Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Shiksha Ayog Ka Prativedan
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शिक्षा आयोग का प्रतिवेदन
1964-66
अनुशंसाओं का साराश
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शिक्षा आयोग का प्रतिवेदन
1964-66
अनुशसाओं का साराश
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शिक्षा प्रायोग का
प्रतिवेदन
1964-66
अनुरासाओं का साराश
शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए
चित्रगुप्त प्रकाशन
पुरानो मनो अजमेर
(राजस्थान)
C
राष्ट्रीय शशिक अनुमधान एवं प्रशिक्षण
परिपद, नई दिल्ली।
राष्ट्रीय शक्षिर अनुसधान एव प्रशिक्षण
परिषद् नई दिल्ली को स्वीकृति से शिक्षा
विमाग राजस्थान द्वारा अनूदित एव
प्रवाशित।
यह पुस्तक या इसका पाइप्रथा
परिषद् की पूर्व अनुमति के बिना
पुनमुद्रित न किया जाए।
मूप350
परागय शिना रिमाग राजस्थान बीकानेर
५ निए
चित्रगुप्त प्रागन
पुरानी मणी प्रजमर
गि पत्रामय
पायममाज माग, मजमर
शिक्षा आयोग का प्रतिवेदन
19641966
अनुशसानो का साराश
लेसक
जे पी नायक
राष्ट्रीय मनुगधान एवं प्रतिगण परिपद नई
स्तिो द्वारा भाजपा नापापी माना पुस्तर
रिपाट प्रयुत परेशान पमान 196166
--समरा भय रिपमग राहिनो अनुग।
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आमुख राष्ट्रीय शिक्षा पद्धति, समी क्षत्रा एव सभी स्तरो की शिक्षा के विकास की नीति तथा शिक्षा में सामा य सिद्धान्ता के सम्बध म सलाह प्राप्त करने के लिए भारत सरकार ने 14 जुलाई, 1964 को एक प्रस्ताव द्वारा विश्व विद्यालय अनुदान मायाग नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ डी एस कोठारी की अध्यक्षता में शिक्षा मायाग का गठन क्यिा। शिक्षा पायोग ने अक्टूबर 2, 1964 को कार्यारम्भ किया। (1) विद्यालयी शिक्षा, (2) उच्च शिक्षा, (3) प्राविधिक शिक्षा, (4) कृषि शिक्षा, (5) प्रौढ शिक्षा, (6) विनान शिक्षा एव अनुसंधान, (7) शिक्षक प्रशिक्षण तथा शिक्षा का स्तर, (8) छात्र कल्याण, (9) नवीन तकनीक तथा पद्धतियां, (10) जनबल, (11) शक्षिर प्रशासन, तया (12) शक्षित वित्त-व्यवस्था के सम्बध म सामग्री तथा समस्या के विशद् मध्ययन हेतु यारह कृतिक दता (Task Force) का शिक्षा भायोग द्वारा गठन दिया गया। इसके अतिरिक्त इसा उद्दश्य से सात बायपारी दलो (Torking Groups) का भी गठन किया गया जिनका वायक्षेत्र इस प्रकार है (1)महिला शिमा, (2) पिछड़ी जातिया को शिक्षा, (3) विद्यालय भवन, (4 विद्यालय तथा समुदाय के सम्बध, (5) सास्यिकी, (6) पूर्व प्राथमिक शिक्षा भोर (7) विद्यालय पाठ्यचर्या । उक्त कृतिय दला तथा पायवारी दलो के विस्तृत प्रतिवेदनो के मापार पर विश्वविद्यालया तया महाविद्यालया व अध्यापको शिक्षा शास्त्रिया, प्रशासको तया छात्रा से व्यक्तिगत सम्पर स्थापित कर, लगभग 9,000 व्यक्तिया (जिनम प्रमुग समाजसेवी उद्योगपति वनानिष तथा प्रपशास्त्री सम्मिलित हैं) से सालालार तया सगमग 2400 का सख्या में प्राप्त पापन- पारे प्रकाश मfTI पापाग ने अपना प्रतिवेदन 21 माह की अवधि बाद 199 1966 को भारत सरकारने सौप दिया। शिक्षा मायाग, इम प्रतिदेन व प्राशन को माज दोषप से प्रधिर समय बीत गया है । इस बीच इम प्रतिवग्न को लारक तया राज्य स्तर पर जा पर्चा हुई है गिना क्षेत्र म ना परिवतन साने ये प्रपन किये जा रह हैं उनमे इस सत्र मचि रगन पान पत्ति सामा यत मनमिन नहीं है । राष्ट्रीय शिा नीति र स्वरूप निर्माण म सो इस प्रनिवान की प्रमुख भूमिरा रही है । मोर गलिए यह पौर नी पावरस हा गया है कि तिहामिर महाप म दस्नापर पा यामम्भव भघिर गहराई म जारर पम्पयन रिया जाय।
11 शिक्षा प्रायोग या प्रतिवेदन प्रराशित होने के समय स हा शिक्षा दिमाग राजस्थान की यह प्रवल इच्दा रही है #ि यह प्रतिवदन शिक्षा म रचि रमन वान तथा शिक्षा के क्षेत्र माय करने वाल समी व्यक्तिया का मुनम हा । क्यारि मूल प्रतिबदन अग्रेजी मे है और मधिय मूल्य का हाने के धारण अधिवाग की समझ व पहुँच के बाहर है अत अभिप्रेत यह रहा कि इमा काई समित हिता स्पातरण जरुरतमद व्यक्तिया को सुलम कराया जाय । गौमाग्य ने इमी याच श्री जे पी नायक, जो शिक्षा प्रायाग के सदस्य मचिव थे और जा भाजक्ल मारत सरवार में शिक्षा मंत्रालय म सलाहकार हैं 7 राशाय शिर भनुमधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, नई दिल्ली के लिए शिमा मायाग इस विशाल प्रतिवदन का अंग्रेजी में सक्षिप्तोवरण दिया । यह प्रप्रेजी सक्षिप्त सस्वरण यद्यपि हर तरह में उपयागी है तदपि हिदी म महाय पारण हिदी के माध्यम से ही मभिक समस्याओं का अध्ययन करन तथा उनमा समाधान योजने म समम धग इसका लाभ भठिनाई से उठा पा रहा था। इस यग यी मावश्यरता पूर्ति के निमित्त श्री जे पी नायक को रिपोर मय द एग्यूपशन कमीशन 1961 66-ममरी पद रिकमण्डेश स' (पार-राष्ट्रीय गरि अनुमपान एव प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली) या निनुयाल प्राशित गरन का काय इस विभाग ने दिया है । याशा है दियह पुग्तर प्ररमे प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिय विद्यालय के पुस्तासयम स्थान प्राप्त बरगी तथा सभी अध्यापकों के लिए उपयोगी टिहागी। में भा ज पा नायर नया राशीय कि मनुसपान एवं प्रशिक्षण परिषद यो प्राशन दाई का विशपत मामारा हूँ नि उहोंने इस पुस्ता में हिनी पावा पिए स्वाति दन या मनुषम्पा की। चौगानेर हरिमोहन मापुर पगात 1968 मपर निश शिक्षा आयोग के सदस्य अध्यक्ष 1 प्रो डा एम कोठारी मध्यप, विश्वविद्यालय मनुन मायाग, नई दिल्ली। 2 श्री ए मार दाऊ, भूतपूर्व कायवाहा लिदास, माध्यमिक शिक्षा निम्तार यामम निदेशालय, न दिल्ली। 3 श्री एच एस एन्विन निशर, इस्टीटयूट मय एज्यूक्शन, सदन विश्वविद्यालय, सन्न। * श्री भार ए गापालास्वामी निशा, व्यावहारिक जनवल साध सस्थान नई दिल्ला (तमी मे सवानिवृत्त) । 5 प्रा साताशी इहारा, स्कूल भव साइम एण्ड इजीनियरिंग, बासहा विश्वविद्यालय, ताक्यो। 6 टा पा एम मा भूतपूर्व निदेशा, वामनवेल्य एज्यूवेशन ल्याजन यूनिट सन्दन। 7 श्री पी एन विरपान, Pिा मजाहबार तया सचिव भारत मरवार, शिला मनालय, नई दिल्ली। 8 प्रो एम दो मापुर, भयगास्त्र एव जन प्रशासन ने प्राध्यापर, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर (क्तमान उपचुनपति, राजस्थान विश्वविद्यालय) । डॉ यो पा पाल, निदेशर, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई रित्ती (वतमान महानिरेगा तया उपाध्यम, भारतीय कृषि अनुमपान परिषद् तथा माय एव कृषि मंत्रालय में भारत सरकार ने अपर सचिव) । 10 कुमारी एम पनपिर, अध्यक्ष शिक्षा विभाग, मर्नाटक विय विद्यारय, धारवाड (तमी से सवानिवृत्त)। 11ो रोजर रिवर, मि, संष्टर पॉर पाप्युनान स्टरीज, हादा सूल मय परिरर हेल्प हावर विश्वविवार, मित्र, रायुरा राम 12 होजी गर न, भूतपय ाि साझार भारत सरकार, एवं निगा एशिपाई गरि मायाजना एवं प्रगामन सस्थान, नई तिी (पर मेवानिवृत्त)।
11
11 डॉ रा सेन उपफुलपनि जापपुर विश्वविद्यालय क्लबत्ता ।
14 प्रा एम ए गुमायस्की निगर, मयाडॉलिजिकल डिविजन,
मिनिन्द्रा प्रव हायर एण्ड म्पाल सरण्डरा एज्यूक्शन, मार एस
एफ एम मार पोर भौतिशास्त्र व प्राध्यापर मास्सो विश्व
विद्यार, मारगे।
10 एम ज्यों दामस, इमपकर जनरज पव ए यूवेशन, मास, तथा
महापा महानिदार, मूनस्वा परिस ।
सदस्य सचिय
16 था जे पी पाया, मध्यर, ति मायोजना प्रशासन तथा वित्त
विमाग, गोपले इस्टीटयूट मद् पालिटिक्म एण्ड इवानामिक्स,
पूना।
सहयोग सचिव
17 पास एप मरगा गहापा निटार, डिपाटमेण्ट भव स्कूल
ए हायर एग्पूर शन, यूनेस्या परिम ।
अनुक्रम परा पृष्ठ 1 3-23 4-5 6-15 7 2-13 2-3 4-8 8 9-11 12-13 14 6-7 15 अध्याय! भूमिका माध्याप-2 शिक्षा-व्यवस्था में परिवान का पातरण 1 शिक्षा का उत्पादनो मुगी बनाना 2 सामाजिर एव राष्ट्रीय एकता की प्रगति (1) राष्ट्रीय चेतना (1) सामाजिक मयवा राष्ट्रीय सेवा (ul) जन विद्यालय प्रणाला (कॉमन स्कूल सिस्टम) (iv) भतर्राज्यीय सदभाव (v) हिंदी तथा भग्रेजी (1) माधुनिक भारतीय भाषाएँ 3 मूल्य मनुस्थापन (वेल्यु भोरियटेशन) 4 शिक्षण तथा मूल्यांकन की मापुनिर विधियाँ 5 लचीलापन तथा गतिशीलता अध्याय-3 गुरगारमा सुधार 1 मुविधापो का सपन उपयोग मध्यापन (1) पारिमिर (1) भय साम (1) पाप एवं सेवा सम्पपी शर्ते (1) व्यवसायिक तयारी 3 विद्यालय पाल्पचर्या 4 विश्वविद्यालय स्तर पाध्यम वा पुनगठन 5 विद्यालय पाठ्यपुस्त 6 उच्च शिक्षा के लिए पाठ्यपुस्तके एव माय साहित्य 7 पात्रों म पुस्तर पितरण 8 शिक्षा प्रणाला में सुधार 8 8 9 16-17 18-20 21-23 10-11 12-13 24-80 28-29 14-41 15-16 30 31 32 16 17 18 18 19 33 34 35-38 39-45 46-47 21-22 23-24 25-26 48 49 50-58 26 27 21-30 9 गणित मस्यामा के मातार तथा अवस्थिति मम्बधी याजना 10 गुपिपापा की व्यवम्या 11 पात्र मेवाएं 12 प्रतिमामा की गाज एव विवाग 13 सित सस्थामा म मुधार के लिए राष्ट्रव्यापा कायक्रम 11 नव परियोक्षण परा 59 60 61-63 6470 71-73 पृष्ठ 31 31 33 31-36 36-37 71-80 38-41 42-61 42-43 81-110 83-85 86 87-89 90-91 95-96 97 98-99 100-110 101-102 45-17 17-20 00-21 51 51-55 55-60 56 शरिप्रवसरों के विस्तार तथा समकरण सम्बन्धी समस्या 1 प्रापमिर गिगा पौर निरशरता का परिसमापन 3 FTII या जनवन सम्दया पारश्यकताएं 4 चमात्मा प्रश 5 रानिय पिता तथा स्वाध्याय C रिस्तरों पर नामांकन 7 fPा तपा मेवायुक्ति 8 शरि पवमरों का समररण (1) frशु गिना (1) धात्रवृत्तियों तथा छात्र महायता भवप्रार (in) प्रपग यासों लिए गिया (6) शेत्राय पसरान (1) गरिरापा का गिला (vi) fruो जातियों की गिना पप्पाप-5 पुषविराम 1 माम्पमिरमिपावगायीकरण (i) रिमिता (1) उffrना उमा ध्यान रुपा प्रमुग पिरियार 103 101 105 100-109 110 26 58 59 59-60 GO 111-171 112-120 111 115-120 62-91 62-68 63 65-68 121-121 68-11 Vil पृष्ठ 71-12 72-76 73 73 परा १ नवीन विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय 125-127 4 विश्वविद्यालयाको मुहद बनाना 128-135 (1) विश्वविद्यालय म्वाधीनता 129-130 (1) विश्वविद्यालयाको वित्तीय व्यवस्था 131 (1) उपकुलपति के काम तथा उसको नियुक्ति 132 (17) विश्वविद्यालय के भीतर म्वाधानता 133 (1) विश्वविद्यालयाचे लिए कानून 134-135 5 विश्वविद्यालय अनुदान मामाग 136-140 6 विज्ञान एवं तकनीकी 141-162 (1) विज्ञान शिक्षा 142-146 (a) नानिक अनुराधान 147-151 (1) राष्ट्रीय विनान नौति 152 (1) पि विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय 153-157 (6) इजीनियरा का शिक्षा 158-162 शक्षित ढांचे का पुनगटन 163-108 8 प्रोडशिया 169-171 9 पूर्व प्रायमिन शिगा 172 10 शागिर भवन 173 11 शक्षिा भनुमयान 174 अध्याय-6 शक्षिा मापोजना, प्रशासन तथा वित्त 170-210 1शशिर पायाजना 176-178 नियम मिश्रण 179-188 (1)ओर सररराप 180-181 (1) स्थानीय प्राधिकरणों का बाप 185-187 (int) ভিসা সমস্যা বা ধার্য 185-190 3 राशेरनर पर गिर प्रशामना पुनपटन 191-193 (Of मनालय 192 {) য যা অনুশন ব বলিয় परिषद 193 | राम स्तर पर प्रशासन रा पुनगटन 191-205 (1) राम सर पर शनि प्रगागन 195 76 77-80 80-87 8081 82-83 88 83-84 85-87 87-89 90-91 91 91 93 93-118 95-96 98-103 98-99 100-102 103-101 101-105 104 105 106-113 107 परा 196 197 198 199 200 201 203 पृष्ठ 107 108 109 109 110 111 112 203 201 200 206-210 206 207 209-210 112 113 113 114-118 111 114 115-118 (1) गिमा निशालय (ii) जिला स्तरीय मगठन (iv) राय शिला मस्थान (6) राज्य विद्यालय शिक्षा वाड (11) मारताय शिला सेवा (vi) राज्य शिक्षा सेया (vii) मतिर प्रामामा प्रशिक्षण (iv) क्षिर प्रशासकों व निमित्त राष्ट्रीय समपारी महाविद्यालय (२) नियामिपि (1) शिना पिधेपर सम्पय (b) fTH पर प्यय (1900-1965) (I) fTI पर प्यप (1966-1985) (1) विरास नाति प्रयाप-7 सतत एव दोधरातिर प्रयत्नों से क्रियान्विति परिनिष्ट 1पन्यासों का पतन पम 2 विधााप पाचर्या 3FM म नामानि (1970-81) गायता तपा पनुन , मारिणी-1 मगिर पप भारत में (विभिन्न) गोतों द्वारा गिगा परम्पय 3 मारन ममापा पर पापारिक ाि परपय पुष परिचय भारत में परमापाग्नि rfrre 6 प्ररित्र पोगर वापिरमाण 1 TS निमप्रतिमात्र योगा पातिक सागर 211-215 119-121 122 125 127 129 136 " 137 138 139 110 " 112
अध्याय ।
भूमिका
-
पिता वा मन्द मला महा म्बीरार किया जाता रहा है सविन
गरा जिवना महर भाज है उतना मनुष्य व निगम म कभी नहीं रहा।
मि पर निमर पात्र व विश्वम ए मा मुरारित शिक्षा तथा नत्मम्वधी
अनुमधात या मावश्याता है जिसका नोगा ज्ञापन में जाता और
भारी मा म पनिg सम्रपा श य मयूग विशाम को प्रनिया, उगवे
पल्याण उनि या उपरा मुरमा व निमिया बग मरत्व है।
2 शातिर पुननिर्माण के तीन पक्ष
पनि गमाज या ममानवारी, जनतााि मानिर बनान की मांग
पा पूरा पग्ना है ता भाग्न म प्रचपिन मिला-पराया म मूरभूत परिवनन
यरन हाँग । यस्तुत गिमा म एप मा पानि को प्राययाता है जो राष्ट्रीय
दया की प्रामिनिए वोदित गामाजिर, धादिर नया मागरि
शान्ति का मम्मर बना गर । इस नाति नान मुम्ब पर
--परिप पर जामनगदजारन से
भारश्यामा पाinामे गम्परामर
গম্য মুগ্ধ বা সি শ া স ফি আন ৰ পৰা
गय मास, निरतर उनी । और मम में रम मेत्रा
मय' पनगष्ट्रीयगर बगवर ।। पौर
र अगरा ममानता पर बन दौर जन कापी पावरवाना
माधार पररि मुरियामारारिम्नार ।
अध्याय 2
.
शिक्षा-व्यवस्था में परिवर्तन का रूपान्तरण
3 न तान पमा म म प्रथम पक्ष की प्रमुमता या प्राथमिक्ता स्पष्ट है।
fTHI राणाय विकास और सुरक्षा म सोच मम्मर तभी सम्भव हैं जबकि
रार उचित पमान पर उचित प्रसार का तरा उच्च गुणसम्पन्न शिक्षा की
पवम्या यर । गमय हा ममस्या का मतत्त्व है क्यापि शिक्षा का परम्परित
व्यय या हर विस्तार 4 माय उमर कटु परिणाम अपना विशना म
सामन धान और तम प्ररार शिक्षा वा म्पारण अधिर कटिन अधित
गर्चीला हाता जाता है । अनण्व मवाधिक महत्त्वपूण मुधार है, शिक्षा
पम्या म पाता वरना उम नागाव जावन तथा आवश्यक्तामा म
सम्बद्ध करना पौर म प्रकार हमार राष्ट्राय लश्या वा प्राप्ति के लिए प्रावश्यर
मामाजिश मावि और माम्नतिक पातरम म दम शक्तिशाली गाधन
बनाए । मगर म पिया जा सकता है
-fTHा का उत्सारना मुगा बनाकर
-मामाजिर एद गदाय परता म अभिवृद्धि करव
-गण गिना व्यास्था म मूप अभिस्यापन द्वारा
- पारन व पिण या माधुनिक पद्धतियो अपनाकर,
-सिम्यागासनातएव गनिशान बनारर।
निशा को उत्पादनो मुपो बनाना
परति ममाज य्यदा व मतगत शिक्षा गामा यतया एक M
म. पुरा पगम्यर यग का निमारग करती है जिना पाग प्राश
राता और निरामय या रमगृति गता है लगिन जा स्वय मापन
rम का नाम TANTRI पर विपरात नागा क उम एर यदुत बढे
गमाया गिला TITI आगीय गति म विग्नार मला है।
गगमार पौगालि गमान पवम्या मfTHIम नर उतारना मुमा हाता
Fiftml यान ममावपूग
पाता है और भशिक्षित
मग गमार पर भार महा जाता। मा यिनि म शिला म विकास
हम राशय मम्मान रासिमाना है जिमग एग साधन उपलब्ध हात
३ हैं ना शिक्षा के विकास म और अधिर महयोग रत है। इस प्रकार HिT और उपादयता दाना एर दूसरा मगरा दत हुए ऊपर चरत जान हैं। मारनवप म जरिबार नागरिकावे जारन स्तर का उन्नत करना है और दूमरीमार शिक्षा व्यवस्था वा प्राम सागा तर विम्नार करना है ताग प्रसार FTET या उत्पादन म मम्बद्ध पाना सॉच प्राथमिाता का वामनम बन जाता है। एम हटियाग गनिम्नतिषित पामरम वा विरामिन रिया जाना चागि (1) विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान प्रापश्याता म बात पोहै कि प्राधिन एव मानिस माघार पर विनान पिता को अधिर मत्व दिया जाय । पि एव उद्योग म विस्तार नया राष्ट्राय सम्पत्ति म वृद्धि प्रौद्यागिरी म प्रगति पर निमर बनी है। इगरा दियान्तिा न गिति पर जात नय प्रधविश्वाम, माग्य या तथा निप्रियता ममाप्त हो जाता है और निमय गत्या पण म मनुष्य पो निहाया प्रतिबद्धता और अधिर मुटर हा जानी है। इसलिए विनान- गि काममूचा मिश्रा या भमिल मन बनाया जाना चाहिए। यिन मिना स्तर म मा मुधार प्रापित है तारि मून मिझाना का मममन मोति बदरवा चिन व प्रयाग वा भावना पाहा तथा विश्वप गामा पुगतामा भोर ममम्या निशान को यान्यना या विकाम हो । म प्रपार यपानिय दृष्टि हमार जावन व मागे सम्वृति या एप अभिन्न अङ्ग बन जायगी। इमा नाह बनाना अनुगधान की परमावश्यरना है जो मुम्पत उद्योग प्य भूपि म विशाम वा प्रभावित बग्न वाना हो । (1) कार्यानुभव विद्यालय, पर, सायगारा, गन पारयान या उतारन मम्दापी हिंगो भी स्थिति में न पाय म भाग मन का वासानुमत्र को ममा की जा माना है और ग मी मर को गामाय जिनामा प्रमित मन ममता नाना पाहि गरिस य बौदिख पाना पापौर पर प्रामाग्नि मामाशि नाभा का कम परत में माना जा गरती है। मम मुसाका पाय भेष मप्रया पग्न का मुविधा प्रामगों मौर पागाना मनोररी मिा गा। युवामा प्रारयानको पिविताना मामान मिलेगा निमम भागपि यमन प्रति काम गम्मान गाणा दिन पोर माया पाप पानशैमाग पनपा और का पत यह होगा कि आपिस उन्ननि म महायता मिलगी, पौर म त म कुछ ता व्यक्ति और ममूह म मम्बर गहर हान व यारण और युद नापस्थवग और प्रामवग म पापा ममम बटन वारण सामाजिर एव राष्ट्राय एक्ता स्थापिन हा मरगा। छात्रा का आयु व समझ की परि परचना का दृष्टिगत रगत हुए वायानुभव का मात्रा व प्रति वा निश्चिन् करना होगा इसलिए HिIT क प स्तर म दूगर स्तर अथवा एप वग भ दूगर पग व लिए निपारित वायानुभन की मात्रा व प्रति म अतर हागा । सरिन यह प्रावग्या है कि कायानुभव न परत प्राधुनिक प्रौद्यागिता में मा धा हा हा अपितु अग्रष्टि सम्पन्न मा हा। (1) व्यवसाय व घधा की शिक्षा पृपि एव उद्योग नियाय व्यनिया व निमाण काय या उद्य प्रायमिरता दा जाय । मन ममय समय पर मनुमागित जनवल की आवश्यकतामा या ध्यान में राहुए माध्यमिर शिशा स्तर पर पधा या शिक्षा तथा विश्वविद्यालय स्तर पर ब्यारमायिर पिता पर विशप बल दिया जाय । उगान ये गमनपा म गिपना पि और उद्याग वायवर्नामा प्रिरासि पापार गिा नया रित पाटयनमा माध्यम स, बहुत बडे पमान पर ध्यागापित निशा यो व्यवस्था की गाय । पधावी गिमार गुणा मा गर 1 IIT मोर पि ग मोर ा पनि राम्बध है राया पर बर पिप जान वा पारश्माता है । G सामाजिर एय राष्ट्रीय एकता को प्रगति HTTT पौर मगरित गप्ट्र निर्माण न लिए मागाजिन एय राष्ट्राम एपमा पा बहन व मगच हा प्रसार मी उमनिनियर प्रति उति मला मारवपूण याग द गया है । इमष्टिग निगम विरमित पिया जाता है यह प्रसार है 7 राप्गेय चेतना राम्गा पगम गा मिशा अपन रिय जायें PिIT ITR Kा शिग हा मारा गाराना थाती बसी उचित राना उपनय मिशन महान मरिष्य या हम अपन गि निर्माता मरा उमा प्रति हमम पियाम ण्य निष्ठा जागृत हा। KRITRIP नाग -1 थम गाएिप ग व तापामा और माय माता मंदिरा पिा मगा 7 मोर नाटप ५ 6 आदि भी मुगनि म शि दी जाय । म अतिरिक्त प्रत्या पात्र या उगमायु एवं परिपक्रना अनुम्प नागग्विता का एपी शिक्षा दी जाप, जिम मानसन स्तरामग्राम मविधान संविधान की प्रस्तावना में उल्लिपित महान् मानव भूप, जिग प्रसार वास्तागिर एव समाजवादी समाज का रचना वरना हम नारने हैं उमगो प्रशनि, दर ममन पान वाली विमिन प्रन्यासीन तथा दोघालीन समस्याए उन स्थायी निगान तमा राष्ट्रीय विरग सम्बन्धित पचवर्षीय पाजनामा मारि विषया या मध्यया गम्मिलित किया जा स । मम म मगनि रह ता उपयुन कायम का मत- राष्ट्रीय सदमार ग तया सम्पूग्ण मानवजाीि व प्रति गहरी नि स सामजस्य रहगा जिन पर भी हम विशप वा दन की प्रापश्यनता है। सामाजिक प्रयना राष्ट्रीय सेवा किमी न किमी प्रसार कामामाजिक और राष्ट्रीय सा विद्याथियो लिए भनिचाप हाना चागिा। एगो सहर स्तर की गिरा भिन्न पर हा विद्यारपता महाविद्यारय म समुगर प म रहना तथा गामुनायिन सा प्रयवा गीय पुराना पा माया व सुनौतीग गनि faষা ম নাগ না গা>ি বঙ্গণ সামাৰি শ ষষ্য ব না । मनान गम्मिरित किय जान चाहिए। प्राथमिर 7 पर ग वायरम या उद्देश्य होगा. उचित उपआया द्वारा गमाज गया पर विभप बल दने हा মাস ম খান ৭ খাব যদি পথ চাপি কালা। মাশমি fTHE नर पर न उद्देपमा वा पिम्नार रिहा सरना है। प्रयर माध्यमिर विद्यालयमा माग्निरिया जाम रिवर ममाज म पनिट सम्बन्ध स्थापित कर तथा ममार-गवा ग सम्बधित एम ममुचिा कायम रनाव जिनम प्रयाच पार भाग ल गरें। मह गमय न हा पहा पुध माध्यमिक विद्याया र ममूटर नि मामाजिर गवा एवं श्रम गिरिरा कोपोर म पवम्पा का जाय और परमनियाप हाना चाहिये रि निम्न माध्यमिा नितर का प्रयोग मम ग म 30 तथा यता माध्यमिर स्तर का दार 20 मिन शिविरा म बनानगर। मियविधात तर पर यह पायम एन मा या श विन्या माध्यमिा गर पर प्ररपर मस्या कम पान ये मिा प्रामादिल लिया जाय कि यह गमान और उमर पापा मेयर रायमाया गिमित पर सेरिन म मामा म हा यहां पर पर दिए यह पनिाप हाना पाहिपनि मह पानी प्रपम नाम पिपरनर पूर रिमा ६ र प म गचारित किमी मामाजिर एव श्रम निदिर म बम म बम 60नि समान बर। गार वायत्रम गे राष्ट्रीय उतना पिवान म अभिवृदिना हागा ही रमा माय माय गापग्य प्रेरणा के नागा म मामाजिर उत्साहापित की भावना पग नगी पौर जन गवा के शिT प्रेरणा मिागी। जन विद्यालय प्रणाली (कॉमन स्पूल सिस्टम ) ग ममय सिमा नवम्या मजा वग भ- चर रहा है उस प्रविसम्ब गमान दिया जाना चाहिए । माज पार गमन व्यनि अपन अपन वाता या मल्पगल्या निजा (प्रावट) विद्यारया म पढन का भजन हैं जा अधिा गुर यगून वरत है पौर मरम्नर या चनाय रखन हैं जबकि दूगर्ग घार बमस्या जनममूह । मपन याताका एग विद्यारया में अध्ययन हतु मापा जा गगार द्वारा जान है और जहाँ पाद शुल्क (पपया सारमा हिमाग ग म मात्र या तुम)नहीं लिया जाता रविन जिनरा सा बहुन गिगमा हाता है । मनात शिक्षा नीति का यह उद्दश्य राना पापियf यह जन निशिग जन पिचारया की व्यवस्था पर - जानि पग-गमुशार घम पापियाममया गामाजिर नरव मादरविना गमीप्रसर गया . नि प्रवासासम्भव नागर, --- मासान पान गिरा पाया गया ना प्रपितु याग्मनापापार माना जाय -मिनम रिगी प्रसारमा मशिन गुम्न न किया जाय पोर -जिगरनाप्रपर विवाद दाखि परायाय ग गर तथा पित भागात म एमा पाप नगर गम्या पना गरि गामार प्रमिमाया अपनयामाना गीत विधारयामभजना पावराना पनुमर नरें। 10 पामार मात्र मा पाया (नरमप) या धारणा पातिपातयिा जाप माला frप निश्चित गम fTER Frer म मच ग.fm नाग पवम्या पापा पवापिस पोए प्रालिमिर पर लागू ाि पारागामारमा *ग प्रापन समोर पर जाना afrnागर पतितिापवाया भान का गुमायदा II बगर मान न पिापा पवाचा ७ । मचि सन पिए बाध्य हा जायेंगे। इस प्रकार मीन सुधार मम्मर हामवगा 11 शिला की जनविद्यालय प्रणाली का एक महत्वपूरग मग यह भी है कि मरदागे महायता प्राप्त ममम्न मिण मम्यामा ( जिनम स्वना या भमा यता प्राप्त विद्याया के अतिरिक्त ममी freण स्याएं सम्मिदिन हैं। चा उनरा प्रबष रिमा भी प्रकार का क्यो न हो, गिमा म मा कुद निश्चित समान विपता हा जो पूनतम स्तर का बनाय रप म । "म समय प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रवध दे प्राधार पर गिभग गम्यायाम प्रकार की वग व्यवस्था प्रचलित है। राजकीर शिक्षा मस्यामा म सम्भवत भध्यापका लिा सर्वोत्तम मवा मम्ब पी ने मार है। तुरनामा दृष्टिकोण म दा सा नवा प्रापिर माधन मी उतारतापूर TITE हैं, लगिन गवा की प्रयधिर सुरक्षा नया स्थानावरण (निमरे चारा व सम्या व प्रति नग अंगी व पनि निहावान रहत है) ममुगप में जीवन বা মার নধা বা শাক সবিনযাপ বা ম কাম সে गाय मिड हारर हैं । स्थानीय स्वापत nिa मस्यामा म म मय वटि नाइयांना ही इन पहिरिन म्यानीय गजनीति व धारण अध्यापको मिलना मवा मुविधा भी प्रमतारजना हानी हैं । मन निशा विद्यालय याय एव निठावान माया का भापित कर सात है ममाग अथवा सनु दाम पनिष्ट सम्पप बनाय रग मरन है तथा य पानी स्वनता भी बनाय रण गरत हैं । सरिन उतरा पाथिर माघार निवर हाता है जा राजार विद्यायाम नहा हाता एम धिताय विद्यालया मा प्रकार का मार पठिनायो मी हाती है.अध्यापार लिए अपघात सवा-मम्ब धी गर्ने तथा मिनाम पर प्रधान नरत सममानतामारादूर रन की पावरल पता है। प्रधा चाह को हाहा, इन ममन सस्माप्रामदुध समान विभपता निर्मित करनी पारसनादया मध्यापागमान ग्नर ममान पोग प्रवश मम्मघाममान नी जिमम कानद ममात हा मोर यायनामापार पर गमो गरीष मम्मामा म बस से मुशिया हा स्पानाय माग मगर नवान विधिया प्रश्नान तथा प्रयागरग्न दी बना। प्रतर्राज्यीय सद्भाय িযা বাসি বি ” মা । বিমি নাস্তা ৪ रमर र विपरम परि जागा अपिल सरमा और धिा मोग पूग घाना पा निमारहाना गरा गिनार कापराय ५ पाटरमा म म्यान दार अध्यापाका मादान प्रदान द्वारा दश को विभिन्न गरि मम्यापा म माग सम्मधा व विकास स अतर्राज्यीय आधार पर प्राप्म विद्यालया व शिदिग या पापाजन पर नया दश व प्रत्यर भाग में छात्रा को प्रयग नगना अगित भारतीय शभिर मस्यामा की स्थापना कर दिया जामाता है। 13 पर मा अनिवाय है गगा म परम्पर प्रानान प्रदान हेतु विविध प्रसार व गाधन मानाय जायें । प्रयर मापाया क्षेत्र म कुछ एम पद हा जो प्रय ममम्न प्रानिय भारतीय भाषामा यो जानन हा गया कुछ एम भी हा जा उना माग्नि में परिचित हा तथा उनम पागगन टने म ममम हा । इम उदय की पूर्ति व लिए विद्यालया महाविद्यानया म विभिन्न माधुनिष भाग्नाय भाषामा अध्यापन या गमुचिन पवम्वाहा । इमर अतिरिक्त प्रया पिपरविद्यालय में प्राधुनिक भारताय मापामा म मा पत एम विभाग स्थापित रिच जायें जाप्रमायगाना पस माय करें। एक मुनाय पर भी है कि कुछ एमा विटिमस्याए प्रयवा उनन पर स्थापित पिय जाय जहाँ रिमिग भारामा नया उनसरा मापाया ममम्यामा का तुलनामा मध्ययन पिया जा मक। बाomo तपा म .. म्ना पर माधुनिर भारताय मापामा पा साय माय पाया जाना मम्मय २ गाना है...-या गुधार बग्न स एम द्विभाषा पापानिप्राप्त । मपी जिना विद्यानया नया महाविद्यालया म भापा मिति प्रावपाता 11 हिदो तया प्रप्रेजी fr-1 तथा पत्री - हा मापापा का गम्पर मापा म्प म सिमित पिया जाय। पाPिएगा नापा है जो विभाजन गमूर पा मगर मापा या माना।। महिलामा म विगारपरनपेनिस गना आप पाम म गाय जात पााि गया ग भाम पिय जागवारे पर गगग प्रयाणा का विर प्रामाशिपाय। एमजी गधिर HTI "गुनारमा गगानगर पापों ग गम्पnि form Pार पौखि पालन न म मापा य म रपयोगा ICT TOरार मा म विन गा माग प्रापना प्रागान्तिासार। मापुनिर भारतीय नापा गमा मागतापमाप्रागपिनगरिया जनागिा। farmपा f-m मा माया जाय । ग उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एक दस वर्षीय अमिर गायत्रम (जड प्रोग्रेम) बनाया जाय तया आवश्यक माहित्य के निर्माए-वाय को उच्च प्राथमिकता दी जाय । उद् क्षेत्रीय मापा नहीं है, इसे उचित प्रात्माहन गिया जाना चाहिए । अहिले दोश में उच्च शिक्षा से सम्बंधित एमी सस्याएं हैं, जो हिदी या माध्यम माषा ३ प म अपनाना चाहती हैं, उह भी उचित प्रात्साहन दिया जाना चाहिए। 16 मूल्य अनुस्थापन ( वेल्यु प्रॉरियन्टेशन ) चरित्र निर्माण शिक्षा का सदा से ही महत्त्वपूर्ण प्रयाजन रहा है। महत्त्व माधुनिर ममाज म और भो अविर बढ गया है क्यारि अाधुनिक समाज मा मुशलक्षेम ऐमे रतिया यो अभिप्रेरणा पर आधारित है ना जीवनयापन का गहराई से परिचित रह है तथा जिन समभ उतनी विमिन रचियाम से भाग वरण की स्वत पता है जितनी भूनकाल व किमी भी ममय में नहीं थी। पतमान शिक्षा व्यवस्था का मुम्प प्रपाजन नान दना है । मुग्यत भान पर ही गारा ध्यान रित परन वाली वनमान शिक्षा-व्यवस्था र अन्तम इस महत्त्व पूण प्रपाजन पर दुर्भाग्प ग बम हा ध्यान दिया गया है । अतएव यह पाया हा गया है कि इस निशा की सम्पूर्ण व्यवस्था म जीवन मूल्या वर भनुम्यापन दिया जाय नया उमरती हुई पाटी म नतिर, मामाजिप और भाध्यात्मिर भूया यो स्थान दिया जाय । 11 निमम पुध मावश्यर मूल्या को पढे हा गिलाया जाना है जम पगानित मानगिा बनार तथा निमय मयान्वपण-~प्राधुनिल विश्व म ने यहत महता प्राप्त कर ली है, शारीरिर थम र प्रति प्रादर तथा मे पटिन र उत्तरदायी वाप वरन पी धना जा उत्पात्रता म पृद्धि कर, धनता मामाजिर उत्तरदायिद वी भावना मोर समाज सामीमावना के प्रतिमा मना तपा पिपराम जिममे म मामाजिर नया राष्ट्रीय एवना म टिम मूल्म भी गमान म्प से ही मरत्वपूर्ण है जा सारतत्र वा जीवन पापन ये तरा पवितमिल कर सर और ग मा इमे (लातत्र) मापन प्रणालीममा समस्त ना मरें, जम दूमर व्यक्ति दृष्टिकोण पा मममन र निरा "द नसर रहना, विचार विमा मममाना उभाना, गरोता तयाम हो म मात्तिपूण आपा मे भगा को तय वन नि घपपूवर प्रयत्न परना, सया गरे मामानिस मा यो मनि काममनना मोर उगा पार पला। हमार सविधान की प्रस्तावना र अनुगार हम শকি থা মানস বা বগা মানা হয় বা ময় মুখ .
