Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Kavi Shri Mala Tamil
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कृषि-श्री माला
समित
सुब्रह्मण्य मारती
सम्पारक-मनुवारह
कम शिवराम शर्मा
राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा
प्रकाराक
मोहातात ना,
राष्ट्रभाषा प्रचार समिति
हिदीनपर बर्मा
माधिभर मुरमित
प्रथम संस्करण-1..
मई, १९६२
मूम्प- २/-
भोपनबाप्त कर
राष्ट्रमापा प्रेस
लिममर, पर्या
मामुख व विषय है A राष्ट्रमापा-प्रचार-ममिति पय असे कार्य के २५ पर्ष मन् १९६१ में पे का रम है। स उपळसमें मनाये जानेवाले रखता-ज्याती महोत्मक्के अक्मा पर मम्मे मारतीय मापायोके मान्य पियोग तथा उसे स्पष्ट पाव्या परिक्य कवि-श्री भाका' की पच्चीस पुस्तकम हिन्दी गानुपाद महित प्रसमित पानी योजना अन्तर्गत प्रस्तुत सन्द पाठमोके समय आ रहा। यपि किमी मी प्रपाके सर्वप्रष्ठ सय मत मिश्य पाया कि कठिन कार्य है फिर भी अफी सीमाओको प्यासमें रमते हुए गम्यमन्प उन उन मापात्रोके विपकी राय से या पर्व मम्पन्न किया गया है। प्रत्येक पुस्तक आरम्मम पिम आपके विकी स्वनाओका चयम टिया गया। अमापा माहिरपना परिचय और वि पिलेषका परिचय दिया गया है। मि मापासेदो पवियांचा पुष्प किया गयाउस पुप करते समय सन् १९२ से पूर्वका साहित्य और १९२ मे बारा मास्पि-म तम्मे एक विमान रेम प्यानमें रमी मित्र कारण पाकिमण मन् १९९० के पूर्वक तथा १९२ के गले मीत्यमें प्रवाहित पिचर-वाराम व विशेष प्रसास्वा अध्यायमा पया आता। बीक म निरामयी बनि प्रस्तुत पुस्तकमे मलित सस्मिको पुने, पायाने मापति सपा अभूतिमममी मामामीने म कपो प्रमत्त परम सम्योग दिया । पुस्तकमे कति पिणे प्राप्त का भी प्रार के परमाने मी अन महमोग दिया। ममम्की आपरम पियानो बया की वही इन मस्करमी (बमर मे. मे उगम्दीटयूट आफ अप्ला आर्ट, बर्मा) का उम सम्योग मिला है उसके Rो मामिति की आपरी । के अतिरिका मा पा अम्पान्प दृष्टियोमे बिग-विनय प्रस्पत एवं भारया मान मिस्त्र, असे प्रति भी ममिति प्रकृयामा व्यक्त करती है आश प्रस्तुत संप पाठमोजे शक्ति व उपयोगी प्रतीत मेस। - hidarin e मंत्री राष्ट्रमापा परममिति
अनुक्रमणिका
पृष्ठांक
तमिम साहिस्प परिचय [प्रारम्भ से १९२० तक] ३
कमि-परिचय
२९
काम्प सम्पय
[कवि-श्री माछा-समिक]
सुब्रह्मण्य भारतो
[फोटो को मार. पदमनामनके सौरम्प प्राप्त
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तमिल साहित्य परिचय [प्रारम्भसे १९२० तक]
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तमिल भाषा और उसका साहित्य । मनादि काम्मे मासेतु हिमाचल प्ररेप एक राष्ट्र माना मया है। प्राचीन कामसे ही गमाके सार-साय यमुना मोरावरी मरस्वती नर्मदा सिन्धु मौर कामेरीके माम सिमे पाते है कापीके साथ-साप रामेश्वर, वारसा और दानापके नाम से पाते है। भारतवर्षकी यह मियोपता है कि इस राष्ट्रीय एकता के होते हुए भी विभिन्न भापा मापी प्ररेणोंकी वपनी-अपनी विशिष्टता सबसे ही बनी पी। हमारे देयके हर भू-पागका रहन-सहन बान-पान या पानाबा साही मपनापना अमग हा। मापाडी भिन्नता पा रही। विधेप स्पसे रमिनको भापाएँ उत्तरकी पापामासे एकदम भिन्न पी। पक्षिमकी मापाएँ वि परिवारकी है। इस परिवारकी मर चार प्रमुख पापाएँ तमिह तेलम्, मम्मा मौर मम्मातम प्रचलित है। स साहित्य सम्पन्न बार मापामोके महापा मम्प कई मोहिमा भी प्रभक्ति है। परमाना कठिन किमि मोप भारतके माविम निवासी पे का गहरसे माए। तोगोका विश्वास है कि मारतके मारिम निवासी थे कुष्मन्यकोगोंगा पिस्वास है कि भारत पश्चिममें जब यहाँ अरब सामर है यहाँ एक बड़ा भान पा पो मारतको मासे घोरता बा। उस समय विमान्य प्रदेसमें एक समा पा। एका भूप हमा जिसमें मग्रमा भौर भासको मोड़नेमाका भू-मान तो बस ४ मम्न हो गया और हिमाम्म प्ररेणा समा संसारका सोम्मत पर्वत बन मा। बीका मोर भारतको बोक्नेबामे प्ररेहके निवासी भारत मा बसे और अनिक कागए। कुछ लोपोका यह विश्वास है कि पिक उतरसी मोरसे भारतमें माये। इन तीन मोमें कौन-सा ठीर है, मह कहना कठिन है। पर इतमा निश्चित कि एक समय पा पब द्रविड़ भारत परमें माप्तये। मिा परिवारको भाषाोंमें समिझ सबसे अधिक प्राचीन है और इसका साहित्य काफी सम्पन्न । कर मिस्याओं माना है कि यह मापा सत्सव भी अधिक प्राचीन है। पर इतना निश्चित है कि दोनों भापाबोने एक दूसरेसे बहुत कुछ म्पिा ठरा एक दूसरेको गत कुछ रिया। पचपि तमिक मापाने भी संसातसे गलिया पो मी मन्म मापार्योकी मपेमा उसपर ससम्तका प्रभाव कम ही पड़ा। तमिपकी प्राचीनता कोई सत्तए नही है। ऐसा माना जाता है कि इस पापाके पिता सिमली है। प्राचीन तमिड साहित्यके तीन संघ-काम" माने पाते है। तमिश मापाकी उन्नतिके दिए पागसंष मदुरा नामक नमरमें स्थापित या। इस सबकी स्थापनाकी कहानी यों है -बगस्त्य मुनि बम भिषकी मात्रापर निकमे तब पिबगीने उन्हें तमिळ भाषा सिखाई। अगस्त्य मुनि (रमिनमें ) मम्म-प्रदेश वा पनि मीर बही मपना बामम बमाकर एने तमे। हाँ उन्होने एक तमिल-अनुवीन समिति' स्थापित की। इस समितिक कार्यम कांगोय तमकी सहायता करते थे। उन दिनों मदुराम बो रामा राम्प करता था पर पापप गएका उसके कई गरवारी पनि बास्स्परे निकट सम्पकमें पते थे। एक बार बस पापप रागाने ममम या विचार वाया कि राधाका प्रोत्साहन पाकर मापाकी उमतिका काम अधिक सफल्ता साप चल सकेगा। बमस्त्य मुनिको भी बात पंच पई। गनुपाचन समिति गब सब माम से मारा था पापी। बपस्त्व मी पही पाकर पने हो। यह मारा गबर वर्षमान मारा मदरसे बात पर पतिम मा। पापप राधामोंमसे एक मनमें बाया कि एगानी समुरके किनारे ये तो बा होगा। वह अपनी पगबानी माग हटाकर पाटपुरम् (या कपाटपुरम् ) मामा समा तटवर्ती नपरम के गया। तब मापका प्रबम सब समाप्त हुमा मौर माटपुरम्भा मम्मम संघ अपना वितीय संघ स्थापित बा। बस रामपानी के बारेमें भी योग विस्वास है कि मधुरा पम्-मन हो पया तर ममम संबका भी बम्ब हुमा क्याटपुरम्म मई मामी बनी म रितीम चकी स्थापना हुई। म है कि प्रथम संपरा m.पों तक रहा और शिवीग संघकाह. पोतका इस परम्-परिमानमें अतिसयोक्तिहोमस्ती परमार पुरमका पत्लेख रामायन मोर महापारधर्म हवा है। तुल्सीराम अनुसार पम्म (पिपी) मुम्बन (मयास्प) पास प्रेता युग पए। यहाँस तारते पर मा। - ५ पिपनी रणकारम्पमें सौताके पिरहसे म्माकुछ पीरामचनगीसे मिले। इस दृष्टिसे मानना ही पामा कि ममस्य मुनि रेतायुममें ही रधिगमें पहुंच गए रे मोर मिय मापाफी रम्नतिन प्रयत्न करने मगे। इसी मामारपर मानना होगा कि कपाटपुरम् परि मधिक नहीं वो तीन चार हमार वर्ष पुराना तो अगस्य ही है। कुछ समय पारपारपुरम् भी बालमन्न हो गया। उसके साथ रिलीय संग मार वितीय संबराहमा भी बन्त हुमा। जब काटपुरम् पानीमें एप गया तर पार रामाभोंकी नई राममानी बतमान मदुरा नगरमें स्थापित हुई। पहन हम कपरमा कोई इमरा नाम का परन्तु परमठीन रागाने अपनी पुण्नी रामपानीका नाम ही इस नई रामपामीको बिया। यहाँ दतीय या अन्तिम मपी स्पापना हुई। पाते है कि यह सप १८५० गो तक सकिस पसे मापाकी सेवा करना रहा। ऐतिहासिक प्रमामोसे विरित होवाकियह संबईमा बार दूसरी मरी तक पता। संभव है उस समय पापप रागात्रोंपर कोई महान संक्ट माया हो मौर इस कारपसे वृतीय सबका मन्त मया हो। इस उप प्राचीन मिठ साहित्यमे तीन संक-काठ माने जाते है --प्रपम सब-कोड मम्प (हितीय) संघ-कास मोर मन्तिम (पवीय) संघका। प्रपम संभ-कामकी कोई ना उपमष नहीं है। रह पाता है नमस्रम मुनिने तमित भ्याकरणकी रचना की थी। उसका नाम "भगत्तियम् ।। बारके साहित्पमें इस मगलियम्" से मृत कई मंच य-तब पापे पाते है। इन रसरमसि पिरित होता है कि यह प्रपम संबकामकी रपमा है। इमरे संपकासको बस एस रचना बब रपम्प है। उसका नाम है, "तोड काप्पिपर" का तोहफाप्पियम् ।" "ठोसम्मम्मियम् " माकरण प्रम है। *तोकाप्पियर" कार्य है-पोतमाप्पियम् बामे"। इसके रचयिता समान्य कोई मानमरी प्राप्त नहीं है। माना जाता है कि ये पाति ग्रामप रे मोर अगम्रप मुनिने सिप्प थे। “वोस काप्पियम् " गायक “माप्पियम् को कुए होम पाप" स्पान्दर मानरर तोस माप्पियम् " का पर्थ प्रयम या पुराना पाम्प करते है। म मापारपर रे यह मिररना चाहते है कि तमिठो प्रयम काम्पमें ही समय पगरा पोप हुमाई रम पूर्व मिड मापार्मे कोई रचना ही सम्मयत नहीं थी। या मियाम्त कुछ ठीम्सा महाँ हगता। “माप्पियम् और “इयम्" लदो पामि बना हुमा सामासिप मम है। इमका मर्ष होता है “निवास रोति' "तोहराप्पिपम् " का मर्प 1 प्रपम या प्राचीन नवास गठित . - तमिम मापामें 'म्याकरण' को इसमयम्' कहते है। परापागमका क्षेत्र प्यारमके क्षेत्रमे मधिक विस्तृत होता है। "इसाकपम् की उत्पत्ति संसारक "म्सगम् " सपसे गई है। "बगचियम्" मार "पोमाप्पिपम्" दोनों "इसरपम्" है। तमिबाणके तीन विमाप ई-बसर दिमाग पम्प बिमाम और विपय विभाग। प्रथम दो विभाग पो सर सपा पम्प मापामोरे माफरोंमें भी है पर पिपर दिमाग तमिहका अपना एक बिप विमाप है। तमिळ साहित्पमें मानव बस्ती पांच भर माने गए है-(१) गुम्बी-अत् पहाडी प्रदेश (२) मुसी-जति पन प्रदेश (३) मलम- बाव र भूमि (४) नेपाल प्रति समातीर मार (५) पाम बर्मात् मा प्ररेप। इन पांचों प्रदेसोके निवासियोक माचार-विचार मौर पबहारकी अरूप-अरूप रीतियापी। इन प्रकिपिभिन्न पापारोश वर्णन साहित्पमे किस प्रकार हो किन मापारोंना पन हो मारि “इमम् "दीसरे (विपप) पिपायका पिपप है। साहित्यिक विषयमाग माने गरें 1-मई मार पुरम । बाई या मर्द भीतरी" है। मनुष्यो मन्तकरणमें उत्पन्न होनेवाले प्रेम विस्वास प्रदा कोष मप बारि भागा वर्णन इस 'बह नामक भाषमें रहता था। 'पुरम" का वर्ष पास। इसमे मनुष्पके प्रेमालाप पुर घासन मापि कार्य कापाका बन रहा था। इन सी बातन्नि निरुपम ही तोलकाप्पियम् तीसरे विमायका विषय है और इसी परसे रचनाका मामकरणमा है। तमिम स्परको जीवाशर और पंचमको कायाभर पावे। नाम बहुत ही सारंग सरोंमें ''नहीं। अनुस्वार मौर विसर्व नही है। 'ए' गौर 'मोदी-नरोनों माराके इस ममी तमिव भाषामे है। तमिल पापामे एक पिप स्पर( )बिसका उम्भारप बा है। यह मामुनिक उच्चारण पर मानम पाता है कि प्राचीन काल में यह स्परम्पयन माने या पीछे मार रस भजनक मापारपमें कुछ अन्तर पैरा कर देता पा। तमिम बसमागमें ससस्तके सभी गर्म नही। उन सनी पोको मूषित करने तिमिल लिपि लिस्ती मुम्ती प्रयामर नामक लिपि प्रचलित हमी है। इस प्रकारका प्रभाष समिक पर बक पर बमा पड़ा कि एसका डोप-सा हो गया। वमिस वर्षमागम भगनोंकी संम्मा यात कम है। मामरी बगमाहाके वर्ग र स्वर्ग तब मोर पवर्ग-म पांच वकिपीत धमनोके समानपर या व पवनी-तर वर्षका प्रथम भार मन्तिम ममा मन है। भिक मापार पेम्वन इस प्रकाराम ८ प मोर म। इनमें - मम नौर म समयमें कोई कठिनाई नहीं है। पर तौर पका रचारन मम प (परि कमी-कभी ह) रमौर में हो सका है। रिम ७ मसरला रमा उचारण होमा इमो रिए मो एए नियम है। तमिसमें प मौर से वर्ण तोपर पम मारह नहीं है। प्रयासरफ प्रभाव परिणाम सरप मब ये पगम भी तमिहमें प्रवाहित हो गए है। तमिछमें चार नए पंगन है गो हिन्दी में प्रचमित नहीं है। है पळ बार । M पक्षिा मापात्रोका एक वियप मंगन है। मायरस यह ममर टेम्पु मौरकतामाषामों में मही पाता है मम तमिष्ठ और मलयालम भापामॉमें प्रचलित प के रचारपमें गो हस्का-मा मार है उमः स्यानपर पसार हानेपर इम मसारका उच्चारण हो पाता है। तमित पारमा मन्तिम मगर यही है। इम बक्षरको मूचित करना लिए वप मापाभा मार नहीं है.मलिए इमरेस्पानगर हमारा उपयोग किया जाता है। “तमिह" पालना गर मप “मिप" है। तमित में हिन्दीका हमार मपठौरा ळ दोनों प्रचलित है। वमिममें एक माग ""होगा। इमन्त्र चारण समारणमे पुण्यधिक पस्प है पर नहीं है। इस प्पयनकी एक बिगेपता हैसके हित्वका चारण "," होता है। तमिममें एक निमेष "म" है। "बार बानेबामे म मौर इम "न" के उपचारनमें अधिक मेट नहीं है। पर इसके लिए नियम है कि रिम मका प्रपोग महाँ करना चाहिए। तमिम माहित्पर तीन विमाप है-पक में मोर माटकम् । मोरे पौरपर इससको काम्प माना जा सकता है। सौ सगीत है मोर नाटकम नामका समाना है। एमा माना गाताtr प्राचीन काठमें तमिममें मगीन माहिन्य मोर नाटक साहिायकी मी बहुच उन्नति दी। अब जैन बार बार प्रमाला प्रायस्प हुमा तब न पोती साहिवान मामा। मंगीतकी एक प्राचीन परम्परा श्री गोमा नई पी। इस परम्पराका उस्सेख प्राचीन पाम मिलता है। तमिह प्रोम बोह पाप और बेर-पतौन प्राचीन राम प्रमिर है। भारत और मौर निषिपस्नी पिहोके माममे प्रमिव कामेरी मौके पामका प्रदेस बोल पम्प पा। इस प्रदेमके रमिष भागात मारा रामनापपुरम् पौर तिरस्नेही रहमानेमामे विकारा पग परिप गग्य पा। मोनों एग्मोके परिषममें मारपरक प्रमोरपिणमें घर गया। ये वीना प्रबल राम्प पे इनके ममाया मम्पसहोर मोरे राग्य । इन रामानों और महारामाहाका मामय पाकर कवियों मार निशानों पमिमकी प्रीति की। वामक मंच मारा नबर वा। र कपि यह पाहता पा कि उनकी कविता संपकी माम्पना प्राप्त हो।
. प्रत्यय । प्रथम संपामो अवस्स्प-कत “अपत्तियम्" केवल 3 बरप बम प्राप्य है। रितीय सप कामका विम"वोलप्पियर" "पोतकाप्पियम्' पूरा प्राप्य है। तृवीय संघ कामको चमामॉमें एटु दो म 'परतु पाह" और परिने डीप कणक" प्रधान है। "एवोम में माठ रचनाओंका संकलन परतुपाट्ट" में बस रचनामोंका भार * परिनन् कोप कना" में मनप रचनामोरा कहा है। इन रचना@में कई कपिर्योकी पीर मौर ग्रंपार रस प्रधान कमिवाओंका संग्रह है। इस संपापको सर्वोत्तम रचना तिकुरह" है। इसके रपपिता "तिस्परपर"। “तिर" एमका पर्व "मी है। बार एक निम्न जातिका माम है। यानमार पावि तुष मानी जाती है। मासा गर्म सूचित करता है। म स्थानपर मार सूचित परने लिए र प्रत्यय पोरा पाता है। तिरुवलपर पमका मर्प पी चमार बाति-बाहे माना जा सकता है। यह विपित नही है कि रस कमिका बससीमाममा पार कपि नामको निक्षेपता बनुरूप रचनाका माम माई। "पुरम सका नाम है। रोहके परि रोपरम भनेको दुरस गही परम होवे। “सिमपुरक" का पर्व भी पुरतम"। कबिने मपनी रपमा पूरी करके संपके सम्मुख पैए की। संबने रस सपनाको मान्यता रेले मोम्प नही माना। ऐसी किंवरती है किसी प्रेरणासे इस रत्तम रचनाको संगकी माग्यता प्राप्त हुई। परीब दो हजार पर्प पूर्व रचित इस विस्मारकका सबसे मामतक बराबर बाररपूर्ण बम्पयन किया जाता है। करीब रस या बारह सकी पूर्व बहनसे ईसाई मिन भारतमें मा बसे थे। उन लोगोंने इस रचनामें ईसा मसौरके पिधारों प्रतिम्बिन पाया। विषमगरको ईसाई माना। बोरॉने उस महान कविनोबार मामा और निर्योने जैन माना। पोने सेब माना बार लबोने पणन। यहाँठक कि नास्तिोंने उमें नास्तिक माना। इसमें गिन बातोका प्रतिपादन हुमाई में मनुष्य माग लिए माग्य है। विसरममे न किसी धर्मपा निरुपनामा है न किसी धर्म-भोपको विधेपणामोका। इममें मम्प मारो भिमाहापो निस्सपाया है। तिरके तीन बरt-धर्म वर्ष मौर काम। इन तीनों क्षेत्रोम मनुप्या माचरण पर पवित्र गौर पूर्ण बनता है, तबमा मोम प्राप्त करता है। यह मोभकी स्थिति बननीय बस स्मानुभूतिसे ही इसका मनुभम थ्यिा या पता मारने भातम बामप' नामको बात भी बह इस मोनी बातसे मिल्यो मुम्ती है। गर्म तपमें गास्म पर्म मौर मति धर्म दोनोंका निस्सहाहै। वर्ष वामें राम पासन सेना संचालन मनोक परम्प परमारिका निरूपण है। काम उनसोपाने - ।
। चपराम्पस्प प्रेम सभी म्यबहाका निम्पम है परमो धास्त्र या प्रम सास्त्रक नामसे प्रचमित सम्बाका-सा इममें कुछ भी नहीं है। हर साईमन्याय है गौर प्रत्येक मम्मायके दम पुरक (मामा न) है। दोनों पारि गुरु १३५ मम्माय बार १३३. कुरत ( नामक छन्द) है। पहला पुरत है मपर मुगप तत्साम् -मादि बपबन मुरादे पुष्प। बगरको मेकर ही यम का प्रचलन है। वादि भगवानको लेकर हो लोकमा प्रमान है। म पुरसटे माघारपर पुठ मोर्योकी मम्सना है कि कविकी मावामा नाम मादि' और शिवाका नाम 'भपवान' ।। इस परम पिने भपने माता-पिताका स्मरण किया है। पर "मावि बसवम" का मर्म बनाधि पराम मानना ही उत्तम माम्म पाता है। यदि “मोर म्पिइम्सी फिरके माधारपर तुलसीरासकी मातानीका नाम "इम्सी " माना गा सस्या है तो इस पुरखो गापारपर “तिम बलपर माता-पिता मी मारिमौर भगवान माने मा सकते है। दृष्टिकी महिमा पाते हुए काम करते है तुप्पाई तुप्पाप भाषिक तुप्पाई तुप्पाप र मवे। इसका साध इस प्रकार है-प्टि माहारफे योम्प सब पराकी सृष्टि फरसे स्वयं ही वाहार बम पाती है। इम रचनाको रके समान ही मादर प्राप्त है। सचमुच यह तमिड और काणताहै। दो सौ बप पूर्व पमिन भारत में एसी शक फास्टेस की मामा एक ईमाई धर्म प्रचारक रहते पे। उन्होंने इस रपनाम टिन मापामें मनुवार भिया । भाइसमा मनुगाव ग्रेगी फ्रेंच बर्मन तपा संसायम हमारे। संबपाहीन कवियोंमें कवयित्री “धोर" का नाम रसोखनीय है। बब मो" मम गवाके प्रति मादर मूधित करने के लिए प्रयुक्त सामान्य सम्म है। ऐमा मासूम होता कि तमिल भाषा "मी" नामकी पो-पार कामिनिया पी होगी। इस यिनी नामसे प्राप्त पनार्मोमें मीरा बन्तर पाया गाता है। पुर माना 'मट्रिम" "मपनानूर" बारि प्रयोमें इनकी पबिनाएँ पाई जाती है। पाता है कि यह मारिमान" नामक रामाके यामयमें एवी पी। इसकी रचनामे पगाका पपपान भी है मौर सर्व-साधारणले उपयुक्त नीति भी हो रहा है “बाति रिपोषिय मेरिन मर्यात बाधि ठोबसपा पाता रममाति का है मौर म देलेगाव (बर्मा कप) निम्न माविका है। ला मारेप"कोठिला रित पुरि बरपायेपम्" 4 "पुष्पोने १० - । भवि पहाँ मन्दिर न हो ऐमी बस्तीम निवास मत करो। तमिल देसमें कोई मगर या गांप ऐसा नही निसर्मे मन्दिर न हो। तमिठ मोगोंते महा-यहाँ म बस्ती मसाई है.