Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner

Anuvad Ki Vyavharik Samsyay

Tivari,bholanath · 2011/01

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डॉ. भोलानाथ तिवारी
डा० प्राम्प्रकारा गावा
मूल्य सोलह रपय
सस्करण १९७८
प्रकाशक
गब्दकार
२२०३ गली डकतान
तुकमान गट दिल्ली ११०००६
प्रावरण
अगार धीमान
प्रागरण मुद्रक
परमहम प्रेस दिल्ली ११०००६
मुद्रक
गान प्रिटस दिल्ली ११००३२
maiM..
पुस्तक वध
सुराना बुर बाइडिंग हाउस
दिली ११०००६
DO
वाँ
साल

अनुवाद
की
व्यावहारिक समस्याएँ
डॉ० भोलानाथ तिवारी
डॉ० ओमप्रकाश गावा

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प्रवेश . अनुवार प्राज युग की अनिवाय पावश्यक्ता है, इसीलिए हर भाषा में उस सद्धान्तिक विवेचन तथा प्रायौगिर और व्यावहारिव स्तर पर उभरने वाली समस्याओं पर विचार की आवश्यकता है। हिंदी में इसी उद्देश्य से अनुवाद नामक पत्रिका का प्रकाशन गुरू किया गया था। प्रस्तुत पुस्तक के लेखकों म एवं (भोलानाथ तिवारी) का सम्बध उस पत्रिका ने सम्मादव के रूप मे सात आठ वर्षों तक रहा । सम्पादन के दौरान इस बात का अनुभव किया गया कि मात्र पत्रिका स काम नहीं चलगा । इस विषय के विभिन पक्षो पर अलग अलग पुस्तकें होनी चाहिएँ । इस दिशा म अब तक तीन पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं अनुवाद विनान (ले० भोलानाथ तिवारी) पारिभाषिक शब्दावली कुछ समस्याएँ (स० भोलानाथ तिवारी तथा महद्र चतुर्वेदी), काव्यानुवाद की समस्याएँ (80 भालानाथ तिवारी तथा महेद्र चतुर्वेदी)। प्रस्तुत पुस्तक उसी माला की चौथी बडी है । यह चार अध्याया म विभक्त है। पहले म अनुवाद के सिद्धात पक्ष और व्यवहार पक्ष को लिया गया है। टूमरे में अनुवाद का अभ्यास करने के लिए अंग्रेजी के अटठाईस गद्याश दिए गए हैं । इनम प्रथम दस के साथ गिदी अनुवाद तया अनुवाद स सबद्ध कुछ समेत भी हैं । शेप अटठारह अनुवाद का अभ्यास करने वाना के स्वय अनुवाद करन वे लिए हैं। हमारा विश्वास है जि सवेता की सहायता सप्रथम दस का अनुवाद करखे तथा दिए गए अनुवाद से तुलना करके अपनी गलतियों को समझने के बाद अनुवाद के अभ्यासी को की सहायता से गेप अठारह का अनुवाद अपने प्राप कर लेंगे। तीसरा अन्याय उच्चस्तरीय अभ्यासमाला का है। इस प्रारम्भ म ग्यारह गया मक्त और अनुवाद के साथ है, प्राग के पांच अभ्यासा के साथ पेवल सकेत हैं तथा प्रत के दस अभ्यास देवल अंग्रेजी गद्याश के हैं। इस प्रकार दूसरे तथा तासरे अध्याय की सहायता म यावहारिक अनुवार का अच्छा अभ्यास किया जा सकता है । अतिम अध्याय विशिष्ट अभिव्यक्तियों के अनुवाद स सबद्ध है। इसम अनुवाद की कुछ उच्चतर समस्याग्रा यो उदाहरणा माध्यम से स्पष्ट पिया गया है। इस तरह यह पुस्तिका अनुवाद का अभ्यास वरन वाला को दृष्टि म रमार प्रस्तुत की गई है । प्राता है उनके लिए यह उपयागी गिद्ध होगी। प्रियवर डा० पृष्णात गमा मुकुल प्रियदगिनी तया राजीव ऋतुपण स प्रारम्भ के दा अध्याया म यहुत सहायता मिली है । इह बहुत-बहुत धयवाद । डा० भोलानाथ तिवारी ० मोमप्रकाश गावा

विषयानुक्रम
9
1 अनुवाद सिद्धात और व्यवहार
2 प्रम्यासमाला प्राथमिक
39
डा. भोलानाथ तिवारी
डॉ. भोलानाथ तिवारी
डॉ. प्रोमप्रकाश गाबा
डॉ. प्रोमप्रकाश गाबा
59
3 अम्यासमाला उच्चस्तरीय
विशिष्ट अभिव्यक्तियो के अनुवाद
92

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1 अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार 'अनुवाद' शब्द 'अनुवाद शब्द का सम्ब ध 'पद' (बोलना)धातु स है। इसमे 'अनु (पीछे बाद म) प्रत्यय लगने से 'अनुवाद' वना है और इसका मूल अथ है 'किसी के कहने के बाद कहना' अथवा 'पुन क्थन । अनुवाद मे हम एक भाषा मे कही गई वात' को उसके कहे जाने के बाद दूसरी भाषा में कहते है दूसरी भाषा मे पुन क्थन करते हैं इसीलिए नव इस अथ मे 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग होने लगा है। अनुवाद क्या है? एक भाषा की किसी सामग्री का दूसरी भाषा मे रूपातर ही अनुवाद है। इस तरह मनुवाद का काय है, एक (सात) भाषा में व्यक्त विचारा को दूसरी (लभ्य) भाषा में यवत करना, वितु यह व्यक्त करना बहुत सरल काय नही होता। होता यह है कि हर भाषा विशिष्ट परिवेग मे पनपती है, प्रत उसकी अपनी भने-ध्वयात्मक शाब्दिक, स्पात्मक, वाक्यात्मक, आर्थिक, मुहावरे विषयक तथा लोकोक्ति विषयक प्रादि-निजी विशेषताएँ होती है जो अनेक प्रय भाषापा से कुछ या काफी भिन हाती हैं, और इसीलिए यह आवश्यक नहीं है कि सात भाषा की क्मिी अभियक्ति के पूणत समान अभिव्यक्ति--शब्दत और मयत - लभ्य भापा म हो ही! 'पूणत समान अभियक्ति से प्राशय यह है कि स्रोत भाषा की रचना या सामग्री का सुन या परकर योत भापा भाषी जो अर्थ (अभिधाय लन्याय तथा यग्याथ) ग्रहण करे ठीक वही अथ अनुवाद को सुन या परवर लक्ष्य भापा भापी भी ग्रहण करे। एमा सवदा इसलिए नहीं हो पाता नि प्राय स्रोत भापा की अभियक्ति स जो प्रय व्यक्त होता है वह लक्ष्य 1 अनुवार के सदान्तिक विवेचन और यावहारिक समस्यामों के समाधान को विस्तृत जानकारी क लिए देखिए मनवा- विज्ञान-डॉ मौलानाप तिवारी 10/मनुयाद को ध्यावहारिक समस्याएँ भाषा की अभिव्यक्ति म व्यस्त होन वार मय यी तुनाम या तो विम्तत (expanded) होता है या गति (contracted) हाना * या पुछ भिन्न (transfered) हाता है या फिर 'नम म दो या अधिक या मिश्रण होता है। साय ही दाना भापामा यी अभिव्यरित इयान्या (प, दयष पद, पद वध, वाक्या, उपवाक्प वापि मुगवर नागक्तियों) में प्रमग-साहवय (Asso ciations) भी सवदा गमान नहीं हात–हो भी नहीं मरते इमी वारण सात भापा म पभिव्यक्नि-गण तथा प्रथ-गक्षक तालमल पाठीर उसी रूप में लश्य भापा म भी ला पाना सक्दा सम्भव नहीं हाता । वास्तविकता यह है कि दोना भापामा म स प्रकार ये ताजमल को समानता हमला होती ही नही फिर उम पोज पान का प्रान ही नही उठता । मपवादा या छोर दें ता प्राय स्रोत (भाषा की) सामग्री पोर उनके पावाद स्वरूप प्राप्त लत्य (भाषा म) सामग्री, ये दोना अभिव्यक्ति पर अय वे स्तर पर प्राय य या रामान नहीं होती। अनुवाद में दानापी समानता एप समझौता मात्र है। वे पेपर एक-दूसरे पे मात्र निकट होती हैं। हो रामानना की यह निरता जितनी अधिप हाती अनुवाद उतना ही अच्छा मौर मफ्ण होता है। उदाहरण के लिए हि दी ये तीन वाक्य लें लडना गिरा जमा गिर पड़ा डबा गिर गया। गराई म देखें तो इन तीना वाक्या ये प्रथम भी मूम अतर है । मा लें मग्रजी म अनुवाद करना हो तो हम the boy fell या the boy fell down वग। स्पष्ट ही मने जी व वाक्य ववल पहन हिदी वास्य व समतुल्य यह जा सकते हैं। भय हिदी बापया म पडना तथा 'जाना सनाया रियाणा रा जो बान व्यक्त की जा रही है प्रग्रेजी म नहा की जा सकती क्यारि उमम इस प्रकार की राहायर प्रियाए हैं ही नहीं। एसी स्थिति महिदी 'लडया गिर पडा या लडा गिर गया En the boy fell या fell down स्पम अग्रजीम अनुवाद अथ और अभिव्यक्ति की दष्टि से केवन निक्ट का ही माना जाएगा। मूल मौर अनुपाद को पूर्णतया एक या समान नहीं माना जा सकता। इसी तरह मान लें, किसी नाटन म एवं स्थान पर प्राता है माइए दूसरे स्थान पर प्राता है मा जाइए और तीसरे स्थान पर आता है तशरीफ लाइए । मोटे रूप से इन तीनो वे अथ म भले समानता हो, किन्तु गहराई स विचार करें तो इनमे अथ वा सूम अतर है। यदि कोई व्यक्ति अग्रेजी, रूसी या इम्तानियन भाषा म श नीना वा अनुवाद करना चाहे ता पहले का ही पूणत सटी- अनुवात कर सकता है । शेप का उम निकटतम अनुवाद या यथासम्भव समान अभिव्यक्ति म अनुवाद ही करना पडेगा, क्यावि इन भाषामा म एसी अभिव्यक्तिया नहीं हैं, जो गदत तथा अथत दूमरी तथा तीसरी अभिव्यक्तियो के पूणत समान हा। एक बात और । उपयुक्त कठिनाई अनुवाद म एक और परेशानी को जम .

अनुवाद सिद्धात और व्यवहार 11 र देती है। चवि स्रोत भाषा तथा लय भाषा में पूणत समतुल्य या समान अमि यक्तियां नही मिनी प्रत अनुवादक कभी-कभी योताभिव्यक्ति और लक्ष्याभि- व्यक्ति म समानता लाने के माह म स्रोत भाषा के एम प्रयोग भी लक्ष्य भाषा भ पथावत ला देने की गलती कर बठता है जो लक्ष्य भाषा की अपनी प्रतिम सहज नहीं होते । एस अनुवादा म लक्ष्य भाषा की अपक्षित सहलता नष्ट हो जाती है । मान लीजिए अग्रजी का एक वाक्य है---The man whe fell from the tree died in the hospital बहुत म हिंदी अनुवादक हि दी म इसे वह प्रादमी जो पेड से गिरा था अस्पताल म मर गया रूप म रख देंगे। रितु हिदी भापा की प्रकृति से परिचित व्यक्ति इस वाक्य को देखत ही समझ जाएंगे कि यह अग्रेजी की छाया है क्याकि हिदी चा अपना प्रयोग है जो प्रादमी पड़ स गिरा या अस्पताल म मर गया । पहले हिदी वाक्य म 'वह the का दादानुवाद मात्र है। या भारतीय भाषाएँ अग्रेजी म इतनी अधिक प्रभावित हो चुकी हैं कि ऐस बहुत से प्रयोग अब अपने सहज प्रयोग लगने तग है। इसी प्रकार हिदी इस विषय म अापका दप्टिकोण गलत है का मस्त म अनुवाद करत समय यदि कोई दष्टिकोण शब्द का प्रयोग कर तो गलत होगा क्याकि सम्वृत म दष्टिकोण' पाद का प्रयोग नहीं होता, इस अथ म वहा दष्टि' श द प्राता है-अस्मिन् विषय भवदीया दृष्टि अगुदा। बहने का प्राय यह है कि अनुवादव को अनु वाद वरन ममय इस बात मे बहुल सनक रहना चाहिए कि लभ्य भाषा में अनुवाद उमकी सहज प्रकृति के सवथा अनुप हो सात भापा को किसी भी रूप म छाया उपर्युक्त बातो के प्रकाश म अनुवाद का निम्नाक्ति रूपम परिभाषित किया जा सकता है- एक भाषा मे यक्त विचारों का, यथासम्भव समान और सहज अभिव्यक्ति द्वारा दूसरी भाषा में व्यक्त करना अनुवाद है। इग परिभाषा म तीन बातें ध्यान दन की है-- (क) अनुवाद वा मूल उद्दग्य है स्रोत भापा की रचना के भाव या विचार लक्ष्य भाषा म यथासम्भव अपन मूल रूप म लाना। (ख) अनुवाद के लिए घात भापा में भावो या विचारा को व्यक्त करनवे लिए जिम अभिव्यक्ति का प्रयोग है उसवे 'यथासम्भव समान या अधिक स अधिक समान अभिव्यक्ति की खोज लश्य भाषा म होनी चाहिए। (ग) लभ्य भाषा में बात भाषा में यथासम्भव समा जिस अभिव्यक्ति को योज हा वह लक्ष्य भाषा म सहज हा, अयान उसब सहज प्रवाह या प्रयोग के अनुकूल हो, सात भाषा की छाया म युक्त न हा। य* ठीक ही बहा गया है कि भनुवाद एव कस्टम-हाउस है जिमम होकर सात भाषा के प्रयाग का विदेशी माल 12/ अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं लक्ष्य भाषा में प्रय साता की तुलना में अधिक पा जाता है यदि अनुयादा अपेक्षित सतकना न बरत।' अनुवाद को तरह तरह से परिभाषित करने का प्रयास किया गया है। तीन प्रसिद्ध परिभाषाएं हैं- (1) Translating consists in producing in the receptor language the closest natural equivalent to the message of the source language first in meaning and secondly in style --Nida (2) The replacement of textual material in onc language by equivalent textual material in another language-Catford (3) Translation is the transference of the content of a text from one language into another, bearing in mind that we cannot always dissociate the content from the form -Foresten ऊपर न पस्निया पे लखक ने भी एक सक्षिप्त परिभाषा दी है, किन्तु अनुवाद की वास्तविक प्रक्रिया की दष्टि स विस्तत रूप म उमयी व्याख्यापरण परिभाषा पुछ इस प्रकार दी जा सरती है भाषा ध्वयारमा प्रतीक की व्यवस्था है और अनुवाद है इन्ही प्रतीको का प्रतिस्थापन, प्रयात एक भाषा प्रतीक स्थान पर दूसरी भाषा के निकटतम (क्थनत और कथ्यत ) समतुय और सहज प्रतीवा का प्रयोग । इस प्रकार अनुवाद निकटतम समतु य और सहज प्रतिप्रतीवन है । प्रथात प्रतिप्रतीकन यथा साध्य ऐसा होना चाहिए कि स्रोत भापा १ वध्य में लभ्य भाषा में पाने पर न तो विस्तार हो 7 मवाचन अय क्सिी प्रकार का परिवतन । साथ ही स्रोत भापा म बथ्य और अभियक्ति का जसा सामजस्य हो लभ्य भाषा मे अनूदित होने पर भी यथासा य दोना का सामजस्य चसा ही हो । समवतत मूल सामग्री पर या सुनार स्रोत भाषा भाषी जो प्रथ ग्रहण करता हो अनूलित सामग्री पर या सुन वर लय भापा भापी भी ठीक वही ग्रहण करे। अनुवाद के प्रकार अनुवाद के कई भेद या प्रकार हो सकते हैं। इन भेदा या प्रकारा के मुख्य प्राधार चार हैं (क) गद्यस्व पद्यत्व, (ख) साहित्यिक विधा (ग) विषय (घ) अनुवाद की प्रकृति । इनमें प्रथम तीन अपक्षाकृत बाह्याधार है तथा अतिम - Translation is a customhouse through which passes in the custom officers are not alert more smuggled goods of foreign idioms than through any other linguistic frontier कार अनुवाद सिद्धात और व्यवहार / 13 प्रातरिख, और इसीलिए यही अधिक साथ है। इन प्रापारो पर मुख्य भेद नीचे दिए जा रह हैं। (क) अनुवाद के गद्य-पद्य होने के आधार पर- (1) गद्यानुवाद-~-जसा कि नाम से स्पष्ट है, यह अनुवाद गद्य में होता है। प्राय मूल गद्य का ही गद्य म अनुवाद किया जाता है, किन्तु यह कोई आवश्यक नहीं है । मूत्र पद्य का भी गद्य म अनुवाद किया जा सकता है, और ऐसे अनुवाद हुए भी हैं। (2) पद्यानुवाद-यह अनुवाद पद्य म हाता है। प्राय पद्य का अनुवाद हो पद्य म होता है किन्तु कभी-कभी मूल गद्य का भी अनुवाद पद्य म किया जाता है पौर ऐसे अनेक अनुवाद विभिन भापाया मे हुए हैं । इस 'छ दानुवाद या 'उदबद्ध मनुवाद' भी कहते हैं। (3) मुक्तछदानुवाद--यह अनुवाद मुक्त छदम होता है। इसमें जो छन्द होता है वह तुक्-माया प्रादि उन ब धना से मुक्त होता है जो पद्यानुवाद के लिए पावश्यक हैं। गक्सपीयर वे कई हिदी अनुवाद इसके उदाहरण हैं। सामा यत मूल सामग्री मुक्त छन्द में होन पर ही मुक्तछ दानुवाद किया जाता है, वि तु मूल गद्य या पद्य वे भी ऐम अनुवाद हो सकते हैं और हाते हैं। (प) साहित्यिक विधा के प्राधार पर- इस प्राधार पर कई भेद हो सक्त हैं किन्तु मुख्य भेद निम्नाक्ति हैं- (1) काव्यानुवाद-क्सिी काव्य रचना का अनुवाद । यह अनुवाद गद्य पद्य या मुक्तड द पिसी में भी हो सकता है। या प्राय वाव्य का अनुवाद पद्य, मग मुक्तछद म ही किया जाता है । यह प्रश्न विवाद का रहा है कि काव्य का अनु वाद भी हो सकता है या नहीं। स्पष्ट ही याव्यानुवाद होत रहे हैं अन अवश्य हो सकते हैं । हाँ, यह अवश्य है कि गली और अथ दोना ही दप्टिया से मूल का मनुगामी सफल अनुवाद क्ला बहुत कठिन है। कभी-कभी तो यह इतना कठिन होता है कि भमभव को सीमा छू लेता है। (2) नाटकानुवाद-विसी नाटक का नाटय रूप में अनुवाद । या अन्य साहित्यिर विधामा के भी नाटक रूप में अनुवाद (रूपानरण) हो सकते हैं और इसमे ठीक उलटे नाटर में भी वाव्य या कहानी रूपम अनुवार (पातरण) होत है । नाटर का नाटर प म मनुवार वाफी कठिन होता है क्यापि उस पठ नीय हान के साथ-साय एमा धना चाहिए कि रगमच पर सेला भी जा मर । इमीलिए रगमच की सारी प्राव यवनामा तथा विपनामा नाजानकार ही मन नाटकानुवाद कर सकता है।

14/अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं (3) क्यानुवाद—क्या साहित्य (उप यास तथा वहानी) का कथा साहित्य (उप यारा तथा कहानी) म अनुवाद । इस श्रणी का अनुवाद कान्यानुवाद तथा नाटकानुवाद की तुलना म सरल होता है ! इस आधार पर रेखाचित्रानुवाद निव वानुवाद सस्मरणानुवाद प्रादि प्रय भी कई भेद विभेद हो सक्त हैं। (ग) विषय के प्राधार पर- विषय के आधार पर अनुवाद के अनेक भेद किए जा सकते है । जस मरवारी रिकार्डो का अनुवाद, गजटियरो का अनुवाद पत्रकारिता से सम्बद्ध अनुवाद, विधि साहित्य का अनुवाट वनानिक (प्राकृतिक तथा सामाजिक) साहित्य का अनुवाद ऐतिहासिक साहित्य (अभिलेखादि) का अनुवाद धार्मिक साहित्य (वाइग्लि आदि) का अनुवाद तथा ललित साहित्य का अनुवाद आदि । (घ) अनुवाद की प्रकृति के प्राधार पर- अनुवाद की प्रकृति के आधार पर भी अनुवाद के कई भेद किए जा सकते हैं। मूलत इस प्रकार वे दो भेद होते हैं (1) मूलनिष्ठ अनुवाद-ऐसा अनुवाद जो यथासाध्य मुल का अनुगमन कर । मूल के अनुगमन में अनुवादा का ध्यान विचार (कथ्य) तथा अभिव्यक्ति (क्थन पद्धति) दोनो ही पर होता है। वह अपने अनुवाद का यथासम्भव दोनो ही दष्टिया स मूल के निकट रखना चाहता है। (2) मूलमुक्त अनुवाद-जसा कि नाम से स्पष्ट है अनुवाद के इस प्रकार म अनुवादक को काफी छूट रहती है वितु यह छट प्राय अभिव्यक्ति या क्थन गली की तरफ ही विरोप होती है क्थ्य या विचार की तरफ से नहीं। क्थ्य मा विचार की दष्टि से तो अनुवाद का मूलबद्ध या मूलनिष्ठही होना चाहिए क्यादि वह यदि ऐमा न हो तो उस अनुवाद कहा ही नहीं जा सकता। हा, सक्षेप की दष्टि से उसम कुछ बातें छोड दी जा सकती हैं। जहा तक अभिव्यक्ति या क्थन शली का प्रश्न है मूलमुक्त अनुवादक् लक्ष्य भाषा की सुविधानुसार, अनुवाद के उद्दश्यानुसार तथा अनुवाद परने या मुनन वालो की योग्यतानुसार परिवतन परिवधन कर सकता है । इमके अतिरिसत सामग्री को अधिक बोधगम्य बनाने के लिए उदाहरणा-उपमाना प्रादि का देगीकरण भी किया जा सकता है। मूलमुक्न अनुवाद को मूलाधारित या मूलाधत भी कहा जा सकता है। सामायत जो अनुवाद किए जाते हैं उनम प्राय उपयुक्त दो (मूलनिष्ट, मूलमुक्न) म स ही किसी एक का या मिश्रित रूप स सुविधानुमार दोनो का प्रयोग दिया जाता है।

