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Vishva Prasidh Jan Kranti Yan
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विश्व-प्रसिद्ध जन-क्रांतियां
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विश्व-प्रसिद्ध
जन-क्रांतियाँ
लेखक
अभय कुमार दुबे
COV फैमिली युक्स प्रा लिमिटेड
F2/16 अमारी र, दरियागन नई दिल्ली 110002.
पितरक
पुस्तकमहलवारी सपनी, दिल्ली 110005
फैमिली बुक्स प्राइवेट लिमिटेड
12/16 अमारी राह दरियागज, नई दिल्ली 110002
सर्वाधिकार 1988
फैमितीस प्राइवेट लिमिटेर नई दिल्ली 110002
वितरक
पुस्तक महत, दिल्ली-110006
विक्रय के
। 6686 सारी बावनी दिल्ली 110006
-----पान 791142911979
2 108 नताजी मभाष मार्ग दरियागज नई दिल्ली 110002
---पान 1268792913279900
प्रशासनिक कार्यालय
12116 अमारी राह दरियागज नई दिली 110002
पान 3276519127278184
शाखा कार्यालय
2212 मिशन राड (शामा राव कम्पाउड) बगलौर 560027 पान 214075
चेतावनी
भारतीय कॉपीराइट एक्ट र अतर्गत इस पम्तक के तपाइममें समाहित सारी मामग्री (रेखा व छाया
चिश मन्ति) सवाधिकार फैमिसी बस प्राइवेट लिमिटेड के पास सरक्षित हैं। इसलिए कोई
भी मजन इस पस्तरका नाम टाटडिजाइन पाठ्य सामग्री व चित्र आदि आशिया पूर्ण रूप
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कर अयथा काननी तौर पर व हर्जे सर्चे व हानि कनिम्मेदार होगे।
तृतीय सस्करण अक्तूबर 1991
सजिल्द लायब्रेरी सस्करण 36/-
भद्रक क्वालिटी ऑफसेट प्रैस नई दिल्ली
स 11.SIM प्रकाशकीय 1712-92 आज की दुनिया तेजी से दौड रही है। आज के पाठक को ऐसे साहित्य की आवश्यकता है जो न केवल उसका मनोरजन करे अपितु उसकी ज्ञान-पिपासा को भी शात करे। हमारे प्रकाशनों मे इन्ही दोनो का सगम मिलता है। सुरुचिपूर्ण, कलात्मक एव ज्ञान-विज्ञान से युक्त हमारी पुस्तकों की प्रामाणिक सामग्री की लेखन-शेली ऐसी होती है कि एक बार उन्हें कोई पढ़ना शुरू कर दे तो पढ़ता ही चला जाये और दूसरी ओर दाम इतने वाजिब हाते हैं कि साधारणतम आय वर्ग का पाठक भी उसे खरीद पाये। यही कारण है कि आज हमारी पुस्तकें पॉकेट बुक्स से बाजी लेती हुई लोकप्रियता एव विक्रय के नये प्रतिमान स्थापित करती जा रही हैं। कुछ वर्ष पूर्व ज्ञान एव चिंतन के धरातल पर एक औसत पाठक को अतर्राष्ट्रीय घटनाचक्र से जोडकर उसकी चेतना को प्रबुद्ध करते हुए, उसके ज्ञानक्षेत्र का चहुमुखी विस्तार करने के उद्देश्य से प्रारभ की गयी विश्व-प्रसिद्ध शृखला अव निर्विवाद रूप से स्थापित हो चुकी है। लाखों-लाख पाठकों द्वारा इसे अब तक पढ़ा एव सराहा जा चुका है और उनमें जैसे इस शृखला की प्रत्येक पुस्तक को सग्रह करने की होड-सी लग चुकी है। दरअसल इस शृखला में प्रकाशित प्रत्येक पुस्तक अपन क्षेत्र से सबधित सभी उल्लेखनीय पक्षी को पूर्णरूप से उजागर करने वाला एक सचिन मिनि एनसाइक्लोपीडिया है। प्रस्तुत पुस्तक विश्व-प्रसिद्ध जन-फ्रातिया इस शृखला की 25वी कडी है। पुस्तक मे 73 ईस्वी पूर्व रोम मे स्पार्टाकस नामक दास के नतत्व में हुए गुलाम-विद्रोह से लेकर इग्लैंड, अमरीका, फ्रास, यूनान, भारत, इटली, सोवियत रूस, तुर्की, चीन, क्यूबा, वियतनाम सहित 20वी शताब्दी तक की अनेक महान जन-क्रातियो की अमर गाथाए प्रस्तुत की गयी है। लगभग 200 दुर्लभ चित्रो एव प्रामाणिक पाठ्य सामग्री से युक्त यह पुस्तक एक साधारण पुस्तक न होकर महान क्रातियो पर (विशेष रूप से तैयार कराया गया एक अनूठा ऐतिहासिक दस्तावेज है। इस पुस्तक की रचना में विशेषकर चित्रों एव नक्शो आदि के लिए सदर्भ ग्रन्था के रूप में जिन विभिन्न देशी-विदेशी पुस्तकों की सहायता ली गयी है, उन सभी के लेखको एव प्रकाशका के हम हार्दिक आभारी हैं। कृपया पुस्तक के सबध में अपनी सम्मति अवश्य भेजे। -प्रकाशक
क्रांति-क्रम
9
16
1 गुलाम-विद्रोह
2 इग्लैंड की क्राति
3 ससदीय क्राति
4 अमरीकी प्राति
5 फ्रासीसी क्राति
6 यूनानी और दक्षिण अमरीकी प्राति
7 जुलाई क्राति और बेल्जियम की आजादी
8 भारतीय स्वतत्रता का प्रथम सग्राम
9 अमरीका की दूसरी शाति
22
28
36
43
48
55
63
10 इतालवी प्राति
11 पेरिस कम्यून
12 सोवियत अक्तूबर प्राति
13 तुर्की की प्राति
14 भारतीय स्वतत्रता संग्राम
15 चीन की जनवादी प्राति
16 मयूबा की प्राति
17 वियतनाम की प्राति
71
77
83
92
97
113
126
131
ܐܠܙ ܐܕ ܬ गुलाम-विद्रोह (ईसा से 73 वर्ष पूर्व) गृह-युद्ध मे घिरे हुए पतनशीलरोमन साम्राज्य के खिलाफस्पार्टाकस नामकएक श्रेसियन गुलाम के नेतृत्व में तीसरा गुलाम-विद्रोह दुनिया में जन-फ्राति की पहली मिसाल मानी जाती है। स्पार्टाकसने रोमन सेनाओको चुरीतरह शिकस्त देकर लाखो गुलामो की परतत्रता की येडिया काट डालीं। सेनापति क्रैसस के हाथो एल्पाइन दरों के मैदान मे स्पार्टाकस को मात खानी पड़ी और छह हजार गुलाम योद्धा नशसतापूर्वक रोम से कापुआ जाने वाली सडक क दोना ओर सलीयों पर सटका दिये गये। अपनी नाकामयाबी के बावजूद स्पार्टाकस की विद्रोह की कहानी आज तक अमर है। पण, अन्याय और दमन के खिलाफ बगावत और युद्ध की शुरुआत गुलामा के आधार थे। गुलाम-जा दास-मालिका के लिए उत्पादन के बालने वाले औजार थ। गुलाम-जिनकी जिंदगी का एकमात्र मकसद मडी मे विकना और अपने मालिक की आज्ञा का पालन करते हुए मर जाना मात्र था। गुलामों ने अपनी इसदारुणदशास उबरने कलिए तीन बड़े विद्राह किये जिनमेसवस प्रभावशालीतीसरा विद्रोह ईसाकेजन्मसे 73वर्ष पहल हुआ था। इस विद्राह का नता था थेसियन ग्लैडिएटर गुलाम-स्पार्टाकस। स्पार्टाकस के नेतृत्व म लगभग चार साल तक गुलाम-सेनाओं ने उस समय दुनिया की सबसे शक्तिशाली मानी जाने वाली रोमन सनाआकोपराजित कर एकबारगी तो जैसे पूरे सामाज्य की नीवही हिता डाली। गुलाम-विद्राह की पृष्ठभूमि समझने के लिए तत्कालीन रामन साम्राज्य के चरित्र को जानना बहुत जरूरी है। ईसा के जन्म से पाच सदीपूर्वरामक ओतम राजाटाक्विनद प्राउड (Tarquin the Proud) को उसके घिनौने कुकृत्यों के कारण गद्दी से उतार दिया गया। रामनों ने तय किया कि वे राजशाहीचलनेही नहीं देगे। इसी विचारधाराकैफलस्वरूप राम पोम्पी तिवेरिअस व गेइअस गणराज्य का गठन हुआ। रामन घरानो के उन मसियाओ ने, जिहाने राजा के खिलाफ विद्रोह का नेतत्व किया था एक सीनेट बनायी जिसकदा सरस्य कौंसुल (Consul) कहलाय। य कोसुल रोम के शासकता थे पर उन्ह हर साल बाद बदल दिया जाता था। रोम दाभागों म बट गया। एकभागपर पटीशियस (Petricians) अर्थात सामता का वर्चस्व या तोट्सग भाग बहुमत वाले प्लेबियस (Plebeians) अर्थात् स्वतत्र नागरिका के अधिकार में था। 'लेथियस अपने प्रतिनिधि खुद चुनते थे। इन दाना के अतिरिक्त राम म एक तीसरा वर्ग भी था-गुलाम वर्ग। दरअसल यह वर्ग ही पूर रोमन साम्राज्य के सुख ओर सम्पदाका आधार था पर इसे काई अधिकार प्राप्त नही था। इस तरह रामन प्रजानत्र हर तरह स दास मालिको ककरूप समीकरणो पर टिका एक घिनौना प्रजातत्र था। रामन साम्राज्य ने प्यूनिक युद्धा (Punic wars) को जीतकर अपनी ताकत काफी बढ़ा ली थी। ईसास 133 साल पहल दो रोमन भाइया तिबरियम (Tiberus) और गइअस (Cauus) न कुछ समाज-सधार करने चाहे। इन दानाका कहना था कि अमीराकोघडी बडी जायदादे नही रखनी चाहिए। इसकपक्ष मे दोनो भाइप्राचीननियां का हवालाते। इस तरह वीविद्राही विचारधारा का भला कौन सहन करता। नतीजतनदोनों भाई अमीरो की साजिश सकल कर डाल गये। इसी के साथ गम म गृह-युद्ध छिडा जिसस गेम का सारा ढाचा चरमरा उठा। इसी जमाने म गुलामा न एक के बाद एक-तीन विद्राह किया दरअसल इन विद्राही के रूप म रोमन समाज की आरिक टन और पतनशीलता का अभिव्यक्ति मिली। साम्राज्य-लिप्मा शक्ति के मद दासों के मालिक होने के अमानवीय दभ और हर कीमत पर आनद भोगने की जिद ने विलासी रामनों का पूरी तरह स निकम्मा, आलमी काहिल थुलथल और लम्पटयनादिया था। अप्रापतिक मैथुन,पशुमैथुन अजीब अजीय तरह भाजनों के चाव और सून में तरबतर गुलाम-याद्धाआ का अखाडे मै दद्वरत दरावर रोमांचित हाना उस जमान रामनापी जीवन-शैली बन चुकी थी। इस बबर शैली श्री रीढ़पर सवम कडी चाटरपाक्सिविटोहन की थी। दागुलाम विदाह हाच थे। पहला गुलाम विदाह यही आसानी स रचला जा चया था। दूमर गुलाम विवाह को कुचलन के लिए पोम्पियम मगनम (पोम्पी) (Pompeius Magnus) जैम जनरल वासनाए लकर SARMATLA tral HUNS SLAYS North Gaspianse Atlanter Orlan 18 5 MEDIA Black See anth A MINOR More van. Talaya Damund A Nala Aaimain ht- . away Jaww ARABIA ourn Sunau albarr neon Sun MeaningANI . GMAI EGYPT AFRI ३ MAURETANIA The ROMAN EMPIRE before the Barbarian imasions तत्कालीन रोमन साम्राज्य का मानचित्र जाना पड़ा था। उसी समय तीसरा गुलाम-विद्राह भी रोम साम्राज्य के शरीर म भीतर-ही-भीतर विषैली गाठ की तरह पक रहा था। एक तरह से खुदरामनान ही गुलामाकोलडना सिखाया था। उन दिनोरोमनाकाप्रिय मनारजन युद्ध कला मे प्रशिक्षित गुलाम ग्लैडिएटरा (Gladiators) का हद्व हाता था। इन गुलामो को पूब अच्छा खिलाया-पिलाया जाता क्सरत करवाई जाती और गुलामी के दूसर काम नहीं करवाये जाते। उन्हे सतुष्ट रखनकलिए उनकमालिक आरत तक मुहैया करात। गुलामो को प्रशिक्षित करन वाल प्रशिक्षक लानिस्ता (Lanista) कहलात थ। राम में जगह-जगह अवाडे बन गये थे, जहादास-मालिक भारी कीमत चुकाकर मनचाह जोडाका द्वव देखते थे। लानिस्तारामना की रक्त-लिप्सावत्ति का लाभ उठाकर यशुमार दौलत कमा रहे थे। उन्होने गुलामो के द्वद्व-युद्धाकारामाच की चरम सीमाआ पर पहुचा दिया था। श्रम (Thrace) क रहन वाले गुलाम एक छोटा-सा मुडा हुआछुरा चलाने मवड प्रवीण हात थ तो अफ्रीका के नीग्रो मछली पकडन के जाल व त्रिशूल से लडनमा एक श्रमियन र छुरव अफ्रीकन हब्शी कत्रिशूल व जाल की टक्कर दखन क लिए मारे रामन व्याकुल रहत थे। गुलामा के द्वद्व के लिए कापुआ (Capua) नगरम पत्थराम एक बहद शानदार अखाडका निमाण किया गया था। इसी अखाड के पाम लानिस्ता लेण्टलस वाटियाटम (Lantulas Battatus) ने गुलामो को ढह सिसाने का स्कूल साला हुआ था जा उम जमान का अपनी तरह का भवस वडाम्फल था। दरानम मार और बुलथुल लानिम्ता याटियाटमपी नजर गलामा का चुननमकापी 11 तज थी। वह उन्हें दूर-दूर से खरीद लाता। रोम की गलिया मे गुडागर्दी से आगना करियर शुरू करने वाले बाटियाटस ने इस अखाडेबाजी स इतना धन वटारा कि वह राम के चार सबसे बड़े मकाना का मालिक बन बैठा। बाटियाटस अपन काम क गुलाम खाना मे ढूढ़ता। खान के दरागाआ को रिश्वत खिलाकर वह एस गुलामा का पता लगा लेता, जा विद्राही स्वभाव के होते। फिर बाटियाटस उन्हे सरीद लता। सानो का काम सबसे कडी महनत मागता था। बाटियाटस के अनुसार जा गुलाम उस कडी महनत को झलकर भी लगातार बगावत के मूड मे रहता हा उसके अच्छा याद्धा सावित हाने की सभावनाए ज्यादा रहती थी। बाटियाटस इन गुलामा को द्वद्व युद्ध का प्रशिक्षण देकर एक दिन उनकी जजीरे खोलकर अखाडे म धकेल देता। याद्धा गुलामो को ऐसा लगता कि मानो वे थोडी दर केलिए दमघाटु कैद मे आजाद हो गय हैं। वे इस लालच मे जी-जान से लडत कि अगर जीत गय तो अगली लडाई मे उन्हें फिर आजार होने का मौका मिलेगा। तीसरे गुलाम युद्ध की जड़ में ग्लैडिएटरो के मन में आजाद होने की यही भावना चिंगारी के रूप म विद्यमान थी। बाटियाटसन नूविया (मिस) की साने की खाना सेम्पार्टाकस को खरीदा था। घुघराले बालो टूटी हुई नाक, सामान्य कद-काठी ओर गहरी काली आखो वाला यह गुलामस्वभाव से बेहद विनम्र गभीर और नेतत्व के प्राकतिक गुणो से युक्त था। अन्य श्रेसियन गुलाम उस उम्र म छोटा होने पर भी 'पिता कहकर सवाधित करते। स्पार्टाक्स आदतन कम बालता। पर गुलामो के बीच उसके आदेश बिना किसी जोर-दबाव के माने जात। Law अधारे में पुडों का आनर मेते रोमन 12 कापुआ म अपन स्कूल के अदर बाटियाटस ने स्पार्टाकस समत दो सौ ग्लैडिएटरा को पाल' रखा था। इनमसे अधिकाश यहूदी, नीग्रा ओर थेसियन गुलाम थे। कई युद्ध-क्लाओ म निष्णात और शरीर स मजबूत इन ग्लैडिएटरो के दिला मे दास मालिका के प्रति गहरी घृणा भरी थी। इसी असाडे म बाटियाटम ने स्पाटकिस का मनारजनार्थ एक जर्मन औरत सौंपी, जिसका नाम वारीनिया था। वारीनिया ने स्पार्टाकस को अपना पति माना और अत तक उसक कधेस कधा मिलाकर लडी। एक दिन दा रोमन नौजवान द्वद्व-युद्ध दखने की लालसा म कापुआ आय और बाटियाटस से 25 हजार दीनारमदाजाडाका आमरणद्वद्वदखने कासोदाकिया। बेकस और कैमस नामक इन रोमना ने ग्लैडिएटरा म स खुद स्पाटाकस, डावा नामक एक नीग्रा और डेविड नामक एक यहूदी और एक अन्य नस्ल के गुलाम का चयन किया। पहला द्वद्व यहूदी और चोथे ग्लैडिएटर में हुआ। यहूदी विजयी रहा पर उसन पराजित ग्लेडिएटर का क्ल करने से इकार करदिया। यह विद्रोह की पहली चिंगारी थी।फिर बारी आयीस्पाटाकस और डावा के युद्ध की। इससे पहलकिरफ़ी की सीटी बजती डाबाने स्पार्टाकससे लडन कबजाय अपना निशूल ताना ओर भूख भडिय की तरह रामना पर झपट पडा। सैनिकान डाबा को फुर्ती से बिना चूक तत्काल भालो स गाद डाला। पर विद्राह की बुनियाद पड़ चुकी थी। बाटियाटसन सजा देने और गुलामा पर अपना आतक जमाने के उद्देश्यसडाबा क बाद एक और बेकसूर नीग्रो गुलाम का अन्य गुलामा के सामने बल्लमा से छद डाला पर इसके ग्लेडिएटर-गुलामो का दद 13 बावजूद विद्राह न रुका। स्पार्टाकस ने उस विवाह की कमान सभाली। विषयम और गानिक्स नामक दो गुलाम इस विद्राह की अगुआई म उसके दाय और वाय बाजू धना डाबा और दूसरे नीग्रा गुलाम की लाश ग्लैडिएटरा का सवक मिसाने के लिए उनक सामन सलीब पर टाग दी गयी परस्पाटकस नेता इनलाशामकुछ और हीमवर सीखा। उसने तय किया कि वह अक्सिी ग्लैडिएटर से नहीं लडेगा। जैसे ही उसने साथी यादाआ को अपना निर्णय सुनाया सभी विद्रोह करा के लिए मचल उठ। सुबह की कसरतकवादव सान क कमर में जमा हुए। स्पार्टाकम न उन्ह एक छोटा सा भाषण दिया। सबसे पहल गुलाम याद्धाआन अपने कोडाधारी दरागाआ और उस्तादा का सफाया किया। तीन पीढ़ी की गुलामी का जुआ अपन कधा पर ढान वाल स्पाटक्सि ने पहली बार गुलामा के माथ आजादी का अमत चया। फिर गुलाम ग्लैडिएटर अखाड म तैनात चालीस सैनिको पर टूट पडे। भरपूर नफरत मे की गयी इसपत्थराओरडडाकी मार केसामायसैनिक थोडीदर भी नटिक्स। स्पार्टाकस न अब बाकायदा ग्लेडिएटरो का नेतत्व सभाल लिया। बाटियाटस के शस्त्रागार स हथियार लकर उसन व्यूह-रचना की और कापुआ स आने वाली सैनिक टुकड़ियों को ध्वस्त किया। उन्हाने सबसे पहले माउट वसुविअस (Mt Vesuvius) का अपने अधिकार म लिया। रोम की सीनेट न विद्राह की सबर सनने पर ज्यादा गभीरता नही दिसायी और 'मुट्ठी भर बागिया' का कुचलने क लिए बारिनियस के नतत्व मे तीन हजार मैनिक भज। रोमन सेना रास्ते मे मिलने वाल गुलामा पर जुल्म-अत्याचार करती हुई आगे बढ़ी। गुलाम मेना ने उस पर रात मे हमला किया। रोमन उस समय आमोद-प्रमोद से थके हुए सो रहे थे। एक एक रोमन बीन-बीनकर मार डाला गया। स्पार्टाक्स ने पोथुस नामक एक सैनिक का राम का राजल्ड देकर कहा, 'जाओ, सीनट से कहो अब कोडो का संगीत सुनते-सुनते हम तग आ चके है अब हम गुलाम नही रहना चाहत। स्पार्टाकस की फौज जहा-जहा से गुजरती गुलामा के हुजूम के हुजूम उसमे मिलत जाते। धीरे-धीर उसकी फौज में एक लाख आदमी हो गया। रामनो ने स्पार्टाकस के दमनार्थपुब्लियस के नेतृत्वम एक बडी सेना भेजी। स्पार्टाक्स ने इसके खिलाफ एल्पाइन के दरों में कामयाब छापामार युद्ध लडा और जीत हासिल की। स्पार्टाकस की चौथी जीत ममियस नामक अनुभवी सेनापति के खिलाफ थी। रोमन फौज खदेड दी गयी। इतिहास मे रामन फौजम कभी ऐसी भगदडन मची थी। वापस आयेहर दस भगोडो मे से एक का कायरता के अपराध में मौत की सजा दी गयी। बाद मे स्पार्टाकस ने ममियस और सवियसनाम के दोरामनसेनापतियो कोगिरफ्तार करकेग्लैडिएटरोकी तरह आपस मे लडवाकर अपनी बदले की आग को ठडा किया। गुलामो ने लडने का एक खास तरीका खाज निकाला था। वे नक्शा बनाकर अपनी रणनीति तय करते और अपने इच्छित मैदान मलडते। रोमन सेना अति आत्म-विश्वास के कारण अपनी व्यह-रचनालोड देती और हार जाती। एक बडी लडाईमे तोरस हजार गुलाम मारेगयेपर उनमें से एक की भी पीठ पर घाव नही था। रोमना क दिलो दिमाग म गुलामो की बहादुरी की दहशत बैठ गयी। आखिर म रामन सेनापति मार्कस लिसीनियस सस (Marcus Licinus Crassus) क नतत्व म मबम बडी सना गुलामा मलडन गयी और उ ह परास्त कर दिया। स्पाटाक्स लडता हुआ मारा गया। 6 872 गुलामा को गिरफ्तार कर राम सकापुआ जान - .
HAR किर्क डगलस की फिल्म स्पार्टाकस का एक दृश्य वाले मार्ग के दोनो ओर लाइन से सलीबा पर लटका दिया गया। वे वही लटके-लटके मर गये। किवदती है कि स्पार्टाकस की बीवी वारीनिया किसी तरह स्पार्टाकस के बच्चे के साथ भाग निकली। स्पार्टाकस की नाकामयाबी गुलाम-विद्रोहों का अत नही था। उसके बाद भी कई गुलाम-विद्रोह हुए। आदि विद्रोही स्पार्टाकस की महान स्मृति मे हावर्ड फास्ट ने 'स्पार्टाकस' नामक अमर उपन्यास लिखा और किर्क डगलस ने इसी नाम की अमर फिल्म बनायी। पर स्पार्टाकसको इससे भी बडी श्रद्धाजलिता आने वाली उनपीढ़ियोने दी जिन्होंने मानवीय आजादी के लिए सघर्ष किया और कुर्बानिया दी। 15 इग्लैड की क्राति (1628 1658) ओलीयर क्रॉमवेल के नेतृत्व मे हुई इग्लैड की क्राति ने राजशाही के उस युग में पहली यार नागरिक सरकार की धारणा को सामने रखा। धार्मिक असहिष्णुता के युग मे इस फ्रालि ने उपासना-पद्धति की आजादी को अपना ध्येय मनाया। राजशाही की निरकुशता और ससद के दुलमुलपन के खिलाफ किसानो के बेटे तलयार सेकर सरे। क्राति का पतन फ्रॉमवेल की फौजी तानाशाही में हुआ और इसर ने फिर एक बार राजाओस्वीकार कर लिया। पर इस क्राति के गर्भ में भविष्य के संसदीय लोकता के बीज छिपे थे। 'शताब्दी इग्लैंड की राजशाही के खिलाफ एक क्रातिकारी बेचैनी लेकर आयी। लगता था कि जैसे पूरा देश दा भागो म बट गया है। एक तरफ पुराने इग्लैंड के समर्थक थे, जा चर्च, राजा और परपरागत समाज व्यवस्था म विश्वास करते थे। दूसरी ओर धार्मिक सहिष्णुता और बाइबिल के पवित्र सूत्रो मे उद्घोषित आजादी के समर्थक थे। ऐसा होना ही था। युगप मे विज्ञान के विभिन्न क्षनो में काफी तर्कसंगत अनुसधान हो रहे थे। इस वैज्ञानिक एव बौद्धिक चतना को सामाजिक अभिव्यक्ति धार्मिक कट्टरता के विरोध मे मिली। संघर्ष पहले गजशाही और ससद के बीच शुरू हुआ। फिर इसने गृह-युद्ध का रूप ले लिया। ससदीय सेनाओ का नेतृत्व ओनीवर क्रॉमवल (Oliver Cromwell) के हाथो म था। इस फौज मे किसानो के बेटे लड रहे थे। मुकाबले म शाही सना थी जा पराजित हुई और किंग चार्ल्स-प्रथम को गिरफ्तार कर लिया गया। इस गृह-युद्ध का अत चार्ल्स के मृत्यु दह और इग्लैंड से राजशाही के सफाये के रूप म हुआ। प्रॉमवल की मृत्यु के बाद इंग्लैंड की जनता ने फिर से गजशाही मे पनाह ढूढ़ी लेकिन इस क्रांति की विरासत के रूप म सहिष्णुता, दास-प्रथा विरोध नारी-मुक्ति आदि विचारों को इग्लैंड के समाज म मान्यता मिल गयी। इस वैचारिक आधार पर भविष्य के इग्लैंड की नींव पड़ने वाली थी। 16 KING D NOR . OENA 4:14 No ENULAND Ladan Drwe 4 Atlantic Ocean VA faru Trut PRANG ICOM FRANCE +601 HAir Bareteen ओलीयर क्रॉमवेल और इग्लैड का मानचित्र सन् 1628 से लेकर सन् 1658 तक चलने वाली इस सामाजिक और राजनैतिक उथल-पुथल की पृष्ठभूमि मे फ्रास मे हुई घटनाए थी। फ्रास की जनता ने उन दिना सामाजिक और आर्थिक जीवन पर राजा का पूरा अधिपत्य स्वीकार कर लिया था। इग्लैंड क राजा ने भी इसी तर्ज पर फ्रास के नक्शे-कदम पर अपनी जनता का चलाना चाहा। पर दोना देशो की परिस्थितियो मे काफी अतर था। अग्रेज समाज ने इसे हजम करने से इकार कर दिया। ससद ने सन् 1628 मे चार्ल्स-प्रथम को याद दिलाया कि परपरागत अग्रज स्वतत्रताओ का उल्लघन नहीं किया जाना चाहिए। पर चार्ल्स ने इस 'पिटीशन ऑफ राइट्स' (Petition of Rights) पर कान नही धरा। उसन निरकुश भाव से ससद को भग कर दिया और अगल ग्यारह साल तक एक बार भी ससद को बुलाने की जहमत नही उठायी। इस तरह राजशाही पूरी तरह से तानाशाही मे बदल गयी। चार्ल्स का मुख्यमनी थॉमस वेंटवर्थ (Thomas Wentworth) स्ट्रैफोर्ड का अर्ल (Earl of Strafford) था। उसने इग्लैंड में भी वही नीतिया अपनायी, जो फ्रास म कामयाब हा चुकी थी। जनता पर से उठाये गय पुराने टैक्स पिर लगा दिये गये। इसी समय धार्मिक क्षेत्र में एक बडी विस्फोटक घटना हुई। केटरबरी (Canterbury) के आकबिशप विलियम लोड (William Laud) ने अग्रेज उपासना-पद्धति (Anglican Liturgy) मे कुछ सुधार कर डाले। 23 जुलाई, 1637 को सट जाइल्स एडिनबरा के चर्च म नयी प्रार्थना पुस्तक पहली बार पढ़ी गयी। रूढ़िवाद के समर्थक तो पहले से बेहद नाराज थे। चर्च मे ही एक महिला ने पूरी ताकत से कुर्सी उठाकर आकबिशप के सिर पर दे मारी। स्कॉटलैंड की जनता ने एडिनबरा के किले की प्राचीरो के नीचे भारी संख्या मे जमा होकर राष्ट्रीय प्रतिज्ञापत्र (National Convenent) पर 17 XWNexmake- E * क्रॉमवेल द्वारा लाग पार्लियामेट का अत हस्ताक्षर किये। जिसका अर्थ था कि उन्ह इन धार्मिक सुधारो में आस्था है। कुछ लोगों ने तो जोश म भरकर अपने खून से दस्तखत किये थे। इस घटना सजिस युद्ध की शुरुआत हुई, उसने चार्ल्स को ससद बैठाने के लिए मजबूर कर दिया। सन् 1640 म पहली संसद बुलायी गयी, जो थोडे दिन ही चली। फिर सन् 1640 से सन् 1653 तक चलने वाली ससद बैठायी गयी, जिसे लाग पार्लियामेट (Long Parliament) के नाम से जाना जाता है। ससद ने राजा को मजबूर किया कि वह 'एक्ट ऑफ अटेण्डर' (Act of Attainder) को मजूरी द जिसके तहत मुख्यमत्री अल ऑफ स्ट्रैफोर्ड को मृत्यु दडदिया जाना था। ससद मे सरकार-विरोधी वक्ताआने राजशाही की धज्जिया उडा दी। दो साल बाद राजशाही ने फिर अपना रुतबा जमाना चाहा। चार्ल्स ने ससदीय नेताओ को गिरफ्तार करना चाहा पर नाकामयाब रहा। ससदीय नेताओं को लदन शहर मे पनाह मिली। इस पर चार्ल्स न लदन पर हमले का फैसला किया और वह राजधानी छाड नाटिंघम (Nottingham) मे मेना तैनात करने चला गया। यही से एक लबे गृह-युद्ध की शुरुआत हुई। उन दिना 42 वर्षीय ओलीवरॉमवेल ससद में कैम्बिज (Cambridge) की नुमाइदगी करते थे। क्रॉमवेल ने बाइबिल की मूल पवित्रता मे विश्वास करने वालो और पादरियो के कर्मकाण्डा व रूढ़िग्रस्तता का विरोध करने वालो के बीच खासी प्रतिष्ठा अर्जित कर ली थी। सन् 1641 मे राजा की अनियमितताओं और ससद के उद्देश्या को लेकर ससद में इतनी उत्तेजक बहस हुई कि सदन मे ही तलवारें खिंच गयी। रक्तपात हाते होते बचा। राजा के खिलाफ ग्राड 18 सैनिको को सबोधित करते हुए क्रॉमवेल रिमास्ट्रस (Grand Remonstrance) यानी घापणा-पर पारित हो गया। चार्ल्स ने इस अपने लिए निर्णायक चुनौती माना। उसन व्हाइट हॉल (White Hall) छोड दिया ताकि लड़ाई के लिए फौज तैयार की जा सके। क्रॉमवल ने ससद की रक्षा के लिए 500 पौण्ड दान क्येि और कैम्ब्रिज म जाकर किसानो की सेना बनायी जिसके लडाक आइरनसाइड्स (Ironsides) के नाम से जाने गये। आइरनसाइड्स ससदीय सना के हरावल म लडे। उन्होने बेमिसाल बहादुरी और अनुशासन का परिचय दिया। पेशे से किसान आलीवर क्रॉमवेल ने अपनी घुडसवार सेना का नेतत्व करने मे अद्भुत सैन्य-कुशलता दिखायी। क्रॉमवेल के सैनिक अपने को बाइबिल के सिपाही समझते। उन्ह लडाई क मैदान म ही बाइबिल द्वारा प्रदत्त सामाजिक आजादी के ऊपर लबे-लबे प्रवचन सुनाये जाते। एजहिल (Edgehill) की पहली लडाई से क्रॉमवल ने जो सबक सीखा उसने ससदीय सेना की अगली जीतो का रास्ता सोला। सन् 1644 मे लपटीनेट जनरल बन चुके क्रॉमवेल ने माटुन मूर (Marsion Moor) मैदान में प्रिंस रूपर्ट (Prince Rupert) की शाही सेना को करारी शिकस्त दी। इस मुठभेड म क्रॉमवेल ने अपने घुडसवारो के साथ निर्णायक भूमिका निभायी। उन्होन शाही फौज के पिछले हिस्स पर हमला किया और कुछ ही देर मे उसे मेदान म बिछा दिया। क्रॉमवेल का दूसरा हमला राजा की सेना के केन्द्र पर हुआ और जीत हासिल कर ली गयी। सन् 1645 में क्रॉमवल, फेयरपैक्स (Fairfax) और आइरेटन (Ireton) जैसे तीन सेनापतियो के मिले-जुले नेतत्व मे न्यू मॉडल आर्मी (New Model Army) ने जीतो का सिलसिला शुरू किया। उसने किलो, काउटियो और रेजीमटों का अपने सामने झुकने क लिए विवश कर दिया। अगले तीन साल राजा ससद और न्यू मॉडल आर्मी के बीच त्रिकाणात्मक सघर्ष के साल थे। ससदीय नेता ढुलमुल रवैया अस्तियार कर रहे थे। फौज चाहती थी कि धार्मिक सहिष्णुता का शासन हो क्योंकि इसी धार्मिक मुद्दे पर तो किसानो के बेटे अपना खून बहाने 19 30 जनवरी, 16490 चाल्र्स प्रथम की जीवन लीला समाप्त कर दी गयी। का तैयार हुए थे। ससद ने आदश दिया कि सेना भग कर दी जाये, पर सेना ने अपनी ताख्वाह की माग की और भग होनस इकार कर दिया। इस पर संसद ने क्रॉमवेल को समझौता-वार्ता के लिए भेजा। क्रॉमवेल मना का समझाने के बजाय उमक साथ हो गये। पर सेना और ससद के विवाद ने चाल्स को एक बार फिर महत्त्वपूर्ण बना दिया। सन् 1647 में स्कॉटलैंड वाला ने अपनी पनाह म छिप हुए चार्ल्स को ससदीय कमिश्नग के हवाले कर दिया और राजा ने अपनी चालें खेलनी शुरू कर दी। जनरल फेयरफैक्स की हिरासत म चार्ल्स को हर तरह की सुविधाए मिल रही थी। चार्ल्स ने पूरी कोशिश की कि वह फौज को सीधे प्रेसबिटरियस (Presbyternans) स लडा दे। वल्म (Wales) म राजा के समर्थकान विद्रोह किया पर मॉमवल न सस्ती से इम विद्रोह का दवा दिया। क्रॉमवेल के नेतत्व में फौज ने राजा के ऊपर मकद्दमा चलाने का फैसला किया। एक क्रांतिकारी न्यायाधिकरण बनाया गया जिसका नाम हाई कार्ट ऑफ जस्टिस' था। 27 जनवरी, 1649 को इस अदालत नचार्ल्स की मात के वारट पर दस्तखत कर दिये। क्रॉमवेल की फौजा ने आइरलैंड और स्कॉटलैंड म भारी जीते हासिल की। सन् 1650 आत-आत दक्षिण इग्लैंड पूरी तरह प्रॉमवल के शासन की गिरफ्त मे आ गया। पिरचार्ल्स द्वितीय ने यगावत करन की कोशिश की। चाल्र्स प्रथम की मृत्यु के बाद ससर 20 न फोज का आग्रह मानलिया था। क्रॉमवेल न इस बगावत का वर्मेस्टर (Worcester) की लड़ाई म कुचल डाला। ससद न क्रॉमवल का राजनतिक शासक ता मान लिया पर धार्मिक मसले का लकर समद और क्रॉमवल क बीच कभी नही पटी। क्रॉमवल उपासना-पद्धति की आजादी म आर ससद पुरान कर्मकाडा म विश्वास रखती थी। प्रामवल यह भी चाहत थकि सरकार चुनी हुई नागरिक सरकार हो। ससद ही कर लगाये आर कानून बनाये। कायपालिका कानूनी दायर म रहकर काम करे। मोजूदा ससद यह मव मानन का तैयार नही थी। अप्रैल, 1653 म ससद को अपन आग झकान के लिए क्रॉमवल न अचानक सदन में प्रवश किया। हाउस ऑफ कामम म क्रॉमवल न अपन विराधी सासदा का शराबी, वश्यागामी ओर भ्रष्ट करार दिया। क्रॉमवल क तिलगा न अदर घुसकर मभी का जबरन निकाल दिया। ससद के दरवाजे पर ताला लगाकर लिख दिया गया 'दिस हाउस इज द लट" (यह स्थान किराये क लिए साली है)। फिर क्रॉमवेल न अपनी ससद बनाने की नाकाम काशिश की ओर आखिर म व 'लाड प्राटक्टर ऑफ इग्लैंड हा गय। THERI KATA मई, 1660 को चार्ल्स द्विती गद्दी पर पैठा। यही स क्राति की असफलता की शुरुआत हुइ। क्रॉमवल एक नागरिक सरकार स्थापित करन क बजाय फौजी तानाशाही स्थापित कर बठ। उन्हान इस कदरकिफायती रवैया अपनाया विजनता परशान हा गयी। इग्लैंड महोन वाल परपरागत आमाद-प्रमाद बद हा गय। इन्ही परिस्थितियो मे राजशाही के ममथन की भावनाय उभरनी शुरू हुई। सन् 1658 म बीमारी स क्रॉमवल का निधन हो गया। एक बार फिर राजशाही ओर ससद की स्थापना हुइ क्याकि क्रॉमवेल क बटे रिचर्ड के पास न ता अपन पिता की क्रांतिकारी विरामत थी आर न ही राजकीय कुशलता। मई, 1660 म चार्ल्स-द्वितीय को गद्दी पर बैठाया गया। लगातार उथल-पुथल और युद्ध से जनता ऊब चुकी थी। लकिन इग्लैंड की राजनीति से जुड लागो मे अपन अधिकारो का कायम रखन की प्रत्ति भी जार पकड चुकी थी। इसी प्रवत्ति ने बाद मे पश्चिमी किस्म के लोक्तत्र को जन्म दिया।
