाममुपलाई ५
॥हेनिगमनमोप्रतिमाहेतु दिदोधवाउदल ॥१५
गमया
ए
पत्री
गेवर उपनय निगलन योरपिप्रतिशाहेड,
व्यःनच विरूध वाला समकत तसा
ध्य विषययातिदशनेन अपनर सनातोतिवदतिमात्र
ৰাজনে নানান तदेवोडायलितास्व।
पि.प्रति
तिवारनामत याक्त मितिवा।
तिवा। दीवपरि
होपयोनिर्दिष्ट साधुको
परोल तयादित
अधिक
1104
हेटरदाहणे प्रये न कत्तांगडनयति साधकाडा तिरिधी साधना
पिया घटांत स्वपतो घृतमति धा। तूत्रावाया ताबा
योगेन्यूनतदानेवदूध
नेतादानादिनी यमविदोषप्रतिकारापति
सद सहावीच्या चधातसाधने होतो महेषमरिहारहेतु यथा
निसाट्रियकला टिस
सामान्य
हरंगप्रयोजकतागययायद्रियंकासोनि
उनिसंडसत्र
नु
तीहतीभानायसाधक सपा सूतोटिसूत्र व्यक्तिगत
दियब कादिसनकातिकतोड़ा
नयलसतीलादिसिसोषपूतीकार या पर्वतारिखमादधुभवता दिसत्र महो।
तीसादिअत्र
सातासिधदेतत्तरमेवोडाव्यमिति।
जानुपयुक्तोनि भारतिवात विधावपतियानेयमतीत तदात्।
तत्र स्वमतेनन या स्य मीमामकुप्रतियथारशनिससचाकालागुबाइतिपरमेन
नयेथारानिय
नत्तमते नयागंधादिक्षित माना अयोसविता दिनयना
क मावतारस्य नो-व्यमान सहित प्रधानता दिनेलोडाव्यनिति
प्रियांगोनिरर्थकातखबर कोरावर
टिकापाठमात्र
लिवर्णविपर्यास कृतात समासाच्युस्न्यात विष्टी मातातिरसकर यदि
कथविद्धापकवालथमेत वहान नितिने नवनिहिकपचिरापकला
HEROIN ति पक्षानवस्य धारवादनालय प्रमा त३ रिजा 1॥१६॥ भोपविनिमुहस्थता अन्यथालान संगहना व भाषमाप्रसवेनान प्रतितदनाम स्यात्तराधिप्रसेगादितिया बयोन वितातीर्थबोधन ॥१६) সদীলিকানাবনি ২৪ मनपेक्ष्यके वनयोगेन नि बून नवा याका मतिदते दित चेति आधारस्य यथा त्यतनयाहतुर ঐ নীলিকানামী-সব্রিালহান পিতল লাল দল। पना या बस्यो अवधानादिवाकांकानिरासाय पुनवचनप्रातिपक्ष्य नितिनियनश्या तत परमसातत्यपवनदोषहीदतनिध्याद नाही नको दि विजानीयादिति अनन्दिताना चकपदी दिप्रयोगोऽपाय बध सर्वावस भवदन्वयपाशिदा दिनानिषई नजाझिनमिसाल दिसनवसना । विवक्षितत्र कमविण यो साप्राहकाला भा म
मोहवादशलपयोःक्रमः सो दिसंग्रहपुरस्कधादियानन्धलाश
नागना धायालासोधार कारणोयतत्रिय दिवादि
तिंदार तविषशास:येदातासोधानान
न प्रयु तदापाबादीशविपयाँवामा प्रतिवादीच ययावपक्षसाधनमूल
धायपर पक्षर पति तदांपासादविपयो काधमलासवनिमालिस
वयूव वित्यसिदिमाई साध्वयांविषयोसवित हाया
सानिवादिनः साधनातावादाविक पसातावरति अवस्थामा
लन्यूतमानुपादान न्यून तदपिबई प्रकार कथासमय बंधनतासा
नयोगाराज यली साधनप्रयागासो धारेतंत्र
गनी प्रतिवानपि वादिसाधनस
नाति धान पवितावा तदन विधानेवाइन्यून प्रतिज्ञाघलाव बयवना
व न्यायालयावयवांमदावा न्यूनो इद चहि तिघाती हो सावनी
दि
यितास्व
नि विनमपसिधांतएवानिहिसियानकि धकरणपिसिधांतःविधासनिगह स्थानानामता प्रमाला గించాల ३ |॥१७॥ 19 पातविना मतदैत्युपगमे वस्तुततानसारगतिान्नितोपयुबपुनरुकतकार्यप्रयोगाऽ दि कोतविधीहरुदाही पनय दूषणातुवा चिोदन प्रतिनिगेनयोराधिक्य मेका क ते पुनरुती अन्यो थत्ते प्रकृतसंगती वतिने अंगतावपाक विविधता शवजसामान्यतयात्राय यथा धूमवतादालोकविशेषतादिनिधभवादेविति यथा द्वितिय यथाध्यभामहानसा महामारडता,धामूहान-सादिरितिकारतीय यथोलिभाचा पंधूमवानालोकविशेषताकधूमादिमानिलिया। चतु धयचायथाअनैकोलिक हेतु कालातीतयेतिअनेकों निकादिरितिका पंचना दूभागस्य स्ववलनेनानुवदा आदिशन्नति प्रतीता स्थपुनःस्ववचन प्रयोजन विनानिधानंपुनरुतीनिहिविधी अथ तेशदाताणाक्षेपत तिन्त्रिापथा।पर्वत वढिमानगिरिरनिमानिता यथारापर्वनिमा पूर्व तो िवितिनलीम यथा जीवभत्रोग्हेना-तोसुकाबहिरन्ती तिवाद नोक्त त्यानिक विज्ञानार्थता वा दिनाप विषावापुनर यदि तपोवारी, याप स्पस्वाज्ञान मनाविद्धताकुथा मविधिद तायदप्रसुवारणमन भाषण चविधीयतादसायनादौष्ट्र के देशानुको दो व्यधातुबादः केवल दूषोक्तिवरणीसा मान वाति सर्वजिगहस्तानातूएगीभावेदूषणायप्रवत्तेशदूषणमात्रानिधानेनिराश्रय ट्रषणस्यादृषकलाददाअन्यथावादेव्यतिधिकरणलानार्थकदेशानुवादेविशिष्ट्रपला तीदायतदिसाघनुवादूनवादाविशेषाचदूषेयावत योग्यतयाविशेषीस शिसदि पलादिनोसन्स्योरपिर येतातो योग्य वायब्रुवौनियमभावी निवपेच ति॥ सोन्मप्रतिभावानातर्थस्यू स्परतूदुले रस्यापिटूचबाता। सभा क्षोसाट्रिना देएगो सार पिपत्तेनथाचा नैन शाषणमे वनिणीत नान्यदितिवानिनो त्रिर सिस्य परिषदाविज्ञान थनिय वाक्यस्या भोप्रतिपत्तिरज्ञानातिनाविधारणतात यायभाना स्याज्ञायतेमयो। अगाविष्टोवननुशाषण मेवेतिलोदिनोलस्यप्रसस्पात्रतिपति प्रतिभा साचा । नया ऐया भाववाअननु वादेनुनुमाषणतोदोकपाटादोअतिरप्रसंगा। नचि माजेनकधानिछदादिक्षेपापाअधमेमहत्वयोजन मस्तिनिर्मिी लवसित-स्वविक्ष्यामिति अनिबत्र मेणेशपादनमतानुज्ञा यकिनबिस्वस्यन RAPI तबारः पुरुषलादिसत नाहितरवतवापि चरितप्रसंगइतिहानलनेन) लनचोरत परिहतनाच्या प्रसंग।इयापत्ति पनादितिअनस्यौदाव्यत यात्रा सिनिमहानानडाबलेपनुयोध्योपक्षणानुदमप्रति लेव्स्पुरतोदावर जपलेनीयाणसवात्प्राभि के डायमेनांवादिनैवाजस्थामा होयमयेदमुक्त aon 2" umeनादेनजात मितिअनन्तिमहप्राप्तोतलिमहोदावनतिर यो ज्यान योगासच ॥१८ विताहान्यायाताई पासव्याहा बायप्रतिशतमन्यप्रासाव न्यौहानबान तमायोपिढेधासारयादिनानासाव्या महिनायूवेतिाइतोयोलाबारी हावा अनेकविलास रणेनोवलप यु तानिरविरलपसागप्रतिज्ञा हानिरियादिदितीयायथागप्रतिज्ञाहीन्यादीप्रतिज्ञांतराविसदितत्तु नि नावसरममाव्यतिम्यूवातन्त्रिहोडावन मनातवाले महनाअनकन्यामा मालो नातं याचपटे यात्रिविधीवडोवकील नत्रीच्यमान या धनपादादिका था नितंरकलिदायूतोनि हस्छानमितिमादिशातिनिशक्त मासि १ बातम्यतदिनांगीकारोप सिधांतापामा जिलयात्युपगतात धारा संतुविधा सबवपतितंत्राधिक पोर युपुराममि बारदाना सर्व नाविकधी पप्रतिरसिधतिः यथान प्यायकोनामोश्चरप्रामाण्यात स्थासीकानुषंगिक सौधिकरणासातःविधेयर-स्वरयंकता वा१.
