Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Samay Ke Panw
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समयके पॉप
मासनलाल चतुर्वेदी
भारतीय ज्ञानपीठ काशी
पीठ लोकोदय सम्पमाला हिन्दी मन्या-1
माका मम्पादक-नियामक
मीचमग
SAMAYA KO PANIA
VAKIA SLAL CHATURVEDI
Prohantom
Rberaly Japperth hasu
Fint Edition 1962
PhaRes/
मारतीय कामपाराशी
मम्मवि मामालाबारापमी
प्रयम सरकरप ५१५२
मूम् तीन सप
दो शब्द म्पक्तियपि या हलके कारण यह संग्रह पपिक प्रपमनटीक। प्रतीत होता है इन पक्तियाँ बीवनने मेरे बीपनको इन रख लिया पा। भीमफेयो बहुत पारे मिस मया है कि महाप्रपाक बीवन हमें यह स्मरण रिहाते है कि हम किस प्रकार बपने जीवनको ईचा उप सकते है। इस पुस्तकमे बावसे पक्तियोंने यो परप-चित गोरे है कभी मिट मही पाते। इसलिए समयके पार' पर मस्तक रखनेके सिवाय मौर कोई बाप नही रिवाई देता। विस्तरेपर पो-पो में इतना ही हिसा सकता है। इस समय तो मैं समस्त रेपम प्यान भारतको उत्तरी सीमापर नमाविराम हिमाम्पपर बींचना पाया। लोकमान्य सिम राष्ट्रपिता बापू, सुमापषमा बोस और मांसीको रानी की नायिका मुमा कुमारी चौहाना इस पुस्तक माध्यमसे मो मुभ-स्मरण किया गया हतभी सफल हो सकता है। दीपारही प्रमिवार दिनांक 011 । -मालनलाल चतुदी
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अनुक्रम
३१
10
तुम्हारी स्पति
मारतीय प्रशास्तिक बनक
२ महारमा गाम्बी
. महात्मा गान्धी .
मागमा गान्धी
महात्मा गान्धी
.सुमाप मानब मुभाष महामानव
देगस्मिता मतिविधि बिटप्स मा
गणेशसकर: एक संस्था
. सागत महाम्ग बिमोग
"प्रेममा परे गया
पगित रविकरण
सेवाध्यमकी विभूति
मवान
"राष्ट्रमेवा रॉक्टर बम्सारी
"मेरेममय-सयार
श्रीयुत रामचनमछ
•जकर प्रमा
16 मुमित्रानमा पम्स
४
१५
.
"
१९ मुम्पाकुमारी चौहान
. पुरातत्व जामका सूर्य
॥ परममिह हार
१बमर शहीद मयतमिह
परवागनाय बम
१t मोतीबा पाक
५रार्पिका जीवन दर्शन
तुम्हारी स्मृति दुनियादी मममुमारी मस्त हो रही है। सपा दुनिया दो बार की निने पुने बीब रहते है। एन्हीकी गिनती दुनियाकी मिनती और पन्हीं मन मिपाका मत। कोई वामस परम पाहम्मे रेवत बामे कि एक पस परीबने मिसे अपनो झोपड़ी मसीव नहीं मार समीरने मी रिसने रि-सिलियोंको हाथ बांधे पहा पाया सस पड़ेमे जिसके लिए हापकी माली ही मछि पो मोर पस पर-दिखने मी जिसको म्पनी पुषिदेकर रोरिया नसीब हो जाती की रस किसानन जिसपर इम्यासेमामपर बरवाधार बरते गये और उस म्यापारीम जिसने पास का मामकी बारीपर अपनेको नीलाम पाया बार-बार अपनहरयको टीका को पुम्माम मोरगी मठो कड़ी दुपहपेमें और टगो रामि वेग रोम बौर करारीपासाठमें मपम एपको परखा और उसपर प्रतिकारापुरवा पापा। एक दिन बाया कि रोते वपन दिलों पर एक बार लिया पाया। पम् ऐना बाबो मिटये मिया नहीं भुलाय भूता नही साये फूटता नहीं मार परमा-वितर। बम्त एकही बात गर यह मूखमबारेमें मारी। मामय पान पी। एकरण मानी बनता और दूसरी तरफ जानकार सरकार । बार्मिक हो बापार्मिक या और समाबकमी। बह मोतिमत्ताम कम न पा मोर पिता ऐसी बनोषी पी मियपर मनुष्यता ममिमान कर सकती है म्योतिपमें रसप्रेम कमाइकरतीक साहित्यका बाबाचार्य माना माता | मातृभूमिकपासोम पसारा रसी को प्राप्त है और महाराण प्रान्तको कम कर पीर सागरी पहा बाप होपोंकी संध्या कम नहीं। प्राचीनताका एसा स्पसक कि यह भाई-
समरक पौर
टिकमें मेरा उत्पत्ति बतलाता।
मौर उन लोग बो हिन बर्मक पपासक होते साप देता।
शिनमा मिसिमे मिहामन्ये बोरकर प्राषित किया
पर या रसका अपनापन पा समाई बी। पर रसके लिए एक बात कहनी
पाहिए । पप पष्ट्रीय मायाप मतवाणवा और सम्हापर मरता उसका
पाम पा। पुस्वकी ताकत एक ही काप देती। मौर तो पूरा करती
है। परम पुरयको वा बोगका मियम पूरापरती है और उसके लिए
पृपा और बाकाय एपको साधन बमा गम्ती है। ममें हमपर उसे
पार पसकी पीताकीर हुई बार बीवित रातको मकर
पसन पीपठाका मायम निकासा उसमे गरीबांका निरास बनने
बखत समझी और मोकटोकोर रममें पसको शाम इस तरह
हाने रूपी नि ठप परमी मार परसात होन भगती है। यह धमकी
बाबम्पसार नेकपा मार मारे-बीर नहायाम पहुंच गया। अपने
सचित पुश्वत्वको सन रामायकी मारपस रसग मोर पैरा होमेवाडी
बिजसीका पनने समम पाट रयरमा मुमकिया। सगरमसाबाता
पर पापा पोषण-बड़ी पसन्द नहीं। उसकी पुरिने सी.
पार नहीं पिया हिको एक सनर रेणको गाम बनाये ।
पमा परिस्थितिका बरसना पाहा। रास्ते रो। एक समाना
निमें मानी ननता पापमलो पिरिषी पनि पुरमनी अंगाती
और मागों मोर पेरामा बामेम मिस्तो मूत मिडिया पर और
परगा। परनुपीठों परे (मानपर पा और कहता
रसारकाचारदी सुपिक परतारदीपही परिमापा। दूसरा पस्ता
भीमा। धीरे-धीरे गाम पाया पाया। रिमा प्रवामिभी एक
नही चाहत पर मौजा गावाहिए रिया जाये।
भायम TRE न म पाता और परमूरे ही मौत हो पाती।
से बहसा मात्र माया पहला सबसे बम प रिपे-जापाप मा।
कुमारी सति
पसने अपनी पूरी समर्ने सामने सी और भी दुमोपर मर नहीं
मनाया । पाामियोम पहला बोर राष्ट्रीयता तिने सापन प्राप्त
हो सकी ये उसने उनी परमॉम ठकर प्राप्त किये। पाहिल्मो टटोमा
पौर धन-पोति पयमगानेवासी पक्ति उसमें भर दी। पसे उन हर
चुकीपेक्षा बो बिन राष्ट्रीयताको बीवन मिले, रागेमता यसका
बम बा और रेसी स्वामीनता उसका ध्येय । हममाया मागीयन
पिरोपीपा और पहने परिकारमिटने कमपिकारिबास मिमा
पाप मना । पसकी शिनातिक उसमे हुए पापमपसमें प्रदेशका मालो
मोर एक ऐसा तसे सरतीबो उसके बमको निबाहता और प्येम
की मोर पसगरम मा मनताको मात्रमुग्ण किये पवा और
विमा हनिपाकाह यानी सिंहासनामा करता।
असम करने वार्षिक प्रगौरता भागारिक सत्पता मोर
प्पेपको ताने से उसके कपडों और पराम विलासकी बार
बना दिया। परिनाम यह किया मोर मुहम्मरके अनुवापियार
समान बिना बनाने की सपका एक एक बनना। पर सने मन बसले
रमको मनसापर सरिए बममा बारम्भ किया कि उसके पास एट्री
यता पनपने में सहारा पिपरिषकी रामायें उसका हा मुबोंने
भी यामा। रारोटो उत्पन्न वा मोर पसाठी मही जाने
देता। संगठन असम समाप पा मह उचित कारगिए पचित
मनितोषी मोरना करता और या अधिक मपना माता
संसारकीचा मामयोग तात गन्हें बोपनमें बना पाती। 'बम
मिप्यारेमा मापन रसके भानमें कटिबाये मोर पसन मनगर वारपी-
को पसपरेणी मेहमके पारागारमें बन्द कर दिया। पहले पसे
खाप या और भारतीय धर्म मारवाडी मुरंगाली समयपर पुम्स्ती की।
पर पाट्रीमिट न बाताकिन्तु डा महम्मा अपना गान्धी
समान मपको अपनी मातिापी एस्ट्रीप दुनिया पुनिपली मनावर
-
समपौष
हा और किसी एक युप मौर स्पबमरमें परम सौमा न रिखमार
प्रस्पक गुण और ममारको पैरा होनेवाली परिस्थितियोकि साप-ताप
समान स्पसे विकसित करता रहा।
पसे अपि मा बापा। पह। भी । पर या पपिपि
नाम गुमान दुरुपयोग नही मिमा प्रति प्रान यि हुए पुष
ससमें सदुपयोग ही किया पपा रागामोको गोममेवाडा रचोमुन हो
चाहे मापियोकी मोहनवाला स्तोम । सामी रामके कसमानुसार समये
तमोगुषकी भी मारेखमा नही । एक अपनी दुनिमा सम्पक-पीस
निर्माताको (सियस ससने अपने मनुवापियों या पीकि बागे कोई ऐसी
पाटनही रपी मिसे नमसम्भव कार मेग पर उसम पहले तप
तपको हियाएँ उत्तर भारतवपर्ने रहर पल्टकी परिस्थितिको
निर्माता और मारणानता बरत किया। श्री उसमे पापी
भाषार रखकर रेणको हिएपम' ( रत्सत्ति ) सिए मारा और
कमी पटका हामी हाकर पिएपनकी वास्तम मनम-गुनापन का
दिया । इस उपयोगी भारतीय फरमम समोर रियामा
ant मोरो मारतीय करने के लिए बासे प्रारम्भ च्यिा पाना पप्ट्रीय
मिसापी पधया। समम बिना ही थी कि पहले परीरपर
पराम्प फिर मनपर पराम्प फिर पर स्पराग्य फिर साथियों
पर सराग्य और फिर समूचे पर सराप । पुलामी से पसावन
पी पिर बह किमीती मोश।
यह परम मुषित पुप सापीनवाका पराना बास समर्म बना
ममटम पर और मम सब जीवों और पराका सपाप करता। परि
पिचियाबारपनि उत्पन्न करने बार बहरनमा मंबटम करता।
रिरबार परमाने गदनको भोर रामही परिस्थितियाँकोपमा
मोर पी बनाया और मम्तमें सारी परिस्थितियों पक्षियों मार मातुनी-
काबधारी पुगपर बमार पाई अपने पयको नियम बनानेम सपा
तुमारी स्पति ५ देवा । बेस बाना समस्यू टी स्टेयके समान उसके लिए साधारण बात थी। बरपाचारी सक्ति यह मुननेको तरसती रहती कि यह कमसेनम एक पार समाये पर रख गामा उसको पड़ी हुई किताब में माचित् उसे मिला नहीं मिला। राम तम्बारों पर किये जाते है पर उसन इसे मठा यि किया। उसने सिय किया कि कोई परायी पात बनताबी इम्याके बिना उसपर इमा महीं रह सकती। विरोधिनी ताकतकी यह बड़ी भारी हार भी किया इस बावन मपके मोमो का पानीकी सरा है। इससे उसकी शक्ति और सचीवताको परीक्षा हो सकती है। महाराष्ट्रका यह प्राण वा। परन्तु उसने महाराष्ट्रको छोमारहित कर रिया मा । उसकी मात्रा पासनेमें परमार कन्याकुमारी तक सभी महा प्पा गया पा। एक महम पाक्तिके समान उसकी सत्ता भारतीयोंकि इयॉम हिार करती और घमौन तथा मार पितो तामतका सामाम्म रहवे ए मो पर करोड़ों भारवीर्योका हायसम्राट् पा। बड़ी-बड़ी पपिता उहक धामने धिर मुमती मार रही विठक मेरे पतिषका अमन मेयकी सापकी पिट्टी बना गला । उसको सत्ता मयसम्मप याप देवताको इसीलिए अम्माम करना पड़ा कि विपके प्रति प्याम करने से विष्टियपासनकीर नहीं। रगत पाहीस वपसे कामम पापा और एक मठ पानीस बपोमा इपिास उसका निमका इतिहास । भारतका कठोर गुम्मन भो बार-बार विममा नाम मि बिना मत चामीस का इतिहास नहीं सिप पकता पाई मह अपनी बुटिकी भनक प्रक्तियाँका शिसमा ही उपयोग पर्योगपरे । उसने देसको सौषता और बार-बार मिटकर यह रिक्षावा कि पूर्ण साधीनता ही भारतका बौदन या इमसे एक विमबी कम लिए रागनचाइमारतीम पार्ममेका सपना देवता मौर अपने इसमें हंगकी सौ नीतिमत्ता अमेरिका-सा अपवसाय और बर्मनी-सा संगठन मानेको प्रसलपीत हा। प्रतियोगी सारियो भिए ममवार वापस लिगमा मिस दिन रसके रेसको कुछ विकारकी कर मिती । दिपिकाकीका उसने यह मोपमा परीकी कि मैं कोम्मित नहीं माउंगा। पाग्दीकी महान मारमाने हरवी बोकमाता- को सिरपर किया कापरायकी विवपिनी पिने से मनमुममा और मालवीयकी मनुष्य मूर्वि उसके नाम पर भाप हुई। एम विपापा किलिका स्ममास्टर, दूसरे दिनका सम्पारक बोर तीसरे निका पम्सिीएका लोकमाम्य भवान् से सहा साप जिस बराक पिकामरे शिमका नाका पीपा कर तीसरे रिमका सारी भगवान प्णा विसरूप उसकी पति पात्र की रसी व्य पनि पछि होते तो एएमे अपनी एम-पता मग बापये भापको महान् समानामक और प्रपा बिठा दिय करने कमर की होती। सा जीव या उस मिशन पूर्णताका इत पाहे साहो पाहे यादी पौराहे बिस व पता हावोबी रसपर हार परमसामका एका र अनुपातीपर पान पसे ही बहसमावा। हमकेश बामका भी विकास यही है और यही उसकी मरम्ममा निवास परमरामे पुण्यात्मानोपहरण । म परमपकी पोपमा मनुसार समगों और हिमामा युबा आपापी मापा मापप ta हए पहाना मेरे लिमोर तुम मेरे पीछे पोतपम प्राप्त करो। उस समय या यहाँ गाउपापिसके प्रपर उसकी जिम्मवारी ने पीमा पानी परमीलापीपी विपनामबिमुसार- मिपम मिाही मो शारिरीक पुमन पाये। पर हो रही पया। और मुली पोम्वे एपको भाणा पोम भी देनामें पूरी रिसाने पारती मरायी। .
भारतीय अशान्तिके जनक - ोकमान्य तिवापर हुए बिना बारमयी प्रमाके तटपर बोपर गेका रषिस्टर बनाने-पैसा कठिन है। जिस समय उनका स्पर्मवास हमा पा उस समय उनके विरोधी प्रयाग गरेपी निक पत्र 'सीकर में उसके स्वनामबाय सम्पादक स्वर्गीय भी सी बाई चिन्तामणि में किया पाकिमोडमाण्य तिफ एक पक्ति नहीं एक संस्था । महारमा पाबीके पूर्व भारतवर्षका सारा देव और मोचोकमान्य बाग मनापर तिम्नमें प्रतिविम्बित प्रतिष्ठिा और प्रतिफन्ति एबा पा। समका बम्म महाराष्ट्रके रत्नागिरि बिदापोडी तासीसमें घिसम्मान नामक स्थानमें २१ दुबई १८५१ की हुबा पा। उनका पामेम मुब्ते समयका नाम धन पा । किन्तु बम्लेको महाराष्ट्र परिवारमे बार बाबक] पाकर पुकारनेको प्रथा है। इसीलिए साचित् बरे होमेपर छोम्मान पाखकागये मौर मराष्ट्रीय परतिबनुसार ही मपना तपा पिताका संयुक्त अधिप्त नाम हमा दागावर । तिलक का उपनाम था। कोकमाम्बसे बड़े होनेपर किसी साधीन पूम तुम अपना फेसब नाम बौनहीं मिलते ? विमाने उत्तर पिया कि मरी मां मुझे 'बाप्ठ कहकर ही फारती पी। सबिए मुम बाल मनाना पात प्रिय है। पेपमाकि बमाने में पापोठी तहसीठ स्पर्मबुकि नामसे पुकारी बाती पी। यह इलाका किनमे है। कोषमाम्प कोमस्प चित्पावन बामण परिमारम पैरा हुए पे। नई शिष्य स्पीय मौन बि सकरके भागोम चित्पावनोपर फिनिक्स पक्षोको सपमा बराबर कापू होती है। प्रोक साहित्यमें यह माना गया है कि यह पक्षी पितासे उत्पन्न झवा परेम पता , भीड़ मार से पसम्ब नहीं होती भार बहन
समस पार
।
परी होती है। यह भी कहा बादा कि इस पनीका जमरण' होचा
है। अपनी एक स्थितिसे ममापी पमपमे समा गया
मोर अपनी चितासे तेजस्वी कर फिर मामय पाने मरने
लगा है।
म्पमामारे समाद मार सयामा कोमा पारसी सारीका
पह फिनिक्स पोम पहर कोई सतरे यार करे पिण
मौम्माम्प बोरसे तमा न परिस्थितिमाही मासे सत्पन नेपाली
माप्ठीय परोपताकी नियारियों का नाम ही कोममाय तिबक है।
भादोलन-प्रियता मानो बम समाबमें भरोची। महापब
घिसायीके पुर स्वामी रामरासनमा बामस्य प्रती from
सामH माहे जपली,
पे परील स्पा
परम्त ते मगताये
भधिष्ठाम
पाहिये।
बमबाटोधनमें पार से बोबर जाये हमारपीक
है। आन्दोमन करते समय या भगवान विप्न पाहिए, गरिस
पानिमें वो बोकमान्य तिलक जीवनको लाटोका उप्र-पूर
मिम माता।
मोगापित मा मोर स्विीर कोमाम्प का पनीतिक
RAN मा। तर मयान पिरोत सीवीपीक
अपरेसने पो होडमापको प्रभाव इपियन व भातोप
अपालिका मा नि जिम वय कायम पापा
नयों और दमय ये नही धिर्म में ही उपवाकोटॉप ही
मरमरण करण प्रतिमि भी हरिमा और मायकपर
मिर मार भी परीसर टमको नयादी भोपना
बसी तरह प्रलेस ममपुरप बोर मोमाम्य भी संन्योर पर हो
मारतीप भगतिक बमक
भने
युपका
निर्माण कर सके। हकमान्य तिलक केबस अन्तिभरीही
नो पे बिम्होंने संपर्प उत्सम किये हो मोर फिर चुपचाप बरपरि
स्मिवियांची प्रतीक्षाम सि पये हों। अम्तिवानीमा हातिवादी
बारपन्तिमष्टा।मानीचे बमकार और दाणीके मको
मभिधापकी दावे और बरबानकी तह एक युग निर्माण कर
सरते। परि भारतीय स्वाही मागाव ग्माने सपामी तो अपन
मगर पूनाम शिसम-संस्पार्मोका निर्माण भी समान किया। एक बार
मनसे किसी मित्रने पृम कि भारतमें पराम्य मिल पाये तो बाप अपने
लिए कौन-सा विभाष के ? उस समय सीए मानो कोकमान्यकर
एमपर मारतीप सविन ममत मापकर जगह पया। पार
'म तोपराग्य सरकार किमी कॉयमें पमिका बम्पापक हो मालेगा।
क्या महत्वाकामाबीचबरसे पोदित मारके मषिकांप राजनीतिशाम
इस सीमको पहीसा पा सकता।
कि अपनसे ही मेबारी E+ पिता नपापरराम स्कूलों के
सेस्टर । रमको मापने पुरके मेबादी होने की सूचना उसको एक
मेटी-सी राखसे मिकी मौ। एक लि वाम यसमात म पड़ने
नहीं गया। लेसिस रिम एम पितामी दौरेपर गये थे। गरमीके
दिन थे। पोहोरोसे कोटे क्यों पुष एकल जानकी सबर
सादो पपी । विस तरह पनिक मने बन मोर राजनीवित बपनी मा
भासे परारित होता है इसी तपशिानका ग्रेप । यदि सन्तपर
बिमाबारेसम्मोकी रबार तो गित्तामा पह बहाया किषका
पामा माया' सो बापराबगीने प्रेषित होकर अपने पुत्र-पीको सामन
स्परिपत रनकी माझा दो मिने-निमामे रितु रस मरी मरमोमे
पूना और बामि पहननेच र्म-मरामा मोटा मंगरला पहनकर।
मृत ईमानकी ए पारकरनेवासे पिता बारावी परारतसे
बाय-बाप हो गये। उन्होंन कराषित समझ लिया कि यह प्रतिमा तामाकी
1 समबके पौष बस्तु नहीं है। अपने राजनीतिक विपासोककारपबिणो सरकारद्वाराकोषपाप लिमबीरनगर का सहने और बार-बार पेशाले भासिए शाम रहे। बोपमानामोकमाम्पको शाम करने के लिए मिमा एपेमा पाकि उस समय सरकारप्रेमीबाम्दोमवारी पारमिता' बहकर उनका मरामाठे परिचित राजनीतिक संकटसे भयभीत होकर उनके पास बाते सनके म्बकि द्वारा निर्मित रेशन एग्युकेशन बोसाइटी-बसी सपा लिटि सरकार-मारा पदपत्र र बाते और साधारपर डोक- भाग्यको स्वीय रेना परता । बरबटोका सभाति परेने तिरपर पर कोर पोर पसार होते! ही मोप पन-ही-मन पनको पण नेमवार समाते किन्तु उनके बेस भामेर पारी मनाता पर उनको पन् १९८ में रेप-निमकी सराह तब हममेरे पनि गरियो बराको पुने पसरबाना र यिा कुछ सा- मना सन्तान हो गये जिन्तु कोई कोषमाम्य विपके मसिधारा-पत्र बनुपरम करना वास पेठ मानकावर रस समय तीर सभा मातबरवा भयक कर्माप सामना करना पसके पाप उत्तराभिसरी और समापीर मोहनदास ATM कापी पेश भाभा गये। होरमा तिमी सगबासकी लिपि भी दिषितमस मारपूर्ण और सन्तरिक्षमत्त सकिएन पस्पपी।जित रिम पानी की राष्पापी मापारही प्रथम राजनीतिक पोपपा करोमानो पसी matfए मापने परने प्राचारो रोक रखामा लिपियां माप सिपि और मोहमी तिथि ३१ गुलाबीर पहली बमस्तकी सम्मि १२बजे परे पापा मारमापो पिपा कम पार मुख मानसिको मन परम-निवाबो मपि well हो या होम्माम्य बाम यापर तिक ससपी पोगमापारमाही मरमा मापन मारतोपच्यान्विकपमा के कितने वर्षों बारम्भ साम्पबादी शासन कायम हो भन्न? प्रतिभाकी विचार-मानीको पयारकी बमौनपर सतारने थिए समयको बागमतवा होथी हो । युप ठो मौसमकी वही चम् मामे है। मार्गपामि बमम भौर पसन्त सबा प्रोममें ही थाम फमते मोर पकवेडेबाते। वो कोषमाम्य विममेरापनीतिकबीवनके चार पिरोपपेय थे। उन विषा- मक कार्यक्रमके चार श्रम स्वदेशी बान्दोमन बायकाट राष्ट्रीय विमा और स्पराम । चतुर पाठसि गामात छिपी न रहेमी कि सपने विधायक कार्यक्रमकी परम सामना करते हुए इन चारों पदयाको बापूने महात्मा मान्बोमे पूर्ण रूप रहा म्मिा पा । फोनमाप सिमपास मौ ये पारों तत्व विरास्त माम में । इस रेसी पबनीतिक महान् पर पितामहारा माई मोरोगी । सन् १९ मे कपिसके कमाता अधिवेसनके पप्पा हुए। अपने बम्पत्रीय भाषण मन्होंने लोंका सास किया था। इस तरह सन् १९२७ में अपने इस पर बनेरे पापा सन् में पहली बार कापसके बम्याने भारतवर्षको बोरसे स्वराज्यको मापका बाबरम नहीं सम्पारण किया पामपटि गरेपोंके सामने स्वराज्य की बात कहनम मायावासियाँको दो-सौ सन्यासी पप गे पर कि उन्हनि अपनी संपठिठ संस्था बारा परम बौर परम शके युतीबीच सरायकी मांग की। के बारेमें जिसनेवाले एकसने पिता है कि ठोकमाम्य स्फूक- मास्टर से सात बीड पर है। किन्तु एस पुममें मौ होगति इस बात विरोष पिमा पा औरभाव भी यह बात सच नही मालूम होती। मोक- माम्ब बिनोदी समाव पे। एक बार अपने कर्मिठे पाय पी हे ब्धियाँको और समय पिता मो कोठमाम्पको बातचीत कुम मावा हम दो पायके साथ विष्टि जाते है तुम चाया मापामारी।
समय पर 'कौन कहता है कि मैं नहीं मेवा ? मैं भी देता है। 'रोरा ' रोग? हमको तो मही रिसता पाते हो तुम? ब, में रोष बाप साप समाचारपत्राम पपी मामिमा खाया करता है। पर मौकमाग्यको सन् १९८ में रेप-निकामा मा म मरिनों भी मुहर मागसमें पते हुए, ये 'पीता-हस्य' की रचना करते रहे। भोकमाम्प विरुषको समझमे सिए उनको बहुमुधी पत्तियोंकी बोर बमारा मान पहना चाहिए। मार्य माति मौरमकी रक्षा करमे लिए महान माम मायाम निवासस्थान मारिफ समुफ मास रास बतमाया पा और विद्वत्तापूर्ण प्रमापा गौर सकसि उसे प्रमापित किया था । पिसमें मन प्रब भाईटिक होम हमर अगर । डोगोंको कर्म- योपकी वाठोम रेनके सिए पनाने 'कर्मयोप-पम्प मामसे पौवा पस्प पिडा चिप्सका बनुषार पूग्य स्वीय 4 भाषण सप्रेम किया पा। माग पुरान पोपोस्सरको मेकर एसमें इम प्रारमय प्राप फूी हि शिवसे बाक्ति होर बिटिस नबर्नपेष्टमे कितनी ही पार गरे पोस्मोका होना रोकया। सच तो यह किमये हो या पुराने सामा- कि उपर कभमानी हाच पाकर मुमने मनुष्म फरक सिए पाप्प हो पाते है। पब सामान्य माप को एमे सपे वरना पीना पा। २४ म ८को रसको तराई भी मौर जून १९९४ को मारने रेप-निकालो बार रन् सोहना चाहिए था। मलि सिने ही पानेपानीबागीरनी निगौसपपीगरीबाती पी पीरह पप मे जरिये माते पे। भारतीय पति साधारपरिमाको भोजमहीने में ममा पारने पापा को बाल-पहन लिए प्रतिमान प्राप पार - भारतीय माम्ति बमक रिलोकी रिवायत पनाम मिन्टी है। प्रतिमासबार दिन सबमें से कम पर रिसे बाते है। सतएडोषमाम्ब बवि बिटिश गवर्ममेकी मपरमें म बाल-मनबाले होते तो सहें सात महीने मरिनकी मिमी चाहिए बी पौर प तप रहें नबम्बर १९१५ को १८ वापतको छोडवेमा चाहिए था। किन्तु मन्हें गौर इस्याऐंसे मी परतर माना पगा। गमे भाचित् तारोण १७ जून १९१४ को बाद सनकी समा पूरी होने पर मह दिन पहले । सात लि तो उन्हें छूटना हवा! परस्परपूमसे सत्ता नहीं गयो इसलिए कि सारे रेपमै हम्सा मरेका । पामे मारी मान होते हुए भी भरपूनसे मास समुरके रास्ते पापा ममा मोर मााससे उन पूना के बामा पया। किन्तु कोषमाम्बको नमेडकर यह प्रचार वा सरकारने होल दिया था कि पून सन् १९१४ मनोकमान्य एंगे। कोषमाम्ब पबद्रोहमे पेड गये थे किन्तु उन्होंने अंगरेजों मा सिटि-शासन के खिलाफ बोले सम्बोरा उपयोप नही किया पारमका एकमात्र मपण पाउनका भारतवासी होना । कहा याममा किमिटी अपन भावराप-काहम माम्पको देना चाहते है पिस्तु बम्बई गवर सिग्नहम माम्प तिवमा यूटमा पसन्द नहीं रखा वा। सोचिए कोकमान्य तिलक और मिष्टोके पर जामे बार बाइसराय ई झदिके रमाने । जिन दिनों होकमान्य तिवारी कालापानी इमा पा पमी दिनों एक मिस्टर मेमियप नामके अमरेसने स्वयं बारपाके शिला पमे जिप्टर पत्र में रागोही छेड प्रकासित पिय थे किन्तु ससे यमनी माइकी सादी समापी गयी। छही दिनों मधिन नामके एकपरेर मारजनाको प्ररयम पदोहका बा करनेपर और यह साहोपर कि मै स्वयं विद्राही है मेरा बाप भी ग्रिोही बा रामा पौर सरकारका हुपम पोगना पमी मागभन करना में बफ्ना पवित्र पसम्म समयता-सा मिनी देशा छ हपठोके कारावास। पर एपिरसनका उन रिलाका मुत्रमा हो हपर प्राटापारसमले
समबड़े पार
इपियार एकषित मेि पास और बोकेबमा पिसे औररिप रागाने
विलापमान किया तो मो एसपमान पके मसिमपाने सर की
पपापि न मेरे सिवाय एप मारमनन और पा दिया किया?
सत्य तो
पासोकमाम्पकी मनमायाका कारण लोकमग्रम्पका पनडोर
महीमा बिन्तु मुकाम भारतीय जनता विद्रोइन कामको कमगोरीपी।
पीक पारप परेर पराबी मकर होकर मी नसी सा पाकर
पवासाबा और भारतीय नेता प्रतिप्टिय होटर भी निकालेको
सन्च उग पानेको बाप्प वा।मही तो गोपोंको भाकामाबो अपराम
होम्माम्पपर समाा पपा और पारी छमार पस्टित राबरने पूर्वमें
मतमेर होते ए भी मो परा कोकयाम्पको सुनायी महरापर होतकये
असंक्त पो। सव पस्टिस बरका पाकिमारतवपकी मानी
बनताको मकाया गया। मिस्तु बमठा मझानी पी। सिटिए परमिष्टर
बनताको नमानी रबरपति कारप बनतापाक ही नहीं सकती थी
और मामाकी । म सपना देगा मपहीन हो गया। किन्तु इस
स्विपमें रणकी मारा मुनम पवाय कोषमाम्पने को कहा पासपमुन
माणपकी गाड़ी परखनेवा मेवा योग्य हीथा। रमने कम कि पूरी-
मे परि मुझे रापी ठाणा है पापि मैरा बावरारमा मुमते पता है
किम निरोप बापस पी कार एक पक्तियोगिता नियमन और
म्याम करती। उसकी पाई किपट भो' और उनताको मार
पहचाका मार मार इस पारसे कौन इनकार करेपा किहोममाम्य विकार
पाषाव मारमा याची मानोसमम पापो कम ए पापी रिटिश
पेरोको पितामही बना रिमा ना?"