ससदीय क्राति (1688 1689) ओ पहली बार 17वीं शताब्दी मे ससद ने राजा को उसके दैयी अधिकारों से वचित पर दिया। आश्चर्य की बात तो यह थी कि इतने बडे सामाजिक-राजनैतिक परिवर्तन मे खून की एक यूद भी नहीं यही। ऊपर से देखने म यह कैथोलिको और प्रोटेस्टेटो का झगडा भले ही दिखायी दे, पर यह धार्मिक विवाद परिवर्तनकामी गतिशीलता का मिजाज रखता था। जेम्स की सत्ता के बाद विलियम और मैरी को सिंहासन तो मिला लेकिन न तो ये कर लगा सकते थे और न ही सेना रख सकते थे। ससदीय प्राति ने बिटेन को दुनियाभर मे घ्यापार करने की दिशा मे धकेला और लोकतन की आधारशिला रखी। लीवर क्रॉमवेल की क्राति ने इग्लैंड का एक एम राम्त पर डाल दिया था जिस पर राजशाही न अधिकारो का कम हात जाना एक ऐतिहासिक आवश्यक्ता बन गयी थी। विज्ञान के आविष्कार युगप म पूर मानवीय चिंतन पर असर डाल रहे थे। स्मिक पर्नेस (Cosmic Furnace) का निर्माण करक ओद्यागिक प्राति की दिशा म एक कदम और बढ़ाया जा चुका था। हालाकि मजिल अभी दूर थी पर चैम्बिन विश्वविद्यालय म सन् 1687म एक युवक गणितज्ञ आइजक न्यूटन (Issac Newton) न अपनी पुस्तक प्रिसिपिया (Principia) का प्रकाशन किया था, जिसम गुरुत्वाकर्षण का सिद्धात पश किया गया था। भविष्य के विज्ञान और ममाज पर इस महान पुस्तक का प्रभाव पडना ही था। जाहिर था कि युराप म आदमी धार्मिक परमवाद (Religeous Absolutism) हाकर अपन अधिकारा क प्रति सजग हा रहा था। राजनैतिक रूप स युराप उस समय प्रास के राजा लूई चौदहवे (Louis XIV) की साम्राज्यवादी महत्त्वाकाक्षाआ के खिलाफ संघर्ष कर रहा था। लूई पूरे युराप या तानाशाही बनने का सपना बुन रहा था। उसने मैडम डि मटनन (Madame de Maintenon) से गुप्त विवाह भी रचा लिया था। इस पत्नी न लूईमा थोलिका ये . 22 ६ समर्थन की प्ररणा दी। प्रोटेस्टटा की ता जैस आफत ही आ गयी। उन्हें जबरन केथालिक बनाया जान लगा। जैसे ही लूई का लगा कि सभी प्रोटेस्टट कैथालिक बनाये जा चुके हैं उसन नाटस की राजाज्ञा (Cdict of Nintes) का दावारा लागू कर दिया। बचे हुए प्राटस्टटा का केथालिक बनने के लिए कवल 15 दिन दिये गये। करीब दो लाख प्रोटस्टट अपने धम की आन पर अपना सब कुछ छाडकर चल दिय। पिलिग्रिम फादर्स के नाम से विख्यात इन शरणाथिया का इग्लैंड यूनाइटेड प्रोविंस ओर ब्रेडनबर्ग म पनाह मिली। इन चित शरणार्थियान हर जगह कैथालिक्वाद क प्रति नफरत फलायी जिसस लागा के दिमागा म उथल-पुथल मच गयी और व सरकार कसिलाफ विद्राह की बात करन लग। इमी पृष्ठभूमि म इग्लेंड म समदीय क्राति का जन्म हआ। क्रॉमवल की मृत्यु क बाद गद्दी पर बठ चाल्स द्वितीय का निधन 6 फरवरी 1685 का हुआ ओर ड्यूक आफ यार्क जम्स-द्वितीय का सिंहासन मिला। जम्म का अपनी गद्दी सदढ़ रसन क लिए यद्ध लडना पडा। उसक भतीज ड्यूक ऑफ मनमाउथ (Dukt of Monmouth) क विद्रोह का दयान क लिए सजमूर (Sedgemoor) की लडाई हुइ जिसम हारकर मनमाउथ भागा पर मत्यु-दड स नहीं बच पाया। उसक समथका का भी मस्य न्यायाधीश जफरीज SamPoskin दो साख प्रोटेस्टेट अपना सब कुछ छोडकर चल दिये। (Jeffreys) न कडी सजाए दी। ये मुकदम बहद बदनाम हुए। जफरीज पहले भी अपने रवैय के कारण एक क्रूर जज क रूपम कुख्यात हा चुका था। इसी तरह क सलाहकार और अधिकारिया न जम्स द्वितीय का उद्दण्ड ओर जिद्दी बना दिया। जेम्स के अदर कइ गुण भी थे। वह एक बेहतरीन नाविक था पर राजकाज क मामल म बहद कच्चा था। तिस पर उसके ऊपर कैथालिकवाद का भूत सवार था। पाप 18ll 23 जेम्स द्वितीय या राज्यारोहण समारोह की राय के खिलाफ उसन कदम-कदम पर अपन कट्टर धार्मिक विश्वास का प्राटस्टट जनता पर थोपने की कोशिश की। प्राटस्टट शरणाथिया ने पहले ही कैथालिस्वाद के प्रति गुस्म का माहान बना रखा था। इौलए व्हाइट हॉलम सुल आम प्राथना सभा हान लगी आर जगह-जगह जिमुआइटम (Jesults) दिसायी दने लग। स्पॉटलैंड म ता आर भी सराव स्थिति थी। क्रॉमवर के जमाने में प्रमुखता पाय प्यूरिटना (Purltons) को यातनाय दी जान लगी। इस तरह राजशाही की ज्यातिया वाघडा भरन लगा। अप्रल 1687 म राजा न दडमाचन की घोषणा (Declaration of indulgence) की। इसका मक्मद था कैयानिका और प्राटस्टटाका उपासना की आजादी दनाजिम्म चाहता था कि प्राटस्टट गीलक्न चच से अलग हा जाय। प्राटम्टट शायद एक यार मनुष्ट भी हा जात अगर उन्ह विश्वास होता कि जेम्म अपनी लडकी मैरी का उत्तराधिकारी बनायगा। मैरी का विवाह विलियम ऑफ आरज (William of Orange) में हुआ था। विलियम मार युगप म पाटस्टेंट क नेता के रूप में मशहूर था। वह जम म डच था और प्राम पलुई चौदहव द्वारा मताये जानम बेहद नाराज था। लुई और विलियम पी शत्रुता उस जमाने म राजनीति के हर जानकार वी जुबान पर थी। जून 1688 म जम्म की दूसरी पत्नी न एवं पुत्र को जम दिया जिस पौरन 24 विलियम-ततीय जेफरीज की गिरफ्तारी कैथालिक धम म दीक्षित कर दिया गया। प्रोटस्टट इस नयी घटना मे काफी चोंक गये। उह लगा कि अब प्राटेस्टट विलियम की पत्नी मेरी इग्लेंड की गद्दी की उत्तराधिकारी नही बन पायगी। साथ म यह अफवाह भी फैल गयी कि वह बच्चा असल म रानी कगर्भस नही जमा कि केथालिको की साजिश का नतीजा है। लदनवामिया ने अपनी इन भावनाआ का प्रदशन मात विशपा की रिहाइ का उत्सव मना कर क्यिा। वविशप दण्डमाचन की घापणा का विराध करन क लिए गिरफ्तार हए थ। क्राति की घडी नजदीक आ पहुची। प्राटेस्टटो ने मैरी और विलियम को अपना नतत्व करन क लिए आरित क्यिा। विलियम प्रोटम्टटवाद आर स्वतनता की हिफाजत करन का उद्देश्य लेकर अग्रजो की धरती की तरफ चला। राजा की तरफ से उसे रोकने और पकड़न के लिए जॉन चचिल (John Churchill) को भेजा गया। 3 नववर 1688 को टोरवे (Torbay) म विलियम न इग्लैंड में कदम रखा ओर चर्चिल की फौज का सामना किया। पर चचिल का विलियम म भविष्य का सम्राट दिसायी द रहा था। उसने अपनी फाज विलियम के नतत्व म दे दी। जम्स का लगा कि उसके साथ अब काई नही रहा। उसन पलायन क्यिा और फ्रास म शरण ली। लूई चौदहव न अपन शत्रुविलियम क शत्रु का हाथो हाथ लिया। विलियम और मरी को नय राजा और रानी क रूप म स्वीकार कर लिया गया। विलियम न जम्म चर्चिल को उसकी सेवाआ क लिए ड्यूक ऑफ मार्लबरा बनाया। यह एक स्वर्णिम रक्तहीन क्रांति थी। इसमे कोई सून-पराया नहीं हुआ था। जेम्स क जज जफरीज जेसे मलाहकारा ने भागने की कोशिश की पर उन्ह पकड लिया गया। इस सब के बावजूद ससद का जम्स की उद्दडताओ की कडवी याद भूली नही थी। उसन नय राजा-रानी पर सौ फीसदी विश्वास नहीं किया। उसने विलियम और मैरी का 25 -- Thor विशपो को अप्रैल, 1688 को टॉवर पर लाया जा रहा है। - अधिकारी का विधयक (Bill of Rights) स्वीकार करन पर मजबूर किया। इस विधयक के अनुसार सत्ता म मसद का हिस्सा निर्विवाद हा गया। राजा की शक्तिया आनशिक देवी अधिकार की दन नही रह गयी बल्कि वह राष्ट की इच्छा के अनकूल हान लगी। इस नये कानून से राजा ससद कनियत्रण म हा गया। अब काई केथोलिक शासन नही कर सस्ता था। राजा स कर लगान का अधिकार भी छीन लिया गया था और उस निजी सना रखन की आज्ञा भी नही थी। सन् 1689 म सहिष्णुता कानून (Toleration Act) बना जिसने प्राटस्टटा काता उपासना की स्वतत्रता दी पर कैथालिका का नहीं। इस तरह म इग्लैंड का 50 वर्षीय धामिक विवाद सत्म हुआ। मैरी की सन् 1695 ममत्युहा गयी। विलियमता मूलत डच था और उसकी दिलचस्पी लूई चौदहव स निपटने म ज्यादा थी। इसलिए उसका ध्यान हमेशा युरोप क दूसर हिस्सा पर लगा रहा। नय कानूना की ताकत लकर इग्लैंड ने सवैधानिक शासन का पहला अनुभव लिया। सन् 1702 में मैरी की बहन एन (Ann) ने गद्दी सभाली। सन् 1714 म उसके निधन क बाद जॉर्ज-प्रथम राजा बना। उस समय तक इग्लैंड और स्कॉटलैंड यूनाइटड किंगडम ऑफ ग्रट ब्रिटेन का रूप ल चुक थे। सन् 1718 क बाट हाउस ऑफ कामस (विटिश ससद) का हर सातमाल बाद चुनाव हान लगा। ससद तत्कालीन भूपतिया के हिता का प्रतिनिधित्व करती थी क्यापि यही तबका शासक वर्ग का भी निर्माण करता था। ससदीय क्रांति क परिपक्व हान क साथ-साथ विटन न बड पैमान पर व्यापारिक और समुद्री गतिविधिया शुरू की। उसके व्यापारियो न जमकर मुनाफा कमाया। यूनाइटड प्राविसज की तकलीफान उनक फायदा म और बढ़ातरी की। ब्रिटन व उपनिवशा कमाल का आयात और फिर उसका निर्यात व्यापारिया क लिए जारदार धधा साबित हुआ। इम मुनाफ स ब्रिटिश सेती पर उद्याग क 26 विलियम और मैरी महारानी एन क्षन म हुई प्रगति म पूजी निवेश किया जा सका। इसी शताब्दी म व तकनीकी साज हुइ, जा बाद की औद्यागिक क्रांति म इस्तमाल की गयी। सन् 1694 म बैंक ऑफ इग्लेंड की स्थापना हुइ,जिसन सरकारी ऋण का एक स्थिर चरित्र प्रदान किया और कई तरह की आर्थिक गतिविधिया का निर्यात करन में प्रमुख भूमिका निभायी। सन् 1666 के भयानक अग्निकाड म भस्म हुए लदन का पत्थरा से निर्माण किया जा चुका था। नये युग मे उसका क्षेत्रफल परिस स दोगुना था और आबादी पूरी साढ़े सात लाख थी। सट पॉल का भव्य गिरजा इस शहर और ब्रिटिश साम्राज्य के धन-धान्य और अधिकार का प्रतीक लगता था। 17वी शताब्दी के इन आखिरी वर्षों ने ब्रिटिश साम्राज्य की जड मजबूत की। राजशाही के अधिकारी के खात्मे ने एक नयी मिसाल का जन्म दिया। इसकी अभिव्यक्ति अगली शताब्दी में हुई। 18वी शताब्दी दो महान घटनाआ क लिए तैयार हाने लगी। य थी अमरीकी स्वतनता का युद्ध और फ्राम की पूजीवादी क्राति। ।
वा थी। मशहूर था कि उनके साम्राज्य मे कभी भी सूर्य अस्त नहीं हाता। अमरीकी क्राति (1763 1782) ब्रिटिश साम्राज्य को पहली गभीर चुनौती उत्तरी अमरीका के 13 उपनिवेशो मे बसे अग्रेज नस्ल के अमरीकियो ने ही दी। उहोने पिटिश ससद द्वारा अपने ऊपर कर लगाने के अधिकार को नामजूर कर दिया। गॉर्ज पाशिंगटन के नेतृत्व में अमरीका ने अपनी आजादी की घोषणा की और टामस जेफर्सन ने आजादी का घोषणा-पत्र लिखा। सन् 1775 से सन् 1781 तक चासे युद्ध में फ्रास और स्पेन की मदद से मजबूत हुए अमरीकी देश-भक्तो ने 45,000मी ब्रिटिश फौज को परास्त कर दिया। यह उपनिवेशवाद पर पड़ने वाली पहली चोट और नये युग की पदचाप थी। 'सदी के उत्तरार्द्ध मे विटेन की ताकत अपनी चरम सीमा पर पहुचने लगी उत्तरी अमरीका म ही उसके 13 उपनिवेश थे। उस समय जॉर्ज-तृतीय क पास राजगद्दी थी। अपने ही साम्राज्य के सूर्य स चकाचौंध अग्रेज यह नहीं देख पाये कि अमरीकी उपनिवशो की अदरूनी ताकत बढ़ती जा रही है और अब वे ज्यादा दिनों तक ब्रिटिश सिंहासन के अधीन नहीं रह सकेगे। इन उपनिवशाम रहन वाले भी नस्ल से अग्रज ही थे लेकिन वे उत्तरी अमरीका की आबो-हवाम छ पीढ़ियां गुजार चुके थे। अब उनम अपन अग्रेज होने के बजाय अमरीची हान का अभिमान पैदा हाना शुरू हा चका था। यह सास्कृतिक अलगाव इस तथ्य से और भी बढ़ जाता था कि इन उपनिवशा पर नियत्रण करने वाला 'हाउस ऑफ कामस' तीन हजार मील दूर लदन म स्थित था। अमरीकी अग्रेजा के हिसाब से उनक घरेलू मामल उनकी अपनी सभाआ य जरिय सुलझने चाहिए था व उनमें ब्रिटिशा की टाग अडवाना पसद नहीं करत या व चाहत थे विविटिश मरवार विदश नीति और समुद्री व्यापार तक ही अपन-आपको मीमित रस। अमरीविया की ये ममाए धीरे धीर तास्तवर हाती जा रही थी। मन् 17617634 पीच 18वीं 28 - अमरीकी पौजा के कमाडर जॉर्ज याशिगटन अल ऑफ ब्यूट (Earl of Bute) के मंत्रिमडल ने ओर उसक उत्तराधिकारी जॉर्ज ग्रनविल (George Grenville) की प्रधानता वाली सरकार न उत्तरी अमरीका म ब्रिटिश फौजा की सख्या बढ़ा दी। ब्रिटन ने अमरीकी अग्रजा से कहा कि व पश्चिम की तरफ पैर न फैलाय। रड इडियना के लिए बड़-बड़ इलाक आरक्षित कर दिये गय। इससे अमरीकिया का माथा ठनका। उन्हाने इस अपनी बढ़ती हुई आजादी के रास्त मे जानबूझकर डाला गया रोडा समझा। ब्रिटेन का दूसरा कदम भी अमरीकिया का नाराज करने वाला सावित हुआ। उनका समुद्री व्यापार नियंत्रित कर दिया गया और उन पर ससद द्वारा कर लगा दिय गय। सन् 1764 का चीनी कानून (Sugar Act) जिसम कच्ची शक्कर पर प्रति गेलन 3 पस शुल्क लगता था और सन् 1765 का स्टाम्प कानून अमरीक्यिा का एक आख न भाया। अमरीकियो के लिए अपन सभी कानूनी दस्तावेजो और दूसर कागजा पर कर के रूप में स्टाम्प लगाना मजबूरी बन गयीं। अमरीकिया ने विरोध म आवाज उठायी और कहा कि जब हाउस ऑफ कामस'म हमारा प्रतिनिधित्व नहीं होता तो ससद हम पर कर कैसे लगा सकती है? नारा लगा 'नो रिप्रजटेशन-नो टैक्सेशन"। जगह-जगह सभाए ओर जलमे हान लगे, जिनमे स्टाम्प 29
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-
UNITED STATES
during the
REVOLUTION
प्रतिकेरिनों में
अमरानी
भूगोमीप
पानून बारम मन की माग की जाती थी। अमरीयाभज गय स्टाम्प नप गया और
गवारोगजमानणारानियालिया गया। पर अमरीशराम गवाना
पसिनार दाभहर उठ। मान पर दयाय न नि अमरियानाटयमान
না যম মালা। তিনি মারা যা লাল বা ঘি মাখা।
ग्निमविगगन म भाापयरतग गया। उगम्यागानन बम
मनासा माग्न मम मरि पाम यग्य और अगन मानस
माननिगमरासिय पर सागर
रामान मामrन पानी मामन अमीमा
नानपानमामिन पदमा
Smrit पान-नत्र
marrts Firmirfrnturn.
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भE स्टेम्प एक्ट का विरोध जा उपनिवश इस आदालन में शामिल नहीं हुए, उनका हुक्का-पानी बद कर दन की धमकी दी गयी। ब्रिटन को य कर वापस लेने पडे। केवल समद का अधिकार जतान क मकसद सचाय पर कर लगा रह गया। तभी सन् 1768 म लाल कुर्ती क ब्रिटिश सनिक बाम्टन (Boston) में नागरिकासे उलझ गय। कस्टम कमिश्नरा को बचाने क चक्कर म सनिका ने पाच नागरिका का गाली से उड़ा दिया। अग्रजा न मामल के नाजुकपन का अहसास करके सना फारन वापस बुला ली पर इस घटना स मभी कॉलानियों में बिटिश विराधी भावनाए फेल गयी। सन् 1773 तक छिट-पुट घटनाओ मे इस आकाश की अभिव्यक्ति हाती रही। यह वर्ष प्रधानमत्री लार्ड नॉर्थ (Lord North) के चाय कानून का था, जिसके चलते ईस्ट इंडिया कपनी को अपनी चाय पर लगने वाले भारी कर से मुक्ति मिल गयी और वह उस सीधे अमरीका मे बेचने लगी। ब्रिटिश चाय एक तरह से अमरीकियो के लिए सस्ती हा गयी थी। पर अमरीकिया न महगी डच चाय खरीदना पसद क्यिा, क्योंकि विटिश चाय खरीदने का मतलब हाता ससद द्वारा अपन ऊपर कर लगान के अधिकार को मान्यता देना। अमरीकिया ने इस्ट इंडिया कपनी की चाय बरबाद करना शुरू कर दी। सन् 1773 के दिसबर म तीन जहाजो म भरी चाय बोस्टन के बदरगाह मखराब हाने क लिए छाडदी गयी। यह घटना बास्टन टी-पार्टी के नाम स मशहूर है। लदन म इस कार्रवाई के खिलाफ नाराजगी पैदा हुई। नार्थ निमडल ने तय किया कि बोस्टन और मेसाचुसट्स को इसक लिए सबक सिखाया जाय। चार दमनकारी कानून पास किये गये। पाचवा कानून क्युवक कानून (Quebec Act) था। अमरीकिया ने इन पाचो कानूना का महन न कर सकन लायक करार दिया। कानून पर अमल क लिए लाल कुर्ती के सनिक बोस्टन मे भेजे गय पर मसाचुसेट्स मसन् 1774 क हेमत म शहर क 31 urAVTAR योस्टन टी पार्टी शीपक से छपा प्रसिद्ध व्यग्य चित्र बाहर एक क्रांतिकारी मरकार की स्थापना की गयी। फाज की नयाग हान लगी। ब्रिटिश गवनर यामम वज ( Thomas Cg) का लगा कि उसकी पाज इम नगावत म नहीं निपट पायगी इनिरा उमन नदन म आर पाज की माग की। मन 1774मफ्लिाडल्फिया म पहली काटीनटन काग्रम हइ जिमम 12 उपनिवशान अपन प्रतिनिधि भज। जाज वाशिगटन जान एडम्म समअल डम्म आर पाटकहनरी जम प्राताप्ठत अमरीकी नता टम काग्रम म शामिल हए। इम काग्रमन प्रण किया कि अगरीटिशमनिकानवाम्टन म आग बढकर ममाचमटम पर हमना क्यिा ता वहा क भाइया की हर कीमत पर रक्षा की जायगी। विटन म कहा गया कि वह मन 1763 म बनाय गय हर कानून का वापस ल क्याकि य मानवता प्राकृतिक अधिकार के विगधी ह। काग्रम न एक एमामियशन बनायी जाविटिश चीजा का आयात आर उपभाग राक्नकाएक जरिया थी। यह भी तय पिया गया कि अगर विटन न मानता अमरीकी चावल का छाडकर हर चीज निर्यात पर भी पावदी लगा दी जाय। जिस जिम न इन पादिया का विराध क्यिा उस अमरीकी आजादी कनय प्रवक्ताआक गम्स का सामना करना पड़ा। हर जगह अमरीकी फाज परड करती हइदिसन लगी। मन् 1775 म ब्रिटन न अपनी प्रभमत्ता जवरन स्थापित करन की शरआत की। जनरल गज का आदश दिय गय। 18 अप्रल 1775 का गजबदस्त वाम्टन मक्काड (Concord) गय ताकि अमरीकी फाज की सप्लाइका नष्ट कर मका लक्मीग्टन (Lexington) म पहली लडाइ हुई। अग्रज फाज का बास्टन तक पीछ हटना पड़ा। इस तरह अमरीकी आजादी क लिए यद्ध की शुरुआत हई। विटन जुलाइ 1776 तक अपनी पाज अमरीका पहुचा पाया। तब तक काटीनटर 32 May LALI बोस्टन मे हआ हत्याकाड काग्रस न जाज वाशिगटा का अमरीकी पोज का कमाडर नियक्त कर दिया था। अमरीकिया न बाम्टन म अग्रजा का भगा दिया आर उनक ममथका व प्रतिरोध का कुचल डाला। 2 जुलाइ 1776 का काटीनटल काग्रम न आजादी का दावा पश क्यिा। दा दिन बाद टामस जैफसन द्वारा लिसित म्वतनता का घाषणा-पत्र जारी क्यिा गया। इस घाषणा पत्र म मानवता का आतक जार क्शामन कसिनाफ विद्राह करन का अधिकार दिया गया था। इमी क साथ मभी उपनिवशा म ब्रिटिश सरकार बैठ गयी आर अमरीकी राज्या का पहना रूप मामन आया। विटन न इम क्राति का क्चलन लिए 45000 सनिक भज। मन् 1776 क तम छ महीना मनिटन की फाज न न्यूयाक स कनाडा तक विदाहिया की धज्जिया उग दी। जनरल लियम हाव क नतत्व म वाशिंगटन की फाज का न्यूयाक म डलावयर नदी तक सदड दिया गया। पर इमी क बाद अमरीक्ना की जीत का मिलसिला शुरू हुआ। वाशिंगटन न माल सत्म हात हात एक बड़ी जीत हासिल की। नय माल मबिटिश हमला फिर शम् हुआ पर तब तक अमरीक्ना का अग्रजा के दुश्मन फ्राम म थियार आर पसा मिलना शुरू हा गया था। जनरल हाव न फिनाडाल्फया पर ता कब्जा कर लिया पर वाशिंगटन की फाजा का नष्ट नहीं करमक। अमरीकी जनरल हारानियाक्नतत्व मक 33 19 अक्तूपर 1781 को याशिगटन के समक्ष आत्मसमरण करते भाई मार्नयासिस - पोजन रिटिश जनरल जॉन बरगान की पाजपाकरारी शिकस्त दी।यह पहलाविर्वादश आत्मसमपण बा। इस घटना क माद मनमरीकना की ताकतवहत बढ़ गयी। पाम आर स्पन विटन में मात साल क यद्ध की हार का बदला लनका माया तलाश रह थ। उहान बिना माग सहायता ली। फरवरी 1779मप्रास न अमरीकी आजादी कामा यताही और सयक्त राज्य जमरीकामकाजी मोध कर ली। इसमे विटन आर प्रास कधीच पद्ध शरू हो गया। मन 1779 म स्पन न अमरीकी युद्ध म हस्तक्षर किया। विटन का धीर-धीर कई युगपीय देशा मे झगडा शरू हो गया। अब पूरा यराप या ता बिटन का दश्मन था या तटम्य। यह पूरी स्थिति अमरीकी क्राति की सफलता के हक म जाती थी। वह अतर्राष्ट्रीय संघप में - - GK 31 Tnt Barbour BW PET LOYLLISTA Sorenamed tra Exordenerseman ALL INTREPID ABLE BODIED HEROES 17Romwingolar rasurkmo Candy Lanand Coast ano paint start Utarparroso Manal Contoh, bare now Box only sa Opportesy of riding het Sort by Hinbngmediagnosrdinator oolought bundCommerrmeabrandarogathapolite Acampin' wktar by koond to Yano de prateat Ratchan Amma Stud Spasited Falom the one who ! nibert the End of the # Luwarihshee GTON COUNT, DE, SR455L "13- N Anam--- Hemama.. HALConths CIRREARSA -ARMA---empire Ram4 Menit ---- Music - ----- --- 34 Ruinthet कास्टिट्यूशनल कनवेशन की अध्यक्षता करते हुए याशिंगटन बदल गयी। उसक लिए इंग्लिश चनल जिब्राल्टर आर भू-मध्य सागर सलकर अफ्री- के पश्चिमी तट, हिंद महासागर और वस्ट इंडीज मे भी लडाई लड़ी जाने लगी। इस परिस्थिति सपरशान होकर ब्रिटनन एक आयाग भेजकर अमरीका को विटि साम्राज्य के तहत म्वायत्तता दने का प्रस्ताव रखा पर अव देर हा चकी थी। अमरी- कापस न इस पर गोर तक नहीं किया। ब्रिटिश सनापति क्लिटन की पाज न्यूयार्क मज हो रही थी और वाशिंगटन की फाज चाकन्नी रहकर इस गतिविधि का परस रही थं क्लिटन न दक्षिणी राज्या पर हमला किया, जहा ब्रिटिश ममथक टारी ज्यादा थ। पर व क अमरीकिया न छापामार युद्ध शुरू कर दिया। ब्रिटिश सनापति लॉड कानवालिस द्वा नॉथ करालिना पर कब्जा करन की काशिश जनरल ग्रीन न नाकामयाब कर दी। इस बाद दूभर हमले म ग्रीन न ब्रिटिश फाजा का दक्षिण म बहुत बुरी तरह हरा दिया वर्जीनिया मकानवालिस ने 7000 की फोज जमाकर याक टाउन म अड्डा जमा पर तभी प्रास न वाशिंगटन की मदद क लिए एडमिरल डी ग्रामक नतत्व म अटलाटिक अपना वडा भज दिया। वड ने ब्रिटिश बड का परास्त करक कार्नवालिस की सप्ल लाइन काट दी। वाशिंगटन ने अपनी ओर प्रासीमीफाज कसायकानवालिस पर दक्षिण जमीनी हमला किया। अब 7000 ब्रिटिश सनिका क मुकाबल वाशिंगटन क पास हजार फौजी थे। मजबूरी म 19 अक्तूबर 1781 का कानवालिम न हथियार डाल दिय सन् 1782 म ब्रिटन म नाथ सरकार इसी पराजय क कारण गिर गयी आर उ सयुक्त राज्य अमरीका की आजादी का स्वीकार करना पडा। ब्रिटन की मारी दुनिया मय जगह पराजय हुइ। हर जगह उपनिवशवाद को धक्का लगा। लाप्रिय मरकारा = स्थापना हुई। अमरीकी स्वतत्रता क घापणा-पत्र न कई मुक्ति-युद्धा का प्ररणा दी। . 35 फ्रासीसी क्राति (1789 1794) . प्रासीसी क्राति ने प्रगतिशीलता और पैचारिक उत्थान म अमरीकी आजादी की लडाई को भी पीछे छोड़ दिया। 'समानता, आजादी और भाईचारे' के नारे पहली बार पूजीयादी प्रतियोगिता बाजार पर आधारित समाज और 'मागय आपूर्ति की बीज रूप मे रचना की। राजशाही पत्म कर दी गयी। आम जनता की हुकूमत स्थापित हुई। हालाकि यह क्राति पाच साल बाद असफल हो गयी और नेपोलियन बोनापार्ट के युग की शुरुआत हुई पर इसके भ्रूण में भविष्य का पूजीवादी समाज मौजूद था। के भी था। युराप आर दुनिया क इतिहाम को एक निर्णायक माड दन वाली सामतवाद विराधी पूजीवादी क्राति का विगुल ता अभी नहीं बजा पर उमक लिए परिस्थितिया तयार हा रही थी। युराप क राजवश अपन अस्तित्व के मकट से गुजर रह था लूइ सालहव ने सन् 1773 म गद्दी मभाली और मा 1788 तक उसक कुशासन ने सरकारी खजाना साली कर दिया। सन 1789 तक आत-आत प्रासीसी एस्टट जनरल (Estate General) के तीना प्रतिनिधि तवाम अलग-अलग कारणाम असताप पनपन लगा। य नीन तब थ-कुलीन वग (Nobles) पुराहित वग (Clergs) आर थड एस्टट यानी मामा य जनना। क्लीना का एतराज था कि राजा क मनीगण मनमानी कर रह है। पुरानी प्रातीय आजादी के वकील सत्ताक अत्यधिक बद्रीकरण क खिलाफया विटन की संसदीय प्राति और अमरीकी आजादी क युद्ध म प्रभावित लाग थामम पाइन (Thomas Paint) मनुष्य क अधिकारा मवधी विचाराम वह प्रभावित थे। आम आदमी के प्रतिनिधि इस बात से नागज थकिसजाना पाली हानका माराबाय कराकस्पमक्सिाना ककधा पर डाल दिया गया है। सन् 1786 का ओद्यागिक सकट सर 1787 और सन् 1788 म हुई 36 Bhartons: ARTHOUTTAR BETEOPannadi Ouruneursement Si te madhe dons Fuc Puran AMDApedios राब्सपियरे खराब फमलो के साथ मिलकर आर्थिक तबाही ढा रहा था। दाम बढत चल जा रह थ ओर अकाल का डर जनमानस को सता रहा था। एसे विकट समय में लूई सालहव और मारिया थेरसा (Maria Theresa) की वटी मेरी एण्टोइनिट (Marne Antoinette) न अपन शासन म सुधार करन की तरफ बिलकल ध्यान नही दिया। राजा का चाहिए था कि वह जनता की तकलीफा का दखत हुए सुविधा-मपन्न कुलीन तबक का नियत्रण म रखता। पर एसा नही किया गया। बढत हुए आर्थिक सकट ने राजा को करीब डढ़ सो वर्ष बाद वसाई (Versailles) एस्टट जनरल बुलान पर मजबूर कर दिया। अपनी प्रजा के तीना तवका से राजा यह पूछना चाहता था कि राप्ट पर चढ़े कर्जे को कैस उतारा जाये? अथ-व्यवस्था कैस दुरुस्त की जाय? इसस पहल सन् 1614 म एस्टेट जनरल की बैठक हुई थी। उस समय म अबतक थड एस्टट के प्रतिनिधि दागुने हो चुके थे। एस्टेट जनरल के 1 100 प्रिि धया म स आध थड एस्टेट के ही थे। कई वकील ओर बुद्धिजीवी एस्टेट जनरल म थड एस्टेट के प्रतिनिधि बन कर गय। इनमे रामपियरे (Robespierre), वालनी (Volney) आर खगालविद् वली (Bailly) क नाम प्रमुख थे। कुलीना के प्रतिनिधिया क रूप म ड्यूक आफ आलियस (Duke of Orleans) और मारस्विस दि लेफायत (Marquis de Lafayette) थे। लेफायत अमरीका की आजादी के नायक जॉर्ज वाशिंगटन क दास्त थ आर उहान उम लडाइम हिस्सा भी लिया था। पुराहित वर्ग के प्रतिनिधि थ काडिनल राहन (Cardinal Rohan), हेनरी ग्रिगाइर (Henry Grigor) आर चाल्म मारिम दि टालीरण्ड (Charles Maurice de Tollegrand)! इसक अलावा थर्ड एस्टट के पास मारक्विसदि 37 न मारपिवस दि मिराव्यु मिगव्य (Marquis de Mirabeau) ओर एब्बी सीएस (Abbe Sreyes) जैस दानता भी य जा मनत ता कलीन वगय पर आम लागा क अधिकारा की हिमायत करत य। मीएम न ता एस्टट जनरल की बठक म पहल एक पर्चा भी प्रकाशित किया था जिमम व्हाट इज बड एस्टट। शीपक क तहत जनता क अधिकागका बलदक्यिा गया था। इम पर्च न मीएम की लाकाप्रयता काफी बढ़ा दी थी। 5 मई 1789 का गम्टट जनरल वीवठक शरू हाइ। दामहीन तक यह बहम चलती रही कि फ्मल बहमत क आधार पर हागया नहीं? दमरातरीया सविधा मपान तवयाक हक म जाता था। 17 जून का थड एम्टट वालान कहा कि व प्रामक 96 प्रतिशत लागाय प्रातनिधि हैं इाला वही गप्ठीय अमैंबली हे आर वजा टक्स मानग वही कानूनी हागा। थड एम्टट या ताक्त दसकर परहित वग क वहत म प्रतिनिधि उसम आ मिला यह दसकर राजा न मरनी की आर थड एम्टट वाला का मदन म निकाल दिया। थड एम्टट क डिप्टी पाम य निम काट म बैठक करन पहुच गय। निम काट म ही उन जन प्रतिानाधया न शपथ ली विजय तयव प्रामकानया विधान नहीददत तब तक अपनी बैटक भग नही करग। 20 जन का यह एतिहासिक घटना हइ। तीनदिन याद राजा न उह चतावनी भजी आर पौरन अपनी बैठक सत्म करन का कहा। थड एम्टट क मिराव्य न अपना प्रमिद उत्तर दिया कि मगीन कीनार पर ही उह हटाया जा सकता है। राजा नशनर अवनी म डर गया। उमन वमाइम मनिक जमा करन शा कर दिय। उधर परिम म जनता व अदर कनीना कसिलाप भावनाए भडक रही थी। गजा नशनन अमेवनी म मविधाभागी वर्ग अपनी मुविधाए छिन जान मै और यह एण्टट 38 ।
कुलीना क हमल क अदशा स डर हुए थे। परिस बराजगारा और शरणार्थिया स बजबजा रहा था। लागा का यकीन हा चला था कि कुलीन वर्ग उनकखिलाफ साजिश कर रहा है। इस माहाल में पूर दश म दग भडक उठ। इन पर काबू पा सकन का इलजाम लगाकर राजा न अपन प्रधानमनी नकर (Necker) को बर्खास्त कर दिया। 14 जुलाई का कलीन वग म अपनी रक्षा करन क लिए हथियार तलाशती भीड न क्लेिनुमा जल बस्टीले (Bastullc) म घुसन की काशिश की। जल के गवर्नर लाउन (Launay) न सैनिका में भीड पर गालिया चलवायी। कई नागरिक मारे गय। इसक बाद ता परिसवासिया का गम्मा भडक उठा आर उन्हान ताप घमीटकर मार्च पर लगा दी। वस्टील पर हमला बाल दिया। गवनर का हाथयार डालन पड। भीड उस घसीटकर लायी और उसका सिर धड स अलग कर दिया। धम्टील मक्वल मात कदी थ पर उसका पतन क्राति की प्रतीकात्मक शुरआत बन गया। परिस क ही नमन पर प्रास क दहाता म भी मघपछिड गया। नयी म्युनिस्पलिटीज वन गयी। ग्रामीणा नथियार उठा लिय। राजा न घबराकर नकर का दावारा प्रधानमनी बनाया आर परिमकी प्राति का मायता ददी। पर राजाक अधिकार और मत्ता तकरीबन सत्म हा चुक् थ। असेंबली क कदमा का क्लीना आर पादरिया न भी समर्थन किया। नय कानूना न सामती सुविधाय, भूदान प्रथा आर मामता पर कर न लगान की परपरा का खत्म कर दिया। पर राजशाही समथक एक गुट का स्याल था कि राजा क बिना पूर दश म अराजक्ता फल जायगी। इसी बीच पाच-छह हजार लागान जिनम महिलाए ज्यादा थी वारमा के महल पर कब्जा कर लिया। फिर असवली परिम म वेठी। क्राति पूरी हा चुकी थी। वैस्टील के कारागार पर भीडमा हमला 39 Don ShoVLON स्टेट जनरल की बैठक, जिसे नेशनल असेंबली मे बदल दिया गया। गाव गाव म 'कम्यून बन गय जिहान एक दूसरे स मिलकर 'फडरेशन बना डाली। "भाईचारा समानता ओर आजादी का नारा हर एक की जुबान पर था। राइन नी के पुल पर तिरगा झण्डा लगा दिया गया, जिस पर लिखा था-'यहा मम्वतन धरती की शुरुआत हाती है।' नेशनल असेंबली ने नया मंविधान बनाया और लूई मालहव का क्सम खानी पड़ी कि वह इसी मंविधान का मानगा। सन् 1790 के इस दिास मास पहली बार एक राष्ट्र के रूप में उभरा। उधर असेंबली म खुली बहस का माहौल था। एक स एक धुरधर वक्ता एक दूसरे क विचारा को काटत हुए अपने तर्क रसत थे। इसी दौरान दक्षिण पथी और वामपंथी जैसी अभिव्यक्तियो को पहली बार इस्तेमाल हआ। जिनके जरिए आज तक राजनीति ममझी जाती है। क्रांति का यह दौर कापी अव्यवस्था और भयानक सकट का था। राजान देश छाहकर भागने की काशिश कीपर पकड लिया गया। असेंबली ने पहले उसे निलंबित किया पर फिर माफ करक गद्दी पर बैठा दिया। फ्रांसीमी संविधान की प्रस्तावना डिक्रशन ऑफ दि राइट्स ऑफ मैन एण्ड दि सिटीजन अमरीकी स्वतत्रता के 40 टेनिस कोर्ट में नेशनल असैबली की बैठक धापणा-पत्र स भी जाग का कदम था। यह प्रस्तावना कहती थी कि जन्म स सभी बरावर हैं। सामाजिक विभिन्नताए तो सामुदायिक उपयाग की दष्टि स बनायी गयी हैं। कानून सब के लिए एक ह। साचन बालने ओर व्यक्ति की स्वतत्रता मबसे अहम है। समस्त प्रभुसता राष्ट म निहित है और कानून सभी की मिली-जुली इच्छा की अभिव्यक्ति है। इस सविधान न विधायिका, कार्यपालिका ओर न्यायपालिका का अलग-अलग कर दिया। फ्रास ने ब्रिटिश आर अमरीका क ससदीय तजुर्बे पर चलने स इकार कर दिया। फ्रास म अधिकारा को मलित करन क लिए कर्तव्या का प्रावधान नही किया गया था। 'फ्रास का राजा' एक प्रभुसत्ता सपन राष्ट का कवल 'प्रथम सेवक रह गया था। पूर फ्रास को 83 भागो म वाट दिया गया। उनक एतिहामिक नामो की जगह नदिया आर पवता के आधार पर नया नामकरण किया गया। अथ-व्यवस्था इस तरह बनायी गयी कि बाजार पर आधारित ममाज का जन्म हाने लगा। 'माग ओर आपूर्ति आर पूजीवादी प्रतियागिता' की शुरुआत हुई। यह नया ढाचा निकट भविष्य म आन वाली अराजकता का कारण बना पर यही ढाचा अपन भूण म भविष्य क परिपक्व पूजीवादी समाज क बीज भी छुपाए हुए था। क्रातिकारी सरकार ने भू कर, व्यक्तिगत सपत्ति पर कर आर धधा करन क लिए लाइसस की व्यवस्था की। एक तरह स राज्य चलान म सभी क यागदान के उसूल क लिहाज म यह सही क्दम था पर व्यवहार म जनता न टक्स नहीं दिया। सरकार का सजाना खाली ही रहा। धीरे-धीर नये क्रांतिकारी सुधारा म लागा का माह-भग हान लगा। 10 अगस्त 1792 को भीडन ट्युलरिसपैलस (Tuulenes Palace) को घर लिया। राजा न भागकर 41 डॉ गिलोटिन द्वारा ईजाद सी पी मशीन (माय) पर पूई (दाप) को मत्यु दड देन के लिए ले जाया जा रहा है। लजिम्लाटव असेंबली मशरण ली। नागरिकान माग की कि राजा का मुअत्तल क्यिा जाय और एक नशनल वशन चुना जाय जा एक नय मविधान की योजना बनाय। 20 सितबर का कन्दशन ची बैठक हुई और उसन सर्वसम्मत स राजशाही सत्म करन का फैमला किया। लइ पर गणराज्य से गद्दारी करन का मुकदमा चला और 21 जनवरी 1793 का प्रास के राजा या मत्य नड दिया गया। नयी स्थिति यह थी कि प्रासक्रमन राष्ट उमदी कमजोर हालत देखकर हमला करन की याजनाय बना रहे थ। दश-निकान कशिकार राजशाही के समर्थक माजिश पर रह थे। एसे म क्राति नायकाम सक रामपियर के नेतत्व म जवादिम (Jacobins) न गणराज्य की रक्षा का बीड़ा उठाया। पर उनका तरीका बड़ा खून पगब वाला था। डॉ गिलाटिन की दजाद की गयी मत्युदन वाली मशीन का इस्तमाल पलकर होने लगा। सन् 1794 तक जकानिस ने कमेटी ऑफ पब्लिक सेफ्टी के नाम पाफ्रास यो तानाशाही मजकडदिया। प्रांतिकारी यायाधिकरण न सैक्डो लागा काफिलादिन पर चढ़ा दिया। रानी मरी एटोइनिट का भी सिर धड सजदा कर दिया गया। यहा तक कि भिन्न विचारावाल प्रतिकारी भी नहीं वस्शे गये। बाद में क्राति का पतन होन पर राबपियर को गिरफ्तार करके मत्यु-दड दिया गया। यह राजशाही की वापसी की शुरुआत थी। क्रांति के इसी दौर मेधासीसी तापसाना रजीमटम कमीशन पाकर अफसर बनने वाले नेपोलियन बानापार्ट के रूप में प्राम को अपना नया सम्राट और नायक मिलने वाला था। राजकीय व्यवस्था का ढाचा काई भी रहा हा, प्रासन सन् 1789 की क्रांति के रूप मदनिया काजादिया था वह भविष्य निर्माण परने वाला था। इसीलिए फ्रासीमी क्रांति का नय युग का आगमन रहा जाता है। 42 यूनानी और दक्षिण अमरीकी क्राति (1821 1830) 19वीं नेपोलियन के हमलो से कमजोर पडे स्पेनी साम्राज्य के खिलाफ दक्षिण अमरीका ने सैन मार्टिन और साइमन बोलीवार के नेतृत्व मे बगावत का झण्डा बुलद किया। उधर बाल्कन राष्ट्रीयताओ मे यूनान राष्ट्रवादी विद्रोह के दौर से गुजर रहा था। तुर्क साम्राज्य के डूबते हुए सूर्य की रोशनी मे यूनानी प्राचीनता और मिथक शास्त्र यूनानी नौजवानो मे आजादी की चेतना फूकने के लिए काफी थे। ब्रिटेन, फ्रास और रूस ने भी मदद दी और दस साल के रक्तरजित संघर्ष के बाद यूनानियो को अपनी स्वतता नसीब हुई। 'शताब्दी साम्राज्यवाद उपनिवशवाद और राजशाही के खिलाफ संघर्ष की शताब्दी कही जानी चाहिए। प्रासीमी क्राति क आदर्शोस अनुप्राणित होकर मन् 1821 म सबस पहल यूनानिया न तुक साम्राज्य क खिलाफ अपनी आजादी का झण्डा बुलद किया। उधर दक्षिण अमरीका क छोट-छाट देश भी स्पेनी गुलामी क जुए का उतार पकन क लिए मचल रह थ। उन्ह साइमन बोलीवार (Simon Bolivar) जैसा नता मिला जिस दक्षिण अमरीका का जार्ज वाशिंगटन माना जाता था। यूनानी क्राति तुर्का का साम्राज्य दक्षिण-पूर्व युराप से लेकर मध्य पूर्व तक फ्ला हुआ था। 19वी 'शताब्दी में इसक ढाच म दरार पड़नी शुरू हुइ। सुल्तान के कमजार हान का अर्थ था मुल्ला-मोलविया का उद्दण्ड हाना आर अधीनस्थ गर-मुस्लिमा क साथ कडाई से पश आना। नतीजतन उपनिवशा म विदाह क बीज फूटना। तुर्की की गुलामी म जकडयूनानी सबम पहल राष्टवादी भावनाआम भर उठ क्याकि परिस्थितिया उन्ह इस ओर धकल रही थी। यूनानिया का पुराहित वर्ग अर्से स एक राष्टवादी ढाच मसगठित था। समुद्री व्यापार AA साइमन मोतीवार लॉर्ड वापरन म लगे होने के कारण देश सबाहर हा रही घटनामा का यूनान पर ज्यादा असर पड़ता था। इमलिए प्रासीसी प्राति का प्रभाव सबम पहन उही पर पड़ा। सन् 1821 म विशप ऑप पात्रास (Bishop of Patras) ने विद्राह की अपील की और मैवरोमिशलिस (Mavro Michalis) न मोरिया (Morea) को आजाद क्ग लिया। उधर समुद्री युद्ध मे भी तुर्की का यनानिया न काफी परशान किया। जनवरी 1822 मे एपीडाउरस (Epidaurus) म राष्टीय असेंबली बुलायी गयी जिसम यूनानी आजादी की माग की गयी। तुर्को ने इसका बडा क्रूर जवान दिया। उनकी पौज कहर की तरह यूनानिया पर टूट पड़ी। यूनानिया का भयकर कत्लआम हुआ। यूनानी आजादी के दम संघर्ष म हिस्मा लने आए ब्रिटिश कवि और गमानी व्यक्तित्व के धनी लॉर्ड वायरल (Lord Brron) न भी अपना जीवन खाया। बायरन की भागीदारी और मौत इस तथ्य का प्रतीक थी कि यनानी सघर्प न पश्चिम युराप की रोमानी क्रांतिकारिता को काफी आकर्षित किया था। दस वर्ष चल आजादी । इस युद्ध न परानी यूनानी किवदंतिया और मिथका का एक बार फिर लोकप्रिय बनाया और अपनी प्राचीनता की खुराक पर पल रहे यूनानी नोजवानों मे कुानी का एक नया जज्या पका। बहरहाल तुर्की न मारिया पर फिर स कब्जा कर लिया। यूनानियों की एक परपगगत खराव आरत आपसम भी लड़ा की थी। व आपस मे भी उतनी ही शिद्दत के साथ लडते जितना तुओं के खिलाफ। तुर्को का उपकी इस प्रवृत्ति स काफी मदद मिली और यूनानी बगावत का पहला दौर आसानी स चल दिया गया। पर यूनान तायुरापका दर्शन देने वाला देश था। जब तुर्मान मिम्रिया का यूनानी विद्रोह कुचलने क लिए बुलाया 44