महाँ-महाँ मन्दिर निर्मित करने का प्रबध मपास कर लिया है। कापाता कि भगवान मारने इस परमित्रीको पर्सन दिये थे। बार बार नही पा रही थी गस्ते में एक बामनरे पेपर एक तक 4ठा पा। उससे कयायित्री ने कहा- बेटा कुछ बामन तो निराशो में पानी। माने पूण-नानी तुम परम बामुन वामोगी या ठमे। कमिमीने पहा- बेटा क्या तुम पिसगी करते हो? रही बामन भी परम मा ठग होता है। काने मा-नानी | मै मपनी नानीसे रिस्लगी नकर वो मौर किससे कहे। मो में तुझे परम जामुन बिताऊँगा। मह कहकर उसो पेरको एक भागस तराहिलाई पिके पो पामुम बमीनपर टप-टप पिरने मगे। मौर्षक हायमें एक मी पामुम नहीं गिरा। बामुन पके ये इसलिए उनपर मिटटी मम गई पी मोष एक-एक फरको चुन एमकर मार पर बाने समी। ताकने पूछा- मानी! बामन हैन गरम? नासीकहा-हा बेटा। ये तो ठरे ही है। गने कहा-मानी मठ हाँ बोष्टी हो । परि मासुन परम नही दो फूक पकार पयों पाती हो? मौर निरत्तर हो गई। पर मन सोचने ली-मुझे बपने शानका बाबमा। मार इस बात सामने मै मू सिरा। यह पामा सचमुष ही प्रतिमासासी है। सम्होंने सिर उठाकर पेड़की मोर देखा तो धम्हें गस पैापर कुमार भगवान (मार-मुखमम) के वर्णन हुए। संग काम्म एक मार प्रसिस कवि कपिहर है। कपित्त मामले साप मावर सूबह र प्रत्यय गोषकर बनाया गया विकर' सममिम मगर प्रचस्ति है। में कपि पारि नामक एक प्रसिट पाताने माधयम पते थे। पारिती पानपीठा पारिबार पियरका सम्बन्ध या पारि बाद पनकी यायोके रिवाह के लिए कपिमर पारा किए मए महान प्रयल पारिका का रोषा कमाएं तमिल प्रदेशमें प्रचभित है। समकालीन सम्म करियों में नाकीरर, परपर, मोर कमिवन सुप्रनारक नाम रस्मेवनीय है। सब काठीन कापोरे नाम तो बहुत बिलोसे प्रचलित पे पर काय करीब पचास या माठ वर्ष पूर्व उपमम्म नहीं। तमिह प्रदेश तार पर गतमोर वारे पत्तेपर माह मेवानामे लिखमेकी प्रथा ममारिकामी प्रपमित है। मारकारे काम और पाप नमानेमे पाह प्रमा बहुत कम हो गई है पर एपपम पठ महापा तमिलनापाका सौभाग्य है किमीसवी सदी मारम्भमें महामहोपाध्याय पीर स्वामिनाव भयर नामक उत्तम साहित्यभराए। समिक " साहित्यमें इनका करीब-करीब यही स्वान गो हिंदी साहित्यमें मापार्य मी महावीर प्रसार शिवीगीका है। इनके मनवरत प्रयत्नोंपा ही परिमाम है कि मनेक प्राचीन कविताएँ प्रकासित हो सकी। अपने मनमोंका उस्सेब मरते हुए उम्होंने एक बार पहा पा-"यह सिर होता है कि तमिरु देसमें अनेक प्रकारको कमाएँ दी और हमसे सम्पर प्रमुग साहिप वा। मार पोंमें सुरक्षित पा-सालिमको भोग-बोरकर प्रकाशित करना मावश्यक है। इन पाकी वोममें घर में गया तब मैंने देखा कि पहली बार मैंने जो पाया था उसका बहुतांश सरी पार जानेपर नष्ट हो गया है। उस तार-पत्रका महत्व समझकर उसकी रमापरलेवाले उम समय माही थे। पुततो पर दो परे भौर प पत्र दिखाई ही नही परे। इसपातको भ्यानमें रखते हुए मझे कहना पड़ता है कि इस समय मो कुछ नपत्रप है, उसमो यन- पूर्वक पुरमित रखा बाप मार विद्वानों द्वारा उसका मनुप्सीतन करपाकर उसे प्रकाशित कराया जाय तो माहामा।" यब सरकारले पो स्वामिनाम बम्परको महामहोपाम्पायकी उपाधिस विभूषित किया पा। ममता उनके प्रति अपना बादर म्पक्स करनेकी प्टिसे उमें "वावा' (बारा) कहार पुकाप्ती की। इस महानुभावकी रूपासे ही हमें समकालीन मनेक रचनामोके रसास्वादन मसर प्राप्त था है। प्राचीन तमिठ साहित्य के पांच महाकाम्प मार पांच मधु काम्प प्रसित है। कीबोग इन्हे सबकामी रचनाएँ मानते हैं। पर महाकाम्प ये है-शिमयभिकारम्, "मधि मेजर जीवक चिन्तामणि लियापति मौर “कृपाणी'। इनामो समय तक तमित प्रधम गौरमौर जैन धोका पर्याप्ठ प्रचार हो पापा। इन मार्योम ग्न पौना प्रभाव प्रकट होता है। हिमपरिकारम् नामक काम्पके पविता कविका नाम “यो है। “ठगो" मुबमा म “ोग राना है। यह कवि र पम्प (भाग करके रख राम्पके रमिनका भाप) के रामा मेरल नुट्टयन" का छोटा माईपा। कहा जाता है कि स्वयं मेरल गट्टयन तो प्रिपा पर उसका मा कवि वर्मपो" न भा। इसी गृहस्म गीवन स्पावकर संन्यास प्रहम छिया तब कोम इन्हें "इगो बरिळ" कहोगे। न पिप्पधिकारम् " पापकी पिपता यह है किधर्म हाबीन पोप पाल बारबेर-पीना रायोकापर्णन इस पापकी वापस्तु वापत होकप्रिप। सपमें इस कामो कपा बस्तु इस प्रकार है समासे कावेरी नौका यहाँ संगम होता हो "पुहार" या पारी पृम्पट्टिमम् नामक एक प्रसिर बन्दरगाह पा। (उस स्पानपर बर कारि पूम्पाटिनम् नामकोटा-मा पाम है। ) बहनि एक धनी पइयो पुष कोगन - १७ मिली। अमियोंका ये मिसार सामना पखेरे। इस उद्देश्यमें उन्हें बड़ी सफलता मग तमित प्रधम गायोंकी संस्मा नगम्य है। यपि नियोनी सम्मा से दु अधिक है पर बनसस्माको दृष्टिसे मनुपाततः बह गात ही कम है। मस्तिकाकर और वैजपकविमोने अपनी ममतवानीकी बकर ममतामें मा जागृति पैदा की। ऐसा माना जाता है कि संघ काममें ही पुरु भक्त कगियोंकी रचनाएँ पुरू हो गई पी। भक्तिकालदेव कमि भायन् मार" और समय कपि'माळवार' कराते मायनमार का बर पिण कोप मधमा मेता गण है। "मामबार" का पाठन परमेबा है। मोप "माथ्यार के मापबार" मानकर उन महान कवियों को मक्ति रसमें बनेपामे मानते है। पर “माम्बार" पाम खेसो नामममार है। पर इनमें पार बहुप प्रसिहए।-माणिक बापा, विधानसम्मघर, पप्पा और मुन्दर। सप मापनमामे पुराने मानिस बाधकर ।। कुछ कोम इनको संभ काहीन मानते है। मे जातिके वामगये। मे पागपस किमी रामाके मन्त्री थे। मपना सुख मोम त्याग कर बि मनिरोकी मात्रा करते फिरते थे। बगा मन्दिरो िवषिष्अता पोंकी स्तुति माते पे। उन्ही गीतोंडा सहकन "तिव गाषणम्" के नामसे प्रसिर है। सिक का वर्ष तो पो । बापकम् रचनाके नामसे करिका मारकर ( मानिक पिपन युक्त)माम मा या कमिक नामसे रचनाका या नाम हमा-या एक समस्या हो । एमकी एक मौर रखना “तिक कोर्षयार" है। इसमें मूफियोंकी तप परमात्माका प्रेमिका स्पमें और पौधारमाका प्रेमौके पर्मे बना हुवा है। उमिड और उसका साहित्य" मामक मपने प्रवमें भी पूर्णम् सोमसुपरमने पिता कि एक प्राचीन तमित काम्पम सूफी मतकी पहाया माचर्यजनक है। तमिमके भरिप-रस-पून मौतोंमें *वेबारम्" और "तिम्माषाम् का स्मान बहुत #चा। दक्षिण भारत के सभी विष ममिन पोताहा पायन प्राय प्रति-रिन होता है। यद्यपि शास्त्रीय गीत बार इन गीका सात वस्तुतः एकही तो मोहन दोनोके गामकी शिम अन्तर मयस्प है। तमिम प्रोमो मनिमें प्रति वर्ष स रिनका मेला समता है। उन रिमॉम प्रति दिन रो बार- समेरे मोर रावको नगवानको मूति पदममें मारे गाती है। इन पुनसमें प्रधान मूतिके पीछे येर पारायण करनेकामे बाते है मौर उनके पीछे ममि-भावपूर्ण बारम् " मारिपौव बानेवासे माने। इन पाठोपापणकरोग प्रतिमें बिमार हो पाते है। पास्त्रीय संगीत अवमम मनमें भक्ति सम्भावनाको अपेक्षा कामोंगे।
बैन था। मधिक मानम प्राप्त होता है। तिरकारकम् तो मानिमा पापकरकी रचना है- वेगारम् विर शान-मम्बपर मप्पर मौर मुदरा की पनामाका सम्रह है। *देव हारम् " का तमिठ स्प बारम् है। ये सम्ममा मायनमार मिन-दिन ती स्पानोंकी यात्रा करत मे उन उन स्मानोंकी महिमा बराबर माया करते थे। मीलोंके पारण + स्पान महिमाम्बित हुए। इम काग्मम ये म्पान पारत पेट्र स्पान्" मर्यात् गीत-माप्त स्थल कहलाते है। एम उपा मम्य भक्ति भावपूर्न मीनोंडा सकसन ही तेबारम् है। समयको दृष्टिम इस तबारके तीनो रपामितामोमें पहल मपर हुए, उनके गा तिरत्रान सम्मेघर हुए और उनके मार मुन्धर । मप्पर पात बैन रे पर बारको ब बन गए। उस समयका रामा उमने अप्परको बाव मनाया। मेव धर्मके प्रति उनकी अपार पसाबी। मामारिफ मुम मुतोषी उन कोई चिन्ता नही पी। वप्परको विर मायुमकरण"मीपत। इमका वह“भी मिव्हा राम"। उनकी कविताएँ उत्तम मभीकी दी। उनसी कविताोपर मग्न होकर एक बार विस्मान सम्बधरने उन्हें "मपर" मर्मात पितामी" कहकर पुकारा इममिए उनका गप्पर नाम पड़ा। म कपिली प्रसिव पितामामाईम शितोम ममनमोम् "मात हम किसीकी (ममीनवा पनवासी) प्रया नहीं है हम यमसे परते नहीं है। पमा सौ सास पूर्ति उपित म्पतन्त्रतामाप्तिो बान्दोकनमें एक उत्तम मारेके काममें माई। लिवान मम्बनारके सम्मम्मम कहानी है कि इनकी माता मपने विपुको एक ढाबाबके किनारे कर उसमें स्नान करन पा। पिम् भूमके मारे बहुत रोमा पर मातासम्मान रस मार नहीं गया। स्नान करनमें ही मन पी। स्पर्य भगवतीने माकर पिाको स्तनपान कराया। भगवती स्तनोंका पान रहे ही पर भिम पावपूष गीत गाने प्रया। सामात् भगवतीसे उसका समन्ध इमा इसलिए सिधुका माम सम्बन्धर हुमा। ये गातिक साझप पे मार इन्होंने बताया सायौपाम वध्ययन किया था। समिठो के प्रमाण विधान प हो। नकी पनामोम स्माभिमानका भाव मता है। मपा मार मान सम्पन्धरके ई सौ वर्ष बार मुदररका काठ माता है। बेस्सप ममपरिपे। अपने समयके पूर्व को कविहुए, उनकी फपितार्मोकी रमाका रहोले प्रबन्ध निमा। ऐक्सिपार नामक एक और कवि हुए है मिन्हनि परिय पुराणम् (गहन् पुराण) की रचना की। इम पुराममें समी पैब पबियोका जीवन वृत्तान्त है। निम्मूगर नामक एक बन्य बने “तिर मदिरम्" (मामन्त्र ) माम एक सुति ग्रन्पकी रचना की। इस स्मृतिम पिव-महिमाकी तीन हजार कषिकी या विधार्मोका सा।
प्रापीम ब माताका नाम मेते ए मन का नाम लेना मावस्या मकी कोई रचना उपमबनही है पर तमिड प्रोपके पैव-भक्त सन्तोम इनका स्थान बहुत ऊँचा है। इनकी कहानी के मापारपर चालीसपी सलीम मोपात हण भारती मामक साहित्यकारले नन्दन परिविरम् (मम्द-परिण) नामक एक परिष-पम्प भिवा मो गहन ही को प्रिय हुवा। मन्द मातिका मस्त पा। बाल बातिका भापप्प-रेव बामनोक देवसे भिम्न पा। पर मन नारकी पमा “बामपो रे" पिरम्परम्ने नटराजपर हुई। में पिरम्परम् पानेको अस्पन्त वातुर थे। एक बाह्मण धमापारके बमीन वेतीमा काम करते थे। बाएन बमीनार मला मात बासको चिवमरम् मानेकी मनुमति से देव । पुनके पके मम्म सपना पवित्र गेम गनेको भी यार मही। अपने मालिककी सपालि साप सेवा करते थे। सर्ग पूण विस्वास वा धिमै रु तो मयस्य ही मालिक की अनुमति पाकर पिरम्परम् पाऊँगा। चिबम्परम् पाने लिए प्रति दिन का इस कारपसे उनका नाम "विरमाळे पोबार पड़ा। "माळ" मम तमिमर्म “मायामी का है और "पोपार" का बर्म "बाएँ"। मति ननका नाम हो "कर बाएवजी पा पया। उनका परिष परब मोर महिलाको विषयका मुम्बर प्रमान। पैर मतों में कुछ महिलाएं भी पौ। “मामार" नामक बम्पर भक्त कबिर्योको सम्पा बाय । म पापों भक्त कपियोंकी रचनार्मोका संप माहापिर प्रबन्यम्' (पार हमार प्रबन्ध) कालाता है। पोम पानगार" “पूरताळगार" (भूतपाडगार) बौर पेवापार" प्रथमवीन बाळवारक नामसे प्रसिर । मागपिर प्रत्यम्का हर प्रकरण (माभ्याय) "सिम्बवारि" नामसे प्रपिर। मे दोनों मार पक्त प्रबके समम तीन तिम्मन्दारियदि कम है। इन तीनौरा पम्म क्रमम कांनी पुरम महापणिपुरम मार मातापुरनमें हुमा। निस दिन पोपूर्व माळवारका पग्म हुमा वा उसके दूसरे ही दिन पूरत्ताळवारका बाम इमा मौर तीसरे रित पेसाबारका माम हुवा। ऐसा वाताई कि ये तीनों मामी सपीमें इन तीन मामा सम्बस्वमें एक रोचहरानी इस प्रकार -मनाप्ससे करीब सौ मीट रसिम-परिधमकी रिपामें “तिर कोपितर" नामक एक प्रसिय ती है। पोर्प माळवार एक दिन इस वीर्यमें रास्तॉपर बात परे। उस समय बोरका पानी बरसने सपा। दे एक सोपवीरे समर पंप गए। मामोपड़ी पापही डोटीबी। इसमें उनमेटे भरणे लिए माना। लेटेही कि एक सम्मन यहाँ मा पनि बामत महापबते पूछने पर मातम का कि पूरताडगार । स्मानाभाषी कारण रोनों बैठे पै मोर 8-18ोनों भगत पर्चा - मपित करना। 4 करना इस बीच एक मोर सम्बन यहाँ मा पहुंचे। ये पेयापार थे। सोपड़ामें तीन कोमोके बैठने के लिए स्पान नहीं पा इसलिए तीनों बोया भपबत् पाम मन हो गए। पर ये तीनों मारमा भगवन्पचमि तस्वीर पे और उप्पर दृष्टिक कम होमके कोई समग नहीं रिवाईदे परे। मचानक उम मारणीम एकमपूर्ण ग्योति रिवाईरी। यह ग्योति भयमान विष्णुकी दी। तीनों मारवारोंमे एक सास भगवान विप्न पाये। इम पार मानम्दमें हरएक्ने मौ-मौ मीठ पेही गीत तिपयन्तादि पासाते है। दुकोग ऐमा मानते है कि परिपाठपार पठी सीमें हुए थे। परन्तु एनको पाठवीं मरीमें हुमा मानना ही उचित होगा। से रामनायपुरम् मिसरे भी मिस्हिपुत्तरके निवासी पे। * "गट्टर पिरान (बाझप-महाराण) और “विप्पू सिार भी कहलाते थे। रहान पाप्णको ही मपना इष्ट देव माना। उनकी विवामि पीरप्प समा गहुत ही मुकर बमन हुभा है। सकामाचा अपमानको पूमास (पुष्प हार ) मोर पामा (मपिताका हार) एक दिन में फूल तने पुष बाटिपामें पहुंचे। यहाँ तकामरे पास उन्हें एक गिन पका हुमा मिठा। अपने घर लाकर उन्होंने ग्मा पासन पोपण किया। वही मिपु माने बहकर मागाळ मामक माळपार हुई। “बागाळ" का बारिमने पालन किया। मन्तिम ळ म्मी मुबा प्रस्पप है। ममबानको फोकी माता मपनपते-करते वागाळका भपकानमे प्रेम हो पपा। वह भगवानको ही बपना पति मानती दी। भगवानको खर्पण करने के लिए यो फूलको माछा पार करती थी उमको स्वयं पहमे पानी पी मौर उसके बाद ममबारको पालावी बी। इस बारा जब पना पता तब पहन तो लोगोंने उसपर बामेप किया। पर गीप ही पिरित हो गया कि भगवानको नमकी पहनी गई मालाही पसर है। तबसे मागाका माम “भूतिकोत्त माचियार" (पहनकर देनेवाली नायिका) का पार कोदुतकर्मा माई-प्रमात पी कोत पो मान् कविताएँ तो गा पर पामाई (पाई) और पृमी मामा परत करने पहनाई। निस्मर्ग मामबार एक और बाळवार थे। ये मेनापति। ये मेष पत बपर ममकालीन थे। विस्मय प्रो मप्पा पनिष्ठ मित्र । यही म्यान देने योग्य बात यह है किरमिम भारत-विभेप इपस समिम प्रदेशमें मैग मौर बप्पा समर्ष पर कम हुए। म पोका सामाग्य रेय बार १८ माप माग म मौर बम धर्मासान करना। तिमम बायारणे सों ममताकी और विशेष पसे पमारवारकी महिमा गाई है। माझमारोंमें नम्मानमारका स्थान बगत मचा। इनको कवितामोंकी "तिम्माय मोपि" (भीमुख पचन ) कहते है। इनका पाम सिस्नेखोती विमो बायार विरनगरी नामक नगरमें हमा। कहा जाता है कि वामपनमें इन्होंने इमली पैर नीचे बैठे पनि तपस्या की मार पर भगवान हरिकी पाहा। इनकी कविताएँ सुमपुर मौर तत्वज्ञानसे पूर्व । भाटयामें मन्तिम सपेक्षर माळवार । के को मा । उनकी कवितामोमें राम मौर म दोनोंकी स्तुति है। इसकी मामक संसात पपावली गाव परित। इनका कापसपी सरी माना जाता है। मम्य पार माया, "ममुर कपि वाव्यार" विप्पामावार" 'तोगप्पिोरि वाळवार" मौर "तिर माप माळवार" की मनना होती है। माथ्यारोंका काल बसपी सीके करीब समाप्त होता है। इसके पार मैष्णव सम्मायक "बाचार्यों का काळ मारम्भ होता है। माळवार तोग उत्तम पनि जानी रेबार भगवामय बन पाये हुए थे। माचार्य पोप टीकाकार। से माळवारोके विचारोंका बन साधारणमें प्रचार करते थे। बापायोमें प्रथम "मारमुनि "में उनके पार पामुनाचार्य बार उनके बार “पमानुगाचार्य "ए नारमुभिने ही मामारीक पीठोके बहार रिम्म प्रबन्धम् के नामसे सम्पावन किया था। पामुनाचार्य नारमुनिके पौत्र थे। पपनसे ही प्रतिभापानी । करो कि पोत राबाके यहां एक परिव बा। उसने तलाशीन सभी पम्तिों की पपस्तकर दिया था। यह ग्न समोसे कर समूह करता पा। अब उसके भारमी बामुनापाक पुम्मे कर मायने बाए, तब सपोपपा गुरु अनुपस्थित थे। यामुनाचार्पने कर देनेसे इनकार कर दिया। इसपर परित बहुत कट हो गया और यामुनाचार्यको पराने-धमकाने लगा। पर यामुनाचार्य परा भी विरक्ति नहीं हुए। उन्होने कहा कि पात्रामें मुझे पणात का है पाप का समूह कर सकते हैं। इसपर गोतामें पास्त्रार्प हमा और पति महोदय पपस्त इए। पोल पमाफी रानी पहले ही उस पंतिसे भरसम्म भी। पर यामुनाचार्यस गव प्रसन्न हो पई। वह उनको सपने पास मुलाकार की पीठ सहकाती हुई मोती माळ बहार मर्मान् "पाने के लिए मावा हुमा"। तबसे यामुनाचार्या नाम 'भाउपरार" पड़ा। मी मार सेसातक भी मन विद्वान। सभी भाषाॉमें रामानुराचार्य तबसे अधिक प्रतिव है। पिपिष्टयतिक प्रवर्तक है। किराचार्य एम उपनिषद् और भपबीताका भाप्प पार sta तस्यका मतिपादन यिा था। प्रमानुराचार्यने भी ग्नी तानोका भाष ।
रवार विभिप्यातका प्रतिपादन दिमा। रामानुगावार्यके बार ममाचार्यने मी ही तीनोंका भाप्य रचकर तहलका प्रतिपादन किया। रामानुगाचार्यका परम भी परम्पार हुमा। पह मास महरके परिचममें करीब पचीस मी पर है। शिक्षा प्राप्त करने के लिए ये कापीपुरम् गए। शिक्षा फातमें ही उनका भपने पुम्स मवमव ही मया। ब्रह्मभूषके ये अपने सुहारा बताये पए मर्पका मान करते थे। पुरु इस बात को लेकर सिप्पसे यह पष्ट हुए और उन्होंने पिप्यरो मार गन्ने का प्रयत्न किया पर रामानुगाचार्य किमी तय पर मए। कई बार पर उनकी काति पारों मोर फैल मई तब तो गुरु महाराम उनके मनुयापी बन गए। रामानुमाचार्यकी कीविसे परिचित होनेपर नारमुनिने उमसे मिकमा पाहा। रहोंने अपने एक शिप्यको कालीपुरम् इसलिए मेरा किया रामानुगाचार्यको बुला काए। परन रोनकि पहुँचनते पहसे ही मारमुनिताहान्त हो पमा पा। पातक बार भी उनके एक हापको तीन पहिया मसीही रहमानी। इसमा मर्म रिमाको माम नहीं बा। रामानुगाचार्य पर पौरपम् पहुंचे तब यह देखकर मे समक्ष पए कि मारमुनिकी तीन लाएँ पूर्ण नहीं हुई। उन्होंने मा--" मारमुनिकी नही इन्पो किब्रह्ममूष उपनिषद् मौर भगवद्गीतारामाप्य रवानाए। उनकी इन तीन मामाको पूरा करना उनके गिमका कर्मम्प है। इन तीनोंका भाप्य पब में सिपा।" उनकी इस प्रतिमा पर मारमुनिकी के तीनों महिमा मामी हो गई। नारमुनिके पिप्यक सावमी रामानुगवार्य कालीपुरममें पतपे। दोनोंकी परिलोमें बार-बार भगा हो पाता था। इमपर मारमुनिरे मिप्य तो मौरपम् को मए मोर रामानुगाचार्म मृहस्मयीवन त्यागकर संन्यासी बन गए। दे दिनों तक पौरपम्म रहन थे। महकि मन्दिरफ निक कार्यक्रमोंका रहोंने मुम्पपस्थित प्रबन्ध किया। * बपने पिगितमा भूब प्रचार करत है। अपनी रित्ता प्रमावसे मनेर माटवारियों को उनोने सपना वनुपायो बना लिया रच समयका को रारा रामानुगके सिगन्तों को नहीं मानता था। उमने रामानुजाचार्यको अपने पास मुशाया। पर रामानुज नहीं गए। रे बाह राग्यका धोकर मैमूरकी मोर बस गए मोर मतो? मामक एक तीर्थस्सम पो बसे। वालीन रामारी सहायता पार उनाने यहाँ भी नारायमका मन्दिर बनवाया। माम भी इस मनि पापिक महोलपमें ममूरके महाराणा सश्मि साहपीप पा। . रामानुगके रो प्रधान पिप्प । एडम माम पा “रात रेपिकर' और इमरेका “ ममबास मानि"। पपपि रोनों एक ही गुसके पिप्य थे और . बिसिप्टातिक सिमान्तको मानदेये फिर भी योनि दो भिन्न सम्पराप घमाए। देशराम्ठ रेधिकरले पार (उत्तरीका) सम्पराप पकाया बोर मनबाम मानिने तेन कह (रतिगी कळा) सम्प्रणाम पाया। रात रेशिकर को महत्व देते। देर पारायमके समर्पक । मनबाम मामुनि माळयारेकि रिम्प प्रसन्को महत्व ने बोर मदिरो मुसीका पाठ करानेके पालपाटी । इसमें ए नही कि दक्षिणमें यों मोर पके बीच संमर्प इए। परस्तु पेप्परोके इन रोगों सम्प्रराकि दीपमें कम संपर्प नही प। हम सबपोकी प्रतिमनि कहाँ-कहीं मार मी मुनाई पाती है। इन मक्त परिमोके साथ-साथ मम्म भनेक कपि अपने मपने गसे पाम्पती रखमा करते थे। इनमें "ण्यम कोणार" (वय-माप्त) नामक कविका नाम उसेवनीय है। उन्होंने कलिंगानु परमि" नामक काम्प रचा। "परगि' हिनीके रासो" के समान मानी जा सकती है। इसलिए कतिगतु पापि" कोहम "कठिण रावो" मान सकते हैं। मानम पाता है कि मभागा कहिंग पम्प उत्तर रमिष रोगों मोरणे समोका कम्य बना। पमिक रेप रामायोने कहिमपर बोमाममम किया उसीका मन “कतिपत्तु परमि" का विषय है। इस फपिका अनुकरपार बाप कवियॊने भी परगि" काय रखे। म्याएमा सो तमित साहित्यके पमझते हुए नक्षम कम का राय मा। ये दोन पम निवासी । बाहर मिलेके तेरिकनुर नामक मारमें उनका माम मामा। उन्होंने मफ्नी मातृमापाले साथ-साथ पसरण भी पाप अम्मबन किया पा। उनमे "मायप मामह वाका माधम मिला था। इस बामपरताको प्रसा उन्होंने अपनी प्रमापनमें की है। उनके पावन-कास उनकी पीति फैल गई। बोयो