Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Jivan Aur Vayvahar
Front matter
No text on this page.
जीवन और व्यवहार
ਵਡੇਟ ਸਫ਼ੀਰ
अशोक पॉकेट बुक्स दिल्ली
एसम्पया
वितरक
एन. •ागम एक सम्म
रीगाना दिली
बाबापत
२१ म्यू मैन्ट्रम माटे
नई सिम्मी।
तीसरा सस्करण
शोक पनि गुस्स
४/५सनपर, रिम्नी
मुक हरिहर प्रेत frat
JINTAN ADH TUYAL
4100
विषय सूची
कम-संरया
पृष्ठ-सपा
१ गास्य अवस्पाकी भिसा
२ मारत
पछा-पूर्ति की करना
२१
४ टीक विषारी गति
२८
। दुबमता का विषार
१२
मावर्षीपन
७ ममान परिस्पितियों । सामना
- प्रमान रहे
१ समयता की पुत्री
१. दारिदमा अनुभव
११ मंगति का प्रभाव
१२ कटु भनुमा
११ पम्प और योग्यता
८३
१४ गुरु मिररा वारम्प प्रालि
१५ मार पर उमा भापूर भैन
१५ पूमपान
१
११२
१८ जीपम परसरारंप
" मा पुरा गर्ने गम
१२१
मदिरापान
No text on this page.
बाल्यावस्था की शिक्षा
बामक का मन्म होस्मासको ति करता है-एक मजे
हाकिम पवना प्रसन्न हूँ कि मेरी प्रसन्नता का कोई मत ही नहीं
और मेरी प्रसन्नता उस समय तक मेरा साप देगी पर तक में मुगा
नहीं हो पाता।
एम. पी. विम्स ने क्या भूब पहा है कि को मोम प्रसन हवे
पम्ही यहाँ परत भी होती है। पदि सारे माता पिता इस बात
को समा में किन्ने प्रसन्नता मोर माइट के भगार मेकर उत्तम
होते है योगबल बम्बों सापहरस्पाम पर मधिकाधिक प्रमच्या
पाये रसिक पन-साधारम के मुख में भी वि हो पाये।
माता-पिता के कत्तम्प -स्टिने पुरमाविषय है किबहुत कम
माता पिता को परनी इस पवित्र परोहर का मनुभव घबधिक
पपय नहीं हमार बोंगो भैर-सरियो समता पाता था और
पसके साप पामरका-साम्पबहार म्यिा गाता पापस प्रकार
उठापाठापा जाता मानो उनका बनम से कोई मस्तिवहीनहीं।
परमषिकरोतु माम मात्र । गहें पड़ी निषमता से
मारा पीटा गाता पारमीअधिकाध मा पिता की यह पारणा
रिजीवन में परम पस्विर भी रेस मास पस्यन्त महत्वपूर्ण
है पपपि वास्तपिता यह किसानोपासन-पोषण पा पिया
No text on this page.
बाल्यावस्था की शिक्षा
बामक का पाम होत्मासको वृद्धि करता है-एक सम्मे
कहा कि मखना प्रसन्न कि मेरी प्रसन्नता काकोर बन्त ही नहीं
और मेरी प्रसन्नता पस समय हक पैरा साप देगी पर कम युगा
नहीं हो पाया।
एम.पी. सिम्स मे क्या बगहा है कि जो मोय प्रसन्न रहते
है समीपही बरफर भी होती है। परिहारे माग-पिता इस बात
को ममम में प्रसनता और पाहट के ममार मेकर उत्तम
होवे है मोमबत मम्मों के साप हर स्थान पर मषिकाधिक प्रमध्यिा
पाये बसि पन-साधारण + मुबमें भी वृद्धि हो पाये।
माता पिता के कत्तम्प-दिने समाविषय है किबहुत कम
पाता रिता को पपनी इस पवित्र परोहर का बनुभएपरिक
पमय नही हमारा को मेर-बकरिया समाना पाता पा मोर
उनके साप पानव का-साम्पबहार किया गावापा पहें इस प्रकार
पठापाठापा गावा मानो उन बमप से कोई मस्तिव ही नहीं।
समरिकारोकिनु नाम मात्र * । उहें पड़ी निरपवासे
मारा-पीरा पातामाबर पीबपिकांच माता पिता की यह बारमा
जिीवन में स्वयं रसके पस्तित भी देन भात प्रत्यन्त महारपूर्व
है परिमारिकता यह सिपालन-पोषण सपा पिपा
पनपने अस्तित्वको माम से महिमावस्यकाबरम
का बह पतम हो पाता है कि अपने इस शामिल को पचापति पूरा
करने का प्रयन रें। अब सरकार को भी यह अनुभव हो रहा।
कि बामा राष्ट्र की रहमूस्य परोहर मोर ससे माता पिता की
बाहीमा पा शिक्षकों को ममा एक पपप्रप्ट शिक्षा पोरमका
सिकार नहीबम देना चाहिए।
बामकों कीभमुचित शिक्षा-सीमासे बहुत-सा सच बचाया
जा पकता है-परि बालक की भिधानीमा मुचित गएकी
पामे में बारी में मोनापिमा मुरमा अदबानों मोर
मुपारनों पर मम होतीबायें। पतित सिम्म
औरकारीको म रिनाकर मत से मस की बाय में परिवर्तित
किया जा समायोकि मामार और कार्य करने वाले मामरिक
राष्ट्र के लिए असीम संपत्ति समापन का सामनपरकि इसके
विपरीत निम्मे ना बेकार सोप राष्ट्र की पीर पर एक निरपयोग
बोल है। परिवारम्भ से ही बातों की शिक्षामा बामुनिक तरा
प्रतिपौला परी माये वो ऐसे लिपपरोन सोपों का पस्तितही
गये।
समुबसपा रीशिवमानको प्रसन्नचित्त समा रमसित
एवं उपयोगी नापरिक बन सकते है।वामा लिएमा रचना
हो पापा शिवना दिएका मिए पूर्व का प्रकार मा
बर्मा । म तपार-सपारे से बने का विकास होता और
बसाहतिक पायपर बाते परामरते-कुतते । स्मेही रुपा
स्पानुमाहरप का प्रकार और प्रेम रस विकास में सहायक सिव
हंसमुख बालक प्रयतमामर मागरिक बन सकते हैं-
पालकोपरगाहर नहीं अपितु पर मर भी पदमी
। स्थापता होनी चाहिए। देखा गया है कि प्रायः घरों में बरयधिक गाम्भीर्य म्पत होता है बामको वपनी यामुसार ऐतने का अबसर मही रिपा माता । यदि उनकी इस सामायिक इन्दा कोदवान का परम पिया बाता है वा उस परिणाम मत्पम्त भयामक होत है। एमके माता पिता को मपासमष उनकी पाक प्रति समग इमा पाहिए । इससे साम यह होगा पिरम्पबहारिक जगत में पदा फ्न परमे मौर नमेंबही विफलताबों रुपा कों का सामना करमा पड़ेगा तो महर्प रममे मोहा मे सकी। इसके अतिरिकमयों को प्रसम्म रहने का अवसर प्रदान किया गमा तो बगाय पुपचाप गुमकुम भिम्न-मन मार दब-रये इने के माता पिता के लिए महायक सिद होम मौर मधे नागरिक बने। मिन बनो को सेस पर में मपमे हारिक विचारों की बमिम्पतिका प्रबसर प्रदान किया जाता है तो न केवल मधे नागरिकही बनवे १ मपितु मी म्यापारी मीर नाम रिफ भी।बपने बीवन में मषित सफल होते मोर उनका मपम पातावरण पर पर्याप्त प्रमाप पड़ता है। प्रममता तपा मनारजन म मानर गावामौर उसकी बातरिक पोग्यतामों तपा पतियों को प्परत होने काबबसर प्राप्त होता है । ममिन तपादुमर परेमू पाठा बरण प्ठोर हृदय रूपा गुस्खमानी माता पिता परिपूम मिशा रीपा सांसारिक संकट प पीडामा मपराप सपा नियम बगानीमा पनीय दयामोनिए पिस्वर उत्तरदायी है। वास्यरात का निससाह प्रसफलतापों तया निराणामों का कारण मन माता है-इस युग में ममेकामे तिसपा प्रमागे गोपनीमसमतामों सपा निरापानोपा कारण राम्यावस्पा उत्साह हीनता या मते है। यदि गामक को हर समय लिए किया री गायें बापों से मोमप्त न होने रिया बाप मोर उमे यात बात पर होगमाय यो समय पिता भी उसे योग्प महोबमासपते ।
जिनामको को हर समोसा पाठा पात-बात पर मिलिमी
रोपाती है पुन-गुनकर पोप मिकामा का रिश
मागासपोरेमी है। यहाँ अपने बारम
विमान में भी पित होगाते है। दिन से कामों में नहीं
बागार पाती है तो विपास हो पाता है कि वास्तव में हमेचा
निकम्मे ! ससार में महाकई बार प्रतिष्ठा रमही
पचारकोसनी बाबापता है। एकरपियामाको रसकेमा
बाप उम्र भर निकम्मा कहकर पुकारते से या काम करने
लिए मोपरी पोरगतोगकाम है बो परे का पल
भने समा। पृषने पर उसमे अपने साथियों को बताया
मही मामता म सरा सा ही रहता है। मेरे मां-बाप मुझे हमेशा
पिकमा रहेका कभी भी मनोकरा'
बनेकोसी निकम्मा और भार कहने से बह पवना निसार
हो पाता कि मैं बिरहुम नापरवाह हो पाया और बा
पति प्रमाल करने से पचता है। उपते रस साहस और पति को
ऐमा पाप गा किनागीरम उसकी उन्नतिमा जाती है।
माता का भावुक हम धीर प्रभावित हो पाता है-
माप माता-पिता बामसेस शरदोषन करते। बोमती
और निकम्मे का
तुम इतने मूर्व और रिसरमा
माहीच मेहनत क्यों नही Car मरवा
कभी भी नहीं कर सका।"
समारयामासाभाविक पक्तिका ताराहो पाता है।
यह एपग्रम पूर्ण ratहितको एकतामा
विचार रसम्म हो पाप किया संसार में भी मी बन रही
रिचायेगा। मावानरपा इस बात पर पिपितवान नहीं रहे रियामा
कोमल पा मारप पर ऐसा सिप्रतिकामागोपा-
का मुस्त
1
पोरन रसरे मिए निन्द का कारण सिरहो बहुत सरल है किन्तु
उसके परिणाम बस्यम्त भयंकर है।
माता पिता अपने परिचितों से कहा करते है कि हमाय भएका
(सो) मिस निकम्मा पौर पराब है। ऐसा बहते हुए समें निक
मनुभव महीं होता किवातक के पपरसे ये शम्द नहीं मिट सकत ।
यदि किसी इम पर कोई व्यक्ति अपना माप मस्ति करतो वृषकी
टिसाप साप माम मी गाऔर फतवा पाएमा। इसी
भारमोसमस्यावस्था में पाना के मस्तिफया हय परमपित
कर दिपे गाउ । उसकी मामु साप-माप बात है।
प्रोत्साहन द्वारा पासक का विकास-माना बहुत पस्ती
हिम्मत हार पंठत है। उनका निकास पिकचर पाह वाह और
पाराप पर निर्भर है। यदि रमकी प्रासाकीमाये ठोमोरयधिक
पिता मम मगा कर काम कर माता-पिता भपका सिया
बामकी पर सियाम करत र उनको परितर रस्साहित करते
६ उमरी महायता करते है वो गमक भी ऐसे माता-पिठा तपा
शिका पर माण न्यौछावर करते हैं। परम्तु परि गर्ने मापे रिन
सिमरा बाप तपा पमा कोटि सेरेमा गाय होतोत्साहहो
पार पड़ी की मिनीपा रार पटार से रख-दर रहते
१और उन होनास का गमन धीमही अत्यन्त मलिन मम्पकार
मर याताई।
पविकिमी पगामा में बहुत-ती भूटियो ता शिपित्तता पाई
पार्य तर भी उसे हर समय उसका स्मरण कराया गामा पाहिए।
माता पिता या शिओं को सबपा नगपात पहम् परष्टि रखनी
पाहिए गमावण्याइयों सपा उसके गुणों को बना पारिए
बौर रगही के बारे में बात पीठपानी माहिए हर मनुप्प बोह
पुरा हो परा पर पामक यदि बापहो रससे काम निकालना है
-
मैं उसके लिए मारी काठिमायोका कारण बन पाता है। एक मां में
प्रोरणाम के नियमों पर अपने बच्चों की बीमा तथा उनका पालन
पोषण किया। सकभी इसका पापा कोई अन्धा तपा प्रशसनीय
कार्य करता हो वह तुरम्त उसको स्याती। पर उसका कोई मला
कोई मुभ कार्य करने की चेप्टय करता तो बरस पस प्रमास की
प्रशसा करती पौर मवी पी किस प्रकार मेरा अपने पापों पर
सन माताओं से अधिक प्रभाष है गोवपमै बन्नौकोहरसमय मिल
पतीपुरती मोर पुरा मला काती पती। होकर भी उसके
बासक बरयन्त मुस्ममावी तपा मासाभरी
पुर
सिर
मार-पीट बासक केसमाव के प्रतिकूल है हरसमय बामक
को नही मही ऐसा मत करो। कहने से सासहीन सपा मोर हो
जाते हैं। उनकी पोम्पता तमा हिमीप हो जाती है। कोमोप
भातकों के स्वभाव से मनमिन है उनकी निरता या मारपीट
कतिपय प्रवर दिवारगमन मस्ति बामे बार बालकों
विनायर तक पहुंचा दिया है। सिरियों पुरमिया मौर
मारपीट से गभानाकारिता तपा सरममता का पाठ सिखाना चाहते
है मयपि ये नहीं जानते कि ऐसा करने से पम्पत पुस्मिान तथा पचमी
मालक भी बामसी और शठबन पाते हैं। बहुत म माता पिता
सपा पिराक या मानते कि एक पुबमे-पतले कोमात सपा मपीसे
माता से मिस प्रारबो से या काम किया जा समता है ऐसे
बन्ले पो साभारतमा पुर्यन होवेगात मादी पाठ-नाव पर बिगा
पाते। पट उनके स्वभावको मसी प्रकार पमन सेना परवानों
के लिए प्रतियय कठिन होता है। गा पनी माताएं भी उनके
समाव से परिचित नहीं होती और पामती कर पाती।
इसरों के सम्मुस बात को मही मिनाहिए-ऐमें
माता पिता पी पिपत्रमा माताए पोपों की
१२
किसी मपराध पर दूसरे के सामने उसे दपना भावपयक सममी है। पोंकि उनके विचारामुसार ऐसा करना बामक केमिए मामकर होवा है । जिस म्पत्ति मे स्वयं मगा अपना पाचाताप का अनुभव नहीं किया वह बालक की ग्स सप्ता तपा पीग का मनुभव नही कर सकता यो उसे म्पबहार के कारण सहन करमी परती है। जिन बालकों को पूसरों के सामने इस प्रकार अपमानित किया बायका कर दिन तक उपास तथा दिल ए है। एक बार किसी पिसाने एकपातक को पूरी कक्षा के सामने यह का कर मोद में बिठा मिया "तुम ममी पूध पीते हो । मानो तुम्हें गोद में मेसू । इस पर सारे शिवापियों यहाका समापा। उस को इस बात पर इवना महमा कि यह मास सदासदास हा मोर पिसी से मार मिसाकर बावनकणापा। तप्प यह बिधिपतर माता-पिता मोर पिसमपने मासको और पियों की कठिनाइयों का अनुमान नही मपाते मौर के बालक पस्वी होस्साह हो पाते हैं। परि उन्हें पारपार भयोम्य और निकम्मा कह कर पुकारा पापमा तो उनका दिन टूट पायगा और पाहें पर किसी प्रकार की पिम्ता सपना पी का सामना हो तो पकमा ग्न मिए अपने रंग की पहमी मुसीबत होती है मोरये प्रसार के वारपार म पभित नहीं होते मतएर मपने छोटे से रित को यह करकर मानवमा नहीं दे सकते कि ऐसा हुमा ही करता है। प्रोत्साहन राप्रभाष-मीठी मीठी गो मार भापा के मार्य से बामको मसर ऐसी शक्तियां उत्पन्न की जा सकती। मिन पर स्वाप्प सपमता मोर मारहाद निर्भर है। हम में से मषि प इस बात को मानत है कि हमार पातारप हमारे साइस, संपस और मागा का हमारी पितों नपा पोप्यताबों पर दिखना प्रभार पड़ता है। पदिास्यावस्था में मासहाय प्रनम्ना तपास
बरयों को विकसितया भागारम पर पोर रिया बायको
हम माने बीवन की रिमा मोर पो है। हम व ममिनवा साह
होनता बारमारिम देवमासे पर बारे। पसले पर हमारे पैर
बकरना समातिरामामारम रफ-समी गाने रसिक
हमारी चाप में पता सिरता और नपती पा बामेयी।
प्रत्येक दमासान उपा सहानुभूतिमीत बामपने पुष की चोट की
बनाकरने लिए एस अपने विचार उस पर प्रमाण
गमतीएवी है। बामक पैसे कमा रमही मोको मकर
यते यह कहती है कि मा हो गया । ऐमापसे से बाराकोम
गत सपोप प्राप्त होता है असिनाम्वर में से रिवार हो जाता
किमान दुधम पापका इमार है। मोहरपीसने की पौड़ानों
और रसोरों को अपने रिपारों द्वारा दर करती रहती है। जो
पिता अपने नाम को साहनी एवं समान विना पाहता है उसे
पाहिप कर मामय पराक्रम और मादुरी की मोरया
यो पुखमरों को रिचारों द्वारा बताया जाता रममै बासीही
सोम्पता रत्पन्न कर सकता है। पिता को चाहिए किया पूर को
परापी कमान पाए और वपने विराम करने वाला समझे।
पोरनही पाता किममा में यदि प्रमेहगतराय पर प्रति
हो पाती है जो पिर बाम सामने राना मी पापों में म
कारीपन महा। कोष सटि मातोपनापौर भिषारयामा
पाप में कभी भी अन्ये और महिसार उत्तम मही र सो।
पपदेश तथा जीजाबायपूरए प-पपाम वर्ष पूर्व पर
मोगा ध्यान षिकामा एम से राई सपा नवा की बोर
रिमारा गदा का पापिका समयावर परिणामोम
पतपते पयोपुरेशराम र सोमायने
मातम
पर राष्ट्रपिनाम बामोरी मिरारा मिले। पितु
-
व विपाराम पस्टा साया है मह उन उपदेशों में माता के सर कों के मुपरिणाम बक्सिया बनाये पाते । मौर पुगुणों मपमा पाप न उसनेस कम होता है। इस युग में मोगों को मपनी मयानक पुधिों परिभाम रहने नहीं पता था । बा पुष्प को एकर ताया गावा है और पाप की मार यद-का ही प्यान दिया जाता है। माता पिता का हरप गुम्बकमी भांति होता है।बाबामम की प्राति तथा उसो पभाव स मापनद्वारा पही सब कुछ प्राप्त करता है या रिचारों द्वारापामा मानस परम पर प्रति च्यिा पाता । यदि नाम के हाय-पट पर सपा समय पदाचार प्रमेया रामपीमवा प्रामाणिकता सरम परियम तपा प्रसन्नता के विचार प्रपट होते गते है तो विकास किया पाता है कि युपा होने पर वह पामा सफपताजपा प्रमम्मत कामगिरी बमगा। प्रात्मवि'वासीको मावश्यक्ता-पान में भारमविश्वास र प्रचार मे पहामा वाहिए मितु इसना भी नहीं कि चमे मपनी योग्यता और पात्रता पर पर्ष हो जाए मौर पर इतराने समे पस्कि पसा रोम रोम म ये विचार नरसन्न कर देना चाहिए कि माता पिता रमसिए पिपरीय देन है और उसे सारी याग्यता तपा पति प्रदान करने वाला परमपिता परमार है। यदि पाठा रिवा बासको पीमारिमक प्राधि मे पीनर और रहे भगवान् की एक पवित्र देन मममें सोमवयम्त योग्य बुद्धिमान मोर सनपारीदन सकते। दिपार पाटन मिला प्रमाती-यह तिनी विपित गात है किगिर पाटन पिया प्रगानो काराबाहो एम-त ही में माएपमिगा दिया गाता है। परापमतमा बहाएर पेमों से पर मारग मोर पोप मीसते म्पाय के वमों से पारमारिता मैटिक गनों मे पन समार तपा बातें मुपर पाती है। गरीवर
मिमका सामन पामन निरमा पन्दयी और रखितावातावरण
में होता है और गिनको संसार ही गन्दीऔर बी बातों का मान
तक नही होता पप सामारिक एवं नैतिकतरपरमाते हो
पेमपने मस्तिष में नए विपार भेकरवाते है। बिनम्रतमा मुस
भार बम बाते एपिसी को मार मभिवारन करते हमीर
उनके मां-बात को मसीहार करना पड़ता है कि विपरमार्टम
मिमप-पति से प्रभावित होकर अविसर पाना अपने घरों की
माया-पमट करते।
शिक्षा-दीक्षा में सर्वाधिक महत्वपूस बात विचारामिति
है -नातक की हिमा-गीता में सबसे बावस्यक पौर महत्वपूर्ण बात
पसके स्वाभाविक पपा और धोत्पारक विचाको मिति
को प्रोत्साहन देना है। किन्तु गत कम बों की सिमा-पीक्षामा
माणिकम से कीपातीमा सामायिक विकास में कोई
माया पा धन बमयों की पूमि में कोई रोक-टोक न हो। गर्म
अपने की बात सप्टम्स से बाइक रिस्त बलाद कृष
काम निया पाए वोपम मानसिक समीस तासमाविहीन हो
पाते है जग माप नियमामपने काम मा पाई में परिमही
मठा वो समय तानिए कि कोई-न-कोई गोप सममें निस्सन्देह है।
पोकि हर बात में पचि मैना नाम लिए ऐसा ही स्वाभाविक
रुपा बावस्यक सापिभियों लिए बहरहाना परिमाप मा
माहो! पर बपने बम्पयन बमा कार्य में बात चीता से
प्रगतिको रस मरितफ से बप्पयन याकाम को कोई विपत्ति
समझने का विचार पर करने की चेष्टा मैगिए । प्रतिलिपट
का करन मानिक सिसा प्रणालीकामप यह किसकी
प्राप्ति में प्रसन्नता और प्रपन हो। नाम होगा जिस
पण सनिए मायभागी। हमारी मा प्रधामीका
33
। पोप यह है कि सूमों में बमों को इतना काम करने के सिए रिवायाता शिसे वह मनी भांति सम्पन्न नहीं कर सकते। पर एकनभम्म पाप है। हमारा मादर्प प्रसम्मता को बढ़ाना मौर बीवन को मुबा बनाना है । और यदि हम इस मावर्ष पर पता से रटे में तो कोई कारम नहीं कि हम उसे प्राप्त कर सकें। इसकी प्राप्ति के मिए हमें माधुनिक शिक्षा प्रगामी पौर मम्म मनेक मुस्मों से मदहना होगा विससे मनुवार मोग निश्चय ही नाक मौ पायगे परन्तु यदि हमें बच्चे पर मुहर परिणाम प्राप्त करने है तो ऐसे मोनों की परवाह किए बिना बारे गहना होमा यहाँ तक कि हम अपने मधित समान को पोषमाएँ । आदर्श जीवन समय सर्वरा सम्मुम हो--अपने माप कोष अपने सामने रमें क्योंकि परिमाप पक्ति और स्थिरता से अपने बीवन के माप का पालन करेंगे तो दुनिया सत्यमेव मापकी उन्नति का मार्ग प्रभातमी पोंकि यह ऐमे ही मोर्पोका सम्मान करना बानती है। मार्ग में परिवतन-यरि माप कुप भी अस्तित्व रखते है। परिमाप अस्तित्व की कुछ भी वास्तविकता है वो माप भोक्त की निसटतम परिस्थितियों में भी निहार सरते यदि कोई घटना अपर पुषटना बापरे भाइम को कम करेगा तो समभीड होने पीबापायरता मी माप वारेमचिन्तामन विचारों सदर निमाने बाग पर साता रोएँ। मापरे भार को परि पतिवार पर हिमारा कोई बारम है ही नहीं मौर
।
महमपन्त मयंकर स्मिति बोकिसी भी पतिबीवन मैग्नलत
हो सकती है। मानो समापन-नोकाकी पवार कोगई हो बह
परम पियुसे एकरम मीर पिर गमा है। यहांलाकि वह साधारण
प्पा निम्नटिका बीमा बोच्या से व्यतीतकणेपर बियप हो
पाता है। वह अपने अस्तित्व को बीरग-सागर भारी पूर्ण
करता है पाकि उसे गिपर पाहे नहाकरसे बाकिस्मय पर
जीवन ािरीको रसासीनतापूर्वकालपरहा से
अपने पोरन र पयो का मम्मों के निम्नतर होने का मनुमबहोता
पापि उसमें यह सत्साहपरमग नहीं होती सियम परमानन
परयों की प्राप्त कर मेता है।
रस पिनापकारी स्थिति पर मोबार समाप्त होने पर
प्रकार होती है। पायर हमारे पाप का उगवत सितारामास्वपमें
मातिन मी पहा मपितु हमारी इष्टि के सम्मुख पर्श पर मया है।
मक्ष्य में संतुसानस समम हम सार पपने प्रसरण से
मन करना चाहिये किया हम अपने जीवनोरमस बामे तो नहीं
निकम परेमा हमारे साहस गे हमारा सहीपतो नही रहा!
एक परम मम्मा अपने जीवन में हमारे सामने वा सकता है।
इस समय हमें अपने मागे-पौधे बना चाहिये । मोन्म्यो जीवन
पर पर पर हमारी पिम्पापक होती जाती समागम भी
उसपरपा महामवर गाजे है। किन्तु पावा महीमारे
कदम गम्भीर रूपा संयमितराने पाहि । उमम पिसी प्रकार की कमी
पदिमी होनी चाहिये क्या ये मनुनम रे माई से होम पार्य।
पीपरोपरपाणीति से छिपात्रामा पाहिबारमपनी प्रत्सना
को मदार में परिमत किया जायै। रित्यारागास
बाबा पाप माने पर पर शाहिल या समिम समार
परिषरममा बाम हिमानी मात्रामा विमों
१८
No text on this page.