अनुवाद सिद्धात और व्यवहार ! 15 अनुवाद की प्रकृति के प्राचार पर अनुवाद के कुछ अय प्रकारा का भी उल्लेख किया जाता है, जो तत्त्वत मूलनिष्ठ और मूलमुक्त स भिन नहीं हैं, बलि अनेक वाता म एक दूसरे पर आवरलप करत हैं । य अय प्रबार अधोलिखित हैं- (1) गदानुवाद- यह शद 'शब्द+अनुवाद से बना है । मोटे रूप म इम प्रकार के अनुवाद म मूल के हर गद पर अनुवादक का ध्यान जाता है। श दा- नुवाद का प्रयोग एक स अधिर प्रकार के अनुवादावे लिए होता रहा है। इसीलिए इसके कई उपभेद पिए जा सक्त हैं । अग्रेजी म लिटरल टास्लेगन, वबल ट्राम्लेगन वड-फार-वड टास्नशन प्रादि इसा का कहत हैं। गानुवाद के मुख्य उपभेद तीन हा सक्त हैं (अ) जिमम मूल सामग्री की हर श दाभिव्यक्ति का प्राय उसी प्रम मे अनुवाद किया जाय । जस I am going home का मैं ह जा रहा घर'। वाइबिल की पुरानी पोथी के पई यूनानी अनुवाद लगभग इसी प्रकार के लिए गए थे । अनुवाद का यह निकृष्टतम स्प है । कभी कभी ऐसा गब्दानुवाद पूणत अवोधगम्य हो जाता है क्याकि हर भाषा म द म एक जसा नहीं होता। जम Will he go का गा वह जाना। वस्तुत इस प्रकार का 'मक्षिका स्थान मशिवा अनुवाद 'अनुवाट कहलाने का अधिकारी नहीं है। इस प्रकार के कुछ और उदाहरण हो सकते हैं मेरा सर चक्कर खा रहा है---My head is cating circles वह पानी-पानी हो गया--he became water and water. य उदाहरण थाड मिन हात हुए भा, प्राय उसी श्रेणी म हैं। (आ) एमा अनुवाद जिसमे क्रम प्रादि ता मूल का नहीं रखत वितु मूल वे हर पाद का अनुवाद म पूरा ध्यान रखते हैं और इसीलिए मूल को गली अनुवाद म स्पष्ट भलवती है। हिदी अम्बवारा म अग्रेजी म पिए गा अनुवादो म एम उदाहरण प्राय मिलत हैं। कुछ उदाहरण हैं It is an interesting point यह एक रोचय विद्ध है। It sounds paradoxical यह विरोधाभास-सा सुनाई पड़ता है। It was hopelessly obscure यह निराशाजनर दग में प्रम्पप्ट था। The insects called silver fish योड जो रजत मछली कहलाते हैं (Siner fish वस्तुत सराद मछली नहा होती। यह एव चमकीले कीडे का नाम है।) There is very small distance betwçon these two cities 16/ अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएँ इन दो नगरो के बीच बहुत छोटी दूरी (बहुत कम पासला) है। There is a custom amongst the Red Indians लाल भारतीया मे एक रिवाज है ! इसके उलटे हि दी अग्रजी वे उदाहरण भी लिए जा सकते हैं बत्ती जलानो। Burn the lamp उसने मच मे दो गोल किए। He made two goals in the match वद्य ने उसकी नब्ज़ देखी। The Vaidya saw her pulse फूल मत ताडो। Dont break flowers मादित इस प्रकार के दादानुवाद, पहले प्रकार के पान्दानुवाद जितने घटिया न होने पर भी घटिया ही कहे जाएंगे। इनका अथ पहले की तरह अस्पष्ट तो नही रहता, किन्तु लक्ष्य भाषा की सहज प्रकृति इनम नहीं आ पाती, बल्कि स्रोत भाषा की शलीय छाया लभ्य भाषा पर धुरी तरह छाई रहती है, मत सहज प्रयोग की दप्टि से ऐसे मनुवाद गलत तथा हास्यास्पद होते हैं । (इ) शदानुवाद का तीसरा रूप वह है जिसे उत्तम कोटि का या मादश श दानुवाद कहा जा सकता है। इसम मूल के प्रत्येक श द बल्कि प्रत्येक मभि व्यक्ति इकाई (जमे पद पदबध, मुहावरा लोकोक्ति उपवाक्य वाक्य) के लक्ष्य भाषा में प्राप्त पर्याय के आधार पर अनुवाद करते हुए मूल के भाव को लक्ष्य भाषा मे सम्प्रेपित किया जाता है । इसम किसी भी शद या अभियक्ति इकाई की उपेक्षा नहीं की जाती । दूसरे ग दाम अनुवादक न तो मूल की कोई अभिव्यक्ति इकाई छोड सक्ता है न अपनी ओर से कोई अभिव्यक्ति इकाई जोड सकता है । सक्षप में श दानुवाद के लिए मैं एक मादश सूत्र देना चाहूंगा शिद के स्तर पर मत छोडो, मत जोगे। उदाहरणाथ The boy who fell from the tree died in hospital का श दानुवाद होगा वह लडका जो पेड से गिरा था अस्पताल मे मर गया।' हि दी की प्रकृति के अनुकूल और अच्छा पदानुवाद होगा- जो लडका पेड से गिरा था अस्पताल म मर गया। इसके विपरीत इसका भावानुवाद होगा--पड़ से गिरने वाला लडका अस्पताल म मर गया। इस प्रकार का शब्दानुवाद ऐसी सामग्री के अनुवाद मे तो बहुत सफल नहीं हो सक्ता जिसम सूक्ष्म भावा का शलीप्रधान चित्रण हो कि तु तथ्यात्मक वाट मय- जस गणित, ज्यातिप, सगीत, विनान, विधि प्रादि-वे लिए तो ऐसा शब्दानुवाद अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार /17 हो अपेक्षित है। मुख्यन विधि-माहित्य का प्रामाणिक अनुवाद का नुवादही माना जाएगा, भावानुवाद नहीं, क्योकि उसम हर गद का अपना मह व होता है और काननी गहराई म जाने पर उसकी अपनी सायक्ता होती है। रादानुवाद की मुख्य कमियाँ य हैं (1) स्रोत भाषा तथा लक्ष्य भाषा यदि गदाय, विशिष्ट प्रयाग, मुहावरे तया वाक्यरचना प्राति की दष्टि स बहुत समान हो, तब ता गगनुबाद वहत परिया नहीं होता, वितु दोनो मे यदि इन दृष्टियों मे असमानता हो तो, असमानता जितनी ही अधिक होगी, श दानुवाद उतना ही घटिया होगा। (2) गगनुवाद में अनुवाद वे बहुत सतक रहने पर भी प्राय स्रोत भाषा या प्रभाव स्पष्ट रहता है । मूल की उस गध के कारण अनुवाद की भापा प्राय वृत्रिम तथा निष्प्राण हो जाती है तथा उसमें मूल रचना का प्रवाह नही रह जाता, जो वरिया अनुवाद के लिए अनिवायत प्रावश्यक है। (3) यत्रयन शब्दानुवार कभी-कभी पूणत प्रबोधगम्य तया हास्यास्पद भी हो जाता है। रितु यदि अनुवादर प्रयत सतक्ता बरतार उपयुक्त बुटिया से बच म ता बरिया पदानुवाद (यदि वह मूल पे भाव को सहज लाय भापा म सफलतापूर्वक व्यक्त परने म समय है) ही वास्तविर अनुवार है। पक्ति प्रति-यक्ति (Interlinear translation) नाम का प्रयास भी शदानुवाद के लिए कभी-कभी किया जाना है। सोन भाषा स सत्य मापा म सहज प में वाक्य लिए-वाय' अनुवाद नहीं किए जा सकत, वितु कोई अनुवार यदि वाश्य व लिए वाय अनुवाद, तो उस शब्दानुवाद को याम प्रति याश्य अनुवार भी रहा जा सकता। (2) भावानुवाद-जमा वि नाम मस्सष्ट है, इस प्रकार या अनुवार भूग दे एब्द, वारया वाक्य प्रादि पर ध्यान न दार भाव, प्रय या विचार पर ध्यान या जाता है और उमीको लक्ष्य भाषा म मन्त्रपिन करत है । राम मनुवार का ध्यान मूल सामग्री के गार पर विशप होता है ता मम गरी मामा पर। अप्रतीम सम पार सग' (sense for sense) रोग ही अनुवाद के निा कहा जाता है। भावानुवाद एवापिस प्रकारका हो गया है। का भूत के वाक्या में हर पद या पद पर ध्यान न देकर पदय का भानुया" (जम भारत में पहा हान याला गहूँ के लिए Indian wheat}, मी साधार का भावानुवा' (जम गेहूँ जो भारत म पदा होता है' 7 Indian wheat), भी वारय मा भावानुवाद वभो पानि वाक्या कामिनार Ram भावानुवार कभी पूर पंरापाफा भावानुवाद मोर कभी for को मिनार उना भावानुवाद माने हैं। गामाया मून माती 18 / अनुवाद की व्यावहारिक ममस्याएं भावो वाली है ता उसका भावानुवाद करते हैं, और यदि वह तथ्यात्मक, वज्ञानिस या विचार प्रधान है तो उसका शदानुवाद परत हैं। किंतु ऐमी भी स्थिनियाँ कभी कभी पाती हैं जब अनुवादक किसी प्रश का बरिया श दानुवाद नहीं कर पाता तो उस भावानुवाद ही करना पड़ता है। इस प्रकार अनुवाद की व्यावहारिक कठिनाई दूर करने का भावानुवाद एव अच्छा रास्ता है। भावानुवाद वा सरसे बडा लाभ यह है कि लन्य भाषा म स्रोत भाषा की अभियक्तियो की गध नहीं मा पाती अनुवाद मूल का यत्रवत अनुसरण नहीं रह जाता और उसम मीनिय रचना जसा सहज प्रवाह या जाता है । दानुवान प्राय गुद्ध भापातरवार के रूपम ही हमारे सामने प्राता है, किंतु भावानुवादक वारयित्री प्रतिभा वाले लेखक (Creative writer) के रूप म हमारे सामने प्राता है। वितु साथ ही भावानुवाद की यह भी सीमा है कि उसम मूल की शली प्रादि न पाने स वह प्राय अनुवाद न रहार मूल पर आधारित मौलिक रचना सा हो जाता है, अत पाठक उसे मौलिक रचना का मा पान द लेते हुए पढ तो सकता है कि तु उसे परवर मूल रचना की शली या उससे अभिव्यक्ति सौदय या अभि यक्ति पक्ष का उसे पूरी तरह पता नहीं चल पाता । कभी भी एमा भी होता है कि पाठ क्सिी रचना को भाव या विचार से अधिक मूल लेखक के अभिव्यक्ति पक्ष को जानने के लिए ही पटना चाहता है। भावानुवाद एस पाठका के लिए भ्रामर होता है क्योरि भावानुवाद म प्राय अनुवादा की अपनो शली मा जाती है, और उसका अपना यक्तित्व मूल लखक ५ यक्तित्व पर एक सीमा तक छा जाता है। इसीलिए प्रादश अनुवाद वह है जो गानुवाद तथा भावानुवाद दोनों पद्धतियों को ययावसर अपनाते हुए मूल भाव के साथ साथ ययाशक्ति मूल शली को भी अपने मे उतार लेता है और साथ ही लक्ष्य भाषा को सहज प्रकृति को भी अक्षण्ण बनाए रखता है। (3) छायानुवाद-हिदी मे छाया तथा छायानुवाद दो गब्दो का प्रयोग काफी मिलते जुलत अर्थों में होता है । 'छाया श द का एक प्रकार का पुराना प्रयोग सस्कृत नाटको मे मिलता है । उनम स्त्री पात्र तथा मवर आदि प्राकृत भापा का प्रयोग करते हैं किन्तु पुस्तयो मे प्राकृत क्थन या छट के माथ उसकी सस्कृत छाया भी रहती है । स्पष्ट ही इस अथ म छायानुवाद शद का भी प्रयाग हो सकता है । 'छाया श द का एक दूसग प्रयोग तब हाना है जब विमी पुस्तक की कुछ छाया या छायावत धुधला प्रभाव लेते हुए स्वन न स्पस कोई रचना की जाए। इसम प्राय नाम स्थान वातावरण आदि वा देशीकरण कर लिया जाता है। भगवतीचरण वर्मा के उपयास चित्रलेखा के क्थान पर अनाताल मास के उप यास थाया' को छाया है । इस अथ मे छायानुवाद का प्रयोग मेरे विचार में नही क्यिा जाना चाहिए। चित्रलेखा पर थाया की छाया ही है वह छायानुवाद अनुवाद सिद्धात और व्यवहार/19 नहीं है। छायानुवाद एम अनुवाद को यहा जाना चाहिए जा शब्दानुवाद की तरह मूल व शदामा अनुसरण न कर, अपितु दाना ही दृष्टिया स मूल में (गव्दत भावत ) मुक्त हावर प्रभात विना मून स विशेष धे उमवी छाया लेकर चले। (4) सारानुवाद-- इसम मूल की मुख्य बातो वा मूलमुक्त मनुवाद होता है। यह सक्षिप्त, अनि सक्षिप्त, प्रत्य त सक्षिप्त मादि कई प्रकार का हा मरता है। भारतीय लोकसभा व वाद विवाद का जो अनुवाद किया जाता है, वह माय ऐसा ही होता है। अपनी मक्षिप्तता सरलता, स्पष्टता तथा लक्ष्यमापा में स्वाभाविक-सहा प्रवाह ये कारण व्यावहारिक कार्यों म सामा य अनुवाद की तुलना म सारानुवाद ही अधिक उपयोगी पाया गया है। लम्बे भाषणों का सद्य अनुवाद करने वाले दुभापिए भी प्राय इसी का प्रयोग करत हैं। (5) व्याख्यानुयाद-~इसमें मूल या व्याख्या के साथ भनुवाद होता है। स्पष्ट ही व्याख्या व्याख्याना के व्यक्तित्व, मान तथा दृष्टिकोण पर प्राप्त होती है तथा उसमे वथ्य के स्पष्टीकरण के लिए कुछ अतिरिक्त उदाहरण, उद्धरण, प्रमाण इत्यादि जोडे जा सक्त हैं। इसी कारण व्याख्यानुवाद में अनुवादर येवल अनुवाद न रहकर काफी महत्वपूर्ण हो जाता है । लोकमा च निलक का गोतानुनाद इसी । सस्कृत के विभिन्न प्राप ग्रथो के सनातनधर्मी एव प्रायसमाजी व्याम्या प्रथ भी इस अच्छे उदाहरण हैं । याथ्यानुवाद म पनुवाद अनुवाद से अधिक बल मूल नी बाता को विस्तार के साथ अपने ढग से समभाने पर देता है। इसीलिए तत्त्वत व्याख्यानुवाद मनुवार से अधिक व्याख्या या भाप्य होना है। इसे 'माप्यानुवाद भी कह सकते हैं । मूल की तुलना म यह वाफा वडा होना है। पडदशन ग्रया के याख्यानुवादाम एक एक सूत्र को कभी-कभी दो दो तीन-तीन पप्ठो म समभाया गया है। व्यास्यानुवाद वाफी प्रभावी होता है पयादि इसमें मूल की अस्पट बातें विश्लेषित तथा उदाहृत होवर स्पष्ट हो जाती हैं परन्तु इसमे एक डर यह होता है कि अनुवादक या भाष्यकार मूल लगा के विचार में कुछ अपना रग पारोपित करके उसके साथ अयाय भी कर सरता है। (6) सहज अनुवाद---यह अवाद का आदश प्रकार है, जिसम अनुरादर स्रोत भाषा स मूत सामग्री वा अभिव्यक्नित और अथत लक्ष्य भाषा मे निकटतम एवं स्वाभाविव समानका (closest natural equivalents) द्वारा अनुवाद परता है। इसे स्वाभावित मटीय अनुदार भी कहा जा सकता है। अनुवाद इसम यथासा य अपना यक्तित्व नहीं ग्राने देता । अनुवाद मूल सा होता है। प्रयात अनुवादक का प्रयास यह हा।। है कि मूल भो पढ़ या सुनकर स्रोत भाषा भापी जो ग्रहण करें, अनुवाद को पर या सुनकर लक्ष्य भाषा भाषी भी ठीक वही ग्रहण कर। तरहना 22 | अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं चतुर्वेदी जी ऐमी शैली में अनुवाद करेंगे तो मैं उदू म इसका अलग अनुवाद न क्राता तथा प्राय इमे ही उदू में भी प्रकागित करवा देता। यहां यह बात भी ध्यान देने की है कि अनुवादक चतुर्वेदी ने होरेस की कृति के नाम में तो काव्य मे उदात्त तत्त्व अथात काय और उदास का प्रयोग किया है, कि तु मौलाना आजाद की पुस्तक के नाम में म्वत उता श द वा प्रयोग न कर प्राजानी का प्रयोग किया है । कहने का प्राय यह है अनुवाद की गली एसी होनी चाहिए जा मूल कृति की शली की अनुगामिनी हो । इस प्रसग म 'शली दि भी विचारणीय है । जब हम अनुवाद के मूल की शली के अनुगमन की बात उठात है तो शली वा क्या अथ है ? गहराई स देखा जाए तो सक्षप मे शली मे वह सब कुछ पा जाता है जो किसी भी रचना म क्थ्य को पाठक या श्रोता तक पहुचान के लिए हाता है और जिस समवेतत अभिव्यक्ति पक्ष या कला-पक्ष की सना देत है । वविता की गली की परख मुख्यत श द चयन, अलकार श द शक्ति, गुण नाद सौदय ध्वनि, दोष तथा छत आदि मे होती है। गद्य म छद को छोडकर यूनाधिक रूप मे ये सभी बातें आ सकती हैं। हिदी में शली के भेदो या प्रकारा के नाम पर पास शली, अलकृत शली उदात्त शली मुहावरेदार गली लाक्षणिक शली यजक शली गुफ्ति शली सरल शली, सरस शली सामा य शली तथा सपाट शली प्राति के नाम लिए जाते हैं। विश्व की प्रय भायात्रा मे भी इसी प्रकार की कुछ कम या अधिक शनिया के नाम हो सकत ? । - अनुवादक को चाहि कि मूल की गली को-चाहे वह किसी भी प्रकार की क्यो न हो-यथामाध्य अनुवार में भी लाने का यत्न बरे हालाकि ऐसा करना न तो सवदा सरल होता है और न बहुत सम्भव ही। उसका कारण यह है कि हर भाषा की प्रकृति में कुछ उसकी निजी विशेषताए होती हैं जो दूसरी भाषा म होती ही नहीं। फिर, जिस भाषा में वे हैं ही नहीं, उनमें कोई भला ला कस सकता है फिर भी यत्न तो होना चाहिए । सीधे न मही किसी और ढग से सही। शली के मुख्य तत्त्वा में Tद चयन अलकार द शक्तियों ध्वनि तथा छद को अनुवाद में ठीक उतार पाने में कभी-कभी काफी कठिनाई होती है। गद चयन का ही प्रश्न लें। किसी भाषा म पर्याया का प्राधिक्य होता है तो क्मिी में वे कम होत हैं मत मभी भाषामा म सभी स्थला पर पद चयन कर सन की जादा नहीं होती। उदाहरणाय हिदी सट समूह म मापो की काफी गुजाइश है क्यानि इसम दशज गदा के अलावा तीन स्रोता ५ शद हैं--(1) संस्कृत तत्सम (2) तदभव (3) विटगी। इमीलिए पथ्वी धरती, जमीन या मुटर सुघर खूबसूरत जसी पर्याय शृखलाएँ हैं जिनके सदर्भाथ कभी-कभी एक दूसरे से दूर होत हैं । इस दष्टि म हिंदी की तीन गलियां हैं अनुवाद सिद्धात भोर व्यवहार/ 23 सस्कृतनिष्ठ हिदी, अरवी फारसी युक्त उदू, बीच की शली हि दुस्तानी। सभी भापायो म ये अतर ठीक इसी प्रकार नहीं मिल सकते अत सभी भाषाओं म अनुवाद मे इहे लाया भी नही जा सकता । रूप चयन की कठिनाई को भी इसी के माथ मिला सकते हैं । हिदी म वैठ, वठा बटिए, बठे य चार पाना वेप हैं जिनमें मूक्ष्म अतर है । अग्रजी, एसी प्रादि यूरोपीय भाषामा में इह उतार पाना असम्भव है । हो, जब हम किसी प्रय भाषा स हिदी में अनुवाद कर रह हा ता प्रसगानुसार उपयुक्त रूप का चयन कर सकत हैं। अलकारावी भी यही स्थिति है। हिदी मे यमक तथा श्लेष अनेकार्थी श दा पर निमर करते हैं किंतु यह आवश्यक नहीं कि लक्ष्य भापा म एसा काई शद हो जिसवे' उतने अथ हात ही हो । उदाहरण में लिए, कनक क्नक ते सौ गुनी का शलीगत सौदय उस भाषा के अनुवाद म उतारा ही नहीं जा सकता, जिसमे कोई म ऐसा शब्द ('क्ना' का पर्याय)न हो जिसके सोना' और 'धदा' दीना अथ होत हा। अलकारा सदभ म सक्षेप म यह कह सकते हैं कि जहा स्रोत सामग्री म उपमा रूप आदि अर्थालकारा के चमत्तार हा उहें ज्या का त्या या थोड-बहुत हेर फर के साथ लश्य भाषा म सप्रपित किए जाने की सभावना हो मकती है, परतु जहा स्रात भापा म अनुप्रास, यमक, श्लेप आदि शब्दालकारो से चमत्कार पदा किया गया हा वहा लभ्य भापा म वसा शली-चमनार ला पाना वत्ति अनुवाद कर पाना ही कठिन हो जाता है। दूसरी ओर स्रोत भाषा में काई अलकार या मुहावरा न पाने पर भी कुशल अनुवादक अपने अनुवाद म अनुप्रास की छटा या मुहावर का सौंदय ला सकता है। शद शक्तिया, नाद सौत्य तथा ध्वनि प्रादि की भी प्राय यही स्थिति है । वस्तुत 'करण विकिणि नूपुर धुनि सुनि अथवा घन धमड नभ गरजत घोरा' अथवा 'मृदु मट मद मथर मथर' का गलीगत सौदय अनुवाद म ला पाना सभी अनुवादका क वस वा नही है। प्राय विभिन भापामा मे अलग अलग हा होते हैं। या अनुवादको ने लय भाषा में नए छद लान के यत्न दिए हैं। उदाहरण के लिए महाभारत तथा गमचरितमानम के रूसी अनुवादवो ने अपने मनुवाद मूल छद म किए है। अग्रेजी म भी कुछ इस प्रकार के अनुवाद विविध भापाग्रा से हुए है। वितु ऐसा हमा मम्भव हाता नहीं। या सवना ऐमा करना बहुत सायर भी नहीं होता, क्योकि किमी छत का जो प्रभाव स्रोत भाषा भापी पर पडता है अावश्यक नहीं नि लक्ष्य भापा भाषा पर भी वही पडे । स तरह सक्षप म यही वहा जा सकता है कि 'न सभी दृष्टिया से यथा साध्य मूल शली को लान का प्रयल हाना चाहिए। प्रयल होन पर इस दिशा म मयिक नहीं तो कुछ सफलता मिलन की ता सम्भावना हा हा सकता है।

24/अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएँ यह बात मादा अनुवाद की दृष्टि स की जा रही थी। कुछ बातें ऐमी भी होती हैं जिना दृष्टि म रमत हुए मूल कृति की गली म कभी-कभी धाडे बहुत परिवता मत हात है। उदाहरण वे सिर कल्पना कीजिए कि किसी पुस्तक का मनुयार गुपठिन बना लिए नवसारा के लिए, विगोरा के लिए तया बच्चा लिए दिया जा रहा है, ता निश्चय ही पर चयन प्रादि की दृष्टि में गलीया न पारा म एम नही रमाजा माता । इसका मप यह हुमा पि मनुवादमी इस प्रार मोली के लिए एक बहुत बडा निणायक तत्त्व यह है कि मनुवा सिरे लिए लिया जा रहा है उमने पाठर यौन हाग? इस तरह पाटना रे नान पौर भाषा-स्तर की दृष्टि म मनुवाद की एकाधिर लिया हो सकती हैं मोर मनुवादर को उनका प्यान रमत हुए पाली म परिवतन करना चाहिए। मान लें, किसी नाटय मा मनुवाद किया जा रहा है। यदि नाटक रग-मप लिए है ता उमका रानी अपेक्षारत सरल हानी चाहिए, ताकि यथोपापना प्रय श्रोता-जा भाषा पान की दृष्टिग हर प्रणी के हा रारत हैं -गुनत ही रामझ जाएँ पिन्तु राप विपरीत यदि नाटक देवल पदन सिरा है तो पाली पोटी वठिन भी हो नो पाई बात रही, क्यापि पाठर प्रपन सममन की क्षमता मी दष्टि म उगे अपनी मुविधानुमार सजी स धीमी गति ग पड़ सकता है। इस सरह ऐसी मगाएं भी मनुवाद की गली को प्रभावित करती हैं। पतीमा सम्य प पुग्नर या राना ये विषय ग भी बहुन पपिर होना है। इस एप्टिम विभिन विषया या रचनामाकोमाटे पगदा वर्गामाटामा सरता है (1) ली प्रधान (प) तय प्रधान । पर बात पर दन की रियर भ मोर गगरिया जा रहा है । इमरा मर्प यह ही गमभना पारित ाि प्रधान रपनामा म तप्प नराहाता या तम्प प्रपान रपनामा माशलीया नही हाता। दाना म दाना हात रितु एकमुत प मा सामरा में पसीप्रपान रपना रपिता महाती नापायाम गपराम्प, मनित निवप रेगापित रिपोतार पाहिली ता सम्पप्रधान रपना हाम राजनीति शास्त्र गति, नि बिरला मात्र मानिनी। नमी प्रापिर विपापापीहर भाषामनी मोनिया हाती है और यril भी हर युग महा। पगार कामर भाग कम पोरगतीपर ग अनुगार मनापानी गाति । उनिए, frTran-गारगरपापामोपनामा गगन * frganम पानी ना मानना LORIगरापर पापा मार सिमित भार मापारी पुरा पदुग free मरतो मगमगार 1 अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार /25 रखना चाहगा, किन्तु यदि उप यास नाटक, कहानी वा करे ता वोलचाल की भापा-शली रखेगा। पहली म अग्बी फारसी अग्रेजी के सदा के आने की सम्मा वना अपेक्षाकृत बहुत कम होगी कितु दूसरी में वे बहुत अधिक होगे। छायावादी काल मे स्थिति ऐसी नही यो । उस समय नाटक, उप यास तथा कहानी वो भापाशैली भी काफी सस्कृतनिष्ठ हो सकती थी। अर्थात उस समय का मनुवादव उपयास तथा कहानी के अनुवाद में संस्कृतनिष्ठ शली का प्रयोग कर सकता था, जब कि आज ऐसा करने म के वह दस बार सोचेगा। यह बात शब्द-चयन की दष्टि से की जा रही थी। शैली के कई प्रय तत्त्वा के सम्बधम भी इस प्रकार की बातें स्मरण रखन की हैं । उदाहरण के लिए, प्रलपार या अलकृत शली को लकर भी ऊपर की बातें एक सीमा तक प्राय ज्यों- को-त्या दुहराई जा सकती हैं। तथ्य प्रधान साहित्य म प्राय -~-अपवादा को छोडकर-पारिभापिक या अद्ध पारिभाषिक दो सयुक्न सपाट शली होती है । उदाहरण के लिए, गणित, भौतिक विज्ञान, रसायनविनान, प्राणिविनान, वनस्पतिविनान प्रादि ऐसे ही विषय हैं । इनम अनुवाद क्ला का मूल माघार पारिभाषिक और पद्ध-पारिभाषिक शादा का प्रयोग है। यो तथ्य प्रधान कुछ विपय यथा साहित्य के इतिहास, राजनीति मारिएम भी हैं जा तथ्य युक्त होते हुए भी प्राय गलीय सौन्दय से भी युक्त होते हैं। मन , इनम एक सीमा तक अनुवादा का शली का ध्यान भी रखना पड़ता है हो, वह लतिन साहित्य स बम हाना है और गणित भौतिक विनान आदि शुद्ध शानिर विपया म ज्यादा । सक्षेप म क्थ्य की दप्टिस जस जस हम स्थूल स सूक्ष्म की प्रोर अग्रसर हान हैं, वम वर्म शैली अथवा कलापक्ष का संवारन की प्रवृत्ति भी बत्ती चली जाती है। गली ये प्रसग म अतिम उल्लख्य बात यह है कि अपर जिस शली की बात की जा रही थी वह माद चयन, मलकार, गुण सदगक्ति प्रादि एसी चीज़ा स सम्बद थी, जिनका सम्बध भाषा की व्याकरणिय सरचना स नहीं था। किन्तु इसके अतिरिक्त शली काएक स्वरुप भाषा की व्याकरणिक सरचना से भी सम्बद्ध होता है। वस्तुन गली कावापी कुछ सम्बध अनर म म एप ने चयन म है। मूत लेगा इसी प्रकार अनाम मे 4 चुनार अपनी विशिष्ट शैली में बान पहता है और मनुवादक सभ्य भाषाम प्रने मेव चयन पर मूल की शली यथामाय मनुवादम लान वा यत्न करता है। प्रनर भापामा म विमीन रिसी म्तर पर व्याकरण (रुप रचना एव वाक्य रचना) में भी भनेर मे म एक में चयन पी गजाइश हाती है। हिन्दी के कुछ उदाहरण हैं-~भारत की चीजें, भार- तीय चीजें, प्रभावित करने वाली रचना, प्रभाव डालन वाली रचना, प्रभावी रचना, मना तुमा स्वीकारानो भला तुमने स्वीकार ता किया, मैंने उनमे 26/अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं याम कराया मैंन उनस काम करवाया, आज वह नहीं जाएगा, आज वह नहीं जाने का,कमल अब नहीं लड़ता है कमल प्रव नहीं लडता, मैं आज नही जा रहा हूँ, मैं आज नही जा रहा मुझमे नही हो सकता, मैं नही कर सकता, यह भी क्या काम है यह भी कोई काम है यह भी क्या कोई वाम है, तू तो बडा लडाका है, चुप भी रह लडाका वही का चुप भी रह वह अमीर नहीं है वह वहा का अमीर है वह भी कोई अमीर है वह अमीर कहा है, इत्यादि । प्रायः सभी भाषामो में व्याकरणिक स्तर पर इस प्रकार के एकाधिक प्रयागा म से एक के चयन का अधिकार मूल लेखक की भांति ही अनुवादक को भी है । इस चुनाव में कही-कही उसकी अपनी रचि ही एक मान चयन का आधार होती है और एस चयनो में मनुवादक की अपनी निजी श ली अभिव्यक्त होती है । इस प्रकार अनुवादर यद्यपि मूल कृति की गली अनुवाद के पाठक या श्रोता के लिए उपयुक्त शैली आदि कई बाता स बंधा है कि तु फिर भी अनेक बातो- जसे व्याकरणिक सरचना शब्द चयन गब्द गक्ति गुण, छद आदि-में उसकी वैयक्तिक रुचि एव इच्छा भी उसके अनुवार की शली की निर्धारिका होती है और इसी स्प में अनुवादक भी एक सीमा तक सजक (creative writer) होता है । इसीलिए अय सभी बाता के समान हाने पर भी वैयनिय शैलीय सोदय तथा सजन गक्ति के कारण रिसी अनुवादक का अनुवाद बहुत बढिया हाता है तो क्सिा का सामाय और क्सिी वा घटिया। निष्कपत अनुवाद की अनेकानेक शलियाँ होती है और हो सकती हैं जो मूल कृति विपय अनुवाद का पाठक या श्रोता अनुवाद का उद्देश्य तथा अनु वादक की व्यक्तिगत रचि आदि पर निभर करती है। अनुवाद की प्रक्रिया अनुवाद की पूरी प्रक्रिया का तीन चरणा म विभक्त किया जा सकता है समझना भापातरण समायाजन । इनम पहले समझने की बात लें। अनुवादक को सबम पहले आधार सामग्री को भला भाति समझ लेना चाहिए। यह समझना दा स्तरों पर अपक्षित है भापा विषय। अाधार सामग्री का भाषा के स्तर पर समझने का प्रथ है उसके शब्द श दबध पदबध उपवाक्य वाक्य स्पष्ट कर लिए जाएँ। इसके लिए एकभाषिक या द्विभाषिर कोगा की सहायता लेनी पड़ सकती है। विषय के स्तर पर समझने का अर्थ है प्राधार सामग्री म कही गई वात का गया विषय अनुवाद को स्पष्ट हो जाए । इस लिए विषय-वोश या विषय विशेष की पुस्तकें उपयोगी होती हैं । इन दोना स्तर पर समझने वा अथ यह हुआ कि अनुवादन न वह प्राधार सामग्री सभी दप्टिया म अच्छी तरह समझ ली है।