त३
शोसार्बोहालांतरेक्षतं स्वशास्लेचानिविधायगलसिधांत
यथाम्न सूईदियन अपूमधातीय भयन विधायदा मीनिवसर्वह
प्रतिता धितमुक्यपगव मोसमासकस्यसंबंध
गोदशनचायामप्रमाणावर : उमस्तिदा चायाको प्राता
व्यास मनातेवघाण विरोधी प्रसंगोदामलप्रमाग सदेहादिताहते
सतरूपेषपेक्षध्यापकासपूक्षसूतविपभाधानता बाधित विष पतासन
तिपक्षकै विद्युता कैगविहिवाहताशासाःगत नासिक्षविरूधनिति
कानावसितकाला सयापदिएकरणूसमसतिषभानावयाप्तस्त्रा
पक्षधप्रमिति सिधित दहितोऽसिवितासचंविधव्यातिपक्षत
मतानीतिराहिलेदादालत्रयाणवासियोधावपतोवेयधनो
तवाचायथाविलवन तिमि यथा घा ताब्युथविशेषणांसिसायथा
शनि सासामान्यव सतिकतक्तादितिय विशेासिटायथोकि
बक लेसरी सामान्य वहनतीसावाआमायामि शोधा धागसाय
नयेबानाबाद। प्रधान निसनकायला दितिनिश्रियैकदेश सिलोया
EENA 2-ज- अकरा मिला था दिवष्यतुत्रवेद ४६ एमाल- योग्यौनामा विशेषगवैय्यपदिौर ६ १९ प्रधानपुरतिसोधकार्यतादितिवादिनीयोय था। रमायबोनिसाअकार्यतादितिापक्षधर्मा ॥१९॥ सुसिध-पंचविधान त्रस्नोसिधायथागराधानिसमापुतेदेतियायधिकरपासिभोयथायट स्पक तकात विशेषणोसिधा या विक्षिषतसलिमानान्यवतादितिविरोधासिधायथासिता वहसति चाषतादितिनागामि शोभा प्रियानानंतीया ताक्षितासदिग्धव्यापतासिधाया. सत्यागो मेवातनय तादिति सापाधिक लेनव्याथलस महातगासौदग्धाश्रयो यसो भविष्य देहा देवपुत्राबाला ब्राणपुत्रतादितासिदिन्याभूयेशासिधायथाधूमबाष्पोविके पर्वताग्निमानधूमवतादिति सन्धिविडोषणसिधायमा विमती रागादियुत-सर्वदा विज्ञान हितसति पुरुषवादिति संदिग्धविष्यासिधा युधा।।पुरुषतेसूति स्वंदात तज्ञ नरहिततादितित संदिग्धशागा सिधोयारिकेत्रनिकायअन्य निश्लये पर्वतावोग मनी धु मेव हादिति। विवाषवैयदिौसंदेहेनततिापक्षवि पूक्षयाने वर्तमानात हलविसतिसपक्ष पक्ष विपक्षव्यापको यथाशनिको कार्यतादिति पक्षव्यापकवि पूर्त कातिया सामान्यवसिपस्मयादिबा दिययावतादिनापक्ष विपण देशतिबंधापयतांनतरीयतादिति पक्षकदेविपक्षीय समचा रथिवी निताकत तदिति॥असतिसपक्षेप्रथमोपभाशाकाहा विशेष मेयतादिति दितीयोयथाप्रसवक्षतादितारतीयोपयोधियतनिती येकतादिति सादवि धाविधानसपो निधनान क्षतिगप्रो। ४४३वति नई दियः 17 तुईयथा।अपदानवतादिति।पक्षत्रपतिरनेकांतिका लोपिबहप्रकारातिपक्ष यापकोयधाराहानिस प्रभपतादितिपक्षुधापकासपूर्वेकदेशत्रिय थापिसक्षता तिक्षिपक्ष्यापको विपक्षक बतियथा अयूगौनिषाणिवाढतिपक्षविपक्ष कसपक्षकदेशतिर्यथा अयंगौन बिषाणितदितिपक्षत्रकदेडोर निधि नोनिसानसूक्षवादितिपक्षसपक्षकदेशरत्तिविपक्षयापकोवधा आसमनसोडूत्येव मुर्तिवादिति। पक्षविपक्षकदै शत्तिसपक्षप्याप कोयथाराआलमन सोनद्रव्यमतिता निसिपक्षविपक्षध्यापक पक्षकदेश निर्यथा आकडालमनोलिय यणिक विहोई सुपरहितहादिता साध्यधिक पक्षएवं वर्तमानातुरनध्यव सितःसनानेकुत्र कारः वि यमानसपुतविक्षःपक्षव्यापको पधा। सर्वमानसंपनेयतादितिापक्षक दिवालिथोगकार्यतादिति विद्यमानसंपक्ष विपक्ष पक्षयाएकोयथाशशेऽनिस आकाश विडोषगुनातादितिगतदेकदेवरातिर्थ या सर्वदयमान संक्रियावादिति ओव चमान विपतोय धाविद्यमानरक्षपक्षयापको यथासर्वकार्यवनममुतत्रिमतादिना पक्षकदेशरतिभासावयवतादितितरतेचा सिधादय उमान्यतरसमसाविधिः विरमादित्रयस्यासिधिमाका पिउभय व्यवहारविषयताविरोधः।प्रमावाभि प्रनाल हिज ॥२०॥ तविषयःकालासयापटिषः सोयनैकप्रकारातमक्षबाधितोय था। अग्निरनष्णापर्व लादिति सक्षबाधितहदेशोपथा।लानही सौतलो पदार्थतादितिअनुमानवाधि तोयुथादेवदत्तचक्षरहितापुरतादिनिताअनुमानवाधिक देशोय यादिवदन निरनियारहिन पुरुषतादाताअगेनबाधिता यथा। सुराबामगनप यादवदव्यता तिनागमबाधितैकदेशवथा सुनासामेब्रासंधान योद्रद्रव्यतादिति सबर पक्ष सितावपित्रिन्यो हेतुःप्रणरसम विभा विमन मध्यावादितात्त यत्र नै चादिश्रीदवारि नोराभिमानिक मिनिनासंभवतः। समबल तयातिमतप्रभावित तसविनामोयथाविनतरवारिक्तादिसप्रसक्षातीतोषिकि नवा दिति अनुमान सिधोया। आकाडानिस समयतादिसत्राकार मनिसमस्य दादिनी बाँद्रियगा गुगाश्रयतादिति अनुमानार्दनिसमनिस्यादितिाओं गमूविरोधोपाप्रधानन स्वतंत्रजईलादेसनकापिलोग मास्चतत्रम् पिकिनस्या दिति उदाहरण पनि युक्तःकश्चिद्रहित उदाहरणालासा-गतिवानेकपूका । नित्रसाचन्यूहिसणैतोवसाध्यवकलये या मनोनिसमूतलावपमततेदनिसंग यापरमापति साधने वेकलापथापाकीतापवैक लय वा यथा अयं महाराषकतिष्यति।सोमवशेडुत्तादाजपत्रांवदिति। कारा मिति अनबहीनुतं यथायथावाविषाणमिति अव्यापानिधानयापयदिति भत्तयचाचूटतिविधन्यौदाहरसाध्य व्यारत्तो यथा। यूनिदी निसनवतितन्तनम नति युधाकर्मेति। सधनायारता यथा। यूभापर परमामुदितिउत्तयारतापाया घटडूति आश्रयही नत पूर्ववत् अव्या त्यतिधान यूथा।मितताकालावदितिविपरीत या पनि मान्यथायोलेनिनवेदितदानसेनव तिबधाकामिति सम्धिसामा धायिन सारागादिमतादण्यापुरषदिति सदिम्बाश्मोत्सयोधागदेवदत्तात गंगनियतिधर्मवता देवदतांतरवदिति संदिन्याप्रयापथायथा नविष्य व प्रादेतिएतेष्वेवप्रपोगेष संदिवसाध्यव्यारत्तोप्यायचा-यांनाजपुत्रासदि साधन वाचतोय या सेनदाक्विालिशतिसिदिभ्यासव्यारा पथोपा ध्या पुरुषर तिसदि चाय परवदिति तूप राहति जाग्य सादिता नया सम्म तमि विकलं तेकामविवाधिन चारा याच्या सिधिवात युदाहरणक्षाआदमूहि ताभास तवति तथवा गोडाव्य हास्य नितिजारतेष यानिनिगराननितहत रोधादिष्टनात विता हिदावा पानिजोहान्यादीनापूनिवाचन दोष विनोधादिव पनि विज्ञान सनऊ है संवादानुक्ति सुताइ लिदातिवैकलपाहि प्रतिपाले अपने पांगों कारः रि अब 11 प्रमाल १॥२१॥ गादियानारावादि स्त्रसतिता तापनाची महाब येनंतोहभाग महाप्रभुसता साक्षिपदमझेदन-विभोने घोनेद्रियानमाटेस्चनपद वति। अरपान दियस्वाक्षीमच्यते। सजातशाल वनपातस्यान स्वरुपमाभि बाद योबहियाका कालादयापिविषयासरवादीनाभिन्न दियविषयात चिदमोक्षचन विषय तापाताअनन्यथात नियमहिसाक्षिणएवं धर्म हत्यूस्थानचकालादे मोक्षिविषयात पू यत्तीन नचंझुना द्यावे यतादामन सोबहिर तयात्युपगमाद अननसहितव्यातिनामूविधतीतेनीनुमान व क्यता जानिबधिराणामयुपले ऐन नागमविष्यता पोति अस्तप व वाडिया সকল বালারহালেই तभूषिताव थाई चिन सावविद। चर्षि पक्ष ईहाललोयोन्य পানি प्रसंसाचा सहिद दिन तव्यपारतंत्र्यात्यात नाईनु है कहविधी म
1076
तयोगिनांदेडाकात स्वभाब व्यवहितार्थ भूपिविषयीकरोति प्रयोगिनीठदेश
युवाहतीथमने
(तविशाठवःसरकारसह रुतावनानांचा यथादेपूइसादि
लाकारहान जनयका यह दादिपमात्रागानित
जायणनना विशिष्ट विषयासविकलए काय धायाको बार्नोगतोतिहितिव
दिकनिति निविफलपमेवप्रतक्षति
सदस्य
विदोषाने (भेदेन विडिवोकस्य वसाक्षसिंधलागतेनैतेद पिनिरस्ताव
शासनिकर्षःमोदनिघतेसपोग
মাসদাস,
समवायोंकि বিপৰীৰিাসৰ শাখাৰ পৰিৱৰিৰ শালা
साआमशानात संयहसमनायनस्वविएपन्यासूनवे तयणक सामान्यज्ञानीत्र
मनशानी उसने नरम्झानोरेवस्यक समवेत समवापेन्गुणकर्मसमवेतमा
मान्नमानी माणसवायेनारज्ञानातिन वसमवेनसमवायनशासमवेतसा
पहाविदोशक्षाविनस्वस्वविषयत्तिसमवोपासावा
