Bharatiya Vidya Bhavan Library, Mumbai
Sanskrit Dhatu Kosh
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(२) इस कोशमै सब सस्कृत धातुओंका अर्थ सरल हिदीभाषामें लिखा है प्रत्येक धातुके आगे गणबोधक अक, पद्बोधक अक्षर तथा वर्तमानका- लिक तृतीय पुरुषका एकवचनी रूप लिखके उसके आगे आजकल उस धातुके जितने अर्थ प्रसिद्ध है वे सब लिखे है जिन धातुओके अर्थ उप सर्ग जोडनेसे भिन्न २ होते है उनको वैसेही उपसर्गसहित लिखके उनके सब भिन्न २ अर्थ लिखे है आखिर परिशिष्टमै धातुरूपावलि दी है जिसमें इक्कीस धातुओंके दशौ रका के रूप लिखे है और थोडेसे उप युक्त प्रथमगणस्य तथा द्वितीयगणस्य धातुओंकेभी दशी रकारौके प्रथम पुरुषके एक्वचनी रूप लिखे है, तथा कर्मणि जैसे दा धातुका दीयते-दिया जाता है, णिच् जैसे दा धातुका दापयति-दिराता है, सन्नत जैसे दा धातुका दित्सति-देनेको चाहता है और यडत और यङ्गत जैसे दा धातुका देदीयते, दादेति-वारवार देता है, येभी रूप लिखे है उपयुक्त सब धातुओके ऐसेही रूप देनेका विचार था परतु ग्रथ बढ जानेके सबब वैसा नहीं किया गया इस कोशमे प०-परस्मैपदी, आ०- आत्मनेपदी, उ०-उभयपदी, प्र०-प्रयोजक, सौ-सौत्र वे० वैदिक इस प्रकार पूर्ण शब्दके लिये एक २ अक्षर उपयुक्त किया है. जिन धातुओके आदिम प और ण है ऐसे धातु सकारादि तथा नका रादि लिखे है और धातुओके अनुबधभी नहीं लिखे हे क्योंकि इस पुस्तकमे इनका कुछ प्रयोजन नहीं है, इनका विशेष प्रयोजन कौमुदी सीखनवालोको है अस्तु, यदि इस पुस्तक्से विद्यार्थियांको कुछभी। लाभ होगा तो मै अपना परिश्रम सफल समझूगा आखिरमें सब सज्जन लोगौस मै सविनय यही प्रार्थना करता हूं कि इसमै कहा भ्रमवशसे गणमैं पदमे, अर्थमे या उपसाँके क्रममै गलती हो गई हो तो क्षमा करके मुझे उपकृत करें इति शम् सज्जनकृपाभिलापी- काळे इत्युपाव्ह काशीनाथात्मज गणेशशर्मा.
॥श्रीः॥ अर्थ भाषार्थसहित संस्कृतधातुकोश। २ टेटा जाना परना, व्यापना ४ पटरना, ३ जाना अक्-अङ्क अड्-अज् थ अझ् (२० प०असयाते) १ रंगना, अक् (१५० अकति) १ जाना हाय पापसे चरना २ रटक्ना, रगा रहना ३ अटकाना अक्ष (१५. अक्षति,०प०अक्ष्णो ति.) १ इच्छितार्थ प्राप्त होना | अझ् (१ प. अगति ) १ समीप • पेठना, घुसना ३ सब जगह जाना या आना २ चल्ना, यहरना (१० प० अगयाते ) १ टहलना, चारों ओर जाना एकत्र होना, जमा होना अग् (१ पं० अगति.) १ घूमना, २ चिह्न करना, निशान करना टेढा जाना २ टेटे रास्तेसे जाना पार-(पल्यगयति) १ प्रवृत्त करना, जगाना, उक्साना विपरि-(विपल्यगयाते) १ छि अगद ( ११ प० अगद्यात) १ पाना, ढापना अघ (प्र०, १० १० अघयाते ) १ वह ( १ आ० अघते ) १ जाने पाप करना २ गुनाह करना, रगना २शुरू करना ३ जलदा अपराध करना जाना ४ जल्दी करना ५ धमकाना, घुटकना, दाग अङ् (१ आ० अक्ते ) १ टेढा गाना ६ जूआ आदि खैरना जाना २ चिह्न करना, निशान करना (१० अच् (१ उ०मचाते-ते) १जाना, १० उ० अक्याते-ते) चिह्न करना, निशान करना चरना २ आदर करना, मान २ गिनना ३ निदा करना, दाग करना ३ मांगना लगाना. ४ टहलना, अक्डके | अज् (१ प. अजात) १ जाना. चरना ५ गोदमे देना २ हाक्ना, दौडाना ३ फॅक्ना नरोग रहना २ सस्कृतधातुकाश। ३ -- अट्-अड् अञ्च (१ उ० अञ्चति-ते) १ झु ६ सँवारना, सजाना आभ-१ काना, टेढा करना २ क्सिी अभ्यजन करना, तैरमर्दन कर ओर झुकना, जाना ३ पूजना, ना वि-१ स्पष्ट करना उत्पन्न मान करना ४ सवारना, शो करना आध-१भरना,सँवारना भित करना मागना, चाहना आ-१ तेल मलना २ चिक्ना करना, चिम्नाना मान ६ कुडडाना, अस्पष्ट बोलना अव-१ दाक्षणका आर जाना करना नि-१ तेल मरना २ उद्-१ उत्तरका और जाना छिपना प्राते-१ तेल मरना २ पर-१ साधा जाना २ वाजसे, सँवारना, सजाना सम्-१ तेर हो जाना प्र-१ पूर्वका आर मरना २ मान करना ३ भरना जाना प्रति-१ पाश्चमका और ४ एकत्र करना, जोडना ६ जाना (१ १० अचात, प्र० १० साना ६ सँवारना (प्र०,१० उ० अचयति-त ) १ प्रक्ट उ. अजयति-ते) १ बोलना, करना, न्यूनाधिक देखना. (प्र० स्पष्ट करना १० उ० अचयति-त) १ प्रस्ट अट् (१५ अटात कृचित् आ० करना, जाहिर करना अप-१ अन्ते ) १ धूमना, फिरना। दूर करना, हटा देना आ-१ पार-१ जाना, भरना झुकाना उप १ निरालना अट्ट ( १ आ० भट्टते) १ आधिक (जल आदि) परि-१ धुमाना वि-१ फैलाना, विस्तृत करना होना • मार डालना ३ दुख सम्-'एकत्र करना, वटोरना, देना (१० प० अट्टयात) १ अनादर करना, अपमान करना जमा करना २ सूक्ष्म हाना अञ् (७प अनक्ति,धचित् आ० अट् (१ प. अठति) जाना अडक्ते) १ जाना २ साफ करना, स्वच्छ करना.३ सरा अड् (१ प अडति) १ उद्यम करना, प्रयत्न करना (६५० हना, पिरयात करना १ चम अमोति ) उपभोग करना, पना, प्रकाशित होना ६ तेल अपन आधेसाग्म राना (वे.) मदन करना, अभ्यजन करना । २रना, व्यापना भापार्थसहित ।। अड्डू २ आखै मूदना | অস্থ अड्ड अन् अन्त्-अरर (१५० अड्डति)१ जोटना, होना. ३ जाना. (प्र. आनय सयुक्त करना. २ वाक्यादिको- ति) १ जिलाना. का प्रतिपादन करना ३ हल्ला अन्त् (१ प० अन्तति) १बाँधना. करना, घेर ऐना ४ प्रयत्न अन्द् (१ प० अन्दति)। करना. ५ फर्याद करना अन्दोल ( १० ५० अन्दोलयति) अण् ( १५० अणात ) १ शब्द झुलाना, हिलाना. करना,आवाज करना (४ आ० अन्ध ( १० उ० अन्धयति-ते ) १ अण्यते) १ जोते रहना, जीना, अधा होना, दिसाई न देना च्छासोच्वास करना. २ वल- वान् होना प्र-१ जीना. (१ प० अभ्रति) १ जाना. अण्ठ् (१ अण्ठते ) १ जाना, अम् (१५० अमति, वे० आमिति, चलना अमीति) १ जाना २ शब्द अत् (१ प. अतति ) १ जाना करना, योरना ३ सेवा करना २ सदैव जाते रहना (वे.) ४ खाना (प्र०,१० उ० आम- २ पाना, हासिल यति-ते) १ वीमार होना, रोग- ग्रस्तहोना. २ रोगयुक्त करना. अद् ( २ प० अत्ति) साना, अम्ब् (१ प० अम्वति ) १ जाना. भक्षण करना. २नष्ट करना (प्र. आदयति) १ खिराना ( १ आ. अम्बते ) १ शब्द करना २जाना. (इ०प० जियत्सति) १सानकी इच्छा करना अब-१ तृप्त होना | अम्बर ( ११ ५० अम्बयोते) १ २ मैह वद हो जाना.३ साना एकत्र करना, बटोरना. छोड देना. आ-१ खाना. प्र-१ अम्भ ( १ आ० अम्भते) १शब्द खाना. सम्-१ साना. वि-१ करना. काटना, कुतर लेना, चवाना. अय् (१ आ० अयते क्वचित् प० अवरयति ( नामधातु) १ कम अयति) १जाना प्र-(प्लायते) करना, न्यून करना.२जातना १ भाग जाना. परा-(परायते) अन् (२५० आनति, ४ आ. १ भाग जाना अन्यते) १ जाना २ समय! अरर (११ ५० अरयति) १ आरे १ वाधना, करना . + अर्थ-अल् . संस्कृतधातुकोश। अर-अर्ज से काटना. २ यल करना. दूर करना. अनु-१ जाने देना, अरहायते ( ना० ) १ प्रसिद्ध मुक्त करना. अन्वव-१ पीछेसे होना, समझमे आना. जाने देना २ हराना. अपि-१ जोडना. अप्यति-१ जोडना, अर्क ( १० उ० अर्कयति-ते ) मिलाना. अव-१ जाने देना, १ प्रशसा करना, स्तुति करना. मुक्त करना. उद्-१ चलाना. २ तपाना, गरम करना. १ सपादन करना. अ (१ प० अर्घति) १ पीडा अर्थ ( १० आ० अर्थयते क्वचित देना, सताना. २ कीमत होना, ५० अर्थयति) १ मांगना, या- मोल पडना, कीमती होना. चना करना २ चाहना. प्र-१ (१० उ० अर्घयति-ते)१ की. मागना. २ चाहना. ३ टूढना. मत होना, मोल पडना. ४ पकडना, घेरना. ५ अर्ज अर्च ( १ उ० अर्चति-ते, १० उ० करना. ६ विवाहमें मांगना अर्चयति-ते) १ पूजा करना. अर्द ( १ ५० अर्दति ) १ मांगना, २ सेवा करना ३ मान करना. याचना करना. २ जाना (१ उ० ४ सँवारना. ५ प्रशसां या अर्दति-ते, १० उ०अर्दयति-ते) स्तुति करना (वे.) चमकना. १ मार डालना, वधना.२ दुःख प्रकाशित होना (इ. अचिचि. देना, सताना पति) १ पूजनेकी इच्छा करना- | अई (१ ५० अर्बति ) १ मार अनु-१ जयजयकार करना या डालना, वधना २जाना. मानना. प्र-१ पूजना. सम्- अ (११०अवति) १ मार डाल १ पूजना. २ स्थिर करना, स ना, वधना.२दुःख देना,सताना. स्थापन करना अई (१ ५० अहति १० उ० अर्ज (१५० अर्जति) १ सपादन भर्हयति-ते) १ पूजा करना, करना, पाना. २ उठाना. (१० सत्कार करना. २ पूजनीय उ. अर्जयति-ते) १ कमाना, होना, पूजा करने योग्य होना. पाना. २ तैयार करना.३ उद्योग ३ योग्य होना वा करना. करना. ४ पदार्थको सस्कृत अल् (१ उ०मलति-ते) १ सँवा वरना. अति-१ जाने देना.२ रना, भूपित करना.२ निवारण .
भापार्यसहित । अक्-अ अवधीर-अश् करना. ३ शक्तिमान होना. ४ करना.२ संरक्षण करना. पूरा करना. | अवधीर (उ० अवधीरयति-ते) अव् (१ प. अवति) १ सरक्षण १ अपमान करना, तिरस्कृत करना, वचाना.२ सतुष्ट करना, करना, घिन करना. आनदित करना, खुश करना. अश् (५ आ० अश्नुते ) १ फैल- ३ घूमना, भटकना.४ प्यारा ना, व्यापना. २ पहुँचना. ३ होना, प्यार वढाना. ५ तृप्त पाना, प्राप्त करना.४ सग्रह क- करना, समाधान करना.६जा रना, बटोरना, राशि करना, नना, समझना.७ प्रवेश करना, ढेर करना. अनु-१ पहुँचना.२ पेठना, घुसना, धसना. ८ पास समान होना. आ-१ पहुँचना. रखना, पास होना. ९ मालिक २ पाना, प्राप्त करना. ३ सौंपना होना, प्रभु होना. १० आज्ञा ( अपनेको ). उद्-१ ऊपरको मानना, हुक्म मानना. ११ पहुँचना. २ पाना, प्राप्त करना. वर्तना, काम करना. १२ इच्छा ३ शासक होना. उप-१ पाना, करना, चाना, १३ कांतियुक्त प्राप्त करना, उपार्जन करना. २ होना, चमकना, शोभित होना. शासक होना. परि-१ पहुँचना. १४ प्राप्त होना, मिलना, पाना. २ समाना, पूर्ण होना. प्र-१ १५ आलिंगन करना, गले ल- पहुँचना. २ समाना, परिपूर्ण गाना. १६ मार टालना या होना. (९५० अनाति क्वचित् दुःख देना, सताना. १७ ग्रहण आ० ) खाना. २ भोगना. करना, टेना. १८ होना. १९ ति-१ अधिक खाना. उप-२ वढना. २० शक्तिमान होना. खाना. २ भोगना. अति-१ P२१ दहन करना, जलाना. २२ अधिक खाना. उप-१ खाना. विभाग करना, हिस्सा करना, २ भांगना. (प्र. आशयति) बांटना. २३ अवण करना, १ खिलाना.२ पिलाना. मुनना. २४ याचना करना, अशनायति ( ना० ) १ सानेकी मांगना.२५ पहूँचना. अनु-१ ढाटस देना. उद्-२ ध्यान देना, इच्ठा करना, क्षधित होना. २वांट जोहना. ३ प्रवृत्त करना. अंशु (१८ उ अशयाते-ते, अशा- उप-१ स्नेह करना. सम्-१ तृप्त पति) १ विभाग करना, वांटना.
सस्कृतधातुकोश। अप-अस् असु-आप् अप् (१ उ० अपति-ते ) १ असु (११ प० असूयाते) १रोगी जाना, टहलना.२ ग्रहण करना, होना, बीमार होना. लेना. ३ चमकना. असू (११ उ० असूयति-ते)ररोगी अस् (१ उ० असति-ते) १ जा होना, वीमार होना. ना, २ लेना. ३ चमकना. (२ अस्त् ( १० प० अस्तयति ) १ प० अस्ति) १ होना, रहना. अस्त होना, कांतिहीन होना, (४ प० अस्यति) १ फेकना, ग्रसित होना. विथराना, उडाना अनु-१ अह (५५० अह्नोति) १ फैलना नीचे बैठना. अप-१ छोडना, विस्तृत होना, व्यापना. गना, वजित करना नि-१ अंह (१ आ० अहते) १ जाना, रखना, धरना, स्थापित करना. निर्-१ निकाल देना, बहिष्कृत (१० उ० अहयति-ते) १ करना. पर्युप-१ चारों ओर प्रकाशित होना, चमकना. घिर बैठना. २ उपासना करना. आ. प्र-१ फेकना, विथराना, उडा- आञ्छ् (१ प० आश्चात ) १ ना.२ खडन करना, स्वीकार वढाना, दीर्घ करना, लबा करना. नही करना, मान्य नहीं करना आन्दोल् (१० उ० आन्दोलय वि-१ विभाग करना, हिस्सा करना. व्या-१ फैलाना, विस्तृत आप् (५ प० आमोते ) १ ब्या करना २ क्रमसे लगाना, अनु पना अभिाव-१ चारो ओरसे क्रमसे रखना सनि-१ सन्यास ब्यापना. अव-१ प्राप्त होना, धारण करना, प्रपच छोडना, मिलना, पाना. उपसम्-१ स- विरक्त होना. सम्-१ एकत्र मीप प्राप्त होना, पास आना. होना. सम्-१ एकत्र करना, २ ग्रथादिककी समाप्ति करना. इकट्ठा करना, मिलाना अस (११ प० अस्यति) १ बीमार पार-१ तृप्त करना. २ परिपूर्ति करना. परिवि-१ चारों ओरसे होना, रोगग्रस्त होना ब्यापना. प्र-१ प्राप्त होना, अंर ( १० उ० असयात ते, पाना. वि-१ ब्यापना सघि-१ असापयति) १ विभाग करना, अच्छी तरह ब्यापना (१० उ० हिस्सा करना, वांटना. आपयति-ते) १ प्राप्त होना, ति-ते) १ झुलाना मापार्थसहित । भाम्-इ इए-इखू पाना. अभिवि-१ चागें औरसे अधिक श्रेष्ठ होना. अधि-१ व्यापना. अब-१ पाना. पाग-१ स्मरण करना, याद करना. २ चारों ओरसे व्यापना. परि विचार करना, मनन करना. सम्-१ समाप्त करना, पूरा अनु-१ पीछेसे जाना.२ अनु- करना. सरण करना ३ अनुकरण यास ( २ आः आस्त) - करना, दूसरेके समान करना. ठना. २ उपस्थित होना, विद्य अर-१ निकल जाना. अभि-१ मान होना, हजर रहना. ३ सामने आना.२ सत्र जाना, जीना. ४ होना. अभि-१ यास अभ्युत्-ऐश्चयादिकसे प्रसिद्ध करना, रहना. २ ऊपर बैठना. होना. अन्युप-१ अगीकार ३ वस्तुसादृश्य होनस इच्छित करना, म्वीकार करना.२.सं- वस्तुको छोडके दूसरी वस्तुको मुर आना, सामने आना. लेना. अभि-१ अध्ययन करना, अब-१जानना, ममदाना. उत्- अभ्यास करना, सीसना. उत् १ उदय होना, उगना.२ उपर १ छोडना, त्यागना, उपेक्षा जाना. उप-१ साग करना, करना. २ हिलाना, पित नद दना. २ पास आना या करना, कंपाना. उप-१ उपा जाना. ३ टेना. निर-१ निकल सना करना, भजन यग्ना. जाना. पार-१ साग और धूम- निर-7 बाहर निगल देना, मा, प्रदक्षिणा परना. पा-१ देशमे निकाल देना, पीहें लौटना. सम्-१ संगत होना, मिल्ना. समुप-१ मामने आना. अधि-(आ.सति) इ(१५० भयनि) २ जाना मं. १ अध्ययन दग्ना, अभ्यास भ्युत्-२ ऐचर्यादिरसे प्रमह करना, मीना. वि- व्यय होना. उत्-१ उदय होना, करना, पर्थ यग्ना. २ मिस उगना. उस जाना.ग-१ पाना, नर्म नहन रम्ना.माले- पाटना. पदाहना: (पटना, सिामना. भागना, भाग जाना. (२९ प (१९एकी)' जाना. एनि) जाना. पान- अ निरमाना- म्म दिनार (पी) १ जाना.
सस्कृतधातुकोश। अप--असू असु-आप् अषु ( १ उ० अपति-ते ) १) असु ( ११ १० असूयाते) १ रोगी जाना, टहलना.२ ग्रहण करना, होना, बीमार होना. लेना. ३ चमरना. असू (११ उ० असूयाते-ते)रोगी अस् (१ उ० असतिते)१ जा होना, वीमार होना. ना, २ रेना. ३ चमकना. (२ अस्त् ( १० ५० अस्तयति ) १ १० अस्ति)१ होना, रहना. अस्त होना, कतिहीन होना, (४ प० अस्यति) १ फेकना, ग्रसित होना. विथराना, उडाना. अनु-१ नीचे बैठना. अप-१ छोटना, अह (५५० अझोति) १ फैलना त्यागना, घजित करना. नि-१ अंह ( १ आ. अहते ) १ जाना, विस्तृत होना, व्यापना रखना, धरना, स्थापित करना. निर-१निकाल देना, वहिप्कृत (१० उ० अहयत्तिते) १ करना. पर्युप-१ चारों ओर प्रकाशित होना, चमरना. घिर बैठना. २ उपासना करना. आ. प्र-१ फेकना, विथराना, उडा- आञ्छ् (१ प० आश्चात ) १ ना.२ सडन करना, स्वीकार वढाना, दीर्घ करना, लवा करना. नहीं करना, मान्य नहीं करना. आन्दोल् (१० उ० आन्दोलय वि-१ विभाग करना, हिस्सा ति-ते) १ झुलाना. करना. व्या-१ फैलाना, विस्तृत आप् (५ ५० आमोते ) १ व्या करना २ क्रमसे लगाना, अनु पना अभिावे-१ चारो औरसे मसे रखना सनि-१ सन्यास ध्यापना. अब-१ प्राप्त होना, धारण करना, प्रपच छोडना, विरक्त होना. सम्-१ एकत्र मिलना, पाना उपसम्-१ स होना. सम्-१ एकत्र करना, मीप प्राप्त होना, पास आना. इकट्टा परना, मिराना २ प्रथादिककी समाप्ति करना. भरा (११ प. अस्यति) १ वीमार परि-१ तृप्त करना. २ परिपूर्ति करना. परिवि-१ चारो ओरसे होना, रोगग्रस्त होना. ब्यापना. प्र-१ प्राप्त होना, अंस् ( १० उ० असयति-ते, पाना. वि-१ ब्यापना सवि-१ असापयति ) १ विभाग करना, अच्छी तरह ब्यापना. (१० उ० हिस्सा करना, वाटना. आपयात-ते) १ प्राप्त होना, भापार्थसहित । ७ ३ अनुकरण आस-३ इए-इस् पाना. अभिवि-१ चारो ओरसे अधिक श्रेष्ट होना. अधि- व्यापना. अर-१ पाना. पारे-१ स्मरण करना, याद करना. २ चारों ओरसे त्यापना. परि विचार करना, मनन करना. सम्-१ समाप्त करना, पूरा अनु-१ पीठले जाना. २ अनु- करना. सरण करना यास (२ मा आस्त) करना, दूसरेके समान करना. ठना. २ उपस्थित होना, विद्य अर-१ निकल जाना. अभि-१ मान होना, हजर रहना. ३ मामने आना. २ सब जाना. जीना. ४ होना. अभि-१ वास भन्युत्-एचयांदिरसे प्रसिद्ध करना, रहना. २ऊपर कठना. होना. अन्युप-१ अगीकार ३ वस्तुसादृश्य होनी इच्छित करना, स्वीकार करना.२स. वस्तुको छोटके दूसरी वस्तुको मुख आना, सामने आना. लेना. अभि-१ अध्ययन करना, अर-१ जानना, समझना. उत्- अभ्यास करना, सीसना. उत् २ उदय होना, उगना. २ ऊपर १ छोडना, त्यागना, उपेक्षा जाना. उप-१ साथ करना, करना. २ हिलाना, कापत मदद देना.२ पास आना या करना, कपाना. उप-१ उपा जाना. ३ लेना. निर-१ निकल सना कग्ना, भजन करना. जाना. पार-१ चागे ओर धूम- निर-१ बाहर निकाल देना, ना, प्रदक्षिणा करना. परा-१ देश निकाल देना. पाठे लॉटना. सम-१ संगत होना, मिन्ना. समुप-१ मामने इ. आना. अधि-(आ० नति) इ(१५० भयति) १ जाना में १ अध्ययन करना, अभ्यास भ्युत्-१ एथयोंदिरसे प्रसिद्ध करना, मीसना. गि- व्यय होना उत्-१ उदय होना, करना, सर्च करना. २ विध्वस उगना.उ.पर जाना. पग-१ करना, तहस नहस करना माने- पाठं तरीटना. पठा- दोहना, १ स्पट होना.२विचामरपना. भागना, भाग जाना (प. इख (१५० एमति) १ जाना. एति) जाना भनि- अ निरमण रग्ना समय बिताना.इद् (१ प. इरो) १ जाना.
. होना, ~ सस्कृतपातुसोश। इङ्ग-इवम् इप-इस् इङ्ग (१ प० इङ्गति ) १ जाना | इष् (१ प. इप्यति ) १ जाना रापना, थरथराना अनु-१ दूढना, खोजना (६५० इट (१५० एटति) १ जाना इच्छाते) १ इच्छा करना, चा इन्द् ( १५० इन्दति) १ अमानवी हना अनु-१ दूढना प्रति-१ पराक्रम होना, ईश्वरी शक्ति ग्रहण करना,रेना २ प्रतिवचन होना देना (९५० इष्णाति ) १ इन् ( ७ आ० इन्धे ) १ प्रदीप्त कोई कम वरावर करना हाना, जना २ प्रकाशित इपुध ( ११ प० इपुष्यति) १ वा चमरना णोको धारण करना इम्- (१० आ० इम्भयते) १ एफ्न ई. वरना इकट्ठा करना, वारना । (२ प० एति) १ जाना २ फैक इर् ( ११ उ० ईयति-ते) १ ईर्ष्या रना, मत्सर करना ना, ब्यापना ३ गर्भवती होना, इरज् (११ प० इरज्यति) गाभिन होना ४ इच्छा करना, इरम (११ प० इरस्यति) १ ईर्ष्या चाहना ५ भक्षण करना,खाना ६ उडाना, फेकना ७ भेजना, क्रना, मत्सर करना इल (६५० इरति) १ सोना, नीद प्रेरणा करना (४ आ० इयत) १जाना, चरना रेना ' जाना ३ भेजना ईक्ष (१ आ० ईक्षते ) १ देखना फेरना, उडाना, वियगना अवलोक्न करना अर-१प्रती (१० उ० एलयति-ते)१ प्रे रणा करना, प्रोत्साहित करना क्षा करना, बाट जोहना २ अपे इला (११ प० इलायति) १ वि क्षा इग्ना, चाहना अभि-१ टारगाना, टकटकी बापना रास करना अप-१ देखना, निहारना उत्- इव् (१५० इन्सति) १ तृप्त होना १ ऊपर देखना उप-१ उपक्षा २ व्यापना ३ सतुष्ट करना, करना, छोडना, त्यागना निर- सुश करना १ देखना, ताक्ना परि-१ परी इवस् ( ११ प. इवस्याते ) १ चारो ओरसे सताप होना २ क्षा करना, सोचना, जाचना प्र-१ देखना निहारना २ क्यूल करना वि-१ देखना, १ सेवा करना भापार्थसहित । इक्ष्य-उ इख-ईर ताकना. प्रति-१ मार्गप्रतीक्षा ईय् (१ प. ईक्ष्यति ) १ ईपी करना, वांट जोहना. २ पूज्य करना, मत्सर करना. बुद्धिसे आदर सत्कार करना, ईष्य् (१ प० ईप्यति ) १ ईर्पा मानना. प्रत्युत्-१ दूमरेके देख- करना, मत्सर करना. नेपर आपभी उसको ओर टक- टकी लगाके निहारना. सम्-१ ईश् (२ आ० ईष्टे ) १ अधिकार होना, चाहे सो करनेकी शक्ति तुलना करना,बरावरी करना. होना. ईख (१ प० ईखति) १जाना. ईप् (१ आ० ईपते) १ जाना. २ भार टालना या दुःख देना. ईज् (१ आ० ईजते) १ जाना.२ ३ देखना, अवलोकन करना. दोप लगाना, निदा करना. ४ (१५० ईयात) १ उच्छन ईज्ञ (१ उ० ईज्जति-ते) १ करना, दिनना. ईह (१ आ० ईहते) १ यत्न जाना. २ दोप लगाना, निदा करना, उद्योग करना.२ सम्- करना. १ इच्छा करना, चाहना. ईड (२ आ. ईहे, १० उ० ईड- यात ते ) १ प्रशसा करना, स्तुति करना. उ (आ० अवते) १ शब्द करना, आवाज करना. ईन्त् (१ ५० ईन्तति) १ वांधना, उम् (१ प. उक्षति) १ निर्मल जकड़ना. ईर (१० उ० ईयति-ते)१जाना. करना, स्वच्छ करना, साफ २ हांकना, प्रेरणा करना. ३ करना.२ गीला करना, प्रोक्षण फेंकना. उत्-कहना, वोलना. करना,सीचना.३ जना. (वे.) प्र-१ भेजना. सम्-१ वायुके १ दृढ होना. प्र-१ सींचना.२ समान जाना. (१ प. ईराति) जलसिचनसे संस्कृतं करना. 3 मार डालना. १ जाना. २ हांफना, प्रेरणा करना. ३ फेंकना. (२ आउख् (१ प. ओखति) १ जाना. ईते) १ जाना. २ कांपना, थर- उस् (१ प. उखति) २ पास थराना, हिलाना. जाना या आना. ३ अलकृत - होना, chi सस्कृतधातुसोश । इङ्ग-इवम् इप्-ईक्ष इङ्ग् (१ प. इगति ) १ जाना. इपू ( ४ प० इप्याते ) १ जाना. २ कांपना, थरथराना. अनु-१ टूटना, खोजना (६५० इट् (१ प. एटति) १ जाना. इच्छाते) १ इच्छा करना, चा उन्द (१५० इन्दति) १ अमानवी हना अनु-१ टूटना प्राते-१ पराक्रम होना, ईश्वरी शक्ति ग्रहण करना,लेना २ प्रतिवचन होना. देना (९ प० इप्णाति ) १ इन्ध ( ७ आ० इन्धे ) १ प्रदीप्त कोई कर्म वरावर करना. जना. २ प्रकाशित | इयुध ( ११ ५० इपुव्यति) १ वा. होना, चमझना. णों को धारण करना. इम्म ( १० आ० इम्भयते) १ एकत्र करना इकट्ठा करना, बोरना । (२५० एति) १ जाना २ फैल इर् ( ११ उ० ईयति-ते) १ ईर्ष्या करना, मत्सर करना ना, ब्यापना ३ गर्भरती होना, इरज् (११ प० इरज्यति) गाभिन होना ४ इच्छा करना, इरम (११ प० इरस्यति) १ ईर्ष्या चाहना.५ भक्षण करना, खाना ६ उडाना, फेकना. ७ भेजना, करना, मत्सर करना इल (६५० इलति) १ सोना, नीद प्रेरणा करना. (४ आ० ईयते) १जाना, चलना. रेना २ जाना. ३ भेजना. ४ ईक्ष (१ आ० ईक्षते ) १ देखना, फेंकना, उडाना, स्थिराना अपलोकन करना. अप-१प्रती (१० उ० एलयति-ते ) १ प्रे रणा करना, प्रोत्साहित करना क्षा करना, वाट जोहना. २ अपे इला ( ११ १० इलायति) १ वि क्षा करना, चाहना. अभि-१ टकरगाना, टकटकी बापना लास करना इव् (१ प. इन्वति) १ तृप्त होना अप-१ देखना, निहारना.उत्- २ व्यापना. ३ सतुष्ट करना, १ ऊपर देखना. उप-१ उपेक्षा करना, छोडना, त्यागना.निर- सुश करना. १ देसना, ताकना. परि-१ पगे इवस् ( ११ प० इवस्यति ) १] चारों ओरसे सताप होना.२ क्षा करना, सोयना, जाचना. प्र-१ देखना निहारना. २ कबूल करना. वि-१ देखना, १ सेवा करना भापार्थसहित । ९ ईस् (१ प० ईट्सति ) १ जाना ताक्ना प्रति-१ मार्गप्रतीक्षा | ईय् (१ प. इक्ष्यति ) १ इपी करना, वॉर जोना . पूय रना, मत्मा करना युद्धिस आदर सत्कार करना, ईप्यं ( १५० ईष्यति ) १ ईपी मानना प्रत्युत्-१ दूमरेले दप करना, मत्सर करना नेपर आपभी उसकी आरटय ईश् ( • जा• ईष्ट ) १ अधिकार टकी लगाके निहारना सम्-१ होना, चाह से करना शक्ति तुलना करना,रादरी करना हाना ईस् (१ प० ईसति) | ईप् (१ आ० इप) १ जाना • मार टारना या दम्ब दना ईन् (१ आ० ईजते) १ जाना २ ३ देसना, अवास्न करना ४(१५ इपति) १९ ठन दाप लगाना,नदा करना वरना, मिनना ईज ( १ उ० ईनात त ) ईह (१ आ० इहते ) १ यत्न जाना दाप लगाना, निदा करना, उद्योग करना २ मम्- करना १इच्छा करना, चाहना ईड (• आ ईटे, १ यात-ते ) १ प्रशमा करना, उ (आ अवते) १शद करना, स्तुति करना आवाज करना ईन्त् (१५ ईन्तति ) १ वापना, उक्ष् (१ प. उक्षति) १ निर्मल जस्डना करना, म्वच्छ करना, साफ ईर (१० उ० ईरयति-ते)१जाना करना - गारा करना, प्राक्षण २ हास्ना, प्ररणा करना ३ करना,सीचना नेजना (व.) पकना उत्-कहना, बारना प्र-१ भेजना सम्-१ वायुक १ हद हाना प्र-१ साचना २ जसिचनस मस्कृत करना ३ समान जाना (१५० ईराते) मारगरना १ जाना २ होरना, प्रेरणा उख् (१ प. औसति), १ जाना करना ३ फेकना (० ईते) १ जाना उस् (१५० उसति ) कापना,थर थराना, हिलाना जाना या आना ३ अग्कृत ~ आ० २ १० सस्कृतधातुकोश। " करना २ . उच्-उज् उभ्-ऊ करना, संवारना, शुष्क हाना, करना, नि-१ अधोमुस होना सूसना ५ म्रान होना,मुझाना | उम् (६५० उभात) १ भग्ना, पूर्ण उच् (१ प. उच्यति) १ एकत्र करना होना, इक्ट्ठा होना २ एक्त्र उम्म् (६ प उम्भाति) १ भरना, करना, इक्ट्ठा करना, बटोरना पूर्ण करना उछ (१ प. उच्यत, वि-व्यच्छ उर् (१५० ओराते) १ जाना ति) १ पूरा करना, समाप्त चरना. छाडना, त्यागना ३ | उरस् ( ११ प. उरस्याते ) १ बांधना, जसडर बांधना प्र-१ वरपान होना पाछना उर्ज (१० प ऊर्जयति) १ छोटना उज्ज् (६५. उज्जात) १ साधा रातिम वर्ताव करना उत् (१० उर्दते) १.नापना, उन्झ (६५. उझाते)१ छोडना, गिनना २ माटा करना, खेलना उर्व (१५२ उति)१ मार टा त्यागना प्र-१ट जाना, मुक्त रना या दुख दना, पाडा करना हाना उञ् (१ प. उति) थोडा उल् (३ प आरति) १ जलना एकत्र ग्ना, थोडा २ वटो उलण्ड (१० उ० उल्ण्टयाते ते) ग्ना २ दिनना, उठन करना, १ परना, उपर फेरना, उटा चुनना उट् (१५० माठात) १ मारना, उप (१५ ओपति) १ हिंसा ठोक्ना, नीचे गिराना करना, वधना २ जलना उन्द (७५० उनत्ति) १ आई| उपस् ( ११ ५० उपस्याते) १ होना, गारा हाना प्रभात हाना, पौ फटना उध्रस् (१ प. उधम्नाति, १० उ० ( प आहति) १ मार टा उनासयति-त) हर समय एना, नए वरना दुरा देना, थाटानना, दिनना মানা उब्ज (६५ जति)१ साधी गतिम ना, साधी गतिम उद ( प उगत) • माग्ना, यता ग्ना - दाना, दमन। ठारना, नाचेगिराना - ना, झोक्ना भापार्थसहित । ११ य ऊन- ऋतू-ऋत् उन्न ( १० नउ, उन्नापति ते), ऋषि (६५०ऋक्षणोति), १ मार कम करना, घटाना. २ नापना, ऋक्षि(५१०ऋक्षिणोति) गिनना. ३ सक्षेप करना. डालना या दुःख देना. २ दुःख उय (१ आ. उयते) १ सीना. देनेका यत्न करना. २ बुनना. उर्ज (१० उ० उर्जयति-ते) १ ऋष (६५० ऋचति ) १ प्रशसा करना, स्तुति करना २ आच्छा- शक्तिमान होना, पराक्रमी दित करना, ढकना.३ चमकना. होना. २ जीना. ३ जिलाना. अर्ण (२ उ० उणीति, उणाति, ऋच्छ् (६५० ऋच्छाते ) १ जाना. उर्णते) १ आन्छादन करना, २ कठिन होना, दृढ होना. ३ इद्रियका वल घट जाना ढकना. अर्ट्स (१ आ० उर्दते) १ नापना, ऋज् (१ आ० अर्जते) १ जाना. गिनना.२कोटा करना, खेलना. २ खडा रहना. स्थिर होना.३ वलिष्ठ होना, सामर्थ्यवान होना. ऊप (१ प. उपात ) १ रोगी ४ जीना. ५ सपादन करना, होना, बीमार होना. २ एकत्र प्राप्त करना, मिलाना. होना, इकट्ठा होना भूजना. करना, कल्पना करना, तक करना प्रवि-१ कुछ कालतक ऋण ( ८ उ० अर्णोति-अर्णते, ठहरना. वि-१ व्यूहरचना क. ऋणोति-ऋगुते ) १ जाना, रना सम्-१ एकत्र होना, इकट्टा गमन करना. होना. ऋतू ( १५० अति) १ जाना. २ . शक्ति होना, अधिकार होना. ऋ(१५० ऋच्छति ) १ जाना. ३ द्वैप करना, शरता करना. ४ २ संपादन करना, प्राप्त करना, कठिनतासे शासन करना,काठि मिलाना. ३ पहुँचाना. (३५० नाईसे अमल चलाना. (२आ. इयति) १ जाना. २ फैराना. ऋतीयते) १ निदा करना, दोप (५५ ऋणोति) १ हिसा गाना २ कृपा करना, दया करना, मार डारना, धना. करना, मिहर करना. उह् (१ आ० उहते) १ उहापोह ऋञ् ( १ मा० ऋचते ) १ , सस्कृतधातुकोश। कद-कर्ज कण-कब पयाने ) १ कहना.२व्यारयान | कर्ण (१० उ० कर्णयति-ते ) १ करना, वयान करना. वेधना, बोधना, छेदना, कौंचना. कद् (१ आ. कदते)१ भ्रमित उपा-१ सुनना.समा-सुनना. होना, घबर जाना, व्याल क (१० उ० कर्तयति-ते) १ होना.२ पुकारना. ३ रोना. छोडना, मुक्त करना, ढीला ४ मार डालना. (४ आ० करना. कद्यते) भ्रामत होना. कन् (१ प. कनति)१ चमकना, कत्र (१० प० कर्बयात ) १ छो- प्रकाशित होना. २ चाहना, डना, मुक्त करना, ढीला करना. प्रीति करना. ३ समीप जाना कर्ट्स (१ प. कदीते) १ कोवे. या आना. १ तृप्त होना. केसा शब्द करना. २ पेटमें कन्द् (५० कन्दति) १ रोना २ गुडगुटना, अब कूजन होना. बुलाना. ( १ आः कन्दते) कई (१५. कति ) १ जाना. १ भ्रमित होना, घबर जाना. क (१ प. कर्वति) १ गर्व करना, २५वराना.३ मार डालना. कर ( १ आ० कवते ) १ प्रशसा कल् (१ आ० कलते) १ शब्द करना, स्तुति करना. २ रग करना. २ गिनना. ( देना, रगाना कालयति-ते ) १ उटाना, कम् (१ आ० कामयते ) १ चा- फेंकना. ( १० उ. कलयति- हना, इच्छा करना. ते ) १ जाना. २ गिनना. कम्प् (१ आ० कम्पने ) १ हिल आङ्-प. १ बांधना. २ लेना. ना, कापना अनु-१ दया परि-प. १ याद रखना. वि-प० करना. १ व्याकुल होना. सन्-प० १ कम् (१५० कम्बति) १ जाना. सारांश निकालके कहना, कई (१५० ककति ) १ हँसना. (सौ०) कल् (१ आ. कल्लते) १ अस्पष्ट कर्ष (१६० कर्घात) १जाना. शब्द करना.२ शब्द करना. कर्ज ( १ प० क्जति ) १ पीडा ३ गूगा होना, शब्द न करना. करना, सताना कवू (आ० कवते ) १ कविता वढाई करना. तात्पर्य कहना.
१६ भापार्यसहित । का-काल काश-कील करना, वर्णन करना. २ तस- काश् (१ आ० काशते ) १ चम- वीरें खीचना, कना. (४मा: काश्यते) १ का (१ उ० कशति-ते) १ मार चमकना. निर (पू.) १ निकाल डालना, दुःख देना. २ दट देना. २ छिपाना, लुकाना. प्र- देना, शासन करना. १ प्रकट करना. कप् (१ प. कपति, १० ५० कप- कास् (१ आ० कासते ) १ चम- यति) १ मार टालना, दुःख कना.२ खासना, खरसारना. देना. २ परीक्षाके लिय घिसना. कि ( ३ प० चिकेति ) १ जानना. वि-१ सोना रूपा आदिकी समझना. नि-२ निश्चयपूर्वक जानना. परीक्षा करना. कस् (१ प० कसति ) १ हिलना, किट ( १ १० केटति ) १ जाना. २ सताना. ३ टराना. कापना. वि-१ खिलना. (२ कित् (३ ५० चिकत्ति ) १ जान- आ० कस्ते) १ जाना. २ नष्ट ना.(१०५० केतयति) १ चा- करना.३ आज्ञा करना, हुक्म हना.२ निवास करना, रहना. बजाना. ४ दड देना, शासन (१ उ० चिकित्सति-ते)१ करना. रोगप्रतिकार करना, वैद्यकी कंस् (२ आ० कस्ते) १ जाना. करना.२शासन करना.३ नष्ट २ नष्ट करना. ३ आज्ञा करना. करना. वि-प० १ आशका ४ शासन करना, दुट देना. करना, विश्वास न रखना. काङ्क्ष (१५० काक्षात, आ-आ-किल् (६ ५० किलति ) १ संपद कांक्षति.) १ चाहना, इच्छा होना.२ रीटा करना, खलना. करना, लोभ रखना. (१०५० केलयति) १ भजना. काञ्च ( १ आ० काञ्चते) १ २ उडाना. बांधना. २ चमकना, प्रकाशित कीद (१० उ० कीटयत्ति-ते) १ होना.. रंग देना, रग, डवोना.२ वांध- काल १० उ• कालयति-ते)१ ना, बंधन करना. उपदेश करना. २ कालकी गि-कीट् (१ प. कीलांत) १ वांधना, नती करना. कोलोंसे मजबूत करना.
सस्कृतधातुकोश। . कु-कुञ्च कु-कुण्डू कु (१ आ० कवते, २५० काति, ६ कुञ्ज (१ प. कुन्जति) १ अस्पष्ट आ० कुवते, ९ उ० कुनाति, शब्द करना, गुजारव करना. कुनीते )१ शब्द करना, अस्पष्ट कुट् (६५० कुटति) १ टेढा होना. शब्द करना. २ पक्षी या भौंरके २ ठगना, फसाना. (१० आ० समान शब्द करना, गुजारव कोटयते) १ कतरना. २ गरम करना. करना. कुक् (१ आ० कोकते) १ ग्रहण कुटुंब (१० आ० कुटुबयते) १ करना, लेना. परिवारका पालन करना. कुच् (१ प० कोचति) १ पक्षीके ! कुट् ( १० उ० कुटयति-ते) १ माफ़िक जोरसे पुकारना. २ कतरना. २ निदा करना, दोप २ स्वच्छ करना, माजके सफा । लगाना. ३ रगडना (१५० करना. ३ स्पर्श करना, छूना. कुट्टति,१० १० कुट्टयति) १ गरम ४ जोतना, हल चलाना. ५ वक्र करना. होना, टेटा होना. ६ लिखना, | कुड् ( ६५० कुडात ) १ वालकके रेखा खीचना. ७ आकुचित समान खेलना. २ खाना. करना या होना.८ कलह करना, ३ वटोरेना, जमा करना. टटा करना. ९ रोकना, अडाना, कुण (६ प० कुणति) १ शब्द क- प्रतिबंध करना. सम्-१ सको रना. २ दानादिकसे सरक्षण चित होना (६ प० कुचति) करना, सभालना. ३ दुःखमे १ आकुचित होना या करना. रहना. (१० उ० कुणयति-ते) स-१ आकुचित करना या होना. १ उपदेश करना २ बोलना. कुज ( १५० कोजाति) १ चौरना, ३ बुलाना. चोरी करना, मूसना. | कुण्ट् (प० कुण्टति) १ कुठित क कुञ्च् (१ प. कुञ्चति) १ जाना. रना.२दुःखादिसे श्रमित होना. २ टेढा जाना. ३ टेढा होना या कुण्ठ् ( १५० कुण्ठति) १ कुठित करना. ४ भल्प या कम होना करना. (१० उ० कुण्ठयति-ते) या करना. माड्-आकुचित १ घेरना. २ कुठित करना. होना, अकड जाना. कुण्ड् (१५० कुण्डति) १ ठित ~ भापार्यसहित । १७ . कुत्स्-कुम्भ कुमार-उपुभ करना. २ दुःखादिसे कुठित कुमार ( १० उ: कुमारयति-ते) होना. ( १ आ. कुण्टते) १ १ वालकके समान खेलना, क्री जरना. (१० उ० कुण्डयति-ते) टा करना. १ रक्षा करना, समालना. | कुमाल् (१० उ० कुमालयति-ते) कुत्स् (१० आ० कुस्सयते) १ १ वालकके समान खेलना, क्री दोष लगाना, निदा करना. २ डा करना. तिरस्कार करना. कुथू (४५० कुथ्यति ) १ वदयू कुर (६५० कुरति ) १ शब्द करना. आना. (९५० कुथ्नाति) कुई (१ आ० कूदते ) १ खेलना, सलन होना, मिलके रहना. २ क्रीडा करना. दुःखित होना, सकटग्रस्त होना. कुल् (१ प. कोलति) १ वटो- कुन्य (१५० कुन्याते ) १ मार रना.२ आपके समान वर्तना. डालना. २ दुःख देना. ३ दु.ख ३ सजातीयतासे रहना. १ गि- भोगना, पीडित होना. (१० नना.आ-१ तत्पर होना.२ च्या- कुन्थ्नाति)१ दुःख पाना. २ संयुक्त होना, मिटके रहना. कुश (४ पः कुश्यति ), गले कुन्दू (१० उ० कुन्द्रयति-ते) १ लगाना, आलिंगन देना. २ लपेटना. कुप् (१ प. कुप्यति ) १ घुस्सा कुंश् (१ प. कुशति, १० उ. करना. (१० उ० कोपयति-ते) कुशयति-ते) १ चमकना. २ बोलना.२ चमकना. कुप (९५० कुष्णाति) १ बाहर कुम्प् (१ प. कुम्पात, १० प. निकालना, रगडके निकालना कुम्पयति ) १ फैलना. २ याद २ चमकना.३ परीक्षा करना, करना. क्सोटीपर घिसके परीक्षा करना. कुम्व् (१ प. कुम्बात, १० प. अव-१ सिद्ध या स्थापित कुम्ययति) आच्छादित क करना. निस्-२ खेंचके बाहर रना, ढापना. निकलाना. कुम्म् (१० उ० कुम्भयति-ते) कुपुम (११ १० कुपुभ्यति)१ १ आच्छादित करना, दापना. छोडना, फेंकना. २ सं.धा. कुल होना. झूठ बोलना. क १८ सस्कृतधातुकोश। कुसू-कूण कून्-कृ कुस् (४ प• कुस्यति ) १ मिलना. कून् (१० आ० कूनयते ) सको- २ घेरना. चित होना. २ ऐठना. कुंस् (१ प० कुसति, १० उ० कु-कूप् ( १० प० कूपयति) १ अशक्त सयति-ते ) १ चमकना. २ होना. २ अशक्त करना. बोलना. कूर्द (१ आ० कूदते ) १ खेलना, कुस्म् ( १० आ० कुस्मयते ) १ क्रीडा करना. विचार करके देखना २ अयो | कूल् (१ प० कूलति) १ आच्छा ग्य रीतिसे हँसना. दित करना, ढापना. २छिपाना. कुह् ( १० आ• कुहयते ) १ अनु-१ अनुकूल होना ठगना. २ आश्चर्य या चमत्कार | कृ (५उ० कृणोति-गुते) १ दुःख दिखाना. ३ मोहित करना. कू (६ आ० कुवते, ९ उ० कुना- देना, सताना. २ मार डालना. ति-नीते) दुःखकारक शब्द (८ उ० करोति कुरुते) १ करना. आते-आ० १ अधिक करना २ विह्वल होना. करना. अधि-आ० १ जीतना, कूज् (१५० कूजात) १ अस्पष्ट शब्द करना. २ कूजना. बढकर होना. २ अधिकार होना, चौकस होना.३ शांततासे कूद ( १० आ० कूटयते) १ नही सहन करना. ४ थमाना, स्थिर देना. २ अस्पष्ट, गूढ या मालूम करना.अनु-प०अनुकरण करना, न हो ऐसा करना, कूट करना. दूसरेके माफिक करना. अप- (१० उ० कूटयाते-ते)१ दुःख आ०१ अपकार करना.२ झूठा देना, सताना. २ जलाना, दग्ध या खराब करना.आ-आ० १ करना. ३ बुलाना, आमत्रण वेषांतर करना, भेष बदलना.२ करना. ४ सलाह देना, उपदेश बुलाना. उत्-आ०१ मार करना. डालना, मरणोन्मुख करना. २ कूड (६५० कूडाते ) १ दृढ बटोरना, जमा करना. उदा- होना. कठिन होना. २ खाना. आ०१दूषण लगाना, छलना. कूण ( १० उ० एणयति-ते) उप-१०१ उपकार करना. उ. १ सकाचित होना. २ ऐंठना. पस-उ०१ पटलना, बदलना.