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Cur150r Sex Tolentit Cctan LOM C Sentinu Pinter ~u an SOUTH AMERICA 1103 und --- दक्षिण अमरीराचा मानचित्र Tuadmanus स वाल्वा की खाडी (Gulf of Volvo) का इलाका राष्ट्र क रूप म मिला। 3 फरवरी 1630 का यूनान एक प्रभसता सपन राष्ट्र घापित हुआ। दक्षिण अमरीका की क्रातिया स्पन व अमरीकी उपनिवशा ने सन् 1816 स ही अपनी मरित की पापणाए करनी शुरू कर दी थी। मन माटिन (San Marun) क नतत्व म अर्जेंटीना आजाद हा चया था। माटिन न एण्डीज पवतमालाए पारकर एक माहमपूर्ण अभियान म चिली का भी आजाद करा लिया था। चिनी की आजादी के दीवाना वा नतृत्व बना? आहिग्गिम (Bernardo Orgguns) न किया था। नपानियन र हमलाने म्पन की राजशाही का कमजार कर दिया थाइर्माला उमय उपनिवश मौया दरावर एक एव र आजाद हात चल जा रहा था जैम ही पतगान पड़ा प्रथम वायाजील यामप्राट माना और मातीनी अमरीका पा मयम पड़ा दश आजाद हुआ वैम ही महान मुक्तिदाता साइमन यालीयार न पानिवारिया की पोज मकर यालीविया की आजादी लिए महिम एहदी। पालीवार न पनिहा की महाइ जीवन म अभूत मै य पशलता का परिचय दिया। गइनार या नामही या म पानीवार नाम पर यालीविया पहा। गर और गारमा पानी अभियान म पाग व बनाता का भी यानीवार न आजारी ग्लिवादी। गन् 1821मी मैन माटिन न पर आजाग्या। मैग्गियाम विधानीपानी का नाम जा रही थी किमानी जनरल रियान 48 जेम्स मुनरो सैन मार्टिन इटुरवाइड (Creol Iturbide) विद्रोहियो स मिल गया और उसकी मदद स मैक्सिके आजाद हो गया। इस दक्षिण अमरीका का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि माइमन बातीवार की सन 1830 म मृत्यु हा गयी। अगर व कुछ दिन आर जीवित रहत ता सेन माटिन आर आहिग्गिन्स के साथ मिलकर दक्षिण अमरीका क्रातिया क हिता का सुदृढ करत। सयुक्त राज्य अमरीका न सन् 1822 म ही दक्षिण अमरीका क इन नव-स्वतन दशा का मान्यता दी थी। उत्तरी अमरीका न भी ता ब्रिटिश उपनिवशवादिया स इसी तरह लडकर अपनी आजादी हामिल की थी। सयुक्त राज्य शुरू स ही बालीवार आरमन माटिन की कोशिशा के प्रति हमदर्दी रखता था। टसर इन उपनिवेशा क आजाद हान स अमरीकी व्यापार म इजाफा हाने की सभावनाए भी थी। इन्ही मिल-जुल कारणा से मयुक्त राज्य अमरीका के राष्ट्रपति जेम्म मुनरा (James Monroe) न युरोपियन ताकता का चतावनी दी कि वे नयी दुनिया क दशा म हस्तक्षेप करने की जुरत न कर। इस चतावनी स कई युरोपीय दशा खासकर जार की व काशिश थम गयी जा चाहती थी कि दक्षिण अमरीका म एक बार स्पनी शासन हा जाय आर अगर एसा न हा सकता क्सिी न किसी तरह की राजशाही ता स्थापित हा ही जाय। मुनरा का यह कदम मुनरा डॉक्टिन (Monroe Doctrin) क नाम से जाना जाता है। ब्रिटन शुरू से ही विद्राहिया का याडी-बहुत मदद दता रहा था। उसन अर्जेंटीना कमाथ व्यापार-सधि कर ली। सन् 1824 म दक्षिण अमरीका म अतिम म्पनी सना पराजित की गयी आर दा माल बाद अतिम स्पनी तापखाने ने हथियार डाल दिय। इसी के साथ दक्षिण अमरीका म स्पनी साम्राज्य का नामोनिशान मिट गया। बोलीवार नबोलीविया कराप्टपतिक रूप मे पनामा म दूसरनताआ की मदद स इन नव स्वतत्र दशो का एक महासघ म गठित करन का असफल प्रयास किया। अगर एसा हा जाता तो ये छाट-छाट दश आपसी लडाइ म अपनी ऊर्जा वरवाद न करता 47
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(163018)
जुलाई क्राति और वेल्जियम की आजादी
चार्ल्स का राज्यारोहण-समारोह शनुतापूर्ण समीकरण आसिर कर तक चल पाता। चाल्स न छाट-छाटकर अनुदारवादिया का अपनी हकूमत म भर लिया। लोगो को डर लगन लगा कि कही वह उनक छिल कधो पर तानाशाही का जआ फिर मे न लाद द। सन् 1830 मे प्रतिनिधि सभा (Chamber of Deputies) के चुनाव हुए। इसम जनता न सुलकर अपना गुस्मा-गुब्यार निकाला और चात्स चुनाव हार गया। चारर्स न जारिश की उपभा की ओर चेंबर को बेशर्मी स भग कर दिया। अब वह राजाज्ञाए निकाल निकालकर हुक्मत करन लगा। ऐसी ही एक गजाज्ञा के जरिए चार्स ने प्रस की आजादी पर पाबदी लगा दी और चुनाव के नियम बदल दिय। फिर इसक बाद जस पूर राष्ट्र की इच्छाआ का अपमान करता हआ चार्ल्स शिकार खेलन चला गया। परिस व प्रिंटम बराजगारी क अदशे से घिर गय। उन्होंने विरोध म अपना धधा बद कर दिया। उसकी दसा दखी दमरान भी एसा ही कदम उठाया। जुलाइ की भीषण गर्मी म गुस्स से पौलत हुए लोग क्राति के प्रतीक तिरग की छाव म जमा हान लग। नान डम (Notre Dame) चर्च पर तिरगा लहरान लगा। चार्ल्स की हरक्ता पर यह अनापक्षित प्रतिक्रिया देखकर सरकार भौचक्की रह गयी। उसके पास ता इस बगावत का दबान व लिए पूरे फोजी तक न थे। 27 जुलाई को शुरू हुई यह क्रांति 29 जुलाई तक आत-आत कामयाबी की मोजल तक पहुंच चुकी थी। परिस के छात्रा आर मजदूरा नबेरिकड राड कर लिए और खुद का नगर का मालिक घोषित कर दिया। चाम की कुछ समय मे न आया। उसने घबराबर गटी छाड दी और अपने पौत्र ड्यूक ऑफ बाडेक्स (Duke of Bordeaux) को राजा बनान की धाषणा कर दी। पर क्रातिकारियान इस समस्या का हल मानन से इकार कर दिया। क्राति म मुख्यत 49 जुलाई क्राति और बेल्जियम की आजादी (1830 1848) फ्रासीसी क्राति की पराजय जरूर हो गयी थी, लेकिन उसका विचार-धारात्मक असर पूरी शिद्दत के साथ मौजूद था। नेपोलियन के पराभव के बाद फ्रास भीतर ही भीतर एक और क्राति के लिए तैयार हो रहा था। लूई फिलिप को सत्ता मे लाने वाली इस क्राति ने एक ऐसा राजा दिया गो 'फ्रास' का नहीं बल्कि 'फ्रासीसियो' का राजा था। इही परिस्थितियो के ज्यालामुखी से बेल्जियम की क्राति कालावा फूटा। फ्रास और हॉलैंड की तमाम नापाक कोशिशो के बावजूद बेल्जियम के रणवाकुरे क्रातिकारिया ने अपनी आजादी हासिल करक ही सास ली। फ्रामीसी क्रांति के असफल हो जाने का यह मतलव यतई नही था कि उन विधारो और नपालियन बानापार्ट ने अपनी साम्राज्यवादी महत्त्वाकाक्षाआ को फलत-फ्लते दयन की गरज म पूर युराप का युद्ध की आग म याका। यही नहीं सुद का सम्राट नाकर अपना गजवरा चलान तर का अधिकार भी हासिल कर लिया पर उमक शासन न कुछ उदार कदम भी उठाय! ये सभी उठे कदम प्रासीमी क्राति की परपरा मही या इही के फलस्वरूप राजशाही दावारा कभी अपनी पहल जेमी जड नही जमा सकी। मन् 1814 में लूइ अटारहव न शासन मभाला और देखत दखत निर्वामित जीवन गुजार रह फ्रामीसी सामत अपने पूर रग-रतब क माथ वापस आग लगा उहान अपनी-अपनी जागीर सभाल ली। आमलागा का यह मव एक आखन भाया पर उन्ह महीवक्त का इतजार था। प्रामीमी प्राति के प्रभाव म यूनान अपनी आजादी जीत चुका था। दक्षिण अमरीका म साइमन बालीवार क नतत्वममुक्ति की आग धधक चुकी थी। लूई के बाद उसका बेटा चाम दशम गद्दी पर बैठा। राजावनन मे चाल्स एक अतिप्रतिक्रियावादी दलकानता था। न उम जनता में दिलचस्पी थी और न ही जनता को उमम। राजा और प्रजा का यह 48 चार्ल्स का राज्यारोहण समारोह शत्रुतापूर्ण ममीकरण आखिर क्य तक चल पाता। चार्ल्स न छाट-छाटकर अनुदारवादिया को अपनी हुकूमत म भर लिया। लागा को डर लगन लगा कि कही वह उनक छिले कधा पर तानाशाही का जुआ फिर से न लाद दे। मन् 1830 म प्रतिनिधि सभा (Chamber of Deputies) के चुनाव हुए। इसमें जनता ने सुलकर अपना गुस्सा-गुब्वार निकाला और चार्ल्स चुनाव हार गया। चार्ल्स न जादश की उपेक्षा की और चवर का बेशर्मी से भग कर दिया। अब वह राजाज्ञाए निकाल निकालकर हुक्मत करन लगा। एसी ही एक राजाज्ञा के जरिए चार्ल्स न प्रस की आजादी पर पावदी लगा दी और चुनाव के नियम बदल दिय। फिर इसक बाद जेसे पूर राष्ट्र की इच्छाआ का अपमान करता हआ चार्ल्स शिकार खेलन चला गया। परिस क पिंटस बराजगारी के अदर्श सघिर गये। उन्हान विरोध म अपना धधा बद कर दिया। उनकी देखा देखी दूसरा न भी एसा ही कदम उठाया। जुलाई की भीषण गर्मी म गुस्स स खौलत हुए लाग क्रांति क प्रतीक तिरग की छाव म जमा होन लगे। नात्र डेम (Notre Dame) चच पर तिरगा लहरान लगा। चाल्स की हरकता पर यह अनापेक्षित प्रतिक्रिया दखकर सरकार भौचक्की रह गयी। उसके पास ता इस बगावत को दबान के लिए पूरे फाजी तक न थे। 27 जुलाई को शुरू हुई यह क्रांति 29 जुलाई तक आत-आते कामयाबी की मंजिल तक पहुच चुकी थी। पेरिस के छात्रा और मजदूरा न बेरिकड खड कर लिए और खुद का नगर का मालिक घोषित कर दिया। चार्ल्स की कुछ समझ म न आया। उसने घबराकर गद्दी छाड दी और अपन पौन ड्यूक ऑफ बाडेक्स (Duke of Bordeaux) को राजा बनान की पापणा कर दी। पर क्रांतिकारिया ने इसे समस्या का हल मानन से इकार कर दिया। क्रांति म मुख्यत 49 उदारतावादी और बानापावादी भाग ल रह 41 मत्य क बाद नपालियन कीवि एक एस 'पागणिक नायक' की हा गयी थी जान यवल प्रामीमी माम्राज्य की 'महाकाव्यात्मक विजय का प्रतीक था कि मुक्तिदाता कस्पम भी दसा जाता था। बानापाटवादिया न मन् 1815 की शमनाक मधिया का मिटा दन की आकाक्षा क माथ भी क्राति की थी। इसका मतलब था कि अगर उनकी चलती ता प्राम की फाज जयम का हडपन और राइन नदी व बाय नट तक माम्राज्य फ्लान की काशिश करती। पर क्रांति म जुड़ घटक उदारतावादिया का इरादा कुछ और ही था। थिएर (Thicrs) नामक एक युवक पत्रकार और लाफित (Laffitte) नामक प्रभावशाली बैंकरन इम मक्ट का हल निकालन म पहलकदमी की। उहान चार्ल्स क राजवश म ही एक एमा सामत तलाशा, जान क्वल उदारतावादी विचारा का था बल्पि गणराज्य क हक म लड भी चुका था। ड्युक ऑफ आलियम (Duke of Orleans) लूइ फिनिप का नया राजा बनन क लिए चैवर द्वारा नित्रित किया गया। लुई फिलिप ने सार्वजनिक म्पस क्रांतिकारी झडम आम्था जताई और 'क्राति क प्रतीक बन युक लापायत [Lifayette) कागल म लगाया। लुइन वायदा किया कि वह फ्रास का राजा बनन र बजाय प्रामीमिया का राजा बनकर दिखाया। इस तरह जिस क्रांत या धीज वपन आम जनता के अमताप सहआ था, वह पजीपति वर्ग की राजशाही म बदल गयी। उस जमान म यही पजीपति वर्ग सबस प्रगतिशील और क्रातिकारी वर्ग था और प्रासीमी गति के समानता स्वतनता और भाइचार क महान नार का प्रतिनिधित्व करना था। he चार्स का पलायन SO सिवटी एट पेरिरेड्स जुलाई फ्रांति का प्रसिद्ध प्रतीक चित्र
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सूई फिलिप के दो चेहरे। अपनी गलत नीतियो और अलोकप्रियता के कारण उसे इस रूप मे चित्रित किया गया। और पूजीपतिया की प्रिय सरकार देखते ही दखते अलोकप्रिय होने लगी। मजदूरा, सिपाहिया और युवा क्रांतिकारिया की लूई फिलिप की सरकार मे स दिलचस्पी खत्म हो चुकी थी। जुलाई-क्राति से शुरू हुई 18 साल की राजशाही का अत धीर-धीरपास आ रहा था। सन् 1848 की क्राति ने लूई के शासन पर निर्णायक चाट मारकर उसका अत कर दिया। बेल्जियम की क्राति लूई क इस पूजीवादी शासन की देन एक और क्रांति थी, जिसे दुनिया बल्जियम की आजादी के नाम से जानती है। 16वी शताब्दी के आखिर म डचान अपनी आजादी हासिल की थी। तब भी हॉलैंड के दक्षिण प्रात स्पेन के शासन क शिकजे म कसे रह गये थे। बाद म आस्ट्रिया के साम्राज्य ने उन पर कब्जा कर लिया था। नेपालियन की फौजा ने आस्ट्रिया का ध्वस्त कर दिया पर सन् 1814 म नेपालियन की पराजय क बाद इन प्राता का हॉलैंड के साथ चस्पा कर दिया गया। ये प्रात बल्जियमक नाम से जाने जात थ। डचा कसाथ जडना बेल्जियमवासियों का कभी अच्छा नही लगा। दानी के धर्म भाषा और सामाजिक रीति रिवाज एकदम अलग-अलग थे। डच राजा के शासन म बेल्जियमा का महसूस होता कि उनके साथ दूसरे दर्जे के नागरिक जैसा सौतला सलूक हो रहा है। सन् 1830 मे डच शासन के खिलाफ दगे होने लगे जो जल्दी ही एक निर्णायक क्रांति की शक्ल में बदल गये। 4 अक्तूबर को ब्रूसेल्स (Brussels) म बल्जियम की आजादी की घोषणा कर दी गयी। हॉलैंडने घबराकर वियना की संधि' को कायम रखने की गारटी दने वाले देशों से मदद की अपील की। य देश बेल्जियम क्रांति को दबाने के हक म थ क्याकि उनके हिसाब से राइनलैंड, स्विट्जरलैंड और इटली तक इस क्रांति का असर पड़ सकता 53 चार्ल्स का परिस आगमन जाहिर था कि एम गजा क अधिकार ता ओर कम हात चल जान थ। लूइ फिलिप क समथक दा भागा म बट हए थ। प्रगतिशील गुट मूवमट क नाम स आर मध्यवर्गी गट रसिस्टम क नाम म जाना जाता था। राजा ने पहल मूवमट वाला का बढावा दिया आर फिर रसिस्टम वाला का। शासन पद्धति म सुधार हुए। तय क्यिा गया कि राजा राजानाआ के नाम पर निरकश शासन नही चला सक्ता। मताधिकार का आर व्यापक तथा पना बनाया गया जिसस मतदाताआ की सत्या पहल की तुलना म दागनी हा गयी। जुलाइ क्राति क चरित्र क मुताबिक लूइ न सशहाल मध्यम वर्ग का आग बढ़ाया। उनकी तिजारिया म पैसा बढ़न लगा। प्रास के इस वग की समद्धि की झलक बालजार क उप यासाम दसी जा सकती है। फाइनमरा उद्यागपतिया और व्यापारियान कपि रलव ओर विदश नीति इम तरह बनायी कि उस युद्ध मन फ्सना पड आर व्यापारी वर्ग फलता फूलता रह। जिम अनपात म पूजीपति वर्ग की जब भर रही थी दूसरी आर उसी अनपात म यहमख्यक लागा की गरीबी भी बढ़ रही थी। राष्ट्रवादी इमलिए नाराज हा रह थक्प्रिास बल्जियम और अल्जीरिया के मामल म विटन का सश करन की नीति अपना रहा था। प्रांतिकारी इमलिए चिढ हए थकिजिम उहान बहमस्यक लागा का राजा बनाया वह मिफमध्यवर्गीय व्यापारिया का माउथपीम बनकर रह गया था। राजशाही कममथक मानत थ कि लूई फिलिप का ता आनाशक रूप म राजा बनना ही नहीं चाहिए था। उनक हिमाव में वह राजघगन क ऊपरी तबकनी मतान था ही नही। बानापाटवादी मानन लग थ कि लूई न उनकी माम्राज्यवादी आकाक्षाआ का चाट पहचाई है। इस वहवर्गीय अमताप के नतीजतन मजदूरा की हडताल हान लगी मना म बगावत की चिगारिया भडक्न नगी और परिम की मडक् युद्ध कमान म बदलन लगी। व्यापारियो 52 सूई फिलिप के दो चेहरे। अपनी गलत नीतियो और अलोकप्रियता के कारण उसे इस रूप मे चित्रित किया गया। आर पूजीपतियो की प्रिय सरकार देखते ही दसत अलाकप्रिय होने लगी। मजदूरा, सिपाहिया और युवा क्रांतिकारिया की लूइ फिलिप की सरकार म स दिलचस्पी खत्म हा चुकी थी। जुलाई-क्रांति से शुरू हुई 18 साल की राजशाही का अत धीर-धीर पास आ रहा था। सन् 1848 की क्रांति न लूई के शासन पर निर्णायक चाट मारकर उसका अत कर दिया। बेल्जियम की क्राति लूई के इस पूजीवादी शासन की देन एक और क्रांति थी, जिसे दुनिया बल्जियम की आजादी के नाम से जानती है। वी शताब्दी के आखिर मे डचा न अपनी आजादी हासिल की थी। तब भी हॉलैंड के दक्षिण प्रात स्पेन के शासन के शिकजे म कम रह गय था बाद में आस्ट्रिया के साम्राज्य ने उन पर कब्जा कर लिया था। नपालियन की फौजा ने आस्ट्रिया का ध्वस्त कर दिया पर मन् 1814 मे नपोलियन की पराजय क बाद इन प्राता को हॉलैंड क साथ चस्पा कर दिया गया। ये प्रात बल्जियमक नाम से जान जात थे। डचा क साथ जुड़ना बेल्जियमवासिया को कभी अच्छा नहीं लगा। दोनो के धर्म भाषा और सामाजिक रीति रिवाज एक्दम अलग-अलग थे। डच राजा क शासन म बल्जियमा का महसूस होता कि उनके साथ दूसरे दर्जे के नागरिक जैसा सौतला सलूक हो रहा है। सन् 1830 म डच शासन के खिलाफ दग होने लगे,जो जल्दी ही एकनिर्णायक प्रति की शक्ल में बदल गय। 4 अक्तूबर को बूसल्म (Brussels) मे बल्जियम की आजादी की घोषणा कर दी गयी। हॉलैंड ने घबराकर वियना की संधि को कायम रखने की गारटी दन वाले दशो से मदद की अपील की। ये देश बेल्जियम क्रांति को दबाने के हक मेथ क्यावि उनके हिसाब स राइनलैंड, स्विट्जरलैंड और इटली तक इस क्रांति का असर पड मक्ता 53
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भारतीय स्वतत्रता का प्रथम सग्राम (1857 1859) प्लासी के युद्ध के बाद अग्रेजी साम्राज्य की जडे भारत मे गहरी जमती चली गयीं, पर भारतीय राजे-रजयाडो, जनता और सिपाहियो ने पूरे सौ वर्ष तक विद्रोह की परपरा भी कायम रखी। सन् 1857 मे एक अभूतपूर्व विद्रोह हुआ, जिसमे अभी तक के सभी विद्रोहो की प्रवृत्तिया और उनका अखिल भारतीय स्वरूप परिलक्षित हो रहा था। इसमे जमींदार, राजा, नयाय, पादशाह, पडित, मौलवी, सरकारी कर्मचारी, सिपाही, कारीगर और किसान शामिल पे। विदेशी इतिहासकार इस विद्रोह को 'सिपाहियो का गदर' कहकर अपमानित करते हैं, पर यह वास्तव मे भारतीय स्यतत्रता का पहला महासग्राम था। इसका नेतृत्य बहादुर शाह जफर, नाना साहय, लक्ष्मी बाई, तात्या टोपे, यस्त खा, फिरोज शाह, बेगम हजरत महल, कुअर सिंह और मौलयी अहमदशाह ने जान की बाजी लगाकर किया। विद्रोह असफल रहा पर इसने अंग्रेजी साम्राज्य की घूसे इस दर्जा हिला दी कि ग्रिटेन को ईस्ट इंडिया कपनी से भारत की बागडोर अपने हाथ में लेनी पड़ी। अंमे "ग्रेजो ने ससदीय क्रांति करके अपनी जनता को तो आजादी और खुशहाली का स्वाद चखाया लेकिन उसकी कीमत उनके उपनिवशा की जनता को चुकानी पड़ी। ब्रिटेन में औद्यागिक क्रांति हुई और ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र म असाधारण उन्नति हुई। दरअमल उन्नति के कवरमुत्त की जड मे कही न कही ब्रिटेन के उपनिवेशा के विमानों और व्यापारिक शोषण की खाद पर फल-फूल रही थी। अग्रज सौदागरा की विशाल क्पनी ईस्ट इंडिया क्पनी न व्यापार करने की नियत स भारत की धरती पर कदम रखा था लेक्नि ढहत हुए मुगल साम्राज्य और खाखल हाते हुए भारतीय मामतवाद ने उसे सत्ता पर अधिकार करने का सुनहरी मौका दे दिया। विटन व्यापारिक हिता का हुक्मत की बागडोर अपने हाथ में रखकर और भी मुरक्षित रखा जा सकता था। 58 ENGLAND OSTEND BRUGES MOTHERLANDS WEST GERMANY ANTWERP BELGIUM BRUSSELS LIELE . LUTAMBOURG बेल्जियम का मानचित्र FRANCE था, लेकिन ब्रिटन बुरी तरह अड गया। उसने तय किया कि वह फ्रास का इस युद्ध क पचड़े मे नही पडन दगा। फ्रास की नयी सरकार भी किसी कीमत पर यद्ध के मूड म नही थी। लूई फिलिप ने टेलीरैण्ड (Talleyrand) को रिटायरमेट से बुलाकर ब्रिटेन के साथ ममझौता-वार्ता करने भेजा। 76 वर्षीय टलीरैण्ड ने लदन जाकर ब्रिटेन का विश्वास दिला दिया कि फ्रास बल्जियम म हस्तक्षेप करने कसिलाफ है। इसी के बाद एक फौजी संधि हुई, जिसन बल्जियम और हॉलेंड के बीच युद्ध-विराम करा दिया। बेल्जियम का एक स्वतत्र एव तटस्थ राष्ट घाषित कर दिया गया। रूस का जार इस घटनाक्रम से खुश नहीं था, पर उसी समय पोलैंड मे विद्रोह शुरू हो गया। इससे उसका ध्यान बट गया और उसे इस मामले म टाग फसान का मोका ही नही मिल पाया। अब यह समस्या मुह बाए खड़ी थी कि वल्जियम का राजा कान वन? कापी माचन समझन क बाद मक्स काबुग (Seve Coburg) के राजकुमार प्रिंस लियापल्डि का राजा बनाया गया। पर नय राज्य की सीमाआ क मवाल पर हॉलेंड आर बेल्जियम म फिर झगडा हो गया। बल्जियम का दावा था कि मास्ट्रिच (Maastricht), लिम्बर्ग (Limberg) और लुक्समबर्ग (Luxemburg) उसके दायर म होने चाहिए। फ्रास की मदद से हॉलैंड ने हमला बालकर ब्रूसेल्स पर कब्जा कर लिया। नयी सौंध हुई। इसमे हॉलैंड को मास्ट्रिच और लिम्बर्ग का एक हिस्सा दे दिया गया पर उसे एण्टवर्पस अपनी फौज हटान से इकार करना जारी रखा। इस पर ब्रिटिश और प्रासीसी फौजा ने मिलकर कार्रवाई की और हॉलैंड को बल्जियम की आजादी को मान्यता दन पर मजबूर क्यिा। युरोप में प्रांतियों और विद्रोहा या दौर अभी चालू रहना था। जुलाई-क्रांति के ही साल मलिवरपूल-मैचस्टर रेलव चालू हुई, जो खासतौर पर सवारिया ले जाने के लिए बनी पहली रेलवे सेवा थी। अगले साल माइकल फैराडे ने विद्युत-चुबकीय प्रेरण (Electro-magnetic Induction) की खाज की। मार्स (Morse) ने टेलीग्राफ के रचना की। इसी वर्ष इग्लैंड म ससदीय-सुधारों का दौर आया। सन् 1833 म पहला पंपटरी एक्ट बना जिमम मजदूरा के अधिकार काझडा बुलद हुआ। क्ला और साहित्य व क्षेत्र म भी यह क्रांतिकारी रचनाआ का काल था। वालजाक पुश्किन, स्टण्टाल और विस्टर ह्यूगा जैम महान लेसक इमी दौर की पैदावार था समग्रत प्रांतिया व इस युगको राजनैतिक परिवर्तन क ममानातर ही मास्थतिक और सामाजिक यदलाव का युग भी वहा जा मरता है। . 54 भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम सग्राम (1857 1859) . प्लासी के युद्ध के बाद अग्रेजी साम्राज्य की जडे भारत मे गहरी जमती चली गयीं, पर भारतीय राजे-रजवाडो, जनता और सिपाहियो ने पूरे सौ वर्ष तक विद्रोह की परपरा भी कायम रखी। सन् 1857 मे एक अभूतपूर्व विद्रोह हुआ, जिसमे अभी तक के सभी विद्रोहो की प्रवृत्तिया और उनका अखिल भारतीय स्वरूप परिलक्षित हो रहा था। इसमे जमीदार, राजा, नयाय, बादशाह, पडित, मौलपी, सरकारी कर्मचारी, सिपाही, कारीगर और किसान शामिल थे। विदेशी इतिहासकार इस विद्रोह को 'सिपाहियो का गदर' कहकर अपमानित करते है, पर यह वास्तव मे भारतीय स्वतन्त्रता का पहला महासग्राम था। इसका नेतृत्य बहादुर शाह जफर, नाना साहब, लक्ष्मी भाई, तात्या टोपे, यस्त बा, फिरोज शाह, बेगम हजरत महल, कुअर सिंह और मौलयी अहमदशाह ने जान की बाजी लगाकर किया। विद्रोह असफल रहा पर इसने अग्रेजी साम्राज्य की चूले इस दर्जा हिला दीं किनिटेन को ईस्ट इंडिया कपनी से भारत की बागडोर अपने हाथ मे लेनी पड़ी। चखाया लेकिन उसकी कीमत उनके उपनिवेशो की जनता को चुकानी पड़ी। ब्रिटन मे औद्योगिक क्रांति हुई और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र मे असाधारण उन्नति हुई। दरअमल उन्नति के कुकरमुत्त की जड मे कही न कही ब्रिटेन के उपनिवशा के किसाना और व्यापारिक शोषण की खाद पर फल फूल रही थी। अग्रेज सौदागरो की विशाल क्पनी इस्ट इंडिया कपनी' ने व्यापार करने की नियत से भारत की धरती पर क्दम रखा था लकिन ढहते हुए मुगल साम्राज्य और खोखले होते हुए भारतीय सामतवाद न उस सत्ता पर अधिकार करने का सुनहरी मौका दे दिया। ब्रिटेन के व्यापारिक हितो का हुकमत की बागडोर अपने हाथो म रखकर और भी सुरक्षित रखा जा सकता था। 55 ENGLAND OSTEND BRUGES NETHERLANOS WESr GERMANY ANTWEAP BELGIUM BRUSSES LIELE FRANCE LULJAMBOURG बेल्जियम का मानचित्र था, लक्नि ब्रिटेन बुरी तरह अड गया। उसन तय किया कि वह फ्रास को इस युद्ध के पचड़ मनही पडन दगा। फ्राम की नयी सरकार भी किसी कीमत पर युद्ध के मूड में नहीं थी। लू' पिलिप ने टलीरैण्ड (Talleyrand) का रिटायरमेट से बुलाकर रिटेन क साथ ममझौता वार्ता करने भजा। 76 वर्षीय टलीरेण्डन लदन जाकर विटन को विश्वास दिला दिया कि प्रासल्जियम म हस्तक्षेप करन कसिलाफ है। इसी क्वाद एक फौजी मधि हुइ, जिसन बल्जियम और हॉलैंड के बीच युद्ध-विराम करा दिया। बेल्जियम को एक स्वतः एवं तटस्थ राष्ट पापित कर दिया गया। रूम का जार इस घटनाक्रम से खुश नहीं था पर उसी समय पोलैंड म विद्राह शुरू हो गया। इससे उसका ध्यान बट गया और उस इस मामले में टाग फसाने का मौका ही नहीं मिल पाया। अब यह ममस्या मुह बाए सड़ी थी कि रिजयम का राजा कान बन? काफी माचन-ममयन क याद मपम कानुग (Sexe Coburg) क राजकुमार पिम लियापाल्ड का राजा बनाया गया। पर नय राज्य की मीमाआमवाल पर हॉलड आर ल्जियम म फिर झगड़ा हो गया। बेल्जियम का दावा था कि मास्ट्रिच (Maastricht), लिम्बर्ग (Limberg) और लुक्सेमवर्ग (Luxemburg} उसक दायर म हाने चाहिए। फ्रास की मदद स हॉलैंड ने हमला बोलकर चूसल्म पर कब्जा कर लिया। नयी मधि हुई। इसम हॉलैंड को मास्ट्रिय और लिम्बर्ग का एक हिम्सा दे दिया गया पर उसे एपटवर्प से अपनी फौज हटान स इकार करना जारी रसा। इस पर ब्रिटिश और प्रासीसी पौजा ने मिलकर कारवाई की और हॉलैंड को चल्जियम की आजादी को मान्यता दन पर मजबूर किया। युराप में क्रांतिया और विद्राहो का दौर अभी चालू रहना था। जुलाई-क्रांति कही सात मलिवरपूल-मचेस्टर रेलवे चाल हुई, जो सासतौर पर सवारिया ले जाने के लिए पनी पहली रेलवे सेवा थी। अगले साल माइकल फैराडे ने विद्युत चुपपीय प्ररण {Electro-magnetic Induction) की खाजगी। मार्स (Morse) न टेलीग्राप की रचना की। इसी वर्ष इग्लंड म ससदीय-सुधारा का दौर आया। सन् 1833 में पहला फैक्टरी एपट बना जिसस मजदूरा अधिधारा याहा गुलद हुआ। कला और साहित्य पत्र म भी यह प्रतियारी रचनाआजाकाल था। बालजार पुश्किन स्टेण्टाल और विक्टर ह्यूगा जैस महान लयफ इसी दौरची पैदावार थे। समग्रत क्रांतिया रेस युगया राजनैतिक परिवतन र ममानातर ही सास्वतिक और सामाजिर यदलाव का युग भी रहा जा मरता है। 54 भारतीय स्वतत्रता का प्रथम सग्राम (18571859) " प्लासी के युद्ध के बाद अग्रेजी साम्राज्य की जडे भारत मे गहरी जमती चली गयीं, पर भारतीय राजे-रजवाडो, जनता और सिपाहियों ने पूरे सौ वर्ष तक विद्रोह की परपरा भी कायम रखी। सन् 1857 मे एक अभूतपूर्व विद्रोह हुआ, जिसमे अभी तक के सभी विद्रोहो की प्रवृत्तिया और उनका अखिल भारतीय स्यरूप परिलक्षित हो रहा था। इसमे जमीवार, राजा, नयाय, बादशाह, पंडित, मौलयी, सरकारी कर्मचारी, सिपाही, कारीगर और किसान शामिल था विदेशी इतिहासकार इस विद्रोह को 'सिपाहियो का गदर' कहकर अपमानित करते है, पर यह वास्तव मे भारतीय स्वतत्रता का पहला महासग्राम था। इसका नेतृत्य यहादुर शाह जफर, नाना साहय, लक्ष्मी याई, तात्या टोपे, यस्त खा, फिरोज शाह, बेगम हजरत महल, कुअर सिंह और मौलयी अहमदशाह ने जान की याजी लगाकर किया। विद्रोह असफल रहा पर इसने अंग्रेजी साम्राज्य की चूसे इस दर्जा हिला दी कि ग्रिटेन को ईस्ट इंडिया कपनी से भारत की पागोर अपने हाथ में लेनी पड़ी। "ग्रजो ने ससदीय क्रांति करके अपनी जनता को तो आजादी और सुशहाली का स्वाद चखाया लेकिन उसकी कीमत उनके उपनिवेशा की जनता का चुकानी पडी। ब्रिटन म औद्यागिक क्रांति हुई और ज्ञान-विज्ञान के क्षत्र में असाधारण उन्नति हुई। दरअमल उन्नति क ककरमुत्त की जडम कही न कही बिटन क उपनिवेशा के विमानों और व्यापारिक शोषण की साद पर फल-फल रही थी। अग्रेज सौदागरों की विशाल कपनी इस्ट डिया क्पनी न व्यापार करने की नियत से भारत की धरती पर कदम रसा था मरिन ढहते हुए मुगल साम्राज्य और खोसले होते हुए भारतीय मामतवाद न उमे सत्ता पर अधियार करने का सुनहरी मौका दे दिया। विटेन के व्यापारिक हितो का हुकूमत की बागहार अपने हाया म रखकर और भी सुरक्षित रखा जा सकता था। अंग 55 PLAN OF THE BATTLE OF PLASSEY GAINED BY COLONEL CLIVE TONE par Mearan Sasurduopati Baacbema Benderen PerdM N tarrerbed camp CAPineer Grow m prone पलाइय ने प्लासी का युद्ध जीतकर अग्रेजोशी जडे भारत मे जमा दी। 3c Play भारतीय रियासता न अग्रजा की इन काशिशा का बचकाने तरीक स कापी विराध ता क्यिा लकिन व आपसी फूट आर नाकारापन कारण गारा की चाला कानही काट सकी। अग्रजा की सन्य शक्ति कम हान के बावजूद प्लासी क मेदान में स्थानीय बहुसख्यक फौजा की हार हुई। सन् 1764 म दिल्ली के बादशाह शाह आलम बक्सर के मदान म हार गय। सन 1765 म उन्हान बगाल बिहार और उडीसा की दीवानी अग्रजा को सोंपकर उनकी राजसत्ता को स्वीकार कर लिया आर उसे कानूनी स्वीकृति द दी। सन् 1772 म वारन हस्टिग्स (Warren Hastings) न इन सूबा की हुकूमत सभाली आर ब्रिटिश शासन व्यवस्था की शुरुआत हुई। धीरे धीरे मेसूर, हैदराबाद अवध सहित मराठा जाटो आर सिक्या की रियासत भी ब्रिटिश हुकूमत के मातहम हाती चली गयी। इस पराजय के बावजूद भारतीय जमीदारा सामता राजाआ, व्यापारिया और आम जनता न ब्रिटिश शासन को कभी चपचाप बर्दाश्त नहीं किया। प्लासी की लडाई और सन् 1857 के बीच के पूरे सो साल अनगिनत विद्रोहा और बगावता के साल थे। मीर-कासिम का विद्राह पहाडी जातिया का विद्रोह, चुआर के विद्रोह काल विद्रोह सथालो का विद्रोह, उडीसा के जमीदारा का विद्रोह साद विद्रोह असम क विद्रोह खासी विद्राह मजनूशाह क नेतत्व मे मुसलमान फकीरो का विद्रोह सन्यासियो का विद्रोह मद्रास प्रसीडसी की उथल-पुथल, विजय नगर क राजा का विद्रोह दीवान वलुतापी का विद्रोह ढाढ जी बाघ का विद्रोह राजा महीपतराम का विद्रोह मुबारिज्जुद्दौला का विद्रोह रामोसी विद्वाह गडकरी विद्रोह गारसपुर हाथरस और रुहलखण्ड क विद्राह वलीउल्लाही आदालन और समय समय पर ब्रिटिश फौज क भारतीय सिपाहिया म फूट पड़ने वाली बगावत इस बात का प्रतीक थीं कि इस देश ने अग्रेजा को कभी मन से अपन मालिक के रुप मेस्वीकार नही क्यिा था। फिर इसम क्या ताज्जुब कि इन तमाम विद्राहा का चरमोत्कर्ष एक महाविद्रोह के रूप म हुआ। सन् 1857 का महाविद्राह एक ऐसी ही घटना थी जिसका स्वरूप अखिल भारतीय था और जिसमे अभी तक की सभी अंग्रेज विरोधी प्रवृत्तिया अपनी 56 22 मुगल शहशाह से व्यापार की आज्ञा मागते अग्रेज सौदागर पूरी शिद्दत के साथ मौजूद थी और यह उम जमान म हुआ था जब भारत म ब्रिटिश शासन अपने चरम-वैभव पर था। कुछ इतिहासकारा ने इस क्वल 'सिपाही गदर कहकर इसका महत्त्व कम करने की काशिश की है पर वास्तव में यह भारतीय आजादी का पहला स्वतनता सग्राम था, जिसम अमख्य भारतीया न अपनी कुवानी दी। यह पहली घटना थी जिमम भारतीयो के मानसो म विद्यमान एक प्रबल राजनतिक राष्टीयता एक दुर्दम्य धारा के रूप म बहती हुई दिखाई दी। सिंधु नदी क पूर्व मे इरावती तक ओर उत्तर मे हिमालय से दक्षिण म हिंद महासागर तक अपना साम्राज्य स्थापित करके अग्रज काफी गलतफहमी का शिकार हो गय थे। उन्हाने ज्यादातर लडाइया भारतीय सिपाहिया के दम पर ही जीती थी। राजस्व बढ़ान क चक्कर म उन्हान मनमानी और छल-क्पर स भारतीय रियासता का हडपना शुरू क्यिा। मन् 1856म कपनी क तीन लाख सैनिकाकी फेहरिस्तम केवल 23 000 गारे नामजद थे। भारतीय सिपाहियो पर खर्चा एक गारे के मुकाबले केवल एक तिहाई बैठता था। इसलिए अग्रज ज्यादा माल बचाने के चक्कर म भारतीया का ही अपनी फौज म रखना पमद करत थे। सन् 1857 के विवाह का राष्ट्रीय और जन-क्रांतिमय स्वरूप उन पाच आरापो म माफ हा जाता है, जो अतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर न अग्रजा पर लगाय थ। उन्हाने कहा था कि ब्रिटिश सरकार ने जमीदारां पर बहद मालगुजारा लादी बकाया क लिए उह नीलाम तक पर चढ़ाया और अदालती पीस क जरिए उन्हें तबाह कर दिया। 57 टीपू सुल्तान के यशजो का अंग्रेजो रो सन् 1792 मे आत्मसमर्पण व्यापारिया म कपय नील आर जहाजी माल क्व्यापार का अधिकार छीन लिया गया। उनके हाथ म जा व्यापार बचा भी उमक बदल म भी लागास शुल्क स्टम्प फीस टैक्स, चगी आदि बमल किया गया। नाकरी करन वाल भारतीया का जची मयादा आर वतनमान म पचित परक यह अधिकार भी अग्रजा का दे दिया गया। विलायतम बना माल भारतीय मडिया म याककर स्थानीय जुलाहा धुनिया बढइया लाहारा र माचिया का भिसारी बना दिया। पडिना मौलविया और दूसर पढ़ लिख लागा को सरआम अपमानित किया गया। बहादुर शाह जफर क इन आरापाक परिप्रक्ष्य मे यह साफ हा जाता है कि 1857 विद्राह की बागडार भल ही गजा-नवाबा के हाथ म रही हो और उसकी मुख्य लडाक शक्ति भल ही सिपाही रह हा पर उसक लिए भारतीय जनता कसभी लवका का गालपद किया गया था। नाना माहब ने फ्रास र सम्राट नेपालियन का पलिखकर इन आरापाया समर्थन किया ओर कसम खाई, 'हम तब तक लडते रहेग जब तक हमम ताकत रहेगी और जब तक कि हमम से एक भी आदमी जीवित रहगा। ऐसी प्रचण्ड शपथ तब तक नही साई जा सकती थी जब तक कि शपथ उठान वाली शक्तियो क पीछ किसी नैतिक आवेग का बल कामन कर रहा हा कवल अपनी रियासत या अपन धम क सकीर्ण स्वार्य तमाम भारतीया का इस महासग्राम मनही धकेल सकत थ। इसके लिए जिस व्यापक आधार की जरूरत थी वह स्वय अग्रजा क दमनकारी और लुटरे शासन न दे दिया था। अग्रेज अपनी गलतफहमी म मान चुके थे कि उनकी शक्ति इतनी ठोम हा चुकी है कि उह दिल्ली के बादशाह क नाम के सहार की जरूरत नहीं रह गयी है। वे अपने नाम पर ही शासन चलान लायक हो गय है। पजाब, अवध नागपुर ओर सिंधपीरियासतों का हडपने के साथ-साथ सरकारी लगान वसली म आम किसानो से मारपीट तक की जान लगी। और ता और भारतीय धर्मों का भी खुलआम अपमान किया जाने लगा। सन् 1857 क विद्रोह के बार म प्रचलित है कि कारतूसा मे गाय और सुअर की चर्बी होने और उन्हें चलान से पहल दात से काटने की अनिवार्यता ने सिपाहियो कर भडका - 58 GROWTH BNTISH POWIA MINOIA 000000 Englishumaanjh Acountana" Jocso ..." s Dependent-Steam (ne marathe namam N B Bay of ngai VOIN mulanta- Arabian L Madrasi Gulf यारेन हेस्टिग ने भारतीयो के प्रति थोडा उदारतावादी रवैय्या अपनाया परतु उसके पाद अग्रेजो का साम्राज्यवादी शिकजा उत्तरोतर कसता गया और सारा भारत दमन की चपकी में पिसने लगा। TIPATH 1.M. दिया। पर असल म यह वजह उन तमाम वजहो म से एक थी जिनका ऊपर वर्णन किया जा चुका है। बगावत की पहली चिंगारी फूटन से पहले विद्राह की एक माटी याजना तैयार करने की कोशिश भी की गयी थी। राटी आर लाल कमल के फूला क जरिए बगावत का मदेश एक रजीमट से दसरे म ले जाया जाता था। नाना साहब के मुख्य सलाहकार अजीमुल्ला, अवध क मौलवी अहमदुल्ला शाह, मुगल-सम्राट बहादुर शाह जफर और दूसर राजे-नवाबा मे पन-व्यवहार और बैठका के जरिए 31 मई का दिन विद्रोह के लिए तय किया गया था। इन लोगो ने मान लिया था कि व मुगल-सम्राट के झडे तले सगठित होगे और अग्रेजा को अपने मादर-वतन से मार भगायगे। पर तय तारीख से पहले ही 29 मार्च, 1857 को कलकत्ता से 16 मील दूर बैरकपुर म सिपाही मगलपाडे न विद्रोह कर दिया। उसने अपन साथियो को ललकारा ओर अपने अग्रेज अफसर को ताबडतोड गाली से उडादिया। अग्रेज डर के मारे काप गये। वीरभूमि, बसकडा, जसोर, कृष्णनगर मालदा, ढाका, फरीदपुर, बाकरगज, त्रिपुरा, सिलहट, चटगाव, खाती और जयतिया पहाडियो म विद्रोह के अखुए फूट पडे। मई के पहले हफ्ते में मेरठ छावनी ने बगावत का झडा बुलद कर दिया। असम, उडीसा और छोटा नागपुर म बागिया ने अग्रेजा को नाको चने चबवा दिये। उत्तर भारत म अवध, रुहेलखण्ड इलाहाबाद, आगरा, मेरठ डिवीजन और पश्चिमी बिहार मे अधिकाश जनता ब्रिटिश शासन के खिलाफ उठ खडी हुई। दिल्ली मे विद्रोही सिपाहियो ने बहादुर शाह जफर को ताज पहनाया। दिल्ली के आसपास गुडगाव हिसार और रोहतक के आमो-खास ने भी 59