तिीयुक्त पचविधनबंधसंवतत विशेषणविदोचनीवनचविनवणाच
११२॥
समवापतिपथा चैहतलेघटानावासादिश नहियलाज
तिकवलप्रमाणनेवाली
निवांच्या अतर कारस्थप्रामाण्यमकापततने
युतीनदिस चारोबाध कसंवा नयिनशामाणमोपदेवल स्थ
दिसाम्याद न चासावकोतवाती अनि ति मनिकनपला अता तथैववाय
जान्नानुमा नागमयोगमवे केवलप्रमाणस्योतियालिस्तिरोष यथा पशान्ता
सुतआहे-मानस प्रसक्षजातिः लक्षणबसे
बकवलप्रमोधी।
वावसस्य
विधाहतान मनेाजन तितितदिद्रियाधिमारलेनदयविषया स्वात
यूटधाण युगनसंग योनिमत्र नाज न्युलाए
संस्कारस्तुत्र मह कारिमान बतावता सुक्षजन्यहा भाव।
प्रमिलानवदेनेति नचाचाहीत नमन्स सब्लिक पायोगेनारक्षित
जीवनाती अतीतादिविषयूयोगिप्रयक्षप्रमाणाअपितातापाता।
केवलप्रमाणनवनभवति निहीतयोहिंवाद अनुवादवाअत
गजन्याम सप्ताह। सिट सनुवादयोनत्रिानोध्यान रोहीतगा।
ज्येषस्मर
क
Fok
होतंटामिनस्तरतुवादस्पचाप्राण्यवाच्यारभार
ন থাকিস্তাবিপ্রবি
ग्निहिमक्षबजनिसादर प्रामाण्य गीत अवारों
माणनेवीय धावूध तादि तिाअन्य स्वामी नरति प्रमाण भय थायला
हिवादाबायोचिन्मयतेत दोसाताबापू विस्थायानिकेत लादितिसतानान
व्यतानिति तंत्राहपथार्थतानुभवात्म
तस्पताहेडा दान डोलेप्रमाणस्थयां गायतथासस्तीका
पवानुमानदेरपयार्थलापानात कि नोयडा कालीनुत याथायरायविषका म
দরবনৱাকালাহলনা হায়াইনকালিবশি।
तदा सौता हाइति सम्म तिरं याविषयो कतिहिनदासीनताशइति। न चा।
योनूरतवावस्यतया रम तर भविषपा के नै छ । तथाऽननुभवातून
हविषयी अतिप्रसंगादिति अननु ते तावन्मान विपूर्यतस्य साक्षिति
नौतिपूसंगो योगाद तिदिदमुक्त यथा
अहानेहमिपदमानित
निएमालापलक्षात त कानप्रमाणात रामनग्राहकाप्रमाण
वयाशकाव्यवछतदनुग्रह सतत तस्याप्प मानवधंधार्थ
1 प्रमाला हिज नुभवादा अहाने श्रोति। विरोध सवादाअहाने येति विरोधादिषसर्वनियहरशनाना वैनिय हस्श नानोमनीवुड सक्ती त दर्शनार्थी ॥२३॥ धनीसमयबधादिता दिनबसाक या योसनि पसाधरणा साधारणश्यतितित्र नाप्रमाणस्वनीवर, शिवति वाक्यविरोध विजयी यतिमाखूवाक्य विरोधोऽपसिधारजातिपेनी-विविधत स्वाक्पतादपसिंघात स्ववाक्पविराधमतवाली। जितिरकवाक्यता नापसिधानेसंग त्रिविधास्वव्याहितितारकली व्यगतपूटादेरन्यान्य प्रतिस्पर्थिली स्वनिपाविरोधःतहान्य न्यो यन्तडाक्या घनतिनत्रसमूयवादीप्रमाणविरोधादिपूर्ण वलयनवादाव्यतिस ज्ञाने नसावक्षना विनायनिदाहरीत जतिन भयमानाप माविकका क्षे वाहतच भवति आदि पदेन सूनसाधादावर नवजामातावधी प्रमाण बाधितअंतान कोहनि मितिबाह स्वकिपीनिधेिइतोटितीयजतिर 1049 यभान ये माना पक्षाना स्तिो स्थापन यंतागायथ्यालानन्यायनैवविध অবৈীব্রইনিৰিনিসুলগননা। সকাল-বৈআইলা বললালাগাদিসু* तिला ती जासुदोहरा जितिनले यमि ये नातिःस्ववानावना एकतर्गत विउमानमविवाहाघोपी साहा।। मान सनिघश्य-विप्रतिपन्नघमाणसापेक्ष प्रमयतालगने ये मानापेक्षानोलो तन्द्रयविदिल सनमानसस्वादाप्रमागविनाधिवेय जातिवली तिपूरिसपोजनीय तदनुनप्रतिज्ञासन्यास विरोधाप सिधा नानानिरतुया पानुपागेचजातिनिरोबर वानव निःसवितोमवतासन्यासस्पनांनसिधापनापपताताप्रतिज्ञाविरोधस्येकवाक्पग पदादिविरोधपतात अपसि भातस्यसाक्षाइह गाय परोक्तंजानःतिषचालक तीयजाति-पादिति।सिधमपि षणासमधुमुत्तरंजानितअसामचिाहविथ सा धारणा साधारण सा धाराबालिगा असाधारणतु युक्तोगहीनमयत जापूक वियोव व विकलासाध्या सिंगप्रतिकतानुतक्विाप्रकरमा। साक्षयाला विसरः मानौप्य माणदीपकला लालित्रतायुपेतंयुक्तांगेन प्रतिष प्र विज पा ॥२४॥ तिप्रमाणेनप्रतिपक्ष सयवस्था प्रतिधर्मसमासाचसाधर्मप्रसव स्थानमाण २४॥ नाविध प्रस्थान वधार्थ समझयथा यदि महानसूसाधादवेधून्यूझिाडा धनवहादसपूर्वनो सिमाजहि हदसा चम्पदिय हासिक कि नयाविशेषादिति भानहानले धुम्पावर्वतता सवस्थानदाहरणच द्राअचुकांगहीन होनप्रतिपक्षाणापले जोहार संप्रतिपक्ष तिदक्षायानेदेसाधकसतपक्षता दिति नईषकपदा पीलादितिव्याचातुई विवादिसाधनसामर्थनबाध्यापक उक शिविनावस्पतिदनिटदधस्पषोताक्षोउकर्षसमगायधादिधर्मवतालहन साल पर्वतोसिमान्तत्तिस्थालयादिनाने विशेष दिशा अत्रसाधन-सहच सान बीजविडोषांवर धसमारोगव्यायभावनांवाहानितदूनगो का निद साध वनक्षतालियसाधन तकतेतदिमितिषेधहेतावपिनियतका भनकतकतवर्ततए बहे तोमवनस्पान तिचस्या दिसक्त सान्या धोनी व्यापक किशर्मसारी वाव्यापकनिरसोको साधनोरन्यरोपी पदषसमःयथा महा विमविस्व नेवल क्यूनाव्यापकस्यालया लक्यूनाव्यापकस्पालपादिमतपवनाबवित्त पोलियोको xमान नछांव वतन प धिनतादल कृष्ण साधनुदा हापिति प्रतिभूधाडेगावपिचदाले साधुकर२ बिनवियतनासबालिनिष्ट नियातहति भवतामधानानभन्सी लिन तयारसूपलंगडतानबीजीताध्यापकवाधितविषयतंसापतिपतवारोण साधना पेर्षि नि ततव्या त्या वायुक्तांगसागातदनायुपगमेनेदंसाधक तापिन्यारतीय पकसमा त्योहतिरितिपक्षमात्रवि क्षिपोतमततदभावपासपक्षस्य साध्य हापा दनवासमा असिनाथस्थलमारश्यसाध्यज्ञापनशक्तिमलम यातियाहामाया न्यूड तसंबायसूमा विषयत चनपविशेषश्चतानि नो पक्षमात्रविवक्षित विवक्षिपतित्रासिधार्थ इव महाजधर्मनतपर्वतेनवाआश्रमहा लसापिसाध्यवतेने साध्य स्पावाअन्यथास ध्यवेकेलयपिजीतहिते यनपहेतुमायूसाध्य स्याह अन्यथासाध्य कलया पानादिति वरपालषदष्टव्याअपक्षमात्र विवक्षितपशुवत मताद दवनिमुशान है तुःसाध्य साधनजले आरोपवायचंत-साधनागसाध्य विकलवादिलासत्रपियोत साध्य स्यूवतुवाक्यताघातविक्षतिपदेपालपक्षवर्तिन्यपिसंचरणाविषयूल वचारतोगाधिकतमसाक्षरतनारयुक्तानामवासिधातादीनानगी कारादिल सपक्ष मोनाविवक्षितपमहतदक्षायोःपक्षस्या साध्यांपादनमण्यम सितार्थतंघात माहीतता नीति तोलावाव्या सिमहकप्रमाणत नश्वसमानों पर्यत खेतपदये गावि है तो सपक्षमाधविवक्षितलमाणिनित्र सिसाथ धमबती हानसहपतेनावाचि साध्यास्पसिधातासो नसाध्यः स्यात AR रिज- चा तः स्वरूपासिलवनसाप्यः स्यादतिर वेनुपातेने वषियोअत्र सक्षविवक्षितनपत्र वा ॥२५॥ । ॥२१॥नत्यापेक्षस्या निरिक्षानबाजी स्वपीति मायातायावठर्यसभूवनदन्येव मलामता साधनस्य धोवर धोतरासायधमणधनात धर्मान रेणवायविचारेण्स्ता धनस्यालिसाध्य व्यक्ति चारापादन बपनमः।तिनसाधनस्यधमांतरेणव्याचार विधवापरात या वृक्षारयतो टोयोश्चतिंवायाचयानिहानसे धूमलमविर बोली लेन सह वर्तमानमापय था क्षेतेन सहनवतात थानानिममूसह वनमा निपिपनसहनतलहविदितीयोथा।यि भागिरि शिविरयोस्चनीचतात्याधा महस्यव्याभिचारतियाग्निमतेनापिस्यादितितलीयेव थायिधामहान समारलपतन। हताश्यामवतन्यतिचारतिनिथानिमोनातिव्यनि-बरेदिति धर्मातस्यना साधा बया यूथोसाव्यतमाम मलनिवाणित थाधूमतमापस्यादिति॥धमीतम 'स्यध मौतेरे गयधारावधानपरसस्थ न्याभवारिकाधमवतमग्नि महति चारिस्या अजबूचि पनि चारा ददनिमुसा नहेतुः अनैकातिकतमारोथाअन्यन्युलिचा रिगायनि-बाना पादनव्यायनाचता नहीं निकाल्दगीकार नद साधकमन कात्र नं कतादिति निषेध है तोरपितभातापातन व्यापइति वक्षा दीनों सिमानामपि निव हेतुनासाध्यतापातनी साध्याममा यथावतानस्य वधूमनतवत्रयोती ।
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সুনিবিল
সাইরহীম!!