अनुवाद सिद्धात और व्यवहार /27 सामग्री को समभ लेने के बाद अनुवादक दूसरे चरण 'भापातरण' पर पासस्ता है । यहाँ वह स्रोत भाषा की अभियक्तियो की समतुल्य अभिव्यक्तियां लक्ष्य भाषा से 'चुनता है । ये समतुल्य अभिव्यक्तिया श द श दबध पदबध, उपवाक्य आदि छोटी भाषिक इकाइयो मे होती हैं । इस चयन म अनुवादक का ध्यान पाच छह वाता पर होना चाहिए (1) समतुल्य अभिव्यक्तिया, स्रोत भाषा की अभिव्यक्तियो के अधिकाधिक निकट हो (2) वे क्थ्य का अधिकाधिक यथातथ तथा स्पष्ट रूप मे व्यक्त कर सकने मे समथ हा, (3) स्रोत-सामग्री की शली का वे अपेक्षित प्रतिनिधित्व कर रही हो, (4) अनुवाद जिसके लिए किया जा रहा हो सभी दृष्टियो से उसके लिए वे उपयुक्त हा, तथा (5) विषय की दष्टि से भापा शली के स्तर पर वे ठीक हों। उपयुक्त पाची का निवाह करते हुए अनुवादक कभी-कभी अपनी शैली का पुर भी देना चाहता है । यदि ऐसा अपेक्षित हो ता चयित भाषिक इकाइयो को अनु वाद की शली का यथासम्भव प्रतिनिधित्व करने में समथ होना चाहिए। यहा आकर स्रोत भाषा की अभियक्तिया के समतुल्य लक्ष्य भापा म छोटी भाषिक अभिव्यक्तियो को पा लेने का काम पूरा हो गया । मूल अभिव्यक्ति सण्डो मे भाषान्तरित हो गई। इसके बाद अनुवाद का अतिम चरण 'समायोजन का काम शुरू होता है । यहा पाकर लश्य भापा म प्राप्त लघु अभिव्यक्तियो को क्थ्य का पूरा ध्यान रखते हुए वाक्या रूप म समायोजित करत है। द्वितीय चरण की पाँचो बाता का ध्यान रखते हुए यहाँ लक्ष्य भापा की प्रकृति पर सबस अधिक ध्यान दना पडता है, ताकि सात भाषा की कोई एमी अभिव्यक्ति भापातरित हावर लक्ष्यभापा की अभिव्यक्ति म न पा जाए जो तक्ष्य भाषा की अपनी न हो। इस समायोजन म स्रोत भाषा के एक वाक्य को लक्ष्य भाषा के एकाधिक वाक्या म रख सकते हैं या एकाधिक वाक्यो को एक म मिला सकते है । समायोजित रूप को सावधानी से देखकर इस बात का भी विचारकर लेना चाहिए कि स्रोत सामग्री के मुहावरे-लोकोक्तिया आदि ज्या-वे त्यो आ गए हा। यदि इस पकार का साई भी तत्त्व खटक्ने वाला हो तो दूसरे चरण पर फिर लौटकर उसे ठीक कर लना चाहिए। कुछ व्यावहारिक बातें यहा अनुवादक की सहायता के लिए कुछ एसी यावहारिक वाता की प्रार सक्त दिया जा रहा है जिनमे कुछ अटपटी होती हुई (मूल के कुछ प्रश का अनु- वाद म लोप, नए प्रदा का पागम, वचन लिंग परिवतन मूलनिष्ठ अनुवाद छोडकर भावानुवाद या व्याख्या) भी यथासमय परणीय होती हैं कुछ अकरणीय होती हैं तथा कुछ ऐसी होती हैं जिनका ध्यान रखने पर अनुवाद अधिक अच्छा हा 28 / अनुवाद की व्यावहारिप समस्याएँ सकता है। या यहां कुछ यो ही लिया जा रहा है इनरी सस्या बापी वडी हा सरती है। मनुवादम विषय का पान भी मावश्यर है इसीलिए मत म रिपय कमान तथा सदमप्रथाबसम्बप भी कुछ बातें जोड़ दी गई हैं। (क) व्यक्तिवाचक सज्ञाएँ व्यक्तिवाचर सनामा या अनुवाद नही परत अपितु इनका लिप्यतरण बरत हैं । इस सम्बध म निम्नाक्ति बातें ध्यान दने यी हैं- (1) यदि खोत भाषा की विगी व्यक्तिवाचर सना के लिए लक्ष्य भाषा म कोई प्रचलित शद हो तो उसी वा प्रयाग करना चाहिए। मूल रा या मनुसरण करना मावश्यक नहीं । उदाहरण लिए यदि ग्रीय स पोई मनुगद पिया जा रहा हो और मूल सामग्री मे प्लातोन (Platon) माया हो तो हिली म 'प्लातोन लिखने की मावश्यक्ता नही हिटीम प्लेटो गन्द 'प्लातोन के लिए प्रचलित है प्रत उसी का प्रयोग किया जाना चाहिए। (2) यदि लग्य भापा म एवम मधिर शर प्रचलित हो तो जो मधिर प्रचलित हो उसी को ग्रहण करना चाहिए। जम America लिए हिती म अमरीरा अमरिया दोना पसने हैं रितु अमरीश ज्यादा घलता है प्रत उसी का प्रयोग होना चाहिए। (3) यति लक्ष्य भापा म एकाधिक द प्रचलित हा मोर उनके मय में योई अन्तर हो तो प्रयोग परत समय सतक्ता के साथ चयन करना चाहिए। उदाहरण लिए ग्रीन Platon के लिए हिदी म प्लेटो तथा अफलातून' दोनो शब्द परते हैं रितु दोनाय प्रयोगाय पूणत एव नहीं है। मफलातून का प्रयोग प्राय प्यग्य मादि म (अफलातून का नाती) होता है जबति प्लेटो का गम्भीरता (4) यदि उस रन लिए लक्ष्य भाषा म कोई भी श द न हो तो सात- भाषा ये उच्चारण को लभ्य भाषा म सहजीकृत वरत हए उसी प म लिखना मौर बोलना चाहिए । 'सहजीकृत बरन का प्रथ यह है कि उसकी ध्वनिया को लक्ष्य भाषा की निकटतम ध्वनिया म परिवर्तित परत हुए लेना चालिए। उता हरण के लिए अरवी मापा वेगद अरव म अ वस्तुत हिदी मे भिन (यह अलिफ से न लिसा जारर ऐन' से लिया जाता है) वितु उम म का हिदी म लाने की प्रावश्यक्ता नही । परवी व विशप अ यो हिदी व सामाय मम परिवर्तित करव उसे अरवी पहना भौर लियना ही पर्याप्त है। इसीलिए हिटीम तमिल या तमिळ यहा जाना पर्याप्त है तमिप लिखना और बोलना मर विचार म अनाव या है। हर लक्ष्य भाषा का अपनी यतमान प्रति के अनुसार ही ग्रहण करना चाहिए। यति विश्व की सभी भापामो स वह नई साथ। - अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार / 29 ध्वनिया लेनी शुरू करें तो इसका कोई प्रत नहीं है। (ख) परिवतन इसम वधन, लिंग, सरल वाक्य का सयुक्त या मिश्रित प्रादि कई बातें प्रा सकती हैं। यहा केवल दो ली जा रही हैं--- वचन-परिवतन कभी-कभी एक्वचन के अनुवाद मे बटुवचन वा प्रयोग तथा बहुवचन के मनुवाद म एक्वचन का प्रयोग करना पड जाता है waters--समुद्र, paints -पेंट, trousers-पायजामा, people say-जनता कहती है। हिंदी, उदू, पजाबी अादि कुछ भाषामा म आदर के लिए वहुवचन का प्रयोग होता है। ऐसी स्थिति म ये भाषाएँ सात भापा हा या लक्ष्य भापा, अनुवादक को वचन परिवतन का ध्यान रसना चाहिए- My father is in the garden --~मरे पिताजी बाग म हैं He will go tomorrow-वे क्ल जाएगे। अथान हिदी म He, She के लिए आवश्यक्तानुसार वह अथवा 'वे',His, Her के लिए उसका' अथवा 'उनका, तथा Him, Her के लिए 'उस अथवा उह या उसको अथवा 'उनको' का प्रयोग होगा । Everyone knows ये हिदी अनुवाद 'सभी जानते हैं" म बर्ता तथा पिया दोना ही म वचन परिवतन के बिना वाम नहीं चलमत्ता। लिंग-परिवतन कभी-कभी लिंग परिवतन भी अनुवाद म करना पडता है क्याकि सभी भापामा म सभी गदा का लिंग समान नहीं होता । मस्कृत मे पुष्प' नपुसक लिंग है ता हिदी म पुलिग है, 'व्यक्ति सस्कृत म स्त्रीलिंग है तो हिदी में 'पुल्लिग है। एस ही 'देवता' हिदी मे पुल्लिग है तो सस्तृत म स्त्रीलिंग है तथा हिदी मे जहाज तया चाद पुल्लिग है ता अग्रेजी म ship और moon स्त्री लिंग हैं। (ग) लोप पागम प्रयोग प्रौर मुहावरे के अनुसार अनुगद मे कभी-कभी 'लोप' या आगम प्रथवा 'छाडना' और 'जोडना' भी पडता है-He fired five rounds of bullets ---उसने पांच गोलियां चत्ताइ । यहाँ rounds अनुवाद म छोड दिया गया है। एम ही city of London को हिंदी में 'ल टन वा गहर', नवहार 'लदन गहर' 30/ अनुवार यी व्यावहारिय' समस्याएं तथा a few words या एव पुछा न कहार 'कुछ पद पग । इसके विपरीत, 'उसके पास साडा जानवर व अग्रजी अनुवाद He has several hundred heads of cattle म heads जोडना पहा है। इसी प्रकार with due respect या with due apology जरा पत्यपारे हिंदी अनुवाद म due छोरना पड़गा । He gave me a piece of advice ये हिदी मनुवाद म एम ही टुकडा (piece) नहीं रखा जा सरता। (घ) भावानुवाद लक्ष्य भाषा के अनुकूल अनुवादर यो वभी-बभी अनुवाद ५ स्थान पर 'भावानुवाद का भी गहारा लना परता है। उदाहरण के लिए, Votes ficely cast + लिए 'स्वत प्रतारा लिए गए मन की तुलना में बिना किसी दवाव में दिए गए मत' अघिय उपयुक्त होगा । एक वाक्य लें, At worst he might not return your money हिदी म यहगे—पयादा-से-ज्यादा यह होगा कि वह तुम्हारे रपय नहीं देगा। अर्थात at worst के लिए ज्यादा स-पयादा यह होगा का प्रयोग करना पडेगा जो 'व्याम्या भी है 'भावानुवाद भी। ऐस ही at best के लिए सदर्भानुसार पई प्रभार की व्यास्याए देनी पड़ सकती हैं या भावानुवाद परने पड सक्त हैं। (3) व्याख्या भाषाए दो प्रकार की होती हैं सयागात्मर और वियोगात्मक । उदाहरण के लिए सस्कृत सयोगात्मर भाषा है तो हिदी वियोगात्मन । अनुवादक को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अनुवाट म स्रोत भाषा की सश्लिष्ट अभिव्यक्ति र तिए लक्ष्य भाषा में भी सग्लिप्ट अभिव्यक्ति देना मावयव नही है यदि वह भी सनिष्ट न हो। उदाहरण के लिए सस्कृत होता के लिए हिंदी में यन म पाहुति डालन वाला कहेंगे जो सश्लिप्ट अभि यक्ति न हाकर एक प्रकार की व्याख्या है। यो यह आवश्यक नहीं मि यह अतर सात भापा वे सयोगात्मक तथा लक्ष्य भाषा के वियोगात्मक हाने पर ही रखा जाए। यह भी हो सकता है वि मोत भाषा म जो वात एप या दोगता में कही गई हो लक्ष्य भाषा के मुद्दावर म उसकी याख्या अपेक्षित हा । उदाहरण के लिए अग्रेजी तथा हि दी दोना ही वियोगात्मा भाषा है जितु अग्रजी की अनक अभियक्तियों की हिदी अनुवाद में यारया अपलित होती है internationally + लिए हिंदी में 'अतर्राष्ट्रीय स्तर पर अतर्राष्ट्रीय दष्टि स अथवा अतराष्ट्रीय रूप से बना पटगा या this is a greater problem के लिए हिदी म यह महत्तर समस्या है ' कहना उपयुक्त नहीं होगा करना पड़गा 'यह और भी बडी समस्या है। अथात् अनुवाद मिदान्न और व्यवहार/ 31 प्रपेगित होन पर मनुवादक्ष प्यास्था भी कर सकता है, इमम चपन ये यत्न म अनु वाद यो बोभिल नहीं बनाना चाहिए। भाषा का प्रवाह अच्छी भाषा म प्रवाह बहुत प्राव यर है । यह बात अनुवाद की भापा के लिए घावन ताले पाव रती ठोक है। यह प्रवाह १३ याता पर निमर परता है, जिनम मुख्य बातें निम्नाक्ति है (क) पदों को समस्तरता-अनुवाद मण्य स्तर कदा या प्रयोग हाना चाहिए । उदाहरण के लिए यदि कोई गिटी म अनुनाद कर रहा है तो उगे यह निश्चित करके प्राग बरना चाहिए पि वह हिदी की विम गली वे पलाया प्रयोग करेगा। हिंदी वी तीन लिया है हिंदुस्तानी उर्दू हिटी। इन ताना शलिया म मुख्य मातर शब्दो का ही है । हिंदुस्तानी म सरल और बहुप्रचलित तत्सम तदभव विनीता का प्रयोग हाता ता उदू म भरवी पारसी-तुर्वी के (विदशी) शदा मा प्रयोग अधिक होता है और हि दी या सस्कृतनिष्ठ हिदी म तत्सम शब्दो का। अग्रेजी या एक सामाय वाक्य लें--Please take your seat हिन्दुस्तानी मे इसमा अनुवार हागा-महरयानी परखे वटिए । उदू म इसका भी प्रयोग हो सरता है लेकिन अच्छा अनुवाद होगा महरवानी करवे ता रीफ रखिए' या 'वरा करम तारीफ रखिए तो हिदी म 'कृपया वठिा अथवा विराजिए' । अव यदि कोइ अनुवार र 'कृपया तारीफ रपिए या 'बराए करम विराजिए' वह तो शदा म एक्स्तरता के प्रभाव वारण भाषाम अपक्षिन प्रवाह नही पा पाएगा। इस प्रकार यह बहुत आवश्यक है कि अनुवादा समस्तरीय श दा का प्रयोग करे। 'यह जगह निहायत सूबमूरत है या 'यह स्थान बहुत सुदर है म जो प्रवाह है यह जगह निहायत रमणीय है' में नहीं है। (स) में की समरूपता-गदा की समस्पता स भी भाषा म प्रवाह प्राता है जिसका ध्यान रखना म्वतन लेखक और अनुवादव दोना ही के लिए मावश्यक है। उदाहरण के लिए चतुरता और पाडित्य । चतुराई और पडितता , 'चतुरता और पडिलता आदि की तुलना में चातुय और पाहित्य म अधिक प्रवाह क्या है ? कारण स्पष्ट है। पहले म एर म 'ग्राई प्रत्यय है तो दूसरे म प्रत दोना शदा मे समरूपता के प्रभाव के कारण भाषा म वह प्रवाह और लय नहीं है जो 'चातुय और पानित्य' म है। 'चतुरता और पडितता' के अटपटेपन के मूल में एक दूसरी बात है । 'पाडित्य' श द ता चलता है पडितता नही। अनुवाद म इस चान को दमने के लिए फास की राज्य प्राति का प्रसिद्ध नारा 'Liberty equality & fraternity लें । हि दी का अनुवादक इसके लिए 'स्वातत्र्य, समता और भाईचारा भी कह सकता है 'स्वत त्रता समत्व और भाईचाग' भी 1 32 / अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएँ तथा 'स्वतत्रता समता और वधुरख भी वितु गदा की समरूपता ये कारण जो गन स्वत प्रता समता और बघुना' म है व या म नहीं है। (ग) थाक्यागों की एकरूपता-वाश्य ये प्रा की एकरुपता स वारय लप युक्त हो जाता है जो भाषा को प्रवाहमय बनान यी दष्टि स वडा महत्त्वपूर्ण होता है । दा वाक्य से (1) वह धनी है तो तुम भी गरीव नहीं हो पौर वह शिक्षित है तो तुम भी प्रतिक्षित नहीं हो, (ख) वह धनी है तुम भी गरीय नही हो और तुम भी प्रतिक्षित नहीं हो, यदि यह प्रतिक्षित है । स्पष्ट ही एकरूपता से वारण ही पहले म ना प्रवाह है वह दूसरे म नहीं है। पुनरुक्ति अनुवादक को पुनरुक्ति से भी बचना चाहिए । पुनरक्तियो भनक प्रकार की हो सकती हैं । उदाहरण लिए, he willstarve and dic जसे वाक्य का क्या करें? starve के लिए हिदी समाना है 'भूवो मरना, तो क्या इस वाक्य का अनुवाद पर 'वह भूखी मरेगा पौर मरेगा' ? निश्चय ही नहीं। ऐमी पुनरुक्ति से बचना चाहिए। इसे यहा जा सकता है वह सान बिना मर जाएगा अथवा 'वह भूखा मर जाएगा' । या 'माने बिना तरप-तडप कर मर जाएगा' भी कहा जा सकता है कितु इस वाक्य म 'तडप-तप पर जोड देने से स्रोत वाक्य की तुलना में कुछ अधिक वर्षों की गलती हो गई है । एम ही एक वाक्य Gandhiji gavc new content to the meaning of traditional words like Satya and Ahimsa स्पष्ट ही content तथा meanivg दोना ही के लिए हि दी शब्द प्रय है । तो क्या कहे 'सत्य और अहिंसा के भय को नया अथ दिया। नही पुन रुक्ति बचाने के लिए तथा वाक्प को भाडा बनने स रोक्न के लिए कहा जा सकता है गाधी जी ने सत्य और अहिंसा जस परम्परागत शदाम नया अथ भर दिया। वस्तुत पुनरक्ति से बचने के लिए कोई निश्चित नियम नहीं दिया जा सकता। इसका निणय अनुवादक को सदम के अनुसार स्वय करना चाहिए। विशेपण विशेष्य अनुवाद म इसकी समस्या कई प्रकार की होती है । ध्यान देने की पहली बात यह है कि यदि लभ्य भाषा म गली भेद हो तो समस्तरीय सदा का प्रयोग विशेषण विशेष्य के रूप में बहुत प्रावश्यक है। उदाहरण के लिए famous city के लिए प्रसिद्ध शहर और माहूर नगर में समस्तरीयना नही है । इसका ठीक अनुवाद प्रसिद्ध गर या मशहूर गहर होगा। इस सम्बध में पीछे भी समेत किया जा चुका है।

अनुवाद सिद्धात और व्यवहार / 33 दूसरी बात यह है कि कुछ भाषामा म एक विशेषण कई सज्ञामा के साथ पा सकता है, कि तु कुछ भाषामा मे ऐसा नहीं होता । उदाहरण के लिए, हिदी मे "सुदर लडका' 'सुदर लडकी रहते हैं अथात इन दोना सनाप्रो के लिए 'सुदर विशेषण पा सकता है, किन्तु इनके अग्रेजी अनुवाद म beautiful grl तो वह सक्त हैं, कि तु beautiful boy नहीं कह सक्त। boy सना के साथ अग्रेज़ी मे handsolne पाएगा । अर्थात अनुवार को इस अतर ये प्रति सतक रहना चाहिए, नही तो गलती हो जाती है । Honraty विशेषण प्रग्रेजा मे Secretary के साथ भी आता है, और degree के साथ भी विन्तु हिदी में दोना सज्ञामा रे साथ एक विशेषण नहा या सक्ता-'अवतनिक सचिव' कि तु 'मानद उपाधि'। ऐसे ही black money के लिए 'काला धन ठीक है रितु black market के लिए वाला बाजार की तुलना मे 'चोर बाजार अधिक अच्छा है। अग्रेज़ी हिदी के पोशाम poor के लिए 'दीन और गरीब शद दिए हैं, कि तु the poor fellow died of मpoor के लिए दीन या 'गरीब न पाकर 'वेचारा पाएगा। अर्थात हर भाषा के हर विशेषण के प्रयोग की अपनी सीमा होती है । अनुवादक को इसका ध्यान रखना चाहिए। अग्रेजी म famous विरोपण वस्तु देश, कृति, व्यक्ति मादि सभी के लिए पाता है कि तु हिदी मे एक अोर 'विग्यात प्रसिद्ध, 'मशहूर, सभी के लिए पा सकता है किन्तु यशस्वी' केवल व्यक्ति के लिए पाएगा, सभी के लिए नही। विषय का ज्ञान अनुवाद के लिए विषय का मान बहुत आवश्यक है। ऐसा न होने से प्राय' भयकार भूलें हो जाती है । इसका कारण यह है कि बिना विषय के नान के मूल सामग्री को भली भाति समझना कठिन होता है और ऐम में अनुवादक शदा नुवाद का सहारा लेन यो वाध्य हो जाता है । वस्तुत जो विपप जितना ही प्रसामा य या तकनीकी होता है उसके अनुवाद मे इस प्रकार की भूला के होने की सभावना उतनी ही अधिक होती है । इसीलिए विनान के अनुवादो म भयकर भूलें प्राय होती हैं। 'पिग पाइरन (Pig iron) के गूकर लौह और गिनी पिग (guinea pig) के 'गिनी शूबर' जमे अनुवाद विपय वे अनान के ही परिणाम हैं । तत्त्वत पिग भाइरन 'बच्चे सोह को कहते हैं तथा 'गिनी पिग' शुक्रन होर एक प्रकार वा सफेद चूहा होता है जिमे हिदी म भी गिनीपिग ही वहा जाता है । ऐसे ही 'जेली पिण (selly fish), सिलवर फिश (silver fish) तया क्टल फिा (cuttel fish) मछली नही हाती किन्तु प्राणिविनान से अपरि चित अनुवादक हिंदी अनुवाद म इहें 'जेली मछली रजत मत्स्य तथा 'क्टल की भूल पर सकता है। इसीलिए यदि कोई अनुवाद जिस विषप मछली पहन 34 / अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं का अनुवाद कर रहा हो, उमस अपरिचित हो तो विषय के जानकार स भलीभांति पूरा अनुवाद दिखवा लेना चाहिए या जहाँ-जहाँ सरेह हो या गलती को सभावना हो उसे उससे भली भांति समझ लेना चाहिए। वस्तुत इमीलिए ऐसी स्थिति म जहाँ मनुवादक या तो ठीक स वेवर विषय का जानकार हा या पिर केवल सम्बद्ध भापाना का जानकार हो वहां सहयोगित अनुवाद प्रावश्यक हो जाता है। विषय वे जानकार को भापाग्रा का जानकार सहयोग दे सकता है ता भापामा के जानकार को विषय का जानकार । इस प्रकार के सहयोग से न तो विषय से सम्बध भूल हाने की सभावना रहती है और न खोत या लक्ष्य भाषा से सम्बद्ध भूल की। विपय ज्ञान के लिए विभिन विषयो के मानक प्रथा, विश्वकोशो तथा परिभाषा कोशा की सहायता ली जा सकती है । इनम कुछ का उल्लख मागे विया जा रहा है। सदभ ग्रथ अनुवादक के लिए तीन चीजो का नान प्राव यव है स्रोत भापा का लक्ष्य भाया का और विषय का। इसीलिए इन तीनों के सदभ प्रथ भी उसके लिए अनिवायत आवश्यक हैं। जहा तक स्रोत भाषा के सदभ ग्रयो का प्रश्न है अनुवादर के पास दो प्रकार के काश होने चाहिए स्रोत भाषा के अच्छे कोश जिनम स्रोत भाषा के शब्दा को (स्रोत भाषा मे) समभाया गया हा तथा स्रोत भाषा से लक्ष्य भाषा के अच्छे कोश उदाहरण के लिए अग्रेजी हि दी अनुवाद की बात लें तो स्रोत भापा अग्रजी है। यो तो अग्रेजी मे कोशो की संख्या बहुत अधिक है किंतु अग्रेजी हिदी अनुवाद के काम के अग्रजी के लिए मुख्यत निम्नाक्ति कोश हैं Webster's Third New International Dictionary यह अग्रेजी (मुरयत अमरीकी) का अच्छा कोग है जिसम सभी प्रकार के दो को अप्रेजी में अच्छी तरह स्पष्ट किया गया है । इसकी एक बहुत बड़ी विशेषता यह है कि यह अग्रेजी का एकमात्र बडा कोश है जिसमे अग्रजी भाषा के सामाय शनाको लेन के साथ काफी सारे पारिभाषिक शो को भी ले लिया गया है। इस प्रकार यह अकेला को भी अनुवादक के लिए पर्याप्त है । इसके छोटे-बडे कई सस्करण हैं जो अपन अपने स्तर पर अच्छे है। The Universal Dictionary of the English Language पारिभाषिक शदो की बात छाड दें तो अग्रेजी भाषामा का यह एक प्रकार से सर्वोत्तम कोरी है, जिसमे अग्रजी शदावे विभिन अथ बहुत अच्छी अनुवाद सिद्धात और व्यवहार } 35 तरह समझाए गए हैं। अनुवाद के लिए यह कोश भी बडे काम का है। - r Chamber's Twentieth Century Dictionary छोट कोशा में यह कोश काफी अच्छा है। ऊपर सवेतित दानो कोश काफी महग हैं अन सभी अनुवादव उहे सरीद नही सक्ते । इसे सभी खरीद सक्त हैं। इमका नया सस्करण अपेक्षाकृत अधिक उपयोगी है । The Concise Oxford Dictionary छोटे कोशा में यह भी अच्छा है कि तु 'चम्बस जितना नही। इसके छोटे-बडे वई मस्करण हैं । मूलत यह कोश ऐतिहामिक मिद्धाता पर बना था, अत वणनात्मक दष्टि स इसका बहुत मूल्य नहीं है । हा, यदि अग्रेजी के प्राचीन साहित्य से अनुवाद किया जा रहा हा और यह देखना हो कि किसी शब्द का किसी विशेष सती मे क्या प्रथ था तो इसका बडा सस्करण (The Oxford DICtionary) जा कई भागो म है, अनुवादका के बड़े काम का है, और अंग्रेजी का इस प्रकार का प्रपेला कोश है। Webster's Dictionary of Synonyms अग्रेजी भाषा पर्यायो की दष्टि स बडी सम्पन है। अनुवादक के सामने पभी-कभी यह समस्या पाती है कि सात पाठ म प्रयुक्त पयाय शब्दा म सूक्ष्म अतर क्या है ? ऐमे मनरा वो ममझे विना मूल पाठ को वास्तविक रूप में न तो समभा जा सकता और न अनुवाद किया जा सकता है। प्रस्तुत कोश म पर्याया का अतर बहुत अच्छी तरह समभाया गया है । इस तरह अनुवाद के लिए यह को भी दहे काम का है। जिस भाषा स भी अनुवाद करना हो, उसके इस प्रकार वे कोगो से अनुवादक को राहापना लेनी चाहिए। स्मी जमन, पेंच प्रादि म भी इम प्रकार के वोश हैं। हाँ अय भाषामो म इस श्रेणी के कोश प्राय नही हैं अत उनम अनुवाद: परने में कठिनाई हाती है। सात भाषा वे दूसर प्रकार के को। सान भाषा स लश्य भाषा' ये हात हैं । उदाहरण के लिए अप्रजी हिटी। यह बात ध्यान देने की है कि ऐम द्विभापी को। (स्रोत भाषा म लक्ष्य भाषा) अनुवादा के पटुन काम के नहा होत जिाम शब्दो मी व्याख्या मात्रा दे दा गई हो क्यारि अनुवाद पाशद चाहिए। उदाहरण के निए, किसी प्रग्रजी हिदीवार म यदि BEAUTIFUL वा प्रथ जो देखन म मच्छा हा दिया गया हो तो अनुवादव इगा दयामय तोसमभ जाएगा, किन्तु यह नहीं जान पाया fr वह पपन अनुग म विम गन्द वा प्रयोग करे । इमी 36/अनुवाद यी प्यावहागिर गमस्याएँ लिए मनुयायाऐगा दिमापी वोग दाना पानि निगम प्रतिद (जम इस प्रसग मसुदर, गूवमूग्न)दित गरहा। मप्रजाहिदाम पहलमयमा उपलम्प नहीं है। जा, उनम तिम्नावित पा शाम उसय अग्रेजी हिदो को-डॉ. युपं । उपस पाग यह गयग पहा है । इसकी यमी यर गम बहुत बार 17 मोर यहाहा यम मुनगर ति" गए हैं । इसीलिए मनुयार गम उन गभी मुगवगवा नहीं पास, जिनकी उम माय या होती है। हो, मत मागर की दृषि ग यह योग प्रन्या है। इसकीय वमजोरी यह भी है निगम ही साहिरिपर दहा मधिा है। हिदी गोलिया - ऐग प्राय दी किए जा सके हैं जिाये रिए माना हिदी मान्दरही हैं। पृहत प्रप्रेमी हिन्दी पोग- याहरी । यह यो पापी वहा है और इसम पारिभापिर तया सामाय सभी प्रकार के वापीसारे गम्द मिस जाते हैं। इस दृष्टि से अनुवाद के लिए यह माम पा है। इससरी गयग मी कमी यह है frइसम प्रप्रेजी मे पाषा ग पपिप हिदा पयाया या बटोरन मा परन दिया गया है जिनम बहुत ग तो ठी समानार्थी ही नहीं हैं और जो हैं ये भी इतो प्रधिर मोर मय्यवस्थित रुप ग िगए हैं कि मायादा उस भीड मम भपन लिए उपयुक्त पद सोमन म वाफी कठिनाई वामनुभर करता है । यस्तुत ० युल्क ने योग जैसी ययातयता तथा व्यवस्था 'स कोम नहीं है । मन्ने का माय यह है कि मनुवार को इग को या उपयाग परत समय पहुन सतवाना में पाम सना पाहिए। मानर प्रप्रेजी हिदी भोग-गम्मेलन द्वारा प्रकाशित यह को भी लगभग डॉ० याहरीरे को जसा ही है । अग्रेजी उर्दू विशनरी-मग्दुल हा । यह कोश भी बहुत अच्छा है । को। यार न उदू के वठिन दाद दो वे साथ साथ माना हिदी तथा उसकी प्रज मती बोली मारि बोलिया म प्रयुक्त गम्द भी पापी दिए हैं। जो अनुवादक भरती लिपि स परिचित हैं, वे हमे हिंदी अनुवाद के लिए भी बहुत उपयोगी पा सकते हैं। उदू के लिए तो यह एक मात्र प्रामाणिव वोश है ही। कभी-कभी प्रथ और प्रयोग के निचयन के लिए लक्ष्य भाषा वेगवी भी मावश्यक्ता पडती है । हिंदी के निम्नास्ति वो मनुवादा के लिए उपयोगी हो सकते हैं हिदी शब्दसागर-नागरी प्रचारिणी सभा, पाणी मानक हिंदी कोग-साहित्य सम्मेलन प्रयाग महद हिंदी को-नानमडल वाराणसी अनुवाद म कभी कभी योत भापा रा लक्ष्य भाषा व योग भी उपयोगी सिद्ध अनुवाद सिद्धात सौर व्यवहार 137 होते हैं। उदाहरण के लिए, अग्रेजी हिंदी अनुवाद के लिए इस दृष्टि स घ्याव हारिक हिदी अंग्रेजी कोश (चतुर्वेदी निवारी) देखा जा सकता है। प्राकृतिक विज्ञान, समाज विज्ञान, साहित्यशास्त्र तया विधि प्रादि मे सम्बद्ध अनुवादा में एक मुम्य समस्या पारिभाषिक शब्दो की होती है। अग्रेजी हिदी परिभाषिक सदा के लिए हिदी म किन शब्दा का प्रयोग करें। इस दिशा में कुछ काम हुआ है जिनमे सहायता ली जा सकती है। कुछ मुख्य पारिभाषिक कोश निम्नाक्ति हैं- वृहत पारिभाषिक श द-सग्रह (मानविकी) वृहत पारिभाषिक श द ग्रह (विज्ञान) वे द्रीय हिदी निशालय द्वारा प्रकाशित ये दोना कोश दो दो खडो म हैं, जिनमे अग्रेजी के पारिभापिक श दा के हिदी तथा अय भारतीय भाषाप्रो के प्रतिश द दिए गए है । विधि और प्रायुविनान को छोडकर अय प्राय काफी विषया के काफी सारे पारिभाषिक श द इसम मा गए हैं । ये कोश तक नीकी विपयो के अनुवादा के लिए बहुत उपयोगी हैं | विधि के लिए विधि भत्रालय की विधि शदावली तथा प्रायुविनान के लिए-वृहत पारिभाषिक शब्द-मग्रह (पायुविनान, मैपविनान, शारीरिक नृविनान) उपयोगी हैं । डॉ. रघुवीर की Comprehensive Hindi English Dictionary भी पारिभाषिक शब्दो की दष्टि स कभी-कभी उपयागी हो सकती है। अनुवादक लिए विषय की जानकारी भा अपेक्षित होती है, और इस दृष्टि से पारिभाषिक गदा को समझना आवश्यक है । इसके लिए विभिन विषया के पारिभाषिक वाशास सहायता ली जा सकती है। कुछ मुख्य पारिभाषिक कोश A Dictionary of Statistical Terms-kendalland Buckland, The International Dictionary of Applied Mathematics Freiberger, Mathematics Dictionary - James and James, A Dictionary of Literary Terms-Shipley वैद्रीय हि दी निगालय सहिदी म भी प्राणिविनान भूचिनान, भूगोल, रमायन, गणित तथा आधुनिक भौतिकी के परिभाषा कोश प्रकाशित हा चुके है तथा भाषाविनान एव कई अय विपया के तयार हो रह हैं जो शीघ्र हा प्रकाशित होग। इनम सहायता ली जा सकती है। अब तर सात भाषा और लण्य भापा गदा और अभिव्यक्तिया की समुचित और तुमनात्मक जानकारी के लिए एकभाषिक और द्विभाषिक' को, विषय का की चचा की गई है। अनुवाद के लिए व्यक्तिवाचर मनाया के ठीक उच्चारण का नान भी प्राव यव हाता है। एमा प्राय हाता है कि स्रोत सामग्री

38 / अनुवाद की व्यावहारिक समस्याए
में प्राप्त व्यक्तियो और स्थानो के नाम की घतनी कुछ और होती है और उनका
वास्तविक उच्चारण कुछ और होता है। इन उच्चारणा की प्रामाणिक जानकारी
के लिए दो कोश बहुत उपयोगी है
1 Webster s Biographical Dictionary
2 Webster s Geographical Dictionary

मम्यासमाला प्राथमिक/41 2 'जल्द' की तुलना म 'कुछ ही दिना में अच्छा रहेगा। 3 particularly merchant जसे अधूरे वाक्याश हिदी में नहीं चलते, प्रत अनुवाद में इसे पूरा कर दिया गया है । 4 people in distress का सीधा भाषा तर होगा 'मुमीवत म लोगो', किन्तु हिदी मे ऐसा प्रयोग नहीं है। मत कहना पडेगा 'मुसीबत में फंसे लोगो।' 5 hated के लिए हिदी मे 'घृणा किया' या 'करता था होगा, किन्तु इस सदभ मे चिढता था' मधिक उपयुक्त है। 6 'भीतर स' की तुलना मे यहाँ मन-ही मन' अधिक अच्छा रहगा। 7 meditate का इस प्रसग में उपयुक्त हिदी समानर' 'ठान लेना' है, साचना' चितन करना' या विचार करना आदि नही । अनुवाद शायला एक यहूदी था। वह वनिस में रहता था। वह ब्याज पर पसे उधार दिया करता था और उसकी वमूली बहुा सम्नी स क्यिा करता था। कुछ ही दिना में वह बहुत अमीर हो गया। लोग उससे घृणा करत थे और एटोनियो नाम का एक युवा व्यापारी तो उसस विशप रूप से घणा करता था। एटोनिमो वहुत दयालु या । मुसीबत मे फैम लागा का विना कोई याज लिए वह पसे उधार दिया करता था। इसलिए शायलॉक एटीनिला सचिढ़ता था। जब भी व दोना लेन-देन मे कठोरता के लिए एटीनिमो उस खरी-खोटी सुनाता था। शायलॉक, उत्तरस्वरूप कुछ नहीं कह पाता था और उसकी खरी-खोटी बातो को चुपचाप सह लेता था, किन्तु मन-ही मन उसने उससे बदला लेन की ठान रखी थी। मिलते थे, Exercise 3 *Ashoka said that the kings first duty was to protect the people and to do justice, and he commanded all his officers to treat people justly and kindly and so put right many wrongs that were done Kindness was to be shown to animals 100 He built' many hospitals throughout india both for men and for animals and made ruless for the care of the aged and So that his laws should be known everywhere, Ashoka had them carved upon rocks and pillars in simple language which everyone could understand These are known as Ashoka s Edicts The rock edicts have been found in every the poor 40/ अनुवाद की प्यावहारिप समस्याएं 4 के लिए गानुवाद न होन हुए भी 'इसो वीच' पदव प अच्छा है। 5 हिंदी प्रयोग को दृष्टि मे रमत हुए यहाँ सयुक्त वाक्य को दा वाक्या म बदल दिया गया है। अनुवाद अलीबाबा एव गराध मादमी था। एक दिन जब वह जगल म लवडियो पाट रहा था उसन पत्थरा ये बीच एम गुफा देसी। उस गुफा म एक मजबूत दरवाजा लगा था जो मर था। वह दरवाजा खोलने की कोगिा परने लगा। इसी बीच डामा वा एक गिरोह वहाँ मा पहुचा। मली यावा ने भाडियो में पीछे प्रपन को छिपा लिया और उह देखने लगा। जब आत्मा का सरदार दरवाजे के पास माया वह बोला 'खुल जा मिमसिम और दरवाजा खुल गया। डाकू प्रदर चले गए। शीघ्र ही ये पिर बाहर माए मौर उनका सरदार बोला 'बद हो जा सिममिम । दरवाजा बद हो गया। जब डाकू चल गए प्रतीवावा प्रपन छिपने की जगह से बाहर माया, दरवाज, पास गया और उही जादुई पाग्दो वा उच्चारण किया, जिनका प्रयोग डायुपा ये सरदार ने किया था। दरवाजा खुल गया । अलीगावा भीतर गया। उसने देखा गुफा सोने चांदी और रत्ना से भरी थी। मलीबाबा न अपना बोग भरा उस गदहे (गध)पर लादा मौर घर यी पार चल दिया। अब वह प्रमार हो चुका था। Frercise 2 3 Shylock was a Jew He lived in Venice He lentmoney on interest and realised it with great severity Soon he be came very rich People disliked him particularly Antonio a young merchant Aatonio was a very kind hearted man He lent money to people in distress and would never take any interest for the money lent therefore Shylock hated him Whenever the two met Antonio reproached him for his hard dealings The Jew did not say anything in reply and seemed to bear these reproaches with great patience but inwardly be meditated? on revenge सकेत 1 lent का दानुवाद हागा सिवितु या भाव है दिया करता था।