प्रपनों का मुहार निश्चित स से उस बोर होता है कि उसका
कीपणारेहार हो और रमका मषिप्य सम्पम हो। पिता इस विचार
से काम करता है कि बब उसकी मृत्यु हो गायमी तो उसके बाप उस
का पुष स्पान मेहमा इसहिए पिता का पुषावस्या का पश्य पर
होने पर बरस बाता है। किम एक बीवन-नग्य ऐसा भी रिस
में किसी प्रकार परिवर्तन की मायायकवानही मीरपहराच्ने
एम्मास पा उरग्बम परिकामावर्ष।
विनम्रता सपा प्ठ मम है-मास्पामस्या हवा पुषामस्वाकी
सीमाओं को पारपरम के पापा परयान पूजावस्था में प्रवेषकरवा
और उस पर लीग तामहाराtो उस समय तलास
ही एक ऐसी माम्तरिक एवं पानी पत्तियो समज पाप रेठी
है। यह एक ऐसा ममिटर उनम्त मगार है जो समय की टूट-फूट
तथा प्रसार सबा बा एता है। यह एक ऐसा मारपयो
मासर नहीं । यह एक ऐसी वस्तु है जिसका फल इसमें तो मिलता हो
है परलोक में भी बसस्प मिलेगा । यह एक ऐसी मनस्वर मजिसके
मम्मुखममारण्य पारे उपहार और सपत्तियां है।
वमिराम मामा की योग्यता को परीक्षा नाता
पोग्यता की परीया उस समय होतीब रमसे मनिराम मांगा पाठा
है भोर पारेमा जाताह बार्स-प्राप्ति के लिए सिना पनि
समिए देगार भाप निराककिपमुकाम
करने के लिए बार है कि प्रश्न यह
किबाप अपपी र श्य
माप्ति के लिए प्रयास में कितनी पनि मावे है।
कपनी और परली में पमा मन्तर है। किसी वस्तुको प्राप्त करने
बीमामा या प्रकट करना और उसे पाने सिए रमकाकरमा
(राई मार्य में तिमी ही बाबाओं का सामरा क्यामरमाप) इन
दोनो म मामार है। गत से मोम स्नीमाएँ
मरते
२
है भोर करते है कि परिहमें सांसारिक मप्रमों से मुक्ति मिल पाये
पर की समस्या माय में बाधकम से रारिएप का भय न हो बीमारी
की बापाम होतो हम बनेक महान् काय करके दिखा सकता है।
परम्तु सस्प वो यह है और इसमें रत्ती भर भी बम्पोक्ति नहीं कि काम
करने वालों मे संसार के बोबो कार्य प्ट ब सकट तपा दुख पीड़ा
से घिरकर
शिबीर ये काम ऐस सोयों में सम्पन्न म्पिको
एकमोर तो मपनी शारीरिक पतितपा-मानसिक शक्ति बस पर
मीधिकोपार्जन के लिए मपर्प परते है मार दूधरी मोर नमी प्रतिम
स्पिरिकों में रहकर अपने जीरनोहम की प्राप्ति मे सबष्ट रहत है।
यह पिरिए बात है कि पो मोग अबकाए के बहुत मभिमापी
पते और मिनका अपने बारे में यह विचार होता है कि मरकाश
क्षों में कोई महान कार्य कर दिक्षाय भब रम्हें सबकाप प्राप्त
होता है तो कुछ भी करते-कराते मही। निम नवयुको मौर मोनिका
पाया में सम्पना पा मसतिको प्रगति की ही सोपाम पर पहुंचाया
मोर मानवीय ससति को रिमाया है उनका सम्बम्प बनकाम
वाहने माने मोर्चा से मही पा पस्किन उन संस्थानों से सम्बाप रखत
प जीवनोपयोगी वस्तुमर्मों की प्राप्ति र सिए पाके याती मोर पोर
संप करती है और बि पीरन की बहन पस्ततामों में बहुत कम
बरारमिता।
इस कारण तो विनिमहरिमापारगतमा यह निधार है कि
मस्तिषा मयि जीवन प्रायः मानष प्राति कमिस्त प्रम को
ममाफ कर देता है। यह मौम्प वा नामियाप की अनुभूति कोमट
रता है। हतही पामार पन्धि जीवन की मदुमनामी तपा
ममिवामी परी सतह परमाते । निमाम्माविरता यह है कि
महपा भायत मुभर नपामनिट पमस्तार एमे पुरपा और चिों
पर दिगायो सगर पारिपतियों में पिरे हा पे मौर मिर्ज
२१
दैनिक पालनामों से सिर मुगाने की भी फर्मत नहीं मिलती पी।
संसार कतिपय सपष्ठ मा महानतम पुस्तक पदिता तपा विपत्ति
पिनों में निती गर साहसार ऐसे मोर्मों में प्रस्तुत किये है
मिममित र भरे जीवन में संतोप की सांस मे का बबकाप
प्राप्त न हबा । जीपमोर प मा भाई नम्बर होता है। स्मितियों
कारण मार मष्ट नहीं हो सका बरसकी प्यास दुस साठी
है। हो परि इम्मान स्वयं न पाई वो पहप भी नहीं कर सकता।
बहुत कम लोम एम मोबीवन को महिला मानते है सहमत
ऐसे म्पनियों का मोबीवन के कामो को परत बनेया और उक
वाहसार पूरा करते हैं। अपना गामस्म समय और प्रपों
को मपनी पामना-मूर्ति और निम्न र पो प्राप्ति में मप्र कर
क में मपनी हिम्मतों मोर प्रयलों को पा परिण
गयों की प्राप्ति में लगाना चाहिए।
जोबन का मारह मात्र पन महीं अपितु मारमा पा उत्थान
होना चाहिए-या पर बुद्धिमानी कि एक पति पारीरिक
मानमिक मोम्पवानी पत्तियों तबाहर बह वस्तु पो उसके परिवार
मे हो मापन प्राप्ति म मगा पाक्सिम पार पारित एन भर
की पुत्रीही या वीरमरपी दान यो परमपिता परमेश्वर में हमें
प्रदान किया। इसमादी सस्ता मुत्यहीन मा निर: कि हम
मरने मुस्कान ममम को मारमाबर पा भौदिर वस्तुओं पर मप्ट
कर और अपने बनाबर वा रिस्पापी को पूत गाए भोरपस
सिम्मृति र पम में परशा'तप्प यह हमारारिकाप ममप
बीमार एवं नगर पानीको माप्ति में भए हो पाता है
मौर फिर भी हम मारे भरमौर नितारा रखते है कि काप
हम प्रपन मार को प्राप्त कर मेमपत रोमत के लिए बरे से
बगनिदान रिनुअपनी मारमा की उपता माता
तपा म्यापकता के लिए पहारिस एप में गम भी नहीं करते। हम
पानवे शिविमोबस्तु को प्राप्त करने की मात्रा गिसके पाप
प्पहार महोरेस से एमिम के पम पानी की माठि है।बीयन की
रेत को बताने भए म प्य तया संकल्प कौमार की सीमा तक
होना पाहिए। यदि मर्म पानी से ही ए दिन को धमामा पागे तो
बह एक मीन तो क्या एक गम मी मही पडेगा । हमारी प्टि सदन
घोरी-छोटी वस्तुगों पर ही है बो हमारे पास-पास होती है। परंतु
महान व्या उप राय बहुत र रिसाई देते है। यही कारण है
निम्न वस्तुए मार सापाणराय हमारे महान् सपा सदर
परीके मार्ग में पामक हो जाते है और यही कारण है कि हम सब
सपा महान् वाद र सामने रुपय की बोर ग माने पर नहीं कर
सपते । सहर स्थान पर समुषित पाग पा पमने पासे इसान बत्पत
निम्न कोटि का जीवन पतीत कसे हुए मिमत है। ये सपने पर्य
में, सिरदीन मम्यापर अमवा नीनिपरक रूप
में सफम होते है किन्तु एक मानव की हरिबे मम्फम पवा ममामे
पसरा कारण यह है कि अपने पातम बारम को प्राप्त
नहीं कर सकत । प्ररया स्थान पर ऐसे सीप रेसन में मारे १ गो हस
तपा सापारण बस्तुमों के लिए उपमहान् जीवनोर पर की
पनि५६बपनी सपपइस्पामाविर पोग्यतामों का सतही
तवा पौशिक नाम की देरी पर पमिदान कर। पपने भय
साभारिप नयो को तुम मुनाप तपा महमी मिकों क परमे
।
पह मरप नही कि मोप पानुन निगमता सपा नेता पर पन
पोप्रधानता देव अपने बीवन सप्न की पूर्ति एप हमार साये
पारने या सम्पत्ति बनाने तहसीमित समाम अपितु तप्प पह
मापार प्रनिरिए सन-परवासामारमें मोच्रमाण
।
उपा मिहिमाम मटक बाते है। दूसरे पन्नों में हम यो र
सम्व है कि यह सुरम् भाम्यात्मिक मारप को अपेक्षा संसार की
साधारण गर पर बस सरेहो।।
मोबनोदय एक महमूस्य मोती है मिसके सम्मुख
सांसारिक मुब हेय है परन्तु मामय ता पसका पोषन-मार्ण
बस्तुत धन संचय और पापी-मोने के समूह के सामने एक मत्पम्त
महमूम्प नसिकी चमक-रम के सम्मुख सब कुछ है। मिन
लोगों के नाम मोक-कायान के बाकाम पर मूर्य बनकर धमके है सन
के सम्मुख सरा उच्च ताप तपा मारणं ऐ है। रोने कयौ मपमे
गप से मुह नी मोरा बल्कि स्थिरता का पता के साथ उस
पर स्टे रहे। भार मानी भरसक पाक्ति उसकी प्राप्ति में नमारी।
ऐसी सक्रियता तपा निष्ठा के साप जीवनोप की प्राप्ति का
प्रपल करता यमेव एक महान कार्य है। यदि माप बस बादाम
को सुर्ने पो समनापको उस मार्च की होग लिए तत्पर करता
को पानी बोर जाती है। यदि बाप रस पनिको म्यानपूर्वक
मुबार उस मनुसार पगार र पो पापको बाशा देती है कि
गिरापरवायचाई पर हप्टि रोबोबापे मरमे मार
पम्नति करने के लिए मनुम रित करती है तो बापका भीवन कभी भी
मसम्म नहीं हो सकता बारे संसार मा संसार बामे पुष ही क्यों
पहें । मुझे बटम विश्वास कि यह सुप माने पावापानोगों की
मैदानमा मुपारनिए अपना पक्तित्व प्रपनी माता का अपनी
पवान कौनमि सासेकी पति समप्सीबाएगी और इस प्रकार की
पनिनेपाले पतिका बीचममत्पम् मम मममा पाएमा बार
संसार महारमा कपी मौर नि. बिम्ना को इसी कारण सफा पति
बममताtioहनि बपना तन मन और बन सर पुप पनी
पादिकोषित कर दिया।
२४
वास्तविक सम्पत्ति स्याग व बसिवान है रुपये पसे काटेर
महीं-मास्तविक सपा ममयर सम्पत्तिके स्मामी वैयक्ति है योगीरन
को सुखद बनाने और माममता के स्वाण के लिए प्रपल काहन
किलोप गिम्हनि स्वाप पोने दमा मारम्पराग पये-पेमे के
रे एकत्रित परमिए । यो मक्ति बस्तुत दानशीन और परमार्षी
पह पारस परपरकी भांति है कि जिसको मह स्पर्य करता है उस
सोना बना देता है ।गो कोई ऐस यक्ति को गिव में रहता है यह
अनुभव करता है कि उसने दृध शोमा नहीं वरन् पाया है और उसका
बीवन मुगर पया है।
एक ऐस यंत्र का बारिफार हना है जिसके पुर्य इतमे कोयत
और ममित बनाये गये है कि रम राणरीरिक शक्ति के कम-से
पर प्पय का अनुमान लिया पा सकता है किन्तु यह जुर्माप्य नही तो
और पया है कि पुओं का मनुमान करने और एक जीपन को मापने
पा पार तक कोई नही पना। परिकई ऐमी कम ससार में बन
पाठी तो कई मबपति बपना नाप ऐसार भाग-बगुना हो जाते मार
भनेक राष्ट्रीय मेष सपा नेता अपने सक्रिय प्रयत्नों सपा सेवाओं का
बम्प नाप तरपति रह गाते।
मेरा बियाम बिह ममम ममीप मलिपीमे रन बिमाम
तपासपनामी मान पीपदी मापत्तियां बिस्वयम्पाक नागीरें
मौरी-बोकारवान बास्तविक सम्पत्ति एवं पन प्रथमिक मान
एपनहीं रहेगे परन् मानमिक एक मैतिक विस्तार उनका स्पान से
में शिनाकारण बिमोम्पतिका धीरन मषिकतापदायक उपा
बसर हो सकता है। ती पक्ति की मानता मा भनुमान उसकी
भारमा मामा म पिया जाएगा। मामला सवार हप्ता
सभ्यता वा मावि रमपी महणा तपा उपपता मानरमाय
मएिक मोटीवी औषधिसमें से बह रपर्योपाटकर बरसे
२१
पिराधियों के महम कर सकता है।
प्रिसिपका कपन कि प्रत्येक पति को पीवन में एe
चारतो परस्प बपने पूर्ण पोषम को पासमा का सण दिवाईवा
में अपनी बत्तमान परिस्थिति में माममुभव होता है कि
क्या जमना।
भगवान मेहरमानवीय मारमा में कोई न कोई मम्प पिपा रहा
प्रत्येक पकि बीमन में एक ममम ऐमा बाता है कि उसके
हार में महान् कायाप मया परमार्म करने की पभिमापा बाबत
होने सतीष मस्विप में पष्ठ कार्य करने की प्रबन रहा
उत्पन्न होती है और पसी समय इन्सान के सामन उजवीरनोदय
हरिपोचर होता है। यदि कोई पछि दैनिकबीयम के प्रमों में
पप समय की प्याकुम सा को म्पपहारिक रूप मौरमपमै
पौरनोरम की प्राप्ति के लिए सबस परसर्ग करने को कतारको
मापे तो उस मस्तिका बाय बन जाता है और एक ऐसी मान
पित कार पारप का मेटा है जो एक बार समरत संसारको
सरपोर देती है और मन मिस्मित पपा है।
इच्छा-पूर्ति की कल्पना
पास्यावापाको पित शिमा-दीक्षा प्राय सफलताका
पोतक होती है। मनप्प मत्पुष यौम्पवा तग बिता रसवे!
गिरें पारा पीपणेत पाने साइम नहीं होता क्योंकि इन
पोमपानी पिया महीदीमकपिम प्रधानमनगरमा
पासपोर ने पोप का दिल का साते है । बपि सह कोई
२९
कदिन बात नहीं होती केबन गर्ने साहस नहीं होता कि ऐसे पराम
गुरुपरमिन्हें करने के प्रकार से पात्र होते हैं मोर मिन्हें
भारम्म बरकरे पूर्ण भी कर सकते है। यदि बचपन में समुचित
पिमा सारी जाये तो बहुत कम तोय मसपत रहें।
यो मोम इस मंमार में बरेनो काम करते है उनकी पस्पना
पादित महत प्रपतिशीम होती है। ये कम्पना में ही अपनी न्याओं
की पूर्ति का विच सम् । मोर उसे हर रम मपनी प्टिके
सामने भी रस सम्त है। हम उन सोपों की मम्पावहारिकता की बहुत
बातें मुनते १ को मात्र पास्पनिक मोरे पौड़ाते हैं परन्तु विश्व इतिहास
कोरमलपूम बोर हर मापिकार मौर हर कारनामा ऐमे स्वप्म
रेसने नार्मों का मामारी है । ऐसे लोगों का पो पटना से पहले उसी
कम्पना पर सरते पो मानवता की मावस्यकतामों का चित्र सपने
मस्तिक में सैर सरते थे।
गिन भोगों की पसना शक्ति निर्मम होती है या होती ही नहीं
जो मोग पसना-पट पर बिपने पार मही होते गो माग
माने मार का केबस गुपमा मौर ममिन पित्र में साते है पे
मोम बोपारमाम नही शिपाया करते । हमें लिप्त राम करने की
बार में पूण पिको हरम मामा के सामने रमना एक पास्त
रिपरि है। यह एक एणा ममूना हमारी मांगों के मामने कर
रेमा पिप मारे समस्त उप र पमित हो जाते
१.यह पति हमारे जीवन में पनुचामन वापिसप उत्पन्न करती
हमारकाप मामुमार काय करने में हमारा पर प्रदर्शन करती है।
11 मम्मरानों पोपान मही मरने सपनो हा
परमानामीत्रिने काममिवाना चाहिए। उन्हें सामा
पहले पति नरपेः पम्मु को रामचिम गाय
उमी प्रसारमहिए भवन-निमांडा निर्माणकाम मारप्न परमे
से पूर्व कपन पिकाने मस्विम मे मना मेता है। बातों को
परमपने विधायगुहार नए और मुमर तपा ममामि
मामे नीमपना करने मोरवन रेलने का साहस सपना
पाहिये । इसी प्रकार से पूषा होकर कर्म भूमि में अधिक प्रभावशाली
कारस
भो स्थिति बार या करगिस मामधिक शक्तिको
बामापने बीवन को साधारण स्पिति में जो परिवर्तन
मापको नियत हो और गित बस्तु को प्राप्त करने की मिसापा
मापके घर में गाई मे रही है रसायही मूस्याका कला इमर
पिस्तु परिबार अपम गग्य का पित साहस, सफाई और षि
रता * माष सामने रखा तो वह पिमापके हम परमपित हो
पाएमा और उठने-बसे मटते सोवेवायवे हमारे सम्मुख ऐगा
बार माप विम प्रकार के स्त्री या पुरुष बनना चाहेगे बारके पीपम
मामे मा ही बापय प्रस्तुत करने में मत हो जापरे ।
सफलता का गुरमतिर नोमा को बार-बार रे एम
हपने से भी सराबता मिनदी है। मैं योग्य , प्रसन्न हूँ मुख में
कोई कमी नहीं मुझे एक पूर्ण एर सम्म सीवन का निर्माच काला
है। मस्तिष्क में मपमी पूति का कि रमने से मारपर्य जनक सहा
पवा मिनी विपरीत घोटा सपा ना पूर्ण विज
मिण्या मा चोरतारारा करता है। और विशेषकर
पिता तमा पीडा राममोर भी हमें हतोत्सादर देता।
कोप्पिति भी सब सम समान स्वस्थ और निरोग मी
हो सकता कपिर प्रपने मस्तिष्क में निराशा मापारी मौर
राम पिप बनाये रखता है। हमे
पासा हम बना
पाहवे ! सा ही अपने पाप परम पूर्ण समान
हिपापारिक मारोप प्राण मा पारीतो मरने
२५
बापो पूर्ण स्वस्थ गौरबमधासीसमममा पाहिए पयोकिहमारे पीर
बयपर भोर मरिफ के मंग हमारे इस काल्पनिक चित्र को ही
वास्तविक रम में प्रस्तुत मिसका हम स्वप्न देख रहे होये है।
मपन मस्तिष्क में मपना मग हेय मापूण मार गिपिन चित्र
समान पाप है। माप पारीरिक तपा मानसिक रूप से पैसा बनमा
पाइने । पैसा ही विमाने सामने रखें। मापकी शारीरिक एवं
मानसिक सा उम चित्र में पाहे कितनी मिल गर्यो न हो।
यदि पाप इस मामसिक चित्र को हर बम अपने सामने रखेंगे
तो पासा भरा मार भोग पित्र स्वममेव मापके मस्तिष से मुप्त हो
बापमा । यदि मापभपने शरीर कीमपने मन्त -सा सममें तीभापको
बारपर्य जनक सहायता मिलगी पोंकि विज्ञान हमें बताता है कि पारीर
के कम-पषिक सभी बसपा समामधूम रमते है। हीमो और पढ़े
केसन रिनिमय प्रकट करते हैं अपितु समझ-यूम सपा मुनि मोर दूसरे
मयम भी भ्यस्त काहे।
जिस समय रिस सग हम कोई मदान कार्य परने का संकर
करते है पनी ममय हमारे बाम्तरिक प्रमपर हमारी महापता होइन
मोरमारे निारप को पूर्ण करने के लिए हमारे परिकारी पर
याय होते है।
ठीक विचार की शक्ति
मंगरमोबापारियों और पम निपुण गोको
मलिन बाँकी निगरो पप्पयना में माध्यात्मिक
व रामामारिया परिस्मा के अनुसंधार गप से नियुक्त
मनेसविराममायोमित करणे वषा सामियो मेने के सपरामा
समिति के सपनों में एक मय होकर या निपप निकामा किपर
और मस्तिक की निगा परबाप्पास्मिक मतों एवं पवस्या का
सुपारसना प्रभाव परवा और मस्य परता और सबसे मान
रिक प्रगति में पर्याप्त सहायता मिमती है।
वास्तविक स्वास्थ्यका भव जा में यह बात होगायपा
हिम्पायुमा पिना रोम उपा प्रत्येक कष्टदायक एष पोकप्रपमस्तु
का पपा कारण पसना का टिपूर्ण रूप सब हमें वास्तविक
स्वारम्प 7 मेरमात हो मामेमा पार हमे शामिक नियमों के मनु
सार भीमन-यापन कारस बागाया। फिर हम मरयम्त धर्माम्पपूर्ण
पासारण भी परम्पतम सपुर सत्पन पर समयबोर निवार
प्रतिसतमा निरोगी परिस्थितियों में साफ निर्ममा तुमन
प्रिय बीवनपी महाबीर मुपप बितेर सये। हर समस्याम
म
मापनेमा मस्तिमाको सरापार सोसाय मा
साव पिपरों से भरा हुमा र शाहिदुराचार पता और
सूठ को स्थान म मिम सके। ना बाप ऐसा करने में समहोगा
तो निर पाप पा-करा ही रोमास होपे। भापका स्वाप्प दिन
प्रतिदिन नम्मतिरेया। इसके अतिरिक्त माप वापस्था पर
पायये और पापकी मजार परामी रहेगी।
पर बापरा बन्दर इस बात की मनुमति माप मुस
में पापकी भायु का पता नहीं पम सम्वा । मानपनाम प्रस्तरकार
बीमार मारी गुमाइति मे भापडी मारमा का प्रतिबिम
मरना।
सामपर निशान--पर हमारे विचारों में परिवर्तन हो पाया
है वो रमारा परीर मौ परियतित हो पाता है। सिर परिवर्तन में
मारते बरम जाती है। मानसिक सन्तुसन से मामसिक पति प्राप्त
होती है पोर मानसिक शान्ति से मामु पठी है। यह एक भरपन्त
मामा निदान है।
पोगात हमारे मस्तिष्क को चिन्तित बनी करती है या हमारी
मानसिक पति को मष्ट प्रष्ट र देवी नही मात म्या मता
बेनी और सन्दरता करती है और इस म्द्र ही से गीत योमह
मन पुपीम पिस पाते हैं।
सरा तरुण रहने का रहस्य बहुए कम लोगों को भपने बास
पान के पुटे पुटे पहावट भरे भोर चिन्तामक बातावरण के प्रमाण
सेपरने का सापन रित्ति है। इसलिए माये दिन निसी म हिसी
रोप में के एवे हैं। यदि मस्तिक में हप-पुष्ट सस्प बायापारी
उपा पूर्ण पोरन का चित्र रसापाप न सम्य कारनामों की कल्पना
मी बाय बोमन पौरन नामा! पौवन के सपनों विचारों मार
बापायों को हर सप अपने सामने रखा पाये तो पारका यौरन बना
ऐगा मापरा पौरन प्रपतिकोमा और भाप पर समयदी तागति
माकोई प्रभाव म परेमा । यदि माप हर समय यह सोरते रहे कि
बाप पुगाए स्वस्प वा इष्ट-पुष्ट वो बाप पुषा सेवाऐंगे
मोर निश्चय ही हष्ट पुष्ट और स्पाप में ।
स्टीपेन्सन कहा परता पा पोयम भास्मा कोकोपित तपा
मुप बनाये समा गपस्त मानसिक अंगों का पान सोत है।'
पोमियाहाँ ? -मामा बनाने का पपा पिपागुरिस
पा को पु! हर पीतम पार पारे में एक बहसमीर स्वर्य
हमारे गरीर के मनराश्चिमान है। समा भेर हमारी माती प्रमृधि
में है हमारे रिपारी दारा नियनित होती है।
पुर एवं मौरोग रिपारा मन पुरा मेरमा समय
रानो पो इमामे मारोगा मोरनिदान हममने बमोस्यों
१
श्यों हम पूरे नियंत और पक्तिहीन होते गाते हैं। क्योंकि हमारे
विचार बोरासमाए हमारी प्रष्टता गुप्त स्थिति में परिवर्तन
परती रहती है हमारा स्वास्प शक्ति हमारे रिचा नुसार
ही बनती है।
दुर्बलता का विचार
बामक को कभी भी भूम प्रयोग्य तवा पुरुजिम करें-
बाया किवने हो बाराते बेतों के लिए पुर्वमता तपा निम्नता का
काल्पनिक संकेत मनगमायु मार तूफान सिर हुमा। कितने ही
मापूस्य जीवन मात्र इसमनुभव के कारण मप्ट भष्ट हो गये । माता
from अपरा धिक्षक के पास को हर घमपशि मौर मूमने
सबन्त में गो हानि होती है उसका बनुमान भी नहीं किया जा
सकता । परिवार को बार-बार यहाा पाय तुम तो मिरे
युर्हो मूहो. तुम सदा राततियां करते पहले हो तुम्हारा
काम कमी होता तुम कभी भी कुछ नहीं बना पाते । यह सब
बामा कोमल तपा सासराय व मस्तिष्क परम प्रकार
पागाती है कि पुष होने पर मौरस चिम्को मिटाना बस्यात एकर
होला है और फमस्वम्प पर मार्गतिका कारण मिट होती है।
क्या बाप मानक की दुनिता और प्रकट मूमंता का कारण
पान? इमरानपिपारण गामा भय मग्गा और
रोष होता है।बाप को माने विचारोंनी निर्मी मनिम्पषित
पा माइल नहीं होता। उसे माता पिार प्रकट करते हुए एकमबाट
१२
33
ता भय बनुभव होता है। यह समानता है कि उसके माता-पिता उपा पप्पापों का मान मोर बनुभव उसकी योग्यता सपा समम मे पर पर है। वह र पाता है और सपने मन में कहा है कि इसमें सरोह नहीं किये मुमसे अधिक पिक्षित तमा मनुमपी है। मुझे न तपा मसामी कहने में पदापित म्यायपूर्ण हो फिर में वास्तव में मूग तपा मशान गा । पर रस इस बात का अनुभव होता है बिहमारतब में मूर्य पाहताध हो पाता है। उसका मुगुमार कोमम हृदय ट्रम हो पाता है मौरबार में पाहे मितमा ही प्रयत्न योन प्पिा गाये पुष बनाये महीं बनता । म एक ऐसे मनुष्य को जानता हूँ पोबो शानदार राय कर सकता पाकिस्तु चनका जीन हम इस कारण से नष्ट हो मया कि पर बहसमा पातो बहुमा रसके कानों में यही माघार पाती ची नि तुम मूरो निरक्षर हो बमामी हो । उमका करना है कि पारम पर कमी से सावनिकप से पपया निजी स्म से पिसी दापिरब पा पर प्रस्तुत किया जाता तो उसकी पुतता का पिर भी उसके मानव-पटस पर पित पा उसके सामने घूम जाता और उससे राम कल्पिाममोपमा समता उसके बारमनिराम को रेम पचती मोर रामनुभव करने सपता कि मुममें बह पोम्यता नही है जिस की मो मरे तापिर्षों में बहसता है। मेरी प्राति में पम्मी है मगोरी। इस प्रकारमहयो पारे में पता मोर हानि नावा। जितु ममि में यह कभी अपने पोल्प माप मामने नहीं माया मौर म प्रहारमपने बीवन का पप्पम माम रमन मो दिसा पिर ससके माता-पिता सपा विसर पचपन में ही यह गमाः मरि यह पामा भीरपा नगीना है गरे मस्तिष्क में रिमाप्रारकीरोई नही मंभपरसपी प्रधिकी गति मदहो हो मा परि पाम यह होगा कि उसका जीरम विमत ही एम गाता । बह
मौर
माधीवत ररपोलमा ममानु रहने की अपेमा साहसीता पराक्रमी
जन गाता । नम यतिरिक्त रमता मौर निम्मता का मनुभव
भी बनेकठिनाायों सपा विपत्तियों का सत्तररामी है।
अनुचित पापसूसो कभी न करें-पारेप में छहमों मनुप्प
मे नियम में यह विचार पर कर मेवा है कि हमारे कारखानों
मासिक मा पार्यालय के मनई और घर में बहुत अन्तर है।
वे उस बग में समय पते है भीर हम निकृष्ट सामा सरस्प
है। इसी प्रकार अपने मारमसिनास मारममम्माम साहस स्थिरता
सपा सरता की गाय समात सकियों को भारी सति पानाते हास
प्रकार के पक्ति हर स्थान पर चादरीकरणे पीप गते मार
दूर कीटो बारी हुए दीप पाते । ममा यही कहा करते है--
'nt साह । जी हार डोरमा। महापमा माप का कपन
सरंगा सायबरपित। जब समाईपतिवारी उनसे कोई
मात मांगता है तो मांग चाहे तिमीही हास्यास्पर एवं मनुषित
पाम हो उम मोपों से प्यार से यह प्रकट होता है कि एमके कोई
परिकार ही नहीं मार पवि मी तो पो उसने अपने स्वामी
बममा मधिकार से बस्पायी रूप से सिम ।।
माना कि माप निकारिधिमार बाप का मालिक मत
पति तर मी माप को मी तो परमात्मा की पुप्पी पर एका
पतना ही अपिता शिवमा प्रापणे या को। परिवार
मा उम्प सपा महान मोर गप सपाक प्रयल भी करते।
तोपापो नम शिबाव काबाप को अपना रिसा रखना
पादित मौर मालिक या निपा पानीको बालों में मा मिसाने
मामी प्रकार मदोष अनुभव नही करना चाहिये ।
ससार माप को पही दुध समझता है जो प्रापपुर को
मममसे है-परिमारने मापको बहुत निम्न तासापारप मोम्पठा
का म्मति समतो बाप हेम और मीही रहगे। पदि माप
म्व मपना मारही दो मापदबहरे मोर मापकी गों
में मार पिचार सपा माभूठियां प्रार होगी। मापकी नियत्तता
मौर पिता पुपार-युारकर पहमी विधाप अपने ममप में बहुत
पुरी राय रखते है । भाप की सक्तता तो ससिप हो ही जायेगी
मिना या स्मरण मिसार मापा बही एप समझेमा गो माप
पुद भपने मन में ममम बटे है।
आदर्श जीवन
भार का रिम मेरा दिम है।मार महरम से यह मग करता हूँ
कि को निधार मानि गर ाप भय नोम को इन पुराइयों
मेबपापा। मारम पमय पसार में स्वारम्म मुरपा मेम गोत
भगन्नता और समपार मेरे माप है।
सेरा पस्तित्य पूण-पानव परीरमी सपना म पाल को
माशी निम्मान पोशानियों ने पूष गोवन प्रान
पिया है। सरी पारीरिक रमाबर में भी किसी प्रकार पीरियर
पतिपट नारीहोती। मामो मे मोमबार मिरमाम
म पपीय प्रारिमागरम पापप्ता कामगार
प्रपट परमेल सिरा उत्पन्न पिया ! माप मे गो माधया कोपाई
मनित दिनानिति तपा मपूर्ण है। में ! गाण
कि मैं मरने रेप मार्ग गम्पुरा म मा महल
पर र माला पुपारी मोहपर मेर
परी म रिपनि नि मरनी भौगोगामने गारिया
परिहम भाव हो जाये किमपने मस्तिष में मपूर्व, मुमते और
दोषपूर्ण पित्र की अपेक्षा अपने पूर्ण रुपा दोपहीम पिस रहने से क्या
नाम होता है तो हम अपने स्मभान भौर विचारों को बहुत पस्य
मुबार सकते है।
यदि हम मपने मस्तिक में जी मुनों सपा विशेषतामों को र
बिमें प्राप्त करने की हमें परिका होती है तो पति वा प्रस्ता
विव ष्टता की बोर हमारे स्वगति से उसमे नपे ।
परिबाप पूर्ण साहस के साप काप करना चाहते है परिमाप
मपनी मारमा की प्रमों की पूर्ति पाहते है पामपन्यायापक
कि बाप या कल्पना पर में कियाप सहें पूर्ण कर परायों
किऐसी मानसिकत्समा से बाबा उत्पान होगा जिसमें से पार्ष
के मुका माणुर्भाव होया मौर यही यह स्पान है यहाँ बाप बीपन
की परेसाईयार होती।
प्रत्येक प्परित सममका है-प्रत्येक प्यक्ति इस प्टिो एक
धनका पिने बीवन चित्र बनाता परेषापार
करता है और फिर रनमें रम भरता है। इसके भवनोद तपा
रपया कामाधार उसके मानसिक सिौन्दय उमा विपता
हपारा बीवन अपने पार पाबनुमाप्त करता है। हम नहीं
पुष बनते १ मेप बनने की हमारे हय में पता होती है।
परिहप गरम महान सपा मुगोप्य बनने की करें और
फिर गमापति उमरे लिए सभी पेंपो पामसमय बिमारी
रमा में उम्मति हो।
buी ममिमापा कोहरप में स्थान मारिए मो उन्नोरयों की
भोर गारमः। ऐसा रिसरगतान होने कीपिएको
..
