Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Vishva Prasidha Drug Maphiya
Front matter
No text on this page.
विश्व-प्रसिद्ध
इटगा
माकिया
No text on this page.
विश्व-प्रसिद्ध
ड्रग
माफिया
लेखक
नेमिशरण मित्तल
प्रकाशक
®
पुस्तक महल
खारी बावली, दिल्ली-110006
© कापीराइट स्वत्वाधिकारी
फैमिली बुक्स प्रा. लि.
F-2016, अंसारी रोड, दरियागंज, नई दिल्ली-110002
. पेपर यैक संस्करण Revised Price 1992 में फैमिलो बुक्स प्राइवेट लिमि. के साथ एक अनुबन्ध के अन्तर्गत प्रकाशित कापीराइट स्वत्वाधिकारी फैमिली बुक्स प्राइवेट लिमिटेड एफ-2016, अंसारी रोड, दरियागंज, नई दिल्ली-110002 प्रकाशक पुस्तक महल , खारी बावली, दिल्ली-110006 विक्रय केन्द्र •6686,खारी बावली,दिल्ली-110006.... .फोन: 239314,291197 • 10-बी, नेताजी सुभाष मार्ग, दरियागंज, नई दिल्ली-110002... फोन: 3268292-9 प्रशासनिक कार्यालय एफ-2116, अंसारी रोड, दरियागंज, नई दिल्ली-110002 फोन:3276539,3272783-3272784 टेलेक्स ; 037-78090 एस वी पी इन * फैक्स: 91-11-2924673 शाखाएं • 23-25, जाओबा वाडी. ठाकुरद्वार, बंबई-400002 फोन: 310941 •2272, मिशन रोड (शामाराव कम्पाउंड), बंगलोर-560027 फोन: 234025 खेमका हाउस, वूमेन्स हॉस्पिटल के सामने, अशोक राजपथ, पटना-800004 कोन: 653644 चेतावनी भारतीय कॉपीराइट एक्ट के अंतर्गत इस पुस्तक के तथा इसमें समाहित सारी सामग्री (रेखा व छाया चित्रों सहित) के सर्वाधिकार फैमिली धुक्स प्राइवेट लिमिटेड के पाम सुरक्षित हैं। इसलिए कोई भी सज्जन इस पुस्तक का नाम, टाइटल डिजाइन, पाठ्य-सामग्री व चित्र आदि आशिक या पूर्ण रूप से तोड़-मरोडकर या अनुवाद करके किसी भी अन्य भाषा में छापने व प्रकाशित करने का साहस न करें। अन्यथा कानूनी तौर पर वे हजे-खर्चे व हानि के जिम्मेदार होंगे। मूल्य: . लाइब्रेरी संस्करण Rs.24/- PUSTAK MAHAL तीसरा संस्करण: मई, 1993 लेजर टाइप सैटिग: एस.बी पी इलैक्ट्रॉनिक्स पब्लिशिंग, 4/45, रूप नगर, दिल्ली-110007 मुद्रक: रूपक प्रिंटर्स, नवीन शाहदरा,दिल्ली-110032 पुस्तक के विषय में कुछ वर्ष पूर्व ज्ञान एव चिंतन के धरातल पर एक औसत पाठक को अंतर्राष्ट्रीय घटनाचक्र से जोडकर उसकी चेतना को प्रबुद्ध करते हुए, उसके ज्ञानक्षेत्र का चहुमुखी विस्तार करने के उद्देश्य से प्रारभ की गयी विश्व-प्रसिद्ध शृंखला अव निर्विवाद रूप से स्थापित हो चुकी है। लाखो-लास पाठको द्वारा इसे अब तक पढ़ा एव मराहा जा चुका है और उनमें जैसे इस शृखला की प्रत्येक पुस्तक को संग्रह करने की होड-सी लग चुकी है। दरअसल इस शृखला मे प्रकाशित प्रत्येक पुस्तक अपने क्षेत्र से सबंधित सभी उल्लेखनीय पक्षो को उजागर करने वाला एक सग्रहणीय सचित्र मिनि एनसाइक्लोपीडिया है। प्रस्तुत पुस्तक विश्व-प्रसिद्ध ड्रग-माफिया इस शृखला की 41वी पुस्तक है। आज अधिकाश देशो की सरकारे शक्तिशाली मादक द्रव्यो के तस्करो के हाथ की कठपुतलिया मात्र बनकर रह गयी हैं, क्योकि इन गिरोहो के खूनी पंजे पूरे विश्व के नक्शे की राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक लकीरो मे गहरे धंसे हुए हैं। पूरी युवा-पीढी आज अफीम, कोकीन, चरस, मारिजुआना, गांजा, ब्राउन शुगर, क्रैक, मार्फीन आदि मादक-द्रव्यो की दलदल मे धंसी हुई, उससे बाहर निकलने के लिए छटपटा रही है। मादक-द्रव्यो का उत्पादन और उनकी तस्करी, आज धनोपार्जन का अव्वल नवर का धंधा बन चुका है। कई देशो के न केवल राष्ट्राध्यक्ष अपितु पूरी की पूरी सरकारे मौत के इस धंधे मे आकठ डूबी हुई हैं। खोजी पत्रकारिता की शैली में लिखी इस पुस्तक मे मैक्सिको, पेरू, पनामा, पाकिस्तान, भारत, अमरीका, बर्मा, चीन आदि देशो मे सक्रिय कोसा नोस्त्रा, पियोवरा, यपस्टर्स आदि विभिन्न नामधारी लगभग सभी मादक-द्रव्य माफियाओ की गतिविधियों का भडाफोड करने की चेष्टा की गयी है। इसके अतिरिक्त पुस्तक मे उस गुप्त कार्य-प्रणाली पर भी प्रकाश डालने की चेष्टा की गयी है, जिमके माध्यम से तस्करी से प्राप्त अरबों रुपये के काले धन को धुलाई करके सफेद बनाया जाता है। पुस्तक के विषय में आपकी प्रतिक्रिया जानकर हमे प्रसन्नता होगी-कृपया निस्सकोच अपने विचार लिखकर भेजे। 12352 -संपादक - नाम .
माफिया-क्रम
1. मादक-द्रव्य और मादक-द्रव्य-माफिया
2. कोसा नोस्त्रा
3. पियोवराः दा ऑक्टोपस
4. यपस्टर्स: गैंबिनो सरदार जॉन गोट्टी
5. मैक्सिको माफिया
6. कोलंबिया: मैडेलिन माफिया
7. मादक-द्रव्यों के अमरीकी तस्कर
8. पनामा का मादक द्रव्य माफिया
9
26
32
40
45
52
68
80
9. सुनहरा त्रिभुज और मादक-द्रव्य तस्कर 89
10. पाकिस्तान में मादक-द्रव्य माफिया 94
11. भारत में मादक-द्रव्य तस्कर
1061
112. पेरू का मादक-गव्य छापामार माफिया 112
113. सवाल मादक-द्रव्यों को वैद्य करने का? 116
14. मादक-द्रव्यों पर प्रतिबंध न रहें? 122
15. धुलाई गंदे मादक-द्रव्य डॉलर की 129
बालो लागी
No text on this page.
मादक-द्रव्य और मादक-द्रव्य-माफिया दक-द्रव्यों का व्यसन जड़ी-बूटियों और उनसे तैयार किये गये पदार्थो के , उन पदार्थों का दास हो जाता है। मादक-द्रव्यों का सेवन मानव जाति के लिए कोई नयी बात नहीं है, तथापि आज मादक 6-द्रव्यो का प्रयोग जिस अविवेकपूर्ण रीति से तथा जितने बड़े पैमाने पर हो रहा है, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। यह भयंकर स्थिति उन आध्यात्मिक और धार्मिक मूल्य-व्यवस्थाओ के खंडित होने का दुष्परिणाम है, जो व्यक्ति के रूप मे मनुष्य के विचारों और कर्म में संगति स्थापित करते तथा उसे उसके परिवार और समाज के साथ जोड़े रखते थे। मादक-द्रव्यो के व्यसन ने मनुष्य को मानसिक शांति और संतुलन प्रदान करने के बजाय उसे विनाश के गर्त में धकेल दिया है। यह विनाश शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और आध्यात्मिक अर्थात् सभी स्तरों पर मनुष्य की शक्ति, बुद्धि और चेतना का संपूर्ण विनाश है। मादक-द्रव्यों ने मानव-जाति को विनाश की जिस दिशा मे धकेल दिया है, उसकी भीषणता को पूरी तरह समझने के लिए प्रमुख मादक-द्रव्यों, उनके निर्माण की प्रक्रियाओ, उनके उत्पादन-क्षेत्रों, उनके व्यापार में लगे हुए मादक-द्रव्य तस्करों (माफिया), माफिया और पुलिस, माफिया और राजनीतिज्ञ तथा माफिया और आतंककारी गठबंधन, मानव जाति को मादक-द्रव्यों से पहुंची हानियों तथा मादक-द्रव्यों के व्यापार से उत्पन्न आर्थिक और वित्तीय समस्याओं का अध्ययन करना होगा। भांग, गांजा और चरस मादक-द्रव्यो का व्यापार भांग और गांजा से शुरू हुआ। भाग का पौधा अर्थात् कैनेविस अथवा हैम्प मंभवतः मध्य-एशिया मूल का पौधा है, विशेषतः सोवियत संघ और चीन के तुर्किस्तान क्षेत्र का। वहां से यह पौधा ममार के अन्य भागो में फैल गया, जिनमे भारत के पहाड़ी क्षेत्र भी शामिल हैं। हिमालय ने शुरू होकर यह पौधा दक्षिण में पश्चिमी घाट तक फैल गया। भारत में इस पौधे के उत्पादनों का प्रयोग हजागें वर्षो मेक्यिा जाता रहा है। इसकी पत्तियों को भांग (पश्चिम में मेरी जेन अथवा मारिजुआना) कहा जाता है। 9 भारत में भाग का प्रयोग मानसिक गिरावट को समाप्त करने और खुलकर भूख लगाने के लिए किया जाता रहा है तथा मनुष्यो पर उसके मनोवैज्ञानिक तथा शारीरिक प्रभावो, जैसे-उन्मेष, उत्साह और आत्मगौरव की भावना के कारण उसको आदर मिलता रहा है। भाग के पौधे के उस ऊपरी भाग को सुखाकर धूमपान के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसमे फूल खिलते हैं। प्रत्येक स्वस्थ पौधे से लगभग एक किलोग्राम सूखा गांजा प्राप्त होता है, जिसका मूल्य एक हजार रुपये से कम नहीं होता। इसका अर्थ यह है कि इसकी खेती से प्रति हेक्टेयर 25 लाख रूपये की आमदनी होती है। नीला गांजा सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह पौधे के नीले और हरे फलो से तैयार किया जाता है। गाजे के धूम्रपान पर एक बार में दो रुपये खर्च होते है। पश्चिम में गांजे को भी मारिजुआना ही कहा जाता है। भांग के पौधे से प्राप्त होने वाला तीसरा तथा सबसे अधिक तेजमादक-द्रव्य. चरस है, जिसे पश्चिम मे हशीश कहा जाता है। भांग की हरी पत्तियो को मसलने से जो राल जैसा पदार्थ प्राप्त होता है, वही चरस है। हेरोइन हेरोइन अफीम से तैयार की जाती है। अफीम के प्रशोधन की चार अवस्थाएं हैं-मार्फीन, मार्फीन-हाइड्रोक्लोराइड, ब्राउन शुगर और हेरोइन। इस प्रकार हेरोइन अफीम की चौथी अथवा शुद्धतम अवस्था है। अफीम के सत पर एसिटिक और हाइड्राइड की रासायनिक प्रक्रिया द्वारा हेरोइन तैयार की जाती है। 100 किलोग्राम अफीम से 10 किलोग्राम हेरोइन तैयार होती है। गहरे नशे के लिए हेरोइन का इजेक्शन धमनियो में लगाया जाता है। हेरोइन के व्यसनी प्रायः स्वयं ही इंजेक्शन लगा लेते है। इस कार्य के लिए हलकी हेरोइन की आवश्यकता होती है। सुनहरे त्रिभुज (वर्मा, थाईदेश, लाओस) की हेरोइन शुद्ध तथा सघन होती है, अतः न्यूयार्क, बोस्टन तथा अन्य शहरो में धूम्रपान के लिए उसे ही इस्तेमाल किया जाता है। सुनहरे त्रिभुज की हेरोइन के भाव महगे हैं। उसकी 0.05 ग्राम की एक थैली दम डॉलर मे मिलती है। यह चायना व्हाइट के नाम से प्रसिद्ध है। प्रायः ऐसा मान लिया गया था कि कोकीन और क्रैक मिलकर हेरोइन को बाजार में से खदेड़ देगे। उनके कारण शुरू में हेरोइन की खपत मे कमी आयी भी, लेकिन क्रैक के प्रयोग में एक ऐसी अवस्था आ जाती है, जब उससे नशा चढना बंद हो जाता है। यही कारण है कि अमरीका मे कोकीन या क्रैक के व्यसनी फिर से हेरोइन का प्रयोग करने लगे है। हेरोइन को आमतौर पर स्मैक भी कहा जाता है। भारत में इसका प्रयोग सन् 1980 के आसपास शुरू हुआ। अब तो भारत भी पूरी तरह से स्मैक का शिकार हो चुका है। ब्राउन शुगर ब्राउन शुगर अथवा डाई-एसिटाइन मार्फीन, अफीम की तीमरी अवस्था है। अफीम में निकाली गयी माफीन कोएमिटाइलीकरण की प्रक्रिया द्वारा ब्राउन शुगर 10 - - मे बदल लिया जाता है। भारत में आधा ग्राम ब्राउन शुगर का दाम प्रायः30 रुपये है। व्यापारी प्रायः इसे ग्लुकोज़, चावल के पाउडर तथा कभी-कभी तो सीमेंट मिलाकर भी बेचते हैं। प्रायः ब्राउन शुगर का एक बार का धुम्रपान 7 या 8 घंटे के लिए नशा बनाये रखता है। ब्राउन शुगर का नशा बहुत तेजी से व्यसन का रूप ग्रहण कर लेता है, अर्थात् दो बार के प्रयोग मे ही और जब व्यसनी को ब्राउन शुगर नहीं मिल पाती तो उसके बिना उसे घोर पीड़ा होती है-शरीर में भयंकर दर्द, घबराहट, पसीना, पेडू में असह्य वेदना और मस्तिष्क की संपूर्ण निष्क्रियता। ब्राउन शुगर आमतौर पर धूम्रपान के काम आती है। ब्राउन शुगर का आधा ग्राम पाउडर एल्युमिनियम की पन्नी पर डाल दिया जाता है तथा उसे दियासलाई की सींक जलाकर जब नीचे से गर्म किया जाता है तो उसमें से धुआं उठता है, जिसे एल्युमिनियम की पन्नी की पोली नली द्वारा पिया जाता है। कोकीन और क्रैक सन् 1880 में पहली बार लातीनी अमरीका की एंडीज़ पर्वत श्रृंखला के जंगली पौधे कोका की लुगदी से कोकीन तैयार की गयी थी तथा आधुनिक चिकित्सा-विज्ञान के क्षेत्र में उसे एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि माना गया था। प्रारंभ में उसका उपयोग आंख की शल्यक्रिया के लिए किया गया था, बाद में नाक और गले की शल्यक्रिया के लिए भी उसका प्रयोग किया जाने लगा। कोकीन मे यह गुण है कि वह तंतुओ को सुन्न कर देता है तथा कोशिकाओं को सिकोड़ देता है, जिसके फलस्वरूप रक्तस्राव अधिक नहीं हो पाता। कोका से शुद्ध कोकीन निकालने वाले जर्मन औषधि-निर्माताओं को स्वप्न में भी कल्पनान थी कि उनके द्वारा की गयी इस खोज के परिणामस्वरूप किसी दिन अवैध मादक-द्रव्य-व्यापार का साम्राज्य विश्व भर मे तथा विशेषतः समूचे अमरीका महाद्वीप पर फैल जायेगा, जो बीसवीं शताब्दी के अंत मे दिन-प्रतिदिन जटिलतर और अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं को जन्म देगा। कोकीन ने पश्चिमी जगत में गांजे, चरस और हेरोइन का स्थान ले लिया तथा वह सन् 1990 के दशक का सबसे अधिक मुनाफा देने वाला बडे-पैमाने का उत्पाद बन गया। भाग, गांजा, चरस और अफीम तथा हेरोइन का प्रयोग विश्व के अनेक भागों मे बहुत पुराने समय से होता आया है, इसके विपरीत कोकीन मादक द्रव्य जगत में अपेक्षाकृत नया है। सन् 1987 में संसार भर में कोकीन की अपेक्षा भांग का उत्पादन 33 गुना और अफीम का चार गुना था। कोकीन के व्यापक उपयोग के पीछे अनेक कारण रहे हैं-उत्पादन की सुगमता, कोका-लुगदी को कोकीन में रूपांतरित करते ही उसके मूल्य में अनंतगुना वृद्धि तथा कोचीन के उत्पादन क्षेत्र अथांत् एंडीज़ पर्वत शृंखला वाले देशों-मुख्यतः कोलविया, पेरू और बोलीविया से संयुक्त राज्य अमरीका के बाजारों की समीपता। कोकीन के व्यापार में कल्पनातीत वृद्धि का एक कारण यह भी है कि यह गांजे और चरस की अपेक्षा कम जगह घेरती है। अतः इसका परिवहन अपेक्षाकृत सुगमतर होता है।
कोकीन के उत्पादन की प्रक्रिया कोका की पत्तियों को पानी में गलाकर उनकी सुगदी तैयार करने से शुरू होती है। मादक द्रव्यों के अमरीकी व्यसनियों में कोकीन इस गलत धारणावश प्रचलित हुई कि यह स्वास्थ्य की दृष्टि से हेरोइन की अपेक्षा कम हानिकारक होती है। कोकीन के प्रयोग से मादक-द्रयों के व्यसन की समस्या और हो गयी है। कोकीन उत्पादन की प्रक्रिया कोका पत्तियो को पानी में गलाकर उनकी लुगदी तैयार करने से शुरू होती है। प्रयोगशालाओं में इस लुगदी पर रासायनिक प्रक्रियाए की जाती हैं। इसके लिए प्रमुखतः ईथाइल ईथर और पोटेशियम परमेगनेट का इस्तेमाल होता है। कोकीन लुगदी को सफेद हाइड्रोक्लोराइड पाउडर में रूपांतरित करने की अतिम प्रक्रिया में ईथाइल इंथरका प्रयोग अनिवार्य होता है। कोकीन में से एक सस्ता और अत्यंत उग्र मादक द्रव्य-कनिकाला जाता है। बैक अपने आप में एक अनूठा और घातक मादक द्रव्य है। फ्लोरिडा के वेड परगने की पुलिम की अपराध (हत्या) शाखाका कमांडरवेन मैक्कार्थी सन् 1984 में संयुक्त राज्य अमरीका पर कैक के प्रयम आक्रमण के समय से ही बैक और उसके पातक प्रभावों के विरुद्ध संघर्ष कर रहा है। वह कहता है, "कि सबमेसराव मादक-द्रव्य है। बैक अथवा कोकीन का इस्तेमाल करने वालों में में एक भी व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि वह 12 मनोरंजन के लिए ऐसा कर रहा है। उन सभी को उसकी बुरी लत पड़ जाती है और वे उसके दास बन जाते हैं। युवा-वर्ग के लोग तो उसे प्राप्त करने के लिए हत्या करने तक को उद्यत रहते हैं।" क्रैक के टुकड़े रॉक्स कहलाते हैं। उसके एक टुकड़े का दाम केवल 5 डॉलर होता है, अतः उसके सस्ता होने का भ्रम होता है, परंतु उसका नशा बहुत थोड़े समय रहता है। अतः उसका सेवन थोड़े-थोड़े अंतराल पर करना पड़ता है और उससे व्यसनी की मनःस्थिति में उग्र परिवर्तन आते हैं। क्रैक ने मादक-द्रव्य-परिप्रेक्ष्य को वदल डाला है। डैट्रॉयट पुलिस का कमांडर वारेन हैरिस कहता है, "हेरोइन का सेवन करने वाले लोगों में हिंसापूर्ण अपराध की यह प्रवृत्ति नहीं होती थी। क्रैक तो तुरंत आवेश और उत्तेजना भर देती है। उसका प्रयोग कर लेने पर व्यसनी अधिक सक्रिय, आक्रामक और हिंसक हो उठता है।' आइस क्रैक की अपेक्षा आइस और भी अधिक घातक मादक-द्रव्य है। आइस कोई नया मादक-द्रव्य नहीं है, वरन् वह एक पुराने मादक-द्रव्य क्रिस्टल मैथ अथवा क्रिस्टलाइज्ड मेथाम्फेटामीन का ऐसा रूप है, जिसे धूम्रपान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। आइस के निर्माण में बुनियादी तत्त्व एफिड्रीन, लाल फॉसफोरस और हाइड्रियोडिक एसिड है। 5 हजार डॉलर से भी कम लागत में 5 किलोग्राम क्रिस्टल मैथ का उत्पादन हो जाता है। वह एम्फेटामीन की सबसे अधिक उग्र किस्म है, जो थोक बाजार में 1,50,000 डॉलर प्रति 5 किलोग्राम के हिरब से बिकता है तथा खुदरा बाजार मे उसका दाम डेढ़ करोड़ डॉलर तक मिल " जाता है। क्रिस्टल मैथ सन् 1960 और सन् 1970 के दशकों में प्रचलन में आया तथा 'स्पीड' के नाम से मशहूर हुआ। उस समय वह गोली अथवा इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। धूम्रपान के लिए बने विशेष किस्म के क्रिस्टल मैथ को आइस कहा गया। आइस की बिक्री पहले-पहल सन् 1989 मे हवाई द्वीप परशुरू की गयी। आइस के एक सैलोफेन-पैकेट का दाम 50 डॉलर होता है, जिसमे लगभग एक ग्राम का दसवां अंश आइस होता है, जिसका एक अथवा दो बार सेवन किया जा सकता है। आइस का धूम्रपान आठ घंटे में एक बार करना आवश्यक होता है, जबकि क्रैक की अवधि केवल 30 मिनट है। क्रैक की तरह आइस भी दो-तीन बार सेवन करने पर अपना व्यसनी बना लेता है तथा उसके समान ही मानसिक गिरावट. दूसरों के प्रति शंकाल तथा मांसपेशियों में सिकुड़न पैदा करता है। सन् 1960 के दशक में 'स्पीड' का निर्माण 'हेल्स एंजिल्स' नामक मोटर-साइकिल सवार गिरोह ने किया था। सन् 1988 में अमरीकी पुलिस ने इसकी प्रयोगशालाएं एक समुद्री विलासपोत पर, एक मोटर-हाउस मे एक पिकअप ट्रक के पिछवाड़े में तथा पाम स्प्रिग्स के एक बंगले के अहाते में पकडी थीं। 13 - हवाई में आइस सबसे प्रमुख मादक-द्रव्य बन गया है, वहां इसे तस्करी द्वारा दक्षिण कोरिया और फिलिपीस से लाया जाता है। संयुक्त राज्य अमरीका में इसका उत्पादन मुख्यतः कैलिफोर्निया, ओरेगन और टैक्सास राज्यो में होता है। मादक-द्रव्यों का उत्पादन मादक-द्रव्यों के उत्पादन मे दो प्रमुख तत्त्व हैं-मूल फसल और रासायनिक पदार्थ। गांजे और चरस का उत्पादन भांग के पौधे से होता है; अफीम, मार्फीन, ब्राउन शुगर और हेरोइन का पोस्त के पौधे से; और कोकीन तथा क्रैक का कोका से। जहां तक रासायनिक पदार्थ का प्रश्न है, उनमे से पोटाशियम परमेगनेट का उत्पादन विशेषतः चीन बड़े पैमाने पर करता है। ईथाइल ईथर का उत्पादन प्रमुखतः ब्राजील में होता है तथ अन्य रसायनों का संयुक्त राज्य अमरीका में। मादक-द्रव्यों में आइस अथवा क्रिस्टल मैथ शुद्धतः रासायनिक उत्पाद हैं। आइस जिन रासायनिकों से बनता है, वे पूर्णतया अमरीका में ही तैयार किये जाते हैं। भाग की खेती मुख्यतः मैक्सिको, कोलंबिया और जमैका में होती है। कुछ मात्रा में इसका उत्पादन भारत और नेपाल में भी होता है। सन् 1989 में मैक्सिको संयुक्त राज्य अमरीका को 4,750 टन, कोलंबिया ने 2,700 टन और जमैका ने 400 टन गांजा तस्करी से भेजा था। भारत में श्रेष्ठतम गांजा केरलवर्ती पश्चिमी घाट मे-विशेषतः प्रदेश के इडुक्की क्षेत्र में उगाया जाता है। पोस्त की खेती मुख्यतः सुनहरे त्रिभुज-लाओस, थाईदेश और बर्मा में तथा सुनहरे अर्द्धचंद्राकार-ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में होती है। सन् 1989 में बर्मा ने अंतर्राष्ट्रीय मादक-द्रव्य-बाजार को अफीम की आपूर्ति सबसे अधिक अर्थात् 1,300 टन की मात्रा में की। अफगानिस्तान ने 740 टन और ईरान ने 300 टन और लाओस ने 250 टन अफीम की तस्करी से निर्यात किया। पाकिस्तान और थाईदेश अफीम के अपने उत्पादन का अधिकांश स्वयं ही खपा लेते हैं। पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान से अपने यहां आने वाली अफीम को विदेशों में भेजने के लिए भारत के पंजाब और कश्मीर क्षेत्रों को मार्ग के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। भारत की भूमि-पर पाकिस्तान से आने वाली अफीम के भारी लदान पकडे जा चुके हैं। थाईलैंड मुख्यतः हांगकांग के रास्ते निर्यात करता है। उसकी अफीम फिलिपींस और मलेशिया मे ही खप जाती है। कोका विश्व भर में एंडीज पर्वत शृंखला वाले तीन देशों-पेरू, बोलीविया और कोलविया में ही पैदा होता है। सन् 1985 के दौरान पेरू में 1.10,000 टन, बोलीविया मे 70,000 टन और कोलंबिया में 20,000 टन कोका-पत्ती का उत्पादन हुआ। इस क्षेत्र की प्रायः समूची कोका-पत्ती-2,00,000 टन का कोकीन और क्रैक के रूप में परिशोधन कोलंबिया के मादक-द्रव्य व्यापारिक संस्थान करते हैं। ये संस्थान संसार के सबसे अधिक खतरनाक मादक-द्रव्य तस्कर (माफिया) बन गये हैं। - . C मादक-द्रव्यों से संबंधित समस्याएं मादक-द्रव्यों का व्यापार इतनी तेजी से फैला है कि शासन-व्यवस्थाएं उसका सामना करने में बुरी तरह विफल रही हैं। मादक-द्रव्य व्यापार राष्ट्रों की प्रतिरक्षा के लिए संकट उत्पन्न करता है, उनकी न्याय व्यवस्थाओं को खोखला और भ्रष्ट कर देता है, नशाखोरी, स्वास्थ्य और अपराध की गभीर समस्याओं को जन्म देता है तथा मादक-द्रव्य उत्पादक देशों, मादक-द्रव्य उपभोक्ता देशो और मादक-द्रव्यों की तस्करी मे मार्ग के रूप में इस्तेमाल होने वाले भारत तथा क्यूवा सरीखे देशों के पारस्परिक संबंधों मे जटिलताएं पैदा कर देता है। मादक-द्रव्यों के सेवन तथा व्यापार के कारण राष्ट्रीय बजट प्रावधानों पर भार बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए सन् 1989 में अमरीकी सरकार ने कोकीन के उत्पादक देशों में से प्रत्येक को मादक-द्रव्यों के विरुद्ध युद्ध छेड़ने तथा कोकीन का उत्पादन रोकने के कारण उनकी अर्थव्यवस्था को लगने वाले घाटे की पूर्ति के लिए एक अरब डॉलर का अनुदान दिया। संयुक्त राज्य अमरीका ने सन् 1990 के अपने बजट में समस्त मादक-द्रव्य-निरोधक कार्यक्रमों पर होने वाले खर्च के लिए 10 अरब 60 करोड़ डॉलर की रकम का प्रावधान किया है। इतनी राशि मे संसार भर के भूखे, बेघर और नंगे लोगों की भूख तो मिटायी ही जा सकती है, उनके लिए वस्त्र और मकान की व्यवस्था भी की जा सकती है। अमरीकी सरकार इस राशि के अतिरिक्त मादक-द्रव्यों से संबंधित अपराधों से निपटने पर प्रतिवर्ष 25 अरब डॉलर तथा नशाखोरों के इलाज पर 2 अरब डॉलर वार्षिक खर्च करती है। इतना ही नहीं मादक-द्रव्यों के सेवन तथा उत्पादकता में हास के कारण उसे प्रतिवर्ष 33 अरब डॉलर का घाटा भी उठाना पड़ता है। मादक-द्रव्यों के व्यसनी मादक-द्रव्यो का सेवन जीवन के प्रायः सभी क्षेत्रो मे व्यक्तिगत, घरेल सामाजिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जैसे सभी स्तरोपर गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर रहा है। मादक-द्रव्यों के सेवन ने सबसे अधिक बुरा प्रभाव सयुक्त राज्य अमरीका पर डाला है। सन् 1987 में किये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार 18 मेसे। हाईस्कूल विद्यार्थी ने स्वीकार किया कि उसने मादक-द्रव्यों का एक बार सेवन किया, 7 में से 1 अर्थात् 14 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने अन्य रूपो में कोकीन का सेवन किया है। युवा वयस्कों में से 6.7 प्रतिशत ने क्रैक का तथा 40 प्रतिशत ने कोकीन का सेवन एक बार किया। जनवरी, 1990 मे किये गये एक अन्य सर्वेक्षण के अनुसार संयुक्त राज्य अमरीका में 1 करोड़ 45 लाख लोग कोकीन और क्रैक के व्यसनी बन चुके है तथा वे लोग इन अवैध मादक-द्रव्यो पर प्रतिवर्ष । खरब डॉलर खर्च करते हैं। इसके अतिरिक्त उस देश में लाखों लोग ऐसे हैं, जो समय-समय पर मादक-द्रव्यों का सेवन करते रहते हैं। संयुक्त राज्य अमरीका मे हेरोइन के व्यसनी लोगों की संख्या दस लाख से ऊपर पहुच गयी है। 15 आस्ट्रेलिया जैसे छोटे महाद्वीपीय देश में मादक द्रव्यों के 50,000 व्यसनी हैं और पाकिस्तान की 10 करोड़ 90 लाख आबादी में हेरोइन के 7 लाख पंजीकृत व्यसनी हैं। इन आंकड़ों से इस समस्या की गंभीरता का बोध होता है। औरों की क्या कहें, भारत सरीखा गरीब देश भी मादक-द्रव्यों की चपेट में आ गया है। यह कहना बहुत कठिन है कि भारत में कितने लोग इनके व्यसनी बन चुके हैं, तथापि सरकारी आकड़ो के अनुसार अकेले दिल्ली राज्य मे इनकी संख्या 3 लाख है, जिनमे 10,000 किशोर भी हैं, जिन्हे स्मैक (हेरोइन) की लत पड़ गयी है। विशेषज्ञों के अनुसार सन् 1980 के दशक में देशभर में दस लाख लोगो को मादक-द्रव्यो की लत लग चुकी थी। अकेले इम्फाल शहर में 10,000 पंजीकृत व्यसनी हैं, मिजोरम मे उनकी संख्या 5,000 और नागालैंड मे 3,000 है। अकेले कोहिमा शहर मे 320 लोग मादक-द्रव्यो के व्यसनी बन चुके हैं। त्रासदी मादक-द्रव्यो की कुटेव से शरीर और मन जर्जर हो जाते हैं तथा नैतिक पतन, हताशा और दारिद्य का द्वार खुल जाता है। व्यसनी लोग आजीविका कमाने योग्य नही रह पाते। उनका दिन मादक-द्रव्यों की प्रातःकालीन खुराक से शुरू होता है, जिससे कि उनके मन में चिंता तथा शरीर में गिरावट उत्पन्न न होने पाये और वे दिन शुरू करने के लिए 'समर्थ' बन सकें। इसके बाद वे तुरंत अगली खुराक की तलाश निकल पड़ते हैं। यदि अगली खुराक मे देर हो जाये तो वे अत्यंत शकाल हो जाते हैं, आसपास के लोगो से आंखे चुराने लगते हैं, उनके शरीर में कपन पैदा हो जाता है तथा वे आवेशपूर्वक अपने-आप से ही बुदबुदाने लगते हैं, उनकी आंखे फटी-फटी सी हो जाती है और जबड़ों में तनाव आ जाता है। यदि किसी व्यसनी के मादक-द्रव्यों का दैनिक खर्च 20 डॉलर है तो उसे कम मे कम 100 डॉलर के सामान की चोरी करनी होगी क्योंकि उस सामान को बेचने पर उसे माल के दाम का पांचवां भाग ही प्राप्त होगा। यदि व्यसनी महिला हो तो वह प्राय: निरपवाद रूप से वेश्यावृत्ति तथा मादक-द्रव्यों की बिक्री की दिशा मे मुडती है, जिससे कि उसे अपने लिए पर्याप्त मादक-द्रव्य मिल सकें। मादक-द्रव्यो के व्यसनी लोग अपने दिन जेलो, अस्पतालों और गंदी गलियो में चिताते हैं। वे न तो अपने परिवारों के बीच रह पाते है, न उनके पास भाड़े के मकान के लिए पर्याप्त धन ही होता है। जिन व्यसनी लोगों के पास अपने घर होते हैं, वे भी मादक-द्रव्य खरीदने के लिए घर बेचकर शीघ्र ही बेघर हो जाते हैं। मादक-द्रव्यो के व्यसनी के जीवन मे कोई भी मुख शेष नही रहता और उसके जीवन की अवधि भी धमनियों में जाने वाले मादक-द्रव्य की प्रत्येक खुराक के माथ घटती जाती है। हेरोइन अपने शिकार को आलसी पशु जैसा बना डालती है तथा कोकीन और फ्रेंक हिमक पशुजैमा। मभी व्यमनी (नशंडी) घोर असुरक्षा से पीडित रहते हैं 16 तथा अपने जीवन के प्रति समस्त प्रकार के उत्तरदायित्वों से भाग खड़े होते हैं। वे तब तक तनावमुक्त नहीं हो पाते, जब तक कि उनकी नाडियों मे मादक-द्रव्य प्रवेश न कर जाये और तब भी उनके मन में यह चिंता बनी रहती है कि कुछ घंटों के भीतर ही उन्हें कुछ और धन जुटाकर उससे नशे की अगली खुराक खरीदनी होगी। सोने से पहले उन्हे सोते समय की खुराक के साथ ही अगले दिन जागने के समय की खुराक का भी प्रबंध करना होता है। कृत्रिम आनंद और अवास्तविक स्वर्ग प्राप्त करने की मिथ्या आशा में वे मादक-द्रव्यों की शरण लेते हैं, लेकिन उनकी यह कामना और नशे द्वारा उसकी पूर्ति की आशा उनका जीवन नष्ट कर डालती है और अस्थायी उन्मेष के उतरने पर उन्हे इस त्रासदायी यथार्थ का सामना करना पड़ता है कि उनके हाथो से उनका परिवार, घर, मित्र और रोजगार-सब छूट चुके है, कपडे गदे हो गये है, शरीर सड़ रहा है तथा रोगी हो चुका है, जीवात्मा का तो कहना ही क्या, वह तो अपने ही प्रति घृणा की कलुषित कीचड़ मे धंस जाती है। वे शर्म से गड़ जाते हैं, लेकिन मादक-द्रव्य उन्हें शर्म से उबार लेते हैं। इस प्रकार वे अगली खुराक और एक खुराक के बाद दूसरी खुराक की ओर तब तक चलते जाते हैं, जब तक कि मौत उन्हें उनकी जवानी में ही लील नहीं जाती। मादक-द्रव्य और बच्चे गर्भावस्था में क्रैक का सेवन करने वाली महिलाएं क्रैक-प्रभावित बच्चों को जन्म देती है। अमरीका मे प्रतिवर्ष मादक-द्रव्य की व्यसनी माताएं 3,75,000 शिशुओं को जन्म देती हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार मादक-द्रव्य-प्रभावित शिशुओ की सख्या सन् 1985 की अपेक्षा तीन गुना हो गयी है। गर्भवती महिलाएं मादक-द्रव्यों का सेवन करते समय शायद यह नहीं जानतीं कि कोकीन गर्भस्थ शिशु को पोषक तत्त्वों तथा ऑक्सीजन के प्रवाह से वचित देती है, जिसके कारण उसके अगो में विकृति आ जाती है और उसका विकास अवरुद्ध हो जाता है। संयुक्त राज्य अमरीका में नवजात शिने से 11 प्रतिशत मां की कोख में ही मादक-द्रव्यों के संपर्क में आ जाते है। क्रैक-बच्चो की पहली पीढ़ी स्कूल में भर्ती होने की आयु में पहुंच गयी है तथा शिक्षाविद् इन बच्चों के व्यवहार से हताश तथा विक्षुब्ध होते जा रहे हैं। इन बच्चों का मानसिक स्तर केवल सहज मानवीय प्रवृत्तियों तक सीमित है। उनके व्यवहार का अध्ययन करने पर पता चला कि वे खाते हैं और खाकर सो जाते हैं, फिर खाते हैं और फिर सो जाते हैं। उन्हें दूसरे बच्चों में तनिक दिलचस्पी नहीं होती। अतः वे उनसे बात करने में कठिनाई महसूस करते हैं। ऐसे अनेक बच्चे समय से पहले ही जन्म ले लेते हैं। उनके मस्तिष्क में पानी भरने की सहज प्रवृत्ति होती है। उनके मस्तिष्क का विकास ठीक प्रकार नहीं हो पाता। वे गुर्दे के रोगों से पीड़ित रहते हैं और कभी-कभी उनका श्वास अचानक रुक जाता है अथवा उनके मस्तिष्क की शिराएं फट जाती हैं। 17 अमरीका में नवजात शिशुओं में से 11 प्रतिशत मां की कोख में ही मादक-द्रव्यों के संपर्क में आ जाते हैं। मारक-अप्प गर्भस्प शिशुओं को पोषक तत्वों तथा ओपसीजन के प्रवाह से पंधित कर देती है, जिससे उनके अंगों में विकृति आ जाती है। जन्म के समय से ही उनका पालन-पोषण वहुत कठिन रहता है। वे अत्यधिक चिड़चिड़े अथवा आलसी होते हैं। उनमे मा का स्तनपान करने की समुचित क्षमता नहीं होती, जिस कारण उनको पर्याप्त खुराक नही मिल पाती। उनके सोने का भी कोई नियमित समय नही होता। उन्हें बोलना सीखने में लवा समय लग जाता है और दूसरों के माथ तालमेल बिठाना उनके लिए बहुत कठिन रहता है। उन्हे स्पर्श तनिक नहीं सुहाता। वे प्राय. एकदम भावनाशून्य होते हैं। उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं आता और वे कभी खुश नजर नहीं आते। उनमे किसी भी चीज के प्रति कोई उत्साह नहीं रहता। वे अपने प्रत्येक कार्य में अव्यवस्थित होते है। चिकित्सा-विज्ञानी इसका निश्चित कारण नहीं सोज पाये है। उन्हे यह शंका है कि मां द्वारा मादक-द्रव्यों के सेवन से इन बच्चो की नाड़ी व्यवस्था को धक्का पहुंचता है। सैकडो 'कैक-शिशुओ' के अध्ययन के आधार पर प्रख्यात चिकित्साशास्त्री डाक्टर जूडी हॉवर्ड कहते है, "ऐसा प्रतीत होता है कि इन बच्चो के मस्तिष्क का वह भाग एकदम गायव है, जो हम मानवों को चर्चा करने तथा सोचने-विचारने की क्षमता प्रदान करता है। मावक-द्रव्य-माफिया मादक-द्रव्यो के कारण जो समस्याए उत्पन्न हुई हैं, उनमे मबसे अधिक वीभत्स समस्या मादक द्रव्य-माफिया (तस्करो) का उदय है। यह माफिया एक स्वस्थ और कानूनों का पालन करने वाले समाज की युनियादी धारणा के विरुद्ध एक गंभीर चुनौती और खतरा है। मादक-द्रव्यो का उत्पादन, व्यापार और व्यसन महामारी की भांति संसार के प्रायः प्रत्येक देश में फैल गया है। " 1B मादक-द्रव्य-माफिया अपनी धनशक्ति के बल पर पलता है। मादक-द्रव्य व्यापार कल्पनातीत ढंग से भारी मुनाफे का धधा है। इस धंधे में माफिया अर्थात् तस्कर-गिरोह अरबों डॉलर कमाते हैं तथा इस अपार धनराशि के बलबूते पर राजनीतिज्ञों-विद्रोहियों को भी, प्रशासकों, न्यायाधीशो, मादक-द्रव्य-निरोधक- अभिकरणों (एजेंसियों) तथा उनके एजेंटो को आसानी से भ्रष्ट कर डालते हैं तथा अत्याधुनिक शस्त्रास्त्र, सचार प्रणालियां तथा यातायात-परिवहन के तीव्रतम साधन, जैसे-विमान, हैलीकॉप्टर, तेज मोटर-नौकाएं, ट्रक तथा कारें खरीद लेते हैं। जाहिर है कि मादक-द्रव्यों के ये तस्कर गिरोह असामाजिक, अनैतिक और सिद्धांतहीन होते हैं। वेन समाज के हित की चिंता करते हैं,नवे उस व्यथा से द्रवित ही होते हैं, जो संसार भर के करोड़ों मादक-द्रव्य-व्यसनी उनके (तस्करो) कारण भोग रहे हैं। उनके मन में जीवन के प्रति सम्मान का भाव किचित भी नहीं है। वे उन लोगों को सताने और मार डालने में तनिक नहीं हिचकते, जो उनके मार्ग मे बाधाएं खड़ी करते हैं। अपराध और हिंसा मादक-द्रव्यों के सेवन से अपराध और हिंसा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। ये अपराध और हिंसा चार प्रकार के हैं-1. मादक-द्रव्य-व्यसनी लोगों द्वारा किये जाने वाले दो प्रकार के अपराध-पहला, मादक-द्रव्यों की खरीद के लिए आवश्यक धन प्राप्ति करने के लिए किये गये चोरी के जैसे अपराध और दूसरा, मादक-द्रव्यो के नशे से उत्पन्न उत्तेजना के कारण होने वाली हिंसा, 2. मादक-द्रव्यों के बाजार पर अपना कब्जा बनाये रखने के लिए मादक-द्रव्यो के फुटकर विक्रेताओं द्वारा की जाने वाली हिंसा, 3. शक्तिशाली मादक-द्रव्य- माफिया द्वारा अपनी फसलो, प्रयोगशालाओं, गोदामों, कार्यालयों, हवाई पटरियों, परिवहन के साधनों और माल ढोने वालों तथा एजेंटों की सुरक्षा के लिए की जाने वाली आपराधिक हिंसा तथा 4. मादक-द्रव्य व्यापारिक संस्थानों द्वारा भादक-द्रव्यों के अवैध उत्पादन और व्यापार तथा राष्ट्रों की अर्थव्यवस्थाओं को चौपट करने वाली तथा विश्व-स्तर पर की जाने वाली काले धन की धुलाई। मादक-द्रव्यों के व्यापारियो ने अपने व्यापार मे उच्च स्तरोपर असंख्य लोगों का निहित स्वार्थ पैदा कर दिया है तथा विभिन्न स्तरो पर काम कर रहे सरकारी अधिकारियो को बड़े पैमाने पर भ्रष्ट कर डाला है। मादक-द्रव्य तस्करों ने बर्मा से लेकर पेरू और निकारागुआ तक आतंकवादियो के साथ अपवित्र गठबंधन भी स्थापित कर लिया है। मादक-द्रव्य तस्कर और कुछ नहीं केवल अपराधी गिरोह हैं। कोबिया के मादक-द्रव्य व्यापारिक संस्थान सबसे अधिक दुष्ट और हिंसक मादक-द्रव्य तस्कर हैं। सन् 1982 से सन् 1988 के बीच उन्होने अपने ही देश के 108 19 राजनीतिज्ञो, 157 न्यायाधीशो, 17 पत्रकारों 1,536 पुलिसकर्मियों, 3,491 मादक-द्रव्य निरोधक अधिकारियों, 408 सैनिकों, 118 छापामार आतंककारियों तथा प्रतिद्वंद्वी गुटों के सैकडों मादक-द्रव्य तस्करों की हत्या कर डाली। सरकारी आकलनों के अनुसार संयुक्त राज्य अमरीका में 70 प्रतिशत अपराध मादक-द्रव्यों से जुड़े हैं। सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयार्क के समाजशास्त्री बनार्ड कोहेन के अनुसार, "अब हत्याएं पहले की अपेक्षा कहीं अधिक जघन्य बनती जा रही हैं। अब हत्या कर देना ही काफी नहीं समझा जाता। शवकी दुर्दशा भी की जाती है। शत्रु दो गोलियों की मार मे ही मर जाता है, उसके बाद उसके शव को छ: अन्य गोलियों से छलनी कर दिया जाता है। उसका सिर काट दिया जाता है अथवा और कुछ।" हिंसा के बढ़ते हुए स्तर के कारण वंदूको अर्थात् शस्त्रास्त्र की तस्करी मे भी वृद्धि हुई है। मादक-द्रव्यों के तस्कर अरयो डालर कमाते है। इस राशि मे से वे शस्त्रास्त्र पर भारी राशियां खर्च कर सकते हैं। अब वे सस्ती बंदूकें इस्तेमाल नहीं करते वरन् खामोशी से चलने वाले आधुनिकतम शस्त्र, सैनिक असाल्ट बंदूकें, मशीनगन और पूरी तरह स्वचालित पिस्तौल खरीदते हैं। धन की मात्रा मादक-द्रव्यो के व्यापार के पीछे मूल प्रयोजन धन है। कोलंबिया के मादक-द्रव्य व्यापारिक संस्थान अकेले ही प्रतिवर्ष 5 अरब डॉलर का धंधा करते हैं। सन् 1988-89 के दौरान अमरीकी सरकार द्वारा जब्त की गयी संपत्ति से मादक-द्रव्य तस्करो की भारी आमदनी की एक झांकी प्राप्त होती है-125 मादक-द्रव्यो के तस्करों द्वारा प्रतिद्धिता के गरण एक-दूसरे महत्या कर रेना एक आम बात है। 20 .. जायदादः मूल्य 25 करोड़ डॉलर, 892 वित्तीय सस्थान: पूर्जी 3 करोड़ 30 लाख डॉलर, 400 से अधिक वाहनः मूल्य 2 करोड़ 70 लाख डॉलर, 550 आभूषणः मूल्य 2 करोड़ 30 लाख डालर, 100 वायुयानः मूल्य 1 करोड़ 40 लाख डॉलर तथा 123 जलपोत और नौकाएं: मूल्य 3 करोड़ डॉलर। यह विशाल धन-शक्ति.ही व्यापार को चालू रखती है। मादक-द्रव्यों का सेवन करने वाले अमरीकी व्यसनी मादक-द्रव्यों पर प्रतिवर्ष एक खरब डॉलर खर्च करते हैं। मादक-द्रव्य तस्कर और पुलिस इन तस्करों ने राजनीतिज्ञो और पुलिस को बडे पैमाने पर भ्रष्ट कर दिया है। पाकिस्तान के भूतपूर्व राष्ट्रपति जनरल जिया के बारे में कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के मादक-द्रव्य तस्करों के साथ उनका घनिष्ठ संबंध था तथा उन तस्करो को राष्ट्रपति का सरक्षण प्राप्त था। पनामा के सेना-प्रमुख जनरल नोरिएगा का तो अपना ही मादक-द्रव्य तस्कर-गिरोह था। कोलंबिया में पुलिस-संगठन के मुखिया जनरल जोस गुइल्लरमो मेडिना सांकेज़ को राष्ट्रपति के आदेश पर उस समय हटाया गया जब यह सदेह पुष्ट हो गया कि वह मैडेलिन मादक-द्रव्य तस्करो के एक प्रमुख सरदार पावलो एस्कोबार गाविरिया से नियमित वेतन प्राप्त करता है। यह सूचना मिलने पर जनरल सांकेज के पीछे एक सैनिक टोही-दल लगा दिया गया, जिसने इस आरोप के पक्ष मे पुष्ट प्रमाण प्राप्त कर लिए कि सांकेज और एस्कोबार तथा एक अन्य तस्कर-सरदार गोजालो रोड्रिगुएज गाचा के बीच घनिष्ठ सबध हैं। राष्ट्रपति ने साकेज़ के विरुद्ध अदालत कार्यवाही का मार्ग नहीं अपनाया क्योकि उससे 80,000 राष्ट्रीय पुलिसकर्मियों का मनोबल टूटने का डर था। इस उदाहरण से सिद्ध होता है कि ये तस्कर पुलिस के सर्वोच्च अधिकारियों को किस प्रकार भ्रष्ट कर देते है। मैक्सिको में भी सघीय सुरक्षा निदेशालय तथा संघीय पुलिस के अध्यक्षों को मैक्सिको के मादक-द्रव्य तस्करों ने इस सीमा तक भ्रष्ट कर दिया कि उन्होंने तस्करों से मिलकर अमरीका के एक मादक-द्रव्य निरोधक एजेंट का अपहरण किया एवं उसे मरवा डाला। तस्कर-आतंककारी गठबंधन अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र मे मादक-द्रव्य व्यापार के कारण होने वाली सबसे बड़ी दुर्घटना मादक-द्रव्य तस्करों और आतंककारियों का अपवित्र गठबधन है। इस गठबधन ने सार्वभौम रूप ग्रहण कर लिया है। अंतर्राष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल के महासचिव आर.ई. कैन्डेल के अनुसार, "यह अपवित्र गठबधन केवल भारतीय उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं है। यह युरोप और अमरीका महाद्वीप पर भी विद्यमान है। वास्तव में यह एक विश्व-व्यापी यथार्थ है।" इस गठबंधन के कारणों की व्याख्या करते हुए कैन्डेल कहते है, "मादक-द्रव्य व्यापार धन प्राप्त करने का आसान उपाय है, क्योकि इसमें बैंको मे डाका डालने की अपेक्षा कम . 21 खतरा निहित है। मादक-द्रव्यों की तस्करी आतककारियों की गतिविधियों के लिए धन जुटा रही है। वह उन्हे संसार भर में सर्वत्र शस्त्रास्त्र से लैस कर रही है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जिनसे यह सिद्ध होता है कि मादक-द्रव्यों के सेवन का बुरी तरह शिकार होने वाले राज्य भी इस प्रकार के अपवित्र गठबंधन को प्रोत्साहित करते हैं। अमरीकी सीनेट की वैदेशिक संबंध उपसमिति ने ऐसे प्रमाणों का संग्रह किया है, जिनसे पता चलता है कि कोलविया के मेडेलिन भादक-द्रव्य व्यापारिक संस्थान और अमरीकी केन्द्रीय गुप्तचर एजेसी-सी.आई.ए. के बीच सहयोग रहा है। इस संस्थान ने निकारागुआ में कौंट्रा विद्रोहियों की गतिविधि के लिए सी.आई ए. की ओर से वित्तीय प्रबंध किया, अपने विमानो में भरकर उन्हें शस्त्र पहुंचाये और उसके बाद वापसी में उन्ही विमानों में लादकर कोलंबिया से मादक-द्रव्य अमरीका पहुचाये। सी.आई.ए. के भूतपूर्व एजेट तथा सोवियत संघ में ऊंची पहुंच वाले शस्त्रास्त्र-सौदागर रिचर्ड जे वेन्नेके ने उपसमिति के सामने गवाही देते हुए बताया कि सन् 1985 के मध्य मे उसने एक ऐसे विमान में उड़ान भरी थी, जिस पर लदे हुए मादक-द्रव्य टैक्सास राज्य के अमरिल्लो नामक नगर में उतारे गये थे। इस घटना के बाद जब उसने तत्कालीन अमरीकी उप-राष्ट्रपति जॉर्ज बुश (वर्तमान राष्ट्रपति) के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोनाल्ड ग्रैग को इस बारे में बताने की कोशिश की तो ग्रैग ने उससे कहा, "तुम वही काम करो, जो तुम्हें सौंपा गया। अपने वरिष्ठ अधिकारियो के निर्णय पर आपत्ति मत उठाओं। संयुक्त राज्य अमरीका ने ईरान और कौंट्रा छापामारों के लिए शस्त्रों की खरीद और आपूर्ति का दायित्व ऑलिवर नॉर्थ को सौपा था। वह 12 जुलाई, 1985 SEAR 9639 9638 c.ru एक मापिया से छापे में राम राम पुलिस की रिर्ण 22 के दिन अपनी डायरी मे लिखता है,"धन जुटाने के लिए 1 करोड़ 40 लाख डॉलर मादक-द्रव्यों से प्राप्त हुए।" इसी प्रकार अमरीका के भूतपूर्व उप-विदेशमंत्री इलियट अब्राम्स और एक सी.आई.ए. अधिकारी अलान फीयर्स ने अमरीकी संसद के प्रतिनिधि सदन और सीनेट की गुप्तचर-एजेंसियों के सामने कहा था कि शस्त्रास्त्र के सुपर-बाजार के बारे में ऐसा माना जाता है कि उसमें मादक-द्रव्यों से प्राप्त धन लगा हुआ है। इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि पनामा के भूतपूर्व तानाशाह जनरल नोरिएगा ने कोलंबिया के मादक-द्रव्य व्यापारिक संस्थानो और वामपंथी छापामार आतंककारियों के साथ सांठ-गांठ कर रखी थी। सी.आई.ए. ने भी निकारागुआ के कौंट्रा छापामारो तक शस्त्र पहुंचाने के लिए उसे भाड़े पर ले रखा था। सन् 1988 में संसार के सबसे बडे मादक-द्रव्य तस्करों में से एक डेनिस हॉवर्ड मार्क्स को, जिसे मादक-द्रव्यों का मार्को पोलो कहा जाता है, अमरीकी मादक-द्रव्य निरोधक एजेंसी डी.ई.ए., आस्ट्रेलिया की संघीय पुलिस, ब्रिटेन के न्यू स्कॉटलैंड यार्ड तथा स्पेनी पुलिस के आपसी सहयोग से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी स्पेनी पुलिस द्वारा मजोरका द्वीप पर उसके बगले में की गयी। इससे पहले वह अमरीका जाने वाले रॉक बैक के वाद्ययंत्रों में गांजा भरकर उसकी तस्करी के आरोप पर सन् 1981 में पकड़ा गया था। इसके बाद उसके विरुद्ध स्कॉटलैड मे 15 टन गांजा पहुंचाने के आरोप पर चलाये गये मुकदमे में उसने ज्यूरी को यह विश्वास दिला दिया कि ब्रिटेन की अंतर्राष्ट्रीय गुप्तचर एजेसी एम.आई.-6 ने उसे आयरिश रिपब्लिकन आर्मी द्वारा संचालित एक मादक-द्रव्य गिरोह में प्रवेश करके उसकी गुप्तचरी के लिए भर्ती किया था और ज्यूरी ने उसे आरोपों से बरी कर दिया था। यह एक तथ्य है कि आयरलैड और स्कॉटलैंड के मादक-द्रव्य तस्करों के बीच घनिष्ठ संबंध हैं। मादक-द्रव्य तस्करों और आतंककारियो के बीच गठबंधन का एक अन्य उदाहरण पेरू में मिलता है। शाइनिग पाथ नामक माओपथियों ने पहले तो पेरू के कृषको को कोका की खेती करने तथा कोलबियाई मादक-द्रव्य तस्करों को पेरू में कोकीन की प्रयोगशालाएं चलाने और हवाई-पट्टियो की सुरक्षा के मामले में संरक्षण प्रदान किया, बाद मे वे स्वयं मादक-द्रव्यों का व्यापार करने लगे। तस्कर-आतंककारी गठबंधन समूचे सुनहरे-त्रिभुज क्षेत्र में बहुत प्रबल हो गया है। वर्मा के मादक-द्रव्य तस्करों ने बर्मा के विद्रोही शान कचिन, करेन तथा कम्युनिस्ट छापामारों के साथ गहरा संबंध स्थापित कर लिया है। वियतनाम युद्ध के दौरान हमंग कबीले के लोगो ने वियतकांग का विरोध एवं अमरीका का समर्थन किया था, इसके बदले में सी.आई.ए. ने उसे पश्चिमी देशों से मादक द्रव्यों की तस्करी के मामले ममदाहालबालबद्ध मामाहोमसर कवीला सरदारों को अमरीका में राजनीतिक तारण प्रदान की।