From 3. अभ्यासमाला प्राथमिक / 41 2 'जल्द' की तुलना म कुछ ही दिना मे' अच्छा रहेगा 3 particularly merchant जसे अधूरे वाक्याश हिंदी में नहीं चलते, प्रत अनुवाद में इसे पूरा कर दिया गया है। 4 people in distress का सीधा भाषातर होगा 'मुमीवत म लोगो', किन्तु हिदी म ऐसा प्रयोग नहीं है। मत कहना पडेगा 'मुसीबत में फंस लोगो।' 5_hated के लिए हिदी मे 'घृणा किया या 'वरता या होगा, किन्तु इस सदभ मे चिढ़ता था' अधिक उपयुक्त है। 6 'भीतर से की तुलना में यहां 'मन-ही मन' अधिक अच्छा रहेगा। 7_meditate का इस प्रसग मे उपयुक्त हिदी समानक 'ठान लेना है, सोचना 'चितन करना या 'विचार करना प्रादि नहीं। अनुवाद शापलाक' एक यहूदी था। वह वनिस म रहता था। वह ब्याज पर पसे उधार दिया करता था और उसकी वमूली वहुन सम्नी से किया करता था। कुछ ही दिना म वह बहुत अमीर हो गया। लाग उससे घृणा करते थे और एटोनिमो नाम का एक युवा व्यापारी तो उससे विशेष रूप से घणा करता था। एटोनिया बहुत दयालु था। मुसीबत म फेम लोगा को विना काई व्याज लिए वह पसे उधार दिया करता था। इसलिए शायला एटीनिया से चिढता था। जब भी वे दोनो मिलते थे, लेन-देन म कठोरता के लिए एटीनिया उसे खरी-खोटी सुनाता था। शायलॉक, उनरस्वरूप कुछ नहीं कह पाता था और उसकी बरी-वोटी बातो को चुपचाप सह लता था, किन्तु मन-ही मन उसने उससे बदला लेने की ठान रखी थी। Exercise 3 1 Ashoka said that the kings first duty was to protect the people and to do justice and he commanded all his officers to treat people justly and kindly and so put right many wrongs that were done Kindness was to be shown to animals too He built“ many hospitals throughout India both for men and for animals and made rules for the care of the aged and So that his laws should be known everywhere, Ashoka had them carved upon rocks and pillars in simple language which everyone could understand These are kpown as Ashoka s Edicts The rock edicts have been found in every the poor 42/पापाद पी पायहाराि गमस्या part of India and there arc ton of the many pillars still standing today सपेत । सर याप को हिदी मनुएल रमन र लिए दो वारया म विमा पर दिया गया है। 2 sad मा दिलीम वहा' भी पहा गा गाता है, रितु पही 'बहना था अधिक उपयुस होगा। 3 reople के लिए हिंदी प्रति सोग सपा जनसा भी हा गात हैं निराजा ये गरम म इन दानापो तुमना म प्रजा पा प्रयोग पपिर सगत है। 4 परगनुवाद 'मस्पताल ATM होगा, वितु यारा हटकर परतात बनवा यहना प्रपिर अच्छा होगा। दिन म मधिर प्रचलित प्रयोग अस्पताल मोसा है, मत या पम्पतालमा काना मौर भी अधिक उपयुक्त होगा। s rules पे लिहिली रामार नियम है पिन्तु राजा के प्रसग में निमम स पच्छा नियम कानून' हागा। 6 स्पष्टता के लिए स्तम्भ'पी'राजागा-स्तम्भ' पर दिया गया है। अनुवाद मगोरा पहना था frराजा का पहला क्त्तव्य है प्रजा पी रक्षा और उसके प्रति याय पता। उरान मान गभी प्रधिवारिया बापान लिया शिप्रजा ये प्रति उचित पोर मदय व्यवहार पिया जाए और इस प्रकार उसने उन यहुत सारी भूला वो जो पहन हा गइ थी गुधार दिया। यह दया पशु-पक्षिया के प्रति भी परनी थी। मोर भारत भर म मादमियो और जावरा के लिए भने अस्पताल खोल पोर घूढा मोर गरीबा यी देखभाल के लिए नियम बानून बनाए। अपने प्राण वा देश वाने-मोन तर पहुचान के लिए उसने उह चट्टाना प्रौर स्तम्भा पर ऐसी सरल भाषा म सुदवाया जिम सभी लोग समझ समें । इह मशाब के राजा कहा जाता है। चट्टाना पर खुदे राजादश दा के हर भाग में पाए जाते है भोर अनेक राजादेश स्तम्भा म स दस माज भी सुरक्षित हैं। Exercise4 Many people foolishly look upon manual labour' as deparad log 2 The Maharajı of Travancore not many years ago, said अभ्यासमाला प्राथमिक | 43 "Be assured that the wielding of a spade, of the driving of a plough or the drawing of water in one s own interest, is not less honourable than scratcbing foolscap (paper) with goose-quills (pens) "3 Some of the greatest men that have ever lived have cul tivated their fields with their own hands Peter the great, Czarof Russia, worked as a blacksmith The late Fmperor of Germany, the son in law of Queen Victoria, learned the art of printing The life of Mahatma Gandhi was a living lessons on the dign ity of labour Useful work of all kinds is honourable It is of false pride that men have reason to be ashamed सकेत 1 manual labour का हिंदी समानक हाथ से काम करना भी हो सकता है । यहाँ इकाइ के रूप में शारीरिक श्रम का प्रयोग किया जा रहा 2 look upon as degrading को हिदी म बई प्रकार स कहा जा सकता है निम्न कोटि का समझना, छोटा समझना, हेय समझना । 3 scratching foolscap with goose-quilis काश दानुवाद है 'फुलिस्केप पर पख के क्लम स लिख मारना, किन्तु इस सदम म कागज रंगना' मुहावरा बहुत उपयुक्त रहेगा। 4 Art के लिए हिंदी समानर 'क्ला है पितु इम प्रसग म 'काम' अधिर सही है। 5 living lesson वे लिए ठीक प्रतिाद न होना हुमा भी 'जीता जागता उदाहरण उपयुक्त होगा। 6 इस वाक्य का व्याख्या स्प म मनूदित किया गया है। अनुवाद बहुत-ग लाग भूषतावा गारीरिक श्रम को ह्य समभन है । पावणकोर रे महाराजा ने कुछ वर्ष पहन कहा था 'विवाम रखा निफावडा पलाना, हर पलाना या पपने लिए पानी पीचना माज रंग म पम मम्माय नही है। जितने भी महा सोग हा है उनम म कुछ न भपन हापों स पेनों की है। मार, पीटर महान मोगर का काम करता था। अमनी के स्वर्गीय सम्रान जो गनी किटोरिया र दामाद थ, छपाइ का माम मीमा था। महारपा गाधी का जीवन प्रभारी गरिमा का जीना नागना उदाहरण था। - 44/अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएँ कोई भी उपयोगी काय, चाह वह किसी भी प्रकार का क्या न हा, सम्माय है । इसम लोग शम का अनुभव केवल झूठी गान के कारण ही करते हैं । Exercise 5 Indeed the path she had chosen was full of Jifficulties It was almost an unimaginable thing in those days for a woman of means? to live a life of independence but the particular profession for which Florence had trained herself was a disreputable* one The nurses in those days were noted for their immoral conduct They could hardly be trusted to carry out the simplest medical duties No wonder, therefore that Florence's parents did not like that their daughter should take up that profession Florence, however did not see eye to eye with them सकेत 1 woman of means--समृद्ध महिला। 2 disreputable का अनुवाद कुख्यात भी हो सकता है पितु कुश्यात शद का प्रयोग व्यक्ति के लिए किया जाता है अत यहाँ बदनाम उपयुक्त होगा। 3 noted के लिए हिदी म जानी जाती था या प्रसिद्ध थी ठीक होगा, किंतु यहाँ पर कुग्यात थी अधिक सगत है। 4 hardly का अनुवार मुश्किल से होता है, वि तु यहाँ नही उपयुक्त होगा। अनुवाद उसने जो रास्ता चुना था, वह सचमुच ही मुश्क्लिा से भरा था। उन दिना किसी समद्ध महिला के स्वतन जीवन जीने की कलना ही नहीं की जा सक्ती थी रितु फ्लारेंस न जिस व्यवमाय का प्रशिक्षण लिया था वह बदनाम था। उन दिना नसे अपने अनतिक पाचरण के लिए कुरयात थी। साधारण स साधारण चिकित्सा कार्यों के लिए भी वे विश्वसनीय नहीं मानी जाती थी। एसी स्थिति में इसम कोई पाश्चय नगे कि फ्लोरेंस के माता पिता का उसका नम बनना पस द नहीं था। पितु पलारेंस के विचार अपने माता पिता के विचारो से एकदम भिन थे।

प्रम्यारामाला प्राथमिक / 45 Exercise 6 There seems to be a general opinion in this country that Sardar Patal was slightly of a harsh and rough temperament Men" call him the 'Iron Man of India He was, no doubt an iron man in the sense that one could rely on him for strict and efficient administration But as a man, to those who had the good fortune of coming into close contact with him he was kind and considerate 5 At limes he even became emotional, where his personal friends and followers were concerned However, it goes without saying that the Sardar had the great skill for organising affairs He knew the way of picking people and putting them in their proper places Once he judged a man and found him correct, he trusted him fully and got him to do any thing he wanted 6 सकेत 1 temperament-प्रवृति । 2 इस सदम म men के लिए 'प्रादमी नहीं बल्कि 'लोग उपयुक्त होगा। 3 in the sense का अनुवाद 'इस अथ म हो भी सकता है और 'क्योकि' भी। 4 strict के लिए हिदी मे 'सम्न' या कठोर हो सकते हैं कि तु 'प्रशासन के साथ पाने पर कहा' अधिक उपयुक्त होगा। दढ का प्रयाग भी हो सकता है किन्तु उसका अथ कुछ अलग है । 5 considerate के लिए हिंदी कोशा म मात्र एक ही शद है-विचारशील, किन्तु स्पष्ट ही इस प्रसग में उमका प्रयाग नहीं किया जा सकता। ऐमी स्थिति म एक्शब्दीय अभियक्ति का सहारा छोडकर वाक्याशीय अभि व्यक्ति 'मवका ध्यान रखते थे अपनाई जा सकती है। 6 रादानुवाद होगा जो भी काम चाहते थे करवा लेत थे रितु इस प्रमग म, जो भी काम चाहते थे, उम करने को सौंप देते थे अधिन सगत है। अनुवाद इस दश म लोगो की ग्राम धारणा है कि सरदार पटल कुछ स्खी और बठोर प्रकृति के थे। लोग उह भारत का लौह पुग्प कहत हैं । इमम तनिक भी सदेह नहीं कि वे इस प्रथ म लौह पुरुष वि कड़े और कुरान प्रशासन के A 46/ मनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं लिए उन पर विश्वास किया जा सकता था कि जिन लोगो को उनके निकट सम्पर्क म पाने का सौभाग्य प्राप्त हुपा, उनक प्रति वे दयालु थे और सबका ध्यान रखत थे । वे निजी मित्रा प्रोर अनुयायिया के मामले म कभी-कभी भावुक भी हो उठते थे । फिर भी, बहन की मावश्यकता नही कि सरदार पटेल मामलो को व्यवस्थित ढग स निपटाने म निपुण थे। वे व्यक्तिया का चयन करना और उह सही स्थान पर रखना जानते थे। एक बार बिसी मादमी को परम लेने वे वाद अगर वे उम टीक पात थे तो उस पर पूरा विश्वास करते थे, और जो भी काम चाहत थ, उमे करने को सौंप देते थे। Exercise 7 Every one is agreed that poorer people should get more money and more help than they do get, and that they should get this help as soon as it can possibly be given Some of the poor say "Well' Share out the wealth now-there is plenty of it about 3 but if we share out the wealth now, no one will be able to run a business, and soon most people will have no jobs and no wages Well let the State run the business The State can run the Post Office and build warship why cannot it run everything else? It could of course The only problems is could the State run businesses better and pay higher wages than the people who are now running the business? Some people say it could some people say it could not सकेत 1 every one का समान है 'प्रत्येक व्यक्ति वितु यहाँ सभी भी ठीक हागा । अनुवाद मे हम सभी का प्रयोग किया गया है। हमारे विचार मे हिदी की प्रवृति की दष्टि स यह अधिक सगत है । यो, इसम मतभेद की भी गुजाइश हो सकती है। 2 अपेक्षाकृत निधन लोग हिटी की प्रकृति के उपयुक्त नहीं होगा। इसी लिए निधन लोग कह सकते हैं । 'गरीब लोग और भी अच्छा रहगा । 3 समाज के पास मूल म न होन पर भी जोडा जा सकता है। 4 चलाना' स अच्छा सभालना होगा। 5 टसक स्थान पर समस्या का भी प्रयोग हो सकता है कि तु सवाल हि दी की प्रयोग परम्परा के अधिक अनुकूल है ।

प्रन्यासमाला प्राथमिक | 47 अनुवाद हम सभी लोग यह मानते हैं कि गरीव लागा का जितना धन और जितनी सहायता वस्तुत मिलती है उसस कहाँ श्याना मिलनी चाहिए और वह भी जितनी जल्दी मिल सके उतना ही अच्छा । उनम से कुछ लोग एमा साचते है नि समाज के पास बहुत सम्पत्ति है, इस सबम वाट दिया जाए। frतु अगर हम ऐसा वर दें तो कोई भी व्यवसाय नहीं चला पाएगा, जिमशा परिणाम यह होगा कि अधिकाश लोगा की नौकरी छूट जाएगी और उह वेतन नही मिलेगा। तब व्यवसाय मरवार को चलाने दा। जब वह डायघर चलो मक्ती है, युद्धपोत बना सकती है तो फिर बाकी सब क्यो नही सभाल सकती ?"वशक वह मभाल सकती है। सवाल यह है कि क्या सरकार व्यवसाया को बेहतर ढग से चला सकती है और ब्मचारियो को पहले म अधिक वेतन दे सकती है? कुछ लोग कहते हैं कि यह ऐसा कर सकती है और कुछ कहते हैं, नही कर सक्ती। Exercise 8 Among all the gifts you can make to a child there is none more conducived to his present and future happiness and con tent,, none more likely to add richness to his life, than a book Not a book but the habit of reading Give him the habit of reading and you have done something for which he may well be thankful all his days Books should be the daily companions of a child s life And they ought not be linked so closely with the school You don't want to create the idea that readıog is a task a lesson It s the fun the good time, he can get out of reading that needs to be emphasized 4 You want to make him enjoy reading so that reading will become a treasured part of his daily life, and there is nothing difficult about this सकेत इस गद्यागके अनुवाद म यह वात ध्यान देन की है कि स्रोतभापा अग्रेजी और लक्ष्यभाषा हिंदी वी प्रकृति और प्रयोग परम्परा में अनेक स्थितिया म अतर हाने के कारण मूल के मात्र भाव को लेकर चलना पड़ा है, इसी लिए यह 48/ अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं अनुवाद उतना मूलनिष्ठ नहीं है, जितना पीये के अनुवाद हैं । वस्तुत अनुवाद को सहज, बोधगम्य और प्रवाहपूण बसान के लिए अनुवादव को कभी-कभी ऐसी छूट लनी ही पड़ती है। ] सहायर, प्रेरक 2 सुख-सतुष्टि 3 सभी दृष्टियो से सम्पन बना सवे 4 अनुवाद में इस वाक्य को इस प्रकार से समभाना भाव या समभा गया 5 बहुमूल्य । अनुवाद बच्चे को जितने भी उपहार तुम दे सकते हो, उनमे पुस्तक से मढवर मौर कोई भी ऐसा नहीं है जो उसके वतमान और भविष्य की सुख-सन्तुष्टि में इतना सहायक हो, तथा उसके जीवन को सभी दप्टिया इतना सम्पन वना सके । वस्तुत यहाँ अभिप्राय पुस्तव नहीं, बल्कि पुस्तक पढने की पादत से है। अगर बच्चे को पढने की आदत डाल दी जाए, तो यह एक ऐसा काय है जिसके लिए वह माजीवन प्राभारी रहेगा। पुस्तकें बच्चे की रोजमर्रा की जिन्दगी का साथी होनी चाहिए और उन्हे स्कूली शिक्षा से बहुत सम्बद्ध नहीं होना चाहिए। तुम्हे यह प्राभास नही होने दना चाहिए कि पढना कोई गहकाय या स्कूल से दिया गया पाठ है । बल इस बात पर देने की मावश्यकता है कि पढना उसे मनोरजक लगे पौर १ह यह महसूस करे कि इसके कारण उसका समय अच्छी तरह बीत रहा है । तुम्हे इस बात का प्रयत्न करना चाहिए कि पटना उसको रुचिकर लगे जिससे कि वह उसके दनिक जीवन का बहुमूल्य लग बन जाए पोर वस्तुत यह कोई मुश्किल काम नहीं है । Exercise 9 You seemed at first to take no notice of your school fellows, or rather to set yourself against them, because they were stran gers to you They knew as little of you as you did of them, so that this would have been a reason for their keeping aloof from you as well which you would have felt as a hardship Learn never to concerve a prejudice against others because you know nothing of them It is bad reasoning and makes enemies 101) अभ्यासमाला प्राथमिर / 49 of half the world Do not think all of them till they behaye ili to you, and then strive to avoid the faults which you see 10 them This will disarm their hostility sooner than pique or resentment' or complaint सकेत यह अनुवाद भी बहुत मूलनिष्ठ नहीं है । मूल वे भावा तया हिदी भाषा के प्रवाह की रक्षा के लिए अनुवादक ने कापी छूट ली है। अभ्यास के लिए यह अच्छा होगा कि इस पुस्तक के प्रयोक्ता इस पैराग्राफ मे मूल और मनुवाद के प्रतर को ध्यान से देखें और यह विचार करें कि कहा-कहा और क्या छूट ली गई है, और क्या इन छूट वाले स्थला पर दूसरा विक्स सम्भव है, जिसमें बोपगम्यता तथा प्रवाह के साथ मूलनिप्ठता भी हो । 1 resentment के लिए विरोध' भी ठीक हो सकता है, कि तु वह इसी वाक्य में पहले पा चुका है, मन resentment को 'प्रतिक्रिया जनित खीझ' के रूप में रखना उचित समभा गया है । कहना न होगा कि resentment प्रतिक्रिया मे उत्पन खीझ ही होती है । । अनुवाद ऐसा लगता है कि प्रारम्भ मे तुम अपने सहपाठिया की पार ध्यान नहीं देते थे बल्कि तुम अपने को उनके विरोध मे रखकर देखते थे क्याकि वे तुम्हारे लिए अजनवी थे । वे तुम्हारे बारे म उतना ही कम जानते थे जितना तुम उनके बारे में । यही कारण रहा होगा कि वे भी तुमस अलग अलग रहा करते थे जो तुम्हें कदाचित अच्छा नहीं लगा होगा । किसी व्यक्ति के बारे में केवल इसलिए मन म पूर्वाग्रह न बना लो कि तुम उसे जानते नहीं। यह तक ठीक नहीं है और माघी दुनिया को तुम्हारा दुश्मन बना देगा। जब तक वे तुम्हारे साथ बुरा व्यवहार न करें, तुम उनके बारे मे चुरा मत्त साचो, और फिर जो दोप तुम इनमें पायो, उहें नजरअंदाज करने की कोशिश करो। ऐसा करने से उनका विरोध जितनी जल्दी शमित हो जाएगा उतना क्मिी भी प्रकार की प्रतिक्रिया. जनित बीम या शिकायत से नही। Exercise 10 Speech is a great blessing but it can also be a great curse, for while it helps us to make our intentions and desires knawa 50 / अनुवाद की व्यावहारिक समस्याए to our fellows it can also, if we use it carelessly make our attitude completely misunderstood A slip of the tongue, the use of an unusual word or of an ambiguous word, and so on, may create an enemy where we had hoped to win a friend Again, different classes of people use different vocabularies and the ordinary speech of an educated man may strikes an uneducated listener as showing pride, unwittingly, we may use a word which bears a different meaning to our listener from what it does to men of our own class Thus speech is not a gift to use lightly without thought but one which demands careful handling only a fool will express himself alike to all kinds and conditions of men । सकेत 1 great के लिए यहाँ 'महान' से अच्छा समानक 'बहुत बडा' होगा। 2 it can be के लिए हो सकती की तुलना मे सिद्ध हो सकती है अधिक सगत होगा। 3 our एक बार पाया है कि तु हिदी मे 'अपने और अपनी दोना का प्रयाग करना पड़ेगा, क्योकि विचार पुल्लिग है और 'इच्छा' स्त्रीलिंग। 4 हि दी म लोगा को जोड दिया गया है जो मूल में नहीं है । 5_may strike के लिए हिदी मे लग सकता है' भी हो सकता है किन्तु 'की गध पा सकती है अधिक अच्छा रहेगा। अनुवाद या तो भाषा एक बहुत बडा वरदान है लेकिन यह बहुत बड़ा अभिशाप भी सिद्ध हो सकती है। इसकी सहायता स जहाँ हम अपन विचारो और अपनी इच्छानो को अपने मित्रों पर प्रकट पर सक्त हैं, वही अगर हम इसके प्रयोग म सावधानी न बरतें तो हमारे दष्टिकोण को कुछ-का कुछ समझा जा सकता है । जबान की चूक या अप्रचलित एव अस्पष्ट शदो का प्रयोग या ऐसी ही प्रय गलतिया लागा को हमारा मित्र बनाने ६ बजाय दुश्मन बना देती हैं। एस ही अलग अलग वर्गों के लोग अलग अलग गदावली का प्रयोग करते हैं और एक शिक्षित व्यक्ति की साधारण भाषा में भी एक अशिक्षित प्रादमी को अहकार की गध पा सकती है । अनजान म हमम ऐम शद का प्रयोग हो सकता है जिसका प्रथ सुनने वाले के लिए कुछ हो तथा हमारे वग के लोगो के लिए मभ्यासमाला प्राथमिक / 51 कुछ और हो। इसीलिए भापा ऐसा वरदान नहीं है जिसका प्रयोग या ही विना सोचे-समझे किया जा सके । इसके विपरीत इसका प्रयोग पूरी सावधानी से किया जाना चाहिए । कोई मूख ही हर तरह के लोगो के सामने तथा हर प्रकार की परिस्थिति में अपने आपको एक ही ढग से अभियक्त करेगा। अतिरिक्त अभ्यासमाला (स्वयं अनुवाद करने के लिए) Exercise 1 Non violence in its dynamic condition means conscious suffering It does not mean meek submission to the will of the evil doer, but it means putting of one's whole soul against the will of the tyrant Working under this law of our being, It is possible for a single individual to defy the whole might of an unjust empire to save his honour, his religion his soul, and lay the foundation for that empire s fall or its regeneration And so I am not pleading for India to practise non violence because she is weak I want her to practise non violence being conscious of her strength and power Exercise 2 Suddenly the audience got restless like Waves visited by a chance gust All eyes were focussed at once on the other end where we could see the frail giant emerge down a corridor, wub a young lady on each side of him on whose shoulders he leaned affectionately whenever he came to his prayer meet ings As he drew near everybody stood up in reverence A hush succeeded the growiog hum when he approached me I made him my obeisance He smiled radiantly Hin 54 / अनुवाद की प्यावहारिस समस्याएँ Exercise 9 The test of a great book is whether we want to read it only once or more than once Any really great book we want to read the second time even more than we wanted to read it the first time and every additional time that we read it we find new meanings and new beauties in it A book that a person of education and good taste does not care to read more than once is very probably not worth much But we can not consider the judgment of a single individual infallible The opinion that makes a book great must be the opinion of many For even the greatest critics are apt to have certain dullnesses, certain inappreciations Carlyle for example could not endure Browning Byron could not endure some of the greatest of English poets A man must be many sided to utter a trust worthy estimate of many books We may doubt the judgment of the single critic at tunes But there is no doubt possible in regard to the judgment of generations Exercise 10 When we survey our lives and endeavours we soon observe that almost the whole of our actions and desires is bound up with the existence of other human things We notice that our whole nature resembles that of the social animals We cat food that others have produced wear clothes that others have made, live in houses that otbers have built Te greater part of our knowledge and beliefs has been communicated to us by other people through the medium of a language which others have created without language our mental capactities would be poor indeed comparable to those of the higher anımals, we have, therefore to admit that we owe our principal advantage over the beasts to the fact of living in a human society The individual if left alone from birth would remain primitive and beastlike in his thoughts and feelings to a degree that we can hardly conceive The individual is what he is and has the GPUTIHTETE scafe / 55 significance that he has, not so much in virtue of his individuality but rather as a member of a great human commumty, which directs his material and spiritual existence form the cradle to the grave Exercise 11 People talk of memorials to him in statues of bronze or marble or pillars and thus they mock him and belie his message What tribute shall we pay to him that he would have apprecia- 'ted ? He has shown us the way to live and the way to die and if we have not understood that lesson, it would be better that we raised no memorial to him, for the only fit memorial is to follow reverently in the path he showed us and to do our duty in life and in death. Exercise 12 The third great defect of our civilization is that it does not know what to do with its knowledge Science has given us powers fit for the gods yet we use them like small children For example we do not know how to manage our machines Machines were made to be man s servants yet he has grown so dependent on them that they are in a fair way to become bis masters Already most men spend most of tbeir lives looking after and waiting upon machines And the machines are very stern masters They must be fed with coal and given petrol to drink, and oil to wash with, and they must be kept at the righi temperature Exercise 13 Looking back upon her life one sees an astonishing com bination of gifts One, here is a life full of vitality, one here are 50 years of existence~not merely existence but a vital, dynamic existence-touching many aspects of our life cultural and political And whatever she touched she ipfused with some 56/अनुवाद की व्यावहारिस समस्याएं thing of her fire She wasındeed a pillar of fire And then again she was like cool running water, soothing and uplifting and bringing down the passion of her politics to the cooler levels of human beings So it is difficult for one to speak about her except that one realizes that here was a magnificence of spirit and it is gone Exercise 14 The great error in the social order today is the false belief that everything can be set right by economics, science and democracy Nothing could be farther from the truth Without the harmony and direction which flows from moral principles and spiritual values, science economic planning and slogan democracy can only lead to greater disorder and the subjection of the human spirit to brute force and matarialism Marx was logical in giving no value to the individual except as a part of a whole, a cog in a machine It is only because man is made in God s image, endowed with a soul that he is raised above other things, Marx removed God and man fell to the level of the animals, distinguished from them only as being more cunning Exercise 15 The best friend a man has in this world may turn against him and become his enemy His son or his daughter, that be has reared with loving care may prove ungrateful Those who are nearest and dearest to us, those whom we trust without happiness and our good name may become traitors to their faith The money that a man has he may lose It dies away from him perhaps when he needs it most A man s reputation may be sacrificed in a moment of ill considered action अभ्यासमाला प्राथमिक/57 Exercise 16 Men who are always grumbling about their poverty, com plaining of their difficulties whining over their troubles, and thinking that their lot in this world is mean and poor will never get any happiness out of life or achieve any success However mean our life may be if we face it bravely and honestly and try to make the best of it we shall find that after all it is not so bad as we thought and we may have our times of happiness and the joys of success There is nothing common or unclean, until we make it so by the wrong attitude we adopt towards it Exercise 17 The Ambassador as he is the representative of his country has to take particular care that neither by his conduct nor by his talk does he bring discredit to his country His style of living, while not ostentatious or extravagant has to be such as to maintain his proper dignity In appearance, behaviour and general contact with people he should be careful not to forget that his individual personality is submerged in that of a repre sentative of his country This fact develops in many people a pompous manner and a generally formalısed behaviour But even that is better than conduct and behaviour which brings discredit to one s country and makes it a laughing stock To strike a happy mean b tween excessive familiarity and disre gard of conventions sometimes attempted by the practitioners of New Diplomacy and the pomposity and undue attachment to the rule of protocol should be the aim of an Ambassador Exercise 18 The function of poetry is to make the life of man more full and real it is to make him an independent hunter of the facts by which men live—the facts of the world and the facts of the universe It enables him to escap- out of the make 58/ अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं believe existence of every day in which perhaps an employer seems more huge and imminent than God, and to explore reality, where God and love and beauty and life and death are seen in truer proportions and where the desire of the heart is at least brought within sight of a goal There are critics who hold that it is enough to say that art offers us an escape from life Art, however, offers us not only an escape from life but an esccpe into life, and the first escape is of importance only if it leads to the second We often speak of theimagination as tho ugh it were a brilliant faculty of lying, on the contrary it is facully by which not only do we see and hear things that the eye cannot see or the ear hear but which enables the eye to see and the ear to hear, things that they did not see or hear before در अभ्यासमाला उच्चस्तरीय Exercise I A few words on the problem of the medium of instruct 100 at the university stage may not be out of place One does not expect that when we discuss a subject such as this, one's' views will be readily shared by others It is sometimes heartening to remember that if education can be defined in one word, that word is controversy where concord arises, learning wathers, where conflict rules education flourishes" In dealing with the language problem we are concerned with a dynamic and creative situation and a discussion of the subject will benefit us all provided it is free, frank5 and objective It seems that so far as the near future is concerned universities have to function largely on a bilingual basis instead of monolingual basis namely, the regional language and English, as recommended by the National Integration Council (June 1962) For post graduate study and research and to serve as a link for inter communication between the universities and also with the outside world, English is ao obvious choice for us in the context of our times On the other hand to facilitate understanding of difficult subjects and basic concepts and to bring together workers and thinkers which is an essential process for advancement of science and 60/ मनुवाद की व्यावहाग्यि समस्याएँ industry in the country the use of regional languagesb ecomes almost a necessity 1 2 5 सकेत A few words को हिली मुहावर के अनुसार ताराब्द लिख सक्त हैं । One सवनाम के लिए हिदी म पोई निश्चित पद नहीं है। सदन में अनुसार यहाँ इस 'हम लिख सक्त हैं। 34 Withers and nourishes | अनुवाद में तापमल वटाना प्राव यक है। दहे त्रमश 'मुरमाना और पलना फूलना लिग सक्त है। frank का मथ है 'स्पटवाटी । यहाँ विशेषण विपयय (transferred epithet) के प्रयाग के कारण यह चर्चा' विरोपण के रूप में पाया है। स्पष्ट चचा लिम्बन से बात अधूरी रह जाएगी। चर्चा वा विशेषण स्पष्टवादितापूण होना चाहिए परन्तु यह शद इतना भारी भरकम है कि इसके प्रयोग स बचना चाहिए । अत दूमरा विकल्प होगा निस्सकोच । 6 English is an obvious choice # obvious choice समान दूरना मुश्किल है। उपयुक्न अनुवाद होगा- अंग्रजी एक सहज विकल्प के रूप में सामने पाती है। अनुवाद विश्वविद्यालय स्तर पर शिक्षा के माध्यम की समस्या पर दोगद कहना अप्रासगिक न होगा। एसी प्राया नहीं की जाती कि जब हम एस विषय की घचा करते हैं तो अय लाग हमारे दतिकोण को तुरत स्वीकार कर लेंगे। उभी कभी यह बात याद रखने स होसना बन जाता है कि यदि शिक्षा की परिभाषा एक रात मदनी हो तो वह गद होगा-विवाद जहाँ सहमति पदा हो जाती है, वहाँ शिक्षा मुरझा जाता है, जहाँ दद्व चलता रहता है, वहां शिक्षा पलती फलती है। भाषा समस्या पर विचार करते समय हमारा सरोकार एवं गतिशील और मृजनात्मक स्थिति से होता है। प्रत इम विषय की चर्चा से हम सबको लाभ होगा शत यह है कि यह चर्चा म्वतन, निम्सकोच और वस्तुपरख हो। ऐसा प्रतीत होता है कि जहा तक निपट भविष्य का मम्बध है विश्वविद्यालया का एक्भापाई आधार की जगह मुस्यत दो भाषाई प्राधार पर काय करना हागा अर्थात क्षत्रीय भाषा और अग्रजी म, जसी कि राष्ट्रीय एकता परिपद (जून 1962) न सिफारिश की थी। स्नातकात्तर प्रध्यया और अनुसधान के लिए, विभिन विश्वविद्यालया वे परम्पर सम्पर की कही के रूप में तथा बाह्य ससार से सम्पन के लिए वतमान युग की अभ्यासमाला उच्चस्तरीय/61 परिस्थितिया म अंग्रेजी एक महज विकल्प के रूप में सामने पाती है। दूसरी नोर, कठिन विषया और मूल सकल्पनामा वा समभने के लिए तथा श्रमिया और विचारखो को एक साथ लाने के लिए-जाति दश म विनान और उद्योग की उनति के लिए आवश्यक है-क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग प्राय आवश्यक हो जाता है। Exercise II 7 What are the basic ideas of this new humanismº They can be briefly stated as a modern and Indian interpretation of liberty, equality and fraternity They are modern because the economic movements of the nineteenth century have given a new content to these ideas They have taken an Indian form because liberty for example, means in India not merely the acquisition of political independence but the emancipation of women freedom for the suppressed classes, liquidation of feudal elements within the country and many other things which have ceased to have significance in Europe In the same way, equality is a dynamic and revolutionary conception in India as society bas always been organised on the basis of inequality of caste and untouchability Fraternity also has a different significance in India for while the univer salism of Hindu thought emphasizes the motive of action as Loka Samgraba or welfare of the world the practical expers ence of the subordination of the non White races and the prevalence of discrimination by European peoples have given to Indian thought on this subject its colour and temper 9 It is the fraternity of the oppressed which has moved the mind of modern India The Marxian doctrine of fraternity 'Workers of the world unite found in India a corollary 'the oppressed of the world unite and this feeling has been deeply ingrained in the Indian mind 1 62/ अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएँ - सकेत Humanism के लिए माननवाद उपयुक्त होगा । यदि यही Humani tarianism पाए तो उस 'मानवतावाद पर सवत हैं । 2 equality के लिए समता उपयुक्त है। कुछ लोग समानता लिखते हैं, परन्तु वह similarity का आभास दता है। 3 fraternity के लिए अनर शत हैं-वधुत्व भ्रातत्व, भाईचारा । परतु प्रस्तुत सदम म Liberty Equality Fraternity के लिए, म्वत नता, समता व धुता अधिक उपयुक्त है । प्रागे वधुत्व लिख सकते हैं । 4 content के वोगत अथ 'प्रतवस्तु' विषय वस्तु यहाँ उपयुक्त नहीं । 'नया तत्त्व भर दिया है लिम्बना उपयुक्त होगा। 5 Independence और Liberty मे अतर करने के लिए इह मा स्वाधीनता और स्वत पता लिख सक्त है । 6 Freedom और Liberty म कोई मौलिक अतर नहीं है। परतु प्रस्तुत सदभ मे 'दलित वर्गों का उद्धार लिखना उपयुक्त होगा। 7 Inequality के लिए विषमता उपयुक्त है । 'असमानता लिखना ठीक नहीं। Caste के लिए जाति र प्रचलित है। पर तु यहां जात पात' अधिक सटीक होगा । इसी साथ untouchability के लिए छमाछूत उपयुक्त हागा हालांकि 'अस्पृश्यता' भी लिख सात हैं। 9 इस जटिल वाक्य को तोडकर सरल बना सक्ते है । इसम हिदी वाक्य रचना की प्रकृति को ध्यान में रखना होगा और पूर्वापर सम्बध का निर्वाह भी जरूरी होगा। 8 अनुवाद इस नये मानववाद की मूल मायताए क्या हैं ? मक्षेप मे इहे स्वतत्रता समता और व घुता की प्राधुनिक एवं भारतीय 'याख्या कह सक्त हैं। ये आधुनिक इसलिए हैं कि उनीमवी तादी के आर्थिक पादोलना न इन मा यतामा में नया तत्त्व भर दिया है। इनका रूप भारतीय इसलिए हो गया है कि भारत में स्वतत्रता का प्रथ केवल राजनीतिक स्वाधीनता की प्राप्ति नही बल्कि स्त्रिया का उत्थान दलित वर्गों का उद्धार, देश के भीतर सामती तत्त्वा की समाप्ति तथा अय बहुत सी बातें भी इसकी परिधि में आ जाती हैं जो यूरोप के लिए उतनी महत्त्वपूण नही रह गइ है। इसी तरह भारत के सदम म समता भी एक गतिशील और नातिकारी सपना है क्याकि यहाँ का समाज मेगा स विषमना जात पात और छुआछूत के अाधार पर सगटित अभ्यासमाला उच्चस्तरीय /63 रहा है। भारत म वधुत्व का महत्त्व भी दूसरी तरह से है । या हिदू चितन के विश्ववाद का प्राग्रह है कि कम का उद्देश्य लाप संग्रह या विश्व कल्याण होना चाहिए, परतु यूरोपीय जानियो वे व्यावहारिक अनुभव न इस विषय पर भारतीय चितन को एक नय रंग में रंग दिया है। यूरोप की विशेषता यह थी कि वहाँ अश्वेत जातिया का पगधीन बनाकर उनके साथ भेदभाव वरता जाता था । अाधुनिर भारतीय मानम दलित वर्गों के वधुत्व की भावना म परिन रटा है। माक्म का सिद्धात था-'दुनिया के मजदूरा, एक हो जानी। भारत म इसके समानातर यह सिद्धात विकसित हुआ है-'दुनिया प दलित वर्गों, एक हो जाना।' यह भावना भारत के मन मे गहरी वसी है। Exercise IIT What is the Secular State! which India claims to be ? It postulates that political institutions must be based on the economic and social interests of the entire community, without reference to religion, race or sect that all must enjoy equal rights but no priv'lges, prescriptive rights or special claims should be allowed for any group on the basis of religion Secondly, it eliminates from the body politic all ideas of division between individuals and groups on the basis of their faith or racial origins In a country which has had forty years of history based on separate electorates communal proportion in all appointments from the meanest to the highest, where a man's preferment depended mainly on his separateness from if not animosity towards members of cther religions or comm unities this is a deficite breach with the immediate past? In the third place it is obvious that a composite secular state must accept as the basis of its policy what Aristotle termed distributive justices, that all communities must share the power as they must share the duties and responsibilities of being a Citizen 64/अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं 1 सकेत Secular State पारिभाषिक र है जिराम लिए प्रस्तुत सदम में 'धमनिरपक्ष राज्य' उपयुक्त होगा। 2 Without reference to religion, race or sect-इस प्रग का अनुवाद वाक्य के बीच में रखा स गडबड पदा होगी। इसको निषेधात्मक प देकर वाक्य वे अत म जोडने म अनुवाद स्पष्ट हो जाएगा। 'race or sect यो हि दी की प्रकृति के अनुमार 'जात-पात वह सकते हैं । 3 Priviliges, prescriptive rights or special claims-37 677 मय एक दूसरे स मिलते जुलत हैं। इनका अनुवार करत समय यह दाब लेना चाहिए कि एक-स शब्दा को पुनरावत्ति न हो। प्रत इहे विगेपा धिकार परम्परागत अधिकार या विशेष स्वत्वाधिकार लिखना उपयुक्त होगा। अधिवार' म जुडे हुए मय अनव शब्द भी अंग्रेजी म प्रचलित हैं जिह एक-दूसरे म पृथक यग्न के लिए नय पारिभाषिक शन्द गर गय हैं right अधिवार, authority प्राधिकार, privilege विपा घिवार, prerogative परमाधिकार। 4 body politic के लिए यहत पारिभाषिक श द सग्रह-मानविकी (केद्रीय हिदी निदेशालय, दिल्ली) म 'राज निकाय दिया है। परन्तु यहाँ इसका कोई प्रथ समझ नहीं पाएगा। प्रत 'राज्य लिखना उपयुक्त होगा। 5 fath का प्रथ विश्वास निष्ठा इत्यादि है । परतु यहाँ घम अधिक माथर होगा! racial origin के लिए जाति' ही उपयुक्त हागा 'जातीय उदगम इत्यादि की जरूरत नहीं। 6 communal proportion का दश अनुवाद उपयुक्त नहीं हागा। इसकी व्याख्या कर देनी चाहिए। 7 This is a definite breach with the immediate past- प्रा के समाना तर हि दी अभिव्यक्ति ढूढना मुदिक्ल है । इसके भाव को ग्रहण करते हुए यह लिखना उपयुक्त होगा- यह व्यवस्था निश्चय ही इतिहास को एक नया मोन टन वाली थी।' What Aristotle termed distributive justice -TYTTTT इस अा का अनुवाद या करेंगे जिस चीज को अरस्तू न वितरण याय की सना दी है। प्रस्तुत स दम म चीज की जगह सिद्धात लिखना उपयुक्त होगा। 8 मभ्यासमाला उच्चस्तरीय/65 अनुवाद भारत जिम तरह का धम निरपक्ष राज्य होत का दावा करता है, उसका स्वरूप क्या है ? उसकी शत यह है कि राजनीतिक मस्थाएं पूरे समुदाय के आर्थिक और सामाजिक हिता पर आधारित होनी चाहिए और उनमे घम या जात-पात का कोई स्थान नहीं होना चाहिए, सबको समान अधिकार प्राप्त होने चाहिए परतु किसी वग को धम के आधार पर कोई विशेषाधिकार, परम्परागत अधिकार या विरोप स्वत्वाधिकार प्राप्त नही हान चाहिए । दूसरे, इसमे राज्य के भीतर धम या जाति के भाधार पर व्यक्तिया या वर्गों के विभाजन के सारे विचार परे रख दिए जाते है। जिस दश के इतिहास म चालीस वप तक पृथक्-पृथक निर्वाचन मण्डला की व्यवस्था रही हो और निम्नतम से लेकर उच्चतम नियुक्तियों म सब जगह विभिन सम्प्रदायों का हिस्सा रखा गया हो और जहा मनुष्य की पदोनति मुख्यत प्रय धर्मों और सम्प्रदाया के सदस्या से अलगाव पर निमर रही हो-चाह उनके प्रति शत्रुता की माग न भी की जाती हो-वहाँ यह यवस्था निश्चय ही इतिहास को एक नया मोड दने वाली थी। तीसर यह जाहिर है कि एक मिले-जुले धम निरपेक्ष राज्य को वह सिद्धात अपनी नीति के आधार के म्प मे स्वीकार कर लेना चाहिए जिम अरस्तू ने वितरण याय की सना दी है और वहां सत्ता के प्रयोग म समस्त सम्प्रदाया का वम ही हिम्मा मिलना चाहिए जैस नागरिक थे नाते क्तव्या और दायित्वा म उनका हिस्सा रहना चाहिए। Exercise IV Nationalism, of course is a curious phenomenon which at a certain stage in a country s history gives life growth strength and unity but at the same time it has a tendency to Jimit one, because one thinks of one's country as something different from the rest of the world The perspective changes and one is continuously thinking of one's own struggles and virtues and failings to the exclusion of other thoughts The result is that the same nationalism which s the symbol of growth for a people becomes a symbol of the cessation of that growth in the mind Nationalism when it becomes successful", sometimes goes on spreading in an aggressive way and becomes a danger 68 / अनुवाद की घ्यावहारिक समस्याएं study and execution Behind every proposal is a great collec tion of files a long series of comraittee meetings a large number of individual discussions and indeed the whole mechanism of administration Parliament cannot govern It can do no rore than criticis Moreover we have discussed these questions in terms of the majority Facing the Government Front Bench is the Opposition? Front Bench There is no dictatorship so long 2 there is in Opposition सकेत Dictatorship के लिए 'अधिनायकवाद और अधिनायकत न राहत हैं। पहला एम सिद्धात वो व्यक्त करता है, दूसरा यवस्था को । यहाँ व्यवस्था या पद्धति की पोर सकेत है। प्रत इम मधिनायकतत्र लिखना उप युक्त होगा। 2 अंग्रेजी की 'at best, at worst जसी अभिव्यक्तिया ये हिदी समानक ढरना मुश्किल है । यहां इस 'बहुत-म बहुत लिख सकते हैं। 3 votes freely cast t adjectival phrase freely caste का ज्यो के त्यो रासने म हिदी वाक्य गडबडा जाएगा। प्रत इममी व्याख्या वर देना उचित हागा- और वोट बिना किसी दवाव के दिए जाते हैं। 'too complicated to be conducted इस अश के अनुवाद के लिए निषेधात्मक शली अपनानी पडगी क्यादि हिदी में इसकी ममाना तर अभिव्यक्ति ढूढना मुश्किल है। 5 apparatus में निहित प्रथ की व्यापक्ता पो यक्त करने के लिए साज सामान राद उपयुक्त होगा। 6 facing का अनुवार है, सामन रहत/वठत हैं । परतु प्रस्तुत सदभ की गरिमा को दवत हुए बरिया अनुवाद होगा-सामने विराजमान हात हैं।' Opposition के लिए यहा विराध या विरोधी पक्ष की जगह 'विपक्ष' लिखना अधिक उपयुक्त होगा। A 7 अनुवाद इस पति को अधिनायक्त न को सना नहीं दी जा सकती। बहुत से बहुत यह निश्चित वर्षों की अवधि का अधिनायकतत्र हाता है। परतु जिन अधिनायको को सक्षिप्त प्रतगल के बाद लोगाम वोट मागने जाना परता है-और वोट बिना किसी दबाव के दिए जाते हैं वे जनता के सवक हाते अभ्यासमाला उच्चस्तरीय | 69 है स्वामी नहीं होते ! मरकार का काय इतना जटिल होता है कि उस 630 आदमी खुले वाद विवाद के द्वारा नहीं चला सक्ते। इसके लिए अध्ययन और कार्या वयन के पूर साज-सामान की जरूरत होती है। प्रत्येक प्रस्ताव के पीछे फाइला का भारी पुलिदा, समितिया की बहुत सारी बंटके, ढेर सारी -यक्तिगत चर्चाएं और पूरा-का पूरा प्रशासन तत्र रहता है । ससद गासन नहीं वर सक्ती। वह पालाचना के अलावा कुछ नही कर सकती। फिर, हमने इन प्रश्नो का विवचन बहुमत की दष्टि से ही किया है । एक पार अगली पक्नियो में सरकारी सदस्य विराजमान होते हैं, दूसरी पार उनके सामने वाली अगली पक्तिया म विपक्ष के सदस्य वठत है । जब तक विपक्ष मौजूद है, तब तक अधिनायक्तन नहीं आ सकता। Exercise VI The essayist then, in his particular fashion, an inter preter of life, a critic of life He dous not see life as the historian or as the philosopher or as the poet or as the nove list and yet he has a touch of all these ? He is not concerned with discovering a theory of it all or fitting the various parts of it into each other He works rather on what is called the analytic method, obserying," recording interpreting just as things strike him, and letting his tancy play over the beauty and signification the end of it all being this that he is deeply concerned with the charm quality of things, and desires to put it all in the clearest and gentlest light, so that at least he may make others love life a litter better 10 and prepare them for its infinite variety and, alike for its joyful and mournful surprises सकेत in his particular fashion को हिदी मुहावरे व अनुरूप अपन ढग से' कर सकते हैं। he has touch of all these म touch का हिंदी समान मिलना कठिन है। प्रस्तुन माम म इसका अनुनाद यो कर सकते हैं उसम इन सवकी विशेषता पाई जाना है। 2 70/अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं 3 यहा rather का कोई सही समान रखना कठिन है । इसका भाव देखा जाए तो के रूप म व्यक्त कर सकते है 4 what is called the analytic method का श दश अनुवाद उपयुक्त नहीं होगा। हिदी मुहावरे के अनुमार इस या कर सकते हैं उसकी काय पद्धति को विश्लेषणात्मक मान सकते है । 5 observing से वाक्य को तोडकर स्वतत्र वाक्य के रूप में रख सक्त हैं। यदि verb की इस gerund form को सरल वाक्य की तरह निरीक्षण करते हुए इत्यादि लिखेंगे ता हिदी का वाक्य बहुत अटपटा हो जाएगा। 6 things strike him मे strike का हि दी समानक मिलना कठिन है । इस या कर सक्त हैं जस जैसे चीजें उसके सामने आती हैं। 7 play over the beauty and signification of feat yarata अनुरूप या वर सक्त हैं (अपनी कल्पना को) सौ दय और अथवत्ता की दिशा म मुक्त उडान भरन देता है। 8 he is deeply concerned with the charm quality of things-- इसका अनुवाद हि दी मुहावरे की शली में इस तरह उपयुक्त होगा- वह वस्तु जगत की रम्यता (या रमणीयता) म डूब जाता है । 9 desires to put it all in the clearest and gentlest light--59 पूरी अभियक्ति वो हिटी म प्रभावशाली ढग से “यक्त करने के लिए उपयुक्त पदावली का चयन आवश्यक होगा। इस यो कर सक्त हैं अपने अनुभव को सवथा स्पष्ट और सुरुचिपूण ढग से प्रस्तुत करने का मचल उठता है। 10 make others love life a little better--इस दिदी में इस तरह लिखना उपयुक्त होगा दूसरा के मन में कुछ अधिक प्रीति जगा सके । अनुवाद प्रत निब धकार अपन ढग स जीवन का व्यारयाकार और जीवन का समालाधक होता है । वह जीवन का न तो इतिहासकार या दानिक की दष्टि में देखता है न कवि या उप यासकार की दष्टि स, परतु फिर भी उसम इन सबकी विरापता पाई जाती - 1 उसका काम सम्पूण जीवन के सिद्धात का अवषण करना या उसरे विभिन अगर को एक दूसरे म जाडना नही है। देखा जाए तो उमकी काय पद्धति को विश्नपणात्मर मान सस्त हैं । जसे जस चीजें उमर सामने आती हैं वह उनका निरीक्षण करता है उनका विवरण देना है व्याम्या करता है और अपनी कल्पना का सौदय और प्रथवत्ता की दिशा में मुक्त उडान भरन दता है । परिणाम यह होता है कि वह वस्तु जगत अभ्यासमाला उच्चस्तरीय /71 की रम्यता म डूब जाता है, और अपने अनुभव को सवथा स्पष्ट एव सुरुचि- पूण ढग से प्रस्तुत करने को मचल उठता है ताकि वह दूसरो के मन मे जीवन के प्रति कुछ अधिक प्रीति जगा सके और उहे इसके असीम वविध्य तथा उन पाश्चर्यों का सामना करने की प्रेरणा द सके जा सुखमय भी हो सकते हैं, दुखमय भी। Exercise VII His mind was so comprehensive that no language but his own could have expressed its contents, and so ponderous was huis language that sentiments less lofty and less solid than his were would have been encumbered, not adorned by it Mr Johnson was however, no pompous converser, and thoughs he was accused of using big words it was only when little ones would not express his meaning ? as clearly, or when the elevation of the thought would have been disgraced by a dress less superb He used to say that the size of a man s under standing might always be known by his mirth, and his owo was never contemptible 10 सकेत 1 2 3 4 यह उद्धरण चूकि मि० जानमन की प्रशसा म लिखा गया है इमलिए यहाँ His का अनुवाद उनका होना चाहिए। mind के विशेपण के स्प मे comprehensive का हिंदी समारक ढूढना मुश्किल है । यह ऐस मन की विशेषता का व्यक्त करता है जो बहुत सारे विचारा, भावो और सक्रपनाया का ग्रहण कर सके । यहा सवेदनशील' गब्द उपयुक्त हो सकता है उनका मन इतना सवदनशील था नि'। contents का प्रस्तुत सदम में भाव लिख सक्त हैं। language वे विरोपण के प म ponderous का हिदी समानक मिलना मुश्किल है । यहा गुरु-गभीर से काम चल जाएगा। pompous converser भी एक विलक्षण प्रयोग है । converser स यहाँ अभिप्राय लखक स है वाताशर से नही । परतु उसके विरोपण pompous का अनुगट भी पठिन है। यहा इस तरह लिखना उपयुक्त होगा- 'चमत्तारपूण लेखन के धना । 5 72/ अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं 6 though के अनुवाद के लिए वाक्य के गुरु म, यद्यपि' या हालांकि लिखना जरूरी नहीं । बीच म 'तो' का प्रयाग करन स अथ भी या जाता है और गली भी सजीव हो जाती है उन पर बड़े बडे गदा के प्रयाग का प्राराप तो लगाया जाता है। 7 meaning के लिए यहाँ 'मथ की जगह 'अभिप्राय वा प्रयाग समीचीन होगा। अथ शदा या भाषा का होता है व्यक्ति का meaning उसका अभिप्राय होता है। 8 elevation would have been disgraced को हिदी मुहावरे के अनुम्प इस तरह कर सकते हैं उनके चितन वे बभव पर प्राच मा सकती थी। might be known-हिदीम size का भाव प्राना यहाँ मावश्यक नहीं क्यामि बुद्धिमत्ता चे प्रकार का कोई अथ नहीं निकलता (जसे piece of advice म piece या भाव अनुवाद म नहीं लाया जाता)। प्रत यहाँ उपयुक्न अनुवाद होगा मनुष्य की बुद्धिमत्ता का अनुमान उसकी विनोद पति से करना चाहिए। 10 'his own was never contemptible-इसका श दश अनुवाद परिन है । हि दी मुहावरे के अनुरूप इस यो क्र सक्त हैं 'वे स्वय इसम कोरे नहीं हैं। 9 Size अनुवाद उनका मन इतना मवदनशील था कि उसके भाव को उनकी अपनी भापा ही व्यक्त कर सकती थी-अय कोई नहीं । उनकी भाषा इतनी गुरु गभीर थी कि यदि उसम “यक्त भावनाए उतनी उदात्त और उतनी पुष्ट न होती तो वे उस भाषा म ही उलझकर रह जाता अलकृत नही होती । परतु मि० जानसन चमत्कारपूण लखन के धनी नही थे। उन पर बड-बडे शदो के प्रयोग का प्रारोप तो गाया जाता है परतु ऐसा वे तभी करत थे जब छोट छोटे गद उनके अभिप्राय को उनना म्पष्ट व्यक्त नहीं कर पाते थे या जब कम अलकृत भाषा के प्रावरण में उनके चिंतन के वभव पर पाच पा सकती थी। वे कहा वरत थे कि मनुष्य की बुद्धिमत्ता का अनुमान उमकी विनोदवत्ति से लगाना चाहिए और वे स्वय इसमे कोरे नही थे।