मदिनी मोषमाग्य निमकमरेगद लिए महान मकरसापा
कोषमाम्य पहात्तीकप्रेिससे सौदे रहावार समर स्पाम लिए
सायीमपातपाडेग मरिमा प्रयापार समोसमारे
बए एक पियाम्पसमा कम मपिरारियोनारा हा पामबार
भारणीप ममाम्पिबनक
मोही दिया पया! एक मरम मेवाने इस हमारे लिए तबियर्या मी
नही मिलने । परिणामतः समा एक सरगम निगो बमें हुई।
सभाको समसवापर हकालीप भैपरेजी सरकार-सपर और म
दिनों तक गरेजनारा सम्पादित 'पायोनियर' सना मारा कि उसने
माम मौर कोष सि मारा कि एकातिवादीकी सभामहीमहबार
भारमी! पहने उस परालाहीम परंप सरकारको भी मठा-पप
पापा। मिस्सी परेर सरकारको दाबी-मुषम वासन-प्रमातीची
पामे मा भाषण सुनने और गिोहीलताकी छाओंकी रस्थिति
दिन रेखा परे। या उसे दोरवर माप दोनो म्पमे परेस
बिलापुरास्था संबठित समिोह मी देखना पड़ा। कमाम्म
और मरमान को बोन पिरोष पते रहे है गन्होंने न कोमाम्मको
पापामा भारतवर्षको।
कमान्द र प्रतिमा परिणऔर यातनामबी स्पराम्प
पापनाकाबनरत सिरिमम्पिन्ति मापायीबो सत्व और महिंसा
को मानकर पी बोर बोकमान्य बरसकी बरवारपरम्पप बनाठ
पहवामा पारिबी रेपणात होगा या पाखोब सकरवाया
रएर होना बहो या बोकमान्य तिला सहारा पाया ऐना मोती
पाठिी बस हो । नामर १९१९को मिटिया मगर र नेता
बमा रेसो देर सम्पारक श्री मल्सबरीने उम् ाि
परफापेनापसापाप करनका पौरव और मामर रोगो
मुम मिले । मारो मपने रेपके प्रति निष्ठा सबमुर सपूत है । मोर
बाप
परापी बन्दरमनवा हम एकही। बरन
अपने भाबर १९१९ पश्मे मिया यहां का बर्वप
मोठा वा पाई मौर बारपप पारे होपोंकी गाण्याबरम
पोली। किन्तु मम महामने यह भी स्पष्ट सिरिता पाक मगर
पए परोसे पता भी नगर विपत्ताली बात नही है। मा परि
समय पर
मगपूर खन मनिमारत बने म मोबात वो बाकी दो पेपी । में
अपने दो सम्मानम शमी कद्र बात गि, इसका मुझे पीsati
किन्तु इस परम भी मारपर पानबारे सोम बहुत कम है।
समयप सानप पीर वापरकरी माई भी सामीपर
सावरकर एक पाये 5 बाय पर करना पापा बोल
फरवरी १९२० चापित बगान कोकमान्य पार पानामा पा।
समें बह भी लिखाबाकि साबाम्पके बम्तर्मत सरामा ध्येय हप
कोमीको मारम-सा मी प्रपना 1 महीनी बह वो मान भी हमारी
बामामका व्यकिया हमें बासमता विष-बन्दुत्व की
जाना चाहिए। सम्पून पृप्पोका एक ही राष्ट्र पो गुम्प एक ही
परके पारिवारिक और रस सि सब पापोका काम सबको समानतास
मिमय यही मत है।
सपम साम्मरायिकता हित प्यादिता मारिला कही नाम
नही। जीम्मापनामार १५ रु १९१९ को मिलर ऐटीत यो पत्र
बाबा रा र म-हकी पुरिसे बहन महत्वका म्यमा पामा पाहिए
पोस्पिस पर मिताहातिवर्ष और चार महीने पापा मी
एंटरप्रभार मन्त्रित भारतको राम्य प्राप्तामा । उन्होंने
अपने परम पकवाक्य पा लिया पाcि मे भावना होम्भार है।"
बहीनोंोपान होलाकि पराम्पकी इमपनको और अधिक
बसमान मान लिए सामान्य तिन न दिनों बालासा
पापियों की प्य कायम की पी होम-तीन और मारपदाग्बोने
कोमाप्य तिलक वर्गवासके एक भार पामे ही होग-कामीमकी
पार की दी। श्री पटही परमपूण बाप पीगत
परला पाताह बहा रोष पवारमा एम्पोंमें
सिमा होमप्याम भारतकी मोर मारा। इसी तरह
कापर मोम्पाग्यो पिम्पबझापामा प्रामाही रिसीला
मारवीप बयास्तिक बनक . हो । कोकमा यकी भनकी हामहोस उस समय भारतीय स्याम्पका ऐसा वातावरण पृठहमा ४ सितम्बर १९१९ की सारनको मारतीय कांग्रेसकी रिपोर्टमें यह भी सिता बापा है कि 'मरम रहके प्रतिनिधियाने मन्वनमे अपना कार्यालय बन्द कर दिया है। मोर मारतको बात सोच मोकमाम्प विज प्रत्याग भारतीय स्वतन्त्रताको और भारतीय संततिको पक-पूसरेको पूरक समझते रहे । मा समके स्वराज्य पान्दोलन भौर उनके सांस्कृतिक-मोवी रमनासे स्पष्ट दिखायी देता है। कामी नामरी प्रचारिणी सभाका पमिलम्बन मोकार करते हुए मेकमाम्यने हिन्दीको राष्ट्रभापा स्वीकार मिया था। केवलराम्यकी भापा 'बामेवारपणा' (मस्मिता) मावश्यक मानते थे । मौर पर इन पंक्तियोंक मेहको समा पतिलम सन् १९५१ में नागपुर विश्वविधान्यकी साहित्य-समितिम पत्ता मोन उपपति मिनेट कनन मार महापयन समापतिक नामका प्रस्ताव परिणत करते हए हिन्दी भाषाको बपाई दी कि उसमें 'बामेवार पमा पात समाके समापतिने करार महापणको पापबार देते हुए पहा पा में हिन्दीके प्रति पापक बनना पाहि मोकमाग्य विमा हिन्दी में यही धुन पाहते थे। बात बपूरा रहकर मी और बी बपूरा ए बापमा परि में यह पस्येव मकिपचे एक राष्ट्रीय-ममा स्थापित वा पो होकमाम्प विमल बिपाकिमक गतिविधियों का संचालन करता पा पम्पप्रान्तम समका संचालम य गरर मुंजे श्मिा करते थे और रिस्टर मम्मकर, ग बरे पी पारतिमे ग बोसकर, में परमपे उपा मम्प कियने हो मगन रस मामा सदस्य के होम्माम्य विकसित मराय पसरीका हिम्सी मारप नायपुरसे निकलता पा रिस सम्मा कम्पबर पगित मारराव सप्रे पे सपा शिसमें बायके मापुर पंचामन पपोप यमला प्रसार पृत स्वर्गीय मामीपर पासपो बारि २
समयदर
तिने समय काम करते थे। बोकमान्य के हिन्दी-जममें काम
करनेवाले बाबा मस्ति । साहित्य-सारस्पति भावार्य अम्बित
प्रसाद पारसेगी। हमकी मेहनी 'भारत मित्रा तथा उसके
परचाप
भी उस राष्ट्रीय तेजस्विताको म्यक्त करती परिक्षा को-
माम्य दिसने युपमें अभिषेक हो चुका था।
कोकमाम्य मतका समर्थन मनरेती निमि अमृतासार पत्रिका'
हवा के शिवम और पत्र करते हैं। यह सब प्यानम
रखमा पादिर कि महारमा नाचौबे कोकमाम्य दिपक पवाद उनके
सावीनता संपम्पमा पूर्व दिया और हाकमान्य तिपको एम्यापी
बस और प्रमापा पराग्यको को उत्तावा इस समय मयेरे
उस मूबपनको परिम्पहात्मा नापी-सा चतुर मार्गरम मिमता तो
भारतीय स्वतनदा पिस्कोपबहानेवालों और रबारबाडोका एक
मनपरख रचोन मात्र होवनी एती। बिस पीडी स्वराग्य प्राप्त किया
है उसमे महारमा गान्धीको भुगामि वेसार प्राप्त मिा तु मा
उत्तपिचर यह है कि या नोकमान्य तिलक पर र
बाबीपी।
परिण निर्माता और राष्ट्रक बस मा पदमागरी कार्यों
विणारे भारतीय बान्दोकन भारतीय रिपो जामोहन
सरको काममाम्य निमसे रचा और महापना ठिी हो। एक युप
पा परस्परविमाप और उसके सोन्टरप समान
मोमाग्य निमा पे और पे मर पमरे बनुपायी थे।
मारतोर सामानोव रखनेवाले बार्मि पत- बम्पन ।
.
महात्मा गान्धी । १ महात्मा गायोको सबसे पहले मैन कसमउली कांग्रेसमें पेचा बा । उन दिनों मोहमदास करमचन्द बाबी कहलाते थे। देयकी राबनीतिक भूपवार मरमपसको तर मे उन विना सर फौरोग्राह मेहता । मस- मऊ माये गए थे। मुप्तम सन् १९७ में शगम होनेके बाद कांग्रेस पर फोरोरपाइ मेहता और स्वर्गीय पोपाप्म गोबर मरम पके हागोम पी पौर हसम्म ही नरम मौर परम रोगों का मिले। पूरी भोर भ. की मयो पापीया माम्य विधायक परम बमबा। सपके मता मोग- माण बाहगंगावर दिसबो का पानीकी सजा पाटकर बाकी मापसी से तार ही माये हुए थे। तीसरी तरफ पानीची पे सिमक एक-एक घरको बन-धीरन सुनता वा और मानता । पन रिलों महारमा पानी कर्मयोर'मलाते थे। नमें कोग कमगीर मोहमदाम परम पद पानी राखेरे। माग्योषी काग्रेस म्पमें भी अपन सिमाम्नक मनु सार पी पीस एथे। एक रिस्टर और इसना बग मता पी पीसे इयो भंगोकार में से हुए मेगा षा-सी हावी पी और पप्प मता बाबीबीसी उपेपा करते । किन्तु पामीप रहें बना पाने में बानना चाहते थे उनपर दरबान बाते थे। पर महारयास स्वर्गीय भार मानेसरगोने कानपुर बायको माता निमवप स्मीयर करते हुए बाबीचीनमा हो कामपुरके मोर भाई भी मेरे पास माम पे । रमसे मैने सोचा है कि 'प्रवाप' का सम्पारक गमेकर विधार्थ माये तो बात परोपवाद का। वो बस मैं मानपुर मागा। पर मैं तुम्हारे ही पास दरेगा। गाईपपेपकरगीने का मरे अपेमानमें पोभूम वी प समपके पौष हम कानपुर मोग मापको बहुत सी बमह यहारे । पारवानी foकविताकर बोले माई, मुझे बाम बना नाही हरता है मुझे तुमारे हो पास बरमा है बन्डा पामो पर हावी है। रमी समय पानी सपा हम सबकान खबर मे पय । बीपी नि म गाग्बीजीको प्रताप प्रम- मथा। उस समय पर सिवनम म्पस्त। एक साधारप-सी मम श्री बामपोनको बगह यूके कोरे रखे हुए थे। मोर पवार प्रेस पर उनके पापी मुक्त रहे । पोसि मिरा समय होते ही सननि अपमा मिनमा र रियारकरने। मोपलोघर हुए मा १. मेरे पास या सुरक्षित है। प्रात जी पनो करते और कती कामपुर सिमाफिक हा मास्टर भी पर। मेरा माची प्रम में और मोरिन ही मित्र सम्बन्तिम नियामक है। पामीरी गोषी मे मा हो ardst। में भी मम्तिमें दिवसरा करा! किमु में उप विकी नहीं समा सकता जो कान्ति मपने लिए की जाती है और मारोको बार पीवोtact कि मामाहोर मरकरीबना पा सका। प्राना तोबाप काम एयरपम्तिवादियोगीरा राणय लोगोली मारी महनठरवार हो जायंगी। स्तर। ममा बाहनाईह यही कि एक-दो मारमा मारे गये। और दिगी ए पाकारयों मनातराम मार प्रयलर भारहीं पा । एक रेप रिमा परेपी मोर मरे सिमाम रेगका पार कर रही है मेपता nिttoह पती हा मारमा।" समय जी महारमानीराम तरने देन हो । बिहार में सीवेनी है कि प्रपालन करनेपर भारतवर्षपो सग्य रे।" मात्रीची ' यामा बिना प्रपल एशिया घोराहिम शमवीपरी प्रयाल माया गरी महाप्मा गान्धी करनी पड़ेगी किन्तु वह सरको मारकर मही स्वय मरकर । मारनेमें मा रुपता, में भी तयारस पते काट सकता है किन्तु मौके पर काटने कोयना अपनी निबध्ता मफ्नी मिन सपनी कापरता और मपन बोबननेको इन्सको कारमा गत मुपिकम है।" ममे देना यमेपली मावीमो कपनस सन्तुष्ट नहीं हुए। पशमीक सापो भी नहीं किन्तु यह मुब सोच पये कि प्रेरणाम्पो पापोमे बामनवासा कोई मेता हमारे बीच और इसीलिए हम सबमे मिषार गाग्मीयोको प्रणाम किया और विरा की। बाबौनीको एक बार मैने बेगमें रेला। ग्न रिला नाका सम्पा पद पर पापा। गत सोचता यारमी माता कि माममाहाँ २१ मतानीची। पाचोनी बीमार हो गये। स्तकी बीमारी दी। तुबसीरासने एक बगइपर नमवान् पमनानेपर मिया है, "प्रमु पम पमतानि मुहाई रह भरत मम के कुटिलाई। इस मावनाका प्रस्पय प्रबमान देना हुआ। बपने बीमार हो पान के कारम माम्बीपी पात्ताप करते हुए कर ऐ पे 'मै तो ऐसा हया कि भपवान्के सामने मुमागार है। एपने कोर्पोको सदा पर किया सत्याग्रह बम रिमा । होगा येयान बाहे। पर्ममेटका अफसर महाके किसानो पुपमन-मा रेखता है और किसानोंकी ऐमी हामटमें भोकर बीमार पर मया । रस समय एसा हया किबीवनकी प्राइतिक रटिनाइयाँको भी मपराब बानपा और सपनको परा भी नहीं सना करनेबामे महान् सके समए । उस समय एमा रुमा कि भगवान सिसने भान हो। गाग्बीयोषी बीमारोमें यह उपमा किमोमासे भाषण मिर-जून नहीं और किमीको म पाम, बाम रेटिए अपमानीची पानके बरपायपरणा है। उस समय मैमे अपमानोगोली माग्यो-मणित मौर मापीमका पहानी-प्रेम मामुपमै
समय पर
रेवा। कृपतानीनी चोपट होबो कुछ मी मुंह मा बाय बोडने पाते
ये। और बारबीनोक प्रति सका पोका पपयोग करलो बार मी
गालीमी रस प्रकार महे मानो को ना प्रिय भवन गुना रहा हो
रस समय मनकी स्थिति ऐसी हो पपी पी कि
सिराही सिराहा परसामधे
एकवार कोकयाम्प लिस्कर मार माबोबी सम्बसि बाम पना
कांग्रेस कमेटीकी बैठकमा रहे थे। यह १४ बमवरी सन् १९२ की
पटना । मयुर स्टेपनपर मेक इनकार करती मीसलए
कोगाने धनपर ही एक समाा बायोजन दिया। बोकमान्य तिल
ट्रेनसे उतरकर सभाम मार मापन भी किया। मारपीगीते मापद दिया
दिनु उपरे नही। राहोंने स्पष्ट परा बीमका कहना कभी नही
मानमा राप का काम कौगिए पितु म भापकी आमाम गार पा-
स्पान का मन करन नही मानता।" परिणाम यह हमालिनापीकी
सेमनपर सामान हरिकम-बमारही करते रहे और परमपुरकी बनता
पापपमेंटी प्रोपाती।
पन् १९२१५ पाई पीने का पीविषयी का
मग गाकर मारपीजीको परपुर के पापावासी साम मापे बिना
मानगो मारपी।ससे ग्रीन मादरै मामपुर होकर पायपुर
पाना हुई तब मैन सिलीम महारमा नापायी माई दुपदरी मारे
पारिपरिपा। मेहबानो मागबीरी मोर रामरत सो परीकी
गुरमी परस्मा की ममी frm पर मिनी मोर पासपुर सिम्प
रममा मामय भाई बमबागान मारमा यि नारायण
मारी बिर मेहमानोष समान नहीं है पापीलीम
रो यादमा तिमाग।
मार रिमी वयमाई दुर्गागर महनाममपी। गहने
(बिमारी येतबहा गया पा) मा मात्र प्रेमी
महात्मा गाम्भी
१५
हए ।
-
भयर मुझे विजयपुर में की और उस लि राष्ट्रीय क्षेत्रमें थाने के पापात
महताची मात्रा बर पिपवारीपने पहे। इस बार एक विनोएका प्रसंग
बाब माया है। मैं भूपया कि यह मामा हुई। महात्मा पानी मिठ
मममम व्हरे हुए थे रसके पालक कमरेमे स्वीय पिटु माई पोखहरे
उस समय मैगनी मम्' गरायो प्रयोग भी कर
सातवी पास भी नहीं बरे हुए। बिटुसमा यस समप सिनरेट पो
हे पे । महात्मापी ईमत हुए मोम बोकिसके सिमरेटपर बात मानद
पराकम्पप्प पा केम विखमाई कर रहा शो! ' पिटुममा
संम्पको तुरन्त तारस्य दोसे कनिसके प्रस्ताबका पान कर रहा है।
रिकामी परते ते पुरातीमें बोस कठे विस्तार
*स? रिमामाई विसिपावर बपना हाब अपने सिरसे सगाकर
बोफे 'रासिका प्रस्ताव को मेहरबान तुमने रिलायठी पीका
बोन फायर पास किया है और में वियती बरोबॉका दोन फायर कर
पाहै।" ऐसा इकार होने एक हम अपनी
पियेपर द्वाप
फेरते हुए पूसरे सभी बहती हुई सिबरेट महमें देते हुए बाका कप
पींचा और बातापरण ईसीसे भर पया।
माखरे एक gaan rरा एक गवसर पि एक मात्र
पापासा एक बहुत बड़ा करि बो दिया को पिन्नी पहियोंकी
महिमाम सतरा वरामीसमोख्या पामोल्लीपती नाके
दोटि-काटिसर पुष्पा समव बनकर बिसी पापी फूट पर बार
निसको क्रिया टूट पाने के विषय एसा मनहोलाबाम्प हमम बोरिया।
उसकी म बरसी भाषाका माप और पका भाग्य मिली पी।
की पति पौरिया उसके मानकर पुर रखी थीं। सेना महाते
इए भी गिसकी बात रामालाकी पपपासन को बाठी हीमोठेहए
* मोविएणमाई यार
ममय पर
भी रिसको बाव वर्माताकी लय या मुमार सोनर की गाती स्मर
पाकम होवे इए भी रिसचे गाव मुनकर सहम-माम प्राणियों और
पत-पास संस्था की रक्षा मिए पन बरस पापा और प्रिया और
प्रिपदपा पारसन म होते हुए भी निसनईमान और नि सिकी
कति मौर मूवि पारिममि दुधरामी गाती से हमने बोरिया रिस
मोमें दुखियको पोकार मर बाती मिपकी बौसम सातमकी
कार सुनावी पावी पिसकी मा विपके परिवानकी मनुहार हाती
और रिसस्पर सामाम्पोको पारनेकी कार होती पती मान्
मान-कम्प मा कापमानबको हमारे पेपर यूमिन स्म पिार
कोरिया।
महात्मा गान्धी २ सन् १९२ के सितम्बर महीनमें सत्ताम स्पेशल कांग्रेस हुई। होममायके स्वमवाप्तको कुछ ही दिन हो पापे में भोर पान्धीबीके पचमके बनुसार हो गदि कोई पति बो भारतीय स्वतन्त्रताके दिए प्रावनाम दिन मौर रात निस्वर डौन रहता है और वपनी सम्पूष पति के साथ मा सोचता रहता कि मारतबक सिए मुक्ति प्राप्त की बाम तो यह म्पति सामान तिकमा माम्प तिकी मत्युके बहुत दिन पूर्ण एकबार महात्मा गान्धीने या मीमहापाकि 'भारतीय स्वतन्याहाके मिए गोषमाम्प सिकनकी मलित बारचर्यजनक है परिये इस समय छो म ये होमै तो मरी पूम मा किस बात में भारतीय स्वपम्पके सम्बनम ही गुरु सोच ये होंगे पा किसीके साथ उसो विपयपर बहस कर ये होगे। कोकमाम्पके ससबासकी पर पाकर बनके पास मुंडे एकाम निका पाबा पिके मामोनकी कठिनाइयोंम बब किसक पास बाकर सलाह कम्मा मार पायता प्राप्त कम्पा। बर में किसके पास बाहर हवा कि सम्पूर्ण महाराप इस प्रयो ग बामे । अमौना में स्वराम लिए काम करते हुए भी सराम्प पर महसे नहीं निकामता बा परम्तु बब मेरे लिए भावप्पा हो पाएहिमे होम्माग्यको मावार को समबम मर गाने में उनकी भावारको बीषित और प्रभाव पोखरा हमारे इस महान् बोराने भारतीय सतबताये रिस पताका को ना रखा पसे एक धमके लिए भी अपने नहीं देना है।" पाबीगी मामबारसे एकदम गई पहुंचकर होडमाम्प विलकी सर्गारोहम गावाम पामिड हो नहीं हुए पे प्रत्युत रस समयकी अपार मोरके बीचमै
२६
समय पर
चोकमाग्यको का भी दिया था।
सत्ता कपिसकेपार महात्मा गावी कार्यो की विपठाको मानके
बिए समयकी पुस्तके पाये पो पोको पाटने पबिर सन् १९५
मकसत्ताम काप्रेसमी तब सपके बप्पयरे मा गुजराती मातृमाण
पाले किन्तु औधको सवा पाम माया माप्तीय राष्ट्र प्रपितामा
पीबावामाईमौरोजीन सबसे प्रपम अपने प्यनीय मापषम स्पपम्प
पारसका सन्चारण किया था और उस एनके साथ तीनपातको और
मिसाया पा। इस तरह मिसाकर बार पापा सरेपी मानो
मन शिवीगामार राष्ट्रीम पिया मोर सराप । मोडमाग्य विककने
अपने मापन-नारा बातम्पनारा और मराठी सम्मिपनों
बाराल पारावातिर गएर पोर रिवा पा ।
माप्तीप स्तम्मताके मान्दोम्मका इतिहास मानमरासि यहवाहिती
मही रिमोचमान्य लोवारमा सिए बीवन पर रहे।
समान एक होम-सामोप प्रोपतीलपा एनाटो मामी का
पी पीजीर दुसरी होम-हीका पातमा कोकमान्य वितरकर
हेपे । कोषमाम्पका समयास होते ही गान्धीजीने पराग्यर मालोमा
पहभारमपन तिरपर उठा लिया । होम-कम होगरे पप्पा इनलिम गरे ।
उम समयसम्ता विश्वप्रेस गप्पा मार-सरीवकामा
हारपतरायने मावा 'मेरा हरय माग्योगी साप जाता है और
मेरा मस्सिपार माया। मारपीबीने मामी मसीन रिसर
पोगना पूर्णपणे सामने रखपी पीस ममय तापमान
ममापीनीकी महिनारर प्रमा म्प करते हुए बमररिस्टर
बैटिरारान मणिकमारतीपप्रेमरी गोष्ट कमेटीकी-हरमदापा
'भापरे मामा मादालनमे देवा स्वपम्प मिसमा टीसाता
*पिव-निर्वाचमममिनि ।
महाप्मा गान्धी छ मी मी बिमाइ सकेगा। माप वही बम्मरस्मा दमे मेके माय हिसाके मामपर एक पार' मिस मैन' का काम किया करते। और प्रकारान्तरसे रेसी मबस्था रखने गरेको पासनको बह पहुँचाते है। इम डोग सब उन दिनों सोफमाम्म तिम्बके सपके मीचे पराभ्यका बाबोन करनेका काम करते थे बह गाम्भीजीकी बात सनकी हिंसाकी पर कारप कोमती समसम विमुक नही बाठी मी । म यो कछकत्ता कापसमें ठहरा गे मा-निबासी (म स्वर्गीय ) हरिदास पीक सगरमस्ट्रीटमाले मकान, पा। मेरे पाप आपुर समसिंह चौहान पे भौर बारके मम्मप्रान्तीय मग्निमगार मन्त्री पी मनुकाविर सिरोमो मुझे पर पार मरे साथ ही माता गयेथे पार पत्ता उन दिनों बाबाकी पासीय माम्पमिम्मामाकी मम्मापको पर मुहानपुर पर पपे में और बात करने की पे। पोष ऐसा बापा किमकाम करत हो उन्हें महारमा माग्बी मान्योमम बनुसार बकाम्य औरनी पड़ी। उस समय कमतामे महात्माची बही घरे हुए महाकी प्पषस्था सर्माय माईबममागची पगारदाप दी। मैं परमपर मिनाले माप सरत्ते में महारमाबरी कमरमें गया तबरेज मि से बातचीत कर ए। कांप सके महामनी मखनऊ एग्मोर पगिलमोचनाप मिम पनी गाम मेटे हुए थे। बोर वातावरणम प्रस्तासकी मपेमा नदासीनता ठायी हुई थी। पोप पराम्प मामोसनको हद समझठे पे। किन्तु महिसासे बाहर परराये थे। मावीनीने अपना दृष्टिकोम उमनाते हुए यह बताया कि एकबार बमहमें लाकर पिए तो मापको पता पस बासनाक मामाकी सक्ति ऐसी है रिसा सामना हिंसाकी शक्ति कर ही नही सकती।हो होनी चाहिए यह वची माहिसा । नाही महिला को हिसास भी अधिक हानिकारक है। मुझे रुपा कि यह महिला को अपने क्षेत्र रोपमा । हिमतुपरकीपसक मंचपर पाकर महात्मा पानी पानी ।
समय पौष बहिंसावारी पासोमार मोरमा समानावी पर मामो प्रषगरम- पनिमे पहात गारिया और मदारमा माबीकी बातका समन किया। रस समय कितने ही सीप तीन बात सोचत । एका पाया मो घोषठा मा किहिमा पाम्बीबीकी समझ मारा दिमकमाही पल सकती। मोम यह सोचते २ किमसिरपर बोर देने का प्रेस सिर भायेगी और सभी प्रभारी परिसमा कांग्रेस प्रोडकर की बानी। तीसरा एक एक ऐमा भी पाबो घोषता पाकि सानिद महात्माची स्पर्म भहिंसापर विश्वास नहीं करते वा रानीतिक चतुराधिकारम महिधापर गोरो रहे है। इस तप सोपवाटीमें भारतवर्ष सिसित मोगही मपिकाइम मोप पब मातासे मोरे व प प्रमार पर बमे किवा मारमायो धार देने के लिए पार और पूरे मता नहीं मानते बिहिया कामासना। सी बप कांग्रेसका अभियान यो प्रविवर्ष रिसम्बरकी एट्टियाम हमारता पर हमारे प्राव मारपुर हा होनेवामा बाबोर उत्तर मौर रशिमा विमान मेवा महिलाको (पने की प्रतिमा-मी र हात्ताले बोले। किन्तु एक बोमवे मेघा में स्पा पान्धीजी साब रिवायीस समाको गीत मान सम- स्माएँ की सिम मा मुमसम्मानक पूर्ण तत्वोपके साम लिए भारतवर्षको स्वराम मिले त भारतरमा मन र किया जाये। अन रिनों महारमा पापो कामसममें कोम्मिका बहिष्कार का स्यान कसा ममारिका मागोतम पामिड पा! नि बाबीपी वितोदर मामलोट महोटलोमीद पानीसित मारकी पौषमानोरीम मचा रो और मई प्रान्तमें सबसे पहले कोम्मित गोमेगास वर्षावरस्टर टिस्य मौर सोमाय परम पिष्य स्वर्गीय मरसिंह पितामपि मानी। रस समय पारि विमरेपर्म मोन पग्निरियादी मीमत तो मापी सिम मारमा पापीर मसलारिता माम्घेलो nिो णि वारय पप महाप्मा गान्धी पिकारियों के बाहर वीर बनता लुरे माम बसहमीप बाम्बोमनसे हपित हो रही थी। मागपुर कांग्रेसम में उसी मकान बरामा पा बिसम म्मरके हिस्सेमें बापूगी ठहरे हुए थे। उस समय सम्पूर्ण मारतोय बीवनमें एक एकपात प्रारम्भ हो गयी थी। १९८ में पर मापपुरम मोग किसी राग मौतिक परिपमें एकर हुए पे तब मामाम्मश्री तरफ प्यान देनेसे मारूम होता पा कि ब्राह्मण-मनाइनमारका कितना बड़ा बोर । बब मोबन मारा तो पो होय शोमा नहीं पान हुए थे उन्ह मपनियोकी वह दूर बैठाकर भोजन परोसा वा हा बा । पर १९१५ में शोकमाम्प घटकर भामे उसके पूर स्वीय विप्नास मुक्को सभापतित्वम को मप्तिम मारतीय राजनीतिक परिपद् भारपुरम गई उसम सोग पहनने पौर बिना सोमा पहननेवाणकी पंक्ति बामने-सामने बैठी बिब मानपुरटी कापस हुई म पाग्भीबोक गुपका पा प्रमाण मा कि भोगनकी वस्तुबाम श्रेष्टता मा पपी बी मोर मनुप्प मान मोगम सम्मिलित पा। मान्बीनी सुपकी मासिक बसहकारिताके यमामेकी यह पहली कांग्रेस बी विपमे कम गरा और मेवर एटकी (मो नगगे बाकर इमपके मगर प्रपाम मन्त्री इप तपा मिनके बमानेम मारल्यपको पराम्प प्राप्त मा) भी कांग्रेस रेखोरे पिए प्रथम पार कांप्रेसमें सम्मिलिए। ममे या पीय मा बमनालाम्मी पवार यो मापपुर कांग्रेसको स्थापत-समितिक मम्मत भी कांग्रेसको सफल बनाम लिए चिन्तित बौर महात्मा गान्धी माना देसकी परम पतिपर सिपास करके बत्पम्त निश्चिन्तये। ही उसपमानमें मप्पप्रदेशको प्रान्तीय कांग्रेस कमेटोको सम्पूर्ण पवित्र इस बातमें नमी ही किमयापीमा प्रस्ताव कोरम हार बाये किन्तु बसायोग पसमें रेप-मरम हसा मचा हमापा और कोप-पोषनमें ऐसा मी मा पा प्रनो साम्प नरमीक गोता पण मा यायपि महारमा माग्बी बार-बार उपस कर रहे थे कि बिना गरिधारे ३ समय पर असापोग प्रस्ताव पाप न दो पिस्तु भोप हो पानाबोके प्रस्तावपर मत के लिए वामहो रहे थे। एक दिन सम्म्मा समय मपन नागपुर के निवास भवनमै मान्धीगीने सब कांग्रेस कायमोंको बुलाया और हा कि मेरे कानोंपर पर मापी कि बाप मौकों (गाग्वीची उस समय कोषको 'लोक ही सम्पारण करते ईबो महिसास मतलब समझाते है उसमें कोरगतियां पूरी जगमपर असम बहर होता है। मुझे दियारा स्वयम्म तो नहीं चाहिए और अमर दिनुस्तान को दिखाके रिना साम्य नहीं चात यो में तो सोकों जर बाहर नि बाउंपा। इसलिए भय बाप होकनपने मापो से पहर निकास पडिए। माम्बीशी लमा काही 'इम निको महान् मा गण एनसरेको दर रेना मे। रस धमय सीम विपरिहायी परिछन हा सम्मोम पर परिजम पाबीसीको राम कासाराको समूशी शारे-मान पुराना और योगना नपो उस जोसे वो काम नही बोला। (मरे परषात् मोगा-शा परिवर्तन तो मामाले सपने पाषषाम किया तु मा ममते मह भय नही निमा कि मुरको मापाडो महिमा म रेस 47 पूरा पानीमान मनाम । किन्तु मारपुर सिर धोरिमा पार पाना बार सिम करना एक बाहरी प्राप्त सबनने जब मनमानी मिर बहरि गिता मिस्टर मामन पमा मामणे दर पापीगीन काम- गरिमि मि साया "मारमा हमारे सामने वाला र हमारे समवरष्ठ महो ऐपना भारिप और इस बावा अपाम पना पाहिए स्वराप पाममें सराबा। इसमें वो ही होग परें बोसस्टमर मरते। बोनही सहसावे पनका इस मामोसम 1 महात्मा गान्धी ३ १९२० में बरमेर रेममा मो मनमाड मेठी बालाघाट मेसे से। यदि में नुसता नहीं है वो मारो म्यानमछ हाई सके बामसे भर १९१५सके प्रधानाध्यापक पे। इस उपस्वागमत हाई मानो वह गौरव प्राप्त किपछिमानिसम विनों पर रेपमपत सेोगी से पक्तिका विटिप भारत में भी सवाल ना कठिन पाने एकरेखीय रियाध नपे हापूमाटर कराये। फिर उनी तिवारी ने पहपर सई गिरफतार कर सिमा गया बोर म्पमप सात वर्ष बिना करमा अयपुर मौर बेहोर (मदास प्रा6) की बेलामे रखा गया।ठीबीपौवा परम उपासक नबर्मक प्रष्ठ ग्यारण। एकरने ५२ मिम उपाए काला मोशन हमी से पेपर बने इसकी मूपियनर मे । ५२ शिम पार पर प्रभु-मसिम्य पन पाने कायो यी मौर रोने सनबर पिये पर बापर मोचन किया । अब पेटीची बाताबाट मे तो उनको मेट- जीरमकी एक प्रलोचरी २८१.२.के कोर में छपी एस समय महारमाचीपारा सम्मारित नगराठी नानीय तप मेपरेनी 'पानिया नर-पोहो प्रकाशित एपे मार डालोको म मुकायम बनुवार गुगपदी 'मयसीवन में प्रकाशित हुमाया। एक बार में बापू साप बसि पासाकी यात्रा कर पाबादीसरे र पाना हो ही पो। म काओंकी कोशिए यह पती किमा सिम्मा पाएको बाली पिh 4 पमपझे मन पराये पनपर पाकर विध प्रकारसे रखेवाहीकानेका पलकले और महारमानीका मान
समय पाँच
अन्तम बात
मुनकर रस रिमेक मुसाहिर दूसरे रिमम ठमेछाप बाते । मुझे गाव
माता है कि पस समय मनिडाड माई (नाबागीय पुष नही) हम
नोकि साब पे किन्तु श्यों ही बापूरेठो सिम माये रिम्समें मुसाकि-
को न देखकर में एक म पास हो पवे बोर बोस पहलि मुसाफिर या
इए ? पब में ममिण भाईकी तरफ रेत और मषिमाम माई मेरी तरफ।
गरते-करते जोमान स्वीकार किया कि मुसाफिर हमारी
मानापर पूसर शिम मेटने पर गये। बापू बाके 'परों नहीं बनाया
पुहित ग्राती फोन पठी ! सरपरी माविकारीता है मगरम
ग्यताई बरपा पान्धीजीके रसे रेखो मुसाफिर पर भगाये जायेंग?
