Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur

Namamala

Dhananjaya, Mahakavi · 2011/08

PDF Proofread

Front matter

भारतीय ज्ञानपीठ काशी
स्य. पुण्यश्लोका माता भी मूर्तिदेवी की पवित्र स्मृति में
तस्सुपुत्र सेठ शान्तिप्रसाद जी द्वारा
संस्पापित
ज्ञानपीठ मूर्तिदेवी
जैन ग्रन्थमाला
इस प्रन्ममाला में प्राकत ससत मपक्ष हिन्दी कन्मा सामिस आदि प्राचीन मापाओं में
उपसम्म वागमिक दार्शनिक पौगगिक साहित्यिक और ऐतिहासिक आवि विविध विषयक
मसाहित्य का अनुसमानपूर्ण सम्पावन उसका मूल और यपासम्भव अनुवाद
आवि के साथ प्रकाशन होगा। जैन भगरो को सूधियाँ शिलालेस
संग्रह विशिष्ट विद्वानो में अध्ययनगृम्प बोर लोकहितकारी
मैन साहित्य गन्य भी इसी गुम्पमासा में प्रकाशित होंगे।
-
मन्ममाशा सम्पादक और निनामक (सस्कृत निमाग)
प्रो. महेन्द्रमार मैन, न्यायाधार्य जैन-प्राचीनन्वायतीर्थ, आदि
मौद्धदरीनामापक संस्कृत महाविद्यालय
हिन्दू विश्वविधालय कापी
संस्कृत ग्रन्था
अयोध्याप्रसार गोयसीय
मन्त्री, भारतीय ज्ञानपीठ काग्री,
दुर्गाशा रोग, पनारस सिटी
मुष- पृथ्वीनाष मार्गच मार्ग भूपन प्रेछ मायपाट काली ।
स्थापनाम
सर्वाधिकार सुरक्षित
विक्रम से २
१८भरपरी १९४
पौर नित २०

नाममाला
स्व
मूर्विरेमी मारपरी सेठ शान्तिप्रसाद बैन

No text on this page.

JNANA PITHA MOORTI DEVIJAIN GRANTHAMALA
SANSKRIT GRANTHA NO 6
NAMAMALA
BY
MAHAKAVIDHANANJAYA
With the
BHASHYA
ОР
AMARAKIRTI
AND
Thic Anchartha nighantu and Ehahsharı kosha
EDITED WITH NOTES
By
Pt SHADIBHU NATHA TRIPATHI
yakaranacharja Sapia Torta
Published by
BHARATIYA JNANA-PITHA KASHI
First Edition
1000 Copia
LAITILA, VIN BALVAT 1870
TOILALA UT
APRIL 190
{
Pnce
N. 3/8

BHARATIYA JNANAPITHA KASHI Louided by SETH SHANTI PRASAD JAIN In memory of his late benevolent mother SHRI MOORTI DEVI JNANA PITILA MOONTI DEVI JAIN GRANTIIAMALA Io the Grantlumala critically edited Jaln agundo Phlloropbloul learnio Ilterary hlstorical and other orlglasl texts Availablo in Prokrit Sunbit Apabhrapala Ilmuli Kannada Tamil Klo III bo pulled fo tacir rospective language with their Innslations in modern languages IND Catalogues of Jain Blandaru inscription sudla of competent scholars and Jain literature of popralar interest will also be publbled OLYLRT BDITUN OR TUX SANSKRIT SLUTIOV l'rof MLAIILADNI KUMAR JAIN VYA1 ACTIS RY A JUN PRACJILN I NYAYATIITIIA IK Profossor of Bauddha Darshana Sanskrit Mahavidyalaya Ilararac Ilindu Unireally SANSKRIT GRANTHA No 6 Publisher AYODIIYA PRASAD GOYALIYA srci BHARATIYA JNANAPITHA KASHI DUN IKUD JIOAD 1 IN 11 is LITI I wadad I alpine hr Vir Sam 2170 III Hights Resend Sukmm Samnat 2000 13u tot 1941 FOREWORD with a The Bharatiya Jnanapitha, Banaras founded by Shri Sbanopraud Jan to perpetuate the memory of his mother Murtiden, has undertaken in ambitious plan of cholarly publications dealmg wich all aspects of Ancient Indum Culare very broad outlook and vision, and has already owed a few workunyadows languages such as Soknit, Praknit, Pali etc. The undertaking has secured a learned sciolar of proved ability tn Pandit Mabendra Kumar Nyayacharya, of the Samant Mahavidyalaya of the Banaras Hinda University is a General Editor The Juana pitha has already published a few works and has a number of others in active preparation The present volume contains two small works of the famous lexicogra pher Dbanımjay. The first w called NAMAMALA, a collection of synhnonyms, while the other is called ANEKARTHA-NAMAMALA recording words with plurality of seases. The first work contamos frust 100 stanzas, while the other is smaller stull. The most important feature of the first work is that it publishes for the first time the Bhashyu of AMARAKIRTI, who gives etymiologral cxplanations of each and every word m the work, and adds a few more synonymous words from his own observation. Hu Bhashyas follows the sme methods us are wed by Kamrasvamin in his famous commentry on AMARAKOSA The catre works very carefully edited with appropriate references to authondo by Pandit Shambhunath Tripattu, a Saptaartha and also a Vyakaranacharya of repate. On reading his foot-notes, I often felt that Pandit Topathi excels the Bhsyakara both in mgmuty and accuracy nay would go further and sy that bw etymological explanations are happaer still. I am sure the scholars will adourc his work in the foot-notes. The volume is further equipped with several indexes. They mdude naturally the word-maderes of both the worlas edited but there are in addition rades recordmg additional words from Amarkas Bhasya, a lot of Yougika worda a lost of socks and anthors ated and a list of quotatops ated in the work all thrs being done by Pandit Mahadeva Chaturvedi, Vyakaranacharyz In, fact the editorial part of the volome Bus thorough us is humanly possible and I have nodang but high admiration for the ability of Pandit Mahendra Kumar the Ge acral Editor m seconng such a team of scholars to produce thu volumc. Banaras Hindu Uarveraty 6th September 1949 PLVAIDYAM A D Litt, Mayurbhanj Professor and Head of The Department of Sanskrit & Pal प्राक्कथन (हिन्दी मनुवार) अपनी पूम्प माता मूर्तिदेवीबी की स्मृति के लिए वायु मान्तिप्रसाद बीमारा संस्माक्ति भारतीय ज्ञानपीठ बनारस में पितापूर्ण प्रकाशनों की एक सत्ताहक पोचमा हाल में भी है। प्राचीन भारतीय संस्कृति के विनात दृष्टि सपना गाते समो मंगों का प्रकाशन इस योजना के मम्तर्पत ह तवा मब तक इस संस्था से संसहत प्रान्त पाली मारि विभिन्न भागों के कतिपय प्रम्प प्रकाशित हो चुके है। इस योजना के सम्पादन के लिए कामी हिम विश्वविद्यालय के संस्मत महाविद्यालय के नुमोप्प विद्वान् ५ महेनमार म्यापाचार्य प्रधान सम्पारोस में प्राप्त है। कानपीठ से मब तक कई एक पान प्रबाधित हुए हैनौर की एक प्रशासन के लिए तैयार है। संमान प्राप म मसिम पोशकार बनम्नपर यो कृतियां सम्मिलित ह। पहती नाममाता कहताती है जिसमें पर्यायवाची मम्मों का संग्रहा मौर इसरी मनेकाई माममाता गितम भनेक गई गोषक भयों का संग्रह है। पहली इति में २ लोक हे बब कि इसरो रुति उतसे पाकी छोरी ह। प्रथम कृति के सम्बम्प में उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इस पर लिया गमा भमरणीति का भाष्प पहने पहन प्रकाश में बा हा है। बमरीति ने नाममाता के प्रत्येक प्रमों की म्युत्पत्ति कर स्पष्टीकरण किया हमीर मफ्नी एटि म भाए गुण और पर्यावाची प्रमों को पामित कर रिमा है। रनके भाप्य को बही सरचि पति है बो कि ममरकोन की प्रसिरीता में क्षीरस्वामी ने अपनायी है। तम्यून हप्ति का सम्पादन स्वातनामा पपित गम्भुनाथ त्रिपाठी प्यावरणाचाय तपती ने को तामपानी रो तमा प्रमानों का उपयुक्त ध्यान देते हुए किया है। ग्नको पिपियों का सम्मपन परम : म मनक मार प्रतीत हुमा ह शिवपित त्रिपाठी-पक्ति मौर मुशि दोनों में व्हाकही भाप्पकार को भी मात कर गए है इतना ही नहीं उनके प्मुत्तत्ति पराधी स्पपीकरण और भी गह। नमें विवात कि गिन् सोम रिप्पनी में मिपाठी बी के प्रयरन की प्रसंसा करने। मन्त्र में अनेक मनुक्रमनिका तला होना है। उनमें सम्मारित दोनों कृतियों की पम दुषी ना सम्मिलित होता तो म्वामारिक ही ह परन्तु इसके अतिरिक्त भमरकीति के नाम मतिरिका तामाबी मूधी पौगिक पानी की भूधी गत पाव भोर पापागों की सूची तमाम में ग्यत पापों की पूषी भी सम्मिलित को पा है। पह तर पगित महारेब की पनुरी प्यारनाचार्यने किया है। सबध में प्रपा तम्पारकीय माग रतना पून बना रिमा मना। मितना मानवी परित से भर पा । और इस सब के लिए म प्रपाल सम्पारक पति महेनमार म्यापाचाय की बीमता हो साहना करता जिन्होंने एसे पान के प्रमाणात प्रकार पीमिगमगती गे पषित विवाह। पापी रिमविश्विासप गिनम्बर १४९ पा पस०पंग एम ए तित अगरगोटेगरबा अम्मा गत पाती भिाग।

प्रस्तावना समप्रमाणि निष्मान पसमापिपमानि मावि समास में पारमत व्यक्ति परराष्ट्र की प्राप्ति कर सकता है। यह सिबाम्त इस बात की सपना देना है कि माह को पहिने भमस्ति और उत्तकी मारा तमा माष का मान माघारक है। परि से परामपाच्या मागाई मार तापयर्षि की प्रतिमा का बोप नहीं है वो बह भटक तम्ता है। बस्तु मम भानों के होने का एक स्पा वाहन है। बता सहन न हो तब तक उसकी कोई उपयोमिता ही नहीं है। एक ही सम संभार से निम मिक बी का पाषा होता है इसीनिए पनिमास्त्रों में एक प मह मी उपसण होता है कि प्रम देवत बस्ता पी बिमा को सूचित करते है पार्ष के बाबक नहीं है। 'पट' मग का संकेत पत्ता ने मिस रप में मित 'पोता को पहा करा दिया है उसी मभिप्राय का स्तन रह सम रस मोता को परा रेगा। पय रिचमान व कोनी कहता है मार भबिचमान को। एक पारविपाप भी एप है जिसका मकर वाय परार्म इस संसार में नहीं है और पट प्रम भी है जिसका बाम पा मोर है। मान के सम्मानब यह निवप कला हि-यह पम अर्यवाची है और यह बनवावीरी बोर है । फिर भी शामिकों ने यह प्रयत्न दिया है पम साल मौर मलमल का विष हो बाप । पत्तका मुम्म पाप है मक्लिाह पा संसहप । मित मर्व में लिप्त प्रग का स्तिपहन होता है वह रस मप का बायको बाता है। मह मित का किसने बहन करामा इसका निर्णय फटिन है। सिर की पित पहन कराने के लिए पसीटना पानी बस्तु है। इसका इतना ही मर्ष है कि परम्परा से यम क्ति का प्रहम बराबर होता बापा है और यह ममारि है । उसमें बिप हेर कर होकर भी सामान्यतया ति की परम्परा मनारि है।बब से पहबीब है तमी से समसमेत सिहन रे पाप निम्न हिलित है पनिम्पासामोरमानोमानवास्याद् म्पनहारता पारयम्प पेपार विपतेरन्ति सामिम्मत सिवपरस्प ग ।। मात-पाकरप उपमान रोप वापरबाप पाप पापमोच विपरम और प्रसिद्ध समरे साभिपति ग्राम होता है। इसमें प्यार से मौगिक धर्मों का पति संरत हम हो भी पाप पर समोर पोमम पो का सेरेस गहन मारक महाँ हो सकता। मन्तत कोम हो एक ऐसा पाप बरता है मितते सभी प्रकार के पो का रित-पहल हो पाता है। को अर्गन् पगाना या शार। पाकरण से सिर मा रापरम्परा से प्रसिस से भी पौगिक राग मोगर मारि प्रमों गमनेरा रे साथ माह बीम में होता है। भाषा ही समर मौर बीपिन तमाशी पाती है जितरा सा भगर पर्याप्त हो और जिसमें प्यपहार मौर परमाष के लिए पपोपी पची पाम विधमान हो। मितने भम्प नावानों के पा निरोगी रामों पचाने पो मापन स-स्वरूप करने को तामप्य हो। इस दुमि से संस्कृत भाषा उतनी तर ही म समानारप परहा है कि इस भाषा पर एक वर्ष का प्रभाव हा और उसने इस पापा सो बम मपम के स्पिन बापन है बम रिपाबा। स प रस पनि मपी मर जात प्रतियों मनो उस समय से मनमोनियां भी चारप परमा पाप गति पिपा पारि भी संतती को प्राति प्रापप स्पर्ग मारे बोर से मापार पनि श्री - नाममाम सौके कारण यह पावन होकर भी विमोग्म मपाल बनी पी। ततो सोकमाना का परमा सबली बोती होने का सीमाम्प नहीं मिल सका । इस भाषा सम्मानी धर्माधम विचार में संसात के कोषापार को भी सीमित कर रिमा। मावा के एकाधिकारियों ने तो यहां तक रह गता है कि अपभ्रम पा मम्स लोकमाया समों में पाचक शक्ति ही नहीं है। बष्टि का अपम मी या साठी काठी या ताली मन में पायामक्ति स्वीकार नहीं करना चाहते। कहना है कि बाघम्सन्ति तो 'पति' मम में ही है। सही या साठी सम सुभकर बो माता को लाठी पदार्थ का दान होता है उसकी विधि इस प्रकार है-प्रथम ही मोता साठी सब को तुमकर संसात ममि' मम का स्मरण करता है मौर फिर उस पम्टि' सम पदार्थबोध होता है। मति ऐसे भोता को रिसने स्पण में भी 'पमि' पर नहीं सुना उसे भी साठी मनसे पदार्थ बोध के लिए ससम्म 'पष्टि' सबका स्मरम मापाया है। इस नामापारित वर्गप्रभुत्व से संसप्त नापा एक शिविप वर्ग की मात्रा कर ए पर। पा महानाम के पत्पमा मादिक में लिया है कि-'तस्माद्बोधन न म्हेभि मापमाक्ति* म्मेत्रो हा एप अपपमः। मर्चात् मान को तो म्- समों का प्यवहार करना चाहिए पौर न मपर्म का हो। बपमन मे है। भपसम का विवरण भी यहाँ यह रिया t-- 'मरि वाममोपरेप किमते गौरिमेतस्मिनुपरिष्टे गम्पत एता गाम्यायोमणमा इति । भतिको सम्म मौर पायी पैया बारि मपसम है। पपपि भाषा को संसात रखने के लिए भारत का संस्कार मावस्यक है मोह एक अपने निश्चित स में पप सती है, लिग और पचन वा मनुमाप्तम भी इसीलिए बारामा होता है परन्तु उसके बारन में किसी बाति विशेष का पारिष का मधिकार मानने से उसकी प्यापरता तो एक ही नती है । नाटकों में स्त्री हो या बातों से प्रास्त भाषा का पुतपापा माना गत मी का हो सकी है। इतना ही नहीं बर्मन में सानु सबमति सम का मारण ही एप माना था। इसका पा सहब परिणाम पाकिधर्म का सा भी हाचा प्रमुत्तारा एप पर्प बिचको मिकामा भी पही। पर्म का अधिकार मौर उससे बार्षिक सम्बाद एक वर्ष का हो पया। इस सम्बन्ध में मौलिक मन्ति महाभमन महावीर गौर करने की । मगने मापात कल्पित बाबान को तोग कर बनमापा वर्मा परेस पिया मोर स्लो मातमा पामर से पामर पापियों के लिए भर्म का मेष होता। वर्म रन पर के लिए बात का कोपयन बनने स्वीकार को किया। इस नाबानाति से प्राकृत भाषामों का विकास हमा। एनहाँ है कि प्रात भाषाएँ प्याकरण गौर निमानपत्तन से मुक्त हो। म सपने मारष है अपने नियम है जिनके मनुतार में पारित पुति और मित्र होती ही है। माहागीर और पुर कात ते करता को दौतरी तरी तक प्राकृत भाषामों को गति मिती हो। मनोक २ मिसाल मारा नापा में महान होते है। मातनाम मास भाषा में बनते ऐ है। पुन त पुग में इन भाषाओं को पति मान ली। इस सुपरमार माधाों ने भी प्रवरना Eमें ही हो । पही कारण है कि दोनों के रिपुत साहित्य से संस्कृत का मेगामार मरा हुमा है। गर्मनिट मे पत पुरन तो मामान पिनाप तमन्ना तिरसेन मारमा प्रायों से ही भी। बात यह कि अमन परम्परा ने मम्पमत में रहन भाग के रात में भी मरमा महामार्ण पोपान किया।

प्रस्तावना प्रस्तुत ग्रन्थ- नाममाता कोप का एक सुबर और पबहारोफ्पोमी मावश्यक समों में समा पम्प है। महल कषि पनम्बयने २ लोकों में ही संत नापा के प्रमुख पमों का चयन कर पामर न सापर मर विमा है। मन से समान्तर बनाने की इसकी मपनी निराठी पाति है। से पूपिणी के मामों के मामे 'पर' पम बोरने से पर्वत के नाम 'मनुष्य के कामों के मापे 'पति' प्रम बोर रेने से रामा के नाम 'इम' के नामों के बागे 'पर' पब मोड़ने पर बमर के नामों का बन बामा मारि। इसपर ममरीति विरचित पाप्य सर्वप्रथम प्रकाशित किया था हा है। इस भाष्य में प्रत्येक सम की मारपसिय मुत्पत्ति निम पूर्वक बताई गई है। बारि से तिर हो पा मम्म रीति धे पर कोई मी पण मि पत्ति नहीए पापा है। इन पुत्पत्तियों की प्रामानिमाता के लिए पा- पुरान, पपनदि मात्र पस्तित बम्पू मोतियायामृत, पिसवानकाम्प, दहमतिममप माप्य महामारत सूक्तिमुक्तावनी, पबमेर, मनेकार्थप्पनिमम्मरी ममरहि भाप्प मापापर महाभिषेक, मीतिसा, शाश्वत हमीनाममाता भारि पन्नों तथा यम कीदि, अमरसिंह, बाताबाप, इमानन्ति नीरस्वामी, पप्रनन्धि, भीमोम हमायुष भारि पत्रकारों को भाम निपपूर्वक प्रमानकोटि में उपस्थित छिया है। पनेक मुत्पत्तियां वो अमरकीति को मना रे मने पायहरम है। बदा- "प्रियन्त मुद्रगन्तबोस्प स्सनिति मल्ल्यात मिसके स्पर्म से सामन्तु मर गाय ए मर है। 'नमन्वति भातगाया यस्मा सत्यो सा नमान्दा' मितको मौनूगगी में मोबाईप न हो प मारा-मार है। यहाना पचुकारतमणानामटि यचारिः अर्थात् पापा का विरोधी म्पादेव। बापि । इसके साथ ही एक मनपर्व निवट भी मुद्रित किया गया है। इसके मन्त्र में निम्नलिखित पुम्पिका पति महाविवनम्म्याहरी मिपष्टतम्मे समसंकीर्ने मनेकार्थप्रामनो बितीम परिमे। इसकी एक मात्र मापुरतम प्रति गुगलकिमोरनी मुख्तार अधिष्ठाता पोरसेवा मबिर से प्राप्त हई दी। रबमा अंशी मावि से माह मिषम पूर्वक नही मावा सकता कि यह रहीं बनम्मकी रुति है, पप पुष्पिका बाम में स्पष्ट रूपसे बनम्रय कर पाया है। इसके ताब ही एक मातस्तक एकसरो कोप का भी नाम किया है। इसको हस्तलिखित प्रति भी पीर वा मन्दिर से ही प्राप्त हुईबी। प्रस्तुत सस्करण- बमरीति भाष्य को एकमात्र मार प्रति ऐतर पमाहात सरस्वती भबन भातरा पावन से प्राप्त हुई थी। इसी माघार से इसका सम्पारन पं सम्मुनानगी बिपाठी ने किया है। संस्करण में मो मनेक परिशिष्ट है ये सम + महावनी बतुरी मारनाबाप ने तमार टिप्पणिर्मा ६ भुनाव बी मिपाठी ने बो परिमम से हिची है। मझे यह सिखते ए मानव होता है कि उनके सर्वतोमुनी म्पाप पारिटाप का परिचय हिप्पों में पर पर पर अन्यकार [ महाकवि धनञ्जय] गानगाता के l महामवि बनमय है। इहोंने स्वयं मफ्ने किमी पन्ध में अपने समम मागि सारा नहीं किया है। ये गृहस्व । सिन्धानकाय के मन्तिम लोकको पात्या में Unार मे बनम्नम के पिता का नाम बतुरेव माता का नाम मोरेषी मार ण का माम मित किया है। इनकी म्याति सितापानकादि' के नाम से भी। नाममाता के अन्त में पामा मानेमा मह लोक स्वयं इसका ताती है। 'प्रमाणमकरस्म पूज्यपाबस्व पक्षमम्। शिसम्मानको काम मात्रयमपश्चिमम्॥ भति-अफसरोज का प्रमान शास्त्र पूज्यपाल का सा-यासारण हार और तित्यानकविका सम्मानकाम्म तीनों मपूर्ण रताय है। मा सोक नाममाछा के भाष्यकार अमरकीति सामने पा ने इसकी पाल्मा भी की है। इसमें इनका उपनाम 'पिस पानकमि' पुषित पिा पया है। टीक भी है पोकि महामपि मनम्बप की सर्वश्रेष्ठ चमत्कारिको इति विसापानबाप ही है। मारिराम परि मे पासनाव परित प्रारंभ में दिवानान काम की प्रसंसा करते हुए मिला है-- “भनर मेरसम्वामा समन्वो पये मुह । पापा बनम्नयोग्मुक्ता कर्मम प्रिया कपम् । अर्थात् पमम्ममारा कहे गए मनेक सामान-मर्मभेर पाले और मस्पर्सी गबन कानों को ही प्रिप से लगये पते कि मन के द्वारा पाने वाले अनेक सापों के मेरक मर्मभेरी पान कर्म को प्रिय नही हगते। तिमान काय अपने समय में पर्याप्त प्रसिदि प्राप्त कर का पा। इसका मतेश बार- बीश भोजराम के समकालीन माचार्य प्रमान ने अपने प्रयकमहमा ( ४ २) में किया है। महन (१२वी सी) विरचित मूषित मुस्तावली में राममेवर के मामले परम्प की सा में निम्नलिखित पर ग्यत है हिमपान निपुपता सता पो बनम्या । - बया बस फम तस्य सतापा बनयम | म क म राबवा बनम्म्य के हिमवानाम का मनोमुपकर सर्राम से जाना पियाई। बसन्मय कवि केरा एक विलापहार स्तोत्र मी मनापा ममा ।। पह अपने प्रतार योग और भीर्य के लिए नि है। रहते यो सक्षम पुत्र का विष उता पिए बनापा का। ममयविचार- मह समर लिए निम्न मार (१) प्रमेय प्रस्तावना ११ (२) इसी तरह पारिराम पूरि (सन् १ १५) मे पानाप बरित में बनाय मौर गिसम्बान का निम किया है मत' ये ११ सदरी ने पार के नहीं है। (३) अहम (१२वी सो) रायमेनर + नाम से सपितमगावली में दो पम् ग्यत किया है या परमेश्वर काम्पमीमांसाकार राममेहर है। इसका उस्ले सोमरेर (९) पमस्तितप चम्मू में पाया जाता है त राममेहर का समय १ वी सरी सुनिश्चित है। रानमेवारोबारा प्रमसित होने के कारन भनम्बय का समय भी सपी रे मार काहीं हो पाता। (४) में हाराहातमी में पटतापम प्रथम माम को प्रस्तावना (५ ६२) में यह भूचित किया है कि मिनसेन के उस परिप्रेन स्वामी ने पयता का ( १८०) में मने का नाममाला का निम्नलिम्ति लोक प्रमानाप में गत किया है- हतार प्रशारा प्यारे विपर्यये । प्रादुर्भाव समातीच प्रतिशम् पिदुर्गमा ।। मा लोक बनेकाष मागमाता का है। पहलारीका गि *. १म१५ में समाप्त हई थी मत बनायर का तमम ९वी समीर बार नहीं हो सकता । (५) बनाय ने मकर देव का गोब 'प्रमानमवस्य लोक ने किया है। मानक का तमम | of सही निश्चित है मत पाम्यय यो सरी से पूर्व नहीं हो सकते। सहात साहित्य का संक्षिप्त इतिहास रेहार में बनम्बय का समय १२ पटक का मध्य निर्धारित किया है। (८ १४) ग्मने मपने 11 मत की पुष्टि के लिए के बी पाठय महाम्म का यह 'मी एव म्यिा है विनम्बय ने मिसवान महाकाम्प की रचना १९२३ मार १४ के मप्प में की है। पर उपरोक्त प्रमाों के मापार से बनम्नम का समय f८ी मपी का मान और नी का पूर्व पि होता है। पालम की मुक्तिमतावली में हो। १रग सरी की रचना , रामरमर के नाम से बात सापाने निपुणता मोक कापमीमांसा कार राममेकर का ही हो सकता है कि प्रबकोन से पता रामवर का। संत साहित्य के लिहात पाय यहाँ प्रान्ति र है, ये वाहन हो १२ वी सगी का मिशन निबार भी उसमें गत रामवर को वी सदी का मैन रामपेबर मताते है! मत बनम्नम का समय सात प्रमापदि मापार मेला का रत्तर भाग मार भी का पूर्व मा ममापित हता है। माम्पकार अमरकीति- महपषित मनरकति माममाता रे भाष्य के मन्त मा परिपका पारस तिहा- “ति म्यामपित्तमीमरमरपोतिना प्रविन भी ऐनबमोत्यमेन समयेषता हतापा बनम्नयनाम मातापी प्रथमकार याम्यात इससे इतना ही जात होता है कि समादीति परिय उपाधि से विभूषित और ये सेमवंत (तनवंस) में गत्पम हुए थे। उन्होंने अपने को बोरा साधि हे मलमल किया है। मग लोकों में पूज्यपार मम्मर विधाननि मेर समसभा चाप हो भाप एक स्माग - १ इसी के मापार से पसा कोए की प्रस्तावना ( P XXXu ) में पी गमावतार पर्मा मे मी भी पनम्मम का बमम १ योमरी निवा है।

१० नाममाला कौति को भी नमस्कार किया है। इन्होंने पाय रे पौष में हा मामापता भी नहीं है वहाँ भी अपना माम देने में संकोच नही किया है। मानों पर परम्प के सोकों की उत्वानिया में मी "सम्मति मनम्पपर्प बारम्पते ममरकीतिमा" (५ ११) मारि लिया है। दो स्पथात' उत्तम करता है। एक बा तो बसम्म प सोकप की प्याला करते हुए स्वयं अपना ही नाम सि पिया है-“वारिविर्षयतेऽभुना। मधुना पानी बारिर्पिते कम्पते । केन भाष्यकी भीमरमरकीतिमा । सम्टापा हो मका उत्तर पास होना चाहिए था। ममरकीति नाम तीन मिानों का पता तपता है- (१) सम्मोबएस' मारि प्रायों के पिता ममरीति'। इन्होंने वि सं १० मा तुरी १४ हे नि भलामोबएस पथ समाप्त किया था । मर्याद मे सिपीय १२वी स्त्री मन्तिम माप मौर तेपी के प्रारम्भ में विद्यमान थे। ये अमितपति माचार्य की परम्परा में हुए है। इसकी पुर परम्पप यह है:-अमितपति सान्तिपेच अमरसेन मारे बनीति और बाकीति के सिप ममरकोति। (२) वर्षमान के प्रगुरु नमरणीति । इनकी परम्परा इस प्रकार है। येन विलासकीति सुभकीति पमपम पमरीति पर्मभूपन अपमान । वर्षमान में प्रक संवत् १२९५ मात्र सुरी बुधवार को बर्ममवर की निवाबनवाईपी। इस निमारस के अनुसार समरफीति का तमय मा १२५ के मासवाप्स सिर होता है। ये सिमीय १rt सी द्विान् रे। इनके इस समय समर्थन सक १५ . में रत्ती गि अपनपर के मित्ताने से भी होता है। (१) बरामयारि महाभारत के पिता वर्षमान समकालीन विचामल मिनाम फोति के सबर्मा अमरगति । इनके समय में बसनत्पारिमास्त्र में लिया :- "पीयाबमरकोरियमहासपिरोमनि । विधाडकौतियोपीनसममा पास्कोपिला बमरकी विमुनिम्मिमाषय कुसुमनापमवापतमयमृत् । मिनमवापहतारिखमारण यो बपति निर्मपर्मपुत्राभर । मदि-मारबोषिष विमतामय कामता निर्मलपुष और धर्म के मामय या मिनस्तक प्रकापक मगरकीर्ति महारक विमाननीति के सपर्मा। विद्यालोतिरे पिता विधानब का सातमक सन् २४८१ मा पा। पा पस्तेन मममत्पारि महामारण विमानमता पम पुर विमालकीति समर्मा भमरकीति का समय करीब सन् १५ बर्षात् तिबीय १५ पवामी तिर होता है । समरपारि पारण का समाप्तिास १४ ४ाक मर्मात् १४८२ ६ है। १ रेखोग हीपणापा 'अमरतीतिमनि मोर उमा पदमारस' मेप । पेन मि मासर माम २ २ न पिलात पा १११मा पिलाए। । प्रशस्तिसगहरे सम्पार, मुमारी यात्री ने सारे बहिरपरिणामिन सबरणारे म एक सिपाहै। मापारि पास्त्र की समाप्ति मूषा 'पारे परतराम्पि पाणावर १४ (परिया है। रोना समास म्प केमा पाहिये । परि राम पपारि पान १४ में प्रमात एमाई पो उममें एक १४६म पिपान की मरम्मी पतासेमा साती है? ४ लो प्रपस्तिमा ए १२८॥

प्रन्यकार में समाप्त इस इन तीन ममरणीति में प्रस्तुत प्रब के रचयिता मम्मोपएस के रचयिता नहीं हो सप्ते क्योंकि उनका काम बि १२७ मासपास पर कि माममाता के भाष्य ( १६२) में आमा परके महाभिषेक से पारण दिया है। मामाघर मे मपना बनमारपर्मामृत पि." किया था। मतः प्रथम ममरफीति इस प्रवरचयिता नहीं हो सकते। यह निष्पाप निम्तता हि प्रस्तुत पन्च के भाष्यका बमरणीति वि १५ मात् तिषीय १२१ तापी सनी के पहिसे के द्विान् तो नही है। इन्होंने भाष्य में भोग (११वीं सपी) नामन्ति (१-या सो) पानि (१२वी सी) सोमप्रम (१२वी सी) हेमचन (१२-१॥ सपी) मारिपचों से भी नामोत्तेल पूरक समताप मिस है। शेष दो ममरकीनि पमा प्यक्ति तो है ही। द्वितीय अमरकीति को प्रसंसा में विजयपुर के शिलामेल में निम्नलिखित पप मिलते है- सिष्यस्तस्म गुरोरासीपनर्गम्पोनिधि । भीमानमरकीर्यो देधिकाप्रेसर धमी। निवपमपूरकबाट भटयित्वानपरोक्तो । परिवस्तिमोपवीप तममरकोटि मयेवमोहरमम् ।' मस्ति-अमरकीति महान् तपस्वी पास्त मौर मम्मी समामि नमानेगाते पोपी थे। इस वर्मन से भात होता है कि ये ममरतीति पातकार की अपेक्षा मोपी मौर तपस्वी ही विमेष रूप से पे। नाममामा भाम्प में मिस प्रकार की मनोति सा पम्ती है वह एक पोपी भोर तपस्सी में नहीं हो सकती। पता मेरे विचार से दितीय ममरीति भी प्रस्तुत सब के रचयिता नही। तृतीय ममरकीतिक वन में 'भारतकोपिर पिसेवन को पापिरम 7 मि रहा है। मतः हमारे प्रहत प्रकार मनमत्यारि महाभारत के रचयिता वर्षमान के समकालीन विधामायके पुत्र विमलकीत के सबर्मा बमरीति है। ये सन् १९५ २ माउपास सर्वात पनाही सरी रे निशा पे। इस समय का भाषण एक प्रमाण पह भी हो सकता है कि हनने सयामीति को समालार किया है। पानीति का एक चियारोपय बम्ब मिलता है। उसकी प्रशस्ति से बत होता है कि ये बहारक कतिकति मिल कम्पारकोम्ति ने मुग ५ पाक संपत १३५ में भिनयालोरय समाप्त किया था। वर्षात् सन् १४२८ में पा पाच समाप्त मा बा। परि पड़ी कम्पानीति अमरकीतिरेरा स्मृत हुए है तो मानना होगा कि ममरीति पानी ती के पिा है। खामार- पर. परब के एम्पायर र सम्मावती मियाकाका सप्तती मनेक मासों मीर पिन् है। वर्षों तक उनने बैन विद्यालय और में साहित्य और पाकरण का मध्यापन कराया है। परम्परा से पूरी तए परिचित है। उनले से मपाच मानो निहारी और विधायीबी विान बिरत है। पनके ततस्पर्धा पपीर पापित्य का निराक यह संस्करण है। कानपीठ इस पन्चरे सम्पारकप में उन्हें पाकर पौरपावित है। में पी एम द ने इस प्रथका मालपन हितकर हम स्पस्त किया है। एए पोविनवी शास्त्री प्याकरणाचार्य ने मनेका निषषु का सम्मान किया है। महादेव चतुती ने सम्पादन परिपिटनिर्माम मौर मूष संसोधन में पूष पोप दिया है। प्रसनबमबी मिम प्पासरनाचार्य ने मी प्रेस काली मावि में पूरा सहयोग दिया है। मुहावरची पारपाचार्य एन ९ १रेको प्रास्ति संग्रह ११॥ ।

No text on this page.

महाकविधनञ्जयप्रणीता नाममाला अमरकीर्तिविरचितभाष्योपेता ५ भीपम्पपादमस्यामनन्तबोध विवादिनदिनमिनं च मम्तभवम् । म्यागकीर्तिममसं प्रसिपल पीर भाष्य मीमि परम उपाधिसिरप ॥१॥ तरस्परमाः मावेन रम्पवेऽमरकीर्मिना। भापं नामस्पेई नावाना पीगिरये ॥ २ ॥ पवपि पनडयो (फेनो) तो भागो बस्तु म एमवे । वाम्पा मगरगामि पादेयाम प्रसादतः ॥ ३॥ पूर्वाचायकवा मागो मुत्पतिरूपविश्पते । सापिसापि स्मरपाऽपि चम्मतामत्र मेरे ॥४॥ शिशठमाचार (प्गपार) परिपालना ममत्परसमुद्गतमद्वारेण निर्विनाममाप्स्पर्म पपनम्पनुपाशविकतरवतानमतारा स्तोकमार- तममामि परं न्योतिरवाङ्मनसगोचरम् । उन्मूलयत्पपियां यद् विधामुन्मीलयस्यपि ॥१॥ तत्परं म्पोति- "ममो' भरहतार्ण गमो सिवाणं ममो पाइरिपार्ण । णमो परमायार्ण गमो जोए सम्बसा पूर्ण ॥" रिमिषम् । नमामि नमलरोमि । किंपिरिणाम प्रधाममनसगोपरम् माकप पाणी मनत १५ पपिपारमनसे तामनसमोन गोचर म प्रपदीतम् प्रवामनगोचरम् प्रसस्पतरूपत्वात् । तपा पोशम्पमेये- "नमस्तु नमसा साप मनसं मनसाऽपि च । वमसेन तमः प्रोकं पातु वपसा सह ॥" तपा पपपनविणा- "सानभूस्पै भवेद् गम्प रम्यं परमपिनाम् । बाने वसर पोविरवाल्मनसगोपरम् ।।" १९वलापनमस्कायरममत्रप्रतिपापमईतियापार्योपापासगरूममा भौति । २ नर्भ तु ममण मामिलादिएपमेवोपमापोभारान्तोऽपि मनसरामा पाएः। ३ साम्व निर्यमणगरपा समुनि राम्यमेवप्रकाशप्रन्ये एक्ल्पप फिशिएमपीपञ्चम्बम् । परिवम्- मुर कमरा पापि मोनिस्वाद पौपिता न । मस्तु समसा प्रीट रस्तापि रबः स्मृणम् ||४|| पत्र पासपोपचपि मनवरामा प्रसारस्तमापि पानीन्नमूगपुखके उत्तरातापिति भुगम् । ४ पप २२।१। २०

माममाठा
में प्रारूपन का हिन्दी अनुराग किया है । चुगलकिशोर दो मुस्तार में ममेकानिपट और
एगी पोल प्रति मेगी। पौनिवासी प्राचीन माप की प्रति मेग कर अनुपहीत
हिमा है।
भारतीय सामपौठो संस्थापक सेठ गाम्तिप्रसाद भी तमा मम्मक्षा सौ रमा रामी बीकी
संस्कृतिमिष्ठा पार इमि मानानुराप मौर सौजन्य इस संस्था के दौरान है। मपनी स्व पुण्यानोका
माता मूतिरेपी के स्मरभाव मूतिरेवी प्रचमाता के संमत विमाम का यह छठवां प्राच प्रकाशित हो
हा है। इस मा पम्पति में ऐसे ममेक कोकोपकारी सास्कृतिक कार्यों की भामाह।
इस प्रस्वासमनिष्ठ मन्त्री भी बयोपाप्रताप दो पोषतीयको कम्पपि सरना और प्रयत्न
से इस सस्मा का इस स्प में सम्मातम होहा ।म बन सब का मामार मानता हूँ।
मारतीय मानपीठ कामी
पोचमत्त १५
२४.१
-महेन्द्र कुमार न
पबमाला सम्पादक
प्रकाशन-व्यय
४) बागब २ रोम २२४२९/१२ पौष ५०५॥) कार्यालय पररमा भूक संबोधन मागि
९.५) पाई पठ १९५र५ ) प्रति का ४११०) सम्मान
२) गितमा
५) भेट मातोचमा बिज्ञापन मागि
१) पार पाई
.com) मीभन
४ ) पर काम
प्रत सामत ३९१-)
प्रति पी। काका एक प्रति शा-)
१

सभाष्या नाममाला अनेकार्थनिघण्टु एकाक्षरी कोशश्च

No text on this page.

महाकविधनञ्जयप्रणीता नाममाला अमरकीतिविरचितभाष्योपेता १० भीम्पपारमनामनन्सपोर्ष विवादिनन्दिनमिन च समन्वभद्रम् । कावासकीर्तिममात प्रसिपत्व पीर भाष्य रोमि परम पुबुद्धितिरपे ॥१॥ सरस्वत्या प्रसारन रम्पतेभरकीठिना। माप बनारस्ते पालाना पीतिरपे ॥२॥ मपपि नहलो (फेनो) क्लो भागो पातु न शम्पते । वपाश्या प्रपरणामि बारेममाम प्रसादका ॥३॥ पूर्वाचार्यता प्रायो मुस्पतिस्परिरमते । सापि ममापि स्वमुपाऽपि सम्पदामा मे बु४ प्रियासमाचार (टाचार) परिपासना प्रमस्परसमुद्गवपमहारेण निर्विप्नशाममाफ्स्पर्षे बनभ्यपार इजियोक्तानमस्ताय स्वोमार- तममामि पर ज्योविरमात्मनसगोचरम् । उन्मूलपत्यपियां यद् विपापुन्मीस्पत्पपि ॥१॥ तत्पर पोति- "णमो' अरहवाएं पमो सिवाय पमो पाइरियायं । पमो उबग्मायाणं णमो खोए रूपमा हूस ॥ पिपम् । ममामि ममकरोमि । विविशिम प्रवाम्मनसगोपरम् पार पासी मनसा १५ पनि पारमनसे तपोमिनपोर्न गोचरं न प्रमचीमूतम् प्राइममगोपरम् प्रतलस्वरूपवाद । तमा पोकशपमेरे- 'नमन्तु' नमसा साप मनसं मनसाऽपि पबमसेन तमा मोल तपम्तु तपसा सा ।। तपा पमननिशात- स्मामुभूत्यै मवेत् गम्पं रम्य यचारमरिम्पम् । माने तत्पर मोतिरवाम्मनसगोचरम् ॥" १ सम्नमतारामम्मम्मप्रविणमालिशवार्योपामारणरूपमा मोति। २मर्भ नभसा सामिस्माविशम्ममेदोकामागतोमाराम्तोऽपि मनसराम्दा सापु। ३ साम्प्रत निर्णयसागरममा सपमुद्रिते शममेदप्रकाशमम् एतसचे पिपिन्यवोपक्षम्मम् । तपित्पम्- मुरमा चापि योपिरस्पात् पौपिता ना हमस्ख पमण प्रोक रमताऽपि वा स्मृतम् ॥३४॥ प्रा मप्रध्यापपपि मनग्राम प्रमापापि कहानीम्नमूहपुस्खो पापिति शुभम् । २. ४ प प २२।९।

५ २ भमरपोर्तिविरचितमाप्योपेवा पत् प्रपियो पापियाम्, पाटुकारबम, परमम्, चिपारिसकम, नस्पक्सम, गवर्न एवम, पयपत्रम, अपरदनम्, पौदनम्, मपसूत्रम्, पूर्वसूत्रम्, रानीविस्मम्, चरणसम्म। गक घरगपुस्मनोवगोबरगाणबनाना [च विषा पापनिया पते वाम उम्मूलपति मूलायुमेरपति । पत् पिपामपि उम्मीळयति स्पापपतीस्पर्ष । सूर्य दिसयमभयं यमलं युगल युगम् । युर्म इन्द्र यम बैतं पादयो पातु जैनयो ॥२॥ पण सुग्मे । ये अवामी परम प्रयम् "विनिम्पामसर्मा ।" शिवपम् ही स्परपी यस्त र रितपम् । समयम् उभी अपनी पख "हिनिम्बामपर्" इत्यनुवर्तमाने "ठभाम्भा नित्यम्" रलपर न त बट् । यमर्स बम बाटोति यमसम् । पुग युग बातीवि मुमचम् । मुगा मुगावा पुर्ग १० मुम्पते धर्मवत्या मुगम । समामवरणव मुगम् । पुम्मम् अनठि दिवोयेन पुनवे रिसपते गुम्मम् । 'मुकिपिविया मछ। सम्यम् दाक्त्पिपी हनम् । ग्यास्पुपरमपेकपार पमम् । पम्मानित प्रीतम् तमेव मैतम् । पातु शपिर्सनियतिर्मिर्णस्वापसः सशिवो असी । तपस्वी संयमी योगी मी सामुश्च पातु यः ॥३॥ पापण मुनी । अपति काखमय पानावीवि मापा । "रिमिचिगनाम्नुपपारित | तना पस्तिसरे- रिपणाक्षराधीनामपिमाहुमनीषिणः ।' पतिः पो मात्रारमा उम्पग्मिपानीसामेन तृप्णासरिचरखान पोगान गुस्सप्पानधर्म मानार पर यति । पाप पतिक्ष- "या पापपानाभाय फतवे स पतिर्मवेत् । मुनि, तपप्रभावाद मन्यते मुनिः । “मम्मत फिरत उम्म' । वमा - 'माम्पत्वावासविधाना मामि। कीर्यते मुमिः । मिना मिस इत्पेषणीतो मिथुा । 'बम्तासिमिधामुः। तापसा पो पिपवे बरस वाफ्ता | "भप्' । वपश्यसाम्या न बहमस्मय मिनीती वरच परि । संशिता गावे १९ म संगिता । या सात नित्वम् । मपस्पिरिमारा शो उनूकर इलम प्रो निलमिधरो भवति, सिम्पो नास्ति । मती 'हिसाऽनतस्तेमाप्रमपरिमोम्यो मिरतिवम्"1" पिचर स्वी। तपस्वी "मनमानामौदर्पत्तिपरिसम्पानरमपरित्यागविश्किशप्पासमप्रमालेगा पाप वपः " भारिपचविनयपासपस्माम्पापम्पुस्सर्पप्मनाभ्युत्तरम् । तपाच निघते बस्नेति वपत्ती । सयमी सबम्ने सम इमियप्राणापणः । सबमी रिपते बसेवि संगमी । योपी • मुक्ति १ पत्रसस्प पूर्णम् 'तपा इति पर गौमम् । २ । शUIRE I ३ एकत्सूर्य । नोपनम्बम् । परंतु विनिम्मामयामा इत्यनुवर्तमाने उमाम्मा निलमिति यकीचवमनातस्पमे वस्तूसमिति निमायो । ४ कासवाचमुगपरतरेप मुसत्तिा, प्राठा । कुर्ग हातीलेष। ५. ठ १० वि प्रलया । ६ गनाम्नुपवाति उ ॥ इति नि । ७. नास्ति मा EM८. बती प्रपस्ने संपातुमठ १४ । मा उ विधि । मनु अनीषने । ११ गए मा ८ स्प] १२. स् 111११ । १३ पा स ।।१ ।।१४ सतेरि मते निमिति पाठवहमानम् oret | १८ एबिदितामपाने बु िपोगे पायौ परस्मैपदो पुम्मापो मा रिकादो मारमनेपदी इस्पेसम्पाठ म्पमा । २० १८ ८स नाममात्र प्रात्म योगे युग मानो पर यु समापी वा प्रारम जुम् पादौ । पर पुन समापौ पा रि । • पुनधि मुम्मसे माइस्पेशीसः योगी । सुखममेन्याविना' मिनिम् । यी क्यों प्रमचमत्यस्य पाँ। सायुः शिप्यायो वीचादिवानामाफ्नपरामुल तमसोन्मूख्नस्मयों मोचमार्गाऽनुमानपरोक स सापुर | सिदि हापयति लापपपिप्यति मा साधुः । "समास्याविन शास्त्र न पवाति दीमाविक पशिष्याणाम् । कर्मोन्मबनसको [पम] प्पानः स पात्र सामुयः ।" "हापारिमीस्पदिसाप्मयापरिबनिवरिपरिम उग्" । यो युष्मान् पातु रक्त । दीक्षित मोणचं शिप्य च तमन्तेयासिन विदुः । चत्वारा शिष्ये । [वीसितम्] दीपा बातास्येवि । सारितादिवर्णनात्लंगावेऽयं तम् । मौएड्पम् मुरो मस्तके भर्म पफ्नाविक मौनयम् । शिप्पम् शिप्पते सुत्पापवे गुम्ण शिष्या | १० "नापी शासुस्तगुण सपू1" गुरोरन्चे बलस्पन्तेपाती वम् । विदुः कपबन्ति । फुसान्ताऽगमसिदान्ता भमा सिखाम्ते । पोकाना देहस्सावा अम्तो पिनाशो येन सः ताम्तः | प्राप्यतीरपागमः मागमनमागमोगा । सियाम्तो [खिोन्दो] निभयो गस्त त सिमान्ता, समयोऽपि । सर्षे पुंसि । अन्य शासमत' परम् ॥ ४ ॥ अनावि रपतीति प्रम्पः। गाखिशासम् । भूमिम् प्रथिवी पृथ्वी गहरी मेदिनी मही । परा वसुमती घात्री आमा पिमम्मराज्यनिः ॥ ५ ॥ पसुघा परणी भोणी मा परित्री सितिम । सम्मिनीलोपरा चोर्वी बगवी गीर्वमुपरा ॥ ६ ॥ सविविमो । मावि मत्र भूमिः । “कर्मिमिरम्ममा ।” मबत्यस्मात् भूरः । रेफान्तबाम्पबम् । प्रपते पृथिवी पृष्पी च । गुरुस्तीवि गरी । गरीवि पाठ' । म्पाये मेपति स्निमति मभुरभमेवोपोगान् पा मेदिनी । ममते मही। मा पूजाणाम् । परस्पगन् परा। पतस्पस्मा पसुमती । राति समावि मेषवार्य वेचो गामिति पानी । धर्मणि पेर इन् ।" पिएमातेरपीमन्ति। बमप समा । “पामुकबभिमाविमस्वा"।" पित विमति विश्वम्मरा । नाम्नि माविभारि २५ तपिरमिता शाम्पत्ययः । भूतानति अवनिः । मियामी । "साम्भम्परमपिाति- परिनिः। अनि मयः । पम पातीति पापा । परति पर्वतानिति परपिर। पोनिः पौखि भुपम् पोसि। शिलामीः । सोणी। 'राम' । धमते भार स्मा मा । परति परिणी । ववि परं प्राप्नोति प्रसारणले सितिः। कागति म मा । कुम्भौरानोत्पत्तिजीपी अस्पस्या कम्मिनी । एति पन हमाम् इला। “रामसमिक्षिविपनासत्तम ।" १ मुबमभुपिपाडलबानुरभाममामामामाना जा रवि पूर्ण का ५ २२॥ २ का उ १३ तास संबात वारपारेरित इति ना क १ मौसमस्यास्वीसपि पिमरे मिरयम् । अर्थ मादिम्पोऽन् । १ का ४२।२१।६ प्रप्ट रपते विर्मश विपदी योग्पा । • काठ ॥१२ वि मरतेमिम मिल पा रवीति गहरी गरी इत्यपि पाठ इति युष्म् । ६ सू it तिन् । १० पलत्य पमते इति पमा पचापिताम्, यम् । ११ मा U८२ । १२.1 MIN । १५ का ठ २४ । र २i लसाम वापिदधम् । १५का र ११-1 २० . ५ अनन्ता पाम- भमरकीविपिरचितमाम्योपेसा सोमवाविप्रमरगीरमेरीराः एते रमाययान्ता निपस्यन्ते । क्शेरामति निखि फोन उबप ।यी। उगा मुवी दुगाँ पुगी हिसाः । मूर्वतिम्माप्नोति उर्षिः । मिवामीः उयाँ । रावान्तर गवि अगतिः । मियामीः जगती । पूर्वा गपति गौः । भीनो।। गमे।। " गोरी धुटि' इस्वोत्यम् । १ पारणे । पा। परति परते । एम् । प्रस्त पनि । पारि पाम् । पसु पनि पा पारगति पसुम्परा । नाम्नि प 'सप्रत्ययः । भरितस्मा 'कारितोषः। प्रमिमानात हवा । "स्वाक्ष्योर्मोऽवः ।" "मिना" मारा। भूतपात्री, रस्नगी बिपुसा पामराम्य, रामवती, रता प्रवाशा कारबपी, गोत्रा, स्पिरा सबसहा । सत्पर्यायघर शैलस्तत्पर्यायपतिप । सस्पायरहो वृक्षा क्षम्दमन्यं च योजयेत् ॥ ७ ॥ १० पोजयेत् पोरमे पम्यं सम्द ! तत्पव्यपरः शेखः । भूमिपरा, भूपर पपिपीचर पप्पीपर, गहरीपर, मेदिनीपरा मदीपरा, पिपरा इसमतीपर' पानीचरा पिस्तम्भरापर, मनीय सुपापरा परवीवर, बोपीवरः माघर, परिणीभरा पिचिरा, कुपरः कृम्भिनीचर। इसापरः उर्धरापरा मावा बगतीपरगोपर, पसुन्धरापय | सविंशति नामानि खस्प सेवानि। तत्पापपतिना। भूमिपति, भूपति, पपिपीपति, प्रपोपतिः गारपति मेदिनीपति महीपतिः परापतिः वसुमतीपति , १५ पात्रीपतिः बमापविः शिवम्मरापति, अवनीपतिः सुभापति, बरणीपतिः पौगपति भापति, परिषीपति मितिपति। ऊपविः कृम्भिनीपति, खापति, उपपतिः उमापवि, भावीपवि, गोपति, बमपरापतिः । सरिंशति नामानि तपसेवि शातमानि | उत्पाययो पस' । भूमिमा भूगार, प्रविधीकर, पृणीमा गहरीमहः, मेदिनीगा, महीम, बसगा बसमवीका, पाचायला बमान विश्व म्भराकार अनीषा सपासा, बरगीमा पोगीमा, मामा परिनता, विक्मि उमाः कृम्भि- २० मारा, वाल, उपराम, उपास्त्र, मातीचा गोम पसुम्परागः । सगिविपारनामानि स्पेविशातमानि । दरीमृदपला शृङ्गी पर्वत सानुमान् गिरिः । नग शिलोषयोऽद्रिश्च शिखरी त्रिकान्मरुत् ॥ ८ ॥ पारण पट । दरी बिमावि दरीमत् । लस्थानात् म पसति प्रषतः । श्रङ्गमस्यास्त्रीवि २५ रखी । पर्वापि स्कल पर्वतः । पर्षमा त । तारसपत सानुमान् । बर्स पिरतीति गिरिः । गनाम्मुपपास्ति। न गमतीवि नग । गेडापामपि । मान्युपपरे गमेगें भवति । शिक्षा उनीमात्र शिवोधपः । बम् प्राकाराम् प्रचीति मतिः । शिरमस्फरप शिवये। कि मवर कुम्नावि विस्तारवठीति विककुत। परविकारलार् मभरस्व स्तम्भ स्खम्मस्वम्मुकम्मरकुम्म्यः स्मरति पम्पमनास्त बातोः गोगा । मिमचे पुनरम्यान स्परोमेति मक्त । मोरवि' । शेष, विविवरा गोत्रः माहारी, कमा प्रावा । प्रस्व पार्म टं सानुर्मेखलोफ्स्पा घटी। नितम्बमन्तो दन्तश्च तत्वानपि गिरिः स्मृतः॥६॥ १ का स् २ | २ मानि सनिपारितपियमिता संगराम् इति पूर्ण का Mum३ कारितस्मानामिपिरश्य रति पूर्णम् कान्स् ॥iw४ का २९ । ५ हरा । ६ मम्मता यदु ४१. कार Inml ९.पाठ ३१५ ११ वर्गफिनाशेन समारस्प तोपोऽपि मोम्म । ११ प २१||श्रीणि पनि मझाम्पत्पेवि विप्रहो ऽस्यत्राविप पा ५।१४ मायनोप' | १२ का । भूतविम्म कि । तफारा। २० स त नाममाठा ५ । पर्वतमेसहायो १७ । प्रस्थीरते पनेनाम प्रस्थम् । नाम्निस्पष' । उभयम् । पाठि रबति बनान् पाश्वम्। वरति उपसायं गचति-तम् । त्रिषु शिषु । मनोधीति सानुः । २ पापा थिमीम्बदिसाप्पणपणियनिवरिपरिम्ब ठम् ।" "पस दामे प्रस्प पावो प्रयोग । मेहनस्य से तल मा मातीति निरुति मिनोति मधिपति कामिचित्तानिविदा मेखता। उपस्यका उप समीपे भवा ठप- स्पा । उपाधिम्या स्पकमासम्नास्टयोः। वटमस्पास्ति वरी। झीगर्य स्नखाम्यतीति नितम्प । अमवीयम्ता । “मग्रवाहस्पमिदमिपुभ्यस्त 'एम्बस्यमयो भवति । दम्पतेऽ (भ) सवेऽनेन पन्तः । 'मृगपाहस्पमिदमिलपुम्मस्व । बारम । तद्वानपि गिरि स्मृतः । प्रपपान्, पार्वान् परवान् सानुमान् मेलखापान, उपत्यकावान् रीमान् निवम्ममान्, अन्तवान् एवान् । राजाधिप' पति स्वामी नापः परिवठः प्रस । ईखरो विमरीशानो मर्तेन्द्र इन ईशिवा ॥१०॥ चतुर्दश राशि। म्यापमार्गेए राबते इति राजा ! "इपितचिराविम्विप्रदिपियुम्पा कनि।" को यमभावार्य । एम्म पनि प्रसयो भमति । अपि ऐश्वर्य पावि रमटीवि अधिप । तपा प उपसर्गनवी मधि वझीरगापिष्ठानाप्पयनश्पर्यस्मरणापिपपु। पासवति पति । पावेति । परमार रतिश्ययो भवति । "अमु गती" मपूर्ण योभनममशीति स्यामी । भावमेरिन्' पीरन । सयुपपद अमेवातीरिन् प्रत्ययो भवति । नापयति रिपु मायः। मृति र प्रयो"। दो एट । अव एष व १५ परिपूर्मात् परिसरति परिवहति स्म मा परिवरः । गस्पर्वा इति ।' परिवरदा प्रमुखलपती" एतौ प्रभुषलपदोरर्पयोर्मपास निपात्से । परिपूर्वस रिस्माषी मनोपरन । पातही प्रत्पन्चर मोरपीत्पन्पे । पेतु फ्रस्पन्ठरपोरिपपम्ति, वेषाम्मवे तर सी परियो"रवि पाठान्तर वर्तते । तेन पाठान्तरेण एस्प परसमा " इति निपात समपरति स्म दरति स्म इति नाम किरते। प्रभवतीति प्रमुः। 'मुबोहर्षिराम्प्रेषु की गनुम्ब मारखोपा 1 और ऐश्वरप्ट इत्पेषशील थिए। कशिपिसिभासीयत्वाम्मदा प" एसोकरी भगति क्वीलादिषु । विभवतीति पिमु । हममयः ।ट शक्नोति परिस्थितिप्रसपान पाम ईशानः। प्राभितम्नान् विमति पोपपति मा । इन्वति परमेश्वर्यमुक्ती भवतीति इन्द्रः। "सानिवरिधिषिधिपि विसरिमरिमझिपन्युमीन्दिम्पो रस्।' एतीति इनः । "मिपिम्पो नम्।"ऐ ईशिता । अनोफास्तर शाखी पिटपी फलिनो नग । द्रुमोऽधिप' फलेगाही पादपोऽगो वनस्पति ॥११॥ हायवे। मनवा करत प्रगति हन्तीति मनोकह । 'प्रोप्रायमेन पा प्रमोका। तरम्सनेनापती मनपरितरितनिमस्विशीम उ । 'मला: सम्पस्प शादी। विमो विस्तारी १पात १३५४ बसनरनु नाम्नि स्थाच कलसम्म करि पिपानायम पत्र कपिपान मिति । २ का उ १।१।३ पा सू ।। इति सन् प्रवराप। ४ार्य बनस्त म्पवे कापते इति परि विमो म्याप । ५गा 3 ॥२०१६ का उ २११७ ११॥ उ १५१ वि पाठेतिम रिशोएप । ९.मा उ ५८ पापिनीवस्तु स्पामिभैरव पान ४२११२६ रवि रखरामा मिन्प्रयन नापिका । समरसमसास्तीति विप्रः । १० गत्पपारमारित पीत्यामरतनामी तिम्पर इस पूर्ण का स् Mix | ११ माम् ॥१५ । १२ का सू ५ ।१५ गमुबम्स्पस्वगरेनौर रवि पूर्ण का ४२ । ११ का म् ४४|| ट २४ । १५ का २१ । १७ प्रन प्रार। मिति सानोपदान परीवीति । मन पातीरोपामय प्रीणरिक स्परेसिवाया! १८ उRI २० १ अमरकीर्विविरचिवमाम्योपेता ऽस्मस बिपी। फलानि नपस्प फद्धिनः । समम्मिामिनम्।' म गमतीति नगा। गेड संशयामपि" । यति हर्षि गधति अपना ग्रामगोप्रमातीति दुमा । प्रनिभिरपरणेः पिबति पाति मा अम्रिपा । प्रश्मिपरक । फवानि गामातीति फलेपाही। ममिपानारी।।' 'फामसरमा प्रोपाद। पिबति पानी पादपः। म गावीस्पगा। "मगलाप्रापिनि पा विप्रपेन नकारखोपा । जनस्व पतिः धमस्पतिः। पारस्पराविलासर ! मला कुरा, याचा पहाग्री सना शमा शिरा अगभापि । तत्पर्य्यायचरो मेयो हरिवलिमसः कपिः । पानरः सवगश्चैव गोलागूलोऽच मर्कटः ॥१२॥ एकोनपिगति मामानि रौ। मनोपपरा तरचरा शासिघर, पियपिचर फधिनपरा, १० मगचरण, हमपर प्रतिपचरः फलेप्राचिर पाइपचरः प्रमर पनपविचरा । इत्यादिशावण्नामानि मरस पानि । दरवीति हरिरा। "तुम्मः । पसलो मुसेस वनिमुबारकम्प माना गरे कपिः । 'पिम्पोननोपमा पाया कि प्रपयो मपति नवोपम । पन पनति-सम्भवी पामरा नरोऽपि । मरेन उत्पादन गपति पावणः। गे संडासामपि' प। गर्गा मूमि नवोति गोसाइ लम् गोलानुनमलासी गालामा उमादित्वात् 'जंगे पिंम । मृर प्रयत्पागे। मियते मग । १५ बय ' मी प्रतापरावयाची निपास्पेते । नौकाः । प्लबम । या । गालागा। विपिनं गहन फक्षमरण्य कानन बनम् । रान्तारमटषी दुर्गम् नब गमे । पते सम्पवे भमेनात्र विपिनम् । ११ पेपितमोह सात तीनम् । उपादरी उपरो। पविना धिमेरिपपिफ्निहिनमहिनानि । एतानि इनमत्वरावानि निपात्यो । गामवे २. भगारिमिर्गहनम् । उभयम् । पति पर्षति कमम् । पर्वते गम्पते स्वापदे भरएपम् । प्रविमाग्यन्ति मन पा परम्मम् । १४ तेरन्न' ममारना प्रथयो मति । उभवम् । म्यते मम्यतेऽस्मिन् काननम्"। पम्पते ऐम्मते मनम् । अन्तम् क्यान्तम् गपति पति वा कान्तारम् । अस्सामरपि । भिवामार। मटवी । दुसेन माया रेन गम्यते दुर्गम् । माना । सबम् एम्मम् पापम् परम्मामी (प्रपसम्)। १ पास भाप ५२।१२१ २.५ वि गमे । ३ का सू ४२. पन्न मोरिन् । एवं सवि परपभाषात् पोपहिरिवि में सम्मपति । वामिभाना रवि टोमवार।। पाभिषारापनाभाषातोपान्तरेषु प्रोमीति दमिरगीतस्यैव नाच पोपाहीति में चिनवम् । ४ ने किमपि वर्ष मात । नगोऽप्रापिनि माइति । ए सू पा२।१२०. पारस्करप्रमवानि चमहापाम् पा . २१५७ ६ मा म चि १८ प्रमाधम् । पम्-नची शिखरी पगालिसानिमो बायोपिम्पी कुरा विविमा परको पिपरा मन्यामरासिको वाम पा पुररिप वाहानीप्रगपादपनगा सागमो पुपदा ॥ इति । ७.का ठा Almमकिपिमसिपिशादिम उठा र उ प्र उणादिलास्सगे वीरपति पुति ।१० र १५८ । ११ पा र २२५५ । १२ का १॥२२ । इवीनम्बर पर पारेकामा । १२ गम् विलोग्ने । मुखमम्ममापीवि पुच् । प्मानमोरिति निरंणद्मला । ११ का उपा२।१५ कानपवि दीपयति स्मरारि । न्नी दोनो। पुसम बसम् मनन बीननमस्स पति विप्राीपा । १६ पुपरीवे परम-अपरेषि प्रश्न राम्दाः पापागोरो । उम्म्- प्रतिस्थापणी वाच्य हस्पपि । सपुष्पैति एले पनपारपरिका ।। स 3 नाममाछा ७ - सपर स्यात् पनेचरः ॥१३॥ परशम्देन मुवे शपरस्प नम नामानि । पिफ्निचरा गानघर कपपरः परम्परा कान पनघर कान्तारघर प्रवीचर, दुर्यधर.। पुलिन्द अबरो दस्युर्निपादो व्याघलुम्बकी । घानुकोऽय किरात सोपण्यानीधरः स्मृतः॥१४॥ पोमति भमति महत्त्व साति गावि पुहिन्दः । पुतीयम । राति' निर्दवत गपदवीति शवरा । वासम्मः । सपति परम्मं शबर । एस्पति अन्यमुपधियोति दस्युः। बनिमनिरसिम्यो यु ।" एम्यो यु प्रभवो मवति । निपीदति पापमान निषाद निषपश्च । ना' पलादिनीमुमो पर। "पप ताग्ने" म रिपतीवि म्पामा । विपिलिपिस्सिपिदयविषिष्यवीरमाणे " एका गो भवति । सुम्पते गमते मासे मुम्भः । ला एप्पक । पनुपा पति इवि भानुप्फा। फिरवि शरान्' १० किराता । परम्पस प्ररवानी (वभ) परतीति परमानीचर । एद्रपम्पममर्मस्वमहिमपमारम्बप:- सबनमानवाचार्यामानुष । प्ररमानीति । पारि फ पयोऽम्मोऽम्पु पापोऽर्ण ससिल बलम् । सरै पर्ने फर्श नीर चोय जीवनमम्विपम् ॥१५॥ शादश पानीपे । भारवति तृषामिदम् वारि, प्रयोति पा यारि। षन्निपिरामिमानिन १५ मेरिम् ।" एम्म इम प्रस्पयो भवति । अकार इम्पदामा । रान्तम् पार् । श्रीक्लीवे । काम्पते पते कम् , कागतीति (पा)। वेसिमी' प्रौ भवतः । पौरते पयते वा पया। "पीद पाने । "पातम्योऽन् । प्रमति गपति तादुत्वं सान्तम् अम्भस् ।"श्रम गन्तो। "अमे' म्मोन्सरमा प्रकार उभारण। 'अनि सो "मनु" इति ठीनो पा "सबाराम् ।' अम्मते सम्मारित्पम् । “अम्बि- पम्बिम्पामः) भाम्पामा प्रत्वमो भवति । पीपते पाति ना पायः। मिकाविकृषिपातपपिरिचिसि- २० चिगुम्पत्प" एम्बत्ल प्रलसी भवति । को वयम् भावार्थः । श्रोत्पः । गम्पवे नानपाना। साम्तम् मर्मस् । रति गमावि सचिनम्। उपादरी पच सेचने। पात्या पार "सच. रवि सतिसम् । 'सबेसिकरच चल पुस्' । सचेखित : प्रत्ययो भवति वस्त्र सो बाति नीचे गवि समम् । स प रणति हिनस्ति सृष्णाम रवि शरम् । बम्पते सेमते एनत् मनम् । कोरडे करम् । प्रारिपेट परि नमतीवि नीरम् । मीयते हिनस्ति ता मीरम् च । तरवि तुपाम तोपम् ।। सौष भावरणों का बीमहेनन बीपमम् । बीपनीयम् च । मानुषन्ति समुद्रमित्यापा प्राप्नोते. स्विम् प्रापो भवति । स्थान। म मियां पः। समिक्रयम् । म्हातम ! प्रासको सपनाम । १प गती म्बादि बाबकापरः। २. काठ १२५ ५. मनुः प्ररणमस्पेति म्मुत्पचिर्पा । प्ररपमिरम्।। रितीति किपि । प्रत्र । प्रतटीस्पर प्रत छातत्यगमने। पचाप। किराचासाम्रति किरात इति पूर्णम्मुत्पत्तिः । ७ मादरम्पमरम्यानी ठत्र चरवीति विप्रो मुछा । ८ द पापिनीन पत्र पमेस्पधिक पाठ।। ९.का उ४।५।१०का उ ५ ।१९१५५११२ उता. प्रति लाल गरवीति रोपा । एमाभमस्तु प्रमियम स्पोऽयम् प्रस्वपमाह । १५ ा उ ५१५ । १४ मा 8 श१ । १५. प्रति लस परांगी गम्बते । पयोद शमी नहपान्तः। भयौ । १८२४ । १५ ति गपति निम्नमिति विप्रो एल् गतौ सस्मात् सहिमपनि इस्पादिns मेष ताधिोना । १८ मा उ । M ४ का ४२५८ ।

