Prakrit Bharati Academy, Jaipur
Vastu Ratna Kosh (granthank-45)
Front matter
Rajasthāna Purātana Granthamalā
Published by the Government of Rajasthan
A series devoted to the Publication of Sanskrit, Prakrit, Apabhramsha,
Old Rajasthanı-Gujarati and Old Hindi works pertaining to India
in general and Rajasthan in particular
GENERAL EDITOR
Acharya JINA VIJAYA MUNI, Puratattvacharya
Honorary Director, Rajasthan Oriental Research Institute.
(Honorary Member of the German Oriental Society (Germany);
Bhandarkar Oriental Research Institute, Poona; Gujarat Sahitya
Sabha, Ahmedabad; and Vishveshvaranand Vaidic Research
Institute, Hosiyarpur, Punjab.)
No. 45
VASTURATNAKOŠA
(A short samskıit treatise containing one hundred and one topics
of the general culture ).
EDITED BY
Prof. Dr. PRIYA BALA SHAH
M. A, Ph. D (Bombay), D Litt (Paris)
(Head of the Department of Ancient Indian Culture,
Ramanand Arts College, Ahmedabad)
PUBLISHED BY
THE DIRECTOR
RAJASTHAN ORIENTAL RESEARCH INSTITUTE
JODHPUR (RAJASTHAN)
वस्तु
रत्न त्न कोश
(नानावस्तुप्रतिपादक - एकोत्तरशतसंख्यासमुच्चयात्मक)
बहुसंख्यक-प्राचीन-आदर्शोपलब्ध-विविधपाठभेदादिसमन्वित
शब्दानुक्रमादियुक्त प्रथमवार प्रकाशित ।
*
सम्पादिका
डॉ.प्रियबाला शाह
एम्. ए. पीएच. डी. (बम्बई), डि. लिट्. (पेरिस)
(प्राध्यापिका, रामानन्द आर्टस् कॉलेज, अहमदाबाद)
प्रकाशक
राजस्थान-राज्याज्ञानुसार
संचालक, राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान
(Rajasthan Oriental Research Institute, Jodhpur)
जोधपुर (राजस्थान)
वि. सं. २०१५]
प्रथमावृत्ति
राजकीयनियमानुसार सर्वाधिकार सुरक्षित
[ई. स.१९५९
प्रकाशक
-
-
सचालक, राजस्थान प्राच्यनिद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर के आदेशानुसार, गोपाल नारायण बोहरा.
-
मुद्रक
लक्ष्मीबाई नारायण चौधरी, निर्णयसागर प्रेस, २६-२८, कोलभाट स्ट्रीट, बम्बई, नं. २.
CONTENT's. - Pages 1 to7 ४० १-७६ ७ ७ । ७ " ८ ४४ ८ ४४ - ४४ ८ १० -- १० १३ १५ १७ । Introduction Text 1 त्रीणि भुवनानि 2 त्रिविधं लोकसस्थानम् 3 त्रिविधा भूमि 4 त्रिविधा पुरुषा 5 त्रय पदार्था 6 चत्वार पुरुषार्थी 7 षट्त्रिंशद् राजवंशा. 8 सप्ताङ्गं राज्यम् 9 षण्णवती राजगुणा 10 षट्त्रिंशद् राजपात्राणि 11 षट्त्रिंशद् राजविनोदाः 12 अष्टादशविध आस्थानम् 13 चतस्रो राजविद्या 14 चतस्रो राजनीतय . 15 षट्त्रिंशद् आयुधानि 16 सप्तविंशति. शास्त्राणि 17 द्विपञ्चाशत् तत्त्वानि 18 द्विसप्तति कला 19 चतुरशीतिर्विज्ञानानि 20 चतुरशीतिर्देशा 21 द्वात्रिंशल्लक्षणस्थानानि 22 चतुर्विंशतिविध गृहम् 23 अष्टोत्तरशतं मालानि 24 त्रिविधं दानम् 25 पञ्चविधं यश 26 सप्तविधा कीर्ति 27 नव रसा 28 एकोनपञ्चाशद् भावाः 29 चत्वारोऽभिनया 80 चतस्रो वृत्तय 31 चत्वारो महानायका Pages 32 चत्वारो नायका 33 द्वात्रिंशद्गुणयुतो नायक. ४० 34 त्रिविधा महानायिका ४१ 35 अष्टौ नायिका ४२ 36 द्वात्रिंशन्नायिकाना गुणा ४२ 37 त्रिविधं सौख्यम् 38 चत्वारि सौख्यकारणानि 39 नवविधो गन्धोपयोग 40 दशविधं शौचम् 41 द्विविध काम 42 दश कामावस्था ४५ 43 विंशती रक्तस्त्रीणा लक्षणानि ४५ 44 एकविंशतिर्विरक्तस्त्रीणां लक्षणानि 45 द्वाविंशति कामिनीनां विकारेझितानि ४८ 46 चतुर्विंशतिरसतीनां लक्षणानि 47 षोडश दुष्टस्त्रीणां लक्षणानि 48 अष्टौ स्त्रीणामविश्वासकारणानि ५१ 49 अष्टौ नार्योऽगम्या: ५२ 50 अष्टविधो मूर्खः ५२ 51 चतुर्विंशतिविधं नागरिकवर्णनम् ५३ 52 त्रिविधं रूपम् ५४ 53 त्रिविधं स्वरूपम् ५५ 54 द्वादशविध प्रमदोपचार ५५ 55 पञ्चविध. परिचय ५६ 56 दश पुरुषा स्त्रीणामनिष्टा भवन्ति ५७ 57 दशभि कारण स्त्रियो विरज्यन्ते 58 त्रिभि. कारण. कामिन्य संवध्यन्ते 59 सप्तविधाः कामुकानां सुरतारम्भा. 60 अष्टविध विदग्धानां सुरतम् ५८ 61 नवविधं सुरतावसानम् 62 नव शयनगुणा 63 दशविधः पार्थिवानां प्रमोद ६० 64 चतुर्विध प्रबोध ६१ 65 चतुर्विधा बुद्धि. ६१ - १७ है १९ २० २१ २४ ३० ३१ ३३ ૨૬ ३७ ३७ ३९ .
2 -- Pages ६१ . ६२ ६२ ६४ ६४ ६५ ६५ - 66 अष्टौ बुद्धिगुणा. 67 चतुर्विधं गान्धर्वम् 68 त्रिविधं गीतम् 69 षट्त्रिंशद् गीतगुणा 70 चतुर्विध वाद्यम् 71 द्विविध(२ द्विप्रकार) नृत्यम् 72 षोडशविवं काव्यम् 73 दशविघं वक्तृत्वम् 74 षड्विधं भाषालक्षणम् 75 पञ्चविधं पाण्डित्यम् 76 चतुर्विंशतिविधं वादलक्षणम् 77 षड्विधं दर्शनम् 78 अष्टविधं माहेश्वरम् 79 दशविधं ब्राह्वयम् 80 चतुर्विधं सायम् 81 सप्तविधं जैनम् 82 दशविधं वौद्धम् 83 चतुर्विधं चार्वाकम् 84 चतुर्विंशतिविधं विचारकत्वम् 85 दशविघं गुरुत्वम् 'Pages 86 पञ्चविधं चरितम् 87 पञ्चविधं पार्थिवानां पालनम् ७१ 88 सप्तविधा प्राप्ति. 89 चतुर्विंशतिविधं शौर्यम् 90 दशविधं वलम् 91 दशविध सङ्ग्रह 92 दशविधो जय 93 पञ्चविध परिच्छेद. 94 पञ्चविधं प्रभुत्वम् 95 सप्तविधमुत्तमत्वम् 96 नवविधा शक्तिः 97 सप्तविधा भुक्ति. 98 अष्टविधमभिमानलक्षणम् 99 चतुर्विध वात्सल्यम् 100 पञ्चविधो महोत्सव ७६ 101 अष्टौ लब्धियोग ७६ Appendix A Appendix B अकारादिक्रमेण शब्दानामनुक्रमणी १-६१ ६६ ७४ ६७ - ६८ ६८ ६८ ६९ ७७ ६९ ७८-८० तो प्रधान संपादकीय किंचित् प्रास्ताविक राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला के ४५ वें अंकके रूपमे प्रस्तुत, वस्तुरत्नकोश की एक प्राचीन प्रति, हमको जेसलमेरके जैन ग्रन्थ भंडारोंका अवलोकन करते समय, सन् १९४२ मे, दृष्टिगोचर हुई। उस प्रतिका केवल अन्तिम पत्र नहीं मिला था, जिसमे शायद लेखकके समय आदिका निर्देश किया गया होगा। बाकी कृतिका ग्रन्थपाठ प्रायः पूर्ण था । ग्रन्थका विषय उपयोगी और नूतन मालूम दिया, इस लिये हमने उसकी प्रतिलिपि करवा ली बादमें, जब राजस्थान पुरातत्त्व मन्दिर (अब नूतन नाम 'प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान') के लिये, राजस्थानमे प्राप्त प्राचीन हस्तलिखित ग्रन्थोंका संग्रह कार्य हमारे निर्देशनमें आरंभ हुआ, उसमें दो-तीन और हस्तलिखित पुरानी प्रतियां इसकी संग्रहीत हो गई। यह रचना अभी तक कहीं प्रकाशित नहीं ज्ञात हुई और विषयकी दृष्टिसे विद्वानोंके लिये एक विशेष अभ्यसनीय रचना मालूम दी, अतः हमने, राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला द्वारा, इसका प्रकाशन करना निश्चित किया; और ऐसे ग्रन्थों के संपादन' कार्यमे पूर्ण उत्साह और प्रावीण्य रखने वाली विदुषी कुमारी डॉ. प्रियवाला शाहाको इसका संपादान कार्य दिया गया। राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठानके संग्रहके अतिरिक्त, अहमदाबादकी गुजरात विद्या सभाके संग्रहमें तथा डभोईके मुक्ताबाई जैन ग्रन्थ सग्रहमें भी, इसकी प्राचीन प्रतियां उपलब्ध हुई। इस तरह ७ प्राचीन प्रतियोके आधार पर, संपादिका विदुषीने बहुत परिश्रम करके इसका उत्तम संपादन किया है जो तज्ज्ञ विद्वानोको प्रस्तुत ग्रन्थ दृष्टिगोचर होते ही ज्ञात हो सकेगा। ग्रन्थगत वस्तु नामसे ही ज्ञात होती है। साहित्यकारों, कथाकारो, प्रवचनकारों और उपदेशकोंको वारंवार उपयोगमें आने लायक ऐसे सौ विषयोंके भेदोपमेद और नामावलिका समुचित संग्रह इसमें किया गया है । इस तरह वस्तुविज्ञानका यह एक संक्षिप्त कोश ही है अतः रचनाकारने इसका नाम वस्तुरनकोश ऐसा उचित नाम दिया ज्ञात होता है । पर संक्षेपमें इसका नाम रत्नकोश भी बहुतसी प्रतियोंमें लिखा हुआ मिलता है । इसका मुद्रणकार्य पूरा हो जाने पर, बादमें हमें पाटणके भंडारोमे भी इसकी कुछ प्राचीन प्रतियां देखनेमें आई जिनमे दो प्रतियां उल्लेखनीय हैं। १) तपागच्छवाले पाटणके भडारमें एक ७ पन्नोंकी प्रति है जिसका अन्तिम पुष्पिकारूप लेख निम्न प्रकार है- "संवत् १५१५ वर्षे कार्तिके श्रीचित्रकूटे व्यलेखि। शुभं भूयात् ॥" (२) दूसरी प्रति भी इसी भंडारमे सुरक्षित है जिसके १२ पन्ने हैं और निम्न प्रकार पुष्पिकालेख है- "इति श्रीवस्तुविचाररत्नकोशसूत्रशतवस्तुविवरणं समाप्त ॥ संवत् १५९६ वर्षे मागशीर्षवदि ७ कुजे लेखि ब्रह्मदासकेन ॥" - ๙ इन पुष्पिकालेखोंसे ज्ञात होता है कि यह रचना ५००-६०० वर्ष जितनी प्राचीन तो अवश्य है ही; और इसके जो अनेकानेक पाठभेद मिलते हैं उनसे ज्ञात होता है कि अभ्यासियोंमें इसके पठन-पाठनका प्रचार भी बहुत ही रहा है। इसका रचयिता कौन है यह निश्चित रूपसे तो नहीं कहा जा सकता-पर केवल एक प्रतिमें, जैसा कि संपादिका विदुषीने अपने प्रास्ताविकमें सूचित किया है, कोई पृथ्वीधराचार्यका नाम लिखा मिलता है; सो अवश्य विचारणीय एवं विशेष अन्वेषणका विपय है । जबतक किसी कर्ताका निश्चय नहीं हो जाय तब तक हमने इसे अज्ञात विद्वत्कृत के विशेषणसे ही प्रसिद्ध करना उचित समझा है। इसके साथ कुछ प्रतियोंके पन्नोंके ब्लाक वनवा कर उनके प्रतिचित्र भी दिये जा रहे हैं। अन्तमें हम विदुपी संपादिका श्रीमती कुमारी डॉ. प्रियबाला शाहाके प्रति अपना आभार भाव प्रदर्शित करना चाहते हैं कि जिनने अत्यन्त परिश्रम पूर्वक इस रचनाका सुसंपादन कर, प्रस्तुत ग्रन्थमालाकी शोभावृद्धिके लिये सुन्दर पुष्प समर्पित किया । प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर माघ शुक्ला १४, संवत् २०१६ ११. फरवरी, १९६० मुनि जिन विजय राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला] [वस्तुरत्नकोश • सयाजीणमुरासिनिधितोमसंहारानिम्मिमिशिविधानसपाध्ययापदाचारघरमादियनिवाडाजात्रासदारंगपंजएलपतिरा सयूविमाडयानाविधानाविमोदनाशादाधिमासारवयोगविद्यारघरमारामाशिवायुमसिविज्ञानियामाणि दहिण्यामरक्षाविश्वाहियातिकालावरगामिविज्ञानातिएरातिदेहाविनासकालानामिािनिविष्ठेशाहोशिसमगलानाABAR विraneविसमासविधाकामशरसाएकोमयंधारावावध रोनिमारमावधारोनायकानाधारोमहानायकाउनि शासनाएका श्रीमाया शनिवाजुएमनोरमानिदिौरसदारितारणाचा निकारणानिविशेगोयनाशविधाजधा विस्यकामाREतिरक्तानीलकणानिधिगतिविरत नीलिक्षणारिवाािलिकासिमानाधिकारेगितानिayaardजतिमानालक्षणानि घोडशमायालङ्कामानि अधोमीण विधासकारणानिशमीना Hशभिमानिधनागारियानाधिविधा विविध फांद्वादनाविधप्रदिपायचविंशतिविधाविशयाएक्शा असमीयामनिशानयतिवानिकायोचिरस्योपनिनिकाणाकामिनीराब तिपयसभि.कासकामासुरसारसविसरवावधानी विद्यामाधानवविश्वातावलावसाanaरानाविधायाधिधामाता विविधालासशिक्षिामटोल आग विधिविधानाagणाएवविधापति। विYaarयोहमधिकारासादविवाधि साहालक्षविणाई यातिविधादलक्ष्यविधदति लकविधमादेश पदाधिवात्माधिस। रामहविधानपरदेश विधवाविधवाकिस्ममितिविधिधारका दक्षाविधेयरचएण्यविश्वरितयpalवधाछामायणाला सनविantaalaमवाशिमएसविनशशिरविशसिमालखास Namala मोमा अनिशाणugaandसो पदविधवलाधिकायापासविध सेवागवानिय avatalamNSमतान्दोटाशिनिकायमा सस्वानरानावनाशिविधलाकसम्माननादानयसलामानवसंचारामधाम विभागप्रशामिनपसमा विविध पुरुEUTRAELHIमाधमयादाlinपदायिदाधीमूलएदाधीरायास कालिमालमित्रासोमवशायादरवारकादेववेशधारमारपक्षाजावाहापशाचोणुकामारिका शोमारावारिदिकावाश्या योगासनादारावघडकापराधकारशकवशयकरटवारयकरणाला RANDAFORANAसदिलयवारयोतिकशERमकाणकया प्रवाशयालयमराजकणलगानिसदशा पदाधिकार सनमायकालमशिदाशिकाamjReरिणाशाहोडिरामानराशासशेयरडयायामामात्या पदासाडोमा रायमालियालमतिमायणामाशाविछोविनयविजयावधियका विद्यारक्षक्षक्षाशाविनापसमासाशीवायसन्मानसमा ६ 'डी' संज्ञक प्रतिका प्रथम पत्र राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला] [वस्तुर नकोश नतिविक्तिीशानशक्ति अवशक्ति कामशानियवाक्तिव्यायामशालालाजनशक्किामतविभूति बालापारमा शानिमामादशास्त्रविधतिमानलकाणीलानाधमाघीकामाबलानाबुधातास मरजास्तितेचोमधदामला देवानाराणयामेत्राणांवलजमादेनमानस्चयवानदासलाचवविधा यूवविधोमदा मानमहासवानदासाकाममहामवासनविदामामिाझानेधदिलेकामवि झानेपानमयनामदाबहलजानित्यूनानिमतविक्षामनाएदिशतिविधानायोशाशायापतापाय दानालानावहयातनालयामापतिपन्नाजयमानाशा मासामाचारणागतापरिवाधाक्षमादानद्यापाश्री धोत्राधारावलकालालकलालानामनाएछद शविलायाळायद्विाधारलगनरसेन्य। कानाराकानवानप्रतिराशाहाविद्यबा लास स्वादिजयाझानासमेघनापिकानि आगरवसधाकानानिधान्दारिदयावलिाराझादना विजयासराशविकोयहाझानेपान सासारनायोगाबालधमेजयोगुऐतसेयहा। रायलिनुवाऊन नुवादानजनक नरोत्तयपनातिनकाशनातव्यारवानेतर्मशालालामायामाधनसागर निवती वा-सुन्यमणगणिजारपाजाश्रीश्रीरसुकिल्याएमासु खः॥ बाल . 'बी' संज्ञक प्रतिका प्रथम पत्र 12 { { > VASTURÁTNAKOŚA INTRODUCTION I Ratnakośa or Vasturatnakosa Aufrecht in his Catalogus Catalogrum has several entriés referring to Ratnakosa. In the entry on page 490 he describes a ms. thus-"Ratnakośa or Vastuvijñānaratnakosa-enumeration of things supposed to exist in a definite number, written by a Jain' author.” This description exactly applies to the contents of our work. There are, however, at least three other kinds of Ratnakośas mentioned by Aufrecht from which this Ratnakośa is to be distinguished. One Ratnakośa is a work of Vaišeşıka philosophy, andther is a work 'oh? Advaita philosophy bearing the name Advaita-Ratnakośa and there is a third Ratnakosa which is a lexicon. Ratnakośa literally means a treasure of jewels. In fact it is a short treatise on various subjects which a cultured man was supposed to know in the Indian society of old times. The larger variety of such works is represented by treatises like Yuktikalpataru of Bhoja, Caturvargacintāmaņi of Hemādri and also -Abhilaśitārtbacintāmaņīıl of Someśvara. Brhatsamhitā of Varāhamihira though predominently an astronomical work also discusses many miscellaneous topics. Our Ratnakośa consists of two parts. The first part .consists of Sūtras containing the topics with their aggregate numbers, while, the second, Vivaraņa mentioning each item of the topics by name. The total number of Sūtras in different mss, varies from 100 to 104, The subject-matter of these topics is mostly, secular giving general knowledge about social and political matters If we classify these according to the four Purusārthas, we would find that most of them fall under Artha and Kama; while some are' of a general literary nature. Thus, for example the following topics would come under Arthanasiul, त्रीणि भुवनानि, त्रिविधं लोकस्थानं, त्रिविधा भूमिः, सप्ताम राज्य, पण्णवती राज्ञां गुणाः, पत्रिंशद् 75797-1 for etc The following fall under Kāma द्वाविंशति कामिनीनी विकारेमितानि, अष्टौ नार्योऽगम्या , दशभि कारण स्त्रियो विरज्यन्ते, त्रिभिः कारणैः कामिन्य सवध्यन्ते, सप्तविधा कामुकानां 'सुरतारम्भा , अष्टविघं विदग्धाना सुरतम् , नवविध STARE etc rilis 1 VASTURATNAKOSA II - : Description of the manuscripts :- The present text is based upon the following seven mss.; six of which are complete All the seven are in a well preserved state, They are named A, B, C, D, E, F and G. Ms. A Source: Muni Jinavijayaji's collection, Rajasthan. No. 57 ‘Material: paper. Folios. 4 Size. 105* 54 inches Number of lines 19 lines per page Nnmber of letters: 50 to 53 per line. Age: not mentioned, appears to be about three hundred years old, Author. not mentioned, Script: Devanāgarī. Begins : Le THT eiere i sparat aeglazinei cani lehi सर्वशास्त्रमयं रम्यं सर्वज्ञानप्रकाशकम् । स्वल्पग्रंथ सुवोधार्थ रत्नकोशं तमभ्यसेत् ॥ १॥ तत्र शतेन सूत्राणां सग्रहो यथा ॥ तत्रादौ त्रीणि भवनानि etc. Ends • jalan peyni himoya TTT mapa mian lt 900ll Colophon: spa TGVATTEET Torregia TIF 11 Ms. B Source. Śrī Muktabāi Jñānamandira, Dabhoi. No: Folios : 6 Material paper Size: 10 x 4.25 inches Area of writing. 8 x3 inches Number of lines. 15 to 16 lines. Number.of letters. 43 to 45 in each line. Age: not mentioned, appears to be not later than 16th cent A. D.'!!!, Author: not mentioned. Script: Devanāgarī, Begins : Ha aalari i tanki i br. 11 सर्वशास्त्रमयं रम्यं सर्वज्ञानप्रकाशकम् । स्वल्पप्रर्थ सुवोधार्थ रनकोशं तमभ्यसेत् ।। तत्र शतेन सूत्राणां सग्रहो यथा। तत्रादौ त्रीणि भुवनानि ॥ etc. ? + 1 + INTRODUCTION 3 Ends: पञ्चविघं प्रभुत्वं । कुलप्रभुत्वं । दानप्रभुत्वं । स्थानप्रभुत्वं । उभयप्रभुत्वं ॥ १०॥ Colophon: इति रमकोशसूत्रशतव्याख्यानं समाप्तम् ॥ लोलाडाग्रामे । पं. धनसागर मुनिष्टक्षतम् । वा. पुन्यमंडणगणिजोग्यं । श्रीः । श्रीरस्तु । कल्याणमस्तु । . Ms. C Source : Gujarat Vidya Sabha, Ahmedabad. No.: 2165 Material: paper. Folios : 12 Size: 8x4.5 inches. Area of writing : 6.5 x 3.75 inches. Number of lines: 11 lines per page. Number of letters. 31 to 33. Age : Samvat 1755 (i e. 1699 A. D ) Author: Prthvīdharācārya. Script. Devanāgarī, Begins : श्रीहरि । सर्वज्ञानमयं रम्यं सर्वबुद्धिप्रकाशकम् । स्वल्पग्रंथ सुवोधाय रत्नकोशं समभ्यसेत् ॥ तत्रादौ त्रीणि भुवनानि । त्रिविधं लोकस्थानं । पंचविधं प्रभुत्वं ॥१०० ॥ इत्यनुक्रमणिका ॥ गणराजं नमस्कृत्य गजतुण्डं सुरोत्तमम् । समस्तविघ्नहतारं रत्नकोश उदीर्यते ॥१॥ Ends : अष्टौ लब्धयोग । अणिमा। महिमा । लघिमा । गरिमा । प्राप्ति । प्रकाम्यं । ईशत्वं । वशित्वं । Colophon इति श्रीपृथवीधराचार्यकृत रत्नकोश संपूर्णम् । शुभं भवतु । कल्याणमस्तु । सवत् १७५५ वर्षे फाल्गुनमासे शुक्रपक्षे लिखितं गिरिनारायणज्ञातीय भट्टवालकृष्णसुत भट्टरामकृष्णेन लिखितं । श्रीरस्तु । श्री। हरिर्जयति । श्री। श्री। श्री। । - Ms. D Source: Muni Jinavijayaji's collection, Rajasthan. No.: 2 Material Kashmirian paper Folios: 3,(incomplete ) Size: 9.45x45 inches. Number of lines. 21 Number of letters, 61 Age: not mentioned; appears to be not later than 15th cent A, D, Author: not mentioned. Soript: Devanagari, VASTURATNAKOSA Begins : अहं । त्रीणि, भुवनानि । १ । त्रिविधं लोकस्थानं । २ । etc. Ends : दशविधं बौद्धं । सगता । परिमिता । पारमिता । विहार । प्रमाण । 'सौत्रांतिक ''निराशकं । योगोपचार । मोक्षपर्यंतं ॥ १० छ ॥ चतु - - Ms. E Source · Muni Jinavijayaji's Collection, Rajasthan. No: Material: paper. Folios: 9.1 to 8a Ratnakośa, 8a to 9 Rāgotpatti. Size : 10x4.5 inches. Number of lines 15 lines Number of letters 38 to 40 Age not mentioned, appears to be about 150 years old Script. Devanāgarī Begins श्री गुरुभ्यो नम । रत्नकोशं व्याख्यास्यामः । थ(व)स्तुविज्ञानं । सर्वशास्त्रमयं रम्यं सर्वज्ञानप्रकाशक। खल्पग्रंथ सुवोधार्थ रत्नकोशं समभ्यसेत् ॥ १॥ तत्र शतेन सूत्राणा कर्तव्य संग्रहो यथा ॥२॥ अथ इति मंगलार्थे ॥ ग्रंयनु कर्ता श्रीवेदव्यास कहिछि etc Ends लघिमा । इशत्व । वशित्व । प्राप्ति । प्रकाम्यमेव । Colophon : इति श्रीरत्नकोश सपूर्ण ॥ श्रीरस्तु । कल्याणमस्तु Ms F Source: Jesalmere Grantha Bhandāra, Jesalmere - 1 No. 315 paper Material Folios 8 Size 97x44 inches Number of lines 14 lines Number of letteis 48 letters Age Samvat 1709 (1 e. 1653 A D.) Author not mentioned Script Devanāgarī Begins ॐ अहं नम । अथ रत्नकोशो लिख्यते । सर्वशास्त्रमयं रम्यं सर्वज्ञानप्रकाशकम् । खल्पग्रन्थ सुवोधार्थ रत्नकोशं समभ्यसेत् । तत्र सर्वत्र सूत्राणा कर्तव्य. संग्रहो यथा । तत्रादौ त्रीणि भुवनानि । १ । त्रिविध लोकस्थानम् । २ । "etc Ends. 'वशित्वम् । प्राकाम्यम् । चेति ॥ Colophon: इति श्री रत्नकोश[:] समाप्त[] श्रीसवत् १७०९ वर्षे वैशाषाऽशित षष्टी दिने रेवतीभवे वारे श्री महेरानेगरेऽलीलिँखत् । श्रीस्तात् कल्याणं भूयात् । Frt - लेखकपाठकयो ऋद्धिवृद्धिः सदैव श्रीस्तात् मांगल्यं महोच्छवं श्री शांतिजिनप्रशादात् श्री ॥ - - ++ + INTRODUCTION 5; 1 Ms. G A copy prepared under the supervision of Muni Jinávijayaji from a ms. of Jesalmere Grantha Bhaņdāra, Jesalmere, Begins': a 7 diacrta i Barat geglazini na TCUTRITH: 1 सर्वशास्त्रमयं रम्यं सर्वज्ञानप्रकाशकम् । खल्पग्रन्यं सुवोधार्थ रत्नकोशं तमभ्यसेत् ॥ तत्र शतेन सूत्राणां सङ्ग्रहो यथा ॥ तत्रादौ त्रीणि भवनानि eto. Ends: galas yra surat lamaran I TETTHETH I FITTITTEL 1 9999 Colophon: şta TEC TEM THINA 11 3 11 3 III Method of editing :- A. comparative study of the seven mss. available to me showed that even though the main substance of the text is common it has considerable variations So the possibility of discovering the original text became remote. Under the circumstances, I adopted the following procedure in presenting this text. Of the seven miss. D seems to be the oldest, though incomplete, while A. B. G. seem to belong to one proto-type. I have taken D as the basis of the text upto sūtra 85 and for the remaining portion of the text I have taken ms. A, which is next in age. The readings of D and A, however, have not been adopted in the text where they were corrupt or unsatisfactory. Variants of other mss. have been noted in the footnotes. In presenting the Vivarana, mss. A, B and G have been adopted as the basis, because they together yield, on the whole a satisfactory text. Where, however, the readings of other mss. seemed better, they have been given in the text, As however, the different mss give at several places different informations, I have thought it proper to give below the main text, the texts of other mss. in full Thus the reader will have before him more or less complete texts of the Vivarana of all the miss In appendix A, are given the additional Sūtras of mis. E as well as the old Gujarati Tabbo' contained in it. In appendix B similar matter gathered from some other works is given, In the Index, I have included important variations from the texts of Vivaraņa given in the footnote. 1 we 6 VASTURATNAKOŚA IV Authorship and. Age:- Of the seven mss. only one, namely C mentions the name of the author as Prthvīdharācārya and one, namely E mentions Vedavyāşa as the author in its Gujarati Tabbo' As we have seen above Aufrecht attributes the authorship of Ratnakosa to a Jain, though he does not mention the proper name. It appears that Aufrecht was led to regard this as a Jain work on account of the mention of re-etc, at the beginning of 'his-manuscript We have seen that four, namely A, D, F, and G, of our seven mssalso begin in the Jain way. B'starts directly with the text without any mangala, C starts with step: and E with riyazi TA', while one ms. belonging to the Oriental Institute, Baroda, not used by me being very corrupt starts with rit TŪRINT **#. Wé cannot say definitely whether si TORT FTH can be taken as a Jain or Brahmanical way of beginning We, however, cannot draw any conclusion about the author being a Jain or non-Jain from the way in which the mos begin, because it depends upon the religion of the scribe or the patron who got the ms. copied. The absence of reference to the name of the author in five mss. and mention of Vedavyāsa in one make us hesitate in attributing our Ratnakośa to Prthvīdhalācārya or the authority of the ms. C. The only thing that we can do for the present is to accept him provisionally as the author of our work The acceptance of Pithvīdharācārya as the author of Ratnakośa, however, does not help us in fixing the age of the work Aufrecht has mentioned seveial Prthvīdharācāryas We do not know which one wote the Ratnakośa given in the ms C. Hemādri in his Caturvargacintāmani quotes Ratnakośa, at least twice, once in the Viatakhanda and second time in the Pariseşakhanda as follows ताम्बूलमुसवासयोर्लक्षणमुक्तं रत्नकोशे- महापिप्पलपत्राणि क्रमुकस्य फलानि च । शुक्तिक्षारेण संयुक्त ताम्वूलमिति संज्ञितम् ।। 1 1 Aufrecht in addition to Ratnakośa has the following entries about the works of Prthvidbarācārya (1) gareta, (2) Hairdeata (3) fredat, (4) pala caur, (5) the commentary Mrcohakatika (6) Vaibesika Ratnakoś& and (7) agafat on T I INTRODUCTION 7 श्वेतपत्रञ्च पूर्णञ्च क्रमुकस्य फलानि च । FTR Dos tot die HES thiyah 11 Ad. 1 (page 242) Vratakhanda. पुनक्षत्राणि च रत्नकोशे दर्शितानि । हस्तो मूलं श्रवणः पुनर्वसुमंगशिरास्तथा पुष्यः । gültag fraaifat Jhia facugiat al (page 732 ) Parisesakhaņda. Here it may be pointed out that from the nature of the topics, one can expect these verses in our Ratnakośa, but in fact we do not find them in any one of our mss This implies that there may be other versions of the Ratnakośa which might have contained these verses. But as the verses mentioned by Hemādri do not occur in our text, his reference to Ratnakośa cannot help us to settle the date of our Ratnakosa. So the only thing that we can say is that it is older than our oldest Ms. D which appears to belong to the 15th cent. A. D. The names mentioned in the "Rājavamsas' vary so much that they cannot help us in settling the earlier limit of the age. The work may be supposed to belong to an age later than the 10th cent, A. D. Before concluding, I must not omit to tender my most sincere thanks to the reveled Āchālya Śii Muni Jinavijayajı, inavijayajı, the Honoiary Director of Rajasthan Puratattva Mandır, Jaipur (now Jodhpur ), for not only accepting this work for publication in Rajasthan Purātana Granthamālā but also for being kind enough to spare time to go over the greater portion of the text with me and make several important suggestions which have been mostly acted upon. I take this opportunity of expressing my sincere thanks to my painstaking teacher in Ancient Indian Culture and guide in the preparation of my thesis for the Ph D degree, Prof R. C. Parikh, Director, B. J. Institute, Gujarat Vidya Sabha, Ahmedabad, for giving much of his valuable time for discussing with me several problems connected with my research work and especially the preparation of the present text. Ahmedabad, 12-4-1959. PRIYABALA SHAH
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C व स्तु र त्न को शः। - अथातो वस्तुविज्ञानं रत्नकोशं व्याख्यास्यामः' । सर्वशास्त्रमयं रम्यं सर्वज्ञानप्रकाशकम् । खल्पग्रन्थं सुबोधार्थं रत्नकोशं समभ्यसेत् ॥१॥ तत्र शतेन सूत्राणां कर्तव्यः सङ्ग्रहो यथा । तत्रादौ- १ त्रीणि भुवनानि । २ त्रिविधं लोकसंस्थानम् । ३ त्रिविधा भूमिः। ४ त्रिविधाः पुरुषाः। - - 13 ५ त्रयः पदार्थाः। ६ चत्वारः पुरुषार्थाः । ७ षट्त्रिंशद् राजवंशाः"। ८ सप्ताङ्गं राज्यम् । ९ षण्णवती राजगुणाः। १० षत्रिंशद् राजपात्राणि । ११ षट्त्रिंशद् राजविनोदाः। १२ अष्टादशविधांस्थानम् । १३ चतस्रो राजविद्याः। १४ चतस्रो राजनीतयः । . , 1 F puts अथ(व)स्तुविज्ञानं aftel व्याख्यास्याम ।, CF drop from अथातो to स्याम । D drops from अथातो to तत्रादौ । 20°ज्ञानमयं. 3 0 सर्वबुद्धि । 4 C सुबोधाय। 5 AB तमभ्यसेत् । 6 F सर्वत्र। 7 ABD drop कर्तव्यः । 8 4 त्रिभुव । 91CF लोकस्या। 10 ABG पुरुषाणामा । 11 E राजविनोदा । 12 E "प्तांगरा। 13 F पदत्रिंगद् राना गुणा । ९ । पण्णवती राजां गुणा । १०. 14 AG "विघं स्था' 1, 0 °विधमा (म)हास्थानम् ।, ६ धं आ । -- वस्तुरतकोशः। १५ षट्त्रिंशदायुधानि । १६ सप्तविंशतिः शास्त्राणि । १७ द्विपञ्चाशत् तत्त्वानि । १८ द्विसप्ततिः कलाः । १९ चतुरशीतिर्विज्ञानानि । २० चतुरशीतिर्देशाः। २१ द्वात्रिंशल्लक्षणस्थानानि । २२ चतुर्विंशतिविधं गृहम् । २३ अष्टोत्तरशतं मङ्गलानि । २४ त्रिविधं दानम् । २५ पञ्चविधं यशः । २६ सप्तविधा कीर्तिः। २७ नव रसाः । २८ एकोनपञ्चाशद् भावाः। २९ चत्वारोऽभिनयाः। ३० चतस्रो वृत्तयः। ३१ चत्वारो महानायकाः । ३२ चत्वारो नायकाः । ३३ द्वात्रिंशद्गुणयुतो नायकः। ३४ त्रिविधा महानायिकाः" । ३५ अष्टौ नायिकाः" । 1 23 . - 7 15 ABOEFG दण्डायुधानि । 16 DE °तिशा°1, AG °तिश।, C त्यस्त्रा। 17 ABOD 'तिक ।, E °द्विसकला । 18 ABOD 'तिविI, E 'तिज्ञा। 19 ABODH तिदे।. 20 OF लक्षणानि। 21 ABO 'तम', Dत्तरं शतं मंगलाना।, E मंगलाना स्थानं । 22 °धय।. 23 0 सप्त ईतय. । अष्टौ रसा ।; B writes नव upon अष्टौ ।, ADCC अष्टौ रसा । 24 D'रो नायका 25 D HEIATI, A puts here 36È FIRST I, G drops this sūtra 1. 26 A puts here त्रिविधं सौख्यम् ।, BD 'शद्गुणनायका ।, 0 °शल्लक्षणनायका ।, F °शद्गुणो नायक 1, G drops this sūtia 27 ABODE wmte नायका fol नायिका A omits the sutra त्रिविघा महानायिका । 28 a diops this sūtra ३ 30 32 वस्तुरत्नकोशः। ३६ द्वात्रिंशन्नायिकानां गुणाः। ३७ त्रिविधं सौख्यम् । ३८ चत्वारि सौख्यकारणानि । ३९ नवविधो गन्धोपयोगः । ४० दशविधं शौचम् । ४१ द्विविधः कामः। ४२ दश कामावस्थाः । ४३ विंशती रक्तस्त्रीणां लक्षणानि । ४४ एकविंशतिविरक्तस्त्रीणां लक्षणानि । ४५ द्वाविंशतिः कामिनीनां विकारेगितानि । ४६ चतुर्विंशतिरसतीनां लक्षणानि । ४७ षोडश दुष्टस्त्रीणां लक्षणानि । ४८ अष्टौ स्त्रीणामविश्वासकारणानि । ४९ अष्टौ नार्योऽगम्याः। ५० अष्टविधो मूर्खः। ५१ चतुर्विंशतिविधं नागरिकवर्णनम् । ५२ त्रिविधं रूपम् । ५३ त्रिविधं स्वरूपम् । ५४ द्वादशविधः प्रमदोपचारः । - । * G alone gives this sūtra but all the miss give its Vi ivarana. 28 F द्वात्रिंशद् नायकाना गुणा । त्रिविधं सौख्यम् ।, F त्रिंशद्गुणयुता नायिका । त्रिविधं सौख्यम् । 29 D सौख्यस्य का 1, ख्यकरणानि । 30 A द्विविधं । 31 A omits this sūtia! 32 BE दशविध कामावस्था.।, F दशविधा. कामावस्था 33 ABODE शतिरक्त ।। 34 ABDE °शतिविर' ।, F drops the sutra, AB put first our sutra. 46 and then give this sūtra as 43 35 ABOD TRAFT 1, E diops the sūtza; F drops द्वा। 36 ABOD ‘शतिअस।, Ediops the sutra. 37 ABG अपलक्षणानि । 38 ABG °मभिचारकाणि। 39 F चतुर्विंशतिलक्षणविधं । 40 ABG 'कलक्षणम् ।, लकवर्तनम् । 41 F drops the sūtra 42 ABRG प्रमोदोपचार ।, D प्रसादोपाचार ।, F दशविध प्रमोदविचार ।. .
४ 45 51 वस्तुरत्नकोशः। ५५ पञ्चविधः परिचयः। ५६ दश पुरुषाः“ स्त्रीणामनिष्टा भवन्ति । ५७ दशभिः कारणैः स्त्रियो विरज्यन्ते । ५८ त्रिभिः" कारणैः कामिन्यः संबध्यन्ते । ५९ सप्तविधाः" कामुकानां सुरतारम्भाः । ६० अष्टविधं विदग्धानां सुरतम् । ६१ नवविधं सुरतावसानम् । ६२ नवे शयनगुणाः। ६३ दशविधः पार्थिवानां प्रमोदः । ६४ चतुर्विधः प्रबोधः। ६५ चतुर्विधा बुद्धिः। ६६ अष्टौ बुद्धिगुणाः। ६७ चतुर्विधं गान्धर्वम् । ६८ त्रिविधं गीतम्। ६९ षट्त्रिंशद् गीतगुणाः। ७० चतुर्विधं वाद्यम् । ७१ द्विविधं नृत्यम् । ७२ षोडशविधं काव्यम् । ७३ दशविधं वक्तृत्वम् । ७४ षड्विधं भाषालक्षणम् । ७५ पञ्चविधं पाण्डित्यम् । - -- 43 D पंचविंशतिविध ।, F पंचविंगतिर्षि । 44 0°नरा. 1, F drops the sutra 45 " द्वादशभिः पारणे लियोऽभिरजयन्ते। 46 ABG दशभि । 47 प्रकारैः। 480 शामिनीनी, लियो । 49 ABCEF विध । 500 कामिना। 51 ABOET रम्भः ।, 52 0 गुरनाम्यानं विदग्धना।, 'दग्धाना!; F अष्टविधो विदग्धाना सुरतारम्भ 1. 53 ABG नवविधा। 54 adiops पार्थिवाना । 55 Ang प्रयोग। 56 A नृत्तम् । 57 AG वादलक्षणं। 58 Bाद'BARO पिंगतिविव 1, "पोटाविय। 59 c वशिल्या, वित्तव्यत्य । te has मितिविध वस्तुत between 73 and 71 GOE पोरगरिध। ३ वस्तुरत्नकोशः। ७६ चतुर्विंशतिविधं वादलक्षणम् । ७७ षड्विधं दर्शनम् । ७८ अष्टविधं माहेश्वरम् । ७९ दशविधं ब्राहयम् । ८० चतुर्विधं सायम् । ८१ सप्तविधं जैनम् । ८२ दशविधं बौद्धम् । ८३ चतुर्विधं चार्वाकम् । ८४ चतुर्विंशतिविधं विचारकत्वम् । ८५ दशविधं गुरुत्वम् । ८६ पञ्चविधं चरितम् । ८७ पञ्चविधं पार्थिवानी पालनम् । ८८ सप्तविधा प्राप्तिः। ८९ चतुर्विंशतिविधं शौर्यम् । ९० दशविधं बलम् । ९१ दशविधः सङ्ग्रहः । ९२ दशविधो जयः। ९३ पञ्चविधः परिच्छेदः। ९४ पञ्चविधं प्रभुत्वम् । ९५ सप्तविधमुत्तमत्वम् । .९६ नवविधा शक्तिः। ९७ सप्तविधा भुक्तिः। ९८ अष्टविधमभिमानलक्षणम् । नानि । 4 61 AG चतुर्विधं ।; F °तिवाद । 62 Eषड्द. 63 0 दर्शनलक्षणम् ।, E दर्श- 64 F अष्टविधा माहेश्वरी। 65 D ब्राह्मण्यम् 1, ब्राह्मणम् 1. 66 सप्त विंशतिविध जैन्यम् । 67 ABG ध चारकत्व, F °धं वा लक्षणम् । 68 चतुर्विधं । 69 AB 'चारित्रं 1. 70 AG diop पार्थिवानां, C पार्थिवपा 1. 71 G चतुर्विध . 72G सप्तविधं ।
वस्तुरनकोशः। ९९ चतुर्विधं वात्सल्यम्। १०० पंचविधो महोत्सवः । १०१ अष्टौ लब्धियोगाः। इति सूत्राणां शतमेकोत्तरम् ॥ १०१ ॥ ॥ इति वस्तुसंख्यासंग्रहः समाख्यातः ॥ . 73 AB १०० छ। 0 १०० इत्यनुक्रमणिका ।, D चेति १०० छ।, १०० इति सूत्राणि समूहे समाख्यातः 1,F१०२ 1. B gives चतुर्विधा गतिश्च । after sutha. १०० † From sa to ख्यातः is given only by B. * A वस्तुरत्नकोश-विवरणम् । -- , अथातो वस्तुविवरणं समाख्यायते । *गणराजं नमस्कृत्य गजतुण्डं सुरोत्तमम् । समस्तविघ्नहन्तारं रत्नकोशमुदीर्यते ॥ १॥ यथा- + १. तत्रादौ त्रीणि भुवनानि कथ्यन्ते । तद् यथा- १ सुरभुवनम् । २ नरभुवनम् । ३ नागभुवनम् । इति । २. त्रिविधं लोकसंस्थानम् । १ देवलोकसंस्थानम्। २ दानवलोकसंस्थानम्। ३ मानवलोकसंस्थानम् । इति । 7 - - । . २) ܝܨ: ; A. १ देवसंस्थानम् । २ मानवसंस्थानम् । ३ दानवसंस्थानम् ।। B १ देवसंस्थानम् । २ दानवसंस्थानम् । ३ मानवसंस्थानम् । C१ देवलोकस्थानम् । २ मनुष्यलोकस्थानम् । ३ दानवलोकस्थानम् । -D १ दानवसंस्थानम् । २ मानवसंस्थानम् । ३ गंधर्वसंस्थानम् ।। E देवदानवमानवानां संस्थानम् । १ देवस्थानं । २ दानवस्थानं । ३ मानवस्थानं चेति । . - २ U ३) ३. त्रिविधी भूमिः। १ उन्नतप्रदेशा । २ निम्नप्रदेशा । ३ समप्रदेशां । इति । AG १ उत्तमप्रदेशः । २ निम्नप्रदेशः । ३, समप्रदेशः। १ उच्चा।२ नीचा।३ समा। FF १ उन्नतप्रदेशा । २ नीचप्रदेशा। ३ समप्रदेशा।, + अथातो...यथा is given only by B. *O alone gives this bloka after इत्यनुक्रमणिका । 1 BO: तत्र त्री। 2G भवनानि । 3 ABOFFG omit कप्यन्ते । 4 ABORFG omit तद्यथा । 6 ABEG omit लोक । स्थानम्। 8 Gomats लोक।। 1 5 ABG मानव । 7 OEF - ८ । वस्तुरतकोशः। ४. त्रिविधाः पुरुषाः। १ उत्तमाः। २ मध्यमाः। ३ अधमाः। इति । A.BG १ उत्तम । २ मध्यम । ३ अधम । C १ उत्तम २ मध्यम ३ अधमाश्चेति । E१ उत्तमा। २ अधमा।३ मध्यमा। ५. त्रयः पदार्थाः। १ धातुपदार्थः। २ जीवपदार्थः । ३ मूलपदार्थः। इति । ५) C धातुमूलजीवाश्चेति E १ धातु । २ मूल । ३ जीवा । F_ १ मूलगतपदार्थाः । २ धातुगतपदार्थाः । ३ जीवगतपदार्थाः। ६. चत्वारः पुरुषार्थाः। १ धर्मः। २ अर्थः। ३ कामः । ४ मोक्षः । इति । ६) ABG १ धर्म । २ अर्थ । ३ काम । ४ मोक्ष । CF धर्मार्थः। काम-मोक्षः। D १धर्म । २ अर्थ । ३ काम । ४ मोक्षरूपाः । ७. षटूत्रिंशद राजवंशाः। १ सूर्यवंशः। २ सोमवंशः। ३ यादववंशः। ४ कदम्बवंशः। ५ परमारवंशः। ६ इक्ष्वाकुवंशः। ७ चाहुआणवंशः । ८ चौलुक्यवंशः । ९ मौरिकवंशः। १० शिलारवंशः। ११ सैन्धववंशः। १२ छिन्दक- वंशः। १३ चापोत्कटवंशः। १४ प्रतीहारवंशः । १४ प्रतीहारवंशः। १५ मुडुकवंशः! १६ राष्ट्रकूटवंशः। १७ शकटवंशः। १८ करटवंशः । १९ करटपाल- वंशः। ३. चन्दिल्लवंशः। २१ गुहिलवंशः। २२ गुहिलपुत्रवंशः। २३ पोतिकपुत्रवंशः । २४ मंकाणकवंशः । २५ धान्यपालवंशः। २६ राजपालवंशः। २७ अनङ्गवंशः। २८ निकुम्भवंशः। २९ दधि- करवंशः। ३० कलचुरवंशः। ३१ कालमुखवंशः। ३२ दायिकवंशः। ३३ हूणवंशः। ३४ हरिणवंशः। ३५ डोडिवंशः । ३६ मारववंशः । इति । ५ .
सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। पुत्र। ७) A १ ब्रह्मवंश। २ सूर्यवंश। ३ सोमवंश। ४ यादववंश । ६ परमारवंश। ७ इक्ष्वाकु। ८ वाह्लीक। ९ चौलुक्य । १० छन्दिक। ११ सिलार। १२ सैन्धव। १३ डाभी। १४ चापोत्कट। १५ पडीहार। १६ लडुक । १७ राष्ट्रकूट। १८ शक । १९ करटपाला २० कोटपाल । २१ वंदिल्ल। २२ गुहिल। २३ गुहिल- २४ पौतिक । २५ मोरी । २६ मंकुयाण । २७ धान्यपाल । २८ राजपाला २९ अनङ्ग । ३० निकुम्भ। ३१ दाडिम। ३२ कलिछुर। ३३ दधिमुख । ३४ हूण । ३५ हरितड। ३६ डोड। ३७ परमार । ७) B १ ब्रह्मवंश । २ सूर्यवंश । ३ सोमवंश। ४ यादववंश। ५ कदम्बवंश । ६ इक्ष्वाकु । ७ वाहीक। ८ चौलुक्य । ८ चौलुक्य । ९ छन्दिक। १० सिलार। ११ सैन्धव । १२ डाभी। १३ चापोत्कट। १४ पडीहार। १५ लडुक। १६ राष्ट्रकूट। १७ शक । १८ करटपाल । १९ कोटपाल । २० चन्दिल्ल । २१ गुहिल । २२ गुहिलपुत्र । २३ मौदिक । २४ मोरी। २४ मोरी। २५ मंकुयाण। २६ धान्यपाल । २७ राजपाल २८ अनङ्ग । २९ निकुम्भ । ३० दाडिम। ३१ कलिछुर । ३२ दधिमुख। ३३ हूण । ३४ हरितट । ३५ डोड। ३६ परमार। ७) C १ रवि । २ सोम । ३ यादव । ४ कदम्ब । ५परमार। ६ इक्ष्वाकु। ७चहूआण । ८ रोरीच। ९ सिलर । १० करण्ड । ११ चण्डिल । १२ गोहिल । १३ मकुआण । १४ पौलक। १५ राजपाल। १६धानपाल। १७ देव । १८ निकुम्भ। १९ दधिकर। २० कोकिल। २१ तरुष्क। २२ दधिपक्क । २३ हूण। २४ हरिअड । २५ कोवोलिक। २६ कलानुर। २७ हरित। २८ सेभट। २९ राठोऊड। ३० शोलंक । ३१ जोधिम। ३२ कलश्च । ७) E १ सूर्यवंश। २ सोमवंश। ३ यादव। ४ ईक्ष्वाकु। ५ कदंव । ६परमार। ७ चौहाण । ८ चौलुक्य । ९छिंदक। ९छिंदक। १० मोरी। ११शेलार। १२ सैन्धव १३ चापो- कट। १४ प्रतीहार। १५ लकुट । १६ कराट। १७ काल । १८ पाल। १९ टाक। २० चंडेल । २१ राष्ट्रकूट। २२ शंकु । २३ फरंड। २४ गोहिलपुत्र । २४ गोहिलपुत्र । २५ गहिलुत्र । २६ पोतिक । २७ मुष्कायण । २८ मकूआंणा । २८ मकूआंणा । २९ पोलक । ३० राजपालक । ३१ धनपालक। ३२ धान्यपाल। ३३ अनङ्ग। ३४ निकुम्भ । ३५धिधिम। ३६दधि- कर। ३७ कोल। ३८ कोलानुर। ३९ दधिपक। ४० सिंहिलंक-जातिभेद । ४१ सोलंकी। ४२ दापिक । ४३ हूंण । ४४ हरिअड । ४५ डोड । ४६ डोडीआ। ४७ राष्ट्रकूट।-जातिभेद ४८ मारू राठुडा । ४९ माखवा । ५० पातिकर । ५१ शेलार । ५२ लुइक । ५३ फराट । ५४ कोल। ५५ चिन्दिलु। ५६. ५७ डोडीआंकाश्चेति जातिभेदाः अनेककोटिशः ॥ ३६ ॥ ७) F १ सूर्यवंश । २ सोमवंश । ३ यादववंश । ४ कदम्बवंश । ५ चहुआण । ६ चौलिक्य । ७ छन्दिक । ८ सिलार। ९ सैन्धव । १० चाउडा। ११'पडिहार। १२ तुडक। १३, राठउड । १३,राठउड । १४ करटवाल। १५ चन्दिल्ल । १६ गुहिल। १७ गउ- लोत्त । १८ पौमिक । १९ मोरी । २० मकूआणा । २१ अनंग । २२ राजपाल । २३ वारड । २४ दहीया। २५ डाभी । २६ हरीयडा । २७ टाक। २८ सीदा। २९ माषा । ३० हूणा । ३१ निकुन्दम । ३२ कोल । ३३ दधिपक । ३४ डेडिया । ३५ सूरिमा। ३६ परिमारवंशाश्चेति । - ५६. मुष्का- यण । २ १० संविवरण-चस्तुरत्नकोशः। ७) G १ ब्रह्मवंश । २ सूर्यवंश । ३ सोमवंश । ४ यादववंश। ५ कुटुम्बवंश । ६ परमारवंश। ७ इक्ष्वाकु। ८ वाहीक । ९ चौलुक्य। १० छन्दिक। ११ सिलार। १२ सैन्धव । १३ डाभी। १४ चापोत्कट। १५ पडिहार। १६ लडुक । १७ राष्ट्रकूट। १८ शक। १९ करटपाल । २० कोटपाल । २१ बंदिल्ल। २२ गुहिल। २३ गुहिल- २४ पौतिक । २५ मोरी । २६ मंकुयाण । २७ धान्यपाल । २७धान्यपाल । २८ राजपाल। २९ अनङ्ग । ३० निकुम्भ । ३१ दाडिम। ३२ कलिच्छुर। ३३ दधिमुख। ३४ हूण । ३५ हरितड। ३६ डोड। ३७ परमार। पुत्र। ८. सप्ताङ्गं राज्यम् । १ स्वामि। २ अमात्य । ३ जनपद। ४ भाण्डागार । ५ दुर्ग । ६ बल । ७ मित्राङ्ग । इति । ८) G स्वामी । जनपद । अमात्य । कोश । दुर्ग । बल । सुहृदिति । F स्वामी । अमात्य । दुर्ग । राष्ट्र । भण्डार । सैन्य । मित्राङ्गं चेति । ९. षण्णवती राजगुणाः । १ वंशगुण । २ विद्यागुण । ३ विनयगुण । ४ विजयगुण । ५ विवेक- गुण । ६ विचारगुण । ७ विस्तारगुण । ८ सदाचारगुण । ९ सत्यगुण । १० शौचगुण । ११ सन्मानगुण । १२ समाधानगुण । १३ सौख्यगुण । १४ सौजन्यगुण । १५ सौभाग्यगुण । १६ रूपगुण । १७ वरूपगुण । १८ संयोगगुण । १९ वियोगगुण । २० विभागगुण। २१ साङ्गत्यगुण । २२ संपूर्णत्वगुण । २३ सौम्यत्वगुण । २४ सकलत्वगुण । २५ सलज्जत्व- गुण । २६ डसनत्वगुण। २७ प्रभुत्वगुण । २८ प्राञ्जलत्वगुण । २९ पावक- त्वगुण । ३० पाण्डित्यगुण । ३१ प्रणयिमानत्वगुण । ३२ प्रामाणिकत्वगुण । ३३ शरणप्रदत्वगुण । ३४ प्रमोदगुण । ३५ प्रतापगुण । ३६ प्रारंभगुण । ३७ परिच्छेदगुण । ३८ संग्रहगुण । ३९ विग्रहगुण । ४० सदाग्रहगुण । ४१ निग्रहगुण । ४२ अनुग्रहगुण । ४२ अनुग्रहगुण । ४३ तुष्टिगुण । ४४ पुष्टिगुण । ४५ प्रीतिगुण । ४६ प्रशंसागुण । ४७ प्रतिष्ठागुण । ४८ स्थैर्यगुण । ४९ धैर्यगुण । ५० शौर्यगुण । ५१ चातुर्यगुण । ५२ बुद्धिगुण । ५३ बल- गुण । ५४ सामर्थ्यगुण । ५५ आक्षेपगुण । ५६ विरोधगुण । ५७ आदर- गुण । ५८ दोषगुण । ५९ विशेषगुण । ६० विनोदगुण । ६१ वृद्धिगुण । 2 Eचेति राज्यागानि ।
११ सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ६२ सिद्धिगुण । ६३ कान्तिगुण । ६४ कीर्तिगुण । ६५ विस्फूर्तिगुण । ६६ व्युत्पत्तिगुण । ६७ वात्सल्यगुण । ६८ माङ्गल्यगुण । ६९ महोत्सव- गुण । ७० मन्त्रगुण । ७१ रसिकत्वगुण । ७२ भावकत्वगुण । ७३ गुरुत्व- गुण । ७४ स्मृतिगुण ! ७५ शक्तिगुण । ७६ अशक्तिगुण । ७७ युक्तिगुण । ७८ अयुक्तिगुण । ७९ अनुक्रमगुण । ८० अभिमानगुण । ८१ दानगुण । ८२ मानगुण । ८३ कारुण्यगुण । ८४ दाक्षिण्यगुण । ८५ दर्शनगुण । ८६ श्रवणगुण । ८७ घ्राणगुण । ८८ रसनगुण । ८९ मर्यादागुण । ९. मदनगुण । ९१ उदारगुण । ९२ उत्साहगुण । ९३ हर्षगुण । ९४ क्रोधगुण । ९५ लोभगुण । ९६ उत्तमगुणश्चेति । ९) A १ विद्या। २ विनय । २ विनय । ३ विवेक । ४ विस्तार। ५ सदाचार। ६ सत्य । ७ शौच । ८ सन्मान। ९ संस्थान । १० समाधान । ११ सौख्य । १२ सौजन्य । १३ सौभाग्य । १४ रूपगुण । १५ स्वरूपगुण । १६ संयोग । १७ वियोग। १८ विभाग। १९ सांगत्य । २० संपूर्णत्व । २० संपूर्णत्व। २१ सोमत्व । २२ सकलत्व। २३ सल- जत्व। २४ प्रसन्नत्व। २५ प्रभुत्व । २६ प्राजलत्व । २७ पालकत्व । २८ पाण्डित्य । २९ प्रणयित्व । ३० प्रमाण । ३१ शरण । ३२ प्रमोद । ३३ प्रसाद । ३४ प्रताप । ३५ प्रारंभ । ३६ प्रभाव । ३७ परिछद। ३८ संग्रह । ३९ सदाग्रह । ४० निग्रह। ४१ विग्रह । ४२ अनुग्रह । ४३ तुष्टि । ४४ पुष्टि । ४५ प्रीति । ४६ प्राप्ति । ४७ प्रशंसा । ४८ प्रतिष्ठा । ४९ प्रतिज्ञा । ५० स्थैर्य । ५१ धैर्य । ५२ शौर्य । ५३ चातुर्य । ५४ गांभीर्य । ५५ बुद्धि । ५६ वल । ५७ अध्यक्ष । ५८ विरोध । ५९ विषय । ६० विशेष । ६१ विनोद । ६२ वृद्धि । ६३ सिद्धि । ६४ कान्ति। ६५ कीर्ति। ६६ विस्फूर्ति। ६७ व्युत्पत्ति । ६८ वात्सल्य । ६९ माङ्गल्य । ७० महो- त्सव । ७१ मन्त्र । ७२ रसिकत्व । ७३ भावकत्व । ७४ गुरुत्व । ७५ स्मृति। ७६ शक्ति। ७७ भुक्ति। ७८ युक्ति । ७९ आसक्ति । ८० अनुक्रम। ८१ अभिमान । ८२ दान । ८३ कारुण्य । ८४ दर्शन । ८५ स्पर्शन । ८६ रसन । ८७ श्रवण । ८८ घ्राण । ८९ मर्यादा। ९० मंडन । ९१ उदात्त । ९२ उदय । ९३ उत्साह । ९४ उत्तमगुणा। ९) B१ विद्या । २ विनय। ३ विवेक। ४ विजय । ५ विस्तार । ६ सदाचार । ७ सत्य । ८ शौच । ९ सन्मान । १० संस्थान । ११ समाधान । १२ सौख्य । १३ सौजन्य । १४ सौभाग्य । १५ रूप। १६ स्वरूप । १७ संयोग। १८ वियोग। १९ विभाग। २० सांगत्य । २१ संपूर्णत्व। २२ सोमत्व। २३ सकलत्व । २४सल- जत्व। २५ प्रसन्नत्व। २६प्रभुत्व । २७ प्रालित्व। २८ पालकत्व । २९ पाण्डित्य। ३० प्रणयित्व । ३१ प्रमाण । ३२ शरण । ३३ प्रमोद । ३४ प्रसाद । ३५ प्रताप। ३६ प्रारंभ। ३७ प्रभाव । ३८ परिछद । ३९ संग्रह । ४० सदाग्रह । ४१ निग्रह। ४२ विग्रह । ४३ अनुग्रह । ४४ तुष्टि । ४५ पुष्टि । ४६ प्रीति । ४७ प्राप्ति ४८ प्रशंसा । ४९ प्रतिष्ठा । ५० प्रतिज्ञा । ५१ स्थैर्य । ५२ धैर्य । ५३ शौर्य ।
१२ सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ५४ चातुर्य । ५५ गांभीर्य । ५६ बुद्धि । ५७ वल । ५८ अधीक्ष । ५९ विरोध । ६० विषय । ६१ विशेष । ६२ विनोद । ६३ वृद्धि । ६४ सिद्धि । ६५ कान्ति । ६७ विस्फूर्ति। ६८ व्युत्पत्ति। ६९ वात्सल्य । ७० महोत्सव । ७१ मन्त्र। ७२ रसिकत्व । ७३ भावकत्व । ७४ गुरुत्व । ७५ स्मृति । ७६ मुक्ति । ७७ युक्ति। ७८ आसक्ति। ७९ अनुक्रम । ८० अनुराग। ८१ अभिमान । ८२ दान। ८३ कारु- ण्य । ८४ दर्शन। ८५ स्पर्शन। ८६ रसन । ८७श्रवण । ८८घ्राण। ८९ मर्यादा। ९० मण्डन। ९१ उदात्त । ९२ उदय। ९३ उत्साह । ९४ उत्तमगुणाः । ९) D १ वंश । २ विद्या । ३ विनय । ४ विजय । ५ विवेक। ६ विचार । ७ सदाचार । ८ विस्तार । ९ सत्य । १० शौच । ११ सन्मान । १२ समाधान। १३ संस्थान । १४ सौख्य। १५ सौजन्य । १६ सौभाग्य । १७ रूप। १८ स्वरूप । १९ संयोग। २० वियोग । २१ सांगत्य । २२ संपूर्णत्व । २३ सोमत्व । २४ सक- लत्व। २५ प्रसन्नत्व। २६ प्रभुत्व। २७ प्राञ्जलत्व। २८ पालकत्व। २९ पाण्डित्य । ३० प्रणयित्व । ३१ प्रसरण। ३२ प्रमोद। ३३ प्रताप । ३४ प्रारंभ। ३५ प्रभाव । ३६ परिच्छद । ३७ संग्रह। ३८ विग्रह। ३९ अनुग्रह । ४० सदाग्रह। ४१ निग्रह । ४२ तुष्टि । ४३ पुष्टि । ४४ प्रीति । ४५ प्राप्ति । ४६ प्रशंसा। ४७ प्रतिष्ठा । ४८ प्रतिज्ञा । ४९ स्थैर्य । ५० धैर्य । ५१ शौर्य । ५२ गांभीर्य । ५३ चातुर्य । ५४ यशोवंत । ५५ सदोदित । ५६ सर्वसह । ५७ धर्मचर। ५८ वुद्धि। ५९ बल । ६० अध्यक्ष । ६१ निरोध । ६२ विनोद । ६३ वृद्धि । ६४ सिद्धि । ६५ कान्ति । ६६ कीर्ति। ६७ विस्फूर्ति । ६७ विस्फूर्ति। ६८ व्युत्पत्ति । ६९ वात्सल्य । ७० माङ्गल्य । ७१ महो- त्सव । ७२ मन्त्र । ७३ रसिकत्व । ७४ भावकत्व । ७५ गुरुत्व । ७६ स्मृति । ७७ शक्ति । ७८ भक्ति। ७९ युक्ति । ८० अनुराग । ८१ अनुक्रम । ८२ अभिमान। ८३ दान । ८४ कारुण्य । ८५ दाक्षिण्य । ८६ दर्शन । ८७ स्पर्शन । ८८श्रवण । ८९ रसन । ९० घ्राण । ९१ मर्यादा । ९२ मण्डन । ९३ उदय । ९४ उदारता। ९५ उत्साह । ९६ उत्तमत्व । गुणाश्चेति । ९) E१ वंश। २ विद्या । ३ विनय । ४ विजय । ५ विवेक । ६ विचार । ७ विस्तार । ८ सदाचार । ९ सत्य । १० शौच । ११ सन्मान । १२ संस्थान। १३ समाधान । १४ सौजन्य । १५ सौख्य । १६ सौभाग्य । १७ सावधान । १८ रूप । १९ स्वरूप । २० संयोग । २१ सांगत्य । २२ विभाग। २३ संपूर्णत्व । २४ स्वजनत्व । २५ प्रसन्नत्व । २६ प्रभुत्व । २७ प्राञ्जलत्व । २८ पालकत्व । २९ पाण्डित्य । ३० प्रणयित्व । ३१ प्रमाणत्व। ३२ शरण। ३३ प्रमोद। ३४ प्रताप । ३५ प्रारंभ । ३६ प्रभाव । ३७ परिच्छेद। ३८ संग्रह । ३९ निग्रह । ४० अनुग्रह। ४१ विग्रह । ४२ आग्रह । ४३ पुष्टि । ४४ तुष्टि । ४५ प्रीति । ४६ प्राप्ति । ४७ प्रशंसा । ४८ प्रतिष्ठा । ४१ स्थैर्य । ५० धैर्य । ५१ शौर्य । ५२ चातुर्य । ५३ गांभीर्य । ५४ वुद्धि । ५५ वल । ५७ निरोध । ५८ विषय । ५९ विशेष्य । ६० विनोद । ६१ ऋद्धि । ६२ वृद्धि । ६३ सिद्धि । ६४ कान्ति । ६५ कीर्ति। ६६ विस्फूर्ति । ६७ वात्सल्य । ६७ वात्सल्य। ६८ माङ्गल्य। ६९ महोत्सव । ७० मन्त्र। ७१ रसिकत्व । ७२ गुरुत्व । ७२ गुरुत्व । ७३ भावुकत्व । ७४ स्मृति । ७५ शक्ति। ७६ भुक्ति । ७७ युक्ति। ७८ मुक्ति। ७९ अनुराग। ८० अनुवास । ८१ उपकृति । ८२ अभिमान। ८३ दान । ८४ करुणा। ८५ दाक्षिण्य । ८६ दर्शन । ८७ स्पर्शन । ८८ रसन । ८१ श्रवण । ९० श्रावण । ९१ मर्यादा । ९२ मंडण । ९३ घ्राण । ९४ उद्य। ९५ ग्रहण । ९६ उदात्त । ९७ उत्साह । ९८ उत्तमत्व । गुणाश्चेति । 1 सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। १३ ९) F१ वंश । २ विद्या । ३ विजय । ४ विनय । ५ विवेक । ६ विचार । ७ विस्तार । ८ सदाचार । ९ सत्य । १० शौच । ११ सन्मान । १२ संस्थान । १३ समाधान। १४ सौख्य । १५ सौजन्य । १६ सौभाग्य। १७ रूप। १८ स्वरूप । १९ संयोग । २० विभाग । २१ संगति । २२ संपूर्ण। २३ सौमत्य । २४सल- जत्व। २५ सकलत्व। २६ प्रसन्नत्व। २७प्राञ्जलत्व। २८ प्रागल्भ्य। २९ पालकत्व। ३० पाण्डित्य। ३१ प्रणयत्व। ३२ प्रणाम । ३३ प्रसरण। ३४ प्रमोद । ३५ प्रताप । ३६ प्रारंभ । ३७ प्रभाव । ३८ परिच्छेद । ३९ संग्रह। ३८ परिच्छेद । ३९ संग्रह। ४० सदाग्रह । ४१ आग्रह । ४२ निग्रह । ४३ विग्रह । ४४ तुष्टि । ४५ पुष्टि । ४६ प्रीति । ४७ प्राप्ति । ४८ प्रशंसा । ४९ प्रतिष्ठा । ५० प्रतिज्ञा । ५१ स्थैर्य । ५२ धैर्य । ५३ शौर्य । ५४ चातुर्य । ५५ गांभीर्य । ५६ वुद्धि। ५७ बल । ५८ अधिकांक्षा। ५९ निरोध । ६० विवोध । ६१ वेप । ६२ विशेष । ६३ विनोद । ६४ सिद्धि । ६५ कान्ति । ६६ कीर्ति। ६७ विस्फूर्ति। ६८ व्युत्पत्ति। ६९ वात्सल्य । ७० माङ्गल्य । ७१ महो- त्सव । ७२ मन्त्र । ७३ रसिकत्व । रसिकत्व । ७४ पावकत्व । ७५ गुरुत्व । ७६ स्मृति । ७७ शक्ति । ७८ मुक्ति। ७९ युक्ति । ८० अशक्ति । ८१ अनुक्रम । ८२ अनुवश । ८३ अनुराग। ८४ अभिमान। ८५ वदान्य। ८६ कारुण्य । ८७ दाक्षिण्य । ८८ दर्शन । ८९ स्पर्शन । ९० रसन । ९१ श्रवण । ९२ ग्रहण । ९३ मर्यादा । ९४ मण्डन । ९५ उदय। ९६ उदात्त। ९७ उत्साह । ९८ उत्तमत्व । गुणाश्चेति । ९) G१ विद्या । २विनय । ३विवेक। २ विनय । ३ विवेक। ४विस्तार। ५ सदाचार। ६सत्य। ७ शौच । ८ सन्मान । ९संस्थान । १० समाधान । १० समाधान । ११ सौख्य । १२ सौजन्य । १३ सौभाग्य । १४ रूपगुण । १५ स्वरूपगुण । १६ संयोग। १७ वियोग । १८ विभाग। १९ सांगत्य । २० संपूर्णत्व। २१ सोमत्व। २२ सकलत्व। २३ सलजत्व । २४प्रस- नत्व । २५ प्रभुत्व । २६ प्रांजलत्व। २७ पालकत्व। २८ पाण्डित्य । २९ प्रणयित्व। ३० प्रमाण । ३१ शरण। ३२ प्रमोद । ३३ प्रसाद ३४ प्रताप। ३५ प्रारम्भ। ३६ प्रभाव। ३७ परिच्छन्द। ३८ संग्रह। ३९ सदाग्रह । ४० निग्रह । ४१ विग्रह । ४२ अनुग्रह । ४३ तुष्टि । ४४ पुष्टि । ४५ प्रीति । ४६ प्राप्ति। ४७ प्रशंसा । ४८ प्रतिष्ठा । ४९ प्रतिज्ञा । ५० स्थैर्य । ५१ धैर्य । ५२ शौर्य । ५३ चातुर्य । ५४ गांभीर्य । ५५ बुद्धि । ५६ वल । ५७ अध्यक्ष । ५८ विरोध। ५९ विषय । ६० विशेष । ६१ विनोद। ६२ वृद्धि। ६३ सिद्धि । ६४ कान्ति । ६५ कीर्ति ६६ विस्फूर्ति । ६७ व्युत्पत्ति । ६८ वात्सल्य । ६९ माङ्गल्य । ७० महोत्सव। ७२ रसिकत्व । ७३ भावकत्व । ७४ गुरुत्व । । ७५ स्मृति। ७६ शक्ति। ७७ मुक्ति । ७८ युक्ति । ७९ आसक्ति । ८० अनुक्रम । ८१ अभिमान । ८२ दानं । ८३ कारुण्य । ८४ दर्शन । ८५ स्पर्शन । ८६ रसन । ८७श्रवण । ८८ घ्राण। ८९ मर्याद। ९० मण्डन । ९१ उदात्त । ९२ उदय। ९३ उत्साह । ९४ उत्तमर्गुणाः । १० षट्त्रिंशद् राजपात्राणि । १ धर्मपात्रं । २ अर्थपात्रं । ३ कामपात्रं । ४ विनोदपात्रं । ५ विद्या- पात्रं । ६ विलासपात्रं । ७ विज्ञानपात्रं । ८ विचारपात्रं । ९ क्रीडापात्रं । १० हास्यपात्रं । ११ शृङ्गारपात्रं । १२ वीरपात्रं । १३ दर्शनपात्रं । १४ सत्पात्रं ।
१४ सविवरण-चस्तुरत्नकोशः । १५ देवपात्रं । १६ राजपात्रं । १७ मानपात्रं । १८ मन्त्रिपात्रं । १९ संधि- पात्रं । २० महत्तमपात्रं । २१ अमात्यपात्रं । २२ प्रधानपात्रं । २३ अध्यक्ष- पात्रं । २४ सेनापात्रं । २५ नागरपात्रं । २६ पूज्यपात्रं । २७ मान्यपात्रं । २८ पदस्थपानं । २९ देशीपात्रं । ३० राज्ञीपात्रं । ३१ कुलपुत्रिकापात्रं । ३२ पुनर्भूपात्रं । ३३ वेश्यापात्रं । ३४ प्रतिचारिकापात्रं । ३५ गुणपात्रं । ३६ दासीपात्रं । इति । १०) A १ धर्मपात्र । २अर्थपात्र । ३ विनोदपात्र । ४कामपात्र। ५विलासपात्र। ६ विज्ञानपात्र । ७ क्रीडापात्र। ८ हास्यपात्र । ९ शृङ्गारपात्र । ९ शृङ्गारपात्र । १० वीरपात्र । ११ देवपात्र । १२ दानवपात्र । १३ कर्मपात्र । १४ मंत्रिपात्र । १५ महत्तमपात्र । १६ अमात्यपात्र । १७ अध्यक्षपात्र । १८ सेनापालपात्र । १९ नागरपात्र । २० प्रधा- नपूजापात्र । २१.मान्यपात्र । २२ राजमान्यपात्र । २३ पदस्थपात्र । २४ देवीपात्र । २५ राज्ञीपात्र । २६ कुलपुत्रिकापात्र । २७ पुनर्भूपात्र । २८ देशीपात्र । २९ प्रतिसा- रकपात्र । ३० दासीपात्र । ३१ देशपात्र । ३२ गुणपात्राणि । १०) B १ धर्मपात्र। २ अर्थपात्र । ३ विनोदपात्र । ४कामपात्र । ५विलासपात्र ६ विद्यापात्र । ७ विज्ञानपात्र । ८ क्रीडापात्र । ९ हास्यपात्र । १० शृङ्गारपात्र। ११ वीरपात्र । १२ देवपात्र । १३ दानवपात्र । १४ कर्मपात्र । १५ मंत्रिपात्र । १६ संधिपात्र । १७ महत्तमपात्र । १७ महत्तमपात्र । १८ अमात्यपात्र । १८ अमात्यपात्र । १९ अध्यक्षपात्र । २० सेना- पात्र । २१ सेनापालपात्र । २२ प्रधानपूजापात्र । २३ मान्यपात्र । २४ राजमान्यपात्र । २५ पदस्थपात्र । २६ देवीपात्र । २७ राज्ञीपात्र । २८ कुलपुत्रिकापात्र । २९ पुनर्भू- पात्र । ३० वेश्यापात्र । ३१ प्रतिसारकापात्र । ३२ दासीपात्र । ३३ देशपात्र । ३४ गुणपात्राणि । १०) C१ धर्मपात्र । २ अर्थपात्र । ३ कामपात्र । ४ विनोदपात्र । ५ विद्यापात्र । ६ विलासपात्र । ७ विज्ञानपात्र । ८ज्ञानपात्र । ९ क्रीडापात्र । १० हास्यपात्र ११ शृङ्गारपात्र । १२ वीरपात्र । १३ स्नेहपात्र। १४ राजमानपात्र । १५ मंत्रिपात्र। १६ संधिपात्र । १७ महापात्र । १८ गंधपात्र । १९ अध्यक्षपात्र । २० सेनापात्र । २१ नागरपान । २२ पुष्पपात्र । २३ मान्यपात्र । २४ पदस्थपात्र । २५ कुतूहलपात्र । २६ सारिकापात्र । २७ सेवकपात्र। २८ श्रेष्ठपात्र । १०) E१धर्मपात्र। २ अर्थपात्र। ३ कामपात्र । ४ विनोदपात्र । ५ विलासपात्र । ६ विशालपात्र। ७ विद्यापात्र। ८ विज्ञानपात्र। ९क्रीडा। १० हास्य। ११ शृङ्गार। १२वीर। १३ अभिनव। १४ देव। १५ दानव। १६ मानव । १७ श्रवण। १८ रथ। १९ कर्म। २० स्नेह । २१ मंत्री । २२ सिद्धिस्थान । २३ संधि । २४ महामात्य । २५ अमात्य । २६ प्रधान । २७ अध्यक्ष । २७ अध्यक्ष। २८ सेना । २९ नगर । ३० पूज्य । ३१ जागरी। ३२ मान्य। ३३ द्वारपदस्थ । ३४ राज्यमान्य। ३५ देवी। ३६ राजी । ३७ कुलपुत्रिका । ३८ पुनर्भू । ३९ वेश्या । ४० अभिचारिका । ४१ दासी । ५२ दास। ४३ परिचारिका । ४४ देश। ४५ गुणपात्राणि । इति ।
सविवरण-वस्तुरतकोशः। १०) F १ धर्मपात्र । २ अर्थपात्र । ३ कामपात्र । ४ विनोदपात्र। ५विद्यापात्र। ६ विशालपात्र । ७ ज्ञानपात्र । ८ विज्ञानपात्र। ९ क्रीडापात्र । १० हास्यपात्र । ११ शृङ्गारपात्र । १२ वीरपात्र । १३ स्नेहपात्र । १४ राजपात्र । १५ मान्यपात्र । १६ देवपात्र । १७ दानपात्र। १८ मानपात्र। १९ कर्मपात्र। २० मंत्रपात्र । २१ संधि- पात्र । २२ अमात्यपात्र । २३ प्रधानपात्र । २४ अक्षरपात्र । २५ सेनापात्र । २६ नागरपात्र । २७ पुष्फपात्र। २८ पदच्छेदिपात्र । २९ राशीपात्र। ३० पुनर्भूपात्र । ३१ वेश्यापात्र । ३२ दासीपात्र । ३३ पूज्यपात्र । ३४ अभिचारिकापात्राणीति । १०) G १ धर्मपात्र। २ अर्थपात्र । ३ विनोदपात्र । ४ कामपात्र । ५ विलासपात्र । ६ विज्ञानपात्र। ७ क्रीडापात्र । ८ हास्यपात्र । ९ शृङ्गारपात्र । १० वीरपात्र । ११ देवपात्र । १२ दानवपात्र । १३ कर्मपात्र । १४ मंत्रिपात्र । १५ महत्तमपात्र । १६ अमात्यपात्र। १७ अध्यक्षपात्र। १८ सेनापालपात्र । १९ नागरपात्र । २०प्रधान- पूजापान । २१ मान्यपात्र । २२ राजमान्य । २३ पदस्थपात्र । २४ देवीपात्र । २५ राक्षीपात्र। २६ कुलपुत्रिकापात्र । २७ पुनर्भूपात्र। २८ वेसापात्र। २९प्रतिसारका पात्र । ३० दासीपात्र । ३१ देशपात्र । ३२ गुणपात्राणि । ११. षट्त्रिंशद् राजविनोदाः। १ दर्शनविनोदः। २ श्रवणविनोदः। ३ कृत्रिमविनोदः । ४ गीत- विनोदः। ५ वाद्यविनोदः। ६ नृत्यविनोदः। ७ शुद्धलिखितविनोदः। ८ सख्यविनोदः । ९ वक्तृत्वविनोदः । १० कवित्वविनोदः। ११ शास्त्र- विनोदः। १२ करविनोदः। १३ विबुध्यविनोदः। १४ अक्षरविनोदः । १५ गणितविनोदः। १६ शस्त्रविनोदः। १७ राजविनोदः। १८ तुरगविनोदः। १९ पक्षिविनोदः। २० आखेटकविनोदः। २१ जलविनोदः । २२ यंत्र- विनोदः । २३ मंत्रविनोदः। २४ महोत्सव विनोदः। २५ फलविनोदः । २६ गणितविनोदः। २७ पठितविनोदः । २८ पत्रविनोदः। २९ पुष्प- विनोदः। ३० कलाविनोदः। ३१ कथाविनोदः। ३२ केशविनोदः । ३३ प्रहेलिकाविनोदः । ३४ चित्रविनोदः । ३५ चलचित्रविनोदः। ३६ स्तवविनोदः । इति । . ११) A १ दर्शन । २ श्रवण । ३ गीत । ४ नृत्य । ५ वाद्य । ६ नृत्तपाठ। ७ लेख्य । ८ वकृत्व । ९ कवित्ववाद । १० शास्त्र । ११ युद्ध । १२ नियुद्ध । १३ गणित। १४ गज। १५ तुरग। १४ गज। १५ तुरग। १६ पक्षि। १७ आखेटक। १८ द्यूत। १९ जल। २० यंत्र। २१ मंत्र। २२ महोत्सव। २३ पत्र । २४ फल। २५ पुष्प। २६ कला । २७ कथा । २८ प्रहेलिका । २९ पदार्थकरण । ३० तत्त्व । ३१ वल। ३२ चित्र । ३३ सत्रा १६ सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ११) B १ दर्शन । २ गीत । ३ नृत्य । ४ वृत्त। ५पाठ। ६ लेख्य। ७ कवित्व । ८ शास्त्र । ९ युद्ध । १० विनोद । ११ नियुद्ध । १२ वाजिंत्रविनोद । १३ गज। १४ तुरग । १५ पक्षि। १६ आखेटक। १७ द्यूत । १८ जल। १९ यंत्र । २० महो- त्सव । २१ पत्र। २२ फल। २३ पुष्प । २४ कला । २५ कथा। २६ प्रहेलिका। २७ पदार्थकरण । २८ तत्त्व । २९ बल। ३० चित्र। ३१ सूत्रविनोद । ११) C१ गीत। २ वाद्य । ३ लिखित । ४ लेख्य। ५ वक्तव्य । ६ कवित्व । ७शास्त्रा ८ युद्ध। ९नियुद्ध। ९ नियुद्ध। १० गज। ११ तुरग। १२ पक्षि । १३ आखेटक। १४ चूत। १५ जल। १६ यंत्र। १७ मंत्र । १८ महोत्सव। १९ फल। २० पुष्प । २१ चित्रगुण । २२ कथा। २३ प्रहेलिका । २४ सूत्रविनोदाश्चेति । ११) E १ दर्शनविनोद। २ श्रवण । ३ नृत्य । ४ गीत। ५वाद्य। ६ नृत्य। ७पाठ्य। ८ आख्यान। ९ वक्तव्य। १०लेख्य। ११ कवित्व। १२ वाद। १३ शास्त्री १४ शस्त्रशास्त्र। १५ युद्धकार। १६ नियुद्धकार। १७ गणित। १८ गज। १९ तुरग। २० पक्षी। २१ आखेटक । २२ द्यूत । २३ जल । २४ यंत्र । २४ यंत्र। २५ मंत्र। २६ महो- त्सव। २७ पत्र । २८ पुष्प । २९ फल । ३० कला। ३१ कथा । ३२ प्रहेलिका। ३३ पदार्थ। ३४ तत्त्व । ३५ बल। ३६ चित्रसूत्र । इति विनोदाः। ११) F १ गीतविनोद । २ वाद्यविनोद । ३ दर्शनविनोद । ४ श्रवणविनोद । ५ नृत्यविनोद । ६ लिखित । ७ लेख्य। ८ वत्कृत्व। ९ कवित्व । ९ कवित्व । १० वादिशास्त्र । ११ युद्ध। १२ नियुद्ध। १३ गणित। १४ गज । १५ तुरग । १६ पक्षि। १७ आखे- टक। १८ द्यूत। १९ जलक्रीडा। २० यंत्र । २१ मंत्र । २२ महोत्सव। २३ पुष्प । २४ फल । २५ कला । २६ कथा । २७ प्रहेलिका । २८ पदार्थ । २९ तत्व।। ३० वल। ३१ वित्त । ३२ सूत्र । ३३ खेलन। ३४ चित्रविनोदश्चेति । ११) G१ दर्शनविनोद । २ श्रवणविनोद । ३ गीतविनोद । ४ नृत्य। ५ वाद्य । ६ वृत्त। ७ पाठा ८ लेख्य। ९ वक्तृत्व। १० कवित्व। ११ वादशास्त्र । विनोद। १३ नियुद्ध । १४ गणित १५ गज। १६ तुरग १७ पक्षि । १८ आखेटक १९ धूत। २० जले। २१ यंत्र। २२ मंत्र। २३ महोत्सव । २४ पत्र। २६ पुष्प। २७ कला । २८ कथा । २९ प्रहेलिका । ३० पदार्थकरण ।, ३१ तत्त्व । ३२ बल। ३३ चित्र । ३४ सूत्रविनोद । १२. अष्टादशविधमास्थानम् । १ मल्ल । २ आप्त । ३ हित । ४ स्निग्ध । ५ मंत्रि । ६ महत्तम । ७ अमात्य । ८ बुद्धि। ९ सुख । १० उभयसुख । ११ आम्नायिक । १२ देशीपुरुष । १३ धर्मपुरुष । १४ धनपुरुष । १५ धान्यपुरुष । १६ कास्यपुरुष । १७ विज्ञानपुरुष । १८ राजपुरुष । इति । ११) AB १ मल्लस्थानं। २आप्तस्थानं । ३ हितस्थानं । ४ स्निग्धस्थान । ५ मंत्रि । ६ महत्तम । ७ अमात्य । ८ बुद्धि। ९ सुख । ९ सुख । १० अभयसुख । ११ आरासिक। १२ संग्रामिक । १३ आम्नायिक । १४ देशीपुरुप । १५ धर्मपुरुष । १६ धनपुरुष । १७ कामपुरुष । १८ राजपुरुप । विज्ञानविनोदपात्राणि च । 1 AG विधं स्थानं । - १२ युद्ध- २५ फल। .
१७ - सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। १२)C १ मल्ल। २ आप्त। ३ हित । ४ स्निग्ध । ५ महत्तम। ६ अमात्य । ७ प्राधान्य । ८ वुद्धिसुख। ९ विवाद । १० उभयसुख । ११ आनाइक । १२ संग्रा- मिक । १३ देशीय । १४ कामिक । १५ विज्ञान । १६ विचारिक। १७ संतोष । १८ प्रशंसा चेति। १२) E १ मल्ल । २ आप्त। ३ हित । ४ स्निग्ध । ५ मंत्रि। ५ मंत्रि। ६ अमात्य । ७ मह- वुद्धि । ९ सुख । १० उभयसुख । १० उभयसुख । ११ आनायिक। १२ संग्रामिक । १३ देशीपुरुष। १४ धर्मपुरुष। १५ धनपुरुष । १५ धनपुरुष। १६ काम । १७ विज्ञान । १८ राज्या १९ राजमान्य। २० विनोद । इति पात्र आस्थानम् । १२) F १ मल्ल । मल्ल । २ आप्तहित। ३ स्निग्ध । ४ मंत्रि। ५ महत्तम। ६ अमात्य । ७ प्रधान । ८ वुद्धिमुख । ९ उदयमुख । १० आनायिक । ११ सांग्रामिक। १२ देशीयपुरुष । १३ धर्मपुरुष। १४ अर्थपुरुष । १५ कामपुरुष । १६ शानपुरुष । १७ विज्ञानपुरुष । १८ राजपुरुषश्चेति । १२) G १ मल्लस्थानं। २ आप्तस्थानं। ३ हितस्थानं । ४ स्निग्धस्थान । ५ मंत्रि। ६ महत्तम। ७ अमात्य। ८ बुद्धिसख । ९ अभयसख । १० आरामिक। ११ संग्रा- मिक। १२ आनायिक। १३ देशीपुरुष। १४ धर्मपुरुष। १५धनपुरुष । १६ काम- पुरुष। १७ राजपुरुष । १८ विज्ञानविनोदपात्राणि च । in १३. चतस्रो राजविद्याः। १ आन्वीक्षिकी। २ त्रयी। ३ वार्ता । २ त्रयी। ३ वार्ता । ४ दण्डनीतिश्चेति विद्याः। 1 G अथ चतस्रो राजविद्याम् । १३) ABD आन्वीपिकी। E अन्वेषिकी। F आन्वेषिकी। ** १४. चतस्रो राजनीतयः । १ साम। २ दान । ३ भेद। ४ दण्ड । इति । 11 चतस्त्र राजनीतयः । १४) C सामदानविधिभेदनिग्रहश्चेति । १४) D सामनीति उपप्रदाननीति मेदनीति दंडनीति १४) F साम दानं भेदः दण्डश्चेति । १५. षट्त्रिंशद् आयुधानि । १ चक्र । २ धनुः। ३ वज्र । ४ खड्ग । ५ क्षुरिका । ६ तोमर । ७ कुंत । ८ शूल । ९ त्रिशूल । १० शक्ति । ११ पाश । १२ अङ्कुश । १३ मुद्गर । १४ मक्षिका । १५ भल्ल । १६ भिंडमाल । १७ मुसुंठि। 1 A B E F G षत्रिंशइंडायुधानि । - ३ १८ सविवरण-वस्तुरनकोशः। १८ लुंठि । १९ गदा । २० शंख । २१ परशु । २२ पट्टिस । २३ रिष्टि । २४ कणय । २५ संपन्न । २६ हल । २७ मुशल । २८ पुलिका। २९ कर्तरि । ३० करपत्र । ३१ तरवारि । ३२ कोदाल । ३३ दुस्फोट । ३४ गोफण । ३५ डाह । ३६ डबूस । इति । harm १५) AB १ चक। २ धनुष। ३ खड्ग। ४ तोमर । ५ कुंत । ६त्रिशूल । ७ शक्ति । ८ पाश । ९ अंकुश । १० मुद्गर । ११ मक्षिका । १२ भल्ल । १३ भिडिमाल । १४ मुषंडि । १५ गदा । १६ शक्ति १७ परशु । १८ पट्टिसु । १९ कृष्टि । २० करणक । २१ कंपन । २२ हल । २३ मुशल । २२ हल । २३ मुशल । २४ कुलिका। २४ कुलिका। २५ करपत्र । २६ कर्तरि । २७ कोपूल । २८ तरवारि। २९ दुस्फोट । ३० गोफणि । ३१ डाह । ३२ डवूस। ३३ लुंठि। ३४ दंडशास्त्राणि । १५) C चक्र । २ पाश। ३ चाप। ४ वज्र। ५ खग। ६ छुरिका । ७ तोमर । ८ कुंतल । ९ शूल । १० शक्ति । ११ अंकुश । १२ मुद्गर । १३ भिंडिमाल। १४ मुषंडी। १५ परिघ। १६ गदा। १७ परशु। १८ पट्टिश। १९ इष्टि। २० यष्टि। २१ कणय । २२ कंकण । २३ हल । २४ मुशल । २५ करपत्र । २६ कर्तरि । २७ कोदाल । २८ डवुस । २९ नाराच । ३० खेटक । ३१ कुठार । ३२ दंड। ३३ पाश। ३४ चर्म। ३५ कुलिश। ३६ दुस्फोट । ३७ डाह । १५) : १ चक्र। २ धनुष । ३ वज्र। ४ खग। ५ छुरिका। ६ तोमर । ७ नाराच। ८ कुंत । ९ शूल। १० शक्ति । ११ पास । १२ मुडु। १३ भल्ल । १४ मक्षिक। १५ भिंडपाल । १६ मुपंडी । १७ लुंठि । १६ मुपंडी । १७ लुंठि । १८ दंड । १९ गदा । २० फांकु। २१ परशु। २२ पट्टिश। २३ रिट। २४ कणय। २५ कणव। २६ कंपन। २७ हल । २८ मुशल । २९ आगलिका। ३० कर्त्तरि। ३१ करपत्र । ३२ तरवारि। ३३ कोदाल। ३४ अकुश। ३५ करवाल। ३६ दुस्फोट। ३७ गोफिणि। ३८ दाहड। ३९ डमरु । इति। १५) F १ चक्र । २ धनुः। ३ वज्र । ४ अंकुश। ५खड्ग। ६छुरिक । ७ तोमर । ८ कुन्त । ९शूल। १० त्रिशूल। ११ शक्ति। १२ पाश । १३ मुद्गर। १४ कुद्दाल। १५ दुस्फोट । १६ गोफण । १७ यन्त्रगोलिका। १८ मसंठि। १९ लुण्ठि । २० गदा। २१ शङ्कु । २२ परशु। २३ पट्टिश। २४ रिष्ट। २५ कणाय । २६ कंपन । २७ कर्तरी । २८ हल । २९ मुशल । ३० गुहिलका । ३१ करपत्र । ३२ तरवारि । ३३ डाव । ३४ ढाल। ३५ डस्थूर। ३६ कुठार। ३७ दण्डश्चेति । १५) G १ चक्र। २ धनुप । ३ खङ्ग। ४ तोमर। ५ कुन्त । ६ त्रिशूल । ७ शक्ति। ८ पाश । ९ अङ्कुश। १० मुद्गर । - ११ मक्षिका। १२ भल्ल। १३ भिण्डि- माला। १४ मुपण्डि। १५ गदा। १६ शक्ति । १७ परशु। १८ पट्टिसु । १९ कृष्टि। २० करणक 1, २१ कंपन । २२ हल । २३ मुशल । २४ हुलिका । २५ परपत्र । २६ कर्तरि । २७ कोपूल। २८ तरवारि । २९ दुस्फोट । ३० गोफणि। ३१ डोह । ३२ डवूस। ३३ लुण्ठि । ३४ दण्डशस्त्राणि । । - * सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। १६. सप्तविंशतिः शास्त्राणि । - १ शब्दशास्त्र । २ छंदःशास्त्र । ३ अलंकारशास्त्र । ४ काव्यशास्त्र । ५ कथाशास्त्र । ६ नाटकशास्त्र । ७ वाद्यशास्त्र । ८ निर्धेट । ९ धर्मशास्त्र । १० अर्थ । ११ काम। १२ मोक्षशास्त्र । १३ वाद । १४ विद्या । १५ वास्तुशास्त्र । १६ विज्ञान । १७ कलाशास्त्र । १८ कृत्यशास्त्र । १९ कल्पशास्त्र। २० शिक्षा। २१ लक्षणशास्त्र। २२ पुराण। २३ मंत्रशास्त्र । २४ तर्कशास्त्र। २५ गणित। २६ गांधर्व। २७ सिद्धांत- शास्त्र । इति । १६) AB १ शब्दशास्त्र । २ छंदशास्त्र । २ छंदशास्त्र। ३ अलंकारशास्त्र । ४काव्यशास्त्र। ५कथाशास्त्र नाट्यशास्त्र। ७ नाटकशास्त्र । ८ निघंट। ९धर्म । १० अर्थ। ११ काम। १२ मोक्ष। १३ तर्क। १४ गणित १५ गांधर्व । १६ मंत्र। १७ वैद्यक । १८ वास्तु । १९ विज्ञान । २० विनोद । २१ कृत्य । २२ कला । २३ कल्प। २४ शिक्षा। २५ लक्षण । २६ पुराण । २७ सिद्धांतशास्त्राणि । १६) । १ शब्द । २ छंद। ३ अलंकार। ४काव्य । ५काथा। ६नाट्या ७ नाटक। ८ निघंट। ९ निर्णय । १० धर्म । ११ अर्थ । १२ काम । १३ मोक्ष । १४ तर्क । १५ गणित । १६ गांधर्व । १७ मंत्र । १८ विद्या । १९ वास्तु । २० विज्ञान । २१ विनोद । २२ नृत्य । १६) F १ शब्दशास्त्र। २ छंदःशास्त्र। ३ अलंकारशास्त्र। ४ काव्यशास्त्र। ५ कथा। ६ नाटकशास्त्र । ७ निघण्टु । ८ धर्मशास्त्र । ९ अर्थशास्त्र १० कामशास्त्र। ११ मोक्षशास्त्र। १२ तर्कशास्त्र । १३ वाद । १४ वैद्य क। १५ वास्तु। १६ व्याख्यान । १७ गणित । १८ गान्धर्व । १९ मंत्र । २० विनोद । २१ कला। २२ कल्प। २३ शिक्षा। २४ पुराण। २५ सिद्धान्त । २६ नीतिशास्त्र । २७ वेद । इति शास्त्राणि । १६) G १ शब्दशास्त्र। २ छन्दशास्त्र। ३ अलङ्कारशास्त्र । ४ काव्यशास्त्रा ५ कथाशास्त्र। ६ नाट्यशास्त्र । ७ नाटकशास्त्र। ८ निघण्ट। ९धर्म । १० अर्थ । ११ काम । १२ मोक्ष । १३ तर्क । १४ गणित । १५ गान्धर्व । १६ मंत्र । १७ वैद्यक । १८ वास्तु । १९ विज्ञान । २० विनोद । २१ कृत्य । २२ कला। २३ कल्प। २४ शिक्षा। २५ लक्षण । २६ पुराण। २७ सिद्धान्तशालाणि । 10 gives no Vivarana.
२० सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। १७. 'द्विपञ्चाशत् तत्त्वानि । १ पृथ्वी । २ अप । ३ तेज । ४ वायु । ५ आकाश । ६ शब्द । ७ रूप । ८ रस । ९ गंध । १० स्पर्श। ११ रसन । १२ स्पर्शन । १३ प्राण । १४ चक्षुः । १५ श्रोत्र । १६ वाक् । १७ पाणि । १८ पाद । १९ गुद । २० उपस्थ । २१ मन । २२ बुद्धि । २३ अहंकार । २४ प्रकृति । २५ पुरुष । २६ रक्त । २७ मांस । २८ मेद । २९ मज्जा । ३० अस्थि । ३१ शुक्र । ३२ वात । ३३ पित्त । '३४ कफ । ३५ मल । ३६ काम । ३७ क्रोध । ३८ लोह । ३९ मात्सर्य। ४० राग । ४१ नियति । ४२ कालविद्या । ४३ शुद्धविद्या । ४४ माया। ४५ शक्ति । ४६ नाद । ४७ बिंदु। ४८ कला ॥ ४९ ज्योतिः । ५० ईश्वर । ५१ श्लेष्म । ५२ सदाशिव । इति । १७) A.B १ पृथ्वीतत्त्व । २ अपतत्त्व । ३ तेजस्तत्त्व । ४ वायुतत्त्व । ५ आकाशतत्त्व । ६ शब्द । ७ स्पर्श । ८रस । ९ रूप । १० गंध। ११ रसन । १२ स्पर्शन। १३ घ्राण । १४ चक्षु । १५ श्रोत्र । १६ त्वक् । १७ पाणि । १८ पाद । १९ गुद । २० उपस्थ । २१ मन । २२ बुद्धि । २३ अहंकार । २४ प्रकृति । २५ पुरुप । २६ विंदु । २७ रक्त। २८ मांस। २९ मेद । ३० अस्थि । ३१ मज्जा। ३२ शुक्र । ३३ वात । ३४ पित्त। ३५ कफ। ३६ मल। ३७ काम । ३८ क्रोध। ३९ लोभ । ४० मोह। ४१ भय । ४२ मात्सर्य। ४३ राग। ४४ नियति। ४५कला। ४६काल- विद्या। ४७ शुद्धविद्या । ४८ माया । ४९ ज्योति । ५० नाद । ५१ शक्ति। ५२ ईश्वर। १७) C १ पृथिवी। २ अप। ३ तेज। ४ वायु। ५आकाश। ६शब्द । ७ स्पर्श। ८ रूप । ९ रस । १० गंध । ११ श्रोत्र। १२ त्वक् । १३ चक्षु । १४ जिह्वा । १५प्राण । १६ वाक् । १७ हस्त। १८ उपस्थ। १९ वायु। २० पाद। २१ मनांसि । २२ वुद्धि । २३ अहंकार। २४ प्रकृति । २५ पुरुप । २६ रक्त । २७ मांस। २८ मेद । २९ मजा। ३० शुक्र । ३१ अस्थि । ३२ वात। ३३ पित्त। ३४ कफ। ३५ मल । ३६ काम । ३७ क्रोध । ३८ लोभ । ,३९ मोह । ४० मान । ४१ भय । ४२ आश्चर्य। ४३ राग । ४४ नियति। ४५ कालविद्या। ४६ माया। ४७शक्ति। ४८ नाद । ४९ विंदु। ४९ विंदु। ५० कला। ५१ ज्योतिरिति । १७) E १ पृथिवी। २ अप। ३ तेज । ४ वायु। ५ आकाश! ६ शब्द । ७ स्पर्श । ८ रस । ९रूप। १० गंध । ११ रसन। १२ स्पर्शन। १३ घ्राण । १४ चक्षु । १५ श्रोत्र । १६ त्वक् । १७ बुद्धि। १८ अहंकार। १९ पाणि । २० गुद। २१ पाद 1 A B अथ द्विप।
सविवरण-वस्तुरतकोशः। २१ २२ प्रकृति। २३ पुरुप । २४ विंदु । २५ रक्त। २६ मांस। २७ मेद । २८ अस्थि । २९ मजा । ३० शुक्र । ३१ वात । ३२ पित्त। ३३ कफ। ३४ मल । ३५ काम । ३६ क्रोध। ३७ लोभ। ३८ मोह। ३९ भय । ४० मात्सर्य। ४१ राग। ४२ कला। ४३ कालविद्या । ४४ बुद्धि । ४५ शक्ति। ४६ ऐश्वर्य । ४७ माया । ४८ ज्योति । ४९ नाद । ५० शक्ति। ५१ नियति । ७१) F १ पृथ्वी । २ अप् । ३ तेजस्। ४ वायु। ५आकाश । ६शब्द। ७ रुप । ८ रस । ९ स्पर्श । १० गन्ध । ११ दर्शन । १२ श्रोत्र । १३ वाक् । १४ पाणि । १५ पाद । १६ गुद। १७ उपस्थ । १८ सनस् । १९ वुद्धि। २० अहं- कार । २१ प्रकृति । २२ पुरुप । २३ रक्त । २४ मांस। २५ मेद । २६ मज्जा। २७ शुक्र । २८ अस्थि । २९ वात। ३० पित्त। ३१ कफ। ३२ मल। ३३ काम । ३४ कोध। ३५ लोभ। ३६ मोह। ३७ भय। ३८ मात्सर्य। ३९ राग। ४० नियति । ४१ कालविद्या । ४२ युद्ध । ४३ माया । ४४ शक्ति । ४५ नाद । ४६ विन्दु । ४७ ईश्वर । ४८ शिव । ४९ सदाशिवश्चेति । १७) G १ पृथ्वीतत्त्व। २ अप्तत्त्व । ३ तेजस्तत्व । ४ वायुतत्त्व। ५ आकाशतत्त्व । ६ शब्द । ७ स्पर्श । ८ रस। १० गंध। ११ रसन। १२ स्पर्शन। १३ घ्राण । १४ चक्षुः। १५ श्रोत्र । १६ त्वक् । १७ पाणि । १८ पाद। १९ गुन् । २० उपस्थ । २१ मन । २२ बुद्धि । २३ अहङ्कार । २४ प्रकृति । २५ पुरुप। २६ विन्दु। २७ रक्त। २८ मांस। २९ मेद । ३० अस्थि । ३१ मज्जा। ३२ शुक्र । ३३ वात । ३४ पित्त। ३५ कफ। ३६ मल। ३७ काम। ३८ क्रोध । ३९ लोभ । ४० मोह । ४१ भय। ४२ मात्सर्य। ४३ राग । ४४ नय। ४५ कला। ४६ काल- विद्या । ४७ शुद्धविद्या । ४८ माया । ४९ ज्योतिः । ५० नाद । ५१ शक्ति। ५२ ईश्वर। १८. 'द्विसप्ततिः कलाः। १ गीतकला। २ वाद्यकला। ३ नृत्यकला । ४ गणितकला। ५ पठितकला । ६ लिखितकला । ७ वक्तृत्वकला । ८ कवित्वकला । ९ कथाकला । १० वचनकला । ११ नाटककला। १२ व्याकरणकला। १३ छंदःकला । १४ अलंकारकला। १५ दर्शनकला । १६ अभिधान- कला । १७ धातुवादकला । १८ धर्मकला । १९ अर्थकला । २० काम- कला। २१ वादकला। २२ बुद्धिकला। २३ शौचकला. .२४ विचारकला। २५ नेपथ्यकला । २६ विलासकला। २७ नीति- कला। २८ शकुनकला। २९ क्रीतकला। ३० वित्तकला । ३१ संयोगकला। ३२ हस्तलाघवकला। ३३ सूत्रकला। ३४ कुसुम- , 1 A B C अथ द्वि ।। مر کر सविवरण-चस्तुरत्नकोशः। कला। ३५ इंद्रजालकला। ३६ सूचीकर्मकला। ३७ स्नेहकला। ३८ पानककला। ३९ आहारककला। ४. सौभाग्यकला । ४१ प्रयोग- कला। ४२ मंत्रकला। ४३ वास्तुकला। ४४ वाणिज्यकला। ४५ रत्नकला। ४६ पात्रकला। ४७ वैद्यकला। ४८ देशकला। ४९ देशभाषितकला। ५० विजयकला । ५१ आयुधकला। ५२ युद्ध- कला । ५३ समयकला । ५४ वर्तनकला। ५५ हस्तिकला। ५६ तुरग- कला । ५७ नारीकला । ५८ पक्षिकला। ५९ भूमिकला । कला । ६१ काष्ठकला। ६२ पुरुषकला। ६३ सैन्यकला । ६४ वृक्ष- कला । ६५ छद्मकला । ६६ हस्तकला । ६७ उत्तरकला । ६८ प्रत्युत्तर- कला । ६९ शरीरकला । ७. सत्त्वकला । ७१ शास्त्रकला । ७२ लक्षण- कला । इति । ६० लेप- ४७छद्म। १८) A B १ गीतकला । २ नृत्यकला। ३ वाद्यकला। ४ बुद्धिकला। ५ शौच। ६ मंत्रकला। ७ विचार। ८ वाद । ९ वास्तु । ९ वास्तु। १० नेपथ्य । ११ विनोद । १२ वि- लास । १३ नीति । १४ शकुन । १५ चित्र। १६ संयोग । १७ हस्तलाघव । १८ कुसुम। १९ इंद्रजाल। २० सूचीकर्म । २१ स्नेहपात्र। २२ आहार। २३ सौभाग्य। २४ प्रयोग। २५ गंध । २६ वस्तु । २७ पात्र । २८ रत्न । २९ वैद्य । ३० देश- भापित । ३१ विजय । ३२ वाणिज्य । ३३ आयुध । ३४ युद्ध । ३५ नियुद्ध । ३६ समय । ३७ वर्त्तन । ३८ हस्ति। ३९ तुरग। ४० पक्षि । ४१ पुरुष । ४२ नारी । ४३ भूमिलेप। ४४ काष्ठ । ४४ काष्ठ। ४५ सैन्य। ४६ वृक्ष । ४८प्रस्था ४९उत्तर। ५० शस्त्र । ५१ शास्त्र । ५२ गणित । ५३ पठित । ५४ लिखित । ५५ वक्तृत्व । ५६ कथा । ५७ व्यवन । ५८ व्याकरण । ५९ नाटक । ६० छंद । ६१ अलंकार । ६२ दर्शन । ६३ अध्यात्म। ६४ धातु। ६५ धर्म। ६६ अर्थ । ६७ काम । ६८ द्यूत । ६९ शरीरकलाश्चेति । १८) C१ वाद्यफला । २ नृत्यकला । ३ गणित । ४ पठित । ५ लिखित । ६ लेख्य । ७ वक्तृत्व । ८वचन । ९ कथा । १० नाटक । ११ व्याकरण । १२ छंद । १३ अलंकार। १४ दर्शन । १५ अभिधान । १६ धातुकर्म । १७ धर्म । १८ अर्थ । १९ काम। २० वाद। २१ वृद्धि। २२ पाचक । २३ मंत्र । २४ विनोद। २५ विचार। २६ नेपथ्य । २७ विलास । २८ नीति । २९ शकुन । ३० क्रीडन । ३१ तंत्र । ३२ संयोग । ३३ हस्तलाघव । ३४ सूत्र । ३५ कुसुम । ३६ चंद्र । ३७ जीव । ३८ स्नेह । ३९ पान । ४० आहार । ४१ विहार । ४२ सौभाग्य । ४३ प्रयोग। २४ गंध। ४५ वाद । ४६ वस्तु । ७ रत्न । १७ रत्न । ४८ पात्र, । ४९ विद्या। ५० व्यास- कला। ५१ दशा। ५२ विजय । ५३ वणिज । ५४ आयुध । ५५ युद्ध। ५६ सम- यनियुद्ध । ५७ वृद्धन । ५८ वर्त्तन । ५९ हस्ति । ६० तुरग। ६१ पक्षि। ६२ नारि।