रामा-महारागा न मापमनसे अपनेको माप मानते थे। उन्होंने अपनी एपमारे लिए या बस्तु वो पास्मीकिसे दी पर उसको ऐसे सारे रामा कि सनकी रामायण मास्मीकि रामायगसे एकरम पवन-सी बन पर। कम्मो पूर्व भी समिकर्म रामायणकी बिना हो चुकी पी। संभकामकी एक तमिश रामायणका पाम मौहमा। मिमी का करिको पमापनका भी प्रस्मेव। पर कमकी पमापब सामने ये सारी वनाएँ सूर्योदयो बारक मन हुस्प बन गई। माम मिष साहित्पर्म कम रामायबो एक मारपीय स्थान प्राप्त है। रामापनकी रचनामें कवि कमने इस बातका म्यान या कि यह पूर्ण पसे मिड काप हो। अयोमास पन वो किती तमिठ नवरा-सा हमा है। सरसूका पचन नाम मात्र लिए परसूला ई-पर सपयुष है कामेरीका। पित भापारे वर्षमान पवियोंमें मुममित माममा रामलिंगम पिरमैने इस -- २१ "ससतमें भी रामायण ई मार समिटमें भी है। तमिठ रामायणकी रखना समस्त रामायणो मापारपर ही है। दोनोंमें रामावतारमी ही कहानी है। पर तमित रामायण सम्पय रामायनम एसाम मिन्नी। ममतारके सकम्पमे कर राम्पामिपेक तरकी प्रत्येक घटना कम्पकी कवि मारमाकिनी तिमे भिन्न है। पास्मीकि रामायणमें विम रामका मामाम्य मानब स्पर्मे बर्मन हुमा है, यह पम्म एमावसमें धादि-मम्यान्न-गीत परमात्मा स्पर्मे यमित है। रही संस्तत रामायमम सीता रामप द्वारा रेन पकाकर उठाई मईम अपमानित पी गई बताईमई है, यहाँ समिझ रामायणमें मती सीवाको एनेका साहम किमीमें नहीं पा ऐमा बपित ह । बास्मीकि रामायणम बहिस्या बार-मकर अपना मतीन नए करमवामी बताई पाहै। कम्पनी रामायबमें यह निर्मक मनबाली दोप-पहिल-मती सामी पमें चित्रित दुई। बास्मीकि रामायणमें बताया गया है कि जब हमण मुग्रीबसे मिय निमिया मए तम राम रामो मृत्यु प्राप्त मामिकी पली गाय मपपान करके मुग्रीवक माप कामयीका करती थी। पर तमिड पमायनमें बवाया गया है कि नही तारा बामपका कोष मात करमके लिए धपके सारे समोसे युक्त होकर मा और उसको देखकर सम्मणने सोचा- हमारी माताएँ मी मर (पिता बमरपके देशनक बार) एमी ही एटी हॉपी । म तप मास्मीकि रामायणका हर पान भावापाना मार मौबिस्पक मनुमार तमितके सचिमें पता यया है।" तमित मापामा पोपण केवळ पगा-महारागाने ही नही बस्कि पार्मिक मटा वीर मधीगाने भी किया है। एमे मोममे एक है, “तिम्पननाब पापीबासी मर"। गौर निमा लिप्पनास नामक गांवमें मा मठ स्मित है। उस मटके प्रथम मटारोग बरोब मकारके समयमें कापीमें जाकर हो । इममिए उस मनापामीवामी मठ' माम पड़ा। कहा जाता है कि उस मममीमने पापीमें कम्प रामायमा परचनोंका प्रबनम किया था और मम्भव तुलसीरामपर उन प्रचनाका प्रभाव पड़ा है। इसक लिए प्रमामस्यस्प यह कहा जाता है कि मार्म सम्पायम पिनाह या मर्यवरके पूर्व परमपूको बस पापविमादम मिलनेका- एक मोका दमन-अवसर मिलता है। पास्मीकि रामायममें पनुप-पमा पूर्व सौता और रामके मिडनेका कोई बबन नही है। प्रषिक सम्परायमें पहले नायक- नायिका एक सरकादेवाह-प-गुमि मोहिलाते है और उसके बार विमार-सूप पन है। कम्पन अपन देगाचार मनुमार सपए पूर्व ही राम मौर सौताको परम्पर पनका मौका दिया। तुसमीदामम भी राम मौर बीताका ऐमा मौका दिया है। रमाने साता मार रामहो एक ही समय पुष्पवारिकाम पहुंचाया है। तुलसी धार कम्मकी रामापत्रक बन्य स्थानों में भी विशेष प्रकारको ममाननाएँ पाईबाती है। यहाँ इस पाम हम मही पाना है कि समय तुलसीपर प्रभाव पा पा या नहीं। सनी यात सवय है कि पास्मादि कम मोर तुलसीकी फजियोश २४ टीका तनी मच्छी है कि लोगोंका यह विश्वास है कि समय तिस्सस्मुबग्मे नया पम्म पर परिमेकअगर मामसे अपनी ही पलामोडी टीका की है। भन्निनारिनियर एक प्रसिद्ध टीकाकार । काम्पके बच्चे पारखी। मापने परिकार पर म बषि सिद्धान्तका अध्ययन करके तामों प्रति सूक्ष्म वॉका परिषद प्राप्त किया। उन्होंने "तोड काप्पियम् पोषक चिन्तामभि" माविकी रचनाओंको टीकाएँ मिली है। परिय मापान पिन्न माध्याकि नाबापिर प्रबंधम्मी टोका मिली है। उनकी मापातमिम मीर संसात मिमित मनिप्रवास (बिपी) बीकी दी। तमिस साहित्पमें “सि परियों की (दिर कपि) एक परम्परा पसी । म मिस कमियो हिन्दी साहित्य सम्त कवियों के समान माना जा सकता है। हम कपियोंकी पापा मुसंसहत उन्च कीकी न होकर बन-माधारणको बोलीको दहीपीपी सिट कपि एकेवरषारीबियो हो पब मानते । मोग साधनापर अधिक मोर देते थे। का सिर कषि मपमी रामाने लिए प्रसिवरे। ककपि रासायनिक प्रयोपोर्मे मभिरचि रखते थे। पासामारोंका बनकर सच्चे ममसे ध्यान करनेकी भिमा देते। ऐसा माना जाता कि सिर करियोंकी परम्परा कारपके कामसे ही पती माई है। स्पर्य अयस्म एक सिर कषि माने गए है। अमएवी सरीम वायुमानबर" नामक एक । उसकी एक रचना "सिार गमम् । रतमें उन्होंने सिर कपियोन परिषष ए मान सम्प्ररायके का हिन्दी कवियोंका परिचय रिमा है। तमित मापाके सिरकवि माह है। इनमेमे पाम्बादिर सिार" सम्म मिार" सिएर" और मरिपूर" मे पर प्रसिर है। सिकषिर्योकी पारखे हुए यापवाना रचित होगा कि तमित परेपमें “सिट मैच" नामक पिकिरमा परवि प्रचलित है। यह परति मायुसे भिन्न है। इस परपिके प्रमर सिर करि माने जाते है। पनिन भाप्त मतापिकाहसे ही शिष मार शिवपूमामा व ममाचार पर वापपी सदाम इस ब धर्मपी एक पति गुरुहुई। इस परिक प्र मेपकादेव ( मत्सप्टयदेव) और रिमेम पैरा हुए। उन्होंने पोषम् नामक मान्य कर उसमें मैच मिसान्त पास्त्रका प्रतिपादन पिया। विही पति बह मारि मम्म और मन्तरहित पगम है उस पसाएकी भक्ति सतीt- मावि इस सिशन्तको प्रमुख मार्ने है। पैसे से उत्पन्न पोति पौष राधिका मूपि स्थिति और परती है, से ही पति (शिष) मे उत्पन्न सती ही मुष्टि स्थिति भारया कार्य करती है। सारागार रापि पपई। पा पमु * पाएम्" में पाकर पति पात पपने में असमर्प हो जाता है। भिमान इस मैग सिमान्तका प्रचार करनेके लिए बनेक मठ स्थापित ए, बिनमें सीम गात प्रसित है। विपनदास काशीवासी मठ का तो उस्लेव पहले ही किया बा पुका है। तिरवारै माधीनम् मोर रस्मपुरम् (धर्म पुरम् ) मापीनम्- मेरो मठ मौर है। नतीनों मठोंने पैग सिमान्तके प्रचारफे साथ-साब तमिम साहित्यकी और बास्तिक धर्मकी बड़ी सेवाएं की है। ब सिमान्तके समबनमें मोर पुस्तके खिली गई, जिनमें मुस्प ये है “चिव शान मिटर" इसके मेवा भस्म नन्दि घिनाचार्य मेयकापरसे मिप्य। “मिम प्रकापम् " इसके टेलर रमापति शिवाचार्य पप्णय हमें उत्पन्न हुए। जैन धर्म स्वीकार कर उन्होंने उसपर कई पाप लिये। 'ऐपिपळार मायनार पुरानम्" "कोइक पुराणम् वाचि उनकी रचनाएँ है। तमिड माहित्पमें "पाकरम सम्बन्धी पर बनाएं हुई, उनमसे कुछ मुम्म रचनामोंका परिषय महो पिया गावाह- माप्परगफारिक -यह जल शास्त्र है। इसके सेवक ममृत सागरर बापी सदरीके है। नम्नत अत्युतप्ट पाकरण प्राप है। इसके ऐशक पपमन्दि मुनियर तेरहवी सदीके है। पौर रोमियम् "मुख मित्र नामके लगने यह प्याकरण “वीर पोमन नाम रागरे मामपर पाएगी सरीमें रवाना। प्राचीन भक्त कपियोंगी यह परम्परा मुम्नीसवी सदी तक पली माईपी। तामुमानगर और मक्त कपि मठायां सीमें हुए थे। गृहस्पायम बहानेके पार खुसी सन्यास पाप किया और पैर मौका पर्यटन लिया। उनकी सविताएँ उत्तम प्रेमीको। उनीमनी सदीमें "पमठिम स्वामी मामक सत काहिए। के पौवमा बम्बाम ही मम्पामी हो पए पे। वे समम्मपबारी ये--मब धर्मों और मम्प्रदायोंक ममन्वय पमपाती। इनका पंग "ममरस सन्मार्ग पप" कामाता है। मते है कि एक कमरेमें गाकर उन्होंने ररमामा मन कर लिया पा। फिर पर यह बोला पया तब यह नही पाये गए। उनकी रचना "घरट पा है। तमिम साहित्यमें कई मुहिम पवियाँकी रचनाओं को मारपूर्ण स्थान मिमा है। इनमें “उमर पुतपर" और "समा पुमबर" ( जगाव ) प्रसि। पोरसवारि मामा मुमहिम ममीर तमिल कषियोंका गगा बार पते प। नाम "सपर कार" पापो समिकम “पीसकार बन गया।
"तेम्बापानि तपिक साहित्यपी करते हुए "वोर मा मुनिवर (पौर महामुनियो) कामाम सेना वामस्पर है। वे इटही खरे मौर ईसाई धर्मका प्रचार करके लिए सन् १७.1 में राभिषभारतमें पाए। समका नाम "कास्टेष्ट येस्की पा। सन्हाने तमिळ भापापा मम्मपन कर उसमें मना पापिय प्राप्त किया। उन्होंने वोन्नून पिकाम्" मारि पन्च रपे । महापर सगीता सम्बन्धमें दो बातें बताना वावश्यक है। बारका दक्षिण भारतमें प्रचलित पपीत मनटिक संगीत पहनाता है। इसकी पति और पसी उत्तर भारतमे प्रचलित संगीवसे एकदम भिन्न है। गात प्राचीन काल में तमिहका अपना एक समातम मा बनेक प्रकारकबारे तपा बनेक प्रकारके राम प्रचभित। जैन मौर बम धमकि कटर प्रचारको कारण तमिम समीत सम्बन्धी साहित्य तवा बार यन्त्र लुप्तप्राय हो गए। कुछ सी पूर्व सदीतका पर सवार Pा, तब रानकि मये संस्करणम्य माम प्रचमित हुए। बपि उत्तर भारत के रायो मार मिनके पकि मामकी समानता पाई जाती है तो भी समष एकरम मिल है। सराहरपके लिए मिलका भैरवी नामक राय उत्तर मापीय *मेरपी से एनम भिन्न है। उत्तरको भैरवी में प्रयुक्त सभी सर भिषके "वोदि नामक एपमें बाते पर नानेकी-महापकी परति भिम है। प्राचीन संपीत साहित्य सम्बादी बीच मुकाई। तमिड प्रदेडोम मचापि बारम् तिम्पुपत माहितमिनीवोका प्रचार गराबर दवा मामा तो भी उनका मेष मन्दिर-मठ भारिपार्मिक मौत ही सीमित था। संगीत एमाणे विवाह मावि बधिकतर मग या संमत के गीत हो पाये बाते। प्रसिर सपातकार त्यापन तमिश प्रदेश का हए। मही दते थे फिर भी मुनकी सारी रचनाएँ देती। उनके एसपी सतत भी दरमियरमका कोई नीव नही है। अबरहमी सदाम मोपात पाणी नामक एक कवि हुए। वापरारकी पतिपर तमिल भाषा "कान रचने को। उनके नापनार परिण कीर्तन यात प्रसिद्ध है। बर तमिल यीवोंकीगाव उमति समीसगी सरीमें गा सारे रेशपरीगीका पासन सानीस्मसे जम गया पर देशको सभी भापायाँका एक नया ही ग मारम्भ इमा। पिताका एक नपा कम चकित बा। एसके लिए आप हमकी पाठ-युस्तको" (readers) की मावस्यता हुई। नये के प्यारमकी बापापकता कविताका सप बरला विषय गाना गारती भी बरसी। भक्त विमति लिए कोई स्मान महींपा। नये समाचारपत्र निकास। कोपरे पम्पास निरहने को। पषमें पुरानी पागित्यपूर्ष बटिक मापारे स्थान पर रश नम्बर मापारा प्रचार बा। तमिह मापाने पोपही अपने विस नपे वातावरण मनुका बना लिया।
तमिह मापामें मीनाक्षी मुन्दरम् पिरळ मये युगके प्रवर्तक माने पाते हैं। ये स्पर्य उत्तम पीके मिशन पे। उनकी प्रेरणा पाएर मनेक नमबह भापाके सेवक बने। उन सेवकोंने म यह उत्तम साहित्यकी ही रचना की पतिप्राचीन प्रायोका सार किया और तमिड मचकी मई ऐसी चलाई। उन्नीसवीं सदी के उत्तराई मा बीसवी सबीके प्रथम रो बघाभियोक साहित्यकारोमें पैर नायकम् पिछले ,मूर्य नारायण पास्त्री मुन्दरम् पिरले रामम् मम्पर, माधवम्या महामहोपाध्याय स्वामिनाप सम्पर, मु मय्यर बार मुब्रह्मण्य भारती बहुत प्रसिद्ध है। मेरनामम् पिछले ईसाई मौर मिठा मुसिफ पे। उन्होने बाधुनिक उपके 'प्रताप मुरमियार चरित्तिरम्" नामक सर्वप्रथम समिक उपन्यासकी रचना की। उनकी बल्ब कई रचनाएँ मौहै। “सूर्य मारायन शास्त्री" तमिलके यो मिशान थे। उनके दमिक प्रेमकी पहराईका मनुमान इस बावसे किया जा सकता है कि उन्होंने अपना नाम परिबिमाष्ठ कमैडर" कर पिया। 'मूर्य नारायन शास्त्री" का यह पुर तमिछप है। तमिस मोलिबरहार" मामक उनकी तमिम मापा सम्बन्धी रखना बहुत प्रसिर । रहोंने इतिहास विज्ञान भारिपर की पुस्तकें बिसगाई। मुमरम् पिछड़ने मनोन मनीयम्" नामक एक नाटक मिला। तिर पान सम्पर" नामक प्राचीन पिरमात कषिका काम निर्मप तिरविराएर (वनकोर ) के राममंशका इतिहास बादि उनकी बम्ब बनाएँ है। “रामम् भम्पर"यो उत्साही नवयुगह। उनपर स्वामी विवेकानाबमा बड़ा गहरा प्रभाव पड़ा। उनके *कममाम्बा परित्तिरम" पो तमिक उपायास साहित्पमें माता स्थान प्राप्त हुमा। बतीस पर्पकी मात्सायुमें ही उनका दात हो पमा पार थी मापनमा एक मा उपन्यासकार मार कहानी-सेसक पे। महामहोपाध्याय स्वामिनाम बम्पर तमिल वाता (बारा) कहलात थे। उन्होंने कई प्राचीन सबोंका उतार किया। प्राचीन पापोंकी बोगम उनाने बहकप्ट ग्या। का प्राचीन रचनार्मोकी प्रामाषिक प्रवियाँ प्राप्त कर ये नरें उनके भनेक शिष्य भार भी प्राचीन बन्योकी सोग और मन साहित्य सृजनमें बसे हुए है। प मु यम्मर प्रसिवरेप्रमात । रिरीकी मिक्षा पानेके सिए में जिमग पए। या वीर सावरकरके सम्पर्कमें माए । भारतकी स्वतन्त्रताक गिए बातम्मारियों साप मिडकर माम्दोलन करले कगे। मग सरकार उन्हें करना चाहती थी, पर मिनीतए पत्रकार पाशिरी धमे पए। पामरपिन प प्रकाप गाए।
भोप और मुझप्प भारती के साप पहने हये। मंत, पसे बांधीवादी बने। भाप रेप मापन " मामा मिस इनिक परका सम्पादन करने थे। उनकी कई कहानियाँ बहुत लोकप्रिय है। समितका सर्वप्रथम निक पत्र “सुपेश मित्तिम्" है। बी मुण्यप भम्पर नामक प्रसिह देशभक्तने यह पत्र भारम्भ किया। बार निकमिड पॉमें उसका स्पान पिरि है। अपनी शिक्षाका प्रभाव पारवषम तमिळ भापा-मापियोपर जितना पड़ा उतना बाप मोर्गोपर नहीं पा तामिक भासोंने अनिवौकी बहस मन्त्री जानकारी प्राप्त की। उसके ऐसे प्रेमी हो गए कि अनेक परिवार परेत योग- चाम्म बनेक अंग्रेजी घय मनायास बी-चौच मा जाते थे। सार्वजनिक सेवामें तो केवल पार्मिक संस्थानों में और पुरान-मापनों मारिमें तमिहका प्रयोग होता था। ऐसे बसमें भी स्वागत भाषण परिचय कराना बाई मा पम्पबार समर्पण बादि मप्रेमी मापामें ही होते थे। तमिल में बोलना तो बारम-गौरमो डिए हानिकर माना जाता पा। ऐसी स्थिति, मुगप्प भारती कांचीपुरम स्वामी पार्मा मुझप्प भिषा पसु नय्यर, सत्यमूर्वि मावि समस्ताने तमिम भाइयोंमें भाप जीवन पूरकर तमिल मापाको महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया।
सुब्रह्मण्य भारती [कवि-परिषय] ३२ भी रेपपरमें म्माप्तरे और उसी प्रकार नरम बसपा मी सारे रेसमें फतेहुने। बीसपी भीक मारम्भमें हमारा ऐप सराग्य मात्र अपने समा। मरमरलयामे केपस प्रस्ताव पासकर मधिक अधिकारकी मांग पेपपरते। मानवारीपास उमा महका प्रयोमर स्वतन्त्रता पानेा प्रयत्न करते थे। इन दोनोवोचमें गरम कपात होग बनता मागृति पैदा करके स्वराम पानेका प्रगल करते ५। सन् १९१४ में यूरोप, प्रपम महापुर गि। उसका प्रभाष सारे संसारपर पा-भारतपर भी पड़ा। उसी समय सयमग गांधीगी भिम मायाम अपना काम पूराफर मात कौटे। बगमय उसी समय विमा ममराम बके कारावाससे मुस्त हुए । रही रिलोंमें एनी बसष्टने होम सम मालोठन पुरू किया था। इन परिस्थितियोका परिणाम यह हुमा कि रेधर्म एक मीन एश्वास भाग पागृव हुमा। तिलक महापय देशके सोत्तम मेता बने। उनके पान्तके कुछ समय पहले ही गांवी पश्यि गरनैतिक बाबोफ्नमें नाम न पे २। बबलोकमाम्प विमला याद हुमा तब मानों पहोंने अपने नेतृत्वका मार गांधीजीको सौंपा। तिका महापग पक्षिम भारतीय समर्थकोंमें मुखाम भारती प्रमुख। गांधीनी पब रक्षिण भारत माये तब भारती उनसे मिठे उने मापौर रिया। इस पटनारे पुण्ही समय पार पाणका रेहान्त हुमा। पब माता सार्वजनिक भमर्म मापूजी एवरे, तप एनी बसष्ट, बिमा सुरेलमाष बनी मावि मेवानीकी ज्योति मन्च पर गई पी। रमिग भारतमें करियर मुकाम भारती मामी पुमक माम्म लिए पूर्व तैयारियां करनेगाोमसे एक थे। अपने साप्ताहिक पत्रों और सुमदर मौतोंक बारा उन्होंने बनताम मा उत्साह पर किया-नई बार फूगा माखी सम्मत कवि। परिस्पायवाके लिए प्रपरन करलका प्रान न होता तो भारतीकी रचनाएँ सम्ममा मोर ही रंगकी होती। यह मानना परेषा कि भारताने अपने मेवों और पौतों द्वारा अपने कामपर मिठना प्रभाव गहा उतनाममा उस समयको परिस्थिपिने भाणीपर मी राहा। भग्म मौर शिक्षा दक्षिण माखको रमिनी सीमा पूर्व काहर्म पापप रामायोका प्रमुख उसकार मनक छोटे-मोर पराइए। मगारे भामगार हो को जमीरार ए पसे जो रामा पकाते । * एट्यापुरम" एक ऐसी ही पनीमारी की। पा स्थान हिम्नसोही निर्मम । दम पीपरीकी करीब पांचाहावको वापि बामदनी थी। इम बमोरारक चिम्मसामि बम्पर नामक एकपरबारी। उनका गपित पास्यसेवा प्रेमपा। मुग्य - ३३ वहा ममियम भारती चिन्मस्वामी सम्पर पुष । म म मन् १८८२ में हमा। बपनमें होम रनको मुप्पया" नामसे पुकारते प। पर पाप माह पब सनकी मानाका रेहान्त हा। उनके पितान दूसरा म्पाह कर लिया। चिन्नम्मामी भम्परको बी इच्छा पी पि मुप्पम्मा" बने और भाई मी एम में उत्तीर्ण होकर या मोहदेपर गाये। पर भारतीया मन बचपनसे ही पारिताकी बोर प्रवृत्त हुवा। वे पितासे बहुन र प हम परक पारण मपम समपस पाठकों माप धमते मी बहुत कम । मिमी परमपि बाम पहा मातापिहरबपनमें हो कविता रचन मगा पा उममे पटाकर रम पितान खूब मारा कि यह माग कविता न प तो हापा मार बालेसाठे मपने पितासे बोला पिपा पपा पिक मो मोर हस वित माइ मेक" मातीनी मी ऐधी ही बात पौ। पिकामी पुषको मंटते लि मा मात? मुप्पप्पा मषितपर प्यान नहीं देता। तेरा वो बासकार है यही सीबम समय है" तो भारठी पिताको मायलेका माहम तो नहीं करते पर मन-ही-मन पुनपुनाते बात मत पात हात माड पा मा पास है। मतता मह कि मनुप्रासकाम भयो सहना पनको गापममे ही गा पार पा। सिमा प्राप्त करने लिए वाममय उनको पाठमाता पालिस पिया गया। पामि के बहुत ही सामान्य व पर परिवाएं परापर करते एते थे। पाठपरम मिपापियों को प्राचीन कवियोंकी रचनाएँ पप्प कसे वर्ग, मुनानी पावी दी। भारती करियांकी रचनाएँ मुनान तो ममम मपनी ही एक दो करिताएँ मुनाते थे। इमपर सम्मापौर पिचारमको मंगपमें "मारवी" (भरपती-पपारेपी) कहा करते थे। एक बार मारती गर्ममें मकई प्राचीन कविता मुना सन अपनी ही रचना मुना सके। सम्मापन हा- वो पाकमेष (एक प्राचीन कपि-लस पसरा अर्प प्रत्यमा गाल) है माधिना क्यों नहा मुनावा?" पर भारतीय जवाब रिया-- मुरली मेषता किसीकी मात्रामे वृधि नहीं पता। पर वो पेन्गम ही परसा करता है। मह भुमकर मसापक एप भी हुए और नाव ही भाष नागर मौ। भूप दिन बाद म उमो पुपको एक सिप भुनाया। सम पितामें मेरे पे माप-माप मुपापक पेड़ा भी पन बा। बप्पापफ मात प्रमन हए। उनीने एक सभा गुमाई। रहोंने पहले उपहाममें भी भारती की साधि दी पी मही उपाहिब म्होने पम्भीरता साप ससमारोह मुप्पप्याको दी। पीमै उमका उपनाम भाती बिपिक प्रचलित हो गया।
