Bharatiya Vidya Bhavan Library, Mumbai
Mijahutti Bahimadi
Front matter
आप पत्र आशय २ सिरकेरोगोंकेवर्णनमें ३३ / ९८ पा-तमकुदकेविषयम। ४६ १४याकज़ाज़केवर्णनमें। ४७ १ मा सिरकेदर्द केविषयमें। ३२ २० पा-गशेकेवर्णनमें। "२ मा सरसामकेविषयमें। ३४२१/पा इतालाजके विषयों ४६ 11३ पां-जूमूदकेविषयमें। इस माळवीके बिषयमें।- 8s पा सकनेके बिषयमें। ३२३ या-हिसकेवर्णनमें। मा-सवातके विषयो। ३७२/पा.अ साबकेवर्णनमें। इस ६/पा सहरकेविषयमें वशमा जुकामोरनजलेकेविट पा. मन्नानसुइरीगौरसह पयमें। सवातीकेविषयमें। दूसराजध्याप पाकाचूमकेवर्णनमें । पा.मृगीके विषपमें ४० आरवकेरोगोंके वर्णनमें ६ २०/पा मालीखोलियाकेवर्णपारमदअर्थात आरवाने केविषयमें। सपा-जुननकेविषयमें २ या-तुरफाकेवर्णनमें। १२/मा सदर औरदव्यारकेबि ३ मा जुफराअर्थाननाखूनेके पयमें। ४२) विषयमें। ५२ पा-निसान अर्थानभूलपा-आस्वमेंजालापड़जाने जानेकेरोगकेवर्णनमें केविषयमें। पा-फालिजके बिषयमें। ४३ पा-सबलकेवर्णनम। ५२ या खदरकेविषयमें। ३६)पा-मुलतहिमाके फूलना १६/पा-लकनेकेविषयमें। नेकेबिषयमें। १)पा तशन्नुजकेविषयमे। ४५७ पा.मुलतहिमाकाग्वजली नमें ५२ ५ आशय आशाय ५५॥ २ . केवर्णनमें। ५६ कवर्णनमें। पा-सोसनुलमुलनहिमा २९/पा-करनियापरफुन्सीहो केवर्णनमें। ५ जानेकेविषयमें। सपा- दोजुलमुलत हिमा पा-मोरसिरचकेवर्णनमें||६० केविषयमें। सपा मेंगाहोनेके विषय में।।६१ १०मादमाभर्थातभासूब २४/पा इततिसाभौरइन्तशार हनेकेविषयमें। केवर्णनमें। ११पा हिरकतुलभैनभाता २५/पा.अनवीयाकेदकेस स्वजलन होनेके विषय में कड़ाहोज़ानेकेबिषयमें। ६३ १२पा कुजाताख मेकि २६/मा-ग्वयालातृकेवर्णनमें ६३ गीवस्तुकेपड़नाचेकेविम पा. मोतिविन्दका निपय ६४ पा.ऑपपरन्बोटनगनेके में। विषयों ५६२पा.असवेमेंसुदा पड़जा६ पा.औरवकेधानके बिम नेकेविषयमें। ममें। ५७//पा- गारवकेकंजाहोजाने ६६ २५पा-कमनाकेवर्णनमें। पच विषयों। पारनोंदीकेविषयमें। ३०पा-जोफवसरमनकर६६ १७/पा.दिनोंदीके विषयमें। दृष्टीकेविषपमें। . पा-सुदाहिदकहाऔग्श पा.बतलानबसारतके वि.६७ कीकावश्मकेविषयमें। ५६/३२ पा चुन्धाहोनेके विषयमै ६७ २४/पा हजुल जैनके विषय ३३/पा-कुमूरगतिदृष्टिकथा में। 4६ कजानेकेवर्णनमें। पा.करनियाकेरभराने पा. आरवकेदुवलाहोनेके पत्र आपाय पत्र आशय . ७४ विषयमें। ६८/२/पा-पलकोकेमफेदहोजा ७३ ३१ पा-बुग़जुलभैनकेवर्णन नेकेविषयमें मि। ६/१० या पत्लकमें खुजली और आरवके मिज़ाजपहिचाननेकी फुमियाहोनेके विषय ७३ 'रीति FF ||पा वरदाकेविषयमें। ७३ तीसराअध्याय शपा-पलककेमोटेभीरक डेडोजानेके विषयमें। पपोटे औरपलककेरोगोंकेवि पा-पलककेमोरेऔरलाल षयमें। होजानेकेविषयमें। ७४ पा.कमनाके विषयमें पा.पलकों पड़नेके पा-पपोटेकेटीलाडोजाने विषयमें। केविषयमें। या-गुहागनीके बिषपमें ७५ ३ या-पलकोंकेआपसमेवि पा-तोसतुल अज़फानके मटजानेके बिषयमों विषयमें ४पा-मलककेछोटेहोजाने रुपा तइन्जुरजफनके वि केविषयमें। to षयमें। मा.शिरनाककेविषयमें। पा. पढ़कमेंघाव पड़ पा.पपोदेके अपरगाँठपडा बेविषयमें। १६ जानेकेविषयमें। ७१//पा.मपोटोंके फूलजानेवे पाओस्मुनकलिवऔर विषयमें जापदकेविषयमें। ७१/२०१पा.यपोटो मस्सेपडजा पा.पलकोंकेम्डजानेकेदि नेकेविपपमें। पयमें। ७२।२५ पा. पपोटोंपर पित्तीउछल 180 - ७५ . ६ 1 १६ आशय आशय २ २ 199 पमें। नेकेविषयमें। १६३पा.काजकेधावके विषय २२/या.नमलपपलककेवि में। पयमें। egeपा.तुरशऔर बकर औरम २३ पा-पलकयरसेमृसीड़ने ममकेविषयमें। के विषयमें। ७१/५/पा किसीवस्तुवेकानमेंप २६/पा-सुलाकेविषयों डजानेके विषयमें। २५/गा-चोरसेपयोटेकानीला ६/पातिनीनऔरदवीकेबि याइराहोजानेके विषयों व पयमें। ३॥ २६) या-क्रीयेकेपासनाकवी ७/पा.कानसेरुधिरनिकलने औरत्नासूरहोजानेके विषय केविषयमें। पा.कानकेटूट जानेकेलि. २७ या.कोयेऔरपलकोंबि नाजलनौरदानोंकेरयुजा र पा जडसेकानकेउरवडना लीडोनेकेविषयमें। निकेविषयमें। २६/पा.कोयेमेंनाककीबोरस . १० मा कनकहीकेविषयमें न चिकमांसहोजानेके विषयाकानमेंखुजलीहोनेके यमें। विषयमें। चौथाअध्याय पा.कानमेंचीरवकी सीमा चाजमालूमझोनी। कानकेरोगों के विषय में पांचवाअध्याय पा.कानोदर्दयो विषयमे २पा. कानकीसूजनकेविप नाककेरोगोंकेविषयमें २०१पा-खश्मकेविषयमें। ८५ पयमें। . ८४ १ ८४ समें।
७ पत्र आशय पत्र आशय m ६ 8 यमें। विषयमें। २ ८८ tc २ पा.सूंघनेकीइन्दीबिगड़ ३/पा-जीभकाबरनानाऔर जानेकेविषयमें। निकलआना ३ पा-नाकमेंबुरामांसउत्पन्न जीमकेटीलेहो जानेके होनेके बिष्पमें। ६ बिषयमें। ४ या नाककेघाबकेबिर्ष ५या.जीमकेफटजानेकैदि ८७ षयमें। या-नाककीफुसियोंके ६पा.जीभकीखुसीके दि ८७ पयमें। पानकसीरके विषयमें ७पा.जीभकीजलनके ७ पा.नाकमेंबुरीगंधआना। वानमे। पो.नाककुचलजानेकेबि- पाजीभमें खुजली होने के षयमें। विषयमे। पा बहुतसीलीभाना। /पा जिफ़दाललिसानके १०पा नथनोंकास्स्वारहना। | विषयमें। ११/पा नाककेभीतरखुजली पपा.फिसादजोंककेविष होनेकेविषयमें। बठवाँअध्याप। १९ या बतलानजोकमें। पा-तकशशरज़वानके मुंहभोरजीभकेरोगोंकेविर्य विषयमें। में। व पा. मुखके भीतरफुसिय पा.जीभकीसूजनकेवर्ण होनेकेविषयमें। 14 १६ पा.मुंहानेके विषप २ पाजीभकायोगलहोना। या आशिलनुलपामके २५ ३ यमें। ६४ W ६०] ८ भाशय आशय पत्र ६ वड़ना। विषयमें। १६गा-जागते औरसोतेमेंमुइसे पा.होंठपरकुंसियाहोना बहुनसीरालबहना 5 - नेकेबिषयमें। अपा.सुरवसेटुरगंधानेके पा-होठमेघाव पडकेपी विषयमें। ५८/पा तालूकीसूजनके बिष सपा होउमेघाबपड़केफळ यमें। तेजाना। सातवाअध्याय आवाजध्याय होठोंकेरोगों के विषयमें। दाँतों औरमसूटोंकेरोगोंमें १ पा.होंगेपरसफेदीहोजानापा-दांतोंकी पीडाके विष १०० केविषयमें। यमें। २ पा.होंठकीखुश्कीऔरफल २/पा-दांतोकेकुन्दहोजाने १०१ निभौरछिलके उत्तरनेकेवि केविषपमें। षयमें। ३ पादोदोकीभावनातेरहने शपा-होंटकेफडकनेके निय केविषयमें। यमें। दांतोके टूटनेऔरस्वो ४पा. होंठेकेछोटाहोजाने और ग्वले ठोजानेकेविषयमें||१०२ गुकडजानेकेविषयमें। यि पा-इफरकेविषयमें। पा. नीचे होटपरअधिक ६पा-दांतकेरंगबदलजाने माराउत्पन्नहोजानेके विषय केविषयमें। यमें। अपा.दांतोंके हिलनेके वि ६ पा.होंटकीसूजनके विषय पपमें। १०२ ९८४पा. भ आपाया पत्रा आशप पत्र १०५ यमें। . . पा. दीनकालम्बानौरमो टाहोजाना। १०६२पा-कव्वेकेलरकाने र पा.दातोंनेखुजलीडोनेके केविषयमें विषयमें २०६३ पा.ग्युन्नाककेविषयमें १० १०/पा.सोते दाँतरगडनेके या-गलेऔरमरी औरकुस विषयमें। १०४ बरैया में फुसियाहोनाने ११० पा.मसूटोंकीसूजनकेबि केविषयमें। षयमें। १०५ ५ पा.गले जोकचिमटर १९ १२ या-मसूटोंसेरुधिरबहनेके नेकेविषयमें। विषयमें। पा-सुईनिगलजानेकेबिन (१३)पा.मसूटोमेघावभौरना षयमें। रहोजानेकेविषयमें ०७ पा.मरीकेमिंचनानेकेबि पा.दांतोंकीजडमेंकमज़ोरी घयमें। होनेसेदांतहिलनेकेविषया-नरवोकेटीहोजाने यमें। केविषयमें १०पा-मसूदोंपरबुरामांसउत्पपा-मरीमेंस्खुजलीद्रोनेके नहोनेके विषयमें, विषयमें। नवनिध्यायर १० या कुसवैग्याकेफडकले औरकांपनेकेविषयमें। १९३ गले औरकव्वेगौरमरीऔर पा.डूबेहुयेके उपायो। १३ कुसवैपाकेरोगोंकेवणी १२ पागलाघोटेहुयेऔरफा नमें सीदिये हुयेका उपाया १ पा.कव्वेकीसृजनके विष 7 २१२ ११३ - . A १० भाशय । पत्र आशण पत्र 7 २३ पा. सरउलचलाकेविष जोड़ोंकीसूजनोंकेविषयमें १२५ यमें। ११४पाछातीकेआसपासपी) १४ या मरीकीसूजन केबिष परुकरहनेके विषयो। यमें। १९४४ सपा छातीकाठंडयाजाना १५ या.मरीमेंघाबपड़जानेके भौरजकड़जाना। विषयमें। म्यारहवामध्याप १६ यश आवाज़बन्दछोजाने गोरपडजानेके विषयमें। १९५४ - दिलकेरोगोंके बिषयमें दसवाअध्याय १ पा.दिलकेमिज़ाजके विश्वमा गाड़में। छाती औरफेंफडेकेरोगोंकेबि २ पा.रखाकान अर्थादिलो "अयमें। घबरानेकेविषयमें। १ पा. दमकेवर्णन में। ९१६३ पा.मू केविषयमें। ९३३ २ पा-खासीकेबिषयमें। १९९४ पा.दिलकेदोनोंकानोंके ९३।। ३ पा.मुखसेरुधिरनिकलने सूजनेकेविषयमें। केविषयमें। दिलसेधूगोउठनेके९३५ पा.मुरवसेपोनिकलने विषयमें। किविषयमे ६९२२६ पा.जगतलकन्यके विश्व ५.पा फेफडेकीसूजनकेवि.२३ पपमें। पा-सिलकेविषयमें। १२६७ या तकरारकल्बकेविरई या छातीकेपरदोंऔरमि पयमें- ल्लियोंऔरबंधनोंभौरज पा.कज़ाफुलकन्बके ९३६ लोऔरउसकेगासपासके विषयमें। ... १२०/५/पा. ११७ आशय पित्र नाशय पत्र पा.दिलकेचनेकेबिघ १३८ । औरतुरव के विषय में। म यमें। ४ पा.हैजेकेविषयमें। - १० पा-दिलपरतरीछाजाने ५ पा.मूरखकेघरजानेयाजाते व विषयमें। रहनेकेविषयमें।। बारहवाभध्याय ६ पा.सूरवकेविगडजानेके विषयमें। स्त्रीकीलातीके रोगोंकेवि,१४५७ पामोजनकाहोकाहोजाव५६ पा दूधकमहोनेकेविषारकेविषयमें। यमें पा.जूउलवकरकेविषयी पा.दूषबदनानेकेविषयमेरधन र या भूस्वकीसहारनहोनेके १५९ १३ पा छातियोंके सूजनेभोरनश्टर विषयमें। न्नेकेबिषयमें। १० पा.अधिकण्यामहोनेके १५५ पा.छातीमेंदूधजमजानेके २४३ विषयमें। विषयमें। ११ पा.गेदेकीसूजनकेत्रिपा या छानीकेपिसजानेके वि४६ यमें। १२ या दुवैलनुलमेदेकेबिपक्ष तेरहवाअध्याय यमें। १३.पा.मेदेकेघाब औरफुसि२५ मिदेकेरोगोंके बिषयमें। योवेविषयमें। पा.मेदेके मिज़ाजविगडाट६१७ पा-पेट फूलनेकेविषय २५८ नेके बिषयमें। २ पा.पेटकीपीडाकेविषयम२४५१५ या डकारजभाईऔरअंगाव पाजीफहम और सूपेडा डाईभधिकानेकेविषयम ५ पयमें। ३ आशयन पत्र भाशय पत्र R पा-लटीउचाकीभौरमत १५२ डाहोजानेकेविषयमें। १६६ लीऔरतकल्लुवनफ्रकेवि ३०/पा.येटचलने के विषय १७/पा उलटीमें रुधिरभानेके में। विषयमें। १६१/३१ पामेदेकेछोटाहोनेकेविर १८/पा मेदेमेशघिरयादूधके . चौधवाअध्याय जमनानेकेविषयमें। २२/पा-अधिकहिच्कीभानेके. जिगरकेरोगोंके वर्णनमें विषयमें (१६३१ पा.जिगरके विगाडफेविष १५० २०)पा. इंकिलाबमेदेके विए २)पा-जिगरकेकमज़ोरहोजा यमें। १६४ नेयाविषयमें। २१ मा कलकुलमेदेकेविर ३ पा.निगरकेसुद्देकेविषयो यमें। १६४/४ पा.मासारीकाकेसुद्देके वि.१७६ २२ पा.मेदेकेफडकनेकेवि 4 पा-जिगरके फूलनेकेविषय १६५/६ या निगरकीपीडाकेविषयमें पा-बजउलफ़चादके विप पा.शिरमाकेविषयमें। ५ १९९८ पा-निगरकीसूजनकेत्रिए २५पा-पेटमेंजलनहोनेकेवि २५/या मेदेकेटीलाइोजानेकेवि१६६ पा-पेटकेपदोंकीसूजनी २६/पा मेदेकीचुनाबटकेटीला केविषयमें होजानेकेविषयमें। १६६/१०/पा-जिगरके फाईविषयार पामेदेकेसिंचनानेकेवि २६०९९ या-निगस्वीकुंसियोंके वि पा.मेदेवेकड़ाहोजानेकेविश्६३ मा निगरकेफडकनेकेविगेशन पा.मेदेकेछापरकेपट्टोंकेका या.जिगरकीपयरीकेविमा पियमें। पमें।
१३ आशय आशय . १६/पा-जिगरकेसोटाहोनेकेविर आंतोंकेरोगोंके विपयमें १५/पा-जिगरसेदस्तआनेकेबि.पा-जलकुलभमाकेबि, १६/या-सूउलकिनीमाकेविषरत २ या मातोंसेदस्तोंमें रुधिरओ १७/पाजलंधरकेविषयमों १२ नेकेविषयमें। पन्द्रहवाअध्याय ३ मा.आतोंसेपीपानेकेबिन.. पा.कुंथकरदस्तआने परकार मौरतिल्लीऔरपित्तेकेरो विषयमें। गोंकेविषयमें ५पा.मरोडके बिषयमें। १पा परकानकेविषयम। १८६६ पा. आतोके फूलने औरयों, २ पा.तिल्ली के विगाडके नेकेविषयमें विषयमें। १९१७ पा. कूलंजके विषयमें। २ पा-तिल्लीकीसूजनके वि पा-बिनापीडाकेकरज़हौ पपमें। ११२ नेकेविषयमें। ४ या-तिल्लोकीसूजनीक पा-पेटमेंकैचुरोपड़नेकेवि० जानेकेविषयमें। सत्तरवाअध्याय पा-तिल्लीकीकमजोरीकेविर ६.पा.तिल्लीकेसद्देके विषप१४५ इनरोगोंके विषपमेंजोपरखानेकीन या-तिल्लीकोउससूजन गहहोतेहैं। विषयमेंजोबायसेहो। पा.ववासीरके बिषयने। २० पा-दिल्लीमपथरीपडजानेर पा-वादीयवासीरकेवि मनः केविषयमें। ३ पा.पैरवानेकेस्थानपरना सोल्हवा अध्याय सरझोजानेकेविषयमें ४ पा.पैखानेकीजगहसूजन R: २०६ -- आशय पत्र माशय' डोजाने विषयमें। --- २० विषयमें। ५पा.पै खानेकीजगह फनपा-जियावितसके वि.में २७ नेकेविषयमें। - १० पा.गुरदे पथरीपडनेऔरत पा.शिरजकेटीलाहोजान्ने मूवमे रेतआनेके विषय केविषयमें। में।.. ७ पा.काचनिकलनेकेबिनेर उन्नीसवाभध्याय र पा.पैवानेकीजगहगहरा २२ मिसानेकरोगोंके विषयमे घावहोजानेके विषयमों पा.पैरखानेकीजगह खुजलीः १.पा.मसानेकीसूजनके वि २९थ होनेके बिषयमें। २ पा.मसानेकेघाबकेवि में २२० अठारहवाभध्याय ३ पा.मसानेकीखुजलीकेबि २२० ४पा-मसानेमेंरुधिरजमजा २२१ गुरदेकरोगोंके विषय में २१२ नेकेविषयमें। १ पा.गुरदेके बिगाडके कि.२३ ५ पा.गसानेकीपीडाकेलि २२१ २ पा.गुरदेके दुबलाहोजानेव२२३६ या मसानेकेटलजानेकेविन विषयगे। ७ पा-मसानेकेफूलनेकै विमें ३ या गुरदेवीकमज़ोरीकेविगेश्या-मसानेपथगेपड़नेले ४ पा.गुरदेवायकीपीडाहो२१४ विपयमें। नेकेविषयमें। पा.गूत्र जलनहोनेकेविन पा.गुरदेकीपीडाकेबिषयमे २१५/१०/पा-मूत्रवंदहोजानेकेवि-२२५) ६.पा.गुरदेकीसृजनकेविष मे२२५११/पा-मुत्रखुट्रकेनहोनेके रस पा.गुरदेवघायकेविषयमराई विषयों पा-गुरदेखुजलीडोनेक २०६१२/पा अचानवामूनिवाला २२६ . प ७ ८ आशय पत्र आशय पित्र । २ J करनेकेविषयमें, जयभवानकपैरवाना होजोत्पा ३/पा मोते मूत्रनिकलजानेमन निकेविषयमें। के बिषयमा ... रमा-पुरुषकाविषपंकराने शव १४/पा.मूत्रमेरुधिरनिकलने वकीचाहना उत्पन्न होनेवा: केबिषयमें विषयमें बीसवाअध्याय २० पाखुसियोंकी सूजनकेविर :/११ पा खुसियोंके बदजाने/२४ । उत्तरोगोंके विषयमेंजोकेबलापुरु ९२ या-लिंगमेरहमकेमुहके२४ • पोहोतेहैं। फडकनेकेविषयमें १.पी- विषयकीचाहनाघटना १३)पा-खुसियोंकीपीडाकेबिन नेकीविषयमें। १४/पा-खुसियोंकेछोटाहो ७२ २ या-बीयंजलदीनिकलान३०- जानेकेविषयमें। नेकेविषयमों १५/पा-खुसियोंकेचदनानेका ३ या विषयकीचाइनागधि२३४/१६ पा रगेंउमरमानेकेविमेंस कहोनेके विषयमें। १७ पाऊपस्कीवालदीली २४८ पा-बीर्य निकलाकरनेकेसव होजानेके विषयमें।. पा-बीयेकेबद्दलेरुधिर २३१२८ पा-हिंगआदिवेघावारपद निकलनेकेविषयमें। बिषयमा पा-सोते मेंबीयेनिकल पा. लिंगकेसूनजानेके २४ जानेकेविषयमें विषयमें ७ पा-लिंगकेहरसममज़ोर २२१२० या लिंगआदिकीखुजली करनेके विषयमें। केविषयमा पा.वीर्य निकलनेकेसम३८/२१ पा-लिंगकेफटजानेकोवि२४५ । . .
भाशय
आशय
पत्रा
२२/पा.लिंगपर औरउसकेमा मेवच्चामरजानेके बिषयमे
पासकडीपुंसियां औरमसारपा-रुधिरजननेकेपीछेनि
सेहोजानेकेविषयमें। कलता उसकेरुकाइने
नपा.मयके छिद्रवंदहोजाने केविषयमें।
केविषयमें
+ २०६६ या. रिजाके विषपमें। ५
जया-लिंगकेटेवाहोजानेके पा.हेनकीभधिकताकेबिन
विषयमें।
• पा.रेइमकेघावकेवि में६६
इक्कीसवाअध्याय
या-रहमकेफटजानेकेविरत
२०पारडमकीखुजलीकेविक्ष
मिराकृसिफ़ावागौरसर्व के ११/पा-रहमकीबवासीरकेवि
विषयमें। १२ पा.रहमकीफुसियोकेवि२६३
१पा.कोलकेविषयमें २०१३पा.रहमकेमस्सोंकेविषय
२ पा.पेट भौरचट्टोंकीफ़िनक १४ पा रहमकेनासूरके विषप२६६
के विषयों। २५६१५ पा.रहमसेपानीवइनेकेविर
३पा.एंडोके उभरनेके बि२५६१६ पा-रहमसेबीर्यवहनेके-२६५
बाईसवा अध्याय
१७ पाहैजवंदट्टोजानेके वि मेर
या रतकके विषय में।
निरोगोंके विषयमेंजोकेवलप्रस्चि १५ पा रहमकेवभरनेकेवि-R
योकाडोतेहैं २०पा.रड़मकेमुकपडनेकेविर
पा.बामहोनेके विषय में। ५३२१ पा.रइसकी सूजनकेविमर
२ पा.बहुधागर्भगिरनेकेवि.२५३ २२पारडमकेदुवैलेडोनेकेवि
२ पा.जन्ने में कठिनताहोलेकरस२२ पा सरतानरहमकेविपप १
पा.मशीमाकेरुकने औरपेय२५६२४ पा रवतिनाकरहमकेवि.२७४
पत्र आशय आशय L ५ स्मिथ २५ पा रहमपानीमरजानेकेवि२२/३ या हुम्मावबाई बिपयमेर २६. श.रहममेंवायमरजानेकैबि पच्चीसवागध्याय तेईसवाअध्याय सूजनोंऔरफसियों औरउनगेगोके पीटऔरहाय औरयावकरोगोंडविध विषयमेजोशरीरके अपाहोते या-कुभनिकलभानेकेवि.२०३१ या सूजनोंभादिकेविषयमें. २ पा, पीठकीपीडाके विषयार पा.स्वालकेरोगोंकेविषयी ३ पा-कोरवकीपीड़ाके बिमरिच ३ पा-बालोंकेरोगोंके विषयमै ४ पा-गठियाके विषयमें। २०६४ मा नारवूनोंकेरोगोंकेविषय पा- पिंडलीकीरगेवडीऔर या अलगररोगोंके विषपमें/३२९ मोटोड़ोकरउमरआवें पावावके विषयमें। ६ यायावसूजकरहायीकेसे पा.कुरइके विषयमें। होजाने विषयमा २ कपा-मारने और गिरपड़ने सेचो ७ पा सेडीकीपीडाके विषयमें रन टलगनेके वियों। पा-तलुयेकीपीडाकेविषप२८२ र पा.कोडेकीचोटकेविषयमें ३२० चौबीसवाअध्याय, १० पाहड्डीकेटूटने और उग्वजा और स्विसलनेके वियपमें तयकेवर्णनमें॥१ ११ या.बिपकेयायमें १ पा.हुम्मायोमीके विषय ९२ या विषैलेजानवरों के काटने में। ka . याडकमाग्नेकेउपायमें। २ पा हुम्माखिल्लीले विषय २६५ नाडीपरीक्षा ३ पा. दिकके विषयमें वनकशासनाईका ४पा-सीतलाके विषयमें रखनवशासलानीका ३२६ ३२ Eag *- १८ आशय आशय पत्र ३५ ३५ २५ - T ३६० २६० ३६. - नाडीकी मिलीहुईप्रकारें। एनवारिशजालीचूस। जदकीमाचूना मूबपरीक्षा जवारिशखोजी। सूत्रफेरंगकावर्णना ३४६व्यकोकाया मूत्रकागादाऔरपवलाहोना। ३४चडब्बुलमिस्क सूत्रकासाफऔरंगदलाहोना। ३४पहब्वेराबन्द। सूत्रकाकफ ३ हव्य सिकबीनजा मूत्रकीतलछटा ३४ाइबरखीज़रान। मूनकापोडाऔरघना:ोना। ३४चइब्यवासली।। बुलगनकावर्णन। ३सरहब्यमित्रा हब्बइफ़नीमूना गिन्लोडई ीपोंकेवनानेकी ३५ दिवालमिश्का शति। दवायतुर्युद। उत्तरीफलधनियाँका ३५५दवाउलकरकमा इतरीफलगुददी। ३५५ दवाउलतुरंनवीना भयारिज़फोंकरा। ३५६ ज़रूर बसपारा भमानासिया। ६मस्तगीकातेला वासलीकूना २५६ कृटकावेल। वरुदयनफसजी। ३५७केसरवानेन। चनादिकुलबुरा ३७ बिच्छूकावेला- निस्यिाका ३५ मुद्दाबकावला. असनारदीनकावेल। ३५वरोगनमोरचा। ३ २६९ २६ ३६६ २२ Sunita . R मोठकीमाजूना भिलावेकीमाना RE RES ।
१ आशय पत्र आशय पित्रा ३७० ३ 1३७२ भासकानेला ३६६शर्बतफा। ३७० रोगनभामला। इशर्बतस्वशरवाशा मोयेकानेला- ३६शवंतपोदीना। गोस्वरुकातेला- ३६ शर्बतदीनार गेहकातेला २६ शर्बतहब्बुलासा सुर्मारोशनाई। ३६५शर्बत अंजवार। माजूनजरमोनी। ३६५शर्वनगावजुवो सिस्केकीसिकंजबीना ३६५शर्बतवालगू। 88 सिकंजबीनवरीगर्भ। शर्बतनीलोफर ३११ सिकंजबीनअनसिली। ३६६शर्बवसन्दला ३१२ सिकनबीनइफतीमूना २६ शर्बतइनाबा सिकंजबीनसफरजली। ३६७शर्बत फिंजनोश। सफूफचारनुस्खम। ३६० शियाफकुन्दुर। सफूफाइबुलरुम्मा। ३६०/शियाफ़अवियजकुन्दुरी। २०३ सफ मिकलियासा३६७ शियाफ़अहमरलीना सफूफ़तीना व शियाफजंगार-शिपाफगाव सफूफ़वेगतेज़क ३६ शियाफाइगराशियाफदीनार मंजनदांतोंका पुष्ट करनेवा शियाफरुधिरकागेकनेवाला ३६८ जिमादशोसा। कूटकेतेलकीसगेरीति। फरजजाहायिसा) सुरतीजाना फलदिफयन। शर्चतकर्दमुकर। २६६ माजूनफलाफली। सर्बतइफसतीना चफिलोनिया। त्र - R98 B५५ २० आशय पत्र आशय स्त्र . B9 . कुर्सभम्वरबारीस २७श्माजूनफिलासफा कुसमाज़रीयुना |३०६ माजूननुजाह कुर्सभनीमून ३७६लोकेमैलकीमाजून सीकन खिचलोडेकेमैलवेयोनेकीरीति कुर्सकौकब माजूनलवून कुर्ससुम्वुल ३७७माजूनबुजूर फुर्सग्लास ३०० विच्छूकीमाजून कुर्मकुहल ३७७विच्छूकेजलानेकीरीति कुर्सगुल ३७धमाजूनजालयड्द कुर्सकहरुवा ३७चमाजूनकमीला कर्मकाक़नज मतबूरवमुलप्यन सा कुर्सज़ियवितुस ७चमुफरहमगीर कुर्सयोलुद्दम ३७गुफर दिलकुशा कुर्सनफसुद्दम ३रामुलानमुवारिक कुर्सत्वाशीर मुलय्यम ३७९मग्डमवासलीकून बुर्सतवाशीएकाबिज महमूरसूल कुर्सकाफूर Reoचुनेकमरहम मरहमकाफूर कोडलुलजवाहिर ३० सिग्योवामरहम कुहल अज़ीजी नग्डममफेदा कलवालानजगम्म मसूरकामरहम कलकलानजठंदी उपमुसंगकामरहम लाजवर्दकेयोनेकीरीति इनकालागग्डम २६ 118 रिक्ष कानूनी hes ३ . आशय ম आशय मरहमनगार नोशदार नकहामिज ३०८ ४ दर Bol पाधिरकोटनेकोरोकनेवाली ३०औषधे। इमेगाटेमधिरकीपतलाकरनेवा औषधियोंकीकैफ़ियत - लीऔषधे। पहिलेदग्जेकीगरमऔ. ३०पनलरुधिरकोगाटाकरनेवा इसरेदरजेकीगरमबी- एली औषधी तीसरेदरजेकीगरमी- समितोंकोगीककरनेवालोगोष चौथेटग्जेकोगरमगौ- पहिलेदरजेकीउंदीभी- उसकफ़कोठीककरनेवालीऔष दसरेटरजेकीउंदीनी- ३२) नीसोटरजेकीउंदीनी- इसौदाकाठीकरनेवाली औपचैट चौथेदस्जेकीउंटीमो. गादेमवादकोपतलाकस्नेवा पहिलेदरजेकीवुश्कभीष लोगोषधे। । मुजिशें दूसरेदरनेकीखुश्कौष ३० तीसोदरजेकीखुशकभौषधोयित्नोंतीमुंजिशें चौथेदरजेकीखुशकनौषधेयकमाकीमुंजिशें पहिलेद कीतरगौषधे सौदाकीमुनिशें दूसरेदरनेकीतरऔषधे जुल्लावोंकीगो दवादेनेकीवर्णन पित्तोंके जुल्लाब वहौषधेजोकधिरकेविग काजुलाय डकोनीववारें। व का ४०पसोदाकैजुल्लाच 17 आशय पिन आशय पव मूत्रलानेवाली औषधे नीदरखोनेवालीभी. हैजबहानेवालीऔ.Xसोते बुरेर स्वादिखलानेवा वीनिकालनेवालीऔ. लीओ. उन्टीलानेवालीओ. र बुरेस्वाबंदकरनेवालीऔ. २० उल्टीलानेवालीपुष्टभो. उपचावकरनेवालीऔर रिभूखल मेजेवीपुष्टकरनेवालीगौषधिारागानेवालीभी. दिल्लकीपुष्ट औरप्रसन्नकरने दातोंऔरमसूटोंकी पुष्ट करने वालीऔ. उवालीऔ. ३२४ जिगरकीपुष्ट करनेवालीजी. ४यदानोंऔरमेंद्रोंकीहानिकारक देकीपुरकरनेवालीभी. औषधे जिगरकीहानिकररकऔर टिकीपुष्ट करनेवाली औषधे मेटेकीहानिकारक मो. वड़औषधेजोमवादको आँख मित्कीदीलाकरनेवालीनौप परनगिरने विष्टिकीडानिकारकऔ. भेजेकीहानिकारक औरपीडा विषयकीचाइनाकोपुष्ट करने उत्पन्नकरनेवालीगौष वालीऔ. पिटकीनरमकरनेवालोगोषारविषयकीचाहनाकीरखोनेवाली पेटवन्दकरनेवालीऔ. औरहानिकारकऔ. पेटबन्दकरनेवाली औ-रवीर्यउत्पन्नवाग्नेवालीगी टि२६ मुद्दाऔरवायदूरकरनेवाली विषपकरनेमें अधिकलहराने औष दिवालीभी. ४२६ कबजकरनेवाली भौ. रविययकरने में मजादेनेवाली नींदलानेवालीभीप। गौपचे ४२२
२३
आशय
पत्र
पत्रा
आशय
-
18
औ..
लिंगकीबटानेवालीऔ.४२५ सूजनकीपकानेवालीऔ. ४२५
भगकीतंगकरनेबालीऔ.-४२ सूजनकीफोड़नेवालीजी. ४
चचार्जलदीजनानेवाली बुरेमासकोगलानेवालीऔष
औषधे।
राधा
वरच
मरेनचचेकोनिकालनेवाली साफकरनेवालीऔ.
२६वीडेमारनेवालीऔ..
माशीमाकी निकालनेवाली याबकीभरनेवालीऔ.
औषधे
इरधघावकीसुरखानेवालीऔषधे| इस
मसाने औरगुरदेकी पथरीको नाकमुंहऔरदस्तोवेरुधिरको
नोडनेवाली औषधे सरोकनेवालीऔषधे।
सूजनकीपटकानेवालीऔ.ख इति
रजनकीनरमकरनेवाली
२४ m 4 भूमिका मद्यविद्यानुरागियोंकोविदितहोकि आजकलंडसवैधविधाकोन चारमर्वयवटाइभादृष्टगोचरहोवाडै तथापिआजककोईरोमीलाभदायक पुस्तक जिसमें भाद्योपातंयथाक्रमरोगोंका निदान चिकित्साआदिहीनछपीड राधारणमेरेचिनमें अमिलापाई गौरविचारनेलगाकिभवगेसीकोनसीपुस्तक यूनानी हैजिसकीउल्थाहिंदीभापामेंहोकरणचलिनहोऔरजिस्सेराबमनुष्यो कोलामहोइसवानकोमोचते स्पझ्यात निश्चैहुईकिमीज़ानुतिव्वानामग्रंथ सकोमुहम्मदंभवंबरनामीपूनानीवैद्यनेअपनेसुद्धोकेनिमितवनापाथा गौरउसकाउलथाउ भाषागेकीममुहम्मदइसन सोहिवने मुंहम्मद अबदुलरहमान की आज्ञामेकियाथाउसपुरुककोंगत्यंत लोकोपकारी सगाकरमेरीइच्छाहुइँकिइसकाउलथालिन्दीभाषामेंकराकरअपनेस्वदेशीम भाइयोंकोफ़ायद पहुंचानाचाहिये-इसडेतु अपनेपरमप्यारेमिबहकीम वारिसअली साहिवसेजोमेरेऊपरसदैबछापादृष्टिरस्वते हैं और किसीम मयंचामफैलोभीघेउनसेउलथाकीप्रार्थनाकीगई उन्होंनेभी प्रसन्नतापूर्व पाइमाश्रमकोस्वीकारकिया-पहराकहीपंथहै जिसकेपटने औरयादकरनेरोम नुष्यमच्छीमहरोगिपोसें प्रविष्टाादिपासत्ताहै-कमोकिइसपंथकोग्रंथ चानिऐसीउत्तमतासे निर्माणकिया है किप्रथमरोगकानिदान शनारतायी छेउमगेगकी चिकित्सामसकसेलगायपैरोवेरोग नकवीवर्णनकीहै-इसी कारणमबहकीमोंने प्रश्रमपढ़ने में इसीवाणाचारवाररकवा है। इसपुस्तककावल्यासन् १८७रईसवीमें मुन्शीकन्हैयालाल वैकुंम्वासीकेलघुभाताबन्शीघरनेवारिसअलीकीमहायतासेवि या गोरभपनेनिनशिलायंत्रालयमथुरामेछपवाया- टिकानापुस्तककेमिलनेकायहहै-वशीधर-बामदासकीमडी मिभन्जलअलूमनामझापाग्यानामथुरा
श्रीगणेशाय नमः
अथमीज़ानुत्तिबहिंदी
पहिलारपस्ट
गरमीसरदी तरीऔर खुशकी की पहचान
ररुहकेविषयमें
गरमीकीपहचान नसली
अधिकप्यासहोनी,जलन, बदनपरजीयासुखी,गंडकका
मच्छामालमहोना जोगस्मीरुधिरकी अधिकता से होतो सिरबागला
होगा,और अंगडाईनयाजमाई और नींदबहुत भावेगी औरसुस्ती
भौर मुंहमागहोगा,बदनभौरज़वानपरयालीहोगी,फुन्सिया और
फोड़ेवहतनिकलेंगे,महेसे खूनकाबहना, नकसीरवहना हाथ
पायगिरना भीरबदनकादखना जो गरमीपित्तसे होगी उसकीय
हचान यहहै,बदनज़यान और आखइन तीनों में जर्दी होगी मुंह
कडवा और जवानसुश्कलोगी,जवान में कांटे पड़ेंगे नाकमेंसु
फीका होना प्यासकाहोना,भूख की कमी,जी मिचलाना,रोमा
चकारवड़ा होना इतनेलक्षणसे गरमी की पहचान है।
सस्तीवीपहचान
प्यातऔरजननकानहोना पनगारंगसफेद याकाला होना जोसर
दीवलगमसे होपहचान उसकी यह है-वदनकी सफेदी और नरमी
सुरती होना बदन ठंडा होना-पवाचनहोना एवडीडकार आनीनींद वा
हुनआनी, इन्द्रिों का सिथल होना, चूंक का पतला और बेनलन
होना नाक से पतलापानीबहना नोसरदी सोदा सेहो पहचान उस्की
यह है बदन का कालाडोंना फस्दसे कालाऔर गोदारुधिर निकल
ना बदन कादुबला होना सोचमें च्या बैठा रहना कोड़ी की जगह
ग होना नौर झूठीभूव होनी ॥
तरीकीपहचान
नरम औरदीलाहोनाबदनका अधिकमूल होना नींदज्यादा होना।
जोतरीगर्मी के साथ हो उसकी पहचान अपरहोचुकी है।.
रबश्कीकी पहचान
क्दनकीसरली औरटुक्लाऔरकुरूपहोनानागपिन और सोदाके
भावही पहचान उसकी ऊपर होचुकी है।इति पहचान ।।.. !.
.
अवमाननी चाहियेसधिर कफासोदाँऔर पित्तसे भादमी का वदना
स्थिर है, जोकोईइनमें से घटबढजाताह तोरोगउत्पन्न होजाताह-राधि
गर्म भोर तरहै-पित्तगर्न और खुश्कई-कफसर्दगोरतरहै -सादासर्द
और खुश्कहै-इनहचारों रिपन्तले एकउंहा घूामगठहोताहै-उसोंग
भी नहीं रहती-ओरेनमनुष्य के बहनकी स्थिरता होतीहै-उसेवायुका
हने हैं और यह बहुधाकफ और हासे उत्पन्नहोतोहे-औरइनहताराम
जोधूओंउत्पन्न होवाई-औरबदनकी स्थिरता भौरजाननिस्से होती
उसको यह कहते हैं- इति गथमखण्ड ।।
दूसरास्वराड
खिल्त अर्यातरुधिर कफ सीना और पित।।
दवाऔररवाने के विषय में अध्यायपहिला उनदवाओंके रिपय मंजीइनचायेके बिगाइकोरवावें-जन्नाचाहियेवि रुधिर चरमकार से बिगड़ता है; एक यह कि अधिक होजाय-दूसरे पतला पड़जाय-तीसरे गादाहोजाय चौथेसड़जायावहता जोकपिरके जाल को थामें यह हैं-कासनी,काइके वीज, धनिया गन्नावके फूल नीकारस सिकन्नबीन, शर्बतरनाक शर्बतमन्दन शर्वतोवडा और जोइनकेवरा रीहोमजोरवा गादे रुधिर का अच्छा करेंवेदवायहहै- आरनुस्वारकापानी सोफावापानी,शाहनकापानी, सिकंजचीन औरशाहद,अपनेसेदूनेपानी में औटाया हुमागऔर जोहकईयसोदाको निकालेंगीवेगाटेरुधिरकोभीगच्छर करेंगी क्योविसादाके मिलने से रुचिरगादा होजाताहै-ौरमादेवला मअर्थात कफ़ाके मिलने से भी सचिर गादा होजाताहै, गम्पो कफकाजुललाव भोर स्वीहवाईगडे-किगाटे कपकोकाटे और कम मौत सदाके यतलेहोने के पीछेसून लानेदालीददाईयादे-और जवरुचि में बलगम मिलाहोगातो फस्दमें रुधिरसफेह निकलेगा-औरजोसी) दामिलाहोगातोराधिरकालाहोगा। वेउपायऔरदवाईयाँ किलोपतले सधिरको अच्छाकरें-जबधिर वल्लगमके मिलनेसेपतलाहो तो चादरजवायारेहाकेबीजहंसराज रजोदवाईयारखएकगहों और बलगमकोनिकाले-कावलीहदवनगम किनिकालनेको बहुत अच्छी है और पहचानइसबलगमनेरुधिर में मिली निकी यहींहै कितधिरवा रंगसफेदीमिला हुआहोगा:बदनका मलना औरमहनत करना,कसरत करनाकफ को फायदा देताई-जाधिरपित्तके मिलनेसे पतलाहोजायपहचान उसकी यह किस्से पोलाकारधि स्पर दिखलाईदेगा-उपयइसका निकालना पित्तका है और पोली . हजइसलियेबहुत अच्छी हेमसरकापानी,शर्बत उन्नाव और कासनी- कापानी फाडाइजाजौरजीदवाषिरकेजोशकोफ़ायदा करेंगी येही इवाइसपोभी फायदाकरेंगी-भबजानना चाहिये कि कभीगर्मी पहुंच नेमेचिल्त सड़जाताहै। और बुस्वारज़रूर होजाता है और बिनागीके कोई विल्त नहीं सड़ता-इलाजउसकामर्द और खुश्कदवासे उचित है। दवारुधिरके जोश में लिखी गई है-रुधिरके गरमहोने कोजोशीधर पाडते विनामड़ने के। बिगाड पित्तका पाँचमकारकरके है एकयहकिपतलाबलगम उस्मेंमिले-दूसरे गादाबलगमनिले तीर रथोडासा मौदा उस्में मिलजाय-चौथेपहिला और तीसरामकारदोंनों. मिलजाय पाँचवपक्षिलागौरतीमरामकारबहुतजनके उसमें मिले। चौथे औरपाचवेमकारमेंयह भेदने-किचौथेमेंगरमाकमहोती है और पांचवे में ज्यादा-नहींतीदोनों एक हैं। वेदवायेंजो पित्तको अच्छाकरतीहैं-जहागरमीअधिक होवहादंडीद वाद-याएकदिनमेंदोनीनवारदें औरजहांगरमीकमही वहांकमब्डी द-देयहहै-ईसबगोलणीदाना,कुंतेफाकासनी,रवीरेककड़ीकेबीजस् स्वाधनिया वन काइकेबीज कपूर ईसबगोलकालुआब निकालकर दि-याःकावेंकरें नहीं कूदनेसेजहर होजातदि-गौरबोदानकाभी लुआ विनिकालें रवासी मेवटी विडी कांचीदानान कुलगे और कासनीके | वाओं काशीगनिकाले औरइनो पतीकोकूटकररसनिकाललें-वासन जिपतों कोधोनानचाहिये कि उसयतअसरलातारहताहै नोकामना केप तांका पानी फाइलें और अकेलायाकुछमिगईयारवटाई मिलाकरविं जोराधिरकेसाफ़कानेमेंसकेचराबरकोईदवानहीं है कुलफेकेबीजक पीसकरबहुत छाननाकालेकोकरनेकेलिये कुछगच्हानहींहै-सी राककड़ीदेवीजजोर धनियेकाशीरा निकाललें-यापानी में भिगोकर
२
कूटके पी-औरयही भिगोयाटुआबढ़त नन्दीभसर करता है।
चन्दनपानी में घिसकरदेलाबड़ी मारीगरमी को बुझाताई और चंदन
सफेदलालसे मच्छाहोताहै-कपूरबदनकीगरमी योदूर करता है-
रजोकियह बहुतठंडा है-इसलिये सिवायजवानभादमीजीरगरम
मिजाज वाले के और कोनडे-भौरउंडे मेवे जैसेनरचूज आदिऔर सब
निवाईयाँ पिचकोअच्छी-औरस्वी औरलड़कों औरवाजों को बहुत,
उडीदवाईयामोनी चाहिये।
बनीहई दवाईयाँजोपित्तको फायदा करती
हैवेयह है
कुर्सतवाशीरमुलव्यावसातबारकाविनर कुर्सकपूर३ शर्यतचंदन
शरवतआलूबुखारा,शर्बतबनफशा शर्बतनीलोफर और सूचनाऔर
लगानाभी चंडीदवानोंका पिचके लिये अच्छाई-औरगर्मीचोबुझाताले
कफकाबिगाडभी पाँचपकारकाहै
राययह कि थोड़ासाकषिरकफमें मिल जायऔर उसके असरकारी
इल-उसकोमोमबलगमकहतेहै।दूसरे जलाहुआ पित्त थोडासा
बलगम में मिलजाय उसकोवारीकपाकाहते हैं और स्वभावयित्तके
मावरहोताहैतीसरेबलगमगरम होजायतो उसको सद्यकाको
हते है वोडासा सीवा बलगम में मिलायती करतीका कमा
कहलायगा। पांचवें कफ पतला पड़ायरसको फीकीफफफही
तेहै और सबकफाँसे अधिकडाहोता है।
दवायेंजोक्फको अच्छाकरेंवेयह हैं।
सौंफ अनीसन मुल्हेटी, जीरा दालचीनी, इलायची बालछड,सुन
का विचारमा इनकेदेने की रीतिहकीमकी रायपर है-कामेदवा
को भौचकरदेना अच्छा है। और जबबलगम सजाय तो वहुनगा
रमदवानदेनी चाहिये स्वासकररचारी बलगम में क्योंकि उत्तमैतम
बहुत होती है। और दाणसके बीजजहाँ कहीं स्गों के भीतर बलगम मड़जा, यबहुत अच्छे हैं। और कणके सड़नेमें जोदेखें तो कुछ दवायेंजो पित्त मेंबयानहुई है मिलाकर दें। बनीहुईदचाई जो कफके लियेदीजाती हैं वेयह हैं। र मभजून फिलासफा सोंठ कीमजून गाजून सौरनवारिजाली स.इनदयाओं को उस समयमैनब किकफ़सानहो और बुरबार नही औरतपोवार्सगुल-कुर्सगाफ़िस-सिकंजबीनबीभीतदिल-बचरण मशतवजूरीमौतदिन-औरगर्म-औरगुलकंददेना चाहिये। बिगाड सौदाकोभीपाँचपकार काहै। एक यह किसौदाअधिकवदनाय-दूसरेयहकिसौदाजलकर बिगड़ लाय-तीसरायइकिसधिरजलकरसौदाबननाय-चौयायइकिकफ जलकरसौदाहोजाय-याचवायकि पित्तजलकर सौदाहोजाय- जानोकिकोई दिल्तजवजलजाताहतो बिगड़ाहुभा सौदादोजा ताई और मतलबजलनेसे यहहै कित्तरी उसकी गरमी ने उड़कर गादा रहमाता है और उसकी असल नहीं रहती-और जलनेसे यहमतलब नहींहै किजलकर राखहोजाय और अगर कोई खिल्न सर्दी मे गाढ़ा ोकर नमजायतोवहसौदानकहलायेगा। वह दवाॲजासौदाको अच्छाकरतोसोयह म्होड़ेगावज़या, रखरबूजे केवीन मुल्हेदी कनोचेकेषीन इंजीर मुनक्का आदिजोगर्म भोरतरह-जोसौदागर्म रिवल्तसे पैदा होतादवा डी भोर तरदेनी चाहिये-जैसेकुलफा, चीदाना रवीरे ककड़ी केवी ज, आदि और नहीं तो गर्म और तरयावह दवा जोगरमी और सरदी में रावर और तरहो। बनी हुईदवाॲसौदाकेवास्तेयह हैं
सिकंपनिइसीसूनी, नौशदारू मानससरात याकूतीवूअली
मुहिदिलकशा शर्यतगावजया शर्बतवारंजबीया, आदि और उकि
तहै कि हरजगह गर्मी और सरदीकभी ध्यान रकवें जीतीशसड़जाय
और तप होयतोयेदवायें औसकर-कासनी के बोन कसके बीज
तीनतीन दिरम्(दिरमामाशेला होताहै)मुल्हेदी-जरश्क हर एक
दोहोदिरम् गावजवा ५ दिन कन्दया सिकंजबीन के साथ और इस
पहिलेचाहिये कि मुननिजदेकर जुल्लाबदे लिया हो तौजल्दी
गुणकौगा-सौदाची रोगों में बहुत दिनोंदयादेनी चाहिये इस लियेकि
मोवाइवाकोदेर मेंगुण करने देता है-सहेहुये सौदा की दवाईयाँऔर
उपायसप में लिरदेंगे।
.
अथवह उपायलिरवेजाते हैं जिनमें सिवाय
खिलानेपिलानेकेदवाबाहरलगाने और.
सूघने आदिसेबदन में अलरकारें।
शमूम- उसखुश्क या तरदवा कोकहते हैं जो संघीजाय।।
लखलखा- उसको कहते हैं कि पतलीखुश्बूदार दवायें सीसी
या किसी बरतन में डालकर सूबे
सऊत्त-उसदवाको कहते हैं जो नाक में डाली जाय॥
नफख- वहतरकचाहे जोनाक में डाली जावै १ ८.३४
वजूर- गातर दवा को गले में चभाना । ।
सनून- अर्थानमंजन।
कतूर- भान किसीजा कोसन के किसी सुगस्त में टपकाय।।
नितूल-मीतधारना॥
सकूब- गीतबद्धतीहुई दवा कोदूर सेरह रहका बदन परडा
.
इंकबाब-अर्यातमपाए लेना है
कुमाद-भात कोई दवागरमकरके वदनको मेकचाहै पर
दवाखुश्क होयातर॥
मुरवूर-अर्थातदवानोंकोजलाकर धूनी उसकी पहुँचाना।
आबजन-अर्यावदाओं को जीरादरवीमारको उम्में बिठाना।
पाशाया- अर्थातगरमपानी मेंयाभौटी लईदवावीमारकेपाव
रक्वें-भूसीगुलर मनफशाले फूलाबाको फूल बेदकेपत्ते और
वरीके पतेनीटावै-यह उपायसिरोरर्द औरखुरवारकेलिये बहुतभी
च्छाहै पाशोयेके समयबीमारकोनकियालगादे और सिर पैक
कारहै औरसुरनके आगेपरदाडालदे किभापमिरकोनपहुँचेइम्से
खपावान होजाता है।
ने
तमरीख-भर्थात् तरचचाको बदनपर मलना।
तदहीन-अर्थात्वदनपरकोईतेल मलना ॥
बखूद- अर्थात् छंडीदवायें मिलाकर आँख में लगामें।
भर्यातकदवायेंपीसकर छिलकना ।।
हिमाद- अर्थात् गाढीऔरतरदवाको बदनपर लगावें।
अर्थात् तर और पतलीदवाकोवदनपरलगावें।
अहम- अर्थात् अंजन।
हमला- अर्थात् किसी पतलीदवाको पारवानेयामूषकीगई
सभीतर पहुँचावें॥
शाफा- अर्थात् ददाकीवत्तीवनाकर वदनके किसीमास्त्र मेंरकव
पातीला-अर्थातकपड़े में वालगाकर और वत्तीचनाकर वदन
किसीसराय में रक्वें॥
हमूल-अर्यात कपड़ायामें भिगोकरके किसीजगह स्कवें।
मिरजजा-अर्यातकपड़े मेंदवालगाकरगद्दीकीतरहीरनगे।
-
सावकरने की जगह रखें।
रन.
शसूम-गरमवीमारियों कीफायदाकरताई-सफेदचन्दन घिसकर सि
रकाओरधनिये केपत्तोंकारस-औरगुल्लाव मिलाकर संपें और जोनरव
लस्वाक्नालेतावद्धतअच्छा है औरजोनीदनआतीहोतो सिर कान मि
लावें औरजोगरमी वहुतहोयतो वापूरभी मिला औरवीरेको काटा
करऔर उंडे मेवे औरफूलों का घना फयदाकरताहै और जिस्कोहरे
धनिये की सुगंधाच्छी नलगेतीतरबूज कारसयामुनेहुरे घीया-
भतिलौकी कारस मिला।
शमूम-ठंडी बीमारियों कार्फयदाकरता-मुश्क-भवर-दालचीनी
जुन्दवेदस्तर-लोग-केसर-सलोज़ी-थोडीरलें। नई
सऊत्त सिरकी गर्मभोरखुश्कीमारियों को फंपदाकरताहै काइका
रस-नीलोफरकातेल-एकरहिस्सालडकीकीमाकाडूधसे हिस्से-वा
हामकातेलयाककातेल मिलाकर नाक में डालें और जो नींदकम
आती होतो वशरवाका तेल भी उस्में मिलालें।
सजत्त-सिरफेरंडेऔरतरगंगोंकामायदाकरताहै-गलुआमुमकी
कुंदर-माजू-जुवेदस्तर केसर-दोनामरुचाके पानी में पीसलें।
नरख-मूर्छवाले कोलोशमला- भोरे सिरकेसद्दोंको खालें और
नककिकनी-कुटकी कूट छानकरयोहीरनाक
बज़ुर-लड़कोंके पसलीचलनेकेरोगों को फायदा करता है -सातर
जुदवेदस्तर-जीराकिरमानीसवयोवरावरलेकर धमें घोलकर
लड़के के मुखमेंटपकावें।
बजुर-मिरगीचालेकोहोशमेलावे-होंग-जुन्दवेदस्त सिकन
वीन गाड में घोलकर मुवमेंटपकावें।
मजन-दोनों को मजबूत करता है- सुरंजान-लॉग-मोथा-मा)
ईपोलीहड़कावक्शन-मफेदचंदन गुलाब के फूल-सरकादर
31
है
कावें॥ १७ बरलेकरमंजनबनावे-जागरनी होतोलोगनडालें। कवर-वान केदर्दकोजोगसिहोफायदाकरे-गोगनगुलईदिरमो गनवादामदिरअंगरकासिरका दिम मिलाकर मंदाचपरप- कावेजव सिरकाजलजाय औरतेल रहजायतो गुनगुनाकानमेंटपdकावें औरजोदर्दवानहोतोथोडी भफीमभी मिलावें॥2 क़तूर-सोजाकको फयदा करें-कासगीसफेदा-कुन्दर-इंज रुत-घेवूलकागोंद-निशास्ता-दम्मुलअरवचन बराबर लेकर कूर्व छान्कर लड़की कीमाकेदूध घेलकर पैसाव के सूराख में टप- हा२ नतूल-नीदलावें औरगर्मसरसामको फायदादेतीहै-वनफशेकेफू ल-काहूके वीज५पाँचदिरम-पोस्तेदाने समेत-गुर्लब के फूल-नी लोफर के फूल-हरे धीयाँके छिल्के-वाचूने के फूल दसरहिरम जी किलेहर एहिरम- इन सबकोऽसेर पानी में पका कर तरे २ हार नितूल-सिरकी डंडी वीमास्यों को फायदा देती है, इकलीलुल्म ल्क-नम्मान-मरजोम-विरक्षाफ़-सातर- वरकुलगार-संव को वरावर लेकर पानी में ओटाकार तरेडा और चद्दर उदा कर भपारा॥ सिरकीगर्म बीमारियों में तरेंडानदेजवनककि जुल्लावनदियादा नितूल-वाईकोपचावे-चावूनेके फूल-इकलीनुल्मलक-कर पॉसके चील गौरफ्ते राजीयाना किरमानी लीग-मरजन जोश-सा त्या-सातर-वरावर लेकर पानी में गोटावें और तरंडादें। से कमाद फैंसीहुई गडकोपचा--जग-नमकपोटली में बाध कर मदीनाचपर गरम करके सेकें-रेड्या गेहं की भूसीयागर्मट से कपड़े में लपेटकेंसेकनामी फायदा करता है। डा.॥
११
कमाद-बदनको नरम करेजौरदर्द को आरामदेवनफशेके पान,
बाबूने के फूल-मोयेकेबीज-पानी में औटाके ईस्पंजअर्थात् मराहु
आबादल उस्में भिगोकालेको
된
वखूर-अर्थान धूनी सिरऔरयादकोताकृतदे-और वफ़कान और
मू औरसुस्तीकोदरकरे-अगरकी-मीठाकूट-सफेदचंदन एक
॥दिरम-कपूर-मुश्क-आधेरदिरम-सवकोकूटछानकरगुलाबमेंस
नकरगोलियौवनाकर सुरवा रक्वें और आगपरजलाकरघूनीदें।।
धूनी-जोपसीनालावेऔरयित्त और कफ़केचुरवार को दूर करें-प
हिले मुजिशनाचाहिये-सोंफ की जड़की छाल-सोफअंगीठी में जज्जा
और चद्दर ओढ़करघूनीले इस्से बहुत पसीना आवेगा।
आवजन-बदनकी खुश्कीको भौरतपेदिकका फायदाकरवाई।
धीगा-ककडी-कुल्फा-काइ-ताखूज-नीलोफरके फूल-चनकशे
केफूल-छिले हुऐनी-इनसयको औटाकर सेसेवरतन में डालें.
जिस्में बीमारगले नकवैठजाय-औरण्कवडीभर उस्में बैठालकर
निकालें-और रोगनवनाशा-और रोगनकडूमने और पाशीया
जो ऊपरलिरवागयाहै करें-औरहायोंकोभीचोवं-पिंडलियों को
वाचना-औरतलुओं और हथेलिगको मलनाभी बहुत फायदाक
रता है-जब पिंडलिया वाघेतोगन से अर्थात् धुरनों से बाँध ॥
ने का प्रारम्भ करें और जवखोलेंतीटरवनों की ओर से रवाले इस
जोमवाद सिरसे उतराहोगा वहफिरंसिरको नचदेगा।
दूसरा अध्यायर फस्द
कोबिषयमें
जानना चाहियेकिफ़दूसेसवप्रकार के मकद निकलते है-अयो/
नगोमेरुधिरभराडोता है-उस्मेंपित्सौदा कभी मिला होताहेइस
१२
.
लियेफस्दकाने मे जोरगों में होगा वही निकलेगा-औरमकारके जु
ल्लावों में यहचाने नहीं होतीहैं फस्दको कई बातों के निमित्तभच्छा
लिस्वाहै-राकवाततो ऊपर लिखी गईहै-और दूसरी यह कि फस्दा
में मवादका निकालनाअपनेवसमेंहै-और जुल्लावपीने के पीछे,
वहमवादकि जिस्को निकालनाचाहते हैं ननिकले ती दस्तोंके.
बंद करने में हानि होगी-तीसरेयह कि फस्द में मुजिशपीने की -
आवश्यकतानहीं हैं।
जाननाचाहियकिवारहबरसकी अवस्थासे पहिलेफस्हरवा
लनानचाहिये और फिर जबतकचाहें तबतकफस्दरवोलें-भौर
मरीहुईसींगी साठ वरसकी अवस्थाके पीछे लगानीनचाहियेक
भीरोसा होता है कि फस्हरवोलकेरुधिर कमलियागया औरफास्द
चंदकरदीतो नपड़ोजातीहै-रोसेसमयमें फिरजल्दी से फस्दर।
लिना उचित है॥
जवकिसी नेज़हर रवायाहोयाकिसीज़हर वाले जानवरने काटाहो
तो फ़द नहींरवालनाचाहिये।
जीराएकविच्छ है नोधरती परदुमघसीटताहुभाचनता है उस
किडंकमारने सेरोमेरसेसधिरवहनलगताहे-उसकें काटने में
फ़स्द रखोलना उचित है।
तांजन-गक ज़हरीली सूजन है जोकिववाके समयमें होती
उस्में जलन बहुत होती है रंगउस्कालाल-पीनाहिंयाँ हरयाली
याकालकालियेहरे होता है-उस्में भीफस्दनरवालना चाहिये।
औरजोरुधिर अधिकहो औरज़हरने दिन भार जिगरभसर दिन
वाहोतो फस्ट रवालना उचितहे जिस्को फस्द खोलनेसे मूळ
आजाती हो-उस्को फरदेसे पहिलेनीवकाशर्वत-यावहे अनार
वाशरवत आदिगुलाव में घोलकर पिलादेना उचितहे-औरफस्द
केपीछेजबथोड़ासाखून निकल जायनो अंगूठे सेदवादे-इसीमका
रहोतीनवार ठहर र केरुधिर निकालें तोमूळनआवैगी और
मोदरकरनेकाअच्छा उपाययह है कि कैमर्थात उलटी कर
चा-दवाउल मिस्को को पानी में घोलकर मुखमें टपका-जि
सदिनफस्द खोनें उसदिन भारीभोजननटें पानरिवलाना-हरी
गपिलानाऔरठंडाई पिलांना फस्त में अच्छानहीं है जागरमीकी
अधिकता होतो ठंडाई पिलाना उचित है इसमें ची मित्तजो किसी
(धिरके निकलने से जोशमेंयाहोगा वहहरजायगा और
जोसरदीहोतोगरमदवानी उचित है।
अक्वेरगेजिनकी फस्द्रग्वोत्लीजातीहैलिखीजाती हैं
कीफाल अथवासगरू-यहरगहायकेजोड़पर पहोंचेके
अपरअंगूठेकेसाम्हने हैं-इसकी फस्द सिर और मुख के
पोगों को फायदा करती है ।
अकहल अथवाइस अंदाम-यहरगतर्जनी अंगुलीकी
सीधपर कीफालके नीचे है-फस्द इस्कीमारे बदन कैरोगे।
को फ़ापदाकरती है।।२।। 2 १६.
वासनीक-यहरगबीच की उंगली के साम्हने अकडल
कीतरफहै -फस्हेंइस्कीउनरोगों को फायदादेतीहै जो बहना
मेंगरदन से नीचे उपस्थित हो गइस रगके नीचे एक रग
और जिनका इलना तथा हकना मालूमझेनाहै रोसा
नहोकि इसरगमें नश्तर गइरालगजाय॥
हलुग्जिरा-यहरंग किसी के हाथमें वासलीक से और
किसी के हाथमें अशाहलसे मिलीहोती- अंगूठे को साम):
ने कलाई केअपर फस्द रशेलना उचित है-इसकीफ़स्त
काफायदा और की मालकाचगवर है-और कभीरयात
१४ पनि नीकैवराचाभीहोजाताहै। इवती-ढुंगलियाअर्थात् कनिष्टकाउंगलीकीसीधपरको हनीकेबरावरह-स्दइसकीभीतर कीवीमारियोंकी और नी चेके वदनके रोगों को फायदा देता है।५॥ असैलग-इवती से मिलीहुईहै-इस्कीफ़स्ट्राईमरखो लते हैं औरहायकोगरम पानी में रखते हैं-यइफस्ददाहिने डायसे जिगर के रोगों को औरवायेहाङ्सेविल्ली के रोगों को फायदादेती है और फेंफड़े केरोगीकोदोनों औरसेफ़ायदा देती। इसरगसधिर दिल गौर जिगर कानिकलताहै इसवास्तेखून शेडासाही नाचाहिये॥६॥ ०० साफ़न-इसरगकी फस्टरवनेके ऊपरपावके अंगूठे केस मने रदोलते हैं-जोकोई स्त्रीकपडासेनहोतीहोउस्केस्सेलने केलिये और चीन ओरखुजली के लिये फायदादेती है और मवादकोतिरसेनिकालती है॥७॥ माविज़-वहरगहै निस्की फाइघुटने केनीचेरवालोजातीहैया माफनसे अधिकफायदादेतीह-पीठ और पारवाने और पेशावकी जगड़केरोगोंको भौरभीतर के दर्द को फायदा देती है। हरकन्निसा-पटरगगिरहँदार पिंडली पर है-पावकेका सन दिखाई देतीहै और जोयहानमिले तोयाव की छिंगाल याऔर चौथी उंगलीकेवीचमै रयोलें-इसीरगक दर्द के वारद इसकी फस्दफायदादेती है। १९०चाररग-वैचाररंगे हैं जोदो ऊपर के होटने और दोनीचे होठमैहै-फस्द इनकी गोल नश्तर से होउके भीतररवालीन ती है-यह मुखऔर मरहों के रोग को फायदादेती है। जवनस्तरशिौरेयान कोलगनावेतोउस्की पहिचान यहहै किाधिर साफ और उचलकर निकले-औरदिनतुरंतहीसुस्त होताबाय-जबरो साहोतोजल्दी सेखायर असुली रस्वदें और चियीलगाकर और गद्दी रखकर वाघदें-औरहाथराना उंचेतकिये पर ररवदे और हिलनेनहें दसदिनतकर्वधरवें-ग्यारवें दिनहोने से स्वालकरफिरवाइसी (मकारसेजबतकपावनपुरमावेकियाको चिप्पी कीदवायें यह द अम्मल अस्ववैन-इंज़रूरत-फिटकरी-किल्कितार-अकीकिया-जलमार, लुआकुन्दर-एकरदिरम-बचूलकागौरदोदिरम-सबकीकूटान कर अंडेकीसऊदी में मिलाकर-स्वरगोशकेरुयेयामकड़ी के जालेमें सानकर सलाईसेघावमेंमरखें और दूसरीतरफकेहाय और पैरों को बर्धरकवें-इससे रुधिरहट भावैगा-।। तीसरा अध्यायू३ सीगीऔरजोंकके विषय में मरीसींगीऔरजोकलडकोंके फस्दकीजगहलगातेहैं-दोवरसकी भवस्थासेकमनचाहिये-और चौच:या पत्रहवीनारीखमुसलमा नीमहीनेकी कोसींगीनलगानीचाहिये-पांनुसोल्हवींयात्तत्रवीतारी खमुसलमानीमहीनेकी कोसीगीलगानीचाहिये स्नान करने के पीछे मीगीलगानाथुराहै-निसमनुष्यकारुधिरगाहो उस्केस्नानसेस्क : घडीपीछेमींगीलगाना चाहिये-औरजब किसीजगहमवाद बहुतइक डाहोतोपहिले फस्दखोलकर सींगीलगानाचाहिये-सींगी के पीछे पछनेलगानासरारुफरदकीतुल्यहै-ज़रानीचेकोलगाना चाहिये || और गरदन के मौहोंपर पछनेलगाना अकहल्की फ़न्दले समाचार और दोनों मेडिअर्थात् मुडोके वीचमें लगानावासलीककाकामदेता है-परंतुपेटको और खफकानको वुराहै चाहियेकिअपरचदावार छनेलगावें और पिडलीपरपझ्नेलगानासाफ़नकी फ़स्ट्रकाकामद नाहै और खली सींगीचुस्वार अर्थात् तप और मवादको निकालने में काम
आतीहै-जोमनुष्यपछनेको नसइसके उस्केजीकलगानीउचित हैं।
चौथाअध्याय
मुन्जिसके विषय में।
मुन्निससेकच्चामवादपकजाताहै- औरमवार के पकनेसेयहमये।
जनहै-किगादामवादपतलाहोजाय औरजोपतलाहोतोगाचाहोजा
-जानना चाहिये किमधिर में मुंन्जिसनर्देना चाहिये-औरजबधि
रिमें और मवादमिलेहोतोमुलस फ़ायदाकौगा।
औषधेजोपित्तदोपकातीगहहैं । उन्नावदाने-बनफशेकेफ
ल-नीलोफरके फूल-स्सातरा-गुलाब के फूल-हरण्कदोर दिरम्-का
सनीकेबीजरदिरम्-पानीया अरक में चार यहरयाआठपहर भिगो)
व-और रवाली या सिकंजनीन यातुरंनबीनया कोई और शर्बतमि
लाकर पीवें-जुसौदा इनक्षीदवाओंको गोदानेसे बननाताई-दवा
भोगने से उस्में गरमीआजानी है जिसरोगीकोगरमीअधिक हो सके
दवासोटाकरलदें-भिगोकरवाशीरा निकालकर या अकेले उराडे
बीन जोतोलदवाओंकीपरलिरवीगई हैवेजवान मनुष्य
चारते हैं-जोबच्चा होनादवाओंको कमकरदें-पिचतीन दिनमें
पकता है जो उस्में किसी और दूसरे मवादका मिलावनहीं नहीं तो
पाँचयाअधिकदिनों में पकैगा॥x Britini
मुग्जिगबलगमका-मुनक्कादाने-सोफकुटीहईदौदिरम-पासाप
कीजगह अनीसनहोतो अधिकफायदाकरें-मुल्हेटी छिलीहुईगोरक
वलीहुई तीनदिसम्भवकाईकुवली२दिरम-हंसराज दिरम-पीले)
दिनीरपदाने-गुनावके फूलई दिरम्- इनसबकोओटावे और
दिरम्शहटकालकुंदडाल करछानकेपिलावें-औरनारतालेसिक
जिवीनडाने तो अच्छाहोगा-जोरोगी कारवासी होतोसिकंजवीननमि
लावें नारीवलगममें पिन और कफदोनों को मिलाके मुग्निसदें।
और यहवात सबमिलेहुसे मवादों में यादरखनी चाहिये-चनेकापानी मेटाहुभा कफ और सौदा के पकानेको बहुत अच्छा-परंतु तपो नदें। नाचाहिये-और जो तप पुरानीहोयत्तौ फायदा करैगा-जो कफगामाया पतला नहीं वहनौदिन में पकेगा और जोगादाया पतला होतो पाँच (दिनमें-या नौसे अधिक दिनों में यकेमा। मुंजिससौदा का-व्हिसोडे २० दाने-उन्नाव १ दाने गाउज़वा-वा दरंजवोया-उस्तखुडूस-हंसराज-सौंफ-स्यातरा-दोदोदिरम्- टाकरकंदयातुरंज चीन-यागुलकंद मिलाकरदें-येदवायें अकेले सोदाकी है। जोसौदा किसी औरमवाद के जलने से पैदा हो-तो उसी मवाद के पकाने वाली दवाईयाथोड़ी थोडीसिलाकर दें-अकेला सौदा १५दिन मेंया स्कदोदिन कमबद में पकताहै-और मतलब पकने से यहीच हहैं-किमबाद जुल्लाबके जार मेनिकल जाय-इससे जाना गया किमुन्निसका असेर मवाद में होले होले होताहै-ऐसे रोगों में कि मादा उनका गादाहोबारबार मुंजिसदेकर जुल्लावदिया जाताहै। औरजबतक जिसका असरमच्छीमाति मालूम नही-तोदूसरा। जुल्लाबनदिया जावै-कभी ऐसा होता है कि विनामुंनिस के मेवा दिपकलाता है- और रोगचौर खानेदवाके जातारहता है-इस में जाना गया कि उपायसे रोगीके दिलको मदद होती है। पाँचवा अध्याय ad जुल्लाबऔरमुलय्यन के विषयों जुन्लाब उसे कहते हैं जोमनाद कोरसों और चूर दूर में चला वि मुलय्यन वह है कि केवलयट और आंतोसेमवाद कोनिवाले-जु- ल्लापके देने में मुजिस पहिले देनाजर है-मुलण्यन में उसकी जरू स्तनहीं-और जो मुरुम्पन से पहिले मुंजिसदेलें तो अच्छा है। मुलैयन मुबारिक भीतर और बाहर की बहुत सी बीमारियों को का यदा करता है-गर्भवती स्त्री और बच्चों और चटों कोभी पिलासकते हैं सिवाय तपोके और भीतर की सूजन को फायदा करता है और सब प्रकार के मवाद को अच्छा है-अमलतास लेकर गुलावया गरमपानी में मलकर छान लें और जो गरमीबहुत होयतौकासनी कारस या ठण्डे चीजों का शीरा उसमें मिलावें- और नो पेट के अन्दर सूजन- होतो हरीमकोय कारस उसमें मिलावें-और वायगोले के वास्ते सौ) फकाशीरा और गुलकंद मिलावें-और जो अमलतास की बूदूर- किया चाहें तो सौंफ और गुलाब का मिलाना अच्छु है-जाचाहैं कि उसमें जार अधिक होजाय-तौशीर विश्त असील और तुरंज वीन गिलादें-उन्नाव- लिहसोडे-बनफशेके फूल-भुनक्का- | गाउजवा आदि को औदाकर अमलतास को उसमें घोलती बहुत अच्छा है॥ १२.972.REE . जानना चाहिये कि जिस मनुष्य की अंतड़ियाँ कमजोर हो-और उसे मरोडा होसत्ता हो-तो अमलतामधे मिलाने रोगन बादाम के नदे-चौरस्साहीगर्भवतस्त्रीयों और चूटों कोभी-दूध पीते बच्चों को रोगन बादास मिलाने की जरूरत नहीं- उनकी अंतड़िया दूध पीनेले सेसी नर्म होलाती हैं कि अमलतास उनमें चिपेट नहीं- सक्ता और अच्छे तरुण भादमी को सोलह दिरम अमलतासदे ने हैं- और स्कदिरम सादे तीन मापे का होता है-इससे अधिक -- नुकसान करेगा। अब जुल्लायका वरणन होता है-जोबड़ी जरूरजके समय r जुरुलाब देना पड़तो उसके पहिले मुजिसनहींदी जाती-जैसे कूलन के दर्द में रात और बदल्ली और मेह और बहुत हवाका विचार नहीं करते-जिस जुल्लाबकी दवा ओटा करदी जायंया भिगोकर- उसके जफर गरम पानी नदेना चाहिये इससे उसका असर ज़ातारहता है और जोजुल्लाव पेटमें मरोडा करे तो उसके अपर थोडासा गरमर पानी पिलादेते हैं और जादवा जुल्लाबचीगोलियाँ या फंकी होती- गरम पानी पिलाने से उसे मदद मिलती है और जो जुल्लाचं में प्यार लगे तोउण्डा पानी नपीना चाहिये- ताज़ापानी थोडामापीलें-परंतु गर्म मिज़ाज वाले कोठंडे यानी काडर नहीं है और कुछ दवाइयो सेसी हैं कि जिनपरउंडापानी पीया जाता है-गर्म पानी के देने से उनका असर जातारहता है-जैसेशरचत बर्द- और दवा जुल्लाब की जिन से-जमाल गोटा यातुरबुद और नमक मिलाहो ॥ निस मनुष्य को दवा अच्छीन लगती हो उसकी दोनों बाह कस कर बाँध दें- और नाकमकड़ करदया पिलावें और कुल्ली करदें- और दवा पिलाने के पी-पोदीनी चवानाऔरसूंघना या पाना और इलायची खानागच्छाहै-॥ और जोडरहोकि इसपर भी कय होनायगी-नौ पहिले कै कर के जुलाब पिलाना चाहिये और जुल्लाब के बाद मोनानचा हिये-और आबदस्त उस पानी से लेवै-जिसमेंरेशा खतमी-औटी हुई हो और पानी गुन गुनारहे- जो जुल्लार अपना असर न करें-तो उसी दिन दूसरा जुल्लाब नरें-और शाफा करें-आलूबुखारेकारसयाइमली गुलकंद और रंजवीन मिलाकर जुल्लाव पर पिलावे-और अमलतासभीनेते हैं- इसी प्रकार मस्तगी को कूट छानकर-डेदिरम-चूगया मिश्री मि। लाकर गरम पानी में फंकानाबहुत मदद देता है- और जो जुल्लाया .
२० से मूळ आजायतो जल्दी से कै कगर्दै-और जोइस्से भी फायदा नहो और कोई हानिनदेखें तो फस्दवासलीफ़ और अकड़ल की वार लें-और जोपेट और अंतडिपीमें गरमी लगे तो बीदाने और ईसबगो ल कालुआब पिलावे-मौर जिस मनुष्य का सिज़ाज़-मौत दिल हो उसे तुखमरहाशरबतमें गुलाब के साथदें-और एक घड़ी पीछे। निर्म भोजन करावे-जानना चाहिये कि खराबजुल्लाब और फस्र सेबड़ी हानि होती है चाहियेकि वीमार का ज़ोरदेखकर दूसरा "जुल्लाब-जिरोजी मवाद निकालना होनिकल आवे-और जो बीमार कमजोर हो उसे घोड़ा थोड़ा जुल्लाक दो दो तीनतीनदि पीछे दें-जुल्लाब से जो बहुत दस्त गावे और उनको बन्द करन चाहैं-और बुखार भी नहीं तो चावल छाछमें मिलाकरदें-औरजो बुखार होतो तुरवगरेहाभुना हुआभुने हुसे कुलफे और वार तंग के स्म के साथ पिलायें- और वह उपाय जो दस्तों के विषय में लिर जायगा करें-17 पित्त के जुल्लांब कीदवाक्येहैं पीलीहड़-इमली-तुरंजबीन-बनफ के फूल-इपासन्तीन सकभूनियाभुनी हुई इशकपेचा-आलघुरखारा-स्यातरेके पत्ते-सलुओ-गुलाब के फूल-शीररिवात-इन में से कुछदवाई से जारदार हैं और कुछ कमजोर चाहे अकेलीरदेयामिलाकर- और सक भूनिया वेभुने नदें-11 मनियाके भूनने कीरीति यह है किया विही कापेटरवाली करके मैंगरतगी केसाथ सकसूनिया रकवें और उसको बन्द करके किनारों पर भाटा लगदें जिसमें दरार बदोनापऔर मिट्टी के बरतन में सवारचूल्हे यामा मेव जवानगप निकालकर नामला।
२१
जुल्लाबवारलेनिकालनेपित्तके
पीसीहडका वाल दिम कालेजलूपयाने-लिहसोडे२० दाने-
सनामक्की-स्थातरातीन तीन दिरम-उन्नावदाने-कासनी केली
जरदिरम्- कुसूसके बीजडेटदिरन-शोर विश्व यातुरंज बीन र दि
ममेदिरमतक भिगोकरयाओयकर पिलायें-औरजोदस्तः |
उससे अच्छेन आवे तो अमलतासभी मिलादें- और जव जमतर
मामिलाया होनोरोगन चनफशा यारोगन बार्दमस्क दिम मिला
नाचाहिये और कमती बदतीदवाकी हकीम कीबुद्धपर है-11
जुल्लाबली कोई दवासी नहीं जोरकही मवाद को निकाले
जोजुल्लाब।
जिसमवाद को बहुधा निकालता है-उसी मवाद के नामसे मच
हर है-तपमें एक पखवाड़े से पहिले पीटीई नदेनी चाहिये-तुस्ने
इसेहाल कविदी होजाता है और जो जरूरत होतो रोगल बादाम में
उसे चिकनाले-और बीदाने और ईसबगोल के लुाव में मिलाकर
पिलवितोहानि नकरै।
कफकेजुल्लाबकीदवायें
22
जाम के फल पा किलका-कंतूथुन- साही हर्जुन-गां
रोकून-इन्युलनील-तुर्बुद-इमल: कडविम फार कालांजी
शुकाई-॥
गर
जुल्लाबकफका मधी
अयास्तिकातुर्बुदसफेद-हल्युल नीलस्मारदिरन-गात।।
इसँहालकवी कलेकेदस्त भानेको कहते है।
२२ गटारस कून- अनीसूनडेट रदिम नमक-और क्कापन के छिलकेडेट दिग-धनसबदवाओं को कटे-और सॉफके अर्क में माने यह एक पूरीखुराकजवान आदमी की है-गारीकूनको कूटना नचाहिये- इस्ले एक चीज़ नाखूनसी होती है-वहकूटे से जहर होजातीहै इस वास्ते उसेवालोंकी चलनी में छान लेना चाहिये कि महीन महीन उसका निकल आवे॥ १ दूसराजुल्लाबबलगमका इसजुल्लाबको तपमेंमी देसकते हैं और पुरानी खासी कोमी फायदा देता है- उन्नाव-ल्हिसोडे-बीमदाने सूरवाहरा जूफा-नी लोफर- और वनशे के फूल-हंसराज-राज़ियानाकुचला हुआ- तीन तीन दिरम्-मुनक्के २५दाने-इंजीर दाने-मुलहटी छिली || हुई और कुचलीहुई दिरम- तीनरतल पानी में ओटावेजवरको (रतल रहजाय तव छान लें- और अमलतास-नुरंजचीन-गुलकं द-दस दिरम मिलाकर मलें फिर छानकर फिर एक दिमरोग निबादाम डालकर पीवें। फंकीवलगमकेजुल्लाबकी तीनदिरमतुबुर्द सफेदको-रोगनर्बदाम में चिकनाकर कूट अगले-और मोठएक दिरम-सफेद नमक आधा दिरम-पीमा कर इसमें मिलाकर ठंडे पानी केसाथ फाके और जो नमक कीर) ६ जगह सफ़ेद बूरा सबदवाईयों के बराबर मिलालें तो अच्छा है- और मस्तंगी भी मिलालें तो अच्छा होगा। दवायेंजोसौदाकोनिकालतीहैयेहैं
ओ.
कावली हड - कालीइड-सनामक्की-वालंगूअर्थात वादन
वोया-इफ्तीमून- उस्तरवुड्स- लानादधुलाहुभारमहर्जरभर
मनी-ऑवला-11
जुल्लायसौदाका
अयारिज़ फीका पाँचदिरम्-इसी सूनदस दिरम्- लाजुबर
दधुलाहुआमातदिरम- हजर अरमनी नौ दिरम्-सके मूनियार
सुनी हुई-चकायन का बक्कल-कालीखर चक दोदो दिरम्-
सम्वुलुंततीव- अनीसून एकसक दिरम-मब को कूट छानकर
करसके पानी में मान कर गोलियां बनारकाचे दाई दिम जर
में से खावें ॥
सौदाकादूसराजुल्लाब
सौदाकी बीमारीयों को फायदादेताहै- कालीहरदोतो
लेपमाशे-विस फायजाअर्थातखंघाली रामाश-इफ
तीसून अर्थात आकाशबेलारतोले ॥माशे-सनायमचीरतो
लेवरती- उस्त खुड्सअर्थात् रुद्राक्षर र तोले रत्ती-गुलाबके
फूलश्तोलारमाशे-गाउजुवा २०॥ माशे-चालंए १०॥ माये-
अनीसून भात वादियानरूमी मागे-सौंफ माशे-काली
१० लानवरद के धोने की यही है कि लाज नरदको महीनपीसकरमानी
में श्रेयवें और थोडासातून का तेलडालफिर निनोरेंइसकेपीछे बहुतसापानी
डालकरोलेरघोलें और रंगीन पानीदूसरेबरतन निकाल कर उसवरतन
को दककर थोडोदेररहने देंजोर्लजवरद निलकर परजावें उसे निकाल
कर सुसालें इसी प्रकार सवधालें-१)
.