२ सविवरण-वस्तुरनकोशः। २३ ६३ भूमि। ६४ लेपन। ६५ दंत । ६६ काष्ठ। ६७ इष्टिका। ६८ पाषाण। ६९ उत्तर। ७० प्रत्युत्तर। ७१ सूचीकर्म। ७२ शरीरशस्त्रकलाश्चेति । १८) F १ गीत । २ नृत्य । ३ वाद्य । ४ गणित । ५ पठित । ६ लिखित । ७ वक्तृत्व । ८ कवित्व। ९ काव्य । १० वाचकत्व । ११ नाद । १२ व्याकरण। १३ छंद। १४ अलंकार। १५ दर्शन । १६ अभिधान । १७ धातुवाद । १८ बुद्धि । १९ शौच । २० विचार। २१ नेपथ्य। २२ विलास। २३ नीति। २४ शकुन। २५ क्रीतविक्रय । २६ संयोग। २७ हस्तलाघव । २८ सूत्र। २९ कुसुम। ३० इंद्रजाल। ३१ सूचिकर्म । ३२ स्नेहपान । ३३ आहार। ३४ सौभाग्य । ३५ प्रयोग। ३६ गंध। ३७ वस्तु । ३८ रत्न। ३९ पात्र । ४० वैद्य । ४१ देशभापित। ४२ देशविजय । ४३ वाणिज्य । ४४ आयुध । ४५ युद्ध । ४६ समय । ४७ वर्तन । ४८ हस्ती । ४९ तुरग। ५० पुरुप । ५१ नारी। ५२ पक्षी। ५३ भूमि। ५४ लेप। ५५ काष्ठ। ५६ सैन्य । ५७ वृक्ष । ५८ छद्म । ५९ हस्त । ६० उत्तर। ६१ प्रत्युत्तर। ६२ शैल। ६३ शारीर। ६४ शास्त्रकला चेति । १८) १ लिखित । २ गणित। ३ गीत । ४ वाद्य । ५ नृत्य। ६ पठित। ७ वक्तृत्व । ८ कवित्व । ९ कथा । १० विनोद। ११ वचन। १२ नाटक। १३ व्याकरण । १४ छन्दस्। १५ अलंकार । १६ दर्शन। १७ अभिधान। १८ धातुवाद। १९ धर्मवाद । २० अर्थवाद । २१ कामवाद। २२ बुद्धि। २३ शौच । २४ मन्त्र । २५ विचार। २६ नेपथ्य । २७ विलास । २८ स्वस्थकर्म। २९ नीति । ३० शकुन । ३१ क्रीडन । ३२ चित्र । ३३ लोहकर्म। ३४ काष्ठकर्म। ३५ दन्तकर्म। ३६ चर्मकर्म। ३७ संयोग। ३८ हस्तलाघव । ३९ कुसुम । ४० इन्द्रजाला ४१ स्नेहपान। ४२ आहार। ४३ विहार । ४४ सौभाग्य । ४५ प्रयोग। ४६ गंध। ४७ वाद। ४८ वास्तु। ४९ रन । ५० पात्र। ५१ वैद्य। ५२ देशभाषा। ५३ विजय। ५४ वाणिज्य। ५५ आयुध । ५६ युद्धसमय । ५७ हस्तिपरीक्षा । ५८ अश्वपरीक्षा। ५९ नरपरीक्षा। ६० नारीपरीक्षा। ६१ रत्नपरीक्षा। ६२ पक्षिपरीक्षा। ६३ भूमिपरीक्षा। ६४ इप्रकर्म। ६५ पापाणकर्म । ६६ उत्तर । ६७ प्रत्युत्तर। ६८ वृक्ष । ६९ छन । ७० शास्त्र। ७१ चोरग्रहण। ७२ कागडाजय । १८) G १ गीतकला। २ नृत्यकला। ३ वाद्यकला। ४ वुद्धिकला। ५शौचकला। ६मंत्रकला । ७ विचारकला। ८ वाद। ९ वास्तु। १० नेपथ्य । ११ विनोद। १२ विलास। १३ नीति। १४ शकुन। १५ चित्र। १६ संयोग। १७ हस्त । १८ लाघव । १९ कुसुम । २० इन्द्रजाल । २१ सूचीकर्म। २२ स्नेह । २३ पान । २४ आहार। २५ सौभाग्य। २७ गंध। २८ वस्तु । २९ पात्र । ३० रत्न। ३१ वैद्य। ३२ देश। ३३ विजय। ३४ वाणिज्य। ३५ आयुध । ३६ युद्ध । ३७ नियुद्ध। ३८ समय। ३९ वर्तन। ४० हस्ति । ४१ तुरग। ४२ पक्षि। ४३ पुरुप। ४४ नारी। ४५ भूमि । ४६ लेप। ४७ काष्ठ। ४८ सैन्य। ४८ सैन्य। ४९ वृक्ष । ५० छन। ५१ प्रस्थ । ५२ उत्तर । ५३ शस्त्र । ५४ शास्त्र । ५५ गणित। ५६ पठित । ५७ लिखित । ५८ वक्तृत्व । ५९ कथा। ६०व्यवन । ६१ व्याकरण। ६२ नाटक। ६३ छन्द। ६४ अलंकार। ६५ दर्शन। ६६ अध्यात्म । ६७ धातु। ६८ धर्म। ६९ अर्थ । ७० काम । ७१ चूत । ७२ शरीरकलाश्चेति । २६ प्रयोग।
। सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। १९. चतुरशीतिर्विज्ञानानि ।। १ हेतुविज्ञानं । २ तत्त्वविज्ञानं । ३ मोहविज्ञानं । ४ कर्मविज्ञानं । ५ धर्मविज्ञानं । ६ लक्ष्मीविज्ञानं । ७ योगविज्ञानं । ८ देवविज्ञानं । ९ शंखविज्ञानं । १० दंतविज्ञानं । ११ काचविज्ञानं । १२ गुटिका- विज्ञानं । १३ रसायनविज्ञानं । १४ वचनविज्ञानं । १५ कवित्व- विज्ञानं । १६ गुरुत्वविज्ञानं । १७ पारंपर्यविज्ञानं । १८ ज्योतिष्क- विज्ञानं । १९ वैद्यकविज्ञानं । २० मेघविज्ञान । २१ यंत्रविज्ञानं । २२ मंत्रविज्ञानं । २३ मर्दनविज्ञानं । २४ नेपथ्यविज्ञानं । २५ मस्तक- विज्ञानं । २६ इष्टिविज्ञानं । २७ लेपविज्ञानं । २८ सूत्रविज्ञानं । २९ चित्रकर्मविज्ञानं । ३० रंगविज्ञानं । ३१ शूचिकर्मविज्ञानं । ३२ शकुनविज्ञानं । ३३ छद्मविज्ञानं । ३४ गंधयुक्तिविज्ञानं । ३५ आराम- विज्ञानं । ३६ शैलविज्ञानं । ३७ काव्यविज्ञानं । ३८ कांस्यविज्ञानं । ३९ काष्ठविज्ञानं । ४० कुंभविज्ञानं। ४१ लोहविज्ञानं। ४२ पत्रविज्ञानं । ४३ वंशविज्ञानं । ४४ नखविज्ञानं । ४५ तृणविज्ञानं । ४६ प्रासाद- विज्ञानं । ४७ धातुविज्ञानं । ४८ विभूषणविज्ञानं । ४९ खरोदय- विज्ञानं । ५० द्यूतविज्ञानं । ५१. अध्यात्मविज्ञानं । ५२ अग्निविज्ञानं । ५३ विद्वेषणविज्ञानं । ५४ उच्चाटनविज्ञानं । ५५ स्तंभनविज्ञानं । ५६ वशीकरणविज्ञानं । ५७ वस्तुविज्ञानं । ५८ स्वयंभूविज्ञानं । ५९ हस्ति- शिक्षाविज्ञानं । ६० अश्वविज्ञानं । ६१ पक्षिविज्ञानं । विज्ञानं । ६३ चक्रविज्ञानं । ६४ वस्त्राकारविज्ञानं । ६५ पशुपाल- विज्ञानं । ६६ कृषिविज्ञानं । ६७ वाणिज्यविज्ञानं । ६८ लक्षण- विज्ञानं । ६९ कालविज्ञानं । ७० शस्त्रबंधविज्ञानं । ७१ शुद्धकर- विज्ञानं । ७२ विशुद्ध करविज्ञानं । ७३ आखेटकविज्ञानं । ७४ कौतूहल- विज्ञानं । ७५ कोशविज्ञानं । ७६ पुष्पविज्ञानं । ७७ इंद्रजालविज्ञानं । ६२ स्त्रीकाम- 1 A B F G अथ चतु।
सविवरण-वस्तुरतकोशः। २५ ७८ पानविधिविज्ञानं । ७९ अशनविधिविज्ञानं । ८० विनोदविज्ञानं । ८१ सौभाग्य-विज्ञानं । ८२ शौचविज्ञानं । ८३ विनयविज्ञानं । ८४ नीतिविज्ञानं । इति । ३७ नख। ४३ द्यूत। १९) A. १ हेतुविज्ञान । २ तत्त्वविज्ञान। ३ मोहजविज्ञान । ४ कर्मविज्ञान । ५धर्मविज्ञान । ६मर्मविज्ञान। ७ शंखविज्ञान । ८ दंतविज्ञान । ८ दंतविज्ञान । ९ काच। १० गुटिका। ११ योग । १२ रसायन। १३ वचन। १४ कवित्व । १५ नेपथ्य । १६ मंत्र। १७ तंत्र। १८ मर्दन । १९ पत्रक। २० वृष्टिक। २१ लेपकर्म । २२ सूत्र। २३ चित्र। २४ रंग। २५ सूचीकर्म । २६ शकुन । २७ छ । २८ निर्माल्य । २९ गंधयुक्ति । ३० आसन। ३१ शील। ३२ काष्ठकर्म। ३३ कुंभ। ३४ लोह। ३५ यंत्र। ३६ वंश । ३८ तृण। ३९ प्रसाद। ४० धातु। ४१ विभूषण । ४२ स्वरोदय । ४४ अध्यात्म। ४५ अग्नि। ४६ जल । ४७ विद्वेषण । ४८ उच्चाटना ४९ स्तंभन । ५० वशीकरण। ५१ हस्तिशिक्षा। ५२ अश्व। ५३ पक्षि। ५४ स्त्रीकाम । ५५ रत्न। ५६ वस्त्राकार। ५७ पाशुपाल्य। ५८ कृपि। ५९ वाणिज्य । ६० लक्षण । ६१ काल। ६२ शास्त्र। ६३ शस्त्रवंध । ६४ आयुधकार। ६५ नियुद्धकार। ६६ आखेटक। ६७ कुतूहल। ६८ कोश। ६९ पुष्प। ७० इंद्रजाल। ७१ पानविधि । ७२ अशन । ७३ विनोद। ७४ सौजन्य । ७४ सौजन्य । ७५ सौभाग्य । ७६ शौच । ७७ विनय। ७८ नीति। ७९ आयु। ८० वाद। ८१ व्यापार । ८२ धारण । इति विज्ञानानि । १९) B १ हेतुविज्ञान । २ तत्त्वविज्ञान । ३ मोहन । ४ कर्म। ५ धर्म। ६मर्म । ७ शंख । ८ दंत। ९ काच। १० गुटिका। ११ योग। १२ रसायन। १३ वचन । १४ कवित्व। १५ नेपथ्य। १६ मंत्र। १७ मर्दन । १८ पत्रक। १९ वृष्टिक । २० लेपकर्म। २१ सूत्र । २२ चित्र। २३ रंग। २४ सूचीकर्म । २५ शकुन । २६ छ । २७ नैर्मल्य । २८ गंधयुक्ति। २९ आसन। ३० शील। ३१ काष्ठकर्म। ३२ कुंभ। ३३ लोह। ३४ यंत्र। ३५ वंश। ३६ नख। ३७ तृण । ३८ प्रसाद। ३९ धातु। ४० विभूषण। ४१ स्वरोदय। ४२ धूत। ४३ अध्यात्म । ४४ अग्नि । ४५ जल। ४६ विद्वेपण । ४७उच्चादन। ४८ स्तंभन । ४९ वशीकरण । ५० हस्ति- शिक्षा। ५१ अश्व। ५२ पक्षि। ५३ स्त्रीकाम। ५४ रत्त। ५५ वस्त्राकार। ५६ पाशुपाल्य। ५७ कृषि । ५८ वाणिज्य। ५९ लक्षण । ६० काल। ६१ शास्त्र। ६२ शस्त्रवंध। ६३ आयुधकार। ६४ नियुद्धकार। ६५ आखेटक । ६६ कुतूहल। ६७ कोश। ६८ पुष्प। ६९ इंद्रजाल । ७० पानविधि। ७१ अशन। ७२ विनोद । ७३ सौजन्य। ७४ सौभाग्य । ७४ सौभाग्य। ७५ शौच। ७६ विनय । ७७ नीति । ७८ आयुर्वेद । ७९ व्यापार। ८० धारण । इति विज्ञानानि । १९) ०१ हेतुविज्ञान। २ तत्त्वविज्ञान। ३ मोहविज्ञान। ४ कर्मविज्ञान । ५शंखविज्ञान । ६ काचविज्ञान । ७ गुटिकाविज्ञान । ८ योगविज्ञान । ९ रसायनविज्ञान । विज्ञान । ११ कवित्वविज्ञान । १२ नेपथ्यविज्ञान। १३ मंत्रविज्ञान। १४ तंत्र १५ मर्दन। १६ क्षेत्रक। १७ इष्टिका। १८ लेपन । १९ सूत्र। २० शांति। २१ सूचि । * after नीतिविज्ञानं we find आयुर्विज्ञानं । वादविज्ञानं । व्यापारविज्ञानं । and धारणविज्ञानं चेति। १० वचन, -- ।
-- २६ सविवरण-वस्तुरनकोशः। २२ शकुन। २३ छद्मा २४ नैर्मल्य । २५ गंधयुक्ति। २६ आराम। २७ शैल ।, २८ काव्य। २९ कांस्य। ३० रौप्य। ३१ कांचन। ३२ काष्ट । ३३ लोह। ३४ पत्र । ३५ वंश। ३६ नख । ३७ दशन । ३८ तृण। ३९ प्रसाद । ४० धातु। ४१ भूषण । ४२ स्वरोदय । ४३ द्यूत । ४४ अध्यात्म । ४५ अग्नि । ४६जल। ४७ विद्वेपण। ४८ उच्चाटन। ४९ स्तंभन। ५० मोहन । ५१ वशीकरण। ५२ संदीपन। ५३ स्वयंभू । ५४ हस्तिशिक्षा। ५५ अश्वशिक्षा। ५६ पक्षि। ५७ स्त्रीकाम। ५८ चरित्र । ५९ वज्र- कर। ६० पशुपालन । ६१ कृपि । ६२ वाणिज्य। ६३ लक्षण। ६४ काला ६५ पान। ६६शस्त्रवंध। ६७ नियुधकरण । ६८ आखेटक। ६९ कुतूहल। ७० कोश। ७१ पुष्प। ७२ इंद्रजाल । ७३ विनोद। ७४ सौभाग्य । ७५ वस्त्र। ७६ शौच। ७७ आयुरिति । ७८ काकु। १९) E१ हेतुविज्ञानं । २तत्व। ३ मोहन । ४ धर्मविज्ञानं । ५ कर्मविज्ञानं, ६ मर्म । ७ लक्ष्मी । ८ संयोग । ९ शंख। १० दंत । ११ काक । १२ गुटिका । १३ योग। १४ रसायन। १५ वचन । १६ कवित्व। १७ यंत्र। १८ मंत्र । १९ मर्दन । २० तंत्र। २१ नेपथ्य। २२ खचित । २३ इप्टिका। २४ लेख्य। २५ सूत्र । २६ चित्रकर्म। २७ शकुन । २८ रंगकर्म । २८ रंगकर्म । २९ सूचीकर्म। ३० छद्म। ३१ कर्मकार। ३२ नैर्माल्य । ३३ गंधयुक्ति। ३४ आराम। ३५ शील। ३६ कांस्य। ३७ काप्ट। ३८ कुंभ। ३९ लोहपात्र । ४० विश। ४१ नख । ४२ दशन। ४३ तृण । ४४ वशी- करण। ४५ भूतकर्पणं । ४६ वस्तु। ४७ स्वयंभू । ४८ हस्ती। ४९ शिक्षा। ५० पक्षी। ५१ हस्तीकाम। ५२ अश्वशिक्षा। ५३ रत्न । ५४ वस्त्रकार। ५५ चक। ५६ वज्राकार। ५७ पशुपाल। ५८ कृपि । ५९ वाणिज्य। ६० लक्षण । ६१ काल । ६२ पानविधि। ६३ अशनविधि। ६४ प्रसाद। ६५ धातु। ६६ विभूपण । ६७ स्वरोदय। ६८ धृत। ६९ अध्यात्मा ७० अग्निविशेषणं । ७१ उच्चाटनं। ७२ स्तंभनं। ७३ मोहनं । ७४ वंश। ७५ वंध। ७६ नियुद्धकार । ७७ आखेट। ७९ कुतूहल। ८० कोश। ८१ पुष्प । ८२ इंद्रजाल । ८३ विनोद । ८४ सौभाग्य । ८५ प्रयोग। ८६ शौच । ८७ज्ञाननय । ८८ प्रीति । ८९ आयुः। ९० वाद। ९१ व्यापार। ९२ धारणं । ९३ आयुर्वेदाश्चेति । १९) F१ हेतुविज्ञान । २धर्मविज्ञान। ३ चर्मविज्ञान । ४ कर्मविज्ञान । ५ लक्ष्मीयोग। ६शङ्खकर्म । ७ दन्तकर्म । ८ काष्ठकर्म। ९ गुटिका। १० रसायन। ११ वचन। १२ कवित्व। १३यंत्र। १४ मंत्र। १५ तंत्र। १६ मर्दन । १७ नेपथ्य। १८ सूतिका। १९ इट। २० लेस्य । २१ सूत्र । २२ चित्रकर्म । २३ रंगकर्म। २४ सूचीकर्म। २५ शाकुनि। २६छद्मकर। २७ कर्मकर। २८ नैर्मल्य। २९ गंधयुक्ति। ३० आराम । ३१ शैल। ३२ काव्य । ३३ कांस्य । ३४ काष्ट। ३५ कुंभकर्म। ३६ लोहकर्म। ३७ उपदंश। ३८ पत्र। ३९ वंश। ४० नख। ४१ दशन। ४२ तृण । ४३ प्रासाद । ४४ धातु। ४५विभूपण। ४६ स्वरोदय । ४७ द्यूत। ४८ अध्यात्म । ४९ अस्थिस्तम्भ । ५० जलस्तम्भ। ५१ विद्वेपण। ५२ उच्चाटन । ५३ स्तम्भन । ५४ मोहन । ५५ वशीकरण । ५६ वस्तु। ५७ गजशिक्षा। ५८ अश्वशिक्षा। ५९ पक्षिशिक्षा । ६० रत्नकर्म । ६१ वस्त्रकर्म । ६२ वज्रकर्म। ६३ पशुपाल्य । ६४ कृपि। ६५ वाणिज्य । ६६ लक्षण । ६७कला। ६८ पानविधि। ६९ अशनविधि। ७० अस्त्रवंध। ७१ नियुद्धकरण। ७२ आखेटक। ७३ कुतूहल । ७४ पुष्प। ७५ इन्द्रजाल। ७५ इन्द्रजाल। ७६ विनोद। ७७ सौभाग्य- 1. सविवरण-वस्तुरनकोशः। २७ कारण। ७८ प्रयोग। ७९ शौच । ८० ज्ञान। ८१ विनय । ८२ नीति। ८३ आयु । ८४ प्रीति। ८५ व्यापार। ८६ धारणविज्ञान । १९) G १ हेतुविज्ञान। २ तत्त्वविज्ञान। ३ मोहन । ४ कर्म। ५ धर्म। ६मर्म । ७ शङ्ख। ८ दंत । ९ काच । १० गुटिका। ११ योग। १२ रसायन। १३ वचन । १४ कवित्व। १५ नेपथ्य। १६मंत्र। १७ तंत्र । १८ मर्दन। १९ पत्रक। २० वृष्टिक । २१ लेपकर्म। २२ सूत्र । २३ चित्र । २४ रङ्ग । २५ सूचीकर्म । २६ शकुन । २७ छझ। २८ नैर्मल्य। २९ गंध। ३० युक्ति। ३१ आसन। ३२ शील। ३३ काष्ठ- कर्म। ३४ कुंभ। ३५ लोह। ३६ यंत्र। ३७ वंश। ३८ नख । ३९ तृण । ४० प्रसाद । ४१ धातु। ४२ विभूषण । ४३ स्वरोदय। ४४ चूत। ४५ अध्यात्म। ४६ अग्नि । ४८ विद्वेपण। ४९ उच्चाटन। ५० वशीकरण। ५१ हस्तिशिक्षा। ५२ अश्व । ५३ पक्षि। ५४ स्त्री। ५५ काम। ५६ रत्न । ५५ काम। ५६ रत्न। ५७ वस्त्रकार। ५८ पाशु- ५९ कृषि। ६० वाणिज्य। ६१ लक्षण। ६२ काला ६३ शास्त्र। ६४ शस्त्रवन्ध। ६५ आयुधकार। ६६ नियुद्धकार। ६७ आखेटक। ६८ कुतूहल । ६९ केश। ७० पुष्प । ७१ इन्द्रजाल । ७२ पानविधि। ७३ अशन। ७४ विनोद । ७५ सौजन्य। ७६ सौभाग्य । ७७ शौच। ७८ विनय । ७९ नीति । ७९ नीति। ८० आयु। ८१ वाद। ८२ व्यापार। ८३ धारणा। इति विज्ञानानि । - ४७जला पाल्या * -- २०. चतुरशीतिर्देशाः। पूर्वदेशाः-१ अंजनदेशः। २ गौडदेशः । ३ कान्यकुब्जदेशः। ४ कलिंगदेशः। ५ अंगदेशः। ६ बंगदेशः। ७ कुरंगदेशः। ८ गोलादेशः। ९ राढ्यदेशः। १० वरेन्द्रदेशः। ११ यामुनदेशः । १२ गंगापारदेशः। १३ अंतर्वेदिदेशः । १४ मागधदेशः। मध्यदेशाः-१ कुरुदेशः। २ डाहलदेशः। ३ कामरूपदेशः। ४ कामाक्षदेशः। ५ उंड्रदेशः। ६ पुंड्रदेशः। ७ उड्डीसदेशः। ८ अग्निमुखदेशः। ९पंचालदेशः। १० सूरसेनदेशः। ११ जालंधरदेशः । १२ लोहितपाददेशः। पश्चिमस्थलदेशाः-१ कच्छदेशः। २ वालंभदेशः । ३ सौराष्ट्रदेशः । ४ कोंकणदेशः। ५ लाटदेशः। ६ मालवदेशः। ७ अवंतीदेशः। ८ श्रीमालदेशः। ९ अर्बुददेशः । १. मेदपाटदेशः। ११ मरुदेशः। १२ कंबोजदेशः । १३ पारियात्रदेशः । १४ लोहपुरदेशः। | 1 B इति चतुराशीति, C अथ चतुराशीति देशा, D चतुर्दशाः।
२८ सविवरण-वस्तुरनकोशः। १५ सेरटकदेशः । १६ तामलिप्तदेशः । १७ किरातदेशः । १८ सौवीरदेशः। १९ बोक्काणदेशः। उत्तरापथदेशाः-१ गूर्जरदेशः। २ सिंधुदेशः। ३ केकाणदेशः। ४ नेपालदेशः। ५ टाकदेशः । ६ तुरुष्कदेशः। ७ ताईकारदेशः। ८ बर्बरदेशः। ९ कीरदेशः। १० खसदेशः। ११ काश्मीरदेशः। १२ हिमालयदेशः। १३ श्रीराष्ट्रदेशः। १४ वज्रलदेशः। दक्षिणापथदेशाः-१ सिंहलदेशः। २ चउडदेशः। ३ कोरलदेशः। ४ पांडुदेशः। ५ आन्ध्रदेशः। ६ विध्यदेशः। ७ कर्णाटदेशः। ८ द्रविडदेशः। ९ श्रीपर्वतदेशः। १० विदर्भदेशः। ११ धाराधरदेशः। १२ कांजीदेशः । १३ तापीतटदेशः । १४ महाराष्ट्रदेशः। १५ आभीरदेशः । १६ नर्मदातटदेशः । १७ मलयदेशः। १८ वराटदेशः। १९ उरलदेशः। २०) A पूर्वदेशाः-१ अगदेश। २ वंगदेश। ३ गौडदेश । ४ कन्यकुन्ज । ५ कलिङ्ग । ६ गोष्ट। ७ अंग। ८ वंगाल। ९ कुरंग। १० राठ। ११ वारंध्री। १२ यामुन । १३ सरयूपार । १४ अतर्वेद । १५ मगध । मध्यदेशाः-१ कुरु । २ डाहल । ३ कामरू । ४ उड । ५पंचाल । ६सौरसेन । ७ जालंधर । ८ लोहपाद । पश्चिमस्थल- १ वालंभ। २ सौराष्ट्र। ३ कुंकुण । ४ लाट। ५श्रीमाल। ६ अर्बुद । ७ मेदपाट। ८ कच्छ । ९मालव। १० अवंती। ११ पारियात्र। १२ कंवोज । १३ तामलित। '१४ किरांत। १५ सेरटक। १६ सौवीर। १७वीकाण। उत्तरापथ-१ गूर्जर। २ सिंधु। ३ केकाण । ४ नेपाल। ५ तुरष्क। ६ ताजिक । ७ वर्वर। ८ खसकीर। ९ काश्मीर। १० वज्रल। ११ हिमालय। १२ लोहपुर। १३ श्रीराष्ट्र । दक्षिणापथ-१ मलय । २ सीघल। ३ पांड। ४ कोरल। ५ अंध्र। ६विध्य । ७ कर्णाट। ८ द्रविड। ९ श्रीपर्वत । १० वैदर्भ। ११ विराट। १२ उरल। १३ तापीतद। १४ महाराष्ट्र। १५ आभीर। १६ नार्मद। १७ कामाक्ष। ८ कंड। १९ पापांतिका। २० चौड। २१ आराढ्य । २२ वरेंद्र। २३ गंगापार । २४ सौसष । २५ कांती। २६ नागणिक । २७ द्वीपदेशाश्चेति । २०) B पूर्वदिशि देशाः-१ अंगदेशः। २ वंगदेशः। ३गौडदेशः। ४ कन्यकुब्ज । ५ कलिङ्ग। ६गोष्ट । ७ वगाला ८ कुरंग। ९ सरठ। १० वारंद्री। ११ यामुन । १२ सरयूपार। १३ अंतर्वेद । १४ मगधा मध्यदेशाः-१ कुरु। २ डाहल। ३ कामरू। ५ पंचाल। ६ सौरसेन । ७ जालंधर। ८ लोहपाद । पश्चिमस्थल- १ वालंभ। २ सौराष्ट्र। ३ कुंकुण । ४ लाद। ५ श्रीमाल। ६ अर्बुद । ७ मेदपाट। ८ मरु। ९ कच्छ। १० मालव। ११ अवंती। ४उड।
. सविवरण-वस्तुरनकोशः। १२ पारियात्र। १३ कंबोज । १४ तामलिप्त । १५ किरात। १६ सेरटक ।। १७ सौवीर। १८ बोकाण। उत्तरापथ-१ गूर्जर। २ सिंधु। ३ केकाण । ४ नेपाल। ५ तुरष्का ६ ताजिक। ७ बर्वर। ८ खसकीर। ९ काश्मीर। १० वज्रल। ११ हिमालय । १२ लोहपुर। १३ श्रीराक्ष। दक्षिणापथ- १ मलय । २ सीधल। ३ पांड। -४ कोरल। ५ अध्र। ६चिंध्य। ७ कर्णाट। ८ द्रविड। ९ श्रीपर्वत। १० वैदर्भ। ११ विराट। १२ उरल। १३ कांजी। १४ तापीतट। १५ महाराष्ट्र। १६ आभीर। १७ नामर्द । १८ कामाक्ष । १९ कंडु। २० पापांतिका। २१ चौड। २२ आराढ्य । २३ वरेंद्र। २४ गंगापार। २५ सौसष। २६ कांती। २७ नागणिक । २८ द्वीपदेशाश्चेति । २०) C१ कुरंग। २ बंगाल । ३ आराध्य । ४ वरणेंद्र। ५ यामन । ६गंगापार ७ अंतर्वेध। ८. मागध। मध्य-१ कुरु। २ डाहल । ३ कामरू। ४ पुंद्रक। ५पंचाल। ६ अग्नि। ७ कास। ८ सूरसेन । ९ जालंधर। १० लोहितपाद । अथ पश्चिमायां दिशि-१ काछल । २ वालंभ। ३ सौराष्ट्र। ४ कुंकण । ५ लाड। ६ श्रीमाल। ७ अर्बुद । ८ मेदपाट। ९ मारू। १० मावल। ११ अवंति । १२ नागणित। १३ किरात। १४ शकट । १५ सौवीर । १६ वोकाण। उत्तरपंथे- १ गुर्जर। २ सिंधु। ३ केकाण । ४ नेपाल। ५ तुरुष्क। ६ तायक। ७ बब्बर। ८ वजूर। ९ कीर। १० कश्मीर। ११ हिमालय। १२ लोहपुर। १३ श्रीराज्य। दक्षिणदिशि-१ पांडु। २ कौरल । ३ पाडल। ४ अद्र। ५ वंध्य । ६ कर्कट। ७ द्राविड। ८ श्रीपर्वत । ९ तंद्रभद्र। १० धरानंग। ११ उरल । १२ जीमूत। १३ मुलतान। १४ तापीतट। १५ महातट। १६ महाराष्ट्र। १७ आभीर। १८ नर्मदातट । १९ कामाक्षा। २० एणदेश। २१ कलिंग। २२ मद्र। २३ सुमंत- देश। २४ द्वीपश्चेति । २०) 5 पूर्वदिशि-१ गौड । २ कन्यकुब्ज। ३ कलिंग। ४ गोल। ५वंग। ६ कुरंग। ७ बंगाल। ८आराद। ९ वरेंद्र। १० यामन। ११ गंगापार। १२ अंतर्वेध। १३ मगध। मध्य देश-१ कुरुदेश। २धाहला ३ कामरूप। ४ बंदु । ५ पुंढ। ६ चोड। ७ मालवा ८ आग्नि। ९पंचाल। १० सूरसेन । ११ जालंधर। १२ लोहितपाद। पश्चिम-१ काच्छल । २ वालंभ। ३ सौराष्ट्र। ४ कुंकण । ५ श्रीमाल। ६ अर्बुद । ७ मेदपाट । ८ मारु। ९ मच्छ। १० मालवु । ११ पारियात्र । १२ कंवोज । १३ तामलिप्त । १४ अवंती। १५ नागाणित । १६ किरात। १७ शकुंत। १८ सौवीर। १९ कुंकण । २० बोकाण। उत्तर-१ गूजराति । २ सिंधु। ३.नेपाल। ४ गुर्जर। ५ भोट । ६ टाक। ७ तुरष्क। ८ तायक । ९ ववर। १० बूसर । ११ कास्मीर। १२ वजुर। १३ हिमालय। १४ लोहपुर। १५ श्रीकाष्ठ । १६ स्त्रीराज्य। दक्षिण-१मालय। २ शिधल। ३ कौरिल। ४पाडल। ५ अंध्र। ६ विध्य। ७ कर्णाट। ८ द्राविड। ९ श्रीपर्वत । १० वैदर्भ। ११ वैराट। १२ धारउर'। १३ लाज । १४ तापीतट । १५ महाराष्ट्र १६ आभीरदेश। १७ नर्मदातट। १८ कामाक्षा। १९ कच। २० पापांतिक। २१ चोढ । द्वीपांतर देश वहु छि। २०) F १ गौड । २ चौड। ३ कान्यकुब्ज । २ चौड। ३ कान्यकुब्ज । ४ अङ्ग। ५ वङ्ग। ६ कलिङ्ग । ७ तिलङ्ग । ८ गोल । ९ वगाल । १० आराध्य । ११ वरेन्द्र । १२ यामन । १३ गंगापार ।
३० सविवरण-वस्तुरनकोशः। १४ अंतर्वेद ।' १५ मागध । मध्य- १ कुरुक्षेत्र। २ डाहल। ३ कामरूप। ४ उन्द्र। ५ पोन्द्र। ६ पञ्चाल । ७ शौरसेन। ८ अग्निमुख। ९ मालवा १० जालन्धर। ११ लोहितपाद। पश्चिमायां दिशि-१ काछेल । २ वालंभ। ३ सौराष्ट्र। ४ कुंकण। ५ लाटदेश। ६ स्थलदेश। ७ दद्मगान। ८ अर्बुद । ९ मेदपाट । १० अवंती। ११ किरात। १२ शकट। १३ सौवीर। १४ कुंकुम । उत्तरापथा: १ गूजर। २ सिंधु । ३ केकाण । ४ नेपाल। ५ टाक। ५ टाक। ६ तुरक। ७ तायक। ८ वर्बर। ९ वर्जर। १० कीर। ११ कास्मीर । १२ हिमालय। १३ लोहपुर। १४ श्रीकाष्ट । दक्षिणस्यां दिशि-- १ मलय । २ सिंहल। ३ कोरल। ४ पाडल। ५ अध्र। ६वंध्य । ७ कर्कट। ८ द्रविड । ९ श्रीपथ । १० वैदर्भ। ११ धारउर। १२ लाजी। १३ तापीतट। १४ तोमल। १५ पण्ड । १६ स्त्रीराज्य । दक्षणपथ-१ कर्णाट। २ महाराष्ट्र। ३ आभीर। ४ नर्मदातट । ५ कामाक्षा। ६ कंचण। ७ कुंतल। ८ पापीतिक । ८ पापीतिक। ९ चौदही । एते देशा द्वात्रिंशत्सहस्राः। २०) G पूर्वदेशः-१ अंगदेशः। २ बंगदेश । ३ गौडदेश। ४ कन्यकुब्ज। ५ कलिंग। ६ गोष्ट । ७ अंग। ८ बंगाल। ९कुरंग । १० सरठ। ११ वारंध्री। १२ यामुन । १३ सरयूपार । १४ अंतर्वेद । १५ मगध । मध्य-१ कुरु। २ डाहल 1 ३ कामरू। ४ ओड। ५ पंचाल। ६ सौरसेन । ७ जालंधर। ८ लोहपाद । पश्चिमस्थल- १ वालंभ । २ सौराष्ट्र । ३ कुंकुण । ४ लाट । ५ श्रीमाल । ६ अर्बुद । ७ मेदपाट । ८कच्छ। ९मालव । १० अवंती। ११ पारियात्र । १२ कंबोज । १३ तामलित। १४ किरात । १५ सेरटक। १६ सौवीर। १७ वोकाण । उत्तरापथ- १ गूर्जर । २ सिंधु। ३ केकाण। ४ नेपाल । ५ तुरष्क। ६ ताजिक । ७ पर्वर। ८खस। ९ कीर। १० काश्मीर। ११ वज्रला। १२ हिमालय। १३ लोहपुर । १४ श्रीराज। दक्षिणापथ-१ मलय । २ सीघल। ३ पांड। ४ कौरल। ५ अंध्र। ६ विंध्य । ७ कर्णाट। ८ द्रविड। ९ श्रीपर्वत । १० वैदर्भ। ११ विराट। १२ ओरल। १३ तापीतट। १४ महाराष्ट्र । १५ आभीर। १६ नार्मद। १७ कामाक्ष। १८ कंदु। १९ पापांतिका। २० चौड। २१ आराध्य । २२ वरेंद्र। ,२३ गङ्गापार। २४ सौसप। २५ कांती। २६ नागणिक। २७ द्वीपदेशाश्चेति। २१. द्वात्रिंशल्लक्षणस्थानानि । १ खर्गलक्षणं । २ मर्त्यलक्षणं । ३ पाताललक्षणं । ४ तनुलक्षणं । ५ विद्यालक्षणं । ६ विज्ञानलक्षणं । ७ वास्तुलक्षणं । ८ विनोदलक्षणं । ९ वादलक्षणं । १० कलालक्षणं । ११ गीतलक्षणं । १२ वाद्यलक्षणं । १३ नृत्यलक्षणं । १४ रूपलक्षणं । १५ धर्मलक्षणं । १६ अर्थलक्षणं । १७ कामलक्षणं । १८ मोक्षलक्षणं । १९ देशलक्षणं । २० पात्रलक्षणं । 1 1 CEF लक्षणानि ।
। सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ३१ २१ समयलक्षणं । २२ पुरुषलक्षणं । २३ ज्योतिष्कलक्षणं । २४, चित्रलक्षणं । २५ स्त्रीलक्षणं । २६ गजलक्षणं । २७ तुरगलक्षणं । २८ पक्षिलक्षणं । २९ सत्त्वलक्षणं । ३० व्यापारलक्षणं । ३१ वस्तुलक्षणं । ३२ विवेकलक्षणं । इति । २१) A B १ स्वर्गलक्षण । २ मृत्यु । ३ पाताल । ४ तत्त्व । ५ विद्या। ६ विज्ञान । ७ ज्ञान। ८ वास्तु। ९ विनोद। १० वाद । ११ कला। १२ कल्प। १३ गीत । १४ वाद्य। १५ नृत्य। १६ कृत्य । १७ धर्म। १८ अर्थ। १९ काम। २० मोक्ष। २१ देश २२ काल। २३ पात्र। २४ पुरुष। २५ स्त्री। २६ गज। २७ तुरग। २८ पक्षि। २९ रन । ३० सद्व्यापार । ३१ सत्त्व। ३२ वस्तु । इति लक्षणानि । २१) C १ स्वर्ग। २ पाताल । ३ मृत्यु । ४ तत्त्व । ५ रूप । ६ विद्या। ७ मनु। ८ विज्ञान । ९ वस्तु। ९ वस्तु। १० विनोद । ११ वार्ता । १२ गीत। १३ वाद्य। १४ नृत्य। १५ रूपक। १६ धर्म। १७ अर्थ। १८ काम । १९ मोक्ष। २० काल। २१ देश। २२ पात्र। २३ द्रव्य। २४ समय। २५ पुरुष । २६ स्त्री। २७ गज। २८ पक्षी। २९ तुरग । ३० धर्म। ३१ रत्न । ३२ मितहार। ३३ सद्यवस्तु ज्ञान मिति । २१) E १ स्वर्ग । २ मृत्यु । ३ पाताल । ४ तनु । ५ विद्या । ६ विज्ञान । ७ वास्तु । ८ विनोद। ९ वाद्य । १० गीत । ११ नाट्य । १२ वार्ता। १३ नृत्य। १४रूप। १५ धर्म। १६ अर्थ। १७ काम। १८ मोक्ष । १९ देशकाल । २० पात्र । २१ सम्यक । २२ समय । २३ पुरुष। २४ स्त्री। २५ गज। २६ तुरग । २७ पक्षी। २८ रत। २९ पान । ३० आहार। ३१ सद्व्यापार। ३२ वस्तुलक्षणं चेति । २१) F १ स्वर्गलक्षण । २ मृत्युलक्षण। ३ पाताललक्षण । ४ तत्त्वलक्षण । ५ विद्यालक्षण । ६ विज्ञानलक्षण। ७ वास्तु। ८ विनोद । ९वाद। १० कला। ११ कल्प। १२ गीतलक्षण । १३ वाद्यलक्षण । १४ नृत्यलक्षण। १५ कृत्य। १६ धर्म। १७ अर्थ। १८ काम । १८ काम। १९ मोक्ष । २० काल। २१ पात्र। २२ पुरुष । २३ स्त्रीलक्षण। २४ गज। २५ तुरग। २६ पक्षि। २७ रन। २८ पान। २९ सत्त्व। ३० वस्तु । ३१ भद्र। ३२ आहार । एतानि शुभलक्षणानि । २१) G १ स्वर्गलक्षण । २ मृत्यु । ३ पाताल । ४ तत्त्व । ५ विद्या। ६ विज्ञान । ७ज्ञान। ८ वास्तु। ९ विनोद । १० वाद। ११ कला। १२ कल्प। १३ गीत। १४ वाद्य। १५ नृत्य । १६ कृत्यु। १७ धर्म। १८ अर्थ। १९ काम। २० मोक्ष । २१ देश। २२ काल । २३ पात्र । २४ पुरुष । २४ पुरुष। २५ स्त्री। २६ तुरग । २७ पक्षि। २८ रन । २९ सद्व्यापार। ३० सत्त्व । ३१ आहार। ३२ वस्तुलक्षणानि । २२. चतुर्विशतिविधं गृहम् । १ प्रासाद। २ आयतनं । ३ हयं । ४ गृहं । ५ कोश। 1 A B अथ चतु ३२ सविवरण-वस्तुरतकोशः। ६ कोष्ठागारं । ७ पानीयगृहं । ८ शौचगृहं । ९ शालागृहं । १० मठस्थानं । ११ सत्रागारं । १२ शृङ्गारगृहं । १३ धर्मस्थानं । १४ विनोदस्थानं। १५ अश्वशाला। १६ गजशाला । १७ वास्तुभुवनं । १८ मंडपं । १९ भोजनशाला। २० तापसशाला । २१ अग्रासनं । २२ आवेशनं । २३ अर्घस्थानं । २४ राजांगणम् । इति । २२) A. १ प्रासाद प्रासाद । २ हर्म्य । ३ आयतन। ४ गृह । ५ कोश । ६ कोष्ठागार। ७ पानीयस्थान। ८ शौचगृह । ९ माल्यगृह। १० मठस्थान। ११ सत्रागार। १२ शझारगृह। १३ धर्मस्थान। १४ विनोदस्थान। १५ मंडुरा। १६ हस्तिशाला। १७वासभवन । १८ मंडप। १९ महानस। २० भोजनशाला। २१ अग्रासन। २२ आवेशन । २३ अर्घस्थान । २४ राजांगणं च । २२) B १ प्रासाद। २ हर्म्य। ३ आयतन । ४ गृह । ५ कोश। ६ कोष्ठागार। ७ पानीयस्थान। ८ शौचगृह । ९ माल्यगृह । १० मठस्थान। ११ सत्रागार। १२ शृङ्गारगृह । १३ धर्मस्थान । १४ विनोदस्थान। १५ मंदिर। १६ हस्तिशाला। १७ वासभवन । १८ मंडप । १९ महानस। २० भोजनशाला। २१ अग्रासन। २२ अर्घस्थान। २३ राजांगणं च । २२) C१ प्रासाद । २ हर्म्य । ३ आयतन। ४ गृह। ५ कोश। दकोष्ठागार। ७ पानीयगृह । ८ शौचगृह । ९शालागृह । १० माल्यगृह। ११ मठगृह । १२ सत्रागार । १३ शंगारगृह । १४ धर्मस्थान । १५ विनोदस्थान । १६ मंदिर। १७ हस्तिशाला। १८ मंडपशाला। १९ अन्नशाला। २० भोजनशाला। २१ शयनशाला । २२ गर्भागार। २३ सत्रास्थान । २४ राज्यांगणं चेति । २२) E१ प्रासाद । २ आयतन। ३ हर्म्य । ४ गृह । ५ कोश। ६ कोष्ठागार। ७ पानीगृह । ८ धौतगृह । ९ शालागृह । १० माल्यगृह । ११ मठस्थान। १२ सत्रागार। १३ शंगारगृह । १४ धर्मस्थान । १५ विनोदस्थान । १६ मंदुर। १७ हस्तिशाला। १८ वासमंडप। १९ महानसं। २० भोजनशाला। २१ अग्रासनं । २२ आवेशनं । २३ अर्थस्थानं । २४ राजांगणं इति । २२) F १ प्रासाद । २ हये। ३ आयतन । '४ गृह । ५ कोश। ६ कोष्ठागार। ७ पानीयगृह । ८ शौचगृह । ९ शालाग्रह। १० मालागृह । ११ मठस्थान १२ सत्रागार। १३ शंगारस्थान । १४ धर्मस्थान । १५ विनोदस्थान । १६ वाजिशाला । १७ हस्तिशाला। १८ वासमंडप। १९ महानस । २० भोजनशाला। २१ अग्रासन । २२ आवेशन । २३ अर्थस्थान। २४ राजांगणं चेति । २२) G १ प्रासाद । २ हयं । ३ आयतन । ४ गृह । ५ कोश। ६ कोष्ठागार। ७ पानीयस्थान। ८ शौचगृह । ९ माल्यगृह। १० मठस्थान। ११ सत्रागार। १२ शंगारगृह । १३ धर्मस्थान । १४ विनोदस्थान । १५ मंदुरा। १६ हस्तिशाला। १७ वासभवन। १८ मंडप । १९ महानस। २० भोजनशाला। २१ अग्रासन। २२ आवेशन। २३ अास्थान। २४ राजांगणं च । 1 .
सविवरण-वस्तुरनकोशः। २३. अष्टोत्तरशतं मङ्गलम् । १ ब्रह्मा । २ विष्णु। ३ महेश्वर । ४ आदित्य । ५ लोकपाल । ६ अग्नि । ७ अमर । ८ सागर । ९ नदी। १० पर्वत । ११ गगन । १२ अहर्गण । १३ गंधर्व । १४ स्कन्द । १५ विनायक । १६ ज्योतिष्क । १७ तीर्थ । १८ द्विज । १९ वर । २० धर्मशास्त्र। २१ वेद । २२ पद्म। २३ पर्वांश। २४ कौस्तुभ । २५ काञ्चन । २६ रूप्य । २७ ताम्रा २८ घृत। २९ मधु । ३० मद्य । ३१ सिद्धान्त । ३२ चंदन । ३३ श्वेतवस्त्र । ३४ वेश्या। ३५ रोचना । ३६ मृत्तिका । ३७ गोमय । ३८ शस्त्र। ३९ अंजन । ४० ओषध । ४१ मणिमय । ४२ शिला। ४३ मोदक । ४४ शंख । ४५ प्रियङ्गु । ४६ वाच । ४७ पुष्प । ४८ श्रुत । ४९ सर्षप । ५० दधि । ५१ दूर्वा । ५२ अक्षत । ५३ उदंबर। ५४ आम्र। ५५ छत्र। ५६ वादिन। ५७ हस्ति । ५८ मुक्ताफल। ५९ खंजरीट। ६० वृष । ६१ ध्वज । ६२ हंस । ६३ कन्या । ६४ दर्पण । ६५ पीठ । ६६ कुश । ६७ तुरंग । ६८ वेणु । ६९ वीणा। ७० ध्वनि। ७१ सिंघ। ७२ मेघ । ७३ स्वस्तिक । ७४ तोरण । ७५ कुंभ । ७६ चामर । ७७ गौ सवत्सा । ७८ आई- ७९ स्त्री सवत्सा। ८० वाहन । ८१ प्रदान । ८२ विद्या। ८३ पानीय। ८४ तुष्टि । ८५ पुष्टि। ८६ प्रसाद। ८७ उल्लोच । ८८ सत्य । ८९ पूर्णपात्र । ९० आर्द्रशाक । ९१ आमिष । ९२ पिप्पल- पत्र । ९३ श्रीवृक्ष । ९४ तालवृक्ष । ९५ पूजा । ९६ निधि । ९७ नर । ९८ सहया । ९९ गौरी । १०० गङ्गा । १०१ सरस्वती । १०२ नर्मदा। १०३ यमुना । १०४ कमला । १०५ सिद्धि । १०६ प्रीति । १०७ कीर्ति। १०८ बीज । इति । मांस । -- 1 A G drop अष्टो... लम् । BC अष्टोत्तरशतमंगलानि ।। अष्टोत्तरशतमंगलानां स्थानानि । F अष्टोत्तरशतं मंगलानि ।
सविवरण-वस्तुरनकोशः। २३) A १ ब्रह्मा । २ विष्णु । ३ महेश्वर । ४ स्कन्द । ५ आदित्य । ६ लोकपाल । ७ अग्नि । ८ अमर । ९ सागर । १० नदी। ११ पर्वत । १२ गगन । १३ ग्रह । १४ गण । १५ गंधर्व । १६ चन्द्र । १७ विनायक । १८ ज्योतिष । १९ धर्मशास्त्र । २० द्विजवर । २१ वेद । २२ पद्म । २३ प्रदीप । २४ कौस्तुभ । २५ कांचन । २६ रूप्य'। २७ तान्न । २८ घृत । २९ मधु । ३० मद्य । ३१ सिद्धान्त । ३२ चंदन । ३३ सितवस्त्र । ३४ वेश्या । ३५ रोचना। ३६ मृत्तिका । ३७ गोमय। ३८ शस्त्रा ३९ अजन। ४० ओषध । ४१ अक्षत। ४२ रत्नमणि । ४३ मोदक। ४४ शङ्ख। ४५ प्रियङ्गु'। ४६ जव। ४७ श्वेतपुष्प । ४८ सर्षप । ४९ दधि । ५० आम्र । ५१ उदुंबर । ५२ छत्र । ५३ वादित्र। ५४ हस्ति। ५५ बीजपूरक । ५६ मुक्ताफल । ५७ दूर्वा । ५८ खंजरीट । ५८ खंजरीट। ५९ वृषभ । ६० ध्वज । ६१ हंस। ६२ कन्या। ६३ दर्पण । ६४ मत्स्य । ६५ तुरंगम । ६६ गीत। ६७ वीणा । ६८ ध्वनि । ६९ सिंह । ७० मेघ । ७१ स्वस्ति । ७२ तोरण ] ७३ कुंभ । ७४ चामर । ७५ गौ सवत्सा । ७६ आर्द्रमांस । ७७ स्त्री सपुत्रा । ७८ वाहन । ७९ प्रदान । ८० विद्या । ८१ पानीय । ८२ पुष्टि । ८३ तुष्टि । ८४ प्रसाद । ८५ उल्लोच । ८६ पूर्णपात्र । ८७ आर्द्रशाखा। ८८ प्रियवाक्य । ८९ श्रीवृक्ष । ९० तालत । ९१ पूजा । ९२ निधि । ९३ नरसहस्र। ९४ गौरी । ९५ गंगा। ९६ सरस्वती। ९७ नर्मदा । ९८ यमुना। ९९ सिद्धपीठ । १०० कीर्त्ति । इति मंगलानि । - - २३) B १ ब्रह्मा। २ विष्णु । ३ महेश्वर । ४ स्कन्द । ५ आदित्य । ६ लोकपाल । ७ अग्नि । ८ अमर । ९ सागर । १० नदी। ११ पर्वत । १२ गगन.। १३ ग्रह,। १४ गण । १५ गंधर्व । १६ चन्द्र। १७ विनायक। १८ जोतिष । १९ धर्मशास्त्र । १९ धर्मशास्त्र । २० द्विजवर ! २१ वेद । २२ पद्म । २३ प्रदीप । २४ कौस्तुभ । २५ कांचन । २६ रूप्य । २७ ताम्र। २८ घृत । २९ मधु । ३० मध । ३१ सिद्धान्त । ३२ चंदन । ३३ सितवस्त्र । ३४ वेश्या । ३५ रोचना। ३६ मृत्तिका। ३७ गोमय । ३८ शस्त्र।' ३९ अजन । ४० ओषध। ४१ अक्षत। ४२ रत्नमणि । , ४३ मोदक। ,४४ शंख । ४५ प्रियंगु । । ४६ जव। ४७ श्वेतपुष्प । ४८ सर्षप। ४९ दधि। ५० आम्र।। ५१ उदंबर। ५२-छत्र। ५३ हस्ति। ५४ बीजपूरक । ५५ मुक्ताफल । ५६ दूर्वा । '५७ खंजरीट । ५८ वृषभ । ५९ ध्वज । ६० हंस । ६१ कन्या। ६२ दर्पण। ६३ मत्स्य । ६४ तुरंगम । ६५ गीत । ६६ वीणा। ६७ ध्वनि । ६८ सिंह । ६९ मेघ । ७० स्वस्ति । ७१ तोरण। ७२ कुंभ । ७३ चामर । ७४ गौ सवत्सा । ७५ आर्द्रमांस । ७६ स्त्री सपुत्रा। ७७ वाहन । ७८ प्रदान । ७९ विद्या। ८० पानीय। ८१ पुष्टि। ८२ तुष्टि। ८३ प्रसाद ।। ८४ उल्लोच। ८५ पूर्णपात्र । ८६ आर्द्रशाखा । ८७ प्रियवाक्य । ८८ श्रीवृक्ष। ८९ तालवृंत। ९० पूजा। ९१ निधि। ९२ नरसहस्त्र। ९३ गौरी। ९४.गंगा। ९५ सरस्वती। ९६ नर्मदा। ९७ यमुना । ९८ कमला। ९९ सिद्धपीठ । १०० कीर्ति । इति मंगलानि । , २३) C१ ब्रह्मा । २ विष्णु । ३ महेश । ४ स्कन्द । ५ आदित्य ।६ लोकपाल । ७ अग्नि- पाल। ८ अमर । ९ सागर । १० नदी । ११ पर्वत । १२ गगन । १३ ग्रहण । १४ गांधर्वः। १५ चंद्र। १६ विनायक। १७ ज्योति । १८ तीर्थाधि। १९ धर्मशास्त्र। २० वेद । २१ पद्म। २२ पर्यंत । २३ कौस्तुभ । २४ कांचन । २५ भूमि । २६ रूप्य । २७.ताम्र । २८.घृत । २९ मद्य । ३० मधु । ३१ सिद्धान्त । ३२ चंदन। ३३ श्वेतवस्त्र ।, ३४ वेश्या। ३५ गोरोचन । ३६ मृत्तिका। ३७ गोमय। ३८ वस्त्र। ३९ अंजन। ४० ओषध ।
सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ४१ रत्न । ४२ अन्न । ४३ मोदक । ४४ शङ्ख । ४५ प्रियङ्गु । ४६ वाक । ४७ श्वेतपुष्प । ४८ सर्षप ।' ४९ दधि। ५० दूर्वा । ५१ अक्षत । ५२ उदंबर। ५३ आम्र । ५४ छन । ५५ वाद्या ५६ दर्भ। ५७ हस्ति । :५८ वाजि । ५९ मुक्ताफल। ६० खंजरीट। ६१ वृषभ । ६२ राजहंस। ६३ कन्या। ६४ दर्पण। ६५ दीप। ६६ अंकुश। ६७ गो सवत्सा ।। ६८ आर्द्रमांस। ६९ रेणु । ७० वीणा । ७१ ध्वनि। ७२ सिंह। ७३ मेघ। ७४ स्वस्तिक। ७५ तोरण। ७६ कुंभ। ७७ चामर । ७८ विद्युत् । ७९ गीत। ८० मत्स्य । ८१ स्त्रीपुरुष। ८२ सपुत्रा स्त्री। ८३ वाहन। ८४ विद्या। ८५ पानीय। ८६ पुष्टि। ८७ तुष्टि। ८८ पूर्णकलश । ' ८९ प्रसाद । ९०, उल्लोच । ९१ मंदिर। ९२ शय्या। ९३ पूर्णपात्र । ९४ आशाक । ९५ पिप्पलपत्र ।। ९६ गंगा। ९७ यमुना। ९८ श्रीवृक्ष। ९९ पूजाविधि । १०० निधि । - १०१ सिद्धि । १०२ जीति । १०३ कीर्ति । १०४ गौरी। १०५ यशश्चेति । - - -- - .. २३.) E १'ब्रह्मा। २ विष्णु। ३ महेश्वर। ४ चंद्र। ५ सूर्य । ५ सूर्य । ६ लोकपाल 1 ७ अग्निपाल। ८ अमर । ९ सागर। १० नदी। ११ पर्वत । १२ गगन । १३ ग्रहण । १४ गंधर्व । १५ नायक । १६ स्वज्योतिष । १७ तीर्थ । १८ द्विजवर । १९ धर्मशास्त्रविद् । २० सद्मपथ। २१ कौस्तुभ । २२ कांचन । । २३ रूप्य । २४ ताम्र। २५ मधु। २६ मद्य । २७ सिद्धान्त। २८ चंदन । २९ श्वेतवस्त्र । ३० वेश्या। ३१ 'गोरोचन । ३२ मृत्तिका। ३३ गोमय । ३४ शास्त्र। ३५ भाजन । ३६ ओषधी। ३७ कमल। ३८ मध। ३९ शय्या । ४० पोत । ४१ प्रियवाक्य। ४२ प्रीति । ४३ रत्न । ४४ मणिशाला। ४५ मोदक । ४६ शंख ।। ४७ प्रियंगु । ४८ वचा । ४९. श्वेतपुष्प । ५० सर्षप । ५१ दधि । '५२ दूर्वा । ५३ अक्षत। ५४ चंदन । १५५ वंदन। ५६ माला। ५७ उदंवर। '५८ आम्ल । ५९ छत्र । ६० वादित्र। ६१ हस्ति। ६२ बीजपूर।. ६३ मुक्ताफल । ६४ खंजरीट। ६५ वृषभ । ६६ हंस । ६७ कन्या। ६८ दर्पण । ६९ पीठ । ७० कुश । ७१ तुरंगम । ७२ गीत। ७३' वेणु। ७४ सिंह । ७५ मेष । ७६ मेघ । ७७ स्वस्तिक। '७८ तोरण । '७९ कुंभ । ८० चामर। ८१ सवत्सा गौ। ८२ आर्द्रमांस। ८३ स्त्रीपुत्र । ८४ वाहन । ८५ विप्रदान । ८६ विद्या। ८७ आर्द्रामलक। ८८ आमिष । ८९ पिप्पल । ९० श्रीवृक्ष । ९१ तालवृक्ष । ९२ पूजा। ९३ निधि । ९४ नगरनायक। ९५ गौरी । ९६ गंगा। ९७ सरस्वती। ९८ यमुना। ९९ नर्मदा । १०० प्रसिद्धा। १०१ कीर्तय- श्चेति मंगलम् ।। २३) F१ ब्रह्मा। २ विष्णु । ३ माहेश्वर । ४ वीतराग। ५ स्कन्द । ६ आदित्य । ७ लोकपाल। ८ गान्धर्व। ९चंच। १० विनायक। ११ ज्योतिष्क। १२ तीर्थ। १३ द्विज। १४ धर्मशास्त्र। १५ वेदशास्त्र। १६ पुराण । १७ पन। १८ पर्यक। १९ कौस्तुभ । २० कांचन । २१ रूप्य । २० कांचन। २१ रूप्य । २२ तान। २३ घृत । २४ मद्य । २५ मधु २६ सिद्धांत । २७ श्वेतांवर। २८ गोरोचन । २९ मृत्तिका। ३० अग्नि। ३१ अमर । ३२ सागर। ३३ नदी। ३४ पर्वत । ३५ गगन । ३६ ग्रहण-1 ३७ गोमय। ३८ शस्त्र। ३९ अजन। ४० ओषधीरत्न। ४१ मनशाला। ४२ मोदक । ४३ संरक । ४४ वाजिन । ४५ प्रियंगु । ४६ श्वेतपुष्प । ४७ सर्पप । ४८ दधि। ४९ दूर्वा । '५० अक्षत। ५१ आम्र। ५२' उदुम्बर । ५३ छन। ५४ वाजिन। ५५ दर्भ। ५६ हस्ति। ५७ वीजपूर । ५८ मुक्ताफल । ५९ खजरीट। ६० वृपभ। ६१ राजहंस ।
सविवरण-चस्तुरत्नकोशः। ६२ कन्या। ६३ दर्पण। ६४ प्रदीप। ६५ अंकुश। ६६ तुरंग। ६७ गीत। ६८ वेणु। ६९ वीणा। ७० ध्वनि । ७१ भूमि । ७२ सह । ७३ मेघ । ७४ स्वस्तिक । ७५ तोरण । ७६ कुंभ। ७७चमर। ७८ सर्वत्थ । ७९ गौ। ८० आर्द्रमांस। ८१ स्त्रीपुरुषजुग्म । ८२ वाहन । ८३ प्रदान । ८४ विद्या। ८५ पानीय । ८६ तुष्टि। ८७ पुष्टि । ८८ प्रसाद। ८९ उल्लास। ९० मदिरा। ९१ सैन्य। ९२ वोर्णपात्र। ९३ आईशाक। ९४ पिप्पलपत्र। ९५ श्रीवृक्ष फल । ९६ तालवृक्ष। ९७ पूजा। ९८ निधि। ९९ गौरी। १०० गंगा। १०१ सरस्वती। १०२ नर्मदा। १०३ यमुना। १०४ तप्ती। १०५ गोदावरी। १०६ सिद्धि। १०७ प्रीति। १०८ कीर्तयश्चेति । २३) G १ ब्रह्मा । २ विष्णु। ३ महेश्वर । ४ स्कन्द । ५ आदित्य । ६ लोकपाल । ७ अग्नि। ८ अमर। ९सागर। १० नदी। ११ पर्वत । १२ गगन। १३ ग्रह। १४ गण। १५ गंधर्व । १६ चंद्र। १७ विनायक। १८ ज्योतिप। १९ धर्म। २०शास्त्रा २१ द्विजवर। २२ वेद । २३ पन्न। २४ प्रदीप। २५ कौस्तुभ। २६ कांचन। २७ रूप्य । २८ ताम्र। २९ घृत । ३० मधु। ३१ मध । ३२ सिद्धांत । ३३ चंदन। ३४ सितवस्त्र। ३५ वेश्या। ३६ रोचना। ३७ मृत्तिका। ३८ गोमय । ३९ शस्त्र। ४० अंजन। ४१ औपध। ४२ अक्षत। ४३ रत्नमणि । ४४ मोदक। ४५ शंख। ४६ प्रियंगु। ४७ जव। ४८ श्वेतपुष्प । ४९ सर्षप। ५० दधि। ५१ आम्र। ५२ उदुम्बर। ५३ छत्र। ५४ वादिन। ५५ हस्ति। ५६ बीजपूरक। ५७ मुक्ताफल। ५८ दूर्वा । ५९ खंजरीट। ६० वृषभ। ६१ ध्वज। ६२ हंस। ६३ कन्या। ६४ दर्पण। ६५ मत्स्य। ६६ तुरंगम। ६७ गीत। ६८ वीणा। ६९ ध्वनि। ७० सिंह । ७१ मेघ । ७२ स्वस्ति । ७३ तोरण । ७४ कुंभ। ७५ चामर । ७६ गौ। ७७ सवत्सा। ७८ आर्द्र। ७९ मांस। ८० स्त्री सपुत्रा। ८१ वाहन। ८२ प्रदान। ८३ विद्या। ८४ पानीय। ८५ पुष्टि। ८६ तुष्टि। ८७ प्रसाद् । ८८ उल्लोच। ८९ पूर्णपात्र । ९० आशाखा। ९१ प्रियवाक्य। ९२ श्रीवृक्ष । ९३.तालवृंत । ९४ पूजानिधि । ९५ नरसहन । ९६ गौरी। ९७ गंगा । ९८ सरस्वती । ९९ नर्मदा। १०० यमुना । १०१ कमला। १०२ सिद्धपीठकीर्ति। इति मंगलानि । 4 इति दानानि। २४. त्रिविधं दानम् । १ अभयदान । २ उपकारदान । ३ द्रव्यदान । २४) Cadds चेति after दानानि । D उभयदान । पूर्णदान। उपायकरदान । E द्रव्यविद्यादिदानं । E अभय उपकारद्रव्य । 1 २५. पञ्चविधं यशः। १ज्ञानकृत। २ प्रतापकृत । ५ रूपकृत । इति । ३ पराक्रमकृत । ४ स.. कृत।