मौर मनिलाम भाईकी मोर मुखातिब कर सलोन माह तमे वो हर
बापमा कार्येमो माचार बगादया मांगो को" बापून पुगरातीमें बार
मम्मा हा पा किन्तु मेरी गपरीम मैने पूरे सम्मॉडओ एस समय नहीं
सिखापा। बम बापू पोरसे उठकर रेमो यूमरे मुसाफिरसि मरे
महामबि बैठ गये मोर अपमे काय-कमकी बात करने जपे। वहाँ
हम मोगान रेखा कि बापू मानी बात रेको मुसाफिरोंसे पनी तीनवास
पर मानो शरिप कई दिनों पहम माकर बैठे हो । मनितात
भाईने मुमते हा म तो बम बापू पारम्पकी चिन्ता किन्तु पापू
भारतबपरे पीयनसे पुल-मिम माना जाता है।
एकबारकी बात हिबा मोपात पयें। ये सबमि भोपाल गा
प। मोपाम्मे 'धर्मबीर बरपा और मेरा प्रमय निपा था। इस
पार माई बमनाया बगानमें मुल मुममा दीपी और में पलास
उनके माता पया। पूरी इस भोपाम-यापारी सस्मा प्रसिस
गमत सीप पर बम्हारी सासरी दी। सर मम्ता साहस
भोपामम पस समय हापिर मौ पे। बापू मौराकरे नबाब साहारे urr
मंसिय नाम भरनमें ठहप्पे गये थे। पपी दीपाका सम्पमा
मगर प्रार्थना राठ पये इस पोरामबाब साइर क्टर सारी
माष्मा गान्धी ॥ महारग मोर मोपामो रियासतके बड़े-बो ममोर-समराम एटमे टेक पहाँको प्रार्थना सुन रहे थे। बापू प्यानस्थ प्रार्थना, बीन। पीतासे हरान परी से पाइपिसे मौर सम्ताको पानियोंसे प्रापमा धमत्र पे। उस दिन उस प्रावना-समाम माकित या मौकर राबा या प्रमा परीब या ममीर कोटा मा पा सब भेर बाने कहाँ बिसीन हो गये थे। सप समय साम्प्रदायिक भेट मानो कोई बीर हीमही रोड पवा पा । बिन रिलों बापू १९३३ में हरिबन रिपर निकले तर स्वर्गीय पगित रविशंकरपी पु समके और उनके साथ हो गये। बाकि रा महा कोपासे पुरुही हमा बा मै बैतूममे मियोको कर मिलवाड़ा पाच मया । उसी दिन बापू सिमना बा मुके पे मौर भित्रमाग बामेपासे । तू पी माई पवावगी मोठीकी भूचनाके मनुस्वार मुझे प्रमा किपाको बिवाम धीम माना चाहिए मोर दिन-ती-विममे मात् रिम पर ही सत्पुगके सर्पाकार मोर्गे मोर पारियोसे कमसेकम मुन्वाई तक विमानाना चाहिए। उस समय मै मिलारामे रेशमत भी माल. फ्फरपीपेपर परामा बा। मैने तुरन्त एक तार सिरानी दिया 'बागी समापुर निाय पण पास बिफोर सन् सेट" और पो परे गाव एम होनि रेखामि बापूगी और उनके सापकी मोटर शिवपादाम भी। विवाहका काम मासे निपटाया गया मोर बापू की मोटर बापे मुस्ताकी भार पम पड़ी। कभी-कभी तो उनकी मोटरकी एप्रसार यस्मी मी पण मी हो पाती पी फिनिससन हम उनकी मोटरफ भागे पवितसेए पते और न म मोटाका पीम हो रविवार पर सते पे । मुन पत्तीटेपण मत में भयभीत होकर मार से यात्रा पर पापा और पुग्प बापूको मोटरमें नहीं बेटा पा। पापूकी मोटरमें भी पनपी पोठी मैयारिय पप पे जिस रास्ता पतात पाँ। पितु मोटरषी तुम हो पाती बीबर पता था कि रन पैश-पाकि निवासियो मुगके मुग पोत गावे हुए बापूको पेक से। .
समई पार और समय ठोरतासे पाचन' करते हुए भी बके हुए बापू उत्साह पूबरू प्रामीणों को हरिबोर पसारका सन्देश मुनात गात पेन्दिा मुस्ताई माते हुए मो पबह प्रामीपनि बापूड़ी मोटर रोकी थी। पामीण माप प्रापः वही मोताको गाते थे बिन बीताको सस समय नाया करते पे पर पनप कोई पारिवारिक तौब-यामास होटवा बा।किन्तु एक प्रामके पामीनों को मैन बह गीत गाते सुना पर अपरान् राममणी पौर बर्षका बनाम काटकर मपोप्या कौटे। बापू पर मुस्ताई पहुंचे तब सम्भ्या हो चुकी थी। यहाँ यो हरियम प्रेमी समाहोपी वी उखा नियन्त्रक गमत पीयुत् बिहारीलामो पटेकडी बमपलो बर्गर मेरे पिच दुसयात बावृती पुत्री कर दी थी। बापू की व्यवस्था चतुराईस बहुत प्रसन हुए थे। असम रात बितानके पापात् बापूको पाइया कि मामले चिसोमाफियायिक पिसिपम और बाप परम प्रिय मिस्टर कम बो उन दिनों एक वर्षके लिए सतपुड़ाके अपहोंमें बाकर पेमें कोमबापू पाने मुशार माइपके पापनार्म मपनी प्रसिर परेर विमा मिम मेरी बारसे मिले जिन्होंने भारतीय पामोंकी सेवाके लिए बापूको बामा बनुमार अपना जीवन सपा रिया और उस परमिदम का मालोजी साप उम स्थानपर गये यहाँ त महापय पते थे। हम होम एककम्बा-पा पुमारगर ताप्ती मरी म मरमौर पर पहुँचवहाँ भकी पारमें सौम्दय पर निश्चिन्त भारसे पाएमा वा माने जापान बातो गरे मरने निकल पा लिग हमसे मुमर क्या हो मरता और पकि बारावीही मर्म पर्य। म गौरका माम बाराहिम बहाँ पीरन परे। वाप्तीभरी राममें पारद पिषमन्दिर निमारण समार नानपारदरिब पसबा बाषी पुरतीपर गार पापा पपा एक हमी पाटी पाने पार तो पिपरपर पमिम पर।
मारमा गादी मकर रेखनेये वापसिंगके मन्दिर वीर ताप्तीका बागरात रोनोमा रिखामी रे ऐ बार सोदय तो मानो सन् १९११ के मरम्मर एस सप्ताहमें पतपुरको पारियों मोर मारियोपर टूटकर विसर पहा पा। पायुका मो मो सोंका बाता काफी ठगा होता फितु सौन्दयमय वृक्षणिक पर शिकार मानो परमगार बना सो मे । पहार मिवरपर पाने कसा हम पितामें पड़े कि यहां पानी कहाँसे माता होमा ? किन्तु उस पर्वत रिपरपर का एक मा मोर उपमे काफी पानी और माहवार पाहा एक मपीचा मिसम देने तथा प्रकार सम्मे हुए थे। बापूने पूछा 'रम कहाँ है? लाग्न बवाया पया कि इस सतपा शिखर पश्चात यह मो इसराउंस घिबर दिखायी देता है यहां इतनी ही मार परसे भी कठिन पढ़ाई।सम घिसरके आर बस्पात बरसे में फन महा- पय पते है । पापू बिक्षिणकरस पड़े और मोरे क्या यहाँ ममी पानवर नहीं मावे ? सप्त समय बरि मै मुम्ता नहीं हठो भी बिहारोतामा मी पटेकले कमाया कमी-कमी पाते पियार्थीका और मसी बानवरोका तो मित्या परिचप है किन्तु ये पते नहा। म परासी भित्र-भिन्न पर्या होते हुए, हम कोम बापू साप सतपुगिपरपर बरे पा रहे थे। और वाप्ती नदोषी होये-नोदी लहरें मानो मौचसे पत गरित सही भी हम लोग मिस्टर कमरे यहां पहुंचे रसके पहले पारमाणी पर गये थे ।इम बोपोगो पर पाने में परा पर गयी पी । मदारमामी मिस्टर कमसे बात करनमे इन तस्कीन पे कि किसान उस समय बात बीतमें हिस्सा मेना गतमरिन पाडौटते समप बर साप्तासे हम होमोने पिरा तो मा कि ऐमा गुमर पान पोपममें फिर रेनो पाया नहीं मिमा बीर या मरवारा वो बभूवष होपा कि भारवमर्पकी बाकी बसमा बेस ताप्ती किनारे बारहडियम कमाये मार रवमें महात्मा गादीरे बारमनल पुष पर रहे। चूमते बापू स्टारसो मारे । ममे कौटनेपर होगमापारिक मार्ग
समपके पांच
प्रान
नामक स्थानके मिनि बापू बाप किया कि वे अपने हरिजन दोरेम
बाबई भी रखें। पितु पूग्य मार दाबाने मैने पर बमबरणे
बौर स्वर्गीय पणित रविकरणी पुपमा गाईबामाको सपा निकर
पिया और हरिया किबापू बागा महीं बायेगे। स्यरसी पहुंचकर पर,
मिपागहमी पीपचन्दनी पोठीकी पमणापम टहरे। यहां प्राव पठार
बापूने मुमसे पूछा "मावनानी बाई यहसि जितनी
म बारह बार इस पौरस मील ।
प्रान बहाको मापाप कित्तो पड़ी है?
'बहाकी बाबादी ममम वीन हगारसे कम ही होगी।
पनिबार र मंगलबारको पहाँ बासर मपते है।
'तुम मेरे बाबई वानका विरोपों पर हो
पत्तर 'याति होमगाबार पापीहे पापा यहाँसे कुछ मौक
पाकर बादी परतो । उमा पुस नही मानीको परमही
पार करना होता है। यो पुरमे भर और कमो कमर-बार पानी नहीं
पता। हाँ पुन हर साठ वाता है दिनु बमी बनकर मार नहीं
मादामा। बापून माहारी हिमाप गहर बारबारमाएर
पुनना या मही। मैं एक मोटार यानी पया। पुस बन पा
पा। उपर बहार हेमा बाह बना नहीं था। मेोट मापा और बापूसे
ररिया कि वारा गुरुबनी पमा महो। माप मामही पा सम्व।
होमागार शिका यह मावा पाप मेरी मम्मभूमि है, इसीमिए पति
बाये हुए मित्राको इस बावरा म मा कि बापूको वा जाने
पमाप मैने तपाका एक मनेगी रिपोर्ट री। बापू पारसी बीमा देते
ए सापरब पये पहात जातपुर महापाकोट मामा। टीम-बार रिल
बार मुघ सार मिना किया मुदामपुर होकर बाबा और मैं
गुरन र उपमपुरम मिले। मेरे तुरस्य रस पानी और मारपाड़ा
पर मया । पारपानाम मेड ट्रेनसे में बापू सापकोटसर मुहागर
महाप्मा गाम्बी . पा पमा । मै इस पाठसे बत्पन्त दुमो वा किमाई मे गाकर बापू साप अग्याय किया जा पा है। उसके तीन कारण १ पाबसि हरिवन-कायमें कोई गे पहायताको माझा महोपी। २ पाप-पैसे सब स्वामि बापूको पेम-भरम मही बाया बा सकता पा। बाबई से छोटे स्थानों को छोड़कर हो बापका दौरा सापा मा सकता वा। ३ गामि हरिजनोती ऐसी कोई उम्पूम रेपका प्याम बोबनवाको सही हुई समस्या नहीं थी कि यहाँ बापूका बामा मनिकाय हो । साम ही बापू नियमो मी-बस बके बगभग सो पार। पाक्रम इस यात्रामे बिमल नहीं सप समा बा । सुझापपुरपर उतरकर बम के स्थानपर बोड़ा हरनेके बार बापूने सुहागपुरको सायनिक सभाम माषण दिया और पलको बाबकि लिए रवाना हुए। उस समय मोठरम में बापूके पास हो या । मैंने मरम्मसे रेशा कि महात्मा गान्धी मोटर रवाना हस्ते दीपप-पैर सिकोरफर मोटरमै सो गये और मार नियाका पर भी सुनायो पाने सपा । मै मन-ही-मन सोचता पाता बाबा बाकर मेप बापूको मिरमर रहे है। जब बाबकि दूसरे पास मोटर बस्तीम प्रबप करनके लिए ये सब उन पीस मिनिटॉम हो बापू ऐसे गाय पये मानो ये सोये है मझे और बर यहाँको सभाम बापूमोन मापन दिया तब तो में मानो पा-सा पपा । पा मापण समाचारपणाम इस पण वाया था 'भाश्मो और बानो में तारीख को याहारमो माया योगाने सुमस नीके बारे में सा कि परामराब है। गराब पता मुनकर मग परीर कमजोर दोमसे बार मानेका प्रोगाम बस पिया । बाम तो दिया मपर मेरा मन पही मा मा पा। मुझे इराद्य परम्नेकी बिमारी पी। भाई मापन- बासकी बग्मभूमि होते हुए भी उन्हाने मरे परीरकी रामय गानकर ही मुमे रोग किन्तु उनको बन्मभूमि और बाप होगाके स्वामको चमेको
समय पर
मरा मम तो बाबईम का पामुझे गनि मना घ्यिा दोस्तनि भी
सममामा, परन्तु उनका कपमा न मानते हुए महामाया। यह बात तो
पाप बाम से किम यहाँ पैसा मेने महोबाया। मैहो बाप माइकि प्रेम
कारण पाया है। पैसा हो में देश भर से बाहा-पापा सहा कर
संगा । माईप्पारेकात गुम्म भापह मिया कि मुझे बाबई माना पाहिए।
हरिवनका काम करनामे माई मान को भी हमें तो पान्ति
बहिया और नम्रताका हो पालन करना है। बापने अपमे मानपत्र
मन्दिर न गुमनपर पुन प्रकट म्यिा है परन्तु मुझे बर मही । मन्दिर
जो समय मानपर तुरु
जाम किन्तु ममी ठोधर्म होगाम में पाएको
मिटाना है। वो माना कि परिणिमॉम-में घुमातका कमक
रोया तो हमारा ना हो जायेगा। अपर हरिजन मदिरमें
मी बाते को पार रयो कि एस मन्दिरमें मवाना बाम नही
पवर्म सारनी बरे सरदार सिंह की मोटरमे महारमारी मुहायपुर
मौर माये । बाम पर यहां पहुंचे तो वहान परमार परिहको
पम्पबार देते हुए पहा कि मुझे बायो रामो कोरने मेणा बताय'
पया था। रितु मापने तो मुत रस बरे पता ही नोटा रिपा।
शिशिमों मारमा पाबीन नमक सत्पाण्ह पाबा एस समय
वारीत २२ मान सन् १९१ को मोरगं पया मोर पर बापू
मास माप पहन पान्धी मैदानम रेपा। महात्मागीली जी-यात्रा
पारमिताही बहो मुम्पा से रहे थे। मेरे माग रय ममप अपमि स्वर्गीय
बाबा साहबनीसकटराव मुग मौर बाहर धीमीनापी बागा
सार मयूसर बाब मगरमा मिनार मोट मापे । मापसे
समनी पार कहा गया 'गुमा मामा वामम महारमानी और ममा सपा
पहिपोपी रोमी साप बापी दी। ममनी मार मैन देगा कि मगरातक
नाम नमः सम्यानही गपूर वापत लिए समनी पौरका मा ।।
सम्मीमासीमाबारीरत समय मौ-सौखट पाएगात पोटा-सामाप।
मारमा गाम्बी किन्तु बास-पासके परिसि ममराठी विमानों के मुकेमुष बापूके रपनके लिए एकत्रित हो ये विशेषता मह कि उनमें से पाम पंचानने प्रतिशत मममप हो पैवाही मोगका प्रयास करके माये । पुनराठी किमानका अपन मैंने वहीं उसी समय किया। उमको पीटपर एक घोल होता जिसमें एकसोटा एकबोटी बोरबान थिए माठिमा मामा पुगरावका बना पदार्म होता । पामको सारे पांच बजे में पुपरी विधानोसे बात करणा हुबा गुमा पाँबसे सममी बाके लिए एस्टेम पानेबाहे केरवाड़ा और सूरी पावानी भोर पापागम होपने पानी सींच रखापा। बिमयत विण रखी थी हाव-बरे सूतकी माताएँ यार यौ। उस समय मुझे गुगराठक गोवाम बापूरपना एस्टेम रसमस पांच-पांपकी टोली पुषराती किसान पुस्प बार स्त्रियों सापपरवेदीमराहोनेपर दिययनोको ज्वार अनेक रेको स्टोका प्रम पैराबरपोपी। जिस टोसोको सममाए कि बापू बाते हो ही मत बामो मो गत वाक्पोतो मुनिए 'हमायबापू पुरणा-पतला, कीबह बीमार नही हो गया हो। पही पसेपर-परवमि बोट नहीबापी हो। महाकाय हमनेसे बह रास्टमीठमपम हो। पायर इस पापी सरकारने र बासे चमो समय से प्रारकर हिमा हो। उस समय बहारोही रस विधमान। प्रयाग पात रस पौर मनकी देनीका करम रस हिनेही में पूरपर एक कामटेन रिसापी पो और पुगराती किसान नर-नारी पोरसे मिला है। 'बापू माये से बागी मेग्यो । होप इसने न किएरको अष्टेनको रेखने के लिए पापी माहीपर पापये मो भी अपनी-अपनी सामेन कर मानो बापूके बानमनपर साम्टेमोड म वृक्षाचे प्रकापके फ फने हो। हरमही बात सहन न करनेमें भरसेना मानो बामरसेबा बन ममी बी और शाके राम-युपको पेपर बैठ पपी मीरा न किसानको बाते मुनिए,
समय पाँच
'मा ने बापूको लाt?
फिर तुम हानि पम्प्सरसे इसमो रु पात्रा पर सिए बापूको
रोका मही
माप पहले दूसरे पिसानो बपनो पाग सम्हासी मोर पोमा
बांका
दोन रा सकता है ? तो गर्मराकी पार है।
एक किसान को इन बातोको सुन पणा पा दोहा पपू पासपुर
यो बावे यही मेरे गांव पासोपान ममा बनतापही बमारें।
मेरे पनि बाम का बापूरे गाते ही 'मीटूममा समान मर्ने ।
एक किसान उत्साहमें का व्यय बमें भाग परिपाबू पाने हम
पर मागे पौर बापूसे हेम कि तुम उपक नहीं मोनो तुम्हारी
मामा सारी गुजरात देशबाने लिए प्रस्तुत किए बाबार मामी
"भाग्पा भाबी गया और दूसरेन मापारममायो बापू माय पामो
ग्यो।
एक महिन पर पकार हुए पुस्पोको परकारकर गोली
रामप्पामे पानाम] टयाना? गरज हरिपुमर पापी मनु
मरामपने कामटेनॉहा गर लिये रोपाठी-सी समाती पापड़ी । यादी
और उनकी टोपी पास पापी अगर किसानोंकी नातपात बाद ही
पपी मानो पोहोर संपमा बनरममा सस्पारिक साप
पसनको । मानेमागे गुजरातरी रिमान महिलाएँ बापू और समयारा
मुगवान मने पीताम करते हुए पत पो पौ। भरा मन मुममे पुण्या
पाइन विसपुत तार गौतारो गादोभापामने पौन कौन बना गया?
पिर मनन हो रत्तर दिया ये नपणा पासपोपहिया हो रिसी
साहित्यिक पारिसी रपमापोह लिए नहीं मरती। बहसाहित्य नाही
समय बातहा।
भीम सानोरे लिए पानी की गई मोहम्मो रिल
मारमा गादी बापू मने सत्यापहियाँको मार भूरुपरी यो सरको माय थे। पहे परमी पमोममें पड़ी दरारें और काटे सस सारमें सब कुछ बा। पा मालूम हुमा पा हि पृषराती किसान नर-मारो दिन भर रस साको कोटे भूनकर पूर फेंक विमा करते पिस साम्से बापू पावे में। पापू कम्मे पार माय । सिरम बारीमा एक टुकड़ा पापा। फुटनों तक बारीकी एक मोती पहने हुए थे उसके एक हापम काठी पी इसरा हाथ एक ससिका कपिपर रखा गया था। परन मुसा बा। पो-रोको प्रारमें सारो सेना कह रही थी रघुपति रापन रागा राम पस्तिपारम सीता राम। मानो मदनमा समापहरे मुरम एष-बाहिनीका मोवामन था। बापू धमनी पारको पक्षमागमें ठहरान नये । बिस्तरेको मपेटकर बनाये बये एक मिटिक और मावे ही उनकी ती माहिपनीमा पोकी। उस समय एप पोको बापू मुव पापे और कुछको उने पगार मुगामा पापा का सनके परिमि कटि नही थे किनु पापक पापके पास से एक पा गपे थे। उसी समय पोहए बापू विधाम करनेकी गाय तेसको प्रति पूरी होते ही समानमान बानो मिए पचव होममे परन्तु इसके पहले इस बावको चापपानी पपे हिबाहर बोडोप समनी पाबम बापये है सकेबान-पीन बार एमेडी मवस्था समुचित है या नहीं। उस समाम उम्पानी पुलिस-पटेलो इस्ता रिसबम्बईम न लिका गरेर सम्पावित धाम्स मार पिया इन दिनों कि हावा किताबाको पापस्तीस पुटिस-परेक रस्वीरे हेमामागीने वमनोको समाप मुबपती हा निधना मापस पा किमापसे कोई माईपरदस्ती पुलिस स्टेसीसे स्वीमरे और निगम पेसी पापस्वी स्तोत्रपिाये अपना इस्तीन वापस है। धिम पटमोसोमा धमापन गनिए म बाप परेन सय
समपर
एस एमय पुलिसकर मार दिया गया था
पिक सस्थापहिमाको गिरफ्तार कर
हर मियो कि
बमामपुरके बास-मासकी पमीन बोरकर पा स्थान मारियामा का
र सिटे गाम्बीनी तथा सत्याग्रही गमभकममा सागरिका
अधिसने मोटर मारिया डायरोको सूचित मिा पा कि पापीनी पव
बामवासीको महीने बाम । नाम्बीनासे मिलने जानेवारी माधियोको ऐसे
के लिप बेकार पुगतो किसानोका पराम पया और को ओपन
सो पोकर दिया गया । सिमम पुहिम मप्रसरों ( Inspectora) मे
मह इमम दिया गया कि मुरबारके को पहनकर होपोंको पापायीक
प्रभार मानसे गरमेष प्रयत्न किया जाये। मैंने उस समय पनाम
श्रीरकरें और पीसोहनी बादी और सब बाह-पास पूरा । फिर
बापूगीका बुबामा मायापही मह बतात हे 'नमक उत्पाद
प्राप्ठोम सिए काम हो। कोम रिवनी शक्तिसेन कामकी।
भापभोम गरमीम हो किडिया पर हो । मोप सोप-समाकर कामको
हापम। कार्यमा परिमाइपो होगको परमात कर दिया गमै
और सरयाप्रतिवादी या ने मारी rd faje मन हो।
होमपन मास कोषध शामित और बदहवरे बनेको
स्यार हो तोमरोबात है।"
मारी बासि मुरारा महारमाचीर-भक्ति मोर मानव यतिक
महान् वय-बाद बिटिप-बिरोप के कार्यवाही।
श्रमजीव और सोमपार उनका पिाय है। परसा मेसी कोई
भाषमा पास महाँस्य करार महापापित समिएका
मेरो पिरोपरी मरे ही माने रिण इन मापपरे कार्य करते समय मो
जीवरसार ताव दाती रही वह रोिगया। मामो मारमानी
परिस और fer-विराप इन कि बीपदी पारा मरगत पे।
मारमा मान्बी रेसीपनि कामोरीन कपको पुती
महात्मा गान्धी
और बकरोरा बनकर उनके कोटि-कोटि निम्नमा योग सापटी।
तिने धीमे ये सोचा कि रस पनिकी तिने पोरकी बाबारीमा
पसे गूसी घनी दी। महारमाबीके रोगनों हाप पाते में एक हाप
मानो अपने एक माप सिसजा पा इसरा हार मानोरन मुरामको
पखवावा निमें सदमेका मम होतापा।से बापप रहते में पा
मानो पकी मांस बानेका ठहो वह स्थान गरोबाकी बाबा राम
महासे हमेशार पा। गरिमोम पोम शॉकिमि म्यहोम
पहामि पुममा पीडाम, एमोमि पिरनि पर्योमे शाहिराव भाडे
धूप पे किन्तु रेबापाम बोड रहा था तो मानो। मामी
बोमन सामाम्पबादी रेसमें बोमेका जीवन सारमौर बाकेबीचका
पवार हो। परीणी घातकी तप पते झे पता है। माना जीवन
भीमविकिपाटे मानो पसीफी मावीमे सीके प्रार्थना-सम्बोको
पुंगानेर दिएपरते । पापो गिरा पोको जिस पसीमें बोले समस्त
मामपाले मौरपसे योगी और बोशीसीबोगरोष्ठापा। पोप
मुरम
व शत्म मानो पुलसीके गुपदाम काबीबाहे, 'एएम
भारको? र सान सामान्पबाही गावासापराधियों समोरी
इस मत करपमें दब रटनी बी। बह एमा करे और विसर पर
महसे हो सकता है या न मान मुबाएँ । तिने कमोनिति गर्ने
अपने हएपमें बन नही किया । तिन परमोशे पगार भी अपने
हमने अनुभव मी परतेपनि पानसे मार रतन होने हमती हो
पसकी एक मुसकराइट मा एक हिका म्याकहीं पता भी नही पाता।
एक बोली बोकतामा सो बायो सतहो। अपने राम राम हाथ
पतारकर पर कार्य क्षेत्र गी मापता हा कायपमै अपने मी मामा ।
पपदाम मी नही माया।
में मोर हो कि पिसीने को पारा शिक्षणा
एसने पप्पा वा लिए विश्व योगा उस हिसाने याची.
समय पर
को नही माए अपने-मापन पर निया । बारा बिमके एक
मोपर पानी सपनाम है ? माव रसकी समाधि में भी तुमन
बाली विविध मुरियन वायुस भारतीय गए सांस र एमपि
कार विनाrt मृतिकार पत्परपर इमानदी कोमठाला उतारने में
म्पस्त पता नर्तक परीरक सन्तुमा मोर बसर रखराका पहरण
करता है बार मुमकि पत्ते को मोर कलियों को परे से है।
मष्टिमा प्रसनन ला उपचनों बार पर्वतोमें पपास सरसकर गुमला
सर्पक्स पर सपा मोर ग पोर फार बार पलीकी पारमें पर
हा। ऐसे समम हम मानो बफ्नस पूछने । पम ! मुबारा माराधना
कमाने पुल्यार्पको गानेस और सारा कापर होम गा सिपा।
यहाँ तुम्हारी बाजार है, यहाँ बान बाम पाहे न पहुँच पाते ते तु
मनः काम उसे पर मुमठेप छम्छे है। मेनियां पाई तुम्हारे परता.
काम पूस, पिस्तु मनि रनम तुम मुम सकळे हो मग पहा ।
तुम बन्न तुम्हें मभिनन्दन ।
महात्मा गान्धी ४ माम्बीबी कहा करते थे 'बबाहर कुछ मीरे मेरे मरमेके बाद यह मेरी बोगी बोबो सोपा। ठिमा सत्य है महान पता है गान्धी बोलो ऐ मुमाएँ भारतमपपरामपो बबाहर और बिनोबा माने । बापूरे राजनीतिक पितपकी ममृत विशेषता हम प्रत्येक प्रान्तम रेख रहे है । समस्त देसम बाब नही बोन सस रामनीतिक चिनोमि महारमा माचीके नेतृत्वमा पिधप पाया है। पम्पतिसेयर मुपौला नायर तक सारे ममें एक दृष्टि बौड़ाइए और परखते हुए माल्यर्पके साप बनुमक कोमिए कि गाग्मी मौषित पुनों युपा बमर है और वह अपनी भूपिमासे मृत्युका उपहास कर हाबब माम्बीबी के इनकी 'अनुर्ण का त राष्ट्रका नियमन करता था मान उसकी प्रेरणाके मक- पर माप विमो सामने ऊँचा मस्तक किये हुएगा। जमीस रिल तक हम उसे सुखी मात्रा देखते थे और प्रहारके लिए, पुष्पहार के लिए, मस्कारणे लिए, और समपपके लिए हमार हाथ पस मिति तक पर बाते थे। बार बांब रमपर बह बावनीय नामक मानो हमारे पास गामा रिखापी देता है। हम मुनाबारे बह नहीं स्मतियार बह रस तक पहुंचते है। बर साबरमती सेवाशाम बा रिस्ठी की पीकांतोनी पाने के लिए शरीरी टिकिट में पानीबीके पास नही पहुंचा पाती। बर माग्योगीको पानके पि हमें स्वर्म अपनो मुगाम अपने ईमानमें अपन अपकरणमे पोर परमी होती है। रुपाय नहीबाबमको महीना स्वामी भी नहीबा पितु मोन रसकी बात पर्मामाकी वह मुमते थे। यह पासक महीपा तु
ममें।
रहस्य भववरित
सुभाष मानव सुभाष महामानव
माम भारवसे गये सोम पते पे तुम बीम्पर हो परसे बाहर नहीं
निका सस्ते और दुमदे कि परसे क्या इसमे भी बाहर पमे पये। पर
यह पिम्प सोचा परदिइने पस्य काम्प बनाकर हिवारसीमन और
हमा तुम्हार
तुम सब युबसे हीटे कोपोने साबा तुम बमरीम मोर पसे घिर
बानोमे बन्दो होमे तुमपर मुकामा पम्पा दाविया बापना हिरोहियो
हिसर पेवा शेर तुम सब मा एक साब। सर्वनामे मित्र .
को भूहिवार समय-समन तिपिम महोबो मिनु भाप परिनाम "
मौर यात्रा में एकदोहोंगे।
रितु फिर तुम्हारा रिमाल पहा अपने सिपाहिति विसर
किमो बहाव कोका मामाने हा हि विमान गिरा विमान दूर
पपा तुम
गिर गये तुम बसम्म सो यामी मरम्म हामी पापा-सपी हो
गये। तुम्हारा मृत्युपर पूर्ण बाम करापुर मया एक बीमे काटा
निकम मा किन्तु तुम्हारी मोकार सवासिनि विश्वास नही किया
पोषाएं मोर साबले पतकि किसी रिन घिमीरेय किली
समें तुम मर मिळो। किन्तु तुप हो यस्म हो? जीवनम
माधम तुम्हारा समायम बरमेया? एक बार भारत माप
बने पाखा भाग्य रिगो तुम बा न विस्मघर नहीं
सप्त।
तुम दुनिया हो या मरे विपरित दर पे सत्र
मिया बानुमोका हेमने मानुको मुमारात और हिमान
भाने पनप रहा।
मुमाप मानष सुमाप महामामय तुम कोर्यो मनपर हो बीचमपर मे हो क्योंकि तुमने भारतीय बीवनको पुरणे बीचो-बीच बीवित किया है। तुम भारतीय विम्यासोंपर हरिया पेहो क्याकि स्वतवता मिमनके रित तुम्हारे प्रपोका मुस्प भामा वाहते किन्तु तुम नये तुम पास न । 'एस्प' पर भी क्या चिसोकाममा होता? तुम मारठीर्योकी प्रपनामापर मोहए हो।बर सहपस मिलन मापमान शाहनवार सिम्बके होछे हए मी यादें बाकास तु बोम्सी है पुगारकी मामी मानो मीसे टकराकरणेर गाठी है बसिमि को रोखता है किन्तु बाई बोचकर उसे इससे नही मा पाती। 'प्रशासमोरकी नियति माझा नहीं देतो। वह तुमसामने माकरण नहीं करती है। पारकरनेको भातोय मन रागी मही होता। यह मानता है कि तुम महामा हो भयस्य । तुम इस्म हो गये। इस देबके सामन्त बोर मोगा और कि- बानो प्राय पस्म होने बाप रेमपमानाको बन्न मामध्यसे अपनाते हैरानो समय रहस्य हो जाते है। तुम छिपायो तुम रपट-कास्तिक होता तुम सेनानी तुम सिपा सातार ! मा पोल पा तुम्हारी बासमूर्तिम | तस्माषिी तो मानो अमम्पाही एलसी पिर माही मी हाम कोरमा बी तयारहरीमापरबानबाहोंगरावरुवारपासॉकी बीमतपर बाप-बात होनेवालोंकी। सुमारे पास-पास हो तुम्हारे पास मेज पहादुरी मानो मनरेखा-सा बमहामापन बनकर देखनेगाहोमसम्मेरे बाद मरे लास बोटयो पसी। औरपात परतो मानो नैनों के पंगले में तुम सेनों से बुला लेंगे। पलपिक डाल पियाने पुतसी पर सुला लेंगे बना कहे ही पती। अपनी भीमा बमी ती पिक पाण बोलवायामाबरे महगे मोठी मी तुमारीमा मनमोहनी
समदार
बरम-गोवती मस्ती।
बालो मारो तुम मपने-बाप पति-पपार नही माये । तुई
पोगका प्रपुर कोम देशरासने । प्यार करनेवाला और बोरसे
पाहा मानो सब निहाल हो उठे पर वाहोमे हा कट सामने मानेपर
तुम अधिक कष्ट मौपठे बोर त्याग करमपर तुम और मरिस्पाम मिा
न हो उठते । तुम कपको मोठे पामो गुपित करत । पस्य मानो
तुम्हारा स्वरूपी मही स्वभाव भीमा।
मुमारी जीवन-यात्राएं मरा विपित की। तुम बसेरे भाई सौ
एस का इम्तहाम रेमे अपने ही भायोको मुकाम मानसर गुमामबार
बिरेयो हामव परमेवामातो पायाव में मिकम बोर पहुंच गये सी भार
राम कम्तिमादिमि बो भरने हो मायाको गुलाम बनामेरामाता
तिकार रोका गाला और मायाँकोयनवा मानकर मरो पूजा की माली
मानो रपाका टिस्टिकर,म-पाके ममि-गवर्म पर पहुंच पये।सी
तपम प्रातुन परेपमहाक माप किमी शिरिप गर्म पुराणात बितान
केमिम मौर पर गये पुरवीचो-बीच रे मनोको मिरमा
पाणी मारे मिगापामार और भारतीय स्वामी प्रथम पामराण
कहलाने । बिर मित्ररागाह जीत पर,माम सिपाहिरि nिter तुम
बोये मी मुरमित स्वारसी मोर पामि तुम पयको गति बना
भारतीय रायपतो मरा पपा समोर विमान टूटनेस तुम पर
पसे बनत नाम या बिना तुमार पुप करें। राया कि
बोपन पाषा-सपरेनु मनपा से बा अनुपी विना पहा ।
वीरमग मी तुम्हारा पर्पमय यहा। पपु रमोषागी प.