अभ्यासमाला उच्चस्तरीय / 73 Exercise VIII It is sometimes said that obscenity does not reside so much in the thing said as in the manner in which it is said 1 But as in the case of blasphemy this interpretation is not borne out by an examination of the works that have been subjected to censorship? Thus the condemnation not so long ago of such plays as Waste, or Ghosts, or Young Woodley, or such books as The Well of Loneliness3 was not based on indecency in the language used but on the supposed social dangers of any public discussion of the ideas dealt with 4 In any case, the standards of decency vary greatly. The advocacy of birth control was regarded as indecent a generation ago, It is so no longer As far as the stage is concerned, the official attitude? tries to follow changes in public opinion but, as Bernard Shaw pointed out keeps always at a respectful distance, say twenty years, behind it on the whole I cannot but conclude that since indecency and obscenity are vague and obscurelo notions they are not matters which can be effectively handled by the blunt machinery of the law सकेत 2 'in the thing said as in the manner in which it is said इसका सीधा सीधा अनुवाद होगा-वही गई वात म नहीं, बल्कि कहने व ढग में। परतु पूर उद्धरण को पढकर यह स्पष्ट हो जाता है कि लेखक साहित्यिक और कलात्मक कृतिया के मदम में अपनी बात कह रहा है। अन प्रस्तुत प्रा का उपयुक्त अनुवाद होगा-~-क्सिी कृति के पथ्य म नही बलि उस प्रस्तुतीकरण की गली मा bave been subjected to censorslup' # censorship FT RET सही हिंदी समाना मिलना मुक्षित है। वहत पारिभाषिक गद सग्रह-- मानविकी का अनुमरण करें तो इस प्राका अनुवाद होगा-जिह सेमर (या अवष्ट भन/प्रवरायन/अभिवचन/निदा) का विषय बनाया गया है। इससे कोई प्रथ नग निरलेगा। प्रस्तुत सदन म इसका अभिप्राय प्रण करत हुए यह अनुवाद उपयुक्त होगा--जिह मापत्तिजनक मानकर प्रकाशित नहीं हाा दिया गया।

4 74/अनुवाद की व्यावहारिक समस्याए 3 य अग्रजी की विभिन कृतिया के शीपक हैं। हिंदी अनुवाद म इनका लिप्यतरण देना ही उपयुक्त हागा। on the supposed social dangers of any public discussion of the ideas dealt,-हिदी वाक्य रचना का जटिलता स बचान वे लिए इस प्रश की व्याख्या एक स्वतत्र उपवाक्य के रूप म कर देनी चाहिए-'यह सोचा गया था कि उनम प्रस्तुत विचारा की सावजनिक चचा स सामाजिय खतर पदा हा सक्त हैं।' 5 vary greatly का हिंदी मुहावरे के अनुरूप इस तरह कर सक्त हैं (शालीनता के मानदण्ड) कही कुछ होत हैं, वहा कुछ। 6 ageneration ago को हिदी की शली म पिछली पीटी के समय कर सक्त हैं। 7 यहा official attitude वा अथ सरकारी रवया या सरकार या दप्टिकोण है । इस शासन का दष्टिकोण लिख सक्त हैं । 8 respectful distance का सही हिदी समानक मिलना मुश्किल है । यहां इस या लिख भक्त हैं- बहुत पीछ रह जाता है । 9 I cannot but conclude को हि दी की प्रकृति के अनुसार यो वरना चाहिए- मैं एक ही निप्प पर पहुचता हूँ। 10 vague and obscure एक ही प्रथ के द्योतक है। यहाँ इह गूढ और क्लिप्ट लिखन स पूरा भाव या जाएगा। अनुवाद कभी कभी एसा कहा जाता है कि अश्लीलता क्सिी नि के कथ्य में नहीं रहती बल्कि उसके प्रस्तुतीकरण की शला म निहित होती है । परतु ईश्वर निदा के मामल की तरह प्रस्तुत सदम म भी यह यारया उन कृतिया की जाच करने पर सही सिद्ध नहीं हाता जिहे आपत्तिजनक मानकर प्रकाशित नहीं होने दिया गया । 'वस्ट या गाटस या यग वुडली जसे नाटको या द वल ग्राफ लोनलीनस सी पुस्तका की निदा का प्राधार यह नहीं था कि इनम अशोभन भापा का प्रयाग रिया गया है बल्कि यह सोचा गया था कि उनमे प्रस्तुत किए गा विचारा की मावजनिक चचा स सामाजिक खतरे पदा हो सक्त हैं । कुछ भी हो शालीनता के मानदण्ड कही कुछ हात है यही कुछ। पिछली पोती के समय सतति निरोध का प्रचार अशाभन समझा जाता था पर तु अव ऐसा नहीं समभा जाता । जहा नर रगमच का सम्बध है इसके प्रति शासन वा दप्टिकोण बदलत हुए जनमत के पीछ पीछे चतने की कोशिश तो करता है परतु जसा fr बना गा ने कहा है वह उससे बहुत पीछे रह अभ्यासमाला उच्चस्तरीय /75 जाता है.-जस Fि वीस साल पीछे। मव मिलाकर मैं एक ही निष्कप पर पहुच पाता हूं कि अशोभनता और अग्लीलता चूति गूढ और क्निष्ट धारणाएँ हैं इसलिए कानून का कुठित तर इहें भली भाति नहीं संभाल सकता। Exercise IX Rabindranath worked for one supreme cause', the union of all sections of humanity in sympathy and understanding, in truth and love His Visva Bharati is an international uni versity where the whole world has become a single nest In this ſostitutions he tried to impart the background of internationalism and help the students to realize the true charac ter of our inter linked humanity and deeper unities of our civilization in the West and the East? Thomas Hardy said The exchange in international thought is the only possible solation of the world 9 Our ancient seers20 never allowed their vision of humanity to be darkenedil by narrow considerations of race and religion The eternal personality of man can spring into being only from the harmony of all peoples in Yet in his own life time Rabindranath saw the world wade through seas of blood oceans of tears bitterer often than death due to mans blindness and folly Whenever civilization decays and diests it is due to causes which produce insensitivity to human values It goes down when our souls are deadened by greed and materialism 1 2 सकेत supreme cause वा हिनी समाना मिलना मुश्किल है। प्रस्तुत सदम म मनान उद्देश्य' लिखना उपयुक्त हागा। 'the union in sympathy and understanding को हिदी मुहावरे के पनुसार महानुभूति पोर म भावना के मूत्र म बांधने के लिए निन्नने में मनुवात म जान पा जाएगा। 3 humanity या मदम पे अनुमार मानवता या 'मानव जाति जिसना चाहिए । यहाँ मानवजाति उपयुत्त होगा।

6 7 76 / अनुवाद को व्यावहारिक समस्याएं 4 His एक्वचन है। परतु रवीद्रनाथ सम्माननीय व्यक्ति थे। अत यहाँ अनुवार म उनका लिसना चाहिए। 5 institution लिए हि दी म 'सस्था गद प्रयुक्त है institute के लिए 'सस्थान लिखा जाता है । इस भेद को ध्यान म रखना चाहिए । ampart the background के लिए पष्ठभूमि प्रदान करना' नहीं लिख सकते । इसके लिए 'भारभिर शिक्षा दना सही वठगा। इस अा को हिदी वाक्य रचना में सपाना कठिन है। प्रत हिन्दी की प्रकृति के अनुसार सकी यारया कर दने से वाक्य सुलझ जाएगा। 8 exchange in international thought के लिए 'प्रतर्राष्ट्रीय विचार का विनिमय' की जगह 'मतर्राष्ट्रीय स्तर पर विचार विनिमय लिखना उपयुक्त होगा। 9 'solution of the world के शदानुवाद से वात नहीं बनेगी। इसकी व्याख्या करके विश्न की समस्यामा का समाधान लिखना चाहिए। 10 seers को द्रष्टा पर सक्त हैं । प्रस्तुत सदभ म ऋपि लिखना अधिक उपयुक्त होगा। 11 darken' को हि तो मुहावरे के अनुसार काली छाया पडन देना लिखकर अनुवाद म चमलार पदावर सक्त हैं। 12 इस अश को हिदी मुहावर की शली मया लिख सकते है जानिया ये मलजोल की भूमि पर ही अकुरित हो सकती है। 13 decays and dies म दाना श द एक ही भार का यक्त करत है। हिदी म इस या लिप सक्त है ह्रास और विना हाता है । 14 goes down का हिदी मुहावरे ये अनुरूप 'रमातल की पार चले जाना लिख सकते है। समस्त अनुवाद रवीद्रनाथ ने एक महान उद्दश्य की पूर्ति के लिए काय क्यिा-मानव जाति के सभी वर्गो को सहानुभूति मदभावना, मत्य और प्रेम के मूत्र में वाधने के लिए । उनका विश्वभारती एक अतराप्तीय विश्वविद्यालय है जहाँ सम्पूर्ण विश्व एक नीट म परिणत हो गया है । इस सम्था म उहाने विद्याथिया को अतर्राष्ट्रीयता की प्रारम्भिव शिक्षा दने और उह य समझाने की कोशिश की कि 'हमारी परस्पर मवद्ध मानव जाति का सच्चा स्वरूप क्या है और हमारी सभ्यता में वे गहन मून कौन म है जो पूर्व और पश्चिम का एक्ता के मून मे बावते हैं। टामस हार्डी न कहा था अतर्राष्ट्रीय स्तर पर विचार विनिमय ही विश्व की समस्यामा का एक मात्र समाधान है। मार प्राचीन अभ्यासमाला उच्चस्तरीय । 177 पिया ने अपनी मानवता की कल्पना पर जानि या घम व सकीण विचाग की काली छाया नहीं पन्न। मनुष्य का गाश्वत व्यक्तित्व समस्त राष्टा के मल जोल की भूमि पर ही अकुरित हो सकता है। परन्तु रखी द्रनाथ ने अपन जीवन-काल में ही देखा कि मनुष्य के अनान और मूखता के कारण दुनिया म खून की नदिया वह रही थी और मसार उन प्रामुग्रा के अथाह मागर म डूबा जा रहा था जा मृत्यु स भी अधिप वटु थे। जब भी सभ्यता वा हाम और विनाग होता उसका कारण मानव मूया व प्रति उपया का भाव होता है। जब लोभ और निप्मा के कारण हमारी पारमा निर्जीव हो जाती है तब ममता रसातल की पार चली जाती है। है Exercise & Then we come to the Marginal Theory of Value The Labour Theory of Value explains or at least helps us to understand 1 the laws of motion of capitalism lou will recollect? that the Labour Theory of Value enabled us to understand the law of exploitation the law of primitive accumolation of capital as also the law of organic composition of capitalthe laws which ultimately provide th- key to the contradıctions that exist within the bosom? of the capitalist system and that must ultimately encompass its doom But the Labour Theory of Value breaks down completely when you come to handle the day to-day problems of economic life The problems of the market place cannot be solved by the Labour Theory of Value If your father finds you somewhat dull and, to help you to get through your examination, decides to engagea tutor, the Labour Theory of Value will not enable him to decide the remuneration to be paid to the tutor The Labour Theory of Value therefore has a sociological significance It has not the immediate, practical or the market place significance.10 सकेत or at least helps us to understand-इम प्रा वा वाक्य के अल म रगना चाहिए तारि बम को मुख्य क्रिया के माथ जानवर द्वार म यायिक क्रिया दी जाए। मायया वाक्य हिंदी की प्रकृति व अनुरूप नहीं बनगा भौर उममा यो प्रथ नहीं निकलेगा।

