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वाल काण्ड
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पालकाण्ड
श्रीगणोपायनमः
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लोक
वर्णानामर्थसहन ना रसानां कुन्द सामपि संगला
नाच कर्तारौ वन्देवाणीविनायकौ ॥राभवानी शनी
बन्दे अडाविश्वास रुपिगौ। याभ्याक्निान पर्यन्ति सि
मास्वान्तः स्वमी पूर्वरं ॥२॥ वन्दे वोधमनित्यं गुरुं
हररूपिण। यमाभितोहि वक्रोपि चन्द्रःसर्वववन्ध
ते ॥३॥ सीताराम गुरगयाम पुरापास्यविहारिणौ
बन्नेविगविज्ञानी कवी पूवर केपी प्रवर्गारवा
स्थिति संहार कारिगीलेशहारिणी सर्व श्रेयस्करी सीना
ननोहरामवालमा ।। यन्मायावावनि विश्वमखिल
ब्रह्मादिदेवासुरा यस वाद स्टयैतभानिसकलरजौ-य
प्पाहभूमः। यत्पादन सेवभानिहि भवाम्भोधेस्ति तीर्या
वनी वन्दे हंसमोय कारणकरंगमाख्य मीशहरि ।।
नाना पुराणा निसमागमसम्मतं यज्ञमायणे निगदित।
चिरन्य तोपि सान्तसुरवाय तुलसी रघुनाथ गांशभाया
निवन्धमति मंजुन्न मातनोति ॥ ७॥
४ चालकाराडः सरा जैहिसुमिरत सिधिहोगशानायककमिवरखदुन करोअनुग्रह मोर बुद्धिरासि अभंगमा सदन। मूकहोइ वाचाल पाचदहि गिरिवर गहन जासु कपामुदयाल द्रवौं सकलकस्लिमलदहन नीलसरोरुह प्रयास तरुण भारसवामिजनयन करहुसुममरधाम सरासीरसागर प्रायन कुपन्दुसमह उमा रमसा का अपत जाहिरीनपान करड क्यामर्दनसयन वन्द गुरु पदकंजक्तपासिंधुनररूप हरि।। महामोहत्तमपुज.जासुवचनविकरनिकर वन्दौंगुरु पद पन परागा सुरुचि सुदास सरम परागा अमिय मूरिमय चरण चार नमनासकालभवरूज परिया सुलतांमुतनविमलविभूती गजलमाल मोद प्रसूती जनमनमजुमुकरमलहरनी. कियेतिलकपुरमावसकरनी चीगरुपदनरवमरिण गाँज्योती सुमिरनदिव्यदृष्टि हिय होनी दलन मोह तम हंस प्रकार । बड़े भाग्यउर आवहिं जासू॥ उपरहिविमलविलोचनहियके मिहिंदोगदुरव भव रजनी के समाहराम चरित मणिमाणिक गुप्तप्रारजहजोजेहि रमनिक सहा गयासुजन शजिहां साधकसिइ सुजान।। कौतुकदेरवाहिौलवनभूतल भूरिनिधान॥९॥ गुरुपदरजरदुमंजुल जन नगन चमियहगदीयविभाजन नहिकाविमलविवेकविलोचन वरगौरामचरित मन मोचन बन्दीपथममहीवरचरणा मोहजनित संप्राय सवहरणा ..
والي مره
वातकापर
मा माउली केसहित गुमाईतलीदासजी कोचीगस चरितकावर
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सुजनसमाजसकलगुराखानी का सामः सप्रेम सुवानी
साधुचरित गुमसरस कपासू॥ निरसविपादनासयफराजा
जोसहिदूरवपरिशिइंदुरावा
या पाना
सुदमंगलमैसंत समाज ॥ जोजराजंगम तीरथरान
रामभक्तिजहंसुरसर धारा सरस्वति अविचारपचार
वन्दनीयोनि
वालकाराउ विधिनियधमयकलिमलहरणी कर्मकथारविनन्दन वरणी हरिहरकथा विराजतवेनी।। सुनतसकल सुरसंगलदेनी वसविश्वास चलनिजधर्मा।। तीरथराजसमाज सुकर्मा। सवहिंसुलमसदिनसबवेमा सेवतसादर समन कलेगा अकथनलोकिक तीरथराज दिइस फल प्रगरप्रभाऊ। रोहा सुनि समुझहिजनमुस्तिमनमजहि प्रतिमनुराग लहहिचारिफलंबछत्त तनु साधु समाजप्रयाग मन्जन फलदेखिइनकाला-काकहोहिपिकवकउमएला सुनि प्राचर्य करैजानिकोई सनसंगत महिमा नहिं गोई बालमीक नारद घट योनी निजनिजसुखनकही निजहोनी, जलचरथलचरनभचर नाना जेजचेतन जीच जहाना मति कीरति गति भनिभलाई जवनेहिजनन जहांजेहि पाई सोजानवसत संग अमाऊलोकह वेदनमान उपाक विनसतसंगविवेक नहोई रामनपाविन सुलसनेसाई संतसंगत मुद मंगल मूला मोइफलसिधिसवसाधनफूला सिंठसुधरहिंसतसंगन पाई। पारस परसिधातु सुहाड़ी। विधिकससुजनकुसंगति परही फरिणमणिसमनिजगरणअनुसाही विधिहरिहर कवि कोविद वानी कहतसाधु महिमासकुचानी सोमोहिंसनकारिजातन कैम/ शाकवनिमंरिणगणगुराजैसे होहा वन्दौसंतसमानचितहितअनहित नहि कोउ ।। अंजलगतभसुमनजिमिसमसुगन्ध कराउ संतसरलचिनजरातहितजानिसुभाइसनेह ॥॥ वालविनयसुनिकरिक्रपांगमंचरणारतिरे॥४॥ बुडरिवदिखलगंण सनभाये जेविनुकाज दाहिने बाये। परहित हानि लाभनिन्हकरे उजरेहरय दिवार वसेरे .4-0
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बालकाण्ड
हरिहरयमा सके प्रा से परचकाज भट सहस चाहुसे।
जेपरोयलवाहिंसह सारखी परहित वृत्तजिनके मनसावी,
तेजलशानु रोय महि पोया। अंधश्चतगुरााधनधनिकधनेपा
उदय केतु समेहित्तसवहीके कुम्भकरणासम सोजतनीके
परयंकाजलगितनुपरिहरहीं जिमिहिमठपलकपीदलगाही
चन्दौखलजस पयसऐया। सहसवदनवरने पर दोया।
पुनिषणावोस्थराजसमाना पर अधसुनहि सहसदसकाना
बहुरिमाक्रसमनिनौतेही॥ संततमुगनीके हितजेही।।
वचन वजजेहि सदा पियारे। सहसनयन पर दोयनिहारे।।
दोहा उदासीन अरिमीतहित मुनतेजरहिवल्लरीति
जानि पानिजगजोरिकारविनय करौसपीति
आफ्नदिशकीन्ह निहोरा तिननिज बोरनलाइव मोरा
वायुस पलिय अति अनुरागा होहिंनिमिय कवडंककागा
वन्दौसंत असजनचरमा दुखपदमय वीचकछुवरणा
विठुरत एकपाशाहरिलेहीं मिलतएक दारुणादुरवदेहीं
उपजहिएकसग जल माहीं जलजजोकनिमिगुणविलगाही
सुध सुरासमसाधु श्वसाधू जनकएकजाजलधिवगाधू
भल मनभलनिजनिजकरतूती नहतसुयश अपलाकृविभूती
सुधासुधाकरसुरमरिसाधू लेअनन्तकलिमलसरिया
गुर अदगुराजानतसनकोई जोजेहिंभाव नीक तेहिसोई
हा भलेभलाईपलहहि महहिनिचाई नीच ॥॥
सुधासहिय अमरता गरेलसराहिय मीच ई
खलगहि अगुगासाधनुरागाह उभयवपारउदधि अवगाहा।
नाहिने कछु गुण दोयवखाने संग्रह त्यागनविनु पहिचाने
भले पोचसविधिउपजाये गण गुणदोष वेद विलगाये
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बालकाण्ड
कहहिं वेद इतिहास पुराणा विधिप्रपञ्चगुण अवगुमासाना
दुरखमुख पापपुण्यदिनराती साधु श्वसाधु भुजान कुजाती
बानवदेवळच अरुनीचू अमिय सजीवनमाहुरमीच
मायाब्रह्मजीवजगदीशा लच्छ अलच्छरकचनीया
कापीमहसुरसरिवर्मनासा महमालवमहदेवेगवासा।
स्वनिर्क अनुरागविरागानिगामारामागदोपविभामा
दोहा अडचेतनगुग दोयमविपूवकीन्ह कत्तीसरा
संतसंगरगाहतिपय परिसीवारिविकार
असविवेकजवदेहविधाता नवजिदीयगुणहिमनगता
कालस्वभाव कर्म वरिआई मिलेपलतिवस चूकमलाई
सोसुधारिहरिजनजिमिलेही लिख दोषविमलयानेही
खिला करदेभलपारसुसंगे निहिनमलिनमुंभावभंग
लखिसुवेयजा बचकेजेऊ देवप्रतापपूजियत तेज।
रुपरहिवतनहोइ निवाइ काल नेमिजिमिदा राहू।
किये कुदेय साधु सनमान जिमिजगजामवंत हनुमाने
हाम कुसंगसुसंगत लाहू॥ लोकावेरनिहित सब काई
गगनचदेरजपवनप्रसंगा। कीचहिमिलनीजलसंगा
साधुनसाधुसदनमुक सारी सुमिहिरामदहिंगणागारी।
धूमकुसंगत कारख होई ।। लिरिवपमुए रण मंजुमसिसोई
साइजलअनलअनिलसंधाता होइजलदजगजीवन दाता।
दोहा रह खजजलपवनपटपाइकुयोगसु जोग।
होइ कुवस्तसुवस्तुजगलरवहिसुलक्षणालोग
संमप्रकापूतिम पारवई नामभेदविधिकीन्हे
प्रापिा पोषकसोयक समुसिजगयाचपपपादीन्हाई
माझेतनजगजीवजेसकल गसमय जानि ।।
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1.
बालकाण्ड
नन्दौसक्केपदकमलमदाजोरिजुगंपानि ॥ १०
देवदनुजनरनागरलगप्रेतपितरगन्धर्व ।।
चन्दौकिन्नरजनिचरक्तपाकर अवसर्व ११
आकरचारलारव चौरासी जातजीवनमजलथलनासो
मियाराममय सबजाजानी कोषरामजोरिजुग पानी
जानिकपाकरिककरमोह समिलिकरडछाडिहलकोई
निजवलबुद्धिमोसमोहिंनाही नातेविनयकरें सर्व पाही।
करनवहौरे पनिगुणगाहा। लघुमतिमोरिचरित अवगाहा
सूझनएको ा उपाऊसमसतिरंक मनोरथराको
गति प्रतिनीचिकचियकी चहियअसियजगजुरैनछात्री
समिहहिंसजनमेरिदिठाई। सुनिहहिचालक्वनमेनलाई
ज्यानातक हितोतरवाता सुनहि मुदितमनपितु अरुमाता
हसिहहिं कुरकुटिलकुविचारी, जिपरदूषण मबया धारी।
निलकवितहिलागुननीका सरसहाडे अथवा अतिफीका
जेपरभागितसुनत हरबाही, तिवरपुरुस बहुत जगनाही
जगवानरसरितासमभाई। जिनिजवाद बदहिजल पाई।
सजनमुक्तसिंधुसम कोई देिखिपूमिधु मानहि जोई॥
हाहा भागलोर मिलायड़करोएको विश्वास ।।
पैहहिंसुरवमुनिसुजनजनखलकरिहै पहास १२
खलपरिहास हाइहित मारा काककहहिकल कर कठोग
हंसहिवक दादुरचात कही। हिंसहिंमलिनतलबिालवनक
वनितासिक नरामपदनेहू तिन्हकहं सुखद हांसरसरह।
सायाभगिनोरिमीत मोरी। हंसवेयोगहंसै नहि रखोरी।
पसुपपीनिनसामुकिनीकी तिनहिंकशसुनिलागिहिफीकी
हरिहरपदरतिमतिरकुन्तरको निन्हकहंमधुरकथारपरकी
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बालकाण्ड
रामभक्तिभूषित जियाजानी मुनिहहिंमुजन सराम्हिसुवानी
कविनहोउँ नचितुरपवीना सकलकलासवविद्याहीना
चारवर चर्थचलकतनाना: कुन्दपवध अनेकविधाना
भावभेदरम.भेद अपाराकविनायगराविविधिधकारा
कवितविवेकएकमहिमोरे। सत्यकहोलिरिवकागदकोरे
दोहा भगितमोरसवगुरिहितविपूर्वविदितगारक
सोविचारिमुनिहहिमुमतिजिनकेनिमलविवेक १३
इहिमहरखपतिनाम उदारा॥ अतिपावन पुराशा अतिसारा
मंगल भवनत्रसंगलहारी उसासहित हिजपतपुरारी
भगिनविचित्रकविततजोर, रामनामविमोहनसोम।
विधवदनीमवभौति संवारी मोहन वसनविना वरनारी॥
सवगुणरहितकुकवितामेवानी रामनाम या अंकितजानी ।
मोदरकहहिसुनहिंध नाही. मधुकरमरिससंतगुगायाही
यदपिकदिन गुमाएकौनाही | रामप्रतापगइहिमाहीं।।
सोझगम मोरे मन आला कहिनसुसंग वडप्पन पाला
धूम तजै सहजकरआई। अगससेगसुगन्ध वसाई
भनित भदेस वेस्तुभलवानी रामकथाजगमंगल करनी
शून्दा ममाल करनिकालमतहरनितुलसीकथारघुनायकी
गतिकूरकविता सरितकोज्य परम पावनपाथुकी
प्रभुसुयशसँग भनिनमलहोइहसुजनगनसावनी
मवश्यंगसूनभसान की सुमिरत मुहावन पावनी
दोहा प्रियंलागहिचानसहिममभनित राम यासंग
हारविचारिकि केरडूकावन्दियमलय पर्सग।
स्वास सुरमिपयविपाद अनिगुनंद करहिंपयपान
गिरायामसिय सिपशंगानहिं युनाहिसंजनि १५
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i - मणिमाणिक मुक्ता विजैसी अहिगिरिराज रिमोहनसी न्टप किरीट संगीतनुपाई लहहिंसकल शोमाधिकाई तैहिमुकविकवितवृषकहहीं उपजहिअंतर कवि लंल्लिही । मक्तिहेतु विधि भजनविहाई सुमित पारंर भावनियाई राम चरितसरविनु अन्हवाये सियमजाइनकोटि उपाये ।। कविकोविद असहस्यविचारी गादहिहरिगुणाकलिमलकारी कीन्ह माजजनगुशा गाना पिरनिगिरालागिविताना हृदयसिंधुमति सीपेसामानास्वानीशारर कहहिं सुजाना जौवायवर वारि विचार होहिं कवितमुक्कामगि चारु दोहा युक्तिदेधिनिपाहिये गस चरितवरबाग। पहिरैसजनविमलारणोमा अति अनुराग जेजनमेकलिकाल कराला करतत वायसवमसाला चलन कुपंथ वेमग छोडे । कपट कलेबरकलिगलभाड़े वचकभक्ति कहाय गम के किरकवच कोह काम के तिनमहंप्रथम वजगमोरी, धिगधरमधिजधधक धोरा जोअपने अवगुणा संवकही वाकया पारनहि लहूहूँ।। नाते मैं अति अल्प वराने थारेमहंजानिहहिं सन्यानो समुक्तिविविधिविधिविनंतीमोरी कोउनकथासुनिदेइहिरवारी स्ते पर करिहहिंजे शंका। मोहिंचेश्वधिकलेजड़मतिका कविनहोंहु नहिंचतुरकहाऊ मनिअनुरूप रस गुणा गाऊं कहरवपति के चरित अभाग कहमतिमोरिनिरत संसारा हिमारुतगिरि मेरुडडाही। कहहु तलकहिले माहीं। समुअत्तासित रामपभुलाई किन कंधोमन अति कलाई पाराममहानिधि भागमनिमम पुराण नेतिननि कहिजासुगुणा करहिनिरंतर गाना -- ft-
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वासकाराड
समानत प्रमअमत्ता सोई॥ नदपिकहे विनरहान कोई।
जहांचे अस कारगा गरवा : भमभावभीति वहुमाया
एक अनीह रुप माना अजसच्चिदानन्दं परधामा।
यापकविश्वरूपसगवाना निधार देह चरितक्तनाना
सोकेवलमतनहितलागी परीकपालेपणानअनुरागी
जेहिजन परममता अरुछोह तहिकरुणाकर कीन्हनको
गरबहोरिंगरीवनितान सरल सवलसाहिवरपराज
बुधवरराहिहरियणा असजानी करहिपुनीतसुफलनिजवानी
लिहिचलमै रघुपतिपुरणगाया कहिहोनाइ रामपद माथा॥
मनिह प्रथम हरिकीरत गाई हिमगवलनसुगममोहिभाई
होहा अनिअपारसरित कर जोन्टप सेतु काहि ।।
चदिपिपीलिकापरमलघुविनु अमपारहिंजाहि १
रहपकारवलमनहिदाई। करिहौरपति कथा सुधाई
व्यासादिककवियुगवनाना जिन्ह सादरहरिचरितवरवाना
चरणकमल बन्दौं सबकेरे पुरुबहुसकल मनोरथ मेरे।।
कलिकेकविनकरौं परणामा जिनवरनेरघुपति गुमायामा
जेषातलकविपरम सयाने। आयाजिन्हहरिचरित खाने
भयेजे ग्रहहिजेहोरबागे॥ पावोसहकपटछलत्याग
होहुक्सानदेह वरदान । साधु समाजभगितसंमान।
जोपवन्धबुध नहिं आदरही। सोचमचादि वाले कविकरहीं
कीरतिभागातभूतिमलसोई॥ सुरसरिसमसवकहंहितहाई
राममुकारतमशिनर्भदेसा | असमंजसबसमोहिमेदेसा।
तुम्हरीलपासुलभ सोउ मोरे। विनिमुहाइ निपार पटोरे
करहअनुराहमसजिमजानी विमलपाहि पनुहसूसुरानी
होहा सरलकवितकरितरिमलसोचादराहसजान
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बलकाराड.
सहजचयरविसराइरिपुजोमुनि करहिं दरवाम।।
सोनहोइविविमलमति हिमतिबलं प्रति शेर
करहुनपा हरियाणा कहाँधुनिपुनिकर निहोर ।।
कदिकोविदरषदा चरितमानसमंजुमगल ॥
वालविनय सुनि सुरुचलरिषमोपरोहतगाल
सोरा वन्दौंमुनिपद कंज रामायणजिन्हानमयों
सखरस कोमलमंजु रोगरहितपणा सहित
वन्दौंचारेड वेदभववारिधि वाहिल सरिस ।।
जिनहिनसपनेहुरधानतरपनिविदा
वन्दौनिधिपोतु भवसागर जिनकीन्ह यह ।।
संबंधायाधेिनुगडेवलविधवारुनी ।
रोहा विधविश्वधगुरचरणावन्दि कहीं करजोरि
पसन्नपुरवहुसकलमंजमनोरशमोरि
निबन्ने भारद सरसरिता गिलपुनीत मनोहर चरिता
मज्जमपान पाप हरएका। कहतसुनतइकहर अविवेका
एमपितु मातु महणाभवानी॥ यावादीनबन्धु दिन दानी
सितदारवामिसरवासियापी के हितनिधिसतविधितुलसीके
कल्लिविलोकिजगहितहरगिरिजा सावरमंचनालजिनसिरजा
मनमिलधारतरबार्यनजापू गरमाव महेश प्रतापू ।
सोमहेश मोपर अनुकूला करौंकंथा सहमंगलमूला
सुमिर शिवाशिव पायपसाऊ वररामचरितचित्तच्चान।
भगिनिमोरिशिवनाविभांनी शशिसमाजमितिमनसुराली
जोगहकथा सनेहसमेता कहिहहिंसुनिहहिंसमुभिस्वेता
होइहिंगम परंतो पनुरागी कलिमलरहितममंगलभागी
दोहा सपनेसाबमोहिपर जारि गौरिपसाङ ।।
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- बालकाण्ड तौफुरहोऊजो बरियत मान २१ वन्दी अवधिपुरी अति पावन, 'सरजूमरिकलिकलुबनसावन प्रशानों पुरनर नारि वहोरी समताजिनपरपमुहिन थोरी सियनिन्दक अधोधनसाये लोकवियोकवनाय बसाये। वन्द कौशल्यादिपिशाची कीरतिजासुसकलंदिरागांची गटेजहरघुपतिपाणिचार विश्वसुरवदखेखकमल तुसाई स्पारथराउंसहित सब रानी। मुक्कतसुमंगल मूरतिखानी करों प्रणाम कर्म मनवानी करहुं कपासुत सेवक जानी जिनहिविरचिवड भगोविधाता महिमाअवधिरामपितुमाना सोरटा वन्दो अवधिभुआलसत्यप्रेमहिराम पद ॥ विठुरतदीनदयाल पियतनत्रयाइच परिहरेउ।। प्रणवोपरिजनसहित विदेहू। जाहिरामपद गढ़ सनेहू ।। योगभोग महंगरवागोई॥ - रामविलाकत पगटेर सोई ।। घावों प्रथमभरत के चरना जासुनियमइत जाइन वरना एमचया पंकजमनजासू। लुममपवनजैनवासू चन्दौलश्मरा पदजलजाता सीतेलंसुभगभक्तसुरक्दाता पति कीरतिदिसलपत्ताका समानभयो योजाका शेयसहनशीश जगकारन जोवनरेडभूमिभय गरेन सासोसानुकूलरहुसापर नपासिंधुसौमित्रगुरागकर रिपुसूदनपर कमलनमासी शूरसुतील भरत अनुगामी महावीरविनों इनुमाना रामजासुयश आप वरदाना सोखा बन्दोपवनकुमार खलवन पावकज्ञान बने । जामुहइयागारवसेदिरामगारचापधरि, रुपिपत्तिच्छनिशाचरराजागिदादि जैकीशसमाजो हन्दी सेंद के चरणसुहाये। अधम शरीरास जिन पाये: म . A .. odi वालकारांड, रखपति चरगाउपासकजेते स्वारगमुरनर असुर समेते चन्दौं पदसरोज मन करे जदिन कामराम के चेरे।। शुकसकादियादिमुनि नारद जेमुनिवरविज्ञान विशारद प्रणादों सहिधनिधारशीया करहुलपाजनजानिसुनीशा, जनकसुत्ताजगजननिजानकी अतिप्रायपियकरुणानिधानेकी ताके जुगपद कमल मनाऊ। जासुतपानिसलमति पाऊ। पुनिसनवचनकसेरघुनायक चरणकमल बन्दसवलायक राजिवनयनरेधन पायक मतविपतिभनसुखदायक दोहा गिरा अर्थजलवीचिसमकहियेभिन्ननसिन्न वन्दौसीतारामपदं जिनहिपरमप्रियविन्त २२ वन्त रामनाम रघुवर के हितुक्तपानभानुहिम करके विधिहरिहरसयवेदमाग से गुराअनूपमानिधानसे महामंत्र जो जपन महेश । कापी मुक्ति हेतु उपदेश महिमाजासु जानिगया राऊो प्रथमपूजियतनाम अभाऊ। जानि शादिकवि नामप्रतापू भयेउ सिद्धकरिठलराजापू सहरानामसमसुनिशिवदानी पिने वीजशिवसंगभवानी हरयेहेतु हेरिहर ही को कियभूयरातियभूयण ती को नाम पभानु जानिपिावनीके कालकटफलदीन्ह उसी के।। होहा परयामातुरघुपति भगति तुलसी शालि सुदास रामनारावरवरराजुगसावन भादौ मास॥ ५॥ धारवरमधुर मनो हरहोग- वरणविलोचनजनजिय जोड़ सुमिरत सुलभसुखद सवकार लोकलाइ परलोक निवाहू कहत्तसुनतमुमिरत सुट नीके | रामलयण समप्रिय तुलसीके चरणान वरमा प्रीति विलगाती बह्मजीवसम सहजसंघाती गरनारायर सरिस सुचाना : जापालक विशेषजनवासा Te-
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बालकाराह :-
भक्तिमुतिय कलकरनविपणा-जगहित हेतु विमलविधुपूया
स्वादतोयसमसुगतिसुधाके कटपोय समाधरवसुधाके।
जनभनमंजुकंजमधुकरसे। जीह यशोमनिहरिहलधरसे
हाही एक भवइकमुकदमारणसरवरगान पर जोर
जुलसीरधवरनामके वरणविराजत दोर २४
समुफतरस नामरुनामीपतिपरस्परप्रभुअनुगामी
नामरूप होठईश उपाधी कथयनादिसुसामुनि साधी
कोवड़ छोर कहत अपराधू मुनिगुरासेदसमुमिसाध
हिरिवरूप नाम आधीना गजाननहिं नामविहीना
रूपविशेष नास दिनु जाने करतलगतिनपरहिंपहिचाने
सुमिरिय नामरूपविनुरेखे धावतहृदयसनेह विशेये।।
मामरूपगति कथकहानी समुमतसुरवदनपरनदरखानी
अगुशासगुराविचनामसुसारखी उसयांवोधकचतुरदुभाषी
दोहा रामनाममणिदीपरि नीदेहरी द्वारा
तुलसीभीतरवाहिरोजोचाहसिउजियार २५
नामजीहजपि जागाह योगी विरतिचिंचारमपंचदियोगी।
ब्रह्मासुरवाहिश्चनुभवहिनूपा कथचनामयनामनरुवा
जानाचहहिंगूदगति जेम नामजीहजपिं जानहि तेज
साधक गोगजपहिलपलाये होहिसिइणिमादिकपाय
अपहिनामजन भारत भारी मिटहिकुसकर होंहिसुरवारी
रामसक्तिनगचारिषकारा सुती चारे अनघउदारा।।
चहुं सतुरनकहनाम अधार जानीपभुहिंविशेष पियार।
चहुँ युगचहुंचुर्ति नामभाऊ कलिवियनाहिचानउपाऊ
दोहा सकलकामनाहीन रामभक्ति रस लीन ।
नामसुप्रेमपियोयहरतिनहिं कियेसनसीन
-वालकाराई
अगुरासगुणदोऽवहारस्वरुप अकय अगाविनादिअनूपा
मारेमन मंड नामवुहू ते ॥ कियजेहियुगनिजतसनिजहते
पौर सुजनजेलमाहि जने की कहापत्तीतिप्रीतिरुचमनकी
एकदारुगनहाविव एक
पालक युगसम ब्रह्माविवेक
उभय प्रगम (गगुगमनामते कहनामावड बोरामत
व्यापकएक ब्रह्म अविनापूी मतचित्तनधन, आनन्दीशी
असपमुहृदयश्वतधीवकारी सकलजीवजगदीनदुरवारी
नामनिरुपतीनामजतन ते.. सौ प्रगटनजिमिमोलरंतनते
दोहा लिगुरातिदहिभातिवईनामपभाइअपार ।।
कहाँ जामवड़ामतेनिजविचार अनुसार॥२७
रामभात हित नरतनु धारी महिसकटकिय साधुसुरवारी
नामसपेमजपत अनयामा भक्तिहोहिमुद मंगले वासी
रामएकतापसत्तिय तारी नामकोटिवलकमानसुधारी
चापिहितराम मुकेतसुत्ता की सहित्तसेनमुक्त दोन्ह विनाकी
सहितदीयं दुरवदासदुरासालानामजिसिरविनिशनासा
मजेउरामा भर्वचापू भवभय भजन नाम पतापू
दंडक वन प्रभु कीन्हसुहावन जन मन अमितनामकिमपावन
निशिचरनिवारदलेउरवनन्दन नामसकलकलिकलुषनिवेदन
दोहा शव गीध सेवकान मुगीतवान्ह रघुनाथ
नामहधारे मित्तखलवेदविदित गुरागाथ
रामसुकरविभावशा दोऊन गिरवेशमा जानसव कान
नामवनेक गरीब निवाजे नोकवेदवारविरदविराजे।
रामभाल कपि कटकवारा नितु हेनु अमकीन्हनधार।
नामलेतंभुसिंधारवाही करडुविचार सुजन मन माही
रामसकलरा रावरा मारा सीयसहितनिज स्पगुगारा
-
वास्तुकाराड on .. . राजाराम अवधजधानी।। गावत गुरासुरमुनिवर वानी सेवक सुमिरतनामसपोती तिनुपमप्रवलमाहदलजीती फिरतसनेहमगनमन अपने नामप्रसाद पाचनहिंसपने दोहा ब्रह्मरामन नामवड वरदायक वरदानि ॥ ॥ रामचरितशतकोटिमहलियमहेपानियज्ञानि नामपसादामु अविनापी सनिअगलमंगलराशी शुकस्नकादिसि मुनियोगी नामप्रसावामुखभोगी नारदजानेउनाम पत्तापू॥ जगप्रियहरिहरहरिप्रिययापू नामजपतप कीन्हप्रसादू। भक्तशिरोमणिमेपहलाद् वसालाननजपेठहरिनाम पाठश्चलअनूपम टीम्।। मुमिरि पवनसुत पावननाम अपनेवपाकरिरारदाराम अपत्यजामिलगजगनिका भयेमुक्तिहरिनामभाऊ में कहउकहांलगिनामवड़ाई रामनसकहिनामगरागाई दोहा राम सामको कल्पतरु कलिकल्यानिनिवास जाममिरत विभागर्ने मुलसी तुलसीदास३. चहगतीनिकालनिहलोका मगेनामजपिजीवविपाका वेद पराणसन्तमत रह सकलमुक्तातफलामसनेह ध्यानपघमायुगमवयुगदूज हापरपरित्तोपत्तपसु पूजे कलिकेवलमलमूलमलीना पापपयोनिधिजनमनमीना नामकामतरु कालकराला सुमिरतसमनसकलजजाला रामनामकलिअभिमतदाता हितपरलोकलोकपितुमासा महिं कलिकमनभक्तिविवेक, राम नामअवलंब नए कू कालनेमि कलिकपटनिधान नामसुमतिसमरथ हनुमान दोहा रामनाम नरकेसरी कनककपिपुकलिकाल आपकजनपहलादजिमिपाल हिलि मुरसाल ३१ ॥
१६
चालकारा
भाय कुभाय अत्तरख भालसहा नामजपत मगलादपादसलू
मुमिरि सुनामरामगुणगाथो को नारधनाशीह माथा।।
मोरिसुधारहिसो सवभाती जासुक्तपानहितमा अघाती
रामस्वस्वामिकमेढ़क मोसे निजदिशिदेवदयानिधिपास
लोकहु वेदसुसाहेव रीतीविनय सनतपहिचानतीनी
गभीगरीव गाम नरनागरगडतमू मलीन उजागर
मुकविकुकविनिजमतिअनुहार न्टिपहिमराहतसवनर नारी
साधुसुजानसशीलरपाला रिण अशभलपरम कृपाला
सुनिसनमानहिंसवाह सुवानी भिनितभक्तिमतिगतिपहिचानी
यह पातमहिपाल सुभाऊ जानिशिरोमगिकाशलराफ
रोफतरामसनेट निसोतकोजगमदमलिनमतिमात
दोहा सटसेवक कीपीतिरुचिरविहहिरामपाल
उपलकिरजलजान हिसचिवसुमतिकपिभाल ३२
हाहुकहावतसवकहत रामसहतउपहास।
साहेवसीतानाशसे सेवक तुलसीदास ॥॥३३
अतिवडि मोरिदिढाई वारी सुनियधनरकहुनाकसिके
समुझि सहमिमोहिंअपडरचपन सामधिरामकीन्ह नहिंसपने।
सुनिश्रतत्वोकि सूचित्तवातुचाही भक्तिमोरिमतिखामिसराही।
कहतनसाइ होइअतिनीकी फित्तरामजानजनजीको
रहतनमभूचितचूक कियकी करतसुरति सौ वारहियेकी
जेहिं अवधेठ व्याधिमिवाली फिरसुकंटसोईकान्हकुचाली
साइकरतूतिविभीषण कैरी मपनेदु सो नराम हिय हेरी
तभरतीह भेटत-सनमाने राजसमारखवीर बरगंने
होड़ा प्रमुसहतर कपिडारपरकिय बापु समान।
दलमीकह नराम में साइन शालनिन ।। ३३
IM.
4 . लकाण्ड रामानकाईरादर है. सब हाकीनाका जोयह साचो है सदा तौ नीकोतुलसीक. ३५ महिंविधिनिजगुरादिलकहिसंवहिवडीशिरलाइ दरेगोरघुवरविशवशमनिकलिकलेबनसोडू: यादवल्ल्य जो कयामहाङ्काभिराजमान वराहसुनाई कहिहों सोइसंवाददरवोनी सुनसकलसजेन मुखमान शंभु कीन्ह यहिचरितमुहावा परिकपाकरिउसहिंसुनाना साइपिालकाकभुसुगडहिंदीन्दा रामभक्ति अधिकारीचीन्हा निहिसनयाज्ञवल्क्य पनिपाना तिन पुनिभरद्वाजपत्ति गाना ति औताक्तासम शीला, समदरशी जानहिं हरिलीला जानहिं तीनकालनिजशना, करतलगीतामेलकसमाना ओजिहरिभक्तिर जाना। कहहिंसनहिंसमुमहिंविधिनांनी दो मैशानीनज गरुमनसुनाया मुसकरखेत । समुमिपएनहिबालपन तवांतरेहडनचेत ३७ पोतावताज्ञाननिधिकथारामकीगढ़। किमिसमुझे हिजीवजड कलिमलसितेतिमट ३१ सदपिकहींगुरुवारहिवाल समुमिनरीकछमतअनुसार भायावन्ध करवमें सोई॥ मिरेमनपवा जेहिहोई जसका बुधिविवेकवलमोर तिसंकहिहाँहियहरिके रे। निसदेह मोहभ्रमहरी कारों काभवेसरितातरयी बुधिविनामसकलजनरजनि रामकचाकत्तिकमविलेजीन रामकथाकलि मन्नगररण निविवेक पावककहमरणी रामकथा कत्तिकामद गाइ सुजनसजीवनमूर सुहा सोडवसुधातलसुधातरंगिन भिवभंजनियसभेक भगिनि असुरसेन समनकी नकदनि साविधिकुलहितोगनिराम संतसमाजपयोधि रमासी विश्वभार धर अचलसमासी यमगणसंहमसजगयमुनासी जीवन मुक्त हेतु जनुकोपी - --
--
२१
।
वालकायह
रामहि प्रियंपादनतुलसीसी दलसिदासहितहिपहुलसीसी
तिप्रियमेकलशैलमुलसी मकालासाहपदसपनिरासो
सिदगुरासुरगण अम्व अदितिमी रखवरभक्तिप्रेमपरिमितिसो
होही राम कथा मदाकिनीचित्रकूट देत गोरु
उत्तमीमुममसनेहवनमियरघुवीर विहान ३
रामचरितचिन्तामणि चारू मजसुमजिनियर आतिगार
जामंगलगुणयामरामके दानमुकिधनधर्मभामके
सद एन मानविराग योग के विधवैद्यभवसीमनोगके
जननि जनसासियरामप्रेमके वीजसकल वतर्मनेमके
एमनपापसताप ग्रोक के पियपालकपलाकलोकके
सचिमुभरभूपनिविचारक कुमजलाभादधि अपारके
कामकोहकालमत्तकरिंगगाने कहरिमानकजनमनबनके
अतिथिज्यप्रियतम पुरारके कामदघनदारिददगारके
मत्रमहामगितिपयव्यालके मटत्तकतिनकु कमाल के
हरनमोहतमदिनकरकरसे। सिवकालिपालजलधरसे
अमिमतदारनदेव तरुवर, सिवतसुलममुरबदहारेहस्से
सुकवि गरदनभमनागास रामभक्तजनजीवनचन से
सकलमुलतफलमयमागसे जाहिरनिरुषधिमाधुलासे
सवक मनमानसमगलसे पावनगरातरर्गमाल से।
दोहा कुंपथकुतक कुचालिकलिकपदस मानण्ड
दहनरामगुराप्याडमिईधन अनलपचण्ड ४
राम चरित राकेशकर मरिस मुरबदसनका
सतनकुमुदचकोरचित्तहितविशेषवडलाहु,४१
कीन्ह प्रमोहिमोतिभवानी जोहविधिशकरकहावस्वान
सो संदहेतु कहदमै गाई कथाप्रवन्ध विचित्र वनाई
. . २२ Var . वालकाराड जिनयहरूयामुनीनहिहोई, जनि पाथर्यकरैसुनिसाई कथा भनौकिकसुनहिजोज्ञान्य नहिंधाचर्यकाहि पसनानी समझयाकामिनिजग नाही अभपतीतितितकेमनमाही नानाभात रामअवतारारामायणपात कोरिअपारा कल्भेदहारे चरित मुहाये भांति अनेकमुनीशनगापे करियनसंशय असरानी मुनियकथा सादररतिमानी रोहा रामधनन्तभनन्तशा समितकथ्यविस्तार सुनिश्चर्यनमानिहहिजिनकेविमलक्विार ४२ इहिनिधिसबसपायकारद सिरधरिगुरुपदपकजधुरी पुनिसनहीविनती करोरी करतकथाजेहिलागुनवारी सादरणियहिनावमाथा वनौविषादरामगुरागाथा सम्वतारहसा इकतीसा करौं कथाहरिपदधारसीसा नौमीभोमवारमधुमासा .अवधपुरीयहि चरितपकास जेहिदिनरामजन्मश्रुतिगावति तीरयसकल तहांचलियावाह असुर नागरवगनरमुग्निदेवा गायकरहिरखनायकसेवा. जन्ममहोत्सवरचहिंसजानकरहिंगमकल कीरतिगाना रोहा मझेहिसजन चन्द बहु पावन सरयू नीर।। जपहिरामधरिध्यानरसुन्दरश्याम शरीर ४३ दरंपरशमन्जन अरुपानाहौपाप कहिवेदपुरावा नदीपुनीत श्रमितमहिमा पनि कहिनसकहिशारदाविमलमा रामधामदापुरीमुहातनि लोकसमस्तविदितजगंपादन चारिवानिजगजीवापारा अवधतजेतननहिसंसारा.. सवविधि पुरीमनोहरजानी सकलसिमदमंगलवानी बिमलकथा कर कीन्हमा सुनतनसाहिकाममददमा एमवरितमानस यहनामा मनतवन पोतिषामा
4
वारतकाराव
मनकरिविषय अनलवनजरही होइ रवी जोइहिसर पाही।
रामचरितमानसमनभावन विरवेट पाभुमुहावन पावन
विविधिदोषदुरवदारिददावन कलिकुचालिकलिकलुषन मानन
चिमहेंशानिजमानस गरवा पाइसुसमणिवासन भाषा
लाते रामचरितमानसवर धरेनामहियहरहरखि हर
कहकशा मोइसरवदमुहाई सादरसुजनमुनहमनलाई
दोहा जसमानसजेहि विधिमयोजगपचारोहहन ।।
अवसोइ कहौंपसंग यव सुमिरिउमा चब केतु ६४
शंभप्रसादसुमतिहियहुलसी रामचरितमानसकवितुलसी
कर मनोहरमति वनहारी मुजनमुचितसुनिलहुसुधारी
सुमत्तिभूमियतहदय अगाधू वेदपुराणा उदधि घन साधू।
वस्यहिरास सुया वर वारी॥ मधुरमनोहर मंगलकारी
लीलासगुणाजोकहहिंदरखानी मोइस्वच्छता कमलहानी
प्रिमभक्तिजोवरणिनि जाई | सोडमधुरतासुप्रतिव सोई॥
सोजल मुक्ततलिहितहाइ राममा जगजीवन सोई
मेधामहिगतसोजलपावन सिमिरि यवणामाचलेमपावन
भरेउसुमानसशिथिलथिरान सुरवदशीनरुचिचारुचिराना
दोहा सुटसुदर संवादवर विरचेठ हिविचारे
तेड्याह पावनमुमगसरघाटमनोहरचारि ५
सम्रप्रवन्ध सुभग.सोपानाजाननयनानररवतमामान
रघुपतिमहिमायगुणाप्रवाधा वरनवसोइयरवारिअगाधा
एमसीराथसिलिलमुधासम उपजावीचिविलासमनारमा
पुरइनमवनचारुचौपाई युक्तिमजु मशिगसीप सोहाई
छन्द सोहा सुंदर दोहा॥ सोडूबडुरंग कसत्कुलमोह
अर्थअनुप सुभावसुभामा गिदपरागमकरंद गमा
-
Vir
•२४
८
चालकार
सुकत एंज मजून मलिमाला ज्ञानविण्ग विचारसराला
शुनि अवरेवकवितयुगाजाती/ मीनमनोहरते बहुभांती
अर्थधर्म कामादिक चारी कहवज्ञान विज्ञानविचारी
नवरसजपनपयोगविराग तेसवेजलचरचारुतडागा
सुततीसाधुनाम गुणगाना सिविचिचजलविहंगसमाना
संतसमाचदिपावराई श्रद्धा कत्तु वसंतेसमगाई
भक्तिनिरूपरणविविधिविधाना- समादयानुमलनाविताना
संयमनियम फूलफलज्ञाना हिरिपदरतिरसंवेवरवाना
औरो कथा अनेक प्रसंगा तिरे पुषितवर्नरणविहंगा।
दोहा- पुहुपवाटिका वागवन सुखसुविहंगविहार
मातीसुमनसनेहजल सींचत्तलोचनचारु ४६
जेगावहिं यह चरितसंभारे तिराह तालचतुररववार
सदासुनहि सादरनरनारी तेइमरवरमानस अधिकारी
अतिरवलजेविषयीवककागा दहिसरनिकटनजाहिवमागा
संवकभकसिवारसमाना इहीनविषयकचारस नाना
लिहिकारमा आवतहियहारे कामीकाकवलाक विचारे
शावत हि मा अतिकटनाई रामतपादिनु आइनजाई।
कठिन कुसंगकुपथुकराला तिनके वचन व्यापहरियाला
ग्टहकारज नानाजजाला ते अतिदुर्गम गैलदिमाता
बनविषयमोहममाना नदीकुत भयंकर नाना
दोहा. जे अंहासवलरहित नहि सतनकरसाथ॥४७.
तिन केहमानसं अगमतिजिनहिनपिपरघुनाथ
जोकरिकालाइ पुनिकोडाजातहिनीदजुड़ाई होई
जड़ताजाइविषमरलागा गयउन मजन पाव भागा
करिनमाइ सरमन्तनपाना फिरिमावसमेत अभिमाना
21 '-04 an जोवहारिकोउपहनावा सिरनिदाकरिताहिसुनार सकलविध व्यापहिनहितेही राम कपोकरिबिन सोइसादरसरमजन करही महाघोरवयताप नजर तेनरयहसरतजहिनका जिनके रामचरितमलमा जोनहाइचहदहिसरमाई सोसतसंगकरी भवनई असमानस मानसचखचाही भडकविहिनिमल वढ्या हृदयानन्दछलाह। उसमेड प्रेम प्रमोद प्रवाह वृत्तीसुभगसरितासरितासी रामविमलयाजलभरित सरयूनाससुर मंगलमूला लोकवेदमत मजल कला नदी पुनीत संमानसनदिनि कलिमत्तार दोहा प्रतात्रिविधिसमाजपुरयामनगर सत्तसमाऋतपसवधसकलसुमंगलसू एमभक्ति सुरसरिताहजाद मिलीसुकीरताबरयु सान जगम समर गपापावन मिलेउमहानिदसान महावन युगविवक्ति देवधनधारा साहितिसहिनसुनिए विविधितापवासकामाहानी रामस्वरूपसिंधुमम मानस मूलमितीसुरसारही सुननसुजन मनपान करही विक्विकथाविधिविभाग जनुसारतीतीर वनवागा उमामहयाविवाहवराती तिजलचर गणिताती रघुवर जन्मअनन्दवधाई भिवरतरंगमनोहर लाई दोहा चालचारत चहुबधुकवनजविप्लवहरंगे नपानीपरिजन सकतमधुकरवारविहग सीय स्वयम्वर कयामहाई। सिरितमुहादानमो विक नदीनादेवटपमश्रने काग किंवटकुशल उत्तरमीदवेका पुनियन पासाहोड़ी पथिक समाजसाह सरिसोई 131
खालकाराडा
घोरयारभगनाथ रिमानी ॥ धारसुवन्ध राग वर वानी
सानुजएमविसहरलाही सो शुभ उमग मुरबदसवका
कहतसुनतहबाइपलकाही निमुक्ततीजनमुदितनहाही
गमतिलकहितमगलाजा पर्वयोगजनु नुरे समाजा
काई कुमति कैकई कैरी॥ परीजासु फलदिपतिघनेरी
दोहा समन अमित उत्पात सदभरतचरितजपयाग
जलधखेलअवगुणाकंचनजल्लसलवककाग ५०
कीरतिसरित हंजरुरी समय रहातान्न पावन
तान्न पावन भूरो।
हिसहिमशैलसुतोणिक्याहू प्रिमशरसरवदनभुजन्नाछाहू
दर नवरामविवाहसमाज सोनुदमगलमयशराज
गीयमदुसहरामवनगवन पथ कगारवर जातप पवन
वर्या धोरनिशाचर रारी: सुरकुलपालि मंगलकारी
रामराज सुरव विनय चड़ाई विपदसुखद सोडू शारदमुहाई
सतीशिरोमणिासिय गुणगाथा सोद गुणा अमल अनुपम पाथी
भातरभावसप्रशीतलताई सदोस्करसंवरनिजाई
हेहा अवलोकन बोलने मिलनिप्रीतिपरस्सरहामान
मायभलिवचधुकीजलमाधुरीसुवासे ५९
आतिविनयधीनता मारी लधताततितमुवारनतारी
अद्भुतसलिलसुनतयुगकाही भासपियासमनोमल हारी
राम सुप्रेमहि पोयतं पानी | हरतसकलकलिकलमगलानी
भव अम पोषकत्तापकताया शसनदुरित दावेदारिददोषा
कामकोह मदमोहनसादन विमलविवेकविरागवदावन
सादरमञ्जनपान किये तो मिहिपापपरितापहियते।।
जिन यह वारिनमानसोये तिकायर कलि कालविगोये:
विनिरविविकम्भववारी फिरहिटगाजिमिजीवदुरबार
२७
..