अन्य धावक्षम
जकता
সর্শীবীর মুসলিম অবদলাইন থাকা বীজ
नामाभिधान त य यातनापुल्सनाकामाशायी या अहवालान
न्यता धनातनायुक्तोगाधिकलंचते ने कहूँ तुना निवरयक तात्॥तिशतमा मेस
ध्य सितिदर्शनादित साधनत्य साध्याप्राप्त पक्षनिरासन पेक्षवडोय
प्रातिसमाधिनजान माग्न जाना त्यातासादरमद यति अप्राया।
तिसोगासायतिवति व्यौता प्राप्त रितिप्रागैवाग्नितज्ञानसावाब
रबमबना नव हितजा यतिमा यात्राप्यवाहितो पतिसंगादे॥माप्य तिवक्ता
लिगू तो नत्य साधप्राविश्यविषयविषयावर संजबाता तथाचधू
मचनमान निति अप्रासाबाबतिप्रसंगांजोशी
जसाध्यस्यात शिक्षाधिक विडोषणस्यानिशीबाहिशेषणासि धारा
पतिषेध तावत्पप्रति प्राप्याप्रायवेसा: सान्य नव्याघलिअयुक्तांगाधि
व्योमलिगविषयसंस्थशलादिमिनिरासेना प्रतिपक्षशेष वितात
नेवहितं स्पापि
GA हिज कारदह गाळाकिमुतादादातस्याप्यत्यादिसनवमछाकस्पाचहराणाधावान्यस्यापि हिप २६ पणप्राप्ति समयापूर्व सरपट वादनापतिमा योनिच तपकीन यशाप्यूल प्राप्यदीपावयित्रक शतिप्राप्ताबुतानपति निसानहेतु। विडोषण न विशेषणासिधिराराणा ववश्वम् स्थाषिक्षादेशादेशापकानवेन्छाप्रोजनप्रसंगसम थापेवास्यापिन यसंगोतावधाप्रमागविकिप्रमाणं तनापन्यादिसूनवस्था कस्युचितारगी तो बिना सिविन्यत्रापित थाहापादितिवारंणा सिमानावहापिरहीत रोयो जात्रे प्येवं वक्तुं शक्यताधा धातः॥अनवधांगमलक्षरता वोन समय पाहदपुर्वतोनिगिकरवेति निरनिकोपिनिलसदितिक्षा हेतु नगमायातिदेवशरतबिमानउत्तानबीजाबाधाद्यारोप्या बापागल्या कबलेतादेरनपगपगमाद्य की गलागणासाधनस्पतुसाहीसावा अत्र तदनुपयामानालस्यान गः प्रतितोनकोनसावादितिम व्यापतिइति शादी ताजा गुप्ततेहेतावनासि युद्धावन मूत तिसनः यथाशन या तत्ते पागविपक्षद पन्ले तस्मिन् अनेन वस्याभाभागा सिधि रिमादित्रादुप्तन्त जयस्व कार्यसाम था शिलानभानकारीभसिध्याघारोजासुहरे वक्तुंडाय तामाबातअनुतात्मा देयूक्तांगाधिस्यादितिचीता सतविनिपकार संशय कारणमात्रणमायाणा संशयसंमपिदिधूमवताविमनिश्पतहि हद महानसंसाधनगदयौनता रायस्यादिति।अस्मान्धमीदे मात्र दर्शनतराहे तस्ये निन्यायक ताभिमानयाधान तुशासतिसातमारोप्यु निर्णयकरणराहियस्यसंशयांगस्थानगी कानासंयिक) रणराहिमस्यायुक्तं स्यन निर्णयांग तोगीकानयुक्तांगहानिरयुक्तोगाधिकाँच॥धन्यथा प्रदूषकाटूषक साधणदिना जाता बषिसंवायेसँगेसाम्या धानति अंगोहतनिधिहब ले लेन बाधबादनंप्रकरबासमः॥यभाव्यतातर्वतीनखिमानने तिअप्रतिप्रमाणाप साडेतानहेतुःबाथ रोष्णुः॥बाधकधिक्बलतूपांगतायुक्तांगहानिः बाधूनतम्या धिको बल होगी कारेछापन यैवजाते पत्राव्योहति विलिहितो माध्या सर्वापर सहभाभी निरासनातवापादनमहेतुसमभिपणाधमवतात अग्निमत ज्ञान मिताकि इत्तानहरताविउतसहवाविनायः॥नाध्याशानेत स्थ-साधनलायोगात्नहिती यसचिनाभा माध्यस्य ततायोगात्नत्ततीय विदेषिणसाध्य साधनातावायोगादिति प्रतिवर्कप्राति सानवी जीभन्यो त्यानेवायारा प्यो प्रतिषेधेपिकिंत्रनिघे ध्यारर्वजावितादेवीयता Chut अना ॥२७॥ यातइतिातोपूर्वता विनापश्यादाविजनदर्शनात-शतोतुयूधायपूर्वमायादिना पश्चाद्धाच्यादेश निदर्शनातक स्य या तिहीनदयुत्ता गहानि का साधन सादिव्यवहारस्य बुधि छन्ता व्यदिताप ॥३० घोदिदमक्षित मिसर्मि मानेनोपरी तारोपणन दोषाभिमान पति समय थोपवतो लिने अदिापोयते अन्य दक्नि मारितिातथाच साध्यविकलोहतत्यादिवविदोष विधिःशे पनि धगम्यतीसाघतिमान शानबाजी साध्यविकलेला यारोग्याव्यासेर भावाय को गहनिगात दनक्षमतनमा धकेमिसुक्ने अदिाचे नातेऽन्यसवसाधक मितिनात याचनावरतिव्याचातरतिसाधन प्रति घातदितरधर्भातहतासर्वपदार्शनोमा रोपादानमविशषसनः यथायोदघूमवतात्पर्वतहानस पोरग्निमविदोषस्तहिंद्रयता सर्व व्यागानिसले स्यादितिनपविधर्मस्य विंचिता पकलीनोवोभानबीजौतिके हाहरिनारोच्योगव्यातिहीनतात्तस्य युक्तीगहागि अन्त्यसप्रति पन्तस्पर्चत पनाह तले साधकलाविशेषपदार्थलाल स्यानिसलाविदोषःस्थादितिव्याचा इतिनतक्षेपिकिंचि मागम विष्यतीति तदुपादान मूर्तिसमविभागमा पभास्ति तत् क्षेत्रमाणतामाने पिकिपिविष्यतिय पक्षलादिति अभावतःप्रमासंभवासानजोजोबध प्रतिषेपोगा लोणतस्थाषिकश्चिदोषामविष्यतीतिवत्तशवरावाधावाततिपयुक्तांगहानिश्उपा प्रसनु पन्तस्य प्रवाच्या देवास्थर निया दिनानादिवास्यं त्याव धारणेतात नारायवेव वारणेविकलात षणमुपलधि सनः यथा पर्वतोनिमानसुल विपर्वत ० नातिमानुत पर्वतोनिमानेवेतिना घमहानसादर प्याग्निमतादानहितीयः।।कदाचिदनाम मतादिसाद वाक्य त्यानधारततर्यवाक्य भा वासिमानमानोभानबाजधाधारोप्याज सुरेपिअस्पूसान्या घाघातामुक्तोगाधिकाँचअन्य व्ययोग व्यवऐदस्यायुक्तादिनिक पिल याविषयिधमीणावामोदितदूतावना विकलपात्तयथाव्याचातापादन गर्नुपल मिसनःयथाउपलधतादिदमस्तोसुक्ने सोपलब्रिस्चामत्युपलधितयावर्तन बोआव नोपल धिःप्रमेयवदुपलभिताना हितापेपिन था॥प्रमेयवदालनित भारत तथा चोपका मितमतिर बमनपलब्धनिदना तिो सुक्तेअनुपलनिस्वालन्युनुपलधित्यावर्ततेचे भि येवूदसतौस्यानाअंती चन्नान पलाच अनुपलध्यताव दनुपलधिवास्तितिरिसाद अत्र विधिमीपल भिसा नबीजप्रसिध्याचारोण अति लोहेरिसमितिःचालीन तथावर्तनतिजाहतावसभावाद्याचा ताअयुक्ताधिकच स्वामनिवाथास्तरयुक्तता न द्विषपेत भारतापपत्तेरिति विवक्षितस्मकस्पधि हस्पतटू पती विकलपतहषजन धर्मिण स्तुति विशिष्टस्यवनांगानिससमा यथाराष्ट्रोनिसईसक्तेन नितमनि साम वनवाहितीपतरावो पायाश्रया सिध्यादीतादि अत्रेधर्म पमिक्षावनिमुभात बोलतर्क पहातिरमाणाध मधनिभाननिसि लतिरपानानाननसाव्याघात तक र या पप्यावाकाजूांगहानिश्लवरिसाधनप्रतियोधनों तरे पासर्व स्साअध वलापादनमनिमम यथादिमहानवेधर्मवतात तोनिमानुत्तहि सहादसवमग्नि टि. माल. दिलिअविशेषसमापांत्य विशेषमात्रापादनमन्य समानीव्यात्यायनावायक्तीगहानितातदार ने युपगमे यूद्यसाधूक प्रतिवदीयस्ततादिदनसाधक ते हि पदाचतात सर्वन व्यसाधकस्या ॥२८॥ शिमोधातहतिापक्षादीनानन्तर स्यासिधि नंदाव्यतत् साधुकते नस्वयमेवोपेक्षितस्यूद्र नवादिसाधुन संग कार्य समयभापर्व तोग्निनिसले पर्वतस्यैवाभावादायसिंधियार्दप्रता यमानतामस्तोसुच्यतेतन्नो शक्ति रज तादीव्यतिचादिति व्यवह व्यतिमातुरुधाम्स्याल दांगासिरोया अस्यजातापितलयतेन व्याघातीक्षितदोषानाघुक्तस्योपसोकर नोक्त विषयातिलति अनिरयाव्यानुयागोडास्य छल स्थाषिउत्तातनावमाह।।॥धुली प्रसंग।।-)पोले स्पाययतिरंपरिकलपातहणून पराक्ततंगःछेली परोक्तषणा संगनतेनाकारोपिवरपनलमस्गले सर्व निदेवलम् संगतछले किन हौसत आहा। ॥ अन्यच असंगता दन्यार्थदोषोते विरोधूस्ततचाप्तभवति छलछलेवाविपस्या निरंपरिकलगार्दूषणसमवेनस्ववचन न्यायन स्व न्यायविरोधेतर्भावात गिरनुये ज्या योगोडालाई वयस्था पसेगमावत विमाही अचाउताधलाअतेश्लान्यनिरनु योजानुपाँगांश यस्य वास गतमेव प्रस्थ वहान्यादरद्धावनस्सपातकाल एवम्यहमस्यूमुंगततान्तिसहस्थानांतर स्या असंगतात नि महा अनचाउकादंब्यपिनियहरछानकिचिद् सँगत मेवा यया धूतरं कृतोपपोगिनुए वसंगततांसरबोधनार्थपरत्तस्पतगत प्रयोगरवसे रतइति लिन धर्म विभूतएव विज्ञानार्थमंपिपअपाकैथेस्य स्फटस्तत्रात नावाप्राप्त कालेवयवावपपी सादिनि ब्रहस्कानमेवनभवति श्रतिरोधात्छदोन गवत् अर्थीवरीय संगम क्षपश्व आनु हो । यति विदुतावपिप्रकृतोपयोगतिमानाचतानातानत्यानुक्तिप्पास तकनि। निवक्षिक्रमानुल्लंघनहिसंगतिमान।अन्यथानुनलाषाच उत्तानुवादवसंगत लातू) प्राप्त पयोद्धावन संगतते न पचन यो ज्यापक्षयामसँगतिरेचा एवमुक्तान्यञ्च यथासंभवमुक्तांत महतद्रयमित्याही अन्याय। यथालिजाहानिःसंबादेत दिति अर्थ तोहानिर संगतापिप्रस्जस्यदोषप विहारप्रतिअन्यथा सस्थासंगतिनवादी एप्रतिज्ञांतरपिविशिदूषणाश्यपंगमादपणापरिहारस्येवसंग चार हिल तर मायने नोहे न्यूनाधिकेन्यूनाधिक योजनायव यं वन्ननषा कारवमन्ना सानु वारे-नुकूलतीनुक्तिश्चनढूषी अबुलुक्तिोतरेवदोषतानि स्पष्ट थकूमाथा दत्वपुरतनधि काउला दयननुभाषर्णन्दन नपणी आयोअनुक्तो अज्ञान मतिभा प्रस्तान युवा पयो गाभिमानादिनानुक्तिमतानुज्ञा या प्रयोजनविशेषात्थ्गत वनक्ष तीति नचानन विविधोवितोपरयादेता तनुमा नेविरोधविवेकाबिहेला नासलाद काटनावाप्रवीते वितिले विविध वाकछले सामान्यछलेमुपभारतवति तत्रमुल्ला पविक्षप्रयुक्तस्यमुना योतकलानयोतहषांना कुछलाअभिप्रायांतरकाकलएनय सामान्य लोअमुनव्यार्थीक्षिपयेषतत्पभुवयाथ लपनयांदूषणमुफ़्चारछलानत्र वाकछलादेर संगतायत विस्परणायापलक्षागतयात्राकछलेमुदाहँरतिगामारवि विवेक्षपागोमीन युक्तेधिनी विवक्ष यागनयन मरात्यनितिवनायकवारप्रस्त प्रनाल १२९१५ ग्रटिदिती यू यानाचा गोयबाहरणइ सुक्नेयु के वनिबारोलान चा नलभितिशबानानिमाये ॥३९॥ परेखाहत बाह्मण तस्यु नताभित्रपिकलपनयानवंबास शिवारादिति प्रतिवहतीयसि होदेवदत्तईसक्ते नवसायमादिति अगवान पनामवि यमदा क्य हादिसदिलवाया गवान यं मयुक्त मनन्दिताबादित्यादिछलस्यप्रनिर्विरोधिविज्ञानयो ट्यायोगेनयां प्रतिपायाचा यः॥हचे तीमिअवधुववृति योगगोयालक्षणे यादारू बाध्य मुन्यारच्या थरणयुक्तार्थ तरेर तिगोगो मुआ-संबधिन्य धुतिरेर नि हालत।। हताशारदे कोतविदसतस्तवतुमनुमान विगो विभागमाह विविधविरोधी-1) अनुमान स्थापारणा साधारण श्वसनाविततिभदोषः। विधानिस तथ प्रतिज्ञाहेनुहष्टांत देनामाअत्रपतिज्ञापनपक्षोप्युपलक्ष्यता हेतुपदेन्या नागबलिंगवामादृष्टात पदेनरचन निषयात्तय पेण तात्पति लादिक्षाने साधनागनां त्रैविध्यात हिवरोधाचतिषविरोधुपर्दसयोग्य वायोज्यू तत्रतिविरोधसामा मान्यवधारणापतिताविरोध दर्शयति-तुम्पन पासिधिर न्यासिविहेतु किसी बतानाजानामतमात्र प्रदान लिगमाय।। प्रमाणविर साप निशाप्रतिज्ञा विरोधात प्रमाणविरोधमहे लातासानी मतविनत्यमेह खान-त्या वय विरोधस्याहेितु विशे दर्शयति ॥४१थि ।। RSS ३.X3 मेदितियाखाअनेनपक्ष साप नहटललगानिसप्रतिज्ञा ४३ तपय यवनादिना विलितं तत्रतस्याप्रमितिःसहपासिधिमाशंतविनोदर्शयति साध्यस्यसा धनस्था सानुगारात विरोधन-साधरतिस्यायविरोधःसाध्यस्थसाधन या सर्वाच्यातिप्रनिलाई विमानविरोधुनाअननुगमोअतुंगप्रतिज्ञाहेतीदिरोषलक्षणसूचित जातितितली पविभागादिसग है योनज्ञातुम मुक्तिनाथरवेमागविरोध निमबान आहसिह निसाधना बनानुमान विरोधोरहतः कथमेतत्रविध्यमितितंत्राह-प्रतिज्ञायां समबेलपमायाविरोधरवसप्रति अनः विविधोटिदि ज्ञावाप्रमाणविरोध प्रवल प्रमाणव-सम्बलपूनाखोन ति आयेबाधक नादिताय प्रतिबंधकृतेनानिंजयायप्रतिज्ञा या नामवलेनप्रमाणे विनापूससति लाभन सजको र लवनि अतोयुरुमुरुमतिरवकारेणास्यहेतु विरोधतयवछिनति प्रतिज्ञामांत्रएवास्थ स्फुरयाए। न्यायादिहेलमस्यालेनौरव हितलाचारतेनप्रब्लेप्रमाणविरोधस्थापितुदोषहप्रवक्ताउपाधि विरोधार्थ व्याक्तीत्यतआहा-सरवोपाधि दोषाषि-नोपाधिःस्वयमेव दोषाकित दो पन्नायकरवसःउपाधितो लेयदोषउपाधि दोषः) प्रतिज्ञाया:समबल विरोधविरोधएकानतावतिनोजविनोधःपतना ध्य न्यापक पृक्त साधना यापद उपाधिसहि पक्षाधावत्तेमानमवसाध्यव्याव काक्र्तयल्पविक्षो ला यातािउवाध्यतावस्यसाध्यसोवे लिगतायुषाधेहि पक्षाय यावृत्ति स्वयात सामान्य व्यावानेशत्तिनापेक्षिततत्रमाध्ययाकर सेवातसाधनापक स्थप क्षेवत्तेमानतावासा धन्याको थुपाधिनपक्षांसाध्यं यार तपेदिति-साधनात्यापकल गावांना सेवाबमानमाध्यता पिकस्य पक्षाघात्तावपिसाध्या या निमाम•दै यस्यादितिमा ध्यव्यापक तयार ॥३०॥ ॥३०॥ तूधाचसापनाव्यापक लालक्षायूद्यानान्डे पाधि-साथ व्यापकता यापुकतिर साव्याप्यनियतिरि निसाध्य व्यारत यदीत एउपाधिगतव्याणतोपूजीवनालांपाधिकोडेतुबायता सिधीशनतीसेकेरामा युर हित स्वपक्षस्येवविवक्षित साद तत्र तमानातुव्यक्षिनाशस्यादिसपरेशनिदेवकाराच्या दिने संयोपाधियारसाचक्षसां ध्यानावसिंधःतदेवपरानुमान दृष्टस्यादितिपश्चाद्ध विना दोषणापपिष्ट पदिति साध्या भावाविना भाव्यभावस्यावस्थमुपजीयतामर्थन प्रास पनिसागनदोषानन्विषगौरवस्थावाविषमयाप्ती व्याप्यतातिनुपपत्ते मोति प्रतिज्ञा विरोधादेरुदाहरसा नाहतासर्वर ते इयतानुमानेर व्याः॥ विवाददमि च्यायला व्यछायनान्निध्या।यथाशुक्तिसतात याचेदयौनिस्मांध्ये सेतदनुमान लिजाविरोधादी उदाहरणंज्ञातव्य मिावतह प मिसथः प्रतिज्ञाया प्रबलपमा विरोध नावदुप पादचिनापस क्षागमादितिजगतःसयतावा सिन्पघटइसादिप्रस क्षेण विश्व ससमियायागमेनू विवादूपदूमसंअर्थ क्रिया का रितादियानुमानेनचेजगत ससलाधारंगीत जगन्निथ्योत प्रतिताप्रबलमा विसधाभावाहिता पारि नुपपादयति सस क्षेयतस्यूचनिभातात। यह लियेतियासिनंगीकृत सापतस्पपिमिथ्यासमशीका अन्यू यूरियलस्पू व्यभिचारापाताअोहइयत हिनामिथ्यतारयंतहेतु दिनाचहपातिधित्वानि निससंयु-चनयनहलान SS पानिधिःस्वान किन्तामानिर्वचनीयमेवातानिर्वचनीयहचवस्यूतावान्त स्वनूपासितिर सूतश्राहा अनिर्वचनीयवस्य प्रतिवादिनास दहावा निर्वचनीय इयतस्पहनता कारे पिप्रतिनादिनस्वासिनिर्विवान तिवादिगागैजसनिर्वचनीयड्रयल पानी तो तेदितियभासिमते सांधा मलिनतामलिनतादिविशेषान पाय धनधाहतुसंधान धारिता निर्वचनी पतदिविषयतमात्रजेगन्धिातेहे तो किलस्वादिसतआहा निचनी यूतमौला बार सते वक्तुंधुमवतमामग्निमते हेतु रितिमूलिनध मादौवादिशीत वादिनाक मत मंगते निवपकतावनीयुध्येतस्यपतिनादिनोमिक्षता गननलिनस धोनालन्त सामान्यनत्रां गौकशक्यतइतिइयत हे मोरया मुपपादयति आमनोविइयता मत तानांगो तस्वोतनो विपक्षवातायत लावून मानता यान्ति होनोयसो भवतीति रतनय तिरेक टांना साधना यार त कोष भवति मादिना शनिवजत दिशने साध्या ननुगममुपपादयति। शुक्रिजतानिन नारी ताशा वाटा मालिथ्यापदेनानि चनी पतमसिमनेवादिन स्तरातेशति जनादौन विद्युत असदेवरजतं प्रसादित बाधक रस येना सतावावधारणात अतःशुक्विज लादिनःसाध्य विकलाभवति साधनान नुगमता पपाद तिमनिस्वनी या स्वयतालाबान । निर्वचनीय हिपत साधन नचतछु किरंजता हो वर्तत मनि d ष्टा सेतना भी तन्न ते चानचिनीयस्यार पाल वषयोनजदिके इतर सावादिनिका नरनारन रजेतादे ॥