ता या टोपे
बहादर शाह जफर
भीर कासिम
हैदर अली
कमरसिंह
लक्ष्मी बाई
अमरचढ याठिया
मगल पारे
नाना साहब
को पाम्पी
टीपू सुल्तान
पतवत फरक
आजादी जिनके खून से हर यूद मे रची पसी पी।
24
the सन् 1857 का सिपाही विद्रोह बादशाह का माध दिया। 11 और 12 मई को सरदाना और बागपत में बगावत हुईं। 13 मई का रुडकी आजाद हा गया। 26 मई को बुलदशहर में एक मुगल सूबेदार ने प्रशासन सभाल लिया। 14 मई को मुजफ्फरनगर में 20 मई का अलीगढ़ म ओर 30 जून को सहारनपुर में विद्राह हुआ। बरली में विद्रोह के बाद रामपुर मुरादाबाद, अमरोहा, विजनार बदाय, शाहजहापुर, फर्रुखाबाद फतेहगढ़ सीतापुर इटावा, मैनपुरी, आगरा, मथुरा और इलाहाबाद म अग्रजा को ध्वस्त कर दिया गया। फतहपुर, हमीरपुर आर बादा भी विवाह म शामिल हा गय। 4 जून का कानपुर म विद्रोहिया सजान पर कब्जा कर दिल्ली की तरफ कूच कर दिया। नाना साहब पेशवा धापित हुए। 4 जून को ही झामी की रानी लक्ष्मी बाई की सेना के सिपाहिया न अपने अफसरा पर हमला बालकर रानी क शासक हाने की घाषणाकर दी। बनारस डिवीजन के चप्पे-चप्प स कपनी बहादुर क हाथ स सत्ता फिसलती चली गयी। जून क अत तक अवध प्रात का प्रत्यक जिला विद्राहिया की गिरफ्त म पहुच चुका था। सन् 1857 क सितबर तक आत-आत पूर देश का वगावत न अपन आगाश म ले लिया था। इस विद्रोह क पीछ काम कर रही याजना का पता इस तथ्य स भी लगता है कि कानपुर की मुहिम म शहजादा फिराज की मना ग्वालियर की सना वावू क्वर सिंह की बिहारी सना आदिन नाना साहब की मदद की थी। बहादर शाह जफरन राजस्थान पजाब आर उत्तर भारत के राजाआ और नवाबा का पत्र लिखकर अपन यड के तल जमा करन की काशिश की थी। राज-रजवाडा ने सौ वर्ष पुराने आपमी यगड सत्म कर दिये थ। 61 5 मार्च 1858 सेसन में गमकर धन की हाली हुई। दा माल तर यह नथारथिन गटर चलता रहा। नतत्व अनपम गुणा स युक्त दिल्ली के शहजाद फिराजन रहलसण्डम सान बहादरपान न अवध की वगम हजरत महल न विहार क्मरी अरमिहान महान मनापति रामचन्द्र पाडरग उफतात्या टापन बदलराड मे झासी की रानी लक्ष्मी शाह ने दिल्ली की सनाव मत्य सनापति जनरल रस्त खान विद्राही नेता महान शायर आर मुगल वंश क अतिम चिराग बहादर शाह जफर न और पशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना माहव ने विद्राह में शानदार भूमिकाए निभायी ओर बलिदान दिये। इन महान याद्धाआकाइस महाविद्राहमदिया गया अशान कभी भलाया नहीं जा सकता। एक्ता के साथ साय भयानक विश्वासघात की मिसाल भी सामने आयी। तात्या ताप विश्वासघात के कारण पकडे गये। रानी लक्ष्मी बाई ने अपना किला विश्वासघात के कारण खाया। बहादर शाह जफर के कछ चाटवारा न उनके साथ धोखा किया। विद्रोहियो म अनशासन आर मगठन की कमी रणनीति के लिहाज स अग्रजा की श्रेष्ठता, विगाह के कछ नेताआ रा ढलमुलपन इस महाविद्रोह के पतन के कारण बन। असफलता के बाद अग्रजो न सपूर्ण प्रतिशोध क्षमता एव पाशविक्ता क माथ विद्राहिया की नशम हत्या की। उहफांसी पर चढ़ाया ओर जमान किया पर यह तय हो चुका था कि भारतीय जनता हमेशा हमेशा के लिए उनकी गुलाम हाकर नहीं रही। सन् 1859 के गवर्नमट ऑफ इंडिया एक्ट ३ तहत ग्रिटिश राज का भारत का शासन इस्ट इंडिया कपनी से ल लेना पडा। महाविद्राह ने उन्ह बता दिया था कि अब वे पुराने ढंग से शासन नही चला सकत। ठीक 90 साल बाद सन् 1947 म भारतीय आजादी क संग्राम के दयाव और सारी दुनिया म अपने साम्राज्य के पतन के कारण अग्रजा का भारत छोड़ना पड़ा। 62 अमरीका की दूसरी क्राति (1860 1865) अमरीकी गृह-युद्ध की बिसात पर भविष्य का औद्योगिक विश्व भी दाय पर लगा हुआ था। लिकन ने शुरू मे दासों से कपास की काश्त कराने वाले मालिको की चुनौती को ठीक से नहीं समझा, पर जब उहोने एक बार दासो की मुक्ति का सकल्प लिया तो हर मोर्चे पर दक्षिण की सेनाओ की पराजय होने लगी। अमरीका की दूसरी क्राति ने न केवल नीग्रो गुलामो को उनकी बुनियादी आजादी और नागरिक अधिकार दिलवाये अपितु पूरे देश को एक औद्योगिक महाशक्ति बनने की राह पर भी डाल दिया। न हाथा स आजादी ता हासिल कर ली थी लकिन अभी वहा पूरे ससदीय लाक्तत्र की स्थापना हानी बाकी थी। टामस जेफरसन के लिखे हुए 'स्वतत्रता क पापणा-पत्र'न दुनिया के कई देशा पर असर डाला पर अमरीका क'नीग्रा गुलाम अभी भी उम सावभाम और सर्वोच्च स्वतत्रता से वंचित थे जिसक मैद्धांतिक मूल्या न अमरीका का आजादी की राह का यात्री बनाया था। उस समय अमरीकी समाज और राजनीति एक तरह स दा भागा म बटी हुई थी। इनम स एक धडा औद्योगिक क्रांति का ममथक था। यह धडा युराप क इस विश्वास म भागीदार था कि दास-प्रथा सपूर्ण मानवता क माथे पर लगा बदनुमा क्लक है और इसे जैसे भी मभव हा मिटा दिया जाना चाहिए। दूसरी आर अमरीका के परपरागत दाम मालिक और मामत थे जिनका मुख्य धधा सती और खासतौर मे पाम की सनी परना था। दास-प्रथा क विराधिया का उत्तर 2 23 राज्या पर प्रभुत्व था और क्पान व दाम-मालिक उत्पादका क पाम दक्षिण क ग्यारह राज्य थे। वस्तुत इम भौगालिक विभाजन की पष्ठभूमि या समझे बिना अमरीका की दूसरी क्रानि का पूरी तरह ममया भी नहीं जा मरता। यह यवल एक छुटभैय विम्म का गृह युद्ध नहीं था कि इनमविश्व की पूरी औद्योगिक सभ्यता का भविष्य भी दाव पर लगा हुआ था। 63 अब्राहम लिन टामस जैफरसन . अमरीका के पाम धन धान्य की कोई कमी न थी। 19वी शताब्दी के मध्य म वहा उद्याग धग का पूरी तजी मविकास हआ था। इसी विकास स आवपित हाकर अग्रज आइरिश आर जर्मन आप्रवासी अपन वणिम र्भावष्य की खाज म अमरीका आत जा रह थे। उन्हें लगता था कि अमरीका क खल मदानो म सशहाभी क सजानेछिप हुए हैं। सन् 1850 स सन 1860 के बीच इस आवजन न अमरीकी आबादी का दाक्राड तीस लाख से तीन कगड बीस लाख कर दिया। उद्यागा कविकास कलिए श्रम शक्ति की जरूरत हाती है। दर्भाग्य से वह श्रम शक्ति उस समय दास पथा के दानवी बधना म जकडी हुई थी। दक्षिण के चार राज्याम चालीमालास नीग्रा दाम थे जो केवल कपास क बगीचा म अपने मालिका की इच्छानमारजिदा क्हपतलिया की तरह काम करत थे। उहजिसा की तरह खरीदा-जचा जाता था। बाली लगाकर मामान की तरह नीलाम पर चढाया जाता था। जबकि पुराप म काफी पहल ही दास प्रथा खत्म करक कानन बन चुका था। मन 1850 से ही दक्षिण के कपास-किमान जिनकी जीवन-शैली पुरान सामता जमी थी अपन आपको एक अलग समुदाय के रूप में देखन लग थ। नीता दास उनक लिए उत्पादन आर आशा-आराम कबोलत आजार था उत्तर की आद्यागिक क्रांति उनकी प्रम कहानी में एक खलनायिका के समान थी जो उनके स्वर्ग का नष्ट कर डालना चाहती थी। दक्षिण वालाकाएक गम और भी साये जा रहा था और वह गम था अमरीकी सीनट म उत्तर वाला का प्रतिनिधित्व लगातार बढ़ना। इभी माल दाना पक्षाकबीच एक समझौत की काशिश की गयी और दास प्रथा विगठित राज्या मखत्म कर दी गयी। पर दक्षिण स भाग कर आय दामाचा वापस उनकगलाम मालिका केपास भज जानकानियम भी बना दिया गया। इस परिस्थिात न एमी कई दखात घटनाआ का जाम दिया जिनक ऊपर हैारयद यीचर स्टा (Harnat Beecher Stone) ने अपना अमर उपन्याम अक्ल टाम्म केविन लिखा। सन् 1852 में प्रकाशित इस उपन्यास नमारी दनिया के सामन 64 राष्टपति चुने जाने के यार मरा पहराते निस्न TOBDSOLD&LET PY FUNLI AUDYTOR, HONDAY the 8th Mar 1829, vince TCL TIME trative 40 SILAVESA RANSMomtmkeatirnatandan MILLIAC-AwaCTanmoldeos TAUTA----- -numar Dow TODELET MARA Home MALL.andFIKA SLAVE AMARA -- ऐसे शर्मनाक विज्ञापनो से होती थी गुलामो की विक्री दाम-प्रथा के समथक दक्षिण अमरीकी राज्या के चेहरा पर कालिख पोत दी। धीर-धीर राष्टपति चुनावा और नय बनन वाले राज्या (कसाम नेवास्ता उटाह और न्य मैक्सिको) के कारण दास-प्रथा के सवाल पर एक भौगालिक विभाजन सा होता चला गया। मानवीय मूल्या के अतिरिक्त इसके पीछ बड प्रवल आथिक कारण भी थे। उनरी इलाक उद्यागा आर लाकतर क हामी थे और विदेश व्यापार पर तरह तरह के नियत्रण लगाते थे। इसके विपरीत दक्षिण वाल मुक्त व्यापार चाहत थे ताकि उह कपास नियात करक बदले में विदशी माल परीदन की सुविधा मिलती रह। कपास-उत्पादका को यह भी लगता था कि जिन युरापीय देशा का माल व सरीदत हैं वे अपने फायदे को मह नजर रखते हुए उनकी मदद करेगा उत्तर के सामन यह समस्या खड़ी थी कि अगर विदेशी माल के आन पर प्रतिबंध नही लगता उसके कारखाना म बनी चीजो का क्या सन् 1860 मे राष्ट्रपति का चुनाव हुआ। चार उम्मीदवार लडे पर जीत रिपब्लिकन 66 म मटी म गुलामो सी यिफ्री - उम्मीदवार अब्राहम लिक्न की हइ लिक्न एक गरीय क्मिान परिवार क्वट थ। उन्ह औपचारिक शिक्षा भी नाम-मात्र कला ही मिली थी पर उहान सद का एक लाप्रिय नता और अद्भुत वक्ता के रूप म विकसित कर लिया था। लव कद कलिकन न अपन जीवन म लकडहार का काम भी क्यिा था। इसलिए उह गरीया आर मध्यवर्ग कासासा समथन हासिल था। व शर सही दास प्रथा का खत्म कर दन वक्ट्टर हिमायती थ। कहा जा मक्ता है कि दास-प्रथा का सवाल उत्तर आर दक्षिण कधीच एक विभाजक रेसावन गया था। लिंकन क चुनाव जीतन का अथ ही दक्षिण क दास मालिका का नाराज हा जाना था। दिसबर, 1860 म दक्षिण माउथ कलिना न पुद का सयुक्त राज्य अमरीका क यूनियन से अलग धापित कर दिया। जनवरी आत-आतमिसीसिपी, अलवामा, फ्लोरिडा जाजिया और लुइसियाना न भी यूनियन स अलग हाकर अपनी आजादी धापित कर दी। अगले महीने टेक्मासन भी बगावत कर दी। 12 अप्रल, 1861 को दक्षिण की सनाआ न फोर्ट सम्टर पर हमला कर दिया। यही स चाल्सटन के बदरगाह का निर्यात क्यिा जाता था। इस तरह अमरीकी गृह-युद्ध की शुरुआत हुई, जिसन अमरीका को दूसरी क्राति क माग पर प्रशस्त किया। दसत ही देखते वर्जीनिया, क्सास, नॉर्थ कैरातिना ओर टनमीन दक्षिण के महासघ की सदस्यता स्वीकार कर ली। अब दो अमरीका बन चुके थ। एक यूनियन समर्थक कहलाता था और दूसरा कनफ्डरशन समथक। कनफडरशन न रिचमण्ड को अपनी राजधानी बना लिया था। जफरसन डेविस इस नय दश क राष्टपति बन गये थ। यह अब्राहम लिंकन के सामन सीधी चुनाती थी।
जनरल सी या आत्मसमर्पण - लिक्न न इस पहल हल्क आर ढलमल ढग मलिया। शरू म उनका रवया क्छ बागिया कामवक मिसान जमा था। इसलिए उन्हान यद्ध प्रयामा पर साम जार नहीं दिया। मभवत यह गलतफहमी दाना पक्षा क शक्ति मतलन के कारण पदा हइ थी। नियन वाल गज्या की जनसरया दा कराड दस लास थी ओर क्नफडरशन वाला की क्वन एक कराड बीम लास। उमम भी 40 लास ता दाम ही थे। यूनियन कपास वित्तीय आर नानिक ताक्त भी दक्षिण की तनना म काफी बढी चढ़ी थी। लिक्न न दक्षिण के वागिया का पराम्त करन क लिए 75 हजार म्वय मवय इक्टठ क्यिा इनकी वागडार भी काइ साम कशल हाथा म नही दी गयी। उधर दक्षिण वाल ता क्यामरा की लडाइ लड रह थ। उनक पाम रॉयट इली जमा जारदार मनापति था। एक यादा आर चरित्रवान व्यक्ति करूपमली की प्रतिष्ठा म प्रभावित हाकर दक्षिण की पाजान इन 75 हजार म्वय सवका का रोद डाला। दा साल तक एक बाद एक जीत हामिल कग्य दक्षिण की फौजा न लिक्न की मीठ स्वप्न दसती आस भडभडावर साल दी। अब लिक्न न गह यद्ध का पूरी गभीरता मलना शक्यिा। मन 1663 म पोजी मवा अनिवाय कर दी गयी। अब ममम्या यह थी कि यूनियन की पौजा की कमान क्मिक हाथ म दी जाय लिक्न जनरल लिमिम एम ग्राट के हक मथ पर लागा न कहा कि जनरल ग्राट पियक्क्ड हैं। आसिर निक्न न ग्राट का ही मनापति बनाया। नतीज पारन 68 लिंकन की फौजो के पमाडर जनरल यूलिसिस एस ग्राट मिल। जनरल शरमन की मदद म जनरल ग्राट न दक्षिण की फाजा को मात दनी शुरू कर दीं। पहली शिस्त न्यू आलिएस की लडाइ म दी गयी आर 3 जलाई 1863 का गटिमवर्ग (Gettysberg) की निर्णायक लडाई म ता पलडा पूरी तरह लिकन की तरफ झुक गया। जनरल ग्राट ने जोरदार फाजी अभियान चलाकर अगल ही दिन विक्सबग (Vicksberg} का जीत लिया ओर वर्जीनिया का पश्चिमी इलाक म काट दिया। मन् 1864 क आत-आत शेरमन और ग्राट की फाजा न दक्षिण की फोजा का पूरी तरह से घर लिया था। दक्षिण समुद्रनटीय अड्डा स रसद बद हा गयी। अब थलीय सीमाआ पर भी काई परिदा पर नहीं मार सकता था। आखिर रिचमड पर भी कब्जा हा गया। जनरल ली की फाज न हथियार डालदिय। 9 अप्रेल 1865 का फोजी सधि हुइ आर गह-युद्ध सत्म हा गया। सन् 1864 म अपन राष्टपतित्व का दूसरा कार्यकाल गुजारते वक्त लिकन तय कर चुके थे कि हार हुए दक्षिण के साथ नरमी का बर्ताव किया जायेगा। उन्होन सन् 1863 मे ही कानूनन दास-प्रथा खत्म कर दी थी। सन् 1865 म दास-प्रथा व्यावहारिक रूप स भी खत्म हो गयी लकिन दक्षिणी राज्या म काला की आजादी सीमित क्यि जान की काशिशे होती रही। लिंकन की हत्या के बाद सन् 1866 म अमरीकी काग्रस न एक नागरिक आधकार कानून पारित किया जिससे कालो को वोट देन, जनवधा पर हस्ताक्षर करने मुकदमा चलान और गवाही दन के अधिकार मिल गये। 69 C प N . . alth undary Mum Qam MNA ND MMreal was a ul SRI A NAM 2. ak nd Pawar T. Oriman- Claneta Belgiant menungam St In VAGIN y - -RAMA rfota NOAY CARO NA mine- WORD-1 Swiminalim onal MAM to M M and Craa Htlantic Ocean Heroin Oreas- CEOAC aanlamma Druenu gurane EAST Gulf of Mexico The United States da và tư Cmfedératim Perud BAHAMA 00 60 Scats of miles तत्कालीन अमरीकी मानचित्र M यद्ध स दक्षिण बरबाद हा चुका था। इसी कारण काला का अपनी नयी आजादी का फारी लाभ नहीं मिला। उन्ह तुरत बराबरी का दजा भी नहीं मिल पाया। गारा न उह हमशा गद आर गडबडी करने वाले लागाकस्पमदखा। लिकन की काशिशास काला को कानूनी आजादी ता मिल गयी थी पर अभी अपनी अमली आजादी हासिल करन क लिए उन्ह न जाने कितनी कुर्बानिया दनी थी। यह जरूर है कि गह-युद्ध के बाद शुरुआती परशानिया क दिन बीत जान क बाद अमरीका एक बार फिर खुशहाली की राह पर चल पडा। 20वी शताब्दी म अमरीका का विश्व की महाशक्ति बनाने का काफी कुछ श्रय इस गृह-युद्ध का ही दिया जाना चाहिए। अगर दास-प्रथा क समर्थक पराजित न होत तावे उत्पादक शक्तिया ही मुक्त न हो पाती, जा किसी भी राष्ट का औद्यागिक महाशक्ति बनान के लिए जरूरी होती हैं। 70 इतालवी क्राति (1860 1867) इतालवी क्राति को दुनिया इटली के एकीकरण आदालन के नाम से जानती है। यह एक तरह से त्रिकोणीय सघर्ष था। एक ओर आस्ट्रियाई और फ्रासीसी पौगो की ताकत थी, दूसरी ओर राजा इमानुएल और प्रधानमत्री काउण्ट कैयर की शकुनि नुमा चाले थीं और तीसरी ओर गैरीवाल्डी और मेजिनी जैसे समर्पित क्रांतिकारी थे। इटली की किसान जनता ने गैरीवाल्डी को अपना भरपूर प्यार दिया।जहा-जहा उनके लाल कुर्ती के सयार गये, उनका खुलेदिल से स्वागत हुआ। गैरीबाल्डी की तलवार, मेजिनी के विचारो और जनता के समर्थन ने आखिरकार प्रासीसी और आस्ट्रियाईशिकजे से इतालवी द्वीपसमूह को मुक्त कराकर एक एकीकृत एव स्वतत्र राष्ट्र बनाने मे सफलता प्राप्त कर हीती। न् 1815 म वियना की काग्रम म आस्ट्रिया न इटली क घाट राज्या पर अपन प्रभुत्व का अधिकार हासिल कर लिया। इन राज्या पर छाट-छाट राजवशा का शासन था। स्वतत्रता भाइचारे और समानता जैस शब्दा का इन राजाआ क लिएकाइ अर्थ नही था। हर तरह क क्रांतिकारी विचारा का करतापूर्वक दमन कर दना उनक खून म था। इमी दौरान इटली के विभिन्न द्वीपा का एक करके एकीक्त दश यनान का सपना दस्सन वाल क्रांतिकारी इतालवियो का एक संगठन 'यग इटली मत्रिय हआ। इस संगठन के नेता थ-ग्रसेपी मेजिनी (Guseppe Marmni) और इम मगठन में पहली बार गिसपी गैरीबाल्डी (Giuseppe Garibaldi) ने भी आजाद और एकताबद्ध इटली क लक्ष्य क लिए खुद को समर्पित किया। यग इटली की क्रांति करने की महत्वाकाक्षी योजना बुरी तरह असफल हा गयी। यहा तक कि मजिनी और गैरीयाल्डी या भागना पड़ा। पीडमाट (Predmont) में गैरीयाडीया उनकी गैरहाजिरीम मौत की सजा दी गयी। गैरीवाल्डीन अगलकासाल मेजिनी गैरीबाल्डी दक्षिण अमरीका की क्रातिकारी परिस्थितिया में अपने साथिया के साथ ब्राजील और उरुगुए की जाजादी के लिए संघर्ष करते हुए गुजार। इसी बीच में इटली म पूरी तजी क साथ प्रातिकारी परिस्थितिया तैयार हाती रही। सन 1840 आते आत सभी महत्त्वपूर्ण इतालविया का यकीन हा चला था कि पीडमाट और उसक युवक राजा विक्टर इमानएल द्वितीय क तहत इटली का एकीकरण किया जा सकता है। इस राजा क पास एक बढ़िया फौज विटन की हमदर्दी और काउण्ट मिला कवर (Carour) के रूप म एक चतर राजनयिक विद्यमान था। सन् 1852 में राजा न काउण्ट को प्रधानमत्री बनाया। काउण्ट यह ता चाहता था कि इटली एवं हा पर वह इसका श्रय मजिनी ओर गरीबाल्डी जसी रडीक्ल क्रांतिकारिमा का नही लन दना चाहता था। काउण्ट न घरल मार्च पर उदार नीतिया अपनायी और विदश म राजा और पीडमाट का ज्यादा म ज्यादा महत्त्व दिलान की जी-ताड कोशिश की। श्रीमिया क यद में हइ परिस पाग्रम म आस्ट्रिया की आपत्ति के बावजूद काउण्ट न अपनी कशलता में पीडमाट की भागीदारी सुनिश्चित कर दिसायी। प्रास क सम्राट नपालियन ततीय की याशिशा और इच्छा के बावजूद भी इस काग्रमम इटली क सवाल पर गौर नहीं किया गया पर काउण्ट वा इम मुद्दे पर एक रिपाट तैयार करक पििधिया म बाटन का मौकामिल गया। मन् 1858 मकाउण्ट न नपालियन के साथ एक र्मोध कर ली। सारत इस धिम इन मुद्दा पर महमति प्रकट की गयी थी। आस्ट्रिया द्वारा हमला हान की स्थिति मग्राम और पीडमोट मिलकर लड़गा जीत की हालत म पीडमाट क राजा या लाम्याही (Lombardy) और वर्नाशया (lenetia) का नारा मिनगा। इमम पीडमाट की 72 काउण्ट केवर विक्टर इमानुएल हुकूमत का विस्तार एल्प्स (Alps) स एडियाटिक (Adriatic) तक फेल जायगा। सवॉय (Savoy) आर नीस (Nice) फ्राम क अधिकार म हाग। इटली क शष बचे इलाका म मध्य इटली की रियासत बना दी जायगी। राम आर नपल्स के साथ मिलकर य चारा इलाक महामघ बना लेग। मन् 1859 की शुरूआत हात ही आस्टिया क साथ युद्ध शुरू हो गया। फ्रासीसी मना की मदद स पीडमोट नमिलान तक का रास्ता साफ कर लिया। नेपालियन न पाया कि मध्य इटली के कई राज्य पीडमाट म विलय हा जान के इच्छुक हैं। इस तरह इटनी म स्वत स्फूत ढग स एकीकरण का आदालन शुरू हा गया। उधर गेरीबाल्डी की छवि एक अत्यत लोकप्रिय गुरिल्ला सनापति कम्पम स्थापित हाती जा रही थी। वसन् 1848 म दक्षिण अमरीका स कापी ख्याति अजित करक लाट य। आस्ट्रियाई फोजा क सिलाफ मुट्ठी भर सैनिका के दम पर गेरीवाल्डी न महान मफलताए प्राप्त की थी। इटली की जनता की निगाह म व मुक्तिदाता आर नायक थ। इसक विपरीत गेरीवाल्डी की प्रतिष्ठा आर लाप्रियता स घबराकर राम म उह क्वल 500 सैनिया की कमान सौंपी गयी थी। गेरीवाल्डी न किमी तरह काशिश करके अपने निका की सख्या एक हजार की ओर उन्ह छापामार युद्ध का प्रशिक्षण देना शुक्यिा। इमी प्रशिक्षित सना के बलबूत पर गेरीवाल्डी न गम की हिफाजत मदा बार अपन मदन दम गुनी बड़ी सनाआ का पीठ दिखाकर भागन के लिए विवश कर दिया। इटली क एकीकरण की माग से चौंककर नपोलियन ने आस्ट्रिया व माथ धि कर ली। इसम इटली के राष्ट्रवादिया को गहरा धक्का लगा। प्रधानमत्री काउण्ट बैंवर न ता विराध म अपना इस्तीफा तक दे दिया। याउण्ट न खफिया तौर पर गैरीवाल्डी को बताया और उन्ह अपन साथ मिल जान की दावत दी। गैरीवाल्डी को लगने लगा कि इटली एकीकरण का वक्त आ गया है। उहोन एक बार फिर अपन मशहूर लाल क्ती केमवार, 73 AUSTRIAHUNCAR) FRANCE SWITZERLANOM TRENT 1018AAPP M.in ISTA14 SAYDY (Trime Bir) -- CROATIA KPIED HONTS - AO BOSNIA CE (TFir 04 IPuscNT A ARCU STATIS +46 CHURCH KINGDOUR ORSICA I) RAL SARDINIA KINGDOM of the TWO SICILIES Allme SICILY The UNIFICATION of ITALY Kingaamef Sardarnia (Pune) A R added 1800 1806 1870 MON एकीकृत इटली का मानचित्र को भर्ती करना शुरू किया। गैरीबाल्डी की राजा विक्टर इमानुएल से भी भट हुई। प्रास और आस्ट्रिया की संधि से इमानुएल भी कतई खुश नहीं थे। असलियत यह थी कि काउण्ट और राजा दाना गैरीबाल्डी का जनता का समर्थन हासिल करने के लिए एक मोहरे की तरह इस्तेमाल करना चाहत थे। वे नहीं चाहते थकि किसी भी जीत का श्रेय इतालवी किसानो के इस बहादुर मसीहा को मिले। दूरदर्श गैरीबाल्डी ने इसे तुरत भाप लिया और इतनी तजी स फौजी कार्रवाई शुरू कीकि काउण्ट की सारी याजना धरी की धरी रह गयी। मई 1860 म गैरीवाल्डी क लाल कुर्ती के हजार सवारा न मिसली (Sicily) पर हमला किया और स्थानीय विद्रोहिया की मदद सफ्तह हासिल कर ली। गैरीबाल्डी ने आस्ट्रियाई फौजा को एक के बाद एक जोरदार शिकस्त - - 74 ।
Ja 11 मई, 1860 को गैरीवाल्डी का आगमन दना जारी रखा। जहा-जहा स उनक फौजी निकलते, जनता उनका खुल दिल म स्वागत करती। गैरीबाल्डी का सदेश हाता, आआ दास्ता मैं तुम्ह तकलीफ कठिनाई और थकान दूगा। हम जीतगे या मर जायग। 'गेरीबाल्डी म डरकर आस्ट्रियाई सैनिक अपनी चौक्यिा छाडकर भागजात। इस अद्भुत क्रांतिकारी पराक्रम क लिए गैरीबाल्डी को राजा न स्वर्ण-पदक प्रदान क्यिा। सिसली पर कब्जा करने क बाद गैरीबाल्डी की फौज न नपल्स की आररुख क्यिा। नपालियन ने ब्रिटन म आग्रह क्यिा कि वह गैरीबाल्डी का राक्न क लिए फ्रासीसी मना की भदद करे पर ब्रिटन न एमा करने स इकार कर दिया। गैरीवाल्डीन सितवर मनपल्मका दरवाजा भी पार कर लिया। उनका अगलानिशाना रोम था। गैरीवाल्डी का ख्याल था कि राम को फतह कर लन के बाद इटली के एकीकरण का महान लक्ष्य पूरा हा जायगा, पर राजा इमानुएल और काउण्ट न गैरीवाल्डी को एसा करन स राका: गैरीवाल्डी न देशभक्ति के महान लक्ष्यो स प्ररित हाकर राजनीति छाड दी और राती करन चत गये। इसके बाद राजान उह काफी प्रलोभन दिय पर उहान अपना निर्णय नहीं बदला। गैरीबाल्डी की शानदार जीता म राम और वनिम का धाडकर याची मभी राज्य पीडमोट में विलीन हा गय थ। इटली के एकीकरण में भी थाही ही चमी चाची थी। फरवरी 1861 मे टयूरिन में पहली राष्ट्रीय मसद बैठी। 14 माचकाइम ममदन राम का इटली की राजधानी घोषित क्यिा। कि राम वास्तविकता में नयी मरवार के पास नहीं था, इसलिए प्रतीकात्मक रूपम राम की दिशा में पलोरमया राजधानी धना लिया गया। 75 नेपोलियन बोनापार्ट अब इटली के एकीकरण म मात्र राम ही वाधक था इसलिए सारी दुनिया के कैथोलिका का इस ममल मदिलचस्पी हा गयी। सन् 1862 म गरीवाल्डी न राम पर हमला करके उस जीतना चाहा पर इस बार उन्ह हार का मुख दसना पड़ा। सन् 1866 तक आत-आत इटलीन प्रशास मधिकर ली। प्रशान आस्टिया कायद्ध म हराकर इटली का मजबूत किया। नवबर 1867 मे गेरीवाल्डीन एक बार फिर राम पर हमला वाना। पर इस बार उन्ह बीच-नाडिग चमपाट (Breech loading Chesspot) राइफला म नम फ्रासीसी सनिका का सामना करना पड़ा। गैरीबाल्डी के फोजी एक बार फिर अपन चहरा पर हार लिख लोट आय! इस पराजय के बावजूद इटली क एकीकरण का ज्यादा गमय तक गक पाना मुश्किल था। दरअसल उस समय अतराष्टीय परिस्थितिया बडी तजी स बदल रही थी। फ्रास ओर जमनी क यद्ध म फ़ास का पलडा हलका पड रहा था। इसलिए फ्रास को राम से अपनी वह गेरीमन बनानी पड़ी जिमन गेरीवाल्डी का आग नही बढन दिया था। नवबर 1867 म इस गेरीमन की अनुपस्थिति में इतालवी सनिका न राम में कदम रख आर इटली के एकीकरण का महान लक्ष्य पूरा हो गया। इतालवी क्राति न दनिया का दा नायाय हीरा दिय-मजिनी और गेरीवाडी। मजिनी जिसन इटली क एकीररण और आजादी का स्वप्न देखा और गैरीवाल्डी जिसने किमान जनता की मदद आर हमदर्दी स इस सपने को धरती पर उतारा। 76 पेरिस कम्यून (1871) राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा और शोषण से मुक्ति के लिए सन् 1871 मे पेरिसयासिपो ने 'दुनिया के पहले सर्वहारा राज्य की स्थापना की। 'पेरिस कम्यून' के नाम से दुनिया भर में मशहूर इस क्राति की मात्र 72दिन की अल्पायु मे ही मत्यु हो गयी। पूजीपतियो की नरभक्षी फौज ने इसे पनपने से पहले ही कुचल दिया। 26 हजार पेरिसवासियो ने क्राति के इस महायज्ञ में अपने प्राण होम कर दिये। असफलता के यायजूद भी पेरिस कम्यून ने मजदूरो को सिखाया कि घ्यायहारिक रूप से क्राति कैसे की जाती है। कम्यून की असफलता के सागर का मधन करके ही विश्व कम्युनिज्म के सस्थापक कार्ल मार्स ने 'सर्वहारा की तानाशाही' का स्वर्णिम सिद्धात निकाला, जिस पर चलकर भविष्य की अनेक क्रातियो को नाकामी के अधे कुए मे फिसलने से बचाया जा सका। 'न् 1850 के बाद सार युराप म औद्यागिक क्रांति अपन लव-लब डग भरती हुई स इसी असख्य मजदूर स्पष्टत एक अदम्य शक्ति क रूप मे उभरते हुए दृष्टिगाचर हाने लगे थे। दार्शनिक और सिद्धातवेत्ता इसी सवहारा वर्ग का समाज की धुरी मस्थित परिवतनकारी शक्ति मानकर अध्ययन मनन म लगे हुए थे। पूजीवादी शाषण के खिलाफ विटन, प्रास और जर्मनी मे मजदूरा के आदोलन पूर उफान पर थे। वाल मार्स और प्रेडिक्स एगल्मन 'कम्युनिस्ट घाषणा पत्र की रचना करके लदन ममन् 1864म पहला अतराष्ट्रीय मजदूर सघ गठित कर लिया था। इम इटरनशनल की पहली काग्रस सन् 1866 मजिनवा महुई। इस सब के बावजूद मैद्धांतिक रूप मे पुष्ट कम्युनिस्ट विचारा और लक्ष्या का अभी व्यावहारिक कसौटी पर क्सा जाना बाकी था। सन् 1871 म परिन म स्थापित हुए पहल समाजवादी राज्य ने माक्स तथा एगल्स को अपने सिखाता की मफलता-असफलता का विश्लषण करने के लिए समुचित निकप प्रदान क्यि। माक्स न परिस कम्यून की m टाउन हॉल मे पेरिस कम्यून की बैठक नाकामयाबी स सर्वहारा का अधिनायकत्व जैसे सिद्धात को खोज निकाला। दरअसल, 'पेरिस कम्यून के नाम से मशहूर मन् 1871 की जनक्राति ने युरोपीय मजदूर वर्ग का न केवल जाति करना सिखाया बल्कि क्रानि की रक्षा करने की दिशा मे भी निर्णायक माग दर्शन प्रदान किया। फ्रास और प्रशा के बीच चल रह युद्ध के अत न पूर फ्रास के दशभक्तो की आत्माआ पर बरी तरह चोट की थी। यह लडाई प्रशा के शासक बिस्मार्क की जर्मनी का एकीकरण करने की महत्त्वाकाक्षा की देन थी। फ्रास की पराजय के बाद हुई सधि के कारण जर्मन फौजी का परिस मे होकर विजय मार्च करना था। परिस की जनता भला इसे कैसे बर्दाश्त करती? सन् 1789 मे जिन परिमवासिया न लगातार कई क्रातिया में भाग लेकर खुद का युराप भर के क्रांतिकारिया का अगुआ बना लिया था, उनके सामन अब राष्टीय सम्मान की रक्षा करन की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी आ गयी थी। युद्ध की पूरी अवधि के दौरानफ्रासीसी हमशा दो भागो म बटे रहा एक हिस्सा प्रशा के साथ शाति चाहता था भले ही वह कैमी भी अपमानजनक शर्तों पर क्यो न हो। दूसरा हिस्सा युद्ध चाहता था और गणराज्य की स्थापना की माग करता था। फरवरी 1871 में युद्ध खत्म होने के बाद हुए पहल चुनाव मे 600 प्रतिनिधि चुने गये। इनम 400 एसे थे, जा शांति चाहत थे और 200 ऐसे जो गणराज्य के समर्थक थे और 'मरते दम तक लडना' चाहत थे। इन प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय असेंबली ने अपनी पहली बैठक म एडाल्फ थिएर (Adolf Thters) का सरकार का अध्यक्ष चुना। 7a बौने कद का थिएर गिरगिट की तरह रग बदलने में माहिर, अत्यत वाक्पटु और फ्रास के पूजीपति वर्ग का पक्का प्रतिनिधि था। 26 फरवरी को असेंबली ने प्रशा के साथ शांति-सधि कर ली, जिसकी शर्ते काफी कडी और सीधे-सीधे राष्ट्रीय सम्मान को आहत करने वाली थी। प्रशा के सामने हथियार डालने के बावजूद पेरिस के नेशनल गार्डो न अपनी तोप अपने पास ही रखी थी। जर्मन सैनिको की हिम्मत नहीं हुई कि वे पेरिस मे घुस सके। उन्होने पेरिस क एक छोटे से काने मे अपन कदम जमाये। खास बात यह थी कि जिस फौज ने फ्रासीसी साम्राज्य को डरा दिया था वह पेरिस के मजदूरो से बने नेशनल गार्डो से उलझने की हिम्मत नहीं दिखा पा रही थी। मजदूरी की यह ताकत और धाक देखकर सरकार क अध्यक्ष थिएर को लगा कि उन्हे जैस भी हा निहत्था कर देना चाहिए वरना वे कभी भी मौका लगन पर पूजीपति वर्ग पर भी हमला बाल सकत हैं। 18 माच को थिएर न राष्टीय गार्डा से उसका तापखाना छीनने क लिए नियमित सना की दा टुकडिया भजी। इस पर परिस न प्रतिराध किया। थिएर के दो जनरल मार गय। वह अपनी सरकार के साथ वर्साई (Versailles) भाग गया और उसने वही राष्ट्रीय असेंबली की बैठक बुलायी। 18 मार्च को हुई इस कार्रवाई के वक्त थिएर का अदाज यह था कि प्रशा की फौज उसका माथ दगी पर बिस्मार्क के इशारे पर 28 मार्च, 1871 मे कम्यून की घोषणा 79 एसा नहीं हुआ। वसाई आकर थिएर ने परिस के साथ संधि का बहाना किया और हमला करने के लिए अपनी सना जमा करनी शुरू कर दी। 26 मार्च का पेरिस म मजदूरा का कम्यून यानी उनकी सरकार निर्वाचित हइ और 28 मार्च को नगर के टाउन हॉल म उसकी विधिवत घोषणा हुइ। अभी तक सरकार चलान वाली राष्टीय गार्ड की केन्द्रीय समिति न परिस की बदनाम पलिस को भग कर दिया और कम्यून को इस्तीफा मौंप दिया। कम्यून ने गष्टीय गाड को एकमात्र सशस्त्र सना घापित किया। 30 मार्च का कम्यून न अनिवाय भर्ती' जैस अलार्काप्रय कानूना का उन्मूलन कर दिया। कार्ल माक्र्स न परिस कम्यून की स्थापना क बाट उठाये गये कदमा का वर्णन इस प्रकार किया है कम्यून न अक्तूबर 1870 स अप्रेल, 1871 तक का सभी मकाना का किराया माफ कर दिया। इस अवधि का जा किराया दिया जा चुका था उसे भाग लिए पेशगी मान लिया गया तथा नगर पालिका ऋण कार्यालय में गिरवी रखी वस्तुआ की विक्री नद कर दी गयी। उसी दिन कम्यून म निर्वाचित विशिया कपदा की पप्टि की गयी क्यार कम्यून का परचम विश्व-जनतत्र का परचम है।' एक अप्रल का तय क्यिा गया कि कम्यून के किसी भी कर्मचारी का ओर इसलिए कम्यून व सस्या का भी वतन 6 000 फ्रैंक स अधिक नही होगा। अगल दिन कम्यूनन चर्च का राज्य से पथक करन की आज्ञाप्ति जारी की धार्मिक कार्यो के लिए सभी राजकीय भुगतान वद कर दिये गय। चर्च की सारी मपनि राष्टीय सपत्ति धापित कर दी गयी। परिणामस्वरूप 8 अप्रल को विद्यालया स मभी प्रकार क धामिक प्रतीका चिना आर उपदशा तथा प्रार्थनाआ सक्षप भ, उन सभी चीजा का हटा दन का आदश जारी किया गया आर क्रमश उस पर अमल क्यिा गया जा व्यक्ति क अत करण का क्षरह। 6 तारीख का राष्टीय गाड की 137वीं बटालियनन मृत्यु दड म प्रयाग आन वाल पर गिलटिन का बाहर निकालकर उसे भावनिक पेपर मारोग विस्तार में रम्पकारों सी पेसाई यानों से ओतम भिात कम्यून की असफलता के विश्लेषण से ही कार्स मायर्स (दाय) और एगेल्स (बाय) ने सर्वहारा-सिद्धातो की रचना की। हर्षोल्लास के साथ बडी धूमधाम म जला दिया। 12 तारीख का कम्यून ने निर्णय किया कि प्लाम वादाम क विजय-म्तभ की जा 1809 के युद्ध के बाद नपालियन द्वारा लडाई मे जीती गयी तापा को गलाकर बनाया गया था, गिरा दिया जाये क्याकि वह अधराष्ट्रीयता और दूसर दशा क प्रति वर तथा द्वेष-भावनाआ को भडकान का प्रतीक था। 16 मई को यह कार्य सपन्न किया गया। 16 अप्रैल का ही कम्यून न कारखाना क मालिका द्वारा बद क्यि गय कारखाना के साख्यिकीय मारणीयन क लिए ओर उन्ही मजदूरा द्वारा, जा पहले उनमे काम करत थ उन्ह फिर स चालू करन की योजना बनान क लिए, उन्हे सहकारी-सघ म मगठित करन और इन सहकारी-सघा का एक बहुत बड़ी यूनियन से सयक्त करन की याजना बनाने क लिए हुक्म जारी किय। 