PAD
वाल.काराडा
बिहा मति अनुहारिमुवारिखर गुणगामनअन्हवाइ
सुमिरिभवानी प्रोकरहिं कहि कविकथामुहाइ ५२
भरद्वाजजिमि पकिय याज्ञवल्क्यमुनिपाये
प्रशसमुख्य संवाद सोडूकहिही तुवझाय।।
अघुपत्तियदपकहहियधरिपायघसादः।।
कहीं यूगलमुनिर्यकमिलनसुभगसंवाद।। ५४
भरताज मुमि वाहि प्रयागाजिनहिरामपअति अनुराग
तापसंसारमदयामिधाना: परमारथपथ परमसुजामा
मधमकरगतिरविजेवहोई तीरथ पतिहि आवसवकोई
देवदनुजकिन्नर नर ओगी सादरमजहिंसकलत्रिवेणी
पूजहिमाधव पद जलजाता. परसि अछयवहर्षितगाता
भरद्वाज आसाम अतिपावन परमरस्यमुनिवरगनसावन
तहां होय मुनिकाययसमाजाः जाहिजेमञ्जन तीरथराजा
मन्नाह पतिसमेतडकाहा कहहिं परस्परहरिगुरागाहा
दोहा मानरूपगाधर्मविधि वरनहितत्वविभाग
कहहिंभक्तसंग वन की संयुततानविराग ३५
शिरूपकारभारमकरनहाही पुनिसवनिनिज प्राधमजाई
प्रतिसंवत असहोइश्चनेन्दी सिकरमजिगवनहिंमुनिबन्द
एकवारभरिसकरनेहाये॥ सवमुनीता याचमानसिधाये
याज्ञवल्क्यमुनिपरमविवेकी भरताजरारबउ पटेकी ।
सादरचर। सरोज पखारे प्रति पुनीत आसनवैठारे
करिपूजा मुनिसुयशावरवानी वाले प्रतिवनीतम्रदुवानी
नाशएक समय वड़ मोरंग करतलवेदतत्वसव तौर
कहतमोहि लागतमय लाजा नकही वह हार अकाजाः
सहा सन्तकहहिं असमीतप्रतिपुराणाजोगाव
.
तालकाराड
dia
होर विमलेविवेक उरगुरुसोंकिये बुराव
असविचारप्रगटेनिजमाह हिरहुनाथ करिजनपर कोई
रामनामकर अमितभावासंतपुरारा उपनिषद गावा
संततजपत शंभुअविनासी शिवमगदानज्ञानगुणरासी
सामाचारिजीवजगप्रहहीं काशी मरत परमपदलही
सोपिराममहिमामुनिराया पिशवापदेश करतकारिदाय
रामकौनपभूपूछा तोही कहोदुझाडूकपानिधिमोही
एकरीम अवधेश कुमार, तिनकरचरितविदितसंसार
नारिदिरहदुखलेहाँ अपार भयडरोबरगरावणामारा
दोहा भुसोरामकिपरकोउ जाहिजपतविपुरारि
सत्यधामसरवनतुम कहविवकवि चारित ५३.
जैसमिटै मोहभम भारी किहहमोकथानायविस्तारी
यारावल्क्य वालमुसकाई, तुमहिंविदितरघुपतिप्रभुताई
रामभक्त तुममनकामवानी चतुगेई तुम्हारे में जानी।।
चाहहु सुनै राम गुण गदा कीन्हे पायमन प्रतिमंदा
तात सुनहुसादरमनलाई कहडेरामकी कथा सुहाई
महा मोहमहिशेयविशाला राम काकालिकाकोला
रामकथाशपिकिरणासमाना सतचकोरकरहितहिपाना
रोसेइ संपाय कोन्ह भवानी महादेवनदकहावरवानी
हा कहाँसोमतिअनुहार अवउमा शंभुसंवाद ।
भयठ समयजेहिह जेहिमुनिमुनिमिहिं विवाद
एकवारवता युगमा ही भुगये कुमजोषिपाही
संगमतीजगजननिभवानी पूजेऋषिञ्चविले मलानी
एमकथामुनिवर्यवखानी सुनीमहेशपरसमुरम्मानी
ऋषिपूछो हरिभक्तसुहाई, कही या अधिकारी पाई।
बाजारा
२६
महत सुनतरघुपति गुगागा कछदिनहाहि गिरिनाथा
मुनिसनविदामागित्रिपुरारी | चलभवनसंगरक्षकुमारी
लिहि अवसरमजनमाहिभाग हरिवंशलीन्न अवतारा
पित्तावचननजि राजउदासी डक बनविचरत विनासी,
दोहा हृदयविचार जातहरकेहिनिधिदानहोई
गुप्तरूप अनुत्तरेव प गयेजानसदे कोई
सोप्या प्रकार प्रतिलोमसतीन नानहिंमर्म साइ..
तुलपीदरमान लाममनडरलोचनलालची
रावणामरसामनुज कर सचावविधिवचनकान्हहिमाची
जौनहिं जाउं रहेपछितोला करतविचारनवनवना जा
इहिविधिभये पोचवसईया। ताहीसमयजाइमापूीमा
लीन्हमीचमारीचहिसंगो भयो तर सोडकपटकरंगा
करिलमूद हरीवैदेही प पत्तापठरविदितनतेही
स्टिगवध सहितहरिओये या अमदेखिनयनजलकाये
विरहक्किन्न नरवरघुराई स्विोजतविपितफिरतदोभाई
कवहयोगवियोग मेजा दिरवापर्गरविरहारक ताके।
दोहा वत्ति विविवरघुपति चरित जामहिम मसजाग
जमतिमन्दविमाह वंशहदय धरहिकच्छ नामः
प्रभसमय हिरामहिंदरवो । उपजाहिय अति हर्मविपाया
भरिलोचनविसिंधुनिहारी कुसमयजानिन कीन्हचिन्हारी
जयसचिदानन्दजरा पाने असकहिचलेटममोजनसावन
चलेजातपिावसतीसमेता पुनिपुनिपुलकित्ताकपानिकता
संतीसारणापासुकीदरवी । उरउपजासंदेहविषोयी।।
पांकर जगतबंध जगदी पा सुरनरमुनिसवनावहिरिता
तिनन्टमसुत्तहिं कीन्हपरवाना हिसच्चिदानन्दं पर धारा ।
,
ENdA- ३० बलकाराड र भयेमरान कविता विलाकी अजई शोति उररहत नरोकी चाहा बल्लाजी व्यापकरिज अजयकलयनीहभदा, मोकिदेहधरिहोइनर जाहिनजानत वेहोर दिजो सुरहितनरतनधारी माउसस्वज्ञ यथाविरारी खोजल सोकि अजस्व नारी जानधाम श्री पनि अमुरारी शंभुगिरानिम्म्यान होई। शिवसरदज्ञ ज्ञानमय कोई असमपाच मनभया अपार होइनहृदय पदोपचारा यपिपंगर न कहेउभवानी अंतरवासी सब जानी सुनहमनीनवनारिमुभाऊ साय असनधारियर काफ जासुकथाकुंभजकस गाई। भक्ति जाम मैं मुनहिं सुनाई सोडूममइष्टदेव रघुवीरा सेवतजाहि सदा सुनिधीरा छद मुनिधार योगी सिड्सन्तविमलमन जिाहध्यानहीं कहिनेतिनिगमपुराणाधागम जासुकीरतिगादहीं सोइरामव्यापकब्रह्मभुवननिकायपत्तिमायाचना अवतरेर अपने भक्तहितनिज तवनितराकुलमनी सोर्दा लागनारूपदेशायदपि कहाप्रिावधारवड वोत्तेविहंसिमहेशहरिमायावल जानिजियः जोतुम्हरेमन प्रतिसदेहातोकिनजाइपरीक्षा लहू ।। तबलगि बैठ रहौं वरंछाही जदलगिसरहहुमोहिपाही जैसेजाइमोहम भारी करसोयनादतके विचारी चली सतीशिवायसपाई कराह विचार करी कामाई उहाशंभु असमनअनुमाना, दक्षसुत्ता कहेनहिकलाना मोहिकहनसंपूायजाई विधिविपरीतमलाई नाहीं हाईस जोगमरचि गरवा कोकरितर्कवदावहिसारखा सकेहिलगेजपनहरिनामा गईसतीजहंप मुरदेशाम
दाह। पुनिपुनिहदयविचारकरिधरिसीताकररूप
आगहाइसालपथतहजाआवत भूप
लक्ष्मिणदेविउमा कृतमा चाकेनहृदयभम भयानि
महिनसकतकछु अतिगभीरा प्रमुषभावजानतमतिधीरा
सत्तीकपटानेऽ मरस्लामी सगदरसीसव मंतर नामी
सुमिरतजाहिमिद अनाना मोइसर्वजगमभगवाना
सनीकीन्ह वह तहादुराई दिखनारिमुभाव प्रभाकर
निजमायावलहदय तरवांनी बालविहासरासरवानी
रिपानिपभुकीन्ह पगाम् पितासमेत लीन्हतिजनाम
कहावहारिकहारषकेत विपिन अकेलाफर केहि
दोहा रामेक्वतदुशूट सुनिपिजा अति संकोच
सतीसभीत महापहचली हृदयवसोव
मैशकरकाकाहानमाता मानिन्नान रामपहवाला
जासत्ता नवदेही काहां उपजाति दारुगोदाहा
जाना रामसती दुरव पावा निजाभावकळपारिजमाया
मत्तीदीव कौतुमगनामा भागेराम सहितमियभाता
फिरिचिततापाप देखा. साहितनसियसुन्दरवेष
जहाँचत हितहप्रभु आसीना सेहि सिह मुना
दशिवविधिविया भनेका तितासावरकते एका
चन्दतगाकरताप मेवा विविधिवेयदेवसरदवा
दोहा सतविपात्रोन्दादेवी सित जनप।।
हिजोहदेवचनादिमुनिहितहितनअनुरूप
देखेनहतहरघुपति जते । शक्तिनसहितसकल मरते
जोदचराबर जे संसार दिखे सकल अनेक प्रकामा
पूजहिप हि देव बंदया। राम रूपसरनहि रेखा
CALA
बालकारा
-~-11
..
Your
श्रवलाको रघुपति बहुतेरे सीतासहित सय घनेरे
आइरएवरसाइलक्षिणसीता दिरिवसती प्रतिभईसमीता
हत्यकपतनु संधि ककुलाही नयनमाद वेठीसगमाही।
विद्वारविलोकउ नयन धारी कहनदीवनहंदशकुमोरी
पुनिपुनिनादरामपदं
पीलातहाजहं रहे गिरीसा
सिंहाः गई समापमहशतव हसि पूछीकुशालात
लीन्हपरीक्षा कवनविधिकहरसत्यसवात ६५
सतीसमुसि रखवीर धमाका भयवसपिशवसनकोन्हदुराफ
कहनपरीक्षा लीन्हगुसाई कीन्ह प्रणाम तुम्नागिहनाई
जोतुम कहा सोम्यो नहोई मौरमनप्रतीत अस सोई
नव शंकरदेखेठधरियाना सतीनाकीन्हवासहजीना
वहरिराममायहि शिरमाता पिरिसतिहिहि भूट कलाना
होइच्छाभावीवलवानांहस्यक्विारने प्रामु सुजाना
सती कीन्ह.मीता कर वेया शिवारमयोवियादविशेषा
जोव करौं सतीसनप्रीती मटैभक्तिपथहाईजनीती।
दोहाः परमप्रेमनहिंजाइतनिकियेप्रेमवड पाप ।
पगटनकहतमहणकक हदय अधिक संताप ६६
संबहिस्ससपदारनामा सुमिरतरामदय असआदा
इहितनुसतिहि मेरमोहिनाही शिवसंकल्प कीन्हमनमाही
यसविचारिशंकरमतिधीर चलभवनमुभिरतरसुदीरा
बलनगमान मसगरामुहाई।-जयमहशमलिमकदाई
असमानुमतितलीको अगा, रामभक्तसमरथ भगमाना।
सुमिनभगिरासती सोच। पिछशिवहि समेतसकोच
कीन्हकवना कहकपल सत्यभामजसु दीन दयाला
स्थापिसातीपूछ बहुभातीत तदपिन कहाधिपुर जागती।
बालका HIN.. दोहा सनी हृदय अनुमान किय सबजाना सर्वन कीन्हकपरमै प्राम्भुसन नारिसहजजडअन ।। सरा जल पर्यसरिसविकाइदेखहशीनिकीरीतिमलि. विगहाइरसजाइकपटखटाई परतही॥७॥ हृदय सास भुकमिजकता बनाउनहिवरना कपामिशिवपरमभाधा पगरनकहेउमोर अपराधी शकरकरत भवनविभवानी पमुमोहिंसजेड हदयश्चकुलानी निजश्वसमुमानकछुकहजाई नपै अवाइसउर अधिकाई सतिहिसमोजानिएसकेनकहाकथा सुन्दर मुरबहे गनत पंथविविधि इतिहासा विपूर्वनाथ पहुंचे कैलाशा तह पुनिसमुझियम्भुपयापन विटेवर तर करिकमलासान। प्रकरसहजरूप संसारालागिसमाधिपाखण्डअपारा दोहा सतावसहिकैलापानव अधिक सोचमन माहिः।। मर्मन कोऊजान कुछ गुणासमदिवमसिराहि नितनवसाचसतीउरमारा। कहादुरव सागर पारा। मैंजो कीन्हरघुपतिपमाना। इनिपतिवचनम्या करिजाना सोफलमोहि विधाता दीन्हा जोकउचितरहासो कीन्ह प्रविधि प्रसदूमियनहितीही शकरविमुरवजियाबहुमोही। कहिनजाइकछुहदपगलानी मनमहरामहिंसुमिरसयानी जोपभु दीनदयाले कहावा | भारत हरनवेदयपागावा।। नौमविनय करौं करजोरी | छिटै देशदेह अब मारी ।। जामोरेणिवचरण सनेह॥ मन क्रम वचनसत्यवतरह रोहा तीसपदी सुनियाभुकरौसु वैगि उपाइ। होइ मरननोदिनीहं अमदुसहविपत्तिविहाइ- इहिविधि बुरिखताजेसकुमारी, चिकशनीयदारुगो दुखभारी
نے بلاء
-Md.
अवलोकरघुपति बहुतेरे सीतासहित सुख घनेरे
साइरणावर साइलक्षिण सीता विरिवसती प्रतिभईसमीता
हृदयकप तनुसुधि कछुनाही नयनमाद वैठीमामाही।
वहारविलोकउनयनधारी कहनदीखनहदक्ष कुमारी
पुनिपुनिनादरामपद शी चलातहाजहर गिरीसा
सिंहा गई समापमहशतव हसि पूछीकुमालात
लीन्हपरीक्षा केवनविधिकह सत्यसबवात ६५
सतीममुकि रघुवीर प्रमान वसशिवसनकोन्हदुराज
कहनपरीक्षा लीन्गुसाई कीन्ह पाम तुम्हारिहनाई
जोतुम कहा सोम्टयान होई मौरमनप्रतीत अस सोई
नव शंकरदेखेठधरिध्यानासतीनाकीन्हवासद जाना
बहुरिगममायहिशिनाला पिरिसतिहिहिट कहाना
हरिदकाभादीवलवाना हस्यविचारणामु सुजाना
सती कीन्ह.सीता कर वेवा. शिवधरमयोवियादविशेषा
जोअन करौंसती मनप्रीती : मिटैभक्तिपथहोरजनीती।
रोहाः परमप्रेमनहिंजाइतनिकियेमवड पाए ।
प्रगटनकहतमहणकच्छ हत्यधिक संताप
सहिमपमुपदगिरनाना सिमिरतराम हृदय असावा
इहितेनुसतिहि मेरमोहिनाही शिवसंकल्प कीन्हमनमाही
असविचारिशंकरसतिधीर पलभवनसुमिरत रघुवीरा
बलतामान मर गिरासुहाई-जयमहामलिमकदाई
असपसातुमचितुकीको अना समभक्तसमरथमंगवाना।
सुनिनभगिरासंतीम सोचा एशिवहि
समेतसको॥
कीन्ह कवनप्रयाकहकपल सत्यधाम दीन दयाला।।
स्वापिसका पूड़ा बहु भालीन संदीपन कोहरुचिपुर गगती।
बालकार
दोहा सती हृदय अनुमानकिय सर्वजाना सर्वन ।।.
कीन्हकपर मैं शाम्भुसन नारिसहजजडअन ॥६०
परदा जल पयसरिसविकाइदेखनिकीरीतिभलि
विजागहोदरसादकपदावदाई परतहीं।
हृदयसाचसमुमतानजकरनी चिता अमितजाइनहिवरना,
कपामिभिवपरमभाधा पगरनकहेडमोर अपराधी ।
शंकरकरण अवले विभवानी पमुमोहिंसजेडहृदयकलानी
निजश्वसमुमनकछकाहजाई तपै अवाइवर अधिकाई ।।
सतिहिसमोवजानिपकेन । कहेउकया सुन्दर मुरब
मिरवत
वरनतपंथ विविधि इतिहासा विपूक्नाथपहुंचे कैलाशा
तह पुनिसमुझिावयापन वैटेवरतरकारकमलासान,
प्रकरसहजसाए संभार लागिसमाधि पखण्ड अपार
दोहा सती महिकैलाशानव अधिक सोचमने माहि ।।
मर्मन कोऊजानकछ सुगसमदिवससिराहि ।
नितनवसीचमतीउरभाराम कवहादुरख सागर पार ।।
मैजों कीन्हरघुपतिपमाना। मुनिपतिवचनमया करिजाना,
सोफलमोहि विधाता दीन्हा। जोक/उचितरहांसो कीन्हा
अविधियसमियनहिनीही शंकरविमुरवजियात मोही।
कहिनजाइकछुहदपगलानी मनमहामहिंसुमिरसंयानी
जोपमुदीनदयाले कहावा भारत हरनवेदयता गावाः।।
नौमविनय करौं करोरी रैवेगदेह अव मारी ।।
जोमारेणिवचरण सनेहूं। मन क्रम वचनसत्यवत्तएह।।
रोहा तीसपदी सुनियाभुकरौसुवेगि उपाइए
होइमरननोदिनहिं अमदुसहविपत्तिविहाइ
इहिविधिबुखितपसकुमारी विकथनोगदारुगोदुखेमारी
वालकारक
.....
वितेमवतसहम सतासीनी समाधि शम्मु अविनासी
रामनाम शिव सुमिरणालागे जानेउसतीजसातपतिजागे
जापांमुपदवन्दन कीन्हा मन्सुरव पाकर आसनदीन्हा
लोकहनहरिकथारसाला रसप्रजेसभयतेहिकाला
दिवाविधिविचारसवनायक दसहिकीन्हप्रजापतिनायक
विड़ अधिकारदमाजवादा। श्रति अभिमानहट्य तेहिं भावा
नहि कामसजनमेजगमाही प्रमता पाई काहि सदनाहीं।।
रोहा दक्षलिये मुनिवोलिसर्व करने लगे वड़ यारा
नवतसादरमकलमुरजेपाइतमरवभाग
किन्नरनारासिङ्गन्धवावधनसमेत चले सुरसा ।।
विवाविरचमहेश विनाई चले सकलसरयान बनाई
सनीविलोक गगनविमाना जातचलेमुन्दरविधि नाना
मुरसन्दरीं करहिंकलिगाना सुनत अवरुदहि मुनिध्याना
पूछेडकशिवकहेश्वरवानी पिता यजमुनिकहरबानी
जामहेमोहिंग्यायसुदेहीं। कछुदिनजाइरहोमिसएहीं
पति परित्याग हृदयबुरव भारी कहननिज संपराधविचारी
वाल्ली सती मनोहर वानी भयसंकोच प्रेम रस सानी
दोहा पताभजनउत्सव परमजीप्रसुचायसु होइ ।।
तोमैजादू पायतन सादररेखन सोड
कहेउ नीक मोरेउमनभावा यहि अनुचित्त नहिनेवतपादा
दक्षसेकत्लनिजसुतावलाई हमपरैतुमहिं विसराई।।
ब्रह्मसमा हमसनतुरखमाना लिहितें बजई करहिंअपमाना
जोविन शेले जादु भवानी, रिहैनशीलसनेहन कानी
यदपि मिनधभुपितुंगुरमरोहा जाइयविनवाले न संदेहा
दपिविरोधमानिजहं कोई तहांगकरल्यान नहोई॥
Con
वालकाराम
भाति पनेक समसुमाराभादी वसनजान उरावा
कल्पमु जाइजोविनाहिदलायें नहि भल बाल हमारे भाये
दोहा कहिंदरवाहरयानवहरहानदम कुमारि।
दियेमुरबगगासंगतव विदाकीन्ह त्रिपुरारि०२
पिताभवनजवराईभवानी। दसवासकाइनसनमानी
सादरमलिहिमिलीदक माता भगिनीमिली बहुत मुसकाना
दसन कुछ पूछीकुसलाना सितिहिविलेकिजरेसवगाता
सतीजारदेविड तवयागा कतहुनदेरिव पांकरभागा
तचिन चटजोपाकरको प्रमुअपमानसमुभिउरकलेक
पाछिल दुरवनहदय असव्यापा जसयहि भयो महा परितापा,
यद्यपिजगदारु दुरव नाना सवते कठिनजात अपमाना
समुमिसोमतिहिमयोप्रतिकाधा विधिजननीकीनगीमा
सिहा पिव अपमाननुजाराहि हदयनहींधवोधा
सकलससहिंहठिहटकि तवयोलीवचनसकोध
सुनसभासदसकलमुनिन्दा कहासुनी जिन्ह पाकरनिरा
सोफलतुरतलहवसवका भलीभातिपछितावपिताहू।
सतपाभु श्रीपत्ति अपवादा सुनीजहां तहसि मारा
काटियतासु जीमनोवसाई यस्यामदिनहिचलिय पराई
जगदात्मामहेंपा.पुरारी जगतजनक सबकेहिनकारी
पितामन्दमनिनिन्दतही दिसंचन संभूव यहि नही।
लजिही देह तुरत यहि हेनरधारचन्द्र मलित्यकेत
अस कहियोगअग्नि तनजारा मयासकतमरवहाहाकार
दोहा सतीमनमुनिशंभुगा लगे करनमरवरवीस
यज्ञविध्वंसविलाकि भारसाकीन्ह मनी ७४
समाचारजव शंकरपाये। वीरमा करिकोप पगये।
M.
बालका
प्रजापतिकीय पारवतीकासीहोना धीरचीमहारेजीककोपबीर
भागहोकरससकाशिरकारकरियजाविधंसकरना।
mint
-
Man
wie
१
पालकाराड
पतविध्वसमाइतिन्ह कीन्हा सकल मुरन्हविधितफ़लहीन
भाजगविदितदक्षगति सोई। जिसका पाम विमुख काही
यहि इतिहास सकल जगजाना, नाते मैं संक्षेप नरवाना ।।६।।
सतीमरताहरसन चरमागा जन्मजन्मशिद पद अनुरागा
लिहिकारराहिमगिरिग्रहजाई जिम्मी पार्वती तनु पाई।
जवतेडमा शैल ग्रह सकलसिद्धि सम्पतितहलाई
जहंतहं मुनिनमुनमकीन्हे उचित कास हिमभूधरदीन्है
दोहा सरासुमन फलसहितसवमनवनानो जात ।
मादीमुनरौलपरमनाकर बदमांति ५
सिरितासनपुनीतजलवहहीं लगरागमधुपसुरवीसबरहही
सहजरैरसक्जीवन त्यागा मिरिपरसकल करहिंशानुरागा
रोहौलगिरिजाह आये जिमिनराम भक्ति के पाप
निसन्तन मंगलग्रहं नाम् ॥ इह्मादिकंगावहि या जासू
नारद समाचार जव पाये। कौतुक हिमगिरिगेहसिधाप,
गैलराज रड़ आदर कीन्हा पगारबारबर बासनादीम्हा
नारिसहित मुनि पदशिर नावारपालिलसव भवनसिचाचा
निजसौभाग रहतविधिवरणामताबोलिमेंली मनिवरराव
दोहा त्रिकालजसजनमगतसदेव तुम्हारि
कहाइ मुताके दोयगुणमनिवर हत्यविचारिक
काहनिविहस गूद सदुदारी सुनातुम्हारिसकलगुरासानी
सुन्दरसहजसुगीले सयानी मामउमा अविका भवानी॥
सक्लासंपन्नकुमारी॥ होइहै सन्तत पियहि पियारी॥
सदाचलरहिकर अहियाता चिन्हितियापैहहिं पितु माता
होइहै पूज्यसकलजग माहीं। इहिसेवत कछु दुरलभनाहीं
इहिकार नाम सुमिरि संसारा नियचदहिपनिन अमिधारी,
२८
--
गलकाण्ड
मैलसुलक्षणा मुत्ता तुम्हारी सुमहजे अव अवगुगापुरचारी
अगुरायमानमातुपितहीना उरासोनससंशय हीन।।
दोहा योगीजटिल प्रकारमननगन अमंगल भये ।।
अससामीपहिंकहमिलहिपरीहस्तपसिरेप
मुनि मुगि गिरास त्वजियजानी दुखदग्गतिहि उमा हरपानी
नारदडूयहि भेद में जाना दमास्कसमुमत विस्त गाना
सकलसरवी गिरिजागिरिमयना पुलकपारीरभरेजल नयना
होड्नम्यादेव ऋमि भाया उमासोवचनहृदय धाररावा
उपजेड शिवपदकमले सनेह मिलनकटिनमनयह संदेहू
जानिकुअवसर तिबुराई सरवीउलंगौटे पुनि जाई
कठिन होइदेवमासिवानी सोचहिंदमति सरवोसंयानी
उरधरिधीरकहरगिरिराम कहाइ नाश का करिय उपाऊ
रोहा कहसमीपाहिमवतसुनिजीविधिलिखालिलार
देवदनजमरनागमुनि कोकुनमेटनबार ७
नापे एक में कहौउपसोड करेंजोदै सहाई ।।
जसवरमै पेनेड तुम पाहीं॥ मिलिहिउमहिंकछु सैपायनाही
जेजेवर के दोष वरंगते. तिसर्व शिवपह मैं अनुमाने
जोविवाहगंकरसम होई। दोयह गणासमकहसवकोई
ओनहि सैज शायनहरिकारेही उधकछुतिनकहदोयनधरिहीं
भानुक्रमानुसईरसरवाही। तिनकहमन्द वाहन कोडनाही
प्रमअरुशलमसलिलसंववहही सुरसरि कोउन अपाचनकहही
समरथ कहनहि रोगगुसाई। रविपादक सुरसरिकीनाई
दोहा जोरसहियों करहिजहाववेक अभिमान ।।
परहिकल्पभरिनर्कमहजीनकि ईशसमान
सुरसरिजलकतवारुनजाना कचईनसन्त करहितिहिपाना
३६
-......
बालकाण्ड
सुरमरिभिलेखपालन कैसे ईमाननीशाहि अन्तर जैसे
शमहनससरेय भगवाना इहिविवाहसर्वविधिकल्पाना
दुसराय पै सहहि सहे॥ श्रापी तोब पुनिकियेकलेभ
जोतपकर कुमारि तुम्हारी भाविउमेटि सकहिं त्रिपुरारी
यद्यपि वर अनेक जगमोहीइहिकहंशिवतजिदूसरनाही
वरदायक पगातारतिभंजन कपामिन्ध मेदकमनरंजन
इकित्तपालदिनशिवाराष्ट्र लिहमनकोटि योगजपसाध।
सहा असिकहिनारदसुमिरिहारगिरिजहिंदीन्ह सीमा
होइहियाहकल्याण सक्सेशयतज गिरीश
काहसवह्मभजनमुनिगयजागिल चरितसुनह जोमयक
पतिहिं एकातपाइकहिमयना नाय नमसमुझे मुनिवयना
जोवरवर कुस होइनन्पा करियविवाहसुता अनुरुपा
नतों कन्यावकरहो कुमारी कन्तमामम पारा पियारी:
जोनमिलहिवरगिरिजहियोग गिरिजड़सहजकहहिंसबलोग
सोविचारिपतिकरहुविवाहू।। जिहिनवहोरहोइठर दाहू।।
असिकहिपरीचयाधरिपोशा वोलसहितसनेह गिरीशो
वरुपादक पगटेशाशिमाही नारदवचन अन्यथा नाही
दोहा प्रिया सोचपरिहर सवसुमिरजू श्रीभगवान।
पारवत्तीजिननिरमयऊंसारकरिय कल्यान ।
अजोतुमहिं सुना पर नेह॥ तवसजाइसिरचावनदेह।
करेसुतपहिसिलैमहेश चानउपाइ नैपिरहिकलेपा
नारद वचनसंगर्भसहेतू॥ सुन्दर सवगुणनिधित्यकेत
असविचारनुमनजिसवांका सहिभातिशंकर अकलेका
सनि पतिवचनहर्षमनमाही गई तुरतउदि गिरिजा पाहीं
उमहिंविलोकिनेगनभरिवारी सहिनसनेह गोद वैगरी ।।
-
सन.क्राराज
वारहिवारलतउरला गद्गर करनकछ कहिनाई
जगत सातु सरवनमानी सातमुरबद वोली दुरानी
दोही सुनहमान में दीरिख अससपनसुना तोहि ।।
सुन्दरगौरसुविश्वर असउपदेशेउ माहिर
करडजाइतपपलकुमारी नारदकहासुसत्वविचारी
मातृपितहिनिइहमनिमावा तपमुखपददुखोपनसावा
तपयलरचैपपंचविधाता तपबलविणासकलनगवाना
तपवलांसुकरहि संहारा लपवत्तपोषधरहिमहिमारा
नपचधारसवसीय भवानी करहनाइतप प्रसजियजानी
सुनत वचन विस्मितमहतारी सपनसुनापैड गिरिहहकारी
मातपितहिबहुविधिसमुझाई चली उसातपहितपाई।
प्रियपरिवार पिता पर माता भगेनिकलमख आदनदाता
दाहा वदागर मुनियतवसाहकहासमुझाइ
पार्वती महिमासनतरहपवधिहिपार
मरिउमा पाया पति चना जाइवान तागतिपकरना
अतिसुकमारनतप योगा- मतिपदमुमिरितनेहुसंवभाग
नितनवचाउपजिअनुरामा निसरीदेह तपहिंमनलागा
संवत्सहसमलफलवाये भाकरवाई प्रातवर्षगंवाये
ककुदिनभोजनवारिवतासा किंपिकरिने कछदिनापास
विलपाच महिपरेसुरवाई। तीन महससम्मत मारवाड़ी
पुनिपरिहरेरासुरवानेठपर्ना उमानामतवमया नपर्ना
निरिवउमहितपक्षीयापारी ब्रह्मगिएमरगगनगीए
राहा भयो मनोयसुफल तवसुनिगिरि राजकुमार
परिहरिदुसहकलेसवाअवमिलिहहि विपुगरे ८४
अस तप काइन कीन्ह भवानी-भयेचनेक धीरमुनिज्ञानी।।
यदरवाजावरवानी सत्यसनामंततं सुचजानी
बालकाण्ड
आवपिनादलावन जवहीं परिहरि घरजायकत्वहीं
मिलहिनुमहिंजवसप्त चरबीशा, जानेहु तवेषमाग वागीशा
सुनतगिराविधिगगनवनानी पुिलकंगालगिरिजाहरवानी
उमाचरित मैं सुन्दरगाना सुनहाभुकरचरितसुदाजा
जवते सती जाइतनु त्यागा। लवतेविमानभयेविरोगा
जपहिंसदार नायक नामा॥ जहन मुनहि रामगुयायामा
दोहा चिदानन्दसुरवधाम शिवविगतमोहमद काम
विचरहिं महिधारहत्य हरिसकललोक अभिराम ४५
कतई मुनिनउपदेशहिताना कहूंगमगुणावरहिवरखाना
यदपिअकामनपिभगदाना भक्तिविरहदुरवदुपिनखजाना
इडिविधिगये कालव वीती नितनव हौइराम पदधीती।
नेम प्रेम शंकर कर देरवा चदिवलदय भक्तिकी रेखा
अगदेराम हातन कपाला रूपशीलनिधि लेजविशाला
पहपकारपोकरहिसराहा नविन श्वसवा कोनिरवाहा
दहुविधियम शिवहिंसमुझावा पारवती करजन्मसुनावा
अति पुनीत गिरिजाकीकरनी विस्तरसहित पानिधिवरनी
दोहा. अविनती मममुना वजोमोपनिज नहे
जाइविवाद शैलजहियहिमोहिमांगेदेड
कहिनिचयदपि उचिनश्वसनाही नाथवचनपुनिमेटिनजाही।
सिरधरिआयमुकरिय तुम्हारा परमधरम यह नाशहमारा।
मालुपिता गुरुपसुकी सानी निनहिविचारकरियशुभजानी
तुमसबभांति परमहितकारी आज्ञासिरपरनाथ तुम्हारी ।।
प्रभु तोय मुनि शंकर क्चना भक्तिविवेकधर्म यत्तरचना
वाहप हर तुम्हारपणारहरु अवररारबटुजोहमकहेज
भना ध्यान भर असभासी करसोइ सूरतिउर गरी
वाल काण्ड
१२
बहिं सप्त ऋषि शिवपाये वोले प्रभुणसवचन सुहाये ।
दाहा पारवती पहज़ायतम प्रेम परीक्षालेहाका ।
गरिहिं प्रेरि पठयह भवन दुरिकोड मंदेह ।। १०
रषिनगौरि देखी नह कसी मन्दित तपस्वजिसगा।
चोले मुनि सुनि शैल कुमारी करहवन कारणानपभारोग
कोहे अाराधहकातुम चहह हम सनसत्य मर्मसवकहर
मन्त ऋषिनके वचनभवानी, बोलो गूद मनोहर वानी ।।
हिन मर्ममनभनिसचाई हसिहहमुनि हमारिजड़ताई
मन हठ परान सुनै सिखावा चहत वारिपरभीति उठावा।
नारद कहासन्य सोजाना दिनु परखन हम चहहिंउडाना
देखिय मुनि अविवेक हमाग चाहन पान शंकरअविकारा
दोहा सुनत वचन विहसे ऋषय निगरि संभवतवदेह
नारद कर उपदेश सनि कहवसेको ८८
सुम मुतन्ह उपदेशिनजाई। निन फिर भवन नदेवनाई
वित्रकेतु कर घर उनघाला कनककशिपुकर पुनिअसहान
नारद सिखजु सुनहिं नरनारी अवशिभवनतजिहोहिंभिरवारी
मनपरीतनसज्जनचीन्हा आपसरिससबहींचहकीन्हा
देहिके वचन मानि विश्वासा तुमचाहरु पनि सहजउदासा
निर्गुण निलजकुवेषकपाली अकुलनगेहदिगम्वरव्याली।
कहह वन सुविअसवरपाये मलमू लहठगके वीराये।
पंचकहें शिवसतीविवाही। पुनि अबडेर माइन नाही
सहा व सुख सोवत सोचनाह भीरव मागिभववाह
सहज यकाकिनके भवनकबहकिनारिवटाहि दर्द
अजहू मानई कही हमारा | हमतुमकहवर नीक विचारा
अनि सुन्दर सुरसुरक्दसुशीला गावहिं वेदजासु यशलीला
'वाल काण्ड दूपनरहित सकलगुणाराशी। श्रीपनि पुरवैकुंठ निवासी।। प्रेसवर तुमहिं मिलाइवानी सुननविहसिकहवचनभवानी सत्यकहह गिरिभवतन रहा हठनछूटेछूटेंवरु देहा ॥५॥ कनकी युनियखानने होई। जारेड सहजनपरिहरिसोई नारवचननमैं परिहरऊ। वसो भवनउजरौनहिंडजो गुरुके वचन प्रनीति नजेही सपनेहसुगमनसुविचित दाहा. महादेवअवगुन भवन विष्णु सकलगुणाग्राम ॥ जेहिकर मनरमजाहिसनताहिताहिसनकाम जीतुम मिलनेउपुथनमुनीशा सुनतिउसिखतुम्हारिधीरगोशा अव मैं जन्मभु हित हारा। कोगुणदोषहि कविशंग जो तुम्हरे हट हृदय विशेषी रहिनजाइविनु कियेवरेपी लौकातकिचन्हमालसनाही कन्याअनेकजगमा जन्मकोटिलगिरगरहमारी वगेशंभुनतुरहीकुमारी जाननारदकर उपदेश आपकहहिं शतवार महश मैया से कहे जगदम्बा। तुमसहगवनेउ मयेउ विलखा देख प्रेमबोले मनिशानी।। जयजयजयजगदम्बभवा दोहा तुमनायाभगवान शिवमकलजगत पितुमात नाय चरण सिर सुनिचले पनि जुनि हर्षित गात जाय मुनिन्हहिमवत पठाये। कोविन्तीगिरहिसहलाये बहरिसन ऋषि शिदपहुंजाई कथाउमाकीसकलसुनाई। भयेमगनशिवसननसनेहा हरषिसमषिगवनेगेहा। मनथिरकारनवशंमुसुजाना लगकरनरघुनायकंध्याता। तारक असुरभयेउनेहिकाला भुजप्रतापवलनेज विशाला। नेइ सबलोकूलोक पतिजीते भये देवसुखसंपति रोते॥ सजेर अमरसोर्जीनिनजाई हारे सुरकरि विविधिानराई ,
४४.
बालकाराड
47
नवनिरचसनजाय प्रकारे॥ देवेविधिसव देव दुरखारे ।
दोहा सवसन कहाउझायविधिदनुजनिधनतव हाय
शंभु शुक्रसमून मुलाहिजीतैरसोय ५२
मौर कहासुन करहु उपाइागी होइहिईयवर करियसहाई
सतीजो तजी दक्ष सरवदेहा ।. जनमोजाइहिमाचल गहा।
तेइ तप कीन्ह प्रांभुपनिलागी शिवसमाधि वैठे सब त्यागी
यदपि चहै असमंजस भारी नपि वातइक सुनहुहमारी
पदवह कामजाइशिवपाहीं करैछोभ शंकरमन माहीं।
गवहमजाइनिवहि सिरनाई करवावविवाह वरियाई
हिविधिभनहिदेवहिनहोई मन अत्तिनीक कहीसवकोई
संस्तुतिमुरन कीन्ह अनिता प्रगटेविषम वारिचरिकेत
दोहा मुरनकहीनिजविपतिसबसुनिमनकीन्हविचार
शंभूविरोधनकुपालसोहि विहंसिकहरअसमार।
निदाएं करवा काजतुम्हारा अतिकहिपरमधर्मउपकार
परहित लागि तो जोदेही सन्ततसन्तपांसहिनेही
असि कहि चलेटसहिसिलाई सुमनधनुषकरसहित सहाई
चलतमारिन्गसहृदयविचार शिवविरोध धव मरनहमारा
तवापनपभावविस्तारा निजवस कीन्हसकलसैसारा
कोपेडजवीह तारिचर के सामहंमिरेसकलचतिसेत् ।।
ब्रह्मचर्य वनसंयम नाना। धीरजधर्म ज्ञानविज्ञाना।
सदाचार जर योगविरागा समयविवेक करकंसवभागा
छळ भागरिकसहाइसहिनसोयुभरसंगमासहिसुरे
सदशपर्वत कन्दरनमह जाइतेहि अवसरदुरे
होनिहार काकरिकोरखवारजेगरवरभरपरा ।।
दुईमा कहिरतिनाथजेहिकहकोपचनुपारकरधए ३
. الاهم बालकारा ४५ -..- दोहा जेसजीवजरा चरवर नारि पुरुष अस नाम तेन्जिनिजमादलजिभ सकल वसकाम सबके हृदय मदन अभित्नामा लनानिहारिनवर्हि तरूपाखा नदीउमगिडधिक धाई संगम करहिं तलाव तलाई जह यस दशा जडन कीवरण को कहिसकै सचेतन करनी पशुपक्षीनमजलखलचारी भये कामेवससमयविसारी ॥ मदनबंध व्याकुलसवलोका निशिदिननहिंचवलोकहिताका देवदनुजनकिन्तर व्याला पितपिशाचभूत वैताला ।। उनकीदमानहि कई वरमानी सदा काम के घेरे जानी ।। सिद्धविरक्तसहा सुनियोगी तपि कासदाभयेवियोगी छंद भये कामनायोगीतातापसपावरनकी को कहै । देवहिंचावर नारिमयजेब्रह्ममयदेवतरहे ।। अविलाविलो कहिं पुरुषसयगपुरुषस्वचवलासरे दुगडरिखल्लोड भीतर कामतनकौतुक ।। सोरटा धरानकाह धीरे सबकेसनमनसिजहरे ।। जेहि रातारघुवीर तेडवरेत्तेहि काल मह ॥ उभयचर असि कोकमयमा जवलास कामासु पहंगयेऊ मिरचहिं विलेकिसकिरमार भये यथायित्न सब संसार । मये तुरन जगजीव सुरचारे। जिममदउत्तरिगये सनवारे।। रुदहिदेवरितमदन भय माना दुराधर्म दुरीम भगनाना, फिरतलाज कछु कहिनहिंजाही सरनठानिसनरचेसिउपाई। प्रगटेमिस्तकाचर वनराजा कुमुगिनवनाराजविराजा।। वनउपवन बादिकातडागा परनमुभगावदिया विभागा जह नहंजतु उसगत चनुरागादिरिव मुरासनमनसिजजागा छंद जायोउसनोभवसुस्ममदन सुभगना नपर्दे कही।
वाल काण्ड
सीतल सुगन्धसमन्दमारत नदन श्रनल सन्त्रासही
विकसेसरन्ह वहकंजगुंजनपुंजमंजुल मधुकरा
कलहंस पिकसुकसरवकरिगान नायविशारा
दोहा सकलकलाकरिकोटिविधिहारेज सेनममेत॥
चलीनचलसमाधिशिवकोपेडहरलिकेन
देखिरसाल विटपवंशावा निहिपरचदेउमदनमनमाया।
सुमन चाप निजसरसंघाने अनिरिसताकिमचनलगताने
बाडे, विषमविशिखरलागे॥ टि समाधिशमुनव जागे
भयेउशमन छोम विशेखी नयनउघारि सकलदिशदेखी
सौरभ पल्लव मदन विलोका भयेउकीपकपेउवयलोका
तवशिव तोमर नयन उधारण चितवतकामभयेउजरिछारा।।
हाहाकार भयेउ जगभारी डर सुरभये असुरसुखाग।
समुझिकाम सुखसोचहिंभोगी भयेक साधकयागी।।
छद योगीश्चकैटक मयउपनितिनुनमिति साइनायी
रोदनि वदति बहभोतिकरुणाकरन शंकरपहंगयी
अनिप्रेमकरि विनती विविधविधिजोरिकरसन्मुखूरही
प्रभु सुतोषकपालुशिवालाविरखवालेसही
दोहाँ ने नि तवनाथ कर होइहि नाम अनंग ।।।
बिनुक्षुब्यापहिसबहिं युनि सुनिनितमिलनसंग ६५
जब यदुवंशरूषणाअवतारा। होइहि हरन महामहिमारा।)
रुषा तनय होंहिपतितोग रचनअन्यथा होइन मोरा॥
रनि गवनीमुनि शंकरवानी कथाअपर अब कहाँवखानी
देवनसमाचार सब पाये। ब्रह्मादिक वैकुण्ठ सिधाये।
सव सुरविष्ठा विरचि समता गयेजहाँ शिव कपानिकता
प्रथक प्रयक तिनकोन्हापशमा भये प्रसव चन्द्र अवतंसा॥
-
A
.
वालकाण्ड
3.