मानवीय मूल्या के प्रति निष्ठा रगनी चाहिए । हमारे परम्परित महान म्प मा समान रूप से ही महत्त्वपूर्ण हैं, जो नि स्वाथता क्तव्यपरायणता, सहिष्णुता शातिप्रियता तया जीवमात्र व प्रति सम्मान । मय मल्य भी बताय जा सकते हैं सविन उन सवा यहा विस्तार देना न तो सम्भव है और न मावश्या हो । दम मदन म तीन महत्त्वपूरा वि दुआ का ध्यान में रखा जाना पा—िपहना दन मूल्या वा सम्पूण पाठयक्रम तथा काय त्रमा म सम्मिनित परना तया विद्यालयो के वातावरण एव अध्यापन के व्यवहार और उनके व्यक्तित्व के माध्यम से अप्रत्यग रूप से दाम अभिवृद्धि करना । दूसरा यह वादित ही है कि विशिष्ट प्रकार व प्रत्यक्ष दिशा नितेश तया महानधर्मों के उपरगाव सदम म एगे प्रयत्ना यो मह्याग मिल । तीसरा, इन मून्या का प्रभ्यापित करने के लिए जा प्रयत्न विय जाय उनम हम अपनी परम्परा व गस्थति यी पावश्परतानुगार पुनाग्या पोर पुनमू ल्यापन गरें तथा दूमर दगा म ग प्रसार म जो उतारता मूलर प्रयत्न हुए हैं उनका भी लाम से, उहरणाथ पाग भी रायत्राति माम वा दाा तथा समाजवाद का उयान । गार व सतुनशोर प्रभावा या उन क्षत्रा म और मा विशिष्ट महत्व है जहां भारतीय परम्परा प्रपनाहत गात नही रहा है जम समानता तमा सामाजिर पाय का क्षेत्र। 18 शिक्षण तथा मूल्यावन को आधुनिक विधियां प्राथुनिर तथा परम्परित HिI-व्यवस्था म एव' महत्त्वपूर्ण मार उनारा PिM तथा मूल्यापन या राति का रोवर है। परम्परित समान म पान मा वृद्धि तया मामाजिव परियतन की गति बहन धामी ही है। मनापय पर्ग ाि या मुग्य उदय है बना यनापा या गड़ा हुमा म्पत्तिय सिमित पराा युदर या जायन यात्रा का स्पष्ट मानचित्र र दशा गारा पा परिग्गरा पसा सपा भालाधनारमा या मजनारमा सानिया मिशाग का अपना पान का स्मरण परन पूजा म प्राप्त गमग गान प्रति मान सम्मान प्रतिमा तया उम वगा या वगा पामगारा रन पर पिनप यादा । प्रचलिा प्यम्या म गिगण पी तपा IIT मा परण होता है । मति मामुनिर ममा म पानमा वृद्धि नपा मामाजिा परियान मी गति यात सम है। पतण्य For Yarm पाहिए चिरा चिया ममितिया नया मूया Rin पगा नदि बना बनाया या राहुपा परित्य पग परना मुगभान-पावार निगम न मानचित्र, गान पा परिरक्षण ही नहा उमम वृद्धि भी क्ला । अतएव शिक्षण की ऐसी आधुनिक पदनिया (मूल्यापन की तत्मम्बधी नरनीक वे माय माय) का उपयोग करना भावश्यर है जो जितासा दृत्ति के प्रासादल, अध्ययनप्रियता, स्वाध्याय की मारत, चितन व स्वप निरण्य की क्षमना एवं समस्या निदान की क्षमता वा दिशप महत्त्व देती हो । अध्ययन के क्षेत्र में यह प्राति और उसका सा मूल्यान ही हमारी नयी शिक्षा-व्यवस्या की भूत आवश्यक्ताएँ हैं तया मही व सूर तत्व हैं, जो प्राधुनिकीकरण वो गनि का लोन करेंगे। 19 मुख्य समस्या है शिक्षण तथा मूल्याक्न की ऐमी नयी पतिया के अवपण नया प्रचार प्रमार करने का, जो रक्षा म शिशरण राय को भार साप प्रदान करें। इस मतोपत्र निदान पई पाररणा पर निमर करता है, जस अध्यापनावी सन ना तथा उनकी क्षमता, अनुमपान या विवाम मुरार ये लिए सामाय वातावरण से बनाय रपना, पशामन बीमार मै महयाग तथा गगनुभूति, पाय बग्न के लिए सनापप्रद पतिस्थितिया तमा प्रभावशाली शिक्षण मामग्री पी पयास उपनधि। यह भी ध्यान म सपना है दिवा म विप जान वार अभ्याम भी मी विचारलर पर नहा अपनाय जान मोर न होसमा प्रध्यापक तथा विद्यालय एर पहावर प्रगति की पोर बढ़ने ही हैं । FTTT मृजन के लिए उपयुक्त क्षेत्र को प्रापश्याता की बजाय गेवा मुरमा वा अपिर मरत्व न वात, समजार एव मामाय शिव ना उम मायता कर स्वागत करेंगे, जावद विस्तृन पाटयवर्या तथा पुरावा परीक्षामा में बार-बार हान याने निरीक्षणा तथा मुपारिमापित नियमों में प्राप्त हान पाता है। सविन पनि भक्छ कि यो विभागीय विनिहित नियमा स हटवर पाय परन म नि म्वीकृति, प्रामान नया गहयाग नहा लिया जाना, ना उनर शिकाय म एव तरह म वाधा ही उत्साहागा । प्रत मूत्र वान यह है कि मा मायाम मनाया आप चीता ही मया मिर भानुगत मन्दै विद्यारया और अच्छे अध्याप या प्रगति करन के पयाप्त पामा मतुन हा एक निवन्न मस्यामा नया पत्तिया या मुगार पर मान मोमि भावश्यर महाग भी माना। 20 इस सनम दो और दिदुपा पर ध्यान दन यो पावरपरना है। पारामा परि मान और किसी नयी नानी र प्रचार मगार गो गति यहा सोप ।, प्रर्या दूर र म उनितीन मम्पापा द्वारा नयो परस्या प्रथम बार मनाये जान समय ग र पम्या नगा इसरे भय यापार विराम तर रबीना ममय यूनतम हदमर यह मानना गलत हागा रि तरनीर म यह मुधार हमशा य पिए हो गया, वस्तुत इमरे गात पुननयावरण का भावपाता है। बाई 'प्रगनितीन धारणा सम्पूण finा-म्पपस्या म सामान रूप से मपनाई जाने याग्प बनती है । इमरा पूर्व ही यह एप्रसार. पी नपा परि' का रूप धारण पर नती है अथवा पान म पमिटिया मामाजिा परिपतन 4 पारण उमरी मुमति नए हाना हाता है। मलिरा युथ मय प्रपिर प्रगतिशील तपनोरम म उस मम्पूण प्रश्राि या पिर दाहगना हाता है । यह र अपरिहाय तथा शासन गमग्यारे जिगमा गामना शिक्षा का करना है। 21 सवीलापन तथा गतिशीलता गरे लिए मापरवाता है एक लचाती तथा गलिशान शिक्षा व्यवस्था भी frma गु मानिा ममाज म तो अवश्य ही नहीं पात विस्फाट व गाय-सस्य समाज तार गति स परिवति हो रहा हा । परम्परित समान म ए यार नई जमा हो पाती निगा व्यवस्था यो हा हा सल्या ता प्रभागाता रह साती पी। पर यह मम्भव नही है चोर पाजय गगार म मटा सौर स भरिप बार में वह माना निश्चित नहीं है वहाण यात पार पिया है fr भूतार बा गिला टावस्था वनमान पी पारामा पूना पर साता पो भविष्य का प्रायश्परतापो की गानि पही। पा पावरमाता है लियतमा पाम्या पो गटार पिदिगपारा प्राप्त पिया जाय, नचारपन सपा गनिशालता का महत्त्व Fया जाय पोर पाय शिक्षा पापा भी एय एमी वाय पति या जिार जा परिवरित परिस्थितियाम सगातार गामशप स्थापित गत विगान भागर म्यानार परिस्थितिया पो मोरपना गपा पर मिन मिन्न नागा ममि मिन्न भिन्न स्तरा पाfणाम चापागामामो मानी मधिर पाहा गई है। जर पाईपटार Mनिया राया पायामा प्रपERITfम पा पारा है माया तिमा पाटिरा Re fm पापा मिट गरापार पहि गागा निगाना नाकामानि पर पापाति माली marrrrr arunानियामा परि भिरमौर PITrfमाला माना जाता है। 26 मनाममा परगना प्रसार शिपामा म लचीलेपन तथा गतिशीलता का व्यास हो जाना होगा । उदाहरणाय सभी दोत्रों के विद्यालया तया महाविद्याया की कमामी के स्वरूप में अव्याहत एकरूपता पर बल देने वो अावश्यकता नहीं है। प्रत्येर स्थानीय क्षेत्र को अपनी विशिष्ट परिस्थितिया के अनुरूप विश्राम कायक्रमों में सामजस्य स्थापित करने को पर्याप्त छूट दी जानी चाहिए । पाठ्यचर्यात्रा में विभिन्न शाणिक मध्यामा वो विभिन्न परिस्थितियो को घावश्यक्तामो के अनुक्ल पपात लपालापन होना चाहिए । इन पाट्यरर्यामा को नवीनतम जानकारी का समावसकर परसर सावित किया जाता रहना चाहिए । विषय भयवा विषय ममूह व निर्वाचन एव किमा एक प्रकार या श्रणी स दूसरे प्रकार या अंगी ये विद्यालय वमन व लिए माज जितनी रयत ता उपलय है, उसस पही अधिर म्वन यता दी जानी चाहिए। यह भी सम्भव हाना चाहिए fr या शागिर मन्या को एक व्यक्तित्व सममा जाप, जिस इस बात की एर हामि यह अपनी खुरपी पिसा विशिष्ट शिशा म जा बुध उसको अपनी मडिया रपतार हा, उसम उन्नति पर सरे । पप है कि परिवतन और सुधार तमी सम्मर है जाति- --मध्यापक तथा गैगि प्रशासर मता हो अपने क्षण के सवागतम विका से परिचित हा भोर भनुमधान एवं निरतर भूत्यापन म पचि रगत हो। -~-सामा य वातावरण प्रयोग व पहरा प्रवृत्ति तया गृजनशीलता यो ममिवृद्ध परन वारा। --प्रशासन का इस तरह विर दीररए हो गया हा मि विचारोमा प्रभावी उन्नति सम्भव हा सरे।
प्रप्याय 3 गुणात्मक सुधार ऊपर यमाय गय तरार। मे शिक्षा प्रणाला म मामूल परिवतन लाने तया उमे सागोबी मावश्यानामों भाराभामा व जीवन स घनिष्ठ रूप में मयत परने रे प्रपन्नों व माय माय यह प्रयरन भी होना चाहिए मिमी संत्राममना स्नरी पर शिक्षा मानर या स्तर पर्याप्त मपस ऊँचे उठे पौर लगातार उन्नतिशीन बने रह तया पुद प्रत्य त महत्त्वपूण एगे भी क्षेत्र हागिनम प मनष्ट्रिीय मुशायले म मो राहे हो गये। 25 यह एर गामाय शिकायत रहा है कि मुख्यत हमारे गत वीम पों में गरि पिाम भी मुविधामा म तीवगति स हान धाले विस्तार के परिणाम स्या निना का स्तर गिरा है । उगाहरणाप, मुख्यत दोपण पायोजन रुपा मावश्यय सापनो प्रमाव पारण निणस्तरीय सस्पार्कोपी माया म वृद्धि हुई है। शिक्षण के स्तर म भी गिरावट मापी है पारि तार मिनार की प्रधि म प्रपश सम्या पी वृद्धि के अनुपात म पच्छे पध्यापर।बी माया म वृदिही हाती मोर निम्नस्लरीय उपलम्पिया पाने विवापिया पी गया ममा वृप वृद्धि हुई है हालारि इनम गुप एमे भी है जा पपनी पास मपमा यार विद्याध्ययन हेतु पान पारग मामागिर ग्याप दी हथिग गातारारमर व्यवहार पी भपमा रगत है। शिक्षा म विनारी प्रयाधि में जमा होना पायरपर है और सामाजित याय हष्टि पाप गमरे पुलाम मा है। मरी मोर चिपिरगा मपया इजीनियरिंग जग म्यवगायो तपा मुस्पन प्रारति विपनों जगे एप वियों में पागपान v Imm मा म पमिटि है। गरे पतिरित पच्ची गम्पाएँ एप परप पात्र पर पिप गया है और गुणारमर स्तर गिराने पहा मा ५ उठने पाच मी १ सपरि पपिर पणे नहीं है । इस प्रकार हमार ममा निमापित या उगात मी ग भी है पनि स्तर नारा माता सपा सोलारीपरगणना परना मत हागा aft मा मा ताना होगा यहिम गएप पी गुगारमन जानिरा मगूगगग उगा पर rय होम मरियम मायामामा काम गम्यम गारंगा। 26 frnा मापनामाग्य म मून प्रान यह तर परला नही है रिमानातिर पपरा उपरहारह पनि यह दुगना है र पक्ष-frant rfarmir नी नपा पातष्तिार पापार पर तुलनीय है कि नहीं। इही महत्त्वपूण मापदण्डा अनुसार उहे जांचन को पावश्यक्ता है। इस दृष्टि से यह कहा जा सकता है कि हमारी शिक्षा- व्यवस्था के प्रतगत प्रचलित मानक इस काय को करन के लिए उहें प्रयुक्त दिया जाना है। अधिक महत्त्वपूण तो यह है कि यदि वतमान उपलब्ध मुविधामो वा भलिभाति उपयोग किया जाता, तो ये मानव कही अधिव अच्छे हो जाते । जहाँ मानव म उन्नति हुई भी है उनको गति प्रौद्योगीकृत देशा के विकास र पनुरूप नहीं रही है । परिणाम यह हुआ कि उनक और हमारे मानर के बीच गत वीस वर्षों म खाई चौड़ी हुई है । अतएव शिक्षा नीति का प्रयोजन यह होना चाहिए कि वह गुणात्मक सुधार के कायमो को महत्त्व दे सापि उपलब्ध सुविधामों के स्तर के अनुरूप यथासम्भव श्रेष्ठ मानक स्थापित हा सर्वे जिन कार्यों के लिए उहें निधारित किया गया है, उनके लिए व पर्याप्त हों, माधुनिक समाज जिस प्रकार के चरित्र, कुशलतामा तथा ज्ञान के उत्तरोत्तर उठते हुए स्तर की अपेक्षा करता है उसके अनुरूप व बढ़ते रह पम से कम उन मुख्य क्षेत्रा में जहाँ तुलना महत्वपूर्ण स्थान रखती है, वहाँ अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर य मानक तुलनात्मक स्तर पर खरे उतरें। 27 नीच कुछ महत्त्वपूण कायमों का उल्लेख किया जा रहा है जिह गिता में मानक के सुधार के लिए विकसित किया जाना चाहिए- --मुविधामा का समुचित उपयोग, -शिक्षा की गुणात्मकता, क्षमता तथा उनका चरित्र, -पाठ्यचर्या म मुधार तथा पाट्यम वा पुनगठन, -~-पाठ्य पुस्तको म गुणात्मक्ता सुधार तथा उनका नि शुल वितरण भयदा पाठ्य पुस्ता पुस्तकालया का पर्याप्त मात्रा में निर्माण पर पात्रों को पाठ्य पुस्तका को उपलब्ध कराना, -परीक्षा प्रणाली म मुधार, -क्षिक संस्थामा मागर तथा उनकी स्थिति के सम्बयम उचित पायोजना, -पावश्यर सुविधामा को पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था, -यात्र-सेवामा की म्यवस्था -प्रतिमामों का अन्वेपण एव विकास, --शिला म राष्ट्रप्यापा सुधार और वायत्रम का गठन -~-सुनिन्न सस्यानो का अधिकतम सीमा तर भयवा माग दश के मौर रूप में उनरा विकास करना, -परिवाभण मै मुधार परना। 28 सुविधाओं का सपन उपयोग जिन ममस्त तत्वों पर मानर निमर परत है उनम मर्वाधिर मत्व पूग है वापरानिर पनि प्रम तया निहारे यातावरण निर्माण के साथ माप प्ररित मुविपापों का सपन उपयोग करना । स्वत तोयनापूवर चलने पानी सिम की रिमामा प्रक्रिया निए मावश्यर है कि सवप्रथम वतमान निविष्ट स्तर में कुशलता को सुधारा जाय । उपलव्य सुविधामा का अधिकत मोमा तर उपयोग यि चिना हो यदि उनमे और वृद्धि परदो जाती है । यह गात्र अपव्यय ही होगा, जा निधन तथा विकासशील राष्ट्र शायद । वर्गशव कर पायें। 29 इस दृष्टिकोण से वई उपाया को अपनाना होगा। पहला भावम्मिर छुट्टियो को सख्या तथा परीक्षामा के कारण मध्यापन दिवसो हानि का पम करना तपा पाय शिवमो को सम्या म वृद्धि करना (विद्यालय म या म 236 नया महाविद्यालया म वप में 216 अध्यापन दिवम से कम हा)। पाय किम की परधि लम्बी हो । पाठ्यचर्या तया भय वायत्रा र समुचित गठन द्वारा प्रवराश गिना या पूरा उपयोग किया जाय । ऐ माग्ना पायो जाय frfण सस्थाएं विद्याटिरा की तरह हैं जि फमा मो या ही रमा जाना चाहिए-जमे पुस्तकालय प्रयोगशाला माविप मर पोर पनि म अधिन नहीं तो कम से कम पाठ घण्टे स गुता रहें। स्वाध्याय की मात को बढ़ावा देने के लिए पौपचारि का तगत free पे 'सपा पातागो पी छात्र के बुल काय भार घगे हुए मापात मध्यवस्था का जाय । शिक्षा प्रारम्भिर स्तर सम्पर पाना मी माया प्रधिारा तथा जमे जमे काई धान उच्च स् प्राप्त पराा जाय मम्मर वानाशा वा सरपा घटती जाय । उदाहरण fro म्नाना पूर्व सर पर युर पाप मार न क तिहाई या एक ची। गम्पा पाHITE मया स्नातकोत्तर स्तर प्रधिशाग स्वाध्याय हेतु निर्धारित हान प्रयागनो (पर्या मध्यापर भायया कक्ष पुस्ता प्रपागालाएँ प्राधुनिर मारतीप गाहित्य निर्माण जिसम माधुनिर मारत भापापा म पाठ्य पुस्ता गरयो गाहिय र निर्माण मा सम्मिलित हैं मागि, को उपचप्रापमाता दी जाय । 30 अध्यापक विभिन्न तर जा गिया ये कार से प्रभावित यरत हैं तथा राष्ट्राप निगम मयागान देते हैं उनम प्रध्यापर पा र उगरी क्षमता सया उगमा परित्र मर्यापित महत्वपूण है। प्रताप यह पावर प्रिनिवष पितापापा मारियायों ग पचपन ममाप्त पर निरनने पाते पुशाय दुधियाय मुर महराण प्रतिष का गिरण-ति दे दार में पारितो.frm मा पहरे प्रपरा पिप जाते रहें सपा उह विमान उणापा मार भाप मेम्प म यमर रगो के लिए मागरम गरे जायें। इस प्रयागरामी उप लिए अनिवाय freर पर मामा पर्याप्त मानरेप पोति प्रवमर PAfrir ममय माम तपा गिर प्रगति पयसर पर पायो तपा गा-गारागारमा की मुहिपाहा ।
म महाविद्यालया व अध्यापका के लिए एप ही बननमम निधारित रिया मनात पाप पर रहे भय सरवारी समचारिया या मिलन वाल महंगाई भाराने पार पाप पानिप्पान दिया है उनके लिए उच सम्वगाम स्पान रित गजाप तपाजा विद्यालय प्रध्यापन विश्वविद्यालय मध्यापर बननदो समता तपा प्रावश्पर निरचि या प्रमाणदउ विश्वविद्यालय पप्पार बनने पराभवमर मुतनहा। प्रष्ट पाय निष्पादन घग्न यान 31 पारिश्रमिक अध्यापका का वतमान वतन सामा यत अपर्याप्त है तथा अप सरकारी कमचारिया की तुलना म कम भी है । गत 15 वर्षों म वतन सम्बधी “पार हुए हैं, लेकिन व पर्याप्त नहीं हैं तथा मूल्या म वढोतरी के कारण व तरह स नगण्य हैं । अतएव शिक्षा के पारिथमिव म निम्नलिसित मुरय 'दातो य आधार पर मूलभूत वृद्धि करने की आवश्यक्ता है (1) विश्वविद्यालय स्तर व अध्यापकाया वतन अाय वरिठ मरवारी मेचारिया के समान हाना चाहिए। प्राथमिक शालाग्रा र अध्यापया का निरम उन राजनीय पमचारिया वेतन के समान होना चाहिए, जो । यता तया उत्तरदायित्व निवहन व दृष्टिकोण स समान हा एव माध्यमिक मास्तर व अध्यापना वा वतन इन दोना बीच म सातापप्रट पम बारित किया जाना चाहिए। विभिन स्तरा 4 अध्यापका व वतन म "तुम भतर रहना चाहिए। (1) विश्वविद्यालया एव विद्यालय अध्यापनावे लिए यूनतम राष्ट्राय जिपम हो । अतर्राज्यीय प्रतर वा यथासम्भव कम पिया जाय । इमो मतराज्याय बतनाम भेद यो प्रमश समाप्त पर दिया जाय। हरणाय विद्यालय स्तर पर सरकारी, स्थानीय प्राधिकरण द्वारा शामित निना विद्यालया व समस्त अध्यापको के लिए समानता का सिद्धान गया जार विभिन्न साया तथा विश्वविद्यालया एव उनम सम्बद्ध प्र 2 जार। मध्यावा या दिया जान वाला महंगाई भत्ता भी उम वनमम य मत्त समान हो। पनिष्ठ प म मषित हो। (m) पारिश्रमिर म गुपार याग्यता एव स्तर सम्वधा मुधार में (1) र पाच वष यतनत्रम या पुनर्विलापन रिया जाय । (1) हर स्तर पर पानति व पयाप्त अवमर उपाय हा । जिन ३
अाम लिए एमा व्यवस्या भी हानि व अपन वतनश्रम की अधिकतम
सोमा या निर्धारित समय से कम समय म ही प्राप्त करतें।
196°•GG मूत्प म्तर को आधार मानकर प्रध्यापका निमित्त
निटि बननत्रम वा परिशिष्ट 1 म विवरण दिया गया है। राय मरकार
"ह कार्याचिन पर मरें मलिए मावश्या है विकद्र उदारतापूवव पाथिर
राहायताद।
32 प्रय लाभ
प्रध्यापना के लिए पल्याए मवाना वा विमिन चिया नाय ।
सरकार एव अत्र्यापर सयुक्त म्परा इमम हाय बतायें तथा विभाग एवं
प्रध्यापार प्रतिनिधि सपुरा रूप स ही दमका काय गवालन करें।
रावा निवृत्ति यो मायु 60 वप हा तथा याग्य व्यक्तिया र मामना
म 65 यप तर पी मायु का प्रावधान हो ।
ममग्न राय कमचारिया तथा अध्याग व निरा गवा निवृत्ति के
समर मिसन यान लाम ग गधित माम्गममानहा। मतगामी
उपाय य हा माता है कि विमूत्राय नाम याजना का विशाल पमा पर
मागार लिया जाय भविष्य निधि म मा पूजा पर व्याज कोपर
ग गमुचित वृद्धिमा जाप मोर ग याजमा प गचाउन गी विधि का
बरिया यनापा जाय।
। याजनामी भी बनाया जाय जिगर गत अध्यापरा मा
नागरिमी मा रिग म IT लिए पावरम वार रियायता
र पाम मिसागर लिए उग प्रपन वतन र उचित पनुरात में ही पसा
पुराना परे।
प्रपा स्तर र वित मारिया या या विश्वविद्यालया में
मा पिपाराम ग्याना म पात वृद्धि राप्रपरन पिय जायें।
foगरा रा राष्ट्राप पर नपा यानामपिग्तार किया जाय
पागम मापतामाटार नरगपाश जाप ।
पापाय सेवा सम्पपी गर्ने
पताका पार गा मरपा तो म गुगर रिया जाना
पता माग ग्याना प्राधिकरण नमित या friमस्यामा
REL-fTriग।
अध्यापना की शक्षित स्वत अता की पर्याप्त मुरक्षा हो नया व उन समस्त नागरिख अधियारा का उपयोग पर म जिन प्रतगत सुनावाम माग लना भी शामिल है रिन मी सामाय परिपाटी एव शनों व अधीन रहते हा जा ब्रिटन प्राम अमरिया जम नोरताविर राष्ट्रा म विरसित १६ 31 प्रध्यापना व माटना वा प्रारमान तया मा पना दा जाय और उहँ म तरफ या अधिकार मा हागि जिगम विद्यालय शिक्षा गामाय नया अध्यापना की वृत्तिर शिया एव उनव वतन तथा काय एव सवा गम्बयी मतों म सम्बन्धित मामता पर उन राय नी जा मर। प्रत्यर राय म शिक्षा मचिव की अध्यणता म मयुन अध्यापन परिषद् का स्थापना की जाय जिमम मध्यापर सगटना र प्रतिनिधि तथा शिक्षा विभाग अधिरारी भी शामिन हा। वाय तथा मवा मम्बन्धित ममी मामल इन परिपता वा मोमा मोर गाय क्षेत्र मगन हाग परिपपरामा न वानी परिपहागी पिन उनी बठाम लिए जान वार नियो का गाधारणतया म्वापार पिया जाय नया वतन एव भत्त मोर पाय पण्टा नया छुट्टी व मामला म मा धन निणया का पूर्वाधिकार प्रशासन काहाहा। व्यावसायिक तयारी मध्यापता या यशवमायिर तयारा म मम्बधित बुद्ध मुख्य पायम निम्नाग्नि है जिहरि पुनरचना मनान मूरय मममा जाना पाहिए। (1) अपर प्रायमिर विद्यालय या प्रध्यापर माध्यमिा शिणाम पाट्सनम को समाप्त पर पुरा हा तया दा वप वा व्यावसापिर प्रमिण प्राप्त हो। प्रबर माग्पमिर रिचाय पा प्रत्यर मध्यापर उग विषयमा स्नाना हा जो विषय उस पड़ान पोरिया जान वाला है नपा निमम उमन -पप्पावमाथि प्रनिगा प्राप्त पर रियाहा! गम्पद महाविद्या निष्ठ मापातामा बी जो यायताएँ हाता: यग याग्यताएं पतर माध्यमिा स्तर मध्यानावी हानी पारिय गया मा गाय हा प्रविण प्रामा गमरा प प्रायमिर दिया गया 2004 2007 मपित गम्मा वार बहे पर प्रापमिर विचारपा (पापर प्रामा रम) २० वे प्रधानाध्यापन प्रशिक्षित स्नाता हा। इसी तरह मवर माध्यमिर स्तर २ विद्यारया के अध्यापना या एक निश्चित अनुपात उतनी याग्यता या हा मोर उता वेतनक्रम मनाप बर रहा हो, जितन उच्चतर माध्यमित्र स्तर वप्रध्यापर। ममस्त विद्यालया में इतनी या इममे अधिर याम्यता व अध्यापर। का पूर्ति परन के लिए सामाय शिक्षा को मुविधामा मुम्यन स्नातकोतर स्तर क लिए तथा वृत्तिा प्रशिगण की मुविधामा का पर्याप्त विस्तार दना होगा। (1) विद्यालय अध्यापया का प्रशिक्षण दन की वतमान प्रणाली मदीप इमलिए है कि जिन विद्यालया व लिए उह तयार दिया जाता है उनगे मम्पारणे बिना हो प्रशिगण प्राप्त करत हैं । इमर अलावा प्रध्यापर प्रशिगण दने वाला विभिन्न प्रसार का सस्याएं दूमर व सहयाग म नरी मतगाय म काम परती हैं। इस भजगार को ताडन के लिए शिक्षा मोएर स्वतत्र विषय के प म स्वीकार किया जाना चागिा तथा, प्रथम एप दूगरी स्नातरीय उपाधिया ने लिए निघारिन पाठयक्रम में ये वरलिपन विषय याम शिगा विषय का प्रारम्भ पिया जाना चाहिए । प्रशिपण प्रगार एय मनुग पान रा सम्र्वा घत उप सारीय काय प्रमा का विरसित परन में लिए पुनि पिसमिद्यालया म शिगा विभाग पी स्थापना की जाय ज्या ग्मा मापन तथा पध्यापर उपाय हा त्या त्या समस्त प्रशिक्षण गस्यापा मा महाविद्यानर स्तर ता उन्नत किया जाय ताकि अध्यापक fTI मन सिविद्यालया वो मामा म मा जाय । मये अतिरिक्त पुति म योगा विद्यालया में मयि राज्याग पात्राध्यापना के लिए पम्यारामिण पा परस्या पियानपा म विस्तार सयामा य विराम, प्रापयामा सायात मगठना पा स्यारा भोर भत्यागा विद्यालया तथा प्रति पिपासा पमपारा-बग म पर बनी व्यवस्था द्वारा सपा गव-गापा सम्पन्न प्रशिक्षण मस्थामा निर्माण के द्वारा भी शिरा मरापोर पागा प्रागाय मागमार लिया जाता घागि । (m) प्रसारा या पावगामित तपागे स मम्बधित पापत्रमा मा या महागा। "मग पर्याप्त सर तर उना परन ५ fm पारस frसि नाTY सम्पन विशिष्ट पाठपत्रम मा सति रिता जाय पारगाव पापपायापुर बनाया जाय पारपत्रम म गुधार बता उपग पुरिदा नाप गिरा पोर भूपावन मा नपो सपा २१ गतिशीत पद्धतिश का अपनाया जाय और छात्र शिक्षण म सुधार किया जाय। सेवारत शिक्षा की व्यवस्था, द्वारा चयन की मधिर अच्छी पद्धतियो को लागू घर नया याना में वृद्धि के माध्यम स अध्यापर प्रशिक्षा के स्तर म मुधार किया जाय और उपयुक्त मात्रा म प्रावश्यक सुविधाया की व्यवस्था को जाय । इमर अतिरिन समस्त शिरण सस्याएं शिशरण गुल से मुक्त हा तथा छात्र मध्यापको पा छायवृत्तिया के निमित्त अधिक प्रावधान उपराधहा। (1) समस्त मध्यापाको सेवा तगत शिक्षा को पयाप्न सुविधा हो । (1) विश्वविद्यालय तथा विश्वविद्यालय अनुसार मायाग नव नियुक्त मनिष्ठ व्यारयातापाव (शिक्षा मम्ब वो मान ) अनुस्थापन के लिए समुचित व्यवस्था परें। (11) मयेर राज्य गमी प्रकार के प्रध्यापार मे सम्बधित अपनी भावस्थानामा पा नियमित म्प से अनुमान गाय और उनका मामा य शिक्षा तथा सेवापूर एव समातगत व्यावसायिर तयारी सम्बधी प्रापश्यर मुविधामा पागल पन के लिए एप याजना तयार करें। एसी याजाएं इन पूरण- वारि शिमा गुरियामा रे साय-समय पाट दादम और पातार पाठपर्या गन्य या जिला पी उचित व्यवस्था भी करें। (1) पापा की शिना र विरार तया इममा याजना बनान में रिए प्रत्यारा मध्यापर शिया बाड का स्थापना करे। विश्वविद्यालय নুস গাধা ব্যঃয রং শ্যা দিশা ৰ ল র শরি बनार गने के उत्तरदायित्व का स्वय प्रपन मार ल तथा इस हेतु राष्ट्रीय गरि अनुगपान एवं प्रविण परिपद व सहयोग से एक स्वारी समिति मा निर्माण पर। 35 विद्यालय पाल्पचर्या प्रभुर भावयता यह है कि विद्यालय पाट्यपया म सुधार तया उमे उना लिया जाय, उसम चन मा रहे निरभर तत्वाशी दूर किया जाय, उनरें पान पर में वृद्धि को जाप, याधिन पुगतामा पनि हेतु तथा सहा रचिया, अमिलिया एवं मूल्य उत्पन्न परार लिए समुचित परस्त्रा यो सारा 36 ग म म म दो मुरनौनिया को अपनाना हाm (1) प्रपरन यह है frराज्य मर ममम्न तताएर सामान पादपर्श अपना पता है। इस प्रर का दिना सोच वाली परमा २२ उमति म बाधक मिद्ध होती है, क्यापि उगा पाउन परना कमजोर मस्यापा पे बस या वान नगै हाती नया दूगरी पार अच्छी गम्याग्रा के लिए यह पाटयनर्या बाई मुनौनि म्दापही होतो । धन पावश्यक्ता पर रोमी रचीती प्यास्था की है जिगर मगत पाठ्यचर्या उपल ध नेतृव ये गुणा तथा साधना मे धाम्नविर म्प म जुरी हागो। तासय यह है रिए ही गाय एा से भधित पाठ्यपया अपनान साव-माय एम एमी राचीली प्रशासनिय व्यवस्था मा लागू या जाप जा विद्यानया का नयो मूभ म १ वाप परन के लिए प्रागाहिन । (1) मी तरह गगापित प्रयदा उनत पायनया का सभी गम्यापा म र माप अपनाय जाने की घन री गति का भी छाना होगा, पगामि हिनता प्रशिण द्वारा पर्याप्त मम्या म अध्यापर। यी और न मुविधामा मा व्यवस्था होना गम्भव है। अध्यापरा पा सत्या तथा उपार गविधापारा ध्यान म रगत हा मुघरा इइ पाठ्यचर्या का एक स अधिर विपया या गमग्र रूप में अपनान या पूर विद्यालया योग जानी पारित पोर मा मुनियाजित याय नम भी बनाया जाना चाहिए कि गमा शिवाय पुप हो यो म पाट्यचर्या म मावश्या मुपार पर गरें । इस मारतीपयधि माना ही प्रवार वी पाठयचयामतगत परिक्षा ली जाय । 37 ग गमय विशपनी पी पिणा उच्चतर माध्यमिर विद्यालय की भसा १ मे भारम्भ हा जाता है यह यहन है। यानाय यह है fr जय सर पार प्रम-गवर्षीय विधाया तिमा ममान न परते तव तर समा हा निा गामा य गिभार गमार पायत्रम उप पराय जायें गरवाही उच्चतर माध्यमिक गा म विपनापी पिया भारम्भ मा जाय। इस प्रसार पनुगार विधानप पाट्यत्रम ना पापर स्वार परिमनुगाहामा । १५ विधा पार पपर्या का निर्माण परत ममय निम्नतिशित यातापा पा राना पाहिए- (0) पापानमय गया ममाज गया गमो स्तर शिक्षा अभिन ta (1) 100ममाता मा पा पाटयगया म विगा द्वारा पाने का मामला I गिय उन यापित (Mrnमरममा निर्धारित किया जाय तथा शारिस पर पारम्पनि मागायुग परिषता यि रामास हैं।