सरावगु प्रायन
पाप मालाम पटोरमत
हमा । क्या मेपर्प गिन पूर्ण पणानियो।
दिनो मगित भारतीय पधर्म तुम्हारे सामने मारमा
परिपालगामराम और बारी हतपत बार पापायी
ई समाप मानब सुमाप महामानव गमे । तुम पून बोर मनीठासमोके सम्मिति के सामने तुम छोटे पर सकता कांग्रेसमे (१९२८) ठोकर मिली। पर तुम स्विमरजकी रोग-शय्यापर पो स्वतत्रताका सप्त-चित्र बमा पेमें तब तुमन मपन देखमासियाको चेतावनी री पी किनावों मतत्पर र इट बा किनु बब तुम डौटकर मारठ मामे ब रेशम मारीमेन डॉक्टर सरे मौर म बान कौन-कौन गाम्भो-पिरोपी तुम्हें स्वय माकरण पो और गाम्बीके नापोलिस भरी हरिपुरा कांग्रेस समा पतितकी बारी-ह पम्पतित्व तुमने स्पर्म गाम्पो मोर मनभाई और पाबीमारियोंकि हापों पहन किया । इसम मा कौन हारा तुम या मारपी? फिर गॅस्टर पट्टाभीसे गेहा मकर गायोको पी टेमकर तुमन त्रिपुरी कांग्रेसकी परी बीवी। शिवनी कटुना किनी मत्सना तिन रहनामाके पीच। एक-सौ तीन गारमें भी कौन एण्याम गुमपर नहोगा किन्तु तुमारी बीती हुई परोपर राम किसने च्यिा? यहाँ मी तुम्हार मापन कठोर संघर्ष पा । तुम्हे हारना पड़ा । हात्ता तुममा कांग्रेसकी गाशे कारो। बहमी एक दिन पर। तुमने सोचा तुमन ठामा तुमने मुक पिाक कांग्रेस-सी एक समानान्तर ममामिनी संस्थाका निर्माण रोग और मेक फिया भी प्रमुभफसे बो तुम्हार बार हीरके हरसे बंगाबको भूबा मारने मार दमामें भून गहनम ही मफल हुए। किन्तु तुम तुम माम्बीक मात्र म र मामा बपनको पार । तुप पुरको प्रचार प्राप्त सप-सम्मि समन और माखोय भासी लिए उसका बपयोग करने के लिए इतन निश्चिन्त कि 'प्राण बाये तो भो तुम पस मबसरको छोड़ने के लिए तैयार न थे। ऐसे निकष कोमो भाग्यम फूषांकी पप्या कमी नहीपी होती । न मम पर फूलोहार, विष मुपबायमान मस्तित्ताधी पषिताके सिपाय और क्या म्पत करते है। तुमने मरनीरता कमी भी अवसरवादितापी बन्दा पाइरसे नहीं समय पर का । सेतुमारी पूजा पान तुम्हारा पर-मंग के कार मही। बम तुम्हारो नाके सिपाही ने मातापर हरवान करणी बम सामपी ! तुमारे प्यार दुलार, रोमान्त पौर चुम्बनमें से हरबानी बज भूमकी सुगम माती पी चौर सिर मसानक एका-विमु राममें से पूछ। पुम्सिका कितवा परा पा । मतेम रस प्रमय काटप-याख भिक्षाप्राप्त कितने पुषिस विताको तुम्हारे राय-बाय तुमपर निगहबानो गले हुए। फिर तुम बीमार तुम्हें गडी म्म बायौ । मौर एकाएक तुम भाया । हिारका तुम्हें माला प्रथम वासराय बनाना । महीनों कोबार न पाकर मारतीयोंको तुम्हारी मृत्युकी का बोर एक दिन तुमारा सगांव रेडियोपर भारतीयोसे बाहना। और बह बाबार हिग्य सेना प दुब बह पारी। मानो पुपक महान् मौर परप मापते तुमनके हापों तुमने अपन-मापकी हंसते-नमते सौंप रिवा। भौर एक विटिप-पुरको बम पुर पहनेवाली रेममामता रेपमे कार्य कानी बह बापामा एपेष्ट हो गया।बहरेपासण्या बोयर पापायके महान पड़ोसोर दापो रोटियों मार मारोपर बिक पुत्री पी तुम किसमानेकी माठीपर बिमपन मुमहके नामको मपने हानी मसबार मिटा देना मूम्प तप्पर, अपमेकी हुन्टा र 'मारत तू भागगराया। भीर बागा मारतो सब तुम्हारा पुष मारी है। तुमारे सिपाही भारतीय समाम हिम ममे । तुम्हारा 'जय हितका नाय भारत पौर भारतीय सरकारका माप हो गया है और समय पर बीमसे समर्माप सरार-पी पके मिले में मार गई भारतीय मनिमा बम भी मिली थी। गितु तुम? माप्तीप ठरमाई अपनी जाना या पोपी वो तुम्हें पुपार पटेमी। एकमातापी सिई एक वारसरातीले बपनी र सम्पति तुमारे भाभी सरारपरक पेष्ठ माता पी पिनुनमाई पटेछ ।
अमाप मानब अमाप महामानव इटमी भक्ति कौन अपनेमें संचय कोषा? यदि मारठको मावाय पनाहगे सुमापको वाहत मपनमें रखमेवाका सिपाही सिपहसालार सेनानी ही नसे मापार र सस्ता है। मीर परिमाण सुमाप किसी मोरसे मा भाये तो गा भपनी स्त्री मोर पुषीके साप महान् पपको बस्तु होमा किन्तु बह पूजा पारमा प्रख्य का मार्ग वो इसे किसी मबयपान ही को घाँपना होगा। ससकी मनन्त मसफम्ताएँ मौर मोर-मरी मगगित सफाए मारत को सम्पूर्न सफल बनाकर गौरवममी हो गयी है। पिामोड स्वप्नवी मात मोर सापक पर अपने समर्पोपर समर्पित हो !पर पता है तब उस मस्तिकी यसफलताएं समाय और समाको सफलता बमकर देषों रक्तम सौटती भायी। तुम बरबिन्या, तुम गान्बोके न हुए, तुम सममुख पहुए. तुम बबाहरके महए, तुम अपने गहुए. तुम हुए बम मातृभूमि भारतमूमिके। तुम्हारी बसफलतार्मोपर म तुम्हरी बगलामोपर ममत पुमारी सेवामापर पुम तुम्हारी सेनार्मोपर पीपदान तुमारे निरोपर यम-चपकार, तुम्हारे सिस्नोपर- मागार भारतमपी- अमित पर।
तेजस्विसाके प्रतिनिधि विट्ठलभाई पार प्राच मेनगुप्ता देहावसानपर हमने लिया या समस्त भारत ही स्वाधीनता देबोको मनाने के लिए उमरे बयावामा गंगार मको बलिदानोकीमामा पाई। २१ नमामि सम माहामें पावत के एम टेनगुप्ता प्राप प रिम । २२ मारने विदारक गिना नगरमे भारतीय राजनीति और रिता प्रतिनिपिपमाप पोसको मी रती माला गंग लिया। स्त्रमा स्वतन्त्रतापली सस्ती पोरमी योग-पार गमि- पनाम प्रसन हो पामेतिहासके पृष्ठोपरतिमानों को स्मृतिनापने हाई गहें पप-पाका मसार मामुमो समाम सवा बना है। पीयुत विट्ठलभाई पटेल भारतीय एयनीतिक न पूण 0 जिस पर धारमा ममार रोजगार एवरेगिमरवारों मोर यकी बार पठी है। बन्यमम मानेगा प्रमाल पालेको पीका मान करना ना भा। बमेम्बरी मायानाकर किस कोपामा और मिपियमही मापा । रस पर ARm मौरी राम हरपार गोरे यांनी मादिमी का रहेको अपने-मापको मनमावित रप तो ऐमी ममता निमदो सातो" पर बारिमान और राम-पशि भनम मुरमित पी मोरप- प्रम स्वाभिमान और भारमलगाडमे मुडिये। उप ममानुपार और पामारोप समादेह भारत- कमानम बार पा पुरेसे पाम बसेरफीक यारे पर तौर ऐम पर मामी पपाही लिए पूर्वी मारोिपको पायगकी परी सामानादी बहा दोन बोरल तरीही
देवस्थित प्रतिनिधि विकृण्माई
भावश्यकता है। यह बसेसीके बधिकार, शक्ति और मर्यारा सरमा
माता कमर प्रसिदए । मन्होंने मरी हुई-सो सुनी रक्तहीन सालो.
पम बसेम्पनीको भी चमका दिया था।
असेम्बली निम्मम मध्यम यदि मायककोई एमता सममें
सबसे पहला म्यान स्व पटेमा है। कौन-सा नमक्ष सरकारी प्रमाबसे
बस्वा पाप पटेख ही एक ऐसे पक्ति हुए गिम्होंने मपसके परको
किसीकसारोपर येन नहीं रखा। बापचपजनक रहता और फूटनीतिक
साप एक बार बह हिर एक्सीन्यो मागर इन-बीको फटकारते देखें
गये। इतमा साइम एक मारतीवमें ? ऐहो पियन पोंका कोई टिकाना
पार गरेबाने इतने रिना पासन करना हो सोचा था गुलाम भारतमें
भाफर पर दिलोसे पारित होना मया था। एक भारतीय-नाराकमा
पर इन-पीट-से म्पत्तिको बोबायगरा बराबरी होना
पपात वास्तवम भावषयवनकदी पर एम्पाय और मिष्मषवाका
मटम पुपारी विधानको म्पत्तिमा ठमर ही देखता पाया।
मा बसेम्बलीके मध्यम पर भी रेपको मूक नहीं। कमी पारणी
सत्याग्रह काम बम्बा तेरे गये कमी राष्ट्रीय महासमाम उपस्थित
होते ए.मी र डाइनेस एमो मेरीसे
प्रप
मिलाते
पाचकर एमी र करते है परे सोनकी तरह नि । एक
'नस समय बिटामाई स्वयमीन पर मौ परस्त
बम ऐ बन्दीमें न पार भी स्वराबी बने हैं।
बार-बार बेस-बीमनने पन्हें पानी ही संसारसे बिरा केरकी पाप्प
किया । बह भारतकी स्वतन्त्रताके मिए बाठो पहर परेपान पते। बीमार
मस्वामें मौ चुप नहीं थे। मृत्यु के मुहम बाते-बाते भी भारतके सम्मायम
प्रचार करने मगे ऐ।
फोकको बाकर हमन भारतीय स्वाभिमान पम्भीर प्रति घर पर
मीति निक्ता मपूष साहस मगन सा पराजिता मोर पक्षा
हर। यहाँ
समय पर
की समठिपाको तो दिया है।
मोममायने बो बार राष्ट्रकी पसनीठिन पिता या सहसा भर
नहीं समवा महसन सानी मापही पाय-4 मटि बार-बार नहीं
बनमते। सरकार और पार किलो प्रयासमानबारेमसि
कमी-कमीही घनमें रिवायी है। अमिमन्यु तमाम सदुपये
पुपकर सवाल-पमा करनेवाली बोरता पिरतीको प्राप्त होती है।
गणेशशंकर एक मस्या कितीको रस र माया पौत्त समय पारिया पोरे-औरहने दीव म। प्रम-मदिन मरण मापद प्रतिवप हमारे सामने बाता है और गोमियम रस मन्तst बाद रिहा गाया है बिहे भाको टिम पर्म wr7, स दिन मैर करनेको हावार पा । रम लिन र fm बना सस्तोमा बस्किदम-मसालाsaxy माणोच परमा ने एक बार nिfi परिमिलियो मामितभामा htract दौरा-मम्मिय ये मारा मारी र प्राचीन सामासिक प्रग, frrte FIR पवित्रता पद माना और मामा साल दो। मादीमा २ सारा "tal- कमी हरुनी गिरी। ' मरम्पतिमी पार' मागोवरपरया, मा समरिमारकर मरतार अपने पोरकी बार मिस्वामित्र कम पर भी होगा। पताको यदि समर गाने ममप भाग पार दो पला वाईए किसकर बीकानावार लोगों तर समरे शाम पीपर मो हम एम मारी और मिनी गति कर मार सिमि प्राय अपी व्यवऊ रेहडी मापप, पटना भामपूरक विचारितामोल माको तान मिपी पर निकले किन्तु निर्माता इससे बीपनको पाना उमर पापित ऐसे दिया कि पायोप्रेमी प्रम-पिसी तय हमारे सामने सोपोर इम
"
समपर
उसको पुनाती के सामने मतमस्तक होनेको वाम्य है।
गती पत्रपर । माप समरे विचारों बाइकपा । पदी
एक ऐमा पापाबो सन् १९१५म एवं नम मास-पास राष्ट्रीय प्राप
सिवायरनम अपनेको पपरपूर्वक कांग्रेसी कह पाता था । पारी
प्रबोमन पासना तो रोपो का मुधीर मौर पमनोठिक मतभे.
का रोका वातावरण कोई भी बसगौके मिपारी तेगको मारम
कर सपा राष्ट्रीय पेत्रमें मनेगी राीयवा समर्पक पे परन्तु उनके
बीरन ऐमोजमा भी मायौपशिपम्हॉन पष्ट्रीय परिपाटी मारका
पागन बारम्पक नही ममता। रानीतिमें निर्धारित पर पूर्व सैसी
का निदि मात्र करने पर पानपान वा नहो पे प्रमुठ एक ऐसे
प्रतिमा पनि यो समपनी बन्न प्रेरणा अनुप्रावित हमा
'मलाप एक रिन को पति मरे कि हिमो-नमय
पटा बना और बार पानको शुभ-स्मृति है। पत्रकार महा हिला
सम्मो 'प्रवार नामक राष्ट्र संघ पाजी कायरोको प-यातकोको
महामो कुरोंको दरबापारियोको मोर सारिपाको ममातार नुमोरिया
री और परिणाममें तहापिया अपमान मानिनौर परापार सहे।
परसबात तो मरे पर विद्यापर समेगामे ई मिलकर
फितुबह तना महमा दरिना मापा विमा हपानामस्वर
रमके लिए बीकी रामाठी वर्षो मानो पर सी
फिरती है। पानवे प्राप' पीपोर गतिठे मास होकर
भौर पनी प्राणाको परामपणे मापार होकर पर प्रधान रेपी बोपने
पारो भरने राम्प प्रगम भाव महसे मार तिने
पाया और हम एक बार पाप मारी मम्मतिरो। ममीले
पा मार समाति मोटारी और रिपपमें
मापार किया है। पापे मेसी''बाराहीला।"
गमेसकर एक संस्था
नसचीमे मह
कभी बात नहीं किया इनके प्रभाव एवं सामकि
भीवर रहते हुए कोई कार्यकर्ता या मिन चाहे यह किसी भी क्षेत्रका क्यों
महो मुसीबत मझे वीर मह । मनकी तप वहांतक बनके
'बाों की पोच भी काम मपन पंटोमे गमेमहीको मपने साप
पाठे। वेपन मठियामें रहे दो अपने कार्यक्षीक मिोम बमको पप
हमिट दो बाते बता नगरी संघापोखे पापवाही दुनिया सनिकटता
भूलकर एमपी माताका मानन महीं कर पाती थी। एक बार
बारामाई नौरोगीके सपासपर वियते ए पोपनीमे भइस बासमका
'म मब बरे-वागारमे मोमबत्तियां रावे सखे पहले
सूर्य के प्रकापमें सूयसी मोर पाते । भार यह बात भमके मुपपर
बसि परती वर्ग बायो।
बोपगेपचाने अपमा मिर कर मानो यह संकट दिया था कि स्वा.
सम्म बताको बास-पासे बमीनपर उतारन लिए हम सिर देनेकी
महठी मान-सहसगुनी हरी-मरी सके। मत सिर मेका पा
संत हिन्दी-अगदी तस्माका यार रहेको २५ मार्थको स्मृति कमी
मपमानित महसे मौर कान्तिकी क्यारियां कभी सूखीम पर पो।
ममेगाको बार का समय हम एक बार पर सोम मिा परें कि हमारे
पिर भी और हम पर भी और बुमन नामवनबामे करसे
इमपर रपार है।
यदि हम पसरला रक्त-करमे पसूक की मानमसुखम पुर्वक
भारनामो दुबारा स तो हिन्दी बाग नाते हमे ऐमिासिक धरोहर और
प्रेरमामय मुहबानो माते प्राप' और उसकी सक्तियोंकी रवा किये
भाना चाहिए । यह हमारी सभी मनेप-पूमा है।
-
स्वागते ते महामाग विनोबा
पाने कर सिने जमानेकी स्मृति सबै कि कसो युगे -पाटीमा
बत मिस करी और पते पार दर मिा सोरेन्समझेप इस प्रान्ति
को दोहराने के बाप । रिचारको कसोटीपर चाहे गिन पुगको
फसिए पिता और बस एकम्पनि मिसेमा पिसके मन मापन
के चारों बोर, म्यक्ति-समूह, सौरमणपके उपपाकी भांति पार पटना
हमा पाया पापेपा । बा पक्तिसापर, पूर्व और पश्चिम मासिक मारी
की ममतासे मादी हो या निम पापोस्ट या कोई और पति-
की पति-बारा उसमें मना जीवन विमीन कर देनेमो रिपर।
अपने पीवनमें अमूहको अपेमा मुमको मा अषित म्हतार
महारमा पानीले एक मपिट बार सपुत भान्तिपर प्रहार किया और
ममी रस रिन गाबी-रिवार रश्मियसिमालोषित आचार्य बिनोगा पर
बाम्बी मकान बरसानसे अपरिपूर्ण कार्यही पूठिकाय पर रिली
पर पहले साबरोबार एक भी साधीचे शिम् मार रणम
इतिहास बसर कर रिपा राबत माज एक बार किरपा
मान सामन बाकि नमकी बपेसा म्पक्तिको पुन-पस्सरो को
पति एवं सामर्मका सात म्पमा बाये।
हो वा पति-नीत निमित पपाशवाणी होताना पमाना
परम निर्माता सो मारोनोमो समय सर्वत
समय मीमार पानेकामे कप-सी राम और मीन से अपने
अभिमतमे निमुगमगर पाती। पमामा हावार होकर वो मोरे
पामगोपाप्योता।
रिपरी एक बार महापाता है। पराइ तो पिमानी मप।
पवागत मरामाग विमोवा
पुप-पुस्प इस पिस्तन प्रमाहको बालके पठन-पपसे पींचकर पिग्मम
म्की मोर मोर येता है। राष्ट्रति बीवनमें ऐसे ही मोर उमसम्पम
पप्पाोंका सुबन करते है।
बेवाय इतिहास चिनावाने पमी से मवसर ही कह दिया किया
समका परिषय नि। प्राचीम पियो अनुगामी इस सापकम अपनी
साबमा परिणार्मोस नीरस और उपेक्षित पनात्मक काकि उपमें मूम
से सोनेकी बांति इस सापमानास बन रखा कि इतिहासके गुप्तचर
उसपर गहाही सके।
महरमागास मिमो पप १९११ से मार समके निर्वाप सन्
१९४८ टक बत्तीसपोकी सम्मी पधि विनोबागोने पपने मामको
प्रसिदिमाहित ध्वपमेरे लिए समाचारपत्रोंको बस दीन मोरे रिपे और
में तीनों रागीयी। माहयोम-मान्दोमकी अबता बोचा-बीच सन्
१९२१ म मप्पप्रान्तीय सरकारकी नियुपता मणप्रान्तकी तस्माईको
राष्ट्राय के सम्मानकी रसाके लिए चुनौती रेठी । नागपुरपे मापा-
परयापदणा। पकान सरकारी अधिकारियोर सत्यापहना संपादन
परमेवाती समितिको बहसा गिरफ्तार कर लिया। हायनामिर बिनोवा
का भासन ममेको मानरमा लिए होडपठा। सत्पापा-सपासमका
भार समारने के लिए बाहर बाम किन्तु दूसरे दिन सरसापट प्रारम्म
परम पारेही यह भी पिरफ्तार कर लिये पय । समाचारपत्रोके पीप
स्वामी बिनाविभामया यह प्रथम बरसरमा। यह पुम प्रारम्भ मम्म
प्रान्तमें उन बलिपपपर बाल होनसे एमा।
मार पिम रिससे मामी एकीची पुकार । माबीजी वन हो
पठे । प्रमुरे पनिोसे वंचित हरिबोंने मन्दिर प्रवके लिए यहाँ बस्यामा
गरामा। बिनोवाको रसके मंचासमोगिए मुम्बपूर भेरा पड़ा।
मा सन् १९२४ वा पर पिनोबा री बार सामन थामा।
प्रसिरिय वीसप भरसर पपरेसे पोषा-- १९४ में । परिष
समबई पाँच
मार महत्त्वमें यह सबसे भागे या। इसका यम भी इसी प्रान्तको मिला।
पाबौनीकी मरामि भारतीय बनता सामूहिकम्पमें सरपाप पोरवर
ममुशासनोको पार पलमें मसमर्प दरी ! गाएब भारत सरकारका पुर
मीविका निराध करने के लिए उन्होंने म्पसियत इत्यापहा विकार
मिश्चित किया। प्राचार्य विनोबाइम बनके प्रथम होता गौरबसे अमि
पित हए!
एकबोर राममोतिक प्रसिरिके सेपमें प्रथम मानेकी मची हास्पाती
सिए । रयाग मर रानियोका रिडोरा पीटते
हुए, उसी पूना-बीर
पार रखकरमपमे हो साथियों में प्रेष्ठ पक्षमकी कोधिोका तारा
हुमा। फिर इस म्पक्ति-पिरोपको समर्पण-भावनाको भी विए से
सापक बोरमक पान पिम माकबसे अभिभूत प्रसिरिमोर मोकप्रतिपय
को पावसनकी तप बार-बार पता मा पाहै।
पम्प प्रान्त दुलाबा सिम मापोग मोगरी भूमि मावी कि
बिनायाका पपन समझी गोरम मेक्ते गोता। ता पा रिनोपारा पूर्ण
माम पा-पी बिनायामहरि भाव। रिणम्पामी हार-परम्परा
अनुसार सन् १९० में गौराके हाई स्पूनमें नाम लिखा गया रितु
सिरोही जीवनाला मार पहनानातिए परम पविष्य मिपिन
सिर्याको बारमा पिने पाराम रीगासपी निर्धार पाटपाताएँ
परा नहीं सकता। पी रिनापने बिना कोई ली हिम तन्
गुमाम शिपा प्रथालीगेरिया पर वार पारिवारिक धीरमकीनाएं,
पश्चिमबारमौर मोनिका रामोस रेपो बम बनाम पानी
नितारा सह रिकामा रपटी पपा मुगमप बाप यापारण मामय
पोमामाही मरमाणापाए, तर पारावार सामने ही श्री
दिनापाने मुगरा मनुमा पिया। रई उम पिणी शाम भी गित
लिए मना-मारिया या विमुक्तये ।
सबसे पहले दिनावर रिसर प रोनों पाईदी होपनावमा
सागत ममाग । बिनोपा
।
महत्तर मादपकी प्राप्ति के लिए परोगबर पर पर।
योग्य मार्गदर्शकको बोयमें रोई और मानसिक संबपति बार भी
विनायक सम् १९१६ माघी पहुंचे। महारमा पान्धी मावरमती बापम
स्थापित कर चुके थे। पर किसकर बापमे महारमानीसे माममर्म पानेकी
मनुमति माही फितु प्रतीक्षा सहन नहीं हुई। बिना मनुमति प्राप्त किये
मेहमान नहीं बतिपिक कप साबरमती पहुंच गये। महारमानीमै पपमे
पापमके प्रारम्भमें ही मानोसोट- सिम विनायकमा स्वायत छिया ।
अपरानि मायपरम्परा अपना नामा म्पबाकर मानो सिरियाका
मपार महारमानोकोवापनाकी पोपमापने भापी।
माममवासी विनायकन भाममे कर्मट और कठोर बनुशासनौली
तपनस पुरनके लिए अपन मन मोर पपरका पसी वएफ रिपा
निस तप प्राचीन ऋषि-मुमो परिचा-पक्व साबमामय बीवनको
कहानी हम उपनिवरोंमें पड़ा करते है। मी बिनायका यह मापमपास
तिमा मामय तपोनिष्ठ एवं बम्पयनधीसरहा-बहस प्रसपर व्यक्त
होता ई-दुर्य बलस्म परीर रिलायकी कठोर प्रमशील किन्तु
शिकायवरहित वर्मा और परिषसि प्रभावित महारमागीमे एह गि
पूण मे हो पो फिर मी ना रा काम कर
के हो?
पिने-चुन पमो पाइ माइगर निपे हुए स्तरका काम करमैत्री
पग-पक्तिम् ।
से कि हम पिप्पको मपने समस्ठ मानाठोम पशासित
कर के मालिक रहाहर पाम्बीबीएप मरमही बाया झेपा।
इस तरण म्पोतिर्महाग प्रमाति हुई और बिनपारी पचन
की परम्परा बागव की पसी। पौषिनाया विनोबा भावेन मये ।
मम्मप्रान्तम बाबायोके मत पर मोर बरे एकनिष्ठ प्रचारमै अपमा
बीवन पपा मेगा स्वयमस्त बममाताजी बरामी बसम्म सेवा
समपके पार
भारनासे सन् १९२१में महात्मागी गरापमाप्रमही स्थापना की गयी।
पिनोमानी इसके प्रधान यापार्प बनाकर साबरमठा पा माप सामे
गये।
महास्मा के निवाससे पौरवान्वित पार (पी) विम तरह का
ग्राम बन गया इसी पयमि ५ मोम पेपर मस्पित पानाराम
निस हरिबन सेवा सुविधा के लिए रिमोबागोने पुमा रिनोग पर
पाते ही परमधाम बम मया। मानो मपनको मीठे-जी मारनेरासे पापा
विनोबान सम्त तुकारामकी बानोको रोहराकर कहा
'भापुले मरण
पारित भी रोता"
पति मपनो मौत मन मपनी बोसों देखी है।
रापिता महात्मा बाबौनारा प्रति अभिनय म्पोति बने
बस करम बामोशित किये बाधाय विनोबा महात्मामागे मालाम
बिनम्तर मन भारतकाप-योगडा ग्रेप और पसे निर्मल बनाने
का प्रयत्न कर। महात्मा बाबीबापतम सापो स्वर्गीय महादेव
साकिरामाम अपिये पात्रो दोहरायी जाये जो बिलोराका पोरन
म मात्रको पोषन प्रशन करणारित पाया
परमे म पिम्दती परम्सर सुदमरम्
पति पति॥'
सन्त तुझसोपसमे भगवान् राम मु मनग्य पm परिभाषा
मोपायी है
सा अनम्प पारे प्रसि मतिम टो हनुमत ।
मै सेवा सपरापर रूप सापि मगवन्त ।।
पौर सलिल अपना लिोगाने परपापिषों बाप अपने बाग
मनका ऐप मनाया
'बार टोपोली या भात मनवागत है।
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स्वागत महामाग पिमोग विनोबारे सम्मकोपम पमोरी बा हावारीका बाप करानेवाण काई पम्प नही । सन विचारोंका मागहमतिसि म्पत होवाचन के साथ बमका बावाबरम रहता है मपसके साप मंगठका। से ही मेर साथ मेरा बाताबरण रहना चाहिए। लोग करते है यह नो कति- युग पाया है, किन्तु कलियुगमें बना है या सतपुनमे यह को अपना के विरा मुग वरे पास है। इसलिए हम ऐसा मार्ने किनियात्री हमारे सामने हम पाचार है। हाबार तो मा होता है। हम कोप घेतम बारमस्वरूप है। हमारा पानावरण हम बनाने । परीर-यमको बाब भी पिनाया बहुत महत्व देत । उस रिन विस्मी के रामबापर प्रावना-यमार्म नमन कहा परीर-श्रम से ही एनिमाम साप्रापमाही बार मम पाहियां पैदा हुई है। प्रपिता महात्मा मान्बीरेइम मुपोम्प प्रकारा-बाइक और बत्तरा विकारी नन्त एकाजताराम पियाके साथ प्याके पापा क्षेत्रमे इम स्थायव एक अभिमनन करत "नम' परमपिभ्यो नमः परमपिम्प"
प्रेमचन्द चले गये !
विनी-ममत्की पानीको मारतीय साहित्यको पानी पना देनाडा
कहानीक पर्म पहानी हो गया ! उसकी बोवन-पटनाभोला भब
हम भैपुसीके पोरोंपर मिनन माम अधिकारी ए गये है। इसमी गित
पबामपर पव-मस्ता शप सटर ये बापमान पत-सत परमार
राहराने की बात हो गयी। पर मानव-संसविका परिष मितता पामीर
हम उसका परिण हिमने बैठ गये। बहा रमकी गाम सिहा करती थी
और ससफो एक-एक सांस गोर उसासका अपनी बानि कर म.
मफकर हाया भावना कापम हम मान ताठा समाकर बम रम सोपवे
बमामबह सारा वगना बाहर निकाम्मको यार। मगर बार
मारमी ही हमारे पाम नहीं है जिसका पहरामा है। उस सारे साहित्य
की मेकर हम कर मानसी गठरी बोरे हुए गाड़ी तण मारिस्पा
पौराहेर को और बस्तुम मामिक माना है। हम पाहत रस
कोई हम यह कहकर रातम पुगर पाने । किन नियोप है हम
उस मामबार।
पर्मपारामें मपनी संपतिऔर मम्पठाका परक प्रहाम रियारला
। महो परण पिसापाषा बोस हारए भी समार पपासकायो
भी-भी
एमामा मते ही नगर मापे पर सिर पर्मणाम
पाताला औरर नाना-ना रोग art। या महिमारे
गातार नीति निर्मो पाए समारों पर पुतलों
इतिहामभयपनों और विज्ञापनो मताको जप पी।
औरबारमाहनार पारधीयनामे जीवन और पापनम पास्वीपना
पीपीमा माती। गोपत्र बदर प्रवेश नगरपातों
मेमचम बोपमा . बोपतके मरो ठोकर मारकर ह बाठी है भोर ठगो कोह-रपपर तो ये मार ठोकर मालेमें भी मसहाय और मसमप होती है किन्तु पर धोबन मोहनाको बगए उत्पान और पतनकी कहानी अपन सीप तापस भरमा देवी धास्त्रीयता सरबतासे अपनी नियामकताकेटप्पे या पापा करती है। पुरो प्रेमपन्नके ममाषम हिमो-बपके जीवन को रोग निर्मानको वीक्ष्णो पायो। पुप्पि कि हिन्दी साहित्यम पिता पा र ग्यो तप उपरेप नाति सबसवाया मोर कहानी भापी बहन के सामान । मामो साहित्य विकाधकी या काळी पी बिसेमा पिप गयो नाबीर पचा बारह माना था। पतिजा सममन स-पासर पाये इतिहासमा प मनमोपनो समापिया- कम्पमें बेनामी मोर निमा इनप पन किन्तु एक कहानो-सका सप हम सम्पूर्ण मानव रापका सपाटना पाते है। मेरे दिमा सम्पून बस बिम बनीधाम हगाम मोर सनाये नहीं जा मकसे ही सम्पूर्न बा साहित्य किसी परामरे 0 पत मही कोपा परती मि कहानी और सपबास-मेपक म्मत किया करता है। म भारमीके पार पा राव रसहीनों के पास पिता मजिसे बातो मार पामरतारे बोलियम्पति के नाम सोनीबम और मोक- पाहिप पानी कहानियां पानी हैसियुमो पति मार-मादिप को हिली-अगर मोर मोषो मर अगदी तक समान फैका मन अपनेपाल भूएमको हिरमोंदी नए बामवाले पानीको और जीपी पति और पवित्र शिम् मोर कमपनी मब बमोन पर पाया साहिएम पहुँचा मका उस हिदी गंमारम प्रेमबम का स्मरण किया मावा है किमी प्राइम मावाडी प्राममायणेरीम हिमी मौसम परेमिकपिमान पटवारी या माम्मुवारक पास बिसा पार पा-सिसे मामि अप्पापााम पोवायुमि सीप परीम
समयले पाँच
प्रोफेसरमि चीनियरों में साहित्यिकामि साकारोंमें कपियोन बदिप्सिी
भक्तिका साहित्य एक-सा रिचमान है तो माया प्रेमपत्र मार मो
साथियों का साहित्य
पाठक बम समाचारपाको पाते तो दे पॉपर रूपा करते।
पर माय प्रकार प्रत्यारोप प्रम्बापर करणे ! मितु
प्रेमपत्रको परनेवाला साहित्यपर एहसान को हिर, साहित्य मही
पता चम्ममा साहित्य ही पइसान बमकर उस पार पाडा।
परिसरीत संगटन रनिता पौर निरपुण्याके हिसार पर tो
कानिया और रफ्णमास पुषको बढी पास्त्रीयता शिक्षा राती
कहना चाहिए । रिन तरह मन अपिमा विका मोके पास
पार-सावरका रिहार Bापार, नामरेपकी कुटिया ने मोर भता
साप मारी करने लिए नाम यिा और इस वह सबके लिए
पर-समापि हप विणको अपने पाप रोक्ने पूरमका बार
जीवन-रान दिया उसी तरह पास्त्रीरता प प मोरी पीर बन
पाने और समा जीवन परिभाषिक र बाम लिी माहिती
प्रेमसम्म मौर पर वापिॉपी मुबमारधारनी पनीने नया वरपर
प्रारम्यिा।
पनि पपम्पाम पा शानियों साहित्यकी प्रमुख समान काम
लिए महीना मह प्रेमपत्रको योमरहमने बहवोपिया ना
दिलीप रिसोपी पीकर नहीं था। वह देना इस समय
बीममुनी दाबाती पर सोचते कि हि वापिर्यापी पिरोह-समीम
प्रमषम्मको गणित परवाना पालिसी-जाताने शिम लियादिपर
भापपिरामरस हामम मारना मौरए समता रही गतिल्दिी-सादिया
सर बारबीर पुरानी बस्तु नही बन पाया।
पीपचीनबार मिला और पी। सम् १९४मे
पीपुल बनारनीयो पापि माह पापी पमो समयसी डेरा
प्रेममलेगमे! उनसे मिला५प्रै सन् १९१५को बमसि बनारस कोटवे हुए भगा पारे । प्रसके बार। मस्ट्रपर सम् १९१४ को उस मिति साप बामि उमके वापरबाके निवास स्थानपर बनारस- की पचमि मैने मानी और उपग्यालाई सम्माया प्रेमाननीकी वारणा पाममेकीकाधिपकीमामे महापा के विचार माने और उनकी रचना प्रेरक- विभोंकी पकी। वामे उहीक साहित्यपर उनके वाच समरस होमेरे यल किये और कुछ समो-मीठी बाई। उसक बार प्रयापकी कारेमो में कनवरो सन् १९.दूसरे सप्ताहम भोर नापपुरके सम्मेलनमें सप्रेको तीसरे सप्ताह मिले । उस समय मैन का महिमपिक मौर मदरसे प्रति परिश्रमी किसी बापक FARA टेसे अधिक अपने साथ अपने साथ मोर अपनी पतिक प्रतिबाररवाह और अपनी कठिनाइया अपनी रचना मोर परवाहो ही पाने पोषमा झार समप्रभा मायभूमिक मस्तिप्पाबानो के बीच मापा. म रायरे में होनेराले मत मेरोको मिटर सम्पूप भारतको संयुक्त वादिएप-सम्पन्न और समान ममेवाके बिचम-स एक बन्दी मिने पाया कि प्रेपपानी समक पमाम है मिसम अपने ममत तुम्प मोठे फळ रेनेको तिरपार सक्ति मोनूप है मौर परमपन कर हमनेबामे कीराको ही माना जाप मानकर सिक शिवा मारनमे ठार पानेवानवाने मुन्धरमे मुम्मर फोनिन लिया करता है। बा माग्यो-बाग पोड़ी मानेही अपनी गरिपाको मौषमका मम करना पमर म भगवान पर पानता और मा माम-पाम विकट विवरे बामपर गमावा किपा ममा म बातावकर मरे पाम बबीमार कम होगी। प्रामीष मौर तो सराह पर भी काटाम हर्मक मारो। हो मरे पाम र पूमा पहम परममा ही परम । बा Bापाकी सामी हां मपकीतिक पापार म्याधिक मम्मीर और एकात बीदनमा मृम्प पूता त्रिम
समब
जीबन कोग पुमे कम मतापे । इस मारना । अपनो माफीविय
मुरसित मानते।
सारसमग्बम मेरा रमका पोग मतदफा का रिचार
पादिम्पक्तिका जीवन ममाया प्रतिनिधि है भार समारली गतिविधि
का सक्त करता है और मरा उपाम पा कि अब बनवापी समुद्रने मित.