मादक-दस्यों की यदती हुई लत के कारण आज समूची मानव जाति के विनाश का खतरा पैदा हो गया है। दक्षिण एशिया में भी तस्करों और आतंककारियों के बीच घनिष्ठ सबंध बन गये हैं। अफगानिस्तान का अफीम की खेती वाला क्षेत्र विद्रोही अफगान मुजाहिदीन आतंककारियों के कब्जे में है। सन् 1989 में मुजाहिदीन ने कम से कम 700 टन अफीम तस्करी से विदेशों में भेजी। पाकिस्तान के सैनिक अधिकारियो और राजनीतिज्ञों पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि वे बड़ी राशियों की घूस लेकर मुजाहिदीन द्वारा चलायी जा रही अफीम की तस्करी को प्रोत्साहन देते रहे है। मुजाहिदीन और पाकिस्तानी मादक-द्रव्य तस्करों ने मिलकर जम्मू-कश्मीर और पंजाब के उग्रवादियो के साथ संबंध स्थापित कर लिया है। भारत के इन दो सीमावर्ती राज्यों में अराजकता की स्थिति उत्पन्न करने तथा शासन और प्रशासन के विश्वसनीय और प्रभावशाली राजनीतिक संगठनों को निष्प्रभावी करने के इस प्रयास के पीछे उनका स्वार्थ निहित है। वे चाहते हैं कि अव्यवस्था के इस वातावरण मे उनका मादक-द्रव्य व्यापार निष्कंटक चलता रहे। इन्हीं प्रयोजनों की पूर्ति के लिए अफगान मुजाहिदीन, पाकिस्तान तस्कर और तथाकथित आजाद कश्मीर के मादक-द्रव्य तस्कर-आतंककारी कश्मीर और पंजाव के आतंककारियों को आधुनिकतम शस्त्रास्त्र तथा आतंककारी गतिविधि के प्रशिक्षण आदि के द्वारा अपना पूर्ण समर्थन दे रहे हैं। आध्र प्रदेश के राज्यपाल और भूतपूर्व मसत्सदम्य श्री कृष्णकांत ने 25 जनवरी, 1990 के अपने वक्तव्य में कहा है कि पंजाब और कश्मीर की समस्याएं अंतर्राष्ट्रीय मादक-द्रव्य तस्करी के साथ घनिष्ठता से जुड़ी हुई हैं तथा पंजाव और जम्मू-कश्मीर में व्याप्त अशांति की आड में पाकिस्तानी मादक-द्रव्य तस्कर और उनर्क अंतर्राष्ट्रीय सहकर्मी एक समृद्ध मादक-द्रव्य व्यापार चला रहे हैं। उनका 24 त था कि पंजाब और कश्मीर के मुद्दे मादक-द्रव्यों के विरुद्ध भारत द्वारा लड़े जा हे युद्ध का हिस्सा हैं। पाकिस्तानी पत्रिका न्यूज़ लाइन' के दिसंबर, 1989 के अंक का हवाला देते हुए श्री कृष्णकांत ने कहा कि मादक-द्रव्य तस्कर पाकिस्तान के पासक और सैनिक अभिजातवर्ग का हिस्सा हैं। लगभग 3,110किलोमीटर लबी भारत-पाक सीमा पर प्रतिवर्ष भारी मात्रा में मादक-द्रव्य पकड़े जाते हैं। इस स्करी के प्रमुख क्षेत्र पंजाब में अमृतसर और फिरोजपुर सैक्टर तथा राजस्थान मे पीकानेर और श्रीगंगानगर सैक्टर हैं। तस्कर-आतककारी गठबंधन का एक अन्य उदाहरण दक्षिण भारत, वशेषतः तमिलनाडु है। अब यह बात सर्वविदित हो गयी है कि श्रीलंका के तमिल-मूल के आतंककारियों ने दक्षिण भारत में विशेषतः उनके लिए बनाये गये शरणार्थी शिविरों के आसपास ब्राउन शुगर का व्यसन फैला दिया है। श्रीलंका के मिल आतंककारी शस्त्र खरीदने के लिए धन जुटाने के प्रयोजन से मादक-द्रव्यों की तस्करी में लगे हैं। इन शस्त्रों को वे चोरी-छिपे श्रीलंका भेजते हैं। ये लोग साठ हजार रुपये प्रति किलोग्राम की दर से ब्राउन शुगर बेचते हैं, जो तमिलनाडु-केरल सीमांत पर कोट्टायम से 100 किलोमीटर दूर बसे कमिली जैसे पर्यटन स्थलों पर डेढ़ लाख रुपये का मुनाफा देती है। तमिलनाडु की पुलिस ने 20 जनवरी, 1989 को पंबन और रामेश्वरम के बीच एक गांव से आधुनिकतम शस्त्रों का एक बड़ा भंडार बरामद किया है। मादक-द्रव्यों और मादक-द्रव्य तस्करों द्वारा प्रस्तुत चुनौती बहुआयामीय है तथा उसका सफलतापूर्वक सामना करने के लिए इस दैत्याकार समस्या के स्रोत और विविध पक्षों का व्यापक अध्ययन अपेक्षित है।
कोसा कोसा नोस्त्रा सा नोस्त्रा अमरीका का सबसे पहला संगठित अपराध-गिरोह था,जिसकी क्रूरता, बर्बरता और बदले की भावना वाले सदस्य बंदूक और छुरे के सहारे जीने और मरने की सौगंध के पाश में बंधे थे। वे कोसा नोस्त्रा के प्रति निष्ठा और गोपनीयता की शपथ लेते तथा सयुक्त राज्य अमरीका के संगठित अपराध जगत पर पूरी तरह हावी थे। कोसा नोस्त्रा के अस्तित्व के लगभग 40 वर्षों में गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन पहली बार सन् 1962 में उसके एक ऐसे सदस्य ने किया, जो उस शपथ का पालन 33 वर्षों तक निष्ठापूर्वक करता रहा था। उसने जिन रहस्यों का भेद खोला, उनसे पहली बार यह ज्ञात हुआ कि कोसा नोस्त्रा अपराधियो और तस्करों का एक ऐसा विशाल सगठन अथवा गिरोह है, जो विशेषतः सन् 1920 के दशक मे अमरीका सरकार द्वारा मद्यनिषेध लागू करने के पश्चात् अवैध शराब के धधे में फला-फूला था। कोसा नोस्त्रा का मुख्य धंधा अवैध शराब की भट्टियां स्थापित करना तथा पुलिस को रिश्वत देकर शस्त्र बल द्वारा उनकी रक्षा करना और सशस्त्र एजेंटों की मदद से अवैध शराब की बिक्री था। कोसानोस्त्रा का अवैध शराब का धंधा काफी बडे पैमाने पर चल निकला था। वस्तुतः अवैध शराव का उत्पादन और बाजार लगभग पूरी तरह कोसा नोस्त्रा के हाथों में था। मद्यनिषेध कानून रद्द कर दिये जाने पर इस अपराध संगठन ने तुरंत जुए के अड्डे स्थापित कर लिए और वह उनसे भारी मुनाफा कमाने लगा। अकैले न्यूयार्क शहर में वह इन अड्डो से 25 करोड़ डॉलर वार्षिक की कमाई करता था। उसने अकेले न्यूयार्क की पुलिस को 5 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी। उसके बाद दूसरा महायुद्ध शुरू हुआ, जो कोसा नोस्त्रा के लिए कमाई का एक अतिरिक्त साधन वन गया। लगभग प्रत्येक क्षेत्र में युद्ध के कारण अभाव की स्थिति उत्पन्न हो जाने के कारण शीघ्र ही काला बाजार पनप उठा। कोसा नोस्त्राने तुरत काले बाजार को अपने हाथो मे ले लिया और सामान्य उपभोग की वस्तुओं की अवैध विक्री पर आधिपत्य जमा लिया, जैसे-मांस, चीनी, पैट्रोल और सिगरेट भी। सन् 1950 के दशक में कोसा नोस्त्रा अमरीका में नशीले पदार्थों के व्यापार तथा उनकी तस्करी में बड़े पैमाने पर लिप्त हो गया। इन द्रव्यों के अवैध व्यापार में 26 संगठित रूप से प्रवेश करने वाला पहला अपराधी-गिरोह कोसा नोस्त्रा था। संगठन कोसा नोस्त्रा अमरीका में इतालवी अपराध-जगत और गुडों का प्रमुख केन्द्र था। इसमें मूलतः दो प्रजातीय इतालवी गिरोह शामिल थे-सिसिलीवासी और नेपल्सवासी। इतालवी आप्रवासी न तो कुशल कारीगर थे, न किसान, न उद्यमी। उनमें से अधिसंख्य अपराधों में लिप्त हो गये और उससे उन्हे भारी कमाई होने लगी। कोसा नोस्त्रा के भीतर सिसिलीवासियों में परस्पर घनिष्ठता तथा प्रजातीय एकता का भाव बहुत सुदृढ़ था। इसने नेपल्सवासियों को भी अपनी सुरक्षा के लिए एकजुट होने के लिए विवश कर दिया था। संयुक्त राज्य अमरीका में संगठित अपराध की शुरुआत इतालवी आप्रवासियो ने नहीं की थी। उन्नीसवीं शताब्दी के अंत मे जब वे अमरीका पहुंचे तो वहां पहले से ही एक समृद्ध अपराध-जगत पनप रहा था, जिसका प्रभुत्व मुख्यतः आयरलैड मूल के लोगों अथवा यहूदियों के हाथों में था। इतालवियों में एकता का भाव बहुत सुदृढ़ था तथा वे सगठन-कुशल भी थे, जिसके कारण उन्होने आयर तथा यहूदी लोगो को मात देकर अपराध-जगत पर अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया। उस समय कोसा नोस्त्रा का सबसे अधिक प्रभावशाली सरदार गिउसेप मासेरिया था, जिसे संगठन के लोग 'जो दा बॉस' (जो सरदार) नाम से संबोधित करते थे। डॉन विटो जेनोवीज तथा लुसियानो जैसे अनेक भयंकर गुंडे उसके साथ थे। लुसियानो को कोसा नोस्त्रा के लोग 'चार्ली लकी' (भाग्यशाली चार्ली) कहते थे। इतालवी अपराध-जगत पर मासेरिया के वर्चस्व के बावजूद वह स्थानीय और क्षेत्रीय निष्ठाओ से ओतप्रोत अनेक गिरोहों मे विभाजित था। इनमें सबसे बड़ा गिरोह कास्तेल्लाम्मारेसे था, जिसके सदस्य मूलतः सिसिली के नगर कास्तेल्लाम्मारे देल गोल्फो के निवासी अथवा उनके वंशज थे। न्यूयार्क में उनका मुखिया साल्वेटोर मारानजानो था। कोसा नोस्त्रा की सदस्यता कोसा नोस्त्रा के रहस्य जोसेफ मिचेल वालाची ने प्रकट किये। उसने 'वालाची पेपर्स' के लेखक पीटर मास के साथ लंबी मुलाकातों में अपनी दीक्षा-विधि पर विस्तार से प्रकाश डाला। वालाची का जन्म 22 सितंबर, 1904 को न्यूयार्क के ईस्ट हार्लेम मे हुआ था, जिसमे मुख्यतः इटली मूल के लोग रहते थे। उसके माता-पिता इटली से आकर वहां वसे थे। वालाची अपने माता-पिता की 17 संतानों में से जीवित बची संतानो मे था। उसके पिता का परिवार घोर दारिद्रय भोग रहा था। उसका पिता पोरपियक्कड था। वालाची किसी के काबू मेन आता था, अतः उसे ।। वर्ष की आयु में बाल-सुधारगृह में भर्ती करना पड़ा। 3 साल बाद जब वह वहां से निकला तो वह चोरी की कला में निपुण हो चुका था। 18 वरस का वालाची चोरो के नामी गिरोह 'माइन्यूट मैन' का पक्का सदस्य बन चुका था। वह अप गिरोह के ट्रकों पर चालक का काम करता था। सन् 1923 मे वालाची को एक सिल्क स्टोर में हुई एक बड़ी चोरी सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया गया और उसे अमरीका की बदनाम जेल सिं सिंग में दस महीने की सजा भुगतनी पड़ी। रिहाई के फौरन बाद ही उसे एक डार के प्रसंग में पकड़ लिया गया तथा तीन वर्ष से कुछ अधिक समय पुन:सिंग सिंग ही बिताना पड़ा। इतने लबे समय मे उसे सहज ही अपराध-कुशल कैदियों का सं मिला, जिनसे उसने अपराध कला का विशिष्ट ज्ञान प्राप्त किया। ब्रुकलिन के शुरू के प्रमुख गिरोहबाज़ अपराधियों में से एक वोल्लेरो के साथ उसकी मुलाकात सिंग सिंग में ही हुई थी। वोल्लेरो भी नेपल्स मूल का था तथा वह गुप्त अपराध-संगठन कोसा नोस्या का सदस्य था। वोल्लेरो ने वालाची को कोसा नोस्त्रा के बारे मे कुछ नहीं बताया तथापि उसने यह आश्वासन अवश्य दिया कि समय आने पर उसे उस अपराध सगठन के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, परंतु वालाची को यह जानकारी वोल्लेरो से नहीं वरन् जेल के एक अन्य साथी डॉमिनिक पैत्रेली के माध्यम से प्राप्त हुई। पैत्रेली को कोसा नोस्त्रा में 'दा गैप' कहा जाता था। सन् 1929 मे दा गैप ने वालाची का परिचय बॉबी डौयल से कराया। बॉबी का असली नाम गिरोलामो सांतुक्कियो था। बॉबी ने वालाची को एक बड़े निर्माता टीम गगलियानो के पास भेज दिया। टौमने वालाची के सामने लंबी-चौड़ी भूमिका बांधने के बजाय उसे सीधा सवाल पूछा, "यदि हम तुम्हे किसी व्यक्ति की हत्या करने को कहें तो क्या तुम उसे गोली मार सकोगे?" वालाची ने तुरंत टौम से प्रतिप्रश्न किया, "क्या तुम्हारे लोग मेरे लिए भी यह कार्य करेंगे?" टौम ने कहा, "हा।" वालाची ने भी अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। यह वह समय था, जब कोसा नोस्त्रा का सरदार मासेरिया कास्तेल्लाम्मारेसे के सरदार मारानजानो और उसके सहयोगियों के विरुद्ध संघर्ष कर रहा था। वालाची को कोसा नोस्त्रा में भर्ती करने की पहल मारानजानो ने की। उसने वालाची को पहचान करने का काम सौंपा। उससे उस इमारत मे एक घरभाड़े पर लेने को कहा गया, जिसमें मासेरिया के एक विश्वस्त साथी के रहने का अनुमान था। यह कार्य उसने सफलतापूर्वक संपन्न कर दिया। उसने मासेरिया के साथी को खोज निकाला और उसकी सूचना के आधार पर मारानजानो गिरोह के तीन बंदूचियों ने उस व्यक्ति की हत्या कर डाली। इस सफलता के फलस्वरूप वालाची को कोमा नोस्त्रा की सदस्यता का अधिकारी मान लिया गया। उसे एक बड़े भोजन-कक्ष में ले जाया गया, जहां लुच्चीज गिरोह के सरदार टौमी तथा जो-बोन्नानी, बाँधी डौयल और दा गैप की उपस्थिति में उसका परिचय डौन साल्वेटोर मारानजानो के सग कराया गया। मारानजानो ने अपने दायीं ओर की कुर्सी की ओर इशारा किया। वालाची चुपचाप 28 जोसेफ भिघेत वालाची, जिसने ग्लानिश कोसा नोस्त्रा के समस्त गोपनीय रहस्य उगल दिये। - उस कुर्सी पर बैठ गया। वालाची के सामने मेज पर एक बंदूक और एक खुखरी रख दी गयी। मारानज़ानो ने उन दोनों घातक हथियारों का महत्त्व स्पष्ट किया, "ये इस बात के प्रतीक हैं कि तुम बंदूक और चाकू के बल पर ही जीवित रह पाओगे।' सर्वोपरिता मारानजानो ने वालाची से दोनो हथेलियां मिलाने को कहा और उनके बीच में एक कागज रखकर उसे दियासलाई से जला दिया। अब उसने वालाची को यह शपथ दोहराने को कहा-"यदि मैने कोसा नोस्त्रा के रहस्य प्रकट किये तो मै इसी प्रकार जलूंगा। मेरे लिए कोसा नोस्त्रा मेरे रक्त-संबंधो, परिवार, धर्म और देश की अपेक्षा सर्वोपरि रहेगा।" यह गुप्त अपराध-संगठन कोसा नोस्त्रा मे वालाची के प्रवेश की दीक्षा थी। उसने पहली बार संगठन का नाम-कोसा नोस्त्रा सुना था। जो-बोन्नानो को वालाची का संरक्षक नियुक्त किया गया तथा वालाची के कार्यों का उत्तरदायित्व उसके कधों पर डाल दिया गया। इस प्रकार जो' वालाची का'गोम्बाह बन गया। जो-बोन्नानो ने वालाची से पूछा कि वह बदूक किस उंगली से चलाता है। वालाची ने अपनी उंगली उसके सामने बढ़ा दी और 'जो' ने उसे सुई से छेड़कर खून निकाला। खून छलक आने पर मारानज़ानो ने वालाची से कहा, "यह रक्त इस बात का प्रतीक है कि अब हम एक परिवार के सदस्य बन गये हैं।' परस्परघाती युद्ध कोसा नोस्त्रा के सरदार उस पर अपनी सर्वोच्चता स्थापित करने के लिए परस्परघाती संघर्ष मे तल्लीन थे। प्रमुख प्रतिद्वंद्वी साल्वेटोर मारानज़ानो और गिउसेप मासेरिया थे। सन् 1930 मे इस संघर्ष मे प्रतिद्वंद्वी गिरोहों के कोई 60 29 सदस्यों का खून हुआ। इस संघर्ष में मारानजानो का गिरोह अधिक समर्थ सिद्ध हुआ, जिसके फलस्वरूप मासेरिया के साथी उसे छोड़ने लगे। अंततः उसके दो निकटतम साथी लुसियानो और जेनोवीज भी गुप्त रूप से मारानजानो के साथ षड्यंत्र में शामिल हो गये और उन्होंने 15 अप्रैल, 1931 को मासेरिया की हत्या कर दी। इस प्रकार मारानज़ानो कोसा नोस्त्रा का प्रमुख सरदार बन गया। मासेरिया की हत्या के बाद मारानज़ानो ने कोसा नोस्त्रा के लगभग 500 माफिया-सदस्यों की एक सभा बुलायी। मारानजानो ने इसी सभा में 'कैपो डि ट्टी कैपी' अर्थात् समस्त सरदारों के सरदार की पदवी धारण की। उसने कोसा नोस्त्रा को अनेक परिवारों के रूप में पुनर्गठित किया। परंतु यह शांति इतनी अल्पजीवी रही कि मारानज़ानो को अपराध-संगठन के साम्राज्य का सुख भोगने का अवसर नहीं मिल पाया। उसे शीघ्र ही यह महसूस होने लगा कि वह लुसियानो तथा जेनोवीज़ सरीखे लोगों को साथ लेकर नहीं चल सकता, लेकिन उन पर चोट करने से पहले ही वह उसी लुसियानो के फंदे मे फंस गया, जिसने अपने सरदार मासेरिया को भोजन की मेज पर गोली से मरवा डाला था। 40 अन्य सरदारों सहित मारानज़ानो मारा गया। अब लुसियानो ने कोसा नोस्त्रा का पुनर्गठन किया तथा अमरीका में कार्य कर रहे अन्य अपराध-संगठनों के साथ सहकारितापूर्ण संबंधों का निर्माण किया, उनमें सबसे प्रमुख डच शुल्ज का गिरोह था। शुल्ज विशेषतःजुए के अड्डे चलाता था। सन् 1935 में अमरीका सरकार के न्याय विभाग ने अधिवक्ता थामस डेवी को विशेष अभियोजक के पद पर नियुक्त किया और डेवी ने शुल्ज के विरुद्ध प्रमाणों का संग्रह शुरू कर दिया। इससे शुल्ज को क्रोध आ गया और उसने डेवी की हत्या की योजना तैयार कर ली। लुसियानो को जब इस बारे में पता लगा तो उसने महसूस किया कि यदि शुल्ज डेवी की हत्या कर देगा तो न्याय विभाग प्रतिशोधपूर्वक देश के सभी अपराध संगठनो पर धावा बोल देगा। लुसियानो इस स्थिति को टालना चाहता था, अतः उसने शुल्ज की ही हत्या का षड्यंत्र रच डाला और 23 अक्तूबर, 1935 को एक मदिरालय में दो डच हत्यारों ने उसका काम तमाम कर दिया। उधर शुल्ज का सफाया हो जाने के बाद डेवी ने अपना ध्यान लुसियानो पर केन्द्रित किया। उसने उसे अनेक आरोपों में पकड लिया, जिनमे जुआघर और वेश्याओ के अड्डे चलाने का आरोप भी शामिल था। उस पर मुकदमा चलाया गया और उसे 30 वर्ष के कारावास का दड सुनाकर जेल में डाल दिया गया। उसके बाद फ्रैंक कौस्तेल्लो कोसा नोस्त्रा का नया सरदार बना। लुसियानो को जेल में बद करने के बाद डेवी का ध्यान अव डॉन विटो जेनोवीज़ की ओर मुड़ा और उसे 'जुए के अड्डों का सम्राट' घोषित कर दिया। जेनोवीज़ अधिक चतुर था। वह तुरत इटली लौट गया, जहा वह फासिस्ट पार्टी को भारी चंदा देकर इटली के तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी का कृपापात्र बन गया तथा उसने भारी कमाई की, परंतु वास्तव 30 मे उसे मुसोलिनी से कुछ भी लेना-देना न था। जैसे ही मित्र राष्ट्रों की सेनाओं ने मुसोलिनी को पछाड़कर इटली पर अपना आधिपत्य स्थापित किया, वैसे ही उसने उनके लिए दुभाषिये और जासूस की तरह काम करना शुरू कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि अमरीकी अधिकारियो ने उसकी सेवाओं की प्रशंसा इन शब्दो में की, "वह पूरी तरह ईमानदार है और उसने घूसखोरी तथा चोरबाजारी के कई मामलों का पर्दाफाश किया है।" वास्तविकता यह थी कि नेपल्स में चोरबाजारी का एक विशाल जाल स्वयं जेनोवीज़ ने ही बुना था और वह मित्र राष्ट्रों की सेनाओ को केवल अपने प्रतिद्वंद्वियों के भेद ही दे रहा था, जिसके फलस्वरूप वह उनका सफाया कराने में सफल रहा। परंतु अंततः जेनोवीज़ अमरीकी सेना की अपराध जाच शाखा के एक ईमानदार एजेंट सार्जेट ओरेंज डिकी के शिकंजे में फंस गया। संघीय जाच ब्यूरो ने न्यूयार्क की एक हत्या के मामले मे जेनोवीज़ को अमरीका भेजने की मांग की। जेनोवीज़ ने डिकी के सामने अपनी रिहाई के बदले में 2,50,000 डॉलर की घूस देने का प्रस्ताव रखा। डिकी भ्रष्ट न था, उसने जेनोवीज को सन् 1945 में अमरीका भेज दिया, जहां उसके गिरोह के लोगों ने प्रमुख सरकारी गवाह पीटरला टैम्पा की विष द्वारा हत्या करके जेनोवीज़ के विरुद्ध चलाये जा रहे मुकदमे का साक्ष्य ही नष्ट कर दिया। एक अन्य गवाह अर्नेस्ट रूपोलो की भी कुछ समय बाद हत्या कर दी। जेनोवीज़ एक बार फिर कानून के चंगुल से बच निकला। इतना ही नहीं, वह कोसा नोस्त्रा में सर्वोच्च सरदार के पद तक जा पहुंचा। उसे 450 प्रशिक्षित अपराधियों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन कुछ समय बाद वह नशीले पदार्थों की तस्करी के एक मामले में बुरी तरह फंस गया तथा उसे 15 वर्ष के कारावास का दंड सुना दिया गया। जेल में उसके साथ मादक-द्रव्यों के लगभग 90 तस्कर थे। उन सब के नेतृत्व की बागडोर जेनोवीज़ के हाथो में थी। वे लोग जेल मे भी षड्यंत्र रचते तथा अपने प्रतिद्वंद्वियो की हत्याएं करते रहते थे। वालाची ने जेल में इसी प्रकार की एक हत्या कर डाली थी, जिसके कारण वह बुरी तरह टूट गया था और उसने ग्लानिवश कोसा नोस्त्रा के समस्त गोपनीय रहस्य उगल दिये। सन् 1970 के दशक मे अपराध अमरीका का सबसे बड़ा व्यापार हो गया था। न्याय विभाग के द्वारा संकलित तथ्यों के अनुसार उसकी आय 40 अरब डॉलर वार्षिक थी। परंतु वालाची द्वारा कोसा नोस्त्रा के गोपनीय रहस्य प्रकट कर दिये जाने के बाद कोसा नोस्त्रा का पुराना रूप नष्ट हो गया। वालाची द्वारा मौन-संहिता-ओमता भंग किये जाने के बाद बीते तीन दशकों मे कोसा नोस्त्रा विविध गिरोहों में बंट गया है, जिनमें से प्रायः सभी मादक-द्रव्यों के तस्कर हैं-गैम्बिनो, जेनोवीज़, लुच्चीज़, योन्नानो और कोलंबो परिवार। नेपल्स मूल के अपराधी लुप्त प्रायः हो गये हैं और नया अपराध-संगठन-'ला कोसा नुऔवो' मूलतः 'सिसिली-माफिया' रह गया है। 31 पियोवराः दा ऑक्टोपस सिसिली की राजधानी पानेरमो विश्व की माफिया राजधानी भी है। सिसिली के माफिया की आय का प्रमुख स्रोत मादक क-द्रव्यों का अवैध अंतर्राष्ट्रीय व्यापार है। यह व्यापार वहां सन् 1971 में उस समय शुरू हुआ, जब संयुक्त राज्य अमरीका ने तुर्की को आर्थिक सहायता के बदले में अफीम प्रदान करने वाली पोस्त की खेती बंद करने तथा उसके स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसले उगाने के लिए तैयार कर लिया था। ठीक इसी समय अमरीकी राष्ट्रपति निक्सन ने फ्रांस को मार्सिलीज़ के बदरगाह पर हेरोइन की तस्करी रोकने के लिए तैयार कर लिया था। परिणामतः मादक-द्रव्यो की अवैध तस्करी का पुनर्गठन किया गया। तस्कर-गिरोहों ने अपनी गतिविधि तुर्की की बजाय 'सुनहरे त्रिभुज'-बर्मा, थाईदेश और लाओस तथा सुनहरे अर्धचंद्राकार-पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान की ओर मोड दी एवं अपना मुख्यालय मार्सिलीज़ के स्थान पर पालेरमो में स्थापित कर लिया। फ्रासीसी रसायन-शास्त्रियों ने सिसिली के माफिया को अफीम का प्रशोधन करके हेरोइन बनाने की विधि सिखा दी। इस प्रकार सन् 1970 के दशक के मध्य मे हेरोइन की प्रथम प्रयोगशालाए स्थापित हुई। एक बैकल्पिक प्रति-राज्य सिसिली के तस्करों ने मादक-द्रव्यों की कमाई के आधार पर एक आर्थिक साम्राज्य का निर्माण कर लिया है। इटली के पुलिस-प्रमुख विन्सेन्जो पेरिसिम के शब्दों मे, "यह आर्थिक साम्राज्य एक वैकल्पिक प्रति-राज्य है-उसके पास कल्पनातीत मात्रा में धन है, जिसके द्वारा उसमे राज्य व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने की अपार क्षमता उत्पन्न हो गयी है। वह समूची अर्थव्यवस्था को दूषित कर रहा है।' 'ला सिसिलिया' नामक इतालवी समाचार-पत्र का सिसिली संवाददाता फ्रांको कास्तालदो कहता है, "मैं स्पष्ट रूप से कह सकता हूंकि माफिया ने स्थानीय अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र पर नियत्रण स्थापित कर लिया है। राजकोप से प्राप्त होने वाले भारी अनुदानों के अतिरिक्त नकद काला धन भारी मात्रा में उपलब्ध है, जिसके बलबूते पर उसने प्रदेश के प्रशासन पर भी अधिकार जमा लिया है।' " 32 । कुंतरेरा-करुआनास गिरोह कास्तालदो का मुख्यालय सिसिली के एक छोटे से कस्बे एग्रीगेंतो में है। एग्रीगेंतो के पश्चिम में दस किलोमीटर दूर सिसिलियाना गांव कुंतरेरा माफिया 'परिवार' का गढ़ है। सिसिली का दूसरा प्रमुख तस्कर गिरोह करुआनास है। ये दोनों गिरोह हेरोइन का व्यापार करते हैं, परंतु ये दोनों वास्तव में दलाली का धंधा करते हैं। कास्तालदो ने उनके व्यापार के विषय में लिखा है, "उनका ही माल ढोने वाले स्टीमर और मालवाहक जहाज लेबनान और सीरिया से अफीम लेकर रवाना होते हैं, जिसे कुंतरेरा गिरोह के लोग समुद्र के किनारे उतारकर द्वीप पर भीतर की ओर फार्म हाऊसों में पहुंचा देते हैं, जहा उसे हेरोइन के रूप में प्रशोधित कर लिया जाता है। उसके बाद हेरोइन संयुक्त राज्य अमरीका भेजी जाती है। अफीम मुख्यत पूर्वी लेबनान के उस वेका घाटी के खेतों से आती है, जिस पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए लेवनान के शिया संप्रदाय और सीरियाइयों के बीच घमासान युद्ध छिड़ा रहता है। यह बात सर्वविदित है कि अफीम के व्यापार में इन दोनों पक्षों को घूस अथवा दलाली प्राप्त होती है। घूस की रकम हमेशा नकद डॉलरो में दी जाती है। सिसिली के माफिया परिवारो ने हेरोइन की आमदनी को भवनों, फार्मो, रेस्तराओ, बैकों, पूंजी-निवेश, बीमा कंपनियों, मोटर-गैरेजों तथा परिवहन-व्यवसाय में लगा रखा है। सन् 1970 के दशक में संयुक्त राज्य अमरीका-विशेषतः न्यूयार्क और न्यूजर्सी क्षेत्रों मे हेरोइन की तस्करी के धंधे पर स्पाटोला, इंजेरिल्लो, गैम्बिनो और बदालार्मेती माफिया गिरोहो का प्रभुत्व था। मादक-द्रव्यों के व्यापार पर अपना प्रभुत्व बनाये रखने के लिए तस्कर-गिरोहों के बीच प्रतिस्पर्धा बनी रहती है। सन् 1980 के दशक के आरभ मे कोलियोन्सी माफिया परिवार ने लुसियानो लिग्गियो के निर्देशन में तथा मिचेल ग्रेको के सहयोग से सिसिली मे चार सौ से अधिक माफिया सदस्यों की हत्या की, परंतु अंततः लिग्गियो और ग्रेको स्वयं हत्याओं के आरोपो पर पकड़े गये और कानून ने उन्हे अपने शिकजे में कसकर उनकी दादागिरी समाप्त कर दी। सिसिली के मादक-द्रव्य माफिया को विश्व के सबसे बड़े मादक-द्रव्य संगठनों मे से एक माना जाता रहा है। मादक-द्रव्यों की तस्करी के अतिरिक्त वह शस्त्रो की तस्करी तथा काले धन की धुलाई में भी लिप्त रहा है। उस पर निर्माण, सार्वजनिक-सेवाओ तथा कृषि-उपज की विक्री पर व्यापक रूप से पैसा ऐंठने के आरोप भी लगाये जाते रहे है। सन् 1988 के आरभ में इतालदी पुलिस ने यह चेतावनी दी थी कि माफिया अपराध-जगत की विविध गतिविधियो के लिए अधिकाधिक किशोरो और युवाओं को भर्ती कर रहा है, जिसके कारण वेरोजगारी से त्रस्त सिसिलीवासियों को बहुत राहत महसूस हो रही है। सन् 1988 मे सिसिली तथा इटली के दो अन्य प्रांतों कैलेवेरिया और कैम्पेनिया में सैकड़ों हत्याएं हुई। इन क्षेत्रों पर अपराधी गिरोहों का प्रभुत्व . . 33 पापमूर्ति रोमिनिको सिका, जिन्होंने अपनी जान का जोखिम उठाकर माफ्यिाके विरुद्ध अपनी आवाज उठाने की जुर्रत की। स्थापित हो गया है। संगठित अपराध के नियंत्रण के लिए नियुक्त किये गये इटली के एक उच्च आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डोमिनिको सिका के शब्दों में, "इसे एक प्रकार की विडवना ही माना जायेगा कि राज्य को अपने ही उन क्षेत्रो में प्रवेश करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जो माफिया के गढ़ वन गये है तथा जिनमे माफिया का हुक्म ही कानून बन गया है।" अब तक ऐसे अनेक इतालवी मजिस्ट्रेट, सूचनाएं देने वाले लोग तथा राजनीतिज्ञ माफिया के हाथो मारे जा चुके हैं, जिन्होंने मादक-द्रव्य तस्करों के हाथों बिकने से इनकार किया। सिसिली के चोटी के साम्यवादी नेतापियाला तोरे ने इतालवी ससद के समक्ष पेश करने के लिए वह विधेयक तैयार किया था, जिसके द्वारा इतालवी मजिस्ट्रेटों को बैंक खातों और आयकर दस्तावेजों की जांच करने की शक्ति प्रदान की गयी। उसके इस कार्य के लिए माफिया ने मई, 1982 मे उसकी हत्या कर दी। उसी वर्ष सितंबर मे उन्होने इटली मे अपराध जगत के घोर शत्रु जनरल कालो अल्बों डेला चियेजा, उसकी युवा पत्नी तथा उनके अगरक्षक को पालेरमो में एक सडक के सिरे पर गोलियो से भून डाला। माफिया ने अंतोनियो सिउला को जेल से छूटने के बाद घर पहुंचने से पहले ही मार डाला। वह मादक द्रव्य व्यापार के उस मुकदमे में सरकारी गवाह बन गया था, जिसकी TY - गोलियो से छलनी कर दिया गया। माफिया ने इटली में आतंक का वातावरण उत्पन्न कर दिया है। न्यायमूर्ति गियोरदानो पालेरमो के एक साधारण घर में रहता है, परंतु उसके घर पर दिन-रात एक कवचबड कार और पुलिस के विशेष दस्ते का पहरा है। उसका नाम माफिया के शिकारो की सूची में सबसे ऊपर है। उसकेघर में इस्पात के भारी 34 दरवाजे हैं तथा प्रत्येक कमरे की प्रत्येक खिडकी स्थायी तौर पर इस्पात की चादर के पर्दे से ढंकी हुई है, जिससे कि माफिया को गोली दागने का अवसर न मिल सके। इसी प्रकार न्यायमूर्ति डोमिनिको सिका जागते अथवा सोते मे, हर पल सुरक्षा पुलिस दस्तों के ऐसे कड़े पहरे मे रहता है, जैसा कि इससे पहले इटली में न देखा गया, न सुना गया। सबसे अधिक कड़ी सुरक्षा इतालवी न्यायपालिका के सदस्य गयोवान्नी फालकन को प्रदान की गयी है। वह छठे आपराधिक संभाग मे जांच-पड़ताल करने वाला मजिस्ट्रेट है। फालकन के दोहरे इस्पाती द्वार के बाहर आधा दर्जन तगडे अगरक्षक अविराम पहरा देते हैं। द्वार की चाबी केवल फालकन के पास है। आंगतुकों को पहले वह स्वयं क्लोज्ड सर्कट मानीटर (टी.वी. स्क्रीन) पर देखता है, उसके बाद फालकन की अनुमति तथा अगरक्षकों द्वारा पूरी तलाशी के चाद ही उन्हें भीतर जाने दिया जाता है। राजनीतिक सांठगांठ फालकन और उसके साथी न्यायाधीशों को कुछ ऐसे मामलो की जाच सौंपी गयी, जिनमें इतालवी राजनीतिज्ञो के साथ माफिया की नयी पीढी की सांठगांठ के आरोप थे। माफिया की यह नयी पीढ़ी भीषण रूप से हिंसक और गुप्त संगठन ला पियोवरा अथवा ऑक्टोपस के नाम से कुख्यात है। ऐसा माना जाता है कि ऑक्टोपस का इतालवी राजनीतिज्ञो, विशेषतः मिश्रित सरकार के सदस्यो के साथ तालमेल रहा है तथा यह तालमेल इतना गहरा रहा है कि इतालवी न्यायाधीशों ने सरकार पर माफिया के प्रति मुलायम दृष्टिकोण अपनाने का आरोप तक लगा दिया। पाओलो बोरसैलिनो दुःखपूर्वक कहता है, "पालेरमो पर एक प्रकार की थकान हावी हो गयी है। माफिया के विरुद्ध संघर्ष का संकल्प पहले के समान दृढ़ नहीं रहा है।" सिसिली की राजधानी में सरकारी और पुलिस अधिकारियों में भी यही भावना व्याप्त है। वे अवरुद्ध जांच, राजनीतिक इतालवी न्यायपालिका के सदस्य गियोवान्नी फालकन, जिन्हें माफिया का विरोध करने के कारण दिन-रात जान के लाले पड़े रहते 35 उदासीनता तथा माफिया के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाने वालो को धमकियां मिलने की शिकायत करते हैं। इतालवी न्याय-व्यवस्था के अंतर्गत जाच-पड़ताल करने वाले मजिस्ट्रेट पुलिस और न्यायिक प्रक्रियाओं का आश्रय लेकर आरोप-पत्र तैयार करते हैं। वे प्रायः अकेले ही कार्य करते हैं, परंतु फालकन, बोरसैलिनो तथा उनके सहयोगियों ने संयुक्त रूप से कार्य करना शुरू किया है, जिससे कि माफिया अतीत की भांति किसी मजिस्ट्रेट की हत्या करके उस मामले (प्रकरण) की हत्या न कर पाये, जो मरते समय उस मजिस्ट्रेट के हाथ में रहा हो। सन् 1983 के बाद के पांच वर्षों में मजिस्ट्रेटो के पारस्परिक सहयोग के फलस्वरूप माफिया के स्थानीय क्रियाकलाप के साथ ही युरोप और अमरीका में फैले उसके व्यापार के बारे में भी जानकारी इकट्ठी हो सकी, जिसके आधार पर दिसंबर, 1987 में हुए एक वृहत मुकदमे में माफिया के उन 338 सदस्यों को सजाएं सुनायी जा सकी, जिनके विरुद्ध हत्या, डाके तथा संयुक्त राज्य अमरीका मे मादक-द्रव्यो की तस्करी के आरोप थे। परंतु जनवरी, 1988 में जब इटली के मजिस्ट्रेटों की सर्वोच्च-परिषद् ने 68 वर्षीय न्यायमूर्ति अंतोनियो मेली को 'माफिया-विरोधी पूल' का अध्यक्ष नियुक्त किया, तब से मजिस्ट्रेटों के बीच फूट पड़ गयी। बोरसलिनी ने सत् 1987 में ही टीम छोड़ दी थी। वह कहता है, "मेली द्वारा पद ग्रहण करने के कुछ महीने बाद से व्यवस्था पूरी तरह बदल गयी है।" मेली ने माफिया के विरुद्ध चल रहे मुकदमे पूल से बाहर के न्यायाधीशों के पास तथा पूल के सदस्यों के पास गैर-माफिया मुकदमे भेजने शुरू कर दिये। यह सन् 1960 के दशक की व्यवस्था की ओर वापसी की स्थिति है, जिसमें प्रत्येक न्यायाधीश अपने सामने भेजे गये मुकदमो की सुनवायी करता तथा उसे यह पता न होता कि दूसरे न्यायाधीशों के सामने कैसे मुकदमे हैं तथा किसी भी न्यायाधीश को माफिया के सार्वभौमिक स्वरूप का ज्ञान नहीं होता था। नयी व्यवस्था का विरोध करने के लिए पूल में सम्मिलित मजिस्ट्रेटों ने इस तर्क पर त्यागपत्र दे दिये कि "हमे लगता है कि माफिया के विरुद्ध संघर्ष में सामंजस्य स्थापित करने का जो मार्ग हमने खोजा था और जिसके अनुसरण से बहुत अच्छे परिणाम सामने आये हैं।" उसके लुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। आमतौर पर यह महसूस किया जा रहा है कि मूल समस्या माफिया के राजनीतिक प्रभाव की है। वित्तीय क्रियाकलाप कैम्ब्रिज के प्राध्यापक एवं संगठित अपराध-विशेषज्ञ आर्थर गिब्सन ने "डेली टेलीग्राफ' को एक भेट में बताया कि "मादक-द्रव्यों से प्राप्त काले धन की धुलाई और नये सिरे से उसके निवेश के लिए ऑक्टोपस ने लदन, लिस्तेनस्तीन, लक्जेमवर्ग और इटली में फैले वित्तीय संस्थाओं के जाल पर कब्जा कर रखा है।' मोटे अनुमान के अनुसार मिसिली के मादक-द्रव्य बाजार से प्रतिवर्ष 50 अरब डॉलर नकद प्राप्त होते हैं। इस राशि का एक छोटा-सा अंश भी द्वीप की 36 वित्तीय संरचना बदल डालने के लिए पर्याप्त हो सकता है। मादक-द्रव्यों की तस्करी से प्राप्त डॉलर अमरीकी बैंकों के अल्पावधि खातों में जमा किये जाते हैं। उसके बाद नकद राशियां तस्करी द्वारा स्विट्जरलैंड पहुंचायी जाती हैं। जहा से लुगानो और मिलान के रास्ते उन्हें इटली भिजवाया जाता है। तस्कर बड़ी नकद राशियां क्रेडिट सुइस नामक बैंक में जमा करते हैं, जिसने इटली से लगी अपनी सीमा से सटे हुए बेलिनजोना सरीखे नगरो मे अपनी शाखाएं खोल रखी हैं। मजिस्ट्रेट फालकन कहता है, "खेद के साथ कहना पड़ता है कि हमे माफिया-अर्थव्यवस्था के छोर ही दिखते हैं अथवा जो कुछ हो रहा है, उसका प्रतिबिंब मात्र दिखायी देता है।" उसका विचार है कि माफिया धीरे-धीरे स्टॉक-मार्केट- -व्यापार, मुद्राकोषों तथा वस्तुओं के व्यवसाय की ओर बढ़ रहे हैं। पालेरमो के तस्कर सरदार उस नाजुक प्रक्रिया पर निगाह और नियंत्रण रखते हैं, जिसके द्वारा उनका मादक-द्रव्य उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। न्यूयार्क स्थित माफिया परिवार बिक्री का संचालन करते हैं। सिसिली के तस्कर अपने मुनाफे की राशियां युरोप मंगाने के लिए प्रमुखतम वित्तीय संस्थानों का उपयोग करते हैं। युरोप पहुंचने पर मुनाफे की उन राशियों का निवेश इतालवी अर्थव्यवस्था में कर दिया जाता है। इतालवी अर्थव्यवस्था पर राज्य का नियंत्रण अत्यंत नगण्य है। संगठित अपराधी गिरोहों अर्थात् माफिया के हाथों में एक गुप्त आर्थिक-शक्ति-गुट का उदय इटली के आर्थिक विकास एवं वृद्धि के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है। परस्परघाती संघर्ष सिसिली के तस्कर गिरोह परस्परघाती संघर्ष मे जुटे हैं। उनमे से प्रत्येक गिरोह समूचे मादक-द्रव्य बाजार पर कब्जा करना चाहता है। पिछले पांच वर्षों मे सिसिली के कैलेबेरिया और कैपेनिया क्षेत्रों में माफिया गिरोहों के पाच सौ से अधिक सदस्य प्रतिद्वंद्वी गिरोहो की आपसी लड़ाई मे मारे जा चुके हैं। यह वस्तुतः गृहसंघर्ष की स्थिति है। गिरोहों की प्रतिद्वंद्विता से इतालवी न्यायपालिका को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर माफिया की गुप्त गतिविधियों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने मे बहुत मदद मिली है। तस्कर-गिरोहो के दो भूतपूर्व सदस्यो-तूतूक्कियो कौट्रोरनो और अंतोनियो काल्डेरोन ने अपनी पहल पर माफिया गतिविधि के बारे मे जानकारी देने का प्रस्ताव किया। काल्डेरोन को गवाही देने के लिए एक बुलेटप्रूफ कार में अदालत ले जाया गया। न्यायाधीश अल्फोसो गियोरदानो की अदालत मे गवाही देने के पश्चात् सरकारी गवाह अंतोनिया सिउला की हत्या कर दिये जाने के बाद से सुरक्षा प्रबंध अधिक कड़े कर दिये हैं। सरकारी गवाहों के अंगरक्षक बुलेटप्रूफ जॉकेट पहनते हैं तथा न्यायमूर्ति डोमिनिको सिका ने मुकदमों की सुनवायी की समाप्ति पर सरकारी गवाहों के सहयोग के बदले उनके चेहरे-मोहरे बदलने के लिए प्लास्टिक सर्जरी के साथ-साथ उन्हें पूरी तरह नयी पहचान प्रदान करने की 37 व्यवस्था की है, जिससे कि वे अवैध मादक-द्रव्य व्यापार और अपराधी जीवन में अपने पराने माफिया मालिकों अथवा भागीदारों के रोप और प्रतिशोध से बचकर नया जीवन जी सकें। कुल मिलाकर इटली में मादक-द्रव्य माफिया ने खतरनाक आयाम ग्रहण कर लिया है, जिसका सामना करने के लिए सरकार को सिसिली में नागरिक अधिकारों का निलवन जैसे कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं। माफिया महिलाएं "हम स्त्रियो को (तस्करी मे)शामिल नहीं करते। हम अपनी पत्नियों अथवा महिला मित्रों को सगठन के रहस्य नही बताते। ....यह पुरानी माफिया पद्धति है। ..कोसा नोस्त्रा पुरुषों के लिए है। हमारी यही परंपरा है।"-एक भूतपूर्व माफिया हत्यारे ने, जो बाद में सरकारी गवाह बन गया था, एक मुकदमे की सुनवायी के दौरान यह बताया, परतु अब यह स्थिति नहीं रही। कोसा नोस्त्रा के पुराने नियम सिसिली के नये माफिया-यप्पीज अथवा ऑक्टोपस पर लागू नहीं होते। सन् 1982 में सिसिली की पुलिस ने 74 वर्षीय वृद्धा एंजेला रूसो को एक मादक-द्रव्य गिरोह के लिए मादक-द्रव्यों की वाहिका के रूप में काम करने के आरोप पर गिरफ्तार किया था। एक अपंग की पत्नी और ग्यारह वयस्क संतानो की इस मां को समाचार-पत्रो में 'प्रैन्नी हेरोइन' (नानी हेरोइन) कहा जाने लगा। कुछ महीनों के अतराल से वह हाथ में एक छोटा-सा सूटकेस लेकर उत्तरी इटली की ओर जाती तथा त्यूरिन, मिलान अथवा वोलाना में अपना सूटकेस खाली कर देती। पालेरमो लौटने पर वह थोड़ी-थोड़ी करके कई बैंकों में ढेर सारी रकम जमा करती। उसका बेटा भी मादक द्रव्य माफिया का सदस्य था। पुलिस का दवाव पड़ने पर उसके बेटे ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, परंतु रूसो देवी का मौन नहीं टूटा। उसने कोसा नोस्त्रा के ढंग की खामोशी 'ओमा' तब भी नहीं तोड़ी जबकि उसका एक बेटा प्रतिद्वंद्वी माफिया गिरोह के हाथों मारा गया। सन् 1983 के प्रारभ मे पुलिस ने एक अन्य महिला सिग्नोरा फ्रान्सेस्का को उसके पति गियोवान्नी बोतादे सहित मादक-द्रव्य तस्करी के आरोपों में गिरफ्तार किया था। उसके बहनोई भी माफिया सरदार थे। न्यायालय ने उसके पति को अपराधी ठहराकर उसे सजा सुना दी, परंतु फ्रान्सेस्का को यह कहकर छोड़ दिया कि महिला होने के कारण उसमें इतनी प्राविधिक और वित्तीय समझ नहीं है कि वह माफिया सगठन का संचालन कर सके। कुछ समय बाद फ्रान्सेस्का और उसका पति उसी वर्ष एक प्रतिद्वंद्वी गिरोह के हाथों मारे गये। इतालवी मजिस्ट्रेटों के पूल ने सन् 1986 मे जो वृहत् मुकदमा चालू किया था, उसमे जिन 474 व्यक्तियों के विरुद्ध मादक-ट्रच्यो की तस्करी से संबंधित अपराधों के आरोप लगाये गये थे, उनमें चार महिलाएं भी थीं-त्यूरिन की भूतपूर्व 38 - 8 बच्चों की मां विन्सेन्जा सेली, जिसके मन में माफिया संगठन के भीतर महत्त्वपूर्ण भूमिका नियाहने की महत्त्वाकांक्षा पल रही थी। सेल्स गर्ल 31 वर्षीया अन्ना कोलिज्जी, 58 वर्षीया एंतोनियेत्ता गिउस्तोलिसी, 43 वर्षीय अन्ना इयान्नी तथा 41 वर्षीया कार्मेला मिगलियारा भी थी। अन्ना कोलिज्जी पर अपने प्रेमी निकोला फार्मोन के साथ मिलकर पालेरमो से कुछ ही दूरी पर एक बंगले में मादक-द्रव्य-प्रशोधन केन्द्र चलाने का आरोप लगाया गया था, एंतोनियेत्ता पर भगोड़े माफिया सरदारों के साथ व्यवहार रखने तथा उन्हे अपने घर मे शरण देने का और इयान्नी तथा कार्मेला पर अपने-अपने घरों में तस्करी के सौदे निपटाने का। अदालत ने अपनी इस टिप्पणी के वावजूद कि मादक-द्रव्यो के व्यापार मे महिलाओ की भागीदारी अब निष्क्रिय नही रही है, उन चारों को बरी कर दिया था। सन् 1988 मे क्रिसमस के त्योहार से कुछ पहले 8 महिलाओ पर मादक-द्रव्य तस्करी के आरोप लगाये गये थे, जिनमे आठ बच्चो की मा 40 वर्षीया विन्सेन्जा सेली भी शामिल थी। उसे सन् 1985 की गर्मियों में उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वह रोम जाने वाले डी.सी.-1 विमान पर सवार होने के लिए हवाई जहाज की ओर जा रही थी। पुलिस ने उसकी तलाशी ली तथा उसकी कमर से टेप द्वारा चिपकायी गयी प्लास्टिक की तीन थैलियां वरामद की, जिनमे ढाई किलोग्राम हेरोइन थी। उसने यह वहाना बनाकर अपराध-मुक्त होने की चेष्टा की कि उसे इस बारे में कुछ पता न था कि उन थैलियो में क्या भरा हुआ है क्योंकि वे थैलियां उसे एक मित्र ने न्यूयार्क के एक पते पर पहुंचाने के लिए दी थी। उसने तर्क दिया कि वह एक मित्र के लिए इतना छोटा-सा काम करने से इनकार नहीं कर सकती थी। अदालत ने उसे हलकी-सी सजा और चेतावनी देकर छोड़ दिया। वास्तव में विन्सेन्जा सेली के मन में माफिया सगठन के भीतर नयी भूमिका प्राप्त करने की महत्त्वाकांक्षा पल रही थी। सिसिली के तस्कर गिरोहो पर अब पुरुषो का एकाधिकार नहीं रहा है, मादक-द्रव्यों की तस्करी के गदे काम मे लिप्त होने वाली इतालवी महिलाओं की संख्या मे निरंतर वृद्धि होती जा रही है। 39 था। यपस्टर्सः गैंबिनो सरदार जॉन गोट्टी ला 'कोसा नोस्त्रा अब मृतप्रायः है और यप्पी तस्करों की एक नयी नस्ल रही है। इसे यपस्टर्स कहा जाता है। शुरू में न्यूयार्क पर ला कोसानोस्त्रा का वर्चस्व था, परंतु जव अमरीका को अधिकांश हेरोइन की आपूर्ति करने वाले फ्रांसीसी स्रोत सन् 1970 के मध्य में बंद हो गये, तब न्यूयार्क में मादक-द्रव्यों की तस्करी का प्रमुख सूत्र सिसिली-मूल के तस्करों ने हार्थों-हाथ संभाल लिया था। संघीय जांच ब्यूरो के अनुसार उस समय न्यूयार्क 'हेरोइन व्यापार का विश्व केन्द्र' बन गया मूल इटली में जन्मे तस्कर लुप्त होते जा रहे हैं तथा संधीय जांच ब्यूरो के आक्रामक अभियान के फलस्वरूप सन् 1981 से लेकर सन् 1989 तक अमरीका के 22 संगठित अपराधी गिरोहों से संबंधित 1,000 तस्करो को सजाएं मिल चुकी हैं, तथापि दो माफिया सरदार विन्सेंट गिगाते और जॉन जोसेफ गोट्टी सघीय जाच ब्यूरो और मादक-द्रव्य निरोधक एजेसी के चगुल से बच निकलने में सफल रहे हैं। जिनोवीज अपराधी गिरोह का मुखिया 62 वर्षीय विन्सेट गिंगाते, जिसे उसके अनुयायी 'चिन' कहकर संबोधित करते हैं, अपना समस्त व्यापारिक कामकाज काफी सवेरे निपटा लेते है। उसकी मुलाकातें भोर मे 3 बजे शुरू हो जाती है। उस समय वह स्नान-गाउन और स्लीपर पहनकर न्यूयार्क के लघु इटली अर्थात् सोहो में घमने निकलता है। उसके विश्वस्त सहायक उस समय उसके साथ रहते है। पुलिस और संघीय जाच ब्यूरो के अनुसार गिगाते उन प्रमुख माफिया सरदारों में से एक है, जो पिछले कुछ वर्षों मे यत्नपूर्वक अदालती आरोपों और सजा से बचते रहे है। न्यूयार्क पुलिस की दृष्टि में गिगाते भयकर दैत्य है। जॉन गोट्टी अमरीका में कानून और व्यवस्था लागू करने वाले अधिकारी न्यूयार्क क्षेत्र मे कार्यरत मादक-द्रव्य तस्करो के विरुद्ध अपने संघर्ष के मार्ग में गोट्टी को एक लगभग अजेय बाधा मानते है। सघीय जांच ब्यूरो के अभिलेखों से ज्ञात होता है कि गोट्टी न गैविनो गिरोह के भूतपूर्व मुखिया पॉल कास्तेल्लानो को दिसंबर, 1985 मे शहर की एक सडक पर गोलियों से मरवा दिया था। उस समय गोट्टी गविनो । 40 । दो दुर्दात माफिया सरदार कारमाइन पैलाते (बाये) तथा जॉन जोसेफ गोट्टी (दाये) अपराधी संगठन में एक कप्तान मात्र था। आज वह गैविनो-परिवार का मुखिया है, जिसे मादक-द्रव्यो के अवैध व्यापार तथा जुआघरो से प्रतिवर्ष कम से कम 50 करोड डॉलर की आमदनी होती है। जॉन गोट्टी का जन्म 27 अक्तूबर, 1940 को साउथ ब्रोक्स मे हुआ था। उसके पिता भवन निर्माण कार्य में मजदूरी करते थे। वह अपने माता-पिता के 13 बालको में से पांचवां है। वे सन् 1952 मे इटली के नेपल्स प्रात से आकर संयुक्त राज्य अमरीका के ब्रुकलिन क्षेत्र में घुस गये थे। गोट्टी किशोरावस्था में ही 'फुलटन रॉकवे व्वायज' नामक नेपल्स-मूल के गिरोह का नेता बन गया था। वह शीघ्र ही कारमाइन फैटिको द्वारा संचालित अल्बर्ट अनस्तासिया के अपराधी गिरोह के क्लब मे जाने लगा था। अनीलो (नील) डेलाक्रोस के साथ उसकी भेट इसी क्लव मे हुई थी। आगे जाकर नील गैविनो-परिवार में उसका मार्गदर्शक बना। किशोरावस्था में गोट्टी छोटे-मोटे अपराधों के आरोप मे 9 बार पकड़ा गया। उसने अपना प्रथम बडा अपराध सन् 1969 में किया। उस पर माल की तीन चोरियों और ट्रको के अपहरण के आरोप लगाये गये थे। गोट्टी ने अदालत के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था, फिर भी उसे तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा देकर अमरीका कठोर सुरक्षा व्यवस्था वाली लेक्सिवर्ग की संघीय जेल में रखा गया, जहां उसकी भेट मादक-द्रव्यों की तस्करी के आरोप में सजा काट रहे माफिया सरदार कारमाइन गैलांते के साथ हुई। गैलाते उमे योन्नानो अपराधी परिवार में शामिल करने को उत्सुक था, परंतु जब यह बताया गया कि गोट्टी नील का आदमी है तो उसने अपना हाथ खींच लिया।