20 अप्रेल को उसने नानवाइया के लिए रात क काम की मनाही कर दी। रोजगार कार्यालया का भी बद कर दिर गया। ये कार्यालय द्वितीय साम्राज्य क समय स पलिस द्वारा नियुक्त श्रम क प्रथम काटि के शापक दलाला की इजारेदारी के रूप म चलाये जा रहे थे। इन्हें अब परिस के 20 जिला की नगरपालिका-व्यवस्था म सम्मिलित कर दिया गया। 30 अप्रैल का कम्यून न गिरवी-गाठ की दुकाना का इस कारण बद करने के आदेश दिय क्यांकि व निजी लाभ के लिए मजदूरा का शापण करती थी आर श्रमिको के ऋण प्राप्त करने के अधिकार के प्रतिकूल थी। 5 मई को कम्यून न प्रायश्चित-गिरजे को गिरा दन का आदेश दिया, जा लूइ 16व का सिर काटने के लिए प्रायश्चित करन के स्मारक के रूप में बनवाया गया था। 81 इस तरह 18 मार्च के बाद पेरिस आदालन का वर्ग-स्वरूप, जा पहल विदशी हमलावरा के खिलाफ युद्ध की वजह से पृष्ठभूमि म दया हुआ था, खुलकर और उग्र रूपम प्रकट हो गया। चूकि कम्यून म लगभग देवल मजदूर अथवा मजदूरा के प्रतिष्ठित प्रतिनिधि बैठते थे इसलिए उनक फेसला का स्वरूप निश्चित रूप स सवहारा हिता के अनुकूल था। इन फैसला ने या ता एसे सुधारा की धापणा की जिन्ह जनतावादी पूजीपतियो न मान कायरता की वजह से पास नहीं किया था। दरअसल य सुधार मजदूर वर्ग के स्वतत्र क्रिया-कलापा के लिए आवश्यक सुधार प्रस्तुत करत थ। उदाहरणार्थ इस सिद्धात का अमल कि जहा तक राज्य का सबध है, धर्म पूर्णत एक व्यक्तिगत प्रश्न है। इसके अतिरिक्त कम्यून ने ऐसी आज्ञाप्तिया जारी की जो सीधे मजदूर वर्ग के हित म थी और जो कुछ सीमा तक पुरानी मामाजिक व्यवस्था की जडो पर गहरी चाट पहुचाती थी। उस समय पूरा नगर शत्रुस घिरा हआ था एस समय में अधिक स अधिक इन चीजा का अमल में लान की शरआत ही की जा सकी। मई क प्रारभ स ही कम्यून की सारी शक्ति वसई सरकार की सना स जिसकी सस्या नित्य बढ़ती जा रही यी युद्ध करने में लग गयी। - अब कम्यनाडों के सामन दुनिया के पहले प्रातिकारी राज्य की रक्षा की चनोती थी। थिएर की सेना ने परिस पर आक्रमण कर दिया था। कम्यूनानि भाड क सनिका और तरह तरह के प्रतिक्रियावादी तत्त्वा द्वारा बनायी गयी वसाई की इस सना के साथ अत्यत वीरतापूर्वक युद्ध किया। 7 अप्रैल को सनाआ न पारस के पश्चिमी मार्चे पर यइ के पास सन नदी के दोनो तरफ वाले रास्तो पर कब्जा कर लिया। लेकिन कम्यूनाऔँ न उस पीछ धकेल दिया। फिर पेरिस पर वसाई की तोप गाल बरसान लगी। प्रशान क्छ यद्ध बदी रिहा कर दिय नाकि व थिएर की फाजो की नाकत दे सक। 3 मई का दक्षिणी मार्चे पर मूल-साके के दुर्ग पर थिएर का कब्जा हो गया। 9 मई का पार्ट इस्सी उसक हाथ आ गया। अब थिएर की फौजा की पदचाप पेरिस की सफीला तक सुनायी देन लगी। 21 मई को सैनिका न परिस म प्रवेश किया। प्रशा की फौजान जा नगर के एक हिस्से पर काबिज थी वाई की फोजा को अपन बीच में से चुपचाप मार्च कर जाने दिया। यह सहयाग उस मोन सहमति का प्रतीक था जो युराप के पूजीपति और सामत वग के बीच विश्व क पहल मजदूर राज्य का कुचलने के लिए हो गयी थी। पर जेस-जैम फौज परिस क मजदूरा वाले इनाक म पहची उनका प्रतिराध और कडा हाता गया। एक एक इच आग बढ़न के लिए फौजा को मजदूर की चट्टानी दीवाराम जूझना पडा। कम्यूनार्ड पूर आठदिन तक बमिसाल बहादुरी के साथ लड। खूनी हफ्त के नाम से मशहूर यह अवधि जब खत्म हुई तो 26 हजार परिसवासी 'मजदूरी के प्रथम गणराज्य की बलिवदी पर अपनी लि चढा चुक थे। वसाई की फौजा न प्रतिराध टटन के बाद मजदूरा पर अत्याचार किये। सारी दुनिया के पूजीपतिया ने खुशी क दीपक जलाये। आखिर क्यो न जलात? उन्हान क्रांति की पहली कशिश को कचल जा दिया था पर उनकी यह प्रसनता ज्यादा दिना तक टिक्न वाली नही थी क्याकि मन् 1871 म परिम कम्यून से सुलगी चिंगारी सन् 1917 म एक दावानल म बदल जान वाली थी आर आग की लपटा से सोवियत अक्तूबर-क्रांति का जम हान वाला था। 82 सोवियत अक्तूबर क्राति (1917) 1 प्रथम विश्व युद्ध काजमब्रिटिश और जर्मन पूजी के बीच के अतर्विरोध के गर्भ हुआ था। रूस मिन राष्ट्रो के साथ था पर उसे युद्ध से कोई लाभ नहीं हुआ। पूरे रूस में मजदूरो के आदोलन जोर पकडते जा रहे थे। जार निकोलस-द्वितीय की दूमा (ससद) जनता की समस्याए हल करने मे असफल सिद्ध हो चुकी थी। देश की दुर्दशापूर्ण स्थिति को सामाजिक-जनवादी मजदूर पार्टी के बोल्शेथिको ने जन-आदोलनो का नेतत्व अपने हाथ में ले लिया। इन योल्शेविको के नेता थे-सेनिन। फरवरी-क्राति ने जार को गद्दी छोडने पर मजबूर कर दिया पर सता में अस्थायी सरकार के रूप में केरेस्की जैसे पूजीपतियो के प्रतिनिधि आ गये। घोल्शेविको ने अक्तूबर मे अस्थायी सरकार के खिलाफ बगावत करके सत्ता अपने हाथ मे ली और जर्मनी व मित्र राष्ट्रो के हस्तक्षेप के बावजूद नयी क्राति की दढतापूर्वक रक्षा की। 'शताब्दी की शुरुआत म पूजीवाद दुनिया के सामने दारूपा म पश हुआ। एक आर पूजीवाद व्यक्तिगत आजादी की वकालत करता था आर सामतवाद के मुकाबले काफी प्रगतिशील बाता के साथ सामन आता था। दूसरी ओर उसकी 'व्यक्तिगत आजादी' मजदूरो की आथिक आजादी की माग के साथ अपना तालमल नही बेठा पाती थी। मजदूर अपना श्रम बचने के लिए स्वतत्र थे और पूजीवाद उस श्रम के अपन मुनाफे के हक म मनमान दाम लगान के लिए स्वतत्र था। इस वर्गीय अतर्विरोध ने सारी दुनिया में समाजवादी-माम्यवादी आदालन को जन्म दिया। 19वी शताब्दी का पेरिस कम्यून इसी आदालन की एक व्यावहारिक अभिव्यक्ति था। कम्यून क कुचले जाने के बाद पहली सफल साम्यवादी क्राति की जिम्मेदारी 20वी शताब्दी का 20वीं उठानी थी। प्रथम विश्व-युद्ध के रूप में पूजीवाद न अपना और भी घिनौना चेहरा दिखाया। 83 kx4 हया से क्छ समय पूप फीनार और उनकी पत्नी कहने के लिए इस बडी लडाई की शरुआत एक मवियाइ खान द्वारा आस्ट्रिया हरियाई महाराजकुमार फडींनाड की हत्या कर दन महई थी। पर यह घटनाता कवल वहाा मात्र थी। दरअसल तो दुनिया की बड़ी बड़ी पजीवादी ताक्त अपना मुनाफा बढ़ान और बाजार तलाश करने के लिए दनिया का नय सिर से बटवारा करना चाहती थी। यड का प्रमख कारण था जर्मन और ब्रिटिश पूजी का अतविरोध। एक तरफ मित्र राष्ट थे। इस बड में थ-रूस ब्रिटन और फ्रास। मरी तरफ जर्मन गठजाड था, जिसम जमनी के अलावा आस्ट्रिया और हगरी थे। मनाफा कमान की प्रति स अनुप्राणित इस युद्ध म 95 लाख लोग या ना मार गये या उरी तरह घायल हाकर अधमरे हो गये। दो करोड लाग घायल हो गये और 35 लाख लोग हमशा क लिए अपग हो गया। इस यद्ध मे 38 देश शामिल हए। इस फलस्वरूपजर्मनी तथा ब्रिटेन की आमदनी क्रमश छ और पाच गुना बढ़ गयी। अमरीका मित्र राष्ट्रा के साथ बाद में आकर जुडा, पर उसन भी बतहाशा और शायद मबस ज्यादा मुनाफा कमाया। रूस को क्या मिला-तबाही ओर सिर्फ तबाही जार निकालस द्वितीय द्वारा युद्ध म अधाधुध स्सी जवाना का झाका गया। मोर्चपर तैनात हर रूसी सैनिक के दिमाग में यह सवाल बार-बार उठता कि आखिर वह किसकी खातिर यह युद्ध लड रहा है? सन् 1911 म रूम के एक लास स ज्यादा मजदूरो न हडताला मे हिस्सा लकर अपन बदल हुए तेवर जतला दिये थे। सन् 1912 में दस लाख से भी ज्यादा मजदूर ने हड़ताल की। मन् 1914 के पहले छ महीना मे 13 लाख 37 हजार मजदूर हडताल पर थे। रूसी सर्वहारा की ताक्त साफ तौर पर बता रही थी कि वे जार और जारीना के कुशासन के तहत और अधिक दिना तक घुटन पिसन के लिए तैयार नहीं थे। मजदूर ग्रामीण गरीब 84 जारीना और जार कुशासन ले डूबा और मझाल किसान रूस की कुल आबादी का एक बहुत बडा हिस्सा थे। जनता मे व्यापक रूप स असताप फेला हुआ था। जार आर जारीना कुशासन की हालत यह थी कि वे एक ज्यातिषी और तांत्रिक ग्रिगारी यफिमाविच रास्पुतिन के हाथ की कठपुतली मान बनकर रह गय थे। रास्पुतिन न जारीना और दरवार पर अपना असर जमा लिया था। युद्ध की वजह स फौजी खर्चा बढ़ता जा रहा था। महगाइ छलाग मार-मारकर आम जनता की कमर तोड रही थी। विदशी पूजी पर निभरता बढ़ रही थी। अगस्त, 1914 स फरवरी, 1917 के बीच 30 महीना म मत्रिपरिषद् क चार अध्यक्ष छ गृह-मत्री आर चार युद्ध मनी बदन गय। राजनैतिक अस्थिरता और अनिश्चितता की इमस बडी मिसाल ओर क्या हा सकती है? दूमा (Duma) यानी स्सी समद म कडट(सवधानक-जनवादी पार्टी) का लक्ष्य राजतन और समद का जोडकर रसना था। समाजवादी-क्रांतिकारी पार्टी कृषि मुधाराका लाग करने पर जार दे रही थी। प्रगतिवादी पार्टी बडी पूजी के फलन-फूलन आर इजारदारिया का मजबूत करने की पक्षधर थी। वुदाविक पार्टी ग्रामीण पूजीपतिया की पार्टी थी। पर कुल मिलाकर य सभी दल रामानाव वश क जारा का अपन रास्त की वाधा नहीं समझते थे। हा रूसी सामाजिक जनवादी मजदूर पार्टी का जारशाही में सख्त घणा थी। इस पार्टी का जम 1898 में हुआ था। यह पार्टी ब्लादीमिर इलिच उल्यानाव लानन द्वारा स्थापित श्रमिक मुक्ति संघर्ष संघ म निकली थी। लनिन का मानना था कि जारशाही और पूजीपति वर्ग के खिलाफ संघर्ष करने के लिए एक एकल और कन्द्रीकृत जुयार पार्टी की जमरत है, जो भाषा और जाति के भद-भाव के बिना पूरे सवहारा वर्ग का अपन पीछ ला सका सामाजिक जनवादी मजदूर पार्टी म दा गुट थे। बाल्शविक (बहुमत वाल) और मशेविक (अल्पमत वाल)। सन् 1903 म पार्टी की दूसरी काग्रम सपन्न हुई। लनिन क 85 रास्पुतिन केरेस्वी नेतत्व म बाल्शविका ने अपना फौरी कार्यक्रम जारशाही यानी एकतत्र का खात्मा और अधिकतम कायक्रम समाजवादी क्राति रखा। बोल्शेविको ने जनता को जगाकर क्रातिकारी आदालन मे खीचने की मुहिम शुरू की। देश के कोन-कान म बोल्शविको ने जाति का सदेश फैलाया। लोगा को बताया कि उनकी बदहाली की असली वजह क्या है? 10 फरवरी 1917 को पेवाग्राद में मजदूरा के प्रदर्शन शुरू हा गय। 14 फरवरी को 90 000 मजदूरो ने काम बंद कर दिया। पुराने पचाग के अनुसार 23 फरवरी को अतर्राष्टीय महिला दिवस मनाया गया। महिलाआ के प्रदर्शन के समर्थन में सवा लास मजदूरा न हडताल कर दी। पाल्शविकान इस अवसर पर अपनी कुशल नतत्व क्षमता का परिचय देकर जनता के सच्चे रहनमा वनन या अधिकार प्राप्त कर लिया। 24 फरवरी तक हडतालिया की सख्या बढ़कर सवा दा लाख हो गयी ओर 25 फरवरी का हुई राजनतिक हडताल ने नगर की सभी आर्थिक गतिविधिया ठप्प कर दी। जार ने कमांडर जनरल खाबालोव को राजधानी म हो रही गडबडिया को खत्म करन और जलसे-जलसा पर पाबदी लगान का हुक्म दिया। जनता का कचलने गयी टुकडियो स मजदूर जूझ गये। घमासान युद्ध छिड गया। 27 फरवरी को 10 000 सैनिक विद्राही मजदूरो से मिल गये। अगले दिन तक बागी फौजियो की सख्या सवा लास हा चुकी थी। मजदूरो और सैनिका ने मिलकर पत्रानाद सोवियत बना ली। सोवियते मजदूरा किसानो और सैनिका क निर्वाचित राजनैतिक सगठन थी। इनका जमप्रथम रूमी क्राति (1905 1907) के दौरान हआ था। फरवरी मे हुई क्रातिकारी घटनाआ का पूजीपति वर्ग के प्रतिनिधिया ने फायदा उठाया। जारशाही की दूमा म बैठने वाले इन प्रतिनिधिया न चालाकी स खुद को दूमा की अतरिम समिति धापित कर दिया ताकि वे युद को प्रातिकारिया के गले उतार सक। 2 मार्च का इमी अतरिम समिति के कहने पर जार न अपन भाई क पक्ष में गद्दी छाड दी पर जार के भाई न घबराकर अरिम समिति की अस्थायी मरकार का सत्ता सौंप दी। 86 जनसभा को सबोधित करते लेनिन इस अस्थायी सरकार का पूजीवादी देशा न हाथा-हाथ लिया और मान लिया कि युरोप की तरह रूस भी उदारतावादी पूजीवादी जनतत्रो की राह पर चल पड़ा है। पर इस सरकार के प्रमुख कारकुना का ध्यान से अध्ययन करने पर ही इसका पतनशील चरित्र साफ हो जाता था। पूजीपति गुचकाव इस अस्थायी सरकार का सैन्य और नौसैनिक मनी था। इस ने सन् 1905 से सन् 1907 के बीच हुई रूसी क्राति की पराजय का स्वागत किया था। प्रिंस ल्वोव शासनाध्यक्ष था। वह हर तरह के क्रातिकारी आदालन को कुचल देन का पक्षधर था। व्यापार और उद्योग मत्री कोनोवलोव अपने मिल-मालिक चरित्र के अनुरूप ही मजदूरा के खिलाफ कडे रवैये की वकालत करता था। वित्तमत्री तेरेश्चको रूस को लगातार युद्ध म झोके रखने के पक्ष मे था। जाहिरा तौर पर यह अस्थायी सरकार उन क्रातिकारी ताकता का सतुष्ट नही कर सकती थी जो फरवरी-क्रांति के दौरान पैदा हुई थी। वैसे भी अस्थायी सरकार को सत्ता हाथ में लेने का मौका मशिविको ने दिया था। बाल्शेविक इस नीति के पक्ष म कतई नही थे। इस तरह से अब तक रूस म दो सरकार बन चुकी थी। एक तरफ अस्थायी सरकार थी ता दूसरी तरफ पत्रानाद सोवियत थी। 3 अप्रैल, 1917 का लेनिन निर्वासन से लौट। पेत्रोग्राद मे उनका जारदार स्वागत किया गया। जनता के दबाव ने अस्थायी सरकार के गठन में कई बार परिवर्तन किये। इन अस्थायी सरकारी में स कोई भी सरकार जन-समस्याआको ता हल नही कर सकी लेकिन वह जनता के आदालनो का दमन करन मे भी कतई पीछ नही रही। 4 जुलाई 1917 को पाच लाख शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियो पर अस्थायी सरकार की फौजान गालिया चलायी जिससे 50 लोग मार गय। बोल्शेविकाकी हत्याए भी की गयी। लेनिन की गिरफ्तारी की याजनाय बनन लगी। लनिन को फिर विदेश चले जाना पड़ा। पार्टी साहित्य छापन वाल प्रसो पर छापे पड़ने लग। बाल्शेविक पार्टी और उसक नेता भूमिगत हो गये। उसका मुख-पत्र 'प्राब्दा राबेची ई सल्दात राबोची पूत इत्यादि के नामो से प्रकाशित हाता रहा। 87 बालविका न 26 जलाई म 3 अगस्त तक अपनी एठी वाग्रम मिगत म्पम की। इसम हथियारबंद बगावत की तैयारी करन और मौव का इतजार करने की नीति तय की गयी। उधर अस्थायी मरकार के नय प्रधानमत्री करम्चीन तक्या क्यिाल्शविका या काबू म करन क लिए मनिय तानाशाही लागू कर दना टीक हागा। प्रधान मनापति का लाव भी इमी पक्ष म था पर व सुद का तानाशाह घापित करना चाहता था। 21 और 31 अगस्त 1917 क बीच जनरल वार्नोलाव की पौजी टुडिया पत्राग्रात म लामनदी करन नगी। कानालाव का वड पूजीपतिया आरमित राणवाममथन हामिल था लक्नि कान लाव का यह विद्राह पनपन म पहल ही कचनदिया गया। इसम लागा की ममय म आ गया कि रूसी जनता क मच्च प्रतिनिधि करस्कीया कानालावव बजाय माविकही । सैनिको ने मिन राप्टो की ओर से लड़ने की शपथ तो ली लेकिन ये समझ नहीं पा रहे थे कि उनकी लड़ाई का उद्देश्य क्या है। 88 मन् 1917 के पतझड म लनिन फिनलैंड से भेस बदलकर पत्रोग्राद पहुचे। उन्ह 1/32 मर्दोवाल्म्काया राड पर बन एक मकान म गप्त रूप स ठहराया गया। यही उन्हान हथियारबद विवाह की योजना बनायी। विद्राही दस्तो का मुख्यालय बनाना तारघरा टलीफान कद्रा ओर रलव स्टशना पर कब्जा कर लना सना क जनरला व अस्थायी सरकार के सदस्या को गिरफ्तार कर लना आदि बात इस याजना का मुख्य अग थी। वाविका की पार्टी न इम याजना का मजूरी द दी। पनानाद गरीसन क क्रांतिकारी सनिका बाल्टिक जहाजी बड क नासनिका व रड गार्डों की मिली-जुली फाजी न क्रातिकारी सनिक क्न्द्र के नतत्व म तयारी कर ली। इस समिति म बुवनोव, दझरझीस्की स्वदलव स्तालिन ओर उरीत्मकी जसे लनिन के विश्वस्त शिष्य आर मार्थी थ। पत्राग्राद म अक्तूवर 1917 में हुए इस मशस्त्र विद्राह म 40000 क्रांतिकारिया न हथियार उठाय। दूसरी तरफ युद्ध म परशान सनिक मार्चा छोडकर भाग रहे थ। मजदूरा ने कारखाना की बागडोर अपन हाथा म लनी शुरू कर दी थी। किसाना न भी जमीदारा का खदेडना ओर लतियाना शुरु कर दिया था। एस म करस्की न पहला वार किया। 241 अक्तूबर का सरकार न क्रांतिकारिया क मस पत्र रावीची पूत क प्रत पर छापा मारा। पर इमी दिन क्रांति क मुख्यालय स्माल्नी इस्टीट्यूट म सारी तैयारी पूरी हा चुकी थी। 24- 25 अक्तूबर की रात का एक-एक करक क्न्द्रीय डाकघर निकालायवस्की रलवे स्टेशन बिजलीघर इत्यादि पर क्रांतिकारिया का कब्जा हा गया। अगली सुबह बैंक वारसा रलव स्टेशन आर टलीफान एक्मचज उनक हाथ म आ गय। क्रांतिकारिया का समर्थन करने वाला यद्धपात अारा नवा नदी म आ गया। अव शिशिर प्रामाद (रेम्की का । सन् 1917 मे फ्रेमलिन मे प्रवेश करते साल सैनिक 89 लेनिन स्तालिन मस्यालय) सीध उसकी तापा की मार के अदर था। 25 अक्तूबर को ऋतिकारी सैनिक समिति ने रूस के नागरिका क नाम अपील प्रसारित की। 26 अक्तूबर की रात 2 10 बजे अस्थायी सरकार के प्रतिनिधियों को गिरफ्तार कर लिया गया। सोवियता की दूसरी अखिल रूसी काग्रेस हई जिसन भूमि और शाति सबधी विज्ञप्निया निकाली। इनम युद्ध खत्म करने ओर भमि पर जमीदार का मालिकाना खत्म करने की घोषणाए की गयी थी। इस काग्रेस म दुनिया में मजदूरो किसानों की पहली सरकार जन कमिसार परिषदू गठित हई। लनिन सरकार के प्रधान चने गये। उद्योगाकाराष्टीयकरण कर दिया गया। शाषका से वोट डालने के अधिकार छीन लिय गय। 1 दिसबर 1917 को फिनलैंड को आजाद घोषित कर दिया गया। दूसरी तरफ क्रातिकारी सरकार के खिलाफ माजिश हो रही थी। सत्ता से हटाये गये पूजीपतिया और सामता ने मातृभूमि तथा क्राति उद्धारक समिति जैस आकर्षक नामा स बोल्शविका के खिलाफ मुहिम शुरू कर दी। पेत्राग्राद से आठ किमी दूर केरस्की इस बात का इतजार कर रहा था कि कब उनकी फौजे पेत्राग्राद पर कब्जा कर और वे अपने सफेद घोडे पर मवार हाकर शिशिर प्रामाद म जाय। पर वाल्शेविकान जनरल क्रास्नाव और उसके स्टाफ का गिरफ्तार कर लिया। कई घटो की लडाई के बाद क्रातिकारी दस्ता की जीत हुई। करस्की फिर भाग निकला। अब बारी आयी मित्र राष्टा के हस्तक्षेप करन की। ब्रिटन और फ्रास ने 10दिसबर 1917 को सैनिक कार्रवाई क क्षेत्रा म बटवारा करके जल्दी से जल्दी बोल्शेविकों का उखाड फेक्ने की साजिश की। अमरीका ने तमाम क्राति विरोधी ताकता की भरपूर आर्थिक मदद की। 25 अक्तूबर स 2 नवबर तक घनधार सघर्ष चलाकर बाल्शविका ने मास्को को जीत लिया था। बाल्टिक राज्या के आधे से अधिक भू भाग पर सोवियता की मता कायम हो गयी थी। देश क पुनर्निर्माण के लिए शाति की जरूरत थी। इसलिए थाडी कही और अपमानजनक शर्तों पर भी 3 मार्च, 1918 को ब्रेस्ट-लितोस्क म सोवियत प्रतिनिधिमडल न जर्मना के साथ संधि कर ली। जर्मनान शांति समझौता ताडकर पूर्वी मार्चे पर हमला बाल दिया था। पत्रोग्राद पूरी तरह घरबदी म था इसलिए लनिन के नतृत्व म सावियत सरकार मास्को चली गयी। 90 EURON AS Tara UN N OF SOVIET SOCLAUST PURI AuN PM ARTH -au- MONGOLIA रूस का मानचित्र पूजीवादी देशा में अकल विटन न सावियत विराधी कारवाइयो पर 8 कराड 97 लास पोंड खर्च किय। क्रांति के लाल रग क खिलाफ प्रतिक्रांति क सफद झड तल दक्षिण ओर पूर्वी इलाका म सनाए जमा हान लगी। 23 फरवरी को इस गह-युद्ध म लडने क लिए लाल सना का गठन किया गया। सिर्फ पेत्राग्राद म ही 40 000 मजदूरा न सना म अपन का नामजद करवाया। लाल सना क पास अच्छ आर काफी मात्रा म हथियार नही थ। हर छ सेनिका क बीच एक राइफल थी। 9 मार्च तक 2 000 ब्रिटिश 65 000 जापानी आर 12 000 अमरीकी सेनिक रूस क गृह-युद्ध म हस्तक्षप के लिए ब्तादीवास्टक पहुच चुक थ। चकास्लावाक युद्ध-बंदिया की फाज सड़ी कर दी गयी थी। सन् 1918 की गर्मिया म मजदूर-किसानी का यह नवनिर्मित गणराज्य सभी आर स घर म आ गया। अगस्त में लनिन के ऊपर कातिलाना हमला हुआ। वे बुरी तरह घायल हा गय। उसी दिन पनाग्राद म एक आतक्वादी न पार्टी के नेता उरीतस्की की हत्या कर दी। इस तरह प्रतिक्रातिकारिया न अदर और बाहर दाना तरफ से क्राति क खिलाफ लड़ाई छड दी। विदशी आक्रमण को देखते ही क्रांति के कई पूर्व-विरोधी देशभक्ति की भावना म प्रेरित हाकर उसके पक्ष म आ गय। जारशाही क कई जनरला न गह-युद्ध म मावियता की आर स जमकर भाग लिया। तमाम तरह की दिक्कता भूस आर कमी के बावजूद सावियत सनाए युद्ध लडती रही और इस तरह सन् 1918 का माल सत्म हान का आ गया। 11 नववर 1918 का विश्व-युद्ध खत्म हो गया। जमनी और मित्र राप्ता क बीच संधि हा गयी। अब ब्रिटेन और फ्रास न अपन युद्धपातो के जरिए क्रांति म हस्तक्षप करना प्रारभ किया। ब्रिटिश पाज अपने टेंक लकर आ गयी। सावियत सरकार न मन् 1919 म अपनी राजनेतिक आर कटनीतिक कुशलता सावित की। लाल सनिक मार्च म एक कदम भी नही डिग। सन् 1920 म आसिर हारकर मित्र राप्टा का अपनी सनाए वापस वलानी पड़ी। सन् 1921 क आत आते गह युद्ध सत्म हा गया। अब वारी आयी गह युद्ध म ध्वस्त हए दश के पुननिमाण की। सावियत जनता न कम्युनिस्ट पार्टी क नतत्व में यह बेहद गभीर और जरूरी काम भी मफलतापूर्वक कर दिसाया। आज माविपत मप विश्व क सबस बड़े दा औद्यागिक दशो म स एक है। 91 तुर्की की क्राति (1915 1921) 400 यर्ष पुराने ऑटोमन तुर्क साम्राज्य के पतन के बाद तुर्की के पौजी अफसरो और जनता मे राष्ट्रयादी महत्त्वाकाक्षाए पनपने लगीं। ये गलीफा और सुल्ताना के मध्ययुगीन शासन से अपने देश को मुक्त कराकर खुली हया में सास लेना चाहते थे। कमाल अता तुर्क यह सपना देखने यालो के अग्रणी नेता थे। तुर्की की फ्राति ने न केयल इस राष्ट्र को अपनी प्राकृतिक सीमाओं में सुरक्षित किया बल्कि सोच-विचार और समाज नीति का पश्चिमीकरण भी कर दिया। खिलाफत खत्म हुई और तुर्की प्रथम विश्व युद्ध की पराजय से उभरकर एक स्वतत्र और प्रभुसत्ता-सपन राष्ट्र बन गया। प्रा 'थम विश्व युद्ध एत्म हान क वाद तुर्की का ऑटोमन साम्राज्य (Ottoman Empire) तेजी से पतन की गत म फिसलने लगा था। करीब 400 साल पहले ऑटामन तुर्की न मसोपाटामिया ओर कुर्दिस्तान सीरिया ओर माइनर एशिया, क्रीमिया और दक्षिण रूस व मिस्र और उत्तर पीकाकाजीतकर अपन साम्राज्य का काफी विस्तार कर लिया था। तुर्को न कास्टटिनापिल {Constantinople) वाल्क्न दशा, हगरी का अपन प्रभुत्व म लाकर पश्चिमी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ शक्ति हाने का रतबा हासिल कर लिया था। लेकिन ज्याही इस माम्राज्य क टूटन की प्रक्रिया शुरू हुई तो यह देखत दसत 'युरोप क बीमार आदमी मबदल गया। स्मक जारन तुर्क माम्राज्य को यह उपमा ऐस ही नहीं दे दी थी। रूस न क्रीमिया को उसस छीन लिया था। यूनान क राष्ट्रवादी सघर्ष ने उस तुर्को क हाथ से आजाद करा लिया था। सर्विया (Serbia), मानिया आर वल्गारिया भी क्रमश अपनी आजादी की तरफ बढ़ रह थ। फ्रासन अल्जीरिया पर कब्जा कर लिया था। मिस्र ब्रिटिश नियत्रण म आ चुका था। कल मिलाकर एक जमान म महान और शक्तिशाली रह चुके इस साम्राज्य की हालत अब सम्ना आर काफी कमजोर थी। सुल्तान अब्दुल हामिद कास्टटिनापिल म बैठकर अपन यच-सच राज्य कानिहायत 92 16वीं सदी का महान सुलीमान का जमाना जय ओटोमन साम्राज्य अपने पूरे वैभव पर था। क्रूर और मनमान ढग स चला रहा था। शक्की आर असुरक्षित सुल्तान न अपन इर्द-गिर्द जामूसा की पूरी फौज ही खडी कर ली थी। वह किमी नये विचार समाज-सधार के किसी प्रस्ताव, किसी भी तरह की आजादी ओर आदालन कजिक्र तक का बदाश्त करन क लिए तैयार नही था। अपने दश और समाज की यह दुर्दशा दसकर युवा तुर्को का मन कुछ कर गुजरन क लिए बचैन होन लगा। पर सल्तान क जासूसा में डरकर सुपिया मगठन बनान क अतिरिक्त उनक मामन काई चारा न था। खुद मुल्तान की फोज म भी इस तरह की सीक्रेट मासाइटिया बनन लगी थी। इनक गठन म एक युवा अफ्सर मुस्तफा कमाल पाशा न सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाइ। यह अफमर ही बाद म तुर्की की क्रांति का नायक बना और अता तुर्क (Father of Turks) क नाम स मशहूर हआ। कमाल पाशा मानास्तिर (Monastur) क मीनियर मिलिट्री स्कूल व एक प्रतिभाशाली छान था उन्हान भैय विज्ञान का गहन अध्ययन करन के दौरान खुद का असाधारण प्रतिभाशाली सावित क्यिा था। मल्नान व मनापति युवक मुम्तफा म भविष्य के जनरल की मभावनाए दसत था उन दिना 20वी शताब्दी की शुरुआत थी आरती को एक कुशल मनापति की जरूरत भी थी। सन 1881 म पैदा हुए मम्तफान 24 माला की उम्र म कप्तान का पद हासिल किया और मिलिट्री बॉलजम ही वतन (Vatan) नाम की सीक्रट मासाइटी बनायी जिसका मक्सद मवधानिक मुधार करना था। यह मामाइटी तुरी का मध्ययुगीन ममाज की जडता स निकालकर नय माच म दालना चाहती थी। पर इसम पहल कि काम अभी बढ़ पाता सुल्तान के जाममा न मामाइटी का नराग लगा लिया। उसक सदस्य गिरफ्तार करलिय गय और क्रांति की काशशा कलक्माल पाशाका 93 कमाल 'अता तुर्क अर्थात् तुकों के पितामह । जल की काठरी मिली। जासूसा न कमाल क सिलाफ सार मबूत जटा लिए ये आर उम मात की सजा मिलन म दर नहीं थी। पर यहा कमाल की एक अच्छ अफ्सर क रूप म स्याति काम आयी आर सजा दन के बजाय कमाल कामिश्कम एकरजीमट मतनात कर दिया गया। वहा कमाल का अपनी युद्ध कला के जाहर दिखाने का पूरा मौका मिला। कमाल की विशेषता यह थी कि उन्हान यरापीय सुधारका की पुस्तका का अध्ययन किया था। उन्ह प्रासीमी भाषा भी आती थी। सीरिया म क्माल न द फादरलैंड एड फ्रीडम सासाइटी बनायी जिसकी विचारधारा तजी स फेली पर कमाल का ध्यान ता तुर्की पर ही लगा हुआ था। उधर तुर्की म क्माल क ज म स्थान सलानिका (Salonika) म एक नये आदालन के अकुर फूट रहे थ। इसम अपन अशदान दने के लिए कमाल न मिन आर यूनान हात हए स्वदश का रास्ता पक्डा। पर सुल्तान क जासूसा न कमाल की गतिविधिया का फिर से पता लगा लिया। उह वापस जाना पडा। बाद में कमाल ने आधिकारिक जरिए म ही अपना तबादला सलानिका करा लिया। सलानिका म एक सफिया सधार-आदालन की गतिविधिया शुरू हा गयी। इसका नाम 'ऑटामन फ्रीडम सासाइटी' रखा गया। मासाइटी क नताआ म कई मुद्दा पर परस्पर मतभेद था। ज्यादातर नता चाहत थकि सन् 1876 क सविधान का दाबारा स्थापित किया जाय। सन् 1877 म सुल्तान अब्दुल हामिद न इस सविधान को मान । स इकार कर दिया था। इसके उल्ट कमाल पाशा का मक्मद बेकार हा चकी परपराआ कुप्रशासन अशिक्षा और पुरान इस्लामी कानूना का मिटाकर पश्चिमी ढाच पर एक आनिक व मजबूत राष्ट की स्थापना करना था। पर पाशा कविराधी नता परिम मनिर्वामन व्यतीत कर रह थ 'यग टर्क नताआस जड़ थ जा आटामन साम्राज्य का फिर से स्थापित करने का अमभव स्वप्न देखते थे। सन् 1908 म सल्तान का पता लगा कि मलानिकाम विद्रोह की चिंगारिया सलग रही हैं। उसनविद्राही अफ्सरा क नता एनवर ब (Enver Bay) का तलब क्यिा पर एनवर न पहाडिया म शरण ली। दूसरा विद्राही अफ्मर मजर नियासी (Niyasi) भी अपन सेनिका 94 BLACK SEA Trey ASEAN TURKEY a mm GREECE Imla Sard Urga .41 Ephe . Bodrum Aod ndow Mer Kus CYPRUS CRETE WED TE RANEAN तुर्की का मानचित्र - आर हथियारा के साथ एनवर क नतत्व म चला गया। धीर-धीर तुर्की फाजा क बड हिम्स नबगावत कर [ आर युवा तुर्कोन मुल्तान का सविधान मानन पर मजबूर कर दिया। इस परिवतन के नायक एनवर आर नियामी थे। ठीक एक साल बाद मुल्तान अब्दुल हामिद न अपन समथका क जरिए 'इस्लाम चतर म का नारा लगाया आर कास्टटिनापिल म विदाह हा गया। अनुभवहीन युवा तर्क सरकार लडखडा गयी। मलानिका की फाज आड वक्त पर काम आयी। इसका नतत्व एनवर आर कमाल पाशा क हाथ में था। विद्राह कुचल दिया गया आर सुल्तान का गद्दी छाडनी पड़ी। अगल ना वर्ष तक तुर्की पर क्मटी ऑफ यूनियन ण्ड प्रोग्रम की हुकूमत रही। अक्तूबर 1911 म ती युद्ध म उलय गया। मन् 1912 म वाल्कन युद्ध म तुर्की का हार सानी पड़ी आर उमक हाथ म युगपीय इलाका निकल गया। प्रथम विश्व-युद्ध शुरू हुआ। सन् 1915 म कमाल न गलीपाली (Gallipoli)द्वीपसमूह क अपनी कमान वाल हिम्म पर विटिश हमला झला आर तीन महीन तक विपरीत परिस्थितिया म चतहाशा बहादुरी आर निजी जासिम के दम पर थाडी-मीफाज क महार अग्रजा का आग बढन सराक रखा। इस तरह कमाल न काटिनापिल का बचाया। युद्ध म व ही अक्ल तुर्की मनापति य जिमन जीत हामिल की थी। इस जीत न कमाल की ख्याति पूर दशम फला दी। फिर भी तुर्की का मित्र राप्टा क मामन घटन टक्न पड। इधर काटिनापिल म यवा ता की मरकार की जगह सुल्तान के उत्तराधिकारी वहीदद्दीन (Vahideddin) न ल ली थी। दश म अकाल पड़ा हुआ था आर जनता का नतिक बल गिर चुका था। सुल्तान न कमाल की माबत आर राजधानी म उनकी माजूदगी टालन कलिए उन्ह काल मागर कतट पर फाज की कमान मभालन के लिए भज 95 -- दिया। कमाल न सन् 1919स तमाम प्रतिराधी दलाया मर्गाठन करना शरू किया। थल मना आर नामना क कमाडरा की युफिया बैठक म तय हुआ कि मुल्तान की हुकूमत कान माना जाय। इस वठक म निक्ली धापणाम कास्टटिनापिल की सरकार का विदेशी प्रभुत्व म करार दिया गया आर सिवास (Sivas) म एक स्वतत्र और न्यूनतम कायक्रम वाता मरवार बनान के लिए राष्टीय असेंबली बुलान का फसला किया गया। कमाल न फाज की नाकरी छाडकर एक नागरिक की तरह मिवाम काग्रम की अध्यक्षता की। सुल्तान ने मित्र गया में मदद मागी। उन्हान तुर्की क गप्टवानी आदालन का दवान की शुरुआत की। अग्रेजान कास्टटिनापिल पर कब्जा कर लिया ओर मुल्तान न सर्वोच्च खलीफा क रूप म मुसलमाना म माल की बात न मानन के लिए कहा। अकाग म 23 अप्रल 1920 का तुफिश ग्राड नशनल असेंबली का पहला अधिवशन हुआ जिसम कमाल का राष्ट्रपति चुना गया। कमाल न घापत किया कि खलीफा का अग्रजा न कद कर लिया है इलिए उसकविता ही सरकार चलायी जायगी। 10 अगस्त का मल्तान न मित्र राप्राक साथ एक एसी मधि की जा पर गष्ट्र क लिएधार अपमानजनक थी। इस मधि स ती ज्यादा से ज्याला एक कठपुतली दश बन सकता था। मागश इस मधिक खिलाप कमाल पाशाक पीछ पडाहा गया। मन् 1921 म यूनानिया न हमला किया ओर तुर्या का मुह की पानी पड़ी पर कमाल न अकाग क क्षण म एक बार फिर इस्पाती दीवार की तरह मोचा लगा दिया। यूनानिया को वापस जाना पडा आर आजाद तीनो पहली बार एक राष्ट के रूप ममारी दनियान म्वीकाग। रूमी प्रासीसी आर इतालवी सरकारा न तुर्की का मा यता प्रदान की। मुस्तफा कमाल पाशा के नतत्व म अगली गर्मिया म यनानिया का मुल्क क बाहर निकाल दिया गया और अग्रजा स सधि कर ली गयी। तुर्की एक लन अर्से बाद अपनी प्राकृतिक सीमाआ का मालिक बना। तुर्यों की क्राति वहा क समाज, राजनीति और कानाम काफी तब्दीलिया लायी। खलीफा की सल्तनत सन्म कर दी गयी। अकागका नयी राजधानी धनाया गया। अगस्त, 1925 म 'फज पहनना गर कानूनी करार दिया गया। तुर्मा की पाशाक कानून शिक्षा आर विधान, सभी कुछ पश्चिमी देशा जैस कर दिये गये। यह विवाह पर पावदी लगा दी गयी। महिनाआ का पुरपा व बरावर प्रकार दिय गय। सन् 1928 म अरवी लिपि की जगह रोमन लिपि का प्रयोग शुरू किया गया। तुर्की की जनतान प्रम स अपन नताका नाम अता तक' यानी तुर्गा का पितामह रस दिया। .. 96 भारतीय स्वतत्रता-सग्राम (1947) 19वीं शताब्दी के मध्य से भारत मे 'स्वदेशी' की भावना पनपने लगी थी। काग्रेस की स्थापना, गोखले और तिलक की राजनीति, भगत सिंह और चद्रशेखर आजाद की क्रातिकारी कार्रवाइया, गाधी जी का सत्याग्रह और आखिर मे 1942 के 'भारत छोडो आदोलन' ने इस भावना को एक विचारधारा का रूप देते हुए क्रमश पूर्ण आजादी की मजिल तक पहुचाया। असत्य लोगो ने कुनिया दी, जेला की यातनाए सहीं पर अग्रेजो के सामने सिर न मुकाया। शायद ही किसी अय देश ने अपनी आजादी के लिए सौ साल जितना लया स्यतत्रता-सग्राम लडा हो। सन् 1857 से शुरू हुई आजादी की यह जग सन् 1947 मे जाकर आत्म हुई। बस, एक ही कसक रह गयी-आजादी मिली पर देश का विभाजन हो गया। सन् 1857 क प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम क कुचल दिय जाने के बावजूद भारतीय लडाई न अपना रूप आर रास्ता थाडा बदल जरूर दिया। 19वी शताब्दी के मध्य से ही विदशी माल क सिलाफ स्वदशी की भावना एक विचार के रूप में उभरने लगी। धीरे-धीर लागा की समझ म आने लगा कि अग्रज मैंचस्टर की अपनी कपडामिल चलान के लिए भारत क कपडा उद्योग को नष्ट कर दने पर आमादा हैं। दादा भाई नौराजी, तिलक, मदन माहन मालवीय और सुरद्रनाथ बनर्जी जस गणमान्य नताआ न विदेशी के विरोध म स्वदशी की आवाज बुलद की। सन् 1896 तक आत-आते स्वदशी आदालन जोर पकडने की स्थिति में आ गया था। दाग्रस का जन्म कभी का हा चुका था। सन् 1905 म लॉर्ड कजन द्वारा बगाल का विभाजन कर दिया गया। इमस अग्रज-विराधी भावना का रुका हुआ सेलाब फिर स फूट पडा। देखते-देखते आर्थिक स्वदेशी आदालन ने राजनेतिक तेवर अस्तियार कर लिय। दरअसल मन् 1857 क सग्राम क बाद अग्रेजा क पहली बार 97
Q
NDIA
स्वामी विवेकानद
राजा राममोहन राय
दपानद सरस्वती
ज्योतिमा फले
'गोविंद रानडे
ईश्वरचर विद्यासागर
बविमचर
नारायणगरु
रवीनाथ ठाकर
सोहनलाल द्विवेदी
भारतेंद हरीराचर
प्रेमयद
INDIAN
ORSTI
पालकृष्ण शर्मा नवीन
LEOEDIA
भरविर पोष
मावरमामयी
महमपर भारती
मितीवारण गप्त
यदे मातरम्। यदे मातरम!