भापार्यसहित । कृ-कृ उपस्-१० १ स्वच्छ करना, कृड् (६५० कृडाते ) १ दृढ या सवारना २ बटोरना, जमा क कठिन होना, स्थिर होना.२ रना. ३ उत्तर देना तिरस-प. जमना, जमजाना. २ अपमान करना, घिन करना, कृत् (७५० कृणत्ति) १घेर लेना, तिरस्कार करना. दुस् (प) वेष्टित करना. (६५० फंतति) प० दुप्पम करना, खराब काम १ कतरना. करना निरा-आ०१ निर्भमना | कृप् (१ आ० कल्पते ) १ शक्ति करना, निदा करना, तिनकेके मान होना, समर्थ होना (१० समान मानना २ त्यागना, उकल्पयति-ते)१ कल्पना क छोड, देना, निकाल देना. ३ रना, विचार करना. २ मिश्रित नष्ट करना, विध्वसित परना. करना.३ चित्रित करना, रंगा परिस (पू)-१०१ स्वच्छ करना, ना (१० उ० कृपयति-ते) ओपदेना परा-प०१ निराकरण १ दुर्बल होना. करना २ सदाचारपूर्वक रहना, कृद् (५५० कृणोत) १ मार डाल अच्छी रीतिस वर्तना प्र-आ० ना २ करना. ३ जाना. ४ १ प्रारभ करना, शुरू करना २ दुखित होता. सेवा करना, नौकरी करना ३ कृद् ( ५ ५० कृणोति ) १ मार जसदी करना ४ बाटना, डालना २ करना. ३ जाना. देना ५ भग करना, ६ कहना, ४ दुखित होना. बोरना प्रति-आ० १ प्रतिकार कृवि (५५० कृविणोति) १ मार करना २ वदला रेना ३ उपाय करना प्रत्युप-आ० १ प्रत्युप डालना,सताना, दुःख देना कार करना. वि-आ० १ ढना. कृश ( ४ ५० कृश्याते ) १ कृश २ शब्द करना. वि-१०१ बद होना, सूक्ष्म होना, महीन होना. लना, रूपातर करना.२सतापित कृप् ( ६ उ० कृपति-ते ) १ करना, कपित करना.व्या-आ० कृषिकर्म करना, जोतना, हल १स्पष्ट करना, प्रकट करना. चलाना.२रेखा करना (१५० २समझाना सस-प०१स्वच्छ पति)१जोतना, कृषि करना करना, २ वटोरना, एकत्र कर हल चलाना, रेखा खींचना ना सु-१०१ अच्छा करना अप-स्राव करना, बहाना. २ बांट सस्कृतधातुकोश। क्न ( कु-केत् केप्-क्मर हलका या कमीना करना, ना, आमत्रित करना.२ सलाह हीन करना. ३ तिरस्कृत करना, देना. धृणा करना. अव- १ तिरस्कृत के ( १ आ० केपते) १ जाना. करना. २ निकालना, उद्धृत २ कपित होना. करना, बाहर निकालना, ऊपर केल् (१ ५० केलति) १ जाना. उठाना.आ-१ आकर्पण करना, २ कपित होना. खीचना. उत्-१ उठाना, उद्धृत केला ( ११ आ० केलायते )२ करना, उठा लेना. २ उत्तेजन देना. सम्-आकुचित करना, क्रीडा करना, खेलना. समेटना. सन्नि-१ खैचके नज केव् (१ आ० केवते ) १ सेवा करना. दोक लाना. (९ उ. कृणाति-णीते ) १ के (१५० कायति) २ शब्द क क दु.ख देना. २ मार डालना. (६ रना, आवाज करना. ५० किरति)१ फेक देना. अप- प० क्नयात, १० प. १ हलसे रेखा करना. २ विरल क्नथयति ) १ दुःख देना.२ करना, अलग करना.३ उडाना, २ मार डारना. फैकना. अव-१ फेंकना आ-क्नस् ( प. क्नस्यति ) १ मनसे १ भरना, भर डालना. प्रति या शरीरसे पक होना. २ (स) १ दुख देना. २ हिसा चमकना. करना. वि-१ विरल करना, क्नंस् (१ ५० क्नसात, १० प. फेकना. सम्-१ एकत्र करना, क्नसयति,) १ चमकना. वटोरेना. अभि-१ उलांडना, क्नू (९ उ० क्नुनाति नीते) १ गर्तगत होना, नष्ट होना, उप- शब्द करना, आवाज करना. (स्)-१च्छेदन करना. २हिसा | क्नूर (१ भा०क्नूयते) १ आवाज करना. करना. २ आई होना, गीला कृत ( १० १० कीर्तयति) १ प्र होना. ३ दुर्गध आना, बदबू सिद्ध परना, जाहिर करना.२ आना. कीर्ति करना. | कमर (१ प. क्मरति ) १ केद (१० उ० केतयति-ते) १ला. शरीर या मनसे टेढा होना.२ - मापार्थसहित] २१ ऋय-क्रम क्री-कुन्य वचक होना, ठग बनना. १ अतिक्रम करना, आज्ञा भग ऋथ् (१ प० ऋयति, १० उ० क्रय करना. उप-१ निकल जाना. यति-ते, काथयति ते)१ मार निस्-१ आगे जाना. परा-१ डालना. (१० प. ऋययति) पराक्रम करना.प्र-१निफल जा- १ वार २ क्रीडा, आनद, मनो ना, नजदीक आना. परि-१ रंजन करना. घूमना. वि-१जीतना. २ ऊपर ऋद् (१ आ० ऋदते) १ दुखित जाना. सम्-१ स्थलातर करना, होना. २ विफल होना. ३ षवर अन्य जगह जाना. की (९ उ. क्रीणाति-णीते) १ जाना. क्रन्द् ( उ० क्रन्दति-ते) १ दुःख सरीदना. २ वदलेमें देना लेना. करना.२ घबर जाना.( आ० ३ जीतना. वि-१ बचना क्रन्दते ) १ पुकारना, जोरसे क्रीड् (१ प० क्रीडति) १ खेलना, बुलाना. विहार करना. ३ ठट्ठा करना, क्रप् (१ आ० क्रपते) १ जाना. उपहास करना.४ मन बहलाना. अनु- आ० १ खेलना. आ- २ दया करना. कम् (१ आ. क्रमते-म्यते) १ परि-सम्- आ० १ खेलना. सम्-प०१ शब्द करना. निर्भयतासे जाना २ रक्षण कर आ-१ उगना, उदित होना. दीक जाना या आना. २ वक्र उप-प्र-१प्रारभ करना. वि-१ घूमना या जाना. ३ वक्र होना पग गिनते जाना.व्या-१ ति या करना. ४ अल्प होना या क्रम करना, आज्ञा भंग करना. करना. (१ प०कामात-म्यति) १जाना, क्रुड (६ प० क्रुडति) १ छोकरे- चलना. आत-१ अतिक्रम कर कीसी चेष्टा करना, २ ड्रवना. ना, हद्दसे बाहर जाना. अनु-१ ३ खाना. ४ दृढ होना. क्रमसे जाना. भाभ-रजीतना. क्रुथ् (९ प० क्रुथ्नाति) १ मार २पराभव करना हल्ला करना. डारना. अप-१ बाहर जाना. आ-१ क्रुन्थ् ( ९ प० क्रुथ्नाति ) १ जय पाना, अधिक होना. उत् दुःखित होना, विह्वल होना. २ ना. ३ वडना, वृद्धिगत होना. रुञ्च (१ प० कुञ्चति) १ नज २२ सस्कृतधातुकोश। कुध-किट क्लिन्ट्-चेल् चिपकके रहना, सटके रहना. | क्लिन्द् (१ उ० छिन्दति ते) १ क्रुध ( ४५० क्रुध्यति) १ क्रोध रोना, शोक करना. करना, धुस्सा करना. | क्लिश् (४ आ• किश्यते) १ दुःख क्रुश् (१ प. क्रोशाते) १ पुका सहन करना. (१ प. विश्ना रना.२ रोना अनु-दया करना. ति)१ केश या दु.ख देना. आ-१ निदा करना, गाली २ हरकत करना. ३ दुःख देना. उप-१ दाग लगाना, सहन करना. दोष देना. प्र-जोरसे पुकारना. क्लीव ( १ आ० क्लीवते १) दुर्बल क्रे (१वते ) १ लेना, सेवन होना, निर्बल होना, वीर्यरहित करना, २ भजना. होना. २ लज्जालु या डरपोक क्लथ् (१ प. कृयति) १ दुख होना देना. २ मार डालना. ३ धूमना. | क्लीव (१ आ कीवते) १ दुर्बल क्लद् (१ आ० वदते ) १ धव होना, निर्बल होना, वीर्यरहित रना. २ विह्वल होना, दुःखित होना. २ लज्जालु या टरपोक होना. होना. क्लन्द् (१ प. कृन्दति) १ रोना |क्ल (६ आ० लवते ) १ जाना. २ बुलाना, पुरारना. (१ आ. क्लेम् ( १ आ. क्लेवते) १ सेवा । कृन्दते ) १ घबरना, २ दुःखि करना त होना. क्लेश् (१ आ० केशते) १ स्पष्ट क्लप (१० उ० वापयति-ते) १ शब्द करना. २ मार डालना. ऋतासे बोरना. २ अस्पष्ट ३ हरकत करना. ४ दु.ख देना, बोल्ना. सताना कण (१ प. क्वणति )१शब्द कम् (१ प. क्लाम्यति ) श्रमित करना. २ कण कण ऐसा शब्द होना, थकजाना २कुम्हलाना. करना क्लबू ( १ आ० झवते ४ आ० कथ् (१ प. कयति ) १ उवा- कुव्यते) १ डरना. उना, पसाना. क्लिद् (४ प० लियति) १ आई | केल् (१ प. केलाति) १ कपित होना, गीला होना. होना, हिल्ना.
भापार्थसहित । क्ष-क्षर क्षल्-क्षिप क्षज्ञ ( १ आ० क्षजते) १ जाना, ढाना ४ गलना.५ अनुपयुक्त सरकना. २ देना, दान करना, होना. ६ वहना. सम्-१वहना. भेटमें देना. ३ मार डारना. ( १० आ० आक्षारयते) १ सञ् (१ आ० क्षजते) १ जाना, दोप लगाना, निदा करना. सरकना २ देना, दान करना, क्षल् (१५० क्षति) १ जाना, सर- भेटमै देना. (१५० क्षजति, १० कना. २ कापना, थरथराना. उ० क्षजयति-ते ) १ दुःख (१० उ. क्षालयति-ते ) सहन करना, विपत्तिमें रहना १स्वच्छ करना, पवित्र करना, धोना. वि-१ धोना. क्षण (८ उ० क्षणोति-क्षणुते) १ क्षि ( १ उ० क्षयति-ते)१ सूक्ष्म मार डालना, जानसे मारना. २ दुःख देना,सताना. ३तोडना. होना, ह्रास होना, कम होना. २ नष्ट करना. ३ राजा सरीखा क्षद् (१५० क्षति ) १ खाना, काम चलाना, शासक होना. भक्षण करना. २ मुक्की मारना, (५५० क्षिणोति) १ मार कूटना. ३ ढंकना. ४ मार डालना, जानसे मारना. २ दुःख डालना. देना, सताना. ३ क्षत करना, क्षप् (१० उ० क्षपयति-ते)१ मे घाव करना. (६५० क्षियति) जना २ सहन करना. ३ हूकना १ जाना, चटना. २ वास (१ उ०क्षपति-ते)१सयमी होना. करना, रहना, मुकाम करना, क्षम्प् ( १ ५० क्षम्पति, १० प. वसना.(९५०क्षिणाति) १मार क्षम्पयति-ते)१सहन करना. २ डालना, जानसे माग्ना.२द्धाय दया करना.३ चमकना. देना, सताना. क्षम् (१ आ० क्षमते, ४ पक्षिण (८ उ० क्षिणाति-शिशुन, क्षाम्यति ) १ सहन करना, णोति-क्षेणुते): मार डायना. सहना, २ क्षमा करना.३ समर्थ २ दुम्य वेगापीटा याना. होना.४ रोकना. शिद (१) अस्पष्ट क्षर् ( १५० क्षरति ) १ टपकना, स शन्दमागहना. रना, झरना, चूना. २ गिरना, शिप (५५ क्षियतिर फैक्नाः हिरना. ३ गिराना, हिलाना. YSमाना.(६- 4 .
२४ संस्कृतधातुकोश। करना, ठट्ठा करना २ आकर्षण क्षुम् (१ आ० क्षामते ) १ मयना. क्षिर-सु क्षुद्-क्ष्माय ति-ते) १ फैकना, उडाना, झो क्षुद् (७उ० क्षणत्ति-अन्ते) १कू. क्ना २भेजना ३ रखना, धरना. टना, पीसना, मुक्की मारना. ४ मार डालना ५ दोप लगाना २कुचलना. ६ नष्ट करना. अधि-१ दोष क्षुध (१५० क्षुध्याते ) १ क्षुधित लगाना, आरोप करना. अब-१ होना, भूख लगना. नीचे फेकना. आ-१ उपहास २ क्रोध करना, गुस्सा होना. करना, खीचना.उत्-१उठाना, उठा लेना.नि-१ रखना पर्या- (४५० क्षुभ्यति,९५० क्षुभ्राति) १ मयना. १ वाधना प्र-१ जोरसे फेंकना. वि-१ फैलाना. विनि-देना धुर् (१ प० क्षुराति ) १ कतरना, २ छोटना समा-भेजना.सम्- चीरना, छेदना २ लकीर खीचना. १ सक्षेप करना २ नष्ट करना. ३ आकर्षण करना, खीचना. क्षेड् ( १० उ० क्षेडयात-ते) १ क्षिक् (१ प. क्षेवति, ४ ५० क्षी- भक्षण करना,खाना. व्यत्ति ) १ मुखप्ते बाहर निका क्षेत् (१ प. क्षेति) १ मदोन्मत्त लना, थूकना, के करना. होना, मस्त होना. क्षी ( १ उ० क्षय त-ते, ९५० (१ प. क्षायति) १ नष्ट क्षीणाति) १ दुख देना, पीडा होना, हास होना, कम होना, करना २मार डालना. म्लान होना. क्षीज (१५० क्षीजात ) १ अस्पष्ट क्षोद ( १० उ० क्षोटयति-ते ) १ शन्द करना.२ कराहना. भेजना २ फेकना. क्षीर (१ आ. क्षीयते )१ मदो- क्ष्णु (२५० क्ष्णोति, आ. सक्ष्णु- मत्त होना, मस्त होना. ते ) तीक्ष्ण करना, पेना करना, क्षी (१ आ. क्षीवन) १ मदो तेज करना, पैनाना. (२ आ. न्मत्त होना, मस्त होना. क्ष्युत) ले जाना. क्षु (२५० क्षौति) १ छोयना. [क्ष्माय (१आ०क्ष्मायते) १ हि. २ ससारना. लना, कांपना.
भाषार्थसहित । २५ खट्-खई क्ष्मील-ख मील ( १५० क्ष्मीलति) १पलक खद् (१ प. खटाते ) १ चाहना. लगाना, पलक मारना. २ शोधन करना, ढूढना. विड् (१५० क्ष्वेटाते ) १ अस्पष्ट | खट् ( १० उ० खट्टयात ते) १ शब्द करना.(४ प. विड्यति) आच्छादन करना, छिपाना, १ नल्हाना, तेलकी मालिस ढांफना. करना, चुपडना. खड़ ( १० उ० खाडयक्तिते) विद् (१ प.क्ष्वेदात) १ मस्पष्ट टुकडे करना, खड करना. शब्द करना. (४ विद्यात )१ | खण्ड् (१ उ० सण्डयाते-ते) १ नल्हाना तेल की मालिस करना, टुकटे २ करना, खंडित करना. चुपडना.२ मुक्त करना, छोड (१ आ० सण्डते ) १ मथन देना. करना, मथना. वेल् (१५० खेलति) १ जाना. | खद् (१५० खदात) १ खाना. २कांपना,थरयराना. ३सूदना. २ मार डालना. ३ सताना.४ ४ खेलना. स्थिर रहना (२०५० खाद- स्व. यति) १ आच्छादित करना. खरव् (१ प. खस्खति ) १ खन् (१ उ० खनति-ते) १ दुःख हँसना. देना. २ खोदना. खच (१५० खचति, ९५० ख खम्ब (१५० सम्बाते) १ जाना. नाति ) १ मर्यादा होनेपरभी खई (१५० खपति) १ जाना. देरसे जन्म लेना. २ सपत्तियुक्त करना. ३ स्वच्छ, पवित्र या ख' (१ प. खजीत ) १ दुःख पावन करना. (१० १० खच. देना, सताना. २ स्वच्छ करना, यति) १ बँचके बांधना.२ को- साफ करना. ३ आतिथ्य पूजन दण करना, खचित करना. करना, सन्मान करना. खञ् ( १ १० सजति) १ मयना, बई (१५० खर्दति) १ चनाना, हिलाना, मयन करना. दांतोंसे कांटना. खञ्ञ् (१ प० खजति) १ लगडा खई ( १५० खति ) १ हठ होना,लंगडाना. करना,२ गर्व करना. . - २६ सस्कृतधातुकोश। खर्व-खुज खुड्-खोट् खव् ( १ ५० खर्वति ) १ हठ खुड् (१ प. खोडात, १० प. करना २ गर्व करना खोडयात) १ टुक्डे करना, खल् (१ प. खलति) १ स्थलातर चीरना (६५० खुडति) १ करना, जाना • बटोरना छिपाना २ निकाल देना खद् (९ १० खौनाति ) १ सप खुण्ड (१५० खुण्डति, १० उ. त्तियुक्त करना २ स्वच्छ कर खण्डयति-ते) १ टुकडे करना, ना, पवित्र करना ३ द्रव्य स्पष्ट चीरना (१ आ० खुण्डते)१ करना ४ मर्यादा होनेपरभी लगडा होना बहुत देरसे जन्म रेना | खुर ( १५० खुरति) १ कतरना, खप् ( १५० खपति ) १ मार चीरना २ खुरचना डारना, सताना खुर्द ( १ आ० खूर्दते) १ खेरना, खाद् (१ प. खादति) १ खाना क्रीडा करना खिद् (१५० खेटति) १ डराना | खेट् ( १ प० खेटति ) १ घबर २ दुख देना, सताना जाना (१० उ० खेटयाति-ते) खिद् (१ प. खेदात ) १ भय १खाना, भक्षण करना दिसाना, घबराना २ सताना, | खेड् ( १० उ० खेडयति-ते) १ खाना, भक्षण करना दुख देना (४ आ० खिद्यते, ७ आ• खिन्ते ) १ साट, खेल् (१ प. खैलति ) १ कपिन दुख सहन करना खिन्द् (६५० खिन्दति) १ दुख | खेला ( ११ प० खेरायाते ) १ देना, सताना विलास करना, क्रीडा करना | खे (भा० खेवते ) १ सेवा कर खिल् (६५. खिलति) १ विनना, ना, नौकरी करना उच्छन करना (१५० खापति) १ स्थिर रहना खु (१ आ० गवते) १ आवाज २ मार डारना ३ सताना ४ करना, शन्द करना दुस करना ५ खोदना खुज (१ प. सोजति) १ चोर सोद (१५० खोटति) १ रग ना, मूसना. डाना (१० उ.सोटयति-ते) होना २ खेरना भाषार्थसहित । २७ खोड्-गटू गण्डू-गम् १ फेंकना. २ खाना, भक्षण | गण्ड् (१५० गष्टति) १ गालों में करना. रोग होना, गडमारा होना. खोइ (१५० खोटात) १ लगडा- गण (१० प० गणयति) १ गिन- ना. (१०५० खोडयात) १ ना, नापना.२ मानना समझना. फेंकना. आधि-१ वखानना, स्तुति क- खोर (१५० खोरति) १लगडाना. स्ना. २ गिनना. खोल् (१५० खोलति) १लगडाना. गद् (१ प.गदति) १ स्पष्ट बोलना. ख्या (२५० स्यात) १ प्रसिद्ध २ वीमार होना. (१० उ० करना, प्रस्यात करना.२ कह- गदयति-ते) १ गर्जना करना. ना, व्याख्यान करना. अभि-१ गद्गद ( ११ ५० गद्दयति) देदीप्यमान होना, चमकना. गद्गद स्वरसे बोलना, रुके हुए आ-१ कीर्तिमान होना. वि-१ कठसे वोलना. प्रख्यात करना. सु-१ पसद ग (४५० गध्यति) १ मिश्रित होना. प्रत्या-१ नाहीं करना, होना, मिल जाना. स्वीकार नहीं करना. सम्-२ गन्ध ( १० आ० गन्धयते) १ गिनना, सकलन करना. समा दुःस देना. २ मार टालना.३ १ सज्ञा देना, नाम रखना. जाना. मांगना, याचना कर ग. ना.५ सजाना, शोभित करना. गग्य (१ प. गग्धति) १ हँसना. गम् (१ प० गच्छति) १ जाना गज् (१५० गजति) १ मदोन्मत्त २ इष्टार्थ सिद्ध होना. अनु-१ या वेसुध होना. २ शब्द करना. अनुसरण करना,दूसरेका देखके (१० उ. गजयति-ते)१श वैसाही करना. आ-१ आना. २ वीचमे या किसीकी ओर जाना, ब्द करना. गञ् (१ प.गञ्जति) १शब्दकरना. भधि-१ मिलना, प्राप्त होना. २ पुस्तकादि पढना. ३ त्याग गड् (१ ५० गडति, १०५० गढ ना, छोड देना. अप-१ रोट यति ) वहना, झरना. २ भाना भर-१ जानना. उत्-१ सीचना. ३ चुआना ( १० ५० नजदीक जाना या भाना. उप- गडयति) १ छिपाना, टंकना. १ नजदीक जाना.२पैदा करता.
सस्कृतधातुकोश। गम्ब्-गर्व गहू-गाइ ३ अनुमोदन देना, सलाह देना | गई ( १ उ. गीते-ते, १० उ. उपा-१ नजदीक जाना या गर्हयाते-ते) १ दोप लगाना, आना दुर-१ दु खसे जाना निदा करना २दुखित होना. नि-१ ज्ञानप्राप्ति करना निर-गल् (१ प. गलति) १ टपकना १ आगे जाना २ बाहर जाना गिरना ३नष्ट होना (१० ला. पर्युत्-१ ऊपर उठना परि-१ गलयते) १ टपाना अब-१ घेर लेना २ बाहर जाना प्र नीचे गिरना वि-१ जाना, त्या-१ लौट भाना वि-१ शत्रु की ओर चढ जाना समा-१ नजदीक जाना २ मदद देना, भेटना, एकत्र होना समुप- साह्य करना परि-१ टपकना. कबूल करना, मान्य करना २ डूबना ३ नष्ट होना । सु-२ आनदसे या खुशीसे गल जाना जाना २ पार जाना सम्-गल्म् (१ मा० गल्भते) १ धीर आ० १साथ जाना २ भेंटना, धारण करना, धैर्य रखना, एकत्र होना ३ ( सकर्मक ) साहस करना जाना गल्ह् (१ आ० गल्हते ) १ दोप गम्ब (११० गम्बति) १ जाना देना, निदा करना गई ( १५० गति) १ जाना | गवेष (१ आ० गवेषते, १.उ. गर्छ ( १ ५० गर्नति, १० उ० गवेषयत्ति-ते) १ टूढना, पता गर्जयाते ते) १ गर्जना करना लगाना २ प्रयत्न करना गर्द ( १ ५० गर्दति, १० उ० (गह (१० प० गहयाते) १ घना गर्दयति-ते) १ गर्जना करना होना, निबिड होना. गई (१० उ० गर्धयति ते ) १/गा (१ भा• गाते ) १ जाना, चाहना, इच्छा करना, आशा गमन करना (३५० जिगाति) करना १ प्रशसा करना, सराहना गई ( १५० गति ) १ जाना गाध् (१ आ० गाधते) १ दूदना. गर्व (१५० गति) १ गर्व करना २रहना, ठहरना ३ ग्रयधनाना. हठ करना ( १० मा० गर्व गाइ (१ आ० गाहते) १ नष्ट क- यते) गर्वको बढाना रना २ मर्मभेद करना. ३ फेर- मापार्यसहित । गिल्-गद् गुध्-गु ना, हिलाना. भव्-१ स्नान गुथ् (१ आ० गोधते) १ खेलना, करना. वि-१ स्नान करना क्रीडा करना (१ प. गुध्यति) २ पाना १ घेरना. (९५० गुध्नाति )२ गिल् (६५० गिलति) १ निगलना. क्रोध करना, गुस्सा करना गु (६५० गुपति ) १ हगना, गुन्द् ( १० ५० गुन्द्रयति ) १ झाडा होना, दस्त होना. (१ अनृत वोलना, झूठ कहना आ० गवते)१ अस्पष्ट बोलना. गुप् (१ आ० जुगुप्मते) १ वचा गुज् ( १५० गोजति, ६५० गुज ना, सरक्षण करना २ छुपाना, ति)१ अस्पट बोलना, गुजारव छिपाना ३ दोप लगाना, निंदा करना. करना. (१ प. गुप्यति)१ गुञ्ज ( १५० गुजात)१ अस्पष्ट व्यामुल होना, भ्रात होना २ दोलना,गुजारव करना. व्याकुल करना. भ्रात करना गुड ( ६५० गुडति) १ सरक्षण (१५० गोपायति) १सरक्षण करना, बचाना करना (१० उ० गोपयति-ते) गुण ( १० उ० गुणयति-ते)१ २ प्रसाशना, चमरना. २ बोलना बुलाना, आमत्रण करना २ उपदेश करना. ३ गुणाकार गुफ (६५० गुफति)। करना, गुणन करना ४ सलाह | गुम्फ(६५० गुम्फति) देना गुंफन करना. २ रचना गुण्ठ ( १० ५० गुण्ठयति ) १/गुर (६ मा० गुरते) १ प्रयत्न घेरना, घेर लेना. भव-२ घूघट करना, उद्योग करना सेना, परदा डालना गुर्द ( १ आ. गूदते) १ क्रीडा गुण्ड् (१५० गुण्डति,१० उ० करना, खेलना (१० उ० गर्द गुण्डयति-ते ) १ घेर लेना, यति-ते)१ रहना, वास करना, घेरना. २ पिट चूर्ण करना बसना २ आमंत्रण करना, सरक्षण करना. बुलाना. गुइ (१ भा० गोदते) १ खेलना, गुई ( १ प. गूति ) १ प्रयत्न क्रीडा धरना करना, उद्योग करना १ गूथना सस्कृतधातुकोश। गेप-ग्रम गुह-ग गुइ ( १ उ२ गोहात-ते) १ छि- १ समझना, जानना.२ समझा- पाना, वस्त्रादिसे टांकना. ना, जताना. नि-उत्-६५० गू(६५० गुवात ) १ हगना, १ के करना, वमन करना. मलविसर्जन करना, शोचविधि समुत्-१० आ० १ जोरसे करना. पुकारना. २ऊपर फेंफना. गूर (१० मा० गूरयते) १ प्रयत्न गेप (१ मा० गेपते ) १ कापना, करना, उद्योग करना. २ भक्षण हिलना. २ जाना, स्थलांतर करना, खाना (४ आ० गूर्यते) करना. १ मार डालना, दुःस देना. २] गेल् (१ आ० गेवते)१ सेवा करना. जीर्ण होना, पुराना होना. ३गेष् (१ आ. गेषते ) १ टूटना, जाना, गमन करना. पता लगाना. द्' (१ आ० गूदते ) १ क्रीडा गै (१५० गायति) १ गाना.उत्- करना, सेलना. (१० उ० गूर्द- यति-ते)१ पसना. २ बुलाना. प्र-१ जोरसे गाना या जोरसेक- गृ(१५० गराते ) १ सौचना, हना वि-२ निश्चयपूर्वक कहना गीला करना. (१० आ० गार-गोम् (१० उ० गोमयति-ते) १ यते) १ समझना, जानना. लीपना, पोतना. गृज (१५० गर्जति)। गोष्ट (१ आ० गोष्ठते) १ वटोरना- गृञ् (१५० गृजति) ६१गर्जना | ग्रन्थ् (१ आ० ग्रन्थते ) १ पक्र परना, पुरना. होना, टेढा होना.२ दुष्ट होना.३ गृध् (४ प. गृध्यति) चाहना गोठ योधना, गूथना.४ झुकाना, गृह (१मा० गहते, १० माः नताना. (९५० ग्रय्नाति १० गृहयते ) १ लेना, स्वीकार ५० ग्रन्ययात) गांठ बांधना. परना. पापना,गूयना.२सदर्भ रगाना. ग(६ १० गिर (ल) ति)१ उत्-१ छोद देना, मुक्त करना. राना, निगरना. (९५० र अस् (१ भा० असो) १साना, पाति) शन्द करना, आवाज निगरना.(१०३० प्रासयति करना. (१० ला. गारपते)। ते) १पेर ऐना.२हरण करना.
मापार्थसहित। ग्रह-ग्लुच् ग्लुञ्-घट्ट ग्रह (१५० ग्रहति, १०५० ग्राह- ग्लुश् (१ प. ग्लुञ्चति ) १ यति )१ लेना, स्वीकार करना. जाना, स्थलांतर करना. (९ प. गृह्णाति-होते) १ ग्लेप् (आ० ग्लेपते) १ पराधीन लेना, स्वीकार करना. अनु-उ० होना. २ दरिद्री होना. ३ १ कृपा करना, अनुग्रह करना. जाना. ४ हिलना, कांपना. अव-उ०१ अटकाना. उत्-प० ग्लेख (१आग्लेवते)१ सेवा करना. ५ विश्वास करना. उप-१ कृपा ग्लेप् (१ आ० ग्रोपते) १ ढूंढना, करना.२ भरना.नि-१ ले लेना, शोध करना. हरण करना. २ शासन करना.३ ग्लै (१५० ग्लायति) म्लान प्रतिवध करना, अटकाव करना. परि-१ धरना, पकडना, लेना. होना, ग्लानियुक्त होना. २ प्रति-१ अनुमोदन देना, हो जम्हाई लेना घ. कहना.२गले लगाना,आलिंगन करना. ३ जीतना. ४ प्रतिग्रह | घग्घ् (१ प. घग्धति)। करना, रेना.५ अगीकार करना. घर (१५० घघाते ) हँसना, वि-१ झगडना, झगडा करना. उपहास करना. सम्-१ वटोरना, एकत्र करना. घट् (१ मा० घटते ) १ होना. ग्राम् (१० उ० ग्रामयाते-ते) १ २ करना. (१० उ० घाटयति- बुलाना. २ बुद्धिवाद कहना. ते) १ घोटना, हिलाना. २ ग्रुच् (१५० ग्रोचति )१ चोरना, बटोरना, एकत्र करना. ३ मार चोरी करना, मूसना. डालना, दुःख देना. ४ चमक ग्लस् (१ आ० ग्लसते )१ खाना, ना, प्रकाशित होना. मक्षण करना. घण्ट् (१० उ० घण्टयात ते)१ ग्लइ (१ उ० ग्लहात-ते, १० प० बोलना, कहना. २ चमकना, ग्लहयति)१ लेना, स्वाकार प्रकाशित होना. करना. घट्ट ( १ आ० घट्टते, १० १० घट्ट ग्लुन् (१ १० ग्लौचति) १ चो यति) १ जाना, स्थलांतर कर रना, मूसना.२ जाना, स्थला ना. परि-१ फैलाना. वि-१ तर करना. मांजना, धोना. २ विगादना.
३२ सस्कृतधातुकोश। घण-घुर घु-घृष् घण (८ प० घणोति, आ० घणु अज्ञानी होना. २ टूढना, शोध ते) १ चमकना, प्रकाशित करना होना घुप् (१५० घोपति) १ चुपके घम्ब् ( १ ६० घम्वति ) १ जाना. काम करना. (१० उ० घोप घई ( १५० घर्बति) १ जाना. यात-ते)१ मनमै विचार कर घप् (१ आ० घषते) १ घिसना. यह सुनाना. २ प्रशसा करना, २ घिसके स्वच्छ करना. घोषित करना. ३ तरह २ के शब्द करना आ-१ एक साथ घस (१५० घसति) १ खाना. रोना २ ढढोरा पीटना घंस् ( १ आ० घसते )१ सौचना, थुप् ( १ आ घुपते ) १ स्वच्छ प्रोक्षण करना करना, साफ करना घिण्ण (१ आ० घिण्णते )रलेना | घूर (४ आ० धूर्यते ) १ हिसा घु (१ आ० घवते) १ आवाज करना,दुख देना. २ वृद्ध होना। करना. पुराना होना घुद् (१ आ० घोटते ) १ लॉटना, घूर्ण ( १ आ० पूर्णते, ६ ५० पीछे आना. २ बदल्ना, बदल घूर्णति) १ चक्राकार घूमना देना. (६ ५० घुटति )१ प्रति घृ (१५० घरति, ३५० जिपति, कार करना २ मार डालना ३ १० उ० धारयति-ते)१ गीला प्रतिबंध करना ४ रक्षण करना. करना, तरडा देना, सीचना. घुइ (६ ५० घुडति) १ प्रतीकार २ चमकना, प्रकाशित होना. करना २ मार डालना ३ वूद २ गिरना, टपकना. घुण ( १० घोणते, ६ प० घृण ( ८ ५० घृणोति, घोति, घुणात)१ चक्राकार फिरना, आ० घृणुते, घर्णते) १ चमक- घूमना, रोटता फिरना. ना, प्रकाशित होना. घुण्ण (१ आ० घुण्णते) १ रैना. घृण्ण (१ आ. घृण्णते) १ टेना, घुर (६ प.घुराति)१ भयकर होना. स्वीकार करना. २ शब्द करना, आवाज करना, घृप् (१ प. घर्षति) १ पीसना पुरांना. (४ मा० घूर्यते) १ २ फूटना. ३ घिसना.
उ० चयति ते) तृप्त होना, चन् (१ ५० चनाते, १० उ० भापार्यसहित । पोर-चट चण्-चम्प् घोर (१ प० पोरति) १ चतुरा चण् (१ प. चणति) १ दान इसे चलना करना, देना २ आवाज होना. घ्रा (३ प. जिनाते)१ सूचना ३ मार डारना, दुख देना. २चमना चण्ड (१० चण्डत, १० आ. ट. चण्डयते) १ घुस्मा करना हु (१ आ० इयते ) १ शब्द चत् (१ उ० च ति-ते )१मांगना, करना, आवाज करना याचना करना,२ जाना चद् ( २ उ० चदति-ते)१ याचना चक् (आ० चस्ते) १ निवारण करना, मागना करना, पीछे हटना ( १ चानयति-ते) दुःख देना, मार सतुष्ट होना २ चमरना, प्रमा शित होना डायना २शब्द करना, आवा- ज करना ३ भरोसा रसना, चकार (२५० चमास्ति, क्वचित् विश्वास करना आ० चकास्ते) १ चमचना, प्रकाशित होना चन्द् (१ प. चन्दति) १ चम क्ना २ आनद पाना, सश चए (१० उ० चयति-ते) १ होना दुःख पाना, २ दुस देना चक्ष (२ आ० चष्टे) साफ चप् (१ प. चपति) ? शान पर ना, समझाना (१० उ० चप बोरना • देसना ३ चूसना यति-ते)२ पीसना २ कूटना ४ छोटना आ-१ देखना चर (९५० चनोति) १ मार चम् (१ प. चमति, ५ प. च टाटना चश् (१५० चश्चात)१ जाना म्नोति)१साना,२पाना आ- २ कूदना ३ हिलना ( आचामति ) १ आचमन चट् (१ १० चति, १० उ० चा करना, पतला पदार्थ मुंहम टेना टयति-ते) १ बरसना २से वि-(विचमात) १ खाना टना ३ मार टालना ४ तोटना चम्प (१ प. चम्पति, १०० उत्-(१.उ.)१ उच्चाटन करना चम्पयति-ने) ना. ३ठगना ३स.घा सस्कृतधातुकोश। चच-चाय चम्ब्-चर्च् चम् (१ प. चम्वति) १ जाना. चर्चयति-ते) १ पटना, अध्य चय (१३० चयति-ते)१जाना. यन करना, चर्चा करना. चर (१५० चरति) १ जाना. २ चर्च् (१ आ. चच्छेते, १० आर साना. ३ आचरण करना. चर्चयते) १ दोप लगाना, निदा अत्या-आज्ञाभग करना. अभि करना. २ वोलना. ३ अध्ययन १ठगना.२ टोना करना, जादू करना, पटना. करना. ३ ध्यान देना. अनु-१ च ( १ ५० चवीत) १ जाना. अनुसरण करना, नरल करना. २खाना.३ चनाना. आ-१ कर्म करना. उत्-आ. | च (१५० चवंति, १० प. चर्ष- १ आज्ञाभग करना, हुक्मन यति)१ खाना २ चबाना. मानना.२ देशसे निकाल देना. चरण ( ११ प. चरण्यति उद-१० उपर जाना. उप-१ १जाना. सेना करना, सन्मान देना २ नजदीक जाना. परि-२ सेना चल् (१ प० चलति) १ हिलना, करना. प्र-१ प्रसिद्ध करना २ कांपना, (६ प० चलाते)१ आचरण करना. व्यभि-१ दु सेलना, क्रीडा करना. (१०५० प्कर्म करना, व्यभिचार करना चाल्यात).१ पालना, वढाना सम्-५०१ साय जाना सम्- (१० १० च (चा) लयति)१ आ०१ऊपर चढना समा-१ हिलाना, कपाना.प्र-१ गिरना. प्रसिद्ध करना. २ अच्छा आच चप (१५० चपति)१ मार डालना, रण करना (१० उ० चारय दुःख देना (१ चपति-ते) तिते) १ सशय होना. २ १खाना. सशयराहत होना वि-१ विचार चह (१५० चहति, १० उ० चह- करना. यति-ते) १ ठगना.२ दुष्कर्मी चई (१५० वर्षात ) १ जाना होना, गर्मीला होना. (१० उ० चर्च (१-६५० चर्चति) १ वोल चहयति-ते) १पीसना, कूटना. ना, चर्चा करना. २ गाली देना, चाय् (१ उ० चायति-ते ) १ निदा करना. ३ द ख देना ४ जानना, समझना. २. पूजा विचारना, टूटना. (१० उ० करना, सन्मान करना.
भापार्यसहित। चिरि-चुक् चि-चिन्त चि (उ. चिनोति-चिनुते,१०१० चिरि (५ ५० चिरिणोति ) १ चययति, चपयात ) ढूंढना.२ पीडा करना, दुःख देना. वटोरना, एकत्र करना. ( १ उ. | चिल् (६५० चिलति) १ कपड़े चयति-ते) १ बटोरना. अप-१ पहरना. नाश करना, विध्वंस करना. उप- चिल् ( १५० चिल्लति) १ मुक्त सम्-१ पाना,प्राप्त करना.निर करना, ढीला करना.२ मनका १निश्चय करना, ठहराना.विनि अर्थ-भाव दिखाना. ३ कामचु- र-२ ठीक २ निश्चय करना. द्विते वर्तना, ठगविद्या करना. ( १५० चयति ) १ पीटा क- चिह् ( १० ५० चिह्नयति )१ चिह्न रना, दुःख देना.(१ मा० चयते) करना, निशान करना. १ घिन करना. २ वैर लेना, चीक (१५० चोकति, १० उ० चौ. बदला लेना.(३ प० चिकेति) कयति-ते)१ सहन करना, १ टूटना. २ देखना. सहना.२ उतावला होना, अस- चेक (१० उ० चिक्रयति-ते) १ हिप्ण होना. ३ ठूना, स्पर्श पीडा करना, दुःख देना. करना. चेद् (१ प. चेटति, १० प०/ची (१ प. चीयति ) १ लेना, चैटयति) १ सेवक होना. २ स्वीकार करना. सेवकके समान आज्ञा करना. चीम् (१५० चीभति) १ प्रशसा करना, स्तुति करना. २ व्याज- चेत् ( १५० चेतति, १० उ० चे. स्तुति करना. तयतिते) १ विचार करना, चीय् ( १ उ० चौयतिते) १ चिंतन करना, याद करना. लेना, स्वीकार करना. २ धारण चैत्र (१० उ० चित्रयति-ते) करना, पहरना. तसवीर खीचना, चित्र खींचना. ची ( १ उ० चोवति-ते ) २ आश्चर्य करना.३ आश्चर्य १ टेना.२ पहरना. ३ पकडना. देसना. (१० उ० चीवयति-ते) १ चिन्त् (१० उ० चिन्तयति-ते) चकमना.२ वोरना. १ विचार करना, स्मरण कर-चुर ( १ . उ चुकयति-ते ) ना, याद करना. १ दुःख देना. २ दुःख होना.
३६ संस्कृतधातुकोश। चुच्य-चत् चद्-चुल चुच्य (१ प० धुच्यात )१ अर्फ चुद् ( १० प० चोदयात-ते) १ निकारना २ नहाना, स्नान प्रेरणा करना २ पूछना, प्रश्र करना करना ३ प्रार्थना करना ( (१ चुट् (१ प. चौटाते, १० उ० उ० चोदति-ते १ प्रवृत्त करना चोटयति-ते) १ छोटा होना, २ जल्दी करना ३ जल्दी देना काहीन होना, थाह होना | चुन्द् (१ उ० चुन्दति-ते)१ तीक्ष्ण (६५० चुटाते, १० १० चोट करना, पैना करना, धार रखना यति)१क्तरना चुप् (१५० चौपति) १ धीरे घारे चुट्ट (१० उ० चुट्टयति-ते)१ कम चलना होना, अल्प होना, थाह होना चुम्ब (१ उ० चुम्वतिते ) २ बटोरना चूमना (१० उ० चुम्बयात चुड़ (६५० चुडात) १ लपेटना, ते) १ हिसा करना, मार घेरना २ छिपना डालना (१५. चुड्डति) १ वर्तना २ चुर ( १० उ० चोरयति-ते ) कामक्राडा करना, इष्कबाजी चुराना, मूसना (१५० चौर करना ३ अभिप्राय सूचित ति, ४ आ० चूर्यते) १ जलना, करना, इशारा करना जर जाना चुश (६५० चणति) १ कतरना, चुरण (११ प० चुरण्यति)१ चुरा हिस्सा करना चुण्ट ( १ चुण्यति) १ अल्प होना, ना, मूसना थाह होना, ( १५० चुण्टात, चुल् ( १० उ० चोलयति-ते)१ १० प० चुण्टयति) १ कतरना बढाना, ऊचा करना भिगोना, ताडना डुवोना चुण्ड (१५० चुण्डाते) १ कम चुलुम्प (१५० चुलुम्पति) १ कत होना, अल्प होना, थाह होना रना २ अतर्धान होना, नष्ट (१० प० चुण्डयात) १क्त होना झूलना, डोलना उद्- चुत् (१ प. चोताते) १ गाला चुल् (१ प० चुल्लति ) १ अपना हाना या परन २ चूना अभिप्राय स्पष्ट करके दिखाना रना, तोडना १ झलना भाषार्यसहित । १७ -- च्यम-रिद्र दुण-च्युत् २ विलास करना, इप्कवाजी च्युस (१० उ० च्यासयति-ते) करना. चूण् (१०५० चूणयति) १ - हंसना. २ सहन करना, सहना. कर्पण करना, सींचना, सकोच ३ मुक्त करना, छोड देना. ४ पीडा देना, मार टालना. करना. चूर (४ मा० चूर्यते) १ जडाना, भस्म करना. छद् (१ उ. छदति-त, १० उ० चूर्ण (१ उ० चूर्णयति-ते ) २ छादयति-ते) १ नाच्छादित आकर्पण करना, सींचना, सका- करना, ढंकना. २ टिपाना, च करना. २ प्रेरणा करना. ३ बचाना. आ-१ स्ना. चूर्ण करना, पीसना. ४ दवाना. छन्द् (१ प. छन्दति ) १ वर- चूप् (१ प. चूपति) १ चूसना. पान होना या करना. (१ प. त् (१५०चतीत,१०१०चर्तयति) छन्दति, १० उ० छन्दयति-ते) २ प्रकाशित करना, जलाना. १फना, आच्छादन करना, सपटना. चन्त् (६५० घृन्तति ) १ पीडा करना, मार टारना. २ एकत्र छम् (१५० छमति ) १ खाना. परके वाधना. ३ गूथना. छम्प (१ प. उम्पति, १० १० चूप (१ प. पति, १० उ० प. छम्पयति) १ स्थलांतर करना, यति-ते)१ प्रकाशित करना, जाना. चमकाना. छई (१०५० उदयति) १ वमन चेल (१६० चेटति)१ कपित करना या होना, के करना. होना, हिलना. छप् (१० उ० छापयति-ते)१ चष्ट (आ० पेटत) १ चेष्टा करना. मार डालना. (१ प. च्यवत्त) १ गिरना. छिद (७० छिनत्ति-चिन्त)१ गिर पडना.२ भटकना, जाना. टिन्न एरना, तुकडे करता.- (१० उ० च्यावयति-ते) १पाडना, परनोरीसे पाडना. हँसना.२ सहना, सहन करना. उत्-हिंसा परना. २ कतरना. च्युत् (१५० च्योतति) सींचना, ग्दि (१०८० छिद्रयति-ते) १ कानौरो छिदवाना. भिगोना. बहना.
सस्कृतधातुकोश स्पर्श करना. पड़े ऐसा कहना छुट्-जन् जट-जई हद् ( ६ ५० छुटति, १० ५० जद (१५० जति )। छोटयात) १ कतरना, तोडना. जडू (१५० जति), १ जम २ टॅकना, आच्छादन करना. जाना, एकत्र होना, मटा होना छुडू (६५० छडात) १ ढंकना, जन् (३ ५० जजन्ति ) १ उत्पन्न आच्छादित करना. करना, जनना, पैदा करना (४ छुप (६ प० छुपाति) १ छूना, आ० जायते) १ उत्पन्न होना, पैदा होना. (१० उ० जनय छर (६ प० छुरति) १ कतरना, ति-ते) १ उत्पन्न करना, पैदा तोडना. करना. कृद् (७ उ० ऋणत्ति, कृन्ते ) १ जप् (१ प. जपति) १ स्पष्ट वो चमकना, प्रकाशित होना. २ लना,२ जपना, जप करना क्रीडा करना, खेलना.३ के ३ मनहीमन कहना, नही सुन करना, वमन करना (१५० छर्दति, १० उ० छर्दयति-ते) जम् (१ आ० जभते) १ जम्हाई १ जलाना, प्रज्वलित करना. लेना. छप ( १० उ० छर्पयति-ते) १ जम् (१ प. जमाते) १ खाना, जलाना. भक्षण करना. छेद् (१० उ० छेदयति-ते)१ कतरना, तुकडे करना. (१ आ. जम्भते) १ जम्हाई | जम्म छो (४५० च्याते) १ कतरना, लेना (१० उ०जम्भयति-ते) १ नष्ट करना. छाटना. छ्यु (१ आ० छ्यवते) १ जाना, जर्च ( ६ प० जति) | जर्छ (६५० जर्छति ) बोलना कहना. २ डराना. ३ निदा जन (२५० जक्षिति) १ साना. करना, दोष लगाना. २ हँसना. जर्ज (१-६ ५० जर्जति) १ यो जज (१५० जजात । लना, कहना. २ हिंसा करना. जञ् (१५० जञ्जति) युद्ध कर ३ निदा करना, दोप लगाना. ना, लडाई करना, मारना. जई (६ ५० जति) १ बोलना गमन करना.
मापार्यसहित। ३२ जिम्-जुड् जर्स-जे कहना, २ डराना, ३ निदा तना, पराभव करना. परा-वि- करना, दोप लगाना. आ०१जीतना, पराजय करना जर्स (६५० जति) १ वोटना, जिम् (१उ० जेमति-ते)१ साना कहना.२ दोप लगाना, निदा भक्षण करना. करना. | जिरि (५० निरिणोति) हिसा जल् (१ प. जलति) १ तीक्ष्ण करना, दुःख देना. होना, तेजस्वी होना या करना, जिव् (१ प. जिन्वति) १ सती पेना करना २ श्रीमान होना, पित करना. सुश करना. २ धनवान होना, सपन्न होना. आनद पाना, सुश होना. ३ (१० उ० जालयति-ते) १दा मुक्त करना, छोड देना. क्ना, निवारण करना. १ जारसे जिप (१ प. जैपति) १ सेवा क दोस्ना. रना.२ प्रोक्षण करना सोचना. जल्प् (१ प. जल्पति) १ बोरना. जीव (१५० जीवति ) १ जीना २ बरना. आ-१ उदरनिर्वाहके लिये क जप (११० जपति ) १ मार माना उप-१ उदरनिर्वाह डाटना,पीडा करना. रिय परम्वाधीन होना, नौसर्ग जस (४१० जस्यति ) मुक्त करना. सम्-प्र सुसंसे रहना, करना, छोड हेना. (१५० ज सुसी होना सति, २० जासयति-ते) १ मार जु (१ आ. जयते) १ जाना.२ ढालना, पीडाकरना.२ ताटना जल्द जाना. (१५० जाति )२ करना.३ उपेक्षा करना. पाप करना.२जाना. जंस (१५० जसति, १० उ० जम | जुद् (१ प. जुगति) १ त्यागना, यति-ते) सरक्षण करना.२ छोड देना. २ वर्जित करना. ३ मुक्त करना, छोट देना. जातिपहिप्पत करना. जाट ( २ जागति) १ जगना, जुन (१ १० जुश्चति, १० दः नींद न टेना. जुभयति-ते) १ पोरना.२५ जि (१ प. जयति) १ सबससे पाशित परना, व्यक्त करना रहना,सपने यटक रहना.२जी जुह (६५. उदात) १ सपना ४० सस्कृतधातुकोश। । जुभ-ज्ञा २ जाना. ३ जोडना. (१० उ० जृम् (१ आ० जभते)। जोडयति-ते ) १ प्रेरणा करना, जम्म (१आज़म्भते) जम्हाई भेजना. २ चूर्ण करना, पीसना. लेना. जुण्ड् ( १० १० जुण्डयति) १ जृ (१ प. जरति, १० उ० जार- पीसना, चूर्ण करना. २ प्रेरणा यति-ते, ४ प० जाति, ९५० करना, भेजना जुत् (१ आ० जीतते) १ प्रका- तृणाति) १ वृद्ध होना, जीर्ण शित होना, चमकना. होना. जुन् (६५० जुनति ) १ जाना. २ जेप् (१ आ० जेपते) १ जाना. हिलना, कांपना. | जेह (१आ० जेहते)१ उत्कठासे जुई ( १ प० जूर्वति) १ मार यल करना २जाना. डालना, दुःख देना. जै ( १५० जायांत )१ क्षीण जुल् (१० उ० जोलयति-ते) १ होना, हास होना, कम होना. पीसना, चूर्ण करना. |ज्ञप (१० उ० ज्ञफ्यति-ते) १ जुप् (१ प. जोपति, १० उ० जानना, समझना. २ सिखाना, जोपयति-ते)१ विचार करना. समझाना. ३ आनदित करना, २पीडा करना. ३ मार डालना. खश करना. ४ मारना, ठोंकना. ४ चाहना, दुलारना (६० ५ तीक्षण करना, पैना करना, जुपते) १ सेवा करना. २ खुश पेनाना. ६ देखना. करना, सतोषित करना. ज्ञा (९ उ. जानाति-जानीते)१ जूर (४ आ० जूर्यते ) १ नोर्ण जानना, समझना. अनु-१सनु होना २धुस्सा करना. ३ मार मोदन देना, आज्ञा करना, डालना, दुख देना हुक्म देना. २ कबूल करना. जूई (१५० जूति) १ मार डा मान्य करना. अप-१ छिपाना, लना, दुख देना. आच्छादित करना, टुकाना. जू ( १ उ० जूपति-ते)१ पीडा अप-१ नहीं जानना अब-१ करना, मारना. अपमान करना, मानखडन कर जृ (१५० जरति)१ अल्प होना, ना. उप-१प्रयम जानना, पहिले छोटहोना, हस्व होना. समझना. परि-१ जान लेना. - भाषायंसहित । ४१ ज्या-ज्यो बिझ्झं समझ लेना, परिज्ञान कर देना. ना, हुक्म करना. ३ घमांचरण प्र-२ अच्छी तरह जानना.सम्- करना. १ प्रतिज्ञा करना, प्रण करना, नि (१ प.जयति) १ जीतना, जय वचन देना. २भगीकार करना. पाना.२ कम होना,न्यूनहोना. स्वीकार करना, लेना. ३ अनु- जी (९५० ब्रिणाति, १५० जय- मोदन देना, भाज्ञा करना. ति, १० उ० ब्राययति-ते)२ प्रत्यभि-१ पहचानना. वि-१ वृद्ध होना, जीर्ण होना. साफ समझना, स्पर जानना. ज्वर (१ प. चरति ) १वर सम्-१ उत्कठापूर्वक स्मरण या आना, बुखार आना. याद करना.२ अच्टीतरह जा- ज्वल् (१ प. ज्वलति ) १ प्रका- नना, समझना. (१० उ.मा. ज्ञापयति-ने)१ आशा करना, शित करना या होना.२जला- ना या जलना.(१०५० प्रज्व- हरम करना. (१०१. ज्ञपय- ख्याते)१ जना या जलाना. ति) १ मार टालना.२आन- २प्रकाशित करना या होना. दित करना, मुश करना.३ झ. तीक्ष्ण करना, पैना करना, पैनाना. ४ स्पष्ट करना, साफ झट् (१ प. झयते ) १ जुटना, दिसाना.५ स्तुति परना, प्रश झइ (१५० झति) १ जना, सा करना. ज्या (९५० जिनाति) १जीर्ण झम् (१ प. झमति) १ साना, होना, वृद्ध होना. २ पुराना मक्षण करना. होना. झर्च (१५. झर्चति ) बोलना, ज्यु (भा० ज्यवते) १ नजदीक पहना. २ निंदा करना, दोप जाना या आना. लगाना. ज्युत् ( १ उ० ज्योतति ते) मई (११० झटंति ) १ योल्ला, पातिमान होना, पमम्ना, पहना. २ निंदा करना, दीप प्रकाशित होना. टगाना. ज्यो (मा. उपने) १ उपदेश इह (१-६ १. शांति, १.५० देना, सिवाना. २ माज्ञा पर इति) १ बोरना, रहना. एस्त्र होना. एकत्र होना. .
૨૨ सस्कृतधातुकोश। दुःख देना. झप-टल टोक-डी २ निदा करना, दोष लगाना. | टोक् ( १ आ० टोकते )१ जाना (१५० झझति)१मार डालना, २ विकना. झए (१५० झपति) १ मार डाल ना, दुख देना. २ ग्रहण करना. (१० आ० डायपति)१एकत्र डप् लेना ३ वस्त्रादि धारण करना, करना, बटोरना, राशि करना पहिनना, पहिरना. डम्प (१५० डम्पति, १० आ. शु (१ आ० झवते ) १ जाना, डम्पयते ) १ एकत्र करना, स्थलांतर करना. बटोरना, राशि करना. झूषु (१५० झूपति) १ मार डा. डम्ब् (१ उडम्बयति-ते) १ फे लना, दु.ख देना कना. वि-१ छल करना, विट (९५० मृणाति, ४ झीर्यात) बना करना. १ वृद्ध होना, जीर्ण होना. २ डम्म् (१५० डम्भति, १० उ० नष्ट होना. डम्भयति-ते) १ एकत्र करना, झ्यु (१मा० झ्यवते ) १ जाना, बटोरना, साश करना. स्थलांतर करना. डिप् (४ प० डिप्यति, ६५० द. डिपति १० उ० डिपयति-ते) (११० टङ्कति, १० टयति १ भेजना. २ फेंकना, उडाना ते) १ बांधना, जुटाना. डिम्प (१५० डिम्पति, १० आ० टल् (१५०टलति) रविह्वल होना, डिम्पयते ) १ एकत्र करना, दुखित होना, हृद्रोगी होना. बटोरना, राशि करना. टिक (१ मा० टेकते ) १ जाना | डिम्ब (१० उ० डिम्बयति-ते) २ टिकाना १ फेंकना, उडाना. टिप् (१० उ० टेपयति-ते)१ डिम्म् (१ प० डिम्भति, १० आ० भेजना २ फैक्ना, उडाना डिम्भयते) १ फेंकना, उडाना. टीक (१ आ० टोक्ते)१ जाना. | डी (१ आ. डयते, ४ आ० डीय टिकना. ते)१ आकाशमें उड जाना, दुल् (१५० टुति) १ विह्वल अतरिक्षमे उडना. २ जाना. होना, दुखित होना. भव-१ आकाशमैसे उतरना. .
भापार्थसहित। १३ हुल्त तरतम् उत्-१ उपर उडना. परि-१/ तट (१५० तदति)१ उचा होना, चक्राकार उडना. प्र-१चपल- वृद्धिंगत होना. (१० प० ताट तासे उडना. सम्-१ समूहके यति) १ मारना, ताडन करना, साथ उडना. समूत्-१ठहर ठह तड़ (१० उ० ताडयतिते) १ मा रके धीरे धीरे उडना. रना, ताडन करना.२ चमकना. (१० उ० ढोल्यति-ते) १ तण्ड् (१ आ० तण्डते)१ मारना, ऊपर फेंकना. ताडन करना. ढ. तन् (८ उ० ततोति, तनुते )२ दुण्द् (१ ५० दुण्डति) १ टूढना. फेलाना. २ वढाना (१ प. ढोक (१ आ० टाकते )१ जाना, तनति, १० उ० तानयति-ते) स्थलांतर करना. उप-१ आगे १ भरोसा करना. २ आश्रय रखना. देना, मदद देना, साहाय्य कर- करना. ३ शन्द करना. ४ पीटा नक् (१ प० तकति) १ उपहास करना, दुःख देना. ५ बढाना, करना, ठट्टा मारना, विटवना लंवा करना. ६ निरुपदवी होना, करना. २ सहना, सहन करना. दुख नहीं देना. व्यति-१ उपहास करना, प्रत्यु- तन्त्र (१० तन्त्रयति) १ फेलाना.. पहास करना. कुटुव पोपण करना. तह (१ प० तति) १ दुःससे तन्द (१आ० तन्दते) १ संतुष्ट दिन विताना. (१ आ० तह होना, खुश होना. ते)१ जाना. तए (१ उ० तपति-ते, ४ आ० त तङ् (१ प. तद्गति) १ जाना. प्यते, १० उ० तापयति-ते)१ २ कांपना, हिलना. ३ ठोकर तप्त होना, जलना. २ जलाना, लगके गिर पडना. तप्त करना. ३ मनमें या शरीरम तश् (१५० तञ्चति) १ जाना. जलाना. ४ अमानवी पराक्रम (७५. तनक्ति)१संफोचित करना या होना. अनु-१५० होना. पश्चात्ताप परना. परि-सम्- त (७५. तनक्ति) सफोचित ११० पश्चात्ताप करना. होना. तम् (१५० ताम्यति) १ इच्छा संस्कृतधातुकोश । तम्बू-तर तश्-तिम् फरना, चाहना.२ मानसिक या तस् (१ प. तक्षति) १ आच्छा- शारीरिक व्ययाप्ते दुःखित होना. दित करना. २ छीलना. (५ तम्ब (११० तम्पति) १ जाना. . तक्ष्णोति ) १ छोलना. तय् (१ आ० तयते) १ जाना. २ अनु-पैना करना, धार लगाना. सरक्षण करना, संभालना. सम्-१ तुकडे तुकडे करना, तई (१० उ० तर्कयति-ते) १ घाव करना. बोलना, कहना. २ प्रकाशित | ताय् (१ आ० तायते) १ सरक्षण होना, चमकना. ३ तर्क करना, करना. २ फैलाना, लबा करना. फ्ल्पना करना, वाद करना. तिक् (१ आ० तेकते) १ जाना. ४ शका करना. (५५० तिम्रोति) १ जाना.२ तर्ज (१५० तर्जति, १० मा० हल्ला करना, चाल करना.३ तर्जयते) १ दोप लगाना, निदा मार डालने या दुःख देनेका करना. २ डराना. ३ उपहास प्रयल करना. करना. | विग् (५५० तिमोति) १ जाना. तई (१ तदति) १ मार डाल्ना, २ हल्ला करना, चाल करना. दुःख देना. ३ मार डालने या दुःख देनेका तई ( १५० तर्वति) १ जाना. प्रयत्न करना. तल् (१ तलति, १० उ० ताल- तिघ् (५ ५० तिनोति ) १ मार डालना, दुःख देना. यति-ते) १ पूर्ण होना. २ तिज (१ आ० तेजते, १० उ० स्थापन करना, विठाना.३ तेजयति-ते)१ तीक्ष्ण करना, सिद्ध करना. पैना करना, धार लगाना. २ तर (१५० तस्यति ) १ फेंकना, चमकना. (१ आ० तितिक्षते) उडा देना.२भेजना.३सो देना. १क्षमा करना, सहना. तिप् (१० तेपते) १ प्रोक्षण संस् (१ प. तसति, १० उ० करना, सींचना.२ झरना.ना. तमयति-ते ) १ सजाना, मल- तिम् (१ प. तेम्पति, ४ प. कृत परता. भव-१ सजाना, तिम्यति)१ आई होना, गीला सरत करना. होना या करना. ४ गुन्हलाना.