सन् 1970 के दशक मे पांच माफिया परिवार थे-कोलंबो, बोन्नानी, जिनोवीज, लुच्चीज और गैविनो। विनो-परिवार मे तीन गिरोह थे। इन गिरोहों के सदस्य गिरोह की आय अपने-अपने मुखिया के साथ बांट लेते थे तथा ये मुखिया अपने हिस्से का एक भाग चोटी के तीन सरदारो को पहुंचाते थे-सरदार, उप-सरदार और परामर्शदाता। गोट्टी कारमाइन फैटिको केगिरोह मे था, जिसने बर्गेन नामक नये क्लब की स्थापना की थी। सन् 1972 मे फैटिको को कुछ कानूनी समस्याओं में उलझे रहने के कारण गिरोह के मुखिया पद से अस्थायी तौर पर हटना पड़ा। गोट्टी ठीक इसी अवसर पर जेल से छूटा तथा उसके संरक्षक गविनो-परिवार के उप-सरदार नील डेलाक्रोस ने उसे बर्गेन गिरोह का कार्यकारी मुखिया बना दिया। सन् 1973 मे विनो-परिवार के मुखिया ने गोट्टी को अपने भतीजे के अपहर्ताओं और हत्यारो से बदला लेने का दायित्व सौंपा। गोट्टी और उसके साथी रूग्गियेरो ने तथाकथित अपहर्ताओ में से एक जेम्स मैकबेटने को एक मदिरालय में गोली से उड़ा दिया। गोट्टी ने इस बार भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके फलस्वरूप जिला अटॉर्नी ने उसे राज्य की जेल में चार वर्ष के कारावास की सजा दिलायी। सन् 1976 मे कालो गैंबिनो का देहात हो गया। उस समय गोट्टी जेल में था। मृत्यु से पूर्व कार्लो ने गैविनो-परिवार के सरदार पद के लिए उप-सरदार डेलाक्रोस के दावे की उपेक्षा करके अपने साले पॉल कास्तेल्लानो को अपना उत्तराधिकारी मनोनीत कर दिया था। डेलाक्रोस को उप-सरदार बनाये रखा गया। गैबिनो-परिवार के 23 गिरोहों में से 10 का नियंत्रण डेलाक्रोस को सौंप दिया गया। सन् 1977 मे जेल से छूटने पर गोट्टी को बर्गेन गिरोह का स्थायी मुखिया बना दिया गया। गोट्टी ने सन् 1980 से पहले ही गैंबिनो परिवार मे महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया था, जिसके कारण वह सयुक्त राज्य अमरीका में कानून और व्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारियो की निगाह में शकास्पद बन गया था। उन्होने सन् 1981 में तीन महीनों तक बर्गेन क्लव मे एक गुप्त माइक्रोफोन लगाये रखा और वे क्लब टेलीफोन पर होने वाली वार्ताओं को टेप करते रहे। इन साधनों से प्राप्त जानकारी के आधार पर अधिकारियो ने जुए का एक ऐसा अड्डा पकड़ा, जिसमें भारी रकमो के दाव लगाये जाते थे, परतु उन्हे गोट्टी के विरुद्ध कोई ठोस प्रमाण नहीं मिल पाया। सघीय जाच ब्यूरो ने सन् 1985 मे मादक द्रव्यो की तस्करी के आरोपों पर गविनो-परिवार के कई अपराधि को गिरफ्तार किया, लेकिन गोट्टी इस बार भी उसके जाल मे नही आया। हां, ब्रुकलिन की संघीय ग्राड जूरी ने उस पर जुआघर चलाने के आरोप अवश्य लगाये। इस बार गोट्टी के दो घनिष्ठ सहयोगियो-भाई जेने और मित्र रूग्गियेरो पर हेरोइन की तस्करी के आरोप पर मुकदमा चलाया गया। 42 पॉल कास्तेल्लानो विनो-परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा मादक-द्रव्य व्यापार के विरुद्ध था और उसने यह आदेश जारी कर दिया था कि यदि कोई भी सदस्य मादक-द्रव्य तस्करी में लिप्त पाया गया तो परिवार के अन्य सदस्यो की ओर से उसे मृत्यु-दंड दिया जायेगा। यह अत्यंत कठोर आदेश था, जिसके कारण गोट्टी अपने भाई और रूग्गियेरो के जीवन के प्रति आशंकित हो उठा। ठीक इसी समय, दिसंबर, 1985 में गोट्टी के संरक्षक डेलाक्रोस की कैंसर से मृत्यु हो गयी और पॉल कास्तेल्लानो ने थोमस बिलोट्टी को गैबिनो-परिवार का उप-सरदार नियुक्त कर दिया। यह स्थिति गोट्टी को स्वीकार्य न था और उसने ठीक दो सप्ताह वाद कास्तेल्लानो तथा विलोट्टी को न्यूयार्क में गोलियो से मरवा दिया। अब गोट्टी स्वयं गैविनो-परिवार का सरदार बन गया तथा उसकी जीवन-शैली पूरी तरह बदल गयी। उसने विडो-कर्स और जॉकेटो का पहनावा छोड़कर महंगे सूट धारण कर लिये। वह बलिष्ठ और सशस्त्र अंगरक्षको के घेरे में न्यूयार्क के महगे कहवाघरों मे जाने लगा। उसके परिवार के सदस्य उसे सम्मान प्रदान करने लगे। स्वयं उसके भाई उसके लिए द्वार खोलने, कोट पहनाने तथा उतारने में उसकी मदद करने तथा उसके सिर पर छाता तानने लगे। जब से गोट्टी गैंविनो-परिवार का सरदार बना है, तब से गैंविनो-परिवार मादक-द्रव्यों की तस्करी का पूर्णतः समर्थन करने लगा है। गोट्टी ने अतीत की घटनाओं से पाठ सीखा है। अब वह अपने लोगों के साथ क्लब में अथवा अपने गोपनीय स्थलो पर मंत्रणाएं नहीं करता। वह उनसे रेस्तराओं मे मिलता अथवा सड़कों पर टहलते हुए चर्चाए करता है, जिससे कि वह माइक्रोफोन और टेलीफोन के टेपिग से बच सके। यह बात बहुत महत्त्वपूर्ण है कि कालांतर मे संघीय जांच ब्यूरो तथा मादक-द्रव्य निरोधक एजेसी के प्रयत्नों के फलस्वरूप प्रायः अन्य सभी अपराधी संगठनों और माफिया गिरोहों-बोन्नानो, लुच्चीज तथा कोलंबो का लगभग सफाया हो चुका है तथापि गोट्टी के नेतृत्व मे गैबिनो तथा विन्सेट गिगाते (चिन) के नेतृत्व में जिनोवीज़ अपराधी परिवार जीवित रहने में तो समर्थ रहे ही है, अपराजेय भी प्रतीत होने लगे हैं। कानून और व्यवस्था की स्थापना के लिए उत्तरदायी अमरीकी अधिकारी गोट्टी को चारों ओर से घेरने की चेष्टा कर रहे है तथा उन्हे आशा है कि अंततः वे उसे लबी जेल की सजा दिलाने तथा गैविनो-परिवार को खडित एव तबाह करने में सफल हो जायेगे, परंतु गोट्टी उनकी चिता किये बिना प्रतिदिन दोपहर के समय एक चमचमाती लिमूजीन पर सवार होकर घर से निकलता है। उसकी कार पर तीन ड्राइवर तैनात है, जो बारी-बारी से उसकी कार चलाते और उसकी सुरक्षा का ध्यान रखते है। गोट्टी के पास कमाई का एक वैधानिक साधन भी है। नलौ की फिटिंग और मरम्मत का ठेका लेने वाली एक कंपनी ने उसे अपने भ्रमणशील सेल्समैन के रूप मे नियुक्ति-पत्र दे रखा है। . 43 न्यूयार्क जिला अटॉर्नी और राज्य का संगठित अपराध टास्क फोर्स गोट्टी को अपने जाल में फंसाने के लिए संयुक्त रूप से प्रयास कर रहे हैं। सन् 1988 मे टास्क फोर्स ने गोट्टी के विरुद्ध इस आरोप के आधार पर गिरफ्तारी का वारंट जारी करा लिया था कि उसने सन् 1986 में बढई संघ के एक अधिकारी को गोली मारकर घायल करने के आदेश दिये थे। गोट्टी को गिरफ्तार किया गया। उसे गिरफ्तार करने वाले अधिकारी को यह विश्वास था कि इस बार गोट्टी उसके जाल से नहीं बच पायेगा, परंतु गोट्टी उसका उलटा सोच रहा था। उसने उस अधिकारी से मजाक में कहा, "मैं इस आरोप को असत्य सिद्ध कर दंगा, चाहें तो शर्त लगा लीजिये, मै आपकी अपेक्षा तीन गुना रकम दाव पर लगाने को तैयार हूं।" गोट्टी जीत गया। अदालत ने उसे अगले ही दिन 1 लाख डॉलर की जमानत पररिहा कर दिया। गोट्टी का वकील ब्रूस कटलर गोट्टी को 'नैतिक व्यापारी' कहता है, हालाकि वह यह भी कार करता है कि उसे गोट्टी की आय के स्रोतो के बारे में कोई ज्ञान नहीं है। वह कहता है, "जॉन गोट्टी कानून का पालन करने वाले नागरिक के आचरण के विषय मे उनकी (अभियोजकों और जांचकर्ताओं की) पर्व-निर्धारित धारणाओ का अनुसरण नहीं करता। .वह 9 से 5 बजे के कार्य-समय का पालन नहीं करता। वह कहवाघरो मे बैठकर ताश खेलता और अपने मित्रो के साथ गपशप करता है। वे (अधिकारी) जुआरियों को नापसंद करते है। जॉन पहले जुआ खेलता था, परतु अब बिलकुल नहीं खेलता। वे उसे गॉडफादर (अपराधियो का संरक्षक) अथवा माफिया-सरदार इसलिए कहते हैं, जिससे कि वह उसे बड़े अपराधी के रूप मे मशहूर करके उसकी गिरफ्तारी पर ख्याति, समाचार-पत्रो की सुर्खियां तथा हॉलीवुड के ठेके प्राप्त कर सके और अपराधी-गिरोहो को नष्ट करने का दर्प पाल सके।" अदालत के समक्ष गोट्टी के मुकदमे की पैरवी करते समय ब्रूम कटलर ने मुख्य गवाहो तथा अभियोजक की ईमानदारी पर पैनी चोट की। उसने आरोप लगाया कि गोट्टी पर अपराधी होने का आरोप लगाने वाले सात प्रमुख गवाह यह स्वीकार कर चुके है कि वे स्वय हत्यारे, अपहरणकर्ता अथवा धोखाधड़ी करने वाले रह चुके हैं तथा उन्हें सरकारी पक्ष में गवाही देने के बदले में आजीवन कैद से मुक्ति तथा धन और विशेष सुविधाएं प्राप्त हुई हैं। जरी ने पूरे सप्ताह भर विचार-विमर्श के बाद अंतत गोट्टी और अन्य सभी अभियुक्तो को सभी आरोपों से बरी कर दिया। फरवरी, 1990 में संयुक्त राज्य सर्वोच्च न्यायालय ने जॉन गोट्टी को आक्रमण आदि के उन सब आरोपों से मुक्त कर दिया, जो उस पर तथाकथित सन् 1986-पड्यत्र के बहाने लगाये गये थे। इस प्रकार आरोप-मुक्त होना गोट्टी के लिए महान विजय सिद्ध हुआ है तथा वह अपराध-जगत और संयुक्त राज्य अमरीका की जनता की दृष्टि में अपराजेय बन गया है। 44 सा मैक्सिको माफिया 'न् 1980 के दशक मे संयुक्त राज्य अमरीका गांजा, अफीम, मार्फीन और कोलवियाई कोकीन सरीखे मादक -द्रव्यों की बाढ को रोकने के लिए हताशापूर्वक संघर्ष कर रहा था। देश की सरकार मैक्सिको को भी इस वायदे के बदले में भारी मात्रा में धन दे रही थी कि वह अपनी सीमाओ के भीतर भाग और पोस्त की खेती की अनुमति नहीं देगा तथा राज्य की सीमाओं के भीतर होकर अमरीका भेजे जाने वाले मादक-द्रव्यो की तस्करी को रोकेगा। परंतु वास्तविकता यह थी कि मैक्सिको सरकार राजनीतिज्ञ, प्रशासनिक तथा न्यायिक इत्यादि सभी स्तरो पर भ्रष्ट हो चुकी थी। मैक्सिको के मादक-द्रव्य तस्करो के पास अपार धन था, जिसके बलबूते पर वे पुलिस तथा न्यायपालिका को भारी घूस देकर अपनी अवैध गतिविधियो की ओर से आंखें मूद लेने के लिए विवश करने में सक्षम थे। मैक्सिको सरकार दावा करती थी कि उसके देश की सीमाओं के भीतर भांग और पोस्त की खेती नहीं होती, परंतु ऐसा न था। मैक्सिको के सोनोरा, चिहुआहुआ, ज़कातेकास तथा सान लुई पोटोसी प्रातो में भाग के विशाल खेत मौजूद थे। पोस्त की खेती मुख्यतः सिनालोआ, जैलिसको और मिको आकान प्रातो में होती थी। जैलिसको प्रांत की राजधानी ग्वादालाजारा पर मादक-द्रव्य तस्करों का ठीक वैसा ही आधिपत्य था, जैसा कि किसी पराजित प्रदेश परविजयी सेना का होता है। प्रायः सभी मादक-द्रव्य तस्कर सिनालोआ प्रांत की पहाड़ियो के निवासी थे। उनके सरदारो-मिगेल एंजेल फैलिक्स गैला?, कारो क्विन्टेरो और अर्नेस्टो फोन्सेका कारिल्लो-मे से प्रत्येक ने अरबों डॉलर इकट्ठे कर लिए थे। फैलिक्स गैला? कोकीन का प्रमुख तस्कर था और वह दक्षिण अमरीका के देशों, विशेषतः पेरू और कोलंबिया की कोकीन अमरीका मे भारी मात्रा मे पहुंचाता था। भांग के खेत संयुक्त राज्य अमरीका की मादक-द्रव्य निरोधक एजेंसी का मैक्सिको मुख्यालय ग्वादालाजारा में था। मई, 1982 में एजेंसी के एक जासूस ने उसे एक ऐसी खबर दी, जिससे एजेंसी में खलबली मच गयी। जासूस ने बताया कि ग्वादालाजारा से कोई 200 मील उत्तर-पूर्व की ओर सान लुई पोटोसी प्रांत के 45 प्रमुष कोकीन-तस्कर मिगेल एंजेल पैतिरस पैसा, जो पेरू और कोलमिया की कोकीन अमरीका में पहुंचाता था। - -- लगभग 220 एकड क्षेत्र में भाग की खेती लहलहा रही है। जासूस ने यह भी बताया कि इस खेती को कुओ के पानी से सींचा जा रहा है और भाग के पौधे 5 फुट की ऊंचाई तक जा पहुंचे है। उसके अनुसार इन खेतों के मालिक कारो क्विन्टेरो, अर्नेस्टो फोन्सका तथा एक तीसरा भागीदार थे। अमरीकी एजेटों को इस सूचना पर सहज ही विश्वास नहीं हुआ, लेकिन उसके बाद उन्होंने उसकी जांच करने का निश्चय करके गुप्त रूप से उस क्षेत्रका हवाई सर्वेक्षण किया। सूचना एकदम सही थी, भांग के खेत ठीक वही और उतने ही क्षेत्र में लहलहा रहे थे। एजेंटों ने खेतो केचित्र खींचे और उन्हें मैक्सिको में संयुक्त राज्य के दूतावास को सौप दिये। राजदूत ने वे प्रमाण मैक्सिको सरकार के सामने रखे। अकाट्य प्रमाणों के प्रकाश में सरकार'खोजो और नष्ट करो' के आदेश जारी करने के लिए विवश थी। मैक्सिको के सैनिक और पुलिस अधिकारी डी.ई.ए. के एजेंटो को साथ लेकर हैलीकॉप्टरों द्वारा नियत क्षेत्र में जा पहुंचे। उस छापे से उन्हें 5,000 टन असाधारण रूप से उग्र तथा नि:ज गाजा प्राप्त हुआ। सन् 1984 के आरंभ मे पुनः ऐसा अवसर आया जब डी.ई.ए. (ड्रग एन्फोर्समेंट एजेसी अर्थात् मादक-द्रव्य निरोधक एजेंसी) के एक जासूस ने उसे यह सूचना दी कि ग्वादालाजारा के मादक-द्रव्य सरदारों ने जकातेकास, डरागों और चिहुआहुआ प्रांतो के हजारों एकड़ क्षेत्र में भांग की खेती में पूंजी लगाने के लिए एक सिडीकेट का गठन किया है। डी.ई.ए. के एजेटो ने एक प्राइवेट विमान में गुप्त रूप से उस क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया। इस बार भी सूचना सही निकली। उसके बाद उन्होंने उस खेती के बारे में मैक्सिको की सघीय पुलिस को सूचित किया। प्रष्ट पुलिस ने तस्करों को छापे की अग्रिम सूचना दे दी और वे छापा पड़ने से पहले ही उस क्षेत्र से बच निकले। इस छापे से केवल 20 टन गांजा हाथ लगा, क्योंकि पौधे पूरी तरह परिपक्व नहीं हो पाये थे। 46 तीसरी बार नवबर, 1984 में मैक्सिको शहर स्थित डी.ई.ए. कार्यालय मे ऐसी सूचनाएं आने लगी कि चिहुआहुआ रेगिस्तान के एक बड़े क्षेत्र मे गांजे की खेती की जा रही है तथा वहीं एक प्रशोधन प्रयोगशाला भी स्थापित की गयी है। मैक्सिको और अमरीकी अधिकारियों ने मिलकर पांच दिन बाद उस खेती पर छापा डाला। वहां उन्हें सिंचित खेत, बड़ी-बड़ी बैरके और पत्ती सुखाने के शेड मिले। लगभग उसी समय उन्होने दो अन्य गांजा-फार्मों का पता लगाया। वह एक अविश्वसनीय दृश्य था-एक ही स्थल पर उच्च कोटि का 10 हजार टन गांजा मौजूद था। भांग के वे खेत मुख्यतः कार्लो क्विन्टेरो के थे, जो डी.ई.ए. की सावधानी के कारण इससे पहले सान लुई पोटोसी तथा ज़कातेकास में भारी घाटा उठा चुका था। ग्वादालाजारा में 18 बड़े मादक-द्रव्य माफिया गिरोहों के अड्डे थे और वह तेजी से संसार का सर्वप्रमुख मादक द्रव्य तस्करी केन्द्र बनता जा रहा था। मैक्सिको के मादक-द्रव्य सौदागर अब इस कठोर यथार्थ को समझते जा रहे थे कि यदि उन्होने ग्वादालाजारा में डी.ई.ए. के एजेंटों को न कुचला तो वे मादक-द्रव्यों के व्यापार में मुनाफा नही कमा सकेंगे। माफिया की चोट अब माफिया ने वापस चोट करने का फैसला किया। जनवरी, 1985 में उन्होने डी.ई.ए. के एक एजेंट की खड़ी हुई कार को 30 राउंड गोलियों से छलनी कर दिया। माफिया ने मैक्सिको की संघीय पुलिस के साथ एक समझौता किया, जिसके अनुसार पुलिस ने माफिया को मैक्सिको स्थित डी.ई.ए.एजेंटों की शिनाख्त करा दी। मैक्सिको की सघीय पुलिस के अध्यक्ष मैनुअल इबारां रेरा और फैडरेल्स नामक सशस्त्र बल के मुख्य कमांडेंट अन्डिो पेवन रेयेस को मादक-द्रव्य सौदागरों की ओर से नियमित वेतन मिलता था। उन्होंने इन सौदागरो को यह समझा दिया कि ग्वादालाजारा स्थित डी.ई.ए. एजेटो में उनका सबसे कट्टर शत्रु एनरीक कामारेना है, जिसका छद्म नाम किकि था। एनरीक मैक्सिको से मादक-द्रव्य तस्करी समाप्त करने पर तुला हुआ था। 7 फरवरी, 1985 बृहस्पतिवार को दिन में 2 बजे एनरीक ग्वादालाजारा के अमरीकी कौंसुलेट भवन से निकलकर अपने पिकअप ट्रक की ओर बढ़ा। उसने अपनी चाबी से चोर-अलार्म बद किया और दरवाजा खोला, लेकिन ड्राइवर की सीट तक पहुंचने तथा दोतरफा रेडियो हाथ में उठाने से पहले ही (जिससे कि वह शहर के अन्य डी.ई.ए. एजेंटो को दुर्घटना की सूचना दे पाता) उसे पांच व्यक्तियों ने घेर लिया, जिनमें एक मादक-द्रव्य तस्कर, दो जैलिसको राज्य के पुलिसकर्मी तथा दो पेशेवर हत्यारे थे। उनमे से एक-सैमुएल रामीरेज़ राजो ने उसे मैक्सिको के गृह मंत्रालय की गुप्तचर पुलिस फैडरल सिक्योरिटी डायरेक्टोरेट (संघीय सुरक्षा निदेशालय) का प्रतीक चिह्न (वैज) दिखाया। डी.ई.ए. के एजेट जानते थे 47 माफिया-सरदार रेफेस कारो विवन्टेरो, जो पुलिस को 2,70,000 डॉलर की पूस का आश्यासन देकर मैषिसको से सुरक्षित थाहर निकल गया। कि सघीय सुरक्षा निदेशालय वस्तुतः मैक्सिको के मादक-द्रव्य सौदागरों की प्राइवेट सेना है। रामीरेज़ ने एनरीक से कहा कि कमांडेट उससे मिलना चाहता है। एनरीक को अपनी जान के खतरे का अहसास होने से पहले ही उन लोगो ने उसे धर दबोचा और अटलांटिक फॉक्सवैगन में पटक दिया। रामीरेज ने एनरीक के सिर पर एक जॉकेट डाल दी और ड्राइवर गाड़ी को दौड़ाने लगा। डी.ई.ए ने अगले दिन मैक्सिको सरकार को सूचित किया कि उसका एक एजेट गायब हो गया है और उससे ऐसा कडा प्रबंध करने को कहा कि कोई भी मादक-द्रव्य सौदागर देश छोडकर न जाने पाये, परंतु मैक्सिको पुलिस ने एनरीक की व्यापक तलाश करने के बजाय डी ई.ए. को गुमराह किया तथा कुख्यात मादक-द्रव्य सरदारो को देश से बाहर जाने दिया। डी.ई.ए. एजेंटों द्वारा सुराग मिलने पर मधीय पुलिस के मुख्य कमांडेंट पेवन रेयेस को हवाई अड्डे पर संभाल लिया, परंतु क्विन्टेरो को गिरफ्तार करने के बजाय वह उसे गले मिला और 6 करोड़ मैक्सिकन पैसो (लगभग 2,70.000 डॉलर) की घूस का आश्वासन मिलने पर उसने उस तस्कर को मैक्सिको से बाहर जाने दिया। इसी प्रकार 14 फरवरी को डी.ई.ए. के एजेटो ने पता लगाया कि होंडुरास का तस्कर तथा कोकीन की तस्करी मे फैलिक्स गैलार्डो का सहयोगी जुआन मट्टा वैलेस्तेरोस मैक्सिको नगर के एक उपनगर में है। उन्होंने संघीय पुलिस निदेशक इवारां को उसके छिपने के स्थान का पता बता दिया, परतु इवारी ने उसे नहीं पकड़ा और इतना ही नही, दो दिन बाद मैक्सिको से भाग जाने दिया। 48 - तना की कहानी 5 मार्च की शाम को एक तरुण ग्रामीण जव एक पशुपालन केन्द्र के पीछे से जरा तो उसे हवा के झोंके के साथ सड़े हुए शव की दुर्गध आयी। सड़क से कुछ न की दूरी पर उसे प्लास्टिक के दो बड़े से थैले एक झाडी-रहित स्थल पर खायी दिये। उसने इस बारे में स्थानीय पुलिस अध्यक्ष को तुरंत सूचित कर या। थैलों से पुलिस ने दो लाशे बरामद की, जो सड़ने के कारण काली पड़ गयी । यह जानकारी फौरन ही मुख्य कमांडेंट पेवन रेयेस को दे दी गयी, परंतु उसने .ई.ए. को इस बारे में सूचित नहीं किया। अगले दिन सवेरे 7 बजे मैक्सिको टेलीविजन ने यह समाचार प्रसारित किया सड़क के किनारे से प्राप्त दो थैलों से एनरीक कामारेना तथा विमान चालक वाला की लाशें मिली हैं। जावाला का अपहरण एनरीक के अपहरण के दो घंटे द किया गया था। वह मैक्सिको का विमान चालक था। उसके अपहरण तथा तना और हत्या के पीछे यह कारण था कि वह पिछले कुछ समय से डी.ई.ए. के नए अंशकालीन विमान चालक के रूप में काम कर रहा था। हत्या से पहले एनरीक को बर्बरतापूर्वक यातनाएं दी गयीं। उसकी छाती के यीं ओर की तीन पसलियां टूटी हुई थीं। उसकी गुदा में ऐसे चिह्न थे कि उसमें बेई वस्तु, संभवतः लकड़ी, सी गयी थी। उसकी खोपड़ी का बायां भाग भीतर ने धंस गया था। उसके हाथ-पांव कसकर बांध दिये गये थे और उसके शरीर पर इसवारों द्वारा पहनी जाने वाली कमीज थी। उसका शव-परीक्षण करने वाले उक्टरों को संदेह था कि उसे जिंदा ही दफना दिया गया था तथा बाद में उसका शव मीन मे से निकालकर जल्दी-जल्दी में सड़क के किनारे पटक दिया गया था। च्चाई छिपाने की कोशिश संयुक्त राज्य अमरीका की सरकार को इस बारे में तनिक संदेह न था कि नरीक कामारेना के अपहरण, उसे सताये जाने और उसकी हत्या के पीछे क्सिको पुलिस की सहमति तथा सक्रिय मदद थी। उसने अपना यह निष्कर्ष क्सिको सरकार के सामने रख दिया। इसके परिणामस्वरूप जैलिसको प्रांत के रात पुलिसकर्मियों तथा छः भूतपूर्व पुलिसकर्मियो को गिरफ्तार कर लिया गया। गरफ्तार किये गये लोगों में हत्याओ की छानवीन करने वाले दस्ते का कमांडेंट ब्रिएल गोजालेज़ भी था। जैलिसको सरकार की ओर से एनरीक की हत्या के मामले की छानवीन उसने ही की थी। मैक्सिको के अधिकारी गोंज़ालेज़ को जीवित रहने देते तो वह सच्चाईप्रकट कर सकता था। वह अगले दिन शाम तक ही मर गया। उसकी शव-परीक्षा से बात हुआ कि उसकी मृत्यु पैनक्रियाज़ के भारी रक्तस्राव के कारण हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि उसकी हत्या पिटायी से हुई। गिरफ्तार किये गये दो अन्य लिसकर्मियों ने यह स्वीकार किया कि एनरीक के अपहरण में वे भी शामिल थे 49 एनरीक कामारेगा अर्नेस्टो फोन्सेका कारिल्लो तथा एक तीसरे पुलिसकर्मी ने कहा कि वह भी एनरीक के अपहरण में शामिल था। जव मैक्सिको कीसरकार दोपी व्यक्तियो का पता लगाने और उन्हें सजा देने में विफल हो गयी तो जांच का काम अमरीका सरकार ने अपने हाथ में ले लिया। अमरीका के न्याय विभाग ने 6 जनवरी, 1988 को लॉस एजिल्स में एक मुकदमा दायर किया और एनरीक की हत्या के लिए 9 व्यक्तियो के विरुद्ध आरोप-पत्र दाखिल किये, जिनमें कारो क्विन्टेरो, फोन्सेका और पेवन रेयेस भी शामिल थे। उस वर्ष सितवर के अंत मे लॉस एंजिल्स की सघीय अदालत में एक जूरी ने जैलिसको के भूतपूर्व पुलिसकर्मी राउल लोपेज़ अलवारेज, कारो क्विन्टेरा के एक सहकर्मी रेने मार्टिन वर्दगो उरक्यूइदेज़ तथा लॉस एंजिल्स के एक सजायाफ्ना मादक-द्रव्य तस्कर जीसस फैलिक्स गुटिएररेज़ा को एनरीक कामारेना की हत्या में सहयोग देने के लिए दोषी ठहराया। मैक्सिको में मादक-द्रव्य तस्करी के दुर्ग मे सेध लगाने में सबसे बड़ी सफलता अप्रैल, 1989 के मध्य में उस समय मिली, जब मैक्सिको सरकार मादक-द्रव्य निरोधक एजेटो के एक विशिष्ट दस्ते (एलीट स्क्वैड) ने देश के चोटी के तस्कर मिगेल एंजेल फैलिक्स गैला? को बंदी बनाया। गैला? ग्वादालाजारा मादक द्रव्य माफिया का बेताज बादशाह रहा है। वह हर महीने मयुक्त राज्य अमरीका में तम्करी से चार टन कोकीन भेजता था। मैक्सिको के भ्रष्ट पुलिस अधिकारी उससे डरते और उसका बचाव करते थे। उसने अपना मादक-द्रव्य साम्राज्य 15 वर्ष तक अयाध रूप से चलाया। S0 मादक द्रव्य सौदागरों के धंधे पर उनकी नजरबंदी से कोई अंतर नहीं पड़ता। अर्नेस्टो फोन्सेका कारिल्लो, रेफेल कारो क्विन्टेरो तथा फैलिक्स गैला? मैक्सिको शहर की संघीय जेल की एक सुसज्जित कोठरी से अपने-अपने आर्थिक साम्राज्य का संचालन करते रहते हैं। मैक्सिको में मादक-द्रव्य माफिया ने भयकर शक्ति प्राप्त कर ली है। मैक्सिको के उत्तरी नगर मोन्टेरी मे 'एल नौतें' नामक दैनिक समाचार-पत्र का प्रकाशक अलेज़ाद्रो जुनको दे ला वेगा कहता है कि उसकी गणना के मुताबिक मादक-द्रव्यों की तस्करी की छानबीन तथा इस गंदे धधे में सहायता देने वाले राजनीतिज्ञो और न्यायिक तथा पुलिस अधिकारियों की आलोचना करने वाले संवाददाताओं का मनोबल तोड़ने के लिए सन् 1983 से सन् 1988 तक माफिया ने 29 पत्रकारों की हत्याएं की। प्रेस का मत है कि मैक्सिको में मादक-द्रव्यो की तस्करी में वृद्धि के साथ ही हत्याओ मे भी वृद्धि हुई है। सन् 1988 में हुई हत्याओ से जनमानस को जो आघात पहुंचा है, वह अभी शात नहीं हुआ है। 20 अप्रैल, 1988 को मिरांडा स्पष्टवादी साप्ताहिक ज़ेटा के कॉलम-लेखक हैक्टर फैलिक्स की हत्या एक ऐसा ही आघात पहुंचाने वाली हत्या है। मिराडा राजनीति और मादक-द्रव्य माफिया की साठगांठ के बारे में बहुधा लिखा करता था। मिरांडा को आमतौर पर 'मिराडा शेर' कहा जाता था। 20 अप्रैल को जिस समय वह अपनी कार में कार्यालय जा रहा था। एक अन्य कार उसकी बगल से निकली, जिसमें से उस पर गोली का अचूक निशाना साधा गया और वह मर गया। मैक्सिको के नये राष्ट्रपति कार्लोस सेलिनास दे गोरी ने सन् 1989 में पद-ग्रहण करने के उपरांत हजारों पुलिसकर्मियो को बर्खास्त कर दिया। वे पिछले दो दशकों से देश मे अबाध चली आ रही मोदक-द्रव्य तस्करी को रोकने के लिए भरसक चेष्टा कर रहे है, तथापि मैक्सिको आज भी हेरोइन और गांजे के मामले में संयुक्त राज्य अमरीका का पहले नंबर का स्रोत बना हुआ है तथा कोलविया, पेरू एवं अन्य दक्षिण अमरीकी देशों से संयुक्त राज्य अमरीका के बाजारों में पहुंचने वाली कोकीन का एक तिहाई भाग मैक्सिको के मार्ग से भेजा जाता है। मैक्सिको ने एनरीक की हत्या के मामले की जांच जनवरी, 1990 में मैक्सिको सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले के बाद वद कर दी, जिसमें रेफेल कारो क्विन्टेरो और अर्नेस्टो फोन्सेका कारिल्लो को उस वर्बर हत्या के लिए दोषी ठहराया गया है, परंतु लॉस एंजिल्स की एक संघीय ग्रांड जूरी अभी तक कामारेना की हत्या के मामले की छानबीन कर रही है। अमरीकी स्रोतों के अनुसार इस छानबीन में मैक्सिको के संघीय सुरक्षा निदेशालय के भूतपूर्व मुखिया जोस अंतोनियो जोरिल्ला पेरेज़, संघीय मैक्सिको पुलिस के भूतपूर्व मुखिया मैनुएल इबारां हेरेरा तथा मैक्सिको के मादक-द्रव्य निरोधक कार्यक्रम के संचालक मिगेल अल्दाना इबारां के विरुद्ध लगाये गये भ्रष्टाचार और हेराफेरी के आरोपों पर ध्यान दिया जा रहा है। 51 " कोलंबिया: मैडेलिन माफिया "म सरकार के तथा उन सब लोगों के विरुद्ध पूर्ण और निरपेक्ष युद्ध की हैं है।"-यह घोषणा कोलविया के मादक-द्रव्य तस्करों की है। कोलंबिया के राष्ट्रपति वर्जीलियो चारको वर्गास ने चुनौती स्वीकार कर ली है और बदले में घोषणा कर दी है, "हमे झुकाया नहीं जा सकता, हम उन शक्तियों पर विजयी होगे, जो हमारे लोकतंत्र को नष्ट और हमारी जनता को दास बना सकती हैं।' कोलंबिया इस समय जीवन-मरण के संघर्ष से जूझ रहा है और उसका अस्तित्व ही सकट में पड़ गया है। इस घोपित युद्ध में एक ओर कोलविया की समूची राजनीतिक, वैधानिक और सैनिक व्यवस्था है, जिसे जनता के विराट वहुमत तथा सयुक्त राज्य अमरीका का समर्थन प्राप्त है तथा दूसरी ओर मैडेलिन और काली में केन्द्रित वह कोकीन माफिया है, जिसका नेतृत्व हृदयहीन हत्यारे तथा शक्तिशाली मादक द्रव्य सौदागरों के हाथों में है। कोलविया मे तस्करों की शृंखला यहुत लंबी है। सबसे पहले वहा पन्ने की तस्करी शुरू हुई, उसके बाद गांजे की तथा अब कोका पौधे से प्राप्त होने वाले मफेद पाउंडर-कोकीन की, जिसके लिए अमरीकावासी भारी रकम चुकाने को तैयार रहते हैं। कोलविया के मादक-ट्रव्य ने सन् 1970 के दशक मे आकार ग्रहण किया तथा अन्य दक्षिण अमरीकी देशों में बनने वाली कोकीन की सरीदारी, प्रशोधन, डिव्याचंदी, निर्यात और विक्री का धंधा शुरू कर दिया। कोलविया के दौमादक द्रव्य व्यापारिक-संस्थानों में मैलिन संस्थान सबसे पुराना है और उसने अपना धंधा भारी मात्रा मे फैला लिया है। उसे अन्य दक्षिण अमरीकी देशों से कोकीन की सरीद से संतोप नहीं हुआ, अतः उसने पहली बार सन् 1980 के दशक में कोलविया के विशाल क्षेत्रो में कोका की खेती शुरू कर दी तथा दशक के अंत में पैर और बोलीविया के बाद बोलविया कोका के उत्पादन के मामले में विश्व का तीसरा सबसे यहा देश बन गया है। मैलिन-व्यापारिक- मस्थान ने जैसे ही गोवीन के व्यापार में गिरावट देसी, वैसे ही एक नया मादक द्रव्य ओक तैयार कर हाला, जो चोवीन मै तैयार किया गया एक घातक द्रव्य है तथा अपने मादक द्रव्य याजार को अत्यधिक विस्तृत कर लिया। ककी एर यार प्रयोग में आने वाली मात्रा कम सचीली होने के कारण वह अमरीया तथा पश्चिमी युरोप के निचले-आयवर्ग-याजार में गहरायी तक फैल गयी।
कोसधिपा के राष्ट्रपति यर्जीलियो पारका वर्गास, जिन्होंने शक्तिशाली मादक-द्रव्य के खिलाफ जंग छेड़ दी है। कोलविया में प्रतिवर्ष औसतन 400 से 500 टन कोकीन का प्रशोधन होता है, जिसका लगभग 80 प्रतिशत सयुक्त राज्य अमरीका के मादक-द्रव्य बाजार मे विक जाता है तथा शेष कनाडा और युरोप चला जाता है। वास्तव मे कोलबिया के मादक-द्रव्य व्यापारिक-संस्थान सही मायने में संस्थान नहीं है। वे ला कोसा नोस्त्री की भांति सुबद्ध संगठन नहीं है। वे माफिया गिरोहों के ढीले-ढाले और निरंतर परिवर्तनशील संस्थान हैं, जो मुनाफे और खतरे दोनो में भागीदार होते हैं। रीति-नीति कोकीन व्यापार के व्यापक जाल में 20,000 से अधिक कोलंबियाई लिप्त हैं। अमरीकी सरकारी अधिकारियों का विचार है कि उनके देश में 300 कोलवियाई गिरोह मादक द्रव्यो के व्यापार मेलिप्त हैं। प्रत्येक गिरोह का मुखिया कोलवियाई होता है, जो व्यापारिक-संस्थान के सरदार का प्रतिनिधित्व करता है। संस्थान की शाखाओं के कार्यकर्ता बहुत कुछ व्यावसायिक, व्यवहार-कुशल और लचीले होते हैं। वे पुलिस की चौकस आंख से बच निकलने में भी बहुत कुशल होते है तथा यदि वे पकडे भी जायें तो कानन के समक्ष उनके बचाव के लिए सस्थान की ओर से अमरीका के चोटी के वकीलो को भाडे पर लिया जाता है। कोलंबियाई गिरोहों में 5 से 50 सदस्य होते हैं, जो आमतौर पर आत्म-निर्भर इकाई के रूप में कार्य करते हैं तथा कोलंबियाई मादक-द्रव्य सौदागर अमरीका में अपने प्रबंधको के मार्फत काम करते है। ये माफिया गिरोह चुस्त होते है और गोपनीयता बनाये रखते हैं। वे अंतर्महाद्वीपीय- र-स्तर पर कार्य करते है। - S3 तस्करी अभियानो का सावधानीपूर्वक आयोजन किया जाता है। एक अवसर पर माफिया ने मियामी के एक आयात-निर्यात व्यापारिक-संस्थान के साथ 2,500 किलोग्राम कोकीन केले के लदान में छिपाकर ले जाने का सौदा किया। माफिया के विश्वस्त कार्यकर्ता हर कदम पर लदान पर निगाह रखे रहे, परंतु मियामी में एक सजग अमरीकी सीमाशुल्क निरीक्षक चाल को भांप गया। इसके बाद संघीय एजेटो ने मियामी से न्यूयार्क और शिकागो तक उसका पीछा किया। शिकागो पहुचने पर उस लदान का मूल्य कम से कम 10,000 डॉलर प्रति किलोग्राम के थोक भाव पर 2 करोड 50 लाख डॉलर हो गया। मादक-द्रव्य संस्थानों के व्यापार के विराट स्वरूप की कल्पना इस आधार पर की जा सकती है कि संघीय एजेंटो (पुलिस) ने कैलीफोर्निया के एक गोदाम से एक साथ 20 टन कोकीन पकड़ी तथा हार्लिंगटन, टैक्सास के एक फार्म-हाऊस से । टन कोलबियाई माफिया अत्यत अनुशासित तथा गुप्त रीति से काम करने तथा लुका-छिपी में पारंगत है। उसका संगठन ऊपर से नीचे की ओर सीढ़ी-दर-सीढ़ी हुआ है। चोटी पर प्रवधक हैं, जो अधिकांशत. दक्षिण फ्लोरिडा में रहते हैं। उनके नीचे यातायात-प्रबंधक, वितरक और काले धन की धुलाई करने वाले लोग हैं, जो न्यू हेवेन से पोर्टलैड तक सब कही फैले हुए हैं। इसके बाद तीसरी श्रेणी है, जिसमे हजारों श्रमिक कोलवियाई माल की ढुलाई, इधर-उधर लाने-ले जाने तथा पहरे आदि का काम करते हैं। लॉस एंजिल्स हैराल्ड एक्जामिनर नामक पत्र का अनुमान है कि लॉस एंजिल्स क्षेत्र मे रहने वाले कम से कम 6,000 कोलवियाई मादक-द्रव्यों के व्यापार में लिप्त है तथा संघीय सरकार के स्रोतों के अनुसार 5,000 कोलवियाई यही काम मियामी क्षेत्र में कर रहे है। कोलविया से लॉस ऐंजल्स और न्यूयार्क तक मादक द्रव्य संस्थानों के क्रियाकलाप का एक ही नमूना होता है। तस्करी, वितरण अथवा काले धन की धुलाई में निपुण अनेक उप-समूह अपने-अपने कार्य में लगे रहते हैं। आमतौर पर कोकीन का भडार तथा धन अलग-अलग रखे जाते हैं। खरीदारों को मुख्य गोदामों अथवा नकदी-गणना केन्द्रो पर जाने का अवसर कभी नहीं दिया जाता। इन दोनों का पता जानने वाले माफिया-सदस्य इने-गिने ही होते हैं। ऐसे लोगो को पुलिस की उपस्थिति को मापने तथा उसके धेरै से बच निकलने का प्रशिक्षण दिया जाता है। फोन के इस्तेमाल में बहुत सावधानी बरती जाती है। व्यापार कभी भी किसी एक कार्यालय के फोन पर नहीं किया जाता, जिससे कि फोन टेप होने की दुविधा से वचा जा सके। सुरक्षा प्रबंध सूप कड़े रहते हैं। एक छापे मे संघीय एजंटो योजूम फर्नीचर नामक कंपनी का पता चला जिसे काली संस्थान न्यूयार्क के क्वीन क्षेत्र में चलाती थी। 4 जनवरी, 1989 को एजेटों ने जम के एक गोदाम से एक करोड 90 लाख डॉलर नकद बरामकिये। यह उस क्षेत्र के गणना केन्द्रो का मुख्यालय मरीसा था, जिस पर कारें और ऐसे ट्रक तैनात 54 थे, जिनमें कोकीन और नकद राशियों के लिए गुप्त तिजोरिया बनी थीं। इनके ड्राइवरों को नकली लाइसेस दिये गये थे। न्यूयार्क के इस मुख्य गणना केन्द्र से दो विल-गणक (मशीन), काफी मात्रा में रबर-बैड टेप और हिसाब-किताब के दस्तावेज प्राप्त हुए, जिनसे यह ज्ञात हुआ कि दो मास से भी कम समय के भीतर 4 करोड़ 40 लाख डॉलर राशि प्राप्त हुई है। संयुक्त राज्य अमरीका की संघीय पुलिस की सतर्कता के कारण कोलंबियाई संस्थानो के सामने मैक्सिको के मार्ग और माफिया का उपयोग करने की विवशता उत्पन्न हो गयी। कोलवियाई माफिया को मैक्सिको के तस्करों के साथ संबंध जोड़ना पड़ा, क्योंकि उन्हे मैक्सिको और संयुक्त राज्य की सीमा के सहारे-सहारे अमरीकी क्षेत्र का पूरा ज्ञान रहता है। लॉस एंजिल्स का एक सहायक संघीय अटॉर्नी सूसन ब्रायंट-डिएसन कहता है, "कोलवियाई मादक-द्रव्य संस्थान मैक्सिको के संगठनो को मादक द्रव्य सौंप देते है और वे उसे उत्तर दिशा में ले जाकर वापस कोलवियाई वितरण व्यवस्था को सौंप देते है।" कोलवियाई भादक-द्रव्य व्यापार का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष यह है कि वे कोकीन के परिशोधन में एक अनिवार्य पदार्थ अर्थात् रासायनिक द्रव्यो का आयात संयुक्त राज्य अमरीका से करते हैं। कोलवियाई पुलिस ने एक छापे मे 4,17,095 गैलन ईथर एसिटोन और मिथाइल वीटोन तथा 95 टन कोकीन पकड़ी, जो कोलंबिया, बोलीविया और पेरू के संयुक्त वार्षिक कोकीन उत्पादन के छठे हिस्से के बराबर थी। परिस्थिति की विडंबना यह है कि सयुक्त राज्य अमरीका जिस व्याधि से ग्रस्त है, उसके निर्माण के लिए मूलभूत कच्चा माल म्वय वही मुहैय्या कराता है। एक कोवियाई पुलिस कमाडर ने पत्रकारों को कोकीन-उत्पादन-संयत्र दिखाते हुए कहा, "यह प्रायः पूरा का पूरा संयुक्त राज्य से आया है और ये रसायन समूचे विश्व से आते है। लातीनी अमरीका केवल कोका की पत्तिया और श्रमिक मुहैय्या कराता है।" रसायनों को बड़ी-बडी दकियों अथवा 55 गैलन क्षमता वाले ड्रमो मे रखा गया था। ढोल एक के ऊपर एक 15 फुट ऊंचाई तक रखे हुए थे। कोलविया में ईथाइल ईथर के उत्पादन पर पाबंदी लगा दी गयी है और उसका आयात सरकार द्वारा नियमित किया जाता है। ईथाइल ईथर के 55 गैलन के एक ड्रम की कीमत संयुक्त राज्य में 500 डॉलर है, परंतु कोलविया पहुंचने पर वह 12,000 डॉलर मे पडता है। रसायन वाजील से भी खरीदे जाते है। पोटेशियम परमेगनेट चीन से आता है। समग्र युद्ध कोलवियाई मादक-द्रव्य सस्थानो के पास भली प्रकार प्रशिक्षित और सुसज्जित सेना है। ये सस्थान अपनी निजी सेनाओं के प्रशिक्षण के लिए भाड़े के विदेशी प्रशिक्षकों का उपयोग भी करते हैं। पुलिस ने इजरायली सेना के एक मैरेलिन मारक-नध्य संस्थान का एक शीर्थस्य सरवार जोस गोंजालो रोगीपुएल गाया, जिसने अपने मारमियों को पुलिस के विरुद्ध प्रशिक्षित कराने के लिए तीन की सेवाएं ली। रिजविस्ट तथा प्रति-आतकवाद-परामर्शदाता ले. कर्नल येइर क्लीन के निरीक्षण में आयोजित परा-सैनिक सत्र का एक वीडियो टेप पकडा है। क्लीनने यह स्वीकार किया कि वह प्राइवेट सुरक्षा गार्डो को छोटी-इकाई संवधी दाव-पेच सिखाने के लिए कोलंबिया गया था। कोलंबिया पुलिस का दावा है कि उसके पास इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि इस कार्य में कुछ ब्रिटिश और अमरीकी भडैत सैनिक-प्रशिक्षक भी लिप्त थे। जहां तक क्लीन का प्रश्न है, उसने सन् 1987 में कोलंबिया सरकार को इस बात के लिए फुसलाने की बार-बार चेप्टा की कि वह उसकी प्राइवेट सैनिक प्रशिक्षण फर्म 'हौड हाहनित' की सेवाओ का उपयोग करे, परतु वह अपने प्रयास मे सफल नहीं हुआ। सयोगवश बोगोटा में उसकी मुलाकात एक अन्य इजरायली कर्नल मारियोस्ट शोशानी से हुई। शोशानी कोलविया में व्यापार करता था। उसने ही क्लीन के केला व्यवसाय मे लगी एक फर्म की उस योजना में शामिल कराने के लिए बातचीत चलायी, जिसके द्वारा वह वामपथी छापामारों से अपनी ओर केले की आपूर्ति करने वाले अपने किसानो की सुरक्षा का प्रबंध करना चाहती थी, लेकिन वह सौदा पट नहीं सका। अतत उसने मैडेलिन मादक द्रव्य सस्थान के चोटी के सरदारो में से एक जोस गोजालो रोडीगुएज गाचा के साथ एक सौदा किया, जिसके अनुसार उसे तीन सप्ताह के सत्र वाले तीन प्रशिक्षण सत्रों का संचालन करने के लिए 8,00,000 डॉलर नकददिये जाने थे तथा इस राशि का भुगतान उसे संयुक्त राज्य अमरीका मे किया जाना था। क्लीन द्वारा दिये जा रहे प्रशिक्षण की खबर फूट निकली। इस पर बोगोटा-स्थित इजरायली दूतावास ने क्लीन को चेतावनी दी कि वह सकट में फस सकता है। यह सुनकर क्लीन अप्रैल मे बाजील के लिए खिसक लिया। उसके चले जाने के 2 सप्ताह बाद ही कोलवियाई सेना ने प्रशिक्षण केन्द्र पर चढ़ाई कर दी। - 56 वहा से उसे एक वीडियो टेप प्राप्त हुआ, जिसे उसने कोलवियाई टेलीविजन को सौंप दिया। अगस्त, 1989 मे कोलविया के राष्ट्रपति पद के लिए एक अग्रणी उम्मीदवार सिनेटर लुई कार्लोस गालान की हत्या के बाद उस वीडियो टेप का समूचे विश्व में प्रसारण किया गया। क्लीन आग्रहपूर्वक कहता है कि वह मादक-द्रव्यो के धंधे में लिप्त नहीं था। इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री यित्मिक शमीर ने भी मादक-द्रव्यों के गंदे धंधे मे एक इजरायली नागरिक की लिप्तता की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। कोलंबियाई मादक-द्रव्य तस्कर शस्त्रो के प्रयोग में प्रशिक्षित हजारों लोगों को अपने यहां नौकर रखते हैं और उन पर लाखों डॉलर खर्च करते हैं। वे प्राइवेट विमान चालकों की सेवाएं भी भाड़े पर लेते हैं, जिनमें से अनेक अमरीकी होते हैं। तस्करी की एक उड़ान से कोकीन पर 5 लाख डॉलर का मुनाफा होता है। अवैध माल से लदे विमानों की उडान मे निहित खतरे को ध्यान मे रखते हुए इस मुनाफे में से प्राइवेट विमान-चालकों को | लाख डॉलर तक का भुगतान किया जा सकता है। कोलविया के मादक-द्रव्य सस्थानो के बारे में एक अन्य चिंताजनक तथ्य यह है कि वे वाम तथा दक्षिण, दोनो पक्षो के आतंककारियों को आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं। अपराध और राजनीति के घातक सयोग ने कोलविया मे अराजकता की एक जघन्य स्थिति उत्पन्न कर दी है। कोलविया हिंसा की चपेट में आ गया है। अकेले सन् 1988 मे 14 से 54 आयुवर्ग के 20,000 कोलबियावासी मौत के घाट उतारे गये। यह कुल जनसंख्या का 7 प्रतिशत है। मादक-द्रव्य संस्थान कोलविया राज्य पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की योजना बना रहे है तथा अभी तक राष्ट्रीय भूमि क्षेत्र के 10 प्रतिशत भाग पर स्वामित्व अथवा नियंत्रण स्थापित कर चुके हैं। कोलंबियाई मादक-द्रव्य संस्थानो ने कोलंबिया सरकार तथा समाज के विरुद्ध समग्र तथा सपूर्ण युद्ध की घोषणा कर दी है। कोलविया की सेना का भूतपूर्व प्रधान सेनापति जनरल अलवारो वालेंसिया टोवार कहता है,"धीरे-धीरे हम युद्ध में हारते जा रहे है," तथा कोलविया के भूतपूर्व राष्ट्रपति बेलीसारियो बेताकर का मत है कि "हम एक ऐसे सगठन का सामना कर रहे है, जो राज्य की अपेक्षा अधिक सशक्त है।" यह बहुत स्वाभाविक है। मैडेलिन सस्थान मादक-द्रव्यो की अरवो डॉलर वार्षिक की कमाई के बल पर जनरल मोटर्स (व्यापारिक निगम) के समान धन-संपन्न तथा लिन अथवा इदी अमीन के समान निर्मम बन गया है। कोलवियाई मादक-द्रव्य सस्थानो ने कोलंबिया के प्राय. समूचे समाज को भयाक्रांत कर रखा है। कोलवियाई माफिया ने सन् 1978 से सन् 1989 की अवधि में 200 न्यायाधीशों तथा न्याविभाग के सहायको, 25 पत्रकारों, सैकड़ो पुलिसकर्मियो, एक न्यायमंत्री, एक महाधिवक्ता तथा राष्ट्र के चोटी के जांचकर्ता की हत्या कर डाली। जनवरी, 1988 में बोगोटा के एक न्यायाधीश को डाक से । पैकेट मिला, जिसमे एक अन्य न्यायाधीश के कार्यालय के बाहर उसकी हत्या का वीडियो टेप था, जिसे स्वयं हत्यारों ने तैयार किया था।
कोलंबिया का एक प्रमुख माफिया-सरसर पायलो एस्कोमार, जिसके एजेंट सोमंयियाई गुप्तचर सेवा एफ-2 के भीतर भी घुसे हुए हैं। उसी महीने मादक-द्रव्य सरदारो ने महाधिवक्ता कार्लोस मौरो होयोस की हत्या कर दी और एक भूतपूर्व राष्ट्रपति के बेटे का अपहरण कर लिया। राष्ट्रपति बारको स्वयं होयोस के अतिम सस्कार में भाग लेना चाहता था, परतु जब उसके विशिष्ट 'राष्ट्रपति-अंगरक्षको' ने स्पष्ट कह दिया कि वे उसकी सुरक्षा का आश्वासन नहीं दे सकते तो राष्ट्रपति को होयोस की मृत्यु पर खेद प्रकाशित कराके ही सतोष कर लेना पड़ा। मादक-द्रव्य सरदार इतने समर्थ हैं कि उन्होने न्यायमंत्री रोड्रिगो लारा बोनिल्ला जैसी महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय हस्ती का टेलीफोन टेप कर लिया। इस रहस्य का उद्घाटन राष्ट्र के चोटी के मादक-द्रव्य-जाचकर्ता कर्नल जेमे रामीरेज़ गोमेज ने सन् 1984 मे एक स्मरणपत्र मे किया था। इसके शीघ्र बाद ही मंत्री की हत्या कर दी गयी। 2 वर्ष बाद रामीरेज़ ने यह दावा किया कि कोलंबिया के प्रमुख मादक-द्रव्य सरदार पाबलो एस्कोबार ने कोलरियाई गुप्तचर सेवा एफ-2 के भीतर अपना एजेंट घुसा रखा है। इसके कुछ सप्ताह बाद ही रामीरेज़ की हत्या कर दी गयी। यह देखकर तरस आता है कि कोलंबिया का रोमन कैथोलिक चर्च मादक-द्रव्य सरदारों का प्रशंसक है। कार्डिनल अल्फोंजो लोपेज टूजिलो और बिशप डारियो कास्ट्रिल्लोन होयोस उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करते है। बिशप होयोस ने तो यहां तक स्वीकार कर डाला, "मुझे भी उनसे धन प्राप्त हुआ है और मैने उस धन को गरीबों को शंट दिया।" एक अन्य चर्च अधिकारी फादर इलियास लोपेरा कार्डेनास ने मैडेलिन में गरीबों के लिए घर बनाकर देने के लिए पाबलो एस्कोबार की प्रशंसा करते हुए कहा, "पावलो एस्कोचार के बारे मे मुझे जो भी व्यक्तिगत जानकारी है, उसके आधार पर मैं यह कह सकता हू कि पावलो एस्कोवार बहुत अच्छा आदमी है।" 58 'कोकीन के सरदारों का मुख्य हथियार हत्या है। 16 अगस्त, 1989 को चार दूकधारियों ने उच्च न्यायालय के मजिस्ट्रेट 39 वर्षीय कार्लोस वालेंसिया की कार र ऊजी सब-मशीनगन से गोलियां बरसायीं। वे मोटर साइकिलों पर आये और त्या करने के तुरंत बाद बचकर भाग गये। अगले दिन 7 सशस्त्र लोगो ने मैडेलिन 49 वर्षीय पुलिस कर्नल वाल्डेमार फ्रेंकलिन क्विन्टेरो की कार को घेरकर कार ने खिड़कियों में से उसके शरीर पर 50 गोलिया दागी और उसकी हत्या कर दी। अगले ही दिन 18 अगस्त को उदारवादी दल का राष्ट्रपति पद का रम्मीदवार 46 वर्षीय लुई कार्लोस गालान 5 हत्यारो की गोलियो से धराशायी हो या। गालान कोलंबिया की राजधानी बोगोटा के बाहर एक राजनीतिक रैली को बोधित कर रहा था। हत्यारे पेड़ों पर चढ़े हुए थे, उन्होंने गालान के 10,000 नमर्थकों की आंखों के सामने उसे भून डाला। गालान की हत्या के एक घंटे के भीतर राष्ट्रपति वारको ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर उपस्थित होकर घोषणा की, 'हम उस नासूर से छुटकारा पाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो एक राष्ट्र के रूप में हमारे अस्तित्व को नष्ट कर डालेगा।" राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय मोर्चावदी की स्थिति लागू कर दी और नागरिक अधिकारो का निलंबन कर दिया। उसने एक कार्यपालिका आदेश जारी करके संयुक्त राज्य अमरीका के साथ कोलंबिया की सन् 1979 की नागरिक-हस्तांतरण संधि को फिर से लागू कर दिया, जिसे कोलंबिया के सर्वोच्च न्यायालय ने सन् 1989 मे एक साधारण से वैधानिक मुद्दे पर रद्द कर दिया था। कोलंबिया की सेना और पुलिस ने राष्ट्रपति की घोषणा के तुरंत बाद 11,000 लोगों को गिरफ्तार कर लिया और मादक-द्रव्य सौदागरों की संपत्ति पर छापे डाले। मादक-द्रव्य सौदागरो ने भी सरकारी कार्यवाही को चुपचाप स्वीकार नही किया। उन्होने बदले मे तुरत चोट की। उदारवादी और विपक्षी रूढ़िवादी दलो के मैडेलिन कार्यालयो पर बमों के विस्फोट हुए। मैडेलिन रेडियो पर बमो के विस्फोट हुए। मैडेलिन रेडियो स्टेशन पर छोडे गये एक लिखित वक्तव्य मे माफिया ने घोषणा की कि "हमने सरकार के, औद्योगिक और राजनीतिक सत्ताधीशों के, हमारे ऊपर चोट करने और हमें तबाह करने वाले पत्रकारो, सरकार के हाथो विक जाने वाले न्यायाधीशों, नागरिको को विदेशी सरकार के हाथो में सौपने का आदेश देने वाले मजिस्ट्रेटो, संघ के राष्ट्रपति तथा उन सब लोगों के विरुद्ध समग्रे और संपूर्ण युद्ध छेड दिया है, जिन्होंने हमें सताया है और हमारे ऊपर आक्रमण किया है। जिन लोगो ने हमारे परिवारों का आदर नहीं किया, हम भी उनके परिवारों का आदर नही करेंगे।" वक्तव्य जारी करने वालों के नाम के स्थान पर लिखा था, "हम, जिन्हें विदेशी सरकार के हवाले किया जा सकता है।' राष्ट्रीय पुलिस निदेशक मिगेल अंतोनियो गोमेज़ पैडिल्ला कहता है, "यह एक समग्र युद्ध है। हम इन छुटभैय्यों को पृथ्वी पर से नेस्तनाबूद कर देंगे। 59 .