२३ (a) विजान एव गणित की पाठ्यचर्या म आमूलचूल परिवता रिय जायें तथा उसे माधुनिर बनाया जाय। (1) इम ममय छात्रा पर मापा साबन काजा भार है उसे शानानिशीन यम विय जान की आवश्यकता है ।रिमापा सूत्र म मुधार करन तथा भाषा शिक्षण म माधुनित पदनिया का अपनाय जान का भी प्रापरता है। {} পৰং বথা প সামি লং ৰী তথ্য বা গৰ निर्धारित की जाय-नामा य तथा उस (एडवाड) । विश्वविद्यालय स्तर के पाठयक्रम का पुनर्गठन विद्यालय स्तर पर तथा प्रथम स्नानद उपाधि लिा निधारित पिपपा का भापमा सम्बध वम रडा हा तया चार को इस बात । एर हानि का मपनी इच्छा अनुप विषय सयाजन या अपना सके और इस प्रसार उन विपया या भी न मा जा उमन विद्यालय स्तर पर नीलिए ध। মা ঃ প্রথম বা নিন কলার ঘাধি ইন বিহা না পাই না विषय ममाजन भी उमा पधिर लचीला हा जा सामry भाज प्रचलन म है। यह विषय-मयाजन दोना हा कला तया गिमान विषया के लिए प्रावस्या है क्यारि व विषय जाभव तर एक दूमर म माम्बद विराद दते पर अधिा धनिष्ठाप में सम्पन सगने उग है । उमर की शिला पर ता यह परमग्नि प्टि ट ना रहा है। अपम स्नाता पिपिए पाटयनमको प्रारयाहा-मामान सभा विशिष्ट । मामार पादमाम मतगत छात्र एक ही समान स्तर तीन विषया या मना है-दनम मा दारिएया हाा चाहिमउत्तोग तथा प्रयाग। पर am स्तर पर विशिष्ट पारपत्रम में मस्या हो। विश्वविद्यालय पर विशिष्ट पाठयरमा तया प्रवीण स्वरनिमित्त মা বাবদ ছা শাখা । লৰা দী বা খা খা প্লাল गुविधामा या प्टिगा त हुए गम्बर महाविद्यातर समा तह १ पादपका भी माम्या का माम नानि का रम गाना बतान wि aमार (प्रभाग) तथा विरिष्ट पानरमा पिए ननम IT मारा निर्धारिला जाना पाहिए । सातर उगि निर्धारित पाठपन 7 प्रमानन नपाल {১} বাঘ নিথর ধঘা মনু বিফ সংলাে, २४ (1) विद्यालया के लिए अध्यापना यो तपार परना, और (in) उन छात्रा की भावश्यक्तामा यो पूति करन वा प्रयन करना जा म स्तर पर मा विस्तृत एव सम्वचित क्षेत्रा म पचि रसत हा भौर जो याद म पाएच डी स्तर पर विपनता प्राप्त करनचा प्रयत्न परें। प्रपति एम विपपा पारपत्रम 4 साय-माय एमे सयोजन-पाठपरम भी पारमय जाय, जिनम काई एर मुम्य और एष या दा सह्वी अथवा सम्पपिन विषय सम्मिलित हा। 12 पीएच हा उपाधि प्राप्त परने के इच्छुर छात्रो के चयन म पदाई बरनी जाना चाहिए तथा मूल्यारन यी पति म गुधार पिया जाना पाहि । रिमो द्विताय विश्र भाषा जरा कमी जमन तया च नापा का पप्पयन बल्पिा हो । निर्देशा पायाग्यना नया प्रापश्यप गुपियानो यो ध्यानपूयय स्पष्ट प स निधारित पिया जाना चाहिए । 13 मह मा वादाय है कि एम ए पयवा एम एसमी पोर पाएच डी यार पार नपा शिर उपाधि मारम्म यो जाय । इसी तरह यह भी यापनाप है fr पाण्व डी मारक स्तर की उपाधि जिन विष विद्यायाम TT यही उग मारम्भ पिया जाप । एमे विशिष्ट प्रयत्न ना पिये जान भारश्यक हैं जो पता तथा विनाम मतगम्बधित विषया ये प्रायन वो उमनपर गरमा मिरान विषय मयाजनों नपा विभिन्न रास्यामा प्रयया विभागा ये बोच गायाग लिए नया पतिया नय प्रकार पध्यापन वग पी मावश्यरता गा। गा गाय-गाय यह मा पावरपाना है कि यतमान यगानिर, पोपागिर पापपरार वो पापयतामा में मम्मपन विषयाम प्रति लिए पर्पोप (पपया मा वम पर्वाप र) यिनिष्ट पाठपत्रम पारम्म पिप जाय । पारपत्रम पापानि पपया उगर पाधि का ध्यान म गएका मम्रपा यायवा बी एमगा एम एगमा प्रयया पृपि मा जानिग पी प्रपम जाधि होगी। जाग पाठयत्रम या गमतापूवर पूरा र प्रमाण-पत्र पिापाप्रपा स्नाता-पत्र प्रगत पिया जा गाता है। 15 पिदार पर मामागी। गया शापित पाट्यचर्या ये गमय समर पुनraiपागाभाष पाता। पर पुनर्विलात यार भारताना पानि गिरिमामा माग द्वारा निमिा २५ पुनर्विन ममितिया में पापत्रम को अपित गतिमानी तया विस्तृत बनाया जाय। विद्यालय पाठय पुस्तके शिक्षा सरस उनत परन से विए उच्च प्रसार यो पाट्य पुस्तका यो म्पपस्या-मारपी पाय वम बहुत ही प्रमाणात मिद होगा। अध्यापर निर्देश पुस्तिकामा तया भय अनुशात्मर मामग्री का भी अधिर मात्रा म निमाण किया जाय। निम्ननिषित उपाया द्वारा मरा विस्तार किया जाना चाहिए (1) प्रत्या कमा बनि प्रत्या विपर म कम से कम तीन या चार स्वीरत पुस्ता हानी चाहिएं तया मध्यापमा यो इस बात को पूर हानी साहिग रि यह उनम स विद्यालय पनिए मर्वोतम उपयुत पुम्न की पुन गरें । जहाँ विनित प्रकार की पाट्यचर्या प्रति है वहाँ अपर ITR पाटयनम fm निर्धारित बहन मी पुस्तका म मे चुनार बग्न यी उमएर हानी चाहिए। (1) पायगुम्नयामा बिमाण मनन प्रक्रिया है जिगर प्रारम्मिर उनादन प्रयन नया र मनिमापदना मादि गम्मिरित है । पाठ्य-पुस्तक- নিম বি না । শাখা বৰ ধুল্যে পিপ তা না मानान B गमय हानी चाहिए। यह बात भी निश्चित हानी चाहिए शिया पा पुलामा मन पुनरीक्षण पिया जा घुरा है और यह माधुनिकतम जानकारी गमान है नया पार गर नही नाम से बम गांव यो मन बार मा उमरा गण गमापन पर रिया जाना चाहिए। (1) प्यायम्भय पनि क्षेत्रों मममी पाप-गुस्तानिपनर प्रनायो प्रागान पिया जाना चाहिए। पुग्नपिन र सिप पुन हमाम दने पराया मय नगा ग मी पारिपियो सया प्रताय पामवितरिय जान पाहि राव विद्यारा पान fm गवार द्वारा भुनी हुपदा ग्वीन पाट्य पुग्नतामा बाम म मामा जाना fm (ar) पादप युनरें रिमन सि पध्या विशेष प्रामान दिया जाना ime (6) विkिण व पियर गमात्र 1 m frag पादन पुस्तामा मषित रावमापिर माता।
(vi) लपरा का पारिश्रमिर दन के सम्बध म उदारनीति अपनायी जानी चाहिए। मरवारी क्षेत्र म ता इस विशेष प स स्थान शिया जाना चाहिए। पाठ्य-पुस्ताा का सुपारन व निमित्त मशीनरी का रि समुचित माग विरमित पर किया जाता है ता पाठय पुस्ता र सुधार पाय म मरवार बहुत यडा याग ? सत्रनी है । यह टाना ही राज्य तथा राधीय स्तर पर ठीर रहगा। प्रत्याराग्य म एक स्वायत्त सगठन होना चाहिए जा व्यापारिश माधार पर पुस्त। वा निर्माग्ग दरवाय । शिक्षा विभाग के गहयाग स म न हानि न लाभ के माधार पर गाय करना चाहिए। राष्ट्रीय व अनुमधान एवं प्रशिभण परिषद् (एन मी : पार टा) राष्ट्रीय प्राधार पर पाठ्य-गुम्नवा वा निमाण पर रगे है। अपन मा चल र पायगुस्नमा म सुधार करने व लिए राज्य मरवार का "म वायत्रम मा पा साम उगना नाहिरा तथा मावश्यक परिवतन पर उह अपन क्षेत्रा म उIIT म पना चाहिए । मा माय माय राष्ट्राय स्तर पर पुस्तकार निर्माण िमा प्यारामि भाचार पर एक स्वायत सगटन को पाय जाामी पावरपाता है । म सगठन का मुम्य उद्दश्य हागा उच्च शिक्षा मेणि तानासी एव विनान विपया से सम्बधित हिला या उद् म एमा पाठ्य-गुमगार या निर्माण करना जिना लिए विभिन्न राज्या द्वारा पृथन प्रथम प्रपा मग्ना सार नगरे । दम रागठन र पाप का एन पी ३ मार ग ग गामजस्य बिराना होगा। य दोना मगठन राज्य स्तरीय समगारपूस हांगे। 18 उच्च Hि लिए पाठय पुस्त, एय प्रय साहित्य दमा रार' पर पावरपा है उस शिना लिए मावश्या पाट्य तुम्मा ममा पार गागिय का विगपार माधुनिर भारताय मापामा म, निर्मागरिया जान । महिनाए ग- (परिका माविया ग पपया बिटन जरा उनन दशा र सरयाग गरम शमा पर मोर मारापिा (Subdivel) पार पुस्तका निर्मातमी पागा म वितार पिया ना पाहिए । उम प्रयम एस गिरिराजार (1) मारमा रोग द्वारा पिणी पुरको लिए गा सरा शान आन । परमारा साबित या मात्रा मधेट न २७ 19 पाठ्य पुस्ता पर्चीना होती है उनव निर्माण म विदशी मुद्रा की उनमनो व अतिरित व वौद्धिन विधाम के दृष्टिकारण म भी अनुपयुक्त हानी हैं। श म प्रथम यगी की गुम्नरा के निर्माण र लिए ग्रावश्यर माधना एव योग्यता की कमी नना है लगिन वमा है गुनियोजिन एच मुन्द प्रयत्ना की (m) वनानिर पारिमापिर गावती के निर्माण गाय को गति दी जानी चाहिए और (1) या 10 वर्षों म हो अगर म्नावर नर व निमित प्रावश्यर पुस्तको म ग अधिकाश पुस्ता तथा स्नातरोतर म्नर यो पुस्ता जिनम विमान तथा प्रोग्रागिरी म मा धन पुस्त भी सम्मिलित हैं या दाम ही निर्माण पिया जाना चाहिए । इन पुस्नया में निर्माण म विशो साता का पूग साम उठाया जाना चाहिए। छाया मे पुस्तक वितरण प्रायमिर स्तर व रामस्त छात्रा रा नि शुल्क पाठ्य पुम्ना र पितरण वा व्यवस्था मा जानी चाहिए। माध्यमिर विद्यालया भोर महाविद्यालया म पाठ्य-पुस्नयानया की स्थारनाया जानी चागि तापि प्रत्यर जारतमन्त साना पयाप्त मात्रा म तपानि TT यि पाठ्य पुस्ता प्राप्त हो म । प्रया का प्रथम म प्रतिगत मुशाग्र युदि छात्रा का पाठप पुग्न होना अपितु मय परार मा पुस्तर गरोग्न पनि उपान या याजना भी हानी चागि। म याजना या विश्वविद्यालय स्तर म भारम्न बर पिर विद्यालया तर विस्तार पिया जा सकता है। 10 शिक्षा प्रणाली में सुधार मिमग को प्राथुनिए पतिया घामपनाय पान र विषय म पहित ही पियरग पिया ना मुसा है।न पदनिया रा प्रभारी ढग स तमा पपनाया जा माना है जगह यतमान गिगा प्रणाा म नग्नुप सुधार पिप जाय । मूपापन या नया पनि मगन यह प्रपन frया जाना पाणिनि विद्यापिया पर बाए परामामा काग्वार पमहा मिति परोगा सागरम मुपाग जाप रि यह गिर पिया यारतविर मा बन जाप सपा पान पिराग सम्बया जिन मारग पगा या पिपिा दरोगामा द्वारा नहा जागाजा सरना, उनरा जानन पे लिए नमो TAIT पानापी जार।
51 प्रार प्राथमित्र म्नर (कमा 1 से 4) की मविभक्त या प्रवर्गात व्यवस्या के निमित्त अध्यापको उचित ढग से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए । उच्च प्राथमिक स्तर (कपास) से लिपित परीक्षा प्रारम्भ मोजा साती हैं लक्नि अधिक महत्त्व मौगिव परोगा या दिया जाय । नदानिर पगक्षाएं तया सचितवृत्त (Cumulative Record) पद्धति मरत वितु अमिर दग समारम्भ की जाएं। प्राथमिक स्तर पर बाह्य मनिराय पराक्षा नहा हाना चाहिए सरिन छात्रवृत्तियां पयवा याग्यता प्रमाण पत्र दन घोर याम्यता निधारित करन के उद्देश्य स ऐसी गामा य परीगाएं ली जाय, जी प्रमापति तथा परियन जोच पर आधारित हा। प्राथमिा शिशारा सम्बन्धित पाठ्यक्रम की ममाप्ति पर विद्यालय प्रमाण पर ६। जिन माय गचितवृत्त पत्र लगा हा तया यति पाई सामा य परीक्षा सी गयो हो, ता उसन परिगामा पा विवरण भी लिया जाना चाहिए । 20 माध्यमिर स्तर पर दा बाह्य परीक्षाए हा-हली रक्षा 104 प्रत म भोर दसरा पक्षा 124 मत म (जब तर नि विद्यालय पाटपत्रम मा पुन अवधि 12 वष या नहा श जातारस पतवती यार म यह परीक्षा गामा 11 बार भी नी जा सरना है ) । प्रश्न पर निमातामा वी क्षमता म विभाग द्वारा प्रश्न पत्रा का क्वल गान प्राप्ति हा नहीं यदि मय उमेश पो जाम भनुदून बनाकर प्रनाम मुधार परप तथा पर प्रसन मान या वनानिप पति अपना पर अथवा माय उपाया सवास परीगामा ग गुधार पिया जाना चानिए। 53 रिमी निसा प्रापार पर मानति दन पसाय साथ गार पापार पर परागा परिणामा र अनुगार मा या निर्धारित की जानी पारिगाय प्रयम या धात्र उन प्रथम 20 प्रतिशत पात्रा मरा पर गिरा II म रापता प्राम का है। या मापन मनियार है राक्षामा समाप्त हान तथा उनर पग्गिामापा पागणार याच पा समय ययागम्भव यमहा। इमर पिए हर मम्मय माप मा जाना पागि प्रधान उपार पुस्तिरामाया जाच पतिए पराम्पा पर पत्रिन पा पाया उपयाग माना, मा TITAL सान पाता उत्तर पुरिगापामा माया म यमा मामा-10 ०परा गाना 51 या परागापा गायप मजा गुभाति प्रथापित परिवतन सहित विविधामप स्तर पर minाय।
55 राष्ट्रीय मानता का तीन स्तर पर स्पष्टत पारिमापिन करने कोमार ध्यकता है प्राथमिक स्तर का समाप्ति पर (कक्षा 8), प्रवर माध्यमिर नर वी ममाप्ति पर (IT 10) मोर उच्चतर मायामर स्तर को समाप्ति पर (ART 1)। स्थानीय परिस्थितिया तथा विकास व उपलब्ध स्तर का ध्यान म रयत हुए प्ररपा राज्य सरकार का उत्त तीनो स्तरा पर प्राप्त प्रिय जान याय शशि माना निधारित बरन चाहिए। इन मxि मानसा का राष्ट्रीय स्तर पर एपीत रिया जाय तयार पस राष्ट्रीय र शशि मानका Tा निधारण किया जाय जिमम निम्न स्तर की शिक्षा मामा यतया रिमी भी राज्य म न दी जाप, सद्यपि बुध राज्य म यूनतम म्नर स ऊंचा स्तर प्राप्त मरन का प्रपल कर सकत है। विद्यालय जिला प तथा राष्ट्रीय प्राधार पर प्राप्त किय जान वाल वास्तविर मक्षिर मानव या स्नर का मूल्यापन परम लिए भी व्यवस्था होना चाहिए । य भी प्रयत्न पिय जाय कि राष्ट्रीय शगिय माना उत्तरोत्तर उन्नत हात रह पोर इस दृष्टिग म ममय-समय पर एम मुनिपाजित स्तरा का स्पष्ट प स निधारित किया जाय, मिह निवास भी एक निश्चित अवधि म प्राप्त कर लना है। 56 समाधान सम्पामा म प्रान्तरित जांच करा व्यवस्था का मारम्न रिया जाय । यह व्यवस्था सब तरह से पूण हा तया गरे मतगत धान उनका मल्यापन लिया जाम, जिनम व मो सम्मिदिन है, जिनकी वाप परासपा द्वारा नाम नहीं की जाती है । यह मूल्यारन विवरणमा ही न! मात्रामर माहा । बार परीक्षामा म प्रात यावा इन परिणामाम খালেব না আপ বা বালি। নাম গামা ম স ম ফা भागमा जाय तया मतिम प्रमाण पत्र म उनमा उन्ला भर पर पिया आप पारिजांच तथा वायपरोगामाम माग ग उताण हाना भावस्पर हाा पारिए और उनम प्रा श्रेया भी मग लग ही दिया जानी चाहिए। प्रतियप मातरिय व वाय जांच के बाप सह माय या मा ध्यानपूर দুদিন frঘা সব স য যা যা ইবি পাশ ৪শ । पापिस पान नरे लिए मशिर सम्यामा वर्गीशरण परत गमय इन frgIREETA RMा जाना चाहिए। जासस्या भग्न परमारे पाचन मपापाया गावपानी नहीं रगती उहन पातर हिवाग म अपितु पापिर पता हिराण मोहनि बुगतना पर। नितान पारेमामरा म उनीमाता प्रयया सम्बस्ताराममाम रहिया i परीक्षा मुधार यायाम का वामाबित करने के लिए एर समुचित गगठा या पावश्यकता है। राष्ट्रीय स्तर पर एन० सी० ३० आर० टी० इम वाय म विद्यालया वा तृत्व प्रदान कर रही है । मानव या स्तर निर्धारण परन, उसरा बनाय रमन उमी जाँच परन तथा उसमे संशाधन प लिए प्रत्येर राग्य म एप भूयासन मगठन स्थापित करना होगा । यह सगठा स्वत मस्या पप में होना चागि पर गम्या स्वायत्त हा तो और मा अया है। जिग किमी का भी जारत हा उम इसको सेवामा स लाम उठा मापदमर हाना चाहिए। नीच वे स्तर पर जिला शिक्षाधिकारी विद्यालया म मूल्याान मुधार प निमित्त गायों के लिए उत्तरदाया हा तथा उह इग माय मनिपम स यम एक विशेषत प्रशिक्षित अधिकारी का महायता प्राम हो । रियाय नर पर परीक्षामा म सुधार गरन लिए विश्वविद्या उम अनुन मायाग में 1 बद्रीय संगठन बनाया जाय तथा विश्वविद्यालयाम तनुपए गगटना रा निर्माण किया जाना चानित । जा विश्वविद्यालय इस माय में रचि तथा पहल करें उनस मारम्भ पर इम गायत्रम को दूमर विद्यालयों म अभिरूप मे कार्याविन रिया जाय । १९ पाय पराक्षामा मगधन स उ ननिशान मस्यामा वा मुक्त पिया जाना चाहिए। (1) विद्यालय स्तर या श्रा गस्थाय! या यह अधिकार प्राप्त हा from पात्रा या नाच व स्वप पर मथा मा 10 ( या या 11 भोर 1) मा निम परीक्षा य स्वय ने जिस विद्यालय शिक्षा राय याइ दाग सा जाताना वाय परामा गमान गमभा जाय । विद्यालय या पागा शाम भरा पर रियाय TT या रान या सफर प्रयाशिया या प्रमारा प्रशन परगा। विद्यालय शिाग सम्बधित राज्य यार एन मनिला निर्माग पर जामा प्रसार सनिचार पर एम स्यूसाम चपन FRm मानाग बसाय । इन रिधानयागार हाशिय भपन स्वप मापा मगर र ग पाना पाठपुग्न निर्यात गर गरें, पौर nिfrr रापदापार IT रियामाया मापन पर गई। (1) मितिमा पर पर मा एक गो प्रसार मा पायाम सारिका जार । रिहाने माता गुणर मग या विश गित माnिा ा मा मा जाप । न महा विमोmufrom IIT गम्बधा निपम या सर, नापन निर्माण पर में पर पानी पर समागित ३१ 29 पर सरे प्रादि । जिस विच विद्यालय स यह महाविद्यालय सम्बद्ध है, उसका काम हागा सामाय परिवीण तया उपाधि वितरण । इन महाविद्यालया को यह विशपाधिकार हमशा व लिए नहीं दिया जा सकना इम प्राप्त वरन र निए ता रह सतत् प्रयत्न परन हांग और क्षमता एव याग्यता वा प्रदशन करना हागा । स्थिति का ध्यानपूवर जांच करन वे बाट यति या पता लग कि विमा महाविद्यालय र स्तर म गिरावट मान जगा है, ता विश्वविद्यालय का अधिकार होगा कि वह उमर स्वायत्तता सम्बधी अधिकार वा समाप्त पर विश्वविद्यालय के मरिधान म ऐस स्वायत्तता प्राप्त महाविद्यालया को मायना रन का प्रावधान किया जार तथा एस प्रयत्न किय जान चाहिये कि चतुय पचवर्षीय याजना वी समाप्ति ना वम स वम 50 प्रतिशत उत्तम महाविद्यालय स पाटि म पाजायें। शैक्षिक सस्थाप्रो के प्राकार तया अवस्थिति सम्बधी योजना पियन कुछ वर्षों म घाटी तया माथित रूप में हानिप्रद सस्पामा म वृद्धि हुई है । शिया के सभी स्तरा पर इन मस्यामा न मानता का परिचय लिया है। यह मावश्या है इस बटनी हुई वमजारा म मुधार किया जाय तया समस्त मदिर सस्यापा २ स्थान में मम्ब प म ध्यानपूवर योजना बनाया जाय ताकि परस्पर व्यापी प्रतिक्रमण द्विरावृत्ति तथा अपव्यय को रोराजा मरे और मधिर वुशन तथा गामाया सस्थामा मा म्यापित किया जा सके। प्राथमिर स्तर की सस्यामा र वार मता इस विचार यो मधित प्रापमिाना नहा दी जानी चाहिए क्यादि प्राथमिर सस्थाएं तो म दृष्टिवोर समानी जाता है रि व्यावहारिस स जितना सम्भव हा प्रायमिर गालामा पायाला पर निपटनम सोना जाय, लविन माध्यमिर स्तर पर पह विचार मपिर महत्त्व रखता है तथा उन शिक्षा व सत्र म ता यह भोर भी पपिए महत्वपूण है। अतएव यर पावरपा है कि सभी काटियो सस्यामोर स्थान निपारण के सम्ब प म सुविचारित माप बनाया जाय और दम माप माधार पर प्रत्यर तिर लिए पृथर स्परा भागामी 1015 वर्गात विराम र मम्मावित पार्यों पायाजना तयार की जाय । एगी पारनामा निर्माण तथा समय समय पर मनाया जान याली पुनरीगण सम्बधी प्रक्रियामा निर्धारित रिया जाना चाहिए। इन यारनामा पाचार पर तमान स्थिति पासमान किया जान एव नया मम्पाएं रहाँ गुर्ने यह नपरिया जाना चाहिए। 60 सुविधामों को स्पस्या सिमा स्तरा पर शिामा विस्तार प्राप्त सापना की तुमना म कहीं अधिर तीन गन स हान र धारण घटत-गी क्षित मस्यामा म सुविधापा मम्पधी स्थिनि बहुम ही चमतोपजनर है। वे उन यूनाम मावश्याताना वा बहुधा पूर्ति भी नही परती, जो शिक्षा विभाग और विश्व विद्यालया व प्रालिन नियमा म निरिट हैं। बटुन मो सस्थाएँ रक्षामा म छात्रा को मन्या मावश्परता मे वहा अधिर हान को ओर प्रवृत्त हैं। शिक्षा या अधिक प्रभावशाली बनान पनिए इस स्थिति म मुधार पिय जाने यी मावश्याता है। विद्यालय स्तर पर मा म छात्रा का अधिरतम राम्या निर्धारित को जाना चाहिए तथा इमका बटोरता स पातन दिया जाना चानिए (यह मस्या अपर प्राथमिप स्तर पर 50 उच्च प्रायमिर स्तर पर 15 तथा माध्यमिक स्तर पर 10 है)। विश्वविद्यालय म्नर पर विश्वविद्याया या उपाय मुविधापा का ध्यान म रगत हुए छात्रा व प्रवण मभ्यपी नियम विस्तृत रूप मे निर्धारित करन चाहिाँ तथा उनसरा हनना स पासन पगा चाहिए । उपकरण पुस्तरालय तथा प्रयाग मातामा सम्बधी मुविधामा की गमुचित पपरया यात महत्त्य गगता है नया न मुबिधामा र सम्बध म "उपयुन रनर यो मावश्या म्प में वताप रया जाना चाहिए । ग्वारप्यपूण तथा पयात गाज सामान ग मम्पन भवनायी व्यथा यो धपा पम पहत्य यिा गया है । स्थानीय भवन निमारा मामग्री - उपयाग, मितप्यपिणा, भयन म मापार तथा निमाण म मागीय पवित्रता गगम म पपिकतम पगेता पर ही मवन एय अय उत्त मुविधामा गजुगना हागाम हा ग्यानाय गमान मे प्रापमिर स्तर पर विशेषन मायाग दिया जाना पाहिए। सापानुमद गरा कायम से भोग ना ग चपाया जा गाता गिर परिणामायण मिण पिपुष पायपर उपररग सपा मगर गापा प्राणाना में प्राता जाय 1 पध्यापनाममा प्रशिगन यिा पायापातिर पानीप मामयी ग मम धीमता शिक्षण गहामा गापा पारगा। मधिल भूस्मपान तथा अग्मि उपररणा दगम्बयम ग पण मम अपनाया जाना चाहि नि गिगा पनगन गाथामा मा गह गमान गाम म मा गरें। मापनापी मापितारण परिवार निगाय मना हो दोनो मनमापति रोमि उमा ममाम पिया जाय महरिसितार को गति प्रामिरता मानी है । मनि मानिस और मुस्थत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुविधा-मम्व यो पूनतम मावश्यक्तानों मे विमो प्रकार की कमी नहा मी जानी चाहिए और यदि बहुत ही पावरपर हो, तो नयो गस्थात्रा की स्थापना तथा प्रवश सम्पा में वृद्धि पर समुचित निप नए रमा जाना चाहिए। - छात्र सेवाएं 61 धार सवाएँ पल पत्याए वायत्रम नही है अपितु चे शिक्षा का अमित माग है भयोपि रनर से बनाय रयन या समस्या मुस्थत उही पर भाधारित है । पाय-पुस्तकानि शुल वितरण के सम्बध म पहल ही जिन मिपा जा चुका है। इसके साथ-साय मई मोर प्रसार यो सेवामा को भी मावश्यरता है। 62 उदाहरण लिए विद्यालय स्तर पर यह मावश्यर है कि निर्देशन खया परामर सेवाएं मोर भारम्न को पाएँ । प्रायमिक विद्यालया मइस मायनम मतगत सोपे सरल तरीको को अपनाया जाना चाहिए- मध्यापरो यो मानिर जांच तथा वसतिर तर समस्यामा की जांच যা মদিরায় না দে মা জী মিয়া ও সাথ দ ধনায় ঘর সময় पायो तया माना पिनामा की सहायता परना । माध्यमिक स्तर पर निशान सेवाएँ एमी होनी चाहिये विशार पाषा मी माग्यता तथा उनकी क्षमतामा एप पिया विरास म सहायता करें । उद्देश्य की प्राप्तिक लिए एक গা স্বপন বাষঙ্গম মনাষ্য পালা দিয়ে সিম নে মুদ্র সংখ্যায় पज ही परामदाता की सयामा मा मिन गुलरर साम उटा मरें मोर उप पुनिदा विद्यालया म मापन निपन वापरम प्रारम्न विय जाने चाहिए। विधालय स्वास्थ्य सवाएँ (जिनम विद्याप द्वारा गवारित की जान वाली मान-मामा मा मम्मिलित है) ययाममय मधिर विरमित भी जानी शाहिए । सम से रम जारतमद यात्रा के लिए ता मह व्यवस्था भनिवाय पस होनी चाहिए तथा योग्य पाया रे लिए एपडे जुदाय जाने की मवस्या भाबाजानी चाहिए। 03. विश्वविद्यालय स्तर पर समारन म नर यात्रामा गामजस्य मम्मर मनाने के लिए पात्र-मयापारेपनगत अनुमान गायत्रम मम्मिनित किये जाएं। रमेर मात्र मिी मक्षिर मसाहार (शिधारा सयग या माया पर सदर) 0 मारप हाना पाहिए, जो धार का अपना अध्ययन पारस गरिन तथा तत्माराधी पागना रनाने में मम्मति विश्व पिता महारिपारा में उपयुस साप्प सेवाएँ रिमित की जानी चाहि जिनम सास्थ्य शिक्षा मो सम्मिरित हा निर्देशन एवं परामा सेवाएं मी उप रम की जानी चाहिा। प्रत्यक 1000 छात्रा पर बम में बम पर परामगटाता नियुक्त किया जाना चाहिए। सूचना एवं काम लिा बद्र मयुप में म्यापित किय जाने चानित। स्वल अध्ययन पर्वाचम हो नहीं रितु प्रकाश अवधि म भी छात्रों में लिए गुमम्पन्न एव विविध प्रकार या मह पाठ्य गतिविथिया को नियाजित किया जाना चाहिए। छात्रावाम में रहन को मुर्विया का मधिर उगार यया जाना चाहिए (स्नातकोत्तर स्तर पर पुरा मती रे 20 प्रतिशत स्यान अघिस्नातन स्तर पर कुल भर्ती में 10 प्रतिशत म्यान उपलब्ध कराये जान या नाय निधारित किया जाय)। द्यानावामन बाहर रहनवाल यात्रा म स म स पम प्रतिशत छात्रार निमित्त नम पलि विश्रामालया प्रथवा दिवम अध्ययन द्रा (डे स्टो मेटम) को स्थापना की जानी चाहिए। ममस्त विश्वविद्यालयो भयका बडे महाविद्यालमा म एप एमा पूग्णवालिब छात्र कल्याण विनयाध्यक्ष होना पाहिए जा पात्र कल्याण रावामो स सम्बपिन प्रशासन की देखभाल कर । 