देवनागरमों की अाहा मेकाभकरके कैलाश पर्वत पर श्री महादेव जीको ममाधि
सेजगानाऔरप्रीमहादेव के कोपसेकामकाभस्महोना
Vodie
न
देवतांगणा
Guimuanam
कामदेव
वाले कपासिंध दृसु केन। कहा असर बायेह केहिहेत
कहिविधितुम प्रमुअत्तरयामी तदपिमति वसविन वोस्वामी
दोहा सकलसुंरन के हृदय अस पाकर परमउछाह
निजनयनन देवाचहहिंनाथ तुम्हारविवाह
यहासत्सवदेवियभारलाचन सोको करिगसदनमदमोचन
कामजारिरति कहं वरदीन्हा कृपासिंधु यहिअनिमले कीन्हा
असिनकारियुनिकरहिंपसाम नाथपसुनकर सहजसुभाऊ
परबत्ती तप कीन्ह अपारा करहु नासुनव अंगीकारा
सुनिविधि वचनसमुभिषभुवानी रसोइ होउ कहासुरवमानी
मदेवनबुंदभी बजाई। वाणिसुमन जयजयसुरसाई
असरजानिसान ऋविचाये तुरतहिविधिगिरिभवनपठाये
प्रथम गयेजहां रहीभवानी बोले वचनमधुरछल सानी
दोहा कहा हमारने सुनेहु तव नारद कर उपदेशा ।।
अवभामूठ तुम्हाराजारेड काममहेश ।।
सुनितोल्ती सुसकाये भवानी॥ उचित कहे मुनिवरविज्ञानी
तुम्हरेजान कामअवजारो अवलगिपूांभुरहे सविकारा
हमरजानसदाशिव योगी अजधनवध कामअमोगी
मिशिवसेयेउंस जानी शीतिसमेत कर्म मन वानी
तोहमारप्रणासुनहुमुनीषा करिहहिंमत्य कृपानिधिईपा
तुसजो कहाहरनारेठ मारा . सोअतिवड़ अदिवे कतुम्हारे
ताल अनल करसहजसुभाऊ हिमतहिनिकटजाइनहिंकाल
गये समीपसो अवशिनसाई. जिससंपातिनिज पोवाई
दोहा हियहरये मुनिवचनमुनिदेरिव पीनिविरास
चलेभवानीनाइपिरंगयेहिमाचलेपास ६६
सवपसगिरिपनिर्हिसुनावा, मदनदहनमुनि शतिदुरदपाना
बालकाण्ड हिमवन बहुत मुरबमान धिविनान RAN बिहार कहेउत्तिका वरदाना हिंदयविचारिशंभु प्रभुनाई। सादा मानेवरीलये नुलाई। सुदिनसुनवन मुघरी मुहाई। विगिवेद महाड विनिवेदविधिलगनचा यवीसनविनसाइदीन्हा। गहिपदविनयहिमाचल जाइविधिहिंनिनदोन्हसोपातों वाचत माननहृदय समानी लगनेवाचिवजसबहिंसुनाई हरष मुनिसबसुरमसुदाइ ममनधि नभवाजन बाजे संगलकलशदशहाँटामिलने दोहा लगेसम्हारन सकल मुर वाहनावाची होहिं संगत मंगलसम करहिअशरगाज शिवाश गयाकरहिसिंगार जय मुकाट मगार जय मुकाट अहि मोरमवार कुंडलककसी पहिरव्यालानिन विभूतिपट निपट कहारेकाली शशि लिलार सुन्दर शिरोग नियननोनिउपजोन भुजंग गरल कपट उरत शिरमाला असिवभेष शिव धाम रूपाला करविमलयस बम विराजाणाचलेबसहचदिवाजहिं बाजाय दखि शिवहिं सुरचियमुसकाही वरलायक दलहिन जगना विशुतिरविवादिसुरवाना चदि चदिवाहन लेबराता सर समाजसबभांतिवनया नहिवरत दुलहाजकमा दोहा. विषाकहाअस विहसिनबोलि सकलदिशिराज विलग विलग होइचलहसवनिज़रसहितसमाज॥ १०१ वरअनुहार बरात नभाई। हंसी करेहड़ पर पुरजाई । विष्णुवचन सुनि सुर मुसकाने निज रसेनसहित विलगाने। मन ही मन महेश मुसकाही हरिकेव्येगवचन नहिं जाही। अनि प्रिय वचन सुनन हारकरे डीप्रेरिसकल गागाटेरेस। शिवधनुशासन सुनिसबनाये प्रभुपदेजलनशीसतिननाये नानावाहन नाना वैया॥ ॥ विहींशिवसमाज निज दरखा।
بالان : .. S ५०.. वालकाण्ड 47 का मुखहीन विपुलमुखकाहू दिनुपदकर कोउबहुपदवाह! विपुलनयनकोउ नयनविहीनी रिखपुर कोउति ननुहीनों छन्द तनुलीगाकोउतिपीन पावनकोउअपावनतनुधरे भूषसाकगलकपालकरसबसयशोगित तन भरे खर स्वान सुबरगाल मुखगविषअगणितकोगने बहजि सि प्रेत पिशाचयोगिनिभतिवरणात नहिवने ७ सोरता नाचहिं नावहि गीत परम तरंगों भूत सब ।। देवतंति विपरीनं बॉलहिवचन विचित्र विधि जस दूलह तसि बनी बराता कौतुकं विविधिहोहिमगुजाना इहाविमाचलरचेउ विताना अति विनिवनहिंजायवरवाना शैलसकलजहंलगिजगमाही लघुविशालनहिवरनिसिराही वन सागर नद नदी नलावा. हिमगिरसबकहनवतपताका कामरुप सुन्दर तनु धारी।। सहित समाज सहितवर नारी आये संकल हिमाचल गेहा गावहिं मंगल सहित सनहीं। प्रथमहिंगिरिबह टहसंवराये यथायोगजहंतहसबछाये। पुरे शोभा अवलोकि सुहाई लागेलघुविरचि निपुगाई। छन्द लघु लागिविधिकौनिपुणानागवलाकि पुरशाभासही वन बांगकूपतडागसरितासुभगतासककोकही मंगल वियुल तोरन पताकाकेतु यह स्टहसोहहीं वनिता पुरुष मुन्दरचतुर्कविदेखि मुनिमनमोहहीं दोहा जगदम्बाज अवतर्गसो पुरवरगिान जाइ। रिद्धि सिदिसंपतिसकल निन नूतन अधिकाई २०३ नगरनिकट धरान सुनिअाईपुरवर भर शोभाधिकाई करिवनावसजिवाहन नाना.. चले लेन माटरगवाना । हिय हरणे सुर सेन निहारी॥ हरिहि देखि अतिभयेमुखारी وہ بالکن۔ - १४ + . चालकाण्ड शिव समाजजब देखनलागे॥ बिरि चलेवाहनसबभागे । धुरि धीरज तह रहे सयाने।। वान्नक सवले जीव परानी गये भवन पूंछहि पितुमाता॥ लहहिवचन भय कपित गाता कहिय कहाकहिजाइनवाता यमकर धारकिधौं बरियाता॥ बरबौराह बरद असवारा॥ व्याल कपाल विभूषाकार छन्द ननुकारव्याल कपालभूपन नगनजास्तभयकरा संगभूत प्रेत पिशाच योगिनि विकट मुखरजनीचरा, जो जियत रहिहि बरातदेखत पुण्यवहतिहिकरसहो देवहिं सोउमा विवाह घरघरवातअसलरिकनकही दोहा समुझि महेश समाज संबजननि जनक मसकाहि वालबुझाय विविधि विधानेडाहोउडरनाहिं।। १०३ लेअगवान वरातहि आये दियेमबर्हिजनवास सुहाये। मैना शुभ भारती सवारी संगसुमंगलं गावहिं नारी।। कंचन थार सोह वर पानी परछनचली हरहि हरषानी। विकट भेषजदरुदहि देखा अवलनिउरभयभयेउविसेखा भागिभवन पैठी अतिवीसाग गये महेशजहाँनिवासा॥ मैंना हृदय भयेउ दुखभारीगा लीन्हा बोलि गिरीशकुमारी। अधिक सनेह गोद बैठारी॥ श्याम सरोजनयनभरिवारी जेहि विधि तम्हहिं रूपासदीन्हा तिजवर नाउरकस कीन्हा।। छन्द कस कीन्ह वर बौराह विधिजे तुमहि सुन्दरतादई जोफल चहिय मुरतरूहिंसी चरखमबदूरहिंलागई तुमसहित गिरते गिरौं पावकजरीजलनिधि महिपरों चरजाउअपजस होउजगजीवत विवाह नहीं करी। १० दोहा भयीविकलयबलासकलदग्विदेखि गिरिनारि करि विलाप रोतिवदनि मुता सनेह संभादि ॥५॥१४ - MAU स वालकाय नारद कर में कहा बिगारी भवनमोरेजिनवसनउजारा यूस उपदेश उमहि जिन दीन्हा चौरे बरहि लागि तप कीन्हा। सोंचेहउनके मोहनमाया उदासीन धानघामनजाया॥ पर चर घालकलाजन भीरा वाम किजाननमवकोपारी जननहि विकलविलोकिसवानी-- गोलीयुतायुवक नडवानी॥ अस विचार सोच्ह मति माता सोन टरैजो रचे विधाता॥ कर्मलिषाजों वावर नाह ताकतदोषलगाइयकाहू तुमसनमिटहिं गिविधिक कामात व्याजनि लेइकलंकी छद जनिलह मौत कलंक करुगा परिहरहअवसरनहीं डरख सुख लिखाजो लिलारे हमरेजारजह पाउचतहीं मुनिउगाक्दन विनीतकोमल सकलावला माही बहभांति विधिहि लगाइ दुपन नयन वारि विमोचही ११ दोहा तेहिश्रसर नारद ऋषियौं कपि सप्त समेत। समाचार सुनितुहिनगिरिरावने बरन जिकेन।। १२५ नव नारद सबही समुझावागारद कथा प्रसंग सुनावा॥१॥ मयना सत्य सुनह ममवानी जगदम्वा नवमता भवानी॥ अंजायनादि शक्विविनाशिनि संदा शभुअरर्धगनिवासित। जगसंभव पालनलयकारिनि निजालीली वपुधारिनि। जनमी प्रथम दक्ष टहजाई। नाम सती सुन्दर तनु पाई।। नहरं शती शंकरहि विवाही कथा प्रसिध्द सकल जगमाहीं. एकवारबावृति शिव मंगा। देखेउ रघुकुल कमल पतंगा भयेई मोह शिव कहानकीन्हीं भगवस मेषसीयकर लीन्हा। छन्द सिय वेष सतीजोकीन्ह तहि अपराधशंकरपरिहरी हर विरह जाइबहीनिमित के यजयोगाजलजरी अवजनाम तुम्हरे भवन निजपनि लागि दारुन तपकिया ap पालकाण्ड # - असे जानिसंशय नजगिरिजासर्वदाशंकरप्रिया। १२ दोहा सुनि नारदकेवचननव सबकरमिटा विषाद। सगा महंव्यापउँसकलपुरघरघरयहसंवाद। २०६ तमयनाहिमवंत अनदे। पुनिमुनि पारवतीपदवदेश नारि पुरुष शिनु युवा सयाने। नगरलोकसबअति हरषाने लगे होनपुरमंगल गाना ।। सजेसाह हाटकघट नाना। भांति अनेक भई जेवनारा सूप शासजसकछुव्यवहारा॥ सोजेवनार कि जाइबखानी। वसहि भवनजेहिमातुभवानी। मादरवोले संकलबराती विष्णु विरचिंदेव सर्वजाती। विविध पाति वैठी जेवनारा लगे परोसन निपुराासुबाराग नाविन्द साजेद्रत जानी। लादेन गारिसद्वानी। छन्द गारी मधुर सुरदेहि मुन्दाव्यगवचन सुनावही भोजन कहिंसुरमति विलंबविनोदमुनिसचुपावहीं जेवनजोवत्यौअनदसोमुखकोटिहूनपरेकयो अंचचा दीन्ह पानगवनेयासजहंजोकोरहमी।। १३ दोहा वहरि मुनिन हिमवतकहलगनजनाईअाइ.।। समय बिलोकि विवाहकर पठये देवतुलाइ १०७ दोलिमकल मुरसादरलीन्हे सहि यथोचित सनदीन्ह वेदीवेद विधानमंवारी 10 सुभग सुमंगलगावहिं नारी। सिंहासनानि दिव्यसुहावा जाइनवरनि विरचि बनाना वेटेशिवविप्रन्ह सिरनाई। हृदय सुमिरि निजप्रमुग्धुराई बिहार मुनीशनउमाबुलाई। करि टंगारसखीलै पाई। दिखत रूप सकल सुर मोहैं। वरने छवि असजग कविकोहै। जगदविकाजानि भवमामा सुरन मनहि मतकीन्हमामा मुन्दरता मीद भवानी जाइन कोटिह बदनवरवानी Pran- والان معه , बालकाण्ड छिंद कोटिङवदन नहिवनैवरनन जगजननि सोमामहा.. सकुचहिंकहतश्रुति शेवशारदमंदमनितुलसीकहा छविरवानि मानुभवानिगवनीमध्य मंडशिवजहाँ, अवलोक्लिसकहिनसकुचिपतिपदकमालमनमभकातही १४. दोहा , मुनिश्चनुशासन गंगापतिहिपूजउ भवानि ।। कोउनि संशयकरेंजनि सुरअनादिजियजानि १०८ जसविवाह की विधिभुति गाई महामुनिनसोमवकरवाई गई राहिगिरीश कुसकन्यापानी शिवहिंसमीजानि भवानी।। पानि ग्रहन जबकीन्हमहेशा हिय हरपै नव सकल सुरशा।। वेद मंत्र मुनिवर उच्चरहीं। जयजयजयशंकर सुरकरहीं। बाहिं बाँजनविविधिविधाना - सुमनहरिनसभईविधिनाना हरगिरिजा करभयेउविवाहू सिकलभुवनभरि रहाउछाहूं। दासी दास तुरंग रथ नागा), धनुचसन मनि वस्तु विभाग अन्न कनक.भाजन भरिजाना.. दाइज दीन्ह नजाय वखान।। छन्द, दाइज दियो वह भाति-मुनिकरजोरि हिमभूधरकला कादेपूरणकामशंकरचरण पंकजगहिरहो।। शिवकृपासागरमसुरकरपरितोषसंवभांतिनकियो मुनि गहे पद पायोजमयना प्रेम परिपूरणहियो . दोहा. नाथ उमाममपागासमन्टहकिंकरीकरे। समेह सकल अपराधसबहोइप्रसन्नवर देह वह विधि शंभुसास समुझाई गवनीभवनचरण सिरनाई जननीउमा बोलितबलीन्ही लैउछंग सुन्दर सिख दीन्ही करह सदा शंकर पद-पूजा नारिधर्म पतिदेवनदूजा वचन कहति भरित्वोचन वारी बहरिलाइउरलीन्हकुमारी। कतनिधि सिरज नारिजगमाही पराधीन सपनेई सुख नाहीं + 1 VIR ।
مه پالنانو
बालकाण्ड
-
.
-
हिमाचल के मन्दिर में शिवजीके च्याहि के निमित ब्रह्मा विष्णु प्रादिसम्यू
रादिवतों कोवरात मेंजानां चौरशिवपार्वतीकाव्याह होना
M.
-1
ܝܢ
FLA
4
.
.
५६ वालकाण्ड 41 but " . J भइ अति प्रेम विकल महनारी धीरजवीन्हकुसमयविचारी ।। युनिमुनिमिलति परति गहिचागा मिवियसकछजाइनवररणा । सवनारिन मिलि भेटिभवानी जाइजननिउर पनिलपटानी छन्द जननिहिं वहरिमिलिचलोऽचितवसीमववकाहूई फिरिफिरि विलोकति मातुननवसखीलैशिवपहेगई याचकसकल संतोषिशंकरउमासहिनभवनहिचले सअमरहरषेसुमनवरंषिनिशाननवाजहिंभल १६ दोहा चले संगहिमवंत तवपहंचावन अति हेतु विविधि भौति परितोषकरि विद्याकीन्हवृषकेतु॥ ११० तुरनभवनायेगिरिराई। सकलशैलसरलियबुलाइ। आदादान विनय बहुमाना। सबकरविदाकीन्हहिमवाना। जवहिंश कैलाशहिंाये॥ सुर सबनिनिजलोकसिधाये जगतमातु पितु शंभुभवानी। निहिरंगारनकहौंबानी॥ करहिं विविधि विधिभोगविलासा गान समेतवसहि कैलाशा हरगिरिजा विहार निन नया इहिविधिविपुलकालचलिग नवजनमें षटबदन कुमारा। नारकासुरसमा जिन मारा। अगम निगम प्रसिद्धपराना पटमुख जन्म कर्म जमजागा। छन्द जगजानिषट मुखजन्मकर्ममनापपुरुषारथमहा नेहि हेतु मैं रषकैतु सुनकरचरितसंक्षेपहिंकहीं यहउमा शंभुविवाहजेनरनारिकहहिंजेगावहीं॥ कल्यागा काजविवाह मंगलसर्वदा सुग्वयावही दोहा चरिनं सिंधु गिरिजास्मन वेदन पावहिं पार ॥ वरनेतलसीदास किमि अति मतिमंदावा ९९ शंभुचरित सुनिभरम सहावा भरद्वाजनितिनुस पावाग पहलालमा कथायरवादी नयन नीररोमावलि ठानी।। । . o
बालकारन
Lax
U
प्रेमविवस मुपत्रावन वानी दशादेखि हरवे मुनि ज्ञानी।।
अहोधन्य तवजन्म मुनीशा तुमहिनामा समप्रियगौरीशा
शिवपकमल जिनहिरतिनाही मिहिने सपनेह नसुहाही।
विनुछल विश्वनाथपदत्तेह॥
दासमतकरलक्षारोह
शिवसमकोरघुपतिव्रतधारी विनुअंधतजी मतीअस नारी
प्रशाकर रधुपति भक्तिहदाई को शिवसमरामहि नियमाई।
दोहा प्रथम कहे मै शिवचरित दूका मरमतुम्हार।।
मुचि सेवक तुम रामकेरहित ससस्तविकार॥ ११२
जाना म्हार गुगशाला कहासुनी अवरघुपात
सुनि सुनियाजुसमागम नोरेग कहिनजाडू जसमुखमनमा
रामचरितमतिअमित सुनीशा . कहिलसकहिं प्रातकोरियहीसा
नदपि यथाश्चुति की परवानी सुमिरि गिरा पनि अशुधनुषांनी
सारददारू नारि सम स्वामी रामसूत्रधर अंतर यासी।।।
जेहि पर कया करहिंजनजानी कदि उर अजिर नचावहिं बानी
पगाऊँ सोइ कपालुरघुनाथा वरनऊं विशद नासु गुशोगाथा
परस रस्य गिरिवर कैलासुसहाजहाशिवजयालिवास।
दोहा सिदे तपोधन योगिजनसुरकिन्नर मुनिन्दा
वसहिजहाँ सकती सकल सवहिं शिवसुरवकेन्द्र १९३
हरिहर विसुरंद धर्मरत नाही निचरतही नस्पन जाही।।
नहि गिरि पर वटा विटमा विशाली. नित नूतन सुन्दर सब काला
विविधि समीर सुशीनलझाया। शिवविनाम विटपधुनि गाया
एकवार नेहितर प्रभुनायेऊ॥ तरुविलोकि उराति सुखमयेऊ
निजकरडासि नागरिकाला विठे सहजहि शंभुरूपाला ।
सुज प्रलवपरिधन मुनिचीर
तरुणा अरुणाचवुज समजरगा नखतिभकाहटयामहरगा।
कुन्द इन्दवर गौर शरीरा।
01 بالیاژ
बालकाण्ड
मी महादेव जीको कैलाश पर्वत परसवेनले श्री पार्वती सेरा
मचरिख कहना
Tbhi
मन
पारवतीजी
all
-
--
بال کار 4
बालकाण्ड
पूर
सुजगभनिनवरात्रिपुरारी॥ यानंद शरर चन्द्र वितरी
दोहा जूटाएकट मुरसरित शिलोचननलिन विशाल
नीतकठलावन्यनिधिसोहवालविधभाला १९४
विर मोहकाभरिपुकैसे घर शरीरशान्तरस जैसे ॥
पारवनी माले अवसर जानी गईशंभुपहमातुभवानी
जानि प्रिया आदरअति कीन्हा वामभागासन हरदीन्हा।
वैठी शिव समीप हरषाई पूरवजन्मकथा विताई।
पनिहिय हेतु अधिक अनुमानी विहसि उमाबोली पियवानी
कधाजो सकल लोकहितकारी सोई पूछन यह शैल कुमारी
विश्वनाथ ममनाथ पुरारी।। विभुवन महिमा विदितम्हारी
चरअरुयचर नागनर देवा। सकल करहिं पद पंकजमेवा
दोहा प्रभुसमर्थ सर्वच शिवसकल कलागुणाधासग
योग ज्ञान वैराग्य निधि पात कल्पतरु नाम।। ९९५
जो मोपर प्रसन्न सुखरासी। जानिय सत्यमोहिनिज दासी
नौ प्रभु हरह मोर अशाना कहि रघुनाथकथाविधि
जासु भवन सुरतरु तर होई॥ .. सहकि दरिद्रजनित होने
शशि भूषन असहृदय विचारी हरहनाथ मम भविभभारी
प्रभुजे मुनि परमारथ दादी कहहि राम कहनाचनादी।
शेषशारदावेद पुरान्छ । सकलकरहिरघुपति मुरागाना
तुम यूनि रामनाम दिनराती सादअपहनरामरानी.
राम सो अवचन्दयतिसतसोही कोजागअलखगतिको
दोहा जोदपतनय तो ब्रह्म किमिनारि विरह मतिभोशि
देविपरित महिमा नत भूमति द्धिप्रति मोरि ।। ९९६
जोअनीह व्यायकू विभुकोजा
कहरू माय नाथ मोहि सोज
अशजानिरित जनिउर परह जिहि विधि मोह मिटे सो कर
.
वालकासड़
बूनदीरब राम प्रभुताई।।।। इनिभयं विकल न तुमहिं सुनाई
जदपि मलिन मनवोधनवावा मोफलभलीभांति में पावा ।।
अजई करशंशय मनमोरे करह कृपा विनऊं करजोरे।।
प्रभुनबमोहि बहभातिवाशी नाश्य सो समुकिकरहुजनित
लवकरचम विमोह मोहिलाही रामकथा पररुचि मन माहीं॥
कहा पुनीत राम गुण गाया जग राज भूषासुरनाचा
दोहा दो पद धार पनि सिरविनयकदाकर जागा
वरगाह रहावर विशद यश धुति सिहात निचोरे १९७
बिपि योषिताअनधिका दिसामनक्रम वचन नुम्हारी।
नौतननसाधुदुरावहिं॥ चारत अधिकारीजहं पावहिप
अति आरति पूछी सुरराया। रघुपनि कथाकहह करिदाया
प्रशनसो कारणाकाहाहविचारी निगुगबह्म सगुणावपुधारण
पुनि प्रभुकहरामअवतारा वालचरितधुनिकहहउदारा॥
महा थाजानकी विवाहा॥ राज नजा सो दूरगा काहा॥
विनति कीन्हेउ चरितनपारा कहहु नाथ जिमि रावया सारा
राज बैठि कीन्ही बहालीला॥
सकलकहह शंकररवशीला
दोहा बूढदिकहकरुणायतनकोन्हजोयराज राम।
प्रजासहित रवंशमणिकिमिगवने निजधाम १९८
पनि प्रभुकहह सोनावरवानी जेहि विज्ञान मगन मुनिज्ञानी
भिक्ति ज्ञान विज्ञान विरागा॥ मुनि सववरणाहसहित विभाग
औरी राम रहस्यअनेका। कहहनाथप्रतिविमलविवेका
जोन में पूछा नहि होई ॥ सोउ दयाल गखहजनिगोई
तुमंत्रिभुवन गुरुवेदनखाना नजीव पामरका जाना।।
प्रश्नउमाको सहज सुहाई। छल विहीन सुनिशिवमनभाई
हरि हियराम चरित संबंधाये प्रेिमपुलकिलोचनजलछासे
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वालकाराज युनाथ रूप उर धावा।।परमानंद अमित सखपाल दोहा मगनध्यान रसयुगधुनिमन बाहिरकीन्ह । उधपति चरित महेशातवाहरषितबरनलीन्ह।। अठा सत्य जाहि विनुजाने । जिमि जगदिनुरजुपहिलाने जानेजगजाहिराई। जारीयथा सपनभमनाई। बंदीवालरूप सोइ रामू सबविधिसुलभजयतजमनास मंगलमवनममंगल हारी।। वोसोदसरथमजरविहारी। कवि प्रशाम रासहिचियुरारी हरषिसुधासागराचारी धन्य धन्य गिरिराजकुमारी।। तुमसमान नहि कोऽउपकारी पूछेह रघुपति कथाप्रसंगासकललोकयशयावन गंगा इसरघुवीरचरराअनुरागी। कीन्हे प्रश्न जगलहितलागी सोहा रामरुपातें माईती सपनेह तव मनमाहि।। शोक मोह संदेहभूम मम विचारकर नाहिं।। १२० दिपिका कीन्हेउसोही कहत सुनन सब करहितहोई जिन हरिकथासुनी नहिंकाना भवनाचाहि भवनसताना जयनन सन्त दाश नहि देखा लोचनमोर पंखकरलेखा।। शिरकटु तूमर समतेला जिन नमनहरिगुरुपदसूला जिनहरिभक्ति हृदय नहिंानी जीवत सब समान ते प्रानी।। जोनहि करहिरामगुणगाना जीहसुदाइरजीह ससाना। कुलिशे कठोर निदरसोइछाती सुनिहरिचरितनजोहररवाती निरजासुनह रामकरलीला सरहिननुजविमोहनशीला दोहा राम कथा मर चनु सम सेवत सब सुखदानि ।। संन सभा सरलोक समकॉनसनसजानि॥ १२॥ रामकथा सुन्दरकरनारी संशय विहंगरदावन हारी॥ राम कथा कलि विटपकुठारी सादर सुनुगिरिराजकुमारी॥
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चालकाण्ड
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रामनाम गुणाचरित मुहाये जन्मकर्ममाणिनधुतिगाय
जधानन्तरामभगाना नया कंपाकीरति गगगगगना
मदपिजयाधुतजसमनिमोरी कहिहौदेखि नीतितितोरी।
उमाप्रश्न नवसह सुहाई।। सुखदसन्तसम्मति मोहिमाही
एकवान नहिंमोहिसोहानी॥ यदपि मोहवसकहाभवानी
लुमिजोकहा रामकोउमाना जहितिगावधरहिं मुनिध्यान
दोहा कहा सुनहि यसप्रथम नरगसेजेसाहपिशाच
पावडी हरियेदखिमुस्खजानहिंझूठन सोच ॥ १२२
प्रअकोविदान्य अभागोग कोई विषय मुकरमनलागी
लमटनगटीकुटिल विशेषी सपनें सनसभा नहि देवी ।।
कहहितेवेदचसम्मन वानी जिनहिनसझलाभ नहिहानीग
मुकामलिनवरुनयनविहीना रामदेखहिं किमि दीना।।
जिनअगुंगा नसगुणाविवेका जल्पहि कल्पत वचनअनेका
हरिमाया वंशजगतभ्रमर ही तिनहिकहतकअघटितनाहीं
बोलुलभूत विवस मनवारे।। तिनहिबालहिंवचन संभारे।
जिनकात महामोह मल्पाना तिनकह कहाकरियनहिं काना
सोरायसीनजदयविचारिताजसशयमजुराममद।
मुनु गिरिराजकुमारिभमानमरविकरवचनमम ।। १०
सगुणहितगुणहिनहिंकडुभेदा बाहमुनि पुराग बुधवदा।।
अगुणश्चमपलखोजजाई भक्त प्रेमस सगुणा सोहोई।
जोगुशारहितमगुणासोकैसे जलहिउयल विलगनहिंजैसे
जासुनामभम तिमित्यनंगा विहिकिमि कहियविमोहमसंग
एमसजिदानंद दिनेश महिनहं मोहनिशालवलेशा
सहजप्रकाशं रुपभगवाना नहि नह सुनि विज्ञान विहाना
हरष विषादज्ञान-प्रज्ञानाजीवधर्महि मितिभिमाना
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८
६२.४५
वालकाण्ड
११
रामब्रह्मव्यापक जगजानागमरमानन्द परेशपुराना।।
दोहा पुरुष प्रसिध्द प्रकाश निधि नगई परावरनाथ
रघकल मारा समस्वामि सोइ कहि शिवनायजमाय
निज महिममुकाहअज्ञानी प्रभुपरमोहधर्हिजपानी
यथागगनधनपटल निहारी पेडसामुदाहहिकुविचारी
चितवजोलोचन लिलाये प्रगट युगलशशिनेहिकमाये
उमाराम विषयकसमोहनमतमधूमधुरिजिमि सोहा।
विवरकरनगुरजीव समेा संकले एकाते एक संचेताः।।
सबकर परम प्रकाशक जोई गमनादिश्रवधियति सोई
जगत प्रकाश्य प्रकाशकरोमू मायाधीशमान गुराधासू
जास सत्यता तेजड मायामास सत्य इव मोहमहाग
दोही रजत सीप महंभात जिभि यथाभानुकारि
मंपिम्पातिई कालसोभमसकैकोइटारे १२४
इहिविधिजगहाराधितरहई यदपि सत्य देतडूरखअहंडू
ज्यौ सपने सिर काटै कोई विनुजागेदुख दूरिन होई
जासु कृपा सभ्रममिटजोई गिरज मोइ कपाल रघुराईय
गदिचंतकोउजासुन पाचा मतित्रनुमान निगमत्रसगाव
दिनुपदरले सुनेविनुकाना। करपितक्क करै विधिनानी
अानन रहिन सकल रस भीगी बितुवानावतारड़योगी
तनुबिलुपरसनयनविनुदेवा गहनासविन गसत्रशेषां।।
अससबभौतिवलौकिक करती महिमांजासुज इनहिवरनी
जेहि ईमगावहि वेदबुधजाहिधरहिमु नेध्यान।।
सोइ दमरथ मतभक्त हित कोशलपति भगगन १२५
काशी मरतजन्नुअवलोकी - जासु नामवलको विछोकी
सोइप्रसमोर चराचरस्वामी रघुवर सबमअंतरजामी।
بانی وا م । 1 ) - কার दिवसहजासुनामनरकहहीं जन्मअनेक संचिअधदहहीं सादासुमिरनजोनरकरहीं। सववारिधि गोपदइवतरह रामसोयरमातमा भवानी॥ नभमञ्चतिवि अस संशयाननगरमाहीं॥ ज्ञान विरागसकलगुनजाही मुनि शिव केशममंजन वचना सिदिगईसबकुतर्क की रचना भाइरपति पद प्रीतिप्रतीनी दारुणाशसंभावना बीनी: बाहो पुनिलिमभुमदकमल गहिजोरि शंकर गान बोलीगिरजारचनवर मनहं प्रेमरस सानि।। शशिकरसम मुनि गिरातुम्हारी मिटा मोहशदात पाव।। तुमरुपातु सबसंशयहरेंज रामस्वरूपजानिमोह परेज नाथलयाअवगयेउ विषादा सुखीमप्रभुचरित्रसाना अबमोहिमायनि किंकरजानी : यदपिसहजजड़नारित्रयानी प्रथमों में पूंछा सोकहहूं। जोमोपर प्रसन्नप्रभुअहह ।। रामब्रह्मचिन्मयविनासी सर्वांतसबउरपुरवायो। नाथ धरेउ नरतनु केहिहेतू मोहि समकायकहरषकेत उमावनसुनि परमविनातो रामकथा पर प्रीति पुनीता। होहा हिय हरष कामारि तव शंकर सहज सुजान। बड विधि उमहिं प्रससि युनिवाले कृपानिधान ९२७ सोरडा सुनुवम कथा भवानि रामचरितमानसविमल कहाभुसुंडि वखानि सुनाविहंगनायक गरुड़ १९ सोइ संवाद उदारजेहि विधिभामागेकहव। सुनहरामवतारचरित परमसुन्दरन॥ १२ हरिगुरानामअधारकथारूपनगगितम्रमित मैनिजमनियनसारकहौंउमा सासुनह॥ १६ सुनुगिरजा हरिचरित सुहाये विपुलविशदनिगमागम नाय । .
-17
हरिचवतारहेतु जेहि होईदमित्य
दमित्य कहिजाइन मोई॥
रामप्रतक्यवृद्धि मानावानी मतहमा अससुनह भवानी
नदपि संत मुनिवेदपुराना।। जसकछुकहहिस्वमतिबनुमान
नसमें समुखि मनावळ तोंडी समुकिपरैजसकारणामोहो॥
जबजब हाइधर्मको हानी॥ बाटहि असुरमधम अभिमानी
करहिं अनीतजाय नहिंबरनी सीहिनिष्पधेनुसुधरनी।।
नबतवे परिविविधिशरीर हरहिकपोनिधि सज्जन पोरी
दोहा असुर मारियापहि सुरन्हिरावाहिनिजवतिमेतुः ।।
जगविस्तारहि विशदयंशारामजस काहेत।।
सोयशगाइ भक्भवतरही। रूपासिंधुजनहिवतनुपरहीं
रासजन्त के हेतु अनेका। परस विचित्र एकतरका ।।
जन्म एकदुइ कहाँवखानी सावधान सुत्तुसुमति भवानी
द्वारपाल हारेकनियादोजी जयन्यविजयजानसबक
विषनापते दोनों भादी। नामसअसुरदेहि तिन पाई॥
कनक कसिधुवाहाटकलाचन जगतविदिन सुरपतिमदमोचन
रवार-विख्याता धारक राहवपुरक नियति
होइनहार पनि इतर मारा जनप्रहलाद संयश विस्तारा।
दोही भये निशचिरजायतवमहावीरवलदान ।।
कुम्भको रावसा सुभद सुरविजईजगजान १२
मुक्तन भयेउ हने भगवानो तीनजन्न विज वचन प्रमाना
एकवार तिनके हित लागी परेउ शरीर भनअनुरागी।
कश्यपअदितितही पिनुमाता दशरथ कौशिल्या विख्याता
एक कल्य एहि विधिअवतारा चरित पवित्र किये संसारा।।
एक कल्प सुरदेखि डबारे समरजलघरसन सब हारे।।
शंभु कीन्ह संग्रामअपाराम दनुज पहावल मरैन मारा।
सिमरवा
वालकाण्ड
परमसती अमराधियनारी निखिलनाहिनीनपुरारी।
दोहा छल कारटारेजतासुबन प्रभुमुरकारका
जेब नहि जानेउ मम तवसाय कोपकारे दीन्हे १०
तासु धाप हारे कीन्ह समाना कौतुकनिधिकपालभजवाना
नहीजलंधरराव भयेऊ। राहतिरामपरम पद्यऊ।
एकजन्म कर कारणा ऐहा जेहिलगिरामधरीनरदेहा।
प्रति अवतार कथा प्रभु केरी मुनि श्वरनी कविन घनेरी।
नारदमाप दीन्ह यकवारा कल्प एकलगिनेहिमवनारा
गिरजा चकित मई मुनि वानी नारदविशाभक मुनिज्ञानी।
कारणाकवन श्राप मुनि दीन्हा कापराधरमापति कीन्हा।।
यह प्रसंग मोहि कह पुरारी मुनि मन मोह सोमबजे भारी
विशाभगवान कोजलंघरकी स्त्री उदाको पनि वनमज करके जलंधरक
नहत करना
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विसुभगवान
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पाल काण्ड mer: श्रीमहादेवजीऔरजलपरकायुद्ध .. S दोहा बोले विहसि महेश नव ज्ञानी नूदन कोइ। हिंजसरघुपतिलरहिजबमोतमनहितगाहोइ १३१ सोटा कहाँ राम गुरागाय भरद्वाजसाद सुनह ॥६॥ भवभंजनरहनाथ भजतुलसी तोजमानामद।। १४ भागरिगुहारक प्रतियांदनि बहसमीप सुरसरिनसुहावनि आश्रम परम पुनीत सहावा ॥ देखिदेवोपममप्रतिभावा निरखि शैल धोविपिनविभागा भियउ रमापतिपद्यनुरागा। सुमिरत हरिहि आप गतिवाधी सहज विमलमनलागिसमा मुनि गति देखि सुरेशउराना कामहि वोलिकीन्हमन्माना सहित सहायजाह मम हेतू । चलेह हरषि हियजलधरकेट मुनासीर मनमहं अनि त्रामा चहेतदेव पि ममपुरवामा जिकामीलोलुपजगमाहीटिल काक इवसंवहिंडेराही टोमवहारलेभागमतवाननिखिम्हगराजा । +M ॥ di ६८. वालकाण्ड कोनिलजलिजानजातिभिमरपति हिनलाज १३२ नाहि मात्रमहिंमदनजरगयेऊ निजमायावतीनमयऊ। कुमुमिन विविधविटपबहुरंगो कुजहिं कोकिल गुंजहिगा। चली मुहावनिविविधिवयारी. कामरुशानुवंदावनिहारी। रमादिक मुरनोरि नवीना। सकल मममसर कला पचीना करहिं गानवहनान तरंगा॥ वहुविधिकोहियानिपतंगा देखि सहाय मदन हरषानाकीन्हेसिनिमपंच विधिनाना कामकलाकछ मुनिहिनन्यायी निजभयडरेउ मनोभवयायी सीमकिचापसकै कोउ नाम वह एवजार नाप्नतिजासू॥ दोहा सहिन सहाय सभीने अतिमानि हारिमन नैन. गहेसिजाइ मुनिवर चर कहि मुठिन्धान बैन ९३३ भाउन नारदमनकछुरोवा कहिप्रियवचनकामपरितोषा नायचरराशिस्त्रायमुपाई गयेडेमदननवसहितसहाऊ अनिसुशीनलनाचापतिकरनी सुरपनि सभाजायसवबरनी सुनि सबकेमन्अचरजचापा - सुनिहिं प्रशसिहरहिशिरनाचा तबनारर गवनें शिव पाहीं॥ जीतकाम अहिंमनि मनमाही कामचरित शंकरहिसुनावा अति प्रिय जानि महेशसिरतावा बारवार विनवड मुनितोही निमि यह कथा सुनायउंमोही निजिनि हरिहिसुनावहकवह चलेंह प्रसंगडरायतवह। दोहा शंभुदीन उपदेशहित नहिं नारदोहे महाना। भरदानकोनुक सुनह हरि इछावलेवान ।। ९३४ राम कोन्ह चाहे सीइहाईकर अन्यायस नहिं कोई भुवचन मुनि मनहिन भाये न विरचि के लोक सिधा एकबार करतल बावीना॥ गावत हरिंगशागाननीना भार.सिंधुगवने मुनि नाथा जहवस श्रीनिवास तिमाथा 4
84 باری مالی
*
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बालकाण्ड
हरषि मिनेउठि रामानिकता विदयासन वषय समेता
वोलविहसि चराचराया बहनदिनन्हि कीन्हीमुनिदाया
कामचरित नारदमबभाषे॥ यद्यपि प्रथम वरजिशिवरायों
अति प्रचण्ड रघुपतिकीमाया जेहिन मोह असफोजगजाया
दाहा रूख वदनकरिवचनमई वोले श्रीभगवान॥
तुम्हरे सुमिरनाने मिरहि मोह मार मदमान ।। १३५
सुनुमुनि मोह हाइमनताको ज्ञान विरागहृदयहिजाके
बह्मचर्य व्रतरत मनि धीरा तुहिकिकरहिमनोभवशीर
नारद कहेउ सहितअभिमानी रुपा तुम्हारे सकल भगवान
करुणानिधिमनदीवविचारी उरकरेगर्वनर भारी॥४
वेगि से सैंडारिहों उपारी प्रणहमार सेवक हिनकारी
मुनिकरहित समकौतुकहोईवसि उपाय करख मैं सोई।
तवनारदहरिपद शिरनाई चलें हृदय ग्रहमतिअधिकार
धीपति निज मायानव प्रेरी सनई कठिन करनीनेहिकेरी
दाहालविर मगु महनगरहिसतायोजन विस्तार
श्रीनिवास पर अधिक रचना विविध प्रकार १३६
बमहिनगरमन्दरनरनारीग. जनुवह मनसिजरतितनुधारों
नेहि पुरचौ. मी निधिराजा अगणित हयगंज सेन समाजा
शन सुरेशसनविभवविलासा रूपतेज बलनीत निवासी॥
विश्व भोडूनी नासुकुमारी श्री विनोहजेहिपनिहारी
सोहरिमायासवगुणवानी शोभातासुकिजाइवरवानी॥
म्वेवरवर मोन्टप वाला ये तागतिमहियाला
मुनिकौतुको नगरनेहिगयेऊ पुरवासिनसनवूमतभयेऊ
सनिसव चरित भूपटवाये करिजाप मान बैठाये।
दोहा पानि दिखाई नारदहि भूपति राजकुमारि ।।
بال فان
चालकाण्ड
कहहना दोषसंबदहिकरहदयविचार::३७
परिवरूप मुनि विति विसारी पडावारलगिरहे नितारी।
ललगातासु विलोकिभुलाते हदयहर्ष नहियनाद चखाने।
जोइहिवरेअमर सोहोड़ी। नमा निहिं जीतनकोई
सेवाइसकलचरांचरताहो। विरैगोलनिधिकन्याजाही।
लक्षणां सवविचारउगवण ककवनाइ भूपमनभावे॥
संता सुलक्षणाकहि पपाही नारदचलेसोच मनमाहीं॥
करौंजाइसोइयतन विचारी जिहिकारमोहिं वरै कुमारी
जपतयटनहोत्याहकाला विविधिमिलैकवन विधिवाला
दोहा इहिअवसर चाहियन्यमशोभारूप विशाल।।
जो विलोकि री कंवरिनवमैले जयमाल।। -१३८
हरिसन मांगौसुन्दरनाई। होइहि जातगहरुमातभाई।
सोरहित हस्सिम नहिंकोऊ इहि अवसर सहाय सोहोऊ
बहुविधिविनय कीन्हतेहिकाला प्रगटेउप्रभुकौतुकारुपाला
असुविलोकिमुनि नयनजुड़ाने होइहिकाजहियेहरषाने।
अति भारत काहि कथा सुनाई करह रुपा प्रभुहोउ सहाई॥
आपनरुप देशप्रभु मोहीयानभांति नहिं पावउसोही
जोह विधिनाथ हाइहितमोरा करोसोवेगिदासमैं तोरा।
निजमायावल देखि विशाला: हिय हंसिवोलेंदीन दयाला
दोहा जेहि विधिहोइहि परम हित नारदसुनहतुम्हार
सोइहम करवनानकछवचन नम्षाहमारे २३
कुमथ मागुरुजव्याकुलरोगी विदनदेइ सुनह मुनि योगी
इहि विधि हित तुम्हारमैठियऊ कहियसअंतरहितप्रभुभयेऊ
मायाविवशभये मुनि मूदा समुफीनहिंहरिगिरानिगूढा
गवनेनुरत नहीं करषिराई। जहाँस्वयंवर भूमि बनाई।
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प
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बालकासह
तिजतिजनासनविठे राजा बडबनावकरि सहित समाजा
मुनिमन हर्ष रूपप्रतिमोरे। मोहितजियानारहिनहि
मुनिहित कारणा कृपानिधाना हीन्ह कुरूप नजाइबरखाना
सोचरित्रलबिकाइन पावा नारदजानिसाहिशिरताचा
दोहा रहेनहाज रुद्रगानेजान हि सब भडगार
विभेषटरवन फिरहिं पाम कौनकी नेऊ॥ १४०
जोह समाज वैठे मुनि जाई हृदयरूपअहिमतिअधिकार
तहबैठे महेश गाँदोऊ विभव गति लखन कोजा
करहिं कूट नारदह सुनाई।
नीकदीन्ह हरिजन्दा ताई।
रोमिहिराज कुंवार कवि देवी इनहिंपरिहि हरिजानविशेषी
सनहि मोहमन हाथ पराये।। -हसहिशंभुगरायतिसचुयाये
यदपि सुनहि मुनिधटपटवानी समुनिपरैबुद्धि भमसाती
काइनलखी सोचरितविशेषी सोखरूप टपूकत्या देखी।
मकवदनसयंकरदेही
देखत हृदय क्रोध मानेही॥
दोहा सखी संग लै कुवरितवचलिजनु राज मराल
देखत फिर महीप सब कर सरोज मयमाल।। १४१
जेहिदिशिबैठे नारद फूली मोदिशितेनविलाकीमूल
पुनि मुनि उकसहिअकुलाही देखि दशा हरगुगामुसकाहीं
धारेन्टप ननु तहं गयेउरूपाली, कुँवार हरषि मेलेउजयमाला
दुलहिन लैंगौलामनिवासा-न्टपसमाज सवमयेऽनिराया
मुनिश्रति विकल मोहमतिर्नाठी. मणि गिरिगईटिजनुगाठी
तबहरगगा बोले मुसकाई।।। निजमुख सुकरविलोकड जाई
यसकहिदोउ भागेभयभागी बदनदीव मुनिवारिनिहारी
भवविलोकि कोधननिवादा तिनहिनापदीन्हाउनियाद
दोहा होइ निशाचर जाइतुम कपटीशपी दाज।
७३ बालकाण्ड TML न सह.हम हिंसोलेहरफलबहरिहमेउ मुनिकोउ १४२. मुनिजलदीखरूपनिजयावाः नदियसनापनाया। करनअधरकोपमनमाहीं सपदिचले कमला पनिपाही देही वापकिमार होजाई जगतमोरिउपहाम कराई। बीचहिपंथमिले दनुजारी मरारंना सोरांज कुमारी बोले मधुरवचन सुरसाई। मुनिकहचलेविकलकीनांई मुनत वचनउपजाअतिक्रोधा माया चमन रहामनवोधाः। पर संपदासकह नहिं देखी | नुमरेड केपटाविशेषी।। मयंत-सिंधरुदहिवौरये। मरन रिविषपान करायेहा दोझ असुरसुरा विषर्शकरहियापुरमा मांगा चारा स्वारथ साधकाटिलतममदाकयटयबहार-१४३ परम स्वतंब नशिरपर कोई भाव मनहि कर तुम सोई। भलेहि मंदमंदाहिमलकरह विस्मय हर्ष न हिय कषुधरह उहकिडहकि यरिकेहसवकोहः अनिशंकमन सदाउका कर्मभुभाभुभनुमहिन वाधा सवलगितुमहिन काहू साधी भले भवनववायनदीन्हा पावड़गे फलबापत कीन्हा बह मोहिजवनपरिदेही सोइननुधरना समय कर्षियाकति तुमकीन्ह हमारी करिहहि कीस सहाइ तुम्हारी समयपकारकीन्हनसभारी नारि विरहनम होउ दावारी। दोहा श्राप शीश धारे हरषि हिय प्रभुसुरकारज कीन्ह निज मायाकी प्रबलताहरपि रूपानिधिलीन १७ जबहरिमायादूरिनिवारी नहि नहरमानराजकुमारोग तबमुनि प्रतिसैभीतहरिचरंगा गहे पाहि प्रणतानि हरराए। सषा होउ मम भ्रायरूपाला समे इछा कहं दीनदयाल मैंदुवैचनकहेउवहरे। कहाने पापमिटहिकिमिमरे ५ 4
می بالا
जमह जाइशंकर शतनामाहीहिहृदयतुरतविधामा
कीउनहिशिवतमानप्रियमा सपनोनित्यागेहजनिभोरे
जेहि पर कपानकरहिपुरारी सोन पावमुनिभक्ति तुम्हारी
असउरीरमहिविवाह नाई संवननुमहिं मायानिय
दीहा बहावधि निहिप्रवाधप्रमुर्नवसन्नध्याना में
सत्यलोकनाचले करतराम गुरागानं ॥ १४५
हस्गा मुनिहिं जानपथदेखी विगतमोहमनहर्ष विशेषी
अनि समान नारद पहंचायो गहिपदभारतवचन सुनाये
हरगणा हमन विश्वमुनि रोया वअपराधकीन्हफलगाया
प्रापअनुग्रह करह कपालाबोले नारद दीन दयाला ।।
निश्चिरजाय होउ तुम दोऊ विभवविपुल तेजबल होऊ॥
भुजवल विश्वजिनवतुमहिमा धरिहहि विशामनुजतनुतहिया
समरमरगा हरिहायतुम्हाग होइहह मुक्तन युनि संसारा॥
चलेंयुगल मुनि पदसिरनाई भयेनिशाचर कालहिं पाई।
हा एककल्प इहि हेतु प्रमुलीन्ह मनुजअवतारा
सर रंजन सज्जन सुखद हरि भंजनभूभार।।॥ ९४६
इहिविधि जन्मकर्महारेकर सुन्दर सुग्वद विचित्र घनेरे।
कल्पकल्प प्रति प्रभुश्ववतरही चारुचरित नानाविधिकरहीं।
तदतव कथा मुनीशन गाई। पुरम पुनीत विचित्र सुहाई।
विविध प्रसंगअनूप वरखाने
कहहिं नसुनिशाचरजसयाने
हरिअनंत हरिकथा अनंता कहहिं सुनहि बहुविधिक्षुतिसंता
ऐमचम्य के चरित सुहायेकल्प कोटि लगिजाहिनगाये
यह प्रसंग मैं कहा भवानी॥ हरिमायामोहहिं मुनि ज्ञानी
प्रभु कौतुकी यशातहितकारी सेवत सुलभसकन्नडरवहारी
सारा. सुरनर मुनि काउ नाहि जोहनमोहमायाघ्रदल
"
वालकाण्ड
बविचार मनमाहि भजहि महामायापतिहि १५॥
अपर हतुसनुशैल कुमारी कहाँविचिवकया विस्तारा॥
जाहे कारजनजाराअनूपा बिही
भयेकौशलपुर मूपा॥
जोपभुविपिन फिरत तुमदेखा वधुसमेत किये मुनिमेवा ।।
जामुचरिन अवलोकिभवानी सती शरीर रहिउ चौरावा।।
अजह नहाया मिटत तुम्हारी नासुचरित मुनु भ्रम रुजहारी।
लीला कीन्ह जी नहिवतारा सोमव कहिहाँ मतियनुसारा
माल मुनिकरवानी॥सकुचिसमेउमा सुसकानी
लरोनहारवरने वषकेतू। सोअवतार मय जेहि है ॥
दोहा सा मै तुम सन केही सव सुनु मुनीशमनलाई
राम कथा कलिमल हरगा मंगलकरनिसहाइ १४०
स्थायभू मनुरुमत रूपा जिनते भइनर स्टरिअनूपा।
दम्पति घरमाचरगानीका अजई गाय प्रतिजिनकी लीका
दपउनान पाद सुत तासू॥ भव हरिभक्तिभये सुन जासू॥
लधुसुत नामयियावत नाही विद पुरान प्रशंसन जाहीं॥
दहतीपुनितासुकुमारी॥ जो मुनि कर्दम की प्रिय नारी
आदिदेव प्रभुदीनदयाला जरजरेउंजेहि कपिल रूपाला
सौरव्य शास्त्र जिन प्रगटवाना तत्व विचार निपुगभगवाना
लेहि मनुराज कीन्ह वहकाला प्रभुनायसुबहविधिप्रतिपान
सो० होइन विषय विराग भवनबसन भाचीचयान
हृदय वहाडखलोगजन्म गयेऽहरि भक्ति बिन १६
वरखस राज सहितव दीन्हा नारिसमेत गवन वन कीन्हा।।
तीरथबरनैमिब विख्याता अति पुनीत साधक सिरदाता
बसहिजहां मनिसिद्धसमोजा तहहिय हरषि चले मनुराजा।
पंथजानसाहहि भतिघीरा ज्ञानभाकजनुधरे शरीरा ।।
و بالاتر . बालकाण्ड 4. 4- Virala ." पहषे जाइधेनुमति तीर हरषि नहाने निर्मल नीरा आयेमिलनसित मुनिज्ञानी धर्मधुरंधरन्टपऋषिजानी॥ जहंजेह तीरथरहेसुहाये। मुनिन सकल सादरकरवायें कश शरीरमनिष्ट परिधाना सनसभानित सनहिं पुराना दोहा दादशाक्षर मवर जपहिसहितअनुराग वासदेव पद अकादम्पति मन अति लाग. १४६ करहिहारशाकफलकन्दा सुमिरहिं ब्रह्म सच्चिदानंदा पुनिहारे हेतु करनतपलानी वारि अहार फूलफल त्यागे उरअभिलाष निरंतर होई. देखिय नयन परम प्रभु सोई अगुगारखण्डअनन्तअनादी हिचिंतहि परमारथवादी। निति नतिजेहिवेदविजया चिदानंद निरुपाधिअनूपा शम्भु विरंचि विष्णु भगवाना उपजहि जासुस नै नाना।। ऐसे प्रभुसेवकवसनहीं। भक्ति हेतु लीलातनु गहहीं। जो यहवचन सत्यप्रतिभाषा नौहमार पूजिहियभिलाषा दोहा इहिविधिवीतेवर्षषदेसहस वाराहारे।। संवत सप सहस पनि रहे समीर साधार॥ १४६ वरष सहसदशत्यागेउसोका ढादेरह एकपदादाजाना विधि हरिहर नप दोसयारो मर्नुसमीप नायबडवारा ।। मांगड वर वह भौतिलुभाये। परमधीर नहिं चलहिं चलाये अस्थिमान होइ रहाशरीरा. तदपि मनांगपि नहि मनपीरा पभुसर्वज्ञ दास निज जानी गतिअनन्य तापस न्र परानी। मांगु मांगु वर भईजभवानी परम गंभीररुपास्त मानी। म्टनक निनावनिगिरीसुहाई. श्रवा रंध होइडरजवाई।। हए पर नन भयेड सहाय मानहसवहिं भवन ने माया दोहा नवरा सुया समवचन सुनि मुलकप्रफुल्लित गान
بالاتر و
चालकाण्ड
बोले मनुकरदंडवत प्रेम न हृदय समात॥ ९५०
सुनु सेवक सुरतरु सुरचना विधिहरिहरवदित परेन।
संवत सुलभसंकलसुखदायर पगतपाल सचराचर नायक
जौचनाधहितहमपर नेह ती प्रसन्न होइयह वरदडू
जोस्वरुपवशिवमनमाहीं। जेहि कारणामुनि यतनकरोही
जो सुबिडमनमानसंहसो अगुगासगुगाजेहिंनिगभूपशर
देखहिमसोपभरिलोचनाया कर प्रणा तरिति मोचून
दंपतिवचन प्रेमप्रियलागेडल विनीत नेम रसपागे
भक्तिवाल पूभकयानिघोना विश्वास प्रगटे भगवाना॥
दोहा : नील सरोरुह नीलमसिा नीरधीर परश्याम
लाजहि तनु शोभा निरषिकोटि कोटि शतकाम ९५९
घरदमयंक वदन छवि सीवाय चारुकयोलचिवक दरग्रीवा
अथारुगरदे सुन्दर नासा विधुकर निकरविनिंदकज्ञासा
नव अंबुज वकछविनीकी चितवनिललितभावतीजीकी
टिकुटिमनोजचापछविहारी निलकललाटपटलतिकारी
कुंडल मकर मुकुट सिर भ्राजा कुटिलकेशजनु मधुपसमाजा
प्रश्नीवत्स रूचिौवनमाला। पति अहारभूषामगिजा
कहरिकंघरचारु जनेऊ) वाह विसूषण सुन्दरने
कारेकरसरिसमभगभुजदंडा कठि नियंग कर सरको दंडा
दोहा तड़ित विनिंदक पीत पुट उदररेख वर तीनि॥
नाभि मनोहर लेतिजनमुनिमपभवर छविहीन ९५२
पद राजीववरनिनहिंजाही मुनि मन मधुपवसहिजेहिमाई
वामभाग शोभितअनकाला आदिशक्ति विनिधिजगमूल
जासुझंशउपजहिं गुगाखानी
अगणित उमारमानहानी
भटिविलासजानुजगहोई. रामवास दिशि सीमालोड़ी।
वालकाण्ड
छविसमुन्द्र हरिरूप विलोकी इकटक रहे नयन घट रोकी
चितनहि सादररूपचनूयारमिन मानाई मनु शत रूपा।
हर्ष विवस तन दशाभुल्तानी पदण्ड इव गाहित्यद पानी
सिर पर प्रभु निजकरकंजा तुरंत उठाये करूगा पुजारी
दोही बोलेकपानिधान पुतिति प्रसन्न मोहिजानि
मोहिजानिक
माग वरजोइन्भावसनमहादानिअनुसानि १५३
तुनिप्रभुवचन जोरियुगपानी घरचारजबाला देवानी
नाथदेखि पदकमल तुम्हारे अनयूजे सब काम हमारे।।
एकलालसावा. मतमाही सामनगमकहिजोतसोना
तुमहिंदेखि प्रतिसुगमगुसाई यामलागुमोहिलिज रूप नाई
प्रथा दरिद विविध तर जाई वह सस्पति मागतसकुचा
नासुप्रभावनजाने सोईनयाहृदय ममें संशय होई।
सोतुम ज्ञानअन्तरयामीपुरवह मोर मनोरंथ स्वामी।
संकाच विहाइ भागल्टपमाही मोरनहिनदेयक तोही।
दोहा दात शिरोमणि कपानिधि नाथ कहा सतभाव
चाहौतमहिनमानसूतप्रभुसन कवनतराव। १५.४
दरिब प्रीति मुनिवचनम्मीले व मस्तु करुणानिधि बोल।
पाप सरिन खोजो कहजाई न्य नवननय होक में आई॥
मतरूपहिविलोकिकाजी देविमांगु वरोरुचितोरे॥
जीवनाथ चतुरन्टपमागासोकपालु मोहिंगनिप्रियला
नभुपरन्तु सुठि होतिविठाई पर्षिभक्तिहिन तुमहिमुहाई
नुसब्रह्मादिजनकजनाम्वासी वासकरलाउरेतर यामी।।
अम समुसत मन संशय होंई कहाँजो प्रभुइमा परि
जे निजभक नाथ तववहही जोमवपावहिंगो गतिलहई
मोइसव सोतिमाइमा
गासनह
बालकाण्ड
بال کیا ء
1
.