३१॥शंतःसाधन विकलोयाभवति।अनिर्बचतमाभिसतस्य डाक्तिरजतादेशिक परिक यतम गी कत्तल टेनसमवरवा चाफ्युपग मीनाइदियोधटानगंतर व्यापारोली गा।शक्यांववादकालाविधीक लेपनमा दोपित तय वावशासन इतितक्रिया सातावरोधोलिभानानत त्राियामबलप्रमाणविरोधस्य ससानसा धनसजाविति लेनै मेगतम पपादयतालमानसिं ता िति सवति साधनता-जंगल मानवियताब भावदिति अधिवक्तुशक्यताराजगन्तियति प्रतिज्ञा प्रतिनिाश निगरानोमानास भूत परिचयतिनिधिमिध्यातव्यापकजाक्तिरजेतादोहोरी य इयता व्यापक जग लिया विमानचुमानालसता भावात अनाजगतो यावर्तमानी मिमान सियतनिध्यातपित्यात पूतीति।दुक्त अगनियोतिप्रतिताप्रसंक्षादिवि तिनदयुक्तमनुमानेनयेष्यकालीनना यतसाध्यानन्तरता गोबरच घिसक्षमीया यूनतहिरोधोनुमानस्वस्यादविर्तमानमा जग्गा हितात सक्षस्पति जिन्न विषयमा बोध्यबाधकलावा स्तिनिहि भवसामपटूस्यामताप्रतक्ष्णपकतार र प्रमाणास्थबा धरताशवपापरिहाति।-जगलसूताहि प्रतक्षस्य वर्तमानमा हिश्रूनुमानांगमंत्रोमायग्राहिणाषिप्रतक्षताविशेषादुन रक्षयोपामाण्य नतो स्वतीति र दिवास्यानानेवपामा सवस्यात्।नायाजगसरतमा हिप्रसास्तव ॥३१॥ मान Mith ATA नाबानाइयो ।। वाविषयतीकुपोलण्यााजगन्मिथ्यातमाहियानुमानस्यनेहनानासिकिंच में सामग मस्यूप्रामाण्यकेनग्यतइति नतावलनस्वर प्रामाज्यविषसतानुभवादनाप्यनुमान अतरे बअवस्थपानादे। लसीचेवहितस्थानभानामैग प्रामाण्यमोहित प्रसध न्याषिप्रस क्ष साविशेषाहतमानमात्र हितस्यादन थाबनते नोत्तरंक्षणे माना। धामा प्यासिधिनेगन्थियातानुमानदेउत्तरंक्षणप्रामाण्यतिलोचदापति दिदिशेदवास्यानाविश्वससभिसाँविश्नससलवाक्या ना माननितानुमानानाजीत अषामाण्य स्थान परस्पर विकसमारन्य तरन्यूतरनिषेधस्या न्यत्तरविधिना तरी यक त-नियमादिति ननोत्तरक्षणअनुमानादिप्रामाण्यमाहक प्रसक्षांतरका विष्यतीति वाचालीसांनषमाणा भावस्थ रहुं शक्य तानिनुनसहक्षन मान मात्र नाहीचनेदिनुसाक्षियंतिनिकनेसामो दूरी पिहोनिधनले नाताला पनुमानागम प्रामाण्य सत्सती साशंक्य गरिहर ति। निस्साक्षितिशत जगल साक्षितिजायद्यनुमोनादिप्रामाध्यस्थ साक्षिसितंचनच्याहत ताई बर्गत क्षित सक्षति ध निति बलातथाचसाक्षिणात्तैमानगोहिवतानारलेनैयकालीन हामी धाक्षावसिधि ने समाचार प्रतक्षविरोधानमनस्य दुर्वाद लिगअन्य माइनिसुन पिढउत्तर दिय सदसुन तथा हिस्य दिप्राप्त वर्तमानमा दिन- X११मा हि११ १३२॥ तन अनलामाण्य विश्वासासंतवृति अविश्वासलनामापन नानुमानस्थ विसोधःस्थादिनिती २६ जाहानायनि-बारनेदागमार्थानुनिषिताध्यवसाय समाप्रसास्य व्यभिचार नातविश्वासनीय दंप्रयुगनिहनीनाक्तिचिमूनेसागमाहौषले दो वो पाइयतानुमान निमानासता घनुमान सदोषभित बसाय केनरेनोयनाता नवायत्वनोना प्यागमाघरमानवधातावासक्षेगर्हि प्रसत्वबनतान्यति नारदहोनादिदमपिपसक्ष विश्वासनीयस्योनोनधानतेनोगमाअिध्यवसायाने ध्यतीतिअनुमायानिदोषताध्यबसा पैदानिश्ननइनियोज्यौविद्यापतिमनी मिष्टावक्तापितास्थानानिधि चाहाना नदरदिवसे दमावस्यभेदाः स्यात्नान हनानास्तिति बने समयान्यस्थानेदाइसव ध्यनता मानुपपत्तों नेहा स्याहा परस्पर सो विमार न्युनर निषेधस्या पनि ना ली यूक्त नियमादितिघसक्षपवमान मात्र म्यूहिवाश्युपगमेचिदोषःसनाने निहनाने निवासस्थानेदार्थमध्यसायहेतोःप्रतक्षस्थापितथालोपसातदिवस पिनव ताध्यनुसायोनस्पदितिसकताहजानन्य नइति वारसतानुमान निदविता ज्यवसायाँ योगेशमाहानिदो चानुमायासंदोषत।नविदापतनायुपंगतायाम माया प्रसोनियमिनारदर्शननाविशन्तनीये ननिदागताध्यवसायानुपर्ष सये ज्ञानु मिति र षपात रमेवाको अभेदागनास्थाले दार्थलाध्यक्सापालपपत्तेरे५८ मल मिसदोषतस्यावासावभावभावनियूमाद्यमान सिक्षतामनुभा सदोष मित्ध्यवस वानर पत्तोटोपनहातमांसदो बानुमा गनिषित संदौसानुमायासदोष नत्थुपन गामा अनुमानाया। नवलप्रसूक्षस्या विश्वासनी महागाकलौभागमा चिया या किनुसयरधानांप्रतक्षले लैननकापियवहासिधा तिसर्वव्यबहारी छदसा साहा। इस व्यवस्वानाउहप्रकार रचना इतिहाद यूदक्तहेतुचनपरिधि पासिरितिहेतु-विनोधहतिातदेयुक्त अभयालिसिमाध्यासिधियोधकरेगानि नामपिहविरोधता दिसताह।-अनयासाध्य व्यधिकरणसिधयोनदूषलान अश्रयाधिराधिकरणाम श्रीवदतिका प्राकूमाध्यधर्मस्थान निधिःसाध्याति यो शिविकामाल विनाशलादिति कमानेषणामसनातनाति संगाभानाने आश्रयासिधादशनामदेषणहांगीकारे निष्टप्रसंगाल्यो। प्रतिसगावेकपाषष हनिसनीहाताअतिप्रसंगनहिदोषता केलयी- दे यस्पषधी तानगीकोरेरिए प्रसंगःतन्य दोषत यथास्वप नदोषतेह दादरीग्निनतमसंगेनदोषतायस्पतादोषतान भी कारअनि संगीतयार पतं यथान्यांसरदोषतानगी कारे साध्य सिंधिप्रसंगे नांदो वह रियो महादेखि चार A •ज अमा ८ प्रपोज का आखिनसायलाध्य सिपनपोर रथेन ।।। ८. १३३॥ प्रसंगाधीनता दातक्षावालयोष अजादोपहोक्तिशातलयोपयुज्यते अतिप्रसंगी ॥३३॥ इदिन भावाभावापले क्ष्यान्वययतिर कोकिनिलिवी इसोधिनाय यजयादेदीपती साहो।।नाच्यामिरेवहिषयोजका। साध्य सि शो साधनस्यव्याधिरेवत्र मानकानदायती साध्या प्रसिधासाध्यसाधनौरवाधिकूर याहार न्यतिरेकानावान्नूहिस मान्यात दोष नासबागीश्रयासिध्यादिनासाथ्यासिधिनि।उपलक्षमनू नितक्षित चले विश्वेतिज्ञातव्याहतुस्पानिधिरि सुक्ता एवकारस्तुमदनकृतादिव्यावर्तक यातिमा धन हि विवक्षिवल्लविद्यमान विक्षिपछलेसायप्रयोज पति॥विनताव्यामिरेनोन कासतआहनाभसहतियामि सेवानिध्यासुतानबहाचेतनतादिसादी दड ना ना भूतों ने ध्यातिषिणामनिरयाससपि साध्यासाने धुवारे काधिकरणलेष जिकान्याविरसंबनोद पटेरिनासमुद्रय ध्यायनुमान दर्श मानानतोनाधिकरमा सिरपिनषणमिति असदाश्रयस्य नो यायानगीकारेबापमाहानात्रसदार यस्थ साधूनेस पियामि विनाकयनिर्वितमाअसदाश्रयस्थ सापकसनेतिब बून् नत्र विचित्रमणमाचटनवनिहितीयः प्रमागविनायनि धेरभावात विनंता वसंक्षमाग मोबात स्तिभितानुमानमेववाच्याक्तिम सत्तदान व ४४रकम स सपिसाव्य समिधले यो जिका मासिर त्येचा जीव छवीर साक प्रमावि मतादिसायौदा नाद श्रोतसाध्या सिरण Npass संताभावापिस धर्मपला भागभावादिस्वामाणिकृयागिइतिबा हतुवापलीकञ्चतत्तयथा-सदाश्रयस्पाल। सतोऽसतानगीकारावट यात्र नस्याध्याप्तिर कितनलिनाचनासर्वत्रावितप्रसंगावधिये सदाभयस्यसाधकता नतिनिवाडेनस्थान अभ्यासस्यसाधनबोधनानोगवादीनिवसनर्निधुकतेनर व्यूसाधना भवतानपत्त-कपमंसदाश्रयोउसाधकस्यादिसनवाहा।। असदा स्थितिमाश्रयोरितहतो साध्यसाधनधर्मयो अधूयतमुपलक्ष्यप्रागोल हेतुसमुच्चयानासहिषयन्यावहारांजरीनुसंपत्ति समुशिनोविन्यसबनाइतोनात भकतनासंतःसाध्यसाधनाश्रयतालावावाच इसाहा-असदाभयताविभिसाति विदोषवा संभवकथम यूमि-असदाभयंसापतनसाधकनितिबदनाम तिःसाधनव्यारत्तक तयाताशेषणमगीरुतमेव अथातयामेवाडायलाना चस्ताविहोवूयातलक्षमा धर्मसंभवेकपाध्यसाधून धमश्रियेसासह विडो बिहीवाभादितावमसदाश्रयतमा भूयाक्सिमितिमन विनाहनीय पुनरक्षा निक्षमतावानयुतलायो सिविषणवत्वस्तविनासायहि।। पः कुतोसनाह।।)