Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner

Padma Chandra Kosha

Shastri P. Ganesh Udit · 2011/07

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* कृपया
एक भागाका टिकट भेजकर हमारा संस्कृत पुस्तकका सूची मंगमार देगए।
वं
दो मानाफे टिकट भेजकर हमारा छपा हुमा केवल हिन्दी पुमओंना वृहद ग्वीपय मंगमारर देसिएगा।
नोट
हमारे यहां भारत वर्ष, तथा अन्यसर्व प्रदेशोंके छपे हुये सर्वप्रकारक और
सर्व विषयोंके संस्कृत तथा हिन्दी ग्रन्थोंका एक वृहद्संग्रह हरसमय विक्रयार्य
तयार रहता है इस लिये जब कमी आपको किसी संस्कृत वा हिन्दी पुस्तककी
आवश्यकता हो तो हमें सरण कीजिये।
भवदीय-मेहरचन्द लक्ष्मणदास,
संस्कृत पुस्तकालय, सैदमिट्टा बाजार, लाहौर.
(Registered for Copyright vnder Act XXV of 1867.)
Pablished by Lala Blaharchand Lachmandass, Sadscrit Pustakalaya, Labore,
Priated by Ramcbandra Yesu Shedge, at the Nirnaya-Sagar Press,
26-28, Kolbhat Lane, Dombay.

निवेदन. यद्यपि इम पाचन्द्रकोपमें साम्प्रतिक शिक्षाके अनुरुल आवश्यक शब्द प्रयमही पयान ये सो भी प्रत्येक आवृतिमें अधिकाधिक सादविन्याम कोपको महल करता है।इसी आशयशे पूर्ण करनेके लिये इस आवृत्ति में पत्रमहससे भी अधिक नये २द मनिवेशित रिये गये हैं और प्रथम और द्वितीयात्तिके अनुसार उन शन्दोंगा प्रकृति प्रत्ययालोचनपूर्वक यथावत् अर्मका प्रमा भी किया गया है। यह फोप मारभून शपोंसे पूर्ण होने के कारण प्रयमदी शिभित जनता m अत्यन्त प्रशंसित हुआ। इमी हेतुसे प्रथम दो आत्तिओम हाय हाय विक गया और arianit इसकी हतीयानिफे लिये इच्छा प्रकट कीगई। | फोपको पानही उपयोगिता रहने निर्माताको सविशेष प्रार्थना करके मिस २ विषयगर्भिन दादावली गरिमिट दी कि सर्व साधारण विद्वानों ओर पाय आदिफे लिये पद पसगायो मी अधिक सम पूर्वी पद होंगे जिससे अनेक दूसरे को देखनेका कष्ट नियम होजायगा । इस पार हमने इस कोपफे आदिम निर्माताका भी मनोदर फोटो लगा दिया जिसका पोशोमा और भी अधिषः पदगई है। यद्यपि इस समय कागज और गुदणका ध्यय उत्तरोत्तर पटना जानी राम की तरह उसी एम्बई में सुप्रसिस निर्णयसागरयपालयद्वारा मोनम पागा पगा है। जिसके देवनदी से रिक्त आकर्षित होता है । पभा-पति. प्रशोधन का पूर्ण प्रयास किया गया है। इस पार नवीन उपयोगी का mantra में गुगन्धि समान होगया है। तीम गारफे गभग आपकोपाला , महाविद्यालय और पुनकालय में संस्थापन किया जाना चाहिये । वयं मा uri लिये मर्प साधारणरा मित्र होजाना पादिये । म बार हमने अपन्त परिम संमि फराण है । यदि यह शिक्षितमण्डला मनोभा तो हम बना wि Ra Re दीपनुपानिय भवास करने के लिये अपनरोगे । संपतमापा FITRA RTER. सानो तरोतर मी भाना, हग सिरे से mentit, भगाना. पदाभिनय reणता भारतसन्तान में rear frikan संगालोम शेषर भारत पुसदीपकारों और हमारा हमार !! tranालको -

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भूमिका सर्वरभासद कोशः प्रमाणे शासगालिनाम् । विधोपकारपर्याप्तिर्यकोशे सुमतिष्ठिता ॥ पद मास सप जानते और मानते हैं कि , आदि अंग्रेजी जातीय विमानोंनेभी व्याकरण और किमीभी भाषामें पूरी २ व्युत्पत्ति लाभ करनेके कोशोंकी पुस्तकें प्रकाशित की हैं, और उनसे लिये प्याकरण और कोरासे परिचित होता विशेषतः संस्रन जानकी इच्छा करनेदारे युरो अत्यन्त आवश्यक है. विशेषतः कोरासे किसी 'पीय मदापुरपोंको अत्यन्त सदायताभी मिली है, सादका परिमान तो मानों राजाफी आमाके ' परन्तु यह सहायता भारतयासिओंके लिये उप- समानद और अटल है. यदि हम किसीभी युक्त नहीं. क्योंकी प्रथम तो ये सय अंग्रेजीमें शम्दशः अर्थका नियय करनेके लिये प्रवृत्त होकर लिये गये हैं, दूसरे उनफा अधिक मूल्य होनेसे प्रामाणिक कोशा लाम फरें, जियो नारा में लाभ करना बहुत कठिन है। और जो "शब्दार्थ- सयानका पुरा २ विश्वास होजाय कि अमुफ भानु" नामय कोश हिंदुस्तानी अर्थसहित है सन्दर, अर्थोकी अवधि यदाहीत. चाहे उस्सेभी यथार्थ उपकार नहीं हो सका, क्यों. प्रति प्रत्यय यलसे औरभी अनेश अर्थ होस , कि उसमें प्रति प्रत्यय पिन शब्द मात्र है। परन्तु प्रचलित अॉफी पसीमा हो, तो नि. जिसमें यहत यदा करनेपरभी बुद्धिमान् शिष्यके स्सन्देद उत्तकोश साल जनोपकार करने में मनमें सन्तोष नहिं होता। मने प्रायः महाविद्या- तनिकभी दुटि न फरेगा । यही कारण है कि, लयादिमें विद्यार्थिओंको परस्पर आलाप करते हमारे पूर्वतन शपिमदाओं और अमरसिंह सुना है कि भलाजी अमुक शब्दका अर्थ जो आदि विद्वानोंने भी अपनी मातृभाषात्मक सं.। कोसमें है, पद क्योंकर हुआ उस अर्थको योधन मत मापा स्पष्ट लिसने, और यथार्थ पटन करनेदार कौनसा धातु है ? और है उसके आगे लिये असीम परिश्रम और विद्वताके साथ जनेय, कौनसा प्रत्यय लगा कि उसका विशेष अर्थ हो. गया परिपूर्ण, मुघटित, मुललित और मदोप गया. यथा कोशमे "नृशंस" इस शब्दका अर्थ फारक व्याकरण और कोशोसी रचना की, जिन्हें लिखा है. घातक यूर परद्रोदी-शरीर । पेदरम। देख महे २ दक्ष विद्वान् विस्मित दो अधापधि जारस। अय कहिये इस प्रकार शब्दफे अर्थका प्रशंसा करते चले आते हैं। परन्तु मुझको १६ मान क्योंकर कार्यसाधक होसक्ता है. जय कि पर्ष पर्यन्त अध्यापक दोकर छोटी और पड़ी विधार्थीके मनमें इसपातो जानेकी इच्छा निर- शिक्षा प्रणालीसे भलीभांति अनुमय होगया है /तर लगी है कि उक्त शब्दका अर्थ पोंकर कि, ऐसे समय जय कि आंग्ल पाठशालाओम } "घातक" हुआ। इसी शम्दका अर्थ यदि इस विधार्थिओंको अनेक विषयों (अंग्रेजी संस्थत कोशमें देखो तो तनिकभी सन्देशन रहेगा। गणित-इतिहास-पदार्थविधा-भूगोल-हिन्दी-उई ऐसे कोशसे छोटे २ विधार्थिओंका तो कुछ अरबी-फारसी-आदि)का अभ्यास करना पड़ता- । उपकार दोसना है. जिनके लिये इतनाही परि- है यहांतक कि, दो ही वर्षमें यदुतसे विषयों में शान पास है कि "न" "र" नर (पु०) अर्थ परीक्षा देकर उत्तीर्ण होना है, तो उस ऋष्यादि "मनुष्य" ठीक अंग्रेजी आदि सामान्य पोसायी प्रणीत यडे यो अन्योंका अभ्यास उनये लिये ना जैसे पेस एपेरमेन-"मेर"मने "आदमी" सर्वथा उपकारी नहिं दो सत्ता-क्योंकि अंग्रेजी-नियय आनियं, इस प्रकारका सम्पपरिचय आदि इतर माराके कोशी मार उक प्राचीन सर्पथा प्रान्तिके साथ मिला रहता है, कदापि कोशोंकी परिपाटी देशकालानुसार सरल नहीं- कादय कतिपय शम्मपरिशानसे विराद नहीं प्रत्युत इनका रचनाशाम इस प्रकारका दुद हसना । इस यही भारी म्यूमताको पूर्ण करने के सि, गुदये निकट चिरफादतक पढने और कण्टस्य उससे लाला मेहायल, लक्ष्मणास प्रोपाईटर करनेक पिना किक्षित्भी सहायक नहीं होते। संस्कृत पुस्तकालय, सैदामिहा बाजार विशेष इस आवश्यकताको पूर्ण करनेके लिये यपि | अनुरोधसे यह पमचन्द्रकोश, जो पपि अंग्रेजी कई एक धीमान, मान्यवर मानिअर विलियम-! कोशोंकी अपंग पाहुन छोटा है, परन्तु कालि.

अच् अण अप गच द्विक० (द्विकर्मक)। द्विय० (द्विवचनान्त)। दाप् (आ)। डीप (ई)। अङ् (अ)। अण (अ)। फ (आयन् । ढ (पर)। ख (ईन् । छ (ईप)। घ (इय)। प्य-(य)। कन्-(क)। टन--(इक)। यक् यत् (य)। यन् पय न (त)। नायतु (तवत्.)। कत्या (त्वा)। सश् खल घ घ पाकन् (आक)। इनि घि (इन् । गिनि तिन् } (ति)। प्यत् यत् (य)। यय णमुल् (अम्)। इप्णुच् खिष्णु (इणु)। उण } (उ)। 'उकञ् ( उक)। } (न)। नन् क्किए । (यह साराही उद जाता है और धातु यि हलन्तही रहता है)। धनिप् ( वन्)। करप (घर)। (अक)।

(',
स्वर्गाय पी प्रमाणा चद्रजीमारिवाला यामत
जुषस (शिमला) जिनकी मसिम पर कोच निर्मिना ।

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ধরাঘববাে
धीमान् पं. गणेशादरी पानी,
भूतपूर्व प्रोप.गर ree , नंगन मर मन, air.

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... .... पाचस्पत्यम्-(धीतारानाय तर्फवाचस्पतिरत वृहदभिधानम्) अस्मिन् कोपे वेद, प्रामण, छन्दो, Rs.A.P. न्याकरण, साहिल, काव्य, नाटक, चिकित्सा, ज्योतिषादिसकलशातशम्दानामकारादिक्रमेणार्थभ्युरप- तपय सरलसंस्कृतभाषया पात्याता विद्यन्ते. सजिल्द. कलकत्ता 280-0-0 शम्दार्थ चिन्तामणि-यह कोपप्रन्प बहुतही उत्तम और गृहत् है, इसमें अकारादिकमसे शब्द लिखे है वलित, बोलिझ नपुंसकलिश लिसनेके उत्तर शम्दोंटी व्युत्पत्ति व सिद्धि के लिये पायिनि. म्याकरणके सूत्र तपा शन्दोंके अर्थ व उनके लिये अनेक कोपोंके प्रमाण तथा विशिष्ट शब्दों में अनेक प्रन्योंमे उदाहरण भी दिये गये है, यह ग्रंप ४ जिल्द व ३.९१ टोंमें है उदयपूर 25-0-0 उपनिपदाक्यकोप-(और भगवद्रोताकोप) A concordanco to the Principal Upanishads and Bhagwat Gita. मुम्बई 6-0-0 अमरकोप-अमरसिंहविरचितः श्रीमहोजिदिक्षितात्मजश्रीमाजुजीदीक्षिततया ग्यास्यामुया रामायमीटीकया सहित ) पंडित शिवदत्तजीकृत टिप्पणीसहित अति मुंदरविलायती जिल्द मुम्बई Amara-kos'a with the commentary (Vgikhyasudhi or Rimis'rami) of Bhanuji Dikshita, son of Bhattoji Dikshita. Bombay. In Press, शम्दसागर-संस्कृत इंग्रजी अभिधान ] (भारादिकमेण अस्कृतशम्दानो अर्था. व्युत्पत्तयध इंग्लण्डीयभाषया व्याख्याताः विद्यन्ते) Shabda Sagar-a comprehensiro Sanscrit English Lexicon chiefly based on Professors Horanco Ilayman Wilson's Sanscrit English Dictionary & compiled from various recent authoritics for the uso of Schools & Colleges by Pandit Jibu Nanda Vidya Sugar B.A. Calcutta 10-0-0 अमरकोश नामलिलानुशासनम्-भासीरस्वाम्युत्प्रेक्षितेनामरकोशोरपाटनेन सहितः Amarakosha-(Namalinganuslasana with the Cornwentary) Amarakoslaodghatana of Kshirastamin. Poons 3-8-0 भमरसार-संस्कृतसे अंग्रेजी का अंग्रेजीसे संरकृत कोष जेदी गुटका. मुम्बई 0-12-0 सरस्वतीकोश-इसमें कठिन भाषाके धन्दोका मुगम भाशमें भय किये है पं. जीवारामप्रणीत प. मुरादाराम पदार्थभानुकोश-(पं. भानुत्तीराइलित) संस्कृत पर उभाराने भर्य. मुम्बई 2-0-0 मालकोश-मालीप्रसादात में संस्कृतमा भाषामे महारादि पदों भर्ष भाषामें :-0-0 शादस्तोममहानिधिः-(मेरहमानिधानम् ) {भाराकमेच समागम एपना पर सरलसंस्कृतभाषया व्याख्याता विपन्ठे]. तारानाथसातितः सर. 11-10 अंग्रेजी और संस्कृत हिमरी-(मंप्रेरी पर संस्था मर्प) धो न सिराना The Practical Laglish Sunscrit Dictionary by l'ainen Shirarım Apto AL.A. ... ... ... ... ... ... M ... सपनऊ ... ...