भाषार्थसहित । तिरस्-तुज् तुट्-तु तिरस् (११५० तिरस्यति) १ गुप्त लेना.४ चमकना, प्रकाशित होना. होना.५ मार डालना. (१तु- तिल् (१ प. तेलति) १ जाना. अति) १ रक्षा करना, प्रतिपा- (६५. तिलति१० उ० तेल-1 लन करना, सम्भालना. यति-ते) १.तेल लगाना. २ तुद् ( ६ ५० तुदति) १ झगडना,. स्निग्ध होना, तैलयुक्त होना.. झगडा करना.२ दुःख देना. तिल् (१ प. तिलतिर तुद् (१५० तोडति,६५० तुडति) तीक् (१ आ० तेकते) १ जाना. १ तोडना,कतरना.२ दुःख देना. तीम् (१ प. तीम्यति) १ आई तुड् (१ प० तुहुति) १ अपमान होना, गीला होना. करना, अनादर करना. तीर ( १० उ० तोरयति-ते) १ तुण (६५० तुणति) १ टेढा होना, पूर्ण करना, समाप्त करना.२ वक्र होना. २ बुरी रीतिसे पार लगाना. वर्तना. ती (प. तीवति) १ मोग स्थूल तुण्ड् (१ ० तुण्टते) १ तोड- होना, तुंदिल होना. ना, कतरना. २ दुःख देना. तु (२५० तोति, तवीति ) १ ३ वाना. जाना. २ वढना.३ दुःख देना, तुत्थू (१० उ• तुत्ययति-ते ) मार डालना. ४ पूर्ण करना. १ परदा दालना, आच्छादित तुज् (१ ५० तोजति ).१ दुःख करना. २ फेलाना. ३ स्तुति करना. देना, मार ढारना. (१० उ० तोजयति-ते ) १ रहना, वसति तुद् (६ उ• तुदति-ते) १ दुःख देना, पीटा करना, घाव करना. करना, मुकाम करना, २ मज- बूत या बलवान होना. ३ ग्रहण तुन्द् (१५० तुन्दति) १ढूंढना. करना, रोना. ४ चमकना, प्र-तुप् (१ प. तोपति, ६ प. तुप- काशित होना. ५ मार डालना. ति, १० ५० तोपयति) १ मार तुझ् (१ प. तुन्नति, १० उ० डालना, दुःख देना. तुञ्जयोत-ते) १ रहना, वसति तुफ (१५० तेफाते. ६५० तुफ- करना, मुकाम करना.२चल ति, १० प० तोफयति) १ मार यान् होना. ३ ग्रहण करना, डालना, दुम्स देना.
सस्कृतधातुकोश। दुख देना. अफडना 1 तुभ-तुस् तुइ-प तुम् (१ आ० तोभते, ४५० तु तुह् ( १ ५० तोहति ) १ मार भ्यति, ९ १० तुभ्नाति)१ डालना, दुख देना. मार डालना, दुःख देना. तूद्ध (१५० तूडति) १ अनादर तुम्प (१-६५० तुम्पति, १०५० करना.२ तोडना, कतरना. तुम्पयति ) १ मार डालना, तूण (१० मा० तूणयते) १ भर- ना, पूर्ण करना. (१० उ० तू तुम् (१ प. तुम्फति) १ मार णयति-ते)१ समोचित होना, डालना, दुःख देना. तुम्ब (१ प. तुम्नति, १० उ० वर ( ४ मा० तूर्यते ) १ जल्द तुम्पयति-ते) १ मार डारना, जाना. २ दुःख देना, सताना. दुख देना. २ अतर्हित होना, तुल् (१ प० तूलाते, १० उ० तूल गुप्त होना, नष्ट होना. यति-ते ) १ त्याग करना, तुर् ( ३ प० तुतोति) १ जल्दी निकाल देना २ तौलना. जाना २ त्वरा करना (६ उ० तरति-ते ) १ जल्दी करना. | तूप (१५० तूपति) १ तृप्त होना. २ जितना ३ हिसा करना २ तृप्त करना, आनदित करना. तुरण (११५० तुरण्यात ) १ जल्द टन (१ प० तक्षति ) १ जाना. जाना २रा करना. तण ( ८ उ० तृणोति, वणुते, तुई ( १५० तू (तु) यति) १ मार तोंति, तणते) १ घास साना. टारना, दुस देना २श्रेष्ठ २चरना. होना. ३ जीतना. ४ वचाना. तृट् (११० तदति,७२० तृणात्त, तुल ( १ १० तोलति, १० उ. हन्ते)मार डालना, दुरा देना. तौरपति-ते) १ तोरना, वजन २अरज्ञा करना, अनादर करना. पग्ना ( १० आ० तोरयते), ३ देना, दान करना. ४साना, पूर्ण करना. भक्षण परना. तुप (४५. तुप्याने ) १ सतुष्ट रूप (१५० तपति, ४ प.तृप्यांत, होना, गुम होना. ५५. मोति, ६ प. पति, तुग (११. तोसति ) १ शब्द १.उ. तर्पयति-ते ) १शत करना,भागाजवरना. होना, गुश होना.२रत कर- भापायसाहत । ४७ हफ-तु तेज-त्र ना, खुश करना (१५० तर्पति, मुक्ति पाना. प्र-२ जीतना. १० उ० तर्पयति-ते) १ प्रज्व वि-१ जाना २ देना, धर्म लित करना, जलाना. करना. सम्-१ तैरके जाना. तृफ ( ६ प० तृति) १ तृप्त | तेज्ञ (१५० तेजति ) १ पालन होना या करना २ दुख परना, रक्षा करना, बचाना देना, पीडा करना. तेप् (१ आ० तेपते) १ सोचना, तृम्प् (६ प० तृम्पति) तृप्त होना प्रोक्षण करना २ प्रकाशित या करना होना, चमरना ३ झरना, तृम्फू (६ प० तृम्फति ) तृप्त चूना. ४ हिलना, कापना.५ होना या करना. छानना. तृप् (४ प० तृप्यति) १ प्यास | तेव् (१ आ० तेवते ) १ खेलना, रगना २इच्छा करना, उत्क क्रीडा करना २ रोना, शोक ठित होना, चाहना करना तृह ( ६५० तृहति, ७ प० तृणेढि तोड् (१५० तोटति) १ उपहास १० तर्हय-ति-ते ) १ मार करना, अपमान करना टारना, दुख देना तोक् (१ आ० तौकते) १ जाना. तुंह (६५० तृहति ) १ वढना, | त्यज (३५० त्यजति) १ छोड- वृद्धिगत होना २ मार डालना ना त्याग करना. त (१५० तरति) १ पार जाना, परतीरको जाना २ जलपर नव (१५० खति) १ जाना, तेरना ३ जीतना ४ नौकादि त्रक् (१ आ० ते) स्थलांतर साधनसे जलके पार जाना अब्रह (१५० बति) करना २ • व-१ उतरना आ-१भारा देकर वङ् (१ प. ब्रह्मति), हिलना. नवपर चढ जाना उत्-१ उप रसे जाना २ जनाब देना, बन्द ( १ ५० बन्दति) १ प्रयत्न करना २ उद्यम करना ३ उत्तर देना ३ पार जाना दुस- १सक्टसे पार जाना निस्-१ उद्यममे निमग्न रहना सुखसे तैर जाना २ मुक्ति पाना त्रप् (१ आ० अपते) १ रज्जित प्र-१ जोतना वि-१ जाना २ होना, शरमाना २ डराना.
४८ सस्कृतधातुकोश। । त्रस्-त्वम् त्वच-दक्ष त्रम् (१५० वसात, ४ प० त्रस्य- त्वच (६ ५० त्वचति)१ आच्छा ति)१ डरना. २ दौड जाना, दित करना, लपेटना, ढांकना. जल्द जाना. (१० उ० त्रास त्वञ्च् (१ प. त्वञ्चति )१ जाना- यति-ते) १ पकडना. २ हरण | त्वर (१ आ० त्वरते ) १ जल्= करना, जवरन रेना. ३ मना करना, २ जल्द जाना. करना, प्रतिबंध करना.४ डराना. विषु ( १ उ० तेवपति-ते) स् (१ प. वसति, १० उ० प्रकाशित होना, चमकना.भव- वसयति-ते )१ बोलना, कहना. १ रहना. २ देना, दान करना- २ चमकना. त्सर (१५० सराते ) १ टेडा त्रा (२५० वाति) १ संरक्षण जाना, कपटपूर्वक जाना. करना, पालन करना. त्रिल् (१ प. विड्वात ) १ जाना, थुड् (६५० थुडात) आच्छादित चटना. करना, लपेटना, ढाँकना. त्रुट (४ प० त्रुट्यति, ६ प० त्रुट-थुध ( उ० थुध्यति-ते) १ स्व- ति, १० आ० त्रोटयते)१ कत च्छ करना, शुद्ध करना. रना, तोडना. २ शका दूर थुत् (१५० थूवति) १ मार डा- करना, सशय निवारण करना. लना, दुःख देना. त्रुप (१ प. त्रीपति) १ मार त्रुफ (१५० त्रोफति) डालना, | द (५ प० दुघ्नोति) १ मारना, त्रुम्प (१५० त्रुम्पत्ति) दु:ख त्रुम्फ् (१ प. ब्रम्फति), देना. दुःख देना. २ सरक्षण करना, पोषण करना. त्रै ( १ मा वायते) १ सरक्षण दम् (१५० दट्वति ) १ त्याग करना, पोपण करना. चौक (०ौक्ते) १ जाना. करना, छोड देना. २ पालन करना, रक्षा करना. त्वा (१५० त्वक्षति)१ छालना, (१ आ. दक्षते) १ जल्द रेतना, बारीक करना. २ कृश करना.२ वटना, वृद्धिगत होना. होना. ३ छाल निसारना. ३जाना. ४ मार टालना, दुःख व (१ प. त्वद्गति) १ जाना. देना.
भावार्यसहित । *४२ दण्ड्-दरिद्रा दल-दह दण्ड ( १० उ० दण्डयति-ते) रिदी होना. २ दुःसित होना. शासन करना.२धनड करना. ३ कृश होना. दइ ( १ मा० ददते ) १ दान | दल (१५० दलति, १० उ. करना, देना. २ त्याग करना, दालयति-ते)१ चीरना, फाड- छोड देना. ना, तुकडे २ करना. २ स्पर दध (१० दधते ) १ देना, करके दिखाना. ३ कुम्हलाना. अर्पण करना. २ धारण करना. म्लान होना. ३ पालन करना. | दत् (१ प. दन्वति) १ जाना, दध् (१५० दन्धति) १ सरक्षण स्थलांतर करना. करना, पालन करना. दंश (१५० दशति, १० आ. दम् (१० उ० दभयति-ते ) १ दशयते) १ डंसना, काटना, आज्ञा करना, हुक्म करना. दश करना.२ देखना. ३ बख्तर दम्भ (१० उ० दम्भयति-ते)१ पहरना.(१० उ० दशयति-ते) आज्ञा करना. (५दभ्नोति)१ १ चमकना. उप-१ सकटमें ठगना, वचित करना. दोंग पडना. समू-१ नोचना. करना. २ चीरना, फाडना, तोडना. (१०५० दम्भयति) दस् (४ प० दस्यति)१ नष्ट होना. १एकत्र करना, बटोरना,गूयना. २ उडा देना, प्रेरणा करना. उचकना. (१० उ० दासयते) दम् (४५० दाम्यति ) १ शांत १ देखना, २ काटना, उसना, करना. २ दमन करना. जी. दश करना. तना, स्वाधीन करना. ४ सुलह | दस् (१५० दसति, १० उ० दस करना. यति-ते)१ काटना.२ चमकना दय (१ आ० दयते) दान देना, ३ देखना. ईनाम देना, देना. २ टेना. ३ दह (११० दहति )१ रक्षा करना. पालन करना, सभालना.४ मार २जलाना. ३ नष्ट करना. ४ डालना, दुःख देना. ५ दया कर- दुःख देना.५ दाग देना, गुल ना.६जाना. देना, दग्ध करना. परि-१ परि. दरिद्रा (२५० दरिद्राति) १ दः पूर्ण रीतिसे जल जाना. ३॥ साधा. है .
संस्कृतधातुकोश । बटोरना. - करना. दह-दिन्बू दिम्प-दिश दंह (१० प० दहयति) १ चमक | दिम्प (१ उ० दिम्पति-ते, १० ना.२ जलाना. मा० दिम्पयते) १ आज्ञा कर दा (१५० यच्छति, ३ उ ददाति, ना, हुक्म देना.२एकत्र करना, दुत्ते ) १ देना. २ सौंपना. ३ 'लौटाना. ४ रखना. आ-१ दिम्भ (१० ५० दिम्भयति ) १ लेना, अगीकार करना. परि-१ आज्ञा करना, हुक्म देना. २ देना, सौंपना. २ ऋण देना. ३ एकत्र करना, बटोरना, जमा ईनाम देना. प्र-१ देना. व्या- २ उघाडना. समा-१ पसद दिव ( ४ ५० दीव्यात) १ खेलना करके लेना. (२५० दाति) १ कतरना, तोडना. क्रीडा करना. २ जीतनेकी दान (१७० दानति-ते, इच्छा- इच्छा करना.३ व्यापार करना, ऋयविक्रय करना, खरीदना बैं- र्थक उ० दीदासति-ते ) १ चना. ४ तेजस्वी होना, चम- खडन करना, तोडना. २ सीधा कना. ५ प्रशसा करना, स्तुति करना, सरल करना. करना. ६ मानद करना, खुश दाय (१ आ० दायते) १ देना, करना. ७ भूल जाना, गर्व आ दान देना, ईनाम देना. दिक मनोविकारसे दिवाना दाश् (१ उ० दाशति-ते, ५५० होना. ८ चाहना, प्रीति करना. दाश्रोति, १० आ० दाशयते) ९ सो जाना, निद्रित होना. १० जाना.(१५० देवात, १० १ मार डालना, दुख देना. २ उ. देवयति-ते)१ पीडा सहन देना. ३ बलि देना. करना. २ याचना करना, मां- दार (१ उ० दासति-ते, ५५० गना. ३ जाना.(१५० देवति, दास्नोति)१ मार डालना या १० आ० देवयते) दुःख करना, दुःख देना.२ देना, सौपना. शोक करना, रोना, आक्रोश दिन्छ (१५० दिन्वत्ति) १ सुश करना. होना या करना, मानदित दिश (६ उ० दिशति ते)१ दि. करना या होना. खाना, समझाना. २ आज्ञा ।
भापार्यसहित । ४३ । . दिह-दीधी दीप- करना, हुक्म देना. ३ कहना, दीप (४ मा. दीप्यते) १ प्र- बोलना. ४ देना, ईनाम देना. काशित होना, चमकना. अप-१ वेपांतर करना. आ-१] दु (१ प० दवात ) १ जाना. आज्ञा करना. २ दिखाना.३ (५ ५० दुनोति ) १ दुःख बुलाना. उत्-१प्रसिद्ध करना, भोगना. २ जलना. ३ तप्त जाहिर करना. २ दिखाना. करना, जलाना. उप-१ उपदेश करना. निर-१] दुःख (१० उ० दुःसयति-ते, समझाना, विस्तारपूर्वक कहना. ११ दुःस्यति ) १ दुःख देना, २जोरसे बोलना. प्र-१ मुकरर छल करना. करना, कायम करना. प्रतिस- दुई ( १ ५० दुवति .) १ दुःख म्-१ पीछे लौटाना, पीछे देना. देना, सताना. व्यप-१ वहाना करना. विनिर्- दुल् ( १० ५० दोल्यति ) १ १ साफ २ कहना. सम्-१ स्पष्ट करना, दिखाना.२ खवर देना. उचकना, उठाना, फेंकना. २ चिताना. ३ डोलाना, हिलाना. समा-१ मान्य करना. समुप- दूरको वस्तु उग से दिखाना. दुप् ( ४ ५० दुप्यति ) १ दृष्टाचरण दिह (२ उ० देग्धि, दिग्धे ) १ करना, दृष्ट रीतिसे वर्तना, २ अशुद्ध होना. प्रा-१ पसिद्ध बढाना, जमाना. २ लीपना, पोतना. होना, जाहिर होनाः दी (४ आ० दीयते ) १ द्वास | दुइ ( २ उ० दौग्धि, दुग्धे ) १ दूध होना, झरना. निकालना, दोहना.(१पन्दोह दीभ् (१ आ० दीक्षते ) १ क्षारे ति) १ पीडा करना, दुःख देना. करना, मुटन करना, हजामत २हिसा करना, मार डारना. बनाना. २ यज्ञ करना. ३ दीक्षा दू (४ आ० दूयते ) १ दुःखसे देना, उपदेश देना, उपनयन जर्जर होना, दुःख सहन करना- करना. ४ आत्मनिग्रह करना. २ दुःख देना, पीडा करना. धर्म सिखाना. दूप् ( ४ प. दूप्यात ) १ पित दीधी (२ आ० दीपीते) १ चम होना.२ दूपित करना. कना, प्रकाशित होना. २ (६ आ० आद्रियते)१ सत्कार खेलना, क्रीडा करना. करना. ( ५ ५० दृणोति ) १ ४सं.घा.
सस्कृतधातुकोश। हप्-दृह दृड्-द्राझ दुःख देना, मार डालना.(१५० ड् (१ प. हाते) १ बढना, दरति, १० प० दारयति) १ वृद्धिगत होना. डरना. दृ (९५० दृणाति ) १ चीरना, दृप् (४ ५० दृप्यति) १ आनदित फाडना, तुकडे २ करना. होना, खुश होना. २ मोहित (१५० दरति ) १ डरना. होना. ३ गर्वित होना (६५० (४ प० दीर्यति) १ विदारण दृपति ) १ पीडा करना, दुःख करना, चीरना. (५५० हणो. देना. (१ प० दपति, १० उ० ति)१ हिसा करना. दर्पयति-ते) १ उजाला करना, | दे (१ आ० दयते) १ सरक्षण जलाना. करना, पोपण करना. दृफ् ( ६५० एफति ) १ पीडा | देव ( १ आ० देवते) १ खेलना करना, दु.ख देना क्रीडा करना. दृम् (६५० हति)१ पीडा करना, दै (प० दायति ) १ शुद्ध करना. दुःख देना. २ रचना, गूथना | दो (४ ५० द्यति ) १ कतरना, (१५० दर्भति, १० उ० दर्भ विभाग करना यति-ते ) १ डरना ९ सबध | यु ( २ ५० द्यौति ) १ शत्रुपर लगाना, सदर्भ लगाना. हल्ला करना. २ आगे जाना, दृम्प् (६५० दृम्पति, १० भा० नजदीक जाना. दृम्पयने ) १ पीडा करना, इत् (१ आ० द्योतते) १ चम- कना, प्रकाशित होना. दृम्म (६ ५० दृम्पति) १ पीडा छ (१ ५० द्यायति) १ धिक्कार करना, दुख देना. क ना, तिरस्कार करना. दृश् ( १५० पश्याते ) १ देखना. द्रम् (१ प. द्रमाते ) १ जाना. उत्-१ ऊपर देखना. २ मावे द्रा ( २ प. द्राति ) १ भाग प्याडेचार करना. ३ सशय जाना २ लजित होना, शर• करना, शफा करना. माना ३ निदा करना, दोष दृह् (१ प. दहीते ) १ वढना, लगाना.४ उड जाना. द्धिगत होना. द्राङ् (१ पद्रावति) १ काव दुःख देना.
भापार्यसहित । द्रा-टुण दुह-धन काव शब्द करना.२ इच्छा! जाना या ना.३ टेढा करना, करना, चाहना. वक्र करना. दारव (१५० द्रासति) १ सम्ब-| दुइ (४ प० द्रुह्यात) १ द्वेष कर- ना, शुष्क होना. २ संवारना, ना, मारनेके लिये देखना. शोभित करना. ३ शक्तिमान टू (९ उ० व्रणाति, व्रणोते) १ होना. ४ निषेध करवा. मना जाना, स्थलांतर करना, २ चोट करना.५ तृप्त करना. पहुँचाना, मार डालना. बाघ ( १ आ० द्रायते ) १ शतक ( १ आ. देकते ) १ शब्द क्तिमान होना. २ लंवा करना, करना. आवाज करना.२ वढ- तानना. ३ क्वांत होना, मुाना. 'ना, वृद्धिंगत होना. ३ अपना दाइ (१ आ० द्राडते ) १ चीर वडप्पन या आनंद प्रकट करना. ना, फाटना, तुकडे २ करना. है (१ प. द्रायति, निद्रायाते) दाह् (१ आ० द्राहते ) १ जगना, १ सोना, नींद लेना. जागृत रहना.२ गिरों रखना. विप् (१ प. द्विपति, २उद्वेष्टि, हु (१ प. द्रवति ) १ जाना, द्विष्टे ) १ मत्सर करना, द्वेष करना, शत्रुत्व करना. अनुसरण करना. अभि-१ तैर- दृ (१ १० हरति ) १ कयूल कर- ना. आ-१ भाग जाना. उप-१ विध्वंस करना, नाश करना, ना, स्वीकार करना, सना २आच्छादित करना.३ रोकना जुल्म करना. प्र-१ भाग जाना, ४ अनादर करना. विमुख होना. वि-१ मार डा- घ. उना.२ भाग जाना. समा-१ एकत्र होकर भागना. समुप-धक (१० उ० धक्यति-ते) १ भेटना, मिलाप होता. २ भाग नष्ट होना. जाना. धण (१५०, धणात ) १ शब्द करना. हुड् (१ प. दोडात ६ प दुर- ति)१डूचना. धन् (१ ५० धनात) १ शब्द करना. (३ उ० दधन्ति) दुण ( ६ प. दुणति)१ पीडा उत्पन्न करना, पैदा करना, फल- करना, दुःख देना. २ नजदीक ना, बार लगना.
सस्कृतधातुकोश । । धन्व-धा धाव-धि धन्व् (१ प. धन्वति)१ जाना, करना, स्वीकार करना ३ श्रेष्ठ स्थलातर करना पदवीपर चटना ४ गुप्त रहना, धा (३० दधाति, पत्ते)१ धारण छिपार रहना. प्रतिवि-१ प्रती करना, पहरना २पोपण करना, कार करना, निवारण करना रक्षण करना. ३ देना, दान वि-१ करना २ धर्मसबधीर्म करना ४ पास रखना अनुस. करना ३ पसद करना ४ पूरा करना, पूर्ण करना. ५ आज्ञा म्-१ अनुसंधान करना. २ दू ठना. अपि-१ आच्छादन कर करना, हुक्म करना ६ वचन ना, ढाक्ना. अभि-१ प्रसिद्ध देना.७ देना व्यव-१ छिपाना करना, जाहिर करना २दिखा सम्-१ स्थापन करना, रखना. ना ३ वोटना, कहना, सभा २ एकत्र करना, बटोरना ३र क्ष्य भेद करना, निशान मारना पण करना, अभिसम्-रजीतना, सम्प्र-प्रतिसम्-१ चर्चा करना, पराजय वरना सम्-अर-१ सावध रहना २ ध्यान देना वादविवाद करना समा-१ स आ-१ स्वीकार करना, अगी माधान करना २ सिखाना. कार करना.२ करना ३ स्या सनि-१ नजदीक रखना, नज पित करना उप-१मदद करना, दीक आना. साहाय्य करना. २ समझना, | धाव ( १ उ० धावति-ते) जानना. उपा-१ मदद करना, जाना.२ भागना ३ स्वच्छ साहाय्य करना नि-१ ऊपर करना, मररहित करना, धोना, रेना, ऊपर करना २ चिमे | ४ स्वच्छ होना अनु-२ जान या उपर स्थापन करना ३ ना,समझना पीछे भागना. उत्पन्न होना, पैदा होना ४ अभि-१ समीपआना या जाना धरना, धारण करना. परि-1 मा-१ उतरना, नीचे उतरना ववादि धारण करना, पहिरना, परि-जत्द भागना वि-१ प्रो परिधान करना. प्र-१ मुख्य क्षण करना, सीचना समुप-२ होना, प्रथम होना २ प्रेरणा भेंटरेरिये दौडना परना,भेज देना.प्रणि-१धारण धि (६५० धियाति) १ पास रख- वरना. २१यल बरना, मान्य। ना या होना, युक्त होना.(५ भापार्थसहित । धि-धू धूक्ष-धृ प० धिनोति) १ जाना, गमन क्षोभित करना अप-(धूनयति) करना २सतुष्ट होना या करना, १ देखना २ छोड देना, त्याग खुश होना या करना चरना निर-१ नष्ट करना २ घिव (५ ५० धिनोति) १ सतुष्ट जाना वि-१ प्रापित करना, होना या करना, मुश होना या क्षोभित करना करना २समाप जाना या आना धूक्ष् (१ आ० धूक्षते ) १ प्रदीप्त धिक्ष् ( १ मा धिक्षते) १ प्रदाप्त करना, जलाना २ जाना ३ आत होना, थक जाना करना, वारना, जलाना २जीना, जीता रहना ३ श्रमित होना, धूए (१५० धूपायाते ) १ गरम थक् जाना, नाक्में दम आना करना, तपाना (१० उ. थिए ( ३ १० दिधेष्टि ) १ शद धूपयात ते)१ चमकना प्रका शित होना २ वोलना, सभा करना, आवाज करना पण करना धी (४ आ० घायते) १ धारण धूर (४ आ० धूर्यते) १ मार करना, आधारभूत होना २ उपेक्षा करना डालना या दुस देना २समीप अन्त-१ गुप्त जाना या आना हाना, छिप जाना धु (५ उ० धुनोति, धुनुते ) १ धूश् ( १० उ० धूशयति-ते) १ शोभित होना, शृगारयुक्त कांपना, हिलना, होना, अल्कृत होना धुक्ष् (१ आ० धुक्षते) १ प्रदीप्त धूप् (१० उ० धूपयाते-ते ) १ करना, बारना २ जीना ३ शोभित होना, शृगारयुक्त श्रान्त होना, थक जाना होना, अल्कृत होना घुर्द (१ १० धूर्वति) १ मार डा घूस् ( १० उ० धूसयति-ते ) लना या दुख देना १ शामित होना, शृगारयुक्त धू(१ उ. धुवति-ते, ५ उ० होना, अलकृत होना धुनोति-धुनुते, ६ १० धुवति, धृ ( १ मा० धरते) १ गिर पड ९ उ० धुनाति धुनोते, १० उ० ना, पडना (६ मा० प्रियते) धावयति-ते, धूनयति) १पा १ रहना स्थिर रहना १ धारण ना, कपित होना, हिलाना, करना, पास रखना, युक्त होना.
६४ सस्कृतधातुकोश । . धृज्-ध्मा ध्मास्-ध्राध् (१ उ० घरति-ते) १ धारण २ आग सुलगाना. ३ आगल करना, युक्त होना. (१ प. गाना ४ प्रदीप्त करना, जलाना धराति ) १ प्रोक्षण करना, सी | ध्मान (१ प० ६माङ्गति) १ को चना (१० प. धारयति)१ के समान कावकाव शब्द धारण करना. अय-, निर्-१ करना. २३च्छा करना, चाहना सत्य करके दिखाना ध्यै (१ प. ध्यायति ) १ ध्यान धृज् (१५० धर्जात) १ नाना, करना, चितन करना, मनन स्थस्सेतर करना. करना, विचार करना. नि-१ धृञ् (१५० धृजति) १ जाना, शोधना, दूढना. स्थलांतर करना ध्रज् (१ प. ध्रजात) १ जाना, धृष् (५ प० घृष्णोति ) १ गर्व स्थरांतर करना. करना. अपने तई वडा समझना | ध्रञ् (१५० जति) १ जाना, (१ प. धपति, १० उ० धर्म स्थलांतर करना. यति-ते) १ जीतना, पराभव ध्रण (१५० घणति) १ वाचा करना. २ अधीर होना, पवर दिकोका शन्द करना, वाजा जाना. ( १ प० धपति )१ बजाना. एक्न करना, बटोरना. २ मार ध्र (१० उ० प्रासयति-ते) १ डालना या दुख देना. (१० उपर फेक्ना, उडा देना. (९ मा० धर्पयते ) १ शक्तिहीन ५० ध्रस्नाति)१पिनना, एक होना, निर्जीव होना. २ करके चिनना. धृ (९ ५० घृणाति ) १ जीर्ण ध्रा ( १५० धाखति) १ शुष्क होना, वृद्ध होना, बूढा होना. होना, सूखना. २ संवारना, धे (१ उधयति-ते) प्राशन सजाना, शृंगार करना, शोभित पीना करना. ३ मना करना, निषेध धोर (१५० धारति ) १ अच्छी करना, निवारण करना.४ पूरा रीतिस गमन करना, चतुराईस परना, पूर्ण करना. पटना, जल्द चलना. धाथ् (१ आ० भापते) १ योग्य मा (१५० धमाति) १ फूपना, होना, समर्थ होना, सायकः मुंइस यशी आदि पाच मजाना. होना. करना, भाषार्थसहित। ध्राड्-ध्वण ध्वन्-नट् प्राद (१ आ० धाडते) १ चीरना, ध्यन् (१५० ध्वनाते,१० ध्वनयाते- तुकडे २ करना, फाडना. ते, ध्वानयति-ते १शब्द कर- (१ प. प्राथति) १ कौवे- ना, आवाज करना. के समान कावकाव शब्द कर ध्वस् (१.आ० ध्वसते ) १ चूर्ण ना. २ चाहना. होना या करना. २ जाना.३, घ्रिज् (१५० धेजति) १ जाना, नीचे गिरना. ४ नष्ट होना. स्थलांतर करना. (१५० ध्वावति) १ का- ध्रु (१ प. प्रवति ) १ अचल वकाव शब्द करना. २ इच्छा होना, स्थिर होना. ( ६५० करना, चाहना. सुवति) १ अचल होना, स्थिर ध्वृ (१५० ध्वरति) १ टेढा कर होना, २ जाना.गमन करना. ना, नवाना, वक्र करना.२ मार ध्रुव ( ६ प० सुवात) १ स्थिर डालना. ३ वर्णन करना. रहना, खडा रहना. २ जाना. न. धू (६५० ध्रुवति) १ स्थिर रहन (१० उ० नक्कयांते-ते) १ ना.२ जाना. उच्छेद करना, नष्ट करना. घेक (१ आ० धेकते) १ शब्द १ जाना, समीप जाना या ना, बहुत होना. ३ हर्पित आना, पहुँचना. होना, हंसना, आनदित होना, नख (१५० नखति) १ जाना, ४ वडापनके विपयमै बढाई स्थलांतर करना. करना. | (१५० मायाति) १ तृप्त होना, नट् ( १ ५० नसति ) १ जाना, संतुष्ट होना, खुश होना. स्थलांतर करना. घ्वज् (१ प ध्वजति) १ जाना, नज् (६ आ० नजते ) १ लज्जित स्थलांतर करना. होना, शरमाना. बम् (१५० ध्वजात) १ जाना, नञ् ( १ मा० नन्नते) १ लज्जित स्थलांतर करना. होना, शरमाना. ध्वण (१५० ध्वणति) १शब्द नद् ( १० नति, १० उ० नाट्य. करना, आवाज करना. ति-ते)१ नृत्य करना, नाच करना, आवाज करना. २ वढ- नभ् (१ प० नक्षति, प्रणक्षति) .
सस्कृतधातुकोश । स्थलांतर करना. नड्-नम् नम्-नस् ना. २ नीचे गिरना, झरना, १ नष्ट होना. २ दुःख दंना या वहना. ३ दुःख देना, पीडा मार डालना. करना. ४ अभिनय करना, नम् (१५० नमति) १ नमस्कार भाव दिखाना ५ कपित होना, करना, वदन करना, सन्मान हिलना, धीरे २ सरकना. ६ देना, नवना. २ शब्द करना. चमकना. अव- सम्-आ-, प्र-१ नम- नडू (१५० नडति) १ भीर होना, स्कार करना. उत्-१ खड़ा क- एकत्र होना, (१० उ० नाडय रना. २ ऊपर उठाना. (१०५० ति-ते) १ गिरना, पतन होना. नमयति, नामयति) १ नवना. नद् ( १० १० नदात, १० प० नम्ब् (१५० नम्बाते) १ जाना, नादयति ) १ शब्द करना, आवाज करना. २ चमकना. नय् (१ मा० नयते, प्रणयते) १ ( १० उ० नादयति-ते) १ जाना, हिलना, पहुँचना. २ सं- बोलना. २ चमकना. प्रणदति- रक्षण करना. समुद्र, घंटा या पशुके समान न (१५० नदीत, प्रन (ण) आवाज करना. व्यनु-१ नादित दैति)१ शब्द करना, आवा- करना, शब्दोंते भर देना. ज करना. नन्द् ( प० नन्दति ) १ आनंद नई ( १५० नति) १ जाना. पाना, वृद्धि होना, पढती होना. आ-१ सुखी होना, आनंदी नल् (१ १० नलति, प्रणलति ) १ होना, खुश होना. आभ-१ सूचना, बास आना. २ बांधना. इच्छा करना, चाहना.२ कबू (१० उ. नाल्याते-ते)१ ल करना, पल्लोंमें लेना, मान्य चमकना. २ बांधना. ३ मट- करना. ३ स्तुति करना. प्रति- काना, अहाना. ४ बोलना. १ उपकार मानना, धन्य मान-नश् ( ४ ५० नश्यति ) १ खो ना, शुकर करना, शुकर गुजारी जाना, नष्ट होना, दिखाई नहीं करना. देना. नम् (१ मा० नमते, प्रणमते, ४ नस् (१ मा० नसते, प्रणसते) १ पः नभ्यति, ९५० नभ्नाति) टेढा होना, कहोना, नवजाना.
मापायसाहत। नड्-निन्द् निल्-नी न (४ उ.नाते-ते) १ वांधना. | निल् (१५० निलाते) १ कुछका अडाना. सम्-१ शस्त्र धारण कुछ समझना. २ घना होना, करना, वख्तर पहरना. दृढ होना, जमना. नाथ् ( १ ९० नायति-ते ) १ | निन् (१ प. निन्वात, प्रणिन्वति) याचना करना, मांगना.२ नष्ट १ भिगोना, गीला करना, सी- करना. ३ रोगी होना, वीमार चना. २ सेवन करना. होना. ४ श्रीमान होना. (१ / निवास (१० उ० निशसयति-ते) आ. नायते ) १ आशीर्वाद १ आच्छादित करना, लपेटना. देना, स्वस्तिवाचन करना. निश् (११० नेशाते, प्रणेशात) ना ( १ आ० नाधते) १ याचना १ शंततासे विचार करना, करना. २ रोगी होना.३ श्री मनन करना, ध्यान लगाना, मान होना. ४ आशीर्वाद देना. समाधि लगाना. नार (१० नासते, प्रणासते) | निप् (१ प० नेपति ) १ प्रोक्षण १ खर्राटा मारना, घर्राया मार- ना, नाक खरखराना. निष्क् (१० आ. निफयते) १ निश्च (१५० निक्षति, प्रणिक्षति) मापना, तोलना, गिनना. १चुंबन लेना, चूमना. निस् (२ आ० निस्ते) १ चुंबन निज (३ उल्नेनेक्ति, नेनिक्त) १ लेना, चूमना. शुद्ध करना. स्वच्छ करना. २/नी (१ उ० नयति-ते) १ पहुँचाना, पालन करना. प्राप्त होना.२ मार्ग दिखाना. ३ निञ्ज (२ आ. निते, प्रणिते) १ पाना,मिलना.४ऐजाना.अनु- स्वच्छ करना, निर्मल करना, १ याचना करना, मांगना.२ साफ करना. नकल करना, अनुसार करना, निद् (१ उ० नेदति-ते, प्रणेदाते) ययाप्रति करना.३ कृपा करना. समीप जाना. पहुँचना. २ अप-१ ले जाना हरण करना. दोष लगाना, निदा करना. २ आकर्षण करना, खींचना. निन्द (१५० निन्दात, प्रणिन्द मभि-, भाभ-१ चिह्नोंसे दि. ति)१निदा करना, दोष ल. खाना, दर्शित करना, अभिनय गाना, धिक्कार करना. करना. २ कृपालु होना. आ-१ करना, सींचना. 4.
संस्कृतधातुकोदा। नोच-नी न-प साना,लेआना. उत्-आ०१ऊनु (२१० नौति, मणोति) १५ पर करना, ऊपर उठाना. उप-१ शंसा करना.स्तुति करना.मा- समीप ले जाना. आ० १ उपन (नुते)-१ दुःखस रोना. यन संस्कार करना. २ मजदूरी नुड् (६ प. नडात) १ मारना. देकर समीप ले जाना. दुर्-१ नुद् (६ २० नुदात ते) १ भेज- खराव रातिसे वर्तना. निर-१ ना. प्रेरणा करना. २ जाना. प्राप्त होना, मिरना, पाना. २ अप-२ दूर करना. निर-१ ठहराना, निश्चय करना. परि-१] वाहर फेंकना, त्याग करना.२ विवाह करना, पाना.२ टूट कबूल करना, मान्य करना. ना.प्र-१ शिक्षा करना.२प्रांति वि-२खुश करना. सम्-१हा- करना, दुलारना, प्यार करना, कना, चलाना. लल्लोपत्तों करना.वि-१ले नाना. नू ( ६ १० नुवाति) १ प्रशसा २ नम्र होना, विनय करना करना, स्तुति करना. आ० १ ऋण चुकाना, ऋण नृत्य करना. करना. व्यप-१ विरल होना, फैलना, अलग होना. विनिर-न (१६० नरति, ९ प० नृणाति) न्यायसे विचार करना, न्याय करना. सम्-१ एकत्र करना, नेद् (१ उ० नेदति ते) १ दोष बटोरना.समनु-१ प्रार्थना करना. लगाना, निंदा करना.२ समीप समा-एकत्र करना, बटोरना. जाना या आना. नीच ( ११ ५० नीच्यति ) । नेप् ( १ आ० नेपते ) १ जाना, दास्यत्व करना, गुलामी करना. समीप जाना. नील (१५० नीलति, प्रणीलात) १ रंगना. २ रंगाना. ३ नीला | पक्ष (१५० पक्षति, १० स० पक्ष- रंग लगाना. याति-ते) १ ग्रहण करना, लेना, स्वीकार करना. २एक नीद् (१ नीवति, प्रणीवति ) पक्षका स्वीकार करना, एक १ मोटा होना, स्थूल होना, पक्षका समर्थन करना, एक दिल होना. ओर होना. देना. आ०२ धर्मके लिये खच/ नन् (१ प. नृत्यति) १ नाचना, १ले जाना.
भाषार्यसहित। पच-पत् पथ-पद् पच् (१ उ० पचति-ते)१५ २ अमानवी पराक्रम करना, काना, पछा करना. शक्तिमान होना अति-१ पञ् (१ उ० पञ्चति-ते, १० प जीतना, श्रेष्ठ होना, वर्चस्वी श्चयति-ते)१ प्रसिद्ध करना, होना. अभि-अव-१ उतरना. जाहिर करना, विस्तारपूर्वक आ-१ आना, प्राप्त होना, उप कहना २ फैलाना, पसारना. स्थित होना. उत्-१ ऊपर पद (१५० पटति) १ जाना, स्य चढना. नि-१ घटित होना, लांतर करना. (१०० पटयति होना. २ मिलना, प्राप्त होना. ते) १ गूथना, लपेटना. २ वि निर-१ भाग जाना, छिपना, भाग करना, हिस्से करना. (१० मुंह काला करना. परि- प. पाटयति) १ चमकना. १ जल्द जाना. २ मौल्यवान् २ बोलना. उत्-१ समूल नष्ट होना. प्रनि-१ साष्टांग नम करना, जडसे उखाडना. वि-१ स्कार करना. विनि-१ पीछे भाग जाना. २ विदारण करना, लोटना. सम्-१ साथ जाना. २ चीरना. मिलना, पाना, प्राप्त होना. पट् (१ पठति) १ पढना, सीख समा-१ शुद्ध करना, स्वच्छ ना. ( १० पाठयति-ते)१ करना. समुद-१ भाग जाना, अथरचना करना. उड जाना. सनि-१ आगे या पण (१ भा. पणते, १० पर थाहर जाना. (४ आ० पत्यते) पणयति) १ उद्योग घधा या १ श्रीमान् होना, शक्तिमान व्यापार करना. (१ प. पणा होना. ( १० प. पतयति-पात यति) १ प्रशसा करना, स्तुति यति)१नीचे गिरना, जाना करना. या उतरना. २ अमानवी परा पण्ड (१ आ. पण्डते) १ जाना, कम करना. । स्थलांतर करना. ( १ पण्डति, पथ् (१ प. पथति) १ जाना. १० पण्डयति-ते)१ नष्ट कर. ११० उ० पाथयति-ते) १ ना. २ राशि करना, एकत्र उडाना, फैलना, स्याग देना. करना, बटोर टेरे करना. पद् (१ प. पदति) १ स्थिर पत् (१ प. पतति ) १ नीचे खदा रहना. ( १०मा० पदय जाना या गिरना या उतरना. ते) १ जाना, स्थलांतर करना.
सस्कृतधातुकोश। , पद-पद् पन्-पश् (४ आ० पद्यते ) १ जाना, (पन् (१ आ० पनते) १क्रयविक्रय स्थलातर करना. अभि-१ देख करना, व्यापार करना, खरी ना, २ जानना, समझना. अनु दना वैचना (१५० पनायति) १ अनुसरण करना आ-१ प्रशसा करना, स्तुति करना. होना २ मिलना, प्राप्त होना | पन्थ् ( १ ५० पन्यात, १ उ० ३ दुर्दैवका अनुभव करना. ४ पन्ययति-ते)१ जाना, गमन गुणाकार करना, गुणा करना. करना, घूमना ५ आना ६ पैदा करना, उत्प पय (१ मा० पयते) १ जाना, न करना उप-१ उत्पन्न होना. २ मिलना, प्राप्त होना ३ पहना (११ ५० पयस्यति )१ समीप रहना, चपकके रहना पयर उपसम्-१ देवके लिये उपहार फैलाना, विस्तार करना देना, बलि देना प्र-१ प्राप्त पर्ण (१० प० पर्णयाते ) १ हरा करना, पैदा करना. २ प्रारभ करना, हरा होना करना, शुरू करना प्रवि-२ प (१ आ० पर्दते ) १ अपान उहराना, स्थापन करना. प्रति- १ पाना २ अनुमोदन देना, पर्प १ ५० पर्पति) १ जाना. क्वूल करना ३ छोड देना, [पई (१ पर्वाते ) १ जाना मुक्त करना वि-२ दु खानुभव | पल ( १५० पलति) १ जाना. करना, विपत्तिग्रस्त होना २भागना व्या-१ मार डालना या दुख देना व्युत्-१ मूलतत्वको पल्युल (१० उ०पल्युलयति-ते) ना, मनन करना सम्-१ वृद्धि १ शुद्ध करना, स्वच्छ करना, को प्राप्त होना, बढना २ कर- २कतरना. ना ३ दूदना, मनन करना. | पल्यूल (१० उ० पल्यूलयति-ते) सम्-१ वृद्धिको प्राप्त होना, शुद्ध करना, स्वच्छ करना चढना. २ करना. ३ दूढना, २कतरना दूढ लेना. समा-१ आ पहुँचना, | पल्ल् (१५० पल्लति) १ जाना. मा उपस्थित होना. २ पूर्ण | पश् (१ उ० पशति-ते, १० उ० करना, समाप्त करना. पशयति, पाशयाते-ते ) १ वायु छोडना भाषार्यसहित । " पयू-पिन पिच्छ-पिल् बाँधना, बेरी पडना. २ गांठ | पिच्छ (६५० पिच्छति ) १ बहुत यांधना, फांस लगाना. ३ जाना. दुःख देना, छल करना.२ विन ४ छूना, स्पर्श करना.५ हरकत करना, हरकत करना. (१० करना. ५० पिच्छयति) १ कतरना, पः (१० उ० पपयाति-ते, पापय चीरना. ति-ते)१ जाना. २ ठूना, पिज़ (१० ५० पेजयाते)१रहना. स्पर्श करना. ३ हरकत करना. पिञ्च (२ आ. पिते) १ रगाना, ४ वाधना, फांस ल्गाना. चमकीला करता. २ स्पर्श कर- पस् (१ उ० पसाति-ते, १० उ. ना, छूना.३ खिणखिण, रुण पा (प) सयति-ते) १ छूना, झुण छनछन आवाज होना. ४ स्पर्श करना. २ निषेध करना, आराधन करना, पूजा करना. हरकत करना. ३ जाना. ४ मार (१ प. पिनति, १०७० डालना या दुःख देना. ५ फांस पिञ्जयति-ते) १ मार डालना लगाना, वधिना. या दुःख देना. २ लेना, ग्रहण पंस (१५० पसति, १० उ० पस करना. ३ रहना, वसति करना. यति-ते)१ नष्ट करना, तहस ४ बोलना, भाषण करना. ५ नहस करना. प्रकाशित करना, तपाना. ६ पा (१५० पिबति ) १ पीना, स्थूल होना, शक्तिमान होना. प्राशन करना. (२५० पाति) पिट् (१ प. पेटति) १ राशि सरक्षण करना. करना, ढेर करना. २ शब्द पार ( १ उ० पारयति-ते ) १ करना, आवाज करना. समाप्त करना, पूर्ण करना. पिठ् (१ प. पेठति ) १ मार पाल (१० पालयति-ते)१पालन डालना या दुःख देना. २ दुःख करना, सरक्षण करना. पाना, दुःखानुभन करना. पि (६ पियाति ) १ जाना, स्थ. पिण्ड् ( १ उ. पिण्डात ते लांतर करना. १०उ० पिण्डयति-ते) १ राशि पिन ( १५० पिञ्चति, १० प. करना, ढेर करना. पिचयात) १ कतरना, चारना, पिल् (१५० १० पेट्यति ) १ फोडना. प्रेरणा करना, फेंकना, उडाना.
सस्कृतधातुकोश। पिवू-पिस्. पी-पुङ - . पित् ( १५० पिन्वति ) १ सेवा | पी (४ आ. पोयते ) १ पोना. करना २ प्रोक्षण करना सींच प्राशन करना. ना, गीला करना, भिगोना. | पीड् (१० उ० पाडयाते-ते) १ (१ आ० पेवते)१ सोचना, प्रतिकूल होना, हरकत करना. भिगोना. २ चेष्टित करना, चेताना.३ दुख पिश (६५० पिशात) १ तुकडे देना, पोडा करना. तुकडे करना, चीरना. २ व्य पोल (१५० पीलाते) १ मूर्ख होना. वस्था करना ३ प्रकाश करना, २ थमाना, गतिरोध करना, उज्ज्वल होना. रोकना. पिम् (७५० पिनाष्ट ) १ चूर्ण | पीव् (१ प० पीवति ) १ मोय करना, पीसना (१० प० पेप होना, स्यूल होना, पुष्ट होना. यति) १ दुःख देना, पीडा पुच्छ् (१ प. पुच्छाते) १च करना २ देना ३ स्थूल होना, कना, गलती करना. मोटा होना ४ रहना, वातना. | पुट् (६ ५० पुटाते ) १ मालिंगन (१५० पेपति, १० प. पेष- करना, गले लगाना, एकम यति) १ जाना. एक अटकाना, भेटना. (१० पिष्ट (१० उ० पिष्टयति-ते) १ उ० पोटयति-ते)१ चूर्ण कर चूर्ण करना, बुकनी करना, ना, बुकनी करना, पीसना.२ पीसना चमाना, प्रकाशित होना.३ पिस् (१ प. पेसाते) १ जाना बोलना, भाषण करना. (१० ( १० उ० पेसयति-ते ) १ उ० पुटयाते-ते) १ एकमें एक जाना. २ रहना, वसति करना, अटकाना गूथना,गाठ लगाना. वसना.३ देना ४ पीडा करना, पुट्ट ( १० उ० पुट्टयति-ते) १ दुख देना ५ मोय स्थूल होना. घटना, कम होना, न्यून होना, शक्तिमान होना, समर्थ होना. पिस् (१ प० पिसात, १० उ० पुड् (१०प० पुडति )१ छोडना, पिमयतिते) १ नष्ट करना.२ त्याग करना २ आच्छादन चमकना. ३ बोलना. करना, ढांफना. , थाह होना भाषार्थसहित । -- पुण-पुल पुष्-पूर्य पुण (६५० पुणाते) १ पवित्र | पुष् (१ प. पोपति, ४ प० पुष्य- होना, शुद्ध होना, धर्मकृत्य ति, ९ प० पुष्णाति) १ पालन करना. (१० उ० पुणयात-ते) करना, पोषण करना. (४५० १ वृद्धि होना, बढती होना. २ पुष्याते ) १ विभाग करना, वृद्धि करना, बढती करना. हिस्सा करना. (१०प० पोप पुण्ट् (१ प. पुण्यात, १० उ० यति)१ धारण करना. परि- पुण्टयाते-ते ) १ बोलना. २ सम्-१ उत्कृष्ट पालन करना. प्रकाशित होना, चमकना. पुष्प (४ प. पुप्प्यति) १ पुष्प- पुण्ड् (१ प. पुण्डति) १चूर्ण युक्त होना, फूलना. करना, मलना, पीसना. घुस् (१० उ० पुसयति-ते )२ पुथ् (४ प० पुथ्यात) १ दुःख बढाना, वृद्धि करना २ दुःख देना, पीडा करना. (१० उ० देना. ३ वढना, वृद्धि होना. पोथयति-ते ) १ प्रकाशित पुस्तू (१० उ० पुस्तयति-ते ) १ होना, चमकना. २ बोलना सत्कार करना, मान करना. २ पुन्थ् (१५० पुन्यति ) १ दुःख तिरस्कार करना, अनादर कर- सहन करना. २ पीडा करना, ना. ३ बांधना ४ लेपन करना, दुःख देना. पुर (६ प० पुरति) १ अग्रभागमे पू (१ आ. परते, ९ उ. पुनाति, जाना, आगे जाना, मुख्य पुनीते) १ पवित्र करना, स्वच्छ होना, अग्रसर होना. करना (४ आ० १ पूयते) पुर्व (१५० पूर्वति) १ पूर्ण कर- १ पवित्र होना, स्वच्छ होना. ना, भरना. (१० उ० पूर्वय- पूज् ( १० उ० पूजयाते-ते ) १ ति-ते) १ रहना, वसति करना. पूजा करना, अर्चा करना.२ स २बुलाना, अमत्रण करना. न्मान करना. सम्-१ उत्तम पुल (रप० पालाते, ६५० पुलात, समारमे अपदरसन्कार करना १० उ० पोलयाते-ते) १ राशि | पूण ( १० प. पूणयति ) १ एकत्र होना, टेर होना. २ बढना, करना, ढेर करना, बटोरना उचा होना. पूय् (१ आ. पूयते) १ तोडना. विलेपन करना.