2
सोइ विवेक साइरहनिप्रम मोहिरुपाकरिदेड १५५
सुनिम्डगूढ रुचिरवररचना रूपासिंधुवालम्वचना।
जोककुरुचितम्हरेमनमाही में सो दीन्ह सब संशय नाही
मानु विवेकअलौकिकतो करईन मिटहिअनुग्रहमोग
वदिचरण मनकहेउबहोरो अवर एक विनती प्रभु मोरी।।
सुन विषयकतवपद रत होऊ मोहिवरमूदकहै किन कोऊ
माणविनुपरिराजिमिजलविनुमीना मान जीवन तिमि तुमहिंमधील.
असवरमरिंगचरणागहिरहेज रखमस्तु करुणानिधि कहेऊ
अव तुम समयनुसासनमानी... वसहजाई सरपतिजधानी॥
सोरठा तहकारि भोगविलासनात गये ककु कालमुनिः
होइहमवधिभुवाल तव मैं होवतुम्हारभुत ९८
इक्षामय नर भेष सवारेमाहाहाही प्रगट निकेत तुम्हारे।
श्रेशनसहित देहधरताताकरिहौं चरित भक्त सुखदाता
जेमुनिसादर नरेवड़ भागी भवतरिहहिं ममतामदत्यागी
आदिशक्तिजेहिजगउपजाया सोअवतरहिमोरयहमाया
पुर उव मैअभिलाष तम्हारा सत्य सत्य प्रा सत्य हेमारा।
युनिश्यसकाहरुपानिधाना अंतानभये भगवाना।
दम्पति उरधरिभक्तिकयाला नेहियानमनिवसेकछुकाला
समयपाइ तनु तजिवनयासा जाईकीन्हअमरावति वासा।।
दोहा इहे इतिहास पुनीतऋतिउमहिकहेउरषकेतु
भरहाज मुनि अपर मुनिरामजन्सकरहेत॥ १५६
सुनुमुनिकथापुनीत पुरानी जोगिरजापति शभुवरवानी।।
विविदित इककेकयदेसू सत्य केतु तहं वसे नरेसू ।।
रंधरनौतिनिधानी तेजप्रताप शोललासवाना
महिकेभये युगल सुतवीरा सब गुसांधास महाररा धीरा।।
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पालकाण्ड
रजधानीजेठे सुनसाही नाम धनापभानुचमकहहो।
अपरभुतोह गरि मर्दैन नामा भुजबल अतुलमचल संग्रामा
भादहिभाइ परस्परपीती ॥ सकलदोष छलवज्जितरीनी
जेठे संदिराजन्टपदीन्हा॥ हरि हिताय गवन वन कीन्ही
दोहा 'जव प्रताप रवि भयेउन्टय फिरी दोहाई देश
जापाल अतिवेद विधिकतहं नहींअचलेश १५७
न्यहितकारक सचिवसुनाना निमिधर्मरुचि रक्कसमाना।
सचिवसयानवयुवल वीरा॥ आपु प्रताप पुंज राधीरा॥
सेनसंगचतुरंगे अपारा॥अमितसुभाटसबसमरजुजारा
सेन विलोकिराहरवाना अरुवाजें गहगहें निशाना।
विजयहेतुकटकाइबनाई। सदिन साचिन्रपञ्चलेउ बजाई
जहंतह परीअनेकलराईजीनेसकलभूपवरियाई
सिप्रदीपभुजवलवसकीन्हो लेलैदरड छाडिन्टपदीन्हा।
सकलनवनिमण्डलतेहिकाला एक प्रतापभानुमहिपाला।
दोही स्ववस विश्व कारबाहवल निज पुरकीन्ह प्रवेश
अर्थधर्म कामादिसरसेवहिंसबै नरेश ॥९५८
भूपप्रताय मानवलपाई। कामधेनुभभूमिसुहाई।
संबेडरववर्जित प्रजासुरवारी धर्मशीलसुन्दरनरनारी।
सचिवधर्मरुचिहरिपदनीती पहितहतुसिरवावत नीती॥
गुरुसुरसन्न पितरमहिदेवा। करसदान्यसबकी सेवा
भूयधर्मजेवेद वखान। सकल कौसादर सुरखमाने।
दिनप्रति देइ विविधविधदाना सुने शास्त्र वरवेद पुराना ।
नानावापी कप तड़ागासुमनवाटिकासुन्दरलागा
विभवन सुरभवनसहाय सबनीस्थनिविचित्रवनाये।।
दोहा जहलगिकहे पुराणाक्षुति एक एक सबयाग
-
ग्वालकाण्ड
बार संहका सहसान्रए किये सहितअनुराग - ५
हृदयन का फलअनुसंधाना भूपवित्रका परम सुजाना ।।
करजोधर्मकर्म मनवानी ॥ वासुदेवअर्पितन्टपज्ञानी
चदिवराजिवारयकराजी॥ गयाकरसब साजिसमाजा।
विंध्याचलगंभीरवनगयेऊ मगपुनीतवहमारनभयेऊ॥
फिरतविपिनन्टपदीखवराहा जनुवनडरेउशशिईि ग्रसिराह ।।
दिधुनहिसमातमुखमाही मनहक्रीयवसउगिलन नाही।
कालकरालदसन छविगाई त विशाल पीवर अधिकाई।
पुरुधुरात इयचारवपाये।चकित विलोकन कानउठाय।।
दोहाँ नौलमहीधरशिखरसमदेखि विशाल वराह ।
चपरिचलेउ हयमुरिकन्टप हांकि नहोइनिवाह. १६०
भावनदेखि अधिकरव वाजी गावाचलावाहमरून गाने भाजीग
तुरंत कीन्हन्टपसरसंधाना महिमिलगयेउविलोकनचाना
नकिनकितीरमहीशचलावा कारकत्ल सुअरशरीरवचावा।
प्रगटतदुरित जायगमांगा रिसंवसभूपचलेउ संगलागा।।
गयेउरिपन गहनवराह जहनाहींनजयाजिनियाहू॥
अतिनकेल वनविपुलकलेमनपिनम्रगमग तजै नरेन।
कोल विलोकभूपवदधीरा भागिपैठि गिरगहागंभीर
अगम देखि सपअतिपछिताई फिरेर महावन परेउभुलाई।
दोहा खेद खिन्नत्यषित कृधित राजावोजिसमेत
खोजतव्याकुल सरित सरजलं विनुभयेउवचन १६१
फिरत विपिनाश्रमइकदवा निहंबसन्पातिकपट नुनि भेषा
जासुदेशन्स्पलीन्ह छाई। समरसेनतजिगयेउपराई।
समय प्रतापभानुकरजानी॥ आपनअतिअसमयअनुमाने॥
सयेउनग्रहमनवहतगलानी . मिलानराजहिंन्टपत्रभिमानी।
- दोहा भूपतिरषित विलोकितेइसरवरदीन्ह दिखाइ वालकाण्ड रिसउरमारिरंक जिमिराजा विपिनवसैनापसके साजा नासुसमीप गवनन्टएकीन्ही. यहप्तापरवितेइनबचीन्हा।। राउतषित नहिंसो पहिचाना देखिसुभेषमहा मुनिजाना॥ उत्तरितुरंगतेकीन्ह प्रामा॥ परम चतुरनकहेउ विजनामा मज्जन.पानसमेतहयकीन्हन्टपतिहरपाई,९६२ गाश्रमसकल सुखीन्टपभयज निजधानमनापसल गयऊ आसनदीन्ह अस्तरविजानी। पुनितापसबोला मुबानी।। कोतुमकसेवनफिर अकेले सुन्दरयुवाजीवपरहले।।।। चक्रवात के लक्षण तोरे दरवनदयालागि अति मोरे॥ नामप्रताय भानुअवनीसा॥ नासुसचिव मैं सुनह मुनीसा। फिरतश्चहेरहिं परेउभुलाई बडे भाग्यदेखेउ पत्याई। हमकहलभदशतुम्हारा जानतीं ककुभलहोनिहारा कह मुनि तातभयेऽधियानयोजन सतर नेगर तुम्हारा।। दोहा निशा घोरगंभीरवन पथन सूफ सुजाना वसह आजु असजानितुमजावेहोन विहान तुलसीजसि भवितत्वता तैसे मिलेसहाकाल मापन श्रावे.ताहि पैकिताहिनहीं लेजाय॥१६॥ मलेहिनायायसुधरिशीशा बाधितुरगनबमहीण। न्यपहभावि प्रशसेउताही चरणदिनिजभायसराही पुनिचोलेर र गिरा सुहाई जानिपिता प्रभुकौं दिलाई। मोहिमुनीशसुतसेवकजोनी | नाथ नाम निजकहलवावानी।। नैहिनजान-पहिं सोजाना भूपरनेहृदयसोकपटसवाना। वैरीपुनिक्षत्री पुनिराजा छलवलकीन्हबहाननकाना समुफिराज सुखदेखिनचराती भिवाचनलो मुलगे हानी । 1- वालकाण्ड सरल वचन टपके मनिकाना - विरसंभारिहृदय हरयाना । दोहा कपटवारिवानीन्टल चोलज्युक्ति समेत नाम हमारभिरवारिश्रनिधन रहित निकेता! १६५ कहन्टपजे विज्ञाननिधाना॥ तुमसातगालनाभमान सदोअयनपोरहहिंडरायें। मलविधिकुशलकुभेष बनायें नहिंने कहहिंसन्न तिटरे॥ परमभकिचनशिबहरिकेरे।। नुमसमयधनभिखारियगेहाई होत विरचि शिवहिं संदेहा॥ चोसिसोसि तव चरणानमामी लोपरकपाकस्यिवस्वामी। सहज प्रीति भूपति कीदेवी॥ याविषैविश्वास विशेषी सबैप्रकार राजहिअपनाई।। बोलेउधिकसनेहजनाई सनसतिभावकही महिपाला इही वसतबीते वडेकाला दोहा अबलगिमोहिनमिलेरकोउमनजनायोंकाह। लोकमान्यताअनलसमकरतपकाननराहा. ९६६ सोगः तुलसीदेखिसुवेष भूलहिमूदन चतुर्नर ॥३॥ सन्दाके केहि येरिवचनसंधासमायसनअहि॥1॥ १६ ताने गुट रहो जगमोही हारेनजिकिमपिप्रयोजननाही। प्रभुजानतसंबविनयजनाये कहहकइनसिधिलोकारकाये तुमसुचि सुमति परमप्रिय मोरेग पीति नतीति मोहि परनोरे।। अबजी तातडरावो नोही दारुगादोषदेअति मोही। जिमिजिमि नापसकथैइउदासाः दिमिर पहि होइ विश्वासा देखास्ववस कर्म मनवानी॥ नवचोला तायर तकध्यानी॥ नामहमार एक तनु भाई॥ सुनिन्दप बोलेर पुनिसिलाई कहनामकरमर्थ वरवानी॥ मोहिमेवरूद्रातिप्रापन्जानी दोहा श्रादिसतिरपनी जवाहतवउपपतिभा नोति। नाम यक तनु हेन हिदेहन परीपहोरि ।। १६७ بالکان -- ५ . एकाछन रिप हीन महि राजकल्प शत होउ ॥ १६ ॥ कारणरककाठन सुनसाऊ।।। वालकाण्ड ३ अनियावरजकर मनमाहीं सुननपतेदुर्लभक्छ नाही। तपवले जगस्टजे विधाता नपवलवाभये परिवाना नपवल शंभुकरहि संहार । तपतेशगमन का संसारा॥ भयेउन्टपहि सुनितिअनुरांगा कथापुरातनकहे सोलागा। कर्मधर्म इतिहास अनेका। करनिरूपनविरति विवेका।। उध्दव मालन प्रलय कहानी - कहेसिमित वाचरजवरनानी मुनिमहीशतापसवस भयऊ प्रायन नामकहनतवलयेऊ कह नायसनपजान तोही॥ कीन्हेउकपदलांगभलमोरी दोहा. मुनि महीशअति नीतिजनहनासनकहहिन्स भोहितोहि परप्रति प्रीति परम चतुरता निरखिन नामतुम्हार प्रतापदिनेशा॥ सत्यकेतु नवपिता नदशा गुरुप्रसादसबजानियराजा कहियनयान हजानिकाजा देखि तात तवमहजसुधाई। प्रीतिप्रतीति नीति निपुरणाई उपजिपरी ममता मनमारे।।। कहे कयानिजबूतोरे अवप्रसन्न में संशय नाही। मांगेजोभूपभाव मनमाही मुनि मुंवचन भूपति हरषांना गहिपदविनयकीन्दनिधिनाना कपासिन्युमुनिदर्शन तोरे। चारियदोरथ करतल मोरे प्रभुहिंपचापि प्रसन्नविलोकी मौगिअगमवरहोउअशोकी दोहा जरामरगाडादरहित तनुसमरनजीत कोज 11 काला तवपदनाइहिं शीशा एकविष्कुलबाडि.महीशा॥ निपचलविप्र सदावरिया।।।। तिनकेकापनकोउं रखवारा॥ तौविप्रनवस्कर नरेशानौतवसविधिविष्णु महेशा चलन ब्रह्मकुल वारश्चाई सत्यकौदोउ भुजाउंठाई। , M 4
वालकाण्ड
بال اند ۹۴
विप्र प्रापदिनुसुंन महिपालातोरनाशनहिं कवहनकाला
हरपेड राउ वचन सुनि नासू॥ नाथ नहोइ मोर अब नासूर
तव प्रसाद प्रभुकपा निधाना
मोकहंसर्व काल कल्याना॥
दोहा एवमस्तु कहि कपट मुनि बोला कुटिल वहोरि।
मिलव हमार भुलावजनिकहह मोर नारवोरि॥ १६८
ताने में नोहि वरनों राजा कहे कथा नव परम अकाजा।
छठे धरण यह परत कहाती नास तुम्हार सत्य मसवानी।
यहप्रगटे अथवा द्विज श्रीपा॥ नास तोर सुनु भानुप्रताया।
अान उपाय निधन नव नाहीं जो हारे हर कोपर्हि मन माहीं
सत्य नाथ पदगहिरप भाषा दिज गुरुकोपकडकोरावा
राग्वैगुरुजो कोपविधाता ॥ गुरु विरोधनहि कोउजगत्रात
जोनचलवहम कहे तुम्हारे हाइनाशनहिं शोचहमारे।।।।
एकहिडर डायत मनमोरा! प्रभु महिदेव श्वाप अति घोरा।
दोहा होहिं विप्रवस कवन विधिकहहरुपाकरिसोउ।
तुम तज़िदीनदयालविधिक रुपाकरिसीर २७०
सुतुन्य विविधयतनजगमाही कर साधि पुनि हाहि कि नाही
अहे एक प्रति सुगम उपाई तहाँ परंतु एक कठिनाई।
माधीन युक्तिन्टपसोई। भारजावतव नगर न होई।
शाजु लगे अरुजवतें भयऊं ॥ काहूकेग्रहग्राम नंगयऊ
जौनजाब नव होइअकाजू॥ वनाइअसमंजस भाजू॥
सनि महीप बोले मड़वानी। नाथ निगम अस नीतिवखान
बडेमनेह लघुनपरकहही। गिरि निज सिरनसदारणावरही
जलधि अंगाध मौलिवह फेन संततधरनि धरत सिर रेनू।।
दोहा असकहिगहें नरेश पद स्वामी होड़ रूपालु।
मोहिलांग हरदसहियप्रभुसज्जन दीन दयालु १७१
.
۹۵ بالانتر बालकाण्ड जानारीन्टपहियापनाधीना बोलानापस कपट प्रवीना॥ सत्य कहीं भूपनि सुनतोही जगमहेनहिं दर्लभ कामोही अवसिकाज मैं करिही नोरा।।- मनकम वचन भक्ति तू मारो। योगयुक्ति तपमंत्र प्रभाऊ॥ फलै तबहिंजव करिय डराऊ।। जौ नरेश मैं करेउं रसोई॥ तुम परमई मोहि जानन कोई अन्न सोजाइ जोइ भोजन करई सोईसोई तवनायसुअतुसरई मुनि तिनके ग्रहजेवें जोऊगा तववस होय भूप.सुन साऊ। जाइउपाय रचईन्टपयेह॥ संवतभरि संकल्प करेऊ ॥5॥ दोहा नितनूतनदिज सेहसशनवरेउसाहितपरिवार मैं तुम्हरे संकल्प लगि दिनहि करवजेव नार इहिविधिभूपकरतियोरे होइहिं सकलविश्वसतारें करिहहिं विप्र होम मख सेवा - निहिप्रसंगसहजहि वसदेवा ।। और एक तोहि कहीलवाऊ म यहि सेवनारद काऊ। तुम्होउपरोहित कह गया। हरियानव में कारे निजमाया। तप दल नेहिकरित्रापुसमाना रिखिहाँइहावरष परमाना ॥ मेधरितालु भष मुनुराजा ॥ सब विधि तोर सवारख काजा। गनिशिवहत शयनअवकीने मोहिनोहिभूपभेटदिनतीजे॥ में नयवन नोहि तुरंग समेता पहचैहौसावतहिनिकेता दोहा. मैं बाउबसोइभेषधरिपहिचानेड तब मोहिया जवएकात बुलाइ सब कया सुनाऊ तोहिं ।। ।।.१७३ शयन कीन्ह न्यायसुमानी मायासन जाईवट केल जानी।। चमित भूप निदाअनिबाई सोकिमिसोव सोच अधिकाई कालकतु निशिचरनहावा हि भूकरहीइन्टपहिभुत्लाद परममिव तापसन्दपकरा जाने सोशतिकार चनरा) तेहि केंशन सुतअरुदशभाई खल अठियजय देखदखदा S
३
बालकाड
4.
प्रथमह भूप समर सब मारे। विष सन्न सुर देखिडखारे।।
हि खल पांछल वैर संभारा नापसरप मिलि मंडविचारा
जैहि रिपक्षयसोइरचैसिउपाऊ भावी वस नजाने कछ राऊ।।
दोहा रिपुतेजसीअकेल अपिलघुकरिगनियनताह
अजहं देतडखरविशशिहिं शिरयवशेषितराद्ध ९७४
नापस न्यनिजसखहिनिहारी हरषि मिलेउउठिभयेउसुखारी
मित्रहि कहिसब कया सुनाई। यातुधान वोला सुखपाई।।
अब साधडे रिपुसुन नरेशात जोतुमकीन्हमारउपदेशा ।।
परिहरि शोच रहह तुम सोई। विनुऔषपहिव्याधिविधिलाई
कुलसमेत रिपु मूल बहाई। चौथे दिवस मिलव मैं चाई।
नामसन्टपहिवन परितोषी . चला महा कपटी अति रोषी।
भानु प्रतापहि वाजि समेता। पहंचायसिसोवाहिनिकेता
यहि नोरियह शयनकराी हयग्रहवांधेसिवाजिवताई
दोहा राजाके उपरोहितहिं हरिलैंगयउ बहीरि॥
लै राखेम गिरि ग्वोहमाहमायाकरिमतिभोरि १७५
आपु विवि उपरोहितरूपानपराजा गोहि सेज अनूपा ॥
जागउपचन भये बिहाना : दषि भवन अतिअचरज माना
सुन महिमा मन महंअनुमानी उठे गवहिजेहि जानन रानी।
कानन गयेउवाजि चदिनेही पुरनरनारिनजानेउ केही॥
गय याम युग भूपनि भावा॥ घर घरउन्सव बाजुबंधावा ।।
उपरोहितहिंदीखजदरांजा चकित विलोकि सुमिरसोइकाज
युगसमन्टपहिं गयेदिन तीनी, कपटीमुनिपदहरिमतिलोनी
समय जानिउपरोहितभावान्टपहिमतोसबकहिसमुझाव
बोहा महर्षे पहिचानि गुरुभम वस रहा न चेत।
वरे नुस्त शने सहसवर विप कुटम्वसमेत॥ १७६
ch 4 Home वालकाण्ड उपरोहित जेवूनार बनाई रसचारिविधिजसुचनिगाई माया सयहि कीन्हरसौई व्यजनवहरानिसकैनकोई विविध रंगनेकरश्रामिषराधा तिहिमहविप्रमासखल साधा सोजनकहंसब विषबुलाये पद परवरि सादरवैठाये। परसनलागजवहिंमहिपाल भईवकासवानी तेहिकाला विन हंडठिउठि ग्रहजाई। हैवडिहानिप्रन्जनिखाहू भयेररसोईभूसुर सासू ॥ सवादिजउठेमानि विश्वास भूप विकल मति मोहभुलानी भावीवसेनावमुखवानी।।। दोहा बोले विय सकाय तब नहि कछु कान्हविचार जाइनिशाचर होहन्टपमूद साहित्यरिवार । २७७ छुत्रवधुने विजुलाई घाललियेसहितसमुदाई। ईश्वररावां धर्म हमारोहसितै समेत परिवारा।। संवत मध्य नाश तब होऊ. जलदाता नरहहि कुलिकोत प्रसुनिश्चापविकलअतिवासा भवहरिवरगिराकासा।। विग्रन्ह श्राय विचारन्ह दीन्हा नहिअपराधभूपकछु कीन्हा चकित विप्रसव सुनिनभवानी भूप गयेजहंभौजनरवानी तहनसननहि विपसारा : फिरेउ राजमन शोचत्रपारा॥ सर्व प्रसंग महि सरनं सुनाई। वसित परेडअवनीअकुलाई दोहा भूपति भावी मिटैनहिं यदयिन वनतोर। किये अन्यथा होइनहिं विनश्राए अतिथोर. १७० असकहिंसवमहिंदेवसिधाये समाचारपुरलोगन पाये॥॥ शोहि दुपा दैवहिं देहीं। विरचन हंसकोककिएजेही उपरोहितहि भवन पहुंचाई। असुरनायसहि खरिजनाई। तिहि खेलजहंतपत्रममय सरिसेनभूपसवाये॥७॥ परिन्हि नगर निशानजाई विविधिभांति नित होत लगई 'वाल काण्ड بالا نظر ۸۸ 1 जुमे सकल सुभटकै करगी। बंधुसमेत पाउन्टप धरी। सत्यकेतु कलकोईन वाचा विपनापकिमि होइनसाचा रिपहिंजीत रप नगर वसाईनिज निजपुरगयेजयजशपाई दोहा भरंदाज सुनुजाहिजब हति विधाना वाम ॥ धूरि मेरुसमजनकेयम ताहि व्याल समदाम ॥ १७६ कालपाय मुनिसुनि सो सजा भयेउनिशाचर सहितसमजा दशशिर ताहिदीसभुजदएडा। रावणानामवीरवरिवरडा।।। भूपअनुनरिमन नामा भयेउ सोकुंभकरणवलधामा सचिवजोरहाधर्मरुचिजासूम भयेउ विमावबंधुलघु तासू॥ नान विमीलगाजेहिजगजानों विशा भक्त विज्ञान निधाना रहेजेसुतसेवकन्टय केरे॥ भयेनिशाचर घोर घनेरे॥ कामरूस स्वल जिनसंअनेका कुटिल भयंकर विगत विवेका कपारहित हिंसक सवपापी वरनिनजाय विश्वपरितापी। दोहा।। उपजे यदपिपुलस्त्यकुल पावनअमलअनूप। तदपि महीसूर श्राप वसभयेसकलधरूप।। १८० कीन्ह विविधि नपतीन्हेउभाई। परमउगमोवरनिनजाई।। गये निकट तपरिवविधाता मागहवर प्रसन्न मैं नाता। करेि विनतीपद गहिंदशशीशा बोलेउवचन सुन:जगदीसा हमकाहूकरमरहिन मारेंवानरमनुजजातिडइवारे।। एवमस्तु तुमवडतपकीन्हा।। मिनमामिलिनेहिवरदीन्हा पुनिपभुकुम्भकररापहंगयेऊ तिहिपिलोकिमनविस्मयमयेऊ जीयहरवलनित करवश्वहारा होइहिं सवउजार संसारा॥ और प्रेरितासमति फेरी मांगेसि नींद मासषटकेरी॥ दोहा गयेर विभीषणापास तवकहा पुत्रवर मांगु॥ तेहि मागेउ भगवन्न पदकमल अमलअनुरागु॥१८९ .. HA
Fin
नहिं देह वरवहासिधाये हर्षितते अपने गहनाये।
यतनयामंदीदारनामा ।। परम सुन्दरी नारिललामा।।
माइ मेयरीन्ह रावरााहियानी भईसोयातुधानपति रानी।
हर्षित भयेउ नारिमल पाई पुनि दोउवधुविनाहेसिजाई
गिरिविकूट इकसिंधुमारी विधि निर्मित नर्गनप्रतिमारी
सोइ मय दानव बहरि सवारी कनकरचितमणिभवनपान
भोगवतीजसअहिकुलवासा
अमरावनिजसंशवलिवासा
तिनके अधिकारप्रतिवंका जगविल्यान जानतेहिलंका॥
दोहा खाई सिंधुगंभीरर्ति चारिदिशिफिरिश्राव
कनककोट मंशिवचितहदवरनिनजाइ बनाय १८२
हरि प्रेरित जिहि कल्पजोइजातुधान पति होय.
सूरप्रतापीतल वलदल समेत वस सोय ।। १८३
रहेतहानिशचरभटभारे। तसब सुरत समर सहारे।।
अव तेह राहहिं शककें परे।। रक्षक कोटि यक्षयति करे।
दशमुख कवई ववरिअसिपाई सिने साजिगढ घेरेसिजाई
दग्विविकट भटवडिकटका यक्षजीदलै गयउ पराई।
फिारे सबै नगर दशानन देखा वयउशोच सुखभवउविसोवा
सुन्दरसहज अगमअनुमानी कीन्ह नहीं रावशारजधानी॥
जहिंजस योग्यचाटिरहदीन्हें सुरती मकल रजनीचर की
एक वार कर पहचावास्यकयान जीत लेता।
दोहा कौतुकही केलाश पुनिलीन्हेसि जाइउगह।
मनहें सैलि भरवाहवल चलाधिक महगाई १८४
सुरवसंगति सुन लेन महाई जय प्रताप बल बुद्दिलाई
निन नूतन सब वादन जाई।जिनियतिलामलोभयोधकार्ड
अतिवल कुम्भकरणासभोता जेहिकहनानितिभरजगजात
वालकाण्ड ६० .:: AA करिमदपान सोव षटमासा जागत होइतिहपरवासा॥ जौ दिन प्रतिहारकरुसोई विश्व वेगिसेव चौपदहोई।।। समरधीरनहिंजाइवरखाना नहि समअधिकन कोउबलवानी चारिदनादजेउ सुत ताम्॥ भटमहं प्रथम लीकजगजामा जेहिम होइरणसम्मुखकोई सुरपुरनिनहि परावन होई। दोहा कुमुखअलकन कुलिशरद धूम्रकेतु अतिकाय एकएक जगजीति सक ऐसे सुभट निकाय ।। १८४ कामरूपजानहि सब माया सिपने जिनकधमनदाया दशमुखवैठ सभाइकषारा॥ देखि अमिनापनपरिवारा सुन समूहजनपरिजन नाती जनैको पारनिशाचरजाती। सेन विलौकिसहजअभिमानी बोलावंचनजोधमदसानी॥ सुनहसकलजनीचरयूपा हमरेवैरी विवुधवस्था॥ सन्मुख नहिकरहिलराई दिखि सवल रिपुजाहिं पराई तिनकरमरगा एकविधि होई कहीं बुझाइ सुनह अवसोई।। द्विज भोजन मष होमसराधा सवकहजाई करह तुम आधा॥ दोहा क्षुधालीगावलहीन सुरसहजहि मिलादा माइ तबमारिहौं किंडिहाभलीभांति अपनाई॥१८॥ मचनादकह पुनिहकरावााादीन्ह सीखवलवरबढ़ावा।। जेसुरसमर धीर नलवाना | जिनकेलरिवेकौअभिमाना तिनहिं जीति रणभानसिवाची उठिसुन पितुअनुसासन साधी दहि विधिसबही याज्ञादीन्हा मापन चले गदा कर लीन्हा चलन रशाशन डोलतबनी गर्जतगर्भववत सुर रवनी।। गवरात्रावन सुनेउसकोहा॥ देवननकेउ मेरु गिरि खोहा॥ दिगपालनकैलोकसिधायो सूनेसकल दशाशन आये। निपुनि सिंहनाद कारभारी दिइदेवनन्हि गारिउचारी।।
و بال ونشر - वालकाण्ड रसा मदमत किरजगावापानभट खोजन करहन पाचा यहांसे छपक है नारदमिलेकहेसि मुसकाई॥ देवकहाँ सुनिदेड दिखाई सुनतमनरवनारदर्हिनभावा म्वनहीपतिहि तुरन मनाया। सागरउतार पार सो गयेऊ नारिरन्दनहं देवर भयेत॥ निनसनकहापतिन्हपहजाई - कहेउ किसाव निशाचरनाहू॥ नवी तिनहिंजीति संग्रामा लैजैही तुम कह निजधामा सुनतवचन एकजठररिसानी पाइचागा राहि गगनउठानी। राईदार धारधारझकझोराण जारिसि सिधु मध्यप्रतिको दोहा गयो पतालअचेत हूँ मरेनविप्रसाद ॥१॥ सावधान उदिगर्ज पनि हिये नहरष विवाद ॥ जीतसि नाग नगर सबझारी गयो बहरिवलि लोक सुरारी। बामन रावराण श्रावत जाना किये देवर्षि सनअपमाना खेलनि रहे नगार विभुनाना निजवलतिनहिंदीन्ह भगवान घाइधरानिन पुरलैमाये नगर नारि नर दैखन धाये। चीसवाह दशकन्धर भाई॥ विधियह गदनि कहाँकीलाई सचिन चाथि विनावहिंभारी नाम न कहै सहै वरु मारी। वामनदी बहतसकुचाना निवछड़ाय दिय रूपा निधाना चलातुरंत निशान्तर नाहालाज शक कछ नहि मन मोहा।। दोहा प्रति निर्लज्ज दयारहित हिंसा पर अति श्रीनि। शाम विमुख दशकन्ध शठ ताप चाहति जीति॥ १८५ भरवाज सुनिजाहि सव होइ विधाता बाम् ॥5॥ दगिकोच हाजातलोत कोडीदाम र नहकह फिरत देव द्विजपावे दराज लेडवह वास दिरवावे ।। इहिन्याचरण फिरै दिनराती महामलिनननखलउतपानी AR.... ..
बालकाण्ड
वहरि तुरत पंपापुरावा ! बालिनामकषिपनि जिहिंगवा
अवलोकैसिइक सरवर सोमा निहिं मनमहामुनिन्हकर नामा
नहीं कपीस करै निजध्यान दशकन्धरहिदेखि मुसकाना
नव रावण बोलाकार कोधा वकध्यानीपिसटविनकोष
नाम तो मनियाय धाईदिकपि युद्ध छोडि कदराई।
दोहा मोहिजीते बिनु समरसुन्यथा ध्यान नक्कीस
कटकराइकहरजनिचारदन दीनि सैवीस
वालि कहा हटि करियनगरी दशकन्धर घर जाइविचारी
खल तुम्हार ऐसोइ है भाई।। अजय चारि दिशि में मुनि पाई
बहिविधि वालिवहनममुकाया कवनिहभाति वोधनहिंसावा
नवसकोपउउिभपटिंकपीमा गहिकारख चापि दंशशीसा
बालहि विसरि गई सुधितामू इहिविधि विगत भएवरमास
एकदिवसि रवि श्रेजुलि साजा कारख ते निसरि शासनभाजी
निनल अशंकवादपनि नहाकर जल कलि संहसमजजहनां
दोहा छोमेउजल भुजवीशवल बूजन लगी समाज
सहस बाहअति कोधमन मोहिंसमवानको बाज
इदाखतह रावणा गदा जासुविपुलभुजवलजलवाडा
माया प्रवल महावल भारी लकेश्वर कह परिसि प्रचारी॥
निरविनियनभाचरज विशाला बाधि राख ककुदिनहर्यशाला
मलेन गरम करि रहई। सिउर मारिकय वह सहई।
मकलाइ देखहिं नर नारीम
माहिलात हसे देगारी
नाम न कहैरह सकुचाना
वहविधिपूछहिं पति मुजाना
सत्य करैरभादिक नारी।। दशाहमा दश दीवक चारी।
मनिपास्ति नवजाइछडावा सुनिनल शापायतिहिं पावा
मारराजातु दीखत्रति अनुपम सुन्दरि नारि।।
बालकायर
चन्दन पश्यापन कर पूजन चलि बिपुरारि।
दखिउर्वसी मन सकुचानी तवरावसा वाला सजवानी
कोतुमनारिगवनकह कीन्हा लज्जासतहिउतरने दीन्हा।।
मनमदमत्त विचारनकरेजा धनपतिववश कर घरेजा।
चीन्ह नाहियुनिशंकाबाई घाटिकर्म कीन्हीपाछेनाई।
मन पकिताइ शोचं उरभयेऊ - लंकेश्वर लंका कह गयऊ ।।
विकल उरवसीअलकहिआई नलकूवरमनवात जनाई।।
दोन्हश्राप तिनको अपारा । राबरा वंश होउं क्षयकारा।।
चली भ्रापलेका कहाई॥ दशकन्धरवैठा जिहिं लाई।
आगेश्राड ठाठिभई शापा निररिख दशाननअतिभयकापा
दोहा. शापहि अंगीकार करि मन महं कीन्ह विचार
दराड रषिन्ह से लीन्ह नहि गेषेउलेक भार १८३
दूतचारिपटयेनीषाधमा । निररिव विसरगे मुनिअधिनात
तिनसन तब पूर्हि मुनिहाली कहह कुशल लकैश झाला
कुशल नासु यह सुनह मुनीशा कर तुम मन चाइनदाशीशा
सुनिसोवचनमहाभयपाई करहिं विचारविरत विसंगई
जिहिंदरबार नीति नहिंभाई खिलमण्डली जरी तह आई।
कछ विन दिये नहींगतियाकी घटभरितधिरटियतनपाशी
दूतन्ह सौपि कहा मुनिज्ञानी भूपहिं कहेउ जादू यह वांगी
दोहा घटे उपरत सय होइहह सहित सकल परिवार
देत उरत घट लेगये लंकापति दरबार ।।
रावणा घरलखि परम डलासा तन दुतन मुनि वचत प्रकार
सुनि मुनिशापउपज उरदाह वाला घट्लइ उनर जाह।
यतन समेत धनिधरिरहे जानिन पाव वात पह
लह घटजनक देश में गयो गांडत क्षेत्र मध्य तइ . ।।
६४
बालकाण्ड
بالانژه
जनकजजरचनातहं ठयेऊ। चासीकरहल करवनभयक
प्रगट अवनि नेटवयकुमारी कन्याकहिलीन्हीगारी
नामजीनकी परम युनीता। नारद साई कहा पुनि सीना
कहिसुकथाषिराउसिधाये वहादून लंकापुर आये।
चारितावं हारा लकेशादेवनको वह देन कलेशा।।।
यहां तक छपक.