बापडी प्रति को उन्नति के मार्ग की पोर प्रवृत्त करे। प्रापको
अपनी कसना पर ऐसा मषिकार होना चाहिए कि यह सब पण
गों के ही बारे में सोरेन हदय में कोई ऐसा रिकार भी मनायें
पिसका मध्य भागमा बार मागे बदना न हो। मापके हाय में
चाहे कोई भी विचारमाय । बाप कोई भी संकस करें।मापकी वृत्ति
सी ही हो उस विचार का उस दरारे का उस वृत्ति का मापके समस्त
परीर तपा परीर के रोम रोम पर मवाय प्रभाव परेमा । पर बाप
मपना विपार पदमते है पौर मापकी मानसिक दशा में किसी प्रकार
का परिवर्तन माता पो पापक परीर में भी याही परिवर्तन या
पाता है।
धोरण शक्तिको पारितशाप्ती मनाया जा सकता है-यदि
पापी मानसिक शक्तिपीम है भोर माप उस बमसाती बनाना पाही
है तो उसका वरीका यह है कि हर समय मपन उप को सामने र
उसी पर विचार करें उसी को सो मीर रसी के मनुमार म्यबहार
पर। यस तक कि माप उस पति को बहुत मरमूव करने । मिस
पति या मंप विशेष में दोपमोर यावा मही है तो उसको
गाने मोर पाठवाम बनाने का यही तरीका है।
हममें ऐसी गति होनी चाहिए किहम मपने मानसिक मनोरंजन
के मिए सम्ममतापूर्ण विरार मान गप्प तपा गप्प स्पमा
एक म। मुन्दर मुपा मोर सन्धी वस्तुओं पर पिम्तम-पान परमे
पौर पर बारे में सोचने से हमारी मानसिक पति में वृद्धि होती है।
सोपप्रिय मनमे का हंग-परिमाप लोकप्रिय बनना पाठे
है होनापको हरच-मीर से प्रम सहानुभूति सपा स्निप्रताधाप
म्पसार परला पाहिए । बोर अपने पाम तपा म मायाँको
विना मुश्यि बना देना चाहिए कि रसराम पर गायें।
पराहमो तया साहसी होने राग-पदि माप पीर पर
कसरी मोर साहसी मही वो वन्य पर्गों की भांति साहस तमा रमता
में भी मम्पास यष्टि करें। अपना रग-रंग पी का-सा मनाने
मोर पाइसी मा दूरवीर बनने का प्रयत्न कर। फिर मोगों को
विकास हो जायेगा किमापड़े मम्बर एक नई पाती।योरिमापका
सियातरम्पबहार पीरों का सा होगा वो संसार कोष
बनकर खिाये।
मापके मन्तर में बोहुप होता है, मापके मामसिक सपा पारी
रिक मरयर मत्यन्त ईमामारी से पसी पर चिन्हों पर पाते हैं।
इसलिए मापसी प्रपना करपे किसी मकिसी ऐन से ही होभी
पायये।
निम्न पपी के लोगों के ही विचार निम्न होते है-
पा बाप बानते है कि बापका वीवन माहेस उमा भापकी योग्यता
विमी कम क्यों है ? इसका कारण यह है कि पापी गोप्यतामों को
बहुत साधारण समते मीरमपने पारमार्गों को गाव सषित कर
बीवनी मिन बही पासिए हम प्रपल से।
हमारे सरहमारे भय तपा मारे बारमविश्वास का ममाव हम
परकरते। मूर्तिकार के मस्तिष्क में मूर्ति का सा नमूनागौर
मोम होगा मुनि पस पविक मुदर और मारुप नहीं बन सकती
इसके लिए बापस्पट हिपहपने मस्तिष्क में एक भम्प मूदिदी
प्रपना कर रख शरद पवर और सी सी ही सम्मति
का समन पर सवा।
परिस्थितियां विनी ही प्रतिमा महोबाप सराबपने सा
मने एक सपनप रहें। परिमाप मपनी पोम्पवानों को सप्ट
पासना स्मर्पित नहीं रसाये दो मापरस्य में कोई न कोईरोप
होमा र मापारण हैस पातु माहोपामीर में ही सारी
पवियोबाप जीवन मायापी।
मारमा तपा शरीरका सम्बम्प-इस बात का मिाचय कि
में सम्म योग्यतामों का मालिक है मेरी पपाईं धारमा है घरीर नहीं
एक बहुत बड़ी बात है क्योंकि बोध भाप सप को सममे पठे ।
अपने सरापार सपा शक्तियों का मापने पो मनुमान सपाया है मपमे
पाप के लिए यो प्रश्नपापमे किये और विस कार्य के लिए भाप
संसार में बाये है रस्तुत यही बात बिमसे मापही पीगम में
स्मिति बनती है मौर मापका पर तमा सम्मान पता है।
वापर वाय पर भापका मनुमान मंरित हो नाता है । भापरा
विस्वास भाप को और सरयों का स्रोत है। यदि भाप बपने मनु-
मानुसार कम योग्यता रखते है वो पापके मस्तिष्क पर सम कमीका
बनुमान म पायमा और माप कमी काम नहीं कर समापे । इस
से पूर्व माप महान विभूतिपों कार्य कर सकें।
नौवन में परिवतन कैसे हो सकता है-परिमाप पपमे जीवन
में भी प्रकार का परिवर्तन करना काहे को महमा भपने मामिक
मपलॉरा ना सकते हैं। मह परिवर्तन यापकी मपनी टीप-प
मौरब सपा सम्मान से हो सकता है। बाद मारमा पारिमार
से नहीं परन् बाम्तरिक टीप-टाप पा मारम्परारा।
मापके काम बापगय,माप साहस पावन एकरप
हाला पाहिप हिपाप गुफ बना सुपरसम्म करें पुप प्राप्त करें।
पद गुप पनर रिपा लिमपो संसार मार कोरपि दमता है।
परिमाप एमा रो मापडी मपनीको पोम्पमा पर मारपर्य
दोमा माप में पाप ररने को पटियापमी मोर उस पक्ति पर
माप पर विस्मित हामे।
असह्य परिस्थितियों का सामना
बीमम स्पापी विपत्ति नहीं-परिमाप पधिकाधिक कार्य करना
चाहते है तो निरषय कर में कि चाहे कुछ भी हो-नम हो या
रात एष हो या सुख माप सम्रा प्रसम्म रग संसार में अपने से
पुषस रा पिवस होपों की सहायतापाचौरसदेव प्रसम्मपिठ तया
पिन रहे।
र स्पान पर निराम सरिग्य तपा सतुष्टप्रिय मोग रिवाईते
है। उसके पितारों के मनुधार बीवन एक स्थायी विपत्ति है। ऐसे
भोगों में प्रसम्म होने और इसने की सामर्ण नहीं होती। ऐसे म्पति
जिनके पीपल निवर पित्ति पर और नियमों में सुबहवा
श्रम दूर कर पिया है परि मुसरा वना प्रसम्न होने का प्रयत्न
नही करपे वो सबका निष्च्यि बनिरहोबा। कोई काम
भीगीर सईये मार इसरों के सम्मुय विफल हो पायो।
म मानुस किन लिए तीन मुबहीन परिस्पियाँ पुर्माप्प की पर
नामों तुम तपा विपत्ति के म मिा दमा रोपों को अपने
बायपास लिए फिरते सपा ऐसीपीगगे बारित करम पर
बाप कार्ग पार गनमा ही ये परकर । पम्हें मिट्टी तसे
पाकर विसुत स पाना चाहिए ।
भूस मा- मी भाप बपने दुम्पि अपने कष्ट परीपामाँ
भौर विममवापों बीमाली रोहरादेवी भाप मपने हाय-परम
पर एक नाप विद पोर जाते। उन असफलवामी को मनरेगा
करमा पाहिए और पिटा देना चाहिए । पारापको उपप
४.
पापी मापकी प्रमति में रोग मटकाती है मौर बापकी प्रकृति पर
ममार गमती मिटा नष्ट करमौर मूस पाये।
अपनी बासा नाय अपनाएँ । मुमे प्रकाश के पपों का हिसाब
स्पनर है अन्धकार से मुझे मया कामी यदि ममिकाधिक मठ काप
करना पाहवे तो अपने मस्तिष्कको प्रकार सत्य, सौन्दम, सब
रिवार सपा प्रसम्मता के रिवारों से प्रकापमान रखें बोबाव
मापको दुरी परे, मापसमाव को ठेस पहुंचाए मोर मापकी समु
सिन्नता मनापागने उसे मिटा गमें मष्टकर पूर्व सके
कि पामापको मार गमे या मष्टकर।
एक घटमा-ए पापारिक फर्म का मालिक एकम्पमितको
मार रखने के लिए या रसके प्रश्न करने सपा पो उम्मीदवार
माग्य का रोना रोया मपने दुम्पि को मारम्म कर दी। इस
परसबामगिरहा- 'मबमामे म्यक्तियों को कभी नौकर
महाँ पता । या ऐसे पामियों के लिए कोई स्थान नहीं मोहर
दम बाप का ना रोया करते है।
माओचाहिए कि अपनी पीड़ानो हा विधियों को अपने तक
होमीमित र मापकी कठिनाइयाँमाम जितने कम सोपों को
होगा रतनामापति में होगा। आप सोपों के उपहास पर
पागे । मार परको सिगा नहीं पौर कोई माप पर पम्प-बाण
नहीं होगा। मापसी कहानी मुनकर मोम यह निष्प वो अपश्य
बिसगरिमारीमार्यो मोर रिपतियों का कोई मौकारण
पवस्य है । दिनुकोई पति पिसी की दुपा पर या से
मकर नहीं पाएर पसि ऐमे गौर सार राईको
कामे अन्दर पायो वाहन पनि सपा सीवता रपता है।रकार
सातरमपने माम पास पहम्मति पौरमासाहित मुहरेषमापारे
है। ऐसे पार पाहता है । मिना पर पति वा पूति से
असह्य परिस्थितियों का सामना
जीवन स्मापी विपत्ति मही-मविमाप मषिकाधिक कार्यकरला
पाहा निश्चय कर में कि चाहे कुप भी हो-दिम हो या
राठ पुस हो या मुख बाप सर्परा प्रसन्न ही संसार में अपने से
एस रा पियप मोपों की सहायता करणेचौर सय मसम्मपिता
बिनम रहेंगे।
हर स्पान पर निराण संरिब तपा संतुष्टप्रिय मोग दिमाईते
है। उनके विचारों के अनुसार बीवन एक स्मायी विपत्ति है। ऐसे
लोगों में प्रसम्म होने पर इसमे की सामर्प मही होती । ऐसे म्पति
जिनके जीवन से निरन्तर विपत्ति पर बोर निराधामों में सुसमा
दूर कर रिया है परि मुस्कराते तथा प्रसम्म होने का प्रयत्न
नहीं करमे हो ये सपा निस्किय पनि व हो पायेगे। रेमोकाम
भी नहीं कर सकरी बार दूसरों के सम्मुर विफल हो पाये।
म मानूम किम लिए सोग मुहीन परिस्पिों दुर्भाग्य की पर
मानों दुल तमा विपत्ति के समूह शुटियाँ उमा रोपों को अपने
पासपास लिए फिरते हैं? हम पो ऐसी पौगोंधीवित करने पर
बाह कर गिहें मार गतना ही प्रयकर है। उन्हें मिट्टी तते
पार विस्मुम भूख पाना चाहिए ।
भूत बाम-रस भी माप अपने दुर्माम्म मपमे कष्ट परीधामों
और विफमवायो नीहानी दोहरावे हे दो बाप अपने एख-पटम
पर एक पारामिह पोर
पान मसफलतायों को मनरेगा
करना चाहिए और मिटाना पाहिए । परिमापको एप पई
।
४.
पातीमापको प्रगति में रोजावटकाठी ईमोर पापकी प्राति पर
उपमार गमती है। उसे मिटा मट करमौर मूस पायें ।
धूप पड़ी वाचा मध्य प्रपमा । मुमे प्रकारे पों का हिसाब
रतना है मम्मकार से मुझे पमा फाम? मपि मषिकाभिमठ काय
करणा चाहते हैवी अपने मस्तिष्क को प्रकाश, सस्य सौम्पम सब
दिपार हरुमा प्रसन्नता के रिचा से प्रकाशमान र बो बात
भापको दुमी रे पापके स्वभाव को ठेस पहुँमाए और बापली समु
पित सतायता में गापा गसे उसे मिटा गर्म मप्टरपूर्व इसके
मिह मापको मार रामे या नष्ट कर दे।
एक घटना-एक पापारिक झम का मालिक एक पति को
मौकर रखने लिए जब उससे प्रश्न करने सगा दो उम्मीदवार ने
माग्य का रोना रोपा अपने दुर्भाप्प की पर्पा भारम्भ कर दी। इस
परसंचालक बिगाकर कहा- मममाये पक्तियों को कभी मौकर
मही रमता । यही ऐसे मारमियों के लिए कोई स्थान नही पोहर
दम माम्प पारोमा रोया करते।
मारको चाहिए कि अपनी पीड़ामों तदा विपत्तियों को अपने तक
की मीमित रखें। मापकी कठिनाइयों का ज्ञान शितने कम सोर्गों से
होगा सतना ही मापक हित में होगा। माप मोगों पहाम रेप
बायेंगे। मा परहिमेमा नही पौर मोमिाप पर पम्प-याण
मही पोोमा । मापती कहानी मुगार मोम यह निप्प तो पाप
निकामरहिवारी हिमापौधार विपत्तियों का मोईनको कारण
बाप है। रिपोई पनि पिसी की गा पर या परके रमे
मापरमही रसतारमपित ऐमे भौगर की वसाय करता मो
परमम्बर 2ी साइम सिता समीपता रपारपार
पानेसरबपने मान पाम प्रसन्नतिपरिमारहारित मुरारोगमा पारसे
ह। यह ऐसे मगर पाता है । दिनरा पपेर, पतितपा पुलिसे
भपूर है। कि ऐपुस मे पाराने पामे दुरंग वा पति हीम
-
शोक संताप छोडो-एक बार पेट में सपने मोर के बारे
में विक्र करते दए कहा कि सही निप्रवा कोई बरम नही सकता।
मौर सही कारण है कि पसे पसम्मकता से कितना हीमा
हमा दो मिनी मिडकिया दो कितनी हीट-पट से उसमें
बनेकोष निकामी परम्तु पासा प्रसाल पेमा। एकोप भावा
ही नहीं।
पा एक बड़ा प्रमाण-पत्र को किसी पक्तिको कार्य
कापस पा उसके पहारीममता के सदमे में मिल सकता।
इसीलिए जो भान नहीं होता कि उसका मालित पर्यो उसे पत्ता
मही करमा चाइना पा।
ऐसे प्रवतरित्त पति सीमाम्य का कौन मनुमान कर सकता
जिसकी मोर कोई मारप्टो को भी उस एमा म करे । प्रत्येक
यतिसमुन और प्रसनषित होगों की समति चाहता है। हर
मनुष्य ऐस लोगों का पानने बार उससे मिलने काम होता है।
से होको सिए किसी भी प्रकार प्रपल तसा परिप्रम र
नुस पाते । चिनकोबोमने लिए वीम पुती होने बाता तपामा
पोनीमों काही नाका साममा करना पावाट राहा
एनो पोत मे पुनते ही नहीं। मोमविरस्थिति में मर
समतीयम विपास करता है पर ऐसे पतिको मामि
विसापास्तारिनारको बोरमोर सम स्पिति पुन
परा सोसारमय पामा रमम अनुसरण करीगो
वरण पतिपरोरदीपसका पागम्मपित्तदा तम।
क्रियापीन रपवासंसार संतापाचीवनपदावधवार
का सपना हप पा निराणामी नोयो मेसि ममी प्रहार
कर सकता है। मुनही, निरामाबादी मोपों को पीवन के सुध के
मम्मत मगर में से बहुत कम माग मिमता है।
इस पगतककोप उस साहसी मगरक के माग में मेरे पिया
१यो सिनम हो और हर जगह प्रसन्नता तथा मुस्कराहट की पुष्प
अर्पट करता पसा पाता हो । उसके लिए सारे द्वार पुस माते । समे
सिी प्रकार कबीरचारिह परिचित की मावस्यकता नहीं। बारे
की पूप की नाईहर कोई उससे प्र म करता है।
हसमुम रहें-मो पक्ति मफमता का है उसे हर पहरी
मुस्कराते रहना चाहिए। उससे म केवल उसके मित्रों में वृद्धि होगी
पर उसे जानने माम मोपों की सप्पा भी पर मायेगी। परिवह
भामरार है तो उसकी पूफान पर ग्राहक मपिक मार्यमे और रस
अपने जीवन पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। परिमापरा मन विपत्तियों
सपा कष्टों से पानी हो कामकट सपा मठार से मापकाबीवन
इमर हो गया है फिर नी पदि वाप हर समय मुस्कराते रहें विनम्र
सपा हसमुख बने रहें वो माप अपने जीवन में एक क्रान्ति मनुमन करेंगे
भारो बन-मपवन में दो मा स्थान पर मुझौं प्रसन्नताओं मौर
मुरूपों सराबहार फूल विमन मये।
मीरिया मरी भारतमा पर है में यपासमा प्रसन्न रहने
का प्रपरन भरती ! मषा प्रसन्नता तपा एवं की हो या सोबती
बम पनी हर पुस्तक पानी लिमियों में परमोमरिमोर
टुप समाती/वादि मेरा कमरा एमपनुप के मुगदर तपा मनो
दररमों में भरा हे। यही है प्रसन्नपिराडाका राम यह मन के
लिए मपए तुरा है । मानव पर लिए सबपर पौष्टिक
मोरपि और यही गग माया सरप्पन भोगनको मरतक
मारमा। परिमाप में याति पिपमान हिरकी
विनम्रता और प्रसारितता प्रमाण मपर बनाम राम,
n
हर समय अपने मानस में इग्बम दीप बसाय र तो नापका मार्ग
पारे स्तिना ही पनि हो भापका गोश फिना ही भारी हो किन्तु
बाप समय बाने पर बाप उस बोमको पठा ममेमोरबभीष्टस्पान
का पार्म कितना ही पूर्णम हो पूरा करमेये बार सफलता के सोपानों
परबते पर गायेंगे।
प्रसन्न रहें
प्रपमे पर विश्वास-यदि किसी पक्ति का विश्वास मापा
पा सकता तो पसकी भावी सफलतामों का भी प्रकार अनुमान मम
सध्या । किसी मनुष्य में भी कोई बड़ा काम बाका पपा दुनिया
की रपा में नही च्या । परिसका पिता ही नहीं तो उस
के प्रपल भी से हो हपि । हर पकनवा के लिए इस बात का निर
पप मानायक किम यह कार्य कर सका है। इसीलिए तो कहा
वया रियो नार्य का मैता तरा बगुमा मपने पर विकास
करता मोर बारमपिशवास ही यह मार्य रिपाता जिस पर पस
कर हमारमा यस्तु प्राप्त कर सकतईयो हमारे लिए सम्भव है।
मही बह पति को हमारीमान्तरित सम्भावनापों का परीक्षण कर
माती है। हमारा सिपाठ हमें सा कार्य करने को प्रेरित करता
है। क्योकि यह हमारीबाम्तरिक मारनामों का बनुमान ममा
सकता है मिनसे पर कार्य संपारित होता है। प्राय मौग मह
माकर परि मुममें यह गुण होता तो में यह कप गवता
मनिममा पोम्म होता तो राम कप्ता रिसे वार संसार
विस्मित हो पाता । तिप्प पर प्रश्न मुणम योग्यता का
नहीं परन् भारम विश्वास का है। बात यह नहीं कि विकायत करमे बाने में यह योग्यता मपदा गुण नहीं है अपितु बात यह है कि उसे बपने ऊपर रिपवास नहीं है। यपि उसमें काम करणे की पूण योग्पता होती है और बहानता है कि उसे यह काम करना पाहिये परन्तु बहनही करता। गर्यो?इम मिए कि उम अपमे सर भरोसा की। परिदम पपने पर विराम तो हमें काम करने के प्रषिक मवसर प्राप्त होसे मपेमाास उम दसा में जबकि हमें मपने म्मर विश्वास नहीं है। हम में से अधिकतर मनुष्यों को स्वरक्त योग्यता प्राप्त है जिस द्वारा हम बीबम में बपने लिए गपपीत स्थान प्राप्त कर मने है। यदि हम में किसी प्रभारी कमी है हो परम दय पातकी कि हमें अपने पर विश्वास नहीं है। मौर पह कमी लिए कोई में प्रोत्साहन रेने पासा नहीं। पोपवाएँ वया पामध्य हमारे बन्दर मुप्तावस्था में विद्यमान है उई पगामे अपना टोरगाने की मापकता है। हमे पाहिए कि सपने मानसिक मरयों को पो हमारे अन्दर में सोये पोहै। तिमोरकर पार। मोना परातन पर कभी भी मिमा करता मापनम्बर मोने को गान पिपी हुई है मगर के लिए मापको कठोर सपा दुम पाटियों में पुराना परत प्रतिभाषरों को हटाना पोगा और सरभो शिरमानी सिमपा सिपा मोना जिसमें पत्पर मोर पम्प पर नि पे मोर उमे माफ करने के लिए मोर पमाणसंग। पियास गफावपर्यो रेताले पोस का-rrrr पाते है हम में पो योप्पनामहीं पुपनीर नही है। सूप में अपने महादियों में मर Pt k पिराय नही मि पाहे तिनी भीमोति पर हो पायथे। रहे यह मान होना चाहिए रिर' f- ।
पिमा तपा मी मोम्पवा कोई मानणमहीसंसार में बात
से ऐसे मगुप्प हए , हिनि बो महान् बर्य दिए है। सर
.
रिमों बारिऔर मूर। मपनी कक्षा में ग्रहोंने कभी कोई
उप स्पान प्राप्त नही छिपा। यह निवासी को हमारे मुप्प
परपोतास पोस देता है और हमे मपनी मोम्यताओं वा एपाँ
+प्रापम का पसर प्रदान करता है। इसी मे संसार में धमत्तार
रिमाये है । मिस पाव से बापका मारमविपास तामही बात
भापकी योग्यतानी में भी अभिवृधिकरती है।
परिमापको मपने चार विश्वास है यदिपार सिमितता के
साथ काम करते दोको पिता नरें किमापकी far
सीमित बापकी योग्यता म्यून है क्योंकि मापकी समता पा
मसफषता माराम मिास स्पिरता सा संपप पर निर्भर
करती है।
नपपुगी कार्यों पर मिपाम मे गे मापपना प्रभाग
गमामा अनुमान पर कर सकता है निवास बार
समार्म में कोई वस्तुपावरमही हो सकती । बहसपनो
को तोपरेता है और विपत्ति के पहाणे को पीसगरमा।
हक विवास का एक उराहरग-वेगमे प्रधान मत्री
सरन गामित बिरनी (11.) राय से कोई परसर
प्राप्त नहीं पा बहपनिक नपा सम्पवर पा मालवा।बम ठग
बदाऔर मार से निकल कर माहाम मेमोर
पापा भी नोहारा हिरा किराग्नीनियमामामा
freeसबमे कम मैंगररेना वादीगया । उसका
प्रतिसीमो महीपा।
मोर खमा में घर पर मपने गए भापम २ मिए पाहा
दो
एन
पूरी
मेरोम-निकर मरे सदसरया उमारदात
प्पिा मोर पसे मपनी नम मसफलता पर भिमफारा। किन्तु उसने
उत्तर में आती हा शिवह समय मायमा म तुम मेर मापण
कोली तुरुता में मुनामे । पौर मा मम माया और बही नब
मुरादिम कोई परपा प्राण पा सरने मामरिबास बीगहायताम
पात्री शेत गया। वह प्रधानमत्री बना पौर पम्पोस बप कम्मर
पा एमाला रहा।
हमें अपनी पवित्र गारिक मार-बार पार रिसाती है कि यह
या शिपाम तया पराकी पोरिमो बम पर हाल हादीप
दररत ममा तपा दूसरेमो पोपममर चमत्कार दिवाव पे और ऐसे
मापसमाप करते थे।गाविस में विविध स्थानो पर मिना
सामिास होता मा हो एप मिमगा । एमा पोगानून
नहीं निमद्वारा आप मफलता प्रप्त करें। मापकी परनै कार
मात्री मांग रत्पन्न करनी होगी मप पर पूरा विराम परमा
सा। बर्ता मा अमीष्ट स्थान तक नहीं पा मगे। अपन पर
विपास कर मार्गों के लिए प्रापारधिमा सिटमा
* प्रयत्नों में मी बम पर चमत्कार हैं। परिमापती बपनी
पोला पर भरोमा परिवार निगम कमाहामा बाम
पोमो उसे भी माति मम्पनर समते हो मामी भाचप्पा
पानीपनियोंदियामीम पनाये अपने विशार्गेजपा पार्मों
का मरमाने मारावी बोर र राषिए । रिमोई भारत नहीं
Frमारमा महो।
बमरीनप्रगतीतिरसपापात्रतापीतम
परसदनारमारमा पाउसरे अपने
पारन के प्रारंभ पनियो तर मायालय को पता
गौरा मादिराम पर और मार दी तो रसमा रोगत
पोपापा औरगापहाग भी हुमा सोता
छोड़ने के पापा उस पद के लिए बहुत प्रयल किमा पामौर पर
यहाँ से मोफर मामा तो पुत्र में उसे मापीपर दिया बन पमने
प्रत किया निमम या तुम यापासीकार नहीं करना चाहते?