संस्कृतधातुकोश। पुर-पृच् पृन-पप् चीरना. २ दुर्गधि माना, बदबू सघर्पण करना, सयोग करना आना. (१५० पति, १० उ० पर्चय पूर (४ आ० पूर्यते) १ तृप्त करना, ति-ते)१ स्पर्श करना, छूना. आनद करना. २ पूर्ण करना, २ अटकाना, हरकत करना. भरना. ३ सतोष होना, आनद पृञ् (२ आ. पृढे) १ स्पर्श होना. ४ पूर्ण होना. (१० उ० करना, सघर्पण करना. पूरयति-ते)१ तृप्त करना. १मानद पूण पर० पूर्णयातनत) ९ पृष्ठ् (६पः पृणति)। ( ना, भेजना. एकत्र करना, ढेर करना, राशि करना, सतोप पाना. करना. पृथ् ( १० उ० पर्थयाते-ते) १ पूर्व (१० प० पूर्वयति) १ रह्ना, फेकना, उडाना. २ प्रेरणा कर- आश्चर्य करना २ बुलाना. पूल (१ प. पूरति, १० उ० पूल-/ पृष् (१ प. पति) १ प्रोक्षण यति-ते)१ ढेर करना, बटोरना, करना, सीचना. २ देना. ३ सचित करना. पीडा करना,. दुःख देना. ४ पृष् (१ प. पूपति ) १ वढाना, थकना, थक जाना. अधिक होना. २ पोपण करना, पृ (३ प० पिपात, ९ ५० पृणाति, पालन करना. १५० परति, १० उ. पारय पृ (३ प० पिपात)१ पालन करना, ति-ते)१ पालन करना, पोपण पोपण करना. २ पूर्ण करना, पेण ( १५० पेणात ) १ जाना करना. २ पूर्ण करना, भरना. भरना. (५ ५० पृणोति) १ कृप्त करना, सतुष्ट करना. (१ २ पीसना. ३ आलिंगन करना, प. परत, १० प० पारयति)१ गले लगाना. पूर्ण करना, भरना. (६आ. पेल् (१५० पेलति) १ आना. व्याप्रियते) १ क्सिी कृत्यमें २ हिलना. आसक्त रहना. पेत् (१ आ. पेवते ) १ सेवा पृच् (२ आः पृक्ते, ७ प. पृण करना, नौकरी करना. क्ति) १ स्पर्श करना, छूना, पेप् (१ आ० पेपते) १ ठहराना, भाषार्थसहित। M ४ पेस्-पी निश्चय करना. २ चपलतासे ति-ते)१ प्रीति करना, दुला. यत्न करना. रना. २ तृप्त होना, संतुष्ट होना. पेस (१५० पेसति) १ जाना. ३ तृप्त करना, खुश करना. पै (१५० पायति) १ सूखना, (१ आ० प्रवते) १ जाना. कुम्हलाना. २ हिलना. पैए (१५० पैति ) १ आज्ञा मुद (१५० प्रोटति) १ घिसना, करना.२ जाना. ३ स्पर्श करना. मर्दन करना. ४ पीसना. ५ मालिगन करना. मुप् (१ प० प्रोपति) १ जलाना, प्याय ( आ० प्यायते)१बढना, भर्जन करना, भूजना. (९५० वडा होना, फूलना. मुष्णाति ) १ सौम्य होना, प्युप् (४५० प्युप्यति) १ जलना, स्निग्ध होना, चिकनाहट होना, २ विभाग होना. (१० ५० प्यु. प्रोक्षण करना, सीचना. ३ पूर्ण पयति) १ छोडना,त्याग करना. करना. भरना. मुक्त करना, प्युए (४५० प्युस्यति)१ जलना. छोडना.५ प्यारा होना. विभाग होना. प्रेसोल् (१० उ० प्रेलोलयति-ते) प्य (१ आ० प्यायते) १ वढना, १झूटना. २ झुलाना. वंढा होना. फूलना. प्रेष् (१ आ० प्रेपते ) १ जाना, प्रच्छ (६५० पृच्छति) पूंछना. आना. २ चेताना, भेजना. प्रथ् ( १ आ. प्रयते) १ प्रसिद्ध प्रोथ् (१ उ० प्रोयति-ते) १शक्ति- होना, जाहिर होना. (१० उ० मान होना, लायक होना,२ पूर्ण प्रथयति-ते)१फेंकना, उडाना. होना, भरना. ३ नष्ट करना. २ फैलाना, प्रमृत करना. ३ पक्ष (१ उ०प्लक्षति-ते) १ खाना. गाना. ४ स्तुति करना. | प्लिह (आ. प्लेहते) १जाना. प्रस् (१ आ० प्रसते) १ फैलाना. प्ली (९५० प्टिनाति) १ जाना. २जनना. मा (२५० प्राति) १ मरना. प्लु (१० प्लवते ) १ जाना. मी (१७० प्रियति-ते, ४ आ० २ उड उड जाना. ३ तेरना. उत्-१ऊपर उडना या कूदना. प्रीयते,९उ०प्रोणाति-प्रीणीते; वि-१ डूबना, मज्जन करना.२ १० उ० प्रीणयाति-ते. प्रायय जलमय होना. सं.पा.
सस्कृतधातकोशी जीता रहना प्लुए-फण फल्बन्ध प्लष् (१ ५० प्लोपति, ४ प० प्लु फल् (१ . फलति) १ उत्पन्न प्यति)१ जलाना, भूजना, भु करना. २ सफल करना. ३ नना.( ९१० प्लुष्णाति) १ ३ जाना. ४ तोडना, चीरना, स्निग्ध होना, चिकनाहट होना. विभाग करना, तुकडे करना. ३ स्निग्ध करना ४ प्रोक्षण कर-फुल्ल (१५० फुल्लाते) १ प्रफुल्लित ना, सीचना. ५ पूर्ण करना, होना, फूलना, कलयाना. भरना, ६ मुक्त करना, छोडना. फेल् (१ प. फेलति) १ जाना, ७चाहना. ८ दया करना. स्थलांतर करना. प्लुए (४ प० प्लुस्यति) १ जल क्वल् (१ प० पवलाते) १ जीना, ना. २ भाग करना, हिस्सा करना, बाटना. व. प्लेव ( १ आ० प्लेवते ) १सेवा बठू ( १ ५० वठति ) ९ पराक्रमी करना, शुश्रूपा करना. होना, शक्तिमान होना. प्सा (२ प० प्साति) १ भक्षण बण (१ प. बणति ) १ शब्द करना.२ सरक्षण करना. करना, आवाज करना. बद् (१ प. बदति ) १ निश्चल फक् (१ प. फकति ) १ धीरे होना, स्थिर होना, स्वस्य रह- धीरे जाना, मदगमन करना. ना. (१ उ. बदति-ते, १० २ रेंगना. ३ अनाचरण करना, उ. बादयति-ते)१बोलना, अयोग्य रीतिसे वर्तना. कहना. फण (१५० फणति) १ जाना. वधु (१ प. बधति, १० उ. २ उत्सुकतासे या स्वल्प रीतिसे याधयति-ते)१ बांधना, बद्ध उत्पन्न करना.३ तेजोहीन कर. करना. २ हिंसा करना, मार ना, कम तेज करना. (१०५० डालना, वध करना. ( १० फाणयति)१ सतेज वस्तुमै जल बीभत्सते)१ मानसिक दुःख आदि डालके अल्प तेज करना. होना २ खेप करना, तिरस्कार २ चमकना, प्रकाशित होना. करना, घिन करना. (१०५० फणयति )१ चा | वन्ध (९५० बनाति, १० उ. ना जाने देना. बन्धयति-ते) १ बांधना, आ.
i 'भाषार्यसहित। ३७ । ४ देना, दान वन्-चल वस्तु-विल् ज्ञांकित करना.आ-(९)१ चारी आ. वाख्यति ) १ लडके. भोरसे बांधना. अनु-१ जोडना, समान पालन या सरक्षण करना. चिपकाना, एकत्र करना. २/वस्त् (१ आ० वस्तयते ) १ अनुसरण करना, ययाप्रति कर जाना.२ मांगना. ३ मार टा- ना. नि-१ वधमुक्त करना, लना या दुःख देना. बंधनराहत करना. सम्-१ | वंह (१ आ. वहते) १ बढना. मिराप करना, एक. करना, वह ( १ आ. वहते ) १ मार भेटना. वन (८ आ० वनुते) १ मांगना, डालना या दु.स देना. २ बो- याचना करना. लना, कना. ३ फेलाना है। रना.-५ मुख्य वभ् (१ प. बभ्रति) १ जाना, होना, अग्रगण्य होना, श्रेष्ठ स्थांतर करना. होना. ६ याद करना, स्मरण बई (१ ५० वर्वति) १जाना. करना. (१० आ. वह्वयते) बई ( १ आ० वर्हते ) १ श्रेष्ठ १ चमझना, प्रकाशित होना. होना. २ वोलना, महना.३/वाड ( १ बाडते ) मज्जन करना, मार डायना या दुःख देना ४ टूबना, स्नान करना, बहाना. आच्छादित करना, ढंकना ५/वाध ( १ ० याधते ) १ रोक फेलाना. ६ याद करना, स्मरण ना, अमाव करना. २ बाधा करना. ७ देना. (१० उ० देना, दुस देना. वहयति-ते ) १ मार डालना वाह (१आवाहते)१ यत्न करना. या दुस देना. विद् ( १५० वेटति ) १ शाप वसति, १० १०व देना, आक्रोश करना, गारी ख्यति) १ जीना, जीता रह देना. ना. २ धान्यसचय करना. विन्द् (१ प. विन्दति) १ अब द्रव्यका अटकाव करना. (१ यर होना, अश होना. ० वलते ) १ जाना. २ मार षिल् (६ ५० विलति) १ छेद डालना या दुःस देना. (१० करना, चीरना (१० उ० वे. आ० वालयते)१ स्पट करके ख्याते-ते)१ फेंकना, उडाना. दिसाना, स्पष्ट करना. (१० २ छेदन करना, चीरना, ५सं.धा. वल (१ संस्कृतधातुकोश। . बिस्-बुस्त बृह-भज् विस् (४ प० विस्यति) १ फेंक देना २ अपमान करना, धि ना, उडाना कार करना बुद्ध ( १ ५० बुक्कति, १० उ० (१ प० वर्हति) बढना, बुक्कयति ते) १ कुत्ते के समान बृह (१५० बृहति) पुकारना २ बोलना (१० उ० वृद्धि होना २ जगली पशुओं बुक्कयति-ते) १ दूसरेको दुख समान पुसारना देना बृ (९ उ० घृणाति, वृणीते) १ बुड् (६५० बुडति) १ छोडना, सरक्षण करना, पारन करना २ त्याग करना २ वस्त्रादिसे आ पसद करना, पसद करके रेना च्छादित करना ३ पिनना बुद् (१ उ० बोदति-ते) १ विवे | वेह (१ आ० बेहते ) १ प्रयत्न चन करना, सारासार विचार करना, उद्योग करना करना युप् (४५० ब्युप्यति )१ जरना बुध् (१ उ० बोधति-ते, ४ आ. ब्युस् (४५० ब्युस्यति) १ तुकडे २ बुध्यते) १ जानना, समझना करना, हिस्से करना प्रति-१ बाट जोहना, मार्ग (२ प. ब्रवीति-आह )१ प्रतीक्षा करना प्रतिवि-१ जा कहना, बोलना गना, जागृत रहना बस् (१० उ० बसयति-ते) १ बुन्द् (१ उ० बुन्दति-ते) १ जा मार डालना या दु ख देना नना, समझना, बूझना म. बुन्ध (१ उ० बुन्धति-ते) १ जा नना, समझना, बूझना मज ( उ० भजति-ते) १ भजना, बुल् (१० प० बोल्यति) १ डूबना, भजन करना २ उपभोग करना, मज्जन करना विषयवासनासे अनुभव करना बुस् (४ प० बुस्यति) १ छोडना, (१० उ० भजयति-ते)१ देना, त्याग करना, दान करना २ पकाना, सिद्ध बुस्त् (१० उ वुस्तयति-ते )१ करना, तैयार करना (अन्ना दि) ३ पृय करना, अलग आदर सत्कार करना, मान करना भाषार्थसहित । पीडा करना. 4 भ-भ भा-भाज् मम् (१० उ० भञ्जति-ते) १ भत्र् (१ पभवति )१ दुस देना, प्रकाशित होना, चमरना २ बोलना, कहना वि-१ नापना | मल् (१ आ. भलने ) १ बोरना, प्रवि- वाद करना (७५० ध्यास्यान करना २ मारना, भनक्ति) १ नष्ट करना. दुख देना, ३ दान देना देना भट् ( १५० भटति ) १ धारण (१० आ० मल्यते) १ वाद करना, पास रसना, २ बोलना, विवाद वग्ना २ ऊपर फेरना, वादविराद करना. ३ भारा उडाना. देकर लेना, भारपर लेना मल्ल् (१ भलते)२ स्पष्ट कहना, मण् (१ प. भणति) १ स्पष्ट व्यास्यान करना २दुस देना पहना, स्पष्ट बोरना प्रति-१ या मारना ३ देना, दान देना जपाय देना, उत्तर देना मप् (१ प. भपात) १ भोकना, मण्ट (१० प० भण्टयति) १फ कुत्तेरे समान पुकारना २ दोप देना, निदा करना साना, ठगना भण्ड् (१आ० भण्डते )१ उपहास | मस् ( ३ ५० वस्ति ) १ चम फ्ना २ दोप लगाना, निदा करना २ ठट्टा करता ३ वो. करना. लना ४ दोप लगाना, निदा मम् (१५० भक्षति, १० उ० भक्षय करना (१५० भण्डति, १० उ० भण्डयति-ते) १ शुभपर्म | ति-ते) १ खाना, भक्षण करना भा (२५० भाति)१ चमरना, करना प्रकाशित होना • सदर दी भन्द (१ उ० भन्दति-ते, १० उ. सना ३ होना, रहना ४ फूक भन्दयति-ते) १ शुभार्म करना ना, धोक्ना ५ आनदी मुसी २ सुखी होना ३ चमफ्ना रहना ६ घुस्सा करना, घुडक मर्स (१० आ० भर्त्सयते) १ ना आ-१ विजुलीके समान धिक्कार करना, निदा करना चमफ्ना वि-प्र-१ विशेष २ टराना, घुडस्ना करके चमकना भर्भ ( १ ५० भर्भति ) १ दु ख | भाज् ( १० उ० भाजयति-ते) १ देना, पीडा करता तुपडे २ करना, हिस्सा करना.
सस्कृतधातुकोश। भाम्-भिष्ण भी-भू माम् (१ आ. भामते, १० उ० भी (३ प० विभति) १ डरना, भामयति-ते ) १ घुडफ्ना घवरना (क्वचित् १५० भय घुस्सा करना ति, १०५० भाययात) डरना भाप (१ आ० भापते ) १ वोल-भुज (७ उ० भुनक्ति, भङ्के) १ ना पार-१ निदायुक्त पोरना सरक्षण करना, पालन करना उपरोधिक वालना सम्-१ दृ २ खाना, भक्षण करना ३ अ सरेसे वारना २ अच्छा रातिसे नुभव करना, उपभोग करना बोलना ४ सहन करना, सहना (१ भास् (१ आ० भासते) १ चम ५० भुजति) १ पक हाना, क्ना, प्रकाशित करना प्रति- टेढा होना दृग्गोचर होना, दिखाई देना, भुण्ड् (१ आ० भुण्डते) १ आ दाख पडना, दाखना श्रय देना, पालन करना भिक्ष (१ आ० भिक्षते) १ याच | भुरण ( ११ ५० भुरण्यति ) १ ना करना, मागना २ प्राप्त क पारन करना २ धारण करना रना, सपादन करना ३ नहीं भू ( १ ५० भवति ) होना २ सपादन करना ४ आशा या रहना ३ उत्पन होना, पैदा रोभसे क्सिा वस्तुको याचना होना अधि-१ सत्ता चलाना, करना ५ कष्ट पाना, थक्ना हुमत करना अनु-१ अनुभव मिद् (७ ३० भिनात्त, भिन्ते) करना २ समझना, जानना ३ १ चारना, तोडना, क्तरना करना ढूढना अभि-१ जी मिन्द् (१ प. भिन्दति) १ भाग तना २ पीडा करना ३ दुख करना, हिस्सा करना देना उत्-१ उत्पन्न होना पैदा भिल् (१० प० भेरयति) १ वि होना परा-१ पराभप करना, भाग करना, अलग करना जीतना प्र-१ जाना २ दृग्गो भिपज् ( ११ प० भिपज्यति) १ चर होना, दिखाई देना ३ चिकित्सा करना, औषधोपचार सत्ता चलाना हुकूमत करना करना ४ अधिक होना, बढना ५ मिष्ण ( ११ १० भिप्णयति) द्वद्वयुद्धर्म समान होना प्रति- १) नौकरी करना १ दरेमें देना परि-१ अव भापार्यसहित। ७१ भू-भृश भृग-भ्रस्ज् मान करना, तिरस्कार करना. मुंम् (१० उ० भृशयति-ते) १ २ घेरना, घेर लेना. वि-१ - प्रकाशित होना, चमकना. २ श्रय देना, पालन करना. २ बोलना, भापण करना. देसना. ३ स्थापित करना, म (९ ५० भृणाति) १ सरक्षण ठहराना. ४ अधिकार होना. करना, पालन करना.२ धारण व्यति-१ परस्पर मित्र होना. करना, भरमन करना धरना, सम्-१ होना, उत्पन्न होना. २ परुडना. ३ भूजना, तलना. समावेश होना. ३ जीतना, मेप् (१ उ० भेषति-ते) १ जाना. पराभव करना. १ शक्तिमान् | २टरना. होना, पराक्रमी होना. ५ एकत्र भ्यम् (१आ० भ्यसवे) १ टरना. करना मिलाप करना. ६ पालन न करना. ७ होनेसरीसा होना, भ्रण ( १ ५० भ्रणात ) १ शब्द करना, आवाज करना. संभव होना. (१ उ० भवति-ते, १० आ• भावयते ) १ प्राप्त भ्रम् (प० भ्रम (म्य) ति, ४ प. भ्राम्यति ) १ चक्राकार घूम. होना, मिल जाना. (१० उ० ना. २इधर उधर घूमना. भट- भावयाते-ते)१ एकत्र करना, कना. वि-१ श्रीडा करना, खे- बटोरना.२ चितन करना. रना.सम्-१ सन्मान करना,स. भूप (१ प. भूपति, १० उ० भू- कार करना. २ गडबड होना. पयति-ते ) १ संवारना, अल-भ्रम् (४ ५० भ्रश्यति ) १ भ्रष्ट कृत करना. होना, पतित होना, गिरना, मृ ( १ उ० भरति-ते, ३ उ० वि नीचे गिरना. भति-विभृते ) १ आश्रय देना, भ्रंश् ( १ आ. भ्रंशते, ४ प० धारण करना. २ पूर्ण करना, भ्रश्यति) १ भ्रष्ट होना, पतित भरना. ३ पोपण करना. होना, गिरना, नीचे गिरना. मृज् (१ आ० भर्जते) १ भूजना. भ्रस् (१ आ. भ्रसते ) १ भ्रष्ट तलना. होना, पतित होना, गिरना, मृश् (४५० भृश्यति) १ शरीर नीचे गिरना. योग्यतादिसे भ्रष्ट होना, च्युत भ्रस्ज ( ६ उ० भृन्नति-ते) १५. होना, नीचे गिरना. काना, भूजना, ६६.या.
संस्कृतधातुकोश। मह भाज-मछ मक्ष्-मञ्च भ्राज ( १ आ० भ्राजते) १ चम | मक्ष (१५० मक्षति) १ मिलना, कना, प्रकाशित होना. मिश्रित होना. २ मिलाना, भ्राश् (१आ० भ्राशते-भ्राश्यते) मिश्रित करना. १चमकना. मख (१ मा० मखति) १ जाना, भ्री (९५० भ्रीणाति-भ्रिणाति) स्थलांतर करना. १ धारण करना, पकडना,आश्र | मगध ( ११ प० मगध्यात) १ यदेना.२डरना. ३ पालन करना. लपेटना, ढकना. २ पूछना. भ्रड् (६ प० झुडति) १ बटो- मक् (१ आ० मते) १ जाना. रना, एकत्र करना. २ ढकना, २ सवारना, अलकृत करना. आच्छादित करना. मङ्ग (१५० मसति) १ जाना. भूण ( १० आ० भ्रूणयते) मङ्ग (मद्गति ) १ जाना. आशा करना. २भरोसा करना, विश्वास करना (१ आ० मते) १ जाना. भ्रेज् (१ आ० भेजते) १ प्रका २ जाने लगना. ३ प्रारंभ कर- शित होना, चमकना. ना, शुरू करना. ४ जल्दी भ्रेप् (१० भ्रपते) १ जाना. जाना. ५ दोप लगाना, निदा २डरना. करना. ६ ठगना, अप्रामाणिक भ्लक्ष (१७० लक्षति-ते)१खाना. रीतिसे वर्तना.७ जूला खेलना. मलाश (१ आ० भ्लाशते-म्ला- (१५० मइति) १ सवारना, श्यते) १ प्रकाशित होना, भूपित करना, अलकृत करना. मन् (आ० मचते)१ गर्व कर चमकना. भ्लास (१ आ० भ्लासते ) १ ना, गर्वीला होना. २ दुष्ट दुरा- प्रकाशित होना, चमकना. चारी होना. ३ बोलना.४ पी. सना, कूटना. भ्लेषु ( १ उ० भ्लेपति-ते) १ मज् (११० मजति) १ आवाज जाना.२ डरना. करना, २ मत्त होना. ३ का. म. मातुर होना. म (१ आ० मक्कते) १ जानी, मच् (१ आ० मञ्चते) १ धारण स्थलांतर करना. करना, पास रखना. २ उच भाषार्थसहित। म-मद् मन-मन्यू होना. ३ उपासना करना, मन् (४ आ. मन्यते, ८ आ० अर्चा करना, पूजा करना. ४ मनुते)१ जाना, समझना. २ चमकना. (१ प. मञ्चति) मान्य करना, कबूल करना.३ १जाना. विचार करना, चितन करना. मञ्ज (१५०मजति, १०प० मन्ज (१५० मनति, १०५० मान योते) १ शब्द करना, आवाज | यति) १ आदर करना, सरकार । करना. शुद्ध करना, मांजना. करना (१०आ मानयते) १ यद मट ( १ ५० मठति ) १ रहना, करना, स्थिर रहना, मद होना. वसति करना. २ विचारमें मग्न २ गीला होना.३ प्रतिकूल होना, पयरना. मण्ट ( १ मा० मण्ठते ) १ दुःख होना, रुकना. अनु-१ अनुमो दन देना, कयूल करना. अभि- करना. २ उत्कठित होना. १अभिमान करना. २इच्छा मण्द (१५० मण्डति, १० मण्ड- यति-ते) १ सवारना, अलकृत करना, चाहना. अव-अपमान परना, निर्भीसना करना सम्-१ करना. ( १० प० मण्डति)१ अनुमोदन देना, कबूल करना. आनदित करना, हर्पित करना. अपराध करना, गुनाह करना. वाढ लगाना २ अलग करना, टूक २ करना. २ क्रोध करना, गुस्सा करना. मश (१ प. मणति ) १ अस्पष्ट मन्त्र (१० आ० मन्त्रयते, क्वचित् शब्द करना या पहना. १५० मन्त्रात) १ गुह्य मापण मथ् (१ प. मथति) १ मथना. करना, गुप्त बात करना.आ-१ २ विचार करना, मनन करना. सत्कार करना, सन्मान करना. ३ हिलना. नि-१आमत्रण करना, बुलाना. मद् (१ प. मदति, १० ५० मद. मन्थू (१५० मन्यति, ९५० भना- यति) १ हर्पित होना. २ दरिद्री ति) १ घिसना, मर्दन करना, होना. (१० आ० मादयते) १ रगडना. २ दुव करना, शोक तृप्त करना, समाधान करना करना, रोना ३ दु ख शोका- (४ माद्यति) १ थकना दिवा सहन करना ४ मयन २ हर्पित होना ( १ मा० मण्डते) १ घेरना, मन्तु (११ उ० मन्तूयति-ते) १ करना, मथना संस्कृतघातकोश। मन्द-मन् मव्यू-मा मन्द् (१ आ० मन्दते) १ स्तुति | मव्य् (१५० मव्यति) १ वाधना, करना, प्रशमा करना २ तुष्ट रोस्ना होना, मानद कग्ना ३ उन्मत्त मश् (१ प. मशति) १ शद होना, गर्म करना ४ मद करना, आवाज सरना.२गोष होना. ५ सोना ६ चाहना ७ करना, घुस्सा करना जाना ८ चमरना, प्रशशित मप् (१ प. भपति) १ मार टा होना ( ११० मन्दति, १० हना या दु ख देना उ० मन्यति त्ते) १ दृष्ट होना, मस् (४ प० मस्यति) १ नापना. हर्पित होना २ थरना, श्रान २ रूपातर करना, आकार होना बदल्ना म ( १५० मभ्रात) १ जाना, मस्त (१ आ० मस्यते) १ जाना स्थातर करना | मस्ञ् (६५० मजाते) १ स्नान (१ आ० मयते) १ जाना, मय करना, नहाना. २ धोना स्थलातर करना स्वच्छ करना मर्च ( १०३० मर्चयति-ते) १ | मह (१ प. महात, १० उ० मह जाना २ शन्द करना, आवाज यति-ते) १ सन्मान करना, करना पूजा करना मई (१ प. मति) १ जाना, मंह (१ आ. महते)१ वढना, मई (१५० मवति ) १ जाना, पर्धित होना (१५० महयति) चलना २ पूर्ण करना, भरना १ चमकना, प्रकाशित होना मल् (१ आः मल्ने, १० प.मर- २ वोरना, पहना यति) १ पहिनना, पहिरना २ मही ( ११ मा० महीयते) १ धारण करना, धरना, पफ्टना पूजनीय होना ३ चिपराना, लटयाना मा (२ प. माति, ३ आ० मि मल्ल (१ आ० मल्लने) ' धरना, मोते, ४ आ० मायते)१ना धारण करना, रखना पना, तोलना २ समाना भनु- मन् (१५० भवति) १ वाधना, १ अनुमान तूई से सिद्ध करना. रोश्ना, उप-7 उपमा देना, तुलना कर भाषार्थसहित ! मांथ-मि मिच्छ-मिघ् ना, समानता करना. परि-१ सलग करना, फैलाना, उडाना, नापना, गिनना, तोलना, परि फेंकना. माण करना. प्र-१ प्रमाण होना. | मिच्छ ( ६ ५० मिच्छति ) १ मांझ (१५० माक्षति) १ इच्छा पीडा करना, दास देना. २ करना, चाहना. रोकना, निषेध करना. माइ (१ उ० माडति-ते ) १ मिन् (१ १० मिन्नति, १० उ० नापना, गिनना. मिन्जयति-ते ) १ बोलना. २ मात् ( १ उ.मातति-ते)१ नापना. चमफना. मान (१ आ० मीमांसते) १ ज्ञान | मिथ् ( १ उ० मेयति-ते ) १ प्राप्तिकी इच्छा करना, शोध समझना, जानना. २ पीडा करना. (१५० मानति, १० करना, दुःख देना. ३ एकत्र १०७० मानयति-ते) १ सत्कार करना, जोटना, जुटाना. करना, सन्मान करना, पूना | मिट् (१५० मेदति) १ गर्व कर- करना, मनाना. अप-भव-१ ना, अभिमान करना. २ नम्र अपमान करना, तिरस्कार होना. (१ उ० मेदति-ते) १ करना. समझना, जानना. २ पीडा मार्ग (१० उ० मार्गयति-ते) १ करना, दुःख देना. ३ हानि सिद्ध करना, तैयार करना. २ करना, नुक्सान करना. ( १ जाना. ३ मार्ग सिद्ध करना.४ आ० मेदते, ४ प. मेद्यति, १० वाणमें पर लगाना. (१५० प० मेदयति) १ स्निग्ध होना. मार्गति, १० उ० मार्गयति-ते) २ पिघलना. ३ अभ्यजन कर- १ टूटना. २ स्वच्छ करना, ना, आंजना, पोतना.४ प्रीति शुद्ध करना. करना, प्यार करना. ५ नरम मा (१० उ० मार्जयति-ते) १ होना, मृदु होना. शब्द करना, आवाज करना. मिथ् (१ उ० मेघति-ते) १स- २ स्वच्छ करना, शुद्ध करना. मझना, जानना. २ पीडा कर- माद् (१ उ० माहति-ते ) १ ना, दुःख देना. ३ एकत्र कर. नापना, गिनना, तोल्ना. ना, जोटना, जडाना, संयुक्त (५ उ० मिनोति-मिनते)१] करना.
७६ संस्कृतधातुकोश मी मुञ्च मिन्द-मिहू मिन्द (१५० मिन्दति, १० उ० | मी ( १५० मयति, १० उ० भाय मिन्दयति-ते) १ स्निग होना यति-ते) १ समझना, जानना २ २ पिधरना ३ अभ्यजन कर नाना. ( ४ आ० मीयते)१ ना, आंजना पोतना, ४ प्रीति मरना, देहत्याग करना (९ करना, प्यार करना ५ नरम उ. मीनाति-मीनीते) १ मार होना डालना या दुख देना मिल् ( ६ उ० मिलति-ते ) १ मीम (१ ५० मीमति ) १ जाना सयुक्त होना मिलना जुड जाना २ शन्द करना, आवाज करना मिव् (१ प० मिन्वति) १ सीच मील (१ प० मीलाते) १ आंखें ना, प्रोक्षण करना, गीला सूदना, पलक मारना उत्-१ करना २ सेवा करना, शवपा जगाना. २ खिरना ३ फैलना करना मी (१५० मीवति ) १ मोटा मिश् ( १ प० मेशति ) १ शब्द होना, स्थूल होना करना, आवाज करना २ क्रोध मुच (६ उ० मुश्चति ते १ मुक्त करना, गुस्सा करना करना, छोडना २ त्याग करना मिथू (१० उ० मिश्रयति-ते) १ (१० मोचयति-ते) १ छोड मिश्रित करना, एकत्र करना, देना, जाने देना २ द्रव्यादिक समाहार करना देना ३ तुष्ट करना, खुश करना मिष् (१५० मेषति १ सेवा करना, (१ आ० मोचते) १ ठगना, शुश्रूपा करना २ सीचना, प्रो क्षण करना, गीला करना (६ मुञ्च् (१ भा० मुञ्चते) १ बोलना, प० मिपात) १ झगडना, कलह कहना २ पीसना, कूटना ३ करना,कुस्ती करना ठगना, मूसना, फँसाना ४ दुरा मित्र (१० उ० मिस्रयति-ते)१ चरणी होना मिश्रित करना, समाहार कर (१ प.मुञ्चति) १ जाना, २ ना, मिलाना, एक्त्र धरना मुक्त होना प्र-१ मतिदान मिह (१५० मेहति ) १ गोला करना, बहुत देना वि-१ मुक्त करना, सीचना, प्रोक्षण कर करना, छोड देना २ समर्पण ना २ मुतना, पेशाब करना मृसना, फंसाना . गर्व करना करना। देना ३ हराना भापार्यसहित। ७७ मुज-मुण्ड् मुद्-मुह मुज् (१ प० मोजति, १०५० स्वच्छ होना. ३ डूबना, मज्जन मोजयति) १ शब्द करना करना. ४ मनमे बैठ जाना. आवाज करना मुद् (१ आ० मोदते)१ आनदित मुञ् (१ प. मुन्नति, १०५० मु होना, खुश होना, हर्पित होना. जयति) १शब्द करना,आवाज (१० मोदयति-ते) १मिश्रित करना. करना, एकत्र करना मुद् (१ प. मोटति, ६५० मुटति | मुन्थ् (१ प० मुन्यति) १ मार १० उ० मोटयति-ते). १ घि डारना या पीडा करना. २ सना, मर्दन करना. २ दवाना, पीडा दुख सहन करना. मुकी मारना, मरना. ३ निदा मुर् ( ६ १० मुरति) १ घेरना, फरना, दोप देना. ४ बांधना, लपेटना. रोकना, गूथना. मुर्छ (१ प. मूर्चति) १ मुर- मुड् (६५० मुडति ).१ त्याग झाना, मूच्छित होना २ वढना. करना, छोड देना.२ आच्छा! मुई (१५० मूति ) १ चौधना, दित करना, वस्त्र पहिरना (१० रोकना. उ०मोडयात-ते)१ मर्दन करना | मुल ( १० १० मोख्यति) १ वोना, मुण् (६५० मुणति) १ प्रण कर. चीजारोपण करना. ना, प्रतिज्ञा करना, वचन देना | मुप् (१५० मोपति, ९५० मुष्णा- मुण्ट (१५० मुण्टति )१ घिसना. ति) राना, मूसना, चोरी २ पाना, मुकी मारना, मरना करना. (४मुप्यति)१ धुराना. ३ निदा करना, दोप देना । २ क्तरना. तोटना, चीरना. पाँधना, गूथना, रोक्ना | मुस (४५० मुस्पति) १ तुस्टे मुण्ट ( १ मुण्ठते ) १ उडना, २ करना, पतरना, तोदना, उड जाना, भाग जाना.२पारन चीरना. परना, रक्षा करना. | मुस्त् (१० उ० मुस्तयति-ते)१ मुण्ड् (१ प. मुण्टति ) १ पूर्ण देर करना, बोरना, एकत्र यर परना. २ मुटन परना, क्षीर ना, राशि करना परना, हजामत करना (भा० मुह (४५० मुद्धति) १ पागल मुण्टते)१ स्वच्छ परना. होना, इद्धि भ्रट होना.
७८ संस्कृतधातुकोश। मूल (१ १ डूबना. मू-मृज् मृड्-मृप् मू (१ आ० मवते) १ बांधना, होना. ३ संपारना, अलकृत बद्ध करना, जफडना. करना.४ शब्द करना, आवाज मूत्र ( १० उ० मूत्रयति-ते) १ करना. अप-प्र-१सफा करना, मूतना, पेशाब करना. झाडना, बुहारना. २ स्वच्छ मूच्र्छ (१५. मूर्छति )१ मूच्छि- करना, पवित्र करना. त होना, मोहित होना, ज्ञानर- मृड् (६५० मृडति, ९ ५० मृड्- हित होना. २ वढना, वृद्धिगत जाति) १ सुख देना, तुष्ट कर- होना. ना, खुश करना. २ सुखी होना, मूलति-ते) १ मूल खुश होना. ३ चूर्ण करना, कूटना, पीसना. (६५० मृडति) पफडना, दृढ पैठ जाना. (१० मूलयाते-ते)१वीजारोपण कर ना, बोना, कलम करना. उत्- मृण (६ ५० मृणति ) १ दुःख १ जडसे उखाडना. देना, पीडा करना. भूप् (१५० मूपति) १ चोरी मृद् (९५० मृद्राति) १ पीसना, करना, चराना, मूसना. फूटना. २ चूर्ण करना. मृ (६ आ० म्रियते) १ मरना, मृध् (१ उ. मर्द्धति-ते) १ मार देह त्याग करना. डारना या दुःख देना. २ आई मृश् (१५० मृक्षात) १ टेर कर- करना या होना, गीला करना ना, चटोरना, एकत्र करना. या होना. (१० मृक्षयति ) १ अपशब्द मृग ( ६ प० मृशति ) १ स्पर्श पोलना. २ मिश्रित करना, करना, ना. २ देसना. ३ मिलाना. विचार करना १ परा-१ बुद्धि- मृर (६५० मृग्यति, १० आ. वाद कहना, सटाह देना. वि- मृगयते ) १ मृगया करना, १ विचार करना, मनन करना. शिसार परना. २ टूटना. मृप (१ उ. मपति-ते, १० उ. मृज्ञ (१ प. माजति, ३ १० मर्पयति-ते, ४ मृपति-ते ) मार्ट, १० उ० माजयति-ते) १ सहन करना. आ-१ घुस्सा १स्वच्छकरना,धोना.२ पवित्र करना. पि-विपत्तिमें पढना. .
भापायसाहेत । ७१ . मृ-ना म्र म्लेच्छ (१५० मपति) प्रीक्षण करना, म्रन (१५० मक्षति ) १ बटोरना, सींचना. एकत्र करना, ढेर करना.२ले मृ (९५० मृणाति) १ मार डा. पन करना, रीपना. (१.उ. लना या दुःख देना, पीटा करना. म्रक्षयत्ति-ते) १ मिश्रित कर- मे ( १ ० मयते) १ बदलेम ना.२ अशुद्ध बोलना. देना. २ लौटाना, पीछे देना. म्रन (१५० प्रचति) १ जाना. मेट् (प० मेटति) ११ पागल म्रद् (१ आ० प्रदते ) १ मर्दन मेड् (१५० मेडति) हाना. करना, पीसना, फूटना. मेथ् (१ उ० मेयति-ते) १ सम- मुच् (१ प. म्रोचति) १ जाना, झना, जानना. २ मार डालना स्थलांतर करना. या दुःख देना, पीडा करना. म्र ( २५० मुञ्चति) २ जाना, ३.सघट्टन करना. स्थलांतर करता. मेद् (१ उ० मेदत्ति-ते) समझना, नेट (१ प. मेटाते) १ पार होना. जानना. २मार टारना या दुःख देना, पीडा करना. प्रेड् (१ प. प्रेटति) १ पागल मेध ( १ उ० मेधति-ते) १ सम- होना. झना,जानना.२ मार डालना या म्लक्ष ( १० प० म्रक्षयत्ति ) १ दुःख देना. ३ सपहन करना. अशुद्ध बोलना, अयह वोलना. मेधा (११ प. मेधायति)१ शा २मिश्र करना, एकत्र करना. ध्र समझना, जलदी जान लेना. म्लुच (१ प. म्लोचति) १ जाना मेप् (१ आ० मेपते) १ जाना. अभिनि-१ नीचे जाना, अस्त होना. मेव (१ आ० मेयते) 7१ सेवा म्लुञ्च (१ प. म्लुञ्चति ) १ जाना, स्थलांतर करना. मोक्ष (१ प. मोलति, १० प० म्लेच्छ ( १ ५० म्लेच्छति, १० १० ५० मोक्षयति ) १ मुक्त उ. म्लेच्टयति-ते १अस्पष्ट करना, छोड देना. या अशुद्ध बोलना. २ सभापण ना (१ प. मनति) १ विचार करना, बोलना. ३ म्लेच्छभाषा करना, मनन करना. बोलना, जगली भाषा बोरना. ७.पा. २ सेवा करना. मेव् (१ आः मेवते ) १ करना.
८० सस्कृतधातुकोश। होना म्लेट्-यत् यन्वयम् म्लेट (११० रोटात) करना निर-१ बदला चुका १पागल म्लेड् (१५० म्लेडति) ऐना, वैरशुद्धि करना २ देना, दान देना. ३ अपने पास दूस म्लेव् (१ आ. म्रेवते) १ सेवा रेकी जो वस्तु हो सो सौटा करना, शुश्रूपा करना, चाकरी देना या वापिस देना वि-१ करना धृष्टता करना म्ले (१५० रायति) १ थक्ना, यन्र ( १५० यन्त्रात, १० उ० श्रौत होना २ निरुत्साह होना यत्रयति-ते.) १ स्वाधीन रख- ३ नष्ट होना ४ मुरझाना, ना २सकुचित करना. कुम्हलाना यम् (१ प. यभति) १ मैथुन य. करना, स्त्रोसयोग करना यक्ष (१० उ० यक्षयति-ते) १/यम् (१ प० यच्छति) १ प्रतिवध आराधन करना, पूजा करना, परना, रोक्ना, अवरोध करना. सत्र करना नि-१ दौडाना, भगाना २ यजू ( १ उ० यजति-ते) १ यज्ञ कुलाचार करना ३ आकलन करना, हवन करना • देवपूजा। करना,आवर्पण करना,सीचना, करना ३ अर्पण करना, देना नियम बांधना उत्-उ०१ यत्न ४ सगति करना, सयोग करना करना, उद्योग करना २ ऊपर यत् (१ आ० यतते) १ निश्चय उठाना ३ऊपर चढना व्या-उ० करना, ठहराना २ यत्न कर १ कष्ट करना, मिहनत करना ना, उद्योग करना (१.उ. २ व्यवहार करना ३ अपना यातयति-ते) १ दुस देना उद्योग करना सत्रि-प. १ प्रति २ मारना, ठोरना, चपेना ३ रोध करना,रोक्ना मा-आ-१ आना परना, दुसम करना हाय आदि भागे करना ५०१ ४ एकर परना, बटोरना ५ जाना २ जयग्न लेना, वा मिह्नत करना, श्रम करता बाग्मरेना मम्- आभ मना करना, गेक्ना. ७ रोट पनी यस्तुआधी एएन बरना, देना, पापिन देना ८ पदरेम टेर करना प. १सयोग परना, देना ९ स साना सा वरना उप-आपपिपाह - मापाथसहित। यस्-याच यु-युज करना, व्याहना, शादी करना. को चाहना, देने के लिये निका- २मान्य करना, कबूल करना. ३ विद्यासे जीतना, विद्याके यु (२ प. यति) १ मिश्रित "चलसे स्वाधीन रखना. (१० उ. करना, मिलाप करना, एकत्र यमयति-ते, यामयाते)१ स्वा करना. २ पृपा २ करना, धीन रखना, तायेमें रसना, अलग २ करना. (१० उ. या- आकलन करना. २ पोपण कर वयात-ते)१ अपमान करना, ना, खानेको देना. दोप लगाना, निंदा करना: यस् (१ प. यस्यति, १५० यस (९ उ. युनाति-युनीते ) १ ति)१ यत्न करना. आ-१ बांधना, वंधन करना, गूयना. मिहनत करना, कष्ट करना. युद् (१ प. युद्गति ) १ छोड निर्-१ खोना. देना, त्याग करना. या (२ प० याति ) १ जाना. २/युच्छ (१५० युच्छति) १ दुर्लक्ष्य प्राप्त होना. ३ पहुँचना. अनु करना, असावधान रहना, गा- अनुसरण करना, पीछे २ जाना. अभि-२ पहुंचना, पास युज्ञ ( आ. युज्यते) १ चित्त जाना. आ-१ आना, प्रस्तुत स्थिर करना, मनको रोकना. होना, हजर होना. उप-१ १० प. योजयति) १ बधन छोडना, त्याग करना, हवाले करना, पापना, तामें रसना. करना. निर-१ बाहर जाना, (७ उ० युनक्ति-युक्त ). आगे जाना. २ शीघ्र गमन जुटना, मिलाप करना, पपात्र करना,जल्द जाना.प्र-१जाना. करना. मनु-१ प्रन याना, प्रति-१ किसीकी और जाना. पूरना, चौकस याना.२.दीप प्रत्युत्-१ सामने जाना, सम लगाना. अमि, माना.. भि-१ समीप जाना, नजदीक दोप उगाना. कांग्याद करः जाना. समा-१ आना, आ ना. हा प्रश करना. पहुँचना. प.उपयोग घर- यान (१ उ० याचति-त)" नाना.. .. याचना करना, मांगना.२.दन पनि म १ फिल रहना. , सस्कृतधातकोश। करना, तामे रखना य-यप् युस-रडू हुक्म करना २ मिलाप करना, युस् (४ प० युस्यति) १ त्याग एकत्र करना प्र-२ योग्य करना, छोडना होना, फवना २ यल करना यूथू ( ४ ५० यूथ्यति) १ मारना, ३ मिलाप करना ४ ऋण देना, दुख देना, पाडा करना पैसा उधार देना वि-१ अरग यूप् ( १५० यूपति) १ मारना, करना, पृथक् करना २ प्रेरणा दुख देना, पीडा करना करना, भेजना विनि-१ व्यय ये (१ आ० यपते ) १ आग्रह • करना, खर्च करना २ नियमित करना, चिपके रहना, निश्च मुरर करना ३ यसे यत्न करना ना, प्रेरणा करना ४ गूथना, यौट् (१ प. योटति)। एकत्र करना विप्र-१ अलग २) यौड (१५० यौडति) १ बांधना, करना, विभक्त करना सम्-१ युक्त करना, मिराप करना समा-१ बहुत विचार करना ( १ ५० योजात, १० र (१० उ० राक्यति-ते) १ योजयत्ति-ते) १ बधन करना। प्राप्त होना, मिल जाना २ तामे रखना (१० आ० यो स्वाद लेना, रुचि लेना जयते) १ निदा करना, दोप रक्षु ( १ ५० रक्षति ) १ रक्षण गाना करना, पालन करना परि-१ युट् (१० उ० युट्टयति-ते)१अल्प रक्षण करना, बचाना होना, कम होना रख (१ प० रखात) १ जाना युत् ( १ आ० योतते) १ चम रग (११० रगति ) १ शमा क्ना, प्रकाशित होना रना, सदिग्ध होना (१० उ० युध् ( ४ आ. युध्यते) १ युद्ध रागयति-ते) प्राप्त होना, मिल वरना, लडाई परना, झगडना जाना • स्वाद लेना, सच ऐना युप् (१ प. युप्यति ) १ चित्त रङ्ग (१५० रगति ) १ जाना वैधव्य होना, घर जाना रह (१ आ० रहते) १ जाना युप् (१० उ० योपयति-ते) १ (१०३० रयति-ने)१च स्वा परना, चाकरी करना माना, प्रशशित होना . m भाषायमाहित। ग्द- ग्म्द ग्न (१० उ: चयति-ते)१ होना, गुश होना आ-(प्रार- रचना ग्ना २ शिप एम भ करना, गुरुग्ना.२ आन करना ३ग्रायनाना. दित होना, गुम होना. म् (१ उ. ग्जति-त, रम् (१ ० ग्मते ) १ रमना, उ• ग्यति-ते)१ रग देना, प्रीडा परना, गेग्ना. ना- रगाना भनु-१ क्सिी वस्तुमै ५०, उप-३०, वि- परिगम अनुरक्त होना, तत्पर होना, करना, स्थिर रहना, आगम लिीन होना, मोहित होना काना भप-वि-१ रिक्त होना, तिर गम (१ प. गम्फति) १ जाना. स्मार करना २ मार टालना या टुस देना. ग्ट् (१ प. रटति, १० ५० ग्टय रम् (१ आ. रम्यते ) १ जाना. ति) वोटना, सभापण परना २. शन्द करना, आपाज सरना. ग्ट् (१ प. रठति) १ बोरना, रम्भ (१ आ. रम्भते) १ शब्द सभापण करना. करना, आराज करना परि-१ ग्ण (१५० रणति ) १ शब्द आलिंगन करना, गले रगाना परना, आवाज वग्ना २जाना ग्य ( १ आ० रयते) १ जाना. ग्द (१५० रदति) १ विदारण २हिरना करना, चारना २ सोदना ख ( १ प रष्यति) १ जाना ग्ध (४५० रव्यति) १ पूरा कर रम् (१५० रसति) १ शन्द क- ना समाप्त करना २अपकार रना, आवाज करना (१०३० करना, मार डालना या दुस रमयति-ते) १स्वाद रेना, चस्व देना ३ पक होना, परुना १ ना.२ प्रीति करना, प्यार करना. शुद्ध होना, निदाप होना, गस्ती रह ( १ १० रहति, १० उ० रह नहीं करना यति-ते) १ छोडना, त्याग रए (१५० रपति) १स्पष्ट बोलना करना. बि-१ अलग होला, रफ (५० रफाति) १ जाना २ भिन्न होना मार डालना या दुस देना रंह (१५० रहति, ) बडे जोरसे रम (१ भा० रभते ) १ आनदित जाना (१० उ० रहयति-ते.
सस्कृतधातुकोश। रि-रखू १ चमकना, प्रकाशित होना [र (५५० रिणोति ) दुख • बोलना, सभाषण करना देना, पीडा करना. (६५० रिय रा(२५० राति) १ प्राप्त होना, ति) १ जाना मिल जाना २ देना खि (१५० रेखति) राख् ( १५० राखति) १ सूखना, रिङ्ग (१५० रिसात) १ जाना शुष्क होना, २ सवारना, भूपि रिङ्ग (१५० रिङ्गति), त करना अरकत करना ३ रिच ( १ १० रेचति, १० उ० रेच कार्यक्षम होना, पूरा होना ४ यति-ते ) १ एकत्र करना, रोकना, निषेध करना, विन जोडना, बांधना २ अलग २ करना समाप्त करना करना, फैलाना ३ दस्त देना, राध् (१ आ० राघते ) १ समर्थ कोठा सफा करना, रेचक दवा होना, शक्य होना, योग्य देना (७.उ० रिणक्ति रिले)१ होना, लायक होना मलशुद्धि होना, दस्त खुरकर राज (१ आ० राजाति-ते) १ चम होना, झाडा हाना २ गर्भपात रना,शोभित होना निर (नी)- करना, गर्भ गिराना अति-५ १ आरती करना वि- शोभित अतिरिक्त होना, अतिक्रम र होना, प्रकाशित होना, चमक ना वि-१ मर शुद्धि होना, दस्त ना.२ जीतना, मात करना खलकर होना झाडासाफ होना राध (४ १० राध्याति,५१० रानो रिज (१ आ० रेजते) १ भूजना, ति) पूरा करना, सिद्ध करना, पूर्ण करना अप-१ अपराध रिफ (६५० रिफति ) १ बोरना, करना, गुनाह करना आ कहना • युद्ध करना, लडाई १ आराधना करना, उपासना करना, झगडना ३ प्रशसा कर करना ना, स्तुति करना, ४ दु ख देना, राश् (१ आ. राशते, ४ आ. सोडा क्रला ५ देना, दान देना राश्यते) १ शन्द करना, आ ६ दोप लगाना, निदा करना वाज करना रिम्फ (१५० रिम्फति)१ मार राम् (१ आ. रासते) शब्द सारना या दु ख देना करना, आवाज करना रिख (५० रिवति) १ जान भाषार्थसहित। - रिश-रु रुच-रुण्ड रिश (६ ५० रिशति) १ मार रुच् (१ मा० रोचते ) १ चमक डारना या दुःस देना. २ मार ना, प्रकाशित होना. २ मानद डारनेका यत्न करना. करना, खुश होना, उत्साह रिप (१५० रेपति, ४१० रिप्यात)१ करना. रुचना. मार डालना या दुःख देना,मार रुज् (६५० रुनति ) १ दुःखसे डालनेका यत्न करना. (९५० या रोगसे पीडित होना. २ वक्र रिप्णाति)१ जाना, सिधारना. होना, यांका होना, टेढा होना, २ अलग करना, भिन्न करना, टूट जाना.(१० उ० रोजय सवध तोडना. ति-ते) मारना, दुःख देना. रिह (१५० रहति, ६ रिहात )१ रुद् (१ ० रोटते) १ प्रतिनध मार डालना या दुःख देना करना, रोकना. २ पुन २ झग २ मार डालनेका यत्न करना. उना. ३ कामवेगसे तलफना, री (४ आ. रीयते)१ झरना, जमीनपर लेटना (१० उ. चूना, टपकना.२ गिरना, नीचे रोटयति-ते) १ कोध करना, ना. (२५० रोते ) १ गर्भ गुस्सा करना. २ चमकना, वती होना, गर्भ धारण करना. प्रकाशित होना. : वोलना, (९१०रिणाति)१जाना. २ भापण करना. अरण्य पशु माफिक पुकारना. रुठ (१५० रोठति ) १ मारना, . २ पीटा करना, दुःस देना. नीच गिरना. (१ आ० रोठते) री (१ आ. विते) १ लेना, १ रोकना, आड आना. ग्रहण करना.२छिपाना, तिरो-रुद ( १० उ० रुढयति-ते ) धान करना, रोक्कर रक्षण कर १ गुस्सा करना. ना, परदेमे छिपाना. रुण्ट् (१५० रुष्टति) चुराना, रु (२५० रौति) १ शब्द परना, मूसना, आवाज करना (१आ० रवते) |रुण्ठ् (१ प. एण्ठति) १ चुराना, १जाना,चलना.२मारडारना मूमना. २ जाना ३ आलस्य या दुःख देना.३ बोलना,सभा करना ४ गडना. पण करना. ४ क्रोध करना, रुण्ड् (१५० रण्टति) १ चुराना, गुस्सा करना. मृसना.