रविशशिपवन वरुनधनुधार अग्नि काल यम सञ्चाधिकार
किन्नरसिद्ध मनुजसुर नागा हदि सही के पथहि लागा।
ब्रह्म स्टरि जहलगितनुधारी . दशमुखवसर्वती नर नारी।
सायुसु करहिसकलभय मीना नवहिाय नित चरणाविनीना
दोहा भुजबल विश्ववस्थकार खसि कोउनस्वनडा
- मण्डलीक महिरावन राज कर निज मंत्र॥ १६५
देवयक्षगन्धर्वनर किन्नर नागकुमारि।।
जोति वरी निज वाह वल वसुन्दर वर नारि।। १६६
बिजीत सज जो कछु कहेजा सोसवजनुपहिले करिरह
प्रथमहि जिनकहायसुदीन्हा निन कर चरित सुनहजो कीन्हा
देखतभीनुरूप संव.पापी निशिचरनिका देवपरितापी
करहिंउपद्रव असुर निकाया नानास्पधरहिकरिमाया।
जिहि विधि होइधमनिमूला मोसवकरहि वेदप्नति कूला
जेहि प्रदेश नुद्रिज पावहित नगर ग्राम पुरागिलगावहिं,
शुभवाचरन कतह नहिं होई। बिदविषगुरु मानन कोई।
नहिरिभक्तिजनअपदानासपनेह सुनियनवेदपुराना
जपयोगविरागा तपमतमागाभवन सनदशांश
आपुनरउिधाव रहेनपावधरि स्वचालवीशा
अमश्यचारा भासंसारा धर्ममुनियमहिकाना
बालकास्ट
तेहिबढविधिवासैदेशनिकासैजोकहवेदपुराना २८
सोरटा वरगिन जाइयनीति पोर निशाचरजोकरहि ।।
हिंसा पानि पीतितिनके पापहिंकवन मिति
वादेववल चोर जुमाग जलम्पद परचन परनारी
मानहिं मातु पिता नहि देवा।। साधन सोकरदावहि सेवा।।
जिनके यहापराभवानीनजानहानिशिचरसभप्रानी
अतिशय देखि धर्म की हानी . पग्म समीन पर अकुलानी
गिरिसरिसिन्धभार नहिंभोही जससोहि गरुचएकपरद्रोही
मकलधर्म देवहि विपरीनाग कहिन सके रावणाभयभीता
धेनुरूपधरिहदयविचारी वाईजहाजहाँसुरमुनि कारी
संताप सनायसि
रोकाइतेकर कान हो
छन्द सुरमुनिगन्धवा मिलिकरिसकायविरचिकेलोका
मंगगोतनुपारीभूमिविचारीपरमविकलभयणका
ब्रह्मासब जानाम अनुमाना मेरिकछुनवसाई
जाकरित दासी सोअविनामी हमरो तोरसहाई २८
सोरटा परनिधरह मनधारकहविरंचिहरिपद सुमिरि
जानत जनकी पीर प्रभजाहिदारुन विपति।
वैटे सुरसरकर्हि विचाराकहपाइयप्रभुकरियप्रकार
पुरवैकुंठ जान केह कोई कोइकह पयनिधि महवसुनोई
जाके हृदय भतिजम पीती। प्रभुनेहि प्रगट सदावहरीती॥
निहिसमाजगिरजा भैरहेऊ॥ अवसर पोइवचन असकहरू
हरियापक सर्वत्रसमाना॥ मने प्रगठहोहिं मैं जानो।
देशकाल दिशिविदिशिह माह कहहुमोकहाँजहां प्रभुनाही
अगजयमय सवरहिन विरागी पवन ने पाठ होहिंजिमियागी
मा बस्ने सबके मन माना साधकरिब्रह्म वेरवाना
दोहा मुनि दिरंचि मन हर्ष तनु पुलक नैवन वह नौर
पालकाण्ड
44
रंजी
-
-
श्वस्तुति कर अजजोरि कर सावधान मंतिधीर॥ १
जयजयजयसुरनायक जन सुखदायक प्रशातपालभगवती
गोद्विजहितकारीजयंत्रमुरारी सिन्धुसता प्रियकता
पालन सुरघरनीअन करनी मर्म न जाने कोई
जासहजरूपाला दीनदयालाकरीअनुग्रह सोई २०
जयजय अविनाशी सवघट वासीव्यापक परमानन्दा
अभिगति गोनीना चरित पुनीता माया रहिन सुकुन्दा
जेहि लगि विरागी अनिअनुरागी विगत मोह मुनिन्दा
निशिवासरध्यावहिं हरिगुणा गावहिं जपनिसचिन्दान
जेहिस्टरि उपाई विविधिवनाईसंगसहयन दूजा
सोकरह अयारी चिन्न हमारी जानिय भक्तिन पूजा
जाभवभय भजनजनमन रंजन गजन विपतिवस्या
भनवच क्रमवानीछाहिसयानी सरासकलसरयूथा २२
शारद मुनि शेषाऋषियअशेषाजाकह कोर तहिंजाना
जेहिदीन पियारे वेद पुकारे दुयो सी श्री भगवाना
भववारिध मंदर सब विधिसुन्दर गुसा मंदिर मुखपूजा-
मुनि सिद्धि सकलसुर परमभयातुर नसतनाथ पदकंजार
दोहा जान समय सुरभूमि मुनि वचन समेनसनेह
बागन सिरा गंभीरभई हरनि शोक सन्देह ॥ * ॥ १९
उत्पङ नुनि सिद्धि सुरेसा तुमहि लागधारही नरमेश
मन सहित मनुन अवतारा : लेही दिनकर वंश उदारा।।
नयप यादेत महा तपकीर तिनकह मैं पूरब वर दीना।
दशरथ कौशिल्या रूपा कौसल पुरी प्रगट नर रूपा
तेलकटह अवतरिहीं जाडी रघुकुलतिलक सोचारिउभाई
पारदरचने सत्य संवरिहौं । परम शक्ति समेत अवतरिहीं
पालका हरिहीं सकलभूमिगतमा निर्मपहो देवससुदाई। # गगन ब्रह्मवानी सुनि काना तुरतफिरै सुरहृदय जुना। नब ब्रह्माचरिगाहसमुझावा अभयभभास जिया दोहा निजलोकहि विरंचिगदेवन्ह इह सिरबाई।। बानर तनु धनि धरनि मह हरिपदसेवउ नाई. की गयेदेवसवनिजधामा भूमिसहिन पायेउ विधामा जो कछु प्रायम् ब्रह्मै दीन्ह हरणे देव विलंबन कीना वनचर देह धरी क्षिनि माहीं अनुलित वल पूनापतिनपाई यरितरु नखायुधसबीरा । हरिमाराचिनपहिस्सा धीराम गिरि कानन जहतह भरिपूरी रिहनिज निजथनीय रूजिरुरी। यह सब रुचिर चरित मैं भाषा अचजो सुनहजोशीहि गया अवधपुरी रघुकुलम मणिगऊ बेददिदिततेहि इसरा जाऊ धर्मपुरषासानिधि नानी हदयभक्ति गीत सारंग पाटी दोहा सोशल्यादि गारिपिय सनेशाचरन पुनीत ॥ . पनि अनुकूल पेल हद हरिपंद कमल विलीन ३०० रिकवार भूयाने मन माहीमालानि भद्रालानि आहे ना माहीं॥ गुरुदह गये तुरत महिपाली चरगा लागि कारिधिनयविद्याला निजदुखसुखपगुरुहिसुनायय कहिवसिसहविश्चिमसुकाय घरह धोरहोइहि सुनचारी त्रिभुवन विदिन भक्त भयहारी।। रंगी षिहि वासह बुलावा पुत्रलागि शुभया कराना भक्ति सहित भुनियाहिटी प्रगटे अगिनि चल कर लीन्हे।। वाले अनल प्रेमयुरनानी। अनि अमन नहिं यो नकानी । जोसिएका हृदय विवागमकल काजमानिधि तुम् यह हवि बाटि देउन्टर जाई यथायाना जेहि भागबनाई। दोहा नक्श्चदृश्य पादक भय सकल समहि समुझाई- ..
.
पालकाएड
44
परमानन्दं मगनन्दम हवन हृदय समाय ॥६॥ २९
नबर्हि राउ प्रिय नारि बुलाई।।- कौशिल्यादि ती चलिरमा
प्रभाग कौशल्यहिं दीन्हा॥ उभय भागनाथ कर लान्हा।।
केकयि कहरपल सो दयऊरहेउ सोउभयभाग प्रतिभपक
कोशिला केकयी हाथ धरि॥ दोन्ह सुमित्रहि मनायसनकारि
इहिविधिगर्भसहित सब नारी भयउ हृदय हर्पित सुरह भारी
जादिन ने हरिग हिंआये॥ सकललोक सुरव संपत्ति छाये।
मंदिर महं सेव राजहिं रानी शोभा शील नेज की खानी॥
सुखयुनि कडक काल चलिगयेऊ जेहि प्रभु प्रगट सोसवरभया
दोहा योगलग्न ग्रह वारनिथि सकलमयअनुकूल।
चरअरुअचर हर्षयत रामजन्म सुरवमूल॥ २२
नवमी निधि मधुमास युनीना शुक्ल पक्षनभिजन हरिपीना
मध्य दिवसप्रति शीतनधामा पावन काल लोक विनामा
शीतल मन्दसुरभि वह वासी हर्षित सुरसंतन मन चाऊ।।
चन कुसुमित गिरिगामनियार नवहिंसकल सरिता मत धार।
सोअक्सर विरचि जब जाना चलेसकल मुर साजि विमाना
गगन विमल संकलसर यथा गावहिंगणगंधर्व दरूया ॥
वर्षीह सुमन सुन्नजलिसाजी गहगह गगनईभी बाजी
श्रस्तुति करहि नाग मुनि देवा रहविधि लावहिनिज गोवा
दोहा सूर संमूह विनती करी पहुचे विज निजधान
जगनिवास प्रगटेअखित लोक विश्राम ॥ २०३
छन्द भयेप्रगट रूपाला दीनदयाला कौशिल्याहितकारी
हर्षितमहनारी मुनि मन हारीबहुत रूप निहारी।
लोचनअमिरामा ननु घनश्यामा निजप्रायुधभुजचारी
भूषण वनमालानयन विशालाशोभाबिन्धुरखरी २४
IAN
بالدانه
बालकाण्ड
श
कह ढह करजोरी वस्तुनि नोरी केहि विधिकरीश्वनंता
सायागुणराजाना नीतश्रमाना वेद पुरान भनंतो।
करुणासुखसागा सब गुण आगरजेहि गावहिनिसंता :
सोमस हितलागी जनअनुरागी पाट भयेशी कंता २५
ब्रह्मांड निकाया निर्मत माया रोमपति वेदकहै
समउर सोइ लासी यह उपहासी सुनतधीरमतिथिरनरहै
उपजाजबजाना प्रभु मुसकानाचरित वह विधिकीन्हचहै
कहि कथा सुनाई मातु बुझाईजेिहि प्रकार सुतसलहै।
मातो पनि वोली सोमनिडोली नजह नात यहरूपा
कीजै शिशुलीलाअतिप्रियशीला यहसुरवयेरमअनूपा
सुनिवचन सुजानारोदन डाना हुइवालक सुरभूला
यह चरितजेगावहिं हरिपद पावहिनेन परहिसक्तमा २०
दोहा विषधेनु सुर सून्त हित लीन्ह मर्नु अवतार
निज इप्सा निर्मत तनु माया गुरा बोचार।। २०४
सुनिशिशुरुदन परमपियवानी संभ्रम चलिभाई सब राही।।।।
हर्षितजहंतहाई दासी॥ आनन्द मगन सकलपुरवासी
दसरथ पुत्र जन्म सुनि काना
मानहब्रह्मानंद समाना।।
परम प्रेम मन पुलक शरीरा॥ राहत उठनकात मतिशीरा
जाकर नाम सुनत ध्रुभ होई मोरेयह पायो प्रभु मोई।।
परमानन्द पूरिमन राजा कहावुलाय जाबाजा॥
गुरु वसिर कह भयउहंकारा . आये जिन्ह सहित पदासा
जमुनुपम वालक देखिन जाई रूपराशि गुरा कहिन सिराई
दोहा नवनादी मुख नायकार जातक सब कीन्ह
हाटक धे-वसन मणि न्रपतिकह दीन्ह । ३०५
लन यंताके तोरनपुरहानाय कहिन जाइजेहि भाति वनादाम
والی فائر .. - -- बालकाण्ड १०० सुसन विधाकाश ने होई। ब्रह्मानन्द मरान सब कोई॥ बन्द बन्द मिनि चली लुगाई सहज सिंगार किये उठिधाई। कनक कलशमंगल भरिथारा - गावन पैठति भूय सुचागगी कावारनी गिनावर करहीं। - वारवार शिशु चरगान परही भारत सूत बन्दि गगा नायकः पावन गुगा गावहि रघुनायक सर्वस दान दीन्ह संव काई। जेहिं पावा रारवा नहिं नाह। सुगम बन्दम कुंजुल नीचा मची सकल वीयिनि विश्वानी हो० ग्रह २ बाज बघार मुम प्रगट भये सुरखकन्द २०६ हर्ष वन सब जईलह नगर नारि नरयन्द।। केकय सुना सुमिशरिक सुन्दरसुत जन्मत नह सोजा! वह सुख सम्पति समय सपाजी कहिनसके सारद अहिराजा। अवधपुरी सोहे इहिभाती प्रभुहि मिलनवाईजतु राती दिविभानुजन मनसकुचानी नपि वनी सन्ध्या अनुमानी।। भूगरधूप जनुबह धियारी - उडै.अवीरमन असतारी॥ मंदिर मीणा समूह जनु नारा न्टय उदह कलश सो इन्दुउदारा। भवन भेद नितिम्रष्टुवानी जनु खग मुखरसमय सुखसारे कौतुक देखि पतंग भुलाना एकमास ताहि जानन जाना। होसक मास का दिवस भा नरम न जाने को ।। रथ समेत रवि थाकेऊनिशाकवनविधिहोइ यह रहस्य काह नहि जाना दिन माग चले करत गुणगाना शिखि महोत्सव सेर मुनि नागा चले भवन वरात निज माग औरौ सक कही निजबोरी। सनुगिरजा इतिहट मति तोरी काक भुपूण्ड संग हम रोज मनजरूप जाननहि को परमानंद प्रेम मुख फूले। वचिनफिरहिमगर्न मन भूले। नेहिसासरजोजेहिविधिम्यावा दोन्ह भूपजोजेहि मनभाव
विश्वसरमा पोषाकरजा
गजतुरंगहेमगो हीरा ॥ दीन्हेस्पनाना विधितीला
दोष मनसंतोबसवन के जहतहदेहिअशीशय का
सकल तनय चिरजीवह तुलसिदासकें इस
कछुक दिवस बीते रहिभाती, जाननजानहि दिनचराही
नाम को कर अवसरजानी पबोलिपटये मुनि ज्ञानी॥
कारे पूजाभूपतिअस भाषा परियनाम जोमुनि शुनियस्य
इनके नाम अनेकनूपा ॥ मैं टपकहस्वमतिमनुरुमा
सामानंदसिंधु सुरखरीसी। सीकर त्रैलोक्र सुपासी।
सोसुरवधाम रॉमन्सस नामा अखिललोक दायक विनासा
जाके सुमिरराते रिए नाशा नामशत्रुहन वेद प्रकाशा॥
लक्ष्म धान रामप्रिय सकलजगत आधार -२०ष्टी
गुरुवशिय हिरावेउ लक्ष्मणा नाम उदार
धोनाम गुरु हृदय विचारी विदतत्व न्दप तव सुत चाग ।।
सुनिजनधन सर्वसशिवपाना वालकेलिरसहि सुखमाना
वारेहि तेनिज हित पतिजानी, लक्ष्मण रामचरमा पनि मानी
भरतशत्रुहन दोनों भाई॥॥ प्रभुसेवक जसप्रीतिबदाई
श्याम गौर सुन्दादोऊजोरी. निरवहि छविजननीटंगलाई
चारिशील रूप गुगाधामा तदपि अधिक सुखसागररामा
हृदय अनुग्रह इन्दुप्रकाश सूचतकिरणा.मनोहर हासा
वहंउछंग कई वरपालन मान दुलारहिकहिनियलालन
दो व्यापकब्रह्म निरंजन निर्मुग विगतबिनोद॥ २१०
सोशूज प्रेममक्विस कौशल्या की गोद।।
काम काटिविश्याम शरीरा नीलकंजवारिद्र गम्भीरा॥
अरुण चरणा पंकन मनजोती कमलदलनवैठे जनु मोती
5
بالا نرم۱۰
वालकायन
निष कलिराध्वजअंकुश सोहै। नूपुर धुनि सुनि मुनिमनमोह
कटि किंकिणी उदव बयरेखा नामि गंभीरजानजेहि देखा
भुज विशाल भूषण युत पूरी हिय हरि नख सोमातिसरी
उर मनिहार पदिक की शोमा विश्वचा देखत मन लामा
कनु कर प्रति चिबुक सुहाई। आनन अमित सदन छविछाई
इश्वसन अधरअरुनारे नासा तिलकको वरनै पारे।
सुन्दर प्रेरणा सुचारु कपोला । अति प्रिय मधुरमो तोतारेवोला
नौल कमल दौउ नयन विशाता | विकटकुटिलटकवर भाला
पिक्कन कच कुचित गभुश्वारे बह प्रकाररचिमान संपारे।
पीन किंगुलिया तन पहिराये जानुपानि विचरन महि भाये
रूप सकहि नहिं कहि श्रुतिशेषा सोजानैसपनेह जिन्ह देषा।
दोहा सुरव सन्दोह मोहपर ज्ञान गिरा गोतीत।।
दम्पति परम प्रेम वस कर शिशुचरित पुनीत॥ २११
यह विधि रामजगतपितुमाता कोशल पुरवासिन मुखदाता
जिन रघुनाथ चरणारनि मानी निनकी यह गति प्रगट भवानी
रघुपतिविमुरव यतन करोरी कवन सकै भवबंधन छोरी॥
जीव चवपद वस करि राखें सोमाया.प्रभु सो भव भावे
मकुटि क्लिास नाव नाही असपछाडि भूजियकङकाही
अन वधकाम छोडि चतुराई। भजतहिक्रया को रघुराई।
ऐहि विधि शिशु विनोद प्रभुकीना | सकल नगरवासिन सुखदीना
निउग कवह हलगर्दै ॥ कवपालनेपालि कुला
दोहा प्रेम मरोन कीशिल्या निशिदिनजातनजान
सत सनेह रस माता वाल चरित्र करिगान
शकदार जननीअन्हवाये।। कारसिंगारपलना पौगये
पूजा हेतु कीन्ह पकवाना।
निजकुलइए देखभगवाना॥
बालकाण्ड
१७३
कारे पूजा नैविद्य चदावा॥ अपगईजहपाक बनाया।
वहरि मात कहवाचलिलाई भोजन करत दोरख रघुराई।
गईजननी शिशु पहभयभीना देखा वाल तहांनि सूतः ।।
वहार झाइ देखा सुन सोई हृदय कम्य मन धीरन होई
इहाउहां दइ वालक देखा मिति असमोर विधान विशेषा
श्रीरामचंद्रजी अपनी माता कौशिल्या को विराटस्वरूप में सम्पूरगजिन
एडको दिखलाना और कौशिल्या कामोहनिवन करना।
कौशल्यानी
वैराटरूप
श्रीराम
पEAIAHMANORAM
N
.
- बालवा در امر مر - खि राम जननी अकलानी। भु हमिदीन्हमपुर मुगुकानी। दोहा दिवा मानहि निजबद्त रूप परवड ।। रोम रोम प्रति राजहिं कोटि कोटि ब्रॉड।।।। २१३ अगणित रविशशिशिवचतुरानन वह गिरिमरिमसिंधुमहि कारन कालकर्म गुण दोषसुभाऊ सो देखा जो सुना न काऊ॥ ४॥ देखी मायास विधिगादी ! अति सभीन जोरे कर वादी । देखाजीव नाव जाहीर दिखीभक्ति जो छोरै नाहीं।। तनु पुलकित मुखवचनश्शाया नयन मंदिचरान सिर नाया। विस्मय वैतु देखि महनारी। मये बहरि शिशु रूप वरारी।। प्रस्तुति करिनजाय भयमाना, जगत पिता मैं मुंत करि जाना। हरिजननिहि बहुविधिसमुगाई यह जनि कनहंकहसिस्नु आई दोहा वारवार कौशिल्या विनय कर करजोरि ।। खुब जनित्योपै केवहं प्रभ लोहिनाया तोरि॥ २१४ चालचरितहरिबहुविधिकीनी यतिआनन्द दामन कह दीन्हा कछुक काल वीते सब भाई बडे भये परिजन सुरवदाद्री चूड़ी करन कीन्ह गुरु आई। विप्र दक्षिणा पुनि वह पाई। परम मनोहर चरित अषारा करत फिरत पारिजमकुमारा।। मनशमनचन भगोचरजोई दयारय अजिरविर प्रभुसोई।। भोजन करत बुलावत राजा नहिआवहि नजिवालसनाजो कौशिल्या जब वोलन जाई। दुमकि तुमकि प्रभुचलीहथाई निगम नेति शिषअंतन यावा नाहियरे जननी हटिधाला। पुनरयूरभरे मन भाये। भूपति विहसि गोद वैवाये ।। बिबा. भोजन करन चपलचित उन अवसर पाई।। भाजि चलेकिनकन वदन दधिचोदनलपटो २२५ बाल वस्तिश्चतिमालमुहाये शारद शेश शंभु श्रुति गाये।।
ye
१०३
२
वालकाण्ड
जिह करसन इनसननहिराती विजावचित किये विधाता।
भये कुमारजवहिं सब भाना। दीन्ह जनेऊ गुरु पितु साना ॥
शुरु ग्रहगये पढ्न रघुराई। अल्पाल विद्यासब पाई।
जाकी सहज खास श्रुति जारी॥ | सो हरि पद यह कौतुकसोरी
विद्याक्लिय निघुन गुगाशीला खेलाह खेल संकलन्टपलीला
करतल वाणधनुष अति सोहा देखत रूप चराचर मोहा।।
जिनवाधिनविहराहिलबमाई. चिकित होहिसवलीगलुगाई
दोहा कोशलपुरवाशी नानारि र अरु बाला ३१६
प्रासह ते सिय लागहीं सब कहंगम कपाल।
पंधु सरवा संग लेहि बुलाई। यलम्हगपानिनखेलहि जाई
पानन स्टग मारहिं जिय जानो दिन प्रति न्टपहि दिवाबहिसानी
जिन्दग राम वाया के सारे नितनु नजि सुरलोक सिधारे
चनुज सरवा संग भोजन करहीं , सातुमिनायाशाअनुसरहीं
जोह विधिसुरनी होहिपुरलोगो . करहि रूपानिधिसोइयाना
वेद पुरान सुनहि मन लाई अाकहहिबनुजहिंसमका
प्रानकालडाट करघुनापामातुपिनागुरु नावहि साया
अापसमलिकराह पुरकाजादिचितिहरहिसनराजा
दोहा व्यापक नकल अनीह श्वज निर्मुस नाम तरूप
भक्ति हेतु नाना विधिहि करत चरितचनूप ।। २२७
यह सव चरित्र कहा में गाई अागिलकथा सुनह मनलाई
विश्वामित्र महामुनि ज्ञानी बसहि विपिन चमचाधन वानी
नहंजयजन योन पुनि कहीं अति मरिच सुबाहहिजरहीं
देखतजन निशाचर धावहिप करीहं उपद्रव मुनि देख पावहि
गाधि तनय मन चिंता व्यापी हरिवितु मारिहितनिशिचरपार
तव मुनिवर मन कीन्ह विचारा पिमुअक्तरेउ हरराजहि सारा
बाल काण्ड
IMPU
इहि मिस देखों प्रभुपद जाई। कार विनतीबानी दोकभाई।
तान विरागसकलगमा मुयना सोम मैदेरव भरि नयना
दोहा वविधिकरत मनोरण जान्ता लापाचार ।।
करिमंजनरय सलिल रायेभपदरवार॥॥ २१८
मुनिश्रागसनसनाजवराजा) मिलनसायले विध समाजा
करिदेउवतमनिहसन्मानी निजप्रासन गरिसानी
चरण पवार कीन्हे अनि पूजाण मोसम माजु पन्य नहि टूजा
विविधभांति भोजनकर वावा मुनिना हृदय हर्षअनि पाता
पूनिचरगान मेले सुनचारी॥ रामदेखि मुनि विनि विसारी
भये मगन देखन मुख शोभा जनु चकोर मूरगाशि लोमा
तव नन हर्ष वचन कहिराऊ मुनिअम रूपाकीन्ह नदिकाऊ
केहि कारगारामन तुम्हारा कहह सो करनन लादेन वारा।
असुरसमूह सतावहि मोही याचन आयेउं रेप तोही।
नज समते देह रघुनाया। निशिवावध होर सत्ताश
दोहा देहभूप मनहर्षि सुन तजह मोहजाना।
धर्मसंयशरपतमकडनकल्याति कल्पाना। २१६
सुनिराजा अनिअप्रियवानी हृदय कंप भावनि कुभिलाती
चोये पन मामे सुन भारी॥विषयचन नहि कहे विचारी
मांगह भूमिधेनु धन कोषा सर्वस दे पाजे सह रोषा।
देह पारा ने प्रिय कछु नाही। सोउ मुनि देव निमिष रकमाही
सबै सुत मोहि पियप्राणाकीनारामदेत नहि नै गोसाई।
कहं निशिवरप्रति घोर कठोरा कहंसुन्दर सुंन परमकिशोरा
सुनिस्टप गिरा प्रेम रस सानी हृदय हर्ष माना मुनि जानी
निवासिए बह विधि समुजावा टपसदेह नाशकह पावा!
प्रति आदर दोउ ननय बुलाये हदय लाय वह मोतिसिखायो
बालकाण्ड
विश्वामित्रकीयज्ञरक्षा करने के निमित श्री रामचंद्र करके तार
राक्षसीवध करना
माहुका
SA
लभता
بالی انز۱۰۸ १०० बालकाण्ड ram सजागानाथ सुन लीजा। तुम सुनि पिता शानभाहको दोहा सौपे भूपनि राहि सुबह विध देशोशं जननी भटन गये पलं चलेलाइ पद शीश२२० सोहा पुरुष ति दरवीर हर्षि चले सुनिभय हरया।। कृपासिंधु अनि धीर अखिलदिएर काम करता अमात्यल उधाण्ड विशाला मोलजल्द तनश्याम नमाला नपद मीनकसेवर भापा॥ चिरचाप शायक दह हाया। बामा और सुन्दर दे आई। विश्वामित्र महानिधि पाई। अनुब्रह्मण्य देव में जानोग सोहि हिन पिना वजेर भगवाना चलेजात सुनिदी-दिवाई सुनि नाइका क्रोध करिधाड़ी। एकाहबासा मारा हरिलीवहा दीन्ह जानि तेहि निज पद्दीन्ह नबूझवि निज हायहि जियचीहा विद्यानिधिकह विद्या दीन्हा जाते लागन धा पियासा अतुलित बलतन तेज़ प्रकाशा । दोहा बायुधसकल समर्पिकारेर निजधानमनानि कंद मूल फूल भोजून दिये भूत हित जानि ॥ २२९ घातकाल मुनिसन रघुराई निमय यज्ञ करह तुम जाही होम करन लागे मुनिकारी मुनि मारीच निशाचर कोही लैसहायं धावा सुनि द्रोही॥ विलुफरवागा राम नहि मारापात योजन गा सागर पारा सावक सर सुबाह पुनिमारा अनुज निशाचर कटक सधार।। भास्त्रिनुर द्विज निभयकारी अस्तुति करहिदेव मुनिझारी।। नहं अनु कछुक दिवसरघुराया रहेकीन्हविपन परदाया। भक्ति हेच वह कथा पुराना: कहा विनयपि प्रभुजाना ।। सब मुनि सादाकहावूफ़ाई चरिल एक रिवय प्रभुजाड़ी चतुक यत सनिश्कलनमा रबि चले मुनि नरके सापार॥ आधु रहे मख की रखचारी ..
वालकाज
१०
KARN
--
चले रामलक्ष्मणामुनिसंगा - गये जहांजापान नया
अनुज सहित प्रभु कीन्ह परमामा बहुप्रकारसुवायो तमा
चाही तादम नपरशाविस उपलदहबारायाः ।।
यहा कलान रन वाहनी रुपाकाहरघुनार ।।
छ प्ररमनपद पादन झोंक नसावन प्रगट मानवपुज्न सही।
हेखन रघुनायकजन सुखदायक मन्सुखमाइकर जोरिरहो
अनि सबधीर पुलक शीरा सुख नहि अविवचन कहीं
अनिशयवडभारी वरणातलागी युगल नयननासधारकई
धीरजसनकोन्हाप्रभुकहं चीन्हारघुपति कपानिपाई
अति निर्मल वानीअस्तुतिठानी ज्ञानराम्य जय रघुराई
3नारित्रपावन प्रमुजगपावनरावाघुिजन सुखदाई.
राजिवलोचन भवभय मोचनपहिपाहिशरणाहिबाई॥ २६
मुनि श्राप जो दीन्हाअनि भल कीन्हापरमअनुग्रही माना
देवर भरिलोचन हरिभवमोचन यह लाभ शंकरजाना
विनतो प्रभु मोरी नैं मति मोरी नायनं वर मांगौश्राना
पर कमलपरागारसअनुराया मम मन मधुपकरैपीमा ३०
जेहि पद सुरसरिता परम पुनीतामण्ठभई शिवशोशधरी
सोईपट पंकजजेहि पूजतचज मम सिरघरेउकपालाही
इहिभांति सिधारी सोनम नारीवारवार हरिचरणा परी
जोननि मन भावासो वरपावा ने पत्रिलोकमानन्दमा ३१
दोक अस प्रभुदीनबंधुहरि कारणा रहित कपाल ।।
तुलसी दास सठ नाहि.भज छोडि कपट जंजाल. २२३
मुनि मुरमारे उनपति रघुराई कौशिकस्न पूछा सिरनाई॥
कह मुनि प्रभुनवकुल इसरोजा... नामसगरनिहा लोकविराजो
कहि जुगमामिन सुकुनारी
प्रथम केशिनी-मुननि पियारी
بالا شمر
।
बालकाय
२९,
कह भुनि प्रभु नव कुलइकराजा नाममगर तिई लोक विराजा।
निहिके जुगभामिन सुकुमारी प्रथम केशिनी सुमति पियारी॥
सर्व प्रकार संपनि मुर भाजा - सुन बिहीन मन विस्मय राजा।
एके समय भामिन दोउ माया माये वन तनय हेतु रधुनाथा ।
सघन सफल तरू सुन्दरताला तहांस्टग मुनि नए तेज निशाना
दोहा सहित नारि न्य मुद्रित मन रहे वर्ष शन स्क।
कीन्हतपबलदेखि भटग प्रस्तुति कीन्ह अनेक॥ २२३
कहि निजी सामन्याहा दियलीस्तव मनिवरदीनाराम
सपनीमनमुनिनस भाषा लहलंवग्जोजेहिभिलावा।
सुनिमुन बचन सीस तिननावा दहनाथ जोशनि मन भावा।।
एकहि कहिउ एक सुन होना दूसरि साठसहस गुन लोना
हरपितभयो मभगवरपाईपोनिजोरि चरनेन सि नाई
सहित भामिनीवहिमाये हरष सहित कछुदिवसगंवाये
जानि सुपरि सुंदर मुखदाई
नाम केसियस मजसजाई।
समनि प्रसब एक बार सोई। भयेसुन प्रगट कहे मुनिजोई।
निरपे सून हरविन सव होई । मंगलं चार किये सब कोई
हरख सहित दिये दान गरे। पूजिविप्र गुरु गौरि गयो ।
येत घट संदरविविध मंगार निवस्त पानिनमह नाची
होहा यह विधि भएउ सकल सुतपूजें सब मनकाम
जाइ दिवस निसि हरषवस मनह समापनस्यास २२४
परिजन सब घर परनिनरेश अनि अनंदनन मिटावेदेम्।।
बालकलि कर भय कुमार लीला करे अगम संसारा॥॥
होइजोकाजसकलमनचीते रहिसुखवसतवदन दिनवीते
सरजूनदीजोअहंई। विमलसलिल उत्तरतटवहई
प्रजालोक केवालक नाना नितउठि तहां करें स्नाना
.
RAKAR
बालकाल
अस मंजस तह तरमी यानी निहिचिदाई वोरि निजपानी
भये जा सब परम रखारी॥ बालकवधसुनिसुनहखरारी।
सकल गये जहे वैठि रंगाला वाले बचन नापपदभाला।
नमन्पचहह अजा प्रतिपाला सुन तुम्हार भापकर काला।
दजव देश सब सुनह नरे॥ बिना तजेनहि मिठे कलेभू॥
दोहा नवमुल कान्हेउ पाप वह मारे बालक बन्द ।।
तुम कह.प्राण समान यह सकलजनकह मंर २२५
प्रजाविले झुनि चौरजदीन्हा॥ सुनाई देशते बाहर कोल्ह
तासुतनय जगविदित प्रभाका गुननिधिसमानांनीहनाको
दसत हृदय स्टप केसों कैमे। मुनि मनमीन सलिल रहे जैसे।
गये प्रजासबनिज निजधामा भयेविलोकमन गुण विधामा
बहरिन्टपति मन कीन्ह विचाराबाईभयेउ पन चौथ हमारा ।।
हिन मंत्री गुरु सुनहि बुलाये। हिमगिरि विंध्य मध्य तव आये।
रुचिर वेदिका एक बनाई। दिवत वनइ वानि नहिंजाई।
मखरंभ छोडेउ नव तुरना विगित जिमि देखिय उरगा ।।
दोहा सुरपति सुन भय दारुणाहिमन महि करअनुमान
आन तुरग तव लीन्हेउ मर्म न कोऊ जान॥ २२६
एवेउमानि कपिल मुनिपाही कोऊन जानकाहहिंगम नाही
जुगवतरहेजेसुभट सयाने ले तुरंग रहेकिनहुनजाने।
तिनसबधानिकही आप पाहीं. महाराजहम कहताडाहीं।।
लीन्ह तुरंगकोइजानन कोऊ. कहा करिय सोसायसु होऊ॥
सुनने वचन न्दप विस्मय पाये - सकल सुनन कहं तुरतबुलाये
जौह तुरंगातुम हेरहु जाई॥ सकल चले चरनन सिरनाई।
सुरपति समदेखिय सवीर सकल धेदुईर अतिरंगा धीरा
जिनहिं चलतधरनीचकुलाई बलिपभूजीव भये सवाई॥
بالانه जाये ११२. वालंकापड समान वाटिका उपवन वा सरितकूप वापिका नडागाथा नगर गांव सुनीश थल नाना गिरिकंदर काननन्यस्माना॥ दोहा इहिविधि खोजतुरंग तिनाय भूपतिमाह चरनन मायहिं नाइ कहि खोज करिनाहि २३५ बादहमहि सुन करहिं पाये। चिलरकलपूर्व दिशिवाय बिनके कर जिमि कुलिशसमाना जोजन भरिखोदहिवलवाना दिग्विअनुल बलदेवडराने॥ मरहनाहविरंचि मन लाने मोचन महीपनाल सब आये दिग्गज देखिएकातिर तिनक्षा रद कथा सुनाये।। बरि सकल दहिगादिशिनाये इहिविधियुनिदूसरगंजदेखा - अनि उनंरा गज निमल पिशेषा नाहेब शामलिन कीने।।चलेसुनापश्विमावत दोने नीमर देषिप्रदक्षिणाकीन्ही युनिउत्तरदिशिसोधहिलीन्ही॥ द्विगज स्वेत निरखि सुखपायेण सकल कपिलमुनियह निधाये खोजवमहीपारनहि पावा.शोभा चहदिशिजलधिसुहाना देखिनापतुरंगनव बांधा मुनिवर पास बोल बचन सकोपिकरि भयावहसच कर नास॥ २२८ खोदामहि हम चारित क्रोधा रिडर पहनतोहि सोया कोउ कहि चोर दीव बढ़ होई एहि समछलीवर हि कोई परधनलैपताल पुनिबायोनसकर लुनिबर भेषबनायो । को कहैयह सुनिबर नाही समुझि देखिलक्षणमनमाही कोऊ कहवकतपकीन्ह पाहोदर ले तुरंग हमारा ॥ सुनत्वचन सुनि चितवाजवहीं भयेभस्म सवेछिन मैं नहीं। उमा रवचन जिहिसमुनवोला सुधाहोइविकनिकमोला। पावक जानिधरहि करमानी जरहि काहिनहिंअतिभिमानी जानिगरल संग्रह करही सुनहरामतेकाहे नमाहीं॥ IPM ....
बालकाण्ड
१२.३
कोध करें विन किये विचार भियसकलनेहिने जरिहारा॥
इहान्टपति अतुमान बुलाये। नहिसायेमबतिनहिपठाये।
दोहा दीन्हा पनि असीस तंति हितवारहिवार ।।
वैवि फिरोले तुरंग सुन मेरे प्राण अधार।।। २२८
चले नार्य पद सीस कुमारी विनुमकाहनकुलउजियारा
जहं तहनिररिव सुनिन केधामा - छिरखंबरिकरिदंड प्रगामा
पन्जगनायसनपाइ असीसाचई दिग्गज कह नोपासासा
राजासंगर के हजार पुत्रीको प्रश्वमेधले पोजादनेजाना नोकपिलदेव
के स्थान परपहच कर कपिल मुनि के वापसे हजार काभस्म होना
कपिलदेव
-
+
।
PAL
AROO
.