८ - बमरकीसिविरचितमाम्योपेवा 'पाप' इति पुरि दोषः । पापा ! प्रपुरलारस्वात् गायन पीपी। अपा। "पार मैदा। इति विमतिमे पस्पर। ममिका अदम्पाः । अदम्यः । अपाम् । मप्नु । ' वर्गापा रापसेषु रितीरी पा। अपम् । प्रमु । धाम प्रग मापा । धिया शैलेन मानोवादी विषम् । उमयम् । पनरसा पुष्परम्. मेपपुष्पम्, पानीमम, उत्कम, पीरम, मुपनम् दम, मद्यम्, प्रेमाखम, भभूवम्, कामम् सवोमुखम् ५ मानः इति नाना। सत्पर्य्यायचरो मत्स्यस्तत्पर्यायप्रदो पनः । तत्पग्यायोग्य पद्म तत्पर्यायघिरम्पुषिः ॥ १६ ॥ तल परिवपर्यागा, पर परराम मुममाने मरस्पनामानि भवन्ति । मार्चरा, मारिचर, कबरः परपरः, अम्भस्चरा प्रमुचरा, पापश्चरा, अर्पस्चरा सलिमपरा बहाचरा, सरपरा कचरा, १० कुराररा नीरघर, तोरपय, बीवनपय, अप्परा, विपचर। । प्रयोगे पारिपारणमामे पनस्स नामानि मनम्ति । माब, पाणि, प्रदा, पपम्भवः अम्भत्रया अम्मदा, पापा अर्गानिच प्रदा यसप्रया, गरमा राप्रदा, मीरप्रदा वोरमदः बीनप्रदः, अप्पदा, विपदः । स्पाचीनि पन मानि । तत्पनीदम पपम् । मारिपर्यापशम्दाने उभयमुम्पे उद्भवम्वप्रमोगे कमसनामानि भवन्ति । पाम्भवम् पायु मषम्, मुशवम् पपउनसम्) अम्भउबम्, अम्म्ममम् पापमयम्, पाउनबम् १५ सक्षिसोनमम् बलोनवम्, शरोमनम्, पनोमबम् शोमबम्, नीरोमबम् वोगोषम् बीकनोमानम् भानुनबम् विपोमवम् । तत्पर्यायपिरम्बुधिः । वाः समा ( सम्पपगा) में मिप्राने पिशवप्रमोगे अम्युपिनामानि अपानि । वार्षिक, मारिधिः, कम्बिा पयोधि भम्भोषिः, अम्बुधिा, पागोपिः प्रसोंधिः तसिपिा, पावित शरपि बनधिा कुशमि मौरधिः दोपभिः बीमनषिः, अम्मिा विपषिः । पृपुगेमा पठमीणो यादो पैसारिणो अपः । विसारी अफरी मीन' पाठीनो (5) निमिपस्तिमि ॥१७॥ एकारण मरस्ते । पनि विस्तीर्णनि रोमाम्मस्व पूपुरोमा । पट् अपीपि स्पर्शन-रन-माण पशु श्रीर-मनोसि पस्प त परमीणा ! पावि गपति बहे पावः । वितरति पारेन्'ि पिसारी मत्स्य इति । साऽन् । पैमारिणः । पवि पन्न् हिनस्ति या 1 'स गती' । यस गीगा"। ए विपूर्ण मिरति मितिमा सेगसः पिसारी। विपतिम्पामा स्वर्गिन् प्रत्यय 1 प्रस्सी २५ (स) दि । पिठारिन् ति बाते सि । "महन् [पूर्ववत् ] ( पूरा गौर)" । समिति राफर | अफर ()मारने (गति) रामास्वापपरी । मौसठे स्किोऽमीपत मीनाः । बहुत स्थात् पाठपति भारलेन पारपत ना पाठीम। निमिपति परस्पर निस्ति पतीविया निमिपा । 'नामा पप (चात् ) पृ"। विम्बति बसेननो भवति तिमि । मरका, भगवः, याची बिमार, जसपर एमा। घनापनो घनो मेपो चीमतोऽम्र मलाहकः । . पजन्यो मिहिरो नम्राट २।२।। र २३३पान् २५०1 १२५ इति शिन् प्र 1 ५. पासू ।२। उन्धविग्पामारि मतेपरमरमानम् रति काशियति । ६ मा २२।२१ । निमेपरहिलाम्मीनानाम् । कोपास्तरेषु वेगमनिमियतमा सनाप्प अमापनिमित इन पदो सुन । न तु निमिष इति । ताम्-'चिनारः शाशी शती निमाम्तिमपि ॥११ 10 पावर, - नाममामा । नब मेमे । इन रिसागस्पो । इम्पीति पनापनः । 'भन् 'पनापन' इति स्प्रेस पनापन इति निपाता। अपमा चिस्सिदचस्नसचरापरचलाचलपतापतवादपनापनपाटूपटा गादि नाममा सहाय । म पिसरे नाम्युपधात् । नविपरिरक्षिपरिवदिशनिपारपतिम्पीऽष्मत्पयो चिननिपातन पेति । बाराम्दात् स्तिदः नसा, परा, चतः पवा बदा, पना, परः इत्यपि मगति । एम्पते पाना धन । “म पनिश्च । अन् । मिह सेवमे । मेहति सिञ्चति भूमिमिति मेष । "मय पाम् ( दिम्पम) प्रम् । नामिनो गुण । “न्या इत्पेषमादीना भी गौ भक्त । हम (स्वचभी भवति । बीवनस्व बजस्व मूतः पुरगन्य इति निम्म्या सीमूत ! बीवनस्पनेन भवानि या बीमूव । बीच प्रारमे । प्रभम्पपो रातिमा समम् । प्रर गत्पर्म । न प्रारति तपो बस्मादिस्के । भानोति सर्मा रिो वा प्रम क्लीये | बलाकादिभिाॉपवे यमारक । पारिवारको बा । प्रवर्षति से पर्जन्यः। उणारी "पृथी सम्प, पृश्के पति का पर्जन्यः। 4. "पन्यपुम्ये इति प्रम्पप्रथमान्तो निपात्रते । मेहति वियति पिर मिहिर । महिर मुहिरन । म भागते न योभते माद । 'किमाविधुर्विमासाम्' एषा मिमा भवति । प्रम, वनमिनु' पपोषर, पायपर। भूमयोनिा, परिस्वान्, मारिया प्रमुमत् मुदिर, समुन् । सम्पा सौदामि (म) नी वठित् ॥१८॥ आकालिकी क्षणरुधिषिपुत् पद् शम्पायाम् । शाम्पति मि शम्पा । शम्मा । राम्पियति मा शम्पा । सुदाम्मा प्रविण एलदिन सीवामि (म) मी। ' तेमपरिगिरवस् । योभनस्म दाम्नो मनरमोरिय बागी सौदामि (म) मी । सौदाम्नी । पौरामिनी प। नास्पति तरित । गडपवेगितु । वास्पति मेप तारपती ति वरित । ठान्वम् । अाफ्लपति स्तोकाल रोपते पाभाकाक्षिकी । “भार मर्यावामिपिप्पो बसे पर रोष गामवे सणरपि । विचीत विपुर। पपहा सपिका राजा, हादिनी, प्रविधि, २० परापती, पममा घनुवा रिस्मा । तत्पतिरम्बुद । मिपुपदामे पविरामे प्रमुग्यमाने सम्पुरनामानि मरन्ति । सम्पापवि. रामनीपति परिवि मासिकधपति घणाधिपतिः विपुत्पवि निपातपति, प्रनिपविा पति उस्कापति इस्पादिमेपनामानि तु। निपातमश्चनिर्वनमुन्शन घ योजयेत् ।।१६॥ पत्यारोपो । निईम्पतेऽनेनेति मिर्यातम् । पर्मवादीनानाति प्रानि । अध्ययम्म १ इम्तेपत्व का पार्तिकम् । मा पनपन इस्पातार पपन न सचिदु पतन्त्रम् । या १५५ पनापन पारपरम् इति । २ र नौपचम्मम् । परिष लिपविहीनी वा हिरणमगाइ पाम्यावस्त्र बदमम् इति कात्या ॥२५१। ४५५ पनियरष। ५मा ४१॥४८६ म्यादीनाम् रविना तू ४/५० तिरम्प प | ७ बहासाभिहारस। मोहार गया । वर्मणि धुन् । अपना बलेन दीपने प्रासपने पास रवि गमाभम । शीदरादिस्वाद मारिपार गदरप बसालति निगमय।८ पाउ हा सू गान प्रीमिरपतम्ने मेधिकार मी तित् १८१।११ सम नकासापापन्वी परमा रवि रिमो माराशिका पन्तपपने दिपा ए समानराप्तगरदरपारात पारेश पट प्रत्यये रिलागीरि भाषासिनोति मिति तापु। १२ का उस इति न्तरस्म २ ममरकीर्तिविरचितमाम्योपेसा स्पतिविपरिम्पोऽमिा। एम्मोऽनिः प्रत्वगो मपति । ' उ सो पानिपपर्वतीति काम् । रामाय'-"यदोमाविममद्रगौरमेरीराः" एवे प्रवणता निपात्यन्ते। पतिपपि पति पणम् । उपति पति परका । उत्पति गैषोऽयं पाव । परिपत्कर्षमा पकः प्रमाः परम । परि समन्ताद भारानन्ता तीवति गन् म रानातीति परिपत्। स विषट्ठ एमविपमिश्विामिनीरावामुराँ, स्यामुफ्तगै सुपसर्गेऽपि मामुपमालिय। कयोति की स्निस्तीति पर्वमा । "पिपरिकरिम्मोऽमा" | पम्पवे विस्तार वाहन पाः। उभवम् । उपायौ फन' पनायते पम्पते मा पाः। पतिपनिम्मा ५" प्राम्मा का प्रत्ययो भवति । वबा नामरसिंगा- "निपगरस्तु बम्बामा पाकोऽमी शाएममौ ।। निफ्परा, बम्बाचा शाप, इपिपिस पिपिस्तमानेका । ५ २ वनम् स्मात् बम् उदभवम् पारम् कामयम् परिपथम् इत्यादीनि मनामानि भवन्ति । तामरसं विदुः । कमल नसिन पद्म सरोजं सरसीरम् ॥ २० ॥ स्वरदण्ड कोफनदं पुण्डरी; महोत्पलम् । पण मसनामानि भवन्ति । साम्पति बन्न साम्यति वामरसम् । अमरसिंहभाप्पे-'तामा प्रकर्षा रसाऽस्य धामरसम् । तमः प्रकर्षाऽपस्तारतम्पबत् । न मनम्न मायदे बापत कमलम् । भिवा माताऽ काम्पते पा। परिकमिमुगिकुशिमा कमा। एम्म मा प्रत्ययो भवति । कम्मदप। नमा स्पस्य नबिनम् । नबति पाति भिम पा मशिनम् । पुसिनलिलिममिहरिम्पा मिनः म । पचते पाति समीर पाम् । पर्तिसुराषिपदमारालम्मो मा। उभवम् । सि तमगे बातम् सरोजम् । सरस्सा रोहति प्रामुर्भरवि सरसीमाम् । परम्प प्रणय परपयडम् । बोअरचयाका नदसत्र कोकनादम् । महाले । [रस्त ] मुदम् । एस्तकमासम्म । निरोपणम् [ अनुदामचपिरोपे ] । पुरति मागस्वास्थात्पुपरकम् । मर (मुर) ममनि रमाने। पुगिरिपेके । पुपति पुपरीकम् । भाप मते पुए शोमे । पुराति बस्पति २५ शोमा पुपारीका । "अनुनासिकान्ता" अनुनासिमन्तादादोई प्रसयी भवति । माप तदुत्पल प मदोत्पमम् । तपा पातामुषा- पुणरी सिताम्मुगम् ।। १ कर्मवीति विमो पाती पगारेणी प्राप्तवम निपात्त । मह गये। परतीवि घिमारे सबल रम् । २.का ठ २।१०। ३ प ४110४ | ४ मा उणरी एक माखि । पा उतू निष्पौरम पमप्र । रामाममस्नु पपि विस्तारे कर्मपि सरपति पत्र इत्पार । ६ अमर It 111 . पी भा IvIC का उ । उ १६१ का उ १० ११ सरी एण्डो पस्पति पिपही मायः । १२ प्रकोषमई क्सकमरे रक्तपररवि मेदिनी रोपे प्रमाणम् । ११-परीभाष पाउ १९ रवि मुरषातो रोकन प्रपन्तः पुगारामो निगलते । रामाणमस्तु पुरिपातीररीरम्वरमार । भाषात मते पुछ पातीररीमसोमवागम्मरमुभरं रिपषम | परम्पमस्तु म पुस्ता । १४ रतायुषा ।।

नाममाम । इन्दीवर चारविन्द शतपत्र च पुप्फरम् ॥२१॥ स्यादुत्पल कुवलयम् तप्त नीलोत्पते । इन्दति शोभैश्वर्य प्राप्नोति इम्पीयरम्। भरान राबी पिम्पति इवि प्ररपिम्पम् । विद्ज़ लामै विद प्ररपूर्णः । प्ररान् पिन्दवीति अरविम्या । कर्मणि परिषः" । प्रत्ययो भवति । इति परसूत्रम् । स्वमते-प्रम्पत्रापि पेति [कर्मप्पर' ] पण बाधकः । पादिसाति पुरेरिवेविधारिपारिलिपि(म्पिोकिदा लनुष्स" पषामनुपसर्गे गो भवति । पसाप्रसव पर पिन्वम् । पिप्पी (पुगरील) कमऽ । (अपि) प्ररविन्दम् । राबपिरोपल भरपियः। केचित्तम खेऽपि पु स्वं मम्मस्ते । शव पत्राम्पस शतपनम् । सीवे । गोमा पोपपति पुम्पति या पुष्करम् । शोभामुत्येण पतति गमतीत्युत्पनम् । को पसते प्राणिवि पचवम् । धितो पहिर्मसपा परमेन मस्येति भीमोगा। १० विशेषमाह- अथ नीलाम्युजन्म प। इन्दीवर प नीलेऽस्मिन् सित सदरपे ॥२२॥ नीबाम्बुद्धम्म । इन्दतीन्दीषरम् । कुमसर [पजनीति सामान्यस्त [ मी] विशेष पति । अस्मिन् सिवे । पत्रौ विकास कोवि चमेश काम्पते का को मोरवे मा कमवम् । पाचम्म । १५ के उपके बने रोति फेरपोरर क्स्पे मिल करयम् । महाले । तद्वती तस्प समतल पम्ममि 'पती रति प्रयुपमाने महिनोनम्मानि भवन्ति । वामरस्वती कमसमती, नसिनम्ती पपपती सरोगमती, सरतीमती, कौनयत्य पुपरीमती, महात्पजवटी, पर पिम्दस्ती एखपत्रपती । २० पिसिनी मेया दिनविकासिन्यामेक | लिमत्वस्या पिसिनी। नचिनी । पुरकिनी । मुगबिनी । प्रवतीर्षन्सरी सता। वालीनामानि योन्यानि- पर्व (बत्तारोप) साम् । दरीतीति मतती । मग ततिरस्या मतती प्रदिप । २५ पारिलायलम् । बस्सवे परखरी । हावि सति चित्त पा स्वा' । भने से पनी । पन्चायी। बम्सिरिदम्तोऽपि । मियामी । बम्ही । हातम। बीरा (म्) पुस्मिनी प्रवानिनी शारिपा किमी पापणासायामपि । १ इम्पवीतीन्दी सहमी 1 चातुम इन्ट ११० प्रवीन् । विकारापदिन इति रीम् च । लापरमिएम पति समुपस्वन्तरमप्यूमम् । ४ एका रितीनीशम इत्वा । ५ मा चत्वारो कर्मामिति पुषम् । ६ प्रानोतीति भवति । वन् पाती तिन् । ही ए शारामिति कि । पोदरा दिलारपस्य व इसका । ७ वा सोमो पाम्नापों सततीति वा । पचाप इत्पन्यत्र ६ परिमाणम्दोमामूसनामफौपषिविशेषवाचकः । किर्मिः श्री सर्पपुवा स्मारपि मावापानी रिति विरलोचनप्रमाणत शिमिराबा। भिमापो सर्पपुत्री मामा-पहागपापा । माया बताया उभाषणप्रतिौ। तोऽदमेव प्रमायम् - ५ भमरकीर्तिविरचिवमाप्योपेता वारिधिपतेऽधुना ॥२३॥ अधुना रवानी पारिपिपपते पवे । न १ भाषा मुनिभीमबमरीविना । साम्प समानामानि प्रारम्मन्ते- स्रोतम्बिनी घुनी सिन्धुः सपन्ती निम्नगाऽपगा। नदी नदो द्विरफम सरिभामा तरङ्गिणी ॥२४॥ रूपएश नपाम् । सोता प्रमाहोऽस्वस्सा सोतस्विनी। बुनौति कम्पवे पुनिः। मियामी' । पुनी । सम्पति बजे पति सिन्पुर । छि। 'सन्दा सम्प्रतारप पम ।” तटेम्पो पर पति नपम्ती । निम्न गावि निम्नगा। मा एमन्तारानीति अमिरगति या भागा' । प्रापेन पा गति मापगा । नपत्पमक राई करोति नदी । नववि नवः। 'अच् पचापिम्पम पम् । रेपो वगै पस्य शिरेफर । १० मवि समुन्द्र पथवि सरित् । सान्तम् । रक्षा मन्त्पमा तरङ्गिपी। परिनी निरिणी मारा शेषसिनी सरस्वती, समाकान्ता हादिनी सोठा, प्यु अरसा दीखती रोषोमया। तत्पतिम भवस्पम्पि, तस्या पुन्मा पविभुनीपविरिस्तारिखमानामानि भवन्ति । होतस्विनीपतिः, पुनीपतिः सिन्धु पवि समस्तीपतिः, निम्नगापतिा प्राफ्गापतिः नापतिः नवपति हिरेफपवितरित्पवि.,जिसीपविः । १५ पारावारोऽमृतोमवः। मपारपारपारौ रसमीनामिघाकर ॥२शा समुद्रो पारिराशिश्च सरस्वान् सागरोऽर्णष । नब स्मुने । पारमाणोति पापयार। अनुतस्लोभषः ममतोमा । अपार मार पस समाप्ती अपारपाः । न ई पृयोति महापानावपारा । चामुणे-"न प्रविषी पिपदि न्या २० प्नोठीवि भापार।। ममारोऽपि । रत्नमीनरामगारमे पाकरे प्राममाने समुद्रनामानि भवन्ति । रानामा पुरोमाकर परवीण, भावाकरः सारिकार मया रितामा, अफराय, मीनारा पाठीनाका निमिपाकर, दिनाकर' । 'ठन्दी क्लेबने सम्पूर्ण । मन्तादुन स्परमादिति समुदा। स्फामितम्पिम्पिपिविपिनुरिदिमरिमनिपन्पुन्दीन्दिम्बी र अनिदमुपानाम गुरुज्नुपण" । तपा परमायुधे -"मुन्ति मिभीमबम्ति मौमाऽन्वरीपनादेयममान्मत्र समुद्रा।" २५ अमरसिंह- समुनचि समुः । पारीण बहाना पशिारिराशि । सि क्यवारणानि यस्प सरस्पाम् । सागरताप सागरः, स्मरतन सात्वात् । अवॉखि यस भवः । १ नोति परति कसावीन् । पुश् कम्पने । किम् । पोररारिला । नान्तताम्मी पनी इति पमाभम' । २ का १।। ३ अामिरगतीति विग्रस पारस पवाभाषीपारस्प होस् च पोएरादिन निपातासामम् । ४ का ४।२।४८ । ५ अत्र रिति वीर्पोचावपाठी पुष । तदुष्म-कानूनी पराम्पोरिति शाश्वत १७९ । ६ पादत्रास कारावार पाद पापर इत्पेष न त बादामा । मटानति भाडापरोति भूभागानेवासानेय दिया। प्रभास्मारिस्पा पानापीकाको नापेशगीय । समीपीता मुद्रा पचरविरोषा गरिमन् न ममा मरगा पर्वते ति मुपस्सन्दरमप्यूपम् । ८ मा उ २।१४।६पा म् ।' मुद ढगै पुराशि सम्पूर्व । भादवाम्ले तपाठाप्मुरारिरिपी सिरतामुम्तीरवपि पई। मी मारलीर पूपोइरादित्वाचन बाप । ११ घी मा ठ शाश नाममाडा १३ ५ सपा च पीरस्वाभिमाष्ये । अर्णोऽस्यास्स्यवः | 'मर्णसो लोप इति वा सलोपथ।" उपषिः उत्थान् , गोपनिधि मगराशि वीचिमाली गराधम। क्शा सर-सपको वीरोवः सुरी चूदा स्वावप दमुदः मृो । सामोपकण्ठं तीरत्र पार रोषोऽवधिस्सटम् ।।२६।। सप्त ध्मीपे । पिम् बने । टिनोति पमातीति सीमा | 'पर्मसोमाभीष्माषमा' एते ममत्वपान्ता निपात्पन्ते । प्ठस्स समीपे उपकण्ठम् । इन्स्पस्मात्तीरम् | वरति पठे इच के तीरं वा! पिपनि पोति बजेनेति पारम् । पामते एमाप्यतेऽस्मिमिति पा। म्याद भागेन रोपस् । गम्मम् । उभयम् । प्रधानम् अवधिः । 'उपगे कि रपवे प्रान्त प्रभसा वटम् । विधु । तटः । ग्री। एम्लो बा। दयि । विवामी, तटी । शम्, छ', प्रमाव: तीरम् । मगस्तरङ्ग कलोलो बीपिरुत्कलिकाऽवलि । पाली पेला सटोच्छ्वासी विम्रमोऽयमुढन्यतः ॥२७॥ का वरङ्ग । भारत बले सनमेष महः । रति सपते वरण | 'तूपतिम्मामा" मायामाम्ययो भवति । प्रसन्वेग्नेन नप कामोग । कुस्थित ढोरति कस्लास प्रत्येक । गाति (पति) गपति पीचि स्त्रियामी बीथी । परिमुलग प्रावि उस्कलिका। रिक- १५ पाम् । मा तमम्वाद बहते भापति । पात्मने पाहिः । लिगामीः । पासी । मवि पूर्णिमापि कालमुपदिशति वेला । स्त्रियाम् । प्यष उम्माप तरोग्यासी । वरति वटा उपस्नम् उपवासः। विभमति पिभ्रम विभः । परम १ उदम्यतः समुद्रस । कमि, वारी । सम्प्रति मनुम्पवर्ग भारम्मते भीमरमर विना- मनुप्पो मानुपो म मनुजो मानवो नर । २० ना पुमान् पुरुपो गोमा एकादय मनुष्ये । मनोरपत्य मनुप्यः।. इसनिपारम्प प्रपमापसे पि"निपावाम्या मीपि मनो सम्पप । पपिदिस्सरस न पारि । प्रना। • मनुष । मानुष' । उणशे प। मम्मते मुबालादिमिति मनुष्प | मनेम्मा उस्पामस्वयः । मानपति मान्यते इति मा मानुषः । "मामेम्स उस्यत्यय । मनम् । १ची भा १५ । २ कोपान्तरेषु समुद्रम्म गणना इति नाम मोपसम्पम् । पर्म चिस्माषानापेवायो गरिमा रति पाठी पोष । एगो पनी परिचई संग्रामास पस्पेति हिमदः । चन्द्रस्य समुद्रमभवत्व पुराणमसियम् । ३Jठ प्रस्पये प्रत व हरीपर्व । पत्रोणादि शरपम् । तर, पपाल पार वोर मतमामा । सीरस सीति विग्ररे पाप । ५ पालनपूरण्यो पू पानुस्तेन पिपापस पूरगतीति पर्यारो पुक्तो न । गणेतीति । मसादिलाए । पारस्वामी तु परे पार भई सम् पारम् इत्लार । ६का र 1410 रतिसि। उ ५।२२ । ८ प्रम मम शदे पर लिस्प सम्हारन्त पर्व । ठण- पिलादीमा । हम उस्प कोतापत्रमा अनुत्तारस परसबों नकार इति गमाभमः । ९. बरणे । रेमो पिप उ स् १७२ स्वीपिम । १० स पिहिवाशस्थाने मनी पप्प पाहपूरति प्प पर प्रापरी रवि पाठो पुकः । ११ का उ १ । १२.का - १ - । १० १४ धमरकीतिविरचिवमाष्योपेता 'गडीय पापिण्ठ पाम्तो परमेवे मुजङ्गमाः। न पुना पचहीनस्यात् पम्गमाफ्न्तु मानुपम् ।।" प्रियते मत्पा '। स्वा सो वा । मनोर्माता मनुमः । मनोरपस्प मानवा। नणाति पिनवति नरम पी मापये नक्वीति पा । "नियो गशुबन्परप' । जस्मात् अन् प्रत्पनी भवति तय गनुबन्ध पतेससरापिसोपाः। पूर्वति तमनेन सान्ता-'पुमान् । उणदी पूनः पनवे पुनावीवि पा पुमान् । पतिमनन्तश्च "अस्मात्तिः प्रत्ययो भवति अस्प ध मन् मन्त पभग हस्पत्य प । कार उम्पारणा। परिपुरि सक्नात् पूरणादा पुस्पा । पूणति पूरपतिमा स्त्रीणामुएर गर्भगति पुरषा । “पग कुन प्रस्माकुप प्रत्ययो भवति । कोजुकमा । मम्मेवा मपीवि पाए। पूरला | सस्वे पुरषा प्रतपाच । “गुप परिवरने । गुम्पति गोपा। पवः स्याचरपविनृपः ॥२८॥ तस्य मनुपराम्बस्वा पव-पतिरामप्रयोगे मुफ्नामानि भवन्ति । मनुम्पमा मानुपथमा मत्वष मनुषया मानपषमा नरपा नृपमा पुस्बया, पुममा गोपाषा | मनुप्पपतिः, मानुपति मापतिः मनुबपति मानवपति नरपति नृपति पुस्पतिः, पुनपतिा गोपापतिः । मृत्योऽय मृतफः पचि पदाति पदगोऽनुग' । १५ मटाऽनुजोन्यनुपर' शसजीवी च किहर' ॥२६॥ एकादश सेवके । मियत इति मृत्पा । ५ ममोसंगमाम् । भियते गण मवाला। मृतका । पववि प्रबो पम्पति पति पतम पा । [पाराम्पाम्] प्रति [पातिः ] । पारातिका पादिकका। "निगारिवारवा ठए । पदम्मा ' गवतीति पदणा। अनु पमा गाठि अनुगा । भरति पुर विमति मटर । अनुगमवावेशीहा अतुगीपी। अनु पमावरतीस्पनुपए। २. शस्त्र प्रामुख्न बोवतीस्पेसीमा शमनीवी । किलित कार्य विवाति जिला बापः सेक्क परम पद्गः पविषम । वपा पाखिसके-(रसो ११) "सत्य पूरे विहरति सम साधुमावेन पुंसा पर्म पितामह परपया पावि देशान्वरागि। पापं शापादिन प नुते नीपरत्वेन साप सेपास परमिह पर पात नास्ति विम्बित् ॥' सी नारी पनिता मुग्धा भामिनी मीराना। २५ ललना फामिनी योपिन् योपा सीमन्सिनीति च ॥३०॥ १ उ १२ । र बारापापे का + पू सम् । ३ का उ २४ । ४ पावि पुनाति पा पुमान् । पातेईम्मन् पूमी सम्वन्, पा उ ४१० इतिहम्मन् इति प्रक्रियाया। ५.नाउ ४iR 1६ पुरि रानादिति : निरुतमारी पिप्राप्त प्रणवीस्मादिरेष । ७. ठ २५४ | ८ गोपाशम्दस्म पुरुषापे कोपाम्तरणमा नीपसम्पम् । एम- गौषा तानियोः पिहो । पोषा निरोप स्प भावासमारणे । पामाराम्सनीतिगत पर्वमास्त्रोक्तम् । म प्रताप मूल मुम्बम् । गोर पति पाठे योदो मतिपमस्तानीति गोपः मुम्पमस्तिमास्यात् पुरुष इति स्माषणम् । ताराम गोद तु मस्तरस्नेहो मस्तिपो मनमा प्र चि ६ का २५ इति माणादिकस्ति लिप गवामिति वा लिप् । पक्न पाइति मुखचित्तपातमि पला पैल्पा । " प्रमाविम्ब र पाठ १५ एस्पते रेम् । पारस्य पदाम्मानितु रवि परेप १२ फिनपारेष्टण् म ४।२४ । १३ पराम्पा पाराम्प वेति बकम्पम, म न पाम्पामिति । पाए रस्सारी । पारस्व परामादीवि पास पद् ।

नाममाया १५ निसम्मिन्यपला यासा फामुको घामलोचना । मामा तनूदरी रामा सुन्दरी युवती परा ॥३१॥ शिविर भिषाम् । “ग प्राप्पाइने रमणास्वापदादयति स्वदोषान् परगुणानि ति स्त्री। उपादौ । लुणस्पाप्मादयति समया मानमिति ली। स्तुणतपत् प्रत्ययो भवति । अप्रमात्र' । "रमुबई.२ । अपना पाठर । मनुमन्योनसत्वरादितापार्य । कारो ५ नाप । कारमात्र एक । अमरमिमाष्ये - म्स्यायस्प(तेज स्पा गमा स्ना।" वा ए इलायुधे- "तणाति पिनेफमाच्छिनति स्त्री" | नरम भी बाविस्पेतनारी । नर नवि भवते मनिता । मुह पैचिस्से कायु मुमति मुग्पा । 'मुदिप प म | भामवे कुप्पते (वि) मामिनी । [भामा] गोषोऽस्वस्पा पा मामिनी । पिमेस्पस्माद(स्पता)मीर । "भियो उजुकीप, मीकः । प्रस्ताम्बमान्यस्मा माना । सारगति (सात) विराति सहरवि (मलति) नरमीप्सते पा ललना । "मस स्मायाम्" । भागान् १० कामयते कामिनी । सुपा सौमोन पातु सेवाये । योपति पुस्प गम्पति रवन्दरा मारमनो योपा। 'कप शिप प्य भय दष मप रूप रिप प प रिसार्या" बोपति हिनस्ति हन्तीति बोषित् । "सरि गरिनुपिम्प इति एम्प इविषययो भवति | कार उचारणः । प्रमरठिन-""योति पुसा योपित् । प्रमादित्यागप्रत्यये पोपिता प ! सीमन्तोऽससा सीमम्तिमी । बपाति चिचं वपुः । नितम्मोऽस्पस्या निम्पिनी । न विपते समस्या भवना। पटौभाग्यवाति यावीति बाला। पमु कान्ता कम् । १५ कमेरिनिए पारिवम् इन् । “अस्पोप ' दीपः । वामयते इस्पेवगीता कामुकी । गुरुमगमनाप भरपासपक्पामुन्। कारिततोपा। 'निमि " माव । मकाराऽनुपबलापूर्वस्पोप दीः । पामे सुधरे कोच ने यस्पाः सा पामलोपना। "भाम मोरे पुरादौ । भाममति । 'भाम कोप" मादायकाराजस्व प्रात्मनेपदी ! भामते मामा। पर्योपारिदएनात् । न सूझममुर बस्पा ता सन्दरी। नरेषु रमते मनासि रमयति पा रामा' । मुशरिपते प्रादिमते बनोऽत्र गोमनो री २० राहिमस्या का मुरी । प्रथमा 'सुन्दर' इति लोप पातुः । मुक्तण्यामादिपिरिस्ति। युपतिः। मिभम पौति नगन् मिभपति प्रोणादिको पा प्रति पुतिः । मियामी । युवती। नीम्पन्या । तपादि प्रमोग- मता मंगर पब मृत्युवसति प्राप्ता ममं घरघुमि पनी पाममय दुनोति र मनो पैपम्यदुरसाद गपूर । बालो दुस्स्पा एक पब र शिशुकाट कृत पेपसा जीवामीति महीपते प्रापति गौरिसीमन्दिनी ॥" पहपित्ताम्पुरपान् पासपतीवि पला । नामनेत्रा पुरग्मी, पाख्विा पणिनी,प्रमरा रमणी २४ "२. पाम् ११२ । ३ थी मा २।१२।४का उ रवि पि एस्प मच । ५ का स् ५। ६ पाउ १५ ।७ भा. २२पर! ८ मा रु १२।९,का म् । १० पारितस्पनामिपिरहेका म् in रतीनी सप नाकारितना रानम्मापरण। १५ मिमित मितिसम्याप्पराम रवि परिमापनुरोसरे भावहारिभापार्षरुर । १० रमते रामा । मतादिलाए । रमरतीति तु न पुनम मन्तम मतादिलाभापात् । १२ मु प्रतीत उनगि मुनी। उन्दी पोना बाकावण । सम्पादि सापारस परकाम् । मौदित्वात् इति रामअम ।१४ का व मा५ ।५ पवित पुलेमाती व बसपा विमा । पचाप । निम्तातु पाला इति स्पान् ।

अमरकोर्सिविरचितमायोपता दरिया मतीपयर्शिनी कान्ता बया, महिला महेसाच । मार्या बाया अनि फुल्या फला गेहिनी गृहम् । महिला मानिनी पत्नी तथा दारा: पुरन्ध्रयः ॥३२॥ परा काये। हुपम् पारखपोपणनोः । प्रिक्वे पुष्पवे गर्भग भार्या । 'अक्षम्माना ५ म्हात्मय । बपरमात्रः । म योपमाणि । मार्ग इति गातम् । "बिगमारा । मानवमः । म सि। भभापाः विसोपम् । चिोपा । "भा पोनी वा (रि) नाति जाया। नी माहुषि रासुसी गस्ते प्रात्मा पुषसापा। समारय-सया बन्या बाया इस्पारस शहा यमयान्ता निपात्यन्ते । नगवि पुषाबनिा। तुम्य" । कुते साधुः कुस्पा मगवादिता । का मर का तोवापि । कावि मापति पीयनेवि 'कसत्रम्। 'अमिनतिकालिम्पोमा पनमाया | १ प्रत्रम् । गमगोरैयम् । प्रय मुरा । मोमु । गहमलमा गहिनी। मा उपाराने पावि प्रत्युपाति गृहम् । 'गोलर मन्यव । 'महिला' -सम्मसारणम् । मामते पूमते । मोहना।मान प्रमकोपोऽमा मानिनी । पति पतति पति पत्नी। निररणे'। क । बोसि एक्लोभाति पुरुष एमिरिति वारा । ' मा पम् । प्रकारमात्रा । पदि । दार इति गातम् । प्रपमा यत् । प्रापा बहुत्वं च । पुरं भमन्ति नेत्रान्ते पुरं गरीर पर पीवि "पुण्भया । १५त्रम्, अधर्मचारिणी गहा, साचरी वापरा। पम्लमा प्रेयसी प्रेठा रमसी दपिता प्रिया । इष्टा च प्रमदा कान्ता चरी प्रणयिनी तया ॥ ३३ ॥ एकारण पालभाषाम् । बन्सवे परसुमित मोतीति परमा। रास्पिरिराति बहिबन्मियोभा प्रभ मन्ययः भामत्यवः । विरामेन मिया प्रेयसी । “वर'मेगति प्रर्याऽ २० 'तर तम साइत्ते स्पा भवन्ति । भविशयन प्रिया श्रेष्ठा । रमते नोऽष मनाति रमपति मि नपु . का ५ ४।२।१५ रवि पण्प्रनय । २ प ५ २।४।४।३.का सू २।१ ।। ४ का ४ ।५का उ॥१४॥६ म् ॥१११ इति पत्र । ७. पाउ गा सेबने । गाति गम्पो पा मोराच पा ठ इस्मन् । रसोरेश्वम् । र शान मरे । पातिभपते मा मासावान् । सं मधुर पनि प्रायवे रददि ना। और पाममेक इत्पम्पन्न । ८ प्रकार सम्मुखी बुम रवि पूर्ण म ५ सारा रवि सहापो गुरागमरण । ९. मीनुवार म्मान रति पूर्वकान्सू १।१५ स्पिनुसार। १ का न्यू १९ ।११ का शव प्रारम्पापपिम्पधिपधिमचिमिरिचप्रस्थीनामगुरे इति पूर्वषम् । १२ प सू ।। ५५ म् ॥६॥। मम्पोपण या दीपों पदिनामिनामिनिचरम इति स्मरमम् । १४ साउम्बिनी पुरमी २६ । पमरारिसोरोष वा गराम्ययुग्म्श्रीरामवर सत्तात्र पुरम्य इवि पाठोऽ० इति न ममितम्मम् । पुरं परन्तोति विमद भरा पा उ ११३९ वि । पोरगरिकास्पुरोऽारावा मुमागम पनि ऐया स्वाप्परः। प्रत एक म्नामुमता प रामा पुरम्मिभिमराः मगुरुम' रति रमु । पुरग्बममन्तीति न विचारताम, स्वापकानुशासनविरहात् । १५. भारिपुरणपा- पनामापिरोपभावारमिदी न पिरमर्वया ! तपपा-भारो माया इमा, मा मेदिनी प्य पत्नी दारा परिक्षामनोगमा । महिलामानिम्मी मिशिएनागिरे। पुरमा पतिपुमम्मी । १६ । उ १२ | १. एनप प्रतापगून मोरनायम् । गमगायाधयम् शा स् पाइतीरनुपमपी पीप्प ।

नाममाला १० बहा, पा रमणी । नरेए एपवे गवति ई वा दपिता । प्रीपाति पविपिच रखपति प्रिया। इम्मसे इष्यते का इरा । को मदोश्याः प्रमवा । काम्पसे नरेग काम्ता । चपते पति षयी । चणिका प्रायोऽसामन्त्रीवि प्रपयिनी। सती पतिव्रता साप्पी पविवत्पेफपत्पपि । मनस्विनी मक्त्यार्या- सप्त पविश्वामाम् । एक पनिरस्तीवि सती' । पवित्रत परीति पतिरेषत सेम्पो नान्दो पस्या इति वा पतिमवा । पतिसेच प्रतं यस्याः पतिव्रता । पस्तृति-"मास्ति' स्त्रीणां प्रथम्पनो न मतमिति ।" सापयति सानी। पतिरस्मा प्रस्तीति पतियती गएकापटियवासा पकपाती। मनोऽस्या मखोति मनस्थिनी । पर्यत सेमते मायाँ । सुपरिता । पिपरीता निरूप्यते ॥ ३४ ॥ मया नहन भाप्पको अमरीस्निा पा पप्प विपपेता ममाया । बन्धकी छलटा मुक्का पुनमः श्यली सला । परमवस्याम् । समावि वरमपितानि पापकी। उसमरति कुलटा । वषा चौपादा 'रस बस कसे वापिन् । प्रस्तोपधागा दी । कुलपूर्व: । कुस टासनवि कुलटा । 'कसे राजे रिशु म' उपपर रावरिभम्तस्प हा प्रत्ययो भक्ति इस १। साधार मुप्पते (स्म) पत्या बने मुख्य । पुनर्भपतीति पुनर्मू।। पुमा बासमति पुमली। पम्वेन्द्रियोत्पा सुख नाति यदावीवि १५ पपुषहम्परतात । पासा सैरिणी असती इतरी वर्षी प्रविनीता, मभिसारिका अपसा। स्पर्धाऽभिसारिफा दवी स्वैरिणी मम्फली सपा । पच पूलाम् । 'स्पृय संस्परों । स्पुराति, सत्यवि, प्रस्थापीत् पस्पर्श या मम । । 'पर बपिशमग्रीची पर । नामिन 'म गुण । निगामापा' भाप्रत्यय । स्पा । पुस्थान्तरमभिसरति अमिसारिका । पूरा मीसात् दूती। पर गती कम्पमे च।। रणम् । | 'भागे २० पम् प्रय। । सस्प इस स्पैर.। मेरी पियतेऽम्या स्पैरिणी। 'बस्पाऽस्वीति मन्तवीन्' इन् । नापम्मिया' प्रत्यया। रमपम्य मस्प पत्तम् । शं सुखम् फसति निप्पावतीति राम्फसी । तपा ने प्रकारे। गसिका जिम्न वेश्या रूपाबीया विसासिनी । पण्यत्री दारिफा दासी मामुको सर्ववतमा ॥ ३६ ॥ २५ मग रमानाम् । पयः परकीसवस्या गएमवीपरानीपरी पा गणिका । 'हवि साहिवाग सब वर्ष मत्तने । बति निरस्ता पुरुषान् दायतीति पत्रिका । मेरो पेसाबारे भषा पेस्पा कपेग मा समन्तानीवतीवि कपाशीवा। पितातोमा प्वीति पिणासिनी । तपा बोटम्- हएको मुसविसरा स्पा भाषमित्तसमुद्भवः । पिछासो नेत्रमा यो बिप्रमोऽत्र गम्खयो। १ अस्थायी रास्पबास्तो मन्तः स्वीयमः। २ 'नास्ति भीडा पुग मो न प्रते नापुपोषणम् । पति गुभूयते पेन तेन खर्गे न होवते ति मनुस्मृति' ५।१५। ३ पतिवानी, एकफनी लि पाठो गुरु. ४ का 3 ५/01 ५.का म् म् ॥५॥२ मामिनमीपभागासमोर रति पूर्वसनम् 1७. पन्ने परितक्ते । अस्प कार बीपुमतिः । = तू ४।५।३ । ९. का स् २०१५।१ मम् २१०५ ॥ ११ २२४४८१ 'रपूपम्मी मोममनप तहकपर्मान्तरी ऽपि' रवि पूर्व मम् । १२. पेरोन नेपथ्येन शोभते कमरेणापत्" इति बन् । मेरो भरा दिमारित्वापत् । ३ १३ ३० ५ १८ अमरकीर्तिविरपितमाम्योपेवा पम्मस्प बी पायसी । परिमार्थ खा रमवतीलामणति विधारपति कामिनम् पारिका । दरपति परिकर्मवा पति वालात्मानं या पासी। पानी। नासमरम्सा । पामबसे इस्पेरंगीता कामुकी । मेर्पा पुरुषार्ण स्तमा सर्ववलमा । सेरिणी। "चसापष्टिकलामिशा सीमहपाविसेमिनी । प्रसापनोपचारमा सैरिन्धी कथ्यते पुषैः ।।" गन्यकारिका । पम्पत्ती । कान्तेष्टौ दयितः प्रीता प्रिय कामी च कामुकः । बालमोऽसुपति प्रेयान् पिटश्च रमणे पर' ॥३७॥ प्रयोपण कान्ते । काम्पतेऽमिशष्यते कान्तः । इप्पते पए |मा कपा संबाता प्रत्पेवि दयितः । 'वारमिवादिनासंबावे इतन् । गायोडोंपा सरे पये पेचा कारखोपा । सौरेसः । प्र प्रमेय कामतम् इतः प्राप्त मीता । पोदरादित्वात् भाकारतोपाः। माविम प्रीतः । प्रीति प्रीबीते 4 प्रियः। 'नाम्मुपक्षप्री- गृर्ग'। 'स्पयवारिपर्योपान्तस बातोरियो।' कामोऽस्यास्तीति कामी। कामम हत्वशी कामुक । पानवे पस्तमः । राशिम रासिमतिपरिणामोऽमा । म प्रत्यय । भपूना प्रासाना पति अमुपति । पतिरापेन प्रिम मेयाम् । प्रिमस्विरतिरोबारगुहारस्मदोर्भवबारका प्रवक्तवहिरनिवासिनता ।" मिट राम्द पिरवि भमोरे काम करातीवि बिटः। एपपेति च । 'रम सागम् । रम् । रमी पहिचत् । से प्रमुरक इन्। ममोपपापीपः । मागुम्बाना इसा । रमवतीति एमणा . मन्यारे । "समानामनाकान्ता" मनः। करिक्त कारितसोपः। "र नस्ल पलम् । एसोति पर गतिमा परामिणा । पविः । परविता । भर्वा । मौण | बा । रपः । प्रमाकः । २० गुम्बा कामपितरि को पा दीपश्च" नपति । भमिका । ममुकः । प्राचाधिनाया । सेवा । सवित्री बननी माता पमा मावरि । स्ते मनमसि सपिथी। मपति मारतेसा वा सननी। माति मोम "मानपटिया माता। प्रम्बा । बनक सबिता पिता। पमा पितरि । जनयति उत्पावफ्तौति मनका | पुत्रान् गुबते (सो) सषिता । परिवार पाति पतीवि पिता । “उमानो पा रपणे पातीवि पिता । 'स्क्सामा | क्सनप्नेप्रताप बातम्यास्तृपितृमात्पुषितवामानमातर' एवे सबालनयनाम्ता निपात्वन्ते । १६ 4 श्रम १ चतुपातितामिन सीहरूलारिसेपिनी | प्रतापनौपचारमा सेरमा लपति तिपय' इत्पमरकोरोनी सा ।२.46 पू ५८।३ का तू ||४|४ सू ४।२।५।५ बसू M५५/ रताप । ६ का उद् ॥१२ । ७ पासू ।।१५। इति नियम्यस्त्र प्रादेश । ८. एपमहापौकिरा पा ५ २११५९का ५ १४॥६५॥ इति स्व ।। ४।२।। इति पुनमय । ११ प्रत् १५४ रवि पोरनारे । १२, प्र सू mins इतनी बीपः । १३ म ए २४/८1१४ फाल्ने नैतत्सूत्रमुपाम्बम् । बैनन्द्रमारसे परमति- पोपरि लादि सूत्रम् II वेन बफलमानता परे दीम्तिमाभिकरोऽभीष ति निपातितः । १५ मानस्तारमा विमास मातीत्ल । मा माने । प्रसपान्तः । १६ का उ २२४२ | नाममाक्षा देहापपनकायाङ्ग वपुः सहनन तनु ॥ ३८ ॥ फलेवर शरीर व मूर्ति परापार मापन कास प्रा ! समाहारसमाबादेवपपनम् । दिए । देबीति २०। रितिथितिरिसपिरमसिमषतीप्रमाता च । एसो पो भवति । अपानसे अपपमा । 'मी' पनिम' प्रख् । चिम् पसरे । पि। वीरतेऽसौ काया। 'गरीरनिवाल्यो। मावा' ५ पिनो पेरे निपासे पा पम भवति मादरच की भवति | उन एस बसि रहि पग रगि शगि भगि, पगि मगि सगि इगि रिपि पिगि गस्पर्पा'। मावि मरणं गमगीति भाम् । उपन्चे पुरवा पनेमेति पपुर । पूषपिचसिमनितनि पनिम्म ठत् एम्प उप प्रपो भवति । सम्पन्ते संपयन्ते पातकोऽत्र संहननम् । पातभिः रसातगात मेरोऽस्थिमाखन्नम् तनुः । तन्' । उपारी वनविस्तारे। नोवोति । हषि धमिवनिपनि १० पधिनिर्षिम्म का एम्म उमस्वसो भवति । करते रिपर गति काछेवरम् । कति मापठि पाकलेवरम् । कोपरं च । प्रमरसिंहमाम्मे फायते कलेवरम् । शीपते पर गति रोमम्मपरिमि शरीरम् । सौगम्य ईर ।। एम्स इरप्रत्ययो भवति । उणादित्वात् । 'मोहम्मुप्पामरी मूई । मून मूर्तिः। स्वियो कि ! भोपपत्योम कति' ' इति मैन् । गालोप (को) "विसकर दोप' । "नामिनामोदकपुरोम्पंधने ५ । मानम् । प्रय हि। रफ १४। बिमा। १५ पर्म । पुरम् | पिगम् । क्षेत्रम् । गोत्रम् । पनः । पुद्गल । प्रतीक । प्रत्यकः । अस्मिन् मय मस्मिन् प्रमे मनः कापभव । रोभिवः । अपपनभय । प्रजभव । पपुर। आनन भा । दनुभव । फलेवरममा । गरमष । मूर्तिमग । पारयः । पायः। अपपनस । अाया। पपुर। जाननम् | उनुस । भोवरा । शरीरब । मूर्षिया । एतानि पुरनामानि भवन्ति । भय २० प्रयोग। सुवः। पुत्र सूनुरपस्यं च तुक् चोक चात्मक प्रभा ॥३६॥ सो पुरे । सकते सुतः । पुनावीवि पुषा ।' पूनो हतर।" भस्मात् मप्रापो भाति बातो साच । मोगुणर्य । वपा र सोमनापाम'-'य उत्पमः पुनावि स पुमा । भय २५ पुरानो नरकात्तापते पा पुमा । पते सनः । दूपिविम्या गबत् ।' साम्या नु प्रत्ययो भवति सब पर । पूर माम्पिविमोचमे ।" पक्ष राम पाल पप गी । पत् ना पूर्व । न पतन्ति फेन मावेन पूर्वमा नरकारी पदपत्पम् । “भमि पवे वास्पदा । नस्व' तत्पु तिः । नपु ४२NC२ का vrine इत्पत् पम्पारेराम । ३ का सू YM५।४ा ठ २।४।५भ ठ ।।६ को पुके मधुराप्पपनो पा पर मेहम् | एवादि" हि सतम्या प्रा। इसम्पन । परि भा २00 | - 3 8 का ५ शशि मिला। का ५ १८।११ का ११८) १२ पाए ८५ 'मानमस्परं परं पणे मयेत्” इति पूए काननम् ।।१२रति मानस पर पईयोगा। १५ “रेफसोक्तिबमोष रवि पूर्णम् । का ६ ॥६॥ इति सकारस्थ विसर्गः । १५. उ ४४१ १६ मी वा तमु ५५ ११।१७ का ट रा १ का उ १९. "नल कपुरष होपः इवि पूर्वम् । का सू २१॥२२॥ इति नसोपा ।

२० १ १ प्रका बावा मया। प्रमरकीर्तिविरचितमाम्योपेता । मोनु | तोगति 'तु। खूपते तोकम् । मात्मनी बात प्रारमम । प्रायन “ससमीपम्बम्यते बने। बाला, पाक, प्रभा गर्भपौरप । पृथु, मिा शाप सिम्म पटुः माप, भगः। उदास्वनय पोतो दारको नन्दनोऽर्मक स्तनन्पयोचानभयौ- महो बाबई। उदातीति समा। सर। नीति विखारति शम्, तमयः। "वो पर । परते यावेम पोत । परपति रणावि या पीता मनाति पारकः। 'नदि मरी। नम् । अत एस नन्। नन्दति कश्चित्तमन्ना प्रपुरः। 'पाताचरोदो (यो )" इम् । नन्दमतीवि मम्दनः । 'नन्दि पासिमदिपिणाषियोभिवर्षिम्म इम्तेम्मोशपाम् मुमत्वया | लमते 'नन्याये प्रत्ययः "मानाम०/- रवि पुस्पाने मना । पारिवानामि पाखितोपः । 'मा मा पूजामाम् संस्पर्मकः । "काय । मूभकाममूवमसमभ एसे काम बान्ता निपात्पम् । नौ बक्तीति स्वमायया । ४'शुनीस्तनमुम्मस्वास्वपुप्पेषु पेग । सर। उत्ताना ते उचानाप । 'ठचानारिषु कई च । स्त्री घेद् दुहितर विदुः ॥४०॥ पुम्मा दुरिवर दोषि मानुस पुनोति मा बिदुम्पयन्ति । वनका पुनी। वयस्पाली सायरी सधीची सबयाः सखी। पद् सभाम् । बरसा प्रभा वपस्पा । पपटी च। मा मन्वामिताधि माहिः । मियामी । माखी। बता परतीति सापरी । माइतीवि हनुर। 'बन्दिरमा मिसमिति रस.।" प्रमपे सत्रीची । सा घम्सा बने सबया' ।मान मातीति पति (सा)। मिनामी सनी। “सरूपारम" सि प्रमि प्रति तापी रिप्रपवान्ता निपात्पते । मालीविपरित मित्र सम्पन्धो मित्रयुक् सात् ॥४१॥ बलारो मिले । पाली रहिवानि पगलादीनि नामानि मिनामानि सुरित्ननः । 'मिमिया स्नाने । मेपति म मेरते समा स्मेहमुक्तो भवति म मा मित्रम् । “धिमिदिम्माम माम्बा १ 'प्रभारसम्मो मुम इति पूर्वम् | म २ ।। इति सेतोपी मुरागमम । २ मोऽगुस्सारं पाने इति पूर्वम् । काम् ॥५॥१५॥ ३ तुब रिसावतावानमितनेषु' । उपरी पा पिम् । तोगति पिवृषनमाइरो उम् इति काप । ठौति पुरवति पिपाय फिचरमाणेऽपीति वाम् । सौषो बारितात्तिस्ति । पासवल इति मुत्परपन्तरमप्यूमम् । ५. का ५ ४५॥५१॥ इति बने। पाठ रा२५इति दन् पाठोपप्रत्वका । ७ पक्ठे बावेनेति विप्रशस्त माता- पाचपोते गोप । पुनायें । पुनावि परते पापरा पोत' । मबारस्पमि -सिप २॥ प्लेग प्रस्तप । ८ पुपतिमनोवारण पावणारा न परते । अठोसति दाररति ना मार्गावनम्, पित्रोनिसन्तानवा बन्याम्पिति बारापोऽमुमम । ६ का स् १ का miri मम्पारे युः इति से दुर्गपत्तिः । ११ ला म् 1 १२. सू दतीनो बोपा । इन पारितगमको। ५का र २१५८३ १४ का एला। १५ का १८ भर दुर्गति । १५ योनि पिस पाति गुनोति वा मात दुहिता । ससारिमापून्माला इसाराः । १७ प्र म् ॥ इति स्प सध्यादेश । १८ समान बरी बला वि पिमही माप । मोतिनपति समानत तारेण । १९ प उ ॥१॥२० मा उ ४ । २१ मेपति मेरते इति वर्तमानकातिकी विमहो दुक न भूवनातिक । २ नाममाछा 4 मा प्रत्ययो भवति । मारी बजभाषा पस्तनागुगलम् । सम्मक्लोन बनातीति सम्बम्पा । मित्र गुनातीति मिप्रयुक् । मुरवि पिच सुर' । गोभन हर्म पस्य था । ला स्निग्ध | सहकत्वा सहकारी सहाय सामवायिकः । पलार वामे । सातवान् सहावा । कम' कनिम् प्रत्यय । प्र. सि । 'पुरि' पा" दीर्घः । सा समन्तामोतीति सहकारी। 'नाम्बवातौ गिनिस्तापाये । पापम् प्रते गपति सहाय । समापे निगुरु सामवापिका। एएए । मनामि सगोत्रो घुश्च सोदर्य पत्तारो भावरि । समाना मामिल समामि। समान गोष बस्न सगोमा । बप्नाति स्नोन बन्पुर । 'पति' बसिहनिमनित्रपीविकदिवन्धिममणिम्पथ' एम एकावणम्म उ प्रयो भाति । सोरया । समानार्य , समर्म गएरः, मानोदरा मामीय , स्वनः प्राप्त गति: १० नामेपा सपिणा अपरजोऽनुजः ॥ ४२ ॥ कनीयान्- हौ (यो) नामावरि । अपर पमानात मबरसा । (मनु) पात्रातः मनुः । “समी । पासम्मौर्य (मस्ते बन" | अबमनमौरविशपेन सुगा कनीयाम् । “पाप या निर। १५ अग्रजो न्येष्ठ प्रमे बावा मप्रमा। प्रमोरो ज्येष्ठ । “परस्प न बदाम्दस्प प प्रादेशी भवति । पूर्वमा परियः, पीपान, अमिय । प्रावनानी स्वसाऽनुजा। भयो भगिनाम् । भानुभावा भादवानी । स्वत (स्प) ति अति विपति रिस्पर'। २० भरता । अनु पभात्रावा मनुमा । भगिनी । ममी बामिः। बामिय। म मसा ननान्दा स्पाव- म्यात् भोत् । मर्नु स्वसा भमिनी ! मनान्दा । 'दुनरि समृदौ" । नत् । "" नम् पूर्वः। न नराठि मानुगारा मस्सो तस्माता ननाला । 'नधि नन्देश न दीर्घम" ननि उपपये । " १.सरतीसिमुत्पतिवान्तामरामे हम्मबति । मित्रगावालाम्ये गोमन र बस्सेत्पेर । एक्स्प पारेण मासे । २ पासू र परिवार २।२।१०। असू 0 ५.13 १६६ १९१०७ वर्तमानचन्द्र भोपहम्पम् । ८ बर्षमान कावणे नोपहम्बम् । ९. नाम्पस्मिन्कोप प्रावधानीएम टपक्षण नायेक्याप मिपि मारण बम । आतुर्शवति विग्रहोऽपि मणिपतित । तपापि भाषा ग मायर्यावति विग्रप पाहुनादी पादिकम मात्पर्य मपातो प्रप्रम प्रारूत्वाम्लीपि भावबानीवि सम्मो मनभरपत्नपार समित् माय । १० वत्पति विपति पित भाव ससेवि विप्रही पोप । भभु पेपण दिलायी। मुलाखत तुम्मसेपन् इति पन्नावर । वाम्बीणोः स्वसामा इति सत् प्राणने इस्लव भन्मस्पये पारस्प सारे प "शासितीति स्वना इस्वार। विपष्ठीवि पनर मुरम इलेष भाष्य शुभप्रेतरति आपते । ११ "श्व एष पनाविश्मनुम्बामा मोतीति एमति ना तू | १० का उत् २१.९॥