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5 Rs.A.P. ... ... 6-0-0 ... ... 1-8-0 ... ... ... ... 1-8-0 90-0-0 ... ... कलकत्ता The Students Practical Dictionary containing (1) Cnglish words with English & Ilindi incanings (2) Ilindi words with Ilindi & English meanings Allahabad अंग्रेजी-हिन्दी शब्दकोष-अपांव भेजी दाम्दोग हिन्दी भाषामें उधारण और अर्थ-- राजिस्द. मुम्बई गुटका हिन्दीकोप-कठिन हिन्दी भादो सरल हिन्दी भाषामें. इलाहाबाद हिन्दीविश्यकोप-पहला विश्वकोषके सम्पादक-श्रीनगेन्द्रनाथ पशु प्रात्यविद्या महार्णवमिद्धा. म्तवारिधि दरकार AL. R. A.S. तथा हिन्दीके विद्वानों द्वारा संकलित । यह कोप हिन्दी के महान् प्रन्योंकाभी अभ्यास करनेवाले लोगों के लिये अलन्तही उपयोगी है। इसके ६ भाग छप चुके है. बाये एप रहा है. दिन्दीशप्दसागर-हिन्दीभापाका एक पृहत् कोश यह एक ऐसा भौकिक हिन्दीकोश है जिपकी महिमा हेरानीसे पाहर है टाईप बनारस २८ भाग उपकर तप्यार हैं. पाकी छप रहा है. दाम प्रलेसमाग. सचित्र अर्ध-मागधीकोप-सम्पादक-पूज्यपाद श्रीगुलाबचन्द्रजी खामीके शिष्य शतावधानी अनमुनि धीरजचन्दजी महाराज (लोम्बडी सम्प्रदाय भाग १ छपरा है शेष उपरहा है। दाम प्रथम भाग सजिल्दका. विष्यलोचनकोर-आचार्यधरसेनकृत मूल और पं. नन्दलालजी शर्माकृत भाषाटीशा । भनेकार्य कोष है, कविता करनेवालोंके बड़े कामका है। छपाई सफाई गुन्दर है। पृष्ठसंख्या ४३२, रूपदेकी जिल्द बैंधी है । मूल्य निफ. धनंजय-नाममाला-द्विरान्पान-महाकायके रचयिता महाकवि धनंजयकृत मूल, और पं. पनश्याम दासजीकृत भा•री । पुसदान्तमें अनेकार्य नाममाला भी है । मूल्य. सब प्रकारकी पुस्तके मिलनेका पता. मेहरचंद लक्ष्मण दास. संस्कृत-पुस्तकालय, लाहौर. 1-0-0 ... 18-0-0 ... ... ... ... ... - 1-12-0 0-10-0 Apply to- MEHR CHAND LACHÁLAN DASS. Sanskrit Book Depot, Said Mitha Bazar. LAHORE. नोट उपरोक्त शेष|पर नियमानुसार कमीशनभी दिया जाता . आर्डर देते समय पया ए पेगी अवश्य भेजें और अपना पता स्पष्ट लिखें। पत्रोत्तर के लिये अवारो कार्ड भेजना चाहिए अन्यथा उत्तर के लिए प्रतीक्षा नहीं करिएगा।

है।) इटा गया है। यह धर्म प्रयके समान पने सायक अन्य पर, ३ कुमारसंभव और शकुंतला, ४ शकुंतल ६ कादम्बरी चित्र, ७ कान्यकी उपेक्षिता ये सा सरल मनोविमान । इसमें मनोविज्ञान जैसे कठिन | और इनमें उक्त प्राचीन अन्योंकी अपूर्व और = वियो बहुत ही सरलताले मुगम भाषामें अच्छी तरह लोचना की गई है। यो.में बहुत कह डालना उदाहरण मार देकर समझाया है और प्रत्येक अध्यायके | सास गुण है। मू०॥") सन्टमे एक रोचक प्रश्नावली दी है ।। समाज । अनु० बावू बदरीनाथ वर्मा एम०- कालिदाम और भवभूति। संस्कृतके दो सुप्रसिद्ध तीर्थ । यह भी रवीन्द्रबाबूकी एक निवन्धावली कवियों के निशान शान्तल और उत्तररामचरित इन दो | है। इसमें आठ निवन्ध है-१ आचारका अत्यार नारी गुनदोषीवैदिनी, मर्मस्पर्शिनी और तुलनात्मक यात्रा, ३ विलासको फाँसी, ४ नकलका ममनोरा।यह मनायेचना कितनी पड़ियाँ होगी, यह ५ प्राच्य और प्रतीच्च, ६ अयोग्य मक्ति, " पूर्व बदलने के लिए इतना ही बदला देना काली होगा कि इसके चिटोपयो। 'प्रभा के सम्पादक लिखते हैं- देशक मुरि नारचार व द्विजेन्दलाल राय हैं। मू०१/ बाकी लेसनीसे जो कुछ निकलता है वह विचारों नाहित्य मीमांसा। यह भी एक समालोचना-मन्य है। चित्ताकर्षक और अद्भुत होता है । .....इस ने पूर्व और पनि माहिलकी-यूरोपियन और पन्ना विचार पूर्ण उपदेशोंसे भरा है मूल्य me) भागीदननामा समान्चना की गई है और अअनर । लेखक-श्रीयुत मुदर्शन । ए की गर तरहसे आदरणीय, 2 भौर कयाके आधारसे लिखा हुआ मौलिक नाटक महान पिक है। भू. ११) सिनहस कहानी लेखक हैं। उनका यह पहला गातारमिह ागीर जिन्दगो दुर्मम नाट- है और इसमें भी वे अपनी स्वाभाविक प्रतिमाके gar में मामा, उनके भाई शससिंह, | हुए है मूल्य १४ र, गोपी गोगोई, भकपरकी कन्या मुक्तधारा। महाकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर Errrrrrrrगा भाति पात्रों के परिव एक नाटकका अनुवाद । इसमें व्यक्तिगत, मामाजिक, artertो मिति तय गो है। मू०१॥3) भार भन्तराष्ट्रीय समस्याओंपर एक नये ही Emm पुगा गुग, दुग, रगति, डाला गया है। प्रारममें प्रो. धर्मेन्द्रनाथ शास्त्री rr ... Her, माया, 'गा, प्यार, सबा, तशिरोमणिकी एक विस्तृत भूमिका है जिस METER मोटि । मनोभे ढंगले अभिप्राय बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है। नाटकपा विदेषण भी किया गया है। ग॥9) अतिगोमाग धीयुत पाल रिचा। राहराय दस्तम । सगीय गिजेन्दलाल - FEBार : मोदनाय सार। नादकका अनुवाद । भनुवादक--धीमान मुंशी REET परम जीयोोनदा लगभग तीन पतुर्थाश माग पचका है । करणारा rria है।) नेयोग्य नाटिका है। म.) मानHIT याने मिया अनेक घग्दनाप । गानो इस समय के सश्रेष्ठ र निराओं, 3ा बन्द शेपाध्याय सामाजिक सम्यारा अनु' बने जोर मार ही मार्मि और हत्या मू. मारह भा. 48. Kinr का अपना गुरम अस्लोदय और स्थापलम्यन । मू. युवाओको उपश। भनेत्री के गुगिर द वगन'का हिन्दी मनुवाद.) Arti Fim ..., मारलगमगी।जिन्दावा सामात्रिमा -riya hir पर भर कोदायमा भर पमा लगाने वाले । * माने पर प्रयो•) मानानकपमा म पुगाम देशी 7 Ring..दि.मामाया र ममपाही न • ६२ ४ - मीनराज सामान Rail + zi writer, म..." ।

पद्मचन्द्रकोश। अम् चिदात्मने नमः। अ.] भकाम्पत, सरहना. | अंशिन, (नि.) अरणिन् । भाग करनेहारा । शरीक. अ, (पु.) अव । विष्णु । न होना । संस्कृत वर्गमालाका | अंशु, (पु.) अश्क। प्रभा । किरण । वेग, पहिला अक्षर, अभाव, अंगुक, (न• ) भंशुक । वन महीन कपडा. अ, (अन्य ) भव-प्रपन्न करना भारिप-सरोंके. भादिमें मंगुधर, (पु. ) अंशु+r+अच् ६ त । सूर्य । धैगवान्, पाठ होनेसे अव्यय है । अभाव (न होता)। प्रतिषेध अंशुपति, (पु.) अंशु-पनि त । सूर्य. (रोकना) । सल्प (योगा)। राम्रोधन । अधिशेष | अंशुमत्फला,(सी.)भशुमन-फलं यस्याः ६ ताफेलेका वृक्ष. तिरस्कार करना)। निषेधार्यक. "नम्" का प्रतिनिधि | अंशुमाला, (नी.) अश+माला ६ त• । किरणों का समूह. है। मरोंके पहिले अन् और न्यानों के पहिले "भ" ही अंशुमालिन्, (पु.) अंशु+मालादनि । सूर्य. रहता है। "न" के 6 अ होते हैं-साय (मिलता- अंस, (पु.) मम्स । कंधा । हिमा. जुलना ) जसे "मायण" माझण ( यहोपवीत भादि होने से) के समान-क्षत्रियानि । अभाव (न होना) असे असफूट, (पु.) अंरा+फूट । त· । बेलका भंगहा. "अज्ञानम्" ज्ञानका न होना। मूलभेद (फरक)-"अपटः" अंहस, (न.) अह+असि । पाप. कपदा नहीं, कोई और वस्तु । सत्यता (योगमा)-टोटापन | महि, (पु.) अकि । पाओं । यसका मूल. जैसे-"अनुदरा" पतली वा छोटी मरवाली । विरोध | अंहिप, (पु.) अहिणा (मूलेन ) पिबति सिक्कतोयम् । (पिएस या पशिलाफ) जमे "अनीति" (नीति वा अहि+पा+क। सीचे गये जलको बासे पीताद। . न्यायके विल) र द गौर लइ सकारोंके पहिले | अक्, भ्या. ५० गती (अकति )। जाना । सांपकी भाति मी सगाया जाता है. अफणिन्,(मि.) नामित ऋणं यम्य । रणरहित । जिसने | अक, (त्रि.) सरकनेहारा. रिसीका ऋण-कां नहिं देना । देशनं । ":" को अकम्, (म.) न कं-मुगम् । मुगका न होना। दु.स। व्यजन मान देनेरो ऋणक पहिले “अन्" नहीं हुवा । (जैगा कि “नाक" न मकं दु.यं यत्र) जहाँ इस न हो. मी अर्धमें "अनृणी" गी होता. अकच, (त्रि.) न• बागा 1-चः । केतु प्रदा नाम अंश, (पु.) भभावेऽन् । विभाग । गरीका तीसको है। जो धडके खरूपमे है. हिम्मा. अकधित, (नि.)न ••न कहा गया। गौण कर्म. अंशक, (त्रि.) अंश+पुल् (भक) । विभाजक (पांटने. अकनिष्ठ, (वि.) न.प.। न छोटा अपीत बाया हारा)। नियाम्-अंशिका । दागद (पारीर-हिम्मेदार) मध्यम-g:-(पु.) बहुवचन (अके-वेदनिन्दाहरे पापे निष्टा (पु.) अश+म्पार्थे पन् । अरा, हिस्मा, टुकमा । मेष आदि यस्य स )। इगौतमका एक नाम है. राशिरा तीरावा भाग । “विभतूंपा मेघनाशके यात्. अकनिष्ठप, (पु.) (अनिष्टान् बनान् पाति-पा-) अंशयित, (पु.) असतृ । शयति । पारनेदारा मागी. दुरध नाम एस्देव. मंशल, (त्रि.) अलन् । बलवान्, अकन्या, (बी.) न• ताजो कुमारी नहीं जान औरत. अंशदर, (त्रि.) अंश हरनि-हाल । अंगहारक । हिस्सा अकम्पन, (वि.) न.तान कापना । -न। एक राक्ष- सेनेहाग । “भशहरोहरो वा पुत्रविताजनान् पिदे"ति सपनाम, अकम्पित, (वि.) न• •जो पता नही । सिर । अंशायतरण, (न.). शस्य भवतरणम् । देवता र (पु.) जनका नाम । दुस्मन्त । भन्तिम दौर- ओंके अपने २ भागसे मिलकर वासुदेव भारि ससे पृथि. रघ एक शिष्य. पीपर प्रस्ट हुआ नरदेह भगवानका भवतार. अकम्पित, (वि.) न.ब.न कहा गया। गौण बम. एमृति.