उस मारती सराही मन्द परम्पराका पगमले पे। प्राचीन कपियोंकी कवितामारा मतभर समन रिना होते के समान रहमा इन्हें पपन्न महीना पर प्राचीन कवितामाँगा मध्ययनकर पनकी विशपतागोता परिचय प्राप्त करने में उनकी दो ममिपि पी। के काबिराट पुपारी हो ही और कपिमोडी पनामोरे प्रति भी उनके मनमें दो पिपी। धम्हें विप पसे सेसी मोर कीट (Shelly and Kcats) की रचनाएँ गाय पसन पी। एट्यापुरम् "मलियन संघ की स्थापना भी की गो। विवाह सन् १८९० में पोय पपकी मायुमें भारतीका पिकाइबा का। समयमदीपली" सम्मा कैर सातवर्षकीपी। उमरिनॉमिकापमान पिबाहका समारोह पांच रिन तक पहा रखा था। पहले दिल परातका बाबमन होता पा इस रिल पिनाह संस्कार होता पा पार पाँच दिन मिनार समारोहमा समावर्तन होता था। बीचके तीसरे गौरीपे पिन सामाग्य मनोरचनका कार्यम पता था। पामको पर एक दूसरे पांवमें महावर पापा । ना धर्मम ममपू कानाता । रातको मोगमके भार पर-बभू पर बैठकर मूते है। यह कार्यक्रम "जह कालाता है। इन अबसरीपर परमार मयू बोना पमडी महिलाएं (कभी-कभी पुष्प मी) पम्मिनित होकर पिया मनाया करती है। इन ममतपर गानेष कार्यक्रम बनिसरा मरे पता और पएका मामा तो इस्तानी। माखी बिगाहमें भारी सात वर्षी बापा नही की। तो करियरने तुरन्त गीत रचकर अपने मुमधुर कच्चे सुनाया। बागपत पांच दिन समारोहकी प्रथा उठ हो या 1-पाके बिन बरका स्माफ्त और दूसरे दिन पिराइ संस्कार होता है। विवाह बिन ममंग मारिकाए भी किसी-न-किसी तरह समय निकाल दिया जाता है। काशीवास विवाहपुरिनबारही भाप्पी पिताका रेहान्त हो गया था। सबरी पत्नी से उनके रो सनाने पी सोना पर्पको डोरी रमाने ही भारतीपर मारे परिवारपासना पार बापदादा। पिताकी कोई सम्पतिमाहीमी रामराया विपातमाही बा प्सिी परीमा उचार्य नही थे कि ही कोई नौररी प्राप्त कर सकते। इसलिए इस पापा बनुभव करने लगे समो मिया प्राप्तकर भी परीमा रतार्षपए बिना मुमो निहला मार मामा कीन हो पाएगा। परिणामत होने सपनी पत्नीको रसके भाप भेर रिया उनकी दिमाग भी अपने बारे साप सपने मायके चली गई। पन दिनों भाप्तीको पुषी " ३५ त पापाम रहसोपी। उसके गुणोंपर भारती कापी पो गये। फी निस्सवान पी इसलिए अपने भवानका बहबई प्रेमसे काहन-पालन करने कभी। उन दिनों पमित पुगकों बूब कम्पो चोटी रखनेको प्रमा। मारकम पो पारवारम पर बारमानेकी रीति रस पड़ी है। तमित प्रोपराह्मन सौप भार मी मूमही रखा करो। भारती दो बम्ध परम्परा मिरापीही। बत कापी पपकर दे पाश्चात्य संमसे धोको दाने मगे। पीरवासूचक मह भी बढ़ान मे। उनके फूफानीको यह मच्छा नहीं मा। उन्होंने मम्मक भारतीको अपने साप बैठकर पाना बानेसे मना कर दिया। मारवाको समातसे निक्षेप सुख ही हमा। फूफानीके वानकै बार या कभी-कभी पहले भी अपने मोरनसे निवृत्त होकर पारि कामपर से बने बामा करी पे। भारतीके फूफानी प्रविरिन गरी निष्ठा साप पटपर" भगवानकी मूर्तिकी पूग या करते थे। पर पलसे पह अखत मैप मारि सामसी बमा करने और प्यान मागान बादि सोलों पधारोमे युक्त पूना कसे पे। ग सपनामें मस्ति-पोत ममानेका पी एम म यता है। इसके लिए गन्होंने 'बोबार" (पारा या गायक ) नामक गादिके एक पुषकको नियुक्त श्मिा पा। उसका प्रतिदिन काम पापमारे लिए फूलबमा र हाना भोर तममपर भक्तिगीत माना। एक दिन बह पूजाके समय उपस्थित नहीं था। फूणी बाहले महीने किमीत पुनानेकामटे। मन हो गए। चनमी पस्नीले उस समय उनसे कहा कि “मुप्पया तो पात मन्ना गाता है, पसीको पामे लिए पो नमुनापा मामे ?" मातीको गुमना गया। मारतीने ऐसे भावपूर्ण रगसे मीय नाकर सुनाया रि फूफानी मन्त्रमुग्ध हो गए। बीवन संग्राम। कामीम भारती सेष्ट्रय हिन्न कामेन में पड़ते थे। मम्प विपकि साग-सान उन्होंने संसल दौर हिन्दी भी मचा माम प्राप्त किया। मैट्रिपती परीक्षा में प्रपम पदार्म रत्तीय हुए। पढ़ाई पूरी करके भारती फिर एट्रगापुरम् पर। पबा साहबने सर्ने कामोसे पर पाबनेड़ा वर्ग कर गुहाया पा। पणा माल उनको अपना परबारी बनाकर सहाअपने पास रखना चाहते। भारती पास हीरे-मक्त । पासीबासम ना मन रेप-प्रम मार पहलवा भासे और भी अधिक भर गया। मेरिती बार गरिबासी मालवा पुगारिमभिर बन गये। उसको प्रसंसामरीत पन को। गने रागा सापका ऐण्माराम और निसरोनी बीवन मया नहीं ममा। थे रामा साहसके मुंहसर ही उनकी को मालोचना करतब। सरा अपनी पर्यमा ही मुनी मामी रामा साहस ऐसी माधोपना मा पो सहते ? भाप्तीको रागा साहबके साले । पा। मागीविकाके प्रानन उनके सामने भर्यकर स्पधारमर सिया।। ममरके सेतुपति हाईस्कृतम तमित भापाक पिलर बने। उन दिनो हाई स्कोंमें मापा शिक्षाको महो दुमति भी दे कबह मपनी मापाकी मानकारी रखने अन्य चिपोकी पानकारी प्राप्त कोई प्रयाल नहीं करते। इसन परिमाम यह होता पाकिम सामान हो सनका मार करते से मौर म मिचाया। भारती एसे भाषा शिक्षा में उन्हें पपी यामाकारम जीवनका छ मनुमन हो गया था तात्यक्षिक राज परिस्थितिका मान पा। बोगीकी भी बन्ली पानकारी दी। मनकापा मारकरते। पत्रकार भारती इसके कुछ समय पूर्व ही माास गरसे " मुदेश मित्तिरन । मिन) नामक एक तमिस मिक पत्र निकलने लगा। उस समय महात पो-तीन मागी निम पावो निकाही ऐ पर मिल रमिक पत्र एक। बी मुखमय बम्पर मामक एक प्रसिर रेसमतने यह पा मारम्म पन बिनोंमें रेसी भापायक पर मानेमें बरी कठिनाइमा उठानी पर रिसेपम्प तमिह प्ररेप परिस्थिति गौर भी कठिन पी। तमित भाप पति ने रेस-विदेपकी स्थितियों का परिचय प्राप्त करणको मापक महा रखते थे। गो ऐसी भमता रखते में मादमापाको सेपाकला को पोरमकी मात मही मानते थे। ऐसी परिस्थितिम भी पी मराम में मान मुबाप मारवीडी मोर मााएमा। भारती उत्साह बोप्पा रेप प्रेमसे प्रभावित हए । पचपि में भी पाक रेपमतमो भी प्रारम स २। मगर पा कि भारतीको परिपूर्ण समारोमा कोरेमा भाकर खामियमंठेने। इसलिए राम्होंने भारतीको अपन मिय उपसम्पारक बनाकर पा बिदेसी समाचारो बनुपाए तमा माम समा सम्पारन मरका काम सौंपा । मयतेव जिवनका मार भी मारवापर न पाणी या काम सोमारकर मास पहरमें बाहर रहने लगे। मा राणाको स्तुति मावे पने या निरे मम्मापक बने रहनेही यह पत्र-सम्पारनका काम माप्तीक मनामपिक मनुका था। पर महार पूरा सन्तोप नही मिन्म। विधिोना बत्वाचार मौर सोगवासियोकी । और संकुचिलवाते में पुणे-अपना सनेस मुनान लिए बातुर थे। मपा, - रचाकी पूर्ति बीच-बीच गीत पार मा रहें सागनिक मामी करने पर समाचारपत्रों द्वारा अपने न विचारों को प्रमा नहीं कर पाते में । - देशी नौका कम्पनी इस बीच देशमें कई महत्पूर्व ऐसी घटनाएं घटी जिनसे उनके उत्साह कोमोर मी बधिक बढ़ावा मिला। भारती सम् १९४ में मास पनि। सन् १९ ५ में बम-विभाउन हुवा। रावनैतिक मन बन्दे मातरम् मग्णन पप होने लगा। भारतीने इस मन्त्रको मेकर मन मोठोंकी रचना की। सन् १९.६ में मी मो चिवम्बरम् पिठं नामर रेसभक्तन बहानका कारोबार शुरूपिमा। प्राचीन काममें तमिड प्रदेसक महाग रदूर रेसोंतम पहुँचते । मग्रेगोके राग्मम पर. पुरमें भारतीयोंका एक भी गहागनदीपा नितन मी बाग में सभी विडियो । भारतवपके समुद्रतटीय बबरगाहाके बीच भी कहीं कोई शो बहावका बाबा गमन नहीं होता था। पिबमरम् फिलेने "तुती (भगीमें दृटिकोरिन) से सिंहल (मका) के कोलोम्बो मगरतक महान कामका निश्चय किया। कार्यों रूपयोगी पुगी समाकर “स्ववेमी स्टीम नेविगए कम्पनी मामक संस्था कायम पर उन्होंन एक महान परीरा। बहार दोनों बन्दरपाहाके बीच में पलने पपा। बनताने समय प्रयग्नका गहरा समर्थन किया। पर विदेशी व्यापारियों मौरसर मारने कुछ ऐसा का रफा किया कारोबार पाहीन सका। परिणामत हालों रुपोंही पूगी र गई। पिमरम् पिछेपर रामगोहका दोप पाया गया। उन्हें कठिन कारावासहा पण रिया पमा। उन्हें महमें मेमकी तरह कोलू पालका काम दिया गया। पिएमरम् पिळे भारतीके मित्र पे। उनपर यि मए इन अत्याचारीका भातीपर बहुत प्रभाव पड़ा। इम्बिया मौर "बासमारत सन् १९ । म खेमें राष्ट्रीय मयसमा (कास) का अधिवेशन पारामाईनोरोगीकी मम्पमाता हुमागा। मारती उसमें पए। मधिवेधमो मार मामकोटनके वे सिस्टर निवेदितासे मिसन भए । बस मुसाकातका परिणाम यह हमा कि भारती स्त्री-स्मातरम्य तया पर्व-वाति-समन्वयक समर्थक बने। भारती अपने विचारों को प्रष्ट पनी सिए बातुर । मोघे कौटने के बार गन्हें इस बातका सुबगएर प्राप्त हुमा। सरेपी मान्बोपन यूप स्वदेसी बस्तु!का पापार बतानके पिए एक “भारत मपार स्पापितमा। तमिक मौर नगीमें एकएक साप्ताहिक पन निकामलेगा निश्चम या। परसाहीसमक्त माषायक बार्षिक सहायता देनको पार हुए। भारती दोनों हाप्ताहिक पत्रोने सम्पावर और भगार प्पबस्थापक बने। तमिम पण “इन्दिया बार पीनी पत्र "बाड भारत नामसे प्रकापित हुए। भाखीका सनिक “सुरेस मित्तिरम" पबसे समन्य फूट यया। " प्रबरमा।
चन रिनी सामान्य बनताको अभिमचि सार्वजनिक कार्यों में बहुत कम दी। कुछ पच्चेि कोप कांग्रेसके नरम रसका समर्थन करते थे। छ होर छिप-छिपे पोशासका संग्रह करने के वणरेखा कठे । दिमक महरायो विचारोंका समर्थन करनेका किसीको साहस नही होता पा) भारतीने का काम अपने सर मिला। मपमे दोनों पदों द्वारा उन्होंने मय-बापूर्तिका व एका पा। सावनिक सभामा नये-नये पौत गाकर बाप कोयामें उत्साह पैग करो। उन दिनों महासके एक प्रसिर पेशमात पी पी मिस्वामी बम्पर प। (यहाँपर अप्रासंगिक होमेपर भी या कहना मनुषित म होमा हि सन १९१० में में समस्त कामाको नापरी प्रचारिणी समा एक समारोहमें सम्मिपित हर बौर उससे प्रभारित होकर उन्होने बोषित किया कि हिन्दी ही भारत की राष्ट्रमापा बन सवीर रसका दक्षिण भारत में प्रचार किया जाना चाहिए। महामना मामयीयगी भाप्त मित्र। मरे पुष बाग भी पक्षिण भारत हिम्पी प्रचार समाके सबल समर्पक है।) ये मरम पम । भावी अपने पोंमें उनकी कड़ी मालोचना करते। नरम बारे मेतासे मेंट एक बार एक मित्र भाप्तीको भी अबस्वामी अपके पास हे माना चाहते थे। भारती पानेको तैयार नही रे पर मित्र बनुरोधसे गहेबानाही पड़ा। मित्र पस्मामी मम्बरसे मरतएक बीयमान कषि सहकर भारतीय परिचय कराया। उनके मीत सुनकर बम्पर या प्रपनाए। गहोंने पिको १. पुरसार रेफर कगिरी बीवोंकी रस हमार प्रतिमा पाई मौर पन्हें सारे तमित प्रदेश बटवाई। बारको बरसविक नाम पठा गा तो मी हा सामी मम्पर बोले-"एनीति मग पात है साहित्य असम। सम्पापक भाप्ती मेरा सपना अधिकार परकवि भापती मारररमा परम्म । मुझे प्रम्पारक भावीसे कोई नहीं है कपि पाणी प्रति मेरी दी पठा। सूरत कांग्रेस बन् १९.. में मुखौ को कासपी पममें भारती भी गये। महासमुषः उनके साथ गए! भारतीके मनमें पहले ही तितक माराम प्रति की भसा भी। मुणकी याबारे बार तो विता महारान उमर बाराम्पर ही बन पए। ये कहा करो -"बो मेवा समपने बाप्पा माह बिना अपने अनुयायियोंकी मुख-मुविधाबारा माल नही रखना बह तो निरा नेता है। पर गो मेवा सरा मपनने बभिक अपने बापारियोकी चिन्ता करता मनुष्य नही रेखवाई। मूखम प्रविरिणतिहरू मारागहमारे मामास दो सचमुच मासे और हर प्रतिनिधिसे पूछने पे कि तुम्हें कोई समसाफ तो नहीं होती? पिसी गातको मायस्वाया हो तो निस्संकोच मायो। देवता हो! तिसक महारानसे भेंट मूण पाचते ही मारखीका प्रपम प्रपल तितर महरामसे मिसनेमा पा। सनाने शिक्षकका नाम मुना पा पर उनसे कभी मिठे महा पे । मूख घार मया पा यहाँकी मापासे मी में परिचित नही थे। उनके पहुंचनके पुष समम पूष ही यहाँ पीरमा पानी बरसा पान पस्तेपर पाना कठिन पा। फिर भी सोत्माह निकट पर। मुटन तक कौपामें चलते हुए भारती कांग्रेस मगपकी भोर मए । ही एक स्थानपर उन्हान देखा कि होम पानी बहानके लिए ना काट रहे प और एक सरमन हाममें पता लिप न मोनॉको मार्यवर्मन करा रहे है। भारतीने सोपही अपने इष्टदेषको पहचान मिया। नतो पानीकी हो परवाह की नीपरकी। महाँपर बटसे गन्होंने भूमिपर पिरमर पवत प्रणाम म्मिा। मूरखकसमार सरकारले मपनी रमन मौविनमारम्भ किया। पपपि "इन्दिया" सम्पादनका सारा काम भारती ही करते पारे मेका उत्तर रामित्व द्रोपर बादो भी सरकारी कागम-पोंमें इस परी सम्पारक परपर “श्रीनिवासन नामक एक पुग्मनका नाम पता पा। भारखीका एकमेव भासपजनक माना मपा सरकारने पत्रपर कानूनी कार्रवाई की। पार्क सम्पारकी माते र मुफ्तना पड़ा मीनिवासन को। ने पांच वर्ष कठिन कारावामन बपरिया बयापा। पापिचेरो प्रयाप्त इधर सरकार माप्तीको किसी जमिमी तप पकाकरण देनके पस्ममें बीमार उपर सत्माही ममपुमकोका प्रबल पा कि भारतीय सम्पारस्वमें इम्दिया पन रबर निकलता ये। महायसे रशियों करीब एक मी मीमकी दरीपर समाके किनारे पूरी नामक एक मबर है। इसे पाचारण कोग पागिरी कहते है। यह उन रिनों काम सिके बम्तर्यत बा। (यपपि मद यह मगर “भारत-मर"में सम्मिलित हा गया है तो भी फ्राम्स रेपन बमीता मे मिधिषव मारतको माप नहीं रियाt) बह निश्चय हुमा कि भारतीको पानिपरी भगा बामे बार महास मिमा पत्र निका। पहरू तो इम रिचारको स्वीकार मही किया गया। पर मझ गया कि महासका गाना पलायन माना बाएमा कायरता मानी भाएगी। पर बन्तम नियम यही हमा कि मोर काहे को कहें मा समर्ने पर मोहित के लिए पाहो बारी रखना मावश्यक है और पाणिरेरीसे ही यह माम हो सकता है।
४० इस बीच सरकारले भारतीको लकी बाशा पारी कर दी पी। इसका पता माप्तीको कृष्णस्वामी बम्पर ारा मिल गया। इन मिस्वामी मम्मरके विषयमे कुछ बोर्पोका दो मह विश्वास है कि ये मही प्रसिर मेवा बिनकी भारतीने मोबासोचना भी दी। उस समय ये मद्रास पम्प सरकारके पहुच उन पदाधिकारी बन गए थे। इसरे गुरु मोर्योका यह कहना है किप्प- स्वामी बम्पर एक दूसरे ही सम्बन ब पो पुलिस विभागके उन अधिकारी और मारखीके बड़े प्रमी। बो भी हो यह समाचार पावे ही माती मद्रास कोरफर पापिणेरी पले मन। उनके पहुँचने के हुए दिन बाद भी मपिन पाल गौरब में मु सम्पर भी यहाँ गा पाप। में सब राजनैतिक प्रवासी पापियेरीमें "मुसी" (स्पषी बाम्बोजनके समक) पहताते थे। इन लोगोंको यहाँ गम्-सी कठिनाइयो मेलनी पड़ी। पारती पर महाससे निकले तर अपने एक मिबसे पामिरी मिबासी एक सम्बनके माम एक परिचय-मन से पए। उस सम्बनने पारखीको अपने साथ रखा। परन्तु बोगी राग्यको पुमिसकी प्रेरनासे झान्सकी पुसिसने उस सम्बनको इतना पराया- धमकाया कि उन्हें विपत होकर भारतीको अपने यहाँसे हटाना पगा। सौभाग्यमय उने पापिपरीमें एक मौर मित्र मिड बए। उस मित्रा भारतीय प्रति बना ममतो गया बा कि स्वयं कष्ट उठाकर भी उन्होंने भारतीको मपने परमे गारामसे रखा। इतना ही नहीं भारतीकी सहायता करने के लिए अपनी पलाने महले तक पिरवी रख में संकोच नही करते थे। यह सच्चे माती भत्तनतोकोत्री या नेता रे मोर न सम्पन्न परिवारही। में एक मापारीक यहाँ मुमीमी करके अपनी बागीपिका बहाते थे। पक्तिकी भावना उनमें कूट-कूटकर भरौपी। में मम्मप्रेमी भी और पाखी त्याला महत्व मानते। समका माम मुनरेश अम्मर बा। प्रवासकी कठिनायो वोर सरकार छ सरकारपर बहुत बाम गस्ती पी किया राजनैतिक कार्यकर्तामाको अपने महासे हटा दे। पर पपनैतिक कामकाजको भाभय रेलसे हार करता मातर्राष्ट्रीय नीति एवं' निपमोरे पिम्स ना। ससी प्रकार प्रेम सरकारको ममन्तुष्ट करना रनो बरन सार्वी थिए हानिकारक पा। इसलिए उमरे एक नया कानून बनाया कि जो “पिरोपी पाणिरेरी माकर बसमा पाइने है, उन पापिनेरी पाच बोगरेरी मनिस्ट्रेटोंकी सिफारिण प्राप्त करनी होपी। पापिणेरी मारलके मन्तगत एक छोटा-मा पहर है। रसपर फारसा मामिपत्य पा इमबिए फासीसी मभिपारिकि लिए ग्ध नगरके बाहरका माष "विरेस" इस कानसे मरपिप बार ॥ सु बम्पर, भारती और बाप सभी पा।
[कपि-श्री मामा-तमित]
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मुब्रह्मण्य भारती और उनकी पत्नी प्रेल्सम्मा
[ोमा पार पदमनाम मौरव प्राप्त
५० इस बीपमें सरकारने माखीको और कालकी भामाबारी कर दी थी। इसका पता मातीको उपस्वामी मम्मर द्वारा मिल गया। इन उम्मस्वामी बम्पर पिपरमें कुछ लोगोंका तो यह गिलास है कि यही प्रसिय नेता है, बिनडी भारतीने मी भाकोषना की पी। उस समय ये मास राम सरकारके गत सच्च पदाधिकारी बन पए। दूसरे मुख कोमाका मह कहना है कि हम स्वामी मम्पर एक दूसरे ही सम्पन बो पुजिस विमागके उच्च अधिकारी ने मौर भारतीय प्रमी । बो भी हो यह समाचार पावे ही भारती महास छोड़कर पाणिरी बठे मम । उनके पहुंचने के कुछ दिन बाद भी माबिम्ब पोप बौर सु मप्पर भी यहाँ गा पहले। ये सब राजनैतिक प्रवासी पाणिपेरीमें मुरेपी" (सदेसी मान्दोमनः समर्थक) कहलाते थे। इन कोर्गोको यहाँ बहुत-सी कठिनाइयाँ मेलनी पड़ी। भारती बब मनाससे निकले तब अपने एक मित्र पापिचरी निवासी एक सचमके नाम एक परिष-पथ ले गए। सस सम्बनने भातीको सपने साथ रखा। परस्त मैगी राम्पकी पुठिसकी प्रेरमासे फाम्सकी पुलिसने उस सम्बनको बचना ग्यमा प्रमकाया कि विवस होरर भारतीको अपने यहाँसे हटाना पड़ा। सौभाम्पस न पापिनेरीमें एक मार मित्र मिस गए। सप्स मित्रका मातीके प्रति इतना ममत्वहो गया पाकिट ठाकर भी गहाने भारतीको अपने परम मारामसे रखा। इतना ही नहीं भारतीकी सहायता करने के लिए अपनी परलोके महले तक पिरवी रखने में संकोच नही करते थे। यह सच्चे मारती- भपतनतोकोषीया नेवारेमौर म सम्पन्न परिवारही। में एक पापारी यहाँ मुनीमी कर अपनी मागीपिका पावे थे। रेषमस्तिकी भावना निर्म यूट-कूटकर परोपी। में काम्पप्रेमी भी गौर भारताचे स्पागका महत्व मानते। उनका नाम सुन्दरेम सम्पर भा। प्रबासकी कठिमाइया बंग सरकार मंच सरधरपर बहुवबाप रामतीबी किया रायनैतिक कार्यपडिौंको अपने पहसि हारे। पर राजनैतिक कारबिको बामय देनसे हमार रमा मातरर्राष्ट्रीय गीति एवं नियमोर पिसा। उसी प्रकार औण मरकारको वमन्तुष्ट करना उसके मान स्मारी लिए हानिमारकमा। इसलिए उसने एकममा कानुन बनाया कि बो“विरेसी पागिरी बाकरवसना पाहते है गम्हें पारिरीके पांच बानरेरी मजिस्ट्रेटोडी सिफारिस प्राप्त करती होगी। पागिरी भारतबन्तर्वत कोटा-सा पहर है। पर मारा माधिपाय पा इमलिए फान्सीसी अधिकारियोरे लिए ग्ह मगर बादपा भाष "विरेस" पस तुमसे माविर बाबू र मु बम्पर, भारती मौर वन्य समी
[कषि-श्री माला-समिस]
सुब्रह्मण्य मारता मोर उनमा पनीरजम्मा