नहीं पिठायी। मुझे यह स्वीकार नहीं । मुझे बासा कापसे
गरिकमा सकता है। म्यायामों में मपनी पाता से काम मेना
पाहता महिमम से । मैं ऐक्टर बनमा परासरे मोर्षों
काका रमिस्टर नहीं। सर्टमा समेग में प्रविष्ट मा पो
पस्टर सईया निधनरा। एक मित्र ने उसे पृट-यामिपकी परकीय
निज भेगा। पटरने उसको धन्यवाद देते हुए उत्तर में सिखा-
मिष मेरों का इमार यह मही है क्योंकि इनमें म केवल पानी
पुम भाता है पति मटर के दाने भी। ऐसी परिस्पिठियों में
बीवन-यापन करते हुए भी पासपने इपिएन स्पाम पर पहुंच कर
रहा। उसकी पपना ससार की महान् विभूतियों में की पाती।।
सिनो स्मि का कपन है डि 'मटर एक पोषित भूम एक बनता
फिरवा पोमा पा। पोरिससा महान् पटिस सार में कहीं
दिखाई नहीं देता।' प्रसिर पर वार्ममिक पौर विकसरि
सम मे रस बारे में कहा था परि उसका मन पुपही मौरसमस्त
ससारा मत उससे पिस्त हो फिर भी एक समानदार पोर नामक
म्पतिशामके महासमर्पनरको दिन बादवा है। बाल्म
विकास में सो रयिता निर्ममतापा गुमनामी कामनन्त पौदामों
से मुकिरिमा और हेमा मप्ट रागनीतिन तपास्ट
भीतिजमा दिया।
हमारे बम्पर में विश्वात एक ऐमो पीरो ममान मन में
धमा दोनिया नहीं मारता ससे मान प्राप्त होता है। सिवास पर
सुपरमिता है रिमे हमारे गायक नहीं रेत सारे । गोहमारी
प्राधि से मुप्तपतामह मारपरीरमात एकमर की भौति
Y.
33
एमाप्पारिमा पैसम्मर यो हर मनुष्य के साप इसलिए नियुक्त
हैवाहिमानीवन उसकी मगमाई करता हे बार से उत्साहित
पत्रेति करता है। यह हमें मपनी समानार्थों की एक मतक-सी
रिता देता है हमें हतोत्साह मही होने देवा मौर कहता है तो मही
बिनो तुम यम तुम बढामे चमी।
हमारी भारिपाटि मौर हमारा विश्वास पत्तियां सपा
मापन रेत मेते है गो भय तपाईकाओं के कारण हमारे बाप नेत्री
मे प्रोमन पाते हैं। हमारी बारिमकाप्टि का विकास होता है।
परमवनीत नारी होती क्योकि उसे माग मामूप होता है और गो
पटिना सामने हैपप उसका हम भी गामटी है। उसमे हमारे मम
पसी बीवन की सरिता में मौर हमारे माध्यारिमा सामाग्प के सा
पर में रखी मनाती है। मिना विकास पासा होता है उसके
लिए कोई परिमाई माग मबास महीं कर सकती । यह सब काम कर
सकता है गर्योटिया पन्तवों से देखता है उस पति को पहपा
नवाई बिसे गामना मात्र ही किसी काय पति के समान है।
कभी मन में काम मामे दोमिए-मापदी योम्पता के
बारे म नामों का विचार पुष हो यो महो माप कभी अपम मम में
मागेरबानमजिविस कार्यकोपरने की मापके मन में इम्या
हैरागपुष माप बनना चाहते है या मार नहीं कर सकते है।
पाने मरिमरियासरोहर सबरंग म बरााप । माप ऐसा
पर मरते है।माने मन में बार-बारय समारोह में मारमा
१५ मा पर मम्मा है मेरे रिए प्रत्येक पर मंथर है। प्रमे
घर पर मोहर-कोप में मिलता है।
म प्रारमा मोषने में माना अपनी प्रारमा हा पाच
गारमा दपा मुष्ठ योगगन माप
पराममारनाभ मानिसमस्या है।
४
No text on this page.
एवाप्पारिमा पसम्बर को हर मनुष्य के साथ समिए नियुक्त
है ताकिमानीवन उसकी यमाई करता गे वीर से उत्साहित
सत्वरित करता रहे। बाइमें मपनी संमारमावों की एक सक-सी
रिना देता है हमें हतोत्साह नहीं होने देता और पा है तो यही
पिनो तुम कदम तुम बराये चमो ।
हमारी माम्तरिक प्टि और हमारा विश्वास में पतिमा तपा
मापन व मेते है भय रूपा कामों के कारण हमारे माझनेत्रों
म प्रोमन एते है।हमारी मारिसकाप्टि का विश्वास होता है।
पर मयभीत मा होती क्योंकि उसे माग मामूप होता है और यो
पटिमा सामने है पर उसका हल भी जाती है । एसमे हमारे मन
हारी गौवन की सरिता में और हमारे बाप्पा रिमक सामाग्य के सा
पर में एपकी सगाई होती है। शिमला विश्वास पक्का होता है उसके
लिए कोई मटिलाई माग मबसनहीं कर सकती। बहसा काम कर
सम्सा है पोंकि वह मन्तबामों पेयता है रस पति को पहना
मारिमे गनमा मात्र ही किसी काय पूति समान है।
कभी मन में काम मामे दोमिए-मापकी योग्यता के
पारे में लोगों पा रिकार युपीयों न हो बाप कभी अपन मन में
पासवान मकप्रिम कार्यकारनेरीमापके मन मेंहदा
दे पा पाप मार बनना चाहते हैं मा भार नहीं कर सकते हैं।
बने पनि तपास को हर समय स पनाये। माप ऐमा
परमाणे। मपने मन में बार-बार ये सम्म रोहगत गर्दै म बारमा
14मर पर मपला हूँ। मेरे लिए प्रत्येक कामभर है। प्रम
भागदौरे मगर-मोए में मिला है।
मप्रसारको सोचने में मार अपनी मारमा तर पाच
माता मोर मार दया मुष्ण को मारन के बापपर्य
नाफामागेका मानिसमा सकता है।
पटिया पर भरोसा करें। इस पुमा पत्थर से तार से बाहर प्रपित होता है। हम विस कार्य करने का प्रपल पर उसके मारे में हमें अपनी सामर्प पर गिवना भटम विस्वाप होपा हमारी सफलता भी उतनी ही निकषम होगी। यो मममुषा कर्मभूमि में पदापर्ण करमौर सफल होने की को चन्हें अपने मन में यह नहीं करना चाहिए मपाता है सहन हो पाई किन्तु मुझ विस्वास नहीं किमो काप में करना चाहता है वस्तुत से गले का पान भी है या नहीं। मेरे काम में मेरेर साप में लोगों की इतनी भी बस मैगन में बनगिनत लोग ऐसे निको मषित पारिपमिक नहीं मिलता । इसलिए मैं समझवा! कि मैंने भूम की है। बस्तु में पपात सबसे बम्चा कार्य करने का प्रयत्न कहेगा। संभन है कही न कहीं मेरा काम भी बन पाये।" को नगपुरफ ऐसी बातें करता है ऐसे विचार मन में रखा और एसे काम करता है वह निापीकही-न-कही फिमत माया गुम साम राया मौकरी से हाप पोटेगा मोर उसका व्यापार मष्ट होगामेया। यरि एस्थ पर गडसा नेपोलियन को भी उतनी ही भयंकर प्रतीत होती प्रितमी किस परामर्षयातायातमा सम्म मोनों को दिमाती पी दो बहकभी भी पसको काातो ठप में पारम कर माता । म्पतिहर समय अपने मार को सामने रखता बो बापामा और महिलापों की चिन्ता मही करता को रिफमता का मुबबनेकी पारामही करता मिसे मपनी विषयमा सप- नवा पर पूर्ण विराम होता है मह बता दिया है और सफ मता प्राप्त कहा। पोप पनने की हमारी अमिनापाई मोकामास करना चाहो १२ ३ सनी र एप को सोते-चायवे स्टो-पैरो, साते पीते इससे रोवे हरम सामने रमना मौर उसी पर अपना प्यान केंद्रित कर देता पाहिए । पर है सफमता सपा मुमका नि । मदि नेपोलियन बोनापार इवाप होकर बैठ पाता मोर यह पोपमा करवा दिइस ममियान पर बिग्य प्राप्त करने का मेरे पसकापाम नहीं तो क्या उपसे भाषा कीरा सकती पी कि उसकी सेना बस दुगम एम पयत पर पा सकेगी। परि यह बात समान में बाती है तो निरिषद से इस बात को मानने में किसी प्रकार का सकोष नहीं होना चाहिए कि माप मपनी सामप्प में सरहकरने और भय के कारण कोई ऐश काम नही कर सकते है जो मापा स्मारक है । नेपोसिमन मानसिक पबयर की सेना का 'पून निवास है। उसकी मामा पर उसके संकेत पर समस्त बसवर दुपना मोर तिगुना काम करते है। सारी मासिक पत्तियां इसी प्रतीक्षा में रहती है कि सिनाम कर हमें बामा और हम उसका पामन करें।बहरहमारी मैना का सेना पति बने और हम उसके पीधे-सीधे पम पर। पुरारोह का पोड़ा कभी हमाम नहीं पीव समता यदि उसे मागे पाने का पूर्ण तपास बिाम म । पश्विक निवास में को साहम तपारवा ग्लाम होती है यही बीर है जो मापकी पति पसारको अन्तिम भी निकाम माठी है। गती गमयरों को समान में सम्पत्तिको सफलता प्राप्त हो सस्ती भोगती हिस निमिरे में एमसुम विश्वास भय मोर का साम पानी बार प्रदेश करते है।परिया मन में यह कहे कि मदन ममी मामारों का नियन्त्रित करने का प्रपान गा मिनु प्य यह है कि मुझे रिपारा नहीं कि मैं ऐमार भी सकता है या नहीं। एक मनुष्य का पौरापिनी हिंग परविश्य प्राप्त करने का प्रयलकरला कमि पाप है। ऐसे मनुप्प निरसम्म हो मोर पो ऐसा कर सोरनु
सागर सपा ऐस काम पसर रागिनमें कम से कम कि
मनसे, वहाँ समता ही सरलता हो, यहाँ पषिक परिपनामा
परे। किन्तु मारमा पछि पति से कोई प्रमभीम
पासप्ट कार्य सम्पन्न नही हो पाता।
रिपाब-पियवा तपा पावस्य मापकी सामपा पोपवाको
सी प्रकार मरापि प्रारमीम रस, मरमारि
रोकिसकी ठीमार पाहोलिका र मनपा
करने का सही। यो पक्रिमावठों का सामनगा
हैरह पोससारमें कुगमनकामहीं पा सता रजिसम्मति
यो परमामालाला और पाहे पाटिन हो या
बरकरारपणानाम पायपासकता।
मतिपदामपनी प्रतिस्थामी होते।
मारमा परको कमी इस बात का विचारही
होतामोमोरच बारा विधारमा माता हिमारे मन
कमरेकीपर राहोती है या नहीं। उमदे बन गरि
अपराकोरीयामापारे पिए पर्पमेयरमा नही।
राससका पतरकारात्मकोमा तुरंत
बपि बाह।
को पनि होमाँ कार्यक्रम
वि.बारमा वाम बहुत कम रहे हैं। कभीमा
माल RAMAIL मार्ग दुर्गममा सरम को
बाद मा माग हो पाई मिनी का
AAL यावर
मारामार हो मानहीं।
RAHIR नीमा भानार प्राप्त
। महीर सपने को विश्वास रहिमाप मौसममी पक्ति की से मी माये महीया सम्ये संभव है माप सपा मसफस ही हैं। मसी प्रकार समप्नमें किससारको हिमवीर की मापायता हैपनपतस्प हो सष्ठी और रसे उपनाम करने मामा भी पोf- कोई पैरा हो पाता है। परिमापदं श्वनी पोम्पवा साहस और समस नही ता पायद कोई पूसरा पति मो समय है माप से शिक पूरी पर भी मही उस वस्तु को उपमण कर सकता है और करेगा। परिमापको मार्ग का मान नहीं तो यह माप पूर्पा मोर उस पर को प्राप्त करने में मपना तन मन बन ममा देगा । मठम्प यह है कि अपने मंकल्प पा स्थिरता रे कारण संसार में दीपि फमा पा मा समावतया हरी यह प्रश्न उरता है कि मरिमम्प पति पनी स्पितियों तपा पावावरण में एकर यश प्राप्त कर रहा है बाप पयों नहीं कर सकते। बात तोकेबम रतनी किलोकार्य बापके मुपूर है उसको पहमे को मपैशा पमिक मुम्दरता से तना काय पुरातता से करना है और हर वस्तु को उसकी परमसीमा तक पहुंचाना है। भापको स्मरण रपना साहिप हिमापसे मी पिकपुरीपरिस्पितियों में प्रमोगों के प्रसंसनीय तपा पान कार्य सम्पन्न किये हैं। परिये ऐसे काम कर मारे येतोबाप पर्यो नही कर सकते। पोम्परित विषप्टयाप्य कापोरान देता है पीछगर देता रमे वास्तव में बही पाय रोगारमा परवा है। सिमा विरारही सापामा नहीं पोरठा म्यागता उसे नपो ही होती है। लरी वारपार में प्रश्न प्रपा पया बारमे पवना पाप नमी मरमता मे कर मिया मोसमी पपा बाद रत्तर ममे रिमी राय पोरोगरा नहीरिया। सामोdim Horm-11----- रिया पा
प्रतिदिन ऐसी ही ईमानदारी से काम लेना चाहिये मानो बिसी
अपरावा से मामला उमर पा है या किसी भूमी से अपने पूण
की मांग करहा है।
कोम्पति अपने ही पापसी से इस कारनकार नहीं
पर समठा कि साहब इस समय तो मा सये रेने को पाना नहीं।
दुनिया उस बारमी को क्या कहेंगी दो बस इस कारण भपने कपन
पा पचन से फिर माये कि उसकी तबीयत नहीबाही पा उनके
रिवारों में किसी प्रकार परिवर्तन बा गया है। परिमाप में दर
फर्तम्पों को यममे और प्रविस कार्यों में पित करने की बात है
वो मार मन में ठान में किबो हो पुका को होएमा नपिप्प मे माप
हरगिर ऐसा न करेंगे। ममात यह कम कर कार्य बारम
कर बाप किसी कर्तव्य को कम पर महीं गर्मगौर भो कार्य
बावस्यक हुम्हें तुरन्त सम्मान करगे कठिनाइयों के पहाड़ का निर्भी-
पता से सामना करेंगे। फिर मापको यादेखकर बापर्य होगा कि
बापरपस पिता और मोह-स्थिरता के सामने पठिनाइयों और
विपत्तियों के पहाइ सि प्रकार पुमी बनकर पाये हैं।
दायित्व का अनुभव
पार मापको काम करने का अवसर नरिया गाये पापा
कमाएको विवादी स्थिति में कोई कार्य मकरमाप उस समय
बाप नही बता सकते कि बाप क्या कर सको ६ माप में किस
कामरमेडी वामप॑ है।
विपन विहार में कुछ ऐमी विमूतियां हुई। रिसर
१.
बपने पतिर पपन साहस तपा हिम्मद के मतिरिक्त सर पर्गमा
ठे उनकी अपने पत्तिय पहुंब म सही पा फिर उस समय
पर उन पर वित्तिकापा टूर पर उनको अपने मापको उस
विपत्ति पाने कमिए पाशक्तिशा पैरभारमे परे।
मिक्षा सपा मावस्यामा की पाय्यामा में भीमकाय मनुप्प उत्पन्न
होते है। एनको भीमकाय इसलिए कहा जाता है क्योंकि माध्मिा
धों की चिन्ता नहीं करते। बापत दूसर स्पितियों पर भी विजय
प्राज करने में उन्हें पता होती है । उन्हें वन कम्निाार्यों मामों
और विपत्ति के पास से एक्ति प्राप्त होती है। मौरब उनमा पुरुष
की माई मामना करम पर विनय प्राप्त करते है।
संसार महान् पत्तियों में मे अधिकार को उस समय तक
अपनी पपाप पक्ति का रती परापर भी मनुमाम नही हम पर
गिसी मास्मि पुर्पटना मा मारी विपत्ति ने उनक पपों को नष्ट
नही कर दिया जिमनाटियों सहारे खोप ठोकर मार
परममिरा दिया।
ऐसी स्त्रियों का पुषों की गहमस्या रिचमान है जिन्हें रस
समय तर अपनी गामप्प तपा योगता का नान नहीं हुमा पर एक
उनसे हर मह वस्तुसि पर उन्हें भरोसा पा किबह सफलता को
भाया सा नमकी मयुमाईरेगी दिन नहीं मा। जब तक कि
जीवन में प्यारीमा पसंदीदाबीर एनसे ममम नहीं करमी पर।
दमार्गी-म-बो शक्ति पाम बी पोग्पना हमारी प्राधिके
मारने पहनत पड़ी किसमे बाहर निकामने के लिए
माहम सपा मंडप की पारपाता।
हमें परमी माम्हसियाबारतरिक गतिमान उग गमय
होता रमरिया पापमी ममम्मरदीप हटने के बारे
माप माप। पौरपती में भारी माता Trx मोरे
सरती । पर तक हमें दूसरों से ममद मिलती रहती है हमारीम
क्तिगत योग्यताएँ हमारे अंतर में स्वप्निल पती है। यह पुष्प
और स्त्रिया अपनी सफमता र बिजय कापीमागवायी कि
सन पर समासंकटमा पर कोई निकर मम्मी मममा दुम्बी
जिससे महायता मिनती पी मर पवा या व्यापार में पारा हो गया
पर मुट गया चोरी हो गई मौकरों से पराब पिम गया या ऐसोही
को मार विपरामा परी मोर उस फारम पम्हें अपने पस्तित्व
पर भरोसा करना पड़ा और मपर-मोट कम र भूमि में प्रत
रमा पड़ा।
पिन नमपुषकों पर विपराबा परती है पा सके जीरन में
कोई दुपटना पट जाती है वो लम्हें बोवापिरव का स्थानमातमा
पर है। मास म्पतीत हो पाने परसाद अधिकार ममयुगक
महनही रहने को पसस पहम पे । उनले बारमे पुरप-सम पत्तियां
पत्सम हो पाती महमाम उमरबाती निमगार में किसी
को मिन्तव सरह मी नहीं हो सकता पारापिस्व पनको पुष्प स्कि
साहसी पुरप बना देता है।
दामिल पतितपासाममविकास करने में बड़ा सहायक
सिटहोवानि नोर्मों को किसी पतपारिता परमही रिया
पाता उनके अपनी बाहर सपा सुप्त गस्तियां नमी प्रद नहीं होती।
पही कारप है कि दिन घोपों पपने पीरन विष्ट पोवाइस
मौरियो पर गुगारे है उनमें पसिनामी सपा परस्त मन्तिम
पाव कप मिमते। ऐसे लोग पौरन की दौर में इसरों पीप
गठेमोहिम पर तो म्मिी प्रकारमा सत्तररापित या दोन
परता है और न उन्हेंबरने सामर्प की परीक्षा करने परमपमेम्प
सिगा पौहरप्रर करने का अवसर मिलता है। पोप रम्हे पर्य
सोचना होता है यह कोई और सोचता है। इस नियत किये
हए मार्य नबनुसार म्यवहार करते है। उन्हें पपन को यस
सोना भाता है। पबहार तो बहुत दूर की बात है नन्हें मौर्य
ग्रोपने का भी नहीं जाता।
उत्तररापिस्व कामो कोमा सम्मान रकमनन्तर ही नये
मरे विचार सोरमे पटनामों को सही कमपस करने की मासिक
मातों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। यही वह पति
है गोन्सान को करिनारों और विपदार्गो पार समुद्र में मुरक्षा
पहिवरार मे पाठीमोरासी परिव के गहा एसान गौरन
ही कठिन परीमाणों और वों में एकता से पूरा करता है।
इस दयन से बवि मटकापपूर्ण पदम दूसरा नामिविकिसी
भरपुरक पर योग्यता तो वह एक-न-एक दिन बमपर बाहर
मिस्मेया और पपना रंग दिरामायणा । समय किबह गौहर बाहर
निम्मे मभर मानिस सपाटा पारोमदार पतियों पर
है। परिवारमा मामे बाताबरण बदर उस नपुरका
पानम-गोपप हमापो बह पीहर प्रकट होमा घोर अवश्य हापा ।
दिपस ममपुषसको निरासामना पा हिम्मत पोड़ने पान मावा
पण गमावरमा दोरमका यह पोदर पम्टर ही में मप्ट दोर
हपापा । पहावापरहीराम पोम्पता पामे यतिका
विवाहीत धाम कमामा कर उसमा संसारता है।
एक पक्ति पर बहुत पोरापिता पेस गने और उगगे
बमय रीगाए तो बाप रोपे क्रिसरोबोहरदोह
संगमरमर पर परमेप नियमेगा औरना प्रारकरेगा। यह
रमीरियत, सारम मारमबियास मोर भन्म मारणोपरिगाम
निरापनीतिकोपा मम। पदिमिटमें
परमता तर तो गारदरियम मप य मत
मनपा । पर मेरे मित्रो रिबापरेपरमिरम्म
सरीका पोल पपरदाती भी गहा गाये तो प्रसनो बाबीर
साप उस मोन का स्वागत करें। संभव है किमाएकी सपमता का
भर इसी में छिपा हमाहो। इसी कारम सायर माप सफलता प्राप्त
कर में और बापका मुबा तपा सुम्मर बीवन का शुभ सवेरा ही से
सत्य हो जाय।
सगति का प्रमाव
पया मापने कभी इस बात पर विचार किया है कि वो पिपेप
सायबापरे पस्तित्वबार विधमान उनकी गिर इसरों तक
पहुँचती। परिबाप प्रसम्म तपा माहदित माप में काम
पौर स्पिरता है आपके पारका रोम रोम विषय प्राप्ति का प्रवर्षम
कर पाबापी बोटी-बोटी से स्वास्म्म तपाइप्ट पुष्टता
'पिरक
रही है तो मापः मासपास बातों में भी प्रभाव प्रोसकर बा।
बापसे गो मोग प्रभाषित उनो मार भी वही विशेपठामें उसन
हो जायेंगी यो स्वयं बापर बम्दर मौजूर। चाहे रिपेपनायें
न हों या सबन मग्दी हो या पुरी मन हो भगा निम्म पनि
भाप मुमत मुगा ता सम्म हो मायने । यदि बाप मसम्पतो
पनमें भो नही मापापन प्रौर ममम्पता गाम हो जायेगी।
परिमापकी कमनी परमी तथा पत्र एव मोमपाल में शक्ति
और उत्साह है पबिाप बपना नाम पूरी हिम्मत मौर मेहनत से
को पाप मित्र मोगों मोर पड़ोसियों के बम्पर श्री
बहीबार पैदा हो जायेगी। मापरे रवाहामको सपने सामने रण
करमाप मा बनने का प्रयाल करें। इस विपरीत पदिमाए
33
स्तर पामा नहीं भाप्तमी र मुत्त है प्राम का पाम पम पर सामरने समारियो बाप अपने पासपास पाता को भी सापना मा मंगति का बड़ा प्रभाव पाता है। मो मोग साप साप रखे से समरीनतिषता तया मास्तर मी मामान हो जाया करता है। किसी पक्ति का परित्र इतमा सबल नहीं होता दियह सपने भासपाम की स्थितिमों से प्रभाषित महो। यरिपिसी परिवार का मनिमावक ही स्थापी गमोर पाकिहो तो पर-ना पर पत्नी पुर लिया सबके सब उम रंग में रणगायमे । यरि पिता पूरी, समसार मसन मोर बिममहोती परकर मी ही सग्गन और मात्रामारी सिट हपि । प्राय देवा गया है कि मुमसत सयम और मुम्पमापी स्त्री सपने मारे मुहने को मप्र समाषी तपा मधु पापी बना देती है। इसका एक उग्यवम सिरप प्यार की एक स्त्री पोपटी मोने की कीबगरमपने मापनमक कार्य तारा प्रस्तुत घ्यिा है। उसके पिमप्रसपा स्त्री प्रभाग से एमगार अपिकवानर महापारी बन गये। उसने मगर के उस भाग में नहीं यह पहती है एक ऐमा विचित्र परिर्तमररिया है जो पहमे भट- पर, बागारामौर हपमी मानिए प्रास्पात पा। मा यहाँ कानून का पार करने वाले और तांतिप्रिय बातम्पाये जाते हैं। बाप सपा प्रेम पना तमा मानिकीबाट महरे हमारे और हमारे त्रिों के बीच पारीएकोण महरे टी-री रिपोर्ट प्रातुनी उम मखितितो प्रममता वपा मम्मोप प्राप्त होता है जो मरगाहपहपीनी पगार निगम और प्रमापी गोमाराम तपा मागाबरा गया है पर ममाता है कि ममापार पत्र नेपामा मारावागिरमा भोग
आप, कार्यालय का चपरासी या गो कोई भी उससे मिलता है
भकाय मौर हर्प का प्रप-मकृप मध परप से पाता है। विमाप
मसवार सरीवते समय राता मुम्परा तो बापका पुष नहीं
वर्ष होपा । पितु समाचार पर देखने वाला मरका गुट पामिय
कामे पाला बन्ना और पसरटर मापको सभाम करने पर यह
बनुमय परमे किमार मोमादमी है। बापका मन सहानुभूति
भारों से भरा हुमा है. आप पनता के हिवपी है। ऐसे बभिवारनों
का हमारे मन में संसार की री पड़ी पस्तुमों की अपेक्षा अधिक
मुम्म क्या मारोगा पाहिए । मोवीन मरये से, मामे
दुनियाँ परम्निया इसके बांटने में हमें रुपमता से काम नहीं मना
पाहिए कि रिवना ममिक प रतने ही मागिक बनी होते जाएंगे।
में एक ऐमी महिना को पानता जिसकी भारत यह किया
बाँकहीं बाजी मुस्कान के श्म बोरवो पलो बादी है। उसका
पर मुस्कराहट पर कुछ पप नहीं होगा जिसका परिणाम या
होता है टिम कारावा मोर पो कोई भी उसकी सेवा करता
है उसके इस में याच रसम्न होती है कि पसेकर फिर पस
महिमा की सेना का बसर प्राप्त होगा । पॉबिरसे सेगा परसे
में मागीय पद मुसान उपा प्रछमता सम्म ममम्म मितये।
पापका पापण यापकी मुध की स्थिति से बाप पर मोर मापसे
प्रमापिठ तोगों पर बहुत प्रभाव पाया है।
परिमापका मुनी। यदि बापने रबासी मुख बना रती
से रिमापका बशिम मित्र मापसे गिर पुशमिर मापकी
देर में पाtarमही। ऐसी स्थिति में वापसे पद माणा हरपिन
मही रपनी पाहिए कि मोर बारपास बामे बापड़ी मूरत उन
को अपनीऔर बागप्रकरेगी। 4 बिरोपताए पोपा रिक्षाने
पानी बोरनोपों कोएर यो मामी मठोपामिनसे हम
1
इरहना पाहवे है क्योरिमापापी भयानमोर समभूग।
स्मार नपा मुण अपना प्रभार पाय पिता मनी-कभी
एफपी मरियम और जापानापो पति की उपस्थित पा-का
परपी और मुस्थामापी हो जाता है। अभी तो रमे मौसम में
निरापद होती।भी से पादूसरे मोपा मुमानों में यह
पठिनही होती। यदिपाहर मरको पालापाईहर में
बल्ली बनासर गला पम्मद करता है। परार भी मोर पाना बाहें
ताबह निरपर होशिष पापतिमीमोर पमता बरतुत
समीरमदाए मोर मुमान परिवार से मय सापों से सरकार और
देवी हाती है। पाने माध-माम मोपों के माप सहमत नही
दोवा । पनी गुगी ये रमतो गुशीमा होती। हम स्वप भी
मी मुर्मामा हुमाकोरममा पतालमा मोचीवन
मुपी मानम्मित होने से रोषवा मोर सनक रग में भगरातता
मपीपी में पपने एक मित्र के पदापाता, रिपो
पाप फेस्तुिर र दामोदर राम काताई
परिपना भरीवपा उमाम है। रसोरिवतिया
पी एस्कोपम गामी निकालने पर मुखी
है। उम पति कोसमी तनादी हपापरा में गुमरमा रहा
किन छोटी-मोटीनमाईत मापना रमेकी मोसा
पप्प महा। पहलालोमा होम उमरी शिमलवनी
र पूरी शिदोरम गरम मारामाराको
ऐगीमी मलारपरमा दपा हर पुर्पना समरबमार
न पाती।
गुगरमाबाने मामा म मरममि र
कि सारे रिहम हम महीपन दे। मीmt
पार हॉपी हम परिस्थितियों को मिस प्टिी रेहमे उसी पर
हमारा जीवन रस पायेगा । परिहमार पिचार बीरों साहमियों
ईमानदारों का सरसों की वो हम दोर, ईमानदार और सरगन
बन पाये और हमारे जीवन में सुबनी-मुख होगा । पपि हमारे
रिचार कायरों नीपों कमीनों मुख्यानपयों माधों और
मानों के सेवो हम कापर, मीच कमीन तुम्ने परमाय बोरी
मान बन पाये । हर मोर से हम पर पिहार की बीमार होगीर
बड़ी हम पर मम दौर माह पापा हेमा। हमारा भीगन मनी
होगामेया और हम हर ममप गस मुशमि हुए पीर बीई।
यो गुममारे मन में होता है उसका हमारे विचारों अनुमति
और भावनापो पर बड़ा भारी प्रमाव पाता है । हम परमपम भास
पास पठाउने बामो मि तरामियो स्यार प्रकृतिका
बापरण का भी प्रभाव पाहै। परिये सनही निराधमारी मुममि
से मोर उनके विचार पिरे हए । वो हम भी से ही होगामये । परि
उनके विचार महान् सनके संकल्प को सपा पनका साहस
बहा रोगा तो इसमें भी ये ही मुप सत्सम हो गार्यये ।
पात पिरित्ता ऐमे कियोपरि का प्रयोग बहुत कम
कर रिभो ये गत सस विपिसा हो है। इसका कारण
पाकिस्समावठया प्रमम्मषित होते विनम्र होते जनका
सहर
से विना मा होगा। रनी पंमति में रोपी भी
स्लासित बनुमा करता है। पामते शिपी को मोवपि की
अपेक्षा आपण प्रपा प्रोत्मारनदी पिक बाबायरता है इसलिए में
पानमा रोगी बोरसते मोर उसे बाणपाते बाल
मापात पानते हैं कि से प्रभावपानी में बाये होगी।
पिसी पर लिप बामपनी प्रमिकामाममन पर हमें हा
fr प्रममा होतीमायर गारमे पकने मरवाए।
पौर हमारा पुष तमा चिन्ता पीड़ा बवंदना भाप्य हो पाती है।
इसके विपरीत यदि ऐसा म्मक्ति पाये जिसके पत्तिय से निपक्षा
सनहीपन या सपा सताप टपक रहा हो उसे देखते ही हमारे मन
पर एक मस पोम पर पाता है हम पर सरासी तपा पिता की
पटाए पाने मपती सौस कमाता है और रक्त बमाने समता
है। इस भावना के बावजूद कि हमारा भी पाहता है पमसे सहानु
भूति प्रष्ट रेहमारे मन म उसके सिर पूमा यि दमापके
माष उत्तम्न होगा।
ऐसे म्पतिमी उपस्थिति में हम कितनी ही पेप्टा करें हमारी
स्वाभाविक विनम्रता प्रस्ट नहीं होती। हमारी बात-चीत के समय
सोत मूप गाव है हम कहनाने नमते हैं। हम विनप्रवा पा शिक्षा
दिली अपनाने पापा तिना ही प्रयत्न करें हमारा यह प्रयत्न म्पर्य
पाएमा । म ममम म्पतिव का पिप मानो हमारे मारे पर म
प्रयेम कर पाया है। पर तक यह दर महो पाये हमारी पीतय
बैंक नहीं होती। बस पहाता गाता है वो हमारे एम-में-दम माता
है। हम संतुष्टि मनुभव करता है।
प्पतिरस अपने मातरण प्रकट करते, गोमुप दोरम
पारे पर प्रष्ट हो जाता है उनके बोमनामक तपा मादी से
टयूटकर निकमता है. बात गोप उनके मार दिपा होता है
पही पादर माना है । परि उनके मम्तर मेंप पर पता और
पुणा पापिय भराहमा है वो यह उनसे पुरान प्रपा रन रिम
मे प्रगट हो गया। उन य म मरोंलिए महामभूति
प्रम मोर मनाईदी मावनाए विमानतो उमपम पा सम
पिन रही बिोपतानों पा प्रतिनिधि परम।
एक पापी मनुप्पी पपगता तपा ममता राइमरा परित
बार वीरमान नया साना है। साईमपीना मोर साता
32
पर संदेह हो जाता है बारपापडीलानुपर काम नहीं कर सकता।
उसकी पीय पुसमाने मफ्ती मोर ससे काम करने में होगा
। बामपनी मानसिक सक्तिवेतनता र निर्णयसहिकोममिका
विकम्पय करने वापर एकतिरसरमाण मा मुखबम बाता है।
बो-पो पिता गिहान मसानों की मानसिक सचिमे मोता
नप की प्राति से हुए माम सठाये , बरेपास्मे करवायों की
पाधि नीर महामना मातालों की प्रथेसा और बालबारा
गत हिस्सा है। ऐथे मोठामों की उपस्थिति प्रोत्साहित होते
है के मस्तिष्क को नई पित प्राप्त होती है और इस प्रकार।
भाषा और दया कुमार मापप-सा के पापर पाठ पाते।
सा बाप भाप दूसरों साप
काही वर्षात इसरे मी
बापरे साप करपे । परिमापू सीम्परिव साप कमीनमी, पा
बारानि से मरा हवा पार कर वो सामन में भी बापरे
तिए से ही विचार पसान होसे । पहाबर है कि समले मन में
भाप सम्पहार से प्रम माघार समाप्रसप्पा मारत्पन्न हों।
मन की तुसमा बसेकीका पची। यह दूसरी बार से
अपनी बाकर्षण शक्ति राषिया निकालता है वो अपने माने
बयर में छिपी होपी मरिहम अपने मित्रों का भाररमोर मन
से या परिस मास्वर में उनकी बच्चाई तपास्वाम
में पपि मत है पौर पनी पवातमा सहायता करना चाहते हो
पनको भी हमारी ममा सा ही विचार होगा। पुरे-से-बुरे
पक्तियास्पिनी प्रेम प्रपय मारिचार मे रसटमि।
दरम्पति सार हम उठठे-ठवे है और काम करो!