मनि, [भार . अकरणि, (पी.)न-अनि । चाप । समाप्त न होना। अकस्मात्, (अव्यय ) एकवारगी । अयानक. किसी काममे हार हो जाना। निस्साह होना, अकाण्ड, (पु.) न+काण्ड न. त. । अवमरविय। अकरा, (खी.) अच् । भावलेका वृक्ष, बिनहाय. बाणविना. अकरण, (नि.) मास्ति करमा यस यत्र वा । जिसे वा| अकाम, (पु.) कम्+धम् न त । इच्छाविन. जहाँ दया नहीं । दपारहित । निर्दय. अकाय, (पु.)न+काय ३० । देहविना-राहू. अकश (त्रि.) न कशः न त । कोमल.' अकार, (नि.)(करोतीनि कारः-+धम्-अण्वा नात! सकर्म, (वि.) न-कर्मः । बहु-विनकान । बहिरा।डोरा. जो कुछमी काम नहीं करता । मियारहित । -: (पु.) अकर्तन, (नि.)( गुथ्) २. त• । उचथं फलं "अ" अक्षर (वर्णमालाका पहिला) । "अक्षराणाना म कति की अस्प । जो रंचे फलको ले नहीं सका। रोऽस्मि" (भ.गी. १०.३३). पर्व । ठेगा ।बाना । वामन । कृत मावे ल्युत् । न० २०।। अकारण, (न.) न+कारण न० त० । हेतुविना । दिन- कारनहारा. मनलय प्रयोजनविन. भकर, (पु.? न. १. जो करनेहारा (कर्ता ) नहीं । अकार्पण्य, (त्रि.) न० ३० । नास्ति अर्पण्यं (दैन्यं) "पुरबादी भोसा" मांझर. यम्मिन् । जो दीनता (आजिनी )के विना मिलहो। अकर्मा (नि.) (नामि कनं यस्य-ब• कम्) । फराव्या. " अचमदेन्यम्." परवीकरितान् । जिस (किया ) का फल (नतीजा), अकार्य, (न० ) कृ+प्यन् न• त• । जुआ चोरी अ.. र (हस्तरिया) ही (म्पति)में रहे दिपुरा काम । ३. विनाम, म भार किया (Intransitire) कहतेहै. अकाल, (पु.) न+माल न त । पुरा समय मतादिन अपमंज्य, (नि.) दमन.न. काम न घरमा करनेका समय. अकालजलदोदय, (पु.) अकाले जलदानां उत्सः । अमंन्, (नि.)मसन पासोपान न करराके. सयु । समयविन यादलोंका होना, साद, (I.) (भार) अम्य । भगरक्षित | अकिशन, (नि.) न+किसन व । निर्धन गरीय. STERTAI.) भासहित. अफिश्चिश, (नि.)न+किधित+मा+का भोग भी न जान. मान, (f.) नः २०१०। दम्मरहिन. नहारा-मूग. irat at पर हुआ। जो भणी | अशिश्चिकर, (4.) मलिपिन++अय् । काम न पनिहारा. पा(t)राए• पदनी । म अकीर्ति, (मो.) न. प. अप्रास्ता कोनिः । अीर्तिम न होना भया । पुरी विध्याति. Inka.) ... था। ओबरा (0) अकुण्ट, (f.) नाष्टा ग.। न एकनारा काम मन (मोर ). शातिर{ht.) न..। न (नटी) अलीमय, (वि.) a+Tत.+भयं. न.तान दरसाग. at (Nimr. अश्य, (म.) गुण+य कस ग: न त । सोना min.) मारन... HIre, (f.) ...! सदन । दुर्भग। अपुल, (वि.) (भन दुत था । विगा हल (4. IHAR नमन गण।। ७)मा नहीं मान्दीन, Tetम. असल्ट, (वि.) ... I मशाल । पार, {Fr.) (२ कमाई की.) मा.. नरादुनंग । यो गर नही अDIgniter. मकुम (f.) ... टग मार। भार, Ig.in art रन । दिवसाधवी. भार्ग, (Fr.) AM-म शव mart मार....... TH (T ... Ryanet.

[ भक्षिय, अर, (नि.) म...ागरहित । गुभी ।-PR, | प्य, (म.) न मे शश्यम् । क्षिमित्-नि...। (म.) महोना । भारम गा. मोक्षय मही होगता । श्रादकी समाप्तिमें देने योग्य हत अरत(नि.)(स-मनि) न. १. मसियागया । (पी) मधु (हन) एक अल। अक्षयधर्म. मदिक्षामनायागा. असर, (पु.) शरम म..। भारादिवर्ण । नारा- भनिन्, (त्रि.)...। जो निपुण (पार)नो। पन्य-मम. जो परामी परमही ग मामल, अरचण, (न.) भक्षरस्य । हेराक, लिसनेहारा. अर, (नि.)(भारत)..नपाटा गया। अक्षरमा (कि.मि.) मा भक्षर ही धीरायो शम् । शिम एएभी मुरारान मही हुआ. एक एकभार । अक्षरों के अनुगार. अपस्य, (म.) यम. त। चोरी आदि पुरा असरजीपक, (नि.) अक्षरेण जीवति । अक्षर जीवन सामरिनसम. गुस् । अरार लिराकर जीनेहारा लेपक. अकएप्प, (नि.) (वार-यमा तारे क्षेत्र असरजीदिन्, (नि.) अधारेण सशिप्यादिकर्मणा जीव पर पप्प । म त पलाये हुए खेतमै पकना । सेती- सीति । भार+जीव+गिनि (इन्) । अक्षरोंको लिरा. बादित बिना अपनेभार पोहुए धान (पावल) आदि परजीविका करनेहारा अपप्पकम, (नि.) भष्ण-गुरं वर्म यर । विगका अक्षरसंस्थान, (न. ) अक्षाराणां संरधानम् ६त. १ अक्ष- कामसोगवारी पुण्यामा. रोका टिकाना । अक्षरोपी रचना करना। बहु-लिपि । अपील, (म.) पुरालम्प भाव डाल+गण मत अक्षरावली. रिनपतुराई. अक्षरी, (खी.) भभुते गगनाभोग मे. अश+सरन की अभाबी.) अस्मान् । माता, बादलों द्वारा आकाशमे म्यान होती है । वर्षाऋतु । मारिन । अता, (वि.) अशा राहुआ। पिराहुभा। फराहुआ. अनम, (पि.) ममः १. जिसका नियम न हो। पाद- अक्षयती, (स्त्री.) भEE-पाशका विद्यन्ते अन । जहाँ रोलनेके पारसे पढे हों । अक्ष+मनुस् (मत्) क्त्वम् । अकर,(IDR+पूर: म. तायलका राजा पाठवि.). अक्षकी। पास्मोकी सेल, अयोध, (प.) कुष्पम् न त । कोपा न होना । अशयित, (नि.) अक्ष-पाराकीडो वेति । पारसोरी रोल- कोपशून्य (नि.) को जामहारा । भक्ष+विद्+किए । ज्येको जानेवाला । जु- अक्ष, (न.)मक्षस्थर । इन्द्रिय । सोलह मा सोल । भारिभा. पामा । पहिया । रावणका एक पुत्र व्यवहार, असशीण्ड, (पु.) meण्ड .. । पका शुभारिमा. अक्षत, (त्रि.) दाण+तन. तन टूटाहुआ (न.) अससून, (न.) भक्षस्य-जपमालायाः पम् । ६ न. जप. रघुराक । मावल जा(बी.)मरासिगीस. मालावर सूत्र । जनेऊ असदर्शक, (s-) Aster+दुल् । मुभिगफ । जुआरिआ. अशान्ति,(बी.) न त । न सहारना । दामा न करना। अक्षदपिन्, (त्रि.) म+दिन+गिनि । जुआरिभा. ई करना। प्रोध परना । बेसबर होना. अक्षधुरा, (डी.) अश+ (क) पुर(मप्र) (स.प. अक्षार, (प्रि.) नामि क्षार यत्र । अहो सर न हो । जो हियेके आगेरा भाग. कृत्रिम (बनावटी) बन नहीं. अक्षपाद, (पु.) भक्ष(पशुः) पाद बा । गीतमगुनि। अक्षि, (न) भसन्ति । नेत्र । भारा. ६. चरx. (अक्षिगत. (नि.) भक्षिविषयं गत. स.। विरोधी शत्रु. असम, (त्रि.) शम् भन्नता सामयीन । समारहित. अक्षित, (वि.)न. त• । क्षित । न क्षय होनेवाला । अक्षमा, (डी.) सम्मान.तान सहारना वरना. पिनाशी । नित्य रानेहारा । एकरस रहनेहारा. अक्षमादा, (बी.) अक्ष+मारास. जपमाला. अक्षितरम्, मशीव तरवि-न..। तभन् । आरके अक्षय, (पु• न.) शि+अच् । न० त• जिसका नाश न हो. समान तैरताहै । उल निर्मल होनेसे नेत्रके समान जान अक्षया (श्री.)(नानिमय दानादेः यस्या विपी) यहु । परताई. जिस तिपिमें दाना क्षय नहीं होता। बहुत पुण्य पदाने- अक्षिप, (पु.) अक्षि पाति-प्राणाति सप्रनेन । (चाक)। हारी सियि। मोमवती अमादाम्या । रविवारकी सममी। भरनतारा जोपासको निर्मल करता है। सहाहानेका एन । पुषवारकी चतुपा । वैशासके पक्ष मृतीया. नम्-समुदय सोन.

मर.(.....मन हो. अगरी, (मागि मरः (वि) रसाः । .. (नि.)३.2.15मानमान: मेर। बिस्ने सि (नहर) नहीं होता । मने (से *rrrrr. पिको ए करनहारा देवनारास । frar ..)..र (न) नहीं। नेहरा नीच (पदार्थ ). अगस्लि, (पु.) भग+भन्+ति । अगा मान । (a).. मग । नहरु अगस्ती, (मो.) दक्षिा. Trr. अगस्त्य, (पु.) मगरका अगला नाम भुने. (3.1 MITोटार. अगाध, (नि.पन्न..। मत गहिरा- ...नेमा अगार, (न.) भगन गमन ऋति-प्रो (2.)नि मेरा १.पा । न गाते हुयेको मिलताई । एक । पर. rir-rt.m५१. घोडे, अगिरः, (पु.) न गीर्यते दु.मेन । गु+या+क जो दुगमे नहीं निगला जाता । सगं पहिल. Tr...jrt.rr...पि अगिरीकर, (पि.) अगिरः (सर्गः ) भोर ( 4) यम्य । जिसके निगमान समय Fri:..-TOR+T: हरीर अगु, (fr.)मानि गी: यम। Vel मावा करता I नि । गरी । अगुः (पु.) राहुका नाम । *। .... | सगुण, (नि.) मामि गुण' सम्म । गुगरहित । परम" गि भा गुण मदी। निकम्मा. wer: ....... .. .. । गुल, (न. ) भगुनन्दन । हामी । देशमा ( अगः, (fr. म.) गुहा दिसामा. .. • ent. WHER ! अगुमाल, (f.) नीतः (गहीत) । . Folनगमान जीता गया अग (1.)..। मामि गृह यां। पापा विना मनशाय Gr ... om ww1.1. अगोगा(.) ... । इन्दिपाकी । मे। मग ना मगना । ' "मी हो। भा. .. * . मनापी, (4) मfat I WEE mehta धति, (.) antan at ... , . . .., नि.) i... ster, famitar ) HTTE : ..." ....... " Want : infor wom 4:4x...''