जनसाधारण ने, विशेषत विश्वविद्यालय छात्रों ने मादक द्रव्य सौदागरों के विरुद्ध सार्वजनिक तौर पर प्रतिरोध-कच का आयोजन किया। संस्थान के सरदारों ने धमकी दी कि कोलविया सरकार की ओर से सयुक्त राज्य अमरीका को सौंपे जाने वाले एक व्यक्ति के बदले में 10 न्यायाधीशों की हत्या की जायेगी। जुलाई, 1989 मे मैडेलिन के पुलिस-प्रमुख क्विन्टेरो ने रेनबो' नामक मादक-द्रव्य-विरोधी छापो मे कोकीन-प्रशोधन करने वाली 28 प्रयोगशालाएं तथा 11 टन कोकीन नष्ट कर दी थी। इसके कुछ समय पश्चात् ही क्विन्टेरो की हत्या कर दी गयी। वालेंसिया की हत्या इसलिए की गयी क्योंकि उसने एस्कोबार के विरुद्ध वारंट जारी करने का साहस दिखाया था। ऐसा करने वाला वह तीसरान्यायाधीश था। पहला न्यायाधीश कौसुएलो साकेज वारट जारी करने के कुछ माह पश्चात् नवबर, 1989 में कोलविया से भाग निकला और अब सयुक्त राज्य अमरीका के संरक्षण में है। दूसरी न्यायाधीश मारिया डियाज को उस समय गोली मार दी गयी, जब वह जुलाई, 1989 मे कार से अपनी अदालत की ओर जा रही थी। न्यायमूर्ति वालेसिया यह बात भली प्रकार जानता था कि एक-न-एक दिन उसकी हत्या की जायेगी। उसने अपनी पत्नी और सतान को ग्वाटेमाला में रहने भेज दिया था और वह माफिया द्वारा मार डाले जाने से पहले हर रात अलग घर में बिताता था। लुई कार्लोस गालान एक अन्य वीर पुरुष था। मार्च, 1989 में उदारवादी दल की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए उसके प्रतिद्वद्वी अर्नेस्टो सैम्पर पिज़ानो को माफिया द्वारा गंभीर रूप से घायल कर दिये जाने के बाद जव गालान से कहा गया कि मादक-द्रव्य सस्थान ने उसके सिर पर 5,000 डॉलर की कीमत लगायी है तो उसने इस कल्पना का खूब मजाक उडाया तथा हल्के-फुल्के शब्दो में कहा कि उसे यह जानकर निराशा हुई है कि उसके सिर पर इतना कम दाम लगाया गया है। इस घटना के 11 दिन बाद गालान को धराशायी कर दिया गया। सिनेटर अर्नेस्टो सैम्पर पिजानो कहता है कि उस पर एक बंदूकधारी ने 10 राउंड गोलियां चलायीं। उसकी जान उसकी पत्नी ने बचायी, जो स्वयं बंदूकधारी और पिजानो के बीच आ गयी और इसी बीच उसके अगरक्षक ने आक्रमणकारीको गोली मार दी। अर्नेस्टो मादक-द्रव्य संस्थानो से ही नहीं वरन् मादक द्रव्यों का सेवन करने वालों से भी अप्रसन्न है। अर्नेस्टो कहता है, "कोकीन के इस अतर्राष्ट्रीय जाल में दर्जनों राष्ट्र लिप्त हैं। संसार भर की कुल कोकीन की आधी मात्रा की खपत अकेले संयुक्त राज्य में होती है, उसे अपनी मांग घटानी चाहिए। मादक-द्रव्य सस्थान (संयुक्त राज्य से) अरबों डॉलर प्राप्त करते हैं, जिनके कारण हमें हिंसा का शिकार होना पड़ता है। न्यूयार्क तथा अन्य अमरीकी शहरों की गलियों में कोकीन का सेवन करने वालों ने ही गालान की हत्या की है और वे हम सबको मारे डाल रहे हैं। ....हमे विश्व-स्तर पर सहयोग की आवश्यकता है तथा कोकीन-जंजाल के समस्त पक्षों-सेवन, 60 उत्पादन, तस्करी, काले धन की धुलाई, कच्चे माल का उत्पादन, रसायनो का व्यापार-को नष्ट कर देना होगा। ....ईश्वर ने मुझे जीने का दूसरा अवसर दिया है और मैं इसका उपयोग देश को हिंसा से मुक्त कराने के लिए करना चाहता हूं। हमें इसके विरुद्ध संघर्ष करना होगा।" 'संघर्ष' केवल अर्नेस्टो का सकल्प नही है, यह उन मादक-द्रव्य-धनपतियों का संकल्प भी है, जिन्होने एक शक्तिशाली कार-बम का विस्फोट करके 2 सितंबर, 1989 को समाचार-पत्र 'एल एस्पेक्टोडौर' के बोगोटा कार्यालय को ध्वस्त कर दिया। इस विस्फोट मे 1 व्यक्ति मारा गया, 80 घायल हुए तथा समाचार-पत्र को 25 लाख डॉलर की क्षति पहुंची। इस विस्फोट से यह संकेत मिलता है कि मादक-द्रव्य-आतंकवाद ने अब 'प्रेस'को अपना निशाना बनाया है। दिसंबर, 1986 में मादक-द्रव्य सौदागरों के एक हत्यारे बंदूकधारी ने इसी समाचार-पत्र के संपादक गुइल्लर्मो कानो इकाजा की हत्या कर दी थी। 'एल एस्पेक् और' के बाद मैडेलिन में हुए बम विस्फोटों में एक पेंट फैक्टरी नष्ट हो गयी तथा सरकारी स्वामित्व वाले 11 बैंकों और पाच मदिरा-भंडारो को गंभीर रूप से हानि पहुंची। अगस्त मे तत्कालीन न्यायमंत्री मोनिका डे ग्रेफ के घर के बाहर एक कार-बम पकडा गया। तस्करों ने श्रीमती ग्रेफ को फोन पर धमकी दी, "हमारा अगला शिकार निश्चित रूप से तुम ही हो।" बाद में एक भूतपूर्व पुलिसकर्मी ने स्वीकार किया कि उसे ग्रेफ और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या के लिए पैसा दिया गया था। ग्रेफ इस घटना से इतनी अधिक भयभीत हो गयी कि वह अपने पति और 3 वर्षीय बेटे को साथ लेकर वाशिंगटन चली गयी तथा एक मास बाद उसने कोलंबिया के न्यायमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। मादक-द्रव्य सरदारों ने 19 नवंबर, 1989 को एक एवियान्स जैटलाइनर में एक बम रख दिया, जिसके विस्फोट से विमान मे सवार सभी 107 यात्री मारे गये न्यायमंत्री मोनिका के प्रेफ, गिसके उपर मादक-द्रप्य माफिया का रमाय इस कदर यदा कि उसने घराकर अपने पर से त्यागपत्रही दे दिया। 61 तथा इस जघन्य हत्याकांड के 24 घंटों के भीतर कोलवियाई गुप्तचर पुलिस के मुख्यालय के बाहर खड़ी एक बस में 500 किलोग्राम डायनेमाइट के विस्फोट से 500 व्यक्ति घायल हो गये और 59 लोग मारे गये। गुप्तचर पुलिस के मुखिया जनरल मिगेल माज़ा मारक्वेज़ के अनुसार, "विस्फोटका प्रभाव एक लघु अणुवम के समान था।" मादक-द्रव्य सौदागरों ने 25 जनवरी, 1990 को एवियान्स की एक अन्य उड़ान बोइंग-707 में टाइम-बम रख दिया, जिसके विस्फोट से विमान बोगोटा से न्यूयार्क के रास्ते में पृथ्वी पर आ गिरा और उसके 72 यात्री मारे गये एवं 89 यात्री बुरी तरह घायल हो गये। इस विमान दुर्घटना में बुरी तरह घायल एक प्रौढ़ का ऑपरेशन करते समय डाक्टर यह देखकर चकित रह गये कि घायल की बड़ी आंत सफेद पाउडर की छोटी-छोटी थैलियों से भरी हुई थी। उस पाउडर की जांच के बाद मादक-द्रव्य निरोधक दस्ते ने बताया कि उन थैलियो में मादक-द्रव्य थे। यह ज्ञात होते ही उस घायल पर पुलिस का पहरा विठा दिया गया। डाक्टरों ने बताया कि वह अपने शरीर के भीतर लगभग एक किलोग्राम मादक-द्रव्य ले जा रहा था। जरामिल्लो की हत्या मादक-द्रव्य संस्थान के एक बंदूकधारी ने कोलवियाई राष्ट्रपति पद के एक अन्य उम्मीदवार वामपंथी पैट्रियोटिक यूनियन के नेता 35 वर्षीय बर्नार्दो जराभिल्लो की गर्दन में चार गोलियां मारकर उसकी हत्या कर दी। जरामिल्लो पर गोली उस समय चलायी गयी, जबकि वह अपनी पत्नी और 13 अंगरक्षको सहित बोगोटा हवाई अड्डे पर विमान पकड़ने के लिए पैदल जा रहा था। दुर्भाग्यवश जरामिल्लो ने उस समय बुलेटप्रूफ ऑकेट नहीं पहन रखी थी। हत्यारे ने अखबार की ओट से एक अर्द्ध-स्वचालित राइफल से गोली चलायी। हत्यारे को जामल्लो के अंगरक्षको ने घायल कर दिया और पकड़ लिया। हत्यारे के तीन सशस्त्र साथी घटनास्थल से भाग निकलने में सफल हो गये। जरामिल्लो को अनेक वार धमकियां दी जा चुकी थीं और उसे यह बात मालूम थी कि मादक द्रव्य तस्कर उसे अपना शिकार बना सकते हैं, हालाकि वह संभवतः पहला कोलवियाई राजनीतिज्ञ था, जिसने मादक-द्रव्य तस्करों के साथ चर्चा का आह्वान किया था। पुलिस ने जरामिल्लो की हत्या का आदेश देने के लिए मैडेलिन मादक द्रव्य संस्थान के सरदार पावलो एस्कोबार को दोषी ठहराया। एस्कोबार ने इस आरोप को गलत बताया, परंतु 'गोज़ालो रोड्रिगुएज गाचा कमांडो' ने जरामिल्लो की हत्या की जिम्मेदारी सार्वजनिक रूप से स्वीकार की। पुलिस ने दिसंबर, 1989 में गोली मारकर गाचा की हत्या कर दी थी। गाचा कमांडो ने कोलवियाई मादक-द्रव्य माफिया के समस्त विरोधियों के विरुद्ध युद्ध जारी रखने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने घोषणा की है कि उनका अगला शिकार सेसार गाविरिया जिल्ला होगा। मादक-द्रव्य तस्करों द्वारा लुई । 62 " कार्लोस गालान की हत्या के बाद शासनारूढ़ उदारवादी दल की ओर से त्रुजिल्लो को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार मनोनीत किया गया है। मादक-द्रव्य सौदागर गाविरिया से विशेषतः इस कारण रुष्ट हैं कि उसने उन सौदागरो को संयुक्त राज्य के हाथों मे सौंपने का खुलेआम समर्थन किया। कमांडो ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि "गाविरिया भले ही 100 अंगरक्षक रखे अथवा अपने सिर तक बुलेटप्रूफ जॉकेट पहन ले, वह हमारा अगला निशाना है। भ्रष्टाचार कोलंबियाई मादक-द्रव्य माफिया ने अपनी विशाल धनशक्ति के बल पर कोलवियाई प्रशासन को खरीदने की कोशिश की है। एक अत्यत चिंताजनक समाचार यह है कि मैडेलिन-संस्थान ने होडुरास की सेना को घूस दी है। होडुरास कोलंबियाई कोकीन के लदानों के लिए एक प्रमुख अड्डा बन गया है। राष्ट्रीय पुलिस का कर्नल विक्टर ह्यूगो फेरेरा दावे के साथ कहता है कि काली पुलिस केले कर्नल ऑस्कर पेलेज़ कार्मोना के दो अंगरक्षक मादक-द्रव्य सरदार एस्कोवार के लिए भी काम करते रहे हैं। फेरेरा ने जैसे ही इस मामले की जाच करनी चाही, वैसे ही अचानक उसका स्थानांतरण कर दिया गया। इसके पश्चात् जब उसने प्रतिरक्षा मंत्री से इस मामले में चर्चा चलायी तो प्रतिरक्षा मत्री ने फेरेरा को झिड़क दिया। इसके शीघ्र बाद ही फेरेरा को मानसिक अस्थिरता के आरोप पर पद्च्युत कर दिया गया। फेरेरा को विश्वास है कि मादक -द्रव्यों के पैसे ने समूचे प्रशासनिक ढांचे को भ्रष्ट कर डाला है। मादक-द्रव्य सौदागर कोलवियाईन्यायपालिका को भ्रष्ट करने के लिए किस प्रकार के हथकंडे अपनाते हैं, इसका एक अन्य उदाहरण न्यायमूर्ति एदुआर्दो त्रियाना-प्रकरण है। न्यायमूर्ति त्रियाना कहता है कि जब उसने एल एस्पेक्टोडौर' के प्रकाशक गुइलर्मो कानो के आरोपित हत्यारे की गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया, तब मादक-द्रव्य सौदागरों ने उसके सामने यह प्रस्ताव रखा कि यदि वह उस मामले को खारिज कर दे तो वे उसे 2 करोड कोलंबियाई 'पैसो' अर्थात् 81,000 डॉलर की रकम देने को तैयार हैं। त्रियाना द्वारा यह प्रस्ताव अस्वीकार किये जाने पर पुलिस ने उसे बताया कि उसकी हत्या का ठेका 14 हत्यारो को दिया गया है। मादक द्रव्य संस्थानों का एक पुराना आलोचक कहता है, "वे यह दुविधा उत्पन्न कर देते हैं, यह घूस ले लो अथवा हम तुम्हें अथवा तुम्हारी पत्नी को या तुम्हारे बच्चों को मार डालेंगे। न्यायमूर्ति त्रियाना अंततः देश छोड़कर भाग गया। कोलवियाई राष्ट्रीय पुलिस के मुखिया जनरल जोस गुइल्ल्रमो मेडिना सांकेज पर आख रखने के लिए नियुक्त सैनिक टीम जब इस निष्कर्ष पर पहुंच गयी कि सांकेज़ तथा मादक-द्रव्य सरदारों-एस्कोबार और गोंजालो रोड्रिगुएज गाचा के बीच घनिष्ठ संबंध है, तब राष्ट्रपति वर्जीलियो वारको वर्गास ने सांकेज़ को पदमुक्त कर दिया। 63 ' मादक-द्रव्य संस्थानों की विशाल आय सचमुच अभूतपूर्व है। मादक-द्रव्य सौदागरो ने उसका निवेश कोलविया के निर्माण उद्योग तथा अन्य औद्योगिक उपक्रमों, विशेषत. मैडेलिन और काली में विलासितापूर्ण भवनों के निर्माण पर किया है। मैडेलिन के नये बहुर्माजले बनारस टॉवर में 10-10 लाख डॉलर के रिहायशी मकान है, जिनमे से प्रत्येक मे लटकते हुए छज्जे पर तरणताल बनाया गया है। वे लोग दूसरे उद्यमो की ओर आकर्षित हो रहे हैं तथा उन्होने कारखानों, रेडियो स्टेशनो, समाचार-पत्रो तथा बाजारो मे पूजी-निवेश चालू कर दिया है। देश की अनेक प्रमुख राष्ट्रीय सौकर (फुटबाल) टीमो के मालिक मादक-द्रव्य तस्कर है। कोलविया सरकार ने 4 अक्तूबर, 1989 को कोलवियाई मादक-द्रव्य सरदार जोस गोंजालो रोड्रिगुएज गाचा के 19 लक्जेमबर्ग वैकखाते जब्त किये, जिनमे 3 करोड़ 94 लाख डॉलर की रकम जमा की गयी थी। यह गाचा की संपत्ति पर छापों की शुरुआत थी। इन छापों से अकूत दौलत का पता चला है। अगले दिन संयुक्त राज्य न्यायविभाग ने इसी प्रकार की कार्रवाई शुरू की, जिसके फलस्वरूप स्विस बैंको में | करोड 3 लाख डॉलर, आस्ट्रियाई बैंकों में 59 लाख डॉलर, ब्रिटिश बैको मे 42 लाख डॉलर तथा संयुक्त राज्य के वैको में 20 लाख डॉलर की रकमे अवरुद्ध कर दी गयीं। इन छापो की शुरुआत गाचा के भतीजे अल्फोंजो रोड्रिगुएज़ मनोज़ की सपत्ति पर डाले गये छापे के फलस्वरूप हुई। इस छापे के दौरान पकड़े गये दस्तावेजों से इस रहस्य का उद्घाटन हुआ कि मादक-द्रव्य सौदागर गाचा के वित्तीय हिसाब-किताब का प्रबंध कोलविया के वित्त-विशेषज्ञ मौरीसियो विवेस के हाथों में था तथा उसे 8 करोड़ 10 लाख डॉलर की राशि निवेश के लिए सौंपी गयी थी, जिसमे से 2 करोड़ डॉलर पनामा के बैंको मे जमा किये जा चुके थे। पनामा उस समय तक जनरल नोरिएगा के प्रभुत्व में था। कोलंबिया की पुलिस और परा-सैनिक बलो ने मादक-द्रव्य सरदारो की सपत्ति पर छापे डालकर कोई 600 फार्म हाऊसो, विशाल भवनो, कोकीन-प्रशोधन प्रयोगशालाओं तथा अन्य जायदादों, 143 स्थिर पखो वाले विमानों, हैलीकॉप्टरो, सैकड़ों नौकाओ, कारों और ट्रको को अपने कब्जे में ले लिया। उन्होंने करेवियन-तटवर्ती उन दर्जनो हवाई-पट्टियो को बंद कर दिया, जिनसे विमानों द्वारा कोकीन संयुक्त राज्य को भेजी जाती थी। एस्कोबार की मिल्कियत वाले 1,000 एकड के एक फार्म-हाऊस में एक वन्यजीव पार्क है, जिसमें बौने हाथी, जिराफ तथा 2,000 अन्य दुर्लभ जीव हैं, जिन्हें अफ्रीका से अवैध रूप से लाया गया है। बोगोटा के उत्तर में स्थित ग़ाचा के विलास-महल मे स्फटिक की सीढ़िया और एक ऐसा स्नानागार-शौचालय है, जिसमें पानी के नलों की टोटिया 64 स्वर्णमंडित हैं तथा गाचा के लिए विशेष तौर पर बनाये गये रोयेदार टॉयलेट पेपर (पोंछने के कागज) का अच्छा-खासा संग्रह भी है, जिन पर प्रख्यात चित्रकारो के चित्रों की अनुकृतियां छापी है। मादक-द्रव्य संस्थानों के पास अकूत दौलत है। सन् 1985 में उन्होंने अपनी सरकार के सामने यह प्रस्ताव रखा था कि यदि वह उनके लिए आम माफी की घोषणा कर दे तो वे उसके बदले में देश पर चढ़े 14 अरब डॉलर के पूरे ऋण का भुगतान कर देंगे। सरकार ने उनका यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। कोलंबिया सरकार ने 1 अरब 20 करोड़ डॉलरो की धुलाई की योजना के सिलसिले में मैडेलिन मादक-द्रव्य संस्थान के वित्तीय मामलों के चोटी के जानकार एदुआर्दो मातिनेज़ रोमेरो को गिरफ्तार किया। यह रकम मादक-द्रव्यो की विक्री से प्राप्त हुई थी तथा इसे कृत्रिम आभूषणो तथा स्वर्ण-आभूषणो के व्यापार के खातों में जमा किया गया था। जैसा कि पीछे कहा जा चुका है कि मादक-द्रव्य संस्थानो की कुल थोक विक्री प्रतिवर्ष 5 अरब डॉलर तक पहुंच जाती है। ये संस्थान इस घातक व्यापार को पिछले 15 वर्षों से चला रहे है। मादक-द्रव्य सरदार कोलविया के अधिकारी मैडेलिन के एक प्रमुख व्यापारी तथा घोडा-पालन फार्म के स्वामी फावियो ओकोआ रेस्त्रेपो को मैडेलिन कोकीन संस्थान का जन्मदाता और पितामह मानते है। ओकोआ परिवार के कोकीन व्यापार की व्यवस्था फाधियो का बड़ा बेटा जॉर्जे लुई ओकोआ वास्क्वेज़ अपने दो भाइयों-बडे भाई डेविड ओकोआ वास्क्वेज और छोटे भाई फाबियो ओकोआ वास्क्वेज की मदद से संभालता है। Ir जार्ने सुई ओकाआ धास्श्वेज़ फारियो ओकाआ पास्पयेज़ कोलंबियाई गुप्तचर सेवा के अनुसार मादक-द्रव्य गिरोहो का नेतृत्व हृदयहीन अरबपति पावलो एस्कोबार गाविरिया, जोस गोंजालो रोड्रिगुएज़ गाचा, जॉर्ज ओकोआ वास्ववेज़, गिलबर्तो जोस रोड्रिगुएज ओरेजुएला और चंद अन्य लोगों के हाथों में है। ओरेजुएला काली मादक-द्रव्य संस्थान का मुखिया है। इस गदे धंधे में उसका भाई मिगेल एंजेल रोड्रिगुएज़ ओरेजुएला उसकी मदद करता है। पावलो एस्कोबार नवंबर, 1989 मे पकड़ा गया था तथा गाचा, उसका बेटा फ्रेड्डी और उनके 15 अंगरक्षक 16 दिसंबर, 1989 को कोलधिया के काटाजेना नगर से 60 मील दूर दक्षिण मे अपने फार्म-हाऊस पर पुलिस की गोलीबारी में मारे गये। मादक-द्रव्य संस्थानों के विरुद्ध युद्ध राष्ट्रीय पुलिस ने कोलंबिया के मादक-द्रव्य संस्थानों पर एक बड़ा छापा जनवरी, 1989 मे डाला। इस छापे को नाम दिया गया ऑपरेशन प्राइमावेरा' इसे कोलंबिया के इतिहास में कोकीन प्रशोधनकर्ताओं के विरुद्ध सबसे अधिक सफल अभियान समझा जाता है। इस अभियान के फलस्वरूप तीन स्थलों पर 8 कोकीन प्रयोगशालाओं का पता लगा। अभियान 10 दिन चला, जिसके दौरान 6.6 टन कोकीन का उत्पादन करने में सक्षम 26 संयत्र नष्ट किये गये। पुलिस ने 1.3 टन कोकीन और अभूतपूर्व मात्रा में रसायन पकड़े। कोलंबिया सरकार ने अपने देश के मादक-द्रव्य सौदागरों को संयुक्त राज्य सरकार के हाथों में सौंपने का मार्ग तस्करों में आतंक फैलाने के लिए अपनाया। सितंबर, 1989 में बोगोटा जेल में बंदी एक घुटे हुए अपराधी एदुआर्दो मातिनेज रोमेरो को संयुक्त राज्य के हवाले किया गया। उसके विरुद्ध अटलांटा की एक अदालत में मादक द्रव्य संस्थानों के लिए काले धन की धुलाई के आरोपों पर मुकदमा चल रहा है। कोलंबिया सरकारने मादक-द्रव्य बाजार को समाप्त करने तथा अपने देश में कोकीन का उत्पादन रोकने के सराहनीय प्रयासों में धन और युद्ध-सामग्री, दोनों की दृष्टि से सयुक्त राज्य सरकार का पूर्ण समर्थन प्राप्त किया है। राष्ट्रपति बुश कोलबिया को आपातकालीन सहायता के तौर पर 6 करोड़ 50 लाख डॉलर की सामग्री और सेवाएं देने पर सहमत हो गये, जिनमें छोटे विमान, हैलीकॉप्टर, पुलिस तथा मैनिक सामग्नी, कई दर्जन सलाहकार और कोलवियाई नागरिकों को उपकरणो के इस्तेमाल का प्रशिक्षण देने के लिए अनिवार्य कार्मिक शामिल हैं। संयुक्त राज्य का दायित्व संयुक्त राज्य की सरकार मादक-द्रव्य सरदारो केविरुद्ध संघर्ष में कोलंबिया सरकार की मदद महज इसलिए कर रही है कि कोलंबिया में तैयार की जाने वाली कोकीन तस्करी से संयुक्त राज्य में भेज दी जाती है तथा वह संयुक्त राज्य में समाज के बुनियादी ताने-बाने को नष्ट किये डाल रही है। मादक द्रव्य संस्थानों पर कोलविया की समग्र विजय में ही संयुक्त राज्य का हिन है। 66 राष्ट्रपति बारको ने मादक-द्रव्य समस्या की जिम्मेदारी स्पष्ट तौर पर संयुक्त राज्य में कोकीन की कभी तृप्त न होने वाली मांग पर डाली है। वे कहते है, "संयुक्त राज्य मे मादक-द्रव्यो का उपभोग कोलविया मे हिंसा पनपने का एक प्रमुख कारण बन गया है। न्यूयार्क, मियामी और शिकागो की गलियों में जब-जब कोई अमरीकी तरुण अपनी लत का मूल्य चुकाता है, तब-तब वह उस अपराध, आतंक और हिंसा की उस जजीर मे एक अतिरिक्त कड़ी बन जाता है, जिसने हमें इतनी भारी हानि और पीड़ा पहुंचायी है।" ज़ाहिर है कि जब तक मादक-द्रव्यो की मांग बनी रहती है, तब तक उनकी आपूर्ति बनी रहेगी। औसत कोलंबियाई यह महसूस करता है कि मादक-द्रव्यो ने कोलंबिया को जो क्षति पहुचायी है, उसकी जिम्मेदारी संयुक्त राज्य को उठानी चाहिए। युरोप की ओर मादक-द्रव्य तस्करों पर इतना भारी दवाव पड रहा है कि उन्हे कोकीन की यह महामारी युरोप को निर्यात करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। अगस्त, 1989 के अंतिम सप्ताह मे पश्चिमी जर्मनी की पुलिस ने मेरहेवेन के बदरगाह पर लदान के लिए लायी गयी 750 किलोग्राम उच्चकोटि की कोलंबियाई कोकीन पकड़ी, जो स्पष्ट तौर पर युरोप के बाजारो के लिए भेजी जा रही थी। अमरीकी डी.ई.ए. ने जर्मन पुलिस को यह जानकारी दी कि 'डॉन जुआन-5' नामक पनामाई मालवाहक जहाज पर जर्मनी के लिए कोकीन का लदान हुआ है। पश्चिमी जर्मनी की पुलिस ने मादक-द्रव्यों की पेटियां एक मोटर वाहन पर लादते हुए देखी, उसके बाद वह उन पेटियों के प्राप्तकर्ता को पकड पाने की आशा मे उस वाहन का पीछा करती रही, परतु जव वाहन का चालक पुलिस की निगाह से बचने की कोशिश करने लगा तो पुलिस को उस पर लदे हुए मादक-द्रव्यो को म्यूनिख के रास्ते मे ही पकड लेना पड़ा। युरोप में कोकीन का भाव सयुक्त राज्य के खुदरा भावों की अपेक्षा 5 गुना है, अतः युरोप माक-द्रव्यों का भारी मुनाफे वाला बाजार बन गया है। मादक-द्रव्यो की तस्करी के लिए हॉलैंड एक अन्य मार्ग बन गया है। हॉलैड की पुलिस ने मार्च, 1990 के आरंभ मे पैशन फल के रस के ढोलों (ड्रमो) मे छिपायी गयी 3.000 किलोग्राम कोकीन बरामद की। यह युरोप में अब तक पकडी गयी कोकीन का सबसे बड़ा लदान था। पुलिस ने 8 तस्करों को भी माल प्राप्त करते हुए पकड़ा। मादक-द्रव्य समस्या ने अत्यंत गंभीर अतर्राष्ट्रीय आयाम ग्रहण कर लिए है तथा कोलविया समूची मानव-जाति की ओर से मादक-द्रव्य सरदारो के विरुद्ध युद्ध कर रहा है। 67 मादक-द्रव्यों के अमरीकी तस्कर की जा रहा है। 18 जनवरी, 1990 को वाशिंगटन का महापौर मारियन बैरी ऊक धूम्रपान करते हुए पकड़ा गया। यह इस बात का संकेत था कि अमरीका में मादक-द्रच्यो के दुरुपयोग की समस्या ने अत्यत गंभीर आयाम ग्रहण कर लिया है। बैरी कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। वह अमरीका मे नागरिक अधिकार आंदोलन का नेता तथा वाशिंगटन का लगातार तीसरी बार चुना गया महापौर है। यह बात सर्वविदित है कि मादक-द्रव्यो के तस्कर वाशिंगटन नगर-निगम के अधिकारियों के साथ साठगांठ करके ही नगर में अपना धधा चलाते रहे हैं और वे निगम प्रशासन के कर्मचारियो तथा उच्चतम अधिकारियो को भारी संख्या में कोकीन और क्रैक मुफ्त देते रहे हैं। निगम के मानवीय सेवा विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, "हम में से कुछ लोगो ने यहां के कुछ वरिष्ठ अधिकारियो को उनकी मेजो पर कोकीन सेवन करते हुए देखा है।' सयुक्त राज्य अमरीका के सरकारी अधिकारियो, विशेषतः पुलिस विभाग के लोगो में मादक-द्रव्यों का सेवन बहुत तेजी से फैलता जा रहा है। अकेले डैट्रॉयट शहर में सन् 1988 के पहले 9 महीनो मे 20 पुलिस अधिकारियों पर मादक-द्रव्यो के सेवन के आरोप लगाये गये। कैक-अड्डो पर डाले गये अनेक छापो में पुलिस को " मादक द्रव्यो ने सयुक्त राज्य अमरीका की समूची सामाजिक, नागरिक, राजनीतिक तथा नैतिक मूल्य-व्यवस्था के लिए गभीर सकट उत्पन्न कर दिया है। इनके व्यापार के माफिया ने समाज में एक समानांतर सशस्त्र सेना और अर्थव्यवस्था को जन्म दे डाला है। इस माफिया की शक्ति को समझने के लिए उसके विविध तत्त्वों की पहचान करना और अमरीका में फैले हुए मादक-द्रव्य व्यापार मचालन को समझना आवश्यक होगा। प्रजातीय संरचना सयुक्त राज्य अमरीका का इतिहास इस बात का गवाह है कि वहा प्रायः प्रजातीय अल्पसंख्यक अपराधपूर्ण गतिविधि में शामिल होते रहे हैं। वर्तमान 68 वाशिंगटन का महापौर मारिपन पैरी, जिसे ऊक नामक मादक-द्रव्य का धूम्रपान करते हुए पकड़ा गया। समय मे अमरीका का मादक-द्रव्य बाजार प्रमखतः वहा के नीग्रो और स्पेनी नस्लों के लोगों के हाथों में है। नीग्रो नस्ल के लोगों में जमैकावासी और स्थानीय अश्वेत अमरीकी शामिल हैं, जो शहरी अपराधी-गिरोहो के सदस्य है। स्पेनी नस्ल के लोगों मे मुख्यतः कोलंबिया, मैक्सिको, डोमिनिकंस और क्यूबा से आये हुए लोग हैं। अमरीका के मादक-द्रव्य व्यापार में श्वेत श्रमिक वर्ग का हिस्सा प्रायः नगण्य है। देश के पूर्वी तट से लेकर पश्चिमी तट तक मादक-द्रव्य गिरोहो का उदय ठीक उसी प्रकार हुआ है, जिस प्रकार मद्यनिषेध के प्रारंभिक वर्षों में 'ला कोसा नोस्त्रा' ने अवैध शराब के व्यापार से प्राप्त होने वाले भारी मुनाफे के आधार पर अपराध-जगत पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया था। मादक-द्रव्य गिरोहों और ला कोसा नोस्त्रा गिरोहों के बीच बुनियादी अंतर यह है कि मादक-द्रव्य गिरोहो के सदस्य ला कोसा नोस्त्रा गिरोहों की अपेक्षा अधिक हिंसक हैं। न्यूयार्क, शिकागो, मियामी और वाशिंगटन जैसे बड़े शहरो के अपराध-गिरोह तेजी से मादक-द्रव्य व्यापार मे घुस गये और उनमें से कुछ देश के अन्य नगरों में भी मादक-द्रव्यो और हिंसा का प्रसार कर रहे हैं। शिकागो शहर मे इन गिरोहों की सदस्य संख्या 13,000 तक जा पहुंची है, जिसे अब तक की सबसे बड़ी संख्या माना जा सकता है। शिकागो के मादक-द्रव्य गिरोहों में से प्रमुख इस प्रकार हैं: कोबरा, डिसाइपिल, एल. रुक्न, लेटिन किंग्स और वाइज लॉर्ड्स। मियामी के गिरोहो मे 34वेस्ट्रीट'प्लेयर्स और अनटचेबल्स प्रमुख हैं, जिन्हे मियामी वॉयज भी कहा जाता है। अमरीकी मादक-द्रव्य गिरोहो का तीसरा मुख्य केन्द्र लॉस एंजिल्स है, जहां ब्लड्स और क्रिप्स नामक दो गिरोह मादक-द्रव्यों के समृद्ध व्यापार मे लगे हुए हैं। इनको रौलस भी कहा जाता है। रौलसंशब्द हाइरौलसं का . - संक्षेप है। 69 कोकीन के किशोर-तस्कर सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयार्क के प्राध्यापक तथा अमरीका के एक प्रख्यात समाजशास्त्री टैरी विलियम्स ने मादक-द्रव्य गिरोहो का अध्ययन करके एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, 'कोकीन किड्स'। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नगर के कुछ उत्कृप्ट और प्रतिभाशाली तरुण-तणियों को ऊक व्यापार के भारी मुनाफे ने अपनी ओर खीच लिया है और ये लोग इस अवैध धंधे में सफल रहे है। अपने सर्वेक्षण के आधार पर विलियम्स इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि "अनेक किशोर तो कोकीन व्यापार के क्षेत्र में कार्य करने के लिए केवल इस कारण खिच आये कि उन्हे कमाई के ऐसे धंधे की आवश्यकता थी, जिसमें पूरा समय न लगाना पडे अथवा थोडे-बहुत अतराल से भी काम मिलता रहे। मादक द्रव्य व्यापार इस दृष्टि से सुरक्षित माना जा सकता है कि उसमें चंद डॉलर तो हर हालत में कमाये ही जा सकते हैं .. इसमे धन और मादक-दव्य दोनो ही पुरस्कार के रूप में प्राप्त हो जाते है और वह भी तुरत: इस धंधे में प्रवेश करने की एक शक्तिशाली प्रेरणा किशोरो की इस इच्छा मे भी निहित है कि वे अपने परिवार तथा मित्रों के सामने यह सिद्ध करना चाहते हैं कि वे आखिर कहीं न कहीं तो सफल हुए....." मादक-द्रव्य निरोधक-अभिकरण के निरीक्षक रुडोल्फो थॉमस के अनुसार इस धंधे मे एक युवक प्रतिदिन औसतन 2,000 डॉलर कमा लेता है। मादक द्रव्यो के तस्कर इन किशोरों को अपने धंधे में आसानी से भर्ती कर लेते हैं। संयुक्त राज्य अमरीका के कानून के अनुसार अवैधानिक पदार्थ रखने के आरोप मे ऐसे लोगो को ही जेल की सजा दी जा सकती है, जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो। इस कानून का लाभ उठाकर मादक-द्रव्यों के व्यापारियों ने मादक-द्रव्यो को जगह-जगह पहुचाने, पुलिस की टोह रखने और विक्री के लिए बड़ी संख्या में किशोरों को भर्ती कर लिया है। वेन काउंटी का शरिफ रॉबर्ट कहता है, "जब आपकिसी विद्यालय की कक्षा मे घुसेगे तो आप किशोरों को फर (रोयेंदार खाल) के कोट पहने हुए पायेंगे। उनके माता-पिता को यह मालूम है कि वे किसं धंधे से कमाई कर रहे हैं, इतना ही नही ये किशोर अपने माता-पिता को यह बतलाना चाहते है कि उन्होंने इस जगत मे सफलता प्राप्त कर ली है। मादक-द्रव्यों के धंधे में लगे हुए कुछ किशोर काफी पैसा बना लेने के बाद इस धधे के साथ संबंध-विच्छेद करके कानूनी व्यावसायिक जीवन में प्रवेश कर जाते हैं। . ब्लड्स और क्रिप्स लॉस एंजिल्म के दो सबसे अधिक बदनाम गिरोह-ब्लड्स और क्रिप्स सही मायने में गिरोह नहीं हैं। वे वास्तव में सैकड़ो उप-गिरोहो के परिसंघ है। इन उप-गिरोहों का निर्माण पड़ोस के आधार पर होता है और इनमें से प्रत्येक में प्रायः 20 से 30 सदस्य होते हैं। इनका नेतृत्व आमतौर पर सामूहिक होता है। 70 ब्लड्स और क्रिप्स गिरोहों के अलग-अलग रंग और प्रतीक होते हैं। ब्लड्स आमतौर पर लाल तथा क्रिप्स नीली पोशाक पहनते हैं। पारम्परिक रूप से गिरोह का प्रत्येक सदस्य माथे पर एक पट्टी बांधता है, जिससे उसके रंग का पता चलता है। पहचान छिपाने के लिए जब वे रंगो का प्रदर्शन नहीं करते, तब आपस में संवाद के लिए इशारों का उपयोग करते हैं। ये गिरोह नाना प्रकार के मादक-द्रव्य बेचते हैं-हेरोइन, मारिजुआना, कोकीन और क्रैक। मादक-द्रव्यो की विक्री सड़क के मोड अथवा एकांत कोने मे तथा उन अड्डों पर होती है, जिनका संचालन इन गिरोहो के सदस्य स्वयं करते हैं। इनमें रौलर्स गिरोहों को वरिष्ठ माना जाता है, परतु इसका अर्थ यह नहीं है कि वे आयु की दृष्टि से बड़े होते है। उनमे से अधिकाश ने तो बीसी भी पार नही की तथापि उन्हें दो कारणों से वरिष्ठ माना जाता है-पहला तो यह कि वे इस धंधे में जेल काट आये हैं और दूसरा यह कि उन्होने इसमें भारी सफलता प्राप्त की है। 'इन गिरोहों के सदस्य सोने के जेवर पहने रहते हैं और मस्टाग, डेटसन और मर्सिडीज-बेंज जैसी कीमती कारों पर चढ़ते हैं। इनके बारे में आमतौर पर कहा जाता है कि ये साइकिलों पर चढ़कर मियामी से बाहर जाते हैं, किंतु लौटते हैं मर्सिडीज कारों में और उनके शरीर पर सोने के आभूपण तथा हाथों मे रौलेक्स. घडियां होती हैं। इनकी कारों में फोन लगे होते हैं। वास्तव मे बिना तार के फोन इनके लिए अनिवार्य हैं। ये लोग इनके द्वारा ही सौदे पटाते और खतरे की सूचनाएं अपने साथियों तक पहुंचाते हैं। इनमें से कुछ गिरोहों की बिक्री प्रति सप्ताह 10,00,000 डॉलर तक जा पहुंचती है। इन्होंने कोलंबिया के कोकीन-व्यापारिक- सस्थानो के साथ गहरा संबंध स्थापित कर लिया है तथा इनके कुछ सदस्यो ने तो कोलंबिया के चोटी के मादक-द्रव्य तस्करों के साथ सीधे संबंध स्थापित कर लिए हैं। कोलंबिया के व्यापारिक संस्थान फेरी लगाकर कोकीन बेचने वाले इन लोगों पर इतना अधिक विश्वास करते हैं कि वे उन्हें पूरे के पूरे लदान उधार भेज देते हैं। मादक-द्रव्यों के ये तस्कर गिरोह इस धंधे को व्यवस्थित रूप में तट से देश के भीतरी भागों तक पहुंचा रहे है। वे डेनवर, अटलाटा और कंसास तक जा पहुंचे हैं। कंसास शहर तो विशेषतः ब्लड्स के अधिकार में ही आ गया है। वे उत्कृष्ट कोटि का कोकीन थोक मूल्यों पर खरीदते हैं। ये मूल्य काफी ऊंचे हैं अर्थात् 10,000 डॉलर प्रति किलोग्राम के आसपास। एक किलोग्राम कोकीन में से 10,000 थैलियां तैयार की जाती हैं, जो छोटी-सी वस्ती में कुछ दिनो के लिए पर्याप्त होती हैं। इनमें से प्रत्येक थैली 25 डॉलर में विकती है। इस प्रकार इन गिरोहों को एक किलोग्राम कोकीन पर 2,40,000 डॉलर की शुद्ध आय होती है। मुनाफे की इस विशाल राशि में से महंगे आधुनिकतम शस्त्र खरीदना महंगा नहीं पड़ता। अमरीका में माफिया गिरोहों के बीच सशस्त्र संघर्ष एक आम बात है। जमैका के 'पजैस' गिरोह अमरीका के मादक-द्रव्य तस्करों में सबसे अधिक खतरनाक और 71 शक्तिशाली जमैका के 'पजैस' गिरोह है। अधिकांश रिपोर्टों से यह सिद्ध होता है कि अमरीका मे कई हजार जमैकाई मादक-द्रव्यों की तस्करी में लिप्त हैं। जमैकाई लोग पहले-पहल फसल पकने के समय सेव और आड तोड़ने के लिए प्रवासी श्रमिकों के रूप में मार्टिन्सवर्ग आये थे। उनमें से काफी लोग कोकीन और क्रैक का धंधा करने के लिए अमरीका मे ही बस गये। अमरीका में जमैकाई मादक-द्रव्य गिरोहों अथवा पजैस' की संख्या 30 से अधिक है। न्यूयार्क, डलास, लॉस एंजिल्स, शिकागो, कंसास, वाशिंगटन इत्यादि सभी वडे शहरों में इनकी शाखाए है। इन्होंने सन् 1987 से अमरीका के मादक-द्रव्य व्यापार पर प्रभुत्व जमा रखा है। पजैस' के विभिन्न गिरोहों में से कुछ इस प्रकार हैं. मॉनटागो बे, रेमा, रिवर्टन सिटी, शॉवर, स्पेगर, स्पेनिश टाउन, टिवोली गार्डन्स, वाटर हाऊस, बुशमाउथ और सुपर स्टार। 'पजैस' की कुल सदस्य संख्या इस समय 10,000 से अधिक है। उसके सदस्यों में तेजी से वृद्धि हो रही है। पजैस' समूचे देश में अपना जाल बिछाते जा रहे है। अकेले कंसास शहर में उन्होने कैक के 75 अड्डे कायम कर लिए है, जिनसे प्रतिदिन 4,00.000 डॉलर प्राप्त होते हैं। उन्होने सन् 1985 मे देश के पूर्वी तट के अड्डो से क्रैक का आयात शुरू किया था, अब वे पश्चिमी तट के अड्डो से भी आयात कर रहे हैं। 'पजैस' एक ओर भली प्रकार अनुशासित है, दूसरी ओर वे अन्य मादक द्रव्य गिरोहो की अपेक्षा अधिक हिंसक भी है। वे मूलतः फेरी लगाकर मादक-द्रव्य बेचते अथवा क्रैक-अड्डो का संचालन करते है। वे अपने धधे में भारी मुनाफा कमाते हैं, 6,000 डॉलर मे एक किलो कोकीन खरीदकर उसे रासायनिक प्रक्रिया द्वारा क्रैक मे बदल डालते हैं और उसकी विक्री से 1,20,000 डॉलर प्राप्त करते है। 'पजैस' गिरोहों ने मादक-द्रव्यों के बाजार के रूप मे वाशिंगटन के महत्त्व को पहचानकर वहा मादक-द्रव्यो का व्यसन परिश्रमपूर्वक फैलाया है। आज वाशिंगटन मे इन पदार्थों के महगे दाम मिलते है। लगभग 28 ग्राम कोकीन का दाम न्यूयार्क की सड़कों पर 800 मे 900 डॉलर के बीच है, जबकि वाशिंगटन मे उतना कोकीन 1,400 से 1,800 डॉलर के बीच विकता है। 'पजैस' के अधिकांश सदस्य अमरीका आने से पहले जमैका में भांग-तस्कर गिरोहो के सदस्य थे। सन् 1980 मे जव क्रैक का विस्फोटक प्रचलन हुआ, तब ये लोग उसके भारी मुनाफे से उसकी ओर उसी प्रकार आर्पित हुए, जिस प्रकार अन्य अमरीकी गिरोह ऊक व्यापार की ओर आकर्पित हुए। इतना ही नहीं जमैकाई गिरोहों ने उस अवसर का लाभ उठाने के मामले में अन्य अमरीकी गिरोहों को मात कर दिया। 'पजैस' में शॉवर और स्पेंगलरल्ये दो मुख्य शाखाए हैं तथा ऐसा माना जाता है कि अन्य सभी गिरोह इन दोनो की उप-शासाएं हैं। 'पजैस' गिरोहो के सदस्य छापामार (गोरिल्ला) युद्ध कला के विशेपज्ञ माने जाते हैं। उनमें से कुछ लोगों ने क्यूबा में गोरिल्ला युद्ध कला का विधिवत् प्रशिक्षण लिया है। 72 हिंसा जमैकाई गिरोह अपनी हिंसक प्रवृत्तियों के लिए इतने अधिक वदनाम हैं कि अधिकांश मादक-द्रव्य व्यापार सस्थान उनके साथ सौदा करना पसद नही करते। 'पजैस' गिरोहो के लोग हत्या के मामले में विवेक का तनिक भी प्रयोग नही करते तथा उनमें दया का भाव नही होता-बच्चो के प्रति भी। उन्हें अमरीका मे हुई 1,000 हत्याओ के लिए जिम्मेदार माना जाता है, इनमे से 350 हत्याए अकेले सन् 1987 में हुई। सन् 1985 मे वाशिंगटन शहर मे हुई 148 हत्याओ मे से 17 प्रतिशत का कारण मादक-द्रव्यों को माना जाता है। सन् 1986 में शहर में 197 हत्याएं हुई, जिनमें से मादक-द्रव्यों के कारण हुई हत्याएं 33 प्रतिशत तक पहुच गयीं, सन् 1987 की 2.28 हत्याओं की 57% तथा सन् 1988 की 67 प्रतिशत तक। 'पजैस' के हत्यारे खुलेआम सार्वजनिक स्थलो पर और रात्रि क्लबों में हत्याएं करना पसंद करते हैं। ब्रुकलिन में एक रात्रि क्लब 'लव पीपुल' नामक डिस्को में लगभग हर सप्ताह हत्याए होती रहती हैं। 'पजैस' गिरोहों के लोग आमतौर पर ऊजी और ए.के.-47 राइफलें रखते है और अपने शत्रुओं को यातना देने तथा उनके अग भंग करने के लिए बदनाम है। 'मद्यसार, तंबाकू तथा आग्नेयास्त्र व्यूरो' ने एक रिपोर्ट में यातना के कई प्रकरणो का व्यौरा दिया है। 'पजैस' गिरोहों का एक शिकार 20 वर्षीय पैट्रिक मॉनफिस्टन सन् 1987 मे बड़े दिन की पूर्व संध्या पर उत्तर पूर्वी क्षेत्र मे एक सराय के कमरे के भीतर बुरी तरह जला हुआ मिला। व्यूरो की रिपोर्ट में कहा गया, "उन्होंने उसे एक टब में डाल दिया और उसके ऊपर खौलते हुए पानी के नल की टोटी खोल दी। जब उसकी खाल उतरने लगी तो उन्होंने बारी-बारी से उस पर पेशाब किया। एडमंड परिवार अमरीका के एक मादक-द्रव्य तस्कर रैफुल एडमंड III की कहानी इस रहस्य का उद्घाटन करती है कि किस प्रकार शून्य मे से माफिया परिवार का उदय हो जाता है। सन् 1985 मे एडमंड जिस समय एक मामूली मादक-द्रव्य फेरी वाले के रूप में वाशिंगटन के अपराध-जगत में शामिल हुआ था, उस समय उसकी आयु केवल 20 वर्ष की थी। अगले 4 वर्षो में उसने अपने छोटे-से धंधे को एक ऐसे विशाल पारिवारिक व्यापार में बदल डाला, जिसकी आय 30 करोड़ डॉलर प्रतिवर्ष तक जा पहुंची। उसने मादक-द्रव्यों के अपने व्यवसाय में अपनी मां, चाची, दो भाइयो, तीन बहनों, दो बहनोइयों और एक चचेरे भाई को वेतन पर रस लिया। उसने वाशिंगटन निगम क्षेत्र में कोकीन और फ्रैक की विक्री बड़े पैमाने पर संगठित कर डाली। संघीय मादक द्रव्य निरोधक एजेंटों के अनुसार अमरीका की राष्ट्रीय राजधानी वाशिगटन में कोकीन और जैक की खपत का 20 प्रतिशत एडमह और उसके परिवार के द्वारा बेचा जाता है। एडमंड की गिरफ्तारी से पर्व उसका परिवार तथा उमके गिरोह के लोग कोकीन पाउडर की प्लास्टिक-बलियाअखबारों में लपेटकर बेचा करते थे। यह 73 - गिरोह थोक विक्री भी किया करता था। लेन-देन का हिसाब रखने तथा नकदी की गिनती के लिए यह गिरोह उस प्रकार की दो मशीने इस्तेमाल करता था, जैसी कि बैंकों में इस्तेमाल की जाती है। नकदी काहिसाब एडमंड की मां के पास रहता था। वह स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग में काम करती तथा वहा से उसे वेतन के रूप में प्रतिवर्ष 39,000 डॉलर मिलते थे। एडमड की दादी भी मादक-द्रव्यों के व्यापार में सक्रिय भाग लेती थी। उसका घर गिरोह की गतिविधि का मुख्य अड्डा बन गया था। एडमंड और उसके गिरोह के अन्य लोगो की गिरफ्तारी मे इस वृद्धा का मनोवल भंग नहीं हुआ तथा उसने पारिवारिक व्यापार की बागडोर अपने हाथो मे संभाल ली। पुलिस ने उसके घर पर तो कब्जा कर लिया परतु उसे गिरफ्तार नहीं किया। एडमड मादक-द्रव्यो के व्यापार से अपार धन कमाता था। पुलिस ने एडमंड के चार मकानो, एक दर्जन से अधिक कारो और ऊजी सब-मशीनगनों का भंडार तो जब्त कर लिया परत उसके हाथ एडमड की वह जगुआर कार नहीं लगी, जिसके पहिये सोने से मढे हुए थे। संघीय जाच ब्यूरो के लोगों ने एडमड-गिरोह के अनेक सदस्यों को उसके विरुद्ध गवाही देने के लिए तैयार कर लिया। उन्होंने अदालत की अनुमति लेकर 60 दिन तक उसके व्यापारिक सौदों से मधित बातचीत के टेप तैयार किये, जिनमे उसके विरुद्ध अकाट्य प्रमाण इकट्ठे हो गये। शहर में कोकीन का सबसे बड़ा विक्री जाल फैलाने के आरोप पर अदालत ने दिसवर, 1989 का दंड सुनाया। उसका गिरोह नगर-निगम के अधिकारियों को भी कोकीन मुहैय्या कराता था। जिस कोकीन के धूम्रपान के आरोप पर वाशिगटन के महापौर मारियन वैरी को गिरफ्तार किया गया था, वह कोलीन उमे एडमड-गिरोह से ही प्राप्त हुई थी। एडमड की गिरफ्तारी और जेल की सजा के बावजूद उमका गिरोह जिंदा है। 'तीन सौ तस्कर' मादक-द्रव्य तम्कगे की कहानी बहुत दिलचस्प है। अमरीका के संघीय जांच ब्यूरो के अनुमार 82 वर्षीया मारगेराइट कोनिक और उमकी दो बेटियो मिमीलिया तथा वौदज़ ने 36 अरब डॉलर की धुलाई थी। पुलिम ने कोनिक को तो नहीं पकड़ा परत उमकी दोनो बेटियों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी के ममय एक मावधान हिला एजेंट ने देखा कि मारगेराइट पीछातिया अनुपात में अधिक पड़ी है। उमे मदेह हो गया और जव उमने मारगेराइट की तलाशी ली तो जमें उनकी पाली में मे हजारो डॉलर की रकम मिली। मन् 1989 में मंपीय अमरीवी एजेंटो ने पावलो गार्जन, उमपी पत्नी मलिदा, उनके तीन बच्चो-जोम, कैरोलिना और पायलो जनियर और मेलिदायी दो बहनों को उन गमय गिरफ्तार रिया, जब वे कैगेलिना के ग्नात होने के उपलक्ष्य में आयोजिन भोज में भाग ले रहे थे। पायलो और मलिटा ने स्वीकार 74 पावलो गार्जन कैरोलिना गार्जन (बेटी) किया कि वे मादक-द्रव्यो के व्यापार में शामिल थे। कैरोलिना और उसकी मौसियों ने धन की हेराफेरी का आरोप स्वीकार कर लिया। दोनो पुत्रों को आरोपो से मुक्त कर दिया गया। सन् 1988 में होडुरास की पुलिस ने होंडुरास के अरवपति जुआन रेमन मट्टा बैलेसतेरोस को गिरफ्तार करके अमरीका के हवाले कर दिया। मट्टा सन् 1960 के दशक के अंतिम वर्षों से मादक-द्रव्यो की तस्करी में संलग्न था। काली और मैडेलिन दोनों मादक-द्रव्य व्यापारिक संस्थानों में उसकी भूमिका काफी प्रमुख थी। अमरीकी न्यायालय ने उसे अक्तूबर, 1989 की मादक द्रव्य तस्करी के मामले में दोषी पाया। उस पर लॉस एजिल्स में 7 करोड़ 20 लाख डॉलर की कोकीन बेचने का आरोप सिद्ध हो गया। उसके मादक-द्रव्य-साम्राज्य का मूल्य 2 अरब डॉलर कूता गया। अमरीका के संघीय अधिकारियों ने कोकीन के व्यवसाय में लिप्त 'तीन सौ तस्करो' की सूची तैयार की है। सन् 1982 में संघीय एजेंटो ने उनमें से एक पावलो नीव्ज़ को मादक-द्रव्य और शस्त्रास्त्र रखने के आरोप पर पकड लिया। दो वर्ष बाद उसने अपना नाम बदलकर लुई मार्तिनेज़ रख लिया। सन् 1985 में वह पहले कार्लोस रेन्डन वना, बाद में ओलान्दो टौरेस। सन् 1987 में जब वह हाउस्टन मे मादक-द्रव्यों के छापे के सिलसिले मे पुनः पकड़ा गया तो उसने अपना नाम लुई मातिनेज़ वताया। सितंबर, 1989 मे वह तीसरी वार पकड़ा गया और उसके पास से 56 किलोग्राम कोकीन तथा 13 लाख डॉलर नकद वरामद हुए। उसने अपना अपराध स्वीकार करते हुए अपना नाम कार्लोस मोनकादो-रुआ बताया। 75 जुआन रेमन महा लियोनेल मातिना एक अन्य तस्कर लियोनेल मार्तिनेज मियामी मे जायदाद की खरीद-बिक्री का धंधा करता है। फ्लोरिडा के अधिकारियों का कहना है कि वह अपने दफ्तर का उपयोग बहामा राज्य से भेजे जाने वाले कोकीन केलदानो के बीच तालमेल बिठाने के लिए करता था। वह एक बार में 400 किलोग्राम कोकीन मगाता था। बताया गया है कि वह अपने कार्यालय की नकली छतगीरी का उपयोग कोकीन के संग्रह (भंडारण) के लिए करता था। वह बड़ी-बड़ी नकद राशियां अपने साथ पेटियो और थैलों में भरकर चलता था। एक बार उसके पास से 10 लाख डॉलर की नकद राशि बरामद हुई। उस पर कोकीन के आयात का मुकदमा चल रहा है। सयक्त राज्य मरीका मे मादक-द्रव्यों की तस्करी भारी मुनाफे का धंधा बन गयी है। संघीय एजेटोने लुई सांताक्रज और फैलिक्स गैला? सरीखे अनेक छटे हुए अपराधियो और तस्कर-सम्राटों को मादक-द्रव्यों की तस्करी के आरोपो पर गिरफ्तार किया है। गैला? मैक्सिको के एक मादक-द्रव्य व्यापारिक-सस्थान का कुख्यात मुखिया है। उसका प्रमुख धंधा शस्त्रास्त्र से पूरी तरह लैस अपने पहरेदारों सरक्षण में कोलबिया की कोकीन और क्रैक के लदानो को अमरीकी बंदरगाहों तक पहुंचाना है। एक सरदार मुनोज़ 29 सितंबर, 1989 को लॉस एंजिल्स की क्षेत्रीय पुलिस और मादक-द्रव्य निरोधक एजेंसी के एजेंटों ने लॉस एंजिल्स के एक गोदाम से 21:4 कि.ग्रा. कोलवियाई कोकीन बरामद की। एक ही स्थान पर पकडे जाने वाले मादक-द्रव्यो 76 मुई सांतानुज फैसियस गैलार्गे की यह अपने समय तक की सबसे बड़ी खेप थी। गोदाम का मालिक रैफेल मुनोज़ तलावेरा था। वह मैक्सिको के एक तस्कर गिरोह का मुखिया है। उसे मैडेलिन और काली स्थित मादक-द्रव्य व्यापार-सस्थानों ने प्रति सप्ताह 3 टन कोकीन सयुक्त राज्य अमरीका पहुंचाने का ठेका दिया था। छापे के बाद मुनोज़ जुआरेज़ के अपराध-जगत में छिप गया। बाद में उसे जुआरेज़ की एक सराय से गिरफ्तार किया गया। मुनोज़ कोई मामूली मादक-द्रव्य तस्कर नही है। उसके मादक-द्रव्यो के गोदामो की श्रृंखला टैक्सास से न्यूयार्क तक फैली हुई है। उसके गिरोह में भारी सख्या में लोग है। भूलतः वह मादक-द्रव्यों को एक वाहन से उतारकर दूसरे वाहन पर चढाने के काम के ठेके लेता है। कनाडा का मार्ग खोलने की चेष्टा कोलंबिया, मैक्सिको और पनामा मे मादक-द्रव्य व्यापारिक-सस्थानो के विरुद्ध कठोर कार्यवाही तथा अमरीका द्वारा मादक-द्रव्यो और उनके व्यापार पर युद्ध छेड देने के कारण कोलविया के मादक-द्रव्य तस्कर नये मार्ग खोलने के लिए हताशापूर्वक प्रयास कर रहे हैं। उन्होने एक नया रास्ता कनाडा होकर खोला है। अमरीकी बाजार के लिए 25 करोड़ डॉलर कीमत की कोकीन लेकर कनाडा में न्यू बन्सविक की हवाई पट्टी पर विमान उतारने के आरोप पर नवंबर, 1988 में दो कोलंबियाई विमान-चालको को लवे कारावास की सजाए सुनायी गयी थीं। मादक-द्रव्य तस्कर इसे चुपचाप सहन नहीं कर सकते थे। उन्होने उन विमान-चालको को जेल से भगाने का पड्यंत्र रचा। कनाडा की पुलिस ने पड्यंत्रकारियो को धर दबोचा-उनमें से एक का नाम टिटो सांकेज रुइज़ था। 77 कनाडा और संयुक्त राज्य अमरीका के बीच 5,500 मील लंबी सीमा पर आमतौर पर पहरा नहीं लगाया जाता, कोलवियाई तस्करो ने इस स्थिति का लाभ उठाने की चेष्टा की। कनाडा की पुलिस ने जिन विमान चालकों को गिरफ्तार किया, उन्हें 2,500 मील की दूरी पर मादक-द्रव्य पहुंचाने के लिए 5 लाख डॉलर के पारिश्रमिक तथा पकड़ लिए जाने पर जेल से छुडाने के आश्वासन दिये गये थे। तस्करो ने इसी वचन को निचाहने के लिए 4 सशस्त्र कोलवियाई भेजे थे, जिनके पास चेनेजुएला के जाली पारपत्र थे। ये लोग जव एडमेस्टन पहुंचे तो एक स्थानीय नागरिक ने उन्हें रूसी समझकर उनके बारे में कनाडा की शाही धुडसवार पुलिस को सूचित कर दिया। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, उसके उनकी भाड़े की कार से एक ऊजी सब-मशीनगन, एक ए.के.-47 असॉल्ट राइफल, हथगोले, अश्रुगैस के गोले और लगभग 3,000 राउंड कारतूस मिले। कनाडा के अधिकारियो के मन में यह धारणा बन गयी है कि दोनों विमान-चालको के पास से जितनी कोकीन पकड़ी गयी थी, कनाडा के रास्ते उसकी 10 गुना कोकीन अमरीका पहुंच रही है। इस घटना के बाद से दोनो देशो ने अपनी सीमाओ पर चौकसी बढ़ा दी है। क्यूबाई संदर्भ क्यूवा के तानाशाह फिदेल कास्त्रो ने अमरीका के इस आरोप का हमेशा खडन किया है कि कोलंबियाई मादक-द्रव्य क्यूबा के रास्ते अमरीका भेजे जाते रहे है तथा क्यूबाई मादक-द्रव्य माफिया ने उन सौदों में भारी राशियां प्राप्त की हैं, परतु जब क्यूवा सरकार द्वारा मेजर जनरल अल्दिो ओकोआ साकेज तथा क्यूबाई सैनिक गृह-मत्रालय के 6 अन्य अधिकारियो परमादक-द्रव्यो की तस्करी के आरोप लगाकर जून, 1989 के प्रारंभ में उन्हें गिरफ्तार किया गया तथा 10दिन बाद यह रहस्य खोला गया कि उन 7 व्यक्तियो ने कोलंबिया के कुख्यात मैडेलिन मादक-द्रव्य व्यापारिक-संस्थान को 6 टन कोकीन फ्लोरिडा पहुंचाने में मदद देकर 34 लाख डॉलर की रकम हथिया ली है,तव स्वयं कास्त्रो के दावे का खंडन हो गया। जनरल ओकोआ तथा उसके तीन साथियों को 13 जुलाई, 1989 को कोर्ट मार्शल के बाद गोली मार दी गयी, जिसका बड़े पैमाने पर प्रचार किया गया। उनके शव उनके संबंधियों को देखने तक नहीं दिये गये, न उन्हें यह बताया गया कि उन्हें कहां दफनाया गया है। इस विषय मे आम धारणा यह है कि यदि ओकोआ ने मादक-द्रव्यों को क्यूबा के रास्ते फ्लोरिडा भेजने में मदद की तो निश्चय ही उसने यह कार्य फिदेल कास्त्रो तथा क्यूबा सरकार की ओर से किया होगा। इन सौदों में प्राप्त भारी राशियो का इस्तेमाल क्यूवा सरकारने तस्करी द्वारा अमरीकी तकनीकी के आयात तथा अन्य लातीनी अमरीकी देशों में सशस्त्र विद्रोह को आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए किया। 78 मादक-द्रव्यों की अवैध तस्करी में क्यूवा की भूमिका एक लबे समय से उजागर रही है। सन् 1982 मे फ्लोरिडा की एक सघीय अदालत में उस कोलवियाई मादक-द्रव्य तस्कर के साथ, जो सन् 1975 से शस्त्रो के लिए मादक-द्रव्यों की गोपनीय तस्करी कर रहा था, चार क्यूबाई अधिकारियो पर भी तस्करी के आरोप लगाये गये थे। मुकदमे की सुनवायी के दौरान इस तस्करी में क्यूबाई नौसेना की भूमिका भी प्रकाश में आयी। गवाही के दौरान यह भी बताया गया कि स्वयं कास्त्रो ने उन सौदो में प्रत्येक खेप पर 5 लाख डॉलर की रिश्वत ली। यहां प्रश्न यह नहीं है कि कास्त्रो ने मादक-द्रव्यो से प्राप्त अमरीकी मुद्रा का किस प्रकार इस्तेमाल किया-उसने उनसे अपनी निजी तिजोरी भर ली अथवा उन्हें राज्य के हितो पर खर्च किया, वरन् प्रश्न यह है कि विद्यमान प्रमाणो के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि कोलविया कोकीन के क्यूबाई बदरगाहो पर उतरने और उसे वापस अमरीका के लिए लादे जाने के सौदो में फिदेल कास्त्रो पूरी तरह शामिल था। पनामा के अपदस्थ सेनाध्यक्ष जनरल नोरिएगा के विश्वसनीय सलाहकारो में से एक जोस ब्लैडन ने अमरीकी सिनेट की एक उपसमिति को बताया कि कास्त्रो को मादक-द्रव्यो की तस्करी मे गहरायी से लिप्त देखकर उसे गहरा आघात लगा था। ब्लैडन कास्त्रो के मुंह से यह सुनकर चकित हो गया था कि "यदि नोरिएगा तस्करी के लिए समस्याएं खडी करेगा तो तस्कर पनामा को रणभूमि मे परिवर्तित कर डालेंगे।" जब ब्लैडन ने कास्त्रो से यह पूछा कि उसे यह बात कैसे मालूम है कि तस्कर क्या चाहते है तो कास्त्रो ने उसे कोई उत्तर नही दिया, परतु कास्त्रो तस्करो के मन की बात बहुत अच्छी तरह जानता था क्योंकि वह काफी लवै समय से उनके साथ सौदे कर रहा था। यह रहस्य अब प्रकट हो चुका है कि कोलबिया के एक अत्यधिक कुख्यात मादक-द्रव्य तस्कर-सरदार पावलो एस्कोबार गाविरिया ने क्यूबा के अधिकारियो के सामने यह प्रस्ताव रखा था कि वे कोकीन के जिन लदानो को अमरीका पहुचाने मे उसकी मदद करेगे, उन पर वह उन्हें प्रति किलोग्राम 1,200 डॉलर की दर से भुगतान करेगा। क्यूबाई सशस्त्र सेना के कर्नल अर्नाल्दो मोरेजोन प्लाट की गवाही के आधार पर यह तथ्य भी सामने आ चुका है कि मादक-द्रव्यो की तस्करी मे भागीदारी की स्वीकृति फिदेल कास्त्रो के भाई तथा क्यूबा के प्रतिरक्षा मत्री राउल कास्त्रो और प्रधान सेनापति अर्थात् फिदेल कास्त्रो ने दी थी। इस प्रकार अमरीकी मादक-द्रव्य माफिया के घनिष्ठ अतर्राष्ट्रीय संपर्क है तथा अमरीकी विदेश नीति पर उनका जटिल प्रभाव पड़नास्वाभाविक है। संयुक्त राज्य अमरीका के लिए इस समस्या के साथ निपटना तब तक संभव नही होगा, जब तक कि करेबियन द्वीपसमूह और लातीनी अमरीका के उसके पडोसी देश प्रतिकूल दिशा में चलते रहेगे तथा उसके अपने नागरिक मादक-द्रव्यों का व्यसन जारी रखेगे। .