हमारे जीवन में उप-नरुप परिमर्वन मत्सन्न करता हम परमही
पोमो मे पे रोकी हिम्मत और साहस देवकर या पसके
बारे में मुगार हम बहुत प्रभावित होते हैं। बीता एककालामे
कोरेगार हमारे मन में भी यति भागाती है। हमारी भी ग्या
होती है कि हम ससार कोप फरक रिलाय नुप बन के दिखायें ।
हमारा मान, स्याति हमारा साधारमोगों के विचारों का परिणाम
यो हमारे प्रति उनके हदय में पापे गाते ना हम किसी बारमी
से मिले हम एक वियप प्रमार उसके पर पोगा।
हमारे वस्त्र हमारी बावे पौर-तरीके हमारी पारीरिकन मान
सिक साम, पो काम हम कर या पिस काम में हम सफस
नहीं हए ये सब बाते मिलकर बह पुष पनाती है जिसे प्रसिद्ध या
कीवि कहा जाता है। बिस पर हमारी सफमता विनय निर्भर
काली है।
हमारी दोसबात सपा हमारे पबहार से हमारा सातम-सामन
हमारी पिया इमारे पावापरण हमारी सम्पता हमारी समतिका
पता पमता हैरही से गात होता हिम रिप स्पमाष के मोगों
की समति से मामाम्बित हुए मार हमने सि प्रकार की पुस्तकं पड़ी
है और यही पी हमारी मापा हमारी निरमता पार जान
हमारी पसम्पता मोर सपन का पता रेती पौर हीरा
हमारी सम्ममता पौर मिानसारी को मापा जाता है।
पर हम एमरे मोगों से पित्ता है मोवैयक्तिक मकस्म का विनि-
मय होता है। हम एक दूसरेशमपनी मुमष्टि या वारीते है।
प्रत्येक म्पत्ति विमीको एरबरीमो यामपाम पानी लिए
महारारमामा मामः होती।
में पफ पोरीतरी मे परिचित कोपा करती थी मैं
गत परममि कि गुम मे माम करते है।यह मानती हो
मपीएमए पिता से कहते है और कोई मषित पुगी या
रिमिव यो होता है। हर कोई रसमे स्मेट रगतामा परि
नाम करती दी।बहर या गाठी टोपहारों और प
या मिस वृत्ति से किसी मस्तु को रेखा मापे बहसी ही नरमाती
है।मारे जीवन की हर पटना हर म्ममहार हर विचार तपार
वृत्ति का पर्दा हमारी मांग के सामने सटका पता है। बब हम
किसी वस्तु को देखते हो हम पत परमम्बर से रफि पार कर
पमा पाता है। परिहमारे कम घुम हमारे विचार मपिन और
हमारी वृति निर्मम है तो हमारे समुष को पर्वा नही
पेगा परन् प्रकार की एक पावर सामने होगी जिसमें हमें कुम्म
मोरे मई मानक और समापूर्ण बातिमा की अपेक्षा कार्य
सस्प और सौम्पर्म के पन हो । हमें यमाई के प प्राप्त करने में
लिए मन ठपको रटिशाममे से हटाना होमा ।
गया मापने कभी इस बात पर विचार किया किमापके पर
स्माष नीष प्रवृत्ति और शिपिन से मे मोन मापसे म्ठ
पये माप कितने पाक कम हो गये हैं। हर पक्ति बम्पकार
से निकल कर प्रकार में माना चाहता है हर म्पत्ति प्रकार का भोगी
है।बारों में हर कोई बापा में पे पटकर पुप में बैठना पसलकप्ता
। मक्ति एकता और रक्षा का gr है। पार से हर
किसी को मा।
हरदमा में प्रसम्म रहें-मतिमासीहतिकीकता ऐसी
कि यदि इसे मनी भांति समझ कर उस परम्पबहार किया जाये
को संवार में एक काम्तिमा भागामे। एक पप वा प्रयत्न करणे
पिएरस्तुमार मरमा की रिपामा पसकामापापूष पार
वा करेंपो मापका कामसोपायेगा। नोम वापसे पूमा करणे
कारपेषा पापडी बोर विलेपार्यप । परि पदम मापी भूप
सेना रिमों में उपतीयता पसम्म हो जाती बी मोरबहये पर
मुरली पा पाठीमागे बापकी भूख बकर मरेबारे सेवासार
मार रखा है। उपमें म्पिापीलवा और कर्म के लिए प्रेरमा प्राप्त
होपी । मूर्य की जीवनराय तरा प्रकाशमान फिरों के साप पाया
की मुहिट और मकार की तुलना करें । म्य की किरणे गरित
हैं उनके नम्बर परितसरे विपरीत पाया मृत है महा जीवन
बीमामा पानाम निमान तकनही प्रकाशा मारा पता
भीमही। जिन मोमों के पहरों पराप और होठों पर मुस्कराहट
होती है हम उन्हें रिवना पमद करते हैं हम उनके चेहरे को उनकी
मांगों को उनकी मुस्कान को देखते है। बार-बार सबते है और
मही पाया हे सार हमारे विचार और भावनाओं में वापी
मा गाती है। हमारा मानवता पर विपाम हो जाता है। म
भाषा पार परमेव हमारा मुकाब उस मोर मुर गाता है टीम
उसी प्रकार जिस प्रकार मूरजमुपी पाश्म उसी भोर को मुराता है
रिस बोर मूर्य होता है। इसके विपरीत रन मोर्मो की मूरत रेषकर
हमारा मन पट गातानि पर सवारसमोर पिम्ता बार
पाये परते, जिनोमट पोप से समामा रहे है। प्रमम्म
पित तमासरा मुरा अनुभव परमा भी एक परराम है। अपनी
दुनिया हम गुप बनाये है पपने मामपास का वातावरण हमारामपना
बनाया हमा होता है। हर में सेनामा नोम समपने लिए बनी
गृह निर्माण करते है और फिर शिकायत करने नमते है कि यहाँ
मगरीबपकार पदियाईनही देतात शिशारीरितार
माग पुरपा तथा रियों को पान पर बम्पफार निराणा माट
समरिणत परिवाई नही । गिम मोपापा
Frontमसार सम्मतिरेमाप नि प्रतिदिन भवति
मिता पाउनसीबा प्रमाणहीमठपा नामनिवार
सोतिरीमानी जो मामा राप्रपाप
मार पामोदेगते जिनमोरपद मुगादा रिजाई ती
प्रातिपात वासुमा बोसो समापं रप मे मते
मौर गर्ने यह ममोहर तपा मार्या मुखाति रिशारिती है यो
प्रकृति ने रान की है ताकिमही मार कुम्प मारुति पो नमामि सर्व
बपने हारों बीमारी कुरीति सपा पाप फंसाकर यमाई है।
पो महान् म्पत्ति संसार को निरयता तपाबमानुपिता पटा
टोप मेरे निकासकर विधा तपा सम्पदा के प्रकाश में लाये है
मिन सोगों से संसार को मानति के मड़े से निकालकर पन्नति के
उत्तुप थप पर पहुंचा दिया है ये पही पूरवीर निभायमा
को पहचानते। पोस सप्टिको उसी रंब मैंसते है जिसमें सरा
मे हमे बनाया है। चनको हर स्मान पर साक्ष्य का पूर्ण भानु रष्टि
गोपर होता है। जिसकी किरणे प्रकार तथा प्रताप हर्प एवं पापा
का समरेश रिमाती है। ऐसे मोप नहीं रेगिमरबमह कुस्मता
पौर रीति के अतिरिक्त कुच विचाई ही नहीं देता। प्रसम्मता प्रमा
संतोप से चमक हुए प्रतापी मानन-मुख बिमको रेत कर ही
किमी परे गरि मनारमौर राहगीरको पम्तोप मिलता है। उनके
विपरीत मम्मी मम्मी वाहियों और युटनों तक मटकी हुई पूषा पामे
हमारौं मतमो सर मापको परमोको भर पाते मीर
को।
'यह दुनिया कागम की पुड़िया र पड़े नस पाना है
रहना महि देस बिराना है।
'नीलिए ऐ मोमो सोका म्यानपारपरलोकको तैयारी
करो। किन्तु इस बीवन में संसार परा समारवासियों के लिए
इतना भी नहीं कर पवेकि मुस्कराकर किसी राम पहरे को मुरित
कर। किमी दूटे हुए पिस पासे को समारंबीर रसे मापा
हम से कम पर बेसी भारतमपमावेसेही
हमारे विचार होते माहे हमारा, हमाप मस्तिफ हमाप
मन उनका राप्त तपा पानाकारी मा बन पाता है। कहने का
जात्सय यह है किवादों का दूसरा माम गौवन है। हम भसी प्रकार
मानते है कि हमारा प्रगट-जीवन बही पुछ होता जिसका प्रतिक्षिय
मारे बर से पाता है। मसार एक मुम्मा है जिससे टकराकर
हमारी पावार हम तक वापस पहुंचती है। यदि हम उदास गिरा
पाबारी, पोहा से कराह है चोखणे वो हमारी पुकार रस
मन्तरित पी मुम्बर से टकराकर वापस पायेगी भोर हमारे लिए
मिराचा मतिरिक्त पुष भी नहीं सायेमो। किन्तु यधिहम प्रमग्न
हमारे हपय तमा मस्तिष्क पर हप छाया हुमा है हम मुभी है
पौर रग सप्टा की स्तुति कर रहे है तो हमारी स्तुति को बनोट
कर टीम रमी दया में हम तक पहुँचगी जिस दपा में कि उसकी
भावान हमारे कष्ठ से निकासी पी।
पता सस्सास एक पति की हर स्पान पर प्रतीक्षा करते है।
बह यही नहीं गाये पर में हो या बाहर, पर मैं हाया फान पर,
सूम में हो पा मेड पर मुग
या पेट पर मुग और मारहाद उसके साप पाते हैं। हर
कोई सा मापनुमा तपा ममता स पबहार करता है। प्रत्येक
एममे पिरर ममम होता है उममे वाले पररे उमी महायता
करो उमरे मन की समुष्टिमा मनुमन ऐना है। इसके विपरीत
एपदूमरा पति हो बात-बात पर सिष पाता है। उसी मेरे
वन पाती है भारमिपुर गाती र फिमी दोप निकासा
उसे मुग तदा हर्ष दिपाईनही रेता । उम कोई परतु ऐमी नगर मही
मानी पिसे देकर सम शेटों पर मुरान मा नाये। यह संसार
को एफरािपास्नर महाभापारमय समपर मममना है
रिममें प्रसारिला प्रवरलेए मय प्रतीत होता है। समार
पाने धीरमगे माहीमबहार ले।
निगराएपपरा गुम- एम्बन रियान
मोर पट्ठ बिचराते है। पंमार में उनके लिए कठिनतम कार्य मंत्री
होता है कि अपनी दुटियों को भूनें। इस रोम से प्रग का
पुख मी थाप मृत सपा प्रमोंसपमहीमा पर
पाप नौती विसार म भार मान की सुप ममे । सनियर
में रिपन मस्तिकवाय से रन पर विचारों को विकाम देने
सिने ही भयानक क्यों न हो कोई भय की बात नहीं। ये मापके
भन में कितनी ही मार बोंबा माप न भूम पार्य मोर सनसे
कोई तमगन । चिन्ता र पोपामीको रबर और पेपर
मोतिमापकी पहिषा मामी को मपकायोपियापकी
पति ही बाप के मागामी कारनामों की भी।
बोरावे पापको भी नही मयती बापके सभाष को इपित
करतीपामापके मानसिक संतुमन को बिगाड़ती। बहे भूम
बायें और गोगारे में कभी कुपन सोरें। मापका समय इससे
मरिक मूस्यवान है कि माप से भूमी विसरोटियों और सूमी पर
चिप प्रगट करने में मटर। परिमाप निराम तपा इवोरसाद
पो ! तो किया या उत्साहहीनता को इस प्रकार मम से निकाल
₹से पोर कोपरमेगाहर परेमरिया माता
बिपनी कमरोपियों
लिएर मरमौर उसे बन ही रहें। पुस्पमान गिरा
रिमी और प्रसन्नता की परीक्षा किनारमायेसी । परिक
पसरा पीपा करे और मै प्राप्त करे फिर अपने पास पानी
परि बापा को गुमर mtो उसे भूम गर्ने ।
परिमाप मापने में मासवाई परिमीत मावे पाय
मामे पोहो गई परिमापकी मिनोहर पुस्तक मेल में
कोरियमई। परिसिी परिस्थिति गिषेप पारम बापका
माम सादिर पो और पोटबायरिमाप पर मात
मपाया गया मापको मानियो री गई वो इन सब बातों कमीत
पाने पर उन्हें बारा माव करने से नाम ? यरि माप नई बार
बार रामेपे वो गाव हानि होगी सोप तथा मुश क मनेक पण
मप्ट होगा । यदि मापसे कोई साई बापकी स्पाठि
होमोई टेम पहनी है पोर पापको परा है दिमाए पुन उस पर
कमी पप सपने वो भगवान के लिए या भयानक पर मोर
ने मापे मपने साप-साथ मठ सिए फिरिये । पर्म भरनो स्मृति
८ पट से मिटा और सपा विस्मृत कर। परियाप भरिप्य
में बने पस्तिक को साफ रख उसे प्राचीन स्मृतियों में पित
नही होने से वो माप यह रेयर बस्ति रह जायेंगे कि भापक
जीवन में एक मया मूर्य उदय हो गया है और मापके मासपास के
बोर भी मापको एक नया पार गवता हुमा इन्मान पाएँ मे ।
स्वास्थ्य और योग्यता
परिमा बनाना चाहते १ मिन् सोग और मन्धी
पौर पर मोहे की मांति बार पाम सिवी पनी प्र में तो पापरे
मिए सबमे पहमें यह मारमा रिपमधे म भन्सान बनने
रा पालकरे ।न्तुि पारप्प पापार रणमा भी उतना ही बार
परिहा किए तपा मनिरता मी मुषसह
मन्तिम परिरमा पहरे में पाप्म सावित प्रपट नही
होती वो चाहे रमा मरितपय हाय रिलताको सम्प और मेरा
पाँम होणारीरिक स्वासमा रमाएपोकनी पोरर
हिमहीं गा माला।
मोर पट्टे निहते है। मेंमार में उनके लिए कठिनतम कार्य ।
होता है
किसे अपनी बुटियों को भूनें। इस रोम से प्रप
समाप मृत पा प्रमों मन नहीं रेबार
बाप पोती बिसार सबौर भागे को सुप बने । निश्षम
में कि अपन मस्त्रिकबएप स म सर विचारों को निकाल
देसिने ही भमान क्यों न हो कोई भय की बात नही। रे॥
मर में कितनी ही गर पो म मा माप उाह मम गा और
कोई धमापन से। पिता तपा परेशानी को करें और
महापड़ी पतितपा सामको मष्ट करमोरिया
सतिबाप के मामानी कारनामों की पूजा।
यो गाते पापको पन्छी नहीं मगही मापके ममान को ।
परती या बापले मानसिक प्रदुमन को बिगारोती। पई
पा मार मारे में जी मन सोचें। बापा समय
मषित भूमपान माप ठसे भूमी मिसरी भूटियों मोर
और प्रपरकाने में भरकर मरियाप निरास सबा हो
पो ! सो निराण मा रत्सादहीनता को इस प्रकार मन से नि
सपोरफोरमे बाहरोमरिया गाता है। अपनी कमजो
के लिए बार बरकरार उसे बार ही । सुस्थमा |
रिमी और प्रसन्नता की धारकिरमानी।
उसरा पौधरऔर गरी प्राप्त कर फिर अपने पास से
मदिन पोतुबनुमा हो ratी उसे भूम
परिवारको मापन देने में असफपठा परिमीत भावे
बाप को भोप है परिमापकी मिनी पुस्तक
दाई हिनदि किसी परिस्थिति विपेपर।
PH THd रिपोमीर पोटमा परिमाप पर
नपाया गया थापको पासियों दीपावो हम बातों के बीत
माने पर उन्हें रोगरा पार से सलाम ! मरि माप ग्ने र
बार रोहराये तो बहुत हानि होगी सीप तमा मुख के मनेक क्षण
प्रोग्रापये । परि मापसे कोई म हो गई है बाकी स्पादि
को कोर म पनीर और मापकी गाडिमाप पुन उस पर
सकमा पप सकते तो भगान मिए या मयानफ पंचर और
बने साये अपने साय-साप मत सिप धिरये । पर्ने मानी स्मृति
के पट से मिटा रे मोर सपा विस्मृत कर परिमाप मरिप्य
म मरने मस्तिफा को साफ लो बसे प्राचीन स्मृतियों में प्रपित
नही होने देगे गे माप मह देप करीत रह पारे रिमापके
ओपन में एक नया मूर्य नाय हो गया है और मापके मासपाट के
कोग भी मापको एकमया पार मा इम्मान पाएँ।
स्वास्थ्य और योग्यता
परिजाल बनाना पाह मिले तोप और बग्यो
पर मोहीमति शो पाम सिमीम में वो पापके
मिए सरने पही यामायण रिपये से बन्द हार मनने
मानोfojाप्प समान रनमा भी उठना ही माप
पद निमाविमा मनिरा का। रिमो पुरस्तर
प्पलिपी में पारे में स्वाप्प तपा परित पट नहीं
होनी दो माहे रम परिसर रिलमा सौर मंच
पहारो गारिक मार रिमापा मारमो मरना भर
रिसीमाना।
इसमें कोई परमेह मही शिकतिज रोपौ बारम मानसिक
संतुमनहीनता के कारण होता है। पूर भय च प ,गह
और पूणा से भरपम्त कर पा पात विष उत्पम्न होते है।रि
यह मानसिक स्पिति एक सम्बे समय तक पो हीबारी रहेको समा
परिणाम पाहत ही मयाना होते है।
बोस योग्य हकीमो वो मौर गटरी मे इस बात को माना
चिन्ता मय हा प्याकुन्तता बामामी विपत्तियों की रप्टि
एपिता का मय परस्पी के सपो परे पिता समेत मानसिक
समम पीन मते है परन् बिगर दिन गुरं पोर रिमास की बीमा
रिमा मरियमोरगाव सो एपीपीमारियो भारत उत्तम
हो पाती है।
हर पी चिन्तित इने मप राह पूषा बोरप में पुतने के
कारण मन रक्त पतला हो जाता है मपितु पाचन क्रिया में भी
परिवर्तन होने मपते है। मार इस प्रकार र प्रकार की गारगमने
भासेपोमाने का निमम मितबाठा है।
हम सब जानते है कि परि मसान मोम वा मोरका राजन
बाये प्रेम प्रथम कारों में समाए हो सका क्या मतमा
करता है। सना मनीन होने वाला पति पौन ही पतन से
मागितामोरबह किसी काम के योग्य नहीं पपाठा
का मस्तिष्क एपित हो पाता पुदि प्रप्ट हो पाती है। पावरमा
मही प्रयापरपासन पर होगा पास समय पानेही
हो जाये और ममुप्प कही नहीं प पाता।
इमविपरीत मरिसोईक्ति सावमाम प्र म ममता महाम
प्रति संताप मोर मुख को अपमे पोप्प बना डार्ग,
परीप अगर सपा पहानता दिन में मस्त रहे तो पसार
और हो पाता है। रसा समस्त पर भगवान पुषस मास्कर
प्रतिविम्म से चमकने-मरने सगता है।
यह समय निकरपा पनता पुरे विचारों और पुराचारी
कारण वपना पूरा र माषा भीवन मप्ट महीं करपे भविष्य का मानव
मपन पारीर के तम्तुमो वोर रोमों को ऐसी पया में नहीं रखेगा कि
उनमें पिता दुसप पमा गह पर, दुबिधार या कुस्वामान का
पिप पिसता रहे। पोरबह पान गायेगा कि सूप का पमा पाप
को एक-फरकर पीटा है।
मापरे लिए इसने बेहतर कोई वस्तु महीं कि मरने शारीरिक
अनुपातमा अपने स्वास्म्प का पान र वाकि भापका दिन व
रिमाप भी स्पस्प रहे और भाप वधिक साम! तपा याम्यता के साप
पार्यरसमेरे एक मिम, चिन्हें हर पड़ी पड़ी चिन्ता पती
किसी बह मपनी स्मरण-गम्ति नमोठे। नम्हें माने मित्रा
सपा मियों तक के माम यार मही रहते । पन्हाने मपनी स्मरण
पति को पाने के लिए बहरे पत्न पि वा पी पिस्तु
कोई माम नहीं। पौर मार हो भी मे पर उन्होंने गो मे कभी
हो नहीं मनाई ? गरिमाम की बावरसता मोर परी उम
का इनार है।
परम मानले हिमारे समस्त मानसिकमबारे स्वास्थ
तपा मुस्था का दारोमार पारीरिक स्वारप्प पर है मौरस्वस्प होने
परमानर रोगकी मपक्षा दम नुमा मषिराम करणा है । स्पारप्प
हमारी गधि वा मामप्प को दग मुना गा देता है और हमारे
बार गमार पपा गर्मी चरन पर देता है। हमारी निर्मप-गति
और मम पुरेको पररानने कीपति में वृद्धि होती है तो सिरहम
रगाप्प दी युनिपायों को मारने मिए पर्यो प्ररनपीतमसी
हो। माना की पारीरिक महानता बीमामासिक समता के
लिए गप्प गरम और नहीं।
मीद की कमी गुती मा में पपरत करना पौष्टिकायम मा म मिलना दर समय काम ही काम करते रहना और माराम का नाम मी म सेना वह हमारी परीरमौरसारत में दरारे बहा मनात म स पति नष्ट होती पती है। ये हमारे परीर को बा में मेर यहाँ से हमारे पर की दोषारों सपा पुनियारों में पानी रिसता रहा है और सर्न समोर बनाता रहता है। मुके ऐसे म्पसायी सोनों का भान है पो प्रहरम मे बषित मोटे-शारे महाँ किन्तु समरे वामपणे परे निश्चित समय पर पाना पाते है पी भाकर सोते है इसलिए इप्ट-पुष्ट मारमियों की अपेक्षा भाषिक सस्प पा सिपाती है। पमही भामसिकमपित भी सनसे मषिक और उनसे काम भी वाराहीकर मेते हैं। परिमापके पपरोला नाही मगत की निगर हिम ही है जो बापरी काम से हो सकेमा। परि प्रातसमेरे बिस्तर उठार मापकी तषित किसी से करने के लिए सरहो और पारा दिन इसी विदीपन में बीते कि जो सामने पाया इससे मनाई हो रो पापको मार रहना चाहिए रिमापकी पारीरिक परस्मा में कोई-म- कोरोपप्राय है यह शिपिकापन बोरहरली पेसाना मपाना बीमार का नयम है पो बाप भर में प्रविष्ट हो गई। पसका एहसाबमोरपद मापके मस्तिष्क कौन्सिी कममोरी संबन्धित है। सम्पत्तिा परेमामन पर पिप सोपपिचार इसका कारण हो या काम समय भोई पटना पर गहो। मरण पुषीहो मापी उसका पता मामा वारिसे और समरको का प्रबम्प भी समहहिबारकबीवन कोमपालिसे बस्तु रसन्न हो । मार पामते करित पपीन का कोई पुरानो गया है मा र पहियों में पुषस पाहि पाप नही कर पसी
दो बम पर
बीमार पा बार्यपी यह
परिमाप उससे काम मेने की पेप्टा करगे तो दृष्माम रटागे मोर
मरम्मत पर भी मपिक समय ममेगा ।
बहरे मोग है पीए वक्त मपने रेप निम्न उपानिकारक
विचारों से अपनी योग्यता मोर सामर्म को मंगाद भूसा समावे
एक है। मैं एमपुरिया को रानना है बिमसे यदि तुम पूणे कि
पपा ताबोगी तो बीमों वस्तुमा के नाम गिनायेमी पो से परापि
प्राप्त नहीं हो मरती । यिस्तु हाने के ममप पोतो वही मापारम
दाम पपातीपाती दिखाई देगी। हमरी स्त्रियों के साप उट-46
या पत-फिर मही सस्ती उम मायाम की भारत महो। रासी हवा
मपी और उसे पुकाम हुमा । रसक पाय पर यदि भूम से भी पिसी
म पामी गमरिया मा पिसी मीर कारण से उमर मीने हो गये
मीपरो नही समती मीनिया नहीं
परमती मानेरीकोई बातु रस रास नही माती बौर पर भूग
की पूछो तो रहेगी कि मुझे भूल तो बहुत लगती है। परिमाप उससे
कही मूम कर महर कि यह काम भाप मिए नामार
इमसे मापको हानि नहीं होगी तो वह उत्तर देपी 'मही भी हामिन
नहीं। ने ऐमा किया तो म मरत होगाऊमी।
यह एक उदाहरण है मौर जीरन में ऐमे बसम्म उमाण मित
समलेस्बिरमामामा प्रातिपर प्रनिम्प एक मीमा मपा
पर पाद में पताना पाता है। और मपने दुर्माप्प पर रोना माता
है। मरने कार बम्पन समापन जिम रोग माममा काना पाना
हमारतीसहरम में ममी प्रसार हो जाता है
पानहीं पता है कि एम स्त्री में दो मरण महीपरि उग
मादर बने गुम रितु उमा मोनियो म पूपिये किसी उमरा
सामनाामा रम पितरा बाई । उसी ममा सीमानामा
पो सो गौर प्पिा परमारमा पारपम गर ।
।
माथिर पे क्यों निमन्त्रण पत्र नहीं माते? किसी के यहाँ भापी हो
या दुखो उमे नहीं पाया बाण । पर्यो उसका नाममावेही बमकी
सहनिया काना पर हाप रख सवो है। एसकी निमत साफ है यह
पिभिवा भी है। योग उसका माम भूम पाते हैं या बानभूमकर से
नहीं मुमात ? इस प्रकार उसकी सारी सामर्प दर पाहर एपसी
निरर्पक मार पोकीयों पपी रहती है। उसका कोई प्रभाव किसी
पर नही । परिबाप हर दम मपनी दुमताका रापममापते पैसे
अपने कार तरस खाते रपे कि बापका स्वास्थ्य ठीक नहीं है माप
बीमार रहते है वो समझ में कि पाप बीमार एंमे मोर मापकासा-
स्प्पीकोनही सश्ता।
हम मा पानते है कि संताप से बार कोई बीर पेट
तपा पाचन को मप्ट करने बाधी महो। यो फिर हम पयाग्न बीमों
को वपस्सम म समाये रखते है या नही उनसे हाप पो सेते ? या
हमें अपने प्राम माता स्मारप्प पिवनहीं।
एक रोलर का पता कि बिस म्पक्ति का शरीर रस
बारमा मिचि परिपद मरने पर की पापों में से पपिठ
निकाने पैर्य से हिम्मत म हारे तो उसे बहुत नाम हमि ।
वह समय मौ बाने पामाई पराम्पि-पराममवासकारण
से की पुराना हिम बीमार हमारे बाबरप पर एफएम पना
बम कर पमरेगा किस बात दुमता और बोला प्रपट होगा
मारे विचार महापार और सत्सप से भटक बसे १ या नमारी
नियत नहीं है। इसमे कोई पाप हो पपारिसका हप रप
भोप 1
पया मार इम पमप में पीमित मी हो किभाप पेटस
हो पये पेट में परा मी पापा मोर पस मेट गपे । पुरमा हा
पनी या पूर्व की सपा में ए पोर का मौका मापा और बापको
इसम हो गया । क्या यह समयमा यया विमाप स्वयं अपमे घासक
बन पाएं, मरने गरीर पर मापा मपना पासन हो । बया बापका
पेट मीर बापका रिमाप माप मपनी मिसियत मही? बया में
बापर माम नही है। परिऔर मस है तो फिर क्या
पारपा पापमा पाहत दो पेट की पार से मामा
मिलती । मेट गामो मापका मन चाहता है सैर-सपारा करें किंतु
बापत पैट पर बनी रहने के लिए बाध्य कर पा है?