साल माल पाल लाला लाजपत राय, बाल गगाधर तिलक और विपिनचंद्र पाल सगठित रूप म भारतीय आजादी की माग विभाजन विराधी आर स्वदेशी आदालन क रूप म दिखायी आर सुनायी दी। राष्टीय आदालन की तह में तीन तरह की अतर्धाराए प्रवाहित हो रही थी। पहली धारा का सबध उन लोगो से था जो जनता की आर स सरकार को तर्कपूर्ण अर्जिया ओर ज्ञापन देकर कुछ विशेष प्रकार की रियायत हासिल कर लेना चाहते थे। य लाग बर्तानवी हुकूमत की 'इसाफ पसदी के कायल थे। इनक अगुआ थ गापाल कण्ण गाखल। दूसरी तरह के लाग चाहत कि लागा मे देशभक्ति स्वाधीनता क लिए प्यार व गुलामी स नफरत की भावनाए पैदा की जाय। साथ ही प्रचार सभाआ जलसा प्रदर्शना और सत्ता की अवहलना के जरिए जनता का प्रतिरोध स्वावलबन त्याग और कष्ट-सहिष्णुता क लिए तयार किया जाय। इन लागा का नारा था 'स्वाराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार हे और हम उस लेकर ही रहग। लाकमान्य बाल गगाधर तिलक विपिन चन्द्र पाल और लाला लाजपत राय इस विचारधारा के प्रमुख नता थ। काग्रस नरम ओर गरम दल म विभाजित थी। तीसरी धारा उन लागा की थी जो हथियारवद कार्रवाइयो अर्थात् फौजी तरीके से अग्रजा का तख्ता पलट दना चाहते थे। य वजाबाज क्रातिकारी थ जा हर क्षण मातभूमि को अपने प्राणा का बलिदान देन का तयार थे। बगाल की अनुशीलन समिति इनका प्रमुख सगठन था। अरविंद घोष, बारीद्र कुमार घोष, भूपद्र नाथ दत्त ओर ब्रह्म बाधव उपाध्याय इस आतकवादी आदोलन के प्रमुख सूत्रधार थे। बहरहाल स्वदशी और विभाजन विरोधी आदालन न अग्रेजा पर कडी चाट की। हर तरह के लोगो न इसमे भाग लिया-नरम दलिया ने थाडी हिचक क साथ और गरम Times aj tu 9 tpril 1947 26 BOMB OUTRAGE BY COMMONS IN THE ASSEMBLY FLYAWB MEMBER AND SRB DALAL Panx in Chamber trond Bou Throwa on Me Flere an Explosion THO MEN ARRESTED POLUE POSTE HOX DAY AND NICHT चदशेखर आजाद भगत सिंह मगतसिंह श्रादिकोफासीदेदीगयी, लाशें नहीं दी जायगी जेलमही जलाए जायगी फांसी राने और पि कॉमिन में अपील नामयूर कर दी गयो रामप्रसाद बिस्मिल ग ha ort on and others राजगुरु प्रीतिलता बढेदार एनी बेसेंट सरोजिनी नायड विनायक सावरकर माताहरदयाल 'बीनारास केशव पर्ये दादाभाई नौरोजी बापा जतिन मुखरेव सिस्टर निवेदिता ASSISTANT POLICE SUPERINTENDENT SHOT DE CONSTABLE WHO EIYES CHISE ALSO BEETS WITH SI Na Sor 'खदीराम बास. मानामागपत राय ममत गपचार खां माचार्य पानाती बामणगाधर तिला सरफरोशीसरी तमन्ना अय हमारे हित में है।
- दल ने पूरे जाश क साथ। इसके फलस्वरूप इग्लैंड से भारत म कपड़े के आयात मे कमी हो गयी। भारतीय कपडा ज्यादा विका। जुलाहा की आमदनी बढ़ी। भारत में देसी पूजीपतियो न मिल खाली। भारतीय बेंक खुल पर अग्रजा ने इस आदालन की एक बात का जमकर फायदा उठाया। स्वदशी आर विभाजन विराधी आदालन काफी कुछ हिंदू धर्म की मान्यताआ और रीति-रिवाजा पर आधारित था। मुसलमान उससे अभी उतने जोश-खरोश से नहीं जुड़ पाय थे। अवसर का फायदा उठाने म माहिर अग्रजा न दग भडका दिय। सन् 1906 म मैमन सिंह जिल म फसाद हान लगा। सरकार की तरफ से इस ओर हवा दी गयी। उधर भारत मनी और वायसराय की मार्ले-मिंटो जाडी न घाषणा कर दी कि उनका इरादा प्रशासनिक पुनगठन करन का है। नरम दलीय नता इस चारे को लील गये और नतीजतन काग्रस म फूट पड गयी। इसमे आदालन कमजोर पड गया। दगा ओर राजनैतिक अनिर्णय की स्थिति न आदालन का लगभग ठप्प कर दिया। अग्रजो न नरम दल वाला को छोडकर गरम दल के नेताआ आर क्रांतिकारिया पर जमकर गुम्सा उतारा। सन् 1907-1908 तक तथाकथित राजद्रोहात्मक सभाए रोक्न का कानून विस्फाटक पदार्थ कानून, भारतीय दड विधान संशोधन कानून, समाचार पत्र (उत्तेजन तथा अपराध) कानून और प्रस एक्ट बना दिय गये ताकि राष्टवादी आकाक्षाआ की घेराबदी करके उन्ह उग्र होन से रोका जा सके। मार्ले मिंटो क प्रशासनिक सुधार धोख की टट्टी साबित हुए। वे पूर्ण आजादी पाने की भारतीय इच्छा को कहा शात कर सकते थ? इसलिए इसी दिशा मे आगे बढ़ने के लिए सन् 1916 म 'होम स्ल आदालन' शुरू हुआ। लखनऊ समझोते के तहत स्वशासन की माग की गयी। काग्रेस ने स्पष्ट कहा "समय आ गया है कि महामहिम सम्राट यह घोषणा कर कि ब्रिटिश सरकार की नीति भारत को निकट भविष्य म ही स्वराज देन की है। क्रातिकारिया न धमाक जारी रख। सन् 1906 से सन् 1917 क बीच 60 हत्याए या उनकी कोशिशे व 110 डकैतिया व लूटमार इसी सिलसिले म हुई। बगाल मे अनुशीलन वाला ने और महाराष्ट्र म विनायक दामोदर सावरकर के 'अभिनव भारत' ने इनमें प्रमुख भूमिका निभायी। मुजफ्फरपुर, अमदाबाद नासिक, मद्रास के पाम तिन्नेवेली, दिल्ली इत्यादि जगहो पर लॉर्ड मिंटो ओर लॉर्ड हार्डिंग जसे बडे अग्रज प्रशासका की हत्या की कोशिश - की गयी। आजादी क दीवान दश की सीमाए पार करके ब्रिटनम भी गरजे। सावरकर ने लदन मे 'इडिया हाउस' के जरिए भारत की आवाज बुलद की और सन् 1909 म मदन लाल धीगरा ने राजनेतिक ए डी सी कर्जन वायली को गोली मार दी। इस सिलसिले म श्याम जी कष्ण वर्मा और लाला हरदयाल क क्रांतिकारी कामा को भी नहीं भुलाया जा सकता। हरदयाल न अमरीकाम गदर पार्टी की स्थापना की, जा घोर ब्रिटिश विराधी पार्टी थी। प्रथम विश्व-युद्ध के दौरान इन क्रांतिकारिया ने भारत की आजादी के लिए विदशो से सहायता पान और पड्यन करने के कई प्रयास किय। उन्ह आखिरी सफलता नहीं मिली। प्रवासी सिखा ने 'कामागाटामारू की घटना में बडी बहादुरी का प्रदर्शन किया। काग्रेस की कोशिशो से ब्रिटिश साम्राज्य की नैतिक बुनियाद खाखली हाती जा रही थी। उधर क्रातिकारियो ने साबित कर दिया था कि ब्रिटेन की ताकत को चुनौती दी जा सकती है। ब्रिटिश हुकूमत के लिए यह काफी चिंता की बात थी। 101 अध्यत पटवर्धन X सिरसामुडा मदाम कामा LUISPENSION राम मनोहर लोहिया 'जिन्ना विपिनचन्द्र पाल linnah Wants India's Parfition अरुणा आसफ अली Demands Two Autonomous Nation States Hindus & \n-Im Gamla Becomic farme जयप्रकाश नारायण T अबल क्लाम आजाद राजेद्र प्रसाद रासबिहारी योस विनय फष्ण योस JO *DBEVATTEL FIRE odiomanON Jana Gana Mans' To National Anthem अशफाकउला यसमभाई पटत मदनलाल ढींगरा 'HINDUS FORM THE NATION AND, THE MUSLIM A COMMUNITY" SAVARKARS AND MAHASABHA बासदेव हरि थापकर पुतिन बिहारी राम देश की आजादी हो सर्वोपरि थी जिनके लिए।
विशुद्ध गुजराती रिसान मी येशभूषा मे महात्मा गाधी साधारण से दिखने पास इसी व्यक्ति ने भारत से आजादी दिलयाने मे सर्वाधिक महत्त्यपूर्ण भूमिका निभाई। हामाल आदालन की वागडार तिलक और एनी बमट के हाथ म थी। इस आदालन म फ्ट की शिकार काग्रम म भी एक्ता करा दी। एनी बेसट की नजरबंदी का पूर देश म क्डा विगध क्यिा गया। तिलक पर तरह-तरह क प्रतिबंध लगाय गय पर य दाना नेता आर भी लाकप्रिय हात चले गय। प्रथम विश्व युद्ध म ब्रिटन की मदद करने क बदल कुछ हासिल हान की उम्मीद लगाय यठ लागा को भी निराशा ही हाथ लगी। ब्रिटेन न सारी माग एक कान मे सुनी और निविकार भाव स दूसर कान से निकाल दी। आदोलन क बदल जा मिला वह था-माटग्यू चम्मफाई सुधार यानी अत्यत सीमित मात्रा म भारतीया का सत्ता का हस्तातरण। सन् 1919 म दूसरा आदालन फूट पड़ा। मुसलमान तुर्की क यलीफा स युरोपियना की बदसलकी स दुखी थे आर हिंदू डोमीनियन राज्यो (जैसे दक्षिण अफ्रीका) म भारतीयों के प्रति अग्रजी रवय म वहद नाराज थ। असहयाग और खिलाफ्त आदालन के दौरन माहनदास करमचद गाधी क व्यक्तित्व का राष्ट्रीय मच पर उभारा। गाधी जी 25 वर्ष तक दक्षिण अफ्रीकाम रहकर सन् 1915 में भारत आय था व पहल समझते थे कि ब्रिटिश साम्राज्य कुल मिलाकर एक भलाई करने वाली ताक्त है। व खुद का गर्व से राजभक्त कहने और जाश क साथ गाड सव द किंग गाते। तर रौलट समिति की सिफारिशा क दमनकारी सुझावा न उनका दिमाग बदल दिया। वे साम्राज्य के विरोधी बन गये। उन्हान इसे शैतानियत का प्रतीक' करार दिया। सविनय अवज्ञा आदालन यानी सत्याग्रह होने लगा। सरकार ने इसका कसकर दमन किया। दग भडकाय राय पर राष्ट्रीय आदोलन की धार इस सान पर चढ़कर और तेज हो गयी। । 103 AND PUBLIC MEETING BONFIRE OF FOREIGN CLOTHES wa take place the Haute w pland M.3. Oppo Ephmayadie w the mila Unzui Patrika SIMLA CONFERENCE FAILS DAWN OF REASON Mass Ciril Disobedlecce Suspended CONCRESS WORKING COMMITTEE & DECISIJA Courtlard Atr stand Dollar tautbrity Tbibited. normt V TITEATRUIT ITIL 04 XS Dua Acheter LEAGUE OBSTINACY SUCCEEOS A FRESH ALLIED LANDING IN BORSE WIDESPREAL RECKET It le Hege Ol FM IN Com teTimund Abrera When Merk Ons Owent WICA 31 AUSTRALIANS FORCE m Imant world agropathy this mattle 2 Right afabrat sande instelanh - GANDHIJI LEAVES FOR NOAKHALI TO Tom II T Ik Wil CAROL MO Conflion for EXIT ATTACKS 'Len Den I way (1wO RODIO | Bengali CONTINUA EWIEN STOY 17 SODCPU 51 Malabu Calf Burg Halchet And Walor H 5430 MAL VAM GREAT MARCH FOR LIBERTY BEGINS Mahatma Sta ta With Hu Chosen Band Ol 78 L RUMOHD - upton STARPSIC RO w mo MAHATMA A STATE PRISONER IN YERA Imprisoned Without Tnal Under 1027 Regulation ADMOURNMENT MOTION COMMONS Nation For Homes By Jamu Herbal The Statesman TIVO INAUCURATION OF M54 the Brelon Of Congu wet A camb Ne DeN Evict AWD DELLATION DAT O PLEDUC OF DOMINIO NS LINES OF IN DOUA IN CHE KOUMAN A MALM MET NADS - तत्कालीन अखपारो मे छपी क्रांतिकारी गतिविधियो से जुडी खबरे 104 जनरतायर जलियावाला बाग यहा चली थी गोलिया - रालट एक्ट क खिलाफ 13 अप्रेल को पजाब के जलियावाला बाग म सभा करने के लिए 15 से 25 हजार तक लोग जमा हुए। बिग्रेडियर जनरल डायर न बिना चतावनी दिय उन पर अधाधुध गालिया चलवायी। सरकार ने कहा 379 मरे पर गैरसरकारी आकड हजारो तक पहुच गये थे। इसके अलावा और भी कई जगह गोलिया चलायी गयी। दमन हुआ। पर जलियावाले बाग मे बहे खून को सारे देश ने अपने दामन पर टपकता हुआ महसूस किया। रवीद्रनाथ टैगार ने सरकारी खिताब त्याग दिया। गाधी जी न हिंसा की घटनाआ के कारण सविनय अवज्ञा आदोलन स्थगित करने की घोषणा कर दी। चौरी-चौरा की घटना न उन्ह इस निष्कर्ष पर पहुचाया था। चौरी-चौरा (गारखपुर) म उग्र भीड ने एक थाने में आग लगा दी थी जिससे वहा तैनात सिपाही इत्यादि जलकर मर गये थे। करल म हुए मापला विद्रोह के कारण उत्तर भारत म साम्प्रदायिक घटनाए भी भडक उठी थी। सरकार ने आदोलन में आधी रुकावट का फायदा उठाकर गाधी जी का गिरफ्तार कर लिया और छ साल की सजा दी। माटेग्यू-चेम्सफाड सुधारा के तहत बनी विधान-सभाआ म काम करन क लिए । जनवरी, 1923 का स्वराज पार्टी बनी थी। काग्रेस ने इन विधानसभाआ का बॉयकाट कर दिया था। इसलिए स्वराज पार्टी ने चुनाव लडा और भारी सफलता प्राप्त की। स्वराज पार्टी में मोतीलाल नेहरू और चितरजन दास की बड़ी भूमिका थी। ये लोग विधानसभाआ म ब्रिटिश हुकूमत से संघर्ष कर रहे थे। पर दास का निधन होन से महाराष्ट्र के कुछ सदस्यो द्वारा अनुशासन ताडने पर स्वराज पार्टी में फूट पड गयी। ION INDIA INI947 ATOWANITAN TISET PVTA Soura du - .0IME tra ARABIAN SIAM * PERAN Irone SE PAT BENGAL सन् 1947 का भारत भाई से PM-Aance .--. ----- STAN CaMY --- NDIAN भाई जुदा OCEAN मन 1924 तक आत आत काग्रमक अदरििभन्न विचागका अभिव्यक्ति मिलन लगी थी। इनम एक कानम्र गुट भी था जिसकी अगआइ श्रीमान अमत डागमजफ्फर अहमद शाक्त उम्मानी आर नलिन गप्ता व हाथ म थी। असहयाग आदालन की वापसी आर स्वगज पार्टी की विधान सभाआ म असफलता न पजाव आर बगाल म आतकवादी यवका का यह तक प्रदान किया कि गाधी इत्यादि के तरीकों स कुछ हासिल नही हान वाना। बंगाल आर पजाब म आतकवादी तज पर सानिकारी आदालन फनफनाकर सडा हा गया। वम फर गय काकारी टन डरती हर लाहार क डी एम पी माडस का गाली म उड़ा दिया गया आर विधान मभा म बम फेया गया। य कारनाम भारत की स्वतत्रता का सपना युनते-जवाहर गाधी 106 BACK 'साइमन यापस जाओ' के नारे गूजते रहे और लालाजी के सीने पर लाठिया परसती रहीं। 'हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातांत्रिक मना क क्रांतिकारिया न किय। भगत सिंह चद्रशखर आजाद बटश्वर दत सुखदेव व राजगुरु के नाम बच्च-बच्च की जुबान पर चढ गय। चाफकर बधुआ खुदीराम बाम व मदनलाल धीगरा क बाद य नोजवान आग क शाल बनकर हर भारतवासी की आत्मा म दहक्ने लग। डाग वगरह पर राजद्राह का आराप लगाकर भुक्दमा चलाया गया जा मेरठ पड्यव क्स के नाम स जाना गया। साइमन कमीशन का विरोध करत हए लाला लाजपत राय ने अपनी क्वानी दी। सन् 1930 2 लाहार अधिवशन म जवाहरलाल नहरू की अध्यक्षता म काग्रसन पूर्ण स्वतत्रता का ध्यय पापित कर दिया। गवी के तट पर आजाद भारत का यडा लहगया गया। यह डोमीनियन की हैसियत की माग म बहुत आग का कदम था। 26 जनवरी का स्वतत्रता दिवम पापित हुआ। रश क हजारा गावा आर शहरा म बडी बडी मभाए करके स्वतनता का मकल्प दाहराया गया। 12 माच 1930 का मुबह छ बज साबरमती आश्रम में 78 लागा क माथ गाधी जी न नमक कानून ताडन के लिए ऐतहासिक डाडी मरन में हराउन टेपित नाम म गापीनी 107 माच शाक्यिा। 241 मील की यात्रा के बाद तीन अप्रन की शाम का गाधी आर उनक साथी डाडी पहच। अगलदिन गाधी जी न ममद व जल मम्नान क्यिा आर यापम आवर नमक्काढला उठाया।नमक्कानन टट गया।मग्वारन नमकवानन ताडन वालाका मार दशम स्टारता म दमन क्यिा। जवाहरलाल नहर आर सान अपन गपफार सा गि पनार कर लिय गय। पशावर म गढ़वाल गयफल्म व नायव चढ़ सिंह गढ़वाली न ममलमाना की भीड पर गानी चलान म इमार कर दिया। मना म राष्ट्रीय भावनाआ की यह पहली आर अत्यत प्रवल आभन्याक्त थी। अग्रजान 67 अरावार आर 55 छापसान यद कर दिय। एक लास लाग जना म पहच गय। ववइम क्पडकीव16 मिल बद हा गयी जिनक मालिक अग्रज थ। गाधी जी व जल जान क बावजूद आटालन नहीं थमा। नमक मत्याग्रह न मारी निया का ध्यान भारत कम्वतमना आदालन की तरफ सार लिया। अग्रजा न ध्यान बटान काना लगन म गालमज मम्मलन क्यिा। गाधी विन ममयात क तहत काग्रम कलाग भी गाधीनतत्व मगमग गालमज बठकम शामिल हा पर उनक हाथ क्छ नहीं लगा। इस बीच मापक एमी घटना हइजिमन मार दशकी भावनाआकावडीठम लगायी। यह घटना थी-मरदार भगत मिह मसदव आर गजगरुकापामी। लागाका उम्मीद थी कि गाधी जी इविन ममझात जागा भगत मिह का फासी म पचा लग लक्नि इम ममझात म हिसक कारवाइया क चल रह मक्दमा का वापस लन का प्रावधान नहीं था। तीना प्रातिकारिया नाममाल यहादरी कमाथ बलिदान दिया। मार दशन आसू बहाय। तीना का नाम आजादी व आदालन के इतिहास म स्वर्णाक्षगम लिसा गया। विश्व युद्ध मे अग्रेजो की ओर से हिदुस्तानी लडे पर हाथ पया लगा? 108 मन् 1935 तक म्वतत्रता आदालन न सफलता की दिशा म कई कदम उठाय। सन् 1937 म काग्रस न मात प्राता म शामन सभाला। उसकी सारी सुधार-याजनाए आर्थिक अभाव की दीवार से टकराकर चूर-चूर हा गयी। दरअसल आमदनी का ज्यादातर हिम्सा कन्द्र मरकार ल लती थी। द्वितीय विश्व-यद्ध की शुरुआत तक भारतीया का अग्रजा की हर चाल समय म आ गयी आर उनका माह पूरी तरह भग हा गया। प्रथमविश्व-युद्ध की तरह अव काई भी अग्रजा की मदद करन का तयार न था। सन् 1942 तक आत-आत धुरी राप्ट जीत पर जीत हामिल करन लग या लग रहा था कि जमन जापानी आर इतालवी सानक विटन का उधड कर रस दग। अगस्त मकानमन कराया मरा का नारा दकर क्रांति का बिगुल बजा दिया। 9 अगस्त का गाधी जी का गिरफ्तार कर लिया गया। सरकार न आदालनकारिया का दमन किया। इसम जनता गुस्स म आ गयी। डाकघर तारघर टलीफान, रल आदि उमक काप क मुख्य निशान वन। पुलिम आर अदालता क प्रति भी लागा म काफी नफरत थी। पूर्वी उत्तर प्रदश बिहार बगाल मध्य प्रात इत्यादि म बाकायदा बगावत हा गयी। जयप्रकाश नारायण न हजारीबाग जल स भाग कर भूमिगत हार आदालन चलाया और एक यादा की स्याति अर्जित कर ली। वगाल की गजनीति की दन मुभाष चंद्र बाम अपने रडीकल विचारा क कारण मन 1939 म गाधी की अनिच्छा के बावजूद काग्रम क नता चुने गय थे। उनका स्याल था कि अग्रजा को छ महीन क भीतर आजादी ददन का अल्टीमटम ददना चाहिए। काग्रस न यह प्रस्ताव नहीं माना। सभाष चंद्र बास गाधी क अहिंसा वाल विचारा आर नहरू क धुरी राष्ट विगधी विचारा म सहमत नही थे। गाधी जी स तीव्र मतभदा के चलत उन्हान काग्रस छोड दी आर फारवड ब्लॉक बनाया। सुभाष चंद्र यास का सन् 1940 म विना मुकदमा चलाय ही जल म ठूस दिया गया। अग्रज उन्ह काफी खतरनाक ममयत थ। 17 जनवरी, 1941 का व अपन घर की क्डी नजरबदी स भाग निक्ल ओर भस बदलकर याना करत हए कावुल, मास्का आर वहा स वलिन पहुच गये। उनकी हिटलर स बााचीत हइ। पर हिटलर ने स्वतन भारत की उनकी योजना का नहीं माना। वासन जापान जान की याजना बनायी। एशिया मे जापान की जीता और युरापीय ताकतो की पराजय ने रास बिहारी बास दो मै सुभाषचद्र योस तुम मुझे खून तुम्हे आजादी दूगा। 109 wom आजाद हिंद फौज के पदाधिशरिया के साथ सुभाष का काफी उत्तेजित किया। उन्होन 28 30 मार्च 1942 का टाक्या म सम्मलन किया बैंकार म दूसरी सभा हुई जिमम इंडिया इडिपडस लीग' बनी। उसका नतत्व मुभाष च जाम का मिला। मलाया म जापानी मना के मामन हथियार डालन वाल विटिश सेनाक भारतीय जवाना आर अफ्सरा की मदद स आजाद हिंद फाज बनी। उसम 40 001 पड बदी शामिल हान कनिए तैयार हा गय। टारया मसभाप जापानी प्रधानमनी ताज म मिला आजाद हिंद पाज का शाम थाडी सफलता भी मिली पर उसकी ताकत पूरी तरह जापान की माहताज थी। जापानिया पतन माथ ही उसका मनाबल भी ट= गया। 18 अगस्त का फारमामा म उडमभाप चद्र बाम का विमान घटना म रहस्यमय माई माउटपेटन ने मुस्लिम भाई' खेलकर शग्रेसस विभाजन के लिए तैमार होने के लिए पियशर दिया। 110
आगादी या यह ऐतिहासिक क्षण आजाद हिदास्तान के प्रधानमत्री के रूप में पडित
जवाहरलाल नेहरू को लॉर्ड माउटबेटन ने शपथ दिलायी।
राजे रजयाडो के राजाओ य राजकुमारो से विदा लेते लॉर्ड माउटबेटन और उनकी
पत्नी
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जिना और लियाकत अली या परिस्थितिया में निधन हा गया। बास न आजाद भारत की एक काम चलाऊ सरकार भी बनायी थी। द्वितीय विश्व युद्ध म अग्रज आर उनक मित्र राष्ट जीत जरूर पर विटिश साम्राज्य का सूय अस्त हा गया। उसकी सेनिक आर आद्यागिक क्षमता का भारी नुक्सान उठाना पडा। दश भर म उमड रही राष्ट्रीयता की भावना का दखत हुए उसन भारत का आजादी दन म ही अपनी भलाई समझी। अग्रज सन् 1916 सही बडी चालाकीस परिस्थितिया का जटिल बनान क लिए हिंदू-मुसलमाना का आपस म लडान की नीति अपनाते रह था काग्रस न पहल इसकी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया। सर सयद अहमद सा आर मुहम्मद अली जिन्ना जैसे लागा को महत्व नही दिया गया। अग्रज भी कूटनीतिक आसिरमज हुए खिलाडी था उन्हान मस्लिम काड खलकर भारतविभाजन की परिस्थितिया तैयार कर दी। लॉर्ड माउटवटन ने वायसराय के रूप म वह कूटनीति खली विकाग्रस का अतत विभाजन मानना पडा। पाक्स्तिान बन गया। लेकिन भारत का राजनैतिक आजादी भी मिल गयी। 15 अगस्त 1947 कालालकिल पर प्रथम प्रधानमत्री करूपम जवाहरलाल नहरून तिरगा झडा लहराया। 112 चीन की जनवादी क्राति (19191949) द्वितीय विश्व-युद्ध के फलस्वरूप गहराये अतर्राष्टीय सकट ने दुनिया मे परिवर्तन की तेज लहर पैदा कर दी थी। रूसी क्राति की सफलता ने एशिया के कई देशो मे कम्युनिस्टो को फ्राति के लिए उत्प्रेरित किया। चीन मे माओ चतुड चूत और चाओ अनलाए और ल्यू शाआछी ने मिलकर क्राति की एक नवीन पद्धति ईजाद की, जिसे दीर्घकालीन प्रतिरोध युद्ध के जरिए 'इलाकावार सत्ता दखल' करते हुए नवजनवादी क्रांति करने के सिद्धात के तौर पर जाना जाता है। माओ की स्थापनाओ को शुरू मे मावर्सवाद के परपरागत विद्वानो ने सैद्धातिक रूप मठुकरा दिया पर अनुभव और व्यवहार जगत मे वे एकदम सही साबित हुई। 'ओ चतुड और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी क नतत्व म हुई चीन की क्राति का तहत ही थी पर इसका नतत्व चीन क किसाना और मजदूरा क हाथ म था। पुरानी जनवादी क्राति स अलगान क लिए इस नवजनवादी क्राति कहा जाता है। कम्युनिस्टा क हाथ स सपन्न हान के बावजूद इस क्रांति का अनुभव सावियत समाजवादी अक्तूबर क्राति स अलग था। सावियत क्रांति औद्यागिक शहरी इलाका म मजदूर बग क मशस्त्रविद्राह के जरिए हई थी पर चीनी क्राति पूर तीस माल तक चलाय गय क्सिाना के दीकालीन प्रतिराध युद्ध से विजयी हाकर निकली थी। इसम इलाकावार सत्ता दसल की नीति अपनायी गयी थी। इस क्राति आर इसक नेता माआ चतुड ने सारी दुनिया, खासकर एशिया के कम्यनिस्टा को बहद प्रभावित किया। कुछ कम्युनिस्ट पाटिया न तो अपन नाम के साथ एक नयी अभिव्यक्ति ही जोडनी शुरू कर दी जिस 'माक्सवाद-लनिनवाद आर माआ विचारधारा' कहत हैं। 4 मई 1919 का परिस शांति सम्मलन क अन्यायपूर्ण निणया कविरुद्ध पचिड क मा 113 डॉ सुन यातसेन तीन हजार स ज्यादा विद्याथिया न थ्यनआनमन चोक म इकट्ट हाकर एक विशाल जलस निकाला। प्रदशनकारिया न हमारी प्रभसत्ता का सम्मान करा दश क गद्दारा का मजा दा ओर वसाइ (परिस) मधि पर हस्ताक्षर न करा आदि नार लगात हा मागपश की कि जापान की तरफदारी करने वाला का सजा दी जाय। इस प्रकार माम्राज्यवाद आर यद्ध-चारिया की तानाशाही कसिलाफचीनी जनता का दशक्तिपण आदालन दशक कान कान म फ्लन नगा। शस् म इम मघर्प की मस्य शक्ति विद्यार्थी य। जन क बाद इस सघर्प नावामित हाकर सवहारा वग निम्न पूजीपति वग तथा राष्टीय पूजीपति वग क एक एस दशभक्तपूण आदालन का रूप ल लिया जिमम मख्य भूमिका सवहारा वग द्वारा जदा की गयी। 5 जन का शाडहारा क मजदूग न आम हडताल कर दी जिसम शामिल हान वाल मजदरा की सस्या 10 जून तक लगभग 70 000 तक पहच गयी। समूच दश की जनता क दशभक्तिपूर्ण आदालन क सामन उत्तरी युद्ध-मरतारा की सरकार का जूझना पडा। उमन गिरफ्तार विद्यार्थिया का रिहा कर दिया छाआ रूलिन लचुडवी व चाङचुङ श्याङ नामक तीना गद्दारा का उनक पटा स हादिया गया आर 'वईि शाति-मधि पर हस्ताक्षर करन स इकार कर दिया। इस प्रकार दशभक्तिपण 4 मई आदालन अपनी पहली विजय प्राप्त की। 4 मई आदालन ननव सस्कति आलालन का भी बढ़ावा दिया आर उस एक नयी व ऊची मजिल पर पहुच दिया। 4 मइ आदालन के बाद ममूच दशम प्रगतिशील विचारा की पत्रिकाआ की बाढ़ सी आ गयी ओर माक्मवाद का प्रचार प्रसार नव सम्पत्ति आदालन की मुख्यधारा बन गया। मई 1920 म छन तृश्यू तथा कछ अय लागा न शाङहाए म चीन का पहला कम्युनिस्ट ग्रुप कायम क्यिा। कुछ समय बाद नी ताचाआन 114 पइचिड म माआ चतड़ न हूनान प्रात म आर तुडपिऊन ऊहान म कम्युनिस्ट ग्रुप कायम किय। उनक अलावा चीनान क्वाडचआ जापान आर परिम म भी चीनी कम्युनिस्ट ग्रुप स्थापित क्यि गये। जुलाई 1921 म चीनी कम्युनिस्ट पाटी की पहली राष्टीय काग्रस का आयाजन शाडहा म क्यिा गया। माआ चतुड तङ पीउ छन थानड्यू, हशहड वाड चिनमइ तङ अनमिड लीता ली हानच्यन पाआ वइसड छन कडपा चआ पाहारा चाड क्वाथाआ आ ल्यू रचिड महित | 3 प्रतिनिधिया न दश क लगभग 50 कानम्टा का प्रतिनिधित्व करत हुए काग्रम म भाग लिया। इस काग्रम म चीनी कानस्ट पार्टी का पहला सविधान स्वीकार किया गया आर छन तश्य का पार्टी की कन्द्रीय कमटी मा महासचिव चना गया। इम प्रकार चीनी क्यानम्ट पार्टी की बाकायदा स्थापना कर दी गयी। जुलाई 1922 म चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने शाडहाए म अपनी दमरी राष्ट्रीय काग्रम की। इस काग्रस का मरय काम चीनी क्राात क लिए पार्टी कायक्रम बनाना था। काग्रम न उस समय की परिस्थिति का व्यान म रसत हरा पार्टी का जा बनियादी कायक्रम तय क्यिा वह कुछ इस प्रकार था -धरलू लडाई का ममाप्त करना युद्ध कायक्रम का तख्ता उलट दना आर दशम शाति कायम करना चीनी राप्ट का पूर्ण व वास्तविक स्वतनता क लिए अतराष्टीय माम्राज्यवादिया के उत्पीडन कजए का उतार पकना आर चीन का एकीकरण करक देश में एक अमली जनवाती लाक्तन स्थापित करना। इस तरह चीन के आधुनिक इतिहास म पहली बार चीनी कम्युनिस्ट पाटी द्वारा एक जनवादी क्रातिकारी कायक्रम जा पूर्ण रूप से साम्राज्यवाद व सामतवाद का विराध करता था पश क्यिा गया। जून 1923 म चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की तीसरी राष्टीय काग्रस क्वाडचआ म आयाजित की गयी। काग्रम म यह फसला क्यिा गया कि कम्युनिस्ट पार्टी क्वामिनताङ (डॉ सन यातमन द्वारा स्थापित राष्टीय पार्टी) स सहयाग करगी और कम्युनिस्ट पार्टी क सदस्य व्यक्तिगत हमियत स क्वामिनताड म शामिल हा सग। साथ ही काग्रेस न यह भी तय किया कि कम्यनिम्ट श्वामिनताड सहयाग के चलते चीनी कम्युनिस्ट पार्टी राजनीतिक विचारधारात्मक आर सगठनात्मक नतृत्व म मजदूर-आदालन आर क्मिान-आदालन तजी से विकमित हान लग। इसी दोरान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नतत्व म क्मिा -आदालन का भी बडी तजी से विकास हुआ। सबसे तीव्र प्रगति क्वाडतुड प्रात म दसन का मिली जहा क्सिान-आदालन का नतृत्व फड पाए नामक नता क हाथ म था। जनवरी 1926 तक क्वाडतुङ प्रात म किमान संघ की कुल सदस्य-सरया छ लास बीस हजार आर क्मिान-आत्मरक्षा दस्तो की मदम्य संख्या तीस हजार तक पहुच चुकी थी। फरवरी, 1925 में माआ चतुङ अपन जम-स्थान हूनान प्रात क शाआशान नामक गाव म वापम आय। वहा उन्हान किसान-आदालन का सफलतापूर्वक नतृत्व क्यिा आर बीस म अधिक कस्वा म किसान सपा की स्थापना की। जून 1926 तक चीन क 12 प्राता मक्मिान-सधा की स्थापना की जा चुकी थी, जिसम कस्बा-स्तर वाल क्सिान-सधा की मख्या 5 300 स अधिक थी आर कुल मदस्य-सख्या लगभग दम लास थी। डॉ मुन यातसेन के देहात क बाद क्वामिनताड की फूट-परम्ती धीर-धीर साफ्हान लगी। उत्तरी अभियान की शुरुआत कहान पर दक्षिणपथी गुट क नता च्याङ काइश न - 115 1 अक्तूबर 1949 को अध्यक्ष माआ चतुड ने चीन लोक गणराज्य की स्थापनारी घाषणा की। मिप क्वामिनताङकी के द्रीय क्मटी की स्थायी समिति का अध्यक्ष और उसके संगठन व सेनिक मामला कविभागो का प्रधान बन बैठा बल्कि राष्टीय सरकार की फौजी क्मटी का अध्यक्ष और राष्टीय क्रातिकारी मना का कमाडर-इन-चीफ भी बन गया। } जलाई 1926 को राष्टीय सरकार न उत्तरी अभियान का पापणा पर जारी क्यिा। इस तरह उत्तरी युद्ध-सरदारा के विरुद्ध एक दडात्मक अभियान की शुमआत हुइ। इस अभियान का मुख्य निशाना इन तीन युद्ध सरदारा का बनाया गया -ऊफइफ, जिसन हुनान हूपइ आर हनान पर कब्जा कर रखा था सन इवानफाड, जिसकी शक्ति च्या सू, आनहवइ चच्याड फूच्यन और च्याङशी प्रातो म केन्द्रित थी और चाग च्वालिन, जिसने उत्तर पर्वी चीन के सभी प्राता और पचिङच थ्यचिन परनियत्रण कर रसा था। मई 1926 म उत्तरी अभियान की अग्रिम यूनिट की हैसियत से 'स्वाधीन रजीमट ने जिसके कमाडर ये थिङ नामक एक मशहूर कम्युनिस्ट थे और जिसकी मुख्य शक्ति कम्युनिस्ट पार्टी और नौजवान सघ के सदस्यो की थी हूनान के मार्च पर चढ़ाई कर दी। जुलाई का राष्ट्रीय प्रातिधारी सना के लगभग एक लाख मैनिशान अलग अलग रास्ता स वाडचआ मकच कर दिया। 116 उत्तरी अभियान की विजय न किसान-आदोलन का तजी से आगे बढ़ाया। हूनान प्रात का सघर्ष जिमका परिचालन व नेतृत्व माओ चतुड कर रहे थे, सार देश के किसान आदालन की मुख्य-धारा बन गया। समूच देश म, सासतोर मे हूपइ, च्याडशी, पवाडतुङ, पच्यन चच्याड और हनान आदि प्राता म किमान-आदोलन तूफान की तरह विकसित हाने लगा। माच 1927 तक चीन मकिसान सपा की सदस्य संख्या एक करोड में भी अधिक हो चुकी थी। इसी बीच मजदूरा के क्रांतिकारी सघर्पन भी जार पकड़ा। जनवरी 1927 म ऊहान के मजदूरा न ल्यू शाआछी क नेतृत्व म विटन की बस्ती को वापस ल लिया। उत्तरी अभियान सना के विजयपूर्ण क्दमा आर अपनी गतिविधियो म तालमल कायम करने के लिए शाडहाए के मजदूरा ने तीन बार सशस्त्र विद्रोह किय। पहली बार अक्तूबर, 1926' और दूसरी बार 'फरवरी,1927 क सशस्त्र विद्रोह असफल रहे किंतु 21 मार्च 1927 को चाआ अनलाए आर अन्य व्यक्तिया क नेतृत्व म किया गया तीसरा विद्रोह सफल रहा, जिसमे शाडहाए क मजदूरा न 30 घटा से अधिक लडाई के बाद शहर का मुक्त करा लिया। उत्तरी अभियान की सफलता आर मजदूर किसान आदालन क चोतरफा विकास ने चीन म साम्राज्यवादिया का शासन हिला दिया। 24 मार्च, 1927 को उत्तरी अभियान-सना द्वारा नानचिङ पर कब्जा कर लिए जाने के बाद उसी रात ब्रिटेन अमरीका प्रास जापान तथा इटली के युद्धपाता न नानचिड पर तापा स गोल बरसान शुरू कर दिय। इस घटना म दा हजार से ज्यादा चीनी हताहत हुए। यह हत्याकाड इस बात का इशारा था कि साम्राज्यवादी शक्तिया चीनी पूजीपति वर्ग का क्राति स गद्दारी के लिए मजबूर करन का पड्यत्र रच रही थी। उन्हाने च्याङ काईशक को अपना नया एजट चुन लिया था और क्रांतिकारी खम का अदर सतहम-नहस कर क्राति का समूल नष्ट करने की कोशिश शुरू कर दी थी। उस समय च्याड काईशक स्वय भी साम्राज्यवादिया जमीदारा ओर दलाल-पूजीपतिया क माय अपना गठजाड ओर पक्का करन को अधीर हो रहा था। 12 अप्रैल 1927 का उमन शाडहाए म प्रतिक्रांतिकारी विद्राह कर दिया और बहत बड़े पैमाने पर मजदूरा व कनिस्टा की हत्याए करवाई। च्याङसू, चच्याड, फूच्यन आर क्वाङतुङ आदि प्राता म भी एस ही हत्याकाड हुए। 18 अप्रैल को च्याङ काईशक न नानचिङ मे अपनी तथाकथित राष्टीय सरकार कायम की जा बड जमीदारा व बड पूजीपति वर्ग का प्रतिनिधित्व करती थी। 1 अगस्त 1927 का उत्तरी अभियान सना क तीस हजार सेनिका न, जिनका नतृत्व चीनी कम्युनिस्ट पार्टी कर रही थी या जिन पर कम्युनिस्ट पार्टी का प्रभाव था च्याडशी प्रात क नानछाङ शहर म एक सशस्त्रविद्राह क्यिा। यह विद्राह चाआ अनलाए (पार्टी की मार्चा कमेटी के सचिव) चूत हा लुड, य थिङ और ल्यू पाछड आदि के नतृत्व म किया गया था। पाच घटा की घमासान लडाई के बाद विद्रोही सैनिका ने नानछाङ म स्वामिनताङ गैरिजन सना क दस हजार स अधिक सैनिका को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया। कछ दिना क बाद विद्राही सना ने क्वाडचआ पर अधिकार करन आर क्वाडतुड प्रात क्रातिकारी आधार क्षेत्र की पुनस्थापना करन क मकसद स च्याङशी क दक्षिण की ओर कूच कर दिया। लेकिन अक्तूबर के शुरू म वह पूर्वी क्वाङतुङ म दुश्मन की वहतर सना के घरे म फ्स गयी आर उसकी शक्ति घट गयी। बच-खुच सैनिकों का एक दस्ता चू 117 त और छन ई क नतृत्व म मयप जारी रसन के लिए हनान प्रात की आर चला गया। नानछाड विदाह चीनी भ्यानम्ट पार्टी के स्वतत्र नतृत्व की शुरआत था-क्रांतिकारी मना द्वारा स्वामिनताद प्रतिक्रियागादिया पर किया गया पहला मशम्न प्रहार था। इसीलिए उसक याद म । अगस्त का दिन चीनी जनता की प्रांतिकारी सना के स्थापना दिवम कप म मनाया जाता है। कन्द्रीय क्मटी न हनान च्याङशी भीमा पर शरद फमलविवाह का नतत्व करनक लिए माआ चतुङ पा वहा भजा19 अगस्त का विद्राह छडा गया। मजदरा-क्मिामा की क्रांतिकारी मना धाडशा पर कब्जा करन लिए तीन तरफ स आग बदन लगी। लाग्न दुश्मन की शक्ति अपन म ज्यादा हान की वजह म प्राप्तिकारी मना का भारी नुक्मान उठाना पड़ा। तत्कालीन पगिम्थात का विश्लपण करत हए माआ चतड इस निष्कप पर पहुच कि क्राातकारी मना का मस्य शहरा पर जहा दुश्मन शाक्तशानी है हमला नहीं करना चाहिए। इस बजाय उम उन हाती इनाया में जहा दश्मन कमजार ह अपनी शक्ति व प्रयास द्रित करन चाहिए। टमलिए वची हुइमना उन नतत्व महूनान आर च्याशी प्राता की सीमा पर स्थित चिडयाडशान पक्तभसला की आर आग बढ़ी। मानछाड विदाह शरद फ्मल विद्राह आर पवाडचआ विवाह न क्वामिनताडकी कत्लआम की नीति का भारी धरका पहुचाया। इसक बाद चीनी कम्युनिस्ट पार्टी न एक नय दार म प्रवश किया, जिमम मजदग और किमाना की लाल सना कायम की जा सकी। अक्तूबर 1927 म लाल मना माआ चतुङ क नतत्व मचिडकाडशान क पहाडी इलाय म आ पहुची। वहा उन्हान जन समुदाय का मर्गाठत करक छापामार लडाई चलायी, भमि-काति की स्थानीय म य-रल स्थापित क्यि पार्टी-सगठन कायम क्यि और मजदरा विमाना की गजनीतिक सत्ता की स्थापना की। चिडकाशान पहाडी इलाका चीन का पहला दहाती कातकारी जाधार क्षेत्र बन गया। अप्रल 1928 1 नानछाड विद्राह म भाग लन वाली मना का एक भाग और हूनान विद्रोह म हिस्मा लन वाली प्रिमान-मना चू त व छन ईक्नतत्व म इसी इलाक म पहच गयी आर माआ चतङ क नतत्व वाली सना स मिल गयी। इम मिलन क बाद चीनी मजदूरा आर किमारावी लाल सना की चाथी कार सगठित की गयी जिमम दस हजार स भी अधिक मनिमय। इस कार क कमाडर च त थ माआ चतुङ इस पाटी-प्रतिनिधि आर छन इ राजनीतिक विभा निदशक थे। चिडाडशान पहाडी इलाक की रक्षा की लडाई म चू त ओर माओ चतुङ न जा सुप्रसिद्ध छापामार कायनीति अपनायी वह इस प्रकार थी दुश्मन आग बढ़ता है, तो हम पीछ हट जात हैं जब दुश्मन पडाव डालता है ताहम उस हरान-परशान करते हैं। जब दुश्मन थक जाता है ता हम उस पर धावा बोल दत हैं जय दुश्मन पीछ हटता ह ता हम उसका पीछा करत हैं।"