सविवरण-वस्तुरनकोशः। २५) A १ शानकृतयश। २ प्रतापयश । ३ पराक्रमयश। ४ सदाचारयश। ५ वर्णन । B १ ज्ञानकृतयश । २प्रतापयश । ३ सदाचारयश। ४ पराक्रमयश । ५वर्णन। C१ शानकृतं। २ प्रतापकृतं । ३ पराजयकृतं । ४ जन्मकृतं । ५ सदाचार- वर्तितमिति। D १ जनतन्वतां यशः। २ प्रतापः। ३ कीर्ति । ४ पराक्रमः। ५ रूपसदाचार- वर्णकृतश्चेति। E १ जन्मरूपं। २ बालकृतं । ३ प्रतापकृतं । ४ कीर्तिरूपं । ५ पराक्रमरूपं । G १ ज्ञानकृतयश । २ प्रतापयश। ३पराक्रमयश । ४ सदाचारयश। वर्णन । २६. सप्तविधा कीर्तिः। १ दानकीर्ति । २ पुण्यकीर्ति । ३ काव्यकीर्ति । ४ वक्तृत्वकीर्ति । ५ वर्तनकीर्ति। ६ शौर्यकीर्ति । ७ विद्वज्जनकीर्ति । इति । - min २६) AB १ दानकीर्ति । २ पुण्य। ३ वर्तन । ४ विज्ञान । ५ काव्य । ६ वक्तृत्व । D १ दानकीर्तिः। २ पुण्यकीर्ति। ३ विद्वजनकीर्ति। ४ वक्तृत्वकीर्ति । ५ काव्यकीर्ति। ६ वर्तनकीर्ति। ७ सूर्यकीर्ति । E १ दानफीति । २ पुण्यकीर्ति । ३ विद्वजनसंगतिकीर्ति । ४ वकृत्वकीर्ति । ५ काव्यवर्तन। ६ शौर्य । ७ गीतिकीर्तिश्चेति । F' १ दानकीर्ति । २ पुण्यकीर्ति। ३ द्विविधजनकीर्ति। ४ वक्रोक्तिकीर्ति । ५ काव्यकीर्ति। ६आवर्तनकीर्ति। ७ शौर्यकीर्तिः। G १ दानकीर्ति । २ पुण्य । ३ वर्तन । ४ विज्ञान । ५ काव्य । ६ वकृत्व । । २७. नव रसाः। १ शृङ्गार । २ हास्य । ३ करुण। ४ रौद्र । ५ वीर । ६ भयानक । ७ बीभत्स । ८ अद्भुत । ९ शान्त.-इति रसाः। 1A B D G अष्टौ रसाः। E नव नाट्यरसाः। Comits this Sūtra and Vivarana. 2 AB शान्तरस। D शान्ताश्च। शांत इति । F शांत नवधा रसाः। -- 1 - + -n- ૨૮ सविवरण-वस्तुरतकोशः। २८. एकोनपञ्चाशद् भावाः । १ रति । २ हास्य । ३ उत्साह । ४ विस्मय । ५ क्रोध । ६शोक । ७ जुगुप्सा। ८भय। ९ स्तंभ। १० स्वरभेद।, ११' स्वेद'। '१२ रोमांच । १३ वेपथु । १४ विवर्ण । १५ अश्रु। १६ प्रलय । । १७ निर्वेद । १८ ग्लानि । १९ शंका। २० असूया। २१ मूढ । २२ श्रम । २३ आलस्य । २४ दैन्य । २५ चिंता। २६ मोह । २७ स्मृति । २८ धृति । २९ क्रीडा। ३० चपलता । ३१ जडता । ३२ आवेश । ३३ हर्ष । ३४ विवाद। ३५ असुख । । ३७ अपस्मार । ३८ निद्रा। ३९ सुप्ता। ४० विबोध ।', ४१ अवभिषा(? हित्थ)। ४२ उग्रता। ४३ उन्माद। ४४ मति । ४५ व्याधि । ४७ वितर्क । ४८ त्रास । ४९ मरण । इति । ३६ गर्व , 1 ७ २८) AB १ रति । २ हास। ३ उत्साह । ४ विस्मय। ५क्रोध। ६ शोक। जुगुप्सा। ८ भय । ९ स्तंभ । १० स्वेद। ११ स्ववृत्ति । १२ व्रीडा। १३ चपलता। १४ हर्पता। १५ जडता। १६ मति । १७ गूढ । १८ आवेग । १९ विषाद। २० औत्सुक्य । २१. गर्व। २२ अपस्मार। २३ निद्रा। २४ सुप्त । २५ विबोध। २६ अमर्प। २७ उन्माद। २८ उग्रता। २९ व्याधि। ३० वितर्क। ३१ त्रास। ३२ स्वरभेद। ३३ रोमांच। ३४ वेपथु। ३५ वैवर्ण्य । ३६ अथु।। ३७ निर्वेद । ३८ ग्लानि । ३९ शंका। ४० श्रम। ४१ आलस्य। ४२ दैन्य। ४३ चिंता। ४४ मोह। ४५ स्मृति। ४६ अवहित्थ । ४७ विदाघ। ४८ प्रलाप। ४९ मरणांत। इति भावाः। । २८) C १ रति। २ हास। ३ उत्साह । ४ विस्मय । ५ शोक। ६क्रोध। ७ ग्लानि । ८ शंका। ९श्रम। १० आलस्य । ११ चिंता। १२ मोह। १३ स्मृति। १४ धृति। १५ क्रीडा। १६ चपलता। १७ जडता। १८ हर्प। '१९ आवेश। २० विपाद । २१ असुख । २२ गई। २३ अपस्मार। २४ निद्रा। २५ स्वपन । २६ वोध। २७ अमर्प। २८ उग्रता। २९ उन्माद। ३० मति । ३१ व्याधि। ३२ विरक्ति। ३३ वितर्क। ३४ संतोप । ३५ विचार। ३६ विध्वंस । ३७ विश्लेष। ३८ विपत्ति। ३९ व्यावृत्ति । ४० प्रशंसा। ४१कारुण्य । ४२ दंभ। ४३ मान । टट उद्योत। ४५ नीरसता। ४६ तितिक्षा । ४७त्रास। ४८ मरण। चेति । २८) E१ रति । २ हास । ३ शोक । ४ क्रोध । ५ उत्साह । ६ भय । ७ जुगुप्सा। ८ विस्मय। ९ शम । १० स्तंभ। ११ स्वेद । १२ स्वरभेद । १३ रोमांच । १४ वेपथु । १५ विवर्ण । १६ अश्रु । १७ प्रलाप। १८ निर्वेद । १९ ग्लानि । २० शंका । २१ असूया।
सविवरण-वस्तुरनकोशः। २२ मद । २३ प्रमोद । २४ आश्रम । २५ आलस । २६ दैन्य । २७ चिंता। २८ मोह । २९ स्मृति । ३० धृति । ३१ क्रीडा । ३२ चपलता। ३३ जंडता । ३४ हर्ष । ३५ मति । ३६ मूढ । ३७ आवेश। ३८ विषाद। ३९ आसुख । ४० औत्सुक्य ।,, ४१ गई । ४२ अपस्मार । ४३ निद्रा। ४४ स्वप्न । ४५ विवोध। ४६ अमर्ष । ४७ उत्सर्गः। २८) F१ रति । २ हास । ३ शोक । ४ क्रोध । ५ उत्साह । ६ भय । ७ जुगुप्सा। ८ विस्मय। ९स्तम्भ। १० स्वेद। ११ स्वरभेदाः। १२ रोमाञ्चाः। १३ वेपथु । १४ विवर्णता । १५ अश्रु । १६ प्रलाप । १७ निर्वेद । १८ ग्लानि । १९ शंका । २० असूया । २१ आश्चर्य । २२ आलस्य । २३ देश्य । २४ चिंता । २५ दैन्य । २६ अशौच । २७ मद । २८ श्रम । २९ मोह । ३० स्मृति । ३१ धृति । ३२ व्रीडा । ३३ च[प]लता। ३४ जडता। ३५ हर्ष । ३६ आवश्य । ३७ विषाद । ३८ असुख । ३९ गर्व । ४० उत्सुक्य । ४१ अपस्मार । ४२ निद्रा । ४३ स्वप्न । ४४ विवोध । ४५ अमर्ष । ४६ उग्रता। ४७ उन्मद । ४८ मति । ४९ व्याधि। ५० रक्त। ५१ वितर्क। ५२ त्रास । ५१ वितर्क । ५२ त्रास । ५३ मरणं । चेति । २८) G१ रति । २.हास। ३ उत्साह। ४ विस्मयः। ५क्रोध। ६.शोक। ७ जुगुप्सा । ८ भय । ९ स्तंभ। १० स्वेद । ११ स्ववृत्ति । १२ ब्रीडा । १३ चपलता। १४ हर्षता। १५ जडता। १६ मतिमूढ । १७ आवेग। १८ विषाद । १९ औत्सुक्य । २० गर्व । २१ अपस्मार । २२ निद्रा । २३ सुप्त । २४ विवोध । '२५ अमर्ष । २६ उन्माद । २७ उग्रता । २८ व्याधि । २९ रव । ३० तर्क । ३१ त्रास । ३२ स्वरभेद । ३३ रोमांच । ३४ वेपथु। ३५ वैवर्ण्य । ३६ अनु। ३७ प्रलाप । ३८ निर्वेद । ३९ ग्लानि । ४० शंका। ४१ श्रम । ४२ आलस्य । ४३ दैन्य । ४४ चिंता । ४५ मोह। ४६ स्मृति । ४७ अवहित्थ । ४८ विदाघ । ४९ मरणांत । इति भावाः । २९. *चत्वारोऽभिनयाः। 4 - ३०: चतस्रो वृत्तयः। सात्वती। २भारती। ३ कैशिकी। ४ आरभटी । इति -- . । ३०)A,१ सात्वती। २ भारती । ३ कैशकी। ४ आरभटी। B १ सात्वती। २ भारती। ३ कोशकी। - ४ आरभटी। ! C. १ भारती। २ शाश्वती। ३ कौशिकी। ४'आरभटी चेति । D, १ सात्त्विकी । २ भारती। ३ कैशिकी। ४ आरभटी चेति ।.. E १ भारती। २ सारस्वती। ३ कौशिकी। ४ आर्भटी। F १ भारती। २ सात्विकी। ३ कौशिकी। ४ आरभटी। G १ सावत्ती। २ भारती। ३ कौशकी। ४ आमरटी। " * There is no Vivai aņa of this sūtia given in'the Mss. though the sūtra is mentioned in the contents 1E diops चतस्रो वृत्तयः ।
सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। - ३१. चत्वारो महानायकाः। १ धीरोद्धत । २ धीरोदात्त । ३ धीरललित । ४ धीरशान्त । इति । ३१) A १ धीर। २वीरोदात्त । ३ धीरललित । ४ उद्धत । B १ धीर। २ उद्धत । ३ वीरोदात्त। ४ वीरललित। C 1 gives no Vivarana DER १ धीरोद्धत । २ धीरोदात्त। ३ धीरललित । ४ धीरोपशांत । G१ धीर। २ उद्धत। ३ वीरोदात्त । ४ वीरललित। . ३२. चत्वारो नायकाः। १ अनुकूल। २ दक्षिण । ३ शठ। ४ धृष्ट । इति । । ३२) C १ अनुकूल। २ दक्षिण । ३ धृष्ट। D १ दक्षिणः। २ अनुकूल। ३ शिव । २ अनुकूल। ३ शठ। २ दक्ष। ३ शत। E१ दक्ष। F१ अनुकूल। ४पडश्च । ४ धृष्टश्चेति। ४ धृष्टश्चेति । ४ धृष्टश्चेति । ३३. द्वात्रिंशद् नायकगुणाः। १ कुलीन । २ शीलवान् । ३ वयस्थ । ४ शूरवान् । ५ संततव्यय । ६ प्रीतिवान् । ७ सुराग । ८ सावयववान् । ९ प्रियंवद । १. कीर्ति. वान् । ११ त्यागी। १२ विवेकी । १३ शृङ्गारवान् । १४ अभिमानी । १५ श्लाघ्यवान् । १६ समुज्वलवेषः। १७ सकलकलाकुशल। १८ सत्यवंत । १९ प्रिय । २० अवदान । २१ सुजन । २२ सुगंध । २३ सुवृत्तमंत्र। २४ क्लेशसह । २५ प्रदञ्चपध्यः । २६ पंडित । २७ उत्तमसत्य । २८ धर्मिष्ठमहोत्साही । २९ गुणग्राही । ३० सुपात्र- ग्राही। ३१ क्षमी । ३२ परिभावक । इति । 1AG नायक। B नायिका 2G नायिका 3 A द्वात्रिंशद्गुणनायक 1; E द्वात्रिंशगुणो नायका, द्वात्रिंशद्गुणो नायकः ।
सविवरण-वस्तुरनकोशः। ४१ ३३) A १ कुलीन । २ शीलवान् । ३ वयस्था ४ शौचवान् । ५ स्वतंत्र। ६सावयव। ७प्रीतिमान् । ८ प्रियंवद । ९ सुभग । १० सत्यवान् । ११ कीर्तिवान् । १२.त्यागी। १३ विवेकी। १४ शृङ्गारी । १५ अभिमानी। १६ श्लाघावान् । १७ समु- जवलवेष ।' '१८ शयाशी। १९ सकलकलाकुशल । २० सत्यासवह। २१ श्रद्दधान। २२ सुगंध । २३ सुवृत्त। २४ मंत्र । २५ क्लेशसह। २६ भाषापंडित। २७ उत्तम- सत्य । २८ धर्मिष्ठ । २९ महोत्साह । ३० गुणग्राही । ३१ कृ(?क्ष)मी । ३२ परिभावुक । ३३) B१ कुलीन। २ शीलवान् । ३ वयस्थ। ४ शौचवान् । ५स्वतंत्र। ६सावयव। ७ प्रीतिमान् । ८ प्रियंवद। ९ सुभग । १० सत्यवान् । ११ कीर्तिमान् । १२ त्यागी। १३ विवेकी। १४ शृङ्गारी। १५ अभिमानी। १६ श्लाध्यवान् । १७ समु- जवलवेषः। १८ शयाज्ञ। १९ सकलकलाकुशल । १९ सकलकलाकुशल। २० सत्यावसह । २१ श्रद्धावान् । २२ सुगंध । २३ सुवृत्त । २४ मंत्र । २५ क्लेशसह । २६ भाषापंडित । २७ उत्तमसत्य । २८ धर्मिष्ठ। २९ महोत्साह । २९ महोत्साह। ३० गुणग्राही। ३१ क्षमी। ३२ परिभावुकः । ३३) E १ कुलीन। २ शीलवान् । ३ वयस्थ । ४ शौचवान् । ५ प्रियंवद । ६ संततव्यय। ७ प्रीतमना। ८ सुभग । ९ विनयवान् । १० त्यागी। ११ विवेकी । १२ शृङ्गारवान् । १३ अभिमान । १४ श्लाघ्य । १५ समुज्वलवेष । १६ सकलकला- कुशल। १७ सत्यवान्। १८ प्रियः। १९ सुवृत्तः। २० अवदात। २१ स्वजन । २२ सुहृद । २३ [श्रद्दधान । २४ सुगंधप्रिय । २५ मंत्रवान् । २६ क्लेशसह । २७ प्रदत्ता। २८ प्रकाशकः । २९ पंडित । ३० उत्तम । ३१ ससत्त्व । ३२ धार्मिक । ३३ महोत्साही। ३४ गुणग्राही। ३५ क्षमावान्] । ३६ परिभाषिकश्चेति । ३३) F १ कुलीन । २ शीलवान् । ३ वयस्थ । ४ शौचवान् । ४ शौचवान् । ५ संततव्ययी। ६ प्रतिभावान् । ७ शुभग। ८ विनयवान् । ९ कीर्तिमान् । १० त्यागी। ११ विवेकी । १२ शृङ्गारी। १३ अभिमानी।। १४ श्लाघावान् । १५ समुज्वलवेष । १६ सकलकला- कुशल। १७ सत्यवान् । १८ प्रिय । १९ अवदान । २० स्वजनप्रियः। २१ सुगंधप्रियः। २२ सुवृत्त । २३ मंत्रवान् । २४ क्लेशापहारी। २५प्रदत्ताप्रकाशकः। २६ पंडितसत्तम । २७ उत्समसत्तम ।, २८.धार्मिक । २९ महोत्साही। ३० गुणग्राही। ३१ क्षमी। ३२ परिभावकश्चेति। ३३) G१ कुलीन । २ शीलवान् ३ वयस्थ। ४ शौचवान् । ५ स्वतंत्र । ६ सावयव। ७ प्रीतिमान् । ८ प्रियंवद । ९ सुभग ।। १० सत्यवान् । ११ त्यागी। १२ विवेकी। १३ शृंगारी। १४ अभिमानी। १५ श्लाघावान् । १६ समुज्वलवेष। १७ शयाज्ञी। १८ सकलकलाकुशल। १९ सत्यासवह । २० श्रद्दधान। २१ सुगंध । २३ मंत्र । २४ क्लेशसह । २५ भाषापंडित । २६ उत्तमसत्य । २७ धर्मिष्ठ । २८ महोत्साह । २९ गुणग्राही। ३० क्षमी। ३१ परिभावुक । २२ सुवृत्त। ३४. त्रिविधा महानायिकाः । १ स्वकीया । २ परकीया। ३ पण्याङ्गना । इति । 1 CE चेति। F पण्याङ्गनाश्चेति । ६ - - ४२ सविवरण-वस्तुरनकोशः। ३५. अष्टौ नायिकाः। १ वासकसज्जा । २ विरहोत्कण्ठिता । ३ खण्डिता । ४ विप्रलब्धा । ५ प्रोषितभर्तृका । ६ कलहांतरिता । ७ अभिसारिका। ८ स्वाधीन- भर्तृका । इति । ३५) A B १ विरहोत्कंठिता । २ खण्डिता। ३ कलहांतरिता । ४ विप्रलुब्ध(?ब्धा) ५ प्रोषितभर्तृका। ६अभिसारिका । ७ स्वाधीनपतिका। ३५) C१ वासकसजा । २ खंडिता। ३ उत्कंठिता। ४ कलहांतरिता। ५ विप्रलब्धा। ६प्रोपितभर्तृका । ७ अभिसारिका। ८ स्वाधीनपतिका चेति । ३५) D १ वासकसजा । २ विरहोत्कण्ठिता। ३ खंडिता। ४ विप्रलंभा। ५ प्रोषितभर्तृका। ६ कलहांतरिता । ७ अभिसारका। ८ स्वाधीनभर्तृका चेति । । - -- ३६. द्वात्रिंशद् नायिकानां गुणाः । १ सुरूपा । २ सुभगा । ३ सुवेषा । ४ सुरतप्रवीणा । ५ सुनेत्रा । ६ सुखाश्रया । ७ विभोगिनी। ८ विचक्षणा । ९ प्रियभाषिणी। १० प्रसन्नमुखी । ११ पीनस्तनी। १२ चारुलोचना। १३. रसिका। १४ लज्जान्विता। १५ लक्षणयुता। १६ पठितज्ञा। १७ गीतज्ञा। १८ वाद्यज्ञा। १९ नृत्यज्ञा । २० सुप्रमाणशरीरा । २१ सुगंधप्रिया । २२ नातिमानिनी। २३ चतुरा। २४ मधुरा । २५ स्नेहमती । २६ विमर्षमती। २७ गूढमंत्रा। २८ सत्यवती। २९ कलावती । ३० शीलवती। ३१ प्रज्ञावती। ३२ गुणान्विता । इति । - ३६) AB १ सुरूपा । २ सुवेपा। ३ सुभगा। ४ सुरतप्रवीणा.। ५ सुसत्त्वा । ६ विप(?नुख)श्रिता। ७ विनीता। ८ भोगिनी। ९ विचक्षणा। १० प्रियभाषिणी । ११ प्रसन्नमुखी। १२ पीनस्तनी। १३ चारुलोचना। १४ रसिका। १५ लज्जान्विता। १६ लक्षणयुता । १७ वाक्यज्ञा। १८ गीतज्ञा । १९ नृत्यज्ञा । २० वाद्यज्ञा । 1 A BG नायिका ।, C D E नायकाः। 2 F स्वाधीनपतिका । 3 A B द्वात्रिंशद्गुणनायिकाः ।, CD द्वात्रिंशगुणानायकाः ।, E द्वात्रिंशन्नायकानां गुणा I, G द्वात्रिंशद्वणनायिका ।
३ सुभगा सविवरण-वस्तुरनकोशः। २१ सुप्रमाणशरीरा। २२ सुगंधप्रिया । २३ नातिमानिनी। २४ चतुरा। २५ मधुरा। २६ स्नेहवती। २७ विमर्शवती। २८ सुवृतमंत्रा। २९ सत्यवती। ३० प्रज्ञावती। ३१ चैतन्या। ३२ शीलवती । ३३ गुणान्विता। ३६) C १ कुलिना । २ शीलवती । ३ वयस्विनी । ४ प्रियंवदा । ५ श(?मितव्यया। ६प्रीतिमति। ७ सुभगा। ८ सुसत्त्वा। ९ सुवेषा। १० सुविनीता। ११ सुरतप्रवीणा । १२ चारुनेत्रा। १३ सुखप्रिया । १४ विभोगिनी। १५ विचक्षणा। १६ प्रियभाषिणी। १७ प्रसन्नमुखी। १८ पीनस्तनी। १९ रसिका। २० लजान्विता । २१ लक्षणयुक्ता। २२ पठितज्ञा। २३ गीतज्ञा। २४ नृत्यज्ञा । २५ वि(वा)द्यज्ञा। २६ सुकुमारशरीरा। २७ सुगंधप्रिया। २८ नातिमानिनी। २९ स्नेहवती। ३० गुणान्विता। चेति । ३६). E१ कुष्टि(?लि)नी। २ सुरूपा। ४समर्था । ५ सुवेषा। ६ सुविनीता। ७ सुरतप्रवीणा। ८चारुनेत्रा। ९ सुखप्रिया । १० विभोगिनी। ११ विचक्षणा। १२ प्रियभाषिणी। १३ प्रसन्नमुखी । १४ पीनस्तनी। १५ रसिका। १६ लज्जान्विता। १७ लक्षणयुक्ता। १८ पठितज्ञा। १९ गीतज्ञा। २० वाद्यज्ञा। २१ नृत्यज्ञा । २२ सुकुमारशरीरा । २३ सुगंधप्रिया । २४ नातिमानिनी। २५ मधुरवाक्या:।, २६ स्नेहवती। २७ आचारवती। २८ रूपवती। २९ संभोगवती। ३० गुणवती। ३१ सुशीला। ३२ धर्मज्ञा। चेति । ३६) F १ कुलीना । २ सुभगा । ३ स्वरूपा । ४ सुसत्त्वा । ५ सुवेषा। ६ सुविनीता। ७ सुरत्न(त)प्रवीणा। ८ चारुनेत्रा। ९ सुखप्रिया । १० विभोगिनी। ११ विचक्षणा। १२ प्रियभाषिणी। १३ प्रसन्नमुखी । १४ पीनस्तनी। १५ रसिका। १६ लजान्विता। १७ लक्षणयुता। १८ गीतशा। '१९ वाद्यज्ञा । २० नृत्तज्ञा। २१ सुकुमारशरीरा। २२ सुगन्धप्रिया। २३ नातिमानिनी। २४ मधुरवाक्या। २५ स्नेहवती। २६ ईर्ष्यारहिता। २७ सत्यवती। २८ शीलवती। २९ प्रज्ञावती। ३० सुसंवृत्तशरीरा। ३१ गुणान्विता। चेति । ३६) G१ सुरूपा। २ सुवेषा। ३ सुभगा। ४ सुरतप्रवीणा। ५ सुसत्त्वा। ६ विष(?सुख)श्रता। ७विनीता। ८ भोगिनी। ९ विचक्षणा। १० प्रियभाषिणी। ११ प्रसन्नमुखी। १२ पीनस्तनी। १३ चारुलोचना। १४ रसिका। १५ लजान्विता लक्षणयुता। १६ वाक्यज्ञा। १७ गीतज्ञा। १८ नृत्यज्ञा । १९ वाद्यज्ञा । २० सुप्रमाणशरीरा। २१ सुगंधप्रिया । २२ नातिमानिनी। २३ चतुरा। २४ मधुरा। २५ स्नेहवती। २६ विमर्शवती। २७ संवृतमंत्रा। २८ सत्यवती। २९ प्रज्ञावती। ३० चैतन्या। ३१ शीलवती। ३२ गुणान्विता । wr L ३७. 'त्रिविधं सौख्यम् । १ आङ्गिक । २ वाचिक । ३ मानसिक । इति । ३७) F शारीरं। मानसिक चेति । 1 ABG add अथ त्रिविधं |, F द्विविधं । 3 AB drop इति ।, CDE मानसिकं चेति । 2 ABG शारीरिक, E कायिकं ।
सविवरण-वस्तुरतकोशः। ३८. चत्वारि सौख्यकारणानि । १ योगाभ्यासकारणम् । २ अभिमानकारणम् । ३ सम्प्रत्ययकारणम् । ४ विषयकारणम् । इति । १ ३९. नवविधो गंधोपयोगः । तैलाधिवासः। २ जलाधिवासः। ३ वस्त्राधिवासः। ४ मुखाधि- वासः। ५ उद्वर्त्तनाधिवासः। ६ विलेपनाधिवासः। ७ स्नानाधिवासः। ८ धूपनाधिवासः। ९ भोजनाधिवासः । इति । ३९) C१ तैलाधिवास। २ पुष्पवास । ३ मुखवास । ४ जलवास । ५ स्नानवास । ६ उद्वर्त्तनवास । ७ धूपनवास । ८ तांबोलवास। ९भोजनवास । ३९) D१ तैलाधिवासे । २ जलाधिवासे । ३ मुखाधिवासे । ४ स्थाने । ५ उद्वर्तने । ६ उदके। ७ विलेपने। ८ धूपने। ९ भोजने । चेति । ३९) E १ तैलाधिवासः। २जलाधिवासः। ३ सुरभिजलं। ४ उद्वर्त्तता। ५ धूप । ६ तांबूल। ७ भोजनाधिवासः। ८ वस्त्राधिवासः। ९ मुखाधिवासः। ३९) F १ तैलाधिवासे । २ जलाधिवासे । ३ वस्त्राधिवासे । ४ मुखे । ५ उद्वर्त्तने । ६ स्नाने। ७ विलेपने। ८ धूपने। ९ भोजने । चेति । * . ४०. दशविधं शौचम् । १ भावशौचं । २ स्नानशौचं । ३ जलशौचं । ४ मृत्तिकाशौचं । ५ श्मश्रुशौचं । ६ संस्कारशौचं । ७ पवित्रवाक्यं । ८ प्राणिदयाशौचं ९ अर्थशौचं । १. आचारशौचं । इति । ४०) B १ जलशौचं। २ मृत्तिकाशौचं। ३ गंध। ४ श्मश्रु। ५संस्कार। ६ पवित्रवाक्य । ७ प्राणिदयाशौचं । ८ अर्थशौचं । ९ आचारशौचं । ४०) C १ भावशौचं । २ मुखशौचं । ३ मृत्तिकाशौचं । ४ गंधशौचं । ५ कक्षाशौच । ६ श्मश्रुशौच । ७ स्नानशौच। ८ नखशौच । ९ आनल चेति । 1 ABC D E F omit the Sūtia and its Vivarana 2 ABG अथ नव। 3 A BG अथ दश ।
सविवरण-वस्तुरनकोशः। ४०) D १ मुखगौच । २ कक्षा। ३कर। ४ श्मश्रु। ५जल। ६मृत्तिका । ७ नख । ८ मल। ९ वृत्ति। १० भावशौच । ४०) E १ मुखशौच । २ नानशौच । ३ मृत्तिकाशौच । ४ गंधशौच। ५ कक्षा। ६ श्मश्रु । ७ जल । ८ नख । ९ अनिल । १० सर्वशौच । इति दश विधं शौचम् । ४०) F १ मुखशौच । २ सानशौच । ३ मृत्तिका । ४ कक्षा । ५गंध । ६म(?श्म)श्रु । ७ जल। ८ पवित्रभाषण । ९ नख। १० आचारशौच चेति । ४०) G १ भावशौचं । २ स्नानशौचं । ३ जलशौचं । ४ मृत्तिकाशौचं । ५ गंधश्मश्रु । ६ संस्कार । ७ पवित्रवाक्य । ८प्राणिदयाशौचम् । ९ अर्थशौचम् । १० आचारशौचम् । १ * ४१. 'द्विविधः कामः । १ स्वाभाविक । २ कृत्रिम । इति । ४२. देश कामावस्थाः। १ अभिलाषा । २ चिंता । ३ स्मृति । ४ गुणकीर्तन । ५ उद्वेग । ६ प्रलाप । ७ उन्माद। ८ व्याधि । ९ जडता । १० मरण । इति । ४२) C१ अभिलापा । २ चिंता। ३ स्मृति । ४ गुणकीर्तन । ५ उद्वेग। ६ उन्माद। ७ व्याधि। ८ जडता। ९मरण चेति । ४२) D१ अभिलापा। २चिंता। ३रस। ४ गुणकीर्तन। ५उद्वेग। ६प्रलाप। ७ उन्माद। ८ व्याधि। ९ जडता। १० मरणं चेति । * ४३. विंशती रक्तस्त्रीणां लक्षणानि । १ पूर्व भाषते । २ दर्शनात्प्रसन्ना भवति । ३ समागमे तुष्यति । ४ संभाषिता हष्यति । ५ गुणान् सखीजने कथयति । ६ दोषान् प्रच्छा- ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात् स्वपिति। ९ पूर्वमुत्तिष्ठति । १. मित्राणि पूजयति । ११ अमित्राणि द्वेष्टि। १२ प्रोषिते दुर्मना दयति । 1 A B G अथ द्वि। 2 A G कृत्रिमश्च । 3 F दशविधा कामावस्था। 4 D लक्षणस्थानानि ।
४६ सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। भवति । १३ वधनं ददाति । १४ प्रथममालिङ्गनं करोति । १५ पूर्वमेव चुम्बनं करोति । १६ समदुःखसुखा । १७ स्नेहवती । १८ संभोगार्थिनी । १९ सन्मुखावलोकिनी । २० सदा विनीता । करोति । ४३ ) A B १ पूर्व भाषते । २ दर्शनात्प्रसन्ना भवति । ३ समागमे तुष्यति। ४ संभापिता हृष्यति । ५ गुणान् सखीजने कथयति । ६ दोपान् छादयति । ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात् स्वपिति । ९ पूर्वमुत्तिष्ठति। १० मित्राणि' पूजयति। ११ अमित्राणि द्वेष्टि। १२ प्रोषिते दुर्मना भवति । १३ स्वधनं ददाति । १४ प्रथममा- लिंगयति । १५ पूर्वचुंबनं करोति । १६ समदुःखसुखावलोकिनी। १७ सदा विनीता । १८ स्नेहवती । १९ संभोगार्थिनी । ४३) C १ पूर्व भाषितं । २ दर्शनात्प्रसन्ना भवति । ३ समागमे पुष्यति । ४ संभाषिता हृष्टा भवति । ५ सखिजने गुणान् कथयति ।' ६ दोषान् प्रच्छादयति । ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चाद् स्वपिति । ९ पूर्वमुत्तिष्ठते । १० मित्राणि पूजयति । ११ अमित्राणि द्वेषयति । १२ प्रोषिते दुर्मना । १३ स्वधनं ददाति । १४ प्रथममालिंगनं १५ ध्रुवनं ददाति । १६ समदुःखा। १७ स्नेहवती। १८ मिष्टान्नं दात्री। १९ सुवेषा। २० सुभोगार्थिनी चेति । ४३) D १ अर्थानुभाविनी । २ दर्शने प्रसन्ना भवति । ३ समं तुष्यति। ४ संभाविता हृष्यति । ५ गुणान् सखीजने कथयति । ६ दोषान् प्रच्छादयति । ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात् सुपति । ९ पूर्वमुत्तिष्ठति । १० मित्राणि पूजयति। ११ अमित्राणि द्वेषयति। १२ प्रोषिते दुर्मना भवति । १३ स्वधनं ददाति । १४ प्रथम- मालिंगनं करोति । १५ पूर्वमेव चुंवनं करोति । १६ समदुःखसुखा। १७ सन्मुखाव- लोकिनी। १८ स्नेहवती। १९ संभोगार्थिनी चेति । ४३) E १ अर्थानुभाविनी । २ दर्शनात् प्रशांता भवति । ३ संतुष्टा इ(?तुष्यं)ति । ४ संभापणेन हृष्यति। ५ गुणान् प्रकाशयति । ६ स्तनयोः पीडनं । ७ भूषणोद्धाटनं । ८ हसनं। ९ नूपुरोत्कर्षणं । १० कर्णकंडूयनं । ११ केशकीर्ण । १२ प्रचारणसंयमनं । १३ सखीजने दोपान् प्रच्छादयति । १४ सन्मुखी शेते। १५ पश्चात् स्वपति। १६ पूर्वमुत्तिष्ठति । १७ मित्राणि पूजयति । १८ अमित्राणि द्वेषयति। १९ प्रोषिते दुर्मना २० स्वधनं ददाति २१ प्रथमं आलिंगनं करोति । २२ पूर्वमेव स्ववचनात् भाषयति। २३ ध्रुवनं करोति । २४ समदुःखे सदा विनीता। २५ सन्मुखविलोकिनी । २६ स्नेहवती। २७ संभोगार्थिनी। भवति। । ४३) F १ पूमायात(? भापते)। २ दर्शनात् प्रसन्ना भवति । ३ संतुष्टा । ४संभापिताद् हृष्यति । ५ गुणान् सखीजनं वदति । ६ दोषान् प्रच्छादयति । ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात्स्वपिति । ९ पूर्वमुत्तिष्ठति । १० मित्राणि पूजयति। ११ अमित्राणि द्वेष्टि । १२ प्रोपिते दुर्मना। १३ स्वधनं ददाति । १४ प्रथमालिङ्गनं करोति । १५ पूर्वमेव ध्रुवनं ददाति । १६ समानदुःखा। १७ विनीता। १८ सम्मुखावलोकनी। १९ स्नेहवती । २० संभोगार्थिनी चेति ।
सविवरण-चस्तुरनकोशः। । ४३) G १ पूर्व भापते । २ दर्शनात्प्रसन्ना भवति । ३ समागमे तुष्यति । ४ सम्भाषिता हृष्यति। ५गुणान् सखिजने कथयति । ६दोषान् छादयति। ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात् स्वपिति । ९ पूर्वमुत्तिष्ठति । १० मित्राणि पूजयति । ११ अमित्राणि द्वेष्टि। १२प्रोपिते दुर्मना भवति । १३ स्वधनं ददाति । १४ प्रथममालिंगयति। १५ पूर्वचुंबनं करोति । १६ समदुःखसुखावलोकिनी। १७ सदा विनीता। १८ स्नेहवती। १९ सम्भोगार्थिनी। M ४४. एकविंशतिर्विरक्तस्त्रीणां लक्षणानि । १ चुंबिता विमुखं करोति । २ मुखं परिमार्जयति । ३ निष्ठीवति । ४ प्रथमं शेते । ५ पश्वादुत्तिष्ठति । ६ पराङ्मुखी शेते। ७ वाक्यं नावमन्यते । ८ मित्राणि द्वेष्टि । ९ अमित्राणि पूजयति । १. सदा गर्विता भवति । ११ उक्ता कुप्यति । १२ गमने तुष्यति । १३ दुष्कृतं स्मरति । १४ सुकृतं विस्मारयति । १५ दत्तं न मन्यते । १६ दोषान् प्रकटीकरोति । १७ गुणान् प्रच्छादयति । १८ सन्मुखं न पश्यति । १९ दुःखिते सुखिता भवति । २० विप्रियं वदति । २१ संभोगे सुखं न वाञ्छति । ANAME ४पश्चा- प ४४) C१ चुंबने मुखं परिमार्जयति । २ निष्ठीवति। ३ प्रथमं शेते। दुत्तिष्ठति। ५ सन्मुखी न शेते। ६ मित्राणि द्वेषयति। ७ अमित्राणि पूजयति। ८गर्विता उत्कथयति । ९ गमने हृष्टा। १० दुष्कृतं स्मरति। ११ सुकृतं विस्मारयति । १२ उक्तं न मन्यते। १३ दोपान् प्रगटीकरोति। १४ गुणानाच्छादयति । १५ सन्मुखं न पश्यति। १६ दुःखिते सानंदा। १७ अप्रियंवदा । १८ संभोगे सुखं नावगच्छति । १९ कोपमुत्पादयति। ४४) D १ चुम्बिता विमुखं करोति । २ मुखं च परिमार्जयति । ३ निष्ठीवति। ४ प्रथमं शेते। ५ पश्चादुत्तिष्टति । ६ परान्मुखी शेते । ७ वाचं न मन्यते । ८ मित्राणि द्वेषयति । ९ कुमित्राणि पूजयति । ९ कुमित्राणि पूजयति। १० गर्विता भवति । ११ उक्ता कुप्यते । १२ गमने तुण्यति। १३ दुष्कृतं स्मरयति । १४ सुकृतं विस्मरयति । १५ दत्तं न मन्यते। १६ दोपान प्रकटीकरोति । १७ गुणान् प्रच्छादयति । १८ सन्मुखं न पश्यति । १९ विप्रियं वदति । , २० दुःखिते सुखिता भवति । २१ संभोगेषु सुखं न वाञ्छति । ४४) E १ मुखं परिमार्जयति । २ निष्ठीवती। ३ प्रथम शेते। . ४ पश्चादुत्तिष्ठति । ५ परामुखी शेते। ६ मित्राणि द्वेष्टि। ७ अमित्राणि पूजयति। ८ गर्विता भवति । ९ उक्ता कुप्यति । १० गमने तुष्यति। ११ दुःखिते दुःखिता [न] भवति । १२ विप्रियं 1 A B C D विशति विरक्त ।, विंशति अरक्त । - - ४८ सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। वदति। १३ संभोगसुखं न वांछति । १४ स्वेच्छया विचरति । १५ दुष्कृतं स्मरति । १६ सुकृतं विस्मारयति । १७ दत्तं न मन्यते। १८ दोषान् प्रकटीकरोति । १९ गुणान् प्रच्छादयति । २० सन्मुखं न पश्यति । ४४) F १ चुम्बिता परान्मुखी भवति । २ चुम्बितानन्तरं निष्ठीवति । ३ मुखं च परिमार्जयति। ४ प्रथमं शेते। ५ पश्चादुत्तिष्ठति । ६ पराङ्मुखी शेते। ७ वचनं नावमन्यते। ८ मित्राणि द्वेष्टि । ९ अमित्राणि पूजयति । १० सदैव गर्विता। ११ उक्ता कुप्यति । १२ प्रोषिते तुष्यति । १३ दुष्कृतं स्मारयति । १४ सुकृतं विस्मारयति । १५ दत्तमवमन्यते । १६ दोषान् प्रकटयते । १७ गुणानाच्छादयति । १८ सम्मुखं न पश्यति । १९ दुःखेन दुःखिता न भवति । २० विप्रियं वदति। २१ संभोगं न वदवाञ्छ)ति । * ४५. द्वाविंशतिः कामिनीनां विकारेङ्गितानि । १ सानुरागनिरीक्षणं । २ श्रवणसंयमनं । ३ अङ्गुलीमोटनं । ४ मुद्रिकाकर्षणं । ५ नूपुरोत्कर्षणं । ६ गुप्ताङ्गदर्शनं । ७ सख्या सह हसनं । ८ भूषणोढाटनं । ९ कर्णमोटनं । १० कर्णकंडूयनं । ११ केशप्रकीर्णनं । १२ पुष्पसंयमनं । १३ नखविलेखनम् । १४ परि- धानसंयमनं । १५ निश्वासोच्छ्सनं । १६ प्राग् विजृम्भणं । १७ बाला- लिङ्गनं । १८ बालमुखचुम्बनं । १९ प्रियभाषणं । २. परोक्षे नाम- कीर्तनम् । २१ अतिक्रान्तप्रेक्षणम् । २२ २२ गुणव्यावर्णनं । इति । ४५) C १ उच्चैर्निष्ठीवती। २ सानुरागा संयमनं । ३ अङ्गुलीस्फोटनं । ४ मुद्रिका- कर्षणं । ५ गुप्तांगदर्शनं। ६ सख्या सह हसनं। ७ नूपुरोत्कर्षणं । ८ स्तनोपपीडनं। ९ भूषणोद्धाटनं । १० कर्णकंडूयनं । ११ केशप्रकीर्णनं । १२ परिधानसंयमनं । १३ निश्वासोच्छ्वासनं । १४ वागविजृभणं । १५ वालालिंगनं। १६ बालमुखचुंबनं । १७ प्रियभाषणं। १८ अतिक्रांतप्रेक्षणं। १९ परोक्षनामस्मरणं। २० गुणवर्णनं । २१ विरहवेदना। ४५) D १ सानुरागनिरीक्षणं । २ श्रवणसंयमनं । ३ अंगुलीस्फोटनं । ४ सदा प्रसन्नं । ५ मुद्रिकाकर्पणं । ६ गुप्तांगदर्शनं। ७ सख्या सह हसनं। ८ भूषणोद्धाटनं । ९ कर्णोत्कर्षणं । १० कर्णकंड्यनं। ११ केशप्रकीर्णनं । १२ पुष्पसंयमनं । १३ नखविलेखनं । १४ परिधानसंयमनं । १५ विश्वासोल्लसनं । १६ प्रार विज़ुभनं । १७ बालालिंगनं । १८ घालमुखचुंवनं। १९ प्रियभाषणं ।। २० परोक्षे नामकीर्तनं । 1 A G द्वात्रिंशत्कामिनीनां ।, B D E द्वाविंशतिकामिनीनां ।, C अथ द्वाविंशति कामिनीनां । 2 ABG मुद्रिका अर्पणं!. 3 A.BG केशप्रक्षरणम् । 4 ABG onmit प्राग्। 5 ABG वालचुम्वनं।, 6 AB परोक्षे नामग्रहणं ।, G omits परोक्षे नामकीर्तनम् ।
- सविवरण-वस्तुरतकोशः। ४१ ४५) E १ उच्चैर्निष्ठीवती । २ सानुरागनिरीक्षणं । ३ श्रवणसंयमनं। ४ अंगुलीस्फोटनं । ५मुद्रिकाकर्पणं । ६गुप्तांगदर्शनं। ७ परिधानसंयमनं । ७ परिधानसंयमनं। ८ निश्वासोश्वा(१च्छा)सनं । ९ प्राक(?)विजृभणं । १० वालमुखचुंबनं । ११ प्रियलक्षणं(?श्लेषणं)। १२ अतिक्रांतप्रेक्षणं । १३ पश्चान्नामस्मरणं । ४५) F १ सानुरागनिरीक्षण। २ श्रवणसंयमनं। ३ अङ्गुल्या मोटनं। ४ मुद्रिका- कर्पणं। ५ गुप्ताङ्गदर्शनं। ६ सख्या सह हसनं। ७ स्तनोपपीडनं। ८ भूपणोद्घाटनं । ९ नूपुरोत्कर्पणं । १० कर्णकण्डूयनं । ११ केशप्रकीर्णनं । १२ प्रावरणसंयमनं । १३ नखविलेखनं। १४ विनि)श्वासोच्छ्वासनं। १५ प्रार विजृम्भणं । १६ वालालिङ्गनं । १७ वालकमुखचुम्बनं। १८ प्रियश्लेपणं । १९ अतिक्रान्तप्रेक्षणं। २० परोक्षे नामस्मरणं । २१ गुणव्यावर्णनं। २२ संभोगवाञ्छा चेति । ४६. चतुर्विशतिरसतीनां लक्षणानि । १ द्वारदेशे शायिनी। २ पश्चादवलोकिनी। ३ पुंश्वली सखी। ४ भोगार्थिनी। ५ गोष्ठिप्रिया । ६ राजमार्गाश्रिता । ७ पतिद्वेषिणी । ८ पतिरहिता । ९ हीनाङ्गभार्या । १० मृतापत्या । ११ बहुदेवरालापिनी । १२ बहुदेवतापूजिनी । १३ विनोदप्रिया । १४ भोगिनी [ सखी]। १५ अतिमानिनी । १६ कृत्रिमलज्जान्विता । १७ परप्रीतिरता । १८ वृद्ध- १९ सततहास्या। २० प्रोषितभर्तृका। २१ लोभान्विता । २२ बहुभाषिणी । २३ क्रीडनप्रिया । २४ वंध्या । इति । भार्या। ४६) A B १ द्वारदेशे शायिनी । २ पाश्चात्यावलोकिनी । ३ पुंश्चली सखी। ४ भोगिनी। ५ गोष्ठिप्रिया । ६ राजमार्गाश्रिता। ७ पतिद्वेषिणी। ८ पतिरहिता। ९ हीनांगभार्या । १० मृतापत्या । ११ बहुदेवरालापिनी । १२ बहुदेवतापूजनी । १३ विनोदकारिणी। १४ भोगार्थिनी। १५ अतिमानिनी। १६ कृत्रिमलज्जान्विता। १७ परप्रीतिरता । १८ वृद्धभार्या । १९ सततहास्या। २० प्रोषितभर्तृका। २१ लोभान्विता। २२ वहुभाषिणी। २३ क्रीडनप्रिया। २४ वंध्या । ४६) १ द्वारदेशशायिनी। २ पश्चादवलोकिनी । ३ पुंश्चली। ४ भोगिनी। ५ गोष्ठिप्रिया। ६ राजमार्गमाश्रिता। ७ पतिद्वेषिणी। ८पतिरहिता। ९दा(?ही)नयुवतीनां संगिनी । १० जलवाहनीनां संगिनी । ११ विनोदप्रिया । १२ अतिमानिनी। १३ दूरं जलानयने गच्छति । १४ कुंभकाररजकानां संगिनी । १५ कुट्टिनी। १६ क्रतत्रिमलजान्विता(?कृत्रिमलजान्विता)। १७ अप्रणीता। १८ संत(?सतत)हास्या.! १९ लोभान्विता । २० बहुभाषिणी। २१ क्रीडनप्रिया। २२ केशसंवाहनप्रियां। २३ आत्मगृहं परित्यज्य परगृहे वार्ता करोति । २४ स्वपति परित्यज्य अन्यमाकांक्षति। 1 ABG अथ चतु०, चतुर्विंशत्यसतीलक्षणानि ।, C D चतुर्विंशति असतीनां लक्षणानि । 2 B पश्चादवलोकनी ।
. ५० सविवरण-वस्तुरनकोशः। ४६) D१ द्वारदेशशायिनी । २ पश्चात् पश्चादवलोकिनी । ३ पुंश्चली। ४ भोगिनी । ५ गोष्ठिप्रिया। ६ राजमार्ग(?)श्रिता। ७ पतिद्वेपिणी । ८ पतिरहिता । ९ हीनांगभार्या । १० मृतवत्सा। ११ देवरजन(?रालापिनी)। १२ गोष्ठिप्रिया। १३ वहुदेवतापूजनं । १४ वि(सं)भोगार्थिनी। १५ अतिमानिनी। १६ कृत्रिमलजान्विता । १७ परप्रीतिरता। १८ वृद्धभार्या । १९ सततहास्या । २० प्रोषितभर्तृका । २१ लोभान्विता । २२ वहुभाषिणी । २३ क्रीडापरा चेति । ४६) E १ द्वारदेशशायिनी । २ पश्चादवलोकिनी । ३ पुंश्चली। ४ भोगिनी। ५ गोष्ठिप्रिया। राजमार्ग(?)टिनी। ७ पतिमन्वेषणी(?पतिद्वेषिणी)। ८ पतिरहिता। ९ हीनयुवतीसंगिनी । १० जलवाहिकीनां संगिनी। ११ विनोदप्रिया । १२ प्र(?अ)ति- मानिनी। १३ दूराजलानयनाय गच्छति। १४ कुंभकाररजकसंगतिं करोति । १५ कृत्रिम- लज्जान्विता । १६ परप्रीतिरता । १७ सततं हास्या। १८ विनोदं बहिनामति । १९ लोभा- न्विता । २० वहुभाषिणी । २१ क्रीडणप्रिया । २२ केशसंवाहनप्रिया। २३ आत्मगृहे वार्ता परित्यज्य परगृहे वार्ताकरणाय रसिका। २४ स्वपर्ति परित्यज्य परपुरुषान्वेषणं करोतीति । :४६ ) F१ द्वारदेशार्द्धस्थायनी। २ पश्चात्प्रविलोकनी। ३ पुंश्चलीसखी। ४ भा(?भो)गिनी। ५ गोष्ठिप्रिया। ६ राजमार्गाश्रिता। ७ पतिद्वेषिणी। ८ पतिवर्जिता। ९ हीनयुवतीनां सङ्गिनी। १० गजवाहकानां प्रिया । ११ विनोदप्रिया । १२ अभिमानिनी। १३ दूरे पानीयानयनाय व्रजति। १४कुम्भकाररजकसंगतिं करोति। १५ कन्दुकासंगतिं करोति। १६ कृत्ति(?त्रि)मलजान्विता । १७ परप्रीतिरता। १८ संततहास्या। १९ निर्जने वहिर्गासिनी । २० लोभान्विता। २१ बहुभापिणी। २२ क्रीडनप्रिया। २३ केशसंवाहनप्रिया । २४ स्वगृहं मुक्वान्यगृहे वार्ताकरणाय गच्छति । २५ रसिका। २६ स्वपति परित्यज्य परपुरुषान्वेषणं करोति। ४६) G १ द्वारदेशे शायिनी । २ पाश्चात्यावलोकिनी । ३ पुंश्चलीसखी । ४ भोगिनी । ५ गोष्ठिप्रिया। राजमार्गाश्रिता। ७पतिद्वेषिणी। ८पतिरहिता। ९ हीनाङ्गभार्या। १० वंध्या। ११ मृतापत्या । १२ वहुदेवरालापिनी। १३ वहुदेवतापूजनी । १४ विनोद कारिणी । १५ भोगार्थिनी। १६ अतिमानिनी। १७ कृत्रिमलजान्विता। १८ परप्रीतिरता। १९ वृद्धभार्या । २० सततहास्या । २१ प्रोषितभर्तृका । २२ लोभान्विता । २३ बहुभापिणी । २४ क्रीडनप्रिया। ४७. षोडश दुष्टस्त्रीणां लक्षणानि । १ पिङ्गाक्षी । २ कूपगल्ला। ३ लम्बोष्ठी । ४ खरालापा । ५ ऊर्ध्व- केशी। ६ लम्बोदरी । ७ दीर्घललाटी । ८ संहितभूः । ९ पुष्पित- १० प्रविरलदशना। ११ अतिदीर्घा । १२ अतिवामना । १३ अतिस्थूला। १४ अतिकृशा। १५ अतिगौरा। कृष्णा । इति । १ नखी। १६ अति 1 A G अथ पोडशस्त्रीणामपलक्षणानि । B अथ पोडशदुष्टस्त्रीणामपलक्षणानि । C पोडशस्त्रीणां अपलक्षणानि ।, E दुष्टस्त्रीणां पोडशापलक्षणानि ।
सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ४७) A B G १ पिङ्गाक्षी। २ कूपगल्ला । ३ लंबोष्ठी। ४ खरालापा । ५ ऊर्द्धकेशी । ६ दीर्घललाटी। ७ संहितभ्रूः। ८ पुष्पितनखी। ९ प्रविरलदशना। १० अतिदीर्घा । ११ अतीववामनी । १२ अतीवस्थूला । १३ अतीवगौरा। १४ अतीवकृष्णा १५ अतीवकृशा। १६ प्रलंबोदरी। ४७) C१ पिंगाक्षी। २ कूपगल्ला । ३ लंबोष्टी। ४ ऊर्ध्वकेशा। ५ लंबोदरी। ६ दीर्घललाटा। ७ मिलितभ्र(भूः)। ८ पुंपितनखी। ९ अतिवश्ल(?विरल)दशना । १० अतिदीर्धा। ११ अतिवामना। १२ अतिस्थूला। १३ अतिकशांगि। १४ अतिगौरा। १५ अतिकृष्णा। १६ अती [व] रोमवतीति । ४७) D१ पिंगाक्षी। २ कृपगल्ला। ३ लंवोष्टी। ४ खरालापी। ५ऊ केशी । ६ लंबोदरी। ७ दीर्घललाटा। ८ संगतभ्रू[]। ९ पुष्फितमुखी(?पुष्पितनखी)। १० प्रविरलदशना । ११ अतिदीर्वा । १२ अतिवामना। १३ अतिस्थूला। १४ अतिकशा। १५ अतिगौरा। १६ अतिकृष्णा । चेति । ४७) E१ पिंगाक्षी। २ कूपगंडा। ३ लंबोष्ठी। ४ उर्द्धकेशी। ५ प्रलंबोदरी। ६ दीर्घललाटा। ७ मिलितभ्र(?भूः)। ८ पुष्पितनखी। ९ अतिविरलकेशा। १० विरल- दशना। ११ अतिदीर्घा । १२ अतिवामना। १३ अतिस्थूला। १४ अतिकशा। १५ अतिगौरा। १६ अतिरोमवती। १७ भूमिपर्यंतांगुलका। १८ मुक्तकेशा। १९ दीर्घदंता। २० खरदेहा । ४७) F १ पिंगाक्षी । २ कूपगल्ला । ३ लंबोदरी । ४ लिम्बोष्टी(?लम्बोष्ठी)। ५ खरालापा। ६ ऊर्ध्वकेशी। ७ दीर्घललाटा। ८ संहितचूचुका । ९ पुष्पितनखी। १० प्रवी(वि)रल- दशना । ११ अतिदीर्घा । १२ दीर्घजङ्घा । १३ अतिस्थूला । १४ अतिकृशा । १५ अतिगौरा । १६ अतिकृष्णा। १७ अतिरोमवती। १८ दीर्घदंता। १९ खरदेहा। २० मुखे(?) किला। २१ भूमिलगितपादपूर्वाङ्गुलिकाश्चेति । ४८. अष्टौ स्त्रीणामविश्वासकारणानि । १ भर्तुः खैरिता । २ पुरुषार्थिनी । ३ प्रण(?णी)तगोष्ठी । ४ निरङ्कुशा । ५ विदेशवासा । ६ अन्यपुरुषं सन्मुखं विलोकयति । ७ यस्य तस्य सन्मुखं हसति । ८ उक्ता सती शपथं करोति । इति । ४८) A.BG १ भर्तुः स्वैरिता। २ पुरुषार्थिनी। ३ प्रण(?णी)तगोष्ठी । ४ निरंकुशा। ५ विदेशवासा।६ पुंश्चली। ७ पति(?त्यु)रीयांदोपाः। ४८) C १ भर्तुः स्वैरं विचरति । २ अन्यपुरुषसन्मुखं विलोकयति । ३ गोष्ठी करोति। ४ निरंकुशा। ५ यं यं पश्यति तस्य तस्य सन्मुखं विलोकयति। ६ गोष्ठी करोति(?)। ७ संसर्ग करोति। ८ ईर्षां करोति । ४८) D १ भर्तस्वैरिता। २ पुरुषार्थिनी। ३ प्रण(?णी)तगोष्टी । ४ निरंकुशा। ५ विदेशवासा। ६ सध्यानी समृत्युपघात:(?) । ७ पुंश्चलीसंसर्गजा। ८ दूकदोषा- (१ईयादोषा)श्चेति । 1 ABG अष्टौ स्त्रीणां अभिसारिकाणि । C अष्टौ अबलानां अविश्वासकारणानि । E स्त्रीणां अष्टौ अविश्वासकरणानि । * - सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ४८) E१ भर्तुः खैरं विचरति । २ अन्यपुरुषं सन्मुखं विलोकयति। ३ गोष्ठीं करोति। ४ निरंकुशं करोति । ५ यस्य तस्य सन्मुखं हसति। ६ उक्ता सती यथारुचिमनुकरोति । ७ अन्यं जल्पति। ८ खैरिणीसंसर्ग करोति । ९ पतिं वञ्चयित्वा रात्री परपुरुषगृहे गच्छति । ४८) F १ खैरगमा। २ परपुरुषसंमुखं विलोकयति । ३ उक्ता सती शपथान् करोति। ४ अलीकं जल्पति । ५ खैरिणीसंसर्ग विदधाति । ६ पतौ ईर्ष्या करोति । * ४९. अष्टौ नार्योऽगम्याः। खगोत्रजा। २ गुरुपत्नी । ३ राजपत्नी। ४ मित्रपत्नी। ५ वर्णाधिका । ६ अस्पर्शा । ७ प्रव्रजिता । ८ कुमारी । इति । १ ४९) A १ स्वगोत्रजा। २ राजपत्नी। ३ मित्रपत्नी। ४ वर्णाधिका। ५पूजिता। ६ कुमारी। ७ राजपत्नी। ४९) B १ स्वगोत्रजा । २ राजपत्नी । ३ मित्रपत्नी। ४ वर्णाधिका। ५अस्पृशा। ६ पूजिता। ७ कुमारी। ८ गुरु[प]त्नी। ४९) C १ स्वगोत्रजा । २ गुरुपत्नी। ३ मित्रपत्नी । ४ वयोधिका। ५ राजपत्नी। ६ अस्पर्शा। ७ दोषसंयुक्ता। ८ कुमारी चेति । ४९) D १ खगोत्रजा। २गुरुपत्नी। ३ राजपत्नी । ४ मित्रपत्नी। ५वर्णाधिका। ६ अस्पृशा। ७ प्रवजिता। ८ कुमारी चेति । ४९) F १ स्वगोत्रजा। २ गुरुपत्नी। ३ मित्रपत्नी । ४ राजपत्नी। ५ वर्णाधिकी- (?का)।६ अस्पर्शा। ७ प्रव्रज्या । ८ कुमारी चेति । ४९) E १ स्वगोत्रजा। २ [पर]पुरुषपत्नी। ३राजपत्नी। ४ मित्रपत्नी। ५ वर्णाधिका। ६ अस्पर्शा। ७ दोषसंयुक्ता। ८ कुमारिका। । ४९) G १ स्वगोत्रजा। २ राजपत्नी। ३ मित्रपत्नी। ४ वर्णाधिका । ५ पूजिता । ६ कुमारी। ७ राजपत्नी । - - . ** . ५०. अष्टविधो मूर्खः। १ निर्लज्जः। २ शठः। ३ क्लीबः। ४ निर्घणः । ५ व्यसनी । ६ अतिलोभी। ७ गर्वितः । ८ निष्ठुरः इति । ५०) C१ अप्रस्तावज्ञ । २ कुपंडित । ३ कुबुद्धि । ४ कुव्यसन । ५ स्वभृशी। ६ स्वमर्मप्रकाशी। ७ गर्वित। ८ विष्टर(?निष्ठुर)श्चेति । ५०) E १ निर्लजः । २ शठः । ३ क्लीवः । ४ निर्गुणः । ५ व्यसनी। ६ अतिभोगी। ७ गर्वितः। ८ निष्ठुरः। इति । ५०) F १ अप्रश्नावी(१)। २ कुपठितः। ३ कुबुद्धिः। ४ कुव्यसनी। ५ निष्ठुरः । ६ स्वमर्मप्रकाशकः। ७ अभिमानी। ८ असंवद्धप्रलापी चेति । - .