૨૨ भमरकीतिविरचितमाम्योपेवा उवि ननांवोधन प्रस्पयो भवति प्रकारो बीच भवति । ननादा इवि मातम् । मासुलानी प्रियाम्बिका ॥ ४३ ।। हो माउसमा गाम् । मातुलसेर भार्ग मातुबानी। “इन्द्र'कारभवसरिमबमारम्म गायनमातृवाचायांगमानु पिच । अन्येव अम्बिका । "अम्बारिम्मो रखका" नवल, प्रत्यया ५ भवन्धि । प्रिया पायौ किन मिपामिका । वैर्याराविरमित्रोऽरिट् िसपत्नो विपद्रिपुः । भावथ्यो दुर्बन पाईयो पी सलोऽडित ॥ ४४ ॥ पत्रपण रात्री। पिशिताम् समीम् इरपति निर्गमावि पीर, पीरम में पैरम् । [परमम्पास्तीति पैरी।] रिपुरमिर्षि गति भाराति' प्राविम । न मित्रम् भमित्रम् । अपात्रतादिवत् । "विपक्षे मम' इति तारलव सूत्रम् । गालमिवर्सि भरि । ति बिन्। " सहिएपनिदमिनियमिनीरामामुपतर्गेऽपि किम् । एमिनिरोन मान फ्नति सपल । तिघे मिपन् । निम्छर रगति रिपु। रजतपम्गुनगुरिगरिमामयः । एवे उसयाम्वा निपात्परते। निपाक्नमप्राप्तप्रापमा प्राप्तल पापनार्थम् । सपन पदसिद्ध सर्व निपानातिसम् । वा परितामिम- 'रेपयति रिपुर। रेप गो । मावर मावि मारपति १५ 'भावम्म । दुश्बन उर्सनाः । परमभधारकमीपण स्तिम्भापिकाम्मे- 'प्रशस्या न नमस्याऽपि दुखनैर्या विधीयते। काम्टका पाइसम्नोऽपि न सुमाय प्रमायते ॥ वषा व परिमुभवम्याम् 'बर मिप्ता पाणिा कुपिवमसिमा बमरकारे पर मम्पापावो मसदन विरचिवः । पर प्रासमान्त' सपदि बठरातदिनिहियो न अन्य दौस म्ये पि विपदा सम विदुषा ।" मर पे केपिर दुर्यनाः सन्ति वेपो मस्खनिपाती भवतु । वाम 'दुरजण मुहिया होठ अगि सुपणु पयासिर मेण । भमिा बिसें बासह तिमिण बिमि मरगड करण" गुणाति गीतमा यः । दूपते निश्पते को हुए । 'पोप्राचम पारिपन । १ पा MRI मन मे ममेस्पपिए पाठ । २. सबनान्तवादियोऽप पारितारम् । सखी मत्व प्रत इन्टनी पतीन् । ३ च गती" । प्रापूर्वकार अगटोग्राम्पिन । प्रमातम राति म दासोवि मम पूर्वसत् 'प (पाने) पावा हि नीच सामामिति विम्। ५ वर पाहिम्मदभातु मम र इति परम्मम् । अन् खरे तार सू minा र सू । ७ दीर मा २८ । ८ मेप्र संपरणे पानामनकार्य सारिवाऽ इति । भावोऽनुरंगें । ५ निर्दपवागरवस्त्रासमप्रमाशिवाम्ममासामम गुप्माठि मुतापनी ११रहो । १० तापपप दो ९।११ बनाइए । गश्मम गिपुरात्र । एसे समय बान्ता निगयी । रविना ॥९॥ १२ पोऽसबसेनि प्रलमर्याऽभियो। विप्रास तस्येव । मम । २

५
४
१०
-
नाममात्य
लपति रामनगुणानाप्दादमतीति समान मंत्री शिनीति गति न हिती मा 'परिक अभियाविन
पविषय, प्रभान निर्मामु परिपम्पी पर प्रमहन् प्रपनी परंपरपावा शात्र,
प्रत्पनीष पण
एर दस्युः अभिमन्पी।
दीधितिमानुरुसोशुर्गभस्ति किरण कर ।
पादो रुपिमरीचिस्तेजोऽचिंगौयुति प्रमा॥४५॥
पोरण रिणे । पिीवे दीपद दीधिति। दीपीको शिक्षित दीपी पातोरिति पयो
भवति। भा दीमौ' भाति मानु । ''रामारिहम्मो नुः ।" एम्पो नु प्रथमः सात् । वसति सी
उन । पुति । मनुते बगद् मानोति मंशुः । भी। उणादो । मनम् । प्रनितीति अंशुः । मनो"
य भनेपांवो गुप्रयपी भवति । [भा दोसो" भावि मानुः । 'दामारी" ] गा मुन बमस्ति
*गमस्ति।
पर्णगमो गद्रावो सिंहपण विपर्ययः ।
पोशादी विश्वरम्म पणनाश पोदरे।।
की किरणः । इलायु- किरति पिसिसि तमामि किरणा। भम्पा पन ।
पोते पण। पचवे पाद 'पदसापिसस्पयोषा पम् । रोपी राषिः । मिते तमोमेन मरीचिः।
स्मीनी । ठायी। प्रिय मरीचि। 'मृपिम्मामीचि भाम्मामीधि प्रत्ययो भवति । भान २५
किपि वान्तो माम्। तीनो। पुस्पेवेवि शम्दमे । भा । भासी । भातः । बयतीति सस् ।
प्रपतीवि भर्पिम् । पपवे पूमते अपि । “अपि पिचिपहिदिदिम्म रहि । गप्पति
माsनीति गी । स्त्रीनी । पोदन पुति । योत (1) पति । प्रभाति प्रमा। रोपि अभीग
प्रपौव शिम पुगि पि विभा बाम मु का प्रपर उपवि पशि परिन ममूल निरीक
२०
दीप्सिन्योतिर्महो पाम रश्मिम्जों विभावसु ।
सतबति । दीयने दीप्ति । पोहन ज्योति। मोतिरामीविपि ।
मावि महाग
"न्तम् । पीयते सूप नम्वन् पामन् । रएि वीर । रणति परनुते रश्मि । कई
बलमानयो । उपतीति कर्म ।। [ विभा बमुह त यिमायगुः ।] (विभा । पम् ।)
शीसोप्य प्रायषाञ्ची तदन्ताविन्दुमास्करी ॥४६॥
तपोती हरम्टी । म्युमाम्मरौ। एरप भामरम मुभातरा । भूवी । शीवाप्प
'म मैत्री निोविग्मेति मते विही दोष । गत्पबारि । म तिमरमादिति
रामाभम । २ का ठ - ०२१1३ ना उ - 113) ४ एम् विकासे पम् पातो 'सापि
तमी स्वारिउ परस्पर सम्प्रारराउ म् ५/८/प्रेगपति विभाति प्रय
रिभा' उपन्या पुरयम्त । पुनस्तावासरिता । भम्ति परियति । भत भलेनी-
पपो । दिपप । प्रारदिवासीगादी परविरारोगरम्पार । ८ मा म् ।।१२।
'प्रपादपर इम्पत्र पारिपामा पटिव। . ना म् n.
११पाव
१२ पाठ सू ।०५२११४ मान मा।
मते पूरपते रेडि रमाभम ।५ बन्नुनम्न भिा तत प रवि सरमा मं । मन्त्री
"रिभाषनु गमा गम्निवाबी । तर नही रिभाषा पनि प्रम M॥२२॥
१६परपावर मातीमो नमो एप मानी दीपा । नरमादिति नमान
संगमापरप्रफुन ।
मू ॥११॥

२४ बमरकीर्तिविरपिसमाप्योपेवा (प्राय) पूर्वाग्दी। सीवी (मारेण ) पूषाम्पी पौरिदुमालरको (गे) ग्रीतीष (मा) पूर्वानो। शीतदीपिवि' । सतिदीपितिमान् । शीतमानु। ग्रीवभानुमान् । गीता ! शीशुमान् । शीतगमस्तिः । शीतगमस्तिमान् । ग्रीवरिस । गौतक्रियान् । शीतपाय। शीतपारवान् । गोत- गपि । गीतरधिमान् । ग्रीधमरीचि । गीतमरीचिमान् । शीवार्षि 1 शतार्षिभान् । गीतमा । ५ जीवभावान् । शीतगु । शीतमोषा' (मा) न् । विचति । शवविमान् । शीतपम । सतिप्रभाषान् । शीतदीप्तिः। शीतदीप्तिमान् । गीतमोति । नवमोतिष्मान् । शीतमा । खिमालान् । शवयामा। शीवकामवान् । शीरश्मि । शतिरपिमवान् । गीतो । सीवीर्यवान् । शीतपिभाषाः । रातविभावसुमान् । किरणरायानो ( मेम्म) पूर्व शोखरामप्रयोगे बननामानि भवन्ति । उम्सम्यायोगे सूर्यनामानि भवन्ति । उपादीधिति । उपादीपिविमान् । उपाभानु' । १० उप्पभानुमान् । उम्पोस । उम्पोसपान् । उगु । ठणमान् । उम्पगमति । उपगभखिमान्। उमारिए । उम्पणिपान् । उम्हपाए । उम्पपादयान् । उपाधि । उम्म गचिमान् । उप्पमरीचि । उपमरीचिमान् । उपमा.। उम्भास्वान् । उपदेगा । उपपवेबस्वान् । उम्पार्थि । उम्पाधिमान् । उम्मगु । उप्पगोमान् । उप्पुति । उष्णपुतिमान् । उम्पप्रभ । उप प्रभावान् । उमादीप्ति' । उपपदीप्तिमान् । उसम्पीवि । ठम्यग्नोविमाम् । उप्पमा । उसमा १५ स्थान् । उपनामा । उपचामवान् । उम्परमिः । उपाररिमयान् । उप्पो । उम्ोयनान् । उन विमाषम् । उपविभावसुमान् । पत्री विधु' सुपारति कौमुदीमदप्रियः । फसामृचन्द्रमामन्द्रः कान्तिमानोपपीपर ॥४७॥ बरा पो । रायोऽस्ताब्दीवि राशी। विषात्पमृत विपुः । "पी मान"। मपा प्रमूर्व एक्वे सूपासति । मुपानामिर्म विकास (स) हेळवाकीमुदी (मौला तला प्रिया कौमीनिला )। असमाना कि अभीरा मुरप्रिया | को विमति सामत् । “मा माने" चनं मावाति पन्द्रमा'। 'चन्द्र मादे पन्दै उपपर प्रभाव मत्वमो ममति । गुण्मभाषारपरहोपः । मिनमोग सार्थ एप। बन्दवीठि पर। सापि तबिधिकिपिपिरिररिमरिमन्विषन्पुनी- निम्मो र" । कान्तिरस्मीस्त काम्तिमान् । प्रोपपीनामीरमय भोपपीचर। इम्युः तोमर, राचा, २५ रोहिणीयस्थमा, मा अषण अभिनेत्रप्रपना । वा पोक्त गरास्तिके- आहु नेत्रोत्पमत्र सुवममृतनिधे य हरेर्नर्मपम्पु मित्र पुप्यायुपस्य त्रिपुरवियबिनो मौषिभूषाविपानम् । पृत्तिमेव मुराणा पाङ्गसविसमाप पाया सम्प्रोविं पस्तनोतु निसरबनियतिअन्माः सपनखम् ॥" १ "मानुपपानाम शलादि पत्तपिपायक सूचम । माऽक्यान्मार्गोपचाप मोमबारस नकार शास्ति । मत्र तपास्चामाषात् “शस्तगोमान्' इति पम्पम् । पल शीत गोसदस्य कर्मचारये तो "गौरतबिवार्षि' इति रपी दुरवात "गीतमालपान् इति सुवचम् | सिदान्त मागस्पो मनुविधः । "न धर्मधारयान्मत्सरी बहुप्रीशितप्रतिपकिर । २ का उ ए ५२। कुरस्पर । ३ पम पूरै माति उतपति गासमेति मन्योपविहार्य । मनमा छन्द मिमीत तुमति लामनेति विप्रहातममम् । ४ प उ ५काठ २४ भारता ire हो । २० द ५॥

नाममावा ૨૧ मापना, सेवरोधि, राणा हिवरात्र खनिकर पीपरुशि निशीथिनीनाप बेवामुक, मुगार वाचायगीरमग' मा प्रप्युपते अपमामेतिक्त् । सुपार्टिः प्रमनिर्गमा हमानवनीतम् । परमाम् । उनि मानि वारस नक्षत्रम्- चत्वारो नपरे । प्रपति प्रभाम् हामीजीये। सपा पामरसिंह 'नक्षत्रमर्स मम्तारा तारकाऽप्युइया सियाम् ।" मावि दीप्यते भम् । वीरस्वामिनि-५"मा विद्यतस्य मम् । तरपना तारा। वारपति पा। ऋणति दिनखि ठम् सम् । मपति से माति न दमः वि (4) सोति वा नसमम् । "प्रमि नचिकरिम्पोमा । तारखीवऽपि | पर शारपत'- "नपत्रे वाऽतिमध्ये पहारक वारकाऽपि च । विनोम्नि पुराणमौलिकपनमाये स्थित वारकै" उत्पति (मरा पप्पमिम्म पर) पतिशम्प्रयोगे चन्द्रनामानि भवन्ति । गुपति । तापपवि । अषपवि । मनपतिः। रामः । गुस्सामी। ठगनापः । नपत्रेश्वर. । वारेन्द्र । १५ निशा। मणदा रबनी ना दोपा श्यामा सिपा बम गी । निशति वमोति पामिवि मिया निग्रो पा । 'भाव'चोपसर्गे' । पपमपवर परातीवि सम्पदा । वमता रखति रबनिः। मियामीः। बनी। रम्नसमार वा नरा रिलारी। मैनेछि मतम् । एरपति बाप दोपा। भादसोमपानमयः । श्साफ्न्ते गयन्ति राविषय मन पामा । वयानका (पनि)महम्- "श्यामा रात्रिस्तु षिटच्यामा श्यामा मी मुग्पपोषना । रपामा प्रियाराम्पावा श्यामा स्पा पवमारिका ।।" पिप प्रेररो। चिप्। चम्प सिपा। पाऽनुबभिदाविमस्मर। सियत स्थापन ने निर्गम्यते पा । भी । तमा प्रारतोऽभयानमय । तमिसा । वमस्विनी । विमाषरी । नकमुला । शरी। २५ त्रियामा । निगोपिनी। यामिनी। बसति । पानयो । रात्रि । 1 १ लोपः पूर्वपरस र प्रच्यलये दरेप इति पापाफ्नवार्तिकम् III पा वनस्पं पूर्षपदसोपविपापम्मत्र प्रमाई वामम् । २ देगी" गम्य मान्मापावापा | सामि- तामरमापेऽपि बहु उपसम्पत । तापुत्तमस्य पपारामित्वात् "रेपी' रविपद पोमम् । वस्तुत स्पर्म राम्रो रेशिफ एन । ३ पाति प्रमा रवीति का ! "भर रदणे" किम् । “मरतो' सूट । रपवे रठिहा। राप्रपय' । मासी इमेति कर्मधारय । नपत्राणं रखतारापानीपतनीसलाप इलमुपपपम् । सो रस एपारस्प इस इति शर। ४ प्रम को १२॥ ५.वार मा १।।२२। ६ मिदारित्वापर। परि परे गुण निगवनाीपः । ७ प्रपति पदवि "पी गवी' दुरादि । पौणदिक उपा किम् | पलात्तचत्वानि । वषमिति । ८का ४ - १५४९ इलारम्प "स्वित धारक इसन्त' पाठा रा२२। पीरमामिभापत्तोष पीवः । १० का vruar९५५ रतो रसोा ।१० का TERI २६ अमरकीर्तिविरपितमाप्मोपेता u करा ॥४८॥ (निशापापात्पर) करणम्ये प्रमुग्यमाने चन्द्रनामानि भवन्ति । निणर । चणबारः रकनीकर । नकार । दीपाशरः । सामानः । पारः । वरमिस्तपनो मानुन पार्यमा रपिः । तिग्मः पतलो घुमणिर्मार्तण्ठोऽर्को ग्रहाधिप ॥४६॥ इनः सूर्यस्तमोवान्ततिमिरारिविरोचन । सप्त य सूर्ये । वरन्सनेनेवि सरणिः । भव'सपन सम्बसविविप्रतिमोऽनिा । सपति पितो तपनः । भावि दीप्यते । मानु। पाभारिम्पो नुः" नुः प्रस्थयः । 'मम्प बने बनावि मतापीय कपिम' । भस्मामा प्रत्ययो भवति अप्पारे । कार उपारणर्य । पुष पुपरी । पुष्णाति वर्षदे देबठा पूपा । पूपादया - "पूपमममुहम्मन्पोन्मातरिमन्नक्षेपन्नेरन् मूर्धन्यूपन्दोपन्' एते सम्ता निपात्लन्छे । इसीति अर्यमा । गती" । राबते रषिः। 'पातम्पः" । दीविषयोति तिग्मः । "मुक्तिचिविया 'म । पति नवलपपे फ्ता । "तु- *पतिम्वामा' । प्राम्बामा प्रत्ययो भवति । दियो मशिरिष पुमणिा । मवालापत्य मायका । मुवा । भाकारामिति भकी । उणारी "मर्च पूर्णपाम् । प्रत अर्कः । रणमीकापायात १५ मिकदापाराम्मा का एम्म, पपी भवति । प्राणामधिपा स्वामी प्रहाधिपः । एतीति हना। 'रविपिम्मी नस्पति (मेरपति धर्मणि) सोकान् सूप । “पूर्पम्पामप्पाः' पर्वरि। सूर्य रवि मत्स्याम्तो निपातः स्मश्च पान्तं च तिमिरमतमोपान्ततिमिरा,पामरि,-समीर पापारि तिमिगरि । विरीपते इस्पेषणीयो पिरोषना । "चरम मानार' । पपा गंगा मानाः मपति । भारिप तपिता सकिरणः प्रपोतना भास्कर, विम्मागुः दिनमणि, २० भालान् पिबत्लान् हरिः पिना भगा, गौरवि दिनकर पूरा शूरम, शुमामी मितिय तिमिर रिपुः गुमान् अंगु परिदम' सारण प्रभाकर, मानुमान् , ईस लगा, मिमः, चित्रभानुः प्रत्पति मर्मसापी बगपशुशरणमा प्रमोना । दिनं दिवाइर्दिषसो पासर'- पाच दिवसे । पोऽएगाने पति हणमति मबारमिति स्निम् । रोनात" (चरि) २५ प पते पस्यो मास्वापारस्य । रविदों [ पनि हो] प्यतेऽत्र; पाइन्तमम्पबम् दिपा । परन् क्लीम् । विपिदन् । म मावि पास (पर)महा। नमिना" इति रिम् (मिा) रीमतीवि दिवसा"। दिवसम् । बेतवमारतसितना एवेतपान्ता निपालवे । भारतम पामराबाओपि । उमरम् । रिषि परिमठिममिवासियोऽर. एम्पोर मन्ययो भवति । पुा । पसा । १ का उम् २।४।२. रत् २०१३ मा ५. २०५२। दुर्गमतिम । ४ा उ०५ ।५.13 मू ॥१४॥६पाठ ५ ११५01७ पा र ५४२२॥ ८.13 तू २५७१९.13 ए २०१७ १० मा ४१ ।१पा ML २.पठ म् ॥ १३ का उम्प २॥ १४ मन्तिीवि प्रचिनी रिस पनि । १५. उत्११६ पास उपसेराराम पाठपति सूर्मातार प्राधिन कापाठराविको पर इति पदमधिषम । १७ नेकनूममा ठसारी सम्पम् । तत्र साम्पा र राति पूषम । सतीति पातर पापाती नर प्राइस इरपुनम् । तर पतुर्पगरे । मारमरि बम् मतिपरिणनिम्म तरा रवि पानिपातो नरम्पक म । पानपतीनि पार । कौमुदीपमुग्णादिम 'प्रतिमिममिप्र मिििपरामिमभिन्' गति पारिरानीरमवर ।

नाममाय ५ १० तत्परम स॥ ५० ॥ दिनकरा, दिवाय, मास्करः दिवसकरा वातरकरा इत्यादि पूर्वनामानि भवन्ति । चक्रवाकाम्मपर्यायम घु- परनाम्म म प धम्मालाम्मे सोमायाकाप्जयोः (परम) बन्यु गम्दप्रयोगे सूर्य नामानि भवन्ति । पक्रयामापुर अम्बवपुः । पन। मान्मुः । इत्यादीनि हातमानि । सदविप्रियः। समुदामा (परत्र) बिमियराम्मे प्रमुम्पमान चूर्वनामानि भवन्ति । अमपिप्रिय । पविति । कुमुरविहम इस्पारि। यमुनायमकानीनगनफ. सपिता मत ॥ ५१ ॥ पमुमाजनकः । पमसनका ! 'कानोनजनकः । सयिता। मता कथितः । पाहोऽप्रस्तुरगो यात्री हपो घुर्यस्तुरङ्गमः । सप्तिरर्वा हरी रप्पा- एमपशाप । मापसे पम्पवेप्रसार । वाऽनेका (पनि) महाम- "बाहो युग्यं पनो पाहो वाहके बाह इस्पपि । पाहो मानविशेषम पाहो पाहुरिति स्मृतः ।' १५ 'प्रमाप्तौ ॥ भए । मनुते माप्नोति बेगनाभीयस्पानमित्पश्च । अषमा 'प्रय भोगने' प्रभाति भवति मुगारीनिस्पया। प्रशिलसिरिषिशिम्बा " । बमाग | "पोषक्स्पोमा कृति' मेट् । “उरो ( रखा ) गमतीति उरगा। 'गेऽमहापामपि । पूर्वमरसाना मामा भम्पपिति भुवि । बाबा हन्स्पस्य पम्पोस्पेगखो वा पायी । इदन्तोऽपि, पापि । वषा मनाममाखानाम् - "चार्य बामस्तु परेऽपि मुनो निःपनवेगयोः।" २० हिनोति गप्पति पते (1) मनेन हया। परि सरमामे ठाय: मदुगपारिव' । सुरं (ण) गति तु (तो) पोति स्वर मा तुरङ्गमा गम" नाम्नुपपरे गमेध संहाना खो भवति 'भारला पाता । उपत्यकाम गप्पतीति सप्ति । "तपेखितहिना" उपेषांवास्ति तति छन् एवे प्रत्यया भवन्ति । प्रति गमति अमेन माठ, "अन् । रत्पमेन इति । पेसा एप्पा गया, पास बमु पोरक प्रनिः बीविः पीति । २५ १ प्रनीत । कमाऽपरवाया जस्ता रणदुला रवि पौराणिकी कमाऽनुसन्धमा । २.११ रहो रहीका ।काठ २।१४ का ५८ १५ माम्तोष पाठः । उपितस्तु तुरण मंगेन गमावीति दुरग । ६ का ४imls भने स २।७८८ पुरपाठीवि पुर। 'पुरो पौ” इत्पन्दन । ९ का २।६।११॥ १० तुरपूर्वागमे 'गमम' इति सरहामः । टोयोति परखे प्रति तस्तिमिप्रकारोऽमपा पापनीय' । ११ का ५ ४३१५/ १२ का तू १८२ १३ का २ ५।१८ " 'म गौ माहुरचालनिन् । १५ रख पातीति सुरुष । न पाति रपमुगमागम्' इति यत् । १६ प्रनिगम्यस्यामा प्रमाणे मुग्यम् । कोशावरे निशम्दाश्त्वम्-'मनी पारनि रपि मिप' स्सु प्रार्पनाऽपना प्रप को ११९२१॥ प्रतीशम्पीरिमनीपर्यापल सर्वसम्मत पाठि पाति गम्पोपमा प्रमासमबस्वात् पीधि सप्तिदपिकाला पाना इलपि कल्प १९३। 'पीवि पान सपूर्वा तु सापाने से पुगान्' पिरस । - को १५॥

२८ अमरकीप्सिपिरपितमाप्यापेक्षा सप्तापश्वो मयखवान् ॥ ५२ ॥ प्रस्मशमस्त (पाद) पूर्व पदि सप्तादि (तरामा) हा पूर्वनामानि भवन्ति । पसमाए | उमाल । सरगः । अस्थायी। समारना | साधुः । तसरगम । साप्ति । समाई । सारिः। सरमा ५ खं विहायो वियद् म्पोम गगनाफाभ्रममारम् । पौर्नमोऽमोऽन्तरीम प- एभरा गगने । लनति पन्नत्वेन सम्पमा 'कम् । विमाति सर्व चिहापानाप विपासा पपिणा मार्ग पिा पम्पतीवि पियत् । (अपना बीना परिण मागे पचति विपत् )। अमरेम्बभाम्मे- "वियपाति' पिरमति वियत् । पाना पारवे (मावि पामते पा) प्पोमर । "सिम्मविमसिरि १० वरामुपपापा' एपामुपधारा भरण पोर मयति । सर्वपातम्यो मन् (ति पिपूर्वकारपमर)। गम्यते सर्वमनेन गगमम् सीवे वा । गलपमेन गगन पा । माकारान्वे सूर्यादयोऽप्राकाम्यम् । न कारावे वा बापती दी । अम्बते शम्दागते प्रारम् । रोमम्ति पक्षियोऽत्र पौः । बिपाम् । नमति बपाति एर्पमात्मना प्रान्तम् नमः । नभम् इस्पदन्तम् नभस च । न भावोऽमम् । अन्त अपाम्पत्र प्रस्तरीसम् । पोरराविस्वम् । पापाममोरस्तरीयते वा अन्तरिघम, अन्तरीच च । मगद्पर्मन् । तारापमः । पुष्परम् । १५ पिपशुपवम् । पिदियम् । नाकम् । अनन्तम् । पुरवस्म । महा (ब) खम् । रेस्पाम् । मेपवायुपपोऽप्यच ॥ ५३॥ मेपरम्दाने बाबुरामानेच पपरामे ममामे भाकायमामानि भवन्ति । मेपपया | मेपमार्ग। फ्नपणा । मनमार्गः । पर्वम्वपथ । पन्नमार्गः । मिहिरपथः । मिरिमार्ग | नाट्पम । नमामार्गः । तरित्पविपन। वरिपतिमार्गः। सौपानिमापविपप । टौदामिनीपदिमार्गः । पानुपपा । वायुमार्गः। २० पावरमा । पावमार्गः । अनिसपमा | अनिममार्गः । मम्पकः | मम्न्मानः । समीररुपमा । समीरण मार्गः । गवाहपष । गवगामार्ग । सग्नपथः । स्वतनमाः । मागतिपथा। भागरिमार्गः । तपरः खेपर- पत्र माकारो परवीति तबर। पाकाणामे परराम प्रपुलमाने विचारनामानि भवन्ति । सचरा विभा । विरामीमचरः । नभमरा | मनपर। अम्बरपरः । प्राभारावरः । अन्तरिक्ष "परा । मेपपपचरा । मेपमार्गदरः । बानुपपवरः । वायुमार्गचरा । पनपवरर | पनमार्गचर । पनापन पनवर | पनावनमार्गदरः । बीभूतपचचर । बीमूहमार्गपर । प्रमपबचरा । मधमार्गधरः। चारक पवबरा । वाममार्गचरा पदपपरा । पम्पमानयर सादिमामानि विवावरसोवानि । - सद्ग, पन गम्पने गपवीति तणः । गगनामे "ग' रामे प्रमुममाने राजतनामानि भवन्ति । २० गः । विहायोग । सिम्मा। मोमग । नमोग । मानग' | पाप । माकाराग। मम्तरिकम । १ "बनु भबदार' प्रयया । स गठौ सरस्वस्मिधितिमा पिमा । अत्रापि ॥ | २ ठक- विमो मोहालागे" बातो "बहिरापारम्परचमासि" ४।२२। इस्मान् शितप । गिजापुस्। पिपरापपति पमति विमानातीन् इत्यपि पोषम् । स गती 'पवाछन् । ३ पर भा २।। ४ का सू ४०५७।५ का ठ सू ४।२८। ६ “गमेगमा रवि पु गमान्तारण ! ७ मशपिस शम्पसाकारवाचकम्मरकोषमबख्वाप्रमागम्-"तारापपोतरीय च मेवामा च ममाषितम्' शरारापका नाममाठा 8 मेपपयगः । मेपमार्गग । इस्लादिनि हातमानि । पक्षी पत्री पसभ्यपि । अन्तिः शकुनिश्चि पतङ्गो विकिरोऽन्पया ॥४॥ सप्त पा । पहाः सम्वस्त पसी । पत्राणि मत्सस्प पत्री । नाम्त । परवीति पनि । मिप्रस्पये पन्त । पत्राशि मन्सस्प पवत्री नाव । पक्षीवि पते परतोधिप्रस्पये इदन्दोपा पधि । इलामुप मामकारेण गणिफेन-पत्रिशम पपिन् नकारान्तः पपिरिकाराम्तम माल्पात । प्रमरसिंह नाममाशागाम्- "पतत्रिपधिपतगपतस्पनरयावा मगोकोषानिषिकिरबिविणपतत्रया" इमरान्त पविराम पठितोऽखि । मामा दीरस्वामिना पतभिरिभरान्ती लिपिय । १० 'पवेरपिरिति' सान्त्सा पनि प्रम्पकादिदम्न 'मम्पते । एवं पितमस्ति मीमदमरणीदिना याचन प्रमाणम् । शम्दाना चिर्म पते । मभसा गन्तु रास्नोति शकुन्त । शकुन्ति । एष शकुनि । एष शानी । गान्त' । कुन । दी प्रान्ती । बसवीति वि । मनो हि पवेन गेन गतीवि पता पिपिरवि पारि पिकिर । 'बागमो गयेन्द्रावो सिरे पणविपर्यय । पोशादी विकारस्तु वर्णनाला प्रपोदरे ।।" मागम 1 मिनिट। बागलं पिशितं मांस पल पेशी प- पम मसि । मलवे अपवे मार्स गाय च । पिसत परिय-भि पूर्व पिशितम् । ममते सम्भाम्पते गरीरीपचनोमैनेति मांसम् । पसिनिममिकमणिकपिम्प त. एभ्यः सः प्रपती २० भवति । पड़पते ( पाचपते ) पतम्। पपिरादिमि पिपवे (पिंगति) शरीरम् पेशी । पामिपम् । रुपम् । वरतम् । तप्रिय । वस्प मसिस्म मिप । मामिपरामा भिषणमे प्रमुम्ममाने रापमामानि भवन्ति । गाय प्रिय । पिपितप्रिय ! मालप्रिय । पक्षप्रिया । पेशीविः । पातुपानस्तथा रमो- सौ भातुपामे । पानि पाम्ना पीयम्सेऽस्मिन् पातुपाम । गतीविस । राक्षसः। कौएप प्रगाए । नैव । नेकसेगा । नेकपैरम । पिपुसेऽपि (र. । प्रसपा)। कीनाशी नाना । राध्यादिपर इम्यते ॥ ५५ ॥ १५ - २५ को २।५।१४२ दौर भा २२५/३४३ का उ सूY") रामाभमरा पातीवि कि"बाचि" इस्पार । ४ पठेन बेगेन गपतीवि विप्रो क्लाफ्नीपम् । साराष्पा नुपातम्मात् । पवरपरपवे इति पन, । "तृपतिम्यामा सू ५/२२। मप्रपात मुकः । 'तपसिम्पमा विकार । ५. "पोइरादय" ।।१२। ण परिका। पिए प्रपये शिवि पिरमते स्म का पिशितम् । “पिरो पिच उत् १६५/ रवीन् । अपवा का रवि रामा भम । ५५ ठ ४/५३ । ८ रससम्मादिवि रप । “वर्षानुम्मोऽमुन्' । भीमारसोपाराम' ५ वनय भमरीविषिरचिवमायोपेवा रात्रिराबाने परम्दै प्रमुग्यमाने राक्तनामानि भवन्ति । राषिषरः । निशाचर। भरावा पर.1 रम्नीचरः । नकचरा दोषाधरा । इत्पानि शावमानि | मारभ्यठे गवगः मुतोऽदितेस्- परिविराम्या प्रत्यम्दे मयुम्पमाने वैस (प) नामानि भवन्ति । मदितिमा । परिवि- । अदिम्पिोता । मदिविदारक । प्रविकिनन्दनः । प्रदिप । अदितिस्पन पर। पवित्पुत्तानरामः । परिधन्ना सेन्द्रो टेष मुरोऽमरः । पनवे । तब इन्द्रय पसि रवि सेन्द्र । 'खिकी "-1 दिन् । बीम्पन्ति कीडम्ति स्वर्गेऽ २० परीभिः ब पिवतम्ति पेपाः । प्रषा बिम् । प्रभा दोम्मति कति परमाननपरे देषः । मुष्ठ रास्ते सुरः । तपा मरन्ति सुरा । सुर ऐरय पुरा एपामस्तीति वा । “भर्रासादिमोऽ । क्वोऽभिमा मुग पीता 1 न मिरते अमर.। आरिला । विदया । सुमनसा | स्वर्गीक्स' | रेषताः । गीलोसार । अममा। मम्स समारमा । निरा । प्रस्सना । बिदुवाः। शिविरपतयः । सान मुपाता। अमृतारानाः | अनिमिपाः पवम् । १५ स्वः स्वर्गोऽध नाफम, पत्तार सगें । मुरितो बन स्परति सदसोरखा रान्तमममम् । स्वर् । विशु कीगादिपु” । रोमान्ति की चिपा पुमान्तः इपि यो । " दिमि' प्रत्ययो भवति । प्रग सप्रमत स्वर्गः । 'स' सम्मा गा गप्रत्यया 1 मारूप दुम्समा नाक । उभवम् । वषासखिदमो मत ॥ ५६ ॥ तस्प वर्गस्य पासवरपास-स्वर्गवावः । चोबासः,वर्गवाटा इत्यादीनि देवनामानि भवन्ति । सत्पति तस्प देवल ( स्वर्गस्व प) पति तत्पति । देवपतिः सेनापति स्वर्गपातपति वर्गपतिः, नामवि, माम, इत्यादिपर्यापनामानि इलाम यानि । चक्र इन्द्रश्च चुनासीरः शवकनु । प्राचीनहि सुत्रामा पनी पासण्डलो हरिः ।। ५७ ॥ शत्रुर्वलस्य गोत्रस्य पारस्य नमधेरपि । पहा प सहस्रामो गीबाणेश पुरन्दर ॥ ५८ ॥ विगजाश्चाप्सरोनायो पासबो हरिवाहन । मस्तश्च मरुस्वाँश्च पा रावणाधिपः ॥ ५8 ।। सवमन्युस्तुरापाट् प पुरुष मोनिकः। ३० संमन्दनोऽय मघवान् पुसोमारिर्मसत्सवः ॥ ६ ॥ इसनिगरिने । पातु गस्नोतीवि शकः । "सास्तिमिविकिपिपिसिरिमरिचन्पु- १५ मारेर दू १११।५ । २. ना ट र ५११॥ ३ का उ ४ ५९ । १ तस्मिन् सगै बस्तीति कान । सवय । लगपर्यापार्यात् परप्र पानशाने प्रपुनमाने विश्रानामानि भवन्तीत्सर्प । ५ का ठ म् २itm . २५ नाममामा ३१ ब्दीनिम्मो रक् । इम्पति परमैभर्पमुक्तो भवति इन। रम् । सुन प्रादिल गीरी मापुस्तयोरफलमा मममेवाड़ा दी शुनाशी । वासमयम् । शोमन मातीर करकेमा यस स सुनातीरा । नौ वम्स्पो। यु प्रमय वासम्पमपि । पत्र पचे प्रममखासम्मो दितीयो एम्स्यो भवति । तया प शोमना नासीरा अप्रेसरा प्रस्व गुनासारः । पूर्वापाम् स्वारपत्' । गुनासौरपोरफ्त्वमिस्पेके। श षी पहा बस्स शतक्रतुः । प्राचीना प्राचीनमुखा बरिपी दर्भा परम । मुछु प्रायवे मान्ता सुमामा। पत्रं पियते ५ रस्म प बनी। पासपति भिनसरीनामा । हिमसे समीकराईरिः। "शत्रुषस्य गोत्रस्प पाकस्य नमुपेरपि"- बशरागोत्रराः पाण्वमुचि रस्सानि इन्द्रनामानि भवन्ति । पर्म पान पसे या विमान प्रदा। फिप् । (छिन्)प्रमाणपत्रेपु" कि तहसमधीपि परम स सहसास | गोवांगाना वाना मौशः (गीविया) । विरम प्रबासु प्रोयो बस्स | पृपोदरादिषा दि । विर मेवमे बा । सि मम्मोगो पत्पमा (पिगैमा)। अप्सरसा नापोऽप्सरोनाय । बस्सपार पासप । हरिमान बस्स हरियाहन । पुष्पवये मिलते प्पयते मम्त् । सान्तम् । मस्तो देवाः सत्यस्य महत्वान् । पर्पति, नाम्तम,सपा । ऐराण छानामधिपः (ऐयवणपिपा) । शव मन्पपः क्वोऽस्य शतमन्युः । "पा मर्पणे ।। पर। पाला। पात' सबवे कमिसमपर प्रमुरळे 'बातोरण वो" रम् । अस्वीप दीपः । साहियाट । दरपूर्वक । तुरंपरित सारस्पमिभक्स्परीनिति तराषाट । “भारम्पति पिय्। कारितस्मा । कारितखोप । मलोपा । नहिनिपिम्पपिचितिनिषु कौ' फिकम्तेषु प्रायकराणा दीपः । रा बातम् । दुरावार १५ निम्पमा । विनावापर सिझोपः । "रापपासेमारीना र स्पर't साप.४ सस्य पत्तम् । रपरत्वात्परपदऽपि सस्प पत्तम् । स्वमवे प्रपिशम्दबज्ञात् । प्रथा तर पेग सहवे तुरापाट । "पारवासि' विम् पूर्ववत् । पुर प्रमूव हून बरे पोया (रेमा) बान पत पुरुता । पातमात्रls विस्पा करोगधादिवत्वात् (कौशिक )। तपा पुराणम्'- "सावमात्रोऽप मगवानदिरया स सर्वत । वदा प्रसूति रेशा कोशिकस्वमुपागतः ।। गेम परति वा । परिनी' सनमति सम्मम्बम | मरमते पम्प नाम्तो ममपा । "म"नजुगवन्तम" म पनि। प्रत्यगो मपति नगवम्तभ । पुलीमपा (म्नो ) रि पुरोमालि। मरवा पपनाना सक्षा मित्र (4) मरस्मस एएमवन । पारि । बसस्पनः । रभवा । विपणु । बमपर । बावीपतिः । गोपति । पर्यन्तः । इयिक । पूर्वरिष्यति । खरार् । गोषभिन् । प्रमपम्पा । परिमान् । पाणाम्ना परिवत्सति । २० २५ १ शु पूनापाम् अश्नुते मानोति "गुर' विम्मुत्पत्वा "ससुर सम्बो निप्पा । तब पुनातारणम्प पु रामा पूमार्प दत्ताराम । २ का सू ४३८५। ३ पेवेशि म्पानोति रिर् । "पिस पानी" कि । पि मापमोको पल त निगा। पोदविवारोफारसीप।। इत्यू मम् । ४ तापातरीमाचि सुपर्णमानि यस्प छ । परि त बसतोस पीत रोषख्यम' | रवि शामित्रोकप्रकारोमा परि । ५ मस्ती रेषाः शास्फ्रम सम्पसेवि मावत् । ६ का स् १८२४। म् ॥२१।८का ५ ३ । ९ का सू श६ १० रपृकरव' पासू ६११०५७।११ पाए ११० १० का २।१।९।१३ मा २०११ पात् ८॥५६॥ १५ का ८ ४ । १६ रसोकोऽयम् अभि चि २१८॥ धरामप्पेषमेवीपसम्पते । २. भाउ ।

५ ३२ भमरकीर्तिविरचिवमाप्योपेवा काष्ठा का दिगाशा च दक्षकन्या तथा हरिद । परिणयाम् । प्रान्ते रामवे (नववादमीण) काठा' । कुम्नाति पितारसति पफ' । भान्तम् । दिरासमकारा दिन। वृतिपुर विगुप्विाम पति सापु । पामते माया । पहा प्रभापविः सम्मा दसकम्पा । रिपनमा हरित' । तत्पर्यायर योज्य प्रा पालगजाम्परम् ॥ ६१ ।। काहादिनामवा परं पोम्म प्रायः मिदिमा पातशाम्बरम् । अपानः | पुपाल । रिपात । सायापास' । पन्यापासः । परिपालः । पासपोगे दिग्पानामानि भवन्ति । काष्ठागर । मात्र । रिग्गय । माणगर । दसम्यागय । परिदमम । अम्बरसम्मयोगे दिगम्बर नामानि भवन्ति । काठाऽम्बर । कुबम्बर. 1 दिगम्बरः । मायाऽम्बर.। बचश्माम्बर । हरिबम्पर । १० पाच- "गिरिफमरदुर्गेषु पे पसम्ति दिगम्बराः। पाणिपात्रफुटाहारास्ते पास्तु परमा गविम् ॥" एपविषा मुनगो मम्मानो पर भक्त मनि मनि । पवनः पवमानश्च षापुर्वातोऽनिलो मरुय । समीरणो गन्धवाः स्वसनश्च सदागतिः॥ ६२॥ नमस्थान् मातरिश्वा प घरण्पुर्जपनस्तथा। प्रमअन पम्पश पायो । पनवे कार पविधीमति पयन । पुम् । 'पू परमे। पू । पनवे पषमाम । "पूरबी शन' मानमात्रः। भनि अनिच • नाम्पत्तगुण । "मो न्। 'म्पन्भी ऽत २० पाने' मोऽन्त । पातीति वायु । 'लापानी' –ति उए । पाति सास्वसित मा मात्र । पावि मरसित पाति पातः । 'मगारसमिरमिपुम्मतः । अनेन बगत् भनिवि प्राणिति न निततिमा प्रनिता। 'नित गहने" । मुद्रमन्तको मिबस्ते सनास मन्त् । वान्तम् । "मोमति उठिस्वयः । तमम्तावीरगति समीरणः । गरब पाति PAST | गन्यवाद । गम्भपाती । वलसनेन समन । व्या काले गतिस्पर सपागति । नम प्रापशमस्वास्तीति नमस्वान् । मारि रेत स्पति पति नान्दो मावरिश्चन् । मातरिरपेय भवति - मावरिया । परावर बाति परे १ "का रामौ निधि' इस्मादि २१२। पाठ लोग स्वन् । २ मा कुम्नाति विखारपति । किप् । पौरपरिलालसोपा नाविस्पेन पोन पा इत्सिवानि मानि मावि मस्या- मिति मा इसातो-पीति केचित् । ३ १ ४ दरम्ति नमन्ति मनपा परिव रिम् शानेर कथित् स्वभित् अपिबति । "इसलिपिम्प रतिः इतीति । ५. प्रास्ता । ६ अम्बिकरण करि रवि पूर्ण तमम् । का ॥२॥१२॥ इत्पविरणः । ७ "भनि च विमणे पात् ॥८का सू १।२।१४ का ४४१ काउ रा ११का 3 ४॥२॥ १२ का उत् । । १३ मातरि पनपा रेता मसि पा , वाऽन्तरी वर्धमानी बाबु मातरिश्मा इत्माराम । बीरस्वामी तु- 'मातरि ते परति इत्पाद । रामाममस्तु-"मावरि बनम्पा पति पते समममममात्" इस्पा | भापपतलाषा दिवनिशाऽपत्ला कृधिपपिए मेने कलिणाग गर्भलेवानपचारापालोवरणस्य पुराणमसिमलाससम्ममुपपमम् | "तु मोरिम गमिपी । विषमातो मनुवनि सिनिम्नन्तो निपाता सम्मा पारमा ५ ।गयारा । नाममाता २३ 'राः । कथमुमुरम्यवादप, फेनपादय शम्मा हश्शयान्वा निपा पन्वे । तपा पहिसन्धानकाम्पे- "मसूपयाऽगम्प निझाम्प यो पुरो विम्बयाऽम्मापरिणामिनीवताम् । गता इवाभाम्वि कुलाधिपेश अरण्युप्लोमा परिवाऽमुवीचया ॥" हु इति सौषो बानुगती । सौत्रा पावलोऽपि म्यादी पश्यन् । पपवीति अयन । पुष सम्पदम्द्रम्पसरधिमतापपतपदाम् एम्मो बुर्भवति । ता दिशाः प्रभनकि प्रमजान प्रपरस्म । सर्राना ! समीरः । हरि. । मापसः । प्राशुगः । अस्प पर्यापपुत्रौ मीमाअनात्मजो ॥१३॥ अस्प पर्यापात् प्रभखनाविशयात्परत्र पुत्रदो दीयते तदा भीमानुमतोनामानि भवन्ति । १० पवनपुष । पपनवनय 1 परमानन्नप । वासुपुत्र । वायुक्नयः। पासपुष । बाक्वनर । अनिसपुत्रः । भनितवनमः । समीरगपुर । समीरणवनमः । गन्यमापुत्र । गन्धपारवनय । सन्नपुर । सनवमय । सदागतिपत्र । सदागस्तिनन । ममस्वत्पुष । नमवचनम । मम्परिश्मपुत्र । मावशिवस्नग । घरपुष । परम्पुवनय । बपनपुत्र विनवनय । परापुष । पहन्नम । प्रमझनपुण 1 प्रभजन वनर । भौमस हनुमतम नामानि शावम्मानि । १५ सस्सखाऽमि, स्म पानी मा तस्सकः । पाशमाने तवराम्दे प्रगुलमाने अम्निनामानि भवन्ति । पपनस । पामुपस । भनिहस । बाक्मत । मस्स्सत | गलास ! समाररास्त । गनख । समागविल्स नमम्बस्सा । मातरिश्वत्व । परम्पुस । बवनरस । पखवत । प्रभवनतम । परमेपा । परमाना । इलादीनि प्रग्नेमामानि कामानि । २० शिखी बहिः पावकश्यानुभुलमिः । हिरण्यरेता सप्तार्चिीववेदास्तन्नपात् ॥ ६४ ॥ स्साहापविईवाशश्च स्वलनो दानोऽनलाः । पैश्वानरः कृभानुश्च रोहिताश्वो विमावसुः ॥ ६५ ॥ पाफपि समागर्मो हम्पपास हुताशनः । २५ एसपियतिरग्नौ। प्रफ भग कुयिहाा गती । माति वायुषणावर्षे गप्पतास्पम्नि ! शिमारपस्त्र शिबी। उमते परि। भगिभुमिपुरधिम्मो नि एम्बो पातुम्यो नि प्रस्पयो भवति । पुनावि पाया। पापु शोपपति रवान् माशुशुमणिः । “ मागे गुपै पनि । “य १ घरगुणम्पोसम्, न तु चरेणु । दिलवामप्रप परम्परामस्व सनात् । एतत्तापामुण विवषम् अभिवानपिम्तामगिरीबायाम् (४८) उपचम्म नमान्ना । बलवस्तु पदिकोन प्रयोगा। घर पर गली कामादौ परए मातरं प्रत्ययावा । बता 'मापनति' पा स् ॥RI इस प्रसपा । मुम्न रम्पु, मुरम मयु अदिसम्दपरस्प सिरिन पिपक्ष "पापपति' इत्यस्य तत्वबोषिम्मा एम्मः | परम्पतीति परः । २.० १ रखो १९३पासू ग१२।४ परति एम्म बाहिरिवि पुस्पतिरम्पर। ५0 उ र म । ६ भाणेपमितीवि पानापुपैः पम्तार "मागिपः नराठि पाठ २१ । भमिः। भार सौमम्, पाणु परि पाए मुपपोतीतिमा। 'सवातुम्म इन्" इत्यता । ७ाउ ५५ 1 - २४ १० अमरकीर्तिविरचितमाम्योपेठा गोपे। अन्तम् परिवार्थोऽनम् । भाषा। प्रशाउपपदे एपो सनिक प्रथमो भवति । रिम्म रेवीस वरिस्परेवा । यत् स्मृति'-"भनेरपर्व प्रथम मुवर्णम् । साषिो चस्प सप्ता पि।। भवन्ति दिएमा, कसका रहा, कणा, ममुप्तमावास्या । अतिरिका गुरूपेति सप्त सप्तर्षिपो बिहाः" बावे बाते पिते साम्वी बावरत् । मावा वा अस्माद पानातवेदाः । ५ सन न पावयति सनूमपात् । अपि तातो पान्ती पा। "सारा' इत्यस्म (स्या!) पवित भर्ण साहपतिः । इतवारकप पख पानातीविनाशः। हुवम् पाणी भोजन बस्प बा । पमधी- स्पेबंशीली पपसमा पोस्पेशीको दाना । भनिवि प्राविसनेन भना। रिस्मानरवाफ्स्य वैषानरा। पति प्रोवि PUनु । रोहिताप्रमो मृगौश्यो पानमस्प रोहिताश्वः । बिमा नमुनं मम स विमायसः । कृपा धर्मः कपिपंराह भेष्ठरप वरूपात पाकपि । पुराणम्- "कपिया मेष्ठश्म पर्मश्च पूष सभ्यते । यस्माद् पृषाकपि प्राद काश्यपो मो प्रमापतिः ।। मीनाममायामाम "वृषाकपि सुदेरे लियेऽम्नौ ।' शम्मा गभों यस्य स एमीगर्मः । हम पातीति एम्पवाट । मनातीवि प्रवाशमः । बहुतः । १५ नमः । सिवेतरगतिः। पर्षिमान् । मपया । परिमोतिः । उपर्युष | चित्रभानु । छपिः । पी योनि । मुमा । कम्पमा । अपापितम् । पीतोत्रा । भानुः | ग्रामपारा।। बनवाया । वमोप्नः । पमूना इस्पे । पमेस्तति । तदादिसनु, अम्निसमः । पमिपुष पायपिस्नः । पापिपुनः । इस्लादीनि सम्पमामानि भवन्ति । सेनानीः स्फन्दाच सिखियाइनः ॥६६॥ फातिमेयो विशाखश्व कुमारः पण्मुखो गुरुः । शक्तिमान् शौचमेदी व स्वामी भरषणोक्षः ॥६७॥ पारशतने। सेना नपाति सेनानी। 'सस्स्'पिहायुगविवमिदविरमिनीरामामुप गेऽपि" परामुफ्तर्गेऽप्यनुपतर्गेऽपि माम्पनाममुपपरे मि भवति । सन्मन् स्कमा | सन्न गुफ रेवोऽस्प पा । मिती ममूरो मानमस्प शिक्षिपाहनः । इतिथानामपए कार्तिकेया । एनए मनोमस्टेमासि पति विशेपेय परोति पिशामः | पिशासावता मा। कुमारो प्रसारित्वात् । २ १ ममी पारभा ।।५५) २ पोत्पमपाय वर्षमानवाद होषिका रगतन पाग्वेदाताप्प । बा को वन (प) परमात बात अति दयते नाति पुत्पत्तिरपि । ३ तन् स्वम्मका न पावपति तीवः । कि । नमारमपात् इति महोगमावः । सन् न पाति रपति बाते बाते मिनरावारिवि का। पावे। शप | वा उन पाति रपवीति उन्नपं पूर्व तासीति । मादोन्प' रति विर् । इस्पप्यूपम् । ४ गोपनिति बभते गतिमा । ५ ताकत्रम प्रमि पि २।१२९। रीगपामेशोरक्ष-पते । पनेरा ४११८ | - सतोप्रयेपर्वाभिमाठ । विहन्तु स गुपीता भवतीति सन इरसर । प्रचारिणे गुपतिसमागमालिरम् । पपापम् । ९. मिपुत् को सनबर" इस्पमा मासस्या पिणापानपर्व गाता मानिग्रामवि विरापन मानोति रानपतमिति पा।" माती । पपारम् । 8 नाममाम । १० H कुस्सिटो मारोऽस्पेवि कुमार | पमुहानि यस्य स परमुकः । गावि रवि देवसैमंगुए। 'नाम्पुफ्ष प्रीगृहां का। शक्तिर्षियतेऽस्प शक्तिमान् । कौम पर्वत मिनचीति मौनमेवी । समस्त्वस्य स्यामी'। शराणां बनम्, शरवसम्, वस्मिन्नुभम शरवणोङ्गया । गौरीपुम । शठिपाणि | वारफारिस । अग्निम्। | बाहुबः । गायः । अपचारी । महासेना । महावेगा । पार्वतीनवनः । तत्पिता शहर पम्मु भिषा स्थाणुमहेश्वरः । श्यम्मको जटि भर्ष पिनाकी प्रमथाधिपः।। ६८ ॥ त्रिपुरारिविशालाक्षो गिरीशो नीललोहित । रुदेन्दुमौलिपचारिस्त्रिनेत्रो उपमध्यज' ॥ ६६ ॥ उग्र मूली कपाली च शिपिविष्टो भवो हरः । उमापतिर्विरूपासो विश्वरूप' फपर्यपि ॥ ७० ॥ एकोनविंशयीस्वरे । तस्प स्फन्दस पिता । श मुलं करोतीवि शर । शम्भवती (स्पस्मारि) वि "शम्मुः । "मुमो इपिगम्प्रेपु प । रोते प्रलयकाले बगदा शिव' । गति प्रचीनेऽपि विवि स्याए । मापाशी बिरा माहेश्वर । नीम्बमकानि प्रदीपस्य ऽयम्पक । नपाडा सोमनाम् अम्मक विवेस्पागमः । धारभूता मटयो जग बल्प पूर्णका बरिषु मत का पूर्जटि।। गुणवि देवान् । 'रागिामीला' एके कापमान्सा निपास्वम् । पिनाम्मलस्प पिनाकी। प्रमपाया 'पपिपा मम पाधिपा । बिपुरासुरसारित्रिपुरालि। पिणने विस्वीरें अधिष्ठी र पिसातासः । "सप्पषिणी लाग" गिरीणामीशी गिरीशः । ऋसटभनाभील इप्प मोरित वस्प व मीजलोदिता' | 'नीमा" भण्ठ ठोहितमाशे इदि नीमतोहित' इति पुराणम् । रोयल्परिमी रुद्रः । 'साक्तिविधि । शनिधिपिरिरविमरिमन्दिर पुन्दीनिम्मो र । मुमाधिमुकर पल (1) इम्युमोमिः। पठाना पशुकारपलपणानाम् भरिः पारिश्रीधि मेषाम्पस्व त्रिनेत्रा। पमी पतीपर्यो ममार्ग परख स रुपमयमा । कोपमूर्यवि उप्र । यमस्परम शुषी । कपास मनुप्पकरीरिरम्पल कपाशी। शिष पियो हवा परिपस्सी (विप्टे) भूमि पस्प त शिपिषिण"। भवतीति मय । रहर। १ मार गमाम् । इमारपतीति पपापम् । को प्रपिा मारनति गुणानिति या विग्रहो बोप्या २ का उ ६।१८। रवीन्द्रपा । ३ साम्यादामिन् प्रत्यया । "सामिप्रेस" पा ५ ५।२।१२६ । अपना शोभनममति रपतीति वामी । "वमेरिन् पौधा उ ५ ५८ स्टीन प्रस्थमा १ । एम्मति मावसतीस्पयों का प्रभावितमोऽज भवति । ५ का remel ६ उपविमो रोनेसिगाइविप्रस्पपा। शिर वीवि शिषपति : पपापति शिवोपा। शिवम स्पास्वस्मितत्वपि विग्रहोमोपा । ७ का स रा ८ प्रमपारा गुर्गावाः । परन्तु "मपाः मुमुः पारिषदाः इत्पमराषुि प्रमपदस्प शिवपर्यायतेन प्रसिद्ध गुगस्पिनाति प्रमपानामपिता इति सुषधम् । ९. रामारीनामयम्क्वा' ५ ६४ ति ५ । १० नीलकप्ठेनोरिव पयपा मा पस्पेति विप्रा । तयुधम्-'नीच पेन ममान रखा तोरित विषा । मीनचोरिव इत्पेष ast परेकी रवि साद' इति मुझस।११ मम को पीर मा ।। १२ का उह २१ ५ इन्दुमौली बत्पेति विप्रः पुरता । १४ उप्पति पा समठि उमः। उसमयाम' उपपप । दोरम् । पपान्तार। अनेनादि उ सू । १५. शिपिरपसोरापपरोगरामन शिपिरामद १६ मम्माय भवति प्रपते इसः । ।