- पनामा का मादक-द्रव्य माफिया नामा ने अपने मध्य-अमरीकी पड़ोसी कोलविया की भाति अपने देश के प के था कि पनामा की सशस्त्र सेनाओ का प्रधान सेनापति तथा तानाशाह मैनुअल अतोनियो नोरिएगा राज्य का मुखिया तो था ही, पनामा के मादक-द्रव्य माफिया का मुखिया भी वही था। अपने पिता की घरेलू नौकरानी के अवैध पुत्र नोरिएगा ने कौरिल्लौस सैनिक अकादमी से स्नातक की उपाधि लेने के बाद अपने जीवनकर्म की शुरुआत एक उदीयमान सैनिक अधिकारी ओमर टौरिजोस के सरक्षण में पनामा नेशनल गार्ड के एक कनिष्ठ अधिकारी के रूप में की। ओभर टौरिजोस सन् 1968 में सत्ता-अपहरण द्वारा पनामा का शासक बना। नोरिएगा जीवन के आरंभ से ही धन, यौनसुख और सत्ता के प्रति आकृष्ट था। जब वह सैनिक अकादमी में महज़ कैडेट था, तभी सयुक्त राज्य सैनिक गुप्तचर सेवा ने उसे अपने एजेट के रूप मे भर्ती कर लिया था तथा सन् 1960 में उसे एक वेश्या के साथ जवरदस्ती संभोग करने तथा पीटने के आरोप पर गिरफ्तार किया गया था। सन् 1964 में जब ओमर टौरिजोस ने संयुक्त राज्य के 470वें सैनिक गुप्तचर दस्ते की मदद से पनामा की प्रथम गुप्तचर सेवा, नेशनल गार्ड के जी-2 खंड का संगठन किया था, तब उसने नोरिएगा को उसका मुखिया बनाया था। उसने अमरीकी अधिकारियो से जासूसी और प्रति-जासूसी का प्रशिक्षण उसी समय प्राप्त किया था। यह सन् 1967 की बात है। सन् 1968 मे टौरिजोस द्वारा पनामा में सत्ता का अपहरण किये जाने के तुरंत । बाद उसकी टीम ने मादक द्रव्यों की तस्करी में रुचि लेनी शुरू कर दी थी। उनकी गतिविधि ने ऐसे खतरनाक आयाम ग्रहण कर लिए थे कि संयुक्त राज्य की डी.ई.ए. टौरिजोस-नोरिएगा टीम को संयुक्त राज्य के लिए खतरनाक समझने लगी थी। यह टीम सुदूरपूर्व तथा अमरीकामे स्थित पनामा के दूतावासों, कौंसुलेटों और वायसेना तथा मीमा-शुल्क कायांलयो के द्वारा संयुक्त राज्य में तस्करी द्वारा हेरोइन पहुंचाने लगी थी। 80 राष्ट्रपति निक्सन पूरी तरह यह मानने लगे थे कि टौरिजोस और नोरिएगा संयुक्त राज्य के समाज के लिए एक गंभीर खतरा बन गये हैं, अतः उन्होने मई, 1971 मे ब्यूरो ऑफ नार्कोटिक्स एंड डेंजरस ड्रग्स (मादक एवं खतरनाक द्रव्य ब्यूरो) के निदेशक जॉन इंगरसौल से कहा था कि मादक-द्रव्य निरोधक कानूनो का पालन कराने के लिए एक योजना का प्रारूप तैयार किया जाये, जिससे कि मादक-द्रव्य तस्करों को उच्चतम स्तरो पर नष्ट अथवा निष्क्रिय किया जा सके। इंगरसौल तथा राष्ट्रपति निक्सन ने टौरिजोस तथा नोरिएगा से निपटने के लिए उनकी हत्या के विकल्प के बारे में भी विचार-विमर्श किया था, परंतु निक्सन के इस विचार पर इसलिए अमल नहीं किया जा सका था क्योंकि ठीक उसी समय वे वाटरगेट कांड में लिप्त हो गये थे। राष्ट्रपति निक्सन को त्यागपत्र देना पड़ा तथा संयुक्त राज्य अमरीका में फोर्ड युग का अभ्युदय हुआ। टौरिजोस ने निक्सन के पतन का लाभ उठाकर नोरिएगा को अपना संयुक्त राज्य संपर्क अधिकारी नियुक्त कर दिया। फोर्ड के बाद जिम्मी कार्टर संयुक्त राज्य अमरीका के नये राष्ट्रपति बने, तब सी.आई.ए. के निदेशक ने उनके सामने यह सिफारिश पेश की कि पनामा की जी-2 गुप्तचर सेवाओं को किया जाने वाला वह भुगतान बंद कर दिया जाये, जिसमे से नोरिएगा को प्रतिवर्ष 1,10,000 डॉलर प्राप्त होते थे। राष्ट्रपति कार्टर ने सी.आई.ए. (केन्द्रीय गुप्तचर एजेसी) के निदेशक की सलाह पर दो कारणो से अमल नही किया, पहले तो सन् 1977 में पनामा नहर संधियों पर हस्ताक्षर किये जाने थे, अतः ऐसे मौके पर पनामा के तानाशाह टौरिजोस को अप्रसन्न करना बुद्धिमानी का काम न होता, दूसरे दिसंबर, 1979 मे पनामा ने शाह ईरान को अपने यहां शरण देकर कार्टर को भारी राहत दी थी, अतः उसके लिए उसे पुरस्कृत करना आवश्यक था। सन् 1980 के दशक के प्रारंभिक काल मे नोरिएगा ने इजरायलियों को पनामा के माध्यम से निकारागुआ के कौट्रा विद्रोहियों के लिए धन और शस्त्र पहुचाने की अनुमति देकर सैंडेनिस्टा शासकों के विरुद्ध रीगन प्रशासन द्वारा छेड़े गये कौंट्रा युद्ध में उसकी मदद करनी शुरू कर दी थी। रीगन प्रशासन ने सन् 1981 मे नोरिएगा को पुनः 1,85,000 डॉलर वार्षिक वेतन देना चालू कर दिया। राष्ट्रपति रीगन के लिए कौटा छापामारो को सहायता पहुंचाना चोटी की प्राथमिकता बन गया था। रीगन को भलीभाति मालूम था कि नोरिएगा मादक-द्रव्य तस्करी में लिप्त है परंतु वे इस मुद्दे को उभारकर उसे अपने हाथों से कोलंबियाई संदर्भ सन् 1970 के दशक के मध्य में नोरिएगा कोलवियाई मादक-द्रव्य व्यापार पर निगाह रखे हुए था तथा उसमें उसकी रुचि उत्पन्न होने लगी थी। जब उसने सोना नहीं चाहते थे। 81 पनामा के मादक द्रव्य माफिया का मुखिया मैनुअल अंतोनियो नोरिएगा। नोरिएगा की गतिविधियों ने अमरीकी सरकार को मुरी तरह से प्रस्त कर रखा था। यदि राष्ट्रपति निवसन वाटरगेट कार में लिप्त न हो गये होते तो संभवतः उन्होंने अमरीका के के लिए नोरिएगा की हत्या करया दी होती। - यह देखा कि मादक-द्रव्य तस्कर धन की विपुल राशिया धुलाई के लिए पनामाई बैको में जमा कर रहे है, तब इस धंधे के प्रति उसका आकर्षण बढने लगा। नोरिएगा ने कोलंबियाई मादक-द्रव्य सौदागरों द्वारा पनामा के बैंकों में जमा करायी जाने वाली राशियो की जानकारी बैंको मे तैनात जी-2 गुप्तचरों से लेनी शुरू कर दी। नोरिएगा ने क्यूबा के अधिनायक फिदेल कास्त्रो द्वारा समर्थित कोलंबियाई वामपंथी छापामार संगठन एम-19 के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित कर लिये। उसने उसके साथ एक गुप्त समझौता करके शस्त्रास्त्र और छापामारों को कोलविया में भेजने के लिए पनामा के मार्ग के उपयोग की अनुमति दे दी। कोलंबिया मादक-द्रव्य सरदारों के साथ निकट सपर्क स्थापित करने का अवसर नोरिएगा को सन् 1981 के अंत में मिला। कोलविया के छापामारो को धन की घोर तंगी आ पड़ी तो उन्होने मादक द्रव्य सौदागरों से फिरौती के रूप में बड़ी रकम ऐंठने के लिए अंतियोक्बिया विश्वविद्यालय के परिसर से मादक-द्रव्य सरदार जोर्जे ओकोआ की सबसे छोटी वहन मा नीज ओकोआ का अपहरण कर लिया। उन्होंने मार्टा के अपहरण की जिम्मेदारी लेते हुए घोषणा कर दी कि वे 5 करोड़ डॉलर की फिरौती मिलने पर उसे लौटाने के लिए तैयार हैं। ओकोआ-परिवार के मुखिया फाबियो ओकोआ ने कोर्लोबया के चोटी के 200 मादक-द्रव्य तस्करों का एक गुप्त सम्मेलन बुलाया, जिसमें एक नया सुरक्षा चल खड़ा करने का निश्चय किया गया और प्रत्येक तस्कर ने उसके खर्च के लिए 30 हजार डॉलर की राशि देना मजूर कर लिया। इस सुरक्षा बल ने छापामारों के 82 विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया तथा 6 सप्ताह की अवधि के भीतर 100 छापामारों की हत्या कर डाली। छापामारों के लिए यह एकचिंताजनक स्थिति थी, अतः वे मादक-द्रव्य तस्करों के साथ समझौता कराने के लिए कास्त्रो के मार्फत नोरिएगा के पास पहुंचे। नोरिएगा के निमंत्रण पर ओकोआ-परिवार के लोग छापामारों के साथ बातचीत के लिए हवाई जहाजों से पनामा पहुंचे। नोरिएगा ने उनके ठहरने और उनकी आवभगत की आरामदेह व्यवस्था की। छापामारों को 10 लाख डॉलर की रकम फिरौती के रूप में चुकाकर मार्टा की रिहाई कराने में 3 महीने से अधिक समय लगा। इस दौरान मादक-द्रव्य सरदारों ने यह महसूस कर लिया कि नोरिएगा एक बहुमूल्य मित्र सिद्ध हो सकता है, अतः उन्होंने उसे भी उसकी सेवाओं के बदले में एक भारी रकम अदा की। कुछ महीनो के बाद कोलंबियाई मादक-द्रव्य सरदारों ने नोरिएगा के एक मित्र विमान-चालक फ्लॉयड कार्लटन कैसेरेस के साथ संपर्क स्थापित किया और वे उसे कोलवियाई मादक-द्रव्य-मुख्यालय मैडेलिन ले गये। वहा उसका स्वागत पावलो एस्कोबार और गुस्तावो गाविरिया सरीखे मादक-द्रव्य सौदागरों ने किया। माफिया सरदारों ने अपनी मुलाकातों के दौरान कोलंबिया से संयुक्त राज्य के लिए भेजे जाने वाले मादक-द्रव्यो को पनामा के रास्ते ले जाने के मामले में कार्लटन का सहयोग मांगा। कार्लटन ने उन्हें कोई वचन नहीं दिया, केवल इतना कहा कि वह इस मामले में उच्च अधिकारियो के साथ चर्चा करेगा। कालर्टन ने मैडेलिन में हुई चर्चाओ की जानकारी नोरिएगा को दी और अंत में नोरिएगा-मादक-द्रव्य-संस्थान समझौता संपन्न हो गया, जिसके अनुसार मादक-द्रव्य संस्थान ने नोरिएगा को पहली उड़ान के लिए 1 लाख डॉलर, दूसरी के लिए 1,50,000 डॉलर और तीसरी उडान के लिए 2 लाख डॉलर दिये। नौरिएगा ने पाबलो एस्कोबार को पनामा के डेरियन क्षेत्र में कोकीन-प्रशोधनशाला स्थापित करने की अनुमति भी दे दी। यह संसार की सबसे बड़ी कोकीन-प्रशोधनशाला थी। फिर वह समय आया, जब कोलंबिया के मादक-द्रव्य सरदारो ने कोलंबिया के न्यायमंत्री की हत्या कर दी और कोलंबिया सरकार ने उनके विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। एस्कोबार और ओकोआ बंधुओं सहित अनेक मादक द्रव्य तस्करों मे भगदड़ मच गयी। स्वार्थ-निपुण नोरिएगा ने मादक-द्रव्य सरदारो की मुसीबत को अपने लिए एक अच्छा अवसर जानकर पनामा में उनका स्वागत किया। मैडेलिन और काली मादक-द्रव्य संस्थानों ने 120 तस्कर पनामा भेज दिये। नोरिएगा ने उन्हे मकान, अन्य सुविधाएं तथा पनामाई पासपोर्ट तक प्रदान किये। इससे नोरिएगा को अकूत धन प्राप्त हुआ, लेकिन शीघ्र ही ऐसी स्थिति आ गयी कि कोलंबियाई मादक द्रव्य सौदागर उससे अप्रसन्न हो गये। डेरियन के आसपास रहने वाले पनामा के कुछ मूल इंडियन लोगों ने न्याय-विभाग के अधिकारियों से अपने क्षेत्र के जीवन मे बाधा डालने वाले नये B3 - आंगतुकों (कोलविया) के बारे में शिकायत की। उनकी रिपोर्ट पर अधिकारी शकित हो उठे और उन्होने गोपनीय रीति से अमरीकी दूतावास के अधिकारियों को सावधान कर दिया। अमरीका ने इस मामले को गंभीरता से लिया तथा नोरिएगा को कार्यवाही करने के लिए विवश किया। 21 मई, 1984 को पनामा ने डेरियन प्रशोधनशाला पर छापा डाला। इससे मैडेलिन मादक-द्रव्य संस्थान के लोग नोरिएगा से नाराज़ हो गये, खासतौर पर इसलिए भी कि उसने उन्हें छापे की चेतावनी तथा पूर्व-सूचना तक नहीं दी थी। उसने उन संस्थानों के साथ पुनः संबंध जोड़ने की दृष्टि से अपने एक विश्वस्त परामर्शदाता जोस ब्लैंडन को फिदेल कास्त्रो के संग बातचीत के लिए क्यूबा भेजा। मादक-द्रव्य संस्थान के सरदारों ने नोरिएगा को जो राशियां दी थीं, वे उन्हें वापस माग रहे थे क्योंकि नोरिएगा ने उन्हें सुरक्षा देने का वचन भंग कर दिया था। अंततः कास्त्रो ने उन्हें मनाया और नोरिएगा को यह वचन देना पड़ा कि वह पनामा में मादक-द्रव्य संस्थान के हितों की रक्षा करेगा। मियामी का आरोप-पत्र संयुक्त राज्य अमरीका मादक-द्रव्यों की तस्करी में नोरिएगा की भूमिका को अनिश्चितकाल तक सहन नहीं कर सकता था। संयुक्त राज्य के महाधिवक्ताने4 फरवरी, 1988 को मियामी की संघीय अदालत में नोरिएगा के विरुद्ध एक मुकदमा दायर किया, जिसमें उस पर आरोप लगाये गये कि उसने पनामाई सैनिकों को कोलंबियाई मादक-द्रव्य तस्करो के अंगरक्षकों के रूप में नियुक्त किया, सैनिक विमानों तथा हवाई अड्डों का उपयोग मादक-द्रव्यों की ढुलाई के लिए करने की अनुमति दी, तस्करों के संयुक्त राज्य मादक-द्रव्य निरोधक अभियानों के बारे में गोपनीय सूचनाएं प्रदान की और मादक-द्रव्यों से प्राप्त धन की ढुलाई के लिए बख्तरबंद कारें भेजी। आरोप-पत्र में कहा गया कि "अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करके मैनुअल अंतोनियो नोरिएगा और उसके विश्वस्त साथियों ने मादक-द्रव्य तस्करों को इस बारे में आश्वस्त कर दिया कि पनामा के सैनिक, सीमा-शुल्क एव कानून लागू करने वाली कर्मचारी पनामा मे उनके (तस्करों के) कामकाज मे तव तक व्यवधान नहीं डालेंगे, जब तक कि उन्हें भारी मात्रा मे शुल्क चुकाया जाता रहेगा।' नोरिएगा के विरुद्ध भारी मात्रा में प्रमाण आने लगे। एक सजायाफ्ता मादक-द्रव्य तस्कर मिचेल पॉल वोगेल ने सिनेट के समक्ष बताया कि एक धार उसने नोरिएगा का एक अत्यंत लोभपूर्ण प्रस्ताव ठुकरा दिया था, जिसके द्वारा उसने एक पनामाई द्वीप पर मादक-द्रव्यों के विमान उतरने की अनुमति देने के बदले में 1 लाख डॉलर प्रति लदान की दर से घूस की मांग की थी। टैम्पा ग्राड जूरी ने नोरिएगा को 5 लाख किलोग्राम गाजा तस्करी से संयुक्त राज्य में पहुंचाने तथा उसकी विक्री से प्राप्त काले धन की धुलाई से संबंधित 8A - पड्यंत्र के तीन आरोप लगाये। षड्यंत्र के अंतर्गत नोरिएगा का हिस्सा 10 लाख डॉलर माना गया। अपराध-साम्राज्य मियामी आरोप-पत्र जारी होने के कुछ दिन बाद ही नोरिएगा के भूतपूर्व राजनीतिक परामर्शदाता जोस ब्लैडन ने फरवरी, 1988 के मध्य में सिनेट की आतंकवाद, मादक-द्रव्यों तथा अंतर्राष्ट्रीय सचार संबंधी उप-समिति के सामने गवाही दी। ब्लैंडन ने कहा कि नोरिएगा ने सीमा -शुल्क और पारपत्र कार्यालयों, रेलवे तथा हवाई अड्डों सरीखी सार्वजनिक सस्थाओ को एक विराट घूस-योजना में बदल डाला था। ब्लैंडन को नोरिएगा ने जनवरी, 1988 मे पनामा के न्यूयार्क-स्थित कौसल जनरल पद से हटा दिया था। ब्लैंडन ने नोरिएगा और सी.आई.ए. के बीच विद्यमान संबंधों को उजागर करते हुए उप-समिति को बताया कि नोरिएगा ने कोलंबियाई मादक-द्रव्य संस्थानों के साथ अपने सौदो में अरबों डॉलर की राशियां प्राप्त की। जिस विमान-चालक फ्लॉयड कार्लटन को माध्यम बनाकर नोरिएगा ने मादक-द्रव्यो की तस्करी के धधे में कोलंबियाई मादक-द्रव्य तस्करों के साथ एक प्रकार की भागीदारी कायम की थी, तानाशाह ने उसे भी ठुकरा दिया। कार्लटन ने उप-समिति के समक्ष कहा कि जब मैडेलिन संस्थान ने मादक-द्रव्यों की उड़ानो की रक्षा के लिए 30,000 डालर की रकम देने का प्रस्ताव रखा तो वह जोर से हंसा और उसने पूछा कि क्या वह कोई फकीर है। कार्लटन ने बताया कि इसके बाद नोरिएगा ने पहली उड़ान के लिए 1 लाख, दूसरी के लिए 1 लाख 50 हजार और तीसरी के लिए 2 लाख डॉलर पेशगी मागे। मैडेलिन सस्थान के भूतपूर्व मुख्य पूंजीनिवेशक रेमन मिलियान रोड्रिगुएज़ का साक्ष्य भी नोरिएगा के लिए इतना ही हानिकारक था। उसने उप-समिति को बताया कि वह पनामाई और समुद्रपारीय वैकों द्वारा 20 करोड़ डॉलर मासिक की धुलाई करता था। उसने दावा किया कि "नोरिएगा को मादक-द्रव्य संस्थान से प्रति सप्ताह 1 करोड़ डॉलर मिलते थे। सन् 1979 से सन् 1983 की अवधि मे स्वयं मैंने उसे 32 से 35 करोड़ डॉलर तक का भुगतान किया था। डी.ई.ए. की वित्तीय गुप्तचर सेवा का मुखिया अल कॉवर्ड कहता है, "कोकीन तथा धन की धुलाई के मामले में पनामा विश्व-राजधानी है। कोलबियाई कोकीन की बिक्री से प्राप्त धन का विशाल बहुतांश किसी न किसी बिंदु पर पनामा होकर कोलबिया वापस पहुंचता रहा है।" कॉवर्ड का वक्तव्य उसके प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित है। मई, 1983 में फोर्ट लॉडरडेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर संघीय एजेटो को पनामा जाने वाले एक जैट विमान से 20 संदूको मे 54 लाख डॉलर की नकद राशि मिली। जैट का मालिक मियामी का एक 85 लेखाकार था, जिसे बाद में धन की धुलाई के अपराध में दंड दिया गया था। इस धन का अधिकांश कोकीन के मुनाफे से आया था। इस अभियान के दौरान पकडे गये दस्तावेजों से पता चलता है कि 8 महीने की एक अवधि में उसने मादक द्रव्यों के मुनाफे की लगभग 15 करोड़ डॉलर राशि पनामाई बैंकों में जमा की थी। निजी संपत्ति लैंडन ने उप-समिति के सामने कहा कि नोरिएगा पनामा का सबसे अधिक मालदार आदमी है। उसके पास देश-विदेश में दर्जनों मकान, बड़ी संख्या में मोटर-वाहन तथा कम से कम ! अरब डॉलर के वरावर नकद राशि है। मजा यह है कि उसे साल भर में केवल 40,000 डॉलर वेतन मिलता रहा है। नोरिएगा के पतन के पश्चात् जब उसके पनामा मुख्यालय की तलाशी ली गयी तो उसका निजी शस्त्रागार सामने आया, जिसमें सैकड़ों स्वचालित बंदूकें थीं। एक कमरे में हिटलर का चित्र और दूसरे में उसकी मूर्ति मिली। संयुक्त राज्य सेनाओं ने नोरिएगा के मुख्य निवास में रखी एक तिजोरी से 60 लाख डॉलर नकद बरामद किये। उसका यह निवास 15 कमरों का 3 मजिला भवन है, जिसके प्रत्येक कमरे में आधुनिकतम वीडियो और स्टीरियो-प्रणालियां लगी थीं, कोलंबस-पूर्व की तथा आधुनिक कलाकृतियां, चीनी मिट्टी की मूर्तियां, पानी के नलो की चादी मंढी हुई टोटियां थीं तथा एक गिरजाघर और आधुनिकतम रसोईघर था, जिसमें गंदी प्लेटें पड़ी हुई थीं। सयुक्त राज्य दक्षिणी कमान के मुखिया जनरल मैक्सवेल आर. थर्मन ने कहा कि “जब सेना ने नोरिएगा के शयनागार की दो तिजोरियां खोली तो उन्हें उनमे इतना धन मिला कि हम अभी तक ठीक-ठीक यह नहीं बता सकते कि वह कितना है।" पाषाणहृदय तानाशाह संयुक्त राज्य प्रशासन का नोरिएगा के साथ एक अनूठी किस्म का प्रेम तथा घृणा-दोनों का संबंध था। एक ओरतो वह उसका इस्तेमाल निकारागुआ में कौंट्रा विद्रोहियो को शस्त्र तथा धन पहुंचाने के लिए करता रहा, दूसरी ओर वह उसे हटाकर पनामा में एक लोकतंत्रात्मक नागरिक शासन की स्थापना चाहता था, परंतु नोरिएगा उसके ऐसे प्रस्तावों को ठुकराता रहा। स्वयं पनामा में नोरिएगा के विरुद्ध नागरिक आक्रोश बढ़ता जा रहा था। संयुक्त राज्य ने पनामा के राष्ट्रपति एरिक आतुरो डेलवैल पर दबाव डालकर नोरिएगा को पदच्युत कराने के लिए पनामा के विरुद्ध आर्थिक प्रतिबंध लगा दिये। राष्ट्रपति डेलवैल ने नोरिएगा से कहा कि वह स्वयं अपना पद छोड़े कितु जनरल नोरिएगाने वैसा करने से इनकार कर दिया। उसने बंधक विधानसभा से मैनुअल सोलिस पालमा को नया राष्ट्रपति नियुक्त करालिया तथा डेलवैल को भाग जाने के लिए विवश कर दिया। 86 तब संयुक्त राज्य ने पनामा को भुखमरी के कगार पर पहुंचाने का निश्चय कर लिया तथा उसके साथ व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, पनामा की वित्तीय संस्थाओ के लिए धन का हस्तांतरण पूरी तरह रोक दिया तथा संयुक्त राज्य और ग्नामा के बीच व्यावसायिक हवाई-संबंधों को समाप्त कर दिया। इसके अतिरिक्त न्यूयार्क और बोस्टन के संघीय न्यायालयों द्वारा प्रतिबंधन आदेश जारी कये गये, जिनके अनुसार पनामा सरकार के समस्त कोष और संपत्ति को अवरुद्ध कर दिया गया। पनामा नहर के इस्तेमाल के लिए पनामा को दी जाने वाली 70 लाख डॉलर की शुल्क-राशि का भुगतान भी रोक दिया गया। नोरिएगा ने सन् 1989 में राष्ट्रीय महासभा तथा राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचन कराने का आदेश दिया। उसने तय कर लिया था कि वह जन-समर्थन का प्रदर्शन करके कार्लोस डक को नया राष्ट्रपति बनायेगा। उसे विश्वास था कि उसका उम्मीदवार जीतेगा, अत. उसने मतदान के समय विदेशी पर्यवेक्षकों की उपस्थिति की अनुमति दे दी। विदेशी पर्यवेक्षकों में एक अतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल भी था, जिसके मुखिया संयुक्त राज्य के भूतपूर्व राष्ट्रपति जिम्मी कार्टर और गेराल्ड फोर्ड थे। नोरिएगा समर्थक शक्तियों द्वारा बड़े पैमाने पर जाली मतदान के बावजूद परिणामो से स्पष्ट हो गया कि नोरिएगा के विरुद्ध लहर आयी हुई है। मतदान केन्द्रों पर मतदाता इतनी भारी संख्या में पहुंचे, जिसकी कल्पना भी न थी तथा वे दृढ़-निश्चयी प्रतीत होते थे। रोमन कैथोलिक चर्च द्वारा लगाये गये निष्पक्ष गणित के अनुसार विपक्ष का उम्मीदवार गुइल्लेर्मो एन्डारा नोरिएगा-समर्थित डक से 3 गुना मतों से आगे चल रहा था। यह खबर मिलते ही नोरिएगा ने सशस्त्र सैनिको को मतपत्रों तथा गणनापत्रकों को बंदक की नली के जोर से जब्त करने तथा पनामा शहर स्थित केन्द्रीय निर्वाचन अधिकरण के पास जाली गणनापत्रक भेजने का आदेश दे दिया। कार्टर को केन्द्रीय गणना-कक्ष में जाने की अनुमति नहीं दी गयी। नोरिएगा ने विपक्ष पर प्रहार करने का आदेश जारी कर दिया। जीतते जा रहे उम्मीदवार एन्डारा की सार्वजनिक रूप से पिटायी की गयी और पनामा में अराजकता फैल गयी। इस प्रकार स्पष्ट हो गया कि नोरिएगा को सैनिक अभियान के अतिरिक्त अन्य किसी रीति से पदच्युत नही किया जा सकता। पनामा की सशस्त्र सेनाओं में अंतःकरण के आधार पर विरोध फैलता जा रहा था। इन तत्त्वों ने संयुक्त राज्य सरकार से प्रोत्साहन पाकर अक्तूबर, 1989 में जनरल नोरिएगा का तख्ता पलटने की कोशिश की, परंतु संयुक्त राज्य की सैनिक सहायता के अभाव में सत्ता-अपहरण का प्रयास विफल हो गया तथा पनामा की जनताजनरल नोरिएगा को अपराजेय मानने लगी। 87 जोस रन (ऊपर) तस्करी की रुनिया के सम्राट नोरिएगाको हिरासत में लेते हुए पुलिस कर्मचारी। नोरिएगा को बंदी बनाया गया जहां तक पनामा की नागरिक और सैनिक शक्तियों का प्रश्न था, नोरिएगा उनके लिए निश्चय ही अपराजेय सिद्ध हो चुका था, परंतु संयुक्त राज्य के लिए वह अपराजेय न था। राष्ट्रपति बुश ने अमरीकी प्रतिरक्षा विभाग को आदेश दे दिया कि वे नोरिएगा को पकड़ लें तथा पनामा में लोकतंत्रात्मक सरकार की स्थापना करें। 24 दिसंबर, 1989 को तीसरे पहर संयुक्त राज्य सेना के यातायात विमान हॉवर्ड वायु-सैनिक अड्डे पर उतरने लगे। 27 दिसंबर को आक्रमण शुरू हुआ तथा तुरंत ही गुल्लेर्मो एन्डारा को संयुक्त राज्य सैनिक अड्डे पर पनामा की नयी सरकार के राष्ट्रपति पद की शपथ दिलायी गयी। नोरिएगा जान बचाकर भागा और उसने पनामा शहर में वैटिकन दूतावास के भीतर पहले तो शरण ग्रहण कर ली और बाद में 3 जनवरी, 1990 को शाम साढ़े 8 बजे संयुक्त राज्य के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। उसे तुरंत हवाई जहाज द्वारा संयुक्त राज्य ले जाकर एक सुदढ़ सुरक्षा-प्रबंध वाली जेल में रखा गया, जहां वह मियामी-आरोप-पत्र के आधार पर मुकदमे की सुनवायी की प्रतीक्षा कर रहा है।
सुनहरा त्रिभुज और मादक-द्रव्य तस्कर मा, थाईदेश तथा लाओस को मिलाकर सुनहरा त्रिभुज कहा जाता है। सुनहरे त्रिभुज के देश पश्चिमी बाजारों में बिकने वाली हेरोइन का लगभग 50 प्रतिशत मुहय्या कराते हैं। सुनहरे त्रिभुज से तस्करी द्वारा निर्यात की जाने वाली अधिकांश हेरोइन का उत्पादन वर्मा में होता है। सुनहरे त्रिभुज द्वारा निर्यात की जाने वाली लगभग 300 टन हेरोइन में से वर्मा 250 टन, थाईदेश 30 टन और लाओस केवल 20 टन हेरोइन पैदा करता है। सुनहरे त्रिभुज और भारत के मादक-द्रव्य तस्करों के बीच इस अर्थ मे एक विशिष्ट संबंध हैं कि सुनहरे त्रिभुज के तस्कर भारतीय तस्करों के मार्फत अपनी हेरोइन तो विदेशी बाजारों तक पहुंचाते ही है, वे हेरोइन के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला एक अनिवार्य रसायन एसेटिक एनहाइड्राइड भी उनके ही मार्फत भारत से खरीदते हैं। अफीम को बर्मा और लाओस की प्रशोधनशालाओं में हेरोइन का रूप प्रदान किया जाता है। बर्मा में 80 से अधिक प्रयोगशालाएं यही कार्य कर रही है। 19 प्रशोधनशालाएं बड़ी मानी जाती हैं। उनमें से 7 थाई-बर्मा सीमांत पर स्थित हैं। थाई-लाओस सीमांत पर लाओस की ओर 5 बड़ी प्रशोधनशालाएं दिन-रात अफीम को हेरोइन में रूपांतरित करती रहती हैं। बर्मा के तस्कर बर्मा का अफीम का समूचा उत्पादन उसके शान प्रदेश के 3 लाख एकड़ उपजाऊ क्षेत्र में होता है, जिसमें 80 लाख शान निवास करते है, जो जनरल खुन-सा के नेतृत्व में वर्मा के विरुद्ध आजादी की लड़ाई में लड रहे है। खुन-सा शान प्रजाति के 16,000 छापामार सैनिकों का सर्वोच्च सेनापति और नेता है। उसका असली नाम चांग ची फू है तथा उसे आमतौर पर 'धन-वृक्ष' के उपनाम से पुकारा जाता है। आज 1 लाख 62 हजार वर्गमील क्षेत्रफल वाले शान राज्य का नियंत्रण उसके हाथों में है तथा उस पर खुन-सा के सैनिको का एकछत्र प्रभुत्व है। जनरल खुन-सा गर्वपूर्वक डींग हांकता है कि उसके शान राज्य ने सन् 1989 में 250 टन हेरोइन का उत्पादन किया। यह मात्रा सन् 1988 के उत्पादन की ठीक दोगुना है और इससे उसके लोगो को 16 खरब डॉलर की राशि प्राप्त हुई, जबकि 89 'धन पूक्ष' के नाम से विख्यात मादक-द्रव्य माफिया-सरदारों का संरक्षणराता बुन-सा संयुक्त राज्य अमरीका में उतनी हेरोइन का दाम इसकी अपेक्षा 10 गुना है। इतने पर भी खुन-सा न तो स्वयं पोस्त उगाता है, न उसका प्रशोधन अथवा विक्री ही करता है। वह केवल पोस्त उगाने वाले किसानों तथा वडी-बड़ी प्रशोधनशालाओ में उसका प्रशोधन करने वाले मादक-द्रव्य सरदारों को संरक्षण प्रदान करता है। 90 स संरक्षण के बदले में वह उन सबसे 40 प्रतिशत कर वसूल करता है। सन् 1988 उसे 20 करोड़ डॉलर राशि कर के रूप में प्राप्त हुई तथा सन् 1989 में 40 करोड गॅलर। जनरल खुन-सा की छावनी पहले बर्मा-थाईदेश सीमा के उस पार थाईदेश च्यांग राय प्रांत में बान हिन थेक में थी, जहां से उसे सन् 1978 में खदेड दिया या था। जनरल खुन-सा अपने लोगो द्वारा पोस्त की खेती का समर्थन करता है। वह हता है, "मैं अफीम नही उगाता, मैं हेरोइन का उत्पादन नहीं करता, मेरे लोग उगाते हैं। वे चावल खरीदने, कपड़े पहनने और अपनी बीमारियों के इलाज के लए दवाइयां खरीदने के लिए अफीम पैदा करते हैं। यदि मुझे अपने लोगो की रक्षा का कोई वैकल्पिक मार्ग दिखायी देगा तो मैं उसका अनुसरण करने लगूंगा।" वह कहता है कि वह हेरोइन को एक आवश्यक बुराई मानता है। उसने एक बार यह रस्ताव रखा था कि वह अपने क्षेत्र की हेरोइन सीधे डी.ई.ए. के हाथों बेचने को तैयार है। इसके बदले में उसने मांग की थी कि उसे राशि की एक तिहाई राशि दे दी जाये जो डी.ई.ए. उसे तथा उसके क्षेत्र में उत्पादित हेरोइन को नष्ट करने के वफल प्रयासों पर खर्च करती है। शान क्षेत्र से मादक-द्रव्यों के उन्मूलन के लिए उसने पश्चिमी जगत के देशों से 15 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता मागी थी। वास्तव में वर्मा में मादक-द्रव्यों का व्यापार खुन-सा से पहले से चला आ रहा है तथा वह निश्चय ही उसके बाद भी जारी रहेगा। निकटवर्ती क्षेत्रो मे लोगो ने कुछ समय तक अनाज उगाने की चेष्टा की, परतु उस फसल से उन्हें 15 किलोग्राम अनाज के बदले में केवल एक डॉलर मिला, जबकि एक किलोग्राम कच्ची अफीम 150 डॉलर में बिकती है। 'क्रिसमस' वृक्ष जनरल खुन-सा चाहे जितना भी शक्तिशाली हो, हेरोइन के अमरीका पहुंचने के लिए थाईदेश और लाओस के वरिष्ठ लोगो का प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष सहयोग अनिवार्य है, क्योकि यह मादक-द्रव्य इन देशों के मार्ग से ही भेजा जाता है। जनरल खुन-सा इन वरिष्ठ अधिकारियों को भारी मात्रा मे घूस देता है, जिसे वहां 'भेंट' कहा जाता है। वह मजाक में कहता है, "ये लोग मुझे क्रिसमस वृक्ष समझते है, वे उसे (मुझे)हिलाकर देखना चाहते हैं कि उसमें से क्या उपहार झड़ते थाईदेश में सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार इतना अधिक बढ़ गया है कि कभी-कभी हेरोइन थाई पुलिस के वाहनों अथवा सेना के हैलीकॉप्टरों तक में ले जायी जाती है। सन् 1989 में डी.ई.ए. एजेंटो तथा देश के उत्तर में बसे हुए शहर च्यांग मिया में स्थित संयुक्त राज्य कौंसुलेट के अधिकारियों ने सुझाव दिया था कि अमरीका को थाईदेश के मादक-द्रव्य निरोधक कार्यक्रम को दी जाने वाली भारी 91 आर्थिक सहायता बंद करने के बारे में विचार करना चाहिए, परंतु संयुक्त राज्य दूतावास ने उस समस्या को वैसे ही लटकने दिया, क्योंकि उसे उसका कोई विकल्प नही सूझा। संयुक्त राज्य गुप्तचर एजेंसियों को यह भी शंका थी कि वर्मा के अधिकारियो तथा मादक-द्रव्य तस्करों के बीच गठजोड़ हो गया है, अतः संयुक्त राज्य विदेश विभाग ने वर्मा के मादक-द्रव्य निरोधक कार्यक्रम को आर्थिक सहायता देना बंद कर दिया। उस समूचे क्षेत्र में सरकारी भ्रष्टाचार एक प्रमुख समस्या बन गयी है। हांगकांग का संकल्प इसके विपरीत हागकाग ने मादक-द्रव्य तस्करी के साथ निपटने मे उदाहरणीय सकल्प और स्वच्छता का परिचय दिया है। हांगकांग एक लंवे समय से हेरोइन के प्रशोधन तथा संयुक्त राज्य एवं पश्चिमी युरोपीय देशो के लिए हेरोइन के निर्यात का एक बडा केन्द्र रहा है। सन् 1980 तक हांगकांग में सुनहरे त्रिभुज के मादक-द्रव्यों की तस्करी समुद्र-मार्ग से होती थी। सन् 1980 में जब चीन ने पर्यटकों ओर व्यापारियों के लिए अपने देश की सीमाएं खोल दी तो तस्करो ने भूमि-मार्ग का इस्तेमाल शुरू कर दिया। सन् 1981 मे चीन सरकार ने सीमा-शुल्क अधिकारियो को मादक-द्रव्य तस्करों की धरपकड का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। चीन की पुलिस ने हांगकांग पुलिस के साथ मिलकर मादक-द्रव्य तस्करो के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। चीनियो ने सन् 1988 में शघाई से सान फ्रांसिस्को के लिए निर्यात की जा रही सुनहरी मछलियो (गोल्ड फिश) के शरीर में से हेरोइन प्राप्त करने के बाद एक अतर्राष्ट्रीय मादक-द्रव्य गिरोह का सफाया कर दिया था। उस वर्ष हांगकांग पुलिस मादक-द्रव्य माफिया के दुर्ग में इतने भीतर तक घुस गयी कि जव विलासपोत ओयूई हांगकांग से आस्ट्रेलिया के लिए रवाना हुआ तो जहाज पर उसके कर्मचारियो मे से चार हागकाग पुलिस के अधिकारी थे। पोत पर उसकी जल-टंकी मे 45 किलोग्राम हेरोइन थी, जिसका मूल्य 4 करोड डॉलर था। छद्म रूप से तस्कर बने हुए पुलिस अधिकारियो ने रास्ते में ही तस्करो पर काबू पा लिया और उन्हे उस पुलिस छापे के अवसर पर सहयोग देने के लिए विवश कर दिया, जिसमे हांगकाग और आस्ट्रेलिया में क्रियाशील मादक-द्रव्य माफिया के 30 सदस्य पकड़े गये थे। पुलिस अधिकारियो ने बडा शिकार पकडने के लिए उस पोत को दाव पर लगाया था। उन्होने पोत के दो कर्मचारियो को आस्ट्रेलिया भेजा, जहां उन्होने हेरोइन का लदान पहुचाने का नाटक रचा और एक जाल विछाया। एक साथ मारे गये छापो में हांगकाग मे 14 तथा आस्ट्रेलिया में 7 तस्कर गिरफ्तार कर लिए गये। आस्ट्रेलिया के इतिहास मे मादक-द्रव्य की यह सबसे बड़ी धरपकड़ थी। इस अभियान के फलस्वरूप हागकाग के एक सबसे बड़े तस्कर गिरोह-14-के' का भेद खुला। आगे जांच से ज्ञात हुआ कि गिरोह के सदस्य काले धन की धुलाई,जुए, 92 वेश्यावृत्ति और अपराधियों को संरक्षण देने के धंधे मे लिप्त थे। हागकांग कुछ वों बाद चीन के नियंत्रण में लौट जायेगा और तव हांगकांग-गिरोह अपने हांगकांग-अड्डों का उपयोग नहीं कर पायेगे, अत. वे अभी से दूसरे स्थानों पर अड्डे बनाने की चेष्टा कर रहे हैं। आस्ट्रेलिया पुलिस अधिकारियों ने हांगकांग-गिरोह के संबंध-सूत्रों के बारे में प्रमाण इकट्ठे किये हैं। उन्होंने इतालवी और लेवनानी माफिया के साथ गठजोड़ कर लिया है। वे मादक-द्रव्य लाने-ले जाने के लिए वियतनामी शरणार्थियों का भी उपयोग कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि हागकांग माफिया के 2,000 सदस्यों ने आस्ट्रेलिया में शरण ग्रहण कर ली है। हांगकांग मादक-द्रव्य निरोधक विभाग और हांगकाग-पुलिस ने अमरीका के संघीय जांच ब्यूरो एजेटों के साथ मिलकर अप्रैल, 1988 में सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय छापा डाला। इसे 'बैम्बू ड्रैगन ऑपरेशन' कहा जाता है। इसमें एक अंतर्राष्ट्रीय गुप्तचरी अभियान के अतर्गत विविध विश्वव्यापी मादक-द्रव्य संस्थानो के 18 सदस्य पकडे गये तथा 4 करोड़ डॉलर मूल्य की हेरोइन पकड़ी गयी। उसके बाद सन् 1989 के आरंभ मे हागकांग और संयुक्त राज्य के गुप्तचरों ने कनाडा, थाईदेश और सिंगापर के अधिकारियों के साथ मिलकर 'व्हाइट मेयर' नामक अभियान चलाया, जिसके अतर्गत न्यूयार्क मे 370 किलोग्राम शुद्ध हेरोइन के साथ मिले रहस्यों के आधार पर संयुक्त राज्य, कनाडा और हांगकांग के 40 मादक-द्रव्य तस्करों को गिरफ्तार किया। उसी वर्ष मई में हांगकांग, चीन, संयुक्त राज्य तथा कनाडा के मादक-द्रव्य निरोधक एजेटों ने मिलकर न्यूयार्क के लिए रवाना की गयी 4 करोड़ डॉलर की हेरोइन पकड़ी गयी। हागकांग के इतिहास में मादक-द्रव्यों की सबसे बडी धरपकड़ सितंबर, 1989 मे उस समय हुई जब एक थाईदेशीय बंदरगाह से मछली पकड़ने की एक नौका पर लादी गयी बर्मा में बनी उच्च कोटि की हेरोइन हांगकांग पहुंची। हांगकांग की भादक-द्रव्य निरोधक एजेसी के लगभग 50 कार्यकर्ताओं ने उस माल की गंध पाकर हांगकांग क्षेत्र में बसे अनेक घरों को छान मारा और अंतर्राष्ट्रीय बाजार मे थोक भाव पर 40 करोड़ डॉलर से अधिक मूल्य की 420 किलोग्राम शुद्ध हेरोइन बरामद की। इस प्रसग मे यह बात उल्लेखनीय है कि संयुक्त राज्य के महाधिवक्ता डिक थॉर्नवर्ग की 15 मार्च, 1990 की घोषणा के अनुसार न्यूयार्क की संघीय ग्रैंड जूरीने बर्मा के जनरल खुन-सा के विरुद्ध एक आरोप-पत्र दाखिल किया है। इस आरोप-पत्र में उसपर 10 आरोप लगाये गये हैं, जिनमें उसका सबसे बड़ा अपराध सयुक्त राज्य मे तस्करी द्वारा टनो अफीम का निर्यात बताया गया है। 93 पाकिस्तान में मादक-द्रव्य माफिया पाकिस्तान मादक-द्रव्य समस्या से भीषण रूप से ग्रस्त है। सन् 1978 तक उस सब का सेवन बिलोचिस्तान और पश्चिमोत्तर सीमा-प्रांत के कबायली लोग कर लेते थे तथा पाकिस्तान में मादक द्रव्यों के व्यसनी लोगो की संख्या कोई बहुत बड़ी न थी, परंतु आज सन् 1990 में उसकी कुल 10 करोड 90 लाख आबादी में 20 लाख व्यक्ति हेरोइन के पक्के व्यसनी बन चुके हैं। इसके अतिरिक्त पाकिस्तान सुनहरे अर्द्धचंद्राकार क्षेत्र-ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान की अफीम का प्रशोधन तथा परिवहन केन्द्र बन गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ तथा संयुक्त राज्य अमरीका पाकिस्तान को पोस्त की खेती को रोकने के लिए प्रेरणा तथा धन दोनों दे रहे हैं, परंतु पाकिस्तान पोस्त की खेती को रोकने के वास्तविक प्रयासों के बजाय उसका दिखावा भर कर रहा है। सन् 1989 के आरंभ में 2 हैलीकॉप्टरों सहित एक बुलेटप्रूफ अमरीकी विमान पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर सीमा-प्रांत के लगभग 700 एकड क्षेत्र में खड़ी पोस्त की फसल में से कोई 270 एकड़ क्षेत्र पर पौध-नाशक रसायन छिडकने के लिए उड़ान भर रहा था कि ऋद्ध कवायलियों ने उस पर विमान-भेदी तोपों से गोलिया दागी। उडान को तत्काल रोक दिया गया। इससे पहले मन् 1986 में जब पाकिस्तान ने पोस्त की फसल पर पौध-नाशक रसायन छिडकने की कोशिश की थी तब सरकार के विरुद्ध दंगे पड़े थे, जिनमे 13 व्यक्ति मारे गये थे। उसके बाद सरकार ने पोस्त की खेती करने वाले किसानों को अपनी फसल नष्ट कराने के लिए तैयार करने की दृष्टि से हर्जानों का भुगतान किया, लेकिन उसके बाद पोस्त की खेती के क्षेत्र में और अधिक विस्तार हो गया। उसी वर्ष बाद में संयुक्त राष्ट्र संघ मादक-द्रव्य नियत्रण कोष के तत्वावधान में मुख्यतः संयुक्त राज्य की सहायता के आधार पर 2 करोड़ डॉलर की राशि लगाकर डिर क्षेत्र के ग्रामीण विकास की एक परियोजना तैयार की गयी, जिसका प्रयोजन उस क्षेत्र के किसानों को पोस्त की खेती की ओर से विमुख करना था। इस बार भी परिणाम वही निकला। किसानों ने परियोजना के अंतर्गत मुहैय्या करायी गयी बेहतर सिंचाई सुविधाओं का उपयोग पोस्त के अधिक फूल देने वाले पौधे उगाने के लिए किया। .