-प्रयलाचन शिबा-अनुयते हिप्रमेयतात्ति ने डिज ॥३४॥ यादीसिता भाभी कय न्यथातथर्व धर्ममाति सारिजानीमान् वध जाहिशष्य ।।३।। दि धियोतिरिशपाथोपूतिप्रानाध्याश्युउगाच विशेषत्याथ पर श्री मोदय सावृत्त गोकतेत साधान प्रतिषपिय देशो नकुत्रापि माध्यामि देषोत्वाइनापिन प्रतिसाचस्पासाधकमि माह। विमतसकते क मित्र सर्वजन स्वपक्षमताब लन् मियामा कागेन । कसकर के का येतान् चटवादेस मैनुमानेन धूरे सहित सिधिर गोकपते। विपि कार्यत् सकल वकत भत्रिणव्यास तयार दिपधर्माबलेनू सर्वज्ञ में वक्तारंगनयोत। उपादानादिविषयतानवतरकुरी है नचज प्रसिधा अतसूदल कुत्रायसिक्षमोथायरम मितिअनेनैन धिकरवा पिसाधकाँचो पपाटूिनभवति। धरादिनिटेनकार्यते n सतत सिध्धुगी कारा कुत्रापिसाध्य साधयाधिकरणलेषण मिलान साध्य पो प्रविशेषार्थाप सो प्रामाण्यापूपगमेपिकि मायात प्रतिसानभूध नुमानसाधकले सनश्राहातापडियो पापित्ति नविस विशेषः निधी यस परिडोषादेःसाधकले अनुमान स्पैनवद तावत परिदोषा दिइनुमानाने सनतिशिलाताईतिरसत आहजपपत्ति मातीतूनाइहोपपतारस थान न्म जितिया परिशेषा भोपहार न्यथानुपतितकुतो मौनतमिसंतमहा। च --21 -उपपत्तेश्वव्यात्यपेक्षास थांगी का ये मोह मायेण दः। अन्यथानुपपत्तिर्हि केनचिहिनाक्रम भविभवः असतवललाव दनुपपति बाहुवादिमागहा भावारजन्य साताअानवस्या नामेवा संभवइतिवाच्योति स्वचव्या पक्षासूर्वथागी का नुचिहिना कस्यचि देवस्थान तयायोतिविना नोपपंचते व्यायपेक्षय थार्थममकमानमितियोत एवमूपिपरिहशेषा नुमानूसानगी कारें धूमाय न्यथानु पता निगम्युन ननिमानल्या अतोडेशनायासवि षिविन सितार हमी वेगानुमानो चापसादे दोबोदिचिरंजीकार्यतिसिंगापमासमा पिअनुमानुपायत सापडातुमाहा।-उपमान यावि-अपिपदेनशाहमागानुमाना, दिइसनुप कुतईसओह। न्यापन पसाताव्यासापेक्ष थोगमको अनुमानो पमोनस्याल्व्यिासापेक्षता तानुमानावे दे कथमुपमान स्याव्यतिरिसत-स्तामुपपादयति।। नामहस्वोनासहकिचियातायोहियानमा प्रतियोगिसतेनसाइतिच्यापिकपमा विवक्षितता नहिपवनसात नेतासहाविहामन्ययाति र पोल्या तिमीमार कोपमानसाव्यातरुपपादनातवीत नियायिको पूमानेपियोऽगो वसतिगोसमोसोगवा हाइवाच्चान्दन्पोर्दए इंसादिपेणंयासिरुपपादनीया।अभावमा छापापिअनुमान शविमुपपादयतितायोग्यानुपलवालि गहताशावानुपलधिप्रमाणनीत्रि सोमालि गमे वनयकुत्रमाणे कुंतानतुपलशिमा सरसाव भाव लधिमोग्यारयनुलधिःतया कुतोनानुमान तमितता सिंचमानादविदोषादंनुसानमेवातचिानुपलभरोगनकले माया सावित्रा 2. ५५३५।। हा अविदोषान॥ अनुपलधिमताव में गोकु ना बोब्यस्पानुपाल धिमितिकमा ॥३५॥ यिभिचारमा समितिवेदतुत हि सापेक्षार्थ गमतीसगीक तस्यौदा तपाचा व्यता अनुपलटिमा स्वाभावयभिचाना दिलचंदूतो पाग्यानुपापरतान संबरोपेक्षेसनवस्थास्यादि साह अविडोषात अस्ता क्षेत्रका इमली क्षिमित्रतादि सदोषः।नचवा चामतुल पूधिरज्ञातवा yबोध यति इसी पाससनुपलक्षिताविशेषासुषु यावोष पती वयेदिसाहा विशेषादानचचक्ष, शदिवा पनि गीतस्याट्रिय संयोगादिवियोषापेक्षताव अनुपल अस्दा दिसाहोशिशोदिति। विविधोनुमानविरोधासादिनीत स्थापयांगमाहा Hउदोषेष्वासपातुमाना दोषागामंतशीवायप्रतिना विनाधोया दोषा द कारतेष्वानुमानदोघापाताभासादीनामविःअतोनोक्त दोशातिरेको इलिलिबलप्रमाण मिाधाकालातीतः सम्बलेनहेत्तरेण विनोधः हतोव्यायंता निष्टरमततिपक्षसुक्ततेनैवहेलनाचेखकरणसमः विधिःपालिधिय विशेषणसिध्यादेराधिस्येतविःयाप्यता सिध्यविनधानको कान ध्यासापतीनामव्यात आवस्यसाध्य संबंधाभावात उत्तर यो विपक्ष विनासायुधभिचारात अन यवसित स्थापिपक्षए वर्तमानतनव्या मर ग्रहणदा तेरेक व्याप्तिस्तत्रंगचनोमिनिटेन सपक्षविपक्षक्षा तावेसपक्षमात्रभतिदयोगाते संपर्विपक्षमा वेवान्चस्य वधूथभप्रासंतिम सूपिस पक्षे ते दुपलओव्याविनश्ययात्रा सपक्षक शरसत्वव व्यतिर दिबदस्य व्यतिकिन यति चत्रास क्षेत्र परसात मन्या सिरेव नास्त्रिउनसे पक्षकदरारतिवदोक्तन्यासिमिति संदेहावस्वती नागोयरिद नौनकातकर मानधनसितइसके निदसवामपक्षविपक्षन हिनदी योगासनविरुधपोरपितत प्रसंगावतारन विनोधा नामताना दोहरा तासाना प्रविः। अश्रयूही नत फरपणे अन्यायरिंभान ने विपतीती न्यायालयानमसंगहो।नई साहतिरमितीतथाविमाध्यविष्लब है तो पातरम स्तो सूतओद।। विदितीपर्व ताग्निमान तिमतादिति साध्यामि दिया दुरसिभरवावी वृद्धिासाध्य वाचवहे। नहिंसा तिव्याहनिय नयाची साध्यूनिशियालो विनातवति व्यासरशय भूनते व नैनवस्य व्याययोन यदि विवक्षितस्छ लेलिगदर्शनानसहिन्यामितिस्यानतंत्र साधन रि. लिगस्था दर्द इनितेनैवानुमान दोप्रसिधोयाचिनायरवानुदयावाआमापसि॥३६ रदूषणानसासासंबोधिभावादिनापिय आपतमापव्याप्टेरा पली मादातहि सिसोपवत दो तिर तो आपसि साधक सुगतः।।। नासहसा वनभोवसंगढतातिसापकीर्वप्रमाणातदातासस्वादन वेक्षण करणायवाया रोक लक्षानिनिराकर्वन आहाना ले अगतावा च॥ नानपीसाधन प्रमाणपासने यंग जानता पर पायप्रारुपर- निसाधान प्रमाग अत्रमनाररहण कुरादित्यसर्थ साधनूगहामा महीन्या सिप्रसक्षादविज मनवचयनिता चेदिय संनिकांदावोस: ज्ञान स्वक मन्यत प्रामाण्या पनवनिमीदाब नियासिअर्थात मावि गोशाता जात विदोषस्वपनाला) तैनल मदिनाचर दाजननीनगई दमिसाकारणा जनपिताना स्वास्थ्य पमाननातेपुन तीते तानरपेनेनन्म तावात कोषिःसा धनंही नैवप्रनो दिव्ययसनिशानदेनलक्षणोपपद्यतेनइमन हाता नयतिरिक्त मायाप्रेमाशोदात्ताप याश्रयाया प्रेमायोरवाताव नी से ते विलादि दलक्षणमुपाहि प्रेमेविट प्रमायांगमायामास्ता जातो 15 th माप्पप्रमाण यापयता भंगीरदेविस्थासितआहाख प्रावामांगीकारतत्री या घशालस्व पतसालिज्ञानेप्रमाया गीततस्यसन्युग नाचनला नावात्तंना भान युक्त तल भूणामतियथाधुरीतियागादिदिन संग्रहीता तंत्राम विपनामिनिनवायोसाचितलावात ने गोकारवायचाहोनास्ट तापामा नंगी कारे अडतं मयेसप्रमाक्षावा देतायदि सरति प्रमाणात हि अनुभूतम् माविक व्यादानुभूत म येस्त्रस्मति विना प्रमाणभावागासस स्मरबानी प्रमूर्णिविनोमोल गर्ने बोहुतरोत्नुभस्ते स्कारजनयति सचूसंहार नोदिनासह दे रनिनिर्ति संस्कार न्यानमनिस स्कारलिंगी सुचपूर्वानुभवाद व्यतिनानतरणा प्रामाणिकल नाषिक्षणस्या व्यावस्मोरपिसम्य चनला दिसते आहलिगहन्प्रामाण्य के लपनागौर यदिलिग लेना मारक असतेहि उतपनांगौर जंस्पान्साक्षादरवंपांनाण्यसभूविस्म संस्कार लगतेस्पा सबसस्पाप्रामाणिकपणानक स्यकलपन तात दोषात दरचाहमा हानिकमायादेतेलिंग प्रामाण्यंत हि पृथकूत्र बतया समान पिसक्षादेल गर्ने वस्यावानवापिंप्रमादिनानभको र कस्या ऑनुमानसमता गायन प्रसचा दिवा तेरपेसाक्षालामाध्यान्न व्यासपोहन भागवताको 6 भाल ११३९॥ लक्षणमुपपन्न मितिइदपिल क्षमयुक्त विधुएव हिप्रसय तिर नुतवश्वति ३६ अबाप्पन भवसतिजमाणनेवास्वनितिविधतात.