--- ११४ बालकाण्ड بازار م इहिविधि साधनमगमङ्जाना मिले गरुड़ मुमती करभाना चरने परन नवनाशय येऊ ॥ जोसकलजेहि विधिसोकहेक सुनन ववनसाच मयाभारी॥ लिये खगेश दिवायलवारी॥ समान तह मज्जन कीन्हा॥ क्रम कम संबंहिजलाजलिहीन्ही बहरिगरुड़ वोलेमुनु वाता॥ मनीहिकहींकरिहि एकंवाना सोला करसुत सीईयाइगंगामावहिंअवनिमहा।।। दर्शन अधजाय मन्जनकीन्हे परमसुख ॥५॥ घटसहस्व नरिह रही विधि गंगापाय परम पावन निधि सुनश्चमवचन हृदय मनभाये सहिन गरुड़ मुनिवरहिवाये नवरवगेश मुनिचलनमाया पूर्वकथा सकल मुनिगायउ आयसुदेइ तुरंग मुनि दीन्हा॥ हर्षिहदय निजअश्वहि चीन्हा नगरसमीप गरुड़ पहंचाई। गयेभवन निजतवरघुराई। इहां तुरंग लैन्टपशिरनाई। पटसहव मुनिकयानुकाई। विस्मय हरष विवसन्स्प भएज कीन्हायज्ञदान बहदयऊ।। बहविधि नरपति राज सनिकीन्हा प्रजालोककहअतिसुखदीन्हा दोहा अंसुमान हित राजदै निज मन हरि पद लाग । गयेउ मगरंतप काजवनहदयधिक अनुराग २३० नासुत नाम दलीप नयभयेका मनतप हेतुउत्तरदेिशिगयेऊ उहाँअगम नप कीन्ह पाता भएकालबसगयेकछुकाला कहड़ कवन दलीयप्रभुत्ताई सेसकलन्पतिजेहियाई जुगवतजेहिनित सुतिरहहीं, महिमातासुकविकेहिविधिकहही भागीरथ अस सुनभयो जासू॥ पितुसमनीतअधिकउरतासू तिनहिवोल पदीन्हेउराजू आपचलेउठि तयके काजू॥ मनकह करन पंष अनुमाना। सुरसरित्राव नजड़नंत मानो निज मनु ननुदीने निमि देऊ फिरिजिजुनगरकनामनलेऊ
|| پالا
बालकाण्ड
९१५
सोरठा रहिदिधिकरत बिचारन्टपकीन्हे नयप्रक्ल नय
वीने कछु एक काल देह नजी कोऊ प्रगट नहि ।
जेहिं सुरसरि लगि तजेनन भूणा सोनजि मूद पियह जलकूपा
इही भगीरथ असमन भयेऊ पितुननावेवहदिनचलिगयेज
काकुस्चनामननय एकरहेक
दीन्हाराजनीति वह कहेजा
कहितवपूर्वकथा मुतपाही दीन्द्रप्रसीसचले. नर नाहीं॥
निकसत नगरसगुनभलपाये अनिहिनिविंडबनजई नपनाये
देवभगीरथ बनसुरवपावा सुरसरिहिततपकूहमनलावा
एकचनदोउंमुजाउठाये॥ रबिसन्मुखचितवहिमेनलाये
सहसवरषवीन इहिमानी। जाननजानेदिनबरुरानी।
देखिउग्रनपअजेचलि पाये वोलेबचनन्टपहिमनभाये।
वहहिन्रपति जोले वरदाना बोलेरपकरप्रजेहिं प्रसारमा
जो मांगोसोजानतअहह मोसन मांगन प्रभुकिमि कहर
शिहा तदपिकहे प्रभु देह वर सबसनन कहवृद्धि।
दुसर मांगोजोरिकर गंगाावहि निदि।। २३१
एवमस्त कहिनिविधिमवहीं सुरिसरि देहराखि को कहीं।।
छरजाह पुनितुरतरसानल किरहिनन्य्पति वहरि सुनभूगल
निहिते कहीं एक नोहि पाही अति दयाल शंकर मन माहीं।
सोई शंकर रखि देव सरआज उनहिंजये ना होयहै काजू
असकहि बिधिअंतरहितभये वहरिभगीरथशिव पहं गये।
विविधि वश्य ग्रंगुरप्रधारा। बारबार शिव नामउचारा॥
शिवदयाल प्रगटे नवाई हाथजोरिन्टपदिनय सुनाई।
भैराखवं सुरसरिकह ईशा॥ बहरि रमापनि ध्यान करीशा
दोहा उहाँ देव सरि शिव ववन सुन मन कीन्ह विसर २३२
जाउ रमातन शिव सहिनस्तानन लायौं बार।
A
९१६
पालकांड
॥
अंतरजामी शिवहि उपाई। निज सिर जटा मोअगम बनाई
इहां भगीरथ अस्तुनि कीन्हीं सुनि मुड गिरा छोडविधिदीन्ही
छूटे सोर भयो जग भारी, चकित देवहि दिग्गज चारी
सुरमरिपुनि हरिजा समानी दर्षक तहरही भवानी।।।।
कौतुकं देखि मकल सुरहरणे कहिजयजयनि सुमनवहवरखे
वहार भगीरय मुमरन्हं कीन्हा डगरिजय शिवकुंदकदीना।।
नहिने भई तीन निधारागा एक गई नभ एक पतारा ।।
गई नभ मोई किचनासिनी दिवनचरा नाम मंदाकिनी।।
दोहा । इस गाईपताल में नाम प्रभावति हरनडरव।।
नौसरि भई सोई गंगा सब संतन को करनसुख
सलिल प्रवाहनिरीष नपति उरअतिभयेज्मनंद
जैसे उमडत सिंधु नब पूर्ण कला लव चंदा ।।
आय भगीरथ पुनि सिर नाये वाले सुरसार बचन महाये।
वेगवंत न्रम रथ लै शानू ।। तुरन तरंग सुभ गतिजिमि
निहित्यचन्तिपचलममाग चलिहौ में नवपाछे लागे।
मुनि न्टप दिव्यतुरंगरपाना चले हृदय सुमिरत भगवाना।
चलीअगकरिन्टपहिसुरसरी देवेन्ह मुदित सुमनकर करी ।।
चलत तेज कछुवरनिनजाई
टूटहिगिरितरु शैल सुहाई
कुलाहल विधिवहभांनी
कमठनत्रय गोल सामाती
मज्जन करहिं देवनहं बाई मुनगनिसि दरहें सब छाई।
सोरण नरपन कर मनलाय हर्ष हृदय नहि जात कहि
दरमन ने अधजाय नरै सकल मुन्जिन कहैं।
मज्जनकर हरपाय सुरजादि सनकादिकषि
मानकरतधनाय असमन दलोकहहि
कामकाजमनलाई जितकी महिमा कहिन सिराई
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१७
-
गा
वालकाण्ड
रथपरजान सोहै नृपकैसे निजवंत रविदेखिय जैसे।।
लाधित शैलसुहावन देशा - पाछे सुरसरियागे नरेशा।।
हरिद्वारसमीप नव आये।। नीर्ष देख सुरसरि मन लाये
तीर्थ निरखि मनभयो सुरखमारी. आय प्रयोगपहचिअघहारी॥
नहो मज्जन कीन्हेडखजाई: वहरिदेव सरिकाशी आई।
मोशिवपुरीसहज सूखदाई - वनिनजाइमनोहर नाई।
अवमै तीर्थविविधिविधिजानी गईतहाँ किमिकहीबखानी।
मंगलोगनकह करत सनाया जाइ बली इहि विधिरघुनाथा
भगीरथ करके रयाटर श्री गंगाजीका टत्युलोक मेंयागमन औरहरहार
काशीदिनीयौ होकरमागर में प्रवेश होना
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भागीरए
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ॐ
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११०
बालकाण्ड
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दोही मिलीआइ पुनि उदधि महउदधि हृदयसुखमान
लगेकहन भागीरथहितमसमंधन्यन प्रान॥
कोन्होअसजोकरहिन कोही त महिमावल कसनहिहोई
संगरसुतनय नरेननेकाला। हर्षवंतनवभयो रपाला॥
अलौरही है कुलमहिकोऊ तिनके संग तरेसब सोज।।
तुमसमान न्टपंदरनभयेका जगविख्यात अचलंजसलयेऊ
सकल सुरन तहाँसंग विधाता पसननायकही सबवाना
धन्य भगीरथ जस जवाजयेऊ तुमसमान नपोरन भयेऊ॥
अपनी सत्य प्रतिज्ञा कियेऊ॥ सम्मतवेदजनन सुख दया।
गंगासागर सब कोउ कहही अधउलूक देखत रविडरही।
भांगीरपी नाम अरुकहहींग सुनसुरसिद्ध नागजललही
असविधि कह निजलोकहिआये जहांमगीएथअनि सुरवपाये।
छन्द पायो अमित सुखबहार पूजासुरसरिहिमनलाइ के
तन दीन्हयाशिष मुंदिन गंगारपभवन सुसपार्क
इहिमांतिसुनगंगाकया नवरामरुनिचरनूननये
कहदास तुलसी राम लपगाहिमहामुनिशिषट्ये
दोहा कौशिकाशिषअमिय सम पापहरबरघुराजा
प्रभुशंशय सबइम गईलवा निरषि जिमि बाज
आशिष सुधासमान सुनि हरखे धीरघुनाथ।
प्रभुसुख पाय कहेउपुनिवेगि चलिये मुनिनाथ
रामनाम ने संशय जाई। देहचरेकर यह फलमाड़ी।
इति
गाविसुवन सबकासुनाई। जेहि प्रकारमुरसरिमहिआई।।
नवपक्रपनि समेत अन्हाय विविधदानमहि देवन पाये।
हर्पिचल मुनिवन्द सहाया वैगिविदेह नगर निगराया।
Parija বাঝা १९६ पुरम्यता रामजव देखी। हरेषेशत्तुज समेत विशेषी॥ वापीकूप सरितसर नाना । सलिल सुधासमभार सोपान गुंजन मज मन रस भगा! कूजत कलबहबरण विहंगा बागावरगा विकसेजलजाता त्रिविध समीर सदासखदाता। दोहा सुमन बाटिकावाग वनविपुलविहंगनिवास फूलत फलतमपल्लवित सोहतपुरचूहमास१३४ वनैनवात नरानिकाई, जहांजाइमनतहीलुभाई।। चारु वजार विचित्रवारी मणिमय विधिजनस्वकरसंवारी धनिकाशाकवाधनदसमाना विठेसकलवस्तुलै नाना।।।। चौहट सुंदरगलीसुहाई संतत रहे सुगन्ध सिचाई ।। मंगलमय मंदिर सब करे चित्रतजनुरतिनाथ चितेरी पुरनर नारि सुभताभुचि संहा धर्मशील ज्ञानीगुगावंता।।।। अतिअनूप जहे तनक निवासू विथ कहि विवुध विलोकिविलास होत चकितचित कोटि दिलोकी सकलभुवन शोभाजनु रोकी। दोहा धवल चाममणिपुरपट सुघटित नाना भातिए २२५ सियनिवास सुन्दरसदनशोभा किमि कहिजात सुभगद्वारसबकलिशकपाटा भूपभीरनट मागध भाटा॥1॥ बनी विशाल बाजिगजशालाहयगयरथसंकुलसव काला। सूरसचिबसे नयबहते। नप गृह सरिस सदन सब करे पुरबाहिर सरसरित समीया : उतरेजहतह विपुलमहीपा।। दिखि अनुप एक अंवराई। सबसुपास सबभांति सुहाई।। कौशिक कहेउ मोरमनमाना इहारहियरघुवीर सुजाना ॥॥ भलेंहिनाथ कहिकपानिकता उनरेतहमुनि नन्द समेता। विश्वामित्रमहामनिभाये। समाचार मिथला पति पाये। दोहा संग सचिवभुषिभूरिभरभूसुरवर गुरु ज्ञाति।
१९२० वालकाण्ड 1 111 XI बलमिलन मुनिनायकहि मुदित राउडिमाति १२६ कीन्हे प्रयासधगधार माथा दीन्हशीश मुदित मन नाया। विन्द सब सादरवन्दे। जानिमाग्यवड रामनंदे।। कुशलतकाहिबारहिवारा विश्वामित्र नृपहि,बैठारी नहिअवसर पाएँ दोड भाई गये रहे दैवन फुलवाई।।। श्यासगौर स्टवैश किशोरा . लोवन सुखद विश्वचितचोग उठे सकलजवाघुपनि धाये विश्वामित्र निकट गये। भियं सब सुरवी देखि दउिभाता वा बिलोचनापुलकित गाला। मरतिमधुर मनोहर पैरवी.. भयो विदेश विदेह विरोधी दोहा - प्रेम भरन मन जानि न्टय करि विवेक धीरेधीर बोले मुनिपटु नाय शिरगाह गिरा गेभीर।। २२७ कहहुनाथ सुन्दरदोउवालक . मुनिकुलतिलक किरपकुलप ब्रह्म जो निगमनति कहि गावा - उभयवैषधरि सोइकि आवा ।। सहज विराग रूप मन मोरा - यक्ति होत जिमिचंद चकोरा गति प्रभ चौ.सद भाऊ॥ कहना जनि करहदुराऊ इनहि विलौकतअतिअनुगगा बरबस बल मुखहि मन त्यागा कहमुनि विहंसिकहान्टपनीका वचन तुम्हार न होहि अली का येषिय सबहिं जहाँ लगिधागी मन मुसकाहि राम मुनिवानी। रएकल मगि दशरथ केजाये. मसहित लागि नरेश पठाये। रामलषमाटोउबधबारूपशीलवलंधास। मख राखेउ सब सारिवजग जीत मसुरसंग्राम २५६ मुनितंब चारा देखिकहराऊ कहिनसको निजपुराय प्रमाऊ सुन्दा भ्यामनार दीउमाना। आनन्द हके आनद दाता इनकी प्रतिपस्या पावनि। कहिनजाइमनभावमुहामि मुनलाथ कह मुादैन विदेह ब्रह्मजीव इव महज ननद ।। +
बालकाण्ड
पुनिश्रुनि प्रमूहिचितवनरनाह - पुलकमान उरअधिक उछाहू।
भुनिहिं प्रशमि नाइ पदशीशा क्लेलिवाइ नगर अवनीशा
सुन्दर सदन सुखद मन काला तहाँवास लै दीन्ह भुशाला।।
कारे पूजामबिधि सेवकाई गयेउ राउपरहविदा कराई।
दोहा ऋषय संगाधुवंशमतिकारभोजन विश्वाम।।
वैठे प्रभुभानासहित दिवसरहा भार याम: २२
लषगाहृदयलालमाविशेषी जाइजनक पुरश्नाइय देखी।
प्रभुमय बहरि सुनिहिंसकुचाही प्रकटनकहहिं मनहिमुसकाही
मिश्रनुज मनकी गतिजानी- भक्तिवछलताहियाहलसानी।।
परम विनीत संकुचिं मुमुकाही वाले गुरुत्रनुसासन पाई।
नाथ लषया पुरदेवन चहह
प्रभु.सकोच डर प्रगटून कहहीं
जो राउर अनुसासन पाऊ। नगर देखाइ तुरन लेबाजी
सुनि मुनीशकहननसप्रीती कसनशन रावह तुम नीती।
धर्म मेनु पालक तुम नाता॥ प्रेम विवा सेक्क सुखदाता।
दोहा जाइ देखि आवह नगर मुख निधान वह भाइ
करह सुफल सबके नयन सुन्दर बदन दिखाई
मुनिपद कमलबन्दि दोउभ्राता चले लोक लोचन सुवेदांता ।।।
बालकरन्द देखि अनिशामा लगेसनलाचन मन लामा
पीन वमनपरि कर कटिभाषचाह चाय शार मोहत हाया।
ननुअनुहरत मुचंदनवारी श्यामल गौर सनोहर जोरी।।
केहरिकंदरवाइविशाला उरति रुचि नागमणिमाला
भ्रमरा प्रवासरसोरहलोचना वरनमयेक तापत्रय मोचना
कानन कनकलविदेहों जिनमत विनाहि चारजनुलेही।
चितान चार कटिवरवाकी दिलकोख शोभाजन चाको
दोहा काचा चीननी शुभगशिर मेचकचक्ति के
१२२
बालकाहर
بالا نرم
नव शिव सुन्दर उन दोउ शोभा सकल सुदेशः २३१
देवन नगी भूप सुनाये। समाचार पुरवासिन माये
प्राय धाम काल-सबत्यागे॥ मनहरक निधि लूटनलांग
निरीरिख मनज मुन्दरदोउभाई होहि सुरवीलोचन फल पारी।
धुवनी भवन करिवन लागी निरवाहे समस्यअनुरागी।
कहाहि परल्या वचनमपासी सखि दनकोटि कामविजीती
सुरनर असुरनाग मुनिमाही शोभाअस कहूँ सुनियत नाही
विल्दाहि भुजविधि सुख चारी विकटभेयं मुख पञ्च पुगरी।।
परदेवश्चम को जगाही. दहि सिखिछविंपट तीये जाही
हा व्यकिशोर मुखमा सदन श्याम गौर मुरवधाम
अंगअंग पर वारिये कोटि कोटिं शतकास॥ २३२
कामवीनसकी तनुधारी जान मोह यह रूप निहारी।
कोरसप्रेम बोली मुड़वानी जोमैसुनासो सुनह सयानी॥
यि दोउन्रपदधारण के टोटा।
वालमरालनके कलजोटा॥
मुनिकौशिक मखके रखवारे जिनरसाअजयनिशाचर मारे
श्याम गात कलकंजविलोचन जो मारीच सुभुन मद मोचन
कौशिल्या सुनसो सुखखानी नाम रामधन शायक पानी ।।
गौर किशोर भेषधरकार करताप रामकेमाहे॥॥
लछिमणा नाम राम लघुभाता सुनुसरिख तासु सुमित्रा माता॥
दोहा, विरकाज करिवन्धुदोउ मग मुनि बधूउधारित
अयि देखनचाप मखमुनि हरषी सर्व नारि।।
दिखि राम विकीउ इककहई योग्य जानकी यह वर अहई॥
जोसति इन हिदेखि नर नाई प्रयापरि हरि हठि करे विवाह
कोउकवान भूपति पहिचान मुनि समेत सादरसन मान।
सरिख पानु प्रणा राउजनजड़ी - विधिवस हरिप्रतिवकहि भजदी
14
4. in
वालकाण्ड
कोउ कहजो मल बहै विधाता सबैकह सुनियउचितफलदा
तो जानकिहिमिलिहवररोह नाहिनझाली यह संदेह।।
जौविधिवमनसवन संयोगोतीरुनकत्यहोहिं सव
संविहमो अनिवारतिनाते कबहुँकयेाहिं दहि नाते।।
दोहा. नाहित हम कह सुनह सखिइन्हकर दशनद्वारे
यह संघट तब होइजन पुण्य पुराकत भूरि-२३४
वाली अपर कहेउसखि नीका यहविवाहअनिहितमव हीका
काउकहेंशंकर चापकटोरा येश्यामल गान किशोरा ।।
सबस मजसअहे सयानी। यह सुनिअपर कहै मुटु वानी
सखि इनकह कोउरअसकहही :: ब प्रभाव देखत लघुग्रहही।
परसि जानु पद पकंज धूरी तरी अहिल्या सात अघभूरो।
सो किरहेविन शिवधनुनारें। यह प्रतीति परि हरियन भारे।।
जैहि विरंचरचि सीय सवारी तेश्यामल वर वर दिचारी।
नासुनचन मनिसंच हरवानी रसोइ होउ कहहिम्दवानी
दोहा हिय हरहि वरषहि सुमन सुमुखिसुलोचनिन्द
जाहिजहाँजह बन्धु दोउ तह तह परमानन्द।। २३५
पुर परवदिशिग दोउ भाईजहाँधनुष मत भूमि बनाई
प्रति बिस्तार चार गचं दारी विमलबेदिका रुचिरसदारी।
वहंदिशिकचन मंचविशाला.. रोजहाँविटहि महिवाला।
निहिपाछे समीप रईपासा॥
अपर मंच मण्डली दिलामा
कछुक ऊंच सब भांति सुहाई वैठहि नगर लोग सद नाई।
तिनके निकट विशालमुहाये ववल थामबहवरगावनाये ।।
जह बैठी देव.पुर नारी॥ यथा जोगनिजकुल अनुहारी
पुरवालका कहिकदिवंचना मादरप्रभुहिदिवावहिं ग्लना।
दोहाः सवशिशुह मिसु प्रेमवस परश मनोहर गान।।
१२४ वालकार Y إلى اندر - 4 तनु पुलकाहअनि हर्ष हियदेखि २ दोउभात २३६ शिश सबसम सबसजाने। पीतेसतत निकट बरखाने निजनिज रुचिसबलेहिवुलाई साहितमनेह जाहिं दोउआई रामदियावहिंअनुजहिरवना कहि म्टदु मधुर भनोहरवचना लवन मेष महभुवन निकाया रचैजास्अनुशामन माया भकि हेत सोइ दीन दयाला। चितवत चकितधनुष मखमाला कौतुके देखिचले गुरुयाही जानि विलम्ब वास मनसाही जासुबोस डर कहेंडर होई मजनप्रभाव देखावंत साई॥ कहिबातेस्डमधुरमुहाई। किये विदाबालक परिश्राई दोहा समय सम विनाति-यात संकुचि मेहित दोउभाई गुरु पदपंकजनाइ शिर वठे मॉयस पाइ॥ ॥ २२७ निशि प्रवेश मुनि गायमुदीन्हा सवहीं सन्यावन्दन कीन्हा॥ कहुत लषा इतिहास पुरानी रुचिरजनी युगयामसिरानी मुनिंदर शयन कीन्ह तबजाई लगेचरंगाचापन दोउ भाई॥ जिनके चरण सरोरुह लागी करतलिविधजपयोग विरागो निदोउ वन्य प्रेम जन जीने गुरुपद कमलपलोटन प्रीते। पारंवार मुबिधाज्ञा दीन्हा॥ रघुपरजाय शयनन्द कीन्हा चायत चरगी लषशा उरलाये समय सप्रेम परम सुखपाये।। पुनि र म कह सावह नाना पौटे घरिडर पद्जल जाना॥ दोहा उठे लषा निशि वियत सुनि अरुन शिरवाधानकान गुरुते पहिले जगतप्रति जागे राम सुजान।। २३८ सकल सौच कार जाद नहाये। नियनिवाह गुरुहि सिरनाप समय जानि गुरुआपसु पाई। लेनपसून्ह चले दोउ भाई भूपवार पर देखेळ जाई। जहं वसंतु ऋटतुरहै सभाई लागे बिरय मनोहर नाना यावरणावरलिविताना 1 r
Pore
वालकाएर
नव यल्लबदल सुमन सुहाये निज संपति सुरनहिलजाये
चालककोकिल कर चकारा उजत बिहानचत कलमोर
मध्यवाग सर साह सुहाना : मशितो यान विचित्रबनाना
अमलसलिल सरसिजवंडरंगी जल खगकूज्जन मुज्जतम्लंग
दाही बाग तबाग विलोकिपमुहर्षे बन्धुसमेत।
परसराय याराम यह जो रामहि सुखदेव।
बडादेशि विधालमालोचन लगे लेन दल फूलमुदितमन
नोहे अवसर सीतालाई गाड़ी: मिरजा पूजनजननि पठाई।
संगसवीसन सुभगसंथाली गावहिंगीत मनोहर बानी ।
सह सनीप गिरजान्टहसोही वरगिनिजायदेवि मन मोहा
मजन क्षरिसर सरनी लमेल गई मुदितमलबौदिभिकता
शीराम लक्ष्मणाजीकापुथ वाटिका में जाना चीरजानवी
जीका गिरजाजनांबचाना
--
بالا و
.....
१२६
वालकाण्ड
पूजा कीन्ह अधिक अनुरागा निजअनुरूप भुभाबर मागा
एक सखी मिय संग विहाई गईरही देखने फुलवाई।
तेइदोउबन्धविलोकंउजाई प्रेम विवस सीता पहं पाई।
दाहा नासु दशा देवी सखिन पुलक गात जलनयन
कह कारण निजहरख कर छहिं सबसवयन २४०
श्याम गौर किसि कहीवानी गिरा अनयन नयनविनुवानी
१ देखनवागकुंवरदोउआये॥ नय किशोरसव भौति सुहाये।
सुनि हरषी सह सखी सयानी सियहियअति उनकंटा जानी।
राककहहिं ब्रम् सुत ने खाली सुनेजे मुनि संग आयेकाली
बिन निजरूपमोहनीडारी कीन्हे स्ववस नगर नर नारी।
वरणत छवि जहंतहसनलागू अवसि देखिये देखन योग।
नासु वचनअनि सियहि सुहाने दश लागि लोचून अकुलाने
चलीभराकरिप्रिय सविसोई, प्रीति पुरातन लविन कोई।।
दोहा सुमिर सोय नारद बचनउपजी प्रीति पुनीत ।।
चकित बिलोकत सकलदिशिशजनुशिशुम्रगीमभान २४१
कंकरा किकिरिग नपुरधुनिसुनि कहतलषसासनरामहृदयनि
रगनह मदन इंडभी दोन्ही॥ | मनसां विश्व विजय कह कीन्ही
असकहिफिरचितये नैहिरा सियमुख शशिभये नयनककोरा
मयविलोचन चारुचंचल मनह सकुविनिमित जेउगचा
दरिदसीयशोभासुखशवाय हृदयू सराहत वचननाना।
जह विरंचि सबनिर्जानपुरलाई विरचि विश्चु कह पगदिखाई
सन्दरना कहं सुन्दरकार विग्रहदीय शिम्यजनुवाई।
सात रपिमा कवि रहे जारी किहि पटरिये विदेह कुस।
राहा सियममा हियवर इथुआनि दशाविचार
वोले निमन अतुज सनवरन संमयअनुहारे २४२
A 44 वालकारातः १२७ तातजनक ननया यह सोई।। धनुषयज्ञ जहि कारगाहाही। भूजन गौर सूखी ले आई। किर्तन प्रकाशफिरत फुलवाई जासुदिलोकिलोकिक शोभा : सहज पुनीत मोर मन छोमा सो सबकारण जान विधाता- करकहि युभग अंग सुनुभु। रघुवंशिन कर संहजसुमाऊ मनकुपन्य पगधरेन काऊ मोहिअतिशय प्रतीतिजियकेरी जहिसपनेह पर नारिन हरी। जिनकेलहहिं नरिपुरणापीठी महिलावहि परतिय मानताठी मंगन लहहिन जिनके नाही. तेनबर घोरे जग माहीं। दाहा. करत बतकहीं अनुज सून मनसियरूपलुभान मुख सरोज मकरन्द छवि करत मधुप मान २४३ चितवत चकित चहें दिशिसीता कहंगये पकिशोरमनधोता जहं विलोकिन्गशीवक नयूनी जनुनहें वर्ष कमल मिलनयनी लता भोट तवसखिन लषाये प्रयासले गौरकिशोरमहाये। देखि रूस लोचनललचाने। हरजनु निज निधियहिचाने धकेनयनरघुपति छवि देखी पलकन परिहरी निमेषी। अधिक सनेह देहभईशोरी शरद शाहिजनुवितव चकारी लोचन मशु रामहिउर धानी, दीन्हे पलक कपाट सयानो। जब सिय सखिन प्रेमबसजानी कहिनसकहिं कलमनसकुना 'दोहा लता भवन ने प्रगष्ट भेहि अवसर दोउभाई निकसे जनु युग विमल बिधुजलदपटल दिलंगाई शोभा सीव ध्रुभना दोउ बीरा नीलपीतजलजात शरीरा काक पक्ष सिसोहत नीक गुच्छाविचरकुसुमकली का। भालतिलक श्रम विन्डसहाये श्रवसा सुभगभूवाछविछाये विकट भर्दिकच घुघीवारे निवसजिलोचन रतनार। चारुचिचुक नासिकाकोला हासदिलाम लेतजनुमोला IA J
11
بالا بڑ۱۳۹
:१३८
वालनकाण्ड
मुख इदि कहिन जायमाहिपाही जो विलोकन काम लजाही
अमांगा माल के कालग्रीवा कामकलभकलभुनुवल सीना
समन संमत बाम कर दोना सांवा कंवर सरवी मठिलोना
दाहाँ केहरि करिपट पीनघर सुखमा शोलनिधान
देखिभानुकुल मृषाहि बिसरासखिनअपात २४५
चीरे धीरजाइक सखी सयानी सीतासनवाला गहि पालीग
बहरि गौरि कर ध्यान करेहू भूय किशोर देखि किन लहा।
सकुचि लीय तव नयन उधारे सन्मुख दोउरघुवंशनिहारे
नख विदेखिरान की शोभा सुमिरि पिता प्रशासन प्रतिकोमा
प्रबल साविन लखीजवसीता : मयेगहरुसवकहहिंसमीता
बुनियाद इहि दिरिया काली सकहि मन दिहसी इकबाली
गूढ गिरा सुनिसिय सकुचानी भयउ विलम्बमातुभय मानी
धारेवडि धार रामउरानी फिर अथन प्रणा यित्वसजानी
दोहा देवन मिसुम्टग विहंग तरु फिर बहोरिबहोरि -
निरखि २ रघुबीर छविबाढी प्रीति न धोरि।। २४६
जानि कठिन शिवचापविसूति चली गरिवर श्यामल मूरति
प्रभुजबजान जानकी जानी। सुखसनेहशोभा गुणखानी
पाल प्रेममय रद नसिकीन्ही, चारुचिचभीतरलपि लीन्हीं
गई भवानी भवन बहोरी बंदिचरगा चोली कर जोरी॥
जयजयजयगिरराज किशोरी जयमहेशामुवचन्द चकोरी
जय गजवदन घडाननमाता जगतजननि दामिनयुतिगात्रा
नाहिं सवश्रादिसध्यअवसाना अमित अभाव वेदनहिजाना
भवभौ विभव पराभवकारिग विश्वविमोह निसर्वसंविहांगिनि
दोहा पति देवता सुतीय मह मातु प्रश्न तवरेख
महिनाअमितनकहि सकहिंसहसशारदाशेष
JAPA
जानकाएर
...
सेवन नोहे सुलभ कलगरा॥ वदायान त्रिपुणपगा
देवि पूजि पदकमल नन्हरि सुरनर मुनि मब होहिं सुग्वः ।।
मोर मनोरथ जानह जीके। बसहसूवारपुर मन होकर
कीन्हउ प्रगट नकारातही सकहि चांगा गहे बैदही।
विनय प्रेमवस भई भवानी खमी माल मूरत मुसकानी॥
सादर सिये प्रसाद उरघरेक बोली गौरि हर्ष हिय भरे।।
मुनु सिय मत्य अशीशहमारी पूजिहि मन कामना तुम्हारी
नारदवचन सदाभुचि साचा मोबर मिलिहि जाहिमनरा ।
छन्द मन जादाचा मिलहि मी वर सहज सुन्दामावरो
करुणानिधान सुजानशील सनेह जानत गवरी।
यहिभानि गौरि अशीशसुनिसियसहित हियहर्षितांनी
तुलसी भवानिहिपूजिपुनि र मुदित मन मंदिर चली ३२
जानि गौरि अनुकूल मियहिय हर्पन जाय कहि।
मंजुल मंगाल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
हृदय सराहन साय लुनाई। गुरुसमायगवने दोउभाई॥
रोनकहा संवकौशिकपाहीं॥
सस्ल सुंभावकुमाइल नाहीं
सुमन पाइ मुनि पूजा कीन्ही पनि अशीश दोउ माइन्हदीही
सुफलमनोरथ होइ तुम्हारे रामलपन सुनिभये सुरवार।
करि भोजन मुनिवर विज्ञानी लगेकहन कछ कथापुरानी।
विगतदिवस मुनिश्रायसुपाई मन्ध्याकरण चले दोऊ भाईी।
प्राचीदिशिशशिधयडे सुहावा सिय मुखमरिम देखि सुखपाया
वहार विचाकीन्हमन माही- सीयवदन समाहिमकर नाही
जन्म सिन्धुपुनियधुविषदिन मलीन मकलक
-सिय सुख समना पाव किमि चन्द वापरो रंका ४१
घटे इद विरहन सुख दाई । यसराहतिजमान्याहे पाई।
सो
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वाल काण्ड
कोक प्रोकपद पंकजद्रोही अवगुण बहुत चन्द्रमातही
विदेही सुरवपटतरदीन्हे ।। होयदोषवड अनुचित कीन्है
सिय मरवकविविध व्याजवेरवानी गुरुपहंचल निपावजानी
करिमुनि-चरगासरोजपामा शायंस पांय कीन्ह विधामा ।।।
विगत निमारनायकजागे वन्धविलोकि कहन असलारे
उगोठवरुणा अवलोकहनाता पिंकज कोक लोक सुरवाता
बोलेलबाजोस्जुिरायानी भुषभावसूचकस्टदुवानी
दोहाँ अरुणोदयसकुचे कुमुदउगराज्यौनिसलीन
निमितम्बार आगमनमुनिभयेन्रंपत्तिवलहीन
परपसवनावत कराह उजियारी गरिनसकहिचाप तमभारी
कमलोक मधुकररंगनाना हरयेसकल निशा अवसाना
स्सेिहिपन सत्रभक्ति तुम्हारे होइहहिंदूटेधनुष सुरवारे
उदयमानुविनुयम तमन्नामा दुरेनरवनजेगनेजप्रकासाः
रविनिजउदय व्याजरघुराया भुपत्तोपसचन्द पन दिरवाया
तवभुजवलमहिमाउयारी प्रगरधनुपविधरन परिपाटी
वन्धवचन सुनिष मुसकाने होइसुचिसहज पुनीतनहाने
नित्यक्रियाकरिगरपहें भाये | चरण सरोजसुभगपिारनाये
सत्तानन्दतजनकवलाये। कौधिक मुनिपहं तुरत पठाये
जनकविनय तिनचायसुनाई हरये बोलिलिये देउमाई
दोहा सतानन्द परवन्दिप गुरुपह जायः ।।
चलनात मुनिकोतवपठवाजनकवृत्लाय
सीय स्वयंवरदेरिवयजाई। ईलाकाहिधों देय बड़ाई।
लगया कहायपभाजनमोई नाथलपोतवजापरहोई
हसे युनिसवमुनिरवानी दीन्ह अशीणामवहिंसुरखमानी
युनिमुनिहन्द समेतकपता हिरवनवलेधनुषमयप्रणाला
1 ना AN पार पासताड १३१ ताभूम नायरा माई। अससुधिसबपरवासिनपाई चत सकल सहकाजविसारी वालक युवाजा नर नारी।। दखीजतकनीर भई भारी॥ शुचि सेवक संवलियेहकारी कल लोगन पहजाऊ शासनउवित देह सब काह। समकादि मुटु वचत दिनीननिन वेगनर नारिय निम मध्यम तीचलह निजरथलमनु राज कुंवर नेहि अवसरमाये मनोमनोहरताविकाव। गुणसागर नागर बरवीरा ॥ सुन्दर श्यामल गौर शाखा राजसमाज विराजत करें। उड़ गुगा महजनुयगावपर जिनकेरहीभवाना जैसी। प्रभु मुरति देवी तिन तेसी देखहि भूप महारगा धीरा मन्हवीर रस धरे शरीरा। ड्रेकुटिल स्पप्रभुहिनिहारी मनहभयानक मूरति भारी रहेअनुर छल जोन्य वा तिन प्रभु प्रगत कालसमदेखा उरवासिन देख टोउ भाई नरभूषालोचन सुखदाई दो० नारि विलोकहि हरपहियनिज रुचिनुरूप जनुसोहतगारधार मूरति परम अनूप। २५२ विषन प्रभु विराट मय वीश वह मुखकरपगलाचन भीमा जनकजातिअवलोकहिंकैसे सजन सगेपियलागहिजैसे सहित विदेह विलोकाहिं रानी शिसमप्रीति नजायवयानी योगिनपरमनवमै भासा सन्नद मनसहन प्रकार होरभातन देखउ दोउभाता देवड्दसमसुखदाता। गहि चितवभावजेहिसीया सोसनेह सुखनहि कथनीया उञ्चनुभवति न कहिसककोऊ- कवन प्रकार काहे कविकोऊ जिह विधिरहा जाहिजसभाजी निइनस दर कौशल राजा हो० राजन राज ममाज मह कौशल राज किशोर بالعائر میں -- १४२ वालकाएंड मुन्दर श्यामलं गौरनन विश्व विलोचन चोर॥ २५० सहज मनोहर मूरात दोका कोटि कामपिमालघसा शरद-चन्द निन्दक मुख नीके। नीरज नयन भावते जी॥ चितवनि चाल मारुमद हरणी भावनहदय जायनाहि वस कलकपाल श्रुति कुंडललोला चिवुकधर सुन्दरम्वाला कुवुद बन्धु कर निन्दक हासा भकुटी विकट मनोहर नासा। भाल विशाल तिलक कलकाही कचविलोकिलिवाललजाही पीत चौतनी शिरन मुहाई। कुसुम कली विचवीच बनाई खो रुचिर कम्खु कलग्रीवा ॥ जनु त्रिभुवन सुखमाकीसीवी दो. कुंजरमणि करम ललिन उर तुलसी की माल वृषभ कन्ध केहवि ठवनि वलनिधिवाह विशाल ३५४ कटिगीर पीन पट बाधे॥॥ करभरचनष वामका काचे पीत यज्ञ उपवीत सुहाई ॥ नख निशिमंजु महाकविका देखिलोग सब भये सुरवारे। इकटक लोचन हिनटाने हरषजनक देविदोऊभाही मुनि पद कमल गहे तब जाई, करिविनती निजकथा सुनाई। रंगभवनि संवमुनिहिंदिरवाई जहजहंजाहि कुवरबर दोऊ तहतह चकितचितव सबकोऊ निज श्रुचिरामहि सब देखा। कोऊ नजान काछु मर्मविशेषा भनि रचना.न्टप सन मुनिकहे राजा मुदित परम मुख लेऊ दो सब मज्जन ने मच्च दक सुन्दर विशद विशाल मुनि समेत दोऊवन्धत वैठारे महियाल॥ २५५ प्रभुहि देखिसंवन्टप हिय हारे जनुगकेश उदय भय तारे॥ असपतीनितिनके मनमाही राम चाप नोरन शक नाही। २ दिनु भजेल भवधनुष विशाला मिलहिंसीय राम उर माला। विहनपर भूप सुनि बानी॥ जे अविवेक अन्यधभिमानी॥ अस विचारिंगवने उघरमाई जिप्रतापवल तेज गवाई चालकाय १३३ नौरउ धनुष न्याह अवगाहा विनु तोरे को कुंवरि विवाहा। एकवार कालह किन होई। सियहित समरजितव हमसोई यह मनिअपर भूप मुसकाने चर्मशील होरे भक्त सयाने। मोसीय विवाहवराम गर्व दारे कार रपन कर जीत को सक संग्राम दसरथ के रसा बाकर रथामरहनि गाल वजाई. मनमोदक नहि भूरवबुझाई शिव हमार सुनु परम पुनीता जगदम्वा जानहजिय सीता। जगत पिता रघुपनिहिविचारी भरिलोचनकविले निहारी सुन्दर सुखद सकल गुणाराशी येदोउ बन्धुशम्भु-उर वाशी। सुध समुद्र समीपं विहाई मगजल निररिव मरहकतजाई करह जान जाकहजोइभावागमताप्राजु जन्न फल पावा असकहि भले भूषअनुरागे। रूप अनूप विलोकन लागे। देखहि सुरनभचटे विमाना। यहि समन करहिकलगावा दो जानिस अवसर सीय तव पठवा जनक बुलाई चतुर सखी सन्दीर सकल सादर चली लिवाह। २५७ मिय शोभानहि जाइवषानी जगदम्विका रूप गुगा खानी उपिमा सकल मोहिलघुलागी प्राकति नारि अंग अनुरागी सीय वरन तेहि उपिमादेई।। को कविकहे अयश को लेई जोपट तरिय नीय समसीया जगअस युवति माहाकम नीया।। गिग सुरवर तनु बह भवानी रति अतिरिक्त अननुपतिजानी विष वागी बन्धपिय जेही| कहियरमासमाकमि बैदेही जोकविसाधापयोनिधि होई परमरून मय कच्छप सोई।।।। शोभारत मंदर भगाल मथे पाणि पंकज नितमोर दो रहिविधि उपजेलक्षिजब सुन्दरता मुख मूल तदपि सकोच सभेत कवि कहहिसीयंसमतूल. २५ 7 -- IN" • . १३४ 3 वालकाण्ड T चली संग ले सखी सयानो गावत गीत मनोहर वाना सोहनवल नन सुन्दर सारी जगनिजननि अतुलिन विभाग भूषण सकलसुदेशसुहाग अंग अंगरचि सावन वनाये। रंगभूमिजवासिय यातुधार देखिरूप मोह नर नारी ।। हर्षि सुरनदुभी बजाई। वीर्ष प्रमून अप्सरागाई।। सोय चकितचित रामहि चाहा भये मोहे वस.सब नर नोहा॥ पाणि सरोज सोहजयमाला औचक चितसकल महियाला मुनिससीय वैठे दो भाई लगेललंकिलोचननिधिपाई दो० गुरुजन लाजसमाज नाड़े देखि साय मकुचानि । लगी विलोकन सखिन तनरबीरहि उस्माति २५ राम रुप अरुसियछपि देवी नरनारिन परिहरी निमेशा।। सोचहिसकलकहत संकचाही विधि सनविनय करहिं मन माही हरु विधिवेगिजनक जड़ताई। मनिहसारस देव सुहाग बिन विचार प्रानजि सरनाह सोय राम कर करै विवाह। जगभल कहेहि भादसबकाहे हठकीन्हेउर अंतर दाह। यह लालमो भगनमबलोग घर सांवराजानकी योयू॥ नववन्दीजनजनक बुलाय।। विरुदावली कहतचलि आये कह नप जाइकहरु पण मोरा चलेभार हिय हर्ष न पोरा।। दोही बोलेन्दीवचन वर सुनह सकल महिपालग प्रणा विदेह करकहहिं हम भुजाउठायविशाल २५८ नसभुजक्लविधुशिवधनुराह नगरुन कठोर विदित मव काही रावसावागामहाभंट.भारे॥ देखिसंगमने गदहि सिधारे। सोइ परिको दण्ड कटोरा राज समाजाजजेहि नोराम त्रिभुवन जय समेत वैदेही दिनयविचार वरै हट नही। दुनियासकलभूपमिलाप - मरमानेप्रतिशयमन माये।
बालकाण्ड
१३
पार कर वाधउटेअकुलाई। नले इषदेवन शिर नाई।
नमकिनकि त किशिवधनुधरह
उटे न कोटिभानिवलकरही
जिनके कई विचार मन माह चापसमीप महीपान जाही
दोहा नमक धरहिमनु मूढ रप उठतूनचलाहलजाइ
मनहपाइभरवाइवल अधिक गधा
भपसहस दस एकाहि बारा.लग उठाननरहिन सारा
होनशम्भु शासन कैसे कामीवचन सामी मन जैसे।
सवन्टपभये योग उपहासी जैसेपिनुविराग सन्यासी ।
कोरनि विजय वीरता भारी ॥ चलेचापकर सरवस हारी
श्रीहत भये हारि हिय राजा। विटेनिज निजजासमाजा॥
न्टपन विलोकिजनक अकुलाने चोलेवचन रोष जनुसाने
होप द्वीप के भूपनि नाना आये सुनि हमजीप्रणाडाना
देव दनुजदि मनुज शरीरा- विपुल देव आयेरणधीर
धनुषभनन के निमित सम्पूर्ण राजा लोगों काजाना नोरधनुष का म
१
inm BHAUNT
.
।
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१३६ .
बालकापस
दोहा कुंवार मनोहर विजय बड़ि कीरति पतिकमनीय
पावन हारविरचिजमु चिउन धनु दमनीय॥ २६१
कहइ कहि.यह लामनभाव काहनधकर चाप चनावा।।
रहाचदाउद तोरबूभाई।।।। तिलभरिभूमिनसकेउ छालाई
अबजनि कोउ भारवैभटमानी - वीर विहीनमही में जानी।।
नजहु व्यास निज २ वटह जाह : निरवानविधिवैदहि विवाह।
सुरूनजायजोधरापरिहर कुंवरिकुवारि रहेका करजंग
जोजन त्यौ दिनुभभुइभाई तोपणा करिहो त्यों न हसाई।
जनकवचन सुनिसव नरनारी देखिजानकी भयेडखारी।।
माखे लषगाकुटिल भैभीहैं। रपट फरकतनयन रिसोहैं।।
दोहा कहिन सकत रघुवीर उरलरोवचनजनु वाग
नाइराम पद कमल शिरवोले गिरा प्रमारा।। २६३
रघुबसिन महजह कोउहोई तहि समाज असकहे न कोई।
कही जनक जसअनुचितवानी विद्यमान रघुकुल मणि जानी।
सुनह भानुकुल पंकज भानूप काही सुभाव न कछु अभिमान
जोराउर अनुशासन पाऊं॥ कन्दुक इत ब्रह्मा उपयोग
काचे घट जिमि डारो फोरीसको मेरु मूलक इब नारी।।
तव प्रताव महिमा भगवाना कावापुरोपिनाक पुराना ।
नाथ जानिअस न्यायसु होई कौतुकंकरी विलोकिय सोऊ।।
कमल नाल इमिचाए चनावों शतजोजन प्रमाण लैधादों।
दोहा नोरी छत्रक दण्ड इव तव प्रताप वल नाच ।।
जौन करौ प्रभुपदसयय पुनिन ध धनुहाथ।। २६३
लषा सकापबचनजवडाला डगमगानिमहिदिग्गज डोले
सकल लोकसबभूप डराने सिय हिय हर्षिजनक सकुचाने.
सुरुरघुपति सब मुनिमन माही सुदिन भये पुनि र मुलकाहीं।।
hine गलकारत
सिनहि रघुपति लवानिवारण प्रेमसमेत निकर वैवारे
विश्वामित्र समय पहुंजानी बोले प्रति सनेह रोडवानी
उटहराम भजाभव बापू मैदह नान जनक मारितापू॥
मुनि गुरुवचन चरंगासिरनावा हर्ष विषाद ने कछु उरभावी
टाटभये उठिसहजसुभाये। उनि युवा म्हगराजलेजाये
दोहा- उदित उदयगिरि मञ्चपर रघुवर वाल पतगा।
विकसे सन्त सरोज सब हरष लोचन भगा २६
न्टपन को आशा निशानामी वचननखत अवलीनत्र
माजीमहिप कुमुसकंचाने
कपटी भूपउलूक.लकाने
भयेविशोक कोक मुनि देवा वयहि सुमनजनावहि सेवा।
गुरुपन्दिसहितअनुरागी राम मुनिन सन खायसु मांगा
सहजहिं चले सकल जगस्वामी । मज मनुकम्जर बर गामी ।
चलतराम सबपुर नर नारी।। पुलकि पूरितनभये मुरवारी।
बंदि पितर सुर मुक्त संभारे।।
होशिवधनुष गालकी नाई नोरहिराम गोश गुसाई।।
दोहामहि प्रेम समेत लरिख सचिन समेत बुलाइ
सीता मातु सनेहवस वचन कह विलखाइ) २६५
सरिखसव कौतुक देखन हारेगा जोउ कहावताहतू
कोउनबुझाय कहे रपयाही ये बालक नस इंटभल नाही
रावसा वाया दुनिहिचापा हारेसकल भूपकार दापा।
सोधनुराज कुवर कर देही वाल मालकि मन्दरलेही।
भूषसयानप सकलसिरानी सरितविधिगतिकहजायनज
बोलीचतुरसखी मद वानी॥ जवंत लघुगनियन रानी।
कहकुम्भुजकह सिंधुश्वपारा शोषउ सुयश सकले संसारा
रवि मण्डल देवन लघुलागा उदय नासुविभुवनतम भाग
पुन्य प्रभाव हमारे
7 ९३८ बालकाण्डः . . दोहा मंत्र परम लघु.जासुबस विधिहरिहरसुर मही मत गजराज कहवस कस्अंकमा खर्च काम कुसुम धनुशायकलीन्हे सकल भवन अपन वशकीने देषिताजिय शंशयनसजानी भजनधनुष राम सुनुसनी । सखी बचन मुनिभई परतीती मिटा विवाद वोनस प्रीती म तब रामहि विलोकिदेही समय हदय विनवति जेहितही मनहीं मन मनाय-अकुल होह प्रसन्न महेश भवानी करह सुकल आपनि सेवकाई हर हित हरड चाप गरु पाई । गगा नायक बरदायक देवा याज लगे कीन्ही नव सेवा बार बार विनती मुनि मोरी कार्ड चाप गरुता अति थोरी। दोहा देखि देखि रघुवीर तन सुन मनाव धरिधीरे भरे बिलोचन प्रेम जल पुलका वली शरीरण २२० नोक निररिद नयन भारे शोनापितुप्रा सुमिरि वहरि मनलाभ अहह नात दारुन हट्टानी समुरत नाहक लाभ नहींनी सचिव संभय सिखदेडनकोई बधसमाजबड़ा नुचित हो। कहधनकुलिशाहचाहि कठोरा कहं श्यामल सुगात किशोरा विधि कोहि भौति-धरी उरधी-सिरसे समन किसिविहिडी। सकलसभा की मतिभईभोरी अवमोहिशम्भ चाय गति नारी निज जस्ता लागन परजरी होहहरुथ रघुपतिहिनिहारी प्रति प्रताप सोय मन माही लवनि मेव युगसमचलिजाही दोहा' प्रभुहि चित्त पुनि चित महिसजन लोचने लोल खेलतमनसिज मीन युगजन विधि मण्डलडोल २६ गिरा अलिन मुखू पंकजरोकी प्रगटनलाल निशा अवलोकी, लोचनजलरहलोचन कोना जैसे पान रुपैसिकिर सोना। संकुचीयाकलना वडिलानी पर धीरज प्रतीति उरआनी MARCH Latchivt. PNPN
V
more
बालकाण्ड
निनमनवचन मोर प्रनसाचा - रघुपति पद सरोज मनरांचा
तो भगवान सकल परवाशी करहिहिं मोहिं रघुपतिकीदामो
जेहिंकैनिाइपर सत्यसनेहा सोत्तेहि मिलन कुछ संदेह
प्रभुननचित प्रेम प्रसालानोमानिधान रामसत्र जाना
सियहिविलोकित्तकैउधनुकसः चितबगंलघुद्यालाहिजैसे
दोहा लवंगा लावेउ रघुवंश मणिरा नाकेउ हरकोदण्ड ।
पुलकिगात बोल बचन चना चापि ब्राण्ड २६
दिशिकुंजरह कमठमहिकाला घरहरगिाधरिधीरनडोला
राम चहहि करधनोराहोहसर्जना सुनिघायसुमोरा
चापसमीप रामजवायनर नारिनं सुरसुकतमनाये।
सवकरसंशयग्रस्त्रज्ञान मन्द महीपन का अभिमान
मगुपति करिगवेगाोई॥ सुरमुनि बरन कार कदराई
सियकरसोचजनकपछितावा गनिनकरदारुगडखदान
शम्भु चाप बङवोहित माई, चदेजाइ सब संगबनाई
रामवाहाल सिंधगारागा
चहत पारीनोह कोउनहार
दोहा राम विलोके लोग सबंचित्र लिरव से देरिख ।।
चितईसीय रुपालनजानीविकल विशेष
दिखी विपुलविकलवैदही .. निमिषविहातकल्पसमते
हषित वारिविन जीतन त्यागी, मुरकर कासुधा-नागा।
कावर्षीजवकृषीसुरवाने। समय चूकि युनिकायतिका
असासिय जानि जानी देखी : प्रभु पुलकेलखिपीति दिसेवी
गुरुहिं पनाम मनहि मन कीना अति स्लायव उठायधनु लीन्हा
दमकेउदामिन जिमिधनलयेऊ., पुनिधनु नभमंडल समभयेऊ
लेन चढ़ावंत रवैचत गाडे काहनलवा देखि सवाल
निहिं क्षरा मध्यसमधनुतोर भरेउ भुवनधुनि पोरकटोरां
वालकाएर
البهار
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कन्द मारभुनना और कटारलविवाजिताजमाणानने.
चिकरहि दिग्गजाडोलमहि पहिलीलावलमन्न
सूर असुर मुतिकर कान दीन्हे भकूलावकलतिजाही
कीदरा भजउराम तुलसी जयतिवचन उदीरही।
शकर चाप जहाज मारार रघुवरखाऊबल।।
बडे सकलं समाज चव जे प्रथमहिनामा २६
प्रभु दाखण्ड चाय महिलगरण देखिलोग सबभरे सुसारे
काशिकरूप पयोनिधिपावन प्रमचारिअवगाह मुहावन।
गमम्म राकेश निहारी। वहीवीच लपेपालमा
नाजेनमगहगह निशाना बनारहि कारगाना,
बहाादिक मुर मिन्द जुनीमा प्रभुहिप्रसंशाहि देहिमोसा
सहि मुमून राप माला गापहि किन्नरगीन रसाला॥
आमजीकावतुप नोडना औरसमपूर्णदेवता पसीना
.