सस्कृतधातुकोश। रू-रेज् रुद् (२५० रोदिति )१ रोना • उत्पन्न होना, उगना २ उत्पन्न गेते कहना उपा-१ रो। होना, पैदा होना, प्रकट होना शात करना, दूसरेके लिये रोना ३ जन्म होना, जन्म लेना रुध् (७ उ• रणद्धि-रुन्धे) १ आधि-१ उपर चढना, चढना, रोकना २ घेरना, घेर लेना आरोहण करना अब १उतरना, अभिसम्-१ प्रतिरोध करना नीचे आना आ-१ आरूढ होना, ऊपर बैठना २ ऊपर मना करना अब-१ सावधान रहना, दक्षतासे रखना उप-१ चढना प्र-१ उगना, अफुर घेरना, घेर लेना, सेनाके द्वारा उत्पन्न होना घेरना प्रति-१ रोक्ना सन्नि- रूक्ष् (१० उ० रूक्षयति-ते) १ १ वद करना, सैन्य आदिसे काठेन होना, रूक्ष होना २ वद करना (४ प० अनुरुध्यते) कठोर वचन बोरना ३ नीरस १ कृपालु होना, दया वरना होना, शुष्क होना, सूखना अनुमोदन देना, सलाह देना रूप् ( १० उ० रूपयति-ते) १ ३ शोक करना,रोना ४चाहना बनाना, आकार बनाना, रचना रुप् (४ प० रुप्यात) १ विफल करना २ मनमें स्वरूपाकृति चित्त होना, भ्रात होना, घबर लाना नि-१ स्पष्ट करना, सम जाना झाके कहना २ वाद करना, रुश् (६५० रुशति ) १ मार वादविवाद करना, बहस करना डारना या दुख देना रूप् (१५० रूपति ) १ सवारना, रुंग ( १ ५० रुशति, १० उ० रकृत करना, मृगार करना. स्शयति-ते) १ चमकना, प्रका | रेक् (१ आ० रेकते)१शका करना, शित होना २ बोलना अदेशा करना, सदिग्ध होना रुप् (१ प० रोपति, ४ प० रुप्य आ-१ अधिक सदिग्ध होना ति)१ मार डालना या दुख अधिक अदेशा करना देना, मारडारनेका यत्न करना रेखा (११५० रेखायात) १ स्तुति (१० उ० रोपयति-ते) क्रोध करना २ रेखा खीचना करना, गुस्सा करना रेज (१आ० रेजते) १ चमकना, रुह (१५० रोहति) १ वीजसे प्रकाशित होना M E मापार्यसहित। ८७ रेट्-रुक् लक्ष्-लड्यू रेट् (१ उ० रेटति-ते) १ याचना | लक्ष् (१० उ० लक्षयति-ते) १ करना, मांगना. २ बोलना, देखना. २ दिलमें रखना, स्मरण सभापण करना. रखना, याद रखना. ३ तारतम्य रेए (१ आ० रेपते) १ जाना. २ देखना, विवेचन करना, निरू- शब्द करना, आवाज करना. पण करना. उप-१ अर्थके कह- रेव (१ आ. रेवते) १ जाना. नेसे दूसरे अर्यका बोधन करना. रेम (१ ० रेभते) १ शब्द कर- सम्-१ अच्छी तरह जानना. लख (१ प. लखति) १ जाना, ना, आवाज करना. रेव (१ आ० रेवते ) १ उट २ हिलना. जाना, चरना. २ नदीके समान | लग् (१ प. लगति) १ संयोग वहना. ३ स्थलांतर करना. होना, मिलाप होना. २ स्पर्श प् (१ आ० रेपते) १ अस्पष्ट होना, ना. ( १०प० लाग- शब्द करना. २ हिनहिनाना.३ याते) १ स्वाद लेना, चखना. जोरसे पुकारना. २ प्राप्त कर लेना, संपादित करना. ₹(१ प. रायति)१शब्द करना, लव (१० उ० लाघयति-ते) १ आवाज करना. स्वाद लेना, चखना. २ प्राप्त कर गेडू (१५० रोदति .) १ उन्मत्त ऐना, सपादित करना. होना, पागल होन. २ अपमान (१ प. लहति) १ जाना, करना, अनादर करना. रौद (१५० रोटति) १ अपमान हिलना. करना, तिरस्कार करना. लङ् (१ ५० लगात) १ जाना. रौड़ (१५० रोटति) १ अपमान २लंगटना. करना, तिरस्कार करना. लम (१ आ० लहते) १ जाना. २ उपवास करना, भूखा रहना. (१५० लहति) १ कम होना, लर (१० उ० लाकयति ते) १ न्यून होना, अल्प होना. २ शु प्राप्त कर लेना, संपादन करना. प्क होना, सूखना. ( १५० २ स्वाद लेना, चखना. लहति, १० उ० लहयति-ते) ८८ संस्कृतधातुकोश। ० लण्ड्-स १ बोलना. उत्-वि-१ लांघना, करना. २ जीभ बाहर निका- मर्यादाक्रम करना. लना. ३ जीभ हिलाना. ४ हि- लच्छ (१ लंच्छाति) १ चिह्न क- लाना,कंपित करना, झुलाना.५ रना, निशान करना. २ ध्यानमें पीडा करना, दुःख देना. रखना, दिलमें धरना. (१० उ० लाड़यति-ते) १ लज् (१५० लजति) १ भंजना, पालन करना. २ हिलाना. ३ चाहना. तलना, भूनना.२ अपमान क- रना, अप्रतिष्ठा करना. (६ उ० लण्ड् (१ १० लण्डति, १० उ० लजतिते) १ लज्जित होना, लण्डयति-ते ) १ चमकना, शरमाना. (उ० १० लाजय प्रकाशित होना. २ ऊपर फेंक- ति-ते) १ चमकना.२ छिपाना, ना, ऊपर उडाना. ३ बोलना, परदेमें छिपाना. भापण करना. लक्ष (१५० लजति) १ भूजना, | लप् (१ ५० लपति) १ स्पष्ट बो. भूनना, तलना.२अपमान करना, लना, अनु-१ दूसरेके समान अप्रतिष्ठा करना. (,१० उ० ल. बोलना, ययामात बोलना. २ ज्जयति-ते, १५० लज्जति)१ प्रत्युत्तर देना, उलट जबाव देना. प्रकट होना, स्पष्ट होना. २ च अप-१ कबूल नहीं करना, मकना (१० प० लज्जयति) मान्य नही करना. आ-१ १ देना. २ रहना, वास करना. विचार करना, पूछना. २ आ- ३ दुःख देना, पीडा करना. ४ लाप करना. प्र-१ चकना, दृढ होना,मजबूत होना.५ दोप बकवाद करना. प्रति-१ प्राप्त लगाना, निदा करना. ६ चमक होना, मिलना. वि-१ रोना, ना.७ प्रकट करना, स्पट करना. शोक करना. विप्र-१ भाषणका लद् (१५० लटति, १० १० लटय- खंडन करना, प्रतिषेध करना. ति)१ बालकके समान चेष्टा सम्-१ बोलना, भापण करना. करना, बोलना.२ अल्प भापण २ कपट करना, वंचना करना, करना, थोटा बोलना. कृत्रिम करना. लड् (१ प. लडति, १० प० रुड- ' आ १ प्राप्त यति) १ ऋीटा करना, मौज m :
मापार्यसहित। सम्ब-यू उम्-ठाजू लम्ब् (१ आ० सम्पत्ते) १ शब्द चाहना. अभि-१ चाना.(१० करना, आवाज करना.२स्ट लापयति)१ चतुर होना, को कना. ३ नीचे आधा गिरना. शल्य जानना. भव- रमाना, आश्रय कर लस (१५. लसति) १ सारिगन ना.२ टिकाना, आश्रय देना.३ करना, गले रगाना.२त्रीडा टियना.४ शिर नीचे और पाव | करना, सेरना, रमण करना उपर करके लटकना. मा-१ उत्-१ चमरना, तेजोयुक्त विश्वास करना, भगेसा करना. होना २आनदित होना, खुश पि-१ देर करना. होना. वि-१ विद्यास करना, लम्म् (१ भा० लम्भते) १ पीटा रमण करना.(१० उ० लास करना, अपकार करना. २निदा यति-ते) १ चतुर होना, कुशल परना, तिरस्कार करना.३ प्राप्त होना, कौशल्य जानना.२ मि. होना, मिटना. ४ शब्द करना, हनत करना, क्र करना, र मावाजकरना.उप-१ज्ञानप्राप्ति होना.२ देर रगाना. उपा-१ लस्त (१ आ. रजते) १ सज्जि निदा करना, निर्भत्सना करना, त होना, शरमाना २५पडाना लग (१ आ० रयते)१ जाना. ला (२५० साति) १ टेना, न लर (१० व्यति) १ जाना. हण करना. २ देना, दान देना उल् (१ प. स्रति ) १जीडा लास (११. सासति) १ टायर परना, रोटना. २ जीम याहर निराले हिलाना, रहलहाना. होना, कार्यक्षम होना, समय (१० आ: टारयते) इच्छा होना. २ मपित करना, समा ग्ना ३१प्प होना, सपना. करना, चाहना २ रसना, टि ४ मना करना, नियमग्ना. काना, स्यापित परना. २रमण करना,संसना, रतिरोटावरना. लाय् (१ मा रापले) रसायर टा (१० ५० राश्यति) होना, गार्यक्षम होना, ममयं चतुर होना, कौशल्य जानना. होना. सप् (१ साति-ने, १/लाइ (१पर जति) १ भूनन. एप्पति-त) १इन्चापाना. २.दीप रागाना, निदा पग्ना योग करना.
ली-ठ सस्कृतधातुकोश । ला-रिह रान्छ (१ प. राञ्छति)१/ली (४ आ. लोयते, ९५० लि चिह्न करना, निशान करना नाति)१ युक्त होना २ प्राप्त लाञ् (१५० लाञ्जति) १भूनना होना, मिलना (१ प. लयात, २ दोपरगाना, निदा करना १० उ० लाययति-ते, रापय लाद (११५० लाट्यति )१जीना ति-ते लालयात-ते, लीनय लाभ (१०१ राभयति) १ प्रेर ति-ते)१पतला करना, गलाना णा करना, भेजना • उडाना, आ-१ खर्च करना प्रवि-१, फैक्ना प्राप्त करना, सपादित करना लिख (१ प. लेखात ) १ जाना | लुच् (१५० रुञ्चति )१ क्तरना, धीरना, तोडना २ छालना, (६५० लिखति) १ लिखना घार निकालना ३ बार आदि लिङ्ग ( १५० लिङ्गति) १ जाना को उखाडना आ-१ आलिंगन करना, गले लुन्न ( १० प० ठुञ्जयति ) १ रगाना (१ प.रिगति, १० देना २ पीडा करना, दुस उ रिगयति-ते) १ तरह २ देना ३ माटा होना, वली होना का रग देना, रगाना ४ चमाना, प्रमाशित होना लिट् ( ११ ५० रिश्यति )१ मत्प ५रहना, वास करना होना, कम होना २ दोपरगा लट् (१ उ० रोटति-ते, ४ ५० ना, निदा करना लिप (६ उ. रिम्पति ते ) १ स्ट्यति) १ सयोग करना, मि राप परना, जोडना २ पिना, रोपना, पोतना, विपन करना हिरना ३ जमीनपर राटना २ वढाना, अधिर करना, जि (१५० रोटति )१ प्रतियघ यादा करना चरना, रोकना २ प्रकाशित रिता (परिस्पति) कम होना, चमाना ३ टपलना, रना, न्यून परना घका मारना (६५० लुटति) होना (६५० रिशति)१) १मालिंगन करना, गडेरगाना जाना माना (१०१० रोटयति) १ चोटना, लिए ( उ० रेटि-सीटे) १ भापणपना • चमरना. चाटना पस्सना सट् (१ प. रोठति ) नीचे ० कम भापार्थसहित। ना, छिपाना गिराना (१ आ. लोठते) १ भ्रश होना, चूरना २ मतिभ्रश रोक्ना.( ६५० लुठति) १ कराना, चूक कराना. जमीनपर रोटना. २ झरना, लम् (१ प. उभ्यति) १ माशा बहना. ( १० ५० रोठयति)१ करना, चाहना, सौभ करना चुराना, मूसना. प्र-सम्-१ लुभाना, आर्पण लुड (१५० रोटति) १ हिलना, करना, सींच लेना (६५० लुभ कांपना, पपित होना २ चमा ति) १ मतिभ्रश होना, भ्रांत कार घूमना (६५० टुडात) होना क्सिी पदार्थया माश्रय करना, लुम्प ( १ उ० एम्पति-ते ) १ टिक्ना २ आलिंगन करना, क्तरना, चीरना, टुक्डे २२ गरे लगाना ३ आच्छादन कर रना, नष्ट करना घिसना. लम्न (१५० सुम्मति, १० उ. लुण्ट् ( १ सुष्टात, १० ५० सृण्ट एम्बयति-ते)१ मार टालना यति) चराना, मूसना टूटना २दु स देना, पीडा करना । २ अपमान करना, अप्रतिष्ठा गोदना, नोचना (१० पर म्बयति ) १ नष्ट होना, गुन करना लुण्ट् (१५० रुष्ठति) १ जाना होना, अदृष्ट होना टुल (११० टोलनि) पित २ चाना, मूसना ३ रोक्ना होना, पिना मयुन होगा, ४ मरसाना रगडाना मिलाप होना लण्ड् (१५० गुण्डति, १० पटप (आनं,०५० टोप लुण्टयात ) १ यापना, कपित यति)माराया दुप होना २ दुराना, मूसना. दनाना लन्यू ( १ १० रुत्यति ) १ मार ल (: ..-गीत) १ टारना, दुरा देना रोहित यरना, अति करना ३ गट हा (१८ नमल यग्ना, श्रम करना१परा মাশনা १७, पति- लप (४१० लुप्यति ) ry एमोनि सस्कृतधातुकोश। लोट-वद् लञ्च-लोच लञ्च (१५० लञ्चति) १ निवा विचार करना, मनन करना रण करना, दूर करना लोट (११५० लोट्यति)१ जूआ लेख (११५० रेख्याते) १ गिर खेल्ना २सोना ३ पहिले होना. पडना, गिरना लोट् (१५० रोटति)। लेखा ( ११ ६० लेखायात) १लोड (१५० लोडात), १ मूर्ख यति) १ गिरना, ठोकर लग होना,पागल होना उन्मत्तहोना. ना, दलना लोष्ट (१ आ० लोटते ) १ एकत्र लेट ( ११ प० लेट्यात ) १ जूआ करना, ढेर करना, राशि करना खेलना २ सोना ३ पहिले होना ल्हप ( १० उ० ल्हपयति- लेप् (१ मा० ऐपते) १ नजदीक ते)१ अस्पष्ट कहना, सदिग्ध जाना, समीप आना २ शब्द बोलना करना, आवाज करना ल्ली (९५०ल्विनाति) १ सयोग लेला (११ प० लेलायति)१च करना, मिलाप करना ३ समीप मकना, प्रराशित होना २ शो जाना या माना ३ प्राप्त होना, भित होना, शोभा पाना मिल्ना लैण ( १५० छैनात ) १ जाना व. वछ (१ आ० वझते) १ जाना. २ आज्ञा करना, हुक्म करना २ आलिंगन करना गले लगा वक्ष (१५० पक्षति) १ बटोरना, ना ३ चूना ४ पीसना, चूर्ण ढेर करना २ क्रोध परना, करना गुस्सा करना, गुस्सा होना लोक ( १ मा० लोक्ते) १ देख वख ( १ ५० यसति ) १ जाना. ना (१० उ० लोक्यात-ते)१ पद (१आ० वइते ) वक्र होना, भापण करना, बोलना चम टेढा होना, दुपता करना, नव क्ना, प्रराशिन होना ना २ वरुपरना, टेढा करना, लोच (१ मा० रोचते)१ देखना दृष्टता कराना, नवाना ३ जाना. (१० उ० रोचयति-ते) १ वत् (१ प. वसति) १ जाना भापण करना, बोरना २ चम वङ्ग ( १ १० बगति) १ जाना २ पना, प्राशित होना. भा-१ लगडाना.
भाषार्यसहित । तैयार करना, बड्यू-वण्ट्र वण्ठ-पद् बह ( १ मा० वक्ते) १ नाना.२ पृय करना, अलग करना, दोप लगाना, निंदा करना. ३ हिस्सा करना, बांटना. प्रारभ करना शुरू करना. वण्ठू (१ आ० वण्ठते)१ अकेला व (१५० वचति, २५० वक्ति, जाना. १० उ० वाचयति-ते)१ बोलना, वण्ड् (१ आ. वण्डते ) १ पृथक् कहना.२ समझाना, जनाना. करना, अलग करना, हिस्सा ३ पढना, अध्ययन करना. प्र करना. (१ प० वण्डति, १० १ बोलनेका प्रारंभ करना. उ० वण्डयाति-ते)१ आच्छा- वज् (१ प० वजति) १ जाना. दन करना. (१० उ० वाजयति-ते) १ वद् (१ उ० वदति-ते, १० उ० जाना. २ सिद्ध करना, तैयार वदयति-ते ) १ कहना, स्पष्ट करना. ४ वाणमें पंख लगाके कहना.२ समझाना,जताना.३ वाट जोहना, राह देखना. अनु- बञ्च १ प० पञ्चति ) १ जाना. आ. १ अनतर बोलना, साथ (१ आ० वञ्चते, १. आ० बोलना, पीछेसे बोलना. अप- वञ्चयते)१ ठगना, फसाना, उ० १ निदा करना, अपकार- प्रतारणा करना. कारक, भापण करना. अभि- वट् (१ प० वदति, १० उ० वट प्र०१/सत्कारपूर्वक अभिवदन यति-ते)१ घेरना, घेर लेना. करना. नमस्कार करना. उप- २ वांधना, गुथना, पटना, एकत्र आ०१समझाकर कहना.निर्- करना. ३ अलग करना, विभाग १०१स्वच्छ बोलना,साफ कह- करना. (१ प. वति) १ ना. परि-प०१ विरुद्ध बोलना. चकना, बकवाद करना. प्र-प. १ चार आदमिति पट (१५० वठति) १ शक्तिवान् सामने बोलना, पकर्णी करना. प्रति-प० १ उत्तर देना, जाय होना, स्थूल होना, मोय होना. देना. वि- आ० १वादविवाद यण (१ प. यणति ) १ शब्द करना, विरुद्ध पक्षकी बात कर- करना, आवाज करना. ना. वहस करना. विप्र-उ०१ वण्ट्र (१० उ. यश्यति-ते)१ विप्रापकरना, वरवाद करना, ९४ संस्कृतधातुकोश। उ० व न्-वम् वय्-वह निठुर बोलना. विसम्-प०१वच वय ( १ आ० वयते) १ जाना, नभग करना, कहनेके माफिक न स्थलांतर करना. करना. सम्प्र-आ• एकत्र होक-वर ( १० उ० वरयति-ते) १ इच्छा र स्पष्ट कहना. १० एक समय करना, चाहना, आशा करना. सवाने एक साथ स्पष्ट कहना. | वरण (११५० वरण्यति)१जाना. वन् (१५० वनति, १० १० वन | वर्ष (१५० वर्षात ) १ जाना. यति)१ शब्द करना, आवाज वर्च् (१ आ० वर्चते) १ प्रका- करना. २ सेवा करना, शुश्रूपा शित होना, चमकना. (१०प० करना, चाकरी करना. ३ साह्य वर्चयति)१ कतरना, चोरना. करना, मदद करना.४आपद्गस्त २भरना, पूरा करना, पूर्ण होना. होना, बुरी हारतमे होना. (८ वर्ण (१० उ० वर्णयति-ते) १ रग वनुते-चनोति) १ याचना देना, रगाना. २ आज्ञा करना, करना, मांगना. ( १५० वन प्रेरणा करना, भेजना. ३ वर्णन ति, १०. उ० वनयति-ते)१ करना, वखानना.४ प्रशसा दुःख देना. २ कोई धधा कर- करना, स्तुति करना. ५ विस्तृत ना, उद्योग करना. करना, फैलाना. ६ चमकना, वन्द् (१ आ० वन्दते) १ सत्का- प्रकाशित होना. ७ पीसना, रपूर्वक कुशल प्रश्न पूछना. २ चूर्ण करना.८ यत्न करना, श्रम प्रशम्भ करना, स्तुति करना. करना, मिहनत करना. ३ वदना, वदन करना. वर्ध ( १० उ० वर्धयति-ते) १ व (१ उ० वपति-ते)१ बीज कतरना, चरिना. २ भरना, बोना, बोना. २ उत्पन्न करना, पूर्ण करना. पैदा करना. ३ वपन करना, वर्फ (१५० वर्फति) १ जाना.२ हजामत करना. ४ बुनना, हिंसा करना, मार टारना. बदना. वर्प (१ आ० वर्पते) १ गीला व (१५० वधति) १ जाना, होना, भीगना. स्थांतर करना. | वई ( १ उ. वहति ते, १० उ० वम् (१५० वमति) १ के होना, वहयातिते) बोलना, कहना. मुससे बाहर आना, वमन होना. २ मार टारना या दुःख देना.
भापार्यसहित। वल्-वल्द वा-वस् ३ चमकना, प्रकाशित होना. (१० प० वल्हयति ) १ प्रका- ४ स्मरण करना, याद करना. शित होना, चमकना. ५ श्रेष्ठ होना. ६ दान करना, वश (२ प२ वष्टि ) १ इच्छा क- देना. ७ आच्छादित करना, रना, चाहना. दकना. वप् (१ प. वपति) १ मार टा- वल् (१ आ० वरते )१ आच्छा- एना, पीटा करना. दित करना, ढकना. २ घेरना. ३ जाना. (१० ५० वालयात) वष्क (१ आ० वष्कते, १० उ० व. 'फयति-ते) १ जाना.२ देखना. १ पाटन करना, पारना. वल्क् (१० उ० वल्कयति-ते) १ वस् ( १० उ० वसयति-ते) १ पोलना. रहना, ठहरना, वास करना, वल्ग् (१ प० वल्गति) १ जाना. वसना. (२ आ. वस्ते) १ २ फुदकते चलना वस्त्र पहिरना, ओढना, पोशाक करना. (१० उ. वासयति- वल्गू ( ११ ५० वल्गूयाति ) १ ते) १ दया करना, प्रीति कर. पूजा करना, सन्मान करना.२ ना.२ मार टालना.३ कतरना, मीठा बोलना. चीरना.४ मान्य करना, कबूल वल्म् (१आ० वल्भते) १ साना, करना, स्वीकार करना. ५ नष्ट भक्षण करना. करना, ले लेना. (१ प. वस्य. वल्यूल ( २१ ५० वल्यूल्यात) १ ति)१ मनसे या शरीरसे सीधा कतरना, चीरना, तोडना. २ होना. २ निश्चल होना. १५० स्वच्छ करना, निर्मल करना. वसति) १ वस्ति करना, टि- वल् (१ आ० पलते) १ जाना. कना. अधि-१ उपर बैठना.२ २ आच्छादित करना, डस्ना. उपभोग करना, काममै रगाना, वल्द (१ आ० वल्हते, १० उ० उप-१ उपास करना, भूखा वल्हयति-ते) १ बोरना, रह रहना. नि-१ रहना, वास कर. ना. (१ आ० वल्हते)१ मार ना, बसना.२ पत्र पहिनना, डालना या पीटा करना. २ ओढना. प्र-१ परदेश जाना, श्रेष्ठ होना, सर्वोत्तम होना. ३ बाहर जाना. सम्-१ सहवास आच्छादित करना, ढपना.! करना,साय रहना, एकत्र रहना. ८सं.धा.
सस्कृतधातुकोश। । घस्क-वाश वास-विज् वस्क् (१ आ० वस्कते) १ जाना समान पुकारना ३ बुलाना, वस्तू ( १० आ० वस्नयते ) १ पुकारना, आमत्रित करना, जाना. २ मारना. ३ मांगना हाक मारना. वह (१३० वहति-ते) १ चहना, वास् (१० उ० पासपति-ते) १ झरना २ ढोना, टो ले जाना. वासित करना, सुगधिन करना, वंह (१ आ. वहते ) १ वढना धूपित करना, धूप देना (४ (१० उ. वहयति-ते)१ प्रका आ० वास्यते)१पक्षाके समान शित होना, चमकना शब्द करना. या (२५० वाति) १जाना, पवनप्ता वाइ (१ आ० पाहते) १ यत्न चलना. २ बहना, पवन चलना. करना, श्रम करना, मिहनत नि-१ नट होना, पवनसे बुझना करना २ पीडा करना, दुख देना विच्छ (६५० विच्छति) समीप वाड (१५० पानात ) जाना या आना ( १० उ. १३च्छा विच्छयति-ते) १ प्रकाशित परना, पाहना. होना, चमकना, २ बोलना, वास् (१ आ. वाढते) स्नान भाषण करना परना, नहाना, अंग धोना. वित्र (७ उ. विनाक्त-वि) १ चात (१० उ० पातपति-ते)१ पृयक करता, अलग करना, १ सुखी होना, आनद करना. २ पृया होना, अलग होना ३ बटोरना एकत्र करना. ३ सेवा छूटना, टूटना. ४ विवेक करना, परना, तारतम्य देखना. चाध् (१ आ० वापते) १ वापा विज्ञ (३५० पेवेक्ति ) १ भग करना, पीडा करना.२ रोक्ना करना या होना २ टूटना, हट- वावृत् (४ भा. यावत्पते ) सेवा ना. ३ विक करना, तारतम्य परना, शुभया परना, चार्ग देखना. ( ६ भा. विजने, परता २ढूंढ निकालना, पसद उद्विजने, ७ प विनक्ति) १ करना. उरना २ सरसे कापत होना ३ पाश (४ मा० पाश्यते ) १ शब्द पापना ४ आपस्त होना, बग्ना,भावाज परना.२पक्षीय विपत्तिमै परना.
माषार्थसहित। वि-विद् विध-विश् विद् (१ प. वेटति ) १ शन्द झाके कहना. ४ रहना, वास करना, आवाज करना २ शाप करना, पसना.५ स्थिर रहना. देना, सराप देना, सरापना. ६ दुःख पीडा सहना नि-वि विड (१ प. वेडति)१ सराप नि-समझाके कहना.प्रति-१ देना, सरापना २ तोडना, देना, भर्पण करता. चीरना. विए (६५० विपति) १ छिद्र "विडम्ब (१० उ० विडम्पयति करना, छेद करना, छेदना.२ ते) १ अनुकरण करना. २ हुक्म चाना, शासन करना. स्वांग ऐना ३ वियना करना, विन्द (१उ. विन्दति-ते)१ प्राप्त अप्रतिष्ठा करना 'करना, सपादित करना. परि-१ विष्टू (१० ५० विष्टयात) १ कम बड़े भाईका विवाह होनेके पहि होना, क्षय होना, हास होना. लेही छोटे भाईने विवाह करना. वित्त (१० वित्तयति ) देना, दान | विप् (१० प० वेपोत ) १ उडा परना, धर्म परना. ना, फैजना विय् ( १ आ० वेयते) १ याचना विल् (६५० विति) १ वस्त्र पाहे. करना, मांगना. नना, कपडा पहिनना, ओटना विद (२५० वेत्ति-येद) १सम २छिद्र करना, छेदना, चीर- झना, जानना. निर-१ विपरस्त ना (१० उ० पेलपति-ते) होना, दुखी होना सम्-(स उडाना, फैरना, प्रेरणा करना. वित्ते) १ ध्यान करना, मनन | विला ( ११ प. विरायति) १ परना, ईश्वरी ज्ञान प्राप्त करना, श्रीडा धरना, खेलना, पिलास योगाभ्यास करना. ( ४ मा० करना. विद्यते) १ जीना, विद्यमान | विश (६५० विशति) १ धुसना, होना, रहना, होना. निर-१ धसना, च्याप्तकरना.मा-प्र-१ विरक्त होना, निर्विष्ण होना प्रवेश परता, पुसना, भीतर (७मा० चिन्त) र मनन कर जाना, धसना २ चारों ओर ना, विचार परना.(१मा० फेशाना उप-१ देठना २ पास बेदयने) शरीरसी सुध रम्दना. जाना अभिनि-मा०समक्ष २ समझना, जानना. ३ सम या सामने बैठना. २लाराम सस्कृतधातुकोश। विधु-वी वी- करना, थमना ३ अभिमान भिन होना. सम्-१ घेरना, घेर करना, अभिनिवेश करना टेना, लपेटना निर-१ मच्छित होना,२ बाहर वीज ( १० १० वीजयति )१ पखा जाना ३ भोग करना, भोगना करना, पछोरना, बना डुलाना, परि-१ सामने धरना, उपहार फटकना देना, भेट देना सम्-१ करवट | वीभ (१ आ० वीभते) १ प्रशसा हेना, आराम करना सन्नि-१ करना, स्तुति करना पास जाना या रहना समा- वीर (१०उ० वारयति-ते) शूरवीर प्रचारमें लाना, रूढिमे लाना होना, पराक्रमी होना, पराक्रम नि-आ० १ निवेश करना, वास करना करना, वसना विप् (६ प० विषति ) १ व्यापना बुझ् ( ५० बुगति) १ छोडना, (९५० विष्णाति) १ उपयोग त्याग करना, वजित करना न होनेसे अलग करना या नि | बुट् (१० उ० वोटयति) १ मार काल देना (१५० वैपति)१ डारना या दुख देना. सीचना, प्रोक्षण करना (३ बुन्ध (१० उ० वुन्धयति-ते) १ उ. पोष्टि-वेविष्ट) १ व्यापना, मार डारना या दु ख देना फेरना, प्रसृत होना |बुस ( ४ ५० स्यति) १ फेरना, विष्क् (१० उ० विक्यात-ते) उडाना २ टक्डे २ करना देखना (१० आ० विष्फ्यते) वू(१० उ० वूपयति-ते) १ मार १ दुख देना, मारना डालना या दुख देना विस (४५० विस्यति)१ उडाना, (५ उ० वृणोति-वृणुते, १० फैक्ना २सामने रखना,सामने उ. वारयति-ते)१पसद पर ना • मुकर्रर करना, योजित क वी (२५० वति ) १ जाना २ रना ३ नियमित करना आ व्यापना, घरना, आम्मण कर च्छादित करना, देक्ना अप- ना ३ फेकना, भेजना, दौडाना १ सरक्षण करना, भाच्छादन ४इकरना ५साना,मक्षण करना आ-१ घेरना, रपना परना ६ गर्भपता होना, गा नि-निर-१ पूरा करना समाप्त धरना भाषार्थसहित। M वृरु-वृण- वृत्-वृत् करना.२ निवारण करना. पारे वृणोति) १खाना, भक्षण करना. १ घेरना, लपेटना, आच्छादन वृत् (१ मा० वर्तते) १ वर्तन कर- करना. २ भरोसा करना, वि. ना, वर्ताव करना २ रहना, श्वास करना. वि-१ स्पष्ट करना होना. ( १० प. वर्तयति) १ या होना. सम्-१ छिपाना. बोलना. २ चमकना. अति-१ समा-१ लपेटना, तहाना. (९ जीतना, मात करना.२ आज्ञा- आ० वृणीते ) सेवा करना, भग करना, हुस्म तोडना. ३ पूजा करना, भजना, आदरा- अतिकम करना, लांचना. अनु-- तिथ्य करना. (१ उ० वरति अनुसरण करना, दूसरेके समान ते) १ पसद करना. २ योजित करना.२ पीछे २ जाना. अप- 'करना, मुकरर करना ३ आ १ लोटना. आ-१ चक्राकार छादन करना. घूमना, प्रदक्षिणा करना, परि- वृक् (१ आ. वर्कते) १ लेना, क्रमा करना, २ पुनः पुनः कर- मान्य करना, कल करना. ना. नि-१ लौटना. २ कृत्रिमसे वृक्ष (१ आ० वृक्षते) १ योजित करना. निर-१ थमना, पूरा करना, मुकर्रर करना. २ पसद करना परि-१ घेरना, लपेटना, करना. ३ आच्छादन करना, आवृत करना. २ बदलना. ३ वर्चस्व करना, वर्चस्वी होना.४ ढकना. वृच (७ ५० वृणक्ति) १ आ- चक्राकार घूमना.५ वट जाना, भागे जाना ६ लौटना, पीछे च्छादन करना, उढाना.२ छो- रौटना. प्र-१ काममें लगना, उना, वर्जित करना. उद्योग करने लगना, प्रवृत्त वृज् (१५० वर्नति, २ मा० वृते, होना. प्रतिनि-१ जाना. वि- ७५० वृणक्ति, १० उ० वर्जय रोटना. २ चक्राकार घूमना. ति-ते ) १ छोडना, पर्जित विनि-१ पीछे रोटना. विपरि- करना. (७ १० वृणक्ति) मनमें भ्रमण होना. समभि-१ आच्छादन करना, उठाना दो जाना, उड जाना (४ अप-१ छोडना.२ दान देना. आ. वृत्यते) १ पसद धरना, वृण (६ ५० घृणति) १ आनद | ठहराना, मुसर्रर करना.२ सेवा करना, उत्साह करना. (८५० वरना, चाकरी करना. (१० संस्कृतधात्तुकोश। २ बटना वृध-व वे-वेड् उ. वर्तयति-ते) १ बोल्ना २/वे (१ उ० वयति-ते) १ बुनना चमकना. वृध् (१ आ० वर्धते ) १ वढना, वेण ( १ उ० वेति-ते) १ जाना अधिक होना १० उ० वर्धय २ समझना, जानना ३ स्मरण ति-ते) १ जाना २ बोलना करना, याद करना ४ लेना, ३चमकना ग्रहण करना ५ सारासार वि वृश् (४ ५० वृश्यति) १ पसद) चार करना, तारतम्य देखना क्रना २ आच्छादन करना, ६ वाद्ययन बजाना ७ वाद्ययत्र ढकना हाथ में लेना, बाजा हाथमे लेना वृष् (१ प. वति ) १ बरसना, वेथ् (१ आ० वेथते) १ याचना सीचना, प्रोक्षण करना २ मार करना, मांगना डारना या पीडा करना ३ वेद् (११ ५० वेद्यात ) १ पूर्तता दुख देना, पोडित करना ४ करना, ठगना २ सोना, सपना देना, दान करना (१० आ० देखना, स्वाब देखना वर्षयते) १ गर्भवती होना,गा वेन् (१ उ० वेनति-ते) १ जाना भिन होना २अमानवी पराक्रम २ समझना, जानना ३ स्मरण विशिष्ट होना, अमानवी पराक्रम करना, याद करना ४ लेना करना ३ पराक्रमी होना । ग्रहण करना ५सारासार वि प्रजोत्पत्ति करनेको समर्थ होना चार करना, तारतम्य देखना वृड् (१५० वर्हति ) १ बढना ६ वाद्ययन बजाना ७वाद्ययन्त्र २ जगली पशुके समान पुकारना हाथमे लेना, बाजा हाथमै लेना. (६५० वृहति) १ यल करना वेप १ आ० वेपते) १ कापना, वृंद (१५० वृहति) १ बढना २ थरथराना जगली पशुके समान पुकारना वेल् (१ प. वेलीत ) १ जाना (१० उ० वृहयति-ते) १] सरकना २ कापना, थरथराना चमकना २ बोलना (१० उ० वेलयत्ति-ते ) १ वृ (९ उ० वृणाति-वृणीते ) १/ कालगणना करना, वक्तकी पसद् करना २ आश्रय देना, गिनती करना सभालना. वेल् (१ प. वेल्लति ) १ जाना भाषायसहित। घेपी-व्यय व्युस-वा सरकना २ कांपना थरयराना ति-ते)१ खर्च करना, व्यय बेवी (२ मा० गीते) १ जाना, करना. सरकना, चटना २ व्यापना, च्युप् (१५० व्युप्यति)। आक्रमण करना, फेलना ३ व्युस (४५० व्युस्यति) १ जला इच्छा करना, चाहना गर्भ ना, भूनना, दग्ध करना २ वता होना.५ भेजना ६ खाना अलग करना, पृय करना, वि ७परना, उडाना भाग करना (१०५. व्योप वेछ (१ आ० पेटते ) १ रपेटना, यति) १ छोटना, त्याग कर घेरना ना, पर्जित करना वेस् (१५० वैमति) १ जाना व्ये (१ उ० व्ययति-ते) आच्छा वेह ( १ मा० बेहते) १ यत्न क दन करना, ढरना २सीना रना २ निश्चय करना, ठहराना वज (१ प. ब्रजति, १० प० मा वेह (१ ५० वेहति) १ जाना, जयाति) घूमना, जाना, भट सरकना २ापना, थरयराना क्ना परि-१ सन्यासीके समान वै(१ प. वायति ) १ शुष्क घूमना या भरना, याना कर- ना (१० १० वाजयति) १ व्यच् (६ ५. पिचति) १ ठग पूर्ण करना, तेयार करना, सिद्ध ना, फमाना करना. व्यथ् ( १ ० व्ययते) १ टर प्रण (१ ५० प्रति ) १ शब्द ना २ दुस भोगना ३ असुरसी करना, भानाज वग्ना (१० होना, क्षुब्ध होना, सतत होना उ. व्रणयति-ते) १क्षत कर व्य (४५० विध्यति) १ मार ना, पाव करना, जखमी करना. ना, पीटना २ छेदना ३ दुसवय (६ ५० वृश्चति) १ क्तग्ना, देना, पाढा करना छेदना, रेतना, छीटना व्यय (१५० व्ययति) १ जाना नी ( ४ आ. श्रीयने, ९ ५० (१० १० ध्याययति ) प्रेरण निणाति-श्रीणाति ) १ टूटी भग्ना, भेजना. २ कम होना, निगलना, पमद करना, बिन एघु होना, न्यून होना (१ ना. २ आच्छादन करना, सा व्ययन, १०३. व्ययय होना, सूखना संस्कृतधातुकोश। बीड्-शच् श-शद बीड् (४५० वीड्यति ) १ लज्जित शञ्च (१ आ० शञ्चते) जाना. होना, शरमाना. २ भेजना. शट् (१५० शयति) १ रोगी ब्रीस् (१ प० वीसति, १० ५० होना, बीमार होना. २ जाना, वीसयाति ) १ पीडा करना, चलना. ३ थकना, प्रांत होना. जखमी करना,क्षत करना, घाव ४ खिन्न होना, उदास होना. करना. ५ छेद करना, छेदना. (१० उ० ड् (६ प• तुडति ) १ डुवना. शाट्यति-ते) १ प्रशसा करना, २ राशि करना, ढेर करना. ३ स्तुति करना. आच्छादन करना, ढकना. शट् (१५० शठति,) १ ठगना. अस् (१ प० त्रुसति, १० उ० वृस- २ मार डालना या दुःख देना. यति-ते)१ मार डालना या ३ केश दुःख पीडा सहन करना. (१ उ० शाठयति-ते)१ पूरा पीडा करना. व्ली (९५०ब्लिनाति-व्लीनाति) करना, समाप्त करना.२ पूरान करना, समाप्तन करना, आधा- १ पसद करना, दूढ निकालना, ही छोडना. ३ जाना. (१० उ० बिनना. २ आच्छादन करना, शठयति-ते ) १ दुर्भापण करना, उढाना, ३ जाना, सरकना. दुर्वचन कहना. २ सुपचन कह- ब्लेक्ष् (१० ५० व्लेक्षयति)१देखना. ना. ३ मौन धारण करना नहीं श. बोलना, चुपके रहना, चुपहोना. शक (४ उ० शक्यति-ते, ५५० (१० आ० शाठयते) १ प्रशसा शक्नोति ) १ सहना, सहन करना, स्तुति करना. करना. २ शक्तिमान् होना. | शण (१ प. शणात ) १ देना, समर्थ होना, योग्य होना. दान करना. २ जाना. शङ्क (१ आ० शङ्कते) १ शका शण्ड् (१ आ० शण्डते ) १ रोगी करना, सशय करना, सदेह होना, बीमार होना.२ अपकार करना २ डरना,घवरना. भा करना, दुःख देना. ३ बटोरना, १डरना, घवरना. एकत्र करना, देर करना. शच् (१ आ० शचते) १ अस्पष्ट | शद् (१ आ० शीयते) १ जीण । बोलना. होना, धीरे २ कम होना, भापार्थसहित। १०३ - श-शब्द श-शम् मुरझाना.२ गिरना. ३ जाना. २वोलना. ३ वचन देना, वा. ४ नीचे फेंकना, नीचे गिराना. ग्दान करना, देनेका निश्चय शप् (१ उ० शपति-ते, ४ उ. करना. शप्यति-ते) १ शपय करना, शई (१५० शति) १क्षत कर- सौगद खाना, कसम खाना ना, जखम करना, घाव करना. प्रतिज्ञा करना. २ सरापना, २मार डालना. गाली देना. शई (१ प. शीत ) १ जाना. शम् (१ प. शाम्यति )१ सांत्वन शर्व (१५० शर्वति) २ पीडा करना, शमन करना. २ शांत करना, दुःख देना, मारना. होना, ठडा होना. ३ मन स्वा- शल् (१ आ० शलते) आच्छा- धीन रखना, स्वस्थ होना, दित करना, ढकना. २ चुभता, क्षुब्ध नहीं होना. (१० मा० सलना. (१५. शरीत) १ शामयते) १ मूक्ष्मतासे देखना. जाना २ जल्दी जाना. (१० (१०प० शमयति ) १ शांत प. शालयति) १ प्रशसा कर- करना,ठडा करना. (१० मा० ना, स्तुति करना. शामयने) १ प्रसिद्ध करना, जाहिर करना, स्पष्टतासे दिखा- शल्म (१ आ० शल्भते )१ प्रश ना. उप-१ शांत करना. उपश. सा करना, स्तुति करना.२ मन करना. नि-१ सुनना.२ आत्मश्लाघा करना,मात्मस्तुति प्रतिबंध करना, रोकना. प्र- करना, शेखी मारना. शान होना, स्थिर होना. २ शव (१५. शवति) १ जाना. २ नष्ट करना. समीप जाना या आना. ३ पद- (१५० शम्यान)१ जाना. एना, फिरना. ४ बदरे में देना. शम्बू (१० उ० शम्पयति-ते) १ देर शम् (१ प. शशात) १ फुदरते करना, राशि करना, पोरना, परना, कूदते जाना. एकत्र करना.२ जोडना. शप् (१५० शपति) १ मारना, शन्द (१० उ० शब्दयति-ते) १ वधना, दस देना, पीडा करना, शन्द करना, भावान करना.स् (१ प. शसति) १ मारना, प्र-प्रति-पि-१ सर करना. यधना, दु.स देना. मामे-१.. .
संस्कृतधातुकोश। शस-शाल शास्-शिट् विनति करना, गिडगिडाना. करना, स्तुति करना. २ शेखी (२५० शस्ति)१ सोना. मारना, आत्मस्तात करना. शस् (१ प. शसाते) १ प्रशसा ३ कहना. ४ प्रकाशित होना, करना, स्तुति करना. २ दुःख चमकना. देना, पीडा करना. ३ अभिश- शास् (२५० शास्ति) १ आज्ञा सन करना, तुहमत लगाना, करना, हुक्म करना. २ कहना, मिथ्यापवाद लगाना, झूठा क- सिखाना, बोध करना. ३ अधि एक लगाना. ४ इच्छा करना, कार करना, अमल चलाना, चाहना. आभि-१ मिथ्यापवाद नियमन करना, शासन करना। लगाना. आ-१ चाहना. २ शासक होना, प्रभु होना. आ- बोलना. प्र-१ प्रशसा करना, ( आशास्ते ) १ आशीर्वाद स्तुति करना. आ- मा० १ देना, भला चाहना. आशीर्वाद देना, कल्याण चाह- शि (५ उ० शिनोति-शिनुते) १ ना, शुभ चाहना.(२५० शस्ति) तीक्ष्ण करना, पैना करना. २ १ सोना.. छीलके बारीक करना शाख (१५० शाखति )१ शाखा | शिक्ष (१ आ. शिक्षते) अभ्यास फैलना, डालें पैदा होना करना, अध्ययन करना,सीखना. शाइ (१ आ० शाडते )१ प्रशसा शिष (१५० शिशात ) १ जाना. करना, स्तुति करना. २ वक- वाद करना. शेखी मारना. ३ २ सूधना, आघ्राण करना. तैरना, तिरना, पैरना. | शिड् (१५० शिवति) १ सूघना, शान् (१ उ. शीशासति-ते)१ तेज आघ्राण करना. करना, शिन (२ आ० शिक्ते) १ अस्पष्ट शान्त्व् (१० ५० शान्त्वयति) १ शन्द करना. २ झुनझुनाना, सांत्वना करना,समाधान करना. उनठनाना, खनखन आदि आ- शार ( १० प० शारयति )१ नि घाज होना. बल होना या करना, अशक्त शिद् (१ प० शेटति) १ अपमान होना या करना. फरना, तिरस्कार करना, तुच्छ ल् (१० शालते) १ प्रशसा मानना. पैना करना.
भाषार्यसहित । शिर-शील शुक्-शुष्ठ शिल् (६ ५० शिलति) १ विन २ पूजा करना, अर्चा करना. ना, उंछन करना. (१ प. शीलति, १० उ. शोल- शिष् (१ प. शेषति, १० उ. यति-ते)१ अभ्यास करना, शपयति-ते) १ शेप रखना, आदत करना.(२०१० शील्य- बचा रखना, पूराखर्च न करना. ति)१ धारण करना, पहिरना, वि-१ अधिक होना, जियादा पहिनना.२ रखना, पास रखना. होना. (७५० विशिनाष्ट) शुक् (१ प. शोकात) १ जाना. २ छूना, स्पर्श करना. पृथक करना, अलग करना.२ गुण दोष दिखाना, भिन्नता दि. शुरु (१५० शोचति ) १ दुःस खाना. (१ प. शेषति) १ करना, शोक करना. (४० दुःख देना या मार डालना. शुच्याते-ते) १स्नान करना, शी (२ मा० शेते ) १ सोना, शुद्ध होना. २ आई होना, शयन करना. अति-१ अतिशय गीला होना. ३ बदबू माना.४ होना, अधिक होना. आधि-१ मर्दन करना, मथना. ५ क्षत मुकाम करना, रहना.सम्-वि करना, जसम करना, घाव १ शंका करना, संदेह करना. करना. शीक् (१ ० शीकते ) गीला शुच्य (१ प. शुन्यति ) १ स्नान करना छीटा मारना.२भिगोना. करना.२ सार निकारना, अर्क (१५०शीकाति,१००शीकय- निकालना, निचोडना. ३ मय- तिते) १ छूना, स्पर्श करना. ना. ४ छानना.५पीटा करना, २ शांत होना, शानतासे सहना. दुःस देना, हगुन करना ३ चमकना, प्रकाशित होना. शुरु (१ प. शोठति, १.१ ४ बोटना, भाषण करना शोठयति-ने) गवना, गर, भीम् (१ भा० शीम) १ प्र. रखना. . गदन विन होना, शंसा करना, स्तुति करना रंगहाना. ३ अरमाना, शेसी मारना, आरमम्तानि मरम्प करना.मुम्बना.५ करना, झील ( १५० शोटानि)। मन हम (पशुत्र) फरना, मनकी एका कागुन (... गुट + संस्कृतघातुकोश। शुध-शुर शुल्क-गृथ् शुण्ठयति-ते)१ रोकना, रोक | शुल्क् ( १० उ० शुल्कयति-ते) रखना. २ जानेमें विघ्न होना, १ कहना. २ प्राप्त करना, मि- लगडाना.३ अलसाना, आल लाना. ३ उत्पन्न करना, पैदा स्य करना ४ सूखना.५सुखाना. करना. ४ छोड देना. शुध (-४ प० शुध्यति) १ शुद्ध शुल्व् ( १० प० शुल्वयति) १ होना, पवित्र होना. उत्पन्न करना, पैदा करना. २ शुन् (६ प० शुनाते ) १ जाना. गिनना, नापना. शुन्ध (१ उ० शुन्धति-ते, १० शुप् (४ प० शुष्यति ) १ शुष्क ज० शुन्धयति-ते ) ९ शुद्ध होना, सूखना. होना, पवित्र होना २ शुद्ध शूर (४ आ० शूर्यते ) १ मारडा- करना, पवित्र करना लना, दुःख देना, पीडा क- शुभ (१ उ० शोभति-ते, ६ शु रना. २ मूर्ख होना, पागल भति) १ चमकना, प्रकाशित होना ३ निश्चल होना, स्तब्ध होना, देदीप्यमान होना. २ होना. (१० आ० शूरयते) १ सुदर होना, शोभायमान होना, पराक्रमी होना, शूरवीर होना. खूबसूरत होना (१५० शोभाति, २ यत्ल करना. ( ११ आ० ६५० शुभति)१ मार डालना शूर्यते ) १ पराक्रम करना, या दुख देना (१५० शोभ- शौर्य करना. ति) १ भाषण करना, बोलना. शूर्प (१० उ० शूर्पयति-ते) १ शुम्म् (१-६ ५० शुम्भति) १ नापना, गिनना. चमकना, प्रकाशित होना, देशूल् (१ प. शूलति ) १ पेट दीप्यमान होना २ सुदर होना, दुखना, बीमार होना. २ बडा खूबसूरत होना. ३ मार डाल आवाज करना. ३ शलपर चढा- ना या दुःख देना. ४ भापण ना, सूली देना. करना, बोलना. शूप् (१५० शूपति) १ जनना, शुर (४ आ० शर्यते) १ मार उत्पन्न करना, प्रसूत होना. डालना या दुःख देना, पीडा शृध् (१५० शीते) अधोवायु करना. २ मूर्ख होना, पागल छोडना. (१ उ० शति-ते) होना. ३ निश्चल होना. १ गीला होना, आर्द्र होना. .
मापार्यसहित । २०७ शू-श्युत् श्माट-अन्य (१ प. शति, १० उ० शर्थ सोचना, प्रोक्षण करना, छाया यति-ते)१ सहना, सहन कर देना. ना. २पराभव करना, जीतना ३ [३मील् (१ ५० श्मीरति )१ पला अपमान करना,अनादर करना टगाना, आखें मोचना२नेत्र डा (९५० शृणाति ) १ मार स्फुरण होना डालना या दु'स देना, पीटा श्यै (१ ना. श्यायते)१ जाना कग्ना वि-(पिशीयते) १दुखी श्रद् (१ जा० अने) होना, पीडित होना, गलिन होना, गिर पटना श्रद् (१ प. अगति) जाना शेल (१५० शेगति) १ जाना, श्रण (१ प. श्रगति, १० उ. सरगना. २ कापना, यग्यराना श्राणयति-ने) १ देना, दान मे (१ आ. शेवने ) १ सेना करना वि-देना. २ सेवा करना, नौरग करना श्रयू ( १५० अयति, १० पं. शे (१ प. शायाति ) १५ श्रययति)१ मार डालना या होना, परना, २ पफ करना, दुस देना, पाडायग्ना मुक्त पाना (१ प. शायते) १ करना, छोडना ३ वधन करना, जाना. योधना, जाटना (२०१० शो (१ प. श्यति) १ तीक्ष्ण श्राययति)। यटी उत्सुरनामे पग्ना, पैना करना, पेनाना, यत्न ग्ना २ पारपार जान सान भग्ना • छोटो बारीक दिन होना ३ जाना (२० करना, धारना उ. अययनि-ने) १ नियंत्र शोण (११ झोणति) २ जाना होना, शक्तिहीन होना रार होना अन्य ( १ ला अन्यने) १ शीट (१५. शैतात) १ गाँ शिविर उग्ना, टोगसना.२ गीर (१५. शीतति), परना शिपिट होना, टोमा होना अभिमान रग्ना, महार (१५. अनानि) मुक्त पन्ना, छोदन अनद कर शुन् (१५० श्रीनति) पाना, ना ३ग्पन्न, गुक्ति पान. श्युत् (१९.योतति), झग्ना • (१६. अयति, १३ : .
संस्कृतधातुकोशा -- अम्-श्रिा श्री-विष् श्रन्ययति-ते)१ रचना करना, श्री (९उ० श्रीणाति-श्रीणीते)२ रचना, क्रमसे रखना. पकाना, रधिना. (१उ० श्रय श्रम् (४ प० श्राम्यति )१थकना, ति-ते, १० उ० श्रायति-ते) श्रोत होना. २ पीडित होना, १ सतुष्ट करना, खुश करना, दुखित होना.३ तपश्चर्या कर मनोरथ पूरा करना. ना, व्रत करना, चांदायणादि श्रु (५ प० शृणोति) १ सुनना, प्रायश्चित्त करना. श्रवण करना.२ जाना. (१ श्रम्म् (१ आ० अम्भते) दुर्लक्ष्य १० श्रवति)१टपकना, झरना. करना, चूकना, गलती करना. प्रतिसगुते-१ कबूल करना, श्रा (२१० श्राति) १ पकाना, मान्य करना. विणोति-१ कीर्तिमान होना, प्रख्यात होना. पक्क करना, राधना, उबाल्ना २ पसीजना, पसीना निकालना. श्रे (११० श्रायति) १ पकाना, (अपयति)१ पकाना. (श्राप राधना.२ पसीना निकालना.३ यति)१ पसीजना. पिपलाना, पतला करना। दर करना. श्राम् (१०प० श्रामयति)१ आ. श्रोण (१५० श्रोणति) १ एकत्र वाहन करना, आमत्रण करना, बुलाना २ उपदेश करना, बौद्ध करना, सचय करना, बटोरना, ढेर करना. वाद करना, सलाह देना. श्रि (१३० श्रयति-ते) सेवा श्लङ् (१ आ० वक्ते ) १ जाना. करना, चाकरी करना. आ- श्लङ्ग (१ पश्वद्गति) १ जाना. माश्रय करना. २ समीप जाना श्ल) ( १० १० श्ययति ) १ या रहना ३ उपयोग करना, शिथिल होना, ढीला होना. काममें लाना. अपा-१ छोडना. श्लाख (१५० श्वास्वति)१ब्यापना. उत्- समुत्-१ ऊचा होना. श्लाघ् (१ ० श्वाघते) १ मश- व्यपा-१ साष्टांग नमस्कार कर सा करना, स्तुति करना, वस्खा ना, जमीनपर गिरना २ विश्वा नना. २ फुसलाना. ३ आरम- स करना, भरोसा रखना. स्तुति करना, शेखी मारना. श्रिष् (१ प. श्रेपति ) जलाना, लिप (४ प० मिष्यति, १५० भूनना, भूजना. पत्ति, १० उ० शेषयति-ते) भाषार्थसहित। श्लोक-वष्ट श्वभू- १ आलिंगन करना, गले लगा-वधू (१० उ० श्वभ्रयति-ते)१ ना. २ सटे रहना, चिपक रहना. दरिद्र दशामें रहना, विपत्तिमें ३ एका करना, मिलाप करना, रहना. २ जाना. छेदना. सयोग करना. (१५० श्लेषति ) श्व (१० उ० वयात ते) १ १ दुग्ध करना, जटाना. दरिद्र दशामें रहना. २ जाना. श्लोक् (१मा० श्लोकतै) १ शोक श्वल (१ प. श्वलति) १ दोडना, करना, कविता करना.२रच. भागना. ना करना, रचना. श्वरक (१० उ० श्वल्कयति-ते)१ श्लोश (१५० श्वोणति) १ एकत्र बोलना, मापण करना. वरना, बटोरना, टेर करना. श्वल् (१५० श्वल्टुति) १ दौडना, भागना. भड् (१ आ.वक्ते) श्वझे (१५० स्वङ्गात) श्वस् (२५० श्वसिति ) १ श्वास श्वन (१मा० श्वचने) लेना, श्वासोचास करना. २ १जाना, जीना, जीता रहना. आ-१ श्वज्ञ (१मा० धनते) सरकना. समाधान परना, आश्वासन श्वञ् (१ मा०पञ्चते) घरना. उत्-१ विकसित होना, श्वन (१आश्वञ्जते) प्रफुल्लित होना, खिलना. २ वट (१० उ० वयति-ते) १ सांत्वन करना, समाधान करना. आशीर्वाद देना, शुभ बोलना, निर-१ मरना, दम छोडना.२ पर देना.२ भयोग्य घचन बोल सांस भरना. दि-१ विश्वास पर ना, अययार्य भाषण नोलना. ३ ना, भरोसा रखना. चुपके रहना, नही गोटना, मौन धि (१ प. श्वर्यात) १ जाना, सापना.(१०२०पाठयति-ते) समीप जाना.२ पटना. २ पूरा करना, समाप्त करना, श्वित् (१मा श्वेतते) १ सद २समातन परता.३ नानासर होना शुभ होना. चिन्द ( १ मा विन्दते ) रसद पष्ट (१० उ० अन्ठयति-त) होना शुभ होना. पूग वरना.२ पूरा न परता. भृ९१. शणाति) १ मार दा ३नाना रना या दुःख देना, पीडा परता.
११० सस्कृतधातुकोश। सग-सन् सट्-सद् (१ उ० सञ्जति-ते) १ जाना (१ प. सगति)१ आच्छा १५० सञ्जति) १ जाना २ सग जोडना दन करना सघ ( ५ प० सन्नोति ) १ मार सट् (१५० सयते)१ भाग होना, डालना या दुख देना, पीडा हिस्सा होना, अपयव होना. (१०प० सटयति) १ प्रसिद्ध करना करना, जाहिर करना, स्पष्ट सङ्केत् (१० उ० सङ्केतयति-ते) १ करना बुलाना, आमत्रण करना २ बुद्धिविचार कहना, सलाह | सद्द ( १० उ० सट्टयति-ते) १ देना ३ समय ठहराना, वक्त वास करना, रहना, सना २ मुर करना मार डालना या दुख देना, पीडा करना ३ स्थूल होना, संग्राम (१० उ० सग्रामयति-ते) मोटा होना, बलाढ्य होना ४ १ युद्ध करना, रडाई करना देना, दान करना सच् (१ आ०सचते) आई करना, | सट् (१० ५० साठयति ) १ पूर्ण गीला करना, छीटा मारना, करना २ जाना ३ पूरा न सचिना • सेवा करना, सेना करना करके स्तुष्ट करना (१ उ० सत्र ( १० मा. सत्रयते ) १ सचति-ते) १ पूरा समझना, पेराना, विस्तार करना अच्छी तरह जानना २ सबधी सबध करना, ससर्गी होना ३ होना, ससगा होना उदारतासे वर्तना सञ्च् (१५० सञ्चति) १ जाना | सद् (१-६ प० सीदति) १ जाना, (१५० सन्जति)१ आलिंगन चल्ना २शक्तिहीन होना,म्ला करना, गले रगाना ० सटे न हाना, खिन होना ३ सूसना, रहना, चिपर रहना ३ सबधा शुष्क होना,मुझाना ४भनकर होना, अव-१ लाना, हिल ना,नष्ट करना (१५०आसीद क्ना, सटर रहना आ-१ अनु ति, १० उ. आसादयति-ते) रक्त होना,आसक्त होना व्या १ चढाई करना, हमला करना १ झगडना, हाथा पाई करना २ जाना अन-१ क्लत होना, . .