वाचावस्थितविशेषणस्पक तर दिसतमानसिप्रनाला हैविध्यमात्रक मामि-ध्यामानानना सादाब निरी स्थतिमाखांतिपय पहाधूिमात्र कुलपन नयज्योत जासतिविषय र यामकरण पभगान्तनतकाच की व्यो विपर्ययादेरनुभवसिधतन दिनराधादिक्षिा दिप पाटिल वपोरनुभव नास्तिक व्यवहारमात्रमियतेआहा-तिदनुभवानॉइस भवन के अनास्तीस किमवतादिविपर्वमादिविषयोऽनुभव स्वयकाहा मानधनातील या निदाह वगनगनुशवमात्रस्मतिमा वनस्पति अविशेषानाअथवाविप यांचा नकार दूषणातरमता यदिहाक्तिका यामि दरजत मिसा दिपबिपर्थमा धनुशबाना किन पुरा न्यानुभवमतिरहुत सरलोचनया स्वपती विषयमय विवेकानहाटे लेदों रजतमिति याटियवहारइत्यनेन हि पुरोगानुशवाजत निमूना नीति दामालाई पूर्वकलावतो उस्याक तेदभावस्था दिति चेदाहिनतही बोष्टन, इले हिहिशेयूवहारस्यकथन सावपितोह नाम सनुवया अर.. देकतेन डिज्ञानसाहसाघवहारइतिचे- पान हिरोईनोजसम्यान दशावस्याप्या पानावाप्तिमी पये यादेगावा कायह इतिहासपुरोसेतिपुरारत्तो क्तिरोनेतियथार्थमागमरवांजनिति ऐतियुनि सामागपलक्षणास्टतिपदेनाशेषवलप्रमाणस्यातिपादकैबलू नका। दंत्रमाणेप्रसादिदेन विविधतिचतुरयानमुक्ततिनियात्मक योनिना नोतिनबसम्यगनुभवसाधनप्रमाणातासन्य सहयोच्दा पनि हाथन जन मावति कुटीरादेनिरासाजीनगहासमताप्रसे सारनुत्तवरण साधुतंगत बग फलादेदज्ञापना प्रभाट प्रमेश्यवध्दा चाटतंदूरीलक्षणूनोपपचनकिस्मादिसतआहाताइवरज्ञानादाच्या सिमसानियायिकेःसलवीरस्यापिनामाव्य नंगी तमूतस्तस्लेन्लीश्वर तदान स्मदोदिता ने बाब्यातादिदमलेक्षा नहि ईश्वरादे सूज्यन्त घसामनवासी इवनितिप्रमावलक्षण दिलंगीकारक्षित नादावतिव्यापिपरिहायवेतिज्ञापनायवनपाडानमूहळाजनानन प्रमाणवितहलनव अतः कथतत्रा निअनाहीत प्रामा ग्यप्रायशि वाचनासाना तेहर्षिःचराहनस्टनिःप्रसक्ष
hos
३ विनितादिषमणविरोसविनोतिलिज्ञादेप्याव्या युक्तस्य प्रमाणा॥
नंगी कारेबाजकतावदाहनामाण्य ज्ञानेन्चा-प्रमामा वादित वस्नान
रयतेनदोसतमासादिगाप्रामा सर्वप्राथाना प्रामाण्यम्प्रोमा
चिकित्याविनारायसात प्रमाणनामावादमानारपसाचना
पिसम्बगनेमबसाधनमेबकिचिदंगोवियते अतोनतयात्रीपागकर
वाईयाहअनाय गोकानबूस्छतेमादिप्रामाण्यज्ञापों
नासन्यगनुभसाधनेप्रमाणमूगोयातहिततामायान
निकैदवानतिपक्षेनंयान् आधेकिनवप्रमाणेनसिप्रमाणांक
रिणवान अन्यत्रापितसंगावाहितीपेत स्यालिमा टायप्रमाणात
रघमिसनवरित स्यात् तस्मातीक्षिजानलेव सर्वप्रमा
आंप्रामीपनायतइसंगीकापतस्पच स्वप्रकाशलेन व प्रामाण्या
षयवान्नाननछानि नजानानीमा
पलाललादितिरेव स्वप्रकाशालजस्वतपस्वरूप सेनिन
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সুসালিসকসন হাস্সান্ত্বনাথবাবনবিক।
जातोपरसादी ज्ञानमहिप्रयोदे हो पाया पडतान्यप्रतिनिवाल
रुपमा नस्टप्रायविशेषण तापपति र एघट सादाबपितदतावापानोदी वि
विपिओबातोपपतिरिति तासनपरुतेनिना चज्ञानता आवतानेस्या
यनियमावायत यदाकारं यूहिजोगलत तषियमिति बौधानामे बोलनति
तथासनीयोगाभाषपूनियनाभात्रसंगानाकरविषयरोपपत्रिी
चतुलयोञन्यथा नेनैवात्रैवजावतायतइति नियमानस्यादिति अन्य स्वाहा
धनांसाधनलमवलक्षणाप्रमावनामाकूरपक्तिनाथस्य यथार्पज्ञानाजी
जोक्तदोषरसतआहान चालान परिछित्रि रेवं सत्रुमा नापतिरिक्त
पूधार्थ ज्ञानच दे। अज्ञात निरतिसोधनूच्युदासाधीप पार्थानमा
दिसाधन पसायीमास्तमानप्तान पूरिति प्रमशान साधन
पिनूल क्षमता कोशात परि कुत्तेरीपेनादेनतमा
यति नहि ज्ञात सूरिदिप मातादीनाबास्तिनात महिनादे
प्रनाला सादे ततपदिसतंनाही पाचप्रमाव्यनिलंगीकाराव।
ल. . डिज १३. सादे घमातादित्रा गोनानिधार्थनवपामा गोकुदिरा साट्रिक्स् ॥३७॥ पमानाव्यतिरिक्तननियनुमानिसकारजना नानिबाधा सकेतिपाताना पारतिमन उमगीकततेनंतस्पस्पेकपा नाताव्यहोरस्तुशहा रणयोर्गही योरेवावा खपती लषयत धूप कायहर्णमा भवतीतिगाएतदपिलक्षण नयुक्ती कुतरसतआह) स्थसादाक्दो आदिपदेनदायनुप्रमाणसमहरम सौदा:सतिमान रायसवरातिदोषः तदेवकुत इसत आहो। नावेदानुमानादिप्रामा ज्यामरी नापनस्सादिग्रहणप्रसिधिलौकिकान का हिनामिन लायापाध्यततुसिधाचे श्री ती चा तो साहास्मितिपूर क्षमाती या नुमानतुष्ट पाँधमानमिति निर्यधर्माद्यनिरितिश्रुनेमा नविदाति कमवितालावनमिव यावासादियानोषयी ध्यर्थमुपास्त धुता वैतिष चतुप्रमाणनापतित मिसतंआहोता संमागमोदी-
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य दावाद या पतलक्षणनितिननविपुयायनुसवातावक्षः
वनस्पा दस युक्त अधितिप्रमाणावृपासिद्धिदो
न
तुभोताद तथापिकतोनापास धातु-संताही
विनातिस्पर
स्वहिषटगतासाधने मे देसि चौतति पन्नापैकेतिया मतदषयामपिता।
सितिपरषिदति।अतः किमतीपथेवमिस्तुआही अतोन षोडपो
सिता दिवस पर सिधानन्यान एरोकारगोयताइषंगानमीन नापति
बलिदाबीमिति स्वपक्षे पूर्ण मनुष्टतपाले बदीगहनतानु सकल तुपा
प्रतियोग्यहाणपोय शिबानी दापतन बाधक तहानेन्दूपेगवान
वटावात पक्षस्थापनेनप्रदषितानि हिवेतनासकालसोक्यापाबाब
वन से परमेष्टामात नमिसिन्पाद प्य सनाविषयसामथ्यानिनिस्मोदिशं पाते
तमेव मानतातावेल तापमवादनासयोलोवनन्या परता
दोषन्य मतो लायाउकात धिमी होनाइए पति मिशसाधनवाद गति मेव
पादपा तानशी संगताताईन परसि सातवदूपताना सिसाधनस्य
चा संगतमुहागिर पादने येव संग रेलीनविरोधादि यो रेषमातरम
th पति क्षम प्रमाणला ॥४२॥ तिच्या यशाचीनतर्भावस्पुटतान्योक्तावमादिस्वरे प्यतनितपंण प्रयोजनादिक दर्शयतिताआमदतीमुनि नान्यासवत न मागः तलक्षा संक्षेपहासच साल क्षणादिपर्णसरोधि वरलवेडा सिर्जमज्ञान भवति दिनवा छतरोही कवूदेदेखि परमात त मेनु सरबरी बतागार कादिति भावनोता आनंद तो थमानना यस्त भाग लिजमघसाहब मनकोक्तिमागेतरति मनोक्षमता जमततिमागेपि तदनुनिघक्ष यातारयुत निति। युकादियुकलापान दिड ते शिष्य स यंते यरुथ वाह वलपरेन येथे सभातमि सताउल संपादिता भाबुभिमनु सहसंक्षेपेटामेति ॥अथ मित्रहो पिभगवाना चा स्वैर वेदना प्रणतिानाशेषमान मे ये साक्षिणे क्षमतपते परनयन नानानयुणांनानारायणस्यप नाली निकाल रिसतोयोल सिताया वितेप्रमाणादिनस्तरकतेन नाजायस्येवमुरय
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॥४१॥
জসান
॥११॥
सितलो दिनलावेलीहाअोतिानतुनारायणस्पारीरस्तिनवा आद्यमा
रबादिप्रसंगादि ये तस्य दिमस्या हो पनामा दिसाक्षिमिशनउत्तय
क्षयोपश्चरस्य शरीर तेववि दाने उपले नाक्षय ने वेति कविहो
हतियोटिक्साच नारायलावन मस्का पर तिलोवे नोंक अजाताना
निराचमा यति मलावर टी पते।यादा बार देवदेनेपुरुषाने नाव
इसीधीमदाबदती गवता या बापविरनिनस्यूषनाणक क्षण स्पटी
काव्या धनजपी निक्षविरवितासाताभारार्पणमस्तु
७॥५॥५॥॥॥५॥७॥२॥५॥
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(लमा
माणलक्षण पु स्वाभिद। शुभमस्तु ।
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