TIMIT Opkum growing areas in Southwest Asia's 'Goldencrescent' TYA SOMETROx Run AFGHANISTAN IRAN AAABA PAKISTAN OM सुनहरे अर्धचंद्राकार की नशे में स्थिति SOUTH AM पाकिस्तान की मादक-द्रव्य समस्या को देश मे पोस्त की खेती पर नियंत्रण करके नहीं सुलझाया जा सकता। उसकी दो बुनियादी समस्याएं इस प्रकार हैं: 1. उसके 20 लाख मादक-द्रव्य व्यसनी लोग और 2. सुनहरे अर्द्धचंद्राकार क्षेत्र मे उसके पड़ोसी-ईरान और अफगानिस्तान, जो पाकिस्तान की प्रशोधनशालाओ को मार्फीन, ब्राउन शुगर और हेरोइन तैयार करने के लिए निरंतर बड़ी मात्रा में अफीम भेज रहे हैं। इन प्रशोधनशालाओं की स्थापना पाकिस्तान के सर्वशक्तिमान मादक-द्रव्य माफिया ने चोरी-छिपे की है। यह माफिया आधुनिकतम शस्त्रास्त्र से लैस है, राजनीतिज्ञो के साथ उसके घनिष्ठ संबंध है और पाकिस्तानी सेना तथा अफगान विद्रोहियो के साथ सुदृढ़ गठजोड भी। अफगानिस्तान की पोस्त की खेती वाले क्षेत्र विद्रोही अफगान मजाहिदीन के नियंत्रण मे हैं। मुजाहिदोन प्रशोधन और पश्चिमी देशो को निर्यात के लिए प्रतिवर्ष कम से कम 700 टन अफीम पाकिस्तान भेजते है। पाकिस्तान के कबायली क्षेत्र में 100 से अधिक प्रशोधनशालाए हैं। उनके अतिरिक्त अफगान मुजाहिदीन ने भी अपने नियत्रण वाले अफगानिस्तानी क्षेत्र मे वहुत-सी चल-प्रशोधनशालाएं. स्थापित कर ली है। सयुक्त राज्य ड्रग एन्फोर्समेट एजेसी (डी.ई.ए.) के नवीनतम आंकडों के अनुसार पाकिस्तान विश्व का सबसे बड़ा हेरोइन आपूर्तिकर्ता बन गया है। पश्चिमी युरोप पहुचने वाली हेरोइन का 40 से 60 प्रतिशत भाग पाकिस्तान से आता है। मोटे तौर पर पाकिस्तान के 4 अरब वार्षिक के मादक-द्रव्य व्यापार का एक चौथाई भाग स्वयं अपने ही देश मे उगाये गये पोस्त के खेतो से आता है तथा शेष सीमा के उस पार अफगानिस्तान के खेतो से। पाकिस्तान के शक्तिशाली मादक द्रव्य सौदागरो के लिए जब अपने ही देश के हवाई तथा समद्री-मार्गों से मादक-द्रव्य का निर्यात कठिन हो गया तो उन्होने अपना माल दिल्ली तथा बंवई के रास्ते दुवई भेजना शुरू कर दिया। दुवई मे वे उसे अपने पश्चिमी खरीदारो के हाथों बेच देते हैं। उन्होंने भारतीय मादक-द्रव्य 95 सौदागरों के साथ घनिष्ठ व्यापारिक संबंध बना लिए हैं। उन्होंने पाकिस्तानी सेना और राजनीतिज्ञो के साथ मिलकर पाकिस्तान की सीमा से सटे 2 भारतीय राज्यो जम्मू-कश्मीर और पंजाब में अस्थिरता का वातावरण उत्पन्न करने की चेप्टा की है। मादक-द्रव्य माफिया पाकिस्तान का मादक-द्रव्य माफिया अत्यत शक्तिशाली है। कराची की एक मासिक पत्रिका 'न्यूज़लाइन के अनुसार पाकिस्तान के मादक-द्रव्य सौदागर अरबपति हो गये हैं तथा उन्होंने आपस में एक प्रकार का घनिष्ठ भाईचारा स्थापित कर लिया है, हालांकि वे कोलविया सरीखे मादक-द्रव्य संस्थानों के रूप में नही वरन् अपने-अपने निजी गिरोह बनाकर धंधा करते हैं। पाकिस्तानी मादक-द्रव्य माफिया के खूनी पजे राज्य के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन में गहरे धंसे हुए है और वे सभी राजनैतिक दलों को धन देते हैं। अतः सरकार बदलने से उनकी स्थिति पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। अक्तूबर, 1989 में प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान पाकिस्तान के मादक-द्रव्य मंत्रालय में राज्यमंत्री मियां मुजफ्फर शाह ने इस रहस्य का उद्घाटन किया कि श्रीमती भुट्टो ने पाकिस्तान के एक प्रमुख मादक-द्रव्य सरदार का यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था कि यदि कुख्यात मादक-द्रव्य तस्कर अनवर खट्टक को जेल से रिहा कर दिया जाये तो वह उन्हें पाकिस्तान नेशनल असेंबली के 10 विपक्षी सदस्यों का समर्थन दिला सकता है। मादक द्रव्य माफिया का प्रस्ताव ठुकराये जाने पर उसने प्रतिक्रियास्वरूप प्रधानमत्री, गृहमंत्री एतजाह अहसान तथा श्रीमती भुट्टो के 2 मादक-द्रव्य परामर्शदाताओं में से प्रत्येक के सिर पर 50 लाख रुपये की बोली लगा दी। इस प्रकार की जघन्य धमकियों के बावजूद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार देश के मादक-द्रव्य तस्करों के प्रति कठोर रुख अपनाये हुए है। यह एक धुव सत्य है कि किसी भी समाज में अपराध तब तक नहीं पनप सकता, जब तक कि कम से कम शुरू मे उसे कानून के रखवालों का संरक्षण प्राप्त न हो। पाकिस्तान में भी ठीक ऐसा ही है। पाकिस्तान का मादक द्रव्य माफिया देश के सैनिक तानाशाह जनरल जिया-उल-हक के संरक्षण में फला-फूला। जनरल जिया ने सन् 1979 में जुल्फिकार अली भुट्टो की वैधानिक सरकार का तख्ता पलटकर सत्ता का अपहरण किया था। मादक द्रव्य तस्करों को जनरल जिया द्वारा प्रदान किये गये संरक्षण का ranR:- -A--रा प्रवेश करने की चेष्टा कर रहा था। जब पुलिस ने उसको यह प्रलोभन दिया कि 96 पाकिस्तान के तानाशाह जनरल जिया-उल-हकः तस्करी की दलाली में मुंह काला यदि वह उस मादक-द्रव्य संगठन के कामकाज के बारे में पूरी तथा सही जानकारी उसे दे दे तो वह 5 साल बाद रिहाई की उम्मीद कर सकता है, अन्यथा उसे 15 वर्ष के कठोर कारावास का दंड दिया जायेगा। रजा ने पुलिस को सहयोग देने का निश्चय करके उस मादक-द्रव्य सिंडीकेट के रहस्य एक टेप-रिकार्डर मे उगलने शुरू कर दिये, जिसके लिए वह स्वयं काम करता था और जिसका जाल पाकिस्तान के सैनिक तानाशाह जनरल जिया के द्वार तक फैला हुआ था। पुलिस ने रजा की गवाही के आधार पर नार्वेवासी संपर्क-सूत्र जॉर्ज ट्रोबर को धर दबोचा। ट्रोबर पाकिस्तान के अनेक मादक-द्रव्य सौदागर-संगठनों के लिए काम करता था। नार्वे तथा स्वीडन की पुलिस ने सन् 1984 की गर्मियों मे नार्वे, स्वीडन और जर्मनी के बाजारों के लिए हेरोइन लाने वाले 3 अन्य पाकिस्तानियों को पकड़ा। पुलिस के अतिरिक्त नार्वे के पत्रकार तथा समाचार-पत्र 'आफटेन पोस्टेन' के संवाददाता एरिल्ड जोनास्सेन ने पाकिस्तानी मादक-द्रव्य सिंडीकेट की गतिविधि के बारे में खोजबीन शुरू कर दी। नार्वे की पुलिस ने पाकिस्तान विदेश विभाग कार्यालय को 3 पाकिस्तानी नागरिकों-ताहिर बट्ट, मुनव्वर हुसैन और हामिद हसनैन के बारे में कुछ प्रामाणिक दस्तावेज सौंपे, जिनसे स्पष्ट था कि ये तीनो नार्वे-स्वीडन में मादक-द्रव्यों की तस्करी में लिप्त थे। जोनास्सेन की खोजबीन से इस संदेह की भी पुष्टि हो गयी कि ये तीनों उस पाकिस्तानी मादक-द्रव्य सिंडीकेट का अंग थे, जिसे किसी छोटी-मोटी हस्ती का नहीं वरन् स्वयं राष्ट्रपति जिया का सरक्षण प्राप्त था। सन् 1985 के अंत मे नार्वे के सरकारी अभियोजक क्रिस्टियान निकोलाईसेन ने पाकिस्तान सरकार से निवेदन किया कि वह इन तीनों को गिरफ्तार करे। उसने 97 पाकिस्तान की संघीय जांच एजेसी को भेजे गये अपने पत्र में लिया कि "नार्वे द्वारा की गयी खोजबीन के दौरान कुछ अन्य नाम भी प्रकाश में आये थे, परंतु जहां तक नार्वे की खोज-एजेंसी का संबंध है, ये तीनों व्यक्ति सबसे अधिक लिप्त ठहरते हैं।" नार्वे का पुलिस अधिकारी ओविड ओलसेन पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी पर दबाव डालने के लिए अपनी टीम सहित इस्लामाबाद आ पहुंचा। परिणामत. संघीय जाच एजेंसी ने 19 अक्तूबर, 1985 को उन लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जिनके विरुद्ध नार्वे पलिस द्वारा आरोप लगाये गये थे। उनकी, विशेषतः पाकिस्तान के राज्य-स्वामित्व वालेहवीव बैंक के उपाध्यक्ष हसनैन की, गिरफ्तारी से पाकिस्तान के सार्वजनिक जीवन में एक राजनीतिक भूचाल आ गया। हसनैन के बारे में कहा गया कि वह वस्तुतः राष्ट्रपति जिया और उसकी पत्नी शफीका जिया का दत्तक पुत्र है। जिस रात हसनैन को गिरफ्तार किया गया, उस रात शफीकाजिया अपने पति के साथमिस की राजकीय यात्रा पर थी। हसनैन की गिरफ्तारी का समाचार मिलने पर उसने टेलीफोन करके संघीय जांच एजेसी के उच्चाधिकारियों से उसकी गिरफ्तारी का कारण पूछा। हसनैन इस्लामाबाद मे राष्ट्रपति भवन से चंद कदमो की दूरी पर रहता था और उसे राष्ट्रपति भवन में आने-जाने की पूरी छूट थी। ऐसा कहा जाता है कि हसनैन सन् 1980 के दशक के आरभिक वर्षों में हबीब बैंक की आर्मी जनरल हैडक्वार्टर शाखा में काम करता था। राष्ट्रपति जिया और बेगम जिया के साथ उसकी धनिष्ठता उन्ही दिनो विकसित हुई। जिमा और उसके परिवार के सदस्यों के समस्त बैंक संबंधी लेन-देन की देखरेख का काम अनेक वर्षों तक हसनैन के हाथों में ही रहा। हमनेन की गिरफ्तारी के समय भी राष्ट्रपति, बेगम जिया और उनकी बेटी की चैकबुके और उनके बैंक खातों की प्रतियां उसके बीफकेस में थीं। जिया तथा उनके परिवार के अनेक सदस्यों के देशी और विदेशी लेन-देन उसके ही जिम्मे थे। पाकिस्तान सरकार इस मामले में बहुत धीमी गति से बढ़ रही थी। हसनैन को स्वास्थ्य के आधार पर जमानत पर छोड़ दिया गया था। जून, 1987 में मामला जब सुनवायी के लिए अदालत के सामने पेश हुआ, तब नार्वे के पुलिस अधिकारी अदालत के भीतर अराजकता की सी स्थिति देखकर बुरी तरह खिन्न हो गये। नार्वे के सरकारी अभियोजक ने गंभीर रुख अपना लिया तथा पाकिस्तानी अधिकारियों से स्पष्ट कह दिया कि नार्वे इस मामले में ठोस कार्यवाही चाहता है। नार्वे द्वारा प्रतिरोध प्रकट करने के 2 दिनों के भीतर अभियुक्तों की जमानते रद्द कर दी गयीं तथा उन सब को लंबी-लंबी सजाएं सुनायी गयी। वे अभी तक पाकिस्तानी जेलों में पड़े हैं। हमीद हसनैन कहता है कि उसे बलि का बकरा बनना पड़ा है। 98 नार्वे पुलिस ने अनेक पाकिस्तानी मादक-द्रव्य तस्करों तथा हवाई अड्डों पर काम कर रहे उन सीमा-शुल्क अधिकारियों के नामों और पतों की सूची पाकिस्तान सरकार को दी थी, जो मादक-द्रव्य लाने-ले जाने वाले व्यक्तियों की सहायता करते थे। उसने मादक-द्रव्य तस्करों के अनेक संपर्क-टेलीफोन नबर भी दिये थे, जिनमें पश्चिमोत्तर सीमा-प्रांत के तत्कालीन गवर्नर के टेलीफोन नंबर भी थे। इस सब के बावजूद पाकिस्तान की जिया सरकार ने इस मामले में आगे कोई कार्यवाही नहीं की। जिया से जुड़े मादक-द्रव्य तस्करों में जापान का हिसायोशी मारुयामा भी था। वह जापान में एक क्लिनिक का मालिक था। मई, 1983 में उसे एमस्टरडम में गिरफ्तार किया गया। उसके पास से 17 किलोग्राम उच्च कोटि की हेरोइन बरामद हुई। जनरल जिया ने उसे अपनी बेटी का चिकित नियुक्त किया था। वह इसी ओट में काम करता था। उसने अदालत को बताया कि वह जिस सिंडीकेट के लिए मालवाहक (करियर) के रूप में काम करता रहा था, उसका मुखिया लाहौर के प्लाज़ा और कैपिटल सिनेमागृहो का मालिक मिर्जा इकवाल बैग है। बेग और हक हाजी मिर्जा इकवाल बेग पाकिस्तान की एक मशहूर हस्ती है। वह खासतौर पर पाकिस्तान के राजनीतिक और व्यापारिक हलकों में चोटी के लोगों के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों के लिए प्रसिद्ध है। वह लाहौर का एक बड़ा जमींदार, सिनेमा मालिक तथा उदार दानदाता है। वह पाकिस्तान मे विविध राजनीतिक दलों के चोटी के नेताओं के चुनाव अभियानों पर खुलकर खर्च करता है। बी.वी.सी. ने उस पाकिस्तान की कुख्यात हस्ती हाजी मिर्जा इकयाल पेग, जिसका नाम 30 शीर्षस्थ मादक-द्रव्य तस्करों की सूची 'में सबसे ऊपर है। 99 - पर एक कार्यक्रम प्रसारित किया था तथा उसका नाम उन 30 मादक-द्रव्य तस्करों की एक रिपोर्ट के उद्धरण प्रकाशित किये थे, जिनमें बेग को "देश का सबसे तैयार किया था और जो अक्तूबर, 1986 में पाकिस्तानी प्रेस में प्रकाशित हुई थी। इस्लामाबाद के समाचार-पत्र 'दा मुस्लिम' ने सीमा-शुल्क गुप्तचर एजेंसी की एक रिपोर्ट के उद्धरण प्रकाशित किये थे, जिनमें बेग को "देश का सबसे अधिक सक्रिय मादक-द्रव्य व्यापारी" कहा गया था। सन् 1980 के दशक में उसकी गिनती संसार के सबसे बड़े गांजा और हेरोइन तस्करो में की जाती थी। उसका मादक-द्रव्य साम्राज्य एक दर्जन से अधिक देशों तक फैला हुआ है, जिनमे सयुक्त राज्य अमरीका, ग्रेट ब्रिटेन, नार्वे और जर्मनी भी शामिल हैं। पाकिस्तान में कार्यरत 40 महत्त्वपूर्ण मादक-द्रव्य संगठनों में बेग का संगठन सबसे बड़ा और शक्तिशाली है। अमरीका तथा युरोप की मादक-द्रव्य निरोधक पुलिस को बेग की तलाश रही है तथा संयुक्त राज्य मादक-द्रव्य निरोधक एजेंसी (डी.ई.ए.) ने कई बार उसे पकडने की कोशिश भी की तथापि जनरल जिया के शासनकाल में उसे उसके राजनीतिक संबंधों के कारण गिरफ्तार नहीं किया जा सका था। सन् 1988 मे पाकिस्तान में बेनजीर भुट्टो सरकार बनने के बाद से उसकी राजनीतिक पहुंच मे कमी आने लगी। नयी सरकार ने खुलेआम घोषणा कर दी कि वह एक कठोर मादक-द्रव्य-नीति अपनायेगी। इस घोषणा के बाद बेग अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए अफगानिस्तान की सीमा से सटे पाकिस्तान के पठान कबायली इलाके में जा छिपा। सरकार ने उसके परिवार के सदस्यों और मित्रो पर भारी दबाव डाला, उनसे बार-बार पूछताछ की गयी, उसके शॉपिंग सेंटर और सिनेमाघर जब्त कर लिए गये तथा उसे धमकी दी गयी कि पाकिस्तान मे उसकी समूची संपत्ति जब्त कर ली जायेगी। इस दबाव के आगे बेग झुक गया और जुलाई, 1989 में उसने पाकिस्तान पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। नेशनल असेबली के विपक्षी सदस्यों ने बेग की गिरफ्तारी का विरोध सिर्फ इस कारण से किया कि उसने विपक्षी इस्लामी लोकतंत्रवादी गठबंधन के चुनाव अभियान पर भारी राशि खर्च की थी। शासक-दल पा.पी.पा.के अनेक सदस्यों ने भी अपनी सरकार की मादक-द्रव्य-नीति का विरोध किया। प्रांतीय असेंबली के एक पा.पी.पा. सदस्य चौधरी शौकत अली ने मिर्जा इकबाल बेग के समर्थन में खुलेआम पार्टी से त्यागपत्र दे दिया। जिया-शासन के 11 वर्षों में पाकिस्तान का मादक द्रव्य माफिया इतना सशक्त हो गया था कि वह एक समानांतर भूमिगत अर्थव्यवस्था का संचालन करने लगा था। मादक-द्रव्य नियंत्रण मंडल उसके लोगों के हाथों में था। पुलिस को तो उसने खरीद ही लिया था। कहा तो यहां तक जाता है कि कुछ पत्रकारों को भी खरीद लिया था। भ्रष्टाचार की स्थिति इतनी भयावह हो गयी थी कि 100 पाकिस्तान का एक और प्रमुख मादक-द्रव्य सौदागर भूतपूर्व मुख्यमंत्री एवं गवर्नर से. जनरल फज़ले हक मादक-द्रव्य ढोने वाले वाहनों को पकड़कर पुलिस हेरोइन जब्त कर लेती और उसे वापस बेच देती अथवा मादक-द्रव्य तस्कर उसे रिश्वत देकर खामोश कर देते। मादक-द्रव्यों की धरपकड़ के बावजूद पुलिस ने एक भी मादक-द्रव्य सौदागर को नहीं पकड़ा। सबसे बड़ा व्यंग्य तो यह है कि मिर्जा इकबाल बेग को जमानत पर रिहा कर दिया गया। पाकिस्तानी अधिकारी बेग पर लगाये गये मादक-द्रव्य तस्करी के आरोपों को सिद्ध करने के लिए कोई प्रमाण पेश नहीं कर सके तथा उन्हें शिकायत है कि संयुक्त राज्य अधिकारी उसके विरुद्ध वह साक्ष्य पेश नहीं कर रहे हैं, जिसे जुटाने का वचन उन्होंने दिया था। एक विपक्षी नेता तथा पश्चिमोत्तर सीमा-प्रांत का भूतपूर्व मुख्यमंत्री एवं गवर्नर ले. जनरल फज़ले हक पाकिस्तान का एक अन्य मादक-द्रव्य सौदागर है। पश्चिमोत्तर सीमा-प्रांत में हेरोइन व्यापार के फलने-फूलने के निमित्त अनुकूल वातावरण निर्माण करने के लिए वह अकेला ही जिम्मेदार है। पाकिस्तानी प्रेस उसे पाकिस्तान का नोरिएगा कहता है तथा यह दावा करता है कि जिस अवधि में वह प. सीमा-प्रांत का गवर्नर था, उसके दौरान अफगान मुजाहिदीन द्वारा की जा रही मादक द्रव्य तस्करी की ओर से पूरी तरह आंख मूंद ली गयी थी। अफगानिस्तान की हेरोइन को पाकिस्तान के मार्ग से विदेशों में भेजने की व्यवस्था भी उसने ही की। बेनजीर सरकार ने फजले हक को सन् 1988 में गिरफ्तार कर लिया। उसके लिए यह एक साहसपूर्ण कदम था क्योंकि सेना और इस्लामी डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ भूतपूर्व ले. जनरल फज़ले हक के संबंध अभी तक घनिष्ठ बने हुए थे। फज़ले हक को मादक-द्रव्यों की तस्करी के सिलसिले में नही वरन् इस आरोप पर पकडा गया कि वह पेशावर मे एक प्रमुख शिया राजनीतिक नेता 101 अल्लामा आरिफ अल हुसैनी की हत्या में शामिल था। उस पर यह आरोप भी था कि उसने पश्चिमोत्तर सीमा-प्रांत में तस्करों को संरक्षण प्रदान किया। उसका भाई फज़ले हुसैन पश्चिमी देशों में एक बड़े मादक-द्रव्य सौदागर के रूप में कख्यात है। हक इतना शक्तिशाली है कि उसने स्वयं से संबंधित समस्त पुलिस-फाइलें नष्ट करा दी। अन्य प्रमुख तस्कर पाकिस्तानी पुलिस पाकिस्तानी मादक-द्रव्य सरदारों का पीछा बहुत सरगर्मी के साथ कर रही है तथा मादक-द्रव्यों की खोज मे डाले गये छापों में कुछ मोटी मछलियां उसके जाल में फंसी हैं। अप्रैल,1988 में जनरल जिया के भूतपूर्व विमान चालक मेजर फारूक हमीद को हेरोइन-तस्करी के आरोप में पकड़ा गया। मेजर हमीद एक ऐसे गिरोह का नेता था, जिसने एक लंबा-चौडा जाल बिछा रखा था तथा जिसके संपर्क सूत्र दुबई, इंग्लैंड और नार्वे तक फैले हुए थे। उसकी गिरफ्तारी एक गवाह द्वारा उन विविध छद्म नामों का रहस्य खोले जाने के बाद हुई, जिनका इस्तेमाल मादक-द्रव्यों की तस्करी के लिए अंतर्राष्ट्रीय अभियानो के दौरान किया जाता था। इन अभियानों के बीच तालमेल बिठाने का काम मेजर हमीद के जिम्मे था। इसके एक महीने बाद पाकिस्तान के मादक-द्रव्य-राजकुमार के नाम से कुख्यात मलिक सलीम को एक लंबे कानूनी संघर्ष के बाद संयुक्त राज्य के हाथो मे सौप दिया गया। उसके विरुद्ध मादक-द्रव्यो की तस्करी के आरोपो पर फ्लोरिडा की एक अदालत में मुकदमा चल रहा है। उस पर यह आरोप लगाया गया है कि वह विश्व के कुछ अन्य कुख्यात तस्करों के साथ मिलकर एक शक्तिशाली सिंडीकेट का संचालन कर रहा था। वह शुरू मे संयुक्त राज्य मे गिरफ्तार हुआ तथा जमानत पर छूट गया था, परंतु वह जमानत को लांघकर पुन: अपने व्यापार का सफलतापूर्वक संचालन करने लगा था। उसके सिंडीकेट पर आरोप है कि उसने संयुक्त राज्य को टनों मादक -द्रव्यो का तस्करी से निर्यात किया। सयुक्त राज्य के हाथों में सौपे जाने से बचने के लिए सलीम ने अदालत को 'रिश्वत देने की व्यर्थ कोशिश की। उसकी इस चेष्टा से अदालत को उसके हस्तातरण की प्रक्रिया शीघ्रतापूर्वक निपटाने में मदद मिली। उसी वर्ष अगस्त मे पाकिस्तान के मादक-द्रव्य निरोधक अधिकारियों ने हेरोइन की तस्करी के एक महत्त्वपूर्ण संपर्क-सूत्र सुहेल अहमद को उसके कराची स्थित राजसी आवास से गिरफ्तार किया। मई, 1989 में जनरल जिया के एक अंगरक्षक पर यह आरोप लगाया गया कि उसने सन् 1981 में ढेर सारी हेरोइन तस्करी से न्यूयार्क पहुंचायी थी। उसका नाम प्रकट नहीं किया गया। पाकिस्तान के उर्दू दैनिक जंग के अनुसार हेरोइन को 100 से अधिक कीमती लैंपों मे छिपाया गया था। ये लैंप संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा 102 के उस विशेष अधिवेशन के अवसर पर प्रतिनिधियों को उपहार-स्वरूप भेंट करने के लिए न्यूयार्क ले जाये जा रहे थे, जिसे जनरल जिया विश्व के 90 करोड़ मुसलमानों के एक नेता के रूप में संबोधित करने वाले थे। जनरल जिया ने अपनी न्यूयार्क -यात्रा का मार्ग अंतिम क्षणों में बदलकर ईरान और इराक होकर जाने का निश्चय कर लिया। इस कारण उनकी पूरी की पूरी टोली का सारा का सारा सामान दूसरे विमान पर चढ़ाना अनिवार्य हो गया। इसी अदला-बदली में एक लैंप नीचे गिरकर टूट गया और उसमे से निकलकर हेरोइन चारों ओर बिखर गयी। सीमा-शुल्क अधिकारियो को सभी लैंपो की तलाशी लेनी पड़ी। उन सभी मे हेरोइन भरी हुई थी। सैनिक अधिकारियों की लिप्तता अंतर्राष्ट्रीय मादक-द्रव्य निरोधक एजेंसियां समय-समय पर ये आरोप लगाती रही हैं कि पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं के भीतर एक अन्य बड़ी हेरोइन-सिंडीकेट तस्करी में लिप्त है। जिया शासनकाल में सेना इतनी अधिक शक्तिशाली थी कि वह पुलिस को सैनिक अधिकारियो तथा कर्मचारियों की तलाशी नहीं लेने देती थी, परंतु पाकिस्तान की पुलिस भी उनकी तलाशी लेने पर आमादा थी तथा जुलाई, 1986 में उसने थलसेना के मेजर जहरूद्दीन आफ्रीदी को पेशावर से कराची के रास्ते में पकड़ लिया। उसके पास से उच्च कोटि की 220 किलोग्राम हेरोइन वरामद हुई पाकिस्तान में पकड़ी गयी हेरोइन की वह सबसे बड़ी अकेली खेप थी। इसके ठीक 2 मास पश्चात् पाकिस्तान पुलिस ने एक वायुसेना-अधिकारी फ्ला. ले. क्वीउर्रहमान को उच्च कोटि की 220 किलोग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा। पूछताछ के दौरान रहमान का मनोबल शिथिल पड़ गया और उसने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि वह इससे पहले भी 4 बार मादक-द्रव्यों की तस्करी कर चुका है। रहमान युरोप को हेरोइन का निर्यात करता था। उसके कब्जे से पकड़ी गयी हेरोइन की कीमत थोक बाजार मे 80 करोड डॉलर थी तथा फुटकर भावों पर 4 अरब डॉलर अथवा उससे भी अधिक! सेना ने उन दोनों अधिकारियों को पलिस के कब्जे से अपने हाथो में ले लिया तथा उन्हें कराची के बाहर मलीर छावनी मे नजरबंद कर दिया। कुछ समय बाद यह घोषणा कर दी गयी कि वे दोनो 'रहस्यमय परिस्थितियो' मे नजरबंदी से भाग निकले। उस समय तक उनके आचरण के बारे मे जाच शुरू भी नहीं होने पायी थी। युरोपीय पुलिस-स्रोतों ने आरोप लगाया कि उन्हें भगाने के लिए 2 लाख डॉलर की घूस दी गयी। अफगानिस्तान के मुजाहिदीन-नियत्रित हेरोइन-उत्पादक क्षेत्रो की हेरोइन को तस्करी द्वारा पाकिस्तान में लाने के षड्यत्र मे पाकिस्तान की तत्कालीन इटर सर्विसेज इटेलीजेंस (सैनिक गुप्तचर संगठन) भी शामिल थी। अमरीका की सैट्रल 103 इंटेलीजेंस एजेंसी (सी.आई.ए.) द्वारा अफगान विद्रोहियों के लिए भेजे जाने वाली शस्त्रास्त्र की खेप तथा अन्य सामग्री आई.एस.आई. (इंटर सर्विसेज़ इंटेलीजेस) की देखरेख में पाकिस्तान से अफगान विद्रोहियों के मुख्यालय तक दो प्रमुख साधनों द्वारा पहुचायी जाती थी-पाकिस्तान वायुसेना के परिवहन विमानो द्वारा तथा नेशनल लौजिस्टिक सैल के वाहनों द्वारा। यह सैल पूरी तरह पाकिस्तान की थलसेना के सदस्यों की मिल्कियत था तथा उसके गोदामो आदि पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध रहते थे। पाकिस्तान की अंग्रेजी मासिक पत्रिका 'दा हैराल्ड' के अनुसार ने.लौ. सैल के वाहनों को निरंतर पश्चिमोत्तर सीमा-प्रांत से कराची बंदरगाह तक हेरोइन ढोने के काम में लाया जाता रहा। लदानों को मुहरबद करके भेजा जाता तथा पुलिस को उनकी जांच का कोई अधिकार न था। शस्त्रों तथा अनाज के बोरों का अपना लदान पेशावर के सरकारी गोदामों पर उतारने के बाद कराची लौटते समय ट्रको और विमानों पर हेरोइन की पेटियां लाद दी जाती थीं। यह सिलसिला साढे तीन वर्ष से अधिक समय तक यों ही चलता रहा। बड़े पैमाने पर मादक-द्रव्यों की इस तस्करी का संगठन पश्चिमोत्तर सीमा-प्रांत के तत्कालीन गवर्नर ले. जनरल हक ने किया था। मादक-द्रव्य माफिया इतना शक्तिशाली था कि जब पेशावर में अफगान सूचना केन्द्र के निदेशक डॉ. सईद मजरूह ने इस तस्करी का विरोध किया तो फरवरी, 1988 में उनकी हत्या कर दी गयी। डॉ. मजरूह ने मादक-द्रव्यों की तस्करी मे अफगान मुजाहिदीन की लिप्तता पर अनेक बार विस्मय प्रकट किया था। मादक-द्रव्य सरदारों के कोप के भाजन अकेले डॉ. मजरूह ही न थे। पाकिस्तान नार्कोटिक कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय-प्रमुख अल्ताफ अली खान ने जिस दिन एक मादक-द्रव्य निरोधक अभियान का नेतृत्व किया तथा 60 किलोग्राम हेरोइन पाउडर पकड़ा, उसके अगले ही दिन उनकी लाश उनके घर मे मिली। सं.रा. में अज़ीजुल्लाह पर आरोप मादक-द्रव्यो की तस्करी मे पाकिस्तान के प्रतिरक्षा विभाग के कर्मचारियों की लिप्तता का सबसे ताजा प्रमाण अप्रैल, 1990 के आरंभ में पाकिस्तान के प्रतिरक्षा विभाग के सेवा-निवृत्त अवर-सचिव अज़ीजुल्लाह हसन के विरुद्ध सं.रा. अमरीका मे हाउस्टन के जिला न्यायाधीश डेविड हिटनर द्वारा लगाये गये आरोप हैं। आरोप-पत्र मे कहा गया है कि हसन ने 5 लाख डॉलर मूल्य की हेरोइन तस्करी द्वारा सं.रा. में मंगायी। हिटनर ने हसन को जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया। स.रा.की संघीय सरकार के अभियोजक ने हसन पर यह भी आरोप लगाया कि हसन ने हेरोइन का एक पैकेट डाक से मंगाया। पैकेट हॉलैंड से कैनेडी हवाई अड्डे पर पहुंचा। उस पर जापानी डाक टिकट लगे थे। डी.ई.ए. के कर्मचारियो ने पैकेट की जांच की तथा जब इस बात की पष्टि हो गयी कि पैकेट के भीतर हेरोइन है, तव डी.ई.ए. का एक एजेंट डाकिये के वेश में वह पैकेट लेकर हसन के बेटे के 104 घर पहुंचा और उसने कैथरीन टर्नर के बारे मे पूछताछ की, क्योंकि पैकेट उसके नाम था। हसन की पत्नी ने एजेंट से कहा कि उसे टर्नर के बारे में कुछ भी मालूमन था और उसने पैकेट स्वीकार करने से इनकार कर दिया, परंतु हसन ने हस्तक्षेप किया तथा यह कहते हुए पैकेट स्वीकार कर लिया कि वह कैथरीन टर्नर के नाम की प्रत्येक डाक स्वीकार करने को तैयार है। पैकेट पहुंचाने के थोडी देर बाद ही संघीय एजेटों ने हसन के घर पर छापा डाला और उसके कब्जे से हेरोइन बरामद कर ली। न्यायमूर्ति हिटनर ने अपना फैसला सुनाने के लिए 16 जुलाई, 1990 की तारीख तय की है। हसन को एक लंबी अवधि के लिए जेल की सजा मिलना निश्चित है। हसन प्रकरण के माध्यम से मादक-द्रव्य तस्करी में लिप्त कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण सरकारी और सैनिक अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं। काले धन की धुलाई ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तान काले धन की धुलाई का कोई बड़ा केन्द्र नहीं है तथा अधिसंख्य पाकिस्तानी मादक-द्रव्य तस्कर विदेशी मुद्रा का बडा अंश विदेशों में रखना पसंद करते है। नकद अथवा तस्करी के सामान के रूप में पाकिस्तान लौटने से पहले मादक-द्रव्यो की कमाई की धुलाई एक निवेश-श्रृंखला के माध्यम से की जाती है। मादक-द्रव्यों की कमाई ने पाकिस्तान में एक नया अरवपति वर्ग पैदा कर दिया है, जो पाकिस्तान के लोकतत्र तथा उसके सामाजिक ताने-बाने एवं आर्थिक विकास के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। 105 . भारत के मादक-द्रव्य तस्कर 'रत मे भांग, चरस, गांजा और अफीम के सेवन की परंपरा बहुत प्राचीन , भाग का प्रयोग प्राय. बादाम सरीखे पोषक सूखे मेवे के साथ किया जाता था तथा इस प्रकार के पेय का मूल प्रयोजन मानवी चेतना में एक प्रकार का अस्थाई उन्माद उत्पन्न करना था, वह भी विशेषतः होली जैसे पर्यों पर। मादक द्रव्यो के रूप में इन पदार्थों के प्रयोग के उदाहरण तो भारत में खोजे भी नहीं मिलेंगे, परंतु आज भारत की वास्तविकता पूरी तरह बदल चुकी है और भारत दोनो प्रकार से मादक-द्रव्यो का शिकार बन चुका है-भारत के लोग, विशेषतः युवा, इनके व्यसनी बन गये हैं और दुर्भाग्यवश उनकी सख्या में वृद्धि होती जा रही है। इसके अतिरिक्त मादक-द्रव्यों के निर्यात के लिए भी भारत का इस्तेमाल किया जाने लगा है। भारत पूर्व में सुनहरे त्रिभुज-बर्मा, थाईदेश और लाओस तथा पश्चिम में सुनहरे अर्द्धचंद्र-पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान के बीच मादक-द्रव्यों के दुष्चक्र में पिस रहा है। उत्तर दिशा में नेपाल विश्व बाजार में भांग, चरस और गाजा की आपूर्ति का एक बड़ा स्रोत है। सुनहरा त्रिभुज और सुनहरा अर्द्धचंद्र अफीम और उससे तैयार होने वाले मादक-द्रव्यों-मार्फीन, बाउन शुगर और हेरोइन का बड़े पैमाने पर उत्पादन करते हैं तथा पश्चिमी जगत को इन द्रव्यों की आपूर्ति के प्रमुख स्रोत हैं। उत्तर-पूर्व में स्थित सनहरे त्रिभुज क्षेत्र में अफीम से तैयार होने वाले मादक-द्रव्यों को पहले बर्मा के गोदामों में इकट्ठा किया जाता है, उसके बाद उन्हें चोरी-छिपे भारत पहुचाया जाता है और यहां से विदेशी बाजारो के लिए रवाना किया जाता है। उत्तर-पूर्व दिशा में तस्करी प्रमुख मार्ग इस प्रकार हैं: मंडाले-तिद्दिम-सिंगहाट-चूडचंद्रपुर-इम्फाल; तामू मोरेह-इम्फाल; और मंडाले. तिहिम-चपाई-आईजौल-इम्फाल। इंटरपोल (अंतराष्ट्रीय पुलिस) स्रोतों के अनुसार सन् 1987 के दौरान समूचे विश्व मे पकड़ी गयी हेरोइनमे से लगभगएक तिहाई अकेले भारत में जब्त की गयी। इटरपोल का विचार है कि पश्चिमी देशो के बाजारों के लिए पूर्वी जगत से भेजे जाने वाले मादक-द्रव्यों का लदान मुख्यतः नई दिल्ली और बबई से किया जाता है। . - 106 - पश्चिमी दिशा मे ईरानी और अफगान तस्करों ने पाकिस्तानी राजनीतिज्ञों और सैनिक तथा पुलिस अधिकारियो के संग सांठगाठ करके पाकिस्तान में हेरोइन प्रशोधन प्रयोगशालाएं और गोदाम स्थापित कर लिए हैं। पाकिस्तान ने तो भारत के विरुद्ध मादक-द्रव्य युद्ध ही छेड़ दिया है। पाकिस्तान में बनाये गये गोदामों की हेरोइन तस्करी द्वारा भारत भेजी जाती है और यहां से उसे विदेशो को भेज दिया जाता है। पाकिस्तान से तस्करी मुख्यतः इन मार्गों से की जाती रही है साहीवाल (पाकिस्तान)-श्रीगंगानगर-चुरू-सीकर-दिल्ली अथवा बंबई रहीमयार खां (पाकिस्तान)- किशनगढ़-रामगढ़-जैसलमेर-जोधपुर-बबई कोकरापार (पाकिस्तान)-मुनाबाओ-बाड़मेर-जोधपुर-बंबई और साहीवाल (पाकिस्तान) -अनूपगढ़-बीकानेर-सीकर-जयपुर-दिल्ली अथवा बंबई। सन् 1989 में भारत में पकडी गयी कुल 2.5 टन हेरोइन का 72 प्रतिशत भाग पाकिस्तान से लाया गया था। इस रहस्य का उद्घाटन भारतीय मादक-द्रव्य नियंत्रण ब्यूरो के महानिदेशक श्री मदन मोहन भटनागर ने किया। पाकिस्तान गांजा निर्यात करने के लिए भी भारतीय मार्ग का इस्तेमाल करता रहा है। भारत में अब तक पकड़े गये कुल गांजे का लगभग 40 प्रतिशत पाकिस्तानी था। भारत के मादक-द्रव्य नियंत्रण ब्यूरो ने भारत के रास्ते भेजे जाने वाले मादक-द्रव्यो के लदान के विरुद्ध संघर्ष में भारी सफलता प्राप्त की है। पिछले पांच वर्षों के दौरान उसने 25,000 किलोग्राम अफीम, 15,000 किलोग्राम मार्फीन, 10,000 किलोग्राम से अधिक हेरोइन, 3,00,000 किलोग्राम भांग, 70,000 किलोग्राम गांजा, 60 किलोग्राम से अधिक कोकीन तथा लगभग 5,000 किलोग्राम अन्य मादक पदार्थ पकडे है, मगर यह सब तो भारत के मार्ग से की जाने वाली मादक-द्रव्यो की तस्करी के सागर की एक बूद के समान है। भारतः एक उत्पादक के रूप में भारत भांग और अफीम का उत्पादन दवाइयों तथा अन्य कार्यो मे उपयोग के लिए करता है और वह भी अपनी खपत के लिए ही, निर्यात की दृष्टि से नही। एक लंबे समय से अफीम की खेती राज्य के नियंत्रण में होती है तथा सन् 1978 के बाद से पोस्त की खेती का क्षेत्रफल 60,680 हेक्टेयर से घटाकर लगभग !5,000 हेक्टेयर तक सीमित कर दिया गया है। भारत में अफीम तैयार करने की केवल दो शालाएं हैं-गाज़ीपुर और नीमच मे तथा ये दोनों ही राज्य के स्वामित्व में हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भाग और गाजे की मांग और उनके मूल्यो में असाधारण बढ़ोतरी के कारण भारत मे चोरी-छिपे भांग की खेती को प्रोत्साहन मिला है। विशेषतः केरल राज्य के इदुक्की क्षेत्र मे पश्चिमी घाट के बहुत बड़े क्षेत्रफल में भांग उगायी जाने लगी है। भाग की खेती की परंपरा वहां बहुत पुरानी है, परंतु अब उसने बहुत खतरनाक रूप ग्रहण कर लिया है। मादक-द्रव्यों के 107 तस्करो ने तमिलनाडु राज्य के कोडईकनाल ताल्लुका में कडाईवेरी के निकटवर्ती क्षेत्र मे भी भांग की खेती शुरू कर दी है। इन क्षेत्रों में उगाये जाने वाले भांग और गांजे का एक वडा भाग हुवली के रास्ते बंबई पहुंचाया जाता है, जहां से उसे पश्चिमी देशों को भेजा जाता है। सन् 1987-89 के दौरान केरल और तमिलनाडु सरकारों ने भांग की हजारो एकड़ खेती को नष्ट कर दिया। केरल सरकार के आबकारी विभाग का दावा है कि उसने अकेले सन् 1987 वर्ष में 14 करोड रुपये मूल्य की भांग नष्ट कर डाली थी। इसी प्रकार तमिलनाडु सरकार के आवकारी ने दावा किया कि उसने सन् 1989 मे 'ऑपरेशन ब्लू स्काई के तहत 40 करोड़ रुपये मूल्य के भांग के पौधे नष्ट किये। सरकारो की सावधानी के कारण अब भारतीय मादक-द्रव्य तस्करी के लिए भारतीय अफीम अथवा भाग और गाजे का भारी मात्रा में निर्यात असभव हो गया है, तथापि सुनहरे अर्द्धचंद्राकार, सुनहरे त्रिभुज और नेपाल में तैयार किये गये मादक-द्रव्यो के निर्यात के लिए तो भारत को मार्ग के रूप मे इस्तेमाल किया ही जा रहा है। भारतीय मादक-द्रव्य माफिया अधिकांशतः बंबई में केन्द्रित है। इस माफिया की पहचान कायम करने में सबसे बड़ी कठिनाई यह है कि भारतीय न्यायिक प्रक्रिया इतनी उदार है कि मादक-द्रव्यो की तस्करी के लिए सजा प्राप्त कर चुके लोगों के नाम पता लगाना तक कठिन हो जाता है। इस संदर्भ मे सबसे बढिया स्रोत भारतीय पुलिस अधिकारी और मादक-द्रव्य नियंत्रण ब्यूरो हैं। सन् 1988 मे बबई पुलिस ने ब्राउन शुगर के कारखानों और मादक-द्रव्य अड्डों पर छापे मारे थे। महाराष्ट्र पुलिस के महानिदेशक श्री एस.पी. सिंह ने आरोप लगाया कि उन कारखानो का संचालन एक मादक-द्रव्य गिरोह कर रहा था, जिसका मुखिया दाऊद इब्राहीम था, जो दुवई मे छिपा हुआ था। श्री सिंह ने स्वीकार किया कि "मुझे शंका है कि वह (दाऊद इब्राहीम) अपने निकटवर्ती सहयोगियो के बल पर अभी तक इस क्षेत्र मे सक्रिय है।"परंतु पुलिस और गुप्तचर पुलिस उन पर निरतर निगाह रखे हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि दाऊद का गिरोह दमन और उसके समीपवर्ती दक्षिण गुजरात समुद्रतट के बदरगाहो के परंपरागत क्षेत्रो में बड़े पैमाने पर फैली हुई सोने की तस्करी में पैसा लगाने के लिए भारत से मादक-द्रव्यो की तस्करी कर रहा है। इब्राहीम मादक-द्रव्य गिरोह आमतौर पर राजस्थान सीमा के उस पार पाकिस्तान से मादक-द्रव्यों की तस्करी करके उन्हे बंबई लाता और विदेशो के लिए लदान से पहले वहां के गोदामों में इकट्ठा करता है। श्री सिह के अनुसार यह गिरोह अफीम का प्रशोधन करके ब्राउन शुगर और हेरोइन की तैयारी मे भी लगा है। इस प्रशोधन के लिए किसी प्रकार के जटिल संयंत्र अथवा प्रक्रिया की आवश्यकता नही होती। मादक-द्रव्य तस्करो का एक अन्य प्रमुख अड्डा दिल्ली है। दिल्ली पुलिस ने एक बड़े अभियान के अतर्गत 7 जुलाई, 1988 को तडके ही अंतर्राष्ट्रीय - 108 . मादक-द्रव्य तस्कर गिरोह के 32 मुखिया गिरफ्तार किये, जिनमे गुरवरूप भिरयानी, जसवीर सिंह संधू, जिदो मलहोत्रा, अज़ीज़ अहमद, नरेन्द्रपाल सिंह तथा अन्य लोग शामिल थे, तथापि पश्चिमी दिल्ली में राजौरी गार्डन का निवार्स युधिष्ठिर कुमार नहीं पकड़ा जा सका। मादक-द्रव्य नियंत्रण ब्यूरो के महानिदेशक श्री बी.वी. कुमार की दृष्टि में युधिष्ठिर कुमार 'सबसे अधिक शैतान तस्कर' है। सितंवर, 1987 में व्यूरो ने उसे हेरोइन की अनेक खेपों के निर्यात में उसका हाथ होने के आरोप पर जिंदो मलहोत्रा और सुश्री मंजुनरुला सहित गिरफ्तार किया था और अदालत ने उसे जमानत पर रिहा कर दिया था। अंतर्राष्ट्रीय मादक-द्रव्य तस्कर-गिरोह का तथाकथित मुखिया गुरबख्श भिरयानी गिरोह के भीतर बॉस तथा बांद्रावाला के नाम से प्रसिद्ध है। शुरू में उसे ब्यूरो ने 28 मई, 1988 को कड़े प्रतिरोध के बीच बंबई के सेंटूर होटल से पकड़ा था। मादक-द्रव्यों की तस्करी के मामले में पुलिस उसकी जोरो से तलाश कर रही थी। जैसे ही उसकी गिरफ्तारी की खबर अमरीका के मादक-द्रव्य निरोधक ब्यूरो को मिली, उसके एजेट भी भिरयानी से की जाने वाली पूछताछ में शामिल होने के लिए मादक-द्रव्य नियंत्रण ब्यूरो के कार्यालय में आ पहुंचे। कहा जाता है कि पाकिस्तान के मादक-द्रव्य तस्करो के साथ भिरयानी के बहुत अच्छे संबंध थे, तथापि वह पाकिस्तान से आने वाली हेरोइन पर ही निर्भर नहीं रहता था, उस पर यह आरोप है कि वह मुख्यतः सुनहरे त्रिभुज से हेरोइन की तस्करी करता था। भिरयानी शुद्ध, सफेद हेरोइन की आपूर्ति के लिए मशहूर रहा है। वह अमरीका के अपने ग्राहकों के हाथो यह हेरोइन बेचता था। पिछले कई वर्षों से वह बंबई की खार बस्ती मे रह रहा था तथा ऐसा माना जाता है कि उसने मादक-द्रव्य गिरोह की बागडोर दाऊद इब्राहीम और करीम लाला जैसे तथाकथित कुख्यात तस्करों के हाथों से छीनी थी। उसने मादक-द्रव्यों की तस्करी का एक विशाल साम्राज्य खड़ा कर लिया था, जिसमें जिम्मेदारी के सभी पद उसने अपने निकटतम संबंधियों को दे रखे थे। वह मादक-द्रव्यों की कमाई के काले धन की धुलाई दुबई और हांगकांग में सोने के तस्करों के मार्फत कराता था। दिल्ली पुलिस ने दो अन्य तथाकथित प्रमुख तस्करों-राकेश कुमार और परवेज़ अस्तर को 14 जुलाई, 1989 के दिन दिल्ली की तिलक नगर बस्ती से 999 नबर के मार्के वाली 10 किलोग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा। यह मार्का आमतौर पर पाकिस्तान से आने वाली हेरोइन पर पाया जाता है। समाचार-पत्रों के अनुसार दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर आमोद कंठ ने बताया कि ये दोनों राकेश कुमार और परवेज़ अख्तर उस बड़े मादक-द्रव्य गिरोह के सदस्य थे, जिसने दिल्ली तथा मुजफ्फर नगर (उत्तर प्रदेश) में अपने अड्डे बना रखे थे। ऐसा माना जाता था कि यह गिरोह पाकिस्तान से हेरोइन की बड़े पैमाने की तस्करी में लिप्त था। प्रकाशित समाचारों के अनुसार दिल्ली पुलिस ने सन् 1989 के पूर्वार्ध मे 1,414 किलोग्राम गांजा, 70 किलोग्राम हेरोइन तथा 15 किलोग्राम कोकीन पकड़ी और मादक-द्रव्यों की तस्करी के 765 मामले दर्ज किये। ine फ्रांसिस सी. मुल्लिन निसीम जानीष अंतर्राष्ट्रीय मादक-द्रव्य माफिया पिछली दो दशाब्दियों से मादक-द्रव्यो में परिवहन के लिए भारत को मार्ग के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। सन् 1971 में अमरीका सरकार ने भारत को सावधान किया था कि फिलाडेल्फिया के लिजा आयात संस्थान का प्रतिनिधि निसीम जानीव भांग और गांजे की तस्करी में लिप्त है। याद में भारत मे उससे भांग और गांजे के दो दर्जन पैकेट बरामद हुए। पुलिस ने इस बात की पुष्टि कर ली कि वे पैकेट भारत मे जानीव द्वारा लाये गये थे। इस समस्त जानकारी तथा जानीव के विरुद्ध लगाये गये आरोपो के बावजूद जानीव भारत आने में सफल हो गया। वह भारत मे अपने व्यापारिक जाल को समेटने के लिए तैयार न था, अतः उसने स्वयं को गिरफ्तार करा दिया। गिरफ्तारी के समय उसके पास से केवल एक किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। अदालत ने शीघ्र ही उसे जमानत पर रिहा कर दिया और वह नई दिल्ली की वसत विहार बस्ती में एक मकान किराये पर लेकर रहने लगा। वह घर लिजार्ड मादक-द्रव्य माफिया का अड्डा बन गया था। जानीव के साथ फ्रासिस सी. मुल्लिन भी पकड़ी गयी थी, जिसका परिचय जानीव ने अपनी पत्नी के रूप मे दिया था। उन दोनों की गिरफ्तारी के बाद उनके कश्मीरी गेट तथा पुरानी दिल्ली स्थित दो गोदामों से 30 करोड रुपये मूल्य का गांजा बरामद हुआ, लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि पुलिस उस जब्त गाजे और जानीव के बीच संबंध स्थापित करने में विफल हो गयी। बाद में उसे भारत छोड़ने की अनुमति मिल गयी और वह सीधा एमस्टरडम जा पहुंचा, जहां वह मादक-द्रव्यों की तस्करी के आरोप पर गिरफ्तार कर लिया गया। हुआ यह कि उसके एजेंट जेम्स बैरेट को जर्मनी की पुलिस ने हैम्बुर्ग बंदरगाह पर एक कार छुड़ाते समय इस कारण गिरफ्तार कर लिया था कि जर्मनी के अधिकारियों ने कार बैरेट को सौंपने से पहले नियमानुसार उसकी तलाशी ली। तलाशी के दौरान उन्हे 110 कार के इंजन से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। बैरेट की गिरफ्तारी ने है जानीव की गिरफ्तारी का द्वार खोल दिया था। भारत मादक-द्रव्य माफिया काफी सशक्त हो गया है। कभी-कभी तो वा भारतीय पुलिस की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली सिद्ध होता है। वह अपनी रक्षा लिए आधुनिकतम हथियार प्राप्त करने और पुलिस एव राजनीतिज्ञो के साः सांठगांठ करने में सफल रहा है। हिन्दुस्तानी आदोलन के प्रवर्तक श्री मधु मेहता 20 दिसंबर, 1988 के टाइम्स ऑफ इंडिया मे प्रकाशित अपने एक लेख में कहा है "माफिया के नेता विशाल जन, धन और शस्त्र संसाधनो तथा तेजी से बढते हुए राजनीतिक संबंधो की मदद से राजनीतिज्ञो और पुलिस पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की चेष्टा कर रहे हैं। वे सरकारी अधिकारियों को खरीद रहे है औ वकीलों तथा न्यायाधीशों के साथ दोस्ती कायम करने में सफल रहे है। उनमेरे कुछ तो इतने सशक्त बन गये हैं कि उन्हें राजनीतिज्ञों के सरक्षण की आवश्यकत ही नहीं रह गयी है। वास्तव में वे अनेक महत्त्वपूर्ण राज्यो के बहुत से शहरों औ जिलो मे समानातर सरकार चला रहे हैं। ....पलिस थानों पर उनका नियंत्रण और अनेक स्थानीय नेता उनसे बाकायदा वेतन प्राप्त करते है। राज्यों के विधानसभा और राष्ट्रीय संसद में उनके प्रतिनिधि मौजूद है। .. .माफिया पुलिस और न्यायपालिका के सदस्यों को भ्रष्ट करके उनकी विश्वसनीयता नष्ट कर रह 1 इस प्रकार मादक-द्रव्यों की तस्करी के मामले में भारत की स्थिति बहुत चिंताजनक हो गयी है तथा इससे निपटने के लिए केन्द्रीय तथा राज्य सरकारों के मादक-द्रव्यों की व्याधि से मुक्ति प्राप्त करने के हेतु उनके इस्तेमाल, उत्पादन व्यापार, तस्करी और देशों के लिए लदान आदि सभी मोर्चों पर संकल्पपूर्व प्रभावशाली कदम उठाने होंगे। 111 पेरु का मादक-द्रव्य छापामार माफिया एडीज पर्वत श्रृंखला की उपत्यका में बसे दो राज्यो-पेरु और चोलीविया में । का उत्पादन 1,10,000 टन था तथा बोलीविया का 70,000 टन।, यद्यपि कोलंबिया के मादक-द्रव्य सस्थानों ने मादक-द्रव्य की तस्करी हिसा. और मादक-द्रव्य डॉलरों की धुलाई सरीखें समाजघाती कार्यों द्वारा विवेकशील समाज की धारणा को गंभीर चुनौती दी है तथापि यह बात ध्यान देने योग्य है कि कोलविया में केवल 20,000 टन कोका-पत्ती का उत्पादन होता है। पेरु और बोलीविया मादक-द्रव्यों के विरुद्ध छेडे गये युद्ध के सामने एक गभीर चुनौती बन गये है। अपने किसानों को कोकीन के व्यापार से हाथ खीचने के लिए मनाना अथवा धमकाना इन दोनों राज्यों के लिए तब तक कठिन ही नही असभव रहेगा, जब तक कि आर्थिक विकास के द्वारा वैकल्पिक उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध न हो जाये। बोलीविया के सरकारी अधिकारी कहते है कि कोका की खेती करने वाले किसानो के सामने वैधानिक विकल्प विकसित करने के लिए उन्हें हर साल 50 करोड़ डॉलर की आवश्यकता होगी। पेरु मे कोका-पत्ती तथा कच्ची कोका-लुगदी के विश्व-उत्पादन का 65% उत्पादन होता है। इस लुगदी को कोलंबिया की प्रशोधनशालाएं शुद्ध कोकीन मे रूपांतरित करती है। पेरु घाटी में कोका का उत्पादन करने वाले किसानों की संख्या 2 लाख है। पेरु और सयुक्त राज्य सरकारों के घोर प्रयासो के बावजूद कोका की खेती का क्षेत्रफल 50,000 एकड से बढकर 5 लाख एकड़ हो गया है, जिसमे से 2 लाख एकड हुआल्लागा घाटी मे है। हाल के कुछ वर्षों मे कोका का उत्पादन पेरु की अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण अंग बन गया है। पेरु को कोका से 1 अरब डॉलर वार्षिक की कमाई होती है। यह कुल राष्ट्रीय आय का 25 प्रतिशत है। सयुक्त राज्य अमरीका पेरुमे मादक-द्रव्य निरोधक कार्यक्रमो पर हर साल 6 करोड डालर खर्च करता है, जिसका अधिकांश शस्त्रास्त्र, हैलीकॉप्टरों तथा मादक-द्रव्य निरोध-प्रशिक्षण पर व्यय होता है, परंतु मादक-द्रव्य नीति-विशेषज्ञो का मत है कि कोका के उत्पादकों के विरुद्ध कठोर उपायों से मादक-द्रव्य युद्ध में विजय प्राप्त करने मे 112 मदद नहीं मिलेगी। पेरु की मादक-द्रव्य निरोधक पुलिस का मुखिया जनरल जुआन जराते जोर देकर कहता है कि अधिक किसानों को कोका की खेती से रोकने के लिए एक आर्थिक विकास-योजना अपरिहार्य है। मादक-द्रव्य उत्पादन केन्द्र पेरु का मादक-द्रव्य व्यापार अधिकांशतः कोलविया के मादक-द्रव्य सरदारों के हाथों में है तथा विशेषतः कोलंबिया सरकार द्वारा उनके विरुद्ध युद्ध की घोषणा के बाद उन्होंने पेरु के जगलों में विशाल प्रशोधनशालाए स्थापित कर ली हैं, जहां उन्होंने अत्याधुनिक शस्त्रास्त्रो तथा रसायनो का संग्रह कर लिया है। इससे पूर्व पेरु के मादक-द्रव्य उत्पादन केन्द्र केवल कोका-लुगदी तैयार करते थे, परंतु पिछले दो वर्षों के भीतर इन उत्पादन केन्द्रो को भरपूर प्रशोधनशालाओ तथा उन रसायनों के भंडारों में रूपांतरित कर डाला गया है, जिन्हे कोकीन से क्रैक बनाने के लिए सं.