करमहाका मार बनाता का दिया । समुरकी नागा टूटकर
पर-विमुबोमट पाना मोर पस नहीं क्तुिबारा चिरम सम्पून
मारी रमताको रियपियाँको मियान उस सामप्पी पसर
अपन गाम्भीर्यको हाम्प बनम और निगाध करपाठी रस्म पित्रो
मार मी बिता सकती।
प्रेमपरवीन मा पिया इसमा अधिक पिया बिपने पुपरी
पामवारे मेमोरपियोकी भी प्रतिमा मोर मापहनतीमा फोरमके
मिर पुन मग का। मेयममें बिठन उपाय रहान धमाय मा
सामाजिक बारपाको सर। पन्हाने पनि मौर निरपुरा उपकरपणे
अपमे पतिवारती पबियाम नही पनन रिवा तो परीषा म्यानमार
की सी-साहित्यम नी माय समी। परि एको पना पुगेपमें
प्रमाणित तो पिता पर्पपड़ी एक दास्पबराती यो प्रसार
पापन समान काम केबीते की सवार में माता पितु
इप यही कम्दी-मसारम प्रेमबारे पिता मारमन मरमवापी
पारिप और सामगोरिया के प्रान तहमा पापा।
पानी प्रतिमा पर मोर मानवम्तमा प्रभावभानी
मवारी सायपपिरामिलामी मगर पता
मनुण पिया।
पानी पापा पापीही गेम मा
बामी गार पर मिोमी गमारमपा कि सिंर भोर नियम
सारिगर काम माहिरप गर बात निषौ । प्रेमपमापी गिन
रममामा पग्मिम हाली सिन)। सो
प्रेमस्म गप! एपमा अमिताका मुममान उसका बम्पयन नहीं है। वाह वह पनिकता महोद होते ए मठे ही समीनपर से ममे मोटरों होते हुए भमे दो पैरा पळने बगे पकवानोंक होते हुए भने हो नमको साप मूमो पटी साने मगे। गरीबोंमें पिसा प्रम करमेबार एसे करमाका प्रेमचनमीन उपयोग नहीं किया। कौतिकी बनिवासी प्रसंसा भी प्रेमवरको सेवनाम नहीं पायी बाठी। जातियत पेसेगत मिचायत स्वागत कातिको समस्त बनिस्ताद मोहबामसे बबमेम प्रेयवतरीकी पानीको हम पौषमा पाते है। इसीलिए मेतृत्व मौर पनिकता रोनाकाही भारी समर्थन प्रेमचमनीके साहित्यमें नहीं मिलता। मारम-पूरक अन्तिवारिता मान प्रेमचदमें यहाँ होते है बहावे हरियॉफी समनापक विपमताका मा ठो बिसन करते है या रियो ग्रिोह लिए मपन पामाम प्रेरणा उत्तम करते है। प्रेमचम्बीके पार सम्र होना पस्न करने नहीं ले जाते सामनेको विषम परिस्थितिसे मुक्त होनेका पलहरी ही देखे जाते है। प्रेमचन्दनीन अपने पात्रों का चित्रण ऐसा किया है कि ग्रामीण जीवनके वर्णनमें पनपी शाम बीम बन गाया करती है। सम्म कमाकार मरकर भी नहीं मरता। बा सोय सपने बाराबना मिन्दुसे रया मौर सहायता मापवे है ये सच कमवार हाते है परन्तुमा प्ररमा मामठेवस्य मी गावित पते है मौर बपने मापबना-बिम्युको भी पुर्षों तक बीवित रखते है। प्रेमचन मुनाप-प्रमपन सहायक प्रेमबार मित्र प्रमचान दिनोरी प्रमचम मानम मिठामको पुरमुरी प्रेमबम्द अपन साथी और स्नेहीकी बलवान् मुश प्रेमचन्न उपन्यास पानपातो बमामनको मोमन रेनेबारे प्रेमबार परे पये ! बाँव मदनपर प्रतिनम पोम पानमा प्रेमकम ही बानो देशमकी पीर नहीं रहे। प्रेमपानी' न म कहानी पूरक यह गिरामी बोली बोर उनका हो पानाही स्मृतिमि पा सरेंगे। किन्तु यो ममर बस्तु प्रचारको पानी बह तो प्रेमबार ममी मी इनमें समर्थ है। परि
..
ममदः पौर
प्रभुको बोकर मान प्रभु-पियोपा परम सत्य मानमः लिए तैयार नही
होता तो प्रेमवतसे महापाको भोकर हप एसके बियोपको सस्प
माननेको से तैयार हो सकते है? यो पो हार्स रोडो पोरन
माम किस किसकी पूना सियास्पिको सामने रखा
एक बार ममचन्नके साहित्यको फिर रेमें। हमारे मन विसारसे 4
देशी प्रेमचम्म पपित मका-बसी मा गगृत और नामामय बह
बस्तुहलती-बत् और हिन्दी-बगतके बारको पारियों को भी मत है
रिसे प्ररमा पाते है। पर प्रेरणा बमबान और ममर अतिपरिणी
पहे, यही अनुसे हमारी एकान्त प्रार्थना है।
परिडत रविशंकर शुक्ल
प्रमा-सत्तामे पागम्य बपेमा पाठका प्रतिनिषित है और
पतएर पगित विषम गुठ मनात मावस बहमती प्रतिनिधि
मिसह या परप मौरी वितु चिन्तनी माग सामन
तर बर्ष पुरानो इसलिए बा-बीवनमें बारह परिस्थिति
देसी मारसम्वा और अपनी ममताबार-पार पचनमें मपनी शक्ति
पुरोग ऐसे मोठे दिन एपद्रयको बाबार मही पाहिए ।
मोगमपनी यावा ऐसी मनाम प है कि बनी सारी मागे गया
के परिणामस्वरूप बिनके पास पान सिए नही पा गयासे
भोपाबा मी रोकिए मम है। एक समय कमार विश्वास थिए
अयमीत होनेन महता।
इधरे होमिया परिपतन पाहिए । परिकाकी मार्ग
गुनारा मिति परिपका जिना पास कोई माम मी बेपो
परिमन करके मारे। तुम्सीयसा वाय र भवर्सप रस ह
मात असार बना स सब बानि-पम साहित्य मरस अपमा
परत्वे पाच रस और पपड़ो बपने पार पाडा हाधिप वर्षी
अपसार नेमाको पिता अमा इरादोका अपममें सभाकर
पटाका शिवको नृप-नोति तुळसीदासपी पारपासे हन सरार्य
*यह पता होना बाया तो प्रारम्मसे मपम-काय इमा
पाहिए, एको मबह-मायाँदी मौरषिरमा साहिए और क्षेपको
मंग-रिवानाकी बबनी होना चाहिए ! कितु पण्ठित कर दी
पापमो समासेमरम्ममपहरीमानमा महतोमी भी
ममप पर
मुस्वपर बतमानमें परिपतन पाहता। भले ही माम्पबाद उससे मनको
माये भरे ही बह पिए-ममंगाका कारण बन ।
तीसर हो । यो भावनारहित योगनारे परापाती।
यपि बड़ी-सी गप्पापी और विषम्पापी योनाका अपमी सातार
लिए मन-चोपन सम्मुग बार-बार पुरन टेरमे पाये है मौर जन-जीवन
प्रभागापो बादरक ना होता है रिम माइरमे योजनाकी मारत
सपार घाला मादमी योजनामा बीमार है। रापताप बाहर
मासमोपी पीमनाको स्पेमार बासनाके बीमार अपनो महा-मनही
पोखमा म पु मामानको निमा और पापनाडी
ममपम-धीनताको मन गाते है।
गोपे से होते है मिनीर बनन या शहीद होने में मग माता।
राषक सिकाए राम साठेबोरे घरीवाम सिपा
मोर यदि राम रिमा रापमा मग तग हो वो बहे पपनरी
नाम भी पा परे। राम राम तो भएमा गहीर
होने की प्रवृत्ति प्रति ही पानशर है बिस बरह रामभीरिक पायो
माहौर मेवाती काम मधि अपना एम पालीगीरी
जपान मिले ताजिकी पटना पानी-पहार स्मिा हाने
समडी है इसी प्रकार महीमा तनुमपि परा हुमा मिपावरतान रहित
मसि अपनी नहीपतिः लिए knाह और पारी स्पषता
सम्पुरता लिमही पाता।
पापको की भीको मिति नियमीर पाते।
समय सिर को प्रपाममात्रा मपामिन पाने करते है।
अमेरिता पम्पनि भाममहावर पहले तो मीटर rut
मोरगिल सरलात मार पाने हो एपीहरीको
पाने है । अनिश्चितगतिरेनापोडी मन्या रिनी भौगोरिनी भी
समामहीमापसील म समपन या सिप मापार
पणिव पिन पह
.५
कार्य करना कठिन होता है।
में महिला परम बाझाबारी है। एमकी दृहिमें
जीवा माग पशन्गा बार है और हाराहमा मस्तार गासे
पो पर अपपी। पापहमत सेट ही नही पिसी भाई
पा समझी जरा इसका सम्मान मोर एमका पतामपन सिरपर
• पत्र में निमम बरस्वाबो मे बप बाते है। इन विमासके
बसपर राष्ट्र-मचान नही हाता ।
सात पिम मन्तिवाहिए। कान्ति बह महाँ बो
ति-नबनाएकस्मिकी अपेक्षा मरेको बतवर बनानम बामे ।
पोसिए को पीप्रति ईमो म्यापित प्परस्बा हर कीम-टिको
पारोशनका बबाला प्रथम कार्य है किसको मिप
सलोनार पर होते हुए प्रमको मनकामोर ममुक समाज रचना-
में समा राम रहिमन-चीवमा महतोपएस मुबचन शेता
है और हम बातोपको उत्पस कर पुलेक पारा में उपार पा
Tv मानना है कि परम सबपर तो मानो
रोटिमा ममी।
पसात भाई का ऐमोही पुछ बरस्पाएं भोर है। ऐसे
एप होवे है रा समार-पाच ईमान गरोस हान ranti
मी-कभी वाय-सबारमोमप रायमें पय परमार और चिन्ता होने
सगती है। समारा परसबापक भयभीत मोर और बीनमरा होने
हते है। मगर साम्प्रदापित पापिकापमा विमय मा विश्व
म्प पारणपणे मार्ग है दर पपाया प्रमाबचा नियम पार
तरका या भय होने
सागर से प्यालोको पीय
मधमय है। तो पङ्ग है कि प्रवासी मही विवपिनी ऐसी बही
मा ममार nlan fस सारा पाता है। ऐसे
समपक लिए हमें रख पार्यकारी माप्रपरमा तो है जिनके लिए कहा
समय पर
पमा ..
मरपतिहितकदमता पाति लोके,
जनपदहितका पम्पते पासि।
पति महति पिराचे निधनाने समाने,
मृपतिवमपदाना पुलमा कार्यकर्ष ।
ऐमाही कामwaf समाव बिपने से सर व हावा।
में यह पसमा किनिरोग बममा समपनी भूमिका मे पर
परमार nि विकरको पूm रवि प्रामाशित मितियार
पौष ने भी समाजमही कार से तो पा featपन
और विरोप पौषमीप पिकापगत म्यक्तिमोको में
अपये पल राममें बहुत कम पाया। दो माई भुगमगोकी मी
पपता पा कर मई। काराइतके मनानुसार परिमोनको
ऐमा ममसर मान से वो पूनरी बार मी मिया ही हममें-मे हिने !
गो पुण सर मातुमोको सम्मायको पति और राजार
पाहायर बिमारा जीवन हम्पनर मू ए पत्ती
पितु यमाई माम मेवामा प्रापमान और परम धामय अरिवाल
है। मी तरह बहकाना
किलर परा
एअynी को बा ले समय मोशनी पुगा
देते तु मामिारा निरासानपान हो । य और तोडगर
रामि मिमप म्पसको वार्मामी galममा अपराधना
टीममा नाम है। हम भारतीय सोग गनिक दारोग पर कहा
होममतेने का अपमे बियामा कपन
मोर मापा गम्परते, तब हम मानी rhरोसने
बगपरमार बामे बाहर भरतप मापा बनुमा
मारने का मुलीमा पनि विसर मुस्ता प्रमा
बदर सिमरा और अपने सार-गत विममित पापीर
पमित रविनक नहीं होने मपमीत नही होते गारोक होते मो प्रायः महीं दो बाते। मेरा परिचय पपित रवियर एपम्से सन् १९१६म बा । ष में पातीस बकिये। ऐसे कितने ही मन माम । बर में समस्याओं को रविशंकरबीकी दृहिसे नाही बेर सफा मनमा ये समस्याबोंको मेरी दहिसे नही रेस पाये किन्तु मैन उममे ऐसा पारिवारिक व्यक्तित्व पाबा रिसभे पाकर भी जिसके बोम मनुष्य अपनको मत्पात निश्चितता सीप कदाचित् बहुत कम लोग यह बानते है कि मध्य प्रदेयके हिन्दी साहित्य सम्मेसमय बामदाता पणित रविकर मुमा मोर उनक कालीन मापी हो। पाठा सम्मेशन वहाँ तक मुझे याद है सम् १९१६ १० मे राम पुरम की हुमा का जिसके सम्पप स्पीय पणित प्यारेलाल मिस बार ए हाए । पपित रविकरणीमे विरोधी भावनामाका विपिन सामगस्प था। ये सोचने परत एपे इन यमे कि मगमप पमह वपो तक में रेप पप्ट्रोय रकमा मामी हो महा मामता पा। सन् १९२ की सागरम दानवासी प्रान्तीय राजनीतिक परिप समय मिमक सम्पप स्वर्गीय डॉक्टर मुंगेचे मैन अपने दो प्रापप्रिय मित्रोको भर्षात् पपित रविधकरवी गुमठ और वर्षीय पमित मनाहाङ्गप्प पोसमलकरको कमपोर अग्राम भरम बसका मिसापा। पम पोको परफर पुष्प पग्नित मापपराममो समेत मुमसे मापा 'रविकरणी पिपपमें तुम्हें अपना मत माना पाया। हो तो मैं कह या बाकि रविरंगरबीम विचारोंकी टपर बहुत पी किन्तु इमरी बोर सिपाहोची महापुरी भी पनकी ऐसी ममुठ कि टिप परमारसे मोहात पपय बिमान गरें भटक मोर परिप वा रानीतिक परिपशक समय मौर एयपुरम मो नमें वमा सेमारा संगठन करते हुए देखा ये उनकी सिपाहगिरीय युमनाम निय विना नहीं पाते।
सेवाग्रामकी विभूति मश्रूवाला मत्य और महिलाके परपर बापरणका बह कर बागवाहोंमें एक दीप पामो और हमारे बीच मुठ पमा । बापामको मिभूमि मह गियोपामार मम्मन मापन-सा हा गया है। साफ्ना उमनामाची मगर श्री महाल भाईदमा भाठा सारा महारमा पाम्पी और भाई पी रिपोरकास मभवासा इम तप मन ४२ से भिकर सन् १.५२ तहमन सेवाग्रापको पाच विभूतिया सोपी और मैराणामको मन्तरमकी परिबितिर्यो सिमा सामो बहिरंगली एक महान विभूमि पर बालममा परमको हमने पोया । बिसी रापक बोपनकी हानि-मामी मापाम हमारी ये हामिया बस्यन्त मकर। महापा गाग्बीने मप्रपाकाका परिचय म मम शिरा "रिमोरहात मार दुरूम पर्यशीसोम- सपनेमाने से पनी मक प्रतिमा पानि समान और प्रानीयवार अभिमानमे मुरब सवाल रिचारक यमनीनिक महा किम नामसे मुगारणारो । समस्त पाकमिमामु । जना सहभागसे ये सपा मुसहै। प्रमपन प्रसंसा और पतरापिट में मशरमेमाने कि एमा इमरा मारती मुस्लिमप मिसगा पा रत्तराषित : पात रममा निबाहनाही ना माहानि। 'पविता पाप पामा परि हमारे पास माग्य पानेकी ही पमायावी पर एम दुर्मम सर्वारी परख पाता है। पर सम्ममा बार समस्या पार पर टूट पाय रिपारसाहात हमारे बीचमै साना बालबा नष्ट है। रिम सर लिये। पति ने बोगसर का पहा
समाप्रामकी विभूति: मभूयाका
!
मुबकी पावार-रगा पयीपायी वाकी बाबार-दर घट
बमी पेट मार हाय मौर सिर रखकर घमासा मारदीय मामम
मानो इएप और हिरपर पैट रबर बह रहा है। माच पाकी
पामारपर बनी मीर परिणकी भागार-कर गिर गमो हमारे
भमकी वापरताका रुपया कि भूमि हम हाथों पर उमसे अधिक
पोतन सगे है जितनी किइम सन् ० या सन् ४९ पामे गोततेरे
किन्तु बनाम सससे कार परते है जितना सम् १९क पर कम
भूमिम रा किया करते थे। समानामके परिपर्योकी ये चिर बिनाएं बिनीषा
और बबाहरलाल पाकिसमट गमती। मौर रोक करबाक बीम
भारी कर देती है।
संस्पाएँ को एक दिन स्पराम्पर पबम पडिम्पियॉपी बलि पड़ाया
परती और रैपरी जप-षण मयोन प्रेरणाएँ प्रान छिया करती थी
भाग रजिस्टर मरन और अपम हो गुमाइपारीको मिलती हपानका
पहा बन पनी बहमारी संस्थाएँ मा मान बमती राम
4मका बारबार मौर कार्यकर्ताओं मताबारे बोशि-मास पटिशाम
सब-या सविहारसही पमी है। मी मपाका वो एक वरख
मौरस पनि कर कमी-कभी पासन मोर मारी संस्थामी
मामाचनाएं च्यिा करते यहाँ अवाका मनोबल किये पनक
लिए पामन मोर कायम प्रति बनाके पापोपमा मुस्प समनाते
राते।
हमारे देश ए मोम बामबाठे सगते बापान मापे समाते।
माप्रामक भीतर तपा मापामक बाहर न रिश-याधिोपर विपीके
एम पुर प्रमाष पाठे कि य पाना पर पश्चिमी देशांनी मा मझकर
पाव और पूरा गरी बमनाम नहाते तो वोमी या सी बमनायम
बमकर मोर मात । ऐस समय स्पिर रिमोबसे पप्पा परिणाम
करमरासे मी विचारमा पाई र मापहरा हमारे बापसे समान
६
१
समय पांच
लिस्सोमारे लिए बही पनिकी बात है। परि पस्यौद बाप और
रूपमापकों बाप तो बस बात करते दर पाये इसपर जुर्माना
से उसे रप दो इमपर मार को उसपर पड़ा। मामो पाच
पर्प पहले बो भय-जयनाका परिकारी चा भार यह कामयसोनारा
पेरे पानेकी बस्तु हो ममा है। मगाबारी कि मानवताको भेष्ठतामें
विस्वास करते ये बता कार्यकाकी प्रेष्ठतान पपसाब रसेमामम्बित
करने और उसका गुप-वन करनमें कमी नही पुस्तके। सोश्यकी
मारमान रेपम मितने रेष्ठ कार्यकर्तामोका निर्माम पिया उनकी ही
भाधार पिकाए है-नाकी कोमलता ममिनमन मोर बीममा पूरवर
मारमपिरोपप। हम बाने क्यों नहीं समझते फिमेनन और मकर
मिकिया कमी किसीके बीवनमे देवसको बम नही सस्ती । मामार
रहकर पम करता मोर माई मानकर पम मार संघट हापागा होना ही
हमारा बस हा समता है।
जित भम्वप्निीयताको मनाने हम टिनी पर्चा करते है असमयीन
बन्तर्राणपताका गम भी सेवापामो हि हमा है। अन्तर्राष्ट्रीयताकी
पृमा और पृमाको मतीियता संमारन हमें रिया से फितुति और
पसि पर माली मावना इमायामकी पनि सिनामा शिपारा
पसा विधारा एक महान गायक एक महान् माया हमारे शेषमे ठगया।
र बोकर हमने बहुत मोरिया । मेरम भरमार है.
फितुपमा समग मनोरसी समस्याओके मुहम्नाय लिगमा परब
पिको अपने सिरपर फरषिपाम कर-करते होम बनेको
मार गहा। परिहम मनुमप र स विमर्म माई ruteी
मामाको पोर पर नारियाtal चीन ही परवीन मालपानी
की ऐमी पाभोर रमा मसी पीरी पंग पानी चाहिए सामान पोषण
मानर पुरपा पहलाने और उसे मनात निर्णन बनाना
रखतीदा रिमाप होपारपीत मनिराणे ममागे नागियों
सेपामाम पिभूति । मभाग ८५ मोर सामन्नामे पान-प्रवृत्ति, निरिका मा' कहने की बनत भगामयी पति भी अपनेमें रपती हो। मोरयका बम मौर गाग्वीवारकी बनम्त समता भारतीय स्वतन्त्रताके रखरीसे मांग करती है कि माई मातारी की समापिपर बैठकर हम अपने पुमती रामनीति और सराम्प-संचा- काम अनम्त परित्र निर्माणकर सकें।
राष्ट्रसेवक डॉक्टर भन्सारी
'गपर सम्माको मुत्यु (रामको) मूभित कर निवाला बापाव
। महारमानीने गटर मम्सा पास्मात् बरसानपर इन पार
अपनी भावनाएं ग्पम की बो। ८ मईको सदरमामा पमपुरके
मगार यही मरीजोंको देयने मसूरी मये । रित-भर पिपरी रेप
भामर्म पस्त थे। इस पका रेनेगाडे पमन पके हर बारम्पार
भातक प्रहार किया। ९की रातको या मरोस पणन एम्मप्रेसपर
रिती कोट पेपे तर बीब ही बैनपुरसौन स्टेपनपर, साहेबाह पर
रातको यकी पति सामेले महारपीके पामि जोंग
ममोहा मम्मारो गिमकी गोरमें महारमामी भनेको सुरक्षित समो
में बाबसा । महारमा गापो ऐक्टर बन्सारी लि-मुस्किम प्रस्त
पर अपना 'पनुमा मानते थे। रहनुमा ऐसा सपा-भो कमी
समतो नही करता पा। मपन इस पत्र सार मिसार महात्मा
की राष्ट्रपी गती हुई सामाजिक एणमोगर माश्मपी पारित
"माजिरयम
स्मित का कराया
मौत बन गया
माग हमारा फूटा
मारिया परी ए पी मनमुबार मोता पसे राणो बानुबो,
जिगोपर मम्मारी सगीपोर पानीपरमला।
परम्मानहरु ये तो सापानिपोषनमें कभी
रिसाही जायो। मानिक सामीपन 1 ११११॥
८५
।
राष्ट्रमेयर बम्पारी
प्रारम्भ होता है। निकाय पिहा सपाट कर भारत मायेही
कि बाबयन पुरके ममसरपर मखिल भारतीय मेरिस मिसन
बप्पटा होकर पमेटी बाना पर इम मिधमका समसया समास
मौर सस्तोपर मालिक मुष्तानमे डाक्टर धम्मारी किसी भी
पिरतीको रिस माओबामे सर्मठ सम्मान से सम्मानित किया। माम
को समपर बायोको पार करटको पटर बासारी पोर
भार पापने तमदास महत्व है।
मम्सारीकाप-प्रेम मोर सेवासी सामने अपने पापभीसी
मसापपानी ही दूर नहीं रममे री बनुमके साथ बह निपरी । उसकी
रसार माप दसम यह गम्मोरखामरी शिमले परमाओंकी बोट मा
कमी मी अपमेको गुमराहम होने रिया पापही पानी बिगाह
बोकिराए मिन-भिम भेगोको मी रसने मफटतापूर अपनाया।
भारतीय पवनीतिमष्टर साराका प्रभावशाली प्रवासम् १९९८
में हुमा रिस्कीमें पप्णय महासभारे अपिवान के साथ प्रति मारठीप
मुस्लिम टीमका मरिनामा गेस्टर मम्सारी उमा स्थानवाप्पल
बनाये गये । उस समय परिस पीर मुस्लिम मोपमें दिम नये मगर
मापगोमबसे पटर भामारी स्मगव मापनको ही सरकार-साराम
होनेडा सौभाग्य प्राप्त हमा। यो पर्व माघ परित मापीय रस
मेटीमाए सेरेटरी पुन पये। इस पर माप मन् १९२० --भाग
दिल कापस सभापति महो गये-ये।
सन् १९२७ की मासही बासिनोकामने मारणोप महत्वाकाहा
मोती मामारपीको विवरे सामान परमा मौर पापा प्रार होमेका
जपमर रिया। उसके पहले हम मामाम्पान्तर्मय स्पराम का कापर
मात्र यात पर मामको भामाठी पीडियो पहासका साधन बनाये
। ममाप्तम हमने इस मप्स फाति त्याग कर पित्र मिte
हमारा सार मुस्मिक मागो-पूसराम-ससे कम ।
समबरे पाप
पूष सराम्पमा मह पीला प्रस्ताव तो राष्ट्रीय मुसामान' रास्टर
मामारीक मतृत्व में सोमत हा जिसकी निमा लिमौर मुसलमानो
भेरसे सा पासपी बार अपने बोवनी बन्तिम पदियों तक गित
हरयम हिमा मुस्लिम प्रमको मुमतानको तड्पन मौजूर थी।
मन् १९१ में कांग्रेस रिटेटर हैसियतले गस्टर बम्नारी अपनी
पदिर कमेटी साप पिरपचारर लिये पये। इस बार पापी-नरगिस
ममताता इमा बिमम ॉक्टर मम्तारोका बहुत का बाप पा।
सन् १९३४ में कापसम स्वस्थापिका समारोपर गरमा
भिाष सिा। इसके लिए जो पामिष्टरी बोवना उत्तरेसमापति भी
भारती ने क्या महरिपार्ट पार करमरटरबम्सारीका पो महत
पूष सहयोग पा उसका परिचय सब मिसा कसनी कसिनाए
रिपोर्ट अबोहवरार रिप बाम पार पुण् मित्र गपटर समयको
बाह सरन पर कि हमन बापी रिपोर्टको रापीय तरंगारे साथ
बहारिया।
सन् १९२ से मार पन् १९११ बपने बीवमरे नियरिलो
बराबर पिस पारपे। पर विपरमात सामि बधि
मग मी मा रानीतिक महत्वका नाम नहीना जिसके संसर
बम्सारी राहिले या बार्य हापशातीय भेता प्रीय नेता
और अन्तर्राय मदार भी उनका मनपा बाम समीती
परिविधिपोर्म राष्ट्रमाया शक्टर भन्सारीको पीकर रापको देवमा सर
पूष माहत हो रही है।
मैं आगेका जय-जयकार पहय परिवोपरगबी गुप्तकी करिता सर्वप्रथम ममे १९७ में पड़ी। उस समय मै गारमे नवा-नमा ही सपा मापा पापका म्यूमिस्सस्टोके पियर मेरे मित्र पीतोताराम पारगीर 'सरस्वती' मासिक पत्रिका माते पे मरिनो स्वर्गीयबाचाय महागीप्रसार निदर्शनारा सम्पारित इपियन प्रेसकी प्रथान पत्रिका सरस्वती में पुप्तमोकी कविताएँ प्रभावितहमा करती बीं। सपि यो बसमाप्रसारनी 'मामु' करित वाहिक ए मित्र उपा पारपोरणी सरस्वती कर रखे मोर परमापासे हटकर बिलकुल नयोग पमें पानेवाली सिमी करिताका रमास्थापन कसे रन दिनों गुप्तमोको कविता नवीन रोक पापीका भूपप भी। बस किसी एक पुस्तकमी परिता हो बोपी मनको मोती हो ऐसी बात नहीं प्रत्येक पुस्तक हिदीमें बात सम्मान सभाब और मोरके साप पड़ी पाती। बयार में मन मोर मुप्तरीकी फूटकर परिवाए कोमोडो गाव माती। मानो प्रममापा बाहुल और अनुपके मने रोग बड़ी बोडीम सिसोहर हिनो करिताको प्रतीता ही रहे। गरिनों स्वर्गीय श्री पीपर पाठक स्वर्गीय परीप्रसार पूप स्वर्गीय भी कामताप्रसारगी पुर और प्रतिमा-पुरप मानूरानी 'कर' एमांकी करितामाकी विषम दी किन्तु पुम्बन गमावा मी करिता सिबतेरेबोरी बोकीमें भी।पीबोगी मार दी पोकीम पारिता सिकर निर्मातापूर्वक किन्तु मत्पम्त ममासे बरे पनवाले एक मात्र पुप्तची ही पे। वि समय 'भारत पाणी निणी उस समय तो कमा से पनौतिक और साम्पनिक रिचारपापम एक तमनमा पपा । समा-मबीर मा 'मास-मारतीक माना
समबके पाप
उपयोग करते मानो उनके हनेकी सामग्रीके भीर्पक बोर मामा
हिनीकी काम्प पुस्तक 'मारत मारती में ही है । सन रिनॉका पायर हो
कोई हिन्दी समाचारपत्र हो निसने गुप्पणी और पनी कविधा तथा
'भारत-मारतो की प्रसारको हा। बब यह पुस्तक निकली व गुप्तमी
और हिलो मम माचार्य महायोलमारी डिरी मे प्रयम हुए कि
समान अपने सिप्य गुप्तचोकी प्रस्तिम सरस्वती म माषित मन्त
विसका इतम एक पर बिल गमा जिसका अन्तिम पक्ति पी
"मोमैमिलीशरणगुप्त उदारत ।
मों मापा नियोगोखे प्रसा पाना उन पुममें मना उनके
बीवे यो अत्यन्त कठिन काम वा पितु पुणगीको नियतीजीका पाम
मामीति प्राप्त प।विराजीने गुप्तमीको अपने पुपके प्रति भरपन्त ईमान
पर और मामुख पाया मौर लगा कि उमें वह पीर प्राप्त ऐपपी जिमी
हिदीमें भाप यकता अनुभव करत थे।
मने मविकीकरणमोकी कोई पला म मुगमे बाब तक एमी नहीं
पड़ी जिसमें ममापाका अपमाग हुमा ।। बस उमड़ी बोगनपारम
रचनामें सन साहसापाt
दर मति जाय मेरा बारो प्रग मारो हाय
मी सहारो सतित हो मारी है।
माम निसाम्तिमुपमें हम विपरपर रहे। हसरी प्रारमित
पर मौर्मपिपरपनी गुणको मनानी की। सर पूण माय पो पुष
पनके पोतर बैठार भार समी पर मारा। पुरके प्रारम्भमें ही
उन्होंने पारडी करिताको निमरी दरमुपारस भर्समा किया करता
पाटकर
पिपपद्रबदन की पटक मही हो पिसमें
मागम-मी लटलटक मही हागिसमें
म और एक पटक महीने मिसमें
भोसलप-नयभर
मन्मत्रमाहीपक नही हो जिसमें
उसको कापता ही नही भाप बतलाते
कपिराज पापके परित न गाने गाते।
मा पूरी कविता मा 'सरस्वती' म पी तो मोग गठो-धाम इसे मस्त
भोकर मनावे वार गुप्तबीको रेसनेके किए तरसते ।
रामनीतिकी सी महत्वाकासा राम न होने के कारण गुप्तमी
सारस्प-ममनमें मगातार को ऐऔर बाब तक मने है किन्तु रचनाको
प्रबरवारिकारमयेपासमप्रिय बनकर नहीं रह सकते। मातक
कि भारत भारती बम्तमें पवित सोहनीफे कारण तो मांसोको पुलिस घोर
बांसी पोपटर भाग गये मोर गुप्ताको काराबासमें मिमा दिया ।
पब स्वीप गोसकरगी विद्यापनि कामपुरसे प्राप' प्रकाषित प्पिा
स्वाससमें समय-समपपर गुप्तमीकी करिता रमन होत। प्रताप के प्रथम
रिपाको मुखपृष्ठर पसिन बीकाम सत्याग्रह-माम्दोगन वामनाने
मममी मोहनदास करमचार गारपीके नामसे उस समय विस्मात महारमा
मारपीकी प्रमस्तिम मुप्तमीको मा कविता प्रकासित हुई। मानो हिदी
बगदी समारी मस-मसपै उस पदी । मेरे लिए तो उस समय गुप्पी
सबस। परक,
माकप मौर क्या नहीं।
उस समय में तुममिया सिनेमामा पा किन्नु गावापरणकी
पपिक मनुकूम बापामें ही निबता बा। गुप्तमीका नया पप पुम बहुत
माया और पापि मगर सनकी समस-सीम पोंहीका मन्नर
होगा मेरे लिए में मय ही भयाकी वस्तुए।
मैने प्रगम बार मैपिटीशरणमी गुप्तको हतनम्मी कनिमय देना ।
यो पसले पो में स्वर्गीय मा गोपरगीसे साँग 4 महार
प्रसारगी बिपीसे सयबाप पुण् मिसि मी सनके पिवयम एव पुष
गुम मना। मोपडीपी रोचीन बप पाम सनके हिमो सारित
पम्मेलन में पूरा पर मैंने गुप्तलीको मानक परिसरे समय रेखा
१ ममबार सरपुझे पार पाना किसी पेशकरको विषा समिनारा- परीविष सपॉप गामापी भट्ट सीप पाहिपरामनी वर्मा सर्पन सम्पापक प्रमरलगी और विभुत उपम्पासपर भीमृत गुम्बापनमाम्यो बर्मा बनने साप । पुरानी समय मा गए 4 लोट- जीवनकी सरसाने मुझे से ही बार और मटके ये है। एयर गुप्ताको मालात परत पार मोर एकबार पतली टोपी पुराने कपोती aur fagी हुईवी मिरमा पहने हुए स्वपि पिनारायनो भाईमनारमारामनी बीबी माप रेबार। बसमय राजनीति पामस्य प्रेषित मिटियो बाममी मी नावे र पीपल विवाना होगा और पटमा विराम अधिकारियोका पाहो रहा सा। ऐसे समय प्रताप राबाद पामोमिडी बसमान अमितापान पाम पाऔर पुप्तमीका र परिवारमें सम्मिलित रहनामयो परिगरिया- कामलाम्मरम्पया। जब भारवर पुनले भारतको हिरी काम्प मोहक मोड़ फिकारे पेटवा परमान्न परिवार व बापर वियरमा सो रबारी रखे हैं। दो समापा गनर हिम्मे और नामा मागमा रियाशिनारे मा सानो बामपूर नी मनोविता रम पम अनुमति मानमोर सपा- में प्राचीन विद्या पाय महावापेमारी पोमा इनी हिम पम्पको पराम के पाबाद ममतापूर्वक स्वीकार गपूर मागे बानेवाली पीमिपाको अपनी सीमा गानझाम । परम मार सावरे बहाने पल ल सब को एक बानमार सरकारले समान पानिजागापूर बीमा और पण मातीपरानि-माही पाt। मानो मिसौर-बारे in बोरे-सीपीडिया बरसता ही मही ही दो मरी मात मरिवारानामगराएकामगार रा
में बागबप-बममा
और पती हुई तस्माामि परितिकाको करिताको मसला की तो
सर साहीनाच अपनी काम्या पंपारकी ऐसो बारे माया कि
या पहचानना कठिन हो पया वित्त और समयकी कमियर मिय
पतिकालीन कविता और दोपही पापा। किन्तु टिपाय या
पेशाम पम पागमता रोड़ पा पप्पयन शिलीम पापो
मोमहा पया पैसा कमा पानो गुप्तमीका पोल उनकी परिण और
समका उत्साहवान अपनी पारिपीका पूरा-तत बनकर अमर है।
अपनी भाषाम्बियाका बो भी मोह मुझमें विद्यमान का उनी
बालीको और मोक्नेका सम्म पेय पो मपिठीतषबी गुप्तको पनि
मेरा पवपत समको परम पयते पर भी चोरी-बोरी पुष विराम
सबसबारामसरमबीपी पिके पात्र हा मामा है। वसीम पिता-
मको सांसारिक परिकाम्या सामनीबानीबारा
पमा प्रतिमें इवने सपा बिपनी रपमा सदैब पर और
भावमा प्रदान करनेवाले पक्तिमा प्रस्तुमा मौर ममापनि प्रति होलने
भपोको पात किया । मोरायके प्रतिमा स्नेह ना माणहो पपा
1 मुग पुषकहकर भी यह मानते है बौषमको परे पति
मानार रखने में उनको गत सफलता प्राप्त tबिटिप-युषका
काम्प-पुप्पाला सिमि परमापा विमान पुमरे हिन्दी काय
परा-सा पपा पा मोर र काम्पो नामार रवि-विमसमीपाक
गरका निर्माण काममहाभा पाता का विषमसिने अपनी
मनोको पामो समाजमही होम रिणाघे मंपिठीमा पुप्त पये
है। रानीतिको मापनोशौ पहुँच पाहे सोबती हो पर पाये और
पाइयमे नहीं बाते विमा "सरल कषित रिति विपत पीर भादरहि
मुबान" प्रयस्तरको अपनी रियाते रहे। मैं सब नाहीस
प्रया करता या मोबपनी रपनाका कमा रा! पर
बदलने कलाकाकीपीरियॉग्रे पौरवान्वित करनामे कोप
१२
समके पौष
गुप्तमी पापाव हिमाम ए और की िरततर हो रही पर
पान में प्रमुम मांगता।
STED मह मोह निरा पन है कि हिन्दी कविता
सरैम एकही पर सवीरे एमपो रमाकी तय तुमके
गुप्लीको बाठी-नाली बनुमोको वाहिनीडा मौमिक सोम
विष्य क्यो म के पो म
फरियन भारतवर्प विस्तु
सिमर गाया हमाम मया पुरावा कर रहा है गुम
मिर्म मह मामी केली होती मिली मून गटकर हम
fromको अपहार मिराबापत परमभारतकी मार पियारी
मीकि भापमा बहिरान और हम कोई मायाप्प
रिमात रसको मरो नगर पानी पान पर पुराती
पारलर और १. पिसा एकही पर्प माप-मार
पमानवाने भारतवी मूमपापीसे पानी पाहिए कि मामा fo
विविता पम्ममही विभिनवा बारपशिमीपसमाप
भी बना रोगामारोपमा एमावर वापरावृप्पीगे
समारमा समस्यामॉकी जाने माना पिपुर मत्प और
परमाको रमपमहापामारणा रवीगामी
साभयं रिनी नगीनी मुमीि पर मा.