मजिया, (अप्रनालिका, निजिला, (बी.) अमेः जिता व शिसा यस्याः । अग्निहित, (पु.)न्दुि+किर । अमिहोत्री. पहु· । अमिरी जीभकी भौति बिमली शिरा हो । त• अमिहोत्रम्, (न. ) अमये हूयते भत्र । हुत्र । च. भागपी जीभ । आगकी शिसा (लाट)। अमिः जिहा त.. मनके साथ अमि स्थापन करके किया गया होम। येषाम् (प.)जिनकी जीभ अमि है। देवता. अमिहोत्रका सम्बन्धी होनेसे अग्नि. निदेयता, (बी.) अमि. देवता यस्याः । जिसकी देवता | अग्निहोत्रिन्, (मि.) भमिहोत्रं अनि भम्प । अमिहोत्र+ अग्नि है । कृतिय नाम नक्षत्र (तारा) । इसी देवता इनि । भमिको स्थापन करके सायंतःहोम रनेदारा अमि ई. सानिक. मिनियांस, (पु.) अभिवत् उदीपक निर्यासः (नि- | अनीध, (पु.) अमिइन् । पुरोहितविशेष का ध्यन्द) मस । बहु· । जिसकी गोंद अमिके समान थमिक आगका काम होमादि. उरीपक (भूगको धमकानेहारी) है। उपचारसे (उस्मे | अग्नीपणेमीय, (नि.) अप्रीपोमा देवने यस्स+ (य)। उपना) अमिजाराक्ष । स । (म.). अनि भौर सोम देवताओं के निमित्त याग. मिप्रस्तर, (पु.) अमि+स्तृ+अच् । भागको अटाने याहित, (पु.) मि+मा+या+क का परनिरातः । भनि- बाला पत्थर चमकी. होत्री. पिया (पु.) धून. अग्युत्पात, (पु.) उन्+पापम् ।त. धूमकेतु (भा ग्निम, (न.) भा+ । सर्ण-आगवी तरह यमकनेहारा. कारने भाग आदिका नीचे गिरना. मिभू, (पु.) अमेः भवति-भू क्रिप् । अपिसे होताहै । | अम्युपस्थान, (त्रि.) भमि. उपस्थीयऽनेन, अनि (पार्तिकेय ) देवताओंका सेनानी । सर्ण (सोना) (न.) उप+स्था स्युर (अन)त. अप्रिमो निपटाने मन्त्र. कोईभी अमिसे उपजाहो (नि.) अप्र, (न.) अर मलोः । उपमा मग । भग। मिमणि, (पु.) अमेः उत्थापकः माणिः। अमिको नि सहारा। पूर्वभाग । गमूह मा मन । कालनेहारा मणि । अपिका साधन आतसी शीश (पाच)। भयिक । प्रथम (नि.). मूर्यवान्नमणि. अप्रकाय, (मी.) असा कायदे पूर्वभाग. निमय, (पु.) भमये मभ्यते पसी । मन्य+अव । अप्रग, (त्रि.) अभे, गटनीति, अw+ne+ : .... थमिके लिये मंचन किया जाताहै । गणिकारी वा गणि आगे जानेहारा. पारी मामसे प्रगिट । गकी साडिभोको रगड़ने- अप्रगण्य, (वि.) अप्रे गवते, भपगम्य ... पररभाग भए उटती है. आगे गिनागरा, प्रधान ननिमारती, (पु.) भरिमारताहम् । अगरलमुनि. अप्रगामिन्, (त्रि.) अगरनीति, REET+निनि मिमुग्ण, (पु.) देवता । माझण. ७त.। आगे जानेहारा ननिमुखी, (बी.) भमि स मुगं (म) मा । | अप्रहा, (.) भनागदा । पर भग, गए । जिगर मुग भपिश समान है। मेला महतक अप्रजन्मन्, (यु.) भने जन्म रस, मजनुमानिन् पक्ष बहेरा। पारामा गोईगाना । गायत्रीमन्त्र मधि पराभणापदिदै उपा र (वि.), मिरक्षण, (न.मि. एसते मनेन । रसास्यु (अ- | अप्रजाति, (पु.) भारतिर, सपा+ न) राग आदि भमि रक्षा परनेछ एमत्र। ममिहोप अमिता ()मा भिगोत्र, अनिष्टोम, (3.)T+मन पापम् । सहरि. अप्रणी, (नि.) अप्रे भोरटेग', अwifrari अग्निप्यात,(पु.)...ति-धासीसम्प्यि समी, . मनार गा भात (मदणं) येते। परसोती ! अप्रतम् (भा.) पूभागाने अपनी श्रम समाप । | अमनगर, (नि.) सर .....। मरीचिके परामें हुए पितर । मनुष्यजन्म भाग अनुभ, अजात ant नपरोस मनि र मार शिर अमानिन्, (5.) र, । रोतेदेपा और मनोरेपिरामिनी. रिसान, (भम.) मी । Kri | अप्रनय, (..' गा(16n होमनावर रोगना।z... अप्रनामित (.. ना. - समानी*.)मानार्मनस अप्रातरा, (मो.)। न प्रहावं अहंति ।न-प्रदायरमा। मर(3.) मारमः गन्य 7 वा एकप्रकारको मसिन्ध(ही)जो गुम कर्ममें आनी हरे man (f). अमिन, (पु.) अप्रे भवः, मप्र+हिम (या) (5.) पहिले निकर अप्रिय, (पु.) अप्रपामा माई। उन (trol सपन-(f.)मो, टमार १. मनीय, (पु.) मा भई। उत्तन (1) रममाटालो. अप्रेग्.(नि.) अप्रे गसी। अगम्+अनमः। म... मन मन्दो, मना मागे जानेहारा सेवक. Enwr (FE) सा (Tre) अप्रेविधिपु, (I.) अदिपिनसोक पतं, अउसः । . ANI सार सिर रनेदाग । न्याय समा(7.)Timr. पर योिटी मिट जाय तो मे “भोग ...)wirin. Jहारी irkiri (f.). अपाः, (I. ), भने किन पारी-अह । भागे रहा। बनापदि बनानेदारा. अ. (R.) अप्रे पूर(बि) पहिरिश Terti.iram: TN tritrarat i भा. आग, (पु.) म मा, अपायरामा Arm.NE मी (f.). भर , (.) नुग AT (गाती) कागा T y २ मा. (IT.) मगर भन । युग । पान कामेशन। माग m(न.प.TATNIनI. प्रगति, (1.) भा पार गरे। पाने Puri Mr.R. RAT witman " ....'. प्रगम (tr. ) Tri) गगन, सपा मा... मपणे पास म.48 - ram ki. भगए , th) TRAIEATH Art प्रयार, ५.) भAITRE (A) म - ram:24:24. Air? ... Ire.... are orattisgrat.) .. trimmitrakant +FICIFMitta TM +- T - - S x -RMA . ......

भिगमन - गर. (3.) । मारक भागापर्वत । चिन्द । अर, (पु.) भर+यत् । गोदमें रराकर भगानेपा रण। पुस्पा भूषण । समीप । गोद (मो.). पामा गृथा (तो) मादि. हुन,(नि.मरापिद चिन्हारनेच माधन मोहर. आ. बुग.प.विमटना । राम लग जाना मापालि-सी, (सी.)भरपा आलि ( १• पा और। गोदा लिरा, मोन पातपति, भापतिमाता R. (म.) मा अन् । देहावयर । गोर। एकदेश । (या) शाम पानिय त.। मालिङ्गन-गले मिलना. मित्र । उपाय मन. भरपालिका, (पी.) मापारिय-दाई । येरी गोदके पास साभा..(भाति । माहीत )। जाना : सैर परना. पोमपना. (सभ्य.) भरधा । महाभाग । ठीक ठीक सत्यम्पीकार. अहलोप, (I.) गाना ः । संस्थाका पाटन | अकर्मन्, (न) भास (देहस्य ) पर्म (संस्मर) (पटाना) गुगन्धवाले प्योरो शरीरपर ऐप वरना । सुशदार पदा- अपिया,(पी.) महानो विधा । भोंकी विधा । गनिन- थासे शरीरको रगहना अहमह, (पु.)+महत। देवी पीना. अहम.(२.) अनूज असुन त्यम् । चिन्ह । शरीर. अङ्गज, (२.) भात् जायने, अर+अन् । रुधिर । अहित, (नि.) ar+चिलियागया । पिप्रकियाग पुत्र देश-जो कुछ देसे निकले (नि.). सागिनागरा. अरण, (न.) अगि-गती-अल्युट् वा णत्वम् । आनन- माप (मन्त्री.) असर । दीगगे जो नया उत्पन्न वेश. होमिटीको जो फाहर निक्ले तिनका । सा जलाशीम अहुति, (पु.) अनकि यात्पनेन करणेन, अज+अति पु- उत्पन्न होनेकी समाननासे सोर रोम. स्वम् । सवारी । अज्यते पूज्यते वर्मणि अति । ग्रन अमि। आइरफ. (पु.) अन्च+पुरषु ततः कः । जिगलो को भमिहोत्री. फारसे वा नियात्राय । पक्षी भादिशा वासम्यान । पुरा. | अगद, (न. ) भां दायति शोधयति दे+क । बाजू-गुहा, आहुरित, (नि.) आरा भस गाना । तारस• इतन् । माहुभूषण, पालीका पुत्र पानर (पु.) अनदान करने- जिग भार (मसी) निकल पायेहों. हारा (वि.)। दक्षिण दिशाके हाथोकी हथिनी (श्री.). अश, ( मन्त्री ) भर+देश । हाधीको चलाने के लिये अजना, (श्री.) प्रशस्तं अ# अस्ति यस्या, भा+न। अच्छे सागसे रेशा होदेका एक प्रयरा भन्न-अहस. भरावाली को श्रीमात्र । उत्तर दिगाके हाथोकी हथिनी. भरामद (पु. ) भारा गृहति । भार (भरा) को अनामिय, (I. ) श्री+क, अनापिय ६ त । अशो- पपराहादीको चलानंहारा महारत. काश ( उराके फूलमे खौलोग अपने को भूषित अहुरादुर्धर, (पु. ) दु+पारि+राल् हस ३ त• 1 दुर्दा- कती है। कुछ रियोरो प्रिय हो (त्रि.) तिम्ली-जिग राधीको यश, साना कठिन हो । मतदारा | अङ्गनाप्रिय, (I.) अनायाः प्रियः । स्त्रीका प्यारा पक्ष, अगपालिका, (स्त्री.) अहं देहं पालयति, अपालि+ अनुराधारिन,(पु. ) अचं धारयार । दायी रसनेवाला. ध्युल् । दाई नामसे प्रसिद्ध उपमाता । पालन करनेहारी. असमुद्रा, (डी.) भागाकारा मुदा । अशके सर- अहमशमनम् , (न.) अहानी प्रगमनम् । शरीरची व्याधि. पवाली मोहर. प्रशान्त होना. इशित, (वि.) सहल । आमवाली. समायश्चित्त, (न.) आस गुमर्थ प्रायश्चित्तम् । शारी. अझोल, ट, ८, (पु.) भात लक्ष्यते कीलाकारकष्ट, अ+ रिक इद्धिक लिये प्रायवित्त । (जैसे किसी राबधारी मोट, ८, (ल) भाकोनामी पक्ष (दिसके पूल पीले मृत्युपर मान्तिक) ओ मुगन्धियुष, लम्बे सम्रेकोटीकय । एवं फल जिग अङ्गा, (नि.) महान् मनमो वा भवति । भूहिए । बालरंग के होते हैं). परीर वा मनसे उपजवा है । पुत्र । बेटा कामदेव आहोलसार, (पु.) ओलम्य गार. ६ त.। भोट- अनमन्त्र, (पु.) (अनाना मन्त्रः । एक मन्त्र । मायाम- पक्षी पिए. अहोलिका, (सी.) असलाअन् सम्प्रमारणे, मो- अगमई, (पु.) अ मरति, भा+म+गि अन् । क. (यह शब्द भरालिकावा अपभ्रंश प्रतीत हो ६.1 शरीर दबानेहारा सेवक । मुसोचापी परनेहारा । ताद.) भालिन बरना गरेमिलना. मोनो मलनेहारा (त्रि.) का मन्त्र - 1 अचर, चिराना अचेतान, (वि.) चित् शानच न•स• Fed संचा] (4.) अचक्र, (त्रि.) पहिये बिना व्यापाररहित. अचिन्त्य, (न०) चिन्ति-कमणि यन्-न• तास अचक्षुस्, (त्रि.) चलमि य० । मन्दनेत्र-अन्या. इयत्तया परिच्छेत्तुं चाशक्य परब्रह्म । वह वर अचण्डी, (खी. ) चडि कोरने यच्चीर न। वह विचार न होसके (त्रि.)। "अचिन्ताः सके गो निसय समाव शान्त हो । दिनकोष (नि.). इति स्मृती. अचनुर, (त्रि.) (अविद्यमानानि चबारे यस) निमके अचिर, (न.) यिर न० न.। थोडा सम्म) चार न हो।न त । न चतुर । जो चतुर ( चाला) काल रहनेहारा द्रव्यमात्र (नि.). नही. अचिरघुतिः, (सी.) अचिरा द्युतियस्याः ब« । = (न.)न चरति चली-वर अन् न त । टहरा- जिमी थमक थोडाकाल रहे (वि.). हुवा-पृथिवी-पर्वत आदि । “चराणामनिमयर". भचिप्णमा, (मी.) प्र+मा+अद्, अचरम, (नि.) न चरमः (अन्तिमः)। जो अन्तिम १० । विजली । योडाकाल रहनेहारी प्रमावाला । (भागिरी) न हो। मध्यन आदि. अचिरमस्ता, (त्री)यचिर प्र-मू-छ आ. । यो अचल, (पु.) न चलति-नन् भन् न त। परंन यक्ष (धमी ) जो जनी हो । गौ धादि. मोरनी कीलर, जो कपि नहीं । पृथिवी. अचिररोचिस्, (नी०) अचिरं रोचिर्यस्याः ब० अबलम्, (न.). योरी देर रहनेहारी प्रभावाला (त्रि.). अचलकन्यका. (मुला-दहिता-तनया सादि पार्य- अचिरान् , (अव्य.) अचिरं अनीति किए। शोर दशनमा हिमालयाती कन्या. अचिरामा, (घी) (अचिरप्रमानी नाई)। मानक अचलजा, (नि.) अचमन जातः ५ त पर्वतमे विडरी. अचिरांशु, (मी.) अचिरा अंशवोऽस्याः य. । अपनपिर. (3.) या शना प्रभालनेनापि मालि- जिमकी किरणें थोड़ी देर रहै (नि.). सनर कालिममा कोदन-जिगी अचिष्णु-, (त्रि.) Ved ( अच्-जाना इष्णु न MRP (वि.). सय स्थानपर जानेवाला । सर्वव्यापी. अपति(पु.) मन ? किरा पर्वतोंका अचेतन, (नि.) चिन्+विच्युच्-चेतना दरान (गिने पो पर काटे). धेतनाहीन चिन् न्यु न• त । बेगमश । हानी अशापतिः, (4) के ये अचेतस्, (नि.) चिन्+ यमुन्न• त. विचार पद (मरयां) चिन. सानिर(पु.) पोपमहिमाय. अचला,(2.)। भम्पन्नात. चेतनना रिना । अज्ञानी । मर्म । मुग्ध । अपनागतमी (4)अभिगमी. अचार, (नि.) दि बारम्यं यम पर। अपेट, (त्रि.) (नास्ति र यस) नि कसा शिविर न.त. (ज)न हो । जा। दोश, अवतन्य, (f.) घेतनम्य भार, अटिन.(.)(d) न माग चतन्याहिता नमून्य नहानभित्र ( अश्य (अन्य.), न..। गन्मुम गम अनित(Veta: टमा। (..)/ मच्छ (f.) UTET, । - मना दिया गया, अरहर, (I.)गि देशमें गना नही। मगर मदिन () (किन सम्प) में विचार | सायदा (वि.) पंदन पानापागको ये त्रामा भर नही । हान्दविना. मम (.) (afe) मामा (1.) माद, RAI, (I.) निमन मिया ल, वारा, निरालय का Folrm. मेरे तनाम ग मर..