61 प्रतिभामों को सोज एव विकास यह पनिवास है शि शिना के ममा स्तरा पर छात्रा भी वपत्तिर मिन्नतामा पर पर्याप्त ध्यान णि जाय नया पिछड़े हुए एव कुशाग्र बुद्धि छात्रा गम्य प म विशप वायत्रम निर्धारित पिय जाएं। दुगान युदि प्रतिभावान धारा म गम्मधिन पायपम ना पान की परिस्थितिया म विशप महत्त्य है शारिराष्ट्रीय जायन की प्रा गाया म प्रशिक्षित जन वल या ममाय तीर से पनुमन रिसा जारहा है भार शाय- या वर गवसे या पारग है जामार का प्रगति म पाया है। मूम युद्धि प्राय राव म समाना मध्यात हाती है और रिय बुद्धि का गमय रहत पान निकाला जाय तपा उग विगित पिपा माप ताहमारा विशाल जन मम्या निरामय हा rमार मियाण नियामत हा मरती है। 65 ग गम TT प्रतिभापापा पूनतम शहा गाजा व दिशासित रियामा। पपितांग परा म यातायरण भनुम नहीं होता अपितरोग प्रतिभावान विद्यार्थी पाता प्रापमा गापा म प्रयास नहीं है नमान ममर सानहाटा पातरि उग्प तरी मिलान प्राता। frमा परीक्षा में प्रासपुर मा प्रापार पर नंगगिर TAIT बगा। 7 निसरनेमा दाग लाना कमाण fare सेवामा प्रभा पाता । महा मा पा र पसारा गि অনিমা বা থব প ম লাইটে বিমির দল দব্যি যা বা বিড়ি यायरम है ही नहीं और यदि है मो ता व अपयाम हैं। ৫৫ दन मना बना होगा यानि क्षिा बागप्राय व्यवस्था र मुल्य কম ম য য য় য মা ই বি সুবিধা বা ধনা বা সয রক্ষা বৰ বিষ বিয়া না। যদি গৰম ৰ মনৰ (Aquaisa ton} ঘা এবঙ্গম, সি ধ ধ্যৰ মূঃ ম বিবাহ বিমণ পিয়া জায়গা দি রুর গামীমৰর। বগম প্রমণ যাৰ ৰ पिए पांच वर्षों और प्रभागातीप्रापति निकी व्यवस्था ন্য সমাস। যিন মামা ন গদিনা বা বসা বন স য মামলা দি। পাশ নিদিপ্ন না দয় ; বিয়স ধাগা কা গান ন বিয়ার খান মা পায় নন গাব গা লা গণ খি যায়াম যা জ ম নাৰি ধৰিমাণ আৰ নদ মিয়া, प्राहि स यनिन ना होगा मत यह निशा प्राप्न बग्न र यार है। বুলি মাগম । মা সনৰ ? মন বি সমান সমান যথ বুথ খ৭ম শ ম এবৰ । ৰ থ া যঃ যাব ? ধি ঘিৰ ব্যাথার চাবি শাসন প্রথি বিত্যায্য में पौर पना र विशrry म सुमम्पस रायम प्रारम्म रिय जाएँ । म পুৰ ৰা বা না পৰি সখা ঘূহ ম যা গা মােগা । মা কালী সাখাব । যারা বার বাবপণ্য বা মানি এই সন-~~ যালোবাল শবন, মাথায় না মায়া । ৰাৰন নিন সামা পি র বিধ যারা বাৰি দিব ? ন শ্যাম পুর শব বল বৰাৰ নাথ নিবাস নগ্ন রাশি। যদি দুনিমা যা সাৰ পৰ সদৰ বিয্য বা ল য যুধিষ সখা নানা বাmি, ব সামাদৰ ল থ য ব ন * না। पतष सियविदारयोरे मापा मगम्य निसा विभाग माध्यमिशन पर শিমা শা বা মাখন যিয় নামে। যা নিয়তির । মাযে ম ল ব ম বিমা খ ছিল {r a * ফি আই খাটি ৫৪ শৰাি যি বিদাৰ rৰ গণমান * বাৰ স সি মার নানা সী ফুg সেখি না বিশেষ মা মহা ধা মী ম দ প ।মা বাৰ যা যা যা যা বিবিতা ম সরি ঘা বরং যেন যাবিং fa সাৰ থাকি। হিমবিয়া। গলপ মৰা মুখ विभागा म से एक विमाग का इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वह विद्यालया एव महाविद्यालयो के अध्यापका के पान व ममझ वा उमन भरने के लिए गणित म क्रमबद्ध अधिगम कायक्रम (प्रोग्रेन्ड सनिंग) वी सम्भावनामा को बाज म सक्रिय रुचि लें। जिन विश्वविद्यालया म गरिणत तथा भौतिर वितान के विभाग सवसाधनसम्पन्न तथा हर तरह से विवामित है, उन विश्वविद्यालया के सहयाग से गणित में असाधारण क्षमतावान छात्रा य निमित्त निरट भविष्य म एम भयवा दा विशिष्ट प्रकार के मावास माध्यमिक विद्यालया का स्थापित किया जाना चाहिए। यदि इन तथा ऐमे ही वायत्रमा का कार्यावित किया जाना है तो आगामी दो दशा म यह सम्भव हो रामेगा कि विश्वव्यापा स्तर पर गणित के क्षेत्र में भारतवष का नाम पिया जाा लग। 69 एमी श्रेष्ठ प्रतिमा के विकास सम्बधी अय क्षेत्रो मा भी पता लगाया जाना चाहिए तया तरसम्बधी वायत्रमा वा विकसित किया जाना चाहिए। 70 यहुन हा प्रषित नगगिय प्रतिमासम्पन्न छात्रो के आगामी शिक्षा सम्पपी गम्पूर्ण दायित्व राय का स्वय बहन बरन चाहिएँ । पाठ्यक्रम मध्ययन की प्राधि, प्रवेश याम्यता मादि से सम्बधित नियमा तया उपनियमो पो भा उपयुक्त मात्रा म उर बनाना होगा। 71 गैक्षिर सस्यामो मे मुधार के लिए राष्ट्रव्यापी कायम गमरा गिा सस्यामा मसिम स्तर को उन्नत करने के लिए एक राध्या पायाम विशमित किया जाना चाहिए । इम वायत्रम या मुरुष उदय हाना चाहिए या परिस्थितिया या निर्माण करना जिनके प्रतगत प्ररर र मस्या भणी क्षमता र भाप सोशष्ट परिणाम पास करने में fro ममत प्रपन्न बरती रह । कुछ मुभ्य वायत्रमा वा जिस पल ही पिया जा -नितर कटिन श्रम करने के लिए अनुकूल वातावरण । निर्माण करना अध्यापनो का गुलारमर गुपार, विद्यार्थी रावासा की मस्यामोमामा तपा गतिमान या उसापुनगर-पवायक्रम rfणामस्मापा म मुपार गावापा राप्रपाला कायम म यहुन प्रधिर सहाया गगनागिन का उत्तरगति नापरिषीण. पर हो। गटि मे निम्नलिगिम उगाये गाने पाहिएँ (6) RT सपा सम में एक गण इसाई गममी पानी पाहिए एका माना गाना पिग परने म उमे मापता दी जानी चाहिए। •गान मारपम पागामी ग मरिचार लिया गया है।
इम उद्देश्य से प्रपन मनुसतम उपयाग तथा उपति के लिए इस स्वम का विपासा मुग वायत्रम बनाना चाहिए । (1) इन योजनामा के मतगत मोतिर माधना को बदान पर हो नहीं अपितु मानवाय प्रयत्ना का ममिरित बरन पर विशेष बल दिया जाना चाहिए, तारि वे भपन सवोत्तम प्रयत्ना दे द्वारा शिणा म सुधार कर सरें। (n) दोपवातिर प्रयनों का एक निश्चित भवधि ता वार्यान्वित बरले म प्रमलारी मात्रा पर इग कायम को सफलता निमर परती है। (1) सभी महत्वपूरण काटि की षिक सस्थामा क लिए दो तरह वर मूल्यारन मानदण्ड बनाया जाना चाहिए-यूनतम तथा अनुलनम । भारम्भ म मम्वचित सस्थामो द्वारा स्वय मूल्यारन के लिए भौर बाद में विश्वविद्यालपापा विभाग द्वारा भावधि निराधाप पा स्वरप इन मान- दो का उपयोग लिया जाना चाहिए । इम मानदण्ड के पापार पर मरित सस्थामा यो त्रिमूत्री मापत्रम के अनुसार वर्गाहन किया जा सकता है (4) अनुकूलतम स्तर को मथवा उसमे कार को मस्याएँ, (ब) यूनतम स्तर की अपवा उमस पर की, सचिन मनुकूलतम स्तर नीचे की मस्याएँ, और (स) यूनतम स्तर से नीचे को स्पाएँ। (1) स बाटि यो प्रत्या सस्था को बम स बम पूनतम स्तर तर उन्नत परन प प्रपल रिस जाओ चाहिए.साय हो माय 'म' कोटि यो सम्यामा को श्रेष्ठता री भोर मपित ऊँचाइमा यो प्राप्त परले में लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इन दोना उद्देश्या की प्रातिलिए महापना अनुदान सम्पपी निपमा म विप प्यास्था की जानी चाहिए। इस गमप शनि सस्थामा से सहायता देन र राम्य ध म मामार नाति ममानता पर भाषारित है जिसरे पोध सिदात यह है कि या तो प्ररमा प्रगति करे या काई भी नर' इन परिस्थितियाम होता गया है विध्यावा. गिर स्तर पर राई भी सस्था प्रगनि नहा परती । मोतिष पस्तुमों तथा उन बन सम्पधी साधना की परिसीमा को हटिगत रगत हुए पावश्पर है rि मिसस्पामा शिाम म चयन पति को अपनाया जाप । समान मगिर सरमामा र मुपार सम्बयी पापमप्रपम पर रेपम भागामो दरोम गमो स्तरमाम सम 10 प्रतिशत सम्पापा 7 अनुमाम स्लर (पा उमम अपित ) Or मोनारिया जाना चाहिए। प्रामपित-स्वर पर य 'गुणवना सम्याएं देश के हर माग म ममान रूप से वितरित होनी पाहि । माध्यमिक स्तर पर प्रत्यक मामुदायिक विवाम बण्ड म कम स कम श्रेष्ठ माध्यमिक विद्यालय तथा उच्च शिक्षा क्षेत्र में प्रत्याजिल म पम मे एम एम अच्छा महाविद्यालय विरमिन रिया जाना चाहिए । विश्वविद्यालय स्तर पर यह पानीय हो कि पांच या छ चुनिदा विश्वविद्यालय पयासम्भव उच्चतम स्तर ता विमिन क्यि जाएं। नव परिवीक्षण यदि उन प्रकार से वायत्रमा यो उपयुत्त बनाना है ता यह घावश्यक है कि रा र शिक्षा विभागा तया विश्वविद्यालयों द्वारा महाविद्यालयो तथा विद्यालयोन परिवीक्षण मम्ब यम अपनायी गया प्रचलित पारणा को पदमना होगा । यादित नव परिवाक्षण को मुख्य विशषता हामी उगरा पीलापन, इस निम्न पणा पी मायामा का गहयाग नया निर्देशन दना होगा मामाप मारि पो मस्याग्रा या उन्नति म नि निशामूचर रेमा माचनी हामी तपा मादी रास्यापा वा प्रयाग परन पा म्वत प्रता देना हागी। गरा मुम्य पापत्रम उतना सम्यामा या नियत्रण म रमना नही हागा जितना उनरा गहायता परना सया उहें निर्देशन एवं विस्तार सेवाएं उपरम्पराना। नय परिवीक्षणा विद्यालय स्तर पर मम्मव बनान में लिए पुछ नापत्रमारा पायाविन परना होगा जिनम निम्नलिमित फायत्रम भी মাগিনি ? (1) पिमागोप मगठन र मतगम निता भार्यानय या मुम्ब साई मान परविणतयों मपा विभाग म पनि गम्दप ग्यापित पिय जान पाहि । (1) गरिवीक्षण पाप प्रगागन स पृथम दिया जाना चाहिए तारि गिना पिा परितारा पोर उमरा पमचारी-यग उचित प्ररार र परिवीक्षण पर जानबर पर पति गिदाण म गुयार पध्यापकों का निधन उनर गिरागरातनायरमा पा गटन या विधारयार निमित्त पिग्गार रानीपरम्पा। (1) नरम पा पपन-पति म मुधार पर परिपोषण प्रपितारिया म गुगामा गुपाररिया जाना पाहिए। उन्हें गमुचित प्रणि मााहोगा। •ग महारण पिटि ममम्पा पर प्राग र म मिार. पुरतिर पिया पापगा।
३६ (iv) प्रधानाध्यापरा का मा परिवोस माय म महावपूर्ण भूमिका निमाना है । उनका चयन ध्यानपूर करना हागा तया उन लिए विशिष्ट प्रशिक्षण मापनम निपारित किये जान चाहिएं। इस समय प्रत्या विद्यालय पृय र से काम करते हैं और व सोधे येवल विमाप सही सम्पत हाते हैं। इसी प्रपना यह भधित पानीय धि विधानया का जाइका सगम (या घाटे तथा मासानी से म्यवम्पित हा मानपाल विद्यानप ममूह, जिला बोच भी दूरी सहगम्य हा) बनाय जाएँ तामिमगम मतगत विभिन्न विद्यालया अध्यापन अपना गर छोटा समूह बना मजा प्रण मम्बधा प्राधार पर पाप पर मरगा और ना माजना तथा निशन सम्दघी विशेष समतामो से सम्पन्न শা। প্রায় বাম স মাৰি বিয়াম ঃ নিম পরার নি पायक पार या पाच उच्च प्राथमिर विद्यालय हो तथा मत्सर उच्च प्राथमिप' पियालय पहागा पार या पाच भवर प्रापति विद्यालयाचा हा प्रत्यr सगम लिए समस्त उच्च प्रायमित मालामा प्रधानाध्यापक बी एव समिति रानी शनि जिगरा मध्याद्रीय माध्यमिा विद्यालय का प्रधानाध्याप हामावरह परमा उच्च प्रायमित विद्यालय म निम्न प्रापमित विद्यालयो कलिए एप इगो तरह की समिति हानी चाहिए। इस विद्यालय संगमरे मनात ममा विद्यालय माहिर गए म र मागे नया उन ममिनियारे माम्पमा उक्त विद्यालया भध्या भपना सभी सम्यामा मुनियोजित विसागनिए उतरायो होंग। विधाय मगम प्रभारतातो र से बाम वर मरदसतिश पायरयर है रह पर्याप्त शनि प्रदान की जानी चाहिा। उदाहरणाय (1) मूपारन पी अधिर मन्धी पदतिया भारम्भ मरल सपा धारामारा से दूसरी गा म अपवा विचार स्तर से दूसरे विधालय स्नरम प्रतिदन म सम्बन्धित नियमा पादने मारपस पियामर गगमनाममममा जार। (1) मगमगन सभी विद्यालयामा गम रूप से उपरण गरपातपा र गुपिया या जाना मम्मद हाना पाहिए । इना अन्तममा मारतानएर भी सम्मिति ! रिह एर शिवालय गदूगरे विचार मनाया नाम इसी तरह प्रताप च पियालय म मुभवस्पिन RT हा माती है, वहाँ भा7 या दिना म सगम रे मानुगिर पारि विrnरे पात्राको प्रयोग राय पपया प्रदशन के लिए साया जा गर । केन्द्रीय उच्च विद्यालया के मनगत प्रध्यापका व छाना में निमित्त एक ऐगे परिमचरण पुस्तकालय की भी व्यवस्था की जा सकती है जिसरी पुस्तके पडोस के विद्यालया को भेजी जा सरें। विशेष पाप्यता प्राप्त प्रध्यापश वी सगामाया मी ममा विद्यालया द्वारा लाम उठाया जा साता है । उदाहरणाय प्रायमित्र विद्यालयो म शारीरिक अथवा पता शिक्षा क लिए पृथक पृयप मध्यापका या नियुक्त किया जाना सम्भव नहीं है, सरिन एसे अध्यापक को उच्च विद्यालया म नियुक्त किया जाता है, पौर यदि गुनियाजित रूप से व्यवस्था की जाय, ता यह सम्मव हाना चाहिए शिप्राथमिक विद्यालया मध्यापना या पय प्रदशन करने तथा उनवे छात्राय माय कुछ समय पतात वरन में भी उनी सेवाओं वा लाम उठाया जा सरे। (1) विद्यालय सगम पा यह महत्वपूण उत्तरदायित्व हाना चाहिए शिवह सामा यत मध्यापारा को गवारत गिना दन तया मुम्यत पम याग्य प्रध्यापमा पपिक याग्य बनाना नाय करें। (1) सगम र मतगत विद्यालया र प्रधानाध्यापरा को मिल जुल पर पिपार विमा द्वारा विशाग गावपी मुम्प गिताना या निणय सेना पाहिए तानि गिनर मगार प्रत्या विद्यालय मपन स्वय ये पायत्रम की यागना बना सरे। (.) या दो पराश मारग्राहो मध्यापरा का पेद्रीय उच्च विधायस गम्बन करना भी सम्भव हा गरे। तारि जव और जहाँ मापरता हा ता उहें मगम रे भगत विद्यालय में भेजा जा सा। (1) मा पाय-युग्ना मध्यापन निर्देश पुस्तिगापा तया शिक्षण महापा गामग्रो पो परगने एवं गा मूल्परिन परन म पुष मुनिता पिवानर सगमों का उपयोग पिया जा माठा है। (1) विपासर सगम का यह प्रधिरार भी दिया जा माना है fr पर निर्धारित परिणामापा मक्या मिता शिक्षा पपिरारीको ग्वीति गे परिवरिल पाठपर्या तपा पापम म मशायन-गरिवपन कर गरे । मगमान गरियो तथा उत्तरापिग्य प्ररयर मगम पातुरत नहा मोबानपा पपाई सास गुरूपाय रोजा गरती है सया पिर नाता पोर माघि मापार पर उना सौर गम उत्तरपिता रोमगा-गाया जाता पाहिए।
18 म्पट है कि इस वापरम स दोना ही विमा तथा विद्यारया का ाभ होगा 1 जिला शिभाधिकारी प्रायः विद्यालय मगम म मुम्चन सम्पा बनाप रपेशा तथा उस एा इसाई मानार व्यवहार वरगा, ससे वह मुख्य मुम्य मावरमपनामा पर अपना ध्यान द्रित कर मवगा और इस प्रकार विमाग का उच्च-स्तराम क्षमग वारे कम निरीगरण अधिरारिया का नियुक्त वरना पडगा। मम विद्यालय भी प्रधिर शत्ति सम्पन्न होंगे पारिएर খি না। সন্ন্যানি বা রস ও ঘি এর স্বত্বৰ पाप परन या प्रवसर पास हो गवेगा। 19 एस ही ममान वायनमा का विलित बरन मनिए महाविद्यालया का पडाग उच्च विद्यामा साउदना नाभर रहगा। विश्वविद्यालय तपा विद्यालमा का इस वान ३ लिए प्रासारित किया जाना चाहिए कि उच्च विद्यालपा म स्तर सुधार कायम म महायता करन प दृष्टिकाए स प्रयोगोर गस्यामा वा सचालन पर, उच्च विद्यालय में पध्यापकाया मयारन प्रतिमा दन की व्यवस्था करें पाठय पुम्न एव लिए-सामग्री का निर्माण पर तपा प्रतिभा का पहिचान एव उमर विराम म महायता करें। 80 বা সাদ কান বাল গা বিষয় যা ওর গােয় এ सम्पर महाविद्यामा म गुपार परन पे विशेष प्रयत्न करन चाहिए । (मामा नया एर विश्वविद्यालय पर 30 से अधिक महाविद्यालयों को मम्बद्ध परामा भार न पडे)। मम्बदना र सम्पप म निर्धारित शो का ममय-समय पर पुनविलोपन तथा उनरा बहाई ग पाउन परवाया जाना হি। শ মাবিয়ালমা যা মযিঘিৰ সশ্ব নিয়ে বিন্য সান্য শাকি--- -म मे मम तीन साल में एक बार सम्बदना बाएर ऐमा विसपाधिशार सममा जाय जिरो प्राप्त पल नि निरतर प्रयत्नान नया पाग्र भन रहना पावर है। इगा माप-माप हो प्रत्या विश्वविद्यालय सम्पर महाविणारा की एर परिपर स्थापित करना चाहिए। दर परिपन पा पाप हागा विविद्यालय मम्बा म गम्बपित समस्त নামৰ যাম না, পা মৰা ম বিখ্যাৰ বা পানি বা মা परनम माता दना महाविधारा उचित शिाम म महमान को इष्टिग उग पनि माय प बनार ग्यता तमा विद्यालया नर निरनर उपना रहा है पपया मही tarमरा पता सगान कि उनमा पाधिश पोश।
प्रध्याय
शक्षिक अवसरो के विस्तार
तथा समकरण सम्बन्धी समस्या!
१?
म
If पुनरचना का नामरा पा है ममा स्तरा पर शशि मुविधामा
या विस्तार पसा जिाम गित मयमराव समारण पर विशेष बल पिया
गया हा।
"गक्षर म मवप्रथम वायत्रम है भौगत नागरिव यशक्षिर
उन्नति करना तयाग दृष्टिकरण ग प्रायमिर शिक्षा लिए पयाप्त मापन
जुगा तथा प्रोः निरधारता का समाप्त करना ।
83 प्रायमित शिक्षा
भारताय सविधान र माघ 17 मनिश है रि 14 वप ता वा
मायुगमा वार या निर एव नियाय शिक्षा दी जाय । यह बयन
गाना मे सम्पर्श पर ही है इगम प्रच्या गिना का प्रावधान भा प्रच्यन पग
निम्ति है। निरा विगारा मम्मा तथा उन पर हान वाल पच गो ध्यान
म रगता साप या प्राप्ति निमित्त एक प्यावहारिक पायत्रम को 20
पासा पानागा। ममग्न वासना का 197776 तापचयपीय तया
194346 सा मतापर्षीय मासया प्राथमिर गिता दना हमारा TI
दाना पाशित
गवारा प्रापमा शिगायका मानिसान घर, जा
मामrnar परम्पर विधायपास गया पपस्या गवगापा
नारन रापा गया निधाराण ।
(6) पशुपमा याजना का गमामि ना विणाय या मवम्या
मदा पर जान पारितारपा सागर पा पर ग 1 मार की दूरी
पाप्रामा दिनपा 1 म मायाप रा रा म र उन
प्रापकर सिम्पाना पागिा।
(u) ग नामारन मुसापत्रमा पा पापाता।
प्रथम पनी रक्षा म नामावन समाप (एस ममय नामापन अधिर विपयरप है, क्यानि इमम पांच थप स यम को प्रायु से लेकर 14 वप म फार तर या आयु वाले माया का प्रवेश लिया जाना रहा है) हा तथा निधारित प्रायु वग (06) बालक का विमो मार रक्षा म नहीं बल्लि पटला म ही नामानि दिये जान का प्रयन हा । द्वारा-पार प्रायमिन स्तर की समाप्ति पर Crat द्वारा विद्याप छाडे जान को प्रवृत्ति का समाप्त रिया जाय (इम समय सगमग 20 प्रतिशत वार भवर प्रायमिर शिक्षा म भाग नहीं बढ़ पात) नया गाप्रपरन हानि जा बालन इम स्तर यी NिT का साम पर यह नियाप प स प्राग व स्तर को शिया या प्राप्त करें। इस प्रथम गाय का पूरा करन र लिए 10 वो दो भवधि म के हुए मुविचारित *प मे नया मान प्रयत्न किय जाए । दूमर कायम को पूरा करन म पुछ मधिरामय लगगा। (1) रावस्यापी प्रतिधारण से तात्पयरेलि म वृद्धि रोष तथा य वा परिममास वरना नया म दात मे भारताना रि प्रया नामारित दान र माग दूगरी पयाम नियमित प स उन्नति करता हुमा सब सा विद्यालय म अध्ययन परना है जर तर मिया मनिमाय पाटपत्रम गमास नही पर सता प्रयवा इमर ! म यह सरत हैं शिप्राथमिय-स्नर पातिमा की प्रचलिन तान वप का भौमत प्राधिका सात वर्षों या T परिवाराहामा मह मर्वापिस पटिन पाप है पौर गा निगन पारि मारातिर और गरिमा पौमत माता पिना भाषिक पराइलन गमन हा पिय प्रपन शनाया बडे हान तर विद्यारय महा रग रह पाता पिता परमीतना मिति frा जाप विपन बार frofreमरत्व का गमझ गई तथा पिणारया मा उत्त गुहारमा गुपारी गापा मिनि मापत्रमा व माध्यम म बागापा अपन प्रति पारित करन नया रास न । दामता वा बाना होगा। इस वायम TIMer सामान हैं। 81 भर तथा वृद्धि राप ? गमस्या प्राथमिरनतर पर बड़ी नयानर है। मनामानि 100 धाम में रयत 10 मा पोरन पर म मामा ) प्रामा नर पर मरा मगमग साधा माग का पहला गामा पाटा जाता है। सार म মম ই বি মানে ব্যথা (গৰ নিশন শি বিশ মন্দ पाने की पारा है ।मरा निन निम्नति द्वारा मय है पहली रक्षा (1) जो पागामा वप म प्रयम कक्षा में प्रवेश लना चाहते हैं उन ममस्त छात्रा के नामा का पूर्व पजात वरन का व्यवस्था वो मारम्भ किया जाना चाहिए । इस पूब पजागरण वप में इन वालो को गल-बदार माध्यम म अनौपचारिक शिक्षण दिय जान वा प्रयत्न किया जाना चाहिए । इसा विद्यालय म पाकर पहन को उनम पाटन पड जायगी तथा इम पर उह मौपचारिक शिक्षण के लिए तयार किया जा मरेगा। (1) यथासम्भव सामा तर उह विद्यालय पूर्व शिक्षा दी जानी पाहिए। हर स्थिति म परतो यमा म येल पद्धति अपनायी जानी चाहिए। (m) पहना मोर दूसरी कक्षा में कोई थणी विमाजन पद्धति नहीं हाना पाहिए और मम्भव होता पहली घोगी कमा म मा श्रणी विभाजन नही पिया जाना चाहिए । पक्षासे-इग स्तर पर क्षय या मुख्य मारग माथिर है-बालर (पिणारा वालिया) ज्या ही पापिय दृष्टि से लामबाग यन जाता है और घर म पपया बाहर पुधाम वरना या पमाना मारम्म कर देता है तो उम विधाय भेजना वन पर लिया जाता है। मताग्य अगालिय' (पाट टाईम) परम्या या यर पमान पर अपनाया जाना चाहिए तारि बालक पा सोपोर पोराजन भी कर सरें। प्रपा प्रपर प्राथमिक मागापा म वृद्धि राय तथा क्षय की रियनिसमून्याान नपा उगरे पारणा पर विचार विमा परन लिए नियमित पापिस पाया पा जागी पाहिए। मम विद्यालय का चमचारी वानर गमग्याप्रति गगहा जायगा सवा दसर शान निगन हेतु प्रपनाए पर भारतमा पिसागम महापा गिद हागा । नामांकन प्रथया व्यप गरमा गाना व पिए पापार पर इन पुराइया का पम पम्न में पारो प्राथमिकता दन र टियागम, पचय पालना ये पतगत क्षय सपा वृदिरापाममा परम पिए मिनिट पश्य निर्धारित पिय जान पाहि तपा ग क्षेत्र म प्रागनिर प्रपन्नों कार पट एव निरिगत जिन मााि जाना चाहिए। प्रौा निरक्षरतारा परिसमापन नीति परिममाण नदेशिएर 20 वर्षीय अमिर पाकमानाना ! पाणामा दमकला प्रतिमा माराम पौर पर टिम लिए 1111 पापु वर्ग उन यामरा लिए मशवालिक मिसा निवाम कर दी जाय, जिहान प्रबर मायमिर स्तर शिक्षा का पूरा नहीं रिया है तया जा व विद्यालय में नहीं पर रह है । इराक साय हा सागरता अभियाना वा चयनित तथा सामाय माघार पर गठित करना होगा। चयनित पति में प्रतगत प्रौदा के उन विशिष्ट समूहा प लिए पापक्रम निर्धारित किय जान चाहिए जिहें प्रासानी से पहियाना नियमित और साक्षर बनन के लिए प्रमिप्ररित पिया जा सकता है। यो दृषि फार्मों तया पापारिक प्रौद्यागिक, सविन काय तया एसी ही माय बडो रास्थायदे मालिश लिए यह अनिवाय (पावरपर हो ता कानून द्वारा) पिया जाना चाहिए मि व मपन यहाँ काम वरन वाल सभी निरक्षर पत्तिया का उनसरा नियुक्ति नियि स तान वप यो मधि के भीतर मातर काम चलान पाय साधार बना देंगे । सरकारी क्षेत्र बढे पौयागिर सस्थानाका इम निगा म तुरत पहल करनी चाहिए और इस प्रकार नतृत्व प्रदान करना चाहिए। अपने समचारिया या भोर विभपत निरक्षरों वी, शिक्षा की योजना বয়ং গলা সয়ৰ ভিতৰখলনা বা কামিল দ্বী বাহি । মাৰি पद सामाभिर विराम लिए प्रारम्भ की गयो रामो सरवारी याजनामा म सासरता वामप्रमको भावस्पर तत्व माना जाना चाहिए । सामा म कामम ये प्रतगन निरक्षरता से लाल क लिए दश में सभी उप उप शिक्षित पुरुषो শখা শহিলা। যা রে যা যা গা সানা খালি বধ ভন। বুনিয়ালিশ सागरता ममियाना म सत्याग लिया जाना चाहिए । इमम सभी पिता पात्रा तपाई सम्यामा सक्रिय भागहा। उच्च प्राथति, माध्यमिक उच्चतर माध्यमित यायमाथिर विद्यालयापार तथा विश्वविद्यालया एवं महाविणाला का भवर र m र छात्रा स भनिवाय राष्ट्रीय-मवा पायरम मगन प्रौटाका सार बनान रामाय लिया जाना चाहिए। ममी प्रसार विद्यालया पप्यापनाम लिए अनिवाप होना चाहिए रि पान म माग में और निरक्षराकासार यनायें। प्रत्यापिर मरपाको मामानिस जीवन RT बना लिया जाना चाहिए था उस यह रदपाव मोरा जाना चाहिए शिवह उस परे गिद रामाजिर औपन निगरता पो परिणमान दे और उस पर सम्पूग उत्तरदापित भी गोगा जाना चाहिए कि यह र निरिट क्षेत्र स निरक्षरता का परिणमा। Pिा तमा जन-चत सम्म यो प्राव'यस्ताएं माध्यमिर तपा शिश्विास नुरnिनामारनमाधि चार मापदण्गे ये मयुक्त म्प पर आधारित होनी चाहिए । जनता द्वारा एमोनिमा पामांग, नसगिन याम्यता भण्डार या ससगीण विकास, वादित गुणात्मक स्तर। मे साधत अमिर मुविधागा का उपाय वराने की ममाज को समता, तथा जन-पर-सम्बधा मावश्यानाएं वास्तविर माता पर प्रापारित मभिव सुविधामा वा विस्तार करन वा समाज की मता से यदि शिमा व यूनतम तय निर्धारित हान हैं ता जनता को माध्यमिक व उच्च शिगा मम्यघी मांग मथवा उपराध नमगिर योग्यता के मगर वो विकसित करन यी मावश्याना मे शिया धिाता नाय निधारित होते हैं । इन उच तया निम्न लग्यो ५ वाच या दूरी । उम विचार विमा के द्वारा समाप्त या जा माता जा मक्षिा व्यवस्था के परिणामा को जन वल मा पायरयातामा म सम्बद्ध करन को मावश्याता में उत्पन्न होता है । इगमे पष्ट हो जायेगा किनि प्रायमिाताग्रा का भपाना है, पिन विभिन्न पाठ्य कमा गा विवाग करना है नथा विभिन्न पारामा म विम सामा ता गुर्विपामा । उपनम्ध कराता है। माध्यमिन एय उच्च nिा निमित्त र मुविधामा की यवम्या सया जायन या अनुमानित मावश्याताप्रा , पापसा सम्बध स्थापित मरन तुग (उत्त) सिपारिश या युध मामाग्य प्रपया माथ ही गमभा जापारिए । जन बम से मम्मघम पा गया मविप्ययाणा कम हो यि तुल टीर ही है मलि पर मिमिन मम्मावनामो पर माधारित होती है। प्रतण्य पर पाया है पाप पर मांगता का पट्टा परन पी पद्धति सपा भविष्यागी गरायो नानीप म भी निर मुपार पिया जाता रहे। या राय माग राय शिा म निरनर प्रयत्नगीन रन्ना पाहिए परिजन या मम्मा नविणा मामा यतया मापारमा प्रयवा माचरमर यता म म्याराना है । मनाया मुविधाममपिस्तार-का GEET पाया मुपिपाए म पराा नाही मीमित हो जाता है। मगर यह भायमा लियादित बन या गुणामर परपर यिा भारत पुग गुग्गामा बर वान बनाय सामायित- उति AT IIT Tउप पापानमा है। पोर मा जन बन या पार हो गरिपाया गया ना नियमित पाने का मात्र नहीं । गतीमार मा म म म पूय जायर यो TELanा गा मा पापार पर लिप गद ri farm .