5 २८
कुटकी न होग-सफेद तुर्बुद आमाशे-सोउ।माशे-इनसबको
औटा औरछनी हुई-गौरीकुन-हजर अरगनी-मिलहनिफती
अर्थात् नमक निफेती दोदोदोग कुचलकर पकने में मिलादें-
और छानकर पीयें जोअधिक पुष्ट करना चाहेती-बकायन के
बक्कल-और एलुभा-सकोतरी-और बदा॥
जिसदवा में आकाशबेल डालें- चाहियेकि दवाओं के औट
नेमें उस्को पोटली में बांधकर डालें और जल्दी से उतारय छान
कर पिलाद - पोर3341
हुकना और शाफी भी मवाद के निकालने के लिये अच्छा
हि-परंतुहमारे देशों में हुकने का रिवाजकम है और जो बह वैद्यक
यो रीति से नहीं तो हानि करता है इसलिये इसका वर्णन यहा नहीं
कीया जाता- और शाफाहुकने की जगह किया जाना है-उसकाव
र्णन यह है कि जब जुल्लाबदिरा जाय और अपना असर नकरे-
तो शाफा करना उचित है और कूलजमें जब नकशाफे से मुवाद को
ननिकाल सकें जुल्लाब नपिलावें और सेसाही वड़े कल में नवा
तक आवश्यकर्ता नहो तब तकशाफा नकरें क्योंकि शाफा बहुत
करनेसे बवासीर उत्पन्न होती है इस जगह बहुधाशाफ़े अच्छे
अच्छे लिखे जाते हैं-
९शाफा- जो कूलंज की बीमारी को अच्छा करता है-औरट
मलाता है इसे तपमें भी देसक्ते हैं- वनफशाके फूल
७ माशे-सनाय ७॥ माशे-हिन्दुस्तानी नमक (अर्थान
स्वारी नॉन) आमाशे अमलतास कालुआव ३५माथे-
लालशक्कर३५ माशे-लेकर शाफा वनाचे और चा
हिये कि लम्बाई शाफ़ की ६ अँगुल रोगीकी हों-17
घा खुलके दल नही उस कन्न कहते है।
.
- । . २शाफा- जो जुलावे के बादं दिया जाता है जबकि उनके : अमरमें देर होजाय--और गर्म मिजाज चाले को अच्छा स है-तुरंज चीन १७॥ माशे-साबन इराकी छ माशे-ख तमी माशे-सांभर नमक७ माशे-लाले शक्कर मागे इन औषधों को क्रूट छान कर शाफा चनाले-11- रशाफ़ा- जो तुरंत असर करें- एक दुर्केडा मावन का छुहा रेकी गुठली की बराबर लेकर पारवाने की जगहमेर- करें- और जो गुल रोगन से चिकना करलें. तो अच्छा होगा-11 शाफा- लड़के और बूढों को फायदा करता है-भीमामा शे-नमकपामाशे-चूरह अरमनीयामाशे-इनँदो। को नौ को मोम में मिलाकर शाफा बनावें और गुलरोगन में चिकना करके काम में लावें- छठाअध्याय कैलानेवाली ओषधियों के विषयों पहिले उन उपायों का वर्णन किया जाता है जो अनजर टो) से पहिले अवश्य हैं जान लो जैव कैका काम पड़े तो उससे रोक दिन पहिले नर्म नर्म भोजन करें और जो गरमी या और कोई बात नहोतो सुगंधि चाला नेल मलें और जिस दिन के करें तो पहिले संगकी दालयाचावल पतली करके पीवें और थोड़ी देर पीछे के लाने वाली दवा पीकर के करें और जिसके मिजाज में तरीहा. उस को पहिले दारू चावल पिलानानचाहिये और जिसका . A कठिन तासे कै आती हो उसे तीनतीन दिन गर्म जंगहमें रकवें। और बदन पर तेल की मालिश करें और भौति र के भोजन करावे इसके उपरांत उलटी करें और उलटी करने के समय सीधा वैठौं रिपेट तथा कमर को दावले बहुधा मनुष्य रबड़े होकर कै करते है। और सेसी के पेटकी जड़से मवाद निकाल लाती है और चाहियेदि के दोबार थोड़ीर देर के पीछे कीजाप इससे बिलकुल पेटनिर्मल होजायगा और कैके पीछे गरमी में गर्म मिज़ाज वाले को ठंडे पानी से मुंह हाथ धोना चाहिये और गर्म पानी में सिकंज बीन या काननी मिलाकर कुल्ली करेंइसमें जो मवाद सुरवमें होगाव हदूर होजायगा और जाडों के दिनों में ठंडे मिज़ाज वाले को हा थ मुंह गर्म पानीसे धोना चाहिये और शहद की सिकंज धीनसे कुल्ली करें औरकुल्ली के पीछे मस्तगी ॥माशे पीसकर शर वकरके साथयाविनाशक्कर के सेवके अर्क के साथ पीलें और जोमस्तगी की जगह गुलकन्द-इतरी फल सगीरे होनी भीडरन ही है औरजो औषधों की तेजी से हिचकिया आनेलगेंतो थोडा गर्म पानी पिलावें और छीके लाने का उपाय करें और जो कैकेपी के छाती और पसलीम पीड़ा होजाय पापेटफूल जायतौगुलरोगन याबाबूने के तेल मलें और गर्मपानीसे धारें और जो केकीतुरंत वश्यकता होतोइनवातों के विनाही करना चाहिये औरजीविष केरवानेपर कैकराना पड़ेतोउसे पेटसे अच्छीमानिनिकालनचाहिये वहदवायेंजोकैसें पित्तों को निकालतीयहहैं - : सिकंजवीन कन्दी १० मिसकाल-पालकका अर्क ४० मिस काल जो औरायेदुसे पानी में या व्याज़ी के पानी में घोलकर गुनगुना पिलावें॥ निसकालधागाशे का होता है गौर वाजेशामाशेकाही मानतेहै ।।
२७
--
-
कैमेबलगमकोनिकालनेवालीऔषधयहहैं.
मूलीकेचीनमाशे-सोये के बीजामाशे-खारीनमकर॥माशे
सबको कूट छानकर शहर में मिलाके खिलावें जो कै आपसे आजाय
तो अच्छा है नहींतो अपर से गरमपानी पिलादे-॥
वह औषधेजोसौदाको मनिकालतीहैयह हैं।
मूली को खाली करके कुरकी उसमें मरदें फिर उसको सिकंज डीन
मेरातभरडाले रकवेसवेरे खिलादें और ऊपर से सिकंन वीनलोविये
के पानी में घोलकर पिलावे-॥ 13, gro
वह औषधेजोपित्त औरवलंगमकोकैमें निका
लतीहैयहहैं। ...
शहद की शिकंजबीनर मिसकाल- स्वारीनमकमिसकाल-मू
लोकाअर्कमिसकाल-मिलाकर गुनगुना करकेपिलावें-
बहऔषवेंजापिनबलगम औरसौदाकोकै में
निकालती हैं यह हैं।
मुलहटी ५मिसकारू-मायके वीजयसिसकाळ-खवाजीकेवी
नोरजी-हरएक मिसकाल-सबकारक कटोरे-यानी मोटी
वैजब पानी आधारहजाय तवसमें आकाशवल को शग्यतन
सकाल डाल के और अगर का सिरका मिलाके और गुन गुनाका
के पिलावें और कै करा-
जबतक उलटी कराने की अत्यंतचाहना नहा-तबतक कालीकु
रकी नदेना चाहिये- क्योंकि वह विप है- और उस्सरवन्नाकम्त्पन्न
२८
.
होता है और इसी प्रकार जिसने के नकी हो उसे बिना जरूरतकै
करानानचाहिये-
सातवा अध्याय
उनऔषधोंकेवर्णनमेजोमवादको पेशाबकी
राहसे निकालतीहैं।
इस प्रकार की ओपधेमवाद को रगों के अन्दर से निकालने में बहुत
काम आती हैं परंतु जब मवाद बहुंतहोतो जब तक फस्दयाजुल्लावा
नदेखें इन औषधों को काम में नलावें-हकीमोंने कहा है कि जाम
वाद जिगर के पीछे होतो उसका निकालनाइन औषधों से अच्छा है।
(पेशाब के जारी होनेसे पसीना-और पारंवाना रुक जाता है इसीप्रका
रदस्तोंके आने से पेशाब कम आता है क्योंकि मवाद दूसरी ओरसे
निकल जाता है इन औषधों से पतला मवाद निकलता हे इस
लिये चाहियेकि जब तकतरीकारोग नहो-इन-औषधोंकोनद-इस
लिये-इस्तिसका अर्थात जलंधर)- फालिज़-जोड़ों के दर्द मइन्हीं
गौषधों को देते हैं और मवाद के पंकने से पहिल ईनको नदेना।
चाहिये।
पेशाबलानेवालीदवाइयाजोठण्डीहैवहयह हैं
कासनी के बीज-स्वीरे ककडीके बीच-शिकंजवीन-लोकी
निघीयाका अर्क-कुलके के बीज-गोखरू - काकतंज- तरबू
जकापानी भादि-1
गर्मऔषधेयहहैं
-१
.
128IMR
करफ्त केाज मोक-जीरा-विजास्फ- सूरबाहुभाजूफा-अज
वायन-गाजरकं चीज-सुंदाव-कवालाभादि ।
मोतदिल अतिवहे औषजिनमे सरदीगरमीब
राबर हैयह हैं।
हंसराज रवरजेके वीज-उडी और गरम औषधों कोमिलाकर
देनेसेभी यही बात होती है-TELEPAL
सातदिल औषधजोपेशावबहुतलाती
जीरा-सौंफ-हरएक असावमाशे कुचल करस्कप्याले पानी में-
औटा, जवपीने के अनुमान रहनाव तो उसे छानेले-और वीरेकका
डीके बीज- और रवर जे चीज-हरएक १०॥साडेदस माशे-पीस
कर इसमें मिलादें-और मिश्री मिलाकर पिलादें- यहचा मवाद
को चंहुत निकालती है और वन्द येशावको जारी करती है और
जा-जीरा और भीक को कूट छान कर पहिले फॉकलें और अपरसे
स्वीरे ककड़ी औरम्वर बूज के बीज पीसके पीव तौभी यही फायदा
होगा-
" औषध
औषधज्ञोचन्दहेजकोजारीकरै।
मा
तज-कलेजीदो मिसकाल- अवहल-जुन्दवेदस्तर-हरएक
७ माशे-सबको कृट छानकर दुगुणेशहद मिलावै और एकामा
सकाल से दो मिसकाल की गोली वाचलं औरमानकाल एकता
गोली निगलकर १४ तोल मागेनाका मर्कयो, जीचन्द होन
का कारणरुधिर की कमी या मिजान की गर्मी न होती तो यह और
धन्लाम करेगी नही तोहानि-
.
३० जोशीदा जाहेजकोजारीकर और पुरुषकाबी यंजोठण्ड सरकरडाहो उसेनिकालदे इसनतीन अर्थात्सतारू) दुरमन तुर्की- तुरमंस-सुदाब- सोफ-करफलके चीन-हरस्कामारी-इंजीर गुलकन्द १०मि । सकाल-सवको भीटाकर और गुलकन्द मिलाकर बराबरवनी न दिन पिलावै-औरफिर तीनदिन पीछे फिर पिलायें-जिस्सेम वाद अच्छी तरह से निकल जावे और हेज जारी करनेवाली और याको रजस्वला होने के दिनों में पिलावे इससेवड़ालाभहोगा। आठवा अध्याय उनऔषधोकेबर्णनमेंजोदिल औरसिर और जिगर औरमेदेकोपुष्टकरती हैं। सिरकोपुष्ट दातारडीऔषधे यह हैं- मोती-आमला-विही-मेय और अमरुदके हरे फूल-गुलाब के फूल-गुलाव- नारंगी-॥ और गर्म गृह-चलाहर-फन्द्रक-चालंगू- सोंट-नागरमोथा, वालछह- मुश्क- अद- अस्वर- गालिया- लोंग-कुन्दुर-अव हरकातल-भेडीका दृध- दिल की पृष्ट दाता और प्रसन्न करनेवाली ठण्डीदवाईयाँ यही है-नाशपानी-मीनागनार-आमला-इमली-सेव-चन्दन-व। मलोचन-गिलेमखतूम-रेवास-चसद-कहरुवा-कपूर- गाउजुवा-धनिया-गुलाबके फूल-मोती-नीलोफर-नारंगीन हड: याकूत-चादीके चरक । 2 १३९ गर्मयह हैं-सोनेके वरक-इत्तरंज छिलके- उस्तखुडूस-भव रेशम-सफेद वह मन-लालवहमत- विसफायज- वालंग- जंगली तुलसी- निरविसी-दारचीनी-नस्कचूर-दरूनन-जाफरा न-सुम्वेल-नागर मोथा-तन-शकाकुल जडंगरी-अन्वर- फिरंजन मुंशक-मदसलीव-इलायची पोदीना लाजवर्द- निगरकी -पुष्टि दावा उसडी औषधे यह है- कासनी-ज़रि शक- अनार-II गर्मयह हैं- छडीला- अजफारुतीब-जायफल-हम्मा मा-सब्वबिलसांन-दार चीनी- गाफिस- लोंग तन-कश. स- रुमी मस्तंगी-॥ नार जानना चाहिये कि जिगर की कमजोरी वय मरदी और सरीसे होती है- इसलिये जिगर की पुष्टि-दावा आषधेयह है। मेदेकी पुष्टि कारक ठण्डी औषधे यह हैं-आमला-अ. नारदाना-समाक- बहेडा- हई- और हर्डका मुरब्बा-'विहीं, विमलोचन-गुलाबके फूल- गर्म यह हैं- सरकंडे की जह- नारगीके छिलके-चालंग- जायफल-दारचीनी-ज़रम्बास- नागर मोथा-तज-साजि ज हिन्दी-लॉग-इलायची- कुन्दुर-झूमी मस्तंगी- मणकत राम शीह-पोदीना-हुदगरकी-॥ जानना चाहिये कि जो वस्तु मेंदे की पुष्टि कारक है- वह अंतड़ियों कोभी पुष्टि करती हैं और जो औषधदस्त लाती है वव मदे को कमजोर करती है- परंतु हड़ दस्त भी लाती है और मेदे की पुष्टि कारक भी है- और सनाय कोभी बहुत से लोग मेदे की पुष्टि कारक कहते हैं- . तीसरदण्ड रोगों और उनके उपाय के वर्णन से -- पहिलाअध्याय 'सिरके रोगोंके वर्णन में पहिला पाठ घ २०-२ सिरके दर्दकेविषयमें जो दर्द रुधिरकी अधिकता सेहोतो-फस्द सरारु करें- और सिरके पीछे सीगी लगावें- और थोड़ा ही सघिर निकाले और नीबू काशरबत पिलावे-औररूधिर लेने के पीछे जो कम होतो-: -नुका अहामिज-यामुलय्यन मुवारिक और जो चीज रुधिरकेलिये लाभदायक है- काममें लावें।। और जो पित्तकी अधिकताम होतो पित्त की पकाने वाली और दीक करने वाली औषधे पिलावें इसके पीछे जुल्लाय उसीका दें-और सफेद चदन को हरे धनियों के साथ पीसा कर सिरम लगावै. --TOS । और जो वलगम की अधिकता से होताचलगम को ठीक करें और सोफ को औराकेशहद डाल कर पिलावेंऔर कुस्तका दिल सिरपर मलें और मुन्नस और जुल्लाच बलगम का और- 2', म
३३
विद इनीर की जड भीरमौर को पानी में घिसकर लंगाना भर
'और जो सौदाकी अधिकता से होतो सौदा को ठीक करें और
उसकी मुजस और जुल्लावडे वाचूने और वादाम का तेल सि
रमें मलें।
जो दर्द इन मवादों से हो उसमें याशोया वड़ा लाभ दायक
होता है।
सेसी पीड़ा में सिर को दधाना नहीं चाहिये क्योंकि इससे पहि
ले तो चैन पड़ता है परंतु अंतमें दुरव दायक है इसकी जगहयों
व को दुधावें और तलुओं को मलें परंतु जो सिरको केवलइथसे
पकडे तोडर नहीं और जुरलाच के पोछे होले होले दवाना भी
गुणदायक है-॥
जो पीड़ा अकेली गरमी या अकेली सरदी से हो उसमेंतुल्ला
वकी आवश्यकता नहीं जो गरमी से हो तो उंहाई पिलावे भोस
सरदी से होतो गर्म औपधे दें।
और जो सिर की पीड़ा किसी भीर रोग के कारण से होते.
पहिले उस रोगका उपाय करें।
(आधासीसीकी पीहा) आधे सिर में होती है और देर में
जाती है उसका उपाय वैसेही करना चाहिये जैसेकि अपर
लिखा गया है।
और इस औषधका सिर में लगाना गुण दायक है- वम्यू
लका गोंद माशे-अफीम २ माशे-केसर रत्ती पीस
कर गुलाब में मिलाकर कागज़ पर लगावें-और कनपटी पर,
चिपटादें और इस रोगकाजल्दी उपाय करेंनहीं तो हद होना
नसे कठिनतासे दूर होता है
बहुत से लोग सिर की पीडा में अफ़ीम आदिका लेप करतेहैं
इनसे तो पहिले तुरंद चैन पड़ता है-परंतु हकीमों नेइनकाल
गाना नहीं बतलाया है-और जो अत्यंत आवश्यकता होतो.
अफीम के साथ केसर याबाबूना मिलादें-॥
सिर की पीडा मेंजोगुलाब सिर पर डालें तो इतना डालें
कि सिर भीगा रहै नहीं तो हानि करेगा।
जो सिर की पीड़ावाले की नकसीर फूटेतो उसे वन्दनका
रें क्योंकि वह उसके लिये अईहै परंतु जवरूधिर अधिक
निकले और उस्से कमज़ोरी बहुत पैदा हो तबवन्द करनार
चाहिये सिरके रोगों में नाक या कानसे पीप कानिकलनार
बहुत अच्छा है-
दूसरापाठर
सरसामके बिषयमें
सिरके परदायाभेजेकी झिल्ली में सूजन होनाने कोस
रमाम कहते हैं-11
जो वह रुधिर की अधिकता से होतो उसका चिन्ह यहहै।
किरोगी के मुख पर हँसीसी मालूम होगी।
औरनो पित्तकी विषेषता सेहोतो उसका चिन्ह यह है कि
गीको मुगला इट और चिड़चिडाहट होगी।
औरजो बलगमसे होती उसका चिन्ह यह है किरोगी।
स्त और घबराया हुआहोगा-
और जो सौदासे होतो रोगी चौकन्नामालूमहोगा सौदारी
,
बहुत कम होता है और जो जो चिन्ह हर मवाद के लिये हम
पहिले लिख आये हैं वह हर प्रकार के सरसाम में पाये जाय
सरसाम जोरुधिरहोउसे करानी तुसकहते हैं और पित्त वार
ले को करानी तुस खालिस और वलंगमी को लीसर गुंस कहते
जानना चाहिये कि जो सरसाम रुधिर और पित्त सेहो उस
में तप अधिकता से होती है और बलग़मी और मौदावी में हला
की और बेहोश रहना और बकना सब सरसामों में ज़रूर हैं-
उपाय उसका वैसेही करेंजैसे सिर की पीड़ा में वर्णन कर
चुके हैं और इस रोगमें तपको उपाय अत्यंत भवश्यक है और
खूनी और पित्त के सरसाम से पिंडलियों पर सींगी और पकनेला
गाना अच्छा है- और दूसरों में खाली सीगीलगाना गुणदायक है।
और लखलखा सुधानाभी तुरंत लाभदायक है सिरसे तपकेउ
तारने को और सब सिरके रोगों में पाशोया और पांव वांधना ओ
र मलना अति लाभदायक है- रवूनी सरसाम में फरद तुरंत कर
नीचाहिये जोरातका समय होतो दिन का विचार नकरें उसी।
समय फस्द करादें-पित्तके सरसाम में भी फस्द अच्छी है क्यों
कि पित्तरुधिर में मिले रहते है- वहुधा मनुष्यों ने वलग़मीऔर
सौदावी सरसाम मेंभी फ़सद को अच्छा लिखाहै परंतु इन दोनों
मेंरुधिर काम निकालना चाहिये-॥
बकना और बहकनामुरसाम में अवश्य है परंतु कभीर
बिना सरमाम ऐसा होता है जैसे किवारी के तपमे चारी के समय
और किसी पीडा या रोगकी अधिकता में इसको मर सास गैरह
कीकी कहते हैं जववह रोग जातारहता है- तो वकना और
३६
चहकना भी जाता रहता है इस लिये पहिले उस रोगका उपाय
करना चाहिये।
तीसरापाठ३
जुमूदके विषय में
यहवह रोग है कि मनुष्यवैग होतो-वैठारहजाता है, और
जो लेटा हुआहो तो लेटा भौर सोताहोतो सोता और खडा होते,
खडा रहजाता है कारण इसका यह है कि सौदा सिरके पीछे
गिस्ता है और वहीं बन्द होके रहजाता है--उपाय इसका यह है।
कि वेहोशी के समय कोई गरम शाफ़ा या सौदा का निकालने
वाला हुकना दें-और शब्बो के फूलोंका तेल और वादाम के
तेल में सोंच या. जुन्दवेदस्तर-मिलाकर सिर पर मलें-औ
रिजब होश होजाय तो मुजिश और सौदा का जुल्लाबदें-और
गर्म और तर वस्तु खिलावें- और सिरके पीछे मोम रोगन लगा
वेंनो मधिर की अधिकता से होतो फस्द भी करें-और पिंडलिर
योपर मीगियो लगावें-फस्दका नश्तर तोगहरादें-परंतु रु.)
घिरकम निकालें.॥
चौथापाठ
सकतौकेविषयमें
यह एक रोग है कि मनुष्य की हिलनामुना बन्द होजा
ता है- और मुर्देकी तरह चित्तपडारहता है जो सासन आती।
तो इसका कारण यह है कि सिरके सवपरदे बन्द होगये होंगे,
जो यह रुधिरकी अधिकतासे होतो फ़स्दसरारू करें- नहींती
वलगाम के निकालने वाले डुकने और शाफे दें और सिरकेचा
ल काट कर सिरको सेकें-और नफूख और सजत काम में लावें-
और जो किसी प्रकार उलटी होसके तो बहुत अच्छा है-और हाथ
यावका मलना और जोरसे चाधनामी लाभदायक है-और खोप
रोपर पछनेलगाकर उसपर पारा मला याबछनाग-पीसकरा
मलना अच्छा है और जब होश आजायनी मुजिमा और जुल्लाब
बलगम कादें-
इस रोग में जबदम आता जाता मालूम नहो तो चंगा होना
असंभव है- परंतु जिस्मेंदग भाता जाना हो उसका अच्छा हो।
नामी अति कठिन है-इसरोगमें और मृत्यु भयह अंतर है किइस
रोग वाले की आरवकीपुतली में परछाही दिवाई देती है और
गर्देकी आरवमें नहीं दिखाई देती- चाहिये कि रोगी काती/
नदिन गति दाह कर्म न करें- किंतु उसके अच्छे होने की आ
सा नहीं है- परंतु परमेश्वर की कृपा से अच्छा होजाय तोक्या
आश्चर्य है-और जो उसकी देह नीली होजात्य तो उसका उपाय
निकरें वह मुर्दा है-
पाचवा पाठ
अतीनिंदा
सबात के बिषयमें
खेमाव से अधिक अचेत होके सोना रोग है और इसीको
संबात कहते हैं-कारण इसका यह है कि सिर में तरी अधिकार
होजाती है- चाहै अकेलीवरी हो या उस्से चलग़म और रुधिर
कामवादमी मिला होइसरोगों जैसा कारण हो वैसाही
ल्लाव-भौर सिस्का सुंघाय-खुश्कीलाने वाली वस्तु और
इतरी फल खिलानी बहुत लाभदायक है-और इसका कारण
२८
मेदाका बुखार होतो चिन्ह इसका यह है-कि पिहिले वद हामी
हुई होगी- और भूखके समय कमती मालूम होती होगी- उन
पाय इसको यह है कि पेंट को साफ़ करें- और इतरी फल का
नीजी खिलायें और सूरया धनिया कूद छानकर खाने के पी
के फंकावें॥
* छठापाउदनं धोशी
सहरके विषय में अक्षे-
X
सहरउसरोगका नाम है जिसमें स्वभाव से विषेष मनुष्य जा
गे और नींद उसे कम आवै कारण इसका सिर में खुशकी-होजा
ना है- चाहै वह अकेलीहोयाउस्में सौदा और पित्त और वारी
बलगम मिला हो जो यह रोग अकेली खुश्की सेहोतो सिरकोकर
रकवें और खाने पीने और सूंघने में तर वस्तुओं को कामला
और जो यह मवाद से होतो उसीका जुल्लाबदें और सिरका
कमीनसुंघाक्योंकि यह नींद कोबहुत खाना है- निद्रालाने
वाली औषधेयह है-हरा सौया सिरहान रखना औवलगमी
सहरमें सिर परसी लपेटना और नाज़बू गुलाव में भिगो कर
सूचना और लखलखा हरदम पासरस्वना अफीम और वनफ
शेके तेलको मिलाकर चंद या पर मलना-॥
जव भागने का कारण तपहोतो पहिले उस्का उपाय करें।
और सिरपर नेल मलें और पाशोया करके हाथ पावमलें-॥
असीखलेसावयापाठोपीन
(सबातसंहरी और सहरसबातीने विषयमें
ट
यह बह रोग है जो सहर और सवाल के कारणों के इवहे हो
जानेसे होता है और बहुत से हकीम यह कहते हैं कि यहपिम
और बलगम सेदमाग में सूजन होजाने से होजाता है चिन्हइ
सरोगका ग्रह है- कि कमी अचेत और घोर निद्रा बहुत काल
क्क रहती है और कभी रोगीबहुत देर तक जागा करता है और
जो मनुष्य इसे भेजे की सूजन बताते हैं उनकी दलील यह है कि
इसरोग में बकना और आस्वं पथराजाना अवश्य है जो निद्रा आ
धिक होतो इसे सचात सहरी कहेंगे और जो जागना विशेषहोतो,
सहरसुवाती कहेगे और जागना और सौताबराबर बहुत कम
देयागया है जो सेसाहोतो कहने वाला जिसशब्द को चाहै पहि,
ले कहे सच्चतो यह है कि इसरोगमें भेने की सूजन जरूर नहीं
स्तु सूजन मेंयहरोग होसक्ता है-अपर केदो पाठ में जो ज्याय
लिखे गये हैं उन दोनों को मिलाकर करें और जब बलगम की
अधिकता होतो कम गर्म बस्तु सुंचावें ओर जिस समय पित्तोंकी
अधिकत्ता से होतो ठंडी वस्तु सुंघावे रेसे ही और उपाय जाना ॥
और जब यह रोग मेजे की सूजन से होतो वह उपाय करेंगे
बलगम और पित्तके सरसाम से अपर लिखा गया है।
आउचापाठप
चिंध काबूसकेवर्णनमें इंटरने
यह वह रोग है कि मनुष्य पुर
कि कोई भारी चीज उसपर गिर पड़ी
वह घबरा करवर्गने लगता है-
फस्दसरारू करें-और पिंडलिये
४०
कमदें- और जो वलगमया सौदा की अधिकतासे होतो उन्हीं
काजुलायदें- और इसरोग का उपाय तुरंत करें नहींतोमृगीही
जायगी-
नवापाठर
मृगीके विषय में सुन
यह वह रोगहै जिस्मे मनुष्य अचेत होकर गिर पड़ता है और
सुख और हाथ पांवटेटे और खिचेरहजाते हैं और वह तडफावर
रता है-इस रोगमै सिरका चोमल होना और जीभ की रगों काह
रा होना अवश्य है-कभी यह रोगवारीसे होता है-जोइसकी
बारी बहत होतोवरा है-परंतु बालकों को कभीर ऐसा देखागा,
याहै-कि एक दिन में आउरवार आती है और फिरऐसी चली
जाती हैकि कमी नहीं होती-उपाय इसका यह है-किवारी केस
मय वह चिकित्सा करेंजोमू में होती है और कोई वस्तुया क
पड़ा लपेटकर उसके मुखमें रस्वदें कि वह अपनी जीमचवान
डालें और हाथ पांव उसके जकडदें किचोटनलगे और जयहो
शमें आवेता जैसामवाद हो वैसाहीजुल्लाबदें- और तरमेवः
और दूधदही नरिवलावें-और-अदसलीव-कोगलेमें लटर
कावें-और-नांस-जो दूसरे खण्ड में लिखागया है सुघावें॥
बच्चों को जो पसली का रोग होता है- वह भी इसी मकार
से है- उपाय उसका मवाद के अनुसार करना चाहिये-औरर
विना कारण के जाने अधिक गर्म और अधिक ठण्डी ओपध
नरें-और दूध पिलाने वाली की हुशियारी स्कवें-किहानि
कारक वस्तु ने स्वावे अससे भोग न करें-कि दूध विगड जाता है,
और बच्चेको कान होतो शाफा करें।
-
स्ना
४१
"
दसवापाउ१०
मालीखोलियाकेवर्णनमें
यह वह रोग है कि मनुष्य को अच्छी बात नहीं सूझती और
वड़ चातें सूझ पड़ती हैं जो केवल बुद्धि के विपरीतही।
कुवुद्धि और अहंकार और धमड़ और व्यभिचार भी इसीमा
कारके हैं-
जैमा मवाद हो उसके अनुसार जुल्लांब दें- और दिलकी
खुशवरने वालीबलु औरनोशार खिलायें-औरभोजन में
हल्फीचरनु चिलाना और थोडेर दिन पीछे कई वार जुल्ला
दिना-अधिक लाभदायक है- और जानना चाहिये कि ऐसे गगी
उपाय कालाभ बहुतकाल केसीले प्रत्यक्ष होता है घवरावें,
नहीं॥
ग्यारहवापाउ११
चीयो
जुनूनके विषय में
यहरोग कई प्रकार का है-जोइसौं लेग और कोषमाया
जामता सानिया कहलाबैंगा- औरजोहंसी और खेल और सताना
होतो उदाउल कल्वकहेंगे।
और जो गनुष्यों से न मिले मुले वो कवरबकहते हैं यहरो
गि मालीवालिया सेवन कर है- उपाय इसका वैसाही करेंजो
माली खोलियाका है- और स्वियोंका दूध सिर पर दुई-और
नाकमेंडालें-और वनफ़थे और वादाम का तेल सिरपरमले
और पेट पर गर्म पानी धारें-और मवाद पकजाने के पीछे
माजून नुजाह- विला--11
४२ बारहवापाउ१२ ऊपाई 64 सदरऔरदव्यारकेविषयमे जवमनुष्पलडाहोयाचले और आंखो के तले अंधेरा आजाय तो उसको सदुर कहते है। . और जब यही बढ़ जाय और सिर घूमने लगे तो वह दवार है जैसामवाद हो वैसाहीजुल्लाबदें- जो मवाद सिर में होगा तो सिरमेभी कोई रोगमालूम होगा-और जो मवाद मेट में होगा- तो जी मचलायगा- और पेट में कोई रोगहोगा-जैसा उचितहो वसाही उपाय करें-औरजो कमजोरी के कारण सिरघूमे तामो जन में हल्की और दिल खुश्क करने वाली व खिला-और रमोतीयों को पीसकर-नीया चन्दन-याअनार के शरन तमें मिलाक्षे नाव और जो सिर में सरदी यहंच ने से सिर घूमें तो सेकें-और गर्म लेप लगायें और गर्म मसालह पड़ा हुआमोजन रिबलावें। तैरहवापाठ१३ निसयान अतिभूल जानेकेरोगकेवर्णनमें वहुधाइसरोगमें सिरमें वलगगयासौदा अधिकहोजाता है-या मिज़ाज में अकेली गरमीबहुत होजाती है- बलगमन और सौदा के मवाद में मुशि देकर-हब्बकोकाया-आदिः खिलाकर सिरकोसॉफ़ वारे-भौरमजूनफिलासफा और वन- और साउलामुरव्वा-बुन्दर-औरशस्कर मिलाकर विलावे और ठण्डे पानी से बचतेरहैं- और सौदादी में-तेल सिरपरभने। और जोयहरोग अकेली गरमीसे होतोठण्डी औरतरवस्तुकामलाद चौदहवापालट अरिया जियादी पन्दहवापाठ१५ lif उमरियाग फालिज़के विषयमें 2400 यह वह रोग है कि आधावदत्त लम्बाई में हिलतामुलतानही बहुधा इसकाकारण वलगम की अधिकताहै-और कभी रुधिर सेमी हो जाता है- वलगमी में चार दिन तकं पुष्ट औषधे नदेखें-और खानापीना बिलकुल क्न्दकरदें-औरजोभूवन रुक सके तो-जीरा-औरदारचीनी-ओटाके दें-औरपानीकी जगह-माउले अस्ल-पिलायें-फिर चौथे दिन वलगमकी मुजिशपिलावे-औरदिनयाचौदह दिन के पीछे जवकिम वाद पकजाय तो जुल्लाबदें-और जुल्लाव के पीछे कूटका तेल मलें और-जवारिशविलादर-और तिरयाक कवीर-और मसरोदीतूस-खिलाना बहुत लाभदायक है-औरजुल्लाक्के पीछे-मुश्क-और कुन्दश-फ़िकफ़िल-नोशादर-पीसकर सुधार्य- और गर्म पानी बदन परनडालें- क्योंकि वहइसरोग के लिये उरडे पानी से अधिक हानिकारक है- जो फालिंग के साथ रुधिर की अधिकता होतो-फ़स्दभी खोल सकते हैं- और जो यह रोगग रमी से होतो गर्म औषधे न देना चाहिये पहिले गर्मी को दूर करले-फिर इसका उपाय करें-और जो फालिज रुधिरकी सूजन से होतो पहिले फस्ट खोलकर उसका उपाय करें। और जो बदन में किसी एकजगह का हिलनामुलनाच न्द होगया होतो उसको इस्तुिरखा कहते हैं । खदरके विषय में ॥सा /
मनुष्य कीदेह में कोई जगह सुन पहजाय उसे खदर कहते
हैं-जोयह रोग रुधिर की अधिकता से होतो फस्द वाले-औरभी
जन कमदै-और जोधलगम की अधिकतामे होतो वलगम का)
जुल्लाब दें-और जो खुश्की मे होतो उसका चिन्ह और उपाय
गलिखा जायगा और जोदवाने और जोरसेवाधने के कारण सेही
तो उस कारण को दूर करें।
सोलहवापान
लकवेकेबिषयमें
इसरोग में सुख टेदा होजाता है और कारण इसका विंचना
ना याचीला होजाना मुंहकी सेक ओर का है लालाहोजानावमा
मसे होता है-चिन्ह उसका सुस्त होना और जीम के स्वाद में फी
पड़ जाना- और नीचे की पलकीरतालका लटक आना-और
विचजाने का चिन्ह थूक का कम होना और माथेका स्विच जाना है।
टीले होनाने में फालिज का उपाय करें-और खिंच जाने का उपा।
आगे लिया जायगा- जब तक चार दिनया सातदिन न व्यतीतही
गायं- कुछ उपायन करें-और भोजन वन्दकरदें- और जो होसकेर
तो पानी भीनदें-और अंधेरीजगह में विठावें और चीनी आईनार
वाग ररवेंदें कि रोगीहरदग उस्में अपनामुखदेखा करें-और
जायफल नुख में रखवामें और किचकीजह की छालनो-माउन
ल अस्ल में औटी हुई हो उस्से कुल्ली करवावें- औरो रुधिरकी
अधिकता से होतो फस्दमी स्वोल सक्ते हैं-इसरोग के उपायमें देर
करनी नचाहिये-जो तीन महीने व्यतीत होनायंगे तो सुहसीधा
न होगा।
चीनी आईना चादीताम्ब और पीतल को मिलाकर बनाते
:
४५
.
है- इसमें मुख देखने से जोरपड़ता है-इस कारण मुंह मीधाहो
जाताहै।
जनन्जिो सत्तरहवापाठ१७
सीटिजनतशन्नुजके विषय में। 12 2073
लशन्भुन किसी जगह के रिखंच जाने को कहते हैं-जी कारणा
उसका वलराम की अधिकता होतो उसका नाम- तशन्नुनरदेव
और इमतिलाई कहते हैं-चिन्ह उसकायहहै कि अचानक उत्प
न होजाय- और चिन्ह बलगम के दृष्टि पड़ें-और जोखुश्की के
कारण पैदा हो उसको- तशन्सुनयाबिस कहते हैं-चिन्ह उसका
यह है कि धीरे धीरे पैदा होगा और उसके पहिले कैया दस्त यारु
घिरबहुत निकला होगा या तप आई होगी यारोगी बहुत जागाहो,
गा या उसके लोश बहुत हुआ होगा- और उसका बदन दुवला
होगा-तशन्नुल इमतिलाई का उपाय फालिज के अनुसार करना
चाहियै-और तशन्नुज याचिस में बदलको बाहर से और भीतर
तरी पहुंचाना चाहिये-और मोम को वनफशेया वादाम के तेल में
मिलाकर मले-औरस्त्रीका दूधनाक में डालें।
विच्छू के डंक मारने से और पन्नेपर घावलगनेसेयाकोडे
पड़ने से जो तशन्नुज हो चाहिये-कि उसकारण को दूर करें।
र मृगीकेसमय जो तशनजहोता है वह मुगीके दूर होने से जा
ता है और जोनजाय तो रोगन गुल या कोई और तेल गुन
गुना करके मलें और कमी आदमी का मुखजम्हाई लेने में
खुलारह जाता है- उस्में किसी तेल कामरूना लाभ दायका
है और जो इससे अच्छान होतो- तशन्नुज-इमति लाईका
उपाय करें।
रहता
fat
२
स
इरसलाज के विषयमें सासे।
समा
अठारहवापाठ १८
तमबुदकेविषयमें
अङ्ग-काकाईभागलम्वाई में तनकरडनाता है-और समेट
नेसे नहीं सिमटता कारणइसका यह है कि कोई पहा दोनों और
से रिश्च जाता है- उपाय इसका वही करें जोनशन्नुज में लिखा
गया॥
उन्नीसवापाठ
पा
कजाजके वर्णनमें
तशनुजजोगरदन में हो और गरदन इधर उधर नपिरसरा
के उसे कज़ाज कहते हैं जैसाकारण हो वैसा उपाय तान्नुजके
अनुसार करें- और यह रोगसब प्रकार के तशन्जुजों से बुरा है।
नाका उपाय बहुत जल्दी करना चाहिये।
बीसवापाट २०
Gar
BAJ"राशेके वर्णनमें मन
इसरोग में मनुष्पका शरीर कापने लगता है -जो पहचलम
मकी अधिकता से होतो निसान और बलगम के चिन्ह पाये
जायंगे-उपाय इसका यह है कि बलगम को निकालें-औरजी
विषयकी अधिकतासे होतो- उसको छोड़दें- और नाजह दूध
पीना और देह परतेल मलना अति लाभदायक है।
इक्कीसवापाठ २९
TARA
તે
समिती
शशिरमें किसीजगह के फड़कने कोइखलाजकइते हैं।
नितप्रतिमुख का फड़कना लकवा आने का चिन्ह है-भोर
पेटकाफहकना मृगी होजानेका और बगल कापडकनाछाती
और वगल कीसूजनका चिन्ह है- और सारे शरीर का जगहर
से फड़कनासकता जाने का चिन्ह है-पेट की रंगों का फड़क
नामाली खोलिया का चिन्ह है-उपाय इसका यह है कि जमक
को गर्म करके उस जगह सेकें- और जोइससे अच्छा नहोतोब
"लगम को निकाले-और जोहेजके चन्द होजाने से यह रोगह
तो फ़रद खुलवाने से जल्दी जाता रहता है।
बाईसयोपाठ२२
लवीकेविषयमें
इसरोगमें देह मारी होजाती है और मुंह और आखेलाला
होती हैं- और जम्हाई और अंगडाई बहुत आती हैं-और ऐसा
मालूम होता है कि तपआने वाली है-और थोडे काल के पीछे
यह वातजाती रहती है-या वारवार आती है-जोवार वार आ
येवोलीधर और पित्त को कम करें-और भोजन थोडासा दें-ओ
गर्म मिजाज़ वाले को उस्डा पानी पीना और उरहे पानी से
स्नान करना अति लाभदायक है- और धनिणको कूटछानकर
शक्कर केसाथ फांकना-या उसको भिगोकर और मिठाई में मि
लाकर मोनो लाभदाता है।
तेईसवापार२३
हिसके वर्णन में,
यह वह रोग है कि भेजे में खुजली विना दर्द होती है-उपा
म
बॉल
य उसका यह है किभेजे को ठण्ड और तरी पहुंचावें-क्योंकि यह
रोगपित्तके वुरवार के कारण से होता है और जोइस्सेमी अच्छा
नहोतो-पित्तों का जुलाब दें- और जो रुधिर की अधिकतादे
खें तो फस्ट भी खोल दें।
न्चौबीसवापाठ २४ गयीस
असोबाकेवर्णन में
यह वह दर्द है जोभों अर्थात् सुचटी में होता है-जो अकेली
गरमी से होतो उसका चिन्ह यह है कि सूरज के निकलने से उदा
न हो- और जो नोंदोपहर तक दिन चढ़ता जायगात्योंरदर्दभी
रहेगा और दोपहर पीछे घटता जायगा-यहां तक कि रात को
दिलकुल नरहेगा- और फिर सवेरे मोही होगा- उपायइसका
यह हैकि-कपूर को रोगनयुल में घोलकर नाकमेंटपकायें और
वाहरसे देह को साफा स्कायें-और जो देह की गरमी अपर चढ़ने के
कारण यहरोगहोतो चिन्ह उसका यह है कि रोगी आँधा पड़ा
हेर-और माथे की खाल विचीहुई होगी- उपापइसकायह?
किनाक में कोई वस्तु कड़ी और खुरखुरीडाल कर-या नखओ
र अंगुल चुभीकर नकसीर फाढ़ें और जो इस्रोनकासीर नफूटते
फस्ट सगरू करें और कपूर सूंघावें और हाथ पांवमलें।
पच्चीसवापाठ२५
जुकाम और नजलेकेविषयमें
जानना चाहिये कि मेले का मलमोनायिका के द्वारा वहे।
उसे जुकाम कहते हैं और जोगले पर गिरे तो नजलाहोगा-गर
मीका चिन्ह यह है कि यहमल पतला और जलता निकलेगा
-
और सरदी का चिन्ह इसका गाढा होना यावे जलन होना उपा)
य इसका यह है कि मिजाज को उरुस्त करें और जैसामवाद
हो वैसे ही उसे निकाले-चाहिये कि जुकाम में मवाद को साफ
करने से पहिले वह वस्तु न खाय पीवे जो मवाद को निकलने
सि बोके-और कलको दूर करें और सिर को बग रहें नजला
चाहें गरम होयाउंडा बहुत सोने और चित लेटने और बहुत
चलने फिरने और सिरसुकाने और खट्टी वस्तु और दूधदही
स्वाने से बचते रहें-और ना जुकाम के साथ स्वामीमी होतो उ
स्का उपाय मी अति अवश्यक है।
माशंग और बादशनाम सूजन हैं-जो मुख परहोजाती
और जुल्लाब से जानी रहती हैं-उनका वर्णन इस पुस्तक के
तमें आवैगा।
दूसराअध्याय
Putr जनन
आखके रोगों के वर्णनमें
नेवों में सातपरदे भौर तीन रतूबतें और एक असवा है-
गोरग के सदृश बीच में से स्वाली है और इसी असवे में दि
खाई देताहे-और गोरख की पुतली भी इसे कहते हैं- चीचौर
बीच में जाकर-स्तूरबजली दीया तक पहुंची है। इसस्तूवर
जली दीया में सब चीजें दिखाई देती हैं, और असूवेसे निक
लकर दृष्टिकी इन्दी तक पहुंचती है-वह इन को पहिचा
न लेतीहै- और इसीरतूचत और असवेके वचाव के लिये
और सबपरदे और रसूक्ते आसपास है।
५०
अब जानलो कि- भीख का परदा जो बाहर की ओर हवा
से मिलाहुआ है- और छुवा जाता है वह सुलतहिमा और कर
निया है अर्थात सफेदी आंखकी जो दिखलाई देती है वह
मुलत हिमाहै-और गोल और काली वस्तु करनिया है-यह
दोनों परदे आपस में मिले हैं- इनके पीछे परदा इनबीया
यह परदा रंगदार है-और करनिया में जोरंगहै चुह इसीको
है इसपरदे के वीवमें एक छिद्र है-रोशनी और चित्रों के निक
लने के लिये और आंख में पानी उतरने की जगहभी यही है।
इसपरदे के पीछे रतूवत वैज़िया है इसका रंग अंडे कीसमे
दीके समान है-इसके पीछेपरदामनकजूतियाई यहपरदामकरी
केजालेकासाहे-इसके पीछेरतूवतजलीदीयाहे-और इसके पीछेरतूव
तज़जाजियानोपिघलीहुईकाचकीसीहै और इसकेपीके परदा
शवकीयाहैजोजालके अनुसारहै-औरइनदोनोरतूवतोंकोघरेहुये।
है और इसके पीछेपरवामशीगियाहै और उसके पीछेयरदासल
वियाई-जोओस्वकेटेलसेलमाहिद-हर पर औररतूवतो
में गलगररोगहोतेहैं-उनकावर्णनभागेकेंरेगे ।
अरबी गित पहिलापाठ९
अभय
रंमदअर्थात् आखआनेकेविषयमें
मुलत हिमा पर सूजन आजानेका नाम रमददै-जो यह
सघिर में होचो चिन्ह उसका यह है कि आरव लाल और भारी
होजायगी और दर्द होगा और चीपड़ उससे बहुत निकलेगी-
और जो पित्त से होता जलन और पीड़ा यहुत होगी परंतु चोपड़ा
क्हुत न होगा और जोबलगम से होतोरंग इसका सफेद होग
और आरखें फूल नायगी और चीफ्ड़ आंसू बहुत बहेंगे-और
जोसौदासे होतो सूजन बहुत होगी और चीयह कुछभी ननि
कलेगी और पलके नचिपकेगी और आंख वोमल होंगी और सि
रमें दर्द रहेगा-और जोरीह से होतो वोगन होगानची पड़
निकलेगा-उपाय इसका यह है कि मवाद के अनुसार उसे सा
फकरें और फस्द और जुल्लाव से पहिले कोई औषधभाखमें
पाल पजव यह रोगहरूका होतोदो तीन दिन पीछे वि
ना फस्द और जुल्लाव के दवा डालनी चाहिये-गमरमदमें
रसोत की लड़की की मां के दूधमें घोलकर- आंखके अन्दर
और जपरलगाना अति लाभदायक है और जब पीड़ा बहुत र
होतो थोडीसो अफीमभी उसमें मिसालें और चाकसू पीस)
कर आंख में डालाना सवप्रकार की रमद में अच्छाहै-परंतु
इसकोथोडे दिन पीछे डालें रोगके होते हीन डालना चाहिये
और गर्म वस्तु नखावें॥
चाकसू के चनानेकीरीतमह-कि उसे छीलकर पानी में,
पकावें और जब गलजाय तो सुखादें- उसके दो हिस्से
लेकर ऐक एक हिस्सा मिसरी और चीनी मामीरा कामि
लाके मीसलें और आंख में डालें-कहकों की आवमें कभीर यह
रोग चडुन होजाना है- उसको वरदीनज- कहते हैं- उसका उप
ययह है कि सिरके पीछे पछने लगा और चुटकी चाकसूर
की आरव में डालें।
दूसरा पाठ२
तुरफा केवर्णनमें
, इस्में मुलत हिमापरसधिरकी फुटकी पड़ जाती है-उपाय
१
न
इसका यह है कि-कबूतर यावतखका कच्चापर उखेड़ कर
सके रुधिर की बूंद अकेली या गिले अरमनी के साथ आवमें
टपकायें-ओर कुन्दरको जलाकर उसकी धूनी आखकोदें-
और जो उसका कारण अति पुष्ट होतो पहिले फस्द करें और पछ
ने लगायें और जुल्लाब।
।' तीसरापाठ३
जुफारा अर्थात नाखूने के विषय में
इमका उपाय यह है कि लाहोरी नमक की सलाई बनाकर
कई वार दिन में आंखमें लगायें- और जोमवाद बहुत होतो.
स्टुसार करें और हव्व अयारिज खिलावे-और वलगम उत्पा
करने वाली वस्तुसे बचें-और जो नाखूनावहुत उभरा हो
तो-किसी अच्छे दखकार को बुलाके उमै उठवालें।
चौथा पाठ
आंख मेंजाला पड़ जाने के विषयमें
इसका कारण यह है कि करनिपा पर कोईवस्तु उत्पन्न
हुई होगी-उपाय इसका यह है-किसमंद फेन को पानी में
घिसकर भाख में लगायें-थोड़े दिनों में अच्छाहोनापगा-
और जोमवाद पुष्ट होतो भेजे को मवाद से साफ करें-और उस
जाले कोनहार मुंह जीभ से चाटनाअति लाभदायक है।
पांचवांपाउस
सबल के वर्णन में
इससेगमें आपकी रगेलाल और मोटीहोजाती हैं और
AN
न
खुजली होती है मोइसमें आसूभी निकलें-और पलकों में पानी
सरो रहेतो उसको सवल रतव कहेगे और जो सेसानहोतो सब
ल याबिस कहेंगे-उयाय इसका यह है कि-फस्टु सरारू करेंड
सके पीछे माथे कीरम और कोये की साकीफ़द खालें-और
जोयह रोग कम होतो-शीयाफ दीनार-आरबलगावें और जो
मारी होता- शियाफ अहमर-और वासली कून लगावें औरस
वल याबिस-में सुरमा भौर औषधों केलगाने से पहिले और
पीछेगर्म पानी से गर्म जगह में बैठकर स्नान करना भवश्यक
है-जवरमद और सवल दोनों सिलेहई होतोदोनों के चिन्ह
पाये जायंगे-ऐसे समय में नगर्म औषधे देना चाहिये न ठर
डी-परंतुमवाद को निकालें और अंडे की सफेदी आंखया लेगा
वें यह दोनों रोगों को लाभदायक है- जोइस उपायसेनजिवि
तोदितकारी से उठालें।
अलीननी छठापाठ६
मुलत हिमाके फूल जानेकेविषपमें
जोषाल जानासुलंत हिमा कारीह के कारण से होतो चिन्ह
उसका यह है कि- अचानक उत्पन्न होगा- और पहिले आँखा
के कोनों में-मकली या मच्छर के काटने की सी जरूल होगी
और जो बलराम से होतो होले होले उत्पन्न होगा और पीडा)
कुहत नहोगी और अंगुली के दवाने से चिन्ह रहजायगा -
और जोमवादबहुत और पतलाहोगा तो वह चिन्ह देरतका
नरहेगा उपाय इसका यह है कि जैसामवाद हो वैसाही जु
ल्लाबद-और ठंडी रमदं की ओषधे काम में लावें-औरतो,
પ્રમજી
ANGIG
मोसंतुलमुलतहिमानेवर्णनमें लगे
यह रोगरोहसे होतो-तीन दिन तक कुछ उपाय नकर आप
से आप जाता रहेगा।
सातवापाठ
मुलतहिमाकीखुजलीकेवर्णनमें
'इस्में बहुधापलकभी घायल यालाल होजाते हैं उपायह
सका यह है कि निमकीन और चरपरा भोजनन खाव-और
फस्द और जुल्लाव लें-औरजस्वको नरंकुलपर रगड़ कर भी
खमैं लगावें- और गर्म पानी से मुख धोया करें।
आउचापाठ
ninet
इसरोगमें आंखकी सफेदी परक्डे कोये की और नरम
मांस उत्पन्न होजाता है- उपाय इसका यहहैकि कईचारम
वाद को साफ़ करें और फिरदस्तकारी से कोडालें।
नवांपाउर And
दोकैतुलमुलतहिमाकेविषयमें
यह वह रोग है कि भांख में बहुधा कोय की ओर क
और लाल और काले दाने पड़ जाते हैं - उपाय इस का यह
है- कि जो मवाद अधिक हो तो उसे साफ करें- नहीं दोगु
लाव में कपड़ा भिगो कर आखपररकवना अच्छा है और
इससे अधिक उपाय की आवश्यकता नहीं।
१
जानर
दसवांपाठ१० पाणी दमआअर्थात् आंसूबहनेकेविषयों जोगरमी से चोतोसुरमालगावें-और सरंदीसेहोतोचासली कुन-और जोआंख की कमजोरी से होतो जली हुई पीली इह- और नमक-औरमाजू-वरावर वरावर कूरछानकर औरखमें सलाई से लगावें-और जो थोडी रदेर और बहकर थमरहाक रें तो उसको हिन्दी में मतना कहते हैं-उपाय उस्का यह है कि पहिले मवाद को निकालें-औरइसके पीछे आसू बहाने वा लीदवालगावें-जैसे चासलीकुन और शियाफ़ अहमर ।। Mak५२ ग्यारहवीपाठ९९ हिरकतुल अन अर्थात आंख में जलन होने केविषयमें जोयह गर्ममवादके कारणसे होतो उसमवादको निकाले और जोकोई मवाद नहो तो-तृतियाको-कच्चे और खट्टे अंगूर केरसमें भिगो के सलाई से आखमें लगावै-औरहरी कासनी केपत्तेकूट करमानी उसका तेल में मिलाकर लगायें-और जो कपूरमी उसके साथ मिलालें तो अति लाभदायक होगा।' बारहवांपाउ१२ . कुजाअर्थात् आखमे किसीवस्तुकेपङजाने के विषयमें जव आस्व में कुछपडनाप तो आंखको कभी नमकें-सेवा नहोकि कोई कड़ीवस्तु होतो-मलने से आरव मेंचुमजाय- -- आंख को गर्म पानी से धेवें और स्त्री का दूध आख में डाले- और जो वह दिखाई देती होतो उसेरुईया नर्म कपडेसे उठालें-औरवहाँ भीतर चिपटीहई हो और छुट नसके तो-निशास्ते को पीसक र आंख में भरदे और थोडीदेर रे रहें-इससे वह वस्तुनिश स्ते में लिपट जायगी-फिर उसे अलगाई से उठालें- और जी. कोई मुनगा यामच्छर आदि होतो मुलतानी मिट्टीयागेरू आख पीसकर डालें और थोडीदेर आरव मेवांषदें-वह उस्मेलिपटगा वगा-फिससकोरईसेउले और जोशीशे का चूरा आखमेगापड़े उस समय वह मीचना जो ऐसे कामों के लिंयेवनायागया है काममैं- ला-या जिसमकार सेवनसके निकाल डालें और निकालने के पीछे स्त्रीका दूधऔर अंडेकी संपेदी मिलाकर आंखमंडालें-दूर से बन्दकरनेमे ओखनहींचिमटेगी। . तेरहवापाउ९३ आंखपरचोटलगनेके विषयमें सोचोटलगनेसे भारवये लालीयासूजनहोतो उपायइसक पायहहै कि-फस्द खोलें-और मुलप्पननुकूम फ़वाकः कापि लायें और गुढीपर पछनेलगायें-इसके पीछे अंडेकीसपेदीरोग निगुल में मिलाके आस्वपरलगायें और जो पीडा जानेके पीछेचे जारकाचिन्ह अतिमिलाइटरहजायनी-धनियापोदीना-और- कालापत्यरनोमिरचोंकी थैली में निकलता है-औरहरताल पीसकर लेप करें-इससे नीलाइटजातीरहैगी और जीतलचा रयापत्यरकाधावमुलतहिमा परलगाहो- उसका उपाय यह है लिफ़स्दु और जुल्लाव कई वारदें-और अंडे की ज़रदीकाओ खपरलेपकरें इसके पीछे यही उपायकरें जो आखके घाव सेवा
का उपाय आगेलिरपाजायगा।
चौदहवांपाट
आरखके चाव के विषयमें ४
आरव के सबपरदोंमेघावहोसत्ता है-परंतुजोरावकेवल
मुलतहिमायर लगाही-औररसरदै क्वहों-उसे सालिम कहते ।
है- उसों पीडाकमहोती है-मुलत हिमा-करनिया- और अन
चीया-फाघाव ओखसे देख मक्ते हैं परंतु परदों के घाव में के
चल अधिक पीडामालम होती है और नवतकपीपनहीं पड़ती
कोईचिन्ह घावका नहीं मालूम होती-उपाय इसका यहहै,
कि फस्दसरीस्तरंत करें-और सेसी औषधेदेते हैं जिनसे कन्न
न होने पावै-और जवपीडा होतोस्वीकादूधटपकावें औरने
चहघाव तुरंतन पवनीधीई हई मेथीकालावटपकायें।
अर्थात् मेथी के चीजों को दोपहर तक पानी में भिगोरकवें-कि
र निकालकर वीसगुने पानी में मकावें जववह पानी आधारही
जाय उसको हिलाकर निकाललैं-यही धोई होई मेथी कार
लुआब है-जवधायपककरवहने लगेदूध और शहद मिला।
कर आरखसेडालें इससेघावसाफ़ होजायेगा-इसके पीछे
शियाफ कुन्दर काममे लावे- और जो असर घारभर आने
परभीरहजाय तो जो उपाय सीतलाके दानों के घावदूर करने
काहै-वही काम लावें-और इसके लिये पुरानी हडडीर)
गुलाव में घिसकर लगाना लाभदायक है।
139553-S
३
पंद्रहवापानश्य
कमनाकें बर्णनमें
यह कई रोगोंका नाम है-ऐकर्जव पलेक रोहसे भारी होजाय
और फूल जाय और जागने के पीछे ऐसामालमहोकि आंखों
धूल पडगई है।
दूसरे नवकरनिया के पीछे पीपइकट्ठा होजायला
तीसरे मुलतहिमापरलाली होवो इससे कमदिखाईदे और
रसवचस्तु धुंधलीमालूमहो।
वह जो केवल पलक कारोग है-उपायउसकामलककेरी,
गों में लिखाजावेगा-और करनिया के रोगका उपाययह है कि
मेथी और अलसीकालुभावभाखडालेंकर मवाद को पका
-औरकाईवारगर्म पानी सेस्नान करें-इसके पीछे साफकर
नेकेलियेरुपीमुखी पीसकर आस्व में लगावें-और जोइमसे
लामनहोतों-दस्तकारीकरें और नहीं तो इसे छेडे नहीं रोसा
नहोकि कोई औररोगठखडाहो और नौमुलतहिमाकारोगहै.
इस्कावही उपाय करें जोसौदावीरमद का है-औरमेथी-चा
-और अकलेल उल सुलक-को औराके आखको धार
सोलहवापाउ१६..
मारतोदीकै बिषय में भी
उपाय इसकायह है किशहद कोसोंफकेपानी में घोलका
रखमें लगायें और पोपल कोचकरीयाबारह सिंगे को कले
जी में चुभोकरआगपररखदे उससे जोपानी निकले उसको
भास्वमें लगायें-इससेतुरंतही भच्छाहोजायगा-और जोमवार
क
it दिनोंदीकेविषयमें रास
अधिकहोतो जुल्लावदें और पस्दखोलें।
सतरहबापाठ९७
उपाय इसकायहहै कि लड़की कीमाकादूधसिरप्रमों
और नाकमेंटपकायें और ठंडे पानी में गोतालगाकर उसेमें आ
सें खोलें और उन्नावका शरबतपीयें। नाम
ii
अठारहवापाठ१८
सुदाहिदकह और शकीका चश्मकेविषयमें
यह चहरोगहै कि आखके अन्दर चमक होती है औरतक)
लेसे छिदतेहैं और ऐसामालूम होता है कि आपको कोई
वोवता है और कभीपीडाजाती रहती है और फिर होजातीही
जैसे आधामीमी और रमदकाकोई चिन्ह नहीं होता जोउपाय
आधासीसीका है वही इसकाकरें- और कनपटीकस्मिको
चाटाले-सेसानहोकि कोई रोग उत्पन्न होजाया।
उन्नीसवांपाठ१९
हजूजउलअनके विषयमें
इसमें विना सूजनके भास्ववाहर निकाल आती है- उमाय
इसका यहहै-विजेसा मवाद हो वैसेही उसे साफ करें-
और हडक्सिकर भारवमें लगायें- और भोजन कमर
वाय॥
328258er setting
4
बीसवोपाठ२०
Cr करनियाके उभरआनेकेवर्णनमें
उपाय इसकायहहै-किमवाद गादा होतो उसे साफ़ करें-ओं
रजुरुर अस्परको सलाई से आरंवमें लगायें और गर्म पानी में
हधोयाकरें-और उसकीभाफाखकीदें-करनिया के उभर
आनेको यह चिन्ह है-किडीहोती है-औरसलाईसें नहीं
दवती-और आंसू नहीं होते और उसमें पीडानहीं होती-औरफ
न्सियाजोकरनिया में होजाती है-वहनमहोती हैं और दवाय
सेदवजाती हैं और उनमें पीड़ा भी होती है।
इक्कीसवा पाउ२९
करनियापरफुसी होजानेके विषयमें
जाननाचाहियेकि करनियाकेचारपरदे हैं-कभीसव में फु
सी होती हैं और कभीएकमें-परंतुफुन्सीपड़नेकी जगह किसी
में सफेद दिखाईदेती है और किसी नहीं- उपायइसकायह
है किफ़द और जुल्लाबदें-और पहिले सेसीठंडीजीपर्धेलगा
जोमयादको इधर गिरने से रोकें और इसके पीछे-शियाफ़)
अहमरलीन लगायें फिरशियाफ़ अजियज़ कुन्दुरी 11
बाईसवापाठ२२
भो २१२मोरसिरचकेवर्णन में
यह वहरोगहैकि करनियाकापरदाफट जायऔर उसके
.
तलेसेअनवीयाअपर को उभरआये-उपाय इसकाउरासेपहिले
करें-जबकि किनारे करनियाकेमोटेनपड़जाय और ऐसाउया
यकरें जो अधिक उभरनेको रोकें और अनवीयाकी अन्दरदवा
दें-वह इसयकारहे किधोया इंआशादना और चादी चीनक
लीमीयाजलीहुईसीपी पीस के ओखमैडालें और धोयेहुयेः
शाहनेका सुरमांओख में भरें और जपरसे गंदीरखकरवांधदैया
सीसेकादकडा आखकी बराबर बनाके यासीसेकाबुरादाछोटी
मीथैली में भरके आस्वपर रख दें-और पट्टीसेकसदें और जे
पिसा हुआसुस्मा छोटीसीथेलीमेंभरके रिवपर रकवकर पड़ी
सेकसk-तोगति लाभदायक है-औरजब किनारे करनियाके
मोटे होजायगेतो फिर किसीमकार भच्छानहोगा-इसरोगका
उपाय तुरंत करनाचाहिये।
तेईसवांपाठ२३
भेगाहोने के विषयमें है
इसमें स्कवस्तुकी दोवस्तु दिवाई देती हैं- जीयहरोग जन्म
सेहोतो-अच्छानहीं होसकता-परंतु वच्चोंकोमृगीके रोगसैनी
रसककरवट सुलानेसे या भयानकशब्द सुनकर अचानकचों
कपड़ने सेभीयहरोग होजाता है-उपाय इसकायहहै कि कोई
लाल याचमकदार वस्तु आंग्य के किनारे उसऔर रखदें निधन
किभखका फिराना चाहते हैं-बच्चा हरदमासेदेवेगौइससे
भाख उसकी सीधीहोजाएगी।
जोगहरोगजवानी मे उत्पन्न होतो कारणइसकातशबइम
तिलाईयायाविसहोगा-पहिचानतशतजयाविसकी यहहै।
कि इससे पहिलेगर्म रोगहगहोंगे-उपायसकायह है किर
52
आंखकोतरी पहुंचावें, की
सिर पर धारे-
और पहुिंचान इमविलाई की यह है कि पहिले संगी आई होगी।
औरतशन्सुनामनिलाई के चिन्ह पायेनायगे उपायइसकाम
वादको साफवरना और निकालना है।।
जो आपके टीले होजाने से यह रोगहोतोइसके चिन्ह और
उपाय वही है जोइस्तिरस्वामें लिखेगये।।
औरजोरीहके कारण आंखका कोई परदायारतूक्तजाती
रही होतो आंखफड़केगी उसकाउपाय यह है कि भेजेसे वलराम
को निकालें-और हव्यापारिज़ खिलावें और क्दहज़मी को
दूरकरें।
चौवीसवापाउ२४
समा
5इततिसा और इन्तशारकेवर्णनमें ।
असवेकेचौदादोजानेयाभनवीयाक छेदके वटजाने की
इनतिसावइते हैं और भाव रोशनीफैल जाने की इन्तधारक
हते हैं।
जानना चाहिपेचिइततिसागसवेकेसाथदंतशार अवश्य
होताहै-परंतुरोसा होसक्ता है कि इततिमागनवीयाकै साथ
इंतशारनहो-और कभीरततिसाभयवाभौरवतिसामनवी
पादोनों साथ होवे हैं इततिसायाअसयेकाअच्छाहोना बहुत
कठिन है-परंतु इततिसापानवीयाका उपायकारणले भने,
सारहोसक्ताहै-कारणजानके उपाय करे जैसें चोट लगजान
सेहोवोफस्दसरारू करें और पिंडलियापरपरनेलगायें।
औरजी किसीमवाद की अधिकतापारवत्वोंजयाकी
है.
अधिकतासेंहो-जैसाकिवच्चोंको भाकरताह-याअनवीया।
कीसूजन से होतीफस्ट और हुकनाकरे भोरजोभनवीया की
श्कीसे होतो-चिन्ह और उपाय इसकाजीफाक्सर एक्सीकेपा
समें लिखाजायमा
पच्चीसचापाउ२५
अन्नवीयाके छेदकेसकडा होजानेकेविषयमें
यहरोगजन्मसेहोतोबहुत अच्छा है-इससेदृष्टितीब्रहोजाती
है-भोरजोकिसीरोगसेहोतोष्टि कम होजाती है-पहिके देखें
किकारण इसका इनवीयाकीतरी है याखुश्कीयारतूबवैजिया
कीकभीखुश्की औरतरीके चिन्हसहन में मालूमहोजायगे
औररतूबत वैज़िया की कमीका चिन्ह यह है कि आपकोटी
होजायगी और वस्तुभली भोतिदिखलाई नदेगी और केसूस
नवीयाके कड़े होजाने और बिगड़ जानेसेभीयहरोगहोता है-
उसका चिन्ह पहहै.पुतली नदिखाईदे-जवकि अनवीयाकी,
खुश्कीयारतूवत वैजियाकी कमी के कारण सेंयह रोगहोतोच
हियेकि भाखेको तरी पहुंचावें-औरजवरसूक्त अनवीयाकी
अधिकतासेहोवो उसत्तरीकोदर करें और कैसूस के विगहाजा
नेमें मवादकोसाफ़ करें औरतरीभी पहुंचा।
छब्बोसचापाउ२६
खयालात के वर्णनमें
इसमें भारवले आगे नगेसेउड़तेमालूमहोते है पर
-
9.
शा
เด
अहाईसवापाउ२८
७ असवे में सुक्षपडजाने के विषय में
जोयह विनामोतियाविंदके होतोचिन्ह उसकायह है कि युत
अन्ली पूरीअच्छीदिखलाईदेगी और सूजननहोगीपरंतुदिखला
ईनदेगा- उपायइसकायह है किभेजेसेमवादको निकाले गोर।
कोयेकीराकी फ़स्दलें और कानपटीकी रगपरजोंकलगाई
और पिंडलीयरपछनेलगावेंऔर पांवकोमले।।
उन्तीसवांपाउर्द
आखके कमाहोने केविषयमें
जोयह रोगजन्म से होती उपाय इसकानहीं होसक्ता और
विसीरोगसे होजायनोचरसल अॅन कहते हैं-उसका उपाय
कारण के अनुसार करें।
जातरीकी अधिवातासेहोतोदेहको और भारवीको मवाद
से साफ़ करें और जास्तुश्कीसेहोतोतरी पहुंचा।।
यहरोगगोरखुश्कीसे होवाई-उसमें सुझाईनहींदेता उम
में औरमोतियाविन्द मेंयह अंतरह किमोतियाविन्द में पहि
लेखयालातकारोगअवश्य होगा और इसमें यहवार नहीं है।
तीहै-आँखवली होजायगीभौरदस्तकारीसे लाभनहोगा
यह रोग जोवच्चाकी आख होतोजवान होने परजावारह
पना तीसोपाठ३०
जोफवसरअर्थातकमदृष्टीकेबियमें
गोकारण इसवारुधिरकी अधिकता होतोफ़रदकरें और
रुधिर केवदलजानेकोरोगकहते हैं और जूतियाको कच्चे और
बहे गरकरसमें भिगोकर आंख में लगावें. और जोयह वलग
सकेकारण से होतो उसके पकाने के पीछे वलरामकाजुल्ला
चढ़े-और चासलीकून आंख लगावे-औरजोइसका कोईऔ
रिकारण होती उपाय उसकाकरें-वुदापे में यह रोगबहुतहोताहै-
उसकाउपायनहीं होसक्ता-परंतुवचाव के लिये वलगमकामा
वादनिकालें और जवाहरातकासुरमालगायें।
इकत्तीसवीपाठ३१
वतलानवसारत के विषयमें
अंधेरीजगहमेंबहतबैठने से घष्टिधुंधली होजाती है-यार,
तूबत पैज़िया काली पड़जाती है- उस्से यह रोग उत्पन्नहो
आंख में वासलीकनलगाये और हल्की हल्की औषधे
गौरमोजनखायऔर जो अचानक अंधेरैकेाहरनिकल आ
नेके कारण से यह रोगउत्पन्न होतोनीलाअस्मानीरंगकाकप
जा आँखापरडाले रहैं-या आस्मानी रंगकी अनकलगायें -
और हल्कामोजनखाय औरभूखे रहने और मैथुन सेवचते
रहें-और रातको कुछ न खाय॥
तृतीसापाउ३२
चुन्धाहोने के विषय में॥
इमरोगमदिनकोकम दिखाई देता है-यह जन्मसेहोतो
इसका उपायनहीं होसत्ता-परंतुपरकीऔर आँखके परदोरे,
यो सह
कालाकरने का उपायकरें-वह इस प्रकार से हैकि- वनफी
औरवादामके तेल से काजलवनाकर आंखों में लगाया करें-
इस्सेदृष्टि पुष्ट होजायगी॥
तेतीसवांपाठ३३
कुनरअर्थातदृष्टि कथकजानेकेवर्णनमें
यहरोगसफेद और चमकीली वस्तुओंपरजैसेसुययावरफार
दिक है-दृष्टि जमानेके कारण से उत्पन्न होजाताहै-उपायइन
का यह है कि कालाकपड़ाआंखोंपरलपटावें-और पहनने गौर
विछानेके कपड़ेगी सबकाले स्कवें-औरदध में कपडा भिगोरा
रआरबोंपरररक्वेंयावीकादूध आंखोंपर दुहे-और कवेः
वादामपीसकेया कुचलके आंखोंपरवा)।
चौतीसवांपाउ३४
आखकेदुवलाहोनेकेविषयमें
इसरोगमेंदृष्टिकमहोजाती है-उपायउसका यह है कि
आखकोतरीपहुंचायें और जोकोई सुहाहो उसे निकालें।
पक
पैंतीसवापाउ३५
बुगजुल अनके वर्णनमें
इसमें धूप और रोशनी की ओर देखनाचुरालगता है-जोय
हरोगगरमीसेहोतो-ठंड और तरीपहुंचाचं-और जोरमद
दिके कारण से होतो पहिले उसेदूर करें।
आंखकमिज़ाजपहिचानने कीरीति।
ह
आखका मिज़ाजगर्म गौरतर है-औरजोइसके विपरीतहोतोना
नलोकिकोईरोगहोगा।
अपरसेछुने मेखि गर्म मालूम होऔर डोरेरंगीन हो और
आखजल्दीर फड़के-तोयचिन्हगरमीकाहै औरसरदीकेचि
न्ह इससे विपरीत हैं।
जोआंखसेचीपड और भासूचहतनिकलें-और फूलीहुई
दिपाईदै-तोयहचिन्ह तरीकेहै-औरखुश्कीके चिन्ह इससे
विपरीत हैं।
काली ओखसयप्रकारकी आरयों से अधिक गर्म और तरहो।
ती है-इसीलिये सेसी ओखमेमोतियाविन्द औरश्गरमीके
रोगवहुधाहोते हैं-परंतुबहुत मनुष्य यह कहतेहैं-कितनी
ओखम मोतियाविन्दवहत होता है।
तीसराअध्याय
पंपोटेऔरपलककेरोगोंकेविषयमें
पहिलापाठ
कमनाके विषयमें खंबानी
कमनाउसको कहते हैं-किमनुष्यजवजागेतो आखीख
रिक होजैसेरेत पडगई है और थोडी देर पीछे यहषटकजातीर
है-पहिले इसमें जुल्लाचदें और-थियामा अहमरेलीन-और
शियाफ़ अहमरहाद लगावें और गरमपानी से स्नान करनाभी
लाभदायका है।
वारा
ए
दूसरापास२
पपोटेकेटीलाहोजानेकेविषयमें
पहिले मवादकोनिकालेंइसकेपछिल्लुजा-अक़ाकियाम्
रिमझीपीसकरपलकऔरमाथेपरलगावें- और जो;ससेलाम
नहोतो पलककाटनी पडेगी-इसकी रीतिदस्वकारजानतेहै और
नाकामीतस्कारगकीफ़स्टकरनावहुत अच्छाहै।।
तीसरापाठ३
पलकोंकआपसमेंचिमटजानेकेविषयमें
सहरमदकेपीछेयामलक्काटने के पीछे यासवलयानाखूने
मे होताह उपाय इसकायहहै-किसलाईसेदोंनोपलकों को
छुटा,और फिर जीराऔर नमकचवाकर पानी उसका भाव
डालें-औराई रोगन गुलमें भिगोकेपलकोंकेवीचौरक्वें-
और अंडेकी ज़रदी मेंरोगनगुल मिलाकर आंखो अपरमात्र
चौथापाठ
पलककेछोटेहोजानेकेविषयमें
इसरोगमें जपरकीपलक सुकड़जाती है और नीचे की पलको
वाहर पलट आती है औरदोंनोंपलकेवरावरवन्दनहीं होती
इसरोगके कारण-पपोटेकेटोलाहोजानेकेकारणों से विपरीति
है-और अधिकमासनोपपोटे में होजाताहै-उसे काटकर नि
कालनेसेमीयहरोग उत्पन्न होताहैजोपहविसीमबाद में
होतो-पहिले उसमवादकोनिकालें फिर कारणके अनुसार
इसका उपाय करें औरजोदस्तकारीहोसके तो उसेमोकरें।।
१
शिरैनाककेविषयमें yersy
पांचवांपाउय
इसमें पलक परनर्ममामहोजाने से पलकामोटीहोजाती है-
और आरदों में यानीमरारहता है उपायइसकायह है कि पहिले
सवादको निकालें और फिर आंसुलानेवाली औषधे आखड़ें
डालें-और जो इससेलाभनहोतो दस्तकारीकरेंऔरयेक्तुन्
खावें जो हानिकरती हैं।
छठापाट
पपोटेकअपरगांउपडजानेकेविषयमें
उपायइसकायह है-पहिले नर्म होने के लियेमोगरोगनल
गायें और पिरमरहमादलीयूनलगावं-नोकाटने को
ग्य होकाटे और कोई मवाद निकालना होतो उसे भी लिए
कालें.
सातवापाठ
शेरमुलकूलिब औरशेरजायदकेविषयमें
जोचालपलकके उलदेहोकर आंख मेंजालगेंऔरचुमाक
करें उसे शेर सुनकलिवकहते हैं।।
ओरजीवाल पलक के सिवायअपनीजगहकोभीतर कीओ
रनिकलें और उनकेचुमनेसे भाख खटकाकरेंउसको शेर
उपायइसकायह है-किपहिले सवाद को साफपारें
जायद कहते हैं।
M
.
फिरवहवाल जो नये उगेहैं मोचनेसे उखेडें और उस जगह पर
नोशादर रंगडदें-औरचे टीके अंडे औरइजीरकाध
धऔर
उसकलीलीका सचिरजोकुत्तेपाऊंटके वदनुपरहोतीहैया
हरे मेंडकाकारुधिरयाहुन
एकासित्ताउसजगह परमलें-और
समन्दरपान ईमवगोककलुभावगेपीसकर लगानाचाल के उ
त्पन्न होने की जगह कोशून्यकरदेता है।
और शेर मुनकलिवका उपाययहहै कि-दिवक कालामाका
गाकर सीधेवाल के साचिमटादें फिरचालनचुमें
र जववालको उखाडे तोचारीकसलाईसे उस स्यानचोदाग
देऔर जहांचालही उसजगहको काटडालना और सीव देना
भोइसका एक बड़ाबाडाउपाय है।
आठवीपाटन
पलकोंकेकड़जानेकेलिपयों
जोयहरोगनुराभोजन खाने से यापित्तोंयासौदाके अघि
बाहोने गेनोतोउसमवादकोनिकानें- और जीएलंक की क
मजोरीमेझोतोजेसा-करानी तेस-औरगर्मतपके पीछे होगा।
तो उमजगहको पुष्ट करना और तरी पहुंचाना चाहिये और
लासली कून और रोशनाई सुरमा आम्बम लगायें-और जो यह
रोगबलगम के अधिक होने से होतो क्लगमको निकालें और
पए करने वालोवस्तुकाम लावें।
और जो कोई साकारणहो किमोजन उसजगहतक न पहु
चसके तो उसकारणकोइरफरें।
नवोपाठ ॥ पलकोंकेसफेदहोजानकेविषयों उपायइसकायहहै-किपहिलेवलगमकोइरकरें फिरज गलीलाले केपते जेत के तेल में मिलाकरमले और मुरमारोश नाई सलाईसे आखमें लगायें। दसवोपाठ पलकमेंखुजली औरफुन्सिया होनेकेविषयमें जैसामवाद हो उसके अनुसारउपाय करना चाहिये और वरुदकनफाजी आंख में सुस्म कीजगहलगांवें मानि ग्यारहवापाठ २२. धारा बरदाकै विषय में बरदारकमवादगादा और सफेद मोलेकीसदृशपपोटे के पर उत्पन्न होजाताहैजपाप इसकायहहैं-किमोमरोगन भौर- दाखलीयूनलगाये इससेनमहोकर उजायगा और नहींतो काटकर निकाल लें। वारहवापाठ ९२२- पलककेमोटे औरकड़े होजाने के विषय में । जवपलकमोटीऔर कड़ी होजाती है तोआंखक्न्दकरला और खोलना कठिन होजाताहै- और पहरोगसौदाके मवादले होता है-इसलिये उपाय उसका यहहै-किपहिले सौदोको ये कावें और मवाद निकालें-और उसजगह को नर्म करें और "
अकलील लमलक-वाचूना-बनफशा-खतमीपत्ते-पा
नीमें भीटाके आंखपरभपारादें ।
औरजो बिना किसीमबाद के इस ग्रेगखजली होती उसको
यवूसतुल जैन कहते हैं।
तेरहवांपाठ १३
पलककेमोदेओरलालहोजानेकेविषयमें
इसरोगमें पलक के किनारेवहुधामोटे होनाते हैं-उपाय इस
कायहहै फि-पहिले मेवोंकानुकूआपावें औरसगाककोगुलाव
में भिगोकर पानी उसकारपकावे-और फिटकरी और कुलफा
औरकासनीकेयत्तोंकोरोगनगल में मिलाकर लेपकरनाला
भदापकहै।
जवयहरीगपुरानाहोजायतोपाहिलेफस्द और मुल्लाव,
फिर शियाफअहमरलीन आंख मेंलगायें।
चौदहवीपाठ१४
पलकों मेंजूयेंपडनेकेविषयमें
यह रोगवलगमसेहोताहै-पहिलेवलपमका मवादनि
का-फिरफलक मेसेजुयें चुनें- और जोछोटा होने के कारण
चुनना कठिन होतो फिटकरी और नमककोऔटाके पलक
कोधोवें-और योडीदेर सलाईकोपारे में स्कवकरहोले से
हाथसे पोंछ और आपमें फेरें-पहजूॲमारने की अति
लाभदायक है।
.
॥
पदव्यापाठरण
गुहाजनी के विषय में
यहरुकसूजन है-जोजोक सहसपलकपर उत्पन्न होती है।
जोअवश्य होत्तोमवादनिकालें-नहींतोन्सोत,औरसलुवा और गिले
अरमनीहरीकास्नीके पानीमें पीसकर ओखपरलंगालें-फिरवाव
लीयून और मोमगरमकरकेलगावें जोइस्सेलाभनहोतोनातूनसे
कुरेदडॉलेंयाकेंचीसेकाटडालें-औरथोडीदेर रुधिरवहने)
जिलदीवंदन करें-फिरनेरुर अस्फर उसपर छिड़करें।
X
सौलहवापाठ ९६
तोसतुल अज़फ़ानकेविषयमें
शहतूतकेसहसस्कवस्तुनीचेकी पलक के अन्दर उत्प
न्न होती है-उपाय उसका यहहै-किफस्दऔर जुल्लावके
पीछे दस्तकारीकरें- और काटके जीराऔर नमकच्वाकर
उसपर टपकावें॥
सतरहवापाठ९७
तहेजुरजफन केविषयमें
इसमेंपलकपत्थरकेसदृशकडीहोजाती है और यह सौ
दाकैगात्मवादकेबनजाने से होता है-भौरइसमेवरदेसे
अधिक पलक मोटी होजाती है-उपाय इसकायह है-कि पा
हिले मवादको निकालें-औररोगन मोम कोपिकलाकेला
गावे-औरकमीयहरोगफोडेको तुल्य होजाता है।
-
अदारहबापाठ१०
पलकोंघाव पड़ने केविषयमें
इसमें मसूर अनार और पिस्ते के छिलके सिरके में पकाकर
लेपकरें औरजवखंडगिरनेलगेतोअंडे की ज़रदी केसर में
मिलाकरलेपकरें।
उन्नीसवापाठ ९९
पपोटोंक फूल जाने केबिषयमें
जो यह जिगर और मेदेकी कमजोरी के कारणसे होतोप
हिले उनकोपुष्टकरें।
औरजोविलगम के अधिक होनेसे होतोइतरीफल खिली
यें और फस्वकाफाल करें-और शियाफमामीरा औरचर
दनहरे धनिये के पानी में पीसकर लेपकरें।
बीसवांपाठ
पपोंटों में मस्सेपडजानेकेविषैमें
इसमें पहिले सौदाकामवाद निकालें और कलोंजी औरना
सकको पीसकर सिरकम मिलाकर लगायें-जोइससे लान
नहोयतो मोचनेसेदवा के-नाखूनगोरीयानश्तरसेका
टंडालें-औररुधिर बहने दें फिर घावपर फिटकरी छि
डकदें किरुधिर वन्दहोजाय।। .