चिर] मिरन, भूगका न होना. .. पछि (नि.) हिमप.। हिरव्य-दोषरहित । स्था मिला। (आ) विशुने उत्पमा परेन । । यह वैश्विरम जिसमें अनहानि न होवे । मसी प्रकारची निगा उन्म न हो (त्रि.) जगदशम गुणसार प्रपन. मछिद्रापधारण, (म.) अधिनया गारतयारधरण | अजकर्ण,(पु.) अगम बर्गत यस ..Mer- भवाभारि+त्युत् । किये गये वैदिकधर्मो रिशयमें यह कहना माल' नामी म जिगके पनंबररोगमारलारे कि यह कर्म माहीन न होरे होते है । मरिचरण -अपिउन, (नि.) (न छिद्क)। न कटाभा । निर• अगाय-गव, (आ) भरो रिपती तर गातार । निन्य । बेरोक, पारचनात्र, दा+अधिकरण क. पदर अरिएमपर्ण-पत्र, (पु.) (परिछानि सत्तानि पनि अजकाय, (अमी.) अको भी पत्रात यम्घ) एक पक्षका नाम जिगके पत्ते कमी नहीं जो रितु और प्रमाको रक्षारता (सिन ) मरते । शायोटक पक्ष । एक पक्षी. अजीर,(.) भारत का पत अन्ददिक अपि, (नि.) (दनं माही टन )। अजग, (पु.) मग यानी Rri जोपाटा नहीं जारात तारिणम अप्ठोटन, (न.) मृगया । अहेर । शिकार. अजगन्धा, (ही. ) Tracer. बैरवा पाय-समयमानी अप्योर, (नि.) सदन यम्य, उदरम्योदभावः । अजगनिया(4) - .. निर्मल जलपाला छोटा तालाब। भरने मामगे मिस सरोवर (म.) गादी में गिर है. तर म टपमiner अध्युत, (पु.) म. न. 1 रूपगामा मयुत , प्यते | अजगम्धिनी, (* . ) भास्य भएमाले ratr mer Ar Prime पापालगामान्ये पर काम निराहुभा-या विष्णु । निती रात्रि (nre) नियमो जो । पीपल. अध्युतजः (पु.) अच्युतार जापते। पं. न. 3 अजगर, (३.) or Cr fate karta... देवाओं की एकणी (जगात) जो विष्णुगे उत्पाद (AAR) मानते है. | अजहरा (*. ) भाग more महिमपि अप्युसम्पल (.) अप्युम पलम् । विष्णुकान बिशेष | पाप एक स्थान. अनन्य, (ta.)- (E).... कमरो अच्युतापज, (पु.) भरगुतस्य पण अ आग्ने, अजजा (Rt. Sarfree...1 भप्रान्तरलभदा. FATEHREE TRE. अनाज, (पु.) अागुनस्य भर गयो, xxi. नामदेरपर रधिमा पुत्र अजनीति, ( frientary, fire Rafrrermiar अप्युनामज, (पु.) आमनोहार जाने अवसर तमा अभ्या, (..)arm inmera mange अयुतापाप, (पु.) उपासनेत्र, rrent प.. INTEN (MR ENTERatl(. HIRIrrrrr... म स|"ave re" ..) मार। PRIMer मनि, (*....... अम् ..... (E" भर Prerrit.) २) (Rt.)। rra असम. (.... MAR Rem. Premierr1L मार...* अज, (पु.).......re ramanracter Prak..eem , [अजानत , (पु.) अच् भन्ने यम २०। जिस पदके | अजरा, (प्रो.) जाम, नतातामारी नामी र दने पर हो। मरन. जराश्य । पुडापेका न होना । बजरगम् ( अय्य.) प, (न.) दहिरहेनुनिनं अन्यदेन+मशीन्- अजय, (न.) न जीयति, जयन्, न त । मित्र हमने मनन करनहारा देवात भूनाल आदि | अजलोमन् , (पु.) अनम्य लोमेव लोम (मारी) उपमान (.) शूमिम्मीनाभी ष (जिसकी मा (पु.) मा जति निन्दा नम्, उम्मन् । जो बकरी रोमी नाई होती है). मन्नि न पा सकें। गराव किताब के पनद्वारा। अजयस्तिः, (पु.) अजम यमि पनिः यम पाति रमति,थाका शानदारा (त्रि.). परेकी वनिक गमन यमिमान्य एक ऋपिच न 7, (मा.) प्रयनेन अनि भगाया अयशोबारिता वा उसमे उपम हुआ एक समूह. अन् । गगन मत्रय नाम । जो याही भाग- अजयोथी, (गो.) अजेन प्रमगा निमिता वीथी पर गो बनेरनेमे निकटतारहता है। (हंगनामी त•। आमगमें पुलसी नाई यमनालानामगे प्रनिद । आत्मसमे मिट होरहा है). यारय (जहोंगे टेसर मारपरे स्थानक पितरं मार्ग). २-८, (पु. ) परम्प पारस पतोस । परर- अजही, (बी.) मत्रम्स मेरम गामिा पनं भर मकान मारनामी नक्षत्र नारा). 4. गालगानामी TV, जिगरे पल मेरे गीग रया, (i) धाति । कर इन मममे भांति होते. यः (पु.) परम्प का तारा असन, (न. ) न+मगर । नितर टूटने गिना । म एनेहारी मात्र. HINHIनगे मग । मार. अजम्याघां. (प्रो.)न र मापो यो, न+हा+शन (पु.) माप । .। भागे अकोन टोडसर दूारे भोजताने Prither (ो पर गो गोर हणा नाममा जगे "तो पात" यहाँ गुषको सोगिना गतगुणमाले सागा. IT.LT.) माती fer गहप्रा। सिमा अनसिक (T) न गात काय, या १५. निगा x नियत हो। शिष्यवायदे और पर.(पु.)am.fem.मर. रदं परंतु भाने को न छोडनंहागामा क्षिता होदा। यी और मानमे या नियमन धोध्या जिवण को यो नी जोर ल, (fr. ) मा पन्य (7.)। थुप्रमाणम्" मग (पु.)पर. भनागर, (पु.) m+fha+मन, नगगे या २. मीमगामी मगर (वन रानी (रम मायन, मी अ) (जगनीया मायाgi rat..( Prat धन्म "मरगा" नीन). errit) मनानी (2.) ननोमा Rो गण मन नपामा .. Here (f.) मसन RFIETH ..karta... (3.)17 yt गवण, न ...माश्री RAHamar ima-21.) r: पिया मा) - 21 free try' arer - FranzMer.

मनातधान, मिटरम्, अजातव्यजन, (नि.) न जानं म्यजनं ( पुरपस्थित ) यया अजि, (न.) भन्+किरन् । उटान नमसे प्रतिर। जिसपी हादी नहीं. चाता ये. अजातशत्रु, (.) जातम्य जन्तुमात्रस्य न शत्रुः, अगमर्थ. अजिरशोचिस्, (नि.) अजिर शोचि ( देनः ) सम्म । समाग । राजा पुधिष्ठिर । जिसका कोई शत्रु उपर नहीं चमकदार तेज (रोशनी) वाला. दुना । जातिशून्य । जन्मधन्य (नि.). अजिराधिराज, (पु.) Ved वेगवान राजा । यमराज. अजाति, (सी.) जन जिन् , न. १.। उपा न होना | अजिरीय, (वि.)(अजिर छईय) सांगनके राया। अजादनी, (प्रो.) अजरेवापते, भद् कर्मपि स्युन । एटने- चीत के साथ मिला हुआ. सेमी दुग देनेदारा नियटीनामी क्ष. अजिस, (त्रि.) हा+मन् न..। परत सापा, जो अजानि, (पु.) नालि जाया यस य. । जायाया निादेशः । बुटिल न हो खीरदित. अजित्लग, (पु.) अजिभं सरतं गच्छति गम्।। अज्ञानेय, (पु.) बजेपि विक्षेपेपि आनेयो यथास्थानं सीश आनेवाला (त्रि.) प्रारणीय मारोहो येन, अज्+अ+मा+नीलमणि यत् | अजित (पु.) जियन्महार । जिहा एगना या नागि ततः या पतसे शखों चोटें पाकरभी नटरता यम्य प. । मेंडकः । जीभमे विग (नि.) हुआ अपने सागीको पहुंचनेयोग्य स्थानपर पहुंचा | अजीकपम्, (न.) अज्या आरोग प्रमाण ती ऐसा पोग । उत्तम पोश. प्रीणाति, या-क। वीर भवार को अपनाया- अजापकम् (न-) अजादुग्धादिभ्यः जातम् । परीके परका धनुष पूष शादिमे उत्पम् । एक प्रकारका पी जो औषधिसे बना- अजीगत, (पु.) म गमनाय गर्नः भ । नि मा जाना और रासी अपवा दमा आदिम प्रयोग किया जानेके लिये छिद (गुगव)ग (गौर) म. वंशमें एक प्राह्मण नाम । जो एनपति. अजापालपा, (नि.) भवान् भापालयति । आ पा णिच् | अजीतिः, (सी.) जीयते। मसीनन । man ग्युल् । (उप. स.)। बकरियोंशे पालने का उनपर नभर होना. जीवित करनेहारा. अजीर्ण, (२०) जम्भावे स., ... अजामि, (नि.) न.. Ved जो संन्धी नहीं। धीमा रोगानेसे साये गये मम मदिन पर जो ठीक नहीं. प्रसारण रोग। R... पुरानो अजायिकम् ( (न.) (मजाय अपयश तेषां समाहारः (नि.)मागी इन्द्र) बकरिये और मे. अजीप, (नि.) औष+मारे पारीन । अजाभ्यम्, (न.) भगाय बाय ।। पारे मरा। मुरदा. और पोटे. अजीयन. (पि.)... पन सIfter अजि, (पु.) + ल् । वेग पम्हारा (दि.) पहिला शिगी कोई रोग नो। मम् (1.14 अजित, (नि.) न जितः (न.त.)। न जीता होना । यु । मन. | अजीयनि, (बी.)नरम +winxit अजिन, (.) लिपति सभाति, मदनानि । गणु-मांस बार नएस प्रार समा. अर्य, (वि.) म ल MI TARA अजिनपत्रा-wि (सी.) अधिनं भर्मेर शुद्धि हरेराम गरन् पत्रं पशो सम्पा. एमरिया रिट नमने अजेय, (नि.)-जिनीरियर प्रविध पक्षिभेद. अशापार-१, (पु.) मार Cen अजिनपाला, (बी.) मरिन (पनिया भर ) पोसrrectors र पलं सम्मः । लगे मममे प्रसर पर परमार्ग r re i (fectrrs. गया . अजिनमोनि, (मो.) निम्म पर. सि.असम. (4.) (माघent GIRधनत्र समारिष बेवकूफ औरत. - हुआ था). लिटाप् । छोटी चूड़ी। क्षुद्र मूपिका । मनात अनलिकारिका, (प्रो.) असलेः कारिका कर, ६.रिमालुवा रनावदी नाममप्रनिद्ध बाबर द्दारीता। म सताका समाव है कि उनमात्रनेमा भगोष,] [प्राशर अजोप, (नि.) न• तान जोपः (प्रीतिः) । जो अश्चिनम, (पी.) for tratrg प्रसन्न वा संतुष्ट नहीं हुआ. मुंह धी। बदमी गिरा भीतर. अज्जुका, (खी.) अर्जयति या सा, अजिमा रकारम्य | अझ (नन ) मिनट जान-माल कार पारि जलं । वेश्या कंचनी ( इसका नाटकहीमे प्रयोग होता है). गा वेट अनगिना अधीन् । शिमला | ar अश, (त्रि.) न जानाति, नहाक । ज्ञानशून्य-मूत्र ।। कारपितरि योग्यताम" जी माप.. योहा जाननेहारा. अजन, (न.) अपने नन कोमटवल । मुन्न। अशफा, (खार्थे कन्) (श्री.) अज्ञ एव । भूमं श्री। माने स्युरा मिलता जाना । मेयाना फरि स्युर। उतर दिवाली दमिनी।-नी। हनुमान अझात, (नि.)न.तान शतः । न जाना गया । न (श्री.)नि युन् । पनि मर टमगाने नि धामा किया गया. रक्ष्यगे इतर वर्षी जानेहग गदर,(*) "अन्यायधीशतन्याहतिणनेति" काव्यपरा. अशातकुलशील, (त्रि.) न. य। न ज्ञातं कुलशोलं यस्य । जिसका कुल वा स्वभाव न जाना गया हो. मअनकेशी, (नी.) भानं हज के यम कोर अशातचर्या-वासः, (नि.) अज्ञातः वामः यम्य । निगम मम्बार करनेदाग हटविलागिनी मम गंपाम्य । दिस रगान कंग काले हो जाय. निवास नहीं जाना गया । (जैसा की पाण्डवोंच ऐसा वाग अअनगालाका, (मी.) अपनाय टा। ...। कचलके लिये मिटाई। गुरमय, आशाति, (सी.) न शातिः न० त० । सम्बन्धी (रिश्वेदार) न होना. अझना, (खी.) अयंत अनया । अजन्तुरका । उत्तर दिशानी हपिनीय नम । हनुमानही मादायग्नो अडान, (न.) ज्ञानभाव ल्युदन. त। ज्ञानका विरोधी शान नाश हो जानेहारा अविद्या नामी वेदांतमें प्रसिद्ध अअनादिगिरि, (पु. ) अननं कृष्ण गिरेः । कदर मारतीकी माता. जगत्का कारण ज्ञान विरोधी पदार्थ । ज्ञानशून्य (त्रि.). समान काला पानीलगिरि. अशानिन्, (पु. ) न ज्ञात गिनि । जो हानी ( समझ- अचनाधिका, (लो. ) अनादधिका कृष्णचन् । दार)न हो । थन नाई नाममे प्रसिद्ध कीटनेद. अज्मन् , (स्री. ) अति गच्छति दानेन अनया, अन् अञ्जनाम्मः, (न.) अवनम्य अम्भः । ५. ता करणे मनिन् न वीभावः। जिसके दान करनेसे संगको पानी । नेत्रजल । बांसय पानी. जाता है । गौ । न । मार्ग । युद्ध । घर. अज्येष्ठ, (वि.) न ज्येष्टः । न त•। जो बहुत बडा वा अझनावती, (बी.) अपनं विधवेऽम्याः, अधिक वर्णनात् । अन्नन+मनुष व दोषश्च । ईशानकोनो हदि बहुत बच्दा न हो। बडे भाईके विना. अग्येप्टवृत्तिः, (पु.) नास्ति ज्येष्टवत् वृत्तिः व्यवहारः अञ्जनी, (ना.) अज्यते चन्दनकुमादिभिरमौ, अर कर्मगि ल्युट् डीए । केसर आदि मुगंध द्रव्यों डिपी यस्य । जिसन दताव बढे भाईकी भाति नहीं. अत्र, (नि.) अज् जाना-र । Ved तुरंत जानेहारा । अझलि, (पु.) यहि । हाय जोडना । उड़े हुए देखें खी। करणे न्युट् । कहवा वृक्ष । कालाननानी दर -अः (पु.) क्षेत्र । मंदान. हाय ।वुक । पावभरच माप. अञ्च, (पु.) भ्वा० टभ । भवति-ते, मानघ-चे, अश्चित अवलिकर्मन् , (न. अनटेः कर्म। प... यच्यात् न अभ्यात्, यक्त अधित । मुकना । इण्या हाय जोहना । सादर प्रणाम. करना। पद्य करना। जाना. अनलिका, (ना.) अप्रतिरिव कायति प्रकाशते ।। अशति, (पु.) अवस्यति । वायु-हवा. अञ्चल, (पु.) अयति भन्न अध+मच् । कोनका भाग। बागका नाम. कारका कोना । पत्रा. अश्चित, (नि.)अचम्म पूजा कियागया। आदर किया- तर्थनिर्देश बुल। हायोंका औरना। + गया । निकोटियागया "अधिनरायपदं" इति महि. अश्चितपत्र,(न.) अधिटानि वकीभतानि पत्रापि यस। पत्तोंडो शिमोडती जाती है मानों द्वाप नोट रखी है। । (.)। पदय मट.