चिडवाडशान क संघप क दोरान सना पर पार्टी एकछन नतत्व का सिद्धात भी निर्धारित किया गया। लाल मना का तीन काय साप गय लडाई क्रातिकारी कार्य क लिए धन संग्रह (बाद म इम बदलकर उत्पादन कर दिया गया) आर जन काय। इसी अवधि म जन-मना क लिए जनशासन क तीन मुख्य नियम आर ध्यान दन याग्य आठ वात' भी निर्धारित की गयी। मन् 19277 शरद सलपर 1930 तक ममूच दशम लाल सना आर क्रांतिकारी आधार क्षत्राका क्दम-व-क्दम विकास व प्रमार हुआ। जनवरी 1929 मलाल सना की चोथी कार माआ चतुड और च न क नतत्व म दक्षिण च्याङ्गशीम प्रवेश क्यिा, जहा 118 उन्हान क्रमश दक्षिण च्याडशी व पश्चिमी फूच्यन नामक दा क्रांतिकारी आधार-क्षत्र कायम किय। सन् 1930 म इन दा आधार क्षना कामिलाकर केन्द्रीय आधार-क्षन बना दिया गया, जिसका मदर मुकाम च्याडशी प्रात क रूचिन म था। सन् 1930 क पूर्वाद्ध तक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा 300 म ज्यादा काटिया मे सशस्त्र विद्राह छड गय आर 15 फ्रांतिकारी आधार-क्षन कायम किय गय। उस समय तक मार चीन म लाल सना की मख्या माठ हजार स अधिक हा गयी थी। जव च्याङ काइशक अपनी पूरी शक्ति स गहयुद्ध चलान म लगा हआ था जापानी साम्राज्यवादिया न मौक का फायदा उठात हुए 18 सितबर 1931 का फाज भजकर शनयाङ पर कब्जा कर लिया। यह घटना 18 सितबर की घटना के नाम स प्रसिद्ध है। च्याङ काइशक न उत्तर पर्वी चीन म स्थित चीनी फौजा का जापानिया का 'कतई मुकाबला न करन का आदशदिया। नतीजा यह हुआ कि तीन महीन से कुछ अधिक समय म ही उत्तर-पूर्वी चीन क तीना प्रात जिनका क्षत्रफल दस लास वर्ग-किलामीटर से भी अधिक है, जापानिया क हाथ म चल गय। जनवरी 1931 म वाङमिङन मूल नाम छन शाआत्वी (1904-74) कम्युनिस्ट पार्टी की छठी केन्द्रीय क्मटी के चाथ पूण अधिवशन म पाटी का नतत्व हथिया लिया। तब में लकर सन् 1934 तक वह पार्टी म एक वामपथी अवसरवादी कार्योदशा अपनाता रहा जिसकी विशेषता कट्टरता थी आर जिस कारण क्रांति का भारी नुक्सान उठाना पड़ा। वाड मिङ बड शहरा पर कब्जा करन की आवश्यकता पर बल दन क अपन गलत दप्टिकाण पर अडा रहा और दहातास शहरा का घरन व सशस्त्र शक्ति द्वारा राजनीतिक सत्ता छीनन की रणनीति का विराध करता रहा। वाङ मिड आर उसक समर्थक चाहत य कि लाल सना वड शहरा पर फारन हमला कर द। उन्हान आदेश दिया कि क्वामिनताल निर्यातत बड शहरा म व्यापक रूपम हडताल आर प्रदशन आयाजित क्यि जाय। नतीजा यह हुआ कि क्वामिनताड अधिस्त इलाका म कनिस्ट पार्टी क लगभग मभी सगठन नष्ट हा गये। वाड मिड आर उमक अनुयायिया न उन कामरडा क प्रति, जावाड मिङकी कादिशा म महमत थ निमम मघप जार निष्ठर प्रहार करन की नीति अपनायी। एक माक पर ता स्वय माआ चतड का भी लाल मा क नतत्वकारी पट म अलग कर दिया गया। अक्तूबर, 1933 म च्याड काइशक न अपनी दम नास फाज के साथ क्न्द्रीय आधार-क्षन आर उमक पाम हूनान-च्याडशी आधार क्षन व पूच्यन-चच्याड च्याडशी आधार क्षन कसिलाफ धरा डालन व विनाश करन की पाचवी मुहिम शुरू कर दी। वामपथी अवमरवादिया क नताआ न छापामारवाद' का विराध करन के नाम पर वहतर मय क्ति का न्द्रित करना शन का भुलावा दकर अपन प्रदश म दूर तक प्रवेश करने दना आर चलायमान उडाइ चनाना आदि लचीली गतिशील काय नीतिया का छाडग्यिा आर लाल मना का मजबूकिया कि वह दुश्मन की वहतर मना स घमासान लडाइ लड। इस गलती का परिणाम यह हुआ कि लाल मना सभी जगह निष्क्रिय स्थितिम पड गयी। एक माल की भीषण लडाइ क बाद भी वह दुश्मन की घरा डालन व विनाश करन की महिम का पराजित नहीं कर सकी जार अत म मजवर हाकर उम केन्द्रीय आधार क्षत्रम अपना रणनीतिक स्थानातरण करना पडा। अक्तवर 1934 मलाल मना की पहली मार्चा मना (क्न्द्रीय लाल मना) क अस्मी हजार स अधिक मनिका न फूच्यन 119 प्रात क छा थड व निडव्हा च्याङशी प्रात कचिन व इवीत स्थाना स रवाना हाकर अपना लबा अभियान (लाग मार्च) शरू क्यिा। दुश्मन की चार नाकबदी पक्तिया को चीरन क बाद लाल सना न क्वाडतुड हूनान और क्वाङशी स गुजर क्वइचआम प्रवेश किया। इस लब अभियान के दारान वामपथी अवसरवादिया न शक्तिशाली दुश्मन के सामन पलायनवादी नीति अपनायी जिसक कारण लाल सना का कई बार खतरनाक परिस्थितिया का सामना करना पड़ा आर बड़ी सस्या म उसक सैनिका क हताहत हान स अत म वह आधे सभी कम रह गयी। खतर मे पड़ी लाल सना आर क्राति का बचान क लिए जनवरी, 1935 म चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की कन्द्रीय कमटी के राजनीतिक ब्यूरा का एक विम्तत सम्मलन क्वइचओ प्रात के चनइ शहर म आयाजित किया गया जिसम वाड मिड की वामपथी अवसरवादी फौजी कार्य दिशा की आलाचना की गयी आर माआ चतड द्वारा प्रतिपादित मही फौजी कार्य-दिशा का पनापित किया गया। सम्मलन में पार्टी क नतृत्वकारी अगा का पुनर्गठित किया गया। माआ चतङ चाओ अनलाए आर वाङच्याश्योङ का पाजी मामलो क तत्वकारी दल का सदस्य चना गया और पार्टी पर माआ चतङ का नतत्व कायम किया गया। इमक बाद म चीनी कति विजय के पथ पर पुन आगे बटन लगी। चनइ सम्मलन क बाद लाल सना न उत्तर पश्चिम सछ्वान प्रात म प्रवेश किया आर वह वहा की चौथी मार्चा सना सजा मिली जिसका नतत्व चाङ क्वाथाआ क हाथ म था। पार्टी आर लाल मना न माआ चतड के नतृत्व म चाड क्वोथाआ की उन अपराधपूर्ण कायवाहिया का विराध किया जा उसक द्वारा पार्टी आर लाल सना म फूट डालन कलिए की जा रही थी। इसक बाद लाल सना न उत्तर की आर बढना जारी रखा। भारी नुकसान व धार मघर्ष क पश्चात लाल मना अक्तूबर 1935 म उत्तरी शनशी आधार क्षन म पहच गयी आर वहात्तनात लाल सना क एक अन्य दस्त स जा मिली। इस प्रकार चीनी मजदूरा आर किसाना की लाल सना का 12 500 किलामीटर लबा अभूतपूर्व अभियान सत्म हआ। अक्तूबर 1936 म हा लङ आर रनपीशि की कमान म लाल मना की दूसरी मोचा सेना ओर चोथी माचा सना का एक अन्य भाग भी उत्तरी शनशी पहचकर कद्रीय लाल सना सजा मिला। सन् 1935 म 9 दिसबर आदोलन ने जापान का विरोध करन और दश को बचाने के राष्टव्यापी सघर्ष म एक नया उभार पैदा कर दिया। इसका क्वोमिनताङ फौज के दशभक्त सिपाहिया पर भी गहरा असर पडा। उत्तरी शेनशी में लाल सेना पर हमला करन के लिए च्याङ काईशेक द्वारा भेजी गयी उत्तर-पूर्वी फौज (जिसके कमाडर चाद्ध बल्याङ थे) और उतर पश्चिमी फौज (जिमक क्माडर याड छड थे) न लाल सना के विरुद्ध गृह युद्ध वस्तुत बद कर दिया। चाङ और याङ के रवैये मे इस परिवर्तन से च्याह बाईशक क्रोधित व भयभीत हो उठा। उसने स्वय शीआन जाकर उन दानों को लाल सना पर हमला करन क लिए मजबूर किया। लेकिन 12 सितबर 1936 को चाद्ध और याङने अपने मैनिक भेजकर च्याह काईशेक को गिरफ्तार कर लिया। अगले दिन उन्हाने सार दश के नाम एक खला तार भेजा जिसमे गृह-यद्ध बद भरने और जापान का प्रतिराध करन क लिए कम्युनिस्ट पार्टी के साथ सहयाग करने की माग की गयी। यह घटना शीआन पटना के नाम से प्रसिद्ध है। लेकिन क्वोमिनताह के जापान परस्त गुट ने जिसका अगवा हा इदिन था इस घटना से लाभ उठाकर गृह युद्ध का विस्तार करन की कोशिश की 120
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- ताकि जापानी हमलावरा के लिए रास्ता साफ किया जा सक और च्याङ काईशक क हाथ स सत्ता छीनी जा सके। इसलिए उसने सना भजकर शीआन के पूर्व म स्थित थुङक्वान पर धावा बाल दिया। राष्टीय हित ओर जापानी-आक्रमण-विराधी संघर्ष की एक्ताक लिए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी न दृढ़तापूर्वक हा इछिन की साजिश का विरोध किया और शातिपर्ण ढग में शीआन घटना का हल करनका सुमावदिया। चाआ अनलाएक नतृत्व में चीनी कम्यनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधिमडल मध्यस्थता करन क लिए शीआन पहुचा। च्याड काइशक का अपनी रिहाई स पहत मजबूर हाकर अनक शर्त माननी पड़ी, जिनम गह-युद्ध राक्न ओर जापान के प्रतिरोध के लिए कम्यनिस्ट पार्टीस सहयाग करने की शर्ते भी मिल थी। शीआन घटना का शांतिपूर्ण ममाधान दस साल स चल आरह गह-युद्ध की समाप्ति ओर जापान विराधी राष्ट्रीय सयुक्त मार्चे की शुरुआत का प्रतीक था। 13 अगस्त 1937 को जापानी हमलावर सनान शाडहाए पर धावा बाल दिया और नानचिड को जाखिम में डाल दिया। इस प्रकार च्याङ काईशेक क शासन ओर चीन म आग्ल-अमरीकी साम्राज्यवादिया क हिता क लिए सीधा सतरा पदा हा गया। परिस्थिति के यह माड लन के बाद क्वोमिनताड सरकार का जापान विराधी युद्ध म मजवरन भाग लना पडा ओर जापान का सयुक्त रूप स प्रतिराध करन के लिए चीनी कम्यनिस्ट पार्टी क माथ एक समझौता करना पड़ा। इस समझोत के अनुसार लाल मना की मुख्य शक्ति को जा उस समय उत्तर पश्चिमी चीन मतनात थी ओरजिसमे तीस हजार से अधिक सनिक थ राष्टीय क्रातिकारी सना की आठवी राह सना का नाम द दिया गया। चू त इसक कमाडर इन चीफ फङ तव्हाए इसक उप कमाडर-इन-चीफ और य च्यनइड इसके चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त क्यि गय। जापान ३ बर्बरतापूर्ण आक्रमण क मामन क्वोमिनताङ का जापान परस्त गुट जिसका सरगना वाड चिडवई था लगातार यही राग अलापता रहा कि चीन क हथियार जापान से घटिया हैं। इसलिए यदि चीन न जापान स युद्ध जारी रखा तो एक राष्ट के रूप में उसका अस्तित्व ही मिट जायगा। दूसरी तरफ च्याड काईशक गुट ब्रिटन और अमरीका की सहायता स यद्ध म शीघ्र विजय प्राप्त करन का सपना देखता रहा। इन दाना की बेहूदा बाता का खडन करन आर सही रास्ता बतान के लिए माओ चतुड न मई 1938 में दीर्घकालीन युद्ध क बार मे नामक एक पुस्तक लिखी व प्रकाशित की। 'युद्ध करन की शक्ति का अथाह सात जन-ममुदाय मे है ' चीन-जापान के इतिहास न उनकी इस भविष्यवाणी का सही मावित कर दिया। सन् 1939 की दिया स लकर सन् 1943 की गर्मिया तक च्याड काईश न तीन कम्युनिस्ट विराधी हमल क्यि। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने जवाबी प्रहारास उमक प्रत्येक हमले का विफल कर दिया। सयक्त मार्च के प्रति कम्युनिस्ट पार्टी का रुख यह था एकता कायम करना संघर्ष करना और मघर्ष जरिए फिर एकता कायम करना। संघर्ष करत समय उसन न्यायाचितता के आधार पर अपना फायदा दखत हुए सयत रूप स लडने का कार्यनीतिक उसूल ओर आत्म-रक्षा का यह उमूल अपनाया 'जब तक हम पर हमला न हा नव तक हम हमला नहीं करग। अगर हम पर हमला क्यिा गया ता हम जरूर जवाबी हमला करेगा अत कनिस्ट पार्टी न क्वोमिनताड क सभी हमला का विफल कर दिया। 122 च्याड काईशेक Park जापान विराधी युद् म अतिम विजय प्राप्त करन ओर चीनी क्राति का पर्ण विजय तक पहुचान की तेयारी करन क लिए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी न यनआन म 23 अप्रल स 11 जून 1945 तक अपनी सातवी राष्ट्रीय काग्रस आयाजित की। ऐतिहासिक महत्त्व की इस काग्रस म 752 प्रतिनिधि आर वकल्पिक प्रतिनिधि शामिल हए जिन्हान सार देश क 12 लास 10 हजार पार्टी सदस्या का प्रतिनिधित्व किया। काग्रस न एक सपूर्ण कार्यक्रम ओर यह सही कार्य-दिशा निर्धारित की "साहस क साथ जन-समुदाय का गालबद करा, जापानी आक्रमणकारिया का पराजित करा आर नय चीन की स्थापना करो। काग्रम म पार्टी का नया सविधान भी स्वीकार किया गया और पार्टी की नयी कन्द्रीय क्मटी चुनी गयी, जिसक अध्यक्ष माआ चतुङ थे। पार्टी-काग्रस क बाद जन-सना न जारा क साथ अपने जवाबी हमल जारी रस आर बहुत म याय हुए इलाक फिर से प्राप्त कर लिए। 8 अगस्त, 1945 का मावियत सध न जापान क खिलाफ युद्ध की घापणा कर दी और उसकी लाल सना न उत्तर पर्वी चीन म मौजूद जापानी हमलावरा पर धावा बाल दिया। साथ ही मुक्त क्षना की जन-सना न भी राष्ट्रव्यापी जवाबी हमला शुरू कर दिया। 2 सितबर का जापानी साम्राज्यवादियो न आत्म-समर्पण के रम्नावेज पर हस्ताक्षर कर दिये। इस तरह आठ साल क कटु सघप के बाद चीनी जनता न जापान-विराधी युद्ध म अंतिम विजय हासिल की। जापान पर विजय पान क बाद समूची चीनी जनता न एक भ्वाधीन, शांतिपूर्ण जनवादी, समद्ध ओर शक्तिशाली चीन का निमाण करन की माग की। लकिन क्वामिनताङ ओर च्याड काइशक चीनी जनता पर अपना तानाशाही शासन थापन पर 123 अड रह ताकि चीन आग भी बड जमीदार वग व बड पूजीपति वर्गक अधिनायकत्व म एक अध-आपनिवशिक व अर्ध मामती दश बना रह। दसरी तरफ, अमरीकी साम्राज्यवादी पूर चीन का अपना उनिवश बनाना चाहत थे। 26 जून, 1946 या क्वामिनताड सनाआन मुक्त क्षना पर चातरफा हमला कर चीन के इतिहास म सबस बडे गह युद्ध का भडका दिया। गृह-यद्ध क शुरू म क्वामिनताड क अधीन 43 लास सनिक थे आर 30 कराड म ज्यादा आबादी क इलाका पर उसका अधिकार तथा सभी बड-बड शहरा और ज्यादातर मचार-परिवहन व सडका पर उसका नियत्रण था। क्वामिनताड न आत्म समपण करन वाल दम लाख जापानी मनिका की ममस्त युद्ध-यामग्री भी अपन अधिकार म ल ली थी। उसे अमरीकी फाजी आर आ थक सहायता भी प्राप्त थी। दूसरी ओर चीनी जन मुक्ति सना व मनिका की सख्या कवल बारह लास थी। माज-सामान क नाम पर उसक पास सिफ पुरानी बदूव ही थी। उम काइ विदशी सहायता भी नहीं मिली थी। मुक्त क्षेत्र जा ज्यादातर गावा म फैल हुए थ उनकी आबादी कवल दस कराड स थाडी ज्यादा थी। चूंकि दुश्मन आर क्रांतिकारिया क बीच का शक्ति-सतुलन एमा ही था इसलिए काइ ताज्जव नही कि उस समय क्वामिनताडन डीग मारत हुए यह कहा कि जन मक्ति सना कानीन स छ महीना क अदर ठिकान लगा दिया जायगा। अपन म प्रल दुश्मन क हमल का मुकाबला करन क लिए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी न जा उसल अपनाया उसका मुख्य उद्देश्य वहतर मय शक्ति का कन्द्रित कर दुश्मन की प्रभावशाली शक्ति स नम्तनाबूद करना था न कि किमी शहर या स्थान पर कब्जा करना या उस पर अपना नियत्रण बनाय रसना। राजनीतिक क्षत्र म पार्टी न अमरीकी माम्राज्यवाद आर च्याड काइश क विरद्ध समूच राष्ट्र का अत्यत व्यापक सयुक्त मार्चा मर्गाठत किया। कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी न सही नीति अपनायी, इसलिए जन मषित सना लडत-लडत आर मजबूत हाती गयी। राष्टव्यापी गह-यद्ध आरभ हान क बाद जन मक्ति मेना 7 आठ महीना के अदर ही दुश्मन क सात लाख मनिका का सफाया कर दिया। माच 1947 म क्वामिनताङका चातरफा हमलकीरणनीति धाडकर अपन हमल उत्तरी शनशी व शानतुट क दा मुक्त क्षता पर द्रित करन व लिए मजबूर हाना पड़ा। जन मुक्ति मना न च्याड काइश की याजनाआ का इस बार भी धूल ममिला लिया। जून आर मितवर 1947 व दागन जन मास्त मना न राष्टव्यापी पमान पर अपना आक्रमण शर कर दिया। अब लडाइ मुख्य म्प मरवामिनताङ शामित इनाया महान लगी। जन मुक्ति मना न पहत म एम शहरा पर जहा यवाामनताड न रक्षा के लिए बहुत-सी पांजे रस घाडी थी बजा कर लिया आर दुश्मन की अधिकाश प्रभावकारी शक्तिया या नष्ट कर दिया। अगस्त 1948 म जन मुक्ति मना न प्रमश तीन बडी हिम चलायी-ल्याआशी शनयाड महिम व्हा हा महिम भार पचिङ पनचिन मुहिम-जा दुनियाभर म प्रमिद है। [42 दिना तक चलायी गयी इन तीन महिमा म पवामिनताड 15 लास 40 हजार मनिका कामपाया कर दिया गया।2 जनवरी 1949 या जन-मारत मना र दम लास मनिवान छाडच्याइनदीकापार करना और दक्षिणी आर आग बढ़ना शम् पिया। 21 अप्रैल का उहान नानचिहया जाच्यादकाइशर व प्रतिप्रियावादी शामन या कट रहा था मुस्त गनिया। यह स्वामिनताह हपमन य पतन या वानर बन गया। इमर या जन मरिन मनान आधी की तरह अलग अनग 124 YANGTZE RIVER MANCHURIA 500 N LES चीन का मानचित्र MUKDEN 0 PE INO Psm . TENA KOREA. YELLOW RIVER NAX ING m JAPAN NANKOW ma SHANEMAT C OING THE NUMP INDIA LASI BURMA ROAD 194 . D LAY CA TO m HONG KOWE BURMA INDOCHINA मार्चा पर क्वामिनताड क बच सच मनिका का सफाया कर डाला। जलाइ 1946 म कर जून 1949 तक उमन कुनमिलाकर 80 लास 70 हजार क्वामिनताड मनिका का तहम-नहस कर डाला आर तिब्बत थाएवान आरक्छ तटवती द्वीपा का छाडकर ममच चीन का मक्त करा लिया। इस प्रकार चीनी जनता न तीमर गह यद्ध म विजय प्राप्त की। 21 मितवर 1949 का चीनी जन-राजनीतिक मलाहकार मम्मलन का प्रथम पूर्ण आधवशन पहचड म आयाजित क्यिा गया। इमम विभिन्न क्रातिकारी वर्गो विभिन्न जनवादी पाटिया जन-मगठना अल्प-मस्यक जातिया आर पवामी चीनिया की नमाइदगी करन वाल 662 प्रतिनिधिया न भागलिया। मम्मलन न गप्टीय जन-प्राताना मभा क सत्ताधिकारा व कामा का निष्पादन करत हुए 'चीनी जन राजनीतिक मलाहकार सम्मलन का सामान्य कायक्रम स्वीकार क्यिा, जा एक अन्यायी विधान की भूमिका जदा करता था। मामाय कायक्रम म चीन लाक गणराज्य की स्थापना करन का निणय क्यिा गया आर यह निर्धारत किया गया कि इस गणराज्य काम्वरूप जनता क जनवादी अधिनायकत्व का हागा जिसका नतत्व मजदूर वग करगा आर जा मजदूर-क्मिान गठजाड पर आधारित हागा। मम्मलन म पचिङका चीन लाक गणराज्य की राजधानी बनाया गया। सम्मनन न माआ चतुङ का क्न्द्रीय जन सरकार का अध्यक्ष तथा चूत ल्यू शाआछी मुङछिड लिड लीचीशन आर चाड लानका उपाध्यक्ष चना। मम्मलन क बाद केन्द्रीय जन सरकार न अपना पहला अधिवशन चुलाया आर चाआ अनलाएका सरकार का प्रधानमनी तथा विदशमी नियक्त क्यिा। । अक्तूबर 1949 का तीन लाय लाग थ्यनआनमन चाक म इक्ट्ठहए। अध्यक्ष माआ चतुङ न चीन लाव गणराज्य की विधिवत धापणा की। चीनी इतिहास का एक नया अध्याय सल गया।
क्यूबा की क्राति (1959) फिदेल कास्त्रो के नेतृत्य म हुए क्यूबा के मुक्ति-सग्राम ने अव लोक-कथाओम स्थान पा लिया है। मात्र 82 क्रांतिकारियो ने तानाशाह बटिस्टा की सुसज्जित फौज से लोहा लेना शुरू किया और तीन साल से भी कम समय म बेमिसाल जीत हासिल की। इस जीत मे कास्त्रो के लेपटीनेट थे-चे गुएवारा, राउल कास्त्रो और सिमेलो। क्यूबा के किसानो ने क्रातिकारियो का दिल खोल कर साथ दिया। अमरीकी साम्राज्यवाद की गर्व से तनी रीढ पर क्यूबा की क्राति एक बहुत बडी ठोकर थी। 'न् 1956 क मध्य म लातीनी अमरीकी दश क्यूवा तानाशाह टिस्टा (Batista) - बटिम्टा क किसी भी विराधी का बेहद सस्ती स चलती। गिरफ्तार लागा का भयानक अमानवीय यातनाए दी जाती। उनकी कटी पिटी लाश सडका पर या ममद्र म पनी हइ मिलती। बटिम्टा ने मावियत मध आर दमर समाजवादी देशाम अपन राजनतिक सवध पूरी तरह ताड लिए थे। वह अब अमरीका क हाथा की कठपुतली मान बनकर रह गया था। क्यूवाइ कम्यनिस्टा की पार्टी पाटिडा मालिस्टा पॉपलर (Portido Socialista Popular) पर प्रतिवध लगा दिया गया था। टड यनियना को गुडा क नतत्व म ददिया गया था। अमरीकी पूजीपति पूर दश मे छा गय थ। फाज अमरीकी अफमरास भरी हई थी आर पलिम की लगाम भी मी आइ ए यहाथ म थी। कल मिलाकर क्यूबा की स्थिति एक अमरीकी उपनिवश जमी हो चकी थी। लकिन क्यूवा कलागाम अपन अधिकारा आर आजादी कलिए विदाह की परानी परपरा अब भी माजूद थी। 19वी शताब्दी म व आधी सदी तक म्वतता सघप चला चक थ। सन् 1933 म उहान णित तानाशाह मकाडा (Machado)का मत्ताम उतार दिया था। टिम्टा भी डरा हआ था। एक यवा वकील फ्दिल काम्बा (Fidel Castro) क 126 क प्रसन मुद्रा में चे गुएवारा नतत्व म कुछ दुम्साहमिक क्रांतिकारिया न माकाडा (Moncado) बैरका पर हमला दिया था। इस कार्रवाइ म छात्रा, युवा मजदूरा सरकारी कमचारिया आर कारीगरा न भाग लिया था। राजनतिक अनुभव की कमी जार किसी ठास कार्यक्रम क अभाव न इन लागा का नाकामयाव बनाया। मभी गिरफ्तार कर लिय गय। फ्दिल पर मकदमा चला आर उहान अदालत म अपना एतिहासिक भापण हिस्टी विल एब्जाल्व मी (History will absolve me)दिया। वादम सभी का माफीद दी गयी। य क्रातिकारी मक्मिका चल गय आर वही म प्राति की अगली तयारी करन लग। क्यूबा क अदर भी तमाम जुल्म सहत हुए भी मजदूर बुद्धिजीवी विश्वविद्यालया आर हाई स्कूला म छान टिस्टा आर उसक अमरीकी रक्षका क खिलाफ संघर्ष कर रह य। भमिगत प्रम टिम्टा के अपराधी का पदाफाश कर रही थी। हुकूमत क खिलाफ सभाए प्रदशन जार हडताल बढ़ती जा रही थी। तानाशाह न उच्च शिक्षा कसार मम्थान बद कर दिय थ। रिश्वत ब्लकमल ओर धर्माकया के जरिए टिस्टा विपक्ष का समथन हासिल करन की कोशिश कर रहा था। टिस्टा अपन भाषणा म आजादी म्वतत्रता आर प्रगति की चचा करत ओर जास मार्ती (Jose Maru) जैम कवि, क्रातिकारी जार शहीद क नाम का इस्तमाल भी करता। फाज का यह पूर्व सार्जेट दरअसल झठ आर बदकारी का घिनाना पुतला था। 127 Dec फिदेल कास्त्रा य चे गुएवारा क्यूवा क अदर की इमी क्रांतिकारी परिस्थिति कासकर फिदल कास्त्रा आर उनक साथिया न क्यूवा पर हमला करन की याजना बनायी। उह स्पनिश फाज क एक पूर्व क्नल अल्बर्टा वाया (Alberto Bayo) की मदद भी मिल गयी। गया मुरिल्ला युद्ध म विशपज्ञ हान व माथ माथ वि भी थे। मक्मिका सिटी स 35 किमी दूर साटा राजा (Santa Rosa) नामक जगह पर वाया न पिदल के कातिकारिया का जगल पद्ध का प्रशिक्षण दना शरू क्यिा। उन्ह हथियारा का इस्तमाल करना आर कठार मस्टार जीवन जीन का अभ्यास कराया। बाया का उन छात्र प्राफसर आफ इंग्लिश र गुप्त नाम म चलान ! इन छानाम अर्नेम्टा च गुएवारा राउल कास्ता डारिया लापज, सिमला आर कार्लोस उमडज जस लाग शामिल 4 जा वाद म फिदेल माथ आधुनिक पयवा के निर्माता बना 22 जून 1957 कामी आइ ए के कहन पर मक्सिकन सीट पलिम न माटा राजा पर छापा मारकर क्रांति की तयारीम सलग्न इनलागा मागिरफ्तार कर लिया। विमग्न समाजन कातिकारया की गिरफ्तारीमा कडा विराध क्यिा मविसका क्पव गटपति पूर्व नोमना मत्री आर एक पड नता समत क्इक्लाकारा आर विहाना की कशिश म एक महीन वाद य लाग रिहा कर दिय गय। मश्मिका आर क्यूबा की मरकारा न इनकी याजनाआ कानष्ट हुआ मानलिया या परिहा हात हीपिदनावीडन निवामी चना प्रन (Venner Gren) म ग्रेनमा (Gramma) नामक याट (समुद्री नोका) 2 हजार डालरम सरीद लिया। 12 मुसाफिरा की क्षमता वाल इस याट पर बैठकर क्राति क 82 सिपाही क्यूना म बटिम्टा के गढ़ पर हल्ला चालन चल दिय। इस दारान उह कह पार गद्दारिया 128 - और हताशा का सामना करना पड़ा पर उन्हान हिम्मत नहीं हारी। ग्रैनमा जैस-जम ममुद्र म आग बढ़ता वम-वैम क्रांतिकारिया का उत्साह ओर उफनता। व 'क्यूबा का गीत आर 26 जलाइ आदालन का गाना गात आग बढ़ते जा रह थ। 26 जुलाइक दिन ही माकाडा बरका पर फ्दिल न असफल हमला किया था। फिदल का कहना था कि अब या ताव हीरा बनग या शहीद। 30 नवबर का जब ग्रनमा क्यूबा क तट स दा दिन की दूरी पर था कि टिस्टा क विमाना र उस दस लिया। 2 दिसवर का ग्रनमा क्यूबा के तट पर पहुचा। बटिस्टा की गश्ती नावा न क्रांतिकारिया का घरकर धुआधार गालया चलानी शुरू कर दी। आसमान स विमान कार्यारंग कर रह था व किसी तरह बचकर दलदली रास्त स हात हुए आग बढ़त रह। प्याम स उनक गल सूखकर छुहारा वन जा रहे थे। व जेस-तसे गन्न चूस-चूसकर अपनी प्यास बुया रह थ। 4 दिसबर की पूरी रात उन्हान गन्न क खता म दोडत हए गजारी। अलीजिया दिपिआ(Aligrade Pro) पर पहुचकर अपन गाइड की गद्दारी क कारण उह दुश्मन क भयानक हमल का सामना करना पड़ा। आध लाग मार गय और 20 गिरफ्तार कर लिय गय। इनम में कई का यातनाए दन क बाद गाली मार दी गयी। बाकी क्रांतिकारी बचकर निकल गय आर सीएरा मम्टा (Sterra Maestra) की पहाडिया की तलहटी म एक किसान की झापडी म जमा हुए। क्यूबा क किसाना न इन क्रातिकारिया की मदद की। अब आम जनता का विश्वास जीतन क लिए छापामारा का छाटी छाटी जीत हासिल करनी थी। 16 जनवरी 1957 का ला प्लाटा (La Plata) नदी पर बनी फोजी चौकी पर उन लागो न हमला किया आर दा फाजिया का मारकर चाकी पर कब्जा कर लिया। इसी वक्त फिदेल न सीएरा मेस्ट्रा की पहाडिया का विद्राहिया का गढ बनान का निणय लिया। इन्ही पहाडिया म पनाह लकर 19वी सदीक स्वतनता-सनानिया न भी अपनी प्रातिकारी कारवाइया की थी। यह एसा चट्टानी इलाका था जहा से एक मशीनगन अक्ल एक हजार सैनिका की गारद का सामना कर सकती थी। और ता आर इन पहाडिया के ऊपर विमान उडाना भी खतर स खाली नहीं था। 22 जनवरी 1957 का विद्रोहिया न बटिस्टा क फोजिया की एक आर टुकडी का हराया। 26 जुलाई आते-आत हवाना (क्यूबा की राजधानी) क भूमिगत नताआ स विदाहिया का सम्पर्क स्थापित हो गया। व पहाडिया में आकर फिदल स मिल। उन्हान क्रांतिकारियो क लिए हथियार गोला-बारूद, कपडा, दवाए और धन जुटान का जिम्मा लिया। । इसस पहले 17 फरवरी 1957 को न्यूयार्क टाइम्स के प्रतिनिधि हबट मथ्यूज न पहाडिया म फिदेल से मुलाकात की। अमरीकी अखबारा म विद्राहिया की बडी बडी तस्वीर छपी। देखते ही देखत व सारी दुनिया म मशहर हा गय। सार जमान म अमरीकी साम्राज्यवाद और बटिस्टा की थू-थू होन लगी। हवानाम छाना विद्राह वरदया। माच के मध्य में 50 छापामार फिदल स आ मिल। अब विद्राही तीन 'लाटना म बट गय। किसाना के बीच फिदेल के साथी दाढी वाल क्रांतिकारिया के रूप म मशहूर हा चुक थ। उवेरो (Uvero) गाव की बैरका पर हमला किया गया। इसम 15 विद्राही ता अवश्य शहीद हो गय पर जीत न फ्दिल कसाथिया का उत्साह बढ़ाया। जल्दी ही सीएरा मस्ट्राक निचले हिस्स म बनी शत्रु की चौक्यिो का साफ कर दिया गया। 129 Bahame Jelands HAVANA Halth पपूया का मानचित्र Jamaica बटिम्टा नक्मिाना आर छापामाराकासम्परताडनलिएमीपरा मग्टा क गावास किमाना का निकालना चाहा पर इसका कडा पतिगच हआ। इमी दारान बाक्सिान विवाहया की क्तारा म मिल गया रिम्टा व असवार क्रानिकारया का माम्काक कनिम्ट एजट कहकर अपमानित करन की चप्टा करता फ्दिल का विश्वाम माक्मवार लनिनवाद म था भी। च गुएवारा जम लाग लडन क माथ माथ प्रातकारी विचारधाग का प्रचार भी करत थ। मन 1957 क खत्म हात हात विताहिया का सीएग मम्टा पर पूरी तरह क्ब्जा हा गया। माच 1958 म राउल कास्त्राक नतत्वम पहाडिया स उतर हमरा माचा साला गया। 12 माच 1956 का फ्दिल काम्ना न एक धापणा पत्र जारी किया जिसम तानाशाही व शिलाफ एक आम जिहार छड दन की अपील की गयी थी। 11 माच का फाजा म अपील की गयी किव विद्राहिया यासाबद। अगस्त 1959 म काम्ना न अपन आसिरी हमल वी याजना बनायी। इस ममय टिम्टा कपास 20 हजार मना, टक आर विमान या विदाहिया क पास कुछ मा यादा थे। उनके हाथयार भी पुरान आरसराव हालत म था नयी याजना के तहत फ्दिल जार राउल वनतत्व वान छापामाराका माटियागा शहर की घरावदी करनी थी। समिला रहनुमाई वाल छापामारा का पिनान डल रिया प्रात के पश्चिमी इलाक पर हल्ला बालना था आर च गुण्वारा क छापामागवालामविलाम हात हए हवाना का रास्ता माफ करना था। यह भी तय किया गया कि जिस समय च गुएवाग क छापामार पाटा क्लारा हान हुए हवाना की तरफ बढ़न लगग उसी समय पश्चिम स समिला की फाज हमला परगी। जग शुर हा गयी। उपराक्त रणनीति क कारण टिम्टा की पाजा का एक साथ चार मार्चा पर लगना पड़ा। च के साथिया न वहातरी आर कुशलता म लडत हुए माटा क्लारा पर कब्जा कर प्रतिकारी विजय की शुरआत की। वटिग्दा यसबर सात ही मुल्क छाडकर भाग गया। उसकी जगह जनरल मण्टिला न पत्ता सभाली आर झूट बाला कि उम फिल्ल काम्नाका समथन प्राप्तहा काम्बानमण्टिलाइमक्दम वीनिता की। 2 जनवरी 1959 का च आर समिला गरी फाज हवाना म घुमी। जनता न उनका भव्य म्वागत क्यिा। तानाशाह क बच हुए मनिका न भी आत्म ममपण कर दिया। प्रात जीत गयी। 130 वियतनाम की क्राति (1930 1975) वियतनाम के किसानो ने ही ची मिह और कम्युनिस्ट पार्टी के नेतत्व म आधी सदी तक साम्राज्यवाद से लोहा लेकर अपने देश को स्वाधीन किया। राष्ट्रीय मुक्ति-सग्रामो के इतिहास मे इस महान सघर्ष की गाथा स्वर्णाक्षरो मे लिखी जा चुकी है। वियतनाम ने फ्रासीसी, चिटिश, जापानी और अमरीकी साम्राज्यवादी इरादो को धूल मे मिलाकर सारी दुनिया को आजादी के लिए जूझते रहने की प्रेरणा दी। स क फ्रासीमी साम्राज्यवाद म और फिर अमरीकी साम्राज्यवाद म लगभग 50 वप तक लोहा लना पडा। फ्रासीसिया न सन् 1868 म सगान पर कब्जा किया था। आजादी क लिए लडन वाले एक किसान याद्धा वन त्रुग कन मात की सजा पान सपहल कहा था कि जब तक इस धरती पर घाम उगती है आक्रमणकारिया के खिलाफ लडन वाल लाग भी पदा हात रहग।' इसी परपरा व आधार पर वियतनामी दशभक्ता न मघपक हर तरह क रूपा का इस्तेमाल क्यिा। 3 मइ 1930 का वियतनाम क तीन क्युनिस्ट ग्रुपा का एकीकरण सम्मलन हागकाग म हा ची मिन्ह की दख रख म हुआ। पहलय गट माथ-साथ काम करन को राजी ही नही थे आर इसीलिए प्रामीमी तीना का अलग अलग दमन करन में कामयाब रहत था हा चीमिह के प्रयासा म उनम एक्ता हा गयी आरीवयतनाम कम्युनिस्ट पार्टी बनी जिमका नाम बदलकर बाद महिंद चीन कम्युनिस्ट पार्टी कर दिया गया। पार्टी न क्राति का 11 सूत्री कार्यक्रम बनाया। इसी के बाद वियतनाम म कम्युनिस्टा का असर तजी से बढा। उहोन 1930-31 के क्रातिकारी उभार का नतत्व किया। नअन ओर हा निह प्राता म जनता ने सत्ता अपन हाथ मे लकर गाव परिषद् स्थापित कर दी। पर यह जनवादी सरकार मान छ -सात महीन म ही फ्रासीसी सना की बबरता क सामन 131 वियतनामी क्राति के नायक हो ची मिह -- टूट गयी। हो ची मिन्ह न हागकाग से ही इस आदालन से यथासभव निर्देशित किया और असफलता क बाद उसकी वजह बनाने वाला एक पत्र लिखकर भेजा। हाक पास इग्लैंड, प्रास, चीन आर माम्को म वियतनामियो व जनवादी आदोलना में काम करने का गहरा तर्जुबा था। वे जानत थे कि कम्युनिस्ट विचारधारा को कैस वियतनाम की राष्ट्रीय परिस्थितियों में लागू किया जाय। सन् 1936 में फ्रास में पॉपुलर फट की सरकार बनी, जिससे हिंद चीन म साम्राज्यवादी दमन ढीला पडा। इसका लाभ उठाकर कम्यनिस्ट पार्टी न जनता के बीच प्रचार के कई साधन अपनाय और हिंद-चीन महाकाग्रस' नाम से एक आदोलन चलाया। इसकी मुख्य माग जनवादी-सुधार लागू करना, जनता वा जीवन स्तर बहतर करना और स्थानीय परिषद के चुनाव मे तमाम अलिग जनता को वोट का अधिकार देना थी। मजदूर-हडताल हुई किसानो क प्रदर्शन हुए और । मई, 1938 कामई दिवस पर 5000 लोगा जोरदार जलूस निकाला। इनदिनाहाची मिह चीनी क्रांति म जापान विरोधी युद्ध में काम करक लडाई का अनुभव हासिल कर रहे थे। सन् 1939 म दूसरा विश्व-युद्ध छिडा। माम ने फौरन वियतनामिया के बचे-खुच अधिकार जब्त कर लिया तावडतोड गिरफ्तारिया होने लगी। एस मे हाम सम्पर्क करन फाम वान डाग और बो वेन जियाप्प चीन पहुच: इन लागा न विचार-विमर्श करक बियमिन्ह (वियतनाम स्वाधीनता मार्चा) गठित किया, जिसन वियतनामिया का एक हाकर फासिस्टवाद के खिलाफ लड़ने के लिए ललकारा। साथ साथ ही प्रासीसिया या 132 मार भगाने का कार्यक्रम भी अपने हाथ म लिया। हा ने अपन एक पर्चे में लिसा-"फ्रासीसी साम्राज्यवादी ओर जापानी फासिस्ट दोना ही राष्ट्रीय स्वाधीनता और विश्व क्रांति के दुश्मन हैं।" राष्ट्रीयता और अतर्राष्ट्रीयता के आधार पर बने इस कार्यक्रम ने वियतनामिया की आत्मा के सात शर का जगा दिया। उन्हाने अपने पडोसी सियामिया के खिलाफ फाज म भर्ती होने से इकार कर दिया। टाकिन क बाक सन, अन्नम कडो लौंग में ओर काचीन-चाइना क इलाके म बगावते भडक उठी। फ्रासीसियो ने भयानक दमन-चक्र चलाया। निहत्थे लागा का मशीनगनोस भून दिया, गाव जला डाल लागा से कब्र खुदवाई गयी ओर फिर उनम उन्ही का जिंदा दफन कर दिया गया। उवर युरोप मे जर्मनी ने फ्रास का हराया आर इधर जापानिया न वियतनाम में प्रवेश पा लिया। हा ची मिन्ह न सदेश भेजा कि जापानिया क खिलाफ गुरिल्ला-युद्ध शरू किया जाना चाहिए। हा जनवरी 1941 में 31 साल के प्रवास के बाद वियतनाम लोटे और उन्होने आते ही आदालन का नेतृत्व सीध अपने हाथा में ले लिया। उन्हान एक प्रचार-सना ओर एक राजनैतिक सेना बनाने की जरूरत पश की। पार्टी का अखबार शुरू हुआ जिसका नाम 'वियत लैप' (स्वतत्र वियतनाम) रखा गया। सन् 1941 के अत तक काआ वाग क्षेत्र म कम्युनिस्टा न बहुत स आधार क्षन कायम कर लिए। हो ने किताब लिखी, गुरिल्ला दाव-पच', 'रूम में गुरिल्ला युद्ध के अनुभव और 'चीन म गुरिल्ला-युद्ध के अनुभव । चीनी नेता सुन यात सन की पुस्तका चीनी युद्ध-कला' और 'स्सी कम्युनिस्ट पार्टी का इतिहास' का अनुवाद किया। उन्हान वियतनाम पर फ्रासीसी कब्ज का इतिहास भी लिखा जिसमे दशभक्ति पूर्ण आदोलनो को प्रमुखता दी गयी थी। इसी पुस्तक क आखिर महान भविष्यवाणी की कि सन् 1945 मे वियतनाम आजाद हो जायगा। धीरे-धीरे क्रांतिकारी आधार-क्षत्र विकसित होते-हाते लामसन तक पहुंच गया। वियतमिन्ह ने मित्र राष्ट्रा स सहायता लन का फ्मला किया। हा एक प्रतिनिधिमडल क साथ चीन गय और च्याग काई शेक से मिलन का बहाना बनाकर वहा क कम्युनिस्टा स सम्पर्क करने की काशिश की। हो गिरफ्तार कर लिये गये। 