इक्कीसवापाठ
पपोटॉपरेपित्तीउछलनेकेविषयमें
.
.
॥
इसमेंखुजली औरसूजनहोजाती है-जैसा किमिडकईक से हो
है-उपाय इसकायहहै कि फास्द करें और पित्तका जुल्काव।
और शोदने दसी-धोया हुआ भीखमें लगावें॥
वाईसवोपाट-२२
निमलयपलक केविषयमें ना
इसरोगमेंपलकपरफुन्सिया होजाती है औरयोडीसीसूज
और जलनभी होती है और घाव पडके फैलताजाता है-पत्न
मवादनिकालें-और रसोत और सलुआघिसकर पलको
iग तेईसवापाठ २३०. : 15:
पलकपरसेभूसी उड़नेकेविषयमें
कभीइसमें चावभीपडजाता है, जोरंग इस सी का मैला
होतोसोदाकांजुल्लाव दें-और जोसफेदहोतोचलगमका फिर
शियाः अहमरलगांव-और जो यह रोगपुराना होनायतो पछने
शकरमलें-और सुरमारोशलाई ओखमें लगावें।
चोवीसचापाउ२४
सुलांके विषय में
यहरकवखुचाम और सास से जुड़ी,पल्लक परवदजाती
है-उसापइसका यह है कि मवाद निकालने के पीछे उस
कोकाट कर अलग करलें ।
पच्चीसवापाटा
चोटसेपपोटे कानीलायाहराहोजानेकेविषयमें
जोधावभीहोजायतोफस्दभीरजुल्लाव-औरचन्दन
और मुरदासंगकोगुलाब में घिसकर मलें और जोधारनहोतो
कोरीटीकरी पानी में घिसकरलगावें-यहसबजगहकीनी
लाइटकोदूरकर देती है।
छब्बीसवांपाठ२६
कोयेकेपासनाककी ओरनासूरहोजानेके
षयमें।
फस्ट औरजुल्लावकेपीछे शियाफ़गईटपकायें परंतुपहि
लेघावकोराईसेपोंछलें और पीपकोसफिकरडा और नौ
षषकेपमीवके लियेमुदीर मास काटडालें-जोइससेला
भनहोतोदागर्दै-और मरहम भस्फेदाजलगावें।
यहनासूरवन्द होकरफूकनाता है-ऐसेसमय में कनोचे
के चीजस्त्रीकेयर्मयागधग्याकेदुधमें पकाके थोडीसी के
सरमिलाकरलगायें-इससे फूटकर फिर वहेगा।
सत्ताईसवीपाठ२७
कोयेऔरपलकमेविनानलनऔरदानों केसु,
जलीहोनेकेविषयमें
जोयह रोगाधिरसे होतोफस्द करें-औरऔर मवादों में
उन्हीमवादोंकी निकालनेवाली औषधी देकर कैकरावें और
कासनीको कूट कैगुलरोगन में मिलाकरलेपकरें-औरजो
कोयेको भवाइसेसाफ़ कियाचाहैं-तोवासकीकृन और
कुहल अजीजीलमायें।
७६
अहाईसापाठक
कोयमेनाकंकीओर अधिकमांसहोजानेकेविष
यमें॥
"उपाय इसकायहहै किपहिलेभवादकोनिकालें फिरशि
याफ़जंगारयामरइसजंगारलगायें-किअधिक मांसकटजाय
जो इससे लाभनहोयतोदस्तकारीसेकाटडाले-और जरूर
अस्कर छिडकें औरपीडोके दूर होने के लिये-अंडे की ज़रदी।
रोगनगुल में मिलाके मलें इसके पीछे भरावकी मरहमलगा
लर
चौथाअध्याय
.
कानकेरोगोंकेविपमें
। सुनना चाहिये कि कान श्रेष्ट इन्डीहै और सबइन्द्रीयों से
भिधिक है-इस्करोगजोमवादसेहोउनमेंट्वाकान में नडा
लनीचाहिये-और जोडा भी तोगुनगुनीकरके-क्योंकि
उण्डी औषधंहानिदेती हैं।
पहिलापाठ
कानकेदर्दके विषयमें
जोयहपीडायासजन घावके कारण सेहोतो उसका उपा
यआगेलिसेंगे-और जो किसी मवाद से या केवल गरमी सेही
चो-फस्द दिसे मवाद निकालें और जो केवल टंड सेहोती
-
उसका उपायकरें और मवाद की पीडा में मवाद निकालने के
पीके उसके अनुसारडपायकरें और कान में पीड़ा कीड़ेके घुस
जानेयापानी कीचूद्रहजाने से होतो उसे निकालनाचाहिये
और एक पावपरखडहोकर कूदना उसकानपरहाथ धरकरनि
में पानी है और सिरको उसी ओरमुकाना पानीको निकाल
देता है और जोइस्फंज(अर्थात्मराहआवादलाकीक्तीब
नाकरकान में रकबे और उसी और देरतकलेटरहेंतोसबंपा
लीनिकल आवेगा।
जोकान में कीड़े उत्पन्न होजाने के कारण यह पीड़ा
होतोचिन्ह उसका यह है-किकान मेंगुदगुदीमाळूमहोगी।
भौरकभी कीडाआपसेआपभी निकल आवेगा-इस्मै शफ़
तालूके पत्तों को मोटाके या उसका रस निचोड़करकान में
टपका-याएलचा सिरका में घोलकर टपकायें-इस्से की
डेमरंजायगे-फिरसूफ कीक्ती बनाकर उस्में सरेशमलकेर
काल में रकचे-कि कीड़े उसपर चिमटकेनिकल आवे-फिरन
विधावसाफ होबाय तो उसंघाचका उपाय करें।
दूसरापाठ
कानकीसूजनकेविषयमें
पहिले जुल्लार दें इसके पीछे देखें-किसूजन छिद्र के
भीतरहैयाबार-भीतर होनेका चिन्ह यहहै,-सुनाईकमदे
गा-और पीडा अधिक होगी औरतपभीहोगी इस्में दर्द की जी
प्रधहरे धनिये के पानी में घिसकर कान के ऊपर और भीतर
लेपकरें और लड़की की माताकाधकान में दुहैं भोर जोइस
सेभीनयंभे-तोमेथीयाअलसीकालुआवटपकावकिपकना
यऔर पीपपड़े।
जोसूजनकानमेवाहरहोतोआंखसेदिखाईदेगीनतप हो
गीनअधिकमीड़ा-इससमयरेसीठंडी औषधेजोमवादनिका
लनेसेरोक-लगानानचाहिये-परंतुरीसी औषधेलगायें-जो
सूजन कोपकावेंऔरचिठादें-औरजोपीडाअधिक होतोकपड
गर्म पानी में भिगोकेयानमगर्म करकेसेकें-औरदोदिनषी
छैकर्मकल्लेकेपत्तेपुरानेघी पकाकेसूजनपरवांधे-इससे
सूजनबैठनायगी॥
यह उपायगर्मसूजनकाथा-परंतुजोवलगमीसूजनहीं
छिड़केभीतरयावाहर उस्में कमसुनाईदेगानवपहोगी-औ
रनपीडाअधिक होगी-केवलवोमऔर रिवंचावमालूमही
गा-इस्मैमूलीयासोये कातेलमवादनिकालने केपीटप
कानालाभदायक है।
तीसरापाठ३
कानकेघावके विषयमें
चिन्हउसकायहहै-किपहले सुजनहोगी-फरपककर
टैगी औरघाक्सेपीयवहेगी-शहद मेंजरेतकोपीसके
वित्ती लगाकरकानमें स्कवे-फिरअंजरुतदम्मुलगखदैन
कुन्दरपीसकरछिड़केन्यारोग़नगुलमै मिलाकवत्तीमेंक
गाकेकानमेंरक-औरजोपीडाविषेशहोतोअफीमजला
करावग्सकीजुन्दवेदसतरमें मिलाके कानमें छिचया कि
सीतेल में मिलाकरंटपकावें।
.
चौथापाउ४
तरशऔरवकरऔरसममकेविषयमें
जोकमसुनाईदेउसकानामतरशहै-औरजोकुलमीनसुन
ईदेतोवार और जोकानकाछिद्रपूरावन्द होजायतोसममहे
जोरकसीइनशब्दोंकोस्क दूसरे कोजगहमीचोलते हैं-
साकारणहो उसीके अनुसारहोले होलेमवादकोनिकालें-
औरजोवोहरीन के दिन साहोतोउसकाउपायकरनाचाहिये
औरजोदापेसेयापैदायशर्के समयसेहोतोकभी अच्छान
होगा-परंतु दूधपीतेवच्चेकोयहरोगहोतोसातरऔर नमक
यत्रावें औरसकबूंद उसकी कानडालें।
पांचवांपाठय
किसीवस्तुके कान में पड़जानेकेविषयमें
जोकोई कंकरयांदानायापाराकानमेंपडजायतो-रोगना
गुलवानमेंडालकरछींकलिचावें और छींकआनेके समय
मुखऔर नासिकाबन्दकरतोजोरकानकी आरपड़ेगाऔर
चहनस्तुनिकल आवेगी-औरजीपानीघुसगयाहोतोवालि
श्तभरकी सोंफकीलकडीलेकर एकभार उसकेसईलपेटें-
औरतेलमें भिगोकरजलावें और दूसराछोर उसकाकानमेंर
कवें-इससे जितनापानीभीतर होगा निकल आवेगा-औरों
कोई छोटाकीडाकानमेंचलागयाही उसकाउपायवहीहै
नोकीडोंके निकालनेका है।
छठापाठ६
तिनीनऔरदवीकेविषयमें
Sir
जोभापसेआपकानमेंतेज़ औरवारीकआचान मकवी
कोसी मिन मिनाहटके अनुसारसुनाईदेती है उसेतिनीचा
कहते हैं।
औरजोनमऔरभारीआवाज़होतोक्हदवीकहलाती
है-अर्थातचक्कीकीसीआवाज़पहिलेइसकावारणमाका
मकरें औरउसीके अनुसार उपायकरें-औरजोशवणकीइन्द्रीतज
होने के कारणसेयहरोगहोतोभारीवस्तुखायें जैसे हरीसा॥
: सातवापार
कानसेरुधिरनिकलनेकेविषयमें
जोकारणइसकारुधिरकीअधिकताहोतोफस्दसेवहुत्सा
रुधिरनिकालें-औरजोकिसीचोटकेलगने सेहोतीफस्दसेरुधि
रकम निकालें और फिरमाजूकोसिरके से भौटाके कानमेंडा
लें-औरजोबोईरान केदिनकान सेरुधिरनिकले नोउसेवन्द
नकरें-जबतककिरोगीकोसू नभाजाय॥
जोजुरीकासांप के काटनेसैरुधिरनिकले उसकाउपाय
कितावके अन्तमें लिखाजायगा।।
आठवांपाउच
कानकेट्रटेजानेकेविषयमें
पहिलेफ़स्टकरें-औरनर्मकरनेवालीऔषपिलावे-गो
रसेलुवा सुगौम-अकाकीया रानीनज-औरमेहंदीके सूखे
पत्तेपीसकर उसजगहलगावें।
नवांपाठ
जडसेकानके उखड़जानेकेबिषयमें
पहिलेफस्दकरें फिरनर्म करनेवाली औषधिपादें-और को
नकोअपनेस्थानपरजमाकेगहीरखकर पट्टीसेवांधदें-और
जो पीडारहजायतो-बतखकीचरबी पिघलाके उसमें खतमी
केयत्ते औरघीयेके छिलकेमिलाकेमलें।
दसवांपाठ १०
कनकट्टी केविषयमें LE
यहरोगवहयावच्चोंकोहोता है।
कंधों केवीचमें औरकानकेतलेंजड़में पछनेयाजोकें।
लगायें-और उसजगहको स्वीके दूधसेधो-औरमुर्दासंग
रकभोलापीसकरछिडकें।
ग्यारहवांपाठ१९
कानखुजली होनेके विषयमें
इपासन्तीन कोसिरके में औटाके और कड़वेवादाम काते
लउसमें मिलाके कानके अन्दर डालें।
वारहवांपाठ१२
कानमेंचीखकीसीआवाज़मालूमहोनी
सेसी भोपऔर भोजनस्यायें और सूजीभेज को पुष्ट
10041
P
करें।
पाँचवाअध्यायय
और।
नाककेरोगों के विषय में .
नाकमें दोरास्ते हैं स्कमेजेकी और दूसरागले की
पहिलापाठ९
खश्मके विषयमें
यहवह रोगहै किसूचनेकीइन्द्रीजातीरहतीहै-और कि
सीवस्तुकीचासनहीं आती॥
जोनाकमेबुरेमांसके उत्पन्नहोजानेसे यह रोगहोतो-
उसका उपायूत्तीसरे पाउमें इसीअध्यायकेलिखाजावेगा-और
जोसूजन या मुद्देके कारणसे होतो-जानना चाहिये कि किस
मवाद से है और जोकेवनगरमीया ठंडसेहोतोउसके चिन्हस
इजसेमालूम होगायो- कारण के अनुसार इसकाउपायकरना
चाहिये-और जीयहरोगखुश्की औरतशन्नुज के कारणसेती
औरगर्मरोगों के पीछे होतोउयायवहुतकमहोसकेगा
दूसरापाठ२
सूंघनेकीइन्दीविगङजानेकेविषयमें
इसमें कुछरवासमालूमहोतीहै-यहरोगतीनप्रकारका,
पहिलीमकारसववस्तोंकीवासस्कसीमान्महो-दूसरेर
यह कि एकवस्तुसेकईमकारकीवांससूचीजाय-तीसरेयह
कि किसीवस्तु कीवासआवे और किसी की नआवें अर्थात
गंधमालूम हो औरखुरीवासनमालूमहोयावुरीचास मालूम
होऔरसुगंधनमालूमहो-उपायइसका यह है किभेनेको
मवादसे साफ़करें-औरजोनाकके भीतर पाचहोती उसे अ
च्छाकरेंऔरजबकेवळ सुगंधमालूमहोत्तोजुन्दवेदस्तर
कीनासलें औरजवकेचलचुरीवासआवैतो मुश्कको नाकमें
टपकावें-औरजोयहरोगपुरानाहोजावेतोसुगंधानेमें मुध
क और बुरीवासमालूमहोने में जुन्द बेदस्तरनाकमेंडालें।
तीसरापाउं३
नाकमेंबुरामांसउत्पन्न होनेके विषयों
'पहिले फस्दुस्खोलें औरजोकलगावें और भयारिजकाजु
ल्लाबदें-फिरअशनान और जंगार और सुरमक्की तीनोंवरा
शविरलेकरपीसकेमरहम वनाएकवत्तीलगाके कान कमीत
उसमासपररका किचहगलजाय-औरजोइससे लाभनही
तोनश्तरवाचाकूसेकारडालें-याघोडे की दमके वालोंको
बिटकर और गांठेलगाकर मांसकोकाटें और फिर मरहमस
फेदेकालगावें॥
चौथापाठ४.
नाककेघावके विषयमें
• जोयहत्तरीसेहोतो पहिले मुरदासंग-रोगन गुल में मि
लाकर लगायें-औरजोखुश्कीसेहोवो केवल मोमरोमन
हीसे अच्छाहोजायगा।
पांचवीपाठ
नाक कीफुन्सियों के विषयमें
इसमें पहिलेफस्द औरजुल्लाबदें और जीवहकडीही
तोनम करने के लियेमोमरोगनलगाये-जोइससेभीलामन
होतो पकने लगावेंऔरमरहम तेजॉबीसे उनकोगलादें-फि
रिघावमरजानेकेलियेमरहमसफेदालगावें।
छठापाठ६
नकसीरकेविषयों का
।
बाहें और जांघे औरअंडकोशंऔरकानऔर छातियां और
पिंडलियांकसकरवाये और गद्दीपर पछतेलगाव और जिगर
परसींगीलगानाभीलाभदायक है-जोरुधिरदहनेनथनेसे
भावे और तिल्ली के जपरवानथनेसे निकालें-तोगधेकी
हालीदको निचोड़करउसकेपानीकी दोतीनन्हें नाकमें डाले
और मकडीकाजालास्याहीमे मिलाकरऔरचक्कीकीगा
डन उसमेंडाल करनाकमेंटपकावें-औरसरेशमुलतानीम
टीमें मिलाकर सिरपरलेपकरें।
और जोमधिरकी अधिकतासे होतो फस्दलें और रुधिर,
जितना अवश्यहोनिकालें-चाहिएकवार में औरचाहे कई।
वारमें-औररूधिरजोपतलापड़गया है उसके गाटाकरने के
(लिये जन्नावकाशास्वत आदिपिलावें औरमसूरकीदालर
औरचायल नीबूनिचोड़करखिलावें।
जोतपयामेनेके रोगोमेनकसीरफूटेतोदेखनाचाहिये
किचोहानसे हैयानहींजोवोहरान होतो कभीबन्द नद
रेसेसानहोकि कोई कडारोगस खडाहो परंतुसूच्छीका
डरहोतोवन्द करदें औरजोवोहरानसेनहोतोउचित उपाय
करें-जबमैजेकेरोगों में नकसीर फोड़ने की आवश्यकता
होतोभीतरनाक की जड़मेवह औज़ारचुभारोंजोइसकाममें
आताहै-और जोकुंदश-मवीज़न औरफरफ़ियून कोकू
टकर औरवत्ती में लगाकर नाक के भीतर रकवेतोरुधिरनि
कलने लगेगा।
सातवांपाठ
नाकमेंबुरीगंधारना
जोफुन्सियांधाबके कारणसेहोतोनही उपायकरें-जो
ऊपर लिखागयाऔर जोभेजेके मवाद के सहजाने सेहोतो-
पहिचानउसको पहहै कि सिरमें कोई विगाड़ होगा औरनों
मिहेमें मवादकेसडनेसेहोतोमेदेकेविगाह से पहिचानाजा
यगाउपायइसका यहहै कि मेदेऔर सेजेकोमवादसे साफा
करें-और शिकंजबीनगौरराईके फेनसेकुल्लीकरें और
कोई सुगंधनाकमें डालें।
आरवापाठ
नाककुचल जानेकेविषयमें
जोसूजन होनेकाडर होतो जल्दीसेफस्दले-और नावं
कोठीक करें-परंतुइसप्रकार से कि सांसनेमो इसका
उपाय यह है कि छूछीपरमरहमलगाकेनथनों में रखें-जववह
सीधीहोजाय-सस्वा-अकालीपा-सुर्रमक्वी-पीसकरवार
तंगपानी में मिलाकेकागनपरलगाके ऊपर चिपकादें-
औरजबतकअच्छीनहोछूछीनाकसेननिकालें।
नवापार
वहुतसीछीकें आना
रोगनगुलसुगंधकानाक में डालें और गुनगुने मीठे पानी से
सिरकोधारें और गुनगुनातेल कानमेंटपकावें-और हाथ पांव
आस्वकान औरतलू मलें-और जोयहरोगलड़के को होतो-
वकरीकागुरदासूनके उसकापसीनानाकमेंडालें-प्रभावके
अनुसारकींकानाचंगेहोने काचिन्ह है-और अधिकछीके
भेजेकेविगाडकाचिन्ह है।
दसवांपाठ१०
नथनांकासूस्वारहना
जोकेवल गरमीसे होतोठंडीऔषधेदें-और जोखुश्कीसे
होतो-तमकरनेवालीवस्तु-जैसे बादाम कातेल आदिनाक
मेंडालें और इस्वीकाधनाकमैदहें-औरजोकिसी गदिम
वादकेचिफ्टजानेसेहोतो नर्मकरने के लिये रोगन नाक में
डालें।
ग्यारहवांपाठ१९
नाकमेंभीतरखुजली होनेविषयमें
जोडीडवापहुंचने से होतो-भेजेकोठीककरें औरइत्री
-
"
फल खिलावें-औरजोसीतलायाजुकामयानजले काचिन्ह
दीरव पड़े तो उनका उपायकरें-जो चाहरसे कोईवस्तुजाको
पिवजाय औरफंसरहेतो-तेलनाकमेंटयकाके नाकमलें
और मुंहबन्दकरके छींकलिवावें-तोवह चीजनिकल पडेगी
औरकमी रोसाकरने से मुंह में होकरमीनिकल आती है।
करवा अध्याय
मुंह औरजीभकेरोगों के विषय में।
पहिलापाठ
जीमकोसूजनकेवर्णनमें
कारणके अनुसारमयाम को निकालें-औरजोसधिरया
पित्तसेहोतो-तीनदिनके अन्दर काइकासनी औरमकोय
पानीसेकुल्ली करें-औरतीनदिन पीछेकरमकल्ली औरमको
यकेपानी में अलसीकेवीज़ोंकालावमिलाके कल्लीको
औरजबसूजन घटने लगेतो-वाचूने नाखून और वनफाशेऔर
अमलतासकीकुल्लोकरें-औरवलग़मी मेंशहदसेकुल्ली
करेंयाउस्मेंसातरऔर अयारिज और मिलाले-और सौदावीम|
इजीर-मेथीकोबीजगीर अमलतासकोजीटाकेवनफशेका
तेल मिलाकवाल्लीकरें-औरकभीरहराधनिया औरहरीका
सनीचवायाकरेंकि सरतानकारोग होजाय-औरजीविपखा
नेसे सूजनहोतो उसका उपाय आगेआवेगा।
-
८
दूसरापाट२
जीभकाबोमलहोना
इसमें माहोताहैकिशब्द-मुंहसेमलीभातिनहीं निकल
ते-औरकभीरोसामीहोताहे किरोगीचोलहीनहीसक्ता है-
कारणजानके उसकाउपायकरें औरफदौरजुल्लावआदि
दौरजीजीभटीलीहोगई होतोदेखें किसिर में कोई बिगा
इयानहीं जोहोतोभेजेकोसवादसेसाफ करे-और वजे औरण
ईआदि पीसके जीभपर मलें किदिवहै-भौरजोसिरमेको
ई विगाडनहोतो फालिजका उपाय करें-औरहुँडीकोनीचे पाह
छने लगावे औरजोमकी कीरगटूट जाने से यामैवादबहुत
सानिकलेके नशन्नुहोजाने से यहाहोतो उपायनही हो
सकता-औरजोसरसामकेपीछेहोयापुराना होजायवहभी,
मछानहोगा-परंतुपुराना पड़ने से पहिले इन्द्रानीनमक और
नौशादरमलें किराले कहे॥
तीसरापाठ३
जीमकाचदजानाऔरनिकलाना
जोरुधिरकीमधिकर्तासेहोतोमराफ और जीमके नीचे
फस्दखोलें औरपट्टीवस्तुजैसे अनार मलें किराल वह और
जोबलगमसेहोतोअयारजें खिलकिचलगम निकाले गोग
नोन सिरके में मिलाके मलें।
चौथापाठ
जीसकेटीलेहोजानेकेविषयमें
3
।
4
इसकाउपायइस अध्यायके दूसरे पाठमे लिखचुके है।
पांचंचांपारण
जीभकेफटजानेकेविषयमें
नोस्खुश्कीकी अधिकतासे होतो तर भीषधेकाम में लायें
और मोमरोगन औरवनाशेकातेलमलें औरभेजेको ठीकका
रे-औरखीरे के कागजोधरलगावें-और जोमेदे कैये से यह
रोगहोतीपहिचान उसकीयह है-किभेनेखुश्कीनहोगी,
इस्में मेदेकामवाद निकालें औरलहसोडेमुख में स्क्वें।
प छठापाठ६
जीभकीखुश्कीकेविषयमें
जोगरमीऔरखुश्की सेहोतोठंडी औरतरवस्तुदें-औरवी
दानेकालआफ्नीलोफरके पानी में निकालकरशक्कर मित्र
करकुल्लीकरें-औरदेरतकामुरयमै लियेरहें भौरजोलस
दारकफ़ाजीभपरजमकर सूखगया होतोबेदकीलकड़ीशि
कंजवीन में भिगोकर जीभपर मलें उससे कह काछूटनाप
गाइसकीपहिचानयहहै किथूकलसदार आयाकरेगा-जी
रजितनीठंडीवस्तुदेगेंउतनालसअधिक होगा।
सातवीपाठ७.
जीमकीजलन के वर्णनमें
मंडीऔषधे औरजोकिसोमवादसेहोतो जुल्लावभी
और कपूरमलें औरइसबगोल आदिठंडी औषधोंकालुभार
--
.
मुंहलेकरजल्दीजल्दीकुल्ली करें और जिसकारणसे होती
उसेदूरकरें।
आख्वापाठन
जीभमें खुजलीझेनेकेविषयमें
पहिचानइसकीयहहै किजीमलाल होगी और रोगीदातों
सेजोभकोखुजलायाकरेगा उपाय इसकायह हैं-किपहिलेम
वादनिका-फिरगरमपानीसेकुल्लीकरें-फिरदूध औरश
क्करसेकुल्लीकरें-इसकेपीछे सिरके मैं कोई तेलमिलोकेर
कुल्लीकरें-और पीलीहड़वाकरजीभपरमलें ।
नवोपाठ
जिदउललिसानकेविषयमें
इसरोगमेंगादाबलगमयारुधिरजीभके नीचेजड़ मेंजम
करकड़ापड़जाता है-उपाय इसकायहहै, किमवाद कोनि
कालेंके-नौशादर-फिटकरी-जंगार-मुर्रमक्की-सिरके में
पीसकरमलें-औरनोइससेन्जाप तोकाटकर निकाललें-
खसावधानी से काटें ऐसानहोकि जीभकेनीच जोरगे हैं वह
कटजाय-कमीमवादइसरोगकापथरीबननाता है-जब
जपरकीखालचीरते हैं तो वह पथरीनिकल भाती है-औरक
भी सुजन होजाती है उसकेछेदने सेगादापानीनिकलता है-
औरफिरदकहा होजाताहै-उपाय उसकायहहै कि पहि
लेछेदकेपानी निकालें-और फिरचमड़ेको केंचीसे कतर
डालें।
लान
-
1
त्र
1602562
ला-
करें।
दसवोपाठ ९६
फ़िसादजोकको विषयमें॥
इसरोगमें रक नयावाद स्वाभाव के विपरीतिमालूम होता
है-चाउँकुछ खावे यानखावें जिसमवादसे होगा उसका
चिन्ह उसके मजे से मालूमहोजायगा-उसीमवादको फस्दर्भ
रजुल्लावनिकालें और शिकंजवीनसेकुल्लो करें ।।
ग्यारहवांपाठ९९
बतलान ज़ोक में
इसरोगमें जीसकोनतोस्वाद आताहै-औरनगरमी नठंड
मालूम होती है-इसकाकारण यह है कि जीभ मेंतरी अधिक
होती - पहिलेमवादकीपकाकेभेजेसेनिकालें-और अकर
करा-मुनक्के-औरराईको औटाके कुल्लीकरें-और जो गर
मीहोतो गुलाब के फूल और समाक औटाके शिकार्निवीन मि
बारहवापाठ१२
तकशशूरंजवानकेबिषयमें
इसरोग, भीम और मुखसेछिलके उतरते है-औरमलने
मे अधिक हो जाता हैं-इस्मेंपहिले फस्दौरजुल्लाबसे पित्त
को निकालें- और असिऔर गुलाब के फूल और गुलनारसिरके
मे आदाके कुल्ली करें।
तेरहवांपाठ-१३
.
.
मुखकेभीतरफुन्सियोहोनेकेविषयमें
फस्दखोलें औरजुल्लाबदे-और धनिया-मसूर-मकोय।
पत्तेसिरके में औदाके कुल्लीकरें।
चौदहवांपाठ
मुंह आने के विषय में
यहरोगभीतरके मवादसे होताहै-इसकाकारण जानकर
मवादनिकालें-इसके पीछे जोपित्तयारुधिर अधिक होतो
उनऔषधोंसेकुल्लीकरेंजोतेरहवें पाउमें लिखगये हैं और
विंसलोचन-गुलनार-माजू-कपूर-सबकोपीसकार मुहकभी
तरछिडके-और जोघावहोजायत्ती,सिरके औरत्नभसेकु
ल्लीकरें-किंमवाद जपरका निकल जाय-और जो सिरके
की सहारनहोतो-केसरकोपानी में औटालें-औरजोयहरों
गकफ़कीअधिकता सेहोतो-सामीरा-हड़- अकरकरा-
सिरके में औटाकेकुल्लीकरें-औरजोसीदासे होतो-मेंहदी
कीपत्तीचवामें- और मानू-धनियांअनार के छिलके-सिर
के में ओटाके कुल्लीकरें।
बच्चों के मुहाने में शीरखिश्तकोमकोपके पानी में घो
लकरकुल्लीकरावे-औरगावज़वांजलाके छिडकें। .
पद्रहवापाठ१५
आकिल तुलफ़मकेविषयमें
यहरोगबहुतहीबुरा है-इस्में घावसारे मुंह में फैल जाता
-इसकाउपाय यह है कि-जले हुये मवादको निकालें-
-
2-नास
antan
और उन औषधोंसेकुल्लीकरेंजोचौदहवेंपाठ में वर्णन हो चुका
है-और जबघावफेलने सेठहरजापती-फिल्द फियून-या
सुरतीनान-घावपरलगावें-औरजोइनसेजलन होतो-लु
आवोंसेयाताज़ह दूध में शक्करमिलाकरकुल्ली करें।
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सोलहवापाउ१६
जागतेऔरसोतमेमुंहसेबहुतसीगलवहना
इसकाकारण यह है किमेदेमेंगरमी औरतरी होगी-या
और तरीलिपेश होगी-पहिचान गस्मी औरतरीकीयहहै-कि
खालीपेटमेंरालवड़तवड़ेगी-औरठंड औरतरी कीपहिचान
यहहै-किपेटमरेपररालअधिक आवेगी- और सुरक्कास्वा
दखटाहोगा औरभोजन पचेगा-जोमवाद अधिक होउसे
निकालें और गरमी मेंहरीकासनीकोनमककेसाथकूटकरच
वावें औररस उसकानिगलें-और ठंडमेंकुन्दुर भोरमस्तंगी
चवावें।
सत्तरहवांपाठ१७
मुखसेदुर्गन्धआनेकेविषयमें
नोइसकाकारणकेवल मुखही होतो उसमवाद से साफ
करें-और जोमेजेसेमवाद गिरता होयामेदे मेंगरमी होतोभे
जे भोरमदे सेमवादकोनिकालें- और हव्युलमिल मुखमें
रकवें औरदंतक्त कियाकरें-और विलीकात्तेलयारोगन
गुलकीकुल्लीकभीर नहारसुखकरलियाकरें।
४
२०९
नराव
अठारहवांपाठ१८
तालूकीसजनकेविषयमें
यहरोगयातोसधिरकी अधिकतासेहोताहेयाचलरामको
अधिकत्तासे-जोरुधिरकी अधिकतासेहोगती-तालूमेंपोडा
औरलाठीहोगी-औरजोवलनामसे होगाती-सफेटोडोगी-
पीडानहोगी-पडिलेमवादको निकालें और जोकुल्ली अपर
पाउमें लिदोगई हैं मवाद के अनुसारकरें।
सातवाअध्याय
होठोंकेरोगों के विषय में
पहिलापाठ
और होठोंपरसफेदीहोजानेकेविषयमें
मदरोगकोटसेभलगहै-इस्लेवलगमनिकालें औरभारी
वस्तुनखावें औरचमेकी गौरखरीकातेलनाक में डालें।
॥
दूसरापाठ२
होटकीरखुश्कीऔरफटनेऔरछिलके उतरनेकेवि
षयमें
चड् उपापकरेंजो मुखके रोगों में लिखागया है-औरहोड
कोहवानलगने दें औरमान-निशास्ता-कतीराकूट छान
करलगावे और जौदवालगावेंउसके अपरअंडेकामतला
Y
छिलकानोभीतरहोता है चिपकादें-किहवासे फटे नहीं।
तीसरापाठ३
होउकेफड़कनेकेविषयमें
जोरुधिररगों सेहोठमें आकररीहवन जाय और उससे होव
फड़के तीसरारु फस्दखोलें औरभोजनकमखावें- और जीव
हरीहवहतगटाहोती सिरके फड़कनेकाजोउपाय करें और जो
मेदेकाविगाड़ होतोजीमचलावेगा और हिचकियांआवेगी और
कैाने में नीचे काहोठफडकेगा-इसमें केवहुतसीकराहाले।
औरजोभेजे केविगाड सेहोतो-उसके पीछे लकवा और मि
रंगी होगी- उपायइसका यह है-कि तरवस्तु नखावें और पा
नीथोडापी--और सेसा उपाय करें किलकवा और सिरंगीन
होने पाये। अनल
चौथापाठ
होटकेछोटाहोजानेऔरसुकड़जानेकेविषय में
जोतशन्नुनतरीसेही तोमवादकोनिकालें और गर्म तेलम
लें-औरनोरखुश्कीसेहोतो उसकाउपायकठिन है।
चच्चोंको जो यहरोग होजाताहे-वहखंचने औरवांधने
से अच्छाहोजाताहै।
पांचवापाठ५
नीचेकेहोठपरअधिकमासउत्पन्नहोनाने के वियों
रुधिर और सौदाकामवाद निकालें-और मसूरयागुरदास
गंकामरहमलगावें-औरमवाद निकालने के पीछेरंगइस
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मासका कालाहोतो पछनेलगावें और सिरकामलें और जेरी
गलाल होतोकुछ उपायन करें।
छठापाठ६
होठकीसूजनकेविषयमें
जोरुधिरकी अधिकता सेहोतोफ़स्दखोलें और लेपल्मगावे
औररसोतकोहरीमकीयकै रसमें घोलकरलगावें-यह उपा)
यगर्म सूजन मेंबहतलाभदायक होगा- परंतु पहलेपइसरो
गके होते हीलगाचे-और अंतमेंवादामके तेल का मरहम
लाभदायक है।
सातवापाठ
होठपरफुन्सियांहोजाने केविषयमें
मवादकोनिकाले-औरजोधावपडलायतोलेपऔर मरह
मलगावें।
आचापाठ
होठोंघावपड़केपीपवहना
उसीमकार सेमरहम लगावें॥
नवांपाठ
होठमें घावपडकेफलोस
इसकायह उपायकरेंजो अपरके .
। जबहोठ में
-
९००
वनाचाहिये-इसप्रकारसे किगरमीसे होतीनर्मकपडाहरो
धनियांक पानी में और हरेवारतंगकेपानीमें औरहरीकासनी
केपानी में भोरगुलाबमें भिगोकरवर्फ सेठंडा करके होठपर
रिकवे-औरकपूर औरचंदन कोईसबगोल केलुभावोरगुल
बमें पीसकरलगावें और सूखनेनदें।
औरजोगंडसेहोती-मुश्क-जुन्दवेदलर-अकरकरा-च
स्वेलीऔरनरगिसकातेललगावें।
औरजोरखुश्कीसेहोतोरोगलबादाम-लुभावइसबगोन
आशजोशक्करमिलाकर पिलावें-भौररोगनचनपशा-रोगन
कारभदिमें मोमपिघलाकर लगायाकरें।
और जोतरीसेयहरोंग होतो-लकवेकाउपाय करें और
नोमवादनहीतीभीफस्द और जुलाबदें।
आटवाअध्याय
दांतो औरमसूटोंकेरोगोंमें
पहिलापाठ९
दांतोंकीपीडाकेविषयमें॥
जोगरमी सेहोवोठंडेपानीसेथमनायगा-और जोसरदीमे
होतोगरमपानीसे औरजीकोई विगाड मिज़ाज में गरमीसेवे
मिनादकैहोतोसिरके और गुलावसे कुल्ली करें और ठंडे विगा
हमेंवात्ययइंगको औटाके कुल्लीकरें-औरजी किसीमवाद
महोतो उसीके अनुसार उसमवादकोनिकालनाचाहिये-
किपीछे उपाय करें औरजो पेटभरेपरपीडाहुआकरतो कारण
इसकामेदेकाविगाडहोगा-उससमयमेदेकामवादनिकाले
औरहरमकरनेवाली औषधंदें-औरभोजनमें धनियावहता
डालें-इस्में कैकरातानहीं चाहिये-औरजोस्कजगह मेदूसरी
जगह फैलताऔर फिरताहोतोवापसेहोगा-पहिले इसमेंम
वादकोनिकालें फिरसाफ़-अनीसून औरजीराकी औटाके
कुल्ली करें।
और जोकीडे पडनेसे दांतमेंपीडाहोतोदातपहिलेछेद
पिडाहोगा-इस्गन्दनाके बीज-खुरासानीमजवायनप्याज
केवीजकूटछानकर मोममें मिलाके आगमजलावें और |
भाउसकानरकुलकीराह मेदांतको पहुंचावें।।
गन्धककाअर्क पीडामेंदातपरडालनालाभदायक है,
परंतु औरदातों पर लगनेनपाव-दंडसेनोमिजाजो विगाडहाँ,
जायउसमें कल्ले, कोसेंकनाऔरसोनेयालोडेकीसलाईसे
दागर्दैनाअतिलाभदायक वाहियेकि कईवारइसज्याय
कोकरें-परंतुसेसानहौकिदाग और किसीदाँतपरलगजाय
जोदांतोके हिलनेसे पीडाहोऔर दातथोडे हिलते होतो,
उनकोपुष्ट करें-औरजोबत हिलते होंतो उनको निकलवा
डालें-परंतुपहिलेजड़कोटोलाकरलें-नहीं तोओखकोहा
निदायकहै औरपीडाकेथमने केलियेअकरकरा-अफीम
कुन्दरकीझडन पीसकेस्त्रीकोदूध मिलाकेदांतपरलगाये
दूसुरापाउ२
दांतोंके कुन्दहोजानेकेविषयों
जोकारणइसकारवडीयाकसैलीवन्तुरबानाहोतो गर्म
काम
'
२
१०२ योचीजचवामें और गर्म रोटीदांतों मेंदा औरजो केवलमेनासेहोतोकडवानादाम और जोज़ाहन्दी भोरजोकोई भीतरीकारणही तो वट्टी डकारें आवेंगी- औरथूकचहुतभावेगा-इस्में लगमयासीदाकासवादकैसेनिकालें-क्योंकि मवादकामे सेकै के साथ निकलना सहज है-और दर्दनहोने से कोईमया दमीदांतोपनहींगिरसत्ता। तीसरापा३Jok दांतोलीआवजातेरहनेकेविषयमें 'इसरोगहरमकारवस्तुस्वाई औरचवाईनहीं जातीइसमें पहिले सवाद को निकालें-औरवकरीकी तिल्लीसूनकरगर्म दांतोपररकवें-औरजोमिजाजमें कोई विगाडगरमी सेहोती, गनगुल और काफूरकीकुल्लीकरें। चौथापाठ मेट दाँतोंकेटूटनेऔरस्वोरवले होनानेकेविषयमें इसमेंमेजेकामवादसेसाफ़करें-और रसोत-मान- रकरा-मजनवनाकर दांत परमलें। ओरजोदांतों कीतरीनातेरहने सेहोतीदांतों में खुजली होगी, औरघुलने लगेगें-इसका उपायनहींहोसक्ता-परंतुदांतों के थामने के लियेत्तरऔषधे दें। पांचवांपाठ५. हफ़रकेविषयमें
इसरोगमेंदांतकीजड़मेरककंकडसाउत्पन्न होजाताहै
जोमवादअधिक हो उसे निकालें-फिरलोहे कीनहरनी से
उसेकाटडालें-औरनमक-समुन्दरफेन-दरमना-जलाकर
मलें-इससेरहासहाजातारहताहै- और फिर उत्पन्न नहीं,
होता।।
दाँतकेरंगबदलजानेकेविषयमें
जोदांतकाररूपीलाहोतोपिनकी अधिकताहोगी औरजो
नीलीहोतोसीदाकी और जोचूनेकासारंगहोतोवलगमकी
अधिकता होगी-सवादके अनुसार उसे निकालें और पीला,
होने में मसूर सिरके के साथ मिलाकेमलें-भौरकाले रंगोंकि
जेकीनडरोगनगुलकेसाथ मिलाकरमले और सफेदीमें म
स्तंगीकातेल मलें।
सातवांपाउ७
दातोंकेहिलनेकेविषयमें
मोवच्चों औरचूदोकोहोतोउसकाउपायनकरें-परंतुइस
केसिबायभीतरीयालाहरीकारण सेहोतो उसकाउयायकरना
चाहिये।
दांततरीकी अधिकता और रुधिरकेविगाह से हिलनेल
गते हैं के बिगाडमेंफस्दसरारू औरचाररगकीखोलें- औरता
डडीपरपलनेलगावें-औरमसूट परनोंकलंगानातिलाम
दायक है-औरफिरदातोंकामुष्ट करनेवालामजनमलें-
और जोइससेमीफायदानही वो-दातोको उखाडडालना
-
९०४
चाहिये-परंतुपहिलेदांतकीजङको इसप्रकारदीलाकरलें
किनश्तरसेचीरडालें-और उसपरइन्जीरके पत्तेउसी कैध
में मिलाके दो तीन दिनमलें-दांतदीलाहोजायगाभौर उरखा,
डने में सुगमता होगी।
आठवाँपाठक
दांतकालम्वाऔरमोटाहोजाना
जोरुधिरकी अधिकताहोती पीडाभीहोगी-इसमें फास्द
खोलें भीरमजादकोनिकालें।
नोवलमम की अधिकता होगीनो पीडानहोगी-इसमें
सोमवादको निकालें और उसी के अनुसार कोई उपायर
कभीरोसाभीहोता है कि औरदातघिसकरकोटेहोना
तेहैं औरकेबलस्कदांतलम्बादिखाई देता है-यह कोई
-रोगनहींहैं- जोइसकाउपायकरनाहोतो उसरडे दांतकोभी
सोहनयाआरीसेरगडकर औरदातोंकेवरावरकरलें।
नवापार
दांतोंमें खुजलीहोनेकेविषयमें
इसमें रोगीकोदातरगहनेयाकोईवस्तुचवायेविनाचैन
नहीं पड़ता-सारेक्दन औरविशेषकरने कासवाद निकाले
औररवतीऔरनेजजओररवारीवस्तुनरवावें-चौरचूने चीजई
कोसिरके में गोसाकेयाशिकंजवीनभन्सनीकोपानी में
घोलकरवल्लीचरें।
करें।
दसवांपाठ१०
सोतेदातरगडनेकेविषयों
जोतरी सेहोतोभेजेसेमवादनिकालें-औरकूटकातेलगर
दनगरमलेनहोतोकेवलमिजाज केककरनेसेहीफायदाही
जाताहै।
लडकों केदांतसुगमतासे निकलने का उपाययहहै-कि
पीकल्लेपरमलें भोरकडीवस्तुनचवाने दें-औरहरीमकोय
कारस रोगनगुल में मिलाकरगुनगुना करकमलें- और अं
गुलीसेमंसू पर लगावेंइससेनो पीडादांत निकलने मेंहो
तीहैनहोगी।
12-02
ग्यारहवापाठ२९
मसूटोंकीसूजनकेविषयमें,
जैसामवाद होउसीके अनुसारमवादकोनिकालें और
वैसीही औषधानेकुल्लीकरें।
वारहवांपाठ९२
मसूटोंसेशघिरवहनेकेविषयमें
जोबहमसूत्रों के कमजोरहोने के कारणसेहोतोमाजू-
और मसूर औरवंसलोचन पीसकर मलें और जो गधिरकी
अधिकतासे होती फेस्ट खोलें और ठंडी भौषधों से कुल्ली
करें।
९०६
तेरहवीपाठ१३
मसूलों मेंघाव औरनासूरहोजानेकेविषयमें
मसूदों से पोपनिकले तोचायहोगा औरजोरेसेहीचालीस
दिनच्यतीतहोजायतीनासूरकहलायगा-मुंहानेकाजोड
पाय है वहीइसकायोरें- औरनासूरको सलाई से दागदें।
चौदहवापाठ१४
दांतोंकीजड कमजोरी होनेसेदांत हिरनेके
विपयमें
इससेगमें दांतकी नहकामासकम और सुरव होजाता है-
गुलामोशल-चलत-गुलनार-हबल आस-हरएकची
ददगोदइ माशे-रवरवनिवती-सिमाक-भकरकरा-हर
रक्षामाशेपीसकरमेस्टोपरजमादें॥104;
पन्द्रहवापाठ९५
मसूदोंपरबुरामांसउत्पन्न होनेकेविषयमें
कभी पिछली डाटके पास सूजन होवेरामास उत्पन्नही
जाता है-मुरमक्की-पिारकिरीहरी-पीसकर रसमांसपर
मलेंत्तोगलनाचेगा।
नवाअध्यीय
गले औरकव्वेऔरमरी औरकुसंवेरेयाकेरोगों
MAH
मरीउसराइको कहते हैं जिससे खानाऔर पीना पेट में उत्ती, कुसबैरेयावहाहहै,जिससे मनुष्य दमकेत्ताहै। पहिलापाठ९ कव्येकीसूजनकेविषयमें जोमवाद अधिकहोउसी को निकालें-इसके पीछेरुधिर मौरस्तिकी अधिकता में सिरके और गुलाव औरहरीमकोय आदिसेकुल्लीकरें औरवलगमी में-काजीऔर-शिकंजबीन और गई पानीमें भौटाकेकुल्लीकरें-और सौदाकी अधिक नामें अमलतासकोताज़दूध घोलकरकुल्लीकरें। दूसरापार, कब्वेकेलटकानेकेविषयमें जोयहरुधिरकी अधिकतासेहोतोफस्दखोलें-और सिरके और गुलावसेकुल्लीकरें-औरगुलाबके फूल-चन्दन गुल नार-कपूरको पीसकरकव्वेपरम।। औरजोवलरामकी अधिकत्तासेहोतोवलंगमकोनिकालें औरशहदकोपानी में औटाके कुल्लीकरें-औरजलीहुई फिर करी-औरंवारहसिंगा-नौशादरसाथ पीसके किसोयत लीवस्तुपर रखेंकेक परनमाके जपरकोटा- और मानसिरके में पीसके यामुलतानी मिट्टीजलीहई सिरके में संदके यासरेश सिरके में पिघलाके और उसमैइसबगोल मिलाके सिरके अपरतालूकीजगहलेप करेंजबवह सूख- 2
९००
नायगावोतालूकीस्वालजपरकोरिखचेगी-इससेकन्वामीजा
परको उट आयगा-जोइन उपायोंसेकुछलाभनहो-और
गलाबन्दहोजानेकाहरहोतो-दस्तकारीकरनी पड़ेगी-अ
थीत बहुत सावधानीसेजितना उचितहोकाटलें-परंतुइस
के काटने और गकाने में बहुराडरहै-अधिकाकाटनाने से-
शब्दोंका उच्चारणअच्छीमकारनहींहोसक्ता ॥
तीसरापाठ३
खुन्नाककेविषयमें
इसरोगगले केभीतर सूजन होजाती है और सांसफर
तीहै औरखानापीनाक्दहोजाताहै-जोरुधिर और पित्तकी,
अधिकताहोतो-सरारूफस्दखोलें-औरजीभ के नीचेजो
रगहै उसकीफस्दकरें-और रुधिरवाईवारयोहानिका
लें-औरनोरोगीकमज़ोरनहोतोस्कचार जितना चाहैं,
घिर निकालें-भोरजीउसके पीछे फिर जरूरत पड़ेतो थोडा
सोडासाधा निकालें-औरनौकन्नहोतोमवादकोनर्मकरेंभीरनिका
पिर सिमाकभीरडीसीपधोंसेकुलोकरेंगौरगर्मीनिकालनेकेलि
पिठंडेशर्वत पिलावेभीरमोजनकीनगह भागंजो पिलावें औरजोस्वामुनि
विडीवस्तोसेकुल्लीकरावें औरपिलावे-जोसूननवाइरग
गरदन परहोभावे-तो उसपर पर्छनेयानो लगावें-इससे
गीतरकानवादवाहरनिकल आवेगा- और रुधिरकी अधि
दत्ता में पिंजलीपर पड़नेलगायें लाभदायक है-जवइस
नगको तीनदिनव्यतीत होजाय-तो अमलतास गायके
दृधघोलकरकुल्लीकरावे-नबरोगीवहुत कमजोरही
१०९
केहकीमकेपासमावेतीवेनरूरत फस्दनखोलनाचाहिये-
नवयहसूजनपकनाय और आपसें आपनटेतोरोभरमा
नी-औरहीगभर्वायीलकीबोटधसे घोलकरकुल्लीकरा
वइससे फूटजायगा-फिर शहद और दूधको मिलाकर
ल्लीकरें-किपीपसाफहोनाय-औरभोजनकी जगह यह
हरीरी स्विकायेंगेंहकीभूसीपानी में भिगोकरकानलें-और
उसमें गानवोदासडालकर औटावं-औरथोडीसीशक्कर
मिलाकरहरीराबनालें॥ २२-२-सन
गळेकी पीबामें ठंडी भौषधगले परमसले परंतुमवाद
निकालने के लिये पोहेबू भरमनीजिफ औरराई पानी में
पीसकरगलेपरलगावेंभवादभीतरसेवाहर विंचवेगा
औरउडीपर पछनेलगावें।
जोयहरोगवलराम की अधिकतासेड़ोतोबुल्लाबपि
लावें और सूलीकेपत्तोंके रस में शिकंजबीनघोलकरक
ल्लीकरें और ज़ोयरोगबहतवटनायतीनीमकेनोचे-
कोरगकी फरदरखी औरंगुहीके अपरमौरतुड्डीके नीचे
पछनेलगावें।
औरजोसौदाका अधिकतासेहोतोफस्दवासलीकरखो
लें औरनश्तरगहरालगावें औरजुल्लाबदें औरदूध और ग
मलतासकीकुल्लीकरें और मेथी औरकरमकल्ले के पत्ते
कूटके उसके रसमें रोगन नरगिस और बतखकीचरवीमि
लाके गलेके चारों ओरलंगावें।
खुन्नाक काल्योव्हतबुगरोगहैइसमेंगेगी अपना
सुस्वकुत्ते की सकार खोल देता है बीभवाहर निकल आती
है यहगलेो उनेले की मूजनके कारण से होता है
-
जायगावोतालूकीवालगपरकोरिक्वेगी-इससेकव्वाभीज
परको क्ठ आयगा-नीइन उपायोंसेकुछलाभनहो और
गलादलोजानेकाहरहोतो-दस्तकारी करनी पड़ेगी-अ
थीत बहुत सावधानी से नितना उचितहोकाटलें-परंतुइस
के काटने और गलाने में बहुसडरहै- अधिका काट जाने से-
शब्दोंका उच्चारणअच्छीमकारनहींहोसत्ता॥
तीसरापाठ३
खुन्नाककेविषयमें
इसरोगमेंगले के भीतर सूजन होजाती है भौर सासरुक
तीहै औरखानापीनाक्दहोजाताहै-जोरुधिर औरपित्तकी
अधिकताहोतो-सरारुफस्दखोलें-औरजीभ के नीचेजो
रगहै उसकीफस्दकरें-और रुधिरवईवारथोडारनिका
लें-औरजोरोगीकमज़ोरनहोतोएकचार जितना चाहरु
घिरनिकालें- भोरजोनसके पीछेफिरनरूरत पड़ेतो थोडा
थोडामधिर निकालें-औरनोंकनहोतोमवादकोनर्मकरेंगीरनि
फिर सिमावीरउंडीजीपथोंसेकली करेंगीरगौनिकालनेकी
येउंडेशर्वत पिलावे भीरमोजनकीनगइ मशिनोपिलावेंभौरजोरवार
हीयस्तोसेकुल्लीकरावें औरपिलावें-जोसूननवादरग
गरदनपरहोभावे-तो उसपर पर्छनेयानो लगावें-इससे
भीतरकासवादवाहरनिकल आवेगा-औररुधिरकी अधि
दाता में पिंडली पर पछनेलगावेंलाभदायक है-जवदूस
रोगको तीन दिन व्यतीत होनाय-सो अमलतास गायके
दूधघोलकरकुल्ली कंगवे-नवरोगीवहुत कमजोर हो
केहकीमकेपासभावेत्तोवेजरूरत पास्दनखोलनाचाहिये-
अवयह सूजनपकुजाय और आपसें आपनफूटेतोरा भरमा
नी-औरहीगमवावीलकीबीटदूधमें घोलकरकुल्लीकरा
वेइससे फूटनायगा-फिरशहद औरदूधकोमिलाकर कुर
ललीकरें-किपीपसाफहोजाय-औरभोजननीजगह यह
हरीरौखिलायें गेंहकीभूसीपानी में भिगोकरछानलें-और
उसमें रोगनवादामडालकर औरावें-औरथोडीसीशक्कर
मिलाकरहरीराबनालें ॥ १८-शसन
गळेकी पीडामें ठंडी औषधंगले परनसले परंतु मवाद
निकालने के लिये पीछेवो भरमनी ज़िस और राई पानी में
पीसकरगलेपरलगावेंमयादभीतर सेवाहरविंच भावेगा,
औरहडीपर पछनेलगावें।
जोगहरोगवलराम की भषिकतासेहोतोजुल्लायपि
लावेंऔर सूली केपत्तोंके रस में शिकंजवीनघोलकर
ल्लीकरें और जो यह रोगबहुतक्टनायतोनीमकेनोचे-
कोरगकी फस्दखोलें और गुद्दीके अपर भौरदुड्डीके नीचे
पछनेलगावें।
और जोसौदाका अधिकतासेहोतो फस्दवासलीकरवा
लें और नश्तरगहरालगावेंऔरजुल्लाचौरदधभौरमा
मलतासकीकुल्लीकरें औरमेथी और करमकल्लेके यते
कृटके उसके रसमेगेगननरगिस और बतखकोचरवीमि
लाके गलेकेचारों भारलंगावें।
खुनाक कल्चोक्तयुग रोग है इसमें रोगी अपना
मुस्वकुते की मकार बोल देताई जीभवाहर निकालभाती
यहगळे के उजेके की सूजनके कारण से होता है
-
२२०
जान
उपाय इसका.फ़रदौरजुल्लाबसेकरें- औरकमी गरदन के
नोजोंकहरजाने से भी ऐसा होताहै चाहिये कि नोडौंकोरी
ककरें।
एकप्रकार खुनाकाकी और है निसेज़न्हा कहते हैं-र
हसबसे बुरी है इसमें रोगी के मुरवसे बात तक नहीं निकल
सत्ती-नकुलनिगलसकता है और जो कुछ पिलाते है तोग
लेसें फंदा पडनाकसेनिकल भाताहै-ऐसेसमय में जोर
लेपरलालरंगहोनाय तो बहुत अच्छा-उपायसंकावई
जो ऊपरकिरवागया ।
- जबरोगीकोईवस्तु निगलनसकै तोगरदन के दूसरेमी
हरे परमींगीलगाकरचुसें उससेरवाना उत्तरने की जगहेकुड
खुल जायगी और पत्तकी वस्तु उतरनेलगेगी औरजबदमा
कजायतोगले मेंछेदकरदें उसकी रीतिवडीपुस्तकोमें लि
रखी है।
चौथापाठ
गले औरमरीऔरकुसवेरैया में फुन्सियाहोजा
नेकेविषयमें
मरीमें मुन्सियोंका चिन्हयहहै कि निगलनेकेसमपर्प
सक्छत होगी औररस्टी औरतेज़ भीरकही वस्तु स्वानेसे और
भी अधिक होगी और कुसवेरैया कीफुन्सियोंका चिन्हयहहै
१ किवात करने में और चबानेमें औरचूंगाऔर रेत पहुंचने में
अधिक पीडाहोगी और निगलते में कुछ मालूम होगा-फ़र
खोलें और रंडे मेवोंका पानी पी- भोग्नईत ठंडा पानीन पिर
P
करें और तेज और खुश्क भोजन खावे-औरजबजानेंकिर्दयो
पक गये तो मवादको पकायें भोर फूटने के पीछे साफकारने
का उपायकरें-जैसाकि बुन्नाक लिखागया:
औरंगलेमें नोफिन्सियों पड़ेंतोकहींकुरल्लीकरें जोखुनाई
कमें लिखीगई हैं।
पांचवापार५
गले में नौकचिमटरहनेकेबियमें
महधारेसेपानीहोते हैं जिनमेंछोटीजोंक होती हैं जब
निनादखेंकोई उस पानीको पीता है तोजोकंगले वामरी
प्याकुसवेरेया में चिपट जाती हैं-कभी तालूकी राहसेनाक
की भारचटकर चिम्टरहती है।
नोलोकग में नीची हो औरदिखाईनदेतो आपसेआप
रुधिरकह निकलेगा गौरवेचेनी होगी।
औरजोलुसरैया में चिमटेतोहस्दमखासी आवेगी-
औरजोनाककैपासचिमटे तोनाको रुधिरबड़ेगा-भौरद
मागवन्द होजायगा-और कभीरखरवारकेसाथ मुंहसे रुधि
रितिकलेगा।
जोगले में ऊपरको दिखलाईदेतोपहिले मोचनेसे सिर
उसकादवोचके थोडीदेरठरेस्हें वह मुंहखोल देगी फिरत
सको निकालले-औरजो दिखाईनदेतीहोतोकालीमि
हीस्क पोटलीमेंधांधके मुंहमेंगलेके पासजायंचहमियी
कीसुगंधसे पोटली में चिमटजायगी फिर उसपीटलीको
निकाल लें।
और गोतालूमेंचिमटीहोतोकरेलेवाइस और कुंटर
१९२
चारें।
कीसिरके में मोटाके नाकमेंडाले-जोइससेजोंकपेट मेंजा
पडेतीजल्दी सेकै करावें-और जोकै सेनानिकलेयाकैन
आवेतोजुल्लाबदें।
पानीबहुतसावधानीकै साथदेखकें औरछानके पीना
चाहिये।
छापाठ
सुई निगल जानेकेविषयमें
मरान
चुम्बकपत्थरकोगुलाब में पीसकर नहारमुखपिला
वे-और घडीके पीछे जुल्लाचदें-भौरफिर मैदे कोठीक
सातवापाठन
मरीकेमिंचजानेकेविषेमें
इसमें पतली वस्तुतोगळे सेनीचेनहीं उतरसकती-और
कडीवस्तु उतरजातीहै आयारिज खिलाकेवळामकोनिका
लें- और अनीसूनकुन्दर-सुम्बक-लालबहमन-और
समेन्दबहमन-भोटके औरछानके योडार पिलाने और
सुडीके नीचे पलनेलगके जुन्दवैदस्तरमौर शिकंजवीन
लेंयाबारे लगावें।
आठवांपाठ
नरस्वरेकेटीलेहोजानेकेवियमें
चिन्ह उसकायहहै कि सासनहीं लीजाती याविलकुल
वन्द्र ष्ठोनातीहै।
2.
*-
7
इसकाउपायहीहै-जोजपरकेपाठमेलिस्वागयाऔरजब
सांसविलकुलतलीनायतोजल्दीसेगमें छेदकरके लोहेया
तावेयापीतलकनकी उस्में अटकादें-किरोगी उसमेंमेसांसलेने
और फिरउसका उपाय करें।
नवापाठर
मरी खुजलीहोने केविषयमें
कैकरा और पुराने सिरके सेकुल्लीकरें-औरदूध औरश
शक्करएकरचूंटकरकेपीवें॥ भोपा
दसवांपाट १०
कुसरैयाकेफड़कनेऔरकांपनेकेविषयमें
फड़कनेका चिन्हयह कि बात करने में हरघडीराकानदमा
लमहोगी-और कापनेका चिन्ह यह है कि बात करने मेकप
कपीमालूम होगी-जैसाकियूटोकोहोताहै इसका उयायवा
ही है नोरेशै और इसकानको उपाय है-और इसमें कुल्ली
करानाभीलाभदायक है।
ग्यारहवांपाठ१९
डूचे हुयेके उपाय में
जबादमीको पानी से निकालें और उसेहोश नहो परंतु
दमाताजाताही उसको उलटा लटकाकर पेटउसकादवाव
कियानीनिकलजायऔर मिर्च और मोट सिरके में औटाके उस
के मुंहमेंरपकावेंकिहोरा में आवें इसके पीछेहरीरावेसन
और दूधकादें कि फेफडाठीक होजाय और जबदेखें किसास
क
F
।
१२४
आतीजातीनहीं है तोजानेकि-हमणया॥
बारल्यांपाठ
गलाघोंटे हुये औरफांसी दियेहुपेकाग्याय
जोदमाताजातादेखें तोजल्दीसेफन्देकोकाट दें-फिरदेखें
किउसके मुख कफहै या नहीं-जोनहोतो सरारूफस्दखोला
द-औरतलबों में राईमलेंजब उसकोहोश भाजायतोरोगन
वनफशा और गर्म पानीसेकुल्लीकरावे-औरजो हमेंकाफपा
याज्ञायतोउसकेनीनेकीआमनहीं।
तेरहवांपाठ९३
उसर उलबलावेविषयमें :-
इसरोगमेंकठिलाईसेनिगलाजाताहै-जोयहगलेके तंग
होजाने होतो खुचाक औरमरीके भिंचनाने का उपाय करें
जैसा जपरलिखागयाहै-औरजोमरी मेंकोई विगाड होमगानेसे
यहरोगहोतो-कारणके अनुसार उसविगाडकोदूरबारें और
दोनोंकंधोंकेचीचमेलेपकरें-इसलिये किमरीपीतवीरहै
औरवासवेरेयाकानीकी और ॥
चौदहवांपाठ१४
मरीकीसूजनकेविषयमें
जैसामवादहोसीकेअनुसारउसे निकालें और वैसेही
शरयतपिलावें।
A
20121
ans
पन्द्रहवापाठ९५ मरीमेंपादपड़जानेलेविषयमें चिन्हइसकायहहै किमरीकी जगहपीडाहोगी औरतेच औरवडीवस्तुकैरखाने मेंदुरल होगाऔर विनीवस्तु भलीमा तिनिगलीजायगीऔरमरीकीसूननके चिन्ह इस्ले विपरीत है। औरघावकमीरफरजानेके पीछे पडाकरताहै-चौरकीवि नासुजनके गर्ममवाद के कारण पड़जाताहै-उपायइसकाय है किसफेदमोंस रोगनगुल में पिघलाकर एकएक घंटक (रके पिलायें-पस्तु इसमे पहिले दो तीन दिनशहद और दूध औरशक्कर मिलाकर पिलावे-किधावसाफ़ होनाया। सोलल्यापार आवाजबन्दहोजानेऔरपडजानेकेविषयमें इसमेंपहिले यहदेखें किनजले सेहैरागले के किसी नि गडसे-जोनजलेनेहोतो खशखशकाशरवा पिलावें-औ पोस्तखशवश सेकुल्लीकरें इससेननलारुकनायगा- औरजोगलेकेचिगाह से होतोजैसाउचितहोवैसाउपाय कवावचीनीचवाना-वाकला-मुनक्के छुहारा-डा जीर चिलगोजा-वादाम-गन्ना-शहद-अलसीकेचीन- इनमें सेहरएक आवाजको साफ करता है। नजले के लियेरुमाळगले लपेटे रहैं-और मिरकोडी इपासेवचावें॥ करें।
।
दसवाअध्याय
छातीऔरफेफडेकेरोगोंकेबियमें
पहिलापार
दमके वर्णन में
यहरोगवडीकठिनाई सेजाताहै औरदूरहोकरफिरहोजाता
है-इसके उपायमें जितनीजल्दीहोसके करें-जोवलगममे
होतो स्वासीकेमाथवलगमनिकलेगा-औरछाती में वरस्वर
इटपाईजायगी-उसमें पहिलेवलगसकी मुनिशंदे-फिर
जुल्लावदेकरमवाद निकालें औरचहतगर्मदवानदें जिस
सेखुश्कीरहजाय यामवादगादापडके जमनाय-औरमवादी
निकालने के पीछेशवतजफादोतीले गर्म पानी में घोलकर
सवेरेऔर संध्याकोसीने केममय पिलायें-औरकभीकभीमूली
कचीजशहद के साथ नीटाकेकैकरायाकरें और जिससमय
बलगम की अधिकताहोतो-अलसी कुचलीकोपानी में
भोटांकरशहदमिलाकरपिलावें-इससेवहुतजल्दीचेनहीजा
यगा-और अलसीकैतेलमेंमोमकोपिघलाकर छातीपरम
लाकरें।
औरतोयहरोगदिलकीगरमीसे होतीचिन्ह उसकायह
हैकिनाडी भौरसांसजल्दीजल्दी औरभारीचलेंगी औरण्यास
बहुतहोगी भोरठण्डीहवा अच्छीमाळमहोगी इसमेंचायें हा
यसै फस्दवासनीकरवाले औलुभावऔर नर्म करनेवाली
भोपधेपिलावें औरहाथपांवमले।।
जा
११ औरजोयहरोगफेफडे में अधिक गरमी होनाने सेहोतो नाडीजल्दीजल्दीचलेगी परंतुभारीनहोगी भोरप्यासबहुत होगी और ठंडीहवाअच्छीमारूम होगी इसमेंठसडीओपधेपि लावें औरलगावें ॥ औरजोयहरोगछातीके उजलोंकेटीलापड़जानेसेही तोनाडीधीमी होगी और सांसद्हरीमावेगी जैसीकिरोने में भा तीहै औरछातीकोसीधाकरे विनापरीस्वासनभावेगी उस्में पानिजकाउपायकरें औरमेथीके बीज-दारचीनी-शहद में गोस्कार टपीवेंऔररोगतनरगिसमलें। औरजी फेंफाडेकीखुश्की सेहोतोप्यासअधिक होगी- गौरआवाज़धीमीनिकलेगीभौरचरवस्तुओं मेलामहोगा-३ समें फेंफडेकोतरी पहुंचा और तरऔषधे भोटाकेउसुमेरोगी कोकिलावें-औरवकरीकाद्धपीनामविलाभदायक है। औरजोफेफडेकी मस्दीके कारण सेहोतोपरडीवस्तु मेहानिहोगीऔरगरमी के चिन्हनपायेनायगे इसमें फेफचे। कोगस्मी पहुंचा और मेथीकेवीज छोटाकर पिलायें-औरगर्म तेकोकोम | CRIOना औरनोदमादमळेनेकीराहों मेंहवामसहने सेहोतो सूखीखासीहोगी-भौरवकगमन निकलेगा-औरवादीव स्तु स्वाने से औरवटेगा-औरछातीमारीनमालूमहोगीउपायों इसकायहहै कियायको निकालें औरजुल्लाव-भौरसोया औरवाचूनाछाती भोर सालों में मनें औरमाजून फिलासफा विलावें।। २५ THE- गोरजोरह फेफड़े कीजनेसेयानिगरादिकीपरदों की सूजन होतोइसदा उपायउन्हीरोगों में लिखाजायगा।।
पासो१२८12
औरजोदगातुन्नाल केकारणसेहोतो-इसकाउपायवह
है जोखुनाक काहे ॥
औरनामेदेकीतरीसेहोतो पेटमरनेपरदमचदनेलगेगा-
और खालीपेटमेंकमी होगी-इसमें सेदेसेसवादनिका और
भोजनकमदेंगौरपवावकीऔषधेरिखलावें।।
एकप्रकार इसरोगकीचहुतचुरीहै-मछातीकोसी
धाकरे विनादमनहीं लियाजाता - औरकारवटरोनहीलेटार
भारणाइतकायातो कोईगाटामवाददै यासासानेकी राह में
सूजनहैयाछाती के उजलोंकादीलाहोजाना-उपायहरस्कका
अपर लिखचुके है।
दूसरापार
खांसी केविषयमें
जोयह फेफड़े कीगरमी उंड औरतरी याखुश्कीसेहोतो
पहिचान उसकीलिखचुके हैं उसकारणकोदूरकरें।
औरजोरुधिरकी अधिकत्तासेहोतोनाडीमारीहोगीओं
रेसासकीहवागर्म होगी और मुखकारंगलालहोगा-इसमें वा
सलीकफस्दखोलें-औरठण्डी औषधेपिलावें।
औरनोनिगरकी गरमीसेहोत्तो-ठंडी ओषधंदें औरतु
मुलय्यनपिलावें।
औरजोकोई पतलामवाटभेजेसे गले में उत्तरेतो-ग
ले सरसराहट होगी गौरवासी मेंबलगमन निकलेगा और
गतको सोते में अधिक होनायगी इसमें ननले का रो-और
पोस्त ग्वश्रयाशको ओटाके कुरल्ठीकरे- दौरचवूलकागोदर
खमे रकवें॥
औरजीभेजेसे फेफडेयरमवाद गिरके गाटाहोजायतो
वडेज़ोरकीरवासीसे वलगम निकलेगा-औरछातीमारीमालूर
होगी औरपहिलेइससे जुकामहुआहोगा-इसमंजूफा-नी
र-मेथीकेवीज-मुलहटी-पानी में ओटाके पी३-और मुलेही
टीकामन-चालीमिरचे-शक्कर-चराबरलेकरगोलियाचनाचे
औरमुख में स्कवें।
औरजोफेफड़े औरछातीमे अधिकतरीहोजानेसेहोतो
रवासी लसदारवलाम निकलेगाऔरछातीके भीतरखरखरा
हर होगी-पहवहुधावूटों औरतरमिज़ाज़वालोंकोहोताहै।
इसकास्पायवही जीवनगमीदमेकाहै।।
औरजी फेफडे में धूयेंयागर्द पहुंचनेयावहुतचिल्ला
नेसेहोत्तोउसकारणकोदूरकरें औरत औरनर्मवस्तुरखावें
और ओषधोंकी कुल्लीकरें-गौरडी भोरपारवानेकी जगहषी
लगावें।
औरजोखासी किसी और रोगके कारणसेहोतोउस रोग
काउपायंकरने से जाती रहेगी।
और जो फेंफडेसेंकुन्सियोयङजाने से होतोनाडीज
ल्दीजल्दीचलेगी औरपेशावनलनहोगी भोरठण्डीवस्तों
सेआराम मिलेगा इसमेंफस्दखोलें औरछातीपरपच्नेलगा
वेऔरपितका जुल्लावदें-फिरनोउपाफ्गलेकीफुन्सियोंका
हिवहीइसकाकरें।
औरजोमेदेकीनरोसेहोतोमेदेसेमवादनिकालें और
भोजनकमरें।
भंगा
औरजोफेफडे में सौंदाकामवादाजानेसेहोत्तोखा
सी में बलरामकालागोर नीला निकालेग और र चिन्हसौदा
4.
माहार
*४३
१२०
केपायेजायगे-इसमें गेहूंकीभूसीकाहरीराशक्करयाशहदडा,
लवारपिला भोर मुन्निशदेकरसीदाकाजुल्लावदें।
औरजोवरस्वरे में पानीया और कोईवस्तुजापड़े औरत
ससेखासी होतोजवचकवहवस्तु वहां से दूरनहोगी-खासीन
थमेगी-इसके उपायकीजरूरत नहींहै-परंतुकभी ऐसा होता
है किभारीवस्तुजा पहने नेमलेकाहरहोताहै-ऐसे समय मेंछा
तीऔरगलेकोसन्हलायें औरकै कराने-इससेवहवस्तुनिक
लिआवेगी।
न
तीसरापार३
मुखसेरुधिरनिकलनेकेविथैमें
इसमें पहिलेपहदेखनाचाहिये किरुधिरमुखको भी
रसेआताहै याभेजे सेया गलेके अन्दर से-जोकेवल मुरवसे
जावेगातोयकके निकलेगा।
औरनोभेनेसे आवेगातोखरवार के मानिकालेगागों
उसके निकलने से सिरहलकाहोनायगा।।
औरजोगलेसेभावेतोचिनास्वामीकेनिकलेगा।
औरकुसरयाकारुधिरकफऔरवासीको सास्थान
कळेगागौरछाती में पीडाहोगी।
औरफेफडेकारुधिरवहुत लाल होगाहे-औरवासी
भीहोतीहै-परंतुपीडानहीं होती।
औरछातीकामधिरकम और फुटकीरमा निकलेगा-
औरस्सीवहुत होगी औरचावकीजगहपीडाोगी-औरहित
लेटने मेंरवामी और पीडामधिकहोगी।
6
करें।
औरजोमरीयामेदेयाजिगर यातिल्लीसे आताहोतो
जिस जगहसे आवेगा उसजगहकोई विगाडयायाजावेगा और
उसके साथकैमीहोगी।
जोसुखसेरुधिर निकले तो आसकेपत्तो-गुलना
र-मान-फिटकरी-आदिसेकुल्लीकरें
औरजोजोंककेचिपटनेसे जावेतो उसका उपायलि
खचुके हैं।
औरजोभेजेसेआवेतोफास्दसराह करें- औरंग
हीपर पछनेलगावें- और अपर लिखीहुईवस्तो सेकुरल्ली
और जो गले और कसवेरैया से आता होतोचहीकुल्ली
करें और कुर्सनपल उलुदममुख में रकवे-परंतुकुसवैरेयाला
बाबकठिनाई सेजाताहै-औरभीतरकेपरदेकेघारकाउपा
यहोसकता है। 4:21
औरजोफेफड़ेसेकधिर माता होतो-फस्दसाफि
औरचासलीक खोलें और पिंडलीपरंपरनेलगावें-और
जो आवश्यकताहोतो-अका किया-कुन्दर-माज-गुलनार
बिबूल कागोंद-गिले अरमनी - अफ़ीम-वरावरलेकर पीस
कमलें-परंतु गहदेखलेनाचाहिये किपाडे में सूजनतो
नहीं है।
हY
औरजोछातीसेरुधिराता होतोफ़स्दवासनीक
खोलें-औरकुर्मनफा उलदममुख में रकवें और खिलावें-
औरछाती परलंगावें।।
छानीकाघावजल्दीअच्छाहोजाताहै औरफेफड़े,
का घावबहुत बुरा है।
i
१२२
औरजोसधिरमरी औरमेदे आदिसे भाताहोतोउसका
उपायआगेलिरवाजायगा!
इस रोगके सवप्रकारों मेषीयाहुभाशाहनालामाशे
खरफे यावारतंगकेपत्तों के रसके साथ देना और कुलफेका
सागपकाकर रवानाभऔर सागइंटलसमेतकच्चाचवाना और
गक उसकानिगलना अतिलाभदायक है।
नवरुधिर किसीजगह फेफडेपरगिरे और उसकेसा
थखांसीनहोतो सिरके भौरगुलाब से कुल्लीकरावें-और यो
हासापिलाभीदें-और नोवांसीभधिकाझौती-सावरशहद में
मिलाके चटायाइनीरकी लकड़ी जलाकेपानी में घोलके
दें-औरहाशाएकप्रकारकापोदीना होता है उमेभी मिलालेतो,
भतिलाभदायक होनायगा।
चौथापा
मुखसेपीपनिकलनेलेबियों
जोयह फेंफडे की सूजनके पटनानेयासिकादि
सेहोतो उपाय इसका आगे लिखाजायगा और नोगले औरस
खके भीतरसे आवेत्तोरकुन्नाक कारोगपहिलेहमाझीगा और
इन स्थानों में सूजन होगी-इसका उपाय हम लिवचुकेर
परंतु जो पीपलाती से भावेसूजन केपट्ने के कारणसे
तोमवाद को उनऔषधों से पतलाकरें जोवलगमावासी में लि
खीगईहैं कि मवाद पतलाहोकेटपक माय और मोमको रोग
नवाचूने में पिघलाके मले और कोई ठण्डीवस्तुओरकन
॥
१२३
3-
ta
करनेवालीकृमीनखावें-औरमवादके पत्तकाकरने के लिये
जूफा-औरहाशा और इन्जीर-और मुल्हटी-ओटाकेपीनाम
तिलाभदायक है-औरयह औषधहर परदेकीसुजनमेंचाहे
वह छातीकी होयाफेफडेकी और फूट गई हो लाभदेगी।
जालना चाहिये किछातीकामवाद फेंफड़े सेंन्तर
करनरवरे की राह मुखसेनिकलताहै- सिवायइसके औरको ६१
ईराइछाती केमवादनिकलनेकीनहीं है।।
-पांचवोपाठ५
फेफडेकीसूजनकेविषयमें
जोसूजनरुधिरया पित्तयारवारीवलगम होतोतप
। चहतहोगी और सांसनलीनायगी औरछातीमारी होगी और
पीडा होगी और गालोंपरलालीहोगी औरण्यासबहुत होगी
और इनचिन्होंमें मवाद के अनुसार कमी और अधिकता होगी
इसमेंचासलीकफस्दखोलें-औरजोराधिरकी अधिकतादेखें
तोपहिलेमाफिनकी फस्दखोलें इसके पीछे मतख मुलग्यन
सेमवादको नर्म करें-औरजोनजले से सूजन होतोफस्द सरा
रुकरें।
1 जाननाचाहिये किफेंफड़े गौरछाती और उसके पास
में नीसूजनहो उसमें तीन दिनसे पहिले फस्दखोलें और जि.
घरसूजन हो उसकी दूसरी औरकीफस्दरवोलें-औरनवमचाद
गिरने से हरजायतों दूसरी मोरकी खोलें-नियरसूजनहो
• फेंफडेकीसूजन मेंजवनय अधिक होगीतोमूजनकी
औरकागालनाल होनायगा-औरभारीपन भी उमीऔरमालूम
Far
चुके
Pરશે
१
होगा-और सूजनकी ओर लेटनेसेमुखसे पानीचहुत्तनिकलेगा
जोरोगीकमजेतहोतो-तीनतीन दिनपीछे पारद खोलाकों-
और उसके पीछेमवादकोनर्मकरें औरमवादकोवाइरसेंचने के
लियेछातीपरपछनेलगायें।
औररोगके गोदिसें ठण्डी औषधेजोमवाद्रको फेंफडेप
रगिरने से रोकेंमलें और इसके पीछे सूजनकीपटकाने अर्थात दि
गनेवाली ओषधेमलें-और जिमादशोसापीडाकोजल्दीसे
अच्छाकरताहै।
खवरदारजिनओषधोंमें कन्नहोजैसेकासनीकारस
चागादाकरनेवाली ओपजैसे शरवतवशवाश और ठंडापा
नीइसरोगमें कभीनदेनाचाहिये-परंतुजोसूजन पित्तसेहो उसमें
यह ओषधेदेसकते हैं।
इसरोग मेंछातीकोमवादसेसाफ करने का उपाय
करें औरजोतपके लिये ठंडाई पिलानी होतोमाइल स्क-और
शर्वतगुलाव और आशजोदें-भौरस्वीरे औरलोकी भारतावून
कापानीभीदेसकते-क्योंकि यहसाफकरते हैं और इनमें
कञ्जनहीं है और शिकंजवीन जोवहुतखट्टी नहोभतिकाभ
दायक है और जब सांसलेने मेरोगीहापनेलगेसोलुभावइस
गोलपतलीकरके कन्द औरशस्वतगुलाबके साथ एक एक
घुट पिलावें-औरगुनगुने पानी से छाती औरपसलीकोधारें-
जवतक किदम ठिकाने से होजाय और पीडाथम्मजाय॥
जहां कहीं सूजन होतीहै यातोमवाद आपसेआप,
पककेदरहोजाताहैयापीपपड़जाता है यावइस्थान कड़ापहा
जाताहै-सूजन पटकने केचिन्द्र यह है किगेगमेंकगीमालूम
होगीऔरवलगमगले से सुगमता से निकलेगा।
१२५
औरपीपपड़ने के चिन्ह यह हैं किरोगवटता जायगा-
और जिस दिन मबाद पकेगा उसदिनवहत अधिकता होगी।
रंतुतपौरपीडाउहरजायगी औरभारीपनारद जायगा और
जिस दिनसूजन देगी उसदिन जाडेके साथतप फिर ज़ोरक
रेगी।
औरवडेहोजानेकेचिन्हयहहै किवहधारोगोंमें क
मी मालूम होगी-परंतु दमरुकेगा और सूरवीरवासीजीरकरेगी
औरभारीपनाभी रहेगा और कभीयह सूजन कड़े पड़नेके.
पीछेभी पलके फुटजाती है परन्तुचहुत कम-जिससमयसू
ननफूरनाय औरवलगमकीनगह पीप निकले तोबहुत अच्छा
है-नहीं तोकहऔषधे देंजोचौथे पाठ में लिखी गई है और व
भीगेसाहोता है किसूजनभलीभांति नहींपकती-परन्तु कि
सीकारणसेकच्चीफूट जाती है और केवल रुधिर निकलना
ऐसे समय में शीघ्रता से मास्दखोले गौरवहरपायकरें-जोती
सरेपाठ में है।
और जोफेफड़की सूजन ठण्ड सेशोअर्थात्वलगम
यासौदासेतोवलग़मीके चिन्हया हैं-किमुखमैथूकवह
तनिकलेगा औरमारीपनाऔरदसकारकनाबहुतहोगा और
गर्म सूजनके चिन्हकोईनहोगे-परन्तु हलकीतपस्हेगी और
गर्भसूजन में तपअधिक होगी।
औरजो मौदा सेहोतीसूखी रवासी होगी और सांस
काठिनाई सेलोनायगी और जोपहिलेगर्मसूजन होफिरकाडी,
होजापचिन्द्र उमकायहहै किकडे पड़ने से पहिले गर्म सूजन
तिचिन्हमायेचायगे।
,
| " , बलगमी पहिले मंचादकोनर्म करें और ऐसीओषधे
मलेंजोठण्डी ही-औरमवादको फेंफडेपरगिरनेसेरोकें और
थोडे दिनपीछेगवतपकम होगांपत्तोवलगमकीमुंजिशपिल,
केजुल्लाबदें।
औरजोसौदासेहोतोरवतमीकेवीजऔरअलसीकेवी
नोकालुआवरोगनवादाम में मिलाके एकरघुटपिलावें और
लडकीकी माकाध और नर्मकरनेवाली औषधेमलें-परंतु
दावीकाउपायवहुतकमहोसकता है।
फेंफडेकीसूजन में कभी पथरी पङजाती है-फिर
खांसी थम जातीहै- और कभीइससे सिल कारोग हो र
जाता है ।।
छठापाठ६
सिलकेविषयमें
फेंफड़े मेंघाव पडजानेकानामसिलं है-चिन्हउ
सकायहहै कि इसमें तपेदिक अवश्यहोती है और स्वासी में पी
पनिकलती है।
पीपभोरकच्चेबलंगमकेपहिचानने में घोकाहोग
ताहै-इसलियेउसकी पहिचानयादरवनीचाहिये-किंपीप
पानी में बैठजातीहै-और आपपर जलाने से गंधनिकालती है-
भौरवलेगमपानी परतेरना है-और आगपररकवने सेगन्धन
हीदेता-इसरोग काउपाय नहीं हो सकता परंतु जोउचित उपा
यकेसाथदेवयोग्यसेदूरभी होजाय तोक्या अचम्मा है-जे
साहकीमधूंमलीमीना ने लिखा है कि मेंने एक स्त्रीका उपाय
.