मालपुर-रम्, अिपिमन्, । अअलिपुर-रम्, (भली.) पोल्ले हायोंस जोना । हये- अहसूल, (पु.) आंभ शुलं विक्रेयं यस्य । पहु. 1 अम हीचा पोहा राना. पेवनेहारा. अअस्, (न.) अमरान् । वेग । शक्ति सरल । सीधा अहस्थली. (स्त्री.) आप्रधाना स्थली। शाक. त। अअसा, (भप.) सम्भाचे अन् । म पनि विलम्ब बहुत प्रासाद( महल वाला नगर-आ. याम्पसी सो+किए। सीमजरी। ठीकठी. अहहास, (पु.) भोन अतिशयेन हासः । हस+धम् ३ ताबी हंसी। जोरसे हराना. असारत, (वि.) तृ• अनुस् । ठीक किया गया । न्यायपूर्वक पिया सा. अहदासफ, (पु.) माहास व पायते, कैक। जोरसै अअसीन, (नि.) अजम् रा| Ved सीधा आगे हसनेके रामय दात याहिर निकलनेसे बढे सफेद (श्वेत) होते है। दांतोंके समान वेत कुंदन. पटा जना. अहालक, (पु.) 2 इस प्रासादोपरि हमिव सलति अजिः, (वि.) अनन्। Yed चमकदार । रोशन । पर्याप्तो भाति अल्मधुन् । महलके ऊपर ईटोआदिमे -जि.पु. चन्दन आदिप हि तिलक मालिका. बना घर । बरसाती । मुगात. असिष्ठः-गु, (पु.) सनक्ति पकिरणः विश्वम् । अत्र | अट्टालिका, (स्त्री.) भालासा क । ईट चूने आदिसे स्ट-इशुन् । अरनी किरणों से जगत्को प्रकाशित की है। थना राजाय घर। महत। ऊंचा मंदिर। एक नगरका नाम. सूर्य । सूरज. अट्टालिफाफार, (पु.) मालिकां करोति । उप. अटू, जाना भ्वादि सर पर. सेट् । अटीभाटी, त. अटारी या महल बनाता है ।राज ईटें रखता है. अटनि-नी, (सी.) अति मोपी, अद+भनि वा दी । अठ, जाना । भ्वादि, पर• सक० सेट् । अउति । भाठीत धनुषके भागे चिल्ला चढाने स्थान । कमानपर चिल्ला [ अठ, जाना । आम० भ्वा० सक० सेट् । अप्ठते. बांधनेकी जगह । धनुष्कोटि. अइ, उचम करना। भ्या-पर-सक सेद । अडति । आसीत. अटरूप, (पु.) अटति प्रमति, भट्मन्, तं रोपति हिन- अ, प्याप्ति फैटाना। खादि. पर• सम• सेद (इसका सि एपक, अद्विा न रयते न+पक । पासास. प्रयोग वेदहीमें होता है) महणोति । आदीत् अटल, (नि.) न० त•। स्थिर (पा)। निथल । अझ, अभियोग ( हमला करना) समाधान (पारित पर- न टलनेहारा । टिन । सस्त. ना) अनुमान करना । भ्वादि पर राक सेद । भा. अदाधि-वी, (खी.) भटन्ति चरमे वयनि यत्र, भद+ ति । आहीत. भवि, वा रोपि दीर्घता । पिछनी अवस्था में जहां धूमते | अड्चलः, (पु.) • त । हलवा एक भाग, है । पम । जाल । सिकार के लिये जो घूमे. अण्, सन्द करना । सासलेना । भ्वा.प.म.सेद । गण- डिभाणीन्. अटपिकः, (वि.) भटा चरति । जंगलमें फिरने (धूम- ने) वाला. अण, जीना । दिवादि-आत्म• भक० सेट् भिपते । आपिड. अटा, (खी.) अट्या मह । पर उभर फिरनेका ख. अण, (न) क (त्रि.) अति यथेच्छं नदति । अण+ भाव (जैसा सन्यासी)। "म्या" "अटाया" इसी अन्, ततः कुन्सायो क । मीच । विदित । बहुत छोटा अर्थमें होते है. (क) पशिविशेष. अणव्य, (पि.) भण, उन् । अणोः सूक्ष्मयस्सस्स भान अटाटया, (सी.) अदम्य भावेष खातात टा।घूमना । क्षेत्र । डोटी खेती सेत (जिरा रोतमें डोरा अनाज पथा गमन । (इसी अर्थमें अटा और अन्य भी है) पैदा हो)। अणु यत् । सर्पप (सरसों) आदिको उपति- अह, लोचना मारना।भ्वादिभात्म.सक-सेट। भाते।भाष्टि अह, अनादर परना भुगदि-उभ-सक-सैद । श्रायति-ते मा. अणि, (पु. सी.) अणति शमारते । भण्मन् । भारा- मामी रथके यो मागे रहनेहारा कीटक (रपके पहिये. अह.(पु.) आयति अनादियदेऽन्यद् एष। भा+पम् । मामील)। गांकी नोक । बाम (इपितरकी नोक)। महलके कारका पर (अटारी) हा (दुरान ) सूबा सीमा (a) भनाज अतिशय ( ज्यादती )नुस (नाचीज) मारना | अषिमन्, (पु.) भगोविः । अहमनिन् । छटापन । अनादर पसीलके ऊपर सेनाका पर (वहां स्थित होकर छोरामार। माउ रिसॉनसें एक लिमि। जिससे गोप नर औरोंकी नीचे होने पर पर्वाह नहीं करते) छोटीसी मन बन सब मानमें गामके। “अनिमा मपिमा अदृधन्धः, (पु.) प.त. राजनिरिके काममे किसी प्राप्तिः प्राय महिमा तपा। इपिप बरिर मानकी नीहभरनेवाला. तथा कामावमारिता". बाला सेत. - न अणीयस् , सिनसतना - बहुत छोटा. अणीयस् , (नि०) अणु+ईयस् । बहुत छोटा । बहुत थोडा। अत, पोधना । इदित् । भ्वादि. पर सक० सेट् । अन्नति , "अणोरणीयान् महतो महीयान्" इति श्रुतिः. आन्तीत्, अशु, (त्रि०) अण+उन् । छोटा । थोडे मापवाला द्रव्य । अत, बांधना । भ्यादि० पर० गा. मेद । अतति । आनीत, (स्त्रियां ) अण्वी । छोटे १ धान, चीना, कानी, स्यामा अत, पहुंचाना, निरन्तर चलना । भ्यादि० पर० सक• सैद । आदि. अतति । आतीन् । कम अतितः. अणुक, (वि.) (साथै कन् ) बहुत छोटा । बहुत थोडा. अतएव, (अव्य. ) अतः कारणात् । इसलिये. अणुभा, (स्त्री.) अण्वी सूक्ष्मा भा दीप्तिर्यस्याः २०।। अतकः, (पु.) अतति सततं गच्छति । अत् कन् । निरं- विजली-विजुरी. सर चलता है । निरंतर ( लगातार) फिरनेवाला पथिक । अणुमात्रिक, (त्रि.)अणु परिमाणं यस्य प० । अतिक्षुद्र । मुसाफिर. अतजश, (त्रि.) म तत् जानाति । नहीं उस (मन) को जानता है। परमात्माको न जाननेहारा. अणुरेणु, (पु.) धूलिकना । प्रसरेणु । जर्रह. भणुरेवती, (स्त्री.) अणुः सूक्ष्मा रेवती तारेव । रेवती अतट, (पु० ) तथ्यते आहन्यतेऽम्भसा इति तटं जलाघात- स्थानं तान्ति यस्य ब०। जिसका किनारा न हो। मक्षनकी भांति सूक्ष्म ( महीन)। एक वृक्ष ( दन्ती ) का आडरी नामसे प्रमिद्ध आश्रयस्थानसे शून्य । पर्वतआदि भाम. ऊंचा स्थान । पृथिवीका नीचला भाग, अणुवादः, (पु.) प० त० । परमाणुवाद ! ( संपूर्ण | अतथा, (अन्य ) वैसा नहीं. श्य परमाणुओंसे बनता है और परमाणु नित्य है). भणुवीक्षणम्, (न. ) ५० त० । बहुत दूतक देश. अतथ्य, (त्रि.) न तया भवति । मिथ्या । झूठ. अतदह, (अव्य. ) जो यथार्थ रीतिसे न । अन्यायसे। मा या विचरना । अणुः सूक्ष्मः वीक्ष्यते अनेन करणे युद् अयोग्य रीतिसे. जिसे सूक्ष्म वस्तु देख पडती है । दुरवीन, अतहुण, (पु.) अस्त गुण• न० त०। जो दूसरेसे अण्ड, (न.) अणन्ति सम्प्रयोगं यान्ति अनेन । अम्+ न उठाया जाय। एक प्रकारका पचन जिसमें दूसरेका है । पताळ (पेशी)। कस्तूरी । पक्षीका अण्डा । वीर्य. गुणग्रहण न कियाजाय. अण्डकम्, (न.) अल्पार्थे फन् । छोटा अण्डा. | अतहुणसंविज्ञान, (पु.) जिसमें किसी का गुण न अण्डफटाहा-हम्, (अनी.) अण्डं ब्रह्माण्ड कटाह इव । समझा जाय । जैसे "दृष्टसमुदं आनय" "जिसने रामद प्रमाण्ड (जगन्) भानो कटाह ( कडाहे ) की भांति. देखा हो उसे ला" इस वाक्यमें गुणीभूत समुद्रका लाने अण्डकोटरपुप्पी, (स्त्री.) अण्टं इव कोटरे मध्ये पुष्पं अन्वय नहीं (एक प्रकारका समास)। "लम्बे कानवालेको यम्याः । बहु.। जिसके कोटर (सोद-स) में अण्डेके ला" इस वाक्यमें गुणीभूत कानका लानेमें अन्वय है, समान फूल हो। एक प्रकारका वृक्ष । अजांत्री. इस लिये इसे "तनुणसविज्ञान" समास कहते है. अण्डकोश-य-पकः, (पु.) प.त.। अण्ठस्य कोशः । अतनम्, (न.) अतू-त्युत् । जाना फिरना।-न: (पु.)। अण्डेका मध्य । कृष्णा पता. सदा फिरता रहता है. अण्डज, (पु.) भण्डात् डिम्बात् जायते । जन् । अतन्त्र, (त्रि.)न. ०। यह बाजा की जिसकी तांत अण्डेसे निकला पसी, सपा मच्छी। कांकलारा नामसे म हो । जो आधीन न हो। जो नियमके भाधीन न हो प्रगिरकृवालाग (किरला) जो कोई अण्डेसे निकला "हखग्रहणमतश्रम्". हो (नि.)। कम्ती (बी.). अतन्द्र, (त्रि.)नन्दा यस्य । कामकरनेवाला चालाक. अण्डयधनम्, (न.) प.त.। भण्डेरा पहना । पना- अतन्द्रित, (नि.) न तन्दा जाता भस । निरलरा । उचमी । दिम्मती. अण्डाकार माति, (त्रि.)। भय भागार । अतप, (त्रि.) न तारयति । न..। जो सपा हुआ भारी बानि (सरल) बाला । बहु.. म हो। शीतल सा रातोपाः (पाय.)। भण्डालु, (5.) । मन्य सहली, पानमतककी एक देवताओंका नाम. अहीर, (बु.) अगरः पुमनामे: अस्य शरतीति । अतपरम, (पु.)न..। धर्मगम्मन्धी याग पिम्म. भान् । पुरा । ममर्थ । शधित. रण (भल) करनेदारा। "संते नासपरताय" (भ.पी.). अपन, (. असनमाम | अतमतनु, (त्रि.) जिगक शरीरमर ER मुसाका शिश मियरस. न हो । तर रहित हरीरामा.