५३ . भवनं । सविवरण-वस्तुरनकोशः। ५१. चतुर्विंशतिविधं नागरिकवर्णनम् । १ नगरे संस्थानं । २ आसन्नोदकभवनं । ३ प्रच्छन्नमहानसं । ४ गुप्तकार्यचिकित्सास्थानं । ५ निकटे नेपथ्यमंडपः। ६ विभक्तं वास- ७ नेपथ्योपकारप्राचुर्य । ८ गृहोपकरणबाहुल्यं । ९ शयना- सनरम्यत्वं । १० वाञ्छितपरिजनः । ११ पार्श्वे प्रविशा(? वेश)- नस्थानं । १२ मध्ये स्नानपीठं। १३ प्रभाते व्यायामविधानं । १४ मध्याह्न भोजनविधानं । १५ नित्यमेव विद्याभ्यसनं । १६ कुलोचि- तविधिना वर्तनं । १७ प्रदोषे गीतादिविनोदविधानं । १८ निशायां खदारासुरतं । १९ कदाचिद्गोष्ठीरम्यत्वं । २० कदाचित् पात्रप्रेक्षणं । २१ कदाचिदुद्यानगमनं । २२ माल्यादिभोगकथनं । ऋतुसमुचितोपभोगः। २४ विद्वज्जनसंसर्गः। २३ सदैव ५१) A १ नगरे संस्थानं। २ आसन्नोदकभवनं। ३प्रच्छन्नमहानसं। ४गुप्तकार्य- चिकित्सास्थानं । ५ निकटे नेपथ्यमंडपः। ६ विभकं वासभवनं । ७ नेपथ्योपकारप्राचुर्य । ८ गृहोपकरणवाहुल्यं । ९ शयनासनरम्यत्वं । १० वाञ्छितपरिजनः पार्था प्रविशा(?वेश)न- स्थानं । ११ मध्ये स्नानपीठं। १२ प्रभाते व्यायामविधानं । १३ मध्याह्न भोजन विधानं । १४ नित्यमेव विद्याभ्यसनं । १५ कुलोचितविधिना वर्तनं । १६ प्रदोषे गीतादिविनोद- विधानं। १७ निशायां स्वदारासुरतं। १८ कदाचिद्गोष्ठीरम्यत्वं । १९ कदाचित्पात्रप्रेक्षणं । २० कदाचिद्वि(?दु)द्यानवाव(?वन)गमनं । ५१) B १ नगरे संस्थानं। २आसन्नो द]कभवनं। ३प्रच्छन्नमहानसं। ४ गुप्तकार्य- चिकित्सास्थानं । ५ निकटे नेपथ्यमंडपः । ६ विभकं वासभवनं । ७ नेपथ्योपकारप्राचुर्य । ८ गृहोपकरणवाहुल्यं । ९ शय्यासनरम्यत्वं। १० वाञ्छितपरिजनपार्श्वे प्रविशावेश)नस्थान। ११ मध्ये स्नानपीठं। १२ प्रभाते व्यायामविधानं । १३ मध्याहे भोजनविधानं । १४ नित्यमेव विद्याभ्यसनं । १५ फुलोचितविधिना वर्त्तनं । १६ प्रदोषे गीतादिविनोद- विधानं । १७ निशायां स्वदारासुरतं । १८ कदाचित् गोष्ठीरम्यत्वं । १९ कदाचित् पात्रप्रेक्षणं । २० कदाचित् वि(?उ)द्यानवन(?ना)वगमनं। २१ सदैव ऋतुसमुचितोपभोगः । ५१) C१ नगरे संस्थानं । २ आसनो(?नो)दकभवनं । ३गुप्तकाचिंता । ४ स्थापनीय पार्श्वपानीयं । ५ सुप्तावेदकं । ६ पृथक् रंधनकं । ७ नेपथ्याग्रहणं । ८ नेपथ्योपप्रकरणं । ९ प्राचुर्यगृहोपकरणं । १० वाहुल्यं रम्यत्वं । ११ माल्यादि भोगभव्यत्वं । १२ गुप्तस्थानं । १३ प्रमाते व्यायामविधान । १४ मध्याह्ने भोजनविधानं । १५ डाछन्नप्रकारस्थान(3) १६ नित्यविद्याभ्यसनं । १७ कुलोचित मार्गे वर्तनीयं । १८ प्रदोषे गीतविनोद । 1 ABC वर्तनं। १ सविवरण-चस्तुरत्नकोशः। १९ निशायां सुरतोपचारः। २० कदाचि[दु]यानगमनं। २१ कदाचित् क्षेत्रनिरीक्षणं । २२ सदैव कर्मसूचितो विभाग। २३ पुत्रपौत्रेषु हेतुकरणं । ' ५१) D १ यथा नगरे स्थान । २ आसन्नो द]कभवनं । ३ सवता(?)प्रच्छादनं । ४ महासनं । ५ परसेव्या गृहमुत्पत्तिच्छाया मित्राणां स्थानस्फोट(?)। ६ नव विश्वमंडपं । ७ विरक्तरक्तवासभवः । ८ नेपथ्यैवकरणं । ९ प्रासार्यगृहे(?) उपकरणवाहुल्यं । १० शय्यासनरम्यत्वं । ११ माल्यादिभोगकथनं । १२ वांछितमित्रजनपार्श्व आचमन- स्थानं । १३ अंतरे स्थानस्थानं । १४ प्रभाते व्यायामविधानं । १५ मध्ये भोजनं विधानं । १६ नित्यमेव विद्याभ्यसनं । १७ कुलोचितव्यवहरणं । १८ प्रदोषांते गीतविधानं । १९ निशायां सुरतोपचरणं । २० कदाचिद्गोष्ठीरम्य त्वं]। २१ न(१) कदाचित्पात्रप्रेक्षणं । २२ कदाचिदुद्याने गमनं चेति । ५१) E १ आसन्नोदकाभुवनांतसुप्तं। २ कार्यचिंतास्थापनं। ३ पार्श्वे पानीयरंधनं । ४ विभक्तं नेपथ्यगृहं । ५ नेपथ्योपकरणं। ६प्राचुर्य गृहोपकरणं । ७ प्राचुर्य गृहप्रकरण- वाहुल्यं । ८ शास्त्रवाहुल्यं । ९ आसनबाहुल्यं । १० रम्यत्वमौल्यादिभागभव्यत्वं । ११ गुप्तं स्थानं स्यात् । १२ प्रभाते नियमविधानं । १३ मध्याह्न भोजनविधानं । १४ प्रच्छन्नभंडारस्थानं । १५ नित्यं विद्याभ्यसनं । १६ कुलोचितेन मार्गेण वर्तनीयं । १७ प्रदोषे गीतविनोदः। १८ निशायां सुरतोपचारः। १९ कदाचिदुद्यानगमनं । २० कदाचित् क्षेत्रनिरीक्षणं । २१ सदैव देवगुरुभक्तिः कार्या । २२ स्वजनपालनं । २३ सदैव समुचितवित्तविभागः। ५१) F १ आसन्नोदुःक(?दक)भवनं । २ गुप्तकार्यचिन्तास्थापनं। ३ पार्श्वे पानीयस्य स्थाने रन्धनकं । ४ विमुक्तने मध्यगृहं । ५ नेपथ्योपकरणप्राचुर्य । ६ गृहोपकरणवाहुल्यं । ७ रस्यत्वं। ८ माल्यादिभोगभावितत्वं । ९ मालादिभोमभव्यत्वं । १० गुप्तस्थानं स्थानस्य। ११ प्रभाते आयामविधानं । १२ मध्याह्न भोजनविधानं । १३ प्रच्छन्न भण्डारस्थानं । १४ नित्यं विद्याभ्यसनं। १५ कुलोचितेन मार्गेण प्रवर्तनीय। १६प्रदोषे गीतविनोदाः। १७ निशान्ते सुरतोपचारः। १८ कदाचिदुद्यानगमनं। १९ कदाचित्क्षेत्र- निरीक्षणं । २० विद्वजनसंसर्गः। २१ कुसंगपरित्यागः । २२ धर्मश्रद्धा। २३ जीवरक्षा । २४ सदैव समुचितोपक्रिया । ५१) G १ नगरे संस्थानं। २ आसन्नोदकभवनं । ३ प्रच्छन्नमहानसं । ४ गुप्तकार्य- चिकित्सास्थानं । ५ निकटे नेपथ्यमंडप । ६ विभक्तं वासभवनं । ७ नेपथ्योपकारप्राचुर्य । ८ गृहोपकरणबाहुल्यं । ९ शयनासनरम्यत्वं । १० वाञ्छितपरिजनः। ११ पार्वे प्रविशा(?वेश)नस्थान । १२ मध्ये स्नानपीठं । १३ प्रभाते व्यायामविधानं। १४ मध्याह्ने भोजन विधान। १५ नित्यमेव विद्याभ्यसनं। १६ कुलोचितविधिना वर्त्तनं। १७ प्रदोषे गीतादिविनोद विधानं । १८ निशायां स्वदारासुरतं । १९ कदाचिद्गोष्ठीरम्यत्वं । २० कदा- चित्पात्रप्रेक्षणं । २१ कदाचिद्वि(?)द्यानवाव(?वन)गमन । २२ असम्पूर्णलक्षणावयव २३ निर्लक्षण । ५२. 'त्रिविधं रूपम् । १असंपूर्णलक्षणावयवं। २ संपूर्णलक्षणावयवं। ३ निर्लक्षणाक्यवं । इति। 1 A. ommts त्रिविधं रूपं । † These ought to be in the following section सविवरण-वस्तुरनकोशः। ५२) A १ असंपूर्णलक्षणावयवं। २ निर्लक्षण । ५२) B १ संपूर्णलक्षणावयवं। २ असंपूर्णलक्षणावयवं। ३ निर्लक्षण । ५२) C १ संपूर्णावयवं । २ निर्लक्षणावयवं । ३ असंपूर्णलक्षणावयवं । ५२) D १ संपूर्णलक्षणावयवं चेति । ५२) E १ संपूर्णलक्षणावयवं। २ लक्षणावयवं । ३ असंपूर्णलक्षणावयवं । ५२) G has given no Vivarana ( see foot note p. 54) ५३. त्रिविधं वरूपम् । १ मुग्धस्वभावं । २ चतुरखभावं । मुग्धचतुरखभावं । इति । ५३) AB १ मुग्धस्वभाव । २ मुखर। ३ चतुर । ५३) C १ मुग्धस्वभावं। २ मुग्धचतुरस्वभावं । ३ चतुरस्वभावं । ५३) D १ मुग्धस्वभावं। २ सुसद्भावं। ३ चतुरस्वभावश्चेति । ५३) E १ मुग्धस्वभावं। २ मुग्धस्वभावं। ३ मुग्धचतुरस्वभावं चेति । ५३) F १ मुग्धस्वभावं। २ मुग्धचतुरस्वभावं। ३ चतुरस्वभावं । ५३) G १ मुग्धस्वभाव । २ मुरख। ३ चतुर ५४. द्वादशविधः प्रमदोपचारः । १ रूपस्विनीनां रम्योपचारेण । २ भीरूणामाश्वासनेन । ३ चपलानां गांभीर्येण । ४ पंडितानां सत्येन। ५ प्रज्ञावता(?तीनां) कलाभिः । ६ शृङ्गारिणीनां सुवेषतया । ७ विनोदशिलानां क्रीडनेन । ८ हीनसत्त्वानां कारुण्येन । ९ शठखभावानां शाठ्येन । १० निर्विकल्पानां सरलखभावेन । ११ बालानां भक्षप्रदानेन । १२ विदग्धानां कुकुमो( ? कुकभो )पचारेण । इति । .. ५४) A. १ रूपस्विनी रम्योपचारेण । २ भीरूमाश्वानयेन। ३ चपलां गांभीर्येण । ४ पंडितानां सत्येन । ५ प्रशावतां कलाभिः। ६ शृङ्गारिणा सुवेषतया । ७ विनोदशीला क्रीडनेन। ८ हीनसत्यां कारुण्येन । ९ शठस्वभावानां शाम्येन । १० निर्विकल्पां सुकुमारप्रयोगेन । ११ बालानां भक्षप्रदानेन । १२ धूर्तानां शाव्येन । 1 AB अथ द्वादशविधप्रमोदोपचारः। C द्वादश प्रमोदोपचारा। D द्वादशविधः प्रमोदोपचारः।। E अथ द्वादशविधः प्रमोदोपचारः। F द्वादशविधः प्रमदानामुपचारः।, G अथ द्वादशविधप्रमादोपचारः।
५६ सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ५४) B १ रूपस्विनां रम्योपचारेण । २ भीरूणामाश्वासनेन । ३ चपलानां गांभीर्येण । ४ पंडिता]नां सत्येन । ५ प्रज्ञावतां कलाभिः। ६ शृङ्गारिणां सुवेषतया । ७ विनोद- शीलानां क्रीडनेन। ८ हीनसत्त्वानां कारुण्येन । ९ शठस्वभावानां शाव्येन । १० निर्विकल्पना सुकुमारप्रयोगेन। ११ वालानां भक्षप्रदानेन । ११ वालानां भक्षप्रदानेन । १२ धूर्तानां शाव्येन । ५४) C १ रूपवती रम्योपचारेण । २ मीरूणामविश्वासनेन । ३ चपलानां गांभीर्येण । ४ पंडितानां सखीत्वेन । ५ वालानां भक्षप्रदानेन । ६ प्रजावतीनां कलाभिः । ७ शृङ्गारिणीनां सुवेषेण । ८ विनोदिनीनां सुकीडनेन । ९ हीनसत्त्वानां कारुण्येन । १० शठस्वभावानां घातेन। ११ निर्विकल्पानां सरलस्वभावेन । १२क्षुधितानांभोजनदानेन । ५४) D१ सुरूपिणी । २ राजोपचारेण । ३ मीसमां(?भीरूणामा)श्वासनेन । ४ चपलां गांभीर्येण । ५ पंडितां भोजन्येन । ६ धर्माण्यं कारुण्येन । ७ प्रज्ञावती। ८ कलाभिः शङ्गारिणी । ९ सुवेषतया विनोदिनी । १० क्रीडनेन । ११ विदग्धानां कुकुभोपचारेण चेति । ५४) E १ रूपवती रम्योपचारेण । २ भीरोः आश्वासनेन । ३ चपला गांभीर्येण । ४ पंडिता सत्येन । ५ वाला भक्षप्रदानेन । ६ प्रज्ञावती कलाभिः । ७ शृङ्गारिणी सुवेपतया । ८ विनोदशीला क्रीडनेन । ९ दीनसत्वा कारुण्येन । १० शत(?ठ)स्वभावशाट्येन । ११ निर्विकल्पा सरलस्वभावेन । १२ सुकुमारा सुकुमारोपचारेण । ५४) F १ रूपवती रम्योपचारेण । २ भीरोः आश्वासनेन । ३ चपलानां गांभीर्येण । ४ पंडितानां ना (१)सत्येन । ५ वाला भक्ष्यप्रदानेन । ६ प्रजावती कलनैः । ७ शृङ्गारिणी- रन्यवेपतया। ८ विनोदशीला क्रीडनेन । ९ दीनसत्त्वां क्रीडनेन । १० कारुण्येन वा। ११ शठभावा घातेन । १२ निर्विकल्पां सरलस्वभावेन । १३ सुवामां(?)आरोपचारेण । ५४) G १ रूपस्विनी रम्योपचारेण । २ भीरुमाश्वानयनेन । ३ चपलां गांभीर्येण । ४ पंडितानां सत्येन । ५ प्रज्ञावतां कलाभिः। ६ शृङ्गारिणां सुवेपतया । ७ विनोदशीलं क्रीडनेन । ८ हीनसत्यां कारुण्येन । ९ शठस्वभावानां शाट्येन । १० निर्विकल्पां सुकुमार- प्रयोगेन । ११ वालानां भक्षप्रदानेन । १२ धूर्तानां शाव्येन । ५५. पञ्चविधः परिचयः। १ प्रसिद्धिख्यापनं। २ दर्शनेनावर्जनं । ३ संभाषणमाधुर्यं । ४ वाञ्छितोपचारप्रयोजनं । ५ विकारसूचनं । इति । ५५) C१ प्रसिद्धस्थापनं । २ दर्शनेनावर्जनं । ३ संभापणमाधुर्य । ४ विकारशोधनं । ५ वाञ्छितोपचारप्रयोजनं । ५५) D १ सीक्षापनः । २ दर्शनावर्जनः। ३ संभाषणमाधुर्यया । ४ सविकारसुवचने । ५ कथितापचारप्रयोजनं चेति । ५५) F १ प्रसिद्धस्यापनं । २ दर्शनेनावर्जनं। ३मधुरवचःसंभाषणं । ४ आतिथ्यकरणं । ५ वाञ्छितोपचारप्रयुं(?यो)जनं चेति । ५५) १ प्रसिद्धरयापनं। २ दर्शनेनावर्जनं। ३ मधुरवचनसंभाषणं । ४ आतिथ्यकरणं । ५ वाञ्छितोपचारपूजनं । - I ABEG अथ पंच , C पंचविधपरिचय ।
सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ५६. दश पुरुषाः स्त्रीणामनिष्टा भवन्ति । १ कुरूपः। २ निर्लज्जः । ३ अभिमानी । ४ असंबद्धप्रलापी । ५ सङ्कुचितशायी । ६ निष्ठुरः । ७ कृपणः । ८ शौचहीनः। ९ मूर्खः । १० क्रोधनः । इति । ५६) १ कुरूपा । २ निर्लज्जा। ३ अभिमानयुक्ता। ४ अनंतभाषिण। ५ निरंकुशा। ६ निठुरा । ७ कृपणा। ८ अशौचरता। ९ हीना। १० भूर्खा । ५६) D १ कुरूपः । २ निर्लजः । ३ अभिमानी । ४ असंबद्धप्रलापी । ५संकुचितशायी। ६ निष्ठुरः। ७ कृपणः। ८ शौचहीनः। ९ मूर्खश्चेति । ५६) १ कुरूपः। २ निर्लजः। ३ नित्यरोगी। ४ अभिमानी। ५ असंबद्धप्रलापी। ६संकुचितशायी। ७ निष्ठुरः। ८ कृपणः। ९शौचहीनः। १० क्रोधी। ११ रूपभागी। १२ कर्णदुर्वलः। १३ मूर्खश्चेति । ५६) F १ कुरूप। २ निर्लज। ३ नित्ययोगी। ४ अभिमानी। ५ असंबद्धप्रलापी। ६ संकुचितशायी। ७ निष्ठुर । ८ कृपण । ९ शौचहीन । १० क्रोधी। ११ विरूपभाषी। १२ कर्णदुर्वल । मूर्ख। चेति । 1 ५७. देशभिः कारणैः स्त्रियो विरज्यन्ते १ अज्ञानता। २ अभिमानावलेपता । ३ निष्ठुरता । ४ दरिद्रता । ५ अंतिप्रवासता । ६ क्रूरव्यसनता । ७ भोगहीनता । ८ अतिप्रसंगता। ९ सौभाग्यहीनता। १० अनुचितता । इति । ५७) C १ अज्ञानता। २ अभिमानता। ३ प्रतापिता। ४ निष्ठुरता। ५ अतिप्रवा- सता । ६ अतिप्रसंगता। ७ सौभाग्यहीनता। ८ अनौचितं । ९ निर्दयत्वं। १० अप्रीतिता। ५७) D १ अक्षमता। २ अभिमानता। ३ अवलेपता । ४ निष्ठुरता। ५ दरिद्रता। ६ सौभाग्यहीनता। ७ अतिअसंगता। ८ अतिअनौचित्यता। ९ अतिशता। ११ भावुका चेति। ५७) E १ अज्ञानता। २ अभिमानता। ३ निष्ठुरता । ४ दरिद्रिता। ५ सौभाग्य- हीनता । ६ अरूपता । ७ अनौचित्यता । ८ दीनहीनता । ९ निर्दिनी(?)। १० वार्धक्यता। ११ विरूपभाषिता। १२ अभावश्चेति । ५७) F १ अज्ञानता। २ अभिमानता। ३ निष्ठुरता । ३ निष्ठुरता। ४ दरिद्रता। ५ सौभाग्य- हीनता । ६ अरूपता । ७.अनौचित्यता । ८ दानहीनता। ९ निवार्यता। '१० काठवाक्रता(?)। ११ विरूपभाषिता। १२ अभावश्चेति । 1 E द्वादशपुरुषाः स्त्रीणां अनिष्टाः। 2 C वदन्ति । 3 C दशभिस्त्रियो विरज्यंते ।। F दशभिःप्रकारैः स्त्रियो विरज्यन्ते । 4 A B G अतिप्रवसता। 5 A BG अनौचित्यता। ८ ५८ सविवरण-वस्तुरनकोशः। ५८. 'त्रिभिः कारणैः कामिन्यः संबध्यन्ते । १ अर्थतः। २ कामतः। ३ सुकुमारोपचारतः । इति । . ५८) A B G १ अर्थतः। २ कामतः। ३ कुमारोपचारतः। ५८ ) C १ अर्थकामतः। २ सुकुमारोपचारतः। ३ संभोगकामतः । ५८) D १ अर्थतः कामरतः। २ सुकुमारः। ३ उपचारश्चेति । ५८) E १ अदानतः। २ कामतः। ३ सुकुमालवचनाद्युपचारतः। ५८) १ अर्थदानत । २ कामत । ३ वचनाद्यप्रचारत । चेति । १ 7 ** ५९. सप्तविधाः कामुकानां सुरतारम्भाः । १ क्रीडापात्राणि । २ भोजनादि । ४ धूपनानि । ५ ताम्बूलादीनि । ७ हास्यादि(?नि) मर्माणि । इति । ३ उपचारविलेपनानि । ६ पुष्पादिमाल्यानि । ४ 4 ५९) C १ पुष्पमालादिदानं। २ वस्त्रालंकारदानं। ३ आश्वासनं। ४ सुस्वाद्भक्ष- भोज्यं । ५ आलिङ्गनादिदानं। ६ अशेषकथा प्रस्ताव । ७ विनोदहास्यकरणं । ५९) D१ क्रीडापात्राणि । २ भोजनाद्युपचारेण विलेपनानि ।, ३ धूपनानि । ४ तांबूलकानि । ५पुष्पमाल्यादि । ६ हास्यादि । ७ रम्यादि। चेति ५२) E १ क्रीडापात्राणि । २ भोजनाचुपचारविलेपनानि । ३ तांबूलदा(?लादी)नि । ४ पुष्पादिमाल्यानि । ५ वस्त्रालंकारदानानि । ६ हास्याष्णिर्मरतानि(?दि मर्माणि)। ५९) F१ क्रीडनेन । २ नाट्यनाथुपचारेण । ३ विलेपनेन। ४ तांबूलदानेन । ५ पुष्पादिभोगेन । ६ वस्त्रालंकरणेन । ७ अर्थप्रदानेन । ५९) G१ क्रीडापात्राणि । २ भोजनाद्युपचार। ३ विलेपनानि । ४ धूपनानि । ५ ताम्बूलादिना। ६ पुष्पादिमाल्यानि । ७ हास्यादिमर्माणि । ६० अष्टविधं विदग्धानां सुरतम् । १ आलिङ्गनं । २ चुम्बनं । ३ धावनं । ४ केशधारणं। ५ वराङ्गशोधनं । ६ सीत्कारादिमोचनं । ७ नखस्पर्शनं । ८ मृदुकुट्टनं । इति । 1 A B G-त्रिभिः कामिन्यः संवध्यते। त्रिभिः संवध्यते ।, D त्रिभिः कारणैः कामिनीनां संवध्यते ।। E त्रिभिः प्रकारैः कामिन्यः संवध्यते। 2 ABG सप्तविधका- मुकानां सुरतारंभः। 3 ABG अथाष्टविधं विदग्धानां सुरतं । C अष्टविधं सुरतं ।। D अष्टविधं विदग्धानां सुरतावस्थानं । 1 + सविवरण-चस्तुरत्नकोशः। ५९ ६०) AB १ आलिङ्गनं । २ चुंबनं। ३ धावनं। ४ केशाधारणं । ५रंग(?वरांग) संवेशनं। ६ शरीरादिकूजनं। ७ नखस्पर्शनं। ८ कुट्टनं । ६०) १ आलिंगनं । २ चुंबनं । ३ धावनं । ४ कचप्रधारणं । ५ वर(रा)गशोधनं । ६ सीत्कृतादिमोचनं । ७ नखस्पर्शनं । ८ मृदुकुट्टनं । ६०) D १ आलिंगनं। २ चुंबनं। ३ धावनं। ४ केशोभा(?द्धा)रणं । ५ रागादिव्यसन। ६ सीत्कारादिमुंचनं। ७ नखस्पर्शनं । ७ नखस्पर्शनं। ८ मृदुकुट्टनं। चेति । ६०) E १ आलिंगनं। २ चुंबनं। ३ शयनं । ४ केशधारणं । ५ वरांगशोधनं । ६ सीत्कृतादिमोचनं। ७ नखस्पर्शनं । ८ मृदुकुट्टनं । ६०) F १ आलिङ्गनं। २ चुंबनं। ३ धावनं । ४ केशग्रहणं। ५ वराङ्गशोधनं । ६ शीत्कृतकरणं । ७ नखस्पर्शनं। ८ मूठकुट्टनं। चेति ।' ६०) G १ आलिंगनं । २ चुंबनं । ३ धावनं। ४ कन्ता(?कुन्तला)धारणं । ५ रन(?वराङ्ग)संवेशनं। ६ शरीरादिकूजनं । ७ नखस्पर्शनं । ८ कुट्टनं ।। . * ६१. नवविधं सुरतावसानम् । १ वस्त्रादिसंयमनं । २ पार्श्व आचमनं । ३ ताम्बूलादिग्रहणं । ४ फलादिभक्षणं । ५ पानभोज्यादिविधानं । ६ क्रीडापात्रप्रवेशनं । ७ सुभाषितजल्पनं । ८ सानुरागप्रेक्षणं । ९ मनोवाञ्छितविनोदः। इति । ६१) C१ वस्त्रादिसंयमनं। २ पार्श्वचालनं । ३ तांबूलादिग्रहणं । ४ अनुरागपोषणं । ५ वांछितविनोद। ६१) D १ पार्श्व आचमनं । २ तांबूलादिग्रहणं ।। ३ इक्षुरसादिभक्षण। '४ पानभोज्यादिविधानं। ५ क्रीडापात्रप्रवेशनं । ६ सुभाषितजल्पनं । ७ अनुरागपोषणं। ८ संतोषवांछितं । ९ विनोदा श्चेति । ६१) । १ वस्त्रादिसंयमनं । २ पार्श्वविवर्तनं। ३ तांबूलादिग्रहणं । ४ फलादिभक्षणं । ५ पानभोजन विधानं । ६क्रीडापात्रप्रवेशनं । ७ सुभाषितभाषणं । ८ अनुगोषण(?अनुराग- पोषणं)। ९ मनोवांछितविनोदाश्चेति । ६१) F१ वस्त्रादिसंयमनं । २ पाय वाऽऽचमनं । ३ तांबूलादिभक्षणं । ४ फलादिभक्षणं । ५पानभोजनादिविधानं। ६ क्रीडापात्रप्रवेशनं । ७ सुभाषितजननं । ८ अनुरागपोषणं। ९ मनोवाञ्छितविनोदः। चेति । . ६२. नव शयनगुणाः । १ अनग्नशायी। २ प्रसारितगात्रशायी। ३ मृदुगात्रशायी। 1 A B G अथ नवविधं सुरतावसानं ।, D नवविधं सुरतावस्थानं ।
सविवरण-वस्तुरनकोशः। ४ सौम्यावयवशायी । ५ अनुशयनं । ६ अभूमिशायी। ७ अशब्दशायी। ८ सन्मुखशायी। ९ वामपार्श्वशायी । इति । ६२) A B १ अनग्नशायी । २ मृदुगात्रशायी । ३ प्रसारितगात्रशायी । ४ सौम्यावयव । ५ अनुशयन । ६ नात्यर्थानप्रात(?)। ७ अशब्द । ८ सन्मुख । ६२) C १ अनन्न । २ प्रसादितगात्र। ३ सौम्यावयव । ४ सन्मुखशायी। ५ अशब्दशायी । ६ अभूमिशायी। ७ संबद्धशायी । ८ मृदुपत्रशायी । ९ नात्यर्थशायी। ६२) D १ अनग्नशायी। २ प्रसारिगात्रशायी। ३ अन्योन्यशायी। ४ सौम्यशायी। ५ असन्मुखशायी। ६ असंबद्धशायी। ७ सन्मुखशायी । चेति। ६२) १ अनग्नशायी । २ प्रसारितगात्रशायी । ३ सौम्यावयवशायी । ४संबंधशायी। ५ सन्मुखशायी। ६ अनुशयनाद्यर्थः । ७ अशब्दशायी। ८ वामपार्श्वशायी। ९ उक्तानि(?त्तान)शायी। ६२) F १ अनुशायी। २ संमुखशायी। ३ प्रसारितगात्रशायी। ४ सौम्यावयव- शायी। ५ संवन्धशायी। ६ वामपार्श्वशायी। ७ अवि(?)स्तनशायी। ८ निश्चलाङ्ग- शायी। चेति । ६२) G १ अनग्नशायी। २ मृदुगात्रशायी। ३ प्रसारितगात्रशायी । ४ सौम्यावयव । ५ अनुशयन । ६ नात्यर्थ(१)। ७ नमात(१)। ७ नप्रात(१)। ८ अशब्द । ९ सन्मुख । ६ १० शौचे ६३. दशविधः पार्थिवानां प्रमोदः। १ ज्ञाने। २ दाने । ३ बले। ४ राज्ये । ५ विनोदे । ६ वैरिनिग्रहे। ७ शौर्ये । ८ धर्मे । ९ सुखे । प्रमोदो दशधा मतः॥ ६३) C ज्ञाने दाने जये रावे(? ज्ये) विनोदे वैरिविग्रहे । शौर्ये धर्म च सौख्ये च प्रमोदो दशधा मत()॥ ६३) D ज्ञाने दाने वले राज्ये विनोदे वैरविग्रहे । सूर्ये धर्म तपे सौख्ये प्रमोदो दशधा मतः॥ ६३) E ज्ञानेन । दानेन । बलेन । सुराज्येन । विनोदेन । वैरिनिग्रहेण । शौर्येण । धर्मेण । तपसा । सौख्येण । प्रमोदो दशधा मत । ६३) F १ शाने । २दाने। ३ बले। ४ राज्ये। ५ विनोदे। ६ वैरनिग्रहे। ७ शौर्य। ८ धर्म। ९जये। ९ जये। १० मौष्ये(?सौख्ये)। प्रमोदो दशधा मतः। 1 A B अथ दशविधः ।, C दविधपार्थिवानां प्रमोद । D दशविधः प्रमोदः। F दशविधप्रमोदविचारः। 2 B वैरनिग्रहे।
सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ६४. चतुर्विधः प्रबोधः। १ बालसंस्कारप्रबोधः। २ शास्त्रप्रबोधः । तत्त्वनिश्चयप्रबोधः । इति । ३ प्रज्ञाप्रबोधः। ६४) B १ शास्त्रप्रबोधः। २ प्रज्ञाप्रवोधः। ३ तत्त्वनिश्चयप्रवोधः । ६४) १ शास्त्र अवोध्य। २ प्रज्ञानप्रबोध। ३ तत्त्वप्रस्वप्नप्रवोधश्चेति । ६४) D १ वालानां संस्कारप्रवोधः । २ काव्यप्रवोधः। ३ ज्ञानप्रबोधः। ४ तत्त्वनिर्णयप्रवोधः। ६४) E १ बालसंयमनं। २ वालसंस्कारप्रवोधः। ३शास्त्रप्रवोधः। ४ प्रज्ञाप्रबोधः। ५ तत्त्वनिश्चयप्रबोधः। ६४) F १ तालसंस्कारप्रवोध। २ शास्त्रप्रवोध। ३ प्रज्ञाप्रवोध। ४ वचननिश्चय- प्रवोध। * ६५. चतुर्विधा बुद्धिः। १ स्वभावजाता ४ पारिणामिकी । इति । २ श्रुतोत्पादिता । ३ कर्मजाता। ६५) C१ स्वभावजा। २ उत्पादिता। ३ परिणामकी। ४ कर्मजाश्चेति । ६५) D १ उत्पत्तिकी। २ वैनयिकी। ३ कार्मजा। •४ पारिणामिकी चेति । ६५) । १ स्वभावजा। २ उत्पादिका। ३ परिणामिका । ४ कर्मजा चेति । ६५) F १ स्वभावजा। २ श्रुतोत्पन्ना। ३ उत्पातिकी। ४ परिणामकी चेति । ६६. अष्टौं बुद्धिगुणाः। शुश्रूषा श्रवणं चैव ग्रहणं धारणं तथा । ऊहापोहोऽर्थविज्ञानं तत्त्वज्ञानं च धीगुणाः । ६६) C १ सुश्रूषा । २श्रवणं। ३.ग्रहणं । ४ दर्शनं । ४ दर्शनं। ५धारणं। ६अर्थविज्ञानं । ७ धर्मविज्ञानं। तत्त्वविज्ञानं । ६६) D १ स्वरूपग्रहणं । २ ग्रहणं । ३ धारणं। ४विज्ञानं। ५ऊहनं। ६अपोहनं। ७ तत्त्वज्ञानं चेति। ६६) १ शुश्रूषा । २श्रवणं। ३ ग्रहणं । ४ धारणं । ५ऊह। ६ अपोह। ७ विज्ञानं । ८ तत्त्वज्ञानं चेति। ६६) F१ शुश्रूषा। २ श्रवणं। ३ग्रहणं । ४ धारणं। ६ अपोह। ७ अर्थविज्ञानं। ८ वचनशानं चेति । 1 C चतुर्विध आयोध्य, चतुर्विधः बोधः। 2 G तत्त्वधानं ।।
६३ सविवरण-चस्तुरतकोशः। ६७. चतुर्विधं गान्धर्वम् । १ अवधानगतं(?)। २ खरगतं । ३ पदगतं । ४ तालगतं । इति । ६७) CEF १ स्वरगतं । २ पदगतं । ३ तालगतं । २ पदगतं। ३ तालगतं । ४ अवधानगतं । ६७) D १ स्वरगतं । २ पदगतं । ३ अवधानं चेति । ६८. त्रिविधं गीतम् । १ महागीतं । २ अनुगीतं । ३ उपगीतं । इति । १ ६८) A B G १ महागीतं। २ अनुगीतं । ३ अपगीतं । ६८) D १ उपांगीतं । २ महागीतं । ३ अनुगीतं चेति । @c) E gives only faoi fra but does not mention the names. ६८) F१ महागीतं । २ उपगीतं । ३ अनुगीतं । ६९. षट्रत्रिंशद्गीतगुणाः । १ सुवरं । २ सुतालं । ३ सुपदं । ४ शुद्ध। ५ ललितं ६ सुबन्धं । ७ सुप्रमेयं । ८ सुरागं । ९ सुरसं । १० समं । ११ सदर्थ । १२ सुग्रहं । १३ सुश्लिष्टं । १४ क्रमस्थं । १५ सुसमयकं ( ? सुयमकं )। १६ सुवर्ण । १७ संपूर्ण । १८ सालंकारं। १९ सुभाषाढ्यं । २० सुगन्धस्थं ( ? सुगंभीरं )। २१ व्युत्पन्नं । २२ मधुरं । २३ स्फुटं । २४ सुप्रभं । २५ प्रसन्नं । २६ कंपितं । २७ समजातं । २८ रौद्रगीतं । २९ ओजःसगतं (? ओजःसंगतं) । ३० द्रुतं । ३१ मुखस्थापकं । ३२ हतांशं। ३३ विलंम्बितं । ३४ अग्राम्यं । । ३५ मध्यं । ३६ सुप्रमाणं । इति । ६९) A १ सुस्वरं। २ सुतालं। ३ सुपदं । ४ शुद्धं । ५ ललितं। .६ सुबंधं। ७ सुप्रमेयं । ८ सुरागं । ९ सुरसं। १० समं । ११ सदध(?र्थ)। १२ सुग्रहं । १३ श्लिष्टं । १४ क्रमस्थं। १५ सुसमयकं(?सुयमकं)। १६ सुवर्ण । १७ सुरक्त। १८ सुसंपूर्ण। १९ सालंकारं । २० सुभापाद्यं । २१ सुगंधस्थं। २२ व्युत्पन्न। २३ मधुरं। 1 F षट्त्रिंशद् गुणाः। ---- । इति। ६३ सविवरण-वस्तुरनकोशः। २४ स्फुटं। २५ सुप्रभं । २६ प्रसन्नं। २७ समजातं। २८ रौद्रगीतं । २९ ओजः संगतं । ३० दर्शनस्थितं । ३१ सुखस्थापकं। ३२ हतांशं। ३३ विभ(?भा)पितं। ३४ मध्यं प्रमाणं। ३५ कवित्कंपितं। ६९) B १ सुस्वरं। २ सुतालं । ३ सुपदं । ४ शुद्धं । ५ ललितं। ६ सुबंध। ७ सुप्रमेयं । ८ सुरागं। ९ सुरसं। १० समं । ११ सदाधं(?सदर्थ)। १२ सुग्रहं । १३ लिटं। १४ क्रसस्थं । १५ सुमय(?यम)क। १६ सुवर्ण। १७ सुरक्तं। १८ संपूर्ण । १९ सालंकारं। २० सुभाषाढ्यं । २१ सुगंधस्थं। २२ व्युत्पन्न । २३ मधुरं। २४ स्फुटं। २५ सुप्रभं। २६ प्रसन्नं। २७ अग्राम्यं । २८ कवित्कंपितं । २९ समजातं । ३० रौद्रगीतं । ३१ ओजःसंगत । ३२ दर्शनस्थितं । ३३ सुखस्थापकं । ३४ हतंसं(?हतांशं)। ३५ विल(?भा)षितं । ३६ मध्यं प्रमाण । ६९) C १ सुस्वरं । २ सुपदं । ३ शुद्धं । ४ ललितं । ५ सुसंबंध । ६ सुजियं(?)। ७ सुरागं। ८ सुरसं। ९ समं। १० विषमं। ११ सदर्प(?थै)। १२ सुग्रहं। १३ सुश्लिष्टं। १४ क्रमस्थं। १५ यमकं । १६ सुवर्ण। १७ सुरक्तं । १८ सालंकारं। १९ सुभाषाप्पं(?ढ्यं)। २० सुसंधिस्थं । २१ सु(?व्युत्पत्तिकं । ' २२ मधुरं । २३ स्फुटं । २४ प्रसन्नं । २५ अग्रण्य(ग्राम्यं)। २६ सुकवित्वं । २७ विचारवतां(?)। २८ सुखस्थितं । २९ विलंवितं। ३० द्रुतं । ३१ मध्यं । ३२ उत्क्रीयमाणं। ३३ सुवाद्यं । ३४ सुकलं । ३५ सुनृत्यं । ६९) D १ सुस्वरं। २ सुतालं। ३ सुपदं । ४ शुद्धं । ५ ललितं । ६ सुप्रबद्धं । ७ सुरागं । ८ सुरम्यं । ९ सम। १० सदर्ध(थ)। ११ सुग्रहं । १२ दृष्टं। १३ सुकाव्यं । १४ सुयमकं । १५ सुरक्तं । १६ संपूर्ण । १७ सालकारं। १८ मुषाभव्यं(?सुभाषाढ्यं) १९ सुसंधिस्थं । २० व्युत्पन्नं। २१ गंभीरं । २२ स्फुटं। २३ सुप्रभं । २४ अग्राम्यं । २५ कुंचितं । २६ क्व(क)पितं । २७ समायातं । २८ रौद्रगीतं । २९ प्रसन्नं। ३० स्थितं । ३१ मुखस्था(?सुखस्थापकं)। ३२ द्रुतं । ३३ मध्यं । ३४ विलम्वितं । ३५ गुरुत्वं । ३६ प्राअलत्वं । ३७ उक्तप्रमाणं चेति । ६९) १ सुस्वरं । २ सुतालं। ३ सुपदं । ४ शुद्धं । ५ ललितं। ६ सुसंबंधं । ७ सुप्रमेयं । ८ सुरागं । ९ सुरसं। १० सुसंगीतं । ११ सुहर्षे । १२ सुग्रहं । १३ श्लिष्टं । १४ क्रमस्थं । . १५ सुवर्ण । १६ सुगमं । १७ सुरक्कं । १८ संपूर्ण। १९ सालंकारं। २० सुभाषायं(?ढ्यं)। २१ सुधिष्प(?ण्यं)। २२ मधुरं। २३ स्फुटं। २४ प्रसन्न । २५ अग्राम्यं । २६ कुंचितं । २७ कंपितं । २८ समायातं । २९ विद्यासंगतं । ३० प्रथमस्थितं । ३१ मुखस्थं । ३२ द्रुतं । ३३ विलंबनं(?वितं)। ३४ मध्यं । । ३४ मध्य । ३५ उक्त। ३६ प्रमाणं चेति। ६९) F १ स्वरगतं । २ सुस्वरं। ३ सुपदं। ४ शुद्धं । ५ ललितं । ६ सुसंवद्धं । ७ सुप्रमेयं । ८ सुरागं । ९ सुरसं। १० सुसंगीतं । ११ सहर्षी(?र्ष)। १२ सुग्रह। १३ सुश्लिष्टं । १४ क्रमस्थं । १५ सुवर्ण । १६ सुगमं । १७ सुरक्तं । १८ संपूर्ण । १९ सालं- कारं। २० सुभाषायं(?ढ्यं)। २१ ।' सुसंधिष्ठं । २२ सुद्यतनं(१)। २३ सुद्यु(?व्युत्पन्न । २४ मधुरं। २५ स्फुटं । २६ प्रसन्नं । २७ संग्राम्यं । २८ विकम्पितं । २९ समूजर्जि)तं । ३० विद्यासंगतं । ३१ प्रथमस्थं। ३२ सुखस्थं । ३३ द्रुतविलंवितं । ३४ मध्यं । ३५ सुप्रमाणं। चेति ।
- ६४ । सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ६९) G १ सुस्वरं । २ सुतालं। ३ सुपदं ४ शुद्धं । ५ ललितं । ६ सुबंधं । ७ सुप्रसेयं । ८ सुरागं। ९ सुरसं। १० समं । ११ सदर्थ । १२ सुग्रहं । १३ श्लिष्टं । १४ क्रमस्थं। १५ सुसमयकं । १६ सुवर्ण । १७ सुरकं । १८ संपूर्ण। १९ सालङ्कारं । २० सुभाषायं(?ढ्यं)। २१ सुगन्धस्थं । २२ व्युत्पन्नं। २३ मधुरं। २४ स्फुटं। २५ सुप्रभं। २६ प्रसन्नं। २७ [क]पितं । २८ समजातं । २९ रौद्रगीतं । ३० ओजः संगतं । ३१ दर्शनस्थितं। ३२ सुखस्थापकं । ३३ हतांशं। ३४ विल(भा)षितं । ३५ मध्यं प्रमाणं । . ७०, चतुर्विधं वाद्यम् । १ ततं । २ विततं । ३ घनं । ४ सुषिरं । इति । ७०) C१ ततं। २ विततं । ३ घनं। ४ सुखिरं(?षिरं)। ७०) D १ ततं । २ विततं । ३ घनं । ४ शिखरं (सुषिरं) चेति । ७०) F १ स्फुटं। २ विततं। ३ धनं ४ सुपिरं । ७१. 'द्विप्रकारं नृत्यम् । १ ताण्डवं । २ लास्यं । इति । ७१) DE १ लास्यं तांडवं च । ७१) F १ लास्यं तांडवं चेति । - ७२. षोडशविधं काव्यम् । १ समयः । • २ प्रतिभा । ३ अभ्यासः। ४ विद्या। ५ जातिः। ६ गीतिः। ७ रीतिः। , ८ वृत्तिः ।, ९ वाच्यं । १० वाचकं । ११ छन्दः। • १२ अलङ्कारः। १३ गुणः । १४ रसः॥ १५ भावः । १६ अभिनयः । इति । ७२) A B १ समयप्रतिभा । २ अभ्यास। ३ विद्या। ४ जाति। ५ गीति । ६रीति। ७ वृत्ति । ८ वात्सल्य । ९वाचका १० छंद। ११ अलंकार। १२ गुण । १३ दोप। १४ रस । १५ भाव। १६ अभिनय । ७२) C१ समवर्ति। २ अभ्यास। ३ विद्या। ४ जाति । ५ गीति । ६ वृत्ति। ७वाच्यं। ८ वाचक। ९छंद। १० अलंकार। ११ गुण । १२ दोप। १३ रस। १४ भाव। १५ हाव । १६ अभिमानश्चेति । 15 द्विविध नृत्यं 2 E पोडशविधं भापालक्षणं ।
-- ४ H । सविवरण-वस्तुरनकोशः ७२) D.१ अभ्यासः। २ विद्या। ३रीति । गीति। ५वृत्तिः। ६ काव्यं । ७ अलंकार। ८ वाचना। ९ प्रबोधः। १० गुणः। ११ दोषः। १२ रसः। १३ भावः। १४ अभिधानं। १५ जातिः। चेति । ७२) E१ समय। २ प्रतिभाषा। ३ अभ्यास। ४ जाति । ५ गीत(?ति)। ६रीति। ७ वृत्तवाच्या ८वाचक। ९ छंद। १० अलंकार। ११ गुण। १२ दोष ।। १३ रस । १४ भाव। १५ अभिनय। १६ विद्या। ७२) F१ समय । २ प्रतिभा । ३ अभ्यास । ४ विद्या। ५ जाति ! ६ गीति। ७रीति। ८ वृत्ति । ९वाच्य। १० वाचका ११ छंदस्। १२ अलंकार। १३ गुण। १४ दोष। १५ रस। १६ अभिनयश्चेति । ७२)G १ समय । २ प्रतिभा। ३ अभ्यास । ४ विद्या। ५ जाति। ६गीति । ७रीति। ८ वृत्ति। । ९ वात्सल्य । १० वाचक। ११ छन्द । १२ अलंकार। १३ गुणदोष। १४ रस। १५ भाव। १६ अभिनय । - 1 :- * - - ७३. 'दशविध वक्तृत्वम् । १ परिभावितं । २ सत्यं । . ३ मधुरं । ४ सार्थकं । ५ परिस्फुटं। ६ परिमितं । ७ मनोहरं । ८ विचित्रं । ९ प्रसन्नं। १० भावानुगतं । इति । ni tEEF give no vivarana. ७३) D १ मधुरं । २ सार्ध(?र्थ)कं । ३ परिस्फुटं। ४ सुमनोहरं । ५ परिसि(त)। ६चित्रं। ७प्रसन्नं । ७ प्रसन्नं। ८ भावानुगतं । . ७४. षड्डिधं भाषालक्षणम् । १ संस्कृतं । २ प्राकृतं । ३ अपभ्रंशं। ४ पैशाचं ५ मागधं । '६ सौरसेनं । इति । muaminicerahananntermunun ७४) A B G१ संस्कृतं। २ प्राकृतं। ३ अपभ्रंशं । ४ पैशाचिकं । ५मागधं। ६सौरसेनं । }, ७४).C१संस्कृतं । '२ प्राकृतं. ३ अपभ्रशं। ४ पैशाचिक। ५ मागधं। ६ सौरसेनं ।। ७४) D१संस्कृतं । २प्राकृतं। ३ अपभ्रंशं। ४ पैशाचकं । ५मागधं। ६ सौरसेनं। ७४) संस्कृत। .. २ प्राकृत ! ३ अपभ्रंश ४ पैशाचा ६.सूरसेन। -- - , ५.मागध। r 1 A B सार्घक। -- सविवरण-पस्तुरतकोशः। - २ प्राकृतं। ३अपभ्रंशं। ४ पैशाचिक। • ५ सूरसेन । ७४) F १ संस्कृतं । ६ मागधं चेति। - * ७५. पञ्चविधं पाण्डित्यम् । १ वक्तृत्वं । २ कवित्वं । ५ सारखतप्रमाणं । इति । ३ वादित्वं । ४ आगमिकत्वं । 1 -- ७५) १ वक्तव्यं । २ वशित्वं । ३ आगम। ४ सारस्वत ।, ५ प्रमाणं । चेति । ७५) D १ वक्तृत्वं । २ आगमित्वं । ३ शास्त्रसंस्कार। ४ प्रौठित। ५ सारस्वतप्रमाणं। ७५) E १ वक्तत्वं । २ वादिकत्वं । ३ कवित्वं । ४ आगमत्वं। ५गमत्वं । ७५) F १ वकृत्वं । २ वादस्कं(१दित्वं)। ३ कवित्वं । ४ आगमत्वं । ५गमत्वं चेति । * ७६. चतुर्विशतिविधं वादलक्षणम् । १ उत्पत्तिः। २ समाप्तिः। ३ सत्यवादः। ४ प्रतिवादः। ५ पक्षः। ६ प्रतिपक्षः। ७ प्रमाणं। ८ प्रमेयं । ९ प्रभेदः। १० प्रश्नः॥ ११ प्रत्युत्तरः । १२ दूषणं । १३ अर्थान्तरं। १४ उपन्यासः। १५ अनुवादः। १६ आदेशः। १७ निर्वाहः। १८ निर्णयः। १९ विग्रहस्थानं । २० अर्थान्तरसमता । २१ सुखरत्वं । २२ उच्चारणं । २३ जयः। २४ पराजयः । इति । । ५पक्ष ७६) AB १ उत्पत्ति । २ सभापति । ३ सत्यवादि। ४ प्रतिवादि। प्रमाण । ६प्रमेय। ७ प्रमोद । ८ प्रश्न। ९प्रत्युत्तर। १० दूषण । ११ भूषण । १२ अर्थातर। १३ उपन्यास। १४ अनुवाद। १५आदेश। १६ निर्वाह । १७ निर्णय। १८ निश्चय । १९ स्थान । २० समता। २१ निग्रह । २२ जय। २३ अजय । ७६) C१ उत्पत्ति। २ सभापति। ३ सत्यवाद। ४पक्ष। ५प्रतिपक्ष । ६प्रमाण। ७ प्रमेय। ८ प्रमेद। ९ प्रसन्न । १० प्रत्युत्तर। ११ दूषण। १२ उप- न्यास। १३ आदेश। १४ निर्णय। १५ निश्चय । १६ नियम। १७ अर्थ। १८ समता। १९ वर्णन । २० माधुर्य । २१ सुस्वरत्व। २२ उभारण। २३ जय। २४पराजय। ७६) D१ उत्पत्तिः। २ सभापति। ३ सत्यवादी। ४ पक्षिा ५प्रतिपक्षिा ६प्रमाण। ७प्रमेय। ८प्रसन्न। ९प्रमेद। १० उत्तरप्रत्युत्तर। ११ दूपण। 12 पंचपांडित्यं। 2 C चतुर्विंशतिविघं नादलक्षणं । .
सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। . १२ भूषण। १३ अभ्यंतर। १४ अनुवाद । १५ अभेद ।। १६ निर्वाह । १७ निर्णय । १८ विग्रहस्थान। १९ समता। २० जय ।, २१ अजयश्चेति । ७६) १ उत्पत्तिः। २ सभापतिः। ३ सत्यवादी। ४ सभावाद। ५ पक्ष । ६ प्रतिपक्षमाण। ७ प्रमेय। ८ शस्त्रप्रमेद् । ९ प्रसन्न। १० प्रत्युत्तर। ११ दूषण । १२ भूषण। १३ उपन्यास । १४ अनुवाद । १५ दशसमिता। १६ निर्णयस्थान। १७ अर्थातर। १८ समता। १९ जय । २० पराजयश्चेति । ७६) F१ उत्पत्ति। २ समाप्ति। ३ सभावादपक्ष । ४प्रमाण। ५प्रमेय। ६ प्रतिपक्ष। ७ प्रभेद । ८प्रसन्न। ९ प्रत्युत्तर। १० दूषण। ११ भूषण । १२ उपन्यास । १३ अनुवाद। १४ आदेश। १५ निर्णय। १६ निश्चय। १७ प्रतिपक्ष। १८ निश्चयस्थान। १९ अर्थान्तरसमता । २० जय । २१ पराजयश्चेति । ७६) G १ उत्पत्ति। २ सभापति। ३ सत्यवादि। ४ प्रतिवादि। ५पक्ष। ६प्रमाण। ७प्रमेय। ८ प्रमोद । ९ प्रश्नं। १० प्रत्युत्तर। ११ दूषण । १३ अर्थान्तर। १४ उपन्यास । १५ अनुवाद । १६ आदेश। १७ निर्वाह । १८ निर्णय । १९ निश्चय। २० स्थान। २१ समता। २२ निग्रह। २३ जय। २४ अजय। १२ भूषण। 1 ७७. षड्विधं दर्शनम् । १ माहेश्वरं। २ ब्राह्म। ३ साङ्ख्यं । ४ बौद्धं । ५ जैनं । ६ चार्वाकं । इति । ७७) D १ माहेश्वरं। २ ब्राह्म। ३ सांख्यं । ४ जैनं । ५ बौद्धं । ६ चार्वाक चेति । ७७) E१ माहेश्वरं। २ ब्राह्म। ३ सांख्यं । ४जैन्यं । ५ बौद्धं । ६ चार्वाक। ७७) F १ माहेशं । . २ ब्राझं। ३ सांख्यं । ४ बौद्धं । ५ जैन। ६ चार्वाकं चेति । ७७) G१ माहेश्वरं। २ ब्रायं । ३ सांख्यं । ४ बौद्धं । ५ जैनं। ६ चार्वाकं । * ७८. अष्टविधं माहेश्वरम् । १ नैयायिकं । २ वैशेषिकं । ५ महाव्रतं । ६ कालमुखं । ७ शांभवं । ३ शैवं ४ पाशुपतं । ८ भुक्तिपर्यंतं । इति । ७८) ABG १ नैयायिक । २ वैशेषिक। ३ शिवधर्म। ४ शैव । ५ कलामुख। पाशुपत । ७ महाव्रत। ८ भुक्तिपर्यंत । ७८) C१ पाशुपत । २ कालमुख । ३ महावत । ४ शांभवपर्यक । ५शिवधर्म। ६ शैव । ७८) D१ न्याय। २ विशेषक। ३ शिवधर्म। ४ शौच । ५ पाशुपत । ६ काल- मुस। ७ महावतिकः। ७८) E१ न्याय ।२ वैशेषिक। ३ शैव । ४पाशुपत्य । ५ कालमुख। ६ महा- प्रतिक। ७ शिवधर्म। ८ पर्यंतश्चेति। 1 A B E F G षट दर्शनानि ।, Cषविधं दर्शनलक्षणं । 2 C इष्टविधं माहेश्वरं । - सविवरण-वस्तुरनकोशः। ७८) F gives no Vivarana . . - ७वानप्रस्था ७९. दशविधं ब्राह्मयम् । १ प्रमाणं । २ संस्कारः । ३ कर्मवर्तनं । ४ होमः । ५ जापः । ६ श्रुता- ध्ययनं । ७ गार्हस्थ्यं । ८ वानप्रस्थं । ९ यतिः। १० ब्रह्मचर्य । इति । ७९) A १ लक्षण । २प्रमाण। ३ संस्कार । २ प्रमाण। ३ संस्कार। ४ कर्म। ५ ब्रह्मचारि। ६ गृहस्थ । ८ यति। ९ ब्रह्मपर्यंत । १० वर्तन । ७९) B १ लक्षण। २ प्रमाण। ३ संस्कार। २ प्रमाण। ३ संस्कार। ४ कर्म। ५ वर्तन । ६.ब्रह्मचारी। ७ गृहस्थ। ८ वानप्रस्थ । ९ यति । १० ब्रह्मपर्यंत । ७९) C १ तत्त्व। २ प्रमाण । ३ संस्कार। ४'कर्म । ५ वर्तन । ६ ब्रह्मचारी। ७ गृहस्थ। ८ वानप्रस्थ । ९ यति। १० ब्रह्मपर्यकश्चेति । ७९) D १ प्रमाण । २ संस्कार। ३ कर्मवर्तन । ४ होम । ५ जाप। ६ श्रुता. ध्ययन। ७ वानप्रस्थ। ८ गृहस्थ । ९यति । ९ यति । १० ब्रह्मपर्य[त] चेति । ७९) E १ प्रमाण । २ संस्कार । ३ कर्म। ४ वर्तन। ५ ब्रह्मचारी। ६ गृहस्थ। ८ यती। ७९) F १ लक्षण । २प्रमाण । ३ संस्कार। २ प्रमाण। ३ संस्कार। ४ कर्म। ५ वर्तन । ६ब्रह्मचारी। ७ गृहस्था ८ वानप्रस्थ। ९ यति। १० ब्रह्मचर्य। चेति । ७९) G १ प्रमाण। २संस्कार। ३ कर्म। ४ वर्तन। ५ ब्रह्मचारी। ६गृहस्थ । ७वानप्रस्थ। ८ यति। ९ ब्रह्म। १० पर्यंत । ७वानप्रस्थ। 1 ८०. चतुर्विधं साङ्ख्यम् । १ तत्त्वं । २ प्रमाणं । ३ प्रकारः। ४ सर्वात्मं । इति ।। ८०) AG १ तत्व। २ प्रमाण ।. ३ प्रकार । ४ सर्वात्मपर्यंत । ८०) B १ तत्त्व। २ प्रमाण । ३प्रकार। ४प्रमेद। ५ प्रमोदपर्यंत। ६ सर्वात्मपर्यंत। ८०) C१ तत्त्वांग। २ सर्वात्मता। ३ प्रमाणं । ४प्रकार। ८०) D १ तत्त्वप्रमाणं। २ सर्वात्मा। ३ प्रकार। ४ कार्य। चेति । ८०) E१ तत्व। २ प्रमाण । ३ सर्वात्मा। ४ प्रकारपर्यंतश्चेति। ८०) F १ तत्त्व। २ प्रमाण । ३ संस्कार। ४ सर्वात्म। चेति । * ८१. सप्तविधं जैनम् । १ सर्वज्ञः। २ धर्मः। ३ तत्त्वार्थः । ६ प्रभेदः। ७ सिद्धिः । इति । : ४ प्रमाणं । ५ प्रतिमा । 1 DE ब्राह्मण्यं ।। G ब्राहचं लक्षण । .
सविवरण-वस्तुरखकोशः। ६९ ८१) A B D F G १ सर्वज्ञ। २ धर्म। ३ तत्त्वार्थ । ४ प्रमाण । ५ प्रतिमा। ६ प्रमेद' । ७सिद्धिपर्यंत । ८१)C१ सर्वश। २ धर्म। ३ तत्त्वं। ४ प्रमाणं । ५ अर्थ। ६प्रतिमा। ७ प्रतिभेद। ८ सिद्धिश्चेति । ८१) E १ सर्वज्ञ। २ तत्त्वार्थ । ३ प्रमाण । ४ प्रतिमा । ५ प्रमेदसिद्धि । ६ पर्यंत । ७ धर्मश्चेति। - - ८२. देशविधं बौद्धम् । १ सौगतं । २ पारमिता । ३ विहारः। ४ प्रमाणं । ५ सौत्रान्तिकं । वैभाषिकं । ७ यौगाचारं । ८ माध्यमिकं । ९ मोक्षः। १० सर्व- दशारिगतं । इति । ८२) A १ स्वसंबद्ध । २ पर्वत । ३ पारिगत । ४ विहार । ५ प्रमाण । ६ सूत्रांतिक। ७ त्रैभाविक । ८ योगाचार । ९ माध्यमिक । १० मोक्षपर्यंत । ८२) BG १ स्वसंबद्ध । २ पर्वद । ३ पारिगत । ४ विहारः। ५ प्रमाण । ६ सूत्रांतिक । ५ त्रैभाविक । ८ योगाचार ।९ माध्यमिक । १० मोक्षपर्यन्त । ८२ । C१ सौगतं ।२ परिषद । ३ परिमितं ।४ विहार । ५ प्रमाणं । ६ शेवातिक । ७ वैभाषिकं । ८ योगाचारं । ९ माध्यमिकं । १० मोक्षश्चेति । ८२) D १ सगता ।२ परिमिता । ३ पारमिता । ४ विहार । ५प्रमाण । ६ सौत्रांतिक । ७ भैराशक(?)। ८ योगोपचार । ९ मोक्षपर्यंत । ८२) E १ सुगत । २ परिगत । ३ पारमित । ४ विहार । ५ प्रमाण । ६ सौत्रान्तिक । ७ योगांत । ८ माध्यमिक ।९ मोक्ष । १० माध्यमपर्यंतश्चेति । ८२) । १ स्वागतं । २ सर्वदशारिगतविहार । ३ प्रमाण । ४ प्रभेद । ५ शौचान्तिक । ६ विभाषिका । ७ योगाचार । ८ मध्यमिका ।९ परमित । १० मोक्षपर्यन्तं । ८३. चितुर्विधं चार्वाकम् । । १ तत्त्वं । २ प्रमाणं । ३ प्रभेदः। ४ प्रमोदः । इति । ८३) A B G१ तत्त्वार्थ । २ प्रमाण। ३ प्रमेद । ४ प्रमोदपर्यन्त । ८३) C१ तत्त्व। २प्रमाणं ।' ३ भेद । ४ पर्यंक । ८३) E१ तत्त्वप्रमाणं। २ प्रभेद । ३ प्रमोद । ४ पर्यंतश्चेति। ८३) F१ तत्त्वार्थ । २ प्रमाण । ३ प्रभेद । ४ प्रमोदपर्यन्तं । चेति । 1 A B G अथ दशविधं । 1 D extends thus far.