विश्वमै पी इस एप माहम बोहत नि ! ते
मामि को मुमठे कानामे होमाना हमारी मालिक
सा बन पाती है और प्रकार | मारेगामाप माने हो
पायो पोरन मासा मार मुरार पारेको पो पुप्पणीत
प्पलिनी रनमा
नटर की समस्त मानवी
का बौने जाम मनोरित पिक पद पर तेर
'यो पालेभा र उपमै भागेर वर-वयापर।'
-
श्रीयुत रामचन्द्र शुक्ल
पाकीर मही पौषता साहित्यिक युपपर मपनी हीरींचता ।
पद पर नहीं मार लिया। उसकी बनी श्यामपन बमहर छाझिय
कोपारी-मारोपर बरस पोहै। किमी पपपर चमन के लिए मांग
नहीं पता किसी विचारफे मस्तकपर साहित्य बनकर उतरने सम्प
मार बता । मसकी सपन लिपाती उसकी हम योमती। या हिन्दी
साहित्यका मेयमपीम सा है रक्षकी बात रापमारताना पुपिहर
मन उसमें साहित्य मनीष निर्माणको प्रमोषमयो माषा है। उसका
भार्ग उसकी सिखारटमे छुपकर से भय बना देता है। साहित्यिक
मतपर प्रकाप पपान सहसे मस्तक आ रखन रमापी मरीर
म भने नारगिमारमें मोदी ठरह महिलाम्मे सापरके पार
में पहारी गॉफी तरह प्रत्येक साहित्यक परम विवादमें भी रपरी सचि
का मभिकारी है। वह समारतीक गीतरा रम्मा पाच संयमयीसा
परस्पडाका परिपाम और माहिरपी बाब याताका कारण मोठहै।
जयशंकर प्रसाद म पौ बाहिर प्रमार न कवियोम मो ममसमर भर सकने सभी मारा ही ना सम्ता कि पार, गि भूपमडीन बारोपर प्रसार सपनो रचना किया करते थे में मारे गाम भी पर है और प्रसारका पानि परीर कहीं भी फितु पारे प्रसार-गरीरसे मिलकर बाती है बहार प्रसारको पाने और समानेको मार कामठाई। बवासे परेशी मुसि मम मादागारमौर रिति परि वियबापाने कबार शिकायतकरीरमारिया मो में पाकर ममापने भूमे विवादिमि मप्रिय बना दिया frj कहा हो या ना माग पन-सी हो या न म पापा पण हो माया स्वकी मारमा प्रमाको कविता काम और बाल ऐसे इसमकारatrimपियों होगको रिप मनापा रासायनारकी पौड़ी प्रचारकोपमा अपनपारम्पारममा प्रसार गरी जिस पर on पालि पर मामले उपस्बिपको माmang प्रवासाम्म सरिए मुक- पप बरामि से बारठी स्पाको पनिकता टिको भोगानोरती है और रामगोपीरो वरपर कली साराम बाता। परनाल मियामीबिधित प्रमातीमा पास भाकर गाती नि-मार गगन-गरम और पनीर मोमा वा सो और नही पीपो गानो। सिमोन और पूर्वी मार मिया मल पौराकिलो बीप बोर ऐमीनी पपत्र प्रसार पाती दिनका मन मोर उनकी मुमतो समका मंकर और उनकी पार्वती सनकी सन्तमा उसका एप्पम्त मानो अपने इतिहास बोर पुष्प के पोकसे सतर-बतरकर बाबीके रस बरर-पुत्रके कपन समारो गये है। महामारत मौर रामायके समकेम्प मोर काबियासकारारिवाये पये इनके अपमें इस रोपनि जन-धीरन काब्दिासक रिलाये प्रोपर ही मपि मासिक होता है। प्रठारी भी बाबीको पान और पनके था- मोकी दूरीके मूम्बनको होम स्वीकार करमेक लिए बार नहीं है। उन पानको विषयम मूड बम क्या कहा गया है. इसकी अपेमागम इसी पाळपर पिक मानबित होते है कि प्रकार से किस प्रकार करते। ऐसे समय बोप सुनना चाहे या म सुनना बाई पो भी यह कहना पायात बागायर प्रतीत होता है कि प्रसारको समम पि समसक बाबी सोड़ियां सुरक्षित । मत यह मावश्यक पिइम प्राचीन रस-सिट करियाँ तरह प्रसार कवित्तको पोलियोम बायनिक समसे वार किए व्याकरण म्याथा और कोष-निर्मापनारा पचिटोपसपा कर पाय जिससे मम माम और बम-मापारमीप्रेमियों पर गोकर्मच प्रसारक नपर बासक्ताब पहमारीमा बमानकी बात मानकर न एमाये गा प्रसारकी नारे का-कग और सबबनका सपा के। प्रसादसे मरे परिषकी बात यदि मापसे कहूँ तो पर पाप हसमे । सन् १९१३ में बाबासे 'प्रमा मामी एक मासिक पत्रिका प्राप्ति होती थी उसमें मानोषमारे लिए प्रसारमा एक होगमारहानी-मपरवाया। म पुस्तिरको एकबहानोरा नाम वा मान-मपानिमी और एक बानो नाम या भी था । उन रिमों मौलिक पहामि मेरा युप हिन्दीमें महीपा बाया बा। हमारे बाम्य पड़ोयो प्रदेषोकी भाषामा मी अंबाबासकहानियोसे बनुपाप हुमा करते है। प्रमा सम्पादकीय कार्या- सयप-स मैने प्रसारबीको पत्र लिखा था किहानियो त बनो में
समय पर
पुस्तकको दो बार पड़ गया पपा हिथिए किये कहानियों की बनुवार
तो नहीं की पी। इतुके सम्पारक 'गुप्तरी प्रपत्र माया यहा
नियां मौकिही है।हिन्तु प्रसारकी याददास्त देखिए
किस घटना
२१९ प बार सन् १९५२ में पाम्मिनितनसे पोरते ए में उनसे पाये.
पास मिला तर रमि हसकर कहा मरता बापको विकास मेरी
कहानियां मनुबार नहीं होती। इसके पापावाम दोनों इसने एमोर गार
मौ एमी बाबरत रहे जिमका कामा उमममय मावावा।
सन् १९१३-१४ में प्रसारको एक पिता एणु में जो पी। इसका
पीपक यदि में भूपता नहीं हो पनुप पा। सरा विरक्त पिपाएँ
को रेपर मुझे गया कि एकरामका पनी गिनीमे मा रहा है।
बपनी इस प्रसनताको मनेर-पार होरा मत पिया। मैंने इस
मायाक एष सनको हिसाबाकि पीपर पाठासी पामीर मुषमा
मामाकदिवादी दुमोती मपी पोरीको स्वीकार करनी चाहिए और HिES
पारकारटोके पर बपनी बात हमी पाहिए । हुन समय पापात
पत्रमा पह रत्तर बाया पाकिममप ममपपरमाने विचार (मोहर
ग्यत करता हूँ। रिमुबीवनपर पहिराका परापारा राकार,
पायाको समाहार र समता पा न मिजाके पास ताब
बाबा सतावा बोरकही परम्पहार जारी रतरबपन निधार
विरपर सरसोरते पसरता था।
मिनमर प्रसार मिसको उगममय जी-जगत रातामा
माएं परी एक यह किस्वर्गीय पुरप पगित महावीरमानसिरी ओर
हमारामपारित सरस्वती मानि परिप्रसन्नामेषिता
मापासे सीबोलीम हिया गाना प्रारम्मवाराम मरण विपर
पर पनपार पानी की तितिापमापा मोजाय मा
नहीबाहीम । प्रतिमा सीसीप नापूरामी र पहिरो
बारी नौरव एप सीरमाग पूर्ण राराम पनि
अपन प्रसार सही बोलीम पिता पिने छिए सामु हुए थे पिस्तु राष्ट्रकवि भी मरिसीधरम गुप्तकी बोपविताएँ 'सरस्वती म प्रणित होती वीर समस्त परी पोखीम किसी बाठी बी। इसी प्रकार स्वर्गीय पपित कामतामसारणी पुर 'सरस्वती म और प्रभा में भी बड़ी मोसोम कविता बियते थे। उस समयके विद्रोही तलमको तरह पी बपकर प्रसारबीने मपमे पठिन मात्र निए कड़ी मोटी सी माध्यमको अपनाया। गुसरी घटना पा हुई कि मारतकी मापीनवा सिए होमबार प्रपलाम हिन्दी-साहित्य पुटता मा रहा था। प्रसस्नोंका भीम कापीसे ही वो पासीम भारवेन्तु पायू हरियपान प्रारम्भ कर पुर। मत मारतीय गीवनको सनत बनान पामे मुधारोडी मोर सारित्वका प्यान पवाबो कि स्मामाणिकपा । बिम तह मक्त-बियों मौर रीति-कालीन करियाँकी करितामे एक पप स्पष्ट दृष्टिमोचर होता है उसी तरह पारवन्तुक विपरी-पुदीन मुपार पारी कपियों मोर नये याबारी कवियोम भी एकप उत्पम मा। मी समाधम नही पासिस समय काम्यन्न माधुर्य सुधारामापसे सपन बस्वित्परो बचा सिर भयमा कविता अमर माधुर्यको सुरक्षित रखमक हिए रिसमा संप उपस्थित नहीं करना चाहता बाता मापारका अपनता तो क्या करता । उपेक्षा पाषर मपमाम मीर परनामीका बम-बड़ा मम्प पुकार भी मापुर्वको रक्षा करमा और प तय प्रकाराम्वर अपनी प्रसठ या सही दारणाके भनुमार याम मर हए मनम्तक मामुपको समासे मन्तरतम और अपनी पक्तियों को निहाल कर म बानरे मिए एपहर बात पहेबाने पिता और पाप ही क्या? बता मस ममपामम्मियाय परि भारतीय पापीलता प्रति ग्रिोहमा और तु-छिपकर जिन्दगी बिताना मीठाचारी थी तो मुषारपार मौर पमा रममतापपिक उपदेयप्राउटकर मालमेरे रिलीम मापा और पनकी माम-पिता सीखनेको अपेक्षा भाबोलो बपदीपकबापनमें बांसुयों और अनुभूतियो पंपसमाहरमानन्द मीर मापुर्य मेमन मेरे लिए मरम्प
समय पर
1
पानाकर भी ग्रिोह क लिए पुपके माधुर्य पोयत म मरत
पली पी। इस तरफोरमाटो सरसे पहले स्तर पी मगर
विपापनि प्रताप प्रमाणितमा। यपि सर्वसापारबसबापरे फैमने
पोरन पिक वासानदो। मनाने मुबसे सामीपारिएसो विपकी
हिवार माप बोले पप गायने । म प मानून नहीं किस रिया
श्रीयकर प्रसार कुछ मिल रहे। बहुकुर है। भूमे गती
एबनायाकी भोर समुप होमेका बाप विसम्मो पर मिला । बार
मुसित समीप बिनयमोहन पा पन दिनों बागी विस्वरिपामयम
पाते थे। या कोई सन् १९२७-२८ की बातोपरापासे होते
हा पयार प्रसारको रचनाबारे यूपही प्रभावित होकर होट। एक
पार पसाबसीसी माम माया पुस्तिका के बाये। मुझे मा मामो
सरानाके परपरमें सांस मानपी। मेरा हाय विक उठा और भापारमा
सम्परख समपार मेरा मनापाव हारवर । रायमा
मी मुममपातका रिपर हुए बिना नहीं पता।
एमापासीगिर ( मानवापर-वाम मात्रा) पहन frमा
#मा मातोंडी परामनामुना परिका मा और ना
मनुप्प या प्राणी मापी ये भारत ऐमी हो मा पर्म-बार
बीए पायान नहीं करना पवा। सनीव राप-पमिनिपाके
मतारमा रिमाग का ग बासि नाम और मूमि भी
सयम पाही सम्मान अनुभूति और पप्पपलके माप
। बसपा मम्मी ममं दी नीतिको पातो.
सिपी बतायी मामीप सपने-बाल रोग नीति
प्रताप मलकाप माषी पावावासमारबमरी निधि
freणी वाचनात एक परिवार को प्रभारी रमाबारेमा
सार पसार इन पलो मान लिाग al
दिम-fORT सापान सोहए रिमाना वीरगलास
अबकर प्रसाद
पंक्तियोकालिए,
क्यों म्पमित मोम गंगा-सी
क्टि कर दोनों बारें
चेतना तरंगिम मेरी
लेती है मृदुत हिलोरें।
धोरम में मृत्यु वसा है
से निवली हो पन में।
पिप-प्पाली बोपीलीभी
पर मदिरा बनी पदय में।
काली मौतों में सिमी
यौपन के मद की लाली
माणिक मदिरा से भर दी
किमने मीशम की पाली।
तिर रही प्राप्ति-चलपि में
मीलम की माप निराली
कला पानी सा-सी
हैगन रेता सी।
अपया इसे पहिए,
तुम स्पर्श-हीन भनुमचमी
मन्दम-तमाल के तसे
जगका दो माम लता-सी
तद्रा-पस्कर हिस।
समा
सपनों की सामगही सब
विसरे, पहपम पर तारा
सित सरसिर से मर जाये
पर सर्गगाकी पारा।
बॉषा मा पिपु को किसने
इन ली अंगारों से
मणिपाले फलियों प्रयुक्त
क्या मरामा हीरो ।
इस तहमा मो प्रसाने हिया ये कानीपरी महाँबापे बस
समय ये मौरर्व भामत और समपपी मस्तीम मरे हुए सम्पूर्ण बनी
पर भीबाये।
मे या मानता है कि पिबपना सामरम्परिनोको ग्यार
देवा बटनामापे मुता महो। केबल रिचा सर
मम्मन मस्तिके मरमौर परनामोंकी पतवासी र पस्थित होवा
हैमहिए रमका पीरन मनी मारा म्प विचारों और पटना
पी तो की सीरमपर निपर उठना है। पर साधार
कामा प्रसार मोर रसके बागर्म दूरी सोपा यम्मी tant
गए और पपम वा सीहो मा सम्ली है। कपिलाके ममप प्रमार
एमे सपने मामा पोई दीवाना काफी सारमेष पाटपर बटर
मारी काय-बाराबपनाकापमपमे गौरमपर पवार मा पापता
है और मररी मिठाम मोलकर तब मीटी करना चाहता
पिरहम प्रभारका पाता ऐना शमायो रेसेपार
लिए बार कप्पाराविक पनी मामीरा नियामपर पाई।
ममना है प्रतिभाषी पापीको मापने पपी और पुमाने के समय बसर
नाम कमी कीमत सामनार पति और मामुक साप समान
अपपंकर प्रसाद इनसाफ रनम पल-गोमोते थे। इस बात कीन हपित न होगा कि प्रसादकपनमें से प्रत्पले थार-पार मारते हए बतरम माप भछे में में किन्तु अपरेप काही नहीं मिडता । मगठा करिता प्रसादकी गएि है उनका मच पनी मृष्टि। करिता प्रसारका प्यार है उनका गप उमका पतम्य । बो गानकारो कलाकार संगृहीत करता है उसे जन-जीवन प्रति सारपान एनेकी मनोवृत्तिका इतना पant किमानकारिया बीभत्स कोटे मपनी मनुभूति योगो न गाने देनेहिए भपया गा रठापर मफ्ते मुंहमे माहन निकलने देनर लिए देश-दुर्मम-महिष्णुता भी उपके पास है। कासाकार पटनामाको वोरते-मरोड़ते है ये बम घटनाबारे बामकार पहमे होते है तब तोम्वे-मराठे t। शामकार मपमी कमममे पपर्म पुगकी रामरता है। मानो उस समप पर एक तम्यूका कार्य करता है किन्तु अपनी कामाके मणाम मी कसाकार भामरको पाम रेनेकी धमता रखता है। प्रसादका पाते समय पाई होगा कोई पता न बरा हो पिस्तु प्रसारको सोते समय पाएमा मया मानो पूर्ण माधुर्य-पेपरे विद्यास महमका एक बहमान स्तम्म टूट गया। पादमि पो होकर नहरे बादाम पर हाकर पाठाबान पाता है कि प्रसारका मापुर्य पराजित और मसफस नहीं किमाने मागेको स्वस्प पीसीको काम्पले क्षेत्रमै बमा देने में सरम हमा है। मिसे नदी विना पा उसे उगाने प्रपनादेमी महीना बाद | भामम्को भयंकर कामि भी सब मात्र लिए ग्हान दूर मही करना चाहा। प्रसारकी रचनाएँ दमनरा काम्प नहों, काप्पा रापंनिविपन है। पुप पाम ए किम दूर हे अमावासी पूर्ति करमकी पगाप मामाची पहिरनमें मषिक तस्लीन छ। बमाको पूठिगी गरन-माप दोबाटो साहो पाती। नया पुष प्रमार के पास भापा बना पर भी मा मौर एक
समपके पार
योतिले बहसपी मरी म्योतिकी तरह प्रतिपाक बमको शिविपनाम
मुप बायों और प्रमोंदी वीपारहीका त्योहार मनाया पिस्तु यह सब
कुममा संस्कृतिकी मापाम पनिपदोंकी पाबा । मामाकी वर्तमानमा
ही मही भाषी बम पेमनेवा प्रसार म्यवहारके भूतकालमर इन
फिरायो पहल लिया यह परपन्त तारा हाते हुए पुराक
पुष्पको सप पवित्र है। मूम नयी धादियास नये प्रष्टीकरण
तौर-तरीका ना पहुँनयी रितु मामाकी तय शिवास पुराना।
बाबोके बाले हुए युम प्रमार सिवासको बस्तु गोडी
पाठीवानोको संवारनवाले थे।
सुमित्रानन्दन पन्त
यह दो पक्षी है उसको तानमें पति विद्यास है। उपाडी
मालोज-मरोमामा परपेड प्राण नाश है। पर पा रहने गापा पाता
सम्मान समयन-भरी पाबी। बम हम पापा मरो रहनसे
मिसर पर प्रचपके पाडो भाव रखी।
उसकी पहली शाम सास दुसरी बासमोर तीसरी औरतीकी
मनकोबागबह निरामा प्रोपनके बीचे पनदेनमतबामें
पत्तर-पत्तापपर शुम्पासा पाया है। मुम पार र दोनोको
अस्थिरताको इभान पुकाम बन चिरामरको तान है।
पसरेमानमें पर्यटयमन निका नरमी मठौ।
मावि नप रामकुपार पर और डोरठि दरम्भरयमें एमकर
है। पसमें मपुट सपा महामार्पटीसा नहीं पिसका
बन-अप पर मिरा रोम-रोम कम्पन बोपका सर और
सरकाप
.
सुभद्राकुमारी चौहान
मुम्मामीमा बमार पतिक पृसार एमा पपडापामो मर्मको
पारा कोई मायने बहामन पुराकर नया हा मोरम निमस
पारा बिना पर पुष्प तो धारे पाठ मानो सपना प्रम मोर धम्मोग
कोठे हो। हसा है बसी बसी ही रोमती मुमताकुमारी
जमान हमसे हम गोपी बेह पपी की मिष पीयो शेम पीकी कि
मचान पारस्टोरीबारे सिम्यकी परीसी टेरियादमी
पापिका मामोको पोको इतवारी तरह प्राप्त मासिक एवं साहि
रिका वितिसपर पर पाया रियरकर मान गोषणको रि-पिनी
नमा मोतितो पारामे मति स्मृतियोंही पार पातरार्मिीय
सपी।
निपारा र एमार मयापारपीमित्र मोरिया और
मीराफी पुरस पिचार पचोराके मौसममें मिट्टी मार के मापा
और मुरली गेमियाको बार-नर परामर पया। पोती
र, मानोगी रिसपता समाना मिटर मापना र रमेणाम
बस सेशितोरी माहे नपरोसा पपमे नाच साबों और सारी
परिमी सविता मप-प्रान्त कहिली-गार पर-पिन या बार
मोर पारसी वस्तु क नमो। नमार महतो र शिता
पसीनापी रियान्वेि पूरे मामा पापापले कभीगनेसी निक
मनुहार कर रही थी कि सनम महामना मुशारी मनकी निमार
मानप गपी पर मिपम ममामा बम और पत्तिय नाम
बपी।
मानह-सत्रकी महा सबसे सारे गानुपयोगे पार
सुमारामारी हान
भारतीय स्वतन्त्रवाके सदेगवाहर बापूको मसहमोग काम रे रेना
सुमामोरे लिए गितमा मा पा प्रान्तीय सरकारमी मका मरी भुनाती
को पानी-पानी कर देने के लिए नागपुरके धमा-सरपायाम कायबारकी
कठिनाइयोंको गोपनका माभुपम बना ना भो उनके लिए मतना ही
पापामा।
संपर्प मुपदा के दिए पोरनई सोष पाया नाम पा । लिपवावे
एक बार संभम रखर पानके बारएको पाबाद दूसरी मफरताकी
भोर परती गयी। पति-पथके फूम मोर सुन रस बनास प्रतिमा
पर्य-चार्य विसरते गये। मावादीकी कमाईबोरसे पार होती गयी किन्तु
पुमनामीको किसीने पीछेसी सारमें पचा? सन् १.४ का कठोर
बादामन मुमारानी बेठम। फिर १९४२ की यह बासिरी कसम-सप
बिम्पर अपानेके लिए भारको मिहत्पी बनता भीपम बस्यापारों और
संहार-उकोकी पिकार बनाया मा पीपी माये हुए मानदे पायौ
बिहेसठी बोमनसे मित सीकी रानी पीरोंकासा हो बसन्त
सससे साफ बीवनको पिरत करमेवाती या मोर बासा कोहेक
सौरपोरबी वीर बनी विमासे बाबारीक पति-पम्पिोच रप-पप
मालोप्ति और पतिपान कर रही थी।
इस प्रान्तिवाडा हापों पड़ी मह उप-रामाका कभी
निस्स्सागो पाम भरती कभी मुझ और विषय मनवाने भाम्पर परम
पाले पानपर पच बनकर पूजी को सामीपाली मोका माषा पाकर
पबामें पक्ति पार करती और माया ससपा अपन भणाम होतो वो
पिवर सगोंको सपेटकर मानपालो पोतो भातको सुनहरा मा में
कीहैयारी म्पस्त पीगीत मी गोपन-समात मिलती पसरी
पार्वोपर पम्पमाके ठार माती नही अनुभूठिक 'मम मापी
भात विचारे होवे । सन मिचियाको वामा समरिया बाकियों-
पर नहीं मा कहकर मर पापा माराया ममता पर मादाना-
समय पौष
पर प्रतिविम्बित होती।
अबसार पान बौर विषाद पौरतो तुम्बामाची चौहान
बोचरसे सवा मपरिचित । ठोरतम परोपा भी इन मुसकराते ही
रेता।
"मैंने हंसना सीता है, मैं नहीं बानसी रामा
मुममे मुखरित हाता है मान का कोमा कोमा ।"
"मे विपर मिल जाती है
मधुमास उवर भाताहै।"
मुमारीकी ये पंक्तियां उनके पाप रहित बोवनको मुभर प्यास्या
है। बार इनके अबसानके पाचात् म पमनसे रवंत पोम-सा मुख
पापी क्यो ममले। तो मानो मुमद्रासीकी ये पत्तियां भी कम होने
"भामा प्रिय पुराम,
किन धीरे से माना।
यह है शास्थान
यहाँ मत शोर मचामा।
इम स्नेहमयी मातृप्रतिमा मारमार अपनी प्रसार प्रतिक
साप पुनो स्मृतिमा भिगमनकी पंखुरिया मी
"मामा भार विदा देते है,
हम गीमी गलि देना"
.
पुरातत्त्व-ज्ञानका सूर्य
गुम्बीने पहले समाचारपत्रोम डोयोन का पाकिस्टर समी
प्रसार पावसायबापार के पो ही फापात् परमको मिला कि
वाराण सारयापन बनी चीन-यात्रा स्पनित र डोट बाये है
भारवाहीकी बीमारी यहाशे पी है। परमार ने समय किसने
सोपा पाकिसके पार बसीर और और बायसबार बामने मोर
पप करणी दुनिया भर परनार मनाने की पुनिया परे
बाप ! इम मार हामी बीमारीपर चिन्ता र करते रहे
सपिए तापते नगर बामे पटक मह विभूति हरी मार मासके
हरि बन्द पीक पार फिर सहमसे बपनको मर्म
नर पाय ! परतु मम पदिपार, पवारबीर हमारे संमत
पामेपरी मारकी बात सतायोक यमारको बाठोकी
उमररी निदरता इससे अधिक का हो सकती है कि मावि
कार प्रामि मयं मान-पान मनुसार si एम्प स्थापित होने की
माबिका होनेवाली दसरहाकी बह-पहरू बिहार मभी समास
भीम पापा बाकि सपने कोनिमय बीरगोएम-राध सपेटकर मारतो
पणहमि रो पबरों और माना-प्रकारको पाति-महावि रखनपाल
संस्तरि सिमिर बोसो बारतको परिप-बरियाको पोर-पोरकर
बाम और बसे हमारे पर्तमानो सत्य समरस कर नेरे पानी
बापटर बाबसपार सपने बीवनी वारर समेट बने ! मागिर
ऐमे रबादी बार षिक बोनापापकाको सनावन विभावना-
का पुनस्सार मानते ! कितु यविभाग कोई पापमपा पुनरापमा
पर ईस'सार' को मसर गुमनेको कहे तो सम्मर,
ममप पौष
इतने बड़े प्रमोमनी महममानकर मई। कार या मम्मर होता
बायसवाहजीका मासान यह एप्पन बपकी रनमें जोमया।
जीवन मारि-पसे मगार वर्मारोदन तक इस पर पुरातत्त्वातामा
पवितीयवा साप पुण्-एमा मम्बाब रहा कि दोनाम से मिनीने सिौ
का सारन जोग। राहुए पसे यापपरा हिला मिररापुरम
बा महादेवरसारके मामले मगहर बार मग मासे र रामारी।
बायकाल मिररापुरम ही बोता। हाई को सीरिया समाप्त हठे
मन भेज रिये गय। वहाँ एम ए हए । वामी मापाम पिमता
प्राप्त की। मन् १९७-८ मरिस्टर र भारत सोरे।गता
विश्विासयमें भारतीय इतिहासक (प्राचीन इतिहास उनका विषय
पा।) प्रोप्रेमर नियुक्त एप पर एक वपन विकटिक सके।
पटना मोरे मोर यही जम पपेमारी गवती रियाबारबार
पोर तक फलामबामे मपप-गरंगोषी होता मूपि विधी वामन
कारिपारे बहेर करमर्म पटु रारामारोप प्रत्यापित शमादी
स्पती और भारतपरसन करना सामोरे पीनियमो पूष
पुरपाके रिता परमुणकी यह म्यानमरी सेक्टर पायमान
मकी। बिहारके पनपने विपरे हुए मापीगर निगमका प्रायम
कानेवासा या महिनीप मनीपी मारमाही प्रमाठित सी पति भूमि-
पर पमिकामबार ममरापया!