स्तपा,1 (१७) [पहि, कामवो भूल गया - मतमस्, (पि.) म तमः यत्र व.। दीप्तिविशिष्ट अतिसार, (पु.) अविरिपनि काम ..। चमकदार. कुरजका. प्रतयण, (वि.)न तरण न.स.पुरातन । पुराना था. अनिकम, (पु.) अविस्मरन् उमः । । अतः, (नि.) न... नामितः यस्मिन् । तर्क अतिक्रान्त कम प्रादिग.नियमको परनामने (दलाल)के पिना । त्रिगमे गोई युक्ति नहीं की नव्यको मुटवाना (त्रि.) आगजी (पु.)तान होना। थुरा म्याय. अनिमान्न, (त्रि. ) अति | सोने प्रतर्षित, (नि.) मात.। न गोया गया। अम्मान दोगया । अनानकपुआ. अतिगुन, (नि.) मन++IVE अतर्फिनम्, कि.पि.। न विचारे गयेकी भारी । जंगा कि शोधमें भगया । मनमाय मान? न सोचा हो. अतिर, (वि.) मन रिदय ( बेगम )- (1.) अतोपगत-उपनन, (नि.) अयानक आप न होगया। एक (मन्त्र ) मन्त्री गग गया सम्मावा. अतपर्य, (नि.) म तयतुं योग्य । न तया। जो | अमिक्षिम, (f.) परे पंगा विरार (सयाल) दाटील में नहीं आगना. अनिग्यद (नि.) भनि नाम | mitra जिगमी. अतल, (न.)भम्य भूगरमा तलम् । गत पातलोमें अनिग, (पि.मि ime पहिला पाताल । तर अन्य (त्रि.). अनलरपर्श, (पि.) मतलम्प अधोभागम्य रों यत्र (पर गमग प्रय ) . जिगरानीयला भाग सुभाम जाय । मबार । अतिगम, भ्या..यom गंगीर. अतिगण (Trfantrian Ram अलग, (भप. ) रसीलिये । सगे परे । यहाँसे । इस अतिग. (5.) Wore vण . .mm योगामामारीgattri कारणमे अपत्य । जसर. पक्षure (दि.) अनम, (पु.)भागनी भागम् । परन । माया । बत । भलीका पना पपा (.), | अनिगरधाg. (3• ) SET अतिगप (1) term reparin अतरिमः, (पु.) Val (मानिन्) । पूगनेवाला होगा। पूर्व In पम्पासी. अतमी-लि (बी.) विशेष । सन. अनि, (प.) या सपना । सपर अतिगमगार, (fr. in अनिक( निमित पाम् । मानेोग्य अतिगुण, (t.) ! ( Free fari() • • nine बरिराषः । मरधर्म सतिगुरु, (नि.) ( (:.:- असिकपा (सी) पम् । तसर बदाय, atी गई या (i) प्रमोन (मा.अनियो(rri in असिषदक, (I.SARke . प. अतिमद (f.) wins का अनिकरण, (.)ft. ITER (fe) मनोरम र शति (नि.) म्। र, अति (f.) (Twink महरा (2) (पु.) re sar अतिताप, (नि.) भयुर' भी Rirman अमित, 5. ahir अविर, ()r..ममा (wordrearrher (h ..... imes अनितम्. (ew.forer. Free {theran. अगिया (3.)TrertREE. - نیست ایده مستشتا ن ت ، لذا لا ههه الندائه شده دوره 12 ولت من حس تينغ لين " هست ؟ 1 ليتا لب تشنم ندا مع هېدم ال. ماء ياء هذا المنه، همون اپ ۲۰ ۱۲:۲۰ ۱ ۲ 3:31 ,2 ,3 :: شب جم و ششم و لندن. از عسيط } مه لباش مهد من ( . ) بل منظمة الد' تا هر حسيند د ت 1.4 لندن، (۰) بني هان! لا ، لا هنلا : دعم { اند ( مللملحمة ) للارجله منيحه شد در نيمه :. محتشد هذه السن نية 1 * ( ۴۰ ) ۱ * ۳ (r) .۳۳ ۰۲۱ ۹۲۹ ریه 1 ۶۴۹ : 1 fare: ۱۳ جم ( 30) ,* .مشيت شي ، لهم ۴۲ ۴۳ ۴ ۲۰۱ frat Mirza . ۲۹۰ و ۳۳۱ ۰۲۱ ۲۶ و پر جو ۱۲ م) م م : ۳۶ r nr 17۴۹ *۱۹۹۲ ۴n, 1 و + .هو : ( ۹۰ ) .mr | هم همه f ۳۰۹ (۰) ۴۹ ۳۲*۱۰ A ۱۲: ۳. 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ART अलीया बनाकपा (म.) अतमिः, (I.) Tad (अत्-अनिघू ) । घूमनेवाला अतिगप, (दि. ) अति नरम पर लार होगया । म गूर्ण । पूरा मामय । शेयर न्यासी. नौ महीगचा. अतमी-सि, (वी) विशेष । रान. अतिगहननादर, (वि.) गा. अति, (प.) हुन प्रसंगा। लापना । ऊपर, अतिषय, (नि.) पतिकान्त पाम् । नमानेयोग्य अतिगुण, (वि.) ( 7 ) पुर। निगुंग । (पूर्ण किर) • • I my नविषारापरनेगयकामधर्म अतिगुष, (त्रि.)नभरी ... (5.) अतिफगा, (सी.) अधिकार प्रयाम् । गुन पहावर भदरणीय मति,r"fo""-". परी गई रथा (कहानी) । निष्प्रयोजन (देमातरम . अतिगो, (को) मा ! . अतिकदवा, (पु.) रिका कन्दः यम्य .लि. अतिमह (वि.) भरिकन्न परम् । रोग (मस) में नहीं अगर । एना सारा अतिकरण (म.)fr. R. परंस पन (कोसिस) Fi पिस , मा. अतिषश, (.) अबिन्त सम् । पपुगो पण अतिप्राय, (.) र (G) रेयर माननेरा (भोग. (3.) र बरे रंग SEE अतिवाप, (पि.) भयुपरः परसम्म । भग रदान () विशेष गर(Ter. अनिय. (पु.)"नामा। असिस, (नि.). पनपाए Trm. (मन परम्)ना (मrt) अतिम (HR) नारद tp. पनि समाप्त होने गतव, बिन्दर. शतिरनम्, (म.)रमेहर पिशा. अभिधम् (th.)। अतिरस, (पु.) एनसमर सिं