७० - सविवरण-वस्तुरतकोशः। ८४. चतुर्विंशतिविधं विचारकत्वम् । १ विद्या। २ विज्ञानं। ३ विनोदः। . ४ कला । ५ कवित्वं । ६ वक्तृत्वं । ७ गीतं । ८ वाद्यं । ९ नृत्यं । १० देशः। ११ कालः । १२ पात्रं । १३ प्रमेयं । १४ वादः। १५ जयः। १६ रसः । १७ भावः । १८ अभिनयः। १९ धर्मः। २० अर्थः। २१ कामः। २२ मोक्षः। २३ लोकवादः । २४ विचारः । इति । ८४) A BG १ विद्या। २ विनोद । ३ विज्ञान। ४कला। ५ कवित्व। ६ वकृत्व। ७ गीत। ८वाद्य। ९ नृत्य। १० देश। ११ काल। १२ पात्र। १३ प्रमेय। १४ पर्याय। १५ जय। १६ रस। १७ भाव। १८ अभिनय। १९ धर्म। २० अर्थ। २१ काम । २२ मोक्ष। २३ लोकवाद । २४ विचारपर्यंत । ८४) C १ विद्या। २ विज्ञान । ३ विनोद । ४ कला। ५ कवित्व । ६ वत्कृत्व । ७ गीत। ८ नृत्य। ९ देश। १० काल। ११ पात्र। १२ प्रमेय। १३ पर्याय। १४ संवाद। १५ अभिनय । १६ धर्म। १७ अर्थ। १८ काम। १९ मोक्ष। २० लोकपर्यकश्चेति। ८४)E १ विद्या। २ विज्ञान। ३ विनोद । ४ कला। ५ कवित्व । ६ वकृत्व । ७ गीत। ८ नृत्य। ९ वाद्य। १० देश। ११ पात्र। १२ प्रमेय। १३ रसा १४ वाद। १५ अभिनव । १६ धर्म । १७ अर्थ। १८ काम। १९ मोक्ष। २० लोकवादपर्यंतश्चेति। ८४) F १ विद्या। २ विज्ञान । ३ विनोद । ४ कला। ५कवित्व। ६ वक्तृत्व। ७ गीत। ८ नृत्य। ९ वाद्य। १० देश। ११ काल। १२ पात्र। १३ प्रमेय । १४ पर्याय । १५ जय। १६ रसवाद । १७ अभिनय । १८ धर्म । १९ अर्थ । २० काम। २१ मोक्ष। २२ लोक । २३ वाद। २४ विचारपर्यंतश्चेति । * ८५. दशविधं गुरुत्वम् । १ वंशे २ ज्ञाने ३ पदे ४ सत्त्वे ५ शौर्ये ६ दाने ७ बले ८ जये । ९ संताने १० स्वगुणे चेति गुरुत्वं दशधा मतम् ॥ ८५) F १ वि(?)शे ज्ञाने पदे शौर्य सत्त्वे दाने चले जये। संताने स्यगुणे चेति । ८५) F १ वंशे। २ दाने । ३ पदे। ४ शौर्य । ५ देवे । ६ दाने । ७बले। ८ जये। ८ विजये। ९ विज्ञाने । १० स्वगुणे गुरुत्वं दशधा मतम् । 1 A BG अथ चतुर्विशति । 4 A.G सगुणे ।, B सुगुणे। 2 C चार्वाक 1; F वादलक्षणं । 3 Cचारत्वं ।
सविधरण वस्तुरनकोशः। ६ ८६. पञ्चविधं चरितम् । । १ ज्ञानचरितं । ३ मानचरितं । ३ दानचरितं । ४ वीरविलासचरितं । ५ धर्मारंभचरितं । इति । ८६) १ विलासचरित्रं । २ धर्मचरित्रं । ३ वीरचरित्रं । ४ गुणःप्रक्षेपणं । ८६) E१ दानं । २मानं । ३ शानं । ४ विचार । ५ विलास । ८६) F१ वीरचरितं । २ विलासचरितं । ३ शानचरित्रं । ४ कलाचरित्रं । ५ गुण- प्रक्षामचरितं चेति । ८७. पञ्चविधं पार्थिवानां पालनम् । १ राज्यपालनं । २ प्रजापालनं। ३ भूमिपालनं। ४ धर्मपालनं । ५ शरीरपालनं । इति । mo ८७) C १ कर्मपालनं । २ धर्मपालनं । ३ प्रजापालनं । ४ भूमिपालनं । ५शरीरपालनं । ८७) E १ धर्मपालनं । २ राज्यपालनं। ३ भूमिपालनं। ४ शरीरपालनं । ५ प्रजापालनं । ८७) F१ साधुपालनं । २ राज्यपालनं । ३ प्रजापालनं। ४ भूमिपालनं । ५ सत्यपालनं । चेति । ८८. सप्तविधा प्राप्तिः। १ ज्ञाने २ धर्मे ३ बले ४ कामे ५ विज्ञाने ६ पात्रसंग्रहे । ७ महार्थे भूभुजां नित्यं प्राप्तिः सप्तविधा मता ॥ मता ॥ ८८) Cशाने धर्मे बले कामे विशाने पात्रसंग्रहे । सर्वार्थभूत(?भु)जां चैव प्राप्तिः सप्तविधा ८८) Eझाने धर्मे घले कामे विज्ञाने पात्रसंग्रहे। सर्वार्थभूभुजां नित्यं प्राप्तिः सप्तविधा मता॥ ८८) Fझाने धर्मे क(?व)ले कामे विज्ञाने पात्रसंग्रहे । सर्वार्थ भूभुजानां नित्यप्राप्तिः । ८९, चतुर्विंशतिविधं शौर्यम् । १ शब्दशौर्य । २ प्रतापशौर्यं । ३ दानशौर्य । ४ स्थानशौर्य । ५ उदयशौर्य । ६ तेजशौर्य । ७ संग्रामशौर्य । ८ प्रतिपत्तिशौर्य । ९ जय- 1CB चरित्र । 2 F पार्थिवानां प्रजापालनं । 3 F drops प्राप्तिः।
- ७२, - सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। शौर्य । १० मानशौर्य । ११ ज्ञानशौर्य । १२ साहसशौर्य । १३ शरणा- गतशौर्य । १४ प्रमोदशौर्य । १५ उद्यमशौर्य । १६ अर्थशौर्य । १७ आचारशौर्य । १८ बलशौर्य । १९ कीर्तिशौर्य । · २० धर्मशौर्य । २१ रक्षणशौर्य । २२ गुणशौर्य । २३ परिबोधशौर्य । २४ प्रबोधशौर्य । इति । ८९) A B G १ शब्दशौर्य । २ प्रतापशौर्य । ३ दान । ४ स्थान । ५ उदय । ६ तेज । ७ संग्राम । ८ प्रतिपन्न । ९ जय । १० मान । ११ ज्ञान । १२ साहस । १३ शरणागत । १४ परिवोध। १५ प्रमोद । १६ उद्यम । १७ अर्थ । १८ आचार । १९ वल । २० कीर्ति । २१ लक्षण । २२ गुण । २३ ज्ञान । २४ मान । ८९) C१ नाम । २ शब्द । ३ प्रताप । ४ दान । ५ स्थान । ६ उत्तम ।। ७ रेज। ८ संग्राम। ९प्रतेपत्ति । १० जयमान। ११ ज्ञान १२ साहस। १३ शरणागत ।. १४ रक्षण। १५ प्रवोध । १६ प्रमोद । १७ आज्ञा। १८ उद्यम । १९ यथाचार । २० बल । २१ कीर्ति । २२ शौर्य । २३ धर्म । २४ रक्षण चेति । ८९) E १ स्नान । २ मान । ३ शब्द । ४ प्रताप । ५ ज्ञान । ६ उदय ।,७ तेज । ८ संग्राम । ९ जय । १० साहस । ११ प्रतिपन्न । १२ शरणागत । १३ प्रबोध । १४ प्रमोद । १५ आज्ञा। १६ उद्यम । १७ अर्थ । १८ आचार । १९ बल । २० कीर्ति । २१ लक्षण । २२ शौर्य चेति । ८९) F १ तनु । २ शब्द। ३ प्रताप । ४ दान । ५ स्थान । ६ उदय । ७ तेज । ८ संग्राम । ९ प्रतिपन्न । १० जय । ११ मान । १२ ज्ञान । १३ साहस । १४ शरणागत । १५ प्रबोध। १६ प्रमोद। १७ आज्ञा । १८ उद्यम । १९ अर्थ । २० आचार। २१ बल। २२ कीर्ति । २३ लक्षण । २४ गुणशौर्य चेति । - ८ - + ९. देशविधं बलम् । वाकायबुद्धिमन्त्रैश्च स्थानसैन्यसुहृज्जनैः । शकुनैर्दैवतैश्चेति राज्ञा. दशविधं बलम् ॥ .......... ९०) C१ वाक्वलं। २ कायवलं। ३ बुद्धिधलं। ४ मंत्रवलं । ५ स्थानबलं। ६ सैन्यवल ! ७ मुहूर्त्तवलं । ८ शकुनवलं । ९ राजवलं । ९०) : १ वाक। २ काय । ३ वुद्धि । ४ मंत्र । ५मन । ६ सुहृद । ८ सैन्य । ९ ध्वनि । १० श्रुति । ११ देवता चेति । ९०) F वक्तायुः शुद्धिमन्त्रैश्च स्थान सैन्यं सुहजनैः। शकुनैर्देवतश्चेति राक्षां दशविध वलम् ॥ ७ शकुन ८ , . -1 F चतुर्दशविघं वलं!, F राक्षा दशविघं वलं। 2A BG देवतश्चे-- सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ७३ ९१. दशविधः सङ्ग्रहः। ज्ञाने पात्रे गुणे शौर्ये पत्नीयोगे बले जये। धर्मे मित्रे श्रुते यज्ञे दशधा गुणसङ्ग्रहः ॥ ९१) A ज्ञाने पात्रे गुणे शौरे पत्नीयोगे बले धर्मे जये गुणेषु श्रुतसंग्रहः ॥ ९१) B ज्ञाने पात्रे गुणे सौरे पत्नीयोगे बाल धर्मे जये गुणेषु श्रुतसंग्रहः ॥ ९१) Cशाने पात्रे च विके च पक्ष्यायोगे बले जये लक्षित । ९१) E१ शानपात्र । २ मित्रपात्र । ३ शौर्यपात्र । ४ नियोग। ६प्रवीण। ७ यश । ८,धर्म । गुणसंग्रहः। ९१) F ज्ञाने पात्रे च मित्रे च पत्नीयोगे बले जये । धर्म गुणे श्रुते चैव संग्रहः सप्तधा ५.बल। मतः॥ ९१) Gशाने पात्रे गुणे शौरे पत्नीयोगे वले धर्मे जये गुणेषु श्रुतसंग्रहः ॥ . ९२. दशविधो जयः। ज्ञानासनप्रतापैश्च सङ्ग्रामैश्च सुहृजनैः । निद्राहारोदयश्चेति राज्ञां दश- . विधो जयः॥ - ~ ९२) A G ज्ञानासनं प्रतापैर्वा संग्रामैश्च सुहजनैः । निद्राहारोदयाञ्चेति राशां दशविधो जयः ॥ ९२) B ज्ञानासनं प्रतापैर्वा संग्रामै स्वसुहाजनैः। निद्राहारै दयाश्चेति राशा दशषिधो जयः ॥ ९२) १ ज्ञान । २ सैन्य । ३ प्रताप। ४ काम। ५ संग्राम। ६ऐश्वर्य । ७ सुक्रत ८ मित्र । ९ सत्व। ९२) E१ मित्र । ३ नियोग। ४वासना। ५सुहृद ।६ ७ ऐश्वर्य । ८ संग्राम । ९ वाक । १० परिश्रमी । ११ निद्रा । १२ आहार । १३ इंद्रिय । ९२) F ज्ञानाशनप्रतापेऽर्वाक् संग्रामैह्यमुष्टुजनैः । निद्राहारेन्द्रिये चेति राज्ञां दशविधो'जयः॥ २ पात्र। प्रताप। . . . र । ९३. पञ्चविधः परिच्छेदः । १ अलक्षितं । २ लक्षितं । ३ मानसिकं । ४ वाचिकं । ५ कार्मिकं । चेति । 83) ABCDG give no Vivaräņa ९३) E १ अलक्षित | २ लक्षित । ३ मानसिक । ४ वाचिक । ५ कर्मण। १९३) F १ अलिषित । २ लिखित । ३ मानसिक । ४ वाचिक । ५ कर्मणा चेति । । 1 F सप्तविधः संग्रहः। १० ७४ । सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ९४. पञ्चविधं प्रभुत्वम् । १. कुलप्रभुत्वं । २ ज्ञानप्रभुत्वं । ३ दानप्रभुत्वं । ४ स्थानप्रभुत्वं । ५ अभयप्रभुत्वं । इति । ९४) A G १ कुलप्रभुत्वं । २ ज्ञानप्रभुत्वं । ३ दानप्रभुत्वं । ४ स्थानप्रभुत्वं । ५ उभयप्रभुत्वं । ९४) B १ कुलप्रभुत्वं । २ दानप्रभुत्वं । ३ स्थानप्रभुत्वं । ४ उभयप्रभुत्वं । कुल । २ शौर्य । ३ दान। ४ स्थापन । ५गुण । ९४) E१ ज्ञानप्रभुत्व । २ अक्षय । ३ शौर्य । ४ स्थापना। ५प्रदान । ६ अभय । ९४) F १ ज्ञानप्रभुत्व । २ आय(१)प्रभुत्व । ३ शौर्यप्रभुत्व । '४ स्थानप्रभुत्व । ५ दानप्रभुत्व चेति । ९४) । ९५. सप्तविधमुत्तमत्वम् । १ वयः। २ कुलं । ३ रूपं । ४ शीलं । ५ पदं। ६ ज्ञानं । ७ प्रयोगः। इति । ९५) A B G१ वयः। २ कुल। ३ रूप। ४ शीला ५पद। ६ज्ञान। ७ प्रयोगपर्यंतं चेति 84) C gives no Vivarana ९५) । १ वयः । २ कुलं । ३ शीलं । ४ रूपं । ५ पदं । ६ ज्ञानं । ७ प्रयोग। ९५) F १ वयस् । २ कुल। ३ शील। ४ रूप। ५ पद। ६ ज्ञान । ८ प्रयोगश्चेति । ७ योग। ९६, नवविधा शक्तिः । १ धर्मशक्तिः। २ दानशक्तिः। ३ मन्त्रशक्तिः । ४ ज्ञानशक्तिः । ५ अर्थशक्तिः। ६ कामशक्तिः। ७ युद्धशक्तिः। ८ व्यायामशक्तिः । ९ भोजनशक्तिः। इति । ९६) C१ व्यायामशक्ति । २ ज्ञानशक्ति। ३ दानशक्ति। ४ धर्मशक्ति। ५ अर्थशक्ति । ६ युद्धशक्ति । ७ भोजनशक्ति । ८ विद्याशक्ति । ९६) E १ धर्मशक्तिः। २ मंत्रशक्तिः। ३ कामशक्तिः। ४ भोजनशक्तिः। ५ युद्ध । ६ व्यायाम । ७ देश । ८ उपार्जन । ९ वाद । ९६) १ दानशक्ति । २ धर्मशक्ति। ३ मंत्रशक्ति। ४ ज्ञानशक्ति। ५ कामशक्ति। ६ अर्थशक्ति । ७ युद्धशक्ति । ८ भोजनशक्ति । ९ व्यायामशक्तिश्चेति । * सविवरण-वस्तुरतकोशः। ९७. सप्तविधा भुक्तिः। O १ शब्दः। २ स्पर्शः। ३ रूपं । ४ रसः। ५ गन्धः । ६ अभिमानः । ७ देशः। इति । -- ९७) Cgives no Vivarana ९७) E १ प्रतिमान । २ द्रव्य। ३ शब्द । ४ स्पर्श । ५ रूप। ६ रस। ७ गंध । ८ देशभुक्ति। ९७) F १ अभिमान । २शब्द। ३ रस। ४रूप। ५गंध। ६ देश। ७ स्पर्शभुक्तिश्चेति । * ९८. अष्टविधमभिमानलक्षणम् । ज्ञाने दाने बले धर्मे धर्मार्थे शत्रुमारणे । समारंभे च युद्धे च अभिमानं प्रचक्षते ॥ - . 1/ -- . । ९८) A शाने दाने धर्मे अर्थे कामे वले शत्रुधाते । समारंभोढितं च । ९८) B शाने धर्मे अर्थे कामे बले शत्रुधाते समारंमे स्थितं च । ९८) E १ शान। २ दान ।। ३ वल। ४ धर्म । ५ अर्थ। ६ काम। ७शत्रु। ८ घात । ९ समारंभ। १० उद्धतं चेति । ९८) F१ शाने। २ दाने। ३ वले। ४ कर्मे। ५ कामे। ६ अर्थे। ७ शत्रु- मारणे। ८ समारंमे चेति । ९८)G१ शाने। २दाने। ३ धर्मे । ४ अर्थे । ५ कामे। घाते। ८ समारम्भो स्थितं च । ६ बले। ७शत्रु- . 2 ९९. चतुर्विधं वात्सल्यम् । देवानां सद्गुरूणां च मन्त्राणां वल्लभे जने । स्नेहेन मानसं यच्च तद्वात्सल्यं चतुर्विधम् ॥ ९९) A B G देवानां सहुरूणां च मंत्राणां वल्लमे जने । मेहेन मानसं यच्च तद्वात्सल्यं चतुर्विधम् ॥ ९९) C देवानां सहरूणां च श्रियां वलयभोजने । रहेन मानसं यच्च तद्वासे। ९९) E वेदानां गुरूणां च मित्राणां वर्णभोजने । स्नेहेन मनसा यच्च तद्वात्सल्यं चतुर्विधम् ॥ ९९) F देवानां सहुरूणां मित्राणां वल्लभे जने । मेहेन संत[तौ] वात्सल्यं चतुर्विधम् ॥ 1 मुक्तिः ।। F भक्तिः ।
७६ . सविवरण-चस्तुरनकोशः। १००. पञ्चविधो महोत्सवः। १ ज्ञानमहोत्सवः। २ धर्ममहोत्सवः । ३ अर्थमहोत्सवः । ४ काम- महोत्सवः । ५ मोक्षमहोत्सवः । इति । - - १००) A.G १ ज्ञानमहोत्सवः । २ धर्ममहोत्सवः । ३ काममहोत्सवः । १००) B १ ज्ञानमहोत्सव । २ अर्थमहोत्सव । ३ काममहोत्सव । १००) C१ काममहोत्सव । २ द्रव्यमहोत्सव । ३ मोक्षमहोत्सव । १००) E१ ज्ञान । २ धर्म । ३ अर्थ । ४ काम । ५ मोक्षमहोत्सवश्चेति । १००) F १ धर्ममहोत्सव । २ द्रध्यमहोत्सव । ३ काममहोत्सव । ४ ज्ञानमहोत्सव । ५ मोक्षमहोत्सव। - 6 - - - - १०१. अष्टौ. लब्धियोगः। १ अणिमा। २ महिमा । ३ लघिमा । ४ गरिमा । ५ ईषत्वं । ६ वशित्वं । ७ प्राप्तिः। ८ प्राकाम्यं । चेति । nimmt 808) ABG give no Vivarana १०१) C१ अणिमा। २ महिमा । ३ लधिमा ४ गरिमा। ५ प्राप्ति। ६ प्रकाम्यं । ७ ईशत्वं । ८ वशित्वं । १०१) E१ अणिमा। २ महिमा। ३गरिमा। ४ लधिमा । ५ ईशत्व। ६ वशित्व । ७प्राप्ति। ८प्रकाम्यमेव । १०१) F १ अणिमा । २ महिमा। ३गरिमा। ४ लधिमा । ५ ईशत्व। ६ विसत्व (१)। ७ वशित्व। ८ प्राकाम्य चेति । - , . 1 C drops the Sūtra but gives the Vivarana. ..., ~ " .* -- Appendix A. Ms E. Additional Sūtras षट्त्रिंशत् वादिनाणि। १ मेरी २ मृदंग ३ पटह ४मरुज ५.कसाल ६ताल ७ लघुताल ८ शंख ९ तूर्य १० भुंगल ११ घर्घरी १२ तृलूरी १३ वंश १४ वीणा १५ पणव १६ दंड १७ डमरु १८ काहल १९ गर्गरी २० दुहिलि २१ भरह २२ कुंडलिका २३ क्रकच २४ रावण २५ कर, २६ कित्ररिक २७ त्रिवल २८ भ्रातृणी २९ हंडक ३० तंत्यं ३१ करड ३२ नागक ३३ ददकुंड ३४ नवसरली ३५ वीणात्रयं ३६ लघुमली मुख वाजित्रा अपदन विनोदी ।। १०० ॥ पंचविंशति गुणोमात्यः । जनपदोभिजातः स्ववह । कृत स्वल्प । चक्षुषन् । प्राज्ञ धारयिष्णु । दक्ष । वाग्मी। प्रगल्भ । प्रतिपत्तिमान् ।सोत्साह । प्रभायुक्ता। क्लेशसह । शुचि । मित्रदृढभक्ति । शीलवान् । वली । आरोग्यवान् । शक्तियुक्त । स्तंभ । चापलहर संयोगो वैरिणः । अकर्ता ॥ १०१ ॥ राज्ञां अष्टादशतीर्थानि । मंत्री । पुरोहित । सेनापति । युवराज । दौवारिक । अंतर्वशिक । प्रशास । महात् । संनिधात् । प्रदेष्ट । नायक। पौरव्यवहारिक। परिवादाध्यक्ष। दंड। दुर्गतिपाल । आटविका ॥२॥ - अष्टौ स्वर्गगुणाः। विषघात । रसायण । मंगलार्थ । विनीत । प्रदक्षणावर्त्त। गुरु अदग्ध ॥ ३ ॥ अष्ट गुणं पयः। सुगंधि सुव्यक्तरसं । तृष्णानं । शीतलं । लधु । हघं । स्वच्छं ॥ ४ ॥ Explanation in Old Gujarati :- श्रीगुरुभ्यो नमः । अथातो रत्नकोशं व्याख्यास्यामः । वस्तुविज्ञानं । सर्वशास्त्रमयं रम्यं । सर्वज्ञानप्रकाशकं । स्वल्पग्रंथं सुबोधार्थ । रत्नकोशं समभ्यसेत् । १। तत्र शतेन सूत्राणां । कर्तव्यः संग्रहो यथा ॥२॥ अथ इति मंगलार्थे । ग्रंथनुकर्ता श्रीवेदव्यास कहि छि। ये मि चौदविद्या सर्व प्रगट कीधी। हवि रत्नकोश एह विनामि ग्रंथ कहिछि । ते ग्रंथ केहबुछि । सर्ववस्तुनु शान येह थिकी जणाइ । वलीकेहवुछि ते ग्रंथ । सर्व शास्त्र मयछि। मनोरम छि। रत्ननु भंडार छि। सर्वशान- प्रकाश थाइ । स्वल्पथोडं ग्रंथ अनिबोधये प्रतिबोधते घणु । एहये रत्नकोश ते निरूपी इछि । ते ग्रंथमांहिंसु एक १०० सूत्र करी संग्रह करी इर्छि । ते सूत्रकी हां । ते कही इर्छि । तत्रादौ त्रिभुवनानि । ते सूत्रमाहिं प्रथम प्रण्य भुवन कही इर्छि । त्रिविध लोकसंस्थान.....।
७८ सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। Appendix B. Similar topics from some other works.- राजवंशाः। Kumārapāla Prabandha gives the following list of the Treats. They are as follows-तत्र वंशः पत्रिंशत् , एवम् इक्ष्वाकुवंश १, सूर्यवंश २, सोम ३, यादव ४, परमार ५, चाहमान ६, चौलुक्य ७, छिन्दक ८, सिलार ९, सैन्धव १०, चापोत्कट ११, प्रतीहार १२, चन्दुक १३, राट १४, कूर्पट १५ शक १६, करट १७, पाल १८, करंक १९, वाउल २०, चन्देल २१, उहिल्ल पुत्र २२, पौलिक २३, मौरिक २४, मंकुयाणक २५, धान्यपालक २६, राजपालक २७, अम(न)ङ्ग २८, निकुम्भ २९, दधिलक्ष ३०, तुरुदलियक ३१, हूण ३२, हरियड ३३, नट ३४, माष ३५, पोपर ३६, नामानः । [-जिनमण्डनकृतकुमारपालप्रवन्धः, पृ.१] k - - आयुधानि । चक्र । धनु । वज्र । खड्ग । क्षुरिका । तोमर । कुन्त । त्रिशूल । शक्ति । परशु । मक्षिका। भल्लि । भिण्डिपाल । मुष्टि । लुण्ठि । शङ्ख । पाश । पट्टिश । यष्टि । कणय । कम्पन । हल । मुशल । गुलिका । कर्तरी । करपत्र । तरवार। कुद्दाल। कुस्कोट । कोफणि । डाह । उथ्थूस मुद्गर । गदा । घन । करवालिका। 3. [श्रीधाश्रयमहाकाव्य (पृ २२) अनु म. न द्विवेदी] (see p. 17 of the text.) - . कलाः। . गीतम्, वायम् , नृत्यम्, आलेख्यम्, विशेषकच्छेद्यम् , तण्डुलकुसुमवलिविकाराः, पुष्पास्तरणम्, दशनवसनाङ्गरागः, मणिभूमिकाकर्म, शयनरचनम् , उदकवाद्यम्, उदका- घातः, चित्राश्च योगाः, माल्यग्रथनविकल्पाः, शेखरकापीडयोजनम्, नेपथ्यप्रयोगाः, कर्ण- पत्रभङ्गाः, गन्धयुक्तिः, भूषणयोजनम् , ऐन्द्रजालाः, कौचुमाराश्च योगा, हस्तलाधवम् , विचित्रशाक!षभक्ष्यविकारक्रिया, पानकरसरागासवयोजनं, सूचीवानकर्माणि, सूत्रक्रीडा, वीणाडमरुकवाद्यानि, प्रहेलिका, प्रतिमाला, दुर्वाचकयोगा, पुस्तकवाचनम् , नाटकाख्या- यिकादर्शनम्, काव्यसमस्यापूरणम्, पट्टिकावेत्रवानविकल्पाः, तक्षकर्माणि, तक्षणम् , वास्तुविद्या, रूप्यरत्नपरीक्षा, धातुवादः मणिरागाकरज्ञानम्, वृक्षायुर्वेदयोगाः, . मेष- कुकुटलावकयुद्धविधिः, शुकसारिकाप्रलापनम् , उन्सादने संवाहने केशमर्दने कौशलम् , अक्षरमुष्टिकाकथनम्, म्लेच्छितविकल्पाः, देशभापाविज्ञानम्, पुष्पशकटिका, निमित्त- ज्ञानम् , यन्त्रमातृका, धारणमातृका संपाच्यम् , मानसी काव्यक्रिया, अभिधानकोषः, छन्दोज्ञानम्, क्रियाकल्पः, छलितकयोगाः, वस्त्रगोपनानि, द्यूतविशेषाः, आकर्षक्रीडा, वालक्रीडनकानि, वैनयिकीनां,. वैजयिकीनां, व्यायामिकीनां च विद्यानां ज्ञानम् (इति चतुःपष्टिरगविद्याः कामसूत्रस्यावयविन्यः) । कामसूत्रे १ साधारणेऽधिकरणे, ३ विद्यासमुद्देशप्रकरणम् । पृ ३२-३३ (CS.S..) (see p. 21) مهمه -- -- सविवरण-वस्तुरत्तकोशः। ७२ जयमंगला on सूत्र १५ अ. ३ अधिकरण १. शास्त्रान्तरे चतुःषष्टिर्मूलकला उक्ताः । तत्र कर्माश्रया चतुर्विंशतिः। तद्यथा-गीत, नृत्य, वाद्यं, कौशललिपिज्ञानं, वचनं, चोदारं, चित्रविधिः, पुस्तकर्म, पत्रच्छेद्यम्, माल्य- विधिः, गन्धयुक्यास्वाद्यविधानं, रत्नपरीक्षा, सीवनं, रगपरिज्ञानम् , उपकरणक्रिया, मान- विधिः, आजीवज्ञानम् , तिर्यग्योनिचिकित्सितम्', मायाकृतपाषण्डसमयज्ञानं, क्रीडाकौशलं, लोकशानं, वैचक्षण्य, संवाहनं, शरीरसंस्कारः विशेषकौशलं चेति । द्यूताश्रया विंशतिः । तत्र निर्जीवाः पञ्चदश । तद्यथा- आयुःप्राप्ति, अक्षविधानं, रूपसंख्या, क्रियामार्गणम् , बीजग्रहणम्, नयज्ञानं, करणा- दानं चित्राचित्रविधिः, गूढराशिः, तुल्याभिहारः, क्षिप्रग्रहणम् , अनुप्राप्तिलेखस्मृतिः, अग्नि- क्रमः, छलव्यामोहनम् , ग्रहदानं चेति । सजीवाः पञ्च । तद्यथा- उपस्थानविधिः, युद्धं, रुतं, गतं, नृत्तं चेति । शयनोपचारिकाः षोडश । तद्यथा- पुरुषस्य भावग्रहणं स्वरागप्रकाशनम्', प्रत्यङ्गदानं, नखदन्तयोर्विचारो, नीवीनसनं, गुह्यस्य संस्पर्शनानुलोम्यम्, परमार्थकौशलं, हर्षणं, समानार्थता कृतार्थता, असंप्रोत्साह- नम्, मृदुक्रोधप्रवर्तन, सम्यक् क्रोधनिवर्तनं, कुद्धप्रसादनं, सुप्तपरित्यागः, चरमस्वापविधिः, गुह्यगृहनमिति। चतन उत्तरकलाः- साश्रुपातं रमणाय शापदानम् , स्वशपथक्रिया, प्रस्थितानुगम- नम्, पुनः पुनर्निरीक्षणं च । इति चतुःषष्टिर्मूलकलाः । जयमंगला टीका कामसूत्रे १ साधारणेऽधिकरणे ३ अध्याये, विद्यासमुद्देशप्रकरणम् । पृ.३१ (C.S.S) * भावाः। रतिः। हासः। शोकाक्रोधः । उत्साहः। भयम् । जुगुप्सा । विस्मयः । निर्वेदः। ग्लानिः। शङ्का । असूया । मदः । श्रमः । आलस्यम् । दैन्यम् । चिन्ता । मोहः । स्मृतिः । धृतिः। ब्रीडा । चपलता । हर्षः । आवेगः । जडता । गर्वः। विषादः । औत्सुक्यम् । निद्रा । अप- स्मारः। सुप्तम् । विबोधः। अमर्षः । अवहित्थम् । उग्रता । मतिः । व्याधिः । उन्मादः । मर- णम् । त्रासः । वितर्कः । स्वेदः । स्तम्भः। कम्पः । अनम् । वैवर्ण्यम् । रोमाञ्चः । स्वरसादः। प्रलयः॥ (ना. शा. अ.७ काशी. सं सिरीझ) रति । हास । शोक । क्रोध । विस्मय । उत्साह । भय । जुगुप्सा । निर्वेद । ग्लानि । शङ्का । असूया । मद । श्रम । आलस्य । दैन्य । चिन्ता । मोह । स्मृति । धृति । क्रीडा।
८०
सविवरण-वस्तुरत्नकोशः।
बीडा। चपलता । हर्ष । आवेग । जडता । गर्ष । विषाद । औत्सुक्य । निद्रा । अपस्मार ।
सुप्त । (वोध )विबोध । अमर्ष । अवहित्थ । उग्रता । मति । व्याधि । उन्माद । मरण । त्रास ।
संदेह । रोमाञ्च । स्वरभेद । अश्रु । वैवर्ण्य ।
(see p. 38)
(विष्णुधर्मोत्तर, तृतीयखण्ड अ.३०)
अभिनयाः।
आङ्गिको वाचिकश्चैव आहार्यः सात्त्विकस्तथा ।
ज्ञेयस्त्वभिनयो विप्राश्चतुर्धा परिकल्पितः॥
(नाट्यशास्त्र-अ.८. श्लो. ९)
(see p. 39)
*
*
अकारादिशब्दानुक्रमणिका । शब्द पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पक्ति ५८ ६ अगीतसगता अगीतिता अग्नि २१ अदानत अद्भुत अद्र २० २५ ११,२४ १८ २९ २,३,४,५ " २६ २७ ९ १३ १० अधम अधिकाक्षा अधीक्ष अध्यक्ष १२ १२ १ ३ ११ १९ " " २,१८ १२ १८ " ३४ ३५ ३२ १३ " ३६ १४ " २७ ३२ २,१०,१७,२५ ११ अमिपाल १४ अध्यक्षपात्र ३३ १३ ३४ ३५ ३० १५ " २ अध्यात्म २१ २४ २२ २३ २५ ३७ २६ २२ अग्निमुख अग्निमुखदेश अग्निविशेषणम् अमिविज्ञानं अग्रण्य अग्राम्यं. २४ १६ ११,२४ ४,२२,३८ ९ २६ २७ ६३ १५ २४ ६२ १६ अध्यात्मविज्ञान अनग्न अनग्नशायी ५ ६३ ८,२१,२९ ८,२१,२९ ९,१४,२९,३४ ६० ५९ ६० अप्रासन अप्रासनं ९ ३,८,१०,१५ ६,१२,२६,३५ २४ - २८ २२ ८ ३२ अनंग अनंगवंश अनिल अनिष्ट २४ " २ अजय ४०- ६७ अनुकूल अनुकम ११ अणिमा ८,९,१०,११,१२ २३ ५,२१,३८ १४,३१ १२ " ७६ अति अनौचित्यता ११ २१ २,१५ ११ ९,१३,१५ २३ २०,२३ १७,२२ १७,१९ १९ १८,२० अति मसगतता भतिकान्त प्रेक्षणाम् अति प्रवासता ६२ अनुक्रमगुण अनुगीत अनुगोषण अनुग्रह ४८ ६,७,८,१० २३ १७,३४ १४,३१ २५ ५५ अति प्रसंगता अतिज्ञता भती १२ १३ १० २४ अनुग्रहगुण अनुचितता ३५ १ ५७ १८ पस्तुरनकोपः। शब्द पृष्ठ पति पृष्ठ पंक्ति अनुराग शट्व अभिधानकला अभिधानं अभिनय ३ १२ १३ ५९ १३ ૬૬ अनुरागपोषणं अनुवा अनुवाद ६४ ५,२१,३८ १५ १७,२०,२७ १४ १५,०० १,५,९,१३ ३८ ४,१६ ११ १,१६ २१,२४ ६,९,१२ ५,९,१३,२१ 30 ६७ अभिनव १४ १२ अभिमान १२ ६० ६० ६६ ६० ६० ५,२१,३८ १५,३१ १५ अनुवास अनुशयन अनुशयनाद्यर्थ (2) अनुशयनं अनुशायनं अनुशायी अनौचितं अनौचित्यता अनंतभाषिन् अन्नशाला अन्योन्यशायी १ १३ ६४ २० २,५ ५७ २६,२९ २ ४४ ५ ११ ५ १९ ५७ १९,२२,२५,२८ ६० अभिमानकारण अभिमानगुण अभिमानता अभिमानयुक्ता अभिमानलक्षण अभिमानावलेपता अभिमानी ५ ८ अप २३ १६ अपगीतं अपतत्त्व ४१ अपभ्रश अपभ्रंश ४५ अभिलापा अभिसारिका १६ ३,९,२२,२९ २,७,९,१२ १२,१४,१६ ३४ ९,३५ १४ २० २,२१,२९ २१ ६ ६२ २० १२ २१ १४ ६५ २०,२२,२३,२४,२५ ६६ १ २९ ४,१०,१६ ३८ ८,१५,२३ २३ १८ ५७ २१ ३४ ३६ ३१ ३६ अपस्मार ४२ ६० १६ अभूमिशायी अभेद अभ्यंतर अपोहन अप्रियवदा अप्रीतिता १ ६७ १ अभ्यास अभय ७ अमर अभयउपकारद्रव्य अभयदान अभयप्रभुत्वं अभयसुख (2) ६४ ६५ ३३ ३४ ३५ ३६ ७४ سد १४ " १६ १८,२२,२५ १,४,७,१० ३ २,१८,३४ १३,२२,३२ १० १६,२४ ४,११,१६ १,११,१२ ३२ ३०,३४ १,५,९,१४ अमर्ष ३८ , अभागी ५७ १० ३९ २३,२७,३० अमात्य १० अभाव भभिचारिकापात्र अभिधान १४ १५ २२ १६ २३ २५ ५,१६ سم अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पंक्ति पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ शब्द शब्द अर्थशौच ४४ १९,२१ अमात्यपात्र १४ १५ ४५ " ७२ २ २ अमात्यपात्र अमित्राणि द्वेषयति अमित्राणि द्वेष्टि १०,१७ ५,११ १४ १३,१८,२६ २२ ७,३२ अर्थशौर्य अर्थस्थान अर्थस्थान अर्थानुभाविनी अर्थान्तर ४६ ४५ ४६ ४७ ३२ ३२ ३० २५ १६,२२ ४६ ३ ६६ १४,२० अमित्राणि पूजयति ४७ ९,१५,२७ ४८ ६ अर्थान्तरसमता १६ " अमोह ६६ ६७ ६१ १० ६१ ६७ १३ ११ अमोहन अयुक्तिगुण अरूपता अर्चास्थान अर्थ ५७ ३२ २४,२६ २३ ५ २६,२९ ३५ १२,१३,१४,१५ ४,९ २१,२५ अर्थान्तरसमता अर्धशक्ति अर्धस्थान अर्बुद ३२ २८ ८ ५,१०,१५ १७,३२ १४,२८ ४,१७ २९ १९ २२ ३० " ३८ २८ " २३ ३१ अर्बुददेश अलक्षित अलिषित अलंकार ६४ ७३ १९ ६९ ७,१२,१७,२३,२८ २४ ३ ५,१०,१३,१७,२१ ७,१५,१९ ११,१५ ७२ २२ २३ ६४ २१,२४ २२ १३ २०,२५ ५,१६,३७ २०,२३,२६ २,५,८,११ २७ २,८,१७,२२ १८ १६,२३ ६ ६५ ७६ २१ ५८ " २८ ४ अलंकारकला अलंकारशास्त्र अवदान २१ १९ अर्थकला अर्थकामत अर्थत अर्थत कामरत अर्थदानत अर्थपात्र २,३ ४० ५८ ४१ अवधान १३ ६२ अवधानगत अवन्ती २८ १५ ३५ ७,१४,२२,२८ १,८ ११ २,४ ३२ २९ १८,३२ १४,२९ ५,१८ " ३० अर्थपुरुष अर्थमहोत्सव अर्धलक्षण अर्थवाद अर्थविज्ञान २७ ૨૮ ९ ७६ ३० २३ ६१ ६१ २,२७ २०,२७ १८,२१ १८ अवन्तीदेश अवभिपा(?हित्या) अवलेपता अवसान अवहित्य अर्थशक्ति ३८ ७४ अर्थशाम ३९ १९ वस्तुरनकोषः। पंक्ति पंक्ति शब्द पृष्ठ २२ १८ अक्षमता ५ १५ १३ ३ शव्द पृष्ठ अवि(ध)स्तनशायी ६० अविश्वास अशक्ति १३ अशक्तिगुण ११ १८ अक्षरपात्र अक्षरविनोद १४ ४ अज्ञानता आकाश १५ ५७ १६,१९,२४,२५,२८ २० २,१९,२१ २१ ६ २० १२ ६,१२,२२,२४ २६,२९ १४ अशन २५ २७ आकाशतत्त्व " १४ २१,३८ २१ " ។ २६ आखेट आखेटक १५ अपन विधि अशनविधिविज्ञान अशब्द अगव्दशायी अशेषकथाप्रस्ताव अशौच २५ ६० ६० ५८ २,६,११ " १६ २६ २३ २९ ३,७,१३,१८,२४ ३,८,९ १३ २१ १३ ८ अशौचरता १५ ६ ४,१७,३० आखेटकविनोद आखेटकविज्ञानं অপ্ত ३८ २३ २४ ७,१८ ११ आख्यान १७ अश्व २५ १२,२६ ११ ६,९,१० " आगम आगमिकत्व आगमित्व आगलिका २३ २३ १९ ६६ ६६ १८ २४ २१ ३ ३२ अश्वपरीक्षा अश्वविज्ञान अश्वशाला अश्वशिक्षा असन्मुखशायी असुख आग्रह ३२ २६ ६० ६,१९,३६ १२ १३ " ९ २ ३८ ८,२३ १० ७,१५,१९ ३९ आशिक आचार आचारवती आचारशौच " ४३ असूया ५,३० ४४ १९,२१ ३९ ५७ ६,८ आचारशौर्य ३ ३ ७२ असवद्धप्रलापी असवद्धशायी अस्थि ६० f २,७,९,१२ ९ ७,१६,२५ १,१०,१८, MY आत्मस्थान १६ ३३ १३ २६ ३४ आदरगुण आदित्य १० ३२ ११,१५,१९ ३८ अस्थिस्तम्भ अस्त्रयध अहर्गण अहंकार २ ३३ ४ " २० ५,१५,२४,३१ १,१७,३३ २८ mr mr mr m ८,१७ o or . . n or ar m २१ २४ ९ , अक्षत आदेश २ ६ ०,२०,२६ १५ १५,२०,२४ ९,१३ " अकारादिशब्दानुक्रमणिका । शब्द पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पक्ति ४४ २३ आराध्य २९ २८ ८ " आनल आन्ध्रदेश आन्वीक्षिकी आन्वेषिकी १९,३९ २५ १,१६,३१ ११ १७ १८,२० ३० २६ २४ आराम आरामविज्ञानं आरामिक' १७ आप्त १६ २९ १६ १७ १५ १७ १७ ९ ३६ २१ आप्ताहित आमीर आई आईमास २८ २४ २५ १५,२६ ७,२० १८ २९ ३० २८ २४ १२,२८ ५,१४ आमीरदेश ११ " २९ ३६ ३ " ३० ११ आईशाक १९ आमेर आमप्रभुत्व आमिष ७४ ६ ७,८ १९ आर्द्रशाखा ३६ ३४ ३५ २५ " ३३ ३५ १६ ३३ १४,३० ९ २३ २५ आन्नायिक आर्द्रामलक ३५ आम्र ३०,३५ १२ २,३६ १७ आलस ३९ १ m m m wr mur v आलस्य ३८ " ३९ ८,२४ आलिङ्गन ३६ ३८ ३५ ३२ ३१ ६,१८,२१ ८,१९ १३,२३ १,३,५,७,९,११ आम्ल २१ आयतन .५९ ६,११,१६,२१,२६ ३२ १६ आवर्तनकीर्ति आवश्य आवेग १० आयु १७ m m mm ३८ १४ २६ १०,२५ १,१५ १५ . आयुध आवेश २ १ ३९ ३८ ३९ ३२ ३२ " २२ २३ २२ १६,३१ १०,२३,३२ आवेशन ७,२२ ३ १०,३०,३५ ५,२५ आयुधकला आयुधकार आश्चर्य २० २५ २७ १४,२८ १३ ८ आयुर्वेद आश्रम २५ ३९ १ . २६ ५८ १२ आरमटी आश्वासन आसक्ति ३२ २३,२४,२५,२६, २७,२८,३० १४ ११ १२ ५ आराद १३ ३१ आराध्य २८ आमन २९ ८ ६ वस्तुरत्नकोषः। पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति ३९ ३ उन्चा १९ १ उच्चाटन आमुख आस्थानं आक्षेप आक्षेपगुण आहार २५ २७ १२ ११,२५ १० ५,२२,२५ १७ १० ३४ २७ २९,१४ ८,२०,३१ १९,२५,३० २६ २४ ६६ २३ ३१ २२ ६६ आहारकला २ ४८ १८ उच्चाटनं उच्चाटन विज्ञानं उच्चारण उच्चारण उच्चनिष्ठीवती उड उड्डीसदेश उण्डदेश उत्कंठिता उत्कियमाणं आना २८ इन्द्रजाल ७२ २२ ३२ २७ ११,१५,१९ १४ ७,२०,३० १५,१९ ९,२४,३९ १४ १६,३६ २३ २३ " २७ " ४२ ६ २६ ६३ उत्तम २२ ८ १६ २,३,४,५ १८ १ २४ ४१ ७२ ९ १७ इन्द्रजालकला इन्द्रजालविज्ञान इन्द्रिय इट इष्टर्म इष्टि इष्टिका उत्तमगुण १२ २६ ३० ११ ९ २३ २४ उत्तमत्व १२ २४ १८ १३ २० १ २३ २५ उत्तमत्वगुण १२ ३५ २४,४१ १७ २६ १२ १४ उत्तमप्रदेश २४ १८ ९ इष्टिविज्ञान इक्षुरसादिभक्षण इक्ष्वाकु उत्तमसत्तम ५९ २५ १९ ४० २० २,९,१५,१९ उत्तमसत्य उत्तरापथ १० २८ १९ २ २९ २ ८ १८ रक्ष्वाकुवंश ईर्ष्यारहिता शत्व " २२ ३० २९ ६,२० १५ उत्पत्ति २० ९,१२,१३,१५ १०,२० १३,२२ ६७ २१ हकप्रमाण ६१ १२,१८,२७ ३,७,११ १५,१७ १६ १४ ६३ उत्पत्तिकी उत्पादिका उत्पादिता उत्मर्ग ६१ ६३ ४७ ३९ २२,२८ उत्साह ४८ भने(मान)गायी ११ १२ १३ २५ ५,२४,४१ १७,३३ २,१२,३०,२८ ११.१७ १०,११, ३८ १९ अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पंक्ति पंक्ति शब्द पृष्ठ पृह शब्द २१ ८,१७ ११ उपस्थ उपागगीत ६२ ३९ २९ ३० उत्साहगुण उत्सुक्य उत्तर गुजराती उत्तरापथदेशा उदके उदय ७४ २३ २८ ३ उपायकरदान उपार्जन उभयदान उभयप्रभुत्व उभयसुख ३६ २९ ४४ ७४ ११ १६ ३० २,६ १७ १२ १३ ७२ " उरल २८ २९ उदयमुख उदयशौर्य उदंवर २८ ११ २५ ७,२३,४० १७,३३ ५,१३,१७ १० २२ १२ २,२०,३६ ७,११,१५,१९ २ ६,३४ १२ उरलदेश २४ ६,१९ १२ १३,२९ ५ उल्लास ३४ ३३ ३५ १८ ७२ उल्लोच ३३ ३५ ८ उद्यम उद्यमशौर्य उद्धत ४० २३ २४,२६ २२ उद्धततम ६१ ६१ ६१ उदात्त १९ १२ १३ ११ ऊहन ऊहापोह ऐश्वर्य १७,३३ २५ " १७ २१ ४ ११ १२ २३ ओड ओज. ओज. सगतं ३० ६४ २७ ६२ १९ १२ ४४ ४४ १,९ ९ " उदात्ता उदारगुण उदारता उत्योत उद्वर्तता उद्वर्तनवास उद्वर्तनाधिर्वास उद्वर्तने उन्द्र उन्नतप्रदेश उन्मद उन्माद ५ " ४४ ૬ ६४ ३० २४ - ११ ओरल ओषध ४४ ३० ९ २ ६,२२,३८ १७ १७,२० ११ १०,१६,२४ ३३. ३४ ३५ ३५ ३८ ३९ ओषधी ओषधीरत्न औत्सुक्य mr mm ३८ ३९ ४५ ३४ १५ ३,१०, ,१५ १५ १३,१५,१७ " ३६ १२ औपध अकुश ४ ३८ ६२ ६,१० उपकारदान उपकृति उपगीत उपचार उपचारविलेपन उपदेश उपन्यास ३७ १७ १ ५ ५८ ९ -or m अग २६ २८ २९ ३८ ३३ १५,२०,२३ ५,९,१३ ३० ६७ वस्तुरनकोषः। शब्द पृष्ठ पंक्ति शब्द पंक्ति पृष्ठ अगदेश २७ १९ २१ ३० १३ कथाकला कगाविनोद कथाशास्त्र १५ " २६ २४ ३,८,२३ १५,२१ ४८ ११ १९ अंगुलीमोटन अगुलीस्फोटन अजन ४८ १८,२४ कदम्ब ९ S कदम्ववश ९ ३३ ३४ ३५ ३६ ६,२२,३८ ३४ १५ ८,३२ ११ कन्ता(कुन्तला)धारण ५९ कन्यकुब्ज ३० १३ . १८ कन्या १४ अजनदेश अतर्विदेश अतर्वेद २७ ३४ ३५ २९ ३० २९ अतर्वेध २१ ११,२९ १,१५ २५ २२ ५,२८,२२,३४ ९,२३ ३६ १०,२६ ४,२२ १,१९ ६,१७,२५ २,१०,१९ कफ 5 m m m m m n o or m m m x . अध्र २१ २९ कमल १७ कमला ३० २९ २२ ३२ २५ कच कचप्रधारणं ३ कर १ कच्छ २८ ३० १७,३२ १८ करटपाल ९ ४,११ १०' कच्छप्रदेश ४ २७ करटपालवंश २१ कणय १८ २६ २,१४,२० २७ ९ १८ कणाय कर्कट करटवाल करटवंश करणक द २९ १८ ३० ९ . कर्णकंडूयन करपत्र १८ १८ १८ ४६ ४८ ३४ २१ ८,३३ १४,२१,२८ २२ १९ २३ १९ २४ १३,२०,२६ ११,१४ .१३ १५ कर्णदुर्बल कर्णमोटन कर्णाट करवाल करविनोद कराट करुण करुणा ९ ४८ , २८ .. २९ ३० ८: m १२ १४ २५ ५,३४ १०,२२ ३१ १८ ." २८ . कर्णाटदेश कर्णोत्कर्षण कर्तरि ४८ २५ ४,६,१२,१४,१६ १ - १८ ३,९,२०,३४ १३ " कथा १५' २६ " १६ २६ कर्मकर कर्मकार कर्मजा कर्मजाता कर्मण ४,९,१४,२०,२६ १३,१७ २०,२४ १५,३६ " १४,१६ १२ २२. २३ - ६१ ७३ " . .
अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पृठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति शब्द कर्मण कर्मपात्र ७३ २२ कवित्व २६ १३,२९ १४ ९,१६ २७ १५ ४,१० २१ २५ १० कवित्वकला कवित्कं(?त्वक)पित ६३ कवित्व कर्मपालन कर्मवर्तन कर्मविज्ञान . १० ६८ २५ ३,८ ४,९,१० २,७,११,१५,१९ २८ ७० १५ २४ कवित्ववाद कवित्वविनोद कवित्वविज्ञान १५ १८ ४,३२ ११,२७ २ २० २५ ३,४,६,९ " २५ १४ on २४ कलचुरवंश कलहांतरिता कला ४२ २९ ४५ २ ४ ३० ४४ कश्मीर कक्षा कक्षाशौच काकु कागडाजय(१) काच १,३,५ २२ २४ २६ १९ " २३ २५ २६ ५,१९ २० " ४,१४,२०,२६ ११,२०,२५ १०,१९,२८ ३,२०,२३ ३८ ६,२१ २,७,११,१५,१९ २१. २६ २७ २५ ३३ ३१ २४ " " काचविज्ञान काचविज्ञान काठवाकता(१) कान्ति ५७ ७१ ६ ११ ९ १९ कलाचरित्र कलानुर कलामुख कलालक्षणं " २० २,१८,३५ ११,२८ २६,२९ १२. १३ ६७ ३० ३१ ११ १ कलावती १७ कान्तिगुण कान्यकुब्ज १५. २४ २८ २९ १९ कान्यकुब्जदेश कलाविनोद कलाशास्त्र कलिछुर कलिच्छुर कलिंग ९ २३,३८ १८ ६ १२,१३,१४,१५ काम ३ १० २८ २९ १९ " ६,१३ ६ १३,२८ २१,२३ १४ ३८ १९ ६,२२,२७ ११,२०,२६ -- ३० २९ २७ ३१ १९ कलिंगदेश कल्प ४,१०,१४ २० ८,१७,२६ २१ २,१०,१९ २२ २१,२६ २३ २७ ११ ३१ ७,१२,१७,२३,२८ ५,१०,१३,१७,२२ कल्पशास्त्र कवित्व ६ १९ १६ ७० १,६,११,१७,२३ ४,१५ " ७१ कवित्व २५ ६,२० " १४ २ १० 1 वस्तुरनकोषः। शब्द पृष्ठ पंक्ति.. शव्दा पंकि पृष्ठा काम ११,१३,१५ कारण्य १३ १५४३.२. । २६ ७६ - wr ३८. ११: कामकला २८ कारुण्यगुण ६ कामत काल ९ ५८ . १३ २३ १४,२७ कामपात्र २५ " १४ २६ २७ ७७२० २,३,६,७ ३५ ७,१४,२२,२८ १,८ ३६ ११,१५ २,३,४,५,७ १५ " कामपुरुप १६ ३१ १७ ६७ काममहोत्सव ७६ २८ कामरु १५,३० ६८ १२ ८,१२,२३,२९ २५,२८ ३८,१२,२७ १ ९,१९,२७ ४,१२,२० २२ १८ कालमुख कालविद्या । ११ २० ३० २१ " कामरूप २५ कालविज्ञान २४ ३० १ काव्य C - १ २२ १९ १३ ३१ ४ कामस्पदेश कामलक्षणं कामवाद कामशक्ति २३ . २६ ३७ ६५ ७४ १८,२२,२४ २,३२ १०.१७ १ - कामशास्त्र १९ १८ कामाक्ष २८ २४ ८१२,१६ ७ ६ " ३० काव्यं काव्यकीर्ति काव्यप्रयोध काव्यवर्तन काव्यविज्ञान काव्यशास्त्र काश्मीर ६१ ३७. १४- कामासदेश २५ २३ २१,३६ ११ २४ १२ कामाक्षा ३० १९ २८. ३ ८,१७,२२ : २१ -३,३२ ७,२१ कामानस्था कामिक कामिनी , २९ ३० ३ १० ३ कादमीरदेश २८ ५ -- ४ " काष्ठ २३ + कामुक पाम्यपुख्य यामजा कार्मिक काछ १६ ६१ ७३ १ २,१६ १८ ११,३४ ३२ २८ १५ २२ २३ २६ २६. " २० काष्टरम गागवलं २३ ६८ काटकला २२ कारना २९ १२ कार काष्टकर्म २४ २३ २५ " " ६,२२ ११ अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पंक्ति पंक्ति शब्द पृष्ठ पृष्ठं शब्द २८ २८ १३ कुरग काष्टविज्ञान किरात २४ ૨ટે २९ - , १४ १,१८ १,१५,२९ ३० २७ ५,१९ दुरगदेश कुल ७४ ८ १९ ६,११,१३,१४, १५,१६ १८ ३० ३६ ३५ किर्तयः १८ १४ २३,२९ १७ १४ क्रीडा कीर ३४ १४ ५,२१ ७४ २,४,५ ३० २८ ८ १८ 'कीरदेश कीर्ति कुलपुत्रिका कुलपुत्रिकापात्र कुलप्रभुत्वं कुलिका कुलिना कुलिश कुलीन ११ २ ४.१७ , ११ ४३ १८ १२ ४० " १३ २२ ३,१९,३६ १२,१८ ૨૨ १६,३२ ११ ४१ ३३ १६ १४ १,७,१३,२०,२७ १४ २२ १४,२८ ७,२०,३० कुश ३४ ३५. " " . ३५ २२ ४ कुसुम " ७२ ७,१२,१५,२० १० २३ २१ ४३ १९ कीर्तिमान कीर्तित्प 'कीर्तिवान् . कुसुमकला कृष्टि(लि)नी कृत्य ११ ७,२२,२८ ४१ ! २१ ३१ १९ " ३ ७२ १० ९ १ १ १५ कीर्तिशौर्य कुडुवर्श कुटुबवंश कुट्टन कुठार कुतूहल १० कृत्यशास्त्र कृत्रिम कृत्रिमविनोद कृपण कृपणा कृषि १६ ३,८,१०,१३ ६ १८ ५७ ५७ २५ २६ १४ '२,१२ १५,२९ ८,२४,२९ १३ २६ २५,३० १८ ३ २२ १५ २४ १८ कुतूहलपात्र कुन्त कुपित कुमारोपचारतः कुमित्राणि १८ '१३,२७ .७,२०,३७ १२ २१ ७,३२ ३,२० '२,१६ ६,२० १४ कृषिविज्ञान कृष्टि केकाण(देश) " ६२ , २९ ३० ४७ २८ ३० ४६ २४ २२ २७ केश केशकीर्ण केशग्रहणं केशधारणं ५९ कुरुदेश कुरूप कुरूपा १ ५७ २,७,९,१२ २३ ५ १२ वस्तुरनकोषः। पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति १ २९ २८ शब्द कंकण कंकूण कंचण कंड २८ १७ ४८ १४,२०,२६ १२ २४ २४ ३० २८ २९ शब्द केशधारणं केशप्रकीर्णन केशोभा(खा)रण केशविनोद कैशकी कैशिकी कोकणदेश कोदाल कोकिल कोदाल कोटपाल १५ ३९ २४ २३,२७ ३० २५ २७ १८ कंदु कंपन कंपित (क)पितं ८,२०,३३ १८ १८ १५ १८ १८ ३ २२ ९ ४,११ २९ कुंपितं कंबोज ६२ ६४ ६३ ६३ २८ २९ ३० २७ १० ४ " १८ १८ ९,३४ ७,२२ १,२९ १८ २८ २९ ५ कंबोजदेश २९ कोपूल(2) कोरल कोरल कोल कोलानुर कोवोलिक कोश ९ २ २७,३०,३७ काचन ९ २६ ३३ ३४ ९ " " १० ३५ ४,२०,३६ १५,३१ १३ " " २९ ur २५ २६ ३१ ३२ " कांजी कांजीदेश कांती १० २६ M २८ ३० २८ ३६ २४ २४ १९ ११ १५,२९ ९,२४ ३२ ६,११,१६,२१, २६,३१ २४ १ ६,११,१६,२१, २६,३१ १९ २३ १८ ८,२३ कोशविज्ञान कोष्ठागार ३२ ३२ कांस्य कांस्य विज्ञान कंकुण कुकण २,१६,३२ १२ ३१ १३,३० २८ २९ ३० १७ २४ २९ ५ कोपमुत्पादयति कौतूहलविज्ञानं कौरल कौरल कौरिल कौशकी काशिकी कौस्तुभ कुंकुण कुंकुम कुंचितं कुंत ३० ३० ३० ६३ १७ १८ " -कुंतल १८ २२,२९ २९ ५,१८ १२ १२ १,२३ २९ ३९ ३९ ૨૨ ३४ ३५ ३६ -- २५,३०. २६,२८,२९ ६ ४,२०,३६ १५,३१ १२ कुंभ " ३० २५ २६ २७ ३३ कंकण १८ १४ अकारादिशब्दानुक्रमणिका । १३ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ शब्द कुंभ खंजरीट ११,२७ ६,२४ ३,२० १३ ३४ ३५ ३६ १८ १६ ३५ ३६ २४ २८ ९,२५ ३,२२,३७ १८ १५ " कुंभविज्ञान कुरंग १४ खेटक खेलन गगनं سه १० कुलपुत्रिकापात्र १४ १५ १२,१९ १३ १४,२४ ६,१३,२७,३४ ३४ ३५ ३६ १५ २,१८,३४ १२,३३ १० क्रमस्थं गज ३ १६ १२,१८,२४,२७ २,८,१३,१८,२४ क्रीडन १८ २७ ३ ६३ ६४ २३ २२ ५८ ૨૮ ३९ १५ ३१ ३२ २६ गजशाला गजशिक्षा क्रीडनेन क्रीडा १८ ७,२२ गण ३६ २,१२ ११ २ गणित २९ २,९ ८,१५,२३ १४ १५ १६ १९ १३ " क्रीडापात्र क्रीडापात्र क्रीडापात्रं क्रीडापात्रप्रवेशनम् क्रीडापात्राणि क्रीतविक्रय क्रूरव्यसनता क्रोध " १५,२०,२३,२६ ९,१४,१६,२० ५८ २२ २३ २१ १५ १२,१८,२४ ७,१०,१५,२०,२४ १९,२३ ३,१४,३५ २४ २०,२३ १,७,१३,१९, २७,३२ २३ ६ गणितकला गणितविनोद गदा १८ " २० २१ ३८ १७ ८,१७,२६ ३,११,१९ २,१२,२०,२८ ५,१३ ९ गन्ध ३ " २१ ७५ क्रोधगुण क्रोधन क्रोधी क्लेशसह ११ ५७ ५७ ४ गन्ध गमत्वं गरिमा गर्भागार गर्व १०,१३ १९ ५,११,१७,३१ २४ ४० ३२ ३८ ४१ क्लेशापहारी खज ७,१५ २,५,७ ९,१० ११,१४,१६,१८ १९ ८,१३,१५ ३,१०,१६ १६,२२,२७ ५,१८,२१,३० ७,१८ २४ २०,२२,२४,२६ १९ १६,३४ ४७ १७ २८ गर्विता ग्लानि १९ ३८ ३९ ४२ ५,११,२४,३० ६,८,२४ २१ खण्डिता वस. खसकीर ९ २८ २० गहिलुत्र ग्रहण गाभीर्य ६१ ११ २९ खंजरीट ३ १३ १२ " १४ 3. वस्तुरत्नकोषः। पंक्ति पृष्ठ शब्द पृष्ठ पंक्ति शब्द गांभीर्य गीत १३ १७ ४८ ४३ ४,२० १५ गुणव्यावर्णन 'गुणशौर्य गुण प्रक्षेपणं गुणान् प्रकाशयति गुणान् प्रच्छादयति १६ " २३ १२ २१ ४७ " " २३ ४८ १०,२७ १४ २७ १,६१० ६,११ ३,१४ ६,११,१६,२७ १०,२६ ७,२३ १,१९ १९,२२,२५ २४ २ “१७,२४ ४७ गुणान् सखीजनं कथयति ११ " २० " ३४ ३५ ३६ ६४ . २ " गीतं गीतकला गुणान् सखीजने वदति ४६ 'गुणान्विता ४२ ६२ ११ २३ २७ ४३ " २० गीतगुणा गीतलक्षण गीतविनोद १५ ३१ गुद गुद . ३० १५ १६ ४२ २१ २५ ४६ ३१ । १८ ३,९,२३,३० ५,१४,३१ ८,१६ १३३ १२,१८,२५ ४,२०,३७ ६३,३० २३ " गुप्तांगदर्शन गुरुत्व गीतज्ञा १२ ४३ ૧ રે " - गीति ३ " ६४ ६५ ३७ १६,२२ १४,२२ ८,१३,२०,२७ १९,२२,२५ १,४,७,१० १४ ३१ ३ ११ . गुरुत्वगुण गुरुत्वम् गुरुत्वविज्ञानं गुहिल २९ ६ 'गुर्जर गुर्जरदेश गुटिका २४ ९ २८ ४,११,३४ १४ १० २५ १८ .