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A
VIETYPalimmy
THIMIRmMummy
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रालकाण्ड MY It रहा भुवन भी जय जय बानी धनुष भगनिजान नजानी मदिन कहिं जहंत नरनारी भजेउ राम शम्भुधन भारी॥ बन्दामागध मून गंगा बिरद बदहि मतिचा सानिकांवरि लोगसव हय राजधान मणिहीमा २७ कान मुदग:ख सहनाई भरिदाल दीसम्हाणा वाजाह बहबाजने मुहाये। जहतयवितिन मगलगायो सखिनसहित हर्षित भतिरानी सुरवत चान पाजन पानी जनकलवर मुख सोच विहान परत थक पाहजन पाई। वीहतभय भूपयन रटेर जस दिवस दीपकविका नियहिय मुखवनिय कहिभाती जनुचातक पायजल स्वानी रामहिलबादिलोकत कैसे शशिाहिचकोरकिशोरकम सतानदानवधायसदान्ता सात समन राम यह कान्हा दोहा संग साली सुन्तर बतर बागवाह नगल चारण गवनीबाल अराल गति सुखमा राप्रपार २७० सासन माध्यसिप सोहन का कावंगमधमकाव जसरी कर सरोज जयमाल मुहाई। विमुविजय शोभाजन छाई। जनसकोचमन परमंउकाह।) ग्राम लरिव पान काह जाइ समीप रामकृवि देखी रहिंजन कंवरिचित्रवरेखी चतुरसखी लखि कहा चुकाई पहिरावह जयमाल मुहाई॥ मुलन युगल करमाल उग प्रेम विवशपहिराइन जाइ मोहनजनुयुगजलज मनाला शशिहि सभीन देनजयमाला गावहि कार श्रव लाकि सहली सिय जयमाल राममिली दोहा रघुवर उर जयमाल दखि देव वर्षहि मुमन सचमकल भन्नालजनु विलोकि रविकुमदगा २७३ पुर औरयोम वाजने बाजाखलमये मलिन साधुसवगाने p porn . बालकाण्ड सुराकन्नर मरनाग मुनाना जयजयमब कति दैनिशी नाचाहिं गावहिबिबुधवटी गार बार कुसुमावलि छरी जनहं विप्र वेद धूनि करही वन्दी विरदा वालि उरही। महिपानाल नाक यशष्यापा रामवरी सियभजउ चापा। करहिं शास्ती पर-नर-नारी देहिनिलावारविन विमारी सीहत सीय राम की जोरी छवि भंगार मनहे येकालारी॥ सखीकहहिं पभ पद गहसीता कातिन चागा परम प्रति भीता दोहा गौतम तिय गति सुरति करि नहिं परमात पदपानि मनविसे नघुवंश मगि प्रीति खलाकिक जानि । सियदेखि भूपभिन्नावर कपूत मृद मन माये । उहिर पहिरिसनाह नभा जहंतह गाल वजाबन लागे तोरधनुषकाजतहि मर्ड। जीवत हमाह कुवार को बाड़ी लह छजाय सीय कह कोऊचिवाधार पावालक दोऊ। जो विदेह कह कर सहाई जीत समरसहित दोऊमाई साधभूषवाले मुनि वानी गज ममाजहि लाजलजानी वल प्रताप बीरता राई॥1॥ नाकापताकाह गमिधाई सोइभरताकि अवकह पाई वसधिनी विधि मह मीसलाई देखहरामहि नयन भरि तजिषा मट मोह लषा रोष पावके प्रवल जानिमालभनिहोर वततयवलिजिमि चहकांगू जिमि शशचहहि नागरिमार जिमि वह कुशल अकारगाकोही साव सम्पदा चहा शिवदाही लोभी लोलपंकीरतिचहड़। अकलकताकि कामी लहई। हारपर्ट विमुख परम गति चाहा निमतुम्हारलालेच नानाहा कोलाडल सुनिसीय मकानी सखीलिवाहनाईजहं रानी। सन मुभाय चले गुरू पाही मायसनेहवामान मन माही TM चालकाण्ड -- चारजवर.मात धन्सरकर कुछार कार . पति सहित मोच बसतीया अवधौविधिहिकहा कररोड भूपचन सनि इनउततकही लषन राम डर वालन संकहीं दोहा गुरुरा न्यून भकुटी कुटिलचितवत नूपनस मन मन गजगा निरिव सिंह किशोरहि चोप- खर भर दसरव विकल नरनामा लि देहि महीप नहि अवसर सुनिशिवधनुभा आय भगुकुल कमल पतंगा ददि सहीप सलल सकच बाजार जालनालुकाना गौर शरीर भूत भलि भाजा माल विशाल त्रिपड विराजा। शीशजरा भास वदन महावा भकुटीकुटिल नेनारगत राते। सहजहि चितवन मनई रिसाते। पभ कर वाह विशाला कटि मुनि वसननून द्वार कलकाध टोमात भपकरगी कठिन वाशिन जाइसम्य मनिनन जनुवीर रस अाय जहं सर्वभए। दखत भ्रगुपति भेषकराला उठ सकल भय विकलभचाल पित समेतक िनिजनामा लाकरसासवदाउ:शामा जहि मुभायचितवाह हिनजान सोजानैजन-वायु वुटानी। जनक वहोरि घायशिरनावा मीय वुलाय प्रणाम करावा आशिष दीन्द-मवी हरषान निज समाज-लै वाइसयानी विश्वामित्र मिल पुनि पाई पटसरोज मेले दोउ साड़ी रामलषरा दसरथक दादा दीन्ह अशीष जानि भलजोरा रामहि चितय रहे थकि लोचन सिपअपार मार मद मोचन। वहार विलोकि विदेहसन कहह कहा नीतभार पूछनेजान नजान जिमि व्यायड को शरीर समाचार कहि जनक मनाये जेहि कारन महीप मब वाय T- OM १४४ HI TANI K वालकाण्ड सुनववचनफिर अनननिहारे देखे वापरखण्ड महिगरे। अनिरिस वाले बचने कठोरा कर जड जनकपनुक केहिती बेगि दिखाउ सूट नन बाजू उलटो माहजहंलागतवराज पोते ज्यरतर देव न्टप नाहीं॥ करिलभूप हा मन माहीं॥ सुरमुनि नाग नगर नरनारी मचिहि सकल वामनभारी॥ मन पछतातिसीय मेहतारी॥ विधि सदारिमववान विगाहरी भगति कामभाव अनि सीना निमेष कल्प.सम वीना। समय विलोक लोग मब जानि जानकी भी।। हर्षन हृदय विवाद कछ वाले श्री रघुवीर।। नाथशम्भु धनमज्जन हारा होइहि कोइराक दास तुम्हारा आयसुकही कहिये किनमोही सनि रिमायू बोले मुनि कोही सेवक सीजी करें सेवकाई परि कागा कारकरियलाई सुनहराम जेहिं शिव धनुतोरा सइस वाह सम.सोरिसमोरा माविलंगाउ बिहाइ समाजा।।। नतु सारे हे सब राजा मुनि मुनि वचन लषरा मुसकाने वाले परनुपरहि अपमाने। वह धनुही तोरेउ.लारकाई। किवदं न अमरिसकीन्ह गुसाई इहिंधन पर ममता कहिहत मुनि रिसायकह ग कुल के दोहा रेप बालककाले वस वोलनतोहि सभार चनही समविपुरारि धनुरिदित सकल संसार GA लषणा कहा हाम हमरेजांना जाना सनहरसव धनुष समाना कामिति लाभ जीर्णाधिनतारे दिखा राम नये के भोरे।। छुचन टूट रघुपतिहि न दोषमुनि विनुकाजकरियकन रोष वालचितय परभु की घोरा रिशठ सुनिमित पाठ सुनि सिसुभावन मोरा बालक बालि वा नहिं जाही केवल मुनिजर जानेसि मोही बालब्रह्मचारी अति कोही दिवविदित क्षत्रिय कुलमोही IN
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वालिकाण्ड
भुजबल भूमिभूप विनुकीन्ही विपुलवामहि देवन दोन्हें ।।
सहसवाह भुज छेदन हारा परशुदिलोकि महापा मारा।
दो मातु पितहि जनि शोच वस करसि महापकिशोनाल्या
गर्भन के अर्भक दलन परम मोर अनि पार
विहसि लषवालेन्डवानीहानुनी महा भटमानी।
पुनि मोहिं देखाव कुवारा चहाउडिरावन फूकि पहाराम
इहाकुम्हड़ ननिया कोउ नाही, जीतीनं देवतमारजाहीं।।
दिखिकुठार भागसन वाना। में कछु कहा सहितश्वभिमानी
स्टगुकुल समुझिजनेऽविलोकी कडु कहाँ सही रिसिं गेकी
मुरमैहिसुर हरिजन प्रकगाई हमरेकुल इनपर न सुराई।।
वधे पापे घपकीरति हारे। मारत पायरिय तम्हारे
कोटिकुलिससम वचन तुम्हारा स्थाधरहे धनुदान कुठारा।
दाजाविलोकियनुचितकहरदामहमहामुनिधीर ।
सुनिसरोवगवंशमणि बोले गिरागनीमा २८१
कौशिक क्षमह मन्दयहवालक कुटिलकालवश निजकुलधाला
भानुवंश गकेसाकलं निपुटनिरकुंश अनु
कालकवर होइहि गोमाहीं कही पुकारि खोरि लोहिना
तुमहट कह जो चहह उवारा कहिलताप वल रोष हमारा।
लवणकहेउ मुनिसुयशतुम्हारा नुमहि अंशतको दरगौपारा
अपनेमुखतुमच्यापानिकरणी वारअनेक भांतिवह वरती।
नहिं संतोष तो पुनिकछुकहहु जनि रिसरोलिदसहखसहरू
दीर पति तुम र अछौभागारीदतन पावह शोभा
दो सूर समरकरगी कहि कहिन जनादहिया
विद्यमान रणापाइ रिपु काय कहि
नुमती काल हाकिजनुलाया जाएगार मोहि लोग बुलाया।
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بازار عام बालकाण्ड .. M५--- सुनन लषगाके वचन कोरी परभु सुधारिधरे कर अवजनि देह दोष मोहि लोगूग कटुवाहीबालक वध योग। बालविलोकिंवहत में चाचा-अबयह मरनहार:भामांचा कोशककहासनियरंपराध : बाल रोयगुगा गिरााहिन, करकठार में नकारन आगे अपराधी गुरुदोहो॥ उता देत छोडो विनु मारे। केवल कौशिक शील तुम्हारे नतरहिकाटिकटार करे गसहि उतरा होउधम दोषः । सुअनकह हृदय : मुनिहि हरिअरे सूझ जगवखरडेउ ऊरव जिमि वजन वूमधवक २८३ कहेलपणामुनिः , . तुम्हारा को । जानादिन ।। मातहि पितहि सरगाभयुनीक गुरुका रहा शोचवड़जी सोजन हमरे माथे कादा। दिनचलिगयेउ व्याजा बोली देव में यहतस्वीरउसवन जव परसुरामसभा में लाइमन बोली। सेवातालावकरना २ । HINI शीरामजन्मी । पराम - " F- .
... -- Poli चालकाण्ड सुनिकटुवचनकुठारसुधारा हाहाकहिंसबलोग पुकारा॥ गुबर पर देखावह मोहीविय विचारवचौन्टप ही। मिलनकवई सुभटरागादेः दिज देवताघरहिकेवाड़े।। अनुचित कहिसब लोग पुकारे रखपतिसैनहिलषगा तिवारे दो लषा उतरन्याहतिसारस भगुवरकोपशानु वरत्तदेखिजलसमवचन वोलेरघुकुल भात :२०४ नाथ करह चालकपर छोह सूध दूध मुख करियन कोह जोपै यभु पनाव कछजानी-तोकिदारावर करतअयानाग जौलरिका कञ्चनुचितकरहीं गुरुपितु मातु मोदमनभरही करियरूपाशिशसक्कजांनी तुमसमशीलधारमुनिज्ञानी रामवचनसनिकहकजुगने कहिककुलपगाबहरि मुसुकाने हसतदेखि नवसिरवरियायी, रामतीरभाना व पापी। गौरभारीर श्याम मन माहीं कालकूट मुखपयूमुख नाहीं सहजटेदवनुहरैन नोही . नीचमीसमलखैन मोही। दी लषा कहेउ होस सुनह मुनिकोधपापकरसूल. जेहिबसजनअनुचित करहिं चलाहि विश्वप्रतिकूल २) मै तुम्हार अनुचर मुनिराया पार हरिको करियशवदायां ।। एटचापूनहिंजुड़हि रिसाने। वैठिये होइहिं पायपिराने।। जो अतिप्रियतौकरियउपाही जारियकोउबडगुराीवुलाई बोलनलषगाहिजनकटिराही भरकर अनुचितभल नाही थरकापहि युरनर नारी छोर छोरंकुमाररवाटभतिभारी भरगुपनि मुनिरनिर्भय वानी रिसतनुजरै होइबल हानी।। वोले रामहि दै निहोरा। वचौविचारबन्धु लघुतार, मन्मलीन तनसुन्दर कैस विवरसभराकनक घट जैसे। दो सुनिलक्ष्मणा विहंसेवहरि नयन तारेगम Lin- चालेकापड गसमीय गवने सचिपरिहारवाणीवाम अनि विनीतम्टदशीतल वारसी, चोले गमजोरि युग पाणी ।। सुनहनाथ तुम सहजसुजाना वालक बचनकरिये नाहकाना वरेवालका एक सुमाऊ॥ इनहिन संतुविदूषहिकाऊ तिननाहीकझकाजविगारा अपराधाम नार तुम्हारा रुपाकोयवधवन्ध गुसाई मोपर करिय दासकोनाई कहियेवेगिजेहि विधिरिसजाई मुनिनायकसोइकरियउपा कह मुनिरामजाइरिसकैसे | अजवन्धु नवचितवननस इहिके कंठ कुठारत दीन्हा॥ तो मैं कहाँकोप की कीन्हा दो गर्भश्रवाह अवनिपर वनिमुनिकुठारगति घोर परश्यकत देखें जियत्त वैरी भूपकिशोर ।। २५७ बिहेनहाय दहरिसिछाती भाकुठार कुण्ठित नपधातो भयधामविधिफिरेउसुमास मोरेहट्य रूपा कस काऊ प्रांजुदैबडखदसह महावा। सुनि सौमित्रविहमिसिरनावा वाहरूपा मूरोने यनुकूला वोलतचनेभारतजन फूला॥ जोपैकृपाकर मुनि गाता ।। कोधभयतनु सुखि विधाता। देखि जनक हठिवालक रोह कीन्हव्हन जयमपुरगेहू बिनिकर किन घोखिन छोटो देखतहोटखोट रपंदोदा।। विहंसेलषणा कहा मुनिपाही मूदिय ज्योरिव कतहलोउ नाही परसुराम नबराम प्रति बोले वचन सोधः शम्भ शासन तोरि शठकरसिं हमार प्रवोध २८६ बन्यु कहलटु सम्मत नारे।।।। नूकूल विनयकरसिकरजोर करूपरितोष मोर सगामा नाहित छाड़ कहाउद रामा छलनजिकरड समरशिवद्रोही बन्धुसहितननु मारो तोही भगुपति नमकि कुठार उठाये मन मुसुकाहिं राम शिरनाये HARA वालकाण्ड r I गुगाहलषाकरहम परराषकतहसुधाइह तवा दोषू।। दिव जानि शंकासव काह॥ वन चंदमानासे नाराज राम कहेंडरिस तजियमुनीशकर कुठारधागे यह शीश जोगिमिजाय करियसोइस्वामी मोहिजानन्द्रायन अनुगामी ।। दो प्रभुहि सेवकाहिससरकस तंजह विष बर दोवा भेषविलोकि कहेसि कल बालकह नहि दोष २८८ देखिकुठारवारा धनुधारी भेलरिकहिरिसिवीर विचारी नामजान पै तुमहिंन चीन्हा। वंशसुभावउत्तर तेहि दीन्हा॥ जौ तुम अपने उ मुनि कीनाई पदशिर भिभु धरनगुसाई ।। छमहचूंक अनजानत केरी चहिय वियरकपाचनरी हमहिं तुमहि कस सरिवरनाथा कहह तो कहां चराकह माथा रोममोर लघनाम हमारा। परभ माहित वदनाम तुम्हारी देवरक गुरारा धनुष हमारे नवगुगापरम पुनीन तुम्हारे मनप्रकार हम तुमसन हार क्षमड़ विय अपराध हमारे वारवारमुनिशिवाकाहा राम सनरास वोलेस्टगुपति सरुष हई तुहं वन्यूसमवाम नियटहि द्विजकरिजानेहमोही मजसे विष सुनाऊ तोही ।। चाप भुवा शरसाइतिजाना काय मोरति घोर कमाल समधिसेन चतुरंगसुहाई महामहीप भये पर चाई। मैंसहि परमुकाटेिवलदीन्हा समयनजग कोरिन मोरप्रभाव विदित नहिं नोरेग चालसिनिदरि विपकेभोरे।। भजेरचाप दाय वद वादा।। हिमति मनहजीत जगकाट रामकहासुनि कहहविचारी रिसिप्रतिवाडि लघुक हमारी छुञ्चतहिदूट पिनाक पुराना नि केहिहेत करोंयाभयाना।। दो० जो हम निदरहिदिनदि सत्य सुनह भगुनाथ
१५.
बालकाण्ड
तौ अस को जगसुभद जेहि भयवस नावहि माघ २६॥
देवदनुज भयोति भटनानागा समक्लवधिक होउवलवाना
जौरमा हहिं प्रचारेउकोजीलरहि मुखेनकाल किनहोऊ
क्षत्रिय ननुधारिसमसकाना कुलकलक नाह यावरजाना
कही सुभावन कुलहि प्रशंशी कालहडरहिन रंगारपुषसी
विप्रवंशकी असंप्रभुताई। अभय होइ जो नुमहिडेराई
सुनि मद्ध गूढ वचन रघुपति के उपरे पटल पर घरमतिको
एमरमापति करधनुलेह॥ खैबड़ चाप मिट सन्देह।
देतचाप नापहिचढगये। परसुगम मन विस्मयमयजा
दो जानाराम प्रभाव तव पुलक उचित गाना
जोरिपाणि घोलें वचन प्रेमन हृदय समान।।
जपरघुवंशवनजवन मा गहन दनुज कुलदहनकाशा
जय सुरविष धेनु हितकारी जय मद मोहकोह भूमहाग
विनयशीलकरुणागुणा सावार
जयतिवचनरसनाप्रति नागर
सेवक सुखद भुभग सब अंगों जय शरीर छविकोटि प्रनेगा
करौं कहा मुखएक प्रशंसा।। जय महसमन मानस हंसा
अनुचित वहन कहेउअज्ञाता।। क्षमहक्षमा मन्दिर दोउभाता
कहिंजयजयजय रघुकुलकेत भगुपनि गयेवनहि नप हेतू॥
अपभये कुटिल महीपराने जह तहकायर गहि पराने॥
देवनदीन्ही दुंदुभीषभु परवरहि फूल।।।
हरणे पुरनर नारिसब मिटा मोह भरमूल ।।। २८३
प्रति गहगहेधाजन वाजे।। सगाई मनाहर मंगल साजा
यूथ यूथ मिलि सुमुख मुनयनी । कहिशान कल कोकिलवयनी
मुख विदेह करवरनिन जाई। जन्स दरिदमन निधि पाडी
वियन वासभइसीय सुरवारी जनुविधुउदय चकोर कुमारी
...
: ، پلکانی " बालकाय F जनक कीन्ह कौशिकहि परामा प्रभुप्रसाद,धनु भनेउरीमा। मोहित कन्यकी होउभाई अवजोउचित सोकहियेगुसाई कह मुनि सुननर-नाह पपीता रहा विवाहचाप साधीना। टूरत ही घनुभयेउ विनाह। सुर नर नागविदित मव काह। दो तदपिज़ाइलुस करे अवयथा वंश व्यवहार। बूमि विपकुलरध्द गुरु वेद विदित्त यांचा।। ६४ दूतमवध पुरवठवहजाईन टप दशरयहि खुलाई का मुदिन राउकहिभलेहरूपाला पडये दूत अवधतेहिकाला। नहरि महाजन संकलबुलाये आइसक्नसादर सिरनाये॥ हारबाट मंदिरसुर वासा नगर संवारह चारिउ मासा ।। हगपचलेनिज र रह न्याय।। पुनपरिचारिक बोलिएठाये। ग्यविचित्र वितान बनाई। शिरधरिवचनचले सनुपाई। पटये बोन्नि गुगी नेहि नाना : जोषितान विधि कुशल सुजाना विधिहिवन्दि नहि कान्हवरंभा - विकिनक कैदली खमा।। टो: हरित मापानकपत्रफल पमरागके फूल रंचनादेखि विचित्र अति मन बिरंचि के मूल।। २८५ विगु हरित मनिरामयसबकीन्ह सरससर्वा परहि नहि चीन्ह कनक कलित अहिवेलिवनाई लरिवनहियरसुवो सुहाई। नहिचिपचिवन्धवनायो बिचमुकता दाम सुहाये ।। मणिकमरकत कुलिशपिरोजा चीरकोर पचिरचे सरोजा ।।। किये टंगा वह रंग बिरंगात गुंजहि कुंजहि पवन प्रसंगा। सुरपतिमावभनगडिकादे मंगल द्रव्य लिये सब ठाढ़े। चौके भांतिमनेक पराई सिन्धुर मणिमय सहजसुहाई दो सौरभू पल्लव सुभगे सुटिकिय नीलमणिकार हेमबौर मरकन धरि लसत पाटमय डोर- Ma. + . 44 h . १५३ बालकाण्ड रचरूधिर वरवन्दनबारें मनह मनोभव कन्द संवारे॥ मंगल कलश बनेकपनायें। जपनाक मट समर सुहाये दीप मनोहर मणिमय नॉना। जाइन वसिा विचित्र विताना जेहि भयपटुलहिन वैदेही । सोवरणों जसुमति कवि कही। दूलहरामरूप गुगासागर सोवितानातिलोकजागर॥ जैनक भवनकी शोभा जैसी प्रति परदग्विये नसी। जेहितिरहुति नैहिसभयनिहरी हिलघुलगभवन देशमी जोसम्पदानी ग्रह सोहासोविलोकि सुरनायक मोहा दो "वसे नगरहिली करि कपूर नारि वर भेषा । 'तेहि पुरकी शोभाकहत संकुचे शारदं शेष।। २८७ पटचे दाराम पुरं पावना हरप नगर विलाकि सुहावन पहारिनिन खबर जनाई। दसरथ सप सुनिलिये बुलाई करि प्रगामतिन्ह पाती दोन्ही मुदित महीप सायउठिलोन्ही बारि विलोईन बाँचत पाती। पुलकगात बाईभरि छोती। रामलषगार कर वरची : पहिशये कहने न खाटीमीटी। पनिरिधीर पत्रिका वांचीहरषीलभा दान सुनिसांची ।। खेलतरहे नहीं सूणिपाई। आये भरत सहित दोउ भाई। कुन अति सनेह सकुचाई। जानकहां तें पाती पाई। दो कुशल माताप्रिय वन्धुदाउ अहर्हि कहकहिदेश सुनिसने सानेवचन गाली बहरिनरेश ॥ ॥ २६ मुनिपातीपुलकोउभाना अधिक स्नेहसमातन गाता, धोति प्रनीत मन्तली दरपी। संकलसभामुखलहेउविशेषी तुवन्स्पदूत निकर वैतारे।।। मधुरमनोहरवचन उचारे।। भैया कुशल कहङदोउ वारे तुम नीके निज नयन निहारेग श्यामल गोर घरेधनुभाथा तय किशोर कौशिकमुनिसाया 5 - :: بالی اند A बालकाण्ड १५६ पहिचान तोकहरू सुभाऊ॥ प्रेम विवम पुनि कह गऊ जादिनने मुनि गये लिवाई। तबते बाजुलाचि सुधि पाई॥ कहह विदेह कवन निधिजाने सनापय वचन दन मुसकाने दो सुनह महीपनि मुकर मरिण तुम समधन्यनकाउमा रामलषरा जिनकेतनय विश्व विभूषा दोउ २८ पूछन योग नेतनय तुम्हारेगा पुरुष सिंहतिह पुरउजियारे। जिनके यश प्रताप के भागे। शशिमलीन रविशीतललागे तिनकहकहिताय किमि चीन्हे। देखिय रविहिकि दीपकलीन् सीय स्वयंवर भूप अनेका।। लिमिटे सुभट एक ते ऐका शम्भुसरासन काहन दारा।। हारेसंकलभूपरियारा॥ नोनलोक मजे भटमानी। सवकी शक्ति शंभुचन भानी सकै उठाय मुरासुर मेरु॥ सोहिय हारिंगयांकरफेर जहि कौनुकशिव शैलउगवा माउनेहिसमायराभवाचावा दाहा नहारामघुवंशमणि सुनियमहा महिपाल मजेडचोपघयास विनु जिमि गज पंकजनाल. ३०० सुनिसरोषम्टगु नायक साये। वहत भांति तिनधारिख देखाये दारिख रामक्ल निजधनुदोन्ही करिवहविनय गवन वनकीन्हा राजतरामअतुलवल जैसे। निज निधानलया पुनितैसे कम्यहि भूप विलोकतजाके जिमि गजहारे किशोरकेता देवदेखि नव बालक दोऊ।। अवन धारिख तर शावत कोऊ दूत वचनरचना पियलागी प्रेम खतापवीररस यांगों सभासमेत राउअनुरागें ।। दूनहि टेन निशवर लागे। कहि-वनीत तेहि मूर्देउकाना धन विचारि मवहि सुषमाना तव उठि भूपवसिय कह दीन्ह पत्रिका जाई।। . कथा सुनाई गुरुहिमबे सादर दूत बुलाई।। ३० । दो १५४ वालकाएर सुनिबोले मुनि अति मुखपाई पुण्य पुरुष कह महि मुख छाई जिमि सरिता सागर महजाईयदृषि नाहि कामना नाही।। निमि मुख मंपति विनहिं बुलाये धर्मशील पहजाहिंसुभाय।। तुम गुरुविय चेनु सुर सेवी॥ तस पुनीत कौशिल्या देखी॥ सुरुनी तुम समान जगमाही भयउन है कोउ होनेउ नाहीं तुमत अधिक पुण्य व काके राजन राम सरिस सुतजाके॥1॥ चोर पुनीत धर्मवत धारी। मुगासागरंवालकवर चारी।। तुम कह सर्व कालकल्याना सजह बरात वजायनिशाना।। दो चलेउ बेगि सुनि गुरुवचन भालहि नाथ सिरनाइ भूपति गवने भवन तवदतहि वास दिवाइ॥॥ ३०२ राजा सब रनिबास बुलाई। जनक पत्रिका वाचि सुनाई। सनि संदेस सकन्त हरषानी अपर कथासब भूप बखानी। प्रेम प्रफलित राजा रानी मनहसिखिन सुनिवरिद वानी मुदित अशीश देहिगुरु नारी अनिशानेद मगन महतारी।। लेदिपरस्पर अति प्रिय पाती हृदयलगाइजुड़ावहि छाती। रामलषसाकीकीरतिकरी वारहिवारभूपावर बरनी।।।। मुनिप्रसादकहिद्वारसिधायो रानिनतब महिदेव बुलाये। दियेदान मानदमभेता॥॥ चले विप्रवरासिष देता। सा. याचकलिये इंकारिदिय निकावर कोरिविधि चिरजीव्ह सुनचारिचक्रवर्ति दशरत्यक।। कहत चलेपहिरे परनाना। हरषि हुने गहगहेनिशाना! समाचारसब लोगन पाये। लागेघरघर होनबंधाये।।। भुवन चारिदशंभरेउ उशहू जनकसुता रघुवीर विवाहू ।। सुनि शुभकालोग यनुरागे मगमहगली संवारन लागे। यद्यपि अवधसदैव सुहावनि - रामपुरी मंगल मय पाबनि॥ २८
है।
बालकार
१५५
नदपि प्रीति की रीति सुहाड़ी मंगलरचनारची वनाई।
खजपाकापट चामर चार। छावापरम विचित्र बजार
कनककलश तोरणा मगिजाला हरवं दधिचकृत माला।।
दो मालमय निजारभवन लालगनरचे बनाये
बीपीसींची चतुरसब चौके चार पुराया
जह तहयूथ मिलि भामिना सजि नवसप्तसकलदतिभामा
विधुवदनी स्टला शावकलोचनिः निज स्वरूपति मानविमोचनि
गावहिं मंगल मंजुल वानी।। सुनिकलवकलकर लजानी
भूपभवन किमि जाइवषांना विश्व विमोहन रचेउविताना
मंगलव्य मनोहर नाना।। राजतवाजत विपुल निशाना
कतई बिदबन्दी उच्चरही कुतह वेद धुनि भूसुरकरही
गावहिं सुन्दरि मंगल गीता लैनाम-राम अरु सीता।
वहत उकाहभवन अति थोरा॥ मानहउमगिचलाचह और
दो शोभा दशरथ भवनको का कवि वरो यारा
जहांसकल सुरशीश मणिरामलीन्ह अवतार. ३०४
भूयभरतपुनिलये बुलाई।हयगजस्यदन साजईजाई।
चलह वैगि रघुवीर वरता। सुनतेपुलकपूरेदोर सांता॥
भरत सूकल साहनी बुलाये भायसुदीन्ह मुदित उठिधाये
रुविरुचितुरंगसाजतिनसाजे व वर्गावर वाजि विराजे॥
सुभगसकल सुटि चंचलकरगी अयजिमिजरत धरतपगुधगा)
नानाभांति नाजाइवखाने, निदरियवनजनुचहतउड़ाने।
तिनसबकयलमये असवारा भरतसरिस सब राज कुमार।
सवसुन्दर सबभूषगांधारी करशर चाप तूगाकोट भारी
दाः छरेछवीले छयले सब सूर सुजान नवीन।
युगपदेवर-अमवारपतिजोनसिकला प्रवीन॥ ३०५
1...
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वालकापड १५६.. वांचे बिद्ध बीरगा गादि। निकसि भये मुर बाहेर टाडे॥ रहि चतुर तुरंगिनि नाना हरयहि धुनि सुनि पवननिशाना रथसारधिन विचित्र वनाये। धुजपताकमरिणभूयाका ववर चारुकिकियाधुनिफरही भानुयाल शोभा अपहरही। श्यामकरण अगिागातहयहोते. नितिन्हरयन्ह सारथिनजोते। सुन्दर सकल अलंकन सौहे। जिनहि विलोकित मुनिमनमोहे जेजल चलहियलहिकी नाईटापनवूड वेग अधिकाई।। अस्त्रशस्वसव साज सजाई रंथी सारथिन लिये बन्लाही) हो. चोद चदि रथवाहर नवारलागी जुग्नवरात। होतमगा सुन्दर सवहिजोहिकारजजात कलित करिवरन परी अवारी कहिनजाइजोहे भानिमवा चले मन गाज घराट बिराजे मनहसुभगसावन धनगाजे. बाहनपर अनेक विधाना सिविका मुभन मुरवासनयाना तिने चदिचले विष बरवृन्दा॥ जनुजनुधर सकल क्षुतिछन्द मागधसून वन्दि गुतागायक चलेयान चदि जोहिलायक वसर ऊंटरषभ बह जाती। चलेवस्तु भरिचाशित भाता कौटिन कांवरि चले कहारा। विविधवस्तु को वरीयाग।। चलेसकलसेवकसमुदाई।निजरमाजसमाज बनाई। दो सबके उरनिर्भरहरष रिनपुलक शरीर॥ कहि देखिहौनयनभरिरामलषगादोरवीर) ३०७ गरजहि राजघरोंदा निधोरण रथरव वाजिहीसचई श्वारे। निदरि घनहि धर्मरहि निशाना निज पराव कछ सुनियन काना महाभीरभूपति के हारे।।।। रजहोइ जाइ ययान यवारेगा चदीअशरिन देवाह तारी लयेत्रारती मंगल थारी।। गावहि मीन मेनोहर नाना॥ अति धनन्दनहिं जाइबखाना -
te
वालकाण्ड
--
१५७
तिवसुमन इस्यदन साजी जोते हयरविनिन्दक पाजी।
दोउग्यरुचिर भूपयहाने नहिंशारद प्रतिजाहिबखाने
राजसमाज एक रथ साजा। इसस्तेज पुञ्ज अनि राजा।।
दोहा नहि रथ रुचिर सिर कह हरषिचढाइ नरेश
अायुचढेंउस्पंदन सुमिरिहरगुरु गौरिगोश 360
सहित वसिर सोहन्यपकैसग मुरगुरुमगपुरंदर जैसे।
करि कुल रीतिवेदविधि राज देखि महिमबभांति बनाऊ
सुमिरिराम गुरु बोयनु पाई॥ चलेमहीतिशाख बजाइ॥
हखे विबुधविलोकि वराता वराह मुमन मुमगतदाताः
मवतकोलाहलय गज गाजे यामबरात बाजने बाजे।
सुरनर नारि मुमंगल गाई सरम गगबाजहिं सहनाई।
घराटरिण्ट धुनि वरगिन नाई सरौकरें पायक फहरोई।।
करहि विदूषक कौतुक नाना हास कुशल कलगान सजानी
दा० तुरंग नचावहि कुंवरवर अनि दंग निभान र
नागरन चितवहिचकित डिगहिनतालविधान ३
वन नवरात बनी बगना।। हाइसगुणगुन्दर सुभदाता
चारचारव बाम दिशि लेई। मनई सकल मंगलकहिंदेश
दाहिन काग सुवेत सुहावा नकुल दरश सबकाइनपावा
सानुकूलवतिविधिववारी मघट सवाल वारिवर नारी
लोकाफिर२ दशदिखावा सुरभीसन्मुख शिवहिपिशाच
दगमाला दाहिनदिशिचाई मंगलगगाजनुदीन्ह दिखाई
क्षेमंकरीकर क्षेम विशेषी श्यामा बाम सुतरूपरदेखो।
मन्मुख यायै दधि अमीन करपुस्तकविध प्रवीना
दो मगल भयकल्यास मयअभिमत फल दातार।
जेनुसबसाचे होन हितभये सगुण एक पार।।
वालकासत
मंगल शकुन सुगम भवनाके संगु ब्रह्म सुन्दा सुन जाकें
राम सरिस बरडलहिन सीता समधी दशरथजनक सुनीना
सुनि बस व्याह सगुज सदनाचे. अब कीन्हे विचिहम सांचे
यह विधि कीन्द्र विरात्ययाना: हय गज गाजहिं हनहिनिशाना
आवत जानि भानु कुल के सरिनन जनक पंचायसेन।
बीच वीच वरबास बनाये। सुरपुर सरित संपदा छायो।
अशन शयन वर वसनसुहाये पावहिं सवानिशमन भाये।
निन नूतन लाख सुख अनुकूला सकले दातन मंदिर भूता
भावतजानि बरातवर सुनि गाहमहे निशान
सजि गजरपट वर तरंग लेन चले बागवान ३१
कनक कलंश कलकी परंथात भोजनललित अनेकपकारी
भरे मुथा सम संब पकवाना मानि भोति नहि जायवधाना
फल अनेकवर वस्तु सुहाई। हरीष रहित भूसंपाई।
भूषण वसन महामगिनानो खगन्दगहयगजव्हविधियान
अगल सगुरो सुगन्ध सुहाये बहुत भाति महिपाल पटाये।
दधिचिडुवाउपहार अपारा॥ भरिभरिकादरिचले कहारा॥
अंगबानन जब दीवबंराता उरआनंद मुलक भरगोता
देखिवनाव सहित अगवानी सदित वातिन ने निशाना
दो हम परस्पर मिलन हित कचकचलेगामेल
जेनु आनन्द समुद्र दुई मिलत विहाइसुदेल ३१२
वरबि सुमन सुरसुन्दरि गावहि मुदितदेवदतमीबजावहि
वस्तुसकल राखी टप यागे: विनयकीन्ह तिन्ह अतिधनुरा)
प्रेमसमेत राउसब लीन्हा॥ भैवकंभीशयाचकन दोन्ही
करिपूसावर मानबड़ाई जनवासेकह चले लिवाई
वसन विचित्र पावडे परहीं पदसरथ नायर यावरही।
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. bje बालकाण्ड देखिधनदधनमदपर हरही विस समन्सूरजैजे करही। अति सुन्दर दीने उजनवासाजहंसबकह सबभातिसुपासा जानी सियबरात पुर बाई। कछनिज महिमा प्रगटजनाई हृदयसुनिरिस सिदिलाई भूप पहनई करनभाई। दो सियायसशिरसिदधारनाइजही जनवास लये संपदा मकले सुख सुरपुर मोगबिलास ३१ निजरबासविलोकि वराती सुरसुखसकलसुलभ सबभीनी विभबभेदकछकाहन जाना सकलजनकककरहिवताना मिय महिमा रघुनायकजानी हरषेदयू हेतु पहिचानी। पितु अागमनसुनत दोउभाई हृदयन प्रतियानंदसमाई संकुचत कहिनामकत गुरुयाही पितुदर्सनलालब भने माही। विश्वामित्र विनयवाड़ देखी उपजाउरसतोय विशेषीं।। हर्षि वन्धुदोउहृदयलगाये खुलकनगलोचन जल छोयो। चलेजहाँ दसरथ जनवासे मनोसरोवरतके पियासे।। दो भूचविलोके जबाह मुनि श्रावत मुतनसमेत। उठे हषि मखमिन्ध महचले थाहसी लेत।। ३१४ सुनिहिदण्डवत कान्हमहीशा बारपदरज घरि शीशा।। कौशिक राउलिये उरलाई कहि अशीशपूंडीकुशलाई पुनि दरावत करत दोउ.भाई.. देखियमति उर सुरखनसमा भुतहियलाइटमहडखमेटे तक शरीर मागाजन भेटे पुनिवसिय पद शिर निन नाये। पम मुदित मुनिवर उर लाये। दिन रन्दवन्देहभाई।।। मनभावत अशीशतिनपाई भरत सहानुज कीन्ह प्रणामाः लिये लढाय लाइ उररामा।। हरये लषा देय दौड भोतो मिलेप्रेम परिपूरन गाता। दो पुरजन परिजनजातिजन वाचक मंत्री मीनग लिये यथाविधि सहिप्रभु परम कपालविनीत ३१४ ... H S .
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१६०
वालकाण्ड
रामहि देखि बरात जुड़ानीप्रीति कीगेनिन जावयानी
न्टषसमीय सोहहिंमुतचारो जनुपनुधर्मादिक ननुधारी।
सूतन्ह सहित दशरथ कहदेवी मुदिन नगर नरनारि विशेयी।
सुमन बरखि सुर हनहि निशाना- नाकनी नाचाहिं करिगाना
सतानन्द अरुविमचिव तन मागधमृत विद्धयवन्दीजन।।
सहित वरात राउ.सन्माना॥ प्रायस मागि चले अगवाना
प्रथम वरात लगन ते बाई नाते पुर प्रमोद अधिकाई।
ब्रह्मानंदलोगसबलहही वदहि दिवसनिशि विधिसन
दो० गम भीय शोभा अवधिमुकत अवधिदाउराज
जह नहं पुरजनकहहिसमिलिनर नारिसमाज
जनक मुनि मूरति बैदेही दशरथ सुकारामधार देही
इनसम काहन शिवधाराध काइनाइनसमानफल साधे
इनसमकोउनभयउजगमाही हेनहिंकतई होनेउ नाहीं।
हुमसब सकल सुरूत कीरामी भये जगजन्म जनकपुरवासी
जिन जानकीराम छवि देखी। कोसुरुत्तीहममरिमविशेषा
पुनि देखव रघुवीर विवाहू ॥ लेव भलीविधिलोचन लाह।
कहहिं परस्पर कोकिलक्येनी यह विवाहवड़ लाइ सानयनी
बड़े भाग विधि बात बनाई। नियनयतिथि होइहै दोउभाई
दो बारह बार सनेह बसजनक बोलाउन सीय।।
लेन बाइडिंवन्ध दोउकोटिकाम कमनीय ३१७
विविधिभौतिहाइहिपहनाई नियन काहि अससासुरमाई
नवनब रामलषगाहिनिहारी॥ होइहि सब पुर लोगसुरक्षा
मखिजम गमलषणाकरजोटा नसेहि भूषसंग दुइ दोग।
श्याम गौर सब अंग सुहाये। निसन कहहि देग्विजे बाये
कहा एक मैं अाज निहारे। जनु विरचिनिज हाथ सबारे
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Altry.
वालकाण्ड
१६९
भरतराम एकहि मनुहारोग सहसालरिखनसकहिनरनारी
लषगाशवसूदनईकरुगा नखसिखने संवगअनूषा
मनभावहि मुखारणिनि जाई. उपिमा कहविभुवनकोडनाही
छ । उपमानकोउकह दाम तुलसी कवि कोविंद कहैं।
बलविनय विध्याशील शोमा सिन्धुइनसमयेल हैं
पुरनारिसकल पसारि अंचल विधिहि वचन सुनावही
चाहिय सुचारिउभाइइहि परहम सुमंगल गावही
सो कहहि परस्पर नारिवारि विलोचन सुलकतन
सरिव सेवकरण गरि पुण्य पयोनिधिभूपदोउ २८०
इहि विधिसकलमनोरयकरही खानन्दउमगिरउरभरहीं।
जिन्दपसीयस्यमम्वर शायदेखिबन्धुसंवतिनसुखपाये
कहत राम यश विशदविशाला. निजभवन में महिपाला
गयेबीतिककुदिन दहिभाती - प्रमुदितपुरजनासकलेवराती
मंगल सूल लगनदिनयावा हिमारितुधगहन माससुहावा
यहनिधि नखतोगवरवास लगन साधिविधिकीन्ह विचार
पछै दीन्ह नारद सन सोई॥: गुगीजनककें गंगाकनजोई
सुनी सकललोगनयहवाला कहहिज्योतिषीश्वहंहिंविधान
धेनुघालबेला निमल सकलसुसंगल मूल।
विप्रन कहेउ विदेह सन जानि समय अनुकूला। ३१०
उपरोहितहि कहेउ नरनाहान अब विलय के कारण काहा
सतानंद तवसचिव खलाये। मंगलकलशसाजि संबलाये
शरवनिशानपणाव वहसाजे । मंगलकलशंसगुनसबसाजे.