" Muy .५५-पादे परिणामा पाउन बल-सम्बधा मावश्यातामा स सर्वात रान लिए निम्ननिगिन उपाय को अपनाना हागा (1) राष्ट्रीय-स्तर-राज्यास विचार विमश परम द्वारा राष्ट्रीय तर यो एक याजना जिम मतगत राष्ट्रीय पिपास स सम्बधित सभा महत्व पूरा पर सम्मिलित हा, बनायो जानी चाहिए जस-~जहाँ प्रशिक्षित यमचारिया का गतिशीलता धिर है या होनी चाहिए अथवा जहाँ वमचारिया । प्रतिष्ठित वरन हतु सस्यापा वा भारम्म वरन या काम बहुन पर्चीता हा अथवा जहाँ एमा मस्यामा म बाधित उच्च स्तरीय समचारी यग या पर्याप्त पूनिन हा मा मतगत इजानिरिण पि तथा चिरित्सा शिक्षा एव उच्च शिक्षा लिए प्रामापा मा तयारी सम्मिनित किया जाना चागि। (1) राज्य स्तर प राडा साधन योजना राय स्तर पर राज्य सरकाराद्वारा बनाया जानी चालिए। (1) जन बल को मावश्यरतापा का महनजर रगत हुए समो क्षेत्रा म विद्यालय तथा महाविद्याम को व्यावसायिक शिक्षा का प्रायमिरता ये पापार पर निन्नार करना होगा। (iv) सामा म fri, जापि बुध ०२१ म बम विवक्षित है और दूसर क्षमा म प्रपिर सिमित, मतगत नामारन व सम्बप म समारण को नाति अपनानो होला 90 चयनात्मय प्रवेश माध्यामर एव पित्रविद्यालय शिम विस्तार की वतमान गनिजी विश्वास लिया जा सरता है, भविष्य में और भधित तह, जन-यन भाव परतामो गम्ब पी गमा अनुमाना स यहा अधिर भाग हागी, पात मासमा नरामपप्पय हा भावन-या या ५ नमार प स यह जायगा । मतएव पावरपर है पि उपचार माध्यमिक तथा विविधाम जपनामर पापार पर प्रवरा विय जाएँ। क्षिा गादी पर पायोशोई बदनाचरा जायगा पपनामा परनिवापि मात्र সাবিনা সি সিন মামনি । বৰং সামৰি গং ग्नाला अधिग्नापौर घमपान पर। पिरमा निम्न माध्यमिर नर पर, जिग मामा ममाप्ति TREमा नाना पाहिए 'पदन यह नहा तारा जाना चाहिरि ४८ याग्य' छात्रा काग देना है और प्रशाम्प' यात्रा का बाहर निराल देना है। इस स्तर पर चयन 'परीगण पौर निशन को मार अधिक पौर निरसन' को मार कम उमुग हो । इमा मुन्र प्रयाजन यह होना चाहिए कि पोई छात्र अपनी उपसधि तया धमतामा स्नर से अवगत हो जाय तया वह यह निणय ले सबै कि उस लिए विद्यालय छापर वाहरी दुनिया म काय परना रितार हागा प्रयवा पिसो विप व्यावसायिर पाख्य म म माग लेना या मामा य निभा हा प्राप्त करते रहना । दूमा म इम स्तर पर चयन पा मय हागा परीक्षण और निगन मवाप्रो यो सहायता के माध्यम म 'प्रारम चयन' । माध्यमिर शिला में विस्तार का चाहे बाद भी स्वर हो, लपिन पात्रा का यह मुपिया समा क्षया पे ममी विद्यालया म उपलप होना पाहिए । रिमो विशिष्ट क्षत्र म चयन पद्धति का कटोरता म अपनाय जाने को मावग्याता है या नहीं इसका निणय म्यानीय माधार पर उस क्षेत्र की जन-या गम्पपी मावश्यानापों नथा (शशिर) विस्तार प्राप्न स्तर यो ध्यान म रणने हुए किया जाना चाहिए। 92 उचित पयन की प्रत्रिया उच्चतर माध्यमिर स्तर ग मारम्म होगी। उच्चतर माध्यमिर (पयवा इमा गमरण) स्तर में विद्यारया य रिक्त स्थानों यो उपम्प गुविधामा की रागनी म निश्चित किया जाना चाहिए भौर तय विद्यालय याग्प मापनों म म मा प्रत्याशिरा पा चयन परे । यह पायम उम गोमा तर पर होगा जिग मामा तर उच्चतर माध्यमिर शिक्षा या पगायारण लिया जा सपना है सया पात्रा या उम पार प्रवृत्त किया गया पर माध्यमिर स्तर मा शिला गमाप्न व्यत्तिया यो नौरा में जितन मायगर उपसम्म सराय जान है जाना परो हुए जो पाना पाहत हैं उन्हें पारापिस HिI सपा स्वगमप लिना को मुविधामा को जगी व्यवस्था को जाती है तपा माम मागा म यह मारना मरना कि शिक्षा काय प्राप्तिमा मापन है मरिम्पाय 93 प्रवर ग्नातर मर पर पपन गतिमोरहीं प्रधित स्टारना रा मानाना हागारटिका ग निग्नविगित प्रापन या पार्यायित परना होगा (1) नागप्प म पारपतहान + लिए नि उपित र यनाए रग पारद र पावर माविधालय प्रपया विविधालय र यिमाग IIT परिणतयानों को गम्या M TAN पध्मारावी गाना कमा प्रान गुमपा के ममम निर्धारित रिया जाना पालि। हिान नपा मगरगापिस पाटमा म पनी हाहा पनि मारे नौर पर अपनापी जाती है । क्ता तथा वाणिज्य ३ पारपत्रमा म मा पनि यो प्रनाये जाने की प्रावग्यता है । महाविद्यालय अथवा विश्व- विद्यालय में विमी विभाग में छात्रा भी अधिक्तम सामापा निर्धारण हर यिति मपय विश्वविद्यालय का ही करना चाहिए। (11) पगंगा प्रणालीम सुधार-सम्र थी शायणम एप प्रश-स्वरूप यह प्रस्तापित किया गया है कि विद्यालय शिक्षा के राज्य वार द्वारा वितरित विद्यालय त्याग प्रमाण म प्रत्यापी मन प्रयया प्रमपन हान ना पाई सिरण नहा, पपिनु दायन विभिन्न विषया मजा उपाधि प्रासपी है उमवा स्पष्ट उत्रह।। अतएव यह मावश्या है कि भायर विश्वविद्यालय विभिन्न पाठपत्रमा म प्रश याग्पना गावापमशन निधारित या भाग्य छात्रा या माना परीमा पर गुधारन हतु पुन परीक्षा देन मान का असर पिया নানা ঘাগি। (1) सम्ध गुविधामा की तुलना में जहाँ प्रावदवासी मम्या मम है, वो गामाया चयापति नहीं अपनायी जायगा । परन्तु यदि उप Trai म माया को गुम्या धिर है ना मस्या प्रयवा सम्बपित विभाग पर शानिमियाय प्रवेशाधिया में स वह मर्वोत्तम छात्रा रापमन परें। (1) तामिमी चपन पदति नहीं सिमित हो पाती ষ রা দাম না প্রধা বা থা মুশ মাম মাৰা বিযা না गरता है। पर्गा म प्राप्त मा की स्वच्दानारिता नया उनकी पविकासनामनाम दानाहान पाली क्षतिरा इसस गधार तथा गया पायो भी मादिर यामारि प म पिपरी भवाया पर उचित दृष्टिपात परत हुए, गर पूरा रिया जाना चाहिए प्रिवेशाविया पो नर्मागर प्रतिमा से सहा पम पहचाना जामा मतिम रूप में चयन परन समय पाउन शिवाय प्रमिसगों तथा उमी उन दौत्रामप्रवीरगना मा দ্য বং মা দান শিক্ষা সারা বা", বিনা শীপ প লাৰ স ম है।माम विरविद्याया पो म पिसार मोर उनम पर साहन माहारा पाहिल पर निर्धाग्नि नियमामा निरस्त करे उस दानामा प्रोगग जिना प्रतिमा की परवान तो पराली गयी है जिस प्रका- को को पूरा Ranाति प्राप निमित विद्यालय पुत्र (school Clusters) भापार पर पाया पर्यानत परा को परशापित विपि या मुक्ती समस्यामा म पात्रों । वान भर १. पर प्रयुक्त पिया जा मरता है। (1) प्रत्येव विश्वविद्यालय वा विश्वविद्यालय प्रवेश वाड की स्थापना करनी चाहिए, जो प्रवेग से सम्बंधित सभी मामलो पर उमे सम्मति दे। (1) उच्च शिक्षा वे मतगत विभिन्न पाट्यत्रमा म (प्रवण सम्पपी) उचित चयन परति म उचित विकास यरन के दृष्टिवाण से एक केंद्रीय परीगण मगठन स्थापित किया जाना चाहिए । 94 स्नातकोत्तर स्तर पर चयन साधित ठारतापूवर करने होंगे, क्योंगि इम स्तर पर गिना ये स्तर का बनाये रखना भत्यधिक महत्वपूरा है। पर यह दोष है जहाँ बीजारापण होता है तथा जा सम्पूण शिक्षा क्षेत्र को नष्ट भी पर गपना है उसका मुधार भी वर सरता है। उनहरणाय इम स्तर पर सरावनति हान म उच्च शिक्षा के लिए अच्छे शिक्षण प्राप्त शरना दुनम हो जायगा । इसम विश्वविद्यालय स्तर पर स्तरावनति होगी सपा परिणामस्वरम माध्यमिक विद्यालया के लिए अच्छे शिक्षा प्राप्त हाना पटिन हो जायगा । परिणामत माध्यमिर मिा म स्तरापनति होगी और प्राथमिक विद्याराया, निए पच्छ नि मिलना याटिन हा जायगा । इस दुप्यत्र या समाप्त परने या एा ही उपाय है कि म्नातकात्तर शिक्षा तथा मनुगधा गुरगारमा स्तर में गुधार पिया जाय । ऐसा करना इसलिए भी भारसा है सापि पि विशाग उद्याग जन प्रशासन तया जीवन में समी महत्वपूरए शनाप लिए योग्य समचारी प्राप्त हो सकें। 95 प्रारालिष शिक्षा तया स्याध्याय र मात्र पूगातिर fr पर ही निमर रहने की यतमान नीति पनिमा दन की पावापा मिमा प्रत्येर क्षेत्रमतया प्रत्पेर स्तर पर निर तथा यानिश (Own time) शिलामो विमान पमाने पर माना जाना चाहिए ठपा पूरि शिणारे रामान ही दादोनो को मगर पिा नाना पारित गरे, इस समय प्रौर सपा प्रनयरत शिया प्राय गूगमा उति है। 'ना हर गम्मा सर तक विस्तार रिया जाना पाम एर माय गुपार पर रा परिणाम यह होगा रि -दिन गिरे रिमो मार को पूरा नहीं लिया है ये रो पूरा माँगेहा पाई पाई ता भगने स्तर की गिना मप्रवेग तामांग in F रिमा गरि स्यामाना समापन करार भयवा बिना नामाक्न पराये मागे की शिक्षा प्राप्त कर सबैगा, ~~काई भी काममा पाग्यता, समता, मान तथा व्यावसायिर बुशलता प्राप्त कर सकेगा और इस प्रकार एक मुशल पापकर्ता बनार यह मधिर भाम सम्दापी अमित अवसरो को प्राप्त कर मरगा और -शिनिपति अपने पान यो सजीव बनाय रस मरगा । परिणाम स्वरूप प्रानो पचि दे क्षेत्र में नवीनतम जान माप यह कदम मित्रारर चल सरेगा। गरम पायमानो जागिर पसउनत तया सम्मान दशा में मो विवामिन लिया जा रहा है ना भारत जगे पर विरमित नपा परीव दम तोयितुन हो उपेशित नहीं किया जा मरना । इन कायक्रमा का पाययत सरल शा परिणाम मह होगा कि विणलय में बाद जोवन म प्रवेश भरला गरम हा जापा, राज्य पर होने वाले शिला ये व्यय में यूनता पा जायेगी नया गिता परम्या में प्रमायित हार बहुत बडी मम्या म व लाग शिमा प्राप्त र मरेंगे ना माथिर गरट वारण शिक्षित नहीं हो पा रहे हैं, मरिन का स्वयं को शिपिरना चाहते हैं। पापार पासमार विकास पर प्रधिर यल दिया जाना चाहिए, न रेवल विश्वविद्यालयों मात्रा रे लिए, मपितु माध्यमिर विद्यालय र पास माओं, पिव वयोगाम दाम बरल वाल तपा माप कायार्तामा एय उन नागरिमा के लिए भी जो सराहनिय एव गोयत्रोप मून्या से सम्बचिन favों पान मारम भ प्रपना जावन मान्न नाना पान है । जा প বা বাম যা য্য খ, গাধা যায় দিন ২ पदमर दिय जान पाहिए उन्हें मार पायों को मरह ही गममा जाना चाहिए पौर नहा गम्भव हा अहें कुछ महाविद्यालया मे मम्बर पर लिया जाना पाहिए, तानिये पृरतारों एव पर गुविधाप्रामा मान गरें। विभिन्न स्तरों पर नामारन भागामा 20 यपो म नामारनशे ममम्याएर स्वर भगवा रस दूसरे तर नया सम ही नहीं, अपितु र हा स्वर भयवा र म म्यान स्थान पर भी मिल रहगो । मन् 1950 से 1969 मर (वायविर) तपा 1966 13, कार (पासना गन) नामोरन र भारत पFिz--- दिप गये हैं।
५२ (6) निम्न प्राथमिक स्तर पर प्रवेशापिया को सम्या सन् 1950 म 1 वरा- 10 लार ग बबर, 1960 म 3 करा- 10 लास हो गयो इस प्रकार प्रथम परवीय याजना वा मोसन वापिर वृद्धि 19 प्रतिशत से वापर तृतीय योजना में 6.प्रतिान हा गयो । इग सन म मय हम सतृप्ति विदु तर पहुँचन याल है । शान ही समा याला विद्यालयाम भर्ती कर लिय जायेंगे तया भी महान याली मागामी वृद्धि जनसत्या म होन वाली वृद्धि तथा शिक्षा म हार वास क्षय वा मा पर निमर परगी। प्रतएव भविष्य म प्रयश- राम्या म हान वाली भावी वृद्धि की दर तीन की तुलना म वही मधिन यम होगा । तथ्य ता य है नि जव जम-दर घटन लगगी और शिक्षा म य कम हान सगगा ता प्रदेश सम्या वस्तुत घटना भारम्म हा जायगा । सन् 1985 ताम स्तर पर प्रसाथिया को सम्या लगभग 7 वरोड 60 लास हा जायगी भयात् 20 वर्षों म दुगुनी हा जायगा । यह माय मद्रास अथवा पेरस जरा राग्पा म ता रारमतापूवर निम जायगा क्यापि यहाँ पहिले हा यहुन बुध पिया जा गुसरा है। मध्य प्रदेश या राजस्थान जस राज्या म यह माय बहुन हा पटिन है । भव मुप ममस्या ता सामाजिक एव प्राथिक दृष्टिकोण रा पिपरा हुई जातिया मुश्यत जनजातिया म स बालिकामा व बाला पा भर्ती परनमा है। (७) उन प्रायमित स्तर पर गा 17 वर्षो म प्रवेशाथिया की मस्या पगभग पौगुना हा गया है-1950 म सगमग 30 साग से बहार यह मया 1961 म एगमग I RUE 20 साग हा गया है। पागामी 2 दमों मातिार मा परिणाम दगी ममान होगा प्रति प्रश-गम्या म पौगुनी धि परनी गा, पर्या196) मन परा- 20 साग से बढ़ार मह सन 1951 परा 60 माग हा जायगी। सिी पपया रस बर्ग दुपनि पात्रामा पार गर म माय बहुत हा पष्टसाध्य होगा। मरिया पनुमा मतगत निगा सत्यों पा मनुपालन परन रे गि परतुन पहा एप मात्र नागर है। जगारि पहम हा म्पत्त तिमा गुरा पतिनिपन परिवारात यासामा शिक्षित करे frrary frI गिाल पमान पर अपनाना होगा । 1987 का पिसारा गायुग माना20 प्रतिशत ए जाने की मम्मारना है। (1) जिन माममित तर पर यगा हो स्थिति है, जंगी उप प्रापरि पर है। 11ों मप्रसापिपा की मश्या पौगुनी हो गयो है-1900 म 1 करा 50 सास से बढकर 1965 म यह संख्या Gकराड 10 लाम हा गयो है और सम्मावना है कि इस सस्या म 1983 तक 2 बरोड 40 साग को भोर बढोतरी हा जायेगी। इस समय विकास प्रसमान है । स्थानाय मावश्यक्ताप्रो व अनुरूप शिक्षा म समकरण स्यापित करन के लिए बुध प्रयत्न करन हा हांगे। इस स्तर पर दा मुम्य वायत्रमा पर विशप बल देना होगा-प्रथम है, एक विशाल पमान पर प्रशालिक शिक्षा की व्यवस्था । इस समय शायद ही यही प्रशालिक शिक्षा की व्यवस्था हो । लविन 1980 तक कुल प्रवशा पिया यो सख्या व लगभग 20/ यात्रा की प्रशकालिव शिक्षा की व्यवस्था या जाना चाहिए । दूसरा कायत्रम यह है कि व्यावसायिर पाठ्यत्रमा म प्रवेश-मस्या म वृद्धि की जाय । इस समय इस क्षत्र म प्रवश-सख्या बहुत रम है । वास्तविक्ता ता यह है कि 1900 म पुल प्रवेशापिया की 31% स घट- पर यह सस्या 1960 म 27 प्रतिशत रह गयी है। प्रतएव 1960 म प्ररेणाथियो को यह सम्या 1 लारा स वावर 1980 तब लगभग 4 रोड 80 साग परनी होगा भर्थात् बुन प्रवेशापिया का 2071 (1) गत वर्षों म उच्चतर माध्यमिक स्तर पर प्रवशाथिया की गरया म 5 गुनी वृद्धि हुई है । यह सग्या सन् 1900 म 2,82000 यी पौर 1960 में 10 लाप 10 हजार । विकास की यही गति मागामी दो दो ता तीब रहमा और 1980 तर प्रवशायिया को सग्या बदर 10 साग ता हो जायगा । यह मुम्पन इस प्रस्ताव , वारण है कि देश ३ तमाम भागा मइस स्तर की शिक्षा की अवधि समान रूप स 2 वप पोर यादी जाय । इस समय यह अवधि बरस मोर उत्तर प्रश्न म ही दो वप है। प्रिया समय चयनित पति नहीं अपनाया जाती तो प्रशापिया सो मम्पा इमरी मापा मोर बर जायगी। व्यावसापित पाट्यरमो म प्रवेश की गाया जा समय 40/ है इसम 30/. तर का वृद्धि को जाना चाहिए तपा मगरालि मियामी मुविधामों का (जा इस समय प्राय नगण्य है) पधिर अपराया जाना चाहिए, तापि कुन प्रदशापिया को मस्या का सगभग 21 मारामिर शिणारा ग्रहण र सरे । (6) स्नातरात्तर स्तर पर 1900 म प्रवगापिया को सस्था साप हमार थी, 1965 म बार 10 साग हा गया है तथा मामा यो माता 1985 वर पह सत्या 30 साणा जायगी। यति प्राम पनित पनि योनहा अपनाया जाता तो 1985 पर इस सम्मा म दुगुनी तया वृद्धि भी हो सकती है । कुन प्रदशापियो के लगभग 30/- छात्रो के निमित्त मावालिक शिक्षा सुविधामा यो जुटाया जाय । व्यावसायिक पाठ्यक्रम में प्रया सम्मा को पुन प्रवशाथिया की मस्या को तगमग एक तिहाई सम्या सर बड़ाना होगा। (1) स्नातकोत्तर-म्नर पर सुविधामा म बहुत प्रधिर विस्तार को भायरसता है । 1900 म यह मम्मा 19 हजार यो मौर 1967 म 1 साप 8 हमार। 1987 ता यह मम्या और अधिक बढ़कर 9 लाख 60 हजार हा जायगी । यह इमलिए कसरि माशा पो जाती है कि प्रवर माध्यमिक स्तर में अध्यापकों म रा कुछ निश्चित मध्यापक तया प्रध्यापन प्रशिगए सस्थामा सास्त मध्यापा म्नातरोत्तर परीक्षा उत्तारण करगे। उच्चतर माध्यमिर स्तर तया विश्वविद्यालय स्तर पो शिशा म विशाल पमाने पर हान वाल विस्तार जिगाा सस्त ऊपर पिया जा पुरा है परिणामस्वरूप स्नातकोत्तर अनुगपान सम्बधी योग्यताएं रमने वाले प्रध्यापका को बहुत बडी मम्या में पायपाता हागो । माघ कृषि उद्याग तथा नोरिया मविपामरे निमित्त मा रोमे पतिया का यहत मधिर सम्पा म मावश्यकता होगी। पिता पवम्या प्रगत 1900 में पराड 10 पाय व्यति प्रवेत पा पुरे थे पर्थात् कुन जनगम्पा का प्रतिशत म बुध पाडा सम, 1965 म पह गाया पहारा राह हो गया है भर्यात कुल जनसल्या का 14 Hinमाया पो जाती है रि 1995 ताग मम्मा म पोर वृद्धि होगी तपा मह ।। मरोहा जापेगा पाप पुन जनमम्या पा 23 प्रतिशत । 98 निक्षा तथा सेयायुक्ति अपमित निमपस्या र मतगत जिला राया मपायुति (एमप्नाय मट) म माई गापा गम्पप रहा है पोर न ही उनम शिला-पपरणारे परिगामा पा न बन पा पासपरनामा प्रयवा राया प्रयगर। म पनिष्ठ पर स्थापित पर गई पत्रपट गम्प प स्थापित रन मा प्रन पिया गया है। अगर जामनुगगामा गया है उमग रिला पोर सेगापुषित म गम ग बम निषि प्रसार मारपसा स्पातिर म गहमाग प्रयास हो मिनगा। यह भी पोपा निम प्रारण म गाम गम्य प स्थापित को गषा mr एनीमा निर्माण मरने को गिा मरा रिय ना रा गाषित है रिगा पनुगार मोहामाई नाना पापि प्राप्नर मना है उस इनाम उपियारे गाप-गाप गरा नियुक्तिमा पाग मी दया गाला गेमा पनि म मुधार गा I from मारेग्य हा १५ जायगा तथा वे मनुभव करने लगे कि देश को उनकी भावश्यकता है और यह उनको प्रोतमा कर रहा है । 99 इम ममस्या पा सतापनः नितान एशात म बंदर नहीं किया जा सपता । इस मुनमान व लिए तीन दिशामो म मभियान भारम्म भरने की मानश्यकता है जनसख्या पर नियंत्रण, शिक्षा तथा मायिक विकास । जाम की ऊंची दर से वारण इस समय यमित प्रसमूह (Cohert) यो सख्या नहीं अपित की है (पर्याद जो वालर यातिवाएं 16 या इसम अधिक भायु प्राप्त पर रते हैं व इस वप म भिर बन जाते हैं) । कुन जनसस्या की प्रतिशत मास्या अमिर बन जाती है । एसो स्पिति म शशिष उपपियां मो नगण्य ৫ অথরি ৬০ ঘনঘন ঘদিৰ গঘিরি ৪ লাখ বা বল লামন 4} प्रतिगत शायमिर शिक्षा यो समाप्त पर पामेंगे। इस 40 प्रतिशत म से भवन सामग 23 प्रतिमन 5 वप में पधिर अवधि तर विद्यालय में पढ पायेगे, सगमग 8 प्रतिया माध्यमित विद्यालय की शिला समाप्त कर पुर होंगे सपा मेपल लगभग 1 प्रतिशत विश्वविद्यालय प्राप्त पर घुदे होगा इस साय हो माथिर यिाम को गनि विशपन पामीण क्षेत्रो म इतनी पामो हाती हैरिम प्रगमूह ५ मा यमिक लिए भी पर्याप्त नौरिया नहीं होती। या स्थिति में सुधार करना है, तो यह परमावश्या है कि निम्नलिखित শাবনী লক বিষয় যান না যা লিমায় বিনা লায় -~-10 प्रपया 15 वर्षीय मुनियामित मामत्रम में मन्तगत गम-दर मापोरना, -~-पायिर धिरास मो सोवता से इस तरह पूरारना प्रिपर ऐसे मुस भपमा ऐतो युक्ती कनिए नोररी की व्यवस्था हो यो थमिर बनना चाहते हैं पौर युवा बानर तथा मानियापों या ऐमो शिणा प्रदान करना कि निन्टिाप करते हुए व राष्ट्राय विरास पायकम में प्रभाव मानोग से माग से सरें। मी यारनामों को राष्ट्रीप, राग्य तपा निता तरी पर मावश्परता है। इन पासना निर्माए ममा इनरोमार्यायिारने र उत्तरदापिरवद्रीय राय और स्थानीय सरसार पाहै भाषा सेवायुति की समस्या का Com मारनामोरे परिप्रेन्य में हा रगर मुममाया मा सरता है। 100 गिमवसरों समरस FI महासपूर सामाजिश रों मचे एर उद्देश्य यह भी है रि नतिश भामरों का इस तरह ममारण किया जाय कि पिछडे हुए प्रयया मुविधामो रा वचित जातिया के व्यक्ति गिना के सहयोग से अपनी प्रवस्था को मुपार राखें । मक्षिा अवमरा का सम्पूरण समारण सम्भवतया असाध्य है । मत समम्या पो जड यह है कि उन तथ्या यो गाज निरालन के सतत् प्रयत्न रिय जाएँ जा अममानता ये विमिम गा को जन्म देने की मोर प्रवृत्त हैं पौर एसे उपाया को अपनाने के प्रयत मो रिस जाएं कि यदि इन वाघय तस्या को पूरी तरह से ममाप्त नहीं किया जा सरे ता कम मे यम उह यूनतम तो पर लिया जाय । इस टिकोरा म नि शुल्ल शिभा छानवृत्ति, पपग पालरा मी शिक्षा देश के विभिन्न भागों में शशिर विकाम म, ममतुनन म गमी तथा सहरियो पी गिना अनुसूचित जातिया तथा परिगरिएन जातिया सगम्मपित गायत्रमों या विरगित करना होगा। 101 नि गुल्फ शिक्षा दायो म निगा म प्रयत्न करना चाहिए कि सम्पूरण शिना शिक्षण शुल रा मुरा' हा जाय । घतुय याजना के मत तव प्राथमिर शिमा तपा पांचवी याजना रे मामा पर माध्यमिक शिला पा शिक्षण गुरम मुक्त पर पिया जाना चाहिए । सर साप साय ही उच्चतर माध्यमिा ग्य विम विचार गिला पाग्य एप जररतमः पात्रा या नि शुfTI दी जानी पाहि पाय यह हा मिन प्रग गम्या 420 प्रतिशत छात्र नि शुन गिता ग्रहण पर गरें। 102 पाट पुग्नता तथा गगन मामग्री का नि गुन यिनाए सपा निशुल शप मेवात (जिनम रिपासप गमय म मिाने याला भोजन भी मम्मिनित १) भारि गित माना जानी चाथि हरमम्मय प्रयत्न Frपागा पाहि fr पायगुग्गा। ना मूर यहन बम हा सयाजमा Fिr पनि हानि पियाजा भुरा है गमात्र पात्रों के लिए पाप-पुस्ताा की म्याहा नपा उनम गुगामापर मम्बया मुधार पायत्रम या गर्योप प्राशजाय पाना पायजमा-पिपासप निषिरमा गया सपा विचारतारा यि जान था। मारन मा-या गा मापा उगम्पह विरारािना पानि । 103 पात्रवृत्तिपातपा पात्र-सहायता दे मयप्रकार पातिमा-गातार पर प्रसार रे पापमा निम्न मिति पाशा पा सिगारिया जाना पारित ५७ 700 (1) frक्षा के विभिन्न स्तरा पर छात्रा को धानवृत्तिया दी जाएँ, कुल प्रवेश सम्या के अनुपात म उनको सख्या लगभग निम्नलिखित प्रकार से हो कुल प्रवेगापिया के अनुपात मे दो स्तर जाने वाली छात्रवत्तियों 1975-76 198566 उच्च प्राथमित्र 25 500 1000 माध्यमिक (मामा य) माध्यमिन (व्यावमायिर) 3000 5000 1500 2500 प्रवर स्नातम (क्ला एव वाणिज्य) 5000 भवर स्नातर (विज्ञान तथा व्यावसायिक) 3000 स्नातकोत्तर 2500 5000 (u) उच्च शिमा म तीन प्रकार की यात्रवृत्तियाँ हानी चाहिएँ राष्ट्रीय छात्रवृत्ति, विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति तथा ऋणा छत्रवृति । राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना म विस्तार वो अावश्यकता है तथा छात्र वृत्तिया वा धापणा एव उनका शीघ्रता से चुकारा करने के लिए इसके प्रशासन म मुधार किया जाना चाहिए । इह प्रधिर मे अधिक समतामूलक बनान के लिए प्रावश्यर है यि पापी छात्रवृत्तियां राज्य स्तर पर उमी तरह प्रशान पो जाना चाहिएं जिम तरह प्रभी प्रदान की जा रही हैं और शेप पात्रवृत्तियों का विद्यालय पुञ्ज (School Cluster)वे आधार पर वितरित लिया जाना चाहिए भर्यात् छात्रों के सामाजिर एव माथिक आधार म समा- ना से किोण में एप जस विद्यालया का एक पुञ्ज बनाया जाय तया प्ररयर विद्यालय पुन रे श्रेष्ठतम पात्रो को छात्रवृत्तियां दी जानी चाहिए। राष्ट्रीय धावृतिया पूरप व रूप में विश्वविद्यालय छात्रवृत्तिया तथा ऋण पात्रवृत्तिया वापरम लागू किय जान चाहिए । ऋण धात्रवृत्तिया की परस्पा राष्ट्रीय गुण छात्रवृत्ति वा द्वारा का जानी चाहिए और इसे विनान सपा प्यायमायिर पाठ्यत्रमा म छात्रों के लिए विशेष उपयोगी बनाया जाना पाहिए क्योकि इहीं क्षेत्रों में सेवायुक्ति एव प्राय की अपेक्षाकृत मच्छी मम्मारनाएँ हैं । यहाई धात्र राष्ट्राय ऋण छात्रवृति प्राप्त करता है और मत्स्चात् मध्यापन व्यवसाय म प्रसर करता है, ता प्रति सवा-वप म पण मा दगा पाहमया रे लिए यमूल परन म पादरिया जाना चाहिए । (m) लिमा म अध्यपन पल हेतु मवश्रेष्ठ प्रतिमा-सम्पन्न छात्रा का धात्रवृत्ति दागे मम्बपिा ए राष्ट्राप वायक्रम हाना चाहिए क्या लगभग .
500 छात्रवृत्तियाँ प्रतिवप वितरित की जानी चाहिएँ । (1) छात्रवृत्ति या गति इतनी होगा चाहिए कि उसरा ममी मात्र पूर हो जाएं जग सपरिवार रहने वाले छात्रा का शिभरण-शुल तथा भय निजी खर्च, जमे पुम्त मागि। जिन छात्रा का छात्रावासा म रहना पडे उह पावारा एव माजन-सम्पधी व्यय का वह्न करन क लिए अतिरिक्त राशि दी जानी चागिए। (१) सर्वोरम परिणाम प्राप्त हा सरें गलिए छात्रवृत्ति बायक्रम म इन दो मार पापत्रमा मा भी सम्मिलित किया जाना मावश्यर है (म) प्ररयर क्षेत्र म तया प्रत्येर म्नर पर अप मस्यामा पी पर्याप्त मम्मा म व्यवस्था (ब) एक एो कायका या विनाम जिमा मतगत छात्रवृत्ति प्राप्त छात्र इन थेट गस्यामा म प्रवेश गरें। (1) उच TिHER सत्र म पात्रवृत्ति प्रदान गरन का अधिरा उत्तरगपिन मारत गराार का यहन पराा चाहिए। विद्यालय स्तर पर यह उत्तरदापिय राज्य गरवारों को यहन परा चाहिए जिह पागामी दम वणे तर अपने पम उद्देश्य म एप पद्राय परामचालिन मायक्रम माध्यम महान्ता दी जानी चाहिए। (vii) पात्रा पा सहायता दने सम्बधी प्राय तराा पर भी ध्यान यिा जाना चाहिए गिरे भगत यातायात वा मुविधाए छात्रायाम में परम पत्तियो नियम मध्यपन बदामा परम्या पोर पायाग गणे सपा उपाउन परने हा मोगो का मुषिपापा को मा सम्मिति पर माता 101 अपग यालरों के लिए शिक्षा नाम उपागम हा Fि15 प्रसग गग तुपा पाग यामा नपा मगमग र मानगिर पग परिमित मानापा 1096 nr fपी पपापा पा जाप । गर गाय-गाप पार प्रा प्राrिr टिपान T; या मानमिर पापाग ग लगा मान र म म पाना मााि fo मा माग माप (Sers ices on Pilot Basm) या विपन रिया जाय । पपग infrint निमित न मम मम्मा र सिम Meanो पति नपाम गुन पायमा मायासि करन ना हर गम्मर प्रयत्न किया जाना चाहिए, जिसर अतगत अपग बालक नियमित विद्यालयाम मध्ययन कर सके। इस क्षेत्र म वापरत शिक्षा के प्रशिभण शाप वाय तथा विभिन्न प्रभिरणाम ताल मल स्थापित करन को दिशाम भी विशप ध्यान लिये जान पी भारश्यकता है। 105 क्षेत्रीय प्रसतुलन मक्षिा विकास की दृष्टि से विमिन राज्या म बहुन वडा प्रतर है और जिला-स्तर पर ता यह तर भोर प्रधिर हाना है । इस असमानता वान मम्पूरात मिटा दना सम्भव हो और न वाहित हा । फिर भी एप सतुल वारा घर (Balancing I actor ) को भावग्यरता है मा मुनियाजित एव दीपमालिस प्रयत्ना द्वारा कम विकमित क्षेगा का सहायन की जाप सारि व कम म मन एप निश्चित यूनतम स्तर प्राप्त पर रा परत उनम और प्रधिा विरमित धनो म भपिर चोटी साई न रहे । इस हेतु माहिर मायोजना तथा विकास व निमित्त जिल वो मूल वाई माना जाना चाहिए ।पही राज्य के विनिर जिताम मभिव विवाग के स्तर को समान परले ने लिए मुनियोजित प रो कोई नीति अपनाया जानी चाहिए । राष्ट्रीय स्तर पर विपिन राग्या म मलि विरास के स्तर म समानता लान बलि भारत ससार का प्रयत्न यरन चाहिएं। 106 यालिशप्रा की शिक्षा यद्यपि गत पुप पर्पो म वालिकामा की ाि बारा को शिक्षा की सुनना म तीच गनि स यर रही है फिर मा उनम बहुत वटा मतर है। उगहरणाय 1965 66 म प्रत्येर नामाक्ति 100 पालना ये पोध वातियामा का सम्माप्रार यो निम्न प्रायमिर स्तर पर 5 प्रायमिर स्तर पर 33, माध्यमिा नर पर 26 विश्वविद्यालय म्नर (गामा य शिला) पर 1 मागापिस पाठपरमों (विधानप सर) म 23 तथा व्यावसायिर पारामा (महाविचारसर) 414 प्रायमिर स्तर पर ममतर यो समाप्त परन गया मापार स्रा पर इसे कम करने का मावश्परता है। महिना ािमा राष्ट्रीय समिनि न जसा नि सिफारिश का है महिलामा पर माणामी बगै म पपिर मान लिया जाना पानि मर विराम के निए विजिट पारनार बना जाना चाहिए तथा प्राथमिकता में पापार पर पामार राशियाई जागा पाहिए। दोना ही पोर रागोमयारिसरापों सपा महिनापापीमिा सोनार नि मिनरी ग्यापित 107 जहाँ जनता को मांग हो और प्रशासनिक दृष्टि स सम्भव हो, वहाँ माध्यमिक तथा प्रवर स्नातर स्तर को वालिवामा की शिभा की व्यवस्था अलास की जाय । कला मानवीय विपया विमान तथा तपनीका पाट्यत्रमा म यात्रामो यो प्रवेश वा उ मुक्त सुविधा हो । इसव अतिरिक्त उच्चतर माध्यमिर तथा विश्यविद्यालय स्तर पर छानामा का उन विशप रचि, जसे गृहविताा उपचर्या शिक्षा मामाजिव याय अथवा व्यापार प्रशासन तथा स्पस्या मादि पाठ्यत्रमा वा उपलब्ध करान व प्रयत्न पिय जान चाहिएं। 108 शिक्षित महिनामा को रोजगार दिलाने की मुख्य समस्या पर ध्यान दिये जाने यो प्रावश्यक्ता है, क्योरि विवाह को प्रायु सीमा म निरन्तर वृद्धि हावी रह्न के कारण लगमग समी अविवाहित एव वय प्राप्त महिलामा के लिए पूणकारिक रोजगार यी व्यवस्था परनी होगी। ज्यो ज्यो परिवार नियाजन यदना जा रहा है उन मधिर आयु वाली महिलामा + लिए भी रोजगार से अपसर तुटान हांगे, जिना वाला बडे हात जा रहे हैं । शिक्षित महिला यर (Woman Poner) का उपयाग उठा लिए उचित माध्यम विरसित परने में माय साय भशकालिन राजगार व अयसर साम निशान हागे वापि महिलाएं अपने घरा वा दम्पमाल मा कर ग और कोई पर रेवाहर ध्ययमाय भी अपना रा। 109 शिया हर स्तर तथा हर क्षत्र म मध्यापियामा पी नियुक्ति को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए । उह प्राकालिन राजगार के अवसर भा यहा वसा सग्या म उपसम्म पराय जान चाहिए । ग्रामाण क्षेत्राम पाय परने में निष, मध्यापिकामाया पापित परन हेतु प्रौर महिलामा र साप्त पाठ्यक्रम मा विस्तार देना हागा सया ग्रामाग मत्ता प्रथया मावारा-व्ययस्था जमी विप गुपिपापारा उपम्प परामा हागा । 110 पिपरी जातियों की शिक्षा रिया गाशिवामा पिा पर विशष ध्यान Pिया जाता रहना पारिए। मनुगूचित जाति म रिगा का पहत प्रगार हुपा है । भव पावा यह कि प्रतिसविराम र मापामों पा परा प्रधिर गोमा र विस्तार किया जाप मिमर पतगत राजगार मधिरापिर प्रगर उपमरान तपा मामागिर पागाप पगिय पिल्ला मगरल परवारेि गाने पी पायरता है। घुमार सामिा तपा मिति aft गिलिपाने की परिन ममामा पर पिकमि पारसना प्रारमानानिm mantr व्यवस्था पर विशेष बल दिया जाना चाहिए । अनुभूचित जातियों में शिक्षा के विस्तार मजा भाषिक एवं सामाजिक पठिनाइयाँ है उह समाप्त करने के लिए बहुत हा एकाग्र हावर प्रयरन परन की पावश्यक्ता है। प्राथमिर स्तर पर मुविधाएं जुटानी होगी तया दूर-दूर बसे क्षत्रा म पाश्रम विद्यालय सालन हागे । मध्यापर वहाँ यी जनजातीय मापा या भनियाय रूप से जानकार हाना चाहिए । प्रथम दावों की विद्यालयी शिक्षा पा माध्यम जनजाति मापा हाना चाहिए तथा इस काल म वच्चा का क्षेत्रीय भाषा म भौतिक शिक्षादा जाना चाहिए । तृतीय वप म दात्रीय भाषा शिक्षा पा माध्यम बनाया जानी चाहिए । विद्यालय र कायम वहाँ के वातावरण एवं जीवन रा सम्पृक्त हान चाहिए । माध्यमिक स्तर पर विद्यालया, छात्रावास-सम्बधी सुविधाप्रा तथा धात्रवृत्तियो म बहुत मधिर वृद्धि करनी होगी। उच्च शिक्षा क्षेत्र म पात्रवृत्ति वायत्रम स सम्बधित प्रशासन को विद्रित करना होगा मोर उस अधिक गलतापूर्वक चलाना हागा । दोना ही माध्यमिर सपा विश्वविद्यालय स्तरा पर विशप मध्यापन या व्यवस्था वरना होगी। जनजातिया की सवा म अपने पा समर्पित पर सरने वाल सागा दी सम्मा म वृद्धि परना परमावश्यर है। भारम्भिर अवस्या म तो इनम से पधिमाश साग जनजातियार बाहर से हांगे, परन्तु प्रयत्न करना हागा मि स्वय जनजातियों म स हा एस म्परित तयार हो।