२८ १२,२८ गुहिलका गुहिलपुत्र .९ ४.११ २४ गुटिकाविज्ञान गुण ६४ ८ २२ ७४ ९ २२ ४५ गुणकीर्तन गुणग्राही ८ २०,२४,२६ ६ १२,१४,१६ २० १२,१९,२५,३२ १२ गुहिलपुत्रवंश गुहिलवंश गोदावरी गोफण गोमय ४,२,२२,३४ ४१ २२ २ ३६ १८ १८ ३३ ३४ ३५ गुणदोष गुणपात्र ९ १४ १५ १४ ६,२२,३८ १७,३३ १४ १४ गुणपात्राणि गुणवर्णन गुणवती س س سس ४८ १३,२१,३५ २२ १६ गोरोचन ३४ ३५ ४३ " १६,३२ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। १५ पंक्ति- पृष्ठ पंक्ति शब्द गाधर्व २९ १8 L गोल गोलादेश गोष्ट ७,१०,१४,१५,२० २९ २७- २३,३९ २० १४,२८ १४ ३५, १२ गांभीर्य चउडदेश २८ ३०. ३५ ९ ५ चक २६ १९ १७ १८ ९ २४ गोसवत्सा : गोहिल गोहिलपुत्र गौ, गौड गौडदेश- २४ ३,२१ चक्रविज्ञानं चक्षु २८ ५,११,१७,२४,३० २० ४,१४,२२,३० १६ २० २९ २१. २२ ३० चन्दिलवंश चण्डिल चतुरा १ गौसवत्सा علم س س س سس ४२ 7 ३३.. ३४. ३३ ४३, ३८ १६ २८ ७,१,३,२२ २,९,१४ गंगा चपलता L १८ १३,२७ १३ १६ १२,२८ २१ १५,३१ ९,२७ २५ 5२४,३९ २६ १३,२२,३० १५,२२ ८,२१,३१ ३९ ३६ १८ ३ ३ गंगापार २८ २९. १६ २३ १९ " ३० २६ २७ + गंध २० चमर चर्म चर्मकर्म चर्मविज्ञान चरितम् चरित्र चलचित्रविनोद बहुआण चाउडा ११ - ६ + . २२ २३ १५ -- २७ ७ ९ । . ४४ २० । ४५. चातुर्य ११ ܕ ܥ ! " १२ गंधपात्र गंधयुक्ति २५ 1१६,३२ ३३ १९ १,१६,३३ १०,२६ २६ ११ ३,१०,२२ ३ ३,५ २५ १,१६,३१ १४.. ૧૨ १०. २६ २५. चातुर्यगुण चाप चापोत्कट ६२२ " १८ गंधयुक्तिविज्ञान गंधर्व २४ ३३ ३,९,१४ २० ३४! ३५. - १४ चापोत्फटवंश चारनेत्रा चारुलोचना ६,११,१८ १३,२१ ११ r ४३ गधर्वस्थान गंधशौच १३ ३० ४४, चार्वाक ५ . ३ ४५ ४५ ६७. १८,१९,२०,२१,२२ ६९ २२ १८ गंधश्मश्नु गांधर्व - . १३ चाहुआणवंश १६ वस्तुरनकोपः। शब्द पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति चित्र चंदन ३१ ५,२७ १३ १९,२९ " " चंद्र १५ १६ २२ २३ २५ २७ ६५ २६ २८ ५,२१,३७ १२,१६ १४ २८ ३,१९,३५ १२ ७,२१ ३४ ३५ ३६ २२ ३४ ३५ ३६ ३३ ३४ ३५ ३ ६ " १८ ११ चित्रकर्म चित्रकर्मविज्ञान छत्र १५,३० १० १२ २० ८,२४ २,२१,३६ ९ " चित्रगुण चित्रलक्षण चित्रविनोद २ छम १६ २१ १५ १६ २५ " २१ २२ २३ २५ २६ २७ १८ १२,२५,३५ ८,२२ १५ " ९ चिन्दिल चुम्वनं ३० ३० १,३,५,७,९,११ १४ ५९ २६ ३१ ४६ २२ ९ २८ चुम्बन (ध्वनि) चुम्वन( करोति) चुम्बने (मुखं परिमार्जयति) चुम्बिता (परान्मुखि छमकर छमकला छद्मविज्ञान छन्दशास्त्र छन्दस् छन्दिक १९ १४ २३ ९ भवति) ४८ १० चुम्बिता (विमुख छंद १९ करोति) ४७ " ११ ८,२२ १६,३७ ९,३३ २ १३ २०,२४ ४,१६ २०,२३,२६ ५,८,११ २७ २,१७ २२ चैतन्या चोड चोढ चोरग्रहण चौड ७,२० ३,२८ २६ ३७ २६ २८ ७,३८ २५ ४३ २९ २९ २३ २५ २९ ३० २२ २३ ६४ ६५ २१ ९ छंदकला छंद शास्त्र छिंदक छिन्दकवंश छुरिका जडता ८ १९ ९ . २ १८ चौलिक्य चौलुक्य चौलुक्यवंश चौहही चौहाण चंच चडेल चंदन १८ ३८ ३९ ४५ १० ११,१७१२४ ७,१४,२२ २,९,१५ १३,१५,१७ ३० . १ १२ २२ २९ २४ ३७. जनपद जनतन्वता जन्मकृतं जन्मरूपं ९ IF 3 ३३ ८ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। शब्द पंक्ति शब्द पंक्ति पृष्ठ पृष्ठ ज्योति १७ २१ जय ३४ 1 ६०' - " २५ १७,२१,२५ १,२,६,१०,१५ ४,२१ ३५ ३,१९ ११ ज्योतिष " ६७ ४ ज्योतिष्क ३४ ३६ ३३ ३५ ३१ २४ ७१ २२ २९ जयमान १ ७२ १० ज्योतिष्कलक्षण ज्योतिष्कविज्ञान ६ r १५ १६ २५ २९ ३,८,१३,२५ ११,२५ टाक ९ २३,३६ '३१ ६ . २९ ३० २८ ४ " २७ १० १८ - " १,४,६ १९ ४,१०,१५,२५ २२ -- टाकदेश डबूस डमरू डाब डाभी १८ १६ २९ १८ ८ ४४ जलक्रीडा जलवास जलविनोद जलशौच २१ ९ १५ ३,१०,३६ १० -- ३ ४४ १७,२० १८ डाह डाहल २८ २६ अलस्तम जलाधिवास जलाधिवास. ३० ४,९,१६ १५,२९ १,१५ .२२ ७,१४,२८ ४४ २७ ४४ 'डाहलदेश डोड जागरी, ९ १४ जाति १० ६४ ३५ १०,१४ ५,१२ ३३ १९,२२,२५ ३,४,७,१० १० १६,३० १२,२७ ९ ६५ - ८ डोडीआ डोडीवंश डोह । तर्क २,२८,३७ २६ ३४ जाप जालंधर १८ २८ २९ १९ ३,१६ २४ २७ १९ १० जालंधरदेश जीति जीमूत जीव जीवपदार्थ जुगुप्सा ३५ २९ २२ तर्कशास्त्र तत तत्त्वनिर्णय तत्त्वनिश्चय १९ २८ ६१ ६१ ६८ १०,२४ ७,१९ ९,१०,११ ३,४,७,९ ३,४,५,९ २४ २६ तत्त्वप्रमाण ३८ ३९ ७,८,९ २,३,१३ ५,१४ ६९ २ तत्त्वम् سی जैनम् ६ ६७ ६७ १७,१९,२१,२२ २० १५ १६ ५,१५,२०,२६ २६ ३१ ५,१०,२६ ६८ १९,२०,२१,२५,२६ जैन्यम् जोधिम ज्योति " १ २० १९,२८ " ३ १८ वस्तुरत्नकोषः। 4 शब्द पृष्ठ पंक्ति ६९ तत्त्वम् तत्त्वलक्षणम् तत्त्वविज्ञानम् ३,२३,२५ २० ३१ २४ २५ २७ ६१ २ शब्द तांबूलादिग्रहणं तांबूलादिना तांबूलादिभक्षणम् तांबोलवास तितिक्षा तिलंग तीर्थ पृष्ठ पंक्ति ५९ १४,१७,१८,२२,२९ ५८ १०,२१ ५९ २५ ४४ W ४,१८,३२ " or ३ २७ - ३९ ६.१ ३८ २९ ३३ ३५ तत्त्वज्ञानम् तत्त्वार्थ ६८ ६९ २१ २३,२५ २८ १,५,२४,२७ २३ २९ १५ २३ १४,२९ ३५ ૨૪ तत्त्वांग तनु ९ तीर्थाधि तुडक तुरक तुरग ६८ ३० ३१ ६० ३६ १८ ६ २९ ३० १५ २२ २३ " १७,३२ १०,३३ ८,१४,१८,२४,२९ ३,९,२१,२८,३४ १८ ३१ ९ ६ ૨૮ ४ तुरगफला तुरगविनोद तुरष्क २२ १५ २० तपसा तप्ती तरवारि तरुष्का ताईकारदेश ताजिक ताण्डव तापीतट तापीतटप्रदेश तामलिप्त तामलिप्तदेश ताम्र سه २९ ६४ २८ २० २९ २९ १४ ६,२०,३५ १० १,२९ ३,३१ २० ३० २८ २९ २८ तुरुष्कदेश तुरंग ܩܢ १६ ३३ ३४ ३५ ३६ ३१ . ४,२०,३.६ १५,३१ १३ १९ १६,३१ " ३,७,१२,१८,२४ १४ १०,२६ '२३ १,१९ २ ૨૪ '१५,३२ ताम्रलिप्त तुरंगलक्षणं तुष्टि २८ ३३ ३४ ३५ ૨૬ ३० २९ ३० ६२ ३४ ३६ ३३ ३५ ११ तायक १२. १३ ८,२५ तालगतं तालवृत २,३ १४,३० १७ ११ . १८ २४,६० " ३३ ३४ ३५ १३,२९ तालवृक्ष २० २६ १० १३ " ६१. ४,२२ २४ तुष्टिगुण तेज ४४ १० २० '२,२१,२९ तालसस्कारप्रवोध तांबूल तावूलकानि तांबूलादीनि तोवूलदानेन १५ १० ६ ५८ ५८ ५८ २१ ७२ 4 ५,९,१३,१७ २२ १८ तेजशौर्य अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंकि शब्द तेजतत्त्व शब्द दर्पण २० १२ २१ ३६ ३५ ४४ तैलाधिवास तैलाधिवासे तोमर तोमल तोरण १४ १२,५८ १०,१४ २८ ४४ ४,२२ १,१९ ३,३६ १६,२२,२५,२८ ३,१७,३३ ३१ दर्भ दरिद्रता देशन दशा दर्शन १७ ५७ २६ २२ १० Wa २ १६ ३३ ३४ ३५ ११ . ११,२७ ६,२४ ३,२० " २४ ६,२२,२९ १५,३२ " । तंत्र २२ त १ १२ १५६ १६ २१ २२ २३ ६१ २५ २६ ६,३४ १४,२९ V २१,२५ ५,१६,३७ २० " 1 १९ तंद्रभद्र त्रयी त्रास ८:१४ २१ २९ १७ ३८' ३९ ११ ६ ११,१६,२७ १२,१७ दर्शनकला दर्शनगुण दर्शनपात्र दर्शनविनोद १३ ७ त्रिशूल १० १७ ।२९ १५ १६,२२ १६ २,१,२९ १८ तृण ५,२५ १०,२३ ३,१७,३३ दर्शनस्थित ६३ ६४ २५ २६ २७ ६ दर्शनात् (प्रशांता ४६ २२ खा तृणविज्ञान दत्तम् (न मन्यते) ४७ भवति) दर्शनात् (प्रसन्नता भवति) २४ ४५ ४६ ४८ " दधि سر سد سه س ४० ३५ १४,२२,३१ १४ ११,२३ २,८ ११ ८,२४ २,१९,३५ १६ १८,२६ २४ १८,२७,३७ १५ ६,१३ ६ १९ ४,१०,३० १ ។ ११,१२ ३३ १८ ८,९,१० ११,२२ २२ ३६ ३६ ४० ८ दर्शने (प्रसन्न भवति) ४६ दक्ष दक्षिण २९ दक्षिणदिशि दक्षिणा दक्षिणापथ ३० २८ दहीया ९ दाडिम १० दधिकर दधिकरवंश दधिपाक दधिमा दधिमुख ७६ ९ ur १० ur दमगान दर्पण ३० ३३ ३४ १४ १३ २ दान १०,२६ २० वस्तुरतकोषः। पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ ११ ०२४ दान १२ शब्द दीनहीनता दुर्ग दुष्फोट दूर्वा ५,२२,२९ ३१ २२ १८ " " १३ १७ ३६ ३३ - " WWW २६ ९,११,१२ ३,९,१६,२६ ११ ९,२५ २,२०,३५ १८ १४,१९,२३,२८ ४,८,१२ १७ ३५ " ७२ ५,९,१७ " " ७४ ६ दूषण ६६ ६७ । ७५. ३७ ११ ८,१०,११,१३, दानकीर्ति देव ९ १५,१७ ३० १४ ११ ५ देवता देवपात्र २६ १,९,१६ २ १४ दानगुण दानचरितम् दानप्रभुत्वम् दानव दानवपात्र ७४ १५ ४,१० ८,१२ १४ २४ ३ १५ ३,४,५,९ ३० .९१६ ४,१० ८,१२ १०,११,१३ १४,१५ १४ देवलोकसंस्थान देवविज्ञानं देवी देवीपात्र देवसंस्थान देवस्थान १४ ११,१९ १०,११ १५ ५७ '२९ दानवलोकसंस्थान दानवसंस्थान दानवस्थान दानहीनता दानशक्ति दानशौर्य दानानि दाने १४,१५ १२ ३५ ३२ देश १७,२०,२४ २१ १४ २३ ३१ ८,१२,२९ - ३६ ६० -- ३,८,१२,१६,२० २३ ७४ २८ १८,२४ २४,२७ १३,२५ २२ " ३,५ -- r ६० देशकला देशकाल देशपात्र २२ ३१ १७ ~ ९ २८ १४ - ८ २५ दानेन दापिक दायिकवंश दास दासी दासीपात्र १३,२० १४ २२ १४ १५ २३ २२ २३ ३५ ३४ ६,१३,२० १४ १४ १५- ७.१४ देशभाषा देशभाषितकला देशभाषित देशभुति देशलक्षणम् देशविजय देशीपात्र देशीपुरुष १८ २२ ३३ दाहड दाक्षिण्य १२ ३० २३ १४ -- २२ १५ १३ ११ ४,१२ ur दाक्षिण्यगुण दीप १४. ५,१५ १६ ३१,३५ २१ अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पंक्ति पंक्ति शब्द पृष्ठ । पृष्ठ १९ देशीय ३ व्रत ११ देशीय पुरुष १६,२३,३० ६२ ६३ ६३ १४ ३७ . देश्य ३९ ३८ द्रुतविलम्बित द्वारपदस्थ द्विज ३३ ५ M १३ - दोष ६,१८ १,८,१९ २४,२६ २,१९ २८ " द्विजवर ३५ ३४ ३५ ६५ ३,१९,३५ १४ १० दोषगुण दंड १२ १७ २९ २२ १८ द्वीप द्वीपदेश २८" २६ १७ २२ १५,१९,२९ १८ १०,३५ ४ दंडनीतिविद्या दंडशास्त्र दंत ९ १८ २९ ३० २७ " २३ २५ १ १९ ९ द्वीपान्तरदेश धनपालक धनपुरुष धनु १७ १२ दंतकर्म १९ १८ २८ " १८ ४ दंतविज्ञान २६ २३ २६ २४ २५ ३८ १६ २७ धनुष्य धनं धर्म ६४ ३७ "२६ ७,१५ २८ ।२४ ५,१७,३० ९,१०,११,१२ १२,१३,१४,१६ ९,१४,२३ २१,२५ ३८ ३ ७,१२,१४,१७ ११ r दंभ धुत २६ ३,८,१३,१९,२५ -- १९ २२ २३ ९ द्युत २२ २१ ३१ २३ २५ २६ २४ ३८ ११,१४ ४,३४ ३६ (२८ घुतविज्ञान द्रव्य . ६९. १३ २,३,६ ५,१०,१३,१७ ७० ३ २७ ७२ ७५ १२ १४ ३६' ७६ ५,७ द्रव्यदान द्रव्यमहोत्सव द्रव्यविद्यादिदान द्रविड " २१ २८ ~ २८. २३ ५ २९॥ ७३ १२ १७ धर्मकला धर्मगुणसग्रह धर्मचर धर्मचरितं धर्मपात्र . ९,२२ ९ ३० २८ ७२. १४ १९ द्रविडदेश दृष्टम् दृष्टि द्राविड १५ ७,१४,२२,२८ १,८ ८,१०,११ १८ २९ १३ १९,३४ धर्मपालन ७१ ૨૨ वस्तुरतकोषः। पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंकि शब्द धर्ममहोत्सव धर्मलक्षण धर्मवाद धर्मविज्ञान ७६ ३० २१ २४ २,३,७ ३२ १६ धारण धारणं २५ २६ ६१ २७ १७,३१ २६ १०,२२,२४,२६ १६ २५ धारणा - ४ २९, " २८ ९ २६ ६१ ११,२७ २१ २०,२२,२४, धाहल धाराधरदेश धारणविज्ञान धार्मिक २७ २ ७४ धर्मशक्ति धर्मशास्त्र १८ - २५ २५ १९ ४१ धावनं २९ १५ ५८ ५९ २३ १,३,५,९,११ ८,९,१०,११,१२ २२ ३५. ४० ३३ ३० ७४ ३,१९,३५ १४ ७२ ३२८,१३,१८,२३,२८,३३ ३२ २ ४३ । १३ धृष्ट धृत धर्मशास्त्रविद् धर्मशीय धर्मस्थान धर्मस्थानं धर्मज्ञा धर्मारंभरचितं الس २६ ३३ ३४ ३५ ३६ " ३ ५,२१,३७ ३१ १३ ५,२२ २,९ धर्मिछ। ४१ धृति --- ३८, धर्मिष्ठमहोत्साही धर्म ६० , ३९ २६ ४० ९ . ३,४,६. २,३,५ ४० ६,१२,३१ २० १९,२०,२१,२५ १५ १०,१२,१३,१९ २३ १९ ३७ १०,२,४ ३,२१, ३४ २५ धर्मण धरानंग ५ ४० २,५ ७५ ६० २९" २३ २५ २६ २२ धातु ४० २,५ - धिंधिम धीर धीरललित धीरशांत धीरोदात्त धीरोद्धत धीरोपांत धूप धूपनवास धूपनाधिवासः धूपनानि धूपने धैर्य ४४. १२ 1 ९ ८ १० ४४ : ४४ ५८ २३ ॥ ४४ ७,८,९ ५,१६ २८ १५ २१ धातुकर्म धातुगतपदार्थ धातुपदार्थ धातुवाद धातुवादकला धातुविज्ञान धान धान्यपाल धान्यपालवंश धान्यपुरुष धारउर ११, २४" - ७५ १२ १२ १३ १०. , १० धैर्य धैर्यगुण धीतगृह ध्राण १०,१४,२० ११,१५ 1१८,३५ १६,३३ ९,२६ २६ -२२ २५ ६,२३,४० ३२ १६ २९ ३० २३ ३१ ३५ १० ३२ ११ १२ १३ " अकारादिशब्दानुक्रमणिका । २३ शब्द पंक्ति पृष्ठ । पंक्ति शब्द नागणिक २८ ध्राण , ध्राणगुण ध्वज १४,२३,३० १६ زر ३० । २० - २१ ११ ३३. ३४, २६ २६ १५ २९. - २९ - नागणित नागाणित नागभुवन नागरपान २९ १३ १०,२६ १८ १५ ध्वनि . اس ل سه سد لا ३३. १४ १५ ६ ३,१०,२६ ६,११ . زر ~ ११,२७ नागरिक ३ . । ३५ नाटक १९ १४ २,२० २२. २१ २०,२४ नख - .. २५ - २६ २७ ४१ नाटककला नाटकशास्त्र नाट्य १०,२३ ३,१७,३३ १९ ३१ १९ ३,९,१८,२३ १६ १३,१७ - - " ८ " १८ ४८ नखविलेखन नखविज्ञान 'नखशीच नखस्पर्शनं नाट्यनाथुपचारेण नाव्यशास्त्र नातिमानिनी १९ २४ ४४. २,४,६ १४,२६ १४ २३ २४ २,४,६,८,१०,१२ ४२ ४३ ९,२३ १६ ९,१४,२१,२८ १६ ". ५८ - . नात्यर्थ (2) नात्यर्थशायी नात्यर्थानप्राप्त ६० १४, ६० नगर नगरनायक नदी ४ . - नाद २० २१ ९,१९,२८ ५,१२,२१ ३५. ३३ ३४ ३५ ३६ ६० २३ ९ १२६ ३ २,१८,३४ १३,३३ ११० १६ २१ १५,३२ २७ नप्रात (2) नाम नार्मद नामर्द २४ नर्मदा २८. २९ ३० ३५० २५ " r १४ . " । । । ७,२५ १८,२१ नर्मदातट ३५ ३६ २९ ३० २८ سر سد لسل १ २१,३६ ११ १८ "" नायक नायकाः नायिका नार्याः नाराच नारि नारी नारीकला नारीपरीक्षा निकुन्दम निकुम्भ नर्मदातटदेश नय नर नरपरीक्षा नरभुवन नरसहन ११ १४ ५,१७ ३२ ११,३४ २२ २३ २२ २३ २० २० २४ २३ ६ १५,३१ २४ ९ ३४ ३६ ३७ ६,१३,१५,२६ " १० ६ वस्तुरनकोषः। . पंक्ति पंक्ति पृष्ठ शब्द पृष्ठ शब्द १३ ८ निकुम्भवंश निग्रह २७ ७३. २४ १६,३३ १४,३१ ११ नियुद्धकार नियोग निरसता निरोध १२ १२ २७ १८,३४ १० निग्रह १३ ८,२४ १३ ५७ - १० २,७,९,१२ १९ निग्रहगुण निघंट निघण्टु निर्णय ५७ १९ २१ २४ ३,९,१४ १८ १४ १६,२०,२१,२४ १,९,१४ १५,२० १९ ६६ निरंकुशा निर्लज निर्लज्जा निर्वाह निर्वाह निर्वीर्यता निर्वेद निवेद निश्चय निश्चयस्थान ६७ । निर्णयस्थान नित्ययोगी नित्यरोगी ૬૬ ६७ ५७ ३८ ३९ ६७ ६० ६७ १,१४ २९ ४,१७,३० ७,१८ ९,१०,१४ १४ १२ ९ निद्रा ३८ १४ ८,१५,२३ ४,११,१६ १७ १४ - ६० २० निर्दयत्वं निर्दिनी (2) निधि २६ २० १४,३१ १०,२६ निश्चलानशायी निश्वासोच्छ्रसन निष्ठीवति निठुर निष्ठुर निष्ठुरता " " ३३ ३४ ३५ ३६ १९ २५ २५ २६ ४८ १५,२१ ४७ ७,१४,२०,२६ ३,८,१०,१३ ५७ १३ ५७ १६,१९,२२,२४,२५, २८ ५७ १९,२० २२ १३,२७ २३ ६,१८,२९ २५ १५,३० २७ २१ २९ ६ २३ निघण्ट निर्माल्य नैर्मल्य निठुरा नीचप्रदेश नीति निम्नप्रदेश नियति २२ १,३१ १७,१८ ८,१९,२७ १,१५ २० '" २१ ५,११ १ २४ سم नियम नियुधकरण नियुद्ध ८ २६ १५ नीतिकला नीतिमानिनी नीतिविज्ञानं नीतिशास्त्र नूपुरोत्कर्षणं २५ १९ ४६ २१ २८ २,७,१८ " २४ २२ ' २४ १२,१८ १६ ४८ " नेपथ्य २३ २६ २२ २३ २५ - नियुद्धकरण नियुद्धकार -- १२,१५ ६,१८,२८ ,६,२० १४,२९ ३८ १२ १४,२८ १२३ नेपथ्य २५ " २७ ५ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पंक्ति शब्द शब्द पृष्ठ पंक्ति २१ . २९ पत्र नेपथ्यकला नेपथ्यविज्ञान नेपथ्यविज्ञानं १६ २६ २५ ४,१४,२५ २,३३ २५ २४ ८ पत्रक ५,२० नेपाल . २८ २० २,१६,३,१ ६,२० २९ ३० । १५ । २४. । २३ १३ २८ पत्रविनोद पत्रविज्ञानं पद पदगतं पदस्थपात्र ७४ ६२ नेपालदेश नैर्मल्य नैर्माल्य नैयायिक नैयायिक नृत्तज्ञा १३,१५ २,३,४ ११,१९,२६ १२ २६. १४ १६ २६ ६७ १५ ६७ ४ पदस्थपात्रं १४ २० पदार्थ ८ ६ १५ २७ १५ नृत्तपाठ नृत्य ४ १७ पदार्थकरण -- १५ १६ ३१ " ,१६,२८ पद्म ३१ १५ ५,२६ २४,२७ ४,२०,३६ ३० १२ ९,१२,२१ ३० ३४ ३५ ३६ २७ १,१०,२२ ७,११, ३,८,१२,१६,२० २७ ११,२३ २४ ३२ २२ नृत्यकला ७० 4. २३ २२ २१ ३०७ ३१ 1. पद्म पर्याय पर्यंक 4. २५ नृत्यलक्षणं नृत्यलक्षणं नृत्यविनोद पर्यंत ३५ ६७ ३४ ६८ ६९ ६८ १७ २७ ” ६,२६ २ नृत्यज्ञा ४२ ४३ ६७ १५,२२ ८,१४,२७ ३० ४१ परकीया पदच्छेदिपात्र न्याय १५ ६ १ परपत्र, १८ ६८ २० । ३३ ७,१४,१५,२१ ९ प्रकृति पट्टिसु पठित परमार परमारवंश १८॥ ८ १८ ९ २ २२ । २३ २ २१ परमित २१ ४ ५,१५ ७,३२ १९,२३ ३,१४,३६ २५ २३ ८,१३,१४ ३,१०,३३ ३ ३४ ३० पठितकला। पठितविनोद पठितज्ञा पीहार -- १५ ४२ पराक्रम ३७ ३६ ३७ ३३ पराक्रमकृत पराकमयश पराममुखी ९ ६,१२ ८,२७ १० ४१ ४८ ५ पण्याना पत्र १५. पराजय १३,२६ २६ वस्तुरतकोपः। पान्द पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति ६,१० २६ ६७ ३७ ३ २४ २० पराजय पराजयकृतं परान्मुखी परिगत परिचारिका परिछद परिच्छेद पशुपालन पशुपालविज्ञानं पनुपाल्य पक्षः २१ ६७ १८ १४ पक्ष ११ ३५ ९६,३३ १८ पक्षप्रमाण पक्षि २६ ६६ ६७ ૬ ૬ २२ २३ २५ १२ १४,३१ १३,२२ ३,११ १८ १७,३२ ३३ २२,२६ २६ ११ ९,१३,१८,२४,२९ १३ २४ ६ १० पक्षि २७ ६१ परिच्छन्द परिच्छेदगुण परिणामकी परिणागिका परिघ परिधानसंयमनं परिवोध परिवोधशीर्य परिभावक ६१ १८ २३ १४,१७ १६ १३ १४,२०,२७ पक्षिकला ३१ ६६ २२ २३ ३१ ४८ २४ ३ G १९ पक्षिलक्षणं पक्षिविज्ञान पक्षिशिक्षा पक्षी ४० ११ २६ १५ २६ ६५ ४१ १४ परिगापितं परिभावुक परिमापिक परिमारवंशा परिमिता परिमितं १६ २३ २६ १५ पक्षीविनोद १२,३२ १९ ३८ १७ १५,१७ १४ ९ ६९ ६५ २९ ३,८,१३,१८,२४ ११,१३ १९ १५ २६ १,२३ ११ १८,३४ ९ पान्चक पाट पाठ्य २२ १६ १६ २९ ३० २० ६९ पाउल १४ ६३ पाणि ४,१४,३१ परिपद परियगी परिस्फुट परोक्षनामस्मरण पवित्रभापण पवित्रवाक्य १५,१७ २२ २१ ८,१६ पाण्डित्य ११ । ur ४४ २१ ३१ १२,३० ६,२२ ५,१०,१५,२६ " १२ १३ ३१ ३१ । पर्वत पर्वत ३ पाताल पाताललक्षणं २,१४,३४ १३,३३ १० ३० ३३ ३४ ३५ ६९ ६९ ३३ २६ २९ ९ २९ पातिकर पात्र १२ पर्षद पाश पनुपाल २२ २३ ६ १५,३० ९,२२,३१ ८,१३,१७,२७,२९ ३१ २७ अकारादिशब्दानुक्रमणिका पंक्ति पंक्ति शब्द पृष्ठ शब्द पृष्ठ ९ १६ पात्र पाल पालकत्व ११ २२ १२ ४,८,१२,१६,२० १३ १३ ३० पात्रकला पात्रं पात्रलक्षणं पात्रसग्रह पार्थिव पाद पावकत्व १५ पावकत्वगुण १० ४ २३ १४,३१ १२,२९ ५,२२ १३ २० २९ ६,१६,१८,२५,३१ २४ २७,२८,३० १३,२७ ११ ३१ पाश २० १८ २१ ४,१४,२३,३१ ८,१६ २९ ३० ६७ " पान २२ पाशुपतं पाशुपत पाशुपाल्य ६७ २५ २३ २६ २७ 1 १९,२४ २ ६७ २३ १,२५ १७ पानककला २२ पानभोज्यादिविज्ञानं ५९ पानभोजनविधानं ५९ पानविधि २५ १५,२०,२६ २३ १५,२९ २१,३८ १४ पाशुपत्य पाषाण पार्श्वचालनं पार्श्वविवर्तनं पार्श्व आचमनं पार्श्व वाऽऽचमनं मित्त पित्त ५९ ५९ ५९ २२ १४,१९ २५ ७,१७,२५ २,१०,१९ २७ २० १ २१ २२ पानविधिविज्ञानं पानीगृह पानीय १८ १९ २५ . ३२ ३३ ३४ ३५ पिप्पलपत्र १३,२९ ९ ३५ ३३ ३५ ३६ ३३ میں ३६ पिप्पलपत्र पीठ १४ ३२ ४,२२ १,२७ ७,१२,१७,३२ २२ ३५ पानीयगृह पानीयस्थान पापांतिक पापातिका पीनस्तनी ४२ ४३ २९ २५ ३० २८ ३७ २५ " पुण्यकीर्ति पुनर्भू पुनर्भूपात्र १४ ७ २९ १४ १३,२१ ७,१२,१९,२६ ८,११,१३,१५ ૨૪ ५,१२,१९ ६,१३ ३० ६,१२,२६,२९ ९ ३० १२ १८ १५ ३५ पुराण पापीतिक पारमित पारमिता पारिगत पारिणामिकी पारियात्र १९ ६९ १ पुरुष ८.१६ १०,१२ १३,१५ १८ १,२९ १८ ८ ६९ २८ २९ १ २० २१ २२ ६,१५,२४ १,९,१७ १७ ८,१३,१८,२३,२९ ३० २७ २४ परियात्रदेश पारपर्यविज्ञान २९ ६ ३१ २८ वस्तुरत्नकोषः।। शब्द पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति ८ पुरुषकला पुरुषलक्षणं पुरुषार्थ २२ ३१ पूर्णदान पूर्णपात्र २९ १ ३६ ३३ ३४ १ ११ ८ ११ Www पुलिका १८ २ १९ १३,३० ९ २३ ३० २३ २७ पुष्टि ११ . १२ १३ ३३ १७,३४ १५,३२ ८,२५ पूमायात् (वं भाषते) ४६ पूर्वदिशि २९, पूर्वदिशि देशा २८ पूर्वदेश ३० पूर्वदेशा. २७ '१८ १३ , ३५. १८ , २८ १३ १० ४७ १ पुष्टिगुण पुष्प पुष्प पूर्व भाषते पूर्व भाषते १५ पुष्प ४५ १९ -- ५,२२ .२४ ३० ४,८,१४,१९,२६ १५,२९ ९,२४,३९ १४ - १६ २५ २६ , ४६ ४६ पूर्व भाषित पूर्वमुत्तिष्ठति - २७ - " २१ ६,१८,२६,३२ -- ४६ ३३ ११ ४७ ३ पुष्पपात्र १४ २६ ६ । १२ १५ ५८ १,८,२० १५ पूर्वमुत्तिष्ठते ४६ पूर्वमेव चुंबनं करोति ४६ पूर्वमेव चुंबनं ददाति ४६ पूर्वमेव खवचनात् भाषयति ३३ १२ ४८ २४ पृथ्वी २० पुष्पमाल्यादि पुष्पनालादिदानं पुष्पवास पुष्पविज्ञानं पुष्पसयमनं पुष्पादिभोगेन पुष्पादिमाल्यानि पुष्टि पूर्वचुंबनं करोति २,२१,२९ ४८ २१ पृथ्वीतत्त्व १८,२६ १९ १०,१७,२१ १३,२९ ५८ ५८ ३४ १२ २० २१ رو १४ ।' - ६५ ४६ पैशाच पैशाचं पैशाच पैशाचिक २६ २० ६५ ४७ २८ पूजा २० ६५ २२,२४ १ " r ३३ ३५ ३६ ३६ ३५ १४ २६ ६ २८ ३५ १८ ९ २५ १० पोत पोतिक पोतिकपुत्रवंश पोन्द्र पौतिक १७ पूजा पूजानिधि पूजाविधि पूज्य पूज्यपान पूज्यपात्रं पूज्य पूर्णकलश ३२ २ ३० . १५ १४ ७ ३ ९ १० १०,१७ ९ पौमिक पौलक ३५ ३५ ८ ९ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। शब्द पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति १० प्रताप पण्ड पंडित ३० ४० °,१३,१७ १४,१६ १९ ७३ ४१ १८ पंडितसत्तम ३७ पचाल २८ २४ १६,३० १२,२६ १० प्रतापकृत प्रतापकृतं प्रतापगुण प्रतापयश प्रताप. प्रतापशौर्य ३,५ २२ १,२,६ । ३० ३७ ३७ - " पांड २,१६ २९ २२ ७१ २१ ११ १४ १९ १० २१ १२ ७३ १४ २१ २८ ८ ७२ ७१ ११ पांडित्य पांडित्यगुण पाडित्यम् पांडदेश पुंद्रक पुंड्रदेशः पुंढ प्रकाम्यमेव प्राकाम्य प्रकाम्यं. प्रकार १० २२ ६,१४,१८ प्रतापिता प्रतापै प्रतिचारिकापात्रं प्रतिपत्ति प्रतिपत्तिशौर्य प्रतिपात्र प्रतिपक्ष प्रतिपक्षमाण प्रतिपक्षः प्रतिपक्षि प्रतिभा २३ २६ १७ २९ २७ २९ ७६ ७६. ७६ ६८. ७२ ६७ ८,१० ६६ १३,२२ १८ ७,१० ६४, ६५ ६५ प्रकार प्रकारपर्यंत प्रकाशक. प्रकृति ६८ ६८ ४ '२१ प्रतिभाषा प्रतिभावान् प्रतिमेद प्रतिमा २०० ४ " ६८ २८ २१ ४६ १,३,५ प्रचारणसंयमनं प्रजापालन प्रणयित्व १९ १४ २०,२१,२३,२४ १९ २५ १८ २४ १,९,१७ २४ ८,१०,११,१२ १५,३२ १३,३० ६,२२ २१ ६ २,१२,१५ २३ ४,८,१२ १४,१९ ३ प्रतिमान प्रतिवाद. प्रतिवादि ७५ ६६ ११ १२ १२ ६६ ६७ १८ ११ १३ १० प्रतिसारकापात्र १४ प्रणयिमानत्वगुण प्रणाम प्रत्युत्तर १५ १३ २३ ६६ प्रतिष्ठा ។ ។ १२ १३. ૬૬ २२ १० १२,२० १३ १८,३५ १५,३३ ९,२६ २५ १८,३५ १६ ९,२६ २३ प्रतिष्ठागुण प्रतिज्ञा. प्रत्युत्तरकला प्रताप ९ ११८ ११ १२ १३ १५,३२ १३,३० ६,२३ १२ १३ " प्रतीहार ९ ३० वस्तुरतकोषः। शब्द पृष्ठ पंक्ति पंक्ति शब्द पृष्ठ ८ प्रमाण प्रतीहारवंश प्रथमस्थं प्रथमस्थित प्रथमं शेते ६३ ६३ २० ३७ ३० ८,१४,२१,२६ ४७ प्रमाणत्व प्रमादपर्यन्तं प्रमाणं ४८ ४१ १७ प्रदत्ता प्रदत्ताप्रकाशक प्रदान ४१. २४ प्रमाणं ३३ ३४ ६८ ६९ १७ १२,२८ ४,२२ प्रभेद प्रभेदसिद्धि प्रमेय प्रदीप ३४ ३६ १४ ४,२० १,१२ " प्रमेयं प्रधान ३२ ६९ १,५,१०,१२,१६,१८ २०,२४,२७ १२ ३० ६९ २७ ६३ ३१ ६६ ६,१३ १४,१९,२६,२८ ३,८,१४,२३,२५ ६६ १३ ६९ ५ ६६ १९,२३,२८ ६७ ४,७,१२ ६६ १३ ४,१२,२० ११ १५,३२ १२ १३,३० १३ ६,२३ ३९ १ ६० २३,२५ ६३ १२ ६६ १९ ६९ २६ ७२ ७,११,१४,१९ १० २२ ६८ २१ ६९ २४ १० १७ १५ प्रमोद ५ प्रधानपात्र प्रधानपात्रं प्रधानपूजापात्र १४ २ १४ १५ १०,१८ ११ ११,१४,१९ २ प्रयोध ७२ ६५ प्रबोधशौर्य ७२ ४ प्रभाव ११ १२ १३ " प्रमोदगुण प्रमोदपर्यंत प्रभुत्व '१६,३३ १३,३१ ७,२४ १४,३१ १२,१९ २२ २० ११ - २ ७२ १२ १३ १० " प्रमोदशौर्य प्रमोद प्रयोग प्रभुत्वगुण प्रभुत्वम् प्रमेद ५ १९ ६९ २२ २३ २६ २३ १५,२९ ८,२१,३१ २४ १ १२,१४ २ - " ७४ प्रमदोपचार प्रयोगकला ३ प्रलय प्रमाण २३,२८ ६७ ६८ २१,२९ ६९ २,२०,२३,२४,२६,२७ १९ ११ १५,३३ १३ २३ २३,२८ ६७ ६८ ४,६,१०,१२,१६,२०, २१,२५,२६ २२ ३८ ३८ प्रलाप ७,१८,१९,३० १३ प्रमाण ६६ ७,१२ प्रवीण प्रशंसा प्रशंसा १०,३५ १५,३३ १२ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। ३१ शब्द पृष्ठ पंक्ति पंक्ति शब्द पृष्ठ प्रशंसा ९,२५ ४३ १३ १७ २,२२,२९ ४ प्रज्ञावती प्राकाम्य प्राकृत प्राकृतं प्रशंसागुण प्रसन्न ६५ २८ ६५ २०,२२,२४,२६,२८ ६६ १ १५,२७ १३ ११ १४ प्राग्विजृम्मणं ४८ ३८ २६ १० २५ २३,२८ ६७ ४,८ ११ १४,३१ १२ १२,२९ १३ ५,२१ ६२ ६३ -१,८,१५,२२,२९,३६ प्रसन्नत्व प्रागल्भ्य प्राजलत्व प्राण २० " प्रसन्न १८ प्राणिदयाशौचं ४४ १८,२१ ४५ " प्राधान्य १७ २ " ६४ ६५ प्राजलत्व १२ १३ प्रसन्नमुखी १२,२९ ५,२२ २० ४२ १६,१८ १३,२१ ७,१२,१९,२६ १३ ६ १० प्रसरण १२ प्राजलत्वगुण प्राजलत्वं प्राञ्जलित्व प्राप्ति " प्रस्थ १८ १३ २२ ३३ ११ ३५ १.१५,३२ प्रसाद " - " " १३ २५ २६ २७ १०,२३ ३,२१ २४ ११ ३१ १३ ११ १७,३४ १२ १५,३२ १३ ८,२५ ७६ १०,११,१४ १० २१ TV ११ १६ १२ १३,३१ १३ ७,२३ १० २२ ३१ ३२ ३२ ६,११,१६,२१,२६,३१ २४ १४ प्रामाणिकत्वगुण प्रारंभ प्रारंभ ८ . १८ ४ १३,२९ ५ ३८ ३६ ६० प्रारंभगुण प्रासाद प्रसाद प्रसादितगात्र प्रसारितगात्रशायी ५,२२ प्रासादविज्ञान प्रिय १८ प्रसिद्धा ६० ३५ ४१ २३ - " प्रश्न प्रिय " ६३ १५ १६ १५ प्रहेलिका ३,८,१०,१३,१५ २७ १४,१९ १२ ३१ ४,९,१४,२०२६ २५ ५,१० २,४,८ ३३ ३४ ३५ ૩૬ " ४८ प्रियभाषणं प्रियभाषिणी ७,२३ १,१९,३५ १६ १६,२२,२८ १२,२० ६,१२,१९,२५ १४,३० प्रहेलिकाविनोद प्रज्ञानप्रबोध प्रज्ञाप्रबोध प्रज्ञावती ४२ ६१ ४३ ३४ ४२ प्रियवाक्य ३२ वस्तुरनकोष शब्द पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति प्रियवाक्य १८ वल १६ ३५ ३६ ४१. वल ११ प्रिय. प्रियंवद ५,१५,२१,२७ ६ १९ १०,२७ १८,२४ २४,२७ ४०. २३ १६ १५ २,८,१३,२८ ४ १३ ६० ४१ ४३ ७० -- प्रियंवदा प्रीतमना प्रीति ४१ १४ " ११ १७,३४ १५,३२ १२ वलगुण १० प्रीति १२ १३ २६ - १३,१५ १०,११,२६ १,१७,३४ ७,११,१५,१९ १५ ८,२५ २५ ७२ . २ बलम् ५ २२ ११ " ३५ १८ ७२ ma . वलशौर्य बलेन ८ ६० २५ बारड ९. २२ ३६ ५ १६,२१,२८ - २,८,२८ १५ ३,५,७,९ प्रीतिगुण प्रीतिमति ४३ प्रीतिमान ४१ प्रीतिवान् प्रोषितभर्तृका ४२. प्रोषिते तुष्यति प्रोषिते, दुर्मना ४५ ४६ प्रोषिते दुर्मना भवति ४७ ४६ प्रौठित ६६ ९ बालकृत ३७ - बालमुखचुंबन ४८ बालसयमन बालसंस्कारप्रबोध वालालिङ्गनं ४८ वालानां सस्कारप्रबोध ६१ वाहीक ९ १० बिंदु २० २,८ १५,२१,२७ ६ २२ १३,२६,३३ २,९ ३ ७.१९ " २१॥ २४ फराट २ १०,१६,२८ १,१२,१८ २३ २१,३७ ९,२५ १७ ९ + बीज बीजपूर बीजपूरक ३० ४,८,१४,२०,२५ ३३ ३५ ३४ . " १६ १५ ५९ " - २० १५ २९ ३७ २२ २२ फलादिभक्षणं फलविनोद वजूर चवर वब्वर वर्वर १५,२२,२५,२६ २२ १७ ३२ १६ २० वीभत्स वुद्धन बुद्धि " । १० २९ वश्वर ११ १२ " २६ १९ १,१७,३४ १०,२७ । ,३०,३४ २८. २९ ३० " , 4 १७,२१ १६ वर्वरदेश २८ " चल १५ ३१ २० 1 ५,१५,२४,३१ अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति भन्द बुद्धि २१ भय ३९. । ५,१४ ४,८,१७ ५,१७ भाजन २३. ७२। २५ बुद्धिकला भाण्डागार भारती २९ २३ २७ ३५ १७ १० ३९ २३,२४,२५,२६,२७, २८,२९,३० २ १४ ६४ २१,२४,२७ ६५ ३,६,१२ २८ भाव - 1. १२ २३ ७० १० ४,९ ४,२० 22 भावकत्व १२ १४ बुद्धिगुण बुद्धिगुणाः बुद्धिवल बुद्धिमुख बुद्धिसख बुद्धिसुख वूसर चोकाण बोकाणा वोकाणदेश १७ २ ३० १३ ११ سه २९ १५,३० २ २८ २,१७,१९,२० भावकत्वगुण भावशौचं भावानुगतं भावुकत्व भावुका भाषापंडित भाषालक्षण भिंडपाल भिंडमाल ६५ १२ ५७. वौद्ध बौद्धं वंगदेश २,१७ १६,१८ ३७ २४ ५,११,३१ २० 10 ४ ६७ २७ २८' वंगाल १८ १९ २१,२२ १९ १४,२८ १०,२४,३९ १४ १७ " २९ ३० . .३० ६,१२ ३१ " १८.. भिंडिमाला, ( १८' . भुक्ति ११'' . २२ ९ २६ २९ ६८ ६८ १२३ बदिल्ल वंध बबु ब्रह्मचारि ब्रह्मपर्यक ब्रह्मपर्यंत ब्रह्मवंश ब्रह्मा " २३ २६ ४,६,८,१२,१४,१६ ९ ५,७,१०,१२ १८ २५,२७ भुक्तिपर्यंत भूतकर्षण भूमि ६७ २६ ६८ ९ १ ८ . १० १ २ ३३ ३४ ३५ ३६ १६ १,११,३४ ३६ २ २३ ३४ ३६ २२ . २३ १,१७,३३ १२,२८ " ९ ब्राझं भक्ति ।। १७,१९,२० २१ २५ भूमिकला भूमिपरीक्षा भूमिपालनं भूमिलेप भूषण २४ ८,१०,११,१२ ७१ २२ १८ . १२. ३१ १२ । २० मद्र भय । २१ ३ १९ " " २१ । ३८ १९,२६ ३,११,२० ३,१३,२८ भूषणोद्धाटन १,५,८,१३ १३,२०,२५ ३४ ३ वस्तुरतकोषः। शब्द पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति १७ २२ मद्य भेद भोगहीनता भोगिनी १७ मर्दन ३६ २५ २६ २७ १३ ७,२०,३५ १३,२९ २० ४२ ४३ २५ ५ ४४ ९ भोजनवास भोजनशक्ति भोजनशाला मर्दनविज्ञानं मधु ७४ २४ ३३ ३४ ३५ १९,२१,२२,२५ ४,९,१४,१९,२४ २९,३४ ३२ ९ ४४ मधुरवाक्या मधुरा ૪ ४२ भोजनादि भोजनाधिवास भोजनाधुपचार भोजने भंडार ५,२१,३७ १५,३१ १३ १५,२१ १६ २८ १७,२५ ७,१४,२८,३६ ७,१३ १४,१६,२० ११,१५ १२ ५८ ४३ ४४ मधुरं ६२ १० ९ १७ ६४ मकुआण मकूआणा ९ ६५ २५,३५ १५,२९ १४,१७ ११ मगध २८ मध्य २९ ३० " २९ ३० १५ २५ १५ २९ मच्छ २९ २८ २२ २७ २८ ९,१५ मठगृह मठस्थान मठस्थानं in m m m ir ३२ ३२ मध्य मध्यदेश मध्यदेशाः मध्यदेशा मध्यम मध्यमपर्यंत मध्यमिका मध्यं ७,१२,२२,२७,३२ ३२ २ ६९ ६९ मज्जा २० ६,१६,२५ २,९,१८ २,३,४,५ १९ २१ २० १६,२३,३०,३७ । ३,१० २१ ૬૨ ६३ ३३ ९ मणिमय मणिशाला मति १८ मध्यं प्रमाणं ૨૮ ६४ १०,१४,२४ २,११ १५ मन २० ५,१५ १३,२५ मतिमूढ मर्त्यलक्षणं मत्स्य २९ ३९ ३० ३४ ३५ ३६ १०,२६ ८,१७ س س س س س س س س س ل م س س س سس १९ १० १७,२४,१२ १६,२७ १५ १,८ मनशाला ३५ मनस् २१ मनु ३१ मनुष्यलोकस्थान मनोवान्छितविनोदः ५९ मनोहरं ६५ मनासि २० मण्डन १२ १३ मर्म २५ ११ मद मदनगुण मदिरा मद ८ ५ ३३ ३४ ५,२१,३७ १६,१८,३१ ५,२३ १६,३३ १८ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। ३५ पंक्ति पृष्ठ शब्द पंक्ति पृष्ठ मर्म १२ ३ २८।। महाराष्ट्र महाराष्ट्रदेश महाव्रत महाव्रतिक १११,२४ १० २७,२८ ३०,३१ ६७ मर्मविज्ञान मर्यादा - ६,२३,४० १६ २५ . १ मर्यादा मर्यादागुण मरण मरण २६ २७ २५ १२ १३ २२ ११ ३१ ३८. ४५ ४५ ३८ ३९ २८ महानतं महिमा महेश महेश्वर २५ ९,११,१३,१५ ३३ ११ ६८६ ६७ ७६ ३४ ३३ ३४ ३५ ३८ २ ११,२७ १३,१५ १५,१७ १९ १,३,१७ १२,२८ मरणं मरणांत ९ महोत्सव २ मरु ११ मल २० ३२ १७,२६ २,१०,१९ २ २१ २१ ३,१९,२६ १२,२९ ३० ३,८,१३,१९,२५ २ १२ १३ १५ १६ ११ " " २२ ४५ ३०. २८ १६ मलय मलयदेश मल १५ २१ १,५,९,३० महोत्सवगुण महोत्सव विनोद महोत्साह महोत्साही मक्षिका ४१ १८ ६ २२ १२,३१ १८,२५ ३० ६,३१ ११ १६ १७ १३ १८ ५ मागध २९ मल्लस्थान मल्लस्थानं म(श्म)शु मराठि मस्तकविज्ञानं महत्तम १८ १ २८ २६ २८ २९,३४ १,५,९,१४ २१ १६ १७ मागधदेश मागधं ३० ६५ २७ ६५ ६६ २० २१,२२,२४,२६,२८ २ महत्तमपात्र ९,१७ १४ १५ मात्सर्य ।१० ८,१९ २१. २ " ६,७,८,१० १४ ६२ २९ ३२ ३,११,२० २५ ११,१३,१९ माधुर्य माध्यमिक माध्यमिक २० ९,१४,२४,२९,३४ ६९ महत्तमपानं महागीतं महातट महानस महानायकाः महापात्र महामात्य महाराष्ट्र १,१५ २. मान २० १४ २५ " ३८ २६ २६ ६,८,१८ ३१ ७२ १४. २८ मानं मानगुण ६,२०,३५ ६ २६ , वस्तुरनकोषः। पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ २ ३१६ १४ १५ ४ १६ १४ १ ७३ ६ शब्द मितहार मित्र मित्रपात्र मित्रम् मित्राङ्ग मिष्टानं दात्री मुक्ताफल १ १४ मानचरितं मानपात्र मानपानं मानव मानवलोकसस्थान मानवसस्थान मानवस्थानं मानशौर्य मानसिक ३० ९ १०,११,१३,१४,१५ १५ ७३ १० ४६ ३३ ३४. ३५ १०,१२ १४ १३ १ ९,२५ ७३ ४३ ४३ ७३ ७३ ११ २१,२२ ३२ ३३ २० ३,२१,३७ १८ ४,३८ १४,३१ मानसिक " ४४ २२ माजल्य ४४ १२ १३ २१ १९,३६ १२,२९ २ मुक्ति १३ मुखवास मुखशौच ४५ मुखशौचं मुखस्था(सुखस्थापक) ६३ मुखस्थापक मुखस्थं ६३ मुखाधिवासः मुखाधिवासे ५,१३ २२ २३ १९ ३० ५,१३ १० ११ माजल्यगुण मान्य १४ मान्यपात्र १४ ४४ ११,१८,२६ ३,९,१२ १५ ४४ मान्यपात्रं १४ ३ मुखे ४४ १४ माया २० ९ १८ २१ ४,१२,२१ २० ७५ ३० मारणे मारववश १४ २६ ८ मारू ९ मालव २८ २९ १८,३२ २६,२८ २,१८ मालवदेश माला २९ ३० २७ ३५ ३२ ३२ २९ मुड १८ मुडकवंश मुद्गर १८ . मुद्रिकाकर्षणं ४८ मुलतान २९ मुशल १८ मुषाभव्यं(सुभाषान्यं) ६३ मुषंढी १८ मुष्कायण ९ मुसुंठि १७ मुहूर्तवलं मूर्ख ३ ५७ मुर्खा ५७ मूठकुट्टनं मूढ ३८ ३९ मूलगतपदार्थ ६,१२,३१ १२,१८,२५ २० २,८,१४,२१ २० ७,१३,१९ २५,३० ३० २४ १५ ४,६,८,११,१४ ६ २० मालाग्रह माल्यगृह ७,१२,१७,२२,३२ १४ मावल ९ ३७ २१ मापा माहेश माहेश्वरं माहेश्वरम् ३५ १० J ३ १७,१९,२०,२२ । १८ ३ माक्षिक १८ १० अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पंक्ति पृष्ठ शब्द पृष्ठ शब्द मोहन पंक्ति । १८ ५,२३,३५ ७,८,९ ८ २५ २६ २७ मूलपदार्थ मृत्तिका ८ ३ 1 ३२ ३३ ३४ ३५ ३६ ४५ ६,२२,२८ १७,३२ १४ १,५ मोहविज्ञान मोहविज्ञानं मोक्ष २४ २ ८ १९ ४५ ३ मृत्तिकाशौच मृत्तिकाशौचं ३१ १७,२०,२२ ४४ ६९ १२,१३,१४,१५ १०,१४,२४ ७,१२,१७,२३,२८ ९,१५,१९ ५,१०,१३,१७,२० ११,१३,१७,२१ २,५,६,७ ४५ " ७७ . मृत्यु मृत्युलक्षणं मृदुकुट्टनं ३१ ३१ १०,१५,२६ २० ४,६,८ ६९ २५ ३० १९ ४,१८ मृदुगात्रशायी २९ ५९ मोक्षपर्यंत मोक्षमहोत्सव मोक्षलक्षणं मोक्षशास्त्र मौदिक मौरिकवंश मौष्ये(सौख्ये) मत्र ९ १२ ३,१५ ८ १९ ६ ६० २५ मृदुपत्रशायी मेध मेघ ११ س س س اا س س २३ १५ ११,२७ ६,२३ २,२० " मत्र १२ १३ १५ १६ २३ १९ ३६ २४ ३२ मेघविज्ञान मंडरा मेद २२ ३,२०,२६ १३,३० ३० ८,१३,१९,२५ १७ १०,२०,२४ २६ ६,२० १३,२९ ८ - २० " मेदपाट २८ ६,१६,२५ १,९,१८ १५,३२ १४ ५,१८ २३ २५ २६ २७ ४१ २९ ३० ५ . २८ " मेदपाटदेश मोदक ५,११,३० २५ ७२ २७ ३३ ३४ ३५ मंत्रकला ३,१२ २२ २३ २८ - " १० ७,२३ १,१९,३४ १५ ५,१२,२२,३५ ११ ३ ९ १५ ७२ मोरी मोरी मोह १० ४१ मत्रगुण मंत्रपात्र मंत्रबलं. मत्रवान् मंत्रविनोद मंत्रविज्ञान मंत्रविज्ञान मंत्रशक्ति २३ १७,२४ २२ १५ २४ ८ १८,२६ ३,१०,११ ६,१९,२१ १,९,१९ ४,३२ २१ ३८ ३९ २५ मोहजविज्ञान ७४ २५ १७,२२,२४ वस्तुरतकोपः। नान्द पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंकि १९ ८ १७ मंत्रशास्त्र मंत्रि यादववंश यादववंश १६ १० १ + १७ यामन १४ यामुन २८ १०,२४,३९ १४,२८ १५ १४ २९,३३ ५,९,१३ ९,१६,२४ ३१ १० २३ ५,१२ मंत्रिपात्र मंत्री मंत्रीपात्र मंकाणकवंश मंकुन्याण ३० १५ यामुनदेश युक्ति २० २३ ८ ११ ९ १० ५ १२ १३ १४,२१,३८ १४,३१ १२ ४० मंडण मंडन मंडप मडपशाला मंदिर ११ ३२ ३२ युक्तिगुण युद्ध २५ ९,१४,३४ १९ १३,१८ १३ २२ २१ १५ १०,३२ १६,३१ १२ २८ ३५ ९ २२ मंदुर मंदुरा मास २२ ३२ ३२ १९ ३ २२ १६ १६ २० २३ ३३ २८ ६,१६,२४ १,९,१८ १४ २१ ५,७,९,११,१३, १५,१७ ११ युद्धकला युद्धकार युद्धविनोद युद्धशक्ति युद्धसमय योग २३ १८,२१,२५ २३ २१ २९ ३६ ६८ " २३ २५ २७ ५,१९ यति २६ " १२ १५ योगविज्ञान २४ ३ १८ २६ यथाचार यन्त्रगोलिका यमक यमुना २५ ६९ '३३ ११,१३,१५,२१ २ ४४ " १३ २२ १५,३२ १०,२७ ७,२५ ११ ६३ ३३ ३४ ३५ ३६ ३५ १२ २६ १६ योगाचार योगाभ्यासकारणम् योगांत योगोपचार योगाचार १९ ६९ ६९ १७ ६९ ८ यश यशोवंत २० २१ यंत्र १७ १३ २,३,८,१३,१८ १९,२५ २१ रति ३८ ३९ २२ ६,१६,२४ १,९,१८ १२ २,१२,२०,२८ ५,१३ १५,३० १३,२६ १९ २४ यंत्रविनोद यंत्रविज्ञानं यादव यादववंश ९ १५,२१ १८,३२ ९ २६ - अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पंक्ति पंक्ति पृष्ठ शब्द पृष्ठ शब्द ५ ११ ५९। रागादिव्यसन राजगुण १. १४ ..१३ १०, २७ ३१ ३३ ३५. २६ २२ ९,१४,१८,२४,३० ९,२२,३२ १,१८ ३६ १९ १ राजनीति १७ २१,२३ राजपान १ रनकर्म रत्रकला रत्नपरीक्षा रामणि २३ १४ ७,२३ ។ ។ १३ १४ १५ ९ १ ३ 1 " " ३६ १४ ५,१२,१७,३५ ३० राजपाल १० ५ १५ रथ रम्यादि रव रवि ९ ३९ १७ ९ राजपालक राजपालवंश राजपुरुष १६ २ २५ २४ ३२,३६ १२,१६ २४ ३३ १२ २० ७२ २१ राजबल राजमान्य १४ १५ १७ " ८ । १५ १३ १३,२२,३० ७,१५ १६ २१,२४,२६ ४,९,२६ २,३,५ २,६,७,१२ २४ ६,२३,३९ १६,३२ ३,१३,३० १४ १८,१९,२४ - राजमान्यपात्र राजविद्या १ रस. १७ रसन राजविनोद १ " ६५ ११ १२ १३ २० १५ " राजवंश १ १५ १२ १६ ४,३७ २१ । १५ ११ रसनगुण रसायन राजहंस राजांगण ३५ ३२ २५. ६,१९ ५,१०,१५,२० २५,३०,३५५ १३ ४ २७ '.. २८ राज्य राज्यपालनं राज्ये राज्यं ८,११,१२ रसिकल १८,२४ ११ २२ ४,२०,३७ ६० १० १७ ७ - " १३,३० ३ ९ १२ १३ ११० ४३ ७२ ३४ १९ ९ रसिकत्वगुण रसिका रक्षण रक्षणशौर्य L ५,१२,१९,२६ १२ राठउड राठोऊड राध्यदेश राष्ट्रकूट २० ४ ८ ७२. २१ ३,१०,२४,२९ राग । २० ८,१९,२७ ३,११,२० ९ १० " २१ ४० वस्तुरत्नकोषः। पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति शब्द राज्ञी राज्ञीपात्र १४ ९ १४ लकुट लघिमा लजान्विता १५ ३३ ४,१२,१९ ६,१३ १,२७ १९,२३ १,५,८,११ २३ ९,११,१३ १४,२१ ७,१३,१९,२६ ७६ ४२ ४३ रिष्टि १८ रीती ६४ लडक ९ ,३,१० . ६५ 1 १० ३ 1 रूप ३ ६ ३ लब्धियोग ललितं " ११ २९ १०,२८ ६२ ६३ १२ १३ २० ३ १२,२२ ४,११,१८,२५,३२ १ १२,२६ १३,२७ १० लक्षण १९ " " २१ २५ २२ ३१ लक्षणकला लक्षणयुता ४२ २५ " ३,१३,२२,३० ७.१५ १०,१६ ६ ११,१३,१४,१५ २,३,५ १२ ३३ ४३ ७५ ४२ २४ १४,२२ ७,१३,२० २१ रूपक ३१ लक्षणयुक्ता लक्षणविज्ञानं लक्षणशास्त्र लक्षणस्थान लक्षणं १९ रूपकृत रूपगुण ६ १० २ ११ २० १२ १२ २० १३ " २६ ६८ ७२ रूपभागी रूपलक्षण रूपवती रूप्य ७,२०,२७ ४,६,१४ ८,१५,२० १२ ३० ३२ १५ ४,२०,३६ १५,३१ १३ २६ २६ लक्ष्मी लक्ष्मीयोग लक्ष्मीविज्ञानं लक्षितम् लाघव २४ ३५ ૨૬ ३५ ३ रेणु रोचना ५ २०,२१ ।