3 78) अनुवाद की व्यावहारिक समस्याए 2 'you will recollect' यो हिती की गली म अापको याद होगा' या तुम्हें याद हागा करना चाहिए। primitive accumulation पारिभाषिक गद है। वहत पारिभाषिक गाड गग्रह-मानविकी में इसका समानक 'पाद्य मचय दिया है जिस यहाँ अपना सक्त है। 4 as also को हिदी की प्रकृति के अनुमार तथा कर देना चाहिए । 5 यहाँ से नया वाक्य प्रारम्भ कर सकते है । 6 ultimately का हि दी की शली में 'अततोगत्वा लिख सकते है। 7 within the bosom लाक्षणिक प्रयोग है । इसका शदा अनुवाद निरथर होगा। इसके भार को ग्रहण करते हुए (पूजीवाद) के भीतर (विद्यमान होते हैं) लिस सरत है। encompass its doom-यह एक विशिष्ट प्रयोग है । हिदी की प्रति के अनुसार इसका अनुवाद यो करना चाहिए—(जा इसके) विनाश को चरम परिणति तक पहुचा दन हैं। इसम ultimately का भाव भी पा जाना है प्रत उसके लिए कोई और श द रखन का जररत नहीं । 9 day to day problems को हिदी की प्रकृति के अनुसार नित्य प्रति की समस्याए लिख सकते हैं। 10 immediate practical or the market place significance A एक विशेष्य si-nificance के साथ तीन विशेपण पाए हैं। इनमे पहले दो तो हि टी म प्रासानी से बदते जा सक्त है-ताबालिक यावहारिक (महत्त्व), परतु तीमरे का कोई ऐसा समानक मिलना कठिन है । अत हिदी मे वाक्य एसा बनाना होगा जिसम दो तरह के विशेषणा को अलग अलग खपाया जा सके। इस इस तरह लिसना उपयुक्त होगा--'(उसका) न तो कोई तात्कालिक या यावहारिक महत्त्व है न बाजार की दृष्टि से । 8 अनुवाद अब हम मूय के सीमात मिद्धात की और बात है। मूल्य का श्रम सिद्धात पूजीवाद की गति के नियमा की व्यारया करता है या कम म-बम उह समझने म सहायता देता है। तुम्हें याद होगा कि मल्य के श्रम सिद्धात से हम शोपण व नियम पूजी व पाद्य सचय के नियम तथा पूजी की सावयव रचना के नियम को समझन में सहायता मिली थी। इन नियमा मे अततोगत्वा हम उन प्रतविरोधा की कुजी मिल जाती है जो पूजीवादी व्यवस्था के भीतर विद्यमान होते है और जो उसके विनाश को चरम परिणति तक पहुचा देते हैं। परतु जब हम मायिक जीवन की नित्य प्रति की समस्याग्रा का हाथ म लत अभ्यासमाला उच्चस्तरीय 79 हैं ता मूल्य का श्रम मिद्धात छिन भिन्न हो जाता है। बाजार की समस्यामा को मूत्य थम सिद्धात की सहायता से नही सुलझाया जा सकता। यदि तुम्हारा पिता तुम्ह ननिक मदभुद्धि समझना है और परीक्षा उत्तीण वग्न म तुम्हारी सहायता के उद्देश्य स तुम्हार लिए शिक्षक लगान का फसला करता है सा मूल्प का श्रम सिद्धा त उस यह निणय करन म सहायता नही देगा कि उस शिक्षा का स्तिना पारिश्रमिक दिया जाए । अत मूल्य के श्रम सिद्धात का महत्त्व ममाजशास्त्राय दष्टि मे है। उसका न तो कोई तालिक या व्याव- हाग्वि महत्व है, न बाजार की दष्टि में । Exercise VI 9 A theory then generally held was that elephantiasis, a tropical disease like malaria, was caused by the night air of marshes Manson bugin his investigations and came to the conclusion that the presence in human blood of a parasite called the Glanias worm probably had some connexion with the disease But the discovery oplys raised a greater problem How did the filaria worm get into the blood ? The worm? could neither walk nor fly A possibility was that it was sucked up by something that fed upon human blood then Telcased again into the bodies of previously uninfected persons The endence pointed to the mosquito, which in biting a person infected with the germs of elephantiasis and then passing on to uninſected persons might well spread the disease To test this theory Manson examined the blood of some of his hciners at the hospital Finding one who was henvily infected he lodaced him to sleep la a room contajping mosquitoes and to let them bite hım 11 The next morning Manson collected the insects 12 gorged with the blood of the infected body He dissected1% them and examined them under a MICTOSCOPE They were all infected with Inc filaria worms Thus was it discovered that the mosquito was the carrier of the germ which caused clephan 113915 80/मनुवाद की व्यावहारिक समस्याएँ 1 सकेत यह पारिभापिर शद है। वहत पारिभापिद श द सग्रह-विनान व अनुसार इस लिए "नीपत या प्रयाग मर सकते हैं । परतु प्रवेल ग्लीपद पे प्रयोग गे सदम स्पष्ट नहीं होता। इसलिए 'लीपट रोग' लिया अधिक उपयुक्त होगा। 2 दिदी म इस प्रा का अनुवाद वाक्य के बीच में रमन स वाक्य जटिल हो जाएगा। इस पर वाक्य म रपकर अनुवाद की भाषा सहज हा जाती है। Tropical disense को उष्णव टिबधीय रोग लिखने पर भापा की स्वाभाविपता नष्ट होती है। मन इस प्रा का सहज अनुवाद होगा- यह मलेरिया जसा गेग था जो उपण प्रदेश म पाया जाता था। 3,4 य दोना पारिभाषिक गट है। उपयुक्त शावली व अनुसार इनके पर्याय मा 'परजीवी पौर फारिया हैं । 5 यहाँ only का अनुवाद 'वघल नहीं होगा। उपयुक्त अनुवाद होगा- "इममे तो और भी बडी ममस्या पैदा हो गई। 6 greater problem यो 'महत्तर समस्या' परने में अनुवाद कृत्रिम हो जाएगा। 'मोर भी बड़ी समस्या शदावली अधिक उपयुक्त है । 7 The worm यो 'यह पृमि लिसन पर अनुवाद अधिक स्पष्ट हागा । 8 'into the bodies वो "गरीरो म नी लिखेंगे। हिदी म गरीर' का प्रयोग एक्यचन म ही पराा चाहिए । इस सम्बे विरोपण का उपयुक्त हिदी समानर मिलना कठिन है । उपयुक्त पारिभापिय पदावली के मतगत nfected के लिए उपसृष्ट/सत्रात/ ममित पर निए हैं । परतु uninfected के लिए सक्रमण रहित' लिखना उपयुक्त होगा। 10 The endence म the वा अनुवाद पठिन है । इस 'प्रस्तुत साक्ष्य' लिखना उपयुक्त होगा। 11 इन वाफ्याशा का शटानुवाद बहुत उलझा हुआ होगा। मत इ है सुलभा कर यह अनुवाद कर सकते हैं.-'उसने उम मच्छरा वाले कमरे म सोने घे लिए तयार क्यिा तापि उस मच्छर काट सकें। 12 प्रस्तुत प्रश मे 'worm , 'rnsect' और germ तीन मिलते जुलते शद प्रयुक्त हुए हैं। इनम स्पष्ट भेद यरने लिए पारिभाषिक शदावली के अनुसार इनके लिए प्रमश कृमि कीट , और रोगाणु गादो का प्रयोग करना चाहिए। 13 पारिभाषित गदावली में अनुमार विच्छेदन किया । 9 अन्याममाता वीर/81 अनुवाद उन दिनों साधारणतु यह मिछान्न म्बीशार किया जाता था जिसनद रोग दलदना की पिठ वायु के कानपदा होता ह । मह मोरिया-त्रमा गा या जा उप्ण प्रणाम पाया जाता था। ममन न अपनी टान-चीन गुरु कर श्री और वह रम निषप पर पट्टचा कि मानव रम म पाग्या वृमि नामक परतीवी की उपस्थिति और म राग में कार्ट मुम्दर हा मुकना है। तु इस मान म ता और भी वटा समस्या पैदा हो गई। प्रारिया कृमि रक्नु म प्रविष्ट क्स होता ? यह कृमि न ता चल सकता है, न सकता है। एक मभावना यह थी कि इस ई ऐमी चाल चूमती है जा मनुष्य क रक्त पर निवाह करती है और फिर टम मक्रमश रग्नि व्यक्तियों क गरीर में साद देती है। प्रस्तुत मान्य के प्राधार पर मटर की पार ध्यान जाना था। वह 'नीपद रागाणा म समित व्यक्ति का काटकर य गगागु ममा रहित व्यक्तिया वे गरीर म पहुंचा सकता था और इस तरह गेग को पना मरना था। इस मिदात के परीयण के लिए मैमन ने अम्पताल म अपन वृट महाया के रक्त की जांच की। उनम म जा प्रत्यधिक मंत्रमाग ग्रस्त या, म रमन मच्छरों वाले कमरे म मोन के लिए तयार किया ताकि उम मच्छर काट सकें। अगली मुबह ममन न उन कीटा को कटठा दिया जो मरमा अम्न व्यक्ति का रक्त जी भरकर चूम चुदै य । उसन इनवा विच्छेदन दिया और मूमदी म उनकी जाच की। वे मव जीवित प्रारिया कृमियों से सक्रमित थे। इसम यह मोज हुई मिलीप- जिम रोगाणु के कारण पदा हाता है, उमका वाहा मष्टर है। अतिरिक्त अभ्यासमाला (म्वय अनुवाद करने के लिए) Exercise 1 Fortunately for me I was brought up in a family where literature, music and art had become instinctive My brothers and cousirs! lured in the freedom of ideas and most of them had natural artistic powers Nourished in these 82 / अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं surroundings, I began to think early and to dream and to put my thoughts into expression In religion and social ideals our family was free from all convention being ostracized by society owing to our secession from orthodox beliefs and customs This made us fearless in our freedom of mind and we tried experiments in all departments of life This was the education I had in my early days, freedom and joy in the exercise of my mental and artistic faculties And because this made my mind fully alive to grow in its natural environment of nutrition, therefore the grinding of the school system became so extremely intolerable to me सकेत brothers and cousins का 'भाई वधु लिख सकत हैं। 2 यहा 'वातावरण शब्द जोडना पडेगा-'वचारिक रवत त्रता के वातावरण मे रहते थे। 3 यही experiments के लिए 'पए-नए प्रयोग' लिखना उपयुक्त होगा। 4 यहा नम बदलकर 'नसगिक पापण का वातावरण' लिखना होगा । 5 इम अश की “यारया कर दने म अनुवाद म जान पा जाएगी-स्कूली जीवन की चक्की म पिसना (मेरे लिए असह्य हो गया था)। 1 Exercise II I did not see Lawrence wbile all thi was going on and indeed when so many things were crashing in the Post War world the treatment of the Arabs did not seem exceptional But when from time to time my mind turned to the subject I realized how intense his emotions must be He simply did not know what to do He turned this way and that in desperation, and in disgust of life in his published writings he has declared that all personal ambition had died within him before he entered Damascus in triumph in the closing phase of the War 2 But I am sure that the ordeal of watching the helplessness of bis Arab friends to whom he had pledged hts word, and प्रम्यासमाला उच्चस्तरीय / 83 as he conceived at the word of Britam, maltreated in this manner, must have been the main cause which decided his eventual renunciation of all power in great affairs His highly wrought nature had been subjected to the most extraordinary strains during that War, but then his spirit had sustained it Now it was the spirit that was injured सकेत 1 Damascus या हिंदी रूपातर दमिश्क' होगा। पूर अश को पालकारिक भापा म इस तरह यक्त कर सरत हैं--'जब उसने विजय-दु दुभि बजाते हुए दमिश्क मे प्रवेश किया उससे पहले ही उसके भीतर की वयक्तिक महत्त्वाकाक्षा दम तोड चुकी थी।' 2 युद्ध के अतिम दौर में। 3 पत्रणा। अत्यात परिश्रमी स्वभाव । 4 Exercise It is said that Shah Jahan, in consultation with his experts saw drawings of all the chief buildings of the world-a state ment not to be taken too literallyl—and that when the design was settled a model of it was mde in wood Veroneo appears to have been present at these consultations and he declared afterwards that he had finished the design which met with the Padshah's approval The silence of the detailed native accounts on this point and of all contemporary writers besides Father Manrique would have little significance were it not for the silence of the Taj itself It must be inconceivable to any art critic acquainted with the history of the Indian building craft that Soah Jahan if he had so much faith in a European as an architect, would only have used him 'o inst ruct his Asiatic master builders in designing a monument essentially Fastern 18 its whole conception or that Veroneo himself would bave submitted a design of this character and 84/ पनुवाद की व्यावहारिक समस्याएँ Icft no mark of his European mentality and craft experience upon the building itself 1 सस्त FTRI CT 497 77 777 at Flare TITT ATT TIETTI पारमी बारगाह या तिप्यतरण । हिदी म बादशाह अधिर प्ररित है। मन यही रुपान्तर यहाँ उपयुसरा होगा। 2 Fuercise IV India is a very old country with a great past But she is a new country' also with new urges and desires Since August 1947 she has been in a position to pursue a foreign policy of her own Shes limited by the realities of the situation which we could nt ignore or overcom- But even so she could not forget th- lesson of her great leader She has tried to adapt howerer imperfectly 3 theory to reality in so far as she could in the family of nations she was a newcomer and could not infiu-ncc them greatly to begin with But shc had a certain advantage She had great potential resources that could no doubt increas her posar and influence A greater advan tage lay in the fact that she was not fettered by the past by old cncmies or old ties by historic clums or traditional rivalrics Eron against her former rulers there was no bitter ness lefe Thus India come into the family of nations with no prejudices or crmifies ready to sclcome and be welcomed Inevitably she had to consider her foreign policy in terms of enlightened self interest but at the same time she brought to At a touch of her idealism Thus she has tried to combine Idealism rith national interest ara TTI TZ 1 मपाप पिनिगगीमामा पा। 2 अभ्यासमानो उच्चस्तरीय / 85 3 'चाहे उसका यह प्रयत्न कितना ही अधूरा क्या न रह गया हो' (यह अश वाक्य के अत मे आना चाहिए)। 4 'वह अतीत की बडियो स नही जक्डा था । 5 'उसके मन मे कोई कटुता नही रह गई थी।' Exercise V History is and must always be no more than an account of beginnings We can venture to prophesy that the next chapters to be written will tell though perhaps with long inter ludes of setback and disaster of the final achievement of world wide political and social unity But when that is attained it will mean no resting stage, nor even a breathing stage,” before the development of a new struggle and of new and vaster efforts Men will unify only to intensify the search for knowledge and power and live as ever for new occasions Animal and vegetable life," the obscure processes of psychology, the intimate structure of matter and the interior of our earth will yield their secrets and endow their conqueror Life begins perpetually Gathered together at last under the leadership of man the student teacher of the universe, unified, disci plined, armed with the secret powers of the atom and with knowledge as yet beyond dreaming life for every thing to be born afresh, for ever young and eager will presently stand upon this earth as upon a footstool, and stretch out its realm amidst the stars सकेत इसका अथ गति मे विराम नही होगा । 2 यह विश्राम की अवस्था भी नहीं होगी। 3 एक्ता के मूत्र में (वेवल इमलिए) वफेंगे। 4 जीब-जतु और वनस्पति-जगन । 5 अपने विजेता को मालामाल कर देंगे।

86 / अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं Exercise VI Toynbee speaks of three different methods of viewing and presenting the objects of our thought, and among them, the phenomena of human life (1) the ascertainment and recor ding of facts', (2) the use of general laws to elucidate the facts ascertained through a comparative study of them (3) the artistic re-creation of the facts in the form of fiction In English the word 'fiction" has two meanings-- something invented or imagined and a literary work with imaginary characters We have seen how Toynbee understands the first two methods so that the third is by no means unexpected, it is more in the nature of an incvitable comple ment . Exercise VII In the highest sense, and from the point of view of truth, religion is an intensely individual issue Every man and every woman must find the answer in his or her own heart But there is a national question also And a national question may be decmed to be always a question of high exp dıency, though not a question of conviction or conscence We must hold together And we connot hold together only on the strength of police regulations An internal regulator of conduct 15 absolutely necessary Will men and women be good and wise without the aid of religion ic without an attempt in their lives to practise the presence of God? Have we become sell sufficient by reason of scientific knowledge and become capable of maintaining character without the sanctions and discipline of some religion or another? sercise 111 The class character of education is most marked in the surnal and growth of the Public Schools Their history and the character they assumed in the nireteenth century haie अभ्यासमाला उच्चस्तरीय /87 often been described and need no further discussion here The classes thus welded together were by the same process divided and continue to be divided from the rest of the nation brought up under a different system In recent decades the public schools have shown great vitality and resilience There is no doubt about their efficiency, but there is increasing resentment against the part played by wealth in their mode of recruitment and their tendency to perpetuate and even sharpen existing class divisions They still hold a key position in the selection of those who fill positions of influence over 1 very wide field, and this is the more striking as between them the independent schools take charge of only about 7 per cent of boys in secondary schools and less than 1 per cent of twenty of the more prominent among those represented at the Headmasters Conference are considered Exercise IX I would instance first, the growing tendency to Specialism which has become a marked feature of University work, both here and in England, during the past fifty or sixty years It is much more common than it used to be for a student to give exclusive, or almost exclusive devotion to one subject, or group of subjects and to be content as regards the rest with the bare minimum of academic requirement The change is, of course largely due to the greater thoroughness with which each subject is taught and learnt, to the enoranous extension in the area of the fields of research, which are still called by the old names--classics matliematics, science philosophy to the higher standard both of information and of exactness, which has naturally and legitmately been set up All this is to the good in so far as it tends to promote erudition and accuracy at the expense of that which is merely superficial and small But the advantage is purchased at an excessive price if it is gained by the scarifice of width of range and 88 / अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं catholicity of interest Pedentry is on the whole, more useful and less offensive than Specialism but a University which is content to perform the office of a factory of specialists is losing sight of some of its highest functions Exercise X What then, is punishment, and how far can it be ethi cally justified. For developed legal systems puoishment may be defined as the authoritative infliction of pain or other deprivation on a person for (or because of) an offence which he has committed Punishment thus inflicted is a deliberate act based on an impartial examination of the relevant facts by a competent authority which issued a verdict and has the means of enforcing it Thus 'nature does not punish and the pajoful consequences, physical or moral that follow naturally' from a wrong act do not constitute punishment Legal and moral offences do not coincide completely but in general serious crimes are acts which are condumned by the moral sense of tbe community and from which every man knows or is presumed to know he ought to refrain Further more the punishment is inflicted for an offence and this in advanced legal systems is taken as implying that the offence was committed with intent and not involuntary Intent generally is taken to mean a specific intention to do a parti cular act prohibited by law Sometimes however though this disputed the notion of intept has been extended to cover consequences not intended as such but likely to follow from the act In other cases again lack of direct intention does not exempt from liability Exercise 11 This image in the mind s eye of the artist is in an almost literal sense, a link between his temperament and his as yet unpainted picture Honcier ague the mental image may be अभ्यासमाला उच्चस्तरीय / 89 It isolates, in visual termis, the essence of what he is going to communicate If he were a composer, the same sort of thing would happen in his minds ear That image is the artist's Vision, the intangible equivalent of his style, the halfway house between his temperament and the final work of art It is the flavour of that vis100 that determines the flavour of his style For example, Raphaels vision of a Last Supper would be remarkably similar in flavour to his vision of a kitchen table, and Raphael's vision of, say, an artist at work would bear no resemblance at all to the same subject as envisaged by Picasso Exercise X11 We often speak of the imagination as though it were a brilliant faculty of lying, on the contrary, it is a faculty by which not only do we see and hear things that the eye lannot see or the car hear but which enables the eye to see and the ear to hear, things that they did not see os hear before To scorn the imagination is to be a blind man delib rately refusing the miracle of sight It is imagination that cleanses the scales from our eyes and awakens our senses to the real things that surround us We cannot fal in love without imagination or become good citizens conscious of our citizen ship or enjoy the song of a robin or the beauty of a rose Friendship patriotism love of father, mother and children, love of nature-none of these can exist without imagination Where there is no imagination there is cruelty selfishness, death We can see the results of the lack of imagination in the cruelty with which nation treats nation and class treats class When Christ announced that all men were His brothers He taught us to look on other people imaginatively and not as though they were ciphers in a statistical abstract To treat a child without imagination is to treat it without love 90/ प्रवाद की यावहारिक समस्याएं Exercise XIII Every language is also a special way of looking at the world and interpreting experience Concealed in the structure of cach different language are 1 whole set of unconscious assumptions about the world and life in it The anthropolo gical linguist has come to realize that the general ideas one has about what happens in the world outside oneself are not altogether 'given by external events Rather, up to a point one sees and hears what the grammatical system of one's language has made one sensitive to has trained one to look for in experience This bias is the more insidious because every one is so unconscious of his native language as a system To one brought up to speak a certain language it is part of cry nature of things remaining always in the class of background phenomena It is as natural that experience should be organs zed and interpreted in these language defined classes as it is that the seasons change In fact the name view is that anyone who thinks in any other way is unnatural or stupid or even vicious—and most certainly illogical Exercise YIV If it were possible for our ancestors to return to carth seeing all the things which have come to pass in the last fifty years or so there would of course be many things which would amaze them Indeed almost everything would appear to the people of fifty or sixty years ago as completely mira culous But the most surprising thing of all and it is some thing which many of us nowadays tend to take completely for granted -- is the fact that inen can fly The businessmann who has to visit his New York office from London now takes it for granted that he can book a seat in a trans Atlantic aero plane and go off to the USA doing his work there, and getting back to his London office again in less time than a one way sea passage even in a modern liner will occupy अभ्यासमाला उच्चस्तरीय /91 Exercise XV Then just about four hundred years ago, Copernicus a Polish ecclesiastic wrote a book of tremendous importance He pointed out that the complicated motions of the sun and the planets across the sky could all be very simply explained by supposing that the sun stood still, while the earth and the planets revolved around it While these ideas were still being discussed Galileo, a professor in the University of Padua, made a small telescope with his own hands and convinced himself—and also showed to all the world--that things were as Copernicus said the sun did not revolve round the earth, but the earth also the planets revolved around the sun In this way the earth had to abandon its proud claim to be the centre of the universe-- to become an ordinary planet, a mere fragment of matter revolving round a much larger sun And three centuries of astronomical study have reduced its importance still further If we look out on a clear moonless night, we shall see the Milky Way stretching across the sky looking like a faint pearly ribbon We know now that the Milky Way is a vast belt of distant stars each star a sun more or less like our own Most of its stars are too far away to be counted even in a large telescope but-strange thought it may seem it is possible to weigh the lot We can do this by measuring the gravitational force with which they attract our sun 4 विशिष्ट अभिव्यक्तियो के अनुवाद Famous city, famous soldier अंग्रजी म 'famous' विपण का प्रयोग crty और soldier दाना व साथ चलता है । हिदी में हम प्रसिद्ध नगर तो लिख सकते हैं, परतु प्रसिद्ध सनिक उतना उपयुक्त नहीं । 'Famous soldier का अनुवाद याम्बी सनिक' हाना चाहिए। पर तु यशस्वी पर नगर के साथ नही पा सकता। यदि दानो जगह एक ही विशेषण का प्रयोग करना हो तो प्रमश विस्यात नगर पौर विख्यात सनिक लिख सकते हैं। Peaceful person peaceful solution अंग्रेजी मे peaceful विरूपण person और solution दोना के साथ मा सकता है। पर तु हिदी अनुवाद म दोना जगह एक ही विगपण प्रयुक्त नहीं होगा । Peaceful person का हम गातिप्रिय व्यक्ति लिखेंग 'Peaceful solution' को शातिपूण समाधान ।' इसी तरह Just man' और Just decision को मा यायप्रिय/ यायपरायण/यायनिष्ठ यक्ति' और 'याय सम्मत/यायसगत निणय लिखना होगा। Honorary secretary, Honorary degree Honorary का अथ है एसी वस्तु या काय जिस स्वीकार करने से सम्मान या गौरव बटे । इसका अनुवाद सदभ का ध्यान में रखकर करना होगा। Honorary Secretary के लिए अवैतनिक सचिव प्रयुक्त होता है अर्थात ऐसा सचिव जो वतन नहीं लेता। इसम honorary Tर का पूरा अथ नहीं पाता परतु प्रचलित हाने के कारण इसे अपना सकते हैं। दूसरी पार, honorary विशिष्ट अभिव्यक्तिया के अनुवाद / 93 degree के लिए 'मानाथ उपाधि का प्रयोग करते हैं जो वि उपयुक्त है। 'सचिव के साथ 'मानाय' विशेषण का प्रयाग नहीं कर सकते-यह वस्तुप्रा के लिए प्रयुक्त होता है, व्यक्तिया के लिए नहीं । Honorary Secretary अनुवाद में एक विकल्प 'मानसवी सचिव है, परतु वह सुान म उतना गरिमा पूर्ण नहीं लगता। Confidential letter, Conhdential secretary Confidental वा अथ है विश्वस्त या विश्वासपात्र । अग्रेजी म यह विशेषण वस्तु के साथ भी प्रयुक्त होता है, व्यक्ति के साथ भी। परतु हिदी मे इनके लिए अलग अलग शब्द रखन हाग 1 Confidential letter ऐसा पत्र है जिस केवल विश्वस्त व्यक्ति को दिया सक्त हैं भयथा उसे छिपाकर रखा जाता है। प्रत इस 'गापनीय पत्र' बना उपयुक्त होगा। Confidential Secretary एसा सचिव है जिम पर पूरा-पूरा विश्वास दिया जा सके, अर्थात् जो भीतर की बात बाहर न ल जाए। इसके लिए 'अतरग सचिव गब्द सम्मत है। Beware of confidence tricksters डाघरा इत्यादि म इस चेतावनी का यह अनुवाद देखने को मिलता है- 'अतरग चालबाजो स सावधान । अतरग ऐसे व्यक्ति को कहग जिसके साथ बहुन निक्ट का सम्बध या मेलजोल हो । अत अतरग मित्र, अतरग मचिव तो ठीक है परन्तु अतरग चालबाज क्या हुए ? चूदि Confidential secretary के लिए अतरग सचिव श द सम्मत है, इसलिए किसी ने पांख मीचार Confidence trickster के लिए 'अतरग चालबाज' रख दिया। केवल 'चालबाज़ से ही यह भाव यक्त हो जाता है। प्रत सही अनुवाद हागा- 'चालबाजों स सावधान।' De Facto de jure recognition इनके लिए वहन पारिभापित शब्द सग्रह-~मानविकी (के द्रीय हिदी निदेशालय नई दिल्ली) अतगत क्रमा तथ्यत वस्तुत मा यता पौर 'विषित मा यता' शब्द दिए हैं । हिदी म तय्यत वस्तुत , विधित इत्यादि शादा का प्रयोग विधा विशपण रूप म तो हाता है, पर तु विशेपण के रूप म नही होता । प्रत यहां ये शब्द ग्राह्य नहीं । उपयुक्त शब्दावली होगी- 'तथ्यपरक तथ्यसम्मत मा यता और 'विधिपरक विधिसम्मत मायता।' .

94/अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं Challenging task इसका हिंदी अनुवाद चुनौतीपूण वाय रखा गया है। विशेपणा व अनुवाद म लम्बे लम्बे नये श द गढ़ना उपयुक्त नही । प्रचलिन प्रयोगो म सवम निकट अथ देने वाले पद मिल सकते हैं। उपयुक्त अनुवाद हागा- विक्ट काय । Empirical इसके लिए हिदी म 'अनुभवमूलक गट प्रचलित है । परन्तु कुछ लोगा इमे प्रानुभाविव लिखना शुरू कर दिया। यह गलत तो नही परतु, अनुभवमूलर' प्रधिर सुगम है क्योरि नसम 'अनुभन' शद मीधे-सीधे माया है, विकृत नही हुप्रा । इधर केद्रीय हिंदी निदेशालय के बह्त पारिभापिक द सग्रह---- मानविकी म इसके लिए 'इद्रियानुभवाश्रित गन्द गटा गया है । यह पद इतना भारीभरकम है वि इसका चलना मुश्किल है। इसम अनुभव' शद दोना पोर स विकृत हो गया है । जस अनुभवमूलब जमा सुगम और साथ गद मौजूद है तब इद्रियामुवाथित जैसा लचर पर क्या अपनाया जाए? Material and moral support समाचारपत्रा रडियो इत्यादि म इम अभिव्यक्ति का अनुवाद भौतिक पोर नतिक समथन किया जाता है। यह सही नही । 'नतिक समथन' तो साथव' है परत भौतिक समथन का कोई प्रथ नहीं निकलता । यहाँ हमने Support के लिए समथन गद चन लिया फिर material तथा moral वे लिए क्रमश भौतिक' और 'नतिक विपण ज- दिय । इमसे बात नहीं बनी । वास्तव में support के दो अथ हैं- सहायता और समथन । अग्रेजी में एक ही विशेष्य के साथ दोना विशेषण चल गए परतु हिदी म नही चलेंगे। यदि हम विरोप्य की दोनो प्रथ छायानो का ध्यान रखें तो सही अनुवाद होगा-'भौतिक सहायता और नतिक समथन या ठोस सहायता और नतिक समथन । देखा जाए तो यह भी कुछ विम्तत हो गया है। तीसरा विकल्प है सहायता और समथन क्योकि इसस पूरा प्रथ निकल पाता है । यह ऐसा उदाहरण है जिसमे अग्रेजी के एक विशेष्य के साथ दो विशेषण लगे हैं परतु हिदी म या तो दो विशेष्यो और दो विशेषणो या प्रयोग करना होगा या क्वल दो विरोप्या का प्रयोग वरना होगा और विगपणा की छट्टी कर देनी हागी। एसे अवसरो पर अनुवादक से विशेष सूम बम की प्राशा की जाती है। Watchdog committee Watchdog वो प्रहरी कुत्ता कह सकते हैं । परत Watchdog com विशिष्ट अभिव्यक्निया में अनुवाद 195 mittee मे इमका लाणिक प्रयोग किया गया है। जुत्ता हिंदी म तिरस्वारसूचक है । अत Watchdog committee को 'प्रहरी समिति लिखना उपयुक्त होगा। Short tender notice इसके लिए समाचारपना म लघु निविदा सूचना' लिखा देखा गया है, जबकि निविदा लाग्वा रपय का सामान खरीदन की थी। Short के लिए आँख मीवर राघु का प्रयोग नहीं कर सकते। यहा 'Short notice से अभिप्राय है । प्रत सही अनुवाद होगा 'अल्पकालीन निविदा सूचना ।' Undersigned अनेर मरवारी सूचनानी म अय पुष्प का प्रयोग करने के लिए सबद्ध अधिकारी अपन सदम म 'undersigned शब्द का प्रयोग परत हैं। हिंदी म इसके लिए अधोहस्ताक्षरकर्ता और अधोहस्नापरी का प्रयोग किया जा रहा है । यह एकदम लचर है । इमका अनुवाद पठिन अवश्य है, परनु इसका मतलब यह नहीं कि उटपटाग श द गड लिए जाएँ। सवथा उपयुक्त शब्द के अभाव म इसके लिए 'प्रस्तुत हस्ताक्षरकर्ता लिखना सगत होगा। Permissive society Permissive का मवध permission अर्थात अनुमति या छट स है । प्रत prmissive society में लागा को कुछ छूट रहती है--विशेषत सक्स के मामल म । इस लिए 'अनुमतिमूलक समाज' बना सक्त हैं परतु वह कोरा पदानुनाद लगता है। हिदी की अभिव्यजना दाक्ति को ध्यान म रखते हुए इसके लिए 'वजनाहीन समाज' निर्धारित किया गया है। वहत पारिभाषिक शद सग्रह-मानविकीम भी यही दिया है। यह सवथा उपयुक्त है। निषधात्मक स्पान्तर के आधार पर सटीक श द रिर्माण का यह अच्टा उदाहरण है। Solid state television Solid State के लिए हिदी म ठोमावस्था प्रयुक्त हाता है, जैस Soltd State Physics Liboratory का हिदी नाम ठोसावस्था भौतिकी प्रयोगगाला है। परतु Solid state television का हिनी म ठोसपिस्था दूरदान बन म उमवी सारी गरिमा नष्ट हो जाएगी। प्रत उम 'सालिड स्टट दूरदान' कहना ही उपयुक्त होगा।