अध्याग ४
5
कुछ विशेष कार्यक्रम
।
111 सभा स्तरा या वसभी क्षेत्रका शिशा गम्वयित उत्त मामाय
भापत्रमा माय साय यह भी भारश्या है ir विभिन्न स्तरो तथा धिमिता
EART म बुध विशेष वापक्रम विकसित किय जाय ताकि देश के लिए प्रावरपर
शिला र माभून पातरणका पूरा रिया जा मम । इनम मम्मिलित है
~माध्यमिर TिA या व्यावसायोमरण (पॉशानाजान)
-उमा पा अध्यया ये मनपा मुग्य विश्वविद्यालय, सम्पूण विश्व
विचार आपल्या या गुगठिन करना,
दिया नया तानारा (जिगम जानिया नया विवानिको भी
गिगा भी सम्मिलित है)
-क्षिा ढोच का पुनगठन,
-ग्री मिला
-पूर्व प्राथमिr fTHI,
-शशिर भयन पोर।
-क्षित भाप ।
ना विषय म भागम हो म पिपरा रिचा गया है।
112 माध्यमिर पिता का प्यावसायोपरण
या महायपूण धार पर पापममा म प ना यह जि माध्यमिा
ािा पारगापारण रिया साय- यह है fr 1986 सर निम्न
मालगिरनमा मामिार पर मामांति पात्रा मस 20 प्रतिशत नया
उगार माध्यमिर पर पर 50 Firm rr या पागापिर पायम
जप गरबा गरें । गा गुरिणापा TT पर ना पापापातामो ग
साहापागि माता शिपमपारीकग जागा
मम्मी प्राय है की गाया मम्मी पाय यमनामा मा हर
TF नुमा पिसापूस लिया जाय ।
-nी पासTIो र गम्प प म नदियागी सम पूर्व
तासगापि Form मिल मंगाया की स्थापना 14
प्रशिक्षण वायत्रों का गठा तथा वतमान म चल रह पायत्रमा म वादिन मुधार और प्राप्त सुविधाप्रापा पिस्तार पारि समा दाता का जन-बल सम्बधी प्रावश्यक्ताप्रा वे विषय म भविष्यवाणी करत समय ध्यान म रसा जाना चाहिए। 113 रस स्तर पर उपाय वगयी जाने वाली व्यावसायिय शिक्षा पाटम कई क्षत्रो से सम्र्वा घत हा जम पि उद्योग व्यापार एव वाणिज्य, विपित्मा तथा जन स्वास्थ्य गृह-व्यवस्या बला तया हस्ताना साचिवित्र पाय इत्यादि । इन पाठ्यत्रमा या उद्देश्य न केवल सावजनिक क्षत्र और निजी क्षत्रो मे रोजगार का मुविधाए उपल ध कराना हाना चाहिए अपितु स्वय राजगार म लगजान यो क्षमता पग पर देना भी हाना चाहिए । इन पाठ्य पमा पा एम छात्रो की भावश्यवनामा यो पूर्ति भी करनी चाहिए जा विभिन्न स्तरो यी सामाय शिक्षा प्राप्त पर चुर हैं उगहरगाय जा प्रायमिर अथवा निम्न माध्यमिर TिHा स सम्बंधित पाठपत्रमा यो पूरा करन से पहले ही विद्यालय घोड पुते हैं । इनरा सगठन यत सचोला हाना चाहिए । शिशुता (Apprenticeship) प्रकातिर, हे रिलीज पत्राचार तथा ममित सघन पाठपरमो माधार पर व्यावसायिर ाि या विस्तार पिया जाना पाहिए । ति सस्याए (सामा र तथा व्यावसायिर) सुगरिन पाम तथा पौधोगिर प्रतिष्ठान विभिन्न सस्थामा भयवा इन सबर सम्मिनित प्रयत्नो के माध्यम ग उगा पाठपरमो पा विपमित किया जाना चाहिए। 114 कृषि शिक्षा प्रायमिर भयवा निम्न माध्यमिर स्तर पर दृषि म प्रौपचारिक शिक्षा दने र सम्बन्धित प्रपत्ल प्रमा तर सफ्त नहीं हुए हैं और सफलता प्राप्त हान मी तय तर पाई पाशा भी नहीं है जब सर मिशिक्षित पत्तिया को एस तरीरातारा पिनाय के प्रति भारपित नही दिया जाता जो कृषि को पर्यास रपम पर्योपाजन यापन वा मोर जब तर शिप्रामाण क्षेत्रा ममम ममम दुध निरिपन पूनतम मुविधामो पा पम्पा नहीं की जाती। पतएप यर यापनार है कि निरट भविष्य म विद्यालय स्तर पर निम्न विप्रों पापार पर गिक्षा ासिराम पिया जाय। (1) सनी भापमिर तपा माध्यमिर विचारया निनम रीसर विधारमा गम्मिलित है मानापमोपिया पार प्रवृत्त करना पाहि गर पिपि-गम्बा रिमा गिर पायम की भावापरता नहीं है. परितु मामार पितान जोव पिता सामाजिर गान गरिरात पारि प्रति पाठ्ययमों का इस तरह अमिस्यापा पिया जाय कि उनमें मान्य वातावरण नया दृषि विकास में मानपाली समस्यामा पा समावेश हो आय । इस स्तर पर कृषि यो कार्यानुभव या महत्त्वपूर्ण प्रश वना दना मी मामय रहेगा। (u) क्सा 10 स पूर्व कृषि की औपचारिक शिक्षा देने का माई प्रयन नही दिया जाना चाहिए। मविष्य म पृपि वा व्यवसाय के रप में अपनाया जा गर, इसी नयारा के लिए इतना हो पयात है कि छात्रों का इम स्तर पर मामाय नि माय-माय गरिगत तथा दिनान वी शिभा का विरोप पान गरादिया जाय। (1) मगा 10 ये वार कृषि की मौपचारिक शिक्षा प्रारम्भ की आनी पानिपौर वह भो पि को पोलिटेक्निक मम्याग्रा के माध्यम से। थे मस्याए एव प्रकार मे बहुद्दगोप सस्थाएँ हागी, जहाँ कृषि तया तत्रामधी तातिए पायपर बुराततामों का प्रशिए दिया जायगा तथा इनके पाठपक्रम ५ माग से मार तीन वपता का विभिन्न अवधि वाल होंगे। इनर गठा म पर्याप्त मपीपन यो त हानी चाहिए । परन्तु रनरें पाठ्यक्रम बहुत ही पापहारिप तपा मुभ्य रूप म सम्पूर्णता पिए हुए होन पाहिएँ । सामा पाया इनसरा उदश्य साई वितिम रोजगार दिनाना होना चाहिए frतु ऐगी गमुचित व्ययम्या पयार होना चाहिए कि पाहता योई बात हा मपानी पार प्रधित मध्यपन गररे उ7 शिक्षा म मम्बघित पाठयम म प्रवेश म गर । इन पोमिरिना संग्यामा म वि स युवा गृपया तथा प्रामीण गों की महिमापार लिए गणित पाटपरमा यो व्ययस्या भी होनी चाहिए। मागिर पापा एव पुराता वा हेष्टि में य गंम्पाएँ बहुत विशाल होनी पाहिए जिनम गमग पर हजार प्रवेश स स तया जहाँ यहीं भी सम्मा हा पगापाएं कि पियविधातरम घनिष्ठ सहयोग मे विरागित से जाना पारिए। (1) मा प्रारम्भिर प्रपया माध्यमित पायरम को मिला ग्राम (भपया कप पारिता मेस्थाों या पिरविधानाम form Farm पुग) प्रपिता मा म पु मारम अपि पार पाना मरगार बनायेंगे। रितु मागामी दुपयगे मजो सुवर परिकोपगार र पम गुनगे गम गे पपिराग ये माग गे रिहाने जापान frmr पामो गमाग परन में पूर्व ही विपानव स्वागया पारगे 14 मारामादेन निपित प्रगार गवा पायत्रमा को मुढ़ बनाना होगा तथा प्रत्या मामुदायिर विशाम वण्ड म एक प्रायमिर प्रसार मवा बद्र स्थापित किया जाना चाहिए ।इन केद्रा पर वायरत कमचारी वग उन तृपरा की तुलना म व्यावहारिव पान म अष्ठ हाने चाहि जिनका वि उहें शिक्षित कराना है, उस क्षत्र र सफ्न पर इन वे द्रा म पनिष्ट पगे जुरे होन चाहिए । कृषि विश्वविद्यालय की प्रमार सेवामा माध्यम म इन पदो को पय प्रशन तथा अधिकाधिक महयोग मिलते रहना चाहिए । पासपाम व युपर कृपा वा चाह प्रशवालिक चाह मक्षिप्त पारपत्रमधे मापार पर कृषि शिक्षा दने के निमित्त न केद्रा का उपयोग किया जाना चाहिए। 115 उद्योग के लिए शिक्षा उधागा म कायरत पद कुशल तया कुशल कारीगरा तया मध्यस्तराप मिस्त्रिया को प्रशिक्षण दन व चार मुख्य साधन हैं अर्थात् मोयोगित प्रशिक्षण मम्मान (पाई टा माई ) सनिष्ठ तानीको विद्यालय तरनौरी उच्च विद्यालय, पानिकिनव तया एप्ररिमणिप एक्ट व अतगत प्रत्त मुविधाए । नव मनावा और भी प्राय साधन हैं जसे मामुदायिक विधाम कापत्रमा मतगत विरामित पारीगर प्रशिमग वेद्र यादा एवं ग्राम्य उद्याग कमीगन मतगत स्थापित हस्तकला प्रमिण पर व्यापार विद्यालय ( सरकारी mनिजा) तथा बहुदलीय माध्यमित विद्यालया म व्यावगायिर प्रगिलण। "ग मशागत प्रशिगण मनाना वतमान श्रमशक्ति या प्रश ऐमा मा है ना वाम पर गापा नग जान म वाद वाम करते करत सीसा है अथवा जो परम्परा म पर पा रह पतृ पप म पिता स पुत्र के प्राधार पर प्रशिाग प्राप्त है । प्रमा मा जो मुरिया उपनग हैं व माधुनिक उद्यागा को मानामा यो मह नजर रगत हुए पपर्याप्त है और यया व गुणात्माता रटिशाम उप-म्नर दी है। 116 भोणगिर प्रणि मस्याना या बटा मधिर विगार करना होगा । उन पाता सिमपिर स्पान उपनप पराप जाा चाहिए ताप्रापमा ाि पूरा पर पुर । म रहिम प्रथा पारा पूनतम गोमा 144 हा इस पर विचार पिया जाना चाहिए | प्रतिण उपाना मुग हाना पाहिए सर रिमोवापि प्रमिण मस्याना का प्रामानिलिया जाना मागितfr पारगानोंग उम्पाग्न साप प्राम पर सपा पप गरि मस्यापा में उपसाग हेतु मामा निर्माग परें। 117 पछि सरनी विचारा पुन मरण रिया बाप पर्यात है उहें तानी उच्च विद्यालय की सपा प्रदान का जानी चाहिए क्यानि कनिष्ठ' भरा पाई तात्पर ही नहीं निकलता । वामान तकनौरी उच्च विद्यालया व पाय गाय हमी युगल बारागरा वा प्रशिक्षिण देन वाल विद्यालया म परिवनित पर दिया जाना चाहिा जा दाना हा छात्रा तथा नियोगा। या मानपित कर सकें तया इह सामा य माध्यमिक शिक्षा पा मजबूरी म अपनाया जाा वाना विवल्प या इह पालिटकिनर विद्यालया के लिए प्रवेश पाग्यता पा रार्चीला तयारी स्थल न मममा जाय । पायरम पष्ट प ग पारपिर हान पाहिए तया उपाप समय के अधिकतम उपयाग द्वारा इन पाटनमा या इस प्रकार से व्यवस्थिति रिया जाना चाहिए पिटिगािकर की प्रायश्परनामा की पूर्ति हा समे ( इस एक्ट का धारामों म एमा सोधा लिया जाना चाहिए fr इन विद्यालया द्वारा मपन पापिन दारा नियुक्ति जा सके) । इन पाट"त्रमा का समाप्ति पर प्यापार प्रमाण-पत्र प्रान विप जान चाहिाँ । यह मावश्या नही है कि पाय म यो पयघि तीन वप हा हा । विभिन्न पाठपत्रमा म पापार पर मपपि का घराया बढ़ाया भी जा सकता है, लेकिन दा ममा विद्यालया म प्रायागिर गाय तया प्यमहारिष विशान पर विशेष यस रिया जाना पाहिए । इन पिटपा में पाधार पर पुनगठित परने राया वतमा। PिM म परम्पर शनि का वम यि जात परिणामस्वरूप तपा गामाय शिक्षा को पपिर महाप दा र पतस्परूप पुस पारीगर तयार पहिरोएसपताना उच्चपिचाय भोगागिर मिग मस्या सपा गामा 7 माध्यमित विद्यालयों का गुमा म मधिर पच्छ विकल्प गिरोगरा। 119 पारिपिता मम्यामों मरा विमार रिया जाना चाहिा । यतमान मजो उनम मामयपी उपादा उगम पिया जाार उनम पार पापमामा निम्नतिगत पापार पर पमियान दिया जाना चाहिए- (6) पागा गाया मरि पयाण रिया जाना चाहिए गिरा उस पार (1) गणि सरना तथा विभिन्न रा पर गा मा पारित मिनिया से गणपियों वार म सारा मारना। इन रानियों का fr पाना पादित।1ोष काम निम्न प्रकारे मामर मग मान मिया । (1) मोर " पौमागिर पनुभव . मग जाना हा पासपी ६७ चाहिए और वह ना विशेषत प्रशिक्षण के पतिम वप म इस प्रकार प्रशिक्षण वा अधिकाधिर व्यावहारिस म्प दिया जाय । इस दृष्टियाण स पालिटेक्निक मम्यामा को मोद्यागिर क्षमा म ही प्रावश्यक रूप से स्थापित करना होगा। (1) यमचारी यग व वतन म उचित मात्रा म वृद्धि का जानी चाहिए तथा तपनायना वा समाज तया उद्योग म उच्च स्तर प्रदान दिया जाना चाहिए, न म समय महमूम का जा रहा मी यो पूरा किया जा मर । अध्यापन इजानियरिंग महाविद्यालय से स्नातर उपाधि प्राप्त होन के साथ साय प्रया व्यावहारिक भनुमय सम्पन्न भो हा । उधागो म बाय कर रहे व्यक्तिया यो शिर यनाय जाने पा अधिन प्रयत्न रिया जाना चाहिए । पोलिटेक्निर गम्यामा म यमचारी वग (जिनम हाल ही म नियुक्त यमचारी नी सम्मिलित हैं) लिए ग्रीम रिद्यानयाय विस्तृत वायत्रमा का मायाजन पिया जाना चाहिए। पानिगीना मम्यामो ये शिक्षा लिए प्रशिक्षण महाविद्यालयाचे सायनसाय धनाय जानियरिंग महाविद्यालयातया तपनीसरी मस्यामा म विशिष्ट पाठ्यक्रम मारग्म पिय जाने चाहिए तारि प्रशिक्षणायियों या गिरण अभ्यास एव उत्पादन अनुमय गम्ब पी नवीन गान लिया जा मर माधारभूत विताना वे सम्बध म मी पायरम भारम्भ दिए जाने चाहिएं। (१) प्रत्यर पालिटेक्निर म माधन गम्पन मुव्यवस्थित पायशालाए सपा प्रयोगशालाए होनी चाहिए तथा उना पूग उपयोग रिया जाना चाहिए। प्रयागनिम पात्र व अध्यारा वा हाय में चला बार या साल मगीन यत्रो घार सय तया डिगि मापारि वो महायता म या ता वित्रा लिए अपना माध्यमिा विद्यालया यो मामान उपल ध मरवान लिए उत्पादन गाय करना चाहिए। (1) उद्या माध्यम म पनि सग्या म तरनीपत प्राप्त हान रग मोर प्राप्त होत रह गा लिए उ प्रारहित परत रहना चाहिए। नानानानिए मारासि पायत्रम प्रारम्न र पानिस्निर गस्याए इम मिपापा सहयाग पर मरता पद्यपि प्रधिर सरसतानापारणाना मग म निर्मित अन्तपिक्रमाय पाटारम (Sandwich type Cour ses) को वा मम्यामों म धनार जान पर ही निगा। (11) गमा पारिस्निा मस्यामो म महिलापा का विगप चि में मार्ग पर पाऊसमा का विगित बग्न लिए मुख्य रुपम ध्यान दिया जाना पाहिए। (30) पारिना गम्यामा म मिान एय nिi fTo 1 ६० विपत पालिटविनर मस्यामा में प्रथम दा वप व शिक्षण मे, अधिक दृढतापूवक चलाया जाना चाहिए । तरनीरजो य निमित्त पाटपरमा म पौधा गिर मनाविन एप ररस्था, मूल्य निधारण तथा अनुमानितारग का प्रारम्भिक पान रिया जाना चाहिए । (1) जिन तरनीगा का विसा उद्याग म बुद्ध वप या अनुभव प्राप्त है उनके लिए चुनिन्दा पारिरिना मस्यामों म म्नातरातर उपाधि पाठपरमो यो ययस्या का जाना चाहिए तानि व उच्च श्रणा ये तानावर का याग्या प्रास पर मरें। 119 पृषिय उद्योग गिगा पाठमा ६ मम्मघम जा शिवचन पर प्रस्तुत रिय गय हैं उगर अलावा व्यापारिप पिपिस्वर्गीय, भानिज तपा पोचागिर पातामा नया महिनामा का विशप वि स मम्मधिन क्षेत्राम रोषा पाठ्यक्रम तयार लिय जान का भी बहुत गुजायश है । इसका पूरा सरर उपयोग लिया जाना चाहिए। 120 तासावा उच्च रिद्यालय पनिष्ट तानीकी विद्यालय पालिटविनर तया पार पावमापिर पाटमा म मिा प्राप्त पुयारा का प्रारमाहित किया जाना चाहिए हिय या ता अपन म्पयन पार माट उद्योग प्रारम्म परें माया गराम साप मिसर घाट पमान पर पागमान समायें या एमे उपम या ऐमा गतिविधियाम पान पाप या पपित पर जिनराज समाज का मापाता है। 21 उन्नत प्रप्ययन ये पंद्र तथा प्रमुख विग्यविद्यालय भारमाय fT का मर्यापित महत्वपूण सत्र मावश्यातामा म स र मापा लिमा पायका वा पानाय जान मा भी है कि जिगर शिमाति नापासपन ग उािगर मरिमर वृद्धि माता र । र गाय नपा पाग्य या पागत्रिय या दन गहा गम्मय मागमा गुणारमा का टिम प्रधानम प्रतिम नावास यही मर्वाधिक पारिन्तु प्रभावशाला मार्ग है, जिम द्वारा मारम्भ स्वरूप उच्च FTII स्तर में सवतामुगा मुधार किया जा सकता है। प्रमग शिक्षा के अपाम नया जापन व ममम्न पो म इमा तरह मुधार किया जा सवगा। 122 इम दृष्टिकाए म जिम महत्वपूर्ण कायम का मशक्त बनाया जाना है एवं विस्तृत रिया जाना है. यह उन अध्ययन पेटा का स्थापना विश्वविद्यालयों पी मानों उचित समायाजना द्वारा सहायता की जानी चाहिए कि वे मुनिल विभागों में श्रेष्ठता प्राम पर मरें और भताग वा उनका उमत ध्ययन रेदार स्तर तरमित कर मरे । / रिमा विश्वविद्यालय, दिमाग का उन्नत बदलिए चुनन का भाधार (उस विभाग द्वारा प्रकिए गय याय को मामा पोर उमर स्तर, भाई far য র ম ম মার মামা ধাত্ব হ ম বাবা যান যা भाषी विकास का उमदा सम्भावनाए हाना चाहिए । दयन यो पनि म तरह मानाई जाना चाहिए कि विश्वविद्यालपा तथा शशित समुदाय पापियास सामान प्राप्त हो जाय यदि पावरपर हा ताउम विभागमा भारम में सम्मावित कर समझा जाय तथा भारम्भिर भवस्था म पमचारीया तथा मावरपा पुस्ता एव उपारणा पा जुटान में लिए पांच पप तर विशप पापिर महोबादी जा माना है। प्रनि सतापनर हा नापागामा वाच थोंs frए पिर रा महायता का स्वीकृत पिया जा उन्नत र बन गन का मुविधा निरन्तर या एक प्रयत्नशील बने रहन पर हा जाना चाहिए । तान से पांच वर्षों से धोए म म सयम एप मार विडिग्नि मिय' राप्रा उतारा निरागण करना पाहि म पिडिटिंग रमिता र सम्य मुविम्यात भारतीय तथा जहाँ गानय हा विदा वि ह। यह मिटा पार्यों का पाचन नया पुनदिन पर। 123 frrar पर्याप्त नही है । यो परिणाम प्रकार है ता प्रासापर है उमन सग या ए पोर शिपाभार पारम्भ रिया जारहा पर मया परिविवार या पिन मि उपाध्ययन गएमा पत्र तयार पिया जायजा ए दूगर मा पर मा भग्न पर हा पावर वातावरण निमारा मरमा किमिम प्रथम या नातरानर पाय तया गाध रिक्षा जागरण और तमाम म पम पम या पत्राम एमा नर उपनय हा सरगा जो प्रतर्राष्ट्रीय स्तर के समतुल्य हो । 121 इनम म मा विविद्यालय या मेघावा छात्र विशेष क्षमतावान तया होनहार मध्यार तथा प्रयम श्रणा की मुविधाएं भौर उपकरण उपनप पराय जााद प्रयत्न किय जाने चाहिए (1) प्रत्यक विविधालय में प्रधिम्नातक और स्नातपानर स्तर की पारवृत्तियो प्रदान को जाना चानिए जिमग प्रतिमागन छात्रो को प्रवेश लिया जा गर । सगमग प्रापी धात्र वृत्तियों एम छात्रा या दी जायें जा उग बद्र के भन के बाहर (1) इन देद्रों लिए भरपा मध्यामा का प्राप्त करने में प्रयत्न सम्बधित गया तपास तर ही मामिन हार गष्ट्रव्यापी प्रोर एक सरह म विश्वव्यापा हान चाहिए । चयन पछी नवीना हानी चाहिए। नहीं पायया । गुन हा प्रत्याशिया मा अग्रिम यतन वृत्तियो प्रान या जाता भागि तया उभार प्रवगर अध्ययन प्रसाामा गुविधा पार व्यावसायिा पटना प्राप्त गरन को गम्मायनापाय प्रति माग्यस्त दिया जाना चाहिए। पापनि समय उनासा मगाम दिया जाना चाहिए तथा पारश्य धन भी उम्प हाना माहिए तारि बिगिट यायता प्राप्त व्यक्तिया यो प्रारपिन परन भिमा बना लिया जा गर । (am) प्रतिमापान मात्रा गया मध्यापम गमूह को पर्याप्त मुविधाएँ तया मतापजना गवा र उपन्य परामा समाना समावश्पर है। पापत्रम या गीता हा या पारम्पर है यानि महायता मादगी और गिमा पोलिया जाना * न मिपमा एक IITया। 121 -मुर विश्वविद्यामर नया उन्ना पम्पन पन्द्र मध्यापना मा निर्माण र उन तिर विराग म मत्वपूण भूमिका निमा साते है।म मिनिम्नाति प्रा frम जान पारित (1) मिति प्रतिमायान यात्रा का गिक्षण प्परगाय प्रति पामि को fm हा गम्मर प्रयन किया जाना चाहिए। रोगका महानिमाया गपा पियविधामया म भजा जाए हाँ मान पम्पपन प्रा 7 । *गर निमिस सिविधानप गुगन MrfoTPJ अनि पारि। (a) मिमस्तियामा निमुक्ति । मुग्धिाजनक काग शिरिदार पा पापाग मान मात्रा में पर पुतिमा माहिए । ५ दागियो तोन स्तरों पर प्रदान की जानी चाहियां व्यायाता, रोडस तथा प्राध्यापक ( प्राफेमर । यात्रवृत्तियो उन विशप याम्यता सम्पन्न व्यत्तिया को दी সামী আমি স য় হয় শ্যাব ৪ ম র ক রব্য হন শরিয়া যা विश्वविद्यालय व विमाग म काय करन का प्रमर लिया जाना चाहिए। ग वान का ध्यान रस जाय कि उनका नियुक्ति यया सम्मव सान स्थायी पदा पर ही हो। (1) विश्वविद्यालय तथा सम्बद महाविद्यालय वा इस बात पे लिए प्रामाग्नि दिया जाना चापिएरिया गति सम्मर व प्रपन नय अध्यापको का पूर्व चयन परें तथा 7 मुख्य विश्वविद्यारय मधवा उभन मपध्यन र कन्द्रा म सम्पर म दुध समय तर र तानि व व्यापयायिक यतातरी प्रात पर सा। 124 वो-मुम्प विश्वविद्यालयाय स्तर को उन्नत बरन को डा परिया म विश्वविद्यालय अनुदान मायाग द्वारा प्राय उपाया रे मलावा निम्न प्रसारमा माग रिया जाना चागिए (1) गाय 4 गिर क्षेत्राव लिए उमन मध्यपन ब पन्द्रा में मदस्या শাহিন - মায়া মম বিৰিয়া ই বিষণ্য প্রয়া দ্বাৰ सम्बत महाधिवातपाय बीच प्रविश्वविद्यातीय सम्पर म्यापित पिय जान चाहिए। (u) उमा प्रध्ययन पER मगा मचाउन तथा राय रे निमित पय शिविद्यारवा पपवा सम्बध महाविद्यालया य वैमानियो तथा मानहार विद्वाना मान दिया जा सकता है। 12) नयीन विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय थेहता दुध पर यानिइ. प्रश्न उच्च fम स्तर गुपार रमपूर्ण मायक्रम को सफलता कतिए धन हो मानरयर है तु सपा मम्मय परिणाम प्राप्त रन लिए तपाइन पदोंम उत्पन्न घर उपसिापा मम्मामा र पमान निरादा महपाना पापम मापागा है पर्यान, नर विद्यारया तथा महाविद्यालयों * Fখানঃ-Safত বলা হয় লু বিনিময়া হা 120 नर पिनी स्थापना करने ममय मामले पा मारामधनी तथा FREET CITTT 11 नगर को पूरी बहन गन और refruit -- - इन्पन्न कर देना बहुत ही हानिगरस हागा जहाँ य भावश्यक गर्न मौर अधिक म रह जाय । पान गुमाव है Fि नय विश्वविद्याया यो म्यापना करत मिय निम्न वाया घान में रगा जाना चाहिए (1) नय विश्वविद्यालय की स्थापना तमी यायमगत माना जा मान > जति उमा स्थापना म सिन्नर, गिण पाय तया शाध क बाय । नर मम्मा गुधार पयाम मापा म मम्मर हा। (ii) गाद मो नया विश्वविद्यालय तर ना नही गाता जाना चाहि जव ता विश्वविद्याय मनुमान मायाग का पूय अनुमति मिल जाय तय पापा राशिरा यवम्यान-जाय। (n) न्य पिरविद्यालय की स्थापना में पूर्व पयाम नयारी की जान पारिए । नवान पिरिधान मा स्थापना को निगा म पन्ना प्रयत्न ता य *णि विग्यप्रियाय पन्द्र स्थापित पिया जाना चाहिए पर्या बुग महा विद्यालय मिजार नाना या मुविधा उत्पन्न करने के सम्बध मायागा प्रपरले गये। मामा मा यतया पीन पियविद्यालय नब गा गामा जाप जर ना नि उम स्थान पर एर पियविद्यालय पद कुछ सम ना.ग. हा गर प्रथम उपानि को नियुक्ति सया विशः प्रियामय प्रपा पार्यो र पारम्म वाप पो प्रयपि तान यप की भर होनी चाहि भोर ग पपि म मायाजना यार उपगपति । गहायता करे। 127 गम्बरें मारिवाया गर म मा मा प्रकार पा गयमित नो। पापागा। मात्र कम सागपात महारिनियामी गम्मा निरन्न तीर गति बढ़ता जागा है। 30 प्रति माविद्यायो म नादा गया 100 मा मा दा मम्या पन पागिा रति मामा पनि पाम प्रनाय जगा fr पहले पहा: मा पर पाना IIT गम्यघम घ्यावा योज बनामी जापौर मा गया TT बगाना गाता नि गया। मरमादिापर याम मात्रा म गति न िमागाया' गुगर या TIR गापामार पर मम्मामा को गम्रापा पर " गगा। ममा पिपरा गाया गाना मा यसमा माम मग गिनाया गया। युधिमगा। । | 12५ मिरिया गायनाता From IT और उमा ग्यामिति ।
७३ - मचानन पर प्रधिकाश निमर करता है । अतएव यह आवश्यक है कि, विश्वविद्यालय व्यवस्था का उच्च प्राथमिकता देवर सुदन किया जाय । क्वल रमा तरह मारतीय विश्वविद्यालय अपने बहुविध उत्तरदायित्वा का ठीक तरह स निमा मगे । इम दृष्टिबाण स जिन कुछ महत्त्वपूरा वायत्रमा राविमिन दिया जाना है उनका विवरण इस प्रकार है 129 विश्यविद्यालय स्वाधीनता सवप्रथम पोर सर्वाधिर महत्त्वपूण मावश्यक्ता ना यह है कि विश्व विद्यालयो का स्वाधीनता को समक्त म्प म म्यापित किया जाय। इसका मुलभूत माधार यह मित प्रयवा मता यो राजनीति व दवाव अथवा विचारो यो प्रतिवद्धता म स्वतत्र स्वाधान सस्था ही सत्य को साज पर सरती है तथा अपन अध्यापना और छात्रा म स्वतत्र चिन्तन एव स्वत विचार विमा यी मारत पनपा सकती है । स्वतत्र समाज के विकास में लिए यह मनियाय है । इस प्रकार की स्वाधीनता के तीन प्रम है (1) छात्रा पा चयन (2) शिक्षकों की उन्नति तथा नियुक्ति मोर (3) पाव्यविषया, शिक्षण विपिया तथा अनुमपान का समस्यामा एवं क्षेत्रा का निर्धारण ! यह सत्य है कि यह म्वापानता एव बडे मदम म होगी जा सकती है अर्थात् राष्ट्र के प्रति मोर मम्पूण म्प से मानवजाति के प्रति उत्तरदायित्व की भावना । मेरिन तय ता यह पौर भी पवश्यक है कि एमा प्रवृत्तियों तथा प्रयामा पर विराम लिया जायजा विश्वविद्यालय को स्वाधीनता में प्रति तया ममाज, । माचित भपक्षामा प्रति याय पर सरें। 130 भारत म विश्वविद्यालय स्वाधीनता को बहुत भयो परम्परा रही है । परिन पर पावश्यरता है उसे मुद परन एव मुगठिन यनान घो। ममी सम्बापत पगो को विशपतोर पर विश्वविद्यालय अनुदान प्रायाग, तपा प्रतशिवविद्यालय परिषद् ( U_B) यो इस विषय म सतत् सजग रहना है लागि एमी म्वाधीनता बाई कपर रा नहीं उतरती, यह ना शिवविद्यालयो को स्वय पाय बन रहार निरतर माना होगा। 131 विश्वविद्यालयों को वित्तीय व्यवस्था विश्वविधालय-स्वाधीनता तब तर वास्तविर मोर प्रमावोसाय मही बन गाता व तर frरा पमरपार विश्वविद्यालयॉर साय मममगारो पौर गभम गमाम न में सपा उहें पर्याप्त पाथिर महायता न , मौर पर र मिहायता म प्राप्त राशिमा प्पय परने नियम सरत नरी बना fredमिवियापों पाराग्यों द्वारा दा जान पाना पापिर महायता - १.