कियावह तेईसवरसजीती रही औरहकीमजालीनूस कहता है।
किमेंने इसरोगमें जिसका उपाय भादिसे कियावह अच्छा होग
यांइसमें शीघ्रता से फस्दवासलीक उसमारखोलें जिघरपीडा
नहो औरनोफस्दनवोलसतोछाती पर पछोलगावें और
जोइसमें नजलाभीहोतो फस्दसरात भीरवोलें और आशनी में
केकडे पकाके खिलावें और तपेदिकका उपायकरें-औरहवी
मयूअलीने लिखा है किइसरोगसे जहां तकनयागुलकन्दरि
लायाजाय खिलावें-यहां तक कीरोटीके साथभीवही खिला
याजाय-परंतुर्यहवात मेरी समझ में नहीं आती-क्योंदिगुलक
ल्द सेदस्त आनेकाडर है- औरदस्तइस रोग में बहुत बुरह-नौं
रिसफफसरतान पारवते उन्नाव-याशरवतखशवाश के साथ
चटानालाभदायक है।
सफूफ़सरतान योंकनातेहैं-किकडेकोजलाकर
स्वकिरलें औरह रावर माशेलें औरचवूलकागोंद और गिरने
भरमनीहरस्करमाशे-सफेदवशरवाश-भौरकालीखशखा
शहर कशामाशे-कतीरामाशेपीसकेसफूफवनावें और
माशेरवायाकरें।
सातवांपाह
छातीके पादों और मिल्लियों
औरवधनों औरउजलों
और उसके आसपासके जोडोकीसूजनों कवियों
માનાલા
१२८
इनसूजनों का नाम अलग अलगरकया गया है- जोर
सूजन आगेकी पसलियों के भीतर किल्ली में या उसपरदे में
जो मरी और मेदे और जिगरकेचीचमेंतनाहुनाहै- पडे उसको
ज्ञान उल जनब स्वालिस और जान उल जनव सही कहते
B. औरजोसूजनभीतरकेसव परदों मेंहो उसका नाम
रवानिकाहै । नाम-2015 Tara
और जोसूजन पसलियों के बीच के उजलों में हो
उसको जात उल जनवगैरसही औरतौर स्वालिस-कहने
ग
औरजो अपरकी पसलियोंकी मिल्ली हो तोउम
कानामइन्हींनामों से रववलियाजाताहै-औरजोपीठ.कीर
पसलियों के भीतर को झिल्ली में सूजनहो उसका नाम
साहै ।।
जिगर और मेदेके वीचमेंजोयरदाहै उसकी सूजनको
वरसामकहते है।
जोगिल्लीछाती से मिलीहुई है उसकी सूजनको
जात उलमदरकहते हैं।
औरइसमिल्लीकेसाम्हने पीठसे मिलीहुई जोगि
ल्लीहै उसकी सूचनकानामजान उल अजहै।
जोपहिचानमवादकी और उपाय फेंफडेकीसूजन
में लिरवागया हैवहीइसकामी करें और सूजन की जगह पोड
सेमालूम होनायगी-अर्थात जिसस्थानपर पीडाहोगीवहीसूज
नभीहोगी औरजात उल सदरमें लेपछाती परलगावें- औरना
नउल भेज़ में कन्धोंके वीचमेंइनसूजनों और फेफड़े की-
--
सूजनों में यह स्तर है कि फेंफडेकीसूजनमें डीकडरातीहुईचन्द्र
तीहै-औरत्मक्तरुकताहै और इनसूजनों में नाडीस्मीनता
तो औरन्दनमीकमरुकना है औरसरसाम मेहोश औरज्ञानतात
हताहै इसी कारण सेवहुत मनुष्योकोसरसामकाधोरणाही
ताहै।
कभीरेसाहोता है कि जिगरकीसूजनमेदमरुपाने
लगताहै-इसकारणसेजात उल जनवकाधोखा होता है-पर
तुजात उल जनवऔर निगरको सूजनमे यह अन्तर है किजिगर
की सूजन में रंग पीला होजाता है और खासीनहीं होती गोन
गरकी और वो और पीडाहोतीहै और पेशाबगाटाआवा।।
जमवाइनसूजनोंका पकजाय तो जोबनाम
खसेनिकलेगा उसमें पकने के चिन्ह होंगे उससमयचाहिए
कि ऐसा उपाय करेजोपीपवननेसेपहिले सबनवादपकके
निकल जायदसलियेगर्म पानी भौर आशजी-शकागो
हदगुनगुनाकरके पिलाना चाहिये-इसलेमवाद वनकर
निकल आवेगा-भौरोगीकोउसकरबटसे सुलावे-निचरमन
नहै-इसमे फेंफहाभूक्नके पासमाजायगा भौरपके हुएगाया
दकोचूसकेनिकालदेगा।
जात उल जनवदोपकारकाहै ऐवाहकीकी दृससगै
रहकीकी-हकीकी तोवह है जीसूजन हो-औरगैरहकीकीबह
है किगादीरोइपसलियों के भासपासमौरमिक्लियो मे रुकना
यऔर पीडाहो।
औरजोरीहफंसने के कारणभागेनहीक्रमकतीइस
लियेजात उलजनवहकीकीकाधोस्वाहोताहै-अक्अन्तरइ
नदोंनों मे यह है किजात उल जनवरीही में भारीपनगौरतपर
M सो नही होती-औरजात उलजनवहकीकी में यह दोनों बातें पाई जाती हैं-उपापइसकायहहै किरीही में पटकानेवाली औ पर्षेलगावें औरकभी फस्द और जुल्लावभीदेनापड़ता है- औरसाम्हनके हाथ से फस्दैउसेलमसालनाशीघ्रतासे लाभ देतीहै। आठवांपाठ छातीकेआसपासपीपरुकरहनेकेविषयमें यहइसप्रकारहोता है किफेंफडे आदिकीसूजन पक के फूट जाती है औरछातीकेआस पास फेंफड़े सेवाहर गिरती है और गादे होने के कारणवहींफसरहती है-नफेंफंडाउमे चूसके निकाल सकता है और नपेशाव और पारवानह से निक लसकती है-चिन्ह इसका यहहै-किइससे पहिले छाती में किसीस्थानपरसूजनहुई होगी औरउसकेपकने के महोंगेऔर हल्कीतपहोगी-औरपेशावऔरदस्त और पीपननिकलेगी इसमें-इन्नीर-सूखाजूफा- हटी-हंसराज-मुनक्के-पानी में जौटाकेरोगनवादाम और- मिश्री मिलाकेपिलावेंकिचड़पतलाहोकर निकलने के योग्यः होजाय- औरवइ औषधेदेनोउसको निकालें-औरपेशाव लानेचाली औषधेभीदें-ओरमसानेकोंधो--और जोदस्तों । में निकले तोनर्मकरनेवाली औषधंदें औरजोदोंनों में निक ले तोकभीवहदें औरकभीवह परंतु ऐसाकमहोताहै।। e- .
१३१
SHIO4
नवापार र
छातीकाठण्डयाजानाऔरजकडजाना
यहरोगया तोचाहरसेअधिकउण्ड पहुंचनेसे होगा या
भीतरसे पहिलेइसकारणको मालूम करें और उसमेंदमरुक
करावेगा-उपायइसकायहहै किसातर और हींग आदि के
तेल मेंजुन्दवेदस्तरमिलाकरमलें और गर्म औषधंगौटाकेर
धार औरलेपकरें और हींगमायडल अस्ल में मिलाके एकएक
घुट पिलावें और हरीरो और माउल अस्लमोजनकीजगहदें।।
कभीयहरोग अफीम पीने और सीसेकेपिघलने के
धू के पहुंचने से होजाता है-इसमें वहगर्म औषधेदें जो खासी
के लिये है-औरगर्मघामों के जोशादेंसेसेकें।
जोअफीमपीने सेहोउसमें केसरकातेकछातीपर
मलें-औरजोसीमेकेधूमेंसेहोतोकुटका तेलमलनाभतिर
लाभदायक है। -
सीसपिघलने केधूरे सेक्हुतवचनाचाहिये।
ग्यारहवां अध्याय
दिलकेरोगोंकेविषयमें
पहिलापाठ
दिलकेमिजाज़केविगाडमें
१२
जो भकेलाहोतोठीककरनेट्टीसेजाता रहेगा
सीमचादसेहोतोपडिले उसमवादको निकाले-और फिरमि
जाजकीमभान करें-और जोफस्दकीआवश्पकताहोऔर को
ईहानिभीनहो-तोदोनोंकन्धों केचीच मेंफ्छनेलगावें-और
रोज़ाज को ठीक करने औरमवाद निकालने में कई बातों का
त्यानरक्खना अनि उचितहै।एकतोयहदेखलेंकिकारणरोग
काकम हैयाअधिक दूसरेरोगएककारणसेहैयाई से-ती
सरेदिलकोकमजोरनहोनेदें-चौथे जोतपहोतोउसकामी:
ध्यान रखें और उपाय करें-इसरोगकोउपायशीघ्रता से करें
नहीं तो पुरानापडके कठिनतासेजाताहै।
दूसरापार
खफकान अर्थातदिलघबराने के विषय में
यह रोगजवदनाताहै तो मूभिानेलगती है
और येदोमकार से उत्पन्न होताहै: अर्थात् या तोइसका
कारण केवलं दिलमें होता है-याचदनके और स्थान में
सामेदाभौरभेनाऔर जिगर और आतें औरफेंफडाआदि यास
रेवदन में और जौडकमारने या जहरीलोजानवर के काटने से
होवहभीइसीप्रकारमेंसमानाचाहिये।
जोइसका कारण दिल केसिवाय किसी और स्थान
मेंहो तो उसस्थानकोठीक करें-परंतु दिल को पुष्ट रकवें-
औरजो केवल दिल मेंहोतोमवाद के अनुसार उसे ठीक करें और
जुल्लावदें।
औरजोयहरोगदिलकै तीब्रहोने सेहोतो हरीरा
।
विलायें।
औरजोवहतसो उलटीआनेयारुधिर निकलनेयाद
माननेदिल कमजोर होजाय और उससेयहरोगहोतो दिन
की पुष्ट कारनेवालीजोषधे और भोजनदें।
लिकिसीकोयहरोगगरमीसेहो उसकोचाहिये कि
गरमान और गर्म हवा में भोरगर्मशहर में नरहें- नहीं
तीजवस्माउसकीकमहोजायगी याउल्टीवहुतहुआकरेंगी
इसरोगमाकुछ वर्णन तीसरे पाठ में भी आवेगा।
तरतीयशवकी कौडी के स्थान परलटकानाइमरो
गर्ने अपिल्लाभदायक है।
तीसरापाठ३
मूछ केविषयमें
जबखफकानवटजाताहैतो आनेलगतीही
औरजयविहुत आती है तो मनुष्यूमर जाता है औरसूच्छी
तीन प्रकारको होती है। ION યુ.
• 'स्कतो यह किरुइहैवानीजानीरहै।
दूसरेयह किवहरुह टनाय॥
i
"तीसरे यह कि उत्पनकमहो- और इन तीनों प्रका
रों में रोगीकमज़ोरहोजाता है। ।
और कहके जाने रहने के भी कई कारणहैं।
स्क यह विदस्तकात भयारुधिर भाधिकालि
कलंजावे॥
दूसरे कोई भी अधिक भौरभचानकही।
1.
१
९३४
तीसरे चैन और स्वादअधिकहोनेसेभीमातीरहती
है
चौथे अधिक पीडाऔर बेचनी से।
औररुहकेचुटजाने के कारणयह है।
कि किसीमवाद के अधिक होजाने सेयाअधिकमा
दिरापीनेसे और अधिकमोटाहोजाने से।
दूसरे अधिकदुरवसे॥
तीसरे अचानकडरके होनेसे॥
औररहकेकम उत्पन्न होने केमीकई कारण हैं।
अर्थात् दिल में विगाडहोनायाबुरेभोजन खाना याबहुतवी
मार रहना औरभूखा रहना ॥
जोमवाद रंगों से दिल में पहुंचता है क्यानोदि
लकीरगों में समाता है या दिलके जपर रहता है उसकावर्णन
इसोअध्यायकेचौथेपार में आवेगा।
चहिये किसूमि कारण के विपरीति उपायकरें-
अर्थातजोमू गरमी से होतो ठंडी ओपधेदिलकीपुष्ट कर
नेवाली संघाचें-जैसेचन्दन-कपूर आदि और केवडेका
भरकू गले में टपकावें-और जोठंड सेहोतो-मुश्क और केसर
आदिसुंघावें-और गलेमेंटपकायें और मिजाज के अनुसार
लेपकरें-औरगर्म मिजाज वाळेकोगुलाव औरठंडापानी छाती
१और मुहपर छिडकनालाभदायक है-परंतुजो बहुत दस्तू
आनेसे शरीर उंडापडगया हो और उसके कारण से मुच्छाहो
तोपानी औरगुलावनछिडकचाहिये-इसमें गर्मरोट्री सुंधावे
औरमाउल अस्ल मुंह में टपकावें और गरम तेल टुंडी कमी
चेमलें॥
x
१३५
औरजोगरमी की अधिकतासे बहुत मापसीना भाके
मूच्छा होतोठंडे पानीया गुलाव सेहाथपावधुलावें औरपसी
नावन्दकरने के लिये मरद के सूखेपले यामाजू पीसकरवदन
पर मलें।
और पीडा की अधिकता से मूहिोतो माजून फ
लोनियां खिलावें- और कुलंज की पीडा में भी ऐसा हीकरें
भौरनो यह रोगजीमचलाने या हिचकीमे होतो
उलटी करानालाभदायक है और बहुधामू कीचहुतसी
सकारों में उलटी करानाभच्छा है-परंतु जोवहुत पसीनाभावे
तो नकरानाचाहिये।
और जोजहरीले जानवर के काटनेयाडंकमारने
से होतो तिरयाक और विषकी दूरकरनेवाली भौषधंदें-
औरजोरम के विगाड से होतो सुगंधन सुघा-- परंतुदु
र्गन्ध सुंघानांचाहिये- और रहमके अन्दर सुगन्धलगादे
औरहर प्रकारको मूछामें हाथ पांव मूलनालाभदायक
है- और जब रोगीचैक्य होजाय नोकरण के भनुमार उपा
यकरें।
मूछ के चिन्ह यह है-रंग पीला होना-हाथूपा
चांडे होना-भौरनाडीहोले होले चलेगी-भौर जो मूछा भी
धिक होगी तो भाभीक्न्दहोजावेंगी-मुर्छा और सकते
में अन्तर यह है कि मूछ चाला पुकारने से मुनता है- और
सकते वाळानही सुनता- औरजोचिन्हमृच्छकि पात्रि
खेगयेहैं-कह सकते और मवातके रोगमें नहीं होते।
मोतदिल ओप, त्रादिलको पुष्ट करती हैं यहहै-
साकृत-फीरोज़ा-सोनचादीकेवाल- गाउजना- ॥
१३६
-
औरगर्म भोषधे यह हैं-जदवार-दरूनज-मुरमा
अम्बर-जरम्वाद-कच्चारेशम-केसर-दोनो बहमने-
ग- कच्चा गद-वालंगूके चीन और पत्ते-छोटी औरचर्ड
इलायची-रैहांके फूल औरवीज-कवावा- तुरंजके छिलके
साजिज़ हिन्दी-रासन
...', औरठण्डी ओषधेयह हैं-कहरुवा-विसद-कपूर
न्दनबंसलोचन-गिलोमखतूम-सेव-धनियां ॥
औरयाकृतियां-और दवाउल मिस्क-भी दिलको
पुष्ट करती हैं- और जोखुश्की औरतरीदोनों प्रकारकी ओषधे|
देना चाहे तो उन्हीं में से उस्डी और मर्म ओषधेसमझकर
मिला।
जब अधिक गर्मी दिल में हो यामूळहोतोमीबहु
तउण्डी भोपळगदेनाचाहिये-इसीलियेपहिलेहवीम दिल
के रोगों कपूर के कुर्सीकाबिनाकेसरनहीं देते थे।
चौथापाठ४.
दिलदोनोंकानोंकेसूजनेके विषय में
दिलन्गपर दोवस्तु उभरी हुई है जिनमें छिद्रभीहै।
गौरजनमें सेड़वादिल को पहुंचती है- उन्हें दिल केकानक
हते हैं-मचनोई रोगदेर तक रहता है और सहजाती रहती है
तो भोजन दिलवोनहीं लगता और इनमें सूजन होजानी है-
येसूजन एडे मवाद होती है-क्योंकि गर्मीयामहोनेसे भाग
निमली भातिन्ही पकता औरवही इससूजनकामवादवन
-और सूजन गर्मी से होयाउस्ड से दिल के लियेवहत
।
बुरीहै-औरगर्मीकीसूजन सेतोमनुष्यमरहीनाता है और उसडी
सूजन में उपायका भवसर मिलताहै-इसका जल्दी उपायक
स्नाचाहिये-नहींनोरोगीदुवलाहोके मरजापमा-1
उस्डी सूजनके चिन्हयहहै-छाती मीरहनी-चहुधा
मूर्झरहनी-मोर उदामी-मोखोपरभुरभुराहर-और मुहका
रिंगबहुत पीलाहोगा।
इसमें-चायना-नारयूना-हंसराज-गेईकीभुमी-पानी
में मोटाकर छातीकोदंडी तकधारे भौरमटकानेवाली ओषधी :
कालेपकरें और दिलको पुष्ट करवेरहें-दिल के गपर की।
दिल्ली में नोसूजन होती है उसमें इनकानों की सूजनसेकमदुख
और मू होती है।
पाचापाठ५
दिलसेधुंआउठनेके विमें
यह किसीमवादके जलजानेसेहोताहै-औरजब
पुराना होजाता है तो मूर्छा मानेकगतीहै और बुरीखुरी बातों
केध्यान होते हैं-इसमें सौदाकासवाद निकालें औरतरी
पहुंचावें-इसरोग में जो रंगरंग के काले दस्त भावे यानकसी
र फूयायवासीर होनावे से रोगीजल्दीगच्छाहोजावेंगा।
छठापाठ६.
जगतलकल्बकेविषयमें
इसरोममें ऐसामालूम होता है कि दिलको कोई दवो
.
०३८
लावें।
रजवसाहोता है तो मूर्छाआजाती है और मुं
नकलते हैं- और थोडीदेरको पीछे रोगी भन्छा
हाजाताहै-इसमें दिलको ठीक करें और दिल और भेजे
को पुष्टरक्वें- और मुरैह सगीर - तिरयाक कवीर खिर
सातवापार
तकश्शुरकल्ब केविषयमें
इसमें दिल छिलताई और पीडाभी होती है औरजर्व
पीडा अधिक होती हैतो मूर्छामी भानातीहै- और थोडेस
|मय पीछेहोश आता है और सू के समय पीडाकी अधिक
तासे मुंह पर मुर्रियां सी पडजाती है- औरमारेवदनसे पसीना
निकलता है। इसमें पहिले कारणको मालूम करें किमवा
द भेजे से भाताहै या किसी और स्थान से फिरवेसाही उपाय
करें-भौरनोपित्तसेहोवो-पितको निकालें-औरनो
नज़लाहोतोमवाद निकालने के पीछेवशरवाशकाशरवत
चटावें-भौरनजले की रोकनेवाली भोपदें।
आठवापार
काज़ाफुलकन्यकेविषयमें
इसमें ऐसामानमहोताहे किदिल बाहर खिचामा
ताडे जेसे उलटी मे-येरुधिरया पित्तकी अधिकता महोगा
जारुधिरकी अधिकता होगी तो मुंह कारंगलाल होगा
भौर पित्त में पीला-इसमें दाहिने हाथ से फस्दवासलीक स्वो
लें और पित्तका जुल्लावदें-औरचन्दनकाशरवत बेदमुश्क
के अरक और गुलाव में घोलकर पिलाया करें-औरभोजन
अच्छादें और दिलको खुश करने वाली ओषधेपिलावें।
नवांपाठर,
दिलकेवैग्नेकेवियमें
यह दिल मेंरुधिर या पित्तकी अधिकता होनाने से
होता है और कभीइसके साथधीमीपीडाऔर सू भीड़ो
तोहै-जोमुहका रंगलाल होतोरुधिर की अधिकता होगी-
मौरपीलाहोयतो पित्तकेमवाद के अनुसार फस्द वोलें और
जुम्लाव।
दसवा पाठ १०
दिलपरतरीछाजानेकेविषयमें
इसरोग में ऐसा जान पड़ता है कि दिल पानी में डूवाना
नाहै औरफउकताई-यहसेगदिल घबराने याप्रकारे में से
है-इसमें दिल के अपर की गिल्लीमेंकफइकहाहोजाताहे
इसमें अपारिज खिलावें-और गुलाब के फूल-वालंयू-वाल
छड-आदिकाकेपछातीपरकरेंऔररोगी मे मिहनत करा-
और कोष दिलावेंइससेतरीदरजातीहै-कभीयहतरीलम
दार होकर दिलमे विमटजाती है
नात
है और क्रोषभाताई
५
२४०
खुशीनहीं होती-इसमेंनर्मकरनेवाली ओपघऔरछाती
पर खुश्कीदरकरने के लियेमोम रोमानमलें फिरमवादको
निकालें और दिलको पुष्टकरें- ५..
रमें दिलवहुत उत्तमवस्तुहै-इसका
रनाचाहिये।
बारहवां अध्याय
स्त्रीकीछातीकेरोगोंकेवर्णनमें
ईश्वरनेस्वीकीछातियों कोदूधके लिये उत्पन्न किया
है और उसकामांसभी सफेद हैजवरुधिर उनमें आताहै तो
दूधवनजाताहै-जैसाकिमर्दकारुधिरपेलडों में आकरवी
येचनर्जताहै।
पहिलापाठ
दूधकमहोनेकेविषयमें
इसरोगमें प्रभावके अनुसारदृधकमहोजाना है-इस
केत्तीनकारण हैं-स्कवामी रुधिरकी उसकेनिकलजीनेसे
दूसरे किसी रोगकेदेर तक रहने से और कभीरुधिरकी अधि
कतासेमीइसीप्रकार सेदृधकम होनाता है कि छाती में
तसारुधिर भाकरदूधनहींवनने पाता-तीसरेरुधिरके विण
इसेभीदूधकमहोनाताहै-चाहे वह
.
10 HIT
4 किमीमवादसे चिन्ह उसकायहहै कि उसमवाद के चिन्ह पाये नायगेया किसीमवाद की अधिकता हो-जोरुधिरकी कमी होतो मिज़ाजके अनुसारकहवस्तुस्वावें जोध उत्पन्नकरेजैसा दूध नादि-औरनोराधिरकी अधिकताहोतोफस्दरवोलें और पकने लगावें औरभोजनथोडादें-औरनोमिजाज़में कोई विगाडहोतो सिसे भोजन और औषधोरुधिरकोठीक करें भोरजोमवाद अधिकहो उसे निकालें। . जोदूधपतला और पीला और स्वाद और वास उसकी तीबहोतो पिनोंकी अधिकता होगी- औरजोवह पानीमा पत लाऔर सफेद और वहाहोत्तोकफ़की अधिकता जानो-भौरजो मैलाभोरगादा भौर थोडहोतो-सौदाको भविकताहै-और जहां कम और पित्तदोनों मिलेहोतो दूधका स्वादस्वारी मारने मकीन होगा। नो औषधवीर्यकोवटाती दुधकोभीक्दाती है औरजबरखुश्की औरतुवले पनसे दूधकमहोजायतोचौपायोंका) दूधमनिलाभदायक है। यह औषधधकोउत्पन्न करती है - गाजरकेवीज- (प्यानकेचीज-शलगमकैबीज-मूलीकेवीज-सोफसवबरावा लेकर उनसबकेवरवरमुनेहसे चने मिलाके कूट छान और उसमे से साढ़े सत्रह माशेताजे दूधके साथसवरेपिलाने. मोरनोरातको सफेदचनेदूध में भिगोके मवेरेछानने और राकार मिलाकेपिलावें नोभीलाभहोगा पहलेपदूधकोस्टाता है-वाकले का गाटा ३५तीस माशे-वादनसाटेर माशे कूटकार केवादरंजकेस्क में वो लकेछातियों परळगावें। . x.
१४२
दूसरापाठ२
दूधवदजानेकेविषयमें
स्वानेकाउपापकरें औरवह औषधे।
१
.
.
.
दायकहोंगी औरलाख और मुरदासंगरोगन गुल में मिलाके
छातीपरलगावें औरमलें-और ज़ीरा ।
लगाना औरईसबगोलके पत्तोंकालेपकरनाभीन
जिव
जकालेपकरें।
A
-
Fr
तीसरापाठ३
छातियोंके सूजने औरतन्मेकेविषयमें
जो किसीगर्म मवाद सेहोतो सिरकेको .. में
मिलाके फुकने मेंमरके सेकें और हरी नकोयपीसकरळेपक)
और तीन दिनपीछे वह ओपधेलगावें जो भागेके माठ में लि
वीगई हैं- और जोरपडे मवादहोतो मनमोदको कूटकर
लेपकरेंयावाचूनेकोसोफके पानीमें पीसकरलगावें औरवही
उपापकरेंजोभीर सूजनोंका है।
९४३ चौथापाठ छातीमेंदूधजमजानेकेविषयमें जावछातीके भीतरदूषजमजाता है तो सूजनउत्स्य होती है-इसकाकारणयह है कि या तोगी सेदूधगाटाहोना नाहै-याउण्ड से जम जाता है और देर तकदूधकेनिकलने सेमीसेसा होता है - कारण के अनुसार उपाय करें और जेवदे। तकदधकेन निकलने सेयावच्चेकेनपीने से या किसी और कारण से ऐसाहोती गर्म पानीसेछातियों कोधारें और डोळेही ले दूधकोचुसवायें किसाराधनिकल जावे-गौरजोदूधके चन्दहोने से छातीपकजाय औरसूजनाय और दूधकारंगे और स्वाद विगडजाय तो सूजन को पकानेकेलिये-चायना-अलसी केवीज-मेथीकेवीन-खैर केवीजबावरलेकर चुकन्दरकर पानीमें अथवाकेवल पानी में पीसके दिन में दो तीनवारकानी परलगावें औरजबसूजन आपसे भाप पककर फूटजाय तोर अच्छाहनहीं तोनश्तरलगावें-कभी रोमाहोता है किनश्तर गहरानहींगता और यीपकीजगहनहीं पहुंचता भोडससे केवल जपरकारुधिर निकलता है- ऐसे समय मेंदूसरीबार गहानश्तरलगायें जिससे पीपनिकले फिरघावका उपाय वही है-नोमुंहौरजीभके घावों में लिखा गया- क्योंकि' छाती में भी पतली और नमरों और मांस हैं- जैसे जीभ और मुंह में- और जोछाती में गुरुकोहोजाये तो भोग रोगनचांघों Je-
१४६
छातीकेपिसजानेकेविषयमें
पांचवापार
मूंगकोसर्न के पत्तों केपानीसें पीसकरलेपकरें औरनो
सूजनहोनायतो उसकाउँपायुकरें।
फिटकरीकोरोगनत में मिलाके शीशेकेवासनमेंस
डेंऔरलगावेतोछातिमांवटनेनपावेंगी और जोउपापलड़ों
केवंदलेकाहेबहीइसकाहै।
म तेरहवां अध्याय
386
मेदेकेरोगोंकेवियों
पहिलापाठ
मेदेकेंमिज़ाजविगडनाने केविषयमें
गरमी भौरठण्ड गौरमवाद भादिके चिन्ह आपसेजा
पमालूम होजावेंगे-जोगरमी से मिजाज में विगाडहो और को
ईमवादनहोतो-थोडाऔर हलका भोजन पेटमें जाकर विण
डनाना है- औरवहुतसा भौरभारी नहीं विगडता गोरमलीभी
| निफ्वनाताहै- रबारी कानव मेदेमें होता है तो-प्यासचदा
जाती है-और ठण्डे पानी से अधिक होती है और गरमपानी,
सेकम-जोरजोमदे में पित्या गरमी होतोभी प्यास वदनानीह
औरयह उस्डे पानी सेवाती है और गर्म पानी से अधिक होजाती
है जोसेदे में केवल गौहो और कोई मवादन होतो मेदेको
ठीक करें औरजोको गर्म मवाद होतो उसे निकालें- मेदेसे
मवाद उल्टीसेभली भांति निकलता है और विासीस्थानसे
मिदे में मजाद आना होतो उसस्थान ने मवाद को निकालें -
वहुधा मेजे और तिल्ली और जिगर से मेदे में मवाद गिराकरवा
हे लक्षण प्रत्येक के यहहैं-जोगेजे से गिरै तीनलाहोगा
और जिगर और तिल्लीसे गिरने में इन स्थानों में विगाइपाया
जायगा-जो भेजेके कारणसेहीनो फस्दसरा खोलें-और जि
गम में दाहिने हायसे फस्दवासलीक या असीलम खोलें कमी
ऐसा होता है किमेदा पुष्ट और साफहोलेकिनदेर में भोजन
चारने के कारण निर्मल होजावे- और सबाद उसमें गिरे माइ
वातवहुधागर्म मेदेको होतीहै कि भोजन न मिलने सेवेचेन
होजाता है-और कभी उनको भरखको अधिनतालेमर्जाभा
जाती है ऐसे मनुष्यों को चाहिये किमतकालदीकोई वही
स्तुवालिया करें और पेट खालीन रनवें-औरकमी मेदेखी पर
में मवादके फंस जाने से रहीरोग होताहें उसमें नयारिजपी
करा खिलाको उछटीकरांवें और जो उसमें शरदवासंतीया
पोलीहड़ मिला तो मवाद मेदे कीतह से उखड़ कारनिहार
ल आवेगा
पेटकीपीड़ाके वियों
जोयह मेदे के विगाड मेहोलो गरदावविहोच
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का-और मेदे में सूजन याघाव होतो उसकावर्णन आगे आवेगा-
गौरजोबायकी अधिकता से होतो पीडा फिरतीहई भालूमहो
गी और डकारें और हिचकियां आवेंगी और पेटबाळेगा-और म
लाहुभा-होगा-औरजवभोजनमेदे में नीचे उतरेगा तौचाई और
पीडा होगी-इसमें पेट को सेंके औरइलायचीको मुलाव में जी
टाके पिलावें और पौदीनाचवावें किडकार खुलकर आयें और
कमूनी विलावें औरजोवाय गाढ़ी होतोकाकाजुल्लायदें और
पचाव करने के लिये उपाय करें- और पेट परवारेलगाने से
पीडाजगदीनाती रहती है-किसीकारणसे पीडाहोरम में शिकं
नवीन को गुलाव यापानी में मिलाकर पिलाना भति लाभदाय
कहै-कभी ऐसा होताहै कि पीडापनले यावारीका सेहो
कोई क्लुठंडीदीजाचे भौरकफ़सेवायकुक्कमउठे औरइसकारणसेपीडामेंबई
कभीझोतानानपडता है कि गर्मगवादहक्योंकिरंडीवस्तसेकमीबई-गौरइसी
प्रकार कभी ऐसा होता है किमबाद गर्म हो और कोई औषधि
गर्म दीजाने और वह धूरे को पचावे और वाय को तोडै तो यो
का होताहै कि मवाद उरडाईक्योंकि रण्डी दवासेलामा
इन दोनों धोकों सेक्डी हानि होती है इसीलियेचाहिये कि
औरलक्षणोंपरभी ध्यान रकवें ॥ पान-संहार
भौर अधिवा भोजन यात्तीनवस्तु खाने से पीडाहोत
उलटी करके उसे निकाल हालें और कई दिन तकभोजन कम
खाय और जो तीव्र भोजन खाने से होतोसेसीवस्तु खावेनोउस
मकारकीनहो॥
औरनो मेदेके कमजोर होने से यह रोगहोतोलक्षण
उसका यहहै कि भोजन करनेकेपीछे पीडावी भधिवाना होगी
और जब तक वह उल्टी यांदस्तों से निकालनलगोपीडानहीं
उरेगी-इसमें वह जीषदेंगोमेदे कोपुष्ट करें और नौशदास,
कोखिलाना अति लाभदायक है।
• औरजोमेदे में मवाद इकट्ठा होजाने से मेदा कमजोर
होजाय लक्षण उसका यह है कि मुखकहहोजायगी और
गर्म मवाद में प्यास और मतली अधिक होगी इसमें देसे
मवाद निकालें और कुर्सकौकब और कुर्स अनीसून लाम
कारका है।
जो मेदे की हिस्सवदनानेसे पीडाहोपहिचान उस
कीयह हैकि थोडे कारण से पीडा उत्पन्नहोजाती-जैसेभो
जनके धूरें यावोग से या सौदाले गिरने सेजोमेदेके खाली
होनेके समय तिल्लीसे गिस्ता है और उससे भूख मालूमहोतं
है-और उराडे यानी पीनेमे और उसके सिवाय किमीप्रकारका
बिगाडन पायानावे ऐसे समय में भारीभोजन यारोसेदवारिख
लावें गोमेदेको कुंद और सुन्नकरदेंजैसे पोस्तरवशवाशको
पानी में भिगोकर और छानबारपिळावें॥12
LEE
एक प्रकार की पीड़ा सेसी है जो खाली पेट मेंनहार
सुरवहोतीहै- और रवाने के पीछेजातीरहती है-इसके तीन
कारण हैं-ऐक यहाक तरी मेदे में इकट्ठी होनत्य और पेटके
रखाली होने के समय सूरब की गर्मी से आटे और उससे वाय
उत्पन्न होके पीडाहो-दूसरे यह कि मेदेकेखाली होने के
समय निगम से पित्त मेदे में गिरे-और उससे पीडाहो-तीसरेय
हकि तिल्लीसे मेदेपर प्रभाव से अधिक सौदागिरै यासोवामे
तेजीहो निमसे पीडाहोजाय-वायका लक्षण यह है कि डकार
भाने मे पीडाहलकी होजाती है और किसी मवादकाचिन्ह
नहीं पायजाना और पिन और सौदा के लक्षणलिखचुके हैं
२४०
परंतु सौदा के कारण मेदे जलन होती है-बाय में तरीको मेदेसे
र करें और उसे पुए रकवें- और एिनमें मवाद को निकालें-
गौर जो अवश्य होतोदाहिने हाथ से फस्द असीलमखोलें और
सौदा मेंगो मवाद की अधिकता होनो उसे निकालें औरवायेहा
से फ़रद असीलम खोलें- औरजी सोदाकी तेजी होतो उसेटीक)
शुभम
श तीसरापाठ गरे 2014
Mates
"जौफ़हमनौरसूयेहज्म औरतुरबमें,
केविषय में।
कारण इन तीनों रोगों के एक है-जोकारण कमजोर
होतो पहिला रोगहोगा-नौरजोबहुत युष्ट होतोतीसरा-और्म
ध्यम में दूसरा रोग होताहै-नोस्वभाव के विपरीतिदेश्तका भो
जन मेदे मेंहरा रहै और फिरपचकर निकल जायनौवह नोफ
इन्म-है, औरजोभोजन भली भांतिनपचे और चतपतलाआ
वितो उसे सूयेहन्म वाइते है।
और तुग्यमा वहहै कि भोजन बिलकुल नपचे और
चैसाही दस्तोंमें निकले जैसाकारण देखें वैसा ही उपाय करें-
चारह घन्टे सेवाम और चाईस घन्टे से अधिक भजन पर में
चरहना चाहिये-मेदेचा जोरोग गर्मी सेनहोस्, सेर भर शि
कज बीन सफर जोनीन तोले सोंठ मिला देना अति लाम
और
चौथापाठ४ हैज़ेके विषय में यहवह रोग है जिसमें बिना पचाइमा और विगाडकर) नेवालामवाद शरीर से मदे में आकर दस्तों और उल्टी में बहत्त जोरसे निकलता है और कभी ऐसा होता है कि उलटीनहीं हो तीकेवलदस्त भातेहैं- परंतुमतेली अवश्य होती है-यह रोगवा हुत हरावनाहै परंतुदस्त भोरप्यास भौरकमज़ोरी और नाडीका नचलना और हाथ पीवका सेंटना देखकर बहुत डरनानचाहिये। जो उपाय अच्छा किया जायगा नोदूर होनाने की आस है- उपाय करने वालों को धक्रानानचाहिये खासकरकेजव किवच्चों कोयह रोगहोइसमेंजहां तक क्ने बिगाड़ करने वाले मवाद को दस्तों या उलटी सेविलकुक निकाल डालें-औरचन्दनकरें परंतुजोरुकावदेखें तो उलटी औरजल्लाब में उसे निकालें और कमज़ोरी अधिक होजाय तो मिजाज के अनुसार क्न्दकरें-बंदका स्ने केलियेनीबू के छिलके मुख में स्वके उसकारसचूंसे नौरन वयास और मम्मी अधिक होतो गरम गौष और विरयाक फार क बाभीन-और यह बातें याद स्क्वे-स्कयह किरोगीको हिलने मुलनेनदें और भोजन की प्रकार से कोईवस्तुनखिलाने परंतुनबअधिकआवश्यकता होतो कोई हल्की औरतली वस्तु खिलाने जैसे अनारयामिहे आदि कारस, और जहांगकरने रोगीके सुलानेका उपाय करें-यद्यपिइसरोग में नीदानाचहुत कदिन है नयापिसवा उपापचलाने के करने चाहियै और वगवाद निकल चुकैतीको ईइलकामोजन हालके अनुसार योडार खिलावे।।
यहां में एक घोवेका वर्णन करता हूं कि ऍतिके अंत
सवेरा होनेपर कभी उलटी होती है उससेडरके तिरयाक फार
क औरलोंग आदि गरम औषधियोदेई यहचान गच्छीनदीहरिनार
मोगर्म औषधैदेनेसेतफ्होजातीहै कभीमवादकेजलनेसेजगारीकहोजाती
चहचुरीहै उसमेमूच्छीऔरकमज़ोरीभौरविप्रभवश्यहोताहेजीमतलाने
दंडापानीपिलानाजहरकोकमकरबाद-जवरेमीउल्टीराति के
अंत में होसूच्छी आदि के साथ ती तिरयाक फ़ारूकदनहीने
कुछन दें- औरतीन पहर तक भोजन नदें-औरजनमूर्छा उत्प
नहोतो तिलीके देल में नाय फल पीसकेगीर गुनगुनाकरके
सारेवदनपर मलें।
पांचवांपाठ५
सूखको घरजाने यानातेरहनेके
विषय में
कारण इनदोनों का गेडे-नवकारणकमजोर होने
मुख घरमाती हे गोरजब कारण पुर होती जाती रहती है-पान
कारण इन दोनों को वहुत हैं-एक केरल मेदेका रिगाइ यि
नामयाद को चाहे पडविगाइगरम होयाटस्टादृमरे मेद में
मवादका उहाहोना-तीसोसारेगरीर में विमांकाचमग
दवी धियाना डोउसकारण सेक्टनको मोननकीचाहनान
डो-चौबेगरके छिद्रों का मला होना भौर चाममा काडाही
नाकिमसमपाद परता नही है-पाच्चे निगरका रामनाण्डो
नाया निगर गौर मामार्गका च वीचमे मदा फनाना-उरे ग
१५१
रास्ते में सुद्दा पहनानो तिल्ली और मेदेकेवीचमे है-सातवें मेने
की हिस्सजातीरहै। AMRIBY
जोमवाद और सौदोकोविगाड सेहो उसके लक्षण
भआपसे आपमालूम होजायगे परंतुकहनी तिल्लीसेमेदेयर
सौदान गिरने सेरास्ते के बंद होजाने के कारण सेहो और जो
वह भेदे की हिस्सजानीरहने से भेने के किसी मवाद के कारण
होउन दोनों में मेदेके कारण सबसे अच्छे रहेंगे और उनदो
नों में अन्तर यहहै कि सौदाकेनगिरने सेहो उसमें खडीवस्तु
खाने से बहुत जल्दीसूख लगेगी- और जोमदे की हिस्सनाने
सेहो उसमे वहीवस्तुखाने से कुछभी भूखनलगेगी-औरइस
के सिवाय भेजे में विमाड पायाजावेगा।
जबबदन को भोजन की चाहना होती है तो कह रगों)
मांगना है औरचूसता है और जिगर से मांगती है और जिग
रमासारीका से और मासाशिका भेदे से- उससमय में मेदाजान
लेता है और तिल्ली से सौदागेदेपरगिरता है और उसकी खटाई भी
रकसी लेयन से मेदा ऐंठना है-इसीका नामभूख लगना है-
जवकभी इन गे से किसी एक बात मे विगाड यडनाता है त
भूख नहीं लगती-सादे चिगाड मेंउसविगाड को ठीक करें-
और जब कोई मवादझोतो उसमबाद को निकालें और नव
शरीर के छिद्रों के मेला होने से यह रोगहोतोगर्म पानीसेना
न करें-और जो जिगर के कमजोर होने से यह रोगहोतो उसमे
जिगर को पुष्ट करें और जोतिल्ली और मेदे केवींच केरस्तेके
वंद होजाने से वह रोगहोतो तिल्ली से मवाद निकालें औरक्च
उपाय को जो दिल्ली की सूजन का है और जव मेदे की हिस्सा
जाने रहने सेहो तो मेजे को पुष्टकरे और आवश्यकता के
९५२
अनुसार भेने से मवाद निकालें- क्योकिएकपट्टाभेने से मे,
देपर आयाहै- मेदे में हिस्स उसीके कारण से हइसलिये
जेके उपाय से उसमें भीलामोगा।
शरीर मेरुधिरके घटजाने और किसी प्रमालेको
डदेने से या किसी दुरव के होने सेभूख विगड़ जाय ताजोर
पाय अवश्य सममें करें- औरजोजावो में केजुऐ उत्पनीने
से मुखजाती रहै तो उनके निकालने का उपाय करें औरइसी
मकारसेकारण कोदूर करें।
+शे-921
भूखलगाने वाली औषधेयह हैं-शिकंजलीन सपर
जली- और नीचूका गर्वत-औरहापोदीना-सिरके में डाल
कर खायें-भौर रेपही अनार-ौर पौदीनेका शर्बत चाटें।
१
लठापाठ६॥
भूखके विगडजानेकोविमें
22-जामा
इस रोग में मनुष्यवह वस्तुवानेलगताइनोस्वाने
योग्यना-जैसे मिटी कोथका कागज रुईगादि-धीर
यह बहुधा पेटवाली स्त्रियों कोहोताहै-इसमेबुरेमवाद भेदे
में इवाने होजाते हैं और उनके विपरीतिवानेकीचाहनाहोतो
इसमें मे सेमवाद निकालें-परंतु पेट वाली स्त्रियोंघावाछ
उपायन करें-उनका रोसास्वाभाव नीनचार महीने पीछे आ
पसे भापजाता रहता है- और मनवायन गोरजीकाचवाना
और ग्यारसनिगलनाभीलामकारवाहै।।
सातवांपाठ
भोजनकाहोकाहोनानेकेविषयमें
यमरने
इसरोग में ठण्ड से मेदेमें विगाडहोनाता है औरतरीसे
मेवा तानसे कि सौदा गिरने से भूस्व के समय होताहे- लक्षा।
णउसका यह है कि खानेका होका हो भौरप्यास बिलकुलन
हो और पेट फूला रहै और नाडीधीमीचले इससे मेदो कोगर
मी पहुंचावें- और अनीसून-अजवायन-जीरा-मस्तगी-आदि
गर्म औषधेचवावेंभौरभेदे परवालछड़-जायफल- भादि।
पीसकर मलें-औरजोकफ़से विगाड होतो उसमवाद को नि
कालें- औरजोतिल्लीसे मेदे पर सौदा अधिक गिरे और उस
से यहरोग होतोलक्षण उसकायह है कि नवतक पेट खाली
रहै मेदे मेंजलन पाई जायगी-इसमें सौदाकामवादनिका
लो भौरदाहिने हाथ से फस्दवासलीक और असीलम खोलें कि
जिगर मे सोश निकल जाय और तिल्लीपरवारेलगावें-जो मे
देया सारे शरीर की अधिक गरमी से भोजन जलदीपवजाया
करे-जैसे कि रसायन याकुरता खाने सेहोताहै-उपायइसका
समझ के अनुसार करें निससे वह कारणदूर होनास्य-जो इस
रोगकाकारण भेजेसे मेदे पर कफका गिरना भौर रक्डा होजाना
होतो वहीडकार अविगी- गौर पनिले ईससे नज़लाभाहो
गा-इसमेंननले को रोकें और जो भातों में केंचुरे पड़ने से य
इरोगहोतो इस कारण से कि केंचुरे भोजन को खालें तो उसका
वर्णन मोन्हवे अध्याय के पास में किया जायगा ।।
-
आग्यापार
जूडल बकरकेविषयमें
इसरोगमेंभूख विलकुल जाती रहती है औरभोजनसे
रेसा दिलाइटजाता है कि एक टुकडाखाना कठिन होता है-प
परंतु सारा शरीर भूखाहोताहै- गौर दिनपै दिनदुवला होताहै:
और जोर घटनताहै-और देखने में कोई कारण और रोगनहीं
पायानाना-नवयहवदजाता है तो मूर्छा उत्पन्न होती है
जव मूर्छा होतो पहिले उसका उपाय करें और फिर कारण
को पहिचान के उमेदर वारें- और जव रोगी कमजोर होतोच
भीजुल्लाव नदे- उत्तम उपाय यहहै कि मेदेको पुष्ट औरठी
ककरें।
जवांपाटर
मुखकीसहारनहोनेकेविषयमें
इसमें समय पर भोजन न मिलने सेमुछामी भाजावी?
चहियेकि हरसमयमोननवनारक्वें ओर मेदेको पुटकरेंगी
र वट मिट्टे भनारके रमऔरसेवकेरसमें रोटीभिगोकरखि
लावें-इससे मेदा पुष्ट होता है ।।
दसोपाठ १०.
अधिकण्यासहोनेके विषयमें
1
यहादो प्रकार का है एक तौसक्चीग्यास होना और
दूसरे गूंठी-सच्चीप्यासवहहै कि जिसमें मरमी केयुमाने के
लिये- और तरीघटजाने से पानी की चाइनाही-इसमें गरमी
और खुश्की के लक्षण पायेजावेंगे भौरपानीसेप्यास बुझेगी-
और टीम्यासवह है कि स्वारी या निस्सीकफयानलाहुना
सौदाभेदे में चिमटे और उसकेधोने के लियेपानीकीचाइना
हो-इसमें पहिले तौठण्डे पानी सेप्यासवुमनाती है परंतुयो।
डीदेरपीछे फिर लगती है और मुखकास्वाद मवादके अनुसार
होताहै-और जोथोड़ी देर पानी न पिये तोप्यामधीमी होजाती।
है- जब वह रोगगरमी से होतोयह देखना चाहिये कि वह
गामी भेदे में है.या जिगर में-याछाती में-या फेंफडे में-जिस
स्थान परगरमीहोठंड पहुंचावें-औरछाती और फेंफडे मोर
दिलकी गरमी में ठण्डीहवास्याना और ठंडीवस्तु सूचना अति
लाभदायक है-और मेदे और निगरकी गरमीकोठंडापानीला
मदेता है-इसी से पहिचान सकते हैं किगरमी किस स्थानय
र है- भौर जब कोईरसडामवाद होतोगर्म पानी में सिवान
वीनघोलकर पिलावें-और उल्टी करावें और सौफ का अर्क
दें औरचनों को भौटाकर उसका पानी पिलावें- परंतु स्वारी
क्लगम में सिवाय सौंफ के जीके और कोईवस्तुगरम नरें
नीचाहिये-औरजवखुश्की होती तरी पहुंचावें-गौर रोगनमा
दाम गौर दूध पिलाना अति लाभदायक है-ौरजोम्यासत
या जिगर की सूजन के कारण से होतोनम और सूननका उपा
यकरें-कभी ऐसा होता है कि बहुत सारुधिर निकलने से
पित की अधिकता होकर बुशकी बढ़ जाती है और उसके
कारण सेप्यासलगती है इसमें उस्ड गौरतरी पहुंचावें-और
किसी लसदार भोजन के खाने से भी प्यास लगती है-कयों
कि वह मेदे में जाकर चिमट जाती है-और उसकेधोने और
छुटाने की चाहनाहोती है-इसका वही उपाय करें-जोक
फ़ की ध्यासका है-और इसमेंयानीकानपीनाभीलाभदा
यक है और कभी बर्फ न्वाने से भीप्यासहोती है इसलिये
छ लोगवर्फको गरमबवाते हैं-इसमें नीवृका शर्बत पीवे
याथोडारगर्म पानी॥
ग्यारहवापाठ१९
मेदेकीसूजनके विषयमें
यह सूजनचाहै जिसमवादसे हो उसमे पीडाऔर
तप अवश्य होगी-परंतु गर्म मवाद में यह दोनों अधिक हो
गे और ठंडे में कम-और चिन्ह प्रत्येवा के पाये जामगो-जो
गर्म मवाद हो तो फस्दखोलें और उन्लीनचाराव-और पुर
जुन्लान मीनदे- जलकल होतो-अमलतास और इमली
और गुलाब के फूल हरी मकोय के फटे हुरे अर्क मे पिलावे
और पहिलेचन्दन और मामीमा का लेपकरें- और पीन दिन
पीछे जौ का बाटाजरचर्द स्वैर के फूल गुलाब में पीसकरले
पकरे और जवठंडा मवादकफाका होतो पहिले कफको नुनि,
सूदें-अंगरकीलकड़ी जलाकर उसकी गरम और मोथा और
सरकंडे की जड और वाल्छड सिरके में पोसकर गुनगुना लेप
करें- फिरजुल्लाव की भावश्यकता होतो अमलतास को
गौटे हुरेजूफे में घोलकर औरठानको पिना- औरजोर
-
P4
सौड़ाके मवाद से सूजन होतो वह सूजन कही होगी-जोउसमें
गरमो कालगावन होतोरेंडी का तेल और अमलतास और म
कोय का अर्की मिलाकर पिलावें-तीन दिन में वह कडापन
जाता रहेगा-और जो यह सूजन पुरानी होजाय तो कुर्ससम्कुल
देनाचाहिये।
वारहवापाठ १२
दुबैल तुल मेदांकेविषयमें.
इस रोग मेदे की सूजन फोडा वनजाती है और
पकके उसमें पीपपडती है- जोगरम सूजन होतो उसे खुरान
कहते हैं- इसके पकने और फूटने के चिदवही हैं जो जातु
जव में बताये गये हैं - जव मवाद कसा होने पर होतो मेयो
और कनीचे के वीन और कडुयेवादाम कूट पीसकर रेडी ।
के तेल में मिलाके लेप करें कि वह पककर फूर जावे- और
जो भाप सेनफूटे तो रोगी को गरम पानी पिलाकर सूजन को
दवावें- कि वह मूाट जावै और फिर मारल असल और गुला
व का शर्बत दूध में मिलाक पिलावें-कि मेदे सेमवाद निकल
जावे- और जवदेखें कि मेदा साफ़ होगया तो कुन्दर दम्मुल
अश्ववैन- गुलनार- कहेरुवा-गिले भर्मनी-पीसकर के
कावें-'कि धावपुरें और आशजी या होगं भोजन कीजगह
स्विलावें।
--
4.4.
तेरहवांपाठ १३
मेदेकेघाव औरफुन्सियोंकेवियमें ।
इसमें पीडा औरजलनखडी औरतीववस्तुओंके रवाने
से होगी-जौर जिस स्थान पर पीड़ा होगीउसी परघाव और
फुन्सियां होंगी- फस्द खोलें और उसी के पीछे वह उपाय
करेंजोसूजन काहै औरकालीगाय के मटेसें था । ।
फूल औरचूके के वीज भौर चंसलोचन पीसकर देनालाभदा
यकहै - और जव फुन्सियो फूट जाय तो पहिले वे औषधं दें
जोधावको साफ़ करें-फिरवह
जैसे ऊपर के पाठ में लिखीगईहै-और नरम करने के लिये
अमलतासको हरी कासनी के पानी में घोल वारदेना लाभ
दायका है।
चौदहवापाट
पेठफूलनेके विषयमें
इसका कारण यातो कोई टएडा मोर सादा विगाड
है यामोजनका विगाड्या किमी मवादका मेढ़े में इकवाडी
ना-इसको चिन्ह और उपायजौपाहन्मऔर मेदेके विगाड में
लिखचुके हैं-औरछोलापीपुापना गुलाम
पिलाना भोलाभदायक है।
-
पंद्रहवांपाठ१५
डकारजमाई और अंगडाईअधिकाने केवि
षयमें।
यह तीनों रोगसारे शरीर मेंयामेदेमें वायके उत्पन्नही
नसे भौर उसमें से अधिक धुंना उठने से होतीहैं-इनमें मवाद
को निकालें और पचावकोठीककरें-औरसौंफ कोमहीन पी
सकर गुलकंद में मिलाकर रिकुलावें-औरमुश्कयामस्तगीशहद मि
लाकार देना अति लाभदायक है- और मारे शरीरसेवायको
खोताहै।
सौल्हवापाठ १६
उल्टी उवाकी औरमतली औरतकल्लुवनपन
केविषयमें
उलटी वह है कि कुछ मेदेसे मुहकी राह निकले-भौ)
र पकाई वह किकुलन निकलेपरंतुसेमामालूमहोकि ज्य
दीहोती है और मतली उल्टीसेपहिले होती है और वरावरंग
लटी होना तकल्लुवनफसकहलाताहै-मवाद के अनुसार
जुल्लाव-और गरम पानी में सिकंजवीनघोळकर पिलायें:
और जो कुछ हानिनहोतोउन्टीकराना उतम है-औरजोमवारी
किसी भौरस्थानमे मेदे में जाकर पिरताड़ोतोग्सस्थानकाल
लाव-और टीका करें-औरनोनपमें वहाल के दिन ग्ल्टी
होतो उसे कभीनरोकें। न
सा
.
आमला-कहरुवा-बंसलोचन-जौकोसत्तू-चाहें
लाभ्याइकहादें।
क्षेत
यहऔषधकफ़कीउल्टीकोदूरकरती है
मेदेकोपुष्टकरतीहैं
जदगरकी-लौंग-मस्तंगी-सूरवापोदीना-
रकूटछाननें-और उसमें से साडेतीनमाशेलेवार पैतीस मागे
गुलकंद में मिलाकर दें।
यहलेपसौदाकीउल्टीकोलाभदायक है
k:- लादन-माखूना-उँडोला-भोरेट कोहरे पत्ते
वमें पीसकार मेदे और तिल्लीपर लगावें- औरंकुर्स
से अधिक कफ और सौदाकी उलरी में कोई
नहीं है- खाली सिंगी विना पछने की दूंही के पास और कंधो
के बीचमें लगाना भोरहायपांच मलना और रोगी के सुलाने
का उपाय करना अति लाभदायक है- और नव भोजन केवि
गाड से उलटीआवेतो सभोजन को विलकुल निकालनाचा
हिये इस लिये चाहे उलटी करावें चाहे नुल्लाबदें औरजो
।
मेदे के कमजोर होने से होतो उसे पुष्ट करें- और जोकैचुरे पड़
जाने से यह रोगहोतो उन्हें निकालें।
+
V
1
.
NA
.
on
सुशी
सत्रहवांपाठ १७
उल्टीमेंरुधिर आनेकेविषयमें
यह रोगदोपकार से होता है-स्क यह किकोई रगर्मी
या मेदेकी टूट जाय या फरनापयारागका मुंह खुलजाय-इस
रोग में मरीयामेदे में कोई विमाइ माया जायगा-और दोनों को
घों के चीच में पीडाहोना मरी के घाव का लक्षणहै- इसमें फा
स्दवासलीक स्वोलें-और भावश्यकता के अनुसार रुधिर
लका--जोरजव बहुत सारुधिर उलटी में आता होतो उसमें
ऐकसेरतक रुधिर निकालना लिखा है- और हाथ पांवकस
ना भौर पिंडलीयर पछनेलमाना और रुधिरकीबन्दकरनेवाली
नौषधंदेना लाभदायकहै- और रंग के मुंहखुलजाने सेजो
सचिर भाता हो उसकेक्द करने के लिये मुनक्के वीजसमैत
साना अति लाभदायक है-औरजोमरी में कोई विगाड होतो
रुधिरकेरोकने कीजो औषधिपियेंवह थोडीथोडी गलेसेनी,
चेतारें कि देरतकादवामरी में रहे और रसके पार जाने में
वर्स वाहिल लाभदायक है- और रेसाहीहरेवारतंग औरहने
कुलोका पानी लाभकारक है।
दूसरे यह कि निगर यातिल्ली यांभेजे में कुछ विगा
डहो भोर वहां से सविर मेदे में गिरकर उल्टी में निकले-ल
क्षण उसकायह है कि उन्ही स्थानों में विगाड होगा-इसमें
फस्द खोलें और उसस्थान कोठीक करें औरटहरठहरकर
थोड़ा रुधिर निकाले परंतु जोमवादबहुत होतो स्वारमी
बहुत निकाल सकते हैं और जोछाती परचोरलगने से यह
१६२ खोलें- फिर मुगोस- -एलुभा-भासके पत्तों के पानी मकर चोटकी जगहलगावें॥ अठारहवांपाठ १८ मेदे में रुधिरयादूधकेजमजानेके विषय के वर्णनमें जवरुधिरकहीं से आकर मेदे में रहजाय और उसमें गरमी नरहै और वह जमजाय याद्धपीवै-वहांडसे यात्रि सीजमाने वाली वस्तु सेजैसे पनीर मैदे मेंजमनाय-लक्षणो नोंका यह है किमू औरठडापसीनाभावे और कमीजाहा भीआताहै कि इसमें मोया भौरपोदीना गोराके और सिकंजवी नमिलाके गरम गरम फ्लिावें-सबजानवरोंकाफ्नीरं नमे हुरे दूध और रुधिरको पिच लाताहै- परंतु स्वर गोश का पनीर इस के लिये वहुत अच्छाह-वह पतले रुधिरजौरदूष कोजमादेताहै-औरजम हुऐ कोपिषलादेताहै।। कभी ऐसाहोताई किधपीने वालेवच्चों के मेंदेमे दूध जमजाता है. कारणइसका दूध पिलाने वाली के दूधका विगाड है- यामदे कीकमजारी-पहिलेदूधको पिघलावें भीर दाई सेवच्चे को अलगकरलें-और अंटनीयागोयावकरीका दूध पिला--भौर उत्तम यहहै कि किसी औरदाई कादूध, पिलावें-जिसकाघअच्छाहो-और जिसजानवर कादूधदें। उसको मुद्दोवया कैसम खिलावे-और जोदाई कोचूरनकर
सके तो मोनन उसकोठीक-औरवामीरथोडाथोडासा तिरिया
कफ़ारूक उसको खिलावें-ौरवच्चेकोभी थोडासा खिलावें।
भौरजवतक दाईको भोजननफ्धनपिकानेदें-औरषच्चे
के पेटकोकपडे सेटोकेरकायें किगरमबै भौरसूखाइमा
पोदीनासाडेसत्रह १७शमाशेजवान को स्विलानानमेहुरेंदूध
कोपिलाता है।
उन्नीसवांपाठ
अधिकहिचकीमानेकेविषयमें
जोवडुत स्वानाने से आवे नौ स्वानेके पीछे रेसाहोगा
जल्दी से उल्टी कराकेभोजनको निकालडाळेभीर पचाव की
नौषधियादें-और कभीइलायचीपोदीना चवाने सेथमजाती
है और कभी आपसे आप भोरजोनका कारण वायहोतो-
वाय उत्पन्न करनेवालीवस्तु केसानेसेरेसाहोगर-और पचाव
नहोगा सेक्च्चों कोबदुतहोतीहैक्दवस्तुनोवायकोदूर
करेंदें औरजोकिसी तीव्रमवादया औषधिके खाने से होता
हलेसिकंजवीन औरंगरम पानी पिलाकर उकरी करावे-और।
ठिंडे और तरलुभावनौरशीरेदें- और गर्म पानी में रोगनवादा
म मिलाकर एकघूटे पीना भौरभोजनमेंमकंचन डालके स्वाना
अति लाभदायक है-ौर नोमैदे मेंकफ केविमट रहने से स्सा
होतोलक्षण उसका यह है कि मुंह से पानी निकाले औरपचाच
नहो और रक्टीडकारें आवें-अयारिजका जुल्लाव देके उस
मवादको निकालें- मोरजोयह किसीसादेविगाइसेहोतील
क्षणग्मविगाड के पापेनावेंगे-इसमें गर्मभौषधे पीवें-या
२६४
इसप्रकार में औरवायमें और कफमें उत्तम उपायदन
और चिल्लानाहै-औरनाकारण इसका जिगर
।
.
क
भीलाभदायक है-और अर्कनाना और रक्ढे अना
रका रस मिलाके पीना औरवहुत साटंडापानी पीनागीररीटे
कोगले मेंलटकाना और डराना और मस्तंगी औरदार चीनीओ
टाके पिलानालाभदायक है।
बीसवापार २०
इकिलावनेदेकेविषयमें
इसरोगमें भोजन रहरके उल्टीमें निकल नाता है-
कारण इसकाछिलनानासीत्त का जो मेदेकेपासढुजव
भोजन पचके उसमांततकंपईचताहेती उल्टीहोजाती है और
नोउपायमरोड़का है वही इसकी भी करें।
इक्कीसवांपाठ२१
कलकुलमेदेकेविषयमें
यह बहरोग है जिसमें रोगीकोयनानपडता है-
कि में गरमराव परलोट रहाई-इसके दोकारण हैं-एक
तौमेदेमें पित्तइकटेहोजाय पाकोईठसडामवाद विगडू
जाय इसमें मवाद और मिज़ान के अनुसार जुल्लाबदें-और
टीककरें।
बाईसवापाउ२२
मेदेकेफड़कने केबिषयमें
इसरोगमें दिलघवराने कीसीहालत मेदे मालूम
होती है-मवादको अनुसार जुल्लायदे और जो केंचुरे पड़गये
होंनों उन्हें निकालें।
तेईसवीपाठ २३
विजडले फवाद के विषय में
महसकंपीडाहै नोमेदे में होती है इसमें हाथपाव
महोजाते हैं और मूलीहोजाती है और दिल तक इसका
नुवंपहुंचता है-औरजोयह रोगदेर तक रहै नौरोगीमाभीजाता
जोडपायमेदेवी पीडाकाइवही इसकाहै ।।
જેલું
चौबीसवापाठ २४ *
पेटमेंजलनहोनेकेविषयमें
जोमहाकाली रोटीयाक्चे फलों के खानेसेयामों
देमेंकच्चीमरीके कलादोगाने सेहोतो लक्षण उसका यह है
विपहिले भारी वस्तु स्वाई होंगी-भौरभूख केममयजलन,
कमी होगी और जोंसौदा के गिरने सेहोतो मुख के समय जल
नहोगी भोर चिकनाई स्वाने मेनलननाती रहेगी-जोभारी;
और तरभोजनके स्वाने से होतो उसमें उल्टीकरावें-औरहल्का
भोजनदेऔर मेदेको पुष्ट करें-औरजोसौदासेहोतोवायेहाथ में
फस्द असीलमयावासलीकखोलें- और हड़कासुख्खा और
सिकंजवीनवजूरीदें।।
पच्चीसवापाठ २५
1.2010
मेदेकेदीलाहोजाने के विषय में
यह दोपकारसेहोताहै- सेकतोमेदाटीला होजाय
और दूसरे उसकेबंधन जिनसे किवहवंधाइआहै-दीले होना
य-पहिलेकालक्षणयह है किपचाव नहीं औरछाती उभर
भावै-दूसरे कालक्षणयहहै किमेदामुक पडे और निसओर।
सुकेगा उसीगोरवोगहोगा-इसमें-इसतिरवा औरफालिन
का उपायकरें-और हल्का भोजनदें-औरसगंधिवाली औरक
नकरनेवाली भौपदें-औरवह उपायकरजोछब्बीसवेंपा
रमें लिखानायगा।
छच्चीसवांपाठ२६
7साल
मेदेकीवुनावटकैदीलाहोनानेकेवियुमें
chy-योनस
यहरोगबहुत बुरा है इसमें भोजनकभीनहींपचताओं
रसूजन गौरविणाइकै लक्षणनहींपायेनाते-जवारिशजद खि
लावें और मस्तगी का तेल मेदे पर मलें- औरचरेले मुर्गेका
संगीतसुखाकर औरयोमकर सवा दोमाशेगतरीफल याश
भवनहकुल गाँस केसायचा-औरहरायशत्र पीसके पोंने
दोमाशेदनालाभदायक है।
९९७
सताईसवापाट२७
मेदेके विंचनाने के विषयमें
रा
नोयहरोगसेदें मेंहीपचावनहीं रहेगा-औरजोपीय
के बंधन में होतोस्वातही भोजन आत में उत्तर जावेगा भौरन
गा-भौरजोदइनेयावायें बंधन में होनो रोगी उसीओरमुकार
हंगा-गौरजोइंसलीके बंधन में होतोरोगीगेको कुकारदेगा
भौर पीठ सीधीनहो सकेगी-इसमें वही उपाय करेंजोतमन्न
नकाहै।
अट्ठाईसवापाठ२८
मेदेकेकड़ाहोजानेकेविषयमें.
साधा
यहकडापनहाथलगानेसेमारामंहोता हैं औरन
ववढनाता है तो दिवाई भी देता है-इसमें मेदेका विगाड़ में
वश्य होगा-जोगरमी से होतो फस्दवासलीक या असीलम
स्वोलें-भौरवाच्या मोम रोगन वनशे या रोमन गुलमें पका
केलंगाय- और जो सीसे होतो- वावूनाः चालछर-मर।
कंडे कीड़-मेथी के वीन-गूगल-कडुवादाम कूरन
के लेपकरें-कभी सेसाहोता है कि तिल्ली के कडे होनाने
से उसी भोर मेदामो कंडाहोनाता है-इसमें दिल्ली का
पाय करें।
१६ उन्तीसवांपाठ २. te 10-0AMBEnre पहचान उमलीयहहै किवह कडापन रेक ओर से पतला औरदूसरी ओर से मोटा होगा और मेदे में कोई विगात नहीं पायानायगा-इसकावही उपाय करेंजो अपरके पाट में। लिस्वागयाहै। तीसापाठ ३०. पेटचलने के विषयों ६२२M लार- नोकोईसादा विगाइ यामवाद होतोलाण और यउसका जपरलिरवचुके हैं-और नोफुसियों मोर घाव सेहो तो उसकावर्णन करचुके हैं और जो निगरमें कमजोरीनहोती सफ़चारतुखम और सफूफ़हब्बुलरमा लामकारक है-ौ रजोनजले के गिरले सेहो उसमें सोने के पीछेदस्त भावेंगे- इसमेंनजले का उपायकरें-औरदरताको नरोके-परंतु भवा दको निकालें और भनेको पुष्ट करें-भीरजोभोजन सेदस्त गावेंनी पचाव औरभोननको ठीक करें-गौरजोरगों के मवाद सेरेसाहोतौलक्षण उसका यह है किशरीरमोटा होगा और दस्त बहे गावेंगे-इसमें फ़स्द स्वोलें और बदन मलें गौरपी सीना निकालें औरभूखेरहें-गोरजो निगरके कमजोर होने से होते दस्त सफ़ेद याहरे आवेंगे-इसमें जिगर गौर मेदे। को पुष्ट करें और नचारिशमस्तंगीरवावें-और जोदस्तवारी ६
बांधकर नावे-तौमवादकरंगसेलक्षण मालूमहोगा-फास्दा
रजुल्लाव से उसमवादको निकालें।
औरजोमासारीका मेंसुद्दापड़ने से रेसाहोतोवर्णन
उसका निगर केसुद्दे में होगा- और जोमेदे के खदानेके मिट
जाने से रेसा होतो कोई गलानेवाला मवाद गिरा होगा-या
मेदे में गर्म सूजन हुई होगी-या विष खाया होगा- कारण
के दूर करने के पीछे - सिमाक- जरबर्द-बंसलोचन-छा
लिया-चंदन- अनारके छिलके रसौत- पीसकर-विही या
अंगूर के पानी मेमिलाकरमेरे पर लेपकरें- और सहू और से,
बऔर विही रोगन वादाम मिलाकर खिलावें- और खाने के
पीछे देराक दाहिनी करवटलेटे रहें- और कहते हैं कि दूध
और मेदे काहीरा मेदे केम्वदानों को उत्पन्न करता है-भौर)
जोजुल्लाव के पीने से अधिक दस्त भावे नौ वडामठी ठंडाक
के पिलावें।
M२६
इकतीसवांपाठ ३१
मेदेकेछोटाहोनेकेविषयमें
ન ગ રે મા
जो यहजन्म मे होतो अधिक भोजनं चाहे हलका:
होदुखदेगा इसका उपाय सिवाय इसके और कुछ नहीं है।
कि नित ऐसा भोजन खावैजो थोडाहो परंतु ज़ोर उसमें भधिका
हो औरजो स्विचावयासूनन आदिसे होतो उसका कह उपा
यकरेंजोगचत हो।
+
-
योधवाअध्याय
-
जिगरके रोगों के वर्णनमें
पहिलापात
जिगरके विगाड़ केविषयमें
चाहे यहरोगमवाद सेहोया विनामवाद के इसमेंनि
पार में कोई विगाडहोगा और इसके साथ हरप्रकार के लक्षण
पाये जायगे-इसमें कारण कोदूर करें-निगरके विगाड को काम
नी अति लाभकारक है-जोर समलतास के साथ हर प्रकार के
विगाडकोलाभ देती है-परंतु अमलतास उससमय परदेंजब
किमवादको नर्मकरना चाहें- अब यहोवह औषधे लिखतेई
जोकेवल निगरकोलानतीहै-इन्हें समझकेदं और वान्न
काध्यान रख ठंडी औषधे-हरीकासनीकारस- अनार कारम
ज़रिश्क काशीरा-अस्यगोलका लुगाव-चन्दन काशन-और
सिकंजबीन-और मठाचाहें इनकोयबेलादेया मिलाके और
जोक्वज़न होनो कुर्म तबाशीर वाविन विही.या नेवको मनम
मिलाके या शर्यत हुम्माजके साघदें औरजी कावन होतोहड़
और अमलतास ओटाकद-औरजब रुधिरकी भधिकताको
और कोई रोकनहो तो फास्ट खोलें-चौग्नो पित्तों से होतीठ
डाई अधिकदें- और जो अवश्य होती फस्द माग्योलें और
उसडी बीपधों का निगर पर रग्वना निगरकीगरमीको चुका
नाहै- परंतुजबतक निगरसे मवाद ननिकाल लेंस्डी औष धेनलागावें ।।.. Hd औरगर्म भोपधेयहहैं- सौफ़-करपक्ष के वीज- शहद का गुलकन्द-भमानासिया दबाउल करकम और कफ केनिकालने के लिये-माउन उमूल- और हलसिंत्र लाभदायक है-और सूखेजूफे को पानी में ओटाके सादे चार माशेदवारलकरकमकेसाथ देंना निगरकोगर्म और पुष्ट के ताहै- और मानून फलसफा और बनियाकाइनरीफ़ल भी नि गिर को गर्म करताहै-और मवाद अधिकन निकालें- किइससे कमजोरी और दुक्ला पन होना है- मोरजोइस रोगमें दतमी भाते होतो कुलफा-रेहीके बीज वचून्ठका गोंद प्रत्येक साटे दशमाशे भूनकर औरंगुलाव में भिगोकर दें-औरनोसोदाकी। अधिकता होतो तरी पहुंचा और सौदा के निकालने के लिये इफनी संनभोटा या इंफती संनकी गोलियां माननोक्नके साथ दें- और कैरूती मुरतब निगर परंलगावें- इससे खुश्की और कडापन जाता है परंतु कि तरी अधिकन पहुंचावे नहीं तो निलंधर होजानेकाइरहै-और नोभोजन हरप्रकार के विगा के अनुसार हो-गौरहमके साथ कोई और रोग भीहोतो सकाभी उपाय करें ।।.नो दूसरापाट २ 22201 निगरके कमजोरहोजानेकेविषयमें चाहे जिस कारण सेहोलक्षण उसका यह है किदस्ता होगा-औरवदनदुबला होगा-
२७२
और मुख विलकुल न होगी- और दाहिनी और बगल में अपर
से नीचेकी पसली तक लम्वाई में पीडाहोगी-परंतुरवाने के
पीछेजव भोजन जिगर में जाने लगेगा-तौअधिक पीडा होगी
और रोगों का रंग सफ़ेद और हरा होगा- और कभी पीला और
कालांजानना चाहिये किवदन के प्रत्येक स्थान में चारशक्ति
है-पचाव दूरकरनेवाली शत्तिा-खेचलेनेवालीशक्ति-और
जाननेवाली शक्ति-जिंगरकीचारोंशाक्तयों में सेलोकमजोर हो
नायगी उसे निगरकीकमजोरी कहेंगे - और लक्षणइनचारोंकी
कमजोरी के अलगअलग, -जिगरके पचावकीकमजोरी केल
पण यह हैं किदस्त और मूत्रधोक्नकासा होगा और सूजन
और उदासी आदिपाईजायगी- और दसरीशक्तिके लक्षण या
हहै कि दस्त औरसूबथोडेर होंगे और उनमें रंगभी थोडा होण
और भूखनलगेगी- और तीसरी शक्ति के लक्षण यह है कि
दरतवडे और सफेद और पतले आवेंगे- और बदनदुवला
होगा- और चौथीशत्ति के लक्षण यह है किदस्त गौर मूत्रमा
सकेधोबनसे होंगे औररुधिर के पतलाहोने से नदन टीला
हो जायगा- और मुंह पर सूजन और उदासी होगी-गहरांग
नो निगर के विगाड सेहो उसका उपाय लिखचुके हैं और
जोसुद्दे या सूजन या निगर के पाटजाने सेया किसी और करण
सेहो उसका उपाय आगे आवेगा-और जोकिसी और स्थान मे
होतो उसस्थानका उपाय करें- और जिगर और रुइको पुष्टकर
ते रहैं- और फ़ास्ट् असीलम भी लाभदायक है।
.
तीसरापाठ३.
११३ जिगरकेसुइकेविषयमें इसरोगामें जिगर के अन्दर या उसकीरगों में कोईगा दासवाद कंसरहता है चिन्ह उसका यह वि शरीर में रुधिर कम उत्पन्न हो और रंग पीलाहो औरटल धोवन से भाई- और जिगर मारोहो- और मोसुदाजिगर के जपर होगा तो वोग अधिक होगा-भौर मूत्रथोडा गोर पतला आवेगा-औरनो सु हामीतर होतो दस्तवड़े और पतले गावेंगे-इस रोग में और नि गरको सूनन में यह अंतर है कि सूजन में तय होती है और अधि कपोडाहोतीऔर सुहे में वीर अधिक होगा जोसुद्दा निगरके गरहोतो मिज़ाज के अनुसार मूत्रलानेवाली औपचे पिलायें गौर जोजिगर के भीतर हो तोलर्म करनेवाली औषधे औरनु ल्काव वें-और उपायों में मिजान काध्यान रकवें-भोरजोर कवन करने वाली वस्तु स्वाने से सुदापडे तो गेगन वादाम. और दृध नौर शक्कर काग पिलावें- और अनार का रस भी लाभदायक है-औरनो निगरकीरगों को मकड़ा होजानेसे सुदाहोतोयह रोगजनम से ही होगा इसकारपाय कुछ नहीं है-सिवाय इसके किभारीभोजन खाने से बचतेरहैं- और कभीरबलानेवाली भीषधे पियाकरें। चौथापाठ४ मासारीकाकेमुद्देकेविषयों लक्षण उसका यह कि जिगर और मेदे के बीच में
***a*
१७४
अंदर को खिचाव और वो मालूमहो और सेदा और लिगर दोंने
चंगेहों- और दस्त कच्चे आने-और शरीर दुवलाझेदाजावे-
इसवा ठीक उपाय वही है जो जिगर के भीतर के सुद्देकाहै
वह गोषधे देंलोसुद्देको दूर करें।
पाचदापार
जिंगरके फूलनेके विषय
लक्षण उसका यह है किदाहिनी पसलीके तले पीड़ा
और रिनचाब हो औरबोमनही औरत गौर पचाव के पीछे से
टअधिक फूल लाय-इसमें कामुनी खिलावें-और शर्यती
नार पिलावें-और गर्म पानी से नहार मुंहनहावें-परंतुहवा
नलगे- और नमक भौरवानरे और सबसे सेकें- और जो आ
वश्यकता होतो जुल्लावदें- और मूत्रलालेवाली नीष पिलावे
और हल्का भोजन निसमें वायदृरकरनेवाली ओपधे पड़ी
हों खिलावें।
कतापार
निगरकीपीड़ाकेविषयमें
जोइसका कारण कोई विगाड़यासुद्दा आदि हो
उसका उपाय लिखचुके हैं- औरजोगिरका या सूजन या जिग
रको पाटने या पयरीमारत पड़ने से होतो उसका उपाय आगे
लिखेंगे।
.
सातवांपाउ
शिरका के विषय में
माहाता
जवनहार मुंह यामहनत करनेके पीछे यादातही
ललदी सेठण्डा पानी पीलें उमकीड जिगर कोळगे और पीडा
होतो गरमयानी में कपड़ा भिगोके गरम गरम जिगरयर स्का
और चाल छड़ और मस्तगी गुलाव और सौंफ के अर्क में पीस
किर गर्म करके जिगर पर लेप करें और गरम पानी से बारें-और
जो इसमें हकीम से कोई भूल होनायगी तौजलंधर या जिगर
कीसजन होजावेगी।
आरखापाठच
जिगरकी सूजन केविषयमें
जोयहरुधिरया पित्तोंकी अधिकता सेहोवो लक्षण
उसकायहहै कितप भौरमास होगी और निगर में वोग गौरपी
डामोर जलन होगी और सिवाय उसके और लक्षणचिर और
पितों की अधिकता केपायेजायगे-और निगरकीसूजनके भी
तरयाचाहरहोने के लक्षणतीसरे पार में लिरज चुके हैं-जोरसि
बाप उसके निगर कीमोत्तम कीसूनन में उल्टी और मच्छी और
हाथपावठंडे होंगेभोर वाईरकी सूजन में खामी और दंगकारू
काव होगा और हंसलीनीचे कोरिखचेंगी और मुत्र श्रोहा होगा-
और सूजन टेदी दिखाई देगीजय मूजन धिरकी अधिकता
२७८
जावे॥
लगावें और देरनकरें-कहीं रेसानहो कि कोई रोग उत्पन्न हो)
और
दसर्वोपाठ १०
जिगरकेफोड़ेकेविपयों
जो उपायमेदे के फोडे का और फेफडे की सूजन का
हेवही इसका है-जोमवाद आतोंकी और गिरने लगेनोहलका
सा जुल्लाव दें-और जो गुरदे की ओर गिरे नौ सूत्र लाने वाली
औषधे पिलावें-और जो फटके पेट में जावे नी जलंधरका हरहै।
उसमें जिक्ची जलंधरका उपाय करें- औरनोमवादआपसे भा
प पक कर पचनावे तौरोगों में कमी होगी-औरदस्तों और मूत्र
में पीपन निकलेगी।
ग्यारहवापाठ १९
भूस
निगरकीफुसियोंकेविषयमें
있다
लक्षण उसका यह है चिनिगरमकोईगरमीसे वि
गाइडोऔर जिगर के स्थान परनलंन होगौरकभीर रोंगटेभी
खड़े छों औरगाडामाव-सका यह उपाय करें जागरस मवादके
विगाह से पहिले पाठ मनिवागयाहै।।
वारहवांपाठ १२
जिगरकेफडकनेकेविषयमें
PAN
इसमें ऐसामालूम होता है कि कोई फूकताहै- जोग
यहयात थोड़ी देर रहकरवंदहो जाती है-कारण इसकानि)
गर का मुद्दाहै- औरवापका फिरना और रहजाना-इसमेंव
इऔषधे देंजोसुद्दे को दूर करें और दाहिने हाथमे फस्दा
सीलम वोलें।
तेरहवांपाठ १३
जिगरकीपथरी केविषयमें ।
लक्षणउसका यहहै कि मोलन पचने के पीछे उला
टी आवें और कोईवस्तुचुभे और जिगरमें पीडाहो और कमी-
हाथ लगाने से निगम पर सूजन और कडापन मालूम हो और
देखने मेंभी भावे और जब दाहिने हाथसेफस्दवासलीक
खोले और नश्तर गहरालगतौरुधिर के नीचे रेतही इसका
उपाय नहीं है जो जगरह वें अध्यापके दसवें पाठ में लिखा
गयाहै।।
चौदहवापार १४
जिगरकेछोटाहोनेके विषैमें
इसकालक्षण और उपायवहाँजोमादेके छोटा
होने में लिखागया-परंतु इसमे जिगर सेमबाट निकालनाचाद्धि
यैचाहेनरम करने वाली औषधंदेंचाहेबलानेवाली॥
&
.
पदहवापाठ १५
जिगरसेदस्त आनेकेविषयमें
यह रोगछः प्रकारका है- पहिलाकीही जिसमे दस्तों में
यीय आती है- कारण इसका निगरकेफोडे का फूटना है- उपाय
इसका लिखचके है।
दूसरागस्साली जिसमें मांस के धोक्न कसेदस्त आहे
इसका कारण निगरकी कमजोरी है उपाय इमकाभी लिस्वचुके
है और मुनक्के वीज़ समैतखानामति लाभदायक है।
तीसरा दमवी निसमेरुधिरके दस्त गाते हैं-धारणा
सका जोकेवल रुधिरकी अधिकताहो भौर घावनहोतोलक्षण
उसकायहहै किवहत सारुधिरनिकलके ठहर जाये और फिर
निकले और चिन्ह रुधिरकी अधिकता के उत्पन्न हों-औरनो
निगर पर घाव याचोट लगने से होतो मेदे और आंतों के रवाली
होने परथोडाधिरवरावरचला जावेगा गौर चिन्द्रघावो इत्य
नहोंगे-जो पेहरोगरुधिरकी अधिकता सेहोतोजन नक कम
जोरीनवटने लगेदरनोंको नवंद को- गोर बाद में फदखा।
लें और मवाद कोट्टमरी और गिरावें-उपाय इसकायहढे किता
थपांच और छातियों आदिको कसकर वाघेचौर परद में थोड़ा
थोडारुधिर ठहरश्के निकालें-भीरनोकरन कीगावश्यक
वा होतोकुर्सकहरुवा- कुलफे के वीज़ोकाशीरा-गोरवारतंग
का पानी मिलाकेदे और भोगन थोडावावें-और जो घाव के
कारण सेहो उसका उपाय यही है और जो यह रोगाधिरकी
अधिकता सेनही तो कारण को दूर करें और सनक मुद्दम
१०१
में जरावर वटाकर देना कबज़ और घाव के भरने के लिये अति
लाभदायक हैं।
या सफारावो झामें निगए पर गरी होगी इसका
उपायभी निगर के विगाड मेलिग्न चुके हैं परंतुमवाद निकालने
मोर ठीक करने से पहिले दस्तों को नरोके ।।
पांच्या संदीदी कारण इसका निगरमें रुधिर या कि
सी और मवाद का जलजाना है- लक्षण और उपाय भी वही हैजो
चिौथी मंकार में लिखा गया है और चंन्दन को गुलाने में
घिस कर निगर पर लगावें और दाहिने हाथ से फस्द असील
मखोलें....
'' छठा खासरी इसमें दस्त गाड़े कीचड़ से आते हैं-इसी
काकारणभी गिगरके फोडेका फूटना है या जिगर के सुद्दे को खु
लिजाला और बुरेमवाद का बहना या जिगर में मवादकाजल जानी
इसमें लक्षण और कारण जानके उचित उपाय करें और जवेतको
कमज़ोरीन बटनेलगे दस्तों को कभी नरोकें-इन दस्तों और
मेदे केदस्तों का अंतर जिगर और मेदे के लक्षणसे जाना जाता
ई-और निगरकेदरलों में बुरी गंधि होगी- और दस्त बारीक
रके.भावेगे-गौर खाली पेट में दस्त कम होंगे और पीडानही
गो, और दिनदिन रोगी दुक्ला होता जायदा और मे
दस्तों में यह बातें न होंगी. परंतु जब निगर के दस देर तक
रहेंगे तो मेदे से भी दस्त आने लगते हैं- उस समय मरोड भोर
निगर के चिन्ह इकट्ठे हो जावंगे- ऐसे समय पर दोनों के
अनुमार उपाय करें।
-
१८२
सोलहवांपाठ ६.