भमरकतिविरपिवमाप्योपवा उमाना पति उमापतिः। विरूपामबीबप विरूपासः । लिए कर बस रयिषरूपा पौड समस कपी । मौसमय } *शिरः पिपठाधि पर प्रोणादिको। भपिशम्पार-गानः । गशिरोसर । पशुपति' । शम्भुः । गिरिया । मौषष्ठा । पिपुपम्तः । भूतेशः । परमेश्वरः । अबकरिए । चापरपसः । सरा। बामदेवः | कामसी । मोमोश' । बहिरेवाः । भीमः । भपः । ५ चियाणा | पादः। भागीरपी त्रिपथगा बाबी हिमवत्सुता । मन्दाकिनी- पत्र गलामाम् । मगरमेन रागऽक्वारिकलाधरणारया मागीरपी। मिमि) पपिभि गप्पति निपपगा'। निमार्गमा । मना पीता भौरेण स्पन जारी । होरपल पा बाहनी । हिमपतो रिमापतस वा हिमबरमुवा । मना मन्दा गविरस्पस्मा 'मम्दाकिनी । मुररित । विष्णुपरी। परिबरा । शिवरादीर्पित। रिसोवा | भीमम् । सुरनिम्नगा । पुपर्यायधुनी भाकायसम्पती (वा परम ) नदीपायेषु गङ्गानामानि भवन्ति । ससोतस्विनी । बिहानी पुनी । विपत्सिन्पुः । मोमस्वम्ती । नमोमदी। पपननिम्नगा । प्रायपगा । पोनी । प्राकारामी। १५ मन्तरीकाीरेफा। मेपपपरिन् । पानुपपतरक्षिणी। सानि शातम्मानि । गङ्गानदीश्वरः ॥ ७१॥ भागीरप्पादिशम (परण) ईयरपर्यापेषु रिनामानि भवन्ति । भागीरीया । पिप गाभिषा । बारपोपवि। शिमलवास्वामी। मन्दाकिनीनार। स्पानि वनानि | पिपिउँधा विधाता च हिणोश्रमतर्मख । पदमपर्यापयोनिश्च पितामहविरचिनौ ॥७२॥ हिरण्यगर्मः स्रष्टा च प्रमापतिस्सहस्रपात् । प्रमात्ममूरनन्तात्मा फा सवय प्रापि। विषति' प्रति मिमि । सिमा लिपिक 'उपस 18 विषति सुमति पाचागुम्योऽतन ।' बि पिने " निपाति पारपति सूवानीति विभाar । ०५ परेमो मुक्षिण । म बापवेना | परमारि मुनानि पानामत पतपपयोपयोनि"- पभपर्यायरामाने पोनिराम प्रमुम्ममाने पावर्नामानि भवन्ति । ठामरस्पोनिः । मतगेनि । नसिनपानिः । पापानि । स्रीनि। मामलनि। सरपयोनिः । पुपरीभा । मसि सर । प्ररपिनगोनि । पोन। पुपरपोनि । लाहोनि मातमामि । पपमपानो पोक पिया पिता पितामा । प्रात्मनो मतानि पिरिएके पृषकवि पिरिधन । पिरिणः । परिधिप । १ मामा पपा मारारमिप देन गतीवि मा। स्वं प पूर्ण समाहारीयो से हम समागन्तविषागेन पिमरामस्पाभरातले पपाचे भवति । गंगागाधिपरगामिले माणोचनम् 'वितो वारपते मयार नागास्वारयतेऽप्पा । रिषि तारक्व लोचन लिपपगा स्मृता ॥ ९ मन्द मक्सि गा ग्रीसमस्या पति पा । "भा हरियापी म्यो । चिन् | गप् । प्रत्यापविमरे मारण्य स्व मन्दम्प प्रमाणे पम् । ३ विज विमाने । शादिः । स पानुम्बन दिव। १ का तू ५७ । ५मा हसू M५१॥ 0 नाममाला । हिर गर्ने यस हिरम गर्मो वा मस्प हिरण्यगर्म । पुरासम- "हिरण्यगमममषचत्राण्डमुदके तपा। वत्र यो स्वय ब्रह्मा स्वयम्भूबॅकविभुः " सम्टीस्पेवशील मरा। प्रमाना पति प्रजापतिः । पद पवौ।" पद् । पपन्ते गम्मरते (गणन्ति ) प्रागिन' तान् पचमान न बन चरणा एक प्रमुखते। "पावोरर वो' ग । लोप दीर्थ । पादिया । पारगन्तीति पाद । हिप प । कारिवस्या कारिवलीपः । मेहार | पाद् । सास पारो बस्न त सरसपान् । रान्ति मन्ते चरावयवत्र मास । उमबम् । इदं बम । म मा । प्रारम्ति मवानि पस्मिमिति बम मन् प्रत्ययो भवति च हकारात् पूर्वम् । प्रास्मना भवति भारम।। न मन्तो रिपवे गत सोजन्ना, अनन्तो विनाशरशिव मात्मा पस्म सा प्रनम्वारमा। कारतीति क। परमेष्ठी। सुरम्पदः । शवानन्द । सपम्।। गत्कयो । एवप्रति स्पपिए । १० तत्पुत्रोऽप नारद ॥७३॥ वरुप पुषस्तत्पुषाः । म राम्बार (परण) पुत्र प्राममाने मारवनामानि भवन्ति । विधिपुनः । पुषः । विधात्पुत्रः । पिरिमिपुत्रः। युरिणपुष । भमपुत्रः । पतुम सपुषः। पद्म पोनिपुनः। पितामहपुत्र । हिरगर्भपुत्र । प्रमापतिपुत्रः । सासरात्पुष । ब्रमपुष । प्रारमम्मत । अनम्हात्मपुष । इलादीनि शवम्मानि । १५ रुष्णो दामोदरो विष्णुरुपेन्द्रः पुरुपोचमः । फेसपश्च पीकेश शा नारायणो हरि॥ ७४ ॥ फेभी मधुलिर्माणो हिरण्यफनिपुर्सर । सदादिसूदन पौरि पदमनामोऽप्यपोऽसबः ॥७।। गोविन्दो वासुदेवश्च- २० एलगिदिनारायणे । कर्पत्परीन् सम्पावरलारुप्पा। प्रविपिम्मो नम्। दाम उपरे बस्म स दामोव । परमम् वाचो हि चाफ्तादाम्ना पोऽभूत् । मेरि पानोति विष्णु । सूपिपिम्पा पबत् ॥ उपग्तमिन्द्रमुफेन । इन उपगठोप्टबलात् ा उपेन्द्र । पुस्पेय उचम पुरुपोचमा । या सत्त्वस्य केशमा। पीताणमिश्रियाणामीशो वशित्वार स्पीदेशः । या मनु रसस्पस्पशाख । नारा भाप भवन वस्प नारायणा ।स्मृत्तिा' २५ "माणे मार इति शोध भावे नरखूनका अपन वस्य तार पूर्व तेन नारायणः स्मृतः ॥" १ "पुराणम्' इस्पारम 'सोक पिमुता एवम्तम् अभिवानचिन्तामणिकामाम् ॥१२॥ उपसम्पते। २का सू ॥२।१।३का सू शY सातुम्मो मन्" का उ सू ४।२८०५, रामे बेरपनि त्वेन प्रमधि प्रयतीति रति विपदा कप मौ' पडे पा । 'पम्पेम्पोऽपि स्मवे पा ॥२॥११॥ नमातिमन रम् २११७मावाणी दिमोदया तबामपनिवारणाय परिसरो पर रवि पौराणिक मा 'सतम्" इति परम स्मात २. नपणे समूहो नारम् एक्ने यस्स मरद विरार पुरवारमावे तत्वं मारम्। तरसते नानाति पा मारपति बपति या 'भापपण: एस्पति पुत्पचित्र।१० मनुस्मृति ११ । नूवोतपरणे मला परस्पाक्नम्पूर्णम् इति पारी सम्पते । - । ८मा र स २ भमरकीर्तिविरचितमाम्योपेसा नरस्साफ्ल पा । नरामयते इति पासेन नरापोऽपि । इस्मष हरिशा स्वस्थ मणी । मन्मते बने। मम् । मनिमनिनमा मघवन्नाकाम' एपामुमययो भवति मपस्तनाकाम यपासस मारेा भवन्ति । "नवस्य । मातीति पनि । 'पातमा मते पाणाः | तवावि सूखन । तवावीना मादीनां वनो नारातिर । भणी मधुः बक्षिा बाका हरिमाशिपुः मरः ५ एम्म सम्पम्मा परमारिसम प्रमुग्यमाने नारायणनामानि भवन्ति । गिरी। रविघमित्रा। कधिविट् । केपिसपस्न । मधुपैरी । मनराविः | मपमिनः । मनरिः । मदिर । मघुसपनः । मपरिपुः । मामकरी । पत्यरातिः । बस्पमित्र । शिविर । बलिसपस्न । बधिरिपुः । पाण्यैरी । पाणराति । पाणा मित्र । मावारि। शाराशि। बायसपना । मापरिपुः । हिरणकरिपुद्धि । रिमाशिपुसपना। हिरम्मकशिपुरिपुः । मुररी। मुरारिः । मुराराविः । मुरविर । मुररुपला । मुररिपुः । मपुण्णुः । पार २० शत्रु: | मधुसूदन । पशिसूदनः । पशिवन्धना । बारसूदन । हिरण्यकशिपुसूदनः । फेशियान । इत्यादि पांचनामानि । गुरवस्वादिपुरुषस्तस्पापस्यम्, गरि। मौरियो । पद्म नामावस्य पचनामा। संशा नामिा। प्रबोवाण विनिमाण बारवे प्रपचीमपति भपोसमा | गोभु विन्दति गोविदः । पसुरवस्थापन पासुदेवः। 'मपुष्य । भीवसा । भीपति | पीतवासा । विकासेन । पिस रुस । मुकपा । परविपरः। उपरकत । कुष्ठ । बलरामन । रमापालि। पागाई। । पुरुष । १५ पाकपि । प्रमुखः । इन्द्रापरम । पम्। पिटरममा । बनमाली । म्नान' । मिना । शम्मा । स्वापूमम् । लामी: श्रीोमिनीन्दिरा। चत्वारः मिमाम् । सपनाशयमोः। बपति पति पुष्पकमाय बनमिति पम्मी।। 'सोमअत्मादौनपगो भवति मोऽन्तम । म मिन् (सेपायाम् )। पुम्भकर भरतीति अभिविभिन्नुमा किम्वीपम एम्मा किप्प्रत्ययो भवति दीभ स्वरस येषाम् । गौ मिनो वीवि गोमिनी' । इम्पति परमेस्सयमुक्ता भवति इम्पिरा । मना। पना । पपासा । हरिमिगा। पारोदवनपा । माया । मा । वा' ।।मा । एमा । सीता । पहा (पला) । मरी । अभिमाऽपि । तत्पति भैलमम्पादिपरश्चक्रधरस्वथा ॥ ७६ ॥ दसापतिस्तत्पति । समीपतिः। भापति गोमिनीपतिः । इन्दिरापवि । लादीनि परि २५ नामानि सः । समूम्पाविपरः । पर्वतपरा । ऐसार । रीमपरा । भरतपरा । चिरा । सानुम पर । गिरिधर । नगभरा | शिवोपरः । भूमिपर । घर । पृषीवरः । गरीवर। । मेदिनोवरा । . भी। १ मम्बते बनेः समात्नेन' इति रोप। २. का उ ए १।८।३ काठ सू ११४ । ४ का ५ २१५ दिः । ८ । ५. प्रब तिमयमैझिप गन पेन, भषो न पीफ्ते बाद रवि मा पिमहाधिकोप्रपत्र। ६ मम्मुम्न रापण 'विष्णु पर्यापते पारपि प्रमाणम्- माया फौखभोग तोमगर्भो परापर.। २०१७ सम्मल नारायणप्ररोऽपि प्रमाणम् । "पिपुते नने विष्यौपा, स्वापि त्रिषु।" ॥१० । ८.का उ शाहका उम २।२३। १० "गोमिनी' शम्दस्य हरम्प प्रमाणे मृग्यम् । अत्यनिमयोऽपि चिनरम । मल पौरामा मिनिपलसे गपि गोपासिकार वस्त्र पत्रिी कौपान्तरसपायः । ११ वाईमा पोलपम्प प्रमाणम्- "समी फामा रमा पा मा बी मन्दिर प्रमि वि १४ । 'गा' इमाई माइवि पर। बरम्यास्त भरो विगुठि पोराभिमानुपी। दवि सम्मापाम् ।

नाममाछा । महीपरा । परापर.1 पसुम्परापरा | पात्रीपरः। साधारः । बमुमतीपर ! विषम्मराधरः। मनीपरा। परगीपर । एमापरः । परिणीपर। शिविपरः । ऊसरा (प्र)।कुम्मिनीपः । इसापर। उपरीवर । वापर । गोपर | भगवीधरः | इस्लादीनि एरेनामानि भवम्मानि । क्या पापरोऽपि । सत्युप्रो मन्मयः फामः सूर्पफाराति (कारि) रनन्यजः । फायपर्यापरहितो मदनो मकरध्वजः ॥ ७७॥ पट् कामे । वत्पुमः । पुष । दामोदरपुत्र | लिप्पुषः । उपेन्द्रवनमः । पुम्योचमसूमः । केशवपुत्र । पीरेशपुत्र । पीशवनम । गनिन्दनः । नारायणा । परिसूत । गोलिया। मानि मगनस पर्यापनामानि पातमानि । मप्नाति पित्त 'मम्मथ । कामपते पन (मनेन) कामा। "स्पकारातिः । मनमोऽम्बरमान पापते अनापसः ! कायपर्यापरहित । विसः। प्रकार । मना । अनपपना । अवपु । मसंहननः । पोवरा । प्रमूर्तिः । इत्यादि (बिपि तस्व) पारनामानि मनं १० मरवतीवि मदन । मकरो पये यस्य स मकरध्वज । प्रघुम्न । मनमिव । पाल्पामा। प्राय । पम्पुर । भीनन्दन पिया। मभुस । शिलीमुखा परो पाणो मार्गणो रोपण' फण' । इप कार पुरन च नाराच तोमर खग ॥ ७ ॥ पारश मारो। गितीय समाम मुम परम शिलीमुखा । रिसायाम् । मन्सनेनेति १५ पुलिसी पप्रत्ययः । बक्षति पाए । पनाम' पन्। मार्गगति भन्वेषगति मार्गणा । राप्यते । निमन्यते रोपणः | पावि 'कपः । इप गतौ । पते गम्पवे शत्रुतम्मुलमिति "पु बन्तुमिम्पति स्निस्तीति पाए । पिपिभिदिपिरिपम्प क । काम्पवे रिपुरपार काएडम् । उमयम् । बनति मिनत्ति ' पुरसम् । नार नरसमूहम् प्रजातीवि मारापम् । वोम्यते रसाप्प तोमम् 'समाका| गीति बगा। पपत्र । पिपुर । विशिख । मसम्म । २० परम्पोऽपि । सापक । प्रदा । पूपतः । रोप । गार्भपया । । मस्तिः । भस्वा । या। ४ १ विग्रो पित्तस्पाने मन सम्दपाठी पोम्प । मनस खोपाचे प्रपोदरारिगणपाठापाठी पि वस्प कार्य । चीरस्वामिरामाभमौ मननं मत् घेवना । मनावीवि मष । पचाप । मतस्पेस नामा मप भन्मप इस्पातः । २ न्दोमामवाकारिरिवि पाठो बोप । सूर्पको माम कमिद दानवस्वस्प नाराकारित्वाताम एर्पकारः । तदुक्तम्- पभि पि ॥१॥२ । 'पुप्पामस्नेतुपापास्मा परी शम्बरसूर्पकौ। ३ शिसी नाम गप्पद । 'मा' इति गोरे मात । ४ का सू ५।९। ५ वि सम्पायवे पुरानोऽस्मिमिति पूर्यो विग्रहः । ६ का ४५९९। ७ वि शरारते पब । पराप। ८ बपति गन्दादि रानुसम्मुसमितिदा । ९ा उ र १३१ ।१० नति दीपते काम इति गमाभम । कमी दासी"। कादिम्म पित्" उ ११२ । इति । अनुनासिकस्पेतु पषादीय । प्रमरपोमु विप्रो "मु कान्ती मनायो। एष प्रत्ययः । रासनेनारवा वापरति इमपन्द्रा । स शब इसको ।। ११ पुर देरपेन प्राति गप्पतीवि पुराणम् इत्मपि । पुरानो प्रावि गप्पति वा । १२ मारमाचामतीति रामाममः । मरमत्रवीति नराधी, नराप्यास्तस्पी माराप पति ऐमरमः । १३ गतौ तीनः । तोतीति तो पिप् । पिरटेमेनेति मर: पुलि समापी पीमासी मएपेवि ठोमर इत्वम्पत्र । १५ सपा । मुस्पटको १५२९ । पविषई पत्रमार चिमपुरमा पर ला इति ।

४० २० बमरकीर्तिविरचितमाम्योपेसा कामुक घन्व चाप च धर्म कोदण्रकं धनु । भिलीमुसादरसनम्- पर पनुपि । कर्मणे गनुपपतवणय प्रभवतीति 'कामु कम् । दम्ति मारपत्पनेन पावन् । भारम्वम् पन्यम् । पपरम वेगोविपरमापम् । उभयम् । परवि धर्मम् । पौ च । कर अनुवमाषणे । कोरपलनेन 'कोदण्डम् । रामपा पनवे पछि पाठवा मनुः । उभगम् । उणारी दबन्तीति धनुः (क) । "पिचमिवनिपनिषरिटबिबिम्प क"। शिसीमुबारसनम् । शिलीमुनाम्नः । शराठना । मर्गणतन । रोपवानः । ममासना। पास्न 1 कामना । सुरपासना | नारापान । वोमराहना। सस्कोटिमटनी पिदुः ॥ ७६ ॥ तस्प पमुपः कोटिमप्रभागम् । झामुमोटि। पन्चकोरि। पापकौयि | काणकोसि । पनुमोति । शिलीमुखाम्नफोलि। रायनकोरि। पागमनकोयि। रोपवानकीगि। मार्गणाधन कौगि । इत्याविषमटनीति कप्पते । प्रति गपदवि भूमिमटनिः। माम् । मटमो । हो तिमाम् । पुष्प सुमनस फुलं लतान्तं प्रसवोद्गमी । प्रश्न असुम देयम्- पर (पाप) पुष। पुम्पति विमति पुष्पम् । मुख मम्मम्त माभिः गुमनताबोबाले । "मिमला पिरारणे ।" फत् । फलति स्म प्रतः । फुस्सं वा। गयोऽर्मक । 'भानुम्बाम रवि नेर् । अनुपसर्गासपीकोलामा निशकारस तस्वम् । “घरकोषस कारावागुणे उत्तम् । शिरेषः । शतापा मम्त पति एताम्तम् । प्रत् (4) ते प्रसवम् । उगप्रति प्राइम पति उद्गमः । भिर प्रपने प्रसूनम् । पून सूनक। पवा उभवम् । को ग्रोमो सूते "सुमम् । २० समग । शे शावम्पम् । उदापसभरः स्मरः ॥८॥ पुषपर्यापलो (' परमा) अपदिषु मा पायपपिचापि स्मरनामानि भवन्ति । पुरेपुर । पुप्पाः । पुष्पशिचीमुन्न । पुप्पशरा । पुप्ममार्गणः । पुप्परोपका । पुष्पकाण । पुप्पाका । पुरसुरा । पुष्पनाराका । पुष्पतीमरः । सुमन भुरमा । मुमशिलीमुस । मुमनोनाराषः। वाम्रो । १ मय उपर पा स् ५।१।१३ । इति प्रभवस्व उपम । टिहोपः । २ बन पाम्मे पुरोग्यादिः । बनस्परा । बानामनेताम्मारवतीम्पः । पात्वांनुरोप तु पति पाम्ममयपासनेन स्पर्धा गोप्प । पीरा पनपा पानापनचाद् धनुषा । पम्पति गति बन्नेवि पौरवामिरामागम इमपाता। निन्यरूपा। ३ परवो रपयारमहत्यापिपई । मनिन्पाप । मायनपर्मगम र पनु पिस्ने मेदिनी प्रमाणम्-- मोनो पुम प्रापारे भावीपमपीसी । परितोषनिषमा मा पनुर्पमनोमपे || माता १६ रही ४ मारणपश्यप । रामाममस्त 'इट भातभाषण" पौरखी बिमामा। स प्रापः । प्रदिरादिवाटसर । परि तपः। नपठे मवि मनमः । गरे दीवीति की। राम्दापमानो एगोम्पेयप्पन्ना। ५.पा उ स् १।११। । मीन मर पाभिरिदिपुर.पा १.९४८मा ग १५४९१०९मा ४११ मा म् । कुमति पमम् । 'कुन तापप दिवारि । "इसमभामरेता पाउन तुमप्रापप । इति रामाश्रम । - 1 ६ नाममामा ४१ अवास्तगासवान्तमुरण। खताम्हनारामा ! घतान्तवीमर । प्रमाण । प्रसबरोपण । प्रसपा । प्रभो । प्रतपाल। प्रसय रन । प्रसपनाराचा। प्रसस्तोमरः । उद्गमश्रितीमुता। ठद्गमः । उद्गमबाण । टद्गममार्गय । उद्गमरोपण । उद्गमश्रा । उगमेषुः । उद्गमभुरणः । उद्गमनागमः । टद्गमतोमर । प्रमनशिलीमुख । प्रमनशर । प्रसूनबार । प्रसूनरोपण । प्रस्नकण । प्रसूनचाग । प्रसूनः । मनमुरम । प्रभूननाराष । प्रस्नतोमर ।कुममशिसीमुख कुसमशर । इसममाण । मुम- मार्गस । रुसमरोपण। अनुमकरा । कुनुमेषु । कुमुमकाण । पुम्मसुम । कुमुमनाराच । फममतोमर । पुप्पशम्या पनुपि शम्दे प्रमुममाने मनपनामानि भवन्ति । पुष्पकामुः। पुप्पपना । पुष्पचाप । पुषभर्मा । पुष्पकोदय । पुष्पपा (मा) । सवान्सकामु । तवान्तपनु (म्बा) । सान्तचाप । कताम्सपर्म (मा) । सवान्तकोरग। सवान्तपन्या । मसपचाप' । प्रापकोदण । प्रसवपनुः (न्या)। प्रस्नकामुक । कुसमपन्या। कुतुमपाप | समपर्मः (मा)। इसमकोगा। इसमपनु. (न्या)। १० प्रत्यादीनि हावामानि । स्वान्तमास्वनित घिच घेतोऽन्त फरश मन । रदय विषिखाऽक्तम्- नर पिचे। 'सम स्पन कर शम्मे। भाम्पू: । सनति स्म भास्वनति रम इति स्याम्तम् मालाम्तम् । 'गस्पो'' निा का 'प्यमवरतपुपालनाम्" एम्स के निभापपेर १५ भवति । पेट । पम्मो '। मनोरनुम्बागे' धुरि" । मनो मुभिवारी लादिना के मेर् । कपि तत्वकपमे पि परत्नापूर्वोठपरोठमो परीकरिपिसवान् "वि बचनात् । अनेन सूप्रेशरमेष विप्रपा भवति । मनोऽभिपानेऽपि परस्पादयमेष विधिर्भवति । तति विचम् । तति पानाति भनेनारमा घेतम् सान्तम् । अन्त निमम प्रियतेऽनेन भत करणम् । मन्नते मुम्मते ऽनेन प्रान्तम् मनस् । पुदम्माऽ हरति पयम् । 'नो दोज्म' । पाए । विगत (वा नए (प) शित (ना) परम तत् पिशिनम्' । मा एमन्तात् मन भाषते ( माकूतम् ) । तथा पारसारस्लाम मावास्तेनापरणेति मानसम्'। मारस्वत्रोद्ममो मतः ॥१॥ वत्र पिचे उद्मपो मारो मत कपित । सान्तसम्मका ! स्थापन | भास्वनिवर । रित्त सम्भव । विदा । स्तम्मनः । पठोपा । अन्तरसम्भव हरससम्ममापसमा विशिणसम्भवः। " पिसिना । प्रातसम्भव । इस्लादीनि सम्दपनामानि प्रातभानि । मीषी मीषा गुणो गष्पा च्या- पाणुगे । भूवि दिनस्थनमा मूगा । मारपस्प मुखस्व विकारो मीी । पनुरनमा बीपीवि - २० । रातू ४४१). सू ४६१९०१५ मा स् MENU पयमीपपाया पुरि बागुण "वि पूर्ण सूमम ।४ का २irtel ५.५ ९।६ पास्वनितमित्यत्र मनोऽपि परस्मात् "पा मम्पमत्तरे तिर् । अपूर्व लाभारे तु वास्तमित्यत्र "मुभिपाही' स्पाविनेट मविपेठ । न सातमित्वमत्र काम् । भारत र पास्तनिवमास्वाम्तमिस्तुभवमिस्पारण । ७ मनुमतिपुरिपूधामा र रति का देश हानाबापर्वमाने का। ८. अन्स राम्दस्वाऽधरिफरणशनिपानरेगावामपनान्तो निश्चय पति मुराधिन मुना । पन्तर्गत परपम्, परमामन्तर्गत देवि मुत्पतियोंपा। ९ मा उ त् २०१५ । १० बिग्लिशमाय गान पिम प्पमा प्रमाणमुपसम्बम् । प्रपोमुपपुपरीताकारतापरपस्य मिनारदिवस्व परिन्नेयम् ।

४२ ममरकीर्तिपिरचिवमाप्पोपेता सीवा । गुम्पते सम्मक्ते मेन गुन । पुति। मोम्योरिता गम्या । बीयतेनगा म्पावणस्नम् । हपा। अलिश पिलीमुख । भ्रमर पट्पदो मेयो दिरेफस मधुवतः ॥ ८२ ॥ लस । भवति मपति पुसवातीअमि'। मधुना विभावारमान मा । ५ भनाङ्गानि एशमलवाता निपारमन्ते । गितीसरा शिक्षामा मुखमण शिवीमुखा। भमन् रौतीति निमत्था अमर । 'शम्यादब राप्रपतीनाम् प्रकारस बोपी मबति । प्राविशन्दात् नगरल सोपा उपायौ 'भमु पत्तने । प्रमतीति अमरा। "रेपिपरिवठिममिवासिम्योपुर । पट् पानि मरण प्रस्प षट्पदः । दौरेफौ यस्म हिरेफा । म स्वमति भक्के मापतः । मपुकर । पुपसिर। इन्दिन्दिरः । पट्परपः । परमि । चरीकः । भन । रोखम्ब । रेखाम् । १० मौर्यादिप्रान्तमन्यादिकन्दर्पस्पैक्षव मनु । पोविकार पेसवम् । प्रतिमौला (कम) । मौनी (म्) । सिमीमुलमोमी (म्) । प्रमरमीपी (कम्) । पल्सदमौला (कम) हिरेफमौरी (म्) । मधुमतमौला (कम) । पशिबीना (मम्) । मामीला (पम्) । शिस्तीमुखमीचा (पम्) । प्रमरबीमा (म्) । पपदग्रीवा (पम्) । हिरेफचीला (मम्) । मपुतगीता (बम्) । अहिगुवः (पम्)। सहगुप (पम्) । शिलीमुखाय (गम्)।भ्रमरगुणः (बम्) । १५ पटपागुर (पम्) । हिरेफगुणः (गम्) । ममुरगुण (गम्) । प्रतिपा (म्पम्) । भम्पा (मम्)। हिरेफना (मम्) । मधुमतम्या (यम्) । इस्पार्शनि कथितीमुम (पनु ) नामानि मानि । हेविरमाऽयुर्घ शस्त्रम्- बलारः शसो | हिनाति ना हेतिः । मिनाम् । सातिविम्भूितपथ' । एवं पिपगारवा निपात्यन्ते । अस्पते धिप्यतेऽनमेति प्रमम् । पापुप्पतेऽमेन भायुपम् । उभगम् । पस्वतेऽमन शस्त्रम् ।' 'नीलाम्पस मुम्वसिसिषमिहपतर्दशन करणे' । मात्र ।"म्मानम् इति नपरगमनम् । ननु सम्बनप्रतिपेमाभावात् इनि प्रत्यो गगमः कर्प भवति । प्रागम्मयाममनिस्पमिति बधनात् रामपाती नि प्रस्पयेइ न मबति । ' भूपये "ति शापारेष (स) । पुप्पाघस्त्र' स्मरो मत ॥८३ ॥ पुणपत्ति प्रमपयिषु शरपयिषु तवा चापपपिचापि स्मरमामानि भवन्ति । पुण १ गोम्पो पाणेमो रिटवः । २ बिनाति बीवतज्नया । मानगोहानी' । मन्येबपि सत रवि ।। म भूपयादी । सभातुम इन् । ४ 1८1५।। ६ पातलोपारा नोपतम्बम् । ७ अमरपर रेफरपतत्वाद् हिरेफः । ८. सम्पस धनुरागम् । भुषण निर्मितम् । अत एष काम मुघमेलुप्यते । मौरियः शम्मा मन्ते यस्प प्रतिः पतिपर भारी पस्योरी स्वपनुरिति पाभुतपाठाप । अस्मिम बर्षिरोपपतवा मसिमौरीम् मामलाम् इत्यादि रीमा बदम्मम् । वस्तुतस्तु मीमारिणोठमस्पादिरिवि पाठी चुत कत्र पदार्पोम्नापि गपु समपदव । मायादव मौर्मादि पनुम ऐसबम् स्पर्म । समुहम्- 'माया रोलम्बमा बमुरप पिशिता काममा पुप्पोतो इवि मारित्वपसे। रीवा तु पपाभुतपाठानुगामिनी 1 6 दिगती नदी ।। व पुरसत्तिग्निशिता बोप्पा । उता 'न् हिंगवाम् सम्मानपति मुबषम्। १ MAHIL१ पाए || म्मानमवर परक्य नफेत्' । १० का म् ॥१२॥ इति सकारण परगमरम्। १३पासू.१२॥ २

नाममाळा
४५
-
देवि । पुप्पामा । पुष्पायुषः । पुपशम । ममनोहेतिः । मुमनोम | मुमनमामुप । सुमनरसमः ।
क्वान्दति । सवान्तामसवान्तापुष । खवान्तराम 1 प्रपामः । प्रसपायुषः । प्रतपण्ड । उद्ग
मोति । उद्गमायुपः । उद्गमयम । प्रसूनहेति ! प्रष्नास्त्रः । प्रनायुषः । प्रस्परामः । समाधि ।
कुमुमाम । समायुष । कुसुमयमः । इसादिकानि नामानि शाम्म्यानि ।
मज पताका केतुश्च घिह सदैजयन्त्यपि ।
प: पनाकायाम | पाते (वि) धूयते प्यमः' । स्मामरसो-म्पसमसियाम् ।
घमिम । पताकारणेपर कप' । परब शिवते पातेन पताका। बसाकारमः'पनाकापिनाक
फ्ताधारमामाभावाचः एते भयावान्ता निपात्तने । परामिवाम् । दीयते सम्ममनेन हेतु।।
स्मारय ---नवानपीलेपनालयावादव" एते तुपान्वा निपात्यन्ते । पापरिकाम्ने ।
बालति (अमेन) चिटम् । विजयतेऽनया पैजयन्ती । बसन्ती का मामी । देवयन्ता | पन्त ।
१०
'तत्वदन्तो पापादिः सम्मोविनकर' स्मर' ॥८४॥
मयप्पम । झपफ्ताफ । मपकेन । झयचिए । झपमेयन्ति । पश्चीयमयः। पम्पीस
पता। पातीयतु । पम्वीचिह । परदीवन्ति । सफरमसः । तफरपताः । कर फेछ ।
समरपिहा । सफरवन्ति । प्रनिमिपम । प्रनिमिपपता । अनिमिपत। प्रनिमिपपिह।
मनिमिपबन्ति तिमिपा । विमिपठाः । विमिस्तु । विमिचि विमिकसन्ति । मीनप्षय' । मीन
१५
पक्षाकामीनकेत । मनभिः । मीनबन्ति । पाठीनपाव । पाठीनफ्ताक । पाठीनतु । पाठीनचिट
पाठीनवपरितः । शम्मोर्षिणकरारमिझकर । इत्यागीनि स्मरनामानि पातम्मानि ।
कौमेयकासिनिस्त्रिंशपाया' फरपालक ।
तरवारिमण्डलाय खगनामावलिं विदु ॥ ८५ ।।
भरा वर्ग । कपी भव कोमेपका । फौरेय । अपवे विपतेऽसि । निफान्तभिरावो. २०
हुचिम्मो निमिश । तासमान्तः । सन् एल पते पाचट पापा । पे काण परेपमत
करपा । करपातः । तरवि (दर) मषमान पारि पोति निम्म्या तरवारि। मपस बलुतमर्म
परय तम्मएरमाप्रम् । पति परमानमेन बरु । लगेगा । स्त्रीत्रा । ऋषि बिनहाता।
अलौहिणी पलानीक वाहिनी साधनं घम् ।
पनिनी पुतना सेना सन्प हण्डो पस्पिनी ॥८६॥
हावरा मायाम् । प्रधानारपानामस्निी प्रसारिणी : "समस्यौरवमूरिणाम ।
अथवा पतन सापवे भावो भीमरमरकीर्टिना भिमाप्तौ । प्रश्नुते पानोतीवि भव ।
२५
१ "पस मती' । पवाघम् । २. प्रम को २।८। ३ का उ ४ | ४ काठ
११२८१ ५. विजयते हिवयम्त रिस्पासी पुस्प । श्रीसारिको मन्मस्पय । मस्साम्पादेश।
विस्तस्पेय पताका बियम्तीति । ६ ते हे नवार्याा पन्त बल मयादिमानफ्यायभारी पस्प
एखपा एम्भुविप्नरम मरः पामा । तेऽपि स्मरपर्याग । स्पा मध्यपरेतादि। • कुत्तति
प्रीलान पासमारेषु पात् ४।२। ५१ इति बड़ा टकम् । ८ को मुदति पाप रामपि ।
९ का उसू ५।१।। "बल परने। मसादित्वाम्या | बजने वाला एनम । कोपालोबल करेस
फबतेपोमपमपम्पत्र । ११४ र ५१२१ १२का म १५ काठ ॥५॥

५ १ अमरकीर्तिविरचितमामोपेण परिगनिमनिकम्पशिषिम्यः सः । प्रत्यया । योमप । "पढो में माप। 'यसकोगे । मा इति बाट । अन का। गो नियवे यस्ता सा वाहिनी । प्रमाणामहिनी प्रपौरिणी। मा सान्तसमीपवारमुपादा' प्रस्थानः समासस्य अन्ते समास समीप प नकारत पूर्वपदस्पात् निमिचात् (परम) यो भपति वा । रानीम् प्रचारियोप्रमाण क्रियते । समाखम्- भएको रयो गममेको नरा पड पदावयः । अपच तुरगास्वनी पत्तिरित्यमिमीयते ।। पत्त्पंगैमिगुणैः सम्मादास्था पयोचरम् । सेनामुमं गुस्मगणौ वाहिनी पृतना चमूः ।। भनीकिनी पटेरिकार्य सेनामुखम् । गया । रमा। या। ९ पदावमा १५ इति सेनामुलम् । गया ९ ग्या' ए मस्सा २७ पदावमा ४५ रवि गुस्मम् । गमाः २७, रमा २० प्रत्याः ८१ पदावन १२५ एति गर । गया ८१ रमा ८१ पापा २॥ पदाम्बा ४५ इतिपादिनी । पमा २४॥ रखाः २४, मवाः ७२९ पदावा १२१५, इति पृतना | गबा ७२६, स्या: ७६ भरमा २१८७ पान १ इति च । गया २१८७, रबार २१८७ अस्याः ६५५१ पदातय' १९१५ स्क्मीकिनी । यानी १५ फिम्योऽसौरिणी। गमाः २१४७ रसार २१८० ध्यार ६५११ पदावमा१९१५ ।पसते तारोति परभूमि माम् । उभयम् । अनिवि प्रापिति लिनः न नीयते पराभव वा भनीम् । पाहा मनाःमस्या पारिनी । पापवे (अनेन ) सापनम् । परान् गपून धमवि प्रस्ते पर। रुपि पमिदनिपनिषधिचिम्म का। चमुम। चबाः सत्यमा परिनी । नाप पिपनि पृतना । मार सिनोति पनाति सेना । "सिनोसेनः । ऐनामा स्था गति तेम्मम् । पाम्पति पणा । मरूपो रप २० गुप्तिरस्परमा मषिनी । फ्ताफिनी । परम् । मनीषिनी। रहा । पम् । कवन समर युद्ध सयुगं कलह रणम् । सग्राम सम्पायामी संपदाहुमहाइवम् ॥ ८७ ॥ सारा रे। कयते कदनम् । समिति प्रतिषिहा भगवा नरा उमरम् । पुभते. (आ) रिभिर्युग्म् । भग समते मिसन्स्पा संयुगम् । कलं मधुरं माय एका महा। रसन्ति २५ दुभुभयोमरणम् । संप्रपन्चे तत्लान्वननेवि संप्राम:' । पुति । संपरेति मृत्यु सम्पराया। भग भागम् विपन्न मानिस ! स्त्रीयो । भक्तम्भ वा संयत् । महरिचाची मादक 'मदाष । वम् माह । सू NUMA कपयोगे । का २५६ सू ।४ प्रपमा सोको महामारव उपलबते । तस्वीपसमित दितीय पामे पचरमसोप्लेन । "परस्त नोपशम्पते। म लोरपा" इति स्तोकानन्तरम् - पश्चिन्त त्रिगुणमेवामा सेमामुक पुषा । श्रीगि सेनामुवाको गुस्म इत्वमिपोयते ॥ यो गुम्मा गरो नाम पाहिनी तु गणामय । स्मा सिमट पाहिमा प्रवनेति विचरमः ॥ चमूल प्रवनास्तिमस्तिसम्बस्वनापिनी। मनोचिनी परागुण पाहु सेनामुन दुषाः ॥ति । स्सो १६ १७१८।५ अभि चि २१॥का ३ । . का उ सू । ८. 'राम्दस्म सेनापत्र प्रमाए मृगम् । ९ " सम्मे" । पपवे विस्मयम्ननास्मिया । राधिकरहमा स्मुर । १० माम मुझे | तमामोति । हेमचन्द्र। साम्मर नाम पति रामामम । ११ भमन्ये पोशरोत्साहप ।

माममाम्म ४. -- ५ पन्ति । पायोपनम् । फ्यम् । प्रधनम् । प्रविवारणम् । मृघम् । भास्कपनम् । समम् । समीकम् । मनीषम् । नि। समुराकः । अम्बागमः । संसोसि (2)। समितिः। समित् । इनाम् । उम्म।। संगरा। गनो मवाजो इस्ती पारणोऽनेकपा करी । दन्ती स्तम्बरम' अम्मी विरदेममितङ्गमा' | 2 || शुपगतः सामजो नागो माता पुप्पी दिया। करण सिन्धुर'- विगविगमे । गति मावति गतः मम्। मवानापर्वाती मतमम । सामीपञ्चम्यन्ते मनवा विपतेऽप इस्ती । "पापोतु पन्यास्गम्या राग्वैष इनेव पारवति पगन् गान् पारम | न एकेन पिवस्वनकपा । रोऽस्पस्न करिन । सन्तोऽपि हरि । दन्या विधवेस २० पन्टी। खम्ये तृस रमठे स्तम्बरमा । खम्मामो रमियपो " तम् । पुमा पिपतेन्त इम्भी। डी पी पस्प दिए । एति गपति शत्रुतम्मुक्षमितीमा । 'रा समत्' भप्रमयो भवति म पम् । मिद गप्पवीति मिवामा | "गमेर" सपत्वमा । हत्वा सपोमान्ट । शुषो लाति एडातीवि, गुराख । साना सामोरयाव सामनः । नगे पति भयो भागः। मन्नते मनेन माता । पुनर विपतेऽस्म पुकपे । दाम्या पिति विपामोति माने । भामे १५ माम्मामेशु प्रत्ययो भवति । स्पन्दने समति म मिपुर ' न्वागत । पनीर पीछ । पालित। सेषु यन्ता याला निपापपि ।। E6 || भयो रबिपक | बरवीति यम्ता। गाोति याता । निपीरवि सिंयाँसो निपादी। गरगन्ता ( यमगता बस्वियम्ता । इम्हिपाता । इपाटीनि ससम्मानि । अपिशदात-पापारस । रन्तिप । समारोहागगमा । मामा। २० नागापरि भण्ठी" (ण्ठि) रखो मृगेन्द्र केसरी हरि । चत्वारा सिंह । नामारि. } गरिसः । मारी। हस्विडिट । कारतरी । अनरूपसपरन' । परिरिप रस्तिथे । खानेरमपि । रूभिएरते te पाठा । कुम्भिरी। इसमेरी । मणगडा । गुनगारिपु । सामोपी । नागारि । पुरिरिपुः । रिपरी । मेसुरिपु । सिन्धुरभैरी । इत्पादौनि पिनामानि ग्रिस सम्मानि। सो मनिरस्त वीरप। । १ गति मापति मतिया ममा २ अ +11३ा म् २१५ भर १४५६ रा ६#F 14/10 । गुगारुपसेपपि । अविस्वादावोसम्मतरताम् पार ॥२९॥ इति मलामो सम्पयः । २. सामवी हिमीचपरा | स्वप समाहम रिमोभायमान् । बदामा बनारे बनता। गोठम्हा या पासमानता । स सामा चम्म । इति मावि । प्रनापान्दार मापन । मानेचारमन् विविर्गान् महा। हामा बवापानमा पि। १० । म ११ समायोरमस्सास्थति ममियभिन्दनीय । १० पर सस्कोर ॥५॥१४ मान- "मामा सूफियों सवारस' । इति । १३ पदामामिवान पिस रवि पाट प्रतिमानि । होमो मेटापित हर काम विधेद 1 ४६ अमरकीतिविरपिप्तमाम्योपेसा "वर्षागमो गोन्द्रायो सिंहे पणविपर्ययः। पोडसादी विकारस्तु पणनारा प्रपोदरे ।।" इस्पनेन एकारस्वकारः। मुगाण चतुष्पदाना मम्मे इन मुगेन्द्र । म्यः सबमेशाः बस्व केसरी । ममाते रविहरि । पयानन । । नहरमुष । मृपरिपुः । सिंग । म्याघ्रश्चमूर भाईला- पगो मारे । माविमति प्राणन् ठगदचे पात्र । चमति प्रचि पगून् पमूराः । परान् गणावि हिनस्ति 'गाईस । बीपी । पुपरीका । तरमु । चित्रकाप । मृगारिः । शरमोटापदोऽष्टपात् ।। ६०॥ प्रोप्रापये। पाति हिनस्ति शरम । "गिर्दिरामहिमझिमोम' १० पदाम्पस्प आपापदः । सो पादा स्वासौ प्रप्टपात् । मोगे पराहो दंष्ट्री च पृष्टि पोत्री च शूफरः । भो (पद्) करे । पस्कने संक्रमति कोर । रानारम्ति परा' । देा सन्मस्य पी। पर्यतीति पूपिः। पीभ । पूर पबने । पू । मौ । पू पवने । । । उभयपदी । पूरतेऽनेभेखि पोत्रम् परिसराफरमो पुषा न् । मात्र । नाम्मन्गुन । ति नपु । पोत्रमस्पस्म पोषो। पो प्रचुरा १५ पलानि, समति वर्षसे ना पीनलेन सूहरा । शुकरच । दम्वतासम्म | बोल | फिर । फिरिपत्र । उष्ट्रो मय' भूखलिकः करमः शीघ्रगामफ' ॥६१ ॥ पसोपे । उम्पते दमते मरौ उपू । सर्वपातम न्' । मपवे गावि मय:' । मरी इलग पन्धनमस्स मासिकारी रमते उमममतीवि सम । घरमम । सीप गपतीवि शीमगामुक । रासेरफः । गोगा । प्रीपी । परा। पू पालो (पूफ )। मौसेयफः सारमेयो मण्डल श्वा पुरोगवि । जिलापो ग्रामभाईल महारो रात्रिनागर ॥ ०२ ॥ मय पारमेपे । कुशे पो भव कीलय (स.)। सरमाला प्रपत्र सारमेय । मगर जाति मरस । पारादीन सति गपति वा सानोभन्दोपि । पुरो गम्हति पुरोगति मिनो शरीर १ 'पोरावर विशा २।२।१०१। बारिमा । माणन् रखीस्पता पानवान्पत्र । ३ गरमा गरवतीति गर् । रिप। दुम्से "वि पूतः । प्रन्धर्माविवरिवों एम् । गार् पाती दूलभेति विमा ।४ का उतू १।१२।५ "अपनले । कोन पनल सोस्यास्तीति कोर। "मर्श प्रावम्' इति रामाभम । ६ बरमाइम्तीठि बर माहारी गस्पेति वा पोपरादित्वात् । ७ का सू A२।८ सुर्य प्रतयं रोतीति । शुकोपरम गुमा वररीमत्वात् । पूर्व राति पा । विपनि करोति वा ।९ परिप्रति प्रिपादन मरभूमि वा इति सम् । 'सर्वधातुम् इन्" इति उ १।२६ मे दुर्गनिद -"परा कान्ती । परीति उप्टः परभा | मम्म पुग्नम्तस्प तम्मनारद मिपावना स्वत्व' सार। का मू ।९।११ मीनावहीन् मयः । 'मी रियाम् । पपाषष । पति पा । १२ गमतमस्त बन करमे पा र ५11७९ ॥ इति न् । न गातानापु । तुगलक पारमय मापारसम्पनैः । ति प्रमि पि । १३ "सभितीनाम्म' सारस्पतदारेषु' पा सू 0 रति सावत् । ११ थिमा रहनया पिस्तीति वियः सबषः। बिहा परी पातीपपि सम्मपति । २० . -- नाममाळा पाति रपति विहार । प्रामायो सार का पाम प्रामशाइस । राम मोतीविकाकर' । कर गम्मे । शरम । रात्री बापति रात्रिजागर । लेगा । पुषण । मपण' । मृगए । शासारक । इम घाटापद स्पर्श फनकार्जुनकाशनम् । सुवर्ण हिरण्य मर्म जातरूप च हाटकम् ।। ६३ ॥ सपनीय फलापीत फार्तम्यरमिलोइयम् । पाचश व स्निोति पतेग्नेन हेमन् । नान्तम् । इम्त हर्म । परमुलोमुप प्रति दास्प मरापपम् । संगागम्' इति बीप । गोमनी वर्गास स्वणम् । उदारताप' । अपया समासे वणवमा पसोपमाः । यथा पदाणे मन्त्र । निति सीबते कमकम् । निचनिम्मामा-3" | फनी वीतिकाम्तिगतिपु । म सर्व मर्यने । प्रजतीस्पर्जुनम् । भापमि' पापि उना । प्रतियोर्मा बमान्ति पाशनम् । शोभनो क्यों पस सुपणम् । उभयम् । पुष्य बि १० दिरपयम् । अथवा मोरा त्यागे । दीपने हिरम्पम् । हो' हिरम" भरमाइम्प प्रययो भवति शिरारेशरच । भिपते पार्य नान्तम् मर्मन् । प्रान्त च भमम् । वात रप पस्य मावरूपम् ।। पति- भसहस्पदोऽपि सावरपया ।' रति रकम् ।पर दौमी । भनिना पठे तपनीपम् । कसा पापति पति कपपीतम् । तस्वराडरे भव कार्तस्परम् । शिक्षायाः पापणामको यस्प शितोळपम् । शवकुम्भम् । गाावम् । परम् । पामीकरम् । मारपतन् । १५ ममम् । सम्मम् । बम्नरम् । कायाम् । गिरिक । पन्द्रपम्। रूप्य रमत गुलिका- प्रयो म्प्ये । सप्प बना मुख्यसेऽनेन सपम्पका रबति जतम् । रम्पत हैना रसपा। गुरु रवानाम । गुरवि रपति पद प्रशार गुटिका । गुटिका च । प्रसापासम् । वारम् | सितम् | पर्यम् । परम् । रपेतम् । भुमि मोहिक तथा ॥ ६ ॥ हो मौलिक । गुम्स्पा पतादिवानोपकरणामगिरोपाम्बातम् शुफिमम् । मुकाना समुही मौक्तिकम् । समूह पम्। वित्त वस्तु पमु ट्रम्प स्वार्थ ग द्रविण धनम्- तपाप ०० २१ पण बम । पिदवि पुष्पकत पितम् । बावन म्यूजिनितमरकीर्दिना । 'पिलु नाम । विद् । विपते स्म मुमते (म) पितम् । निशका । 'भिवणविरामलापमभोगेपु" वितमिति १ एकति शन करति उचारबतीति विप्राः । गुपवारमपम । यहा कीमते स्पारिकमाइते कुरु । " अाराम | रिप। रवि रागन र । रु चाली पुरति पिप्रहा। २ पा १२५ । काठ मू ne ४ पमते पुम्रनम। ५ का उ सू २६ । ६ वा उ म् ।। . मामिस्पर्य । अषमा प्रशस्त मत बामम् । प्रतिमा स्मश्पर । ८ सुरमनिकराने पा । ९ रामवावादमा परम् | १० ला मुहिम चौता गवा पापति गपति वा परमानिति परवीतम् । ११ सपपरियायाम् । मन्तः । मचा यत् । १२ का सू ४११४।

अमरतिविरचितमाम्योपेता १० । निपातः । निपाक्स्पहन भवति । पारस्म' तो नो न भवति । पसति मुखममेन यस्तु। कमि' मनियनिषसिरि-पम् एम्मतन् प्रत्ययो भवति । क्सति मुनमनेन वस । “पण सिविनिमनि पपीरिकदिबनिमसिम्पम' एम्प सादाम्प उ प्रययो भवति । पूस्खे गम्पसे प्रम्यम् । पर स्पति मन नरति अषमा पुर्ष स्क्नति ला स्वम् । उमगम् । पुग्यसमिति प्रथम् । गुमान् राति ।। 'राते हैं। श्रीयो । मत गम्क्वे द्रषिप्पम् । दधाति भारपति पारत्त पनम् । स गतौ । करातीस्मे खील कस्वरम्। तिपिसिपाठीशरवाश्मा र परम्पया 1 पुन । पारम् । स्वापदेवम् । म क्पम् । रिम्पम् । हिरमम । विभवः । वत्पति प्राः कुवे चकपिलम् ॥ ६५॥ वैश्रवण राघराधमत्तराभापति तथा । अलकानिल्प भीद पनपयायदायकम् ॥ ६६ ॥ सम उमेरे । तस्य पविः तत्पति को प्राहुन पन्ति । विवपतिः । मुपविः । पातपतिः । प्रम्पपति । स्वपतिः । पर्बपति । रा()पतिः । द्रविणपति । धनपति' । स्परपतिः । इत्यादिपर्याफ्नामानि कोरस्प जातम्मानि । फुत्सितो मेरो । मुम्पत्वाचस्प त कुरेरः । पिजले कनेक्त्वावेकपिहला । विभ पठोपस्पमपि शिवादित्वात् । पारशी धैभवणारा पदार्थ रामा रागराया। उत्तराशयाः पतिः १५ उत्तराशापतिः । मयन निलगी एप यस प्रमानिन्नय । भिम परते भीदः । पनपर्यायदापका। बनाया। पन । पित्तासः। वित्तः। बमुदायकः । बसदा । ब्रम्पदामा द्रम्पदा । स्वदायक । सारा दायक । गाविणवायकः । दरिदा। फरवरायन स्परवः । राष्ट्र जनपदो निगों जनान्तो विपय स्मृत ॥ पच नपरे । यो राप्रम् । तपा च सोमनीती - 'पशुपाम्पहिरम्पसंपरा रावते २० शोमते इवि राष्ट्रम्" । मनी प्रामगि । चन् । गारते प्रमितमम्मे प्रमुच्यते । पातोमती"इन् प्रत्ययः । अस्पोर दीर्य बानिरिति एवम् । गनिषपोम' हसः। पनि पावम् । पनगम्ति प्रबो बनमिति मना । 'मन् पघाविम्म 'मम् पब 1 पारितस्माना " पारितोप । पर गती । पदभम लवरी पचते गम्मत प्राप्यते मामापत इति जनपदः । अपचार मन् प्रत्तमा । पनपद पति माता । पाप सौमनीता- बनस्व वमाप्रमण्मणस्प द्रम्मात्पचे स्थानमिति अमपया ।' निर्गम्यते बम्मिमिति मिग । निगा रोऽपिरण इति प्रायः | PORम्पत्र-निर्गम पस्मिमिति निर्ममनी गिरि । बनानामता निकट सताम्ता । पिन कपमे। भाला प सि पिपू । विपिबन्ति अस्मिमिति पिपय । पुति शाना 4 नाम्प गुणा । 'ए' मा पा । पमोमनीती- विपिपास्तप्रदानेन स्पामिन' सम्मनि गमाम् नृपाभिनरप सिनोति बप्नातीवि विपयः । पुरा नगर पेय पदन पुटमेदनम् ॥ ७ ॥ २५ पा तू ॥१२२ का उ १।२०।३ मा उ मू ।।४ पौड कमणि । प्रत्ययः । मन शमे प्रथमोपा। ५.भाउ ॥२॥ ६ का ४४1101 ७ बन तमु १।८पा म । । ५ का १९७१ का २५८ ११ का म् | १२. परमविपानम पुति हंगामा पा इति कर्मणि पपा पमम्पनीमा पचम्म । म पगम् तम कार पिपानात् । १३ वन मु ५५ १४६ । ५।१।१३५॥ १५४ा तू ४। ६ पा र ५९७ पाव ५५१८ का दू १२।१२। १९ बन समु।

माममाय ४९ पर (पच) नगरे । प पाचनपूरणपोः । । । पृणवीलेवशीला पूर "किम्माबिर्षि भावाम्' कि । 'ठरोधपोपपस्य च उर् । पुर् बातम् । 'नामिनीपर्पोर० पूर् । पेोप | सि । मनाथ सितोपः । "रेफलोपिठनीया रस मिला। पू: । मयतः । पुरं पुरी । इदन्तोऽपि परिः 1 नगा सस्पत्र माम्मस्व नस्यत्र पा मगरम् । क्रीये । नगरी । नानाविशागताना पशिा भागानि पनपत्र पत्तमम् । पन घ । मा स्मृतिमे:- ५ "पट्टन शगम्यं पोटनिॉमिरेव वा । नौमिरेव तु यद्गम्प पचन तत्परते॥' पुटा पासा मिपरोऽत्र पुटमेदनम् । तीये । अपिशनम् । निगमः । द्रा । स्थानीयम् । वस्त्र लपनमास्यं च पदन मुखमाननम् । पम्मुने । पब परिमापछे । उन्नतेग्नेन पक्वम् । 'सर्वचाम्पान्' । रप मप् कप मचाना १० पापि। सपतेन्मेन सपनम् । मुर् । मत्सते रिमपास्पम् । 'समुटीपुस मिति मच । पद मावा माथि । उपते नेन वदनम् । मावि मुमति स्तोमेण वा मुखम् । सम्पवे या मुलम् | ठठादी । मुन हुल वक्रिमाम् । पौरापिफलारिन् । मुस्खपति प्रभादिलादनेनेति मुखम् । मुखको मुखिरच" । तुम प्रम्पमो भवति पावोमुसिर । रघर उपारसाप । मा भनिविससिम्पनेन माननम् । तुणम् । भवणं भोत्र भवश्चापि फर्म चैव श्रुप्ति विदुः ॥ ६ ॥ पर करें । भूयतेऽनेन प्रवपम् । भूस्तेऽनेन भोत्रम् । क्यार । गोत्पनेन सान्तम् भषः । पहाये । करोति गम्भावपान करण" | पर्सपति का ः। किन मेरे । भूपतेऽनया भुतिः । भिवाम् । पितुः कपबन्ति । गक्षि चक्षुर्नयन पिर्ने बिशोधनम् । स ने । सवेनया रक्तासम्पान्तः । म मासी । परनुते प्साप्नोस्वननारमा पगीन २० पोनिवि असि । "प्रशिकपिम्या सि । पपपात नान्यम् पमुः। अपमपिचपिभीष समिनिम्ब ठस्" । नीयते चित्त विषय मनेन नयनम् । रसते प्रकारापोऽनया रएि। नीयतेऽनन रय नेबम् । उभवम् । विरोपेर सोप्पते पवनोस्पोमेन विसोधनम् । अवम् । वारका । नोति । फार्म फेकरापा विनमस्तस्य पैकवम् ॥ ६ ॥ तरम नेत्रस्व पकने पर (पर)। रगतीवि 'नासम् । उभयम् । क (शिरस) ०५ १ का ४५017 का ५ ३५४ाभूकम्स्पोलम् । ३ का १८१४। इति पौर्य ।४ का प्र म् ।।६ का २।१।७ 'नगपातु पाणम्पति' पा र ५२१ पार्विन मलपायो रा । अषणा मण् पावोरीणारिको रमत्वमा शस्त्र पस्थे । ८ का उ तू ॥११॥९ मास्वमतेऽम्हादिना प्रसवपरवि। १० 'कस्पानुगे- पत्रापि इतिका सूपम् । ४।५। २। शोकमयाभुक्मनु पाणिनीयम् ॥१९॥ ११ सम्पतेड साप्त फचारिश्मनेनेत्यपि । 'दिलनेमुर् चोदाचा उ म म प रित् मुहागमधेसम्मक। मुदि वानि बानोमियाम्पत्य विपीर ता । १२ काठ ॥१५१३ दीकविमा रोवेरीमा रिको परम्परा । औरत पाणर विप्यते प्रति रामोऽस्मिमिति वा बिरवि शरीरे मिति वा । १४ प उ ए ५॥५४॥ १५. उ २१।१६ प्रविशस्तिपपिपी गण्डमपति मानौति पति रामाभमः | कट प्रापिपवीति पारस्वा ।

बमरपतिविरचितमाम्पोपता त्रिवि पि चिपतीवि (कचोति) केकरा | न पावि कामिनमपाह' । उमयम् । विमम विभमः । रितस्य भाको पैरुतम् । दन्तवासोऽघरोऽप्योष्ठे पर्णितो दशनन्दः । बलारभतु प्रोडे । दम्दाना पाटो दन्तवास । मसति शोभम्मपरा । 'प्रपो' पोपरी ५ वा । प्रोडसम्मा सहिवारीपा। पपरोऽप्पीडमारे रखें' । उपति दावि ठपानीहरसमोठः। उपते वीणावारेगोरी पा । पर्णितः पिव । शनस यो 'परामर । शिरोमरो गलो ग्रीवा कण्ठश्च धमनी घम ॥१०॥ पर गते । गिरो परवि शिरोपर । शिरोपरा छ । गलति भोम्न गर । एणति मितिमा प्रोवा । उणावी गराम गणतीवि प्रौला । रामिहाप्रीता: एवे प्रत्ययान्ता निपात्पते । कति १० कठा। कस" अस्माठपस्यो भवति। बमा तोरी बम । बम्पतेनरा पमनिः । इदन्त । मियामी । पमनी । धमदि पमः । मन्या । घरा। दोर्दोपा च मुखो बाहु'- पवारो बाहौ । पम्पसे विनीय परान्नेन दो। गन्वम् | 'दमे गेस् । दूपरति पुर पा इति योपा । पारम्व । प्रपया । म परवे । मुफ्तेऽनेन भुन । निपावनात् पयो कात्म न भवति । नामिम १५ शव गुपप न भवति । सुमन्सुम्पी पाणिरोगको इत्तस्मि निपाठनात् । भुगा च । पावनति पाए । “बहिस्सरि (रवि) पनि पशिम्प ठम् । प्रकोट । पास्ति' करस्तमा । यो स्ते । पसायवे म्पसारस्पनेन पाणिः । रिमतिरशिपसिम्म ए-म व मावि हसते हस्ता।' इसेत्त । कीर्यते विप्पतेनेन पर मा| शम"इस्पता। पायाला । प्राहु हुमिरोंऽसश्च- बाहुगिरतो अस रवि वहां प्राहा पन्ति । प्रसवे मारेयांस साम इस्तशाखा कराहुलिः ॥ १०१॥ सागुम्बाम् । स्वस शाखा व स्तियामा । पाकुम्नादिममापि मावि गति मतम् । बोक्सी । प्रती । करस्वामि" कराहुतिः । एमगुरम् । प्रागुरी । . 5. नासा घ्राणम्- २५ १ प्रपातीपपा । 'मपि गौ' । पम् । २ नो भया' इस्पारमा पठे बल पीर स्वामिमापमत्रोवतम् । नामे प्रौरापरी ।' इत्पमरीष्मूलपदस माल्यारपम् 'भोगम्पा सरितापपरी हतियाम्पमत्रानुसरोनाधोत्मप्रस्तुतमिति विरे।३ रम्वारकापन्तेऽनमेति वाराणः । पुति माया पाए १ उ म् २।२।५ का उन १६ उ ५२।११पा तू ॥९॥८. उत्पा उ र त का उ म् ॥२ नमा दरबमिशामिपुम्पस्वा रवि पूर्व एनम् । ११ ब प्रमाणम्- पागि गा गमोहन लमरमाता। “पमामा शप राम इति प्रभि चि । १२ प्रसते समारम्मत इव | "सम पावे । प्रत पाउभुरादिः । ग 'मम गवी प्रमवि प्रमते चा अंत । प्रौसारित पयर । १३ मागुन रस्सा पाउन् सपावोसप्रस्सर । अनिशम्द। पापविमानतोपि ना ठ ।। सिरसा । प्रियामी । भद्रती इसरि।

नाममाया हो नास्किाराम । नास्ते शम्दारसे नास्पतेऽनयामा मासा' । नेस्ना पा किमपमेन प्रामम् । जीये। सिड्नी । नातिका । पोहा । उरो वस' १० ही भुगमम्मे । मते गम्पवे उरा''प्रस्म अस्मायसुन्श्ययो भवति अस्प ठरादेशो भवति । गढी। मस पाठो माग यति पानी घस । पोमोऽस्तम' महमायतन् प्रत्ययो भवति सोऽस्ता । प्रकार ठम्बारणाः। वर्गस्व कि। निमिधादि स्मारिना पत्ल । कुक्षि स्पामठरोदरम् । भयो बठरे। पति (कुष्णाति) निपस्याहार कुक्षिा । पुनि । कुषम् । जीवे । मति सठरम् । अपपा का दौरोज पान । उणायौ निपातीप्रति । उनत्ति क्लेदमस्याहारमुवरम् । एते उभयम् । पिपपम् । तुन्दम् । स्वनः पयोपररूपी वलोम इति पणित ॥१०२ । चत्वारा कुछौ। सम्पद बातो स्तनः । पयो धरतीति पयोधर' । फोपते मी मुच मानेन कुमठे मनिन पालीफियत का कृपापम । पसि बासी चमोजः। ठरसिका। पहोमः। फटिनितम्ब भोणी च बपन- बालार. परपाम् । करपते पस्तौरादापते कटि । भी।क।परम् । निवगमतिरापेन सम्बते प्रयत"नितम्प । प्राभीमठे पामिभिः भोप । नादिलायो। भोणी । "दन्तोऽपि माणिः । बिगामी । मोगी। हन्ति चिचमिति अमनम् । ममेप' । पकारात् कामीपवम् । पसनम् । पापम् । जनम् । कुपती । भारोहकरम् । विकस्थानम् । स्पानपदामाऽपि विकम् | फलप। जानु चाप। २० हो बागो । गम्नु बाबते यानुः । मापारिमिलविनाप्पारनिगनिवरिपरिम्प उ' । बराति "जाः । प्रीलान् । गा । चलन चरण पादं फमोरिय पद विदुः ॥१०३ ॥ ' 'गास गमे । नात् मातुः । म पन् वा । २. नेइमतोऽपत्र समुपतम्बम् । ३ अमते गम्यते यतेनति रोप । अचमा उरस् बहामः कापारिः । उरस्पति बहमारते उरः । फिप् । ४ ३ ॥५ का उन्म १६२।६ का स् १५1 सर्गस रिसावें । इति पूर्व सूत्रम् । का र १८२५१ "निमित्तालापबपिपारागमरप : पत्त्वम्' रवि पूर्ण सूमम् । - "उप निम" प्रशिपिम्पा सिक' का उule "खन गदी शपये खरवि यमवि गोपनोपमम् । स्कन्प- से पति कामुको स्वन रस्सम्यत्र । १ बरतीति परः । पचापम् । पथली पर परोपर । इति मोषम् । कोकविनोद कर्मम्मपि पयोषार इति स्पात् । ११ तम्ब गौ" नितम्मति मावि मिस्त सम्पते मु. नियत ताम्मति मरम्तममा निक्षम्य इति रामाभम । १२. भूयते लिपिरिणनिरम "भु ममा श्रीगाको शिः। इति रेमचन | भोप समाते" भापति निविषारीयपणे तामातीमवतीति मोनि। चातुम्मन् ति रामाभम । १५ उ २५ बाबवेऽनेनामुपनादि बानुरिति हेमचन्ता । १५. काठ म् ॥१॥ १६ ना कोपान्तरणमायमुपक्षम्मम् । १७ वपि पानोरण माशा मा पसाबपनयोः सन्निनरिति मेद । समापि बहामीपाद मेवारिसपना बानु पगाबहादुम्म् । तर मेवस्त न विस्मचाना ।