परिमापका पेट मापको पाचन-फि, बापका दिन मापका
सिमर बापरीमान वापसीमा भापम मुह मापके हाप मापकी
मिलियत तो बाप नन पर पासन क्यों नही रखे । रमको माग
और कि पामत करो या मही। भाप उनको मापना दास
बना नाम बनकर न रहें।
परि मापने रबम रिया ६ तो उमदी पूति पूर्ण पो अपने
गियर पर मोर पिर मे मनुमति मत ? बारको मात्रा करनी
मा मार कोई मौर काम करतो र भोर तुरस्त करें।
पौर पर मार गइममान है रिस पर सप पिता को भी
निस सोरिप होगीपप्रपाम मंत्री ग्मास्टन में
पापियामेर में भापन नपाने मोर भापत्र भी ऐसा निम मिमी
पाति या भाग्य निर्णरहोवा पा कमी पत्रीपदावा
कि मुझे पूरा मा पो परमे १५ पार फिर भापगरमा?मही
रपिर मीणामाम महाबपने पतिम मानेर
माले मामाले मानिसमामी मोर मामरममा धमदार
रगवानी दो गो पर मासन पिया गावा।
बार बानपानमा परण ठप्प पीमिारे र
परसण मोगा मेना गोम्पूनापिक मरता
परि हमें कुछ करना है तो हमें परीर करम समभरार तवा भावुक कोर्पो को मात्रा देनी चाहिये और उनसे काम मैना चाहिये हमारे मित हमारी बात मामने के मतिरित पुपमही का सपदे। मानसिरसा के पास है। माँ पतिय किमानबमरीरमाहों मो सिर की चोटी से मेकर पैर की एड़ी तक को एक प्रकार से मस्तिक विखरे हुए टुरेहै। हम सब जानते है कि निराशाजनक हतोत्सा करने वाले तपा भैर्य छीनने पाम विचार पिस प्रकार मटपट सरीररिसी भाग पर प्रमार गतबर से काम करने से रोकते है। इसलिए कि हमारे विचार की मशीन का एक मंग है। यही कारण है कि पेट और बाराप नियरिमाग तपा गयरबाय मरमौका पर- पर सम्पम्प है।हरेक दूसरे पर प्रभाष गमता है। एक पंग की पीड़ा में दूसरे पंग भी बराबर के साक्षी होते है । सेठ सारको सब भूब नयी खाने परमाकरठ मये बाहर से पोस्टमन तार माया । बापरे सिप्राप्त बोका और सिर परकर बैठ गये । पर हमार रहामाप दिवानापानीमिरे पापो तो बहुत भूष भगी हुई थी किन्तु को है.हा दुप नहीं। सेठ साहान मुह बोमते सिर से बनी है। इसी प्रकार पार बस पन्द्रह मिनट भाषा पटा बीत मया। बन्द में दोमे तो गायोमे कि मुझ भूम नही पाना उठातो।' उसमा कारप पपा पारत पही कि तार में लिखा पा पारखाने में काम पारो मया पतिमा मनुमान रम माननयमम है। यह रगह रप तो ऐसा मि परको मालूम है ऐसी पटनाए हम में है अधिकतर सामने परित होती है। ठीकसी प्रकार का वितर परीर ममस्त मझोपर प्रभाव गमता हमारे पिया कारण हरप बीरा-सा है। पीर मरिमेट में गमा पाय दोगant समता मता है और मितान पन्त में पोमोवाईगोकारवाहम १.
मेबविरोध स्वम वो पास-पूम और मोटों के बीच मोते रहते है और
फिर वेमकर विस्मय करते दिसतरनाकाटों और निरर्थक दास
की पसम विस प्रपर पकार पार हो गई। यपि मार दोहोमा
पाहिये एक सुन्दर मौर रिताकप क मानसिक रुपाम जसा कि हमारे
पोमियों का है। किन्तु हम यह नही मते म्हिोंने देठ पोत समय
बम सरापार पस्याप स्मारप्य मोर सोनयपोरदायगीरजर
पोपा सिर निकामा और सबकी मासों में तरी हो गई मौर
पर फपत पककर तैयार हो गई यो सबने उसे हो हाप मिया ।
हमें चाहिए कि दिखा सदाचार और स्वास्थ्य का उप-से-उन्म
स्तरमपने सामने प्रमौर हर बीमार मुमयि हुए मोर महिमपिचार
कोबाद उसका पताधारऔर नए पर।
पूर्ण साप्प से इम्मान भी मारी मुप्त पहियां पाएत हो जाती
और मनुप्प काम करमे सपा पस्त भीवर पडीत करने की मा
प्रस्टरता है।
पदिमाप रोगी को यह इस बात का मएम है कि मापदे पर
रेगिम माग में पीड़ा है यहां का कोई निश्चित काम करम के
पोप्प नही बर निर हा मरे । रमका निदान बात यह
किये और सिरितारामबाप उनकी इमराकोरम गर्ने।
सीन वर्ग का कपन रिरिचार उपाहारमा मामस
पर परमति होजाती। इस प्रसार मानरमपनीहानी अपने
परीर में पय सिरा रेता है और परिपते पमुशी पापबीती सर पर
कोरपना में मिपी हुई पावे।।
पदिमाप स्पाप राना बारोमास पाति तान्द
परतीकाप्पान । पूर्ण साम्प्पाममा बारकांना सामने
ऐना पारि की श्रीमर पापा बारपीका नमूना
पानीसामनेणे ।
ससार पी भपिकाप रीतियों का कारण गया है। यही नकि
पारीर समस्त कोप दुर्गा निरक्षता तपा प्रज्ञान करिवारों से निकम्म
या दो एक प्रसिमपात है किसान मात्र अपने विचार कारप
बीमार हो सकता है। पपिपरा-पी पीड़ा हुई चोट मप गई या पास
प्रम का मोर भेट गये । पाप रोग को निममम देते है मोर रोम के
सपनों को भयानक स्पिति तक पहुँचाते है।
इसके विपरीतसा कि उमर उम्मेत पिया ना पुरा परि
इम्सान पूर्व स्वास्म का नमूमा साममे रखे पोर यासमझते कितीमारी
हमेशा बने बासी पीर नहीं बस्कि स्थायित्व सपा स्पिरतातोपत
स्वास्प्प को प्राप्त है,वो पह कभी बीमार म परे।
ससार में मक्तिपम एक समिए उस सृष्टा भी बत एक
परमात्मा ही हो सकता या सर्वम्पापी प्रतिमान तथा सन्धि
रानाम है । उसने कोई पस्नु भी भर्म नहीं बनाई । इसलिए रोप का
अपना बस्तिस्य मी पस्तुत्र रोप ठो पारीरिक तुमन केन
होने से उत्पन्न होता है।
शुद्ध विचार
द्वारा स्वास्थ्य-प्राप्ति
प्रतिनि हमारे सामने ऐसे उदारण बाते मनसे मामूम होता
है कि रिचार पर पर जिला प्रभाव गमता है। पर तक हमारे
रिपारों में पुरि सामर्द तपा पता न हो परीरकोपों की मन्नु
मस्ती सामप्प सपा एमा को बनाये रपमा मसम्भव है। यदि हम
अपमे विचारों को संतुमित तथा मुना रोहमारे पपैरोकोपी
मागीवन भी मतुमित बार सुनरावी हो सकता है।पाप' मुगरापक
विगार हमारे पर करोड़ों मनाई कोपों मौर रोमों में पिन
दीना मारमा एकदेशा । इसके विपरीत भर पा विमा कार
सिर रोग पिता मसफलता का संत मपना प्रगत पिउन
पोपा बदर प्रविष्ट कर देता है मौर फरसम्म परीर में भयानक
पापाय पोर पुल पैरा होने नाते हैं।
इस संसार में रहकर मबस सापाम से रम्मान कर माता
एयर किएपपरी करोगों नहीं मम्ही पोटरियों और कोयों
को पूर्णपेप स्वम्प रहे। मौर इस प्रकार मनुप्प मनिट पर
पशपाप सम्मा मौर (मानरार बन सकता है।
बापन मन मापका बन्त रपएक नमूना है पापी मानगि
पति पद स्तर है जिसको सामने रखकर जीवन का ताना-बाना
दुना बाता मा पहर पूम ससस्प्प का पित मपनी बानी
सामने रखें। सपने मापको सस्प हष्ट-पुष्ट सपा मम मममें और
निमवाना विचार बपने समीप माफटकने । बाप मन-अपंग
पर पपनी नियममा मा प्रतिदिम कभी नहीं पहना पाहिए । बीमारी
पिको परीरमा सडार मारकर निरात मे चोर
कोपरनिामा साता है। परिमाप प्रपन मस्तिष्क में एफ ऐमा
पिन भापित कर ममारिए महान् सक्ति मामा अपने
बसिरकोपपने मृष्टय का एक प्रतिपिम मार समान में दो माप
माने परिवरव का पपा पान मेपे । एमी में पार मपने बालर
ऐया होमगा की हिम्मत पायगे प्रिम मार मार तिह
गायो।हमने बरने मम्निरपोरमीमती दुरी पार अपनीषल्पना
में बना एपीएम उमगे सीमानमही भर मरते समा बाप
परना पारीरिक मानसिक पपा मारिषा चित्र बना गाबाप
सा ही बन सपालले । मापरारतम मार हरममय
सम्मी का प्यार । मरने पम्पूण मिरा सामने रमे माधि पाप अपने को बनाना चाहते हैं। किरमाराचीन भार पान के पीपेसीरिया और मापके मानसिक स्तर का जनु सापकरेगा। हमारों पाश्मी ऐम मिसमे तो मरने fanापतीनिहर निर्दम मोर रोपी विनासी मरने मामने रखरे कारणा बीमार पसे । हे सरा भविभीति रोप पेरे पते कोई पति उस समय तक स्पाप बसगन पोर(ए-पुष्ट माही बन सकता राकिरस्वाम्म्पा शिबपने सामने रमे। माग मे मोम मानसिक और शारीकियोपोष्टि से सीमार होते है। स्तुन में निरंतता एवं परिधान कर और सरा सी-मम्मिी रोमाभित्रमा निबनताका मारने मार-माप मिए फिर महतो ऐसी ही बात है कि कोई पति सफलताका ममितापी हो किन्तु मर में पिसता का विचार निए किरें और उसके मस्तिष्क पराम का चित्रवि हो। ऐसा विचार तो एक- मता पा विजय के लिए पासिर होता है। भरि पाप सस्प होना चाहते है तो रसको कपमा कामपने बिगर में पति और पौरप का विष तर समय मपने सामने पूर्ण लारप्प मोर समुमती मार नमूना पे कमी मौर बीमारी का विचार मन में विमुलन मा। में ऐसे मोगों को मामलामो पो इस गितार को अपने पाप हिए फिर किस पर कोई-मकोई पैन कारमा पैग है । परिही कोई रोप सर गाताना परी पराकार मा पेम समझो कि एमएलियास समरोहकाधिकार हो पाये। मरिसका विचार महरम पा और मा मात्र का प्रा पापोगा-गोग एप लिग।
निरसर हम बात पर नियाम करत ना किमाने जीवन के
मिनती मार पन्त निकट है बाप मृत्यु के समीप परे
-बारका कोई राम मग यया है जो दिस शिमर और दिमाग को
पर चुप पाये जागो माप उम भ्रम और उम मेगा एक
एकलि माय शिकार हो जायमे । यह मम मममम स्वयं माप
और माप मन को निरामावादी बना देवा । पस्कि मापकी मा
मे मीर शक्तियों के रक्त की भी मतिय पुरमिचोर मना है। ऐमी
पति में जीवन पटीन करमा दुध रहित है कि प्रादमी हर पड़ी
प का शिकार हो सके सिर पर दुगतमा चिन्ता सवार हो माठा
हर पूर की नास्पनिक छाया उमा पीपे मगी हुई हो। ऐगोरा
में दो माम मारी मामध्य तपा गतियों से पहिलो साता है।
मी पापी मानसिक समाए भोर रिपार हगि भापका जीवन
भी पन्ही सामों में रम पाएमा । परिमाप निसता पापकी
रस्पना करते रहते है तो मिति से पापन पर निबम मौर
रोमी गायमा ।
बात से लोग ऐसे भी है गोपरि मोजना एमात मुर मैं
रातमे तो उसके साथ हो त्रीण पाए और भी माय निगत
पायो । सो पर सण यह विचार पता है कि यमुपस्तु उनके
समार प्रतिम है अमुहम उनके मिए अरिदमही । बस्तिक
तो मापारण बिति में बहुत ही प्रभावित हो राता है। परिणाम
रापेर औरतों में पापनातिकीयोfrपाए होनी वीर
पाटीया पारन भरपय बर मातुर होने और मानसिक
foetrप्रभारी ही वीरमर से।
पर ऐसी पटनाए प्राप जी हरिएकपुरोनिमा पर
पाकि
माने मे मारग विमुगरूर मोगों के हमी के
पारे पेट में दम पर गबीरमरे मनोरमापति
मानित किया गया उन स्तियों में मोमपाचम दरोपिणी बोर
गट नियत पापा के वतिरिक्त पर में भी पन हावी
पी पेट भर कर पाना पाया मोर ग पर इस पपपरहेजी का को
मसर मी महुमा । पचपि सनकोनही पाना यदि परमामा पापा
तोपरप्ट का सामना करना पाता।
इसका पपा कारण है। देवम यही कि उनका पूरा प्यान में
मुगरा मुबदाग से बटा दिया गया पा और किसी पूसरी चोर
प्यानमग्नी । उनका समय हंसमोनते गीत गमा और शिनाये
रंसी रसकी सुपर प्रतिकिया + रमके रिमागों को निप्पय कर दिया
पौर इसलिए उनका भोग्न मेरे में जाने से पाते पुनरपिचारों में
पित नही मा। पर की तरह रामको पानी मेश पर सपना
नहीं पागो ननके लिए अनुमति नहीं थी। न पहा यह मामही
पा कि ये वस्तुए हानि पहुँबायमी मोर नही बातों पर गौर
करने का मौका मिला।
बपाचन के पुराने रोगियों में भी इसी प्रकार प्रयोग किये।
मामा में जाति प्रमान तपा मालारित पे ननका पाम भनी
बीमारी की मोरया मा पा। रम्हाने ऐमी पस्तुए साई पो
न्तिी रेप मेंबरपरदेसी समझी पा सकती बीमार उनको
कष्ट नहीं हुमान
परि एप्पि पिन्दों पपपा नपों को बार-बार पीट रहे
तो सम्मिी-म किमी रोप ममममम पाते (यदि भाप बार
बार पद निधार परेलिमाप नियंदाप बीमार मापका
पारप्प सरावगे निश्चय ही बापका स्वास्थ्य बिमाणाबीर
मोतिहीन सपा बीमार बन माये। क्योकि
यमय ब्जिी पोड़ा को सामने रम पर दो मापको पिर पाएगी।
पपने पतित और पाने मीर पर मत्पषित पानी से
भी स्वास्प्प नष्ट हो जाता है। सुस्त मौर निकम्मै मार्गों को सरा
भानी चिन्ता हती है। मामूम होता है कि नामीमाम तथा पल्पना
पक्ति में पार गहरा सम्पन्न होता है। कहीं परा सा ६६ एमा टीस
ग्ठीमार उरहान सममा किया नोत्रिी मामामी भयकर रोयक
मनन है। ये मोग हर समय मपनै मापको दोपी ठहराते रहते हैं।
कपी तो कहते है मोहो भार तो बाना म्यादा या निपा कही
मुरमान ही न पहुँच गाए । कमी पाईपमा तप प!ि मीच
मही बाएपी पुकाम हो पापा । इसरे घरों में उनकी मां समेत
अपने म्पत्तिरप पर ममी रहती है और उनका मान हर हमय रमी
पर ऐत्रित होता है। उन्हें हर वक्त अपने पापसे पिकाया रहती
पीवन को कत्री भी पूर्ण साप मोर तमुस्ती की स्थिति
में नय समते मट पका राते हैं। रामको परामीबात में
बीमारी का भय होने ममता है। मेराईका पहरमौर का समुः
बना मत है।
एरीम राबर यदि सोर विचारवीर चिम्ता से ममुप्प
रोपी हो पाता है तो पया यह रिचार तारा होतदुराह नही हो
परता? परि मुझे प्रम हो पाए कि म बीमार मौर में वास्तव में
पारपाई पार गतापपा तन्दुरगती और मारप्पा
दरप्पान सपने में में सस्प नही होगाठा? होता है और
पारोपमा
पोपा बना पा समरा पूग पित्र माने मरमुग
ग पनी मामा और रिमापासपूगममता बपने मस्तिष
नीररिरहे प्राप्त रमे पोर उमबनगर मसान
रामने पूरा-पूरा प्रपल परे।
सीमारियां प्राय मनार में गिर गौर मनापालिके
गरण सम्ममीमा मोरो मिस पप
1
प्रप्टमा अनियमित एन-सहन और स्वासप्प के सिद्धान्तों से लापर
बाही के परिणामस्मस्म अधिक उत्पन्न होती है इसलिए अब तकाल
दुनियारीरोपो कोरमही किमा पाएमा उनकामप्ट होगा भर है।
विद्यार्थी परि गित नियमानुसार मनात हत मकरे तो पसे
सही ग्चर पाने की बासा मही होती । किन्तु मापको बसम्म म्पत्ति
ऐसे मिलने को दिनयत समस्ती निपों को दोहये प्राकृतिक
नियमों का संबन करते है और फिर मुलस्ती को श्री सम्मी
रखते है। मानो पो बोकर गेहूं की फमाल काटने का।
यह यो पर पानते है कि परियोने से पूरा-पूरा काम लेना है,
से पड़ी रोजी सामरोड़ाना हैतोयह बामपया है कि साइम उसको
पूर महमापे-बुजामे महकी मामिण करे पास पर पास पौर राना
और उसे काफीमाराम का मौका है।
foतुबपन म्पटिस के बारे में भममानकी पपने हापों से बनाई
हमान के गरे में उनका या विचार किया तो परती
ऐसी इस म मामिप मनोरजन मोर धन-दर की कोई मापता
मही । ।बाने-पीने मोर सोने की मिमित मारतों बिना ही इस
का काम पा सस्ता है।सास्प पैदा करने बामे विचारों बिना
भी पचर का यह बड़ा काम एकता है। इसका बम पर कि
विधाता पपने हाथों से सचिव इस भाषचना इन्सानी मपाल
का एम माप निमम बषितमयोपको मौर यह उम्मीरपणे
किया हमेगा टीक और पान ऐसी हम पाएंगे वही करेगी,
हमारी धमों और मामामों का पालन करेगी। किन्तु फिर भीका
तीबाशिर कमिशार हो ही जायेगी।
मागी पिता नोपों को मा सिगायेगी कि एक दुरंत बारपण
कोपिस प्रकार बनाम बना सप।सि प्रकार एक मोर मुके
हए समाप सनुमान प्राप्त र म है और ीक होसम् ।।
शायर्ग का पपन है "मागका प्रत्येक पिचार मस्तिक के
रेकार में होता है हर या मंभित हो जाती है। मनुष्य इस
प्रकार मपने परीर, मपने जीवन की कहानी सुर मिलता है मौर इस
प्रकार परिपते हर व्यक्ति की मापनीती सम परीर में सिसीई
पाते।
विस प्रकार हम किसी सरी पारीमार काम की पोरकीनीन
रखते है उसी प्रकार हमें स्पारम्प की दुनिया भी रखनी चाहिए।
पप्पपन सपा प्रेक्षक पाबाद में परमेष्ठ स्यबहार पिया अप
नाना पाहिए मोर स्वारप्स का प्यान रखना चाहिए। हमें माहिर
कि हम स्वास्थ्य के बारे में बात करे पार पन्दुरली के माप को
सरा बपने सामने रखें। ठीक रसो मका मेनूम विद्यापी
कोर पड़ी मानून की चिता रहती है। वह बेटा है वो कानून की
पावें करता है सोरता है वो उसी बाबत पड़ता है तो कानून की
तिवारे पला है। यहाँ तक कि रहवा भी ऐसीही पगह है वही
समूगए।
स्पारण का प्रश्न या एकदिक प्रपनपीपमा नियमित
रूप से पनी और स्वारप्पसियतों का पासन मे ही
मे गारप्यता नहीं हो ममता। हमें मही मोर हिर पिचार सारा
गानीमापार-मा रानी चाहिये।
मरिमाका पितारक मापको रियत परावर मार्गमा
मनुभव नहीं कर रहे हो पौल बपने पूर्ण स्वाप्प रीपोर मान
या कति काम नही, स्पिन मरना है । परिमाप इस
रिसरमिसरप है मुझे कोई परमही।"माटो
परमपने मामने एगदेवोमार बानपा साप और ए-पुष्ट
हो पाए ।
परमी मारम में बीमारी का रिकार
मानले
फोरम दयारामापके मस्तियोमामार मापकी पस
बिम्ब उठे तोरसे मी समय बाहर निकाल है। सोचने और और
करने का बरसर ही बस पहले से निकाममोर उसके
स्थान पर अपने मन में शक्ति साम्पसमा पुम्दरता की पम्पमा
अमित करने । यदि ऐसा करे और ऐसा करते रहेंगे वोबाप अपने
विमानको स्वारम्य सौर्य प्रति सफलता वा विनयविषारी
घे भर मि । पिसा फल या शेमा कियापका घर पपिसानी
मोर मस्तिष पुष्ट हो जायेगा । भाप सहत तमा विनयी पि मौर
पाप सुचीश वित्त ठेपे ।
मानव-शरीर तथा भरपूर जीवन
पम परी पर सभी बारमी ऐसे बनते-फिरते दिया
पो वास्तव में बीवित नहीको मासी
मनिकतर
कोप और उनके परितकाकीकोमीयो बर्षस्वप्न की स्थिति में।
इसका कारण यह है कि वर्षमा बिसके प्रभाव से
छन कोपी की यह पपा होई। हरणेद्वारी हा पर्याप्त मारा
में नही पिमती। पीपमा मातीम से जगमम पित।
में पारितोकिनुभम मूवीर इस स्थिति में मानापमती फिरती
मा.