सूरल किनीआकेविषयमें
यह रोगभी जिगर का विगाड़ है और जलंधर से यहि
ले होता है- और लक्षण उसकायहहै किमुंह और हाय पांवपर
भुरभुरोहट होती है और जिगर की कमजोरी केलमण उत्पन्न
होते हैं- उपाय इसकाजलंधर में लिखाजायगा-जो यह
रोग पुष्ट नहीं होता है-इसलिये कमजोर भौपधेदें और सा
फर करें और पैदल चलें-और यह रोगवटजावें औरजलंधर
होता इभाजानपढे नौ स्वा रची जंटनी के घताना में दोस्ती
सिकंजवीन मिलावेनालामदायवा है-और अनारकारम
पिलानाभी लाभदायक है और ठंडा पानी विल कुलन पीवे-
और पानी केवदले कासनी भौरमौंफ़ और मकोयवा अपि
लावें-औरनो होसकेनौ भूविरहेंनहीं तो मुंग याचनीको भौटा
को उसका पानीटें और गौयह रोगवयासीर याहेन केरुकने से
होतो मत्रलानेवाली भोपधंदेकर और लेपलगाकर उन्हें जारी
करें औरजोडससे लामनहोतोफस्द साफ़िान खोलें और रुधिर
थोड़ा निकालें और फस्दसेपहिलेजुल्लावपिलाना उत्तमहै।
सत्रहवांपाठ २७
जलंधरकेविषयमें
पड़ोगतीनप्रकारकाहोताहै- पहिला जहमी इस
में मारे शरीर पर भुरभुराहट होतीहै-गौरमवाद मांसके भीत
।
.
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१
होताहै।।
दूसरा जक्कीइसमें पेट मशक साहोजाता है-औरहार्य
पावपरकभी मजल होती है औरकमीनहीं होती-और पेटके
परदों मेंतरी समाजाना है।
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तीसरातवली इसमें गाटी वायपेट के परदों में समा
जाती है और पेट पर हाथमारने से तवले कीसी आवाजानक
लती है इसमें पहिले कारण कोहरकरें- और फिर जिगरको
गेक करें- औरगरमी पहुंचा और जोगरमी होतो उसेवुझाव
फिरइस रोगका उपाय करें अनि स्तनौर मूब और पसीना
लाने वाली नौषधंदे से शरीर का चाल में गाड़ देंना और
खुश्का जीयःमलनाजैसे नरकचूर और राख और रखूव कला
और मंडुये का मटा मादि औरस्खुश्क करने वाली गौपधों का
लेपकरना भति लाभदायक है।।
और ठंडा पानीनपीचें और गर्म औषधेमी भधिक नदें-और
जोविनाउंडे पानी पियेचेन नपडे तो छोटीवधनीजिसकीटोरी
सकड़ाहो उससे स्कएकचंद पानी गले में टपकावें-औरवह
पानीभीपक्काहुभा.मौरउँदा कियाहमाही और घोड़ा सिरकाभी
उसमें मिलानें- और जोपानीकैवदले कासनी गौर सौंफ का
अर्क दें तो उत्तम है और कहभी थोड़ाहो चाहिये किदिनभरमें
भोजन से तिगुने पानी पिलावें-और चंगेरहने के दिनों में निती
नाभोलन स्वाते हों उस्काका हिस्साइसरोग में सवेगनार
गतिलाभदायक है नित्नाखा सकें खावें और जहां तक होसके
नलिनदे और रोटी में मौफ मनीसून निलादें भौर सुरनो रोदी-
खिलाव और भाबी जरनी कादृएमति नामदायबाहे-भोगन
न कालयकसमानरीयून भारराकहाआराधमूबलान
और पानी केवदल पिलावें-इस दूध पिलाने की रीति यह है कि
पहिले दिन १४० माशे पिलावे-फिरहररोज १४०माशे वदादि
याकरें-परंतु इसकाध्यान रखें कि मेदे में दधजमनेनपावें।
इमके लिये पोदीना और हव्य सिकवीनजकमी दिया करें-
दूधननमेगा औरलहमी मेंहब्बरावंदकानुल्लाच दें-औरजी
गरमी होतोहडको ओटाके शर्वतचर्द मकर के साथ दें और।
जिक्की मेंजोगामनिहोतो कलकलीन हरिदें-औरजो गरमी
होतो कलकलानजवारिद और पीलीहड़ अति लाभदायक है
और तवली में मिलान के अनुसारजुल्लाव-और सरप्रकारों में
मृबाद निकालने के पीछे निगरके पुष्ट करने के लिये कुर्स भ
चरवारीस आदि खिलावें और मूत्रलानेवाली निचलदें उसे
बदलते रहें औरजो भौषधदें उसेभली भांतिपीस दियां करें
कि वह जिगर में तुरंत पहुंचे और पसीना छानामी अति काम
दायक है रीति उसकी यह है कि नमकरिमनीकोरोगनवाय
ने में मिलाकर शरीर पर मलें और पसीनेको पोंछते जावें और
इसीरीति यहहै किगरम रेत में रोगीको बिठाया किटान
और उस चारों भोर शरीरको रेवसे तोप केवल मंहरवलारह
जब रेतटीहोजाचे नौ और गरम रेत डालें इससेशननजान्दैपटक
जानी है और जो सूजन विसीरका स्थान परहोजेसे दाय में
यापाव में तो उसीको रेतमें गाडे और ऐसेही धूपमें चिंग भी
गरम न दियों में गौर समुद्र के पानी से न्हानालामदायन है।
औरजोनमक को पानी में घोलगारवाई दिनतक धूप में पानी
वहमी समुद्के पानी के समानहाजाताहे गोरयह पतरीको
सुरवाता है दिहलंबा-जगन्नीचावृतरकी पोटदलकुलचनन,
सुरांनीचर्वी इन सबको मिलाकर मरहम चनाले-लहमी में
सारे शरीरमरलेप करें और तबली हाथपांबपर और निक्की में
विवल पेट पर-औरचाहियै किनक्ली में मवाद निकालने के पीछे
कियके तोडने का उपाय करें- उन भौषधोमेजोमेदे के फूलने में
लिखी गई है और सूरबासुद्दोंब और इसपथ गौर सौंफ और गजमुख
और नमक जर्मनी और लाल शक्कर पीसकर सुद्दाव के पानी में
शाफा बनाकर पैरखाने कोजाइ स्कवें और निक्की में ठेवादेते हैं।
उससे पीलापानी निकलता है परंतुइसमें रहै-इस रोग में जो पा
उनी रोगीको मिलाते हैं उसके यकानेकी यह रीतिहै कि सौ हिस्से
गानी और स्काहिस्से सिरका मिलाकर औटावें औरजब तिहाई रहा
नाय तो ठंडा करके पानी केवळे पिलाया करें-इससेजलंधरकी
प्यासबहुतचुमती है-प्यासके बुझाने और जिगरकेसुद्दाखोलने
के लिये सिरका मेतिलाभदायक है। और इसके लियेज़रित्रकभी
गच्छा है-जोरवासीहोतो वहीनस्तु कोई नदे- जोइसरोगके
साथ कोई और रोग होतो उसका भी ध्यान रकवें और निषकी
में पेट पर यहलेपकरें-नमक अरमनी- मुलैठी-कर्दमाना-
मुनक्के-प्रत्येक माटेदसमाशे-करब के वीज ना साढ़े
चौबीसमाशे-बकरी की मेंगनी १९५माशे-जौका भाटा और र
गौकागौवर प्रत्येक २१ मागे-सवको पीसकर सौंफया कासनी
किपानी में मिलाके पेट पर लगावें।
तवलीनलंधर में जब बहुत दिनहोजावें और मेट
किडा होजाये तो उस समय पेट केवडाहाने के सिवाय और कुछ
डरनही हैं और उपाय उसका यह है किग्न नौषधोकालेपकरें-
जिनसेपेटनमै होउसके पीछे वाचूना नपचना-दौनामरवा-सात
रक्षाबके बीज जुन्दवेदसार-गाजकीराव-मतान-कटछानके
रहावके यानीमें पीसकर पेटपरलेपकरें औरजवजलंधर कोई
--
रच्६
औषधलाभदायक नहोतो पांचस्थान परदागदेएक मेदे पर
सरा जिगर पर-तीसरा तिल्ली पर-औरचौथामेदेपर-नीचेको
पांचवाटूंडीपर-जोरोगीपुष्ट होतो सबदागइवाहा नहीं तो थम
थमकर।।
पंद्रहवां अध्याय
यरकान और तिल्लीऔर पित्तेकेरोगोंकेविष
यमें॥
पहिलापाठ १
यरकानकोविषय में
इसरोग में शरीरका भौरमास्त्रोंकारंग पीला या
कालाहोजाताहै-पीला यरकान पिनोंके फैलने औरवाला
यरकान सौदा के फैलने सेहोता है।
पोलापरकानवहुत अकारलाहोताहै-वाबह
नोव्हरान के दिन पित्तों के चमड़े की ओर भाजाने से होता है-
इसमें जोरोगी पुष्ट होतो कुछ उपायनकरें औरजोकमजोर हो।
वो उसे गर्म पानी में विद्यादें कि शरीर के छिद्र खुलें-भौरमचाच
मलीभांति चाम में भाजाय और केवल सिकंजवीन याकासनी
के शोरे के साथ पिलावें जो पीलापन आपू से भापनाता रदै
तो अच्छा नहीं तो बोलने वाली औरजलावेने वाली भौष
पिलावें असामोसा मानना
दूसरीमकारवहहै कि निगरमें गरमी से कोई विगाड
उत्पन्न होने के कारणहोयह बहुधाधिरकी तपमें होता है-
इसकी पहचान निमरकेविगाड सेहोगी-इसमें वही उपाय
करेंजो जिगरके विगाड में लिखागया है।
तीसरी प्रकार चहहै कि पित्ते के गरम विगाह सर
त्पन्नहोलाणउसकेपहहै कि अचानक उत्पन्न होगा और
उसमे पहिले सफेदमय भावेगा-फिर पीलाहोकर गादा और
काला होजायगा- औरन कोई विगाड़ भौर सुद्दा जिगर में होगा-
और भूख जैसीकी तेसी रहेगी इसमें सिकंजवीन कासनी के शी
रिके साथ पिलावें- और जो उपाय निगर की गर्मी का है वहीं
चौथीप्रकारकह है कि पित्ते मेंगरम सूनन उत्पन्न
हो और उससे पित्त मोरकर फैलें- लक्षण उसका यह है कि
तप रडैगी-भोर जीम में वादे पडेंगे और उबकाई और उ
लिटी होगी जो उपाय निगर की गर्म सूजन का है वही-
इसका है।
पांचवी प्रकार कह हैनोमारे शरीर और सगोंकी गर
मी से ग्त्यन्न हों-लक्षण मला यह है किवदनजलेगा औरको
वनस्हेगा और सारे मंग में खुजली गौर फुमियां होंगो-और सर्व
लसण गरमीक पायेनावेंगे-जोकोई सादा विगाइ होतो ठंडा
ई पिलावें और जोमबाद होतो उसे निकालें और सारे शरीरको
ठीक करें- और तरी पहुंचाने वाले रोगन मलें-और उसी प्रकार
के भावजन में विगवें।
छठीप्रकार वहहै जोशरीर के छिद्वंद होने से उ
त्पन्नहोता है इसका कारण यह है किगरमीकी ऋतु में बहुत
चलने से रेत शरीरपरजमजानी है और छिद्रवंदहोजाते हैं-इस
से पित्त औटवार फैलते हैं इसमें खैरु के फूल और गेहूं की भूमी
मोटाकर उसके गर्म पानी सेन्हावै।।
सातवीप्रकार वह है जोजिगरकी गर्म सूजन मेहो-
लक्षण और उपाय उसका उसीसूजन में लिखागयाहै
आठवीं प्रकार वह है जोनिगरके सुद्देसेहोइसकार
पायमी जिगरकेसुद्दे में मिलेगा।
नवी प्रचारवहजो विल्लि जानवरके काटने में
वियरवाने से उत्पन्न हो-इसमें विष का गोगुणदूर करें-और
वह भौषधंदेंजो उचित हों भौरजोगरम विपरवाया होती-कुर्स
काफूर और ठंडी ओषदेंदें- गोरजोठंडा विषदोनोतिरयाकमा
रुक खिलावें।
दसवींप्रकार यह है कि पित्तकमजोर होनावेचौर
पित्तोंको जिगर सेनखेंचे-औरवह सारेवदन में फैलजावे-ल
मणउसकानी मतलाना है- गौरपिनोंकी उलटी होना और
कवज़ रहना औरदस्त विना रंगके होना-इसकाउपायक्ली है
जो जिगर की कमजोरी काहे ।।
ग्यारहवीं प्रकार यह है कि जिगर और पिनेकचीच
में नोरारत है उसमें सुद्दापडे-लक्षण उसकावहीहैलो पिचेकीका
मज़ोरी में लिखागयाई-औरदस्तभीहोले होले सफेदआनलंगे
गे-इसमें निगरके मुद्दे को खोनें।
।
वारहवीं प्रकारचहहै कि पिलें और बातों के चीच
में जोरास्ता है उसमें सुना पड़े- इसमें अचानक दस्त सफेद
आवेगे- और कवन होगा-इसमें भी सुद्दे को स्वोलें औरस्न
दोनों प्रकारों में अमलतास कोकरम कल्ले के पानी में घोल
कर कडुये वादाम का रोगन मिलाकर पिलाना भति लाभ
दायक है।
तेरहवी प्रकार यहहै कि इन दोनोंरास्तों में बुरा
मांस यामस्सा उत्पनहो-लक्षण उसकावही हैनोगपरको
प्रकारों में लिखा गया है- परंतु उपाय इसका नहीं हो सका
।
चौदहवी प्रकार यह है जोकफ कीकूलजसे उत्प
महो-इसकाकारण यह है किलेसदारका रस रंगके मुंहप
र चिमटनावे निसने पित्त गिरते हो- उपायइसकाहीहैजो
बंज का है।
इसरोगकारणदूर करने के पीछेजोपीलापनगी
स्व में रहनायतो गरमस्थान में बैठकर पुराना सिस्का नाकमेंडा
लें और सिरका और गुलाल मिलाकर गावमेंटपकावें और इफ
संतीन को मोटराकर कुल्लीकरें।
कालायरकान भीकई प्रकार जाहोताहै-पहिली
प्रकार कही हैनोबुहरान के दिन हो-तिल्लीके रोगों में इसके
पीछे तिल्लीकावह रोगषटजावेगा इसकाउपायंकहीहैजो पि
तोकी प्रकार में लिखागयाहै- गौरवाबूने और सोयेका तेलम
लना अति लाभदायक है।
दूसरीप्रकारवह है कि जिगर और तिल्लीकेबी
चमेरास्ता है इसमें सुद्दा पडे-लक्षण उसके यह है कि भूरय
T TH
होलेहीले घटेगी- और निगर में चोरू होगा- और' :...
भी हौले हौले वदेगा- इसमें सुद्दे को खोलें - और जुल्ला
व दें- और वायें हाथ से फ़स्दवासलीक अथवा असीलमः
--
खोलें।
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तीसरी प्रकार वह है कि मेदे और तिल्ली के बीच
मेंजो रास्ता है उसमें सुद्दा पडे-इसमें भूख अचानकजाती रहै
गीऔरतिल्ली में बोझ होगा-इसका उपायमी :
रकासा करें।
चौथीमकारवहहै जोरुधिरके नलनाने मेउत्पन्न
हो- यह निगरकी गरमी के कारण से होता है-इसका :.
उपाय जिगरकेविगाड में देखो।
पांचवी मकारवहहैजोतिन्लीकीकमजोरी सेउत्प
नहो-इसकाउपाय आगेलिरवाजायगा ।
छनीमकार वह हैनोतिल्लीकी सूजनसे उत्पन्नहो
इसकावर्णनभी भागेकरेंगे।
सातवींप्रकार वह है कि निगरमें मधिकरंडमे वि
गाड हो और उससे यह रोग उत्पन्नहो-उपत्य इसका निगरकेरोगे
में लिखागया है।
जवयस्कानपीले और काले दोनों साथ होतीदोली।
हाथ से फस्द स्वोलें-वीन दिनबोच देकर और ऐसी भौषधेमो
टाकर पिलावेजोसोदा और पित्तों को निकालें-और जो भवा
द अधिक हो उसके अनुसार उपाय करें- और जिगर और ति
ल्लीको ठीक करें।
7
दूसरापाट२
तिल्लीकेविगाड़केविषयमें
गर्मीकालक्षण तिल्ली काजलना और मूब और
दस्तोंका रंगलाल और काला होना और गरमी के लक्षणयां
येनाने।।
और चंडकालक्षण यहहैकि तिल्ली के स्थान पर
गड बड़ होनी भौरभूस्वकाघटना और दूसरे लक्षण उस्ड के पा
येजावेंगे।
भौर खुश्कीके लक्षणयह है कि तिल्लीपरकड़ाप
महोगा और रुधिरगादाहोगा और शरीरदुवला होगा।
तरीके लक्षणयह हैकितिन्लीमेंवोकहोगा मौरी
शीरका रंगमीसे कामाहोणा?
जो कोई सादा बिगाड होतो मिजान कोठीक करें
औरजो मवाद होतो रसमवावं को निकालें और फिर टीककरें
जैसा कि निगरके रोगों में लिखा गया है और वाये हाथ से फरद
वासनीक खोलें-भोरजोगरमी से विगाइ होतो यह औषधेला
भदायक है। वेद के पत्तों भोर कूशूसले यांनी में सिकंजवीन?
मिलाकरदें- और नर्म करने के वालें काली हड़ पानी में मोटी
के भयलवाने के साथपिलावें. और जो गरमी अधिक होतो
कुर्मकार श्रमकूल्लू कंद्रीफून मिलाकरदें- मोरजो उस्ड से
विगाड़ होतो मनमूद का पानी भौर सिकंजवीन चुनरी नारे
मह पिलावें-भौर मूली कापानी और निरियाक भवी और
लकंद. और शिंत्र की जड़ की छाल-सिकंनवीन वुगेके साथ
..
दे और जो खुश्की से विगाइ होतोशर्यत वनफ़शा और मालजोन
न भादि तरी पहुंचाने वाली औषधे पिलावेंयालगावें-और
जो किसी मवाद से विगाड होतो पोहिले फस्द औरजुल्लालसे
सौदाको निकालें- औरजोतरी से विगाड होतो-गुलाबके
ल-किन कीजड़-वालछड़-रेवंद-धुलीहुई लारब-जौरनार
श्क सब को पीसकर कुर्स वनाके दें-और सुखाने वाली गोष
धोकालेपकरें- और नर्म करने के लिये हुव्व अयारिज़ दें और
जोवाई मवाद मिले हुये होतो उसका उपाय भी वैसाहीकरें और
रतिल्ली से ठंडाभवाद निकालने के लिये विजचीजड़कीला
ल और इफ़ती सून दोनों वरावर कूट छानकर शहद में मिला
के सात माशे दैनाचाहिये और जोठंड और खुश्की दोनों हो
तो उनका वर्णन कियाजायगा।
तीसरापाठ३
तिल्लीकीसूननकेविषयमें
जो सूनन गरमहो तप नित्य रहेगी-औरनो कारण
इसका रुधिर होतो तपचौथे दिना अधिक होगी-चौरजो पित
होतो एक दिन चीच करके नप अधिक होगी-गौरचाकी भोर
लक्षण रुधिर और पित्तों की अधिकत्ताके यायेजावेंगे-ौरजो
कपाकी सूजन हो उसको नहब्जुन तिहाल कहते हैं-गौर जो
सौदासेहो उसको नसावत्त या सलावत चाहते हैं-लमणतरी
और बुश्की के दूसरे पाठ में लिये गये हैं मवाद के अनुसार
उसमवाद को निकालें और टीक करे-औरजोगरम सूजन
*nt
3.
होतोजीका भाटा-हरीमकोय-माज के पतोकेपानी में पीसकर किल्लीपरलेपकरें-भौर कफ की सूजन में भंगुरकी लकड़ी कीरा ख-रोगन गुलमें मिलाकर लेप करें-याक्करीकी मैगनियोजला कर उसकी राव तीन हिस्से भौर किनकी लकड़ी की राख एक हि। से सिरके में मिलाकर लगावें- और जो सौदासे होतो अर्शक सिरके में पकाकर या सुहावऔरपोदीना सिरके में पीसकर या गेहूंकी भूसी सिरके में ओटाके गशैक मिलाकर तिल्लीपर लेप करें- और कहते हैं किजो कोई प्याला माग की लकडी का बनाकर खानापानी उसमें खिलाया पिलाया करें तौचालीम दिनमें तिर लोकी सूजन धुलजावेगी- और हंसराग-सूखाजूका-संभालूके वीन वरावर लेकरकूट छान के शहद में मिलाके सात भाशे खि लानाभी सूनन को लादेता है और इंजीर और कित्रका अचारलो सिस्का मेंकनाहो अति लाभदायक है- और मरहमों से सूजन को नरम करके वायें हाथमे फस्द मासोलम खोलना लाभदेता है। चौथापाठ तिल्ली कीसूजनके पकजानेकेविषयमें .. लक्षण पीपफड़ने कायहहै किपीड़ा होती है-जैसे कोई वस्तुचुभती हो भौर सूबमें क्लेकर निकलती है और मुंगधिमानो है और कभी ऐसा होता है कि यह सूजन भदरवोफूटती है और उलटी और दस्तों में निकलती है-उपाय इसका वह है जो निगर कोडे का है- परंतु मूबलानेवाली भीषधे मिज़ान के अनुसार, और नोपीय निकलनाने के पीछेभी कडापन है तो
औस्करन करने वाली औषनों से बचें-और' ।
नव सूजन कड़ी होके पुरानी होजाय और कोई औषध लामका
रकनहोतो दागदें-इसकी रीति यहहै विचाम को तिल्लीकी
जगह से मोचने से पकड़ के अलग उठाने-और लोहेके भौजार से
जिसकी दोनोंके होभली भांति गरम करके नागदें- और उसी
दाग के इधर उधर दोदाग और देंक्तिीन वार में छदाग होजायें
और जो वह ओज़ारछ:पहल का होतो औरभी अच्छा है- उससे
स्कडीचारनेछ दागहोजावेगे।
पांचवांपाउ
9MITH
तिल्लीकीकमजोरीकेविषयमें
जोतिल्लीकी खेंचने वाली शक्ति में कमजोरी होतोलम
॥ण उसका यह किसूरब विलकुल जाती रहेगी- और नीदादरोग
उत्पन्न होंगे-भौरजोउसकी मासका शक्ति में कमजोरी होतो मी
दाकी उमटी और दस्त होंगे और नो उसके पचाव में कमजोरी
होगीनी भूखचहुत होगी-या सौदाके दस्त होगे- और जोदृर
करने वाली शक्ति में होतो तिल्लीपद नावेगी- और भूरवजाती
रहेगी-तिल्ली के पुष्ट चारने के लिये इफसंतीन रुमी और बान्दछ
गौरझाजकाफळ भौरवार्दमाना-और सरकंडे की नई को
लीवरें- और वित्रिकीनड और गुलाब के फूल-गूगल भवको
कूटकरमाज के पत्तों के पानीने यासुद्दाब के पानी मे निलाके सिर
कि के साथ तिल्लीपर लेपकरें-और तिल्ली कांग्रखुरेकपड़े से
मलें-और उसपर रवाली मोंगीलगावें।
.
दायक हैं।
छयापार
तिल्लीकेसुद्देके विषय में
इसमें तिल्ली में बोगहोगा - और सूजन के लक्षण वि
लकुल न होंगे-जिगरके सुद्देमेंजोपुष्ट करने वाली औषधे लिखी
गई है दें- और सिकांन वीन कुजूरी और कुर्स किन्न अति लाम
सातवीपाट७
तिल्लीकीउस सूजनकेविषय मेंजोवाय सेहो
यह तिल्ली केपचाव और दूरकरनेवालीशक्ति कोक
मनोरी सेहोतीहै-इसमें तिल्ली को पुष्ट करें- और गेहूं कीमू
सी और वानरा और नमक कूट कर मेंके और नमक भर्मनी और
पोदीना और सुहाव सिरके और शहद में पीसकर लेपकरें- और
बारे लगावें- और सुफूफ़ तरातेजक स्त्रिलावें।।
आठवीपाठ
तिल्ली में पथरीपड़नेकेविषयमें
इसमेरेत मूवमें भानी है और तिल्ली मेंचुमती है और
सके सिवाय और कोई रोग नहीं होता- नीरवोसिरके में मिले
कर लिलावें और उसोका लेपकरें-गौरमूवलाने वाली ..
औषधे देंजोगुरदे और मसाने की पथरी को तोड़ती हैं।
सोल्हवाअध्याय
आंतों के रोगों के विषय में
पहिलापाठ
(ARH
जलकुल अमआकेविषयमें
इसरोगमे भोजन विना पचेहुरेदत होकर निकाल
जाता है- जो आंतोमें कुंसियां होतोजलन और पीडा होगी-और
पतला और पीला पानी निकलेगा-पिनोंका जुल्लाव दें-और
फस्दखोलें-औरठंडी जौषपिलावें- और सुफूफ़नलकुल
अममा बिलावें।
गौरजी
औरचु
मना भीतर होगा-पीड
और कमीनीवेको
और कभी आसा
गोषयें,
3
कोकेनीचेला
।
और
.उलटी करावें-
और
सुस्वानेवाली औषधे दें।
औरजोतरी से बिगाड़ होतोसुखानेवालीसुफूफ़ खिला
औररोगन गुल पेट पर मलें।
औरजो मित्तोंकी अधिकता होतो पित्तों को निकाले
मौरपोलीहडदें।भीमान
औरतो कफ और पित्त दोनोंहोतोदोंनोंको निकालें
गौरयोलीहड़सातमाशे-हज्बुल गास-माजप्रत्येकपौने सातमागे
सबको कूटछानकर उसमें हालोपौने सात माशे मिलाके यहसुफ
फसातमाशेफकावें॥
औरजोफ़ालिज से यह रोग होतो उसीका उपाय
करें।
और जो जुल्लाव से यह गोग होतो चार तुमभून
कर रोगन गुलमें चिकनाकरके फंकावें- और जोहालोंको मैट में
इतना गौरावें कि वह जमनावे- तो उसका खिलाना भनि लाम
दायक है।
दूसरापाठ २
आंतोंसेदस्तों में रुधिर आनेकेविषय में ।।
यह रोगोत्रकार का है एक तो यह कि भातें छिलनावे
इसमें यह किरुधिरकी भधिकता से आतों को रंगका मुंह खुन
किसी
पहिली प्रकार भात आतोंके छिलजाने केजीकारण
इसके पित्तहोंतो पिचकेचस्तभावेंगे और फिरदस्तों में छिलके निय
लिंगे- और फिरसामलिलकोसमेत और भावनिकलेगी-और
नावे॥
+
१७
गर्मी के लक्षण पायेजावेंगे- आदि में कच्चे अंगूरोंकासत और अन
रका सत्त और जो भीषधेरखट्टी और कवज करने वाली हों खिला
वें-भौरजवमवाद अधिक होना तो उसे निकालें-और लुगा
अस्पगोल औरलुआववीदाना-औरलसदार औषधेजोघावको
वंदकरें पिलावें-और कलफेका शीरा-गिले भस्मनी चेसाथ पि
नाना औरसुफूफ मिकलियासाभतिलामदायक है-औरनबत्तुर
तदस्तों को रोकनाहोतो वीजोंकोमूनडालें और केवल वारसंगला
भदायक है- और नव पीड़ा अधिकहत्तोचार तुरज्म का लुभाव रौ
निगुल में मिलाकर पिलायें।
औरजो कफ़ सेहोतो पहिले कफकेदस्त भावेंगे-और
बहुधाजुकामनजले केपीछे ऐसा होता है-पहिले कारणको रोके
औरयह औषधंदेंनोघाव परचुप- जैसे रैही वो नीज गौरचारत
गऔरजंगली तुलसी आदि-औरकाली हड़ घीसे चिकनाकेमून
कर और कूटछानकर तीन माशेलें- और उसके बराबर सफेद
किंदमिलाके खिलावें।
और जो यहरोगसौदासे होतोहरसमय मोड रहे
और दस्तों में सौदा और रुधिरऔर छिलो निकालेंगे-इसमें
दिले कारण को दूरकरें-फिरतिन्लीको पुष्टकरेंगीरमयादशेनर
मकरने वाले नीज और सुफूफ़ानीनरिवलावें।।
और नोतिन्लीकेकडयन बोरमवादकोशकी से
होनोपहिले फवजहोगा-और जैसीही वस्तु खाई होगी-औरमवार
भीकहानिकलेगा-इसमेंतर और नरम करनेवाली वोपर्शकोद
जैसेवीदाने गस्पगोलकालगाय-गौर शर्बत वनफ़शा औररोग
नवादामादि-औरजब भातासेमवाद निकलना गौरमगेड
है नौकचन करनेवाली गोषधेजो चाहों-परंतु नव
तकमवादकोनलिकाललें-और आतों मेसूखामवादन निकल
के कमीकावन करनेवाली औषधेनदें।।
औरजो विषेलीवस्तुखाने से मरोड़ होजैसेहरताल और
नौसादर औरचूनाआदि- उसमें उन्लटीकरावें औरताजादूघऔर
हरीरे पिलावें।
औरजोजुल्लावपीनेसेमरोडहोतोठंडी औपधेदें और
सुफाफतीन औरवीन विलावे-औरमठे में लोहाकुकाकर अकेला
पिलावेंगाचावलकेसाथ खिलावें।।
जवांतोंकीरगखुलजानेसेरुधिरकेदस्त भावें तो
लक्षण उसका यहहै किमरोड़ और ववासीर और जिगर केदस्तों
के लक्षणनहोंगे और पीडाभी नहोगी-परंतु पेचिशमें पीहाभ
वश्यहोती है जो रुधिर जधिकनिकलजाय और रोगी में जोर देतो
फहवासलीक खोलें-फिरवंदकरने के लिये कुर्सकहरुवाआया
ऐसीही गोपदें-औरगिलेअरमनीपौने दोमाशे-शर्वत हन्छु
लगायाशत अंजवार के साथदेनाअतिलामदायकहै औरण
नारके छिलके भौरमाग गौर गिले अरमनीबरावरलेके कूटछ।
नकरगोलियांवनायें-उसमें से सात माशेखानाअतिलाभदाय,
कहै-औरपेटपावारेलगानाभी अच्छाहे ।।
जक्तवासिके इस रोगमें अफोमकेप्रकारकी औष।
नखिलावे औरजो अवश्यकता होतोशाफे मेंदेया उनके सा
उनकीठीक करनेवाली औषमिलादें ।।
तीसरापार ३
२०० आंतोंसेपोपआनेकेविषयमें कारणइसका यातीमरोड़ से घाव पड़जाना है- या पक कर सूजन का फूटना-इस में पहिले पेचिश होगीया सूजन होगी। पहिले उन भौषधों से हकनाकरेंनोधावको साफनी रे औरफिरउनसेजोघावकोभरलार्व-हुकनाकरें।। साफ करनेवाली औषधे यह है- अनार के छिल के सिमाक- आस-चावल-जो-सवको कुचलके पानी में भौटावें- और मलकर थोडासा विना बुझाचूना मिला कर हुकना करें। और भरलानेवाली ओपधेयहहैं-वचूलकागोंद- गिले भरमनी-दम्मुल अखदैन- वरगदकेरेशेकारस-जलाइ माकाग़ज़सवको पीसकर हरेवारतंग के पानी में और कच्चेशही तुनके रसमें मिलाके हुकना करें। जबमरोडसे पोप भालेतीपहिले कारणको दूरकरें-और फिरघावकेभरनेका उपायकरें। चौथापाठ ४ कुंथकेरदस्त आनेकेविषयमें इसमें गांव निकलतीहै और कभी उसके साथरुधिर होता है यह सवेमवाले भातों में फंसरहने से होता है और में आप निकलती है इसकोनहोर
मसका यह है कि अस्पमोल आदिके पिलाने से भाव
नहीं आती-इसमें मवाद को गर्म करें और वैसाहीहकना
काम में लावें और कभी केवल गरम पानी लाभदेताई और
इसमें कक्न करने वाली नौषधेकमीनदें-किउससे मरने
काडर है।
औरजोकफया पित्यासौदा से होगईहों तोउपा
यउसका मरोड में लिखागयाहै।
“इस रोगमें हुकना और शाफा अति लाभदा
यकहै।
और जो नीचे की मांतमें गरम सूजन होने से यह
रोगहोतो उस स्थान पर बोझ होगा- और कभी तय भोर
सूत्र कठिनता से होगा-इसमें फहस्सोलें और कमर के नीचे
पिछने लगावें- और भोजन थोड़ादें और ठंडी औषधेजोमधि
स्की गरमी दूर करें पिलावें- और जव मवाद का गिरना रु
किजीयेतो- खैरू - मेथी- वनफ़शा - बावूना- करमक
ल्लेके यत्ते-ौसके पेटको और पैरवाने की जगह को धा
और जो उलूटी हो सकती हो तो बहुत अच्छा है।।
और जो परवाने की जगह अधिक ठरड पहुंचने
से यह रोग होतो. - सेकें और गरम पानी मेधारे- और
कूटका तेल आदि गरम करके सलें - और ईद गरमक
रके उस पर और सात माशे हालों भून के महामुं
हफांके।
जोसवारी या किसीकाही वस्तुपर बैठने सेहोतोमो,
मरोगन मलें।
वाली पेटमें स्वटाई स्याने से भी रेसा रोगहोजाता
+
हैं उसमें मिश्रीका शर्वत पिलावै।
पांचवा पाठ
मरोड के विषय में
इसका उपायकारण के अनुसार करें जो ऊपरलिर
गयाहै-और कूलंज में और कैचुये पड़ने केरोगमें लिखा
और जो जुल्लाव के पीने के पीछे यह रोग हो-
तो थोडा थोडा गरम पानी पिलावें और रोगन गुल
जायगा।
छरापाठ६
आंतों के फूलने औरबोलनेकेविषैमें
यहरोग वाय उत्पन्न करने वाली वस्तनों के रवाने,
से या चुरा भोजन रवाने से होताहै इसमें अच्छा भोजना
वावें- और गुलकंदौर गुलाव पीवें और जो कारणकम
जोरहो और उससे आत को ठंड पहुंचैतो अति वोलेंगी-
समें भोजन थोडा स्वावें और माजून फलाफली और करनी
रवावें चौरजोइसके साथदस्तभी आतेहोतो जवारिशरवोन
भतिलाभदायक है।
सातवांपास
कुलंज के विषयमें
यह पीडाहै जो कूलन नाम एक आत में होती है-
और इसके साथ विलकुल कवजहोजाता है- और जोकछ
निकलताभीहै तो बडीकठिनता से- कारण इसका गाढ़े
कफाका आंतमें अटका रहना होतो भोजन बुरा स्वायाहोगा
औरकवन अधिक होगा और स्वही और नमकीन वस्तुभ
च्छीलगेगी पहिले शाके और हुकनोंसे मवाद को नरमको
फिर जुल्लाव पिठावें-और वह जुल्लाव सेसा होकि मतली
कोदरकरे- और मेदेको पुष्टकरें-जैसे सफ़रजली और जवाम
शशहरयाराकाजुल्लावदें।
जुल्लावदेने से पहिले भावज़न औरसेंक, औरने
पनकरें।
और कवजदूरहोजाने के पीछे एक रातदिन वि
लकुल भोजन नदें और चनोंको मोटाकर उनका मानीग
रम मसाला डालको.- और मानी योड़ा पिलावे औरजोपी
नीकेवदले गुलावयासौंफ का अरक यामाउलभरलदें तो
गच्छाहै।
जोगादीवाय के कारण से पीडाहोतो तकलेसे चुभे
गे और पेट फूलनेवालीवस्तु रवाई होगी- और पेन वोलेगा।
1३
और पीडा एक स्थान परनरहै इसकाउपाय भी वैसाहीकरें।
और जुल्लाब देने से पहिले इसमें ठेय आदि कर सकतेहे
और सोयेका तेलमलें और कमूनी खिलावे और अपाम्
२०४
करें- जो मेरे के फूलने में लिखा गया है- उरद के
गाटेकी रोटी सक ओर से पका के कचची ओर से गरम
गरम पेट पर वांधना और वारे लगाना अति लाभदा
यक है।
:: पेट परसोदाके गिरने से भी कुछ मनुष्यों को सेसीपी
डाहोतीहै- चिन्ह उसका यहहै कि अचानक पीडा हो-
और पेट फूल जाने और रक्सीडकारें आवे-परंतु पीडाधिक
नहो इसमें सोदाका सनाद निकालें और फस्द मसीलम
खोलें और तेलमलें- और जो भीतोंकी सूजन के कारण से
पीडाहोतो मवादके अनुसार जुल्लाबदें और फस्द बोले-
और वह उपाय करें जोमदे की सूजन में लिखागया है दीली
और कफकी सूजने बहुत कम होतीहै- और सौदा की सूजन
में उन भौषधोंसे हकनाको जोवायकोतो. और उन में
रोहान मिळेहों।
नोरजो भातके टलनाने से यह पीडाहोतोकूदने
उछलने से ऐसा हुभाहोगा-इसमें पेट मळवावें इसीकोली
गनाफा टलना कहते हैं।
ॐ और जो आंत अपनी जगह से उतर गावे औरमवाद
गांत में फंसा हुमा होतो उस मवाद को निकालें - और मि।
सन्लाने वाली भोपदें- और रोमा उपाय करें कि फिरय
होगनहो॥
औरजो आंतोके भीतर पित्तइकडाहोके
।
तोकेवल मवाद ही निकाल लेने से लाभहोजायगा ।
ऐसा बहुत कम होता है क्योंकि पित्तपतळे होते हैं और २१
में उत्पन्न भी कमहोतेहैं ।।
गया है। ........
औरजोमसाने और गुररे और जिगर और तिल्ली
और रहम की सूजन सेहोतो उनका उपाय करें।
सेक प्रकार कूलन की बहुत बुरीहै.- उसको
एला जस कहते हैं- और उबकाई और उलटीभीसमें
होतीहैं। . LunarnaLT+टर
औरजब यह रोग बदजाता है तो पैस्वाना मुंह
से निकलता है - इसका उयाय वही है जो ऊपर लिखा
इसरोग के आदिमें फ़स्ट अति लाभदायक है-जब
मांतों में सूजन होयाउसकाडरहो।
हरप्रकार की कूलंज में यह औषधे अति लाभदायक
हुंदर कामासः मरवायेहुर केंचुर-भुनाहुभाविच्छू-
जलायाहुआ वारइसिंगा- और यही ओषधेमरोड़ के रोगको
एकदम में खोदेती है।
आस्वापाट
क्निापीड़ाके कवजहोनेकेवि
जयमें
इसमें कुलंज का उपाय करें और शर्बत वनगारोगन
वादाम के साथ पिलावें।..पाव
नवापाटर
पेर में केंचुए पड़नेकेविषयमें
यहचारप्रकार के होते हैं-एकलवेचालित भारत
यागज़मरो उनको केंचुए कहतेहैं।
दूसरे चौडेजैसे कद्दूके बीज होते हैं उनको कद्ददाते
कहते हैं।
तीसरेगोलहोते हैं।
चौये पतले और छोटे इनको चिंचिने के
लक्षण इनका यहहै कि दिनकोहौंट सूरखे हैं-
और रात को गल बहाकरे-और मेदे के मुंहपरकुरेदमाल,
महो गौर सूरवके समय केंचुए जपर चढतेहों और अपर
हीकी आतमें पडतेहों औरकहदानोंसे और तीसरी प्रकार
सेभूरव अधिक होजातीहै-औरंवोकभीकभी दस्तों में भी
निकला करते हैं-और-कूलून-और-अजैर-नामका
तों में उत्पन्न होते हैं और चिचिनेवच्चों के बहुत पडतेई
और नीचेकी आंतों में होते हैं उनमें पैरनाने कीजगहख।
जलीहोतीहै।
इन्हैंमारके निकालें-इसप्रकार सेकि तीन दिन
वरावर ताज़ा दूधमीठाडालके पिलावें-और चौथे दिन
दुधके साथ यह औपदें छिलाहुमा विरंग-कावलीस
रिखस-तुरवुद-कमीला प्रत्येक आमाशे वाकला-
मिन्नी- कुड़वाकर प्रत्येक २४॥माशे-शीह ३५ माशे-
नमक ३॥ माशे कूटछानके १०॥माशेदें और पीने के
समय नाक बन्द करलें- नहींतो कीड़ोंको इनकीवास
पहुंचजावेगी।
गरम मिजान चालेको गरम औषध कभी नरेंस
२०७
केलिये यह औषधहै खट्टे अनारके पेड़की छालोरल
सीकी जडपानी में घोटाके और छानके पिलावें-इससेकी
डेमर जाते हैं औरदस्तों के साथ निकल आतेहैं-औरजो
हवा पीना बुरामालूम होतो हुकला याशाफाकरें-औरये
भीनहोसकेतौ सिमाक अकाकिया गिले मखेतूमशराव
पीसकर पेट पर लेपकरें-यावड़येबादाम और कमीला
और तुस्मस और कित्र और करम्ब को सिरके में पीसकर
लेषकरें।
औरवचचों के लिये यह उपाय जतिलाभदायक है।
किमहदी और मोम मिलाके वत्तीवनावें और उसकाशा
करें फिर थोडीदेर पीछे दियेसे देखके जो कीडाकिनारेहो)
उसे मोचने से पकड़के खेचलें जैतून का कवचातेलीत
विप्रकारके कीडोंको लाभदायकहै चाहेखिलावें यापा
स्वानकीजगह लगावें॥ हुला-
सत्रहवांअध्याय
-नि
औABAR
उन रोगों के विषयमें जो पैरवाने कीजगह
होतेहैं।
२०८
पहिलापाठ१.
बबासीरकेविषयमें
इसमें पैरवाने के स्थान पर मससे फूल आतेहैं
जो उनसे रुधिर और पीलापानी बहै तो उसेखुनी बवासीर
कहते है औरजोकुछनचहेतोवादीबवासीरकहलातीहै।
इस रोग में सौदाके मिलने से रुधिर गावाहोजाता है यावह
जळजाता है और कमी पितों के मिलने सेमी होताहै-रुधिर
के गादा होने लक्षणयहहैं शरीरभारी होगा और पीडा
और बरक अधिक होगी-और पितों के मिलने के चिन्हय
हैं कि मसलों में जलन और पीडाहोगी-फस्दखोलेंभार
जोनहो सकैतो पछने लगावें और कब्ज़ कोदूर करें औरय
रधिरको ठीक करें और जो वह अधिक निकलता होतोकुर
संकहरुवा खिलावें-और जब कालारुधिर निकलने लग
और कमज़ोरी काडरनहोतो कभीवंदन करें क्योंकि इससे
और रोग नहीं होने पाते और जोमस्से फूलेहों और पीडाहोप
रंतुग्नमें रुधिरनबहताहोता खतमी और सोये से सेकें-
और रोगनशफतालू सलें- और मरहमसफैदे कातिलान
दायबाहै परंतुमस्सोंके कादने मेंडरहै-लोकाडेतो सक्रम
ससारखने और गूगल और मुरगौरवकायनके छिलकी
गौरकॉचलीसांपकी गौरदंडनीवैगनकी चाहे सबकोच
हेएक रकोजलाकरधूनो नामस्सोंको सुखादेताहै-
रगिरादेताहै।
1
36081
२०२
दूसरापाठ २
वादीववासीरकेविषयमें
इस रोग में गादीवाय आंतो में उत्पन्न होती है-वह कमी,
नीचेको उतरतीहै और कभी पीतकी ओरजाती है और कभी
हाथ पावों में जाती है और कभी खून बहताहै भौरक्रमी
पेटबोलताहै औरकभी पीड़ामी होतीहै-इसमें सोदाकामवा
दनिकालें और वायकी तोड़ने वाली औषधेदें और किनकी
जड़ की छाल सक हिस्से और सातर फारसी उससे भाधीपीस
कर सात माशे कंकावें औरवदनका मलना और घोडे कीस
वारी और महनत करना और फस्द नासलीक जति लाम
दायकहै।
तीसरीपाठ३
पैरखानेकेस्थान परनामरहोजाने के विरमें
उससे पीलापन वहा करताहै और बड़ी कठिनाई
मे भच्छाहोता है- इस रोग में शियाफगर्व पानी में घिसकेस
विरे और शामकोदोतीनवूदे इसकी चित लिटाके टपकाया
करें-औरजब तकदवासूखनजाय वैसेही पडेरहें-औरजोना
सूर में वत्तीजा सके तो वती उसी शियाफकी गोषधों केगोदा
कामानीलगाके रक्वें-औरसलाई मेंसईलपेटकेवतीवी
जगह रखना उत्तम है।
और जवनासूर आतकेपार होलाता हैतो अच्छानही
-
होसकता।
चौथापाठ ४
पैखानेकीजगह सूजनहोजाने के विषय में
जोगरमी से होतो घोडा और जलन होगी-फस्दखी
लें और पछनेलगावें और उलटी करवं- और जब सूजनप)
कने पर आवेतो तुरंतचीरदें क्योंकि देर में नासर पहने
का डरहै- और जो सूजन ठण्ड और कफकी अधिकता से
होतो सूजन नरम होगी और गर्मी के लक्षण विलकुलर
न होंगे उसमें उलरी करावें और यकाने वाली मरहम।
लगावें।
पांचवा पार
पैखाने कीजगह फरजाने के विषय में
इसका उपायवहोईनो होठों के फरने में निस्वाग
याचौरबहुत ठण्डे पानी से बचें-और खटी वस्तुनरखावें
औरकवजनहोनेदें-इसके लिये सवेरे शनत क्नफगानी
ररोगनवादाम और लआव वीदाना मिलाकर देतेहैं और
नरसभोजन खिलातेहैं।
छटापाठ६
शिजकेटीलाहोजानेकेवियमें
शिरजसकपडाहै जोदस्त और वाय को रोकालाई
जनवहादीलाहोजाताहै तोदस्त और वायनहीं रुक सकती।
अचानक निकल जाती है यहवारतरी और ठंड पहुंचने
से होतीहै-इसरोग में उस मवाद को निकालें जिससे पड़ा
दोलाहोगयाहो और उस उपाय से मिजाज को ठीकको-जी
फालिज में हिरवागन्याहो-औरजो सूजन होतो उसकाउपाय
करें-औरजोचोटलमाने याववासीरकै मस्सेकाटनेसे महरोप
होतो ज्यायउसकाकठिनहै।
सातवांपाठ७
काँचनिकलनेकेविषयमें
जोकारणइसका सूजन होतो उसका उपाय करें-
रखतमी और जनफ़शाओटाके रोगीको उसमें विटलावें-
गोर मोम रोगनमतो वह जन्दर बैठनाती है -नौर जो
तरी से पवादीलाहोजायतो उससे यह रोगहोतोजरासेक
बने में निकल मायाकरेंगी-और सहजसे अंदर कोचली।
जानेगी-उपाय उसकायहहै कि रोगनगुल मलके उसपर
सफेदा 1-गुलनार-माज फिटकरी-सुरमा- अनार के छिल
कि पीसओछानके छिड़के और गदीरखकर कसदें।
-
आठवीपाटन
पैरखानेकीजगहगहराघावहोजानेकेविषयमें
इसमें काला मरहम लगावें और सुखाने वालीओषधे
हिड-औरजो योडाकी अधिकता होतो अफीम सलें औरव)
ही उपाय करेंजी औरधावीका है।
नवांपाटर
पैरखानेकीजगह खुजलीहोनेकेविषयमें
जोकीडे उत्पन्न होने से खुजलीहोतो लक्षण नौर
उपायउसका लिखचुकेई-और जो कोई मवाद होती उसी
के अनुसार उसे निकाले-औरहरमवाद में मुड्डीपर पच्ने
अलगाना और सिरका और रोगन गुल सलना अति लाभदा
फव्यकहे।।
असारहवाअध्याय
गुरदोंके रोगोंकेविषै
पहिलापार गुरदेके बिगाड़के विषय में ॥५॥ लक्षण गरमी औरउण्ड और मवाइके वैसेहीपायेजा योजैसे कि जिगारके विगाड में लिस्बेगये हैं-और उपाय भी उसी परकारकाकरें-औरजवगरमी से विगाड होतो काफूर, मलंना लाभदायकहे-परंतु अधिकनमलें कि इससे पथ रोपडजाने काडरहे-और विषय की चाहनाभी घरजातीहै। दूसरापाठ २ નિરમજી गुरदे केदुवलाहानानेकेवियैमें लक्षणइस रोगकायहहै कि मूत्र अधिक और सफै द आवेगा- और शरीरवलाहोगा और विषयकीचाइना भीकमहोगी-और पीठ और सिरमें पीछेकी ओरहलकीयो डाबरावर रहेगी - जिस कारण सेहो उसकारण कोदूर करें- और फिर गुरदेको मोटाकरनेके लिये- पिस्ने वादाम-वं कलारियल-शक्करके साथ और दवाउने तुरंजबीन और विषयकी चाहना उत्पन्न करनेवाली औषधे खिलावें। तीसरापाठ३
२९४
गुरदेकीकमज़ोरीके विषय में
। लक्षण इसका यह है कि रेदा और सूत्रा होने से और
करबटबदलने के समय कमरमें पीडाहोगी- और विषयको
चाहना और सूत्र परजायगा- और मासके घोक्नकासा भूत्र
जावेगा- जो कोई सादाविगाड होतो उसी के अनुसार
टीककरें।
औरजो गुरदेके दुवलाहोने से ऐसा रोगहोतो उसक
उपायकरें।
औरजो गुरस्के खाल दीलाहोजानेस-औरउसके
रास्तोंके खुलजाने से यह रोगहोतो कारण उसका विषय
ची अधिकता याचोट लगना यामूत्र लानेवाली औषधीब
अधिक पीना होगा-इसमें कारणकोसकरें-और जोऔष
निगरको मुष्टकरती है वह गुरदेकोभी यष्टकरती हैं और
माजून लेवूव भोर विषयकीचाहना उत्पनकरनेवाली
अतिलाभदायकहैं।
चौथापार ४
गुरदे मेंबायकीपीडाहोनेकेविषयमें
इस रोगकमरके आसपासपीडाऔर खिचावह
गाऔरवोझ नहोगा-औरपथरीकेलक्षणभीनपायेजाव
गे-और सूखके समय पीडाघरजाया करेगी इसमें जीरा
सोया-सुझावकेचीन-वावूना सवको पीसकर गुरदेवस्था
पर लेप करें- और शर्वत कुर पिलायें औरवाय की तोड़ने
वाली औषधे खाना और शरीरकोमलना और पचावकोठीक
करना अति लाभदायक है।
पांचवापार
गुरदेकीपीड़ाके विषय में
इसकाकारणगुरदेकीवाययाकमज़ोरीया सूजन
यापथरी यायावहोगा-उसकारणकोदरकरें-औरवावूनानी
रसोया औरस्वतमी और करम्बके पते औटाकेभाबज़न करना
हरप्रकार की पीडाकोलाभदायकहै।
छापार६.
गुरदेकीसूजनके विषयमें
लक्षाणजौरज्यायउसकामवादके अनुसार वहहैजो
जिगरकी सूजनमें लिस्वागया- परन्तु कमर में पीडाहोगी।
जोदाहिने गुरदे में सूजनहोतो कुछ ऊपरको जिगर के पास
पीडाहोगी-औरजोवायें गुरदे होतो नीचेकोमसान केषा
सपीडाहोगी-यह इसलिये किदाहिना गुरदावायेंगुर
से कुछऊंचाहे।।
औरजोपोडाअधिकहोतोपरदों के पास गरम मवा
सेहोगी।
२२६
औरजो सूजन गुरदेके रस्तों में होतो मूबरुकेगा-
औरतो आतों के पासहोतो पीडाभीतर की ओरहोगी और
अचम्मानहीं कि कुलंजकारोगभी उत्पन्न होजावे-और
नव गुरदे की सूजन पुरानी होजावे।तो फ़स्द माविज़लान
दायकहोगी।
सातवीपाट
गुरदेकेषावके विषयमें
लदाणउसका यह है कि सूत्र में पीय और रुधिरी
रछिलके निकलेंगे-और गुरदे के स्थान पर पीडाहोगी इस
में मवाद को ठीक करें-और जिस ओरके गुरदे में घावही
सीओर फस्दवासलीक़ खोलें- और पुष्ट जुलाव कमीन
परंतुहलकाजुल्लाज देसकते हैं-इसके पीछेगी औरतर
डके अनुसार सूत्रलानेवाली औषधे पिलावें-और फिरवा
विमरनेवाली औषधे-जैसे गिले अरमनी-दम्मुलअब
कैन-जलाहाकाग़ज- कुंदर आदि औरकुर्सकोकनन
औरवादकुल कुजूर स्विलानालाभदायकहे ।।
आरवापार
गुरदेखुजलीहोनेकेवियमें
सात दिन में दोवार मवादको निकालें-और उलटी
करें-और शर्वत वनफशा पिलावें- और शियाफविरत
कोरोगन वादाम घुिसके मूत्रकेछिद्र मेटपकावे औरक्नी
इकुल कुजूर खिलावें।
प, नवापाटर
म जिया वितुसके विषय में
यह वह रोगहै कि पानीजैसा पीवें जैसाहीतुरंत
सूत्र में निकल आवे-इसका उपाय गर्मी और ठण्डदेव
केकरनाचाहिये-गरम में कुर्सकाफूर और कुर्सतवाशीरा
रकर्स जियांवितुसदें औरतण्ड में मसरोंदीतूस औरंमाजून
मामिकुल चौल स्विळावें
इसंचापाउ०
गुरमें पथरीपड़ने और मूत्रमे रेत आनेके
॥ विषयमें।
वारा
इसरोगकी वारिया होतीहै-कसीस्कमहीनेके पीछे
कभीवर्ष दिन में और कभी कमवद मेंजोर करता है।।
इसका लक्षणयह है कि दुड्डी की जगह खिंचावी
रबोगहोगा और मूत्र पीला भोरलालगावेगा-औरकीर
उसमें एबीभी निकालेगी- गौरजव भातें भरेंगी तो पीडाम
धिक होगी।
२९६
औरजोसूजन शुरदेके रस्तों में होती सूत्ररुकेगा-
औरतो आतों के पासहोतो पीडाभीतर की ओरहोगी-और
अचम्मानहीं कि कुलंजकारोगमोउत्पन्नहोजावे-और
जव गुरदे की सूजन पुरानी होजावोनो फस्द माविज़लानी
दायकहोगी।
सातवीपाट
गुरदेके घावके विषयमें
लदाणउसकायहहैकि सूत्र में पीप और रुधिरी
रछिलके निकलेंगे-और गुरदे के स्थान पर पीडाहोगी उस
समवाद को ठीक करें-और जिस ओरके गुरदे में घावहीउ
सीओर फ़रदवासलीक रखोलें- और पुष्ट जुलांच कभीनद
परंतुहलकाजुल्ला देसकते हैं इसके पीछेगर्स औररर
डके अनुसार सूत्रलाने वाली औप. पिलावें-और फिरखा
विमरनेवाली औषधे-जैसे गिले भरमनी-दामुलअस्त्र
चन-जलाडमाकाग़ज- कुंदर आदि और कुर्सकोकनन
औरवनादिकल वुजूर स्विलानालाभदायकहै।
आठवीपाठ
गुरदे खुजलीहोनेकेवियों
सात दिन में दोवार मवादको निकालें-औरउलट्टी
करें-और शर्वत वनफशा पिलाव और नियामविया ।
६
कोरोरान वादाममे घिसके मूत्रकेछिद्रमेंटपकार्व-औरक्नो
दकुल बुर खिलावें
नवांपाठ
जिया वितुसके विषय में
यह वह रोगहै कि पानीजैसा पीवें वैसाहीतुरंत
सूत्र में निकल आवे-इसका ज्याय गर्मी और उराडदेव
किकरना चाहिये-गरम में कुर्सकाफूर और कुर्सतवाशीरा
रकुर्स जियाविसदें-औरतण्डमें मसरोंदीतूस और माजून
मासिकुल चौल स्विलावें
इसवीपाट
गुरदे पथरीपड़ने और मूत्रमे रेत आनेके
॥ विषयमें।
वारा
इसरोगकीचारियाहोतीहैं कमीस्कमहीनेके पीछे
कभीवर्ष दिनमें और कभी कमवूद में जोर करता है ।।
इसका लक्षणयह है कि दुइडीकी जगह
रवोमहोगा और मूत्र पीला मोरलालआवेगा-औरकीर
"उसमें पपीभी निवालेगी-भौरजव भातें भरेंगी तो
धिकहोगी।
'२२०
दूसरा पात
मसाने के घावकेविषयमें
चिन्ह उसका यह है कि सूत्र में छिलके और
औरजलन होगी और रुककै आगा-उपाय इसकावही
हैजो गुरदेकेघावकाहै-औरजवपीडा अधिक होतो:
अवियज़ स्त्रीके दूध घोळके सूर्यके छिद्र में टपकायें-
औरजन पीप अधिक आतीहोतो केवल माउल अस्लटप
कावें वहंघावके साफ करने में अतिलाभदायकहै-औरमा
सानेके रोगोंमें सूत्रके छिद्रसेदवाना पहुंचाना तुरंतला
ताहे- और स्त्रियोंको पिचकारी से दवा पहुंचासकते हैं।
तीसरापार
मसानेकीनुजलीकेबियमें
पेड़में खुजली और जलन और पीनाहोगी और
मेंदुरगन्धिहोगी औरकभीकभीउसके साथरुधिरमीनि
कलेगा इसमें मवादको निकालें औरतीककरें-और लभाव
बदाना और स्लीका दूध और रोगनवादाम मूत्रके विद्रमेंट
का-औरइन्ही गोषघासेडकनाकरें- औरभोजनकीनगर,
आशनो और दूध और चांवलरवानान्लाभदायकहै।
-
चौथापारः
मसाने रुधिरजमजानेकेविषयमें
रोग सबसे रुधिर निकलने से यामसाने में चोट प
उनसे और किसीग के फटनाने या मुंह खुलजाने से उत्य
इस रोग में हाथांव उरडे होगे औरकमीजा।
गा और सूच्छहोगी-अकेली सिकंजवीन अनसिली
समेंबोडी अंगरकी लकड़ी की राख मिलाके पानीमें घो
शासकर पिलावें और खरगोशका पनीर अंगरकीलकड़ी कीराव
के पानी के साथ खिलायें-और पेडूको उसपानी से धोरें और
सूत्रके छिन्नमें सपकावें औरइस उपाय सेजमाहुआरुधिर
न पिघलें तोवह ओषधेनोपथरी को तोडें और सूत्र लानेवा
मन्त्री भीष और पुराने चनोंको सुहावके पानी में औटाके पिला
व गौरजवकोई भौषधलाभदायक नहोतो जमेहुसरुधिर
कोचीस्कर निकालें और भोजनकीजगह पुरानेचनोकोनों
संकरग्सका मानीदारचीनीडारके पिलावें ।।
पाँचवापार ५
मसालेकीपीडाकेविषयमें
यह सूजनके कारण होगा-याघावके बारकुजलीके
यापथरी पड़ने के या मसाने में वाय उत्पन्न होने से इनसचे
r
२२२
A
का उपाय लिरव चुके हैं एक प्रकार इस पीडाकी यह
जोमसाने के विगाइसेहोतीहै-जोयगरमी ।।
सहोगी और सूत्र जलन होगी-'और पहिलेइससे .
M
स्तुरवाई होगी-इसमें टएडाई पिलावें और
वि औरठंडी बनादकुल उजूरं
सूचसफेद आवेगा-और इससे पहिलेडी
लाये होंगे जैसे कपूर आदि-और ठंडीहवालगने
डाहोजातीहैगरमभोजन और औषधेदें-
नीसेपेडूको धारें।
और दूसरीमकारइस पीडाकीवहहै कि
नके दिनमवाद मसाने भाव भौर मूवज़ोर से
और उससे यह पीडाहोइसमें अधिक मूत्र
पाय करें।
छसापार
मसानेकेटलजानेकेविषयमें
पीठपरचोरलगने से रेसाहोताई
पधोका लेपपेड़ पर करें औरजोचोट पड़ने से पट्टा
गयाहोतोसूब सेक रहताहै-
अचानक सूत्रानेलगताहै-इनदोनों में फस्द
खोलें-और कभीइसरोगके साथ और रोगभी होताहै-
लेउसरोगका उपायकरें और फिर इसका।
14et
.
२५१
सातवी पास
मसानेके फूलनेकेविषयमें
मसाने में वाय मरजातीहै- और पेड़ पर विचावरह।
और काय एक स्थान पर नहीं रहती औरन बोम हो
और जो योग और खिचाव एक स्थान पर रहैतो जा
निकिवायके साथ तरीभीहै-इस रोग में कुछ दिनों तकमा
उल उसूल गरम पिलावें याउसमें थोडा रोगनदइंजीर
मिलाकर पीवें-मौर रोगन गरमनोचाय को बोडेमले और
करके छिन्द्रोपकावें- और रोगन केसरका खिलावे औ
रिमो भौरनव सुब निकलने में कठिनताहीतो रवरकुनेके
बोईस छिलके कुचलके कंद के साथ और आवज़न
नजितावे-जौरअवइसके साथतरीमी होतो चांरवार उलटी
करवं- और निरियाक भौरमसरुदीतूस और इंजीर विलावें
आरवापाठन
मसाने पथरीफ्डनेकेविषयमें
लक्षण उसकायहहैकि लिंगकीज में खुजलीहोगी
और योडीरदे पीछे सूत्र आवेगा और विषयी चाइनाप
हलेतो सकवार मधिकहोगी- और पिरतवाड़ी जानीदै
गी-इस रोगमें सूबका रुकने माना-याविकबुलनमाना
और मसानेमें पीडाहोना कुछ नहीं होता-परन्तु निसर
२२४
..
समय पथरी मसाने के मुंह पर आनंकर अड़जानी र.
तो ऐसा होताहै और इस प्रथरी का उत्पन्न होना
रिसेजान सकते हैं कि गुरदे की जगह और । .
पीड़ाहो॥
वह उपाय करें जो गुरदे की पथरी में :
है और दधिक पुष्ट औषधे दें और विच्छ
कातेल आदि पेड़पर मलें और सूत्रके छिमेंदपकावें
औरजो भविश्यहोतोचीरकर निकालें और जो रोगीकी
वरयासतरह.या १२ वर्ष से कमहोतो कभी सोनकरें-कि
मरने काडरहै औरजवं पथरी सूत्रके रास्ते में आकर मंस
रहेऔर सूत्रसकजावे और उससे पीडाहीतों रोशीकोशि
लिटावें और दोनों पांच वटाके गरम पानी से पेड़को घार
भौरनीचे से अपर तक मलें-इससे पथरीनंहासे हटके मना
के अंदरचलीजावेगी-और सूत्रका रास्ताखुलजावेगा
जिलि यहूदासीलपथरीक तोडने लाभदायक है।
नवापार
सूत्र मेंजलन होनेकेविषयमें
यह गुरदेयामसाने की खुजलीयाइनीस्थानो
किचाव की पीप से होतोहै-खुनी और घावका उपाय
रे-औरनो लिंगके भीतर चाव होतो उपायु उसकामा
गेलिसाजायगा और नो निगरकी गरमी और पिनोंकी
अधिकता से होतो उनके लशण यावेजावेंगे-इसमेंबछा
।
भौषयरें-जोजिगर के विगाड़ में लिखचुके हैं- औरजोमवा
रकी अधिकता के कारण उनसेलाभनहोतोमवादको निकाल
ने-औरश्याफ अवियजस्त्रीकेदूधमें घोलकर रोगनगुली
ररोगनवादाम मिलाके मूत्रके छिद्र में पकायें और लिंगको
अस्पगोलके लुआबमेंरकवें।
लिंगले छिड़ में एकतरी चिमटीहै उसके छिलना
निसेमीयरोगहोताहै-लक्षण उसकायहहै कि उससेयहि
लेगस्म औपचे सूबलाने वाली वाईहोगी और विषयकी
अधिकता होगी इसमें पहिले कारणको दूर करें-श्याफाम
वियन कोस्त्रीके दूध में घोलकरसबके छिन्नमेंटपकावें-
औरलुभावों और चीनको चाहेंपो चाहेंटपकावें।
दसवांयार१०
सूबवंदहोनानेके विषय में
जोयह रोगगुरदेयामसानेकी सूनन सेयाउनमें
पथरीपड़ने सेयो मसाने में रुधिरके नमने योयीपअटकनेसे
यावायके फैसने सेहोतोउसका उपाय अपर लिखचुके हैं।
औजो सूबके स्थानपर मांसउत्पन्न होनेसे यहरो
गहोतो भोर किसोरोग केलमण नहींहोंगे-औरइसकाउपा
यनहींहोसकता-परंतुवोडासा लाभहोनेके लिये-डीलाभौर
नरमकरने वाली औषधोका भावज़न कों-कि बिलकुल
वनरहैं।
.
२२६
.
मसाने की गर्दन पर एक महाहै जोमूत्र को नि
बोडता है. उसके टीला होने से भी यह रोग होजाता है-
लक्षण उसका यह है कि ममाने के हवाने से मूत्र खुलके,
कलता है- इसमें गरमी पहुंचावें चाहे पीने की
मे यालगाने की मे और वह तेल मलें जो फ़ालिज में
गये हैं।
औरजोमसाने और लिंगमें लेसदार मवाद
हौर उससे सूत्र रुकेतो पेड़वोझल होगा-गोर
लेगाटाकरनेवाली वस्तुवाई होंगी-और किसीदूसरे रोग
लक्षणनहोंगे-इसमें पुष्ट औषधेसूबलाने
और आज्जन करें और रिखसक और विच्छूका तेल उसी
मेंटपकावें।
औरजोममानेकीदरकरने वाली शक्ति के जाते.
म्हने से यह रोग होतो उससे पहिले रोगीने देर तक मूव
को रोका होग-इसमें आक्ज़न करें- और पेडको हाथ से
दवावें- और रोगन विलसान और रोगन बुरित पेई परम
ले-औरजोइससे लाभनहोतो एक पोली सलाई चांदी
शीगे योगंगे की लेकर छिद्र में डालें-नीति ने
कियोडासा फूसहारेशम कालेकर तागे में वोधे- और
सिरा उसधागे को उस मलाई में डालकर निकालें- और
निस भारवह सडाहो उसी और से सलाई उस छिद्रों
डालें-जव वह सलाई मसाने के मुंह तक पहुंच जाये तो
ग को ज़ोर से रवींच लें तो जूत्र का रास्ता विल कुल सुन
नावेगा।
U
जानु
औरनो मूव के रास्ते में घाव या कुंसी होनेसे मूत्र
रुकतो उनके लक्षण पायेजावेंगे इसका उपाय सोजाकरें।
देखनाचाहिये।
औरजवपीट या पेड़ पर चोट लगने से यह रोग
हो तो देखना चाहिये कि सूजन है या मसाला ढीला और
खिचंगया है जो सूजनहोतो उसका उपायकरें-जोरजो
खिंचाव आदि होतोफस्दवासलीक स्बोनें- और रोगनर
औरजो मूत्रके रास्ते में खुश्कीऔर कवजहोतोगरमी
किलक्षाणपायेजावेंगे-औरतर नौषधोंसे लाभहोगा-औरममा
नि सेयोडासा मूत्रननिकल सकेगा-औरजववहंत माइक
होजायगातो भलीभांति निकलाकरेगा-इसमें तरी भोरउंड
.4
औरजो पहों औरवचनोंमरकफ़ के गिरने सेमसा
निभौर मुबके रास्ते में खिचाव होजावे तौलक्षण उसकायही
हैकि मूत्रथोडासारवलकर निकल पड़ता है और रेलेसे
नहीं भाता-इसमें खिचावका उपाय करें- जैसा हमालि
खचुकेहैं।
औरो पेइपरपेलडेचटजाने से मूत्ररुकेतोज्नकेल
तारनेका उपायकरें।
औरतो सूत्रकी सरसराइटनमान पड़ने से यह
रोगहोतो केसर और विलसान का तेल छिन मेंरपकार
वें और पोदीने और सोयेंगादिका लेपकरें-भौर मांड
लवसूल और रोगनवेदईवीर पिलावें- और तिरियाककर
चीर खिलायें।
રરર
.
* 3
औरजोतरी से यह रोगहोतो सब से पहिले उलटी
करावें।
औरजोमसाने केरलजाने सेहोतो उसका उपायबित
चुके हैं।
औरजोमसानेके आसपास किसीऔरस्थान में सूजनप
विगाडहोतोउसस्थानकाच्यायकरें।
औरजोमसानेकेवरावरगुरियों के मरने से मूव रुवे
ती उमारियों को अपने स्थान पर विरावें जैसा कि चारहवें
यात में लिखाजायगा।
ग्यारहवायार९९
मूवखुलकेनहोनेकेविषयमें
'इसरोग में मूत्र एक एक बूद करके भाताहै-उसके
लक्षण भोर उपाय दसवें पाठके अनुसार हैं।।
वारहवापार १२
गचानकमूत्रनिकलाकरनेके विषयमें ।
मसाने के दीला होने या नस में कोई गरम
विगाह होने पर उसकी मास पास की सूजन से याममा
नेके उलनाने से यहरोग होतो उसका पाय दसवें पाठ में
ठिवचुके हैं।
२२२
औरनोशरावया वरचूलों आरिले खाने सेहोतो
उसकारण कोहरकरें-भौरजो मसाने के वरावरकी गरियों
केटलजाने से होतोदेखें कि वहभीतर को धस गई है या
वाहर उभर भाई नोभीतर घसगई होंतो खाली सीमिया
उसजगह पर रखकरसे या जिफित् कालेपकरें औरनो
वाहर उभरोहोंतोहाथ से मलें-और जो मसानेके बंधन
गये होतो उनका उपाय नहीं होसकता।
तेरहवा पाट९३
सोतेमें मूत्रनिकलनाने के विषय में
यह रोग लड़कों कोवहत होताहै-इसमें गरमीपह
चावें और दसवें पात मेंजो उपाय मसाने के पढेकी सुस्तीदूर
करने का कही करें-भौर रावको कई बार टाके पेशाब
किरालें-भोरगत कोखाने पीनेनरें-औरकुन्दरकाजीरा
हबुल आसमत्येक सादेवाईस२२॥माशे पीसकर १०
माशेशहद में मिला करें और सोने के समय सात माशे
खिलादिया करें।
चौदहवापाठ१४
मूत्र मेरुधिर निकलनेकेविषयमें
जोगुरदेवीरगफट गई होया खुलगईहोतोचिन्ह
२३०
lect
रुधिर साफ़ लिबा तलछट केनिकलेगा
पीप विलकुल न होगी जो थोडाथोडा आता होतो रग कान
हखुलगया होगा- और जब वहुत सा भावे तो जानो रग
फर गई है- फस्दवासळीक या साफिन खोलें-और कुर्म
कहरुवा और कर्स चौलुहम खिलावें और पेड़ पर और पेस
ने की जगह पछने लगावे-और जव रुधिर में तेजी होतोरडे
पानी से पेड़ को धारें भौर नंडी औषधों काळेय करें औरण्या
नरकचे किरुधिर मसाने में नजमने पावें-और शर्बतरण
नाव धनिये के चकू में देना रुधिरको कदकाता है और
भीको त्रुझाताहै।
औरजब जिगर यागुरदेवीकमजोरी सेहोतो रुधिर
से सूत्र अलग नहो सकेगा-इसलिये उसके साथ नि।
कलेगा- लक्षण उसका यहहैकि सूत्र मासके घोक्नका
साहोगा।
नवरारदा कमजोर होगा तो सूत्र सफ़ेद औरगा
औरजब निगर कमज़ोर होगा तौ मूत्र लाल औरप
तिलाहोगा।
इसमें जिगर और गुरदेको पुष्टकरें।
औरजोमूत्रकी रणे में घाच होतो पीप आदि सेजा
न पड़ेगा इसका उपाय लिखचुके हैं और कुर्सकाकन
लाभदायकाहै।
होगा।
*
TRI
२३१ वीसागध्याय ॥२०॥ उनरोगोंकेविषयमें जीकेवलपुरुषों कोहोते हैं। पहिलापार विषयकीचाहनावरजानेकेविषैमें u विषयकी चाहना शरीर केवडेबडे स्थानों के चंगा होने से पूरी होतीहै और विषय कीचाहना हो प्रकार सेघर जातीहै। कतो यहहै यह भापड़ी घटजावें-दूसरे लिंग केटीला होजाने से इन दोनों प्रकारों कावर्णन मग अलग कियाजाता हैं। पहिली प्रकार के कई कारणहैं। एक तो यहकि शरीर भोजन की कमी से कमलो होजावे और ससे रूह और वाय और रुधिरको विषय कमवाद हैं कम उत्पन्नहीं अक्षण इसका यह है कि कम जोरी दुवंळापन होगा- और पहिले से भूस्खे रहे होगे-
२३२
उपाय इसका यह है कि अच्छे अच्छे भोजनों से औरपुष्य
औषधों से शरीरको पुटकरें और खेल कूद और नाचरंगमे
लगे रहैं।
दूसरे यह हैं कि वीर्य थोडा उत्पन्न होचार
हे भोजन भली भांति खावें- लक्षण उसका यह है कि
वीर्य थोडा निकलेगा- कारण यह है कि कोई निगाई
वीर्य उत्पन्न होने की जगह पड़ जायगा - और उन व
स्तुओं से हानि होगी-जो उस विगाड़ के अनुसार हो-
और उनके विपरीत से आराम होगा इसीसे उस विगाड़ा
की मकार जान पड़ेगी- कि गर्म है या रंही आदि इसमें गि
जाजको नीकलरें।
MNA
तीसरे यह किवीर्य अधिक हो परंतु उसकतेजी
और गुरे गुदा इंटजातीरहै लक्षण उसका यह है किवीर्य,
अधिक निकले औरंगादाहो और विषय करने के समय
भादि जोर कमहो और फिर अधिकझोजाय-इसमें भाजूने
र माजून कुजूर आदि खिला
कैगरमीपतु
ज़रऔनी में
।
.
किविषयेकी
मला-
लिंगभादि
रम
परद
चातका
२२३
छटे यह कि दिल या मेदे या जिगर या भेजे यागुर
हेपे किसी विगाइ के होने से ऐसा होतो पहिले उसविगा
काध्यायकरें।
दूसरी प्रकार यहहैकि शरीरमें कमजोरी होनेसेया
बहुत दिनों तकविषयकेछोङदेने से लिंग सुस्तहोजायज्पा
यइसका अपर लिखवुके हैं और गर्मपानीसे घारे- फिरभेडी
कादूधमलें-और जिफलंगावें।
जोनीचे के घरमें वायुहीतोदेखेंकि लंड से है यागी
(सेया खुश्कीसे उसीके अनुसारकामकरें।
जोपट्टों पर कफ कै गिरने या लण्ड पहुंचने सेहो
लक्षण उसकायहहै कि पहिले ये सवबातें पाईजावेंगी
गौरवीर्य पतला होगा-और विनाज़ोर करने के निकलाकरे
गा-इसमें वही ज्यायकरेंजो फालिजकाहै और गरमशाफे)
और हुकने करें और गरम औषधेमलें-और लिंगकोबहुत
मिडे पानी सेधारें- जोवह उसकी ठण्ड सेनसिमटेती उस
रोगका उपाय नहीं हो सकता।
अब ऐसी औषधे लिखीजाती हैं जो लिंगको वडा
पहिले उसेखुरखुशऔर कड़ेकपडेसेइतनामले कि
लालहोजावें फिर रोगन मोर्चा और इसीप्रकारकी और भी
पधेमलें और उसपर जिफ़तकालेपकरें।
दूसरेकफसके पानी से कईचारधोवें।
वेकरी के घीसे कईवार चिकनाकरें।
चौथे केंचुरी याजोंक सुखाके रोगन सोशन में मि
लाके मलें।
करें।
२३४
---
स
दूसरापार
वीर्यजल्दीनिकलनेकेविषय में
उंडयातरी से होतो लक्षण उसका यह कि बहु
ति सफेद और पतला होगा- और गर्मीन होगी- गरमजु
ल्लावों से मवाद को निकालें- और उलटी करावें औरमा
जून खुव सुल हदीद बिलावें और उसकी शराव पिलावें
और शहदाने को भौटाने शहद मिलाके पिलावें।
और जो यह रोग वीर्य और रुधिर की अधिकता
सेहोतो फस्द रवोलें- और विषय ओडाकरें और भोजनक
म रखावें और वह वस्तु रवानें जिनसे वीर्य और रुधिर कम
उत्पन्न हो।
और जो वीर्य में तेजी आगई होतो लक्षण उस
का यहहै कि वह पदला और पीला निकलेगा-नौर उसमें
जलन होगी-इसमें ठंडाई और कार के बीज औटा के
पिलावें॥
औरजो बमजोर होने के कारण से यहोगहरे
तो उसकारण को दूर करें। Foranxii २६५५
तीसरापाठ३
विषय की चाहना अधिकहोजानेके
विषयमें
२३५
यह रोग भीरुधिर भौर-वीर्य की अधिकनासे
होताहै उन्हें कम करें-परंतु रोसानचाहियै कि कोईहा
नि हो भौर जो बहुत ही अवश्य होतो फस्द और जुल्लाच
-और वह वस्व स्वावें जो वीर्य कोकमकरें-औरभोजन
भीकमरवावे॥
नीसेन्हावें॥
दायक है।
औरजो वीर्य में तेज़ी होतो टंडाई -और रंडे या
औरजो कमजोरी हो और रुधिर कमहोनावे- औ
रिइस पर भी वीर्य की अधिकता होतो वह पतला और
सफेद होगा-इसमें कलौंजी और मुंहाव और संभालू
कि वीज देना चाहियै-भौरनवारिश कसूनी अति लाभ
और जोवीर्य के स्थान सुष्ट हों-परंतु शरीरमें
और स्थानों पर कमजोरी होतो उसके लक्षण पायेजावेंगे-
पायइसका यह है कि वीर्य के स्थानों की कमज़ोर करदें-
और दूसरे स्थानों को पुष्टकरें।
और जो वीर्य के रास्ते में फुन्सिया या घावया
सनकी उत्पन्न होने से यह रोग होनो लक्षण उसका यहहै।
कि विषयकरने के समय वीर्य मजे से निकले - परंतुघा
व में पीड़ा होगी- और पीपभी निकलेगी-इसका उपाय
वही है जो मसाने के बावका है- फस्द और जुल्लावर
औरजो शरीर के फूलने मे यह रोग होतो रामी
की अधिकता में रही औपचे दें. और जो तरी अधिकहोते
वहौषधे देंजो वाय को तोड़ें और खुरकी करें - गौरजी
भादिम
T
1
सौदा की अधिकता होतो फस्ट वासलीक खोलें-और सौ
दाका जुल्लाबदें।
चौथापार
वीर्य निकलाकरनेके
jનીજ
विषयमें
• नो यह रोग वीर्य्य की मेधिकता या तेज़ी या उस
के स्थान के टीला होने से होतो लक्षण उसका यह है कि
रंत ही विषय की चाहना उत्पन्न होजाया करेगी-औरहर)
वार मे वीर्य निकलेगा- इसका उपाय दूसरे पाठ में लिव
गयाहे॥
और जो यह रोग उस पढे के विचनाने मे होतो,
वीर्य के स्थान पर है तो विचावका उपाय करें-औरपेडू
आदि पर रोगन मलें।
और जो गुरदे की कमजोरी होनौर उसकीची
पिघल के निकला करे तो लहाण उसका यह है कि विपयुका
रने के पीछे मूत्र मे कोई वस्तु सफेद और गादी निकले और
गुरदे की कमजोरी के और लक्षण पाये जावेगे और कभी
विषय की बातें सुनने मे भी वीर्य निकलं गाताहै-उसकारण
.
यह रोग स्त्रीयों को भी होता है और उसके
। यही कारण होते हैं जो अपर लिखे गयेहैं- और कभीरहमा
।
को भी दूर करें।
.
२३७
के मुंहदीला होजाने से भीहोता है- उपाय इसका यहहै।
कि उलटीकरावे- और कब्ज करने वाली भौषधों कोगोट
के आवज़न करें।
यह औषयवार्य यामजी यावदी निकलने में
लाभदायक है-मुहाव के चीज्ञमा दस मागे-संभालूकेची
न और सौसन कीजड प्रत्येक सात माशे-पीमछानके मरेया
कच्चेअंगूरके रसमें मिलाकरें।
यहड्या मज़ी और वदी को लाभदेती है-मंगको
भूनकर पीमके शहद में मिलाके.।।
जाननाचाहिये कि मंजी औरवेदीलमदारवस्तुहै
और मूत्र के साथ या उसके पीवे नकली करती है।
पांचवापार५
वीर्य के वदलेरुधिर निकलनेके
विषयमें
इसका कारण खुसियों या गुरदे कोकमजोरीहै-जे
गरमीकाडरनहोतो खुमियों को रोगन मस्तगी में भिगोवैगोर
शरदोंको पुष्ट करें।
छटापार
२३
सोते में वीर्य निकलजानेके वि
षयमें
इसका ज्याय और लक्षणवहीहैजो चौथे, पाठ में
लिरवचुके है- और सीसे काटुकड़ा पीछे कमरे पर गुरंदों
वीजगहवाचे।
सातवा पार
लिंगकेहरसमय जोर करने केविषयमें
जोरुधिर की अधिकता होतो फस्द खोलें गौर
भोजन थोडादें-और रंडी औषधे काम में लावें-और जोड
और खुश्की से होतो उलटी करावें- जिससे कफ़ निकलेजोगा
वह औषधे जो वाय को तोडे चाहे लगावेंया खिलावें और
मुहाल का तेलपीट और पेडू परमलें ।।
आरवापार
वीर्य निकलने के समयअचान
कपैखानाहोनाने
के विषयमें
२३१
.