७४ ना 'मवपन महायता (दगिए परिशिष्ट चार) यवम्या के माधार पर पुनठिन दिया जाना सम्मवत मवश्रेष्ठ हागा । गो अतिरिक्त यह मा होना चाहि नि विश्वविद्यालया म जना 1 ममा साधा जवावाही न बरना पढे । उगरा दनिय प्रशामा अथवा उनर वित्तीय मामने न ता जन चर्चा विषय हा मोर न ही दगत राजनानि व शिकार हा मोर इस दृष्टि से यह वादितही है जिउनका हिमाय स्तिाव मसन अथवा विधान ममाया समक्ष न रमा जाय रिद्राय विश्वविद्यालय कानून म प्रावधान है निश्विविद्यालया जांच हुए सम इपिज्या गजट म प्राशित रिय जाा चाहिए तथा लया-जांच प्रतिवदन ये माय पिजिटर पा लिगाय जान चाहिए । इस पद्धति स सरवार या इम धान वा पावरपर अवसर मिल जाता है रि उना विताय तथा प्रशासनिा स्वात्रता म अनुचित हस्तक्षेप पिय बिना यह मुधार तथा निरीगण हतु विजिटर' या पार से पायवाहा पर सव' । उन राज्य निभर विद्यालयाम सम्बय म मा एमा हो व्यवस्था या अपनाया जा सकता है, जहाँ 4. सहा पाईएमा व्ययम्या नहीं है। 132 उपासपति के पाय तया उसरी नियुक्ति सिगी विश्वविद्याप म उपपति व पनि हा हाता है निगम प्राता जा है fr या विविद्यालय म पक्षिर म्बनता तथा प्राणी जास्पा गिजातामा प्रतिपादिता तथा गाय की गाज के प्रति पिपश्चिातय पाश्विद्धता कि वह उत्तरलाया हाता है पौर विश्वविद्यार या पायपापिसावा व इस तरह उपयाग पर मरामि शभिययग या पपा तमाम गतिविधिया म उमा निर पर गायोग मिना रहे । उपयुलपति सागायन एप प्ररयान Pिापी या पिणन पति हाना पाहिए, जिस पनि प्रयागराय पनुमय भी हो। पति की। मरा निणय सय रिपियामय या पर पाnिfiविविधागर ममानित पदम्या का प्रथवा उमो परियति माया जा गाता है । माया परन परत ये निमिर पारि मगर पाना एyिामा franा नि प्रभात पान उनम का माय गिरिधानप मे सम्बद है सा उगा। र गतिमा गाने मारा सीमाना पाक्षिा मति यह शिkिar TITमा यमपाराम Tin IIT प य नाfrm उग हो शिमगर ग पपिनिगु I frया जाना था।
৬৭ বিবিধায় ই হার মনম ই বলবি দা মলি পৰিয়া এ সাপী খালি। 1१९ विश्वविद्यालय के भीतर स्वाधीनता বিহাৱিাৰ মাঘীনা বা ময় বশ ধৰি বিৰিয়ায় পান বা শাসি নিশাদ মাদা ধব ধন ধিযা সায় যাবি পাশবিৰ মুখী স গচাৰ ব ক্লা এ যন্ত বিন নানা যনং বয় व इस प्रकार नोचे गे ऊपर नर विचारारा प्रादान प्रान मम्भव हो सके। ্য মা সাদি ৰ ৰাি বিলনিনিন কাৰ গণনাৰ সন বাহি {}} বিশ্ববিখ্যলত * বন বিমা যা লা সাধাৰ গ ম মাহবুব পুষিৰ নিমাই & ? মহানবি [য বিনীয় পৰিবা ধাধা প প্লয়াসিস বা প্ৰাৰ্য ধা। প্লাৰ বিদায় স্বী বিমাস্তাফা ধী বা মগণ বােশদিবি , লিৰ মা প্ল্যাথৰ, গুড় যায় না gযাণৰ খ র নিষাখির স্বর ন্যায়া মম । সমম প্রথম মহা মহ যদ কম হ বা গৱষ্য ২ দYি বিমা গ গশি থাপনা সমস্যা না বুলবণ য যথাসা, নর মা খ মৰ ৰবি শাখা না রাখার দাবি বিৰাৰ বিষ মিষ বা নই। পৰা যাযহাঃ মাহ সয়া সানি ঘি ফ ম বা মামি যী সাম। গ বি এম মিমা খা বিবি গা মাঘী ঘাম গয়না ना हागो । जहा विशन यमाग बडे है। वही विमागायर को महापताप সাদা বা হীগ সহ দা vৰ ভাব বিমাম ই দ ম নিন বি সাম। কিসবিয়াল ধাম ধৰি ৰ অনুপরি এ বিমান খামার যা হয় নিবিস যাব মী। (1) ঃ আবাrি মাবিল্লামা গাযােঘানা দয়া মায়া स्वाति न दी जाय नया बचाव को हष्टि से उन्हें निश्चित मामा মীণ মালা গ গ গঘি বাপ বা সাথ !ি না বেলি मनाया स्वाधीन गम्यामारे निमारसमरिया जामर। {i}} {বিধাম দাদু ? শাসিমুশষ গমনা সানা খাrি, সিড দাম rিe froার্থীযা পনিই বির্য সয়া খন বল না । শা!ি! গাধার এ প্রান যায় ৪ মণ ধাৰ গা পা গা মানা ধা। সুষ বিনাশ গী হিৰায় ৪ বি বি এস rি পী গান সহ বিােযেদিও এতো শখ ।
को मयुक्त ममिनियों बनायो जाना चाहिए | उपकुनपति अथवा प्रधानाचार, जा भी मस्या व मध्यम हा व इन ममिनिया में कार्यों स पूरणत भवगत रह । सस्थाध्या का प्रध्यगता में एक भौर बनाय समिति हा जिसब मत्स्य मध्यापर वग तया द्वारा प्रतिनिधि हो । यदि इस प्रकार यो का ध्यवस्था ठोर तरह स चलन रागना है ता पम स कम बहुत बडो मस्या म मा घाटी पामानो म हर हा जान याना उन समस्यामा पा निगवरण ता हा जायगा, जा उचित प्रयमर पर ध्यान न लिय जान र कारण पटुता उत्तन परतो हैं पौर जा माला तर म यहुपा भनुशामन म लिए भयवर पतरा साधित हा सरती है । इमम मध्यापर तथा छात्रा के बीच नय अच्छे सम्बध स्थापित होगे एक नया विश्वाग पनपगा । विश्वरिद्यालय प्रशासन म भाग लेन व लिए धारामा उस्माग्ति बरन तथा विश्वविद्यालय "दनिर काय म उह अपन उत्तरापिरय मा महगूस कायान लिए यात्रा ( अधिस्नातक छात्र मा) प्रतिनिधिया 1 माहित्यिक परिपद नया विश्वविद्यालय “यायालय से गम्बट दिया जाना पानिए। 11 विश्वविद्यालय के लिए पानून म प्रतिवन म तया पाश विधान र प्रतिवेदन (Report of the loilel Act') म विश्वविद्यामपा या मुहट बगान तथा उनके प्रशासन मा पुनति परनर लिए ना मुभाव लिय गय है उन। प्रभावशाली रूप गायिग मिल पाया है भारत में विश्वविद्यालया। निमित्त पामान कानून का पति पुनर्विलोकन पिया जाय तपा उसम मायारागार मापन पिस जाए । इग निगा म शिक्षा मत्रालय सभा विधागप भनुन पायाग का पाल सी पादिए । विश्वविद्यालय मनुमान प्रापाग frम पापप गग्य गरगार सपा गया धत विश्वविधालया मापHिIT रिपार विमा कनर निमाई उपयुक्त व्यवस्था ईशा हो जानी चाहिए। सिविधामा ग मधिन नाई मा नया कानून fPrinार रिमग ममाया पिया जाना पाहिए। 111 प्रगनिवास बात पर मोमा र उपना गयी है पाधि निमार गया में जा मुरारम पश गि गया। नाम सा नाम गिरिधानपारा चित्र पा पिणापा है। मा err माran मा प्रतिसादी गुग्गा दो पाहिल Criपियारा का स्वापानता पनागर जरा गामन निमाfarmir रापनारा तया मुहमा शान निपटा लिए उचित परम्पराएं विकसित पा जाएं । मतब चाहें ता मारत मरवार मर्वोच्च मायालय से निवेदन करें रि यह उन प्रवृत्तिया रा पुनर्विवान वर जा विश्वविद्यालया तथा शक्षित सम्यामो स मम्बधित मामला पर प्रिय गम "यायालपा ने निणया म स्पष्ट हरिणावर हैं तथा यायालम म बात को सम्मावना पर भी विचार करें जिया पाई ऐमी उचित नीति निर्धारित की जा सकती है जिससे हि विश्वविद्यालयाकी स्वाधीनता बन रहन म तथा उच्च शिक्षा के उचित विकास म महयाग मिलता रहे। 1136 विश्वविद्यालय अनुदान पायोग इग ममय गिना बाजा ढाँचा है, उसके पन्नगत उच्च शिसा कई सडर म विमत्त है उनका पापस मन तो कोई सम्बध हो है और न उनम किया प्रकार का मान प्रदान हो । विश्वविद्यालय अनुरान मायाग सगमग 60 विश्वविद्यालया मे सम्बयित है तथा उनव विकाग के लिए प्रपन पाम उलय गशि उनकी महायता करता है जो राशि उन भारत सरकार से इसके लिए प्राप्त हुई है। इमर मलावा कृषि विश्वविद्यालय है जो अमरोगी भूमि मनुन महाविद्यालय सम्बपी मिटान सप्रेरणा मास परत है। इस गिटात न गत मागे म अमरीको व्यावसायिक शिया तथा मृपि उत्पान में बहुत ही महत्वपूण पागलन रिया था। पि गिशा विस्तार सेवाएँ सपा माथापा मयुक्त पाने पर बल दना इन पि विश्व विधानया की मुख्य विशेषता है। इन विश्वविद्यालया न कृषि शिक्षा सपा शाप में विकास की महायताय पपन स्वप के मातिन एवं मामाजिर विमाना के विभाग भी मार रिये हैं ! गहापुर मारपुर, दिल्ली, मगम पानि स्थानों पर तानोमा मस्थान भा हैं जा सगरानून में पनुगार 'राष्ट्रीय महत्त्व काममm' हैं तथा जिला उपापि वितरण का अधिकार भी प्राम है। हरि विविवारया सया पोयागिक प्रशिक्षण संस्थाना रामा कृषि মালব বা কি মাযার যিনি ধনুর সাধাণ ফ মামম मे नापितु माथ ही प्रापिर महायता प्रशन पर दी जाती है । पिरिमा गिगा fort महासमा स्याम्प मात्रामय प्रदान करता है। यह मा बहाना पाहिy fromश्विारा पर free frLT उत्तरदायित्व मा मामिाही है।मर प्रारम म.वालमन नारगन प्रमावमासा प्रयता अमर -र-गा.शिला गामारे उप fru... नाम महतो भगा।
1137 वोदनीय है म विश्वविद्यालय अनुगन पायाग यो उच्च गिगा की गपूरण व्यवस्था मा प्रतिनिधि र करना चाहिए । इम यावमाघिर पण से मम्बोधन तथा उममी ममम्न ममम्याग्रा ये निगाण म पर्याप्त प म ममम हाना चाहिए । यह पई पारणाम मावश्या है और उनम से मुम्न कारण यह kir मान पिस म बाई मा पिया गपूण रूप म सिमित नही हा सरता, परि वह मक्षित जावन का मुम्यधारा म मनग है । कृषि तानीको तया चिकित्सा विपान एव fTण नमा मम्पन हा पायग जरि व इम विस्तृत धारा में जुड़े हुए है। तथा य प दूमर ना ममम्यामा तथा मावश्यानापा स मम्मपित मा हॉगिन क्षेत्र मना मरा मर्याधिर माधा सम्बध है हा, अनुमधान पान म माइम यदुत ही प्रति विस्तृत रूप में प्रयुक्त करना होगा । भविष्य म वाम्नपिर नया प्रारम्म यहीं सहा पायगा जी विभिन्न विधाएँ मापग म मिनती हूँ।मगलभ म य मी पर पिया जा मरना है कि उत्त मा यता विश्वविद्यालय पागन मायाग विधेयर को पागमा के अनुरूप ही है जिनकी रचना ही इस परमपी गई है fr विश्वविद्यालय अनुगन मायाग उच्च शिक्षा के मभी त्रा मनाय परें । पत उच्च HिI , निमित गमटीय ममिति की गिफा तिमा पनुमा पिया जाना पावश्या है जिनम यह पहा गया है कि पमा परार पाउच निगा ना मगूण एवाई माा जाना चाहिए fr पारमाथिर गिगा यो गामा य FTII म मवथा पृयव नही लिया जा माना पौर प पावश्या है fr कृषि जोनिग्गि नथा चिरित्या मासि मुन गभी प्रभार पा उपnि उप शिना पियरिद्याप अनुान पायोग मायत्रमा मुस भगायावर प्रतिम दिशा जिग तरफ हम राना पागि। 138 पुराणोंग नत्र मा म न उगपा जा गरे सो यः पादित पि जानिरिग नया पिषिमा गिगा निमित विश्वविद्या मप अनुतपापागपी कग पर गगाना गा गिरिया जाना चाहिए मपा उनम धाम मप्रमागूप गामजप पारिन Vिfrगी नयी या सगम fonा पाnि : विपरिचालय पापायाग की नए मायापितfrय गा । यह पावश्यर नही पाना manा प्रापमा म म्यापित मग पर भी मानों पातिमा मा गगन प्राचिार वारिस गपा FIR रोमानिस मार करता गनिमम होने पनि माया पियार मिार मां गया माया TAITRImगरें । ग ग पान को लिया पोर .
७६ का पाइ विम्यान वैज्ञानिक हाना चाहिए न सगटना का विश्वविद्यालय अनुरान मायाग की तरह हा सराय परना चाहिए अर्थात सम्बधित मासयों द्वारा उह एक मुश्त भाथिक सहायता दी जानी चाहिए। इन मगठना । स्वतन्त्रता हानी चानिए वि व इस राशि का विश्वविद्यालयो म उनकी मावश्यर तामा तथा विकास य पायत्रमा में अनुरूप वितरित कर स । सामजस्य बताए रमन हतु मह वादित है कि विश्वविद्यालय अनुदान मायाग तथा विश्व विद्यालय अनुदान पायाग की तरह व उक्न मगटना व बुध सदस्य एव दूगर महान पाहिए । इसक अतिरिवन वायत्रमा का पुनविलापन परत तया उनम सामजन्म बनाए रपन हतु न पारा संगठनाये अध्यक्ष समय-समय पर विचार विमा करते रहने चाहिए। 139 () उप शिक्षा हतु गसलाम मणम्या या समिति न यह विचार म्यषा दिया था कि पूरावारिस उपचुनपनिया 7 विश्वविद्यालय अनुदान पाया मा मदम्प पनाना चापित नहीं है । मरवार ने इस प्रस्ताव को स्थाबार कर लिया है तथा विश्विद्यालय अनुदान विधयर में पावापर परिपतन किये जा रहे हाहू काई अधा प्रस्ताव नहीं है और न यह उचित ही है शिविर विद्यालय भनुमान मायोग या उग प्रन्यात एव रिद्वान यो सेवामा का लाभ न मिन सी ययत इमतिय र वह उपपति भी है । विश्वविद्यालय अनुदान पायागयोम मस्या 124 152 वा हानी धानिरा। इनम से तिहाई मे पिर सरकारी अधिराग नहीं हार पाहि । कम म कम एक निहाई सरम विश्वविद्यालय वग से हाने पाहिए जिसमा उपनपनियो में मामिल हाने को सम्मायनामा सापमान नहीं रिया जाना चा िशप गदम्य विम्यात रिक्षाविदहापालि । मथित माया म सागमस मम्बधित । हो गरें इमर लिए यह लिया जा मरता शाक्य वर्ग को वर्तमान गस्यता पपिएसोन वर पिया जाप तथा दासारस पषित पोई पति इमा 139 (भा) पापागमा उपधिन ममस्यामा की विमानातया मता इमिगत रयत हुए यह पाया fr उम बहन यही माराम पोतथि पापी जाय तारि यह उनका प्रमाण नरी में निर्वाह पर मा। पापाग न मिन विशाम यातापामान दिया है और हम प्रतियन म जिन पारनामा रा गुमाया पसा है उन हग्गित रगत हा यह पर है कि अनुप माना जा पायरन पिया गया है वह किारियों तथा महाविद्या 'पा मापारभूत गिगामारधी मारापातामा ए पर्याप्त नहीं है। पर बलमान पारिन गतिमाही पपिर प्रनिटिनी होगी।
-- विश्वविद्यालय मनुन मायाग का निम्नलिदिन कार्यों के लिए ता मुख्य रूप से अधिक धन का भावश्यकता होगा ही -उन्नत अध्ययन पवेद्रों तथा मुख्य विश्वविद्यालयों का विकास -कुछ मुनिरा विश्वविद्यालया में शिक्षापीठ का विकास -~-नानकोतर शिगा तथा अनुमपान का विनाम, -राज्याम स्थित विश्वविद्यालया हेतु मनुरार्ण भनुदान यो परम्पा -द्रीय जोच मगटन का म्यापना मोर -माधुनिक भारताय मापापा म माहित्य का विकास ।। 140 म प्रतिवेन म पो गयी मिपारिशा के माघार पर विश्वविद्यालय पनुन पायोग विधया 1976 का पुनर्विलोकन किया जाना चाहिए तथा उममे वांछित सशायन रिय जान चाहिए । इस नये विधयय या मनिमाप देने पहले राय गरवारो स विचार विमश पर लिया जाना मी योछिन है। 141 यिनान एय तकनीश विनान विवाग ये साय-माय मानावी गान में भी प्रगति हाती परिणाममाए उतान पधिप हाने लगता है। इसका साराय यह नही रियल ाि एव अनुगपान में पसा मगा देने मात्र से ही कोई देश स्वर ही गमन हो जायगा । सप्प यह कि इस प्रतिकूल भी पटित हा साला है । विमान II तपा उमिन प्रसार र मनुमपान , पन्त सम्म पों मातालय यह है कि पनि उई राष्ट्रीय पावसातामा के अनुरूप प्यवस्थित पिसा जाय ता उपागम वृद्धि होगी। पधिर उत्पारन परिणामस्वाय बिहान य प रे मिण भोर पपिप मापन व योन उपसम्प हाने लगेंगे पौर प्रसार तिन, नानौती पान तया उत्पापना म अभिवृद्धि होगा। पाएर विगान fMENT गुगनिन म सान परना राया अपि य उपाग गि निमित्त वगानिस पनुगपान का प्राग्गादन देना भगिर पुनगठन मुर कापस mग प्रभावगामा यी प्रपरन मुपत रिय मान पादिर देग म प निगुण पति का पि विज्ञाना म अनुमपान सपा उन्नर पम्पयन निए पापित पिया ना गर । 142 विगान PिAT तीशागे वपमान माम्ममिर गया उम्प शिशा व गोप तपा से पापापालामा पनि पित पागामी रगों म तिा एप First ITS मा पर गादि का मस्तम गुण ran वृद्धि करनी होगी। विमा ग्राम प्रास प्राधिर विराम का क्षमता से अनुरूप विधान शिक्षा व तुबना मान वै विकाम को सम्बद्ध करने तथा विज्ञान विकास के कारण म वनमान सेत्रीय प्रसतुनन का बम कान कामी परम पावण्यवना है। 143 विमान एव गणित व उन्ना अध्ययन रे द्रोथा विराम दिया जाना भी पाया है। इनका प्रध्यापश्वग सवठ एव योग्य हाना चाहिए पौर जहाँ वहीं मम्मद हा उसम अतर्राष्ट्रायम्यातिप्राप्त व्यक्ति मम्मिलित विरे जाने पाहिए। या तोन वष लिए अतिथि मध्यापका को निश्चित अनुय ५ रे पाधार पर नियुक्त किया जाना चाहिए । ऐम प्रतिधि मध्यापर को मेवामा उपतर रान के लिए विश्वविद्यालय अनुदान मायाग में एक ममिल भारतीय समिति का गठन करना चाहिए । इस समय विशार जाय र र मतर्राष्ट्रीय म्याति प्राप्त भारतीय वैमानिका तथा सुविध्या বিশখা পানি ধা । যানা * কাল মাসরি বিমা সা না ? 141 अघिस्नातक तथा स्नातकोत्तर विधान पायरमा ममीन ही मामूल मूल परिवतन विय जान को भी पायरना है। प्यावहारिक पाय तर সাব বিগান rথ গুমি বিশান মঘা দ্বিন মম ব মা বিগ बत यि जान की मावश्यकता है। मोतिर विज्ञान महाविर तय সাহাবা গামস ম খিল গান বা লা লানা- স্যবধ। 147 प्रत्या महाविद्यालय नया विश्वविद्यालय विमान विभाग 4 पापमानाए गुजित होनी चाहिां छात्रो प्रोनाहिन दिया जान বা িকি মান্না । যা আ বা ফসো মা সখী যায় "नामा पापारभूत साना और मम्मामा का जानवारा प्राप्त परमार मालामालाही अपित मपना ग बाय पाना चाहिए जमा रिभमी ना है । आनीय नि-लाम बाप पर रह पति भी इनका मापकाली या पत्राचार पाठपरमारे मतगत उपयाग गरे । 16 पिपी मध्ययन ॥ मा मरिर गए से प्रागाहित करना होगा यनि जारितालों में विमासावर में मोतिय वनानिए (गणित मा) और जीव विजान म अपिररि गन बाल शानियारादिष मे गम्मिनि पिया जाय तो यह पहला मामय रापा ! मा तर मोरिल लिन नपा पति विभाग प्रयास मानविन हगि, - अनुगधानविपरीनिर रेगर में रहें।
८२ 147 यज्ञानिक अनुसंधान वनानिय भनुमधान तथा उमर विकास या प्रगति की शाम भी पविलम्ब प्रयत्न विय जान की मावश्यक्ता है। 148 विश्वविद्यालया म विमान शिशा तया वभानिव मनुमधान " गुनियाजित म्प मे सहयोग तथा प्रामाहा दिया जाना हमारी राष्ट्रीय नाति मा मूलभूत पाय हाना चाहिए | गृजनगोन बनानिष तथा इजीनियर रिसा दश पा रहमून्य तथा दुराम पाती होत है। यह विश्वविद्यालयो में स्थान दिया जाना चागि जहाँ ति उनव गुणात्मक प्रभाव मा सामा यत अधिकाधिर साम उठाया जा सकता है । शाध-काम निमित्त अनुगन का राशिम ममिवृद्धि | जाना चाहिए तथा दशामत तक विमा विश्वविद्यालय महान पाल पुन गर्च का लगभग चौथाई माग अनुमधान पर सच लिया जाना चाहिए। 149 गुट (मूर माथारभूत ) भनुगधान र सामा यत महत्त्व दने पात पिण्यविद्यालयों का मा व्यावहारिय अनुगधान एवं विकास में महत्वपूर्ण स्पागा तरह तानाया मस्थाए मा गुट अनुमघान राय को कम मरय नई दि 2 मा प्यायरिख एव मोदागिन अनुमघान-पाय पर विशप पर। 150 प्रमि यह रही है यि काई प्रनिर धन उगाया जाय ता अनुराधान पाम 'गुट पोर पपिर गुर हाता जाता है । भारत जग विवासार दान पिय माशारिस भ्रमपान , महत्त्व या दृष्टि सग प्रपार वा प्रवृत्ति पर रोर गाया जा पायरया है। इसका पावण्या पस प्रथ यह है कि nि पारिरिंग सम्रामा म पन रह पामधान पाय म नमसानिपरा हा TI परितु गुर यनानिए मनुगपानापा मा माया मान राष्टिग पनि गहमाग गम्य प यन रह । यिस्मविद्यासपो, नियगि गम्पापा नया नयागार सममारिया द्वारा प्राग म विचार मा सपा Trainar प्रोणागिर भनुमधान का समस्यामा पा माहिर पहल गोर निTIMTAIT पायरयाता है। पिपिणापो PITTER मापण प्रा याना प्रान प्रान हा मासा र मोर मा पास attra पियाना में शिव म बया दामा वाम पर उग, निरा नियामा बनाया जा मतपरिषमा म TRI real 1 शिपिमा PPER नुर्गपाल गाय का पाना नामो यात्रामा पर वे एक माय काय कर रहे हैं । जहाँ भी मम्भव हा पौर सुविधाएँ उपलब्ध हा ता मारतवप में भी इस प्रकार के प्रयत्न किम जा सकते हैं। ht मारत म एमो बहुन मी सम्याएं हैं जो विश्वविद्यालय की तरह का मनुमधान-बाय कायान्वित करता हैं । लकिन जिनका वायक्षेत्र विश्वविद्यालय (प बाहर ही है । प्रपरन विय जाने चाहिय शिवे विश्वविद्यलाया में काम करें पियवा कम से कम इतना सा हा ही मरता है कि वे विश्वविद्यालयास धनिष्ठ सम्पन रणत हुए अपने कार्य का माग बढ़ाते रहें। 22 राष्ट्रीय विज्ञान नीति मर्वोच्च स्तर मसारी अधिकारिया के लिए यह पहुत ही महत्वपूरा है शिव बानिय पिया पर पया सम्भव मिपार तथा वस्तुनिष्ठ सम्मनि प्राम कर सकने में प्रति धाश्वस्त हो सर्वे । म तिये एक ऐसे सलाहकार महरा निर्माण रिया जाना यावश्यर है जिसम बानिर अनुमधान में मम्बधित प्रमुग अभिकरणी ६ प्रथाना में अतिरिक्त एगे व्यक्ति भी मदम्य हाने चाहिए जा अपन व्यवसाय प्रति निष्ठावान तथा उसम स्याति प्राप्त होने से साय माय स्वय के प्रति विपास उत्पन्न करन चाल भी हो। 30 वप को भायुवाले कुछ प्रमुग वर पानिप भी इन मदस्य हाने पाहि व्यक्ति को पच्या मशिारणा प्रधाना की तख्या में एम नरी हानी माहिए । विश्वविद्यारया सरकारी अथवा गैर-सरकारी মনুষযান সলিল্লানা, এখীগ সয্য মামা অনলা ম শ ন লা?? যা चयन रिया जा सरता है । म मनादार मण्डन म पवल वनानिय तपा साना हा नही रितु मरणास्थी एव मामाजिक विपानवेत्तामा मे मतिरिक्त एम पति भी हान चाहिए जि उग राय व्यवस्था सम्रपी अनुमय प्राप्त है । मनारस की वानर माहार समिति का उन माधार पर पुनग्नि परन रे गाप-माय उप प्रभावशाली मचिवालय उपराया जाना चाहिए तथा इस पाय यो गित बग्न मसराम स्पतिशो Fit माप गम्बर पिया जाना चाहिए ममिति एमा स्थिति में हानी আর যঃ গ বাধ্যবিধি বা দু যণ্যৰি চাবাসা भनुमान मगा पर सपा सरकार सवानिर नीति तथा सिमित दायों मानित पापमामि उपाय बागा मम्मपम सम्मति दे मरे। राष्ट्राप पनुमधार नोनि को स्थिति या पुदिनोरन मी गम ममिनि गे निरलर मरने पहला पाहिए । । कृषि विश्वविद्यालय तपा महाविद्यालय प्रसर गर म म गे बम पर सिविधानर या म्पा जानी चाहिए एमा परन क लिए यतमान विश्वविद्याया में स पिसा • विश्वविद्यालय मा कृषि विश्वविद्यारय म रूपातरित करन की मम्मावना मा ध्यान में रसना पानि । इम कृषि विश्वविद्यालयका कृषि सम्बधा परम्परागत विशपतामा ययन स पपना काय प्रारम्भ परवे ममय पी मावश्यक्तामा अनुरूप पमा पाटपरमा मा पिम्नार निरन्तर करत रहना चाहिए । स्नातकोत्तर मा शिपन पबना उपसित सत्रा का शिला नि मावश्या पर्याप्त मावधा उपलव्य कगना इना प मुख्य कार्यो म स प्रमुग काय होना चाहिए । इमग मा पनि महत्वपूग्ण यह है कि इम स्तर पर सर्वोच्च स्तर साभा बनाये रमना होगा। अपि विश्वविद्यालया तया रायपि विभागा दायित्वो म स्प गगन दिया जाना चाहिए । कृषि विश्वविद्यालय मनुमपान, क्षिा तथा प्रमार पायामा पा सम्पन्न पर। 151 प्रयाग र तौर पर यद्यपि कुछ दूर दी जानी चाहिए तथापि यह अनि वाय, पिगमा पि विश्वविद्यालया मा पिही एम मे मरत्वपूण गिसाता मा मानर पनना चाहा जम एरप्रांगण विश्वविद्यालयो मात महा विद्याल रन्न गिविधानया में सम्बद न हो । निपुण छात्रा का प्रारपिन राग मिल पात्रवृत्तिया पा र व्याम्या (27. धानो या धात्र तिया) पर्याप्त पार गुपस्थित पाम तया समचारी धग का वेतन पिपिपिचाया पमपारिया र यान मे गमार होना चाहिए। 155-पि पिपिधाया पतिरिकपर विश्वविद्यालय जहाँ निषि पाणि पपया पुषि मराप तया जा गपि अध्ययन रो यदाया देना मा. मम्मय महापता आ पाए तथा कृषि क्षेत्र र पर उनर पार्टी का पि विविधालयास पायो मे पर्याप्त मास ना यानि jh Tir frानो तपा पौधागिर प्रगिक्षण गस्थाना मे शशित PER गिन रिप गाने पाहिए। म गम्मर बनाने + लिए प्राय पाप मोर नागपात्र पौर पमपा- यापान frया जा गाना है पाप भागभागमा पापत्रम पानाय जागान है। a utart freप्रतिमानों नपा उप मुन विविधालयों में rit FRHIT Tranा गाभारनामा को भा गारमा जाना पाहिए। hi मर गुभाव परिपालों में प्रस्तापित विस्तार fm 1 rela मी गार गार पानि मामान TT महा ८५ विद्याता म स्तर सम्बपी मुधार लाने में लिए एकाग्र प्रयल किय जान पाहिए । भारताय हाय अनुसधान परिषद् (भाई सी ए पार ) तया विश्वविद्यालय भनुन मायाग वा समुक्त ग से इन वृषि महाविद्यालयाका हर १३ वय निरीक्षण करना चाहिए तथा एस महाविद्यालय जिनका पर्याप्त कचा स्सर नहीं है, उनका उच्च तरनीकी स्तर की शिक्षा दनवाली मन्यामा म रूपातरण किया जा सकता है या फिर हममम्बद्ध रिया जामकता है। 1३९ इजीनियरो को शिक्षा गत दस वषों में इजानिय प्रशिक्षण म पर्याप्त प्रगति हुई है। इन चार दिशामो म भोर भी प्रगति वाछित है (1) उद्यागा स अधिा व घनिष्ठ सम्पर' (2) इजानियरिंग सस्थामा म व्यावहारिक वाय पर विषय पर देन की दृष्टि से गुणारयर मुपार, (3) वतमान मस्यामा का गठन एवं কী মী {} নিয়লি মন্না মুখর বালিক সাশ্য प्रतिष्ठानो (प्राई माई टो) म अपितापिय ममर पापार पर प्रवेश पवगर प्रगन करना। 150 পিস মীনা গাম ফল # {নমির বাবা বা মমােরি frमा जाना चाहिए । प्रशिक्षण सुविधाए उत्पन्न करने के लिए मोद्योगिक प्रतिष्ठाना को उपदान दन को दीप पाजना का मा भारम पिया जा माता है। गारनिय राम से सम्बंधित उद्यागो का इस वायलिए बजट म पृषक म प्रावधान किया जा मरता है । जो उद्योग भयवा अशाग मगठन प्रणि सुविधाएं देते हैं यहाँ उचित एय योग्य प्रशिक्षका को रियुक्त किया राना चाहिए । मोवागिर एक मक्षिक मस्यामा प्रतिनिधियो को प्रतिमा सयमा पुनवितान बरन लिए नियमित रूपम मिरत रहना चाहिए। उपाग सम्बधा समस्यामा का अध्ययन करने की मिजीनियरा मनुगभान पाम का भपिराधिर मगर रिया जाना चाहिए तथा उसागो रामचरित ग्नातगातर पात्रम मरधा मनुमधान काय का यह पावापर हाई वोस पघि म विभिन्न सकोम विमानित frपा जाना पाहि नारि अधिकाधिप गया म नाग भनुमधान राम म मरलता प्राप्त परस। उधागा रिजाइन या पापाप तपा मापमाति विकास न पापार पर हॉटर को उपाधि प्राप्त करन की मुविधा मायाजानी पानि 160 नि रितुमा भाधार पर बानिपरों को मिला में रहीं अपिल मुगारमा गुधार परना होगा {} আখাম্বা যিশানী সি বা মুখিনা মালা আলি CATrain Frरानारान्ति। मामि हमारे इजानियरो म मे मुख्यत जो मनुमघान विकास तथा तक्नीशि छात्रों मनाय कर रह हैं, अधिकाधिर लाम उदा सवें। (11) पाटपरम , तामरे या मे ही पूणागि छात्र के लिए व्यावहारिक अनुनय प्रास गरन की मुविधा हानी चाहिए। उद्योगों में महयोग मेन कापत्रमा रामाययानो म निर्माण किया जाना चाहिए तपा उनमा उचित परिवीगण किया जाना चाहिा एप इह पारपत्रम यो समाप्ति पूर्व ही पूरा किया जाना चानिए। जहाँ सम्मय हा मगित पाट्यत्रम प्रारम्भ रिय जाने चाहिए। दोनो हा निर्धारित पायरमा तथा भवराश अवपि म एप और मध्यापर माय अमित गस्यामा म उपयागाय उपारणा पर शोध मरने तथा उनकी डिजाइन यान वाय द्वारा वायशाला म पिय जान थाले पम्याम को प्रधिशापित उपारामुग बनाया जा माना । अमिराय (Project) या म उयमा पा उपादन सम्बया समस्याए पात्रा को निराकरण हेतु मौसजा माती है। प्रध्यापन या विश्वविद्यालय विमामा को इस बात शिरा प्रामाहित किया जाना चाyि fr उद्योगा म सलाह मशविरा में तपा मा म नि म उद्यागा म जापर घाम गरें। नीमरानीन विधातयाम पध्यापा गया उयोगायोम व्यावसायिर गम्य य स्थापित परनये मधिरापित भवगर प्रगत पिप जार पाहिए । स्नातशत्तर पापत्रम मप्र भने म परे रिगा उपाग म र यप का म्यायहारिप अनुमय प्राप्त লা লাগা। rি অনিয়া পারি। (1) उatो पाया पूर्ति हेतु विभिन्न प्रारमारियर गाना froरियामा य नIIT पामा म गामसम्म म्यापित र यह भापरयर fr पTिM म परियामा जाप गपा पा तानाना निर्माण यनमा एयन मथापाम पापगार या पायावर माण र नई गिगा जाय । उचामा मा पनि पाTIRE A रिणि जिग प्रारविशता भाग हान पाना ffffry 10ग गम्यपिा पायाम भमा जाने भाजपा ना ना पिता भी सि आसे गमापा। (6) माया पिया गा मानीसरी বা যে গা খাল •াmি w? ৱিাণাস্তা TAIT STI II गान (Research design) ८७ (1) विशपन समितियों व सलाह मशविर से पाठ्ययम म निरन्तर सथापन होत रहना चाहिए तानि विमी भी प्रकार की जड एकरूपता स बचा जा सके। स्नातकोत्तर पायमो का भवधि र सम्बध मापता सान को काई मावायरता नहीं है इनकी प्राधि चुनिन्दा क्षेत्रा की मावश्य मतानुरूप एक से दो वर्षों के बीच हा सरती है। 161 निकट भविष्य म नया सस्थामा की स्थापना अथवा बडे पमाने पर बनम विकाम पर नहीं परिर (1) वतमान सस्थामा को अधिकतर सीमा तर बढाने, (स) अपव्यय का दर या समाप्त करन तया शिक्षण म गुरबारमा मुधार करन, और (ग) मेवारन पत्तिया व लिए सेवाबालीन पाठ्यत्रमो मम्बया ध्यवस्था करन पर विशप वन लिया जाना चाहिए। 162 বানিশি মাৰিখ্যষী সখা স্থান ভাই মাই ল ম সব मम्बधा भवसरों , समरण पाश्यिापित करन को प्रावश्यकता है। प्रदेश का माधार क्वल मय प्राप्ति का ही नहा मानार एमा प्रयल रिया पाना पाहिए कि प्रवशापिया का प्रायोगिक तौर पर एक स अधिराम से चुनाव परने या गुविधा हा तथा चपनित छात्रा का पाल्पता या उनकी वास्तविर उपलब्धि यो रोशनी म तुलनात्मक दृष्टि म प्राका जाना चाहिए । 163 शक्षिर ढाचे का पुनगठन गत वो म दश १ प्रत्यर माग मे शशिर ढांच व पुनगटन तथा বিব র দাবি মা মা মানায় নান যা সমান খান रविराम पर पर्याप्त ध्यान लिया गया है । गुणात्मर मुधार सम्म पी जा कार गुमाय शिय गय हैं उनए। दसत हुए नि यात्रा का कम हा प्रायमिना भात है । फिर भी मशिन च म मुघ परिवतन निमदेह नामदापर हांगे, परिद नपिप्य म मपाय जान पान प्रस्तावित मशिा पुनपउन स्वायत्रम विन्धिान गर मे यापन दिया जाए। 161 नय ur ढाच मा स्वयम प्रसार होना चागिर एर म तान वप को पूष विद्याप निया, -मी मामार शिना जिम म तद विमा निया जामाता है प्राथमि form18 वय निम प्रामर स्तर मार या যৰি বা সুতা রাখনি র মা শব} মা বিল মায়াময় सरपाािमान पादा वयं प्रयया ए ममान वप पा माप মাৰি «ি (মাথামি গয়না শ য খ শ্যা । मायामा20, ह) ८८ -उच्चतर माध्यमिक स्तर का मामा य शिभा दा यप पयवा एर म तीन वप वी घ्यावमायिर शिया और उच्च शिक्षा स्तर--नीन वप या अधिक प्रयम म्नातर उपाधि निए नया दूमरी अथवा अनुमपान उपापियो के लिए विभिन्न प्रधि पाठ्यक्रम । पहला रक्षा म प्ररग की पायु सामान छ वप से कम नहीं होना चाहिए । भय वनामा म प्रवेश घायु मामा निर्धारित मग्न यो कार्य प्रावपाता नहीं। 165 गणिताच पुनगठन व इम पायत्रम का तीन भोर से भारम्म परना होगा। प्रथम है दश नगमा हिम्मो म दसवर्षीय विद्यालय व्यवस्था प्रारम्म करना । इम सम्बप म नेवल ममूर तथा उत्तर प्रदेश म माई समस्या उत्पन्न नहीं होगी। जिन राज्यों म (माध्रप्रदश प्रगम नागालैंड विहार गुजरात मनाम महाराष्ट्र पोर उगमा) इस समय विद्यालय त्याग प्रमाण-पत्र प्राप्त परन या भापि 11 या 12 पप व पाठ्यक्रम को मुव्यवस्थित परना होगा तापिनय दाच या प्रपनाया जा सरमौर इस प्रकार विद्यालय गिताको प्रयपि दग वष हा जाय । गा राया में जहाँ वि माध्यमिप शिक्षा पायागा गिफारिशों के मतगत उच्चतर माध्यमिक शिक्षा पद्धति मषित प्रचलन है यहाँ निम्न नरोष प्रानान हागे (1) मा सिए प्रत्या माध्यमिक स्तर विद्यालय या उच्चतर मापामर स्तर पर विधानप बनातकी पावश्यकता नहीं है। श्यन मपिर. विनासपा मधिर हात उन्म विद्यालया-जुन मस्या था मगभग " पाया- उन गिना पाहिम धिम गभी वतमान उच्चतर मामिर पियानपान मारा पुनविनापन किया जाना पाहिए तथा जा उम्पनर माध्यमिता विवापर या गहन याय न हा उब रिचालय बना पिा जाना पाहिए। (1) पानवारी पति (Streaming) स्याग रिया गाना पानिपानिपमा पारगमोई मुगठित पायाम प्रारम्म नहीं रिया meifrgI 4 10 प्रथम पीर मामाप सिपागा in पर मामा मारा प्रहाला पाfreeसा 11 में विभिन्न frefuTI मान नपान पाया जाना मारिए --- (i) गार पाच पाना पाणिा पौर दूगरा वापmrt 1110 की उम्प विधान विपापियों होना पा में देना होगा ! नि उम्पतर माम्ममा हायाम विद्यालया छात्रा के लिए यह आवश्यक नहीं होना चाहिए । व चाह ता मक्षा 11 के बाद एष अतिम परीक्षा दें प्रयवा दो म्मिा म पनि कक्षा 10 और रक्षा 11वाद । 