एकमाती पसवापरता सावा पीants मेवानी
उपनप कार मीर मेठा । तमे या प्रकार नहीं होता कि
पानीषित
भीमरीरकीहारीकोटरियों में से टीम
पोलापमही करती पापारिकाप्ट से मूव सोसल
पसारी पनर पीवन बदा पनि राम नहीं होती।
ऐसा पति कभी-कभी ही देखने में माता है जिसमा समस्त
परीरमौर उसका प्रत्येक मंग पीपन वा गति से भरपूर हो।
प्सिी-म पिसी प्रकार जीवन व्यतीत कर मना ही पर्याप्त नही
है। कि हमें पूर्ण स से भरपन्त मणामी ग से मोर राप से
साप नीवन म्पतीत करना चाहिए । हमारेबल का हर भाप मोर
र माग का हर रोम भोरकोप पूर्ण पोषन भरपूर होना चाहिए ।
हमें चाहिए कि हम पूण स से पिम्दारिस हममुम हसे पुरुष
मोर पर्मी और माह स भरे हुए हों। हमारी ममत्रोपी ठरा पक्ति
की कोई सीमा हीमोसी जीवन का नाम पूर्ण जीवन है।
बहुत से मोप इस बात को मत्यन्त मारय समाते है कि
संसार में एक म्यापारी केस में या एक पेशेवर के स्प में अपनी
प्रमिति की बुनिपार रणे। मिनुदेइम गत का तनिक विचार नहीं
करते कि उन्हें मरमे पाम स्वास्थ्य की दुनियाको परत बनाना
सीए । ग्न मस्तिष्क में पदस्पना होती है कि दुरस्ती मयो
मग प्राप्त होती है। परीरपोषों का भी भाग्य है पो जीवन
निोदी मर्यारा निरिस करता है और पारीरिकमा भी प्रकार
करती है मेफिन मही नामले कितापुती मी इमान के सपने बस
मानितु किम प्रभार? टीम म मापने मोर प्राविक मिटात
के बनुसार श्रीयम म्पतीत करने में ।
ऐमे मतपतोग मिलगे गो बालेर बरपपिर पार्य मठे
है। पामो मूम पूमी पाप पसारे को बाप नगर सपना
प्पपपार पताते है शितमी पन्टिएर दिन में हुई है उमसेपही
पपिएप्पर पर रामने अपने पार दिपेहरबमारा उमाम
रिमी माटार स्पिनि रामपापा निरोप और पर
में पकाते चमे मारे।। यह मम्मर हिम पार गती
मीद बोरस में बरपरणपो बिपत रात पाम माना
१.१
मुरक मा
पपी। मामागको
सोपहाडिका पोहा
हा। नमी या देर में हमें अनुभव हो पाया है किहमारे स्वा
स्म कारोबामा निकम मया है। मामठे हो प्रकृति मे समास्य का
क्या मूल्य निषित किया है। अपने पालकी मिमित तमा सोचे
उसमे नियों मनुहार एमा करना। यह मूम्म है यो प्रति नेता
स्म का निषित किया है।
स्मारप्प बनाने मोर पसे काम सने लिए सबसे पस्तीबात
मह किनबारतों से भरा नाम गोपहिसमा सामप्प कोमप्ट
करती ।यो परीर मौरबारमासम्बरम को भीम बनातीtar
एमका निकम्मा बनाती।
हमसोम सतोप पोर पोति से तो बीवन पठीसरमा जानते
ही नही हम बागम की रक्षा में श्री रहते।परों के सम्मा
हमें रिमी पन मनही पाता। हम हर पड़ी हर मनपरे पर
पया को मियता के साप नष्ट करी पते है। हम नहीं पामते कि
इस मागयरबरोसि प्रकार या बाय। हमें उमा भी
शान नही कि सि को नही तोपम कम रात पोहोचपनी
मानसिक पीक की गति को ममम र। हम ऐषा नहीं करते
पारिक रिल रात पराग उससे काम मेटेरहते हैं। परिणामतः हमार
बबब समय पामेहीकार होते।
औरत बार ममरीकी हर मिनट रम पमप
करवाएगभी वाती मी सम्मा। यदि पति की
प्रतीमा माछो और महीना बल कोही पाकर परसर
म्हमना मुहारमा,अपना पहरा विठित बामपा उसके नाम पर
विसर पर पानी पवन पासपी और भेगा किसी
सामाग्य का बोभा अपनी पीर पर लिये। पिन्ति र
इ.पी साइपनी भूषों को नाप या अपने हापकी पड़ी या
पतीको पुमायेमा बौर परषि उसे अपने घरीर कोटीमा छोड़ देना
साहिए पा पर्योकि वह कोई काम नहीं कर रहा होता वह सोषणा
एता है और मन को केमित करोषपदों को तना हुमा रखता है।
इन हरकतों से वह अपनी पति को पप गप्प करता एता है।
मपनी पछि को मोहीमट करने वाले दौर मसावार काम करके
पपने मनपों को पाका देने मामे मोग हमें हर जगह मिमत है।
रेम में भी बटमे तो मारामसे नहीं रमे उनके लिए पौत हो माना
सेमर नहीं । पर हरू गाड़ी सपने ममीप्ट स्थान पर नपा बाये ये
बने बैठे रहते हैं। रमपहरे से चिता तवा परेवामी प्रपट होती
एकदम मापार मरने मामने बामे स्थान पर बैठ जाते
है उनकी मसें फूप गाती है और मासिपुर गाती है। इस प्रकार
दे पार पहुंचने से पहले ही मपनी बहुत सी पक्ति नष्ट कर पूरे
एमापारी बजार मी पाता है भोर साना भी पाता पाता
पाठा क्या है मुहम पास-पर-पाच पवा नाता है। यह सब
दुप रस मिनट मरवा या पिसी भेंट करना होती है। इस
प्रकार यह सपने मैदे को भोजन पकाने लिए पांच मिनट की भी
मनुमति नहीं देता यह मपने रात को मानसिकार्य करने के लिये
मस्तिष्क को मोर भर देता है। पकि उसे पेट में रार नामा
पपाना चाहिए था। यह दिन भर रवा फिरता है मानो उनके
जीवनदारोमगरहीदेगी मोरर पर है। मा एक दिन में
इतना पायपरमवा है। रिष पूरा पाने के लिए एक पूरोपियन
नरम राबरता: सिर उमतिमय होता है, मामुम मुझे
बनी पर्योदो गया? रात भर मीर पों मही बाठी? मसी
पपरा बोगता है? मेरा सपार पिरिणापों हो गया है ?
ग्रारमिया (मिमी पुसावापानी सीमा में है।
१..
बहुत कम मोम ऐसा पाक्षिक मितमपिता की कतास
बानिश है। ऐस मोर्चाको बाबताशेर काम भारस्ती करते
यपि उनका मन रस काम करने को नही राहता। रेपो मी
काम पूर्ण मतमता से नही कर सकते। भीमवे पण
मते रमले मस्विमी उस काम के मतिरिठ मोनार हे
चिो मार राव की पिस्ता सयौ होती है। हर पड़ी या सोपाठ
पकिमातुम क्या हो पाये। इस प्रकार अपनी प्रमिकांस
पति याही मष्ट कर देते हैं।
रीकी चिन्ता मा बराहर मनुव पौदप को पुरण कर
रेती। उसके बराबर पिपिन पर पाते। उसकी पारीरिक तथा
मानसिक पति एवं सामर्व काम करने से विषयहोराठी है। मस्ति-
सकोस प्रकार सामना चाहिए
किसी प्रकार मानसिक
सति कीबोर प्रत न हो बारसमस्त पतिया ठरा योग्मवाएँ उसी
कार्म परनित होनी चाहिए जो उस समय मिलाया हापस
पसी पपा में काम पूरी प्रति हो सकेपा बार उसके करने से पका
पर बमुमर होगी।
हर प्रकाराबधित बाद कर दो। तुमारे मासिक
मगरा पारीरिक बार में पोरयमको ठीक करतो फिर तुमें
जाप होपा कितुर बम का काम कर सस्ते हो बस्कि
सरकार के पारमी से होवामाबोबसे काम प्रारम्भ करते
सबद थे।
बहुत मे चतुर तथा पत्ताही मनुष्यों को पहभनुपान ही नहीं
होवारितिनी वीरता के अपनी पयहार पम्ति मर करते
है। अपने दम को बहुत पाती है। साफी बदली
भाप बहुत देर होती है। ऐसे म्मानित पापारपत्रमा परमन्ती स्प
भारी परवाहीमा पर होते हैं। पाएँ शाहिय पपी तीरावा
कोतनिकम्मर और मषिक चिन्तन से पामों। एप्प यह है
कि ऐसे मामलोम बहुत काम करते है मीर मपनी सामप्य से पर
कर करते है। पर्योंकि बहन साहसी मोर मर्यवान होते ह उनकी
मति वीज होती है कि अपनी शक्ति को पतनी वेगी से वर्ष पर
गमते दिखनीकी से बह पंवा मी नहीं होती। इसमिए कभी-
कमीपहव सरास मोर पिम्तित हो जाते है । उमें मपनी उदासीनता
काबनुभव होता है और चिन्तित सपा उनी एते है।
बहुत कम मोगों को इस बात का अनुमब है पिारीरिकमा
तपा स्पास्म पर पाहस पेय क्या पताका पिताना पाऐमरार होता
है। माइसहीन पीर तपा मस्बिर प्रावि बास मनुप्य इम्मान पह
नाने के अधिकारीही । परिम्मान हिम्मत हारपट तो जीवन की
किसे रिम्ता होगी ? माहम एष पय हाय को पड़ी की सबसे लम्बी
पहानी है और मानवीय एप्रिमो बनाने पाना पहिया है।
मा पर विस्मय की बात नहीं कि एक पोटे मदुर्गम गरीर में
बहार मे भीड़ी हिम्मत पाई गाये ? ए ऐमा भरीर जो मपमे
बाप को म्परहारिकाप नसता हो उमकी सहायता मकर
सरता हो तो मपमे मन की बात माने में ममप मऐ। यह तो एr
प्रकार का विनोद किए बम-पतमे निरास सपा पीडबर्ग मासे
मादमीमदर ऐमी मा और ऐमोमिनापा पाई गाये निसे
पूरा करने से रस पति में तान न हो । पर यह हमारा रोष
होवा हमारी मपनी पुटियों का परिणाम होता है। परिहम
भपनी परिकको मटका अपने परिमोशीपन करतो
महामहोती।
परिमापरा पर त है भाप रप मा पाम ने परमा
पानेनो मापसी मानसिक स्पिना समता पादि से सपा
नाम | पदिएर मगर परनी रता का पेगेरे वप पर ममा
करते। हमें पाहिए हिम सापारम बीरन म्पतीचबरेंरपपि
हम ऐसा नहीं करते। यदि अपने मना वास्तविक शाम उत्तम
करने ही अमिमापा ममि बाहर किसी मशीन के
पिपा मह प्रयट रुप में हमारे सामने बापामें
में मपने रहन-सहन को परममा होगा अपने जीवन स्तर में भी
परिवर्तन रपे हपि ।
यो मनुष्य अपनी पक्ति से पाला कार्यात नहीं सम
मते वारीरिक वा मानसिक पक्तियों का भगारबोगकाप
समय काम बाधा से बताए। पाहे यह समझ मेना
माहिए रिमोपरि परीर में एकलि में सत्पन्न होती है उसी
दिन म्पय कामा मारी है। मतिपछि समिए हमें की
मारवाहिम दुर्घटनामों और मो+भाकस्मिक मामलों से
अपनी रक्षा कर समापी एक प्रकार की मुरमित मेमा विस
म पर हमें बचानक जाने माप्ती विपत्तियों सपा मपर्व पराका
सामना करना है। मनुष्य अपनी पी-पी पति को पीनही
वमा गनिममिवर से नष्ट कर देगामे हिदी मास्मिर्ष
टना से रब की पसिनही दवा मोरयदि एजी भी है वोग
रामीकारक मित्र रोगों सहनही पिकार होगाते
है। विपेपर आप रोयी है तो गरम पृत्यु पनपा
पाकि उनके मन में प्रतीकार-सरितमीती।
प्पसम भी इस बाकि आप मापी-मरमरमर बना
पर मस्तिकपा एममा मा रिवित इसके परिणाम
महत प्रपंदर होते है। ऐसे एप्सबी चापको हर बा मिम पायी
कोई पाप सपा काधमा मारियो सरेको मामाका
एक हिस्कोबाना दुसरा भग बौर परमको मेरी पर
निकोलसरपवा।
प्पसन के पास मारों नही सापों। ममत्य स्त्री पुरुप मपने बहुमूस्प सावन मदिरा बक्रीम की भेंट पड़ा रहे हैं मोर नहीं समझते किये बया करहे। सिका मागिरसपा कारण है हिपहपा सोप गो भने काप कर सकते है इतने बुरे काम करते है। इसका एक बड़ा कारण मुप्तता म्यूनाधिस्ता मार हर प्रकार की मनियमितता मिसके हामो मनुष्य मपना स्वास्थ्य बिमा, मेता है और फिर वपनी स्थिति पर पापाताप करता है। उस मात नहीं कि परि पारीरिक स्पिति घीम है परम सप नहीं दो परवीर होगा ससरे रिपार विपद्धन हमि और पोरे में काम केगा उसकी वात पवार देने ममी। दम्माम पो काम करता है उसका प्रमार उस शरीर पर पड़ता है। एकी पारीरिक तपा मानसिरण का परस्पर मारा मम्बम्ब होता है। परम सस्प है वो दिमाग भी गुस्त रोपा मार यदि निस्म ही धेगी है वो भी कार्य कर सपोप न होगा। दम रोमे मगदुमक रेसते कि 'मुबह के समय पर अपमे पाम परया पार गाते है तोमरे पहरोपर ग्ना रागार मार्मोपी मुहर गयी। उनके पास पिचहते ६ बाग सीह मायब मुग्त और पान मस्तामाकोसी है। गरे मन म पार में नरे मारप-सम्मान और बारम-पास की अस्तित्वहीनता पापना पलता है। तात्पर्य रहमे सपा हिमपने चीरन ममनुष्ट मग माठे । रिस माप होता है रि बार पाम परमे कोमा पर्यो नहीकाठाराम मरे कि पार पाकर गारे में प्रसारितता तथा सरमा से बरे एएमाएं गरोगना पोक्तिपरमीटरोरामा पाता।। म पाल परमोन परतीपतियों को भारतीय मुर्गामाप पुरम पर रिपा पोप को मार-
को एक वस्तुमानपका परमाता है टोपा अपनी बारी काश्वमा
पास हो जाता है कि अपने ही को हानि पामाता महमा न होगा
बामपने ही साप पक्षा करता है। उसे इसका वनिक प्यान नही
किसरि उसमें बह दुरीमान होती पोपा पार सफल मनुष
बनसावापा।
यो वस्तु दम्माम कातन प्रष्टकर बम्बार पारीरिक
तमा मानसिहभषयमों को धीम बनारे पर इसान की मोयता
सपा मामर्प का बम्पर वो उससे बहकरमापका कोष्टिरा
मही और इन वस्तुओं में सियरेट सबसे बड़कर है।
वाममयुगल पिसे परमारमा बमर-पतिमा हामर्म प्रान
की किया इस भयानरूपण मारी परे में मिरफ्तार है।
पीलिए वह भी बहुमानताका मनुमय करता पिर रिपश्ता
Iसका सर्वस्व गाता पवा।बाप राममनही करते कि
रह विनीमरपात है।
मदिरा-पान
इन रेप (बी) में ऐसे मसस्य स्त्री-पुरुप है मार प्रतिरिन
पाकी म्पा में रिहोतीणा पीपोरिन रात भरिपान करणे
नमो मस्त व महोय होते ! और न ही पूर्णतया होण में हो।
परिसरोबोई गावीमा माहोग कहठेतो परे पीधे पा
पायरी और से मपनी प्रतिष्णा एकमाक्रमप सममे।रिस्तुम
मिए ही बना होता कि पराब पीकर बिनुन मरमस्त हो
बातेमोपात समपमस्तीविन लिपबोर
1.
उसकारण पनप मस्तिपीर पतन रोना निस्क्रिय रहते हैं।
म कुछ ऐसे परारियों को बामता बोगेंग मारा करते कि
इम पीकर भीरमस्त नही हुए, मद्यपान हमारे काम में भी बायक
महीं होता किन्तु सो विनाशकारी एवं पातक परिणामो का बमु
मान नहीं करते क्योंकि यह पुराई धीरे धीरे सामने भी और यह
ऐमी पिनी होती है कि प्रारम्भ में तो उसका मनुमन भी नहीं हो
पावा।
प्राव रस-साडेस बपि सभी काम मारम्ममा पिस्तु
एक साहर किसी-न-सी बहाने से पहर से बाहर बम गाते
हैवापिएक बोतन पिपरकोपबाम मोर हागरम होकर काम प्रारम्भ
कररें। पापि मुबह के समय रात पर पाराम फरमे पापाव सन
की प्राति प्रस्त बसों में विचार मस्तिष्क सरस रोमा पाहिए।
For मराप करने के लिए पसमें काफी पाठ होनी चाहिए या
मे मक्तिकी दया रसनीय नहीं ?
पह पिठनी भयंकर रिमति है परि जमुमोकिमारा
दिया निप्पिप दो गया है हमें पम्पन या पापात होने बाना
गोप पन हमारी योग्यता पा सामर्पको मा कर देगा। इस
पातपाबनुमस्तिनापुतबा हिमारा मस्तिपात गरहो
पुरबार हमारे पारिकायामकरने से कार।
यह रितमा रमाय है कि मासूम हो हमारे
परिवार मीरेनोपीरे धीरे पापका-भीमरहीमोघमारेख
भासो रास नी भरतीपा हमारी पामों को मिरामे
गमती है। हमारे जीवनोएप तपा हमारे मार्ग मापारमय
मावीमर में ऐसा नुमर होठा विमे हम परे में हाप
पर पारदमारे पास-पाम धुप पाहोरे गामे बने हुए
पीलिमहीपत म मेरे है।
१५
एक वस्तु का नपका पर पाता है वो,बह अपनी भावती का ना
रास हो पाता है हिमपीको हानि पचाता है। माना न होगा
पामपने ही साप पता करता है । एसे इसका तनिक प्यान मही
कि परि उसमें पहपुरी मावत न होती तो यह बात सफा मनुष्य
बनसकवाया।
पोबस्तु इम्सान का चेतन प्रकारे पापा करो पारीरिक
तवा मानसिक मबयों को लीप बनारे पीर इम्मान की योग्यता
सपा सामर्प का बम्त बरतोससे बार मापका कोई कट्टर पण
नहीं बार इन पस्तुमों में सिगरेट सबसे बरपर है।
पाह नवयुवक मिसे परमात्मा ममर-क्ति वा सामर्थ्य प्ररान
की किया इस भयानक पत्र पतारी पये में पिरफ्तार है।
पसीबिए पाबीगा पुरसता का बनुभव करता है सिर गिर पड़ता
है। उसका ससपाता रहता है। माप क्या अनुभव नहीं करते कि
पह किमी दुसद बात है।
मदिरा-पान
इम रेस (अमरीका) में ऐसे मसम्म त्री-पुस्प है और प्रतिदिन
उनकी मा में दृष्टि होती पापी गोरिम रात मरियपान करणे
न तो मात महोय होते है और मी पूर्णतया होप में होते।
परिसरोकाई मरावी या मरोग हठे तो उसपीधे पा
पाने और उसे अपनी प्रविण पर एमाक्रमत्र समम । रितु उन
लिए ही बना होता दि पर पीकर निमुन मरमस्त हो
पाते मोसानिमममस्तोत्रम मिरात मईहते है मौर
33
उसके कारण नका मस्तिक और तन पोना निष्क्रिय रहते है।
में कुछ ऐसे परारियों को मानता इबो गैम मारा कप्त कि
हम पार कभीमरमस्व नहीं हुए, मपान हमारे काम में भी मारक
मही होता किन्तु उसके बिनासकारी एवं पातक परिणामों का बनु
मान नहीं करते पोंकि बहराई वीरे-पीरे सामने बावीरबह
की उमिनी रोवी पारम्भ में तो उसका बनुभन भी नहीं हो
पाता।
मात रस-सारे एखबरे होय ममी काम भारम्म ही हुमा हैरिस्तु
एक साहर कि किसी-न-किसी गाने से रपवर से बाहर पमे गाते
साकि एक बोतल बियर कीपा मोरमागरम होकर काम प्रारम्म
पर। पचपि मुबह के समय रात भर माराम करम पाचात उन
की मति प्रस्न बरपयों में स्मृति और मस्तिष्क ममम होना चाहिए।
लिमर काम करने के लिए पसमें काफी तापत होनी चाहिए । पा
ऐसे पति कीरपा दयनीय नहीं?
मास्विनी मयंकर स्पिति है परिबनुभव हो कि हमारा
दिमाप निप्पिस हो गया है हमे कम्पन पा पत्तापात होने वाला है
गोपन पर हमारी योग्यता तपासामप्प को मप्र रहेगा। इस
बाताबमबरिक्षमा सकिहमारा मस्तिकात बेकारदो
पुसौर हमारे पारीरिक वापराम करने के कार।
यह रितना रनायक मामूप होगा हिमारे
मरिमाको पीरे धीरेशीमवासीलरोहमारे रथ
भारो रामनीरती है नपा हमारी पामों की पिटा
गमती है। हमारीपनारपतमा हमारे भार को बाबसारमय
पमा ती बोर हमें ऐसा मनुभर होता है जो इस बारे में हाप
पर पार ६६सारेगाव-पास पुष्प मापारे गाने बने हुए
१एपौरित नही परत कोमने पे।
""
एक दिन में निपट में बैठा मीचे उतर हा पा। पर रोषनरी
मगिम के समीप पहुंचा तो मेरे कानों में बातों की बागाबमाई देखा
पो दो सुन्दर नामक मापस में गाकर रपे।पातिाप का विषय
बा हमने ममुक बनीम्मतिपदा विपत रविवार सेम्पतीय मिा
जिसकी भगवान में इतना दिया है कि उसे अपने हापों से कमाने की
बाबापता महीं। एकबोमा पार हमने तो इतनी पी इतनी पी
कि सबसपी एनिमा मदी। पिसी-नपिसी तरह गिरते
परदे पर पहुंचे। पर पहुपकर तबियतको टोक करमे कनिए पोबारा
एक मोवन बियर पीपाई।
4 नवयुवर तारी हमा पाने और
अपन रिमार्मों को निमाम देने के लिए मिफ्ट में सबसे सरकी ममिन
की मोर पारे।
एसी बस्ती मरदासी में कौन काम कर सकया है या संसार
कि काम इमो तार पसा करते हैं। मोर उप प्रपतिसीम पुप में पर
स्बिर पुर मोर दियान मोमो समयों को भी ममिका
विकास कामा पाता। हम नवयुवक को सफलता किस प्रकार
प्राप्त होमप्ती है सिरीस में मे मोगाच्या नाम नही करती
जिसके पीपप किta माम ऐयापी और प्यभिचार में मरो
साहै?
पर स्पिति पारि पदम ही तो में मनोप मफत।
फिर म नरयुकका रया मेगा पिसमपनमोरमोर पाप
विम
पापा जीवन पर्ष में उसकी सफमताकी भी
कोई ममाना है? रिपक्कि परेको र पर स्वयं बामे
गो का प्रयल कर रहा है।
पहिमपामोरास बना हरमपय मरमे माननियमों
पोशायी पता परिमार यादगा किमारी मानसिक
नगर समय मपीसी मोर हम निषित प म उन पो
No text on this page.
माप में पहर भर को मार गबने बराबर कीया।
मुमै विस्वास है कि यार भोप पूर्ण स्वास्प और सस्ती की
हालत में हों परि उनके परीर का हर कोष बोर हर कोठरीसस्प
होवो चाहे कितने ही पावर और भयानक कीटाणुहोवे उनसे परे
ऐने । बिस पलको गरिमा भोवनबाने को मिमे और उसकी
मुम्मा पारेखभाषा मी समुचित प्रमग्न हो उस परीर के समीप
बीमारियांकनहीं सकती। सारव से बराबर बस
फरता, विपत्तियों मार का मास्तविक कारण भीषण शक्ति
दुईम मनुष्य को हर समय कृषिवार जताते पते ।। पाके
प्पर के बरतनी प्रतिकार तिमही होती किमानिया पर
गिरवी होगापे, प्रपरता को नीचा दिखाए। अस्प्यार मोबन
का मभागहीर प्रकार के भव दुत चिन्ता निराणा बाधिरोपों
का बम्मराता है। मिस मटिको पी मरन्या भोग्नमामि से
कठिनाइयो नही होती और एसके मार्ग में पापकमही होती शिम
एप्पुरम मनुष्य पुरत पराजिवोबावारिसे बानीपति
पर विपास होता है।
परिमापा पर गपापके दिमाग की प्रेमी हो
मापकी हिम्मत बार पैसनर हो गाये और मापके इरादे पूरे न
होम रिसरों में पुष्टि नही होगी बीर संपस में स्थिरता कामगार
पेमा रप्टिो पारे पुरता ता पर पा रहेगा आपको स्थितिको
सममने की मतिनही रहेगी। उम्प यह है कि परिमापका स्मारप्प
तरारोबापरे मानसिपर भी पूर्ण स्पेण कार्य नहीं कर
अम्प पी में यह मौहमपदे मिथितनी निईमता सरीर
में होगी मानसिक गतिमा भी पतनी हीएस समाप होगी। बाप
कमागरमा गॅपटर, रिस्टरमपरा सापारप कौम मापारी
प्रोफेसर पा चपरासी फिन्तु बीमारी की दशा में मारे छतापरमाणे
ताररमौर मापे प्रोस्सर सपा पपरासी होमे। मोग पो मोम्यता
कोप्टि से पाप पर है किन्तु मपने स्वारम्प की पर भी
प्पान देते हैं प्रतियोपिता की ओर मे मापसे पापे निकल पायमे।
इस मा0 सर्प तपा प्रतियोगितामुप में सप्ट तपा मत
सफलता के लिए सौर परिव रोमनिराप वा । पह
म्पति गोस्ठोरसे-टोर कार्य कर माता है अपने निरषय पररा
एवा है पोटिमार्यों की चिन्ता किए बिना बागे कम पठाए
पाता है पाकिस मापी पीरव सोबटोरिसा भी विचार
सोगा सेकस मोर होपा बापाएँ सबस होंगीयहो कर्मभूमि में बागी
मे गाता मारमन्तिम विजय का फरेरा का पता है।
मंमार महान् ममिपान ही पक्तिपूरेपरसाठा रिमा
परीर स्वस्प सिरे पेग सात और विमका रिम मात्र हो ।
उसके बायेम पारिवारिक पपाप हर समताम योग्यता र
गिना या स्तिका सामना कोई पीर नहीं कर सरती मौर
मस्विपत परिमापारोमदार सरदस्तीला ममताकत पर
बानुगार साम्ती में टिपर मरे तुम्हारी गति दीपमूस्प
सामीपरप करने लिए राम दीपति होनी चाहिए एप
मोपोंभारिसर पिहान् पाप कम छ तपा मारक
मरर सरते। परि महान् सत्यकी दुनिपार भी मयूर
बोरसम्म पर पर ही रणी रा मानी।।
मिमति सप्प पहियाबारग्निहोत्रीति
पपोस्रिोगरी हरमाड़ी में वीरस पीतारसरही
सीपरतुन हि समिर इतरमा।
जीवन बदलने का ढग
पाकापी पूर्व विपास नहोमार को कार्य सम्पन्न नही
कर साठेबाप पड़े वागार कोदोरकर, पबमाको स्यावर
पनी-नों में फिरते मै पर वरपुर निवासम हो कि भाप राग
मार्ग पर पर मये।
माय मोम वागार चाय पती-पॉम फिरते पते है।
भागार में पनवे-मरते पापरवाही से पनका काम सिीमती की
चोर बावा है और परम्पर पर रवाना हो पा रोपाहे.
पारा बागर में माने का साहस नही हवा । तुम मोम इसलिए
सन्नति नही कर सम्वपिने विचार में भाप के पनी ठे।
हर किपर हमाराम ऐसा वो पिर प्रयलाईर्ष
एककार-मीनार है। हर मस्ति स्मिता पनी होता
पौर प्रमल ना समय की एक विर अस्तु समाप्त कर परता
है। मत परिणाम यह होता है कि मामे पर सम्व है।
पोरन ही प्रगति र परम् दिन प्रतिदिम र मममति की
मोर सुरते.
मस्तिष्ककोपाठ रपमापका पनात्मक पतियार
रोमार मार ऐसा कोई काम नही पिसके द्वारा हस!