रा. अमरीका से चोरी-छिपे तस्करी द्वारा लाया जाता है। सं.रा. अमरीका से प्राप्त वित्तीय सहायता के बल पर पेरु लिमा के उत्तर-पूर्व में 310 मील दूर सांता लूसिया में एक विशाल मादक-द्रव्य निरोधक केन्द्र का निर्माण कर रहा है। वहां 5,000 फुट लवी हवाई-पट्टी है तथा 8 हैलीकॉप्टर और एक सी-130 यातायात विमान रखे गये है। सरकार ने 40 एकड़ मे फैले इस सैनिक शिविर पर 5 लाख डॉलर खर्च किये है। इस शिविर मे पेरू के 200 मादक-द्रव्य निरोधक पुलिसकर्मी, 50 अमरीकी परामर्शदाता और 100 कोका- -उन्मूलन कार्यकर्ता रहेगे। सांता लूसिया छावनी हुआल्लागा घाटी के सबसे अधिक सपन्न कोका-उत्पादक क्षेत्र के मध्य मे है तथा इस पर विद्रोहियों का नियत्रण है। इसे 'खतरनाक क्षेत्र' घोषित किया गया है। इस मादक-द्रव्य निरोधक केन्द्र में भूमिगत बंकर बनाये गये है, जो प्रहरी-चौकियों तथा बारूदी सुरंगो से घिरे हुए है। उसे एक दुर्ग-छावनी के रूप में बनाया गया है तथा उसमे विद्रोहियो के भारी आक्रमणों को झेलने की क्षमता है। इस सब के वावजूद यह प्रश्न बना हुआ है कि क्या पेरू मे कोका की खेती को रोका जा सकता है? "शाइनिंग पाथ' का प्रवेश ऊपर हुआल्लागा घाटी मे कोका की खेती तथा कोकीन-प्रशोधन और परिवहन के कार्यो मे 5 लाख स्थानीय लोग लगे हुए है। पेरु की सेना और पुलिस को घाटी पर नियत्रण स्थापित करने के प्रयासों मे सफलता नहीं मिल पायी है। सन् 1984 तक घाटी पर मादक-द्रव्य तस्करो का नियंत्रण था। उन्होने घाटी को हिंसा का क्षेत्र बना दिया था। पेरु के मादक-द्रव्य तस्करों का नेतृत्व कोलंबियाई मादक-द्रव्य संस्थानो के हाथो में था। सन् 1985 मे उस क्षेत्र के मादक-द्रव्य-व्यवसाय में उस समय एक नया आयाम जुड़ गया, जब सेंदेरो लुमिनोसो अथवा शाइनिंग पाथ के 2,000 से अधिक माओवादी छापामार यह सकल्प करके इस क्षेत्र में घुस आये किलिमा की सरकार 113 को हटाकर ही दम लेगे। तीन हजार वर्गमील क्षेत्रफल की इस घाटी के अधिकांश क्षेत्र पर शाइनिंग पाथ छापामारो का प्रभुत्व स्थापित हो गया है। शुरू में छापामार पूरी तरह अनुशासित थे और उन्होने इस क्षेत्र में शांति-र -सुव्यवस्था की स्थापना की थी। छापामारो ने कोका की खेती करने वाले किसानों की ओर से मादक-द्रव्य सरदारों के साथ सौदेबाजी करके कोका-पत्तीका उचित भाव तय कराया और दोनो पक्षों से कर वसूल किया। कर मे प्राप्त धन का उपयोग उन्होने अस्पतालो और अन्य सामाजिक प्रयोजनों के लिए किया, परंतु मादक-द्रव्यो से प्राप्त डॉलरो ने शीघ्र ही माओवादी छापामारों को भ्रष्ट करना शुरू कर दिया। अब वे मादक द्रव्यों के लदान की प्रत्येक उड़ान पर 15,000 डॉलर लेते है तथा इसके बदले में मादक-द्रव्य तस्करों की हवाई-पट्टियों की सुरक्षा का प्रवध करते हैं। मार्च, 1989 मे 200 माओवादी छापामारो नेतस्करों के साथ मिलकर सांता लूसिया छावनी से 9 मील दूर उचिजा की पुलिस चौकी पर आक्रमण किया, जिसमें ro पुलिसकर्मी मारे गये, [ को तो छापामारो ने शहर के चौक मे फासी पर लटका दिया। उचिज़ा मादक-द्रव्यो के लदान का एक प्रमुख केन्द्र है। सरकार ने इसके बदले मे 1,100 विद्रोहियो की हत्या कर दी तथा उचिजा पर वापस कब्जा कर लिया। शाइनिंग पाथ विद्रोहियों ने अपने विद्रोह मे अशतः उस शुल्क का इस्तेमाल किया, जिसे वे कोका-उत्पादको और प्रशोधनशालाओं से वसूल करते रहे हैं। पिछले कुछ समय से वे स्वयं कोकीन-प्रशोधन के धधे में लिप्त हो गये है। पेरू में पुलिस द्वारा कोरा की फसलों का सफाया 114 - सरकार के मादक-द्रव्य निरोधक अभियानो के मार्ग में ये विद्रोही छापामार हुत बड़ी बाधा बन गये हैं। वे समय-समय पर कोका-उन्मूलन कार्यकर्ताओं पर आक्रमण करते हैं। उनकी संख्या अब 2,000 से बढ़कर 6,000 हो गयी है। एक र वे कोका को विष तथा प्रमादकारी वस्तु बताते है, दूसरी ओर वे घोषणा करते कि उन्हें कोका-कृपको के हितों की रक्षा करनी चाहिए। 27 मार्च, 1989 को उचिज़ा पुलिस चौकी पर आक्रमण के समय 200 शाइनिग पाथ छापामारो और मादक-द्रव्य तस्करों ने मशीनगनों, स्वचालित इफलो तथा हथगोले फेकने वाले यंत्रों का इस्तेमाल किया। पुलिस गैरीज़न की राबंदी 5 घंटे चली, अंततः चौकी के भीतर घिरे हुए पुलिसकर्मियों का गोला-बारूद खत्म हो गया और उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। चौकी के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को नगर-चौक ले जाया गया तथा एक-एक करके मार डाला गया। उसके बाद छापामारों ने पुलिस के दो संदिग्ध मुखविरों को गोली से उड़ा दया, दो वाहनों को चारूद से भस्म कर दिया तथा गैरीजन के शस्त्रागार से बची हुई 40 एसाल्ट राइफलें और मशीनगन एवं हथगोले फेकने वाले दो यंत्र अपने साथ ले गये। आक्रमण में कुल मिलाकर 10 पुलिसकर्मी और 5 नागरिक मारे गये। मादक-द्रव्य तस्करों तथा शाइनिंग पाथ छापामारो के बीच बढता संबंध पेरू सरकार के लिए ही नहीं, उन किसानो के लिए भी चिंता का विषय बन गया है, जिनके हितों की रक्षा का दावा छापामार करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि अपर हुआल्लागा घाटी के कोका-कृपक हिंसा से ऊबने लगे हैं और मादक-द्रव्यों के व्यापार से मुक्त होना चाहते हैं। कोई 6,000 किसानों ने अपरं हुआल्लागा आल्टो-इडस्ट्रियल कोऑपरेटिव बना ली है और धीरे-धीरे कोका के स्थान पर अन्य फसले उगाना शुरू करने के एक कार्यक्रम के लिए धन जुटाने की दृष्टि से 2 लाख डॉलर की राशि इकट्ठी कर ली है। किसानो ने यह महसूस कर लिया है कि देर-सवेर कोका तो मिटकर रहेगा. परंतु कोका के साथ जन्म लेने वाली हिंसा टिकाऊ हो सकती है। वे अपनी भावी पीढ़ियों के भविष्य के बारे में चिंतातुर हो उठे हैं। दरअसल अब वे एक ऐसा सुदृढ़ औद्योगिक आधार चाहते है जो वैकल्पिक फसलो की पूरी-पूरी खपत का आश्वासन देने में समर्थ हो। 115 मादक-द्रव्यों के विरुद्ध अमरीकी युद्ध राष्ट्रपति बुश ने मादक द्रव्यो की मांग और आपूर्ति में कटौती के लिए 10 मादक-द्रव्य व्यापार की फुटकर विक्री तथा उपभोक्ताओ और विक्रेताओं पर समान रूप से चोट करने, व्यसनी लोगों के चिकित्सा कार्यक्रमों के विस्तार,जिनमें उनको मादक द्रव्य-ग्रस्त पड़ोस से हटाकर नौकरी तथा शिक्षा प्राप्त करने में सहायता प्रदान करना भी शामिल है एव मादक-द्रव्यो के विरुद्ध छेड़े गये युद्ध में कोलंबिया, पेरू तथा बोलीविया को दी जाने वाली आर्थिक सहायता मे वृद्धि पर खर्च के लिए है। मादक-द्रव्यों के विरुद्ध युद्ध दोनो मोर्चों पर लडा जाना है-मांग के मोर्चे पर तथा उत्पादन और आपूर्ति के मोर्चे पर। सं.रा. सरकार इस तथ्य से अवगत है कि देश के । करोड 45 लाख नागरिक मादक-द्रव्यो का सेवन करते हैं तथा अवैध मादक-द्रव्यो की खरीदारी पर प्रतिवर्ष अनुमानतः । खरब डॉलर की राशि खर्च करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि नीति-निर्माता तथा कानून का पालन कराने के लिए जिम्मेदारी अधिकारी भी ऐसा मानने लगे है कि अमरीका की कोकीन-समस्या को अततः मांग के मोर्चे पर हल करना होगा, परतु अनुभव से यह सिद्ध होता है कि निरोध एक सीमा तक ही प्रभावशाली रहता है। सं.रा. प्रशासन ने यह महसूम कर लिया है कि उसे मादक-द्रव्यो के उत्पादन तथा उनकी तस्करी को रोकने पर अधिक ध्यान देना होगा। कोकीन के उत्पादन और उसकी तस्करी में सबसे अधिक लिप्त देशों-कोलविया, मैक्सिको, पेरू और बोलीविया ने इस युद्ध मे स.रा. अमरीका के पक्ष में संघर्ष करने के लिए अपनी सहमति प्रकट की है। राष्ट्रपति बुश ने मादक-द्रव्यो के विरुद्ध युद्ध के संचालन का भार सं.रा. के नेशनल ड्रग कंट्रोल पॉलिसी विभाग के निदेशक विलियम बैनेट पर डाला है। बैनेट ने मादक-द्रव्य-दैत्यों के विरुद्ध संघर्ष की एक व्यवस्थित योजना तैयार की है। बैनेट योजना मादक-द्रव्यों के विरुद्ध युद्ध की वैनेट योजना एंडीज पर्वत श्रृंखला वाले राष्ट्रों के साथ मादक द्रव्य-युद्ध को कूटनीतिक प्राथमिकता प्रदान करने, 116 मादक-द्रव्यों को जब्त करने, तस्करों को निशाना बनाने, इस संघर्ष में भाग ले रही विविध संधीय एजेंसियों के बीच सामजस्य तथा अततः उनके उपयोग को रोकने पर बल देती है। राष्ट्रपति बुश तथा विलियम बैनेट कूटनीतिक मोर्चे पर काफी हद तक सफल रहे है। उन्होंने महसूस किया कि मादक-द्रव्यों की आपूर्ति करने वाले लातीनी देशों की कुछ वास्तविक कठिनाइया हैं। जिन्हें वे सं.रा. के सक्रिय सहयोग और उसकी आर्थिक सहायता के बिना हल नहीं कर सकते। अतः उन्होने एंडीज घाटी के देशो को वैदेशिक ऋणो के मामले में कुछ छूट तथा विश्व बैक अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा-कोष से नये ऋण दिलाने का वचन दिया है। सं.रा. ने इन देशों को मादक-द्रव्यों के विरुद्ध युद्ध में अनुदान तथा कोकीन के लाभदायक व्यापार के रुक जाने पर उनकी अर्थव्यवस्थाओ की क्षतिपूर्ति के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की है। कोलविया ने मादक-द्रव्यों के विरुद्ध पूरी गंभीरता के साथ युद्ध छेड़ा है। मादक-द्रव्य सरदारो पर लगाम लगाने के उसके प्रयासों के कुछ परिणाम सामने आये हैं। कई मादक-द्रव्य सौदागर सं.रा. के हाथों मे सौप दिये गये है, जिससे कि वह उन पर मुकदमे चला सके तथा सबसे अधिक शैतान सौदागरों में से एक जोस गोज़ालो रोड्रिगुएज़ गाचा मारा जा चुका है। कोलवियाई सेना ने कोका के विशाल खेत नष्ट कर डाले हैं तथा कोकीन प्रशोधन में काम आने वाले दस लाख गैलन से अधिक रसायनो और 32 टन कोकीन एव कोका-लुगदी को जब्त कर लिया है। मादक-द्रव्य तस्कर भाग खड़े हुए है। पेरू और बोलीविया द्वारा उनको अपने यहां शरण देने से इनकार कर देने पर वे अव वेनेजुएला को मादक-द्रव्यों के मुख्य लदान केन्द्र के रूप में इस्तेमाल कर रहे है। सं.रा. प्रशासन ने कोलविया, पेरू और बोलीविया को चल-धरातल-राडार- स्टेशन देना स्वीकार कर लिया है। मैक्सिको की खाडी के किनारे-किनारे मादक-द्रव्य परिवहन-मार्गो पर पहरा देने के लिए वायुसेना के अवाक (वैमानिक चेतावनी एवं नियंत्रण व्यवस्था) विमान तैनात किये गये है तथा सं.रा. की थलसेना को मैक्सिको सीमा के इस ओर युद्ध का अभ्यास करने के निर्देश दिये गये हैं। इसका प्रयोजन मादक द्रव्य तस्करों को डराना है। मादक-द्रव्य-विरोधी अभियान में संरा सेना की भूमिका में वृद्धि होती जा रही है। सेनाओ से यह अपेक्षा तो नहीं की जाती कि वे तस्करो के आमने-सामने भिड़त करेगी, परंतु कभी-कभी उन्हें वैसा भी करना पड़ता है। ऐसा लगता है मानो स.रा. अमरीका अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है, परंतु यह युद्ध तब तक नहीं जीता जा सकता, जब तक कि देश के भीतर से मादक-द्रव्यों का सेवन समाप्त नही कर दिया जाता। इस दिशा में सं.रा. के नागरिक अपने स्तर पर कुछ अत्यंत उपयोगी और प्रभावशाली कार्य कर रहे हैं। 117 नागरिक अभिक्रम सं.रा. समाज की शांति के लिए मादक-द्रव्यों के सेवन तथा उनकी तस्करी सबसे बड़ी चुनौती बन गये हैं, जिसके कारण कानून का पालन करने वाले नागरिक यह महसूस करने लगे हैं कि सरकार और प्रशासन के साथ-साथ उन्हें भी अपने स्तर पर मादक-द्रव्य-अभिशाप का सामना करने के लिए सामने आना चाहिए। स रा. अमरीका के सुविख्यात अश्वेत राजनीतिज्ञ रेव. जेसी जैकसन एक ऐसे ही नागरिक हैं। वे विद्यालयों, विशेषतः अश्वेत मुहल्लो और गदी वस्तियों के विद्यालयों में जाते हैं तथा मादक-द्रव्यो के व्यसन एवं व्यापार में लिप्त किशोरो के हृदय मे स्वाभिमान का भाव जगाने की चेष्टा करते हैं। एक विद्यालय मे उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनमे से जो विद्यार्थी अपने समान आयु वाले किसी ऐसे किशोर से परिचित रहे हो, जिसकी मादक-द्रव्यों के सेवन से मृत्यु हो गयी हो, वे उठकर खडे हो जाये। वहा उपस्थित लोग यह देखकर विस्मित हो गये कि सभाकक्ष मे एकत्र विद्यार्थियो मे से आधे से अधिक अपने स्थान पर खडे हो गये। जब जैकसन ने यह पूछा कि उनमे से किस किसने मादक-द्रव्यों का सेवन किया है तो पहले एक, फिर दो और उसके बाद दर्जनो विद्यार्थी उठ खडे हुए। उनमे से अनेक ऐसे प्रतीक रग और चिह्न धारण किये हुए थे, जिनसे यह बोध होता था कि वे किस गिरोह के सदस्य है। जैकसन ने उन्हे प्रतिज्ञा दिलायी कि वे मादक-द्रव्यो और हिंसा में लिप्त नहीं होगे। उन्होने उनसे कहा, "तुम रेगने वाले साप नहीं हो, तुम मानव हो। अपने प्रति अपनी अपेक्षाए उन्नत करो।" सं रा. के नागरिको ने जब यह देखा कि सघीय, राज्यीय और स्थानीय अधिकारियों की प्रभावशीलता उनके दावो की तुलना में कहीं भी नहीं टिकती तो वे उनकी ओर से हताश और कंठित होकर अपनी गलियों में स्वय पहरा देने लगे। DRUGS REA CEAD END PEET THUGS ARE BETTER TA ITHAN DRIES मारक-प्यों के विरोध में न्यूपार्क में प्रसानि 118 उन्होने खाली मकानो को सील कर दिया क्योंकि मादक-द्रव्य तस्कर उनमें अड्डे बना लेते हैं तथा उन मकानों के मालिकों के विरुद्ध मुकदमे दायर किये हैं। नागरिक अभिक्रम की शुरुआत ईस्ट डैट्रॉयट मे सेविन माइल बस्ती की निवासी 34 वर्षीया रैंटाइन मैकेस्सन से हुई। वह क्रैक-गिरोहों की गतिविधि को एक वर्ष तक विस्मय, जुगुप्सा और कभी-कभी आतंक से देखती रही। उसके बाद एक दिन उसने अपनी बस्ती के निवासियों को गलियो में पलते मादक-द्रव्य गिरोहो के विरुद्ध सगठित करने का निश्चय कर लिया। उसने उनके विरुद्ध एक कूच का आयोजन किया। उसके पड़ोसी उन गिरोहों से इस कदर आतंकित थे कि उनमें से केवल 60 लोग कूच में शामिल हुए, जिनमें से अधिसंख्य बच्चे थे। मैकेस्सन ने हिम्मत नहीं हारी और अंततः वह मादक-द्रव्यों के विरुद्ध अपने युद्ध में प्रत्येक परिवार को शामिल करने में सफल रही। साउथ फिलाडेल्फिया में नारिको ने 'रेजिस्टेंस' नामक संगठन बनाकर गली-मुहल्लो मे पहरा देना शुरू कर दिया। न्यू ऑरलियंस के नागरिको ने 'न्यू ऑरिलियंस वैलोसिटी फाउंडेशन' के तत्वावधान में नगर भर में 22 मादक-द्रव्य विमुक्त क्षेत्रो का गठन किया है। लॉस एंजिल्स में 'ब्रदरहुड क्रूसेड ब्लैक यूनाइटेड फंड' नामक संगठन ने नगर के क्रैक-अड्डों का पिकेटिंग शुरू किया, जिसके फलस्वरूप नगर की अपराध दर में पहले ही महीने में 67 प्रतिशत की कमी आ गयी। नगर के मादक-द्रव्य का एक बड़ा भाग अत्यंत उग्र गिरोहों के हाथो मे है। उनका सामना करने के लिए लॉस एंजिल्स की महिलाओं ने 'मैजिक'-मदर्स अगेस्ट गैग्स इन कम्यूनिटीज़-नामक सगठन बनाया है। लॉस ऐंजल्स में 'दा कम्यूनिटी यूथ गैग सर्विसेज़' नामक संगठन को नगर और देहाती क्षेत्रो से आर्थिक सहायता प्राप्त होती है। वह मादक-द्रव्यों के विरुद्ध युद्ध पर प्रतिवर्ष 20 लाख डॉलर खर्च करता है। इस संगठन के सदस्यो में मादक द्रव्य गिरोहों के भूतपूर्व सदस्य और व्यावसायिक सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। यह संगठन मादक-द्रव्य गिरोहो के सैकडो सदस्यो को मादक द्रव्यो की लत तथा उनका व्यापार छोड़ने के लिए मनाने में सफल रहा है। इसने रात्रि के समय पहरा देने का काम भी हाथ मे लिया है। शिकागो मे रेव. जॉर्ज क्लीमेट्स और रेव.मिचेल पीफ्लेजर ने सेट सेविना चर्च वाले साउथ क्षेत्र में एक मादक-द्रव्य-विरोधी कूच का नेतृत्व किया। फादर क्लीमेट्स के चर्च-क्षेत्र के एक 18 वर्षीय लडके की मादक-द्रव्यों के अतिसेवन से मृत्यु हो जाने पर उन्होंने एक स्थानीय कैडी स्टोर के विरुद्ध कार्यवाही शुरू की। यह स्टोर क्रैक धूम्रपान के काम मे आने वाला पाइप, इंजेक्शन की पिचकारियां और कोकीन की तराजू भी वेचता था। रेव. क्लीमेट्स स्टोर मे गये और उन्होंने उसके मालिक से कहा कि "इन सब वस्तुओ को यही, इसी समय नष्ट कर डालो।" मालिक के मना करने पर वे स्टोर के द्वार के भीतर खडे हो गये और भीतर आने वाले ग्राहकों से कहने लगे कि स्टोर 119 का मालिक मादक -द्रव्यो के सेवन के उपकरण बेचता है। 45 मिनट बाद स्टोर के मालिक ने उन सब उपकरणो को दुकान से हटा दिया। कुछ समय बाद उन दोनों पारियों ने एक स्थानीय मादक-द्रव्य उपकरण-निर्माता के कार्यालय का दरवाजा तोड़कर उस पर कब्जा कर लिया। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार तो नहीं किया, परंतु उनके सत्याग्रह से प्रभावित होकर इलिनॉय की विधानसभा ने उस प्रकार के उपकरणों की विक्री पर प्रतिवध लगा दिया। हाउस्टन मे मादक-द्रव्य माफिया ने एक महिला की उसके लिक वैली घर में घुसकर हत्या कर डाली। इस पर वैली के 20,000 निवासियो ने संगठित होकर पुलिस की मदद से उस समूचे क्षेत्र से मादक-द्रव्यों और मादक-द्रव्य तस्करो का सफाया कर दिया। एल्मवुड के नागरिको ने 'एल्मवुड नेवर्स फॉर एक्शन' नामक संगठन बना लिया तथा सभावित खरीदारो को डराने के लिए कार द्वारा पहरा लगाना शुरू कर दिया। वे जहा कही मादक-द्रव्यो का आदान-प्रदान देखते सेलुलर कार फोन द्वारा पुलिस को विस्तृत सूचना देते है। उनके फोन का खर्च राज्य सरकार उठाती है। हाउस्टन पुलिस ने जिन पहरा देने वाली इकाइयों को अपना संरक्षण प्रदान किया है, वह उन्हें विशेष कार-चिह्न और सी.बी. रेडियो देती है। बोस्टन में 'दा मोंटगोमेरी वैस्ट कैंटन स्ट्रीट क्राइम वाच' नामक संगठन 54 घरों के क्षेत्र में पहरा देता है। दक्षिण-पश्चिम अटलांटा में मादक-द्रव्य सौदागरों से प्रस्त क्षेत्र के नागरिक अपने क्षेत्र में पहरा लगाने के लिए आगे आये और उन्होने मादक-द्रव्य सौदागरों से छुटकारा पा लिया। ब्रुकलिन-न्यूयार्क में मादक-द्रव्य सौदागरों ने मुस्लिम मस्जिद अल-तकवा के चारो ओर के क्षेत्र में 12 क्रैक-अड्डे खोल लिए थे। व्यसनी लोग राहगीरों को बंदूक दिखाकर लूट लेते थे। दुकानें बंद होने लगी और उस क्षेत्र के निवासी आतंकित रहने लगे। इतना सब हो जाने पर मुसलमानों के एक समूह ने पड़ोस को मादक-द्रव्य सौदागरो के चंगुल से मुक्त कराने का फैसला किया। उन्होंने वाकी-टाकी संभाल लिए और दिन-रात चौबीसों घंटे मस्जिद-क्षेत्र में पहरा देना शुरू कर दिया। उन्होंने क्रैक के अड्डों को वहां से हटाने के लिए पुलिस की मदद ली। प्रहरी दल के सदस्यो को यदि गली-मुहल्ले में मादक-द्रव्यों की खरीद-फरोख्त का कोई मामला दिखायी पड जाता तो वे साहसपूर्वक खरीदार और विक्रेता के बीच खडे हो जाते और रेडियो द्वारा पुलिस से संपर्क स्थापित करते। यह पहरा अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हुआ। उस क्षेत्र के सभी मादक-द्रव्य अड्डे बंद हो गये। अश्वेत बस्तियों के जो लोगपहले भारी आमदनी के कारण अपने बच्चो द्वारा मादक-द्रव्यो के व्यापार की ओर से आंखें मूंद लेते थे, अब उस बारे में चिंतित हो चले हैं, वे अब पुलिस के साथ सपर्क के लिए टेलीफोन की सीधी लाइनें स्थापित कर रहे हैं, मादक द्रव्य-ग्रस्त क्षेत्रों में मादक-द्रव्य-विरोधी अभियान चला रहे हैं और विद्यालयों में पहरा लगा रहे हैं। सं.रा. में मादक-द्रव्यो के विरुद्ध युद्ध सभी मोचों पर लड़ा जा रहा है, परंतु वहां एक आम भावना घर करती जा रही है कि राष्ट्र इस युद्ध में पराजित हो चुका 76 -द्रव्यो का मादक द्रव्यो के विरुद्ध अमरीकी सरकार पूरे पुद्ध-स्तर पर जूम रही है। है। मादक-द्रव्यों के धन ने मादक-द्रव्य सरदारो के विरुद्ध संघर्ष के लिए भेजे जाने वाले संयुक्त राज्य सैनिकों को भी भ्रष्ट कर दिया। कोलबिया के मादक-द्रव्य सरदारों ने पनामा से स्वदेश लौटते हुए अमरीकी सैनिकों को मादक- वाहक बना डाला। इस रहस्य का उद्घाटन 5 मार्च, 1990 के टेलीविजन प्रसारणों में किया गया। सी.बी.एस. टेलीविजन नेटवर्क ने बताया कि इस सिलसिले में कुछ गिरफ्तारिया हुई हैं तथापि इस बात की काफी आशंका है कि जनरल नोरिएगा पर स.रा. में मादक-द्रव्यो की तस्करी के आरोपों पर चल रहे मुकदमों के सिलसिले में उसे पदच्युत तथा गिरफ्तार करने के लिए पनामा भेजे गये 13,000 सैनिको में से स्वदेश लौटने वाले कुछ रंगरूटो के माध्यम से मादक-द्रव्यो की भारी मात्रा सं.रा. पहुंच चुकी है। मादक-द्रव्य सौदागरो ने स्वदेश लौटने वाले सैनिको को थोडी-सी कोकीन साथ लाने के बदले में 10,000 डॉलर तक की प्रलोभन-राशि चुकायी। इससे यह सिद्ध होता है कि मादक-द्रव्य व्यापार कितना संक्रामक है तथा कोलंबियाई मादक-द्रव्य सरदार कितने शक्तिशाली है। मादक द्रव्यों के विरुद्ध छेड़ा गया युद्ध दोनों मोर्चों पर विफल प्रतीत होता है-पहले तो वह मादक-द्रव्यो के उत्पादन और उनकी आपूर्ति को रोकने में असफल हो गया है, दूसरे वह सं.रा. समाज में दावानल की भांति फैलते मादक-द्रव्यो के सेवन को रोकने में पूर्णतया विफल रहा है। . 121 सवाल मादक-द्रव्यों को वैद्य करने का? 'म लोगो,अभिजन वर्ग तथा एक सीमा तक मादक-द्रव्यो केविरुद्ध युद्ध-स्तर धारणा व्याप्त होती है कि मादक-द्रव्यों के विरुद्ध छैड़ा गया युद्ध विफल हो गया है। मादक-द्रव्य संस्थानो ने कोका की खेती तथा कोकीन-प्रशोधनशालाएं कोलविया से हटाकर पेरू तथा वोलीविया और वेनेजुएला मे भी स्थापित कर ली है। उन्होने सयुक्त राज्य तथा युरोप मे मादक-द्रव्यो की तस्करी के लिए कनाडा, स्पेन तथा हॉलैंड होकर नये मार्ग खोज लिए है। मादक-द्रव्य सरदार मादक-द्रव्यों की काली कमायी की धुलाई के लिए उन अतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओ और बैंकिंग व्यवस्थाओं का उपयोग कर रहे हैं, जो बहुराष्ट्रीय कनियों और वैधानिक निगमो को उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त स.रा. मे मादक द्रव्यों की कुटेव व्यापक रूप से फैलती जा रही है। सन् 1958 मे वहां 58 लाख लोग मादक-द्रव्यो का सेवन करते थे, कित सन् 1990 में यह संख्या बढकर ! करोड 45 लाख तक जा पहुंची। सं.रा. सरकार ने सन् 1988 मे मादक-द्रव्य विरोधी कार्यक्रमों पर 8 अरब डॉलर खर्च किये, सन् 1990 में यह राशि बढ़कर 20 अरब डॉलर तक जा पहुंची। इस राशि मे संघ, राज्यो तथा स्थानीय निकायों द्वारा मादक-द्रव्यों के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियानो के लिए किये गये वार्षिक बजट के सभी विनियोग शामिल है। इन ज्वलंत तथ्यों ने मादक-द्रव्यो के सेवन तथा उनकी लत (कुटेव) और मादक द्रव्यों से सर्वोधत गिरोहों द्वारा की जाने वाली हत्याओं तथा सडको पर हिंसक वारदातो सरीखे अपराधों मे वृद्धि और भ्रष्टाचार तथा हर साल । सरब डॉलर के बरावर काले धन के सृजन के बारे मेचितित लोगों के मन और मस्तिष्क में एक गहरी आशका और कंठा उत्पन्न कर दी है। समाजशास्त्री, अपराधशास्त्री और प्रशासक खुलेआम यह प्रश्न उठाने लगे है कि "क्या हम कोकीन तथा अन्य मादक-द्रव्यो को वैधानिक मान्यता देकर इस युद्ध को समाप्त नही कर सकते?" मादक-द्रव्यों को वैधानिक मान्यता मादक-द्रव्यों को वैधानिक मान्यता दिये जाने की वकालत करने वाले लोग कहते हैं कि मादक द्रव्यो के निरपराधीकरण का मुख्य लाभ मादक-द्रव्यों से 122 । संबंधित अपराधों तथा उनके विरुद्ध युद्ध से होने वाली सामाजिक और आर्थिक क्षति में कमी आयेगी। न्यूयार्क का अपराधशास्त्री जार्जेट बैनेट मादक-द्रव्यों के निरपराधीकरण के प्रबल हिमायतियों में से है, वह यह स्वीकार करता है कि सं.रा. में मादक-द्रव्य समस्या बहुत भीषण हो गयी है, परतु प्रश्न तो यह है कि "उससे निपटने का सर्वोत्तम उपाय क्या है? मादक-द्रव्यों को एक आपराधिक मामला घोषित करके हमने वस्तुतः इस समस्या को और भी जटिल बना दिया है। यदि हम उनका निरपराधीकरण कर दें तो हमारे सामने केवल एक भीषण अपराध-समस्या, एक भीषण भ्रष्टाचार-समस्या तथा एक भीषण विदेश-नीति समस्या ही बचेगी। मादक-द्रव्यों के निरपराधीकरण के समर्थक ऐसा मानते हैं कि मादक-द्रव्यो की कुटेव को कम करने का श्रेष्ठतम उपाय यह है कि उसे एक आपराधिक समस्या मानने के बजाय सार्वजनिक-स्वास्थ्य की समस्या माना जाये। वे मानते हैं कि मादक-द्रव्यों के निरपराधीकरण द्वारा सरकार मादक-द्रव्य बाजार को उस माफिया के हाथों से निकाल पायेगी, जिसने बड़े-बड़े शहरो के विशाल क्षेत्रो को गोलीबारी का क्षेत्र बना डाला है। मादक-द्रव्यों को वैधानिक मान्यता प्रदान करने की धारणा का उदय मादक-द्रव्यो के विरुद्ध युद्ध के विकल्प के रूप में हुआ है तथा उसके पक्ष मे बुनियादी आधार पर यह विचार है कि मादक-द्रव्यों की समस्या केवल मांग और आपूर्ति की समस्या है। जब तक मादक-द्रव्यो का सेवन होता रहेगा तथा उनकी मांग बनी रहेगी, तब तक किसी न किसी स्रोत से उनकी आपूर्ति होती रहेगी। मादक-द्रव्यो की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून मादक-द्रव्यों का सेवन करने वाले लोगो को उन्हे प्राप्त करने से नहीं रोक सकते। मादक-द्रव्यों की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाने वाले कानूनो का प्रभाव केवल नकारात्मक होता है। वे मादक-द्रव्यो के व्यापार मे खतरे का तत्त्व निहित होने के कारण तस्करो को अत्यधिक ऊंचे दाम वसूल करने का अवसर प्रदान करते हैं। यह बहुत स्वाभाविक है, क्योकि मादक-द्रव्यों के विरुद्ध युद्ध जितना सघन होता जाता है, आधारभूत पदार्थ-भांग, पोस्त अथवा कोका-पत्ती की खेती, प्रशोधन, परिवहन तथा गली-कूची में विक्री तक समूचे मादक-द्रव्य व्यापार में खतरे का तत्त्व उतना ही बढ़ता जाता है। ऊंची कीमतो का अर्थ है मुनाफे की ऊची दरें,जो ऑक्टोपस की भांति अपने खूनी पजे नगरों पर फैलाते जा रहे दुर्मति मादक-द्रव्य माफिया के लिए अधिक प्रलोभनकारी सिद्ध होती है। मादक-द्रव्यो पर लगाये गये प्रतिबंध उसे अपने हितों के सरक्षण के लिए आधुनिकतम शस्त्रास्त्र तथा कभी-कभी ठेठ चोटी तक समूचे सामाजिक और सरकारी ढांचे तथा तत्र को भ्रष्ट करने के लिए लाखो-करोड़ो डॉलर की घूस का सहारा लेने को विवश करते हैं। मादक-द्रव्यों को वैधानिक मान्यता मिलते ही मादक-द्रव्य व्यापार में से मुनाफे की ऊंची दरे स्वतः समाप्त हो जायेगी। बाल्टीमोर का महापौर कुर्त श्मोक - 123 TILI SMULE बर महापौर कुर्त रमोक नशों को वैधानिक करो " कहता है कि "यदि मादक-द्रव्यो की तस्करी में से मुनाफे का तत्त्व निकाल दिया जाये तो मादक-द्रव्य-विक्रेताओं की ओर से मादक-द्रव्य छिपाने के लिए किशोरों को एक रात के 100 डॉलर दिये जाने अथवा स्कूल जाते समय भी इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यम धारण करने की कोई गुंजाइश ही नहीं रहेगी। असाधारण मुनाफे की संभावना समाप्त हो जाने पर अन्य धंधे छोड़कर मादक-द्रव्यो का धंधा अपनाना युक्तिसगत नही रह जायेगा। मै ऐसे किसी किशोर को नहीं जानता, जो शराब की विक्री से पैसा बनाता हो। प्रिंसटन विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एथान नाडेलमान का विचार है कि मादक-द्रव्यो को वैधानिकता प्रदान कर देने पर वे भारी खर्च नहीं करने पड़ेगे,जो आज मादक-द्रव्य-निरोध तथा बदी मादक द्रव्य सौदागरों पर किये जाते हैं। इतना ही नहीं, इस कदम के फलस्वरूप राजकोप को मादक-द्रव्यों की वैधानिक बिक्री से राजस्व के रूप में अरबों डॉलर की अतिरिक्त आय होगी। यह सब विशाल धनराशि एक ऐसे मादक-द्रव्य विरोधी कार्यक्रम पर लगायी जासकती है, जो मुख्यत. सामान्य लोगो को तथा विशेषतः विद्यालयों में पढ़ रहे बालकों को, मादक-द्रव्यो के दुष्प्रभावो के बारे में शिक्षा तथा मादक-द्रव्यों के व्यसनी लोगों के लिए वर्तमान समय की अपेक्षा बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करे। आज इन मदों पर केवल 50 करोड़ डॉलर वार्षिक खर्च किये जाते हैं। मादक-द्रव्यों के निरपराधीकरण में वह अवैध मादक-द्रव्य व्यापार अनिवार्यतः समाप्त हो जायेगा, जिससे तस्करों को प्रति वर्ष 20 अरब डॉलर से अधिक राशि प्राप्त होती 12A H प्राध्यापर एमान नारंगगान अनुगार मादर दल रापैधानिकता प्रदान की गानी गाए। इमरदम परिणामाया गगन गगन पगारवां परवी आधरिपन आय होगी, जिसं मार- मारोधी सापमा पर रारण गा गरंगा' किन मादक-द्रव्यों को वैधानिक मान्यता दी जाये तथा मादक-द्रव्यो की बिनी किस माध्यम से और कितनी मात्रा में की जाये? ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर मतभेद होने के कारण मादक-द्रव्यों के हिमायती निरपराधीकरण को लागू करने के लिए कोई सर्वसम्मत व्यावहारिक कार्यक्रम तैयार नही कर सके। कुछ लोग गांजे को वैधानिक मान्यता देने की सिफारिश करते हैं, दूसरे गांजे और हेरोइन को तथा कुछ अन्य इस सूची में कोकीन और क्रैक को भी शामिल करते हैं। एक भूतपूर्व मादक-द्रव्य व्यापारी (जिसका हृदय-परिवर्तन हो गया है) क्लॉड ब्राउन का सुझाव है कि अस्पतालो और दवाखानों द्वारा की जाने वाली भादक-द्रव्य विक्री को ही वैधानिक मान्यता दी जाये, क्योंकि उससे मादक-द्रव्यों के उपयोग के पीछे निहित "तड़क-भड़क का भाव समाप्त हो जायेगा तथा उनके साथ रोगी होने का कलंक जुड़ जायेगा। इससे किशोरो का उसके प्रति आकर्षण नहीं रहेगा।" एक आम प्रस्ताव यह है कि मादक-द्रव्यों की बिक्री शराब की भांति लाइसेसशुदा व्यापारियों के माध्यम से ही की जाये। साथ ही मादक-द्रव्यो पर भारी कर लगाये जाये और उनकी बिक्री का कठोरतापूर्वक नियमन किया जाये। कल्पना भी जघन्य है दूसरी ओर वे लोग हैं, जिनकी दृष्टि मे मादक-द्रव्यों तथा उनके सेवन को वैधानिक मान्यता देने की कल्पना एक घोर अनैतिक धारणा है। निरपराधीकरण के विरोधी तर्क देते है कि यह धारणा मादक-द्रव्यों की कुटेव से ग्रस्त लोगो के प्रति उदासीनता के दृष्टिकोण में से उत्पन्न हुई है। डी.ई.ए. के मुखिया जॉन लॉन के अनुसार मादक द्रव्यो को वैधानिक मान्यता प्रदान करने की धारणा का एक जघन्य नस्लवादी पक्ष है: “जो लोग मादक-द्रव्यों को वैधानिक मान्यता प्रदान 125 जोन लान मिचेल रोजेयात करने की बात उठाते हैं, वे निम्नस्तर सामाजिक-आर्थिक वर्गों के लोगों की मौत के वारंट पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है।" यदि मादक द्रव्यों के सेवन पर लगा अवैधानिकता का कलंक हटा दिया गया तो कानूनों का पालन करने वाल नागरिको के मन मे भी मादक-द्रव्यों के प्रयोग का प्रलोभन उत्पन्न हो सकता है। यदि मादक-द्रव्य कस्बों और शहरो के प्रतिष्ठित क्षेत्रो में दवाई की दुकानों अथवा लाइसेसशुदा सौदागरों पर उपलब्ध होने लगे तो जो लोग आज मादक-द्रव्यो की खरीद के लिए अधियारे, गंदे तथा वेहूदा स्थानों पर जाने की कल्पना मे ही सिहर उठते है, उनके मन में भी मादक द्रव्यों की खरीदारी की वासना उत्पन्न हो सकती है। मादक-द्रव्यो के व्यसनी लोगो को सभालने और उनकी चिकित्सा के कठिन कार्य में लगे हुए सामाजिक कार्यकर्ता और चिकित्सक तो मादक-द्रव्यो को वैधानिक मान्यता प्रदान करने के विचारमात्र से कांप उठते हैं। न्यूयार्क के एक मादक-दव्य पुनर्वास केन्द्र का अध्यक्षमिचेल रोजेथाल कहता है, "मादक-द्रव्यों को वैधानिक मान्यता प्रदान करने पर हमारे पास नियंत्रणहीन लोगो की विशाल भीड जमा हो जायेगी।" उसे भय है कि यदि मादक-द्रव्य खुलेआम मिलने लग जाये तो उनका मेवन करने वाले लोगो की संख्या पर नियंत्रण लगाना असंभव हो जायेगा तथा मादक-द्रव्यो का सेवन करने वालों में से 75 प्रतिशत लोगो को उसकी लत लगने की संभावना उत्पन्न हो जायेगी। यह तर्क भी सही नहीं है कि यदि मादक-द्रव्यों को कानूनी मान्यता दे दी जाये तथा उनकी विक्री के लिए लाइसेंस जारी किये जायें और उनका नियमन किया 126 - जाये तो उनका काला-बाजार समाप्त हो जायेगा, क्योकि वैधानिक मान्यता के प्रबलतम हिमायती भी यह सुझाव नहीं दे सकते कि किसी भी उपभोक्ता को असीमित मात्रा में मादक-द्रव्य खरीदने का अधिकार दे दिया जाये, किंतु जब तक यह न हो, तब तक मादक-द्रव्यों की चोर-बाजारी फलती-फूलती ही रहेगी। मादक-द्रव्यों को वैधानिक मान्यता देने से शाति और सुव्यवस्था की समस्याएं जटिल हो जायेगी। मादक-द्रव्य चाहे जितने सस्ते हो जायें, उन्हे खरीदने के लिए धन की आवश्यकता रहेगी तथा उनके व्यसनी एक ओर तो बेरोजगार रहने के लिए विवश रहेंगे, दूसरी ओर उन्हें हमेशा पैसे की तलाश रहेगी, अतः वे मादक-द्रव्यों की खरीद के लिए या तो स्त्री-पुरुष चोरी करेंगे अथवा स्त्रियां वेश्यावृत्ति अपनायेगी। इसके अतिरिक्त मादक-द्रव्यों से संबंधित अपराधों में वढोतरी होगी तथा यह वृद्धि मादक-द्रव्यों का सेवन करने वाले लोगो की संख्या में वृद्धि के अनुपात में होती जायेगी, अधिक संख्या में विवाह टूटेगे, परिवार नष्ट होंगे, अधिक बच्चों का शोषण होगा तथा गलियों में होने वाली हिंसा और हत्याओ में भी वृद्धि होती जायेगी। मादक-द्रव्यों ने सं.रा. में समाज और सरकार के सामने एक नैतिक चुनौती पेश की है। यह बात बहुत गहरायी से महसूस की जा रही है कि राज्य समाज के नैतिक ताने-बाने को सुरक्षित रखने की अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। न्यूयार्क मे सं.रा. के अधिवक्ता रुडोल्फ गियूलियानी को भय है कि यदि मादक-द्रव्यों को वैधानिक मान्यता प्रदान कर दी गयी तो मानव-जाति की समूची प्रगति नष्ट हो जायेगी। वह कहता है, "मादक-द्रव्यों को बुरा कहना तथा उन्हें वैधानिक मान्यता देना-ये दोनों बातें एक साथ संभव नहीं है। कानून अन्य बातों के अलावा शिक्षा का साधन भी है।" प्रत्युत्तर मादक-द्रव्यों को वैधानिक स्वरूप प्रदान करने के हिमायती भी इस नीति में निहित नैतिक मुद्दों से अवगत है। वे न तो मादक-द्रव्यो के सेवन को क्षमा करना चाहते हैं, न उसे प्रोत्साहन ही देना चाहते हैं। उनकी दृष्टि में वैधानिक मान्यता का अर्थ मादक-द्रव्यों के सेवन को स्वीकृति देना नही हैउसका अर्थ है नियंत्रण। वे कहते हैं कि नैतिक रोष द्वारा इस वास्तविकता को नहीं बदला जा सकता कि मादक-द्रव्यों के अवैधानिक होने के बावजूद आज वे प्रत्येक व्यक्ति को, हर समय तथा सब जगह उपलब्ध है। उनके उत्पादन तथा उपयोगको वैधानिक स्तर प्राप्त हो जाने पर मादक-द्रव्य तस्करो का आर्थिक आधार नष्ट हो जायेगा तथा उनके धंधे की ओर प्रवाहित होने वाला धन का अपार प्रवाह सूख जायेगा, जिसके परिणामस्वरूप उनकी हिंसक रीति-नीति निरर्थक हो जायेगी। साप्ताहिक पत्रिका 'टाइम' के संपादक के नाम एक पत्र में अल्बर्ता अरांगो कहता है, "यदि मादक-द्रव्यों का उत्पादन वैधानिक रीति से औद्योगिक प्रशोधनशालाओं मे होने लगे तो उनकी एक खुराक का मूल्य केवल चंद पैसे रह जायेगा। कीमतों में इतनी 127 भारी गिरावट आते ही इन तथाकथित चमत्कारी मादक-द्रव्यों का भड़कीला विष धूल में मिल जायेगा कि ये अमीरों को ही उपलब्ध हो सकते हैं।' मादक-द्रव्यों को वैधानिक मान्यता और स्तर प्रदान करने के पक्ष और विपक्ष मे समस्त तर्को के बावजूद इस बुनियादी सच्चाई से इनकार नहीं किया जा सकता कि मादक-द्रव्य-समस्या मानवीय-व्यवहार की समस्या है तथा मानव समाज को अपने संपूर्ण इतिहास में शायद पहली बार मादक-द्रव्यों के उपयोग से बहुत थोडे से समय के भीतर हो जाने वाले संपूर्ण विनाश से बच निकलने की कठोर और गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। व्यवहार परिवर्तन के दो ज्ञात-साधन शिक्षा और भय रहे हैं। मादक-द्रव्यों के विरुद्ध युद्ध तभी सफल हो सकता है, जबकि यह दोनो मोर्चों पर लड़ा जाये-मादक-द्रव्यों, उनकी तस्करी तथा उनके सौदागरों के अस्तित्व का विनाश; और किशोरों तथा वयस्कों को विद्यालयो तथा महाविद्यालयों में नागरिक-स्तर पर मादक-द्रव्यो के सेवन मे निहित खतरों से अवगत कराना एवं उसके साथ ही यह भी समझाना कि मादक-द्रव्यों का सेवन करने पर उन्हें कानून के हाथों कठोर दंड भोगना पड़ सकता है। मादक-द्रव्यो के विरुद्ध युद्ध एक लबा और सतत् कार्य है। इसमे विजय तभी संभव है, जब भांग, पोस्त और कोका उगाने वाले किसानों को उनके स्थान पर लगभग समान आमदनी वाली अन्य फसलें उगाने का प्रलोभन तथा प्रोत्साहन दिया जाये और मादक-द्रव्यो के संभावित सेवनकर्ताओ को इस खतरनाक रास्ते पर पांव न रखने के लिए मानसिक रूप से प्रशिक्षित किया जाये। 128 धुलाई गंदे मादक-द्रव्य-डॉलर की मा दक-द्रव्य तस्करों में वैध व्यापारिक उद्यमो तथा बहुराष्ट्रीय-निगमों को अरबों गंदे डॉलरों की धुलाई की अद्भुत दुष्टतापूर्ण क्षमता है। टाइम साप्ताहिक के अनुसार, "एक धुलाई-चक्र में, जिसमें प्रायः 48 घंटे से भी कम समय लगता है, मादक-द्रव्य तस्कर कोका के स्पर्श से गंदे 20 और 100 डॉलरों के नोटों को वित्त-बाजार की जमापूंजी, कारों की डीलरशिप तथा पर्यटन-होटलों आदि सरीखे ऐसे साफ-सुथरे पूंजी-निवेशों मे परिवर्तित कर सकते हैं, जिनके मूलस्रोत का पता लगाना लगभग असंभव हो जाता है। विशेषतः सन् 1980 के दशक में संयुक्त राज्य में काले धन की धुलाई का एक संपन्न उद्योग पनपा है। टाइम पत्रिका द्वारा किये गये सर्वेक्षण के अनुसार संदेहास्पद स्रोतो से प्राप्त धन को साफ-सुथरे धन मे बदलने के लिए मूलभूत शुल्क 4 प्रतिशत है, किंतु मादक-द्रव्यो की राशियों तथा अन्य गरम रकमों के लिए यह शुल्क 7 से 10 प्रतिशत है। पश्चिमी जगत मे काले धन को गलित धन कहा जाता है। अरबो डॉलर की मात्रा में यह धन अतर्राष्ट्रीय वित्तीय सस्थाओं में से प्रवाहित होता है। प्रत्येक वर्ष लगभग एक खरब डॉलर राशि की धुलाई होती है। धन की धुलाई-प्रक्रिया नकद राशियों को सयुक्त राज्य अमरीका के बाहर ले जाने से शुरू " होती है। मादक-द्रव्य तस्कर समूची नकदी अमरीका से बाहर नहीं ले जाते क्योंकि उन्हे अपनी राशियों के लिए देश के भीतर ही सुरक्षित और लाभदायक वित्तीय संस्थाएं उपलब्ध हो जाती है। वे प्रायः अपनी नकद राशियों की धुलाई और उनका निवेश स्वयं संयुक्त राज्य में ही कर लेते है। संयुक्त राज्य के आयकर विभाग के एक नियम के अनुसार बैंकों को प्रत्येक 10,000 डॉलर अथवा उससे अधिक राशि के नकद-जमा के बारे मे करेसी-ट्रांजेक्शन रिपोर्ट दाखिल करनी पड़ती है। मादक-द्रव्य तस्करों ने इस प्रावधान का लाभ उठाया है। वे वित्तीय संस्थाओं में सैकड़ो नामों से दस-दस हजार डॉलर से कुछ कम नकद राशियां जमा करा देते हैं। एक अन्य प्रावधान के अनुसार जिन खुदरा व्यापारियो के यहां बड़ी मात्रा में नकद राशिया इकट्ठी होती हैं, उन्हें 10,000 डॉलर वाले नियम से प्रायः मुक्त कर दिया जाता है। मादक-द्रव्य तस्करों ने इस प्रावधान का भी लाभ उठाया है तथा अनेक फर्जी कंपनियां और खुदरा व्यापार की दुकाने खोल ली हैं।