भारतरी याम मायमरार पुनको बार बार आप पे।।
निर्माता थे। रिमुबारे मारोन तिहास माममा पानी भार
दीप रिपापियो गामम मापा गापमानवान उमसी एक माम
मन पर दी। पहले तो मार मियामोतामाषनाएं
मिंगम पापमानतीरे गाव रहा। समिति मोकासार
पर परेशानीगोमल पत मोर पितारोमनमाना।
मम् १५ सेमबार गा५ तारमीतबारनीय निदान
पुरातन-पानका पूर्व
कतिमिर का नामले प्रसिट।। सन् १९५म प्रभावित मपनी एक
पुस्तकमे मायसपाटबीन इस तिमिर काम्पर कमार प्रकार गा।
इसके पापा मारतीय इतिहासार सम्भवतः बोलनमा उनकी विम
पुस्ता मोरिमा हिमो बाप इपिया' नामसे प्रकाशित हुई।
पायसवालमोने यो एप बिमा बह सीमाकी प्रामाणिकताके साप
वा । उनको सानोम मायाराकी-सी मूषमता पमोम विधाराको दै-
कर बना रेनेशाची प्रेरणा मार गिरायम सर्व गाको पहराई मोगर पो।
बापसार र हिडमे ठसे तो मानो उनको बलियो मतोतके मारे
सायबठमान और मविप्पो ताने-बाम गोडमेम म्पस्त हो जाती किन्तु
उनका प्रामाणिकमोर समालोचक मस्तिकतरता चिसी मी विचारको
मूषकरूपम कामगार सरमामे और वर्तमान तमामाबी पीठीका पापन
परोहर बन गाने रेनको पार माता पातक नको पनो मन्पटि
पसम भयोमम्मकी मावि मटन बोरगमको तप विस्तृत मोर सत्प
समान बिरमन निधि रेतनाजोकिया-माया बबनसि
पर होवार भी वायसराम मपनी रुविया पर्म हमार बोष उपस्थित
ठाकुर लक्ष्मणसिंह चौहान
दोरमती अकुर मामबिहनी पौहान जब इसहारमै नहीं है।
मनका बम बगवा शिषष बाम और प्रयापम पीवन-यापन और
पावसान परमपुरम एमा। सन १८९४ बाम माघार नरमप
मिन मिनिष पेमें इसना और ऐसीअनुपम देस-सबा को कि परिपन
परिवामित
पुष मौर गुलाम धर्म पैरा महुए हावे तो देश मा अन्ति
बारो, पमार-मेगा कांग्रेसी प्रबहार मारककार, मि भोर निपुण
पिस्तौम सानवाले तपा बम मल्याप्रवीके माते मी कौडिदे-पाप
हुई होगी। और ममानकी बिरोपिनी पत्तियोंमे मोहा मेमा और
पते-मात प्रम मा गाना इस प्रास्ता रोघासबारमा यही बामा
पा-मार मरमपमिद मोर निरनमसिहा सोश मारनपिए ।
हामिलाबो-गममें इन प्रापरत मारो यान अपनी
मेगएँ गायीबी।
सहर समनसिंह पाया हाई स्कप पाते मे मत
समिए मानी पारिवारिक पटिमाागि बात निधीते का fre
तिरस्कार सम्पन समयाको मिसीसी बरसनबाप्ती पराशर
मी सम्मे। सन् १९११ में एक दिन प्रातार सामनभिन मेरे पर
बाये और मेरो पालोरोबोत मात्री पदको पिरोडौरान प्रसार और
सा। मैंने बीपम हो टोपा पुम पारेशा प्रकार र पारसे
म करता?" पर बोसे 'सी चिरीराने प्रमारामार मा
परीतारम भा गया और में न हो पया।" मैन गिरना
'भार पानि परमानी पररवारा प्रसार मार रहे। पोरी
पारगा मई मापने पहा औहा या मारमा मा
मन मसिंह चौहान फिरसे मेरेगर महोबा सकती इसलिए शिवमीमें एक बार पर माये इए मेहमानो बायममको खुधी मना रहा है। और सचमुष बीवनम उसके बाद मसिंह कमी परीधाम फेम हुए मपि पनका विषय मकर गाविपमे हुमा। समन फर्षिता सिमा करते थे। महामन्छी सिखते। मैन रिलोनापासे प्रमा' नामक मासिक पत्रिका बहाया करता था ! समय पर कविता नियते निर्मीठामी मात्रा सदैव ही कानुन बनाको भागा परठी। रचनाएँ रामद्रोही हो पाती। मैं समझी पंक्तियोम कुछ बोग परिवर्तन करके प्रमा' म णाप रेता । म रिनों पम्प मापरा कपिलमें पाते । यह सन् १९१३-१४ को बात है। मै वृन्दावना पुमुक्त रस्सबमें बाते हुए, मसिहके पास बीमियम बरा। मैंने उसके पाप प्रया'का बहक देगा जिसमें बास-पासकी सब पाई मुरमित परमपम नामकी करिता पुरो-की-पूरी काटकर से पनी भी । गुप्ताका मोमोज में मैन पमपको पड़ापा बा। एप स्पोपे पड़ा पर मैंने "प्रभा के पुष्पर-से पिता पट फैकमेका व्यर समसिहसे पारष पूण । सामनसिंह दामि मानू मा पसे । बोते 'मरा मधे पुरस्कार पीजिए। पपिता पाफ्नम गोह होता है उसे काटकर फैक देम तो माहोता! में मस मर पपा मोर पठारबपने गहरे ग्माने- से उनके मामू पोछ दिमे मोर फिर पैन अपने मोमू भी पो छिमे। बापरा कायमै पाते हुए ठाकुर सामसिंहये 'पुको प्रपा' नामक एक नाटक मिसामियाँको पहिवाम बब कामगिगाजाप पामारक मुझे कर बरे। मेरी पलोन से बहेवार रम किया। र बार परियोजी एक होटी-सी पैटौ ही मेरी हिजोई तुकी-बेतुकी वीरें- मोटा-सावराना बासपर पौर बामेछा तासाममा बामौर रखकी पापा मेरोम्मी पती पौ। पर मेरम पेटीके पास बैठता पर मेरी पली और माता दोनों मुनम गठ मार होती। में मति बहुत समय पर रता मा। रमझा सह पा कि इस पेटीमें 4 छ ऐमो बार लिस विचार रखा इ रिसके कारण मुल पार-बार पुलिस बोडी गपा माता है। और इस तरह मै बपने पिता मोर परिसारक नामपर समाता पीप्तिायों मोर ममगाराको तो माताजो बसने मना दिया करती पो । तिनी कीमती पिया पता पीवी अपन मेटेको पिसी बात- में पहबानसे बचामरे सिए। होषमाम्प विहान दिली मागते ममे त्यानाकी सगबाट है।पत मरमरस हापप पो। सन् १९११कीबाबा श्री सपेमप्रसन्न मिह (पापात् बाा मिया) कांग्रेसले सम्पाये। पसी समय हिगुस्तान रिपलिन कम्यम्मन (शानिगारियों )ी समम बैरक पी में बाबा गपापा । मेरा गामि दिल्ली सपना सामो सुप निर्माता भाई बमपर रिपार्पो' याया माये । हिमारे यहाँ पामेराबारा पुर। मरो पलोन उन सात मिा। गनपरी और मेरी पलीदी सकाम मेरी पटोस तामा दूटा भोर रसमा पगना मटा पया। गनपरी मग्य कागा साप सार समयहिका ना कुला प्रथा पर मारपर भपका नाम रामानुग लिया पपा का। नाटक किननही सापम Bा पामीर प्रशाप से पह लिए सम्म एक बको बमानको फम भरना पगे। या मरोर' भरतपुरस निरासा तब उसके प्रबरमाय सम्पार ठार मामिड म प्रापलाम सम् १२ समन् १ २१ र तीन बदम बोर की लिपाट शिम पारगारको पार रणे एपसार घार मारपमित मनमोकामा बप पासमबनी और समरे परमात् परमार हार कापस पाम्म EिAT at पसरे प्रपम मग्रियाम सापूर या पपा यापार मीर सागर मायमिर बौहान। सपीमा नुमरामारी काममबर ५ मारमामा परे
ग्रामममिरौहान
मीरमकी प्रधान पटना पी। सुमारे लिए समपने मपनी कवितारा
पभिमान कर दिया। भोलिानों साहिप मिसते दोनों
भापम कले। ऐलों बेस बावे और रानीतिरादिवाके दायों
बानों ही टिक्यापूक पोसे माते। ऐसा लगता है मानो मरम ल
रोनार बीवन र पपास प्रान्तम ऐसा कोई माम्बोसम नही हमा
मियमै समसिंह अपनी पति से पिट रहे हो।सी मीठी है में
हादुर शिवगियों को दूर यहीं पर मुकी नही। सबनयिमत यस्मरमों
को कर इनका गोप मेना-भर गाडी ए गया है। 4 स्मरम इतने
पारे है किन्तु इसने मषिक है कि में से कामोंकी सीमामा ?
परिस्पानीयाली अभिशापसे परे बीपोचममा पो सपथ
और मुमहाके महान् बोपनकोलो मुमहामारी चौहान और समप
सिरोहान बीवन प्रतिभागी बीर कप-महीने पुपके ऐसे समय
पारप मिपाकर युम मारपणाममा करते है।
कोष मोहरमनका बिमोरबारपपरमर पता था। एक बार एक
सम्बन रेसमें यमनसिपर बनाया और उनकी दरक बेगुती बग-बता-
पर पालिया रेकरे। मापस पाठिसेपछिह बोले 'महापप भग
मुझे विश्वास हो पपा में माइनसे बना हमा" ऐप मिा यह
पाय मुनते ही यहाका मारकर इस पो और प्रमी रेनबार महापप
गासिरले पये।
पीमती मुमहामारी चौहानको वायर हिनी-बम भोर मानपुर
पारस प्राम्तम सोया पायार सम्मपसिहका र पुष्पाक
भाष हमने मुमारामारी स्मिरम-मनिरमा साप पो रिया।
मुझे तो समय और मुममा मबी को ऐसे कप है Eिमी की
मोर माने पिम ट्रेन से उतरकर पो माये । बोपनी सब हमनपा
गाव असा होते और भरपपके प्यार और सुभपर निहालोनी पटले तो
परते ममम तुम गए। मई मा सम्मान पार
८
समय
पाते हुए साम्पको इसी माम्पमें जमा रेनकी मात्र मी तबापत
होती है। समभ गम । म मानवास स्थान का ममिया नहीं
पायी मा सम्वी मिस्तु मा बराबर पहुँच रही है। मालाम एक
पार दमनको रेव पानकी माफ रिपया हो मी मिस्तु पर मांगों
बायोगदमे बह वपन समस्त भरके माप मिरवर पूम है। पीबीएम
दिन कोपिएका म मा पदमन मोर सुमा हमारे बीच में ये
मिस्तु निराकरमापराओं का पद nिtो रामार प्रमुवा प्रतिभा
मोर पुस्पापकी रीपर ममता बीए तो मन ही कि पीरिया हमारी
ही पीरिया है। बालोग शिाही राजनीतिम पो सनो ममात्रय गुण
एमा मुमापन मा नया किये गुण और मुकाने तपा समझौता करतको
रामनीतिम रतन ही मीरपर मर मरे तिमेमपर उन पिपामापी
सफरवा निरास पती रिसायी जाती है वो भी चाइम पाग मोर
तरीय शिमो रिलायकी परम्पसमें मरमपसिहमे लियापर गिनी पान
बासी मामामारीम बस बतियों से मुमाले साये।। एक
पार करमग और मुना रानी साप माप मालासनमें पा मारा
बिलासपुर सममें मन एक तुमारी लियो पी
एक पर एक मर मिटा किन्त
हे निर विमल ट्रेडको याद
प्रयो के पम में पाते रहो,
पीपमापप के बीच साद।
भुरे हो दोनों दानों भोर,
उगम हिल मिल मुफले रहो,
उमान न दाप भाग,
पम पर रहने रहा।
उमदा पारो र कर,
समय लो fryनो पर तान
राममनसिंह चैहान
भौर में करने पल पर
तमारी मपुर मूर्ति प्यान ।
१८ सितम्बर सन् १९२१ सो विमासपुर हमें यह तुकायी
मिपी गयो भी बर कि मामसिह मोर सुम्मामारी दोनों मारपोबीके
भो तमे मसहमोग मायोजनमें मरपूर मुटे हुए थे। मुप्त नही मालूम
पा कि सितम्बरे इसी भमागे महीनेम मुझे अपने समर्म हाटे अपने
मारके मामबके लिए यह पामि मी सिनी पोमो। ममकी
पारको मरे ये मामू मौर पि भाप तमाम बटियोडो मुम पूरक बमहाय
माधीदि । मै बानता हूँ मैं बहकर भी न कर पाया मोर कमेको
गत माडी पगमा ।
अमर शहीद भगतसिंह
भयवमिहको मौनती या मो पो । रम्हाने माझी
मांगवे इनपर कर लिया। बीत रही भी इमरीके
हिए कीवेमार हा एपे थे इसरि किनकी मृत्युचे भाषण
म पर कोई न करो। ममतसित पहिसाफे मुबारी
पे परम्तु हिंसाको भी कम नही मामते थे। नापारीसे ही
सून रमेको मार थे। समय अम्तिम पापा-मको
परत समप रमत्रमें परमरा गया। मुझसी नही रोग
बस्ती। मुझे पानापरे भुपरपावर ग्यरो या मोमी
मार दो।" इन दीपम नरम भयको भी पीत लिया था।
पनकी वीरता लिए हमार बार पाई।
-महारमा गान्धी
पवारमा बिममारी की जिमने हारेपी
भामारित कर रिमा। भारतका मुलामी गाय
प्रामही रेप समापा मार लिए ग्राम बबाह
पा मारपीसामना लिए यह सत्यम्त मातुरमा।
-हरलाल नारू
भगताि देशपाम सपनो मिस गहना कम रकमेपास
भारतीय नियाम्पिारे पम मुग FIR मोर प्रमा
मानपारामारंपनिप्रदीपपासामे तरारतिनिक
पोटमा महर १५ । सरसर सिर भी मिर
बमोनित पायाम हमारमा पेस गरें।
गाईप प्रासीर पा शिली माती पनिया और
समर सहीर भगतसिंह पापा बहमनसिंह मालकी निरेगी सरकार मारा २१ मार्च १९३१को मामको पूीपर मारिया बना । विस समय भारतकी मोहबानी अपने काम पर पोरी ममता मोम मस्तका देवी बी एस समय भक्तमिर मासमानकी पफार मोठ माने पता । ममतमिरको दुनियान बांबमि मुको और दरवस्तार देने के लिए इस समा परिवार मुटुम्बिया और स्वयं मपतसिएक पिताले अपागको शादी समाधाना तारामकी एक माकोसे करना तय किया परन्तु ममतातही मानो तो सरकी मोनी हासे पुछनेयमे भारत परोपर पनी मम्मी को चुपी दी। डियोभी मप्र विपन्चोकी मुना मुनमेवामा याताम विवाहको तैयारियोंपरा मारकर प्रारोपया। साकारी पुनियाको रफा पया मयसमा बोरिनों बार बारमन-मोसन मा मषित मा बामकर रेखा।पोरी पाहाँका माय हिमाम बापी। रसके रावण मन छोपा 'पमा पाराही माप परिपके लिए का-बायन समप रेपका मनुपायी ऐनधी अपेक्षा सपने-बापम मनुपाया होगा रतने अपि स्पमा सममा ! विमी में सीमा है कि पता मौर परमानदेवतिरको कमाई कर दी है। उसमय साामम-मोमन- -यूपी सपमानता परमयी मावि र मामाकी बार सामन कमीशन के लिए परयोगो मारतीय मता पवार तरीतला मारतरामा बाना गौर से सममें पुलिस हानों नाटिया वाला हिसार लिम्मावावर वरमोंटो मार मगाठी परमा पीस समय एसोको समामें भाटी वापरणले हए काल्प बोरसे महापालिकाठियां मुनपर नहीं बोरिटिश साप्राम्प परीपरपर ऐडी बम्प पटनायासे हमारवर हमार एपसे बाहर हो जाये तो इसको निम्मेवारी दरकारपर होगी।" समय पर
समपरपोष
पिनासको नर्म पानी पीठी बासन्ती रेबीने कामाजीके पिटनपर
सम्मत रेपी दरमाईपर हानत मैगी पी। रस समय एक महामाने
भारतीय तहमामि कुरबानीरी ही उम्मीर की होगी कि मनोरम
केंगन और हापमा पटोली । फितुरी गम्भीरताका नाम दो वरमाई
की। उप ममा इक्रा ही पम पमा मौरी पर एकका रस
भारको पनि विवर्ष सामने रच दिया 1 पदपि देश तरपाकी
बहिसारे क्षेत्र पारीके साप मामगरपापा तथापि पर्प माना
इन पर भूमोको उपेनीव बस्तु पी।
बलिदानकी तैयारो
१७ दिसम्बर मन् १९२८ को गोको पसोपोर पो पो सागन
पासोने बीच रिपा गया। मुन्धी बामसिंहको गोली मानी पड़ी। परनामह
सप भी गोली मार मरगामी हुए। इस तय माश्मन-मप्र निर्माप
की रीपर इन वोपर मार मारवाया गुना। मि तमाम
मोकीलामो यो रगहोंने गरे महिमा-परमार मकर मसाला
पूनमे मनोमा भाग्निकारी प्रतका पूरा यिा। पुलिस इसनी हतियार
कि सामपापियोरापा ममगा गोमबार पसने बाई
मिलताप पाई यहाँ निम हाशपर मिसार कर अपनी माता
परिपपरिपा। उस ममप म निधारियाय माहो पापा।
गरेर ४xtr९सेगी गोषी पाते
प्रमिोर पसरसारसी कपकायापरिपाय
पनि
(पागाभाग) परभाना गाया मारपीन माजी
प्रगानीमार भी अब एक नया राय भरने जा रहे मी मानो
भारतीय माम तपासात रम हित बीमार
। णि ममय भारापागाभिए रहमाची
पान पारमो ममप माने-मा भिम साबने मार गावान महा
-
अमर साहब मगतसिंह 'संसारके गहरोंके कान बोम्नेक लिए मैने बम का है। यह है मेरी पिस्तोस । माप मुझे पोरसे मिपार कर सो है। बहरोको बाबार देनेबाने इस तमको और उसके मतमामे सापीको पोरे दिनों बार कानून का प्रसाद मिठा । बटुकार का पानोकी कापीट पीन पहा मीर ममसिह बपनी तारक मये पर-परिपतमोका सामना करने-मान् सरकारमारा पाये जानेवाले मये मुकामे मभियुक्त बनकर काहोर येत- में बसेपये। यतोन्द्रकी शहादस राप्यतापर प्रामॉकी बागीचा नेम इन तस्गाको डाझेर हमें एक नया हिवार मिया । जिस वइ एमोसे बड़ी सोनेकी मूठी बनान पाला मुनार किमी पपको ए बास पा!की बालियां मुगार देनको पुनमें पोसी के लिए पूरी बमम रख देना से ही इन परलोकी मामीने सके राम-दिपोपर होनबाछे दुर्मधाराको पूर परम के लिए साहोरमा १५ पून १९२९ सबनम प्रारम्म मिपा। एम्मा दिन नहीं पपवार और महीने बीतने को। उपवास बारीगा। राष्ट्रीयताकी बम मगादी कमिया मुरमानेगी। उपर सरकार अपनी कूरवापर मक पी। देपत-रते २५ दिसम्बरको तम कान्तिकारी पडीत परनाक मिपारा । सरकारने ममक्षा किस मा इन पणती होकरो होप टिपने मप पायेगे। परम्पर तो पौठो प्रेमीकी तए पके पामकी हास घो। भम्तमें भारतकी पान मसापर बिटेनरा बेहारी पंगा रोपा पर। रामनोनिक रियॉ बम और रहें नुप-मुविधाएँ की सरकारने प्रतिरो। पर भारतीय तरमा सपबासकामनम मौतको मामग्यमापी पी पपर भारतका फोसा कानुन अपने जीवन वितासक एएमये परिपार नामा रंग भर पापा से मानो दल एमासे रस्मा-चाई
समय पर
बेक्ती पौ। महोगापबार बार एवं सरकारतारारो भयो सातो
यनमामो मोवाके मारवा मे वापसपने मुडमके लिए माय
उपस्थित मी पर एक नवे वामिनारा या कानून बनाया मा
रिममियुधको परहाविम मी मजिस्ट एक रातकी सहायतासे पनि
पुषसके दोपॉपर विचार करता है और अपना समा सम्वाद।
सम्पता और प्यायके मुंहपर कानूनकी यह सफेनो पेटकर इन ममियों
कावा किया-सरसर मपनि परपुरचौर मुखरेपको सोफी
सगरीयी।
माताके चरमोम मट
दिसाको परहिवाकी कालिख पो म्यस्त थी। बीसी सदी
प्राग-पातक सावनोपर ठार माघीसे अधिक दुनियाजी मामीची
गाडीयिनिया गान्त बोर की जाडो पत्तो पदारोगारी
मजपिकर सकी। वह कप पीपी द्वारासमोर
पठाने परपरासी परीपर माचक मुकाया। बाद बस निकाममा
बापापारियोल सोचा भपबिया पपा । भारतकमीनिहाहों यत्पर
को रस्सी इस पार नही पूसरेगी। पर ये सपने ही थे। पर पान्तिम
पर पापा बर मारी रपनीय विषयताकी मेकर कमाते हुए
पती प्रतिहियाने पावरमा 'ममाज पराग मोर नुमरेर मनगरे
पिपर है। मगर वो दून के सहार मिरर दोनाले समान
को कोई नाम नहीं बन सप्ती 1 २१ मार्च ११वासिनि।"
काठिती हुरी नीचे वाले हुए बोपारपार मायकी
उपवामिनी माने एकटमोबाइपीपी और शिरोपी।
मारलीय तापाईने सरकार प्रापना की
मननीजन तो मगत बम
यो रार1
पो दाता
अमर महीर भगतसिंह
मतसिंहकीमतेस-बीस की दी । म्न् १९२१मे नि हाहौरके
गै एपी स्ममा परियाम महायोग बायोमनकी परम किया था।
भगतसिह रारा पाया रघर मर्जुनसिंहने अपमे दो सिंह मस्ति और
मुगरको मातृपेपर १९ मे हमें पान छिपा । पपतसिह, पनका पोता
उस परिवारको बोरसे रिवा या तीसरा उपहारमा।
रवीन्द्रनाथ ठाकुर
पिताप्रबर काम कामेहकरमे एक बार रबि घरकी पविता
पार मपम पम्पको इस तरह उपस्थित पिया पा
'कसी बोली थारे फत तुम कहाँ हो दिनीपुर हो।
फरने मम्मएपमें से पुकारकर पहा रेषि
मेवो तुमारे ही
हरयम निवास करता है तुम्हारे पाम दोहै।
रवियरने अपनी सिी यच-सम्तकम एक उपमा देते हुए कहा था
'भाबमें बैठा हमारावीपराधी मही सिने रग पो नीराम
रर रिया और पामोप माबमें भरमा नुपम कर रिया लिहमी
मपरापी है पो हुए पानीको पानी-मस्ती कमी रेखा और सनी
तवा मापियोड़ी रसाम गुरनहीं पटना । माता पर रवियर
इस महलयरो परिमापा मिलते ५ मोर माग्पीनी परिभावारे पहरण
गरिनरते।
रविमारने वाति मापा और सम्प्राय जाट रे पैसो पारकर
लिया था। कदाचित मीगिए मारतवपर्म अपना राष्ट्रीय गान पुररोगी
सम-पव-मन बारकावनापा मार कसारित की पारण रियार
पोशारिरीम बरारमिपर समदेखि भारतीनामा vिe
विश्वविधामपर्म अपना पनि बतान माठ प्रपा भाषी
पारमाबमसको पुना।
रपिटारको पहल सहन बा मिष्टने मैंने पलार गितीमारिय
सम्मान गापा। मम्मैव समाप्रिमिर म नीर श्री
पोरीनहरराषगा। मरतार रामोनो मामन ममाम
उपस्पिायरमसमा सीप परिपोपुलातमान समन भोपिमान
रवीन्द्रनाय मकर
। पिपुर रेपमी सारा पहने हुए थे। उनकी जीरे पाय
प्रतानी बोर बोर-पोरसे हरम बरामा पा मोर उनको बालाई यो
पानी में समाजका सरमा भरिभ्य पापा। ये मममसे
कोमा मोम पे । म पनाम पूती तुमय पत्ता
हरियालापन घोर फस-सा मोघ सा मनुमर पर भोप परपर हो के
14 मे बम एनोंको सुन रहा तब मेरे पास बबरमही पपायर
परिचा' माचार्य सद्गुरन बापी पी होरामणी मनापा
पौमती कमलाबाई पाहा जि भोमान् मिसाइए ता पम्प किम हो
सरगन ठे। गुमेको रस समय पापी पररामकी प प्राप्तको।
पन मानो तीच तीरोंकी वह मास में करते हुए निकले।
पीमती कमलाबाई साहिया विष पम पमोम रिप एपीपी
पवारि सम्हाले मारने भापपमें ए सम्मेलन पहा पा
हापौने दिया पहनती और सब एक मार बफन पतिका बनकर ती
है। पान रसीदार पैगाम मा किन पुरपा पोपहना दिए
बहुमो पाने मुन्नेकामा हो बाता है। यह बससे पहना मावश्यक
मीकि धीमी पापाई साहिबाकै पक्षि पीपा सरार निवार
उन दिनों इन्दोरहरियो प्रारम् मिनिस्टर।
रपि यार सपनो मोशामें पाव भठे MIRR होते थे। यामामा
परपकठिन किन परिवंश पिपोशामा म पार।
बयापारिमिति पदमि मपनी बाउमापीर पाा मन
महरि पूरी पे ।
एक बार मैने पुरोचित सन् १४२ शान्तिमिठो
उत्तरानमें पाया। 2 माई बनारगोरामी परीक पापा
बोकरी-बाबो देवता साप पामिनिमम गण
पाठाम
ममिमी पेभिएर म येथे सो पारित मोसन विपासप पोर
माया स्टेयापर मममन रसापरे पहरती थी। सव स्टेमारह
-
समपरेपौर
यपास्थान पहुँगा रेनेबामे मित्र उपस्थित थे। यों ही शान्ति मिसनकी
सीमाम मैने प्रथम दिपा गुम प्रारम्भमें पुनिया-
तानसोबई
किसी नशेकश तर वा मदिया मौर सम्पुहानी बहन पिपर
पाती-सी साबीन पिपरोसे रखरठीई पपरपियों ही दिवाली
रीवी। किन्तु पोड़ी ही रेम मेरा मन हमारों वर्ष पौठे पर गया और
में भारत समयुपको अपने सम्मुख देखने पा। छोटे-छोटे छोपी
मिट्टीकी परीबापाचे बोर न रोवापर महामारत मोर पमापन काकी
तपुर गावकी पटनासिबने इर। मोरही सरस
निपरचमात्य देयकर मेरा मन बदलव हो गया। पौड़ी ही दरबाये
मेरे पाहि-
निमय क्लास-माबो एक के गौरेया। पानी
अपनी मौकी सम्पूर्ण रक्षा करते हरबारे बोरगरिया या स्थित
। अपने जनताकार विवादियोम रेगमें ठाए बमापक योगी
मो मासूम होते रेप का ये प्राप्यापक रन प्राप्यापर्कमि मिय
बोअंडेगों या नियरियामोम पाते हैं। पप्यापकॉक कामेडी मेली
ऐसीबी गित से बम्यापनही बाहर नहीं जा रहा था। ममता
पा वरिपरनेवासे हर पपिया किसीप सिचाईबाने
है प्राध्यापकको भी रिसीव पहा पिणाहीरहना पापा ।
रवियर रिस स्पात यो रसका नाप पातराषष।
इम सोग पाकर टेप एक छाय-मा सोमेर और परामर
बमा हुमा था। वहाँ मात्राय चिठीगमोदन गरीने हे fe
रवियर जोशीम और मिट्टी परीर में पना सारा पाये।
मा मुमार मुझे कमाविमनोप्रेमीपनाराराम पर रिलीपारा
पारम महाँ बसोट गरिबाना बार।
अपीरी और सीने पर एक
निमायोता हा नेहरहो
की शिम पूरी तए मुर पापा की मो0 गुगन्धित र
मिया और स्थिरता राता और बा गुरेले स्तरापर मोहरे
पोननाप यार
वम उमर बन कर ऐसा ना मानो शिर पर ताराचम्पका या
कपन सपा सरप है कि बाबाबाद मौर इस्पचार पद्यन्तकेही म
भौर भार पर परप-परप बमोहर पिनोबा भावे यह करते।
कि पम और राजनीतिका पुग समाप्त हो पया परमो दमन पास्त्र मौर
विज्ञानमा पुग मा मया है तब पाति-निकेतनकी बाहोंडी पृष्ठभूमिम
शिमोगा मारके य विचार बहुत ही बवान् रिबासी रेते है।
जब हम कोष सोकर हमारीप्रधावनी दिरहरी (मो समलिों यहाँ
हिम्बामे भाषाम पे ) पर बामे हमसे मिमीन पहा माय मुझेष
अपन विस्थ भारती विधाविया मापन करने पधारनवालम मुररेवकी
पर पूरी भारत है कि कमासे या ए पपने विरोपियाका समय
सभाम नही माने ना बाहरे। मुझे ऐसा हगा किअपकी भारागीर
ममापित हम आप सप्टा बोनमापका समासनमें मसमर्प से है। पर
मप्य सचमुच माताको तयापन विचारोका प्रबनन करता
पम्हे पुरवा मोर संबाप्ता नंबपन पतकरम को बसरप
में सनके लिए मिरवाता म पुरम का मुकार मासे उमर
पटाता है अपने मन्वयक रमका बारेकर उनका पालन-पापण करण
वा बगवकी कौन माता एमोजो पाना सोगो कि एकबीर पर
बन्चरो जग्म पि जाये और दूसरो बोर उनका हरपाप पन्हें काट-काट
बरहमन्दुमपरता पसा जाये।
पाविनिमेटम साप मगामा मोनिकेतन मौ मैने देता। म
लिो वियोले माये हए । विरिपरसदापनी श्रीनिमम काम
कर परे। धीनिरेन रिसमारतो गिरिपाठय पाम्ति निनका पा
स्पामबहीबसी परिषधि लिएकोम पार रिय पावे।पत्यही
परिपत्य मारी सेवा करन योग्य नहीं हो सका पदीया ऐप
पबाग। यही माकर मामूम हबा किनारमा बोस-को बनायो
प्रल्पात पसारारक विषास भीनिस्तन मोरियो मुशाषित है।
समय पर
प्रामोप दौताम पुररेर यहाँ ऐसा रस वे रे गये मानो वह बम्प
होक नही इसो बोले प्राणी है। ग्राम-पीत बाबा पामोच-बीत
मपुर तोरे हो पापही यह भी सुषित करते शिप्रामवासिनी भारती
यमान पोमि भाचा फोहनका पपळम कर रही है।
समता पिम्वन भोर पिसारे दिमाग और प्रमको पाइयों
माम बहा विचारोंसे मापार पसरे इनकार रामरभाषा
को भीरमाइमें विकार या मस्तक किसे पहा बापा। पता है
एक मिर। इसप पर। यहाँकी पापियो पुर-पुकारकर बह पीर
फिको उपाभोवों की पोगे | मानो यमाची माचाएँ.