96/अनुवार को व्यावहारिक समस्याएं Urban Life कई लाग Urban life का अनुवाद 'नगरीय जीवन परत हैं क्यारि urban गब्द विशेपण है ! पर तु हिन्दी की प्रकृति के अनुमार 'नगर जीवन लिसना उपयुक्त है । इसी तरह Administrative service वो भी 'प्रगामवीय सवा या 'प्रशासनिक सेवा के बजाय 'प्रशासन सवा ही लिखना चाहिए । School ahead परिवहन के सक्ता म इसका अनुवाद स्यूल भाग है लिखा जाता है । यह श्रम सही नहीं। इससे ऐसा लगता है जस पोई 'स्कूल वो ढंढ़ रहा हो और हम उसे उसकी स्थिति बता रहे हो । वास्तव म हम वाहन चालका को यह बताना चाहत है कि वे अपनी गति धीमी कर लें और प्राग बटन में सावधानी बरतें, मयादि प्राग बच्चा का स्वल है। प्रत सही भावाद होगा-- आगे स्कूल है। Refugee women centre Refugee के लिए हिंदी में शरणार्थी र प्रचलित है। अत Refugee women centre के लिए शरणार्थी महिला केद्र' सही था । इधर शरणार्थिया के साहस और प्रात्म निमरता की प्रशसा करत हुए उह 'पुरपार्थी कहा जाने लगा। इस पर किसी ने Refugee women centre का अनुवाद 'पुस्पार्थी महिला केद्र कर दिया, मानो य महिलाएं कोई पुरप प्राप्त करने की इच्छुक हो । सही सदभ से कटकर शब्द क्तिने वतुके हो जाते है Black money, black market Black money की सवपना हिनी म नही थी। इसका शब्दानुवाद 'काला धन हिंदी में प्रचलित हा गया है । यही उपयुक्त है। दूसरी ओर, Black mar ket का शदानुवाद याना बाजार भी बताया गया। परतु उसके लिए हिदी म अधिक उपयुक्त । द 'चोर बाजार और 'चोर बाजारी मौजूद हैं जो सटीक भी है । उहें वरीयता देना उपयुक्त होगा। वस 'काला विशेषण हिदी म भी तिरस्कारसूचक है 'काले कारनामे 'काली करतूत इत्यादि इसके उदाहरण हैं। Readymade garments, shoes Readymade वा हिती समानक है तयारशुदा जस-Readymade goods तयारसुदामाल ! परतु विशेष वस्तुग्रो वे सदभ मे भिन भिन विशेषणा का प्रयोग करते है और यह उपयुक्त भी है। अत Readymade garments विशिष्ट अभिव्यक्तिया के अनुवाद 197 को सिले सिलाए कपडे' कहा जाता है, और Readymade shoes को 'बने बनाए जूत। Highly inflammable पट्रोल की गाडिया पर यह चेतावनी लिखी रहती है ताकि उहे आग से दूर रखा जाए। हिटी म लिखा जाता है-- शीघ्र प्रज्वलित पदाथ । यह सही हो सकता है। परन्तु इसे कौन समझेगा? जिन लोगो के लिए यह चेतावनी है उहें मरन गदा मे सदेश देना चाहिए । अत इन गाडियो पर यह लिखना उपयुक्त होगा -- एक्दम आग पकडता है। Cumulative Joss बृहत पारिभाषिक शब्द सग्रह--मानविकी के प्रतगत Cumulative loss या हिंदी समानव 'सचित हानि दिया है । 'सचित' श द का प्रयोग 'धन', 'लाभ' या 'गुण' के सदम में तो उपयुक्त है, पर तु हानि भी सचित हो सकती है- यह समझना मुश्किल है । प्रस्तुत सदभ म कोई नया शब्द गढ सकते थे, या अपेक्षा कृत अपरिचित शब्द रख सकते थे, जस कि 'उपचित हानि' । इसी के समानातर cumulative profit के लिए 'उपचित लाभ का प्रयाग कर सक्त हैं। परतु 'सचित जस सुपरिचित गन्द को हानि के सदभ में लाना उपयुक्त नहीं। Substantial error, Sabstantial loss राजभाषा (विधायी) आयोग द्वारा प्रकाशित विधि शब्दावली म उपर्युक्त दादा के हिदी समान प्रमश 'सारवान भूल' और 'सारवान हानि' दिए हैं। क्या वोई भूल या हानि भी सारवान हो सकती है ? ये ऐसे उदाहरण हैं जिनम विसी विरोपण का एक समानव माख मीचकर गलत सदों मे जड दिया गया है। साधारण भाषा में इनके लिए क्रम बहुत बड़ी भूल', बहुत बड़ी हानि या भारी भूल , भारी हानि या सचमुच की भूल , सचमुच की हानि' रख सकते हैं। परन्तु पारिभापिर अप मे मा 'तात्त्विक भूल' और 'तात्विक हानि अधिर निरापद होंगे। Actua} will, Real Mill General will यह शम्दावली पासीसी विचारव स्सो की देन है। इसके साथ जटिल मकरूपना जुही हैं। प्रत इसका अनुवाद वठिनाई उपस्थित करता है | Actual मोर Real समानाथर हैं जिह हम वास्तविक या ययाय कहत हैं। परतु रूसो के चितन के सदम म Actual will हमारी ऐसी इच्छा है जिसमे हम अपने मारवालिय स्वाध के बारे में सोचत है, Real will मे मतगत हम यथाव हित R 98 / अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं है पर विचार करत है जा पूरे समाज व हित के साथ जग रहता । General will ममा सार सरम्या की Real will वा समुच्चय है। बरत पारिभापित दस ग्रह-मानसिरी के प्रतगत Actua will Real will और G neral will fएमा स्वायपरवदच्छा प्रादा इच्छा और जन इच्छा पर दिए। इनमें 'जन इच्छा तो उपयुक्त है परनु पहन दोना शर भूल गन्नावली स वतुत दूर हर गए है ! Actual will और Real will का अधिक साथ प्रवाद गामयिक (या तारातिर) इच्छा' और 'तात्त्विक इच्छा होगा। A man who knows price of everything but value of nothing Value और Price साधारणत पर्याय मान जात हैं। इनके लिए हिदा म प्रमा कीमत और मूल्य रस सवते हैं हालाकि यह बनाना मुश्विल है विविसी पितार की कीमत और मूल्य म अतर कम करेंग? प्रस्तुत वाक्य के अनुवाद में भी वीमन और 'मूल्य शदा का प्रयोग कर गत हैं परतु Value के लिए अधिक साथव पट होगा 'मूत्यवत्ता । मत उपयुक्त मनुवाद हागा- ऐसा प्रारमी जो हर चीज की कीमत तो जानता है पर विमी चीज़ वी मूल्य वत्ता को नही समझता। When freedom is menaced or justice is threatened यहाँ menaced और threatened पर्याय के म्प म पाए हैं। हिंदी म भी इनो समाना तर पर्याय ढटन हाग हालांकि उनके प्रयाँ म वोई मूक्ष्म अतर होना जरूरी नहीं । अत इसरा अनुवाद या कर मात ह- जहाँ स्वत त्रता लिए सतरा पदा हो जाए या याय पर पाच पाने लगे। Likely to win Bound to min इन अभियक्तियो म एक केवल सभावना का सकेन देती है दूसरी निश्चित स भावना का । प्रत इनवे अनुवाद इस तरह हागे India is likely to win भारत की विजय सभावित है। India is bound to win भारत की विजय प्रवन्यभावी है। Open to criticism Liable to criticism! Subject to criticism ऐसी अभिव्यक्तियो का अनुवाद कभी भी कठिन होता है। इनके लिए कोई बने बनाए समानर नहीं सुभाए जा सक्त | The conduct of minister will be open to criticism -इसका अनुवार ऐसे करेंगे- मत्री व पाचरण विशिष्ट अभिव्यक्तिया के अनुवाद 199 मालोचना की जा सकेगी' (या की जा सकती है)। इसम देवल राभावना की बात है, अर्थात यदि कोई उसकी बातोपना करना चाहे तो कर साता है । दूसरी ओर, जब हम कहते हैं His action will be liable to criticism तो दसमा अनुवाद हागा-'उसकी 'कायवाही की पानाचना अवश्य होगी।' 'Our action will be subject to criticism के लिए प्रचलित दौली में यह लिख सकते हैं। 'हमारी वायवाही ग्रालोचना का विषय होगी' या 'ग्रालाचना का लक्ष्य बनगी। Leisure, Leisure class Leisure के लिए बहत पारिभाषिक शत मग्रह-मानविकी म कोई गन्द नहीं दिया है हालापि अरस्तू के चितन के सदम मे यह एक पारिभाषिक शन्द है। Leisure class के लिए वहा 'फुरसती वग/सावयाश वग' दिया है। Leisure class की मकल्पना वैबलिन चितन स जुटी है। देखना यह है कि इनके उपयुक्त समानक क्या हान चाहिए । प्रस्तुन सरम में Leisure के लिए 'फुरमत' या 'अवकाश र उपयुक्त नहीं होंगे। यहां यह व्यस्तता या काम का विपर्याय है, प्रत इसे 'नाराम लिखना उपयुक्त होगा । 'पाराम म 'काम न करने' और 'सुस सुविधा दोना या भाव है जो Leisure की मकल्पना को पयाप्त साथक वरता है । अरस्तू के विचार से दाशनिक चितन इसी Leisure की उपलघि हाता है। इसी क्रम म Lessure class का 'प्रारामतलव वग' लिखना उपयुक्त होगा। यह गद वनित की साल्पना को भी सायब करता है जिसके अनुसार यह वग अपने आपको श्रम के दायित्व में मुक्त करपे विलासिता का जीवन बिताता है। पुरसती ग हिदी म न तो प्रयुक्त है न उपयुक्त है। सावकारी वा भी कोई निश्चित प्रथ नती निक्लता क्यापि यहाँ Retired तक को अवकाश प्राप्त लिखा जाता है। Usefulness, Utility सामाय भाषा म ये दोना शब्द एक ही प्रथ के द्योतक हैं- उपयोगिता। परन्तु अथशास्त्र में इन दोनो मे प्रतर है। बहत पारिभाषिक शब्द सग्रह- मानविकी म इनवे लिए पथक पथक शब्द निधारित किए गए हैं Usefulness तुष्टिगुण Uulhty उपयोगिता इनवे मूल भानर को स्पट करने के लिए इनकी परिभाषा पर विचार पर लेना उपयुक्त होगा। Usefulness वा अथ है किसी वस्तु का अपन आपमें 100/ अनुवाद की यावहारिक समस्याएं उपयागी होना, प्रत रोटी कपडा, माइकल फान-सवमे यह गुण पाया जाता है । दूसरी पोर Utulity का अर्थ है, हमारी प्रावश्यक्ता के सदभ मे किसी वस्तु का उपयोगी होना। यह Usefulness स भिन है। उदाहरण के लिए दो एक सी साइक्लो की Usefulness बराबर होगी। पर यदि किमी के पाम एक साइक्ल (सही हालत म) पहल स मौजूद है तो दूसरी की उपयोगिता कम हो जाएगी। प्रत प्रस्तुत सदम म usefulness को निरपक्ष उपयोगिता' और utility को 'सापेक्ष उपयोगिता कह सक्त हैं। परतु ये श द कुछ बडे हा जाएगे । फिर निरपेक्ष और 'सापेक्ष विशेषणा का प्रयोग दही होना चाहिए जहाँ इन दोना सकल्पनामा म भेद करना आवश्यक हो । जहा अकेला Uuly पाए, वहा उसके साथ 'सापक्ष लगाने से भ्रम पदा होगा। फिर Utilitarianism के लिए 'उपयोगितावाद लिखा जाता है । अत utility के लिए उपयोगिता ही उपयुक्त है। रह गइ समस्या usefulness की। इसके लिए 'तुष्टिगुण पर पुनर्विचार जरूरी है । 'तुष्टिगुण (यदि ऐसा श द बनाना ही हो तो) प्रात्मपरक होना चाहिए जववि usefulness वस्तुपरस होती है। फिर, 'तुष्टिगुण और 'उपयोगिता में वसा सीधा सम्बर भी लक्षित नहीं होता जसा usefulness का और utility से लक्षित होता है। प्रत प्रस्तुत सदम म usefulness के लिए उपयोग या उपादेयता शदावली अपनानी चाहिए । सामा य भाषा म इन श दो म वसा भतर स्पष्ट नही है । परतु पारिभाषिक सदम में अनुमोदित मौर प्रयुक्त होने पर यह अन्तर उसी तरह हो जाएगा जस utility मोर usefulness के सदम में स्थिर हो गया है। Bureaucracy Bureaucrat Bureaucracy के लिए अनेक शद प्रचलित हैं-अधिकारितत्र नौवर माही दपतरशाही । ये तीनो सहो हैं हालांकि इनम से क्मिी का चयन सदभ का ध्यान में रखकर करना होगा। परतु Bureaucrat के समान के लिए पहने दाना शन्दा स सहायता लेना सम्भव नही। इस वेवन अधिकारी नहीं कह सक्त। नौकरशाह भी उपयुक्त नहीं क्योंकि उसका कोई स्पष्ट अथ नहीं निकलता। 'दफ्तरवाह गट उपयुक्त है क्योकि वह दफ्तर के माध्यम से शासन की शक्तियों का प्रयोग करता है। प्रत जहाँ अंग्रेजी म bureaucracy और bureaucrat दोनागदा का प्रयोग हो, वहां हिटीम दफ्तरवाही और दफ्तरशाह का प्रयोग उपयुक्त होगा। The foll and their culture Folk का भय लोग या विशेष जन समूह है। Folk song folk lore, विशिष्ट अभिव्यक्तियों के अनुवाद /101 folk culture इत्यादि के लिए हिदी मे क्रमश लोकगीत, लोक्वार्ता, लोक सस्कृति श द स्वीकृत हैं। समस्त पदो मे, अथात जहां समास का प्रयोग किया गया हो, folk के लिए 'लो' शब्द सही है । परन्तु मला 'लोक' शब्द folk का प्रथ नहीं देता। प्रत the folk and their culture लिए 'लोक और उनकी सस्कृति लिखना उपयुक्त नही । सही अनुवाद होगा लोग और उनकी संस्कृति' या 'जन समूह मोर उनकी सस्कृति ।' Eligible for goveromeat accommodation इसका यह अनुवाद देखा गया है- सरकारी प्रावास के लिए पात्र है।' कृपापात्र, प्रेमपात्र या विश्वासपात्र का प्रयोग तो ठीक है, परन्तु 'सरकारी आवास के लिए पात्र क्या हुआ ? सही अनुवाद होगा~'सरकारी प्रावास का हकदार Courtesy begets courtesy इसम यदि begets पाशब्दानुवाद करेंग तो वह जंचेगा नहीं- नम्रता नम्रता को जन्म देती है। इसका अनुवाद यो किया गया है.~ नम्रता नम्रता की जननी है।' यह रूपातर पहले विकल्प से अच्छा और सटीक है। परन्तु इसका भाव ग्रहण करते हुए य विकल्प भी उपयुक्त होंगे-'नम्रता नम्रता की प्रेरणा देती है,' या नम्रता दूसरा म भी नम्रता जगाती है।' Love begets love वे समाना तर हि दी वहावत मौजूद है "दिल से दिल को 'राह हाती है। अत यहाँ begets के अनुवाद की समस्या नहीं। I have broken my slate स्कूलो म कभी कभी ऐस वाक्य का शादिक अनुवाद करने बताया जाता है मैंने अपनी स्लट ताड दी।' इसम एसा लगता है, जैस जान-बूझकर या गरारत के इरादे सस्लेट ताडीहा परतु कहने वाले का तात्पय यह नहीं था। अंग्रेजी म यह बात कहने का ढग है। हिंदी में इस या कहगे- मेरी स्लट टूट गई ।' यही सही अनुवाद होगा। इसी से मिलता जुलता वाक्य है I have broken my leg' जाहिर है हिदी म इसका अनुवाद होगा-'मरी टांग टूट गई।' ऐस कोई नहीं रहगा- मैंने अपनी टांग तोड दो।' . The Prime Minister reviewed the progress of the plan रेडिया या समाचारपत्रा म इस वाक्य का यह हिन्दी अनुवाद देखने को 102 / अनुवाद की व्यावहारिक समस्यात मिरता है- प्रधानमत्रीन याजना को प्रगति की समीक्षा की।' यहाँ review लिए समीक्षा उपयुक्त नहा । समीक्षा म विगी वस्तु म गुण दापा पर विचार पर मपना मत व्यक्त किया जाता है। मत Book review को पुस्तर समीक्षा' पहना उपयुक्त है। परन्तु योजना मे सदम म मत व्यता वरना मुग्य नही था, उसपर पिचार करता मुम्य था। मत सही अनुवार हागा-प्रधानमत्री न योजना पी प्रगति का पुनरीक्षण दिया। Tom, Dick and Ilarry Tom Dick and Harry विस्टोरिया युगी। इगल ह म राह चलते व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता था। मत इगवा अथ है ऐम लोग जिना यो यिाप महत्त्य न हो । जाहिर है Tom, Dick घोर Harry तीन साधारण लोगा के नाम हैं जो एक साथ मान पर साधारण लोगा ये वग के घातक हात हैं। हिंदी म इनके लिए ऐरा गरा या गा गरा नत्यू सरा मुगधरा प्रचलित है जिसम नत्यू और खरा भी यात हा गाधारण लोगा वे नाम व्यक्त करते हैं । जिन मुहावरा म नामा का प्रयाग हाता है उना समाना तर मुहावरा म भी नाम पा सकते हैं-कोई दूसरे नाम । परतु कई बार नामवाचक पट माधारण भापा म भी प्रयुक्त होते हैं जहाँ माम का विशप महत्त्व नहीं होता। एम मदों के अनुवाद म नाम बदन दने म पोई हज नही दात यह है कि व मूल वध्य ये भाव को सही सही व्यक्त कर सकें। उदाहरण के लिए निम्नलिखित वाक्य के अनुवाद म नाम या वदन रावत हैं If an economic cliunge benefits John and harms Bill, we can ask whether John can compensate Bill for his loss and still be better off यदि किसी पाथिर परिवतन स अहमद को लाभ होता है और महमूद को हानि, तो हम पूछ सकते हैं क्या प्रहमद महमूद का घाटा पूरा कर सकता है और फिर भी सुपी हो रह राक्ता है ? A man is born as individgal, he lives in society and becomes a person इस वाक्य म individual और person दोना पर पाए है । इन दोनो के लिए हिला म यक्ति पद प्रचलित है। परतु प्रस्तुत वाक्य म लेखक न Individual और person म भेद करन की कोशिश की है। यदि अनुवाद में विशिष्ट अभिव्यक्तिया के अनुवाद | 103 यह भेद यक्त नही होता तो अनुवाद वेकार होगा। तनिक गहराई से विचार करें तो पता चलेगा कि लयक ने व्यक्ति के दोस्पो की कल्पना की है एक वह जिस रूप म वह जन्म लेता है, परतु उसका काई व्यक्तित्व नहीं होता, दूसरा वह जिस रूप में समाज पे अतगत उसका विकास होता है अर्थात जव उसका व्यक्तित्व विकसित हो जाता है । इमी विश्लेषण स अनुवाद का मूत्र हमार हाथ लग जाता है। अत उपयुक्त अनुवाद कुछ इस तरह स होगा--'मनुष्य व्यक्ति के स्प म जम लेता है समाज में रहकर उमके व्यक्तित्व का निमाण होता है (या उसका व्यक्तित्व विकसित हो जाता है)। Individual person हिदी म individuat और person दोना के लिए 'व्यक्ति शद प्रचलित है। परतु individual person म individual विशेषण है जिसके लिए यक्तिगत भी चलता है। तब individual person को 'व्यक्तिगत व्यक्ति' तो लिखेंगे नही । एक जगह इसका अनुवाद 'यक्तिगत मनुष्य' किया गया है (प्रत राष्ट्रीय विधि फेविक, हि दी अनुवाद, खण्ड ! प० 197) जो हि और भी बेतुका है। इसका सही अनुवाद होगा-ध्यक्ति विशेष । Bibliography of Hindi books समाचारपना में इसका अनुवाद हि दी पुस्तका की प्रथमूची दखा गया है । Bibliography के लिए 'पुस्तक्मूची या प्रयसूची सही है परतु books प्रा जान पर पुस्तक और 'म थ' दानो का प्रयोग गलत है। इसकी जगह "हिंदी पुस्तका की मूची, हिदा न था की मूची 'हिंदी पुस्तक्सूची' या हिदी ग्रन्थ सूची लिपना उपयुक्त होगा। Transliteration into Devoagarı Script Transliteration के लिए हिदी म 'लिप्यतरण (लिपि+अतरण) लिखत है । समाचारपत्रा म Transliteration into Devnagari Script वा अनुवाद देवनागरी लिपि म लिप्यतरण दस्खा गया है । यह सही नहीं। दवनागरी म लिप्यतरण लिखना उपयुक्त होगा। Audit of accounts Audit के लिए हिदी म लेखा-परीक्षा' स्वीकृत है। Audit of accounts का मनुवाद 'हिमार पिताध की लग्वा परीक्षा दखा गया है । हिमाब विताव और लवा एक ही चीज है इन दाना का एक साथ प्रयाग उचित नहा । अत audit 164 / अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं of accounts के लिए भी वेवल लेखापरीक्षा पयाप्त होगा। Compensation of loss Compensation के लिए 'क्षतिपूर्ति श द प्रचलित है। इसी आधार पर Compensation of loss का अनुवाद क्षति की क्षति पूर्ति देखा गया है। क्षति श द की पुनरावत्ति उपयुक्त नही । यहाँ केवन क्षतिपूर्ति लिखकर काम चल जाना चाहिए। Right of anberitance Inheritance के लिए हिंदी में उत्तगधिकार' प्रचलित है। Right of anheritance को भी उत्तराधिकार ही लिखेंगे--उत्तराधिकार का अधिकार नहीं, क्योकि अधिकार शद को दो बार नहीं ला सकते । Letter of resignation Resignation के लिए हिदी मे त्यागपत्र प्रचलित है । Letter of resig nation को भी त्यागपत्र ही कहेगे। Court of Justice Court के लिए हिदी शब्द यायालय है। Court of justice को भी 'यायालय' ही लिखेंगे। International Court of Justice को अतर्राष्ट्रीय यापालय कहेंगे, अतराष्ट्रीय याय का यायालय नही। Special privileges Privileges के लिए हि दी म विशेषाधिकार श द अपनाया गया है । Special privilege को भी विशेषाधिकार लिखेंगे क्यादि विशेष शद दो बार नहीं पा सकता। Volatile yapour बहत पारिभाषिक गट सग्रह-विज्ञान के अलगत Volatile के लिए 'वाप्पगील शद दिया है और Vapour के लिए वाप्प । परतु प्राणिविनान म Volatile vapour Tद भी प्रयुक्त होता है । नब क्या उस वाष्पशील वाष्प लिखेंगे? इसका क्या भय हुमा ऐमे प्रयोगो को ध्यान में रखते हुए Volatile के लिए वापगोल ग नहीं देना चाहिए था । उपयुक्त अनुवाद होगा- उन गीत वाप्प।

विशिष्ट अभि यक्निया के अनुवाद | 105 Oral shape egg Oval shape वादिदी समानक 'अण्डाकार' है ।परतु Oval shape egg को 'अण्डाकार अण्डा लिखना उपयुक्त नही। सही अनुवाद हााग्राम अण्डे के आकार का अण्डा । यहा ऐमे अण्डा का जिक्र है जिनके प्राकार भि न भिन्न होत हैं। अण्डाकार' स ग्राम अण्डे आकार का सकेन मिलता है। अनुवाद म यही वान स्पष्ट करनी होगी। The Science of Zoology Zoology के लिए हि दी म प्राणिविनान श द स्वीकृत है| Science का भार लाने के लिए 'विनान शब्द दो बार नहीं ला सक्त । अत The Science of Zoology को भी प्राणिविज्ञान' ही लिखेंग । यदि यह किसी पुस्तक का शीपक है ला उसम जैचाव लाने के लिए प्राणिविनान की रूपरेखा । भूमिया' आदि लिप सक्त हैं। Commonwealth of Nations Commonwealth का हिंदी समााक 'राष्ट्रमडल है। Commonwealth of Nations के लिए 'राष्ट्र शद का प्रयाग दो वार तो घर नही सक्ते । प्रत इस भी राष्ट्रमण्डल ही लिखा जाएगा। Foreign country Foreign के लिए हिटीम मिशी विशपण के स्प म पाता है। परतु Foreign country वे निरा विदशी देश लिखना उपयुक्त नहा । इमन लिए 'विदा हा पर्याप्त है । सदभ विरोप मे विदेशी राष्ट्र' लिख सकते हैं। Drain off large amounts of water Drain off के लिए जल निकास शद प्रचलित है। परतु drain off Harge amounts of water का अनुवाद बहुत मारे पानी का जल निराम' दया गया है। पानी और ल दाना वा प्रयोग उचित नहीं। यहाँ बहुत सार पानी (या जल) का निवाम' लिखना उपयुक्त होगा । Cape Sugar, Sugarcane अंग्राम गन्न और चीनी का सम्ब व उतना स्पष्ट नही जितना हिटीम है। अत वहाँ साधारण चीनी को Cane sugar यहा जाता है और गन,को, 108/अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएं To Defence of Liberalism यह एक पुस्तक का शीपर है। इसका श दानुवाद हिदी म बेतुका लगगा- 'उदारवाद के पक्ष में। प्रत उपयुक्त गापर का चयन करते समय कल्पना शक्ति स काम लेना होगा। इसके लिए उदारवाद का महत्त्व लिख सक्त है। A Guide to Diplomatic Practice इस पुस्तक के गीपक का शदानुवाद राजनयिक यवहार पय प्रदशक मागदर्शिका' इत्यादि हा सकता है। पर तु इससे उपयुक्त गरिमा लक्षित नही होती। अत उपयुक्त शीषक होगा- राजनयिर यवहार की स्परखा।' Politics in India इस नाम की पुस्तक का हिंदी गीपक भारत में राजनीति रखा गया है। यह निराश दानुवाद है जो हिदी म चतुवा लगता है। सही शोषव भारत की राजनीति या भारतीय राजनीति होना चाहिए। Politites among Nations इस नाम की पुस्तर या पीपक हि दी म रखा गया है- राष्ट्र के मध्य राजनीति । यह निरा पदानुवाद है जो गिदी म साया नहा होता । ग्रजी म Politics among Nations सही है । परन्तु इसका हिंदी अनुवाद प्रत Hष्ट्रीय राजनीति ही उपयुक्त हागा जा पुस्तर वी विषय-वस्तु यो सही यस्त करता है। सी तरह Justice among Nations शापा वा यनुवाद अत र्राष्ट्रीय याय हाना चागि राष्ट्रा कम य याय नहीं । Aid to Iodia by Britain पइ नाग by ये निरा द्वारा निपना प्रावग्यर समभन हैं। प्रत ये Aid to India by Britain वा अनुवा बरत हैं प्रिटन द्वारा भारत का सहायता। हिदी की प्रकृति के अनुम्प अनुवाद होगा भारत यो विटन यी सहायता। Institute of Fconomic Gronth Instituter लिए गिनी म सम्यान गद प्रयुक्त है। इस तरह Institute of Economic Growth का प्रामाहागा-प्राथि निराम गम्या । पर इसम एस स्मथार का बोध हाना जहाँ प्रायिक विद्याम पिया जाना हा जप विशिष्ट अभिव्यक्तिया के अनुवाद | 109 अभिप्राय उमके अध्ययन स है, मन इसका सही अनुवाद 'प्रार्थिक विकास अध्ययन नस्थान' होगा। Poor Lans Poor Laws इंगलड के प्रसिद्ध कानून हैं। इनका शदानुवाद 'निधन- कानून हागा जिसम काइ अथ नहीं निगलना । दमम कोई व्याख्यात्मक शट जाडना होगा। सही अनुवाद हागा निघा सहायता कानन । Department of Management Studies इमका श दश अनुवाद होगा प्रवध अध्ययन विभाग।' परन्तु प्राध अध्ययन स कुछ स्पष्ट नहीं होता। अत उपयुक्त अनुवाद होगा 'प्रवध विनान (या प्रवविद्या) विभाग', क्यादि इस विभाग का मम्बध प्रवध-व्यवस्था के वनानिक प्रध्ययन स है। Foundations of Political Science इसमा अनुवाद प्राय राजनीतिविनान के आधार' या 'राजनीतिविनान के मून प्राधार किया जाता है । परतु 'आधार' गद का बहुवचन पयोग वेतुका है। हिदी म foundations Tद वे वहुपचन पक्ष का बोध कराने के लिए उप युक्त अनुवाद होगा-'राजनीति विनान वे प्राधार-तत्व । A Text Book of Surgery इस नाम की पुस्ता हिदी गल्यपिनान की पाठयपुम्नक' शीपत्र स प्रकाशित हुई है । सीपक म पाठयपुस्तक गदद पाने में उसकी सारी गरिमा चली गई है। उपयुक्त गीपक होगा- गत्यविनान की रूपरेखा । इमी तरह A Handbook of Science of Psychology मे भी handbook के नुवार ---हस्तपुस्तिका लघुपुम्निया नियमपुस्तिका निर्देग पुस्तिका/गुटका इत्यादि का प्रयोग यहूदा हागा। यग भी ममाज मनोविनान की भूमिका/ रूपरेखा इत्यादि का प्रयाग समीचीन हागा। A Grammer of Politics' था अनुवाद 'राजनीनि के मूलतत्त्व' शीषर ग छपा है जा किमटीक है। Theory and Practice of Modern Gofernments इस विषय पर प्रकाशित मना हि दो पुम्नया का शापद माधुनिए सरकारा व गिद्धात और पवहार रखा गया है। गरवारेंता टूटती वाती रहती है। पिर, मरवारोप निदाना मोर व्यवहार वा अध्ययन क्या ग्रा वास्तविक - ?