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४१ मुदेपी कोम बहुत चिन्तित हो गए। एक बॉनरेरी मनिस्ट्रेट भारताक मित्र । भारताने रमें सारी परिस्पिति समनाई। उन सरगमने बहीपर एक समरिश पर सिवाया मार भारतीको मारवासन हर पर मेर रिया। दूसरे रन उस सम्वनने भारतीको पॉश एक गट्ठर माकर रिमा। उसमें भारतीय भए, अमिन बावरे लिए मोर मुसम्परके लिए पौष मनिस्ट्र टाके पांच पॉप सिफारिस पत्र पे। बम प्रेस सरकारने रन रामतिर परभाषियोंको कष्ट पहुंचानेमा एक (सरा भाव निकामा। पागिरी एक छोटा-सा नपर है। यहाँ मामम प्राप्त बन सभी "सुदेपी कोर्गोको बार्षिक सहायता पिटिस मारसे ही मिस्ती भी। शिटिगर विमागन सब पत्र मनीमार मावि रोक दिए। उन तीनों या मम रिहास्सर होरिनामपर बाबाले पत्र मनीबार मारि प्रेपकोंको वापस र दिए गाते 1ससे मारती और उसके साबियोको बहुत मधिर कठिनाइमा मेगनी पत्री पी। पर रन मोगाने सारे पट यही पौरपके साथ सहन किए। सहायता परमानेमाले सरसे सम्म म गार पर बाते में या मिरवसनीय मोोंके हाप मेरठ में। घर सरकारको मौहार मानकरमपनी निर्धारित मीति बरनी पड़ी। पापियरी सपिम्पमा भारती मारब मु बम्पर प्रति दिन नियमित पसे मिला करते पे मार वनेक विषादी पर्चा करते थे। औरे-धीरे मरदिप बापूको यभिवधि निरी राजनीतिसे हटकर माम्मारिमक विपर्पोको मोर मुही। भारतीमें भी इस तरहका -पुरा मात्र परिवर्तन । केवल देप्रमाके पर ये सीको मुति काली मां सक्ति मारिपर भी पीत रचने मगे। परमप्रेममें किसी तएका मन्तर नाही एमा। बहन्मों-का-पौबता रहा। पागिरी "इभिया' पर अधिक समय तक नहीं पड़ सका। रघर पिटिस सरकारका निगम पा इपर फेंच अधिकारियोंने भी बहुत कष्ट रिमा। इम्बिया के बार भारताने "कर्मयोगी माप पत्र निमाहा। यामी मधिक समय तक नही पापाया। इसके बाद उन्होंने “म नामक एक पर निकाला। गामी पुण् सनय तह पार गल हो गया। भारतीने अपनी गपिकात पनाएँ पापियरीमें ही की। यहाँ रहोंने अनेक चमक्तिपून मीत रथे। "पांचाठि रापमम्' "मुषित पाटद" "मन पाटदु" भारि कार्योकी रचना की और भान रपम् नामक एक गद्य-काम्य भी रमा। पुरकारा प्रथम महरमें मरे हर राजनीतिकोने पर्मनाक पिम्स प और उसके मित्र राष्ट्रोका समर्थन मिादा। उसके बाप होनेपर साम्प प्राप्त कोरे सपने देवे मारी। पर सरकार कोगोको केवल रामों (प्राता) 4 ४२ पासनमें पिभागो संचालनका अधिकार मि। इच मय पम्प सुधार- बापोगनको बसम्म बाठे समय सरकारने पपनैतिक दिौंको मुक्त कर पेमेकी घोषणा की। भारती पाणित पीयनसे मर गए थे। सीने बिटिप भारतमें मानेका निश्चय किया। पागिरीकी सीमा पार करके पो हो सनाने रिदिप भारतमें प्रवेष पिया पोंही पुलिसने उन्हें हमामातम में लिया। पर मासाप्रमुख तोपोंने सरकारपरमा प्रभा गठा। फहत पीपट्टीपारवी मुक्त कर दिये गए। पुलिस अपनी पत्नी मागम पाकर है। ताम्रपा मीफा तटवर्ती यह सुन्दर गोप उन्हें पा प्रिय गा। भारठाणे हिए मानठिक पान्ति प्रदान करने में यह मान बड़ा ही उपयोगी सिम हमा। कुछ दिन मागम करके बाद भारती फिर महास बहे माए । स समय “मुरेश मित्तिरन का सम्मारन ए रंगस्वामी मम्मंगार नामक प्रसिस पिठान पपत करे। हान भातीको पिर बपने कार्याम्पमें लिया गौर ए उस परका उपसम्पापबनाया। पा-सम्पारन सारे सामाजिक कार्याम मी भाप ले। हमारे एम एन रिमों मगारोंका संपटन नमा-गया पुरो रहा था। उसमें भारताने की सियासी को दी। गोपीनीसे भेंट सन् १९१९ मारनमें पानीमाने पर पातुनके पिसबा प्रयन मान्दोलन पर प्रिया पार इस हमलने उस माह माह पधारे समनपाखी उनसे मिलने गय । पनका गांधी परिपप नहीं पा न कोई उनका परिचम रेलेवालाही पा। उस समय रमले माडीगीर पासवानकी कोई पाठहीहीदी। । अपचाप बचानक पाँचीनी कमरेमें प्रविष्ट और बाकर गांधीगीरे पास बैठ गए। उस समय उस कमरेमें पगानी स्वीय वायमूर्ति पम्बामी बम्गारमादिपस्थित थे। ये सब भारतीय भाषममय रहए। पिसाने चमका मांधीगीसे परिचय माई करामा। माप्तीने नमस्ते कहानको भूमिराबांधी। सहीने अपमा परिषम भी नहीं रिया दौ--"मिस्टर पाणी मार पामको एक मामें मै भापक नेमावा मा बाप उस हमारे बायम पांणगाने महादेव नाईको मार भामक कार्यवापर समाप पूछा तो मिरितहमा मिस एस समर बम्पत्र माना पा। उन्होंने भारती महा- “यार तो मही ही सम्ता कम हो टो मा पेपा! पाळीने महा-पा नही हो मम्ता। मणा में रिया मेता हूँ। माप यो बान्दोमन पुस्कर हे है बारेमके सिमा हितकर होमा। मापको मेरा भाभीर है।" वारा कापसे गए। बापूगी पिस्सिव-म हो गए। उन्होंने उस ममय पही उपस्थित होर्मोस पूण पि ये कौनमानीरवार रिया-ये हमारे मिक सके राष्ट्रीय रवि है।" बापूाने पूजा-- या इस तमित रेपमें ऐसा कोई मही है वो प्रेम साप इस पगिकी सेवा-सुभूपा कर सके ? भारतीका हिन्दी प्रेम सन् १९१८ में बापूगीने रमिन भारतमें हिन्दी प्रचारका कार्य बारम श्मिा बा। मासरे मोर्गोडो हिन्दी भाषा सिवान लिए उन्होंने अपने पुत्र रेवदास मांत्रीको महास पगापा। वरास गांधीने तिरुवात्मियभिमाम प्रसिद मोहम्मो में एक हिन्दी वर्ग बताया। यह बम मध्यम् पी मीनिवासापास नामक प्रसिव देशभक्त परपर चलता पा। भी पीमिपासचाम पापियरीमें भारतीय साम पते में मोर सरेसी स्टीम मेरिमेमन कम्पनी भारत भगार और मम्प राष्ट्रीय सेवा-बायोम बहुत अधिक पनकी हानि सान कर चुके थे। पास मामौके पास मानेपर पौधीगीने रबिणसे भी हरिहर शर्मा और उनके साथ कुछ माय नवयुवकों को हिदी सीखनके लिए प्रयाग भगा पा। रिकी विमा पूरी से एहिर पनि महास तौटनेपर सरास गांधीने इन्हें हिन्दी प्रचारका काम सौंप दिया मौरये अपने पिता के पास वापस बहे गए। इसी समय भी माती फिर मद्रास बा पहुंचे थे। मी हरिहर शर्मागी पहले से ही भारतीसे परिचित पर्मागी मी “पसौ" होबोंमें मिके पे पानीको धर्मपत्नी मोन्तीरोग भी पबम् पावकी है। मारतीकी पत्नी पेस्तम्मा भी इसी मामकी दो। इसी नाले में पिर पति कार्पोमें मभिषि प्रकट करने गये। भारती समाये ही हिल्ली-प्रेमी थे। इसी कारण उन्होंने अपनी पुत्रीको हिन्दी वर्ग, मेनना मुरू कर दिया। विक्ष्यस्मिमिका “पार्ष सार" मन्दिर पग प्रसिर है। न मनिरके सामने कुछ पाइ मोरके परमें ही हिन्दी बर्म पसमा भा। उम मन्दिर पीडकी मोर एक फिरायके मकानमें भारतीयी पते थे। सनानता सम्बन्धी रमको पिनी रिसातवी किये कौए और मौरयाको भी मानन मानिके समान ही मानते थे। उन्हें पूरा सिबास मा कि प्रेमसै हिम बन्नुको भी भान्त बनाया जा सध्या है। इनिग भाखडे बोबो मदिरों में हावी पापनेकी प्रथा है। तिस्परिक- मिले मदिरमें एर हाबी बार भारती बहुधा प्रति दिन हिन्दी पममें पागरे मार मन्दिरके उत्त हाबीके पास भी बावे मोर उसको कुछ फा बारि विसावे रे। एक रिन हाबीने सनको भानी से टेक दिया। पिर गए। रए हसी-सी पोर माई। उनके कुछ मियान उनको वहाँसे हटार सनदे पर पगारिया। उसके पहले भी उनका स्वासप्प बहुन सन्तोषप्रद नहीं था। मा १९२१ सितमार, ११ वासीको १९ वर्षकी बलायु पनमा पात हुमा।
। . (अमित मारतीका व्यक्तित्व भारती को हसमुख सवारसाप चौर पर प्रशा-प्रिय थे। ग्ममा मात्माभिमान को ऐसा था कि बहुत बपि संकटम होनेपर भी किसीधे कुछ मांगते महीये। ऐसी परिस्पिति पा कर देते थे कि पता होष यही मानने समते पेकिमावि हमसे धन पहपकर हमारा उपकार रहे हैं। ये कमी बावा हमसे गान इस तरह पहन नहीं करते हि महाप मागे पेगौर पाताका उपर। पाताको मपना पाप बढ़ाकर मरती पर रानको रकम रखनी परती पी- मारतीमह रकम उठा सेते। वे मे- यामहमार मही--यह कपि गौरवको रखा है। परि मै बाताका हाप पर माने तो यह ममने या कि मनी कबिसे बड़ा है। पातकीन होकर बादलका बल प्राम करे तो उसमें नपावकका गौरव है मौरन बादसरा मझव। पापिरेरीमें यमस्वामी पट्टिपार मामक एक उखन । प्रवेश पर सोकि नामके साथ "बेटि"-बाररमा बार गोड़कर पेटियार -पद योगा गाता है। भारतीय गो भक्त थे। भारतीसे मापर मिलने माते और उनके साथ कुछ समय बिताभर बिरा होरेक पूर्व कप कर बाया करते थे। एक बार भारतीको पैसकी बड़ी माधम्मकता की। स्पयाँक लिए उमस काम क बया था। संपोषण पसी रिम बही पट्टिपार मा पहुँ। भागने कहा-“हो भाईट्टियार। रोग पीत सुनाको हो। मार कहानी मुनो।" पट्टियारले कहा- माप वो भी सुनाऍपे मै सुनकर पाय हो पाऊंगा। भाप्तीन कहा-मानी पुरानी है--मुनी। रो मित्र । एका पेझिमौर दूसरा किसान मा। नोभमपर पी गए । कि रास्ते में भयानक मंगा पड़ता था और रास्तमसमरा रे पहाफा काम पूरा करके पानी ही हौटना पाहते २। पर म बस्ती पूरा नहीं मा इसलिए उमरानोको पापस मानेमें रे हो गई। बन तक पाप- पपते अप हो गया। वती पहानी सुनाकर माताने पूछा-या पहिसार। रोम बनाने के लिए मोदी सभी गुप्ता या परा सर करे। पट्टिपारने कहा--पाप गार पाई पर पहा माते है। मैं तो मापके साथ पम्नेवाला बटोही हूँ। मुझे किसी बातका रमही है क्योकि माप मेरे भाषा भारती एमाह! गाइ! नाग मरिमरी! बदारहो। बा तो मुसो मारे। हरोंने फिलामको सूर मारा उसके पास पुण्या, वह मर र लिया। यह कार पनि मचानक गिर पया। यह नुमो 1 । मी मानम करना कठिन पाकिमकी सांस पर ही है या नहीं। पर मारे किमानको सूट तापट्टिकीयामा देशकरमापस्में बातचीत करने कप-महो छोरोम घरको। मरेको पपा मारलाई पट्टि मट बोम उठाको भाई! तुम्हारे पहरे धन कमरमें रन पये बरार रखते है क्या? इतनी पहानी मुनाने वार मातीन पूणा-या माई पट्टियार। कहानी ठी मोहै? पट्टियारम नम-4 क्या मान कि कहानी ठीक है या नहीं। माप पतन पोर ही पहेंगे। उमट्टिकी बात तो मैं नहीं जानता। पर मेरी कमरमें एम रफ्य1 मीगिए। यह कहकर रामने अपनी समरमे दम रपयका मोर मित्रता मोर भारतीय मामने रख रिया। माणीने मानानीरे हरे रातके ममय परेमें दटा परते पे में दो दिनबारे सूरता है। यह कार में हमने भय । भारतीको बाट्टियार भिम प्रकार ऐन ऐ उसमे या साप माभूम होता था कि उनके मनमें भारतीय प्रति किलनी भरा पी। महारमा माचार-विचार ही माप होते है। मुम्-मुस्में मोग गर्ने और समझ नही पाठे! रनको निरा या ममहमला करते है। ममय मारयेही मोग रग महारमामींची पूजा करने ममते है। भारती बीवनमें एमी बनेर परमाएँ बटी मिनमे गम-नापारस ही नहीं उमः मम-सम्बन्धी भी पर्ने पाया ममते। बामनी पटनामा कारण परिकी महिला मार पर भारतीको मंतिम एक बार पागिरीम एक हाका मारतीखनम माया। उसको तोप पायक मानते थे। यह पिस्ताना पा बता तो नहीं पा पर सरा मौन पता भा। एनममता नहीं था। भारतीने गा राम प्रेममें पाम-पोमकर ठीक घ्यिा या साठा है। कोप रमका पहास करते हगे। एकारण पनि पार हमारा मोबने हमारा समान पा। दम जमानामे ममी भारतीकी प्रामा करने हम। फिर्म वर्मापम पम पुराम-दनिहाम मारिपर मारताकी पना मनस्य पी परमा परम्परामा वामकाते। गाडिभाकोदोमानी नहीं थे। मार रिण पाने ही दोन पत्रोपवीत पानना . विसापा। मे मोरबीतम पास थिम भारतीय बामगॉमें बयान निन्दनीय माना जाताहै। मारताको भी इस बातार ही मिना मलमली पड़ी थी।
H पए (स्वगीय र रामस्वामी) नामक प्रसिर तमिल पाने अपनी 'महाकवि भारतीवार नामक मारतीको चीरनामें एक पटनाका पमन किया है। उसका सरस मामा मों है एकरिन सरेकरीबमाठ बने मै घरविम वाममसे निकलकर भाप्तीके पर पा पापा। नहाँ कई लोग एकभित । गोधर्मे एक होमणमा निसमस घुमा निकल पा पा। कुछ पेग वेदपाठ कर थे। वही होमकृपके पास भारती विण्यमान। उनके पास ही कनक मिम नामक हरिबन बाम भी अपा। रस समय प्रोफेसर सुबमबम जैसे कई प्रतिष्ठित होम भी यहाँ उपस्थित थे। "मै गाकर प्रोफेसर साहबके पास बैठ गया। मैने पीरेसे उनसे पूछा- यह पया हो हा" चन्होंने कहा-कनक मिमका यसोपात संस्कार हो रहा है। मय मायाका उपरेप होनेमामा है। मुझे बड़ा बापच मा। मैंने फिर प्रोफेसर साझसे पूछा-मारतीके पास बैठाामा बाम ही क्या हरिजन बार- कनक किंगम नामकबह बाबर है बिसका महोपपीत हो रहा है ! उन्होंने कहा- यही मा, देखो भाखो मुसाको मायबीका उपरेप है। "मुझ बा पाश्चर्य हमा। कुछ ही महीनों पूर्व एक बार भारताने मुमसे बनुरोप निमा माफि में बपना महोपबीत गवार पर बहुप दिनोसे मझोपपीत मही पहनते थे। यही बातसम बमोपनीत नही पहनते मौर मुझे तो ममोपमीत रवार नेकी सगामौरबम मिष हरिबन पालो पोपपीत पालाने सिमे ऐसा मारपर रख पहै। “मैं मौन म पा। भारतीन मेरी और रेषा तर नहीं। मावत्रीका परेम पूरा होनेपर उन्होंने काक स्विमसे काटा! मायसे तुम बाइब हो। तुम निर्मम हो। किसीसे मव ग्रो। बरि कोई तुमसे यह पूरे कि तुमा ममोपात संस्कार करातेका साहस किसने किया तो तुम निर्भर होकर मेरा माम बता सकते हो। किसी भी परिस्थितिमें यह पनेऊन ग्वारना। भाखाका यह मनूग उपरेश मुनकर मैने चारों मोर एक नगर रातार रेवादिनाजोग मननी-मनसतो महाऐ हैं। पर सरेहरोंपर मैने भारतीय विचारोके समयमा ही मार पाया। उपनयनके कार्यक्रम बनम्वर सभी होग पान-सुपारी पहन कर निराहए। कम मिपमको उत्तर तक पचाने लिए भारतीने मपने एक मित्रको भेगा। "ब सब ठोप बहे गए र भारताने अपना योपदीत निकास गना। सते ए मेरे पास भाकर पौने- क्या बात है? मैंने कहा- निमाहित पलियों (समित प्ररेशम रश्मिनी मौर मत्पनामा परिणती धर्म पलियां मानी H - निों- नाती है।) माररस हमारमोपिनाकि सारीकरणमाके पौरुष निरपरामारी माने पावे। बापका यहाझोपरेस (गायनीका उपदेय) मी कुछ एमाही मालूम पाता है। भारतीने कम-विमको नमार माधम मामता बीर पानवा उसके हिए अनेक मावस्या नहीं है। हमारे-तुमारे लिए यह मनावपपक है। नवीन शासन कनक दिसमझ लिए यह नितान्त बावस्यक है। शिम समय में उसको बनेक पाना हा पा उस समम मैप भी यमेट पहनना बावस्या का। यह काम पूरा हो मानेपर या उसकी मावश्यकता नहीं पा है। मैं उधको उतारा है।' भारती समापसे अत्यन्त उदार। स्वर्य कर उगते पतंपर भी ममिनेगामो नियममकरते। मपन ममे बस्त्र मई कमीन भय मंगरण मर्योको रेगा। हमारे यहाँ से लिपा माड़ी पलती से ही पागिरेरीमें उन पुणे बपि नामक मादी वस्ती पी। यह माडी मापैसे वीपी नहीं पाती वो पाएमेसी माती पीमिमामिमे उसका नाम पुरा (Push) गाही पा। ऐमी गाली बहानेगामि मरा हो या करती दी कि कौन भारतीको अपनी पाठीमें बाएपा। भारतीका सम्ग भारतीको भावनभर भाषिक ठिमाई महनी पड़ी। पर इस कारमसे मी विकिन नही हए। मान रपम् समान एक रामप्ट पपकाम्प है। अपने भान मी रमपर सवार होकर उपशान्तिको मह साक, सस्प हो और धर्म कोमा पाटन करते है। इन कोसी पीच मृत्यू होरका भी वर्पन करने का असर पिने निकाला है। उसमें उन्होंने सपने को स्पितिका बहुत ही सगर और मुगर बमन रिया है। उनकी पली उनके सामने मागस्यक मोपी सुपी पंप जी -कविन बंबार माया कि सम एक दिनको मावस्यताकी पूर्ति के लिए ग्राम में मम मड़ाई का पयोषी पावस्पस्या होगी। 'भारती "मिम्पामार कानपन करते थे। उन्होंने कहा है- मसारको में सपना मान ! पा मेरी पती पत्नी मिरी माया है। सोनी लिस्मी मेमो पुपिया क्या सपने है? पी में मानहीं मान सक्वा।" भाती सौरक उपासक थे। पर उनकी सौदर्य पामना नामुमता नहीं पी। मुख और प्रमी भायरे पर मुख मोम मिनियोंके मधीन होना रे मा नयाँ समस्त उनका पियामह किसने मरको मुबी एनेक लिए पैरा पिमा है। हम अपने मुको माग पूरी मुनका प्रपन करें दमौहम मन्ने मास्तिकपर्नेमे । रहने -शनि भोपानुष पिसे एमिक अतिम ममितिरोन।
५० किया करती थी। संमोगमप में एक रागकुमारसे मिमी। मैरा उससे प्रेम हो गया--में सससे मौ मिस लिया करती थी। एकबार इन सारी बातोंका मेरा पया वो तीर्नी प्रेमी वापसमें हाकर मर गए। वही पिकारीकी पुत्री या कोरत बनी समास सपना हनुमानास बगर बना मौर एगमार तुम सस हो। पर सापुने सुमसे कहा था कि मैं तुमसे मयस्य मिगी। कोयनकी बात सुनकर कपि प्रेम मम्न हो गया। उसने अपने हाथ पाए। कोयम उसके हामि मा गिरी। फपिने से अपनी शीसे पा लिया। रेखा- यह वो कोमल नही म्पमती सुमती है। अचानक कमि बाग उठा। उसको मार बाया कि यह पनामें निरा पण रेच रहा था। भारतीकी कविताको बार हिस्सोमें बौटा पा सकता है-रे-भक्तिके मौत रे भक्तिके मौत रसात्मक काम्प मौर फरकर काम्प। उनके सैकड़ों निबन्ध है। इनकी की कहानियां ह। पैसासम् एक कहानी है विसमें यह सिस किया गया कि यार सात मेतसे धास्तम् बनता है। भारती जीवन काम्मे कितीने उनपर प्यान नहीं दिया। मृत्यू पार ही उनके साहित्यको महिमा यही है। हम निस्सकोच सक्ते कि कर कपिके बाद भारती ही ए, बिनकी पामि साहित्पपर गण पहरी परी है।
सुब्रह्मण्य भारती [काम्प-संचय]
कषि-मी मामा-
६ कनिष्पत्तिम् अमान-एमन्
सावित विप म तिमोपि एल्साम्
एमेनको पेपरए-पिनर
माम मपिदिल्लन कमोट ।
७
तमै मष्ल् पलियालम्-मुम्बु
तपपलियालम
मतप मद्यम कार-एमै
एरिट्टप्पायुम् मनिस्मान
८ इमो सोस्सिने केह-नि
एएशेपमेन् एम वायिर मक्का !
कोपिस पोन् बोर पति-
पुरत्तपारवम् कूरिनन् कणीर।
पुत्तम पुषिष संपल-पत्र
भूत यत् पछिन् नुटपगम्म
मेत
मे-मन
मेग्मै कसै गळ् तमिपिनिन इसके
१० शोस्तपुम कविस्त-अवै
कोस्सम तिरमै तमिए मोतिविकत
मेत तमिपिनि चागुम-मय
मेहुं मोपिगल मुवि मिश गोगुम
-तमिल पब मै कन्या पी तब (कन्या पर्वमें उन दिनों) मेरे कानोंमें पारों मोर पम्मेबाष्ठी (अनेकों दिशाओंकी) अनेकों बातें पड़ी पी। उनके न पामे क्या-नया नाम थे। ये स्वयं मिटकर नष्ट हो गई। पिताकी पाफे वससे और प्राचीन सप्तम कवियों सपके मएसे माजतक काष्ठ मेरी ओर दृष्टि उठाते हुए भी ग्रता पा। ८ बार मने एक बात सुनी। हाय! मेरे प्यारे बन्यो ! भव में क्या करे ? बाज बोलनकी योग्यता म रसनेवाले एक म्पम्सिने ऐसी बाप्त सुमाई। सुनाई क्या, मानों मुझे मार ही गमा। "नई-नई माएँ, पञ्च भूतोंके कार्यकलापके मम (धादिस सम्बन्ध रसनेमामा साहित्य) श्रादिकी पश्चिममें नम उन्नति हो रही है। वे बिगप कमाएं समिश्में नहीं है।" 'ये वतसाई नहीं जा सकती है। उन्हें म्यातार यसप्लाने की मक्ति तमिसमें नहीं है। बव धीरे धीरे तमिस मर माएगी । परिणामत वे पारमारय मापाएँ अब दुनिया भरमें फैएगी।
वि-भीमाता- एषन्द उरतान-मा इन बसे एमक्केभिसामो भिगवीर एट विणकुम -कसै पोस्वपळ् यात्रुम कोगार्मराक्षेपीर । १२ त म पसियामम- शाम पुतपर सब बसिम्पासम इम पेहमपपि तोरुम -पुगप एरिप्पुति मिझ एम इस्पेन् ।
-तमिल
उस भावमीन यह सब कहा । हाय ! हाय ! में क्या इस
निन्दाके मोग्य हूँ ? (मेरे मम्मो ! तुम लोग पाठों विद्यार्थीमें
पसे पामो। कसाकी जितनी सम्पत्ति मिरे सापर यहाँ
(तमिठ साहित्यमें) एकत्रित करो।
पिताकी पाके बमसे और भारके उत्तम विद्वानों के
तपरेबलसे में इस महान मपयघसे पप गाऊँगी। उत्तम
कोति पाकर मैं ममर बनी रहूंगी ।
कषि-मी माला-
२ तमिष
यामरिण मोधिगळिले तमिष मोषिपोस्
इनिरायगुम कानोम
पामरराय, विमंगु गळा उममनत्तुम
इगपनि शोह पान्मै फेट
माम म तमिष रेनकोय इस
बाप बिगत ममो? बोस्वीर!
तमपुर तमिष में राहग मेलाम
परम वर्ग मेपरम् णम ।
२
यामरिन पुसमरिमे कम्बोप्पोस
बलवर पोन इळगोब पोस्
भूमिबमिस् पांगमुमे पिरवदिस्स
सम्मै अम्म पुपए मिथ इस्तै ।
ऊमैनराम् विस्मळा दुर्गा
पापगियोम , मोर बोस केहोर
शेम मुरमेष मेनिम तेरयेस्ताम
तमिपू मुपागम क्षेपिकाचे पोर ।
समिस
२. तमिल
बम कविता कपि तमित्र मापाडी महिमा मार मामकमरे समित
होबारी दुमतिका सपन करता है और ममनाश दिनमा मा पर्दम्य है।
पमिल होमाग गो बात है यह सभी मापा भाषियोंके लिए माग है।
हम जिमनी भी भापाएँ बानत है उनमें प्रमिस मापाके
समान मधुर कहीं कोई दूसरी मापा महीं ह । (एमी उत्तम
मापा पाकर भी) हमें तुम्छ हाफर, पा तुम्य हाकर सारे
ससारकी निम्दा पात्र होकर मपने बाप्पनस प्रप्ट होकर
नाम मात्रके लिए तमिल-बाला" कहलाते हुए रहना या
अच्छा है? हमें ऐसा प्रवध करना चाहिए कि मधु-सा
मिठास सींचनेवासी मिसको पावाम मसार भरमें फेसे ।
૨
हम गिठमे कवियोंसे परिपितह उममें कम्ब' के समान
पद्मर के समान पोर ळगोवं" के ममान दुनिया
भरमें कहीं कोई पता नहीं हुआ है। यह सत्य है, यह मूठी
बाई महीं है । (अव) हम मोग गूंगे हाकर, वहरे हाफर अग्धे
होकर रहत ह एक बात तो मुनिए, मदि मुगमतापूरम
रहमा हो तो गली-गसी में तमिल भापानी धूम हा ।
कदिभी माता-
.
पिर मास मस्सरिक शातिरगळ
तमिष मोपिपिस पैत्तिरस मम
परबार पुगप रेय पुरुनगळ
तमिए मोपियिमापदत् बेपम
मरवाग ममरकुळे पर गरगळ
पोल्बदिलोर महिम इस्ते
तिरमान पुसमैपेनिस बेलिमाट्टोर
मी वणकम् क्षेपास बेगम !