C
शरीरके बड़े रस्थानों की कमजोरी से औरतरी
की अधिकता से होता है इसमें उन स्थानों को पुष्ट करें-औ
सनकाकिया और एमक और गुलनार और क्वूल का गोद
और कंदर से शाफ़ा करें और विषय के समय भी यहीकर
नाचाहियै- और नारदीन का तेल पैरखानो के स्थान परम
और विषय के समय पेट वाली रकवें।
'नवापार र॥
पुरुषको विषयकरानेकीचाहना
उत्पन्नहोनेके विषय
॥में।
इस रोग में आंतों में कुजली होजानी है-जौकोई
मवाद पाया जावे तो उसे निकालें और इस रोग कामवाद
बहुत करके रखारी कफ़ होता है और जो सुभावमें स्त्रियों,
कीसी बातें होजावें तो मारपीट से दूर करें।
दसवांपास ९०
खुसियोंकीसूजनकेविषयमें
जो सूजन अधिक और वोगल हो औरगर्मी पाईनाने
२४०
तौरुधिरकी अधिकता होगी- और पित्तों की अधिकता में
अत्यंत गर्मी होगी-पहिले पीठ और पिंडली पर पछनेला
गावें और फस्द रखोलें- फिर उन रंडी औषधों का लेपकरें
जो मवाद कोइधर गिरने से रोकें और इसके पीछे उसलेप
में पटकाने वाली औषधे भी मिलालें और फिर केबलफ्ट
काने वाली औषधों का लेपकरें- जैसाकि सूजन के उपाय
में लिखागयाहै।
औरजो सूजन मेंनर्मी और सफेदीहोतोकफ
की अधिकता होगी-इसमें उलटी करावेंगौरकफकी मुंजि
शौरजुल्लाबदें-औरवाकलें के वीज पीसके वेसन और
शहद में मिलाके लेपकरें।
औरनो सजन में करापन और कालापन होतो,
सौदा की अधिकता होगी-इसमें नरम करने वाली औषधे
वाकूने और नारेबूने के साथ लेपकरें-और फिरसौदाका
ल्लोव और मुनिशदें।
और जो किसी मवाद के लक्षणनहों और सूजन
फूलीहुईहोतो वाय मे होगी-इसमें पटकाने वाली औष
धों से सेंक करें- और कसूनी स्वावें और जोइससे लाभनहीं
तो उलटी करावें और जुल्लाव दें-जोरोगनीचे के हो
- उनमें उल्टी कराना अति लाभदायक है- और उसमें
डरभीनहीं है।
जोसूजन केवल थैली अर्थात अपर कीवाल
में होतो दुख कम होगा और सूजन दिखाई देगी- गोरगी
दएकी सूजन में दुख औरतप और प्यास अधिक होती है।
.
४९..
म्यारहवां पार९९
खुसियोंके वदनाने के विषय में
यह रोग सूजन की प्रकार से नहीं है-इसमें मोटा
न जाता है. इसमें खुस्सानी अजवायन और शूक
रान और तफोह और पोस्त रवशवाश और सान के पत्थर
की रेत हरे धनिये के पानी में पीसकर लेपकरें-औरजो
गिळे अर्मनी और सिरका भी मिलालें तो अति लाभदाय
क होगा और इसी लेपको स्त्री की छाती पर लंगाने से
छातियों वदने नहीं पाती- परंतु इस रोग में भोजन भीथोडा
स्वाना अवश्य है।
वारहवापाट१२
लिंगमें रहम के मुहकेफड़कने
केविषयमें
मवादं को निकालें और रुधिर कोठंडा करें और
फिर उसी जगह पर जोंकें लगाना अति लाभदायक है।
और भोजन भी अच्छाखावें।।
.
:२४२
3
तेरहवापार १३
खुसियों की पीडाकेविषयमें
जो सूजन के कारण सेहोतो उसका वर्णनंकरचुवे
है और जो चाय होवो पीडा एक जगहनाहरेगी-उसमें सेवे
और गरम तेल महें-और जोगी डसे:विगाड होतो उस
का उपाय भी लिख चुके हैं- और जो बोट पड़ने से पी
डाहोतो फ़स्ट खोलें और कनफ़शा- खैरू मकोय कहू.
नीलोफरकालेषकरें।
चौदहवापार९९
खुसियों केशेटाहोजानेकेवि
षयमें।
यह ठंड के पहुंचने से होता है-इसमें गरम पानी
सेन्हावें और गरमदवायें लगावें।
पंद्रहवापार९५
खुसियों के चढ़ जाने के विष
आयो॥
कभी ऐसा होता है कि बिलकुल अपरचदा
ते हैं नीचे कुछभी नहीं रहता उस समय मूत्ररुक के और
दपकटपक के निकलता है-औरचलाफिरा नहीं जाता-और
बोथोडाचदे तो थोडीर पीडा होती है और कुछ हानिनही
होती-और कभी पीडाभीनहीं होती-परंतुजो देर तक यह
रोग रहेतो अच्छानहीं है-इसमें गरम पानी से स्नानकरें
और फरफियून का तेल मलें-और आवज़न करें औरउसी
जगह सींगियों लगावें॥ जादा
इसीप्रकार से कभी लिंगभी चटजाता है-उसका
पायमी यही है।
सौल्हवापाट
रगे उभरआनेकेविषयमें
इसका उपाय वही है जो पैरकी रंगें उमरने का
लिरवा जावेगा- और जो कडापन भी आजावे तो उसका
वह उपाय करें जो सूजन का है।
.
सत्रहवापाठ १७
अपर कीखालंदीलीहोजानेके वि
षयम
समाजू-आस-गुलाब के फूल-गुलनार-चलूतके।
फल आदि कवज करने वाली औषधों का उपकरें और
उन्ही को जोराकेधारेंग
तु अठारहवापावर
लिंगादिकेषावकेविषयमें
जो यह घाव ताजे होतो मुर्दा संग और तृतिया
छिडकें और लगावें-चाहे सूरवा पीसके या मरहम बना
के-और जो रुधिर की मधिकता होलो एहिले सवादको
निकालें।
र औरजो घाव पुराने होतो यह मरहम लगावें
दुम्मुल अखवेनु- और मुरेमत्येक नी माशे- रलवा-मु
संग-इंजरुतै प्रत्येक सात मागे पीसके रोगन गुल
मिलाकेलगावें।
जो घाव लिंगके अंदर होतो मूव गाने में जलनहीं
गी- उसका उपाप मसाने के चाव से करें।
२४५
उन्नीसवापार
|-.. लिंगकेसूज़जानेकेविषयमें.
इसका उपाय वही है जो दसवें याद में लिखाग
याहै।
वीसवापार२०
लिंगआदिकीखुजलीकेविषयमें
इसमें फ़स्द खोलें- और रान और जांघ परय
छने लगावें और पित्तों का जुल्लाबदें फिर गरम पानीको
र सिरके से घारे-और रोगन गुल मलें-और अंडेकी सफेदी
कालेप करें।
इक्कीसवापार
लिंगकेफरजानेके विषयों
इसका उपाय वही है जो पैरवाने कीनंगह केपट
3407
Xu
ने काहै॥
बाईसवापार २२
लिंग पर और उसके आसपासकड़ी
सियोऔर मस्सेहोजानेके
विषयमें
१२
कालादाना सिस्ते में मिलाकरलगावें-औरव
ही उपाय करेंजो मस्सोंका है।
तेईसवीपाट२२
मूत्रके छिद्रवंदहोजानेकेवियों
जो फुसी निकली होतो मूत्र करिनता से जलन
के मायहोगा- इसमें फ़स्द खोलें- औरकुलके और स्वस्थ
जो के चीजोंका शीरा निकालके शर्वत रवशवाश के साथ
दें-और अस्पगोल रोगनक्नफो और वादाम में मिलाके
लिंग पर रक--जब वह पकके फूढे और पीपनिकलेती
श्याफलावियन रोगन गुल और स्वीके दूध में घोलकेछि
समें रपकान-और जो पीडा अधिक होतो थोडीसीधी
मभी मिलालें।
और जो कोई सदार मवाद छिद्र में फंसा
त
D
होतो मूत्र कम्निता से निकलेगा-और जलन नहोगी-
और मूत्र में उसमधाका लक्षण पाया नावेगा इसमें
मूत्र लाने वाली औषधे दें और मिचलाने वाली औषधों,
को बोगके घारें और उसी नौटेहुरे पानी में घोड़ासारगी
नवावूना मिलाके पिचकारीलें।
औरजोमस्साहोतो मूबकठिनाई रोहोगा-ओ
रनजलन होगीनका निकलेगा-जोवह मस्सा सिरेपर
होतो स्लुमा भौर सफ़ेदारोगन गुलमें पीसकरटपकावें
और जो पीडा अधिक होतो फस्द साफिन रोले-औरपि,
उलीपर पछने लगावें।
. .चौवीसापार
लिंगकेटेदाहोजानेकेविषयमें
इसका कारण पढेका खिचावयांसूजन है पनि
ले उस कारणको दूर करें और रोगन भादि मलबे उस
स्थान कोचरमकरें-और फिर हाथ से भली भांति उसेसी
पाकरलें।
इक्कीसवाअध्याय
॥२९॥
२४०
मिराक सिफाकऔर सर्व
केविषयमे
जानना चाहिये कि पेटके चमडेको मिराक कह
ते हैं और जो फिल्ली उसके नीचे है वह सिफ़ाक़कहलाती
और एक परदा मोटा चिकनाजो सिफाक केतलेह-स
विकहलाता है।
पहिलापाढ९
कीलकेविषयमें
सिह वह रोगहैकि सिफाक की राह जोड
चदी की ओर है खुसियों के पास से खुलजावे- या सिः
फाक आपही यहां से सजावे और सर्वात या वाय
यातरी खुसियों की थैली में उतर आवे-इसको फित
कभी कहते हैं।
औरजब कोई गादा मवाद उतरे तो उसेवार
दुल लहमी कहते हैं-इन पांचोंका वर्णन अलगअल
सिकरते हैं।
पहिले भातके उतरने का लक्षण यह है
कि थोडी थोड़ी उतरे- और कम्निाई से ऊपर को चढ़े
और चटनेके समय गडक्डहो- और कभी लंनकी
पीडा भी इस में होती है- उपाय इसका यह है कि
4131
08
.
न
हौले हौले मलके अपर चदावे और जो तुरंतन लहेतौ ग रम पानी से घारें-और आवज़न में विटावें- और जवचन जाये तो यह लेप पेड़ और चट्टों और खुसियों पर लगावें- मस्तगी-इंज़रूत- कुन्दुर-सरों के फल और पत्ते-नाकार किया-गुलनार-मुर-दम्मुल अखवैन- फिटकरी-रसौत- अमल-सलमा- सबकोबरावर लेके कूट छान के सरेश मोहीको हरीमकोय के पानी में पिघलाके यह औषधे उसमें मिलाके एक कपडे पर मरहम की तरह लगाकेख सियों पर सिमटादे और जयर से पैही वेचकर वाध- और तीन दिन तकवधा रक-- और रोगी को चाहियै कि तीन दिन तक चित्त पहारहै-और तीन दिन पीछे वहुत होलेसे उदे और चले फिरे और जो वस्तु हानिदायक हो उसेच खावे पीवे और हिलने कुलने सेवचें- और नित्त जबारिश कम नी,खाचें और आकडा जोइस कामके लिये बनाया गया 02जयस दूसरे सर्व के उतरने का लक्षण भी कठिनता सेच ना है- परंतु उसमें गड़बड़ नहीं होती- और यही इसमें और जीत के उतरने में अंतर है-इसका उपाय भी वही हैलोजपा रलिरवागया॥ तीसरे वाय के उतरने का लदाण यह है कि सहनसे जपरकोचदे और गड़वड अधिक हो-इसमें वायकी तोड वाली औषधे काम में लावें और वाय उत्पन्न करने वाली वस्तुसेक्वें और पट्टीवाचे रहैं। चौथे पानी उतरनेका लक्षण यह है कि खुसियों की स्वाल भारी और पानी से भरी मालूम हो और किसीज्याय वाये नहै। YOEY
२५०
से अपरनचढ़े-इसमें उसपानी को सुखावें जैसाकि जिर
क्कीजलंधर में लिखाहै- और नव उससे लाभनहोतोछेवा
देके पानी निकालसालें। orayana
पाचवें करदुल लहमी में गाटापन और रिक्चार
और कडायन थैली के अंदर होता है कि उसकी खाल में
यही अंतर है- इस रोग में और यहां की सूजन में मतबू
खइतीमून से मवाद निकालें- और वाकी वही व्याय
है जो खुसियों की सूजन काहै। संगम
3
an-दूसरापाट२
पेट औरचट्टोंकीफ़ितककेविषयमें
कभी सिफ़ाक एंडी के पास गपर वार यानीचे
को उससे फटनाता है और मिराकजैसे कातैसा रहता है-
और जो कुछ सिफाक़के तले भर कर मिराकको ऊंचाक
रताहे- और इसी प्रकार सेचट्टों में सिफ़ाक़ फटजाता है और
सजगह ऊंचा होजाता है और यह दोनों रोग वहतकर
को स्त्रियों को होने है- उस जगह को भारी गड़ियों और प
हियों मे कराके वाधे और बन वस्तुगों से बचें जो जपरनि
खीगई है-परंतु सच यह हैकि यह रोग अच्छे नहीं होने-
उपाय करने से कोवल यह लामहै कि रोग बदने नहीं पाता
रते हैकि इन रोगों में पांवों की उंगलियों पर सीखको
करके दाग देना लाभदायक है और इसी प्रकार.
से उस मोटी रंगपर नो अंगूदे की जडमें हाय की मुद्रीपर
1
BAR
है दूसरी ओर रागरें । ४.२२ जाया
--
इंडीकेज्मस्नके विषयमें
तीसरी यादव
जो उत्पत्ति के दिनबुरी तरह से काटने से याकि
सीचोट से उभर आवै तो उसी समय तुरंत ही उसे टीककरें
नहीं तो पुराना होने पर कुछ लाभनहीं होगा उसीसमयपटी.
भादिसे रीक करें।
जोयह रोग सिफीक के फटने याकफकेडका
होने से होतोजैसाकि निक्की जलंधर में होता है यावायके
इकट्टाहोने सेजैसाकितवलीजलंधर में होता है या डीकी
खालके नीचे-मांसवदजाने से या किसीरंगके फटजाने से
और रुधिर इकठा होने सेहो॥
इनमें सेजो रोग फ़ितक की प्रकार का है उ
समें द्वाने से टूही नीचे होजाती है- चाहे गड़बड हो
और कफमें वोमजान पडेगा॥
और वाय में नरमी होगी- औरचायकी उत्पद
करने वाली वस्तु स्वाने से उभर अधिकहोगा और उनकी स्त्रिया
रीतसे घटेगा।
मांस उत्पन्न में ट्रंडी कहीहोगी और खाने से
नहीं वेगी।
और रुधिर के इकट्ठा होने में अपर का रंगनील
यानहोग
૨૨ याकाळ होगा जौयह रोग फितक कीमकार से हो उसकाध्याय लिखचुके हैं। औरजोकफ़यावाय से होतो उसका उपायजलंध रके वर्णन में देखलें। और मांस उत्पन्न होजाने में कुछ उपायन करें- वह अच्छानहोगा। औरजोरुधिर इकट्ठा होजावे तो जॉकलगाने कवज़करनेवाली भौषधोंका लेपकरें-जोनकसीरकेवणे नमें लिखी गई है- किरगोंका मुंह जिससे रुधिर निकलताहे वन्द होजावे ।। बाईसागध्याय ॥२२॥ उनरोगोंकेविषयमेंजोकेवलस्त्रियों कोहोतेहैं पहिलापाठ १
२५३
वाझहोनेकेविषयमें
13-11652
जो रहम में कोई विगाडगर्मी या संडयाखुश्की
या तरी और सादा या मवाद से ही उसका कारण जानक
उपाय करनाचाहिये।
गरमी की पहिचान यह है कि हैन कारुधिरा
काला भौर गादा होगा और उसमें गरमी भी पाई जावे
उडकी पहिचान यह कि हैनकारुधिरदेरकर
के और विनाजलन के निकलेगा। सेलरो-
और खुश्की की यहिचान यहहैकि पेशावकीजग
हसूस्वीरहेगी और हज़कमहोगा। मेला-२-1-
तरीकी पहिचान यह हैकि रहम सेतरी निकला
करेगी- गौर सेसी स्त्रीको तीन महीने से अधिक पेटन
गी।
रहेगा।
हम से वहै ।
और जोविगाह किसी मवाद से होतो पहिचान
उममवाद की उस तरी के रंगसे जांनी जावेगी- जोकिर
२२
जोसुटापे के कारण गर्भ नरहैतो दुवलाहोनेका
उपाय करें।
और जो अधिक दुबला होने से हो यहाँ तक
कि इतना रुधिरन वचे कि बच्चे को बना दो मोरा
होने का उपाय करें जो इस पुस्तक के अंत में लिखाग
या है।।
२५४
औरजो हैज़ के वंदहोजाने से होतो ऐसी औषधेका
म मेंलावें जो हैज़ को निकालें।
और जो रहम की सूजन याचवासीरयाघावयाका
डेपन से होतो उसकारण को दूर करें औरइनका वर्णन
लगअलग कियाजावेगा।
और जो रहम में गादीवाय इकट्ठा होने से होतो
लक्षण उसका यहहै कि पैंडू फूला हुनाहोगा - और वि
षय के समय पैशाव की जगह से वाय आवाज के साथ नि:
कलेगी इसमें वाह औषधेकाममें लावेंजो वायको तोडे-और
येडूपरचारे लगावें-और रोगनवेदइंजीर सादे दशमाशेमाल
उसूल में मिलाकर पिलावें।
.
और जोरहम के मुंह में कोई विगाड होजैसे
सूजन या मांस या मस्सा आदि जिस से मुंह वन्दु होला
वे तो उस कारण कोदूर करें- उसका वर्णन आगे किया
जावेगा॥
औरजो रहम का मुंह सामने से हदगया है।
जो उससे वीर्य भीतर नजासके तो विषय करने के समा।
यपीडाहोगी- और उसका उपाय २०, पारमें लिया
औरजी विषय के पीछे स्त्रीतुरंत ही उठरवडीहो)
याकोई औरवात इसी प्रकार कीहो जिससे चीये फिसलक
रनिकालजावे तो उसकारणकोरोकें ।
कभी पुरुष भी वाम होताहैजैसे कि वीर्यचोवि
गजाने सेहोतो पुरुष का उपाय करनाचाहियै-औरवीर्य्य
को टीककरें-
जावेगा।
और कभी सेसा होता हैकि मनुष्य के जन्म में महो
गहोतो उसका उपाय नहीं होसकता।
अब इस बात काजानना कि स्त्रीवामहै यापुरुष
इस प्रकार से होसकताहै कि दोनों के वीर्य अलगरलें-और
उन्हें गरम पानी में डालेंजो अपर तैरता रहेजान किन्वही :
वामहै।
जो नीषकि गर्भरहने के लिये लाभदायक हैं-
यह हाथी दांत काबुरादा यासादेचार माशे खिलावें या
पनौरलगावें।
170
दूसरापाटन
बहुधागगिरनेकेविषयों
जोइसका कारण चोढ़,याक्रोध,यादव आदिया
उली याभूक या कोई रोग होतो उसकारण को रोकें-चामा
होने के कारण और इसके स्वाहैं-इस लिये जयरके पास में
देखना चाहिये ॥ ४
बीसरापा
जन्मेकग्निताहोनेकेवियेमें
इसका उपाय रंडी और गरम हवा और समय
अनुसार करना चाहियै- और जो स्त्री कठिनता सेजना
सनीली
vangal
३
२२-टान
के
कर- जसे भारवें महीने मेध पिलाया करें जितना उसेपन।
सके- औरजब वहजनने को होतो उसे गरमजगहमें लेजायें।
और गरम पानी बदन परधारें और भावजन में विटावें-और
तेल मलें औरट लावें- औरटेंडे पानी और ठंडीवस्तुओं और
खटाई सेवचें- और स्त्री कोचाहिये कि अपनेदमकोरोके
और पवि पर ज़ोर करें और कँथे और दाई रोगन वादाम याग
लसीका तेल- और गलसीकालाव मिलाके गुनगुनाकर
केरहमके मुहपर बहुत सा सलें-इससे वचचा सुगमता से
उत्पन्न होता है।
છેai
यह औषधेइस रोग को अति लाभदायक है।
म्बक पत्थर काकडाकडा वायें हाथ में आधे और भूगेकी
जड़दाहिनी रान पर बांधे-औरदार चीनी खिला--और जोन
दिवेदस्तस्या हींग भी मिलालेतो तुरंत लाभ होगा- परंतु,
गरमीनहो और अमलतास के छिलकेडेद तोलाकुचलक
ओटावें और शर्चत बनफामा याचनों का पानी मिलाकेपि
लावें-इसमें तुरंत ही बच्चा हो सकता है और मैशीमामी,
निकल आतीह-और गर्भवती स्त्रीको सुगंधिच सुंचाना
चाहियै-और जानने के समय तो कभी नहीं सुंघावें ।।
चौथापाठ
सोलारा-भसिमा
मशीमाकेरुकने और पेटमेंवच्चामरजाने
के विषय में।
२५७
..
पेट में वचचा मरजाने का लक्षण यह है कि फि
रना उसका बंद होजाता है-और स्त्री के हाथ पांवटंडेहोजा
तेहैं-औरहांपने लगती है-और सांसपेट में नहीं समाती-
इसमें तुरंत हीवचचेया मशीमाको निकलिं-चाहिये किया
हाड़ी पोरीना-हंसराज अवहल-प्रत्येक सादे गा दशमा
तरस और पोदीना प्रत्येक सातमाशे ओटाके और
तीन तोले मिश्री मिलाके पिलावें. और नक चिकनी
या पिसी हुई कलोंनी यातमाकू की नास सुंघाके छींक
लिवावें और नव छीक आने लेगे तो मुंह और नाक :
बंद करानें- किज़ोर छींकका अन्दर को पड़े औरवच्चा
मराहुना निकल पड़े और सायकी केंचली और कबूत
रकी जीत जलाके रहम में धूनीदें तो तुरंत लाभहोता है-
और जो इनसे कुछलाभनहोतोवचचे को काटके निशालें।
पाँचवापार
जोरुधिरजननेके पीछे निकलताहैसके
आहे. 2011-M
११
रुकरहनके विषय में
इसका उपायही है जो हैन के बंद होने का
कुछ स्त्रियों कोननने के पीछे पीडाहोतीहै उसकी औष
यह अलसी के वीज मोटाके रहमको भपारादें.
और गधी का दूध गुनगुना करके सूत्र की जगह को घोवें
और गधे या रिक्चचर का सुम जलाकर धूनी लें- और
२५९
सातर का पानी पिलावें- और खुब्बाज़ी ओंटाके पिलावें-नौ
र रहम में भी यहुचावें- और जो कोई दवा लाभदायक न
होतो पोस्त को पानी में भिगोकर उसका पानी थोडासा
पिलावें॥ नाम
कभी गर्भ गिराना पड़ताहै- यह अत्यंत महा
निषेधकाम है- और जो अत्यंत आवश्यकता होतोउसकारण
म यह है कि कागज की वत्ती वनाके रहम के मुंह में रकानें
और जो उसको कतरान में माथवा इन्द्रायन के पानी में
या उसके जुशंदे में भिगोलें तो अधिक पुट हो जावेगा-
गौर हींगदो माशे सूखा हुभा सुदाव दश माशे- मुरमुक्की
तीन माशे कूट छान के खिलाके और अपर से अपहल,
ओटाचे पिलायें-संध्या और सबेरे यह सब सक खुराक
और भोजन के बदले चनों का पानी दें- और तिरियाक गर्वी
भी लाभदायक है - और जो नौषध मरे हुऐबच्चे औरम
शीरमा को येर से निकालती है वह पेट के गिरने में भी काम
जाती हैं। मसाय
गर्भ गिराने के समय पहिले गरम स्थान में बैठक
ररोगन वेद इंजोरमलें और चिकनाई पिला- औरजव गिरजा
वितौ गूगल और राई जलाके रहम को धूनीदें कि रुधिरगादान
होने पावे और निकलतारहै।
नव चाहे कि गर्भ नरहने पावे तो दयाय उसका
यह है कि रिपय करने के पीछे सात वार या नौ वार करें
और वीर्य निकलने के पीछे तुरंत ही जन खडी हो और
लें- और पुरुष विपय के समय लिंग पर तिली
तेल मलाकरे
उसकी चिकनाई से वीर्य फिस
२५२
ल जावेगा- और काली मिर्च विषय करने पीछे मूबके
विद्र में रकवें- और चूहे की मेंगनी पीस के गहीवनाके
હાથી છેક ની
रकवें॥
.
में 20-11-3-3
छटोपाठ
रिजा के विषय में 185
यह वह रोग है कि जिसमें सवलतण गर्भ
रहने के से पाये जाते हैं- परंतु वह गर्भ नहीं है क्योकि
इस रोग में और गर्भवती होने में यह अंतर है किवच्चेके
हिलने जुलने के जो समय हैं उनमें क्चचा हिलता नहींहै और
लराण जो गर्भ केहैं वह नहीं पायेजाते।
और ऐसाही जलघर में और इस रोग में जानने
वालों को अंतर मालूम होजाता है गर्थात जैसा कडापनइम
रोगमे होताहे वह जलंधर में नहीं होता।
कारणइसका रहम की सूजन होतो उसकाउया
य आगे लिखाजावेगा।
और जो किसी मवाद के गिरने या वायकेउत्पच
झेने से हो तो उसका उपाय पहिले पाट में लिव च
और जो केवल स्वीके वीर्य से और ग्हमसेको
ईवस्तु उत्पन्न होगई होतो गर्भको गिरादें।
.
सातवापार
हैजकीभधिकता वियों
ईस-पक्ष
न३२ जोरुधिरको मधिकता से होतो फस्द से उसे
कम करें छातियों को पही से कसके नाध-और उनके
नीचेमिछने लगावें-भौर फस्द के पीछे कुर्सकहरुबारुधिर
प्रवर करने के लिये खिलावें- और शाफा मुमसिके रहम ।
में करें।
और जोरुधिर पितों की अधिकता से पतला
और तेज़ होगया होतो पित्त के लक्षण पाये जायगे-इसमें
पित्त को निकालें औरवही अपर वाले कुर्स औरशाफा भोर
विंस्न पेडूपर लगावें॥
नोरुधिर में तरीक्दजानै तोकफकेलक्षणपाप
जावेगे-इसमेंतरी को सुलावें और निकालें। जया
जोसोदा के मिलने से रुधिर में लेजी आगईहो
तो रुधिरकाला यानीला याहाहोगा-उसमें सौदाकोफस्द
और जुल्लाव से निकालें।
औरजोइसका कारण रहमकीक्वासीर याघाव
होतो उसका पाय धागेभायेगा।
औरजो जनने की कठिनता से रहमनी सरोकार
गई होतो- उसका उपाय आठवें गौरनवें पाट में हिरवा
गयाहै।
औरजो कचेची फूटने में वह रोग होतो :
२६१
शराव में विसावें भीरकबज़ करने वाली भीषधे जैसे
माजू और सुनार और गुलाब के फूल औराके आगेमेधात
और उस स्थानको चिकनारक-और अंगूर की लकही)
और पत्तों की राख कपडे यर रखके गद्दी वाधे और जहर
मुहराम में घिसकर पिलावें- औरजो उपाय धावकाई
वही मरहम लगावें ॥
आस्वापार
रहमकेषांवके विषय में
3२९-x
लाण उसका यह है कि पीडाक्नी रहेगी-
नर पीप या रुधिर अकेले यादोंनों मिले हरे निकलेंगे-
जिबतक घाबमें पीयन पड़े और कोई हानि नहोतो फस्द
सोलें- और भोजन ठीक दें और कुर्सकहरुवा खिलावे
और कल करने वाले हकने और गद्दी काममें लावें-और
नवभाव में पीय पड़े या सूजन पकके फूटे तो रोगन गुल
और शक्कर और रोगन वनफशा पानी में घोलके रहममें।
हकलाकरें- नीरजव मवार साफ होजाय तो मरहम वास
लीकून रोगल गुल में मिलाकर रहम में हुकना करेंकिंध
वगच्छा होमाय ।।
और नो रहम की गर्दन में घावहोतो इनही
औषधों की गद्दी स्कवें- कुछ हुकने की आवश्यकतानही
है और अकेला शहद या मोटा हुादूधमई में भिगोके
चार में रक और रहम से मवाद निकालना गति लाग
2
२६२
दायक है।।
और जब पीडा अधिक होतो- अफ़ीम औरकेसी
रस्त्री के दूध में घोलके उसमें रुई.भिगोके रहम के भीत
र रकवें॥
नवापार
रहमकेफरजानेके विषयमें.
-Ren
इसमें विषय के समय पीडा अधिक होगी-औ
र लिंगरुधिर में भराहना निकलेगा-लो मरहम पैरखाने
की जगह के लिये लिखे हैं वही लगावें- और मरहम
वामलीकून और रोग़न वनफशा लगाना अति लाभदायक
है-कभी पैखाने और पैशाव के स्थान के बीच में जो पर्दा
वह जनने की कस्निता आदि से फटजाता है - इसमेंन
लीका गूदा और सफेद मोम और बकरी के गुरदे कीची
लेकर बहुत सा संग निराहत मिलाके मरहम करावें और
उसको गद्दी पर लगाकर इस प्रकार से बांधे शिधाव कीज
राइजमजावे- और हानि कारक लस्तुओं से बचें।
दसवापादर
05-14
रहमकीस्कुनलीकेविषयमें
यह रोग पित्त वारी बलगम या सौदा यावी
२६३
में तेजी आजाने से होता है- लक्षण इसका यहहै कि हैज
कारुविर पीलाया सफेद याकाला होगा- पहिले मवादको
निकालें- फिर पोदीना,अनार के छिलके - और दुली हुईम
सूर कट छान के मुसल्लस या शरीव या सिरके में घोलके
रुई उसमें भिगोके अन्दर रक-- और रोगन गुल औररोगन
नफश मलें- और जोसूत्र के स्थान पर नुजली होतो उसका
भीयही उपायहै।।
ग्यारहवापार
अभ्यामें लिख चुके हैं।
रहमकीववासीरकेविषयमें
इसका उपाय भीचही है जो बवासीर कासनहवें
बारहवायात २२
रहमकीसियोंके विषयमें
२-२५
यहरुधिरके विगाड़ या पित्त से होता है-फसियों
छूने में भाती है और खुजली होती है-फस्द से मवाद कोनिका
ल गौर सिकंजवीन फ्लिावे और सफेढे कामरहम लगावें
और जोरहम की गर्दन की में फुसिया हो- औरजो भीतरको
होती हुकनाकरें।
मिजान की लंड और गर्मी के अनुसार सुखाने का उपापकरें।
तेरहवापाठ९३
ज
रहमकेमस्सोंके विषयमें
साहारा
यहभी छूने से मालूम होते हैं फ़सोले- औरसे।
दाका जुल्लाच दें- और वाकूना नाखूना और मेथी और
अलसी के बीज ओंटाके भाजन करें और पेशावकरलेकेपी
छेउसीसे चोदें।
चौदहवापार
१. रहमकेलासूरक विषयमें
जवकाव चालीस दिनकाहोजाताहैतो उसेना
सुर कइतेहैं- लसण उसला यह है कि पीलापानी नहाकरे
और उपाय उसका वही जो आठवें पातमें लिरवागयाहै।
पंद्रहवासात १५
रहमसे पानीलड़नेके विषय
इसमें फेदभीर जुल्लाब से मवाद को निकाले और
न
व
सौल्हवापाट १९
रहस सेवीर्यबहनेकेवियों
1061-अनारहर
इसमें पानी वहने में यह अंतर हैकि यानी में
हुगंधि अधिक होगी- और वीर्य में गादायन और सनेरी
अधिक होगी इसका उपाय वही है- जो पुरुषों के वीर्यव
हनेकाहै।
सत्रहवा पाट९७
हैजक्दहोनाने के विषय में
जन-MA
जोरुधिर की कमी से होनो शरीर दुवला होगा.
गौररुधिर की न्यूनताके लक्षण पाये जायेंगे-पुष्टभोजन खि
लाके रुविरवदाने का उपाय करें।
हराया
जोरजो उसड पहुंचने से या किसी गाटे मवाइकेमि
लने से रुधिरभी गाटाहोगया होतो पहिले उनके कारण पाये
जावेंगे-औरगंडके लक्षण होंगे- उसगादे मवाद को निकालें
औरवह जोष जिनसे रुधिर पतला हो चाहे पिलावें या
औरजो रहम की रंगों के मुंह बंद होंगये होतो
देखना चाहिये कि कारण उनका गर्मी है या दंड यारनुश
की-फिरवैसा उपाय करें-जो कि पहिले पीट में लिखा
मपारा॥
गया है।
जोरहम का घाव भरने से रुधिर रुक रहा होतो
सका उपाय नहीं हो सकता-परंतु अधिक हानि सेवचनेके
लियेकमीकमी फस्द खोला करें- और मिहनत अधिकच
रे-औरभोजन कमवावें।
औरजोरतकके कारण सेहोतो उसकाउयाय
आगे आता है।
और जो अधिक मुटापेसे रुधिर निकलनेकेरने
वंदहोगये होतोदुबला करने का उपायकरें।
औरजो रहम का मुंह चिरजाने सेहोतो उपाय
सकावीसवें पाठ में जावेगा।
अवारहुवापाटश्य
रतकके विषय में।
यह वह रोग है कि भग के मुंह पर या उस
के और रहम के मुह के बीच में या रहम के मुंह पर कोईव
सुचढ़ी हुई उत्पन्न हो-पहिले में लिंग अंदर नजासत
और दूसरे में पूरा जावेगा- और तीसरे में जामकेगा-परंतु
जिका रुधिर निकलनेनपावेगा-चाहिये कि इसकी कि
सीसेकाटडानें।
२६०
उन्नीसवापार १९
रहमके उमरनेकेविषयमें
ને જલ ১A
इसका लक्षण यहहैकि पेड़ और कमर औरपै
खाने के स्थान पर अधिक पीडा मालूम होगी- औरकुज़ाज़
भौर राशे के रोग उत्पन्न होंगे-औरभीतर कोई वस्तु नरम
पाईजावेगी-आतों कोहराने से और मसाने को भूत्रलाने
वाली औषधों से साफकरें- चमेली का तेल या रोगुनगुल
लेकर उसमें थोडासाकेसरका तेल और अरगजा मिला।
और गुनगुना करके रहम में टपकावें- और अपर मलें
और दाई सेकहदें किस्त्रीको चित किटाकर दोनों राने
उठावें-इस प्रकार से कि आपसमें मिलनेनपाचे अलग
लग रहें - और भेडके नरम वालजो स्वालके पासवालोंकी
जड़ में होते हैं लेकर उस शराब में जिसमें कि कक्ज़ करने
जाली औषधे. जोंटाईगईहों भिगोके अकाकिया और सुक
गौर रामक कूट छान के उसमें उन वालों को लोड़े और
पोरलीसी क्नाके रहम को उससे उठाकर भीतर करें-ओ
रसस पोरली को उसी जगह रहने दें और दूसरी गद्दी सेमी
गको भरहें और कसके यसरी वाघे और पेडपर उसके आस
पास काबिज़ औषधों का लेपकरें और तीन दिन तक इसी
मकार से रहै- और हानि कारक वस्तुओं और हिलने मुल
ने से बचें- तीसरे दिन पट्टी खोलके उस औषधिको नि
कालें और नई दवा रख-और जब तक भली भांति
२६९
आराम नहीं चलने फिरने में पट्टी बाँधेरहें और क्रावरसु
गधिसंघावें ॥
वीसवापाट२०
जाताहै।
रहसकेमुकपड़नेकेविषयो
મેલાં-રમે
यह दाईको हाथ लगाने से मालूम होसकन
है और इसमें वियय के समय पीडा होती है- और कभी
कभी पैचिश भी होती है- और सूत्र और पैरखाना बंद
गोरुधिर की अधिकता से 0 तन गई क्षे
तो जिधर को मुकाओ हो उसी ओर फ़द साफ़िन रखो
+ और जो ठंड पहचने सेहोतो तर आवज़न मेवि
टावें- और रोगन बाजूने में बतख की चर्बी पिपलाकरके
मलें॥ २
और जो कफ़ गिरने सेहो तो अयारिजें रिखका
वो मवाद को निकालें।
an और जो कारण दूर करने के पीछे भी यह रोग
नाविनी उंगली में मोम रोगन लगाके दाई सीधा
करदें।
राना
इक्कीसवापाठ २९
रहम कीसूजनके विषय में
वको उपाय करें।
घरमार-मा
जो गरस से होतो लक्षण उसका यहहै कि रास्मत
होगी औरनाडी और सामनन्दी जल्दी चलेंगी। औरमेदेशी
भेजेमे विगाह होगा-ओरजो आगेकोरहममें सूजन होतो-
पिडमें योडाहोगी-और जो पीछे होतो कमर की और और
जो दोनोंजगह होतो दोनो कोरब में पीडा होगी इसका३
पाय नहीं है जो मसानेकी सूजनकाहै।
और जव सूजन पकजावे औरफूले तो रहमकेघा
और जो कफकी सूजन होतो पेड़ के आसपासयी,
डा होगी और वोकभी होगा-उलटी और मेसाने की टंडीसू
जनका उपाय करें।
औरजो सौदा सेहोतो कडापन होगा औररह
म किसी ओरमुका होगा और पीडाकम और वोग अधिक
होगा- फरद और जुल्लार से सौदा को निकालें- और सरह
म और चरबी और रोशनों से चाहे पिचकारी लें या गहीरखें।
या लेप लगावे - और सोये और खैरु को मोटाके रान
दिनमे दो वार आवजन करें।
२७०
16
वाईसवापाट२२
रहमकेदुबैले केविषयमें
जब सूजन पक्जावै औरन फूटे उसकोदुवैला
कहते हैं।
जो यह रङ्म के मुहमें होतो छेवा देकर पीयको
निकाल डालें।
जो रहम के भीतर तह में होतो मूत्र लान वाली
औपचे पिलावें- और नरम करने वाली औषधों का लेपकरे
कि आपसे फूटजावें- और जो फूटने में देर होतो-इंजीर
रराई ओटाके रहम में हुकना करें और फोकै उनकाकूट
के सूजन की जगह पेडूपर लेप करें- और जव फूटे तो पीप
को साफ़ करें- और घाव कोमरें।।
तेईसवापार२३
सरतानरहम के विषय में
यह रोग बहुधा गरम सूजन के पीछे होजाताहै
इसमें कड़ापन और गरमी और तयक होगी- पीडालाती
तक होगी-और पांव पर सूजन होगी - इसका उपायनहीं
हो सकता- परंतु थामने के लिये ऐसे मरहम लगाया
करें जिन से पीडा धीमी हो-और भावज़न और दुकनाशादि
किया करें और मरहम रसूल अति लाभदायक है- औरसौ
बाके निकालने के लिये कभी कभी फरद और जुल्लान
दि. परंतु तैरी पहुंचने काध्यान बहुत रकलें ।
चौबीसवापार
해
इखूतिनाकरहमकेविषयमें पुन
इस रोग में सुगी और सूर्छा कासाहाल होता
-परंतु कफ मुंह से नहीं निकलता- और तड़पन नहीं होती
गौर मूर्छा सेसी अधिक होती हैं कि युकारने से भी कुछखें
वरनहीं होती-सृच्छी में वह उपाय करेंजोसूचिौरमृगी
काहै परंतु इसमें सुगंधि कभी न सुंघाचे-दुर्गघिसुंघानी
लाभदायक है- और गंधक और गूगल आदि जिसमें दर्ग
बिड़ो नाक के आगेजलावें- और सुगंधिरहमके भीतरमले
गौर मुश्क और अम्बर की धूनी रहम में पहुंचावें-औरजव
विषय के छूट जाने या वीर्य की अधिकता से यह रोगहोते
होसके विषयवारें।
औरजब हैज के रुधिर रुकने सेहोतो-फ़र
फियून और काली मिरचे गद्दी में भीतर रकवें- और जव
रोगी चैतन्य होतो सूर्यलानेवाली औषधे पिलावें-औरफ़
खोलें और मवाद निकालें और रहम को मुष्टकरें ।।
पच्चीसौंपाठ२५
+ગુલM
न
Aus
रहमपानीभजानेकेविषयमें arriाना- इस रोगमें ज़िक्की जलंधर की भाति पेट फूलजात भोरकभी पानी अपर वह आता है-इसमें रहम और सारे शरीर का मवाद निकालें और मूत्र लाने वाली औषधे पिलावें और वह उपाय करें जो जलधुर और पंद्रहवेंपा ठमें लिखा गया है और मुकी रहना और महनत करना लासरायक है- और कहते हैं कि सफेदकुटकीभीतरलग ना अच्छाहै। छब्बीसवापाट रहम में वायभरजानेकेवियेमें नेश्न- राम इसमें पेइ फूल जाता है और पीडा भी होती है-और जाने से तवले की मी आवाज़ निकलती है। गयारिन रिवलाके सारे शरीर का मवाद निकालें-भी र वाय नोड़ने वाली औषधों से हुकना-लेय- सेंक- वज़न आदि करें- और जो उपाय तवली जलंधर काहैव हीइसका।। जो रोग वीसवें अध्याय के नाठवें गौर नवें औरव रहवें पाद में हिरवे गये हैं वह रिचयों कोभीहोतेहैं-उनक उपाय नहीं है जो पुरुषों के लिये हैं।
तेईसवाअध्याय
पीठ औरहाथऔरपोक्करोगोंकेबि
Q4नवाट
ययो
पहिला पाट?
कुभनिकलानेकेविषयमें
इसमें पील की गुरिया अपनी जगह से भागे पीछे
रहने वायें खिसक जायें।
इस रोग के कारण पाँचहैं- एक उसपढेकी सूजन
ओ गुरियों के मास पास है।
दूसरे सरियों के नीचे गादीवायकारुकना।
तीसरे यहनि पतली तरी गुरियों की नसोंमें आने
चौथे नसोका विंचना काय
पाचवेयइकि गरियों पर चोटपड़े।
और उसे दीलाकरः॥
ए
IVB पहिली प्रकार का लक्षण यहहैकि पहिले पीठ में
पौड़ा होतीहै- और नाडी भारी होती है- और तप अधिकहीं
तीहै।
और दूसरी प्रकार कालशण यह है कि पीड़ाधि
कहोतीहै विनातपके॥a
तीसरीमें मूत्र सफेद निकलताहै-औरइससेप
हिलेतरवस्तु खाई होगी.॥ यापीy- 21
और विचाव और चीट पड़ने का लक्षणतोसव
जानतेहैं।
पहिली प्रकार में फस्द खोले और मुलायमकर
ने वाली औषधे दें- और लेप लगावें- और सूजन काउपाय
दूसरी और तीसरी प्रकार में कह उयायकरेंजो
गर्देकी वायकाहै।
और खिचाव में तशचभुजका उपायकरें।
और चोट लगने में पीटके मुहरों को ठिकाने
मे विनावे नो भीतर को घुस गये हैं अपर रखेंचे सोगियों
से यावारे लगाकर या जिन और गूगल थोड़ा सा अब
रकर मिलाके लेप करें कि सूखने में तनाव पड़े औरज
पर रिवंचे।
जो मुहरे वाहर उभर आये होतो हाथ सेमलके
भीतर अपने टिकाने परफेर दे- फिर काबिज़ भीयधोंका
लेपकरें कि फिरन उभरें।
करें।
है
-
२७५
दूसरापाट -२
पीसकी पीडाकेविषयमें
Ei361
जो कारण इसका केवलकोई विगाडे विना
मवाद के होतो ठंड लगेगी और पीडा विनायोमके होगी
औरंगरमी से आराम मिलेगा इसमें पिलाने और लगाने से
गरमी पहुंचावें॥ .
औरजो कफ उत्पन्न होने या गिरने सेहोतोकपा
उत्पन्न होने में पीडा चोगके साथ होगी और पहिलेसेक
उत्पन्न करने वाली वस्तु खाई होगी
और कफ गिरने के लक्षण इनके सिवाय-क्रोध
दोड-धूप-और मिहनत आदिहैं।
मुवादको निकाले और शार्फकरें।
और कफ गिरने में पचाने वाली चौषधोका लेफ्भी
लाभदायक है विनामदाद् निकाले हुसे।
और जो पीट मे काय कमी होतो लगा उसका,
वही है जो कफ के गिरने का है- परंतु इसमे वोझ नहो
गा या हलका होगा- और पीड़ा इधर उवर फिरेगी-इस
का उपाय भी लिख चुके हैं. क्योकि जड़ इसकी भीक
sarie औरजो विषय की अधिकता होतो विषय करना
लोड़ दे और रोगन गुल और रोगन, अरजान पीठ पर मलें
और जो इससे लाम न होतो कफका मवाद निकाल ।
और जो गुर्दे की कमजोरी हो तो लक्षण और
ज्याय उसके वही है- नो गुरुदे के रोगों में लिखे गये
जो पीठ में वडी रग है उसमें रुधिर की अधिकता
सेहो तो पीठ के सहरों में गर्दन के पास से-कमर तक वरा
बरलम्वाई में पीड़ा भोर तपक हो-इसमें फ़स्द वामली
*क और माविज़ खोलें और ठंडाई पिलावें- और ठंडी औष
विलगावें।
जो यह रोग रहम के विगाड़ से हो जैसे किंस्त्रि
यों को हैज़ आने के समय हुजाकरता है- जवकि भलीभा
नि खुलके न आवै इसमें हैज लामे बाली औषधंदें-और
सर्के निकालने का उपाय करें- और रोगन गुल पीट पर
मलें। + नपाधी
तीसरापार ३(
कोखकीपीडाके विषय में
मो-
जाश
इसके कारण और लक्षण और उपाय पीडकीपी
डामें देखें।
चौथापा
.ansinet
११ मरिया के विषयमें
यह पीडा शरीर के जोड़ों में होती है-इसमेंकभी सून
नहोतीहै और कभी नहीं होती।
जो चूतड़ों के जोड़ में पीडा हो उसे वैजलक्नीको
हते हैं- और जो कुलेसे नीचेको उतरे पावतकनी भनि
साकहलाताई।। -अन२॥
औरजो रखने के जोड़से अपरकोचदे या पावकी
। गलियों मेहोतो उसका नाम नुकस्स है-बहुधायहयावके
नाटे में होताहै। -
और जो हाथ पाँव के सवजोड़ों में होतो वनयमुफा
सब प्रकारों के कारण और उपाय एकमेंहैं-
इस वास्ते एक उपाय लिखा जाता है- और जो वस्तु
किवल एक ही प्रकार के लिये हैं वह भी बताई जाती
जो केवल गरमी उंडे या खुपकी से होतो हौले
हौले उत्पन्न होगा- और चोम और पीडान होगी- और इन
विगाड़ों के लक्षण याये जायेंगे-पीने और लगाने की
भौषधों से मिजाज को नीक करें- और तरी से यह रोगनही
-
जोरुधिर की अधिकता से होतो उस स्थान पर
लाली और नपक और तनाव होगा-जो पीडा सक ओरहोनी
दूसरी और फस्द स्वोलें- और जो दोनो ओर होतो दोनो ओर
से खोलें-जो हाथ के जोडों से होतो फस्दू हफत् अंदाम
स्वोलें- और पांवो के जोड़ों में होतो वासलीक परंतुरुधिरा
अधिक निकाल- और जो मवाद के नरम करने की
४
आवश्यकताहो तो वैसी औषधे दें- और मिजाज़ के टीक
करने के लिये वित पिलावें- और रोगके आदि औरवद्र
तीमें फ़द के पीछे उन दंडी औषधों का.लेपकरें-जोम
वाद कोइधर गिरने से रोकें और पीडी की अधिकताम
सुन करने वाली औषवें भी मिलानें- और रोग,के अंतमें
वनफ़शा और खैरआदि फिर पंचाने वाली भोपजे
से नाखूना और चाकूने के फूल.काममें लावें चाहेत.
करेंया लेप ।
औरजोपित्त के-मिलने से रुधिर विगड जावे तो
पित्तके लंसणं पाये जायेंगे-अर्थात पीडा की अधिकता
गौरजलन आदि फस्द, खोलें- और मवाद को नरसकरें
परंतु रुधिर अधिक-न निकालें-फिर मूत्र लाने वाली
नौपचे जो उंडी हों-अति लाभदायक- और वचाने वा
ली भोपों का लेप कभी नचाहियै- और इन दोनों
कारों में सिकंज वीन, नी बहुत तेज़ न हो लाभ कर
बीहै।
और जो पित्त से पीडा होतो केवल उन्ही
के लसण पाये जायेंगे - इसमें मवाद को नरम करें और
मिज़ाज को टीक करें-और उलटी अति लाभ कारक है,
और फस्दल खोलें यह रोग केवल पित्त से बहुत कम
होताहै।-यान
जो कफ़ से होतों जोड़ बोझल होंगे औ
र चण्ड के लक्षण पाये जायेंगे इसमें उलटी करावे-औ
र मुंनिश देके कईवार-जुल्लाच दें-जवे मवाद निक
चुके नौ सूत्र लाने वाली गरम औपचे पिला -
।
२७
गौर इसमें भूले से भी केवल वह ठंडी औषजी मवाद ।
को इधर गिरने से रोकें-याकेवलंपचाने वाली औषधेका
भीन लगावें ॥ बना
और जो सौदा से होतो रंग कला होगा और
पीडा कम होगी और सूजन में कड़ापन और तनाव होगा
फस्तु खोलें और जब मवाद भली भांति पंकजावै तौ सौ
दादा के जुल्लाव दें-और ऐसे मरहम लगावें जो कड़ेपनको
नरमकरें। 33
" : फ़द में नश्तरं चौड़ा लगावे गोरुधिरगादा
काला निकले तो बहुत सा निकालें-और वंदनकरें-और
मोजोलाल और साफ़ निकले तो तुरंत बंद करदें-और पहिले
मवान् को सौदा की मुंजिशों से पतला करले - फ़िर फ्रस्तु
खोलें।
जोवाय से होतो पीडा फिरैगी औरत्नाकहो
गा-इसमें गुलकंद और गुलाव और सॉफका अर्क औरशी
र्वत वजूर पिलावें और रोगन गुलमलें और क्रफको लिका
लिऔर पचाव को ठीककरें। हाल
सपल सर्व प्रकार वायु की पीड़ा की ऐसी किक
डापने और तेजी उसकी हड्डियों तक पहुंचती है-औरउ
से तोड़ती है और विडती है-इसमें रुधिर और पित्तको
तीन
जो पीड़ा मिले हुसं मवाद मेहो उसकाउपा
यभी वैसाही करें-और सुरंजान सब प्रकारों में लाभकार
स्वानेमेभीऔर लगाने में भी परंतु कफ के मेवाद को अ
तिलाभदायक है- और इसमे जीरा सोर मिलालनाचाहि
निकालें।
.
२८० - ये फिर मेदे को हानि न करेगी- और नव इसे खाने तोजो डों पर रोगन गुल मलते रहें-और इसकी खुश्की से फिरंदा निनहोगी यह औषधेइस रोग में लाभकारक-सुरंजान और मिश्री मिलाके कूल छान के साढ़ेदशमाशे डेपानी के साथ फंकावें। सूखा धनिया और वरावर शक्कर मिलाके साडेदस माशे रिवलावें॥ सफेदवशवाशपीसके वराचर शक्कर मिलाके सातमाशे फंकावें॥ अस्यगोल गरम पानी में घोलके औररोगनगुल मिलाके लेपकरें। १० मेथी के बीजों का लुभाव और सिरका मिना के लेपकरें। तुकरम गादि में सुन्न करनेवाली गोषधों और चंडीगौषधों मे जवभेजे में कोई विगाड उत्पन्न होवो भीषधि को तुरंतही छुडालें और वाचूना और स्वैर को औटाकेसि रिकोंधारें कि मवाद भेने से उतर आये ॥ १॥ अव वजउळवर्क और अरकंनिसा में भौषधि से लाभनहोतो पहिले रोगमें कूलेपर दागदें और दूसरे में दखने पर १EAR अरकुंनिसा जोरगहै- उसकी फस्द भी लाम कारकहै- वह रंग गैटीली होतीहै- चाहिये कि लोहेकी सीख भली भांति गरम करके रखने से आठ अंगुलकपर दागर्दै चौडाई में और सक दाग पांवकी छुगलिया और । 2 दूसरी उंगली पर जो उसके पास है जड़ में जयर को सला गरम करके लगावें कि सकलकीर सी पड़ जावै चोव चीनी सावधानी के साथ जोड़ों की सब प्रोडाओं को निलाभदायकहै। २-515 पांचवापाट पिंडली की रंगेबड़ी औरमोटीहोकरम ધં વાલ- रआवें॥ इसमें सौदा और कफ़ का मबार निकालें- और फरद वासलीक और जुल्लाव और उलटी के पीछे न्ही सगों की तरह खोलेंकि उनके भीतर कामवाद निकल जादै भीर जव रोग में कमी होनाव तो भली भांति नर्मी से उन्हें बाधे किमवार उलरन आवै। छदापार६ पावसूलकरहायीकेसेहोजानेके विषय में ધાdeો ફીલ इसका उपाय वही है जो ऊपर के पाट में लिखागया और जो अधिक हो जाये तो अच्छा होनही सकता ।। 2
२८२
सातवापार
5. गड़ीकी पीडाकेविषयमें
CoYECK-6
३
जोघान से होनो मरहमलगावें।
जोचोर लगी होतो-मामीमा-गिलैजर्मनी-पानीया
गुलाब में पीसकर लगावें - और तंटे पानी से घारें और पछने
भी लगा सकते हैं।
और नौजूने के दवाने से होतो भी वहीउपायहै।
और नो मवाद के गिरने सेहोतो रुधिरके मवादमें
फरर खोलें।
2-
और जो कोई और मवाद होतो उलरी करावें और
जिल्लाबदें।
और गरम पीड़ामें रोगन गुल और ठंडीमेवाने
औरफरफियून और कूटका तेलमलें।
आठवा पाठ
तलुयेकी पीड़ाके विषय में
grai-ला
इसपीडा में धरती पर पैरनहीं रक्ताजाता-ममूर
को सिरके में पकाकर लेपकरें- और नोरुधिर का मवादन
पधिक होती सबसे पहिले फन्द खोलें।
चौबीसाअध्याय ॥२४॥ तपके वर्णन में -हमान तपतीनप्रकार कीहोतीहै-हुम्मायौमी-हु म्माविल्ती हुम्मादिक्की पहिलापार हुम्मायौमी के विषयमें यह वह तप है कि इसका संबंधबह सेहोताहै और एक दिन में बहुधा जाती रहती हैं- इसके कारणबहु नहैं जैसे डारव-क्रोध-भूक-प्यास धूप- भाग - भी जन आदि- जब कोई कारण इन कारणों मेवटजाताह तो रह गर्न होजानी है और तप हो आतीहै- और रूहें- तीन है- नफ़सानी हैवानी- तवई इन तीनों में से जिस रूह के कामों में हानि हो जानों कि उसी रूह में
२८४
ཨ3ལ།
तहै। ना२२
हुम्मायौमी का लक्षण यह है किगर्मी विनान ।
लन के बराबर रहेगी- जैसे कि वहत मिहनत करने मेंही
तीहै-और सेडी तप और दिक़ के लक्षण नहोंगे-और वह
घाएक रात दिन रहके उतर जाती है जबकि दूसरी प्रकार
की तपन हो जावै- इसमें कारण को दूरकरें- जैसे जैचि
इस तप में भोजनं वंदन करें सिवाय उसतप
के जो तस्वमे सेहो और उलटी भीन करावें- और नफ़रद
आदि परंतु जो तप सुहे से हो और कारण उसका मवादकी
अधिकता हो और जव मेदे में पचावन हो और गरसनी
जिले में फ़स्द आदि कर सकतेहै- औरइसनईसाफी तप
इसतह साफ़ी और मुंहे की तप में शरीरकाम
लना और महात करना और गरम पानी से न्हाना मति
लाभदायक है।
इसतहसीफी वह तप है जिसमें शरीर के
बंद हो जाते हैं- और रूगल मैन्ली और मोटी होना
जैसे कि ठण्ड की अधिकता से खाल सुकड़ना
भोर सुद्दे की वहहै कि पतली रगों में गादाम
वाद फंसनावें।
Kyकश्फी तप उसको कहते है कि महनतान्हान
छोड़ देने से गोरुके- और उससे रह गर्म हो जाव-चाहै
सहापड़ेयानपड़े।
-
२८५
और ज़होरीतंप वह हैकि पेचिश की अधिकता
आदि से नपहोजावै॥
दूसरापादन
हुम्माखिल्तीके विषयों
शरीर में चार मवाद है- कफ-रुधिर-पित्त
सौदा- इसलिये इस तप में भी चार प्रकारें लिखीजा
.
पहिली प्रकार रुधिर की तय एक तो यहहैवि
रुधिर केवल गरम होकर तप उत्पन्न करे और सड़े नहींदू
सरे यह कि सड़ जावे-पहिले तप को सूना खस और दूसरी
को मुतविका कहते हैं- पहिली के लक्षण यहहैं किसीप
र की अधिकता होगी- और शरीर स्कसा गरम रहेगा नौ
र पसीना नावैगा- और मुतविका में मूत्र और पैरखाने में
इगंधि होगी और जितने लदाण रुधिर के गौटने के हैं-
इसमें सोनाखस से अधिक होंगे- जैसेहोसके और सुग
मता से रुधिर को निकालें- आवश्यकता के अनुसार रुधि
रिकी गरमी को बुगावें- और रुधिर को साफ करें- पर
तु बहुतं,ठंडाई देना इसमें बुरा है कि इस से कफ का
सरसाम होजाता है - सोनारस में जितना अधिकार
पिर निकालें अच्छा है- और मुतविका में आवश्यकता
मिलसार॥
जब रुधिर पतला होजावेतौ शर्वत उन्नाव
२६
पिलाके उसे गादा करें- और जो गांदा हो तो सिरके की
सिकंजवीन देने से पतलाहोजावेगा और ऐसी औषधेदें-
जो मवाद को नरम करें- और जव मवाद वुहान के पीछे
रगों में रहनावै नौ हगे कासनी का मके ७०माशे फाड़के
और साफ करके ५२॥माशे सिकंजवीन मिलाके में जो
खांसी का लगाव हो तो वही वस्तु की नरें- बीदाने
और अस्पगोल का लुआन पिलावें- और शर्वत वनफ़शा
चटाचे उमेरजो खटाई के बदले कोईऔर रोसी जौपधिदे-
कि खामी को भी लाभदायक हो और तप को भी नौ वह
त अच्छा है-इस तप में उन्नाव भिगोके याऔटाके पार
नी उसका कई दिन तक पिलाना अच्छाहै-विशेषकरके
नव कि रुधिर को गाढ़ा करना हो- और केवल अस्पगोल
रुधिर के साफ़ करने को अच्छा है- और आलूबुखारे का
पानी भी लाभदायक है - और खांसी को भी हानि नहीं
करना।
४.दूसरी प्रकार पितों की तय है-चाहेअकेली हो
या कोई और मवाद मिलाहो लसण पिन गादिका सिरेपर
इस पुस्तक के लिया गयाहै-यहांइतना जानना चाहियैक्ति
जो पित्त का मवाद रगों के भीतर माया होतो तप वरावर
रहेगी- और एक दिन बीच कुरके अधिक होगी इसका नाम
गचे लाजिमहै।
Har 2सी संगन
और जोयह मवाद हिल गौर मेदे के पाराकी
रगों में सड़जात्रै तो रोगीकी अधिकता होगी-इसकानाम
तपे मुहरिका 2017
और जो मवाद पिनों कारगोसे बाहर कहीस
तो गिव्य दायरकहते हैं ।। 2 । फिर यह मवादजो निरे पित्तों के विना किसीऔर मवाद के नौ गिब्वे खालिसकहेंगे। और जो कफ मिला हो और ऐसा मिले कि दो नों मिलकर एक हो जावें तौ गिब्वै गैरेखालिस नाम: होगा। औरजो कफ और पिनका भली भांति मेलनहीं। हो- और अलग अलग हों तो शनुरुल गिल क निभानwar गिव्वे स्वालिस में तप एक दिन आयेगी औरर कदिननहीं-परंतु जो से गिल्वेइकट्ठा हों इस प्रकार मेकि स्कर दिन भाले और दूसरी दूसरे दिन आवै तौ वारी सेजा लामालूमन होगा। ૯ નીશ એ દલ और गैर खालिस में एक दिन अधिकता होगी - और दूसरे दिन कुछ थोड़ा सा अन्तर होजा મીલે शतुरुल गिव में पित्त और कफ रगों मे बाहर मड़े होतो लक्षण यह है कि एक दिन केवल कफ के लक्ष पाये जावेंगे- और दूसरे दिन दोनों के -क्योंकि कफ की तप रोज़ वारी करती है- और पित्त की एक दिन वीच करके तो जिस दिन पिन की वारी न होगी उस दिन केवल का के लक्षण पाये जावेंगे- भऔर पित की वारी के साथ जो दोनों मवाद रगों के भीतर होतो दोनों के लसण बराबर रहेंगे परंतु एक दिन वीचं करके अधिकभनर वेगा। दोनों के
२८०
होजायगा नविन
2 और जो पित्त रगों के भीतर हो और कफवाहर।
होतो पित्त की तप वरावरहैगी- और कफ की भी अपने
समय पर रोज़ आवेगी और एक दिन वीच करके म
चिकता होगी - इन तीनों का नाम शतुरुल शिवगी
खालिस है।
२
और जो पित्त रंगों से बाहरहो औरकफ़भीतर
तो कफ़ की तप चराचर रहेगी- और पित्तकी एक दिनवी)
चंकरके आवेगी जिस दिन पित की तपकी चारीहोगी उसदि
नरोगों की बहुत अधिकता होगी-इसको शतुरुल गिब्वेरना
लिसकहते हैं।
गिब्वे स्वालिसंजो वरावररहेसात दिन से अधि
कऔर गिब्वे रगलिसदायराचौदह दिन से अधिकनहीं रहती
परंतु उपाय में भूलनहो MAnd
पितको ठंडाई भौर तरी पहुंचाना चाहिये औ
रनोकवन होतो मवाद निकालें- और जब मबाद पोंके
भीतर हो तो बहुत ठंडाई न दें. परंतु मवाद के पकाने
का ध्यान रुकवें और तपे मुहरका में उड़ाई भधिक
चाहियै- जिससे दिक न होने पावे। परंतु वह तपे मुहर
का जिसमें मवाद गरमी से अधिक हो उसमें पहले,
मवाद वी पकाना और निकालना चाहिये और ठंडाई
नाध्यान रकवें । और मवाद निकालने के पीछे उंडाई
अधिक करें और इस पित्त की गिव में जो रुधिरकी
: |अधिकता हो- और सूर्य लाल और गादा निकले नौ
फ़द खोल सकते हैं- बहुत करके नंब कि मवादरगों
के भएर हो परंतु जैसा कि रुविर की तप में वेधलंक फ़
स्द खोल सकते हैं- चैसा पित्त की तप में नहीं कर
सकते- और जो वोलें भी तो रुधिर बहुत थोडा निकाले
नौर वह भी पकाने के पीछे भौर जब केवल पित हों और
रुचिर की अधिकता विल कुल न हों तो कभी फ़दर
निलोले ।।
नयै दाइरी में जो हो सके तो बारी के दिन
भोजन न दें- और नव नाडा और कंपकी आने को हो
तो सिकंजबीन गरम पानी के साथ पिळावें कि इससे
उलटी होजावै- और निकल जाबैं- और जो उलटी नमी-
होतो उनकाई ही से पचजावे- और जाड़ा ठहर जावे-और
जव तप उतरने पर होतो पोशोया करें- और पांव गरम पानी
में रकवें और मलेंकि रही सहीगर्मी सिरसे उतर जावै और
उस समय सिकंजवीन भी पिलाना अच्छाहै- जो मतली
हो और कुछ हानि नहोतो उलटी करावें- और जो भानों में
गडवड़ होतो जुल्लाब दें- और नो मूत्र खलके नहीं आताही
नो मूत्रलाने वाली औषधे पिलावें. और जो शरीर पर वरी
पाई जाने और पसीना खुलके न आवै तो यसीना लानेका
उपाय करें- और जो इनमें से कोई बात नहोतो जुल्लाव
और गरम तयो में तुरंजबीन नरें- परंतु भालूऔर
इमली के साथ और जब तक मैंवों के पानी से काम निका
लि- कोई और पुष्ट वस्तु दस्त लाने वाली नदें सिवायम
लिय्यन मुवारिक के ।
नाअच्छाहै।
यकहै।
और जब पित्त भकेले न हो तो विना
सुज़िश दिये जुल्लाव और सुलय्यन न दें- परंतु
माद' का औस्ना कम करने के लिये देसकतेहैं।
जितना का अधिक हो टंडाई कमदे-परंतुरखा
री क्लगम में ठंडाई देना चाहिये।
तप में जब तक इन संबचातों को भलीमा
निन जान लें-उपायन करें और कुर्सगुल और सिकंज
चीन गुलकंद के साथ मिली हुई तप में अति लाभदा
तपे मुहरिका में बहुत पसीना और
नीद और भूक का हौकी और छौंको की अधिकता
और मूर्छा आदि होती है- और नकसीर फूटती है-
और दम रुकता है-इन का उपाय भी तप के अनु
(सार करें। ICC UZH-राम
पिनों के तप की एक प्रकार ऐसी है-जिस
मे वरावर तप रहती है- और एक दिन वीच करके भ
धिक हो जाती है- और पित्तों के लक्षण पाये जाते हैं-औ
र भीतर गरमी और नाहर ठएड होती है- उपाय इस
का वह है- जो गैर खालिसा का है- और सिवनवीन
और गलंकन्द लाभ दायक है-इस तप को लैप्रिया
कहते हैं।
इसी तप की एक मकार और है-इसमें वारी
के समय मूच्छी आजाती है- उसकी हम्मागशिया कहत
है इसका उपाय वही है- जो उस हुम्मायौमी काहै-जी
कि मूळ सी हो जाती है-और वारीके समय रोटी नीबू के
| गर्क में भिगोकर थोडी सी खिलावें।
तीसरी प्रकार कफकी तय है-जो इसमें का
का मवाद रगों के भीतर सड़ जावै तो उसको लसका
यह मवादजो खारी कफ हो और दिल और
मदे के पास स्मों के अन्दर सडजावे तो मुहारका कहलावे
गइसमें और पित्त की मुहरिका में अंतर उनके लक्षणों से
मालूम होजावेगा।
और जो कफ़ स्गों के बाहर सडेती नाईवी और
मुंआजिवा नाम होगा परंतु लसका वरावर रहतीहै विनाना
डेगौर कभी कभी थोड़ी देर के लिये कुछ कभी कभी भी
होजाती है।
और नाइवा मति दिन में एकदोवारउतरजा
तीहै।
कफ की तप में कफ के लक्षणं पाये जा
वेगे- परंतु खारी कफ में वह लक्षण नहीं होते-क्योंकिड
समें गर्मी अधिक होती है इसपर भी वारी काकी गर्मीपि
लोकी गर्माको नहीं पहुंच सकती।
रवारीकफ़का लक्षण यह है कि रोंगटे शरीरपरक
इटों और रंजनौर कपकपी घोडीहो।
न और जेजाजी कफ़ मेंकपकपी अधिक होती है और
स्कफ़में रेडक्हुतं मालूम होती है. मीठे मे कम नौर
चढवा कई वारियों तक रोगटे खड़े होना+और ठंडऔर
कपकपी कुछ नहीं होती. सात दिन नकाशहद की सिका
नवीन और शहद का पानी जिसमें थोड़ा सा जूफागोराहमा
२९
और भाशनौ जिसमें मोड़ी सौफ़ और चने -
रहें- और सिकंज चीन और गुलकन्द ।
च्छाहै इसके पीछे सिकंजवीन और गरम पानी से
वें-वहत करके उस समय जब कि वारी आलेकोहो औरन
हुत सी पिलावें- और जितनी उलटी सुगमता से आवेगच्छा
है-और कभी कभी गुलकंद के साथ अनीसून दें-औरपोदी
नाऔर मस्तगी वरावरचवाया करें-जव मवादमलीभांति
पकावे तौ जुल्लावरें।
जो कवज हो तो रात को दवाय तुर बुद्ध
जितनी उचित हो रिक्लाया करें- और सेवेरे गुलकन्द -
माशे खिलाके ऊपर से शहर की सिकंज चीन पिलाया
करें- जव कि कवज़ दूर करना हो। और जो सूत्र
गादा और रंगीन हो तो फस्त खोल सकते हैं- भी
र जव भेजा कम ज़ोर हो तो सिकंजवीन न दें- और
मवाद निकलने के पीछे कुरस गुल अति लाभदायव
है। 883
जो कफ़ की तप पुरानी हो और कपकपी
अधिक भाती हो- और शरीर देर में गरम होतो अजवायन
कूट छान के शहद में मिलाके रामाशे खिलावें-और गारी
कूनामाशे शहद ॥माशे में मिलाके खिलाना भी ऐसा
भौर लमका में पकाने वाली और पतली
करने वाली गोप देने में इतनी जलदी न करना चाहिये
जैसी कि नायवा में करसकते हैं- कहीं ऐसान होकि
मवाद पिघल के सिर में चदनाव- और सर सामहोजावे-
छानाहा
परहोचुका।
नामनही है।
और सिरकी पीड़ा और भेजे की कमजोरी में तो ऐसा कभीन
चाहियै ५५40210602ty-ye
सकप्रकार कफ की तप की ऐसीहै- जिसमें भी
लंड औरवाहर गर्मी होती है-उसको नया लुस बोलते
हैं और एक और प्रकार है जिसमें भीतर गर्मी औरवाहरलैंड
होतीहै-उसकानाम लैरियाहै-उसका वर्णन और उपाय
कफ की तपकी एक प्रकार ऐसी है जिससेंग
रमी और लंड इकट्टा भीतर और बाहरहोती है-और एवम
कार में भीतर उंड होती है-और वाहर असलीहालत- और
कपकपी कई वार विना गर्मी के आवे-इन दोनों का कुछ।
एक प्रकार दिन को जाती है- और रा
न को उतर जाती है- उस को निहारी कहते हैं- और
एक प्रकार रात को आती है- और दिन को उतर जाती।
है- उसको लैली कहते हैं-इन सब में मवाद को पता
र चौथी प्रकार सौदाकी नपहै-इसका मवादभीजी
रंगों के भीतर होतो रुवालाज़िम कहते हैं- और लदाण उसका
यह हैकि तपवरावर रहेगी- और दो दिन वीच करके अधि
जो मवाद रगों के बाहर सड़जावै उसको रुवा
दायककहते हैं-भौर यह दो दिन पीछे दौरा करती है-
और इस तप के आने का दिन इतर जाने के दिन समेत
चौथा दिन होताहै-इस लिये इसकानाम रुवा रक्खा गया
लाकरें।
कताहोगी।-
२२४
है इसीप्रकार से पांचवें दिन वाली तप औरछरे दिन वाली
भादि जानों-परतुं चौथे दिन वाली वहत आया करती हैय
इतयें या तो नचई सौन्दा के सड़ने से होंगी-लक्षण उनकाय
हहैकि पहिले वह वस्तु खाई होंगी जो सौदाको उत्पन्तक
और नाडीहल्की होगी-दूसरे यहकि रोरतबई सौदासे
हो-और यह बात हम पहिले लिख चुके है कि नो मवादन
लता है वह औरतवई सौदा होनाता है वो मालूम हाकि
यहत रुधिर या पित्त या कफ यासौदा से होगी और
लक्षणहर मवाद के पाये जावेंगे- परन्तु पित्तों की तप
में गरमी और तपों से अधिक होगी- और जलदी जाती
रहेगी।
तये रुवातक रहती है और कभी पाँच
छैःवारी हो जाती रहती है और फिर आने लगती है
इसमें नागके दिनवहत चारके इस रोग के चादि में
खाना पीना बन्द करदें- और उण्डा पानी और मेवे और
बाये उत्पन्न करने वाली वस्तु और गरम खुश्क और ज
लदी सड़ने वाली वस्तु से बचें- और तर औषधों और ।
भोगनों से जहां तक हो सके- मवाद को पनावे-फिर मवा
दको निकालें कईवार करके-और रुधिरकी रुवा फ़रव
खोलें-परंतु दो तीन चारियों के पीछे और २ प्रकारों में भी
फस्द स्वान्नें-परंतु मवाद के भली भांति यकजाने के पीछे-
और पिनों की तय में यूकाना अवश्य नहीं है. और
नत्र फरह से रुधिर लाल और साफ़ निकाले ती गेक-और
जो यह तप ले तक रहै नौ रोगी में जोर रहनेका त्यानम्
और कडा परहेज़ न करावें - और हर महीने के सिरे पर
.
प्रकारें हैं।
२२५
फस्द उसैलम खोलना भीर बोडासारुधिर निकालना अच्छाहै
औरवारीके दिन३घडी पहिले खाली सीगियालगाके बहुत
देतक-चूसना लाभकारक है।
मिली हुई नयों की कई प्रकार हैं-नाम उन
के अलग नहीं है-सिवाय शतुमल गिब-और गिबैंगे
रस्वालिमा के- और जिसकी इनमें से वारीका ठीक नहो
उसको सुस्वत लित कहते हैं- औरतों के मिलने की तीन
+भान
स्क यह कि स्कतप अभी उतरी नहीं कि दूसरी
चढ़े-उसको मुदाखिला कहते हैं।
दूसरी यह कि एक उतरे भौरदूसरी चढ़े उस
को मुवादिलाकहतेहैं।
तीसरी यह कि इकहा दोनपेंच-चाहेमा
यउतरे या नहीं-उसको मुशारिका और मुशाविका कहते है
उपाय इसका सोच समझ केकरें-जो अधिकहोउसकैदूर
करने की अधिक आवश्यकता जानों।
तीसरायाउ३
दिकके विषय में
यह वह तप है जिसमें बुरी गर्मी शरीर के.
बड़े बड़े स्थानों और दिल में बैठ जाती है और अच्छी
तरी पहिले जाने लगती है- और आदि मे उसको दिन
t
कहते हैं।
' और जदूसरा दर्जा होता है तो गिरपिचन्नेल
गताहै- उसको जवूल कहते हैं ।।
- और जव इससे भीवनावे औरवाल गिरनेलगे
उसको मुफ़तित कहते हैं-' उस समय उपाय कठिन होजा
ताहै।
अकेली दिक की पहिचान यहहै कि हलकीतप
वराबर रहती है- और भोजन करने के पीछेगर्मी बधिकहो
जातीहै- और नाड़ी कमजोर होती हैं परंतु खानेके पीछेनाड़ी
मनोरपाया जाताहै सूत्र में छिलकेसे निकलते हैं-इसमें
शरीर को नरी और ठंड पहुंचावें - और भोजन और मकान
और हवा ठीक करें- और ठंडी औपचे और गधेका दूध
रमग पिलावें- जोसड़ी हुई तपनहोतो इसके देने की कि
यावड़े ग्रन्यों में लिखी गई है-इसतप में जहां तक हो सके
शरीर केवड़े वहे स्थानों को पुष्ट पकवें गौर तरी पहुंचायें-
और दस्त न आने दें- और जवकमजोरीवदने लगती माग्छ
लहम पिलावें।
स्क और रोग है जो दिकसे मिलता हु
है उसको दिक शेख़त और दिक्कुल हरम कहते है..
वह यह है कि जवान सूखकर वुट्टोंकासा होजाता है और
बढेको होतो वह और भीचुरा होजाता है- विना गरमीके
और बहुधा बुट्टी को यह रोग होता है और जवानों को
कम् और वच्चों को वहुत कम-तपों में ठंडीवस्तु अधिक
खाने से दिल में बंड से विगाड़ हो जाताहे-या महनत करने
केपीले रंडा पानी पीने से या किसी और ऐसेही कारण
~
से यह रोग होता है-इसमें मिज़ाज़ को गरम और तरवस्तु
में से ठीक करें- परन्तु वहत नदें- और कभी कभी शहद
चाहें- और जब यह रोग-जगह पकड़ लेता हैतो अच्छा होना
बहुत कठिन है परन्तु उपाय से हाथ नरोकेंकि जलदी मा
रिने से बचें- और सोने का वर्क शहद में या गुलाव शर्बत
में मिलाके खिलाना और माउन्लैलहम और भड़की ज़रदीना
तिलाभकास्कहै।
मान
चौथापाठ २७
सीतला के विषय में
इस रोग में जो तप होती है उसमें वेचैनी और पीठ
में पीड़ा होती है- औरनाक खुजलाती है और आंसूकहते हैं-
और मोने में चोंक पड़ता है।
उखसरा में मोतिया से वेचनी अधिक और कमर की,
पीडाकमहोती है।
सीतला निकलने से पहिले रुधिरकमकरें-जवाने
कि फस्द खोलें और लड़कों के जोक लगावें- और नरमकर
नेवाली गोपः पिलावें- और शरबत उन्नाव वरावर पि
लायाकरें।
गौग्जवनिकल आवै तौ कभी मवाद न निकाय
रन्तु भली भोलि निकालने का उपाय को इस प्रकारने
कि शरीर को नरम कपड़े से रोके रक-- और ठण्डा
पानी स्कर चूंट देते रहें-और खूबकला विछोने पर विद्या द-और ओंटाके भयारा। पांचवापाठ CL हुम्माबबाईके विषयमें यह तप बहुत बुरीहै ववा के दिनों में होती है। ताजन एक रोगहै उसके निकलने में। जब तकर्वहन निकले सवादको निकालें-भौ रगरमीको चुमावें-और दिल भौर भेजेको पुष्ट करते रहें-औ रिजव तागन निकल आवै तो उसका उपाय करें-जैसाकि आगे लिखा जावेगा। पच्चीसवाअध्याय ॥२५॥ सूजनों औरफुन्सियों और उनरोगों
'२१९
के विषय में जो शरीरके ऊपरहों
पडिलापार
तीहै।
सूजनों आदिकेविषयमें
छोटी सूजन को फुसी कहते हैं-और सूजन
कई प्रकार की होती है और उनका नाम भीजुदाजुदा है-
जैसाकि भागे लिखाजाताहै।
फलामूनी एक सूजन गोंदी है- बहुतवड़ी
रुधिर के मवाद से उसमें पीड़ा और तपक अधिक हो
फस्द खोलें और आदि में वह ठंडी औषधे
जोमवाद को इधर गिरने से रोकें लगाये-जैसे चंदनछा
लिया-गिलेअरमनी-मामीसा- भकाकिया- गुलाबकेफ।
लकासनी आदि और बढ़ने के समय दीलाकरने वाली
औषधे मिलाले-जैसे जौका आटा-हराधनिया- खैरु-
खुब्बाज़ी गादि और अंत में दीला करने वाली औरयका
ने और पटकाने वाली नौपचें मिलाके लगावे-जैसेवाकले
कामाटा- और स्वैरु-खुवाजी- वाचूना- कनौचा आदि
गौर जव सूजन बढ़ने से रुकनाय तो अकेली परकाने
वाली भौष लगावें- जैसे वाचूना गौर नाखुना गलमी
और मेथी के बीज आदि।
और जव मवादन पचै और पकने पर भाजावें।
तो पकाने वाली औषधों का लेप करें-जैसे कनौचे औरक
ताके चीन और इंजीर आदि कि जलदी पकनावे- फिर जो आ
यफूटजावै तो अच्छाहै-नहीं तो फ़रने वाली औषधेलगा
व-जैसे कबूतर की वीट और शेक या नश्तर से चीरदे-और
फन्दके पीछे जो कबज़ होतो मतख फवाकया मुल
ययन मुबारिक पिलावें।
यहनो रीत लेप की लिखी गई सब सूजनोम
इसी प्रकार से करें-सिवाय उस सूजन वे जो कानके पीछे
और वग़ल के नीचे और रानके कोने में होबडेरस्थानोंके
मवाददूरहोनेसेहो वहाँ सेसी ठंडी भौपचेंजो मवादकोइथर
गिरने सेरोलगानानचाहिये।
सक्राकिलूस, यहवहुत चुरी सूजन है- नि
सस्थान परहोती है उसको काला करदेतीहै और विगं
देतीहै- काला होने से पहिले गहरे पछने लगावें- और
उसी जगहका रुधिर निकालें-फिर मटर का आरा सिकं
जमीन में मिलाके लगायें- जब वह जगह बिलकुल काली
होजावै॥
सिवाय काट डालने के कोई उपाय नहीहै-
सीसमय काटडालें- कि विगाड़ आगेको नवदे-और इसमें
फस्द कभीनरवोलें- जो वई काटने के योग्य नहोतो आ
सपास उसके दाग-।। -१२-२०१८
हमरा- पित्त की सूजन है-जो केवल पिन
होतो जलन और चमक अधिक होतीहै- औरफैलताहु
7"
गावला जाता है- और पीला होता है और जो पित और मावा
के मेल से होतो लाल होता है और जलन नहीं होनी- और
नमलदी फैलता है- केवल पिन में उन्हें निकाले- और र
रंडी और तर औषधंगावें-हर समय औलोमेल से।
हो तो पहिले फस्ट खोलें- और फिर पित्त को निकाले-औ
दवा उसी रीति से लगायें - जो फालगभूनी मे लिखी गई
।
“जसराय यह दाने होते हैं फैलेहरे और वह
तिलाल पीडा और जलन के साथ जैसा अंगारा होताहै-इसी
में पित्त को निकालें और जो रुधिर अधिक हो जो फरदभी
पुरवोलें- और कुछ लोग यह कहते हैं कि रुधिरइन्ना निकाले
कि मूळ मानावे और यह लेप लगावें-सिरके की तलछट
गरम ज़मीन पर डालें-जन बोलने लगेती उसे बताके कपूरनि
लाकेलगावें- और जो गिलेजर्मनी या सिर धोने की मिट्टी भी
निलालें तो अच्छाहै।
नमस्ता, सक दाना या बहन से दाने होते
हैं- जलन और खुजली उसमें बहुत होती है और अपनीन
गह से वदतो नहीं जो केवल पिन होता खाल के गपरहीटों
गा और जो रुचिर भी मिला होतो स्वाल के जपर और मामक
भीतर पैटा हुनाहोता है। कारण के अनुसार उपाय करे-
और जमरा वाला छेप लाभदायक है- और दवाय नरद
| गास पाम लगाने और घाव का उपाय सफेटेक मन्डम
सेकरें।
जावरसिया, छोटे र दाने खाल यर बार
कैसे होनाते हैं. नोक उनकी सफेद और नड लालहोताई।
३०२
-
और अलग अलग निकलते हैं-इसमें वित्त और कफ़
का मवाद निकलें - अनार के छिलके थोड़े से सिर के औ
र गुलाव में पीसकर मलें- और जो आवश्यकताहो तोफख
भीरबोलें
का नार फारसी दाना है उसके भीतर पतला
पानी भराहोताऔर जलन और खुजली अधिक होतीहै-ओ
रनव निकलताहै- जलदी खुरंड हो जाता है-निकलने मे
पहिले उसजगह लाल और मोर के रंग की लकीरें-
पड़ जाती हैं, 'फस्द खोलें और पित्त का मवाद निका
ले- और मुरदासंग गुलाच में या माजू सिरके में पीसकर
लगावें।
निफ़चात लाले पड़ने को कहते हैं-
उसके भीतर बहुधा पतला पानी भरा होता है- औरक
भी पतला रुधिर और कभी केवल गादी वाय होती है-
और कुछ नहीं होता- फस्द खोलें और रुधिर को गाढा
करें- और जब छाला वड़ा होकर फूल जावै तो सोने
की मई से फोड-जिससे पानी सवदह जावे- औरउंडप
औषधेमलें।
शी पिची ददोड़े होते हैं-लाल औरचय
हे छोटे हों यावड़े- और बहुधा अचानक हो जाते हैं-
और खुजली और वैचैनी होतीहै- जो उससे पानी व
हेतो'दुलम कहते हैं- मवाद इसका बहुत करके सुधि
रिया कफ होता है और लक्षणहर एक के पाये जायेंगे
रुधिर में फस्दू खोलें- और कवच दूर करें- ओर सिरका
और गुलाव और रोगन गुलं मलें- और कफ में मवादको
३०३
निकालें।
माशर यह सूजन पित्त और रुधिर से मुहप
रहोजाती है-इसमें मुंहलाल और पीडा और तपक होती,
और सिर और कान और नाक और गाल और माथाम
जजाते हैं-बहुत सा रुधिर निकालें-फिर मिज़ाज को नरमकर
और उस समय गले और छातीपर उंदी औषधेलगावे-किंग
बार मुंह से उतर करछाती पर न गिरे और ३०दाने उन्नाव
के पानी में औटाके सिकंजवीन मिलाके पिलाना अतिला
भदायक है।
ताजनक सूजन है-जो बहुधा ववा के
देनों मेंहोती है-इसमें जलन क्रावर रहती है-औररंग
मका लाल या पीला या नीला या हा याकालाहोताहै,
नारंगों में हर दूसरा रंग पहिले से बुरा होताहै - इसमें
दिल भौर भेजे को उसड और ज़ोर भधिक पहंचावें- और
रसनन के आस पास उंडी औषधे लगावें- और उस
पर गहरे यछने लगावें- और गरम पानी से घोडालें-
कि रुधिरभली भाति वह जावे- और जो रुधिर की अधि)
ता होतो फस्द भी खोलें- परन्तु पहिले सूजन पर पछ
लगालें।
औराममगाजिन यह वह सूजन है
वग़ल में या कॉन के पीछे याचट्टों में उत्पन्न होक्निा
पपके मोर जो किसी और जगह के घावके या गुठली केका
रण सेहो तो केवल 'जिदवार घिस करलगावे-मवाद निका
लने की आवश्यकता नहीं- और जो शरीर के बड़े बड़े
स्थानों के मवाद दूर होने सेहोतो दीला करने वाली गोपचे
के बीज-कबूतर की वीट-विनावुझाचूना-अंडेकी दाहद में मिलाके लेप करें- और नश्तर सेवारदेना। ३०४ . आकिला म लगावें - और रंडी औषधं जो मवाद को इधर गिरने रोकें-जलगावें. और मवाद को पकाके चीरने का यकरें। - मवादइसका आस में चारों जन्दी जल्दी फैलना है-और सवेरे से साझ तक अमलना स के वीज के वरावर होजाता है- इसमें दागदें- और गिले भर्मनी सिरके में पीसकर आम यासलगावें- औरक्दन से मवाद भली भानि निकालें- और घाव को सिग्के और पानी से बोवें. जो इसमे लामन हो तो दागर्दै-इस प्रका) रसे कि तेल कड़कड़ा के आस पास ओकिले के आटे से प्रेर) बनाकर वह नेल उसके बीच में छोड़ दें कि जितनी जगह लसनाने दुम्मल, इस सूजन कांसब जानते हैं इस में रुधिरको फन्द आदि से निकालें- और मवादों कों जुल्लालों से निकालें- और मिकंन वीन पिलावें- और आदिसे तीन दिन तक रंडी औषधे लगावे-और चौथे दिन अस्पगोन्न डेकी मुफैरी में मिलाके लेप करें- और नव पकने परहो पकाने चरेिं- और पीप आदि से साफकरें-घावके भरने उपाय करें। पकानेवाली औषधेयह हैं-इंजीर इलक- कर मलें-गेहूंका आटा गूध के थोडा सा नमक और था। का तेल- और शहद मिलाके सूजन पर बायें।। फोडने वाली भोपर्धेयह हैं- खट्टी- खमीर, ।
३०५
C
सब से उत्तम है।
दुवैला- यहसूजन दुम्मल से बड़ी विना पीड़ा
के शरीर के जपर या भीतर होती है। इसका मवाद भी कई
रंगका होताहै-जैसे काली मिट्टी और करीऔर नाखूनह
"स्ताल और चूने कासा-पहिले मवादको निकालें-और भोज
नथोड़ादें- और मरहम दारवलियून लेप करें-जव मवाद्
पकजावे तो चीरदें-चाहिये कि मवाद को कई वार करके
निकालें, क्योंकि एकवारगी निकालने से इसमें मूर्छाआ
जातीहै- और जवसत्र मवाद निकल चुकैतौ पुरानी रुई घान
में भरदें कि सारी पीय को चूसले - फिर चावके भरने
का उपाय करें- जो दुवैला भीतर होताहै - उसका वर्णन
अपनी अपनी जगह लिख चुके हैं- जब तक सूजन मली
भाति न पकले ठसेन्बीरेंनहीं- और चीरने का स्थान उभरीह
ईनगहहै - जो पिल पिली हो भौर चाहिये कि वेको
जोचेकी ओर झका रकवें जिससे मवाद रेलेसे निकल जावे॥
जज़ीमा सूजन है सफेद विनागरमी औरपीडा
केइसमें मिजान को ठीक करें- और कफका मवाद निकालें
भौर नतरुन की वारमें जो अंगूर के पेड़ की राखसेवनाईगई
हो और गोडे सिरके में मिलाकरेछेपकरें-और एलुभा सिर
के और गुलावमें घोलकर लगाना लाभदायकहै।
नफखा वाय की सूजन को कहते हैं वह
हल्की और उंगली सेदवाने के पीछे फिर वैसीही होजाती
है-जैसेमश्क मेंहवामगहो-वाय उत्पन्न करनेवाली वस्तु
गोसेव--और वायकी नोडने वाली वस्तुरखावें-औरवाजरे
के आटे से सेकें और नमक और अंगूर की राख और गौकागोवर
--
३०६
और फिटकरी और एलुआंसव को पीसके सिरके में मिलाने
लेपकरें।
सलमा- सूजन है मोटी चिनाकडेपन कति
नीचेखाल के हिलाने से हिलतीहै-अपनी जगह पर-इसमें
कफका मवाद निकालें- और मरहमदाखलियून नित्यल
गायेरहैं- और जो इससे लाभनहोतो वह ओपधैलगावें जो
गलासड़ाकर फोड़दें-यनिश्तर सेचीरके भीतर से सावधा
नीके साथ उस गुचल को निकालडालें।
गहूर्द और "गारें शरीरके जापर होती है।
इनमे औरसल में यह अन्तर है कि यहवडेनहीं होते-
और कडेहोते हैं और जोमवाद अधिक होतो एककेपास
दूसराभी निकल आताहै-इसमें मरहम दाखिलीयूनलगावे
औरभारी तुकडासीसेका उसपर वांधे।
• तनिशला- उस सूजन को कहते हैं जोग
दूद के स्थानों में उत्पन्न हो- परन्तु यह तामन की प्रकार
से नहीहै-पाय इसका वहींहै जो औराम मुगावित
काहै। CIA
खुनाजीर- चुरी सूजन है- और सलोकी
प्रकार उभरी हुई होतीहै और दवजातीहै-और वहुधानरम
मांममे उत्पन्न होनी है-बहुत करके गर्दन और वग़लमेवलग
मको निकालें-और दाखिलीयून लगावें औरमवाद निकाल
नेके लियेहब्वेचीज़रान और हन्वेवासली चौरइतरीफ़लगुदा
दीसवसे उत्तमहै।
सुकैल्स- कही सूजन को कहतेहैं-बहुधा
सोग के मवाद सेहौताहै- सौदा को निकालें- और दारिद
लगावें-और कभी का सेयाकफ औरसौदा से
मिल कर होता है परन्तु इसमें कडापन कम होता है मया
दके अनुसार उसे निकालें-यहसूजनदो प्रकार की होतीहै
पोडी होती है और दूसरी में नहीं होती-
उपाय हो सकताहै और दूसरीकानहीं। :
सरतान- यह सीदाकी सूजन है- अधि
कड़ी कालापन लिये हुये चुरे रंगकी और वीच में
और भीतर को वैठीहई और उसके किनारेलाल,
हरी में होती हैं-सर्व मिलाके केंकड़े कासा होजा
.. इसमें हौले हौले कई वारकरके सौदाका
निकालें और जिगर के मिज़ाजको ठीक करें-
संडी औषधेलगावें जो मवाद कोइधर गिरनेसेरोकें
तक कि पीप यडे-उसकेपाठेघाव भरनेवाली और लंड
वाली और बढ़ने से रोकने वाली औषधों का
:-जैसे कलईका सफेदा घोया हुआ तूतिया, आदि
॥
.