14 महीने बाद च्याग सरकार ने उन्हें काफी जद्दा-जहद के बाद रिहा किया। हा का स्वास्थ्य जेल-जीवन की यातनाआस टूट चुका था पर उन्हाने पहाडो पर चढचढ़कर अपना गठिया दूर किया ओर अधर म झाक-झाककर अपनी नजर ठीक की। उन्हाने चीन म वियतनामिया के सगठना से कहा कि वे अपने काम का केन्द्र वियतनाम को ही बनाय आर जितन लाग लौट सकत हो, स्वदेश लौट जाय। दो साल बाद अर्थात् सन् 1944 म हा भी वियतनाम लौट आय। वियतमि ह गुरिल्ला ने कई बार फ्रासीमियो क सामन जापानिया से मिलकर लडन का प्रस्ताव रखापर फ्रासीसिया ने कम्युनिस्टो कखिलाफ जापान का साथ दना जारी रखा। जनता में आतक फैलाकर उसे वियतमिन्ह म शामिल हाने से रोकन का प्रयास किया, पर जहा जहा दमन हुआ, वहा-वहा आदालन और उग्र हो उठा। फ्राम म दगाल की विजय के बाद हिंद चीन मे फ्रास व जापान के बीच मतभेद बढ़ गये। इससे क्रांतिकारी आदालनका फलने फूलने का मौका मिल गया। हो ने राष्टीय मुक्ति सेना गठित करन का प्रस्ताव रखा और जियाप्प का इसका जिम्मा सौंपा। 34 लडाका का पहला दस्ता बनाया गया, जिनमस कई ने चीन में फौजी शिक्षा ली थी। उस प्रचार और मुक्ति-दस्ता' कहा गया। इमसे दूमर दिन ही पाए खाट और ना नाम मे पहली जीत हासिल की। 9 मार्च, 1945 का जापानियों ने 133 प्रासीमिया को पूरी तरह से सत्ता से उतार दिया। फ्रासीसी नागरिक गिरफ्तार कर लिय गया - | माच, 1945 का वियतमिन्ह न फ्रासीमिया स शनुता खत्म करक उह शरणाथियो का दर्जा दिया। गरिल्लानप्रासीसी सैनिका का जापानिया की कैद से छुडान के लिए हमल तक किय। जापान न दाए वियत (विशाल वियतनाम) पार्टी के जरिए कठपुतली मरकार बनायी और एक पौज जुटाकर वियतमिन्ह के खिलाफ भजी। वियतामह न इम पाज का आसानी म हरा दिया। उसकहथियार छीन लिये और सदा मजबूत कर लिया। नारा दिया गया- जापानिया के लिए न एक दाना न एक छदाम । 35 लागा तीन राइफ्ला व एक पिस्ताल के साथ शुरू हुई मुक्ति-सना म अब 10 हजार सिपाही भर्ती हो चुके थे आर उमक कई गुप्त दस्ते दशभर म फल हए थे। 15 अगस्त 1945 का कम्यनिस्ट पार्टी की जन काग्रम तान गाव क आधार इलाक म हइ। अगले दिन जापानिया न विश्व युद्ध म अपनी पराजय स्वीकार कर ली। जन काग्रम न सशस्त्र क्रांति का आदशदिया आर गष्ट्रीय मक्ति समिति का चुनाव क्यिा गया। मति शरू हइ जन मुक्ति-मना न जापानी चाक्यिा का ध्वस्त कर दिया। 14 अगम्त का हनाइपर उसका कब्जा हा गया। 2मितवर का अस्थायी मरकार बनी।हाची मिन्ह न स्वतनता का पापणा-पत्र पढ़ा। पर वियतनाम का अभी माम्राज्यवाद कसिलाफ लडाईकीकापी मंजिल तय करनी थी। मित्र राष्टा न जापानिया का निशस्त्र करन क नाम पर वियतनाम का दा भागाम बाटा। दक्षिण भागविटिशमनाचा गौपा गया आर उत्तरी भागच्याग काई शर की मना का। 23 मितवा काविटिश मैनिकान मैगान का घर मल लिया। यह एक नया हथवडा था। पहल हर जगह जापानी मैनिक भज जात आरफिर उनम हथियार लन र नाम पर अग्रज और उनकी कमान म भारतीय मानक पहच जाता प्रामीमी अग्रजा गहथियार तपाही और तपास 134 लेकर बर्बर आक्रमण करते और बाद म अग्रेजा और भारतीयो की आड में छिप जाते। वियतनामिया ने इन दिक्कता के बावजूद कडा प्रतिरोध किया। उत्तर से वियतनामी देशभक्त आ-आकर दक्षिण म लडन लगे। उनके सून स बहा की धरती लाल हा गयी। उत्तर वियतनाम मे हो ची मिन्ह को च्याग काई शक क जनरला के हथकड़ा का जवाब देना पडा। 6 जनवरी 1946 का हा ने चुनाव कराये ओर जीत हासिल की। देश को युद्ध से बचाने और पुननिर्माण के लिए समय निकालने के लिए होने 6 मार्च 1946 को फ्रासीसिया से सधि कर ली। उन्ह इस सब के लिए कछ आलोचना अवश्य झेलनी पड़ी पर व अत म जनता का समझाने में कामयाब हा गय। 31 मई को व फ्रास रवाना हुए पर उन्हें वहा इसाफ नहीं मिला। 14 दिसबर का फ्रासीसी सना ने संधि तोडकर हनोई और दूसर शहरो पर हमला कर दिया। उहे सफलता तो मिली पर वियतनामी दशभक्ता ने भी जमकर सघर्ष किया जिसस बड़ी मस्या म फ्रासीसी मार गय। एक बार फिर मुक्ति-युद्ध शुरू हुआ जा 7 मई 1954 तक चला। रीन-बीन फूके 55 दिन के युद्ध म मुक्ति सना ने फ्रासीसिया को अतिम रूप स परास्त कर दिया। जिनवा सम्मलन बुलाया गया जिसमे ढाई महीन तक बहस हुई। 20 जुलाई 1954 का युद्ध-बदी समझात पर दस्तखत हुए पर अमरीका ने इस समझोत पर दस्तखत नही किय। अमरीकिया न न्यू जसी में रहने वाले ना दिन्ह को दक्षिण म कठपुतली सरकार का प्रधानमत्री बना दिया। अमरीका का 200 पौजी अधिकारिया का सनिक सहायता परामर्श दल पर्द के पीछे से युद्ध का सचालन करने लगा। धीर धीर अमरीक्यिा न हर क्षेत्र म फ्रासीसिया का स्थान लना शुरू कर दिया। साल-डेढ़ साल म उन्हान दक्षिण वियतनाम का अपना अच्छा-खामा उपनिवेश बना लिया। जिनेवा समझोत म स्वतन आम चनाव के जरिए दाना वियतनामा क एकीकरण की शत थी पर अमरीका की कठपुतली सरकार ने दक्षिण वियतनाम को स्वतन राज्य पापित कर दिया। दक्षिण वियतनाम का साउथ-ईस्ट एशिया टीटी (सीटा) के सरक्षण म लेकर साम्राज्यवादी चौधराहट पुरता कर ली गयी। 20 जुलाई 1956 को जिनवा समयोत के मुताबिक आम चुनाव होन चाहिए थे लकिन अमरीका न 4 मार्च 1956 का कवल दक्षिण में चुनाव करा के 123 सदस्यो की धारा सभा सडी कर दी। दक्षिण की सरकार ने न ता भूमि सुधार किय ओर न ही ठीक से शासन चलाया। आतरिक भ्रष्टाचार आर जन-दमन के कारण वह अलाकप्रिय हो गयी। कम्युनिस्टा न वहा वियत-काग के नाम स सघप शरू कर दिया। उत्तर स पहल वियत-काग का क्वल आर्थिक एव नैतिक मदद मिली और बाद म सीध-सीधे मेनिक ही दक्षिण म लड़ने के लिए आने लगे। अमरीकी राष्टपति कैनडी ने चार हजार अमरीकी मनिक वियत-काग और उत्तरी वियतनाम के खिलाफ भेज। सन् 1965 तक अमरीकी विमान विभिन्न बहाना स उत्तर पर बमबारी करन लग। सन् 1966 तक दालास अमरीकी फौज दक्षिण की तरफम लडने लगी। अमरीका अपनी नीति का कारण अक्ला पडन लगा। प्रास न सुद का इस नीति मे अलग घापित कर दिया। सन् 1967 म अमरीकी रक्षा-मनी मारनमारा न वियतनाम के मिलसिलम अमरीकी नीति की जाच की जिसक नतीजमन् 1971 म सामने आये। सन् 1968 मे राष्ट्रपति चुन गय निक्मन ने पूरी काशिश की कि भयानक चमवारी करके वियतनाम को ध्वस्त कर दिया जाय पर अमरीकी ताक्न वियतनामी सक्ल्प को नहीं ताड सकी। हार कर सन् 1972 मेनिक्सन को अपनी फौज वापस बुलानी पडी। यह 135 निर्मम साम्राज्यवादियो का उपहार दनिया के तथाथित सबस ताकतवर दश की एक बहद अपमानजनक पराजय थी। अब अमरीकिया न नया हथकडा अपनाया। उन्हाने युद्ध का वियतनामीकरण करने की काशश की। जनरल थियू के रूप में अपनी एक कठपुतली के जरिए उसने वियत-काग आर उत्तर वियतनाम के खिलाफ लडाई चलाई लकिन अप्रैल, 1975 म कानम्टा की फाज न सेगान को घर लिया। थियू दो लाख दक्षिण वियतनामिया क साथ भाग गया। मगान का नामकरण वियतनामिया ने अपने महान नेता के नाम पर ही 'हाची मिन्ह नगर क्यिा। नवबर 1975 म दक्षिण आर उत्तर वियतनाम क एकीकरण की घापणा हई। वियतनामी क्सिाना न विश्व के इतिहास म सबसे लबा, निर्मम धोराबाजी स भरा हुआ युद्ध जीतकर कमाल कर दिखाया। उन्हान प्रासीसी जापानी, ब्रिटिश और अमरीकी मामाज्यवादी तारता को अपन आजाद रहन क द सकल्प स पराजित किया। आज वियतनाम एक म्वाधीन और विकासशील राष्ट है। 136 1.300100,000 तीन करोड़ से भी अधिक पाठकों की पसंद रैपिडैक्स इगलिश स्पीकिंग कोर्स पिक्स गतिश धाका कोसे Ma Rapdosan Topyin awablesort ANT . 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शिवा प्रालिद्धारकाला जनरुचि के 50 लघु विश्वकोशो की एक अनूठी सग्रहणीय मुखला सना मांसाहारी तानाश विधिव पेड राण आतावादी 4 orat राज PROGINE समय खज प्रति Bes Beera Ay-प्रति जासूसा Aatta Aye aan विसिव 'किस रिक्ष રો न সু বলা मिव रिक रिक R मूल्य प्रामाणिक पाठ्य सामग्री सरस कया शैली 0 सैकडों दुर्लभ Also 201 प्रत्येक available अक्सर्च वित्रों से सुसज्जित कलात्मक प्रस्तुतिकरण 0 फोटोटाइप सैट D बढिय्य कागज/ऑफसेट छपाई बहरगी आवर वाजिब दाम in English S/ प्रत्येक इस भूखला का मूल उद्देश्य एक औसत पाठक को अतर्राष्ट्रीय घटनाचक्र से जोडकर उसकी चेतना को प्रबुद्ध करते हुए उसके शान-क्षेत्र का विस्तार है। इस शृखला की सभी पुस्तके मानव-जगत से जुडे लगभग सभी महत्त्वपर्ण पक्षो जैसे विज्ञान रहस्य, रामाच, दर्शन, धर्म, खेल, सस्कृति, अपराध भ्रष्टाचार आदि पर विहगम दृष्टिपात करते हुए सारगर्भित विषय-सामग्री प्रस्तुत करती हैं। इस शखला मे प्रकाशित पुस्तके विश्व-प्रसिद्ध 1 खोजें 2 अनसुलझे रहस्य 3 रोमाचक कारनामे 4 युद्ध 5 101 व्यक्तित्य 6 धर्म, मत एव सम्प्रदाय खेत और खिलाडी 8 रिकॉईस 19रिकॉईस 1 10 वैज्ञानिक 11 यिनाश-लीलाए 12 दुर्घटनाए 13 गुप्तचर सस्थाए 14 जासूस 15 प्रेरक-प्रसग 16 चिकित्सा पतिया 17 करकेतिया एव जाससाजिया 18 जासूसी कार 19 क्रूर हत्यारे 20 सम्मताए 21 रोमास कमाए 22 अनमोल खजाने 23 दुस्साहसिक खोज यात्राए 24 भूत प्रेत घटनाए 25 जन-कातिया 26 कुख्यात महिलाए 27 हस्तियों के प्रेम-प्रसग 28 राजनैतिक हत्याए 29 विलासी सुदरिया 30 तख्ता पलट की घटनाए 31 सनदी तानाशाह 12 मासाहारी तथा अन्य विधिर मे पौधे 33 आतौफिक रहस्य 34मियक एव पुराणा 35ष्ट राजनीतिन 36 साहसिक कमाए 37 मातकवादी संगठन 38 पारलौकिक चमत्कार 39 मार्शनिक एवं दर्शन 40 ठग एव जाससान जनजानताजनाए मार्कीटेक्ट अशोक गोबल की प्रामाणिक पुस्तके 501 होम रोचक तथ्य डेकोरेशन गाइड मूल्य 151 तारखर्च 5/- मूल्य 281 हाकखा डिमाई सारज 120 पृष्ठ इस पुस्तर म गृह सजा मवधी सभी विषयायो • मोडावाटर म विनक्ल माडा नहीं होता। विस्तारपूर्वक और चियो महित समझाया गया - मनष्य की रपतवाहिनिया की कुल लम्बाई है -धर्मयुग 100000 मील हाती है। इस चितापसी मदद म घाटी छोटी जगहो को ऐसे ही गुदगुदाने पाले य ज्ञान विज्ञान के भी अच्छी तरह मजा कर दर्शनीय बनाया जा नए क्षितिज खोलने पाले 501 अगाने तप्य' सरता है -नवभारत टाइम्स LIREILERTAILUEBIFU 70 से 225 वर्गमीटर के नक्शे wिat विचित्र ईसान SIRH 51 हाउस डिजाइस M विश्व के विचित्र इसान -ए एच हामी मूल्य 201 हाफखर्च 51 साइन के 108 पष्ठ • दो सिर वाला अजूबा बच्चा कैमा था? .शरीर से जडे स्यामी भाई। •तीन टागा वाला व्यक्ति पैस चनना था? • क्या काई न्यक्ति आधे टन का था? ऐसी ही स्तिनी अयायविचित्र जानकारिया। चिजन्तुओ का तितार विचित्र जीव-जन्तु मूल्य 481 हाकखर्च 6/ प्रत्येक नक्शा निम्न मातों को ध्यान में रखकर मनाया गया है • ड्राइग डाइनिंग बैठक द बापरूम एव रमाईघर आदि का सही तालमेल हा • जगह का सदपयाग हो सभी कमरे हवादार हा व उनम कदरती रोशनी हा आदि। 250 से 500 वर्गमीटर के नक्शे (क्रार एतीनेशन के रिजाइनों सहित) माडर्न हाउस Risitasty हाउसमस L -ए एच हाशमी मूल्य 20/ डाकखर्च / टुआटेरा नीन आख वाला विचित्र प्राणी। काध मेंढक जिसकी पारदर्शी त्वचा में से भीतर का मारा शरीर दीख पड़ता है। मैंपधारी मछली जिमक सिर पर प्रकृति ने जलन वाल बल्ब दिए हैं। प्रकार के 75 से भी अधिक विचित्र जत। मुल्य 36/ सब 6/ • गेडी सरिय के डिजाइनो की पूर्ण जानकारी •मजावटी पड़ पौधो की जानकारी कमरा के परस्पर सही तालमल क तरीक • मकान सम्बधी प्राविधिक जानकारिया •बिल्डिग बाई लॉज का विवरण आक बच्चोक इंटेलीजेंट बनाने वाला आदत नालिजाक, बच्चों के मस्तिष्क में घुमडने वाले हजारों अनबूझे 'क्यो और कैसे किस्म के प्रश्नों के उतर बताने वाला एक अनूठा प्रकाशन चिल्ड्रन्स नॉलिज बैंक (छ घण्डो मे) Ratan Caldren गिपट घॉरस4 मे मलिक बच्चे के मस्तिष्क के लिए एक टोनिक जरा मी समझ आते ही बच्चे के मस्तिष्कम 'पयो' और 'पैस किस्मक हजारा प्रश्न घमडन लगते हैं। उचित समय पर मिल प्रश्ना के उत्तर उसके दिमाग क लिए टॉनिक का काम करत है जबकि उतर न मिलन म उमका मानसिक विकाम रुक जाता है। प्रश्नो मे से कुछ की प्रसक 0 महिलाओ की दाढी क्यो नही हाती? क्य अन्य ग्रहा से लोग पथ्वी पर आत है: D आकाश नीला वयो है? 0 मुहास भयो होत है? 0टस्ट ट्यूब बेबी क्या है D सपन चय. दिखाई देते हैं। इलपटानिक घडी म काम करती है?0मिम्र म ममी केस उनाने थे?0 उड़न तश्तरी क्या है? लसडी क्या है। हाइडाजन बम क्या है? आदि 6 खण्डो की इस प्रथला मे है • 1300 बड़े आगर के पछ . 1100 से अधिक चित्र .500000 शयों की पाठ्य सामग्री .1050 प्रश्नासबोध उत्तर विशेषताए .50 लाख से भी अधिक पाठकों की पसद • विद्यालयो मे परम्कार कम्पम विरित • प्रत्यक खण्ड अपन आप म मपण • पत्र पत्रिकाओ द्वारा प्रमित मूल्य पेपर वैक 321 डाकखर्च.5/- प्रत्येक पूरा सैट_1921 (गिफ्ट बॉक्स में डाकखर्च भाफ आधारभूत विषय है - पृथ्वी एव ब्रह्माड - आधुनिक विज्ञान वनस्पति एव पशु पक्षी जगत • आविष्कार एवं खोजे । बल एव खिलाडी * आश्चय एव रहस्य सामान्य ज्ञान * मानव शरीर * भौतिक रसायन व जीव विज्ञान आर अप्रेजी तथा 8 भारतीय भाषाओ में प्रकाशित तरीके कुरपदान किरा Master Computer Today For A Better Tomorrow बडोदये 11 Zusic camxUTA PROGRAXXING COMASTEA FOR BEDSTERS MY. Computers are invading every facet of a persons fe--the home the office the अपना classmom or the play ground Whether in job or business, they are opening up bright new कद vistas of knowledge and happiness. बढाइये मूल्य 20/ डाक्खर्च / Also avalable in English प्रस्तुत है कद लम्बा करने का आजमाया हआ वैज्ञानिक अनुसधान। इसमे यूरोप और अमरीका में टेस्ट किया हुआ ऐसा सचित्र कोर्स दिया गया है जिसकी मदद से आप केवल 15 मिनट प्रतिदिन Er VK Jain अभ्यास द्वारा कुछ ही हफ्तों में अपनी हाइट 10 • Computer for Beginners सेमी तक तोयदा ही सकते हैं। • Basic Computer Programming The twin-books are a must for those who are विनाहिथियारमा को जापानी कताएँ Interested in computers thelr function and operation but are discouraged by their जूडोकराटे complexities. An is made easy through simple जूडो कराटे language and instructive illustrations. The books are designed for mass (जुजुत्सु बॉक्सिग सहित) education as per Computer Literacy Project of NCERT and also conform to मूल्य 20/ डाकखर्चा course on computers recently undertaken पृष्ठ 128 by CBSE Also available in English Big Size 192 & 172 pages respectvely Price Rs 36/ eachPostage Rs 6/each हिन्दी में पहली बार प्रकाशित 300 से अधिक दाव पेंचा का चित्र कोर्स। इसकी मदद म आप लाठी भाला आदि के वार से अपना बचाव चाक, A MAMPLETE GUIDE TO करके अपने सेचारगना ताकतवर हमलावर का PCS Complete भी चुटकियों मे धराशायी कर सक्त हैं। Guide आप जो तीतो करना युनाई to PCs Gion आधुनिक MA बुनाई शिक्षा + Creates awareness about modern computer Hardware & Software & how these can serve as productivity ads. Imparts working knowledge of Computer technology Software Packages like Word Star Lotus 1 2 3 dBASE Ill etc. to an ordinary man avoiding technical words. Helps in assessing the operations that पस्तक में 200 मे अधिक नई बतियों से उनी वस्त्र तैयार करन की विधियादीगई है।माय में उनकी धलाई व दाग धब्बे छडाने के विभिन तरीके भी दिये गये हैं। ग्राम 10/rent equire computer Rs 48 Postage As 61 Skill in comespondence ensurts Brighter. CarcsceFaster Promotion. Sure Success in TAGE TENTIAATMAITRA PAL Rapıdex Self Letter Drafting Course SELF LETTER DRAFTING COURSE -- Big size Pages 354 Price Rs 48/ Postage Rs 61 Whether you are an administrator or a upervisor office superintendent or a teno-typist--the skill in correspondence an art you must master because Imost every situation every occasion alls for a well-drafted letter And with his skilt in hand none can stop you from etting ahead FEATURES Sentences and phrases in abundance Tick mark the required ones. Astange in proper order instantaneously Shape & mould the way you want to And now make as many letters as you want on the same subject DIVIDED UNDER 3 SECTIONS It takes care of your personal and social letters commercial correspondence and applications for job Vhile other books teach you to copy eadymade letters given in them this ourseurst teach youhowtodroftaletter V your own choice कोई भी भाषा तीखें Books for Science Students rep (AAMA elatuM रैपिडेयस लैंग्युएज लर्निंग सीरीज इतनी सरल व ग्राह्य सीरीज कि आप कुछ ही दिनों में काम चलाने लायक काई भी भारतीय भाषा बोलने और समझने लगगे 12 खण्डों की सीरीज़ की पुस्तकें हिन्दी सेसुगू सर्निग कोर्स हिनी कनर लनिंग कोर्स हिरी तमिलर्निग कोर्स हिवी बगला मनिंग कोर्स हिन्री गुजराती सनिंग कोर्स हिमामयालम मर्निग कोर्स इसी प्रकार प्रातीय भाषाओं सहिदी सीखने के लिए भी 6 पुस्तकें उपलब्ध General Science A series of five books The series provides help and gudance on all the major branches of science Physics Chemistry Biology Geology & Astronomy Price 157 each Posrage 41 euch Quiz Series (Work Books for Physics, Chemistry Biology & Science) Each book in this series contains 1000 quiz type questions covering almost every branch of particular science with answers Price 12 each Postage 4 each Know Science Know Science offers pupils in the 10 13 age range 1000 questions in the general field of Science Prex Rs 12/ Postage Rs 4/ GEN GEN GEN GER GENERAL SCIE SCI SCII SCH SCIENCE FAVAN m UZ UE मभी पस्तके तनमन 240 पये में प्रत्येक पस्तक या मय 30 अक्तर्द 61 प्रत्यक rIL देल-खेल में जादू सीखो, खेल ताइंस के खेलो-जान बढ़ाओ, रौब जमाओ, मित्रों में वश लेनो 101 101 निक 101 मैजिक ट्रिक्स -आहवर यूगिराएत 101 1101 साइस गेम्स -माइवर यूशिएल साइस गेम्स इस सचित्र पुस्तक में दी गई हैं-एसी 101 विज्ञान के 101 खला की यह पस्तक ल हीघेल शानदार व जानदार ट्रिक्स जिनका समझना मे कुछ एसे वैज्ञानिक उपकरण बनाना सिखा दती जितना सरल है उनका प्रदर्शन उससे भी है जो बनगे तो खिलौन ही पर बच्चा का आसान। बसा जरूरत है तो थोडे से अभ्यास के बिलक्ल असली उपकरण जैमा ही आनद देग। साथ चन्द ऐसी चीजो की जो तम्ह आसानी से | जैस-पैरोमीटर, विद्युत चुम्यक, हैक्टोग्राफ, उपलब्ध हो जाएगी। स्टीम टरबाइन, इलेक्टोस्कोप आदि ट्रिपस की एक प्रमक टूटी माला फिर| इनके अलावा बहत से अन्य रोचक प्रयाग तैयार गिलास का पानी गायब करना जैसे-कागज के घर्तन मे पानी उपासना, भाप रूमाल आग से न जलेसर पर रखा हैट से नाय घसाना आदि 101 मनोरजक जादू स्वय पछले आदि प्रतीत होने वाले वैज्ञानिक खेल। मूल्य 20/ डाकखर्च 31 पृष्ठ 120 मूल्य 20/ हाकखर्च 57 पृष्ठ 120 Also available in English English edition also available Gunnlamucing publit duo Learnscience while youpky SCIENCE thedhirent Science Quiz Book CHILDRENS PICTURE DICTIONARY All in colour 4 . Successfully prepares your child for admission in a Public School • Contains 1500 words of daily use • Each & every word has been explained with colourful pictures & small & simple sentences # Most useful for 10+2 Courses * Covers the most modern topics of science like Computer/Robots/ Space/ Electronics/ Laser/Maser etc * For better performance in Viva cxaminations * To meet the challanges of Science Quiz programmes on Radio/TV * For Competetions like MBBS Engineering etc .All interviews connected with scientific services/posts rico 24/Postage & Pages 112 Also available h Hindi The Dictionary is really a treasure trove of knowledge for yourchildren wherein they will discover the ramesof Birds.Arumals-Fraute •Vegetables.Colours Parts of Body etc. Giant Siternce 24/Postage 6 घर बैठे दजियों चेती टेलहिता तिखाने वाला प्रवाहोएतरता पाती रैपिडैक्स होम टेलरिंग कोर्स (लसिका श्रीमती आशारानी व्होरा) घरभर की पोशाका अर्थात् न ह-मुना की नपकिन म लेबर पुरुपो की कमीज पैंट तक कल मिलाकर 175 से अधिक डिजाइना एव नमूनों की पाशारा की प्लानिंग कटाई व सिलाई की मचित्र जानकारी। • मनमाहक प्राय लभावनी मैक्मिया मलौनी नाइटी नाइट मृट व गाउन आरपर टाम नह मन्नावरगारगरपड पवर पतिया क लिए पैट चल पाटम शर यशट व जीम •गह मज्जा लिए परद शन आदि 300 से अधिक रखा य छायाचित्रा से समग्जित • परान कपडा म बच्चाकपट बनाना • भाति भाति की डाटम चनट पनीट्रग जय आम्तीन चार यार बटन आदि •मशीन चक्लपजों की जानकारी भी मूल्य 48/डाश्या चौदात हिजामगावती-सहपान परिवार चिल्ड्रन्स लाइब्रेरी ऑफ नॉलिज लायरी 30 (Arthrama Knowinde भीर 400 स्रीगुरोप मापारी म पुग्नर में पानी पिर पर 1200 पिtentness शिirtun- DtrTTErrarterry Treatment और पिनारमा Crrrrrrrrxit PotaskedmastarMakattimedientanAmermatitantrding को ऐशकलर औससिंग कैमराताधारपाटो दिया-मस्याका ट्रिक फोटोग्राफी एड कलर प्रोसेसिंग -ए एच हाशमी योतल के भीतर आदमी, हथेली पर नाचती औरत, सेव मे से माकते पच्चे या पत्ते पर प्रेमिका का फोटो उतारिए। ट्रिक फोटोग्राफी पर हिंदी में प्रथम पुस्तक-जिसमें ट्रिक और इफेक्ट की पूरी पूरी प्रैक्टिकल जानकारी चित्रों के साथ दी गई है इसके अलावा कलर फोटोग्राफी व कलर प्रोसेसिंग की प्रैक्टिकल जानकारी भी इसमें है जिसकी मदद से आप निगेटिव या टासपेरैसी की प्रोसेसिंग कर सकते हैं और डिमाई साइज पृष्ठ 248 अच्छे कलर एन्लार्जमैट भी बना सकते हैं। मूल्य 321 डाकखर्च 6/ इस्लारापरत्तायामालादारावरचत KR तविक सकियो मंजसस्य मय 40 Labe 1500 अदभुत आशा A मप 241 डाक्खर्च 5/ डारखर्च / ससार के 1500 अद्भुत तात्रिक सिद्धिया आश्चर्य मत्र-अध्येताओ तांनिको एव साधको के लिए ऐसी पथ-प्रदर्शक पुस्तक जिसमे दुष्कर तांत्रिक | पुस्तक में कुदरत के चमत्कारों अद्भुत क्रियाओ का सरल एव सचित्र विवरण है। ऐतिहासिक घटनाओं बादशाहों की अजीबो- गरीब सनकों साहस और वीरता क बेमिसाल मत्र रहस्य कारनामो पृथ्वी समुद्र और आकाश के मत्रा के मूल स्वरूप मत्र चैतय मत्र जीव जन्तुओं और वनस्पतियों की अनजानी कीलन उत्पीलन, मत्र ध्वनि मत्र विनियाग | विचित्रताओं का सचित्र वर्णन किया गया है। एव मत्रा के सफल प्रयागा के लिए सचित्र ग्रथ। मूल्य 36/ मकर b/ पष्ठ 224 • दुर्गा महिमा •शिव महिमा विष्णु महिमा • लक्ष्मी महिमा • गणेश महिमा • हनुमान महिमा . हमारे गीसम्म CAM हमारे। पुज्य पूज्य तीर्थ Sarjit RREN बड़े 200पृष्ठ मूल्य 361 हास्छ । पुस्तकों में महिमाओं के अतिरिक्त पूजा के व नैवेद्य आदि की विधिया भी हैं। भूरुप 18/वर्ष 51 यह पस्तक आपको तीर्थों की धार्मिक ऐतिहासिक पष्ठभूमि उपयोग में आन वाल साज-मामान आने जाने के मार्ग का निर्देश ठहरने आदि की वाछित जानकारी प्रदान करगी।
योगाभ्यार नारा कितामा रोग छुटकारा पाइये। YOGA योगासन एवं SADI साधना योगासन एवं साधना विश्व-प्रसिब "भारतीय योग सस्थान" के योगाचार्यों द्वारा सिवित एक अनूठी पुस्तक * आसनों का सुपोध व सचित्र विवरण *प्राणायाम विधि - चक्षु-व्यायाम * पौष्टिक भोजन * योगासनों द्वारा रोग निदान आदि योगासन पर सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक भारतीय योग सस्थान की सैकड़ों शाखाओं में डिमाई साइज 120 पृष्ठ मल्प 18/ हाकस 41 प्रतिदिन हजारों योगाभ्यासी रोगों से छुटकारा पा Also available in English जीवन का आनन्द ले रहे हैं। English-Hindi Sentence Dictionary जो हिन्दी बोलती डिशवपाक्योंहित) हिदी में पह अपने ही प्रकार की पहली ऐसी रिपशनरी है जिसकी शम्दाथलीयाक्यों के रूप में योलती है और अपने पाठकों को उसकी डिक्शनरी ध्याकरण-रचना से परिचित कराकर उसका मूल्य 28/ सही-सरमों में प्रयोग भी सिखाती है। गरखर्च 6/ पष्ठ 4 प्राय प्रयोग में आने वाले अग्रजी के 4000 शब्दो का हिन्दी म उच्चारण, हिन्दी-अथ तथा उनका अग्रेजी के वाक्यो मे प्रयाग सिखाने वाली अपने प्रकार की पहली डिक्शनरी। अगेजी मराठी सफाण भी उपमण Laptai-11 Sentence Dictionary ----- तजकाजएस RIKE My Picture Dictionary 101 दिमाग कात For Nursary Classes All illustrated 48 multi colour pages ive 101 दिमागी कसरते हरीश चन्द्र ससी सिर का खजलान कलिए विवश कर दन वानी ऐमी पहलीमा चनौतिया जिनका हल करन की कोशिश मे जहा एक आर आपका मनारजन होगा वही दूसरी आर आपका दिमाग भी तज होगा। बच्चा जवाना तथा बूढा-सभी क लिए मजदार 101 रोचक दिमागी कसरत Also available in English भूस्प 18/गकर्ष 5/ Picture Dictionary Price Rs 12/ / Postage Rs 4/ प्रतिपरिवाजोतिबीहातारेलामविरतिदहन द्वानिकम्माविकानागपाइतावानाताका हातका C Siddly HTTNC Folteam ARTHA वृहद् हस्तरेखा शास्त्र प्रैक्टिकल हिप्नोटिज्म ३ • आप खद अपन हाथ की रेखाएपढ़कर अपना भविष्यफल जान सकत हैं। क्सिी पण्डित अथवा ज्योतिषी के पास जाने की आवश्यकता नही है। • हस्तरसा के 240 विभिन्न योगों का पहली बार प्रकाशन जैस-आपके हाथ मे धन सपति का याग पुत्र याग विदश- यात्रा योग आदि हैं या नहीं? • आपक हाथ की रेखाए क्या कहती हैं? कौन से व्यापार से आपको लाभ होगा? नौकरी म तरक्की क्य तक होगी? पत्नी कैसी मिलेगी? इत्यादि सैक्डों प्रश्न के उत्तर। मूल्य 40/ डाकघर्च 6/ Also available in English • पुस्तक में हिप्नोटिज्म को सरल सरस ढग से चित्रा द्वारा समझाया गया है जिससे साधारण पाठक भी एक अच्छा सम्माहन विशेषज्ञ बन सकता है। • पुस्तक मे हिप्नोटिज्म के प्रकार पयोग शक्ति, हिप्नोटिज्म के सिद्धात, त्राटक सम्मोहन के तथ्य आदि पर पूर्ण प्रामाणिकता क साथ सचित्र विवरण है। • रोग निवारण कष्ट दूर करने व जीवन में प्रतिदिन आने वाली बाधाओं व आपदाओं के निराकरणम इस पुस्तक मे दिया गया विवरण पूर्णतया उपयोगी है। डिमाई साइज 266 पृष्ठ मल्य- 401 डाकखर्च 61 Also as asłable in Engush . जो निबटाने गटारीमावादाता का आवायकाई हार के प्रसिद्ध गण्टरो एप पिरोपकों द्वारा हिन्दी मे 16 तथा अग्रेजी में 18 हेल्प लिखित प्रसिद्ध रिटिश पॉकेट हैल्थ गाइड्स • एमी (Affergies) पतबीयता (Anaemia) (अय हिन्दी में भी उपसय्य) सधिशोष एवं पठिया (Arthritts & Rheumatism) पक्टि हैल्थ गाइडस इन बीमारियों के कारणा • (Asthma) जटिलताओं सावधानियों तथा रोक्थामक .पीठBack Pain) उपायो के बार म आपका ज्ञानवर्द्धन करगी। पदों के रोग (Chidrensinesses) • संचारी समस्याएं ICtrculation Problems) -बरमार और ि(Deprenmon&Annery) प्रत्येक •पमेह (Diabetes) • उबस्तार (High Blood Pressure) .prethe (Heart Trouble) परिधि (TheMenopause) • ronint wrot (Migrane) fegy MT (P ptk Ulcers) • (e-Menstrual Tension) • रोष (Skin Troubles) .Cystitis • Hysterectomy - me य m A न 0 Outruithall Stains घरममताब्यूटोनिक- होमप्याटीक्लीनिक Spot Check SPOT ECHECK - Post Straightforward tips to cope with all types of stains. A full section on fabrics with a comprehensive chart. Tackle stains on Wallcoverings, Carpets Pots Furniture Metals etc. यह पुस्तक हिन्दी में भी उपलब्ध है। Pnce Rs 18/ Postage Rs 51 होम ब्यूटी क्लीनिक -परयेश हाज Also available in Englis} घर-बैठे ब्यूटी क्लीनिक जैसे मेकअप की विधिया सिखाने वाली एक एसी पुस्तक जिसमे त्वचा की देखभाल शरीर को सुडौल बनाने सबधी व्यायाम तथा आकर्षक हयर स्टायल्स आदि की सपूर्ण जानकारी दी गई है। बहे 140 पृष्ठ मून्य 281 डाकप 61 मायनिक करानेतज्जाजाला ৰাইড गृह- -उपयोगी HOME HINTE नुक्ते (Home Hints) -- MAHARMA मा उपयोगी मॉडर्न हेयर स्टायल्स -आशारानी व्होरा माहियारास Also available In English मूल्य: 241 हाकखर्च 6/ चीजों के लबे समय तक बिना सडे-गले भडारण इम पुस्तक की मदद से किसी भी प्रकार की हयर की विधिया बोतलो, टी-पॉट आदि की सफाई | सैटिग घर में ही कीजिए। बॉय कट बॉब कट सहित हजारो नुक्तों का एक बहुरगी सचित्र | राउण्ड कट, स्ट्रेट-कट पीजर कट स्टैप्स सकलना पोनी टेल रिंगलट्स शाल्डर कट शग- मूल्य 18/ डाकरा स्टायल या स्विच सज्जा- कमरपातलो काजए LUANNAराटरामाधारत बेबी हजागाइड लेडीज स्लीमिंग कोर्स |बेबी हेल्थ गाइड -आशारानी यहोरा केवल 15 मिनट रोज के इस कोर्स की मदद से यह गाइड बच्चों से सबंधित सभी विषया का एक आप अपनी कमर और पेट पर चढ़ी फालतू चरवी | अन्य एनसाइक्लोपीडिया है, जिसमें उनके शीघ्र ही घटा सकती हैं और अपनी कमर का नाप शारीरिक रोगों से लकर उनके मनोविज्ञान तक पाच दिन में सात-आठसेंटीमीटर तक कमकर के सभी पहलुओं को सविस्तार समझाया गया है। सकती हैं। Also available in English फोटोग्राफ्म 140 रेखाचिन 42 वडा साइज मन्म: 20-ख मूल्य 40/ डाखर्च 61 द्वारपतनहोतकता है। बाटिक कला तातिए बाटिक कला मोटापा 20 दिन में पाटिक कला मोटापा घटाइये बहमास के 120 पष्ठ Alshasuable in English मूय 20/ खर्च / मोटापा भयकर बीमारियों की जड है सैक्स क्रीडा में बाधक है सेहत के लिए के वस्त्रा तक पर बाटिक क्ला का प्रयाग घर की सजावट के साज सामान से लेकर पहनन अभिशाप है। केवल 15 मिनट नित्य का कोर्स कर-पर्दे, मेजपोश, टीकोजी, रेडियो कवर, लगातार 20 दिन तक करिए, आपको | चादरे कुशन, साडी-ब्लाउज आदि पर आश्चर्यजनक फर्क नजर आएगा। विभिन्न प्रकार के रग बिरगे डिजाइन बना सत्य 201 गाव पष्ठ 72 सक्त हैं। सटिजतिखान यालाकात धाकरिताकाटना काम ड्राइग प्राथमिक उपचार तथा . प्राथमिक पेण्टिग कोर्स (First Aid) Al y available in English मूल्य 181 डाकखर्च 5/ इम कार्स की मदद म आप कछ ही दिना म आकृतिया के एक्शन म भर चित्र तथा पस्तक म डाक्टरी सहायता उपलब्ध हान तक मीन सीनरिया वाटर-कलर आयल कलर दिल का दोग पडने करट लगन विषाक्त भाजन गोलिक पटिंग हिन्दी अग्रजी लेटरिंग आदि खान जल जान चाट में निरतर खन बहन सीख कर लाभावित हा सकत हैं। हडडी टटन आदि जैसी अनक कस्मिक पष्ठ 14 मूल्य 20/ शक्यर्च 5/ दघटनाआ म जान की विधिया दी गई है। गाईज पेण्टिग कोर्स A FIRST I AID उपचार -एएच हाशमी OrtoGraancryIndoors HOUSE PLANTS House Plants ल भारतीयष्यंजन Ho-DNA भारतीय व्यजन -फमुदिनी मुशी Price Rs 18/ Postage Rs 5/ मृय 12/ गवई 41 -- Tips on indoor greenery Get to know all about choosing buying watering and feeding House plants Bottle gardens... Flowering and Foliage plant from BULBS In BONSAI Full of Colourful Plustrapons पराठे पूरी सब्जिया बाटी की सपने सलाद चटनी मुरम्बै अचार खीर हलवा डोसा इडली कचौरिया शरबत आगमीम आदि बनाने की विधिया।
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