उळत्तिए रमपोळिद्यपापिन्
बारिफनि मोळिपुणगुम
मेळत्तिम् पेपरक पोम् कतै पेशाम
करि पेमकुम मे मापिन्
पळतिल दाम्बियाम कुरुगोस्लाम
विपि पेट्र, परवि कोवार
तेव्हा तमिपमरिन शुकणार
रंगमरर शिरप्यु करार ।
-समिक
अन्य देशों के उत्तम विधानॉके गास्त्रोंका समिसमें मनुवाद
करमा पाहिए। ममर कीर्ति पा सकें--एसो मई रचनाएँ
तमिसमें रखनी चाहिए। छिप छिपे (पर बठे ) वापसमें
मपनी पुरानी बसाई सुनानेमें काई गौरव नहीं है। उत्तम
पाणिस्प तो नहीं है जिसके सामने विगी रोग सिर
मुकाएँ।
हृदय, यदि सुन्दी म्योति जगे तो जिम्हापर ग्योति
पमेमी । यहि बारके प्रवाहकी तरह फसामी और कविताकी
गार बड़े तो गड्ढे में पोहए बघे सभी दृष्टि पाकर उत्तम
पर (भादरपोय स्मान) पाएंगे सुमधुर मिस-अमृतका
स्माद सेनेवाठे यहाँ देवतार्षीका गौरख पाएंगे।
ब-भी मासा
पन्दे मातरम्
वारे
मातरम एन्बोम -एगळ्
मामिल तायै पचंगुरमेन्दोम
(ब)
मोमे-अभु
२
बाति मर्सगळे पारोम-उपर
जम्ममिशतित एविन रायिन्
बेरियरापिमुम
पारुत्तिम रापिनुम
मोमे। (बम्बे)
परंपर्यळेमुम-मबर
एम्मुग्न् बाव दिगिदप्पपरमो
पसीनत्तराम् विवारो-पिर
भत्तार पोत् पर तीगिप पारो। (ब)
मापिरमणिगु नाति-एनिम्
मम्मियपुगस एम मीति-ओर
तायिन् परिट्रिन पियोर-सम्म
पागे पागम सहोदर रमो? । (पमे)
योम पट्टाप्त रए वाप-नम्मित
मोद.म मोंगिल अनेबहुम ताप
मपि तेपिरत येण्डम नम
मानम बास पितममकेतु बेगम । (पम्बे)
३
समित
२
३ पन्दे मातरम्
या गीत उन रिमाने रखा गया र यमे मातरम् का सारणमी
पमाह माना जाता था।
.
महान् भूमि मावाहो सिर
बन्दे मातरम् कहें!
मुकाएँ" कहें।
हम माति या धर्मको महत्व नहीं देंगे । यदि उत्तम जम्म
इस देममें प्राप्त कर लिया हो तो फिर ब्राह्मण हो या किसी
मन्य पुछका-सब समान है।
२
सुन्छ हरिवन हो सो क्या में हमारे ही साम महों नहीं
एंगे? क्या वे भीमपास बन जाएंगे? यम्म देशकाठोक
समान गया ये हानि पहनाएँग ?
हममें हजार पातियां हैं, वो(इस पातको रेकर) मन्यॊका
दसस देना कहाँका नीतिह? एक मौके पेटसे उत्पन्न
भाई भापममें सब से तो भी पया ६ (एक दूसरेके )
सहोदर नहीं है।
-
बगर हम एक होकर रहें तो हमारा (शम) जीवन है
मदि हमारी एकता टूट आप सो हमारा पक्षम है। मह पाठ
अम्छी सए नाम सेनी पाहिए। यह मान यदि हमें हो
पाय तो फिर हमें किस भावकी कमी रहेगी ?
कपि-भी मामा-
-
४. मारत देशम्
मारत देश मेमु पेपर शोत्सबार मिति
भयंगोस्सुबार सुपर पगै बेस्तुपार।
१ छिळ पनि मलैपिम मीयुतमुधोम-अरि
मेसै कात मुषाम कप्पस बिपोम
पछिळत्तला मनत्तुम कोइलोमुवोम एगळ
भारत देश मेव तोळ कोटदबोम । (भारत)
२ सिंगळत्तीविमुस्कोर पालम बमैप्पोम
सेतुब मेगुरुत्ति पौषि समैप्पोम
गतिम मोरिवल्म मोरिन मिगैपास
मैयस्तु पार गछिस पपिर घोप्पुबोम । (भारत)
घट्ट कमिगळो तंगम मालाम
देर पक पोख्ळगळुम कुस्नेहप्पोम
एत्तिमै गठिसम पोन रिवं विद्र
एम पोळमैतुम कोगुवयोम । (भारत)
मुत्तु कुळिप्पोद सेन
मोस्त बगिकर पस नाटिमर बन्ने
मति ममस्किनिय पोष्ठकोप
बेगबा
मेकरेपिसे। (भारत)
५ सिम मविपिन मिन निस विनिते
मेरा मन्नालिया पेममुग्ने
सुपरसेसुमिनित पाहिशत्तु
म
४
मम्मळ
तमिस
१७
मारत देश
स्था मापा रेश्य क्या इसकी कम्पना पनि भारतीन बारसे
पचास वर्षे पूर्ण यों की भी
भारत देशका माम लेनेवासे समाबके मपको नष्टकर
दुख और सत्तापर विजय पाएंगे।
१ हम पुत्र हिमाचसपर सैर करेंगे पश्चिमके समुद्रोपर
बहान बसाएँगे
निचछे प्रदेशोंमें ममिर पनाएंगे-
भारत देस (हमारा) कहकर (वाठ) भुगा ठोकेंगे।
२
सिंहस द्वीप तक एक पुष्ठ मनाएंगे, (श्रीरामचंद्र द्वारा
पूर निर्मित) सेतुको चा बनाकर सर बनाएमे । वपमें
मानवाले पानीके आधिक्यको लेकर बीचके प्रदेसोंकी खेती
बढ़ाएंगे।
सो-सादकर सोना और मन्य अनक प्रम्य मिकालेंगे।
बाठों विधामोंमें पाकर उहें रेगे मोर इन्छित वस्तुओंको
में पाएंगे।
३
४
मोती मिकास्नेका काम दक्षिमी समुद्र में होता है। वहीं
मन देशोंके म्यापारी माएंगे बोर हमारे पसन्दकी पीयें
हमें देकर हमारी पा चाहेंगे।
सिम्धु नदीपर पांदनी रात र प्रदेशकी मवमुमतियोंक
साप सुम्दर तेरस ( मापा) के गीठ रपकर (गाते हुए)
नाव पसाकर जामम्द मनाएंगे।
कवि-भी मासा-
१ नंग मरि पुरत्तु गोयुमै पमम
काविरि बेट्रि सपा मारकोलमोम
सिंग मराठियतम कबित कोण
झरत तगळ परिशम्पिोम । (मारस)
काशि मगर पुसबर पेशुम रे पान
काभियित केट्पवॉर कवि शेम्बोम
रामपुत्तामत
पोरर
बम
मस्मियर कसरत संगम महिप्पोम । (भारत)
पट्टिमित माग्युम पबिल गयुम
पणि मममळेन बोरि पिप्पोम
कट्टि रिरविमंगळ कोण्य
कापिनि पमिगला बर्ष कोप्पोम । (भारत)
मायुधम शेपवोम मस्त कागिबम प्रेप्रोम
मातंगळवेप्पोम कवि शाहपळप्पोम
भोपुरस बोम्योम पापुरत बोप्योम
पम्मगळ गोस्वोमपम पमेमळ शेमबोम । (भारत)
१. रेमळ शेपवोम उप पडगळ दोस्रोम
कोणिगळ योयबोम हम्मानिगळ मेस्पोम
तग्मम परप्पु मुगर पमिगळ दोपयोम
भासम नग वक्ष्म कप्पात पळ दोपवोम । (भारत)
-तमित
कामेरीकी बोरके नागरपानोंके बदले में गगा मदीकी
बोरके गेहूँ उपे, सिंह (जैसे वीर) मराठोंकी कविता लेकर
चहें बेर प्रदेशके हाथी दोबसे पुरसत करेंगे।
काशी नगरके विद्वान पो म्यास्पान देंगे वह कापीमें
सुना पाए,ऐसा या वनाएंगे । राजपूतामाके पीरोंको कम्ना
प्रदेशका उत्तम सोना देंगे।
रेशमके बोर सूती भस्म बनाकर महार-मारेर फगायेगे।
गवतीके व्यापारी ठोस पदाप छाएँगे उन्हें ये (मस्म वादि)
देंगे।
यौगार बनाएंगे-मच्छे कागज बनाएँगे, कारखाने
सोलेंगे, पिचासयोंकी स्थापना करेंगे। हम केंगे नहीं,
सिरको नीचे गिरने नहीं देंगे, सम्धी बात मोमेंगे एवं
उदारताके कार्य करेंगे।
१०
छावे बनाएंग, हम आदि सेतीके मिए जावश्यक वस्तुएँ
बनाएँमे , वोरे वनाएंगे-सोहेकी कीमें मनाएंगे। करप और
विशाह गाड़ियां बनाएंगे। जिनको आते देखकर यम भी
र बाए, ऐसे बहार धमाएँगे।
कवि-भी माता
११ मन्दिरम कर्पोम पिन तम्बिरम कोम
बान मळम्पोम काल मीने यळप्पोम
पमिरा मपमस्तियस कप तेलियोम
सम्बि तेरपेमकुम भास्तिरम कर्पोम । (भारत)
काविमय बोम्बोम मस्त कामळोम
कसै बळर्पोम कोस्स कुमै बळर्पोम
बोषियम बोम्बोम मल्स मशियळ भेस्वोम
ससमतोषितनेत्तु मुबमु शेम्बोम । (भारत)
पादि परपोपिय पेरिस् एत्रे
तमिय मगळ सोस्सिम शोस ममिवाम एकोम
मेरिपिनिषु पिरामिडम
नमयर मेमबर, कोपर मदोर । (भारत)
१ -तमिस मात्र सीखेंगे काम करने वा सोसेंगे। बाकाशको मागे-समुद्रकी मछठियोंको नापेंगे। मन्द्रमण्डमकी बनावट- की बानकारी पाएंगे। सुरगों (मान)को वडा सके-ऐसी विद्या सीसेंगे। काम्य रचेंगे सुम्दर मन निर्मित करेंगे क्लाकी वृद्धि करेंगे कारीगरों (मुहार यादि) की भट्टियां बढ़ाएंगे। चित्र बनाएंगे, बन्छो सूश्यां बनाएंगे। ससारणी चितनी भी कारीगरियाँ है, मन लगाकर करेंगे। १५ ओवै नामक प्रसिय तमिल पुत्रीने को कहा कि जाति केवल वो है-कोई तीसरी महीं, यह अमृतवपन है"-यह पोपित करेंगे। मीठि-मिष्ठ होकर दूसरोंका उपकार करनेवाले उत्तम मासिके और अन्य छोग मिम्म भाति है--यह बोपित करेंगे।
इदि-श्री माता
म संगाल ताम
१ तो निगप मानतुम मन्दिर
कसे वावर्गमबळ
एम पिरगवळ पभूपराव
इयतबिनळाम एंपळ तस्य ।
२
३
पास्म
ममृत्तरिमप्पिरायतळ
मायिनुमे एमळ
पाळ एमालमोर कमिगे
पमित्रपाळ एगळ साप ।
मुप्पा कोटि महमुरपाठ रयिर
मोयम्पुर मोमुख्याळबळ
शेप्पु मोपि परिमेट्टयाळ एमिर
सिम्यने मोमुरेमाळ ।
मापिनिल बेर मुग्यबळ-कैपिस
मसतिगए
मेबिकिनवळ
पोपबवळ तीयर
वोदुर तोर पाळ।
महब कोटि तारक गमतम
घरंगळ मापळ
साप-तमै
पेक्षा
माशि पखवरतुगळ
दोमा किरतुमळ ताम।
पसम्पाळमान
तमिल
५ हमारी मी
इस कविता कपि भारत माता का वर्णन करता है
हमारी मां इस प्रकारसी है नि पुरानी जितनी भी बातें
हुई, उन सबको बाननेबारे शानी भी यह नहीं जान सकते
कि यह (माता) कर पा हुई।
२
यपि यह ऐसी है कि कोई भी इसकी मायुका निर्धारण
नहीं कर सकता तो भी पद तक यह ससार स्थित रहेगा
तव तक हमारी माता कन्याके रूपमें विरायमान रहेगी।
मुंह इमके सीस करो, पर प्राण इसका केवल एक है।
(एक हवय है भारत गननी ! ) इसने पोलमेको मठारह
भाषाएँ है पर इसका पिम्तम एक ही है।
इसको पोमपर वेद है, हापमें भमाई फरमेवासी तसवार
है वायप मेनेवारोंपर सपा करती हसकी मुगार्मोमें
खुरोंको गिरा पेनेको तापत है।
५
साठ हजार सवष्ठ हापोंसे हमारी मो युस करती
है, विरोध मामकर आनेवालोंको वह पूर पूर कर
देती हा
कवि-भी माला-
६ भूमियिनुम पोरै मिस्रयाळ पेम्म
पुन्निय मेत्रिमळ ताय-एमिस
तोमिए प्यार मुनानिप्रिडगार कोयम्
दुर्गपने
यबळ
शमादि
तुरबिय
तोष बाळ एंगळसाय-पित
बोदै तिमिरि कोपेप.स गाहम
मोक्वनैपुम तोपवाळ ।
८.
योगतिमे निगदपळ उम्मैयुम
मोप्रेम
मपरिवाळ-उपर
भोगत्तिकेयुम निरबळ एपदम
पो? तामुयाळ
मस्करम नारिय ममरे वापत्ति
पुरिपाळ एंगळताय-अवर
यस्मपरायिन मवर विप.गि पिन
१०
देग्मै
बिरन
ताप।
इमयाबरूनतम
मगाळाम एंगळसाय-अवन
तिम्म मरयिनुम तानमर्रयाळ निस्तम
शीरएबाळ एगळ
तमिम
७५
६
भूमिसे भी अधिक सहनसीछह, पोहो पवित्र हृदयवाली
है। पर सहनेवालों के सामने दो बह भयकर पुर्गा
स्वरूपिणी हीह।
।
पासपर वासचद्रको धारण करनेवाले सन्यासीको भी वह
हाप मोड़ती ह और एक पक्रायुष धारपार सातों माकोंका
पाटन करनेवाले एककी भी पूजा करती है। शिम मोर
विष्णु दोनोंकी पूजा करती है।
F
योगमें बह यसमान है वह मानती है कि सत्प एक ही
है । उत्तम मोर्गोस भी वह सुसम्पन है-उसके पास सोनेका
और है।
सरमी राजाओंको बह मापीर्वाद देकर उनका मका
करती है। बो वैसे नहीं है, उन्हें निगलकर बह मानन्दका
ताणप नृत्य करती है।
१०
हमारी मां सुप्र हिमापठको दी हुई कम्पा पुगती है ।
उस ( हिमाचस) का मस्तित्व मिट जाए तो भी माप
नष्ट हुए विमा सवा बनी रहेगी।
पक्मिी माता-
६ तायिन मणिक्कोहि
तामिन मगिरकोहि पारीर-मरे
तापू मु पपि पुपप बिर पारीर ।
२
ऑयि बळबोर कम्मम-मरन
उबिपिन मेत बन्दे मातरम एवं
पौगिम एप दि तिपय म-झम्म
पट्टोळि बीशि परबर पारीर । (तापिन)
पद तुमिना
सामो-मधिम
पाय शुषट्र म पेरुम्पुपरफाद.
मद्ध मिपुत्वरित्तातुम-म
मबिमार पुररिकोळ मागिक परमम (तामिम)
इम्बिरन परिबरम मोरपास-मरिस
एंपळ तुहकारिलम्बिरे मोरपास-ताप
मन्दिरम मरपुर तोचम-अपम्
मामे बप्तिस्वस्तयन यानो। (साथिन)
कम्पत्तिम कीप निदृतकानीर-एंगम
फाणल्म वीरर पेदन्तिम
मम्मधुरिम अम्पोरर-तंगळ
मत्सपि रोम कोरियिमकाप्पर । (तायिन)
मणिपणियायपा मिर्तुम-पर
मारिय कादि पोर मानामयो
पनिगळ पोहनिय माबुम-विरस
पमिदोगुम पश्चिम कापीर । (तापिन)
तमित माताकामा परास वर्ष पूर्व या राष्ट्रीय महासभामे पी मालकी रसना नहीं की की उस समय कपि भारतीने राष्ट्रीय समाको स्पना करके उसको एक स्प पनि पिसाबा। माताका उत्तम साता देखो। सिर झुकाकर उसकी पंचना करें और उसकी कीर्ति गावें। उपा-सा एक चम्मा ह । उसके शिसरपर एक पमकने- पाठाधम उड़ रहा है मिसमें सुवरखाके साय 'पन्दे मातरम् हिसा हुया है। २ पया उससे मिय रेशमका कपड़ा ही माम ? उसको परफर बड़ी सेबीसे यहमेमाठी भोपी पसे को भी उसकी परवाह न करनेवाला सबस वस्त्र है। उसके एक पार्समें रम्यका वय है दूसरी ओर हमारे मुसछमानोंका मका पाद है। बीचमें माताका मा (मन्दे मातरम्) रिहाई पर ह । उसके महत्यको समझ- मेकी शक्ति किसमें है? कहीं भी सिनेमें दुलम वीरोंका समूह बम्रे मी (पास) खड़ा है देखो। वे विश्वसनीय वीर अपने अमूस्म प्राण देकर मी मणको पा करेंगे। उन लोर्गोका पति पद सदा हमा-या यह पार्य दृश्म (उत्तम दृश्य) बानवप्रव नहीं है ? उनके बाभूपोंसे महठ पक्षस्पस मोर विषय-यीके सेबसे युक्त स्पको तो देखो।
ऋषि-मी माता-
७८
६
सबमिप
माटु पोयमर-कोर
दीपकन मरवर्गळ, घेरवनबीरर
मि तुमिब तेसंगर-साम्पिन
पोषिके पप्पियोहिम उबर ।
कम्मरर
मोट्टियरो-पोरिस
कानुम अवासकुम मराठर
पोन्मगर देवगळोप्प-निर्वाम
पोरयार इनुस्तानत्तमम्सर ।
८. भूतहम
मुद्रिाम बरगम-मरा
पोरविरल याबुम मरप्पुरम परैयुम
मातगळ कर्पछ बरैयुम-पारित
मरवक्ष्म कीतिकोळ रजपुम बीरर ।
पम्बनरत पिरलोर-मुन्ने
पार्तन मुरार पलर पापम मामाहार
तुम पोप रिनुम तापिन-पर
तोप निनत्तिम वंपत्तिमोरुम
छोम्ब पाप्पा कापौर-अपर
शिम्बपिन बोरम निरन्तरम माप ग
तेम्बार पोट्टम
बरत-मिता
तेवि तुपमम मिरपुर वापू म (तापिन)
तमिल तमित प्रदेशके वीरपायकर आँखोपाछे मरस ( नामक पातिके) होग, पेर राम्यके वीर मिश्चिन्त बोध्र लोग, मावाकी सेवामें ही निरत तुरूप (पातिके) साग । ७ कर लोग,मोट्टि (उत्कलो) लोग, काल भोरमाए- इस प्रकार युद्ध में नमानेमासे मराठे स्वर्गके देवताक समान सहनशीष हिन्दुस्तान (आविर्तक) पीर बवतक भूतए नष्ट न हो पाए पबसक धर्म-युटकी विषयका मंत म हो, पबवर माताओंका सतीत्व नष्ट न हो तबतक बनी रहनेवाली कीतिमे युक्त राजपूत वीर ! पौर नदीके प्रवेशके फोग पार्ष बादि पीरोक पम्म प्रदेशके होम सोते हुए भी मावाकी परण-सेवाका ध्यान रसनेवाले वमके योग २० एक साप होकर उस (धण) की रक्षा कर रहे है, देखो, उमका एकाग्र पीरप सदा बना रहे ! समर्ष फोगस प्रसित भारत वेवीकी ध्वना बनी छे ।।
कधि-मी माला--- ८. - भारत समुदायम् - भारत समसायम बापू गवे-पाप ग पाप.ग भारत समुदायम पाप गये-गय! चय!!, जय !!! (मारत मप्पा कोटि धर्मगलिग संगम मए मैकाम पोड उरमै मोप्पिसार समुदायम उलगत्तरकोर पुशुमै -बाप ग (भारत) मनियर रणव मनियर परिमकुम बपक्रम इनियुडो? मनियर मोपा मनिबर पाठ्म वाप पई पनि पुमो-पुमनिस बाप्पक इति मुणो-नम्मिसर बाप्पक हनिय पोधित गळ मेरिय पपरपाठ एण्यस्म पेरुम कनियुम किप गुम मान्मंगळुम गकिमि मार- कमसिपि सक्षम मार-मित्तं मित्त कपरिकषि तक्षम मार-वात्म (भारत) रनि योर बिपि दोनोम-मर पर भाल्म काप्पोम तमि मोक्ष्वनुमकुना वितं एमित रतगिनं मपित्तियोमबापू प (भारत) इनि पुणो? २
-तमित
८१
• मारतीय समुदाय
भारतीकी महापमा उनके पामिरासे पापस मा बामे बाकी है।
बार हम बपना सामत कोयम्प भान है। बारसे पासीस वर्ष पूर्व
फपिने सतब मारतकी *सी पस्सना की थी-सकी महक हम यहाँ पाते है।
मारत समुदाय जिए । भारस समुदाय लिए ।
गय !!
(भारत)
तीस करो, होकि इस सपपर सबका समान स्वस्थ
रहेगा । यह अनुपम जन समुदाय है-सारे ससारके लिए
एक मवीनवा है।
मय!
जय !!!
१
मनुष्यता आहार मनुष्य छीन रे-यह क्रम क्या बागे
पा सकेगा। मनुष्यको तापते देखकर मनुष्य (चुपचाप)
देखा करे ऐसी जिन्दगी क्या मागे बस सकेगी? इस देधर्म
ऐसी विन्दगी चल सकेगी? हममें ऐसी जिन्दगी पम सकेगी?
.
मनन्त उपमाऊ बमीन और सुविस्तृत मेसि परिपूर्ण
हमारा देश है। मपरिमित फल, मूस पद आदि वेनवाला
यह देश है-यह अपरिमित देनेवासा देश है। नित प्रतिदिन
मपरिमित देनेवासा देश है।
२
मव एक मिपम बनाएंगे और सश उसकी रक्षा करेंग ।
यदि कभी किसी एक व्यक्ति के लिए भी बाहार न रहे तो
हम ससारको मिटा देंगे।
कविधी मामा-
८२
'एस्सा पिर्गळिलम नाने सकिरेन
एपुरतान
पेरुमान
एस्तो ममर निलयेयाम मम्मुरप
इन्दिया उहपिर्कळिमकुम-माम
इदिया उमगिर्कळिमकुम-आम-आम
शपिया एमपिर्कळिमकुम-बाप
(भारत)
४
एस्सोम्म बोर मुसम्म एस्तोम्म मोरिनम
एल्कोवम इम्बिया मरफळ
एस्लोएम मोर निरै एस्तोम मोर वित
पस्सोरुम इभाट्ट. मार-माम
एलोमामा.मन्नर-माम माम
एस्तोम्म इमाट. ममर-बापू ग
(भारत)
८३
-तमिल
पीकृष्ण भगवानने कहा पा, सभी जीवोंमें में हो रहता
है। सब सोग बमरस्त्र प्राप्त कर सकें ऐसा उत्तम माग
मारत दुनियाको प्रदर्भित करेगा। हो मारत दुनियाको
प्रदरित करेगा, हो, हो, मारत दुनियाको प्रदर्शित करेगा।
.
सब एक कुलके है, सन एक किस्म के है, सब भारतकी
सताने हैं, सपकी एक तोछ, सबका एक मोम-सम इस
देसके रागा है, हम सब इस देशके रारा है, हो, हम सब
इस देशके रागा है।
कषि-भी माता-
८४
सान्निर वाम
70
7
एम् तपियुम हम सुतमिर पाहम
एषु मरियम एंगळ मरिमैयित मोहम ?
एमेमाने के विसंगुगळ पोगुम ?
एमम रिम्नसगळ तीर्घ पोय्यागुम ?
अबोर भारतमारक कमोने
मारिपर वाप बिनै मावरिप्पोने ।
तवमतुम निम्नळमो
मेग्यरियोम
मुम वायुसम्मनो।
पंचमुम नोयुम निम मेयरियार्को ।
पारिमिस मेम्मंगळ बेरिनिया ?
तबमरम्बपिन
विरतामो?
तापुम तन छुप ग्यै तरिपोमो ?
मजनेमळ मैयुम करमै पिसायो
मारिप मीयुम निन माम मरम्बायो ?
बैंगमहरगपरे
बीदिबोने
बीर मिसामणि मारियर कोमे ।
८५
स्वतंत्रताकी प्यास
माप्तीने इस गीत पर तरकालीन मग सरकार र स्प्ट हुई।
पर इस पर कोई कानूनी कारवाई नहीं पहा सही पाकि इसमें
रायोकी कोई बात नहीं है।
हमारी स्वतंत्रताकी प्यास व बुझगी?
हमारा
दासताके
प्रति मोह कव नष्ट हो? हमारी मौके हापकी हयारियां कर
पिरेमी ? हमारे पट कर मिटकर मूठे (निरे स्वप्नवत्) बनेंगे?
उस दिन महामारत मचानके ठिमे षो माए-हे पार्यो
जीवन रक्षक! विषयकी प्राप्ति क्या तुम्हारीही कपासे मही
होती? (तुम्हारे) सम्मे भक्त (हम) मूत्रते पाएं-यह क्या ठीक
है? मकास बोर मीमारी मया तरे सच्चे भक्तोंक ठिए है? तो
फिर ससारके सुस-भव किसके लिए है ? कोई चरणमें मावे तो क्या
उसे कुण्या पाता है ? मां भी भला क्या मपने विधुको दुतकार
वे? हे वार्य, क्या तुम भी मपना तम्य मूस गए ? कठोर कर्मवाठे
राखोके हे पातक! हे वीर शिवामगि, हे बाकि रामा ।
क्मा बमय प्रदान करना तुम्हारा फर्तम्य नहीं है ?