मिलाके ॥
नुरुआ- सकदाना होताहै-
-जिसमें से एक वस्तुरग कीसी निकलती है लाल
कालापन लिये हुस और वदते २ एकरक वालिरत या.
अधिक होनाती है और कमीस्वालकेनीचे कीड़े
रेंगा करती है- अदि में फ़स्ट खोलें फिरनोकें लगावें-और
मवाद निकालें तरी पहुंचाने के माथ और एलका
और हरी कासनी के पानी में पीस के लगावे औरण
इस रोग में काम कारकहै- चाहिये पाहेले दिन
नेदेती॥
माशे एल्लुजाहरी कासनी के पानी में रात को भिगोदें- और
सवेरे भकेला या कंद के साथ मिलाकर पिलावें-और
सरे दिन ॥माशे सलुआ लें- और तीसरे दिन कामांशे-और
जवनह.बाहर निकलने लगती सीसे के दुकडे पर लपेटे कि
चोझसे बाहर निकलता भाव-और आसपास सूजन के
रोगन मलें- और गरम पानी फुकने में भरकर सेकें और
ध्यान रकवें कि नहरुवा टूटनेनपावें- और जोटभी जावे
तौलम्वाई में चीरदें- कि सागसवाद निकलनावे- फिर
घाव को मरहें और कमीले कीमानून इस रोग को नहींही
जुज़ाम इसमें शरीर का रुप विगड नाताहै।
और नाकचपरी होजाती है और भावान वैवजातीहै-और
मुंह फूलके शेरकामाहोजाताहै-इसमें फस्द नौर जुल्ला
वों मेशरीर कामवाद निकालें-और नित्यगरम पानी सेन्हा
-और रवाने पीने और नाक में डालने और शरीर पर मलने
से तरी महुंचावें- और वकरी कादूध अकेला या रोटी भिगो
कर स्वाना अति लाभकारक है और जोनस्तु सौरा उत्पन्न
करें- उससे बचें- और इसके न्याय से पानगनहीं यह
हेरमें अच्छाहोताहै।
साफा बाव को कहते है जो सिर और
इपरहोते हैं- जो तरी के साथ होतो फ़स खोलें- औरड्डू
और शाहतरे को भौटाके-पिलावें-इससे मवाद निकले
गा- और रुधिर को गक करें- और हलदी अनार के छिन
के-मुंदसिंग-और मईदी पीसके सिरका गौर रोग़नगुल
मिलाके लेप करें- और जो सूरवाहो और सफ़ेद छिलके
खाल परसे उतरें तो तरीपहुंचावें-एक प्रकार इसकी सेसी
है- जिसमें शहद का सामवाद निकलना-और सक में
हाने पड़ते हैं जिनकी नोंके सुई कीसी होती हैं और दूसरी
रेसी है जिसमें कहादुम्बल हो जाता है और पीप नहीं पड़ती
और एक इंजीर कासा होता है- और सक मेंहजामत बनवा
ने से सिरकी-बाल लालहोजातोह-इनसवप्रकारों में मवा
रको निकालें और मिज़ाल को ठीककरें ।।
खुजलीजो सूखी होतो तर वस्तु लगावें-फिर
कई वार करके मवाद निकालें और गरम पानी से रान करी
के रोगन गुल भौर सिरका मिलाके मलें-और जो तरहोगी।
पीला पानी उसमें से वह तो पहिले फस्द वोलें और जोमवाद
अधिक हो उसकाजुल्लाव दें- और गरम दवा कभी न लगा
हिक्का - उस खुजली को कहा जिससेदानेन ।
|पहें इसका उपायभी वही है जो ऊपर लिखा गयाहै औरनोरखा :
जली पेशाव और पारवाने कीजगइहो उसमें मेथी और अलसी,
केवीन शहद के साथ औरके कपडा उसमें भिगोके शाफाव
नाके रखें।
खुजली औरणयितीजोबच्चोंकोल्होती है-
उसमें पछने याओंके लगाके-गुलाब के फल और क्नफशामौर
नीलोफर और छिलेहएजो औटाके शरीर को धोवें और गपए
से रोगन मलें और दूधपिलाने वाली अर्थात्वचचेकी माको
ओषधिकिावें ॥ मासान
इस छोटे छोटे दाने लालशरीरपरनिकलते
हैं-उनमें खुजली अधिक होतीहै- फस्त और जुल्काव सेपित
कामवाद निकालें- और नमक और मेहंदी सिरके में मिलाने
मलें।
दाद खुरखुराइट फैली हुई खुजली के साथहो
तीहै- आदि में नवकि मासके भीतर तक नहोतो रसौत सिरके।
में घोलकर याहड़ सिरके में पीसकर मलें- और जोकुछमा
सके भीतर पहुंच चुका होतो उस जगह पर जो लगाने और
उशक यामुर सिरके में पीस के ऊपरसे मलें-और जोभलीभी
ति मांस के भीतर वैट गयाहो और खाल मोटी पडगई होतोय
हिले फ़द और सौदा के जुल्लाव से मवाद को निकालें और
गरम पानी से स्नान करें- फिर उसजगहकारुधिर निकालें-
नौर तीन औषधे जैसे हरताल-उशक भोर राई-गूगल-फिर
करी गेहूं के तेल में और सिरके में मिलाकर लगावे- जबदा
दगाता रहे तो रंडी औषधि कई दिन तक लगावें-कि फिर
नहोने पावै- और बच्चों के दाद में वासीथूक लगावें-और||
नव दाद औषधि से अच्छानहो और संभव होतोचीरदे-फिर
तीन औषधे लगावें कि बुरामांस गमजावें-फिर वह औषधेल
गावेंजोधावको भरें।
लिबली-सुहासे सफेद फंसियां होती हैं नाक औरमा
थिपर निकलती हैं- इनमें शरीर से कफका मवाद निकालें
और अंगूर की लकड़ी की राव सिरके में मिलाकर लेप
लगावें।।
वनातुल लैल छोटीर फुन्सिया रातको
ठंडके समय निकलती हैं और उनमें खुजलीभी होतीहै-
फन्द और नल्लाव से मवाद को निकाले और गरमपानी
मे स्नान करने और मलने से शरीर के छिद्र स्वोलें जैसाकि
३२९
खुजली में लिखा गया है और कफ़स के पानी में सिरकेकी
तलहर मिलाकरमलनालाभकारकहै।
सससे अधिक की कुंसियां कई प्रकारकी)
होती हैं - पहिले मवाद को निकालें औरनमक और सिरका
लें-औररोगन गलसे चिकना रकवें ॥
चलखीया- इन इंसियों मेंसे फ़रके पानी
वहता है और जपर खरंड जमजाता है और इनके साथ
बहुधा दिल घबराताई- और मूर्छा,आती है- पहिले म
बाद निकालें- और गिलैमर्मनी, सिरके में पीस कर नि
त्यलगाया करें जब तक कि घाव सूरव के नया मांस
नजमे॥
वतम- यह काली मुसियां होती हैं जो
पिंडली पर निकलती हैं-इत्तमेसे काला पानीवहताहै पहिले
फस्द वासलीक खोलें- और कई वार उलटी करावें फिरनों
कोया पचनों से उसे जगह कारुधिर निकालें- औरजलीहु
ईमहंदी मामीरा पीसके सिरके और रोगन त मिलाके लगा
याकरें।
तौमा - ऊंसी है घावनाली कि मासके भीत
रशहतूत कीसी होतीहै- मवाद निकाल के मरहम गंगार
लगावें- कि बुरा मांस गलजावे - फिर मरने वाली मरहम
लाभर दाखसक गरम सूजन है-जो नाखूनों कीनड
में होती है इसमे पीड़ा और तपक और विचाव अधिकहीं
ताहै- और कभी तप भी होजाती है- फरद मौरजुल्लाबने,
पीछे मिजाजको ठीक करें- और आदि में अस्पगोल सिरके
सगावें॥
३१२
5.4
में घोलकें गौर वर्फ में ठंडा करके लगावें- और नो पीडाथ
|धिक होतो खुरासानी अजवायन और अफीम सिरके मेयी
सके लगावें- और जोइससे मच्छशनहोतो रोगन जैत गरम
करके उंगली उसमें रक- किमबाद पचनावे-और नोइस
से भी लाभनहोतो अलसी और कनोंचे के वीज मलें-और
जवसूजन पकजावै तौ चीर-नवपीपसाफ होजाव तोमर,
लानेकाउपाय करें।
अबूरसमा चोट लगने या कुंचल जाने मे
स्वाल के नीचे रग फटजातीहै- और रुधिर नौर बाय उसकी
स्वाल के नीचे भटक रहतीहै- लक्षण उसकायह है कि
स्गके खुलने पर सूजन दवजावेगी- और खुलने पर उभर
आवेगी क्योंकि खुलने में रुधिर रगके अन्दर रिवंचनावे
गा-औरबन्द होने में फिर बाहर निकलेगा-और रंग उतनी
खालकावैगनी और नीलाइट लिये होगा- कज़करनेवा
ली औषधेलगावे-जैसे शाहबलूत भीरमाजू आदि और जो भी
षधेरुधिर को हिलावें उनसेवचरहें।।
कई प्रकार की फंसियों और दाने होते हैं-एक
यहकिकोटे र दाने जिनकी जड़ें सफेंद और कडीहों और देर
में पकें- और सिरों से उनके योडीरपीपवहे तो उनको जान
लभस्ल कहते हैं।
दूनरीवहकि कडीहों और मुंहपर निकले-और
भासपासलालीहो उनको-शैलम-कहतेहैं।
तीमरी वहजोकनपटीपर कानकी जड़में होती
औरचीरने से गानारुधिर निकलता है।
चौथो प्रकार सेसी ही होती है- जो सिर औरगर्दन
के नीचे निकलती हैं-वह बहुतसी निकलती हैं और घोडाउन
में गधिक होती है।
पांचवी प्रकार वह है-जोहोतीऔरकही और
पीडारहित हों और देर चकरहे-और एकजगह से जाके इसरो
जगह निकल भावें।
इन सबमें मवाद के अनुसार मवादकोनिका
- और लेपलगायें- और सिर और गर्दन की फंतियों में रोग
नवनफ़शा स्वीके दूधमें मिलाके नाक मेंरपकावें-औरन्ति
रिपैमलें।
आदेठा फरंगच यह रंगरंगोदानेहोते.
जिसमवाद की अधिकता हो उसीको निकालें।
दूसरापाउन
खालके रोगों के विषयमें
सफेददाग
। यह गाड़ी सफेदीहोती है जो खालपर
होती है-और सम्पूर्ण शरीर पर भीहोजातीहै।
छोप हलकी सफेदी वाल पर होती है-अंतरइदा
दोनों में यह है कि पहिली में चमक होती है और दिन मात
दिन खालके भीतर फैलती जाती है और सुई चुमोने मे साधरण
नही निकलता और छीप बहुधागोल होनी है और अचानक
त्पन्न होजाती है और सुई से संधिर निकलवाहै। ,
बादीलीप और दाग कसे रवाल उपरती है-
३२४
धारा
परंतुलीप की पतलीहोती है-औरदागेकीमोटी-जैसे मछली
के छिलके - सफेदलीप और दाग में कफ़कामवाद निकालें
नौरकालेमें सौदा का फिर तुरुसुस और मूलीके वीन सिरके में
पीसकरसफैदहीपमेंलगावें।।
और कालीछीप और दागमें काली कुटकी सिरके में।
पीसकरलगावें।
सफेददाग अर्थात कोदमें कालेसांप कारुधिर
लगानालामकारकहे।
जमाईजो मुंहपर पड़ती इसमें और कालीछीम
||में यह भेद है कि छीप खुदेडी होतीहै- और यह साफ़होती</
है।
नोस
तलमश- मुंह पर और शरीर पर लाल होना
वरश वैसीहीकालीदेहै।।
इनमें रेवंर चीनी शहद में पीसके लेपकरें और
पीलाहरनाल हरे धनिये के पानी में पीसके लगावें-जजेइमा
से भीलाभन होतो सव शरीरका मवाद निकालें. फिर लेप
लगावें- और औषधिलगाने से पहिली उसस्थानको गरम
पानी मे सेकें-गौर औपधिभीगरम करकेडीलगावें।
मन तिल काले और नीले होनेहै-इनकावह उपाय
है जोमाईकाई ।।
नरलचोट पड़ने यादवने से रगफटजावे और रवालके
नीचे रंडाहाके नीलाहोनादाहै-नवपीडानाती रहे नौकरम्न
के पतों या पोदीनेकालेपकरें।
.:: नीला गोदानी स्त्रियों के होताहै टम के ।
३९५
मिटाने का उपाय यह है कि नतरून और गरम पानी मेउस)
नगह को मलें और फिर इलकुल वतम'शहद में पीसकेकई
वार लगावें-जौइससे नमिटे तो अस्ल बलादर लगाके
सुई की नोंक से कोंचें कि घाव पड़के नीलाहट वह
जावै॥
वादशनाम, सुरवीहाथ पांव और मुंह पर यह
तीहै- और विशेषकरके रंडमें-इसमें फस्दखोलें औरहड़को
बौटाके जुल्लावदें- और जो घाव होतो लालमरहम लगावें
और उसीजगहकारुधिर निकालें-और सावनलगावें-जवव
इसूरखजावे तो गरम पानीसेघोकर फिरलंगावे-और इसीप
कार कईवार करें।
धूप में फिरने याकमज़ोरी यागरम औषधेख,
ने या किसी मवाद की अधिकता से शरीर कारंग बदलनाचे,
दो कारण को रोकें और मवाद निकालें- और लोक औरपुटकारे
औरवाकलेके आटे से मुंहघोडालें।
सिरसे भूसी झड़े नौ रोग़ान मलें - और बु
कन्दर के पानी में नमक डालके सिर घोवें- जो इस से
लाभ नहोतो कफ़ और रुधिर और सौदा का मवाद निका
हाथ पांव आदि जो हवा की गरमी याह
से फटेतो मोमरोगन मलें- और जो भीतर के विगाड मेहोते
तर औषधे काम में लावें जैसे दूध आदि- और मवादको
जोखाल कडी होजावे याउतरनेलगे नीमवाद
कोनिकालें-और तररोगन मलें।
निकालें।
जोखाल छिलजावे तो मुदसिंग गुलाबमें घिस
कर मलें-जो सूजन काडर होतो फंसद खोलें- और कपडाप
लीमें भिगोकर रक-- परन्तु जो पहेके किनारे परहोतो मोग
कपडानरकवें॥
ला
तीसरापार
बालोंके रोगों के विषयमें
कभीवाल झड़जाते हैं और रवालनहीं उतरती जी
कमी दोनों बातें होतीहै-यह खालका विगाइदै- इसमेंमद
दको निकालेंग
जो बिना विगाड़ केवाल गड़ें और टूटे तौकारण
के अनुसार उपाय करें।
नो सिरके वान भड़के खाल नरमहोजावतीजा
लदीजलदी सिर मुडाया करें और आस और मामलेकातेल
नित्य सिरपरमलाकरें।
* जोचंदियाके चाल इतर भावतो उसकाभीयही
उपायहै - परंतु जो वुदाये सेहोतो अच्छा कदापि नहीं होस
जोवाल खुश्की से फरने लगेतीतर औषधंगार
रोगन लगावें॥
नो निकी चाल चिकनी होजावे तौइतरीफले
मि.मवादको निकालें।
कताई।
मोबुदापे से पहिले वाल सफेद होजावेतो सवेरे,
नित्य एक हड़का मुरब्बा खावें और महीने में सात दिन
तरीफल सगीर स्वायाकरें- औरदो महीने पीछे काका
जुल्लाव लियाकरें-और रवट्टीवस्तुओं और फस्द और विषय
की अधिकता से बचें।
जोचाहैकि वाल काळे रहे- तोलादन और
लिका तेल मलाकरें-ौरवालों को लम्बा करने के लिये
मलेको पानी में भिगोके आम और गुलाब के फूल छानकेउ
सपानी में मिलाके सिरघोलें।
बालोत्तपन्न करने के लियेपुरानारोशन तले
कर उसमें कैसूम की राव और समन्दर फैन मिलाकर भले
और जो उपायवालमारने काहै वहीकरें।
औरवालों को उतारना चाहेंतीचूना और हर
लाल लगावें-इसको चूरा कहते हैं- परंतु पेड़के वाल उस्तरे
से मुंडना अच्छा है इससे विषयकी चाइना अधिक होती
ह- और वहांनुरालगाने मेहानि है।
और जोचाइकिवाल न निकले लौवनजनों
रअफीम और शूकरान सिरके में पीसकर म.-और सानूनी
रकछुयेका रुधिर और चेरी के अंडे मलनाभी यही लाभ
Relliticle
और चूंवर वाले और घने बाल होने के लियेवरी
कि पत्ते और मानू और मैचीके वीन शनी में डालके उस पानी से
सिरकोचोवे ।।
औरवालों को पतला करने के लियेहल्दी-
की गारव नूरे में मिलाके गोलीवनावे-सूखेवालों पर दिन
।।
३९८
भरमें कई वार सूरवी गोली फैराकरें-परंतु एक जगह मरनहरा
वें नहीं तोवाल गड़जावेंगे।
चालोंके सीधाकरने के लिये कि उलनहीतेन
कोपानी में मिलाके गुनगुनामलें।
रिखज़ाव के लिये मुर्दा मंग-वुझाहुभाचूना-
रमुलतानी मिट्टी- तीनोंचरावर लेकर पानी में पीसकरेवाले
पर लगावें- और अरंडका पत्ता अपर चोधे- पहरभरपीछे
बोलकर पानी से घोडालें- और लगाने से पहिले भीषों
लेंकि मैल नरहै- और नकोई रोगन सिवाय रोगन गुल
केलगावें॥
और बालों को लाल पीलापन लियेहुरे कर
नेके लिये महंदी शरावकीतलकर, गतीनज मिलाकै पानी में
पीसें-और फिटकरी और हरताल मिलाके मलें।
और वालों के लाल करने के लिये-सीद और
दुशको ओटा घोवें।
बनूमाश को पीसके सिरके में मिलाके लगाना
चालोको सफेद करता है।
चौथापाल
.
नाखूनों केरोगोंके विष
यमें
नाखून मदहोजावें तौ मेथी भौर अलसीकेवी
जकूटके शहद में मिलाके लेपकरें-और जोइससे लाभनहो
तो मवाद लिकालें।
जोपीले पड़जावेंतोजरजीर के वीन सिरके में यो
सकेलगावें और पिन कामवाद निकालें।
जो उनमें पीडाहोतो आसके पत्ते औरसरोकेप
नेटके मलें।
जोनाखूनों की जड़ें मोटी औरकुरूपहोजावेतो
सौदाका मवाद निकाले और मरहम दाखलियून और
मोमरोगन लगावें।
जोनास्वन फरने होतो तरीपहुंचानाचाहिये
और सौहाका मवाद निकालें और वतस्वकी और मुर्राकी
ची मेथी के लुभाव में मिलाके मलें ।
जोनाखूनका के कारणदीले होके गिरते हों
लो पीडानहोगी-काको मवाद निकालें और जोरुधिरकीने
जीसे होतो फस्द साफिन खोलें और पिंडलीयर पछनेलगावे)
जोहाथके नाखनों में होतो फस्दवासलीक़ और जोपावके
नाखूनों में होता शरबत उन्नार पिलावें॥
जोनाखूनों में खुजलीहोवोनदी के पानी से धोके
और इंजीर कूटके लगावें ॥
जोनाखून कुचल जावैी आदि में आसऔरण
नार के पत्ते कूटके वाधे- फिर गेईका आटा जैत में मिलाके
जोनारवन अवरक कीप्रकारसफेद औरचमकी
लेऔर मरमुरे होनावेतो माउल उसूल और गुलकंद औससिकंज
वाये।
३९८
भरमें कई वार सूरखी गोली फेराकरें- परंतु एक जगह परनहरा
वे नहीं तोवाल गड़जावेंगे।
चालोंके सीधाकरने के लिये कि उल्लनहीतेल
कोपानी में मिलाके मुन गुनामलें।
विज़ाव के लिये मुर्दा संग-वुझाहुभाचूना
रमुलतानी मिट्टी- तीनों चरावर लेकर पानी में पीसकरेवाले
पर लगावें और अरंडका पत्ता अपर वाचे- पहर भरपी-
खोलकर पानी से घोडालें- और लगाने से पहिले भीधो
लेंकि मैलनरहै- और नकोई रोगन सिवाय रोगन गुल
--
केलगावें॥
१
और वालों को लाल पीलापन लियेहुरे कर
नेके लिये महंदी शराब की तलछर, रातीनन मिलाकै पानी में
पीमें और फिरकरी और हरताल मिलाके मलें।
और बालों के लाल करने के लिये-सौंद और
दुशको गोटाकें घोवें।
वमाश को पीसके सिरके में मिलाके लगाना
वालोंको सफेद करता है।
चौथापार
A#6.
नाखूनों के रोगोंके विष
यमें
।
.
.-
जोनारकून अवरक की प्रकार सफेद औरचमकी
नाखून सफेद होजावें नौ मेथी और अलसीकेवी
कूटके शहद में मिलाके लेपकरें-और जोइससे लाभनहो
जो मवाद निकालें।
जोयीले पड़ जावें तोजरजीर के वीन सिरके मेयी
सकेलगावें और पित कामवाद निकालें।
जो उनमें पीडाहोतो आसके पत्ते औरसरोकेप
करके मलें।
जोनाखूनोंकी जड़ें मोटो और कुरूपहोजावेतो
सौदाका मवाद निकालें- और मरहम दाखलियून और
सामरोगन लगवें॥
जोनाखून फटने होतो तरी पहुंचानाचाहियै
(और मौदाका मवाद निकालें- और वतस्वकी और मुर्गकी
चरनी मेथी के लुआव में मिलाके मलें।
जोनाखूनकफ़के कारणदीले होके गिरतेहों।
तो पीडानहोगी-कफका मवाद निकालें और जो रुधिरकीने
जीसे होतो फस्द साफिन खोलें और पिंडली पर पछनेलगावे
जोहाथके नाखूनों में होतो फस्दवासलीक़ भीर जोपावके
नाखूनों में होतो शरबत उन्नाव पिलावें।
जोनाखूनों में खुजलीहोतोनदी के पानीसेघोके
और इंजीरकूटके लगावें॥
जोनाखून कुचल जावैसे आदि में आसऔर
नारके पत्ते कूटके वाचे- फिर गेहूंका भाटा जैत में मिलाके
वाचे ॥
.
और भुरभुरे होजावेतो माउल उसूल और गुलकंद औरमिकं
वीन रोगन वादाम मिलाके में जव मवाद पकचकेतोइफ्तस्त्र
औटाके पिलावें और बकरी की पीउका मैल चर्बी और बादाम
मिलाके लगावें।
भी नाखून पर चोट लगने से रुधिरनीचेजमनावे
ती नित लगावें- और जरनीरके वीन सिरके में पीसकरमले
और दिन में कई बार मुंहमें उंगली डालकरचूंसे यह अतिला
भदायक हैं।
ओनाखून को उरवेदना होतो हरताल औरजा
वशीर 'कड़ये वादामके तेलमें मिलाके मलें- और जोप
हिले मरहम दाखलियून लगाले तो शीत लाभ करेगा।
पांचवापार
अलगअलगरोगों के लियौ
जुये भौर लीखें और चक चाहें सिरमेंयाकहीं
भौर पडेतो वारी पानी से स्नान करें और जल्दी जल्दी उजले.
कपडे बदला करें- और गोहकी चीर और नौशादर सिरकेने
घोलकर मले-जी पसीना बहुत आवें अधिक स्वराने सेतो
भूखा स्कवें- और जोकमज़ोरीसे होतो पुए करें- औरमान
पीसके मलें और मासके पचेजलाके धूनी लें- और रेसे भी
जन खिलावें मिनसे गादा रुधिर उत्पन्न होऔर पसीनारूक
जावे- और नंगा रहना- और हलके कपड़े पहनना और
हवा में वैठना-भौर पसीने कान पोजना लामबारक है-
३२१ डरनहो॥ और यह रोगन पसीने कोरोकना है और दिलको पुष्ट करना - और मच्छाको लाभकारक है-सेव और विही का पानी गौर गुलावरोरान गुल में मिलाके आग पर जलावें कि रोगल रहजारे बुहरान के दिन जो पसीना विपेश निकले ती उसे बन्द नकरें- जबतक किच्छी और कमजोरीका जो पसीने में रुधिर निकले तो फस्द खोलें- और जुल्लाव दें- और वह औषधे पिलावेंजोरुधिरकीगर्मी को बुझाती है फिर ससी औषधे शरीर पर मलें जो उसके छिद्रों को बंद करें-जैसे अनार के छिलके और आसके पते पाइनके पानी से स्नान करें। -करने- अधिक दुबला पन और मुद्रापा मी एक रोग है. मोराका उपाय यह है कि पहिले उसके कारण कोदूर करें- फिर वह भोजन और औषय समय के अनुसार-जो शरीर को ताजा करें और यह औषधिमतिमाभकारक है लोदी सफेद-नोदरीलाल- स्वशस्वाग-सफेद बादाम- हस्सनोवर-हव्युसमना-चुन्दुक - हव्यतुलविज़रा सबकोवरावर लेके कर छान के गाय के घी में चिकनाका रके हलुभावनायें-औरमवरे और सारुको जितना उचितहो खिला-और भोजन रोसादें जो अच्छा और गादा औरतर कधिर उत्पन्न करें। और दुवलाकरने का उपाय यह है किजा बरें- और सूत्र लाने वाली औषधे पिलावें- और भोजन और पानी यौडा औरसोये और कूट का तेल मलें- 4.
२२
और इतरीफल भौर कसूनी विलावें-और कडी जगह पर
मुलावें- और यह औषधि शरीर को दुवला करती है-घोई
हुई लाखमाशे सिरके में पीसकर नहार मुंह खिला
सिर और माथे की खाल खिचने में क्लफशे या
कडू और काहू का तेल-और स्त्रीका दूधमलें-और भेजेको
मिवाद निकाले- भौर जोजन्म सेहोतो अच्छा नहीं हो सक
"
जो सिरवडाहो जाने तौचमडे कीटोपीवनाकर।
पहनावें- जो वहुत तंग हो- और पाव और पिंडलियो मलें और
भोजन थोडादें।
जोसी की समय बंगलिया फूलें और खुजल
वेतोखारीपानीया चुकन्दर के औटे हुए पानी सेघोवें।।
जोदुट्टी घायल और लाल हो जावें तो नादिने
चिरने और चितळेटने से रोकें-और रसोत- मिलैअर्मनी-भका
किया-और गुलनार आदिलगावें और घावों पर सफेदेकामर
हमलगावें॥
जो शरीर सेदुर्गधि आती हो तो मवाद निकाले
फिर मुरदा संग गुलाव में घिसकर मलें और नोशदारू खि
+नाशा
जोठंड से हाथ पांव काले और विगडजावेतो
सूजन होने से पहिले रोगन जैन याकोई और गरम रोगनमले
औरजव सूजन होतो आदि में नाखूना और सोया और मेथीम
लसी आदिको ओंटाके हाथ पांव उसमें रक- औरजनउससे
निकालें नोरोगन गुल मले-और पिसी हुई मसूरको ओंटाके
लावे।
और जवकालक आजावे गहरे पानलगावं कवे और मधिरको बहने दें कि आप बंद होजावे- गिले अरमनी पानी और शहद और सिरके में पीसकर लिगामें- और थोड़ी देर पीछे पानी और सिरके से कोई वा रचोवे ।। जो आगसेजल जावे और फफोलानयडा होतो कपडावरफ पर दरडा करके जली हुई जगह पर रकवें और रघडी बदलें - और गिले अरमनी पानी और सिरके में मलने और मसूर उसमें पकाके लेपकरें और काजल गोद में घोट किलगाता- और अंडेकी सफेदी लगाना और दही और दूधमल हालाभकारक है औरजवछाला पडेतोकाई खोलें-औरसफे औरचूनेका मरहमलगावें॥ जलते हुरे तेल से जल जाने में बड़ी उपाय- को-जो आग से जल जाने का है परन्तुं अन्डे की सफे. दो तेल में घोलकर सफेदा मिलाके लगाना अति लामका ल खोलते हुस्पानी से जल जाने में नीकी सख अंडे की जर्दी में मिलाकर लगावें। विजली से जल जाने का उपाय वही है नोभा धूप में जलने में काफूर और सिरकेके मर मिलावके चेपलगने से जलन होतो यछने लगाके मीगी लगाचे-फिर सिरके का मरहमलागावें। गका है। हममलें। " ३२५ और उवकाई और हिचकी उसमें बराबर रहती है छाती काघाव भी ऐसाड़ी है उससे हवा निकलती है-छाती केप रहों का घाव राहैजसमें दमकता है- भोरमदे का घाव भीवुराहै- ऐरका खाना उसमें से निकल आता है-सिवायई नके नहा घाब ड़ो तो कुछडरन करें- जो सीधा होतो टांके लगावें - भीरकोई हड्डी काटुकडाहो उसे निकालडालें। जरराह बुद्दिमान औरदसकार चाहिये ।। जो कोई वस्तुचुमजावे तो पहिलेउसे निकालें- फिर मुर औरकुन्दर घाव पर छिड़कें। सातवांपा -- कुरह के विषयों इसकीप्रकारें भी वहत हैं- यहभी ज़रराहीसे संबंध रखता है - जो थोडाहो तो आमसे आप अच्छा होना नाई. और नो बहुत होतो वह मरहम लगावें जो बड़ी पुस्त कों में लिखे गये हैं और जीवके गले कूटके शहद में मिला के वांधे और परहेज और मवाद निकालना अति लाभदाय कहै-गौर नासूर को पहिले गुलाव से जिसमें अंगुरकी लकी सेकी सब पड़ी हो भली भांति धोवें और समुद्र के पानी से यासावन के पानी से जिसमें घोड़ोहरताल और नौशादर मि लाहो बोना अति लाभकारक है और फिर पुरानी रुई गुल्य वया माउल अस्ल में भिगोके इंजस्त-गलुगा- मुर-
३२४
नो पान खाने से चूने के कारण नीमफट जावेती
लभाव अस्यगोल आदि से कुरुल्ली करें- और वादाम
यफल काल मलें, और खोपराचवावें।
छापार
चावके विषय में
मांस के फटने को घावकहते हैं- जब उसमें
पीप पड़े तो उसकानामकरहा है उसकी प्रकारें बहुत हैं-
उनका वर्णन निन्च गकवर आदि बड़ी पुस्तकों में देखें
यह जोही से सम्बन्ध रखता है परन्तु थोडा सा जान लेना,
चाहियेदिलको धाव की सहार नहीं उसमे मनुष्य तुरन्त
मरनाता है-और भेना भी नहीं सहार सकता-लक्षण उसके
घावका बुद्धि का विगड जाना है- और गुरदे और मसानेगर
आत का घाव भी ऐमाहीजानों - और पहिचान मसाने के
पाव की यह है कि मूत्र उसी में से निकलेगा-और जो आदमे
होतो पैरवाना निकलेगा- जिगर का घाव भीवुराई- परंतु
अच्छा हो सकता है और पट्टे आदिका पाव भी बुरा है
उसमें रंग बदलता है-और मूर्छा और विचाव होता है।
और रावका घाव आगेको चोर होतो.वचनेकी सकूमई
तर पेट का घावजोभली भांति लगा हो भयानक है
सदी से गरमगरम उधेड़ के चांचे औरजववह सूखजावे तो
और जोरवाल के नीचे रुधिर सिमट आयाहोतो रोटी का गूदा
१२७
नवापाटर
PM
कोडे कीचोटके विषयमें
नोवाल के नीचे मांस टुकड़ेर होगया होतो
से दवाके और मनके इकचा करें- और फिरक्की कीखालू
इसे खोलें -इस उपाय से एक राति दिन में अच्छाहोजाता है,
और मूली मलें।
और विसल
हडडीके टूटने
दसवापार९०
उखड़ने
नेकेविषयमे
और नि
Hit
इसका
नि में आसके पते कुचलक
"
की जरदी
Primausite
१६
दुममुल भरववैन-कुन्दुर- भीम-कैसर- पीस के मिला
चं- और घाव पै रक। - जव तक अच्छान हो और जोरस
से लाभ नहीं तो जहाँ तक हो सके कुरा मास कारडालें कि
और उसके भरने का उपाय करें।
आरवापाट
*ह:
मारने और गिरपड़ने से चोट
लगने केंविषय
में
ह
"
जोसूनन और तपन हो तो गिलै भरमनी और
मंडे की सफेही आदिकालेपकरें- और जो सूजन औरत्प
हो तो फस्द और पछने लगाके रोसी उंदी औषधे लगावे जो
मवाद को इधर गिरने से रोकें- और जो शरीर के किसीवड़े
स्थान पर लगी होतो उसे पुष्ट करें- और उनले कीचोंट पेंप
हिले पीड़ा को दूर करना चाहिये।
नेसने
2
बारहवापार२ .
विषेले जानवरों के कारने याउंकमारनेवे
उपायो
इसका उपाय छःप्रकार से होसकता है जैसा
उचित सम वैसाकरें।
पहिले कह औषधदें कि असली गरमी को उभारे)
और भीतर के स्थानों को पुष्ट करें और विषको दरकरें- जैसा
विरियाक कवीर-औरलोवतवरवरी-निवार आदि।
दूसरेवह औपचदें जो शरीर से तैरीको निका
लें-उली यानुल्लाव से परन्तु मदनखोलें- औरतर्रारा वि
च्छुके इंक मारने में या ऐसे साप के काटने में जिन से किशी
(रीर के हरचिरंसे रुधिर निकलने लगनाई-फस्द खेलस
तीसरेजहर मुहरा और तिरियाक जो उसी विष
कदार करने को हो-जैसे घडियाल के काटने में उसीका
मांस और सापके काटने में उसीका मांस खिलादेना अतिला
भिदायक है।
सोम
चौथे वह औषधंदे जो उस विपैलेजानवरके
मिज़ाज सेविपिरीति होनेसे होंग विच्छूके लिये औरइसीमका
पंचमें वह दवाया उपाय करें-जोमवादकोहि
कतेहैं।
रिसे जोड़ो।
३२८
स्यारहवापार
बिषके उपायमें
8*..
गुनगुना पानी या तिलीका तेल या मक्त्वनव
हुत सा पिलाके तुरंत उलटी करावें-और जो इससे उलरीम
ली भांति न हो तो सोये के बीज औरनमक पानी में औटाके
और तिली का तेल बहुत सा मिलादें - और उलटीकें लिये
जो कुछ वहुत सादें-नवमलीभांति उलटी होचुके तौगी
कोत्तानो दूध जितना पिया जावे पिलावें- और जो यह भीउ
लटी में निकल जावे तो बहुत अच्छा है- और मकवन भौर
घी पिघलाके दूधकी जगह दे सकते हैं और तिरियाककु
वीर लाभकारक है- और विष खाने वाले को सोने नदें-औ
स्जो भूस्वा हो तो उचित भोजन पेट भरके खिलावें-भौरजवा
उस विष का नाम मालूम होजावै तो वही औषधंदेंजो उसे
दूरकरती है।
जव विष रवाने वाले को सूर्छा भाजावे और
भाखोकी पुतलियां फिर नावेया भारवेलाल हों औरनाडीव
दहोजावे और जीभवाहर निकल भावे और ठंडापमोनानि
कलने लगे तोजानों कि अवनवचेगा।
होताहै जो कुत्ते के काटने मेंहोताई-चाहिये कि उससेभीवचे
कुत्ते का काटा हुआ पानी से बहुत डरता है और पानी पीना
छोडदेता हैइसीसे मरनाता है उसे पानी पिलानेका उपाय यह
हैकि एक नरकुल बहुत लम्बालेके एक सिरा उसके मुंह मेंडा
ठे और बहुत दूर से दूसरे सिरे में पानी छोडें कि वह पानीको
देसनेनपावे- और कहते हैं किजव कुना काटे उसी समय
रुधिर उसका लेके थोडा सापानी में मिलाके पिलाने और
छह महीने तक रोजरक माशे मुशकविलायें और तीन महीने
तक चावको वहने दें और जिसकुत्तेने काराहो उसीकाक
लेजाभून के खिलाना अनि लाभदायक है।
A
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समासोयगन्यः
लाके विघको खाल की और वहादें-जैसेदवायादौड़ने सेपर्स
नानिकालना परन्तु इसमेंडरहै।
छटे विषको फैलनेनदेइस प्रकार से कि जिस
महकांदायाडंक माराहे जोहो सके तो उसस्थानको तुरंतही
कारडालें-और दागदें-या अपर कोहरके कसकर बाचें कि विष
आगेनचटने पावै-औरटंडीवसुल करने वाली औषधेलगावें और
उसजगह सोंगीलगानाऔर मुंहसेचूसनालाभदायक है-परंतुचूस
नियालेकापेटमराहो और रोगनगुलसे उसे कुल्लीकगदें-जोउसे
हानिनहो॥
लागियारक मेड है जिसमें से दृधनिकलता है
उसकाधमापके काटे हुयेको लाभकारक है-और तुरंज
के वीजरे माशेसवज्ञान वरों के विपको लाभदेते हैं औरक्नि
की ताज़ाफल भी अति लामकारक है-नियोलेकामेदा और
पटमवाद घोकर धनियालगाकर भूनना और सुखाके खि
लाना और वकरीकी मेंगनी जलाकर खिलाना और लेपकप
ना और सातर खाना और लेप करना अति लाभदायक है।
और पक्का या कच्चा दूधधीके साथ उस स्थान पर लगाम
भी अच्छाहै।
हल मिह औरचेदी और शहदकीमकवी के काटने
मेनीन हथेलीभरधनियां फांके।।
वावले कत्ते के काटेकोचालीस दिनतकम
च्छानहोने दें- जोघाव भरने लगेतो ऐसी औषधिलगादे नि)
ससे वह वहे और सौदाका मवाद निकालने में बहुतलगे
रहें. इसवा पिप वरषों के पीछे और करना है और जिसकि
सीको कुत्तेने कारा हो उसक कारने में भी वही अव गुण
AF
नाड़ीपरीक्षा
दिलकीस्गकेचलनेकोनाड़ीकहते हैं
वहदिलके खुलने गौरवंदहोनेसेचलती है खुलनेसेहवारिस
चिकेभीतरजातीहै जिससेरहदैवानीजो दिल में है आरामपानी है और
गरमहवाकेदूर करने के लियेदिलवंदहोताहै इनदोनोंसेमनुष्यके
गरोस्काहाल और उसके रोग और आराममालूमहोते हैं इसप्रकारसेशरी
रिकाहाललानाजाना है।
एकतौयह किकितनीजुलती है औरकिल्नीहोजाती है-
इसकीनोसरने हैं क्योंकिनाडीमेलम्बाई औरचौड़ाई औएगहरा है और
हरसक इनतीनमेंसेयावहुत अधिकईयाकम, यामध्यमईनवानतीन
सिड्नतीनकोगुणाकरोगेनौतियानी होंगेवहनौयह नवीलर्थान
अधिकलम्बी-रकमोरबहुतकमलम्बी-मोन दिलअर्थातनलम्बीनी
लोटी उतनीलस्वीजितनी किचाहियेथअरीज़अधिकचौडीजेपककम
चौडीइमौनदिलउतनीचौडोजितनीकिचाहिये मुशरिफ़अधिकारी
हुई मुनखफिजदचीहुई मोत दिलन बहुत उभरीनदवी॥
तवील में जितनाकिचाहियैवह रोग अधिकमालूम
होती है कारणइसकागरमीकी अधिकता है।
रक़सीरमेकम मान्म होती है उससे जितना किचाहिये
कारणइसका गरमी कमीहै।
३मोत दिल में रंगउतनी मोलुमहोतीहै जितनी किच,
हिौइसमें मिज़ाजकीगरमी ठीक रहोतीहै ।।
%3D
३३५
औरतीनकुत्तरकलेनेकीरति जिसकोसलासीकहते
अकारोंकोसकहीरकवेधीरतीसरीप्रकारबदलनीरहें।
नकशासलासीका
अ.
ना. मो. मो.
मुश. मुन. मो. मुश. मुन. मो. सुश, मुन. मो.
क. क. क. क. क.
ज. मो. मो. मो
मुश. मुर. मो. मुश मुन. मो. मुश. मुन मो.
में मो. मो. मो. मो. मो. मो. मो. मो
ज. ज. मो. मो. मो.
भुश. मुन. मो. मुश- मुन. मो. मुग. मुन. मो.
।
.
अकरहोकिअपरके दोनोनकों मेतामेनवील और मासे
अरेज़ और कासेकसीर औरगोसे मोतदिलऔर लासे पक और
(मुशासेमुशरिफ और रमुन से मुनरवाफिज़जानो।
दूसरीप्रकारजोरऔरकमजोरीजालनाहै बड्यहहैजोचाडोमोर
मैलगेदेखनेवालेकी उंगलियोंके मांसपरतो उसकोयुष्टकहो ।
समें दिलभीपुष्टहोता है औरजोहोलेसैलगेदोवहकमजोर
वेगीयहपहिचान है दिलकीकमजोरीका।
औरतीसरीमोनदिलहै जिससेजोरहवानीका हिलमेंटीक
होनापायाजाताहै।
तीसरीप्रकारनाडीकीचालकासमयदेखनाहै जोवह
३३४ ८ ४अरीज़में उसकाचौडान जितना किचाहियेठससे अधिक होती. इसमेंनरीकी अधिकताहोगी। पञ्जयको चौडानकमहोवाहैइसमेंतरीकमहोतीहै। ६मोतदिलमें जितनीचाहियेउतनीचौडाईहोगी उसमेंतरीठीक ठीक होती। ७ मुशरिफ़मेवहरंगअधिकउभरतीहैयइमीगीकाकारण मुनस्वफिज़मेंहदसेकमउभरतीईगरमीवीकमीहोगी। मोनदिलमें उतनाउभारहोगा जितनाकिचाहियेइसमेंगी भीठीकरहोगी-यहनोपकारेंएकरकुतरकी लम्बाई औरचौड ईऔरगहराईकोयहापरकुत्तरकहते हैं-जबंदोमांतीनकुत्तोको मिलामोतोदोकारेंसचाईसरकी निकलेंगीजैसाकिआगेकेदो नकशोंमें लिरवागयाहै परन्तुदोकुत्तगेंकेलेनेकीरीनिजिसको सनाईकहतेय किलस्वाईकीनीनप्रकारोंकोचौडाईकीतीन अकारोंकेसाथलेंनोनोहोंगीफिरलम्बाईडीकीतीनप्रकारोंकीगढ़ राईकीतीनप्रकारोंकेसाथलें यहभीनोहोंगी-फिरचौडाईकीतीनप कारोंकोगहराईकीतीनप्रकारोकेसायलेंयहभीनौहोंगी-पहस वमिलकरसनाईसहुई। नकशासनाईका त. क.क. क.मो. मो. मो. न. मो. मो- अ. त. क.क. मो. मो. मो. मुश. मुन. मो. मुश. मुन मो. मुश. मुन. म. अ. भ. न. मुग. मुन. मो. मुश नुन. मो. मुश. मुन . त. अ. मो- क. न. मो. मो. मो. मो.
अलगरती उसकोमुतवी फिलवाज़ और मुख्तलिफ़ाफिलवाज़क
हतेहैं इसमें हालवुराहोगा-जोहरनवजे के टुकडेमवहालोंमें एक
सेपाये जावें औरजोसवनवजे जगहोंतो उसेमुस्तवीमुतलक,
डोंकीराहसेकहेंगे-और जोअलगरहोंतो मुरवत लिफनुतलकर
'कीराहसे कहेंगे यह दोनों बुरेहालकेविन्द, मनवी
और मुखतलिफ में अधिक और जोनबजेके हरटुकडेकेसकर
कड़े में मुस्लवी और मुखतलिफ़देखें अर्थातजोटुकड़ानाडीका
सकउंगलीतलेहोउसके आदि और अंत मौरमध्यमें इसवार्य
खितलाफ होतो उसेमुस्तवीमुतलक औरमुखतलिफ ।
और इसीप्रकार से मुस्तवी फिलवाज़ और
वाज जानोयह भीहाल के वराहोने औरकमज़ोरीकी अधिकता
और मवादके भारी होने का लक्षणहै परंतु मस्तवी में थोड़ा और
मुखतलिफ में अधिक।
नवी प्रकार मुरवतलिफ नाड़ीमें क
दौरानको कारकमकारकाअंतरस्कवैतो उसको मुख्तलिफ़
मुंतजमकहनेहै औरजोरकसानरहेतो मुरवतलिफगैरमुंतज़म
यहवहतवरेहालकालदरणहै।
दसवीमकारनाडीकी तोन्टदेखनाह-तोलकहते एक
पस्तुकोदूसरीवस्तुसे अंदाजाकरनेको-इसलिये ३
नाडी होती है उसको जैयदलकजनकहेंगे-औरजोइससे विपीवि
दोसेरदीउलक्लन कग-इसकी तीन सूरतेहैं पहिलीमुजावि
वहहै कि एक अवस्थावाले कीनाही मिलतीहोउसके
यामवालीभवस्याकीनाडीसे जैसे कि लडकेकीनाडीजवान की
कीचुहेकीसीहोदूमरीमुवाइनुलवज़नवहहै किजो
दुरकी अवस्लाकले से मिलती हो जैसे लड़के
न
३२८
तीसरीखारिजुलवजनवहहै कि किसी भवस्थाकीसीनहोजैसेका
पतीहुईनाडीजोवहुतबुरीहै और इससेजपरकीदोंनोंभीचुरीहैपरंतु
इससेकम।
नाड़ीरुद्धऔर असलीगरमीकोआरामदेवीहेजवगरमीकी
अधिकताहोऔरनाडीमें किसीप्रकारकाकडापननहोऔरजोरर्भ
होतोनाड़ी अजीमहोगीअर्थात तीनोंकुतरोंपरक्टीहई औरजोइस
सेकुछभीलाभनहोतोसरीहोजावेगी औरजोइससे गर्मीवदेऔरल
भनहोनोमुतवातिरहोजावेगीऔरजोनाडीमेकडापनहोतोसगीर
होगी अर्थानतीनोंत्तरों घटीहई औरजोनाडीनरमहोपरंतुउस
मेंज़ोरनहोतोसरीहोगी औरजोउससेलामनहोतोमुतवानिरहोजी
वेगीऔरजोकमज़ोरीबहुतहोतोकामजल्दीनकरसकेगीऔरस
गीरहोजावेगी।
जवमवादयामोजनकेजोरकेवोगमेनाडीदवजावेगौरउभ
रनेसकेतोकुलमगीरहोजातीहैजैसाकितपकेआदिवारियोंके
अन्दरहोताहै चाहेंजोरहोतरीसेनाडीनरमहोजातीहै औरखुश्कीले
कडीपरंतुबुहरानोंमें कुछकडीपाईजातीहै।
मवादकेबोरसे याकमज़ोरीकीअधिकवासेनाडीमेंइति
लाफ़पडनाताई औरनवकमजोरीवहतबदनादीहै तोइन्तिजाम
नाडीकाजावारहताहै उचितवज़नभानहीं होता।
नाड़ीकी मिलीहुई कारें
मज़ीमउसनाडीकोकड़तेहैंजोतीनोकुतर्राविटीहुई हो।
सगीरवह जोनीनोंकुतरोमेंघटीहईहो।
गलीज़वह है जोचौड़ाई और गहगईमेवटीहो औरलक्षणहैमवा
दकीअधिकताका।
--
३४१
सूत्रपरीक्षा
जाननाचाहियै कि मूत्रयहड़ी पानी पियाहुआहै-पहिले
मदे में भोजन के माथ मिलता है कि उसे पतलाकर कैलसक्ना
फिरमासारीका मेंहोताहुभा जिगरमें पकताहै वहां से गुरदे में
होके मसाने मेंइकहा होता है और जो कुछ रुधिरसे मिलाहुमा
निगरमे रहनाताहै वहरगों कीराहमे सारे शरीर में पहुंचके कुछ
पसीने में निकलजाता है औरकुछफिरगुरदे होताहआमसानेम
गिरता है इसीलिये सबरंगीन होजाता है जिसको पसीनावहता
नाहे उसे पेशावकमहोता है और ममीनाकमभानेवाले को पेशा,
वअधिक होताहै-जब मसाने मेंइकहाहोजाताहैतो पैशावलग
ताहैइसीलिये सारे शरीरका हाल इससेजाना जाता है यहां सेदो
चातें मालूमहुई-एक यह कि पैशाव में दोवस्तु एक पानी और
दूसरे मारीफ्न।
दूसरे पेशावसे जिगर और ममानेकाहाल भली भांति
नानाजाता है।
मूत्रके रंगकावर्णन
अमलरंगपांच हैं-पीला-लाल-हरा-कालाऔरॉफै।
और सिवाय इनके जोहोवहइन्ही के साथ हैं।
पीलेरंगकी पांच प्रकारे हैं
तियनी- उसापानीकसारंगहोता है जिसमें भूसा भिगोयाई
भान पीलाहोताहै-सपैदी लियेइयेयहलक्षण मिजाजकी
उकाक्योंकि यातोपानीकी अधिकता होगी या पित्तों की कभीय
इदोनों ठंडसेहोतेहैं परंतु पित्तोंकीसरसाम में भी मूत्रकारंगरोसा
होजाता है।
उतरुजी- अर्थातहलका पीलारंगजैसे तुरंजके छिल।
केकाहोताहै-इसमें पीलापन तिपनी से अधिकहोताहै यहल
क्षणहै मिजाजकेसीकहोनेका जोरमलीभांति पचाव होनेका
अशंकर-यह पीलारंगहैलाली लियेहुए मिज़ान मेंग
ग्मीहोने का लक्षणहै।
नौरी-यहरंगवह है जिसमें पीलेपनलाली अधिक
होती है औरचमक आग कीसीहोती है-इसमें अशक से अधिक
गरमीडोती है।
अहमरनासे-इसमें नारीसेलाली अधिक होती है औरगम
मीभी उससे अधिक होगी।+++
दूसरा रंगलालहै वहचार प्रकार काहोता है ।।
असहव-थोडीलालीहो और सफेदी मारे पतलेरु
धिरसे।।
वरदा गुलाबी रंगको कहते हैइसमेंलालीमसइव
से अधिक होतीहै और गारुधिरसे पायाजाता है।
कानी-यहबहुत लाल होताहै उसरुधिरसे जिसमें
गरमीवदीहो।
अत्तम-लालहोकालापन.सी
धिरकीगरमी से
यहचारोंरुधिर और गरमीकी अधिकताके लक्षण है
एक दूसरे से अधिक भौर कभी रंडे रोगों मेभिल्लाल रंगटोजाताहै
जैसे फालिज और सजल किनी में क्योंकि जिगर की कमजोगिमे
रुधिरपानी सेभलीमातिगलगनहींहोसकता औररूधिरपैभाव
मिमिन्नाभाताहे॥
तीसरा रंगहरा है-यहभीचारप्रकारका है।
फिसतफी अर्थात पिसतई रंग यह ठंडका चिन्हहै क्योंकि
पित्तों और सौदा के मिलने सेहोताहै परंतुबहसौदाजो दंड से तत्य,
नहोकरशीनिकाह कि यह रंग पित्तोंकेजलनेकालाण है क्यों
किइसमें पीलेपनको मलकहोती हैजो ठंडे सौदाने होतातोकाना
-
अपन होता।
नीलनजी-जैसेनीलपानी में घुलाहोइसमें फिस्तकी
निभी अधिक ठंडहोतीहै-यहंदोनोरंगजोयचत्रों के मूत्रमें होतो
शालिज यानशननज होनेकाडरहै।
जननारी अर्थात जंगारकासाइसकाकारण गरमीकी
विकता और पिनों काजलना है।
कुररासीगदने कामारंग यहभी पितों के जलने काममा
गहै परंतुजननारीसेकम् ।।
चौथारंगकाला है इसे कई कारण है।
एकजलना इस प्रकार से किपहिले शरीर में गरम पिता
हो और वह जलादे भूबके मवाद को और रंग उसकाकाला होजा
वि परंतु उसमें पीले पनकीमलबा होगी भौर पहिले से मूवमेगंध
होगी यालाल भावेगा।
इसराकारणजमनाहै-इसीमकामे शरीर में ठंडागर्व
इडोजो मूबके मवादकोजमा और कालाकरदेइसमे पहिले
सेहग मूत्र विना गंधके या वहीगंध निरोहसमावेगा।
६
कुछडर नहीं।
तीसराकारणसौदाका मूत्रमें निकलना है यह सौदाकीत
भौरवुहान के दिन भावेगा इससे पहिले मवादके पकनेकेलय
पायेजावेंगे और पीछे रोग में कमी होगी।
चौथाकारण किसीरंगीन वस्तुकाखानाहै जैसेकालोश
रावआदि जोवहवस जैसीकीसी सूत्र में निकलेतोजानलोकिनि
गरकाज़ोर जाता रहा औरडरावना है औरजो अधिक स्वाटेनेसेहोते.
पांचवारंगसफेद यहदो मकारकाहोताहै।
.
एकदूधकासा गादायहकाकी अधिकता और मिजाज
कीसंडयाहड़ियों और पहोंके औरची के पिचलनेवालशगजैसी
कि दिकके अन्त में होता है-कारण इसकाअधिक गरमीहैइसमें
चिकनाई सफैदी के साथ होगी और शरीर दुवला और पनि दिनपि
चलताजावेगी।
दूसरेमानीकासारंगयइलक्षण है निगरके पचावजातर
हने का गंडकी अधिकता सेयामृबकेरस्ते में सुझापडने से किरंगीन
वसुनहीं निकलती और निरापानी निकल आताई।।
मूत्रकागाटाऔरपतलाहोना
मोत दिल वह है जोनवहुत गाटाहोन पनलाजैसाविचंगेर
निमें होता है औरलक्षणहे पचाव और मलि मातिपकनेका ।
गादा होनालक्षणहैनपकनेकाक्योंकि निवापचाटुभा
फोक मूत्र में मिलके उसे गाटाकरदेता है औरकमी चिन्हहोताहेगा।
मवादके पकनेकापहिचान उसकी यहहै किपकने से पहिले सूत्र
वहुत गाटाभावे और पकने के पीछेकमगाटा भावे॥
कभीवहुत पानी पीनेसे मूत्रपतलाभाताईभौरकमीम्स
F
३४५
रास्ते में भी सुहापड़ने सेभी पतला आताहै पहिचान उसकी यह
कि मुद्दे की जगह वोझ और तनाव पायाजावेगा और कभीम
वादके नपकने सेभी पतलाहोजाना है-जवकि मवाद रेसाकच्चा
कि निकलनसके जैसाकि काकी तपों मेहोता है।
सूत्रकासाफ़औरगदलाहोना
माफवहहै कि एकसाहो गौरवारपार उसमें से दीखपड़ेने
से पानी-चाहेगाराोजैसे अंडेकी सफेदी ।
और गदला यह है जिसमेंवारपारनदीखपडे ।
साफ़ मूत्र चिन्हहैमवाद के पकने और हरनेका।
और गदलाहोना चिन्हहैमवादकेनफ्कने और ओंटनेका
कभीज़ोर जाते रहने से और शरीर के अंदर की सूजन से मूत्र
थोडागदलाहोजाताहै।
मुबकीगंध (IF
जब तक कि सूत्र में जितनीचाहियै उतनीहीगंधहोतो
जानो कि मिजाज ठीक और मवाद पकाहुआहै और जब उससेवजा
व तौ दोवाने होंगी यातो मवाद अधिक सटा होगा जैसाकि
सड़ी हुई तपों में यासूत्रके सस्थानों में खुजली और घाव होगा
सेमा बहुधामसाने के बाव से होता है क्योंकि वहां सूत्रदेव
करहरता है और घाव में पीडा पाई जायगी और मूत्र में पीप और
छडे घावसे निकलेंगे और मवाद के सड़ने में यह वान
होंगी।
मुत्र में गंध विलकुल नहोना चिन्हहै मवाद केक
चचाहोने भौरेजमनाने का और कभीज़ोर जाते रहने से भी ऐसा
रसूत्र मज़सून दहहै जिसमें रसूवमहमूद कीबानेन पाई
जानें इसकी भी तीन प्रकारे सबमें अच्छीगममाम फिरमनन
स्टिक फिर रासिवजवकि अपरमहरनावलछटकागरसीसे हो ।
रसूर्वरदी-यातो तीसे उत्पन्न होती हे याशरीरसे-शरीर
कीरसुवचो असल स्थानों सेहो उसेखरगती कहते हैं और जोऊन
से नहीं और चिकनाई उसमें पाईजावेतोचसमीकहनेहै-और
जो चिकनाईनहोतो लहमीहै ।।
खरगती जो अपर मे अविनोकधरीकहेंगे और जो भीतर
से गावेतौटकड़े इसकेवड़े औरचौडेसफेदीमालालहोतोसफा
यहीकड़ेंगे-सफेद चिन्हई मत्ताने के छिलनेका-औरलालगुरहे।
यानिगरके छिलनेका 127212
जोडकडेवडेचौडेनहोतो-लालहोजरसनीकहेंगे और
नही तोचखाली॥
तलछट जोतरी सेहो उनमें से जोलालीलियेउयेहो चि
न्हहरुधिरके जलनेका और कभीकभके जलनेको और जो पिड़ों
होतो पितो की अधिकताका और काली सोदावोजलनेका।
जो सूत्रविना तलछटकेहो उसके कई कारणहैं कमी
वादकानपकना-दूसरेसुहा-तीसरे मवादकीकमी-चंगेमनु
प्योंके सूत्र में नलवाट बहुत थोडीहोतीहै-औरजोहोतीमीहे तोनि
नापचेहरे भोजन के फोकसे॥
दुबळे मनुष्य के और मिहनत करने वाले के सूत्र में नल्न
करवहतकमहोती.-और जोरोगी मोटा और आरामचाहने
वालाहो उसके भूत्र में बहुन आती है-जिसनलबट काफोकपीप
होउसेमहीकहते हैं और जिसकाफोकगादा और कवचामवाद
होकह मुरवाती है-यहवहुन करके अरकुंनिसा और वनैमुफासिन
३४
करोगों में आतीहै-इनदोनो कीसूरत एकसीहोती है परंतु अंतर
यहहै कि मद्दी मेंदुरगंधिहोती है और मूजनयावावके फूटनेके
पीछे निकलतीहै-और हिलाने सेजलदी फैलजातीहै औरजलो
दीइकबाहोजाती है और मुखाती में यह बातेनहीं होती।
मूत्रकाथोड़ाऔरफ्नाहोना
मूषकेघनेहोने केवहुत कारण, एकपानीवहुत पानी
अकेलायकोईवस्तु मिलाके या तरमेवोंकारखाना-दूसरे शरीर
कापिघलनाजैसाकि गरमतयों में होताहै-तीसरेरुकेहरा मवाद
का निकलनाजैसाकि वहरान इदरीहोता है। नि।
वुहरानी भौरजवानी मे यह अंतर हैकि वहमनी मेंजोग
होता है और मवाद के निकलने के पीछे रोगीको आरामहोताहै|
और जवानी में कमजोरीहोतीहै उसमें पुष्टगर्मीपाईनातीहै भौर
गंधितेज होती है और गरान के दिन नहीं होता-
बुरामूवजेसेकाला और गाढाइसमें अच्छाबहहै कि
बहुत आवेऔरस्करकेन भाबैइसमेंजोर होता है और जोकमज़ो
रहोगी तौरुकके भावेगा।
मूव के थोडाहोने के कारणमीक्हुत-सकत्तरीका
अधिक पचनासरे शरीर मेंतरीकानर नागरमीकी अधिकता
सेतीसरे सुहा पड़ना उनरस्त्रों में जिनसेकितरीमसाने में जाती
हेचौथे अधिकदलयापसीना आना-इससेजोतरी मूत्रमें आ
तीथीं वदस्त और पसीने में निकलनावेगी।
पचाव केकमहोने पर भीजोमूत्रवडुनथोड़ा आवेती
.
जलंधरहोजाने काडरहै।
चुहरानकावर्णन
-
रोगकीलाई जो मिजाज़ के साथहोतीहै उसेकुहरानक
जो मिलान जीते औररोगसकचारगी जातारहै उसेवाहरन
गिहमूद याकामिल कहते हैं और जोरोगजीने और रोगीएकवारगी
मिरजावे तो वहानदीतामहै-यह दोनो गरम रोगों में होने र
॥
"
जोरोग अच्छाहोनेकोहोपरंतु देर में इसेतहल्लुलकह
तहै यह बहुधा पुराने रोगों और उडे मवाद में होता है।
और जोइसीप्रकारसेरोगमारडालने कोहोतोजूवान भी
रजकूल कहते हैं। पुरोपुल
चंगाहोने के लक्षण यातो सकवारगीमाम होवेंगे
परंतुदेर में मनाहों और मवादथोडार निकलयापहिले मिजाज
काजोर कुछनमालूमहोपरंतु मवाद की कुछ निकाल के स्कवा,
रगी जीत जावेतो वुहान जैपदे नोकिसकहतेइ-जोरोगजीते
कलरजोर कोघटादेया पहिले रोगका जोर मालूमनहो परंतु कुछ
सोरजोरको घटातारहै और सकवारगी मारडालें उसेवह
सनदीनाकिसकहते हैं-इन चार पिछलों कानोमव्हयन मुर
इन आठों सूरतों में रोमकारसेवदलनेई यानी सकवार
यीचंगाहोने की ओत्या स्वारगी मरनेकी भोर यायोडारचंगाही
जेसी मोरयाथोडारमरनेकी और यादोनों मोर हो औररोगीचंग
३५०
मोजावेयादोनो हों और भरजावे ॥
नववहुरानमें मवादएकवारदुरनहोसके तोक्डेरस्था
नोसेइमरी जोर चलानाताहैइसेबहुरानइतकालीकहते हैं कुछ
रोगजैयद हैं-जैसेयस्कान खुजली दाद औरकुछरदीहैजैसेवोद
खुन्नाक- आकिला-दुबैला-भादि।
वुहरानइंतकालीनहीं होता-परंतु जवकि कमजोरीही
और सराद गावाहो।
वहरान होने से पहिले उसके लक्षणपाये जाते हैं अति
जोवह दिनको होतो पहिली रातको औरनोरातिकोनातो दिनको
वह चिन्ह होंगेकभीगरम रोगों में सीन दिनतकबहरहते हैं चिन्छ ।
जिस दिन गधिकता हो वही दिन वहुरत्नकाजानों।
जिसबहुरान मेंमवाददरही वह पांचप्रकारकाहोताहै|
नकसीर उल्टी-दस्त-सूत्र-औरयसीना।
भूत्र और पसीनेकाबुहरान बहुधानाकिसहोताहै-नक
सीरकाचुन सबसे अच्छाह-फिरदस्तोंकाफिरलरीका-फि
सूत्रका किरपसीनेका फिरखुराजातकामबहरबहरानके चिन्ह
अलगर लिखेजाते हैं।
सकसीर के बहरानकेचिन्ह यहहै-कानों का सुनहोला
आनाने आनी सिनाचमकतीहुईदस्तु शाखाके सामने दिल
ईदेना-नाक खुजधाना सिएकी सेंधमकना आरखें और मुंहला
उलटोवाले के चिन्ह यहहैं दमलना-मल्ली-मिन
काहर-मुंहकडवाहोना-फर्डकलाकौडीकी पीडा-आग्वोंकेनी
चे अंधेराहोना-नाडीकावंहोना औरनीत्रेकाहोठ फड़कना
दस्तके लतणयहहैं-पेट की पीडाशरीककावोगलही
लहोना।
ग
पक्रियो काननना-पेट फूलना-पीटकीपीडा-दस्त रंगीनहोला
(नातोकावोलनी- और नाडीकासगीर-औरकवी-औरसल्वहोंने
और किसी कहानके लक्षणनहोना।
और मूत्र के लक्षणयह मसानेका बोकल होला-औपस
का बहुत औरगाटाहोना-और मवाद कादूरनहोना-यह बहु
पानाडों में होता है। ०५१५
पसीने के चिन्ह यह हैं-मुंईकाफूलनाचौथे दिन सूबरंग
रहोजावेगा- और मानवें दिन गावाहोना और रोगी स्वप्नमें-हग
माम और नदी और मेहवरसतादेवेगा-औरजव उसके शरीरपर
दरवक हाथ रकवेंगे तो गरमी अधिक मालूमहोगी।
बुहराल ईतकाली के लक्षण यह-तपका जोर गौरम
बाद कान निकलना और सारे शरीरमें याएकजगह पीडाहोना
कोई डरकी वातनहोनी और जोर और नाडी का ठीक हो
काने वहना और चीफ्ड और आंसू और रेट सिरके रोगों
केबुहरान की पहिचान है और रालवहनाती के रोगों की और
अनासीर कारुपिरवहत्तसेरोगों कावुहान जैयद है कभीगरने
केचिन्हमालूम होते हैं औररोगी अच्छा होजाता है और कभीमर
कोहोता है और रोग घरजाता है उस समय नाहीनर्मली याद
होजाती है।
उड़ान जैयद कीपहिचान यहहै किमवादभच्छापका
होगा और चहभलिभाति निकलेगा औरनाही तरीक और पुष्टहोगी
हान रदीइसके विपरीति है-दुहरान के दिन कोई रोसी और
नरें जोमवादको निकालें दूसवाले नुल्लाव आदिनदेनाचा
हेयै-जो होसके तो भोजन भीनरें और नहीं तोडलका भोजन
३५२.
देनाचाहिये औरलक्षणोंकोदेखके मिजाज की मदद करें-जोम
वादनकसीर से निकालाचाहिना हो. ::
उसेननिकालसकताही तोमदद।
रिमरकवें और गरमपानीसे तरेंडादें-जोउलटी
टीकरावें औरजल्लावचाहती होतोमुलैय्यन
भीजानोंजव मालूम होकि वहरानइतकालीहै और मवाद कि
सीजगह गिरके उसे बिगाडेगा तोमवाई को.धिर गिरावें
कुछ हानिनहो-जैसेकि जोजगह उसकेक्रावरहो उसेंकसके
होतोवायेहाथसे कोई कडाकामनकरेंया
उगवें जोमवाद
स्व. पिडलियोटखनोंतकका
सें-औरजोमेदे मेंहो और छातीकी और गावेतोबाहें औररानकसे
मूवमें पसीना निकालें और पसीने में मूब उलटीमेंदस्त औरदस्त
में उलटीजवनक अधिक आवश्यकताचहोवुहरान में मवादनि
कालनावदनकरें और उसे शरीरकी किसी उत्तम औरकमजोरी
जगह परनगिरावें रोगके आदि गेंवुहरानवहुत खुराहे-बहुतसे
हकीमजो रोगदोपहरसे पहिले उत्पन्न हो उस दिनको है
साव में गिनतेहैं-औरजोदोपहरके पीछेहो उसेलोडदेते हैं-जन
के पीछेजोत्तयहोउसी समयसे गिनीजावेगी रोगमें कुछ दिन
इरान के दिनहैं - उन्हें बाहरीयाकहते हैं और कुछ योमुल।
नजारअर्थातखवर देनेवाले और कुछनवुहरान के नखवर
नेवाले परंतु कभीर वुहरान उनमें होजाताहै-उन्हेंवाकैफिलवस्त
कहतेहेजैसाकि आगकेनकशेमें लिरवाजावेगा-चुहानकाजोर
औरैकडापन आउ दिनतकरहवाहै फिरघटजाताहै।।
।
जिन दिनों में वृहरान बहुत करकेहोता है औरअच्छाहोनाहै कहग्यारह दिन उनकीनगहहमने एकका कनकशेमे लिखा है-और जिन दिनों में वुहरान रदी औरकुराहोताहै ह आठ दिन है नकीजगहदोका मंक लिवाहै- और जिन दिनों में वुहरालनही होतावह तेरह दिनई उनकी जगह तीनका अंक लिखाई और नमेंजुल्लावसी देसकते हैवेखटके होकर औरछः दिनवाकै फिलवस्त उनकीजगह का अंक लिखाहै। हिन हाल दिन हाल दिन हाल दिन हाल १ वुहान ११ २ खिलाफ़ी ९२ २ १३ २१ १ २१ २२ । ३ २३ २३ ३ ३३ १ ३ ३ ४ or m 10 १ १४.१ २ ५ २५. ३ २६ । ३ ६ २ १ ३७ ar ७ om ३८ ३ ८ २।२ १८ lor ए ४ K: २ lov ३० २० २ कभी देखने में रोगमालूम नहीं होता-छटाइनवुहान जैयद होजाताहै तोवह दिन सानवा होताहै- क्योंकिव्हरानजैप
दछटे दिन बहुत कम होता है।
नकशे में जो दिन लिखे गयेहैं उनमें गरम रोगों कावुद्ध
रान होता है- और पुराने रोगों में महीना नौरवास दिन कीजगह
है जैसाकि कफकी औरसौदाकीस्वा में सात महीने गिब्बकीसान,
बारियों के बराबर हैं-इसलिये वहान १२० दिनयासात महीने
यासातवर्षयाचौदह माइक्कीसवर्ष पीछेहो।
वारी वालीप मेंवारीके दिन वुहान होता है-उसदिन
पिरमरानरकवें।
वुहरान में बहुत बुरेखुरे लक्षण होना मरने की पहिच
इतिश्रीवुहरानका
वर्णनसमा
राना
[211
२
१२
विक्लामी
हरन
बुन
३२
133
133
४
13
मल
३]
39
रोजुनम
3
मिलीहुई औषधियोंकेक्ना
नेकी विधि-
45.-
'रबाहै।
इस पुस्तक में जौचनी हुई औषधे रोगीको देने के लिये
बताई गई हैं उनके वनाने की रीति अव लिखते हैं और जिम एष्टि
में उसका नाम भागयाहै उस एष्टि काभक मी उसके भागे लि
इतरीफ़लधनियाका ना
तीनोइडे बहेडा-हिलेहुये मामले- धनिया-उस्तरतु
इस-मुंडी-वनफगे के पाल-प्रत्येकनोले तीन तोले रोगन वा
दाम में मिलाके तिगुने शहद केकवाम में मिलाके चालीस
दिन तक जौ के अंदर रसको और उसमें से एक तोले यादोतो
इतरीफ़लगुददी
उसखुडूस- गद्जोवकरीके गले में होने है उन्हें
सुस्वाके-विसफायज- प्रत्येक १७ ।। माशे
हड आमलातुर
बुद-प्रत्येक २८यमाशे-इझीमून ॥ माशे-अनीसून-मस्तगी
लेखावें॥
मेज M लोंग- तज प्रत्येक सातमाशे- नौशादर-शैतरज-नरकचूर-रपरी कून- प्रत्येक माशेकछानके उसी प्रकार से शहद मेवनाले और १७॥माशे रवावें। अयारिजफ्रीकर CAL वालछड जारचीनी- ज-हब्बुविनसान- बदविला सान-सस्तगी-आसारोन-केसर- प्रत्येक रक तोला- एलओ दो तोले या तोन तोले सक्को कूटलान के कंजीवनावें उसने से सात माशे पेट खाली होने पर शहद और गरम पानी के (सायदें। असानासिया मुरमक्की- अफीम- वजकल वजन-केसर-जुन्न वेदनर-कूट-करमाना- खशखाश-गाफिस-वफरीकाहनी सींगजलाहुा-डियेका कलेजा सुरवायाहा-सबकोदराव रलेके कूट कान के घोलने की दवाघोलके शहद में मिला और छ: महीने पीछे ३॥ माशे कासनी के पानी या शहर के पानीके। सायदें। बासलीकून १७३ चादीका मैल- समन्दर फैन प्रत्येक रामाशे-स दाकलाई-जोद-नमक तुरकी कालीमिरने- नौशादर-दारफि लफिल-प्रत्येक ॥ माशे-जलाहुभा तांची समागे-लोग- लडीला प्रत्येक रामाशे-कपूरररती- तेज यात-जुन्दवेदस्तर वालछह-सुरमा प्रत्येक ३॥ माशेड्न सव को पीसकर सुरमा स
वनालें।
वरुदवनफ़सजी
वनफशेके फूल-धनिया बवूलकागोंद कतीरा
प्रत्येकामाशी निशास्ता. माशेकूटवानके यांचवार,
सिरके में भिगोके छायामें सुखायें फिर सुरमाक्नालें। "
बनादिकुलकुसर ८ गाव
स्वरबूजे और ककडोके वीजप्रत्येक रामाशे-के
हू-कुलगे और स्वस्के वीज-सफेद बालबनन-वादाग
कितीरा-निशास्ता-मुलहटीकासन-वश्वाशसफेद-गिले
मिनी-कंफसकेवीज-प्रत्येकामाशेयूटछानकेवीदानेकेलुत्र
वमेंकुसक्लावें और२०माशेखावें॥
तिरयाक
गोलमिसफेद-सुरमक्की प्रत्येकरमामाशे-जित
यांना शामाशे-ज़राबन्दमुरहरन-माशेहरमुलकेवीज़-
कलौंजी-जीरा-प्रत्येक माशेकूदकानकर गुलाव मेंगूधलें
औरवाकलेकेसरवावें।
सोटकीमाजून
सोत० माणे-तवूलकागोद-इलायचीकेदाने प्रत्य
कश्माशे-लोग-दारचीनी प्रत्येक रामाशे-जायफल केस
र प्रत्येकामाशे वसवासाश्चमाशेवारछानके०५माशेमि
श्रीकीचाशनी में मिला।
".
भिल्लाबेकीमाजून
.
काली मिर्च-दारफिल फिल-कालीहड़-बहेडा आम्
लामुंदवेदस्तर-प्रत्येकरमाशे मोथारामाशे-कूट-अस्लेव
लादुर-विरंगकाचिली-शकरतंबरजद-इन्धुलगारमत्येक
१०माशेकूरछानकेदुगनेशहद औरभरलवलादुरकोचाश
नोकरके मिलावें औरछ:महीने यीछेखावें।।
जवारिंशजालीनूस
बालछड़-छोग-इलायची-नन दारचीनी-सोट-कुली।
निन केसर-सफेद मिरचें-दारफिटफ़िल-दयौईकूट-मोथा-अवधि
उसान-हब्बुलआस-आसारोन भीगचिरायता प्रत्येकनोलेभए
मस्तगीपतोले- औरसबकेवरावर शक्कर दुगनेशहद साजून
चना औरसात दिन पीछे रमाशेखावें।
अदकीमाजून
जोपचावकोरीक करती है और सूरवलगातीहै औरती
भौरकफको मेसेदूरकरनी है।।
केसर-सोउदारफिलफिल-नायफल प्रत्येकामा
शिवालछडइलायची केदाने वसवासा प्रत्येक माशे लोग
मस्तगी प्रत्येक १०॥माशे कचचाजद-तन प्रत्येक सामारो
कूदलानके दोसेरशवकर मेंचाशनी कग्लें।
जवारिशरवोजी
कन्दुर अजवायन-मस्तगी-मोथा. वालछडप्रत्येक
.
20
.