श्रुभगसुशासिन गांवहिगीता करहि वेदधुनि विप्र पुनीता
लेनचले सादर इहिमोती गयेजहाजनवास बराती।
कौशलपतिका देल समाजू प्रति लघुलगेतिनीहसुररान
।
2.0'.-... h १६३ बालकाण्ड भयेउ समय अवधारिय पाउ- यह सुनिपानिशानन पाज महिपतिकरिकुलविधिरना चलेसँग मनि साज समाजां। दो भाग्यवि भाग्यविभवन शकरदेखि देवब्रह्मादि। लगेसराहन संहस मुखजानिजन्म निजवादि११८ सुरनसुनवालनपसरजाना रवाह सुमन वजाइनिशाना शिवब्रह्मादिकविबुध वरुया चढे विमानन नानायूचाग प्रेम पुलक तनहृदय उदाह चलें विलोकन रामविवाह। देखिजनकपुर सुरश्चनुरागे निजरलोक सवहि लघुलीगे चितवहिं चकित विलोकिविताना रचनासकल अस्वेकिक नाना नगर नारि नररूस निधाना सुधुरसुधर्मसुशीलसुनाना तिनहि देखि ससुर सरनारी भयेनखत जनुविधुउजियारी विधिभियावयाविशेषी निजकारणीका कतनदेषी दो शिवसमुफ़ाये देवसबजनि चाम्बयसलाह। हृदय विचारह धीर भरिसियरधवीरविवार ३२० जिनका नाम लेत जग सकल मंगल मूलन शाही करतल होहिं पदारथ बारीसियरामकहेंउकामारी। इहिविधि शम्भुसुरनसमुझावा पुनि भागेवरवसह चलाया। देखेदशरथजाता महामोदमन पुलकित गाता साधुसमाज संगमहि-देवा जनुतनघरे करहिसुखसेवा सोहतसाण मग सुतचारी जनुअपवीसकलततुधारी मरकत कनकवानबरजोरी दिखि मरनभैप्रीतिनापारी एनि रामहि विलोकिहियहरले पहिसराहिसमनतिनवरखे दो रामरूप नवसिख शुभग वारहि वारनिहारे । पुलकगात लोचनसनलउमासमेत पुरारि ३२९ केकि कण्ठद्धतिरगामल नंगा नड़ितविनिन्दक वसनसुरंगा ITA
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वालकाण्ड
१६६
व्याहनिभयगतिविधि बनाये -- मंगलमयसवमति सुहाये।
पारदविमल विभुवदनमुना नयननवलराजावलजावना
सकल बलौकिक सुन्दरलाई कहिनजाय मनहींमनभाई।
वसुमनोहरमोहहिसगा। जातनचावतचपलतरंगा
राजकुंवरवर वाजेनचावहि
वाप्रशंसकविरद सुनावाह
हित्तरंग पर राम विराने गतिविलोकिरवगनायकलाज
काहमजाइसवातिसुहाना वाजमेराजन कामतनावा।।
नुवाजिसेववनाइमनसिजगसहित अतिसोहही
जाकी वरात में राजादसरथभरत शहनादिप्रययावारिस
बॉकोजनकपुर में जाना और पानी लेना ।।
THUROHIT
. الی از۱۳ L १ १६४. I + A १ " + . बालकाण्ड अपने वय वलरूपगुण गति सकलभवनविमोहड़ी जगमगनिजीन जडाऊजोति सुमोति मानिकनेहिलगे किंकिणाललामलगाम ललितविलोकि सुरनानुनिगगे दो प्रभु मनसहिलयलीन मनचलतवाजि हतियार भूषगाउलगातड़ितघनजनुवरं बरहि नचाव ।। ३२२ जहिबरंगाजि राम वसुबारागः निहिशारदतनावरी पारा।। शंकरराम रूप अनुरारो।।।। नयन पंचदशश्चतिप्रियंलागे हरि हितसहित रामजबजोहे रमासमेत रमापति मोहे। निरखि रामकवि विधिहरषांने - साठेनयनजानि पकिताने। सुरसेनप उर बहुत उछाहू॥ विधितेदेवरे लोचनलाह। रामहिसिनव सुरेश सुजाना ॥ गौतमश्चापपरम हित माना। देव सकल सुरपतिहिसिहाही . आजु पुरंदरसम कोउ नाही। मुदित देव गणारामहि देखी स्पसमाज हं हरष विशेषी का अति हर्षराज समाजदह दिशिद्धन्दमा वाजहिपनी वरहि सुमन सुरहरषिकहिजयजयतिजयरघुकुलमनी इहिभातिजानिबरातभावतवाजनेबड़वाजहीं। रानी सुनासिनिबोलि परिकन हेतु मंगलसाजही ३६ दो सजिवारती अनेक विधि मंगलसकल संवारि. चली मुदित परिकनकरन गजगामिनि बर नारि ३२३ विश्वदनी संग शावकलोचनि. स्वनिजतनुलवित मदमोचन पहिरवरगा परतावर चीरा॥ संकूल विभूषरांसजे शरीराध सकलसमंगल गवनाये : करहिगान केलकण्ठलजाये ककरा किकिसानूपुर वाजहिः - चालविलोकिकामगजलाज वाजहिवाजनं विविधिप्रकार नभचरुनबारसमंगलबारा: शनी शारदारमा भवानी जें सुरतियचदिसहसवानी 1 ។ . --
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जोसुखभासियमातु मन देरिखाराम वर भेवा
करनारिवरभेष बनाई। मिलींसकल रनिवासहिचाई
करहिं गान कल मंगलबानीहरष विवसवसकाइनजानी
काजानिकाह मानदवशसब्रह्म वापरिकनवली
कलगानमधुरनिशानवखहि सुमन सुरशोभाभली
यांनदकन्दविलोकिलहसकल हिय हर्षित भई
अम्भोज अम्युक खम्बुउभंगि सबंग पुलकापलिई १७
14
--
दो
सोन सकहि कहि कल्पशन सहससारदा शेष ३३४
नयन नीरहाट मगलजानी गरिनेकरहि मुदित मनरानी
बेदविहित अरु कलव्यवहार कीन्ह भलीविधिसव परिचार
पन्न शनि मंगल गाना
यावडेयरहि विधि नाना
करिचारती अधीतिन दीन्हा॥ गमगवन मरजेप्रतवकीन्हा
दसरथ सहित समाजबिराजे।। बिभव विलोकिलोकपतिकाजे
समय रसुवर्षहि फूला॥॥शातिपदहि माहि रेशनुकूल
नभ अरुनगरकोलाहलहोई आपनपरकह सुनेन कोई।
इहि विधिराम मरुपहियायें अपंदेहासनवैगये
है वैठार अासन भारती कार निरतिवर सुख यावहीं
मगिवसन भूषसाभरिवारहिनारि गलगवहीं।
ब्रह्मादिसुरवर विन भेय बनाइ कौतुक देखहीं ॥ ३८
अबलोकि रविकुलकमल रवि सविसुफलजोवनलेखहीं
नाजवारी भाटे न राम निकावरि पान॥
मुदित अशीशहिनादशिरहीन हरय समाः।। ३२५
मिले जनक दशरथ अतिप्रीती करिवरिक लौकिका सबरीती
मिलतमहादोडराज विराजे उपिमाखोजिर कवि साजे
लही न कतई हारिहियमानी इनसमयेऽपिमा.उरानी।।
' 14 १६६ बालकारात समधी देखि देव अनुरागे। सुमन वरषि यशगावनलागे जगविरचिउपजावाजवतेः। देखे सुने व्याह वह तब ते मकलभाति समसाजसमाजू समसमधीदेखे हम बाज देवं गिरा मुनि सुन्दा माची प्रीति अलौकिक दरदिशिमाही देत पावडे अर्थसहाय सादरजनकमपहिल्याये छ' मंडपविलोकि विचित्ररचना सचिरता मुनिमनहरे निज पागि जनक सुजान संबंकह निसिहासनधरे कूलइए सरिसे वसिर पूजेविनय करिचासिपलही कोशिकहियूजत परम प्रीति किरीत तीनपरैकही। समदेव बादिकं वरषय पूजे मुदित महीश दिये दिय शासन सबहिं सबसनलही अशी वहाँरे कीन्ह कोशलपति पूजा जानिशसम भावना जा कीन्हजोरिकरविनय कराई। कहि निज भाव विभवरहताई पूजेभूपतिसंकलबराती।। समधी सम सादर सबभांती॥ आसन उचितदये सब काहू कहोकहा मुखएक उकाहू। पकलबरातजनकसनमानी दान मानविनती वरवानी। विधि हरिहरदिशपति दिनराज जानहि रघुवीरप्रभासी। कपट विश्वरभेषवनाये कीतुक देखहि प्रतिसचु पाये पूजे जनक देव समजाने दियेसुबासनविन पहिचाने। ॐ. पहिचान कोकेहि जान सवहिवामानसुखभरिमई मानन्दकन्द बिलोकि दुलहउभयदिशिवानदमई मुरलवेराम सुजान यूजे मानसिक स्वासन दिये अवलोकि सरल सुभावप्रभु कोविबुधमनप्रमुदितभये रामचन्दमुखचन्द विलोचन चारुचको।।। करतपान सादर सकलप्रेमप्रमोदन घो। - १ ३३ 171, JAN पालकारत २.६७ समयविलोकि वसिव चुलाये सादर संतानंद मुनि आये बैंगिकंपरिच भानहजाई ले मुदितमन भायम पाई रानीसुनि उपरोहित वानी।। प्रमुदिन सखिनसमेतमयानी विप्रवधूकुल रब्द बुलाई। करिकुलरीतिसमगलगाई नारि वेबजेसुर वरनामा सकल सुभायसुन्दरीश्यामा निनादेखि मुख पावहि नारी दिन पहिचान प्रागा ते प्यारी।। वारवार सन्मानहिं रानी रानी उमारमा शारद समजानी।। सोय संवार समाज बनाई मुदितमारपहिचली लिवाई चलिलाइ सीतहि सखी सादरसजि सुमंगल भामिनी ।। नवसा साजे सुन्दरी सब मन केजर शामिनी कलगान सुनि मुनि ध्यानत्यागहिकासकोकिललाजहीं मजोर नपरकलित ककरा नालगति वरचाजहीं सोहत वनिता वेदमहे सहज सुहावनि सीय।। छवि ललनांगा मध्यजन मुखमा तिय कमनीय सिय सुन्दरता नरगिन जाईलघुतिवहन मनोहरलाई सावन देखि वरातिन सीता राशि स्वभाति पुनीतांग सबहि मनाहि मन कीन्ह पनामा देखिरामभये पुरण कामा।। हरष दशरथ सुत्तन समेता॥ कहिनजाद्र धानेदजेता। सुरपणास करिवहिं फूला सुनि अशीशधुनिभंगलमूला मान निशान कुलाहल भारी। प्रिम प्रमोद नगर नर नास इहिविधि सीयूमंडपहिचाई। प्रमुदित शान्ति पदहिं मुनिराई निहि अवसरकरि विधिव्यवहार, वडकुलगुस्सद नान्ह बचास भाचारकरिगुरुगौरिगाति मुदितात्र जानहो मुर पगट पूना लेहिं देहिंधशीशमुनि सुख पार मधुपर्क मंगल बेंजोजेहि समय मुनिअन में वह 1
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बालमराह
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-भरेकनक कोपरकलमासर्वकरलियेपरचारकरहै।।
"कुलरीति प्रीतिसमेतरविकहिदेत सर्वसादकिये ।।
हिभातिदेव पुजाई मीतहि समग सिंहासनदिये
मन बुद्धिवरवानी अगोचरपगटकविकैसे करें ।
सियराम अवलोकनपरसरप्रेम काहुनलारतपरे
'होमसमय तनु धरि अनल अनिहित महातिलाल
विभरि वेदसंवकहिविवाह विधिदेह ।।
जनकपारसहिमीजगजानी मिया मातकिमिजाय वरवानी ।
उपना मुक्त सुरव सुन्दरताई सवसमेरिविीधरची वनाई।
समयजानिमुनिवरन उलाई सुनत सुअसिन सादरल्पाई।
जनकवा मदिवासह मुनयना हिमगिरिसंगवनीजनु मयना।।
कनककलशमाराकोपरकरे अचिसुगन्ध मंगलजलपूरे
जनकारवयम नजीम गीजानकीजी सय विवाह
Fa
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HTTHURMAINiminuintHiIAL || HEALTRAMmnuallptunTINE
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२६ - divya बालकाण्ड निज कर मुदित राउौरानी परेरामकेशागे बानी।। पदहि वेद मुनि मंगल बानी। गगन सुमन करिअवसरजानी पर विलोकि दम्पति अनुरागे पाय पुनीत पवारन लागे। इं लगे पखारन पाय पंकज प्रेम तन पुलका बली। नभ नगर गान निशान जयधुनिउमगिजनुचंद्रदिपलली जिपद सरोज मनोज बरि उरसदैव विराजहीं॥ ४४ जसुकति मूनि विमलता मनसंकलकारेमलभानहीं जेपरसि मुनिवनिता लहीगति रहीजोपानकाई मकरंद जिनको शम्भूसिर ध्रुचिता अवधि सुरवरनई कारमधुप मुनिमनयोगिजनजैसेई अमिमतिलहै येत तिपदपवारत भाग्यभाजनजनक जयजयसबको ४५ बाईवर करतलजारिशारवोच्चार दोउ कुलगुरको भयो पाणिग्रहणाविलोकि विधि सुरमनुजमुनिअानंदभैरे सुखमूल दूलहदेखिदम्पति पुलकितनुहलसहिये करिलोकवेद विधान कन्यादानन्यभूषण दिये हिमवंतजिमिगिरजामहेशहि हरिहि धीसागरदई तिमिजनकरामहि सियसमा विश्वकंलकीरतिनई इकौर करि जोरी भगनिगौरि मूरति सावरी करि होमविधिवत गादिजोरी होन लागीभावरी॥ ४७ दो जय धुनिबन्दीवेदधुनि मंगल गान निशाना सनिहरवहिवरहिमुमन सुरतरु सुमन सुजान ३३० कुवारे कुवार कल भावर दही नियनलाभ सब सादरलेही। जाइनवरनि मनोहूंरजोरी ॥ जोउपिमाकछु कहियेसोथोत रामसीय सुन्दर परिवाही।। जगमगाहिमागावभनमाहीं। मना मदन रति धरिवहरूपा देवहिराम विवाह अनूया। t .
14
वालकास्न
दशा लालसा सकुचनथोरी प्रगटत दुरत बहोरिवहोरी।।
म मगन सर्व देवन हारे। जनकसमान अपान बिसारे।।
प्रमुदित मनिन भावरी फेरी निगसहित सबरीति निवेरी॥
रामसीयसि सिंदर देही । शोभाकहिनजात विधिहीने
अरुण पराग जलजमरिनीके शशिहि मूष चहिलोभनमीके
वहरि बसिय दोन्ह अंतुसासन र दुलहिन बैठे यकवासना
" वैठे बरासत रामजानकि मुदितमन दशरथभये।।
तन पुलकि पुनिर देव अपने सुरुत सुरतसफलनये
भारि भुवत रहाउलाह राम विवाह भासवहीं कहा।
केहिभाति वरणि सिगत रसना एक मुखमंगलमा. ४८
हजनकपास्वसिवायसव्यासाजिसेवारिके।
मांडवी तिकीर्ति सम्मला कवरि लडकारिके।।
कुशकेतुलन्यांप्रथम जोगुराशिौलागाशोभामई
सबरीतिप्रीति समेत करिसोच्याहत्तम भरतहिदुई
जानकी लघुभगिनिजो सुन्दरिशिरो मारा जानिके
सौजनक दोन्हीव्याहिलपमाहिंसकलविधि सनमानिके
जेहिनामभुतिकीरति सुलोचनिसमुखिसक गुणा नागरी
सोदई रिसुसूदनभूिपति रूपशीलज्जागरी।। ।। ५०
अनुस्वादुलहिन परस्परलरिख सकृति हिय हर्षाही
सव मुदित मुन्दरता सराहहि सुमन सुरेगा वर्षही।
सुन्दरी सुन्दर वरमा सब एक मंडये राजहीं।।
जनुजीउ उरचारिक अवस्था विभुन संहितविराजहीं
12. मुदित अवधिपत्ति सकल सुत वधुत समेत निहारि
जनुपाये महिपाल मणिकपनसहित फल चारि ३३
जसरघुवीर व्याह विधिवरणी सकल कवरमा तेहिकरणी।
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141 " : adhu बालकाण्ड कहिन जाइकछु दायज भूरी। रहा कनक मणि मंडप कम्वल बसन विचित्र पटोरे। मातिर वह मोलन चरिंग गजरज तुरंग दास अरु दासी : धनुअलंकृत काम डहासी। वस्तुअनेक करिये किमिलेखा कहिनजाइजानहि जिन देखा लोकपाल अवलोकिसिहाने लोन्ह अवधपतिसबसुखमान दीन्ह यांचकन्ह जोजेहिभावा । उवराजोजनवासहियावा नवकरजोरिजनक म्वानी। वालेसबबरात मनमानी सनमानसकलदरात सादरदान विनयबदायक। पर मुदित महामुनिरन्दवन्दे पूजि प्रेमलगाय । सिरनाई देवमनाय संबंसन कहतकरसम्पुट किये सुरसाधुचाहतभावसिंधुकि तोबजल अंजुलिदिये ५३ काजोरिजनकवहारिवन्धु समेत कौशल राय सों वोलेमनोहरवचन सानिसनेह शीलसुभाय से। सम्वन्धराजनरादरे हमदडे अवसब विधि भये। यहराज साजसमेत सेवकजानिवीं विन गयलये।।५३ यहंदारिका मारचारिकाकार पालिकोकरुणामयी। अपराध क्षसियोबोलिपच्येवडत. ही बीवीदयो। पुनिमानुकुलभूषा सकल मतमानविधिसममकिये कहिजात नाहि विनतीपरस्पर प्रेमपरिपूरराहिये। रंदारिका गणसुमन वरवहिराउ जनवासहिचले। टुंदुभी धुनिवेदधुनिना नगरकौतूहल भले।। तव सरिखन मंगल गानकरत मुनीश जयसुपाईकै दुसहलहिन संहितमन्दरिचली कुहर ल्याइकै ५५ दो पनि रामहि चितव सिय सकचतम सकुचन हरित मनोहरमीन कवि प्रेम पियासे, नैनः।। ।। ३३२ ५४ 44..
हरतवाल रविदामिन जोती . उहू प्राचरनलगेमारा मोती reak ९७२ बालकाण्ड वामशरीरसुभाय सुहावत॥ शोभाकोटिमनोजलजावन पावकजुन पदकमल सुहाये। मुनिमनमधूपरहतजई काये। प्रीति पुनीत मनोहर धोती॥ कल किकि कटिसूत्र मनोहर बाह विशालविभूषण सोहर पीरजनेउ महाकवि देई। करमुद्रिका गोरिचितलेई सोहतन्याह साज सबसाजे उरसायत सबभूषा राजे पीतज्वरना कांखो सोतो॥ नयनकमल कल कउल काना बदनसकल सौंदर्य निधाना सुन्दरझकुटि सनोहर नासा भाल तिलक वषिरुचिर निवास सोहत मौरमनोहर माथे। मंगलमय मुकता मणि गाथे छ गाणे महा मारी मार मंजुल अंग सूचितगारही निनारि सुन्दरवर विलौकहिनिरखिडवितानारही मगिावसन भूषणा वारिपारतिकरहिं मंगलगावही सुरसुमनवहिं सूत मागधवन्दि सुयशसुनावही ५६ कुहवरहिचाने कुंवाकुर्वरि सुवासिनिन् मुखपाईकै अतिप्रीतिलौकिकरीतिलागीकरन मंगल गाइके। लहकौरिगौरि सिखावरामहिंसीयसन सादरकहू रनिवास हास विलास सरवसजनमकोफलसलहै ५७ निजपाशिमणिमहं देखि प्रतिमूरतिस्वरूप निधानकी चालतिनभुजवल्ली विलोकनिविरहवसभइमानकी कौतुक विनोदप्रमोद प्रेम नजाइकाहजानहिवली) वरकुंदरि सुन्दरसकल सलिनलिवाइजनवासहिचली ५८ तेहिसमयसुनिय शशीराजहंतहनगरनामानंदमहा चिरजीवह जोरीचासचारिउमदित मनसवही कहा। योगीन्द्रसिदमुनीशदेव विलोकि प्रभुदन्डभी हनी।।
PAN Jodier बालकारातः चले हरषिवरषासून निजरलोकंजय ३ मनी पर सहित वधूटिन कुंवर सब नचाये पितु पास ... शोभामंगले मोदभार उमगेजन जनवास॥ ३३३ सुनिजेवनार भयेउवहभाता पठयजनकवलायवराती॥ परत पावले वसन अनूपा सुतन समेतू गवन कियूभूषा सादर सबके पाव पखारे। यथायोग पोहन वैगरे धोयेजनक अवधिपति या शीलसनेह जाय नहियरमा। बहरिराम पदपंकज धोये जिहरहृदय कमल महंगोये॥ लौनोभाइ राम सूमजांनी पोयचरा जनकनिजेपानी आसनचितसवहिन्पदीन्हे बोलिसूपकारीसव लीन्हे ।। सादलगेपरन पनवारे कनकरवीलमणिपालसवारे को सूपोदन सुरभी सरपि सुन्दर स्वाद पुनीत क्षणामहं सबके परसिगे चतुर साविनीतः ३३४ विचकोरकार जेवनलागे। गोरेगान सुनिति अनुराग भोतियनेक परे पकवाना।। सुधासरसनाहि जायवरवाना यसनलगे सवार सुजाना व्यंजनविविधि नाम को जाना।। चारिभौतिभोजन विधिगाई एकरक विधिवरगिन जाई।। करसंकविरव्यंजनवहनाती॥ एकरस अगणित भाती। जेवत देहिमधुरधुनि गारी॥ लैले नाम पुरुष अरु नारी॥ समयसहावन गारि विराजा॥ हंसतराउमुनिसहित समाजा नित नूतन मंगलपुरमाहीनिमियमरस दिनअमिन जाही देपपान पूजजनक दशरथसहित समाजमा जनवासे गवनेमदित संकलभूप सिरताज रहि विधि सवही भोजनकीका बादासहित आवमनलीन्हा बड़े मोरभूपतिमागाजागे जाकमुनिगमागावन लागे दरिदकंववरवधुनसमेत किमिकाहजानमोदमदजेता पात किया कटिंगैगरुपाही महाप्रमोद प्रेम मन माहीं । - करि प्रगामपूजाकरजोदीं।वोलेगिरा ऋमियजनुवोरी।
-4-
बालकाण्ड
तुम्हरी कपा सुनिये मुनि राजा मये श्राजु मम पूरला काजा
अबसर्वविय बुलाई गुसाई दिहधेनु सबभाति बनाई।।।।
मुनि गुरु कार महिपालबडाई पनि मठये मुनि सन्द बुलाई।
दो वामदेव अरु देव ऋषि वालमीक जावालि
आये मुनिबर निकर तब कौशिकादि तपसालि ३३६
दंड प्रगाम सबहिन्दपकीन्हा पूजि सप्रेम वरासन दीन्हा।।
बारिलम वर धेनु मगाई काम सुरभिसम शीलसुहाई
सब निधि सकल अलरुतकीन्ही मुदित महीय वरपिन कहदोन्ही
करत विनय वरविधितरनाह लह धानुजगजीवन लाह॥
माइ नशीश महाशश्वनन्द लिये बोलिपुनि याजकरन्दो।
कनकनसनमगि हयगजस्यदन दियेवूफिरुचि रविकुल नंदन
बले पात गावत गुशागापा जयदिन कर कुल नाया।
इरिविधि राम विवाह उछाहा सकैनवरण सहस मुरवजाहू
बारबार कौशिक चरण शीश नाइ कह.राऊ॥
यह सब सुखमुनि राज तव रुपा कटाक्षप्रभाउ ३७
जनक सनेह शील करतूती पसबभाति सराह विभूती।
दिन उडि विदा अधिपति मांगा. रासहिजनकसहित धनुरागा
नितनूनन खादर अधिकाई दिनप्रतिसहस भांतिपहनाई
नित नवनगर अनदउछाह दसरथ गवन सोहाय ने कार
वहत दिवसनीत यहि भाती जनु सनेह रजु राधे बराती।
कौशिक सतानद सब जाई कही विदेह न्रपहिसमुगाई
अब दसरथ कह खायस देह यदपि काडि नमक सनेह ।
भलेहि ना कहि सचिवबलीये कहिजयजीव शीश नित नाय।
दापूवध नाय चाहतंचलन भीतर कर हु जनावमा
भये प्रेम बस सचिव सुनि विप्र सभासद राक
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| होइहहं संतत पियहि पिपारी
बालकास्त
पुरवासी सुनिचली बराता यूनविकल परस्पर बानी।।
सत्य गवन सुनि सूबविलखान मिनहसाझासर सिजसकुचाने
जहंजहं आवत बसे बराती॥ तहसीचलावहभाती
विविधिभौति मेवा पकवानाम भोजन सजिन जाय परवाना।
भरिभरिक्सन अपार कहासः पठये जनक अनेक संसार
तुरंगलाख रय सहम पचीस सकल संवारे नख के शीशा
मत्त सहस दश सिंधुर साजे, जिनहिदेखि दिशिकंजर लाजे
कनक क्सन भगिभरियाना महिषी धेनवस्त विधि नाना
दायज अमितन सकियकहि,दोन विदेहगुहार
जो अबलोकत लोक पति लोक सम्पदा योरि।।
संबंसमाजयहि भौति बनाई जनक अवधपुरदीन पठाई
बलिहिं. वरात सुनहि सब रानी विकलमीन गाजितु लघुपानी
पुनिरसीय गोंद करले । देइ अशीश सिखावन देहो।।
सासु ससुर गुर सेवाकरहू। पति रुख लखि प्रायसुझनुसर
अति सनेह वस सरवी सयानी... नारिधर्मसिसहि मुटुंदानी
सादरसकल कुंवर समजाई. गनिनवार उरलाई। 1si
बहरि बहार भेटहि महतारी कहहि विचिरबी कत नारी
दो तहि अवसरं भाइन सहित रामभान कलकतुः,
चले जनक मंदिर सहित विंदा करावन हेतु
चारिउ भाइ सुभाय सहाये नगर नारिनर देखनधाय॥
कोडकह चलनचहत्तहहिबाजू कीन्ह विदेह विदा कर साजू।
लेह नयन भरिरूप निहारीण प्रिय पाहन भूपसुत चोरी।।।।
को जाने केहि सुकत सयानी नयन तिथि कीन्हे विधि खान
मरणाशील जिमि पाव पियूषा सुरतरुलहेजन्म कर भूरवा।
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بالائے ہیں ॥ १७६ वाललाएड पाव नारकी हरिपद जैसे। इनकर दरशन हम कह से निरखि राम सौभाउरघरह। निजमनफारिस सूरति मणिकरह यहविधिसवहिनयन फलदेत गये कंवरसव राज निकेता दो रूप सिधसब बन्धु लम्बहराषउटी निवासु. करहिनिशवर भारती महा मुदित मन सासु।। ३४१ देखि रामछवि प्रति अनुरागी प्रिमविवसपुनि पूनि पद लागी रहीन लाज प्रीति उर छाई। सहजसनेह वाशि किमिजाई भाइनसहित उवाटचन्हवाये इस वशनप्रति हेतु जिवाये बोलेरामसुअवसर जानी॥ शीलसनेह सकुच मय वानी॥ राउ अवधपुरचहन सिधास। विदाहोन हितहमहि पठाये।। मातुं मुदित मन बायसुदेह वालक जानिकलनित नेह॥ सुनत वचन विलदेउ रनवार वलिनसकहिं प्रेम रस सासे।। हृदय लगाय कंपरिसवलीन्हीपतिनसहितविनतीनतिकीन्ही कारे विनय सियारामहिसमाजोरकरपुनि कहे बलिजाउं तात सुजान तुमकह विदित गति सबकीय परिवारपुरजन मोहि राजहि माताप्रिय सियजानिवी तुलशी सुशील सनेह लखि निजीकाकरीकरिमानिची तुम परिपूरण काम ज्ञान शिरोमणि भायप्रिय जन गुन गाहकराम दोष दलन करूगायतन असहि रही चरणोगहिरांनी । प्रेमपंकजगिरा समानी ॥ सुनिसनेहसानी वरवानी बहविधि राम सासु सनमानी रामविदा मांगत करजोरी कीन्ह प्रणामबहोरि नहोरी। पाइप्रशीश बड़ा शिरनाई भाइनसहितं चलेरघुराई। मंजुमधुर सूरतिकर यानी भईसनेह सिथिलसवानी॥ पुनि धीरजपरिकुवरिहंकारी वारवार भेटहि महतारी ।।
Hathee
वालकाण्ड
पहूंचाहि फिरिमिलहिवहोरी बिदीयरस्पर प्रीति नमोरी।
पनि मिलति सरिवनविलगाई वालवत्सजन धेजुलवाई।।।
दो प्रेम विवस नरनारिसब सरवन सहितविपास
सानह कीन्हविदह पर करुणा बिरह निवास ३४२
भुक शारिकजानकी जिनाये कनक विचरन राखिधराये।
याकुल कहहिकहावैदेहीं । सुनिधीरजपरि हरैन कही।
भये विकल खगमगडहिभाती मनुज दशा कैसे कहि जाती
वन्युसमेत जनकनवाये प्रिम उमागिलोचन जलाये
सीम विलोकिधीरतामांगी रहेकहावत परम विरागी
लीन्ह राउ उरलाइजानकी मिटीमहा मर्याद जानकी
समुझावत संवसचिव सयाने कीन्हसुभावमवसर जाने
वाराहे बार सता उरलाई सजिसन्दरियालकीमगाई
दो प्रेम बिबस परिवार सब जानिसुलगन नरेश
कंधारे चटाई पालकी समिरे सिदिगोश ३३
बह विधि भूपसुतासमुकाई नारिधर्म कुलरीतसिखाई
हासी दास दियेयह तेरेवचि सेवक जेणियसियको
सोपचलत व्याकुल पुरवासीहाइसगानुभमंगल राशी
भूसुरसचिव समेत समाजासिंगचल पहुंचावन राजा
गजरथ माज वरांतिनसाजे सुनिगह गहे बाजने बाजे॥
दसरथ विश्वोलि सर्वलीन्हे दान मान परिपूरगा कीन्हे ।।
चरण सरोज धारधार शीशा मुदित महीपति पाईनगी
मुमिरिगजानन कीन्हपयांना मंगले मूल सगुणभै नाना
दो सुरप्रसून वरहि हरषि करहि अप्सरा गान
चले अवधपति अवधपुर मटित वजानिशान ३४४
सकी विनय महाजनकेरे सादरसकल मोगन.टता
A
Ur
الفاظ م AM 4- we.. 'बालकाण्ड भूषण वसन वजि गज दीन्हे | प्रिम पोषि गढे सब कीन्हे ।। वारवार विरदावलि भाषी।। - फिरेसकल-- रामहि अगषा वहरि कौशल पनि कह ही जक प्रेम वस फिरान वहीं पुनिकहभूपति वचन सुहाये - फिरियमहीय दूविड़ि आये। नरबहोरि उतरि भये गठे ॥ प्रेम प्रवाहविलोचनवादे नव विदेह वोले करजोरी वचनसनेह सद्याजन वोरी। कसैकंचन विधिविनय सुहाई महाराजमोहि दोन्ह वडाई। दो० कौशलपति समधी सजन सनमाने सबभांति मिलनयरस्पर विनयकार प्रीतिन हृदयसमाति ३४५ मुनिमण्डली जनकशिरनावा नाशिरवादसहि सन पावा। सादर पुनि भेटे जामाता रूपशील गुणनिधिसभाता जोर पकाह याणि सोहाये वोलेवबन प्रेमजनु जाये॥ गमकरौं केहिभांति पसाय मुनि महेश मनमानस हंसा॥ करहियोगयोगीजेहि लागी। कोहमोह ममता मंद त्यागी यापकब्रह्मबलख अविनासी: बिदानंद निमा गुणा राशी॥ मन समेत जेहिजानन वानी तरकि न सकहिसकल अनमानी मरिमानिगल नेतिकारकही जोतिहकालकारतरहहो। दोष नयन विषय सोकह भयउसी समस्त सुखमूल सर्वहिसलमजगजीवक भये ईश अनकले ३९६ सबाहमांत मोहिदीन्हवराई निजजनजानि लीन्ह अपनाई होइ सहस दशारद शेषा : करहिकल्प कोरिक भरिलेषों मोर भाग्य राउर गुरा गाया। कहिन सिराहि सुनिय रघुनाथ कछुकही एक वल मोरे तुमरीमउसनह सुठियारे॥ चार बार नागोकर जोरे। मनमरिहरेहनाजनिभोरे। विपरववत प्रेमजनु पोधे। पूरणाकाम राम परि तोयें।। - AD, - ....an ६ i JI बालकाण्ड करिवर विनयससुर सनमाने कोशिकवसिव समजाने विनंती वहरि भरत सन कीन्ही मिलिमप्रेम पुनियासिवादी दो मिले लषा रिपुसूदनाह दीन्ह प्रशाशमहीश भये परस्पर येम बस फिर फिर नावहिं शीशग३४ वारंवार कारबिनय बड़ाईगा रघुपति चले संग सब भाई जनक गहे कौशिक पर जाईचारेन भिर नयनन लाई जोसख स्यश लोकपतिवहही करतमनोरपसकुचतग्रहहीं सुनमुनीशं सब दरशन तोरे अगमनकछ प्रतीति मनमा सो.सुख सुयशंसुलभमोहिस्वामी संवृसिधि नवदीन अनुगामी कीन्दविनय पनि पिर नाई। फिर महीपति आशिष पाई। चलीवरात निशान बजाई। मुदितकोटव सव समुदाई रामहि निरषि ग्राम नर नारी पाइनयनफल होहिंसधारी दावीच २बरवास कार मंगलोचन सुखदत।। अवधि समीप पनीत दिन पहची साइजनेता.३४८ हनेनिशान पगांव वह वाजे भिरि तिनिहये गय गाजे अझ मृदंग डिमिडिमीसुहाई सरसरागवाजेसहनाई।। सूरजन भावत अकनिवरातों मुदित सकूलपलकावलि गाना निज रसुन्दा सदनसंवारे॥ हाटवाटचौहत पुरद्वारे।। 'गली सकल अरगजा सिचाई जहं तहें चौकेचा पुरोई।। बनावजारन जात वरखानाग चोराकेत पत्ताक वितालाम सफल पुंगफलकदलिरसाला रोयेवकुल कदम तमाला लगे श्रुभगतरुपरसत्तिधरसी मणिमयमालवालकारकरणी दो विविधिभांति मंगलसकल ग्टहररचे सवारि॥ सरब्रह्मादिसिहाहिंसवरघुवर पुरी निहारि॥ ३४० भूपभवन तेहि अवसरसोहा विना देखि मदन मनमाहा -
Dr.
चालकाएर
मंगल शकुल मनोहर ताई रिष्टि सिटि सुख संपदासुहाई
जनुउछाहसव सहजसुहाये। तनुधार र दशरथसहाये।
देखनहेतराम वैदेहीं। कहह लालसा होइन केही
यूचर मिलिचली सूझासिनः निजकवि निदरहिमदनविलासिनि
सकलसुसंगलं सजीभारती गावहिजन भेव भारती॥
भूपति भवून कुलाहल होई जाइननरगिसमय सुखमोई
कोशल्यादिरासमहतारी॥ प्रेम विवयतनदशाविसारी॥
दिय दान विपन विपुल पूजि गोश पुरि।।
प्रमुदित यरस दलिजन पाइ पदारथ चारि।। ३५०
प्रेमप्रमोद विवस सव माता । चलहिनचरगोशिथिल संवेगात
रामदरश हित पति अनुरागी परिकनसाजसजनसबलागी
विविधि विधान वाजनेनाजे मंगल मुदित सुमित्रासाजे॥
हरदद्वदपिलवफूला॥ पानपुंगफल मंगल मूला
अक्षत अंकुर रोचन लाजा मंजुलमंजरि तुलसि विराजा
छरेपुटपट सहजसुहाये। मदन शकुनि जनुनीरवनाये।
शकन संगधन जाहिवयानी मंगलसकलसहिसरानी
भारतीविधिध विधानामदिन काहि कलमंगलगाना
दा० कनक थारभरि मंगलनिकमलकरलालये मात्र
चली मुदितपरिकतकरनपुलकपनावित गात ३५१
धूपमनमम वकमयऊ सावन पनघुमजनुछ येज
सुरत सूमन मालसुरवरवाह मनहदिल्लाकि प्रतिमनका
मजुल मणिमयवंदन वारा मनहपाक रियु चाप सवारा॥
प्रगटहिरहिरन परभामिन चारुचपलजनुदमकहिदामिनि
दमीधुनिघन गरनहि धोराग याचनातक दोडर मोरा।।
भूविसुन्धवहवरवहिवारी खुरखीसकलशिपुरनर नारी
mbólin
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वालकारा,
१८१
समय जानि गुरुयायमुदीन्हा पुर प्रवेशरघुकुल मणि कीन्हा
समिरियम गिरजागरण राजाय मुदितमहीपति सहितसमाना
दो दोहि शकुन वरषहि सुमन सुरइन्दगी बजाइ ।
विविधि वधूनाचाहि मुदित मजल मंगल गाइ।. ३५२
मागर सूत वान्द नट नागरंग गावहि यश तिर लाकउजामा
जेधुनि विमल वेद वरवानी दशदिशि सुनिये सुमंगल सानी
विपुलवाजने बाजन लागे नभसुर नगरलोगअनुराग
वनेवराती बरशिन जाही॥ महाभूदित मन सुखन समाही
पुरवासिन तव राउजुहारे दिखतरामहिमये सुखारे।।
करहि निनावरि मणिगगाची बार विलोचन पुलक शरीरात
भारत करहि मुदित नरनारी हिरषहि निरखि कुवर वाचारों
शिविका सुभग यौहार उधारीदेखिदलहिनिन् होडिसगरी
दो गहिविधि सवहीं देन सुख नाये राजधागा
मदित मातु परछन करहिं वधुन समेतकमार ३५
करहिवारती वारहि वारा प्रेम प्रमोद कहे को पारा॥
भूषण मणि मट नानाजानी॥ करहिं निकावर जगणिताती
बधुनसमेत देखि सुन चारी॥ परमानन्द मानं महतारी
पुनिरसीय रामाचे देखी॥ मुदित सुफल जगजीवन लेखी
मरवीसीय मुख पुनि र चाही गान करहिं निज सुकत सराही
वरपहिं सुमन क्षगाहिं क्षणदिवा नारहिं गावहिलावहिं सेवा
देखि मनोहरचारिच जोरीग शारदउपमासकलंदोरी
देवन बनहिं निपट लधुलागी इकटकरही रूप अनुरागी।
दोर निगम नीन कुल रीति कार वरण पावड़े देता
वधुन सहित सुत परछि सब बलीलिवाइनिकेत ३५४
चोरे सिंहासन सहज सुहाये जनु मनोज निज हायवनाये
Unit TATAH ९८२ पालकार तिन पर कुंवरि कुंवर पैगरे। सादरपाय पुनीत परवा ।। धूप दीप नैवद्य वेद विधि। पूजेवरडलहिन मंगल निधि चारहिवार धारनी करहीं। व्यंजन चाम चामर सिरदरहीं वस्तु अनेक निछापर होही भरी प्रमोद मातु सव सोही पाबा परम तत्तु जन योगी अम्मतलबजनु संतत रोगीण जन्मरकजनु पारस पावा। अंधहिलोचन लाभ सुहावा।। मूकवदनजसशारद छाई। मानह समरसूरजय पाई।।।। इह सुरवते शतकोटि गुगा पावहि मातु अनद भाइनसहित विवाहं घर नयाये रघुकुल चन्द। ३५५ लोक रीति जननी काहिबरडलहिनि सकुचाहि : मोदविनोदविलोकि वह राम मनहिं मुसकाहिं ३५६ देव पितर पूजे विधि नीकी पूजी सकल वासना जीको । सवहिबन्दि माहिं वरदाना माइनसहित राम कल्यान संता हितसुर नाशिष देही। मुदितमातुअंचल भरि लेही। भूपति वौलिवानिन लीन्। यान वसने मणिभूषा दीन्ह। आयसुपादूराखि उर रामहि मुदित गये सब निज र चाहि पुरनानारि सकल पहिराये घर घरवाजहिवनदधाय।। याचकजनयाचहिजोईजोई प्रमुदित राउदैइ सोइ सोई॥ सेवक सकल बजनिया नाना पूरा किये दानसन माना ।। दो दहि बशीशजहारिसब गावहिं गुगागागाय : तव गुरुभूसुरसहितग्रह गरन कीन्ह नरनाथ। ३५७ जावसिय अनुशाशन दीन्हा लोकवेद विधि सादर कीन्हा भूसुर भीर देखि सब रानी सादरउठी भाग्य व जानी।। पाय परवारिसकल म्यन्हवाये - जिभली विधि भूपंजिवाये। मादा दान पेज परि तोष। दित अशीश चले मन सोधे।। ...
میں پائی جائے۔ + । M ----- बालकाएर १६३ वविधि कीन्हें गाधिसुत पूजा-नाथ मोहि सम धन्यादूजा। कीन्ह प्रशंसा भूपति भूरी गनिन्हसहित लीन्ह पमधूरी भीतर भवन दीन्ह बर बासू मन जुगवत रह स्पेनिरयावास पूजे गुरु पद कमलबहोरी॥ कीन्ह विनय मन प्रीनिन थोरी दी. बन्धुन समेत कुमार सक्रानिन्ह सहित महीश पुनि मुनि सन्दन गुरु चरंगा देत अशीश मुनीश ३५८ विनय कीन्ह उरति अनुरागे . सुतसम्पदा राखि सब बागे। निग मागि मुनि नायक लीन्हा प्राशिरवाद वहत विधिदीन्हा उरधरि राम हिंसीय समेता हरषि कीन्ह गुरु गमन निकेना विवधू कुल रज्द वुलाई॥॥ चीरचाक भूषमा पहिराई॥ वहारे बुलाइ सुयासिनि लीन्हीं... रुचि विचारिपहिगवन दीन्ही नेगी नेग योग सब लेही गा रुचि अनुरूप भूप मरिग देही। प्रिया पाइने पूज्य जे जाने। भूपति भली भांति सनमाने। देव देखि रपवीर विवाह वरषि प्रसून पासि उछाहू॥ दो. 'चले निशान वजाइ सुरनिजरपुर सुरवपासा कहत परस्पर रामयश हर्ष न हृदय समाइ ३५० सब विधि सहि मुदित नरनार रहाहृदयभरि घरि उछाह॥ जाहं रनिवास नही पगु-धारे सहित वटिन कुंवर निहारे लिये गोद करि मोद समेता। कोकहि सके भयउ सुखजेता वधू सप्रेम गोद वैगरी। बार बार हिय हर्ष दलारी। देषि समाज मुदित रनिवास सब के उर, शानद विलासू कहेउ भूपजिमि भवउ विवाह सुनि सुनि हर्ष होत सर्व काहू जनकराज गुण शीलबंडाई प्रीति रीति समंदा सुहाई।। वन विधि भूपभार जिमिवरण रानी सब प्रमुदित मुनि करशी दो सुंतन समेत नहाइ टप बोलि लिये गुरु ज्ञाति 1 3G 1 الار 11. JAN बालकाण्ड भोजन किये अनेक विधि घरी यांच गई राति ३६० मंगल गान करहि बर भामिन भई सुख मूल मनोहरयामिति अंचे पान सब काहन पाये।। स्वग सुगन्ध भूषित्त कविये रामहिं देरिव रजौयस् पाई। निज भवन चले शिर नाही। पिम प्रमोद विनोद बड़ाई। समय समाज मनोहर नाई। कहिन सकहिं क्षुति शारदेश वेदविरंच महेस गोधू॥ सोमैं कही कवन विधिवरणी भूमि नाना शिरपरैकिधरण। यसबभांति सबहिं सनमानी कहिट दचन बुलाई गनी॥ व लरिकिनी पर घर बाद सरवहनयन पलक की नाई दो लरिकाभ्रमित उनींद बस शयन करावह जाइ अस कहि गये विनाम टहरामचरमा चितलाई ३६१ भूय बचन सुनिसहजसुहाये जटित कतक मागपलंगरमा सुभग सुरभि यय फेनु समाना कोमलकलित सुपेत्ती नाना प बरहन वरवरणि नजाही स्वंग सुगंध मरिग मंदिर मोही रतनदीपमुठिचार चंदीवा॥ कहतनवनै जान जोहिजोवा सेजरुचिरचि रामउठाये ॥ प्रेम समेत पलंग पौनाये। आजा पुनि २ भाइन दीन्ही निजू २ सेज शयन निन कीन्ही देखि श्यामद मजल गाता कहहिं सप्रेम वचन सवमाता मारंग जान भयावनि भारी॥ कहि विधितात.लाडका मारी ही घोर निशाचर विकट भर ससर गर्ने नहि काह मारे सहित सहाय किमि वल मारीचस्बाइ ३६२ मुनिरासाद ग्ल नात तुम्हारे ईशचनेक कर वो टारे ।। भाव रखवारी करि दुइभाई यस प्रसाद सब विद्या पाई मुनि तियातरी लगत पंगधूरी कीरतिरहीभुवनभरि पूरी॥ कमठ पीठ पविकर कठोर नपसमाजमह शिव धनुहोर
बालकाएर
विश्व विजयं यश जानकि पाई जाये भवन व्याहि सब भाई
भकलनमानुष कर्म तुम्हारे। केवल कौशिक रूपा सुधारे
नाजु सुफल जग जन्म हमारे देखि तात विधु वदन तुम्हारे
दिन गये तुमहि विनु दवविरचि जनि पारहि लेखे।
हो रामप्रतोषी मातुसबकहि विनीत वरवयन
सुमिरि पाभु गुह विन पद किये नींदवस नयन ३६३
नौदह बदन सोहि मुठिलोना मनह सांझसरसोरुह सोना
घरघर करहिजागरणा नारी देहि परस्पर मंगल गारी
पुरी विराजित राजत रजनीगरानीकहहिं विलोकह सजनी
सुन्दरिदधु सासु ले सोई॥ फरिणापति जनुभिरमणिउरगोई
मात पुनीत काल प्रभु जागे अरुणचूड़ बरबोलन लागे
बन्दीमागध गुरा गा गाये पुरजनहार जुहारन आये।।
वन्दीविन सुरपुर पितु माना याइ शीश मुदित सबैमाता
जननिन्हसादर बदनिहारे भूपति संग द्वार परा धारे
दो : कीन्ह शौच सवसहज भूचिसरित पुनीत नहाइ
पातकिया करितातमहं प्राये चारिउ भाई।।
भून विलोकि लिवें उरलाई हराब रजायस पाई।
हिरिव राम सब सभा जुड़ानीलाचन लाभ अवधि अनुमानी
युनिवशिष मुनि कौशिकूनाये सुभगसुन्नासन मुनि वैगये
सजन समेत पूजि पद लागे
निररिव राम दोउ उर अनुराग
बहिहि वसिय धर्म इतिहासा सुनहि महीप सहित रनिकासा
मुनिमननगमगाधिसुतकरी : सुदितवसिय विपुल विधिवत
वान दे सूब सांची कीरत कलित लोकनिहलानी
सुनि मानंदभपे सरकाह॥ रामलषरण उर अधिकारका
दा० मंगलमोदउशहनिनजाहिदिवस इहि मानि
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राम नमसंगमब भामा
बालकाएड.
उमंगी अवध अनंदरिनीधकार अधिकात ३६५
सुदिन साधि कर ककरणहार मंगल मोदविनोद नथारे
नित न मुख सुरदेखि सिहाही वधूजन्म याचहि विधि पाही
विश्वामित्र चलननितचहही रामसप्रेम विनय वस रहहीं।
दिन रसदगुणा भूपत्ति भोज, देवि सराह महामुनि राऊ ।।
मांगत विदाराड अनुरागे सुतन समेत ठाट भये आगे ।।
नाय सकल सम्पदा तुम्हारी मैसेवक समेत सुत चारी।।
करब सदा लरिकन परछोह दरशन देत्तरहर मुनि मोह।।
असकहिउ सहितसतरानी परेचरमा मुख खावूनवानी
दीन्ह अशीशविर वह भाती चलेनप्रीति गनि कहि जाती
दो रामरूप भूपति भगति व्याहउछाह अनदगांग
जात सराहत मनहिमन मुदितंगाधिकलेचदा ३
वामदेव रघुकुल गुरु ग्यानी बहार गाधिसुत का वरवानी
सुनि मुनि सुयशमनहिंमनराक
वरसात प्रायन पूरायप्रभाऊ)
बहरेलोग जायसु भयऊ सुतन समेत स्पति ग्रह गयेज
जह नहं राम ब्याह यशूगावा - यशपुनीत लोक तिहकावा
आये व्याहिराम घरे जबते॥ बसेपर्ने अवधसब नबनें।
प्रभु विवाहयश भयउउदाहीं सकहिंनवरणिगिसअहिना
कविकुल जीवन पावनजानी राम सीयं यश मंगल खानीमा
हिते मैं कछु कहावरवानी करण पुनीत हेतु निजवानी
० निजोगिया पावन करता कारण रामयश तुलसकियो
रघुवीरचरित्नपार वारिधि पार कवि कवनेलझो
उपवीतल्याउलाह मंगल सुनहिंसादरगावहीं
वैदेहि रामप्रसाद तेजनसर्वदा सुरव पावही ६१
मुनि गायकहौ गिरीराकन्याधन्य अधकारीसही नितप्रीति नूतनसुना हरिगुणाभक्तिअनुपमतेलही रघुवीरपदचनुरागजललोभारिनवेगिवुझावई यह जानि तुलसीदासमनकमवचनहरिगुरागावई दो कठिन कालमलग्रसितननुसाधनकछुकनहोइ पट्टविचारि विश्वास करिहारे सुमिरैधि सोई॥ सो मनहरिपद अनुरागकरह त्यागि नानाकपट।। महामोह निशिजागसोवतवीतेकाल वह ॥६॥ सियरघुवीर विवाहजेसप्रेम सादर सुनहि। तिनकह सदा उदाहमंगलायतनरामयश इति श्रीरामचरित मान सेकलकलि कलुष विध्वंसने विमल वैराग्य विज्ञा नसन्तोषसंपादनोनामप्रथम सोपान .