कवि-भी माता-
८८
१५ पागनी एम्मान
महात्मा गांधी पञ्चकम
१ पाव प मी एम्मान, इन्मेपत्त नाहिस्साम
साप्द्र परम मिचि विरलतपरिकेट्ट
पाप् पट्ट नियबाम मोर भारस शामतम्न
बाविस्कवम्ब गोपि महारमा मी पाप पा वाप म ।
२ मरिमै पाप बगमि माट्टार विगुरम पाणु शेखम
कुरिमपित सपई, कस्मि जानमुम कूरि योपि
परिमिश तसमै येम्परिणकोद शन्धि शेणाप
मुरिविसा कीर्ति पेट्राय मुविमाळ मुरम्म पुडाप ।
३ कोरि वेभाग पाशत
मुतिग कोणावधन एनको?
हरमिनात तांगुम पुरे शोवान एनको ?
एम मोतिप्पुगपरिणमै पे?
पिरिविक्षा तुम्बम भेम्पम परापीन
बेम्बिगि यदिदम बण्णम
पडिमिश परियाबासबम एळिराम
-तमिस
१० हमारे महात्माकी जय
महम्मा गांधी पसर
पापीजीने पर मसहयोग माग्दोगन भारम्भ किया तब कपिने उनकी
दिन में पांच गीत थे।
-
पीयो हे हमारे महारमा! इस संसारके देशोंमें निम्न
स्पान पाकर दरिद्र होकर स्वतंत्रता होकर, प्रष्ट होकर
पो भारत दुरवस्पा पा, उसको मिलाने के लिए आए हुए
हे गांधी महारमा, सुम जियो ! गियो !!
तुममे ऐसा क्रम रखा कि देशवासी दासरवसे निवृत
होकर स्वतत्र हो, धन और धाग्यसे सम्पन्न हो शिक्षा
और मानमें उन्च हों मोर ससार मररी मेवा भने । सुमने
मत कीर्ति पाई, ससार मरमें प्रथम स्पान पाया।
।
३
क्या तुम वह हो यो भयकर मागपाएको काट गहने के
सिए मूठिका (मड़ी बूटी) साया? पण और विद्युतको
सहनेकी शक्ति रसनवाठा (गोयन गिरिरुपी) साता
बनानेमासे हो क्या? क्या कहकर मैं तुम्हारी कीर्ति
गाऊँ ? बनत सफ्टोंको परा करनेवासी पराधीनताको
दूर करनेके लिए तुमने ससारके मिस नया मोर मति सरल
उपाय निकाला।
कवि-भी माला-
११ कलै मगरिन पुगष
१ मेछळ तामरे पूवित इल्पाळ
बीले बोम्पुम मोसियिस इप्पाळ
कोळे इन्वम कुमा कविते
कूर पावसर गळ्ळत्तिप्पाळ
गळवाम पोळ तेरि पन
मोम बेत्तिनुमित्रोळिवाळ ।
कळ मद मुनिवर्गळ कूष्म
करणे पाचट पोपळाबाद । (बेळ्ळ)
२
मारतींगुर पाटित हरप्पाळ
मक्कळ पेनम मपौयिक झळाळ
गीतम्पाटम कुपिसिन कुरसै
किळियिन मावप्पिरम कोपाळ ।
कोरगम
तोपिसांतामि
कुम बितिरम गोपुरम कोपिस
नितिन एपिसिन मुद्राळ
इम्बमे बरि बामि पेट्राळ । (बेळळ)
-तमिसः
१ कला देवीकी स्तुति
बाग्मी सरस्वती विद्याकी अधिष्ठात्री देवी है। इसको तमिममें
* मगळ" करते है। बसहरेमें नरमी दिन तमिस प्रदेशमें सरस्वती पूना"
ही मामके साप मनाई पाती है। इस त्पाहारको मोग 'बायुप पूना मी
कहते है। इस दिन सब मौवारों की पूजा होती है। यंत्रॉपर काम करनेवाले
बपने अपने यंत्राकी पूजा करते हैं। सभी परोंमें पुस्तकोडी पूजा होती है।
कमादेवी श्वेत पद्ममें निवास करती है मीणाकी
प्पमिमें रहती है अपार पानव प्रान करनेवाली कविता
रपनेवासे फरियोंक हदयमें रहती ह, एक मात्र 'सत्य को
मोगकर उसको पहचानने के बाद प्रकट करनेपासे वे
बदर स्विष्ठ होकर भमकती है यह देवी निपपट मुनि-
पराके करमा पूर्ण वर्मोका सार-रूप है।
२
माताबों
मधुरम्पमि-युक्त गीतॊमें रहती ह, बच्चोंकी
तली पार्लोमें इसीह, उस देवीन गीत गानेवासी कोपसमी
मावाम मोर तोतकी नीमको अपना बासस्पान बना
स्पिा ह । निर्दोप कारीगरीमे पूर्ण पित्र, गोपुर मंदिर
शादियोंकि सौन्दर्य रहती है। वह मतिमत बामद है।
१४
कपि-मी मामा-
३
बम्म मद्र तोपित पुरिमुण
माम माम्बर गुम बमावा
जामकुँपिरागिय कोस्सर
पियोनिए शिपियर
मिमनोळ वापिगम शेयबोर
बीर मार पिम बेरियर याम
तंयमेषु वर्गगिडम बेयरम
परमि मीपरिबागिय रेयबम । (बेळ)
पेपबम याबुम बगिदुम देबम
तीमै काट्टि विमक्किडम येणम
उयवमेष करतुरे योगळ
रपिरिनु पिरागिय रेयबम
परमेपोर शेयर्ग एप्पोर
भेम्मै मारिपमिम्बिएम देयकम
केबम्बि उपप्पबर यबम
कविकर येवम, कम्युलर देयमम। (बेळे)
शोम्बमिप मपि नादिर मुळीर
शेविती बनमगुषम पारीर
बम्बनम इबटके होम्ब देशात
वापि यक्तिओं लिापु कनीर।
मम्मिरत मुगुते?
परियो माग अकि मरन मेत
सम्मत मतर पिबोर
शासिरम मबळ पूमनपत्राम। (पेट्रो
५
समिस
३
निर्योप काम करके जीवन-यापन करनेवाले मनुष्योंकी
वह फुटम्प-देवो है । लुहार, विस्प शास्त्री वर्ग बन्छी
वस्तुओं का म्यापार करनेवासे पैश्य, बीर राणा ब्राह्मण
-समी इस देवीक परणोंपर मुकते है। यह इसमसारमें
साममय दवह।
समी देवता इस देवीको पहचानते है। यह वेवी सकट पैदा
करके उसको फिर हटा देती है। सबकी भलाई चाहने-
वालोंको यह देवी जानकी बान है, बो कार्य मारम्भ
करके उसमें सत्सीन हो पाते हैं, उनकी मसाई करनेगामी
देवी है सन तोड़कर परियम करनेवालोंकी देवीह करि
परों की देवी है आस्तिकोंकी देवो ह ।
हम सब
उत्तम तमिम प्रवेशके रहनेवालो ! माओ
मिसकर इस देवीकी वन्दना रे । यह बच्छी तरह जान
हो कि इस देवीको बन्दना रना कोई मामान काम नहीं
है । बिना पप समझे मत्रका उम्पारण करो और पुस्तकें
एक पर एक समाकर रलो मोर उनपर फूल और पदम
पड़ामो-यह बंधी रीति उस देवीकी (सनी) पूना
नहीं है।
१५
ब-भी मासा-
९ वीरोरुम कसैयिन विळक्कम
बीरितोरुम इरगोर पछिळ
मार मुद्रिसम उम कर्मळ
मगगळंगुम पर पस पछिल
मप्र
तीपिनुविकरयाग महत्तस
कर तोडुममुरमेन
के मै कोळ बघि इब कमार। (पेल्ले)
७
ऊपर देशम पवनर तम देशम
परय मायिट्रोळि पेद मायु
शोजपमयोर शिशि शीमम
मेस्ट
पारसिक पपवेशम
तोणसत्त दुबलकम मिसिरम
शूप करप्पुरतिनित इभुम
कामुम पर्पस माहिरे एस्साम
करिब रेविपिन मोळि मिगुप्योंग । (बेल)
मान मेबोर सोस्सिम पोलम
भारत माहिर बसीर
मनमिषु पेरिविपकिनार
योगि पस्वि युपंप मरवीर
मानमद यिर्मगुपळोप्प
मयिस बाप बरे वापू वेनसामो
पोनराई दम्पुरत
पुन्म तोप्प मुपसवम पारीर। (पळे)
देणाम
तमिल or - पर-पर कसाका मान कराया जाए गछी-गलीमें एक- दो पाठशालाएँ मुझे, देश भरके सभी गांवों (और शहरों) में कई पाठशालाएं मुरें, बिस गाँव (या बहर ) में विणा (का प्रचार ) नहीं है उसे दूर-टकर पछा विया पाए, मासाका प्रसाद पानेके ये ही मार्ग है। ७ होंका देश यपोंका देश, उदय-सूपका प्रकाश पाने- पामा (बापान) देश, पीन, धनी पुराना पारसीक देश, तुर्की मिसर, और समुद्र पारके सभी देशोंमें विद्यादेवीका प्रकास फेस पा। मान केवल शम्बका भाव ह । हे भारतवासियो | तुम मोग एक बहुत बड़ी भूस कर रहे हो चलत विद्याके लिए (आवश्यर ) परिप्रमको तुम लोग भूम ही गए हो। मान-मर्यादा सोकर मृगतुल्य मोना भी कोई मीना है ? पो बीत गया, उस पर भय दुसी मत होमो। संकट दूर करनेका प्रयत्न किए।
कवि-भी मामा-
पिनळ
इन्नगनि झोलंगळ बम
इनिय नीर तम शुनपळ इरल
अन्न सत्तिरम आमिरम रेतत
मासयम पविनायिरम मादृत
बामगळ याम
पेपर पिळपि योळिरा मित्तल
अम्ल पाविनुम पुष्णियम कोटि
भागोर एपरकेपत्तरिपित्तस ।
(ले)
१०
निरि मिगुनवर पोई तारीर
निवि कुरीबाबर कामुगळ तारीर
मा मट्रपर बायचोस भळीर
माणमैपाळर उप्पिन मल्मीर
मदुर ते मोवि मावरगळेलाम
पामि पूऔषकुरियन
पेशीर
एएम्म मस्मि इंगेबपे यामुम
इप्पेरम तोपिल माट्टाम
पारीर।
(वेळ)
समिस मति सादिष्ट कंद, मल, फम आदिका बाग-बगीचा लगाना, मीठे महका माण्य स्पापिष्ठ करना, हजारों अन्न सत्र (यहाँ विनापसेके भोगन मिस पावा ह।) स्थापिठ करमा और दस हजार देवासय बनवाना, ये सभी धर्म ऐसे है कि इनके द्वारा मनानेवासेका नाम प्रसिद्ध होकर वेगयुक्त हो पाता है। उन सबसे करोड़ गुना उत्तम ह- एक गरीबको मक्षर सिमाना। १० धनिको । समका र वे दो, धनहीनो ! पैसे-पैसे देवो । दीनो, केवल मुंहसे घाशीर्वाद दे दो। पौरुप- बासो | पम-दान दे दो। मपुर वपनवाप्ती मातायो ! पाणी पूमाके योग्य पत्रम योमो । कुछ भी देकर किसी तरह, मामो हम यह महाम काम कर गर्ने ।
कवि-भी मामा- १०४ १० पाप्पा पाद्ध २ ३ पाप्पा मोरि पिळमायु पाप्मा- मोम्वितक मागाः पाप्पा । करि मिळेयार पाप्पा-मोर कुपम्यै क्यारे पाप्पा चिमधिर कुरुपि पोसे-नी तिरिनु परम् पा पाप्पा पण परचे गळे कप-मो ममरिस मगिन्ति कोल्छपाप्पा । कोप्ति तिरियुमन कोपिम विळपार पत्ति तिरए मम्ब कास्काम-अबई परपकप्पग बेगम पाप्मा । पास पोपिनु तक्ष्म पाप्पा-अम्ब पशु मिप ममररि पाप्पा पाल कुप सुबम्म मायान-मर मनिरहुं तोप मरि पापा । पणि प शुम मम बिर-नेत वयासित रपूर पक्ष्म मा मगि पिप बगुम मम्मै मानव भाररिक वेप मरि पाप्पा । कासै एप र मन परिप्पु पिम्बु कनिर कोयम नस्स पाट्ट मासे मुघ म मिळयाट्ट-एघु पपुरकम पतिकोळपाप्पा। ४
तमिल
१०१
१२ बत्त्वोंका गीत ।
पापा एम्बका बर्ष है मना बच्चा। पिके दो पुनियाँ है
जिनमें छोटी "पाप्पा" नामसे पुकारी पाती है। उसको शिक्षा
देते हुए करिने यह गीत रचा।
१
पन्चे ! हमेशा सेमवा-कूदता रह कमी सुस्त होकर
मत वैठ। मम्प पकि साम मिलकर सेम। किसी पन्नेको
गामी मये।
नन्हे-मन्हे गौरेयेकी तरह तू भी इधर-उधर मेस्ता-
फूदता ए। रंग बिरगे पक्षियोंको देखकर तू मासें ठग कर।
३
यह मुर्गा देव, ममीनको पोबसे कुरेव-कुरेवकर अपना
मोचन पोन रहा है। उसको साम मेकर सू सेठ ।
कोया सपटकर दूसरोका माल पुरा मेता है उसपर
दयाकर।
गाय दूध देती है । यह बहुत बच्छी है। वह कुत्ता
पूंछ हिमावा हुआ मा रहा है-यह मनुष्यका सापी ह।
-
पोगा, माड़ो सींचता है । पैस किसाोके काम आता
है । यह हरमें पोता भाता है। पकरी हमारा मामय
पाकर बीती है। इन सबका पासम करना पाहिए।
सवेरे बागकर पढ़ना फिर उत्साहपर्धक पीत (का
मम्पास करना) शाम भर सेग्ना-इस क्रमकी मावत
करके।
कवि-भी मासा- ८ १ पोय शोस्त गा पाप्पा-एम पुरी सोस्त लापा पाप्पा बेबम नमरकु तुणे पाप्पा-ओर तीगु पर माट्टा पाप्पा पातकं झम्पवर कमाल-नाम बर्यकोळ्ळ हागा पाप्पा मोदि मिपितु पिए पाप्पा-मबर मुपत्तित पमिप नु बिए पाप्मा। सुन्बम मेगि बाब पोलुम-माम झोर्नु विर सागा पाप्पा अम्बु मिगु येस्पम उण-सुम्बम भत्तनगम पोषिक विद्युम पाप्पा । १० झोम्बल मिय केररि पाप्पा-ताप बोन मोस्से सट्टारे पाप्या तेम्बियप कुपी मोणि-नी तिर कोण पोरार पाप्पा । ११ तमिप तिवमा रम्मै पेट्र-एमळ वाये एम्बित ममिप रिस इनिपरि पाप्पा-मम मापोर्गछदा मटि पाप्पा । १२ पोस्सित नपर्नु तमिप शोस्से पर तोपा परितिरि पाप्पा पोस्वम निरम हिनुस्तानम-अरे लिमम पुगप विसरि पाप्पा । पारित इमय म पाप्पा-हिस पापुम कुमरि मुमै पाप्पा फिरणाम पेरिय करत पपायनरन हिपस्कितम मेकिसम पाप्पा । पाप्पा १०३ तमित मुठ मही बोलना चाहिए । कमी पीठ पीछे मिदा नहीं करनी पाहिए । ईश्वर हमारा सहायक है हमपर कमी कोई सफट नहीं पड़ेगा। अत्यापार करनेमालेको देखें तो कभी उससे परना महीं पाहिए । उसको गिराकर पैरोंसे पुषस गरु, उसके दे मुंहपर पूक जब हमपर विपदा बाए, तय हमें भयमीत नहीं होना पाहिए । परमारमा प्रेममय है, यह उन विपदामोंको दूर कर गरेगा। १० सुस्त रहना बग गुरा है । माताकी बातोंकी मवहेमना न कर । मास-बावपर रोनेवासा यम्बा पगु है। तू ग्ट- प 'हमारी मां पवित्र तमिम भूमि है" कहकर उसकी बना कर । यह ममतस भी उत्तम है। हमारे पपित्र पूर्वनोंका देश है। भापामोंमें घेष्ठ तमिम है। उसका प्रयापूर्वक सम्पास कर। हमारा हिन्दुस्थान समय है। उसकी प्रति- हिम स्तुति कर। इस देवाके उत्तरमें हिमालय है मौर दक्षिणमें कुमारी मन्तरीप । पूष मोर पश्चिममें गो समद है।
कवि-भी मासा- १०४ बेव मुरयविध नार-मस्त बीरर पिरम्प पिड मार व मिस्तार हिन्दुस्तानम्-इनै स्वमेषु कुम्बिार पाप्पा । १५ सातिगळ इस्मै यति पाप्मा-कुस तापू मि रन्धि पोसस पाबम मीति उपर्म मति कवि-मम्बु निरय रीयबर्मळ मेसोर । १६ रमिलिगतिक अनुभम-बम उम्मै एमु तानरिबस पेम पथिरा मुग्य मेश्याम वेण्डम- वाप म मुरमै मरि पाप्पा ।
तमिल १४ इस देश मेदोंकी उत्पत्ति हुई। अनक वीर हुए । यह हिन्दुस्तान हर तरह से सम्पन्न है-इसे दव मानकर इसकी बन्दना कर। १५ पाति नामकी कोई वस्तु नहीं है। कुरुकी उच्चता या नीयता मानना पाप ह । नीति, उत्तम मुधि विधा प्रेम- इनसे युक्त मोग वो है। जीवोंसे प्रेम करना पाहिए । यह पानना पाहिए कि ईश्वर सत्य है। निश्पस मम चाहिए। यही पीनेका उपाय है।
कवि-भी माम
१३ मुरक्ष
मुबसागुम-मोर
पेट्रि एटु रिमकुम एट फोटन मुरमे
पेवम एमुम वाग एप कोट्ट मुरले
मादि यो कम्पनोरे मिर्तनम गम्छ
निय शक्ति वाग येन कोढ़ मुरमे
१ कम मस्ता शोस्पेन-एना
तेरिया शोहन
मीसकेस्मा
देयबम तुम बोमबेग्युम ।
२ बेड मरिम्पवन पाान-पक
तरिम्बबन पाप्पनि
नीदि निस तपरामह-म
तेमंगळ होयबबर मायकल ।
३ पडगळ विपन शेष्टि-पिरर
पट्टिपि तीवन होधि
तोगरेपोर पगुप्पिासे-तोषिप्त
पोम्बसे पोत पपिपिस्स
४ नानुम बप्पुम गोने-म
नागिनित मोघु पुरंम्बास
तपरि भिववे-शेतु
बीप विडम मानिर बाति।
५ मोटे कुसम्बपनिले पोळ
मोग वळपबन तम्ब
कस्मंगळ छोटे-ममै
पाप बिर पोयमबळ माने ।
-समिस
१३ का
हे के तुम इस तरहमी पनि पैदा करो कि विजयकी पोपमा
पाठों दिशामोंमें हो गाए । तुम्हारी चोटमें वदोंको सदा वय [जरित
हो उठे । तुम्हारे नोटको सकारमें 'प्रिनेत्रके साप नवन करनेवाली माता
पतिकी सदा जय हो!" यह ध्वनि गृपरित हो उठे।
मैं देश हितकी बात कहता हूँ मुझे नो सत्य प्रतीत
होता है वह कहता हूँ जितनी भी मसाइयाँ है, उन सबका
बादि पुरुप हमारी सहायता करे।
२
बेद वामनेवामा ब्राह्मण ह कई विषाएँ बाननेवाला
वामण ह । नीति और नियमका पाछन करते हुए दा
मोर पाछनका प्रबंध करनेवासा नायक (क्षत्रिय) है।
वस्तुएँ अपनेपासा प्रेष्ठि (पश्य) है। औरोंकी भूस
मिटानेबाला मेष्ठि है। 'दास' मामकी कोई वाति नहीं
है। सुस्तीसे पाकर अन्य कोई नोचता नहीं है।
४
यहाँ पारों पण एक समान है। इन चारमैसे यदि
एम मो पम हो जाए तो काम बिगा पाएगा। मनुप्य
वर्ग हो नष्ट हो पाएगा (भम्न होकर गिर पाएगा)।
मुटुम्बमें वस्तुओं का सग्रह पिता करता है। पम्प काम
संमारती हुई मा मुटम्म चमाती है।
कवि-मी मासा- ६ एक्सपळ दोस्ववर मारनगर यावल्म मोर कुममनो मेखि मनवम्म मोप्राय-नम्स बोर मातरम फागोम ७ शारिप्पिरिगळ झोल्मि-मरिस ताप पेषुम मेरोभुम कोळमार मोबिप्पिरिगळ शेपवार-मंगु निसमम पंगळ शेपवार । ८. शादि कोइ मैगळ देणाम-मन्यु पनिस शोपित्तिगम वैयम माररबुद्रिंग बापू बोम-सोपित मायिरम मामुरा शेयबोम । ९ पेग्मुक्कु गानत्तै बैसान-मुवि पेगि पळतिम सिन मप्णुपटळे शिस मूगर-मस्त मारररिव ऐसतार। समाळ दरणिमिम मोमै-कुत्ति कादि केत्तिर पेमाळ मरिचे बळास-पम पेमै पदिएम काणीर। ११ देवम पतप्पत सोस्मि-पगै तामै उप्परमैतितुम मोपाय-एंगम मोर पोळामा चेपम । १२ तोपिन कुम्बिरम पारि-मित्तम रिप पणम तुझकर कोरस गिल्बपिन मुन्ने निषु कुमिम येशू मरसार। १. कामो बळपपर मूगर
समिस
पुत्र सेवाके काम करते हैं। क्या ये सभी एक ही
कुटुम्बके महीं है? हम देखते है कि सब एक होकर अन्ठा
कुटुम्ब पठाते हैं।
जो मातिका भेद पताकर उसमें कैंप बोर नीषका मंतर
मानसे है ये नीतिमें मतर साते है मौर प्रतिदिन भगा
पदा करते हैं।
पातिका कटु वर्गीकरण हमें नहीं चाहिए। यह
ससार प्रमसे पसताह । हम यहाँ यादरके साप रहेंगे और
बनेको कार्य नरेंगे।
ससारका भार सम्हासनेपासे ईश्वरने स्त्रियोंको (भी)
मान प्रदान किया है। परन्तु इस मिट्टीके मोहमें
कुछ लोगोंमे स्त्रियोंको बुखिको प्रप्ट कर दिया है।
१०
पो आोंमें एकको नष्ट करके क्या दृश्यका मानंद
उठाया जा सकता है? यदि स्विर्पोको गुटिको बढ़ाया
पाए तो निश्चय है कि ससारकी कमियां दूर हो
पाएंगी।
यो छोग देवको मनेकता मानते है क्षेत्रमाफी माम
प्रग्वसित करते हैं। ईश्वर एक ह और सबमें समाया
हा है।
१२ मग्निकी पूजा करनेवाले प्राह्मण प्रतिदिन दिद्याकी
पन्दना करनेवासे मुससिम मदिर, सूछीके सामने सड़े
होकर प्रापना करनेवासे ईसाई,
कवि-पी मासा ११० पास्म पणिनिलम देवम-पोळ याविनुम मिमिम अस्पम पारसकुळे येम्बम मो-रिस पर्पस सगळ अपाम। १४ वेळ मिरत्तोर पूर्म-एंगळ वीट्टिक मळम् पिठळपळ पेद्रा धर्म-म पेरस्कोर निरम मायुम। १५ पाम्बम मिरम मोर हुट्टि-कलम् पाान्यु निरम बोर कुट्टि पाम्य निरम घोष कुटिवेळळे पासिन निरम मोर कुष्टि । निरमिन्दानुम-मब यादम मोरे तर मयो इन निरम शिरिषमुम-तु एटमेमुम हास्मतामो। १७ मंगळ भेट में पट्टाल-मरिस मानुगर एमपळ गण्ठ एकाम पाब'म मोमेनस कापीर । १८. मिंगरेषु कोट्ट मुरमे-हम्म मीषिसम बाप यबरेलाम ममरेप कोट्टु मुरदो-पोम्मै पारि गुप्पिने एस्लाम २९ मम्वेषु कोट्ट मुरले-मरिस मारकममा मे फोटु तुन्धमळ यापुमे पोगुम-पेहम् पर पिरिपळ पोनास।
तमिम
ये सम विस देवको पूमा करते हैं वह सर्ववन्दित है,
सर्वम्यापी है। सबका एक ही देव ह-समें मगरेकी
भावश्यकवा महीं है।
१४ मोर १५ सुनिए, हमारे परपर एक सफेद रगकी मिली
पणतीह। उसके कई माने एक ही मासे उत्पन्न होनेपर
भी हर एकका अलग अलग रग है।
उनसे एक मटमैठा है, एक काना-सा कामा । एक
बना सपिके रगका है और एक दूध-सा सफेद ।
म पाहे जो हो गया वे सभी बप एक समान नहीं
है? क्या यह कहा पा सकता है कि अमुक रग मन्छा है
बौर ममुक पुरा
?