भापार्थसहित । १११ सधू-स सभा-सई थक्ना, परहान होना • पूर्ण होना, पूरा समझना, पूणतया करना, पूरा करना, समाप्त कर जानना • ससक्त होना, सलग्न ना समा-१ प्राप्त होना, मिर होना, मिलाप होना ना, इच्छितामी प्राप्ति होना | समाज् (१० ५० सभाजयति) १ उत्-१ऊपर चढना २ नष्ट सेना करना तृप्त करना ३ करना उप-१ पास जाना. देखना नि-१ ऊपर या भीतर बैठना | सम् (१ प० समति) १ घबराना, २खडा रहना ३ पारन करना, हिचकिचाना २ घनराना नहा, सभालना प्र-१ आनदा होना, हिचाकचाना नहा (१० प सुखी होना, सुश होना . समयति ) १ व्यग्रचित्त होना, प्रफुल्लित होना, खिलना ३ पच साना, पेच पटना (४प उत्तम दशा प्राप्त होना ४ सुसा सम्यति ) १ परिणाम होना, करना, सतुष्ट करना, खुश कर रूपातर होना ना . स्वच्छ करना, शुद्ध कर सम्म् ( १ सम्नति ). १ जाना ना ६ स्मित करना, मुससुरा (१० उ० सम्मयति-ते ) ना वि-१ शातचित्त होना, सयोग करना, मिलाप करना, खिन्न होना, दुखी होना, आत जोडना होना, थरना सम्-१ इच्छि- | सम्भर ( ११ प मम्भनि) तार्थकी प्राप्ति होना २ मड पालन करना बोरना, पन करना सध (५ १. सनोति) २ मार | सम्भूयस (१५५ मम्भूया) डालने या दुख देनेकी इच्छा । बटुन होना करना मर्ज (१५ मन) १ उपार्जन सन (५ उ० सनोति-मनुते)। नाना, मिटाना, पाना, प्रात देना, दान करना • मेगा सान प्रान होना करना, पूजा करना : मसारम(१५. मनि) करना (१ प. सनति) म (१५ मति) सेना करना, चारगना मा (प मर्वन)- सप् (१ प. सपनि) पूर्णन ली में रहना पदेना, + ११२ संस्कृतधातुकोश। सम् संम् ( २५० सास्त) ११ सौना सल्-साम् साम्य-सिधू सल् (१ प. सलाते) १ जाना, साम्ब् (१० प० साम्बयात) १ सरकना. २ कांपना, थरथराना. एकत्र होना, सयुक्त होना, मिरना, सयोग करना, मिलाप १ करना. सस्त्र (१५० सज्जति) १ जाना. | सार ( १० उ० सारयति-ते)१ २ तैयार होना, सिद्ध होना. दुर्वल होना. सि (५ १० सिनोति-सिनुते, १ सह ( १ उ. सहति-ते, ४१० उ. सिनाति-सिनीते)१वा साति, १० उ० साहयति-ते) धना, गूथना २ फदेते गिरफ्तार १ सहना, सहन करना. २ करना अध्यव-१ निश्चय कर शक्तिमान् होना. ३ सतुष्ट ना, ठहराना. २ सिद्ध करना, होना, तृप्त होना, खुश होना हेतु पूर्ण करना व्यव-१ उद्योग उत्-१ उत्साही होना, आनदी करना, धधा करना वि-१ का- होना २ उद्योग करना, यल रणीभूत होना. करना. प्र-१ जुल्म करना। सिञ्च (६ ५० सिञ्चति-ते) १ जबरदस्ती करना. वि-१ दृढ निश्चय करना, निर्णय करना, प्रोक्षण करना, सोचना, छीटा देना अभि-१ अभ्यजन करना, ठहराना. सान्त्व् (१ उ. सान्त्वयति-ते) चुपडना, लीपना, २ प्रोक्षण करना, सीचना, छोटा देना १ सांत्वन करना, समाधान सिट् ( १ ५० सेटति) १ अपमान करना, विवेककी बात कहना करना, तिरस्कार करना. साथ (४५० साध्यात, ५५० सा सिध् (१५० सेघति ) १ जाना, धोति)१पूर्ण करना, सिद्ध कर ना, हेतु पूर्ण करना २जय पाना, चलना २ आज्ञा करना, हुक्म जीतना, यशस्वी होना, सर करना. ३ धर्माधिकारकी दीक्षा देना, उपाध्याये करना. ४ मगल करना, फथ करना, पार लगाना कर्म करना.नि-प्रति-१ निषेध साम् ( १० १० सामयति )१ करना, मना करना. प्र-१५ सांत्वन करना, समाधान करना, सिद्ध होना, कीर्तिमान होना. शांत करना. (४ प० सिध्यति) १ सिद्ध भापार्यसहित। ११३ --- सिम्-सु सुख-सुर होना, जीत होना. २ ममानवी | पराक्रम होना. प्र-१ उत्पन्न पराक्रम ( सिद्धि) को प्राप्तिके करना, प्रसूत होना, जनना. २ लिये आरंभ किये हुए जारण मा. गर्भ धारण करना. ( ५उ. रणादि कर्मकी समाप्ति करना, सुनोति-सुनुते ) १ यज्ञार्य स्नान दीक्षित होना. ३ पूर्ण होना, स. करना.२ मंयन करना, मथना. माप्त होना. ४ शुद्ध होना, ३ स्नान करना, नहाना. १ गटती नहीं रहना. दयाना, हिलाना. ५ यंत्रादि सिम् (१ प. सेभात) द्वारा अर्फ निकालना.६ पीडा १मार सिम्म (१५० सिम्भति) करना, दुःख देना, सताना, कष्ट डालना या दुःख देना, पीडा देना. अभि-१ प्रोक्षण करना, करना. २ प्रकाशित होना, मार्जन करना, सींचनां. २ स्नान चमकना. ३ भापण करना, करना, नहाना. बोलना. मुख (१० उ० सुखयति-ते) १ सिल (६५० सिटति) १ चिनना, सुखी करना, आनंदी करना, सुश करना. (११५० सुत्यति) चुनना. सिन् (४५० सीव्यति) १ सीना, १ सुरसानुभव करना, आनंदानु. भव करना. सविन. करना. २ बीजारोपण करना, योना, रोपना. मुह (१० उ० सुट्टयति-ते ) १ अपमान करना, तिरस्कार कर सिव (१५० सिन्वति) १ सीचना. ना.२ अल्प होना, थाह होना. २ सेवा करना, नौकरी करना. सीक् (११० सीकति) १ प्रोक्षण मुभ (१५० सोभति, ६५० सुभ- परना, सींचना, बरसना.(१ ति) १ दुःरा देना, मारना. २ योलना. ३ चमरुना.४ सुदर ५. सौकति, १०५० सीकयति) १ स्पर्श करना, ना.२ सहन होना. रायमूरत होना. फरना, सदना. मुम्म (१५० सुम्भनि) १ दुम्स सु (११० सपति, २५० सौति) देना, मारना. २ बोलना. ३ चम- १ उत्पन्न करना, पैदा करना, कना. ४ सुंदर होना, खूबसूरत जनना.२ गर्भ धारण करना. होना. एचय, सामप्य या अमानवीमुर (६५० सुरति) १ मत सा- ११४. सस्कृतधातुकोश। सह-सूई सूक्ष्य-सृज् मर्थ्य या अमानवी पराक्रम सत्कार करना.२ आदरसत्कार होना.२ चमकना. नहीं करना. सुह (४५० सुह्यक्ति ) १ सहना, सय् (१५० सूयति ).२ मत्सर सहन करना.२ तृप्त होना, सतुष्ट करना, परोत्कर्प सहन नहीं होना, खुश होना. ३ पराक्रमी करना. २- दूसरेका अपराध होना, शक्तिमान होना, समर्थ सहन नहीं करना, ३ अनादर "होना. करना, अपमान करना, तिर- सू (२ आ० सूते, ४ आ० सूयते) स्कार करना. १ गर्भ धारण करना, जनना. | सूप् (१ प. सूपति) १ गर्भधारण २ उत्पन्न करना. (६ प० सुव- करना, जनना. ति )१ भेजना, उडाना. स (१५० सरति) १ जाना, सर सूच् (१० उ० सूचयति-ते) १ कना. अनु-१ पश्चात् गमन सूचना करना, बात कहना, करना, पीछे २ जाना. २ दूस- जताना. २ दूसरेको न्यूनता रेका देखके वैसा करना. अप-१ दिखाना. लौटना, पीछे आना. अभि-१ सत्र (१० उ० सूत्रयति-ते) १ चारों ओर फैलना. २ सहगमन सूतसे लपेटना. करना, साथ जाना. उप-१ पास सूद् (१ आ० सूदते, १० उ० सूद- जाना. प्र-१ आगे जाना. यति-ते) १८पकना, झरना. २ २ आगे आना. ३ फैलना. वि- रखना, अमानत रखना. ३ पवित्र १ आना. २ अलग २ जाना. ३ करना, शुद्ध करना. ४ कबूल छोडना, छोडके आगे जाना करना, वचन देना. ६ पीडा कर (३ प० ससति) जाना. ना, दुःख देना. ६ क्षत करना, सज्ञ (४ आसृज्यति, ६ ५० सृज घाव करना.७ मार डालना या ति) १ छोडना, त्याग करना, मार डालनेका यत्न करना. २ उत्पन्न करना, पैदा करना. सर (४ आ० सूर्यते) १ स्थिर उत्-वि-नि-१ वर्ज करना, करना, थमाना. २ दुःख देना, छोड देना. सम्-१ मिलाप पोडा करना. ३ मंदबुद्धि होना. करना या होना, एकत्र करना सूई (१ उ. सूक्षति-ते)१आदर या होना, संसर्ग करना या होना M भाषायसहित। यादुरा देना . मा-पन्द गम्भ-म्पट सुप् (१५. सी) १ गना.सम्म (सामन, २. अप-१ पागंभ होना, हरना राम्नानि, ९ प.सभ्नाति) नम (१५. सभात)। १ मार सहगत परना, मेरना, प्रति मृम्म (१५० गुमति) सरना घर सग्ना २ मूग होना, या मदना, पाटा परना पागर होना, मतिमत होना म् (९मृत)' मार टारना मु (५ उ• स्नोति-मनुने, ९ उ. मानानि-रएनीने ) १ सेक (आसन) पदना, फुदाना, उटना २ मेट (१५० मेनि) (१ जाना उपर उठाना ३ भान्टादित मे (१ उः माति-ते) १ मंशा यग्ना, दाना परना, भारी याना शुलपा सन्द (१आन्दन)१ पाना, लग्ना.२ पिशाम ग्ना, भरी पदना २ ऊपर उठाना. सा रगना ३ पूजा गगना, अर्ना करना सामग्ण परना सम्म (९7 शुभ्नाति, ६५० से (११० सायति ) हास होना, रहनोनि) १ प्रतिश्च उपना, यम होना हसा करना, रोश्ना धारण मो (१५. स्यति ) १ विधम घग्ना परना, नष्ट यग्ना २ नष्ट होना, म्खद् (१ मा.स्पदत )रजीतना, भग्न होना पगजय परना, हटाना स्त मान् (१५० सोनी) १ जाना, रना, तोटना. ३ स्थिर करना, सरपना २रगित होना पग्ना ४ साना, भक्षण स्कन्द (१२ स्वन्दते ) र कूद करना ५ति परना, कष्ट देना, थकाना ६ मार टारना ना, फुदरना, उडना २ उपर रेना, चढाना ३ दुराना ४ या दुरा देना, पीटा करना, भगवरना पहाना (१५० सन्दति) १ जाना २ ससना, शुष्क होना स्सल (२५० स्पति)१ जाना ३ गिराना, टपराना, फैनना २गिरना, च्युत होना ३ वटो अप-१ चढाई करना, हल्ला रना, एसत्र परना ४ ठोकर करना रगना सस्कृतधातुकोश। गर्जना करना स्त-स्तिपू स्तिम्-स्ट स्तक (१५० स्तफति, १० १० क्ना, झरना, चूना २ प्रोक्षण स्तकयति) १ रोक्ना, हरकत करना, सीचना करना. स्तिम् (४ प. स्तिम्यति) १ गीला स्तम् (१५० स्तगति, १० ५० होना, भीगना स्तगयति ) १ आच्छादित |स्तीम् (४ प० स्तीभ्यति) १ गीला करना. होना, भीगना स्तन् (१ प० स्तनति) १ शब्द स्तु (२ उ०स्तौति-स्तुते, स्तवीति- करना, आवाज करना (१० स्तवीते) १ प्रशसा करना, उ० स्तनयति-ते) १ मेघकीसी स्तुति करना २ पूजा करना, अर्चा करना ३ सेवा करना, स्तम् (१ ५० स्तमति) १ भ्रति भजन करना होना, व्यग्रचित्त होना २स्तुच (१ आर स्तोचते ) १ स भ्रांत नहीं होना ( १० प० तुष्ट होना, खुश होना, प्रसन्न स्तमयति) २ भ्रांत करना, भु होना २ प्रकाशित होना, च लाना २सताना, उपद्रव करना मक्ना, तेजस्वी होना स्तम्म् (१ आ० स्तम्भते) १ वद स्तुप् ( १० १० स्तोपयात) १ ढेर करना, रोक्ना, अवरोध करना ल्गाना, राशि करना २ जडबुद्धि होना, मूर्ख होना | स्तुम् (१२० स्तोभति) १ भव ३ दृढ होना, खबक्सा अचल रोध करना, रोक्ना २ मूर्ख होना ४ चक्ति होना, विस्म होना, मदमति होना ययुक्त होना ५ स्तब्ध होना, स्तुम्म् ( ५ ५० स्तुभ्नोति, ९५० नष्टंद्रिय होना, जडाभूत होना स्तुभ्नााति) १ अवरोध करना, (५५० स्तभ्नोति,९५० स्त रोक्ना २ मूर्ख होना, मद्मति नाति) १ प्रतिवध करना, होना रोकना २ जटबुद्धि होना, स्तूप ( ४ ५० स्तूप्यति, १० उ. मूर्ख होना स्तूपयति-ते) १ ढेर रगाना, स्ति ( ५ आ. स्तिघ्नुते) १ राशि करना हल्ला करना, घेर लेना. स्तु (५ उ. स्तृणोति-स्तृणुते) १ स्तिप् (१ आ० स्तेपते)१८। पत्रादिसे आच्छादित करना, स्वक्ष्-स्तोम् भापार्यसहित। ११७ स्त्ये-स्था ढकना, वि-१ फैटना, विस्तार स्तुति करना, मुँह देखके बोल- होना ना, खुशामद करना (११० स्१क्षात) १ जाना |स्त्यै (१ ५० स्त्यायति)१ शब्द स्तूप (१० उ० स्तर्पयति ते) १ करना, आवाज करना २भीर ढेर रगाना, राशि करना होना ३ घेरना, फैरना स्तृह (६ ५० स्तृहति) १ मार | स्थग् ( १५० स्थगति ) १ आ डालना या दुख देना, पीडा च्छादित करना, ढक्ना करना | स्थल (१ १० स्थलति) १ स्थिर स्तूंह (६ ५० स्तृहति) १ मार होना, थमना २ स्तब्ध होना, डारना या दुस देना, पीडा खडा रहना, ठहरना करना स्थस् (४५० स्थस्यति) १ रहना, स्तु (९ उ० स्तृणाति-स्तृणोते ) मुकाम करना, वास करना, १ वस्त्रादिसे आच्छादित कर वसना ना, वस्त्र उढाना स्था (१५० तिष्ठति) खडा रहना, स्तृह (६५० स्तृहति) १ मार डा ठहरना २ वाट जोहना, मार्गम लना या दुस देना तीक्षा करना (१ आ. तिष्ठते)१ स्तेन् (१० उ० स्तेनयति-ते) १ विनति करना, गिडगिडाना २ अपना अभिप्राय दूसरे सम चुराना, मूसना, टूटना झाना अधि-१ स्थानारूढ स्तेप् (१० ५० स्तेपयति) १ फै होना, पदारूढ होना, अधिका क्ना, उडाना (१ आ०स्तेपते) रारूढ होना २ ऊपर रहना, १ टपरना, चूना २ सीचना उपर वैठना ३ जीतना, वढना, स्तै (१५० स्तायति) १ घेरना, भधिक होना अनु-१ यथा रपेटना, वष्टित करना, रोक शास्त्र वर्तना काममे लाना, रखना उपयोग करना ३ सटे रहना, स्तोम् (२० उ० स्तोमयति-ते) ल्टरना, चिपर रहना अर-१ १प्रशसा करना स्तुति करना सेवा करना, शुश्रूषा परना, २ आत्मघा करना, शेखा चाकरी करना थमना, स्थिर मारना, चढाई करना ३ मुख रहना आ-आ. १ निश्चयपूर्वक २१८ संस्कृतधातुकोश। - पुष्ट होना. स्था-स्था स्युड्-स्नुस् बुलाना. २ योजना करना, निय करना, वना. समुत्-१ उठ मित करना, मुकर्रर करना.प० खटा रहना. सप्र-१ प्रवास १ कबूल करना, मान्य करना. करना, परदेश जाना.२ आगे २ अधिरूढ होना, ऊपर बैठना. जाना उत्-५० १ खडा रहना, आस स्थुड् (१ प. स्थडत्ति ) १ वस्त्र नसे उठना. आ. १ प्राप्तिके धारण करना, कपटा आढना, वास्ते ढूढना. खोजना. उप-१ पहिरना. प्रशसा करना, स्तुति करना. २ स्थूल् ( १० आ० स्थूलयते) १ पूजा करना, भजन करना. ३ मोटा होना, स्थूल होना, शरीर देवको प्रसन्न करना. ४ मित्रकी नाई आदरातिथ्य करना, सभा- स्नस (१५० स्नस्यति) १ थूकना. वना करना.५ जाना या रहना. ६ पाससे जाना, होकर जाना. स्ना ( १ प. स्नाति) १ स्नान ७ आलिंगन करना, गले लगा. करना, नहाना, शुद्ध होना. ना. आ० प्राप्तिको इच्छा कर-स्निद् ( १ ५० स्नेदयति ) १ ना, मिलनेका हेतु रखना. नि- स्निग्ध होना, चिकना होना. १ रखना, स्थापित करना, २ पिघलना, पतला होना, चूना. पर्यव-१ अचल होना, स्थिर स्निह् (४ प० स्निपति) १ प्रीति होना. प्र-१ जाना. २ आगे करना, स्नेह करना, मित्रता जाना प्रोत्-१ आसनपरसे उठ करना. (१ उ० स्नेहयति-ते) ना, खटा रहना. प्रति-१ देवके स्निग्ध होना. साम्हने हाथ जोडके खडे रहना, स्नु (२ प० स्नोति ) १ भापसे परमेश्वरार्पित होना. वि-१ अरु- टपकना, झरना, चूना. ग खडा रहना, दूर खडा रहना. स्लुच (१आ० स्नोचते ) १. स्वच्छ २थमना, पाट जोहना. व्या-१ करना, निर्मल करना. आजा करना, हुक्म करना. स्तुम् (४ प० स्नुस्यति) १ खाना, सम्-१ अच्छा होना, भरा निगरना. २ ग्रहण करना,लेना. होना. २ पास होना. ३ पूर्ण ३ अदृश्य होना, नही दिखाई होना, पूरा होना. ४ एकमत देना. ४ मुससे बाहर फेंकना, होना. समा-१ करना, आचरण थूकना. - मापार्यसहित । स्तु-स्पृह स्तुद् (४५० स्तुद्याते) ? के कर- (रुट (१०३० स्काटयति-ते ) १ ना, रद्द करना. सलना, मिलना. २ फटना. मे (१५० स्नानयति) १ घेरना. कण्ट् (१५० स्फश्यति ) १गुल स्पन्द (१ आ• स्पन्दते) १ काप ना, पिटना. २फटना. ना, थरयगना.२ जाना. कण्ड (१ प. स्फण्डति, १० प. स्पर्ध (१ आ. सते) १ मत्मा स्फण्टयात) २ विनोद करना, करना, दूसरेकै हितको इच्छा ठट्टा करना करना, दूसरेका भय नहीं कर (६५० स्फगते) १ कापना, थस्यगना, धरुपकाना.२ प्रस्ट चाहना. स्पर्श (१० आ० स्पर्शयते)१ग्रहण होना, प्रसिद्ध होना, जाहिर करना, टेना. २ सयुक्त करना, होना. ३ जाना, जाने लगना. जोटना | स्काय (१० स्फायते)१ माय स्पा (१५० सशति-ते)१ अब होना, स्यूर होना. रोध करना, रोकना. २ प्रसिद्ध फिट (१० उ० फेटपति-त) १ करना, जाहिर करना. ३ एकत्र भाच्छादित करना, वरना २ वरना या दुरा देना. गूथना, गुफित करना. इस स्किट ( २० उफियनि-ते;) ना (१० आ० सागयते)१ बहसार होना, जोरदार होना. रेना.२ सयोग करना, जोटना. २ मार डारना या दुख देना, स्पृ (५५० स्मोति ) १ माक्षग पटा करना ३ रहना, घाम करना, पाटना.२मतुष्ट करना, करना, यमना. ४ देना. सुश करना. ३ जीना. स्कुट ( १ उ. मोति-ने, ६ म्पृम् (६ ५० स्मृशाते) १म्पर्श पम्फुटनि) २ मिना, प्ररहित करता, बना.२मयोग करना, होना (१५. स्फोटनि, १० हाथमे रेना. उप-१ नान कर उ. आम्मोटयनि-त) १ पन. ना, आचमन वग्ना, २पार्शमे रना, छेदना, तोडना, चीग्ना. उपग्ना २ माग्ना या दुमदना स्पृह (२. उः स्पृहयान ) १/रुद्द ( १० ५० म्यान) १ इच्या पाना, पहना. सपमान सपना, अनादरसग्ना.
१२० संस्कृतधातुकोश। आश्चर्य करना स्थ-स्यन् स्फूड (१५० स्फुडति) १ पत्रा- [स्त्र (९ उ० स्वृणाति-स्वृणीते)१ दिसे वेष्टित करना, लपेटना, मार डालना या दुख देना. आच्छादित करना स्मि (१ आ० स्मयते) १ स्मित स्फुण्ट (१५० स्फुष्टात )१ मार- करना, मुसकुराना, मदहास्य ना या दुःख देना. २ छेदना, करना. (१० आ० स्माययते) चीरना, तोडना (१० ५० स्फु. १ अनादर करना, तुच्छ मान ण्टयति) १ ठठ्ठा करना, विनोद ना, तिरस्कार करना वि-१ करना. स्फुण्ड् (१५० स्फुण्डति, १० उ० स्फुण्डयति-ते)१ विनोद करना, | स्मिट ( १० उ० स्मेटयति-ते) १ ठट्ठा करना अनादर करना, तुच्छ मानना। तिरस्कृत करना. स्फर (६ ५० स्फुरति ) हिरना, स्फुरित होना. १ जाना ३ | स्मील् (१५० स्मीति )१ पलम रना ४ सूजना. रगाना, परक मारना. स्फुर्च्छ (१ प. स्फूचीत ) १jस्म (१ प. स्मरात) १ स्मरण फैरना, विस्तृत होना. २ स्म करना, याद करना, २ दुख रण नहीं रहना, भरना या उत्सुक्तासे स्मरण करना. स्प ( १५० स्पूजति) १ मेघ वि-१ भूलना, विस्मृति होना गर्जना होना, गर्जना होना, (५५० स्मृणोति) १ पारन गडगडाना. वरना, सरक्षण करना २ आन- स्फुल् (६५० स्फुरति) १ स्पष्ट दित करना, सुश करना ३ होना. प्रस्ट होना. २ ढेर कर जीना ना, सचय करना ३ हिलना, स्यन्द् (१ आ० स्यन्दते) र टप यापना, स्फुरित होना. पना, झरना, ना.२ सीचना, स्फई (१५० स्फति) १ छाया देना २ जाना. अनु-१ पेलना, विस्तृत होना, २ भू टपरना, झरना, चना. टना, याद नहीं होना. स्यन् ( १० मा. स्यनयते) पूर्व (१५० स्पूनति) १ मेप चितन करना, मनोव्यापार घर- गर्जना होना, गदगटाना. ना, मनमै साना.
मापार्यसहित। १२१ । स्मम्-स्वङ्ग स्व-स्वस्क स्मम् (१ प. स्यमति ) १ शब्द स्वञ्ज (१ आ. स्वझते)१ मालि करना, आवाज करना. (१० गन करना, गले लगाना. ५० स्यमयति, उ० स्मामय-स्वट् (१०५० स्वठयति) १ पूरा ति-ते) चितन करना, मनन करना.२ पूरा नहीं करना. करना, विचार करना. स्वद् (१ आ० स्वदते, १० उ: सङ्घ ( १ आ० सकते) १ जाना, स्वादयति-ते)१ स्वाद लेना, सरकना. चखना. २ तुष्ट होना, खुश स्रम् (१ आ. स्रम्भते) १ वि- होना. ३ आच्छादन करना, श्वास करना, भरोसा रसना. २ ढकना. चकना, भूलना. स्वन् (१ प. स्वनति ) १ शब्द स्रम् (१ मा० नसते)१ गिरना, करना, आवाज करना. २सवा- नीचे गिर पडना, घिसकना, रना, सजाना, अमृत करना, घिसफ पडना. सुशोभित करना.वि- (विष्य निम्म् (१ प. नेभति) १ मार पति) अव-(अरवणति)१ टालना या दुःख देना. सशन्द भोजन करना. निम् (१ प. निम्भति) १ मार स्वप् (२५० स्वपिति ) १ सोना, डारना या दुःस देना. निद्रा लेना. सिव (४५० स्रीव्यति) १ शुष्क | स्वर (१ ५० स्वरात ) १ शब्द होना, सूखना. २ जाना, सर- करना, आवाज करना.२ दोप कना. लगाना, निदा करना. खु (१५० स्रवति) १ जाना, सर-स्व ( १० ५० स्वतंयति ) १ कना. २ टपकना, झरना, आपदस्त होना, २ जाना. चूना. ३ वहना. स्वई ( १ आ० स्वदेते) १ स्वाद सेक (१ मा० सेकते) १जाना. टेना, चरखना. २ आनदी होना. से (१५० सायति) १ पक कर-स्वव् (१ प. स्वाति) १ गाली ना, पमाना. २ पिधारना. देना, सगपना, निदा करना. स्वस्कर ( १ भा० स्वस्थते) १ जाना. . . स्वइ (१० स्वदने)११जाना.
१२२ सस्कृतधातुकोश। साद्-प्वत् प्वक्-हय् स्वाद् (१ आ० स्वादते) १ स्वाद वष्व (१ आ० प्वप्फते) १ ऐना, चखना (१५० स्वादात, जाना, चलना १० प० रवादयति ) १ मधुर ह. होना, मीठा होना सुखदायक (१५० हति) १ प्रकाशित होना (१० स्वादयति) १ आच्छादित करना, ढक्ना. होना, चमकना स्विट् (१ आ० स्वेदते, ४ स्विद्य | हल् (१ ५० हठाते ) १ फुदकना, ति ) १ पमीना छटना २ फुदरते जाना, उड जाना २ छोडना, त्याग करना ३ भूल दुष्ट होना, घातकी होना ३ ना, भ्रात होना ४ चिकना सभमै बाधना, जस्ड बाधना ४ होना जुल्म करना, वलामार करना स्व (१ प. स्वरति ) १ शब्द हद् (१ आ० हदते ) १ मलवि सर्जन करना, शौच करना करना, आवाज करना २ रोगी होना, वीमार होना ३ दुख हन् (२ ५० हन्ति ) १ मार डा देना, पीडा करना, सताना स्ना २ जाना ३ अत करना, सम् १ अच्छा शन्द करना आखिर करना, किसी प्रकार स्वृ (९ उ० स्वृणाति-स्वृणीते) समाप्त करना अभि-१ मुखसे १ मार डारना या दुख देना वजाना नि-परि-१ समूल नष्ट प. करना प्र-१ऊपर रखना २ ष्ठिन् (१ प. ठीवति, ४ प० प्रहार करना, मारना, ठोकना ठीव्यति)१ थूकना प्रति-१ विरुद्ध पक्षमा खडन ठी (१ प. ष्ठीवति) १ थूक्ना करना व्या-१ प्रतिबंध करना, ब्रो (१५० पोणति) १ बटोरना, रोकना सम्-१ हिसा करना, एकत्र करना बधना २ एकत्र करना, बटो प्लोण ( १ प. प्लोणति ) १ रना आ-(आहते) ठोकना, वटोरना, एकत्र करना. मारा वक् (१ जाप्वकते) १ जाना हम्म् (१ प. हम्मति) १ जाना व (१०५ प्वर्नयति) १ जाना हय् (१ प. हयति) १ जाना २ २ आपद्रस्त होना पूजा करना, सेवा करना भाषार्थसहित। १२३ हर्य-हिट हिण्ड्-हुच्छ शब्द करना, आवाज करना. बहुत कारसे जन्म ऐना, उत्पन्न ४ थकना, श्रात होना. होना, पैदा होना. हर्य १५० हयति ) १ जाना. २ हिण्ड् (१ मा हिण्टते) १ घूम इच्छा करना, चाहना. ३ श्रांत ना, भटरना.२ अपमान करना, होना, थकना ४ प्रकाशित अनादर करना तिरस्कार करना होना, चमकना | हिल (६५० हिरति )१ हावभाव हल् (१ ५० हलति) १ जोतना, करना, नसरा करना.२ लीला करना, क्रीडा करना. चासना, हल जोतना. हस्-(१५० हसात ) १ हँसना. हिव् ( १ ५० हिन्नति ) १ तृप्त २ ठट्ठा करना, नर्म करना होना, शात होना. २ तृप्त कर परि-१ परिहास करना, ठट्टा ना, शांत करना हिष्क (१० आ• हिप्कयते) १ मारना. हा ( ३ प० जहाति ) १ छोडना. मारना, दु.स देना २ भ्रमण करना, घूमना. (३ हिंस् (१ प. हिसति, १० उ० आ जिहीते) १ जाना, चलना. हिसयति-ते, ७५०हिनस्ति) हि (५५० हिनोति) १ जाना मारना, वधना, दुःख देना, सताना. २ प्रेरणा करना, भेजना. ३ हु ( ३ ५० जुहोति) १ यज्ञ पर- स्थूल होना, मोटा होना, वढना. ना.२साना, भक्षण परना.३ ४ दुःखी होना. तृप्त करना. ४ भेजना. ५ देना, हिछ (१ उ० हिकाति-ते) १ ग्रहण करना. स्पष्ट शब्द करना. २ हिचकी हुइ (६५० हुदति) १ वटोरना, आना, हिचकिय टेना. (१० एकत्र करना. (१५. होडति) प० हिकयति ) दुस देना, १जाना. सताना. हुण्ड् (१ प. हुण्डते) १ वटोर- हिद् (१५० हेटात ) १ गाली ना, एकत्र करना. २ मान्य देना, निदा करना, आत्रोश करना, कबूल करना. ३ टेना परना (९५० हिदणाति) हुर्छ (१ ५० हुन्छति) १ मन योग्य कारके होने के पश्चात् तया कृतिसे यक होना. २टि , संस्कृतधातुकोश। पना. ३ दवे पार्यो भाग जाना, हटना.४ ठगना. हुल् (१ प. होलति) १ जाना. २ हिंसा करना, मार डालना, बधना. ३ आच्छादित करना, ढकना. हूड ( १ हूडति ) १ जाना, सरकना. ह ( १ उ० हरति-ते ) १ ले जाना, पहुंचाना.२ रेना, ग्रहण करना, ३ नष्ट करना. ४ चोरी करना, चुराना, मसना. अनु- १ अनुकरण करना, यथाप्रति करना, दूसरेकासा करना. अप- १ ले जाना. २ पीछे फेंकना, हटाना. ३ चोरी करना, चुराना. अभि-१ हल्ला करना, मार पीट करना. अभ्या-१ तर्क वितर्क करना, वाद करना, शुद्धाशु- द्धका विचार करना. अभ्युत्- १ देना, अर्पण करना. अभि- व्या-१ उच्चारण करना. अव- १ पुनः सपादन करना, फिर प्राप्त करना.२ शासन करना, दड देना. उत्-१ उपर लेना, उद्धार करना.२ देशसे निकाल देना. उदा-१ कहना, २ दृष्टांत- पूर्वक स्पष्ट करना, उदाहरण- पूर्वक कहना. उप-१ देना. २ समीप लाना. उपसम्-१रखना, नहीं देना. २ सिकोडना, समे- टना. ३ समाप्त करना, तमाम करना. नि-१ ठिहरना, जमना. निर-१ अपमान करना. निरा- १ उपवास करना, विनी आहा- रके रहना, भूखा रहना. परि-१ गाली देना, सरापना, निंदा करना. २ छोडना, त्याग कर- ना. ३ रोकना. ४ सार या तत्त्व निकालना. प्र-१ प्रहार करना, मारना, ठोंकना. प्रति- १ नजर रखना. प्रत्या-१ इद्रि- यदमनपूर्वक ध्यान करना. प्रति सम्-१ छोडना, त्यागना.२ अप्रतिष्ठा करना. वि-१ क्रीडा करना, विलास करना, खेलना. व्या-१ बोलना, कहना. व्यव-१ उद्योग करना, धधा करना. २ वाद बखेडा आदि करना. सम्-१ मार डालना, जानसे मारना.२ समेटना, सिकोडना. ३ नष्ट करना.४ बटोरना.समा- १ एकत्र करना, चटोरना.समभि- व्या-१ एक मतसे या सम्मातिसे योजना करना या रचना, युक्ति निकारना, सयोजन करना. समुदा-१ कथन करना,कहना. समुप-१ एकब करना. २ देना. संप्र-आ० १ युद्ध करना, लडाई - मापार्यसहित। हृणी-होड् गु-होड् करना, लटना. व्यति-आ. (१ होडते )१ अवमान करना, एफमतसे चोरी करना. अनु तिरस्कार करना. आ० १ परपरागत व्यवहारका द्रु (२ आ. हुते ) १ छिपाना, सेरन करना.(३ प० जहर्ति) १ टुकाना. २ चुराना, लेजाना, बलात्कार करना, जुल्म करना. दवालेना.मा-नि-१छिपाना, हणी ( ११ आ० हणीयते)१ झुकाना. शरमाना, रजित होना. २ झल् (१ प. हलति) १ कांपना, क्रोध करना, गुस्सा करना. थरथराना. हृप् (४ प० हृप्यात )१ हृष्ट होना, हर (१५० गति) १ ढक्ना, सतुष्ट होना, सुशहोना.(१५० भाच्छादित करना, रपेना. हपति ) १ झूठ बोलना, मिथ्या हप् (१० उ० हापयति-ते) १ बोलना. स्पष्ट बोलना. हेट् (१ आ० हेटते ) १ प्रतिरोध हस् (१ हसति) २ शब्द करना. भावाज करना. २ कम होना, परना, रोक्ना. अल्प होना. हेर ( २५० हेठति) १ रोकना. हाद् (१ आ हादते) १ अस्पष्ट २ निठुर होना, फूर होना. शब्द करना. हेड् (१ प. हेडति ) १ घेरना, ही (३५० जिलेति) १ रजित घेष्टित करना, सपेटना. (१५० हेडते ) १ अवमान करना, हो ( १ १० हीच्यत्ति) १ तिरस्कार करना. शरमाना, रन्जित होना हेद (९५० हेदणाति) १ जन्म हुइ (१५० टुडति) १ बोरना. देना, उत्पन्न करना, पैदा करता हूइ (१५० दति) १ भोग्ना. २ २शुद्ध करना, पवित्र करना. सरफ्ना. योग्य काल होने के याद बहुत हेप (१ मा दयते ) १ हिनहि. यारमे उत्पन होना माना. हेप (१मा हेपते) हिनहिनाना. होह (१ प. द्रौटाते ) १ जाना, होइ (१५० होडात) १ जाना. सरसना होना, शरमाना. जाना,
१२६
सस्कृतधातुकोश।
लग-हल
हर (१ प० हगाति) १ आच्छा भ्रात होना, मोहित होना,
दित करना, ढकना, लपेटना घबराना
हा (१० प० हायति) १ स्पष्टो ह (१५० हरयति) १ वक होना,
चारण करना २ बोलना टेदा होना, बाका होना
स् (१ ५० हसति) १ शब्द हे ( १ उ० ह्वयति-ते) १ बुलाना,
करना, आवाज करना
पुकारना २ नाम लेना, नाम
हाद् (१ आ० हादते ) १ सतुष्ट
लेके पुकारना, हाक मारना
होना, खशहोना २सतष्ट करना,
३ मागना ४ युद्धके लिये बुला
खुश करना ३ वाद्यके सरीखा
ना, रडाई मागना ५ बरावरी
शब्द करना
करना, स्पर्धा करना ६ लडाई
करना. ७ शब्द करना,आवाज
हल (१५० हलति, १० प० हुल करना उप-नि-वि-सम्-
यात) १ कापना, थरथराना २ आ- आ० युद्धके लिये बुराना
MRAAM
इति
भाषार्थसहित
संस्कृत धातुकोश
समाप्त।
धातुरूपायलि। १२७ धातुरूपावलि। क्रियायोधक भू स्था आदि शब्दोंको धातु कहते हैं और धातुके उत्तर जो विभक्ति उसे तिइ कहते हैं इसलिये क्रियाबोधक पदको तिडन्त कहते हैं क्रिया सामान्य रीतिसे छः प्रकारको होती हैं. १ वर्तमान, २ परोक्ष अतीत भूत, ३ सामान्य भूत, ४ अनद्यतन वा चिरकालीन भविष्यत्, ५ सामान्य भविष्यन् और ६ हेतुभविष्यत्. वर्तमान जो समय बीत रहा है. जैसे-अहम् पश्यामि-मैं देख रहा हु. परोक्ष अनीत भूत जो समय विना देरी बीत गया. जैसे-सः बभूव- यह हुआ था पर देसा नही. सामान्य भूतजो होगया. -स ऐधिष्ट-वह बढा. अनद्यतनभविष्यत् जो देरसे होगा. जैसे-सः गन्ता-यह जायगा. हेतुभविष्यत् यदि यह होगा तो यहभी होगा. जैसे-घेव सुदृष्टिः अभवत् तदा सुभिक्षमभवत्-यदि अच्छी वर्षा होगी तो सस्ता होगा प्रथम सब धातुओंसे नव लकार लटू लिटू लुट् लट् लोट् लड् लिङ सुइ लड् ये आते हैं वर्तमान काल वोध करनेके रिये लट् लकार, भूत अनद्यतन परोक्ष कार पोध करनेके रिये रिट्, भविष्यत् अनद्यन काल वोध करने के लिये लुटू, प्रेरणा अथवा आशीर्वाद अर्थ बोधके लिये लोट् , अनद्यतन भूत काल बोध करनेके लिये रइ, प्रेरणा अथवा आशीर्वाद भर्य गेध करने के लिये लिइ, केवल भूत काल बोध करनेके लिये लुड और हेतुभविष्यत् काल और क्रियाकी सिद्धि बोध करनेके लिये लद लकार आता है. उक्त लकारोंक स्थानमें परस्मैपद तथा आत्मनेपद नामक ति आदि प्रत्यय आते हैं अर्थात् परस्मैपदी धातुओंसे परस्मैपदके और आत्मनेपदी धातुओंस आरमनेपदके और उभयपदी धातुमासे उभय पदके प्रत्यय भाते हैं. दोनों पदोमें ति आदि तीन २ विभक्तियाँकी क्रमसे प्रथम, मध्यम और उत्तम संज्ञा होती है. युष्मद् भस्मद् शब्दको छोडकर यदि अन्य रा ग्ह तो धातुसे प्रथमपुरष होता है, युष्मद कर्ता रहते मध्यम पुस्प और अस्मद् कती रहते उत्तमपुरष होता है. सः गच्छति-मह जाता है. त्वम् गच्छसि- - 1.स.धा.
१२८ धातुरूपावाले। तू जाता है अह गच्छामि-मैं जाता हू जब धातुसे लडू लुड् लड् लकार आते है तो स्वरादि धातुओंके आदिमें आ और सामान्य धातु औके आदिमे अलगाया जाता है क्रिया दो प्रकारकी होती है सकर्मक और अर्मक, जो क्रिया कर्मसहित रहे उसे सकर्मक कहते है जैसे- गुरु शिष्यमुपदिशति-गुरु शिष्यको उपदेश करता है जिन क्रियाओंमें कर्म पद नहीं रहता उसे अर्मक क्रिया कहते है यथा-शिशु शेते-बाल क सोता है अह तिष्ठामि-मै स्थित हू अश्वो धावति-घोडा दौडता है धातुआका वर्ताव दश गणोमे है उनके नाम तथा व्यवस्था भ्वायदादी जुहोत्यादिर्दिवादिः स्वादिरेव च ॥ तुदादिश्च रुधादिश्च तनत्यादिचुरादयः ॥ १॥ १ पहिरा गण भ्वादि, २ अदादि, ३ जुहोत्यादि, ४ दिवादि, ५स्वादि, ६ तुदादि, ७ रुधादि,८ तनादि, ९ क्यादि और १० चुरादि धातु और तिइके बीचमैं जो प्रत्यय आते हे उन्हें विकरण कहते है यथा भ्वादिगणपठित धातुओंसे अ विवरण होता है, अदादि गणी धातु विररणरहित है, जुहोत्यादिगणपठित धातु विकरणरहित है, पर धातुरो द्वित्व हो जाता है, दिवादिगणपठित धातुसे य, स्वादिगणपठित धातसे नु, तुदादिगणपठित धातुसे अ, रुधादिगणपठित धातुओंसे न, तनादिसे उ, स्यादिगणपठित धातुसे ना और चुरादिगणपठिन धातुभासे भयय विवरण होते है, उक्त सय विकरण लट् लोट् रइ और विधिलिद स्कार परभे रहते होते है और स्कारों में नहीं सरर्मक धातुओंसे कर्म तथा कर्तामे र आदि प्रत्यय आते हैं, याद कर्ता कारकम प्रयमा विभक्ति और धर्म कारक्में द्वितीया विभक्ति रहे तो उस वाक्यको कर्ट याचा प्रयोग कहते है जैसे-कुम्भकार घट क्रोति-कुमार घट पनाता है पर्नुपाच्य प्रयोग कर्ताका जो वचन होता है वही क्रियासाभी होता है अर्थात् फ्तत एर वचनान्त होनेस क्रियाभी एक वचनान्त होती है और वत्ती द्विवचनान्त होनसे क्रियाभी द्विवचनान्त होती है, कर्ता बहुवचनान्त होनेसे नियाभी पहुवचनान्त होता है शिशु पुस्ता पठति- बारक पुस्तर पढता है शिशू पुस्ता पठत -दो नारक पुस्तक पढते है शिशा पुस्ता पठन्ति-बारर लोग पुस्ता पढन है कुम्भकारो घर परोति कुमार पट बनाता है कुम्भकारी घर पुस्त-दो गुह्मार घट बनाते हैं कुम्भारा घट कुर्वन्ति युझार रोग घट बनाते हैं.
서 धातुरूपावार। लट् आदि लकारोंके स्थानमें होनेवाले परस्मैपदी ओर आत्मनेपदी प्रत्यय. लट् (वर्तमानकाल ). परस्मैपदी प्रत्यय. आस्मनेपदी प्रत्यय. हि. व पु ए. हि. ब प्र ति तम् अन्ति प्र ते आते अन्ते,भते म सि थस् य म से आये थे मि बस् मस् उ ए वहे महे लड़ (अनद्यतनमूतकाल ). त् ताम् भन् प्र त माताम् अन्त, अन म स् तम् त म थास् आयाम् ध्वम् अम् व म उ वहि महि लिद (परोक्षानद्यतन भूतकाल ). अतुस् उस् आते हरे म य अथुम अ म से आये चे म व म उ ए वहे महे लुइ ( सामान्य भूतकाल ). तु ताम् अन् R त आताम् अन्त, मत स तम् त थासू माथाम् ध्वम् मम् व म वहि महि लट् (अनद्यतन भविष्य ). प्र. डा(मा) रों रम् प्र. डा(आ) रौ म सि आये खे मि वस् मस् पहे लट् (मामान्य मविप्य). ति तस् अन्ति भाते अन्ते, भते म सि यस् थ आये चे मि बस् मस् ए वहे महे उ प म उ थस् थ उ उ धातुरूपावलि। लोद ( आज्ञार्थ). प्र. तु,तात् ताम् अन्तु प्र. ताम् आताम् अन्ताम्, भताम् म. हि, तात् तम् त म. स्व आथाम् यम् उ. नि व म उ. ए वह मह लिङ् (शक्यार्थ आदि). प्र. व ताम् उस् त आताम् रन् म स् तम् त म. थास् आथाम् ध्वम् उ. आम् व म उ. इ वहि महि लड् (संकेतार्थ ). प्र तू ताम् भन् प्र त आताम् अन्त, अत म. तम् त म. थास् आथाम् ध्वम् इ वहि महि प्रथमगणस्थ परस्मैपदी गद् ( वोलना ) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. पु. एक्वचन. द्विवचन. बहुवचन. प्र. स. गति ते गदन्ति लट्- म स्व गदसि युवां गदयः यूय गद्य उ. मह गदामि आवो गदाव. वय गदाम. प्रस' जगाद तो जगदतु. लिट्- म व जगदिय युवा जगदयः यूय जगद उ. अह जगद,जगाद आया जगदिव वयं जगदिम प्र. सः . गदिता तो गदितारी ते गदितारः लट्- म व गदिताास युर्गा गदितास्थः यूय गदितास्थ उ अह गदितास्मि भावा गदितास्व' घयं गदितास्मः प्र. स. गदिप्यति ती गदिप्यत ते गदिप्यन्ति लट्- म ल गदिष्यसि युवा गदिप्यय. यूप गदिप्यय उ. अह गदिष्यामि आवां गदिप्याघ. वय गदिप्यामः तो गदत ते जगदु. .