110/अनुबाट पी व्यावहारिस समस्याएं उद्देश्य गागन या शासन पद्धतिया/प्रणालिया के मिडात और व्यवहार का अध्ययन करना है। प्रत उपयुक्त गीपय हागा 'आधुनिर शासन प्रणालियाँ सिद्धात और व्यवहार । इसी तरह Comparative Government का अनु वाद 'तुलनात्मा सरवार नहीं करना चाहिए हालांकि यह अनर पुस्तया के सीपक के रूप में पाया है। सही अनुरात गेगा- तुलनात्मक शासन या तुन नात्मक सन यवस्था।' Five Types of Political Theory इस नाम की पुस्तक का हिन्दी गीपर रपा गया है-'नीतिशास्त्रीय मिद्धात के पांच प्रवार।' यह बहुत लम्बा है । फिर प्रचार गन्दशीप म जंचना नहीं। उपयुक्त शीपक होगा-'नीति मिद्धात व पांच रप या नीतिसिद्धात पांच विधाएँ।' Speeches and Documents on British Dominions इस नाम की पुस्ता या हिंदी पिय रखा गया है-निटिग डोमिनियना पर भाषण और दस्तावेज। इमम पर वा प्रयोग अटपटा है। सही अनुवाद होगा--निटिग दोमिनियना ग सम्बन्धित भाषण और दस्तावेज । परतु शीपक में गायद इतना विस्तार अभीष्ट नहा । प्रत और भी उपयुक्त अनुवाद होगा- त्रिटिा डामिनयन भापण और दस्तावेज । Towards a Just Social Order एव पुस्तक इस शीषर का शानुवाद होगा यायपूण समाज-व्यवस्था की ओर । परतु यह श दावली शीपक के लिए उपयुक्त नहीं। इसका उपयुक्त अनुवाद होगा- सामाजिक याय वी मोर। Principles of Social and Political Theory म पुस्तक वा हि दी अनुवाद सामाजिक तथा राजनतिक शास्त्र के सिद्धात शीपक के प्रतगत प्रकाशित हया है। यह शास्त्र पहा म पा टपका? यदि यह तक दें रि यह समा शास्त्र और राजनीतिशास्त्र वाला शास्त्र है तो भी बात नही बनती क्यामि य श द प्रमश Social Theory और Political Theory के लिए उपयुक्त नही । कठिनाई र सलिए पदा होती है कि हिटी मे Principles और Theory दोनो के लिए सिद्धा त गद प्रयुक्त होता है । परन्तु Principles of Theory के सदम को सही सही समझ लेन पर अनुवाद पठिन नहीं रहेगा।

विशिष्ट अभिव्यक्तियो के अनुवाद | 111 इस हम 'सामाजिक और राजनीतिक सिद्धात के मूतत्त्व या 'सामाजिक और राजनीतिक सिद्धात-तत्त्व लिख सक्त है। Uoder DTC Operation वमा पर इस अभि यक्ति का अनुवाद 'अतगत दिल्ली परिवहन लिखा देखा गया है। यह हिटी की प्रति के अनुरूप नहीं है। हिंदी में दिल्ली परिवहन के मतगत' लिखना सही हागा। इसी तरह By order,District Magistrate' को 'पाशानुसार, जिलाधीश लिखना ठीर नहीं। हिंदी की प्रकृति के अनुसार इस या लिखना चाहिए-जिलाधीश के प्रादश से।' Prevention against malaria समाचारपना म इसका अनुवाद 'मलेरिया के विरद्ध रोक्थाम देखा गया है। यह सही नहीं। हिदी की प्रकृति के अनुसार मलेरिया की रोक्थाम लिखना उपयुक्त होगा। Stolen goods recovered by the police समाचारपत्रा इत्यादि म म अभिव्यक्ति का यह अनुवाद देखने को मिलता है-पुलिस द्वारा चोरी का माल बरामद। यह ठीव नही। रिया पद से बने विपण म पहले द्वारा के प्रयोग से भापा गटवा जाती है । इसम एसा भी लग सकता है जस पुलिस द्वारा चारी का मान बरामद हुग्रा हो। एसे सदर्भो का अनुवाद कठिन अवश्य है । उपयुक्त अनुवाद हागा-पुलिस के प्रयत्न स चोरी कामाल बरामद। In pursuance of the reccommendation of the Official Language Commission Pursuance ये लिए हिदी मे 'अनुमरण पद प्रयुक्त है। 'In pur suance of अभिव्यक्ति का अनुवाद 'राजभापा आयोग की सिफारिश ये अनुमरण म दया गया है । यह प्रयोग हिदी की प्रकृति के अनुरूप नहीं । सही अनुवाद होना चाहिए- वा अनुमरण करत हुए। The conference started carly in August हिदा म मा यह अनुवाद देखा गया है- सम्मान प्रगम्त व शुम म गुरु हुमा । 'शुरु 77 दावार प्रया नहीं गता। हमारे पाग वत गार पिल्ल 112/मागदी पापहाराि समग्यास भी है। मा गया गिया पति हागा-गामा प्रगतये गुरु म प्रारम्भहमा। It can safely be admitted that पहा Sircly fण या मापा लिाई पागरा।। गा पारगावा गा-गुणापूयर माना जागाfr । प्रनिति यारीमा निराणिमा विग म घ7 गुना पाहाण- 'पर मान मना रािगारि । None live profitably that live wickedly दग महागावे मग म नियामिण पामापा- एटिनाई उपनियत पता है। इमरा पण होगा- जा या जीता है यह सामना जीता। यहाँ सापूर गा प्रयोग स्तुपा है। उपयुग मावार हागा- 'जो तुप्टनापूमा जीरा है (या दुए या जीवन जी ) उसप जीन ग गया साभ In the case (crone) of theft Inform thc police Immediately दिी म in the cast (erent) of या मनुवाद साधारणा की हाला म पिया जाना है। प्रस्तुत याय या यह मनुगद दान म पाया है- चोरी की हालत मसुरत पुलिस यागपित परें। मातर हिन्दी म भी चोरी योहासत मना लिया जाता। सही अनुया- हागा-- चोरी होने पर तुरत पुलिग यो सूचित परें। Former, latter अग्रतीम दो भीजामाजिक माा पर न पाया प्रयोग सवनाम प रूप म यरत हैं । हिदी मना गमानर रही हैं। पुछ लोगान इनप लिए पूर्वोस्त और 'प'चादुात गढ़ हैं। एकदम वतुये और पहाहिती मदनरा भाव ग्रहण करते हुए व्याम्या पर रनी चाहिए या भोर दूसग म वाम गला लेना चाहिए जसरि निम्ननिरिक्त अनुवा? रा स्पष्ट हो जाएगा- They keep horses and cattle the former for riding, the latter for food व घोरे भी ग्यत हैं मनी भी, र सवारी के काम मात हैं दूमो भाजन प लिए। - विशिष्ट अभियक्तिया के अनुवाद | 113 Vice versa अंग्रजी म Vice versa का प्रयोग वहा होता है जहा काइ सम्बध निर्दिष्ट करन के बाद यह बनाना हो जिम उलट दने पर भी उन वस्तुमा में वही मम्बा रहेगा । हिदी मे ऐसी कोई अभिव्यक्ति नहीं है। कुछ लोग इमका अनु वार करके लिखत हैं 'पौर प्रनिनमात भी' (दे० रामचद्र वर्मा, द और अय, ५० 37 पारि०), परतु एम र गढकर हिंदी को वोभित बनाने में क्या फायदा | हिंदी म अपन टग म पूरी बान वहा उपयुक्त होगा, जैमा कि निम्नलिखित अनुराद म स्पष्ट हा जाएगा I dislike him, and vice versa "मैं उसे पसन्द नहीं करता, और वह मुझे।' A good teacher may not be a good author, and vice versa हो सकता है अच्छा अध्यापन अच्छा लेखक न हो या अच्छा लेसर अच्छा प्रध्यापन न हो।" यदि कुछ विस्तार की गुजारा हा तो म वाक्य का यह अनुवाद भी कर सक्त हैं 'हा माता है, काइ अच्छा प्रध्यापक तो हो पर अच्छा लेखक न हा, या काई अच्छा लेखा तो हा पर अच्छा अध्यापन न हो। As well as हिदी म As well as का ममानर उपल ध नही - । परन्तु जहाँ इमा प्रयाग हा या मा भाव ग्रहण करत हुए अनुवार म बठिनाई नही हानी पाहिए। 'He is the founder of this institution as well as its Director -ग याक्य वा अनुवा या पर सवत है-वह उस सस्था का निशान भी है गम्भार भी या 'यह ग गस्था या निगा ही नहा मस्यापर भी है। प्यान रह शिग्रेजी म found TT as well a म पहने पाया है Director याद मा परतु वानवा अभिप्राय यह था कि वह Diretor ता है ही (या जैमा frमार नानो हैं) founder भी वहा । पन अनुसार म म यदन जाएगा। As early as as late as यतिदिन ममय पर बस न के लिए प्रयुगा होत है पातुनि दी म नोलि 'मिसन | पर भी हो मटम वा देते हुए इनरा मार हिम भी यमान पर गणक मिा, 114/अनुवाद की यारहारिक समस्या was accepted as early as in 1957 वा उपयुक्त अनुवाद नागा-- यह प्रस्ताव १९५७ म ही स्वीकार कर लिया गया था। दमी तरह It was discovered as late as in 1976 का अनुवाद या वर मरते हैं- कही 1976 म जापर यह पता चला कि । In the 1930s इसका प्रय हैं, 1930, 1931 1932, 1939 परतु हिदी मे रावे समाना तर अभि यक्ति नहीं मिलती । उपयुक्त अनुवाद होगा-1930 म गुरु होने वाने दार में या बीसवी तादी के चौथे दार म। Sooner or later, etc यह यार एक दूसरे के विनोम पद एक साय प्रयुक्त होत हैं । यह प्रवत्ति अग्रेजी में भी है हिंदी में भी। एसी अभिव्यक्तिया का अनुवाद करते समय यह देखना चाहिए कि अननी म वे पिस प्रम स पाए हैं बल्कि हिदी म वे क्सि क्रम म प्रयुक्त होन हैं । हिदी म साधारणत छोटा श द पहले आता है बडा बाद में। इस प्रम को ध्यान में नहा रखेंग तो अनुवाट हिन्दी की प्रकृति के अनुरूप नहीं रहेगा और खटकने लगेगा। उदाहरण के लिए Sooner or later का अनुवाद' जल्दी या दर स नहीं करना चाहिए बलि प्रचलित मुहावरे के अनुसार दर सवेर में लिखना चानिए । इमी तरह more or less + लिए कमो वश लिखना चाpिr give & take के लिए आदान प्रदान Sile & purchase के लिए स्य विश्य by hook or by crook के लिए छल या बल से और profit and loss के लिए हानि लाभ । For and against के लिए 'पक्ष विपक्ष उपयुक्त है परतु यति कक की ओर सकेत हा तो खडन मडन लिखेंगे । Men and women वो या नो स्त्री पुग्प लिखना चाहिए या नर नारी | Civil and military का अनुवाद सैनिक और असनिक करना चाहिए 'असनिक और सनिर नहीं। Congress and conference हिंदी में Conference के लिए 'मम्मेलन श - लिखा जाता है Congress का काग्रेस ही लिखते है जो अनव सदर्भो म प्रयुक्त होता है । उदाहरण के लिए सयुक्त राज्य अमरीका के विधानमडल (Congress) का हि दी म कानस ही लिखन हैं 'Trade Union Congress को मजदूर संघ काग्रेस लिखत हैं। पर तु जहा Congress and Conference एप साथ बात है नहा काग्रेम और पिपिष्ट अभिव्यक्तिया वे मनुवाद/115 सम्मनन अपा लगता है । अत यहाँ महारामा पार सम्मलन या 'सभा और सम्मलन लिखना अधिक उपयुक्त होगा। City of Delhi अग्रेजा म 'City of Delhi, lear of 1978 (यादि प्रयोग चलत है। कई जगह इनका अनुवाद 'दिल्ली या नगर 1978 वा वप इत्यादि मा गया है । यह सही नहीं । दिदी म दिली नग, 1978 वप' या प्रयोग उपयुक्त होगा। We cannot wait any longer इस वाक्य का अनुवाद यो बर मरत हैं-'हम भोर अधिक प्रतीक्षा (या इतज़ार) नहीं कर सकते। परतु यह वारय ऐम सदभ म माया जहाँ इसे तार द्वारा प्रपित करना था। तार वा सदेश यथागभव गक्षिप्त होना चाहिए । प्रत इसका यह अनुवाद किया गया जा सवथा उपयुक्त था- हम पर रव नहीं सकते।' All the seven members all वा अथ सभी या सर के सर है। इसी प्राचार पर all the seven members को सभी मात सदम्या ने लिया जाता है । यह हिदी की प्रवृति के अनुरूप नहीं । उपयुक्त अनुवाद होगा-मात के सात सदस्या ने या 'साता सदस्या ने।' परतु जहाँ सग्या बडी हा वहाँ यह कठिनाई पैदा हो सकती है जम all the hundred and one' का दम तरह अनुवाद पठिन होगा। म सदर्भो म, एक सौ एक सदस्या म सबवे सब ने निम मरते हैं । Agricultural breakthrough हिदी म breakthrough के लिए कोई उपयुक्त शद नही। Agricul tural breakthrough का अनुवाद साधारणत 'कृपि मे प्रगति' किया जाता है । 'प्रगति श द breakthrough का पूरा प्रय नहीं देता क्यापि प्रगति तो धीरे धीर और थोडी थाडी भी हो सकती है परतु breakthrough म तीन तथा युगातरकारी परिवतन लभित होता है । अत उपयुक्त अनुवान होगा। कृषि युगातर। Non transferable लाइवरी काड या लाइसेंस इत्यादि पर इसका अनुवाद ग्रहस्तातरणी - 116/ अनुवाद की व्यावहारिक समस्याए दिया जाता है। नादिव दष्टि से यह चिल्तुत सही है ! परतु यह शब्द जुबान पर चढना इतना मुशिल है वि वम पढे लिखे ही क्या, पढे लिखे लोग भी शिकायत करते हैं। इसकी जगह कुछ एमा नियना चाहिए- इस माड का प्रयोग कोई दूसरा नहीं कर सकता भल ही यह लम्बा लगे। No exit रेलवे स्टेशन के एक द्वार पर इसमा अनुवाद 'निनाम निधि देया गया है। शादिक दष्टि से यह सही हो सकता है परतु देखना यह है कि जिन याग्रिया के लिए--विशेषत ग्रामीण और कम पढे लिखे यात्रिया के लिए यह सवेत लिखा गया है वे क्या समझेंगे उनके लिए ता इधर रा वाहर न जाएं लिपना अधिक उपयुक्त होगा, भले ही यह कुछ लम्या हो गया है । Rule Regulation, Act, Canon ये श द तरह-तरह के नियमा या काय कानून वे वाचर हैं। इनके पारि- भाषिक अर्थों म अतर स्थापित करने के लिए क्रमश ये शर बनाए गए है Rule नियम Regulation विनियम Act प्रमियम (या कानून) Cannon अभिनियम जहाँ ये श द पारिभापिर अथ प्रयुक्त हा वहाँ इस अतर का ध्यान रखना होगा । परतु सामा य अथ म नियम काय कानून त्याति का प्रयोग उपयुक्त होगा। Rigbt Authority, Privilege Prerogative य श द तरह तरह के अधिकारो के वाचक है। रनवे पारिभापित अर्थों म अतर स्थापित करन के लिए नमा य गब्द स्वीकार किए गए हैं Right अधिकार Authority प्राधिकार प्राधिकरण (सगठन निराप) Privilege विशेषाधिकार Prerogative परमाधिकार परतु जहा य सामाय अथ म प्रयुक्त हा वा इनके पारिभाषिक समाना रखना प्रावश्या नहीं।

विशिष्ट अभिव्यकितया रे पापार117 Leare is a privilege not a right Right और Privileges लिए हिन्लीम मधिशार'मौर तिपिशरग स्वायत हैं । प्रस्तुन वाक्य यामाधा-मीषा अनुवाद हागा-री विशेषाधिकार है अधिकार नहा। बात नग बनी। जा पीर सिपाधिकार (विश+ अधिगर) है यह अधिकार कम नग' सार मदन माग मा उपयुगा अनुवाद हागा-छटा दा जा माती है तो नहीं जा पाती।' Social and Personal Factors in Health Factor लिए हिदी म 'यार' बावर प्रसित बग्न पीnfre को ग, परतु वर्मा उगह पदकता है। गणित म factors गुपनगर हाल और वर्ग सम काई करिना नहीं। परतु मामाय भाषा म या बंगानिय वामय म ही क्या factor या गा-गाया लेग्नि चतुरागमार रमना माय "यक है ? इसरे समय Social and Personal Factors in Wealth ना अनुवाद करेंगे-मपदा मे मामाजिव और वैयक्तिक पारस " सिनना पहा है। इस पाप का उपयुक्त अनुवाद हागा-- मपदा वितनी सामाजिर, विननी वयक्तिक । Comedy, Tragedy नये निरापमा 'मुमान (सुग्घ प्रिन) और 'दुवान (दुम+मनपात प्रचलित र विपन नाटव के प्रसाराम मदम म । फिर सामाय अथ म भी यहा पर चलाए गार पर य उपयुक्त नाथ क्याyि Comedy पार Tragedy म कपल प्रत का महत्व नही होता यरि पूरे घटना म प मून स्वर गदसरा सरोकार शशाता है। अत दनक लिए क्रमा 'कामदा' (जा सामना पूर्ण पर) पोर वामती (जा भाग पदा कर) गद गरे गए । शट माथय तो हैं ही भूल दावे साय दनका साम्य भी दपने काची। दमी तरह अंग्रजी अनर पारिभापिप गाव समानव ध्वनि-साम्य वे प्राधार पर निधारित किए गए * जिनम कई वटुत सीर हैं| Academy लिए अकादमी parabola a निरा परवनय , spiral ये निा सपिल, interim के लिए 'अतरिम और technique के लिए 'नानी' इत्याति उदाहरण है रुप मै प्रस्तुत किए जा सकते हैं । एम कुछ ? मामा य मापा म भी प्रचलिन हैं जम Hospital वे लिए अस्पताल Lantern a लिा लालटन Romantic के लिए हमानी Command के लिए कमान Orderly के लिए घरहती Captain + लिए कप्तान Officer के लिए अक्सर Recrust के लिए रंगस्ट इत्यादि।

118/ अनुवाद की व्यावहारिक समस्याएँ Co existence Co existence लिए हिंदी म सह अस्तित्व प्रचलित है और यह उपयुक्न भी है । यहाँ सपि कर सहास्तित्व' लिखना एक्दम बेतुका और हास्यास्पद हागा। इसस दाना - विकृत होपर पूरा गद अपरिचित हो जाता है । हिदी म सधि केवल वही करनी चाहिए जहाँ मूल गब्द इस तरह विस्त न हो जाएँ । नाहरण के लिए स्वागत म तो 'सु+ग्रागन की सघि ग्राह्य है, परतु मु+अवमर को सुप्रवमर हा निमेंगे स्वमर नहीं। - Fascism Fascism के लिए वहत पारिभाषिक गद सग्रह-मानविकी म फासिस्ट वाद/फासिज्म श द दिए हैं। बात यह है कि Fascism एक जटिल सकल्पना है और इसके साथ इतने विचार जुड गा हैं निहिती मूल का कोई ऐमा शट टूटना मुश्किल है जो उह व्यक्त कर सके । एक बार इस निरकुग गासन + साथ जोडा जाता है दूसरी पार अघ राष्ट्रभक्ति जातिवाद और अल्पमत के दमन के साथ । इसवी "युत्पत्ति इटालवी गद fascio म हुइ है जिसका अथ है 'डडा वा गटठर । प्रत मूलत यह एक्ता अनुगासन और संगठन का प्रतीक था और यह उन लागा के सगठन और सिद्धाता का द्योता था जो प्रथम विश्व युद्ध के दौरान टला के हित म जीन मरने के लिए एकजुट हो गए थे। बाद म मुसो लिनी न इस विचारधारा का उपयोग राष्टीय गौरव के। पुनरुद्वार के उद्दश्य स क्यिा और राष्ट को जाति विप के साथ एकाकार करक नागरिका स सवस्व समपण की माग की। अत अपराष्ट्रभक्ति अपमत १ दमन और निरकुल शासन व भाव इसके साथ जुट गए और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तो पश्चिमी जगत में Fascism और Fascist तिरस्कृत गद हो गए। जाहिर है कि हिंदी म Fascism का सही समान जुटाना कठिन है । डा० रघुवीर व प्रसिद्ध को A Comprehensive English Hindi Dictionary of Governmental & Educational Words & Phras s म इसके लिए उग्रराष्ट्रियता श द दिया है। परतु यह श द Fascism की एक अच्छा को व्यक्त करता है पूर तत्त्व को नहा । फिर उग्रराष्ट्रीयता या उग्रराष्टवाद शट Chauvanism के प्रथम प्रचलित हैं। एक विरल्प अघराष्ट्रवाद है परतु वह भी Fa cism वे पूर अथ को उक्त नहीं करता । वही कहा इस प्रात्मोत्सगवाद' लिखा जाता है पर तु यह भी अधूरा है। फासिम्टवाद भी अटपटा है क्योकि वह हि दी मा द निमाण का परिपाटी के अनुरूप नहा । अत ले कर कामिज्म ही वच जाता है। Fascist को हिंदी में फासिस्ट ही लिखग। जहा सम्भव हा - विशिष्ट अभिव्यक्तियों के अनुवाद ! 119 Fascism वो पामिस्ट विचारधारा' भी लिख सकते हैं। कुछ नेसर Fascism यो फासीवाद लिखत हैं। यह एकदम वतुवा और हिंदी का प्रवृति के विरद्ध है। वाद दाद तो हमारा परिचित है, परतु'पासी मा निरथम है या उसस पासी की भ्राति हा सकती है, और तब व्यग्य म कह सक्त हैं जि यह मिद्धात विरोधिया को फांसी चटा दने का सिद्धात है। पर तु वनानिक वनी का निर्माण इस तरह नहीं होता। हिती म सबर दावे निमाण की एक पद्धति है, वह यह मि इसम विदेशी अस इतना विवृत हो जाए कि पहचानना ही मुश्किल हो जाए । 'दावे और प्रतिदाव' म अरवी गद 'दाव' के साथ प्रति' सस्कृत का उपसग है, परन्तु यह अटपटा नही क्यापि दाव में हम भलीभांति परिचित हैं और उम हमन विकृत नही होन दिया । जिल के अधिकारी का जिला (जिला+इश)लिखन पर कठिनाई हागी क्योकि इसम पिदशीमा (अरवी शाद) 'जिला ही विकृत हा गया। दूसरी पार जिलाधी' हिदी मे खप गया है क्योकि इसम जिला अण्ण है और अधीन का विकृत स्प भी मठाधी, दहाधीश यायाधीश प्रादि गाम हमारा सुपरिचित है। दूसरी पार फासीवाद' म फासी प्रा इस म्प में हिदी म प्रयुक्त नहीं। अत वह निरथक रह गया है। परन्तु Nazism पे लिए नाजीवाद चल सकता है क्यादि नाजी सम्पूण शद है मौर वह हिदी म भी ज्या-वा त्या प्रयुक्त है। इसके अलावा विदेगी मूल में हिन्दी प्रत्यय लगावर स्वतत्र विपण तो बना सक्त हैं परतु सकर शन्दा म सधि म ययासम्भव बचना चाहिए। दे शब्दा Nuclear weapons Nucleus परमाणु का एक हिस्मा है जिसब लिए यहत पारिभापिक शद सग्रह-पिनान व अतगत नाभिक केंद्रक सूक्तिप्रस शन्द स्वीवार किए गए हैं । अत Nuclear के लिए नाभिकीय विपण बनाया गया और पाख मीच पर प्रयुक्त हान लगा INuclear Weapon का नाभिकीय प्रायुध' लिखा गया (वही) । परतु यह उपयुक्त नहा । नाभि म गरीर के उस अग की ओर ध्यान जाता है। जब बाइ द गलन दिशा म ध्यान खाचें ता उसवा प्रयाग उपयुक्त नहीं। हम छाता का लघुतावाची गद छनरी' प्रयोग करत हैं छाती नहीं करता दूसरी ओर यूक्लियस म ' यूवतीय विशेषण बनता है जिसम विगी अग विकृत हो जाने पर भी खटकता नही । यह एमा उदाहरण है जिसमे विदगी कम महिती प्रत्यय लगाकर स्वतत्र विशेषण बनाया गया है। अन मूल 021 / अनुवाद की व्यावहारिक समस्याए Nuclear weapous का यूक्लीय अस्त शस्त्र लिपना उपयुक्त होगा। Political Affairs Committec Affairs के लिए हिंदी में मामला उपयुक्त शद है। Political Affairs Committee म affairs बहुवचन पाया है । हि दी म बहुवचन का निर्देश कारक से मिलता है समास रचना म उसे पान परना कठिन है। अत राजनीतिक मामला सशति या राजनीतिक मामले समिति दाना अनुपयुक्त हैं। कभी कभी इम राजनीतिम मामलो स सम्बधित समिति कहा जाता है । यह सही तो है पर बहुत लम्बा है । अत मामला शब्द स वचार देखा जाए। 'राजनीतिक विषय समिति स यह भाव बहुत कुछ व्यक्त हा जाता है। Minister of Foreign Affairs का कभी भी वितशी मामला के मत्रा लिखा जाता है। परतु यह भी अटपटा है-विदेश मत्रा या 'परराष्ट्र मत्री स काम चल जाना चाहिए। United States United Kingdom, United Nations United states at (United states of America) & fere feet # सयुक्त राज्य अमरीसरा प्रयुक्त है। अमरीया का उल्लय जरूरी है। United Nations को सयुक्त राष्ट सगठन लिसा जाता है । पर तु United Kingdom को युनान्टेड किंगडम लिखत है । वन्त पारिभापिका संग्रह —मानविकी में भी यही दिया है। टसका अनुवान शायद इमलिए नही करत वि United States म United सघीय प्रणाली का द्याता ह और United Kingdom म यात्मर प्रणाली का । States और Kingdom दाना लिए ल पर राज्य पद ही मिलता है। अन United States और United Kingdom का एक जसा अनुवाद हो जाएगा जवकि पहला गधारमा गणतन है और दूसरा एकात्मक राजतन । परतु युनाइटेड किंगडम लिसन स एररूपता नष्ट होती है । प्रत इस सयुक्त राज्य निटेन लिखना हा उपयुक्त हागा। राज्य' State पे लिए आया या Kingdom के लिए यह सदभ म ग्रहण किया जाएगा । United का अथ भी तो सदभ म ग्रहण करत है । United Nations या United Nations Organisation के लिए मयुक्त राष्ट्र सगठन उपयुक्त है। संगठन न लिखने पर यह भ्रम हो सकता है कि हम राष्ट्रा के समूह का उल्लेप कर रह है या किसी एक गट का। अंग्रेजी के समान पट म वहुवचन का प्रयोग बनटके होता है परतु नि दो म यह सुविधा नहीं । अत स्थिति को स्पष्ट करन के लिए अय । जाडन पड सक्त है।

7 Assembly लिए भी मना है।मतगट 'गभागदका प्रयोग बरत व्यापर है और Houset सिउसका प्रयोग जित नहीं। प्रत House of Lords जिद मक्त है परन्तु इमम उच्चारण की कठिनाई वा दपते हा 'लाड सभा' चाहिए इसम उच्चारण की कोई कठिनाई नहीं। यदि इमे 'वामन सभा कर तो भ्राति होगी, जम 'वामन इस सभा का विरोपण हा House of Representatives कोताप्रतिनिधि सभा ही नियना चाहिए। इसमे विवादपी Head, Speaker, Chairman, President Chief, Dean पदका प्रयोग किया जाता है। विश्वविद्यालय के Head of the Department ये कुछ ऐस शद हैं जिनके लिए हिंदी में प्राय पाख मीचवर 'अध्यक्ष को विभागाध्यक्ष कर जाता है। किसी देश वे Head of the State से गायाध्यम या कभी-कभी'राप प्रमुख) वहा जाता है। यहाँ तक विशेप पग्निाई नहीं । भाग्न वी लोकसभा या ब्रिटिश वॉमस सभा (हाउस प्रॉफ कामस) Speakeraiभी वहा का अध्यक्ष कहा जाता है। अंग्रेजी में Speaker गद का प्रपना एक इतिहास है और इसका मूल अथ इसने वतमान अथको प्रतिविम्वित नहा करता। अत यदि छोटे से speaker लिखेंगे ता उसका मनुवान वरना होगा बम Speaker वा प्रथ लोक्सभा या वामस विष्टि नितिगा दे मनुनार / 121 forse of Lords llouse of Commons, Ilonse of Representatives इनानिए वहन पारिनापित मप्र मानविकी मे मा हाम बिलास/का सभा', हाग्म और कॉमन प्रौर हाउस प्रॉग्निजेंटेटिन' एि हैं अयान मुचन "नका लिया कर दिया गया है। हिंदी म मन्ज़ि' जग का नीतिप्यता मिया जाए-ममम म नहीं पाना! House 'TER माय थारी वठिनाई यह दि उहाँ या प्रदेना माना ३. वांदम सन्न' रिखा जाता है (वमे Chamber के लिए भी 'गदन' प्रयुक्त है। परन्तु House of Lords दयादि वे मन में यह 'मभा हो जाता है उसने नोद हा नहा । House of People मा माना अनुवाद भी लामभा है। इतना हा नहा, Council of States a हिंदी अनुवाद 'राज्यममा म Council का सुमानक भासमा है। Legislative Assembly के अनुवाद 'विधानमभा' में का समानर लाल सभा उपयुक्त है। Lords और Commons या वतमान प्रयोग इनव मूल अथ स मिन हा गया है। प्रत इनके लिए मन लाड स और नामम' ही रिपना उपयुक्त होगा। House of Lords के लिए लाइ स राभा रिखना अपिय सगत हागा | House orCommons को 'वामम सभा लिखा S बोई गजाइश नही। ।

122/ अनुवाद की व्यावहारिष ममस्याएं - सभा का अध्यक्ष होगा। रावे लिए बाई नया गद गुभाना कठिन है। केवल यह ध्यान रसना चाहिए कि रेरा प्रयोगा ग अध्यक्ष द अपन सदम स न वट जाए। प्रत जहा प्रावश्यक हो, वहाँ सबै साथ भारतीय लोरमभा या निरिग काम स-सभा वा उल्लेस वर दना चाहिए। फिर, Chairman के लिए भी अक्ष शत प्रयुक्त हाता है। उदाहरण लिए, रिरली विकास प्राधिकरण र Churman को प्रत्यक्ष ही कहा जाता है। यहाँ भी अय काई गब्द सुभाना यठिन है। किसी ममिति के Chairman को भी प्राय प्रत्यक्ष ही कहा जाता है। पर तु क्सिी सभा के सदम म सभापति' पाद का प्रयाग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, भारत की राय सभा Chairman यो 'सभापति कहना उपयुका हागा तो इस लोकसभा के अध्यक्ष' से पृथक करता है। President को भी हिदी म प्राय 'मध्यक्ष' (या कभी-भी सभापति') कहा जाता है । क्मिी सस्था President यो प्राय अध्यक्ष ही लिखते हैं पौर कोई पद नहा मृभता। कभी-कभी President के लिए प्रधान गद का प्रयाग करते हैं पर तु सना के रूप म प्रधान Tद के साथ स्थानीय महत्त्व वा भाव इतना निकट से जुड़ गया है कि बहुत बडे पदा क मदभ म यह उतना गरिमायुक्त प्रतीत नहीं होता। दूसरी पोर क्सिी देश या राष्ट्र के President को प्राय 'राष्ट्रपति लिखा जाता है । यह भी कम कठिनाई पदा नहीं करता। यदि हम सोवियत इस के President यो राष्ट्रपति क्ह ता वहा के Presidium को क्या कहेगे? राष्ट्रपति मडल'T' उपयुक्त नही राष्ट्रपति परिपद भी उपयुक्त नही क्याकि Presidrum क्सिी यक्ति विशप की परिपद नहीं होती बल्कि वह सामूहिक नेतृत्व का प्रतीक है। अत ल देवर Presidrum लिए अध्यक्ष मडल शद ही बचता है । इस साथक बनाने लिए प्रस्तुत सदम म President के लिए अध्यक्ष गद ही रखना पडगा। इधर, Chter के लिए भी हिदी में अध्यक्ष प्रचलित है। Chief of Army Staff को सना यक्ष कहा जाता है । इसका एक विकल्प प्रमुख है। प्रत Chief of Technical Section को तकनीकी अनुभाग प्रमुप कह सकते हैं । विपण के स्प में Chief का स्थानापन 'प्रधान , 'प्रमुख या मुख्य होगा, जसे Chief Edrtor से प्रधान सपाट कहये और Chief Martral Law Administrator को मुख्य मागल ला प्रशासक । फिर, Dean के लिए भी अध्यक्ष गब्द अपनाया गया है। विश्वविद्यालय की क्सिी Faculty (मकाय) Dean को 'सकायाध्यक्ष' कहा जाता है । Dean, Faculty of Arts को सकायाध्यक्ष कला समाय ता क्ग नहीं, यत विशिष्ट अभिव्यक्तिया के अनुवाद / 123 'प्र यक्ष, कला सकाय' लिखा जाता है माना 'अध्यक्ष, हिंदी विभाग' और अध्यक्ष, कला-मकाय' का एक सा रतवाहा । चलो यहा तक यह मान लिया नि अध्यक्ष की गरिमा सदभ विशेष से पार ली जाएगी। परतु Dean केवल Faculty के तो नही हाते। अब Dean of Student Welfare को क्या कहगे ? 'अध्यय, छात्र-कल्याण' से बात बनेगी नही, वयाकि छात्र कल्याण कोई सम्था विभाग या मकाय तो है नहीं। एक विकल्प यह है yि Dean के लिए 'अध्यथ' की जगह 'मधिष्ठाता शद वा प्रयोग किया जाए। तब Dean Faculty of Arts को क्लासकाय अधिष्ठाता लिखा जाएगा, और Dean or Student Welfare को छान कल्याण अधिष्ठाता । फिर समस्या आती है Dean of Colleges की। यदि हम उस महा विद्यालय अधिष्ठाता या कालिज अधिष्ठाता' कहत हैं तो एसा लगेगा जसे वह किसी कालिज विरोप का प्रमुख (यानी प्रधानाचाय) हो । परतु वह ता विश्व विद्यालय का अधिकारी है जो एक नही, गायद मव कालिजा के उपर है। ऐसी हालत म उस कालिज विभाग अधिष्ठाता कहा जा सकता है, हालाकि यह भी कोई बहुत सतापजनक श द नहीं । Dean का एक विकल्प शिरोमणि है जसे Dean Faculty of Arts को क्ला-सकाय शिरोमणि' कह सक्त हैं और Dean of Diplomatic Corps का 'दूतवग शिरोमणि' । परतु शिरोमणि' शद इतना पालकारिक है कि तकनीकी वाडमय में इसका प्रयोग शायर उपयुक्त न हो। यहा हमाग उद्देश्य समस्या की जटिलता को प्रकाश म लाना है ताकि विद्वान् लाग इस पर विस्तृत विचार करवे इसके समाधान वा उपाय सुभा सके। उपसहार- इन सब उदाहरणा के आधार पर अनुवाद के कोई निश्चित नियम निधारित नहीं किए जा सक्त जिह सीसकर कोई सिद्धहस्त अनुवादर हो जाए । इतने उदाहरण सकलित करना भी सम्भव नहीं जिनस अनुवाद की मारी समस्याग्रा का विस्तृत परिचय मिल जाए। यह एक प्रनत क्षेत्र है-हरि भनत हरि क्या प्रनता। परन्तु हरिक्था का परिचय ही हरिभक्ति की भावना जगाने के लिए पयाप्त होता है । मत इन उदाहरणा को सामन रखकर सक्रिय अनुवादक का दिशा निर्देश मिल सकता है। फिर वह अपने अनुभव के आधार पर अपने भनुवार म निखार ला सकता है।

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Anuvad Ki Vyavharik Samsyay

Author
Tivari,bholanath
Title
Anuvad Ki Vyavharik Samsyay
File name
Anuvad Ki Vyavharik Samsyay
Text
OCR done
Citation
1978
Published
2011/01
Publisher
Delhi,sabadkar Prakashan
Language
Sanskrit
Pages
118
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
History
DLI number
547192
Barcode
4990010025761.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
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