मारो और मुनक्के कोसिरके में भिगोकरनिकालनेमूनलें और
योसकर उसमें से १०५माशे इन्वुलासर माशेसवकोकूट
हानके दुगनेशहद औरकन्दकीचाशनीकरकेदवाओंकोमिला
-औरामाशेसेटमाशेतक सावें।
हवकोकाया॥
फीकरावामाशे-तरवुदसफेद-मुनाइभासकमूनि
या उस्तत्वस प्रत्येकामाशे बकायनरारत्तीकूटछानके
सोफकेपानी मेंगोलियांवनावेंयह सब एक वारकरवानेको
है।
हबुलमिस्क
गोलियाबनावें।
कालिया लोंग अकरकरा प्रत्येकामाशे गुलाव
कि फूल.मफेद चन्दन हड़ अत्येकमाणे वसलोवनशामाशे
मुश्क कपूरमत्येकदागकूटछानके गुलाब और पानके भने
हब्बेराबन्द
राबंद माशे-गारीकून आमा सुष्माशे जरा
वन्द दोदांग-गूगलशामाशे-अनीमून दाग.कूटछानकेगो,
लियांवना यहदोबारके खानेकों है।
हब्वसिकचीनन
सिकवीनज एलुभा.गारीकून गूगल वरावरतेनेगी
लियांबनावें और माशेसे भामाशेतकरखावें।
।
हब्बरवाज़रान
और
भुताहुभासकमूनियां जालशीर प्रत्येक माशे व
कायन भामाशे नोशदरमाशे गारीकान माशे असार
जपीकरा लामाशे इंज़रुत.९४माशेतुरखुदरामाशे-
कूट लानके गंदने के पानी में गोलियांवनावें और ३ ॥ माशे
खा
हब्बबासली
वालछड़.तन.हव्व औरंजदपिलसान आसारोन म
स्तगीदारचीनी केसर-प्रत्येक शामायेनमवा माशे.सुनी
सकसूनियां.१४माशे उस्तखुडूस-वकापनमत्येकाम
'तुर्बुदरामाशे लुगारदमाशे-कूट छानके पानी में गोलि
बनावें और माशेस्वावे।
art
हब्बसिन
भुनीहईसकमूनियारली.उसाराँगाफिसास्ती.
गारीकनपत्ती सिनशामाशे कूटछानके
नीनेगोलियांवनालेयहरकवारखावें।
हब्बइफ़तीमून
जुस्तखुडूसपदांग कालीकुटकी नमक प्रत्येक
माशे.विसकायजे.गारीतून प्रत्येकामाशे भयारिज.
शमाशेगोलियांवनाले यह सवदो चारयाचारवानेको हैं।
दिवालमिक मिला
मस्तगी कवचागद तुरंजके छिलके दारचीनी.लोग
बालछड.सुज जायफल कवाचा बड़ी औरछोरीइलायचीके
दाने जोग्या सरकंडेकीजड़ जंगलीतुलसी.पिरजमुश्क नममा
म और वालगकेवीज दौनामरुवा विनाविवेमोती (सुद-क
हरुवाशमई कचचारेशमकटाहुभा.मफेद औलालवामन
सत्येकश्यमाशे मुश्क रामाशे-हडकेमुरब्वेकेशीर गूध
विमानवनालें।
: दवायतुर्बुद
तुर्वदसफेद छिलाहुनासाफकियाहु॥३५माशे-सो
मस्तगी प्रत्येकामाशे कंदवनसबके वरावरकूटछानकर्फी
कीवनाचें और सामाशेखावें।
दवा उलकरकम
केसरमाशे.आसारोन द अनीसून फितरासालय
न.रेप.मरमयकी प्रत्येक रथमाशे लालेछड २९माणे मीगकूर
तिजफकाह सरकंडेकीजड हम्बविलसान प्रत्येक माशे मुले
गजोद मस्तगी.गाफ़िस प्रत्येक रामाशे-विळसानकातेल
माशेकूटहानकेशइहमें मिलाकेमाजूनक्नालें औरमाउलमाल
केसायधमाशेरवावें॥
SARARIA
दवाउलतुरंजेवीन
221
११
ट
तुरंजबीनसफेदमाफकरके १०५माशेंडेदसेरदूधमेगे
दावेंजरगादीहोजावेतो॥माशेरवावें॥
जरुरजसफर
इंजरुत लुभा रसोत प्रत्येकामाशे लेसर-मुर-सत्यें
कामाशे.पीसकानके भाव लगावें।
मस्तगीकातेल
मलगी ५माशे.रोगन गुल१७५माशे.एक शीशीमें,
डालके गरमपानीमें उमेरकवें और उसकेनीचेभागनलावें.
यहां तक कि वह मस्तगी तेल में पिघलनावे. फिर उसे निकाल
कूटकातेल
कूट ३५माशे.काठी मि.फरफियन प्रत्येकामाशे.
भवारकरामाशे.जुन्दवेदस्ताणामाशे. जैतलातल १७५मारों
कूट और अकरकारे और मिरचीको३५०माशेपानी में रातदिनाम
गोवे फिरोटावेंकिगाधानलजावे. फिरतकातेल मिलाके भी
सवें, किनिरातेल रहनावे-फिरशुन्दवेदस्तर औरफर फियूनको
नाटकानके आगपरसे उतारके डालदें।।
केसरकातेल
मुरमत्रकी ||माशे.चिरायता पक्षमागे केसर कई
माना.प्रत्येक समारो-चिरायते औरकेसरको अलग औरमुर्रम
सक्कीकोगलगसिस्क में भिगोवें पांच दिन तक औरछटेदिन:
.
३६३
कर्दमानाको भौसिरके में भिगोवें एकदिनसात रोजकानके
स्लिीका तेल मिलाके मोटावेकिसिमका जलजावे औरतेलरह
जावे
M
- बिच्छूकातेलं
20
ज़राबंद सुदहरन निन्तियाना-मोन्या-करनेकीजडकी
चालमत्येकवतोले चूटकरंथीशेमेंभरें-और६०५ माशेकडुयेबा
दाम या निष्ठीकानेठ उसमें डालदेशोर उसका मुंहवंदवारर्वधूप
मिरवडे गरमी में सात दिन और जाडोंमें चौदह दिन-फिरउसद
वाको उसनेलमें भलीभांति घोलें और दोबडे विच्छूजीतेउसमे
लोडहें फिर मुंहवंदकरकें चौदह दिन और धूप में बचें फिरछा
nisܢ
सुहावकातेल:
इरेसुद्दावका गर्करतोळे.तिलीयानैतकेनेल में जो
तोलेहो मोटावे कि पानीजलजावे।
नारदीनकातेल :
चिरायता-वरलगार सोदकफी अद बिलमान
लाख-लेजपात-आसकेपत्ते-नास्दीन-संरकन्डेकीनड़-सना
गबहल करदमाना दौनामरुवावरावरलेके कुचलकेशन
दिनगुलाव और पानी में भिगोवें फिरकानो तिलीकातेल मि
लाके औटाकि निरातेन रहनावे
Y
13
४
रोगनमोर्ची
कानेटेजोकवरों में होते हैं:००मकड़ें-और एक
शीशेमें जिसमें चमेलीका तेल पडाहोनीतेडालें और
गग्मीकीधूपमें सात दिन तक फिरसाफ करलें।
आसकोतेल
इन्युल आसकूटकरतिलीकेतेलमें मोटावें-फिर
रोगनामला
4
छिलेहसामने आसके पत्ते-सनोवरकेजह
लवरावरलेकर कूटके पानी में गोटावें-किगलजावे फिरकान
केतनातेल मिलाके पानीकोजलाकि निरानेलरहनावें।
सोयेकातेल
सोयेकेचीनकायामेंमरवाके तीनतोलेले भौरति
तेल ५७॥ तोले शीशेमे भरके धूपमें २ दिनतकरक
फिरलानलें।
गोरवरूकातेल
होगोखरुकोकरके पानीजसका तिल्के तेल में मि
आगपरजलावेंकि निराल रहजावें।
गेहूंकातेल
इसकेवनाने कीदोरीतेहैं-सकयह कि गेहूंको आनिर्ण
शीशेमें मरके अपरसे कपड़ौनीकरें और उसके मुंहमरेशे किसी
छालके या तिनके भरदें किगेंहूं गिरनेनपावें-फिरउसको किसी
वर्तन में किनीसवेछेदहोलटारबकेजपरइसके गर्ने
पिलेचुनें औरआगलगा-औरतेनश्वाननमेंरवदें कितेलाउमा
मिंटपकाकरें।
निकलताहै।
दूसरीरीनियह हैकिगेहूको किसी साफपत्थरपरर
स्वकेयर से कोई लोहेकीवस्तुगरमकरके जोरसेदवामेतेल
सुर्मारोशनाई
नुहासजलहुआ.शादना प्रत्येकामाशे गोल
मिर्चे दारफिलफिल कैसरबकायनामाशे-जंगार सलुजा
नमकमर्मनी प्रत्येकामाशे इकलोमिया-अमाशेपीसकेस
रमाक्नालें।
शा
कालीमि.दारफिलफिल सोट तन-हास्चीनी.
लोग-कुलीन प्रत्येक तोळेभरन्दोंनोंतोटरी औरवहमने.व
जीदालालिसानुलासाफीर भीगकूट-मोथा वालछड़-मृत्य
कश्तोले कूटछानके शहदमें मानूनबनालें।-
सिरकेकी सिकंजबीन
माजूनज़र ओंनी
.
33
सिरका और शक्करदोनोंराबरलेकर कनालें।
सिकंजवीनवजूरीगर्म
32
'उसारागाफिस.रेवन्दचीनी-प्रत्येकमाशे कर्फस.का
सनी और कुशुसकेचीज-सोंफ अनीसूनप्रत्येक आमाशे किज
औरसोंफ और कर्फसकेजडकीछाल रामाशे-सबकोकुन
लले १२१५माशेपानी में भिगोने औरपानीसेचौथाई सिरकाउसमे
डालें-परातदिन उसेमीगारक-फिरऔटाके माफ़करलें और
तोलेकंद में चाशनीकरलें।
सिकंजबीनजनसिली
अनसिलज्छटांकलकडीकीछुरीवनाके काटे-छोटे
छोरेटुकडे औरपुराना सिरका २०२५माशेडालें और औटावेकि
विलकुल गलजाने और सिरकापांचवां हिस्सारहजावे-फिर
उसमें गुणाकंद मिलाके धीमी आंचमें पकावें-औरकार
सके भर्थात झाग निकालतेजावे यहांतककिचाशनी पर र
सिकंजवीनइफ्तीमून
उस्तम्खडूस. सौंफ-शाहतराप्रत्येकामाशे उफनीमून
विषफायज सनाय काविलोहडप्रत्येक माशे-इनसबको।७५
माशेसिरके में भिगोके भोराककानलें और माघसेरकंदमेवा
शनीबनावें।
भाजावे॥
।
सिकंजबीनसफरजली
वहीविहीताजी कूटकेपानी उसकाऽसेरलें और/पाव
भर सिरका मिलाके ओटावे-फिरमरकंदडालके किवामगर्थात
चाशनीवनालेभोर जोसिरकेकेवदलेनीवूकाअर्क मिलाकेनौगति
लामकारक होगा।
सुफ़्फ़चारतुखम
ईसबगोल-तुरक्मरेहा. कनौचे भौरवारसंगकेवीन
वरावर लेके किसी मिट्टीके वरतन में भूनें और गरम पानी ऊपर
डालकें लत करें औरथोडासारोशन गुल यावादामडालके
खिलावें॥
सुफ़्फ़हब्युलरुम्मा
31
खट्टे अनारके दानेभुनेहये माशे-करोया-धनियां
मत्येक १४माशे-काम-खरव तिवतीमत्येक माशे-गुलनार
गर्दसिमाक मत्येकामाशे-करोयाऔरधनियेको सिरके में
भिगोके सुखाके भूनें फिरसवको कूटछानके फंकीवनावें गोरख
माशेस्वावें।
सुफूफ़ मिकलियासा
ईसबगोल७०माशेहा-वारतंगमरुके वीज ववूलका
गोद-गिलेभर्मनी-खशरवाशमत्येवामाशे-चूकेऔरकला
केचीन-निशास्ता-प्रत्येकुरामाशे-वीजोंकोभूनके भौमवावी
सवकोकटके मिलाद-और टंडे पानीकेसाथ फकावें।
H
-
30
सुफ़्फ़तीन
ईसबगोल-मसूऔररेहाके बीज निशास्ता-मुनेहसेच
केकेनीज-गिलेअर्मनी.वंसलोवन बबूलका गोद-सबका मित्र
यास्पगोलके करके मिलाके १माणेरोगनगुलयावादामने
चिकनाकरके गुलावके साथफंकावें।
मुफ़्फ़तेरातेजक
तेरातेज़क कोस्कगतिदिन भंगूरके सिरके में भिगोवे
। औरथोडासाजौका आटाउसमें मिलाकर गूथे. और धीमीग
रागकेननूर में रोटी उसकी पकायें किजलनजावें और सूख
जावे फिर उस रोटीगे से १४०माशेलें औरसंभालकेवीज-इ
सकूल्लूकन्दीयून विजकेनड़कीलाल उजवामत्येका।
माशे.गन्दनेके वीज.जोग-विरमानी-किसकराति सिरके में
भिगोके सुनलियाहोप्रत्येकरमाशेसवकोकूटछानके
संजनदांतोंकापुष्ट करने
वाला
गुलनार-फिटकरी-आमला.अकाकिया बराबरले
मजनवनावें।
दूसरामंजन यहहै-मुर-तृतिया फिरकरीगई सिमाकर
लाबके फूल-रवहेअनार के छिलके आमलेका उसाराम
गुलनारकोज-वरावरलेकेकूटछानके मंजनवनावें।
कीवनालें।
-माजू
कूटकेतेलकीदूसरीरीति
वनरामाशे-मुस्मक्की-मारचोवाप्रत्येका०माशे.क
हनाकर २५०माशे-सवकोकुचलके गुलावमें एकतिदिनभिगो
वैफिर भौटाके औरळानकेतिलीयानैतकेवलमें जोमानीसेति
लाही मिलाके औटाकि निरावेल रहजावें।
सुरतीनान
खहे और मोटे अनार के छिलके प्रत्येक १०५ माशे.
माञ्च-गुलनार-फिटकरी-जलाइभाकाग़ज. अकरकरा प्रत्येक
३५माशे-सिमा ५शामाशे-नमक नौशाद प्रत्येकासमा
गो-कूट छान केहबुलासके सिरके मेंगूध के टिकियावनाके
सुरवारकवें।
शर्बतवर्दमुकर्रर
गुलावके फुललाजेशचूदारजीरा गौरसवनी निकाल
के सेरभरन्हें और पांचमेरपानी में गोटायें-यहांतकविरंगऔर
स्वाद औरमांध उसकी पानीमेंआजानें फिरमलके उसकाफोक
निकालडालें और उतनेडोनयेफलहालके मोरावे-और उसकामी
फोकनिकालडा इसीप्रकारसे जितनीवारचानयेफूलबदल
तेजावें-फिरकानके पानीले बरावर शकरमिलाकेनिवागंकरले
औरश्यार तोलेगीवें॥
शर्बतइफ़संतीन
१३७०
इफसंतीनामी आमाशे-गुलावके फूलरमाशे-३५
हरपानी में भिगोके बोटावेंजवचौथाई रहनाने तो-मलके छान
किशकर मिलाके किनामकरें।
शर्बतचूफा
सूखाजूफाडंठल निकालकेश्माशेलें-औरउससेदुग
नेपानी में भिगो-फिरओटाके १०२माशेकंद और स०५माशेश
इडालके किवामकरलें।
शर्बतस्वशरवाश
पोस्तस्वशरवाशदानोसमेत १००लें-उन्हें कुचलकेदो
मेरपानीमें भोटावें फिर पासेरकंद मिलाके किवासकरलें।
शर्वत पोदीना
खडेभनारकारसएक हिस्सालें-औरहरेपोदीनेकारसकी
टकेभाधाहिस्सालें फिरदोंनोंको मिलाके औटावें औरउसकेवर
(वरकंदहालके किवामकरलें ॥
शर्वतदीनार
रेवंद १८माशेकशूसकेवीजामाशे-गुलाबके फूल
माशे.कासनीके वीजर माशे.कासनीकीजड़१०५माश:
विदको कुचलके योटली में बांधके और भौषधोंके साथ भिगो|
दि और हलकी आंचपर ओटा फिरान के कंद सफेदसा
शेडालके किवामकरलें-और यूपमा से ५मा.औरत।
माशे.तकपीवें॥
।
लालें।
शर्वतहब्बुलास
हब्बुल आमहरा ६०५साशेकुचलके औरहरामाजूउसके
बरावरकुचलके मिलाके दिन तक यानी में भिगो फिर औटाके
रावर कंदहालकें कियामकरलें।
शर्वतगंजवार
अंजवारकीजड़ और छिलके औरडालीप्तोसे जातो
ठेतकलें औरकुचलके एक रात दिनगरम पानी में भिगोवे और
हलकी आंचपरमओटावे और मलके छानके ४०५ौशेकन्दमि
लाके किवामकरें और चाहेंतो यातोलेरबहे अनारकैवाने भी मि
शर्बतगाक्जुबा
'हरीगावजुवीकारम निकालके औरकन्द सफेद मत्ये!
कासेरभरलेके और मिलाके औटावें और कफ अर्थात मागनिका
नडालें फिर गुलावर माशेडालके निवासकरलें।
शर्वतवालंगू
वालंगूके हरेपने कूटकेरसनिकाले-एक हिस्सालेके
हुगनीकन्दडालके किवामवनालें।
शर्बतनीलोफर
नीलोफ़रके फूलहरे२०३माशेचौगुने पानीमेश्रावदि
रभिगोयेंफिर ओटावेगव निहाई रहनावे तोमलकेसाकरलें,
.
"?
३३२
और २०३माशेकन्द मिलाके किवामधारलें।
यहीरीतिशतवनफशावनानेकीहै।।
शर्बतसन्दल
सफेद चन्दनकाचूरा खुशबूदार नववे माशेलेके
४०५माशे. गुलाब में दो राति दिन भिगोवें फिर गुलाव अगा:
लगनिकाल लें और चन्दन में थोड़ा पानी डाल के औटावे
फिर कह पानी और गुलाव मिलाके ८१ माशेकंदमें किवाम
करलें।
शर्बतउन्नाव
उन्नाव एक हिस्सेचार हिस्से पानी में भिगोके औटा
जव चौथाई जलजावे नोदुगनी शक्कर डालके विवाम
विनालें।
शर्वतकेवड़ेकीभी यही रीति है-उसकीवाल को और
नाचाहिये।
शर्वत फिंजनोश
कचचे अंगूरकारस४३ माशे सिमाक-माजू.गुलना
र-गुलावके फूल-कुन्दुर सातर-मोया प्रत्येक ३५माशे कसरी
फिटकरीमत्येकामाशे लोहेकामेल १३५माशे-दवाओंको
कूटके अंगरकेरसमें गोटावें-जबतिहाईरहजाय तोमाफचर
करवछोडे।
६ शियाफाकुन्दुर कुंदुर३५माशे-उशक इंजस्तप्रत्येक सामाशे. केसरमाशे मेयीके लुभाब मेंशियाफावनावें औरजबाव यहोतो उसेटपकावें औरजोपाल और सियोकोपकाना होतो पटीभीवांधे। शियाफ़अवियजकुन्दुरी कवीरा-बबूलकागोमत्येक श्यामाशे-निशास्तावामी न्दुर-प्जीयोसलानके ईसबगोलकेलुभाव बनावें। शियाफअहमरलीन वाय घुलाहुभाशांदना ३५मात्री-जलाहुभानांवारमाशे. बबूलबागोंद कतीरा सुरभक्की प्रत्येक माशे-बुतुद्-काहर व मोती, तेजपात प्रत्येक १४माशे दम्मुल उमरखवैन केमरम त्येकशामाशे सीप्रकारसेक्नाले। शियापंज़गार जंगार-बवलकागोंद सफेदाप्रत्येक मामे पीस केक्नालें। शियाफग स्लुआ कुन्दुर जस्त-दम्मुल अस्ववैन-गुलनार- सुरमा-फिटकरी. प्रत्येक तोलाजंगार-इमाशेषीसकेक्नाले)
कुर्समाज़रीन
माजीयूनसुदेब्बर-पीलीहड़के छिलके जौका आग
वरावर लैकैशकर मिलाके कुर्सक्नावें और४ामाशेशर्बत गुल
केसाथरनायें।
कुर्सअनीसून
'इफ़संतीनरुनी-आसारोन करफ़सके वीज-बा
दाम अनीसून कूटछान के पानीमें गूधकेबनावें और सिंचन
चीनने साथ।
कुर्सकिन
ज़रानंद तवीलाशे किनकेनडीहाल उशकार
प्रत्येक परमाशे-समालकेवीन.गोलमिर, गत्लेक माशे
शिकको पुराने सिरके में घोलके और नौषधोंकोकूटछानके
मिलादें और माशे सिकंजवीनके साथरवावें ।।
कुर्सकौकब
वाकड- जुन्दवेदस्तर- तन- तीनुलवहींग वैरव
नके छिलके मुरमक्को प्रत्येक समाशे अफीम-केसर भी
ठान्द-गलाईआमनरक-प्रत्येक भामाशे.सफैद खारवाग
दू-अनीसून सीसालियूस-खुरासानी अजवायन सुरवामी
करफसवेवोन प्रत्येकीमाश गोदीको पानी में घोलके
सन औषधौंको पीसछानकेशाहदमें धकेसवनालेका ।।
यामें सुखावें।
27117
m
१०
૧
३१
: कुर्ससुम्बुल
१४
वालाइ- फिकाइ सरकंडेकीनड़ तनजावन्दत
वील-वारचीनी चिरायता अत्येकपामाशे कसर अनीसून.
मुरमक्की काहवाकूट-कालीमिर्चे.प्रत्येक शामाशे-गूगल.
मागी.प्रत्येकामाशे-उशक पामाशे पहिले गूगलकोयला
बमें घोलें फिर और ओषधीकोकूटछान के मिलाने और साद
माशेखावें।
कुर्सरलाऊस ent
माशेखावें॥
काळसके वीज.अनीसून प्रत्येक ५२॥माशे इफ़संती,
निभाशे. मन.माशे.मुरमक्की कालीमिरचें. जुन्द अफीम
प्रत्येक भामाशे-सबकोकूटछानके पानी में कुर्सबनावें भोरण
कुर्सकुहल
सुरमा-धोयाहा-शादना दनुलभववैनमत्येक
74/माशे गुलनार-माजू अत्येक माशे-गुजनकासीगजलाहमा
अकाकिया प्रत्येक शामाशो-लाइन केसएमत्येक माशे.
सिराजपामाशे कुटलानके हुरे वारसंगके पानीमें गूंथ के बना
वें- और ३॥माशे बार तंग औरकुलफे के पानी के साथ रखा।
कुर्सगुल
.२१ वंसलोवन इपसंतीन-बालूटूडप्रत्येक मारे
१०॥ माशे-गुलाब के फूल मुलेटी प्रत्येक मारो
चरंजवीन
३७०
छान के गुलाव में कनावें और माशेया उससे अधिक
कुर्सकहरुवा
कहरुबा-सुद-मोती जलीहुईकोड़ी
कासीगजलाहुआ-धीयाहुभाशादना-प्रत्येक गामाशे मुला
विकेफूल-कुलफेकेचीज धनिया सिमाक-भुनाहानिशास्त
औरववूलका गोंद. गुलनार प्रत्येक १७॥माशे वसलोचन
अक़ाकिया. बरगद की डादीकाउमारा प्रत्येक माशे.कूटी
छानके वार तंग के पानी में गूधके गोलियां बनावें और अमा,
शेखावें।
पी
कुर्सकाकनने
ककडीके बीन३५माशे-काकनज १०॥माशे-कर्फ
सके बीज भंग गिलैमर्मनी-बवूलकागोंद दम्मुल भवबैन
वजसलवनजप्रत्येक०माशे-अफीम-३॥माशे-कूटछानकेवन
बैंऔर पामाशेखावें॥
कुर्सजियावितुस
बंसलोजन मुलहटीकासत प्रत्येकाशामागे कुल
फिौरकाइकेबीज-गुलावके फूल. मिले जर्मनी अत्येक
माशे-धनिया-चूकेके वीज-प्रत्येक माणे.सफेदवंदन ।
लनार सिमाक ववूलकागोंद प्रत्येक माशे.कपूर १॥माशे
कदछानने कुलफे औरा के पानीमेक्नावें ॥
कुर्सबीलुइम
ककडोके वीज हमाशे.विशास्ता-कतीरा गुलनार)
सिक दम्मुल अरबवैन.बलूलका गोदप्रत्येक शामागे कूटछान
विकुलफे.यावारतंगकेवीजवनावें॥
कुसनफसुहम
गिलैजर्मनी कहरवा-बबूलकागोंद दम्मुला
लकेत बसलोचन, निशास्तो कनीय अकाकिया गुलनार,
बरगद की डाढ़ी वरावरलेके वारसंग औरकुलफे के पानी में
धकेवनावें।
कुर्सतबाशीरमुल्ययन
निशस्ता.वंबूलकागोंद सफेरखशखाश कतीराम
त्येकामाशे. स्वीरेफकडीकहकेवीज प्रत्येक रमाशेतुरंजबीन
माशे-सफेदसलोचनामोशेकटछानके ईसबगोलने
मुआवमेंबनायें और थामाशेरवावें।
कुर्सतवाशीस्कालिन
वंसलोचनामाशे.कुलकेवीजभुनेहुये माशे
लावके फूल २४ माशे-सफेदचन्दन-बबूलका गोंद का
रा निशास्ता-शाहबलूत-चूकेकेवीजसवमुनेहुये सुलही
कासत.जरिशक प्रत्येक अमाशे गुलनार अकालिया।
३८०
मत्येकामाशेकूटछानके सेवयाज़रिपककेपानी वनावे
औरामाशेखा।
कुर्सकाफूर
कपूर रमाशे गुलावके फूल-तुरंजवीन प्रत्येक
माशे.स्वीरेककडीकेवीन.बंसलोचन मुलहटीमत्येक १५
माशे-काइके वीज.२८माशे-कुलफेकैवीन समाशे कासन
किचीज समाशे. कइकें बीज माशे मुलइटीकासन ११
माशे कूट छान के ईसबगोलके लुभावमें वनावें औरणमा
शेतकवावें
कसूनी
जीरा- सदब्बर मुद्दाच सौंठ-काली मिस्चेनमक
अर्मनीको शहदमें मिलाके मानूनबनालें।
कोहलुलजवाहिर
+ इसके दोरीते हैं एक यहकिलालफीरोजा मारक)
शीशा सफैदा- निशास्ता प्रत्येकामाशे-धोया आशादन
रिसोत. शियाफमामीसा केंकडेजछेहये इकली मिया प्रत्ये
कश्शमाशे-तूतिया वसलोचन-दहनाफरंग प्रत्येकामाशे
इंजरुतमोशे सुरमा७०माशे कपूर सोंटप्रत्येकाजी।।
माशेकचचे अंगूर रसमेंघोटें।
दूसरी रीति यहहै.सुरमागमाशे मार्कशीसी
१७॥माशे इकलीमियाजहवीधुलीहुई. वुसुद.मोनीपसमा
---
---
३८१
माशे.शादना माशे केसर १माशे-सुरमाबनावें।
कुहल अजीजी
जलाहुआसुरमा १७॥माशे सोने औरचादीकीरका
लोमिया शादत्ता तृतिया जलाहातांवा प्रत्येकामापीलीहर
के छिलके तेजपात काली मिर, दारफ़िलफ़िल. नोशादर
सलुभा. रसोत-केसर केंकड़ामत्येक शामागे मोट मामाने
कपूर जी. मुस्कतीनजौ. लौंगवत्तीमज्ञी, पीसके सुरमार
बनावें।
करवावें॥
कलकलाननगरम
+- रेबन्द इसारागाफिस-अनीसून-वालछड़. प्रत्येक
मान माशे. ईसा प०धमाशे. माज़रीयून मुव्वर गारीकन
पीलीहड़, सिकवीनन प्रत्येक १७॥ माशे कूटछान के शह)
में मिलाके माजूनबनावें- और १०॥माशे-से चौदह माशेन
कलकलानजडी
+ गुलावके फूल-मुलैटी कासनी औरककड़ीकेवीन
मुलहटीकासवप्रत्येक माशे-उसाराइफसंतीनामाशे.मा
जरोयून मुदव्यर-पोलीहडप्रत्येक रामाणे-तुरंजचीन-अमर
तास सफेदकन्दमत्येक ५२॥माशे.मानूनबनावें औरसातमा
शेसे १०ामाशेतकस्वावें॥
३८२
लाजवर्दकेघोनेकीरीति
लाजवर्दको पीसके सुरमाकरलें- और पानी मेंगी।
टाले औरथोडासाजैतूनकालडालें फिर नितारें फिरबहुत
सापानी डालके होले होले घोलें और रंगीन पानी अलगवर्तन
म निकालेकेदक घडीभरपीछेतलछटवैटजायगीवहीतल
चटकामकी है इसप्रकार से फिर उसपहिले लाजवर्द को
बहुत सा पानी डालके वैगलें यहीतलछट सुस्वाके काममे
लावे।
माजूनफिलासफ़ा
काली मिरचें.दारफिलफिल सांग-दारचीनी.आमला
वहेडा.शैतरज हिंदी ज्ञरावन्दमुदहरज.खुसियतुस्सालिवचि
लगोजेके वीज.जावूनेकीजड़-दरयाईनारियल प्रत्येकामा
चावूनेके चीजपामाशे.मुनक्के प०५माशे.दुगनेशहदके किवा
ममें मानूनवनावें और दिनपीठेखायें।
मागूननुजाह
काविलीहडके छिलके.कालीहड़ बहेडेकेछिलके
छिलहुस्मामलेगत्येक ३५माशे.तुरखुद सफेद विसफायजड
कोसून.उस्तखुट्सप्रत्येक आमाशे कूटछानकेडुगनेशहदने
किवास में साजननाते।
लोहेकेमैलकीमाजून काट्रीहड-आमला-कालीमिरचे सोंट-दारफ़िल्लफ़िल. मोथा शैतरजबालछड़-सत्येक ३५माशे गंदने औरसोयेकेबीजा प्रत्येक पक्षमाशे लोहेका मेलधुलाहुआ.३५०माशे कूटलानके सगनबादाम मिलाके शाहदमें मिलावेंफिरसुभकामाशेमिला केचीनीकेवर्ननगरक- लोहेकेमैलकेयोनेकी रीति- मैलको दिनअंगरके सिरके में भिगोवें और मिही सोनगिरने- फिरउसे सुरवाकेकाममें लावें। मानूनलघूब Com * बादाम अवरोट-इन्चकर्तम-हब्बुलंबतम इन्वेसुनो। विरहन्चेजलम मिन्दक.पिस्ता नारियलताजा हव्यफिलफिला जनसवकीमींगी.स्वशस्वागसफेद दोनोतोदरीऔरवहमनें हिले, हुरेतिल-रखरबूजे. मिरजोर-पियाज-शलगम रतवाहिलयून. इनसवकेबीन औरसोरदारफिल्लफिल.करावा तज-वारचीनी) शिकाकुल-कुलीजनसबकोबराबरलेके कूटछानके. में मौजूनवनावें।
*
माजूनबुजूर
X गाज़र.शलगम-पियाज-सूली.हिलयन.रतन.
बीज.हब्बसुनोवर इन्दफिलफिल लालतोदरी
र पीलीतोदरीकेवीज-लिसानुलशसाफीर-शकाकु
(बृहमन-चूचीदानामोगकूट-सोट-दारफिलफिल-डीग.
सबवराबरलैकेशहदमेबनावें औरणामाशेताज़दूधके
।
बिच्छूकीमानून
जलाइभाविच्छ्रमाशे जिन्नयानाथामाशे-सोंडे.
मा.दारफिलफिल कालीमिर्च प्रत्येक माशे काकनजारा
जुन्दवेदस्तर प४ माशे-कूटछानके शहदमें
और जौखाचे-औरलउकेको जौदें।
विच्छूकेजलानेकीरीति
मोटाशाशाकपडौतीकरके-विच्छूकोउसमें छोडदें.
करके गरम तनूर में स्कगनि उसे रकावेंऔर सवेरे निकाः
माजूनहरुलयहद से
कडू-खीरे कृकसी और खरखजेके वीजोंकी
माशे हजरुल यहूद गसील १५माशे-कूटछानके शहद
'मिलावें और माशे से शामागेतकरखावें।।
1
३८५ माजूनकमीला कमीलाक्रांवलीहड़ बहेडा.मामला तुरखुद-मोठ- बराबरलेके कूटकानके तिगुनेशहद मेंयाकंदके किवाममेंमि लाकेवनाबैं और सातमाशेखावेंग - ‘सतंबूस्वमुलय्यन उननाव-लहसोडे-नीलोफर वैसकेवीन.बनायौ रबाबूनेके फूल अगलवासकाशीरा-तुरंजवीन-रोगनवादासपा लीमें ओंटाके मलकेछानके पिलावें। २५.२५) सुफरहसगीर गावगुवा मूगेकीजह धनिया-मोती सफेदवहमदनु नके छिलके कहलवा रेशम सपेोदजलाहुमा कुलफेकेजीन पतोले कपूरहमाशे-फूटछानके झंडके सुरव्वैके शीरे गेमजून विनावें औरणमाशेवावे॥ सुरहदिलकुशा मूंगेकीजड़-कहरुवा नरकचूर-दोननमत्येका माशे.कच्या महामार्ग काविलीहड और पिस्ते औरतुम्नने छिलकेकच्चारेशमकदाइभा.मोती प्रत्येकमा धनिया सलोचन.प्रत्येकालामाशे-दोनोवहमनें प्रत्येक माशे. गावजुवा-गाइतरा-वालंगू-सक्कोकुवानके अनार-चूका. भौरजरिशकका पानीप्रत्येक३५माशैलेकरसफैदकन्द गर्वता 7
ट
20
क्नफशप्रत्येक ४०५माशे मिलाके किनामवनावे.फिर
डालके माजूनवनावें॥
मुलय्यनमुबारिक
अमलतास इमली.कासनीकेयानीयानौके पानी में
पिलावें. औरथोडासानोरोगनवादामया रोगनगुलेमि
लालेबो अतिलामदायकहोगा।
मरहमवासलीकून
रातीनन- जिरू चर्चीवरावरलेके देवक
॥
22
जावशीर.जंगार गन्दाविरोजा मुरमलकी.
अमाशे.कुन्दुर-ज़राबंद तवील प्रत्येक १०॥माशे.
.१५॥मानो उश्करसामाशे गूगल सफैदमोम राजीनन
१४माशे गूगलको सिरके घोलके औरवाकी
तेलमेंजोदामाशेहो पिघलाकेसवकोमिलाके
चूनेकामरहम
चूनेकोपानी में घोलें फिर नितारकेदूसरा ।
इसीप्रकार वारकरें- फिर सुस्वाके रोगन गुन गावि
तेल में मिलाके मुलतानी मिट्टीडालके मरहमवनावें।
३७
मरहमकाफूर
मफैदेके मरहम मेंकपूर मिलादेनेसेक्नजाताहै।
सिरकेकामरहम
सुसंगतोले पीसके पत्तोले अंगरके सिरके औरतों
तोळेजतके पुरानेतेल में डालकहलकी आगपर पकायें और
बोटतेरहें किमुरदासंगजमनेनयाचे-जववह नलके कालाही
नावे और मरहमका किवामीकहोतो उसे निकालें।
मरहमसफैदा
रोगन गलतोले-मोम एकतोले पिघलाके थोडा
सासफेदा मिलावेंशतना किरोगन और मोमको माले-फिरी
भंडेकीसफैदी मिलावें औरकभी थोडासाकपूरभी मिलाले
दूसरीरीति इसकीयह है कि सपैदा औरसफेदमोम
रोगनगुल मिलाके मरहमवनालें।
मसूरकामरहम
मसूर बाबुनेके फूळ नास्तूना वैर-सवकोपानीमें
औटावें जनगाटाहोजावेनो ढिकीज़रदी और मुरगीकीचींगि
डाकेमरहमवनावें।
३८
सुरदासंगकामरहम
मुरदासंग-सफैला-केसर फिटकरीपीसके रोगनवा
दाम में मोम पिघलाकेवह औपधेमिलावें।
कालामरहम
जैतकाल १२५५माशेलें उसमें मुरदासंगश्तोलेपी
सकेमिलादे भौर गोटावें किकालाहोजावे-फिरकुंदर-दम्म,
लभरववैन इंज़रुव सत्येक माशे.पीसके मिलाव।
सरहमजगार
इंजरुज.उशक प्रत्येकदमाशेजंगारतोलाभर. सिन
रकमें पीसकेशहद मिलावें।
नोशदारू
गुलाब के फूल समागे सौदफ़ी१७॥मागे लोग मा
लगीन
-नगर वालछड़ प्रत्येकाशमान नरम्बावसवासा-छो
टोभोरवड़ी इलायचीकेदाने जायफल.न.केसर मत्येव
मागेकटछानके अनगरकवें ओरनाजे मामलेद्धमतीन
रातदिन भिगोवें औरहररोज दूधबदल डालाकर-शिरमा
नीसे घोके ताने पानी में ओरविं-नवमलीभागिलना
नोकपडे वंधिके सारापानी निचोडडालें-गारमलीभांति
पीसके उनमें से एक सेरभरलें फिरदोसेरशहद याक्रन्दके कि
वाम में मिलाके पकावें फिरवह ओषधेपिसीकनोहुई उसमें मिला
विभोरचीनीयाचादीके वरतन में रखें और८० दिनतकसबछोड़े
फिर३॥माशेसेजमनक रवावें जोरइसकांदीवर्पतकरहताहै।
जबतकनहीं विगढ़ता।
220
वनफकेफूलमारों इमली छिलीहई३५माशेती
नफूलनीलोफरके सांतवहे आलू-पीले आलू और उननावमत्यै
क१५पानी में भिगोकेछनके पिलावें।।
वनीहुईऔषधेसमा
सहुई
औषधियोंकीकैफि
यत
अवहम तुम्हेंकैफियत उन औषधोंकीवतलाते हैं जो
इस पुस्तकमेंवकृतकाम आईहै परंतु तुम्हेंइतनासमगलेलाचा
हिपैकि औषधको कैफियतवही औषधकी गरसी लंड और तरी)
रखुश्की है हकीमोंनेइनचारोंकेचारदरने ठहराये हैं।
जोपीछे पीने से कुछनमालूमहोपरंतुबार वारयाग
धिकरवानेसे गरमी ठंड भादि मालूमहोतो यह पहिलादरजाह।
इसकीजगह हमने एकाअंकलिखाहै ।।
औरजोअसरमालूमहोपरंतु मनुष्य के किसीकाममे
हानिनकरें-बहदूसरादरजा- उसकीजगह जगह का अंक
लिया है।
और जोमातुप्पके कामों में हानिहो परंतुमारनडालेम
हतीसरादरलाहै-इसकीजगह का अंकलिरवाहै ।।
जोकामों में हानिहो औरमारभीडाले नोचौथादरनाहै
इसकीजगह एकाअंक किरखाहे।
औरइरदरनेमें तीनर रुतबेहैं आदि. मध्यमः
न्त.परंतुहर भौषध में इनरुतवोंकोजाननाकदिनहैऔरजो
औषधे वाइर लगाई जाती है- उनमें तो अत्यंत हीकारिन हैं।
तर भौषधोंकी गरमीपहिलेदरने से नहीं चढ़तीक्यावि
स्वाहै ।। जोगरमी अधिक होजावेगी तोतरीनातीरहेगी औरयहभीच्या नरवनाचाहियै कि दाने और रुतबेजोजपरलिखेगये उन मेंहकोमलोग आपसमें कुछ अंतरभीरखते हैं। हिन्दीवैद्योंने औषधोंके दोहीदरजेनडराये,-पहिला स्थल जिसमें पहिला और दूसरादरजा आगया। और दूसरा महा जिसमें तीसरा औरचौथादरजाभा जाताई। हमने आगेगरमकी जगहामा और रडेकीजगह- उभौर तर कीजगह रत) और पुरककी जगह रख लि पहिलेदरजेकीगरमौष चना-लादन राव बोडीजंगठी.शाहजरा रानुआइफ सतीन वाचूना तेंदुआ कनांकेबोन भादि। दूसरेहरनेकीगरमौषधे करशास.कुंटुर-मस्तगी गर्वकीजई-मफेद औरकाली माजरीयून कीजह जादरज-जयवंश्ववील और सुंदहरज-शा हिद.चिरायता केसर भनसल-सोया विज्ञासा-नमक-फर सियून गंधर सेलारस शहदकेटकामैल इसकाकस.दि लसान.टंगनोनीज.मेगी गिउल हिसार कारगर चुन्न (केएंडकीलाल आदि । mya Hasy2em 5. सान.नरावंद-जित शैलम माहदानन.चिरायता-करसना. रिम्ब मकड़ीकाजाला जाबशीर कादूध-भादि ।। तीसरेदरंजेकीखुश्कौषधे । . लहसन अनीसून इतीमुन-तगर-जलनार-हींगच ना. जूफा. तजमदीनामरुवा.जामन-जायफल-सातर लूत अकालिया-इफसंतीन. अमल-साजरीयूनकीजड, बिल साना नमक-हाशा-चूका उतरुज वारशीशगान नतनवर्गः मूलीकानेल जलाहाकेकडा सरसा-वाशीसुद्दावानलीहुई फिटकरी कलोंजी जलेहयेबाल-एलुमा सिमाक-फादा निया कैसूर-करोया-बच-मसकत्तरामशी अजवायन-आणि चौथेदरनेकीरखुश्क औषयें 2. राई सुद्दाववरी गन्दना बफ वीयून कुतरान- अफीम धतूरकाफल आदि। पहिलेदरनेकीतरऔषवें रोगनगुल.का.पालक-गावजवा.खुसयतुस्सानि व.शफतालू-वनफशेके पत्ते चिरोंजी इंनोरगादम- तोवरी- सोसनकाउसारा - ગુલ
दूसरेदरजेकीतर औषधे
कुलफ़ा लोनिया-
- तरबूज-कडू मिशमिश.अस्यगोन
पलवल।
अ,इउ,
अस्पग्रोल~ 3-३-त.२- पित्तोंको टीककरता है।
अनीसून.२-ख.३-कफकोगककरताहैं।
सुलहटी ग-३-ख. काकोठीककरता है।
इनीर ग.१-त. २- सौदाकोटीककरता है।
.ग.१- रव.२-
इजरूत ग.नअंत-रव.२आदिमें।
अकाकिया ठ०२-रव-नया-उ- परव.रुधिरकेरनोंको
(लाभकरताहै।।
उस्तखुडूस ग-१-स्व-१-सौदाकानुल्लाबहै।
इकसतीन ग १-ख-पितोंकानुल्लावहै।
इज्जास-उ-१-त- पित्तोंशानुल्लाबडे। न
इंतीसूज-ग-३-२-३सौदाकाजुल्लावहै।
मामला -२व आदि में-सोदाकाजुल्लावहै।
इसफानारख गतिपालक--त-१आदिमें उल्टीमें
पिनोंकोनिकालताहै
अवहलग-२ ख.२
बाबिरंग-गन-खरअतुमे । बारुज्ज्ञव-अर्थातगोडकीवीर-गरखर जोत गर परसियावशोभातहंसराज- मोतदिल-गवं त. तुमकुशूस-ग.१ एस- ग.१ ख- सडेहुयेकफाकोगों से निकालता तुमवाजकोकहते है इसकीजगहेतु लिखा है तु:खावूजा-पार तर सौदाकोटीककरता है। तु मरु-गर-तर सौदाकोठीककरताहै। तु:सोया- ग३ अन्त रवर आदि उलटीमें कफकोनिकालना तु-गाना-ग-२-२ तु: मूली-३-खरउलटरी मेंकफको निकालताहै। तुरुवद गरआदि-ख-अतमेंककोजुल्लावहै। तमरहिन्दीअर्थात इमली- ठ-१-ख-२ भितों तुरनवीन- गप-तप- तिम्बोल अर्थातपान-गर-खर तरबूज-उपादि-गर अंत 190 जाचः जुदवेदस्तर अति दरयाई कुत्तेका फीता - ग३अंत ख .. -------------- परमसन्न करती 7-1 जौ-- खर आदि जलनारअर्थात गुलनार-उर-खरआदिमें जदवार अर्थात निरबिसी-गर-खादिम दिलका पुष्ट जायफल-गरमत-ख जिगरको पुष्टकरता है। जाफरानमर्थातकेसर-गर- खा. फासूखा गर-खर,भनमें जजवीलअनि सोंठ-सत्र-खर जम्वाद अर्थात नरकचूर-गरखरभवे- विलको पुष्ट और असनकरता है, जाक-ग-३-३ । जिस-ग-ख जरीनज अर्थातहरताल-पीली-ग३-रव-३- औरलाल गर- चिनार-3-1 'T. t- नव२ हुजन अर्थात रसौत- गरमी और ठंडमें मोत दिल है हिलती अर्यातहींग गा भादिखत बुलमुलूक दूधउसका गर ख ३और पते और दानेउस के-ग३ खमंतमे हंबुलनीलमीत कालादाना-ग३.ख३ कफ़का चल्न वहै। हुरमुलअर्थात इस्फद-ग-३ सर कफकाजुल्लावहै।
हजरलाजवर्द ग१ वर सोदाकाजुल्लावहै।
ANS-RT
हर्जरअरमनी-गर खरसोदाकाजल्लाव
हम्सामा-ग३-ख जिगरकोपुष्टकरताहै।
हव्वनिलसान-गर-स्वर- अन्त में जिगरको पुष्ट करता
.
हजुरुलयहूद-गए-खरं
इलैलाजई - उपअंत-खरपित्तोंकाचल्लावहै।
हलैलाकाविली- मोतं दिल उंड में-ख-4- सौदाकाजुला
हलैलाकाली- उ१मध्य-रवर सौदाकाजुल्लावहै-हले
लाइडकीकहते हैं।
१३
.. रख..
खुरफा अथति कुलफा- उ-३-त-२- मित्तोको ठीककर
ख्यान अर्थात वीरेककडीकेवीज-रत-२ पित्तोको
इटीककरताहै
खरबक अतिकुटकी-ग-३-रेवर
विश्व अर्थात ईट- ग२-वर
ल्यारशम्वर अर्यात अमलतास- गपत-१
खिसकदीनामतिकड़-ग-२स्वाभत में कफ काजुल्ला
रैलेरू-त.
खिसक अर्यात गोखरू-गःख-या-र-ख-या मोददि
राध
वहै
R
4
.
खूबकला ग त -
दम्मुल अरवचन-ठ३ रव-३-
दमाग़जानवरोंका-उ-त-भेजेकोपुष्टकरताहै
दरराजभर्यात तीतर-ग-वभिनेको युएंकरना
दरोनज-ग३खर दिलकोपुष्ट औरप्रसन्न करती है जान
र.
रिहारतुलसीयानाजवोगप-रवरी - 7
रोग़नकेसर-ग-२-ख-अमेजेकोयुष्टकरताहै
रैवास-उरखर दिलकोपुष्ट भौरअसन्न करताई
रोगनज़र्द धीग.१८-१ अंतमें पुराने में खुश्की आजातीहै।
(421
PA
स.
सम्बुलुनतीवरबालछड़ा गरव-२ अंत-कफकोठीककर
सिपिस्तालहसोडा मोतदिल गरमी और रंडमें-न-सौदाको
(टीककरताहै।
सबूसाभूसी गा-ख
सिरका-१२- वर
सुरंजान-गर- खर
सोदामोथार गर-रवर
2
क
सामूनिया-ग.३-१२ शत-पित्तोंकाजुल्लाव?
सनायनक्की- गरभंत-स्वासौदाकाजुल्लाबहै।
सुहाव-ग.३-ख३
सलीरवारलन ग-२-ख.२ अन्त- जिगरको युष्ट करती
साजिज र तेजपात गर-खरसेदेको पुष्ट करता है।
सफाल-व:ग. ETEREST.
सरेश-ग२- खर
सरता-रकेकडा3-२-तर
संगयशम-२- खर -
सरो-ग- स्वर
सलखयाकेंचलीगर-रखर अंत Ite
सन्दल-सफ़ेद और पीला-उ-वर और लालचर-खापितों
कोटीककरताहै। .
सिन्न-रालभारग-ख
सातर-गर-रवर अंत
समग़विवूलकागोंदर ग-स्वर
सावन ग-३-खन :
बंसलोचन-द-२-रव३- दिलको पुष्ट और प्रसन्न करता
है
श.
शूनील कलोजी ग३-स्व३
शिवाफिटकरी गर-ख३
शहतरा-ग-ख.२
गवाई-गर-वर
दामाहो
शीरखिश्त-गा अंत और मोत दिल-त-स्व
शिक्षमवकायन-गर-स्वरकफकोजुल्लावहै-
शकर-गप-तप अंतमें और पुरानी-ख
शीरभेड-गतभेनेको पुष्ट करता है
शिकाकुल-ग-१-तर- दिल को पुष्ट और प्रसन्न करता
शादना-१ अंत-स्वर :
ग.
गालिया-
गारीकून-गई-विरकफ़काजुल्लालई
-ग-रवभेनेकोषष्टकरताई ,
गाफिस-ग१-स्वर जिगरकोपुष्ट करता
गावज़वां-गए-ख.सौदाकोपीककरतीहै
गुलबलफशास-ता
गुलाब : नयाग
गुलावके फूल-दर-स्वर मेजेकोपुष्ट करते हैं
गज़मानजत्माजावर
गावरसावाजरा उखर
गुलनीलोफर-२१- तर
गिलमख़त्म-उ-२ - ख.२ दिल को मुष्ट और प्रसन्न करती
गिलमुल्तानी-ग-स::
९.१२२:: --
(है:
फ.
फिरंजमुश्करामतुलसीगर-रवर दिलको पुष्ट औरप्रसन्न
.
फैदानिया पारम-दिलको पुष्ट औरप्रसन्न करना है
फरफियून-ग३ रवाना
जिन किश्तत्संभार गर-वर
क.
काक़ला इलायचीवडीग-१-वर-छोदी-गर-वरका
(कोटीककरती है।
करनाल(लोंगा ग३-रव३.
कुस्त कुटाग- स्व३ ।
कलकतार-गह रख:-
कसूरीयून-वडी-गर अंत-वर लोडीग३- रवरकायकानुन
कशरउतरुजाकिलके विजोडेकेग-वर दिलकोपुर
र प्रसन्नता
कुसाउल हिमार-जुन्लावकी औपचहै
कमीला गर-ख२
कासनी-उर-रखर पित्तोंवोदीककरतो .
विजानीज़-धनियारउर-रवरपित्तोकोगककरती है
काहू-उन-रव३अंत पिनोंकोटींकरता है।
कसून जीरागर-सरकफकोटीककरती
सन्दुर- गप-स्व
L कुन्दुश-ग-स्वअन्त कह-तर- काकेनन-उर-खर कवावा- गर-खर कहरुवा- मोतदिल गरमी और ठण्ड में-ख-दिलकोपुष्टमी खसनकरती करस्व-गम-खर करोयागर-खरमेदेको पुष्टकस्ताहै (२०१ ल. स्कूलाव-उर-खरपितोकाजुल्लापहै न लोबिया-लाल-गभंत-तर मोरो लोवियासफेद-मोतदिनगरमी औरठजमें लाख-गस्वर-या गप-खर लागिया-ग-४-खर लोवतवरबरी-गर-खर eitriयो म. मामीरा-गर-खरभ मुनक्का-गस्ताकाकोटीककरती मुश्क- गर- खर+ मुर-गअन्न-खरजत गरजनजोश-दोनामरुवार गजन-व? माहीजहरज-ग-रखकानाजुल्लाव-इसमें सेंछालवाप जातीहै। A
४०६
मस्तगी- गर-रवर अंत लहान
मिलहनिनी-निमकदुर्गधवालाग३-खरकफ़ औरसौद
कोनिकालता
मोम-गरआदिमें
मोती-उर- ख२ अन्त-दिल और भेजेको पुष्ट और प्रसन्न कर
सुर्ग-गपभन-मोनदिन्लनरोमें भेजेको पुष्टकरताहै
मिशकनरामशीरपहाडीयोदीना ? ग३ अन्त मेदेकोपुष्टक
(रताहै
मुरदासंग- ग३ - वर विष है- जपर लगाने से अच्छा मांस
(तपन्नहोत
लमक- ग२-स्वर
नानालाग़ खुव्याजी टप-त?
नानरंबाह- अजवायना ग३-खन आदि में
नारंज-पीले छिलके और फ्लामने- गर-सर
नारंजकीरवटाई-उर दान स्त्र
नारंजके छिलके और वीज-उ-२-ख.२ भेनेको पुष्ट कर
तात
नारदीन-गर-ख निगावो पर करता है।
नौशादर-ग३- ख३ मोजनकोपचाता-और भेदेऔर गांतोंसे
मवाद निकालताहै।
.
१०७
व
वरकचांदीके-र-१-रव१- दिलको पुष्ट और प्रसन्न कर
चरक सोनेके- मोव दिल और गर्मी भी परवते हैं- दिलकोपुर्ण
औरप्रसन्न करते हैं।
य.
याकूत- मोत दिल गरमी और उडमें-खर- दिलकोपुष्टीर
प्रसनोकरताहै।
इतिसम्पूर्णम्
दवादेनेकावर्णन
रोगीके हाल रुतु और शरीरकेस्थानके अनुसार औष
धदेनीचाहिये.और जोतते भोजन में खाने के योग्य हों उन्है
मोजन में खानाचाहिये और जोदवाकीतरह पर रवाने पीने
और लगाने के लियेहोज्न्हें उसी प्रकार सेवाम
यै अर्थात जो औषध खाने कीहो-इसकेलगाने से कुछला
नहोगा।
वहभौषधेजोरुधिरकेविगाइकोठीक
करें।
चाईवट विगाइकेवलरुधिर हो-या किसीऔरर
दके मिलने सेहो॥
रुधिरके ओंटनेकोगेकनेवालीऔपचे
कासती और काइकेबीन-धनिया गुलाबके फू
निकारस-सिकंनवीन-उन्नावचन्दन और केवडेका
गादेरुधिरकोपतलाकस्लेवालीऔषधे
आनृवुस्वारेकापानी-सीफकागर्व-गाहनरेव
सिकनवील-मान्लभस्त ।
1.....
४०र
पतलेरुधिस्कोगाढ़ाकरनेवालोनीषा
बिल्लीलोटन-रेडाकेबीन-इंसराज-काविलीइड-को
खाकी ओषधेरुधिरकीटीककरनेवालीयहहै - विमडंडी-आ
बनूस और शीशमकीलकडी-नीमफल और पत्ते-नीलोफर
मोस्वनफशेके फूल-गाजरकाशर्बत-मुन्डी-मंहदी-कचनाल
नीलकंटी।
पित्तोंकीरीककरनेवालीऔषधे
ईसबगोल-बीदाना-कुलफा-कासनी बीरेककड़ी
केवीज-धनिया- सफेदचन्दन-कपूर-काहकेबीज-वनफाशे
माननीलोफर औरचन्दनका शर्वव-कुर्सकाफूर-कुर्मतवाणी
रमुलय्यन कुर्सतवाशीरकाविन ।।
कफकीटीककरनेवालीऔषधे
सौम-अनीसून लिलीहुईमुलहटी-जीरा दारचीनी-नु
लक्के-बालछड वैरु-सुन्दानी-इलायची-बिरंजारक.म्स
जून सोर-मानून फिलासफ़ा-सोरकीमाजून-जवारि मनाली
सौदाकीटीककरनेवालीऔषधे
लहसोडा-गावजवा स्वरबूजेके वीज-मुलहटी.उंजीर
मुनक्के इफ़तीभून कनौचेकेबीज-सिकंजबीन उफतीमून
माजून मुकरात-योकूतीवुभली-नोशदारू मुफरह दिलकुण
शर्वनबालंगू-शवत गावजवा॥
(१५)
४१०- गादेमवादको पतलाकरनेवालीऔषधे अवहल-इसकील.चूका- सिरका उस्तखुडूस ह ब्वबिलसान उकहवान इंनीर-जुन्दवेदस्तर-राई-केरतम लहसन.सरकंडेकीनड-संभालू-बावना-दारचीनी मोय ( जादा-वज. सूरवाजूफ़ा-कूट-सातर-पोदीना-ज़राचन्द-अन वायन उटंगनं गोरा-अकरकरा सिकनीनज सुद्दाव-नम्मा म.ईरसा-हुर्मुल हुफ़-मशकत्तरामशी. विल्लीलोटन-क रदमाना-कमाज़िरीयूस ॥ मुञ्जिशे. वह गौषधेहैं-जो विगडेहयेमवादकोपकाके नि कालनेके योग्यकरदें-अर्थात पतलेकोगाटाकरें- जैसेख शरवाश.औरकाहकेबीज-यागाडेको पतलाकरें-जैसे सूखेत फा और हाशाकाजुशादा-याकडे औरजमेहयेकोनरमकरें जैसेभलसी और मेथीकेलेपसेकपा और सौदाकी सूजननरम, होजातीहै। पित्तोंकीसुंजिशें. उन्नाव. गुलावके फूल-ननको ओर नीलोफरकेफू ल-शाइतरा:कारानीके वीज औरजद-मकोड-सिकंजवीन- रंजबीन लालशकर गर्वत आलू गुलवान्दभाफत्तावी। कफकीमुंजिशें. मुनक्के. खैरुलेवीन. सौफ़ अनीसून मुलहटी- सिकंजवीन। हंसरान.शकाई-योलाईजीर-गुलाब के फूल- गुलकन्द- सौदाकीमुंजिशें लहसोड़ा-उन्नाव-गावजवा-बिल्लीलोटन.छि लोहुई- मुलहटी-हंसराज-उस्तखुड्स-शाहतरा.शकाई.वादी वई-सौंफ-तुरंजवीन-गुलकन्दा जुल्लाबोंकीऔषधे यह औषधेचुरेमवादको पैरखाने से निकालदेती है। पित्तोंकेजुल्लाव. इमली-भालूबुखारा- तुरंजवीन शीरग्विश्त- सनाय के पत्ते-पोलीइड-वनफ़शे और गुलावके फूल-कुशूमकेवीज अमलतास-इफ़संतीन.सकसूनियां-शाहतरा उल्लुआ.लवला व.शिवरम माज़रीयून॥ कफ़केजुल्लाब. बकायन-कन्नूरीयून-माहीज़हन गारीकुन-काला दाना-तुर्वदहर्मुल.विसकदाना-विसफायन. कलोनी. काई.मीनीसुरंजान रेवन्दचीनी सोंट-गूगल वैदइंजीरकेवी जोंकी गिरी और तेल-अमलतास हब्बभयारिज-हब्बुसलाती न.फरफियून-माहूदाना-कुसा उलहिमार।।
४१२
सौदाकेजुल्लाब
इफ़तीगून उस्त स्खुइस-चिल्लीलोटन.मामला-
नवद हजर भर्मनी.काबिलीहड़-कालीहड़ सनामक्की.
शूस बिसफायन-गारीकून-कालादाना भयारिनोकरा-रे
बन्दरक्ताई।
सूबलानेवालीऔषधे
यह औषधे पतले और बुरेभवादको मूत्र में निका
लतीहैं।
तंदी.
स्वीरे ककड़ी औरकुलफेकेवीज- खैरले फूल ग्वार
निसक- कहककड़ी और तरबूजकापानी.खरखजे औरचि
रिचिरेकेजीज अलसीकेवीज.आशजो.कासनीकोपानीऔर
वीजनौस्जड़ काकनन नीबूका भर्क मिलाहुआ-शोरा.सि
किंगवीना
करफमकेबीज- सौंफ.मनीसून विरंजास्फ-सूखा
फा.कवावा. अजवायन-सहाब.गाजरकेत्रीज-हंसराजवा
लछड़-अमलतास मीठाकूर केसर-तज-तगर अदविलसा
नि.अवहल-करके बीजोंकी मींगी कलोंजी. पोदीना बुध
जी.चनोकापानी॥
मोददिल.
इंगराज स्वरखूनेकेवीन गरम और रंडीऔषधको
मिलाके पीना।
हैज़बहानेबालीऔषधे
तज-कलोंजी. अवहल-हरल-जुन्दवेदस्तर-बावि
डंग. विरंजासफ़-कर्दमाना.बावूना मीटाकूट-कवावचीनी
हंसराज-फरोसीयून अदफादानिया- जिन्तयाना-भगवा
यन जाबशीर-जादा मुद्दाब केसर तगर नम्माम. सूखी
जूफ़ा-करफस.दोनामरुवा-कमाज़रीयूस.वुन मशके
तरामशी-चनोंकापानी अमलतासके छिलके- मोथा
बीयनिकालनेवालीऔषवें
करफास-इफसंतीन-सौंफ़-तुर्मुस-दामनातुरकी
सदाब।
उलटीलानेवालीऔषधे
{जोमेदे और उसके आसपाससेमवादकेडल्टीमेनिकालनी है।
मूली सोये कडवेवादामका यानी और बीज.स्वरचू
जेकीगड़ विनीलिलीमुलहटी-शहद-सिकंजबीन लालश
कर-ननक गरम पानी जरजोरके वीज कुन्दुश-मचीज़न
माउलभरल-भेडकादूध-माज़रीयूनके वीज-लाललोनिया
.
'ली.बाहु और काइके वीज-सफेद चन्दना वादाम-मवा.शची उलटीलानेवालीपुष्टजौष कुटकी-राई-नौजुलक-कंकस्जद-निविलहक भेजेकीपुष्ट करनेवालीऔषवें हंदीऔरतरण गोती-मामला-विहीसेब और अमरुद्धके ताजेफल गुलाब और गुलाबके फूल-नारंन॥ - . बलादुर- फिन्दक-विल्लीलोटन- सोट-मोथा वा 'लछड़-सुश्क- जन-गम्बर गालिया लोंग कुन्दुर-रोगन अवह र-जानवरोंके भेजे मुर्ग-तीतर-भेड़दूध॥ x औरवाकीयहहैं-हड़का मुरब्बा-सेन बिही.अम. इ-नाशपाती. फिरंजमुश्क जायफल केसर-उस्त खुड्सः चमे तनरंजा दिलकीपुष्ट औरप्रसन्न करनेवालीभी. ठंटी। अमरद-नाशपाती अनार-आमला इमली. सेव. चंदन-वंसलोवन गिलेमन्वन्म-रैवास-वुमुद कहवा का पर-गायनवा धनिया-गुन्नावके फूल-मानी-नीलोफर- हड-याकूत-चांदीकेवर्क। (गरमा सोनेके वर्क-उतरुजके छिलके उस्तरबुडूस-रेशम- वहमनें-विसफायज-बिल्लीलोटन-वादसूज-जेदवार-दा स्वीनी नरकचूर-दोनज केसर-सुम्बुल-मोथा तन-शकाकु ल-जदारकी-अम्बर-फिरंजमुशक-फादानियां-इलायची- लाजवरद-नाना वाकीयहहैं-छडीला-इज़फाउत्तीव-आलू-घनि त्या-मूंगा.मुंगेकीजड-नीलोफर-वजरुलहुम्मास-पान-हड़- सोसन नद-अम्बरं-याकूत- फिरंजमुश्क-मुश्क।। जिगरकीपुष्टकरनेवालीनीष (संदी। कासनी-जरिश्क-अनार और उनकेपानी-लाब. ईसबगोल.शर्बतसन्दल-सिकंजवीन (गरमा बडीला इजफारुचीव-जायफल-हम्मामा-इन्वनि लसान दारचीनी-गाफिस-लोग तज-कुशूस रूमीमस्तगी- नारदीन-सौंफ़-कसकेवीन-गुलकन्द असली असानासिया दवाउलकरकम॥ औरवाक़ीयहहैं इससन्तीन-नरकचूर-सोया व बरौनज- तगर-इलायची- पिरते-ज़राबंद-बिल्लीलोटन सुन -गुलाबके फूल-निशास्ता-मेहकामानी-उदहिन्दी। मेदेकीपुष्टकरनेवाली औष रंटी। आमला अनारदाना- सिमाक-वहेडा- .विहीवंसलोचन-गुलावके फूल। (गरमा सरकंडेकीनड़-तुरंजके छिलके-बिल्लीलोटन- -दारचीनी-नरकचूर-मोथा-तज-तेजपान लोंग- -कुन्दुस्-करोया-रुमीमतगी-मशक्तगमगी - अदग़रको॥ वाकीयहहै-कच्चेमालू-जामन- तगर-गोलमि रच-ऊंदिनीकादूध-छडीला-कचनाल-पोदीना-अदहिन्दी संगदान मुर्ग-दही-हम्मामा॥ निगरकीहानिकारकऔष उंदापानी-नारंगी-छुनारा-इंनीरनर-इंजीर - सिरका नितखाना- जाडौंकाशहद-कालीहड़ इन्धुलवान-दारशीशमान॥
४१७ मेदेकीहानिकारकऔष विली-मसूर-माउश्शाईर-हालमकेबील-मीटेआन्दी उन्नाव-अलसीके बीज-मुजसफरके फूल-अदरकम्बौरक इंजीर साफ़सिया-जादा-हसरम-हम्मामा-पुरानापनीर- परमपानी-गौकाघी मिटाई ।। मेदेकीदीलाकरनेबालीऔषधे हब्बुलवान-इजरअर्मनी-पेठेकेबीन-सज्जी-लो बियेकासाग-नास्थिलकादूध॥ भेजेकीहानिकारकऔर पीडाउत्पन्न करनेवाली इज़फारुत्तीबकीधूनी.बजरुलंबनन-कुन्दुर-गंदना- सोया-लहसत-पिमाज ग्वैस्केफूल सूचना मसूर-मेयी-अल सीकेजीज-बैंगन-मूली खुवकलां. उतुरुन. तूने इफसंतीत. पालक-संभालू- सरकंडेकीजड- तव बुलूत-जादा मुलगा र-जायफल-लवान-पैवन्दमरियम-हींग वशवाश इजाए। भरतरंगार-काविलीहड़-तम्बाकू-सरशेफ ।। पेटकीनरमकरनेवालीऔषधे मूली-पालक काम्ब बिनौला चुकन्दर गरेका 1x2 रस.शहदकसमेत-शफमालू- सिरका सिली.हब्बुस्सम ना कुलफे और क्थुयेकासाग भेडकाढूध-बकरीकादूध मिक्वनवहत स्वाना-ना- सौंफ-हडसना इमली गुलाब तुरंजबीन सोंफकीनड़ और मर्क-गुलकन्द ।। पेटवन्दकरनेवाली औष बकरीभौरमेडकाकलेजाभुनाहमा-भुनाहुभावा कला-उजवारकी जड़-नौकामतू-कल्पीयेभुनेहुये-क नाल-जीरा-सिमाक-रेहांकेवीज ईसबगोल-कनीचा-वार दंग-वेलगिरी-हब्बुलास-इलायची-सोफ अनीसून-निश रता- गिलेअर्मनी-जहरमुहराय सुहागौरबायड्रकरनेवालीऔपचे प सस्कन्डेकीना-शाहवरा-गारीकून-सौंफ-अफीम. इफसंतीन- सातर-बसर्वसा-संभालू-नावशीर-कर्फस.उस खुड्स-फनीमून-निन्तियांना जीराकिरमानी-ईरसा अन वायन-हालों-गोनरकेवीन सोर-दारफिलफिल-सुहान- हारचीनी-केसर-दोनामरुवा-ज़राबन्द-कवावचीनी कुर सदस्पद- अनीसून-जद-तुरमुस-हाशा सलारस कंट्टोपून करसना॥ कक्नकरनेवालीऔयवें - तुरंजके छिलके-संगदानसुरीको पिस्तेके वाइरके छिलक- जारिश्क-इन्चुलभास- सलोचन-दम्मुल भववैन गुलनार सुद-मरवरी क-मसूर-वारसंग सरकन्डे कीजड़-सरोंकेफल- जामनगर आमकी गुतलीकीमींगी मस्तगी-चना-चावल-माई-मा, कुंडुर-तीनमरवतम-ईसबगोल सुनाडा-सोनेकेवर्क-अम खद-कहरुबा-झांकेबीन-निशास्ता-जाकर-गावरस नार दीन कुनारकीगुग्लीकीमोगी। नीदलानेवालीगीष स्वशरवाश मौरपोस्तकाचरेडा-स्वशरवाशके फूल घना-सोयामिरहानेरखना-केसर-मुअसफरके फूल बनात गेकफाल-हराधनिया-आशनी-बादामकाशीरा औररोगन- रोगनगुलगोगननीलोफर-हाथपावमलना-पानीकी भावान गाना-हवासेपत्तोंकेहिलनेकीमावाज-काइकासाग-कनकी मिलीसोतेहुये आदमी के मुंहपर छिडकना-अफीम तुफोड़- हम्मामा-वाचूना॥ नींदखोनेवालीऔष पोदीना सिरका-राई- लोंग-सिरौरमाथे औरको नपटीपरलगाना-गोलमिरचे मुश्कनमक सिरकाकपूर और गुलावके फूल सूचना-अयारिज़फीकुरामेकल्लीकरना की खनाया विमगादेडकीवीट मिरपरबोधना-चायगौरवुनपीना ४२२ पोसक मानेको मलाई सेलगाना-चंद्रमाकी भोरदेखना- सिं रिका।। वह औषधेजोमवाद को आश्व परन गिर नेदें। तरवूनके छिलके-कुन्दुर-करनुलदेवलदीक- भाजनम-वेजगलबनज-केसरइस्त्रीकेदूध में मिलीहई-चन) -टेबलान-छालियां-तिग्यिाकफारका-इजरूज म कोड-विही-ससुर-बारज-सफेदसंदल-बकायन-फिरत भिरबन्द- अकालिया-जो-सिमाक-अमन्द-बुसद-निया रिसोत कुरान॥ दृष्टिकीहनिकारक वारीभोजन-गरम यानी सिरपरडालना-सूरजकोदे खना-बैरीभातशत्रुकोदेखाकरना-मसूर-कुलपा-चूना चरम्ब-काडू-चिरचिरा-गन्दना-विपयकी अधिकता-धूप गौर भागकै पासबैटना-चमकीलीवस्तुदेखना।। खएपकीचाहनाकोपुष्टकरनेवालीऔ रखें। रम्कावर्षकारीकानदा-मुर्ग-तीवर-रन्छ। ली- अन्डे-लडिया-जाम-गाजर-मूली का गाना ४२३ -गाय और भेरकाद्ध-गायकाघी-खीर-छुआर -फिन्दवा-हब्बुरसमना- पिस्त-चिलगोज़ा-सानव- -कुलीजन-वूज़ीदान-गोरखरु-बहमन-नोदी- 'तिली-हॉली- चिरचिरेबीज-केवांचकेबीजोंकी मिगी. -मूसलीअकरकरा-मस्तगी-गंदनेवेलीन- दार फिल फिल-रवशवाशसफेद-सोंठ-उर्शना-नगर-न -बाकला-इन्द्रजों-लडेकामैल-नेगमाही माहीरोवि -माहीसकूनकर-मुश्क-मोती-चिड़िया और अन्डे उसके अंगूर-करफस-नसवासा-कतीरा-भस्वरोट-पनीर-मायाक -जिरंजीर-हब्बुन्जनम-हींभ-सुरंजान- फ़िल्लक-तन- भेडलेक्चचेकाभेजा-हिलयूनकेबीन-लीविया-ना गिरी-इंजीर॥ कीचाहनाकीखोनेवाली औरहा निकारकऔषधे फिरंजमुश्क-कासनी-काह-उन्नाव-ईरसा- -मडोडफली-घनिया-मकोह-कचचालइसनः -कालीखशरवाना-कपूर-पानी पीछे पानीयीना-खटाई-इमली- आलूबुखारा- काय तोडने वाली वस्तु- चूका- वर्कलाय मानि ४२२ पोराका माने की मलाई से लगाना-चंद्रमाको गोरदेखना- सि वह जौषधेजोमवाद को आरन परन गिर रिका। नेदें। तरवूनके छिलके-कुन्दुर-करनुलाइवलदकीक- आनन्म-बेज़गलबनज-केसरइस्त्रीवेदूधमें गिलीहुई-बन शा-बलान-छालियां-तिग्यिाङफारुक-इजरुतम कोइ-विही - ससुर-बारूज-सफेदसंदल-बंकापंग फिसल जिरबंद - अकालिया-जो-सिमान-अमखुद-बुसुद लिया सीत-कुचरान। दृष्टिकीहानिकारक खारीभोजन-गरमयानी सिरपरडालना-सूरजको रखना-बैरी भातशत्रुकोदेखाकरना-मसूर-कुलगा-चूच बारम्बे-का-चिरचिरा-गन्दना-विषयकी अधिकता-धूप। गौर आगके पासटना-चमकीलीवस्तुदेवना॥ लिएयकीचाइनाको पुष्ट करनेवालीयौ सूखें। एकदईयायनीकानया-जुर्ग-तीतर-रच्छ ली- केन्द्र-लाडया-ग-गर-मूली-का-गैरटनर
४२५
लिंगकीबढ़ानेवालीऔपचे
कैचुये- अकरकरा-सफैदकनेरकीनर कीलाल
घोडकेसुम-लौंग-जायफल-दारचीनी-केसर-रोहान तानि
तमलना-कसकेपानीसेकर्डवारघाना-बकरीके पीसेकाई
बार चिकनाना-केंचुरे औरनोंक सूरखेडये सौसन के तेल में भी
सकेमलना।
भगकीतंगकरनेवालीभोप
घकायन और अनारकीछाल-मौलसिरीकीळाला
कोपोसके कपडे में लगाके रखना-माजूफल औरकार और
शहद मिलाके भगोलगाना-बबूल-इसफल-कालीतिली
गोखरू-इमलीकेबीज- बीरबहुद्दीग
नीचे लिखीहुई औषधोंसेबच्चाजल्दी
जनाजाताहै.
गूगल-नज- गुलनार-बकायनकीछाल-नीलोफर
कीनड -मोया-वारतंग औरमकोहका उसाग- कालीखश्वा
मलगाना चुस्वकपत्थरकावडाइकड़ाउलटेहायमेंपवाउन
वसुहसीधी जोधपर वांधना-दारवीमी-स्वाना-तिलीका
तेल अलसीके लुभावमें मिलाके भगमेलगाना ।।
"
४२४ योग केसुर॥ यउत्पन्न करनेवालीजोषवें गन्दनेकोबीन-शकाकुल-मीटामुरंबान-कड़के बीजोंकीमींगी- पियाजगीकोदूध-कंटनीकाधवरा मिली इशा-वतस्व-मुर्ग-हज्बुजलम-वूनीदान-वहमन-बादा म-पिस्ता- शलजम-हालों-चना-इन्दनौ-सुगास जास्यि ल-तोदरी-भलसीकेवीज-छडीला- तुरंजबीन-सॉट-सुश्क विषयकरने में अधिकारहरानेवाली औषवे. भफ़ीम-जायफल-बीरबहुही-गूगल-धतूरेकेवी ज-औरफ्ते-खुरासानी भजवायन- लॉग-कालीमिरच-बस वासा-केसर-मस्तगी-दारचीनी-सोंठ-कपूर-मुश्क- अकर), करा-बबूलकेशल-गोमाकेबीज-गिलोकासत॥ विषयकरने मजादेनेवालीगोष लोग-दारचीनी-कवावा-अकरकरा-मवीज़जकुच लकेनौर सोंठशहद में भिगोकेयककेसाथ लिंगपर मलकत्रित घयवरना। सिरकेवालपीसके चमेली के तेल में मिलाकेलिं परमलके निषयकरना-वीरवहद्दी-पारा-केसर- कपूर- किबूतरकीवीर॥
४२५
लिंगकीवदानेवालीऔषधे
कैंचुये- अकरकरा-सफेदकनेरकीजउकीलाल,
घोडेके सुम-लोग-जायफल-दारचीनी-केसर-रोगन तानि
तिमलना-कफैसकेपानी सेवईवारघोना-बकरी के घीसेकई
बार चिकनाना-केंचुये गौरजोंक सूरबेहुये सौमनकेल में
सकेमलना।
भगकीतंगकरनेवाली गोष
वकायन और अनारकीछाल-मौलसिरीकीछाला
कोपीसके कपड़े में लगाके रखना-माजूफल-औरकपूर और
शहद मिलाके भगमेलगाना-बबूल-इसर्फज-कालीतिली
गोखरू-इमलीकेबीज-बीरबहुट्टी
नीचे लिखीहुई औषधोंसेबच्चाजल्दी
जनाजाताहै.
गूगल-तंज-गुलनार-बवायनकीलाल-नीलोफर
कोजड - मोथा-वारतंग औरमकोहका उसारा-कानीखरखा
मलगाना-चुम्बकपत्यरकावडाइका उलटेहाथ पकाउन
वसह सीधी जोधपर वांधना-दारचीमी-स्वाना तिलीका
तेल भलसीके लुभावमें मिलाके मगमेलगाना।
मरेहुयेबच्चेकोनिकालनेवालीी. ज़राबन्द-भवहल-अलसी-गन-गोलमिरच- बूजीदान-हंसराज-कालीकुटकी-कालाजीरा-माजूपीसके योना-कलौंजी-हरीमहंदीकीछाल-नांसके पत्ते नोटाकेयी ना-पीपलासूल औरकालीकुठकीपीसके विरोजा मिलाके ट्रंडीयर लेपकरना- पिसाहुनाकुन्दुशशङ्दमें मिलाकेडी यापेड्रपरलेपकरना॥ मशीमाकीनिकालनेवालीगी. हंसराज-करम्बकेवीज-कबूतरकीवीट- कलो जी-विरंजास्फ़-जुन्दवेदस्तर-ईसा- पिसाहुभागवहलरह ममेंटपकाना- और पीना-बावूना-हब्बुलकली।। मसाने औरगुरदेकीपथरीकीतोड़ने वालीऔषधे. तगर- विजास्फ़-समग भालू-खरबुजेके वीज- गोखर-हंसरान-सौंफ़-कालेचने-हजरुल यहद-संगसरम ही-हन्दुन्छ किल्त-कहुवावादाम-मोथा-सिकेवीनन-वि च्छूकीयरच ॥
४२७ सूजनकीटपकानेवालीऔषधे कमाज़रीयूस- गाज-हाशा-जगवन्द-नाखूना (वन रवानहरा-इज़ार जिशान-जादा-जाबगीर-उशकहंस राज-जंगली पियाज़-बावूना-विरंजारफ-सरकन्देकीजड़- वाकला तगर- उकहवान-वैरु-जित-वतमकागोंद-ली दिन-नम्माज-सुलहटी-तुरमुस-कुसाउलहिमार-दीनाम "वा-गाफिस-किनना-फोदना-खुरु-जुन्दवेदस्तराई- दारहन्द-बैरी-दाग्चीनी- केंकड़ा-सोया-सलुभा॥ सूजनकीनरसकरनेवालीको गोंद-जैतून-बजरूलबनज-गूगल मोया-वेद इंनोरऔर विनोला भोर स्वरुकातेल-बतकेकीच:-नली कागदा-ईसबगोल-बैरू मौरकनौच-जित इतकुलवन म-ईसा-सलारस-नाखूना-करम्ब-अम्बर-मोम-मुर- लादत-सुक-अलसी-सिंहदी-॥ सूजनकीपकानेवालीऔषधे नारवना-ईरसा-करस्व-बतमकागों-अम्बरी लाइन-सलारस- मोम-बैरके वीज-सुर-सुकम सूजननी फोडनेसीजी
जंगलीपियानु- गंधक-हरीजाज़-हफ़-पेडोंजादूध
कबूतरकीबीट-चना-कूट-फरफियून साबन कलकता
रगनजार-ज़रारीड़।
बुरेमासकोगलादेनेवालीभोय
इंनिस्त-उशनान-नमक-मुरदासंग-तांवेकाबू
राक्ष सौदा- सैन्दूर-जलीहुईसीपी-जंगार-जूतिया-न्यूना
साफ़करनेवालीऔषधे
अवहल-शि-शोग-नमक मिससी-आवकास
ईसा-शहद-गंधक-हब्बनिलसान-ईजरूत।
कीडेमारनेवालीऔषधे
वाजिहंग-इफसचीन-जादा-सूरबानूफा-करो
या-इम-पोदीना कमीला-गीह-कलौंजी-शफ़तालले
ले-तुरमुस।
बावकीभरनेवाली
सुर्मा- समगभालू- ईजरूत-इस्फंज-वर्कवुलूत
दुस्मुल भरतवैन जिस जेरावन्द-वारवंग-कालाजीरा:
ईरसा सल्लूभा गिलेमखतम संगनिराहत्त-गल-कती।
गुलनार सफेदकनार सफेदमाम-गोकादूधधोयाहुभाग
४२. लिसानुलइमलकापानी॥ बाबकीसुखानेवाली जलीहुई सीपीजोरछुआरामौरघोडे गधेकासुम- इंज़िस्त-छडीला-मुरदासंग-सलुभा-चोयाहुभाचूना-तु/ तिया-सुन्दरूस।। नाकमुंह औरदस्तोंकेरुधिरकोरोकने वालीऔ. दम्मुलभववैन-मस्तगी-कन्तूरीयून-सरोकेफल पनिया-ज़रिश्क-वुसुद-रसौत-जीरा-कपूर-अंजवारकीन ड-पोदीना-गेरु-वादरुज- सुरमा-वुल्लूत-वारतंग-कहरु वा-निशास्ता-जसलक्नन-शादना-गुलनार-कुन्दुर-मा चू-गिलैभर्मनी-बरगदकीडादी-पत्थर-रेवन्द्रचीनी माज काफल-परेकेबीजा जुन्श्वेदस्तर-साफ़सिया-मवाद कीवेचनेवा नूग -गंधकसफेद-राखकापानी-वाल उडानेवा मोम-निशास्ता-कहरुबा-कतीरा-जमानेवाली इंज़रूत-उडीला-धुलाचूना- तूतिया-सलुभाज लीहुईसीपी-साफकरनेवाली हैं।
४३०
मको सवगोल-गुलनार छलिया-धनिया-मत्रा
दको रोमाजिगह नहीं गिरनेदेती।
अफ़ीम-अफरीवीयून बछनाग-निश-मारडालने
राई-फौदनन-इंनीर-लालानोनानी- लालकरने
वाले है।
अफीम-इस्सन्द-कुचला-ज़र्वकीजड़-शाहतरेकी
जड़-तम्बाकूके पत्ते औरजीज- कुन्दुर-शूकरान-लोग-धन,
रिकाफल-बजरुलचनज-काकनज-यबरुजुस्सनम-सुनना
रिनेवाली है।
अफीम-वतखकीचरबी-यबरूजुस्मनमकीजड़
भहेकीसफेदी-निशास्ता- कनीरा-बबूलकागोंद-पीडाके
रोकनेवाले है।
उकडवान-इसतरक-इम्मामा-केसर-सोया-श
कायक-का-लफाह-शाहसफ़रम-सुलानेवाले और
शुनकरनेवाले हैं।
नगर-हव्वुलकिल्त -हाशा-शाहातरा-बादाबई,
वनफ़गेकीनड-हजरुलगाफांतीस-फेंफडेवोहानिदेतीही
तम्बाक-नकछिकनी-छींकलानेवालोहैं।
बवूलकागोंद-निशास्ता-कतीरा-धोयाचना-चिपक
नेवाली और सुहाउत्पन्तकरनेवाली हैं।
मनीसून-इफ़ीसून-वसवासा गाजरकेवीज-समा
लू-जावभीर हानामा-दार फिल फिल-काली मिरच-जीरा
करदमाना-सौर-नरकचूर-जरावन्द-सुद्दाव-मोथा-सातग
कन्दर- करपास-उमजवायन-पेव फूलने औरवायको लाभ