। ५ १० अमरकीतिविरपिसमाप्योपेवा पद् परये । पासवे पशनम्' । परस्पमेन परपम् । फ्यतेऽनेन पादः । पम् । पान्तोऽपि पाद । 'कमु पारनिक्षेपे। अम्पत्पनेनेति क्रमः । 'महि गती दिनुभत्तामायमा मात्पनेमेस्पं हि। परिः भोगांवोरिप्रस्मयो भवति । अमिम । पपते परम् । भने । शिरो मधमाङ्ग फम्- पस्पारी मस्तक । स्तिापाम् । शीर्मत हिस्पते शिग । उपिरनिरामयी बबन्" एम्पोछन् मत्तमो भवति तासनत् । छेनागुणाः । अनुपातोपः। मां मोहम्मुम्हासपीः । मूखम मारवाः प्रागिनो मूर्षा । "पूषापय ---"पनमन्मन्नुभन्मननीहन्मातरिश्मलेइन्स्नेहन् मन्सूपन् एत पवा निपात्यन्ते । उत्तम पद माम् उत्तमानम् । के गै सम्पे । कापवीति कम् । पीम् । मस्तक । म्याग माना। प्रारम्प प्रेरितेरितम् । पया प्रेरणे । प्रारम्मते मारम्पम् । 'शरिणपिवर्गारताप्प" प्रत्ययः । रगतो कम्पने छ । प्रति प्रेरितम् । ईरितम् । “नपु सके भाने का । नाम् रत्वतीनामानि प्रारम्पन्वे प्राचार्यमीमदमरकीर्विना- वाग्मचो पचन पाणी मारती गीः सरस्वती ॥ १०४॥ १५ सस पाल्पाम् । ठप्पते पार । “पपिडिभिट्टमममा पिम् पी एम्बा विप् प्रत्ययो भवति दीभस्वरम्पाम् । पति पष संवानुम्पोऽन् । उपते बचनम् । पाम्पते बागि 1 मिमीः। पाप्पी । विर्ति मा पारवति, भरतो तमा तस्बे मारती । दबा --- 'भारमनि मोरेशाने पत्तौ पाते भरतरामस्प । प्रपति गी: प्रगीता न वापरो रिपते प्रमा।। गीतते उपचाते राम्त गीर सरपमरवा सरस्वती । वामी । पारि- गोगीः कामदुपा सम्पप्रमुला स्मर्यते सुम। दुष्पयुवा पुनर्गो प्रयाक्नु: सेप असति । सिंहदिपषने गर्म- सिंह कष्ठीसे निपे गये पने मेषेप गम" शमा म्यते । गर्धन गर्जः । हेपाऽश्वे पाना रामे हेपा । परम् । पापा । पहित गजे। गबरामेसहितम् । परम् । स्फीतर पेनुकसमे- २० १ चमत्पनेनेति पहनमिति सुवधा।२ प्रनामिपानचिन्तामणि प्रमाणम् - 'परया रमणा पाद पापीमतना कमा । इति । १२८ ! ३ का उ ए ४५९१४ का उम् २।५। ५ पत्र प्रमावान्तराभावः । पण मनोपाजमिति वा तात् । ६ पासू ४।२।११। ७का उम् ।। ८ उपते पत्र इति कमरि किमही पुछ । ९ का उ तू ॥५६॥ पर राम पुरादि । २१ पिंगम्मेपणमौ मरामः सुम्पते। एवं पलमारतामनी मंत्र बोनम् । १ नाममाग धेनुकसमे शिशुक्रसे स्फीतहत' सीतशम्मः कप्पते । स्तमित जलद तपा ॥१०॥ जल मेने मेपाना शर्म स्तमित कपते । स्तम्पते स्तनिठम् । स्पन्दने चीत्कृतं मन्त्रे मट च हुश्त तथा । स्पन्दने रपग्रन्दे पीक पते। मम्मे मटे व राम्या कपते । हुमर्ष हुँ परिप्रदने ९ सत्त्वं मुष्ट से मयादी राममोऽयम् । कुरतमे हु निलमा । अनिशानाम् हुहु मुघ । सीत्कृत मणितं कामे- कामे कनपभोगपत्तापशम सीहत मभितम् । सीरिकम सीताम् । ममते मणियम् । खसं शालायुधे ॥ १०६ ॥ खाऽयुषे बन्फतम् । मुगमम् । मञ्जीरफ तुलाकोटिर्न पुरं- नया मीणा चरणाभरण । मधि सैन । मस्पायवि रित मशीरम् । अपपा मम्म मपुर मीरवधि मडीरम् । सुहागा कोरिरिप मुताकोटि । भोगति नौसीसि नपुरम् । शिशिनी । पादकटका । हसकम् । पदाङ्गदम् । वापरो नाना । तत्र ससुतम् । वत्र तस्मिन् मडोर ठसले सपत कम्पत । २० मादृत पाय मरुति- क्रेत -५ मरुति पायो त्पम साइत सम्पते । तौबासयो' ।। १०७ ॥ फौयम इसम कौमासा तपोकोशासयोः सदी मता पिता । तपा पामरसिंह - 'मिपावपमगारपारपदमप्यमपैवता । पन्चमश्फेस्यमी सप्त मन्त्रीकण्ठोस्पिता: स्वरा ॥ तपाप भरनारके - "पर्व मग पुगवे गावस्तृपममापिम । भागरिकतु गान्धार कौना कामति मध्यमम् ।। पुष्पसापारणे मह पिमति पचमम् । व पते पानी मिपा गया। मासाण्ठमुरस्तासुविहारज्म संम्पपन् । परम्म संमायते पस्मातस्मात्परा इति स्मृत । १ नमप्रसता गौ पनु निशम्गे हस्तियाब समायो राम म्पतिवमुच्यते पति गया। वारसारस्पन्नु गोपस्सगम स्कीनतमिस्पेष प्रतिभाति । अनकोशान्तरणमालाभापकि- मगोगादर्शनाप मूखरामाऽनुसरयमेव शरणम् । • या सपा वा वीरमति । कुर प्रतापने पुरादिः। अचरः। सा सारा कारिप्रमस्पति रामाममः । ३ मुक्न भूसवे वा न्। । ए स्ठबने । रिम् । मुपि पुरवि पुरम् । पुर प्रगमने। गुपपति। ४ शम्ममेरमाद् म पान्तरोगमन्नराममा स्परमेदवा ५ प्रम को श६ “प" स्वारम्ब “ति स्का" पन्त मगतना इस्पे तापामुपम्बस्ता पाठा 'निपावर्षमपाधार' -ति पीरस्वामिमा मेमोरिया उपचम्बते । तथा ५४ अमरकीतिविरचिवमाप्पापेक्षा ५ १० प्रवीत सस्तुतं लम्पट परिचित स्मृतम् । पर स्मृते । मतीपते प्रतीवम् । ए खतौ।। भातादेम सा| सम्पूर्ण सम्म प्रकारेण स्तूयत स्म संस्कृतम् । सन्मधे म सम्पम् । परिचीयते स्म परिचितम् । स्मरी स्म स्मतम् । संस्पिप्त दशमीस्थ व परामु च मृतं विदुः ॥१०८ ॥ पत्लारी मृते । संविते स्म संस्पितः । हम्पूर्वकस्वितिः । परामी तिम्तीति दरा- मोम्यः । तपा प- "प्रबमे बायते चिन्ता द्वितीये द्रष्टुमिच्छति । तृतीये दीपनि पासमतुर्ये भवसे परम् ।। पाहमे दमवे गात्र पसे मुक्त म रोचते । सप्तमे स्मान्महामूर्दा उम्मचस्वमपाष्टमे ।। नबमे प्रापसमेहो पसमे मुच्यतेऽसुमिः । पर्वः समानान्तो बीपस्वस्वं न पश्यति ॥ पाना पूरी दशमी वन विस्वीति पा रामीस्था । परागता मतमोरम पयः । मियते रुम मृत विदुः कपबन्धि। खेदो पोऽप्यमर्पश्च कट्फोपक्राधमन्यव । स्म कोपे । विद परिपाठे । तवारी सिन् ति । पैसे पारिपाठात् लिम्मे (तसेदन ) दिः । भाने पञ् प्रत्यया । दिप पीवी प्रवादी । रेपण षेपा। मृष विविधागाम । कुरा । शफ मृष धमानाम् । रिसायो विमापित' । मूषु बहने भादौ परस्मैपदी । समयम् अमर्पः । पशुधम्म । रोपण सद् । सम्पदायित्वाइन स्विप ! कोपन कोपः। गोपन कोप । मन हाने । मन्यते' मम्युः । बनिमनिरविमी यु" । एम्बो मुप्रययो भवति । ठणापित्यापोरमारशी म मावि । हर्प प्रमोद प्रमदो मुक्कोपानन्दमुस्सप' ||१०६॥ स्म हरें । हर ः। पापं । प्रमोदन प्रमोदः । मरी हर्षे । प्रमदनं ममयः । मदा प्रतमी प्रसमोम्पपरयोमररत् भवति एपा । मोवन मन् पात मियाम । ए हौ । वीपणे तोप । मानन्दनम् मानन्दः । पु सि । नदि समयी । उत्तपनम् उस्मय ।प्रीति । ठाकः । उरमा । कृपाऽनुकम्पानुकोशोप्रन्योक्ति फरा दया । परमानाम | कप पावाम् । परां कपा। पानुकबभिदापिभोम् इव । " सम्प्रसारयम' इति परस्मेवारतमप्रसार । लमते य पानाम् इति सापकात् उम्पसारगम् । 'लिगामाषा। अनुकम्पनमनुकम्पा । अनुमोशन्सनेन अनुकोणः । पुसि 1 न हम्बोधि मारतोक्तिः। करोनि मिपा चित्त मितिमा फरबा । उमादो हुाम करो। प्रियते करना । 'शताध्यमिका १५ २० १ षपमि से पारधिन्नीया । सापायस्तु "शोक गुर सोचने मेदा' इति ममि चि झोपपर्यापस्तु- 'कोकोवाऽमपरीनप्रतिमा समुधौ लियो' इस्समरः । २ मम्पते त्या मनति रोपः।३ का उ म् ॥११४ का सू ५५ ठरपणम्यस्पोत्सदा ममावम्- 'उरमो मारपमिद मोचनुपापम् । इति मेदि को पाप १२ हो ४१५८२। ७ कमा सम्प्रतारण पा गए स् १४८ कम्तममयमा स्वमवम् । पापिम्पादि सूर्य परमतम् । १ का उ म २६ ।

नाममाळा १ जिम्म उन एम्प ठना प्रत्ययो भवति । दयने दया । दस बनगतिविणपानेषु । भिदापम् । सपी विपणा प्रमा मनीपा घीस्तवाश्रय ॥ ११० ॥ पा एनौ। रा रस्पय्यमम् । मोह। त मुप्पाति राममति इति शमुपो प्योत्सनमा पिपणाप्रमान प्रहा'। मनुते मानावनया मनीपा। मनस ईसा मनीया मा। 'लहालयो रीपे मनाप स्पनेन अस्पत्वगदेलोप ! र सहोपथ । पागपिकागजोकोपमाया समाए। ५ स्मृ पिम्वामाम् । पान धीः । समवादिलाया कि पापा मम्प्रतारणम् 'अननैव सम्प्रतारस दीप प्र लि। (रेफोसियनोम मारो विवि समझाशयः। उपा-प्रेचा । प्रविभा। बुद्धिः । मवि । मेघा । मल्या । संविति । उपशनि । प्राममेघाविनी विद्वानमिरुपो विचक्षण । पण्डित मरिराचार्या याम्मी नैयायिफः स्मृत ॥ १११॥ पराविपि । प्रमानात ति प्रा । मादित्वावम् प्राह । मबास्स्वरप मेभावी। माया मेपासमो विन्' पापिकारात्स एप विभ परा विभापिता' । शेपेम्मो मरिपत । मधिमान् । पुरिमान् । गि गमे । विद । रेपि गानाठीति पिशान्। बतमाने । । शन । । 'पवि प्रादि 14 "शनुमु । सम्पाने पसु । वारेणास्तरसमन्ति इति पचनात् सो एपमान सार्ववानु बलात् भी परेते कम्पयतामिासी मननपरत्वाव्यस न भवति । शिन् बातम् । १५ "सि । ' साम्तमातोनोंपधागा दी । बिषो पि । अभिगत रूप येनामिकपा 1 कप पिा । "कोरिखाना स्वरो रूपं नारीरुप पवित्रता। पिपा स्पं कुहागा मा म तपसिनाम् ।" पप चाम्पूिषः । विपिप पर विषमणा । नन्दादेनु । पोरन'। रिप् रास्तम् । पिलायो मिसान् इत्पनेन पिपक्षण रवि निपातः । निपावस्व फळ मारगो न भगति । पपा मुधि । २० पा समावास्येति पगिता तारपिसारिरनारसवाते खम् । - पाषण सोपा । मि । रेफ । पूर पारिगर्भविमोपने । एते दि समि। भूस्खदिम्म कि एम्प प्रिय पो भवति । को पपदर्य । मापते पाषायः। परेराह पागुरी । तपा पोषम् - 'ए नम्बिनीतिशास्त्र- "पम्मापाररवो निस्पं मूगवारविरप्रणी। चतुर्वणस्प सास्प य स भाषाय इप्यो । १ ते इति शेर्मोहः । रिम् । तम्मपणातीति, मूलमिभुमारित्वात । गारादिरी । शमे ती एकामावहोपे ठगितभेति शपि ग्रगामेति रोमुनीति पीसा । 'विप शर्म। परीति। पी सा । ३ मसपने नपम्प । ४ मा & पूर्व २८ स् । पीरिया । ६ गतम्पदाम्पि प्पिा मा ५८५ । - २०॥ मू ।६।१५। प्रादुर्गाति । १ अपमेशधिकरणामम्बितयोः । अनिकरण परिका ॥२ 'प्रादेग्विारपत्य १९२। १३ 'शर्षनु' । पा १४॥४॥१५पासू २७ का ५८1१८ 1 Iindi६पाउ ० काम 100 मीतिमा 2y ५. पामते नमा 'वर्तमान राम नाम १२॥" I 1८६ का १५रखा अमरकीर्तिविरचितमाम्योपेवा प्रगस्ता वागत्यस वाग्मी। नामे विचारे निमुको नैयायिक। पीरः । सम्पर्क। पिपमित् । पर । भामस्मः | मन् । मनीपी । । दोपस । कोविदः । प्रमुर पीठी । करि'। कपि । महा। विशारा । पाषान् । मटिमान् । पारिपपो पुष सम्प सद संसत्समोचित । पद् समापुस्पे । परिषदि उमा भव पारिपथः । पए । पुष चगमने । पोपतीति दुपा । माया पापुः सम्पः । पुरानो भोग्यो धितम सापुरुम्पते । मसि उचिवो पौग्प मराषिता । ससदुषिता समोषितः । नमाम् । सभातारः । सामायिक | परिपत्समाऽस्थानपती- पर भानाम् । परिषदिनस्पस्सा परिपत् । सा भास्पस्या समा। प्रात्मस्वारस्पीमवेऽ स्मिन् मास्थामम् । (प्रधिपति राडा)पतिः-प्रास्थान उभा "स्पादिपर्यापनामतोऽधिपति' पतिरित्याविपर्याय सम्पु सस्नु राशे नामानि भवन्ति । परिपाधिपतिः । परिपपतिः । समाधिपधि | सभापवि । मारमा नाधिपति । प्रास्वानपति । राजसूयो नृपक्रतु ॥ ११२ ॥ ममवेश्वरप्रयाग (नारे) हो। पुश् अमिष । पु । ग्बाला । राम्न्पूर्ण १५ पण तोतमी राहा सूबवे वा पस्मिन्निति राबस्य । रास्मश्च । प्पयनपान्यो निपातः । सपा गर्ग का भूपातुः । तमाच स्मृती- "गोसपे सुरमि हम्मादाजसूये मममम् । भश्वमेघे हर न्यास् पौणरीकेन्दिनम् ॥" रिएर मन्सिकापीठमासन्दीमासन विन्दु । पातमे । स्टून पाहायने । किसूर्यः । विस्तरणं विएरः। तर गमिमामम् । स । नाम्न्तगुण । म्याः । तमा तस्स पलम् | *वर्गप परवर्गास्मनः। ममते पाठ मल्लिका । पेठवीति पीठम् । प्रपोदराविस्वाही । प्रा मन्वास्सीदति विमलस्लामासपी । भासते ८ ०० । १ अब ममासम् अभि पि ।।५। 'विमान सभी पपिपिएसम्पर्म का प्रारूप कनिमिम्पपीरा । मेगापिको विवपिणारवपरियोपहा' प्रामाणिवमनीवितुष्प्रसुवाः ॥ महो विपभिमम्मावान् मन् पनि। अधिपती राबा इति प्रतीमाभिस्य भासावर्शनार मूल पाग इति न भ्रमितम्मम् । पूषापरपासोमम्मे हमारेशासम्भवात् पापरतेन खदपारला भाषात् मा रापर्णनस्सासरस्वाच । एवं च भाप्रस, न तदपिपवे रामम्पपरणा-वीकातुषि शेपरचनमित्व पुन भाति । ३ का तू० ३८०२४।१५ म् ॥२४॥ ५ रवी इतुम् । परमपिता रवीको पम्तिसोमा रसो । उपसम्पद । ६ ruth सू ८५1८ या स् रा१७२१६ 'भास उपवेशने'। मदापा HEE इनि दम्परो भवति प्रमाम्मपि च । रित्ता । तपा रोवम्-"स्वार पेबाटनमान्दी इति३८८ | अभि पि । पा नाममाझा १७ विएप मुवन ५ जिनः। उपविरसते ऽरिमन्नासमम् ! 'हमयुटोयत्रापि च' मुद् । यिदुर भयवम्ति । लोको जगत्- पत्वारी गगति । परिसत्यप्र पिप्टपम्। भूतानि मबन्यम्मानुषनम् । लोक्यत लोकः । गमतीपेपल जगत् । निगमारे प" सिम् । गमो शिर्षचनम् । भम्पासमकारशोप ।' मस्स पसर्ग:" गस्थ व । गम् बातम्। 'पम्चमी | वीर्ष । मममनवनगा को पसमतोप । मात्मत् । पासोस्तोऽत पानुभन्थे तोऽन्तः। पोप ! सिनपु सङ्गम् । वस्य पतिर्जिन ॥ ११३ ॥ तस्प भुवनस्य पतिसिंग पते । अनेकभवगानम्पसनमापणतून् कारावीन् मस्तीति 'नशमिापिम्मो न । विश्पपति । सोकपतिः । बगत्यति । इत्यादीनि निस्प पर्याप- नामानिशाठमानि । वर्षीयान् अपमो ज्यायान् पुरुराप प्रजापति । एल्वाङ्क (फ') माश्यपो प्रया गौतमो नामिजोअन ॥११४|| सपमे ! अतिशयन यो पपीयान् । "'प्रिपस्पिरविरोरुमहुसगुणस्तृपदोर्प बनारका अपसोहिगर्वपित्रापिमा। पेण अहिंसारादीपमण मातीधि ' एपम । पिपिम्या पनत् । माम्माममा प्रत्ययो भवति प प गया । अयमेपा मम्मे प्रासी १५ पवा प्रशम्पा या उपायान् । “रम पम " रामस्य पारयो भवति । पृ पातनपूरण्यो । प्रावि पाशवोदि पुर । ' इपिपिभिदिपिदिपम्प का एम्मा प्रत्ययो भवति । अस्मिमानि अपारमा मादो पर परविषिा 'तोऽपा' निपात्पन्ने पति बपनात् । (पापा भग भापः) प्रशानाम् इनपरगेन्द्र पालना पति स्वामी प्रजापति । परहाराम् । पादपते मोरे पस्याका । सपा चा मरापुराण- "बास्नाप तपमा रससपाहण मृणाम् । पाकरित्पभूरयो अगवाममिसम्मतः ॥" पारस पपिरतेम पापीति कापपा । तपा र महापुराए- पारयमित्युच्यते नमः काश्यपस्सस्प पालनात् । परतीति मझा। २० मा सू ५।९। “सखर प्रतिवा" म का भी ना माप पोरनम्पने म व पाणिनिपातुपाठे। ३ पिरान्स्परेवि रामाभमा । पिरास्परिमन् बोनापीका इति रमपन । ४ाम् - ५ का नातू ४ा म् Nc का ग ॥ ९ का ५ unोरी परम पनि पूर्ण गूपम् । १.६ म् ॥१॥ ११ पान् ५।४।१५७) १२ पेस भाठीति विमदे मातीनुरमर्गे ! भरमी । पति पर्माममिति विपरे 'भपिपिम्पा वपत् । सपने 1१३ का उम् ।।१४0 ४/५३ १४ा उन १।१ । १६ र प्रपदो न यशः । नाही मग प्राय इति पुन प्रतिभाति । राणाम् का ( रखारगम् ) निमगा । हन ऐगर । तर मारामाह- मन्नारपनि हा ५ । १० अमरकीर्तिविरचितमाम्योपेसा "बारमनि मोक्षे माने यो ताते च मरवरामस्य । प्रमति गी: प्रगीता न पापरो पिपते प्रमा ।' प्रत परोमा नास्ति । गोलमो पात्रोत्रताम् गौतम । पार्षे महापुराणे- गोर : स्वगः स प्रकपात्मा गोवमोऽमिमवः सताम् । स वस्मावागवो देवो गौतममुतिमन्यमूत् ।।" नामेती नामिनः । भने गावोऽनमा प्रात्तात् । सन्मतिहितिरीि महावीरोऽन्त्यकाश्यपः । नाभान्वयो वर्षमानो यचीर्पमिह साम्प्रतम् ॥ ११५ ॥ ससी ठमोचीमा मनिर्वस्व सम्मति । महापुराणे- "वस्सम्देले गवे दाम्या चरणाम्यां च भक्तिसा। भस्वापि सम्मसियो भाषीति समुदायतः॥' (ममते पूम्मते इति माति ) । मस्ती पूना पक्ष त माति । मिशिणाम् इन्द्रायतम्भाविनीम् म् भवरणा समवसरणानावपळापमवर्णनमी पपादरी इवि पीर । पीर इति नाम माग्दावम् । बन्माभिपके पासपुगरीरदर्धनावहिलरिम्स सामर्षमापनाचे पाराइन मेसचाशनापिन्ग १५ पीरनाम स्तम् । महाँबासौ परिः महापीरा । तपा पात्प्रतिमपमा पे- इमारपसे भाममीकीयो कोउता सामोअन विमानस्थम्नागक्स्पो (बोपना महाफटाटोपोपेत मयानकं सर्परुप विस्म हो पेप्टिवा । मगाँस्वस्माम्मस्ताविपापम्पास कला चाचीण । ततस्तेन महावीर इठि माम रूतम् । मम कास्य देव पावीवि भरपका श्यपः । तत परस्तीरो नास्ति । नापोलो बप नापावया । पाच- २० "चरमारा पुरुषममा जिन्नुषा धर्मादमस्ते पुन नेमिभीमुनिमुमतो हकिने पीरोऽप नापाम्पसे ।। रोपाः सप्तदशामित्र जिमबरा इम्माधोद्रपा प्रोचम्मोहविमाशनैपनिपुमा मास्म सन्त निये ।। सच तमम्ता भर परमाविण्यप्राप्त मानं केवयान यथावर्षमामा | 'वष्टिमागुरिरझोपमवाप्योरुपसर्गयोः । भाप पंप हसताना पमा पाषा निशा रिसा ।।" दत्यपराम्बस्वापरलोप । मा भूपिम प्रत्यक्षदरी-भगतो कि गर्भाववादी पिणे मारिनिनिर्मिता विगिरी पूर्वा एनापि सम्म व अतिगरपादिका वर्षमान पति नाम एवम् । परिमन पदमकाले यस्प तीर्थ मार्यम् साम्प्रतम् अपना पते । ३० सर्पशो वीनरागोमन् कवली धर्मचकमृत् । सीपरस्तीफरस्तीकरिम्पपास्पतिः ॥ ११६ ॥ नम मिनेन्द्र । ग अपोषने । हा। सर्पमा । सर्व बानाति पेवि स । “भावो'नुपात गांतक प्रास्वप । कपनप योगम्' इति बमभावात् घासीपा । मिशिnted प्रति इतः प्राप्ती रापो पस्त पीठराग । महिननायोइनन (स्पा) भावाप परिप्राप्तानन्तचरवतरूपा न राजनिर्मिता . १ का ४४२ मा सू Vil ~ नाममाला मविशमवतो पूवामातीति मर्हन् । पाविसयमनवानाविश्य पिम्पाय यस्पेति मान् । विकास केवगनमस्पस्म देवकी। बिननर्मक सासारसुरु टोप में निराधारठमा विहारकाले गाने गात् सचीवदयास्पक रत्नमयमायुधमिशेष विमति वानुमवतीति पर्मचममृत् । वीर्षे वापशागणार्म करोतीति वीरा । ठाणे मोतीति वीर्यात् । हिमपाधापविा दिम्पयाफ्पत्ति । तपा चोकम् - 'यस्सर्वात्मदिन बससहित न पन्दितोप्ठार्य नो पादाकरित न दोपम लिन नश्मासरुनुक्रमम् । शाम्तामविप सम पगुग संकर्षित कर्मिमि रठः सपपिदः प्रनष्ठपिपदः पायावपूर्ण पत्र ।।" खेल निवसन पासपीरमम्बरमशुफम् । पर पर । चित्तते परमतऽनेन चेस स प । निषसत्यनेन निवसने पिवमन बने । बससे मेनाग पास। सान्तम् । घिनौति उपारंपति सारखा पीरम् पीवर च । अम्बवे गपति शोभा ममेन अम्बरम् । उभगम् । अंगन् फारमवि प्रशुकम् । तीये । कर्पटम् । प्राचारनम् । बामम् । सिचमा ) परः परम्, परी । पोवा । प्रापराप्रापार । सम्मान। यसायन्तः दिगापादिसमितो उपमेश्वर । बमान ममपापा मम्वे दिगाददो विकरारा भादौ यस्प तसधितोपपमेयर । समाविक १५ नाम मन्ते विगारिक नाम भारी बवा-विक्षस । दिवाण । शिवसनः । दिगम्बर । दिग्गुन । विषम पारापेस । कागनिवस्नः । कागवाण । काराचीर. । कावार । वारशुकः । कारापमा । फुप्ता । कुम्निमन । कुमाण । कुवीर' । बम्बरा । गुणा बम । माशाख । भागानिरसन । मायामासाः। मापाचीर । भाशाम्बरः । पारगुकः । प्राणायन । पचम्पावेसः। दवानापाताः । दचकनाची। पम्याम्बरः । दचागुन । पवन्यापन । परिम्पेतः । हरिधि- 0 बस्न रखिासा । हरिपोर । हरिदम्परः । हरिपुष । रयिम । इलादीनि हपमेसरनामानि भावम्मानि । म रुपिर रक्तम्- पमा हुमे । पाम्पते बन मम्' । विर् भावरमे । पदि पिपम् । ""तिमिपि मम्मिपिपिशुषिम्य किर' । रसपतेऽनेन रत्तम् । फस्तूरी मृगनामियम् ।। ११७ ।। मौ मृगमय । के सूरते पस्तूरी' । मृगनामेमांवम् मगनामिजम् । मृगमामीयं च । फर पनसारं प दिम सेपेत पुण्यमान् । का साम। कम्यते कपूर । पेपत्यका । 'माम्बम्पगुडः।' 'हपे रोडः रूपमा १ मते माहीबते कामम् 1 5 दाने। यसोनु म् " मी उ पति उम प्रापमा नुमागमम् । इति रामाभम' । मोतीति वीरस्वामी । ० का उ १२ । ३ सपा पोष्म् मेदिमाम् ता । स्ती re | 'रकोजरले मोलादि रजिते सोहित मिषु । मसीकन्तु मे वामे पाचोनामहर्षि'। इति।४ पिरति लपवे मशहमारतेन मन्यते स्पर्पः । विकति पम स्पा इतिधी स्वा ।" गौं' सति गप्दति यन्भीरमा इति समागम । "सापिहारिम्प ठरो तो' पाठ । 1 इत्पमर । पृषोपपदिलातुर् गौयरित्वानी च । "किरिमसिपिया रिम्प ठरोहो" इति का ३ा६ ।। ६ नाम्पन्दगीमा विभागोगुया" का ३।५।१ । ७का ९ut उ ६० अमरकीर्तिविरचिवमाप्योपेता १० सत्पम् । उपरयो दि बहुसम् देन- कपियाचि रुपिप्रवृत्ति चितिमापा फचिदन्यदेय । विषर्विपान यामा समीम्य तुर्विघं पालक पदन्ति " पनस्वेव नारोऽस्प घनसाय । दि गती। हिनोतीति हिमम् ! पिपुषिमापूरियो ५ मन् । चन्द्रसंशा । सितामा । दिमाशुभः । समालम्भोगरागम प्रसाधनविलेपनम् ॥ ११८ ॥ बत्तारा (ो । सम्पम् प्रकारेणासम्म समासम्म । मास्य रागोऽजराणा । प्रायैव साध्य मण्य प्रसाधनम् । विशिष्यते विस्फाम् । भूपणामरण रुपम्- पप पाभरणे । तसि म्प प्रतहरे। भूपते मापतेऽनेन मूपनम् । भा समन्ताद् मियते शोमा चार्य तेऽनेन पामरप्पम् । रोचते रम्पम् । प्रतद्वारा । परिपार । मगनम् । मान्य मालागुणसम'। चत्वारः पुष्पमालानाम् । मालेर मास्पम्। चाववितात्पर । मास्नवे पाते माना। अपना मा सास्ति पुष्पामा माहा । भिराम् । गुपवीति गुणा । “नाम्पुपनप्रीतगहा" का । सम्मते १५ सम्। 'अस्मिन् विपासगिति" पुः | मेखला रसना माची। अब काम्याम् । मेहनस्थल वत्स मोलाचीति निरठिा मिनोति प्रदिपति कामिपित्तमिति पा ममता । रसवि गद रोतीति रसमा । रस कान्चौ ( गम्दे ) सौमोऽज पाट । भोली ग्रोमा कपति( कायते) पप्नातीति कादि।। मिपामीः | काचो । तती । प्रमापा । पग्निम् । पारनम् । शिशिनी हेमपयायस्त्रकम् ॥ ११६ ॥ हेमरामात्मभयमे प्रमुम्मामे मेलापविनामानि भवन्ति । मसूत्रम् । प्रधामम् । समषम् । फनकम्मम् । मनस्त्रम् । कायनसूत्रम् । दिरम्पसूत्रम् । पाठस्मभूत्रम् । ग्राकुम्भपूपम् । पामसूबम । मपौतम्भम् । रुपनीवसूमम् । पार्टस्वरस्तम् । इत्यादीनि पानि । भोगीबिम्ब फटीस्त्र मानम्नमिवाहितम् । चय पहाले । मायाः पाः बिम्ब प्रथादई भोगोविम्बम् । पय दूरपति वेरपतीति १ पा सू १।१।१४९॥ अन कारिकाकोण परिवा।२ दिनोवि गप्पवीपर्यः । कम रस्वासाप उनलमागात् । पति पाठसमिति रामामम ।। ठ १॥५५॥ ४ मासम्म बिसियते पतः। ५ का पू ४॥२॥५१॥ ६ का सू ४।३।०३।७ मतं गतिं सातीति पोररारिस्पान्मेसरोवि रामामा । मुर तसवीति इमपन्द्र मीयते प्रदिप्यते इति दी था । मित्र तसम्म २IMIR.। ८ मनुते परिम भरनारि अमिपित पति रामाममहमपमो। परारम इति गारेशभ। दीमिमापनयो । सवातुल्स इन । शिमिनी नपुरम | मेपक्षासपमि पाठो मुकामदुष्म- 'नपुरन्तु नुवाकोरि पारव प्रकारे। मीर तक गिनी-प्रमि पि । ।

नाममाला - कटीसमम् । मान प्रमासीत सूत्रपतीति मानसूमम् । केषिद् रागष्य पठम्ति पहाच । मदिरां मधमेरेय शीघु फादम्परीमिराम ॥ १२० ।। प्रसमा वारुणी हालो मधुवार्ग सुरां विदु । एका मधे । मावत्पनमा मदिरा । मधिरा | मपतेऽनेन मधम् । "यमिकरिगा' वनुपतर्ग"। इरायो प्रामसीमानाम् साधु पेरेयम् । गेरसेनन शीपुः । गीरो पुस्' । शीपो(पो)रिये ५ पठितवात् गीषुप्राक रवि मालमत् । प्रपमा पीवेs बना शो गया। उभवम् । तातम्या । रिक्त नीसमम्परं पस्प तकदम्बरो क्सका। सम्पेय प्रिया कादम्बरी । कुत्सितमते यास्पनमा पा कादम्बरी। पति परिमाम्मतनया इरा। मारमा प्रटीस्पनमा प्रसमा । मादन्तः । करुणस्यापरम्पारणी। पाठि जग्गामना दासा। स्विमाम् । मा वारपतीति मघुपारा। मुमति सूते भब सुप। सपा रिम्यानमाम्मे-'प्रतिप्रापमावेन समुद्रमपनामिकासिता मरे। मुरा।' 'सश्मीकौस्तुमपारिबावामुरा परपम्तरिमद्रमा गाव अमदुपाः सुरवरगजो रम्मादिदेवागना ।। भाषा सप्तमुमा सुपा हरिमनुः सो विर्प पाम्पुको रत्नानीवि पतुर्दश प्रतिदिन हर्षन्तु ते मात्रम् ॥ पिपुर कषपन्ति । मनुः । पासव । परिसुवा । सारसा । गुणा । गन्पोमा । माधवक । १५ मापया । कर मया । फरस, करना। परिभूत् । तान्त निराम् । वालम्मदत्त । पाएर । कापि शाम्नम् । मृतम् । मामीकम् । पुण्रामव मपविशेषो हो । सन्म(न)न्ति सृप्ति गत्पना गुण (ब) से पम्नुमभिगम्मते या गुणा* श्रीमो । शुरडा । भारते मनपति मदम् प्रासपा | पुति । तश्विापी शौण्डो गपेत मधपः ॥ १२१ ।। दौम्मपासफे। गुग्गरी म मगर पीएम पिपति पापयतीति मा मधपा। सक्तोऽक्षपूर्वपानेषु विचित्रा शब्दपद्धति । बपी मपासते । प्रदेश पूर्वेषु सक. प्रासत । पूर्ववतः । पानेषु सका पानसका पिभिषा नाना प्रकाय राम्दाना पसति भणि शपपयति । प्रवीण । प्राप्त । अपश्विर । गोको पात भघि पटु पपित शम, पपक्ष निपुरा स्मेवादि गौपणादिक्षिण । सपियङ्गपीनाज्य- सि बिपि । स पातका सपन्सनेम माम् सपा । पचीये । भपिशुधिषिपपि बाविवक्षि इति । सपा गती। मो गायोहस्प विकारो दयावीनम् । मङ्गगीन मस्वनदिन गोरे म् । उप- १० तत्तु याबीन पद् भोगोशोहोदय पृतम् । १पा म् ४।२।११।२ का ठ तू ।। ३ सीपुरिति इम्बोपन्यत्र पाठः । ४ 'गुपा हाहा हागर प्रभावारणी मुरा। मामि पि १५१ ५ शुगरान्दो मदिराभाषी पानमरस्थानमपि । उदुम्-'शुपा राशा पारहरम्" अभि चि ARE गा पानमदरबानम्" बभि बि एण्यापी मदिरापामागारे भर पति रामाप्रम। गुग्ण मदिराऽस्स्पस्पेविका स्मारिलारण इति हेमचा । ७ पास् २०१४।८ का २४ हम को २१२। २० उसो २१ ६२ . । ५ भमरीतिविरचिवमाप्योपेवा सपा पाणावरमहामियो- "मामु पीयूषो स्मृतिमसिनानिभिः शेमुषीपस्सिकन्दै मेंपासस्याम्मुमाईवरफसवरमिनेत्ररत्नापिरेकैः । निम्नर्मामपेपप्रधुरमधुरिमस्नेहपूमोऽपि ये ऊोयगावीने स्नपनमपनय पान्तमानोचिनस्य । बीमते चिपले पित्तममेनारपम् । वबा पीरस्वामिनि-"मा मननीयमाम्यम् । 'मादिभ्यः संप्रयाम् श्यप् । पृवम् । भाभारः । पाम् । पाम्पम् । इति । दुग्घ क्षीराऽमृतं पय ॥१२२ ॥ पत्तारोएग्धे । एर पूरगे। पुमचे पुग्धम् । परर भने। सौगोऽयम् । परसो क्षीरम् । पसेः पिब" रिमात्रः । गमानबनेस्नुपपासोप । पिनशिग प्रभमा का "शातिपसि पानाच फलम् । प्टयोगे । 'मम्मनमत | उपदी पिए पप विवागाम् । योवीति मोरम् । वीरोगगभौरगम्भीरा एवे ईरमत्मवान्ता निपात्यन्ते । न मियतेऽमेन अमूवम् । मागमरकारितात् । पीवते पा सरस्वत पयः। प्रमुन् । कास्यम् । स्तन्वम् । पीच पर्व प । उदधिन्मपित तम कालशेय पिबद् गुरु । पत्तारस्तो। उदोन समति बवे पदम्बित् । सान्तस्वालम्बममः । मयते (म) मपितं मोल । वमति पति ताम् । उभयम् । "त; विमागमिम त केवल ममिव स्मृवम्" इति बपन्वति। चरा गर्गमा भर्व कामशेष पियेव गुरु । तत्कालीन गरिष्ठम् । परितम् । रपारतम् । प्रायो पयो दशानेहा पूर्ण यौवनक विदुः ॥ १२३ ॥ वारुण्य पौपर्नच श्रौ तापम्प । भर परहोममेस्समेन मायः पुति । साम्सोपि प्रगत् । परद । एससि पुम्पति स्पोमुख पणा । न सेवते मोहा। अनेसोमतरतारित " एते सन् प्रत्पपाता निपास्यन्ते । स पेशवाम् । पूर्व मापारने दिमादौ पात्मनेपदी । परन्तानी प्रास्त()ीया परस्मैपदी । पूर्ववे मित् पूवति कभित् । इम् पुरापपधमा ।। ५ कारित परिवठोपा । उभयपा २५ पूरि बातम् । पूपते रम पूर्ण। ना। पान्तणावपूर्णपणमसारमनन्ताः इलनेन पूर्णेवि निपाता | पूनो भागो गोक्नम् । ला पोयनकम् । 'पुनासिवानामेन्सी । परस्प । बार्विरम् । २ १३९ । ३ का मू 11८।२।।पा ७ मानमस्वर पर वं नयेत्' का २॥२१1८1 मामारपोऽनेन्वायरपारो परीवारका । पूर्णपूर्वका स्वारो मोक्नस्वारीपनामीवि स । एकापसमा ठसम्मे रवि बस्तु पुतम् । १ प्रल शरीरस्य नमेशारते गपति इति प ।११ गरीरस कमेप दिवम्ति पर वायारीनि मते पण तिम' । १२ नारन्ति मायपति मानवे नायम्पने पति रामाश्रम । नमाइन एरच रवि सामु । १५ 1 उ त् ११४ पात An१५ बा. ७/१३५॥ पारेर रवि भम् । २० पया min४ा क त उ पहा माममाम ६० भागवारम्पम् । भाषा गए । भूना भावो गोपनम् । अन्त्यो यादीन स्थपिरो मत । भयो । अन्त भयोप्रस्पः। परे नियुको पारीम'। तिरतीति स्थपित गति भङ्गाम्मता पिता । प्राया। । पातामः । दशमीस्पः । परन् । बरठः । बी | पक्षा। पंचोऽन्वयोऽन्याय स्मादामाया संससि इलम् ॥ १२४ ।। पायथे। उसते काम्पवे बनेन पंश पुति। अपपते पन्तविरणाम्बया विमेल पस्यमझाम्पपाय | माम्नायते मानाया । उम् सम्म प्रकारेण नीति विस्तारमतीति सम्तति । सन्दनन मा सन्ततिः । (को)लति सर्व भवत्पत्र रुखम् । उभवम् । गोलम् । अभिवन । ओपो वर्गश्च सन्तान पर सो (एस्पालाम्तरवर्गमिरे )। श्रीमते भोपः । मते मियातीयेन पृपा किनवे १ धर्म । सम्पये सन्तामा। विकरः । निधार । निवाः । पिटर' । प्रा । पुस । सम्रा सम्पयः । समुद्र । समुदायः । साना । यूप । निकरम्बः । करम्यम् । पूगः | पशि । घर | समभायः । ममतम् । पम्याचम् । गासम्। स्वीमा समूहः । काव्यमेव फपिस्थितिः। दो काम्प । कोमाग काम्पम् । तथा च यशस्तिन:- "दुबनाना' दिनोवाय दुपामो मविजम्मने । मम्परमानां न मौनाय मन्ये काम्यमिदम्भपेत् ॥' मीना स्पितिः कयिस्थिति। पश्विन प्रारम्यते भीमश्मरकीर्तिना- इसो मरालयकाङ्ग मोरसे। पितान्ति समरति बामस्या पन्ति गप्पति पाईसा। ते! | मर मह कमलमपितागमिषति पम्पतीवि मपला । पध्माति कामानि का पस्य चाकामः । मानसोका खेतवर । ईसवाहा सनातन ॥१२४ ॥ सम्बाद पारगम प्रमुम्ममाने प्रभो नामानि भवन्ति । ईसवाल । मरासमाए । पका बार । इत्यादीनि शाल्म्मानि । मप्रो परिग फकी शिस्वी प्रापिफस्तथा ॥ नीलकण्ठाकलापीप शिखण्डी- सा मयूरे । मा रौति मयू । मीनाति मानीन् मयूरः । उहापौ। मीम रिसाषाम् | मबवे २५ १ प्रयाम्पमा नौपसम्बम् । २ नौपनमठिकम्प विराति है। भबिरशिपिरस्पारि पाउ १५३ वि किरणयपो युगागमो हस्पत्य प । ३"शान्तौ' पम् । मुम् | बमवे करतेऽनेनेति सामी । ४ अववि पनीर । प्रदर। इगो' | अच् । रस्सा ५ भत्र प्रमाणम्- माम्नाया समागमे उपरो इति म १६ सपते सम्बग्विस्तारपतीति रामामम' । ७म ऊपरी । हा पित। माम्मारिवार सप । ८मा १ रखो २५१९ ा उ म ५ दिर निमतिरस्पपिम्पम्प : । इति ।

६४ भमरकोतिविरचिवभाज्यपेठा इति मनः । 'ममते' को मौ" । बर्षमस्सास्ति पही। “फस'बाम्यामिनन् । झापापी प्रवस्त्र देकी । शिलापस्प शियो। प्रापि पांडा मयुक्ता प्रापिक' । नीर्स को बस स नोकरठ । कसापोस्पस्म कबापी। शिजडीसमस्त शिलायरी । मचलाकी। सपोरन । शिवायल । इमाम कण्ठ । चन्द्रकी। शुक्रापान । सत्पतिर्मुहः ॥ १२६ ॥ स्म पवितत्पति कार्तिकेय । मगमगत् पतिशम्दे प्रमुग्यमाने कार्तिकपपर्यावनामानि भवन्ति । मगपति । परिबपतिः । यिति । शिलिपतिः । प्राषिकपतिः। नीशाप्ठपतिः | फलापि पति | शिक्षणापदि । स्मादीनि शासम्मानि । परटा वारली इसा- रोतिभावाम् । पर विशिमरति गमति पाटा । बरहल मानो पारखी। स्थायि । बरहा गावाति इसी। फोक ईहामृगो कः। प्रगदिक को पार कोका । मगेपस्प हामृगाः । सो मगनवे वा रागः । कर तक भागाने । बर्षते 'पुकः। परमाया । हरिणो मृगम पृफ्त'- यो मृगे । गीदेन हिप हरिणा । माघेम पते मृगः । पर्वति सिंचति भूप प्रपतः । पान्तोऽपि प्रपत् । एमः । कुरा । फरमम । सारमा पारस । रिस्म । अपच । साम । पाठ प्रमी । एम्बर । बस पासारा। कसतारोमपि । सदहः शर्वरीकर ॥ १२७॥ परिपपर्वापदापनि प्रयुम्पमाने बनत नामानि भवन्ति । हरिणा । मृगय । पूपता।। २० इत्यादीनि हातमानि । पमगोऽहिर्विपपरो लेलिहानो भनङ्गम ॥ नागोग्गी फनी सर्पः- मग त । पना न गपचौति पभगः । नमाग्नपादित्यस्योपसात्वात् । अरव (सेड) २५ ।मीकम्पोर्नसोपच नतोपः। विप परवि विपपरा । सिविलिदानः । भुगाम्या गपति मुबामा न गानोति माग । उरसा गप्यतात्पुरग । "ठरो विहारतो पिणी । उरो विवापसोरुपपदयोर्गमम संहार्ग सो भवति तपोभ उपिणी पपासले मनन । कामपस्प फनो। १ का उ१४।२ पा ५।२।१२२ गार्विका पासमानामिनन् । ३ मा माता वासन मुम्बते पालेयपिनवे इत्पमत्र। ४ बीमाविष्माइते रोति वा । ५ रामान मस्तु-'पाता पिन्वषो बिम्सुमारामपणापत्त पृफ्त । प प्रापच "स्पार। पठी मिमुचित प्रति दो स्वा । ६ पप पतितं वषा स्पासमा गपातीति रामाभमः । सर्वपप्रपोरिति पाकिन । मा उतू at पियो नसोपभ । अहि गतौ । प्राति मैगन गन्धति। - मृ तीस्परमिको सेसिवानः । शिशुगतात्- 'वाप्पीश्वयोमबनराधियु वान' पा र १॥२।१२९॥ इति चानए । ९ भुम्न कौसिम्पेन गप्दति भुष इस गवति अत्यापन । गम' का VIRI ति। विवरण मुगङ्गाम का ए ४॥४८॥ इति सपि च सुगामा भुभा रवि । १० नगे पर्वत भयो नाग । प्रमरा न गप्पतीश्वग' न भगा नाग इलम्पत्र । ११ सू mami नाममाझा ६५ सर्पति गति सः । पुवाइ । मुझग। प्राशीविषः । पटी । म्पास । तरोसप । मासी । पाए । दिरसन । पाभवा । काकोदर । दर्सर । दोर्षपुर । दम्दार । रिलेशण । भोगी। विमग । पचनाशन । गोपः। कुम्भीनम । दुधी। गान । मुगलमुक्त भुति । वरी विनतात्मज ॥ १२७ ॥ तस्य पमगम्प मेरी रानु विनतारमा गा ! पपगरी । पहिरिपुः । विपपरागसिः ।। रोमिहान रिपु । मुगावः । नागरिट । मुशमनपस्न । फणिहिट । यत् । सीपी । इलादीनि गानामानि । सुपर्णा गरुठस्ताक्ष्या गरुत्मान् शनीधर । इन्द्रविन्मन्यपूतात्मा वैनतेयो पिपामय ॥ १२८ ॥ नब गो। गोभन स्वण मय पणमम्प सुफ्ण । माप-"मुरगूं' हेमपचायाप्त । र १० शिरापण गता । गसपूर्व । गमि पर्रयते गरा। वर्णागमो गोवादी सिंह परषिपयय । पोलादी विकारस्त बम नाराः प्रपोदरे ॥ इस्पनेन श्लोपन गम्तएसम्म कारस्प साप । उस्ले गतः । गरम । तस्साफ्ल्प साश्या । गम्स पछा तस्वस्थ गहमाम् । शनीना विहानामीबर. स्वामी श्रादुनीया मिषान् पत्रमित । मन्त्रेण पूत पवित्र पात्मा पस्य त म अपूतारमा । बिनवाया पाप वैनतेय । विप घपतीदि विषसय । काम्परनन्दन । विष्णुरपा । पनगारान | नागान्त। समिन्द्रिय पाक च भो (स्रो ) मोऽस फरण यिदुः । परिनिये। स्वर्गमीमा सनति बिगारपतीति लम् । इनमारमनो लिङ्गमिग्निपम् । एप्पति हर्षे प्राप्नोति विषप्यु शब्दम्पलपरतगन्देश पीकम् । गोस्पनेन हान्दम् भोत । सासम्पादित। अस्याति रिपर माप्नोति प्रभम् । क्रियते मनोऽनेन रिपपेतु करणम् । रोष [विपपि] । पम्पतम्। पुण्य भाग्य च सछत भागवर्य च मस्कृतम् ॥१२६।। पञ्च पुष्पे । पुष गोमे । पुति गोभने परवे वा पुण्यम् । पन्यपुष्प" | भगस्पेस परित कारणम ] भागम । भागमेष माग्यम् । मागायच" । सुष्ट शिजते सुरुतम् । २५ एश्वयस्य समप्रस्य पर्मस्य यशसा मियः । पैगम्यम्याच मोसस्य पण्णा मग इति स्मृतिः।' २० १॥२९। २ ग २१ ।१०२ । प्रत्र कारिकारूपस परितः । ३ बम्पस सत्तदिन्द्रिवाषिरानस्प नातमारावानात्, सम । सनु भावारण |परमम्मा। ४ इन्द्रियमिलिमिम्पोदिना पच् । पम्प । ५ वालम्पभातरशय पणेनियाचा दनम्मोपशम्य "प्रियवाची सीत्र परिवार । कम- 'पीमच कर सोठ 4 विपपीलियम् म सामिपे निम्नगारये म्पिमर ॥२३॥ नानाम्पामासमुपसम्मम् । स्विरसमाधान प्रकारस्तु-मिति सुखायामम्पम् तरस का तापनमिम्मिमिति । ७ पुण्योति पुण् । 'पुष गुमै मगि । गुपति + । पुण्मरति पुथ्यम्। तराईति । पा म ५।१६। पति यत् । पुनाति पब मेस्सम्बत्र ।८ पाउ । ९ स्तोकोम विशुपुराणस्पतेनीस्सिवितः मम की घी मा माप्ये १११॥ ६ -- ६६ अमरकीतिविरपितमाम्योपेता भगसे भाग भागमेप मागपेयम् । नामरूपमागेम्मो मेगा | समीचीन किमत (स्म) सकतम् । अघमाम दुरित पाप्मा पाई प किन्धिपम् । प्रजिनं फलिल पेनो इष्कृतम् परा पापे । म वाति माविनम् भयम् । मंहति गति नरमादिकमनेन भ हः । सान्तम् । पुरितम् । इर् टोमोऽयमातु । पाति मुगारयति पाप्मा । पु ति । सर्वपातम्मो मन् । पाति द्वगते परियति पापम् । पापा । निन्यस्पेन मयते मुझुमदुम् किरवि साविमा बिस्विपम् । निश्चिपा' मषिपौ' एतौ विलनान्तो निपाल्पते । परमतेपनीयवेऽनेन वृमिनम् । फलमवि कवितम् । क्लेरिका । एति गति [मुखम् मनेन एम । पान्तम् । दुपिलवे स्म तुफतम् । तमा। कलम् । १० कश्मषम् । शुभम् । प्रतिनिटम् । पम् । किनम् । मत । अनेका। समयी जिनः ॥ १३०॥ तस्प पापस्वयपी तमयी। मपयनी । दुरितवमी। पापगरी । इस्पादीनि बिनस नामानि भवन्ति । सदनं सप मवन पिण्यं पेश्माप मन्दिरम् । गह निकेतनागार निभान्त नित गम् ॥ १३२ ।। २५ पसत्यापसवापास स्पाने घामास्पदं पदम् । निकाय निरूप पस्त्यं परम विदुरालयम् ॥ १३ ॥ बर्षियति । स्ना तीवमपत्र मदनम् । की। सीदन्ति मुगिमात्र सम | "at बातम्मो मन् प्राण । भवति भूतान्या भवनम् । पिप गन्दे । रेवि राम गरोस्पत्र पिप्णयम् । विपद् प्रत्ययो भवति । विशवा पेपम । नाम्वम् । मापन्ति मना भर मम्विरम् ।पी २० जी । मदिरा । गेह सौमा निवारणप्रायोः। गेहवि गीतवातावपादिक निमारपतीवि हम् । पहाति मागेम । गेो । त्व' । म निकितन्ति बानपत्र निवेतनम् । अङ्गम्ति गरस्पर भागारम् । अपार । निशाम्पन्ला निशान्तम् । नितिपर्व माघारते मिश्वम् । पपाति मरेणोपानित वन ग्राम् । वसन पसति । भानसस्वम बना पावसयम् । मा समन्तागुम्पतेऽत्रावासा । स्वीयते बनेनाम स्थामम् । शान्ति पनारि पाम । नान्तम् । भएम्व प नामम् । कीये । प्रास्प(प) यतेऽभास्परम् । पचत २५ गम्पते पदम्। निपीयतेऽसी निकापा | "1"शरीरनिवातयोः कमाः पम् । नितोपते भाभिम्पते (मत्र) जियम् । पति सोचो निपाये । मना पसम्ति बसनस्पत्र पस्यम् बही पापे साधु बस्यम् । पत्ती १ पा स् ५५ कार्तिकम् २ मारवे गम्पति दानादिनापम् । भपि गरी । पचापम् । भागमणावस्यानित्तत्वाम मुम् । ३ दुपमित पमनमननेति रामाभमः । ४ का उसू २ruर निसिपापपिपी का उ मू १।२२। ६ यो बर्मने। बजे कितीमम् । ग्यते पनिमिपपि । . पसरवि नावि समिति रोष । ८ का उ १२८ । ६ का उ पाए । १ तिमिरविमरिमनिपनिषधिरुपिपिम मिा पा न् ।२।। ११ का सू ॥२।५ । इति बिगद गेह रति निपात । १२ मा भरवि भापत पाप बाहुमा भारात्मकः । भगि गत माः । नमीपथ। १३ निणरा अम्तो पम्पर । निगामाम् पन्चने गम्पठे रमेति पमा भम । 'मम गठौ । रु।१४ "भासर प्रतिगाम' पासू Intrइति मुर। ११ का ४१५१५ १६ प्ररस्वारम्ति सप्पीभापत्र पस्यम् । “स्मै शम्दतापमोः । . ।