रम बदमता है, इसमिए यह बावश्यक नहीं कि ममुष्य
भी बदले। विचार बोरकार्य सबक एक है-यह बानो।
हे! तुम्हारी पनिमें यह उद्घोपित हो कि इस
संसारके सभी निवासी समान है। अपनी मनिसे मह
भोपित करो कि मूठा पाविभेद तोगा पाए ।
(सभी यह समझें) कि प्रेम भावस्पक है बौर उसीमें
मसाई है। यदि एस-कपटका भेषमार मिट पाए सो
गायो दर हो जाएंगी।
कवि-मी मासा २० मम्बे कोटर मुरम-मरकळ मत्तमै पेश्म मिगाराम मंगळ याबुम पेरगुम-दंग पापल्म मोप्रेम कोपाम। उग्न पिरत्वार्गळे पोठा-म् उमगिस मनिर रेल्साइम परम पेरिपुप वैयत्तिस-बिस एएस्कू पायंगळ शेस्वीर । २२ मरत्तिनै मट्टपन तन्पोर-मा बातें खोपिर शेयवान शिर पुरया देय्यम- शेर्न उमा बेस्सै इस्तै। २३ बपिटू या शोरुण कण्डीर-गु पाप म] मनिर रेम्लोम पपि वाप.पण पापवीर-पिर तिरबत वेण्णाम। २४ उमा पिरमवर्गळे पोसा- उमणिमिक मनिररेस्कोरम् विग्म कोपवर मेसिम्मोर-म सिम पिपैत्तिर २५. पसिमें पुरंपतु देप्पम-मम्मे पाप तिर होयपर देयषम मेसियु कपासुम कुपर-न बोपति मिरित्तिर सामो। २. तम्पि शदे मेसिवानाल-प्रष्णन तानर मै बोळ सामो? पोम्युकुमकोमपाम पनि माळ गिरिम सामो। सामो।
११३
-तमित
२०
सभी मनुष्म समान है। यदि हम गान गाएँ कि सब
समान हैं तो सुखकी सूप वृद्धि होगी।
२१
इस ससारफे सब सोम भाई-भाईक समान है। यहाँ
स्पाम बहुत है। इस ससारमें (फिर भ्यप ही) क्यों
मना पाए।
२२
जिसमे पौधा सगाया वह बरावर पामी देकर उसकी
बढ़तीका ध्यान रखता है। पर ससक है। यहाँ अप्न
अपार है।
२३ इस सखारफे सभी मनुष्योकि पेटके मिए यहाँ मन्न है।
तुम लोग परिश्रम करके पदा करो मोर पायो, दूसरोका
हिस्सा मत प्रायो।
२४
इस ससारके सभी लोग सहोदर-सम है। क्या यह
उचित है कि सबस निर्वछको साएँ ?
२५
पर सबक है। हमारा पाछन दैव करता है। बच्चा
दुर्वस ह इसलिए क्या उसको ठुकराया पाए ?
छोटा भाई परा कमजोर है-इस कारणसे क्या बड़ा
माई उसे अपना वास मना से? वांके या साठीरे ममसे
ममा मनुष्य दास बन पाए।
कवि-भी मासा
पुप
२७ भन्नु कोट्टु मृरक्षे-अस्मि
याम विमले
पिन मनिवर्ग साम-कास्य
पेट्र, परम पेट्र, पाप पार ।
२८. अरिवं पळतिरस देएम-माकळ
अत्तने पेमकुम मोग्राय
शिरियार मेवर पोशाल-पिम्बु
रेस्बम एस्सोरयुम वाप तुम ।
२९ पागल समत्तम्म-तोपर
महोबार
पाम्मकुम तो सेय्यादु-मुषि
विपरी पोप्युम।
५० पपिट महोरिर अप्पम-गु
बाप.
ममिवलकामाम
पमिट्र, पसाकस्वि तमु-ब
पार
नतिर पेम।
२१ बोमेष कोदड मुरशे-अम्बित
योगेषु कोट्ट मुरशे
नमे कोट्ट मुरोनर
मामिला माम्बवरेस्माम।
पटूम
एगुम
1
मिम
२७
(सुखी जीवन के लिए) प्रेम आवश्यक है। उसमें समता
स्वातंत्र्य है। इस (स्वतत्रपा) के पाव सम सोग सुशिक्षित
और सम्य होंगे।
२८.
सब सोर्पोको अपना मान भड़ाना पाहिए। यदि छोटोंका
उतार कर दिया जाए तो देव सबका भला करेगा।
२९
ससारमें समता मोर प्रातृप मा जाए तो ऐसी परि-
स्पिप्ति आएगी कि किसीको बुराई किए बिना सारा
संसार स्वस प्रतापूर्वक जीवन मिताएगा।
"
न
इस ससारमें सभी लोगोंको पेटभर मोगन भगय मिले।
बनेक प्रकारकी विद्याओंको सीसकर बोर दूसरोंको सिखा
कर इस ससारको ऊपर उठाना पाहिए ।
हे के! तुम्हारी म्पति द्वारा एकरवकी पोषमा हो
यह मोषित करो कि प्रेममें सम एक है। हे के! इसीमें
सब लोगोंकी मछाई है।
कपि-मी मामा १४ कण्णन एन शेषकन कूसि मिग केदपार कोस देसाम ताम मरम्पार से मिए वत्तिपना बोटि संगिडपार "एमग मी ने किंग पर विस्#" एषात "पामपिते तेळिग्नु पासात करित" बेन्बार पेपाटि मेर भूतम बमोबार पाटियार पोतु पिट्ट पमिरयाम नाबार, बोयामस पोम्पुरप्पार, बोरमक और भेदार पायारियो तनिपिरते पेशियुपार उळ बीट्ट, घोषि एस्ताम अरम्मतत्तुरेप्पार एन बीट्टित स्तयोमास एंगुम मुरपारंवार श्रेषगरात पट्ट भिरममिपरम् कपीर मेषगरिका विहितो शेम्मै भरकमिस्र गिरनास पानुम पर मिपुमु पापित एगिस्यो बम्बान "बादि मान एषाम् मार का मेप्तियुबेत, माछै नान कात्तिदुमेन पोर होन परि केदपेन, दुमि मागाळ कात्तिान शिम कुपए सिगार पाहिले मागळ कादि मपार परि पातिबेन काट. बपि पानामुम, पर अपमानासम दरदिर पगसिप्से एनेरामानाम मिरमतं पार्य विस्त, देवरोर सम्मडने हवेन तंगलुरकोर तुम्ब कद्र गिर पामिास माह मनिएन ऐप । " मुरा काप्पेन १४ कान्ह मेरा नौकर कुष्ठी म्यादा मांगते हैं, जो कुछ भी वो भूरू माते है, बगर काम म्यादा हो तो मपने परपर रह जाते है। यदि उनसे पूछा पाए "पर्यों भाई कम क्यों नहीं माए" तो षवाब देते हैं कि मटकेमें विच्छू पा उसने दोससे काटा। कहते हैं-परमें गहिणीको भूत वाधा हो गई। कहते हैं धान नामीको मरे बारहवां दिन ह । अनवरत मूठ पोलते हैं। तुम कोई काम दो तो कुछ मोर ही कर बैठते हैं। म्हारे उगोत्रियोंसे बसग पा-माकर बातें करते है। तुम्हारे भरकी सारी बातें गुसे याबारके वीपमें मोपित कर देते हैं। तुम्हारे पर यदि किसी वस्तुका धमार हो तो उसकी केली बोट घोषणा कर देते हैं। नौकसि जो कष्ट पाया वह बहुत-बहुत अधिक है। यदि मौकर न रहा तो काम ही नहीं पाता । इस पर संकटम में पब म्याकुल हो रहा था तब न मामे कहाँसे कोई माया मोर दोगा में (पातका ) ग्वाला हूँ। गाय बछरे पराता हूँ, पम्पोंका* भी पासन करता हूँ। घर साफ करके दीपक पलाकर रख सकता हूँ। किसी भी भाडाका पालन करेगा। कपड़े-फसेकी रक्षा करूंगा। छोटे बम्पोंको सुंदर मीत रचकर सुनाया और सुवर नाप नपाऊँगा-यह प्यान रहूंगा कि ये रोएँ नहीं। चाहे संगसका यस्ता हो पाहे पोरोंका भय हो, रास हो, दिम हो–ब भी मावश्यकता हो, अपने धमकी पिम्ता किए बिमा आपके साप रहकर यह ध्यान रखूगा कि पापपर कोई संकट म परे । मेने कोई विद्या प्राप्त नहीं की जगसी आवमी हूँ। * तमिमें यहां पर "म" धम प्रयुक्त है। इसका मर्म पन्नोंका या "प्रगाम बोलोसला।
कम्भिी माता- आमपोप.. नामरियन, पाद म बामा गोमति कुत्तपोर मरप्पोर भयवश्व मानपुरियेम एषु पम शोस्ति निभान, "एर पेपर शोत" एप्रेन "ओघु मिस,कम्मन एग्बार रिस्टोर एभान कहागि उपळ रास, कबिहे भस्म गुणम मोटरवे मधामा उत्तिम सोक-गिरदात साकवनेमुळते मार मपिप चि पुरन "मिकापुरे पर शोस्ति विष्णु पसा साद.गिराप कृषि एम केट किषाय पूर' एप्रेम । " ऐमने । तानिकटम पेणाट्टि सन्तरिकळेनु मिस्तै मानोर तमियाळ नरनिरै तोषा विग्नुिम पपविळपिस्त, देपरोर मापरितार पोडम। भरियन मेम्मिन्छ कायम पेरिना कामु पेरिरिस्स" एमाम। पपित्तियत्तिस मोमनये मिमधुम कठिपुग्ने मामधर्म कोण बिन, मम मुरोप मम्मिरते कम्पनुरु पट्ट. मिगुम्बु बरस पाकिचेन, कन्नास पेठ.पष्म पेशाम पेशिमुरिपाठ कान इम रणम कार्प पोस एन बुरामम पणमुरा कामिकमाम माम् मुगुसस कपरियन वोदि पेमगिरान, वीर पर मानगिराम पारिपार दोम छ मेलाम तट्टि याकुपिएन माम्लाह पाक्ति पळपुताय पत्तिमनाय मोफ ममम पाहगिरान, भोमुगए पित । पण माछाप माळाप माळाग -समिस फिर भी यापश्यकता पड़नेपर साठी पसा सपना हूँ, मुक्का मार सकसा हूँ, पावन पट र सकता हूँ। मेरी भोरसे कभी भी धोखेबारी नहीं होगी। पों बहुत कुछ कहकर वह चुप हो गया तव मैने पूछा-"तुम्हारा माम क्या है?' उसने उत्तर दिया- कुछ महीं मोग मुझे 'कान्द' कहा करते है।" पह हट्टा पट्टा पा, उसकी आँखोंमें पच्छे गुण मसकते थे, उसके बघम स्पप्ट मौर गभीर थे। इन कारणोंसे में मन ही मन प्रसन्न होकर बाम गया कि वह एक योग्य यक्ति ह। मैंने उससे कहा- तुम बातें तो बहुत करते हो मोर अपनी बड़ी बाई मी मूव करते है। बोसो, वेसन क्या होगे?' उसमे कहा 'महाक्षय] मेरी न तो पादी ही हुई है मौर न मेरे कोई सन्तति हो है। मैं तो यकेछा हूँ। पपि कोई पका देश विखाई नहीं पाता तो भी मेरी वायुके किसने पप बीते-सका कोई हिसाब नहीं। बाप मुझे मायय भर दें, बस । मैं तो हदयके प्पारको अधिक महत्वपूर्ण मानता हूँ, पसेको महीं। , M मैने सोचा कि यह पुराने जमानेके सनकी सो!मसे कोई है। मैं वा भुरा हमा। मने उसको अपनाया। तवसे में देखता हूं कि दिन प्रतिदिन पाम्हको हमारे प्रति भगन बदटी हो पाती है। कानसे में इसनी मसाइयो पा रहा हूँ, बिनका वर्णन करना समय नहीं है। मांसोंकी रक्षा से परके करती है, ठीक उसी प्रकार वह मेरे कुटुम्बकी रक्षा करता है। कभी गामाता महीं ह । भरके बाहरका भाग मुहारता है, पर साफ रखता है । वासियों को त्रुटियाँ करती है, उन्हें समझाकर उन टिमोको दूर करता है। दम्पोंका दो बह गए पाय-मां और पंचके समान है। उत्तम समतिका परिचय पेवा ह। में उसमें किसी प्रकारकी श्रुटि नहीं पाता। -
कवि-भीमाला-
पणमेसाम दोर्तुरतु पास बापि मोर बगि
पेटुपळे ताम पोसापिरिय मुर माररित
मायनाम मम्मिरिपाप मस्तामिरियनुमाय
पण्विमे देवमाय पार्वपिसे शेषकमाप
एंगिसो पमान र मारि ए गोमान
गिवने याम पर एमतवम क्षेनिन
कम्मन एनबगते कास पैस नाळ मुबताय
एनम पिचार एम भवन पोरप्पाम
मेस्वम
छमा पीर शिरप्पु मकीति
कस्वि मरि कवित शिवयोमम
तेलिये परिवाय शिवनामम एमुम
मोळि घेर तमम तुम मौगि पगिमन काम !
सपने मान बादकोगेम कहोणेम कयुकोगेन
कम्मम माठको कारगमुम उकळनये।
समित
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१२१
बारपयक वस्तुमोका संग्रह करता है, दूध लेकर रखता है-रही छेकर
रखता है। स्त्रियोंकी माता-सम बादरके साप रक्षा करता है।
बह एक अच्छे मित्र तुस्य है, अच्छे मंत्री मोर बन्छे गुरुके तुत्य है,
संस्कार उसके देव सुस्प है पर देसनेमें वह सेवा-सा ही मगता है । म
पाने कहाँसे माया भोर पोसा में पातिका म्वाहा हूँ।
म माम्म किस तपस्पाका फल है कि मैने उसको इस तरह
पाया । मपसे मेरे घरमें काम्हके चरण पड़े, तबसे मुझे किसी वासका
सोपविपार नहीं करमा पड़ा। सब उसका काम हो गया।
ऐश्वय यौवनका-सा स्वास्थ्य, सम्पन्नता बगई, यण, विद्या मान
कविता शिवयोग (भक्ति) सुस्पष्ट झान ऐसी तेगोमय सारी
मछाइयां मिरय पा रही है।
पाम्हको मैंन अपनाया क्या-मैने उसको पहचान लिया,
पहवाम छिया । कान्हको भपनामा, इसके कारण भी है।
कवि-भी माता---
१२२
१५ कण्णम्मा एन कावलि
मन्मएकी-मुष
रिस्ति तुमकर शेर पएकमरि-पेपाळ
तिरैपिटटु मुममसर मरतुमत्तम
परिस मिनेटम ऑगि मुम निकुमर
मायुम मुरबा शातिरंगमाम
पस्सि मिमपुम मावि रयुम-सुणि
मरसर मालपगु मरम्परिक्स
शोस्ति
चोरि मरतु मोर कातिगुणो।
मारियर मुमेरिपळ मेम्म एनगिराय-पर्ग
आरिय पेम्पमा तिरंपळ चप्पो
मोरित मुर कप पपागिय पिन-वेगम
मोप्पुषा कारवरित मान मेरि?
यारिस्मे
तत्तिरवार-पन्
बाग मुगति मगदि बिट्टास?
कारिय मिस् परियोग पाप्पिसे-कति
कमान तोसरिसक कातिप्पामो ?
तमिस
१५. कान्ह मेरी प्रेयसी
स्त्रियां परवा करके वपना फमछ मैसा मह छिपाती है यह
विस्सीके मुग के कामसे परा बाया क्रम है। पतरी कमरको
भोर बागे वद आनेवाली छातीको फना ही शास्त्र (सम्मत रीति)
ह । पतसी कमरको और आग पर आनेवाली छातीको कपड़ा छिपा
मेता है, इस कारणसे उनका सौन्दर्य ठिप नहीं पाता । ममप कठा
सममाए महीं समझी पाती। यदि मुखग्योतिको ही छिपा सिया
पाए तो फिर भमा प्रेम से हो सकता है?
मार्योकी प्राचीन रीतियां तु यच्छी लगती है। प्राचीन कालपी
स्त्रियां क्या परवे में पीं? एक दो बार मिमकर परिचित हो गानके
माद नाम मात्रके लिए दिखानेमें सरमाको यौनसी बात है ? यदि
में जबरदस्ती परवा हटा दूं तो पोन मेरा क्या कर ठेगा ? म्पर्पकी
हिचकिचाहटसे कुछ नहीं होनेका । जिसको फल प्राप्त हो गया क्या
बह फिर उसका छिलका दूर करने में विलम्ब करेगा ?
कषि-मी माला- १२५ M माल मामन पाणकिरपाय मितपगै कागि निमें ममरमेडनाळ विवम्बि अवन पो महर पुरतेने कोपनक्कु नित्तम कोमुत्त निनसाम भीपापा चितम वगैयिक तेमोपिये मी याने मासपिर पाक्कळित्ताय मैयक्तिमासिक मबन पानुरल सहिमामा शोस्सिविट्टाय। मायिष पे निधन मपगिन पेई कीसि तेयमेंगुम तान परव तेन मतैपिन शामिनिकोर वारकोन होस्वमुम मस पोरममे सामुग्यान मारनत्तुम प्रति नाम शेयरयाम मोट्ट पुसियनन्तम मूत्त मगनामा मट्ट कुरगनुमा मेरान पेन नि ममम पुरिय नियमित्तु मिनप्पम तम पगुगि "मिमोर तैयाक एन पिळगह कम्पामम बोय्युम कातरमेन" एमिरमम एण्णा पेह मपि पि एम्पिए मिन तम्ब मागे रान पट्टान्। 1 पिनर जिस दिनेगळ दोपरमपिम पेप कुयिमी मिनोत्त तोषिपस्म भोपुमोर मायिके मिनर कोरिपळ बिळे पार पोमे काट्टिनिरंमे पाळिसाहि निपिसे बेट्टाकेन पम्मान बेस अमर क्षेरमान तनम तमिये पिरिनु मान तोपर्नु परा मानवान् मैमनोर तमिस महाम पानकर में उनके परोंमें गिरी। मुनिने प्रमसे मुझे पासीर्वाद दिया । ममे उनसे कहा, "हे भनिवर ! इस पृथ्वीपर निम्न पक्षी पाप्तिमें मेरा जन्म हुवा है । परन्तु मेरा स्वभाव अन्य कोयल से भिन्न हमें सबकी भाषा समझ पाती है। यही क्यों ? मुझमें मनुष्यों से मनोमाष हे तपमा मुटे समप्ताइए कि ऐसा क्यों है ? मेरे यों पूछने पर मुनिने कहा, हे कोयल, सुन । पूर्व पग्ममें तू पीर मुग्गा नामक कठोर कर्मेवारी शिकारी नायकी पुत्री होकर पर रेमो दक्षिणी भाममें एक पहाइपर रहती थी। तू पौवनमें अत्यम्त स्पती पो। तीनो तमिछ राग्यों में सौन्दर्य में तेरी समता करनेवासी मौर-कोई नहीं-यो सिकारियोंमें तेरा ममेरा भाई एक "माग्न" (ऋषम राब) था। यह सेरे स्पपर मुग्ध होकर काम पर-स्व इया । बहुत दिनसि उसकी यह इच्छा थी कि तुमसे ही उसका विवाह हो। यह तुप्से स्वर्म पुष्प बोर साबा शहद आदि सा-गकर दिया करता था। वह सदा तेरी ही या करके व्यग्र रहा फखा पा । हे मधुर मापिणो ! तूने उसकी पत्नी पननेका बपन दिया-प्रेमसे महीं परन्तु उसको दुसी न देख सकीं, इसलिए तूने बपन दिया । हे सुन्दरी ! मेरी सुन्दरताकी फीति तो वेसभरमें फैम ही पुकी पी । पक्षिमी पहाड़के पासै प्रदेशमें एक शिकारियोंका रामा पा। मह सम्पत्ति और मीरता-दोसि सम्पन्म पा । उसकेरोसे साप देव कांप उठता पा। उसका माम मो? पुटिपन पा । बह अपने मेष्ठ पुष मेट्टै कुरमन (मर्कट राप) के लिए एक सुयोम्प वधूको होममें पा । उसने तुम प्राप्त करनेका निकपय किया। तेरे पिताके पास आकर उसने कहा- 'तेरी सरकीको अपने पुत्रकी बघू बनानेसरा मैमे निश्चय किया है।' बहुत प्रसन्न होकर तेरे पिताने स्वाति दे दी। । । इसके बाद कुछ समय बीत गया, तब एक दिन हे कोमछ ! सू मपने ही समाम स्पपती ससिडि साप शामको सेस ही पी। तुम मोगोंका हेमना विपुलवाकी कीड़ा-सा उगता था।
यान" अवि-भी माता- तोपियतम नोयुम तोगुत मिषे मामा पापियाम का मिट्टान, मैपस कर बम मिने निम्नमितान, मषवन कण उग्न मा मोहम् कोम मिट्टाम मिमें मबन मोरिकलाम मी पवने मोक्कि निप्राम मामबोल नोक्किमिते मानि कामु विट्टोर तोषिसम्म मन शुग कोसत तान कमे मादि पुरस्बन पोतु मेमे मबि मर मिट्टार, मामपनुम निमिरते "पाणि तसंवन मपन एन र्गत मा गिदै पपगुमाय मारवमाग तोभियान पयन कम्युमे मिन मि मानकारक कोपन' एमिक मनत्तरपिक मी मोपिवाय पाठ मरममैमित तैयाराम, अपमित तमिमरिस्तारपराम मावर पे मार माधुग्ने वा पिम्पीर मानबर पेन म पुरपर तम्मपळ पान फोस्त मगर सिपम कृषि मुयस वेदपापो ? बम रित मावेमार बेरक्को पेन्मेरप्पार? पत्तिमियाप बापू पदस्लाम पारवेम्बर तामेमिनुम गति बिनै मगळा मागळ पुरि पोषविस्त पोमरि पोद पिरेम पोय पापीर तोपिपाम पमै किट्ठ पोपिनरे, एन शेगेम एममी मप पेमाबत 'ऐयनें। ऐनून १२९ -वमिस तुम योग बन प्रान्तम इव सस रही पीतम पेर देघा गामा पुत्र शिकार मम्मे वाया। वह रामकुमार एक हिरनका पोटा करता हुआ बहुत दूर पता गया-यह अपन सापियोंसे बरग हा गया था। उमने तुमे ससिकि साप मटस देख रिया। तुग्न वह तुमपर रीम गया। उसने निश्चय कर मिया कि वह तुझे अपनाएगा । हे गवती! मी उस राजकुमारको देखकर प्रममम्न हो गई। उसने तुझे देखा तूने उमे। उसी दर्शनमें सुम दोनोंन अपन अपने प्राण एक-दूसरेको दे गले। रामकुमारको वहाँ दसकर तग सखियाँ गई । उसको पार्टीमा पुत्र पानकर व र गई थी। बह गयकुमार तेरे पास आया मोर बोला " में पर रामारा पुष हूँ। हे शिकारीकी पुत्री तू बहुत सुन्दर है । पुस्य जम मनका मने भाग फल पाया । देखते ही में तुमपर मुग्ध हो गया। तू भी कम मुग्ध नहीं हुई पी। मपनको काम रमाकर दू बोली महागम यापके महमें सुनती हूँ पांच सो सामिनिया है और मभीका अनुपम सौन्दर्य ह । सुना है कि उना गानम परपर भी पमीनता है। बाप उन्हीके साथ सुनी होकर रहिए । मुझ रानाकीधावस्यकता महीं है। मैं तो परत प्रदेशको निम्न जातिको हू? फही पनगर सिंहका प्रयास भ्याए हावाह? वीर प्रतापी रामा पहा निर धिपारीकी पुषीको इच्छा रोगा? यपि हम मानिकी छोटी हैं वो भी हम परमी हाकर रहतो हारांगना होकर नहीं। मापके स्वणमय परमोंकी सौगधह धाप पाए। मशियां भी मुछे छोड़कर चली गई ह हाय ! म क्या कर? 14 + * इम बाद निहता है दिकविहीर गामार वा। कोपर पतिापम पिगती है। परिका पालामा पता किरकोमा नहीं मुन्दर मुली है। मामा उमटीमा है मारपरिको पोरठा कि हम पण देनमा पा!
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-वमिस तुम सोम बन प्रान्तमें पप सेठ रही थी, सब पर देखा गया पुत्र विकार सम्ने माया । बह रामकुमार एक हिरनमा पीछा करता हमा बहुत दूर पला गया-यह मपने सापियोंसे बल्ग हो गया पा। उसने तुझे सखियोंकि साप समते देख रित्या । सुग्न्त वह तुमपर रीम गया। उसने निश्चय पर स्त्यिा नि वह तुमे अपनाएगा । हे मुबती! तू भी उस रामकुमारको देखकर प्रममग्न हो गई। उसन तुझे देखा तमे उसे । उसो दानमें तुम दोर्नोन मपन अपने प्राग एक्सरेको दे गसे। राजकुमारको वही देवकर तरी सहियां हट गइ । उसको पत्रवीका पुत्र पानकर पे पर गई थी। यह रागामार वेरे पास माया और दोसा पुष हूँ। हे धिकारीको पुत्री ! तू बहस सुन्दर है । पुरुप बम एनेका मने मात्र फर पाया । देखते ही मैं तुमपर मुग्ध हो गया। तू भी कम मुग्ध नहीं हुई पी। अपनेको काबू रखकर तू वोठी महाराम मापके महझमें सुनती हूँ पांच सौ कामिनियां है और सभीका अनुपम सौन्दर्य ह । मुना है कि उनके गानसे परपर भी पसीजता है। माप उन्हीके साथ सुमी होकर रहिए । मुम रागावी यावश्यकता महीं है । म तो पवत प्रदेशकी निम्न जातिषी हूँ? कही बनराग सिंहका पाठकसे स्याह होता है ? पौर प्रतापी रामा हो मिरे शिकारीकी पुत्रीकी इच्छा करेगा? यपि हम नातिकी छोटी है तो भी हम परनी होकर रहती हपारोपना होकर नहीं। मापके समय परमोंकी सौगध है बाप नाइए। सखियां भी मुझे छोड़कर पसी गई है हाय ! म मया कई ? में घेर राजाफा . . इस बार सिर होता है कि विही यह रागामार वा। कोमट पनि हापम मिरती है। कविको महबार मात्रय होता का कोपट मही सुन्दर मुली है। मचानक उसकी नरदूटती है पर परिको बोध होगा किनारे स्पण देवता । *