आवर्या गदाय ते गदन्तु यूयं गदत क्यं गदाम ते अगदन यूयं अगदत यय अगदाम ते गदेयुः आवां अगदान धातुरूपावाल। प्र. सः गदतु,गदतात् तो गदताम् लोट- म. व गद, गदताद युवा गदतम् उ. भह गदानि प्र. सः अगदत् तो अगदताम् लक-म. व अगदः युवा मगदतम् उ. अह अगदम् प्रे० प्र. सः गदेव तो गदेताम् लिइ-म व गः युवा गदेतम् यूय गदेत उ. मह गदेयम् आवां गदेव वय गदेम आ. प्र. सः गद्यात् तो गद्यास्ताम् ते गद्यासुः लिङ्ग-- म. त्व गद्याः युवा गद्यास्तम् यूय गद्यास्त उ. मह गद्यासम् भावा गयास्त्र वय गयाम्म प्र. सः अगदी तो अगदिष्टाम् ते अगदिपु. भगादी अगादिष्टाम् अगादिनः द- म. व अगदीः युवा मगदिष्टम् यूय अगदिष्ट अगादी अगादिष्टाम् अगादिर उ. अहं अगदिपम् आवा अगदिप्व पय अगदिम अगादिपम् अगादिप्य अगादिष्म प्रस: अगदिप्यत् तो अगदिप्यताम् ते अगदिप्पर सा-म. वं भगदिप्यः यु अगदिप्यतम् यूय अगदिप्पत उ. मह अगदिप्यम् आर्या भगदिष्याव वय अगदिप्याम प्रथमगणस्थ आत्मनेपदी बाध ( वाधा काना) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. प्रस: वाचते तो माते ते याचन्ते लद- म. सं वापसे युवा माधेये उ. भहं बाधे भाषा बाधायहे वयं पाषामहे यूय भाषणे धातुरूपावारे । प्र सः बबाधे बबाघाते ते बबाधिरे लिद- म. स्प यवाधिपे युवा बवाधाथे यूय बबाधिदे उ. अह बवाधे आवां बबाधिवहे षय बबाधिमहे प्र. सः बाधिता तो बाधितारौ ते बाधितारः लद्र-म त्व घाधितासे युवा बाधितासाथे यूय बाधिताध्ये उ. मह वाधिताहे आव बाधितास्वहे वय बाधितास्महे प्र. स. वाधिष्यते तो बाधिष्येते ते वाधिष्यन्ते सृद्-म. स्व बाधिष्यसे युवा बाधिष्येथे यूय बाधिष्यध्वे उ. भह बाधिष्ये आर्या याधिष्यावहे षय बाधिष्यामहे प्र. सः बाधा तो बाधेती ते बाधन्ताम् लोट- म स्व वाधस्व युवा बाधेया यूय बाधष उ अह बाधे आवा याधावहै वय वाधामहे प्र.स अबाधत तो अबाधेता ते अबाधत 5- म. स्व भवाघेथा युवा अबाधेयां यूय अवाधक्ष्य ७ अह अयाधे आवा अबाधापहि षय भवाधामहि मे० प स वाधेत तो बाधेय़ाता ते बाधेरन् लिडू-म. व बाधेथाः युवा बाधेयार्थी उ मह बाधेय आवो बाधेवहि षय बाधेमहि प्रस' स्वाधिषीष्ट तो बाधिपीयास्ता ते बाधिषीरन् माशी-म श्य साधिषीष्ठाः युवा याधिषीमास्था यूय माधिषीय जिंकून इ. भह बाधिषीय माता बाधिषीवहि वय वाधिषीमहि प्र स. अबाधिष्ट तो भवाधिपातां ते अवाधिषत लह- म त्व अबाधिष्ठा' युवा अवाधिषार्थी यूय अवाधिदम उ. अह भवाधिषि आवा अवाधिष्वहि वय अवाधिष्माह प्रसः अवाधिष्यत तो अवाधिष्येतो ते अवाधिष्यन्त ला-म. व अवाधिप्ययाः युवा अवाधिष्येयां यूय अवाधिस्मध्व उ. अहं भवाधिध्ये आवो अबाधिप्याषहि यय अबाधिष्यामाह यूय माधेय ते हरन्ति तो हरतः युवा हरथः आवा हराया तो जहनुः युवा जयः वय हरामः ते जगुः . धातुरूपावलि । प्रयमगणस्थ परस्मैपदी ह ( हरण करना) धातुके लद् आदि दश लकारोंके रूप. प्र. सः हरति लट्- म त्व हरसि यूय हरथ उ. मह हरामि प्र. स' जहार सिट्- म. व जर्थ यूय जह उ. मह जहार, जहर आर्या जहिव वय जाहम प्र. सः हर्ता तौ हत्तीरो ते हरिः लट्- म. व हासि युवा हर्त्तास्यः यूय हत्तीस्थ उ. अहं हर्तास्मि आवा हत्तीस्वः वय हर्तास्मः प्र. सः हरिप्यति तो हरिष्यतः ते हरिष्यन्ति सद- म त्व हरिप्यसि युवा हरिष्यथः यूय हरिष्यथ उ. अह हरिष्यामि आवा हरिप्यावः षय हरिष्यामः प्र सः हरतु, हरताप्त तौ हरताम् गेटू- म. स्व हर, हरता युवा हरतम् यूय हरत उ. अह हराणि षय हराम प्र. सः अहरत तो अहरताम् भहरः युवा भहरतम्. यूय महरत ज. अह अहरम् घय अहराम प्रे० प्र. सः हरेत् तौ हरेताम् ते हरेयुः पि-म. स्व हरेः युवा हरेतम् उ. अह हरेयम् आषा हरेव वय हरेम आशी अ. सः हियात् तौ हियास्ताम् ते हियामः सिंह- म. त्य ह्रियाः युवा ह्रियास्तम् यूय हियास्त उ. अह ह्रियासम् आवां ह्रियास्व षय हियास्म आवां हराव ते अहरन् हा- म. स्व आवां भहराव यूय हरेत यूय अहार्ट धातुरूपावाले। प्र म अहात् तो अहाम् ते अहापु लड्- म व अहार्षी युवां अहार्टम् उ अह अहार्षम् आवा अहार्य वय अहार्म • प्र स अहरिष्यत् तो अहरिप्यताम् ते अहरिप्यन लड्- म स्व अहरिष्य युवां अहरिप्यतम् यूय अहरिप्यत उ अह अहरिष्यम् आवा अहरिप्याव वय अहरिप्याम प्रथमगणस्थ आत्मनेपदी ह ( हरण करना) धातुके लट् आदि दश लकारोके रूप. तो हराते ते हरन्ते लट्- युवा हराथे यूय हरध्वे यूय हताध्ये प्र स हरते - म त्व हरसे उ अह हरे प्र स जने लिट्- म त्व जह्निपे उ अह जड़े प्र स हर्ता लद्- म स्व हर्तासे उ अह हताहे प्र.स हरिष्यते ल-म व हरिप्यसे रष्ये हरताम् लोद्- म त्व हरस्व उ अह हरिप्ये प्रस अहरत तस्- म व अहरथा उ अह अहरे आवां हरावहे वय हरामहे तो जताते ते जहिरे युवा जहाथे यूय जहि। आवा जविहे वय जह्निमहे तो हर्तारी ते हार युवा हर्तासाथे आवा हस्विहे वय हर्तास्महे तो हरिष्येते ते हरिष्यन्ते युवा हरिप्येते आवा हरिष्यावहे वय हरिष्यामहे तो हरेताम् ते हरन्ताम् युवा हरेथाम् यूय हरयम् आवां हरिष्यावहि वय हरिष्यामहि तो अहरेताम् युवा अहरेथाम् यूय अहरध्वम् आवां अहरावाहि वय अहरामहि यूय हरिप्यध्वे उ अह ते अहरन्त धातुरूपायलि मे० प्र. सः हरेत तो हरयाताम् ते हरेरन् लिइ- भ. त्व हरेयाः युयो हरेयाथाम् यूय हरेध्यम् उ. मह हरेय आवा हरेवहि वय हरेमहि बाशी-प्र. सः हृषीष्ट तो हपीयास्ताम् ते हपीरन लिङ्- म त्य हृपीठाः युएँ हपीयास्थाम् यूय हृषीध्वम् उ अह हपीय आवां हृपीवति वय हृपीमहि प्र. स अहत ती अहपाताम् ते अहपत लड़- म. व अहष्टाः युवा अहृपाथाम् यूय महध्वम् उ. अह अहाप आवो अहृष्यहि वय अहष्महि प्र स' महरिप्यत तो अहरिप्येताम् ते अहरिप्यन्त ला-म त्वं अहरिष्ययाः युवा अहरिप्येयाम् यूय अहरिष्यध्वम् उ. अह अहरिप्ये आयां अहरिप्यावहि वय महरिष्यामाहि द्वितीयगणस्थ परस्मैपदी अद् (खाना) धातुके लद् आदि दश लकारों के रूप. प्र. स. अत्ति तो अत्त युवा अत्यः यूय अत्य उ. अह अनि आवां अहः वय अद्मः प्रस: जपास म व जयसिय युवा जक्षथुः यूय जक्ष लिट्- उ. अह जघास,नपस आ जक्षिय षय जक्षिम प्रसा आद तो आदतु' म व आदिथ युवाँ आदथुः यूय आद उ अह आद आवो आदिव यय आदिम प्र. सः अत्तु, भत्ताद तो अत्ताम् कोट्- म स्वं भद्धि, अत्तात् युवा अत्तम् यूय अत्त उ. अह अदानि वय अदाम ते अदन्ति लट्-म व भारिस तो जक्षत ते जनः ते आदुः ते अदन्तु आषां अदाव ते आदन् ते भय धातुरूपावाले। प्र.स आदत तो आत्ताम् सह- म व आद युवा आत्तम् यूय आत्त उ अह आदम् आवां आद वय आध प्रस अद्यात् तो अद्याताम् लिङ्-म व अद्या युवा अद्यातम् यूय अद्यात उ अह भयाम् आवा अद्याव घय अद्याम अत्ता तो अत्तारौ ते अत्तार लट्- म त्व अत्तासि युवा अत्तास्थ यूय अत्तास्थ उ अह अत्तास्मि आवां अत्तास्व वय अत्तास्म प्रस अरस्यसि तो अत्स्यत ते भत्स्यन्ति कद-म स्व अरस्यसि युवां अत्स्यय यूय अत्स्यथ 1 अह अत्स्यामि आवा अत्स्याव वय अत्स्याम अद्यात् तो अद्यास्ताम् ते भयास माशी-म व अद्या युया अवास्तम् यूय अद्यास्त लिंक- अह अवासम् आवा अद्यास्व वय अद्यास्म अषसत् अघसताम् ते अघसन् लह-म व अघस युवाँ अघसतम् यूय अघसत उ अह अघसम् भार्वा अपसाव वय अघसाम प्रस आत्स्यत् तो आत्स्यताम् ते भारस्यन् :-म व आत्स्य युवा आस्त्यतम् यूय आरस्पत उ अह आरस्यम् आवो आस्थाव वय आत्स्याम द्वितीयगणस्थ आत्मनेपदी शी (सोना) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. शेते तो शयात ते शेरते लट्- म व शेषे यूर्वा शयाथे अह शये आवा शेवहे वय शेमहे तो यूय शेवे + धातुरूपावाल। १३७ प्र. सः शिश्ये तो शिश्याते ते शिश्यिरे लिट्- म. वं शिशीपे यूवा शिश्याये यूय शिशीढ़े उ. अहं शिश्ये आवा शिशीवहे वय शिशीमहे प्र. सः शयिता तो शयितारी ते शयितारः लद- म. स्वं शयितासे युवा शयितासाथे यूयं शयिताध्ये उ. अहं शयिताहे आवा शयितास्महे वयं शयितास्महे प्र. सः शयिष्यते तो शयिष्येते ते शयिष्यन्ते द्- म. स्वं शयिष्यसे युवा शयिष्येथे यूय शयिष्यध्ये उ. अहं शयिष्ये आवा शयिष्यापहे वयं शयिप्यामहे म. सः शयताम् तो शयेताम् ते शयन्ताम् लोद- म. त्वं शयस्य युर्पा शयेथाम् यूय शयध्वम् उ. महं शयै मायां शयायहै वयं शयामहे म. सः अशयत तो अशयेताम् ते अशयन्त ला- म. त्वं भशयथाः युषां अशयेयाम् यूयं अशयध्वम् 8. अहं अशाप आया अशयावहि वयं भशयामाह तो शयेयाताम् ते शयेरन् प्रे० म. न शयेयाः युवा शयेयायाम् पूर्य शयेध्वम् लिह-र. महं शयेय भाषा शयेयहि वयं शयेमहि मा. प्र. सः शयिशीष्ट तो शयिशीयास्ताम् ते शयिशीरन् लिए-म. स शयिशीष्टाः युषो शयिशीयास्याम् यूयं शयिशीध्वम् उ. अहं शयिशीय मावा शयिशीपहि वय शपिशीमहि म. सः अशयिष्ट तो अशयिषाताम् ते अशयिपत बर- १. स्वं भशयिष्टाः युवा सशयिपायाम् यूयं मशयिध्वम् उ. मह भशयिपि आधा अशयिष्यहि वय अशयिप्महि प्र. सः अशयिप्पत तो मशयिध्येताम् ते भशयिष्यन्त म. वं अशयिष्ययाः युवा अशयिप्पेयाम् यूपं नशयिष्याम् ख. महं भशयिष्ये भाषां भशपिप्यापहि वर्ष मशयिष्यामहि म, सः शयेत + यूय विष्ट धातुरूपावलि । द्वितीयगणस्थ परस्मैपदी विष् ( द्वेष करना) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. प्र. स. द्वेष्टि तो द्विष्टः ते हिपन्ति लट्-.म. व देक्षि युवा द्विष्ठः उ. अहं देष्मि भावां द्विप्वः वयं द्विष्मः प्र. सः दिद्वेष तो दिद्विषतुः ते दिदिषुः लिट्- म. व दिवेषिय युषां दिद्विषयः यूयं दिविष उ. अह दिद्वेष आवां दिविषिष वय दिद्विपिम प्र. सः द्वेष्टा तो बेटारी ते दृष्टारः द- म. व वेष्टासि युष द्वेष्टास्थः यूय द्वेष्टास्थ उ. अह द्वेष्टास्मि आवो देष्टास्वः वयं दृष्टास्मः प्र. सः द्वेक्ष्यति तो हेक्ष्यतः ते द्वेक्ष्यति लद- म. त्य द्वेक्ष्यसि युवा द्वेक्ष्यथः यूयं द्वेक्ष्यय उ. अह द्वेक्ष्यामि आवां वेश्यावः घय द्वेक्ष्यामः प्र सः टेष्ट, द्विष्टात् तो द्विष्टा ते द्विषन्तु लोद- म. त्वं हिट्ठि, द्विष्टात् युवा द्विष्ट यूयं द्विष्ट उ. अह देपाणि आव देपाव वर्य द्वेषाम प्र. सः अद्वेट् तो अविष्ट ते महिपन लड्- म. व अद्वेट् युवा अद्विष्ट यूय अद्विष्ट. उ. अह अद्वेष आवां अद्विप्य वयं मद्विष्म प्रे० प्र. सः द्विप्यात् तो द्विपाता ते द्विप्युः लिङ्-म. त्व द्विप्याः युयर्या द्विप्यात यूर्य द्विप्यात उ. अह द्विष्या आवां द्विष्याव षय द्विप्याम आ० प्रसः द्विप्यात् तो द्विप्यास्ता ते द्विप्यासः लिङ्ग-म. त्वं द्विप्याः युवा द्विप्यास्तं यूयं द्विप्यास्त उ. अहे द्विप्यासं माया दिप्यास्व ययं द्विष्यास्म धातुरूपावलि । १३९ अद्विाद तो अद्विक्षता ते सद्विक्षन लह- म त अद्वितः युवा अद्विक्षत यूय अहिक्षत उ मह अद्विक्ष आवा अद्विक्षाव क्य अडिक्षाम प्र.स अद्वेक्ष्यत् तो सत्यता ते अद्वेक्ष्यन् लङ्-म व अद्वेत्य युवां भक्ष्यत यूय भवेक्ष्यत उ. अह अद्वेक्ष्य आवा अवेक्ष्याब वय महेश्याम द्वितीयगणस्थ आत्मनेपदी विप् (द्वेष करना) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. द्विष्ट तो द्विपाते ते द्विपते ल्ट- म त्व विक्षे युवा द्विपाथे यूय हिडे उ. अह दिपे आवां द्विप्वहे वय द्विप्महे प्र स दिद्विप तो दिद्विपाते ते दिद्विापरे लिद- म त्व दिद्विपिपे युवा दिद्विपाथे थूय दिद्विपिध्वे उ अह दिद्विपे आवां दिद्विपिबहे षय दिहिपिमहे प्रस द्वेष्टा ती द्वेटारी लूट- म त्व द्वेष्टासे युवा दृष्टासाथे यूय द्वेष्टा उ अह द्वेष्टाहे आवा वेष्टास्वहे वय द्वेष्टास्महे प्र स द्वेक्ष्यते तो द्वेक्ष्येते ते द्वेक्ष्यते लद्- म त्व द्वेक्ष्यसे युवा द्वेक्ष्येथे यूय द्वेक्ष्यध्वे उ अह द्वेक्ष्ये भावा द्वेक्ष्यावहे वय द्वेक्ष्यामहे द्विष्टा तो हिपाती ते द्विपता बोट्- म व द्विश्व युवा द्विपाथर्या यूय हिट्स उ मह पे भाषा उपायह चप द्वेषामहै अद्विष्ट तो अद्विपाता ते अद्विपत लद्- म त्य अहिष्ठा युवा अद्विपाथा यूय अद्विद्ध उ मह अद्विपि आवो अद्विप्वहि वय भदिप्महि ते द्वष्टार धातुरूपावाल। प्रस द्विपीत तो द्विपीयाता ते हिपरिन् प्रे० म व द्विपीथा' युवा द्विपीया यूय द्विपीध्व लिइ-उ अह द्विषीय आवां द्विपीवहि वय द्विपीमहि प्र.स द्विक्षीष्ट तो विक्षीयास्तां ते द्विक्षीरन् आ० म व विक्षीष्ठा युवा दिक्षीयास्या यय विक्षीध्व लिङ्-उ अह विक्षीय आवां विक्षीवहि वय विक्षीमहि आदिक्षत तो अद्विक्षाता लुड्- म. व अद्विक्षया युवां अद्विक्षाता उ अह अद्विक्षि आवां अद्विक्षावहि प्र.स अद्वेक्ष्यत तो अद्वेक्ष्येता लइ-म त्व अद्वेक्ष्यथा युवां अवेक्ष्येया उ. अह अवेक्ष्ये आवो अद्रेक्ष्यावहि ते अद्विक्षन्त यूय अद्विक्षध्व वय अद्विक्षामहि ते अद्वेक्ष्यन्त यूय अद्वेक्ष्यध्व वय अद्वेक्ष्यामाह तृतीयगणस्थ परस्मैपदी हा (त्यागना) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. जहाति ते जहति लद्- म व जहासि यूय जहिथ तो जहित जहीत युवा जहिय जहीथ आवां जाहिर जहीय उ अह जहामि वय जाहिम जहीम तो जहतु युर्या जहयु यूय जह प्र स जही लिट्- म व जहिय जहाय उ अह जही आवा जाहिर वय जाहिम ते जहत आवां जहाव धातुरूपावलि । प्र, सः जहातु तो जहिताम् जहितात् जहीताम् जहीतात् लोद- म. व जहादि युवा जहितम् यूय जहित जहि (ही) हि जहीतम् जहीत जहि (ही) तात् उ. अह जहानि वय जहाम प्र स अजहात् तो अजहाताम् ते अजहुः लट्- म त्व. अनहाः युगो अजहातम् यूय अजहात उ. अह अजहाम् आवां अजहाव वय अजहाम प्रसः जह्यात तो जह्याताम् ते जयुः प्रे० म. त्व नद्याः युर्गा जह्यातम् यूय जह्यात लिङ-उ. अह जह्याम् आवा जद्यार वय जह्याम प्रस' हाता तो हातारी लट्- म त्व हाताति युवा हातास्थः यूप हात्तास्थ उ. अह हातास्मि वय हातास्मः प्र. स. हास्यति ते हास्यन्ति लट्- म. व हास्यसि युवा हास्यय. यूय हास्यय उ. अह हास्यामि आवां हास्याव. वय हास्यामः प्र. सः हेयात् तो हेयास्ता ते हेयासु आशी-म. व हेया. युवां हेयास्त लिङ्ग उ. मह हेयास आव हेयास्त्र वय हेयास्म प्र. सः अहासीत् ती अहास्तां ल-म. व अहासीः युवा अहास्त यूय अहास्त उ अह अहासिप आवां अहास्व वय अहास्म म सः अहास्यत् तो महास्यता ते महास्यन् लङ्- म ल महास्यः युवा अहास्यता यूय महास्यत उ. अह अहास्य आवां महास्याव वय अहास्याम ते हातार आवां हातास्वः तो हास्यत. यूय हेयास्त ते अहासु.
ते हातार यूय हाताध्ये २४२ धातुरूपावाले । तृतीयगणस्थ आत्मनेपदी हा (जाना) धातुके लद आदि दश लकारोंके रूप. प्र. स जिहीते तो जिहाते ते जिहते लट्- म व जिहीपे युवा जिहाये यूय जिहीध्ये उ अह जिहे आव जिहीवहे घय जिहीमहे प्र. स जहे तौ जहाते ते जहिरे लिद-म व जहिये युवां जहाथे यूय जहिध्ये उ अह जहे आवां जहिवहे वय. जहिमहे प्र. स हाता तो हातारी लट्-म व हातासे युवा हातासाथे उ अह हाताहे आवां हातास्वहे घय हातास्महे प्र स हास्यते तो हास्येते ते हास्यन्ते लट्- म व हास्यसे युवा हास्येये यूय हास्यवे उ अह हास्ये आवां हास्यावहे वय हास्यामहे प्र. स जिहीता तो जिहाता ते जिहता सोद- म व जिहीप्ष युषा जिहार्या यूय जिहीव उ. अह जिह आयो जिहावहे षय जिहामहे प्र स अजिहीत तो अजिहीता ते अजिहत लड्- म त्व अजिहीया युवा भजिहार्या यूय अजिहीव उ अह अजिहे आवा भजिहावहि वय अजिहामहि प्र स निहीत तो जिहीयात! ते जिहीरन प्रे० म व जिहीया युा जिहीयाथी यूय जिहीन लिड्-उ मह जिहीय भावो जिहीपहि वय जिहीमहि प्र.स हासीष्ट तो हासीयास्ता ते हासीरन मा० म ल हासीठा युयाँ हासीयास्थों उिड़-उ मह हासीय आ हासीवहि षय हामीमहि यूय हासीन TA धातुरूपावाल । अहास्त तो महासाता ते अहासत लड़-म व अहास्या युवा अहासायां यूय अहाध्व उ अह अहासि आवा अहास्वहि वय अहास्महि प्र स महास्यत तो अहास्या ते अहास्यन्त लड्- म त्व अहास्याथा युवा अहास्येया यूय अहास्यध्व उ अह अहास्ये आवा अहास्यावहि वय अहास्यामहि तृतीयगणस्थ परस्मैपदी भृ (धारण करना ) धातुके लट्र आदि दश लकारोंके रूप. विभर्ति तो विभूत ते विभ्रति लद्- म व विपि युवा विभृय यूय विभृथ उ अह विभाम आवा विभृव वय विभूम वभार ता यभ्रतु ते बभ्र मस बमथ युवा बभ्रथु यूय चभ्र उ अह बमार, चभर आवा वभृव वय वभूम प्रस विभराचकार तो विभचिस्तु ते विभराचर म त्व विमरांचरर्थ युवा बिभरांचऋयु यूय विभराचक उ अह विभचिमार आवा विभराचव चय विभचिकृम विमांचकर लिट्-प्र स विभरांनभूव तो विभबिभवत ते बिभराबभूव म त्व विभरारभाविध युधा विभराचभूवथ यूय विभरोचमूब उ मह विभबिभूव आवा विभराग्भूविध वय विभविभूविम विभागमास तो विभरामासतु ते विभरामासु म त्व लिभरामासिय युवा विमरामासथु यूय विभरामास उ अह विभरामास आवां विभरामासिन वय विभरामासिम प्र स भर्ता तो भतारा त भतार लट्- म व भासि युवां भारथ यूय भतास्थ उ अह भर्तास्मि आवो भर्तास्त्र वय मर्तास्म १४४ धातुरूपावाले। प्र. सः भरिप्यति तो भरिप्यतः ते भरिप्यंति रुद- म. व भरिप्यासे युवा भरिप्ययः यूयं भरिप्यय उ. अह भरिप्यामि आवां भरिप्यावः वयं भरिष्यामः प्र. सः विभ, तौ विभूता ते विभ्रतु विभृतात् लोट्- म. स्व विभृहि, युवा विभृत यूय विभृत विभृताद उ. मह विभराणि आवां विमराव • वयं विभराम प्र. सः विभः तौ भरिभृतो ते भारभरुः लङ्ग-म. त्य अविभः युवा अविभृत यूयं भविभूत उ. अह अविभर आवा अविभृव वय अविभृम प्र. सः विभृयात् तो विभ्याता ते विभूयः प्रे० म. ख विभृयाः युवा विभृयात यूयं विभृयात लिङ्-उ. अह विभृया आवा विभृयाव यूय विभृयाम प्र. सः भ्रियात् तो भ्रियास्ता ते भ्रियासुः आशी-म. व भ्रियाः युवा भ्रियास्त लिंद- F-उ. सह भ्रियास आवो भ्रियास्व वयं ध्रियास्म प्र. सः अभापदि ती अमाष्टी ते अभाएः लह- म. व अमापी युर्श भमा उ. अहं अभाप भार्या अभावं पर्य भभाम प्र. सः भभरिप्यत् ती अभरिप्यता ते अभरिप्यन रह-म. वें अमरिष्यः युवा अमरिष्यन यूयं अमरिष्यत उ. अहं भरिप्य आवो भरिघ्याय षय अभरिष्याम इतीयगणस्य यात्मनेपदी भृ ( धारण करना) धातुके लद आदि दहा लकारोंके रूप. प्र. सः पिभृते ती विभात ते विनते रह- म. ने विप युशे पिभ्राये उ. मह विध्र भाषा विभूयह वयं निममह यूय भ्रियास्त यूय अभाई यूय विमले धातुरूपावाले। म. सः यने तो वभ्राते ते चभिरे म. खं बभूपे युवा बभ्राथे यूयं वभृट्वे 3. अहं बने आवां बभूवहे वय वभृमहे प्र. सः विभरांचक्र तो चिभरांचक्राते ते विभचिकि म. व विमरांचापे युवा विभचिनाये यूय विभरांचकृढ़े लिट्-त. महं विभरांचक्रे भावां विभरांचवहे वय विभरांचकृमहे प्र. सः विभविभूव तो विभरांयभूबतु. ते विभबिभूवुः म. व विभरांवभूविय युवा विमरांवमूवयुः यूय विमरोबभूव उ. अहं विभरारभूव आवा विभवभूविव वयं विभविभूविम म. सः विभरामास तो विभरामासतुः ते विभरामामुः म. त्व विभरामासिय युवा विभरामासयुः यूय विभरामास उ. अहं विभरामास आवां विमरामासिव वय विभरामासिम प्र सः भर्ता ती भारी ते भर्तारः लद- म. त्य मासे युवा भनासाये उ. अह भर्ताहे आर्वा भर्तास्वहे चय भास्महे प्र. सः भरिप्यते तो भरिप्येते ते भरिष्यते -म. व भरिप्यसे युवां. भरिप्येये यूय भरिप्यध्वे उ. अहं भरिये आवां भरिप्यावहे वय भरिप्यामहे प्र. सः बिमृता ती बिभ्राता ते विभ्रता लोद- म. व विभृप्व युवा विभ्राओं यूयं विध्व 3. अहं विभरे आवां विभरावह वय विभरामहै प्र. सः अविभृत तो अविभ्राता ते अबिभ्रत सह-म. व अविभृथाः युवा अभिभ्रायां यूयं अविध्य उ. अहं अविनि मा अविभूवहि वय अविभूमदि प्र.स. विनीत तो मिनीयात ते पिधीरन प्रे० म. व विधीयाः युवा विधीयायां यूय विम्रीचं लिङ्ग-उ. अह विभ्रीय मावां विनीवहि वयं विधीमहि यूय भर्ताले . , ते अभूपत धातुरूपावाले। प्र. सः भृपीट तो भृपीयास्तां ते भृपीरन् आशी-म. त्वं भृषीष्ठाः युवा भृपीयास्था यूय भृषी लिङ्-उ. अहं भृपीय आवा भूपीवहि वयं भूपीमहि प्र. सः अमृत तो अभृपाता लङ- म. त्वं अभृथाः युवां अभृपायां यूय अभृद्धं उ. अहं अपि आवां अभृप्वहि वयं अभृमहि प्र. सः अभरिप्यत तो अभरिप्येता ते अभरिप्यंत लङ्- म. त्व अभरिष्यथाः युवां अभरिप्येथां यूयं अभरिप्यध्वं उ. अहं अभरिप्ये भावां अभरिप्यावहि वयंअरिष्यामाह चतुर्थगणस्थ परस्मैपदी दिव् ( खेलना) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. प्र. सः दीव्यति तो दीव्यतः ते दीव्यति म. त्वं दीव्यास युवा दीव्ययः यूयं दीव्यय उ. अहं दीव्यामि आवा दीव्यावः वय दीव्यामः प्र. सः दिदेव तो दिदिवतुः ते दिदिः लिट्- म. स्वं दिदेविय युवा दिदिवथुः यूयं दिदिव उ. अह दिदेव आवां दिदिविर वय दिदिविम प्र. सः देविता तो देवितारों ते देवितारः लुद- म. त्व देवितासि युवां दोवतास्थः यूयं देवितास्थ उ. अहं देवितास्म आवां देवितास्वः वयं देवितास्मः प्र. सः देविष्यति तो देविप्यतः ते देविष्यति लद- म. व देविष्यसि युवा देविप्यथः यूयं देषिष्यय उ. अहं देविप्यामि आवो देविष्याव: वयं देयिष्यामः प्र. सःदीव्यतु दीव्यताद तो दीव्यता ते दीव्यंतु लोट्- म. त्वं दीव्य,दीव्यतात युवां दीव्यत यूयं दीव्यत उ. अह दाव्यानि आयो दीच्याव चयं दीच्याम ते अटाव्य + ते दीव्येय ते दीव्यास धातुरूपापलि। १४७ प्र.स अदीव्यत् तो अदीव्यता लड्- म त्य अदीव्य युर्या अदीव्यत यूय अदीव्यत उ अह अदीव्य मावां भदीव्याय वय अदीव्याम प्र स दाव्येत् तो दीव्यता प्रे० म त्व दीव्य युया दीव्यंत यूय दीव्येत लिङ्-उ अहं दीव्येय आवा दीव्येव वय दाव्यम प्रस दाव्यात् ती दीव्यास्ता आगी-म त्व दीव्या युपी दीव्यास्त यूय दीव्याम्त लिड-उ अह दीव्यास आवा दीव्यास्त्र वय दीव्यास्म प्र स अदेवीव तो मदेविष्टा ते अदेविपु लङ्- म व अदेवा युवा अदेविष्ट यूय अटेविष्ट उ अह अदेविप आवा अदेविप्व वय अदेविष्म प्रस अदेविष्यत् तो अदनियता ने अदेवियन लङ्-म त्व अदेविष्य युवा अदेविप्यन यूय अदेवियन उ अह अदेविष्य आव अदेविप्याव वय अदेविप्याम चतुर्थगणस्थ आत्मनेपदी प्री (खुश होना) धातुके लट आदि दश लकारोंके रूप. प्र.स प्रीयते तो प्रीयते ते प्रीयते रद्- म स्व प्रीयमे युर्ण प्रीयेये यूय प्रीयत्व उ मह प्रीये वा प्रीयावहे यय प्रीयामहे प्र स पिप्रिये तो पिप्रियाते ते पिप्रियिरे लिट्- म व पिप्रिायपे युवा पिमियाथे यूय पिप्रियिडे (ध्ये) उ. मह पिप्रिये आवा पिप्रियिवहे वय पिप्रियिमहे प्र स प्रेता तो प्रेतारी ते प्रेतार लट्- म व प्रेतासे युवा प्रेतासाथे यूयं प्रेताचे उ. मह प्रेताहे माया प्रेतास्वहे वय प्रेतास्महे यूय प्रेष्यत्वे यूय प्रोयेध्व १४८ धातुरूपापाले। प्र. स: प्रेप्यते तौ प्रेप्येत ते प्रेप्यते लद- म. व प्रेप्यसे युवां प्रध्येये उ. अह प्रेष्ये आवां प्रेप्यावहे वयं प्रप्यामहे प्र. सः प्रीयता प्रीयेतां ते प्रीयता लोद- म. त्वं प्रीयस्व युवा पीयेयां यूय प्रीयध्व उ. अह शीय आवां प्रीयावहै वयं प्रीयामहै प्र. स' अप्रीयत तौ अप्रीयेतां ते अप्रीयत लङ्-- म. त्व अप्रीययाः युवा अप्रीययां यूय अपीयन उ अह अपीये आवा अप्रीयावहि वय अप्रीयामाह प्र. सः प्रीयत तो प्रीयेयाता ते प्रीयेरन् म. त्वं प्रीयेयाः युवा प्रीयेयाथों लिङ्ग-3 अह प्रीयेय आवां प्रीयेवहि वयं प्रीयेमहि प्र. स. प्रेपोष्ट तो प्रेषीयास्तां ते प्रेपीरन् आशी-म व प्रेपीष्ठाः युवा प्रेपीयास्या यूय प्रेपी लिंद-उ. अह प्रेपीय आवां प्रेपीवहि वय प्रेषीमहि प्र. सः अप्रेष्ट तो अप्रेपाता ते अप्रेपत लड़-म. व अप्रेष्ठाः युवा अप्रेपायां उ. अह अप्रेपि आवा अप्रेप्वहि वय अप्रेमहि प्र. सः अप्रेप्यत तौ अप्रेप्येतो ते अप्रेष्यत रङ्ग-म व अप्रेष्यथा' युवा अप्रेष्येयां उ. मह अप्रेष्ये आवां अप्रेप्यावहि वय अप्रेप्यामहि पंचमगणस्थ परस्मैपदी शक् ( सकना ) धातुके लद आदि दश लकारोंके रूप. प्र. सः शमोति तो शवत' ते शशुपति लद- म. त्व शोपि युवा शनुथः यूय शत्रुग्य उ. महं शोमि आवो शयः पय शत्रमा यूय अप्रेट्स यूय अप्रेप्याय १४१ ते शेकुः यूयं शंक वय शकिम ते शक्तारः यूय शक्तास्थ घय शक्तास्मः ते शक्ष्यति यूय शक्ष्यय वय शक्ष्यामः ta ते शतवतु यूय शदुत धातुरूपावाले। प्र. सः शशाक तो शेकतः लिट्- म. व शेकिय शशस्य युवा शेकयुः उ. भह शशाक शशक आवां शेोकव प्र. सः शक्ता तो शक्तारी लट्- म. त्व शक्तासि युवा शक्तास्थः उ. अह शक्तास्मि आवां शक्तास्वः प्र. सः शक्ष्यति ती शक्ष्यतः - म. त्वं शक्ष्यसि युवा शक्ष्ययः 3. अह शक्ष्यामि आवां शक्ष्यावः प्र. सः शक्रांतु, शत्रुता शत्रुतात, लोद- म. व शहि, युवा शनुत शनुतात, उ. अह शनुवान प्र. सः अशको तो अशकुता F- म. व अशकोः युवा अशक्तं उ. अहं अशाव आवां अशनुव प्रे० प्र. सः शड्ढयात् ती लिङ्-म. व शत्रुयाः युवा शनुयात उ. अह शकुयां आवां शनुयाव आशी-प्र. सः शक्यात् तो शक्यास्ता लिद-म. स्व शक्याः युवां शक्यास्त उ. अह शक्यास आर्वा शक्यास्व प्र. सः अशकत् अशफता -म. व अशक: युवा अशकत उ. अह अशक आवां अशकाव आवां शनुवाव शनुयाता वय शवाम ते अशकुवन यूय अशत्रुत वय भशनुम ते क्षयः यूय शनुयात वय शयाम ते शस्यासः यूय शक्यास्त चय शक्यास्म ते अशकन् यूय अशकत वय अशफाम । यूय सुनुध्वे धातुरूपावाले। प्र. सः अशक्ष्यत् तो अशक्ष्यता ते अशक्ष्यन् -म. त्वं अशक्ष्यः युवा अशक्ष्यतं यूयं अशक्ष्यत उ. अहं अशक्ष्य आवां अशक्ष्याव वयं अशक्ष्याम पंचमगणस्थ सू ( मंथन करना) धातुके लद आदि दश लकारोंके रूप. प्र. सः सुनुते तो सुन्वाते ते सुन्वते - म. त्वं सुनुपे युवां सुन्वाये उ. अहं सुन्वे आवां सुनुवहे, सुन्वहे वयं सुनुमहे,सुन्महे प्र. सः सुपुवे तो सुपुवाते ते सुपविरे लिट्- म. त्वं सुपुविपे युवा सुपुवाथे यूयं सुपुविवे (ध्वे) उ. अहं सुपुवे आवां सुपुविवहे वयं सुपविमहे प्र. सः सोता तो सोतारी ते सोतारः लट्- म. त्वं सोतासे युवा सोतासाथे यूयं सोतावे उ. भह सोताहे आवां सोतास्वहे वयं सोतास्महे प्र. सः सोप्यते . तो सोप्येते ते सोप्यते रद्- म. त्वं सोप्यसे युवा सोप्येये यूयं सोप्यले उ. अहं सोप्ये आवा सोप्यावहे वयं सोप्यामहे प्र. सः सुनुता तो सुन्वाता ते सुन्वता लोट- म. त्वं सुनुव युवा सुन्वार्थी यूयं सुनुध्वं उ. अहं सुनवे आया सुनवावहै घय सुनवामहे प्र. सः असुतुत तो असुन्याता ते. असुन्वत लङ्ग- म. त्वं असुनुथाः युवा असुन्वाथों यूय असुनुध्वं उ. अहं असुन्वि आवां असुनुवहि वयं असुनुमहि असुन्वाहे मसुन्महि प्रे० प्र. सः मुन्वांत तो सुन्यीयाता ते सुन्वीर लिङ्- म. वं सुन्बीयाः युयो सुन्वीयार्या यूयं सुन्वीवं उ. महं सुवीय आषां सुन्वीपहि घयं सुन्वीमहि धातुरूपावरि । आशी-प्रस सोपीट तो सोपीयास्तां ते मोपीरन् लिंबू-म व मोपीष्ठा युगां सोपीयास्या यूय सोपीट्स उ मह सोपीय आर्वा सोपावाह वय सोपीमहि प्रस असोष्ट तो असोपाता ते असोपत लङ्-म व असोटा युवा असोपाया यूय असो उ अह असोपि आवा अमोप्वहि वय असोप्महि प्र.स अमोप्यत तो असापता ते असोप्यत लड्-म व असोप्यया युवा असोध्येया यूय असोप्यध्व उ अह असोप्ये आवा असोप्यावहि वय अमोप्यामहि पष्टगणस्थ तुद् ( दुःख देना) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. तुदति ते तुदति लट्- म २ तुदसि युवा उदय यूय तुदय उ अह तुदामि आवा तुदाव वय तुदाम प्र स तुतोद लिट्- म स्व तुतोदिय युवा तुतुदयु यूय ततुद उ अह तुतोद भावा तुतुदिव घय ततुदिम प्रस तोत्ता तो तोत्तारी ते तोत्तार लद- म त्व तोत्तासि युवा तोत्तास्थ यूय तोत्तास्य उ अह तोत्तास्मि आवो तोत्तास्व पय तोत्तास्म प्र. स तोत्स्यति तो तोत्स्यत ते तोत्स्यति लद्- म व तोरस्यास युवा तोत्स्पय यूय तोत्स्यथ उ मह तोत्स्यामि आ तोत्स्याव वय सोत्स्याम तुदत, तदतात् तो तुदर्ता लोट्- म त्व तुद, तुदतात् युा तुदत यूय तुदत उ मह तुदान तो तुदत तो तुतुदत ते तुदत भावा तुदाव वय तुदाम ते अतुदन आवां अतुदाव ते तुदेयु न तौ तुद्यास्ता ते तुद्यासु मावा तुद्यास्व यूय अत्तात्त धातुरूपावाल। प्रस अतुदत् तौ अतुदता लड्- म त्व अतुद युवाँ अतुदत यूय अतुदत उ अह अतुद वय अतुदाम प्रे० प्र. स तुदेव तो तुदेता लिड्- म त्व तुदे युवा तुदेत यूय तुदेत उ अह तुदेय आवां तुदेव वय तुदेम आशी प स तुद्यात् लिड्- म त्व तुद्या युवा तुद्यास्त यूय तुद्यास्त उ अह तुद्यास वय तुद्यास्म प्र स अतौत्सीत् तो अतीत्ता ते अौत्सु लर- म त्व अौत्सी युवा अत्तौत्त उ अह अतौत्स आवां अतोत्स्व वय अौत्स्म अतोत्स्यत् तो अतोत्स्यता ते अतोत्स्यन लड्- म त्व अतोत्स्य युवा अतोत्स्यत यूय अतोत्स्यत उ अह अतोत्स्य आवो अतोत्स्याव वय अतोत्स्याम पष्टगणस्थ मृ ( मरना ) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. प्रस म्रियते तो नियेते ते म्रियते लद्- म त्व म्रियसे युवा म्रियेथे यूय म्रियध्वे । 3 अह म्रिये आवां म्रियावहे वय म्रियामहे प्रस ममार तो मम्रतु लिट्- म त्व ममर्थ यूय मम्र उ अह ममार, ममर आवां माम्रिव वय मम्रिम प्र स मती तो मारो ते मगर लद्- म त्व मासि युवा मतस्थि वय मर्त्तास्थ उ अह मास्मि आवां मस्यि वय मस्मि ते म युवा मम्रथु यूय म्रियध्व धातुरूपावाले। प्र. स मारिष्यति तो मरिष्यत ते मरिप्यति हद- म व मरिष्यसि युवा मारप्यय यूय मरिष्यय उ अह मरिष्यामि मावा मरिष्याव वय मरिप्याम म्रियता तो म्रियता ते म्रियन लोद- म स्व म्रियस्व युवा म्रियेयां उ मह म्रिये आवा म्रियावह वय म्रियामहे अम्रियत तो अम्रियता ते अम्रियन लङ्- म व अनियथा युवा अम्रियथा यूय अम्रियध्व उ अह अम्रिये आवां अम्रियावहि वय अम्रियामहि प्र.स नियेत तो म्रियेयाता ते म्रियेरन् लिद-म व म्रियेया युवा म्रियेयायां यूय म्रियेव उ अह म्रियेय आवा म्रयेवहि वय म्रियेमहि आगी प्रस मृपीष्ट तो मृपायास्तां ते मृषारन् लिज-म व मृपीष्ठा युवा मृपीयास्था यूप मृपाव उ अह मृपीय आवा मृपावहि वय मृपामहि अमृत तो अमृपाता लइ-म व अमृथा युवां अमृपाथा यूय अमृद्ध उ अहं अमृपि भावा अमृप्वहि वय अमृप्माह प्रस अमरिष्यत् तो अमरिप्यता ते अमरिष्यन लक-म त्व अमरिष्य युवा अमरिप्यत यूय अमारिप्यत उ अह अमारष्य आप अमारण्याव वय अमरिष्याम सप्तमगणस्थ रुध् (रोक्ना ) धातुके लद लकारोंके प्र. स रणद्धि तो ते स्थति लद- म व रुणसि युवा रुध यूय रुष उ अह रुणध्मि वय रध्म ते अमृप्त आदि दश आवां रध्व तौ रुरुधतु ते रुरुधु यूय रुध वय रूरूधिम ते रोद्धार यूय रोद्धास्थ वय रोद्धास्म' ते रोत्स्यति यूय रोत्स्यथ वय रात्स्याम ते रुधतु यूय रुध वय रुणधाम १५४ धातुरूपावलि। प्र स स्रोध लिट्- म त्व सोधिय युमा रुरुधथु उ अह रुरोध आवा रुरुधिव रोद्धा तो रोद्धारौ लट्- म त्व रोद्धासि युवा रोद्धास्य उ अह रोद्धास्मि आवा रोद्धास्व प्रस रोत्स्यति तो रोत्स्यत स्टट्- म त्व रोत्स्यसि युवा रोत्स्यथ उ अह रोत्स्यामि आवां रोत्स्याव प्रस रणद्ध, रुधात्, तौ स्था लोट्- म त्व रधि, रुधात् युवां स्ध उ अह रुणधानि आवा रणधाव प्र.स अरुणत् तो अरुधा लड्- म त्व अरणत,अरुण युवा अरुध उ अह अरणध आवां अरध्ध प्र स रुध्यात् तो रुध्याता प्रेक म त्व रुध्या युवा रध्यात लिङ्-उ अह रथ्यों आवा संध्याव रध्यात् तो सध्यास्ता बा० म त्व ध्या युवा सध्यास्त लिइ-उ अह रध्यास आवा ध्यास्व अस्थत् तो अस्था अरोत्सीत् अरोद्धा हद- म त्व अस्थ युवा अधत मरोत्सी भरोद्ध उ अह अस्थ आवां अस्थाव भरोत्स अरोत्स्य ते अरुधन् यूय अरुष घयं अरुध्म यूय रुध्यात वय रध्याम ते ध्यास यूय रुध्यास्त वय ध्यास्म ते मरधन अरोत्सु यूय अरुधत अरोद्ध वय अषाम भरोस्म A यूय रुध्वे धातुरूपावाल। प्र.स अरोत्स्यत् तो अरोत्स्यता ते भरोत्स्यन लड्-म. व अरोत्स्य युवां अरोत्स्यत यूय भरोत्स्यत उ मह अरोत्स्य आवां अरोत्स्याव वय अरोत्स्याम सप्तमगणस्थ रुध् (रोकना) धातुके स्ट आदि दश लकारोंके रूप प्रस रुधे तो स्वाते ते रुघते सद्- म त्व रुत्से युवा स्थाये उ अह रुधे आवा रुवहे वय महे प्र.स रुरुषे तो रुरुधाते ते सांधेरै लिट्-म व रुरुधिपे युवा रुपाये यूय स्धिधे उ. अह रुरुधे आवा रुरुधिरहे वय सधिमहे प्र स रोद्धा तो रोद्धागे ते रोद्धार लट्- म स्व रोद्धासे युवा रोद्धासाये यूय रोखाध्ये उ मह रोद्धाहे आवां रोद्धास्वहे वय रोडास्महे रोत्स्यते तो रोत्स्येते ते रात्स्यते लट्- म ल रोत्स्यसे युवा रोत्स्येथे यूय रोत्स्यष उ अह रोत्स्ये आवां रोत्स्यावहे वय रात्स्पामह रुया तो ख्याता ते स्धता लोट्- म त्व युवा रुवाया यूय रम उ अह रुमधे आवा रणधावहै वय रणधामहे प्रस तो अस्थाता त मरंधत :-म व अस्था युवा भरुवायां यूय अरव उ मह भराध मावा अरुथ्यहि य भरध्माह प्र.स स्थीत तो स्वीयाता त स्थीरन प्रे० म त्य रुपीया युर्थ स्थीयायां यूप स्थीय लिद-3 मह रथीय आवो स्थीवाहि वय स्थीमहि अरुध तो तनुत' १५६ धातुरूपावाले। प्रस: रुत्सीट तो रुत्सीयास्ता ते रुत्सीरन् आ० म. त्व रुसीष्ठाः युवा रुत्सीयास्यां यूय रुत्सीध्व लिङ्-उ. मह रुत्सीय आवां रुत्सीवहि वय रुत्सीमहि प्र.सः अरुद्ध तो अस्त्साता ते अरुत्सत लइ- म. व अरुद्धाः युवां अरुत्साया यूय अरुध्व उ. अह अरुत्सि आवा अरुरस्वहि वयं अरुत्स्महि प्र. सः अरोरस्यत तो अरोस्येता ते अरोत्स्यत लङ्- म. व अरोत्स्यथा. युवा अरोत्स्येया यूय अरोत्स्यध्व उ. अह अरोत्स्ये आवा भरोत्स्यावहि वय अरोत्स्यामहि अष्टमगणस्थ तन (फैलाना) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. प्र सः तनोति ते तन्वति लद- म. व तनोपि युवों तनुयः यूय तनुथ उ. अह तनोमि वय तनुमः,तन्मः प्रसः ततान ते तेनुः लिट्- म. व तेनिय युवा तेनयुः उ. अह ततान ततन आवो तेनिव प्र स तनिता तो तनितारी ते तनितार: लट्- म. व तनितासि युवां तानतास्यः यूय तनितास्य उ. अह तनितास्मि आवो तनितास्व. वय तनितास्मः प्र सः तनिष्यति तो तनिष्यतः ते तनिष्यति लद-म व तनिष्यसि युवा तनिष्ययः यूय तनिप्यथ उ. अह तनिष्यामि आवो तनिष्याव' वय तनिष्यामः प्र. सः तनोतु तनुताव तो तनुतां लोट- म. व तनु, तनुतात् युवा ननुत यूय तनुत उ. मह तनवानि आवो तनवाव वय तनवाम प्र. सः अतनोत ते भतन्वन् लड्- म. त्व भतनोः यूय अतनुत उ. मह मतनव आवा अतनुव अतन्वषय अतनुम,अतन्म आवां तनुव.,तन्व तो तेनतुः यूय तेन वय तेनिम ते तन्वत तौ अतनुतां युवा अतनुत ते तनुयुः . आवा तनुयाव ते तन्यासुः धातुरूपावलि। १५७ प्र. स. तनुयात् तौ तनुयातां म. व तनुयाः युवो तनुयातं यूयं तनुयात लङ्-उ. अह तनुयाँ वय तन्याम प्रसः तन्यात तो तन्यास्ता मा० म. व तन्याः युवा तन्यास्तं यूय तन्यास्त लेंड-उ. अहं तन्यास आवां तन्यास्व वयं तन्यास्म प्र. स. अता(त)नीत् तो अता(त)निष्टा ते अता(त)निपुः पुड़- म. त्व अता(त)नीः युवां मता(त)नीष्ट यूयं अता(त)निष्ट उ. अहं भता(त)निपं आवो अता(त)निप्य वय अता(त)निप्म प्र. सः अतनिप्यत् तो अतनिप्यतां ते मतानप्यन हा म. त्वं अतनिप्यः युवा अतनिप्यत यूय मनिप्यत उ. अहं अतनिष्य आवा. अतनिप्याव वय मतानप्याम अष्टमगणस्थ तन (फैलाना) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. प्र. सः तनुते तो तन्वाते ते तन्वते न्ट्- म. त्वं तनुपे युवा तन्वाये यूय तनुध्ये उ. अह तन्वे आर्या तनुवहे,तन्वहे वयं तनुमहे तन्महे तो तेनाते ते तेनिरे लेट्- म स्वं तानपे युवा तेनाये यूयं तनिध्ये उ. अहं तेने आवा तेनियहे वयं तेनिमहे प्र. सः तनिता तो नितारी ते तनितारः उद-म. वं तनितासे युवा तनितासाये यूयं तनितावे उ. अहं तनिताहे मायां तनितास्वहे वय तनिनास्महे म. सः तनिष्यते तो तनियेत ते तनिष्यंत हद- म. वं तनिष्यसे युवा तनिध्येये यूय तनिष्यन उ. अह तनिये मावा तनिष्यावहे व्यं तनिष्यामहे प्र. सः तनुतो तो तन्यानो ते तन्वतो टोट-म. व तनुष्य युर्या तन्वाया यूयं तनुर्ण उ. भई तनवे भाषां तनयाय वयतनामह धातुरूपावाले। प्र. स: अतनुत ता अतन्वता ते अतन्वत लङ्- म. व अतनुयाः युवा अतन्वाथा यूय अतनुध्व उ. अह अतन्वि आवा अतनुबाहे वय अतनुमहि अतन्वहि अतन्महि प्र. सः तन्वीत तो तन्वीयातां ते तन्वीरन् प्रे० म. व तन्वीयाः युवा तन्वीयाथा यूय तन्वीव लिङ्ग-उ. अह तन्वीय आवा तन्वीवाहि वयं तन्वीमहि प्र.सः तनिषीष्ट तो तनिपीयास्ता ते तनिपीरन् या० म. व तनिपीछा. युवा तनिपीयास्था यूय तनिपीध्व लिङ्-उ. अह तनिपीय आवां तनिपीवहि वय तनिपीमहि प्र सः अतत,अतनिष्ट तो अतनिपाता ते अतनिपत लुङ- म. व अतथाः, युर्वा अतनिपाथां यूय अतनिध्य, अतनिष्ठाः अतनिट्व उ. अह अतनिपि आवां अतनिप्वाहे वय अतनिप्महि प्र. सः अतनिष्यत तो भतनिष्यतां ते अतनिष्यत लङ्- म. त्व अतनिप्यथाः युवा अतनिध्येयां यूय अननिष्यच उ. अह अतनिये आवा अतनिप्यावहि वय अतनिष्यामाह नवमगणस्थ की (खरीदना) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. प्र. सः क्रीणाति तो क्रीणीतः ते कोणाते लद- म. व क्रीणासि युवा क्रीणीयः यूय कोणीय उ. अह क्रीणामि आवा क्रीणीवः क्य क्रीणीमः प्र. स. चित्राय तो चिक्रियतुः ते चिनियुः लिट्- म. व चियिथ, युवां चिक्रिययुः यूय चिक्रिय चित्य उ. अह चिक्राय,चियावा चिक्रियिव वय चिनियम प्र सः ऋता तो तारों ते तारः लट्- म त्व ऋतासि युवां क्रेतास्यः उ. अह केतास्मि आवां वेतास्वः वय नेतास्मः यूय केनास्थ यूय प्यय धातुरूपावाल। प्र.स वेष्यति तो प्यतः ते वेष्याते बह- म ल क्रेप्पसि युवा प्यर स. अहं क्रेप्यामि भाव प्याव क्य केप्याम प्र स' क्रीणातु तो क्रीणीता ते कीणतु कीणाताद होद-म त्व कोणाहि- युवा नीणीत यूय कीणीत कीणीताद व अह त्रीणामि भाषा कोणाव वय श्रीणाम अक्रीणात् तो सक्रीणीता ते सक्रीणन हद्- म त्व अगाणा युवा अक्रीणात यूय नक्रीणात उ अह अमीणों आवां अक्रीणीव षय भनीणीम प्र स क्रीणीयात् तो क्रीणीयाता ते झीणोयु' प्रे० म व क्रीणीया युवा क्रीणीयात यूय कीणीयात लिङ्- अह क्रीणीयो भावो कीणीयाव षय क्रीणीयाम प्र. स क्रीयात् तो क्रीयास्ता ते क्रीयासु माशीम व क्रीया युवा क्रीयास्ते पूय क्रीयास्त लिंग- भह क्रीयास भावां क्रीयास्व षय क्रीयास्म प्र स अपोत् तौ भऋषिष्ठा लर-म व अपी युवा अपिष्ट यूय अषिष्ट उ. भह अक्रेय भाषा भक्केष्व षय अष्म प्र स अकेष्यत् तो अक्रेष्यतो ते अकेप्यन् -म त्व भक्ष्य युवा अक्रेप्यत उ अह अक्रेप्य मावा भक्रेप्याव षय भनेष्याम नवमगणस्थ आत्मनेपदी पू (पवित्र करना) धातुके लद् आदि दश लकारोंके रूप. न स पुनीते तो पुनाते ते पुनते कट्- म स्व पुनीषे युषा पुनाथे 8 मह पुने या पुनीषहे पर्य पुनीमहे १२स घा ते भवषिषु यूप अकेष्यत यूय पुनीध्ये ग . धातुरूपावलि । प्र. सः पुपुवे तो पुपुवाते ते पुपुविरे लिद- म. व पुपुविषे युवा पुदुवाये यूयं पुपुावदे(ये) उ. अह पुपुवे आ पुपुविवहे वय पुपुविमहे म. स. पविता तौ पवितासै ते पवितारः लट्- म त्व पवितामे युवा पवितासाथे यूय पविताध्वे उ मह पषिताहे आवां पवितास्वहे वय पवितास्महे प्र. सः पविष्यते तौ पवियेते ते पविष्यते लट्- म. त्व पविष्यसे युवां पविष्येये यूय पविष्यवे उ. अहं पविष्ये आवों पविष्यावहे वय पविष्यामहे प्र. सः पुनीता तौ पुनाता ते पुनता लोद- म. त्व पुनीप्व युवा पुनार्थी यूय पुनीध्व उ. अह पुनै आवो पुनावहै वय पुनामहै प्र. सः अपुनीत तो अपुनाता लङ्- म व अपुनीथाः युवा अपुनार्या यूय अपुनीध्व उ. अह अपुनि आवो अपुनीवाह क्य अपुन महि प्र स. पुनीत तौ पुनीयात ते पुनीरन प्रे० म. व पुनीयाः युवा पुनीयायों यूय पुनीध्व लिड्-उ. अह पुनीय आवां पुनीवहि क्य पुनीमहि प्र. स. पविपीष्ट तौ पविषीयास्तां ते पविषीरर माशी म. व पविषीष्ठाः युवा पविषीयास्या यूय पविषीद (ध्व) लिइ-उ. अह पविषीय भावा पविषीवाहे वय पविधीमहि प्र स' अपविष्ट तो अपविषातो ते अपविपत लड़- म. व अपविष्ठाः युषां अपषिपायर्या यूय अपविट (ब) उ. अह अपविषि आवा अविवाह वयं अविष्माह प्र सः आविष्यन तो अपविष्येता ते अपविष्यत लड़- 5-म. व अपविष्ययाः युवं अपविष्येया यूय अपविष्यन्न उ अह अपविध्ये मावा अपविष्यावाहे क्ये अपवियामाह ते अपुनत धातुरूपावाले। दशमगणस्थ चुर् (चोग्ना ) धातुके लट् आदि दश स्कारोंके रूप. प्र. स चोरयाते तो चोरयत ते चोरयते लट्- म व चौरयसि युर्गा चोरयम यूय चारयय उ अह चोरयाम आवां चोरयाव षय चोरयाम प्र. स चोरयामास तो चोरयामासतु ते चोरयामास लिट्- म व चोरयामासप युवा चोरयामास यूय चोरयामास उ अइ चोरयामास मा रियामासिव वय चोरयामासिम मस चोरायता तो वोरायनारी ते चोरायतार खुद- म वं चोरापनाने युर्वा चसमास यूर चोराशास्य उ अह चोरातास्मि आर चोरामास्त्र वर चोरातास्म प्र स चोराये पते तो चोरामेष्यन ते चोरायप्यात लट्- म व चौरयिष्यसि युवा चोरायप्यर यूय चोरायेप्यय उ अह चोराययामे आ चोपियाव वप चोरायष्याम प्रस चोरयतु तो चोरयता ते चोरयतु चोरयताद लोद- म र चोरय युवा चोरयत चोग्यतान उ अह चोरयाने मावा चोरयाव वय चोरयाम प्रस अचोरयत् तो अचोग्यतां ते अचोरयन लङ्- म व अचोरय युवा अचोरयत यूय अचोरयत उ मह अचोरय आवां अचोरयाय वय अचोरयाम प्रस चोरयेत् तो चोरयेतो ते चोरयेयु प्रे० म व चोरये युधों चोरयेत यूय घोरयत लिङ्-र सह चारयेय सावा चोरयेव वय चोरयेम म स चोर्यान् तो चोयास्ता ते चोर्यासु आशीम व चोया युयों चोर्यास्त यूय चोर्यास्त लिङ्- अह चोयास आगो चोयांस्व वय चोर्यास्म यूय चोरयत - यूय ताडयध्वे धातुरूपावाल। अच्चुरत तो अचूचुरता ते अचूचुरन् म त्व अचूचुर युवा अचूचुरत यूय अचूचुरत उ अह अचूचुर आवा अचूचुराण वय अचूचुराम प्र. स अचोरयिष्यत् तो अचोरयिष्यतो ते अचोरयिष्यन् छङ्- म त्व अचोरयिष्य युवा अचोरयिष्यत यूय अचोरयिष्यत उ अहं अचोरयिष्य आवो अचोरयिष्यावषय अचोरयिष्याम दशमगणस्थ ताइ (मारना ) धातुके लट् आदि दश लकारोंके रूप. ताडयते तो ताडयेते ते ताडयते लद्- म व ताडयसे युवा ताडयेथे स अह ताडये आवां ताडयापहे घय ताडयामहे प्रस ताडयांचके तो ताडयाचक्राते ते ताडयांचक्रिरे लिट्- म व ताडयाचकृपे युवा ताडयांचाथे यूय ताडयांचकृष्ट्वे उ अह ताडाचक्रे आवा ताडयांचकृवहे वय ताडयांचकृमहे प्र.स ताडयिता तो ताडयितारी ते ताडयितार' लट्- म व ताडयितासे युवा ताडयितासाथे यूय ताडयिताध्ये उ अह ताडयिताहे आवा ताडयितास्वहे वय ताडयितास्महे प्र स ताडयिष्यते ती ताडयिष्येते ते ताडयिष्यते खद- म व ताडयिप्यसे युवा ताडयिष्येथे यूय ताडयिष्यध्वे उ मह ताडयिष्ये आवा ताडयिष्यावहे षय ताडयिष्यामहे म स. ताडयता तौ ताडयेता ते ताडयता कोट्- म त्व ताडयस्व युवा ताडयेथा यूय ताडयत्व उ अह ताडयै आवा ताडयावहै प्र.स भताडयत तो अताडयेतो ते अताडयत लह-म व अताडयथा युवा भताडयेथा यूय अनाडयध्व स भह अताडये आ भताडयावहि वय अताडयामाई षय ताडयामहे न महि धातुरूपावलि। ताटयेत तो ताडयेयाता ते ताडयेरन प्रेम व ताडयेया युवा ताडयेयाया यूय ताडयेय लिङ्-उ मह ताडयेय आवा ताडयेबाई वय ताडयेमहि प्र. स ताडयिपोष्ट तो ताडायपीयास्ता ते ताडयिपीरन माशीम व ताडयिषीष्ठा युर्वा ताडयिषीयास्या यूय ताडयिषीट्दै छ लिंङ-उ भह ताडायपाय आवो ताडपिपरावहि घय ताडयिषीमही अतीतहत ती अतीतडेता ते अतीतडत लह- म व अतीतडया युवा अतीतडेया यूय अतीतहम उ अह अतीतडे आवा अतीतडावहि घय अतीतडामहि मताडायष्यत तो अताडयिष्येता ते अताडयिष्यात -म व भताडयिष्यया युवा मतादायप्येयो यूय मताडयिष्यन्न उ अह मताडयिष्ये आवो मताडयिष्या षय अताडयिप्या वहि प्रथमगणस्थ उपयुक्त धातुओंके प्रथमपुरुपके एक वचनके रूप. अङ् (चिन करना ) धातुके रूप. लट्-मइते रड्-आङ्कत लिट्-आनले सुइ-आङ्किष्ट लुटू-अद्धिता इंद-अशिष्यते लोट-अताम् विधिलिङ्- अङ्केत आशीलिंड-आर पीष्ट लड्-आदिप्यत मर्माण लट्-अड्क्यते णिच् छट्-अश्यति-ते सप्त-अश्चिक्पिते अक्ष (फैलना ) धातुके रूप. छद-अक्षति लइ-आक्षत लिट-आनक्ष लुङ्-आक्षीत, भाक्षीत टूट-अक्षिता, अष्टा लट्-भक्षिष्यति, अक्ष्यति लोट्-अक्षतु वि. रिइ-- भक्षेत् आ० लिइ-अक्ष्याद सट्-आक्षिप्यत, आक्ष्यत १ रुट्- मक्ष्यते णि० लट्-भक्षयति णिच् रङ्-आचिक्षव स-अचिक्षिपति अज् (जाना) धातुके रूप. टू-अजति सड्-आजत् लिट्-विवाय इ-अपेषीद, माजीत छुटू-बेता, अजिता लट्-वेष्यति, अजिष्यति लोट-भजतु वि०लिए . धातुरूपावाल। भनेत्. आ० रिङ्-धीयात् लट्-अविष्यत्, आजिप्यत् का स्ट-वीय ते णि लट्-वाययति स०-अजिजिपति, विवीपति यडतल्ट्-वैवीयते अद् (जाना) धातुके रूप. स्ट्-अयति रड़-भाटत् रिट्-आट एड्-आीत सुट्-अटिता बट्-भटिथ्यति रोट्-भटतु, वि० रिइ-भटेत् भा० रिङ्-अध्याद. मड-आटिष्यत् क० लट्-अव्यते णि. रट्-आटयति-ते स० लट्- भाटिटिपति यह लट्-अटादरते, आहहे, आदीति अई ( योग्य होना) धातुके रूप. लटू-अहति रुख-आईत रिट-भान्ह -आहीत लुट्-अहिता. स्ट् अहिप्याति रोट्-मत वि. हिड्-उत रुह-आहिष्यत् क. -अीते णि स्ट्-अर्हयति-ते स० रट्-अजिहिपति यह रुटू- महायते इ(जाना ) धातुके रूप. लट्-अयति रह-मायत लिट-इयाय रडू-ऐपीत लूटू-एटा लट्- एण्यात लोट-भयतु वि० हिद-अयेत् आ० रिट्-ईयात् लड-ऐप्यत् ईक्ष ( देखना ) धातुके रूप. एटू-ईक्षते ए-ऐक्षत रिट्-ईक्षाश्कार हुड्- ऐक्षिष्ट रट-ईक्षिता बटू-ईक्षिप्यते लोट्-ईक्षताम् वि. लिह-क्षेत आ. रिड्-ईक्षिषीष्ट, बर-ऐक्षिप्यत क० लट्-ईक्ष्यते. णि० रट्-ईक्षयति स० लट्-ईचिक्षिषते. ईर्घ्य ( ईर्ष्या करना) धातुके रूप. स्टू-ईति रुड़-ऐर्यत लिट्-ईश्केि हेड-ऐप्यात् लुट्-ई -ईयि ता. लट्-ईपिप्यात लोट्-ईयॆतु वि० लिट्-ईयेत् आ० रिद-ईर्ष्या- तु. रद-ऐष्यिप्यत् क. रट्-ईय॑ते. णि रुटू-ईjयत्ति णिहुद ऐध्यियत, ऐषिच्यत. स. रटू-ईयविपति, प्यास्पिति उ (शब्द करना) धातुके रूप. लटू-भपते रङ-आषत लिटू-उवे. सुट भाष्ट. स्ट-ौता. लट्- मोप्यते. रोट्-अवताम् वि. रिड्-अपेत. आ० हिद-ओपीट. लद भोप्यत का लट्-ऊयते. णि रुट-आवयते स० लट्-उपिपते या स्ट् असूयते.