नाममाढा बासे सामु 'मस्पमिवि भीमाय । शीर्मते रिसते शीलापन शरणम् । शाहीर बनेनामालय 1 पुसि । पितुः पयन्ति । पुरम् । कुलम् । संस्थामा | खेयं सात च परिखा पमा परिवासाम् । अनु अपदारणे । लन् । नम्पते सेपम् । *भालनोरिच " प्रत्पपी नारस्पेनर । "अपर्णा एप्रारमण मोरेकार । सत्य [स्म] भातम् । परिखापते परिणा। ५ वन स्पाद लिहिमम्। शो प्रापरे । गुम्कादिक परम्पत्र वमम् । प्रस्मा' टिम पूतिकस्मिम् । बभूमिकम् । भूतिपुहिमम् । प्राकार परिघि साल बनाएगें । प्रफुन्वि मिति प्राकार । 'मारि कारके मायाम' पम् । परि १० समन्ताद् बीवसे परिमि. सति करोति सनगरपर्यत शाल सार्स । प्रतोली गोपुराकति ॥ १३४ ॥ ही पिपितापाम् । प्रमिएन् मन प्रोत्पते परिमीयतेऽत्र प्रतोही। गोपछे रसवे गोपुर स्मावि गोपुरातिः । प्रामा'सौपाम्याणि प्रय थे । पाठायम गैप पहने एमासादसौपाया॑णि । श्रीवास्वस्मिमफ्नमनातीति मामाव । 'भरि चार तावाम' । मुगापा सिप्तामा भव । मौषम् । पन्द्रकरान् परति पम्पम् । निन्दो मचवारण । तो प्राभमे । निम्म् पते निम्ह । मता प्रमादिन पतन्ती वाटेनेन मचधारण । वातायन मवालम्पम् से गाये । वातस्यापन मार्गो पातापमम् । उभयम् । मममीरम् भासम्बम् मतालम्पम् । बालग्न । बातम् । आलम्ब्यसुखमासनम् ।। १३५ ॥ रात्रामवाम्मे हो । प्रासम्मम्म प्राहम्पनस्प सुखम् प्राप्तम्म्पसुबम् । मुसेनास्यते भासनम् । २॥ सम सपर्स समावि सरक्ष मम्म सरफ् । तुम्या सधर्मम्पस तुला फमोपमा विधा ॥१३६ ।। २० पपरि मूझे पस्पशमा मारिल उपापि पाठमेव 'निणन्दरस्वसदनम्' २१ इत्पमरे वापरावागत् माता पि विग्रहीतम् । ० भ० ज०१२। ३ का ॥२॥२। ४ प्रशियने इति शि पन । ति रामाभम 1 ५. का त् ५। ६ परितो धीपते परते नगरमननति गमामम' । ७ दलबाट सत्यवे साता। 'म गौ । न । ८ पुगारन्तु गोपुर भरचिवम । तस्माविरिपाइपिस्पालसाणीपर्म । ६ मा स् In १० मुपमा लिमा सापः । शेप.ए । १ रति मोहिम्ममियम्मन । मासादापाणाममापिगमेशाशनम् । पर तपिशेपो । तदुषम् 'स्मादि बमिना पत प्राडादो रेसम्मुगम् । औषौमी रामचनम् ।।१।पमरा। न पिम्मम अमरकीतिविरपिचमाप्योपत्ता एकारण समामे । ठमानं मानौति ममा | समान' सागो वन्य मषण । समाना शातित परम समासि | समान समते सरस । 'समानान्पपीमा सरसर । शस्म । पत्तम् । पोकसे' पस्प पत्पम् । 'पपांगे | समान पारस सायातमानानपीम प्रपय । प्रमार | अनुम्पत्पाद्गुणनियंपः । गनुपपत्तामराशे पठ्यते। ' " इति समानस्य ५ समान । समान समत सर । मानापमोम छिन् । उता सम्मितनुश्या । मनी धों यस्य सभा । समान रूप बस्य : सरूप कानामगोमरपानमणीयपस्सु 'ति समानस्ल मादेश । वीजन सुखा। 'तोरप' मामलम । मोपारलाकारभ । पवि कसा। उपमा । विषा । प्ररम्पः | सायप्रतिम । ममिभः। प्रारा। विन्मान्यो विद्यमानश्च गुरुस्थानाम्पुजाननाः । १० सिंहादीनि च पर्यायमुपमानपु योजयेत् ।। १३७ ।। पोजयेत् गोरपेत् । पर्याय विरोपणम् उपमानेषु । वित्तम । वित्तपः । विरस गाविः । विस्मयः । किस्म । मिला। विद्यस्मा | चित्तधर्म । विकका । विपुल्म । पितमा । अनेन प्रकारेप माम्परिचमानगुम्स्वानाम्मुबाननािरिशम्दा ठपमा प्रयोगनीपा । ध्यपदेशो निम प्याज पद व्यविकारशलम् । १५ छप सप्त समपरेशम म्पपदेशा' ।पुति । निर् प्रतिगमेन भाविनिमम्मम्मते म्पाजा। पुसि । पख्ते गम्पसे विषम पदम् । पविकरय म्पतिका । राति प्लम् । मीने रवि समा५ । नान्तम् । जीवम् । विषम् । काम्म् । इयम् । उपाधि । मिषम् । वल्पम् । चान्तमत्प्रेक्षा शम्दमन्य घ निर्णयेत् ॥ १३८ । शो मागम् । यस चरित्रवान्तीपत्तास्त । उत्प्रेषणम् उत्प्रेक्षा । वार्वा । मात्तिः । उपम्ता । . २० १ पत्र तमादप रूपान्दा नब समामे । तुलारपोपमा निषा इति पलारस्खलामामिति पापेन पठमऽपि नाऽभिप्रायेरा हराए । कपिएमिषेधि पाठः । परम्न प्रचाविभाशयोज पुका। एवं बयोवश इति पतमम् । अमिपापाठे"उपमाभिषा" इस्मनगौरपमाघारको सति “एचदश इति सम्पते । २ ममरे परे नमानस्स सादेशविधानपचनामापात्तमान मातीति विवामित्म । मम मम्मे मवि सम्म मोतीति सम । समा एमस्व महम मोलेग । पचाप । ३ धर्मम्म पम मे मगदौ एकल सको बोका र ४५॥ प्रत्र ति. 1 ४ का सूE४।५कार समानान्पगोश्चति पम्पम् इति पार्दिकसमेडोपामते ।। । काशिभसाम्। मातवमन्त नेतारणमुपातमम् । पतिरपीसी सपि मास्ति । प्रशिका ठीडीपचनसाम्पेपि प्रत्ये बस्तरूपत्ताम्प नास्ति । ७ पगारातु मानस्प छ का त ४|११५१८ का ४।२७५ पति। हमोतियनपवनिनामिनामगोत्रस्मस्मान गोषचनमा इति पा सू ६१८५/ पावनिक नैतत्, अनुत्तोपमाभ्यामिति वापिठमिति प्रतिभाति । ११ मपदिस्यते म्मपरीतपाल तापम् । १२ नि नितरां तदिन भाति निभम् शलम्बन । १५ म्पबन्ति विधियन्ति प्रमेन मावः । “भग पश्चेिपरमों" । पम् । १५ पति किनधि बस्तत्वममेनति का।बोबोदने । स प्रत्यय । १५. कापत कम्मनेन काम । मनिन् । हस्याः । परम्पपार । पुरादि । २६ सब राम्रो प्यगम् | १० पत्तोऽनुत पानीमा गोषवीपोत समामिवस्येति रमाश्रमः । - नाममारा ६९ । मात' पूग' समाजश्च समूह सन्ततिम्रज ब्यहो निकायो निझरो निरम्प करम्यफम् ॥ १३६ ॥ ओष समुदय' सह महात समितिस्तसि । निचय प्रफर पङ्क्तिः किंग्रतिस्पमूर । पणोति पादयवि पात पूग्पते पूजते मा पूगा पीय समाज पन् । गभूपते सम्मम् दोस्पते ममूह । मतम्पते मम्तप्ति । प्रजनस्पत्र मज । उभयम् । विशपेस उम्पसे प्यूहः । ५ निचीयोऽसौ निकाय । पापम 1 निकोप वे निकरः । समन्तामिहरन्ति वदन्ति (हिन्दन्ति) निकुरम्यः । कृत्मितम् प्रश्ते बदम्बम् ।स्वा के कदम्यकम । हा क्वीन । उम्पते मोम "मम्मादीना सप।' समुद्रीपवेभ समुदयः । समुदापश्च | सायन्टेरिममा सह | सान्यो संपात । दन्तेर्ष । इरा गटो सम्पूषा । उमपन समितिः। स्त्रियां कि । सनन सति । निधीयतेता निमय' । १ उपम । प्रथम । जसः । प्रवियत प्रकरए । पपि पिस्तारवपन । पञ्च | इदनुसन्धाना बाना नहीको नास्तीति । परन पक्कि । प्रति । पानां सममो ग्रज ॥ १४०॥ पशूना प्रा समूर समन' कप्पते । प्रा चेरण । म सम्पूर्ण । समान समय । “समुदोरण पगुपु' ममीपाम्यासमासनमम्पस समिघि विदुः । अघिद्र च निकटमवप्लग्नमनन्तरम् ॥ १४१ ॥ नब समाप । समानीति ममीपम्' । प्रमुफ्रय चासत सम्पास 1 पत्र । भातच रम प्रासनम् । मर्द गती वाचने प । म भभिषः। भवतिम अम्पर। निकाय । सामीप्यम'" मेर् । दार सब कारतकारयो त्वम् । ! -पाताकारण गत्वम् । तबगस्य निग. मस्त रास्यम् । समिधीवत समिपिः। भ)पिनोवोति प्रयिम् । 'नावापरच नोतरम् प्रग्पयो भपति दीपंध। द टपठाए । निति निकटम । (नि) नाम्ठि कटोरतिकनिकट । करबर्गमरणयी । भरतगति (एम) भरखम्नः । न अन्तरम् अनम्तरम् । सनीन् । समयाम् । भारात् । पराम् । उपा , पानापानतर्पत मातादयो विगविगमा प्रपापन्ते । अापो वर्गम नम्मान रति शम्पावान्तरपगमे इति एमः । परम्नु पसारे प्रपोगठान्पमति रमत । : 'मन परा। माना । सम्पत्र तुम एकस्मिन् राशी निपम्प इति मुगमिम रवि पन्नासपम । प्रातमारिति निशान दीप । ३ पूपने शिस्बन मम्पवे पूजन जननमुनापात् गशिमान निर्माप्पा पा पूग । 'हारिम स्ति। ठम् १५८ रति पूर पूर्वापा विर्ग पप । पूगरसे पूगनास पनि प पि स्पानियावेन प्यन्तास्फुत्त एम्माणम् । मा गनिदेग्णया । पर । 4 कर पाने । बार समारम्बन् । यो निकुम्म स्परि । ६ मा पूनाइएलपत्। तर बिर ५.1 म टरपूर्ण ए गत। "पा प्रति नमुटप । पति नमुना गयमनसा पाम् ४॥६॥ इति इस प्रश्पयो पाराभ। "रा पारी:ममिति पिपर तमान । प्रनमानम । पन्तमा पोप इत् सीसर । गचागनाप मरिसमीरन् । "पा सू toI "I" गू १५ "वर्गम परबगाहबग पा म ८r "पाठ सू । १ । अमरकीर्तिविरपिवमान्यापेठा 'ठम् । प्रायनम् । तनिकरम् | प्रातमम् । जित्या एलिलि सीर लागलम् पम इले। मि प्रये। बि। गीयते मिरया। 'बमवाली क्सन सम् । पावोस्तोक्स पानुबन्थे | स्त्रियामाना"। इसति इति । मस्सल इसिम्म । भूमि सति पिसिलति खम् । ५ सोयते पप्पते परमया सीरम् । सङ्गवि भूमि गति माहरुम् । सत्करो पस। इसपर्यायवा रपयिषु पसभरनामानि भवन्ति । मिस्माकर । एशिया इसका । सीरकरा । सालमा रसपालिः । इम्पादीनि हातम्मानि । रखतीदयितो नीलयसन फेसपाग्रज ॥१४२ ।। १० नो पाद्र । रेवस्मा पफ्तिी भा रपवीवयिता । मोस कपर्ण पणे बतन यसत नीसपसमः शिवस्पाप्रम केशवाज । कालिन्दीकर्षक: । बज । प्रहम्मनः । अर्जुन फान्गुनो जिष्णु पवेतपाजी कपिपज । गाण्डीवी कार्मुकी सव्यसाची मध्यमपाण्रय ॥ १४३ ॥ उपसेनः सुनिमाको दैत्यारि शक्रनन्दन । कर्णभूली किरीटी घ शम्दमेदी घनमय' ।। १४४ ॥ सम शाईने । प्रल मम । प्रबति (कोतिम्) मनः । वाम बमिनाविम्म उम। फल निप्पटी। फसतीति फागुन । पिशुनाम्गुनी एतौ उनप्रन्पयाम्तो निपास्ते । बबी मेरी सीली मिप्सु । "बिमुयो। स्नु । सेवा पापिनो यस्य स श्वेतयासी। फपियानरो को गलत कपिघस । गो गोवतीत्येवणीसो गायडीयो । कामुक अनुरस्तीमत कार्मुकी। सम्मे पाचपवीति मम्पसाची। मायमरपासा पागमः मम्पमपारकर । युधिीिरभीमगी गरेक्नकसगोर्म मेशुनः हैन मध्यमपागल कापते । पूर्व निोवि पप्नातीति पसेनः । मनिमु प्यते राभि सुमिर्मोक । दुठा ममात् । देवम्पारि पत्यारि। ग्रास्पद्रम्प नन्दन शासम्बना अनः पप्पते । पमस्त पुत्री मुषिद्विरा । पारोभान । मम्मानः अश्विनीकुमारगोनकुलमादेवी पुनी । अतस्वमेव तत् । पये यास विषप्ते पस्पासा करशशी । टि शेखर वियते मस्सातौ फिरीरी। रायमेदोऽस्मल पायमवी। १ का सू ४१२।२९ । पत्र गंहति । २ का सू ४१।।। ३ ा ( Prire | । । २।६।। फस निपची उनश्यबी गोम। जति कर्मसिरिमपठे इस्वरः। ६का स् ४|४|१८ । ७ गा बीवनतीति गोप्पम् । पिरामगरे पागमानुपानाम भीमागावाश्मणेऽनशरारणस्प महाभारतातस्यात् । पस्तुल्य गावान गाणीवमिति पनपनुपो नाम सदम्पास्तीठि गाजीची इति मत्वपीय इन् । बुछ पटकोप- गापीली गामिणोऽमिमाम् | गाडीवो गाखियोऽपाली इति १३५/४४) मूने गागीमाशम्पख गाणी प्रन्पिरसास्तीति गाग्दोषम् । 'गागमगात्तशामाम् पा सू ५।।२१ । ति मत्तायो । स्पातोति मत्वपीर इन् । ८ सम्पेन मामपाणिमा पि सचते पापा वतीति सामी। २० ४ काठ ट नाममाम्म नाम्पन्न ५ केचित् गम्वेदीवि पठन्ति त्यपि स्वात् । विवये । बनपूर्वः । पन विस्वान् पनपा। 'नाम्नि गुण । “ए'म' । 'स्या योन्तः।" पनपेवि कोनामामिषानमपि बातम्पम् । पम्मूत १ शममेदी । प्रवा पर कोऽपि नास्ति । पापनाम मिपेण स्वनाम कमितमस्ति । फरुफीचकयो3री वायुपुत्रो वृकोदर । कुम्लेरी। कीचकपैरी । पुरुष । कीपकरानु । कुरिपुः । दीपकरिपुः । मनिवसुत । पचनात्मय । इस्पादीनि भीमस्व पारनामानि भावमानि। कोरण्पदवा तात् उदर पस्प स पृकोदरः । समवती यम फाल' कृतान्तो मृत्युग्न्सक ॥ १४५॥ पद समे । सर्वेषु सम तम्य पतवे समयः । नान्द । रिपो मिमे म पर्तते इति वा । यम पवि निहाति प्रो यमा। ममतामयाग। कलमठि कन्न् पिनाराहतुसेन कासः । मतोन्ती बिनाशो पेन स सान्त । मियतनेनति मृत्यु । मुबिगे गुपयुको"। अन्त मोतीति मतका । १० रामन | प्रेतपति | पितृपति । कीनाराः। बरस्वत । कालिन्दीसोवर. । धर्मरायः । दापराहरिः । दक्षिणपतिः । भारदेष । सदारमजो जातरिषु कौन्तयो मरतान्वय । कौरव्यो राजयक्ष्माऽसौ सोमवशो युधिष्ठिर ॥ १४६ ॥ सप्त गुपिपिरे । सस्प पर्मस्पास्ममस्सबारमजः। समवर्तिपुत्र । यमोश । वान्तपात । मभ्युननन । मन्तवारम । इत्पादीनि पुषिष्ठिरपरिनामानि वावग्यानि । बास्स गोस्व रिपुर जातरिपुः । मुस्था अपश्य पुमान् कौम्तयः । भरतोऽम्पपोस्य मरताम्वया । इरोरपस्य पुमान् कौरम्पः। रामभिनरेन्द्र मला पूमते राजयक्ष्मा।' सातम्यो मन"। रामवमा पति चित्पठन्ति । सोमी गोस्प सोमयशः । सुपि ममामे विस्तीति युधिष्ठिरः। श्वेतार्मुनो सुचिः श्वेतो पलम सितपातरम् । शुक्राषदात घवल पाण शुम्र अतिप्रमम् ॥ १४७ ।। प्रयोदश स्खेत । सदन घेत' ।प्रति झुंन । साचतीति शुचि शोर । मारते श्येत । प्रसवति अवलस । पलक्षमा 1 सिनोति मनाति(मन )सित ! पडसे याति मनोऽत्र पापहर। अपना नगर्दापागुम्यो र पागत्वमस्थास्तीति पागर । पाण्ड । पागर । शापति मनासिमन् शुक्खा। गुरु गतौ । प्रथरायते गोप्पते प्राप्त । बवि पषस । पपते पावि ५ 'नाम्नि नमामिवारितपिरमिसा सत्रासाम्' का म् Hal२ का मू सा५।१।३ १।२।१२। ४ १ २२ । ५ पनवगात्पर कमिपदम्पमरवेत्ता मातीपर्पः । ६ पुको भीमबठराग्नि ८ उपरे मस्यस्यपि 1 सशस्तीपस्थ रयामे सासरतीति बचम्पम् । मन्तर्गवन्तपति मन्तमपन्तक दति बापन् । १० कोशाम्तरप्रमाणमरामारवादिकपासवादात् महाविमवाराच 'प्रातरिया रसिमडोडर मुठ । म माता रिपषो बम्पेति सुपिपिरष 'प्रशासन -ति संत्रा । ताम्- मशात शस्मारिफर्मपुमा युधिष्ठिर' । श्रमि चि ॥५८ | ११ का उम् ॥२८ । १२ रिलता बर्षे । म्यादि मारम । पचापर । १३ मन्नति तापपवे म्ने । १४ गुप्मुम्सलपवना सर्वसामासीयस्थ होकानुमबसिद्धम् । गत्वति निर्मसीमयति गुचि । गुप ढीमा । छ । १५. वैद् गठी । स्यापत गप्पति नीतादिवर्गमिवतम् । साम्पामितन् । पाठ सू ९। इन् । १६ भवति मा- लपवे वा प्रापिदमा उनपतेनेति । बधि भागरिरम्साप इत्यस्तीपश्ये । १० प्रयापद एम। दे शोषने । कर्मगि का। १८ पुनोप्पणीमाम् ति हेमपन ।बावति मनोत्र। भाउ गरियो । कला स्परपतीति रामाप्रम । ० १ ७ ठ - १ अमरकीतिविरपितभाध्यापता मनोऽस्मिन् पाए । शोभवे शुभ्रः । राधिन इस प्रमा गस्म शशिममम् । गौरा । हरिए । रुणं नीलासितं कालम् चत्वार प्णे। पर्यान् कर्पति कृष्णः। नीलति नीजम् । उभयम् | न सितम् असितम् । मुलमालाति काजा । प्रहपति या मन 'स' । भेषम् । मामलम् । वाम च । पासाराम् । 4 परित् । शिनिसाम “ति एर्गः । भूमं धूम्रमलिप्रम । विशिकरणे त्रय । पुनावि पूमा । धनोत्पभिभवसि गर्ग पूनः। धूमलरच । प्रमि पत्रमा यस्पोसिमम । तमोज्धकार तिमिरं घ्यान्त संतमस तमम् ॥ १४८॥ वाम्पति मन्त्रीमति चामुरत्र तमः | सान्तम् । सीब । मय टप पपात करोतीविभप कारम् । तिम्मते मानायवे नैन तिमिरम् । काम्वारे पामते धान्यम् । गम् तम्मक प्रकारे तमा सम्तममम् । ताम्पतीसि तममिस्मयम्तम् । साम । प्रबदमसम् | अन्यतमम् । तमिमम् । भूखाया । भूलापम् । विगम्बरम। लोहित रङ्ग माताम्र पाटल विनदारुणम् । पर रफ । रोहसि बापते शोभाऽप लोहिता । रमते रक्तम्' । प्राताम्पवे कार परत करेषु माताघ्र पारवीति पारमा । पारशः । विशीयते विशद । भूपति मर्प (विबाs) रुणा पीसे गौर हरिद्रामम् हरिद्वारा प्रमः। पीबत मनोऽमेन पीतम् । गावे गति पिय नीता। तमा न नाममाहापाम-गोरा श्वेऽरण पीते विशुशप मस्पपि । विन। हरिखापत् भाभा पिस्वदरिद्राम। पालाश हरिवं हरित् ॥१४६॥ हरिदयरों कमा । पसाशय परस्पार पालाश। पलाश दमा-शतसे। पिंशु पणे पाताम्या । रित्यपि" । रवि चि हरितम् । हरित् । - २ , पम्पने मते पा पोवाभि इति । इति मन । कर्पति मन इति रामाभम । पिंपरी -ति मा । २ पाम परौं । नाम्मुपपेति का सू का ४ पासवति मन त्यन्पर ।। अब पानि न युः । 'पामारी परित परित्' इति पयस रोगराममे दरम्या। वाण लिभिनजाति सम्मानरामाविति रेगिमा । तन- धूप्रमाला पसारित प्रत्यमरः । १५१५ ! बान्तारमशागण नममो बिहिनिमेशाया- 'काम पम्पते रति । सर्वरोगहरता पम्पत भारतमिनिमम । - मा रम, प्रा पियाम्ण इति ताम्। पिशव व अपम खेत विशियन मि मभ नर पारलम । तदुतम-पेनरम पारला रस्समरा । ह'ग मीचमनि प्राभाये। पसावा ।पाउ ।तीजन् सपा।' जति रम रम्पत रम पामिश्य या ले पनि पार । गैर पान । दि सपे । १० गुग्ने उपे ममाग्मिन् । ' उनमन । पोरगुणामिण स्पुमारित । गूपते गी । इति मप | re मरलेषग। ३ म ५।" गाना गा नाममाया हरिणी लोहिनी शोणी गौरो श्पेनी पिशायपि । पर रहा। वेवारिसशोस्टिम्बस्ती ना" प्रमेन ईमत्पने कारस्म नकारच ! हरिणी। वाचका-"कामाहरिणी स्मृता" हरिताबरोतिमापते गोमात्र लोहित (रसपोरक्यम् । स्पतारिखलोहिम्मतो ना' अनेन ईखकारस्य च नकार । सोहिनी माता। इलायुषे - "अपारसमसका छोहिनी परिकीर्तिता" शोर शोणी । गावे गौर | नरात्विानी। गौरी। मापते गति भियं श्येनी । इलायुप -"श्येनी मुवपनामा " श्वेना च । पेसि पि प्रत्यये पिशाती। सारङ्गी शबरी फाली फरमापी नीलपिजरी ॥१५०} पटपम परें । सारयति गमपति [ बहुमान् ] सारख । प्रपये सारही। राति पाति कार्यान् पर रामश्च । प्रत्यये शयरी। कासनवि कातः । ईपये काली। पानति पर्णन कम्मापा। करमापी। नीत गन्म । नीवि नीलम् । प्रत्यये नीती। पिथवि पिम्सरा । प्रम्प पिजरी। पराग मधु किम्जक मकरन्द च फौसमम् । पर अममरगा । पर प्ररूपमापते सम्भाम्पते पुम्पेषु परागा । उभयम् । मम्पवे सम्भाव्यते पुप्पा मधु । उभवम् । किं सस्पति किलरकम् । मामले मगपडे पुम्मनेन मकरम्बम् स्मैव कौसमम् । उपचाराद्रज पांशुरेणधूलोष योजयेत् ॥१५॥ कलारो प्रभाम् । रंग सगे । रमपनेन जा ! “पिरमिटी बचए' "मक पण पणि नाराने । परापते पनि । 'परिवरिपग्रिम्प उम्। स्मवौ । पते रेषः। रामानम्म्पो ' मुर" । धूरत पुनौति पा पूद्धि । उपधारात् पुष्परच । समनापागुर पुपरेगुः । पवास्तधि। मख्वरमा। प्रसूमरे। इलादोनि पुपरयो नामानि शासम्पानि । फलकापधमलिन किचक सक्ष्म लापनम् निमोघमपम पर मप्लीमसमपि त्यजेत ॥१५२॥ १५ २० १ मा पौशिका पचपर्णमिति इति महमम्, म रहा। पपई मेश पवा-परियी शुक्रामा होदिनी रामबाण शोखी कोपनरगि, गौरी रखिरामा स्पेनी कुमुवपनामा पिङ्गी पावरता । २ 'पितारिवभरिवरोरिवार पणेन्ठो न ! २११६३ पेनी कुमुपपत्रामा गुफामा रिपी स्मृता । बणकुममसाणा शैमिली परिकीर्तिता। इति पूणा श्लोक। ४१५३।४ हवा ! ५ मा ४४५३ । ६ सय पर मीडिया पर परिशिये पति पम्पम् । मेरो पपा-वाशीमयाम्पमिताः। काक्षी नील्याबस्ति । पिटरी पीतरता । प्रम परागविषयी पुप्परगोपापको मधुमपरन्दशमी पुपरसवाचको कौतुम रामम्तम्भवाचका, इति बिका। ८. परगति परमुलपंगठि हि विमा परम | ९ किधिग्मति 'मय परमारणे । पासाला निगमसावि बडीमपति इति दी था । 1 मकरमपि पति कामानप्रवान्मपरम्द 'यो पसगाने । ( मरमपि भवति बनातीविना। “प्रदिनात्मने ।मम्मए । रामाणिवि रामाम । ११ का १९९० पाउ मू ।।१५ पासू ।।

अमरकीर्तिपिराषितमाम्योपेता । पशप्रा । मबसे सरगना न प समीचीनम् भवपम् । मस धादिपपी. मेन मरिनम् । फिरिस्त, पति वियस्कम् । सरगति पर नान्तम् मम । सामफ्तेऽनन मापनम् । निमुष्पवे मिबोपम्। नम पुर्षों पाम् । न बातीस्यपमः । गर्मीमामाभाषमा । पम्प्प पाम् । महिना काय मस्यते' परिमाचीमिते मखीमसा। d स्पजेद खपुग । बनोदाहर कीर्ति साधुमादं यमो विदुः । पर्ण गुणापसिं स्याति प्स परासि । बनाना चोकानामबार बनेन सोनोवाशिम या अनोशारणम् । व संगमे । कर-"बुराविम । इन् I Fd पारिसे । किर्ति बातः । नामिनीर्वा । कीर्ति बातम् । कीर्वनं तित। तापो हिमन' फिलम । कारिखसोप । मिपु मानेषु ब्यावेपु तबाटीवाना मी १० एकम्मानसोपः । सरस्वकारो सुपते। वि। रे | साधूना मत्पुम्माण बारः साधुवार । रातो माग्यो हितरप गपुरुष्यते। पर देवपूगरिपु । इम्पते यशः । . पब शिप' अरमापरन् प्रयो भवति स प पनत् । बस शिः । कार उम्पारमापा । पम्पद सापुबनेन पर्णः । गुणानामपति भेपि गुणापतिः । मापवे व्यादि । होकः । प्रमिला माझ्या । अबधान तु सारसम् ॥१५॥ वारसे हो । प्राचीपतेऽवधानम् । प्रतवार्म च । हामते "सासम् । प्रेप्यादेश्वनिदेसाझानियोगा पासनं तथा । पगरेगे । प्रेमते इति मेप्प । मा समन्तार रिणवीस्यादेशा। निविरमते निदिराचीति का मिश । भावानातीस्पा | नियुबम् निपोगा । गास्क्वे प्रतिपायवे शासनम् । शाम मनुशिरी। सन्देश प्रिपयोः मीपुस्सयोः मुलगापा सम्वेशः । सन्विति ' सम्वेशा। भमहिनाममाहानाम- 'समेसबागवापि स्यात्। पार्वा प्राचि किंबदन्त्यपि ।।१५४|| नमो नगीनामाम् । हिजोपर विपसे स्पा मा । प्राभाऽविचिम्पो . 3 म १ प्रमाणमरिमापति हीना गमतीसम्पत्र । २. न बधि गोपमित्यप गम् । भावपम्मागर्मपपितमानिरी' इति पत् । ३ मात्र प्रमाणपतरमुपाम्पम् । निमुपत निधन हाय पहिरनाम्नति परणे पश् । पहिना बसमचिम्लिनात् । ४ प २१ । ५ पचते दुःखममेन । पचि पस्तीवर विस्तारे पा। धर्मणि पम्। ६ 'मठी मी परिमाणे । 'मि उगा पा । परा महाप्रयास्तीति स्मादिना पार सन् प्रत्ययः। येकावविप्राथिम्मः । तत्र मसिमत इसाप । ७ गू । ८ तापी रिवि निदेशात् वः कारिख इर् । ६ "नामिनीपुरीमाने र प्रसू ५८ । ११ सूर । १२ गति बहे मणाम् । १५ पारेरानम् पारिश्ते पति निमः । १४ प्रयापि पाहायवे माहान वि पिप्रा । १५ दिसते रविपतिपत्र म्पाया। ११1१७ पा र ५१२ ।। पा ५ १५ नाममाम स्त्रीम्साचे पाच प्रब बनोनया प्रवृत्ति । लिगाम् । किस्सित परस्पत्र विसवन्ती' । बचान्ता पम्तः। फठोर फठिन स्तम्घं फर्क परूप पम् । पते । ति देश बीचति कठोर.२ | पठति कठिन । स्तम्भौति स्म स्तम्पा । कक सोपोल बा । पति कोवि निरपव कशः। परुष्पति कुपतीति परुपा । कुप हुष सरोप पारियो । पति म रा । “परिसवारी प्रमुखसकतीः । मः। मसाः । सर। एमा। निरः । बरठः । मूर्तिमत् । मूर्वम् परम् । प्रौढम् । एपितम् । स विषु । अश्लीलं काइल फल्गु निस्सारे बसि पर । मस्तीमते न रिमध्यवे स्वयं चितम अश्वीनम् । पचनम् । शिरः भा समन्तात् परवि प्रशोममान रोतीति कारजम्योत्सव । पुर चौरा । फन निप्पटौ। फलति फस्ना। रघुवरहगुमारिरिपुचपन । फोमल मृद्र पनसम् ॥१५॥ पना कीमते। पौ पृपिमा मखसे फोमनम् । मुददोरे। मृनावीति मूपु' । पिंगति पेशलम्'' । महमारा । गुतम् । प्रत्पम्र साम्प्रतं नये नय नसनमनिमम् । पद्मपीने । प्रत्यप्रगति प्रत्यप्रम्"। सम्प्रति भ साम्प्रतम् । नमसे नम्पम्"। नौति मपम् । नूसचे नूतनम्' । म ममम् अप्रिमम् पृप्पाविम्म इमपा । मिनाम । १ फोऽपि पाए । रिम्पूर्वाद पदेरोपादिको मन् प्रत्यय झस्मान्त । गौरादित्वाम्मी । इति रामाभम । २ ठिपकिम्मामोर" का ठ स् । 'कठ कवीचने । २ परि- भागुरिरातोपमित्वपेरम्लोपो मतपतिजीकोष विमहभिवः । एमाममध-पिपर्ति पूरगति पर्व बुर्ति भौति । 'पू पाहनपूरणको । 'पूनहि इत्पाविमा २ सू ५। उपञ्। प्रत्यार। पुपाति पूरगति पर कोपेनेति मिना। ४ का ५ ४१९५1 ५ न भिर्य पातीवि प्रश्नोतम् । कालया। पिडकादित्वाम्मतम् । इति रामाप्रमः ! म भोरलास्वाति सिप्पारिवाग्म लपानी।६ कारसोऽपुरवागिरी हेमचन्द्रः । ७ सति पिशीति एपम्पत्र । १॥९॥ इत्युप्रत्यय गय । ९ को पिम्पा महवे पारपति मियम् वः । मस मत्त बारणे पचाप । परमेष महत्व सिपति । वस्तुतस्तु कोमह रामस्म मिदिमकारान्तरेष साबनीमा । पौवीति कोमल पति विग्रहो,भिवानचिन्तामणे । काम्पते कमी इलया । १० मपते विमणि स्पयो मापः। ११ पिगमेकरोन तवं परोतीति प्रोणनिरोपाम् । गमाभमतु- पिरा समापी पेशन पेश मारितमितता सोसावीवि सिप्मादित्यावर प्रत्यार । पेशनामस्म पचायों मुम कोमसापों गौर। मुष्म् -'पधे पतुरपेशवारमः परमान उपम समरा । २।१।९। एबल पेराशा।' इति भमि रि lys I ? प्रम गटो" |प्रतिनममप्रमविपीरस्वामि रामामी । प्रतिगतमपमनेमेति ईमपन्द्रः। १५ ९ सपने । यो पत् । १४ मुफ्ते नवम् । प्रदिप । एवं धर्मणि विग्रहो गुरुः । १५ मवमेव मानम् । “नबस्स म्परास्नपचनपलाम प्रपा पा ४ । इति पनप प्रत्वनी नगराध । एकत्र । १६ म्यारिपमादिम मा तिमि । मार पृपारिम्पः (मम् तत मागर्मोपिानात् पृषारी पाठामावाप। बलपि । अप्रिमन् इस्प निएस्पापते। ८ काठ भमरकीर्तिपिरपिसमाप्पोपेवा ५ १० मूनम । में त्रिषु । पुराण बठरं बीर्य प्राक्तन सुचिरन्तनम् ॥ १५६ ॥ पत्र पुरातने । पुरा भवम् पुराणम् । बठ इवि सौषोऽयं पातु । गठवीति मठरम्'। बीते मीर्णम् । प्राक् पूर्व मबम मातमम् । मुज चिर म मुधिरतनम् । प्रत्नम् । प्रनम् । मो रेहोश्यामन्त्र स्ते रामा भाम त्रणा पर्यन्वे । म् तापाम् । मो.' । रेप भागठौ ।। नु विधागत्पी । । दाने । हो। हिगती । हे। कश्चित् फिम्पन संशये। सहामो शम्दौ यते । प्रविशेषामिषाने पिनरादौ प्रपगन्तमौ। तपा बोम्- 'फिम सविमास्यम्ताविषनो । मित् । मन । कौबित् । पौषन । केचित् । केचन इत्यादि । प्रिया कापित् पाचन इत्यादि । सीये पिस्त् ि। बन | इस्मादि। "द्राफमणेशाय" मपदि सीमापे प्रयासमा पसे । निपधे मा न खम्बलम् ॥१५७ ॥ निपे चत्वार' शम्दा वर्तम् । उच्थैरुपापच सुनसचमुमतमन्तिम् । परी । उम्पीते उम्पम् । मन्नयः । उन पर परच्यावधम् । गुमति देयमार तुरम् । ठम्चीबवे उज्यम् । उन्नमत्पुमतम् । उफीफ्ते एप्तिम् । प्रांशु' तासम्पः । उपप्रम् दोषम् । भाव। नीष न्यगातन इम्जं नीचईस्न नपेस्परम् ॥१५॥ पसे । निधीयते नीचम् । वमतीति म्पर । भातम्पते मान्नम् । कौतिपाधि कुम्भ १ पचपि बरठरादो पो प्रतिमो पठरणम्पसदरे तपापि कपिठरणामोऽपि बाग पठितस्तबारापेनार-मति बटरमिति । बदुष्म-ठरा पिारयो भने २. भातीति मोत् । गम्मत्पमा । बया–मो भार्गव । रिणोतिरे । वि। पका रे गा । से "ति पृषकसम्बोपनाममुखम् । परन्तु मारका रो इस्पा स तम्बोधने मपुरते। र पुरोतीवि हो । पपा र विट सले । दिनोति ।। दि गला रो"। विम्। रचा है दरम्प । ३ पपिरोपा इसाराम। ४ प्राति द्रा । 'द्रा मुस्ता गौ' । बाहुबारा । मकार इत् । तपाटी मसी द्वापस । ५. पाहपनम माहाम 'नाप्रपनरमे । पम् । पूपो- दरादिलाद बस्य म | ६ सम्पन्ले परिपद गी" । हन् | प्रपोदरारिवासमोरवकोपः। ७ यति देवं पावरतीति । पम् । कुत्पम् । ८ उम्मति म उपतम् । ९ मार्च मक्ते उदितम् । १ मारवते २५ माशु ! "माए माप्ती" ११ निश्यामा सम्मी चिनोतीति । ति रामामम । निम्नमदति नापेरम्वस्त पा। मां भाविताय। अम्पाना ममात्र खिोप । १२ माम प्रमाण मुफ्तम्भम् । १३ दौति माविपिरोपं ते सूरपति । कौ पृषिमाम् उमति भरभपति । "उप प्रायो। म । गाबादि । कम उम्भमागमत ति पमामम । - - नाममाण ५ म्युम्मच । निचीरते नीचेस् । इसति इस । अमा सह सम साफ माई सत्रा सज् ममा । मौ सा। प्रमति प्रमा' | सह हन्ति गच्छति मा। मा मिनोवि समम् । ता माति गपति साकम् । परम् माय म । सह प्रायते सभा । युपी प्रीतिसेवनयो । बुप् सहपूर्व । सा उप समू । किन पेोंपा। सि । म्पा । सिलोप । समम्ति समा1 मान्ति पर्तम्ने अठबी पासा पा। स्त्रीवाले। सर्पदा सतत नित्य अश्वदात्यन्तिक सदा ॥१५६।। पद् नित्ये । सस्मिन् कारो सवदा । काले विदेशाम्पेम्स एप पा । सतन्यतेम्म सतत सम्तवम् । निपञ्चवि निस्पम् । समतीति शश्यत् । प्रत्पन्ठे भषमास्पम्तिकम् । सबा रवि निपात । सर्वग्रदात्परो दाप्रत्ययो भववि सर्वरय समाश्च । सर्वस्मिन् काले मवा। सना क्न 'माग्नम् । अपम् । शासतम् | गारपतिकम् । प्रनस्वरम् । अविनरपरम् । स भिषु । वियोग मदनावस्था विरह पन्सक विदु । पत्तारो पिरो । विगोम्न वियोग । मनस्म मर्पस्मारस्पा मनायस्पा । विरा विरा। मह मत्त बारसे । मालस्पाने चित्काल पति पठन्ति । परसत परतः | स्थायें क. १ परमका -- प्रेमामिलापमालम्प राग स्नेहमस परम् ॥१६०॥ पर स्म।। शिवस्प मात्र कर्म पा प्रेमा। पिप' सिवरेति प्रादेशः । अभिनप्पवे मिनापा। सप खेपणी नमोः । माखमते मालम्पम्'। १२किसहिपवर्गान्ताब" । रम्ब रागे । रन् । रम्मन रागा । भाषेपम् । 'रवर्भावारणमो पचमचोपः । अस्पो दी । यो कगौपुर मानु पायो। बारगकार । प्र वि । रेफः | अपारम्पतऽनेन राग । “म्पबनारब' करण पन् । प्र विरामीः पबमशीप । प्रतो दीपः। परी गारिवि बारगमर स्निपवे स्मा। संहित सहित युक्त सपहं समृतं युतम् । मस्कृतं समयेन च प्राहुग्न्धीतमन्वितम् ॥१६॥ . । १ न माति मा माफ्निामनेवाग्मेपता न गइति । सः । पररपो मा। . मानाप का ए २१e। ३ "मसी एमी परिमास । रुम बात। पपापन् । सममिति मान्तम पपम् । माकमीकम् । भिष्म समा राम्दी अर्पवाबदो न सहापमापक । लुतम्-- हायनोमी परस्समा एवमरा । प्रोसिप पतस प्रामा चिस्पम् । तर मान्ति प्रयो पातामिति विनापि नवापसमाराम व मापन। तब तूना नामानात् । ४ का सू शट। ५. तनु विस्तारे'। का। समोवा दिवसको रति मसोमः। ६ सम्नमु निम्पमिति वा नियमाप । नियमति नियत भवतीस्पर्य । ७ भर परतीति बनु युतम्। यश तुप्तगी। पाहुलकारक्त । ८ नानाविशमा बिराप्पनिप्पानी पपोत पदादिराम्दम्मामार्यतपा कायोपिर्न साइने । है महाशम्बोर्षिगायत प्रमाणावर नीपलम्पम् । १ सू 14011 पारेरा । इमनिश्पर । पृपादिम इमनिमा इति । ११ मालम्मरम्प पगारे कौपान्तर मंगारी नोपशम्म । १२का स् ॥२॥११।१३ का र ९६।१४ पात् Mnti १५.५५ ।।

भमरकीतिविरपितभाष्यापेक्षा र सहिते । तदीयते सहितम् । सहितम् । "लुम्पेवपश्यमा हस्पे तुम्नमममसोरपि । समो वा हिससवयोर्मासस्य पनि युरूपमो।" पीन पुक्तम् । पूची सम्पः। पृ । सम्माकिस्म सम्पूकम् । मायामक रवि ५ तरि मत्ला । पयो मौ"-चप्लाभियो रम सम्मतम् । पौरिस्म युतम् । तलिमठे हम समातम् । एमवेयवे म समवेतम् । मन्त्रीस्ते स्म मम्वीतम् । अम्वितम् । याचा सरणि पन्या मार्गः प्रपरसम्परौ । सप्त मागें । वर्तन्ते प्रतिपयम् ना येन त् परम । मान्दम्। 'चातुम्यो मन्' । पपति प्रति पति प्रमेन मान्तोऽध्या । सरपना परमि। वस्तासमा । सतिमात्तिनाम् । । पतन्ति गमन्ति मनेन पापा' । माता दम्तोऽपि । पथिा। पथ । पचान ! पम्ब इत्पपि । एवे पुसि । मान मार्गपन्स्पनेन वा मार्ग: । पुसि । प्रौर परापनेनेति प्रचारा। सरस्पनेनेति स! पतिः । एसी । पनो । प्रपनम् । परवी । पपा । निगमः । बिमार्गनामगा गङ्गा मार्गपूर्व नियमे प्रमुन्नमाने गहानामानि भवन्ति । नियाममा । निवरपि । निपपा । १५ विप्रथरा। भिखारा । पोपो गोमजलं प्रब ॥१६२॥ बगीगा स्पाने । पोफ्ते गागोज पोपा। पला ममहम् पोमखम् । गापो। सावत्र मया । गोडसम् । पोम् । मङ्गो रविशरिन यहरिस्सिर्पश्व मृस्गिवः । पच महिपादिक । पर गणति शिनस्तौति " (म्)। शिशु । म् ।। ति पूर्वः । एति धर्मपसेवक मतमा एति मावि इतिहरिः। “हर हिनापमोर पो प्रायवः । नाम्बामणा । मायं सामिन एरवीति "नापहरिः। र स्निायगो प® । सिरोऽमस्तीति , - न १ नहीबठे इति विग्रहो न मुठा । सम्पूर्वस्व हाफमचायापलाठमवाप्रवीः । अतः मन्बीते म सरितम् । सम्पूर्वापामा उपवये पात्रो हिरिति मारे। २. १४ का । युमट रुम मुकम् । ४ का ५ ४ir ९ ५६।६का उ ४॥२८ ७. प्राठि सन्तत गणपति मनोज पप्पा । 'पत साठवगमने" । पनिस्तस्प पा" का सू ६५९ । इति पनिप्रापया तकारस्थ पारमा । "प्रचि में पपिकानाम् । पोर्ष भेति भनिस् बभाम्ताए । इति रामाश्रमः । ८ 'पत्ल फतने । पतेस्पधेयाति पोऽन्वादेराभेति बारामा । पबम्तेऽनेन । 'पप गती । पपन्तेजेन । पपे गो । पविमपिम्पामिनि ।वि रामामम । ६. मुमते वितृगीस्मिठ पारे । मम् शुदौ । पञ् । पदि। म प । मार्पते दतिया। 'मार्ग सम्वेषपे' । पाने एम्दारम्ते इस्लप' 'पास राम' । ११ प्रणमामानि" म् १४८ । परिगयाम् । प्रामपये निपावः । गा गनादीतो विपापमिति तय दुर्ग: । स्त' रङ्गमस्वतीति अर्श प्रारिम्पोऽर । एवं सति मरिसापिसंहा संगम्यते । अबमा विषाण मेवार्प म्पात् । १२ च ५ ४॥२५ । १५ नाप नासार रवीश्पपत्र । द माममा । १० . तियशः । गणातीति राजम् । मानि" एसेजप्रत्ययावा निपात्पम्ते । शानि वियम् पेपी ते क्षणः । गोश्चतुप्पास्पशु प्रपो गरि । पूर्ग गयनोति गौ।। रत्तार. पादा पवागे पतुप्पात् । स्परा इति सौत्रो पाठ । सशते [बामठे ] हवि पशुः । मायादमा-"प्राप्दप सुनुमित्राताराकुमुम ५ अपहरेवरमगामारफुगमा प्रवे शग कुस्मरान्ता निपास्यन्ते । तत्र महिपी नाम देहिका ॥१६॥ नौ महिमाम् । वन वस्मिन् मम' महिपः | नादित्वारी महिपो । शिव उपचीबते गणेन देरिका। कृता नदीप्णो निष्णात कुमली निपुण पटु । पुण्ण प्रमीण' प्रगम्म फोपिदप पिचारद ॥१६॥ एकारण कुण्णे । प्रा कवं फर्मास्प ती। नर्या नावीसि नवीन । 'निनदीम्पा' स्नावे दोगते' इति पत्यम् । नितरां संस्नाति स्म शुचिवमाप्नोति स्म निष्णात । सित सति कराल । भषमा कुणन् नाति कुरान । निपुगतीवि निपुणः । ग्रीमनमर्मत्वात् । पटति बाना सीवि पटर। मुपति एम एम । मुरिर् तम्पेपण । प्राश बीगास प्रवीमः इति मुरूपाचे परिपम्प १५ निपुणे पटा । तपाई- निस्पा उत्तमा फैमित्सामाद मिपानयन् । झियतेऽपने फैमिलैमिन्नैप स्वराजितः । प्रगल्भते मगरम' ! गम्म बाप्पी की ति तदभिप्रायमिति निम्मला काते कोमिया । विरोपेण पाप प्रणावि विशारद । क्षेत्रमा । कालः । मुलः । रुवा । एभः । शिक्विा । विदग्पश्चतुर दो बारे। रिमते ' विदग्प । पुष्पापांन पद पार पतुर। भूर्तश्चात् क्तिम' छ । १ " तिम इत्पकाराम्ठपाठमिन्स्प' । पाल्पाम्तेन्वतार "विरसस्तिसोप' इति तिमविश इति बारावीप मुतस्वम् । बकारान्त पारपार एकाबरीनलेन मते दोभाय । न पाला रान्तस्तिवाद कनाऽयम्कोरकारेण पश्मभिमत । तदुक्तम्-'पाधियररि म २८१ । २ सामापविणेपार्पताला पर्यावस्थामावालो मसीति पाठरिचय । गोगा पशुविरोप बहीनदारी। चतुष्पात्मगुरदो वर्षपगुपाचस्वात्पर्यावत्वमिति विकः । ३ का उ ०।१५। ४ “महिर 0। माते पते पा पिशाशकास्वात् । प्रौपारिकरिपम् । प्रागमणात मानिस्कवाय नुम् । इत्यम्पा । ५ मात्र कोपा-तरसवाद । ५ पा म् ८१५८५। ७ प्रम पूर्ण भमासोचोचने १६ कारिफायनयामेषमुपासम्मठे निस्तारण कारिमत्तामभिपानपत्र। उत्तास्त न मपगठ । -कौवि प्रतिपारपति धर्मादि कोविरा । बाटोनिन्। पचति विद। गुफ- पवि। भरिदा। अपरा कपि परे पिदा पस्पेदे रामाममः। 6 पिरोपणे गोगाए मत्वमा विशारदः। इति एमपना। विरिपो विपराठोमा शाखा इति पमा ।१० पिरोपण मे पिच मावि स्म मिया। 0 Co भमरकीतिविरचितमाम्योपेवा 4 पत्तारो पूर्वे । पूर्वति स्म हिनस्ति स्म सदापार धूर्त । घार बीतीति पाए । पिसवारस्यस्पेवि फितव । गठरतीति शठः । पापिनको काम कार्परिक । पालिका कौर तिकमा । मापापी । मायी। कापि नागरिको इय फापि प्रापि पेय प्रातम्पा । नगरे भयो नागरिक । गोत्रसंशाहनाम सत् ॥१६॥ चलाये नाम्नि । गा पाप्पा स्वापारेण त्रायवे रपति पारति गोत्रम् । मान समा। पाप नाम प समारस्वादेवचनम् । प्रहपते असते माम् । नममम नाम । मुग्यो मूटो बडो नेटो को मूर्खपच कव्वद । सम मूर्ने । धर्म मषु मुमति संग प्राप्नातीति मुग्पः। मुर विस्थे । मुमति स्म मूव । गगस्पारिना कोह।। दवर्ग । ४टोसोप । तिः। रेफा । पाति म पुष्प गप्पति' जर बास्मभ । म यो न स्तूमते केनापि' नेर । म बम्भने । मते मूकः । मूकादय - 'मूबसूफ अर्भक्पृपुरुषामका' अन्यवान्ता निपात्यन्ते । मुरबिस्थे । मुमति कार्येषु मूखः । मुरे" मर्च । कुस्तित पदति करना। विषयः । वालिया। पारिया! बातः । बरा । गिा 'नासी । पशु स देवानां प्रियोऽप्रानो मन्द भयो म । देवानां निप. । प्रपि (मि) इत्यर्थ । म AT प्रमाण! | पु मन्दवे स्वपितीवि मम्द । - - १५ का १ अमृता परतीति कोविकः । तेन परवीति ठम् । २ पूर्वसामान्याम् इव । ३ पबमा प्रापारेग च स्वरम पर रखने । नामा:पि स्वानुरूपाचारपतीम्मामाग्माम प्रतिग पति । रामाझमस्तुरगपते परसते उपा। रवि पुत्पत्तिमार। “गुर् गमे । ४ वटुसम- मंशा पारपवना माम दस्तावपापसूचना रवि । प्रम को । ५ भावेऽनेनेवि रोगा। ना ना नादिनी भवति । ६ नमन मामेत्पमतम् । भागे पनि प्रपामापा एनसनामरामागुवापते । म्ना पम्पासे ग्नायो उपठे ऽभिपोया पो नमेति सिमा म्याप । मामन् वीमन् रवि निपा निस । पर मुरारीनामा पा प्रतिवरारपसारः"बर्गल पर sad का सति पप दलोपीवीपा" मा समाति मागे माति तात्री म भगति। रमपारम्प पर ति मचन्द्रः। ११ मेग्रामः कोरा ना नीलमन । पारगमरमूषगदी का वाम विस्वा ममते । तपम-"परमान पादि। दति। आम पो ।१८। समूची साराभुतो अभि चि ॥१२॥ मारिया रति पटा सम्भागने। पापियामापायी तर तामामाभित्रापेण पा बीग बनाएकोपा वभिगः सामाभ्याभिप्रापण प्रयोगः। १: म २१५८) १३ पा 3 - १४ मा प्रमाणानरमुरा पम् । १५ मारिनाम्प प्रमाणम्। १५ प्रमे HERE IRY I प्रमाणम | ताममनासीर गरे एमाली पम्नदमे इति। १७ साना पिता पार। पण्या अनुष पनि पा ।

नाममाग ८१ घीनामसि ॥ १६६ ॥ पीपस्ति । इसिस्ति। प्रतिमावर्षिय । प्रावर्यिता | मनीयापति । विपणपर्मित। मविपर्विता । सावर्षित । इसातीनि मुलनामानि मपन्ति । पाष्टिफा फलम चालि:हित स्तम्पफरिस्तथा । पत्वारः शासिमे। परिप्रेण पपन्ते पाटिका' । परिरिखसम्पमा इस्सरी ५ समवि पुरिमनेन फसमा | शामते पायेषु शानि । प्रयपा महातिना अमरेग मुख' साधि । पति पत मीकि स्तम्पकरि। पत्स' शस्फरिर्जातः पोउन् पदधनः स्मृत ॥ १६७ ॥ बलारी बसे । मातरममाश्य पति वासः । याद रोतीति शरुत्वणि() "म्म 'शतोरिति' प्रीतिलत्तयोरपसम्मानागिन् । पद् पम्ता पस्त स पोरन् । “उमासे पतपरामासु १० पप उर्व पारंटीपर पराना बस्य स पदानः | चोरीरो गर्वित स्वन्पो मानी पाइपुरुयतः । उग्रीव उद्वरो रसः नव गर्षिते । गोपतीवि शोएसीर । "करोडम्प ईरा" । पर्चाप्रपाः संजावोऽस्य गर्षित | तारपिताविपरीनामातेऽर्षे एवम् । स्वमवे म स्तम्प' । मान पूजावितवगो गो विपते १५ प्रस्थ मानी। भाम् भरपारोऽस्त्वस्व गायु । “उप्रशुभम्यो । उबम्पठे कमेण स्वत उद् कर्जा प्रवा पल र मोवा । उसरति गणनम् उतरारपतेस। नीपश्च पिभुनोऽयम ॥१६॥ पनो दुने । निवर्य पार्प चिनोवि नीया | मैत्री पिंगति मेभी पेरायविषा पिशुना । वासमः। पिनपिपा पिशुना। 'पिगुनफागुनौ" मम्पों पाम् । न मावीरपथमा । १ बर्मनीमानीमा २० पमा' । दुबन । बाप । पोषपाही । विधि। पौरफागारिकस्तेनास्तस्फर प्रतिरोपमः। निशाचरो नरो हेरिफः प्रणिपिश्च स ॥१६॥ "नव चौरे । घोरपतीवि बोरासाऽपि चौरस । एकागार प्रानमस्कागारिका । - - । १ 'पनि पस्पिोरा पक"पा ५।१।१ । तिन् प्रत्ययो रामग्रमणोपम। २.ब्द रीतीवि सम्मारि । जम्पराको । सू. ५। रवि कम इप्रता।। पास २५ ।। प उ ए ine | ५, "वर्गाप्राममीयुत् इति ।१।। उत्तष्ठन्ति गप्पति दिनति वा उब इति हेमचन्द्रा। हत्वाऽप राम्दो गता। कम्पनीवि विप्रा उकः । प्रा पिशुनाईनुरोपेन रिमामेरः । निपूर्वप्रषिनीवहिलकामा । उपसर्गवीपंध। मनरा सिसमायोति विमः । ८ गिगेन दरपति पिपिरिमिनिम्मा लिन् । सू ॥५५॥ इलुन् । पिगुनपति पपिएनति वा । "अपिरमति बागपतीति भोगः वि हेमचना। ९, काठ र २६१ । १० का उ ( १ चौपश्यो नियामपन्वार पर दौरे । गगण यामा मणिमन्तावा गुमचरे । इति पाठ उचितः । तदुपम्-रिको गूदपुम्मा। मणिनि- घमि पि ।

- ८२ भमरकीर्तिविरचितमाम्यापेक्षा स्तेनमति स्यामवि मा स्तमः'। उमयम् । तरपति परामचर्य नमति तरक। "तसे'र । अपना कम कपूर्व । तरोतीवि तकरा' । व्यापम् । नाम्वन्दावा । टिलाचस्प तपारा । प्रविधि मार्ग प्रतिरोपका निर्ण परतीति निशाघरा । गरबासौ मर गूडनर हिनोति परराष्ट्र मप्रति हेरिका । प्रमाण निव गुप्तो बीमते मिक्ते मा प्रणिपिः। बा । परास्कली । मसिम्मा। ५ मोपण । प्रतिमोषक । प्रस्सरोपलपापाणपनस्तु विना पनः । मसूणत्याहादसति "मस्वरा । काठिममुपजाति उपसम् । उभयम् । पिन ि *पापाम | पासानम । राति पूगति द्रिसते पानिपते पाका स्पत् । मियाम् । पाति 'पातु । शिनोति क्रोधि' रिसा। शिडी पबिगाम् ।न्यते' पनः । श्रमन् । प्रान् । पुसकर सत्र पातमयो लोहम् मौसोई । तर तस्मिन् पापाणे बातम् उझबम् ममातम् । प्रस्तोमवः । उपतीदमकः । पातमम । उपयुझय । शिहोमषः । नोमयः । तादि सोमामानि भवति । अमवे समरिमर मान्छम् प्रय । एनाति सर्व मोहम् । साताम्म नरेस्परम् ॥ १७० ॥ वा पापाये उद्भवानि सुषगनामानि पबन्ति । १५ क्षामं धान्तं कश्च क्षीस हीन जीणे प पैरिणाम् । षीविसानं दून च नम को। पारविम सामम् । शम्मति स्मशाम्तम् । रुशम्। सीएम् । पीनम् । - १ 'खेन दौर" । अपवित्र । पचाव। २ का उ ए । 'पापापम्तामन्त- फारममाहागिापिमानिशाप्रमामाभित्रकत नान्दीकिछिपिसिविषविमतिदेवगापवररममा " सू । इति समाप्रत्यया । ४ रस्सुम्पतयः प्रविमापावापौरपाषा म। गुमचरपोगा। गुमवरपाराल-बापः । परसः । मलाक्लि । बर।। वायना | सः । चारा । ५ ख मापायने । पपाचम्। ६ अरपा पमोवि पनः । मो. शम्मोः पहो पोपस । ७. "पिपर सम्पूने" । पालभवान। प्रपोदरादित्वारिकारमाना। पप बामे प्रापे । तिभेति पम् । पपत्लमेनेति । प्रापण | 'पर गम'। अन् । पापभागमपछि मोऽप्प न्मत्र ग्राम । ८ "रणावे पुग् इस विताए । 'भातुस्नु परिकम्” प्रमि बि । 'भातुम्न शितापगरिक विरोष" मन को । माविकोपप्रमाबत सामाम्पतरपपिस्य पाठीभुत । १ छिनोतीति वासमशिबावर्न विदुक्समवे । “गो नम"। स मीधि स्पम् । वनको- तीवर्ष । न शिजेति निपातो पाहुसकाणदिशाम एमापावि 1 रामाभमाविमुपतिकारक “शिक उम्मे शिततीति शिता । गुपति कातुम् । वाम्तरतम्ब मीभिर्विचारग्रीषम् । १ गम्बरमा शिवा शिक्षा पापि गिशि स्मृत इति कम्पनुकोपवास्मोपोतकम् । १२ 'मूर्ती पनिम" का ए nirm । इन्तेर पनारेगम । १३ पटुक्तम्-"पुतामिमेरे स्वामणिदोष शितापरे । गगन्नपिणे रोमाबेगपरिवारमा । मिकी का ११५ ।

नाममाळा । बीपी स्म मोर्यम् । ग्रीवि स्म शीर्षम् । भवस्पवे अपसानम् । दुवे म दून पोरामेन्द्र तप वैरिणां राणा मयतु इति प्रयोमनीयम् । धैर्य शौर्य व पौरुपे ॥१७॥ पार पौरपे । बीरस भागो पैयम् । गुरस्प मापः शौर्यम् । पुरुपस्प माप पौरुपम् । मुष्माई भवत इस्वप्मालम् । सिप्रामवर शीघ्र सहसा मटिवि द्रुतम् । पूर्ण जब स्पदो रहो रयो पेगम्सरो समुः ॥१७२॥ पोग्श गे| विपति निरस्पति सिमम् । रमपम उणारी गावम्म । भानुते पाश । पापाबीवि उग् । मगधि मादि पा ममः । इसर्ति माम्तमम्पपम् परम् । मदन्त च मरम् । शेवे का शीप(णि) वि पाप्नोति पा शीघ्रम् । सहते सहसा । प्रमपम् | मरति संभातीमगति १० एन्वममयम् । सविति द्रवि म चुतम् । स्वरते स्म तूर्णम् । बन सपः । ४ गयो। स्पन्दवे स्पदः । "स्पदो ब" इति ताः । राफ्स्पमेन पा । रमते रीवाति पाऽमेन रया । मीन (पिम्प) देगा विमेन तरा। ' सर्ववानुम्मोअन् । साते भूमि खापुः । संगः । गविपरमो बनो धर्म बचना माशुशीमापस इत्पर्यमेवः । सदागठिप्रस्तावा- साधीयोऽत्यर्यमस्पन्त नितान्त सुष्टु मै मृधम् । स पणे । साधुम्मी रिव सापोय" । पम् । प्रतिकान्तोऽर्च मेखो मात्राम् पत प प्रत्पर्यम् । प्रत्पम्तम् । प्रतिषेलम् । प्रतिमा । निवाम्पति स्म नितान्तम् । प्रगति सुन्छ । १ अभाववान मिमा प्रयापपि शम्दा बिग्रेपनिप्नास्टेन जुम्ममिति बिरोपमप्पाहा । राजेन्द्र तब रिपो कुटम् बाम मवतु । एवं शाम्ब गमिस्यापपि पोन्नम् । प्राणानराम्स्प भाक्रम रन्दत्वात् तपरिणमषान नाणे भवलिति विक। भवस्पते ऽवसानमिति कोविमास्मसात । अवपूर्वस 'पोतर्मणि" इत्पस्त्र भारतरि प्रपतीयते इति रूपम्, मत्स्पो पति परिसर विभाग पास्पवाठि परस्मैपदमेव । नापि कर काटोपबहानशम्य । उपससे 'मरसित इति रुपस्पैन धर्मसम्मक- सात् । तस्मादयतावतेप्रतायो पा प्रागनमिति विप्रहो चुका । २. कोपान्तरप्रमाणवी मनायब पारिशम्दाना परसरकर्ममेदाप गाना स्वेऽपि पलसामान्यविषयमा परः पौरप रत्गुरुम् । २ गतिम बनी भी धर्मरपना मागुणीमादर इसमेदस्त गरमा पत्ताद विपारमस्वान्ता नष सीमा पाची तपन्नास वेगा इति सुषपम् । “शा पसेझान भरिदिएकोपारप सीमापतया पाठे सम्मेऽपि पृषगस्प पाठो मरिविशम्यपुमरणिय पोषः। ४ पिपति नितम्ममिति शेपा 1५" मस्यो गुदौ" । पाहुनभन्दः । मरिमोरिवि नुम् । सोरिवि सोपा । मम्मति कासारपस्थे मनमः । ६ "पर मणि । मा प्रतिमा परा सापति। “पोऽन्तामणि' । मामापरी हिस् । पिमपन्तप्रक्रूिसम्मा गन्तमममम् । गारगम्-"रा विधीव न क्रियामित्यादि । ७. "मन सदा। प्रोणादिक इति। ८ा र III स्पम्मेपनि नसोपी दीमारय । स्पयन स्पर इति भापतिमहो बायः यो पियो भपषसनी । १० र ५ ५ । ११ प्रतिरामेन ठाधु बाट पा तापीच रवि । साधुम्पी हित इति डोषविप्रास न हापो। अविरागा सो पिपानात् । टापीर रवि मूतोकपदस्थ जीरन दिव रवि पिमहामि तपैन ।

1 ८४ अमरकीर्तिविरचितमाप्योपेवा 'मापदम्बा-अपन दुप मत परिण मिन्टु ता. पनु इस्पायवः । वे अपमम् । पिमति साम् । स्फुटं सामु सलु स्पष्ट विश्वद पुप्फलामली ११७३१ खम निमते । परस्पभिभावोऽमात् 'फनम् । सापतीवि साधु । समीति ब। सामवे स्म स्पषम्। विवि पिचे विशवम् । पुष्पवीति पुष्करम् । नमसमस्मिन् ममतम् । . प्रकाराम् । पकय्म् । चित्राश्चर्याहतं घोपं विस्मय कौतुकोऽप्यहो । पर पौतुके । चिम बने । चिनोतीवि थिमम् । भावरतीत्पाश्चर्पम् । पारस्परि लामट् । पचावाम् । भद् पूर्णः । मद् विस्मिठो ममपा प्रमुवा । “यदि मुषोत बोपते पति पोपम् । विस्मीयते इति वि मया । ऊस भाव कोतकम् । प्रो दोन बारबर्मम् इति १० मोनोरम् । भमियोगोपमोपोगा उत्साहो विझमो मत ॥१४॥ पोरमे। अमियोम्नम् अभियोगः । म तपरमे । पम् उत्पूर्णः । “पुरादेष' -पन् । "प्रपोप . - । उपामि इति वावम् । “मानुकवाना"इस्लाः । उपमि बाम । उपमनमुपमा । भाष पम् । “कारितस० २।" उपोयनम् उयोग । उत्तानमुत्सारः । विक्रम निमः | रहोऽनुरइसोपांधु रहस्यं च मिनति क. । चत्वार एषाम् । राति मति बना बत्र सात पासीदे। अम्मम । अनुगत ग मनुरासम् ।" अम्बवतप्तेम्पो पत्" । उपारनु अम्मबमुबम्वम् उपांशु । राति भर पस्पम् । पुमान् मिनत्ति विचारमति । प्रपत्रम् । एमन्तम् । । निराशाकम् । उपरम्। विनम् । लिपिम् । मान्तिम् । फीनामः रुपणो लुम्पो एनर्दीनोऽमिलापकः ॥ १७५ पर रुपणे । सोमेन सिरपति बामते 'कोनाशा पाणी पाचकाना मागति पिनाराष वाधिनाय । पते रचित मराठ रुपण तुम्मति स्म गुम्पः । प्रप्नति एना| गरिवपि लात् । सोमेन पोतते गोमते (ोफ्ते पति ) पीम । शेर पर । कपिल ना इति पठन्ति । सप पावो । अभिपूर्व । अभिवपापेशव ममितापुर । 'मयमालपम्स्पाइतपतपदमुकर" - २० - १५ ठत् ११५ रवि प्रत्यया । २. सपावो शव विदितः । मस्पतीवि मर का । " प्रश अप फल्ने । रिवादि । गुपपति । शिरणातभरिखमा । ३ कवीत का विमो माया, मत्रपारानाका पमि तोर स्थापः। प्रत्रगुपविक ।४ पक्ष । पाता। सराम्दो नाना । दुधम् -- "निपपासाऽसहारे विशावाशुनपे ख" ! म को १२५ १ ५ विक विषारणे। सिरौति चित्रम् । पचापम् । इत्सन्मा। मा इति बर्मन मिनीय इति विप्रोऽन्यत्र । 'प्राममनिले पनि छन् ।७.41 उ स् १२५1८चोपरामर पामयि । नुकम्-चोपतु प्रेम प्रस्मेषमतेपि र भने त २१५२१६ का ३२।११ | १. ।।५।११काव । १२ प वीनो सीप । १३ का amati मा पारिश्रचि २९।१४ पन्य पिमापने रोरोबोपमाया मम् दोपमनो माम् ५ पा ९।१५ का ३४ ।