बाण काटेपामा प्राप्तकरस।
मामलोप गावरले विपमावादी विचारों से पाने पर
समोसनेमापोसपबारे पठे। "मान स्थितियाप
पालामहोमरस स्थितियों मोक्तानकरता fr
११८
रेमीका कपन है।
मन में भी यह प्रम न होने फितुम् पसरतमाहोगी। अपने
मन में पुष्ट तपास पसर में पूर्ण विस्थाम के माप पदें कि
मुझे ममार में किसी काम के लिए पैदा किया गया है और मैं मम
पान की पारी बारने बाहुबस से इस काम को सम्मम्ममा। मपने
स्माष पा प्रातिकोस प्रकार घिसित करें किनाप बरे में बड़ा
कार्य सम्पन्न कर समय। मपनीबारत समापसे या प्रगट म होने
चरिमायुमर मापको साधारण पाम करने। पबिआप यह
अम्पास पर मोर नाठों पहर निर्मागरम र सपा सरमामय विचार
अपने सामने रण पो मापनी यह मानमिरा रिसी-न-पिसी पर
पापक मिए मंसार में पछ राति उत्सम्म करेगी मोर मापकी
पविमापाएँ पूग होगी।
पहन प्यापारी तपा दूधामदार भिमका मस्तिस्मादी दण
और जोरपमे रोगामाकमा मनाएगानमारण मपनी
पोप्पता को बहुत ही सीमित कर मत है। र उमः मरिता पर
ममेह भय मौर रितारे पोटे-पो मा एपदम इस्मा दोस रेत
और नर मामिक बबाहो मूमा-गराफर रेठ।
परिपाप कोमामा रमाबादवरतापपने परिपा
बपने मस्तिक कोरम्प-मे-परिपति में सपना पूरा-पूरा प्रस्म
परमपम जीवनोपने पीरनोर यो मनरम मतीव पर।
बरसेमापोरगमी पीरमरपाय से भापी पति को विगि
परीबरने मन मे मर रानौर पंपहीनमा रिपारीको
सिनोमापर प्रपस्नोर पानीपरा भीममर
पापमोमपा निधिपरामराबर मात को
पाने मामने और नीचे बनुमा करवा दीन रामने
प्रयामपरिवार पोरोमररिस्पान्नल
कर रहें।
हर जगह ऐसे इम्मान मोरो महान काम सम्पन्न कामे
केसिए समपपीत पठे है किन्तु उनके मस्तिष परम सत्रयों
का परिकार है। पौर रहें सीमा की नाईबाबाकर अपंपुरमा
मिमि बना ऐ पोर ये इतना भी नहीबानते किन प्यों से
डिस प्रकार पिणा।
म मक्ति को मानता यो प्राय अपना मानसिक संतुलन
खोकर नि भर के लिए मपनी पक्रियों और पोपतामोको निरमा
बरवा। प्रात काम कोषले पसका पहरा धमतमाने ममant
होर विप से रसके मानधिमयों को बाका ममता है। उसकी
भारम-सम्मान को इतनी ईस पहुँचती है पसे श्वना पुमोर निराशा
होती है कि वह दिल भर को काम संतोप सामनही कर सकता।
मुपसरे पर काम पर किसी प्रकारमा मनोमानिय
निरामाबाचीरता सापकामासम्म मकरें। परिमाप ऐसा
करप तो फिर यह अममम किलि भर सब कुषमापकी या के
रिस्य होता ऐसा । परिसंपीतम गमत जी हामीमियम राना
बारम्भ करो तो नुर बवाम हरि मा नही समिए परिमापनि
पुज संतुष्ट पना पाहणे मुह ही सुबह अपने रिमान बार
को यमीकोन बसिहोमीको हार नमायें पाकि
मापलि भर मनोहापा मगर पान सुनते हैं।
कार्यारम्म समय मन में ठाम में कियाराम ममी
प्रपरकीरावट या बापा नहीं परने प । परिमाप अपनीन
में रम्नति की मोर पाममा पाहते है तो संकल्प करमें कि
बाप कारकम मापोहामारोपर गौर उरग्यतो।
बाप मन में पाप धीहो मापक यस्विम में किये
ही मोपरासन भाष रसम्म हो सका बाप हरे पर प्रति
-
बिम्मन पो परन् इसके विपरीत मापके पेहरे से प्या हर्षे तपा
बानन्द प्रकट होना चाहिए।
परि एता करने का गलरेंगे तो बाप बस काल में ही ऐसे
हो पायो । मो ममूना माप मपनी पांचों के सामने रखये मही पाप
के मानस परमपित हो पायेगा। फिर क्या होपा ? यही किमापर्क
दुरिपार या स्त्रिी से प्रतिकार मेने कारिपार सब नष्ट हो जायेगा
मादि बाप मुहिम भीवमें मापकी माटी पापा मोरयाप
पागबजार मा दो बापको मनुमन होपा किमापके पानस में भी
ऐसे ही विचार उमर मोर हिर परिमाप प्रस्लिप रिमाई देने
का भी बन कर तो यह नहीं हो सकता भयोकियह संभरहरीमही ।
पीर का प्रावधान इस रिपार, प तपा मनुभूति का
मामाको मिस्तिष्क में जमे है और मन पर अधिकार किए
इए है । मी रिपारा पुस्पानुसार हर बबयर की सक्स बन
गाएको । मसार में ऐमी ग बातु मही पोइस नबम्पमापी मौर
चार परको गेम्स । यरि रमे कोई रोक सकता है उसमें
परिवर्तन कर मरता है तो परिवारों की सम्पूर्ण प्रादि इतनी
विकिमरिचार सभा उमटे हो जाये। मन मा मरि
सका प्रभार परीर पर बार होता है रिनु समरे मी निपम है
पौर निमम पिसमें कोई परिपकमहीं हो सकता है।
परपात मर्ममप ममपने पिता सपा बनुमतियों को
गि सहपारा हमारी पुपमी गाता है। इस रिसर की
पोम पोमोहपारेरीर पर परार राम
हस्तापरता रहा है। इमलिए मोदमारे हरे पौर
मे देवता है हमारे परम पर प्ररर होगा। हमारी बार
सपा मारामारी रवीणो मार रमाप अरिवार
मारकर
१२१
विचार मन र मस्तिकपरमागावीर जीवनोप में
परिवर्तन कर देता है। वास्तव में बात यह है कि योगा चिार
पा मुहाव मन में माता पाहे यामी से भी बाए बहमारीरिक
कोपारकोभीयों पर faहो पाता है। इसका समार
प्रभाव पड़ता है और बाहर से यह प्रकट हो पाता है।
रासं किसने मे पिने सुन्दर पम्मी में यह तप्प प्रकट किया
है। मदिको पहिप से यह मान में किया सत्प का रामन
पडेगा बीर बम सही काम ही करेगा तो मोदी समय में पसरे
मस्तक से पौरपा प्रताप परमपमा बौर पर हरे । पराक्रमी
उपा प्रवापी बनेमा।
पके पम्पात रामिकबर विकास पमरयाशि
परक समिम का कसम कि बार-बार मापनाने से बहादुरप
होबावा रेपिल परिवर्तित हो मावसभाप स्पषीकी
बाबमापके बारे में बापहारिक पम्पों और किपाका
पापमा सेती है। यहाँ तक कियो म्पतिसरा सवा समा
प्रसन्नमित बन जाता है। बोहरसमय चिन्तन करवा देहमि.
पराठा मोर को मारी बायकोपसवा पोककरे रस
पर मानावों में बराको पोक ही पता पता है।
बापरे गरे परिवर्तन से मापको दुनिया मोर मापके प्रभारा
धीन पहियों की दुनिया में परेप पीनान हो पाता है।
बीमामारीमेपमा प्रेसर हर्प सपा मापार पर
हैसि प्रकार पियानोराने वाले को दुर की मन्नम से प्रति
मता बोरामे नियरबारको मुरमानुसार बनाना
पावा। भविष्य मानवमासमा एपापौर मेरमा केवारी
हो रहरैमा बाहिबीवनयाप में स्तिो प्रकार की प्रविष्ट
जमा और सूरापन म पापा पाए । पाकसी पनप नही सहेमा कि
मुगा ही-हुमा ममकान की बनाई हुई मोमसतम पुगो पामी इस रा-
भानी मशीन से काम मेना मारम्भर बाकि नममें मुष दोप
सतम्न हो पाओ।विस प्रकार एक पल सारिहा भपने बिमरे हुए
बाजेहार मानोगोरे सामने महापा।
पोयम के इस पाप में से एच पिम्ता निरापा और मम्य प्रवि
म मारे गुरे ताराको निकाल देना चाहिए मन्या रहमण्ये
पाने नहीं विपर सकेगा और मनमोहरराग नहीं पताप सकेपा लिम
+ मुमाने लिए प्रति मे र बनाया।
भाप म बात को मनी प्रकार हदसमम पर में किबाप को
गिमा परेका प्रपन कोई बस्तु प्राप्त की हो साठी। भाप
पपने संकार और संप करत परदी प्रपनी पापों और मपनी
बभितापायों का ग्यान विना सकते है।
परिमारने स्थिरचित्तवासाप अपने विचार को सफलतापर
दिवरमा मापको गहरार बार होगा किनापको कितना
नारा है। स्पर्य से किसी सीपस्तु किसी महान कार्य को
मागारले मोर मापारि पमी पोम्पा को रेस म पगा।
मिति इम्मान को बनाया ही ऐमा किबह सपष्ट कार्य
बपिपिक प्रसन्नता वीरया में कर सकता है समा सुगम हीदर्प
उस्मारमा मनिए परमहसम्न होता है पम समय बह
पंप योग्यता का स्वामी होता है।
प्रविषमता और मुरीपपनाममा दम्माम के कारनामों का
परमो पाराम तपाइर्ष के लिए पात हमारे परिवल
मोनिशपमे पिकापियामेनपापारने पाती।
परवानीपा कम हो गया एवं पपरमें
पुरमा हो रह समय पप्प सारिमा भी पूर्ण एवंस
उपोरनाराम नहीबमारमा
१२॥
भोग नहीं समझते किनारमपके पार चिन्ता, पोकवादि
से स्विनी मानवीय पति नष्ट होती है मौर प्रकृति में रोप सम
हो पाता है।
परिमापको परे हो कोष पाए, या किसी पिता की
पार बताये वो इस रॉि कोप में स्थानहरेपौर समर
विचार करें। पर भाप समय किसी कोने में भी रह या
इसको ऐसे विचार सपने की प्ररमा पक्षमापसे ही विचारों
को सपने मन में भीमापार समपापमयों को
सिपिन करकिसी भक्ति का समयमा पारे में
विचार-निमय करने की मारत सोपामीरी
बारे पुरीमारी बामे पुटने रेकर।
सोप सहन करने की भारत एक सन्धीमान परिमापक
अमर मान सपी हो मेहत्तर ही मामीगार निक
नने म अपनी पीड़ाए दूसरीकोन सा रस मला
पिसारमा हो मनको बोरगतकार और प्रकार
पसका प्रभार मटरनिरके परिममावबाट
भारपाईबाबाराम दुआ पर ना होने की कारें अपनी
मामाया पिता टमरें पौर या दिमापन
रोपए किलोपित को पिपार सपने मरितक
मेलामे दो भापको मरमारमाधम होगा जिनापविनीपती
सागरम हो गये हैं और मारपीपकान विनरोपई।
परिमार है रिमाप मामले में गिन
जपाने रहाम में आपकी सारी शक्ति नष्ट हो जायची तो
परिवारको मम पिकात मारकी पासाबाप
रिपारारा पापयाँ हा शिविरही कि
है। सिपिार से मारपीट परताई तुरस्त परे विकत
१२४
विचार कोषपने मस्तिष्क में खाने का प्रपल करे हो बापका कप्ट
रोपायेमा क्योंकि मान प्रति की यही पिपता है।
शिवनी बार बार अपने मक-मरिमोर पम्मापूरहोन कीपिका
पत का पतनी ही बार अपने मस्तिष की सतह परबमिटक्या
भमा माठियां बमाते हैं। परयम्त साहस के साप च रिपार को
पसर और उसके विपरीत विचार को मानस पटल पर पंकित कर
। पूण निवास के साथ भोपगा कादे कि पति बत तपा बनु
दूमता पापरे बामसिम बापिकार है और बाप प्राप्त कर
पंप।
किसी परिमिए यह वापरुपक मही कोई विपता नही
टि पनिपपा पार कायरता कीरिपप्रिया सहेमयोंकि हमारे अन्तर
में पड़ी से बड़ी पिता और विपरित काबपूर निदाम पिचमान है।
दुम तपारिता का निदान-जिस प्यक्ति की या ममि
माराको हिपनी रिपतियों मार पीड़ामों को बदम गमे यह
होमरमता ते ऐमा पर सम्माविम पोरे से पतिक सम्यारा
पीमापापरता है। दो दिपार बपना प्रम उस पीडित कावा है
मेरल गमे । रिमया होगा? रमपीमारी प्रवृत्ति परत पायपी
परराष-से-पहोगापेगा । पौर विमुतनपा मारमी बन पायेगा।
मिनप्रसार हम मरावी पर सारणमा का माहम रमते
सीप्रसर हामी पिस्तानी पौर पियों के पास पर
मानोष एमाला रामरहम रण मरते रिम प्रभारहम दूसरों
पोप्रोरनारमनिरास होने गतिरमले १हम मपने व्यक्तित्व
भीमारी पारसमले।
सरा प्रराम्न रहमे काग-बाप नरप्पा मस्तिरको
गुमागायोप्पान मे । जीरन में रखना काम
पोपुरी गा पोषने और रिलाराम
मिमै । अपने मापको प्रसन्नता वा समृरिसों (उप निम्ता
और निरामायमा रिचार) को बापरे यार में प्रवेश करने
अबसर ही मिम । मोम्मति मपनी तबियत को हर मान किसी-न
किसी काम मेहगापे पता है माता प्रसम्म पठा।
इसके विपरीत को मषित कार पहा पाको काम महीनता
पातकी तबियत में पूरे विचार गौरपमरे मवर में पितानमा म
सपा मुमार
माए।
हमे भीवन-दन ऐसा बनाना चाहिए किम परमात
सपने बामसिर मपिणार को सपने माँ से पो हर समय इस
मनाने की चोरी की ताक में मने रहते है मुरक्षित रख सके हमारा
कमिकम पूरेबममा मम्ति सापहर ऐसे रिशर
ऐसी बात और अपने मन वा मस्तिक रगनीपुरमन मापुरती
कीमति समना कर सके मोहमार दिमाम मन्तिा रसम्म करे
जिनमे हमें दुमपान पोहपारे मानसिक संतुनम से पच निर्मन संतोष
कोमप्र प्रष्टकर।
मुप्त-शक्तियां मनोप बहुमा साधारप वा हीन कार्य
रहते है पपपिग्मकी प्राति में एमी बस पक्तियां सोई परी
नि: बोबो काम पूरेकर सम्से है, गम एमको
क्रियापीसने हवा समकाने की बावापाता है।
पास्म-सम्मान कीमोग-अपने पारको अपनी बास्तनिस्ता
पामारी भनुपति मति मागे मारता होगा।
इस प्रपारम मपनी शहिदिमान सागर में दोन नपास
और हम ऐरी मनमोल मोती मिग विमा बारे में हमें लिक्ति पार
भीम या किनारी सम्पत्ति।
दमाप बीवन बालुवामपने सबा को मामूम मे, मपने माप
श्रीपासने लिए ए यात्रामा प्रावि परियों से भरीरी
मौर वे हमारे जीरन पी लिबास्पार्मों पर गुमती है केवल
उस समय उन्हें मोरन यामी पारी या तो कोई पनि मौकिक
पुस्तक होती है या कोईडिया रस्तम्प या भापग पा' पुष उपाय
या फिमीोम मित्र श्री महायता मोहमारे बम्बर पा मापदादा
है मोदूसरों को या तादिसाईमही रेता मोर परिरिपाईरता भी है
यो रम में बम रहम है। पोई की मारी मोर मास्मिर दुध
एना या विपरा या हमारे जीवन की कोई महत्वपूर्ण पटना एक मार
पापी उपमम्प कर देती है शिमा मगान में एक इमरी पी तुम
पानी है मार हमारे अवयव गुण तथा प्रमट पारियो से पियामीम
परली विमो मम्बाप में हमें मका पिपार भी नहीं पाता कि
हमारे पाम पी या हमारे अधिकार में पी। कभी-कभीम प्रभय
पा पानी मिल पाती है पो हमारी प्राति मुफ्त भागे
पो पोन भी गौर हमारे अपने अग्तिरपी मरसे बड़ी योग का
पारपम पाती।
पांतरिम योग्यताएं-प्राय मोगॉरियर विनोबना
कोई-न-को एप्त योग्पना पाय विधमान है जो मी-गनती
रिमी म-मीप्रसार स्पपपेष प्रसट हो जायगो। दिरही कार्य
परिमापार मिनु यह मरपा ममरप है पाम् मागी प्रम
है। सप्प पारो भास्मिा पनि हमारे सिर पर
परलो"पारिमा अभियान पूरारमाहा र मममय उम
पारमिनियमापनारऔर उमभषानक अभियानको
गnिfuी महामति प्रष्ट पापा
मानारामारेमापोरी-मा मादिगा सिके
बारे में पारा बिमारता है बिहरहा मे मार्ग में पहम
दो पारदी गिारीमदो। मम में दा freमाको
htमारे बारपियोमा पोरगार
बावरिक मा
में संभावनाओं के कितने बामस्प मोठी पिसे
के ममुष्प यो महान कार्य सम्पन्न कर रहे नीमनी सामर्प
उपासमामा कीमतम सोड़ी पर नहीं पहुंचे बिपनी सम्पूर्ण
शक्ति पय नहीं करते। हमारे बदर ऐसे सवार सर्वमा निरसमोरन
पनि किसी की नहीं। महेमामावि
होमा है और पहें काम में माना है। हम ऐसे मपपुषों मार पाहछी
मोयों पर माचर्य होता है जो अपने बाप किसी मनिन की बोरर
सर हो पाती और पिछी श्री या पिता प्रभाव केला ही
मारपर्यजनक कार्य करते हैं। पर कर हम कहा करते है
माके पर पहले से यह भोप्पा की नितु परिहम प्रगल करें
हो शायर हमारे बापर भी उन नमपुपों के मान पानसे मी मषित
प्रतिमा सकती।
बस्तुत कठिनाई पहनाती है कि हम में से रिकारका यह
निरास होता है कि हमारे हदय में इस रिवार ने वर पकानी
जो जवारे मोरसटी रिहमारी सामथ्र्य पौरोम्यता सीमित है।
पो
एप हम कर रहे है उससे बिरयकर ही नहीं सकते । मेरी
भास्माहि प्रापमोग अपनी सामर्म अपरिमित होने के कारण
तिम एक है। शमीममता का फारम इसके अतिरिक्त और
पुपमही पिनी मुष्ठ हमामरिक पोपळापार में पान
और ससे सममित्र होने की पेटा भी नहीं करते।
अपने मारको पुष पराममा समिर एक बहन की भी
हैऔर एसपल परदाय है। हरा ऐसे कार्य पर ऐती समानी
अपना शिससे मराठा समातियता तथाटता करो।
कोई काम माराठे समय मन में एमोहरा 'माया
पहीला हसबभिमानकोपताना मैपडीशपिल।
११८
--
मुमे बपनी वीरता सिर करती है और मना पौरप प्रणित करता
पर्ना संसार मुझे पर कडेगा मुझे नाम कहकर पुकारेया और
मुझे पिपरेमा।
इसी प्रकार के कान का महान् पटियों के सहरम ठाप
पर शाहि पो समपासमय बापको उखरित सपा मनुप्राणित करें
पौर रत समय पर बाप को मापको धीर पाएँ ।
सदा युवा रहने का ढग
हम यूरोपों हो पाते हैं -एक मामोसी हकीम से किसी मे
पर रिण हिमरे क्यों हो पाते उसने उत्तर दिया इस
सीन मारग है पामा यह किहम मुनी और हमापार पया में पायाम
महापासे मरा परत छोटे टोटे कीटाणु गो मानिकों की सदारती
पर कहनाते हैं हमारे बन्दर ही मन्दर विप फैमाते रहते हैं
सिमको हमारी विपत नवा के काम मार नहीं मरती मोर पो
बचा इमारी मृत्यु का कारण बनते। तीसरा मृत्यु का भय पो
सारा भीम मेता है हमारे पापों को न कर देता है और
से समय से पहले ही समस्या के समीप रहना देता है।
नवीनोंपारमा में सम प्यापारभार पर सापित
रिया है और यह म्यायोचित भी है। समार में धोपन हा पुरषान
पारप रतने लिए पारिक प्यायाम है गरीरमहीं।
पायामका महत्व-बानुषिकमारपवादों में सबसे अधिक
पातपायुको प्राप्त कमरेबार मोरममोरटीहोरसप्प
सम्पापामबीपीमताची पुरऔरतीप्टिमोरम
पनि परिमापति रहना चाहिए बम्पासपीगित महीप.
१२१
समये, किन्तु मात्र पोषित पना ही पप्ति महीने सापसासम्म
या पलिका होना प्रारमक है और यह पोज म्यायाम बिना
नही प्राप्त हो पाती। इसके अतिरिक रामस्वामी सिया ने
के लिए भी प्यायाम अत्यावश्यक एवं पयस्यभागी ।
पोका प्रमुख विधार-प्रात पोहरा बनुषी सोगों
में
यह बमुर विचार प्राप्त है कि सब सनकी मृतावस्था का
समय बा गया है पोवन सपा सक्रियता की माम पी पर पुकी है
मानसिप सपा सारिक मबयर पगारे और दिन प्रतिरिन
संचार की सक्रितामों पर पामियों में भाग मैन के समीप हो।
पापा पर पन्हें सरस समा सामार काम करना चाहिए
पोतका कठिन कार्यों में हाही महीगतमा राहिए । बर मयुरी
लिए यो साभारतमा मलि एतिपाली सस्य इष्ट-पुष्ट और
मार हो । स्पान रिककरमा पाहिए । यही कारण
माको माया पौर वातको की किसी मोवी को सीकार नही
करो।पई मायाम बासखसे साभारतमा पाहोती पिक
पमने फिरने से उनका मा पारामाता है। इसलिए मुस्ग नामस्य
पमा मामी समन माते ।परे पयो में हम यों कह सम्वे
कि पाष इसलिए समति पोट कापर गत किमान
की एक बस्ता विरेप पर परिवाते हैं। इममिए पनकी प्रति
माय हो पाती।
पराससकारण समयप पिषित और बेकार हो
बाते समयरकोप बान शकापूर्णतमा धामना नही
र सरते । परदे पर रिना विप एरमित होता जताई
बामनी-तियोडमीर साठे शिकाम पनवे-फिरते
मारणा परिणाम यह होगा पिन परम में बीमारी।
माने की सापये नहीं पड़ी। उनके मस्तिप सा माहीत
पमरे रगप रेगे पदर कोप समय से पो पूष का हो पात
1 समिर पीट होगाते हैं मोर मामस्य उसामी तमा मुस्ती
मिकार हो पाते है।
मध्य मुति तपा पाससा पर्यों होते है-प्राप नोपसमा
बन माममी होत परि रोटी कपडासमा मम्म युनियापीरबाबा-
पाया आहे पिम मरेटो ये मान सम्म नोयों
की भांति हाप-रकम दिसापोर पुराप पर में बैठे रहें। पर
में हायपर हाप परे पटना मोर पसाम मा पदानिया पाकर
ममय मनीत करमा सहय कार्य है। पितु पाहर निकलने और
चीन रेजगार पपेड़ गामा पहा मरमौर दुसम है । इसीलिए
तो मतिर पोप समाएर पुरा भी होते है रेसभिमतोप
पिधार हो जाने पनामा काम पासमारने कीमत
राम मरिसम उसके सारप्प को मत हानि पहेती रितु
समें सनी परा नहीं उन्हें तो सारस्पप्रियता ही माती।
गति श्रीपन है पौर निकम मृत्यु-ति गौरन है और
मलिकप मृतु । जीवन का मूस नियम परिहरिस्तुमा पर
पर नही कि गोप गानों की मातिर दिरं पारसी मरिक
पा नपा पार म पारमापिहमे करते थे। मका
मवनयापम महरि रमापनिए पनप पारिफमा
पाप और पोरा-बहन मानमियरा बापामाविका नियम
पारित गर्यो म काप मेगाधनमी सायपी।
काम से मपपा यापस -शारा यह मिसान भी
मामिस्रोपों पर हारमोरबलोरिदों पर भी जो एक
मला कोरिमेपलामो रपदरमा परिपर २ पौर कार्यात्मकी
मानिक प्रातिपणे एपस्तु पारस मे मेती सिराहम
प्रयोग नहीले त रमी पापापाप रिपर पका
इस काम में ताते हैं। पर हम अपनी गागों दो महीनों
निएर रो परिणाम यह होगा कि मास राषिकाए भाम मन
बायेगा और मात्रा ऐप ए मापी । मी प्रभार मस्तिम
कोप भीमातस्य और पतिककाम्पावरमेंसमाविमाष
की कोठरिया सिर गायेंगी मानसिक पर्षों में हास मा मपेमा
कारोगामेरे।
आकर्षक उकृष्ट ० लोकप्रिय अशोक पकिट बुक्स प्रेस में प्रेम में प्रम में प्रेस में पुमन मम्मा हो पपे तारीम की लोकप्रिय पुस्त सूरे पेट सम्म पत्ते पत्थर कहाँठ गुसथन भन्दा मीसमम एकरी दोपाट गुमपम मन्या पापबी सधन मा पोक स्पमती बर.पुमवम माता कुतिया पौषत पानी कार्टन पास्तपानबी पारपीपीप पोत पानी सापकोमा सौकत पानी मामी पोस्त पानी कान्तिकारी मनी तीपम पिपेरपुरी बापकासास्प मुस्य १..प्रति पुस्तक उपन्यास काली पटा प्रसमें प्रसम प्रेस में प्रेम में प्रम में प्रस में प्रेम में पुमाहल तीन की पुमसनमा प्रमपम मरा पुमक्षा मन्त्रा पुसपना
से हम काम मे नाते हैं। यदि हम मपनी बहुमोको महीनों
निप्पस में तो परिणाम यह होगा कि मांसा पिकास मान मन
रायेपा मार मार दीया ऐप र बायेगी । इसी प्रसार मस्तिको
कोप भावामस्य और पतिरेकपा मम्मासकर रस्सरिमाम
को कोठरिया सिर वापी, मानसिक वर्षों में हास पाने मना
कार हो जायेंगे।
० आकर्षक • उकृष्ट ० लोकप्रिय अशोक पकिट बुक्स से रपये सौरबको नोप्रिय पुस्त मरेपा मम पत्ते गुमपन नन्ग पत्पर होंठ गुलाम मन्दा प्रममें गुमपम मना प्रम में हममें प्रेम में प्रम में एकभी दो पाट सुनसन मन्दा पापबी गुमधन भन्दा गरपोक समती मा. पुनरममता पुतिया पोक्तानी कार्टन मोमपानबी पारसौबीम पौषत पानपी साँचकोमा पौरपानी मामी पौरखमाननी रान्तिकारी ममी पीएम रिपेरपुरी पापकासाम्प्प मूस्म १.. प्रति पुस्तक उपम्पास प्रेन में प्रमम प्रम में प्रम में कासीय पुमान मन्दा पुमन मा गुनाहोम तीन ने दुषण मन्य राझी मंडिस और रास्ता दो दिमोबा मारमा मोर का ताप पीस नावहीरे भाप की प्यास दीपि होम प्रम पुगगरिन हपोरेपीर पोट माधना दीमा पटी पर्वम पून मोरपाय कापरीबार बीमा मारेकी बिरिया बाणेरी पनिया यह मरित बनयानी बारित सौर कृप्योपान मागिर चीनमाप टैगोर मनीता पट्टापाप्याय तीराम फ्रिरोगपुरी गय रापय यापर मिल ५ मुरन द्वारकाप्रसार ए.ए. मगोपाल पारि एमबसनम प्रो. इरिगम गोबिनम पम्त बहरत पा पामापी परारमौर पुषी कामे माये बनीता पट्टोम्पाप बिमोर रस्तोगी पार्मका मारतार सुधीर पार मवतीप्रसारमारपेयी बमनात बदर पाकर भागाम तीराम फिरोगपुरी एलप्रपा पीन अपनारास स्वर बारित मीट मूने मेले कर २.मिनट बम्बिया पूनमकीरात कामी गोरी सिलीगुरपान घट के मांस उपतबीते रैन पमिता मारपेन शर्माचा मनिका मित्र राजाराम शास्त्री स्यामसुन्दर पर पणपाल मारमी का बच्चा हास्य-प्याप दिम फेंक माटरी का टिकट सैतानकीरापरी पी ही पिटे भीमतीबी पौषत पानी पोत पानी पास पानी पौषत पानी पौषत पानी पौरत पामधी परारत बोरमोउपयोग जीवन और व्यवहार मेट मार्गम परिवार नियोजना पई कम्ट्रोम रा.भरत पीर हिन्दी गीत प्रकायित्रियों की प्रतिनिधि रचना स्नेही हिन्दी के मोगाप्रिय प्रथम पौत भूपेम स्टीव पिरिपन समा काय १०.१पेर मूलबी यमासी २..स्वगाया नरमी बमासी बारकी मरम नर बयासी-र मादी इरिकमा पाते गुप्लीमा - राही मशिन और रास्ता दो विसदोबाई मीरमा पोर का तारा मौग मायके हीरे भाग की प्यास प्रीमियम होप प्रय पुनारिम पोरे और बोट सामना सरता पटी पब प्रम और पाप पादित समीर जम्मयोपान मावि चीननाय मोर मनीसा पट्टोपाप्माय तीराम फिरोजपुरी गम रायप रमाकर मिग २ मुन तारकाप्रसाए ए. अम्ममोपाहार एम-समय मागी पिरिरमा भगवरी पहिया यह मगित मनमानी पमापी परास्मीर पुणे पामेमामे प्रो हरिणम मोबियाम पन्त यमदत पा बनाता पोम्पाप बिमोर स्टोबी रुपाकर मालवार मुधीर धीरज ममवतीप्रसारमारपेयी बममारास बस्तर पार्यकरमापार तीर्पराम पिरोगपुरी रलप्रमय मौत बममारास बार बारितार सर २.पिनट बधिमारी भूकमको रात कामी गोरी रिसतीगत घट के बाम पप बीते रेन बमिता यारवेन्द्र शर्मा चन्द्र ममिका मिय पगाराम भास्मी स्यायसुम्दर पर्यन यमपान बारमी का बना हास्प-प्याय रिसर माटरीका टिकट पैतान की डायरी जीही पिटे है श्रीमतीबी पोखपानबी पौषत पानी पौरख पामबी पोपट पानी पौषत पानी सौषत पानी मीबमोउपयोग जीवन और व्यवहार रेट माम परिवार नियोजन । वर्ष कन्ट्रोम गरम पीर हिनी पीत प्रायित्रियों को प्रतिनिधि रचना स्नेही दिली मोपप्रिय प्रगम पीत सूपए ही मिरिराम सेना १०.१र १०. माश्या बारकी मरमें पिछया पपने मुरली बमासी यूएनबी बम्बासी नरबमासी-यूर मम्मी मृगनयी यम्बासी