166 इस वायरम का दूसरा चिदु यह है कि उच्चतर माध्यमिक स्तर की गिरा विधाम निम्न प्रकार से लिया जाय (1) उच्चतर माध्यमिर स्तर का विद्यालयी शिक्षा का भग भोपिन किया जाना चाहिए तथा प्रस्तावित राज्य विद्यालय शिक्षा वाड ঘুম ঘ্যান নিয়ম বা প্রান কাহি। (1) इस स्तर का शिक्षा फिलहाल अधिकाशत मगविद्यालयाम और बहुत ही कम मस्या में मुघ कुन हुए विद्यालयाम भारम्म को जानी चाहिए। अधिषस अधिक विद्यानयो को उच्चतर माध्यमिर शिक्षा-स्तर तर उमत frयाने तथा विश्वविद्यालमा भौर बडे महाविद्यालयों, मुख्यत स्नातकात्तर मगविद्यालयों से इन उच्चतर माध्यमिक कक्षामा का समाप्त करने में प्रपत्न दिये जान चाहिएं । मानन देवल 20% माध्यमिक विद्यालयो तथा 30% महाविद्यालयो में ही उच्चतर माध्यमिक शिक्षा को सुविधा प्राप्त हो । (11) 10 से 20 वर्ष की अवधि व अमिर कायम द्वारा इस स्तर शिमा की भवधि ममान रूप से दो वर्ष वानी होगी। 167 विश्वविद्यालय स्तर पर मुख्य समस्या उत्तरप्रदेश म है जहाँ पिता, বিন গাৰ খাত্রি শ য়ম না ঘি বাম ঘি বান যন্ত करनी होगी। इस रद्देश्य की पूर्ति के लिए भी 15 से 20 वप की अवधि म साई मिरवायत्रम अपनाना होगा। 16९ इम पुनगटन में चाय में स्तर उन्नत करन या साप निरन्तर सामने बने रहना चाहिए । उदाहरण लिए यह गम्भव होना पारिए विपन्छ द्वानों का प्रवेश देन तथा उपलब्ध सुविधाप्रो रे भपिकाघिर गमुचित उपयोग परने से मवर्षीय विद्यालयोगिता को ममाप्ति पर एसा म्तर प्राप्त किया का मर जो जिवनमान म उ चतर माध्यमिक स्तर पर 11 वर्षीय मिसारे उपरान्त मास पिया जा रहा है। परिणामत प्रथम स्नातक उपाधि को शिक्षा सलर मत होगा, विपन तर तो और भी जयवि उच्चतर मालमिर तरको inा हो भधि समान रूप से दो वप री हो जायेगी । वस्तुत भविष्य को प्रथम स्नातक उपापित स्तर वह हाना पाहिए जा वर्तमान म स्नाकर वापिस स्तर है तार पाय मो अनुसंधान राय रे हामिापन पर पपा मा.पा। ऐगा होने पर हमार पहातमा पलाय कर के भनुम्प हो जायेगा, मोरिइम ममय हमारे यहां मना विज्ञान एव वाणिज्य वा स्नानकात्तर उपाधि का स्तर सामा मत विशाल प्रमुम विश्वविद्यालया ये प्रथम स्नातर उपाधि व स्तर के समाा है। 169 प्रौढ़ शिक्षा निरक्षरता की ममाप्ति तया सभी क्षेत्राम व सभी स्तर वा शिभान अन्नगत प्रशालिर तथा स्वकालिक शिक्षा विकास से सम्बधित कायमों का उल्लप पर पिया हा जा चुका है। प्रशवालिक तथा स्ववालिक शिक्षा या सिराम पवन उन लागो र लिए ही नहीं करना है जिह भोपचारिक fTII ग्रहण परना है बलि उन लोगा के लिए भी जो बिना काई पराक्षा यि अपन पान और अपनी कुशलता म वृद्धि करना चाहत हैं। महत्त्वपूर्ण मायश्परता ता यह है कि यमचारियो को एसो शिक्षा उपलग्ध करायी जा frय पपने नान पोर अपना दुशलता म वृद्धि पर सर्वे, कि जीवन न जितिन प्राप्त पर सरें तथा अपने व्यवसाय में प्रगति पर सवें । पुस्नवाला गमाहार समिति द्वारा रिय गये मुभाया ये अनुरूप पुस्तकालय सम्बध मुधिपापों म गुपार सपा उनका पिम्तार करने की भी मावश्यक्ता है । 170 वियविद्यालयों तया ममाज के बीच पनि सम्बध विरसित पर पर विशप यस लिया जाना चाहिए क्योषि भानिय विश्व म समाज गया विश्वविद्यालय या महारपण पाय हो गया है । राष्ट्रीय सेवा पाया पर मा पनि यस यिा गया है । इस विवास लिए भी यह मावश्य fr विपियानय मोर समाज म पनि राम्पर हो । स्थानीय, क्षार तपा राप्रीम गमस्यापा का गम्भीरतापूषा प्रध्ययन परापाले मभिवरंग ही मरह हो पिपिचालया का माय मरना पाहिए तागि सरकार जाताअप निशा सपटा प्रारम्यता पहने पर इन समस्यामा सम्बर मेरो गामति प्रात पर गरें उनमे निगस गरें। इन विश्वविद्यालय द्वारा पार सम्पप महा नहीं अपितु जापन हर क्षेत्र : रापरम पापगापित समपारियों का सगरत EिR सि मा पाटकम सथ पापनागिन रिप जाने पाहि । ययसापी गामाय frI मेगा पापम भाग टिग बना मान है जिनगाधारण तप पविणा-या पामगाता तया पागा निठा पनप गर । पान fr.frमानार-गायन राग उग गधि सरा infraन मग परत पार ही नहातु एग मेना-या रे प्रगति परा पर प्रकाशित परमपिन free 17 पास! frierram frra गारनामरम परमाननगम रायगि मापा मार ममरपामार प्रति समझ उत्पन्न हो सके। इन तथा ऐमे वायक्रमा की याजना बनान, उह वार्मावित परन तथा वनरा मन्यारन करने के लिए विश्वविद्यालया वा पर्यात व्यवस्था उपलब्ध हाना चाहिए। इसके लिए उपकुलपति की अध्यक्षता में एक प्रौद दिर बोड की स्थापना की जानी चाहिए जो नीति निर्धारण करे, गायत्रम बनायें মধ্য বিৰিত্যয় ও নিনিশ বিমাগী মাৰ মিল। বল হাখির परबाह द्वारा स्थान कायमा के कार्यापन लिए पर्याप्त कमवारी र का व्यवस्था भी होनी चाहिए। हम यह भी अनुभव घरते हैं शिदा पुरा विश्वविद्यालया को प्रौढ गिगा के विभाग विवमित करने चाहिएँ । शिक्षकाता বিষাঘা হা গা দিয়ে ২ বা দুয়ো না দিয়ে মার মা বা मनोविज्ञान में विभागा सहमाग म प्रौढ शिया का समस्त समस्याओं के सम्बध में अनुसधानकार्य को कार्यावित करना, उसका निर्देशन परना विमाया का लक्ष्य होना चाहिए। 172 पूर्व प्राथमिक शिक्षा সুষ থমিক মিশা এ বিষয় যান বিমা সানা ঘাযি, নহুষ য रहरि 1966 तर इमम 354 प्रतिशत बालको का प्रवेश दिया जा मा । एसोगिगा विकास हेतु बम गीली पदनिया पर विशेष वन देने सा पावसाता है, ये पद्धतियां चाहे मद्रास म चल रहा पति से अनुरूप ह चाहे प्राथमिर शिवालयों से जुडे हुए बाल रूप म हा । राज्य का चाहिए कि वह जिला स्तर पर पूर्व प्राथमिक शिक्षा प्रमार के लिए विशाम वेदो को स्थापना कर, पूर्व प्राथमिर मध्यापारा प्रशिक्षित परे, गाय कायक्रम अपना तथा प्रावश्यर माहित्य तयार करवाए । साधारण नपा पूर्व प्रायमिर विधान का मचानत निजी प्रपलो लिए धार लिपा गाना पाहिए, चाहे ता राग्य उ समारण प्राधार पर माथिर महायता देमावा है। 13 दाक्षिक भवन विद्यालय भवना की समस्या पर शीघ्र ध्यान दिए जाने की माय. राता है । म सम्पप में अपनापी गयी नीति रहषा पासट रही है। परि मृगों पाया मविपालय भाग का पावहारिप म्पम पानाम गाने के महपा प्रपरन हुए हैं पितु इसने साप-माय मदन यारनामे के निर्माण मन्तगत मूल्यवान तथा ऐगा पागम सम्पन्न भवन मा प्रमुगता प्रात पते रहे हैं । पिस गशि जुटान, निर्माण की मागन पम भरल तपः शाघ्रता में भवन निर्माण करने के सम्बध म हमारा दृष्टि तय्यारमा हान मावश्यक है। इम गम्बघ म निम्नलिसिन कायम अपनाय जान का मुभाव है (1) अधिक मात्रा मे मावटन-विद्यालय भवनो का वनमान मगन्तापजनर म्यिति वा दृष्टिगत रात हुए यह मावश्यप है कि मनिर्मित विद्यालय भवना को न्यूनता की पूर्ति की जाय तथा नय प्रवाधियो के लिए अतिरिक्त मपन बनाय जाएँ। (1)ीय तथा राज्य बजट म विद्यालय भवना निर्माण हेतु मावटिन रागि म भनिदि की जाना चाहिए तया मय सामाजिक साधनों का समारण के मापार पर मपिराधिर उपयाग लिया जाना चाहिए । निजी विद्यालया या भवन निर्माण हेतु ऋण तथा अनुदान राति उतारता पूवर स्वीकृत यो जाना पाहिए। (un) कीमत मे पमो-विद्यालय भवन निर्माण की योजना तथा प्राप्त स्थान र उपयोग मम्म पम पावरपर जानकारी या व्यावहारिस सर पर प्रयुक्त किया जाना चाहिए । (iv) भवन निर्माण में प्रयुक्त हानवानी परम्परित सामग्रीक प्रमाव तथा उनकी यदा हुई पोमतारा स्थिति म मुनिमित यच निर्माण को मिचालय भवन व्यवस्था प म स्वारार पर लिया जाना चाहिए। (1) प्रामाण कोत्रों में भयन-पामा शाम गाला भवन निर्माण हेतु स्थानाय प्रपरलो तपा पा उगान को प्रोत्गाहा दिया जाना चाहिए । ग गम्पप में रिना मवालय राय (Aucleus) पाने गुभाव मा मामा यत अनुगमन लिया जान का गिफारिशमा जाती है। (11) नगर पोत्रों में भयन-दम शेर म यनने यार भयनी म स्थानीय उपप गामार उपसागदाग भया निर्माण समाप्ति परी मायामा युग गिरप्ररारा समायटोदार दातया पारीगरानी टिप निमा निर्मित मयना + उपयाग द्वारा भवन निर्माण महाने पाम य म मा को नानी पाहिए । यही नही गम्मय हो जप art tf माता निर्माण गरिशिन पर भवन निर्माण मप्रन पिया जाप । (1) सोन भपन निर्माण-EिETTR भरनों मम्मपा गुरिया पनि पाRIT] म स्पानाप गौ पपपा पाग पापों का नया नगर में मापारि तपा पनि पामा निर्माण माप गा।
(rm) विद्यारय भवन निर्माण पाय का निरीक्षण करने तथा उमे मिशित करन हेतु प्रत्या राज्य में सावजनिक निर्माण विभागातगत एक मसिर मवन विकास मण्डल की स्थापना वा जाना चाहिए जा शिभा विभाग रेनिपट सम्पा में रहकर काम करेंगे । ये प्रस्तावित माल उम म म हाने पाल भवन निर्माण का स्तर सम्बधी विवरण तयार परेप ताहि पारमान महान वाले उत्पादन की तरह मावश्यर उपररएको मधिर मात्रा मे तयार लिया जा सर । राज्य मण्डला कायमा म प्रावश्यक ताल मेल बनाये रमने हतु इसी तरह से द्राम स्तर पर एक भवन विकास मण्डल की स्थापना की जानी चाहिए। (iv) रामसीय भवनो में निर्माण म हाने वाल विलम्ब को राम यास हेतु मयि पान निर्माण कापत्रमा को पावित करन के लिए मावजनिक विमाग म ए पृथक इवाई की स्थापना की जाना चाहिए । माद म शक्षिर भवन सामजस्य समिति (वनसारटिया) को स्थापना की जा सकती है वारि मौद्योगिव मापार पर बने मानो नापूरा-पूरा लाभ उठाया जा राव। (E) मक्षिर भवन विकास मण्डल द्वारा अपनाय गय कम गति सापनों को जानरारी निजी सस्यामा को भी दी जानी चाहिए तथा इन मस्यामा का अधिकतम व्यय मीमा रे माधार पर मनुलन स्वीकृत रिया जाना चाहिए। 174 शाक्षिक अनुसंधान गरि मनुसधान को विकसित ररने तथा मनुगपान वाय पा गरि नीति निर्धारण व शिक्षा व मुधार कार्यो म प्रभावपूर्ण तरी स सम्बर करन पेनिमित्त शान उपाय किय जाने चाहिएँ । इस दृष्टि में निम्ना रितापत्रमा वा विरसित क्मेि जाना पावश्परता है (1) राष्ट्रीय मानिस अनुमपान एवं प्रशिक्षण परिपद् + मतगत एर अनेस (Documentation) तथा वितरण कर से स्थापना की जानी पाहिए। (1) सम्बधित विषयों म वि अनुमपान वायो बादला पोटार विरमित किया जाना चाहिए। यह ठोर है Eि ममा प्रमिण महा- विधारप frमो न रिमा प्रकार का माप-बाप र रिन्तु रचत वे हा मामा र भाप नहीं, ऐसा परन म भनुमान धारा प्रगति मr पाई है। गिगापाठ) (Schools of Lotucation) पह विशेष पिव है रिद विभागार महयाग शशिर अनुमपान पार में पहली पामवृद्धि १४ (1) यह वाचनीय है कि शिव विचार एव मनुसधान या विधान परने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान मस्पान जगी ही एक राय शिक्षा प्रमामा या स्थापना मा जाय जिमो मास्थ प्रमुम शिनाशास्त्री हीयह मारमा पार श्पर रूप मे गैर सरकारी व्यावमाथिा मगठन होना चाहिए, तु इस मारन मरवार से पर्याप्त वित्तीय सहयोग मिलना चाहिए । (17) अनुगयान में प्रगति हेतु गिना मनालय व मतगत एक शातिर अनुमपान परिषद् को म्पापना वा जाना चाहिए। () अनुमपान पाय प्राप्त सूचनामा ३ वर्गीकरण सया पारडार विश्लेषण एव उन पर विचार विमग हतु मिशिष्ट प्रशिण दिये जाने की तीर पावश्यकता है। (vi) राज्य स्तर पर राज्य शिक्षा सस्थान तथा राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय गावि मनुमपान एवं प्रशिगण परिपद मा दायित्व हाना चाहिए रि वार परापान एवं विद्यालय म प्रचलित मम्मासा प मध्य गहरी साई यो गमा परें। च शिक्षा के क्षेत्र म नियविद्यालय अनुदान मायाग का मा से प्रयान करने होंगे। (1) शपिगपात पर हान वाल पुन व्यय में पर्याप्त बढ़ोत्तरी परनी होगी सदर यह हा निरारा fTI पर दिये जाने वाले दुल स्पय पा1 प्रतिशत अनुमपान पाया गय पिया जाए।
प्रध्याय 6 . शैक्षिक आयोजना, प्रशासन तथा वित्त 11 यापूर्वगामी अध्याया म उल्लिपित शनिव पुनर्गठन के विशाल सापत्रमा सफलतापूवर एव प्रभावशाला तरीदे स वार्यावित किया जाना है ता भावश्यक है कि राशि मायाजना म सुधार किया जाय द्र तथा राज्य दाना ही स्तर पर मम्पूरण प्रशासनिक ढांचे पा पुनगठन किया जाप -शिक्षा में विकाम में ययासम्मय पधिर साधनो का उपलब्ध किया जाय और जा भो साधन उपलब्ध हैं उनका मितव्ययता र मापार पर सदुपयाग किया जाय, पौर हढतापूर्वक् एव दीपवालिय समय तक रियाभित मरने व लिए भाई वायत्रम अपनाया जाय। “म पतिम अध्याय में इन पापत्रमा पर पुछ विस्तार से पर्चा की जायेगा। 16 शाक्षिक पापोजना मासिक पापाजना की सफलता के लिए निम्न विदु अनिवार्य हैं 11) शिपा को राष्ट्रीय नाति या काई एक ऐसा विशाल ढांचा हा जिमा मतगत स्थानाय मिनतामा मापार पर सामन्त्रस्य स्थापित परत हर राग्य सरकार तथा स्थानीय अधिकारी अपनी हाई याजना बना मर और गावित पर मरें। (1) 20 वर्षों की अवधि में विभक्त शिक्षा सम्भावित विकास की पण पालिर पाना बनायी जाय। उत सम्मापित योजना रोष्ट परगन नपा उपलार सापना पाधार पर शिया विकाम की पष पर नया वारि याजनाएं बनाया जा मरती है। गिता पायाग द्वारा * নয় মা। মাথায় ব্য িী খাদ্য নীর শবে বগা रिदार गम्भावित विराम रामपूण एवं दोपरातिर पाना तयार की यामरगा। 17 আছিরে কেল্লাঘিৰ দহবত সয়াম ६६ रिणम लिप जान या प्रचलन है। स्थानीय स्तर पर शाभिर पायाजना निमित्त वाई प्रमावशाली व्यवस्था नहीं है । कई बार इसका परिणाम यह हाता है कि स्पानाय परिस्थितियादा नजराज कर पिया जाता है और इस प्रकार रार की पहा परन की क्षमता ही ममात हा जाती है । अतएव यह मावश्यर है कि गष्ट्रीय गग्य या म्यानाय प्रर्थात तीना म्लरो पर प्राथमिकता क्रम का अपनाया जाए। प्रत्या वातर का अच्छा एक प्रभावशाता प्राथमिक शिक्षा का मुविधा माध्यमिक गिमा का व्यावमायोररण स्नातवात्तर शिक्षा एव पनुम पान भयवा पि एय उद्योग को गिना जैसे राष्ट्राय महत्त्व के वायत्रमों को राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिाता इन प्रयो म प्रान की जाए दि उनके मम्वध में जा मा निग्णय पिप जाए द पाया गया ग विचार विमा करके ही लिए जाएँ भोर जब एर चार निगणय न लिया जायना प्रयन राज्य या यह पत्तम हा जाना चाहिए कि वह उना प्रभावपूण तगने से हढ़तापूयम विपादित परे। पाय दूसरे मार्गो म जिनवरी सध्या रही मधिल हागा, राज्यस्तरीय प्रायमिानापो का निर्धारित रिया जाना चाहिए या प्रत्येर राज्य का स्वा मा सावि स्थानीय परिस्थितिया को दृष्टिगत रगत हुए वह उतरे अनुस्म्यय निणय ले गरे । इनर प्रनगत ऐमा समस्याएं भी सम्मिलित * जगी माध्यमिा TिHI नि गुल की जाए अथवा नही । एरा मामलों म रामाय स्तर पर पररूपता स्थापित करो या माई मावश्यता नहीं है। विधानया म मुपिपाए प्रा परना तथा प्रध्यापनों पर न किय जानवाते सम्पर गम्बप में निग्गय पन प्रालिस गम्बधित मुधमय मामलों म स्पानीय प्रापमानामा पापार पर बाई व्यवम्या अपनाई जाय। जिला राय विधामय मा पर गम मरकार उचित प्रपितरिया को एसी शक्तियों সপ মাং rি য মহাবিব ঘনিষা শী সাপ্লামা গাব মী एगे पनि मर जारि स्पानाय परिस्थितियार सयया अनुकून हो। मामा म पनि गरे गिले पपया एक विद्यालय में दूगरे पामय मरिया मा प्ररा पा समानमा या रगो गोगोई पापश्परता मी होती पाहिए। 178 अपम तीन पथौर मारनामों प्रकाशिमित्र रासपा राष्ट्रीय र र िगर र पुतिन गघि सत्रों में मापारमा गोमाता गुपा r गाने पी पावासमा नरा पिर नीचे विशा। (i) नामरिन य पर पा प्राप परसा से पिर ध्यान मामान गम्मी ममकान पर पाबासा मधिर बल दिया जाता रहा है । यह सत्य है वि विस्तार की बहुत ही पावश्यकता थी, विस्तार होता भी रहेगा। रितु इस पक्ष को प्रावश्याता मे प्रपित महत्व दिये जाने का परिणाम यह हुप्रा है कि गुणात्मकता जमा महत्वपूर्ण पक्ष उपेक्षित हो रहा । इसी तरह, व्यय ये लक्ष्या की पूर्ति पर अधिक ध्यान दिये जान के परिणामस्वरूप प्राथमिकतामो के जम में व्यवधान उत्पन्न हुमा है तथा अपव्यय वढा है । प्रत समस्या यो उसको सम्पूरगता में ममझे जाने तया सामा य व मुख्यत गुणात्मक सुधार से सम्बंधित उद्देश्यो के विगत स्वरूप को विकसित करने की प्रावश्यकता है । सगठित प्रयत्नो को प्रावश्यकता तथा चयनित पद्धति को अपनाना प्रपम तीन पचवर्षीय योजनामा म सामा य नीति यह रही कि प्रत्येक शान म कुछ न कुछ पायत्रम अवश्य अपनाया जाये । इसका परिणाम यह हुमा विजा भी अल्प साधन उपलब्ध थे वे एक विशाल क्षेत्र म वियर गये । दम नाति म अपव्य निहित है । प्रतएव भव यह प्रावश्यर हो गया है कि बुध महत्वपूण वायत्रमों पर ध्यान द्रित किया जाए । जसे अध्यापना की योग्यता में सुधार, पृषि शिक्षा का विकास, समस्त वालों के लिए श्रेष्ठ एवं प्रभावशाला प्राथमिक शिगा को व्यवस्था, निरक्षरता का समाप्ति, माध्यमिक Freा का व्यावसायीकरण, मुख्य विश्वविद्यालया वो स्थापना, स्नातकोत्तर रिला का विरास एव उसम सुधार, छात्रवृत्तियों की संख्या में वृद्धि तथा प्रत्येक स्तर पर लगभग दश प्रतिशत सस्थामों में गुणात्मक विचारा की मयोंच सीमा। 3 उन कायक्रमों पर विशेष ध्यान जिनमे निपुणता तया कठिन श्रम को प्रावश्यक्ता है भाजाल व्यय सम्य पी लक्ष्यों की पूति पर जो बल दिया जाता रहा है। असा परिणाम यह हुमा है कि ये वायरम अवश्य पावित कर दिये गये है ग्निमें प्पय करना मामान है, अर्थात् भवन निर्माण पयवा नामावन म वृद्धि । पर दुर्भाग्यपूण स्थिति है, क्याबि एस वई कायक्रम भी होते हैं जिनम प्रधिर विताय मागत को प्रपेशा मुविधारित प्रयत्ना, गगठन, निपुणता तथा वठार यम की मावश्यकता होती है । एमे वायत्रमा ५ पुष उदाहरण इम प्ररार है -विश्वविधालय स्तर पर शिक्षा का माध्यम बनाए जाने रे पिए पापुनिर भारतीय मापामो म मायभ्यर साहित्य या उत्पादन, गिर पनुगपान, -परोगा पद्धति म मुपार, -विद्यालय पाठ्यपुस्ता तथा शिभग एव अध्ययन उपारणा मा निर्माण, -शिगन एव गिशा विभागाने अधिकारियो वा सेवारत प्रशिगण, -परिवोटारण यो तानी म मुपार --म्यानीय समाज एव प्रमिभाव के सम्बया म मुधार, -प्रतिमामम्पन्न छात्री + निमित्त निशन तथा सम्पन्नता प्रदाया वायरमा का व्यवस्था तथा पिछडे हुए एव पद विकसित धात्रा दो विशेष सहायता। इस प्रकार व बद्धन स उगाहरण दिये जा सकते हैं । ध्यान देने का वात सा यह है दि बनमान परिस्थितिया म जवकि वित्तीय साधन सीमित है मधिर पूजी की सागत याल कायनमा पो अपेक्षा इस प्रकार के कम पलि कायरम पावित किय जाने पर पही मधिर विशप पर दिया जाना चाहिए । 179 निप यए अभिवरण गरि प्रशासन का मुग्य ममम्या यह है दियेद्र राज्य तथा स्थानीय स्वापत्त गरारा fTI मम्मघापार्यो । क्मि प्रार निर्धारित रिया जाय मिना दापिय राज्य मरवारा पा है अतएव स्वामावित स्पस उनरा स्याा मुख्य है । रिन्तु इसम दो प्रगर वे परियतन रिये जाने का पावर सरप ताराय सरवारास विद्यालय शिक्षा सम्बया दापिरा को स्पानीय पपिरारियों साथ मिलकर यहन करना हागा पापि विवासों निर प्रशासन का स्थानीय प्राधिकरण रा पयासम्भव निर मागमा दाना पाहिए। पत जिला स्तर पर उग विधिपत निर्मित स्याा प्राधिारण गौर पिा नाना पाहिए। दूसरा पार उच्च गिनाक्षर उन्हें सिविधामा पिपियामय मनुन पायोग तथा भारत सरा समिरर दापिरत परत भरना होगा। दूगरे | मप यह मरते है fr -वियप frा मुम्बा ग राग्य एय स्पातीय माझे पर और -कुम्प गिगाव रागमा पर निभर करता। का पद प्रापारागिन' जिमग पापाजनाय प्रभाग CM मासा पाय Arरण याच गए मतुर सिमा मिसिगना पारित। 180ोय गरगरपाय गरिधान सम्पान frnाप्रामया मागविनासर feminापान है निमार तप PETER CARTHI पापा ममान निर्मा' मम्मर है उन प्रयोगा में स्वतता तथा लचीलापन बनाये रमना माज की मर्वाधिक मावश्यक्ता है । मतएव शिक्षा के विकास तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति रेनिमाण की दिशा में मविधान के वतमान प्रावधानों का नुन पर उपपाग दिया जाना चाहिए। 181 केन्द्रीय सरकार के लिए यह भी मावश्यक है कि वनानि एव तपनीको क्षेत्रों म सस्याएं स्थापित करने के अतिरिक्त वह सामाजिक विताना म विशेषता मान करने वाली सस्यानों की म्पापना परे । मामाजिक विनाना म मानव विषय तया शिक्षण विमान भी सम्मिलित है । य सस्थाए विश्वविद्यालया में যনি ত প বাণিৰ গী পানী ব্যষ্টি না য বিষৱািলী ৰখা २ मिन प्रग-स्वरूप होनी चाहिए। 182 वेद्र शासित क्षेत्रो म मोबद्र शिना का विरस र साता है, मुम्पत दिल्ली म जहाँ सिर क्षेत्रों के लिए पादा स्वरूप सस्थानों को म्यापना की जा सकती है। 183 निपुरगना प्राप्त व्यक्तिया शो के द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जाना चाहिए तथा सभी मामलो में सम्मति एव मह्योग दन र उद्देश्य में देश म उपतन्य सवठ स्पत्तियों की गवा राज्य मरसाराा उपलध परायी जानी चाहिए। 181 बद्रीय एव देद्र सचालित क्षेत्रा म शिमा प्रमार माध्यम से मो मिला निमित वित्तीय दामित्व वहन करना चाहिए। गी प्यपस्पा तत्र रे सहारे पन्द्र राष्ट्राप हित म उद्देश्य से महस्यपूण धोत्रो म शिया के विराम यो पोसाहित तया निशिन या सरता है। केटीय क्षेत्र में चलाये जाने वान रायकमा म म कुछ इस प्रकार हैं (6) राष्ट्रीय पात्रवृत्ति पायक्रम म विस्तार, (1) पिछड़ी जातियाम निर्मित धावृत्ति थायरम म विस्तार, (m) विश्वविधालय मनुन मायाग के लिए पावटन, (v) अपि इनीनियरिंग तथा चिरिश्मा शिक्षा का विराम, पौर (v) शशिर भनुसमान म उन्नति । सामिन लिए जिन बापत्रमा पी सिफारिश की गाठी है, उनम से उप इस प्रकार हैं (1) शिक्षा परिगण {n} দাপিং বং মায়াবি মিশা দা গান, (m) राR FTII स्पाना दिसाम, परिशिष्ट-5 शैक्षिक व्यय सारिणी सरया-1 भारत म कुन मास अप 1950 51 से 1963-66 ता 1950-51 1955561196061 1190566 अनुमानित 1 ममी सातों म कुन शक्षिा व्यय 1441 1,897 3114 6,000 (दग साग एपों म) १ वृद्धि वा पार 100 166 301 524 3 মপি শফি সখি म्पर () 32 48 78 191 वृद्धिा गूध 100 150 241 372 5एन राष्ट्रीय पाप 95 300 99,800 141,100 210,000 (খলিত দুম্মা प्रापार पर) (ग साग हाम) 6रिका गूपर 100 103 115 220 7 प्रतिमति राष्ट्रीय u(ঘনিন মুর্ষ 2665 230 3256 पापार पर) 8 दिपार 100 96 122 159 राष्ट्रीय पार 12 29 ITrrमप 10 तिसर 100 158 200 242 प्रपम साय गमा पासना योगना पाना HTTrir पर होगा दि 100, 117, by-frm dnFR1463 121 १३७ सारिणो सस्या-2 भारत मे (विभिन्न) स्रोतो द्वारा शिक्षा पर व्यय (1950 51 से 1965 66 तक) 195071 195556 196061 196066 भनुमानित 1 राजकीय (1) कुल व्यय G52,678 1 172049 2,340,914 4,271,856 (000 रुपया म) (u) वृद्धि का मूचांक 100 179 შეე 655 (un) शिक्षा पर कुन ग्यवाप्रतिशत 571 618 680 712 2 स्थानीय प्राधिकरण कोप (1) कुन व्यय 124987 163548 224,914 378031 (000 रूपया म) (1) वृद्धिरामूचना 100 131 180 302 (un) शिक्षा पर कुलम्पया प्रतिशत 109 86 6.5 63 3 गुरूप (1) सध्यय 233,272 (000 कायों म) (1) वृटिरा मूघर 100 (i) शिक्षा पर पुन पया प्रतिशत 204 379033 590,208 918077 162 253 394 200 171 153 100 137 (1) कुन प्य 132880 181,980 287,715, 432,036 (000 रुपयों में) (1) वृद्धिा मूचा 217 325 (m) frया पर पुन व्यय प्रशिगन 116 96 84 72 5 वृद्धिको प्रोगत प्रपम पिताप नृवाय समस्त तानी योजना पाजना यागना याजनाएं (0) रासकीय पोष 124 148 128 133 (i) पानी प्राधिकरण पोप 55 66 73 103 १2 9.2 96 (परसान 65 96 81 frगामापागा प्रतिषान पृ471 ‘বি র 109 8.5 सारियो सध्या-3 मारत में लक्ष्यों पर आधारित शिक्षा पर व्यय (1950 51 से 1965 66 ) कुन प्पय पा वृद्धि (000 7 में) प्रतिशत वापिक प्रोसन 1950-51 1965-66195051/1965-661 पुरध्यय 130 84 160 104 115 136 30 153 115 120 160 107 प्र प्रत्याध्यय 1 पूर्व प्रापमित्र विद्यालय 1198 11,000 01 02 2 निम्न प्रापमिर विद्यालय 304813 1,220,500 319 203 3 उच्च प्रापमिर विपास 16990 717,500 67 120 याग (प्रयम स्नर) 4130311949000 387 3.25 माप्पपिर विपासप 290 450 1,181,000201 197 म्यावसापिर विधालय 36944 250000 32 6 वि पिपासप 23,335 39920 20 07 7 माध्यपिरस्टरमिडियट fTET बोर्ड 5,338 15000 05 08 मोग (द्वितीय स्लर) 90067 1515120259 253 8पिरियामय 49,032 270000 15 विविधाय 6256 65,000 05 11 10 गित एकता महाविधालय 11711 327,500 63 35 11 मारमाविरगिला मापियाम 42191 350000 37 58 1: fufte TI मारिपामय 2221 17500 02 0.3 योग (तीय स्तर) 171410 11030000 130 172 13 (योग प्ररमण) 9105301104920 पत्ररयाध्यय 14 निमानि 27,361 114009 19 15मरन 09270 GG6055 16 पानिया 31136 420035 30 10 til पारि 17 18261 95463 16 16 18 तिर 13479 201118 1ोगमन 303001 -31 20ोग T061000 1000 wr friramATTACT ܐ ܕܐ 100 81 111 11.5 191 117 १७ 117 सारिणो सरया-4 कुल शक्षिक व्यय (1965 85) 1945-661 1970-7111975-7611050-81 1 1985-86 1 196066 मूल्यों पर पाधारित राष्ट्रीय 210000 291,000376000500000 673000 माय-वृद्धि में प्रतिवप 67.यातरी का पनुमान (पप दस साग म) 2 पृद्धि या पार 100 138 179 210 300 3 अनुमानित जन सस्या (दम सागा सरया में) (Projection) 4243 स्तर मा यहिर्वेशन 105 360 630 690 748 1 टिका गूचांव 100 113 127 140 151 5 जनमस्या प्रतिव्यक्ति पर राष्ट्राप मार (रूपयों में) 597 724 ००० 6 वृद्धि का गूपन 100 141 171 212 6000 963 7 उमगिरप्पर (मार 11.5622303 40364 रूपों मोवृद्धिम प्रतियप 10/बढ़ोतरी मा पनुमान) 8 वृद्धिमा गूगार 100 161 418 673 राष्ट्रीय पायो 41 गुमना में पूरा मतिर 50 60 पपराप्रति 10 दिसा गूधार 100 117 141 172 217 11 प्रतिपकि सिर पप्पयों में) 121 17.3 247 361 40 1 पति मूगररांक 100 सोड-FI मायाग या प्रक्रिया, पृ473 118 259 29 34 १४. सारिणो सरया-5 भारत में लक्ष्यों पर आधारित शैक्षिक व्यय (1975-76 और 1985 86) मा उपय (000 म) पुन व्यय मा प्रतिशत 141570 1985-9019376 |19555 प्रायतक पूप प्रापमा 15 236926 3719,220 2111067 2132310 1312,336 488531 6199616 5110287 7,072018 3,613010 158 156 84 12 152 127 175 90 निम्न प्रायमिर उस प्रायमिर निम्न माध्यमिर 77 मात्रामा निग्न एय रिमाण त्तिमा मोग (पिण) 389050 301650 1611360 1190210 19 37 10873119 21579121 699 631 122 10. 1892,706 1,121200 629200 1238903 1013100 2116200 100 60 10 गि पार गति 1615166 10,699 563 205 17810 403610 05 10 प्रो frn गोग(भारत) 11506095 3668161 938 909 पुमो frortilfaget १५010 370556 100५५90 2173196 १४१ सारिणी सस्या-6 प्रति छात्र औसत वार्षिक लागत (1950 51 से 1985 86 तर) प्रोसत वापिस लागत गैर अध्यापकीय प्रति प्रध्यापन प्रति अध्यापक लागत का प्रीमत छात्र सत्या अध्यापकीय याग वापिक वेतन सागत से मनुपात अध्यापकीय लागत के कारण और प्रध्यापपीय लागत के कारण वप ह रु ह पूर्व प्राथमिक शिक्षा 55 55 1950-51 196566 197576 198386 914 1,000 1800 2,500 103 195051 1965-66 197570 198586 545 1046 1,800 2500 20 30 52 80 45 190051 196760 197176 198286 682 1087 2100 2870 20 513 37 19 31 563 30 20 40 500 50 25 40 500 69 34 निम्न प्रायमिक शिक्षा 34 246 16 4 38 111 27 3 50 202 43 9 196 67 13 उच्च प्रापमिक शिक्षा 24 320 28 9 31 124 5 35 200 73 14 35 200 99 20 निम्न माध्यमिर HिI (सामाय) 25 448 50 23 22 370 78 29 25 333 152 51 25 333 201 67 निम्न माध्यमिक क्षिा (प्यायसापिर) 16 868 106 92 15 1000 208 208 37 45 87 119 193051 196566 197576 198386 1238 1,909 3,100 4150 73 107 203 268 1950.01 190566 197576 1985-86 1,705 2,887 197 417 500 600 - 363 197576 199 SG 1500 5,000 उच्च माप्यमिक शिक्षा (सामाय) 20 333 272 91 20 333 333 111 उम्प माप्पमिर मिा(प्यावसायिक) - 1975-16 1985-86 ।। ।।। 100 800 Arram . an ४२ सारिणी सध्या-7 उत्च शिक्षा में प्रति छात्र औसत वार्षिक लागत (1950-51 स 1985 86 तर) मोगत यापित मागत और पति मध्यापक प्रति प्राध्यापकीय पौमत पापिर प्रध्यापन तागत या वितन छात्र प्रध्यापकीय सख्या लागत स मनुपात पांग मध्यापसीय सागावे कारण और प्रध्यापीय लागत से पारण ह १ 133 200 2,696 1000 6000 1,500 20 20 1b 15 737 638 667 667 98 128 293 367 231 328 733 917 500 पयर-स्नातक म) नाव पाणित 19,051 10666 197576 198686 (प) विना एय पारगापिर 19501 196566 1973-76 1985-86 सर (C) एम पर 10576 1053-36 3948 6110 11 11 1181 1000 357 381 422 583 119 1167 1500 2,000 - - - 10000 19000 8 8 118 118 1375 1,625 3000 1650 1,950 3000 -r 1973.70 1.५९.56 5,000 - 6000 गो-.- frnxT483
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