नाममाव्य ८५ । पर्वः । पिचान । मितम्पब । सुत । मुहरू । मसीन | भा । पराप। पाशनीस सितो यह सपानीसो नियन्त्रिता । नियामित' मालितः पिन पाभितो रिपुः ॥ १७६ ॥ नबसे। पारा नीता पारानीत । मीयते स्म सित । मते स्म बरः। पीप्रविश नीता प्रापिता सम्मानीतः। निक सबाल्मरल नियमितः । नियामी पातोप नियामिव । भादा ५ समासाऽस्पेवि श्यतितः । तारपितानिदर्शनादिवम् । पिनमते स्म पिनसः । पाया उंबातोरस पाशितः । रिपुः । कान्त च फमन कसं फमनीयं मनोहरम् । अमिराम (रा)मणीय रम्य सौम्य घ सुन्दरम् ॥ १७७ ।। पण परिप्ठे (प्रतिसपरे) । कामते काम्तम् । दाम्पते कमनम् । प्रमस्ते इस्पेरगील १० कनम् । काम्पते पाम्पवे कमनीयम् । “विम्यानीचो'। मनोररवि मनोरम्। मनोहारी । ममोरमम् । अभिरमसम् अमिरामम् । रमणस (गाय) रिव रमणीयम् । रम्पते रम्पम् । होमस्स भाषा सौम्पम्मर सोमोम पुपति सष्ट नबमति पवि निरमस्या सुम्परम् । चारु प्रतक्ष्णं च रुधिरं प्रशस्त पिपन्धुरम् । दर्शनाय मनोईप प्रो ममीगे। परन्ति नेत्राप्पा पार । शिप्यते सुम्पसेऽनेन एसस्पः । रोपटे तरेम्पो रुचिरम्। प्रथमते म मास्तम् । वम प्रिपम् पम् । चित्त पनाति पापुरम् । हसते दर्शनीयम्। मनी मामातीति मनोमम् । पिचपर्यायहारि च ॥१७॥ चिवहारि । मनोगरि । इलारीनि मनोहरमामानि शवम्मानि । अवश्याय तुपार च पालेय तुहिन हिमम् । नीहारम पर दिमे । प्रसस्पायवे भवस्यायः । "रिरिसिपिरिणपिरसिम्पप्पतीमास्तर परस्पर । उपन्स्पनेन तुपारः। मसाधागलं प्रायम् । वोरणस्पईसवि सुदिनम् । तरि पईने। स्निोति पते जममेन हिमम् । निहिते नीहार । मिरिका । पूमिका । रमाम् । १ का सू ३९ । २. रमण रितमिति विपदो पुरुः । तस्मै हितमिति चतुगम। मूले पदीय चौपयामयाब रमशीनमेष पमडीयम् इति स्वामियोऽपि मायः। ३ सोमस्म भाव इति मिमी अफ । “प्राविपची प्रारभूणे भाषः इति विशावाद शैम्प इस्पस्प सोमवमिरय बापरे । वा सोमो रेवाप्रपेति गुपतिः 'तोमार्गस् । इति सम्। पपमा होमस सोमा । ठळमनुर्षदित्वात्पम् इति पमाममा । ४ मुर निवठे मात्रिकते। भातारम् । प्रपोदारितान्तुम् । मन उमति भाडादरोवि पि वा। पूर्णकात् “उन्दी पोदने" उन्दबातोहुलप्रदरः । दिलात्परकाम् । इति यमाममः ।५ मे मनो मेति रोपः । शिखर पारिने । पचपे रपोरपा 7 सू ।। इति ना। उपवारा प्रमा। १२.५८।७ प्रहारम् पशप प्रति प्रथयो हिमापस । तस्मा गा मालेबम । प्रस्। समिबसवाना बारेषि पा - H॥२ । रति पारिशरेय। DO - एम्पा 10 अमरविपिरपितमाप्योपेवा तकर विद्धि मगाइ रोहिनीपविम् ॥ १७६ ॥ वस्परस्परस्तम् । हिमपास्करणम्दै मसुम्पमाने पन्द्रनामानि भवन्ति । प्रभावारकर । पारकर । प्रायकरा । दिनकर । हिमकर । नीहारमा | मुगाः । रोपियोपविः । सो नामानि पिरि पानीहि। पुमार्ग समर प्रा दो प्रमानपुरपे । पुमागासी माग भेषः पुमागा घरपासी नर. समरा । माहुः सन्ति । तिलक प विशेषकम् । सलाटिका ललामापि पूर्खवाई तथा द्रुमम् ॥१०॥ पर तिलके । शिक्षकाकति तितका । विनतीवि तिसकम् । विगिनभ्येवि पिरोप । स्थायें । विशेष समवे सत्ताम् । ॐ प्रस्पये साताटिका । तात्मते मामा । पूर्ण भारतीति पूर्वशः। प्रपति परि गचति छुमा । तमासपमम् । चित्रकम् । अञ्जन फन्मतं नाग गबपाटस्मारुणम् । पर सबसे । भन्मतेऽमनेस्पयनम् । पति मेवरूप कायसम् । न शोमाम् प्रगति गपति नागम्। यमवि गोममा मायति गम्। पारसाया इयम् पाटबम् । पपति गति २५ ग्रोभाम् मारणम्'। सार्स परिषि वृक्षं च मरः प्रकारे। तरवि गमति वा सम्मः। परिवीक्ते पापवे अमेन परिधि पोवि नमरमाचारपति इसम् । इम्या स्त्री सारणी विदुः ॥१८१॥ पाः५ पानीपनिर्गमनमागें। वे परेसापुः कस्या। लणति सम्पमापिनधि स्त्री। सरस्कनया सारणी । तो विपु पन्ति पनम्ममयो मामाचारोऽमरकरांचाारण । चारोऽअसई प्रणिपिनिगूठपुरुषश्चर । पचा बारे। परति रामपते पाए । मसर्पति अपसर्प । पतपत्त । प्राण २ । - १ पत्र वितपिरोपके टीलोक्यमासपापियो बनाकवतिक्षामारणे । दु कम् -"तिको तमासपत्रचित्रपुणपिरोषन । भमि त्रि १. सारिका पमन्याय बजारभूपणम् । तदुम्म्- 'पापारमा सारिका प्रमि पि शमसामा तीमन्ताप्रे मर मपीमिरिण पार्यमास एनारिष्तस्परम् । तदुक्म् - 'पुरोग्यस्त हवामम्' अभि पि ॥५। पूर्णपाएमगोण कोपान्तरे पाठो नोपसम्मः । २ पर पते । इलपिचारमम् । पानी समानापा । नागगमपामारणा भोरकपोसाविरम्मकसोस्विराविरोपपासा । तम्म् भनेका तामो-"नागो माने पुन्नागे नायकेतरे' ।। "पायान्तु उसासरयो' । 'भाबोगस्यो । तन्मा पगे बुरे ऽछे नि सदाप्रकरागयो ९८।३ प्रम्हमेष भास्यम् । परामस्त साचा पोषान्तरतबादो नोपसम्मा ।५ मा विवि पल्मम् । भौगम्दोष स्मा मारम्मो बीविगोषक, तपा। ६ पूर्वमुटे ऽपि तिवसानपापेन पारेमामपि गप्दात् मुथिनीति । ७. परति शत्रुमपते परा बरे। वार्षिकोत्। पर सवार ।

नाममा CU निवरी गुतो धीयते प्रणिपिः। निगूढापाठी पुस्प निगपुरुष । परतीति घर । स्पः। 'ममा पा मम्बर। सदानुक्त सहसास वस्मात् पूोक्दात् परं पान् इति प्रमुग्नमामे सानासनामानि भवन्ति । निगूढ पुरुषवान् । परवान् इलादीनि शासम्मानि। सस्पार्षे सन्त ऋतम् ॥१८॥ स्या हो । म सुपए प्रतं तस्य सुनतम्। पोदरान्तिानासनगम । अपवि गवति मन पपपमत्र ऋतम् । व्या पामरकोपे-"सस्य॑ तम्पमृवं सम्यक् ।" निस्तल चतुल वृषम् भयो पनुते । निर्गत सं प्रतिष्ठाऽस्य निस्वनम् । भयमा निर्गत वनारसौभागानिस्ततम् । भूमो न तिष्ठति वा । वर्तते प्रमति पर्तुग्म् । पल्पते स्म वृत्तम् । त्रिषु । स्थपुट विपमोन्नतम् । विघमोन्नते स्पपुरम् । स्पापमस्वात्मनो विषमीन्नने स्पपुरम् । प्राय क्लीवे । दीर्घ प्रांशु १५ दी । गति वाम् । मारनुते म्मानीतीठि मांशु'। विशाल च पास पपुलं पषु ॥१८॥ पत्ती बिस्ती। रितार विराति विशा'यम् । बहून् हावीति पासम । प्रबते पति प्रपुरम् । गुममात्रासल 1 पर्वते पृथुः। पात् । उस। गुरु । विस्तीर्ण । उम्पण दारुणं तिग्मं पोर तीनोग्रमुत्कटम् । म पोरे । उमणस्पुरवणम् । पौरादित्वात्पधे ला। पारपति दारुणम् । विविधतीति २० विग्मम् । पुरति पोरम् । वीववि वीयम्। तीष स्वोस्पे रु। उम्पति उमम्' । ठाकरपते रस्कटम् । मतिममम् । भीमम् । भवानम् । भाभीसम् । मीपणम् | भीष्मम् । भैरवम् । सोसलं तिमिरं याप मन्द विद्धि विसम्प्रितम् ॥ १८४ ॥ १वा पा भर्य प्रभावन बडो बाति प्रसिर्गि गस्पेति वर्ष । २. मी. १०।२२।३ बस्नुवल मांगुरीर्पयोरमेछ । पौविस्मृतास्वराण पर्याग । गुस्मतः । तम्- दीपमापतम् भम को 1110 ।४ इविवारण' । बातचाप । सावि हस्पत्यमिति पो । ५ प्रारा प्रषी स्पस्पपि । ६ पिश प्रोगमे । बाहुसकापाल। रामाभमम्नु- गालपारपी रवि पा सण विशगप्पातप्रत्ययमार। ७ टणीति उत्पणम् । प्रपौवयरित्यारोस इति पाठीश पुतः । “पण रामे" । पम्। उमणशमो पस्नुसः सपा, नराम्णा मो पुद्धसी मति नसानाम् । मा उगम्ममामा पापा । तिवीचवीति पमामलादन म मुकम् ति निशाने । निशान हिस्सोपणम् । देशमावि सिम्मम् । मदायक । ६. 'पुर भीमा शमी । भोरपतीति पोरम् । म्पम्तादम् । १. उपति गुमा जनमते उमम् । उप मपाय पिादित अग्रेम मारिना गमातारा ।

८८ ५ अमरकीतिविरपिवमाम्योपेवा पर कार्यविनम्मे (म्बिवे)। गौ मावि मन्दो भावि का शीततम् । वाम्मवि समर्प मिचति तिमिरम्' । लिमित स्पिमिठ मा पाठः । गया भर्न यायम् । मन्यते मम्पम् । पिसम्मले हम विम्वितम् । पिदि पानीहि । स्वमावः प्ररूति भील निसगों विश्वसो निब। पत्र स्वभावे निगे। वा स्वकीयो भाषा स्पमावा। प्रकप महतिः। पाम्पते शौसमति पाशीलम् । नियन्वते निसगा । विरम्तिीति पिश्यस रिसाव । पिमम्मः । योग्या गुगनिकाऽम्पास' मोम्यासे । जुम्म पोम्पा' | गुम्पते जानिए गुणनिका' । मन्त्रस्नमम्यासः। स्पादमीवं मूहुर्मः ॥ १८५ ॥ मामापरं पार स्यात् भवेत् । प्रमीयम् । अमीदयम् अभीपणम् । बाममुखमीयते मा अमीस्पम् । निवयम् । मुपासीफ सपा मोपम् बलारो प्रहाले । मृबते खते नारक पुलमनेन मुपा । भारमभवम् । प्रति स्वस्वाशा (ख)पिचारपति मशीकम् । मुखति स्वरति निमित मुषा । मादन्दमम्मयम् । मुमतेज पिच मोपम् । विफलं विवर्ष पूपा । निमारने प्रया। विगत पर विफलम् । मिगत भासं परमात् वितपम् । रणे लापादयति गुणान् पूपा । मनवम् । विधुर व्यसनं फर्ट कृर गानसहरेत् ।। १८६ ॥ पर स्टे । पम्टेन बिपुनौति गरीर विपुरम् । मत्तते अनेन म्पसनम् । यो (पति) पप्पम् । कयोति जिनपि तु सेन रुपम् । गामवे पानम् । उमरेत निवरेत् । समस्तं सकल सर्व कुस्न विर्य तपाऽखिलम् । पर समत्ते । समरसते एकीकरोति समस्तम् । धर्म प्रस्ते उमप्रम् । मार्ने सवाति सकतम् । सरति मबम् । सन्तति पापविमानोति रस्मम् । विद्यति निवि न विश्वम्। मावि वि शून्यमस्माविसम् । तिमिल प । । २० १ १ "विम भारीमा । सिम्पति भारीमति विमिरः । पितम्बाचो पन पास शीवा तिपतिय भवति । २ पिरसराम्बस्व प्राप प्रमाणावरं नास्ति । एवं पिलाटो निमामोऽपि । पिसत्यम्माम्बामानमपि माकरतारपाम् । प्रतोऽज पिपपि म्पस एष प्रभारम् । ३ पोप पिकामे वणीति पोवा का ताईरिति पयमा । ४ गुमते गुणना। पपिरिवार मागे 'मासमन्पेवि पुन् । ती स्वारगुरुनेव गुरुनिन । ५ प्रमिस्यौति प्रमीयम् । "देव' । पातुकारामुः । मन्मेपामपीति पाया। इति रामाभम । ६ का मृगाडीकरादी समारो पितष गम्य भाववाचा । मुषामोपग्रमा विस्तापायमौ च पसमा मर्षणाचा इति पियको मात्र । हुलममरे-"मृपा मिप्या व पि १५ । 'पसीत प्रिपेनते ॥११ । 'मोर्प निरकम् ।।१।८१ । माकपा मुषा' Mix | "मितम सनत पचा १८२१ । इति । ७.पति तिति पेति बी खा । ८ रुमस्ववे म समस्त्रम् | "प्रमुफ्णे। मटिका। हमाम्मममम ममम् । १ सहयामिति सम् ।

१२ नाममामा सफल विकल स्खण्ड शन्क सेश लष विदु ॥ १८७ ॥ पर सर। रानीति कामे शकसम् । शक । विवा प्रमा परमात् द षिकसम् । नाले बएए मियते ठेग' हिरा पिछ गाठौ।"भरि घरफ समानाम्" ।रीति शर्म परोति 'लया। पितुः पपम्ति । अर्धम् । मेम । सामि । अवम्पूर्णम् । यसप! मर्म फोप घ मर्मगि । प्रियतेऽनेन मम । नान्तम् । इप्पो कोपम् । पला परिपादं सं नयेत् । परेप इस्पा करा । परिवानं परियाद । बसवठी (स)ति सम् । शोणित लोहित रक्तं रुधिर ससजासजम् ॥ १८ ॥ पसपिरे । गोमवे वर्षत होनेन शोपितम् । वालम रोइति । बाबते सोदितम् । १० रगति रम पम् । पर पिरम् । पवाद गणमानते सवसम् । प्रत्लते धिपते प्रसा। सन्वतानारवासनान्नद फन्यापतिर । पया (पत्लार) सन्तवे ।न्यन्यते स्म सन्ततम् । न भारतम् भारतम् । न मस्पतीपशील मजन्मम् । मनाम् । कम्पापत्तिवनम्तु इति प्रपोग्नीनम् । उद्वाह परिणपने विवाहप निवेशनम् ॥ १८६ ॥ पत्तारो विवाहे । ठारनं समापरिणोपवे परिणपनम् । विनाम पिपाहा। निश्पते नियेरानम्। शुपिर पिवरं रन्ध्र बिद्रम् पत्ताररिक । गुपति मतमन 'सुपिरम् । उपशुपाविरा। विनियवे म्मम्पमनेन विरम् । रगति मातेन रप्पति हिनस्ति प्राणिम पा रामम् । विपते क्त् छिद्रम् । सारम् । रितम् । निम्मे २० बनम् । रोच्म् । पम् । बपा 1 गुपि । गवा च गहरम् । गर्वापारी। पवित प्रापिन मिरति गता । गठ । गरीवि गरम् । पवन रम्प च पाताल नरफ पान्त्यमेघस ॥ १६० ।। पत्तरो मारे। सबत पर्पोपरि परता एका स्वभिर्मान्त वा मनम्। रसामा भर्ष रस्पम् । परन्त्यपम्मिन् पातालम् । नराः पारपत्र परफ। नारका । पुति। ममपस बुमिनीया लिए प्रवीभाषे” । रिसादि । ती पनिपानमर्वानुम्पम् ।। २ का ir । ३ लूबते दिपने सपा । दोरम् । धान निमाल न हबनाऽभिभयो । कोप एमः पशीपारा मदिम्मा तमो । पेशोनो ममरपानापमापुरे सम्मकम् । घन उपचारान् कोपा:पि मर्मत्पम्मुन्नेनन् । तासन-पोगोनो इमले पारे रिम्पे लहपिपानम् । शातिरकारे पापा राम्दारिताम ।पा पग ६।५ "विमितिमदिमन्दिरदिपिरपिगुपिय रि" गाउ १२।। मुपिरणालीति विप्रो उरमूपिमुपमपी र" पा ५२१ गति । फ्यगर पस्पारिरपम् । उपतीति पा गौ दमय त पाठः। पीरम्बाम्परि दम्पमर पगर । ०५ १ पसंद भमाफीतिपिरचिवमानता मम्पचारिदिदा याम्ति पदन्ति मरा समरः । द्वादि । अदम्र भरि भूपिष्ट मरिष्ठ बहुलं बहु । प्रपुर नम्मानन्त्यं प्रान्य प्रावपुष्कतम् ॥ १६१ ॥ भाउ प्रमले । म दमदम् । मपनि माबुमर मूरि रिम । पसिशन बदपिठम्। "पहा सोरो भूपहो 'स' पिठि" मगरयो पिगमभ । पतिरपेन दुलो रिट बासि प्रामुप पालम् । मधुरठि 'प्रपुरम् । न एक कम्। अनन्तस्य माप मानमस्पम् । पामते म पीपनेनन या मारपम् प्रामपति रम मामूतम् । प्रभूत सम्पति पुषसम् । पुष्प पापुरम पुम्। मवो मावस ससार सप्सर च संहति । वरखपतरी धीरस्त्यजेन्मन्माबव अयम् ॥ १६२॥ सो गरे । भवतीति मपा। भगतीति माषः। या मालिनीकी का भरिमन् संसाए सिरत परिमन संसरणम् । सतररा संसति । मनरवीति जम्म । मामा तीवि भासपम् । पति पगल्या प्रमति (प्रत्र) जय । ऊर्बर्जस्वी सरस्मी वेजस्वी प मनस्यपि । स्वार (प.) गौमुठपुष्प । कर नई पारस्पस्येति अस्थी । सास्वोक्ति १५ स्थी । सरोयाबीवि सरस्पी। बोयालोति देनस्पी । मनीस्पतीवि मनस्त्री। मास्सरो मामुर' पर प्रदीरसुमटो मणः ॥ १६३ ॥ पर मुभट । भासते रत्येवं गौतो भास्वरः । मासुए। भिरि भातिभमा पुरा । पुरवि शुर। र बीर मियान्ती । प्रायवे प्रपी। तुष्ट भर समरः । पिडा। तनुन धर्म कारमावतिर्माणवारणम् । पास । तनु उपर जास्ते पति तमम् ।गोल्प पर्म । कप बमते सरीरम मनन कपथम् । प्रावरणमापतिः। बापानौ बार निधन पाप्मवारणम् । पूर्पर्स मुकम् । मेरोति गोमा सम् । काम राम रमते कम्युल। ध्यमातपोमवारणम् ॥ १६४ ॥ अगरणा । वर्षापा वापपीति पम् । नियु | बनी । मातपात् मारते भावपत्रम् । अभ्यस्प पारगम् समषारणम् । सूपसमा फेब शिरोरं पाल फर्ष विरामीहयेत् । पाणी। मनके रोवे देणा। शिव रोहति शिरोम। वे सबिते पास। मरखो चौबते यति मा पा । पावे बरलेन बिगरा । चिकुला मेवा । शिरसिया। IM५८२ पा ५ ५। ३ मचौरवि मपुरम् । पुरो। अगदीन सिसिका । पति 1 मग पुण्याः पुरमिति मा यमाभमा । ४ प्रानते भम्बते "म मापापी" भने सामिति म मा लोमते "मन मविशेष म् । नोभाको मेति कायम ! ५ का स् । ५९ । इति ।।६ पिपिहिमावासाप्रम का सू १४is (ति।प D ०५ सू.nt.

नाममाम ९१ १० . पनि 'कुन्तता घरापाश च पम्मिाल फपरी फेसपन्धनम् ॥ १६५ ।। चस्मार शबने । पुर तपोरने । “कुपरेरच' इन् । नामिनो गुण | बोदनं धूग। 'कन चूपपीरमृगपतिम्म इनन्नेम्प तहासाम्" मा प्रत्लर' । कारिखकोप । निपातनात् उपवाया वित्तम् । इस्प स्तम् । पूगा शिलाया पागा कपन पूछपाश । पम्मिा सौगा। पम्पन्चे केशा ५ पपन्चे पम्मिल्ला । मस्सकोविकारो नदाविलारी । कपरी। इसम्वोऽपि करि । प्रामन्ती वा कारा । केशरप बन पेशवम्मानम् । देसी । नेगी। बीणा । उररीकृतमप्पीकसमगीत तथा। भयोङ्गीकारे। वरीप्रमतीनो मा पल्मावो का भवति । तपार-उरी उररी ही परणे पिस्तारे । प्राभुतम् । प्रविधायम उपगतम् । मस्तुकारोऽम्पुपगमे अम्मुपगमे पातारे अस्वकार पते । अत मोतीवि(करणम्) प्रवार । धर्मपर" पए प्रस्पर । अस्लोप पनि । मनम । स्वागदावना कारे" मकापगमा । सस्पहार पणार्पणे ॥ १६६ ॥ सस्पापणे उत्प रोवावि सस्पा । सौहार्द सौरद हार्द सौरप सस्पसौरमम् । मैत्री मैत्रेयिफापर्य सहायं संगत मतम् ॥ १६७ ॥ परा (सारण) समे। द्वा भाषा सौहार्दम् । सौपम् । हार्वम् । सौरपमेष्मेव पास्पम् । समुर्भावा सम्पम् । पुरस्पे (मेरिद) सौरमम् । मिनस्ल भाषो मेगी। मैम्बा निपुलो मयिक । न बीपले पार्यम् । सहावी (म) वे सहाप्पम् । संगमनम् सातम् । भेम कम्पाणममय भेयो मर ष मङ्गलम् । मावुक भविक मयं श्योवसीयं शिवं तया ॥ १६८ ।। पण (एनपण) मागे। पियोति क्वेशान् सेमम् । प्रमते मापते करपाणम् । कर्म मीयस्मनिवि पा सायम् । प्रका प्रग्रस्म मेयस् । साम्सम् । भदसे हारते मुखीमनसोन मद्रम् । में पापं गालपतीवि महसम् । भानगी मापुम् । 'मयमानापभूस्पासषपक्पामुकन्' प्रो २५ भवोऽस्यास्तीवि मधिकम् । पुण्यश्तो भरिकम भपति भम्पम् । स शामनय सीमा मोषसीमः । सीक्सीवत च । रमतो पसीयन् । शीपते तक्रियते दुसममेन शिपम् । माष्पविभामा भीमरमर कोचाना शिष भवा। । १ मिनशमो भगरपाची । तदुष्म-"बिन मगर मुममरा विवामित् भाभि चि १।९५ । परा भारोऽपि हरिराष्ट्रप्रपोग । २ का सू २।११। ३ का ।। ४ का सू ४५८२ | प्रत्र दुर्गति उनएपीसम्मपरिम्प इमन्टेम्पी का प्रात पपवम् इलवस्मा।५ प्रखरामपार ।६.1 एला। . भानमस्पर परब नरेत् प्रा ।१।२१ । ८ का तू ॥१॥२३ । ६ व्यस्प पर सपकारा | मारे पम् । का विमटीकोवल्लतः । १० M४।११ का सू शति! २७ ।

अमरकीर्विपिरपिवमामोपेता यता पापस्सवियत्र भोता यकस्वचापि तौ। भन्दपारायनस्पान्तं न गतौ वर्ष के पपम् ॥ १६६ ॥ प्रस्मसोतस्य सुगमम्मामा । तथापि फिश्चित् कस्मैचित् प्रतियोपाय अषितम् । मोपत्कियहिलो मार्गम सा याति किम् ।। २०० ।। वपापि ममा पनम्यापिना इषित कपितम् पस्मैचित् प्रतिलोषाप शनाप । उहिमा गोषकेत् शापयेत् । मार्गक कि पाति गप्पति अपि तु न गवति । प्रमाणमकलङ्गस्प पून्यपादस्य सममम् । दिसन्मानको काम्यं रत्नत्रयमपमिमम् ॥ २०१॥ एखानापमपभिम मषीनमपूर्ववर्तते । फोनम्जस्य सत्कवीनां शिरोमणेः । प्रमाणं नाममालेति सोफानो हि अवयम् ॥ २०२॥ पनमय को लगाना शिरोमणः इति अमुना प्रकारे नाममाता लोभना प्रमाबमस्ति । १५ प्रभासं समुपेत्य वेदनिनदम्यावास् तुपाराचा- स्पानस्पावरमीपर मुरनदीम्याचात् तपा केचपम् । वप्पम्मोनिधिशायिनं जलनिभियानोपदवारहो कुर्वन्ति मनम्नपस्प प मिया पम्दाः समुत्पीडिता ॥२०॥ परो खोका पनत्रयस्थ र भिषा क्या रामाः समुत्पीडिता सम्मा प्रकारेप पीरिया' २० फुकुन्ति । किं हवा पूर्व परनिनालाबार मिपात् प्रमाण मुफेम प्राप्य और पारावापान स्थावर मरनवीभागात् प्राप के मीनिष्णु कि मिशिष्ट अम्मोनिविद्यापिनं पतनिरिमानीप- देशात् समुपेत्य सुगमोन होस। इति महापण्डितमीमामरकीतिना विपन पीसेम्बंशोत्पन्नेन पाणवेपसा खावी पनम्पयनाममाखायो मपर्म अर्ग व्यास्पाचम् वाप भीमरनायकपिपिरपिता अनेकार्थ नाममाला ४ १० जिनेन्द्र पून्यपाद व लाचार्य पियापनम् । महन्त विरसा नताऽनेकार्य विष्णोम्पहम् ॥ १॥ गम्मीर रुचिर चित्र विस्तीर्णाभप्रसाधकम् ॥ शाम्द मना प्रषायामि कवीनां हितकाम्यया ॥ २॥ गम्भीर रुचिर मनोन चित्रं विस्तीर्णायप्रसापकम् । मुगमम्पास्माऽस्ति । अहत्पिनाकिनी शेम्म शम्म् वि पिचनाम्तं परम् । जिनापहंचयागतौ। मिनी कम्मेवे। पैदपया विषस्यन्ती मेम सम पदसूया विषस्वन्ती सूर्गी प्येते । विष्णुरुठी पापी ॥ ३ ॥ पिण्ठाविन्द्रगोविन्दौ भनेन्तौ शेपचाङ्गिणी ।। शेषम बरणे, शापि विष्णा रोपाईगे। जीमू वौ तु करिकीरी पर्नन्यौ शक्रयारिदो ॥ ४ ॥ मनमम्मसि फान्तारे अम्मति काम्वारे मनम् । भूषन विष्टपेऽसि । भुगममाख्या १मयाब भवतीति शम्भु । प्रियः । शवसमाधी । तुम्म् - "शम्भु सारसमणिपोरवपि प गरे । इति विदो भा 4.1 मे 1-'शम्भुव माईगर शिव ।२१। इति । २ विष्णु, पनिर मिवर रस्येतेपपि मिना । कम्- 'मिनस्वाति रेऽतिपरमिसरवीमि दि चो मा ८ । इमे- 'गिनीरसुख विष्णुपु १२५९ । ३ विवस्वान् देवकी अने ३।१७ । अब पराम्पाटारमलुतेकी सरस युक्त । ४ अप्निम बसम- पापिनुप शिवेनी "मने - १९ । ५ पनपरिपनन्ता। अनन्तः शेपै पुगामनमा मिनु इति मेदिनी । ६ बीमूवी पास मुर। पोपी मतिर इति मने ७. पन्मिो मेपनि नि । मम्- पम्मो मेपरापनि मनमा राजी पति मेरिस्माम् । १५ ४ बमरफीतिविरचिवमाप्योपेता पूर्व सपिपि पानी विष हालाहले बल्ले ॥ ५॥ तन्पं दारेषु शय्यायां ज्योतिषभुवि तारके। घषसे सुन्दरे रामो पामो पके मनोहरे ॥६॥ नक्षत्र मन्दिरे पिण्यम् वधि शम्द करीपत्र नो पिप्पम् । नपुंसम् | विष शम्दे । घसने गगनेऽम्परम् । पसमे गगने मम्बर पर्वते । प्रमय राम्ई राति दरातीवि अम्वरम् । परिपी पादपे साल परिधी पावसानो पति । स सामों चावीवि सामा। 'साम राजवर्ग मात्रप्राकारयोरपि" इति मिः । सिघु स्रोतसि पोपिति ॥ ७॥ स्रोतमि पोपिति सि । स्वन्दी सिन्यु। सारस पानी पूर्वे सविता भवः सारतः। केतन दीषितौ बजे। पतन्ति माननगर केतनम् । तया - "स्पे निममाण बिहे मन्दिरे फेवन विदुः ।" मयख कीलके दीप्ती मपी विस्तार मातीवि मयख। पवन शसमे रपी ॥८॥ पततीवि पतः। पाल गवा । अम्जन कसले नाग पसले नागे भमनो पर्वते । अन्य मविप्रमणकातिमु । विक्रमेण भगवे प्री- नियतपत्रम । सारङ्ग पवे गज। सावीवि मारण मरल, प्रगुण इसे धनुषारमरम। पुन्नाग सन्नरे तरी ॥४॥ पुमाभाना माग । २.२ . पूर्वर न भरसेन पिस परित' मपन रति कि। ३ गामि मिरा न मानो सिमणबलेन प्रसारमा यस्मपि सरतापस पान ना aff मम्। 'पुमागा मिनासाले । प्रातील नर पानाग मास्तरे। दखि मेरिना २० २८ ३ मन भनेकाप-नाममाला पाभमन्योनल म परमो पाताने भर पाइजम्पा । पम्प सोमव। कामु ठोस काम्पते पापो कपु । अप मा पपणे उगमा ग्यारेक नागम । यस्परो पुमये पुम्ने पुमय सगौर गुम्ने मुष कर लिन मावि कम्य। स्पन्दन परम्पुनि ॥ १०॥ गमन्ते स्पम्दनम्। अद्रिगिरियनस्पत्यो Infreरतिम निरपरम्ती सागिरिपम स्पोः। ति मासामिादिः । शिसरी तरुमध्रपो शिमगा कि शिनरी। गजा पन्द्रमहापत्यो । गततिराया। हिजो दमनप्रियो ॥११॥ frtaहिम मोपामरगियो ।म्मा रनवनिरमतीविरम्मा। फदसी पनमोपपो । पर पाना रम्पत विधानसी। अशोक गुमनस्तरों कोपरमादासा मोश। गुमना गुरपुप्पयो ॥१॥ मुग्म गुन पनुपुष तपी सुरपुरगे । गोननविन सुमना । मुकाजतपोस्तार सवार। भरि मय गुपगयो । THE भनि। पानापदग्पयो साम १५ ८ . ५

अमरकीतिविरपिवमाप्योपेता
५
प्रपवा-
१
१४
पय' सलिलदुग्पयोः ॥१३॥
पीपते पपा।
मालप्रकर्पयोः काष्टा
कासश्च मुरबादिलबर ।
"स्वस्मे नरे मुसासीने याक्रस्पन्देत गोपनम् ।
सम्प निराचमो मागस्युटिरिस्पमिघीयते ।।"
“सर्पपस्म प्रसस्नेन शिसस्प पतवोऽम्परात् ।
वियप पायदावानं च स (१) नि। स्मृतः ।।"
प्रमपम प्रार्यता उखाता गा। असम प्रकर्पश्च पासपको तपोः कातकर्पयो काटा
कप्पते । काराने भासते काठा ।सन्तोत्रम् ।
कोटिः सम्याप्रकर्पयो ।
कुस्तीति कोठिः।
"किमती पम्पसहसा कियसी छताच कोटिरपि चिपसी ।
भोगार्योमतमनसा रत्नपती पसुमती कियटी ।"
रन्ध्रसंश्लेपयो सन्धि
सन्मान सम्धिः।
'सपियोनी सुरजाया नायडमा रसेपमेदयोः" इति मी' ।
सिधुर्नदममद्रयोः ॥१४॥
म्पन्दसे सिग्नु ।
निपेपदासयोवापा
कपन (मापन) पापा । मात्र प्रतिपाते।
न्यामोहो मूर्खमौनयोः।
मामुपते म्पामोरा
कोपीनाम्नरपोर्गुणम्
गुपवे गुणम् । गुहू बरगे । “गुण्मुपस्म रहस्येच तिमी'।
फीलाल रषिराम्मसो ॥ १५ ॥
पीस मातीति कीसासम् । "कीपर्स मधिरे मील" इति इमा।
मम्पसस्कारयोरः
मन पूगते ननस्यप । मनाय पन् । उपपत्तागों न। 'स्यामाना स्थप
बाम्प श्रेष्ठासीनयो।
२०
२४
-
३
प्रने स २२२५७ 10 पामीराम्दस्त मूना मून मग्यम् । ३ प्रने २॥५८ ।
रीता ग्यातामसति बारपति । मम पापपादौ । इति बझे विप्रहः । पिरा तुटपीठ'। मन
॥५८.। पागू ४/९९1० सू ४॥1॥

१७ ५ १० ५ अनेकार्य-नाममाला भेटफखीनयो त्या | बापा मपो जास्प । मेषषस्सरयोरप्द प्रतीति प्रदः। मवाद'-"साम्दमन्दामाः । “वमः संवत्सर मेघे मुस्सके गिरिमिपपि ।" सायों श्यगरुत्मतोः ॥ १६ ॥ तृपलात्पप ताप पुति। स्तम्भवास्थ्णयोः स्तम्म स्तम्भु इविनोमोमबाठः । पर्या पिन्सारितर्फयो। पर्या। हरकीलकयो स्पाण तितीवि स्थाणुः। स्पैर स्वच्छन्दमन्दयोः ॥ १७ ॥ सस्प र स्पैरा । सस्ताव ऐतमारेरिगोरपि पढ़म्मम् । तवा पानवारे- "स्वरं विदरवि स्वैरं गते सौर व अल्पसि । मिसुरेका मुलो लोक राजपीरमयोसितः ।। "स्वैरा मन्दे स्वतन्त्र 'तिमी । साहु सहीर्णविपरे पलालामौ च कीलक । सस्यायाम् प्रवति मते पा । फाननोवे पट्टी दायो दयोऽपि च ॥१८॥ कामनोदमूवे पडी दापो योऽपि च । दुनोतीति वचः। पापा । नामहाविद्यमीमुमो गा । फोनापा कपणे मृत्ये कृतान्ते पिधिताभिनि । सया पुण्पजनान् प्राः समनान् रामसानपि ॥१६॥ तोमेन स्तिरमते मापते कीनाशः । वासमा । २५ विरोधनो सौ चन्द्र नुसनी हुताशने । पिरोचते रशीही विरोषनः। सो नारायणे प्रघ्ने यतावरण सितम्बरे ॥ २० ॥ तीति सः। सोमभन्द्रोऽमृतं सोमः सोमो राजा युगादिम् । सोम' प्रतानिनीमेद मोमपोऽगस्स्यदिग्पतिः ॥ २१ ॥ १ का उ स् ॥१४ इति समसमा । भने २२२२६ । ३ ततेोरिणारिए का र १८४ पने१४८२ । ५. एवे एस्मात् । 'शशि पाराम । पौण रिकता।६ का ॥२॥१५॥ इति पमपमा 'टा ठरवापे । २० ५ १० । भमरकीर्तिविरपिसभाम्योपता पुम् अभिवपे । अनेन सॉपी सापनि शता। अजो विघिरमो विष्णुरज भम्भरवस्तमः । अजसेवार्पिको व्रीहिरबो रामपितामहः ॥ २२ ॥ म मायके मोपपते ममः। शुरेऽनुपहले बहो मामणे सचिवोत्तमे । आपातेऽग्यात्मसविचौ प्रपपर्ये शुचिर्मतः ॥ २३ ॥ मता पिता । एवेबपु पुषियम् । शोषवि बनो पातग्मे शुधि । सबा 40. जिनकपम्पूलाम्मे- "न सीमिः सझमो यस्प समामाविवर्जितः। से गर्षि सर्वदा माहुः मारव प तारानमिति ।। अर्कोप्रमियरैवस्तुप्रयोजननिाचिषु । परामः पश्यते । अभिषेकम गम्दी पाच राबमध्ये गावापर्ष त पापा अभि देवम पते । मुबरम् । परख-मस्मादिसारिवादियो । गैरिकावित ( दिप)पत। प्रवीन कार्यम् । निवृत्तिव मुहिक । वास । गती । संत इस्पर्य । माया पदार्यचेपास्मसचामिमायजन्मसु ॥ २४ ॥ १५ प्यषु भाव पठपवे । भवति भाषा । 'पा' महाविधुनीभुषो ग। प्रायो भूमोपमातर्पप्रमृत्पमनिधिप । एवेबमापा' राम्दः । अन्ध पदार्थसामीप्यधर्मसस्वव्यतीविपु ॥ २५ ॥ एतेचमतः । अक्षो प्ते यरूमाझे नयनादौ मिमीवक । पूते पबया रसपकारो नयनादौ विमीतके पूतनामाम् प्रसो पवे । सारः भेष्ठे पले विसे कोभे भलघरे स्थिरे ॥ २६ ॥ मेटे से बचे कोरो कोरोमा पाठः । बापरे, स्पिरे सारी पर्वत । परस्पनेनेति सार। २५ वसमत्स्यगीर" इति परमेय पम् । स्वमते "भरि प कारके संसानाम् रवि पम्। “सारो मनस्थिररायो। बस मेछ"प विभी। पाचि वारि पनौ ममौ दिशि लोम्नि खो दिदि । विरिख दीषिसी प्यावेफादसु गौर्मतः ॥ २७ ॥ पूर्वा गतीति गी । गमे ।। चन्द्र सूर्ये पमे विष्णो वासवे दईरे इसे । मृगेन्द्र वानरे पापी वमस्त्रपि हरिः स्मृतः ॥ २८ ॥ हरतीति इति। . प्रामयन प्राप । इस गती । रम् । ३ स्पिरम्माधि मलाश ५१.४ का म् ।। ५.ममे २८ २० ३ ४२५५।

५ १. अनकार्य-नाममाठा हह पये फरिकरप्रान्ते योनि सङ्गफल गदे। वापमानमुखे वीर्ये मले पुष्करमटसु || २६ ॥ पुष्णातीवि पुष्करम् । भारादौ कपापादी तादौ च पिपे बले । निर्यासे पारद रागे वीर्येऽपि रस इम्य ॥३०॥ काराग- "मारहास्पकरमारौद्रवीरमयानका।। बीमत्सागुमशानाम नप नाटपे रसाः स्मृताः ॥ पापा-विधाम्हमपुष्टक्यापपु । मृवादी-मरवितवेवसरमुरसेषु । वि बने मिसि परतपिरापे पार रागे, पामेऽपि स प । तीर्य प्रमथने पात्र लयाम्नाये विदायरे । पुण्यारण्ये अलोचारे महासत्पे महामुनी ।। ३१ ।। प्सेपपु तीपम्'। धातु पम्ममु लोप शरीरस्य रसादिए । प्रचिन्यादिचतुष्क व स्वमाव प्रकवायपि ॥ ३२॥ पशु साए मगरमतवामरीविकाम्नेषु । शरीरस्प रवादिषु रसासमसिमेनरोऽस्तिमम्पानेषु । पृषिमापिणे च विम्म बोवामु (वनस्पति) पु समारे पावपित्तरोमादिषु एतेषभु पातुः पम्पते । चादीवि पातुः । प्रधानालालम्पापुणप्रमापना । बजलक्ष्मतुरमेय ललामो नवम् स्मृतः ॥ ३३ ॥ २. एवेषपु 'बबामः | सवामन् । आरुवावसरे रूप प्रामणादिषु आतिषु । मान्पानुलेपने पंच पर्ण पसु निगपत ।। ३४॥ भारती भको रुपे प्रामणादिसु गाविषु मात्यानुतपने सवर्णो निगपते । अपरादाबुदाचादी परमादौ निस्पने स्वरः । २५ पतेप ससस कप। मपराधीमा उसप. . श्री श्री । उदाताबी- ' रसमम्पमान उदाक' 'नीरनुदाता समस्या स्वरित" । पानावी- "निपाइपमगापारपरजमम्पमपमताः । पप्रमरपस्यमी सम वन्त्रिकण्ठोपिताः स्वरा मिस्मने शमे। ३० मझेखापारमिद्धान्तकालेषु समय स्मृत ॥ ३५ ॥ समय समया। तरति तीते पाग्नेन तीर्यम् । २ ला पितामे" | रसमोरमान समीति वतामा । ३ "प राम पति पत पाप बन मणि प्रभा तरि । ४ हजरत भू २५ म को १०१।

१० ५ १० अमरकीर्तिविरचिम्माम्योपेसा सन्त्र प्रपाने सिद्धान्ते सैन्ये सन्ती परिच्छदे । समते म्मुत्पाचवे शमा भोति ठानम् । प्रस्पर । सवमोघसि सचायामुत्साहे स्मेनि बन्सुपु ॥ २६ ॥ वेबपु सत्यम् । रूपादौ तनापु ज्यायामप्रपाने नये गुण । गुबमवौति गुणा। मानपारित्रमोक्षात्मभुतिपु प्रभवाग्वरा ॥ ३७ ॥ परा पिरिना। अवनशे क्षमे बसे पहियोंगे म्पतिक्रमे । मध्येऽन्त करणे रचे विभेपे रहिवेऽन्तरम् ॥ ३८ ॥ एवेबषेषु प्रता हेती निदर्शने प्रश्ने भुतौ फण्ठसमीकृतौ । मानन्तर्येऽधिकाराचे माजपे पाय इप्यते ॥ ३९ ॥ एप्पते पप्पते । अप एमपु। देवावेवप्रकारादी म्पपदे विपर्यये । प्रादुर्भाव समाप्तौ च इतिषमा प्रकीर्तितः ॥ ४॥ प्रकीर्तितः फपित इतिशबा एतेबषु । रगती। ।। पति एवमादिकमर्पमिति । "इति 'मुर्पमि ममविम्मो बन्" इत्यनेनेतिप्रसर । इति भावम् । प्रप बाष सिसोपा। पो पनुप्यहिंसादावुस्पादादावये नये । द्रम्पक्रियाश्रये वित्त बीवादी दारवकृसे ॥ ४१ ।। एवेपाषु धर्मः । परतीवि पर्मः। मर्तिमस्य पदार्येषु संसारिण्यपि पुद्गला । पतेयषु पुगः । कर्मकर्मनोकममातिमेवेष वर्गणा ॥ ४२ ॥ (फार्म पुगहलमा) पानावरबादि नोर्म-गरीपदि । गाविर्गोपदि । एतेपुवा एपर्यस्पासमग्रस्प वीर्यस्य यशसः भियः । राम्पस्पाययोधस्य पन्ना मग इति स्मृतः ॥ ४ ॥ भगतस्मिभितिबगा। पाहुः कैरम्पमान्स्येि विवित निर्मातामपि । १ पास एएए रूप नोपहनम् । २ का २MI पूर्वन्ते पुनः पुन उत्तपमें रति पुरा । गम्ति विसीय गमाः। पुरम ते गताम पुइमाः। प्रयोदरापिताइस्मर। ४ भब्बते सम्पते पाता भगः । २ २५ पी। ३ १०१ ५ अनेकार्प-नाममाठा प्रसस भाग केषस्यम् । समिः मेवलपोषावारिष्टाप्ती नियती भियाम् ।।४।। सम्भन लब्धि। अनेकान्ते च विपाठी स्यामिपात भुते क्वचित् । 'स्पात समेत् स्वेषपेषु निपातः । महारको धर्मचन्द्रस्तत्पट्टे धर्मपण । तत्र देवेन्द्रकीर्ति भीसम्पन्द्रस्तत परम् ॥ १ ॥ धर्मचन्द्रस्ततो मानसागरस्तत्पदेऽममत् । सेन पुस्सफमेतदि दच (सोफरितेम्पा ) ॥२॥ इति धनञ्जयनाममाला सटीका समाप्ता १ स्यात् इलाकारको निरात एतेपणु इवि समन । २ इतः परं मुद्रिवस्तरेपषि पार उपहम्मते वपा-- 'वर्गनारी मग एन ममा रास्ले प्रसेस्पधि ॥४५॥ परमात्मा निम ठिप पर मेगारिषु । दिमापिभिरपारामलिविनामरि तिमिति द्वारपालिमामिला पिनौ। परमादीनपि ag: शरसोचममासान् ॥ रवि ३ पत्रादिदोपदचित्पाटमेश सपशोषित सहर

अनेकार्थ निघण्टु
गम्भीरान् पिश्चिमान् विस्तीमाप्रतापनात् । कपासमान प्रयम्मामि कबीना हितकाम्पया ॥१॥
पाणिभूरश्मियनेषु पश्यनिस्वारिषु । मबत्वप
मेवाबी गोमयमुपलमयेत् ॥
प्रचापतिपरिष्टो को मापुरभिधीयते । का प्रमा स्वर्पमापान्तिकापारमा मतः पवित् ।।३।।
सहित मिति मे भिर कमिति चोच्यते । बाममिमिवानाहर्मत्स्याननिमिपास्तपा ॥१॥
मग्निाव बहिन र पुमा र एष। शिचिनोमिहिताः सम एकाच मत मिली ॥५॥
हतो नारामा प्रोक्त पितो शिवाकर । मस्साचापि स्मृतो हसो हंसाचापि एिपम ॥५॥
सारसस्तरसिमेनो पतम्पपि च सारसः । राचापि पतियो रामा धोक्तो निभाकर ॥
विमानमुईताप स्पामवेतमा पवित् । हिमाराति स्मृतो महि हिमारातिय नासर ॥८॥
बनम्नमोऽग्निपरिपातो पााचापि पनज्मयाापीमत्ताच मत पानी बीपत्तो विस्तः स्मृतः ॥९॥
भग्निपिरोक्न प्रोक्तो नामरस्तु पिरोचन । विरोधमा बम स्पायचित्यो विरोधमा ॥१॥
पाम्पस पचितिः पचिनो निमयते । कम्युष पवितामा कम्युरिष्टाच भर ॥११॥
भासरोभनि समुरिष्ट व्हापुरपि चित् । पतङ्गो रिणामपा पतन मनमा स्मृतः ॥१२॥
कौखिको परामा स्याउकावापि कौमिक । अनुझा व पिन्जुश्च सम्मान महेबरा ॥१॥
पूषोतुर्मत सम्बक कील होच्यते । बम्मको बामो व अपाताचापि बम्युका ॥१४॥
भाई पस्तु मपवान् बर्मामुर रमते । मन्त्री पाच पानाच प्रहो बाबी निमम ॥१५॥
कतमी रम्मो सेया तिमाच महम्ममा । तमोना पहनापरिमाचापि प्रोत्पते ॥१६॥
मपूचा किरपा मेया मधाचापि कौलमाः । सपनिमत्तब प्रोक्ता सप्ताल्पे अषमा पचित ॥१४॥
बसमा चरा पता देवाच बतबो मताः । न मिन्न्यमित्युक्त ये बिमय मत पचित् ॥१॥
बासोबरमिति पातमम्बर च ममास्तम्म् । क्या समितीम पया बीर मत पषित् ॥१९॥
मि पानीपमुनि शिव भेप हि सुधम् । मिथोमपात प्रपः भिवं भेण्ड प्रचलते ॥२॥
सर पिचानीयावधिमे बिगुबरम् । स्पावन चाम्प निमित्वनाथ महारपा ॥२१॥
म तम समाम्यात बाचाबोलवस्तथा। अमृर्व बौमित्युक्त पिप समागम् ॥२२॥
म सहि प्रोक्त मृतमान सर्व तवा । तो वृतमित्ति प्रोक्त मृत पपिा वरिपत् ॥२३॥
पालीय वपि प्रोक्त चिनासाहत पिवम् । हस्तिहस्त कर मोग करो इस्ता प्रापते ॥२॥
कौसाविर प्रोक्त नीर व प्रसस्मते । बुबन समितं मापा भुवनं स्मृतम् ॥२५॥
प्रवाह कोमई कोमल स्पसमाधकम् । सदन स्मृत तोब सबन पाम ते ॥२६॥
तोप सपति पस्ति निन्य तप निगते । संबर चप्रोत संबरा पर्वतो मयेत् ॥२०॥
संबराचाऽनुपातो पो बिमति रसा प्रिपाम् । स्वरपालामाथि प्रारिग बाम्बरपेक्ताम् ॥२॥
पत्नी बोरिमा प्रारिमा समता मता । अपितिः पृषियी मेपा देवमातापितिः विचित् ॥२९॥
मम्मा भाषा परित्यक्ता त्वद्विारा नियबते । पूषो धर्म पचिो परामपि पति ॥ ।।
मा का परितो पणा बोक्ता प्रतक्रतुः । रोहिमेपो म प्रोक्तो रोहियो पुषः पवित् ।।११।।
परमेयो त मेरो नायो पाच पते । रामस्तु माननी यो रामो रामरविवचित ॥१२॥
रामाच मुक्तो बनी रामाच पबनाबना । बराह जया मातोपरपीबनमा पवचित् ॥१५॥
पराहः प्रबरो सेयो विम्युमेपो हीतमा । मगारात्मरोलमो मारियमेनाचापबो मरः ॥४॥
मग पाच मिस्सातो तबायो एमपी । सरीरषः स्मृतो रोप पुपाचापि परीरमा ॥१५॥

अनेकाप-निघण्टुः १०३ सय पृषामयं च मापनासाप्रमेव । ममा समास्यात कई रोम रमते ॥१॥ चामान्तमिति प्रोत्तमनन्तं पबतं वचित् । विम्मु धिमम्त स्पाम्नागाधानात उम्पते ॥१७॥ प्रमापत्ति स्मृतोरामा बझा चापि प्रजापतिः । प्रजापतिः स्मृतः सत्ता सता पर पम्पते ॥१८॥ नाम पपोपट प्रोक्तो बाम स्पायपि हर । वामश्च भान प्रोक्तो बामरथ प्रतिकूमारे ॥३९॥ मागोपो पोपको धेय बधिरामोपको मम । पराचार समाल्यातापानमः स्मृतस्तथा ॥ ॥ पासरस्तु स्मृठो मागो पासरो रिपनो मताधिमाषतुनिता या पापाच परिम्मत! mu पार्यों रामयामोत्तापर्षक विपो मता: सान पनमिति प्रोत स्निाय साम् निगवते ४२॥ स्वा स्वगत्य मा नापता मुष्पित । स्वमात्मा बनिरिपामा प्रोक्तो गामूविm कमोबिपनो मत: भारपि मा बाप । हुम्माहीमा प्रोक्तो क्षेपास्तु कमो विधः ॥ मम बाम समरिक मर्म रोग प्रचलते । मनस्तु वो मेया करो यत्वषोडपः ।।४।। प्राता भगप प्रोक्तो विहाराचापि कप्यते । पर्न पर्न बिगानीमा भने विपुतभुपते ॥४॥ प्रयुज्यते च पस्मिरिचर व सहावापयो । पर्व स्पबमान स्थावम्म बेगम उच्यते ॥४॥ समूच बर्म सहप्ता प्रबरन्ति मनीपिस । ममुराच मुरा सेया सचिोपारयोमुरा ॥४८॥ नापाच पिरोया पनपारच सविस्मना । गावच तवा मासु पचिस्मार देवगायन ॥४॥ ताम्पो हप समुरिष्टस्तामसवापि पतविरार । बाल्यानमुरामावलियारच चित् परान् ॥५॥ तुमी बनस्पति प्रोषता परिच प्यते । मिसरी गुम गीष्टः भिसरी पर्वत स्मात ॥५१॥ शियो प्रिय रम्ता दिन पती नियतते । चोरो मनिमामो मेयो पाताचापि महिमाम ॥५२।। मात्म रसतमुनिष भुत कामस्तव । नामो मृतको क्षेप पीनापाश्चापि रानस ॥५॥ डोनामोमि तमश्च रुपणो यम एव च । कीनाम कर्वको मेय कीनामाच गोरा ।।५।। भवनात प्रधान स्पारमा पापुरम् । मोतिराचनधि ज्योतिनमा मुम्पते ॥१५॥ ज्योतिष गरितो बहि काम्पेषु मनिपुङ्ग । प्रपान सम्मान से प्रधान तमुच्यते ॥१६॥ भपा संवस्तरो यो मेवाचापि चिम्मत । बमाहा महामेपा शिहरी बबाहका ॥५॥ सोपा पर प्रस्तोपर प्यते पृतम् । बीमृताच मतो नापो बीमत परपिरम्मुर ॥५॥ पौलस्त्य तु मत पुर्व पौलस्य पौदर्य मिगु । विहानकाच प्रोक्ती निरय पुर्ण रतः ॥५॥ पमन्य असर प्राह पर्ववतु शना । मितीमुखा स्मृता बापा पमराव शितोमुखा ॥ ॥ मेवा सीमति बिया मेवा मिल्यो मता। मम्मरोप विमार मनिपुर निपपते ॥१॥ पुस्त्व चापि मत पुर्व प्रस्थ पौष्पमुध्यते । पिासोरिपोरेया विद्यासस्वासबो मवा. ॥१२॥ मापाप्रति विमा धिमामा तु तोबरी। मामोति विसमा स्वचिस्यामपु मानिनम् ॥१५॥ माया प्रमाण gm मा । पमिनियमिति पात मसमप्यते। पार्वराष्ट्रा महाहंसा पृतराप्यनुता पचित् ॥६५॥ प्रभाकरो मत पूर्णे बहिबाषि प्रभाकर । तिनं भुक्तमिति मे सितंबर प्रथमते ॥१६॥ मसित रममित्पुरत ममित मलित स्मनम् । पमस्तु माटुलो डेयः मागको नामास्तमा ॥॥ पिपरकुमाहागारपिाचापि तवेपते । पमस्तु बायसो भयो यमः प्रेताविपस्तमा ॥१८॥ नाम सारत विशात्तवारमरबारमबम् । काम बनस्य कायस्पालाम्य स्तर प्रकीर्तितः॥१९॥ तुश्चापि मन रम्ये सामेति मुनिपुर । मारमेय स्मोको रसाराचेतसः पचित् ।।." भामुकारी भगन स्पारती तोमर स्मृत । मादित्य रवि रिपाइपस्याबाप्परित नग 100 पेपो रसस्तवा रे रो तोहितमुध्यते । स्मयो नितम्प स्थानितम्बपरतरम् ॥ हैन परिवति पिसे बनु तेगो निगते । पाररत प्रः स्वचापि मितातिती Ival एमावाली प्रारम्मा स्वमीमा मता। पापामो गिरिमा प्रोषता मेपाश्चापि मनापिभि Irom

१०४
भनेकार्प-निपण्टुा.
मिगते । मौवयं रसहिष्णमृत सत्यमपि पवचित् ॥४५॥
मा मालेति विपः रेबिरामिनीतहम् । पमिमियमम पार्ष एमmu
मत र पा विधायपावहारिकमेष प । पपमिनिपमित्युक्त पत्रं तामरस yिiwn
त्पमापनन मोत नीरमायतनं तदा । पुष्पं सोहिवरिष्ट पुष्पं बसु तथा ॥ven
पानी तुरगामी पो पानी स्पेनो बिहगमः । विपिनाविहमपुरवनारित्यास्तु वानरान् ॥४॥
शिवामितहमान् हनिप्ति कोरिया । पुष्पम्पमसिन हपभूपमतमा ॥८॥
रामोपावनीमेपु मलाम नबमु स्मृतम् । मुगा स्मृतातिरोपोगा समती ममरी सबा ॥८॥
मात्र भूगे मेय. कोकिला पचनप्रिया । पुतिन बालविर पर स्पागोगपम् ।२॥
रतं पापमिति मे सत्वर पोपमुध्यते । पियङ्ग रोषमा स्माम्मेवास्तितको मता ॥८॥
ससारे ऽवस्थित बिह शिस्तिक मतम् । परिचर्यकर्ष निकास्तु कपो मतः ॥८॥
मानारलपविता मयूर रापिनी स्मृता । रिमायामितिहेप केसरित्व विीपते ॥८५॥
मपातो मधुरा पाया का इत्पमिमीयते । महातमुस्यो नाम भयरकर ॥८॥
भाष मारमापूर्ण मानोवस्थापरपणम् । बिताता काममो दोपस्तरेष कति मतम् १८७॥
रतमा रिला हकबाप बेति हास्यते । शिरसो र यो गुम्बी निपचते ॥८८||
भाहत समीप स्यानिमित पोलिोलतम् । मएको मेला स्याभूवातको मता ॥८॥
भिरा पिङ्गरती पा विमान सदन मतम् । पुएबर्मा मिपिविष स्मारकर्षकस्तुरीरता ॥९॥
पापामाता मानीनो पालोव इति स्मृतः । रतफागनुर माता प्टिममताबाम ॥९॥
रनी हस्तियम्त स्पारन हितम् । तो पाएम् विपारामान हस्तिबम्बनम् ॥१२॥
पनापनतिरपाल साप्पपिकाप । अपाचीन मनोर पुरिया तु पेनुषी ॥९॥
मस्तु पारपे यो नो यातनवाहिनी । मश्वारोहो महपानोपाना हरप पनि ॥४॥
मामा रिमेय तुरा पबिता । माममात भवेत्तय पर पिधिनमुष्पते ॥१५॥
पुर' रिस मे गुम सरममुध्यते । गहन मुक्तिरवाराह तिमिमातिम् ॥९॥
मागणीरिवानामारगीभूताप तथाप्टमम् । तोम्जो शतिनो भयो रविना नुर रमत ॥१४॥
भारतमा विवादमा गहन मतम् । भान गाने मरे पितरं चापि गस्पते ॥१८॥
पार पाम इति प्रोत्तोषभुतु पितो मन । स्परिर्प पारेपनि मुम्यते ॥१९॥
परमेष्ठी मन पेटः प्रम प्रिपपुरादतम् । प्रभाग स्त्रीपुरेसर तूप इति from
पापा स्याम्मारितारणाय स्मृत । तापमार्माग्य बिहार्मम् ॥११॥
ध्यापपानापरा प्रोग्ता पानी तुसमुषय । मापपानु स्मृता प्राचित्तोपना १२॥
रोग समाधान न नारिल स्मृतम् । भानदात न तभिरता गरिमारणम् ॥१॥
पर रिए पातम्भ सानुग्पत । रिला पागर रोग प्रेनि बने
मगिर पर न लिन चापि रिम् । सनयमोमारि प्रपर दरमपते ॥१॥
पासोलो तो वो बोषिया । मानपुर frameतापो बायो मार ॥
गयाापा मारतोही पवित्रामा पागलो मारोतबिमार परितलि |
निष min रोमानिन । मभोपापा मारा पारित गमम् ॥१॥
तल रिपो।एमा मिनीपाविमा भरा बना Im
tum franोगा पासपुर। भरि प्रभारिपनि मगा।
परापानि म सामोस । प्रिसारगे पोसा मातार मिनि ॥
गायबोपन निधी पाणी गावोगा गि
गुषमा
त्तिो मारोबारीपारामा पानीति ॥१॥

बनेकार्य-निपण्टुः १०५ - मापुनिसम्पते तोप तेन बीपति पपकम । तस्य पनानिमानेन रामो रामापसोचम ११४|| पतत्य पर्व हातपाय च यत्पुरा । इलाम बताकर्मस्तेन तनः स्मृतः ॥११॥ तीम्मान प्रधान को नामानको मात । त पापपस्य पारे तेन मीमो मुशोबर ॥१११।। पस्म मुत्तिमुखा बानी पुष्पमालोक स उच्यते । य ग गानिमा व पुरमा मते ॥११॥ महासससस महेम्बास प्रचलते । सविस्तारयेच पर पूर्व तापयेत् ॥११८॥ पूर्व सापयेवस्त पिपाव त पूपप । तस्मारपि यो भय त तु भूषपमुपप ॥११॥ सिंहानितान्तसौपीएस तिहावि स्मृतः । पे हि स्पष्टप्रवक्तारो मतास्ते म्यातकारिन ॥१२॥ पोममित्त र नाम्मावि सफीनाम प्रति स्मृतः । योमरोमधिसमस तु मावति स्मृत ।।१२।। उपहार यो हन्ति सम्म इति स्मृतः । हर्षे गर्ने सुचेको भूगीच प्रतिमारते ॥१२२॥ स्नेहमाग्मनये चैव मनामी निपपते । मातीत्यते यत्र सम्यात्म प्रथयते ॥१२॥ तसाच समापान समापिरित्ति पते । सर्वतसविनिमु तो स हि बात इति स्मृत ॥१२४॥ निर्ममो निपारो शिम सिमय । प्राता शाकामा समाविस्मा स सभ्यते ।।१२५।। मुहरोमसमतिर्वस्तु सम्मेवार पौरका । वृत्तिमा तु पापाना परो बहि तरिम्या ॥१२॥ माहारयवहारे पा प्रीतिनिरपस्करा । परस्पर स्पारेषु ततो पेषो प्रवर्तते ॥१२॥ विमम्मानमवापि हा प्रौतिनिपापा । पा स्पातिरिति प्रोक्त वयोमानारम्यते ।।१२८।। कौतिल्पासियमोमोमा भगवन्निति चोच्यते । प्रियकरानेषु यः भर सपार इति स्मृतः ॥१२९॥ रजस्वला तुपा मारी ला बोरया प्रीतिका । प्रीतिविकिय स्वारमालिगिसन् विपुम् ॥१५॥ तमो तित्ति पीप्तौ तपो ६ स्पा पार्षक । मोपबातोलो बोबत गराइति स्मृतः ॥१५॥ मिम्पाधिमानी नास्तिकप्रीतितः । वामः कोपा पूर्ण प्रोमो मध्यमे ॥१२॥ मन्त मदो विपादाय यस्य स स पदमा । ममते भारष पो मृते भर्तरि गोगा ॥११॥ मनमार्थोऽनमानाति स यामी निपच्ने । भूमात्री पमिमी बाला भाभीयानीविनी ॥ परित पबीमार मोठपला परामुमन् । पा फीचमाच न्वकोऽपि पावित्ता त गम्यते ॥१३॥ पुर्व सोमव पर्म काम सम्म तपा। नुनय च सहिष मेरा पस्त्रमाविषु ।।१५।। विम्बारक्तपरा यामी निम्मोष्ठी का विनिमित्। पा स्यात् भग्नपरा मनमा त बिनिदिमेत् ॥१४॥ पूर्वापारप्रतीकामा हुमी मम्माम्तन ची। सम्मविपिस्ताङ्गो ता मानिनी ॥१५॥ नाबस्यक्ता या नारी समिता का विनिहिमेत् । या मत्ता मतगणपोतिाता या मत्तकामिनी १३९॥ मूरािम रिमुहिम मन बाब इति स्मृतम् । मृरि भयो दरम्म्ह तस्माद् रिममोहित ॥१४॥ चतुष्पणिमतिमुबो कोहितपीच एव च । निर्मातावमापाबमा राबनः स्मृतः ॥१४॥ रोपमा या मरमारी मानिना तो विनिमत् । पोषमान विधामाला परिमाणम् ॥१२॥ ताम्मामुपेता बनिता म्यप्रोपपरिममता तुपे वानिकी यस्पा ता स्त्री पनीयलोचना ॥१॥ पर्चममाननियोंपोपनिश्चितः । राजीवमात्ये पैतम्ति स्तिाव सितातितम् Ime तितोपात्तीता रामावतोबना । बलिमिपरिमिक्ता महाठी पाहता ॥१५॥ स्पनमापनिवापत । बस्थे ति समय तस्मैवार्य त मर्मसंयुक्त ततपानिमुमते । बहने पारणे सामे बहने पर्मपिता ॥१॥ रमाउने सझे माफ माय प्रयतते । मझापा विधापा सप्ताामस्वमुमामिनि १van विषमातररा पते यात विसस्थिताः । कोठरस्था पति या वर्पकारवागार ॥१४९॥ माताप्रपाम्बो पस्तुलानामपिरोद्गम । सौमाम सि कोम स्मितम् । वाताईत मान्य तरिहर्सडितम् ।।१५।। * मोट--मूछ प्रतिमें १४ मे १४८ तक पयोपर मोदी पर है।

बनेकाम-नाममाछा ॥ मुम्मो बाह प्रस्म सम माप इति विपीपते । बिपिन भूम्पमित्पुरतं विपिनं गृहमेव ॥१५२॥ परमपर्म मान वसनीयावाचक । तपिश्चाप्पाच पानी पीतमुष्पते ॥१५॥ नहार मातमित्यन्त प्रदोषान्तो निती पति महाकपिपीचनम्बयाते निषष्ट्रसमये पम्पसको बनेपाम्पमो शिवीपपरिया ॥२॥ एकामरी-कोपा विवाभिमाननीयानि प्रपितोय प्रमाप्यते । ममरेच बीकाबरमानमामिया ॥१॥ बनमा स्पष्किाम भीपरीस्बर । म रमन यो मानवमातरी ॥२॥ नविन रिपो भवोविन्द मिव । मोगा मौरनत स्पा पम परम्म नि । को पालामा . स्पायुपमामिषु । सा मुमुझे पुस्तु भूमौ पम्मे चलन irl स्पोपनियोः प्रहम पितामनिये । स्वाबोमिन मुचे मून्ये मुझे बिरि हो रौ ।।५।। गस्तु पातरि मर्च पा पोतो पो पिनापके। वर्षे पिशि पनो पवे भूमापियो पले पिरि 10 बस्तु मुण्टो मा किरिया , पुनी। मम्मो मेप मेनिन बाबानबोरयो In व सूर्य कामे तु मिर्मत गस्तु देवरि । विमो तेवत्ति माथि विमाया बिबवेऽपि च ॥८॥ मो नमे थे पायौ जो गावाने परिपती पिया करो ठो तौठो महेमरे ॥९॥ भूरे मामा भामेर मिये पनौ । हो भनिने समे सलार्या बस्तु निारये ॥१॥ जाये तस्तसरे प्रेग्न्योस्ता पुनर्गमा । बो भीमाचे महीये । पल्या तानयोः ॥११॥ बायचा पाने की बातरि बर्मिती । पूरिस्पचितातु मो मो बाबरपो' ॥१२॥ मिस्तु मेतरि स्तुत्यो नौ तु पस्तु पातरि । पाबने बरपाने च को माबोगयो ॥१॥ ना: कस्तो भूर्भुगत्वाने नोर्म मामि पियो । भिरप्ति मा माने भीमामारियमकम् ॥१॥ म पुतिय पर्ने पस्तु मातसिनिय समाः । यास्तु बातरि बाप याने सामान रो भूवो ॥१५॥ तीचे वानरे पामे रा स्वबसे मनो। रीमे पये पूर्वी चम्नेपि ॥१॥ मी पुन परेनी भयेको महेन्चरे । परिवमपितास्वामीप वा स्मरेम्समम् ॥१॥ मुमे मा तुनोमाया की सबने निमावरे। सिमे पुर्बम बिमोने वा परोखर १८॥ Himal हो निपाते चास्ते पारधि मूलिनि।मेरमात्मता माता प्राकरिसम्मता ॥१९॥ - प्रति एकरभरी नाममाला समाप्ता जा धनञ्जय-नाममालागतशब्दानुक्रमणिका प्प श्लोक रोक पृष्ठ ८५ श्यक सग्द वम्बम बन्तरिक्ष पृष्ठ ७१ २८ १४५ बए २० ११७ मत्पर्ष बदम मरितिसूत অপুর वी मम्रय १२४ । ४ मेट मन्यकाम्पप धम्तेबासिम मम्वकार ५८ ३ ८ કર ममम १४८ १२४ वम्पय मम्बवाय १२२ ५ H मम १ ७१ १८९ ६७ पक्षि मसाहिनी अखिम ७५ १६२ वन्वित मन्बीत महाय ७८ " ८८ भबर माधिप पोषाग वम्पन् मनन्तर मनन्तारमन् वनयम अनभ्राट मनक १८७ ७६ ७ ५ . १४ माग्नि मग्निसून मपणन ७३ ७७ १८ अपत्य ९ माम मनारत ८९ १८९ बपाज मपारवार मप्राम अप्सरोनाप २५ अग्रिम ८ . ६६ ८ ८ १७ ३८ २० ६२ ८५ ४॥ १२ ६ बाराम वगील महिम २५ २ १७४ ८४ बमिमिप मनिमेष बनिम मनीक वनुकम्पा बनकोम बमुग मनुपर मनुस अनुगा बमुगोबिन् अनुपम् १४ पि ५ बम्बि बमय ममियोम ममिपम बामिन्प मभिमाप बभिशापुक अभिमारिका अमीम अम्पर्ण ४ ८ . ४२ UR २१ २१ ४॥ १७ २९ ८८ १८५ ८८ अगर्म ८९ अगम्तरिपु मन्यनरमम" भटनी Y अरबी मायन्त ८३ बोहम् ४५ ६२ ५ बम्माम 14 अमोरह ११ १८५ १८ ५ अन्तकरम बमर .