इलेक्ट्रॉनिक जमाखर्च सन् 1986 से फैक्स मशीनों के उपयोग के कारण अमरीकी वित्तीय व्यवस्था में एक संपूर्ण क्रांति आ गयी है। इन मशीनो ने धन की धुलाई को अत्यंत सरल बना दिया है तथा वित्तीय सस्था में पहुंचने के बाद उसके ओर छोर का पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है। धन की धुलाई करने वाला व्यापारी बैंक अधिकारियो के साथ किसी प्रकार की बातचीत के बिना ही निजी कम्प्यूटरों की मदद से सारी दुनिया में कहीं भी अपने धन का इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण कर सकता है। न्यूयार्क स्थित समाशोधन केन्द्र इंटरवैकिंग पेमेंट्स सिस्टम (अंतर-बैंकिंग- भुगतान व्यवस्था) के अंतर्गत काम-काज के एक दिन में लगभग 7 सरव डॉलर राशि के डेढ़ लाख अतर्राष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन करता है। इस राशि का एक अंश मादक-द्रव्यों की तस्करी से प्राप्त होता है। अमरीकी बैंकिंग एसोसियेशन के विधि-परामर्शदाता जॉन वायन के अनुसार, "इलेक्ट्रॉनिक हस्तातरण वास्तव में एक कम्प्यूटर द्वारा दूसरे कम्प्यूटर के साथ बातचीत है।" व्यक्तिगत लेन-देन के मामलों में निहित धन के स्रोतो का पता लगाना लगभग असभव हो जाता है। इच सैंडविच धन की धुलाई की एक अन्य पद्धति डच सैडविच है, जिसका आविष्कार करेवियन सागर के द्वीप नीदरलैंड्स-एटिलीज के बैंकरो ने किया है। इस पद्धति के अंतर्गत कोई भी चैक अपने अमरीकी ग्राहकों के लिए हॉलैड मे एक निगम की स्थापना कर देता है, जहां वह ग्राहक उम चैक की स्थानीय शाखा में नकद राशियां जमा कर सकता है। वह अमरीकी ग्राहक नव-स्थापित डच निगम का नियंत्रण एक एंटिलीज़ ट्रस्ट कपनी के माध्यम से करता है परंतु उस कंपनी के स्वामी के रूप में उसकी पहचान द्वीप के गोपनीयता-कानून द्वारा पूरी तरह गोपनीय बनी रहती है। अंततः अमरीकी ग्राहक द्वारा हॉलैंड में जमा कराया गया उसका पैसा बैक की एटिलीज़ शाखा उसे उधार दे देती है। काले धन की धुलाई की यह एक बहुप्रचलित रीति-नीति बन गयी है। इसका एक सबसे अच्छा उदाहरण ला मिना धुलाई ऑपरेशन है, जिसकी योजना मैडेलिन मादक-ट्रव्य संस्थान के वित्तमंत्री' एदुआर्दो मातिनेज़ रोमेरो ने तैयार की थी। रोमेरो अंततःपकडा गया और कोलंबिया सरकार ने उसे स.रा. के हवाले कर दिया। ला मिना का अर्थ है 'माइन' अथवा खान। इस ऑपरेशन के प्रथम चरण में मादक-द्रव्यों की बिक्री से प्राप्त नकद राशियो को सयुक्त राज्य के न्यूयार्क, हाउस्टन और लॉस एंजिल्स सरीखे नगरो मे सहयोगी स्वर्ण-विक्रेताओं और छडें मंगायी। तीसरे चरण में सोने के लिए तैयार कराय गय सदूका मनकद एमागे मातिनग रोमेरो, जिसकी गिरफ्तारी से ला मिना ऑपरेशन का पर्दाफाश हो गया। राशियां भरी गयीं और उन्हें लॉस एंजिल्स मे मादक-द्रव्य संस्थान द्वारा नियंत्रित खुदरा आभूषण व्यापारी के यहां पहुंचाया गया। इस व्यापारी ने अपने बही-खातों में सोने से आभूषणों की तैयारी और उनकी नकद विक्री के फर्जी उल्लेख किये। नकद विक्री से प्राप्त धन की ओट मे मादक द्रव्यो की कमाई का धन बैंकों में जमा कराया गया। नकद राशि के बैंक में पहुंच जाने के बाद उसे किसी भी दिशा में ले जाना सुगम हो जाता है। ला मिना के पांचवें चरण मे बैंक में जमा करायी गयी रकम को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से मादक-द्रव्य-संस्थान द्वारा नियत्रित न्यूयार्क के बैंक-खातों में हस्तांतरित कर दिया गया। वहां से उसे पनामा के मार्फत समुद्रपारीय विशेषतः युरोप के गोपनीय बैंक खातों मे हस्तांतरित किया गया। छठे और अंतिम चरण में वह रकम कोलंबिया पहुंच गयी, जहां उसका एक भाग व्यापार-संचालन तथा कोका-पत्ती की खरीद पर खर्च हो गया। मुनाफे का एक अंश सयुक्त राज्य को वापस भेज दिया गया, जहां उसे जायदाद की खरीद तथा अन्य निवेशों मे लगाया गया। इस प्रक्रिया को समझने की कोशिश में दिमाग चकरा जाता है, परंतु उसके द्वारा मादक-द्रव्यों की कमाई के गंदे डॉलर धुलाई के बाद स्वच्छ धन में रूपातरित हो गये। रोमेरो की गिरफ्तारी के साथ ही ला मिना ऑपरेशन का भी पर्दाफाश हो गया और सं.रा. न्याय विभाग ने दिसंबर, 1985 के प्रथम सप्ताह में घोषणा कर दी कि उसने 5 देशो के बैंक खातों मे 6 करोड़ 1 लाख डॉलर की रकम का पता लगाया तथा उसके हस्तातरण अथवा निकाले जाने पर रोक लगा दी है। यह राशि मैडेलिन मादक-द्रव्य सस्थान के एक सरदार जोस गोज़ालो रोड्रिगुएज़ की निजी 131 - आय का एक अंश थी तथा सं.रा., लक्जेमवर्ग, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया और ब्रिटेन के बैंकों में रखी गयी थी। इसका पता वित्तीय दस्तावेजो और कम्प्यूटर डिस्को से लगा। पश्चिमी देशो में धन की धुलाई के लिए न्यासों (ट्रस्ट्स) का उपयोग एक आम रिवाज बन गया है। सेंट किट्स द्वीप पर एक निष्क्रिय कंपनी फर्स्ट ट्रस्ट कॉर्पोरेशन का एक भूतपूर्व निदेशक टिमोदी नीव इस आरोप में पकड़ा गया है कि उसने अपने मादक-द्रव्य व्यापार के काले मुनाफे की धुलाई के लिए फर्स्ट ट्रस्ट का इस्तेमाल किया। इसी फर्स्ट ट्रस्ट के तथाकथित जाली दस्तावेजो के आधार पर भारत के प्रधानमत्री वी.पी. सिंह के बेटे पर आरोप लगाया गया था कि उसने इस ट्रस्ट के पास भारी रकमे जमा कर रखी थीं। नीव ने जनवरी, 1990 में कनाडा की एक अदालत ओंटारियो सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जे. डेविड वाट के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने कबूल किया कि वह सन् 1982 से सन् 1987 तक पूरे 5. वर्ष ऐसा करता रहा था। 'शकरची कांड काले धन की धुलाई का सबसे बड़ा केंन्द्र स्विट्जरलैंड है। वहां बैक नोटों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मै संलग्न 500 से अधिक बैंक और वित्तीय कंपनियां हैं, जिनके कारण वह देश धन की धुलाई के इच्छुक लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र बन गया है। स्विस बैको मे यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड, स्विस बैंक कॉर्पोरेशन और क्रेडिट सुइसे-तीन सबसे बडे बैक है तथा ऐसा कहा जाता है कि वे विश्व के गदे धन की धुलाई का प्रमुख माध्यम है। स्विस बैंक हस्तांतरण भुगतान और विदेशी मुद्रा विनिमय के रूप मे प्रतिदिन 1.खरब 24 अरब डॉलर का प्रशोधन करते हैं तथा विश्व के वार्षिक स्वर्ण-उत्पादन के 50 प्रतिशत की बिक्री मे मदद करते हैं। सघन व्यावसायिक काल के दौरान ज्यूरिख के क्लोटन हवाई अड्डे पर दिन 1.3 टन विदेशी मुद्रा उतरती है। स्विट्जरलैंड मे धन की धुलाई को अपराध नहीं माना जाता तथा नकद विदेशी मुद्रा से भरे हुए सूटकेस लेकर स्विस सीमा काउंटर से निकलना बहुत आसान होता है। स्विट्जरलैंड की ओर इतनी भारी मात्रा मे विदेशी मुद्रा के खिचाव का प्रमुख कारण यह है कि उस देश के कानून धन की धुलाई प्रक्रिया की गोपनीयता का आश्वासन प्रदान करते हैं। स्विस बैंकिंग इतिहास मे मादक-द्रव्यो की कमाई के काले धन की धुलाई का सबसे बड़ा ऑपरेशन सन् 1987 मे प्रकाश में आया। स्विट्जरलैंड मे शकरची ट्रेडिंग के नाम से चल रही एक वित्तीय संस्था का मालिक मोहम्मद शकरची नामक लेबनानी है। शकरची कहता है कि उसकी संस्था ने नकद राशियों और सोने की भारी मात्राओं की हेराफेरी मे विशेष स्थान प्राप्त कर लिया है। वह अच्छे दिनों में प्राय: 2 करोड़ 50 लाख डॉलर प्रतिदिन की नकद राशि प्राप्त कर लेता है -शुल्क 132 सामानर मारक द्रव्यों की बिक्री से प्राप्त काले धन' को 'युलाई द्वारा 'सफर' यनाने की कला में निष्णात ज्यां मधेरियन तथा असाधारण दिनों में 10 करोड़ प्रतिदिन। शकरची ट्रेडिग के 2 ग्राहक-बारकेव और ज्यां मधेरियन आपस मे भाई है। जांच से पता चला है कि वे मादक-द्रव्य धन की भारी राशियों की धुलाई में लिप्त रहे हैं। हुआ ऐसा कि जुलाई, 1983 में तुर्की के अधिकारियो ने शस्त्र और गोले-बारूद की तस्करी के आरोपों पर स्विट्जरलैंड से यामर मुसुललूलू नामक व्यक्ति के प्रत्यार्पण की मांग की। स्विट्जरलैंड मे छोटे शस्त्रो के निर्यात को अपराध नहीं माना जाता, अतः वह इस मांग पर चुप्पी साधे रहा। अगस्त, 1984 में तुर्की ने मुसुललूल के प्रत्यार्पण का प्रश्न फिर से उठाया और इस बार उस पर मादक-द्रव्य तस्करी के नये आरोप लगाये। इस बार स्विस अधिकारी चिंतित हो उठे। मुसुललूलू भी समझ गया कि उसकी गिरफ्तारी शीघ्र ही हो सकती है, अतः वह ज्यूरिख से सरक लिया, परंतु उसके भागीदार हाजी मिर्जा को ज्यूरिख मे ही रुकना पडा। टंटा खडा हो जाने के कारण मिर्जा को सिसिली की राजधानी पलेरमो मे हेरोइन की प्रशोधनशाला को बंद करना था। उसके पास 600 कि.ग्रा. मार्फीन बंच गयी थी, जिसे वह बेच डालना चाहता था। इस कार्य मे उसने तुर्की में जन्मे इतालवी निकोलो जिउलिएत्ती की मदद लेने की कोशिश की। मिर्जा की तलाश की भनक स्विस अधिकारियों के कानो में पड गयी, उन्होंने तस्करी पकडने मे संयुक्त राज्य की डी.ई.ए. से मदद मांगी। मादक-द्रव्य सौदागरो के छद्म मे डी.ई.ए. के एजेटो ने फरवरी, 1987 मे 40 लाख डॉलर मे सौदा तय कर लिया। स्विस अधिकारियों ने मिर्जा और उसके 133 सीमा शुल्क एजेदों द्वारा न्यूयार्क हवाई अड्डे पर सन् 1989 पको गपे 20 साख डॉलर के छोटे नोट। नोटों का संबंध कोलंयियाई मादक-द्रप्य तस्करों से था। संपर्क सूत्र जिउलिएती को माल के साथ धर-दबोचा। मादक-द्रव्य जब्त कर लिए गये और उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। जिउलिएत्ती के घर की तलाशी के दौरान स्विस अधिकारियों को उसकी इलेकट्रॉनिक पता-बही मिली, जिसमें अन्य महत्त्वपूर्ण जानकारी के साथ-साथ मधेरियन-बंधुओं के ज्यूरिख के फोन नंबर तथा क्रैडिट-सुइसे-बैक मे उनके एक खाते के नंबर की पहचान हो गयी। मधेरियन बंधुओं के फोन नबर तथा खाता-नंबर की खोज से ठीक तीन मास पहले सीमा शुल्क एजेटो ने लॉस एंजिल्स अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 3 सूटकेस पकड़े थे, जिनमें 20 लाख डॉलर के छोटे नोट थे। सूटकेसं ज्यूरिख के मुद्रा-व्यापारी बारकेव के नाम भेजे गये थे तथा ऐसा कहा गया था कि उनके भेजने वाले कोलंबिया के मादक द्रव्य तस्कर थे। स्विस अधिकारी ऐसा मानते हैं कि बारकेव और उसके भाई ने एक अरब डॉलर से अधिक रकम की धुलाई की, जिसका अधिकांश मादक-द्रव्य तस्करी का मुनाफा था। स्विस पुलिस ने जुलाई, 1988 में मधेरियन बंधुओ को कागजों की फाइलो में छिपायी गयी 19.739 कि.ग्रा. कोकीन के साथ लुगानो मे गिरफ्तार कर लिया। अप्रैल, 1989 में संयुक्त राज्य मे मधेरियन बंधुओं के विरुद्ध एक आरोप-पत्र दाखिल किया गया, जिसमे उन पर रिपोर्ट दाखिल किये बिना ही संयुक्त राज्य की 134
Pacinusian EHA
गररे
।
इनररमा
गवटर ने जनता से भुना KHET MERA
मरकंड ने बनारसे, मेलामोRATAK
दिन कारियों ने इस एसयान मारमा १५
दर्शननन नेविभिगोरामा
गझनी ट्रेंडिग के संयुक्त निदेशक तथा पो से स्मा)
हन कर तत्कालीन स्विस दारमती एलिषाभ RI RE wit।
एनिमय कम ने अमरीकी अधिकारियो के साथ सहयोग AIRTA
संकटांकेलिए मार्ग बनाने के कार्य में पमुष मिन
बीप
के त्यागपत्रका भेद खुलने पर उसे उसकेपद से सिनेमा
तया समपर यह आरोप लगाया गया जिसने अपने पतिमोभलामीमोशिश
में गोपनीयता के सरकारी नियमों वन निमा । श्रीमती ममत
स्वीकार किया कि उसने अपने पति को भी मारे सानामामा।
इसम्वीकारोक्ति के बाद उसने जगवरी, 1980 में अपनेपन से त्यागपत्र या
विश्व में धन की धुलाई के फोन
धन की धुलाई की सुविधा नाम पालादेशी
है। धन की धुलाई के केन्द्र वितरtarit गमेजो गोगीतों में
लेकर गोपनीय स्वामित्व वाले नीती विमा uated
ऐसा ही एक केन्द्र हागकांग है। उसे पूर्वी जगत की नकद-धन की बैंकिंग राजधानी माना जाता है। राष्ट्रपति मार्कोस द्वारा की गयी फिलिपीस राजकोष की लूट में से अधिकांश राशि हांगकांग की वित्तीय संस्थाओं के मार्फत ही स्विट्जरलैंड भेजी गयी थी। हांगकांग के अलावा नौरू, वानुआतु, केमैन द्वीप, आइल ऑफ मैन, नीदरलैंड्स एंटिलीज़, नसाऊ (बहामाज) सरीखे अनेक छोटे द्वीपों तथा लक्जेमवर्ग, ऑस्ट्रिया तथा लिख्तेन्स्तीन सरीखे युरोपीय राज्यों में धन की धुलाई के केन्द्र हैं। इसके अतिरिक्त सं.रा. अमरीका में मियामी के स्थान पर लॉस एंजिल्स मादक-द्रव्यों के धन की नयी बैंकिंग-राजधानी.बन गया है। न्यूयार्क शहर भी ऐसा ही है, वह धन के इलेक्ट्रॉनिक हस्तातरण का प्रमुख केन्द्र बन गया है। कनाडा में टोरोटो गदे धन की धुलाई का प्रमुख केन्द्र है। वहां बैंकिंग-नियमों में ऐसी शिथिलता है कि बैंकों के ग्राहक चाहे कितनी भी बडी नकद रकम जमा करायें, बैंकों उनके बारे में आयकर विभाग में किसी प्रकार की रिपोर्ट दाखिल नहीं करनी पड़ती। नोरिएगा की गिरफ्तारी से पहले तक पनामा भी धन की धुलाई के लिए बदनाम रहा। सिसिली का एक छोटा-सा गांव कोरलियोन सिसिली की मादक-द्रव्य- गतिविधि का केन्द्र बन गया है, उसमें 5 बैंक हैं। इटली के सबसे कम विकसित प्रदेश सिसिली में 100 बैंकों तथा उनकी 1,200 शाखाओं के अतिरिक्त 600 वित्तीय संस्थाएं हैं, जबकि प्रदेश में इनके अनुरूप औद्योगिक अथवा व्यापारिक आधार नहीं है। ये बैंक प्रायः मादक-द्रव्यो की अवैध की कमाई की धुलाई का ही धंधा करते हैं, जो इटली की सरकार के लिए काफी सिरदर्द पैदा करता है। धर्म-संकट विश्व की समूची बैंकिंग एवं वित्तीय व्यवस्था आज एक गंभीर धर्म-संकट में फंस गयी है। एक ओर तो यह अपेक्षा की जा रही है कि बैंको तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं के बही-खाते पारदर्शी हों, जिससे कि धन के वास्तविक मालिकों की पहचान की जा सके, दूसरी ओर इस सिलसिले में कठोर कदम उठाने के मामले में एक गहरी उदासीनता है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "ढेर सारे नियंत्रणों से वित्तीय विनिमय-संस्थानों का धंधा चौपट हो सकता है।" बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से काले धन की धुलाई अकेले मादक-द्रव्य तस्कर ही नही करते, विश्व का प्रायः प्रत्येक व्यापारिक निगम इस गदे धंधे मे लिप्त है। विश्व भर में व्यापारिक संस्थानों ने काले धन की धुलाई की जिस व्यवस्था का निर्माण अपने लिए किया है, उसका लाभ मादक-द्रव्य सौदागर भी उठा रहे हैं। 136 NIAN पिक्स 3,00,00,000 तीन करोड़ से भी अधिक पाठकों की पसंद रैपिडैक्स इंगलिश स्पीकिंग कोर्स प्रिय अभिभावक, आपका बच्चा अग्रेजी स्कूल में पढता है, गलिश अंग्रेजी अच्छी तरह लिस-पढ लेता है, उमकी एकमात्र समस्या वह इसे बोलने में हिवक्ता या अटकता है! इसका समाधान यता रहे हैं उसके प्रिय खिलाड़ी कपिलरेय- अंग्रेजी मोलचाल सीखने का एकमात्र सोर्स रैपित इंगति स्पीकिंग सोर्स *ORSE न MAM-- Mu -~- AAMA M/AAI 40 HD Vdow More ran . Mar It's really a good book to learn spoken English -Kapil Dee ' 1am *azar Popra autam COM JN मर नि Nar R Kus Jan -RMAN नवनिक aftar Arolory SRLD peedM MCG | कान्वेंट स्तर की शुद्ध द फेरटेिदार अग्रेजी सिखलाने वाली ऐमी पुस्तक जो, भारत के कोने-कोने में फैली, जिसे हर भाषा के लोगों ने पसंद किया तथा समाज के हर वर्ग ने अपनाया। सभी भाषाओं में बड़े साइज़ के 400 से अधिक पृष्ठ man Ajam Jar.. 12 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित मूल्य: 50/- प्रत्येक आदि। स्त्री के सौन्दर्य, स्वास्थ्य एवं रोगों का एनसाइक्लोपीडिया लेडीज हैल्थ गाइड; नेलिया महिला-विषयो की विशेषज्ञा श्रीमती आशारानी होग * सौन्दर्य समस्याएं: बेडौलपन, अपुष्ट वक्ष, छोटा कद, बालों का झड़ना, चेहरे की कमिया लेडीज * आमशिकायतें:मामिक धर्म की गड़बड़िया, ਛੰਦ बेजा थकान व तनाव,पीठ-दर्द, हीन-भावना, यौन रोग आदि। शिशु-जन्म प्रक्रियाः गर्भाधान से लेकर प्रसवोपरात का भोजन, सतर्कताए एव समस्याए। को साइज के * सामान्य स्वास्थ्यः नारी शरीर रचना की 410 पृष्ठ सपूर्ण जानकारी, फर्स्ट-एड, मीनूपाज, बाझपन आदि। यीमारियां: रक्तचाप, मधुमेह, तपेदिक, -25 विशेषत्र झरटरी के इटरप्युन पर' दमा, वक्ष तथा गर्भाशय का कैन्सर तथा : आधारित एक प्रामाणिक ऑपरेशन आदि। पुस्तक गाइड . दि 300 Purwa :
खेल-खेल में सीखो विज्ञान भयो फोटोग्राफर द्वारा लिखित र ते फोटोग्राफी सिखाने वाला 101 साइंस 11OTO एक्सपेरिमेंट्स एक्सपेरिमेंट्स -आइवर शिएल प्रैक्टिकल फोटोग्राफी नन्हे वैज्ञानिकों के लिए लिखी गई एक ऐसी | कोर्स पुस्तक-जो सरल व रोचक प्रयोगों द्वारा विज्ञान के जटिल सिखातों को समझने में निश्चित रूप से मदद देगी। प्रयोगो की एक प्रतक:- लेखक :एएच हाशमी * कैसे चल पाते हैं जल-सतह पर कीट? ast zTnagta * नहाने के बाद क्यो लगती है ठड? पोट्रेट्स, ग्रुप्स, स्वि-लाम-मोर, कमरे मे बैठ नापो सितारों की दूरी! स्पोट्स तथा स्पीड फोटोग्राफी, विवाह-उत्सव, इसके साथ ही यामापी, सूक्ष्मदर्शी, गायनेमो जानवर, प्राकृतिक दृश्यावलियां आदि सभी मौको के फोटो खीचना सीखो। आदि अनेक उपकरण बनाने की सचित्र विधियां। वर्षिण • पाण्टेक्ट •एन्तामेण्ट चिन मूल्य: 24/- डाकखर्च:5/- पृष्ठ: 124 सत्यूमेण्ट कापिंग फिनिशिंग करिन। English Edition also available हिमाई साइज 244 पृष्ठ मूल्य 28/- गवर्ग. 6/- . सर्वश्रेष्ठ ट्रिक्स का अनूठा संकलन क्विज टाइम क्विज़ टाइम -आइवर शिाल चिल्ड्रन्स ट्रिक्स एण्ड स्टंट्स QUIZ TINE मूल्य: 24/- इस सचित्र पुस्तक मे तुम पाओगे • ऐसी कुसी,जिसे तुम नही उठा सकोगे। • ऐसा गुम्यारा,जिसे तुम नही फोड़ सकोगे। • अदृश्य मानव,जो तुम्हारी आखो के सामने गायब हो जाएगा। अंगुली,जो हवा में तैरेगी। तुम्हारे दोस्तों को चकरा देने वाली-रहस्यमय, आश्चर्यजनक-लेकिन करने में आसान 70 ऐमी, ही, अन्य मनोरजक ट्रिक्स। मल्प 15/- गवई.5/- पृष्ठ 120 Vx 131able in English. डाकखर्च: 6/- पृष्ठ: 128 जन-सामान्य तथा विद्यार्थियों के लिए समान रूप उपयोगी प्रश्नोत्तर शैली में लिखी यह पुस्तक विज्ञान, इतिहास, भूगोल, साहित्य, खेलकूद तथा फिल्म जगत से जुड़े आधारभूत 1001 प्रश्नों के सचित्र उत्तर प्रस्तुत करती है। Also available in English उदीयमान कार्टूनिस्टों केलिएविशेषउपयोग . lEnglish edition also available कार्टून कैसे बनाएं मूल्य 24/- डाकखर्च.6/- विश्वप्रसिद्ध खला जनरुचि के 50 लघु विश्वकोशों की एक अनूठी संग्रहणीय पंखल मांसाहारी- नाश बिर्थिव पेड़ ओपीवानी संगठन HAN रोमांस का वोज स्वजा fied तिर विपरि विषावित रिक रिक Also available in English मूल्य: प्रामाणिक पाठ्य सामग्री सरस कथा-शैली सैकड़ों दुर्लभ 20/- प्रत्येक बकखर्च: चित्रों से सुसज्जित कलात्मक प्रस्तुतिकरण - फोटोटाइप सैट 5/- प्रत्येक रदिफा काम/ऑफसेट छपाई बहरंगी आयरप बारिव दाम इस शृंखला का मूल उद्देश्य एक औसत पाठक को अंतर्राष्ट्रीय घटनाचक्र से जोड़कर . उसकी चेतना को प्रबुद्ध करते हुए उसके शान-क्षेत्र का विस्तार है। इस शृंखला की सभी पुस्तकें मानव-जगत से जुड़े लगभग सभी महत्त्वपूर्ण पक्षो जैसे विज्ञान, रहस्य, रोमाच, दर्शन, धर्म, खेल, संस्कृति, अपराध, भ्रष्टाचार आदि पर विहगम दृष्टिपात करते हुए सारगर्भित विषय-सामग्री प्रस्तुत करती हैं। इस श्रृंखला में प्रकाशित पुस्तकें:- विश्व-प्रसिद्ध.... 1.खोजें 2. अनसुलझे रहस्य 3. रोमांचक कारनामे 4.युद्ध 5.101 प्यारतत्य 6. धर्म, मत एवं सम्प्रदाय 7.खेल और खिलाड़ी 8.रिकॉईस-19.रिकॉईस-11 10. वैज्ञानिक 11.विनाश-लीलाएं 12. दुर्घटनाएं 13. गुप्तचर संस्थाएं 14. जासूस. 15.प्रेरक-प्रसंग 16.चिकित्सा पद्धतियां 17.बैंक कैतियां एवं जामसाज़ियां 18. जासूसी-कार 19.क्रूर हत्यारे 20.सभ्यताएं 21. रोमांस-कपाएं 22. मनमोल बगाने 23. दुस्साहसिक खोज-यात्राएं 24. भूत-प्रेत पटनाएं 25. जन-जातियां 26.कुख्यात महिलाएं 27.हस्तियों के प्रेम-प्रसंग 28. राजनैतिक हत्याएं 29.विलासी सुंदरियां 30. तख्ता पलट की घटनाएं 31. सनकी तानाशाह 32. मांसाहारी तथा अन्य विक्षिा पेड़-पैधे 33. मसौकिक रहस्य 34 मिथक एवं कपाएं 35.पष्ट राजनीतिक 36.साहसिक कबाएं 37.मातंकवारी संगठन 38. भरमौकिक चमत्कार 39.गानिक एवं वर्शन 40.1 एवं जातसार - Sou 2014 अनजाने तथ्य जानिए आकटिस्ट अशोक गोयल की प्रामाणिक पुस्तकें 501 होम रोचक तथ्य डेकोरेशन गाइड मूल्य: 15/- डाकखर्च:5/- मूल्य 28/- डाकख.6 डिमाई साइज़:120 पृष्ठ इंम पुस्तक में गृह मजा मबधी मभी विषयो को - मोडावाटर म विलकुल मोडा नहीं होता। विस्तारपूर्वक और चित्रो महित समझाया गया • मनुष्य की रक्तवाहिनियों की कुल लम्वाई है -धर्मयुग 1,00,000 मील होती है। इस किताब पी मदद से छोटी-छोटी जगहो को ऐसे ही गुदगुदाने पाले व ज्ञान-विज्ञान के अच्छी तरह मजा कर दर्शनीय बनाया जा नए क्षितिज खोलने वाले 501 अजाने तथ्य। सकता है -नवभारत टाइम्स विचित्र दुनिया-विचित्र लोग 70 से 225 वर्गमीटर के नक्शे । - SIA विश्व विश्व के विचित्र इंसान 51 विचित्र हाउस इंसान डिजाइंस -ए.एच.हाशमी मूल्य 20/- डाकखर्च 5/- मूल्य 48/-डाकखर्चः 6/- बड़े साइन के 108 पृष्ठ प्रत्येक नशा निम्न यातों को ध्यान में रखकर • दो सिर वाला अजूबा बच्चा कैसा था? बनाया गया है, • शरीर से जुडे स्यामी भाई? तीन टागो वाला व्यक्ति कैसे चलता था? • ड्राइग, डाइनिंग, बैठक व बाथरूम एव रसोईघर आदि का सही तालमेल हो. • क्या कोई व्यक्ति आधे टन का था? • जगह का सदुपयोग हो. सभी कमरे हवादार ऐसी ही कितनी अन्यान्य विचित्र जानकारियां। हो व उनमे कुदरती रोशनी हो आदि। विचित्र जन्तुओं का संसार 250 से 500 वर्गमीटर के नक्शे (फ्रण्ट एलीवेशन के डिजाइनों सहित) विचित्र विचित्र जीव-जंतु माडर्न हाउस प्लान्स हाकखर्च 5/- टुआर्टरी: तीन आस वाला विचित्र प्राणी। मृत्य 36/- मकबई - कांच मेंढक:जिसकी पारदर्शी त्वचा मे से भीतर • गेडी-सरिये के डिजाइनो की पूर्ण जानकारी का सारा शरीर दीख पडता है। •मजावटी पेड-पौधो की जानकारी लैंपधारी मछली: जिमके सिर पर प्रकृति ने •कमरो के परस्पर मही तालमेल के तरीके दिए हैं। •मकान-सम्बन्धी प्राविधिक जानकारिया. के 75 से भी अधिक विवि-जंतु। मिल्डिग बाईलॉज का विवरण जीव-जन्तु मोवन हाउसप्लस E म -ए.एच. हाशमी मूल्य: 20/- बच्चों को इंटेलीजेंट बनाने वाला अद्भुत नॉलिज बैंक बच्चों के मस्तिष्क में घुमड़ने वाले हजारों अनमूझे 'क्यों और कैसे किस्म के प्रश्नों के उत्तर बताने वाला एक अनूठा प्रकाशन चिल्ड्रन्स नॉलिज बैंक (छ. खण्डो में) Dandran's Komindan आकर्षक गिफ्ट वापस Hanum Area हिए. चया बच्चे के मस्तिष्क के लिए एक टॉनिक जरा मी समझ आते ही बच्चे के मस्तिष्क मे क्यों और कैसे किस्म के हजारो प्रश्न धुमड़ने लगते हैं। उचित समय पर मिले प्रश्नो के उत्तर उमके दिमाग के लिए टॉनिक का काम करते हैं जबकि उत्तर न मिलने में उमका मानसिक विकास रुक जाता है। प्रश्नों में से कुछ की झलक महिलाओ की दाढी आयो नही होती? अन्य ग्रहो से लोग पृथ्वी पर आते हैं? आकाश नीला वपो है? महासे पो होते हैं? टेस्ट ट्यूब बेबी क्या है। मपने पयो दिखाई देते है? Dइलेक्ट्रानिक घडी कैसे काम करती है? 0 मिम्र में ममी कैसे बनाते थे? 0 उडन-तश्तरी क्या है? एल.एस.डी. क्या है? D हाइड्रोजन बम क्या है? आदि.... पृष्ठ 6 खण्डो की इस श्रृंखला में है..... . 1300 बड़े आकार के . 1100 से अधिक चित्र •5,00,000 शब्दों की पाठ्य-सामग्री • 1050 प्रश्नो के समोध उत्तर पिंपर वैक:32/-डाकखर्च 6/-प्रत्येक पूरा सेट : 1927- (गिफ्ट बॉक्स में डाकखर्च माफ विशेषताएं .50 लाख से भी अधिक पाठको की पसद • विद्यालयो में पुरस्कार के रूप में वितरित • प्रत्येक एण्ड अपने आप में सपूर्ण • पत्र-पत्रिकाओ द्वारा प्रशसित आधारभूत विषय * पृथ्वी एव ब्रह्माड * आधुनिक विज्ञान, वनस्पति एव पशु-पक्षी जंगत * आविष्कार एवं खोजे' खेल एव खिलाडी * आश्चर्य एवं रहस्य * सामान्य ज्ञान * मानव शरीर * भौतिक-रसायन एव जीव विज्ञान आदि अंग्रेजी तथा 8 भारतीय भाषाओ में प्रकाशित - Mastu: Computer ruuay For A Better Tomorrow कद पढ़ाने के अनभूत तरीके raute Jocarrorm OTPR ... an FOR RImm ALD infinit Computers are invading every tacet of 3 person's it--the home, the office, the अपना classroom or the play ground. Whether in Job or business, they are opening up bright new कद Vistas of knowledge and happiness बढाइये मूल्फ-20/- मकरा: Also rvailable in English प्रस्तुत है कद सम्या करने का आजमाया हुआ वैगानिक अनुसंधान! इसमें यूरोप और अमरीका में टेस्ट किया हुआ ऐसा सचित्र कोर्स दिया गया है जिसकी मदद से आप केवल 15 मिनट प्रतिदिन - Er. V.K. Jain अभ्यास द्वारा कुछहीहफ्तों में मपनीहाट 10 • Computer for Beginners सेमी. तक तोपड़ाहीसकते हैं। Basic Computer Programming The twin-books are a must for those who are बिना हपिपार मारधारा की जापानी कलाएं Interested in corriputers, their function and operation, but are discouraged by their जूडो कराटे complexities. All is made easy through simple जूडो कराटे language and instructive Illustrations. The books are designed for mass (जजुत्स-बॉक्सिग सहित) education as per Computer Literacy Project of NCERT and also conform to मूल्य: 20/- डाकख:- course on computers recently undertaken पृष्ठ: 128 by C.B.S.E. Big Size 1928 172 pages respectively Also available in English Price:Rs 36/-eachPostage:Rs.6/-each हिन्दी में पहली बार प्रकाशित 300 से अधिक दांव-पेचो का सचित्र कोर्स। इसकी मदद से आप A COMPLETE GUIDE YO चाक, लाठी, भाला आदि के वार से अपना बचाव करके अपने से चार गुना ताकतवर हमलावर को PCS Complete भी चुटकियों मे धराशायी कर सकते हैं। Guide आप भी सीखो करना बुनाई to PCs . आधुनिक बुनाई शिक्षा * Creates awareness about modern computer-Hardware a Software.8 how these can serve as productivity aids * Imparts working knowledge of Computer technology. Software Packages like Word-Star, Lotus 1-2-3, dBASE-II] etc. to an ordinary man avoiding technical words. Helps in assessing the operadons that fre computer. :Rs.48/-Postage :Rs 6/- पुस्तक में 200 से अधिक नई बुतियो से ऊनी वस्त्र तैयार करने की विधिया दी गई हैं। साथ में उनकी धुलाई दाग-धब्बे छुडाने के विभिन्न तरीके भी दिये गये हैं। मूल्य 40/- सकतः 5/- .
Skill in correspondence ensures Brighter Career... Faster Promotion... Sure Success in Business... Raspur Rapidex Self - Letter Drafting Course SELF LETTER DRAFTING COURSE Big size Pages: 354 Prce Rs. 50/- survete Whether you are an administrator or a supervisor, office superintendent or a steno-typist--the skill in correspondence is an art you must master, because almost every situation, every occasion calls for a well-drafted letter. And with this skill in hand none can stop you from getting ahead FEATURES Sentences and phrases in abundance. Tick mark the required ones. Arrange in proper order instantaneously. Shape & mould the way you want to. And now make as many letters as you want on the same subject. DIVIDED UNDER 3 SECTIONS. It takes care of your personal and social letters, commercial correspondence and applications for job. While other books teach you to copy readymade letters given in them, this course will teach you how to draft a letter of your own choice कोई भी भाषा सीखें . arhite Vio ethta on Books for Science Students General Science A series of five books The series provides help and guidance on all the major branches of sciencePhysics, Chemistry, Biology, Geology & Asironomy Price: 15/- cech Postage 47- <sch Quiz Series (Work-Books for Physics, Chemistry, Biology & Science) Each book in this senes contains 1000 quiz type questions covering almost every branch of particular science with answers, Also Price 12 .each Postage 4'- each in Hindi Know Science Know Science offers pupils in the 10-13 age range 1000 questions in the general field of science Price: Rs. 15. Postage: Rs.4/. रैपिडेयस लैंग्युएज लर्निंग सीरीज़ इतनी सरल व ग्राह्य सीरीज कि आप कुछ ही दिनों में काम चलाने लायक कोई भी भारतीय भाषा बोलने और समझने लगेगे 12 खण्डों की सीरीज़ की पुस्तकें GEN CEN GEN GER GENERAL SCIE SCIE SCIE SCO SCIENCE हिन्दी-सम्पनिंग सेर्स Rat-alan Ratiu af! हिन्दी-अंगमार्निग सेर्स हिनी-गुजराती सनिंग कोर्स শিবালয় দিন इसी प्रकार प्रान्तीय भाषामो से हिली सीखने के लिए भी 6 पुस्तके उपलब्ध सभी पालने मगधन 10 एवं में प्रत्येक पातर कामाय 10/- प्रत्येक Only ) !
खेल-खेल में गादू सीखो, खेम साइंस के खेलो-मानपदाओ, रोय समाओ, मित्रों में परामेमो 101 मैजिक abr सैनिक दिक्स 10 -साइंस- 101 इंसाबसाइंस गेम्स ट्रिक्स -आइपर पशिएस -आर यूगिएन इस सचित्र पुस्तक में दी गई हैं ऐसी 101 विज्ञान के 101 खेलो की यह पुस्तक खेल ही खेल शानदार व जानदार ट्रिक्स, जिनका ममझना मे कुछ ऐसे वैज्ञानिक उपकरण बनाना सिखा देती जितना सरल है, उनका प्रदर्शन-उससे भी है, जो बनेगे तो खिलौने ही पर बच्चो को आसान! बसा जरूरत है तो थोडे मे अभ्यास के बिलकुल अमली उपकरण जैसा ही आनद देगे। साथ चन्द ऐसी चीजो की, जो तुम्हे आसानी मे जैसे-पैरोमीटर, विद्युत-घुम्मक, हैपटोग्राफ, उपलब्ध हो जाएगी। स्टीम टरयाइन, इलेक्ट्रोस्कोप आदि.... द्विपस की एक मसक: टूटी माला फिर इनके अलावा बहुत से अन्य रोचक प्रयोग तैयारगिलास का पानी गायब करना जैसे-कागज के बर्तन में पानी उपासना, भाप . रूमाल आग से न जले, सर पर रखा हैट से नाय चलाना आदि 101 मनोरजक जादू से स्वय उछले आदि. प्रतीत होने वाले वैज्ञानिक खेल। मूल्य: 241- डाकप:5/- पृष्ठ: 120 मूल्य: 24/- डाकखर्च: 5/- पृष्ठ: 120 Also available in English English Edruon also available योगाभ्यास द्वारा किसी भी रोग से छुटकारा पाइये! Get your child admitted in a public school योगासन योगासन साधना एवं theches CHILDREN'S साधना dictionary PICTURE योगासन पर सबसे DICTIONARY ज्यादा विकने वाली All in colour पुस्तक 1 • Successfully prepares your child for admission in a Public School आसनों का सुबोध व सचित विवरण • Cpntains 1500 words of daily use. प्राणायम विधि चक्षु-व्यायाम पौष्टिक भोजन Each & every word has been explained योगासनों द्वारा रोग निदान आदि..... with colourful pictures & small & simple • योगासन सैकड़ों शाखाओं में प्रतिदिन हजारों The Dictionary is really a treasures योगाभ्यासी रोगों से छुटकारा पा जीवन का irove of knowledge for your children wherein they will discover the आनन्द ले रहे हैं। names ol..Birds Animals Fruits • Vegetables • Colours Ports of साइज छ: 1201 मृत्य: 20/- डामगुर्च,4/ • Body etc. Alsat available in English Giant Size Price: 36.Postage 6'. Blctum --- sentences Subject Quiz Series in six subjects, so far Science Quiz Book (General) SCUENIGE Qideorok Covers advanced topics on Plant Kingdom, Animal World, Human Body, Human Diseases, Medicine, Universe, Science Laws, Scientific Instruments, Domestic Appliances, Computers, Space Exploration, Every day Science, Scientific Achievements of India, Inventions and Inventors and many more similar topics. Electronics & Computers Quiz Book From the history and evolution of Electronic science and computers to the latest developments in the field. Mathematics Quiz Book Crisp questions that can be asked on Arithmetic, Algebra, Geometry, etc., covering all formulac, theorems and short-cuts Environment Quiz Book All ecological and biological aspects of the nature SOTTOunding us. Medical Quiz Book All developments in the field of medicine and medical equipment, diseases and all related zoological topics. WW ENVIRONMENT QUIZ 300K Astronomy Quiz Book The universe in a nutshell --- stars, planets, satellites, comets and all the theones based on astronomical inventions. MEDICAL . Explanatory answers provided for every question. Profusely illustrated for better and quick understanding. Helpful for vivas, and competitive tests like MBBS and Engineering and other scientific courses. To face the challenges of competitive quiz programmes on Radio/TV or in Schools and Colleges. Useful scientific tips for all interviews Recommended for 10 + 2 classes, 'Science Quiz Book' also available in Hindi Big Size Price: Rs 24 each. Postage: Rs. 5 1- attract SMARUT कैमरा साधारण हो या बढ़िया-आप स्वयं डिक फोटोग्राफी कर सकते हैं. ट्रिक फोटोग्राफी एंड कलर प्रोसेसिंग -ए.एच. हाशमी .योतम के भीतर आवमी, हपेली पर नाचती औरत, सेय में से मांकते बच्चे या पते पर प्रेमिका का फोटो उतारिए! ट्रिक फोटोग्राफी पर हिंदी में प्रथम पुस्तक-जिसमें ट्रिक और इफेक्ट की पूरी-पूरी प्रैक्टिकल जानकारी चित्रों के साथ दी गई है. इसके अलावा.... कलर फोटोग्राफी व कमर प्रोसेसिंग की प्रैक्टिकल जानकारी भी इसमे है,. जिसकी मदद से आप निगेटिव या ट्रांसपेरेंसी की प्रोसेसिंग कर सकते हैं और डिमाई साइज पृष्ठ: 24 अच्छे कलर एन्लार्जमैन्ट भी बना सकते हैं। मूल्य: 32/-डाकखर्फ डा. नारायणदत श्रीमाली द्वारा विरचित 'रिप्ले' की Believelor Not अब हिन्दी में भी... मल्य 40 -- -100 मूल्य: 30/- संसार के डाकखर्च:5/- 1500 अद्भुत तांत्रिक सिद्धियां आश्चर्य मंत्र-अध्येताओं, तांत्रिको एवं साधकों के लिए ऐसी पथ-प्रदर्शक पुस्तक जिसमें दुष्कर तांत्रिक . पुस्तक में कुदरत के चमत्कारों, अद्भुत क्रियाओं का सरल एवं सचित्र निवरण है। ऐतिहासिक घटनाओं, शदशाहों की अजीयो- गरीब सनकों, साहस और वीरता के बेमिसाल कारनामो, पृथ्वी, समुद्र और आकाश के मत्रों के मूल स्वरूप, मत्र-चैतन्य, मत्र जीव-जन्तुओं और वनस्पतियों की अनजानी कीलन-उत्कीलन, मत्र-ध्वनि, मत्र-विनियोग | विचित्रताओं का सचित्र वर्णन किया गया है। एवं मत्रों के सफत प्रयोगो के लिए सचित्र ग्रन्थ। पृथ: 36/-मई.6/- पृष्ठ 214 मंत्र रहस्य . दुर्गा महिमा • शिव महिमा • विष्ण, महिमा • लक्ष्मी महिमा • गणेश महिमा तीर्थ-यात्रा का सुफन पाइये 'हनुमान महिमा "हगार) हमारे Marut पूज्य तीर्थ बड़े 208ष्ठ नाश्य:/- पुतरों में महिमामओ के आंतरित पूजा मंत्र, नयेच मादिधियां भी है। मग Is' ..5. यह पुस्तक मापा, तीर्थों की धार्मिक, ऐनिगिय पृष्टभूमि उपयोग में आने पाने माज-मामान, माने जाने के मार्गसनिा, टारनं पारियोपालनानगरीपानमोगी।
घर बैठे दर्जियों जैसी टेलरिंग सिखाने वाला प्रभावी एवं सरल कोर्स परभरको पोदाको अर्थात्पने-छोकी रैपिडैक्स होम टेलरिंग कोर्स नेपकिन से लेकर पुरुषों की कमीज-पैंट तक.. कुल मिलाकर 175 से अधिक (लेखिका: श्रीमती आशारानी व्होरा) 'डिजाइनों एवंनमूनों की पोशाकों की प्लानिंग, • मनमोहक फ्राकें,लुभावनी मैक्सियां, सलौनी नाइटी, नाइट सूट कटाई व सिलाई की सचित्र उनकारी। व गाउन, आकर्षक टाप्स, नन्हे-मुत्रों के रंगारंग कपड़े. युवक-युवतियों के लिए पैंट, बैल-बाटम, शर्ट, बुशर्ट व जीन्स • गृह-सज्जा के लिए परदे, कुशन आदि पुराने कपड़ों से बच्चों के कपड़े बनाना • भांति-भांति की डाट्स, चुन्नट, प्लीट्रस, जेबें, आस्तीन, कालर योक, बटन आदि • मशीन के कलपुर्जो की जानकारी भी 300 से अधिक रेखा व छायाचित्रों से सुसज्जित | मूल्य: 48/- डाकखर्च: 6/- RA होम टारगकोर्स . FIR Pagal Hindi Sentence Dictionary English-Hindi Sentence Dictionary. अंग्रेजी-हिन्दी बोलती डिक्शनरी (वाक्यों सहित) हिन्दी में यह अपने ही प्रकार की पहली ऐसी सिशनरी है जिसकी शब्दावलीपाक्यों के रूप में बोलती है और अपने पाठकों को उसकी प्याकरण-रचना से परिचित कराकर उसका डिक्शनरी मूल्य 28/- सही-संरमों में प्रयोग भी सिखाती है। मकखर्च: 6/- पृष्ठ.बो 154 प्रायः प्रयोग में आने वाले अंग्रेजी के 4000 शब्दों का हिन्दी में उच्चारण, हिन्दी-अर्थ तथा उनका अंग्रेजी के वाक्यों में प्रयोग सिखाने वाली अपने प्रकार की पहली डिक्शनरी। अग्रेजी-मराठी मम्माण भी उपरण --- --- -- अपना दिमाग तज कीजिए My Picture Dictionary 101 दिमागी- कसरी For Nursary Classes All illustrated 48 multi-colour pages. . 101 दिमागी कसरतें हरीश चंद्र संसी सिर को जलाने के लिए विवश कर देने वाली ऐमी पहेलीनुमा चुनौतिया, जिनको हल करने की कोशिश में जहां एक ओर आपका मनोरजन होगा वही दमरी और आपका दिमाग भी तेज होगा। बच्चो, जवानों तथा बूढ़ो-मभी के लिए मजेदार 101 रोचक दिमागी कमरते • My Picture Dictionary Price: Rs. 151- Postage: Rs. 51. : प. 18/• मकान: 5/-Also availableinEnghah, YNTAL प्रसिद्ध भविष्ययपता, प्रकाश ज्योतिषी, हस्तरेखा-विशेषज्ञ एवं सिंदहस्त तांत्रिक-मांत्रिक डा. नारायणदत्त श्रीमाली की अनमोल पुस्तकें HTRACH प्रविदास दाद तामामाम HYPNG हिप्नोटिजन . वृहद् हस्तरेखा शास्त्र प्रैक्टिकल हिप्नोटिज्म . - आप खुद अपने हाथ की रेखाए पढ़कर अपना भविष्यफल जान सकते हैं। किसी पण्डित अथवा ज्योतिषी के पास जाने की आवश्यकता नही है। • हस्तरेखा के 240 विभिन्न योगों का पहली बार प्रकाशन, जैसे-आपके हाथ मे धन-सपत्ति का योग, पुत्र-योग, विदेश- यात्रा योग आदि हैं या नहीं? • आपके हाथ की रेखाएं क्या कहती हैं? कौन से व्यापार से आपको लाभ होगा? नौकरी मे तरक्की कब तक होगी? पत्नी कैसी मिलेगी? इत्यादि सैकडो प्रश्नो के उत्तर। डिमाई साइज़ 266 पृष्ठ मल्यः 40/- डाकखच. 6/- Also available in English • पुस्तक में हिप्नोटिज्म को सरल-सरस ढंग से चित्रो द्वारा समझाया गया है, जिससे साधारण पाठक भी एक अच्छा सम्मोहन विशेषज्ञ बन सकता है। पुस्तक मे हिप्नोटिज्म के प्रकार, पयोग, शक्ति, हिप्नोटिज्म के सिद्धात, त्राटक, सम्मोहन के तथ्य आदि पर पूर्ण प्रामाणिकता साथ सचित्र विवरण है। • रोग-निवारण, कष्ट दूर करने व जीवन में प्रतिदिन आने वाली बाधाओं व आपदाओं के निराकरण मे इस पुस्तक में दिया गया विवरण पूर्णतया उपयोगी है। मूल्य: 40/- डाकप: 6/- Also available in English रोगों से निबटने में डाक्टर से भी ज्यादा आपकी अपनी भूमिका आवश्यक है इंग्लैंड के प्रसिद्ध डाक्टरों एवं विशेषज्ञों द्वारा हिन्दी में 16 तथा अंग्रेजी मे 18 हैल्थ लिखित प्रसिद्ध चिटिश गाइड्स पॉकेट हैल्थ गाइड्स • एलर्जी (Allergies) रक्तक्षीणता (Anaemia) (अब हिन्दी में भी उपलब्ध) सधिशोष एवं गठिया (Arthritis & Rheumatism) पॉकेट हैल्थ गाइड्स इन बीमारियो के कारणों, •रमा (Asthma) जटिलताओं, सावधानियों तथा रोकथाम के .पीठ का दर्द (Back Pain) उपायो के बारे में आपका ज्ञानवर्द्धन करेगी। . Tattu (Children's Illnesses) • ररत-सवार की समस्पाएं (Circulation Problems) mun मकवर्ष; 4/ • अवसार और चिता (Depression & Anxiety) प्रत्येक मयुमेह (Diabetes) • उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) •हाप रोग (Heart Trouble) • रजोनिवृधि (The Menopause) . •माधासीसीका (Migraine) vie पष्टिक मासर (Peptic Ulcers) रयोपूर्व तयर (Pre-Menstrual Tension) सपा-रोग (Skin Troubles) Cystitis. Hysterectomy CAMP OM मूस्य:8/- प्रत्येक Met ont ज Dia द . .
Out with all Stains घर में ही ब्यूटी क्लीनिक होम ब्यूटी क्लीनिक होमम्यूटीवistar Spot Check SPT CHECK -- Straightforward tips to cope with all types of stains. A full section on fabrics with a comprehensive chart. Tackle stalns on Wallcoverings, Carpets, Pots, Furniture, Metalsetc. यह पुस्तक हिन्दी में भी उपलय है। Pnce:Rs. 18/-Postage Rs.5/- -परवेश हांग Also available in English घर-बैठे ब्यूटी क्लीनिक जैसे मेकअप की विधिय सिखाने वाली एक ऐसी पुस्तक, जिसमे त्वचा के देखभाल, शरीर को मुडौल बनाने सबंध व्यायाम तथा आकर्षक हेयर स्टायल्स आदि की सपूर्ण जानकारी दी गई है। बड़े 140 पृष्ठ मूल्यः 28/- डाकखर्फ 6 आधुनिक केश-सज्जा सीखो समय और धन की घचत करें गृह-उपयोगी HOME HINIC नुक्ते mahimala गह उपयोगी नुको MGHAT मॉडर्न हेयर स्टायल्स -आशारानी व्होरा मांड हियररलयास -.-. (Home Hints) Also available In English. चीजों के लंबे समय तक बिना सडे-गले भडारण इस पुस्तक की मदद से किसी भी प्रकार की हेयर की विधियां, बोतलों, टी-पॉट आदि की सफाई | सैटिग घर मे ही कीजिए। बॉय-कट, बॉब-कट, सहित हजारों नुक्तो का 'एक बहुरंगी सचित्र | राउण्ड-कट, स्ट्रेट-कट, फीजर-कट, स्टैप्म, पोनी-टेल, रिंगलट्स, शोल्डर-कट, शेग- मूल्प.18/-हाकख5/- स्टायल या स्विच-सज्जा-मूल्य: 241-साकसं 67- फमर पतली कीजिए 18विशेषज्ञ मस्टरों के इंटरव्यूज पर आधारित संकलन। बेटी हैल्य गाइड बेबी लेडीज स्लीमिंग कोर्स हेल्थ गाइड -आशारानी व्होरा " केवल 15 मिनट रोज के इस कोर्स की मदद से | यह गाइड यच्चों से संबंधित सभी विषयो का एक.. आप अपनी कमर और पेट पर चढ़ी फालतू चरबी | अनूय एनसाइक्लोपीडिया है। जिसमे उनके शीघ्र ही घटा सकती हैं और अपनी कमर का नाप | शारीरिक रोगों से लेकर उनके मनोविज्ञान तक पाच दिन में सात-आठ मेंटीमीटर तक कम कर के सभी पहलुओ को सविस्तार समझाया गया है। मूल्य 20/-हाकखर्च:3/- मूल्यः 40/-डाकख :- सकती हैं।
मोटे पतले हो सकते हैं पाटिक कला सीखिए 'मोटापा घटाहक சாகச 20 दिन में मोटापा घटाइये बाटिक कला बो साइर के 120 पृष्ठ Also available in English मूल्य. 20/- कखर्च 5/- मोटापा भयकर बीमारियो की जड़ है, घर की सजावट के साज-सामान से लेकर पहनने मैक्स-क्रीडा में बाधक है, सेहत के लिए | के वस्त्रों तक पर बाटिक कला का प्रयोग अभिशाप है। केवल 15 मिनट नित्य का फोर्स | कर-पर्दे, मेजपोश, दीकोजी, रेडियो कवर, लगातार 20 दिन तक करिए, आपको | चादरें, कुशन, साड़ी-साउज़ आदि पर आश्चर्यजनक फर्क नजर आएगा। विभिन्न प्रकार के रग-बिरगे डिजाइन बना मूल्य. 20/- डाक्टर्च 5/-पृष्ठ-72 सकते हैं। पेंटिंग सिखाने वाला कोर्स आकस्मिक दुर्घटना के समय पेण्टिग कोर्स FIRST प्राथमिक उपचार ड्राइंग प्राथमिक तथा उपचार पेण्टिग कोर्स (First Aid) -ए एच हाशमी Also available in English मूल्य: 18/- हाकखर्च:3/- इस कोर्म की मदद में आप कुछ ही दिनों में आकृतियो के एक्शन से भरे चित्र तथा पुस्तक मे डाक्टरी सहायता उपलब्ध होने तक मीन-मीनरिया, वाटर-कलर, ऑयल-कलर, दिल का दौरा पडने, करट लगने,विषाक्त भोजन एक्रेलिक-पेटिंग, हिन्दी-अंग्रेजी लैटरिंग आदि | खाने, जल जाने, चोट से निरतर खून बहने, मीख कर लाभान्वित हो मकते हैं। हड्डी टूटने आदि जैमी अनेक आकस्मिक पृष्ठ 144 मूल्य 20/-अकलर्च 5/- दुर्घटनाओं से जूझने की विधियां दी गई हैं। Bring Greenery Indoors रसोई की रानी यनिये HOUSE PLANTS House Plants भारतीय व्यंजन ----- भारतीय व्यंजन -कुमुदिनी मुंशी मूल्य: 15/- डाकखर्च: - Pnce.Rs 18/- Postage Rs.5/- Tips on Indoor greenery Get to know all about choosing buying watering and feeding House plants Bottle gardens.... Flowering and Foliage plant from BULBS to BONSAI. Full of Colourful mustrations. पराठे, परी, सब्जियां, पाटी, रही, कोफ्त, मलाद, चटनी, मुरम्चे, अचार, वीर, हलवा, डोमा-इडली, कचौरिया, शरयन, आइमरीम आदि बनाने की विधिया।
हिन्दी में पहली बार प्रकाशित बहुरंगी एनसाइक्लोपीडिया जनियर साइंस एनसाइक्लोपीडिया जूनियर साइंस एनसाइक्लोपीडिया (Junior Science Encyclopedia) 256 पृष्ठो मे 800 से भी अधिक रगीन चित्रों एवं मूल्य: 300/- डाकखर्चः 70/- 80,000 शब्दों की पाठ्य-सामग्री से युक्त प्रस्तुत एनसाइक्लोपीडिया वैज्ञानिक विषयो पर लिखा पांच खंड गया एक अमूल्य संदर्भ-ग्रथ है। बच्चे की हर । पृथ्वी एव ब्रह्माड.2 नाप, गति एवं ऊर्जा, 'क्यों', 'कैसे', और 'कहां का उत्तर देने में सक्षम 3 प्रकाश, दृष्टि तथा ध्वनि, 4. इलेक्ट्रॉनो की एक सग्रहणीम ग्रंथ! उपयोगिता, 5. खोज एव आविष्कार। Published in India in collaboration with Hamlyn Publishing London सविख्यात पाक-कला विशेषजा 'श्रीमती आशारांनी व्होरा द्वारा प्रस्तुत मॉडर्न कुकरी बुक भारतीय एवं पश्चिमी स्टायल मे किचन सैटिंग • मेहमानो का स्वागत कैसे करे, परोसने के के 15 से अधिक फोटोग्राफ्स, रमोईघर के क्या-क्या तरीके हैं, ध्यजनो को प्लेटों मे कैसे आवश्यक सामान व आधुनिक उपकरणो सजाए तथा डायनिंग टेबल पर प्लेटो व क्रॉकरी आदि को कैमे मजाए। • दैनिक नाश्ते, लजीज ब्जिया तथा विशेष अवसरो के लिए मीठे व नमकीन विशिष्ट पकवानों के साथ-माथ जैम, मुरब्बा, जैली, प्रया नित आइसक्रीम, कुल्फी, स्कवैश, फूट-कस्टर्ड, मूल्य: 20/- अचार, चटनी, मांस, मलाद, सूप, मैंडविच काकघर्ष:5/- और फूट-काकटेल आदि व्यजनों को वनानं Also tvailable in English की मचित्र विधिया। साहिता 148 पृष्ठ मैकों रेखा चमत्कारी किरण-लेसर अपने माइलों के लिए कोई भी मनपसन्द रमा मत्रालय, भारत सरकरारा पुरस्कृत नाम घुनिए! एक ऐसा चमत्कारिक आविष्कार, लेसर- जिसके उपयोगों ने आज मारे 2not बाम ममार में धूम मचा दी है। सरातमा मेसरले 50 से भी मधिक उपयोगों की मषितजारसी। P बच्चों के 2001 नाम 11:पृष्ठ मूल्य: 24/- मूल्य: 10-य:4/- TunColour) furt.6/- जीव-जन्तुओं की आत्मकथाएं N.C.E.R.T. द्वारा पुरस्कृत 51 जीव-जन्तु हम जीवित लेखक-रवि तापटू महान आविष्कार -राजेन्द्र कुमार राजीव भूमिका-रामेरा बेदी पुस्तक में आज के विज्ञान और आधुनिक सभ्यता जीव-जन्तुओं के संसार के 50 सरस्यों की को आधार ममझे जाने वाले हजारों साल पहले के रोधक आत्मकथाएं, उनकी जवानी सुनिए- PUSTAK MAHAL (Incorporating Hind Pustak Bhandari 10-B, Netaji Subhash Marg, New Delhi-110002. अपना मनपसन्द याद्य बजाना सीखिए - सितार मीधिए -गिटार सीखिए -पालन सीखिए हारमोनिपम सीलिए - मेरोसिन प पेंजो मीसिए - यता योगी-योगो मीखिए संगीताचार्य श्री रामावतार'योर' रचित पुगा पोदी के चहेते पाप, जिन्हें विना शिक्षक के मरल से मोजमाता है और हमारे इन गो को मद मे आर कुछ ही दिनों में निम्मी पुढे निमसने लगा माप ....
No text on this page.