३० ३५ १० ३४ लाजी . १ लाट १७ रोमांच ६,२२ १४ ३,१७,२९ १७ २३ २९ ३० २८ ३० २७ ३० २९ ३८ १७,३१ लाटदेश २७ ६ ४ रोमाचाः रोरीच रौद्रगीतं ९ १३ १६ १८ १,९,२२ ६४ ६२ ६३ ६४ २६ लास्य लिखित १४,१५ ६,१७ १६ २२ २३ " रोप्य रंग १९,२३ ३,१४,३६ २ १ २२ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। ४१ पंक्ति पंक्ति पृष्ठ पृष्ठ शब्द ३० २१ शब्द लिखितकला लुइक लुंठि लेख्य ८,२२ ६,११ ९ लोहपुर वक्तव्य वक्तव्यं वक्तृत्व ६ १८ ४ १९ १५ १६ २५ ३० १,१०,१८,२६,३५ २८ १,६,११,१७,२३ २४ १४,३० ११,३४ १५ १६ २२ " २२ २३ लेप लेपकर्म २६ २३ २५ ३७ ७,२१ वकृत्वं २७ ६ ७० २२ लेपकला लेपन २१ २३ २५ - १ ३५ वक्तृत्वकला वक्तृत्वकीर्ति वक्तृत्त्वविनोद वक्रोक्तिकीर्ति २८ १७,२३ १९,२४ ३,१४,३६ १०,१७ ४,७,९,१० ३,८,११,१५,१९ २५ ८,११,१३ १८ १५ ३८ २४ १५ ६,१९ १३,२८ ४ ३७ १५ ३७ " २४ ९ ७० २२ लेपविज्ञानं लोक लोकपर्यक लोकपाल २९ १४ वचन २२ २ " ३३ ૩૪ ३५ ३८ १,१७,३३ १२,२९ २३ २५ २६ " ९ २७ ६,१० २१ २६ लोकवाद लोकवादपर्यंत लोकसंस्थान ७० १८ १० ६१ २५ १ वचनकला वचननिश्चयप्रबोध वचनविज्ञान वचनज्ञानं वचनाद्यप्रचारत . २७ लोभ २० २१ ६१ ५८ ३५ १८ १७,२६ ३,११,१९ ९ ९,२३ वचा लोभगुण लोह ११ वज्र ३५ ११,१७,२४ ६ २ वज्रकर वज्रकर्म लोहकर्म २६ २६ २८ १९ ३२ २१ वज्रल २५ २६ २३ २६ २६ २८ ३० २८ २९ ३ लोहपात्र लोहपाद . ६ १६,३० २८ २९ २६ ३२ २० लोहपुर लोहपुर लोहविज्ञान लोहितपाद वज्रलदेश वजुर वज्रकार वर्जर वणिज वर्णन २१ ४,१७,३२ १३ ३० In m ir २४ २९ ३१ १,२,६ २५ १७,३२ ३ ६६. २२ ३० २७ लोहितपाददेश २५ वर्तन કર वस्तुरत्नकोषः। पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति शव्द वर्तन वर्तन २३ ३७ १०,३३ १०,१७ ५,६,८, १२,१४,१६ २५ २४ ५९ . ६८ १३,२६ २० १४,१७,२२,२५ १४ ५,१३ १९ ४४ ६ वस्त्राकार वस्त्राकारविज्ञानं वस्त्रादिसयमनं वस्त्राधिवासे वस्त्राधिवास वस्त्रालंकरणेन वस्त्रालंकारदानानि वस्त्रालंकारदान वाक वर्तनकला वदान्य ४४ २२ १३ ५८ १५ ११,१३,१४ वय ७४ ५८ वयस्थ ४० १४ ५८ १२ १,७,१३,२०,२७ ܩܢ ३५ २० वाक् ४,२३ २१ " १० २५ २४ 2 ७२ २३ ४२ २२ वाक्वलं वाक्यज्ञा वाक्यज्ञा बागविज॑भण २७ १२ ४८ २१ वाच वाचक २५ ८,२४,२९ ८,११ ४१ वयस्विनी ४३ वर ३३ वरणेंद्र २९ वराजशोधन ५८ वरं(2 रा )गशोधन ५९ वरागशोधनं वर (2 वराङ्ग) संवेशन वराटदेश २८ वरेंद्र २८ २९ ३० वरेन्द्रदेश २७ वशित्व वशित्वं ૬૬ वशित्वम् वशीकरण २५ २६ २७ वशीकरणविज्ञान २४ वस्तु २२ २३ २६ ३१ वस्तुलक्षणं ३१ वस्तुविज्ञानं २४ वस्त्र " ६४ ६५ २३ ६४ ६५ वाचकत्व वाचकं २०,२६ २० १३ ६ २४ २ १०,१२,१५ १२,२५ ५,१७,३५ वाचनविज्ञान वाचना वाचिक वाचिक ६५ २३ २१ ३२ " . ७३, २ २७ ८ " १८ १५,३० ८,३१ १८,३६ ९,११,२५ ३,१९,३० १८ वाचिकम् वाच्य वाच्य वाजि वाजिन वाजिंत्रविनोद वाजिशाला १९,२६ ३ ३५,३६ २ ६५ ६४ ३५ ३५ १६ ३२ २२ २३ २५ २६ ९ वाणिज्य, वस्त्रम २८ १६ ९,२२,३२ १३,२७ ७७,२०३, १२ ३८ ३७ १९ २६ वत्रकार २७ ११ अकारादिशब्दानुक्रमणिका । ४३ पृष्ठ पक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति २२ سد वाद्यकला २१ २४ वाणिज्यकला वाणिज्यविज्ञानं २४ २२ वात २३ ७० २१ ७,१७,२५ २,१०,१९ १८ ११,१६ वार्ता ११,२३ २७ ३,८,१६,२० २२ ३१ वाद्यम् वाद्यलक्षणं १७ ३१ mr mr ३१ ६ वात्सल्य १ वाद्यविनोद १५ १६ ११ २१ वाद्यशास्त्र २३ १२ १९ " ३ ४२ " ३,१९,३२ १०,२९ २३ ११ वाद्यज्ञा वानप्रस्थ १५,२२ ५,७,९,११,१३, ६८ १३ ६४ ६५ ११ " १५,१७ २,१२,१४ २ ६० वात्सल्यगुण वाद ११ १६ वामपार्श्वशायी वायु वायुतत्त्व २० २,२१,२३,२९ १९ २० " १२ २१ . १४ " २२ २३ २५ २८ २८ वारद्री वारधी वाद २८ १४ ३० ४,१९ १२,२६,३० २१,२८ १७ २६ १६ ६,२१,२७ ४,१७,२२ २३ २९ २७ वालभ २८ ३१ " १३,२७ २९ ३० ३ ७० वालंभदेश वासकसज्जा ४२ २१ वासना ७३ ५ १ वादकला वादलक्षण वादलक्षण वादिकत्व वादिन . ३१ वासभवन वासमंडप ३० ६६ ३३ ३४ ३२ १९ २,६,८ १६ ९,१४,३४ २४,२९ ११,१५,१९ १२ २१,२८ ६,१५,२१,२७ ३ वास्तु १२ " २२ २३ ३१ २१ १७ " " २२ ३६ ६६ १६ ३ वादित्वं वादिशास्त्र वार्धक्यता वाय ४,१० वास्तुकला वास्तुभुवनं वास्तुलक्षणं वास्तुशास्त्र वाहन ३२ ३० १९ ३ ३० १६ " १७ १५, १६ २३ ३१ ३५ ३३ ३४ ३५ " " ६,१०,२२ ३,१४ ७,११,१६,२८ ३ १२,२८ ७,२५ ४,२१ ३६ विकम्पितं ६३ वस्तुरत्नकोषः। पंक्ति पंक्ति पृष्ठ शब्द शब्द पृष्ठ विग्रह ११ १२ " १७,३४ १४,३२ ८,२४ २३ विद्वजनकीर्ति ३७ विद्वजनसंगतिकीर्ति ३७ विद्वेषण २५ विद्वेषण ९,११ १३ ११,२५ ४,३५ १० १३ १० . २ २७ विग्रहगुण विग्रहस्थान विग्रहस्थानं विचक्षणा ६७ ६६ २४ ४२ १६ १२,२० ६,१२,१८,२५ विद्वेषणविज्ञानं वि('वा)द्यज्ञा विद्या ४३ ११ ८,१३,२०,२७ १०,२७ ८,२५ १,८ विचार ८,२५ १२ ४३ १२ १३ २२ " १ १३ १९ ४ " १२,२६ ६,१७ ३० ” ३८ २५ ५,१०,१५,२६ w ७० २२ ३१ ३३ ३४ ३५ ५ ५ विचारकत्वम् विचारकला २१ २९ ३६ ६४ २३ २८ " " १० १५ विद्या ६५ १०,२२ १० विचारगुण विचारपर्यंत विचारपानं विचारवता (2) विचित्रं विजय विद्यागुण विद्यापात्र १३ ६३ ६५ १३,२९ ७.२५ ४,२२ १८,२२,२५ १,६,७,१० २,७,१५,१९,२१ १४ १५,२२ १ ३५ ३० २१ २१ २९,३७ १५ १४ १५ ११ विद्यापात्रं विद्यालक्षणं १५ १३ ३० ३१ १२ ८,२५ १ ७४ १३ २२ २३ १६,३१ २२,३२ २२ विद्याशक्ति विद्यासगतं विद्युत विध्वंस विनय ૬૨ ३५ ३८ ६ १० १४ २५ २८ ११ १०,२७ २१ १२ ३१ ११,१६,२५ १२ ८,२५ १,१८ विजयक्ला विजयगुण विजये वित्तकला वितर्क वितर्क वितराग विततं वित्त विदर्भदेश विदाघ १३ ३८ ३९ ३५ ६४ १६ २८ १६,३० १,१५ १४,२१ ९,१०,११,१२ २१ विनयवान् विनायक ३३ ३४ २८ ९ ३,१९,३५ " ३८ १९ ३६ ११ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। शब्द पंक्ति पृष्ठ शब्द पंक्ति पृष्ठ २ विनीता विनीता विभ(भा)षितं विभाग ६३ ११ ४२ ૪૩ ४६ ११ १२ १३,३० २८ ४,२० १८ विनोद २५ ३४ २० १,१८,३५ ११,२८ १३ १० " १२ १३ १६ १७ विभागगुण विभाषिका विभूषण ८ ६९ २५ २६ २७ २४ " २१ १०,१४ २१,३४ ९ १५ ६,११,१८ १२ " १९ २२ २३ २५ २६ विभूषणविज्ञान विभोगिनी ४३ ४२ २,२९ १,१६,२०,२५ १२,२६ १५ १६,२९ ९,२४,३९ १४ २३ ६,११,१६,२१,२७ २,७,१५,१९ २८ विमर्शवती विमर्षमती वियोग ४३ ४२ " १७ २८ ११ ३१ १२,२९ ११ २० विनोद. विनोदगुण विनोदपात्र १२ १३ १० ३८ ३८ १० १८ १० १४ ७,१४,२२,२८ १,८ वियोगगुण विरक विरक्ति विरहवेदना विरहोत्कण्ठिता विराट ४८ १५ १३ ३० विनोदपात्रं विनोदलक्षणं विनोदविज्ञानं विनोदस्थान ४२ २३ २,४,८ २३ १ २८ २५ ३२ २९ ६ " ८,१३,१८,२३, २८,३२ ३० ३२ ३ विरूपभाषी विरूपभाषिता विरोध ५७ २४ १३ २७,३० १९ ११ ५९ ६० १ १३ २१ १८,२४ २२ २६ २५ २,४,७ १२ १३ विनोदस्थान विनोदहास्यकरणं विनोदाः विनोदे विनोदेन विपत्ति विप्रदान विप्रलब्धा विप्रलंभा विप्रियं वदति २७ १० २७ विरोधगुण विलम्वितं ३५ ४२ २३ ४२ ८ विल(भा)षितं १० ६२ ६३ ६३ ६४ २२ २३ १३,२५ ६ ४८ विलास विबुध्यविनोद विबोध १९ . १२,२७ ६,१८,२९ ७१ १५ १३ ३८ ११ ८,१५ ४,११,१६ २१ " २९ विलासकला विलासचरित्रं ७१। ४,६ ४६ वस्तुरत्नकोषः। पृष्ट पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति बिलासपात्र १४ ७,१४,२३,२८ विषय १२ २,३४ १३ १३ ४४ २ ४४ ६ २५ विपयकारणम् विष(सुख)श्रता विप(सुख)श्रिता विषाद २० ४४ ४२ ३८, विलासपात्रं विलेपनाधिवाग विलेपनानि विलेपने विलेपनेन विलंबन (वितं) विवर्ण विवर्णता विवाद २० १४,४३ ३,१०,१५ ५८ ११,१५ १८ १६,२३,३० ४,३० لے اس سہ ६३ विष्णु १ ३८ ३४ " १,१७,३३ १२,३८ २ ३८ ९ । ८ ३८ २५ विवेक ११ विश्लेप विश्वासोल्लसनं विहार ४८ २७ १०,२७ ८,२५ १,१८ २२ १२ १३ १० २९ " १४ २३ ६९ विवेकगुण विवेकलक्षण विवेकी ३१ २१ ८,१०,१२,१४, १६,१८ ५ ५,११,१६,२५ ४० विज्ञान २ १६ ३,९,१४,२१,२९ १९ विग निशालपान विशुद्ध करविज्ञानं विशेष २६ १५ २ ३१ ५,११,१५,२६ ०४ २३ ३७ १०,१७ २० विज्ञानपान १४ ८,१५,२३,२९ २ १२ १३ १५ २,९ ११,२८ विनानपानं विज्ञानपुरुप ६७ ३० १३ १६ ३२ १० २८ १२ पिटोपक विठोपगुग प्रिोग्य विमवम् मिनार विज्ञानं १२ ७६ ६१ २२,२५ १५ १०,२७ ११ विज्ञानलक्षणं २,७,११,१५,१९ 3. ३० २१ १३ २,१८ १० विनारगुण मिति विज्ञान विनोद विज्ञान विनोदपात्र विनाने १६ -३६ ७० " १५ ३,१९,२६ १०,२९ १ २,१२,२०,२९ १५ विचारयना (3) वीगा ૬૨ ३८ Fan ३४ ११,१७ ५ १० ३६ ४७ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पृष्ठ 'पंक्ति शब्द शब्द पृष्ठ '११ ३४ वेष वेश्या वीर १४ १९ ६ १३ १४ ३३ ३४ ३५ ३६ १४ ७१ ५,२१,३७ १६ १४ वीरचरितं वीरचरित्रं वीरपात्र ४ १४ २० १५ ८,१६,२४ ३,९ ३७ वेश्यापात्र १५ १३ २ १४ वेश्यापात्रं वैदर्भ २८ ४, ३,४,६ ४० ४० . २९ ३० २२ १४ वीरपात्रं वीरविलासचरितं वीरललित वीरोदात्त विशालपान विप्रिय वृत्त वृत्तय( वृत्ति) वृत्तवाच्य वृत्ति (, २९ २८ १,४,२३ " २३ ६,३५ १,२४ १५ ९,२२,३२ १०,१९,२५ १६ १६ १९ २ २२ ६५ २ २४ १५ ६१ ६४ ६५ १९,२३,२५ १,८,११ वैद्य वैद्य वैद्यक वैद्यकला वैद्यकविज्ञानं वैनयिकी वैभाषिक वैरनिग्रहे वैराट वैरिनिग्रहे वैरिनिग्रहेण ६९ ६० वृद्धि ११ २९ २,१८,३५ २६ १९,१५ २४ ३५ १८,१९,२४ २२ । १७ ६० ६० १८ १२ २२ २२ २३ २२ ३३' ३४ १२,२५,३४ वैवर्ण्य १८ वृक्ष वृक्ष वृक्षकला वृष वृषभ ३९ १३ ७ वैशेषिक २६ १ ९,२५ ६८ २४ " m m m m in ३५ ४,२२,३७ १८ १९ ७,२० वृष्टिक २५ २३ वैशेषिक वोर्णपात्र वोकाण वंग वगदेश वंदन वंध्य ३० २९ २८ २७ ३३ वेणु ५,१४ २३ १३,२७ २० १८ २ २९ all www an to w ९ वेपथु ४,१७,२९ ६ १२ ८,२५ 1 '२१ वंश १ वेद ३३ ९,२३ ३,२३,३३ -- २५ ૨૬ ام اس ه له سه له " ३४ - ४,२०,३५ १२ " वेदशास्त्र वस्तुरत्नकोषः। पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति १० १४ शब्द वंशगुण वंशविज्ञानं वंशे विंध्य शब्द शकटवंश शकुन ८ २४ १४ २२ ७० २४,२७ २३ २१ १३,२७ ६,१८,२९ ८,२१ १,१५ २२ २५ २६ २८ २९ ३० २८ ५,३४ २२ w विध्यदेश ८ व्याकरणकला २१ शकुनकला २१ २५ ३१ २४ ११ व्याकरण शकुनबलं ७२ २३ २४ १९ २९ ३० व्याख्यान व्याधि शकुन विज्ञान शकुन्त शङ्कु शक्ति ३८ १८ २०,२४ ४,१५,३६ १९ १०,१६,२४ १२,१७ १३,१५,१७ १७,३१ २६ २,१६ २७ व्यापार २५ " २६ " " २९॥ २१ ११ २३ १२ २१,३१ १३ १४,३० १७ १८५,१२,१८,२५,३१,३२ २० ९,१९,२७ २१ ४,५,१२,२१ ११ ४० १२ ३१ ३ - " १८,२० २३ व्यापारलक्षणं व्यायामशक्ति व्यायाम व्यायामशक्ति व्यावृत्ति व्यासकला व्युत्पत्ति ७४ ७४ , २६ २२ ३० ४ शक्किगुण शत श( ? मितव्यया शत्रु शत्रुधाते शठ ११ ११,१३ १२ १३ ११ २८ १४ ३,१९ १२,२९ २ १७,२५ ७,२१ शब्द व्युत्पत्तिगुण व्युत्पनं व्युत्पनं १९ २० " ६२ ६३ ६४ २१ ४ ७२ १३ २,१३,२१,२९ ६.१५ ९,१३,१७ २,३,५ २,८,१७,२२ २१ वन २१ १२ -- ३८ शब्दशास्त्र शब्दशौर्य वजला ब्रीडा ब्रीडा- वीष्काण शक २८ १३ ९,१४ १९ ४,१० ४ . ९ ३२ १९ शयनगुण शयनशाला शयनं शयाज्ञ शयाज्ञी शय्या १९ ४१ . ४० १० ८,११ १५ शकट ४,२९ १,१८ ३० ३५ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। ४९ पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति शरण १३ - १२ ६१ ६७ २,४,८,१० १३ १० - १५ १८ ७२ शरणप्रदत्वगुण शरणागत शरणागतशौर्य शरीरकला १५,३२ ३० २३ २२ ६,१०,१४,१८ १ १०,२२ ३८ ९,१०,११ t ७२ शास्त्रकला शास्त्रप्रबोधः शास्त्रप्रमेद शास्त्रविनोद शास्त्रसंस्कार शाश्वती शिखरं (सुपिरं) शिधल शिला शिलारवंश शिव २६ २२ ३९ ६४ २९ ३३ २३ ३३ M शरीरे पालन शरीरशास्त्रकला शरीरादिकुजन २ २,१२ २१ २३ ५१ २२ २३ १९ २३ १० २६,२८,३० १९ ४० ३५ शिवधर्म - ६७ ६८ m ९ २ A 1. " ६,२२ ६,१२,२१,२६ १८ २६ " " शिक्षा शिक्षा शीत्कृतकरणं शील १० 1 १५ १४,२८ - शस्त्रबंध २२ २५ २६ २५ २६ २७ १६ ७४ २४ २२ शीलं शीलवती ४२ १५ २४ शस्त्रबन्ध शनबंधविज्ञान शस्त्रविनोद शनशास्त्र शाकुनि शान्ता शान्ति शारीर शारीर ११,१३,१४,१५ १८ ३,४,२२,३० १४ १,७,१३,२०,२७ शीलवान् १२ ३१ २० ३५ २६ ५ ६ ९ २५ २० १२ T ४३ शीला शुक्र शुक्र शुद्धकरविज्ञान शुद्धलिखितविनोद शुद्धविद्या . ५,१६,२५ २,१०,१८ २२ १७ शालागृह शास्त्र २१ २४ १५ १,१७,२२,२७ २ २ १५ १६ २२ .१,२० २,५१० २१ ६२ शुद्ध २१ १२,२२ Wik २३. २५६ ४,११,१७,२५,२२ . १९ २५,३५ १४,२७ १२ ใy ६४ १ शुभग ४१ 1- २१ ३५ शुश्रूषा 1 " १२ शरवान् ४० शास्त्र भयोध्य शास्त्रकला २४,२६ ' १४ १२,१८,१९,२५ १७ २२ १० १४।
वस्तुरनकोषः। शब्द पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति शब्द शौर्य रहार शशारगृह शझारपात्र ३ . १४ १३. ३७. ३७ १० ९,१६ ७४ शुमारपात्रं शशारवान् शौर्यकीर्ति शौर्यगुणं शौर्यप्रभुत्व शौर्यपात्र शौर्यम् शौर्य शौर्ये ६ १४ ७२. ६० झारस्थान शुजारी शेलार शैल १८,१९,२५ :- २४,२७ २२ ६० ३० . २ शैलविज्ञानं शैव शौर्येण शौरसेन शोलंक शंका ९ ३३ १९ ३२ २,८,१३,१८,२३,३२ १४ ८,१५,२४ १५ ३,९ १३ १७ ४१ १५ ४७ ૧૨ २८ ४१ ३,९,२२,२९ ९ २२,३० १,३२ २३ १२ २४ १२ ६७ २६,२९ ६८ १ ६७ २४ ६९ १४ ३८ - २,१२,२०,२८ ३९ ५,१३ ३ ५ ११ ११,२८ १२ ९,२६ २२. ११ १३ २,१९ २३ : ५,१७ २६ १०,२४,२६ २५ १६,३० १९ ५,१८,२१,३० ३९ः ७,१८ २४ शंकु ९ शैवं शैवाविक शोक शंख १ १८ २५. १९ १२ शौच २७० ३३ १० " ३५, ३६ ५,८,२३ १,१९ १६ हा २५ ३२ ४ २४ १४ १,१५ शंखकर्म शंखविज्ञान शंखविज्ञान शाभवपर्यक शाभवं श्मश्रु २८ ६७ २१ शौचकला ६७ ६७ ३० २९ २३ - २७ १० ४४, ३२. शौचगुण शौचगृह शौचगृहं शौचवान् शौचविज्ञान शोचहीनः शौचान्तिक शौर्य १६ १२,१७,३२ १ १,७,१३,२०,२७ २ ३,८,१०,१३ श्मश्रुशौच श्मश्रुशौचं श्रद्दधानं श्रम ४१६ २५ २० '१,४ २३ १८ ४,१७,३० ५,१८,२१ ९,१९ २४ ६,२२,४० "१६,३२ ४१. २५ " ३९, श्रवण ६९ ११ १२ ११ ११- १३ १४ १८,३५ १६,३३ ३० अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पंक्ति पंक्ति शब्द पृष्ठ शब्द २ २७ १५ श्लिष्ट श्रवण ६ १० १६ ११ ६४ ६३ २० ३४ ३५ १० श्लेष्म श्वेतपुष्प श्रवणगुण श्रवणविनोद - ८,२४ १,१९,३५ १५ १६ . ४८ " १६ १६,२२ ११,२४ २०,२४,२६ ८ श्वेतवस्त्र श्रवणसंयमन । श्रवणं श्रीकाण्ठ ६१ ३३ ३५ ३५ - १ २९ ३० ३० श्वेतांबर सकलकलाकुशलं ४० श्रीपय श्रीपर्वत ३५ '३२ १७ ४,१०,१५,२२,३० १३,३० ११ ४१ सकलत्व ११ १२ " ९ ९,२३ ५,१९,३४ २२ १७,३१ १४ १७ ३० २८ २९ श्रीमाल ५,२१ १९ सकलत्वगुण १३ १० ५८ १५ ३० २७ २८ ४८ ३० २२ १७ ६९ श्रीमाल देश श्रीराज श्रीराज्य श्रीराष्ट्र श्रीराष्ट्रदेश श्रीराक्ष श्रीवृक्ष १८ १२,२५ १६ १२ १६ ३,७,१०,१३ ११ सकुमार सख्यविनोद सख्यासहनं सगता सग्रामै सङ्ग्रह सङ्कुचितशायी सती सत्पात्रं २८ २८ २९ २१ ६ ५ ४ س س س س سه ३४ . २० १४,३० १०,२६ २३ श्रीवृक्ष ३ - १३ . ११ १२ १३ १०,२८ सत्य P ९,२६ २,१८ १९ ६ ११ १० १५ ६८. १० १२ . २६ श्रीवृक्षफल श्रुत श्रुताध्ययन श्रुति श्रुतोत्पन्ना श्रुतोत्पादिता श्रेष्ठपात्र श्रोत्र ७२ सत्यगुण सत्यपालन सत्यं सत्यवती १४ १७ - २० १२ २७ ४,१४,२२,३१ ७,१६ ३,९,२२,२८ १५ २१. ४१ सत्यवाद सत्यवादी सत्यवादी सत्यवन्त ६५ ४२ १७ ४३ २,२२,२९ १२,२२ ६६ १८,२७ ३,११ ४० १८ ४१ २,८,१६,२३,२८ ४१ ४,१०,३० ३२७,१२,१७,२३,२८,३२ ४१ लाधावान् श्लाघ्य- लाध्यवान् विष्ट ४०। २३ -१६,२७ सत्यवान् सत्यासवह सत्रागार TA ५२ वस्तुरतकोषः। . पंक्ति पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ २ ३२ ३२ ४६ ६० शब्द सत्रागारे सत्रास्थान सत्व सत्वकला सत्वं सत्वलक्षणं सत्ये ३१ शब्द सन्मुखविलोकिनी सन्मुखशायी सन्मुखावलोकिनी सन्मुखं न पश्यति सन्मुखी शेते २० ९,२५,३० १० १५ ४७ • २८ २,५,९,११ ३,२० १२,१७,२४ २१ ६,१२,१८,२५,३१ २ १५ २२ ७३ ३१ 7 ४५ ३ ४६ ७० २४ । सब्यापार सदर्थ १९,३० १४ सन्मुखी न शेते सभापति ६६ ३१ ६२ ६३ ६४ १८,२७ ३,११ १९ ६७ " १७ २ ६७ सभावाद सभावादपक्ष समंजातं m 9 १६,३३ ६७ . १४ १८ 1 १८ ६४ ५ " समता ७,१४ २३ २३ ५,१२ १०,२७ ९,२६ २,१८ ६६ ६७ सदाग्रह ११ १२ १३ सदाग्रहगुण १० सदर्य (22) सदा (2 सदर्थे ) ६३ सदाचार ११ १२ १३ सदाचारकृत सदाचारगुण सदाचारयश ३७ सदाचारवर्तित ४८ सदाविनीता ४६ २१,२५ २,६,१४ १० २,२० 44 समध्या ४६ ४६ १४ समदुःखसुखा समदु खा समप्रदेश समय १७,१८,१९,२० - १० १७ १५ १,२,६ ३७ ar - ។ १०,३३ १३,१८ ४,७,१० ६ सदा प्रसन्न २४ ३,८ ५ २२ २३ ३१ ६५ २२ ६४ ६१ ६४ ६४ ६ - २२ १ सदाशिव २० ११ समयकला समयप्रतिमा समयलक्षणं समय समवर्ति समाख्यात समागमे तुष्यति 1 १८ २१ १३ २५ ४८ ur ५ १७ १९ १५ सदैव गर्विता सदोदित सद्मपथ सद्यापार सत्यवस्तुज्ञान सन्मान ४६ ४७ १ समागमे पुष्यति १० १२ ३५ ३१ ३१ ११ १२ १३ १० ९,३० १४ ११,२८ ९,२६ समानदु.खा समाधान ११ ૨૪ ११,२८ ९,२७ २,१९ सन्मानगुण 17 १२ १३ १०. सन्मुख ६० समाधानगुण ५३ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पंक्ति पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ शब्द समाप्ति ១ ६६ ६८ ६८ २०,२२ २४,२५ १९,२६ १२ शब्द सर्वात्मपर्यंत सर्वात्मा सर्वात्म सर्वसह ससत्त्व सर्षप ६८ १२ २२,२९ १२ १४,१५ ९ ७५ ७५ ४१ १८ ११ समायातं समारंभ समारंमे समारंभोदितं समारंभोस्थित समुजवलवेष समुज्वलवेष समूजतं (?णि) सम १९ ३३ ३४ ३५ ३६ ३६ ८,२४ २,१९,३५ १६ ४० ४१ " २ १७ ३,९,१५,२२,२९ ३६ १३,२३ ५,१२,१८,१९ सह २१ ३३ ६३ ६४ २ सहया सहर्षी साह्वयम् सायं सागर ४६ १६ समं तुष्यति सम्प्रत्ययकारणम् सम्भाषिता हृष्यति ४४ २ ४७ १ सम्भोगार्थिनी ४६ ३४ ८ ४८ सम्मुखावलोकनी सम्मुखं न पश्यति सम्यक सरठ ३१ ६७ १७,१९,२०,२१,२२ ३६ १० २,१८,३४ ३५ १३,३३ १० १८ ३९ २३,२४,२५ ३९ २७,२९ १४,१७ १२ ४८ ११,२४ ५९ १६ ४८ १८ १७ ३ 5 २८ २८ ३० २८ सरयूपार सागत्यगुण सात्त्वती सत्त्विकी सार्थक साधुपालनं सानुरागनिरीक्षणं सानुरागप्रेक्षणं सानुरागसंयमनं साम सामर्थ्यगुण सारस्वत सारस्वतप्रमाणं सारिकापात्र सालंकार - सरस्वती ३३ ३४ १७ २२ . س س س س سے " १४ १५,२९ १५ २१ १५,३१ २७ ७,२४ १३,३० ४,२१ ९१ . ६ १० ૬૬ ६६ १४ सलज्जत्व ११ १३ १० ५,८ २७ १६,२५ ७,१७,२०,२८,३४ ६२ - २१ ६३ ६४ ३ २४ س सलज्जत्वगुण सवत्सा सवत्सा गौ सर्वत्थ सर्वदशारिगतविहार सर्वदशारिंगतं । सर्वशौच सर्वज्ञ सर्वज्ञ सर्वात्मता ३५ ३६ ६९ ६९ ४५ ३९ १२ ४१ २० , ९ सावत्ती सावधान सावयव सावयववान् साहस साहसशौर्य सितवस्त्र ४० ३० २७ २,८,२७ १५ ६,१०,१४,१८ १ ५,२१,३७ ७२ ७२ ६८ १,३,५ २८ २३ ३४ ૨૮ वस्तुरत्नकोषः। शब्द पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति सिद्धपीठ सिद्धात १६,३२ २१ शब्द सुखस्थं सुखस्थापकं ३४ १९ ३३ ૩૪ ३५ २,९,३७ २३ ६ RRia ६४ " १५ " ४२ १२ १३ १९ सिद्धातशास्त्र सिद्धि ५,२१,३७ १६,३२ १३ ७,१२,२६ २० २,१८,३५ ११,२८ २२ ६० सुखस्थितं सुखाश्रया सुखिरं (? षिरं) सुखे सुगत सुगन्धस्थं सुगन्धस्थं- (2 सुगंमीरें सुगम सुगंध १८,१९,२५ १८ ११ ६४ . १२ १३ -- ६२ १६ ३५ १० ६३ ३६ ४० ४१ ६८ २९ ४१ सुगंधप्रिय सुगधप्रिया ११ २७,३४ १८ ५,११,३० १७,२३ १५ १,९,२१,२४,२८ २५ ४२ सिद्धिगुण सिद्धिपर्यंत सिद्धिस्थान सिलर सिलार ६९ ४३ १४ २ ३१ १६ ९ सुगंधस्थं 1 ९ २,९,३३ ६२ ६३ ६२ सुग्रह १० २ - १४ १४,२३ २,५,१९,२६,३३ २ ६४ میں सीतवस्त्रं सीत्कारादिमुचनं सीत्कारादिमोचनं सीत्कृतादिमोचनं सीधल ५९ २८ ४० १८ २४ ४,६,८ २९ ११ ६३ ६३ -- सुजन सुजियं (2) सु( 2 व्युत्पत्तिकं सुद्यु(? व्युत्पन्न सुतालं २८. १४ " ४ २९ ३० ७३ २२ ६३ ६२ ६३ ६४ ३५ १२,२२ ४,१८,२५ سی سی لس اس १ १६ १५ ६३ ६३ ६३ सुक्तम् सुकलं सुकवित्वं सुकाव्य सुकुमार सुकुमारशरीर सुकुमारोपचारात् सुकृतं विस्मारयति २८ ३५ १९ ५ सुधिष्पं (? ष्ण्यं) सुद्यतनं (2) सुनृत्यं सुनेत्रा सुपदं ४३ ५८ ८,१४,२०,२७ ११ ४२ ६२ ६३ ४७ " १२,२२ ४,११,१८,२५,३२ १ ४८ ६४ सुख १६ ११,१६,२३ २,७ ४,३० ६ ६,११,१८ १७ सुप्त सुप्ता सुपात्रग्राही ३८ - सुखप्रिया ४३ ४० २० ५५ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पंक्ति पंक्ति पृष्ठ शब्द पृष्ठ शब्द सुरम्यं सुरसं सुपुत्रा नौ सुप्रबद्ध W : १८ or w w w १७ सुप्रभ ६२ ६३ १९ ६३ १३.२३ ६३ ५,१२,२६,३३ ६४ २ ४० १५ ६२ । १३,२३ ६३ ५,१२,१८,२५,२६, - ५ १,८,११ " सुराग सुराग ६४ " सुप्रमाणशरीरा ४२ १ २ ६४ सुप्रमाणं ४३ ६२ ६३ -'. २१ ४२ सुरूपा ३८ १३,२३ ४३ सुप्रमेयं ६० ६२ ६३ ६४ २६,३३ सुराज्येन सुहृद् सुवर्ण ११,१९ १०,२४ २२ ११ १५,२४ ६,१३,३४ १० २ ६२ ६४ ४,१२ स्फुटं सुबन्ध " ३ ६२ १२,१३ ६४ ६३ ४ १६ --- - ४३ ४१ सुभग सुवाचं सुविनीता सुवृत्त सुवृत्तमत्र सुवृत्तमंत्रा सुवृत्त. सुवेषा ४० ५,११,१७ ५,११,२४,३० १९ २ १६,२४ सुभगा ४३ ४१ सुभाषाव्यं ।' ११,१९ सुभाषाय सुभाषाय(!) ५,१७,२४ १४ ६४ १ ४१ २,८,१४,२८ ४२ ११,१९ ५,१०,१७,२४ ६२ ६३ ५,१४,२०,२८,३५ २५ १४,२८,३५ ६४ २६ १६,२० २३ १५ ६५ १७ २१ १६ सुशीला सुसत्त्वा ४६ ૪૩ ४२ ४३ १९ i ५,१७,२४ १५९ ६२ १५,२४ सुभाषितजनम सुभाषितजल्पनं सुभाषितमाषणं सुभोगार्थिनी सुमनोहर सुमंतदेश सुरफ सुसमयक (सुयमक) सुसमयक ६,२६,२० ६३ ६४ ६३ ३ २९ ६ २६,३३ 1. ३५ १४,२१ २४ २४ [६३ ६,१३,२०,२७,३४ ४२ ૪૨ ५,११,२४ मुरत सुरतप्रवीणा । ११,१९ सुसगी(त) सुसधिष्ठ सुसधिस्थं सुसपूर्ण सुसंवद्ध सुसबन्धं सुसवृत्तशरीरा सुस्वरं wr ur » ११,२५,३२ है १८ सुरन(त)प्रवीणा सुरमिजलं मुरभुवनम् ४३ ४४ १२ १२,२२ uri वस्तुरनकोषः। . पृष्ठ शब्द सूरसेन २९ पंक्ति १२,२६ २९ १ ६५ २४ ६६ १ सूरसेनदेशः सूरसेनं सूरिमा सेना सेनापात्र ९ ३८ १४ - १४ । १७,२५ ११ सेनापालपात्र १५ १५ ११ १४ ६३ ६३ १०,१८ १४ m सेनापात्रं सेभट सेरटक ९ शब्द पृष्ठ पंक्ति सुखरं ६३ ४,११,१८,२५,३२ ६४ सुस्वरत्व २५ सुखरत्वं १६ सुस्वादभक्षभोज्यं १२ सुषाभव्यं(:सुभाषान्यं) ६३ २० सुषिरं ६४ ९,१२ सुश्रूषा २० सुश्लिष्टं ६२ १४ १३,३४ सुहर्ष २६ सुहृद ४१ १७ ७२ २५ ७३ १६ मुहषी (24) ६३ ३३ सूचि २५ ३५ सूचिकर्म २३ २५ ८,२१ सूचीकर्म २२ १४ २३ २ १५,३० २७ ६ सूचिकर्मकला २२ १ सतिका २६ २९ सूत्र १५ १६ १९ २८ १९ १ " २९ ३० २८ १९ १ सेरटकदेश सेवकपात्र सैन्धव १४ २७ ९ ३,९,२२,३३ है १० ३ १९ सैन्धववंश सैन्य सैन्य १० १२ २२ २३ ११,३४ ७२ " २१ । १४ २२ २८ २२ ७२ सैन्यकला सैन्यबलं सोम सोमत्व ९ ૨૪ १५ १३,३० - ७,२१,३५ -१४,३० ६ २३ २५ २६ ૨૭ २१ १६ ६.२४ ११ ११ १३ सोमवंश सूत्रकला सूत्रविनोद सूत्रविज्ञान सूत्रांतिक सूर्य सूर्यकीर्ति सूर्यवंश २१ १७ १,८,२१,३२ 19 ५,९,२७ ९ ११०,१२ , १२ १२ ६९ ९ १० ६० ३ १३५ ३७ T,८ सौम्यशायी सोलंकी सौख्य - ९ २८ १७ ११ १.१ ११,२८ " १८,२१,३२ - १०,२७ १० १ १२ १३ ३,११ .
अकारादिशब्दानुक्रमणिका। ५७ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ शब्द सौसम २५ mr سر २९ १० ३ ५७, , ३,७,१०,१३ सौख्यकारण सौख्यगुण सौख्यम् सौख्ये सौगतं सौजन्य ६ ६० संकुचितशायी सगतं संगति संग्रह ६४ १३ ११ १२ १३ १० संग्रहगुण संग्राम ७२ १६,३३ १४,३१ ७,२४ २३ ६,१०,१४,१८ १४,१७ २२ ३५ २,६,१०,१४ ३६ १४ सौजन्यगुण सौत्रान्तिक सौभाग्य ७१ सनामशौर्य संग्रामिक 20-25 १६ C - " . संग्राम्यं संततव्यय ४ ४१ १४ '२० ४१ संततव्ययी संताने संतुष्टा (तुष्यति सतुष्टा संतोष ४६ २३ ६९ ११ ११,२९ १२ १०,२७ १३ ३,१९ २५ १६,३० २७ १५ १० १७ ८,१६,१८ ११ १२,२९ १२ १०,२७ -१३ ३,२० - २२ १४,२९ २३ ८,२१,३१ २५ १६,३० ९,२५,३९ १५ २२ २ -१० १७ २५ २ .५७ १८,२०,२३,२५,२८ १३ ४ १९ ६० ६० ४,५,१५ ६० १,१०,१३ १६,३० १६ “६५ २१,२३,२५,२७ २८ १५,३१ २९ १३,२१ ३० ४,१७ .२७ .२८ : १९ २९ १,१५,३० ३० २५,२६ ..२२ ३० ३ २५ २१ ३८ ५९ सौभाग्यकला सौभाग्यगुण सौभाग्यविज्ञान सौभाग्यहीनता सौमत्य सौम्यत्वगुण सौम्यशायी सौम्यावयव सौम्यावयवशायी सौरसेन १२ संतोषवांछित संदर्य(श्र्थ) सदीपन सधि सधिपात्र १४ ३१ २७,२४ १४ Wr mm १५ १४ १ . F १८ २ सौरसेन सौराष्ट्र संधिपानं सपन्न सपूर्ण सपूर्णत्व १३ ११ १२ १३ १३,३० ११,२८ २१ .१९ 1 १० सौराष्ट्रदेश सौवीर सपूर्णत्वगुण सपूर्ण ६,२०,२७,३४ ६२ ६३ ६४ १६० ५,१९ सौवीरदेश " संबंधशायी ६,११,१४ वस्तुरतकोषः। . शब्द पंक्ति + पृष्ठ १३ '३३ २८ सांगत्य सिंध सिंधु २१ १५ J १९ " २,१६,३१ ६,२४ ३ सिंधुदेश सिंह २९ ३० २८ १३४ ३५ ३६ ३० २८ ११,२७ ५,२३ २० ९ सिंहल सिंहलदेश सिंहिलंक सींदा स्कन्द . ९ २७ ९ ૨૨ ३४ ३५ ३८ १,१७,३३ २८ ९ " -3 २३ १९ शब्द पृष्ठ पंक्ति संभाविता हृष्यति संभाषणेन हृष्यति .४६ २३ संभाषिता हृष्टा भवति ४६ ११ संभाषिता हृष्यति २० संभाषिताद् हृष्यति ४६ ३० संभोगकामतः ५८ संभोगवती ४३ १५ सभोगसुखं न वांछति ४८ १ संभोग न वंद(श्वाञ्छ)ति ४८ सभोगार्थिनी ४६ २,९,२१,२९,३५ संभोग सुखं न वाञ्छति ४७ १३ सभोगेषु सुखं न वाञ्छति ४७ २५ सभोगे सुखं नावगच्छति ४७ १८ समुखशायी ६० १३ सयोग ११ '१२,२९ १२ ११,२८ १३ २० २२ १३,२८ १९,२९ , २६ १२ सयोगकला १२१ ३२ सयोगगुण १० १८ सरक ३५ ३४ सवाद १३ सवृत्तमंत्रा ४३ २९ सवेशनं २ सस्कार ४४ २० सस्कार ४५ ६८ ४,६,१०,१२, १४,१६,२६ सस्कारशीचं ४४ १८ संस्कृत ६५ २०,२२,२४,२६,२८ ६६ सस्थान ११ ११,२८ १२ १०,२६ १३ २,१९ सांगतं. १४ सांगत्य ११ १३,३० १२ ११,२८ - २३ स्तनयो पीडनं स्तनोपपीडनं स्तम्भन स्तवविनोद स्तम २६ ३५ " .. ३ '३८ ३,१३,२९ ६,१४ स्तंभन १२ २५ J स्तंभन विज्ञानं स्तंभनं स्त्री २५ २६ २४ ३६ २७ ३१ ,२६ २५ २३ ११ ८,१३,१८,२९ स्त्रीकाम ६ " १२,२६ १९ २४ ३५ २४ । १ ३५ स्त्रीकामविज्ञानं स्त्रीपुत्र स्त्रीपुरुष स्त्रीपुरुषपुत्र स्त्रीपुत्र स्त्रीराज्य . ३५ ६९ २९ २४ १० ३० २,२४ १२,२८ ३१ स्त्रीलक्षणं खीसपुत्रा " " अकारादिशब्दानुक्रमणिका। ५९ पंक्ति पृष्ठ शब्द स्नेहवती २१ शब्द स्त्रीसपुत्रा स्त्रीसवत्सा स्थलदेशा + १७ ३६ ३३ ३० ६६ '६७ २१ स्पर्श . स्थान १४ ७.१५ + ३ . "७४ ५,९,१७ ४,५,८ २३ स्पर्शन २१ " ४४ १० " स्थानप्रभुत्व स्थानवलं स्थानशौर्य स्थाने स्थापन स्थापना स्थितं स्थैर्य ७४ ur पृष्ठ पंक्ति ४६ २,९,१४,२१,२९, ३४ ५ २० ३,१३,२१,२९ २१ ७५ ११ *२४ १२ ६,२२,२९ ०१३ १६,३२ २० ३,१३,३० .२१ ७५ ७५ ६२ १७ ६३ १,८,१४,२१, २८,३६ ६४ ४,१२ ११ २२ १२ ४,२०,३७ १३ १३,३० ३८ ६,१९,२१ ३९ २,९,१९ ४५ १२,१४ ११ १५ ६ २२ स्पर्श स्पर्श स्फुट ६३ ११ -- *१२ " १८,३५ १६,३३ ९,२६ २५ -१३ "१० स्मृति .. سہ ४८ स्थैर्यगुण सन्मुखं न पश्यति स्नान स्नानवास स्नानशौच १३ " ४४ ८ ४४ ४५ २३ ३,५ १७ स्नानशौचं " ४४ ४५ ४४ ४१ ur स्मृतिगुण खकीया स्वर्ग स्वर्गलक्षणं स्वर्गलक्षण स्नानाधिवासः नांने स्निग्ध १०,१५ ४४ ३१ '३० ३१ लिय १७ १५ २९ १,५,९ ३३ १३ स्वजन -निग्धस्थान L १२ ४१ १६ १७ २२ २३ *१४ स्नेह ५,२०,२६ १६ २९ २३ १७ १,१३ ७,१९,१७,३३ स्वजनत्व स्वजनप्रिय. स्वतंत्र खधनं ददाति ३६ २९ ४१ ४६ ३१ १ ४६ मेहकला नेहपान ४७ २२ १४ :१५ २४ ३ स्वप्न २२ । २३ ४२ १४ ८,२० ३८ ३९ ६१ ६१ स्नेहपान नेहमती सेहती स्वभावजा स्वभावजाता वयंभू २३ ४,११ १४,१६,१७ १२ २५,१८ + २६ २,९,१५,२१,२८ ६० वस्तुरतकोपः। पंक्ति पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ शब्द स्वयंभूविज्ञानं खरगतं १८ ८ २,३,४ ९ . १९ २४ ६२ ६३ ३८ ३९ हरिणवंश हरित हरितट हरितट १ १३ खरभेद ३,१७,२९ ९ ७ १७ १० ६ स्वरमेदाः खातिप ३५ ३६ ३५ १४ " ३ हरियटा ९ ११ १८ २९ १०,२८ २२ १८ ३६ ३२ ६,११,१६, २१,२६,३१ २,८,१४,२८,३३ ३१ ३२ १२ हर्म्य ३ खरूपगुण १३ १० ११ १७ १८ इल हसनं १२ २० १३ हस्त ૧૨ १२,२९ खरूपप्रहण स्वरूपा स्वरोदय १७ १०,२४ ४,२२,३४ ९ ४६ २० २३ २२ २२ २३ २१ हस्तकला हस्तलाघव १३,२८ ७,२४ ३२ ९ हस्तलाघवकला हस्ति स्वरोदयविशानं स्ववृत्ति १५ १३ ६१ ४३ २५ २६ २७ २४ ૨૮ ३९ ६९ २३ ३४ ३६ ३३ ३५ १४ " १८ ३,२१,३७ १७ खसंबद्ध स्वस्थकर्म स्वस्ति w १०,१२ १८ ११,२७ २० १५ ६,३३ २ हस्तिकला हस्तिकाम हस्तिपरीक्षा हस्तिशाला ३५ ३६ २२ २६ २३ स्वतिक १९ २३ ८,१३,१८,२४, २९,३३ १८ २४ इन्तिशिक्षाविज्ञान हर्ष २० ६९ ૪૨ ८,२२ २,१० खागतं स्वाधीनपतिका म्यागापिक खाधीनभर्तृका स्वामी स्वेद हर्पगुण हप्ता ३९ ११ ३८ ४२ १० ३८ १० ३,९ ९,११,१२ ३,१३,२९ ६,१४ २० इंग १४ १५ , १३ १०२६ हता ६२ ६३ ६४ हाथ हास ३३ ३४ ६४ १४ ३८ २९ ६ १२,२०,२८ हरिभर ९ १८,२८ ३ ५,१३ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। ६१ पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति हास्य १९ ३७ ३८ शब्द क्षुरिका क्षेत्रक १७ २५ २८ ३५ २ हास्यपात्र १४ ८,१५,२३ ज्ञान २७. १ १५ २,९ ६,२७ ३१ ६० १८,२४ हास्यपानं हास्यादि हित १३ ५८ १६ १७ ३७ १५,२१ २९ १,५ ७२ ७३ २४ ६,१०,१३,१८ १४ ११,१३,१५,१८ १३,१५ १६ हितस्थान हितस्थानं हिमालय २८ ३३ २१ ४,१३,३२ ७,२१ २९ ३ ज्ञानकृतं ज्ञानकृतं ज्ञानकृतयश ज्ञानचरितं ज्ञानचरित्रं ज्ञाननय ३६ ३७ ३७ ७१ ३० १,२,६ २ २८ w ६ ७१ हिमालयदेश हीना हुलिका हूण ६ २५ १८ २६ ९ ज्ञानपात्र १४ ६,१३,१८,३७ ६ २३ २ १० १५ २९ २१ ७३ ६ हूणदेश हूणवंश हेतुविज्ञान ८ २६ ६१ ६ २४ ७४ २,४,८ १७,२०,२४ २५ ज्ञानप्रबोधः ज्ञानप्रभुत्व ज्ञानशक्ति ज्ञानशौर्य ज्ञानसत्त्वम् ज्ञानं ४,८,३२ ३ २७ १ १० १२ होम क्षमावान् क्षमी ६८ ४१ १९ ६० २२ २१ १२,२५,३२ . ४१ ज्ञानं ११ २ . , राजस्थान राज्य द्वारा प्रतिष्ठित राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर E सम्मान्य संचालक मुनि जिनविजयजी द्वारा संपादित राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला - - राजस्थान सरकार द्वारा पुरातत्त्वाचार्य मुनि श्री जिनविजयजी के संचालन में पहले जयपुर अवस्थित राजस्थान पुरातत्त्व गन्दिर को "राजस्थान ओरिएन्टल रीसर्च इंस्टीट्यूट" अर्थात, 'राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान' के नूतन नाग से, एक पूर्ण शोध-संग्थान' के रूप में जनवरी, सन् १६५६ ३० रो पुनः संगठित किया गया है और अब इसका भव्य भवन जोधपुर में बनाया जाकर उसकी प्रतिष्ठा वहाँ की गई है । राजम्यान बहुत प्राचीन कालसे ही गारतीय संस्कृति का एक प्रधान केन्द्र रहा है, जिसके परिणाम-वरुप यहां संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, राजस्थानी-गुजराती और हिन्दी आदि भाषाओं में अपार साहित्य की रचना है । वेद है कि हमारी उपेक्षा के कारण बहुत गा साहित्य नष्ट हो गया है। विदेशों में भी हमारा बहुत गाहित्य जाता रहा है और वहां के विद्वानों ने उसका विशेष अध्ययन और प्रकाशन भी किया है । कलकता, पूना, बम्बई, बगोदा, पाटण, अहमदाबाद, काशी आदि के ग्रन्थ भण्डारों में भी राजस्थान का साहित्य प्रचुर मात्रा में सुरक्षित और एशियाटिक सोसाइटी, कलकत्ता; भण्डारकर ओरिएन्टल रीसर्च इंस्टीट्यूट, पूना; भारतीय विद्या भवन, बम्बई; गायकवादः ओरिएन्टल इन्स्टीट्यूट, बौदा; गुजरात विद्या सभा, अहमदाबाद; नागरी प्रचारिणी सभा, काशी, आदि सुप्रसिद्ध शोध-संस्थाओं द्वारा राजस्थान के साहित्य को आंशिक रूप में प्रकाशित भी किया गया है। राजस्थान में आज भी अपरिमित गात्रा में साहित्य-सामग्री, लिसित और मौसिक दोनों रूपों में, प्राप्त होती है। इसके संग्रह, संरक्षण, सम्पादन और प्रकाशन का प्रबन्ध करना हमारा प्रधान कर्तव्य है। राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान में अब तक कोई १४-१५ हजार से अपर प्राचीन एग्यालिसित ग्रन्थों का संग्रह किय जा शुका । बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अलवर, जयपुर आदि के व्यक्तिगत ग्रन्थ-मण्डारों में गी हजारों हालिसित अन्य प्राप्त होते हैं। इन अन्यों में से अधिकांश अप्रकाशित है । विहत, जगत में राजस्थान के महत्वपूर्ण प्रन्यों के प्रकाशन की वी उत्सुकता से प्रतीक्षा की जा रही है। राजग्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान द्वारा "राजस्थान पुरातन प्रन्थमाला" का प्रकाशन, राजस्थान में गग्रहीत, सुरक्षित एवं प्राप्त संरस्त, प्रारत, अपभ्रंश, राजस्थानी, हिन्दी आदि भाषा निवात प्रन्य-रनों को, साहित्य-सराार के सामने मुसम्पादित रप में, प्रस्तुत करने के उद्देश्य से किया जाता है। प्रस्तुत ग्रन्थमाला के अन्तर्गत अब तक ४०-४५ ग्रन्थ प्रकाशित किये जा चुके है और अनेक अन्य विभिन्न प्रेसों में छप रहे । जिनका प्रमाणन यथा समय होता रहता है। इस ग्रन्थमाला में इतःपूर्व प्रकाशित कुछ संस्कृत ग्रन्थ १. प्रमाण मंजरी-ताकि चूशागणि सर्वदेवानार्य विरचित पैशेषिक दर्शन ग्रन्थ, अनेक व्याख्याओं से सगलंयत; संपादा-श्री पटागिराम शास्त्री, भ. प प्रिंसिपल गहाराजा संरगत कालेज, जयपुर । २. यन्त्रराजरचना-महाराजा सवाई जयसिंहकारिता । वेधशालाओं में प्रयुगा यन्त्र निर्माण विषयक प्रामाणिया अन्य । संपादक-ग्व. पंसिन श्री केदारनाथजी, भृ पू अध्यक्ष वेधशाला, जयपुर । ३. मार्पिकुलवैभवम्-विद्यावाचस्पति ग्वर्गीय मधुसुदन ओझा, जयपुर द्वारा रचित । प्रपितत्त्व- निरूपणात्मक प्रामाविज्ञान विषयक अनुपम अन्य । संपादक-महामहोपाध्याय पं. श्रीगिरिधर शर्मा चतुर्वेदी, जयपुर। है - . ४. तर्कसंग्रह-पण्डित अन्नंभट्ट विरचित न्यायशास्त्र का प्रसिद्ध ग्रंथ, पं क्षमाकल्याण रचित फक्किका से समन्वित । संपादक-डॉ. जितेन्द्र जैटली एम्. ए , पी-एच्. डी. प्राध्यापक, रामानन्द आर्ट्स कॉलेज, अहमदावाद। ५. कारकसंबंधोद्योत-पं. रभसनन्दी रचित । संस्कृत व्याकरण का कारकविपयक अपूर्व सुबोध ग्रंथ । संपादक-डॉ. हरिप्रसाद शास्त्री एम्. ए. पी-एच् डी. उपाध्यक्ष भो. जे. अध्ययन संशोधन विद्याभवन, गुजरात विद्यासभा, अहमदावाद । ६. वृत्तिदीपिका-पं. मौलिकृष्ण भट्ट विरचित । व्याकरण, न्याय व साहित्य विषयक वृत्तिविचारका विशिष्ट ग्रन्थ । संपादक पं. श्री पुरुषोत्तम शर्मा चतुर्वेदी, साहित्याचार्य । ७. शब्दरत्नप्रदीप-अज्ञात कर्तृक । संस्कृत भाषा का संक्षिप्त शब्दकोश । संपादक डॉ० श्री हरिप्रसाद शास्त्री एम्. ए. पी-एच्. डी. (वम्बई)। उपाध्यक्ष-भो. जे. अध्ययन-सशोधन विद्याभवन, गुजरात विद्या सभा, अहमदावाद । ८. कृष्णगीति-कवि सोमनाथ विरचित । गीतगोविंद के ढंग का एक सुन्दर संस्कृत गीतिकाव्य । संपादक डॉ. प्रियवाला शाह एम्. ए. पी-एच् डी. (वम्बई ) ही. लिट् (पेरिस ); प्राध्यापिका रामानन्द आर्टस् कॉलेज, अहमदावाद । ९. नृत्तसंग्रह-अज्ञातकर्तृक । नृत्यनाट्य विषयक कलाभ्यासियों के लिए अपूर्व रोचक ग्रंथ । संपादक-डॉ प्रियवाला शाह एम् ए, पी-एच् ही (बम्बई ) डी. लिट् (पेरिस)। १०. चक्रपाणिविजयमहाकाव्यम्-भट्ट लक्ष्मीधर विरचित । उपा और अनिरुद्ध विषयक प्रेमकथा सम्बन्धी अति मनोहर महाकाव्य । सपादक-पं केशवराम काशीराम शास्त्री, क्यूरेटर एवं गुजराती भाषा और साहित्य के प्राध्यापक, भो जे अध्ययन-सशोधन विद्या भवन, गुजरात विद्यासभा, अमदाबाद । ११. राजविनोदमहाकाव्यम्-महाकवि उदयराज विरचित । मध्यकालीन भारतीय इतिहास सम्बन्धी एक महत्त्वपूर्ण काव्य । अहमदाबाद के सुलतान महमूद बेगडा के जीवनचरित्र का वर्णन । संपादक श्री गोपालनारायण बहुरा, एम् ए , प्रवर शोध सहायक, राजस्थान पुरातत्त्वान्वेषण मदिर, जयपुर । १२. शृंगारहारावली-श्रीहर्ष कवि विरचित शृगाररस का अपूर्व गीतिकाव्य । सपादक-डॉ प्रियवाला शाह एम्. ए, पी-एच् डी (वम्बई ), ही लिट् (पेरिस)। १३. नृत्यरत्नकोश (प्रथम भाग) मेवाड के सुप्रसिद्ध महाराणा कुम्भकर्णदेव (कुंभा) प्रणीत नृत्य-विषयक महत्वपूर्ण ग्रन्थ । सम्पादक-प्रो रसिकलाल छोटालाल परीख, अध्यक्ष-भो. जे उच्चाध्ययन- सशोधन विद्या मन्दिर, गुजरात विद्यासभा, अहमदावाद तथा डॉ. प्रियवाला शाह, एम् ए, पी-एच् डी., ही. लिट् , प्राध्यापिका-रामानन्द आर्ट्स कॉलेज, अहमदावाद । १४. उक्तिरत्नाकर-साधुसुन्दर-गणी-विरचित । उक्तिव्यक्तिविषयक महत्वपूर्ण ग्रन्थ । सस्कृत और देशीय भाषा शब्दों के तुलनात्मक अध्ययन में अत्युपयोगी। अज्ञात कर्तृक उक्तीयक और औक्तिकपदसग्रह समन्वित । सम्पादक-पुरातत्त्वाचार्य श्री जिनविजय मुनि, सम्मान्य सचालक, राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर। १५. दुर्गापुष्पाञ्जलि-ख० महामहोपाध्याय पं० दुर्गाप्रसादद्विवेदीकृत । भक्ति-विषयक सुन्दर मुक्तक काव्य । सम्पादक-पं० गङ्गाधर द्विवेदी, साहित्याचार्य, व्याख्याता-महाराजा-सस्कृत-कॉलेज, जयपुर । १६. कर्णकुतूहल-महाकवि भोलानाथ विरचित । सरस सुन्दर नाटक । सम्पादक-पं० श्री गोपाल- नारायण बहुरा, एम् ए, प्रवर शोध सहायक, राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर । इसी ग्रंथकार की श्रीमद्भागवत में वर्णित भगवान् श्रीकृष्ण की लीलाओं के आधार पर निर्मित पद्यमयी रचना 'श्रीकृष्ण- लीलामृत' सहित । १७. ईश्वरविलास महाकाव्य-कविकलानिधि देवर्षि श्रीकृष्ण भट्ट विरचित । जयपुर के महाराजा ईश्वरीसिंह की आज्ञा से निर्मित ऐतिहासिक महा-काव्य । सम्पादक -निर्मित 'विलासिनी' सस्कृत टीका सहित । सम्पादक-कविशिरोमणि देवर्षि भट्ट श्री मथुरानाथ शास्त्री, साहित्याचार्य, जयपुर । ।
६४ १८. रसदीर्घिका कवि विद्याराम प्रणीत । रस अलंकार आदि विवेचनपरक सुबोध रचना। सम्पादक-गोपाल नारायण बहुरा, प्रवर शोध सहायक, राजस्थान प्रा. वि. प्रतिष्ठान, जोधपुर । । २. राजस्थानी साहित्य १९. कान्हड़दे प्रवन्ध-महाकवि पद्मनाभ रचित । खधर्म और स्वदेश रक्षा निमित्त जालोर के चौहाण-कुलशिरोमणि महावीर कान्हदेव (कान्हड़दे) के बलिदान की गौरव-गाथा । राजस्थान के प्राचीन इतिहास सम्बन्धी साहित्य की महत्वपूर्ण प्रवन्ध रचना । सम्पादक-प्रो के. वी. व्यास, एम्. ए., प्राध्यापक- एल्फिन्स्टन कॉलेज, बम्बई । २०. क्यामखाँ रासा-फतहपुर ( शेखावाटी) के नवाव अलफखाँ ( कविवर जान ) रचित ऐतिहा- सिक काव्य । सम्पादक-डॉ दशरथ शर्मा और श्री अगरचन्द नाहटा । २१. लावारासा अपर नाम कूर्मवंशयशप्रकास-चारण कविया गोपालदास विरचित ऐतिहा. सिक राजस्थानी काव्य । सम्पादक-राजस्थानी के सुपरिचित विद्वान् श्री महतावचन्द्र खारैड़ । २२. बाँकीदासरी ख्यात–जोधपुर के कविवर वॉकीदास रचित राजस्थानी साहित्य की सुप्रसिद्ध रचना । सम्पादक-श्री नरोत्तमदास स्वामी, एम्. ए., वाइस प्रिंसिपल एवं प्राध्यापक-महाराणा भूपाल कॉलेज, उदयपुर। २३. राजस्थानी साहित्यसंग्रह-खींची गगेव नींवावतरो दो-पहरो' 'रामदास वेरावतरी आखडी री वात' तथा 'राजान राउतरो वात-वणाव' नामक तीन राजस्थानी वार्ताओं का संग्रह । सम्पा- दक-श्री नरोत्तमदास स्वामी, एम् ए., प्राध्यापक, महाराणा भूपाल कॉलेज, उदयपुर । २४. कवीन्द्रकल्पलता-मुगल सम्राटू शाहजहाँ के समकालीक काशी के सुप्रसिद्ध विद्वान् कवीन्द्रा- चार्य सरस्वती विरचित मनोहर काव्य ग्रन्थ । सम्पादिका-श्रीमती रानी लक्ष्मीकुमारी चूंडावत, जयपुर । २५. जुगलविलास--कुशलगढ़ (राजस्थान) के भक्त महाराजा पृथ्वीसिंह अपरनाम कवि पीथल विनिर्मित ब्रजभाषा में भगवान कृष्ण और राधा की ललित-लीला-वर्णन-परक सुन्दर रचना । सम्पादिका- श्रीमती रानी लक्ष्मीकुमारी चूंडावत, जयपुर । प्रेसों में छप रहे संस्कृत ग्रंथ १. शकुनप्रदीप-लावण्य शर्मा रचित शकुनशास्त्र का अत्युपयोगी महत्वपूर्ण ग्रंथ । २. लघुस्तव-लघ्वाचार्य प्रणीत, सोमतिलक सूरि कृत टीका सहित । करुणामृतप्रपा-ठक्कुर सोमेश्वर- विनिर्मित, सस्कृत सुभाषितों का सुन्दर संग्रह । ४. वालशिक्षाव्याकरण-ठकुर संग्रामसिंह विरचित, संस्कृत व्याकरण का बालोपयोगी सुबोध ग्रन्थ। ५. पदार्थरत्नमंजूषा-पं. कृष्ण मिश्र रचित, न्याय शास्त्र का महत्वपूर्ण प्राचीन ग्रन्थ । ६. काव्यप्रकाशसंकेत-अलङ्कार शास्त्र का सुप्रसिद्ध मूर्धन्य ग्रन्थ, सोमेश्वर भट्ट कृत-'सकेत' सहित । ७. वसन्तविलास फागु-अज्ञान कर्तृक-फागु काव्य रूप में सरस सुन्दर रचना । ८. नन्दोपाख्यान-अज्ञात कर्तृक-उपाख्यान रूप में सरल सस्कृत रचना । ९. चांद्रव्याकरण-आचार्य चन्द्रगोमि विरचित-संस्कृतका प्राचीन व्याकरण ग्रन्थ । १०. वृत्तजाति समुच्चय-कवि विरहाङ्क विनिर्मित छन्द.शास्त्र का महत्वपूर्ण प्रन्य । ११. कवि दर्पण-अज्ञातकर्तृक-छन्दोरचना विवेचनपरक प्राचीन ग्रंथ । १२. स्वयम्भूच्छन्द कवि स्वयम्भू विनिर्मित अपभ्रंश छन्द.शास्त्र का प्राचीन ग्रंथ । १३. प्राकृतानन्द-रघुनाथ कवि रचित, प्राकृत भाषा का अत्युपयोगी व्याकरण ग्रंथ । १४. कविकौस्तुभ-पं० रघुनाथ विरचित, काव्य शास्त्र विवेचनपरक ग्रंथ । १५. दशकण्ठवधम्-महामहोपाध्याय ख० पं. दुर्गाप्रसाद द्विवेदी रचित रामचरित्र विषयक चम्पू काव्य। १६. पद्यमुक्तावली-कविकलानिधि श्रीकृष्णभट्ट विरचित ललित मुफक काव्य ।
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