घनम्मय-नाममाम पृष्ठ श्लोक सम्प ममब रमेक पृष्ठ पभोक मबरम ७३ बास्यन्तिक बारेम ममत ८४ ९८ मामात्य ९ ममा अमित्र अमृत अमृतोद्भव १२२ १८२ २२ ६२ १५ २८ ८६ ८५ पानम मममम बरसान अबसर्प बमस्याय मविपुर बपनि भरमीक ५४ मापमा १२ २४ वर १ मामरम ५० मम् . १५ पाच बाम्नाय ६८ २८ ५२ १२४ ८३ अम्मति बष्टपात् ४. ९ ८ माबम मार्या मालम्म्ममुरा {W १० ६० अष्टापर ४० बयम ८२ ६ मसि असित असुपति ८५ १४८ ७ मापम्प माठी ७२ १८ मरथ्यानीचर बरम् २ ८२ १.२ १८८ | भावटि २० मस्तुकार . जराति अरि २२ २२ ७२ मासु महन मान्तोपित बहि महिए ८१ २९ ५४ बाबास ८५ । बाति ११८ । बाय पापा बाम २ ८. अधि २३ १२८ / मापुससनि २२ मात्पर्य ८ ७ ५५ मासम भासम्बी ५१ मर्मस . १५ ९५ नाकामिनी भाकाण ९ २८ बासन ८२ १२१ मासब भास्थानाधिपति ५६ २ २६ २० ५८ । बास्पद मर्पमन् मर्थन मईव माकानिमय ५२ मागम मागार भाचार्य मारि n मास्वमित । ७४ अभिप्रम अमीक ४२ ७२ ८८ ८२ १४८ १८६ माम्प १५४ १२२ १५८ १९४ न . १ ५ ७५ ८ पातपत्र ९ इन्दिरा इन्दीवर ७३ १५२ ७२ मावान मारमन - ។ मात्मन् ७३ मुमौष्टि दशमानुक्रमणिका पृष्ठ स्लोग १३४ पृष्ठ मोक १४ ५ लोक १ ५० उधोग ऐका २ लागि १२८ ८२ माप रामन १८९ १५८ २५ ८८ बोष्ठ मोपपीवर उपकप १२ २४ उपग्यत Y ९ ६ उपमा ७ ७८ ६० ६८ क PAREERE::..: १८ उपमान 14 ५२ 1203 ८२ उपक उपम उपेन्द्र १७५ ७४ ५२ कता ६० रित सान चित् २ २ कर ५ ५ १ १ उमापति ७ १९८ हामृग १२७ उ उरम उरीपन रम उ उर्वी MA पटाभ कदि (पती) ५१ फरिसूत्र पटीमुत्र कमि ३५ पठोग ८७ १२ ३ ६ -- . . १८४ १५८ १५८ १५८ १५८ ४८ १८४ उरवण ८० १४ 20 उप्प ४६ ५ उष्णपाप FEE:...:E,,EER . कश्यप उत्कर ਚ २३ उच्नम उजित रा २५ ८० उकम्पिा उत्तमान ५२ उत्तरामापति ४८ उत्तानमय २ ८७ २० 94 करीत ११ २२ ९१ । बस ऊर्गपिन कनीयम् २१ ४२ ८२ उत्पक रोना एसब २२ ११८ ६८ बम २५ ४८ ***** ****"ะงง ๒ :: ८७ कपर्दिन् कपामिन् कपि कपिप्पर १८२ . ८४ अपि २ . ७ २. 12 १२७ ४८ उपवन उपर उमित् उगम चम्पाव उठ एस्पस्नी एपरिङ्ग एरागारिक एनम कमनीय D ८ ८१ १ २ 12 12 ए १५८ १६८ १५८ १७४ ८५ २५ RA ८१ ऐबम ऐरामपाधिप ।

मनम्जय-नाममाछा BL श्लोक सम्म AL शेक ११ सोक २२ ४१ ३ ५ कम्युति परिन् मुगप्रिय मुरविप्रिय २० कुम्भिम् गम्मिमी ८८ " १६ पामिन् १८ कामिनी कामुक १८ कामुकी है काय कार्तस्वर कार्तिकेय २४ कामुक कामु किन् ८८ १८ ८९ १२४ ९८ . काम १ . १२ २२ कुममय - ५९ . २ ११८ १५२ १२ पात १४५ १४८ १२॥ १५ ४ ८ .२ ६२ . ५८ मातम काही काश्यप PLAL कुपतिन् सुम पार कुति ८१ ९ ८८ ८. १८८ पाप्म । DID {.. " Whjlar Paint काप्यमाम काष्ठम्बर विपरन्ती १२ १२ Laya ७१ ८८ ७४ १५४ १८. ८४ पामावी कस्याम पा पाम 10 ८५ किरम १९८ २७ १५२ ८२ IAS ९ ८८ २७ he 121 कितम किरण मिरात किरीरित .२ कसूरी पप्पर . कीचकसम 12 AR १५३ ५८ .८ . कादम्बरी कानम रानीनगनक ६ केपरिन् दुभि २. (१८ ८५ म . १७ १४२ कामापब सिन् IDH । कुबेर , ४८ २२ JA १५८ कान्तिमद कोक ४ २४ ३९ -- २१ बाम सम्दानुम्मणिका प्रष्ट स्लोफ ७८ al Sta म १८ ४.” 14 गग गम पारि कोगर कोप गुपम्यान सुमिना ३४ ८९ १८० कामम ८१ १५५ सुपर गगन ३५ ७१ ८९ ܬܚ ८४ २२ ૧૨ १८८ ८५ गा कोपर ४ { ११२ १०३ महिली ७१ २४ ४० ३ कीमुरी रम्प नेपा २८ ५४ पा २० " ११४ ८ । कोपिर कौमुम ग्यानि - ५६ ग २८ गोत्र गोत्रा गापा मापुर मायाम पीमिनी ५८ २८ १२४ गयन त 10 पता ७८ १५२ ८८ १८ औपदिन सने १२ २५ १२ ४५ १२८ माबिर गौतम पौर गीरी ५७ ७२ १४ MAA २५ ४८ मभित्र गरपवाह समम्ति पार मएपन् पर गर्ग पवित पस १८८ ४८ पाकर भमा प्रापिप ग्रामपाक पीता । २१ ४५ ५ ग १२ १ ८१ ५ . ८२ १ ८२ Ubah १८ . २५ बन ४८ गह्न 12) 1८८ 1122 बनमार बनाबम ८ १८ १२२ ३ सिनि भिपा चित्र पौर योग मुष्ण सुप्त सम भोगी १२ ८२ ५ । वृणि ७ ११ ८. ५२ पारी गागीविन् मिर गिरि पिरीम मौषिम १८४ १६२ ०८ बोप माग ८ . च १८ । , ०६ ८२ एमा २५ स ८८ २८ १२० । मनिया गुगापति गुरु १५५ १२१ १२९ ११२ पनयनाममाळा रसोक श्लोक १८ सम श्लोक प्रष्ट १८ ४८ पृष्ठ ४ . m चतुम त चतुष्पात् २ पृष्ठ ५ ४९ २४ २४ 20 ४ मममी मनपर बनान्त पनि अनोपहरण ४८८ १२ चनमस् चमू १८ ८५ तटोच्यास सहित तविषम्या प्रति ३ ९ १८२ १४ ७ तमम २ १ ૨ ६० ८५ १०२ बदम पहा २९ बादम्प गाव ८१ १५० ४ तनुम तनूपरी तनुनपान् तपन तपनीय तपस्मिन् राम तमस तमोरि 38 ८६ ८५ १८२ १५८ मातरम् जानु २ . १४८ ९ बाया ७२ २२ ७१ १४२ चित्र 2 १०४ ५५ १८२ विश्या गिन निष्म चिप ८. १५ १२ ५५ १५२ २७ २४ ७ पीपत ९२ तरग तरंगिनी तरपि हरवारि तरस्थिन् पूजापाण 2 बेतम् ८१ 1८२ १ ५ ८१ ८४ . तस्कर 12 जीवा ८२ ८२ तापस वामरस तारा पाम्प ताप २ १ २५ १२ ग्यायस . R ४८ १२४ १२८ ४९ पिन ११८ ज्येष्ठ ज्योति २५ x १८ ८१ (१८ 1८ तिग्म २१ १५८ १८८ म तिमि ८ . मरिति विमिर पबत् बगती ५. . १४८ १८४ ८ ६ प सपरन्तु ८४ २५ पिपर तिमियर तीर वीर्ष तीपर पटर १५६ सत ८ १८ त १२ ५८ ५८ ५८ ३८ १२५ तीन ११३ दलोक सम तीर्ष कर तीप पृष्ठ ५८ ८० शयानुक्रमणिका पृष्ठ रस्मेक पमीस्म १२ १२४ पूपि . ८ १८ . पामाप्रिय देह १५८ रामोदर ४४ ४ २ . २७ ર - राप पारिमा तुरब तुरंयम तुरामाह दूम तुसाकोटि तुस्म तुषार तुहिन त्यारि पोस् होप पुति घुमणि ८७ १८४ . १ पयुमी ७१ पुस् १०२ ७१ १२२ २२ ५ देवम् तेगम्मिन तोग तोमर तोम तोष दासी रिपरि १२ रिपाक ३२ बिगर १२ निगम १२ दिन २५ २८ विवरण २ २६ ૨ पिम्पबामपति ५८ पीक्षित रीवित २० ..36 mont:33-RDERE :::"5a अपिण इम्प ४० ७८ " ५ ५ पाक ८ १५७ १.२ ५४ ४ ५ ८ ४ म दुहिम ३ བཟླ ཝ ཟླཝཱ བྷྱཱ ཟླཝོ ཟླཝ ཟ ཉྙོ ཐོ ༢ཟླ ཟླ ཟླ 4 ཤཱ ཀྵ २ २ ६९ ०१ १०५ २ २ शिवम पिने मिपथमा त्रिपरि निमार्पमा दीप्ति २५ ८. सर्व हिप ८९ ५८ १८॥ १२२ १२ निरव १८ तिरैप ८८ २४ ८२ दुरित दुर्य पुरन ४२ २२ राष्ट्रि ४६ १२ २२ ४ रित् बमबम्पा २२ ५४ २२ २ २ ४ पातमास गीत नी ૨ ५ ४५ ५४ ८८ ८२ ४७ १५५ बनगम ७ पपिव पपिण १८ १६ ४८ दृतिरि २ परीत ८१ ४८ ४ ८ ११८ १९ १५ भमाय अनुप ४ . पर्सनीय ८५ १ ८२ ५४ बमनीबम पनवयन्नाममाछा पृष्ठ प्रष्ठ रलोक बम्मित्त ७७ नित्य निरस . ६ ७४ ५ मनाइ नन्दन नमस् नमस्कम् मप्राद ममुचिषा नयम २ २८ १२ ८ परिणी ॥ १५२ १५८ Y पम पर्मपात बमात्मन ५८ ५८ ८५ पप २८ २८ १०६ मरक मसिन २ ९ धातु पानी पानुक ३ ५ मय ७ २॥ मार बामन् पिपमा नियोष निम निम्मपा नियन्त्रित नियामित नियोग नित निम्मूह निमय निबसम नित निवेशन मिया निणर निगान्त निवार निपारिन् मिप्माव निसर्प निस्तक मिम्मिय माग १२८ १८२ 25 ८ २५ ४८ भागरिक मागारि ११ १२ ९ १ ५ » FEFER-EEEEEEEEE: २७ ७२ ५२ १४८ १८ ५८ ५० ८ १६५ ई धूम पुटि पूत पूसि भूमिहिम पन धैर्य १८५ मापहारि मापाबय नाभिर भाम मारर नाराष पारायण मारी ८८ ८० ७८ १५८ . ५२ ८३ मीष 10 १४ 100 ८४ माता ७ ८५ पधिनी पानी मास् भीर मोम मापसष्ठ ६२ भीमपिम्मरी १२१ निसराय १३ भ १ नाम २५ १८ मिरम्म निगम निप्पुरत मीपसमा . २२ . १८२ १४ मीरार मार्ग ८ निय ८८ ४ निमार मपुर . २८ १५ बसायी-मीर. मण मिम्बिनी निमग ४ . २८ सन्नानुक्रमणिका पृष्ठ श्लोक al स्लोक झम RA नपच्न परासु 201 पाशित पापनीत ८ गरिता परिचित परिपयन ५४ ८ ८९ १६. नैयायिक १८ पापाप पितामह पित पिनर पिनाकिन शिपिन १५८ ७६ प १८९ ४ १८१ २८८ १ २ १५५ १८ १८ पभिन् परिवार । ८६ परिपूर ५ परिपठ १ पाप ७५ पर्वम्द पर्वत पक २९ २ ८१ १ २ पित ८ १५२ १४ ४ ८ पिपी पीठ पीत CA पंक्ति पटू पदन पगिरी यही पुषनरी ३२ पुटमेन १२९ १२ ve १२६ . ५४ M ८४ । पवन पवनपुत्र परमान पवनमत प पाए पापा पार पाटन पाणि पाण FREEEEEEEEEEEEEE.. ३ पत्रिम पताका पनि पतिबनी पहिला 4 वजन २८ ५ ४८ e. १० ४८ ८ १४ .. ५८ ४८ १२ पगरीम १ पुष पुनम् एमम् १३ पुर प । पार पुरधी-पुरन्धि १६ पगम परी ४८ पुर । पुष पुरुषोराम पुषहव पुरापनि ५ पति पत्नी पाण १२ ५४ पाताल २६ ७८ पाबम ७ पपिन् ११४ २८ पार २३ 1. १८ १५८ पाए । २ पाप पराग पनि १२ १२५ H पाप्पा पच २ . पुमिन पुनोमारि पनाम ३० 40 पापबार . . . पम् पुपरिन् ५ पापा पतिमा पाकी ८. ( ૨ NA २० ८ घनमय-माममाठा पृष्ठ रमेक पूर श्मेक श्लोक १५४ ४ ८ पुपहेति पूग पूषन् पृतना प्रवृत्ति प्रशस्त प्रहहा E» - 12 ८१ प्रसव ४ ८ र ५ प्रसाधन ६ ८ ८ ४२ पृपुरोमन् पुरु प्रसूम प्रस्तर ८५ 128 ८२ 741 ८. प्रस्म {" पृषी है . १२१ १८२ ८५ १४२ ५८ १८ ८. । ७५ प्रसमा प्रोक्षु प्राकार प्राक्तन प्राचीमहि ८ ५५ पेशल पेभिन पोत पोत्रिम ७५ मतिमून पहिल २ held . १ 17 १८ १ प्रकर प्रकृति प्रमाम ८८ १८५ प्राभूत प्रायम् १२ १२५ 24 गाम (पाण) बापबारण १ बापसून . बाची (पानी) ८५ प्रामेम प्राषिक प्रासाब १२५ १७ १८ प्रमापति पामा प्रिय १५४ ५ प्रधा प्रमापिनी ५ प्रिया प्रियाम्बिका प्रोव बाहु धिरस् विशिनी : २३ २२ १८ ५६ ११२ १८२ 17 12 प्रेमन् ७७ २६ प्रविधि प्रतिरोधक प्रगत प्रयोष्ठी प्रत्पर प्रभम्जन १८ ११ बझन ॥ ८१ ७५ प्रेयम् प्रयसी प्रेरित रेष्ठा प्रेप्प म भ प्रम । भग मट {" ५४ १२८ अमपाधिप प्रमा प्रमा प्रमोर प्रीम पभिन् फहिन् फवाहिन मा १ ५ . मन मनुभसा मर्मन् २१ प्रमौर ९ कास्न ११७ सप प्रष्ट पृष्ठ श्लोक १४८ श्लोक समयानुक्रमणिका पृष्ठ रसोक प्रानुगामी २१ ४१ प्रातृम्प २२ म भरगाम्बम भब ११२ सम्प मन्यु मंगलायन् मय मयूज मपूर मराह मरीचि मरल ११ २८ भमन भरिक मम्प भायय भापौरपी भाग्य ५२ मकरणम महरन मनु मयत ८३ १२५ १०२ ७१ ३ ८ मम्म् ५ ३२ भानु ४६ २१ ५९ ८५ मनीष माम मंगमाप मनित मतमय मतान्म मरवा मरू ३ भामा भामिनी भारती भार्या ॥ . १५ मरत्मा ८८ १४ मर ६ ८ २८ ११२ १९८ २३ १२२ भावुक माम् मामुर भास्कर मत्तपारम मषित मवन मरिग १५२ ११॥ १५२ ५९ ३ ९ १२ २५ मच ५८ भातर भिम १२ १२१ मस्य मर्म ममिन मस्सिा महीमम महति महम् महापीर महास महिला महिपी मही मपप २ । २५ ५८ मषु माग ५ भुष मममम १२१ ८२ । १४ . ३ ५ ८१ . १८ सुषम भ भूमि भूमिपर भूमि २८ १२८ ममून मप्यमान्य मनम् ५ मनम्बिन् ०१ मनम्पिनी मनीपा मन्न मनुष्य मना ८२ | मना २ मंद ११ २८ महापन माम मा मानंग मातरिन् मातुपानी ८९ ९ मपम २२ मृग भर १०८ १७ २८ २८ १३८ ८1 मुपन् ८३ मन्दामिनी मान्दा १५० मानिन् मानिनी मानुष मार १२० ४३ CR मन्मन לט २८ ८१ भनय-नाममामा पृष्ठ गोक पृष्ठ श्लोक रसोक मा प्रम २९ मार्मम माग . २५ रजत रबनी २५ मैत्री मैत्रेयिक मैरेप माय मोग्य मौक्तिक मौर्षी १२ १८६ मामा ८८ बस् . ८. मास्प मितमम ८८ ४० २५ ५२ २ ८२ २ य रम ८ १८ १८ मित्रयुग निहित मीन मीनाकर ८ यनागि यदि यन्यू २ । रमण रमणी रमणीय १२ ५ १७० २५ ९८ यम ८५ ८५ ८ १४५ १७२ २० मुग्म मुग्धा ममता यमगनर यमक २ १७ रविम २३ २० A रसना ८ १८५ ८१ २९ मुषा मुनि मुरमूचन भरम १०५ यमुनानक यक्षम् यातुधान पातू याप पारम् २ ३० ८८ ८९ ८४ ८. १४ राम ८ ८ ५ १ H युग ४८ २ २ २ R राणन् रामममन् रामराग राबसूर्य पपिचर राभिमागर रामा ११२ २ ५२ २९ १२० युग्म युव पुर युधिष्ठिर मुमति ८. मूर्ति मूर्यम् मृग मृगनाभिचा भूमाफ मृगम मृत मृत्यु मुड मृषा ४८ ९७ ४४ २९ २ ८५ पपिर १.८ २१ ३ योगिन् योम्पा मोवा बोषित् बौवन पौवनिक ६ ८८ १८६ ३५ . १२४ १२३ ४ मेसमा { सविर ११८ १८८ ८९ ५४ ८ १२ र ८॥ ५९ १८ प स्पागोवा २८ ११८ मेषपण मेरिनी मेषापी ५ ४० रक्त ८१ १८८ १९६ रामानुक्रमणिका श्लोक | सम्म पृष्ठ स्लोक ८१ पृष्ठ पष्ट श्लोक परम पस्स्य ७ १४२ बमू माग्मिन् रेवतीपयित रे रोपम रोपण गोहिनीपति रोहिवाश्म २६ ७८ बन ५ ८५ बनम्पति बनिता बनेपर बाचस्पति मानिन् पात ४ । २५ २२ ६७ ५२ ६२ १३ पावापन ३३ १५२ १२ १८ मन्मन् मरमी समीपति ल ७२ ३८ १८ ८३ पुस् बप ७८८ १२४ संबिका बयम्या समा २ १८ ८९ पान( गाण) बामबारक बागम बम ३७ बाणी (वामी)२ मामलोचना मायु १२ बावपथ २८ पायुपुष ७१ मार् बार्श BY सवान्त ८ १८९ परटा मपन ५४ M बपिनी काना . ८२ १२५ ८९ ७४ . ८८ जोरम कान १५२ ८४ १८० १६२ सप्पक ७ २१ बिहान १२ १२ १४ १२८ १८. बारि वारिपि पारिगमि बारमी पार्मोन २ बर्नुस ८७ बर्मन् ७८ पईमान बर्मन् पावस् बहिन(बहिप). बहम पकिमान (बजीमन) बम्मम १८ ८ २१ १२१ १२४ बासर ૮૨ १२१ १४. बामा । तोह होहित मोहिनी १८८ ॥ बास बासुरेश य याता २७ बाहिनी ५२ ८५ बनम् बलोग ८९ ८४ २८७ ५२ बमति यमु बमुषा बमुम्बरा बमुमती । ३ ૧૧ विका विरम विषमम बिट बिपिन् विडीयम् ६ १८ १० ३ बचिन् ४७ , - ५ पनमय-नाममाता श्लोक पृष्ठ लोक श्लोक पृष्ठ ८८ पृष्ठ ८ पितष ५ बिरस्प विश्वस विश्वम्भरा ८८ वैधारिण पषण वैवानर ४८ है पिराब पिचमाम पिचत् ८२ . ९ ५ १५ १२९ १२७ ९७ १८ विपनय विपपर विपय विकिर विष्प भ्यतिकर म्पपरेप पसन १२४ १५८ ११८ १८६ विमान पिषि ८८ ७२ ७२ ७० प्पाम ५. १८ العهد . ५१ ९ ८८ १८५ ७४ १०४ १२७ ८४ १८ विष्ण विस्मय बिहायम पीधि बीवराप २८ ११२ अटी (पति) ११ २ १८१ प्रतिन् . ८८ २१ ॥ ५८ ५८ ४ मिनतात्मा बिम्माग्य बिपिन विफम निमारमु विमु पिमम वियत् भियोग पिरपिन् मोमम् २८ ५३ २० बक फोरर बस विन ४ १८० ८९ २९ ६६ ८७ ३८ १८३ १२८ ७० प्यात महन् पा १८ ३ ८८ ५८ पनि पानीश्वर मन्ति पतरि सषितमत् २९ ८१ १८५ चिम्पारा । २६ ५ ६६० ११४ . अपम इपमापर पुषमेवर पूपर्मन अपायपि ११० मरर १५ बिमोचन ७ ८९ १५ ८ . १८९ १४८ १७३ पति मंपा ममु ममुविजार गर मा ८४ ३२ ८३ बेपन १७२ ७२ २० 1४ बिपाम पिपात विगाग्नि । - ८ देग्मन् पाया للطلبة 3 . २२ 2 १७ विगाहारा तिमिग Ct १८१ 10 गारी गवरी गालि १२ २२ ८८ गरिन् .

१६ सम्मानुक्रमणिका पृष्ठ श्लोक पृष्ठ स्सोक श्लोक {: शिव ५८ परण ९८ १९८ . ८३ परभ ४१ सरसनोमय ३४ परीर पृष्ठ मीर ४८ पुति भेयस मोनि( मोजी )५१ मोमीबिंब ६ पोरस भोता पोष सिप्य मोम सीगामुक पौतम पीपु सी पपीम गुक्तिम ८८ १२९ १२ १७१ १२६ १२७ परीपर १४ ८८ ८१ १८७ पन् १०८ १२ ७ १७ ८९ २३ पमिन् मसिपम घापत् १२९ बमम् स्वेत स्वतयाविन् सोवमीम JU पुषि मुस-सुर पाक भुनासीर घुम गुपिर कर ८. १७ १९८ प ८९ ८२ १७२ १७१ ८१ ८ ७ पास्वनीचिन् १४ पातिन् ५ सम्म घात ८२ पारसी-मारदी 1 पाहिन् १० पाई पामि मासम ૨ पिपरिन् Y घिमिन पिचिपाहन ७४ पट्पर पदपन पग्धीच पण्मुख पाणि पोग्न् पूपिन् सहिद सहित १६० ४ ८ स गिन् भेमपी क ५५ ४ ८० ३ ८ . २ ८० १२ १८ संयत सममिन् संयम मंपित ससरण संसार स्मृति २ पैमभर भोषित पोपी ३ . १२६ ९ १८८ १५ १२ ११८ ॥ ६१ ८१ प ७३ चिपिषि मिर सिरोपर सिरोषह शिहा ५२ ५ १ ८१ पौर पौरि सौर्य प्पामा स्येत स्पेनी ८२ २५ संस्तुत सस्पित संहनन सहित सम्म १८ १८ ४८ शिळीमुक्त है १४८ Vo ८८ ७१ ९८ सक्त १२२ मिडीमुसासन ४ पितोचय गिनोमय प्रबग भी १८ ७६ २ ९ १८ सम्प १२२ धनअपनाममाम पृष्ठ रोक स्मोक पृष्ठ ७ सगोत्र ३ २. सप्तापिप् मप्ति समोचित सम्म समित सबयम् सबर्ग २ ११२ संगत संपाम ८० ५६ ८ सम २७ १८ १८ संघात समाति सम्प ५ ११२ ४१ ८ २१ ४२ ४७ ८९ ७. ८८ २ ८५ समित सवित्री सम्पसाभिन् सर सहकारिन सावन सहपरी सहसा महाय सहसपात् हमान सहित साकम् साबर सावन सापीयम् संशा संतत सतत सती सतत सत्य सत्कार १७२ १० १२९ १८२ ११८ १४ ८. ५८ १११ समा ७७ १२ समब समर समबर्विम् समयायिक समवेत समस्त समाण समातम्भ समिति समीपर्म समीप समीरप समुबम समा मम सम्पफ्य सम्मुक्त सम्पनी सम्मृत सम्मम्म सरभि सरसीपह सरतत् सरस्वती सरि १४१ ६२ १४ २६ १२ ११२ २ - ८० सा ८ सवन सवरचित ५६ सरा सरागति १२ सपुषित । ५६ मान साप मा ६७ सपमम् सधर्म सभी २ समातम ॥ सनामि . ६ ७७ Y . १२२ ८ २ सामुमार साप्पी सानु सानुमत् सामन साम्प्रतम् सारमेय सा ११२ १ २ १२५ ५ ४१ २३ 44 १२ सन्तति १२ २८ साह १५५ १४१ सन्तमस ७२ १२ सानान सदेप अम्बानीत १५४ १०८ २ १२८ १२२ १४९ ८५ मरोग सा तपित् मुब स सईरा सबसमा साहस साहाय्य मित सिराम्त सिम्यु सिम्बर {" ८८ सम्मति ५८ ५८ Y २४ ८१ १२ . १२ ४५ ५२ सपल सपरि १५३ १७ १२३ लोक पृष्ठ शम्पानुक्रमणिका सम्प प्रष्ठ स्मोक सोहर महिप रोक प्र४ सत्र सीतत स्वाहापति सारिणी सीमन् सीमानिनी ह मीर ७ १२१ स्वन स्वनबम स्तमित २ ४ समाह १२५ १२५ १२७ ७९ ३९ ७१ मुपिलन मुत सुपारुति सनाधीर मुनिमोक ७५ ५४ इन्सोक्ति ५२ ३ ८१ ८८ ७ १२ ८५ १७७ स्वम्पकार स्तम्बरम स्टेन स्त्री पूर स्पबिर १२९ ८७ मुन्दरी मुपर्म मुमा मुमन १८॥ १२४ १८ - ४ ८ हरिण हरिपी २ ५ ११ १२१ मुवर्ग ३५ ७२ म्नो सस स्पष्ट स्फीता ८३ ८४ ५२ ८. २ ७२ ७२ रित हरिणाम हरिबाइन मुस् दूधामन् मुगु - १७ ८ स्मर Y ८. १८२ स्मत ५५ ८३ ५. ७ स्पन्दन सर . ६ सूरि मूर्य सूप कारि सना सेनानी पेनानीपित सम ४१ ८१ . २४ सवन्ती १२ मोतस्मिनी सोतस्विनीपति १२ ५ ५ ४५ इस्तमासा हस्तिन् हाटक २४ २५ ८८ ८५ समाष ८८ ११८ १८ सौरय सोमन सौरामिनी सौर सौम्म सौरम । स्वर्ग स्वर्ग स्वम् हिम ८५ हिमपत्ता हिप्प हिरम्पपिपुमून . हिरण्यगर्भ शिवतम् ॥ ८२ १ सौहाई स्वामिन् ॥ १४ १२४ पनयनाममाम मोफ पृष्ठ ८२ पृष्ठ सोक पृष्ठ श्लोक हीन AIR HMIRI ५२ पीक इपीकेट है हेति हेरिक हेपा हेसमबीन हस्स ८१ ४२ १२२ १५८ 12 अनेकार्थनाममालास्थशब्दानुक्रमणिका श्लोक | सम्प रमेक BM पृष्ठ ब प्रष्ट १८ कोनि सीर म २१ २१ १ ९८ : ९ ग प १ १७ म बी धर्म पुस १ १५ २७ ૧૨ बनन्त १८ प बिम्ध्य मन्त ९८ २५ b मन्तर १८ ५ अमर पर्चा ६ १. पतंग पपस् पर्यग्य पानवाय पुपमा ४ मर्प ९८ २४ १ ५ ४२ इति १ EEEEEEEEEEE चौमूत पोलिप् क प्राप-प्राय २४ त १ १ म " भय काष्ठा कीमाम कोठाक भाव २४ ५ १८ माध्यम्यसम्दानुक्रमणिन मोफ । गद पृष्ठ पृष्ठ इसोक 1 तोफ ३ म मारम ५ माग्म मन ४ पायपि ९॥ 1 र माद ७ ४ ७ - मिप । म्यामार १४ 7 ९० १८ E५ पर गम्भु মিলি पारि कुपनम् मोम म्नम म्पानु ७ पि काम २। ५ - व म्यान मस्त मम्पि वर्गमा ५ १२ १४ ४ ७ ३ ३ ३ ममय ह १ २ मार A ८ ૨૮ नाममालाभाप्यस्यायनामकारातिसूची गप B पंक्ति पृष्ठ पनि , पति । सार २ भापति भापतमम २८ पापी म LIF १८ ७२ “ अपर ८ INALA २६ ८1 . निमात्र तिर ग्प १८ HAjA । .. . الخاطر عزلشلل . ८ ५ ८ अपयन सि १७ १८ डा १८ ce १८ C rfrrn असि शिमा पिन . کرکرنا . , २ ८ IP ८ १०६ घनश्यनाममाला पति शम् पृष्ठ पति a. प्रष्ट २॥ पंक्ति ૨ ३ मा पषि ममिमन्त्री अभियान अभिसारिता धा ८ ce ६८ २३ १० १८ २ भाभारत बाग्मीय नवलम् १ १ उरब मभाग १८ २४ मादित्य १२६ . ७ १२ उपस्म उपकप्ठ 3 ममापम मापार २ १८ २ मानन ८ २१ माप्त " ८ १ ४ अमूम ममत बमनिर्गम ममताम उपमत उपपति उपमा उपसम्मि c ८ ort. ८. ५ २५ . १८ ८ माप्तुस्प मामीम मामिष बापत भायोपन २२ २१ १८ 10 ६८ এম १८ १८ २ १४ - उपाधि उसिर उर उपयुध ७८ २३ ८७ (४ १ १४ २॥ १८ १५ ॐ ८ अमि . भाम्पानी अग्छि मषिमा भनि भ माण्व मारोह मामीषिय मामुग माप्रमाम मापन मापन्न मामय . स २० २५ ८९ ४ २८ २ २ अग मु । बगार ६ १ १२ भाहाय , 3 " २३ है " १० बबयम - पूर ए १ मबिनीना १ १० एसपी ३८ १२ परी " मित्र ८ २१ ' ए 71 भाभ अरमन जीवात् ग्मी बमा ऐरावती ई ८ २ पुती गिान Lin उ T . . १ " TT नका । Ja 14 १ - माम्यस्थशमानुक्रमणिका १२७ पृष्ठ पंक्ति पंक्ति पूछ ६८ पृष्ठ मन्त्रिीमोदर ७१ राप्यपनन्दम काश्यपी पछि १८ ८ १ करम ८५ पार्म कनिष्ठ १ करबपिप्रिय कोस कोबर कौनप कोमृतिक 9 किम्पचान १ २ २४ ५ ८ २ किर किरि किमि कपट 1८ २८ ८ Y २० २८ २९ कीनाग ८ १ ३८ २१ कमला कमिता । १ कीसाम हीच ६ पसीन ८५ मणिका . शिविपर तीर ८ क्षीरोद पीरोपवनया १८ २५ २१ ६ ५ २ कर्णबप कमब ५ १ ५ १२ कृती ६५ -- ४ ८ युध म १ {3. १ क्षुप्फ ८५ २६ २२ ७ ८५ १ कर्मसाधी रपु ३ मुरविषस्लम २० कुम्भीनस' ६५ कुरंग ६४ गुरपम क्षत्र {१५ ११ १८ २ क्षेप . ૨ समापीन १२ ८ २१ २१ ६ २ ८१ १ १ १८ ग ६१ कट पन्यदारिका १ २७ २ १२ १ काय ६० ६ २ २ २ १ ५६ २ ४ १५ पाकोर काम्पीपर राम्ता कापिमापन काममी कारिक कामसार मानिन कामिनी स्वकर्मा तिमुप | तहत पती कृत्तिबामा पौग्यानि प्टि प्पिवर्मा प्पिसार मायोत्तमा २ गरिक २ | पर्मपोन २ पाप पाईपम गिरिक पिरिम १६ । गौण पुरिका । २ . 222 21 १९ १८ ८० १२८ भनमय-नाममाछा पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति २७ पृष्ठ ४॥ पुस्मिनी चम्हास २ २ ५१ २ गावक स जाति ज्योति पपमा -- पात् मृग गोकर्ष गोकुल ६१ २८ पसा बामीकर २२ १५ १८ ९ २ २ त गोत्र १ ८१ ४५ ७ गोरमिर मोपति तटिनी वटी परिवान् तापमा चित्रकाय चित्रपूर चित्रभान । २ {२१ २ १॥ ૨૧ ९ २ Y ७८ ५ २ २ १ ६ गोप्ट गौर गौरीपुष बापन् प्रावा सीबी २५ ८२ न २६ . २२ तरकी माग तमस्विनी परन्क्ष पपला बयप्राप . २५ २५ ३ ८. ५१ प तमालपण वमिम तमिमा समी तमोम्न १२ ४ पम २२ १८ जनान्तिक ૦૨ २५ २१ २४ २५ पारस ८ । ८ बन्य १ १६ पम्बा १ तरम् ७ . ६२ भूमि पन पूतोर पोट ४५ २२ २ भयन्त जयन्ती १८ " १ तार १ ४ . २ ४ . च ८ २ २८ २ द्वारका तापारि तागपष तापर्य तिम्माग तिमिरिषु नीर २० २५ पारापि बलायन ३८ २६ २ १५ 13 पापा पासक वामिर ८ २ . पोपविपि पपीवन १८ २१ २ सिम पिम् ६४ - ५ . विमानस १० माप्यस्वनमानुक्रमणिका ८५ २५ ४९ १८ | भूमिका पृष्णि २ घुष ४७ २ १ न ८१ २५ २५ त्रिपक्षबीपिका ३६ विषिष २८ त्रिपा त्रिपुरान्तक पिप्रचरा ७८ त्रियामा २५ त्रिपा पिविष्टपस. मिसपप १८ त्रिसरमि ५८ धिमाला २६ ४० १ ४ पीपा पृष्ठ पुर्पति दुर्गम दुबई गई पुरध्यवन युति देवता बत रोपपाही पोपा २२ २५ २८ १५ १२ मक्तमुवा मसराय नहिनी पाक नामाम्तम भावीक मासिका मि:महाक निकाय निपुरम्म मिसिक ८ । २ १८ ७८ ८४ २१ २ २८ ८ पुम्न ४८ ८८८ २ ४९ ८ ७२ रखापरपसक पमिणापति १२ २४ ८ १२ ४ पा ४२ १२ ११ १८ पाहत १२ १ २ २२ १ १ १२ पारपारमा - ॥ २५ निमम .८ नितराम् ८८ मिरम निर्वर निरिमी १२ निम्मेबम ६९ नियह निपीषिनी २५ निधीषिनीनाथ २५ निपार २१ २ २ हिगिता दिरसन पीपबती डीपी देषण दमुमा मूना पमिता १२ ४ १ २३ २ २ २१ ४ ४ ९ ८९ २८ . ४ भगम्यम परमिषर बर्मराज बनी प्रय बाम २ ८९ स्मीस्प २३ ८२ रावायनीरमम २५ पाण्याविना ८ दाम बापाई पासक रियम्बर मुपएम नम नेस्ना नेकपेय मैकसेय मैत म्या. २९ १७ २८ २८ २ १८ २१ २१ २९ २८ पारावर बीर ५६ १ प न १ ममर भूमोनि पिनमपि रियस्पति पजपा ५ ७ ४ पनायन्नाममाछा १२ Aby ८४ १८ पट पटी ११ ७६ पिपति पीवबासा पीति A २७ १ २७ २ पीयूष १ १८ २५ २५ ४५ प्रभन्न प्रवन प्रवामिनी प्रतिकिट्ट प्रतिशत प्रतिपक्ष प्रहिमय प्रतिमा प्रतिम प्रतिमोषक प्रतीक प्रतीपपिनी २ २२ पीयूषधि पीम पुम्ब पुटमिनी .2 ८ २२ १८ ૮૨ है ७ ३ पुनी २ SA १४ ११ १ १५ पुर प्रत्पनीक २ 21 21 २ २८ २१ पुरमी ९ ७ ७८ १२ १॥ ८२ प्रचार प्रषोतम ६२ पुरुप २१ १२ R प्रपन प्रपात ८ २५ २६ । परमून पतापिनी पति पपपप पपनी पवार परित पदम पति पागापर पदमबामा पमा पदमी पचा पम्प पयोपर पर परमेश्वर परमेष्ठी परास्माती परिपत्री परिपाता परिपन परिपार पग्म पपरम्पाटा पमाली पम्म परमापन पम पापनि पागुका पार पारासामम पानीय पानीमन्म नि १ २ २१ A प्रमाकर २१ ४२ प्रमा २८ ८२ २३ पुष्ट पुपमिद पूग पूर्वर पूर्वरिपति प्रहमान . ९ १२ १८ २१ ૨ ४ १ २ १ ha 2) १२ पपुर २ ६ १ २३ पाह १ प्रपया प्रषितरण प्रवृत्ति प्रदेगी प्राणु प्रामामिलाप प्रामा २ २॥ पुस्मि पृषरस पूपक पोन १८ २५ २ १ ४७ २१ ८ 214 ५४ ८४ २८ (१८ ८ प्राचार प्रीति प्रेक्षा प्रेमपडि १५ ८ 12114 ११ २ २ ८ ८ फ २३ १ अषपात ३ पर माप्यस्थशष्यानुक्रमणिका ८ Y मायब प बबभूमिक છે? ४ k ८ भुवन भूमाय भूतमानी भूतेश भैरव भोक्ता मोगी १८ ८० २२ १८ २५ २२ ३ . ८ ૨ ८ माप माणीक मामसोमम् मामा मायावी मापी मितम्पष मिष मिष मिहिका मिहिर बममूबन पहिम्पीति . १ ४ ४ २ १ म ८ पारिए बाणासन मम्मुकेश १८ २६ १८ ८५ २६ ४२ मगम ६ १८ २५ २ १४ २ { बाम ૧૨ ८ बामिछ मातम ८ ३५ ८ मगर मति मतिमान् मत्स्य म मधुकर ममुसस मनसिय मनीमी . २८ १५ ૨ ९ २ २९ २ ८ ४२ ८० १८ पहत् महामान ब्रह्मचारी मदिर मूर्तिम मपंग मुगबंध मुपरिपु मगार मंगारि मृपामिनी १४ ४६ २५ २ ४ ५२ २ २ ૨ मला ८७ २२ १४ ४५ भग Rી १० २५ मुधक मेरपुष्प ८ । भयानक मर्म मा मारी ८ १८ १८ मोपक ५ य मस्मि मन्या २ मयूब २२ मराठवाह मरम् महार्मन् १२ मम २१ महिम्हण मस्तक २ महावेगम् महाबम २१ महाविम मारबत २ महामेन ४ । महिला ५२ ८० १ भपम २७ २५ ८ १२ पार्षवर्ग पयु पाम्प पायाम पामिनी प भसा मानमान् मासर मास्वान् २८ ४२ २६ २६ २१ ४ १२ १ यूनी ५ २२ महेमा १ भीम १८. मीपत्र मीप्प भीमम् मुगःमुक र २५ ४ १ मा २२ । एनमर्या रानाती मागमा २ ४ घनसयनाममाग १८ ८९ राजपाभि १८ रमणी रमा ३८ परमिता परता २ २८ २२ मियम पिपसन ८५ १८ २ २० बाप परिष्ठ बपिनी बर्तनी बीयान १५ २८ ७८ रश्मि रसा रामस रायमूत्र पपसर्प ५६ २९ १८ २० । ५२ २८ विविक्त पिणार गिमित विमम्म बिबरप विश्वास बिष्टर मिटरभया विष्णुपर विप्पी १ ૨૪ २५ ६ ८८ १८ ८८ . १८ बसा बमति ६ २१ १२ रापि रिय २८ m बस्त ५९ १५ १२ १ सम ४ २० १८ १४ २२ यतिरेता पातप्रमी बामदेव बामनेत्रा १४ ३६ पियन विमर पिसार बिस्ती पीचिमाली ८ २८ ८० १८ २२ १८ २ रोक रोषि रोपोषणा गर २॥ १२ २ . २५ पार्ता पामतेपी बासिता पारतोगपति ૪૨ २८ २. रोजिनीवस्मा २४ २५ बीनहोत्र ति पौर वृष धिम चाम पारि स ५ पाय ६८ १८ २६ क २ १८ वित्रान १ २ विह R ४ २ . ८ पिया विषय विपषित पुग्यमा पाप पापि पाए १ । १८ ८ प बगोद १ १ . . ३८ ग म ४८ २ मोरन ८२ २२ गिमा रिमा fun १ परा ८ . ૧ भाम्यस्यसमानुक्रमणिका माम सुमछापाज । सबंध २३ सम् २ ग्योमकोश ३ २८ सनातन १० पुण पूपि धर २२ २ यात २० २३ २ समामेय सनी सनिष्ट सग्निम सपिण ७ १ ८ पोवहिनी स २८ ८ . पक्तिपाणि पवमृति - . १ ६४ १ सप्ताय २१ २१ ९ ७ समासर . मतानम्ब २ १ १० प्यामष्ठ भारदेष मीपष्ठ पीनन्दन थोपति पोषत्तार . समाम्बार समय समर्याद ५६ ३ १८ ३८ मम २३ मन राम्र ७१ ६४ ०४ समवाय २२ पम्म १८ २१ १ पत्र खेत खेतभार बेतरोधि ग्रय २२ १ ૨ २५ समास्या समामोदर समानोदर्य समिति समीक समीर समुदम २५ ५ मम्मी ८ ४५ प पण्प्य २ ४२ पचरम २५ - । पाधि ९ समदाय मचार मणिसमर मातामृम मातकुम्भ पापप १२ २ १२ १२ २ म २५ १ २३ २ ५५ ८ १ - छार मारिया ३ ३ समरकाम्ता समुइनबनीत समूह मम्मर मम्मित् सरस्वती सविरा समीप सचिन २ मय मंग्या संस्बावान् संगर संपत्ति मग मंम्पान सस्याय साट पाप ४५ १२ मामा ४७ ८ २ ३ ५५ ८३ ११ २ -- ०७ ७१ २ - सा पायव पातिम शिसित पिपापा ३ । ८ १ पिजिनी सया १३ | समर्म मम्मम्मा २१ सन्चय २ सा सदानन २ सर्वत्र सर्वनामुन ८ समि सविता २१ सहारा २३ महारी मरपचारिणी ११ ९ १५ पिरनिय गिप ताप २ J. १५ पनमय-नाममासा २१ ३ ३ सुरपाम सुरसरिद सुरोप स्वादूप स्वापतेय स्मैरिभी ४८ . ३ ५६ २१ ८९ Y ईस २१ सेषता सेवक सैरिन्थी मोर ४८ २ । १८ १ २१ १२ २६ २१ ५ २ ८ ९ ७२ ४ स्वमयित्नु स्वग्य स्तोम १२ २ २१ १ सामकिरन सहाय सामराम्परा सामायिक सामि साय सार मारत सारसन सार्प सिंह सिनी सिषय ਬਿਬ सिवान सितरपति सीता मुमार मुचरिता मुषामूर्ति मुषी मुपर्मरेतु मुपी सुमनस् सुरम्पेट मुरनिम्नमा हरिणत हरिप्रिया हरिमान् हरिएम हम ८ स्थानीय स्थिरा २५ ६ ७ ४ २ R ७ २२ ८ १८ ७५ २५ - ९ स्पर्सन स्पस स्पृभ अष्टा मोठस् .. हिमबाग ५ २५ २ ४ ६ ४८ . R १२ २१ १८ १ १२ २५ स्वमम्म स्पद हैपा . ३ ७ ५२ १ २६ १२ २१ २ १ स्ववीप ३ हादिनी । हेगा १२ ५२ स्वापुरमा २१ यौगिकशब्दानुक्रमणिका ४८ मम्निपर्यापमा सेनानी भरपर्यापमपी जिन परितिषमात्पर समाप प्रयोये ऐवनामानि वापापपर्यायपबम वापपर्यायपरक्षेचर ५४ पम्पिति बन्न हायरिणामत पर पासप्रयोग मगप्रयोमम्बरप्रयाग रिमानामानि कायपर्यावरील मम्मम फार्म पर्यापछोटि बटनी ०१ बिरमवाभिम्प पूर्व पीताम प्रयोगपमनामानि या होठभिरम हिरमणम्य पूर्वम् ष्णएन प्रपोग मूर्यमामामि गमा Y4 रणपर्यापपुषः मम्मच महानदीपयर सिन्दु १ पित्तपर्यावहारि मनोहम् १०८ माजपर्यायप्रिय राक्षम गिरपापर्यायकर बत १४२ सपाचादि मगायत स्मर ८४ तामरसपयामबनी बिसिनी २३ ग्निपर्यापार भूप देवपर्यायपति इम ५७ देहपर्यापमम सव पायपुनी मंगा ७१ बनपर्यापहायक पुगेर भीनामर्मित मर्प नापपर्याणरि मृगेन्न मिशापर्यायर चन ४८ पन्नगपर्यायरी गरा १२८ परिपत्पर्याप कमसम् २ पवनपर्यापपुन भीम पवनपर्यापपुत्रः हनुमान् पवनवाधिसमा पनि पुष्पपर्यापपर स्मर पुप्पपर्यायास्थ स्मर प्रस्थपरिवान् मिरिः मूमिपपिपर भूमिपर्यायपति नप भूमिप पापण मा मनुप्पपगिपति नृप मयूरपर्यायपति मुह भपपपायपषमातार पत्रिपयिष राक्षस ५५ रुक्मीपपिपति हरि पायुपर्यायपष भाग पार्पर्यापचर मस्स्म मार्पयायधिः अपि बार्पर्यापोम पपम् मित्तपर्यायपपि कुबेर पिपिपर्यायपुत्रः मारव बिपिनपायपर बनेपर " पिपपपर्यायपति मिन ११५ एम्पापमपति सम्वृष ११ साभम्पादिपर हरिय ७१ सेनामीपर्यायपिता मा १८ मोतस्विनीपर्यायपतिः बनि २४ स्पर्मपर्यापपतिः ना स्वर्गपर्यायव घिरपः स्थावपर्यायोभमा मारा हिमपर्यायकर पता १७९ ८ ८ . ९ ७ भनेकार्थनिघण्टुगतशब्दानामकरादिसूची ८५ व ८२ ७५० ग बम पगारि केपरिन् कोषिका कोटरस्प कोमड उ २१ ४ प्रसन् राक्पा बार उम्मीष उमा मता १८ मम्पारम १२५ ८८ मय । सर २१ मनन्त बनिमिप बपाचीन स भव ७५ प ग २२ ७५ अमृत भम्पर मम्रीव २ क पो गोरुक प्रावाण by अर्म प ममाव ८६ ८८ बन १४ २४ बस्मारोह असित १ २० . ४८ ८५ महम पपप चमू मापोर र ४ ८५ की १२१ ज कीनाम माग्मर मारिण्य माधि १२१ २५ श्रीमान ५८ बीमून पनि नापी ११४ बागमन भाष त भाग्याप लिप्न १२१ तास मागम १२ तमानर सार भारत ५ १८ अनेकार्यनिपण्टुरणानुक्रमणिका २३७ विक १४ मार्ग ८७ पत परात् पप भास्कर १२ ४० १२ २५ सुस्प दमी अपस् तोरन तोपर प्रियामा विर भुवन भूरियर म पप परचिट परमेष्ठी परिचय पर्यम्व पक्काम १८ मयूवा ८५ ८१ मतकामिनी १५ पविष्ठ १५ १२१ १२१ पवन पानीय पाप पालजन्य पिपङ्ग पिषित रान रान्त री पुरचर्मन् दरोगा १२४ १ मन्थिन् मन्द मन्दिर मयूब ममिम्मच ममर महेन्नास माया मुम मेषक ५२ ५२ ૮૨ ११८ ७८ पुसिन पुमर पुम पुस्त पृष्ठीही पौमास्य प्रयापति । १२ पात विष्य १४ ८१ १४ १८ य न १८ यम १८ प्रधान मदपयोप १५१५१ १५२ प्रपा प्रभाकर प्रासर पपयूप गापित मास्तिक र ११२ फ एवम् फेनवाहिनी ९४ ७२ ८५ नितम्म निपापा १२८ निरुपमा १५ १४ ८९ नृसिंह प्रोपपरिममा १५१४॥ रत्न १४ गौमत्त रम्मा १ प समन् रापीरोषन १५ १२९ । राजीवकोषमा १५ १४२ । राम मनवन् भामिनी पर १५८ पनऽय-नाममासा रायण १२ विभावसु भुष पेमुपी प हिप बिमाछी विरोचन ल - १ विकास विभाग प उदमन परपद १५ सलमा २४ 12 स हाम हमिता सबसी सबर वृविन १२ २. २८ । सत्र कामप सत्तर ८1 सहाय हेक्षा सबन २५ २. १२ बैंगन मपितमागिन् १५ मम्पन माधि १५ १४८ ८२ सम सप्तपि सप्ताम समाधि समाधिस्म समाद १५ बन्या परमपिनी स बा १॥ बाम ८९ घरपष्टी सम्म वराह भरीरण परी सारंग पारस ਬਿਬ सूमना स्वरिष्ठ ११॥ 1. ४२ १८ २२ १२ पष विवरिन् पिसिन् ४१ २ ९ , बागी पाम पामेम बासर विधान् बिपी बिपिन १॥ ८ :::Ea भिषा पिलीमुह पौत सुम दिमाराठि १२ ८ ८१ 3 १४ उद्धृतवाक्यानामकारादिसूची १ परमान तरेसमा ५. ममो मरईवान मा संगर एक मृत्यू वसति १५ अतिप्रसापमान तत्तु महीन या माग्मताराप्तरिधानो २ मममनाबमोपपति- तत्महे मते ताम्मा मदन्ति मिथीभवन्ति २ २२ २ मसूपयायग्य निसाम्य पौ ॥ दुम्बष मुहियर होर पपापपामनापाय मात्मनि मोमेझाने ५२५८ पुषनाना मिनोदाम य उत्पन्न पुनाटि यस मापोमारा ति प्रोक्ताः खिोम्नि पुष्प २५ यसमाहित नपर्नसहित ५९ माग पीयूपपुस्मिनि १२ मई पुषिनी पिपठि १२ २ रेपनाए पोमराठीनाम् मानेत्रोरबमको मुठ २४ नमत्रमर्म म ताप २५ मोस्तुमपारिजातकमुरा५१ नमःमामिमम पर विप्प पाणि २२ उरीय पामित यान्ति १४ बर्नागमोमवेमारी एका रपो मगरको ममन्तु मयसा सार्य २३ २९४५ ५९१५ ऐमर्मस्प एमपत्य मममे प्रामसम्मेहो बार बामस्तु पयेऽपि २७ कपिराहः येष्ठाच नासाकठमुरम्ताह बाहो मुम्म बनो बाहो २० फायमित्युपत उग निपारस्तु पम्मा- पाकपि मरेमे छिपती पम्पसहमी मिपारर्वमान्दार प्पामा राभिस्तु विद् स्यामा २५ मारकामे मामली- पम्मरमते मात्रम् पर्ग मयूरा गते कोकिलाना परोप पम्माचारखो नित्म सम्पपूरे विहरति सम पगचित्प्रवृत्ति पचिरप्रति । पहन एक्टमम्म सन्धिोनी सरहामा मिरिकम्पएर्गेषु २२ पधिपधिपतम- २९ सर्पपस्य प्रम गोसने मुनिहन्यात पत्पास्मिनु सर्व समास्याति म सास्त्रम् मी स्वयः साष्टारमा पुपरी सितापुरम् स्पस्ने नरे मुशासाने ૧૨ पुष्पसाबारणे काते स्थान मूत्यै नमेर १ पतु परिकलामिका १८ प्रथमे बापते चिन्ता एवो मुवक्किारः स्यात् पत्तार, पुषचा अपस्या मममस्मापि २२ हिसानुतस्तेमा २ पातमागोऽप ममपान् प्रायश्चित्तदिनययावृत्य २ हिरण्यगर्भमभवत् भाष्यगता ग्रन्था अन्यकाराश्च १ विषबानकाम्मम् विधानम्बी धोकारपनिमम्मी- विसत्वानमाप्यम् १ १७ माममाण २ मारम्वा . पपनविपास्त्रम् ममरकोपः ८ पृमपार १ समन्वमा १ वृहत्प्रतिश्मनमाष्यम् १८ १५ मूक्तिमुक्तासमी २२ १८ ममासिंहः मरखनाटकम् ५३ १२ सामनीतिः ४८१९२४२. मारवम् २ १. २२२॥ महापुपमम् बमरमिहनाममाजा २९ २१ ५८ बमासिवाप्यम् परकीर्ति हायुषमाप्यम् भारावरमाधिपेकः १२ बननम्धिनी तिपास्त्रम् ५५ २॥ समम्नितम् स्पानीति १ २४ २५ मनाममाका चीरस्वामी हमी १६१०२१२. गस्तमित । पस्तिपत्रमूगम्पम् १८८ हेमामाममामा १४१२ पौयाँ: बामपुषा १ -- ४ इलामुषा १२ मा सस्तविवरण बपि मभिवानचिन्तामणि बनेका # भनेकासदाह बम को ममरकोप बम को सौ मा बमर कोरबीरस्वामी भाप अमर अमरकोप बस बनेकार्षण र सू समाधिसूत्र कास को कत्माकोस का उकातलमाथि का मू कावनसूत्र यम विवाद मरास्तिम मौ मा मौरस्वामिमाप वावासकास भी स्सा मौरस्वामी मि को का विलकीपनकोस बन समु बनपरसमुरेश कान्तम * मू बनेनसूम पिको रिपोपनकोष त सू पत्तासूत्र नीतिघा नीतिसार र पनापत्रिका मौ मा सम् सू नीति वाया र सू समारंपतिका पामृत समुपसूक्ति सूम पप पपनन्दिपममितिका हा फारिकापामटायम कारिका पाह पापिनि उपारि सापू पाटाकतम पा मनसू पाणिनि पपसूब सर सरस्वतीयमरण पाव भाम्य पावग्यकमहामाय पार समा स सारस्पत पा सू पामिनिष मो र मौषरमापि समास सूम मे को पाप मैपिनीलोर बाम्तवर्ष हेम हेमसम्मानसासन चकातामहपमाना का पूकत्तापमान पूर्षि का माला पूर्षिमूब शुद्धिपत्रम् ७ पस प० मनुदयः मुद्रपा (पट ५० भमुदवा एवषा विपासम विषयमा स्वमित म्वमित मिरी भिकरो ५४ २१ मुक्तीपा मुत्तोपा-१ २१ ली बयेतो

Namamala

Author
Dhananjaya, Mahakavi
Title
Namamala
File name
Namamala
Text
OCR done
Citation
1950
Published
2011/08
Publisher
Kashi, Bharatiya Jnanapitha
Language
Sanskrit
Pages
159
Library
Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur
DLI number
314066
Barcode
99999990312217.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
ZaGsx7SwdCJ
Download PDF

Namamala