धातुरूपावाल। उख (जाना ) धातुके रूप. रट्-आखति. सड्-ओखत्. लिट्-उवोख. लुइ-आँखीत्. लुट-ओ- खिता. लट्-आखिप्याते. लोट-ओखत. वि०हिह-माखेत्. मा. हिद- उस्यात. लड-ऑखिष्यत्. का. स्ट-उस्यते. णि० स्टू-आसयति. स. ब्द-औचिखिपति. ऊ (कल्पना करना) धातुके रूप. स्टू-उहते. टड्-ओहत. लिट्-उहाञ्चक्रे लुइ ओहिष्ट. सुर-उहि- ता. नटू-हिप्यते. लोट-उहताम्. घि० लिङ्ग-उहेत. आ. रि-3 हिपीट लड्-मोहिप्यत. क० लट्-उहते. णि० लट्-उदयते. सराट- उजिहिपते. ऋ ( जाना ) धातुके रूप. रर-मुति. - आच्छंद. टिट्-आर. हरआपति, र अती. नट्-अरिष्यति. लोट्-अच्छत. वि. लिट्-ऋत, मारियांत मर-भारिष्यत्. क.० स्ट-मर्थते. णि रनि.मा-गर. पाति. यद स्ट-मरायते. भरत्ति, अरियन्ति, अनि, अनि धातुरूपायाले। कमिप्यते. लोट-कामयताम्. वि. लिङ्--कामयेत. आ० लिङ-कामयि- पोष्ट, कामेषीष्ट. लड्-अकामायष्यत, अकमिप्यत. क० लट्-काम्यते. क० लुङ्-अकामि.णि लट्-कामयति. स० लट्-चिकामायपते. कित् ( रोग दूर होना) धातुके रूप. लट्-चिकित्सति. लड्-अचिकित्सत्. लिट्-चिकित्साञ्चकार. लुइ- भचिकित्सीत्. लुट्-चिकित्सिता. लट्-चिकित्सिप्यात. लोट-चिकि- सत. वि० लिङ्-चिकित्सेत् आ० लिङ्-चिकित्स्यात्. लह-अचिकि- सिष्यत्. कृप् ( समर्थ होना ) धातुके रूप. लट्-कल्पते. लङ्-अकल्पत. लिट्-चक्लपे. हुड्-अलपत्, अकल्पिष्ट, भकप्त. लुइ-कल्ला, काल्पता. लट्- कल्प्स्यते, काल्पप्यते, कल्प्स्यति, कल्पिष्यति. लोट-कल्पताम्. वि. लिङ्-कल्पेत. आ• लिङ्-काल्पषीष्ट, कलप्सीष्ट. लङ्-अकल्प्स्यत, अकल्प्स्यत्, अकल्पिप्यत, अकल्पिष्यद. क० लट्-कृप्यते. णि• लट्-कल्पयति.स० लट्-चिकल्पिपते, चिक्लप्सते. कम् ( जाना) धातुके रूप. लट्-क्रामति, काम्यति, क्रमते, क्रम्यते. लङ्-भकामत, अक्राम्यत्, मक्रमत, अक्रम्यत. लिट्-चक्राम, चक्रमे. लुङ्-अक्रमीत, अक्रस्त. छुट्-कामेता, क्रन्ता. लट्-क्रमिष्यात, कंस्यते. लोट-क्रामतु, काम्यता क्रमताम्, कम्यताम्. वि. लिङ्-कामेत्, काम्येत् क्रमत, क्रम्येत. आ० लिङ:-क्रम्यात्. कंसीष्ट. लड्-अक्रमिप्यत्. अक्रस्यत. क. लट्-ऋम्यते. णि लट्-क्रमयति. णि० सृष्ट-अचिक्रमत्. स० लट्-चिक्रमिषति. यह लट्-चंक्रम्यते, चंक्रमीति, चंक्रन्ति. क्रुश् (पुकारना) धातुके रूप. लट्-क्रोशति. लडू-अक्रोशव. लिट्-चुक्रोश. लुङ्-अक्षत. लुट- कोटा. लट्-क्रोक्ष्यति. लोट-क्रोशतु. वि. लिड्-क्रोशेत. आ० लिङ्- कुश्यात्. लङ्-अक्रोक्ष्यत्. क. लट्-ऋश्यते. णि.. लट्-क्रोशयति.णिक ए-अचुक्रुशत्. स० लट्-चुक्रुक्षति. यङ् लट्-चोऋश्यते, चौकोशौति, चोकोष्टि धातुरूपावलि। घ्रा (सूचना) धातुके रूप. रुट्-जिघ्राति. रङ्-अजिघ्रत. लिट्-जघौ. लुइ-अघाद, अघासीद. सुट्-धाता. लट्-प्रास्यति रोट-जिघ्तु, वि० लिङ्-जिप्रेत्. आ० लिङ्-. प्रायात, प्रेयात् लड्-अघ्रारयत्. २० लट्-ध्र यते. णि० लट्-प्रापयति. णि ० सुइ-मन्घ्रिपत्, मजिनिपत. स० ला-जिघ्रासति यःल्ट्-जेत्रीयते. जनात, जेनयाति. चम् (खाना) धातुके रूप. स्टू-चमात. रडू-अपम्त रिट्-६चाम टुइ-अचमीद लुट्-चमिता. बट्-चमिप्यति रोट् घमत वि० ल्हि चमेद. आ० लिइ-चग्यात. न- चमिप्यत्. क० लट्-चायते णिलट्-चामयति स० लट्- भाचमिपति य० लट्-चञ्चाम्यते. चर ( जाना ) धातुके रूप. स्ट्-चति. लइ-अपरत् लिटू-६चार. सुट्-अधारीत. ट्- भारता. लट्-चरिष्यति रोट्-परतु वि० लिइ-चरेत् आ० लिङ्- पर्याव. लड्-मचरिष्यत् २० टर-पर्यते णि० लट्-चारयाते स. कर-चिचरिपति य० रट्-चपूप्यते, चरीति, चत्ति. च्युत् ( चूना ) धातुके रूप. स्टू-प्योतति रड्-भच्योत्त. रिट्-उच्योत. हद-अच्युतव, मच्यो- तीत. सुटू-ज्योतिता. भट्-योतिप्यति लोट-च्योतत वि. लिह- च्योद. भा० लिट्-च्युत्यात. नद-अच्योतिप्यत. क० लट्-न्युत्यते णि एर-च्योतयति-ते. णि इ-अधुच्युतव, मधुच्यतत् स. स्ट्- बुध्यतिपति, दुर्योतिपति या स्ट्-चोच्युत्यते, चोच्युतीति, घोच्योत्ति. जम्म् (जम्हाई लेना) धातुके रूप. स्ट-जम्भते रह-सम्मत. रिद-ज्जम्भे. लुग-मजम्मिष्ट. सुइ- अग्मिता. लटू-जम्भिप्यते. सोर-जम्भताम् वि. लिइ-जम्भेन आ. रि-जम्भिीष्ट नड्-मजग्मियत. का स्टू-जम्भ्यते पि. एट- मम्मयति. सार-जिम्मिपत. २० लट-जनभ्यने, जनभीति, जनन्धि. जीद (जीना ) धातुके रूप. स्ट्-र्जापति स्इ-अजीवद. लिट्-जिजीप. सद्-मनीवीत. एर- २६८ धातुरूपावाल। गाह ( जलमें धसना) धातुके रूप. लट्-गाहते. हड़-भगाहत. रिटू-जगाहे. लड्-भगाढ, अगाष्टि. लुटू-गाढा, गाहिता. लट् घाइयते, गाहियते रोट्-गाहताम्. वि. लिङ्-गाहेत. भा०हिड्-घाक्षीष्ट, गाषिीष्ट. लड्-मधाक्ष्यत, अगाहि प्यत. क० रुट्-गाहते. णि० लट्-गाहयते. स० रट-जगाहिपते. य. लट्-जागाह्यते गुप् ( रक्षण करना) धातुके रूप. स्टू-गोपायति. रड्-भगोपायत. रिद-गोपायाश्चकार, जगोप हुइ- मगोपायीत्, भगोपीत, अगौप्सीत. टुटू-गोपायिता, गोपिता, गोता. बट-गोपायिप्पति, गोपियति, गोप्स्यति. रोट्-गोपायतु. वि. लिड्न गोपायेत् आ० लिङ्-गोपाय्यात् गोप्यात्. लड्-अगोपायियत, अगो पिष्यत्, अगोप्स्यत. क० लट्-गुप्यते. णि०, स्ट-गोपाययति, गोप्यति. णि० लड्-अजगोपायत, अनूगुप्त स० लट्-जुगोपाणिपति, नरसति, मुगोपिषाते. य० लट्-जोगुप्यते गुप् ( दोष लगाना) धातुके रूप. लट्-जगुप्सते लड्-मजगुप्सत. लिर-जरासाश्चक्रे.इ-अनगुप्सिष्ट. लुट-जगुप्सिता. नट-जगुप्रुिप्यते. लोट-जगुप्सताम्. वि. रिड्-जुगु- प्येत. आ० रिइ-जुगुल्सिपीष्ट लड्-अजगुप्सियत क० रट्-जुगुप्स्यते. स. लट्-जुगुप्सिषते. गृह (लेना) धातुके रूप. रट्-गर्हते. लड्-भाईत. लिट-जगहे. लुद्ध-अगहिष्ट, महक्षत हट्- गहिता, गर्दी. लट्-गहिप्यते, घृक्ष्यते. लोट-हताम्. वि० लिट्-'हेत. मा० लिड्-गहिषीष्ट वृक्षीष्ट लड्-अगहायत, अपर्यंत २० स्ट- गृह्यते णि० लट्-गहर्यति. स. स्ट्-जिगहिपते, जिघृक्षते य० लट्- नरीगृह्यते, जरीगाँति, जरीगढेि.' घस् (खाना) धातुके रूप. ल्ट्-घसति रुड-अघस्त. लिट्-जघास हटू-घस्ता. लट्-पत्स्यति, छोट -घसतु वि. रिड्-पस्त. आ० लिड्-घरयात. ल ड्-अघत्स्यत. का लट्-घस्यते फ० स्ट-घस्ता.क. लट्-पत्स्यते क० र-अघत्स्यत.
- धातुरूपावलि स्पज्यात्. लट्-अत्यक्षत्. क० लट्-त्यज्यते. णि. लट्-त्याजयति. स. हट्-तित्यक्षति. या लट्-तात्यज्यते, तात्यजीति, तात्यक्ति. दद् ( देना) धातुके रूप. लट्-ददते. लह-अददत. लिट्-दददे. लुङ्-अददिष्ट लुट्-ददिता. लट्-ददिष्यते. लोट-ददताम्. वि. लिङ्-ददेत. आ० लिइ-ददिपीष्ट. लग-अददिप्यत. का लट्-दद्यते. णि० लट्-दादयति-ते. स० लट्- दिददिपते. य० लट्-दादयते, दाददीति, दादत्ति. दध् (धारण करना ) धातुके रूप. लट-दधते. लङ्-अदधत. लिट्-देघे. लुङ्-अदधिष्ट छुट्-दधिता. सट्-दधिप्यते. लोट्-दधताम्, वि. लिड्-दघेत. आ० लिड्-दधिपोष्ट. लड्-अधिष्यत. का लट्-दध्यते णि• लट्-दाधयति-ते स० लट्- दिदधिपते, य०स्ट्-दादध्यते, दादधीति, दादडि. दश् ( डसना) धातुके रूप. लट्-दशात लङ्-अदश लिट्-ददश. लुइ-अदक्षिीत. लुट्-दंष्टा. लटू-दक्ष्यति रोट्-दशतु. वि. लिइ-दशेत् आ० लिङ्-दश्याद. ग-अदक्ष्यत्. का लट्-दश्यते णि लट्-दंशयात. स० लट्-दिदक्षति य० लट्-ददश्यते ददशीति, दंदष्टि दह (जलाना) धातुके रूप. ट्-दहति लड् अदहत्. लिट्-ददाह. लुङ्-अधाक्षीत. लुट्-दग्धा. नटू-धक्ष्यति. लोट-दहतु. वि. लिङ्-दहेत. आ० लिइ-दह्यात. लट्- भधक्ष्यत्. क० लट्-दह्यते. णि० लट्-दाहयति-ते. स० लट्-दिधक्षति म. लट्-दादह्यते, दादहीति, दादग्धि. दा ( देना) धातुके रूप. लट्-यच्छाते. लङ्-अयच्छत्. लिट्-ददी. लुइमदाद, लुट्-दाता, नटू-दास्याते. लोट्-यच्छत. वि० लिङ्ग-यच्छेद. आ० लिङ-देयाद. सह-अदास्यत्. का लट्-दीयते. णि लट्-दापयतेि. स० लट्-दित्सति. २० लट्-देदीयते, दादाति, दादोते. दु ( मागना) धातुके रूप. लट्-दवति. लद-मवद. लिट्-दुदाव. सृद्-भदावीद, अदीपीद.
२७० धातुरूपावाल । जीविता. लट्-जीविष्यति. लोटू-जीव. वि. लिइ-जीवेत्. आ० लिहू- जीव्यात्. लड्-अजीविष्यत्. क० लट्-जीव्यते. णि० लट्-जीक्यति. णि लुड्-अजिजीवत्, अजीजिवत. स. लट्-जिजीविषति. य० लर- जेजीव्यते. ज्वर (ज्वर आना) धातुके रूप. लट्-ज्वरति. लड्-अज्यरत. लिट्-जज्वार. लुइ-अज्वारीत् लुट्- ध्वरिता. लट्-ज्वरिष्यति. लोट्-ज्वरतु. वि० लिड्-ज्वरेत. आ० लिह- ध्वर्यात् लइ-अज्वरिष्यत्. क० लट्-ज्वय॑ते. णि लट्-ज्वरयति णि. लह-अजिज्वरत् स० लट्-जिज्वरिपति. य० लट्-जाज्वर्यते, जाज्वरीति, जात्ति. दौक् ( जाना) धातुके रूप. लट्-दौकते. लड्-अढौकत. लिट्-डुढौके. लुड्-अटौकिष्ट. लुट दौकिता. लट्-ढौकिप्यते. लोट-ढोकताम्. वि. लिड् दौकेत. मा. लिड्-दौकिपीष्ट. लड्-अढौकिष्यत. क० लट्-ढोक्यते णि० लर- दोकयति. स० लट्-डुढोकिपते. य० लट्-डोटीक्यते. तिज ( क्षमा करना) धातुके रूप. लट्-तितिक्षते. लङ्-अतितिक्षत. लिट्-तितिक्षाञ्चक्रे लुङ्--अतिति क्षिष्ट. लुट्-तितिक्षिता. लट्-तितिक्षिप्यते. लोट्-तितिक्षताम्. विलिह- तितिक्षेत. आ० लिङ्-तितिक्षिपीष्ट. लड्-अतितिक्षिष्यत. ह (तैरना) धातुके रूप. लट्-तरति-ते. लङ्-अतरत, अतरत. लिट्-ततार, तेरे लुइ-अता- रीत. अतीर्ट, अतरिष्ट, अतरीष्ट. लुट्- तरिता, तरीता. लट्-तरिष्यति-ते. तरीप्यति-ते. लोट्-तरतु, तरताम् वि.लिइ-तरेत्, तरेत आ० लिङ्ग- सीर्यात्, तरिषीष्ट, तरीपोष्ट, तीर्पोष्ट. लड्-अतरिष्यत्-त, भतरीप्यत्-त. फ० लट्-तीय॑ते. णि० लर-तारयति. स० लट्-तितरिषति, तितरीपति, तितीपति. य० लट्-तेत्रीयते, तातरीति, तातति. त्यज (छोडना ) धातुके रूप. लट्-त्यजति. लड्-अत्यजत्. लिद-तत्याज लुड्-अस्याक्षीद. खुद- रयता. लट्-त्यक्षति. लोट्-त्यजत. वि. लिड्-त्यजेत्. आ० लिह- धातुरूपावाले। धोय्यांद.लङ्-अयोरिष्यत्. क. -धोयते. णि लट्-धारयति. णि. लुद-अयोरव. स. लट्-दुपौरिसात. या लट्-दोधार्यते, दोधोरीति, दोघोत्ति. ध्मा (फूंकना ) धातुके रूप. ला-धमति. लङ्-असमत्.लिट्-दध्मोलुङ-अध्मासीद. लुट्-ध्मात. बट्-मास्यति. लोट-धमतु. वि. लिइ-धमेद. आ० लिड-भेयाद, ध्मायात. सङ्-अध्मास्य. क० लट्-मायते णि लम्-ध्मापयात. स. लट्-दिध्मासते. य० लट्-देध्मीयते, दाध्मति, दाध्माति. नम् ( नमस्कार करना ) धातुके रूप. रट्-नमाते. लड्-अनमद. लिद-ननाम. लुइ-अनसीन्. लुट्-नन्ता. नटू-नस्यात. लोट-लमनु. वि. लिइ-नमेन. मा. लिइ-नम्यात् ल- अनस्यत्. क. ठर नम्यते. णि० लट्-नमयति, नामयति स० लट्-निनं सति. या लट्-नंनभ्यते, ननमीते, नंनान्त. निन्द (निंदा करना) धातुके रूप. ल-निन्दति. ल्ड्-अनिन्दन. लिट-निनिन्द. लुट्-मनिन्दीत. लुट्- निन्दिता. ल-निन्दिष्याते. लोर-निन्दा. वि. लिइ-निन्देव. मा. लि-निन्यात लइ-आमन्दिष्या. का ल-निन्यते. जि. ला-निन्द- Kit.रो. नी (ले जाना) धातुके रूप. ला-नति-ते. लह-मनयन. अनया लिप-निनाय. लुइ-अपीव, अनेट. लु-नेता. लट्-नेप्यति-ते. लोट-नयतु, नयताम्. वि० लिइ “नयेत, नयताम्. भा० लिइ-नीयात्, नेपीष्टः लङ्-अनेप्यत्-त. क. लट्-नीयते. णि० लर-नाययति-ते. स. सद-निनीपति-ते. य. लए- नेनीयने, नेनयोति, नैनति. पत्र ( पकाना ) धातुके रूप. ल-पचति-ते. लइ-अपचत्-त. लिए-पपाच, पेचे. लुइ-अपा- क्षीत्, अरक्त. लुट-पक्ता. लर-पक्ष्याते-ते. लोट-पचतु-ताम. विलिङ्- पचे-त. आ० लिम-पत्र्याव, पक्षोष्ट लइ-अपश्यत्-त. क. लट्- १७२ धातुरूपावाल। सुट्-दोता. लट्-दोप्याते. लोट्-दवतु. वि. लिङ्-दवेत्. आ० लिङ्- दूयात्. लङ्-अदोष्यत्. का लट्-यो. णि. ल-दावयात. स. लर- दुपाते. य० लट्-दौदूयते, दोदवोति, दोदोोते. दृशू (देखना ) धातुके रूप. ला-पश्यति. लङ्-माश्यत्. ले-ददर्श. लुङ्-अदर्शन, अद्रा "क्षति लुइ-द्रष्टा. लट्-द्रक्ष्यति. लोर-पश्यतु. वि. लिड-पश्येत. आ. लिङ्-दृश्यात्. लइ-अद्रश्यन. का लर-दृश्यते. णि. लट्-दर्शयाते. णि दुङ-अदीदृशत्, अदर्शन. स. ला-दिक्षो. य० ला-दरीह श्यते, दरिदृशीत, दर्दीष्टे गुर ( चमकता) धातुके रूप. लर-योतते. लइ-अयोतत. लिट-दियुते, लुड्-अमुता, अयो तिष्ट लट्-द्योतिता. नए-योतिप्यते. ले.ट्-योतताम. वि. लिङ्-यो नेत. मा लिड्-द्योतिषीष्ट. लङ्-अयोनिपत. क० लर-युत्यते. णि ला- योतयति. स० लट्-दितिपते, दियोतिपते. य० लट्-देइत्यते, देव- तीति, देद्योत्ति. दु ( भागना धातुके रूप. लर-द्रवाते. लङ्-असत. लि-द्राव. लुह्-अदुद्रुवत्. लु-द्रोक्त. लट्-द्रोप्यति. लोट्-वा. वि. लिइन्द्रा. ० लेइ-दूयात. ह. भाष्य क० लय1. Iण लवासात. जि. लुइ-मा मद्दवत्. साला-दुपति. य० लट्-दोद्रूयते, दोबोते, दोद्रोोते. धा (पीना ) धातुके रूप. ला-धयति. उड् भरयत्. ले-दयी. लुट्-अधद, अगाव, भया सीत. रुद्-धाता. लट्-धास्पाते. लोट्-धयत. वि. लिइ-धयेत्. आ. छिड्-धेयात. लइ-अधास्यत्, क. लट्-धीयते. णि. ल-धाव यति-ते. णि• लुङ्-अदीपपत्-त. स० ला-पित्साते. य० वर-देघीयते, दाति, दाधाति. धोर (दौडना) धातुके रूप. ला-पोतेि. लह-मारत. लि दुयोर, लुङ्-अमेरीद. लु-शे. रिता. नट-धोरप्याते. लोट-पोरतु. वि. लिइ-धोरेत, मा. लि. .
१७५ धातुरूपावाले। बीभत्सेत. आ. लिह-धीभत्सिपीष्ट. लड्-भवीभरिसप्यत. क. रट्- बीभत्स्यते. णि लटू-बीमत्सयते. बुध (जानना) धातुके रूप. लट्-बोधति-ते. लड्-अयोधत्-त. लिट्-युवोध, बुबुधे. हुड्- (बुधू धातुका ) अयोधीत्. (बुधिर धातुका ) अयोधीत, अबुधव, अयोधि, अबोधिष्ट. लुट- घोधिता. लट्-पोधिप्यात-ते. लोट्-वोधतु. बोधताम.पि. लिइ-बोधेत-त. आ. लिइ-बुध्यात, बोधिष्ट. लद्-अयोधिप्यत्-ते. क. लट्-अध्यने. णि लट-बोधयति. (बुधिर धातुका ) योधयति-ते. स. लट्-अमुत्सति. य० लट्-योबुध्यने, योयुधीति, वोवोद्धि. भृ ( मरना) धातुके रूप. लट्-मरति-ते. टङ्-अभरद-त. लिट्-यभार, वने. सुइ-अमापद, अभृन. हर-भत्ता. लट्-भरिप्यति-ते. लोट-भरतु-ताम्. वि. लिट्- भरेत-त आ० लिट्-धियात्, भृषीष्ट. लट्-अभरिप्यत्-त. क० लट्- प्रियते. णिल-भारयति. णि -अपीभरत. स. सद्-विभरिपति- ते, बुभूति-ते. य० लट्-वेधीयते, गर्भत्ति, परिभात, परीभत्ति. भ्रम ( घूमना ) धातुके रूप. लट्-भ्रमति, भ्रम्यात. उड्-अभ्रमद, अम्रम्पत्. लिट्-पभ्राम. लुट- अभ्रमीत. सुर-भ्रमिता, ट्-भ्रमिप्यात लोट-भ्रमतु, भ्रम्यत. वि. सिद्-भ्रमेत, भ्रम्येत्. आ. लिट्-भ्रम्यार. मद्-अभ्रमिप्यद. फ. टर-भ्रम्यते. जि० लट्-भ्रमयति णि सर अपिभ्रमत्.स. स्टू-विभ्रमि- पति. य० रुट-भ्रम्यने, यंभ्रमीति, मनन्ति. मन्य (मथना ) धानुके रूप. एद-मन्यति. सह-समन्यत लिट-ममन्य. रस्भमन्यात. शुर- मन्यिता. म्हट-मन्यिष्यनि. लोट्-मन्यत. वि. रिद्ध-मन्येत. आ० रिह- मथ्यात् मड-अमान्यप्यत्. क. मध्यने. लि. लट्-मन्ययति-ते. सर-मिमन्यिपति. पर-मामप्यते, मामन्याति, मामन्त्यि. मय्य (बांधना ) धाइके रूप. एट-मम्पति, रह-समप्यत्. रिए-ममध्य. सर-समयीत. १५- मान्यता. नर-मयिष्यति रोट-मनु रिस्-मय्येन माहि- . २७४ धातुरूपावाल । पच्यते. णि लट्-पाचयति-ते. णि लुड्-अपीपचत. साल-पिपक्षति- ते य० लट्-पापच्यते, पापचीति, पापक्ति. पत् (गिरना) धातुके रूप. रूट्-पतति. लड्-अपतत. लिट्-पपात. लुड्-अपतत. लुट्-पतिता. लट्-पतिष्यति. रोट्-पततु. वि० लिङ्-पतेत्. आ० लिङ्-पत्यात. लड्- अपतिप्यत्. क० लट्-पत्यते. णि० लट्-पातयति. स० लट्-पिपतिपति. पित्सति. य० लट्-पनीपत्यते, पनीपतीति, पनीपत्ति. पा (पीना) धातुके रूप. लट्-पिपति. लड्-अपिबत्. लिट्-पपी. एड्-अपात्. लट्-पाता. लटू- पास्यति लट्-पिबतु. वि० लिड्-पिवेत्. आ. लिङ्-पेयात्. लह- सपास्यत्. कालट-पीयते. णि लट्-पाययति-ते. स० लट्-पिपासति. य० लट्-पेपीयते, पापति, पापति. प्यार ( वदना) धातुके रूप. लट्-प्यायते. रङ्-अप्यायत. लिट्-पिप्ये. लुइ-अप्यायि, अप्यायिष्ट. सुट्-प्यायिता. लट्-प्यायिष्यते. लोट-प्यायताम्. वि० लिङ्-प्यायेत. भा० रिड्-प्यायिपीष्ट. लड़-अप्यायिष्यत. का लट्-प्याय्यते. णि. लट्-प्याययते. फण् ( पहुँचना ) धातुके रूप. एट-फणति. लड्-अफणत. लिट्-पफाण. हड्-अफणीव, अफाणीत. एट-फणिता. लट्-फणिप्यति. लोट्-फणतु. वि. लिङ्-फणेत्. भा. लिइ-फण्यात. लट्-अफणिप्यत्. क० लट्-फण्यते, णि लट्-फणय- ति. स. लट्-पिफणिपति. य० लट्-पंफण्यते, पफणीति, पंफण्टि. फल (फलना ) धातुके रूप. एट-फरति. लड्-अफलत्.. लिट-पफाल. लड्-अफालीत. उर- फरिता. भट्-फलिप्यति. लोर-फस्तु. वि. लिइ-फलेत. आ० लिड्- फल्यात्. लड्-अफलिप्यत्. क० लट्-फल्यते. जि. लट्-फाल्यति. स. ब-पिफलिपति य० ला-पंफुल्पते, पफुलीति, पफुल्ति. बंध (निंदा करना ) धातुके रूप. एट-बीभत्सते लह-मवीभत्सत. लिट्-बीभत्साश्चक्रे सुइ-मवीभ रिसट हट्-पीभरिसता. लटू-पीभरिसप्यते. लोट-पीभत्सना वि.लिक .
धातुरूपावाल। २७७ यम् (नियमन करना) धातुके रूप. लट्-यच्छति. लङ्-अयच्छत्.लिट्-ययाम.लुइ-अयसीत्.सर-यन्ता. लट्-यंस्यति. लोट्-यच्छतु वि० लिट्रयच्छेत्.: आ० लिङ्-यम्यात्. ह-अयस्यत्. फ० लट्-यम्यते णि लट् यामयति, यमयात. स० लट्- यियंसति. य० लट्-यंयम्यते, यंयमीति, ययन्ति. रन् ( रंगाना) धातुके रूप. लट्-रजति-ते टड्-अरजत्-त. लिट्-रराज, ररने. लुङ्-अरोड्- क्षीद, भरत. सुट्-रक्ता. लट्-रक्ष्यति ते रोट्-रजतु-ताम्. वि. लिङ्-रजेत-त आ० लिङ्-रज्यात, राष्ट लड्-अरक्ष्यत्-त. क. -रज्यते. णि. रट्-रज्जयति, रजयति. स. लट्-रिरज्जिपति-ते. य. खट्टारज्यते, रारजीति. रम् ( आरंम करना ) धातुके रूप. सट्-आरभते. रूड्-आरभत. लिट्-भारेमे. टुड्-आरब्ध. लुट्-आ राधा. लट्-आरप्स्पते. रोट्-आरभताम्. पि. रिड्-आरभेत. आ. लिइ-आरप्सीष्ट. लड्-आरप्स्पत. क. रुद-आरभ्यते. णि लट्-आर म्भयति णि लुइ-आररम्मत्. स. लट्-आरिप्सते. या एट-आरारभ्यने आरारम्भीति, माररधि. रम् (क्रीडा करना) धातुके रूप. लट्-रमते. लड्-भरमन. लिट्-रेमे. टुट्-अरस्त. लुट्-रन्ता. लट्- रस्पते. लोट्-रमताम्. वि. रिइ-रमेत. आ० लिङ्-रंसीर. लद्-भर. स्यत. क० लट्-रम्यते णि लट्-रमयति. णि सुट्-अरिमत. स. लट्-रिरंसते. य० लट्-रम्यते, ररमीति, रंरन्ति. रुह ( वढना) धातुके रूप. लट्-रोहति. लड्-अरोहत. लिट्-सोह. सुद्-भरक्षत. हट्-रोदा. लट्-रोक्ष्यति. रोट्-रोहतु. यि लिइ-रोहेत. मा०लिइरपात. लड्- अरोक्ष्यद, क० लट्-रहाते. णि लट्-रोहयति, रोपयति. णि इ- भररहद, मरूपत्. स. एट्र-रुरक्षति. य० लट्-रोरात, रोरहीति, रोरोटि. लम् (पाना) धातुके रूप. उद-रमते. एट असमत.लिट रेमे. खुद-भलम्प. एट-सग्या, नट- .
धातुरूपावाले। मव्यात्, मव्य्यात्, लङ्-अमव्यिप्यत. फ० लट्-मव्यते, मय्यते. णि. स्ट्-मव्ययति. स. लट्-मामव्यिपति. य० लट्-मामव्यते, मामव्योति, मामात. मान् ( विचार करना ) धातुके रूप. लट्-मीमांसते रड्-अमीमांसत. लिट्-मीमांसाश्चक्रे लुङ्-अमीमा- सिष्ट. लुट्-मीमांसिता. लट्-मीमासिष्यते. लोट-मीमांसताम्. वि० लिट्- मीमांसेत. आ० लिड्-मीमांसिपीष्ट. लड्-अमीमासिष्यत. क० लट्- मीमांस्यते. णि० लट्-मीमांसयते मे (मुवादला करना ) धातुके रूप. लट्-मयते. लड्-अमयत. लिट्-ममे. लुङ्-अमास्त लुट्-माता. लट्- मास्यते. लोट्-मयताम्. वि० लिड्-मयेत. आ० लिट्-मासीष्ट लङ्- समास्यत क० लट्-मीयते णि० लट्-मापयते. स. लट् मित्सते. यः स्ट-मेमीयते, मेमयोति, मामेति, मामाति. मन् (मनन करना ) धातुके रूप. लट्-मनति. रङ्-अमनत् लिट्-मनो. लुड्-अनासीत् सुट्-माता. लट्-मास्यात. लोट्-मनतु वि० लिङ्-मनेत् आ० लिइ-नायात, नेयात्. लङ्-अन्नास्यत्. क० लट्-मायत णि० लटू-नापयति. णि. हद-भमिन्नपत्. स० रुट्-मिम्नासति. य० लट्-माम्नायते, मानाति, मान्नेति. यज्ञ (पूजना) धातुके रूप. स्ट्र-यजति-ते. लड्-अयजव-त लिट्-इयाज, ईजे. लुद्-अयाक्षीत, भयष्ट. रुद-यष्टा. लट्-यक्ष्यति-ते लोट-यजतु-ताम. वि. लिङ्-यजेव-त. आ० लिड्-ज्याद, यक्षीष्ट. लड्-अयक्ष्यत्-त. कल-इज्यते का लड्-ऐज्यत्. णि लट्-पाजयति-ते. णि• लुड्-अयीयजद. स० लट्- यियक्षति-ते. य० लट्-यायन्यते, याटि. यत् (यन करना ) धातुके रूप. स्ट्-यतते. सह-अयतत लिट येते. लुट्-अपतिष्ट हद-यतिता. बटू- यतिष्यते. रोट्-यतताम्. पि. लिइयतेत. मा० रियसिपीष्ट सर- भयतिष्यत. क० ला-यरयते जि० लट्-यातयति-ते. णि सुरमयीय तत्. स. -पियतिपते. य. रूट-गायत्यने, यायतीति, यायात.
धातुरूपावालि । सुइ-भवाहि.णि० लट्-वाहयति-ते. स. लट्-विक्षति-ते. य. रट्- वावरते, वावोदि. वृक् ( लेना) धातुके रूप. लट्-वकते. रइ-अवकत. लिट्-वडके. लुढ़-भवकिष्ट सुट्-वर्किता. लट्-वकिप्यते. लोट्-वर्कताम्. वि. रिह-वकंत. मा० लिइ-वकिपीष्ट लड्-भवकिप्यत. का लट्-वृक्यते. णि. लट्-वर्कयति. णि टुड्- अवकत, अवीवृक्त. स० सट्-विवकिपते. य० लट्-परीवृक्यते, वरियक्ति, परीवक्ति, व्यक्ति, वईकीति, परिकीति, वरीकाति. वृत् (होना) धातुके रूप. लट्-वत्तते. एड्-अवर्तत. लिट्-पते. सह-महतत्, अपत्तिष्ट. सुट्- पत्तिता. लट्-पत्तिप्यते, वत्स्यति. लोट्-वत्तेताम्. वि. लिङ्-यत्तेत. मा० लिह-वत्तिपोष्ट लड्-अवतिष्यत, भयत्स्यत्. का लट्-वृत्यते. णि० लट्-वर्तयति. स० लट्-विवत्तिपते, विद्वत्सति. ३० सट्-वरीवृत्यते, परिवृतीति, परिवति, परीवृतीति भादि. वे (बुनना) धातुके रूप. स्ट-बयति-ते. अवयत्-त.सिट-उवाय,वा, उये. लुइ-मवासीद, अवास्त. लट्-याता. लट्-वास्यति-ते. लोट्-वयतु-ताम. वि. लिह- घयेत्-त. मा० लिट्-उयाव, वासीष्ट लट्-अवास्यत्-त. क० लट्- उयते, णि सट्-पाययति-ते. स० लट-विरासति-ते. या लट-पावायते, वावाति, बावति. व्ये (टॅकना) धातुके रूप. सट्-व्ययाति-ते. लइ-अव्ययत्-त. लि-विव्याय, विय्ये. रड्- अव्यासीद, अव्यास्त. सुट्-च्याता. लट्-व्यास्पति-ते. सोट्-व्यस्त- ताम्. वि. लिइ-व्ययत्-त. मा०टिह-यीयात, व्यासीट सदसव्या. स्पन-त. काल-वीयते. णि एट-च्याययति. स. लट्-विच्यासति-ते. ५० एट-पोयते, घेश्यीति, यत्ति, शद् (जाना ) धानुके रूप. एए-शीयनेलह-मशीयत. लिए-शशाद. सद-अशदद. -शत्ता. नर-शस्पति. रोर-शीयताम्. वि. टि-शीयेत. ना लिइ-शयाद.
१७८ धातुरूपावाले। लप्स्यते. लोट्-लभताम्. वि० लिङ्-लभेय. आ० लिड्-लप्सीष्ट लड्-- अलम्स्यत क. लट् लभ्यते. णि लट्-लम्भयति. स. लट्-लिप्सते. य. लट्-लालभ्यते, लालभोति, लालम्भीरते. लोच (देखना ) धातुके रूप. लट्-लोचते. लड्-अलोचत. लिट-सुलोचे. टुङ्-अलोचिष्ट. सुर- लोचता. लट्-लोचिप्यते. लोट-लोचताम्. वि० लिइ-लोचेत आ० लिङ्-लोचिपोष्ट. लङ्-अलौचिप्यत. क० लट्-लोच्यते. णि० लट्-लोच यति. स. लट्-सुलोचिपते. य० लट्-लोलोच्यते, लोलोचीति, लोलोक्ति. वद् ( बोलना ) धातुके रूप. लट्-वदति लङ्-अवदत्. लिट्-उवाद. लुइ-अबादीत्. लुट्-वदिता. लट्-वदिष्यति. लोट्-वदतु. वि. लिङ्-वदेत. मा० लिङ्-उद्यात्. लाडू- अवांदप्यत्. क० लट्-उद्यते. णि लट्-वादयति. णि• लु-अवबदत. स० लट्-विवादपति. या ट्-वावद्यते, वावदीति, वावत्ति. वप् ( वोना) धातुके रूप. लट्-पपाते-ते. लड्-अषपत्-त० लिट्-उवाप, अपे. लुङ्-भवाप्सीद. अबप्त. लुट्-वप्ता. लट्-वप्स्यति-ते. लोट्-वपतु-ताम्. वि. रिट्-वपेत-त. आ० लिड्-वप्यात, वप्तीष्ट. लङ्-अवप्स्यत्-त. क० रुटू-उप्यते. णि. लट्-वापयति-ते. स० लट्-विषप्सति-ते. य० लट्-धावप्यते, पावपीति, घावप्ति, वस् (रहना ) धातुके रूप. लट्-वसत्ति. लइ-अवसद. लिट्-उवास. हुड्-अपारसीत्. लुट्-यस्ता लटू-वत्स्यात. लोट्-वसतु. वि. लिङ्-वसेद. आ. लिह-उप्यात. लह भवत्स्यद. क० लद-उप्यते. जि. लट्-वासयति-ते..स० लट्-विवत्सति य० ए-वावस्यते, वायसीति, वावस्ति. वह ( वहना ) धातुके रूप. लट्-वहातेते. लट्-अवहन-त. लिट्-उवाह, उहे. सुङ्--अवाक्षीद, अघोट. लोट्-वहतु-ताम्. वि. लिड्-यहेत-त. आ० रिह-यवाद। वक्षीष्ट लह-भवक्ष्यत्-त. का लर-उद्घते. क. सट्-मोहन. क.
धातुरूपावाल। सुद्-भयाहि. पण लट्-वाह्यति-ते. स. एट-विक्षात-ते. य० सट्- वावरते, यावोडि. वृष (लेना) धातुके रूप. एट्-वर्कते. सह-अवर्कत. रिट्-पवृके. सुद-अवष्टि सुटू-वकिता. लट्-वकिप्यते. लोट-पर्वताम्. वि. लिङ्-वत. आ० सिदयांकंपोष्ट लट्-अवकिप्यत. क० स्टू-वृक्यते. णि० लट्-वर्कयति. णि सुड्- भवक्त, मधीवृक्त.स. ला-विवकिपते. या लट्-वरीवृश्यते, परिवक्ति, घरीवक्ति, वक्ति, वकीति, परिकीति, परीशीति. वृत् (होना) धातुके रूप. रट्-वर्तते. सङ्-भवर्तत. लिट्-यवृते. हड-अमृतत, अयत्तिष्ट. सट्- वत्तिता. लट्-पत्तिप्यते, वत्स्यति. लोट-वत्तताम्, वि. लिङ्-यत्तत. मा० लिइ-यत्तिपोष्ट. लड्-अवत्तिप्यत, भवत्स्यत्. का ला-वृत्यते. णि० लट्-यत्तयति. स० एद-वित्तिपते, विवृत्सति. य० लट्-धरीत्यते, परिवृतीति, परिवत्ति, परीवृत्तीति आदि. वे (बुनना) धातुके रूप. लट्-ययाति-ते. रद् अवयत्-त.लिट-उवाय,पयो, उये. सह-अयासीव, अवास्त. सुट्-वाता. लट्-वास्यात-ते. लोद-वयतु-ताम. वि. लिङ्- घयेत-त. आ० लिट्-उयाद, वासोट लड्-भवास्पद-त. कला- उयते, जि. रट्-पाययति-ते. स. सट्-विरासति-ते. या लट्-वावायते, वाघाति, पावति. व्ये (टॅकना) धातुके रूप. हर-व्ययति-ते. सइ-भव्यय-त. रिद-विव्याय, यिव्ये. सह- अव्यासीव, अव्यास्त. ए-च्याता. नर-प्यास्यति-ते. सोर-व्ययतु- ताम्. वि. रि-व्ययेन-त. मारिइ-पीयाद, प्यासीर सद-अध्या- स्यत्-त. या एट-बीयते. णि उद-व्यायपति. स. एट-विव्यासति-ते. या रद-पेयीयते, पेश्यीति, येवेत्ति गद् (जाना) घानुके रूप. एट-शीयने एमशीयत. रिद-रागाद. उद-भशदद स-शत्ता. -शास्यति. सोर-शीयताम. वि. सिर-शीयेत. मारिइ-शपाद.
धातुरूपापाले। श्रूयात्. लड्-मश्रोष्यत्. णि० लट्-श्रावयति. णि• लुड्-अशुश्रयत्, अशिश्रवत्. स० लट्-शुश्रूयते. य० लट्-शो श्रूयते, शोश्रवीति, शोश्रोत श्चि (वढना) धातुके रूप. लट्-श्वयति. लड्-अश्वयत्. लिट्-शिवाय, शुशाव. सुइ-अश्वयीत, शिश्वयद, अश्वत्. लुट्-वयिता. लट्-श्वयिष्यति लोट्-श्वयनु वि० लिड्- श्वयेत. आ० लिङ्-शयात् लड्-अश्वयिप्यद. का लट्-शर्यत णि० लट्- श्वाययति. णि० हुइ-अशिश्वत्, अशुशवत्. स० लट्-शिश्वयिपति. यः लट्-शेश्चीयते, शोशूयते, शेश्वयीति, शेश्वेति. सन् ( गले लगाना ) धातुके रूप. लट्-सजात. लड्-असजत्. लिट्-ससञ्ज. लुइ-असक्षिीत्. लुट्-सक्ता. लट्-संक्ष्यति. लोद-सजतु. वि. लिङ्-सजेद. मा.लिइ-सज्यात्. लड्- असंक्ष्यत्. क. एट-सन्यते. णि० रुट्-सन्जयति. स० लट्-सिसक्षति. य. लट्-सासिज्यते, सासनीति, सासक्ति. सद् ( गिर पडना ) धातुके रूप, लट्-सीदति. लइ-असीदद. लिट्-ससाद. हङ्-असदत्. लुट्-सत्ता. लट्-सत्स्यति. लोट्-सीदतु. वि० लिङ्-सीदेत्.आलिङ्-सद्यात्. लङ्- मसत्स्यत्. क० लट्-सद्यते. णि० लट्-सादयति. णि लुइ-असीपदत्. स. लट्-सिपत्साति. य० लट्-सासवते, सासदीति, सासत्ति. सस्त्र ( जाना ) धातुके रूप. रुट्-सज्जति-ते. टड्-भसज्जत्-त. लिट्-ससन्न, ससने. इ-अस. ज्जीत, भसनिष्ट. लुट्-सज्जिता. लट्-सज्जिप्यति-ते. लोट-सजा-ताम्. वि० लिड्-सन्जेत्-त.आ० लिइ-सज्जाद, सन्निपीट, लङ्-असजिप्यत्- त. का टट्-सज्यते. णि० लट्-सज्जयति-ते. स० लटू-सिसज्जिपति-ते या स्ट्-सासज्यते, सासनीति, सासक्ति. सह (सहना ) धातुके रूप. हर-सहते. सह-असहत. लिट-सेहे. हद्-असहिष्ट खुद-साहिता, सोढा. लट्-सहिप्यते. खोट्-सहताम्. पि. लिङ्-सहेत. आ: लिइ-स. हिषीर.रड्-असहिप्यत. क. रट् सहते.णि लट्-सहयति.णि सुदर असीपहत. स. लट्-सिसहिपते. य० लट-सासयते,सासहीति, सासोदि.
१८४ धातुरूपावाल। त्-त का लट्-स्मय॑ते. णि० लट्-स्मारयति-ते. स० लट्-सुस्मर्पते. या लट्-सास्मयेते, सास्मरीति, सास्मत्ति. हृ ( हरण करना) धातुके रूप. लट्-हरति-ते. लङ्-अहरत्-त. लिट्-जहार, ज), लुइ-महापति, अहत. लुट-हर्ता. टू-हरिप्यति-ते. लोट्-हरतु-ताम्. वि. लिइ-हरेत- त. आ० लिड्-ह्रियात्. हृषीष्ट. लड्-अहरिप्यत्-त. का लट्-ह्रियते. णि लट्-हारयति-ते. स० लट्-जिहीपति-ते. य० लट्-जेहियते, नह- रीति, जरिहरीति, जरीहरीति, जरिहर्ति, जरीहर्ति. ह्राद्. ( आनंद करना ) धातुके रूप. लट्-झादते. लड्-अहादत. लिट्-जहादे. लु-अहादिष्ट. लुट- हादिता. लट्-हादिप्यते. लोट-हादताम्. वि. लिड्-द्वादेत. आ० लिङ्-हादिपीष्ट. लड्-अह्रादिप्यत. क० रट्-हाद्यते. णि० लट्-हा- यति-ते. स. लट्-जिहादिपते. य० लट्-जाह्राद्यते, जाहादीति, जाहात्ति. हे (पुकारना ) धातुके रूप. ए-हयात-ते लङ्-अह्वयत्-त. लिट्-जुहाव, जुहवे. लुङ्-अहत, अहत, भहास्त. लुट्-हाता. लट्-हास्यति-ते. लोट्-द्वयतु-ताम्. वि० लिड्-हयेद-त. आ० लिड्-हूयात, हासीप्ट. लड्-अहास्यत्-त. क. लर-हूयते. क. टुङ्-अह्वायि, अह्वापिष्ट, अहत, अदास्त. क० लट्- ह्वास्यते, हायिप्यते. क० लहू-अहास्यत, सहायिप्यत. णि लट्-ह्वाय यति णि लुइ-अजहवत्. स. लट्-जुहूपति-ते. य. लट्-जोहूयते, जोहवीति, जोहाति. द्वितीयमणस्थ उपयुक्त धातुओंके रूप. आर (वैठना ) धातुके रूप. लट्-मास्ते, भास्स्ते. लइ-आस्त. लिट्-मासाशके टुड्-आसिष्ट. एर मासिता. लट्-आसिप्यते. लोट-मा आ० रिड्-आसिपीट लड्-मासियत.. । मासयति. स. एट-आसिसिपते. - धातुरूपावलि । इ (जाना) धातुके रूप. एट-एति. लहू-ऐत्. लिट्-इयाय. लुद्-अगात् खुट्-एता. लट्- एप्यति. रोट्-एतु वि० लिइ-इयात् आ० लिइ-ईयात्. लङ्-ऐष्यत्. क० टर-इयते. क. सु-अगायि. णि लट्-गमयति. स. लट्- जिगमिपति. ईड (प्रशंसा करना) धातुके रूप. लट्-हे. लङ्-ऐट्ट रिट-ईहाञ्चक्रे लुट्-ऐडिष्ट. सुट्-ईडिता. लट्- इंटिप्यते. रोट्-ईटाम् वि. लिइ-ईडीत. आ० लिइ-ईडिपीष्ट लड्- ऐटिप्यत. क० लट्-ईडचते. णि लट्-ईडयति. स. लट्-इंडिटिपते. जाए (जागना ) धातुके रूप. लट्-जागति. लह-अजागः. लिट्-जागराञ्चकार, जजागार. लुइ- अजागरीत सुट्-जागरिता. लट्-जागरिष्यति. लोट-माग . वि. लिङ्-- जागृयात्. मा. रिइ-जागत्.ि क. सल्-जागयेते. णि० लट्-जाग- रयति सारद-जिजागरिपति. दा ( कदरना) धातुके रूप. एन-दाति. लइ-अदात्. लिटू-ददी. हुड्-भदासीत्, खुट्-दाता. हद-दास्यति. लोट्-दातु. विलिइ-दायाव. आ. लिइ-दायात. सह-अदास्यत्. कएन-दायने णि लट्-दापयति. स. लट्-दिदा- सति य ए-दादायते, दादाति, दादेनि. यु ( मिलना ) धातुके रूप. छा-योति. लइ-अयौद. लिट-युयाय. लु-अयावीत्. सुट्-यविता. सदस्यायप्यति खोद-यौतु. वि० लिङ्-युयात् आ० रिङ-यूयात्, नर-अरिष्यत् का सा-यूयते. णि ला-याययति सा लट्-युयूपति, युधिपति या लट्-योयूयने, योयमति, योयोति. वन (बोलना) धातुके रूप. स्ट्र-पक्ति सह-अवर, मग. हिट-उपाध, उचे मुद्-अवोचत्, मोचत सुर-पत्ता. पर-पक्ष्यांत-ते. सोर-यकु. पिक लिड्-मच्यात्, मा लि-उज्यात, पक्षीट गड्-भत्रक्ष्यत्-त. क. उद-उच्यने जि. एर यादयात. सासर-पिशाते-ते. या लट-पावच्यते, यायक्ति.
धातुरूपावाले।
शी (सोना) धातुके रूप.
लट्-शेते. लट्-भशेत. लिट्-शिश्ये. सुद-अशयिष्ट. छुट्-शयिता.
लट्-शयिष्यते. लोट-शेताम्. वि. लिङ्-शयीत. आ० लिट्-शयिपीष्ट.
का स्ट्-शय्यते. णि स्ट्-शाययति. स. लट्-शिशायपते. या लट्-
शाशय्यते, शेशयीति, शेशेति.
श्वस ( श्वास लेना) धातुके रूप.
लट् स्वसिति ल्इ-अश्वसीद, अश्वसत. लिट्-शश्वास. सु-अवतीद.
लुट्-श्वसिता. लट्-श्वसिप्यति लोट्-श्वसितु वि० लिङ्-श्वस्याद. मा.
लिङ्-श्वस्यात्. लड्-अश्वसिष्यत्. क. स्ट्-श्वस्यते
सू (प्रसूत होना) धातुके रूप.
रा-सूते रङ्-असूत. लिट्-सुषुवे. टुइ-असाविष्ट, असोष्ट लुट्-सोता,
सविता, लट्-सोप्यते, समिप्यते रोर्-सताम्. वि० लिइ-मुवीत. भा०
लिङ्-सोपीष्ट, सविपोष्ट. लइ-असोध्यत, असविष्यत क० लट्-सूयते.
फ० रुइ-असानि. णि लट्-सावयति णि लुइ-असीपयत् स० लट्-
सुम्पने. य० ला-सोप्यते, सोपवीति, सोपोति
इति
धातुरूपावलि
समाप्त
पुस्तक मिलनेका ठिकाना-
गंगाविष्णु श्रीकृष्णदास,
लक्ष्मीकटेश्वर" छापाखाना,
कल्याण-मुंबई.