से माही रिचारीसे कही या हो । यहाँको योगको माम णेरी
मेरी टिम-टिम रानियोको रेकर पाना हमारे परके राणिपा बान और
हमारी रपनाबोंकी पहचान हुए बिमा कहाँ पो ।
पहार हरियाणे काम सूमन्दिव फूल हमारे स्वाना से Edt
परन्तु पातिनिकेतन मीर पोलिवनी पृष्ठभूमिम पोटा-सा मचाया
पर मुझे लगा मन्ठा सपा। ऐरे भगायपर तो हमारे बार-बम
होमे पाहिए जिससे पामीन होग बपने कारमें होनेकाही उपमको पान
सःऔर अपनबारकी सपना मेवा-गोवा रस। म अगाया
परम मबहार बोसको सतुमा बाते हए पानोमोही मुखिया तवा हाक
भाताबरणको एकत्रित बस्तुएँ मनपर पापौष प्रभार गते बिना नहीं
पी। छी तर पोपने पिछोले नमूने बम्प पपु-पतियों नमूने
और बरोबो तथा प्रमहरि स्वाप पारे सारे।
इन सबको चार या विचार भी बाया सा बस्तुओं
बहप पर वीमनाब भी बात कह गाते और गर्नु
पप पर भारतीय अपि गीरनामसर पारे। सपता हर
बाहों-तेरह वर्ष बनाये गये हमारे काम्पमाप पृस्प भी हो
किन्तु पच मापे ऐसी निपिए मिठते हम दूर नहीं रह सकते मोर
समग्रमा मम १२. र पार बस्यक सिए उपवानी भी नही हो सकते। हमारी सरिता को अनुप्रापित करनेबारे तत्वोंको हम असहिष्णकम सम्मे।बाई महार- केगको-सी भी परकी-मी विसत मौर मम्साहकी-मी पारी बनी हमारे पास काबति स्थिति मौर रिपति इम्पर मेरे पार ममें दो से। करियर पोन मोमें मोनिकेतन स्थापित करमहा गेम पह है कि मानका मेयर मपनी पूमवापर पाबा सारा मामे । उन्हें कम पापीक बार मात्पनिमा का पर बनाया माये । उन्हें मुभाया जाये किनकी भाको मतमोर सनकी भी रक्षर हलो राहिए । अपने रेपन सतिकबहारोंका जाने सहा जिपस बत्तमान बानि कारों और साथमोपबपने पास-पास रचित मपयोग होवे लस। निमसे समीर सानो उनके मम पारोबसेमारीक बावको मोष स और ये मपनी बातिमा सुपार सकें। हमारा को गोप है कि बास-मायके पार गांवोंको हम पूरी समता रेस। बिराम योरमें शिका प्रदेश हो सके और अपन मामि प्रापी अगिरकर | प्रामीम-से हमारे पापन और पाप मोर गुस्प कापEANI रखने-मन समूह बनाकर पार मावा ही पसलकामारो देखने लिए भोम्मे-जी परिमि मितपय मूरी परमी और पप्पोको साटमे बीर-गोरे ऐसे पत्थर बनने म बिसौप पुरान और माने दिन माफिरलपाने मपते । सो तप एमपी रावटों और हायरी भीमकनारे साहित्पर्य कविता स एल एलन करते है जिनमें मामास मंगर चमतताए रिना नही पता और निवारण र बह मपको गौरवान्वित मनुमर परसामोप ऐने रलोडो सिनेको ध्या परिक निपुण होते है Tami पॉो पिक-पिसार परपि
समप पौष
बमा लेते है और भेष-विस मारह करते है शिकार पनी बिसे-
पिसे
दुमोको एन पहा बाने समे। १७ स्पार्मोपर पा रही प्रसार भर
अपनवे विस प्रकार पो मारियों और बोथे सरोवरोक पाटॉपर
पापियोस बाबी पीर मोबाएँ घर बोर पाती है क्योंकि ममरमबार
सेकर मारियों तक सब कुछ यतिथीम पाराक मेवामें पता या
और हम 'कुको सब कु मामकर नीशमा मास-पासही माते
पाति-निमेसन और पीनिकनमें मानो रबीननाबस्व और पानील
साम्माषा हमारोप परवा है। यह माना पुकारकर पता कि
हमारी विभिन्नता
एकता
निवास करती है। क्या ही माही कि इस
एकी मोरस संसारको विभिन्नवाम एकता स्थापित हो सके और हम
पोमनाली मन्दी तय पापान ।
भारतीय संस्कृतिका नौरव और उपनिपदीय सूमोकामन पुमेकी
रचनाबामि स्पष्ट बोबपाया है। कमवा हना इसबार समापन
पुगों-युगोंको मेंट समेगाली मापाम पर हुया है। निरी पाट्रीयता
मधिक महत्व नहीं दे पाये और उसे कमी बदगिफ्तार मारेनहीं
बाने देना चाहते थे।पाहते कि
"यहाँ मस्तिष्क महीम भौर मसाउँमा उठा भा है,
यह शान मुल और रिस संकषित सीमानों में
बिमागित मही
यहाँ राम सस्पगाराई मेंस बम्म पारस करते है,
भार यहाँ प्रयक पलसांशता सम्पमता की भोर भागे सती है,
गालिक की शुर पारा स्मयों के रेगिस्तान में मार्ग मही तो
पैसा
यहाँ मानस उमेमुली हाफर मिन्तर विस्तार पाते र विचारों
भोर किसानों में भागे पढ़ता है,
रवीम्ममाप पर
१२९
-
उस मुकि के स्वर्गमें-
है परम पिता।
मेरे राष्ट्र का जागरण हो।
हमारे बोरकी मिमेरक रेखा को मोडमा मौर नष्ट करत बाना
माना उनका पुत्त बा । सारा मारतवप और सम्पम पयत् एसे ही मेवहीन
भौर मेर-विरहित रवि ठादुर कुपरि मोरपति पवारमो
मार करता रहता है यार करता रहेपा ।
पण्डित मोतीलाल नेहरू
सबसे पहले पगित मोतीम्मम्मी मा सम्पर्म मामेका नवसर
मुखे मामबाबा मबिक भारतीय कांग्रेस मधिवेशनमें मिदा यो पापर
सन् १९२३ में हमा पा। सन्त बानियसमा सभापति मौलाना बर
कथाम बाबार । हरिमांक मिए पिमें पपे मरवरा सबसे
सपनायो बार बारपाची पटकर साबरमती मारे । शान्तिवारी भीगोपी
नाच वाहाके बलिदान प्रानपर रेप और पमित मोतीलाम
पहर एक तरफ पोर महात्मा गाम्बी तथा मोठामा मामार दूसरी तरफ।
मामा प्रथम वो पौरेस कमेटीका निष्पय सर्गीय श्री राम माती
सामगीके प्रतिकूल ही पपा । पगित मोतीगत माग्न पर्यना
मुन्न ए कमेटीक प्रापपसे कोई नही हटा सकता । यह
मेरा और 4 परीरको बाटीनोटो इस पर कर
ग। तिन हो परस्थित सरस्मॉक ही नहीं कार्य महारमा गाबीके
कपास उम समय पर बरस पड़ा था। मना सनी बरी रयाममयो विभूतिको
शेरकर पाबाबी इम के लिए रखे भी तो क्या ? सरेप
बायु परिचौकी विधिषियोता नाम किस पसरतासे रेप।
बन्तमें कांग्रेस कमीका निर्मम बहीमा रिस गरेपोषाही
कपिट मी दूर-दूर होनेसे बच गयो । मा गालीगीबोंकी श्रीत की
पा पति मोतीहास हमके त्यापकी पहना कटिंग। प्रमता का
पाबोगी पति उस उमप बममान मुगा बनकर मोतीमा रमेपर
पहरा रहे। का सचमुष पात्र भार पारा कानिबार और
गादीवार दोनों एकीकरणका दुर्गम पर पा। उस दिन मैन पाने
पइस मोतीहासीको सरे गौरपके पापा ।
गव मोतीबाड मेहस इसरी बार मैने पगित मोपोहात नेहमको सन् १९२५ में ऐसा कर प्रेसर राष्ट्रका कार्य करने के लिए भरपुर पधारे मौर पगा गोल- मके महमें हरे थे। उस समय पर ये बबमपुरस एटमी बाय भोर म्होने भपमा दौरा प्रारम्भ किया तब श्रीमान दुर्गाबर मेहता सेट मोविल स पगि सरकाप्रसाद मिम और मतबा मम्प घोष उनके साप-माष कि जर मीना हाकर साकीबोर बसे तब इनम-से कयास में र पपित रकाप्रसाद मिप ही उनके साथ थे । सापम यो रामरयास पुसी बोर बामराले पिरोमणि बन्धु से वेगस्ती ठरुष मी यो गत मोठीमाम्बीके लिए स्मारपरक वस्तुमाको सार-मम्हार रमत । उम समय पगितमोरे साप उनक सहरी मीरपाम्पाय मौर समक पक्तिमत सेवक ये लिप हरि महकर पुधरते थे। रखमें पगित मावीमामयीके अप्पमन-मसार महका-बारा हमया। सफमा पुरतासा कर रोमा साटावीचड़ी बनाम सोपा कर पानो सम्पयन-मामग्रो रते हुए ये मौर उसमे निशान लगाए सन और परमपर वियत दी प्मान नहीं दे रहे थे। उगी रिनो बसिरे एक प्रबम निरोगी श्रीरापानराव पापन रमुरीम पगित मातीसगीका भूगोवा ये माये पे कि नम्ह (पीरापमान मे) णार मप्पप्ररेणो कपिस टुको रोहा बायपो। मरने परेम तिमी सावकी गौच भी करना चाहते थे।पा पगित मोतीमाती गरा पहुंचे तो एक मामो-मगमी मेला कापस निरोपर्म मापन रे के है। य नया पहले काँग्रेमी ही विमुमती पह महीनको विरेय मागासे हाटकर कांग्रेस पिरोपी परिहान सपाली जनतासे मपीतकी पी किसने बोका पूरा बता मेरी बात मानकर माप काम उम्दे परें। पतित मायोमास मेहम्मे कामयकी प्रप्टसासे बामन्त और-मम्मोर स्परम र पामराको पहुए पहा पा मेला मय कोई सहानी, मेहदी है। हिन्तु छह महीने समय पाँच पहरे को पिसमें ये है और मा कांग्रेस समर्थनमें बातम है। अब हमारे सामने प्रश्न यह है कि हम अपन मलाकी भारतमें रहनेवामी समस्त बीवनीका पार मानें भया विहायतम म महीने यमानेमा मवानीकी बात माने । मेरा नियम है कि पाप इस बमकी परिस्थिति बानकर बातम्म देनेगा मेवाबीकी बात मान । उस समम अपने मुंहसे कटू प विमान निकम देनेबारे पणित मोतीजस्मोकी मनोमो मुनकर मेरम पद्गद मा। में उन दिनों पूरी वरप बा और पगित मोतीमायोके पैसे मसन्तु। तुम नाम दो पुरे तो कांग्रेसकी प्रथम पिसके ममें मैने देखा कि सीब पम्ति मोतीगीका जैम और बोलने का निवास कितने बयान में विचमी बार मौर सम्म एक बार में स्वर्गीय पणिबी साप तूरबा पापा । इटारसीम ट्रेन परानो पो । इटारसी स्टेसनपर तत्कालीन भारत सरकार वार्म मौर मेगी इनस' मिस पर्य। पपिवयी बायोकी टोपो नाका पुरवा सम्म जारी परियेसम बो भने मानमरे रहे थे । पनका और पर्व मानो जित म्य बा। मम पापीपर कोप माप-मा करणे हए भी इनस'ने कहा 'पपिनी बारीकी टोपी पहनकर तो भाप पापानमें ही नीमाते। पणिगीका बबाब मानो मा बामगाडी पीलीका बयान पापोडे बरे माप मेरे इस फोटे-से परिवर्तन- पबड़ा पी। हमारी बायेकी पीपी को हमारी पीकी पौदिया नाकर परिबन करी। मैं तो इसी बासा काम करणाहूँ। पपिानी पर मात्र में उनके बहरेपर लेपका निशान नहीं पा । दे पायात ठप परम गोठ रहे थे। पगितमी तूल पहुंचने से पूर्व होगाबार एक घटना हो पड़ी पी । पसली प्रपिस पर्वा वापरयक है ।मा यह कि एक नेता होपा- बार मापे । नमग्री परिष पाटीमें पना मापप हमा। रोनापारक गेम रिपेपत मौर रणब है कुछ मुसहमान भी मानीको इस
नगित मोतीकाहरू
होकर पृष्म
हातका गत का किये यहाँ-तहां शिमोर सामान होकर मीन
मोपत बनेको करते समय पर रमकी समा रनमें मानी तो एक
समयकेने रक्त मेताची पामे पता मदोषपसे भरारतन समाके बीच पणे
4 सिर्फ मोफ्त ही खाते है या मी भी नेतागीने
पार मारणे रत्तर रिया 'जी नहीं में सेवा गोस्त बाता हूँ। मर्मराके
भाटकी सठ समाणिक और वैन मह सुनते ही एक ही ताराबमे यहसि
विस गये और सभाकी उपस्थिति बहुत कम रह गयी। रक्त समाके
समापतिजीको इसपर इतने बोरसे मुस्मा माया हिरमोन काल मियाही-
की मपनीरपात सक्त मनपा परमपर पॅरी। इसके पीप परमात
तुम्मे पगित मोतीलाम्यासे इस घटनामा परमा रामेकी कोशिश की
पपी । पाका नगाय परिणामी मोठा लिए पाहुए सप
एकील साहनात मी होगामारपाखा प्रम रोहराया। हमापतिक
चामपर पस पनाम कदाचित् कोई स्थानीय सरमन बैठे हुए थे। पग्मित
मोतीहामीले प्ररन पूछनेकामे पडोस साइको मोह माय तेहए
पहा चार पाच पानेवालोम में सिर्फ चारपाईनही बावा सामेवानों-
में पानही वाताऔर यदि माप दस रेपी सतम्बारिरोधी हाँ
वो मेरे सी सभामें बासको वा सकता है।" इतना पाकर
पगितमो पानी बारपार स्मामाविक सीमें विसविता पड़े। पानी
भावपता नहीं कि प्रामरता महोरप को साथि उक्त प्रान कमरे
होमिए उस ममाप स्पय नये सभासे पलायन कर गये। सोनीन उन्हें
समझाया मौ गितु रिकी पान के नम सो बाट मय ।
एमार मैन पग्पिा मोतीमासीहा मानम भवन प्रयामम देगा।
पुमा गीत होने के कारण मोर प्रातका बल्वाम् बहुमत एकमुखो हो
जानरमाण परपन्न प्रमः । रम समय समय पर बमनापासनी
मौर में पनीमानम मन परे थे। में सवलपिा मुरता
पतापारिजमोरीको शिवयोमे गरीबी विचार किस उप मिस्रप
-
समय पांच सकते है।(बमी भी इस पिपपपर में विचार करता रहता है।) पपित मोतीहास्नीमे इस सम्मत्व मपने विचार व्यक्त करते हुए कहा था बो मपनी ममीरीकी निरपोफी मुविधाएं स्यावर परीयोकी सपा नहीं यसकता उसके लिए इस रेगम बगह नहीं मिली। उसके लिए किती मी रपम बगह नही मिनी चाहिए । पचपि मोतीलालजी तत्कासीन मुक्त प्राप्त मामी बीमॉम पे किन्तु उनी बाबा धामने पर अपने देशका मानचित्र पापा और अपने पस्तित्वको एपको सबाम सानेको उनी बट मगर किसीसे मात लामो स्पार, पो। सम्मा काट उमरको प्ठी हुई म पर समप मानपर पामा पम्पयनम न हो पनवासा सपाय और अपन महम- 4 भवनका छोपर पाबागी साबरमतीवासी दुटियाकी और या सरमकी सामय उपा अपनी सुविधाको सतरेमें गमकर सर अपनी मनाकी मगन और उसके सापको बहाते गाता-यसब पमित मोठी सामनामी एसोरिपवाएँ पीबो उनकी-मौ चागा महापुष्प मही प्राप्त सकती है। 0
राजर्षिका जीवन-दर्शन
मवेर हामी बीषा म्पपारके माम मारकी वह किन्दो
ग्यम से हम पुगों-युगाद सतारे भापरणको मकर पसरते।
डापही देशका सत्यापन बीवन भी मौर रजनीयम
मतलवायन भी। गोमन्त करपको महान् यिनी! मानव
परितका समसार कानूम मी मौर ऐति-मौतिकी ईमानदारो भो ।
समापोटपर्प परमेकी बात एक बार में लाहौरफे माय
तराम-मममम पर काला सामपरायबीसे बातें कर पापा । समयों
एमालजी लामामोसा स्पापित पबनोविक fone विद्यालय ( तितक
बाक पोलिटिकम) या दो बप्पय पुन मय से या पुन नामका
हो । कामीका पाटिनमो बहुवरिपरी है और न पर
मीकि विद्या रिचायक अप्पमपमें अपनी पी बामवासी सेवामोरे
fला विशेष पुनकर बहो पेवन ना पाये। यो भम्प यामाग्य
सरस्मोको माता है। पन दिनों लाइम विषयपर प्रमेय सपना पुरा
पूछनेकी हिम्मत नहीं हुई किन्तु सन् १९४३ में माम मपिस भारतीय
हिमको साहित्य सम्मेलनमा सम्पन हमा और गोरखपुर मनले कर
माम तर न समझे कामगोडोपहरो पुपनो पियत रोहरायो ।
टगमनी तामनयन हो उठे। बोल मावतहानी महसे सम्भव पा
किराममोतिरिचालयका समापति सम्परा बरते। साहासी महान्
पेरिनरेभारत मौरबमका उठाये गये भारीप एपलादि
लिए मेरा सिर मुफ बाताबोर रहा पितु लॉग भुम
राजनीति कि विधाममा अप्पर बनवाया और यह सम्मो
ममप पौष
समता पाकिम समेटेको पाल।
एक बार मामा-गरेप मनुबासे बस ए मोर माने
भोप पुरुपातमहासरी टमनको अपने यहाभ दीवान नाया। फो।
एक बार टगानबीने प्रसार मानेके लिए मोटी मापी गि
गोर पोर प्रयागको भूपि पम्हें एक प्रिय है। सोम मामा-नरसने
सकार को नोकिया किन्तु मनदादी एदीकी मारपर पौने क
महारपाबौने का प्रयाप पपकर अपना स्थापन मामा गरेको
मिया दिया। इस प्रसनकी लारतीराहगो पतुर्वरोगे प्राप्त समारो
पवाराणनारा अपमा बा atोपवेशक किसी महामान्य
पनिक सम्बनम हिन्दोसारे एक पितको सो एक मुप्रति निर्म
नियुषण कमको मात कही। मगलि मपनी सब मुस-सुविधा भी हिब
सेबोरेसनेमा अपित समाते थे। पपिा मारतीयोने पर
'पमिक सम्मको सिब दिया कि मी रमाने तो पुरसामान और
मबर पचनेको मोक्षित कोविएपा होपमापकोबा भायेगा।
सपारी अत्यन्त मर है किन्तु राष्ट्रीय का भारतीय भाषाबारे
मौरकी रमा करन से जीन मुबारे व्यक्तिमि-से । सो
मारन रेने बरे हो तो बपने छोटे-कोरे सबाहर रिपोरस
आप पर किसानोपन उमा माया एला मी पण
सामने सिमान्तकिटने पाकिस्बराम मिकी पात
एकबार हिन्दीसम्मादी प्रस्तापर मत देना पनो माने कोटी
मोति जटिपूत (प्रस्तावको हिली नि मानवारसके
विरोषम संसद पपना मा विया भौर साप हो ldat पाप मी
रिमा।
म त सध यह माना है कि मोर माग
इन रेमही राबवाग र परिणा। मोसिए महाममा
मोरबीने एक बार पोषय (प में तगा पिको
गर्विका बीवन-दान 1. हिमपिस्तपिपापपर्ने प्रवेप करामेके लिए पारा) संपर सवा र पुस्पोत्तम री बाबा रबी उसका मम्स परम उसे माझा देता है। मारतकी पातीयता बहव बसमा कि उसके पास पुस्योत्तमयम टपन- पैसा पनि मौर।मान पर वाहा पा पाता है बोर सपोप या पिषित होने पमता, रामगोची तण बकर बम मिला है। होम बासर यह मुने बाते है कि पडेय टपानी मेबस हिन्दी बात को मान है। किन्तु पनगीमे एक बार मुमसे कहा पा और पर बाघले समान यहां-तहाँ मापन मी रिये कि यदि हिन्दो मारतीय स्वतन्त्रवाके मारे जावेगी तो मैं सब बसका या पोटगा। हिन्दीको पकी मासापरीके पर भावारी प्राप्त करनका साधन मानते थे। बौर भिबनके बार मावारीकोबचाये रखनेकापमा माईसम्हयामागी माणिसाची पोरे यहाँ एपमनी बार में एक ही कमरमें बोए । गरमे मराठी मराती और हिमौका गुमपान पर पापा मार तीन साम्पकी बात कह पापा का माननीने पापा 'मैने सुनाई किमिड तेस और मम्मानम बहुप मा साहित्य है। मिग तो मापनमामो मार ही देय नही पोग बाती कामें एक बात का साप मिस योमता है और सिमापुर मौर ममापाका एक बहता मान समित बोबठा है। रमा बिना मुगाके इनी बगइ मापा बोलीमा सम्ती उस समय में सोचता रहा कि सम्पत्तिको समस्त मारतबपका मिमा समास पा लोग यह मुमार माया करेंगे कि महात्मा बाग्पो मतमेरो समय मौ रगतको पर मानते थे। उन्होंने एक बार कहा भी था कि हिन्दी परि इस देमकी काति पोसीबिए कि पुरपोतमाम-बम महान् पनि समाचार प्रय रगनी -कविताकेप हिमायतो है। स्वये गुपेरको पापसे पाते और पये रत्तर प्रदेश पिपान-समाके माननीय
मम
सा उन्होंने अपनी नीति सारए मुसम्मान मियाको मपमा माई
पतछापा मारासोनिए उनकी दिदीकी रोकिनाति भुमम्मान भाइयोंकी
समसमें वोमा सरुवीबी किती बरेव समान मामा कायम भासों
हिन्दौ दोसनेमार्गापर ना बत्तरायित्व किये सारे बपदका स्वागत
Rस दिपपमें सम सबक सीखना चाहिए । पिछले महादुर म
समसार कम्युनिस्टा और मनिस मा समबन करताप
किंतु रमने सभी सवा पुरता और नापिक मारबाको सतरेमें
मही पाने दिया। मोकिए बमके महति माविमार पिसम मत्मा
दिखा रहे है। और सके गहकिनमे स्विने ही गोमाको पाता रिस
रिबीके पास क्षेत्रमा प्रयाप पिले पातीव-पचास परिही बाप
मापा एमके पहाण मापण बांग्रेपुर पही स्थान किया।
स्परी और परेक पिरोने पर एएन और सारे पापको दीका
पर बनाया। परिम सम्तवर तुबमीवासको तप हिणीमा विस्तारवाई
को हमें मार रिपोगा- एन छोपाली रनी चाहिए मोपीम
atuwat और मपमा विमान इसी मापाम पिस प्रार।
इसी रूप में मीरमस्तित्व और प्रबलको समझना चाहिए। ल्ली-
पारी पहार नि कोमि नमीका मात्र समायानामा परी
की अस्तिरयम ही नही है। भापगतामोपनीमा
मिए सुबम पौरि पाहिए इसीलिए हिन्दो गमका निवि किया गया।
एक पार हामार मुनगर मा पा FRोरिवीको
पार पम्की नापाकर पमा पोगा। पमकी मिति प्रस्पाम ही
माँया और अपनादि पोम परिवर्तन करना पांगा। क्या बाप
उसके लिए प्रस्तुत है ! एक बार या मी विहिनीका नाम
भारीपेतो रे ऐना ! ६८ की बात
की बात है-सम्बनीमा
मपिधरी।
समर्पिनबीचमनन
मुझे यह सुनकर मारय महो मा मोर हिम्मी-बमको यह सुनकर
पाइए बिना न ऐसा कि इस रेसले एक प्राम्सकी गयरी मममीके
सामने रखीयो तब ग्नानि अपनी साइमम नमाके शाब इनपर
कर रिया । इस विषय में उनका कपन माररणीय था। उनके मतसे
यही काम छोटा नही है बिहमारे प्रदेम बह-यहाँ गवरिना कापम
हुई है हम बहकि लीवर और पनरों की सहायता करें । सन् १९२४ में
सपनपारबीके पनापुरम चल्नेबारे पनमोहक मुकदमम गमेएबीम
याम्प बिचाने के लिए सबमें गनगी पास कानपुर प्रयाग क्या
पर प्रयाममे पार पान ये बौर पर रिनों साधुपर पो
पियोपीरि हिन्दी माहिप मम्मेलन कायम टपगी हार। उप्त
सपमहानगोने मो मेंपरेशीमे रमतव्य सिाया पा मोर पिसे गोपनीने
कुछ समय परिवनिषि साप फरापरकी सरासतम पेश किया पा मेन
बाकि रस पसम्पा मिजाते समय कानूनको मा नाति-नियमकी कोई
मी हिमा नजीके हरेपर नही दी। में यह भी मिलान कर कि
कानपुरका प्रताप' उन दिनों इस रेमरे स्मादीमा प्रवृत्तिका पायक
और मापापातमा परेप पुष्पातमदासमीपन सस पथके ट्रस्टियाँम से
हिन्दी विद्या बीर निती पपरे पति ही टपोषण मावन मही
है. बरवे दिग्दो साहित्य सम्मेबोन गाडे ! वाहिदो पुस्तक प्रहा
पोपी पीर बाहर पुन-पुण पुस्तकें मवश्य खरोख है। बिन
बिमाहौर बार मेगनत को मैनेजरप बम रिलोंगयपन उन
पा शम इस रेप बाया बामपाली हिन्दी पाध्यालामा सिएप
कर २१२। यह पास मुझसे मन् १९४० में स पास्वामी परमान
पीपी।
१९२ में परमा लिली साहित्य सम्मेहमो समय ध १९२४ में
मोरगरी पापिद सीमही रखे हुए है। ये सव पद च्याते
समपने पार
प्रति बाप
बोच ही में विपको त्याग रे तो बसका सहावामित्व परोपर नहीं
हो सकता । मीने इस मासको भरपूर पारवानी dtoसनकी बाठी
से मामबका मन न पुर। मैने आपको पस प्रतिम वन्हें कमी रस
सेनामा मिस पयपूषक शव को है। मान पिपमा
पहना मस्तिष्क रखनेवाले दिए म्पर्य या मपयम है। यदि किसी
समुहम भाप टगानीको देखें तोरपना सपा को मार सोमय
प्रमादित बिमा महा एकको । मानसकी बात
कोरोपई उनकी पावनहीं हो पपी सारके समस्त सम्भोर
प्रकार से उत्तुजापूष बिमाकी तप निधार रखें। उस समय
मापनको सक्ति रिनोको बाराी तप निर्ममतापूर्वक बिना
पोपहनी पडी।मायत की बात को मार मिनाये हप
बनारसी पानेकी बिन माष्ठमी या विचारांनी मोरगी
दाप करवाती नाती नामक मारतचाप दिएक
बापम पूमरीमा पर मोर उसकी सौरियापर मनमा
पैर जमा-मारी मनुब बामे गता पता है। सपना है बहाने
अपनी मम्मर्ष पानी मारतों को ऊर्मपुत्रीमाना लिया है। समान
अपने वोपन जितना सहा पवना कमीपहा नही । मानो साता
वे पीलियोकी परमरामा पाप है। पाली पनिताको पा समति
कोपनियता की बनिम्ता हो मामालकी पलियारे सोबो सपने
पाचौपर सवार ही नही मटेपथपिए सौमिए पर
में सो पासमरा मैंने यहाँ सन्चाका मारित्या पापा।
पिनी पर मायावादारीपनको नमन कप मी मानो
जना महि र नाहै। हमको मांस पानो उमर
वित्तका परिकार बोमन के भाव
बाम मोर हिली उपनका भय बराबर बि बार्यनी । उनका जीवन
गावामी मुहरको तहमा पाणा अपनो मारोताt
रामरिकाबीपन-मन
पौर रस्तुबा संस्थाबा और पक्षियोर स्पमें निर्माण काब मिया करमा
हैसमा मपि न पचनापर रों पर ही सकता है एक एस्पोकेट
के माते उनके मस्तिकमे नौ बनेकदियाकिन्तु रपया और मस्तिष्क
की मिसि मधिक भारतीय समतिका मूल्य मान्ठे है और भारतीय
परिषोशमा चारठाना पाते कि मिसपर म्पया और मस्तिण
की पति पापी पा सके। पाकिसे मानते । कि मस्तिनपक्ति
पसीमा होम्पिी रेप मोर कित्ती बातिक परिवसे सीमही ही
सम्वी इसीलिए काम्प सि काहति नाटक और धर्मोपरेप इस मयसे
परे पुष्पोत्तमदास सन मानो उरीमार पोरनर्म पु-मिकबामा मानते
है। गांव में मानता हू दे मानते है कि बीवनको उनका उसका
नाम है जिसके लिए फियत नहीं देनी पता है। यही कारण है कि पान
पीबापूजी गग प्तने सम्मानित किये गये कि पदि जी महारमा माग्यीय
साप मतमेर मी हो पाता तो महारमानी रगनीको प्रेटवारपारम
मगातार मतमेरक विपर्योपर भी सनद महार गत।
परिएर हायमें कोई मौभाग्य मोर इसमें जनसेवा पर माये तो
यहाँका बामडागायो मरेकी अठोस हगा है और पाको
ट्रायने । हगता है कि पार मिस मोर संशतिम कोई मेर
नही मानते । जोरान उन्हें बनी है. यह पते थे। और परोपईने ।
बमॉम गोपगै बवानोंस नदी का पानही मही
पापी मौर म्पतियों भरतार पपने पापनाम र ति हिन्दी
संसार वारा मी तरफ गर मा समान समारटी वर
पर ही जीवित रहा और मोतिरामा । परि म मिले
हम्परा वामनरा पोल्लिाको शिर होय पदि.
पा मार मारपसरी बारमानामा पर्ने पुष्पातमारापरणी
भातश्परता।
र पाममा मापनको महा पुतको गार
समबर पाँच
'यस्ता
घरम मा से सम्बोषी मरी में कोई बता मी बार सोपी नाबसे
कोई पार नही गतरता । इसीलिए हमारे मन्याने पापा
को हमें काफी वर माये धर्म हमारा यह मो हम पा रयम मार
मारा मस्तिस्न पामो अपने परिपके दावोस मपनी सतिम से
ऍक्ता थे।" इस मक्तिका बोलला भी बोलना । चुप पना भी इस
पक्तिका भी बोसमा ठहर गाना भी इस व्यक्तिका बानोमना
भी बोलना है माँ मर जा भी। और उस इस मागेका गरीबसे
परीब बारपासे पड़ा म्पषित पड़ सकता है। ऐमा पति परम पमन
नो परे हुए भी माने तोपर टैमा होता है। यह व्यक्ति मझेप
माता म्पत्तिस्य मम पाता।
रियो मापा और भारतीय साहित्य के प्रति उनके विचार महात्मा
पाबीसे पात कम मिते-जुलते है। अकसर याप्रो रेसे पये है।
महात्माजीसे भगवे समय मुझे मना नहीं पता । पितु साथीकी
एक मो माखापूर्वक महात्मा पाबीसेम के मौर सौ वृत्तिसे अपने
प्रतिम समबाहीको भी समान सके। बो दोष परोकी प्राप्ति अपनी
बाडमे भिया रखते है म ही में, समत किन्तु भो
मोगामे पाकी प्राप्ति समय पिणे पसका साहस पाते समय
सत्यापित पीक बम्प और साहसको समय ऐ है और समन्न ।
से भामते है कि काने में विस ग्त्तरपयित्वकी भाषम्पन्ठा होती
कमी-कमी 'ना' करने उससे बड़े उत्तरदायित्वकी वापरायणता ही
पाठी।
दिल्लीका बानकार यह अनुमब करता कि दिनी रेपी
घमात भापामोरे हिल-मिल पाने मोर गर्ने वा सरकारपोष भी
की, बो हिन्दी मे परमन रहना चाहती है, जो हिमपन के
बोहोनेका मर सकती है और हिमाली मान सम्पना नहीं बन
सभी पापो हिन्दी इस पर प्रत्येक भाषा-भाषी मोर निवासीम
रामपिता गोपन
पौरव मौर तामही बन सकतो या खिो हिन्दी पुष्पोत्तमदास टपरकी
हिन्दी नाही । पुस्पोत्तमदास टपनको हिनीके सिरपर हिमालय-सा
पर मोमिन सि मोर सपा उसको भुगएँ मेगा मौर
यमुना
उसके प्यार
ममा मोर ताप्ती उसकी किमिमी बार सोभित
सकी भारीकी बिना मा कारोबार महानी पर मार रही
और समुश्की वप पुस्पोतमयस रमन मह उसी दिवाक परमि
पण हा प है और पमरें गाता येमा । यससे सम्मबकिनास
और तमिम स्मेि सोपरम परे महाराष्ट्र पुगपत मासाम और पैमान
बिसे स्वीकार न करे, यह पुस्पातमारास पनकी हिन्वी हो। यहिनाके
रमी सबमाप्त महान पके ससक जिसके विषप अन्तबार बिनाया
पावे कि पानी सम दो रसो पटकी होती है मो मो ममता है।
पापि को इस बात कुछ मामला नहीं है कि हम उनका
सम्मान करते है या नहीं करते। सम्पनो सामान सबा कमी मी
माहते।
सोप बाम यो परमोगापागोको रोप है। बो हिन्दी
प्राम्तीम हिलोपल्या समोर बेरठ मपने अधिकारों को मुरमित
रखनके लिए हिनीका विपेष यो रम्ह पौ रामागीको गोप रेसका
मपिभर किस वप ममहीं समझ पाता। यो प्रपोप विस्तार और
मटा दिपाइपकी पापा की सापोंकी मापाबासे भी
गत सोचना है। यह हिल पम्प होगा कि हिमास्यपी तरह हम बपन
सवा पवा और काम्याम पुस्पोत्तमदास गणको पार कर सरें।
बनेट बार नौकामा पधारे है। ये मक्षित भारतवर्पोय
मौसम अप्पर मावे सपा पपारे र स्थानीय मीनार महा-
रिप बनरा बाप मापा मोर को सम्मानम मीण दिया गया
पारिनु एक दिन वापी दिती मुबहमें काफ्ते में रामसमझ
मसापके पीबोमप्रभमो वा भाजी-भगार भी पापम्पति
१
समय पर
पाठकके साथ अपना पधारे थे। म दिनों में स्वयं मन में किन्तु उनकी
सांस-मास मानी माफी रचा और बाधीत बनकर बेट पी पी ।
उनकी पिपर पोख्नेवाला ही नहीं सम प्रस्पेकतम समरनेवासाम्पषित
भी यह बानता है कि वो साता उनम है यह विश्वको दुर्लभ प्रस्तुमि-स
पर। टमनी साप है टमाननी के साथ ऐपी और उनकी
मीय पुस्योत्तमयाची टपरके सबक पकिनवटी मेरे प्रमाम !*
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*परम राबपि माननीक निपनसे मपर वर्ष पूर्व सिमा
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