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पतिशी (n) [अनिमान, बीत जाना. . -1 पोजमेंसे गुजरा हुआ. अतिधृति, (बी.) भतिकान्ता प्रति स्टादशाक्षरपादिकां अतिममत्तिः, (स्त्री.) अति++राज+क्तिन् । अत्यन्त पति प्रा. स.। समीर अक्षरों के प्रत्येकपादवाला एकः क्षाराति । किसी काममें बहुत लगजाना । प्रसंगको छन्द । जिसका धर्म का सतोप जाता रहा हो (•ि ). छोड़ निगका सम्बन्ध दूसरे के साथ रहे । लक्ष्यमें जो अतिनिद्रा, (बी.) हुत मीद।- (पु.) बहुत लक्षणवा सम्बन्ध होताई उसे प्रमग कहतेहैं जो इसके सोनेवाला । नौदरहिन ।-द्रम् ( अव्य.)। नीदका समय विपरीत हो यह अतिप्रसंग है । प्रसगको घोष देनेहारा (नि.) अतिनु-नी, (वि.) भतियान्तो नावं नाहीचे अतिप्रीदा, (सी. ) विवाहके योग्य अवस्थावाली कन्या । हस्तः । डीसे उतरा हुआ। शि स्त्रियां च प्रतिनीः उमरमें बढ़ी हुई लड़की. अतिपञ्चा, (Rt.) वर्ष अतिश्यन्ना। पांच वर्षको अतियल, (नि.) अतिशचितं बलं यस्य यः । मदे यल- वासा । भतिशपिनं यल मस्या ५०।यो बलको उत्पन्न सांप गई। पांच वर्षकी कन्या. परनेहारी पीले रंगकी बेडियाला नामी बेल (लना)। अतिप, भ्या. ५. लांघनाना । भूलजाना. यह अनविद्या जो विश्वामित्रने कृशाश मुनिमे सीसी अतिपतन, (न.) अति पदमत्युर । अत्यय-नाश-परवारी. और रामचन्द्रजीको समर्पण की (स्त्री.) बा बल । यही अतिपत्ति, (बी.) अति+पदक्तिन् । न सिर होना । सेना । यदी शफि. अतियालक, (नि.) अतिशयित बालकः। मा..। अतिपत्र, (नि.) अतिपय मला. स. । अतिरिक बहुत यालक । पचवनवाला । -क (पु.) यया. पृहत् पत्रं यस्य वाय. पोले सोधगया।पटे २ पत्तोंवाला अतियाला, (स्त्री.) अतिकान्ता पास्यावस्थाम्। भाल्या. हानिकंद वा. वस्थाको साघ गई। दोवर्षकी गी. अतिपथिन्, (पु.)अतिशयित सुन्दरः पन्याः प्रा. स. अतिनलचर्य, (न. ) अतिशयितं ब्रह्मचर्यम् । बहुत देर. अते. पूजार्थत्वात् न समायान्तः । अच्छा रास्ता । समय तक ब्रह्मचारी रहना ।-यः । ( अतिक्रान्त. ब्रह्मचर्यम् )। अतिपर, (नि.) अतिक्रान्तः परान् । शत्रुओंपर विजय जिसने बीसंग करके ब्रह्मचर्य तोड दाता हो. प्राप्त करनेदारा।- (पु.)। दाना दुश्मन. अतिम(मा)रः, (पु.) अतिशयितः भरः या भारः। अतिपरिचय, (पु.) बहुत परिचय ( वा कफीयत), प्रा.स.। बड़ा भार ( पडा बोसा). अतिपरोक्ष, (त्रि.) अतिकान्तः परोसे ( भव्य)। अतिभवः, (पु. ) अतिशयेन भवति प्रा. ए• । लांघ- नेत्रीसे बहुत दूर । बहुत छिपा नेवाला । जीतनेहारा. हुआ. अतिपातक, (न• ) यतिकान्तोऽयन्तदुष्टम्पेनान्यत् पातकं | अतिभीः, (पी.) भनि विभेति अम्या दर्शनात् । मी पिए। प्रा•• यहा पातक (बडा पार ) जमे पुररोंका माता- जिसके देरानेमे बहुत सरना है। बिजली. नं (बहु) भोर कन्याके साथ गमन करमेने उपजा एवं अतिभूमि, (बी. ) अतिशयिता भूमिर्मयांदा प्रा.स.। लियोंका पुत्र, पिता, और श्वशुर (सौरा) के साथ संभो. की मर्यादा अधिकाई। भनिममेऽव्ययीभाव. मा. ग करनेसे उत्पन्न हुधा पातक विशेष कहलाता है। पाप- दाका तोरना। मर्यादाको तोड़नेवाला । पृथिवीपनेहा- को सांघनेदारा पुण्यशील पुरुषादि (त्रि.). रा(त्रि.) अतिमहल्य, (पु.) अतिमहलाय हितं, अतिमाल यत् । अतिपातिन् , (नि.) भति-पत्-गिन्-णिनि । शीघ्र भागने- विस्वादा। बहुत मंगलमे पूर्ण । बाहुन भको उत्पन्न हारा । जानेवाला. परनेहारा (नि.). अतिमगे, (अन्य ) अति प्रमीयवेऽस्मिन् काले, गंके। अतिमतिः, (दी.) मान. अतिशरिता मतिः (मानम्)। बहुतही रावेरका समय. बड़ा महंकार । औरत. अतिभवन्ध, (पु.) भटिशक्तिः प्रवन्धः । लगातार. अतिमय-मानुर, (त्रि.) भतिकान्तो मलं मनु । अतिमद्ध, (त्रि.) भतिशयेन प्रादः। प्रा. म.। मनुष्यो सांप गया। देवीरासियाठा. जीता हुभा। बहुत बह गया। बहुत बड़ा हुआ. मतिमर्याद, (त्रि.) अतिवान्तो मयांशम् । उचित निय- अतिप्रश्न, (पु.) भति+यान । भनिनन्य मर्यादा मको पनेहारानि होइनाग. प्रभ। इस प्रकारका प्रश कियेजाना कि जिसका अतिमात्र, (वि.) अविकान्तो मात्रा -.. उत्तर मिलनुश हो।दूसरेको विगने (निशाने) के लिये बहुन थोरेको लापनदारा (अतिकम करनेत्रा) प्रश्न करना । जैसा बृहदारण्यकोपनिषदमें बालाकी प्रासपने अनिमान, (नि.)मान मतिमतः । परमाने दर योगिराद माझवल्ययजीको किया है। उत्तरन होनेवाली प्रभ. होगया । जो मारामा . न भनिचर,] (१८) पिनर अतिचर, भ्वा०प० । अतिक्रम करना । पुम परना। अतिनीया, (गो.) अनिगरोन सीना पाटी दूर अपराध करना. प्रा. ग. 1 tanी (गोटर) गं (कुमा) अतिचरा, (श्री. ) अतिक्रम्य चरति अति+र+थन् । देजगुणवाला (नि.), पद्मचारी वृक्ष ( यह उत्तरदेशर्म होता है)। हगीका दगग अति, भा. प. सापना । गुजरना । मानना. नाम पद्माभ भी है। कईयोने इसीको स्थलपग्रिनी, अनितृष्णा, (श्री. ) यहुन तृष्णा (ग ) । यति पमिनी और पद्मचारिणीलना नाम निर्दिष्ट किया है। वा०प० हांपना 1 गुजाना । वह जाना. घहुन बदलनेवाली. अतियि, (पु.) शनि गति न निति, अन् हथिन् अतिचार, (पु.) अतिशयेन चारः, अतिक्रम्य या चारः । मार्गमें चलता २ घरमै आगया मुमारि । "कग: अति+च+पम् । यहुत चलनेहारा । बहुन चलना । ज्योतिषशास्त्रमें प्रसिद्ध माल आदि पांच प्रहांका पूर्य के निवगनियित्रांनाः स्मृतः। अनियहि स्थिती यम्मा सम्मादनियिरुच्यते" मनुः । कुरा और मुदती के पुत्र विशेष मंबन्धमे तेजको न सहन करने के कारण टेदी और शीघ्र आदि गतिसे अपने भोगने योग्य गमयको नाम । रामचन्द्रजीरा पोता. सोधकर और और राशिमि जाना. अतिथिदेव, (नि.) अतिथि. देर इव पायो यस्य । यति अतिचारिन् , (पु.) अति+च+णिन् । अपने गमयको यिको इयरयुद्धिो पूजनेद्दारा :-: (पु.) गबमे पर भोगेविन दूसरी राशीमें जानेहारे मंगलादि पांच प्रह देवता शिवजी. लांघकर जानेहारा । बहुन जानेहारा (त्रि.). अतिथिसपर्या, (धी.) अतिथीना गपयां पूजनम् अतिचिरम्, (क्रि. वि.) बहुत देर ( दिलम्ब ). सपरपानुः कण्वादिः यर ततो भर् । गृहस्थ प्रतिदिन अतिच्छत्र, (पु.) अतिक्रान्तः एवं प्रादि स. । छातिया करनेयोग्य पांच यज्ञमि मनुष्ययनविषयक अतिथिजन नामसे प्रसिद्ध एक तृणविशेष (जो घलपर होना है)। आदि। (इसी अर्थमें अतिथिपूजा मी). तालमखाना नामसे प्रसिद्ध एक तृणमेद जो जलमें रहता अतिदग्ध, (त्रि. ) पुरी तरहसे उठ गया. है । मुलफा नामी एक प्रकारका शक जिसके पत्र और | अतिदानम् , (न.) यहुन देना । उदारता : फिआनी. फूल छातेकी शकलके होते हैं । क्षीरम्यामीके मतमें "छत्रा" अतिदिय, तु. ५. । जतलाना । यदलना. इतनाही नाम है । छातेको लांघनेहारा (त्रि०). | अतिदिष्ट, (त्रि.) अति+दिएकल । और धर्मका और अतिच्छन्द:-दम्, (त्रि.) अतिक्रान्तं छन्दः छन्दं वा । आरोप करना । उसे "प्रकृतिके समान विकृति करनी सांमारिक इच्छाओंसे रहित । वैदिक आचारको तोडनेहारा. चाहिये" इस पाक्यसे प्रकृतिम्बर अमावस्यायाम्पदिरे अतिजगती-ति, (खी.) अतिक्रान्ता जगती प्रयोदशा- अकार्य प्रयाज आदि विकृतिस्वरूप पवादियागमें अति- क्षरपादारसिं प्रा. रा.। एक छन्द जिसके प्रत्येक पादमें दिष्ट (आरोपित ) कियेगये हैं। "इतरधर्मम्य इतरम्मिन १३ अक्षर होते हैं । जगनको लांघनेहारा (त्रि.). प्रयोगाय थादेश आदेशो नाम" इति मीमामा। यह अतिजन, (नि.) अतिक्रान्तो जनम् । वह देश कि जहा अनिदेश ५ प्रकारका है, शान, कार्य, निमित्त, म्याग, कोई मनुष्य नहीं । निजन. और रूप। करणव्युत्पत्त्या मीमांसाधानका उपदेशवास्प । अतिजय, (नि.)भनिमितो जवो यस्य व० । यटे पैग- शनिदेश व वत् आदिशब्दोंसे पहिचाना आता है. वाटा । जल्दी चलनहारा. | अतिदीप्य, (पु.) अनिशयेन दीप्यते अतिदीप कति अतिजागः (पु.) मतिरायिनो जागरो निद्वाराहित्यं यस्य यत् । रकचित्रका लालचित्ता नामी वृक्ष, वनालयकपी । ( यह सदा जागताही रहता है ) अतिदूर, (त्रि.) बहुत दूर:-रे,-रान, रेण । (प्रायः जिसको नौद नहीं (पि.). अतिजान, (त्रि.) अतिकन्नो जानं जानि जनकं था। इसके पहिले “न” रहना है)। पटी साप । यहति जो अपनी जाति का पितागे मी सरसन्त भेट हों. दूर नहीं । "तपोवनम्य नातिदूरेण". अतिडीन,(न.) अनिकान्त दीनं पक्षिनिमेदं प्रा. रा.। अतिदेश, (पु.) अति+दिन+घम् । व्याख्यानरूपा । पक्षियों बहुत या जाना. अन्यधर्मको दूपरेमें टगाकर दिमादेना. अनितम् , (अन्य ) अति+र+ततः यामु । बद्भुतही | अतिदय, (नि.) द्वयं अतिमान्तः, नासि द्वयं यस्य या । दोनोंको पि गया अथवा जिसके पास दोनों नहीं। 2. अमितीपत(नि.) भनिरायन भीगः करसो यम्य मारदिन । अनुरम. 4. परिव पनि । मिरा । समग नाम प्रगिर | अतिपयन् , (पु.) अतिरिक्तं धनुर्यस्य यः पनुमोना। सोमशन (पु.). अच्छे भनुपवारसा योधा । मरभूमियो धनद्वारा (नि.) 1 (९) मितिमान, दीत जाना. ॥ फौजमेरो गुजरा हुआ. अतिधृति, (की.) अनिकान्ता पनि पारपारिस अतिमसत्ति, (सी.) अति+प्र+राज+फिन् । अत्यन्त पति श ..। उमीग मारे गयेकपारवाला एक भागरिक । सिमी काममे बहुत लगनाना । प्रसंगको एन्द । जिसमा बा ईनोप जाता रहा हो (नि.). छोर जिगरी सम्बन्ध दूसरेके गाध रहे । लक्ष्यमें जो अतिनिद्रा, (-) पुत नीद ।- (पु.) बहुत सभणना सम्बन्ध होताद उसे प्रसंग कहते हैं जो इसके विपरीत हो यह अतिप्रसंग है। प्रसगको छोड़ सोनेवाला । नौदरहित ।-द्रम् (मन्या)। नदिका समय देनेहारा (त्रि.) अतिनु-नी, (नि.) पतियन्तो नाव प्रा. राही अतिप्रौदा, (स्त्री. ) विवाह के योग्य अवस्थावाली कन्या । इसीसे उतरा हुभा । शिविर मतिनी. उमरमें बसी हुई लडकी. अतिपञ्चा, (Rt.) पशवर्ष यतियन्ता । पाँच वर्षको अतियल, (नि.) अतिशयितं बलं यस्य यः । पड़े पल- यासा । भतिशचितं बलं यस्या. ५.। बड़े पलको उत्पन्न पपई। पांच वर्षकी न्या. करनेहारी पीले रंगकी पेरियाला नामी वेल (लता)। अतिपत्, भ्या. प. सोपाना । मूलजाना. यह अनविद्या को विभानिनने कृशाध सुनिसे सीसी मतिपतन, (न.)मति+पर+त्यु । मलय-नाश-परवाती. और रामचन्द्रजीको समर्पण की (स्त्री०) महा बल । बड़ी अतिपत्ति, (सी.) भति+पद+किन् । न सिर होना। सेनामी शजि. अतियालक, (नि.) अनिशमित बालकः । प्रा. स. । अतिपत्र, (त्रि.)अति+पत्र अला. स. अतिरिक्त बहुत पालक । पचवनवाला । -क. (पु.) यचा. पृह पत्र यस वापसने पायाापरे १ पत्तोबाला अतियाला, (बी.) अतिवान्ता बाल्यावस्थाम् । बास्या- हामिद . वस्थाको लांच गई। दोवर्षकी गो. अतिपथिन्, (पु.) मतिरादिनः मुन्दरः पन्याः प्रा. स. अतिप्राह्मचर्य, (न) अतिशयितं ब्रह्मचर्यम् । बहुत देर- बः पूजार्थत्वात् न समासान्तः । भच्या राना। सपथ तक ब्रह्मचारी रहना ।-य. । ( अतिकान्तः प्रह्मचर्यम् )। अतिपर, (त्रि.) अतिमन्तः परान् । शत्रुओंपर विजय जिमने घीसंग करके ब्रह्मचर्य तोड डाला हो. प्राप्त करनेहारा ।- (पु.)। दाना दुश्मन. अतिभ(भा)रः, (पु.) अतिशयितः भर. वा भारः । अतिपरिचय, (पु.) बहुत परिचय (वा कपीयत), प्रा.स. बिदा भार (पहा बोहरा). अतिपरोक्ष, (त्रि.) भनिकान्त. परोक्षं (य)। अतिभयः, (पु. ) अतिशयेन भवति प्रा. स. । लाप- नेत्रोंसे बहुत दूर । बहुत छिपा हुआ. नेवाला जीतनेहारा. अतिपातक, (न. ) अनिकान्तोऽत्यन्तदृष्ट्वेनान्यत् पातक अतिभीः, (त्री.) अति विभेति अन्या दर्शनात् । भी किए । मा..। यहा पातक (बड़ा पार ) जमे पुरोका माता- जिसके देसनेसे बहुत डरता है। बिजली, नं (बहु) भोर कम्याके साथ गमन करनेसे उपजा एवं अतिभूमि, (नी. ) अतिशयिता भूमिर्मयांदा प्रा. स.। बड़ी मर्यादा अधिवाई। अनिमेऽव्ययीभावः । मर्या- खियोंका पुत्र, पिता, और श्वशुर ( सौरा) के माप सभी- करनेसे उत्पन्न हुआ पातक विशेष कहलाता दाका सोरना । मर्यादाको तोड़नेवाला । पृथिवीलापनेहा- पाप- यो साधनेहारा पुण्यशील पुरुषादि (त्रि.). रा (त्रि.). | अतिमहल्प, (पु.) अतिमहलाय दितं, नतिमाठायत् । अतिपातिन् , (नि.) अनि-पत्-गिन्-भिनि । सीघ्र भागने- विरुपाक्ष। बहुत मंगलसे पूर्ण। बहुत शुभको उत्पन्न हारा । माघ जानेवाला. करनेहारा (त्रि.). अतिमगे, (अन्य ) अति प्रमीयतेऽस्मिन् काले, गे के। यतिमतिः, (Rt.) मानः भनिशरिता मतिः (मानम्)। बहुनही सबेरका समय पहा अहंकार । भोसल. अतिप्रपन्ध, (पु.) भतिशवित. प्रबन्धः । लगातार. अतिमय-मानुप, (त्रि.) अतिक्रान्तो मलं मानुषं। अतिमपुर, (त्रि.) भतिशयेन प्रारः। प्रा.म. मनुष्यको टोप गया। देवीशतिषाला. जीता हुमा ।बहुत बह गया । बहुतबा हुआ. भतिमर्याद, (नि.) भत्तिकान्तो मयांदाम् । उचित निय- अतिप्रश्न, (पु.) भति+र+न । अतिक्रम्य मर्यादा मो लांघनेहारानि तोडनेवाम. प्रधः । इस प्रकारका प्रश्न येजाना है जिसस अतिमात्र, (नि.) अविकान्तो मात्रा मामला-श.। उत्तर मिलघुका हो ।परेको विडाने (गिहाने) के लिये बहुन योरेको लापनेहारा (अनिकम परनहारा). प्रश करना । जैसा बृहदारण्यकोपनिषदमें पालकी प्रामपने अतिमान, (हि.)मान मनिसन्त । परिमापसे पहिर योगिराद् याश्वस्पयनीयो किया है। उत्तरन होनेवाला प्रा. होगया। जो माया नहीं जाता. ।

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अतिवादिन] (8) बित भक्षर. अतियादिन, (नि.) सदाननीय पदतीति, मतिमा अतिव्यामि, (.) अनिरिमापरिन् । अतिस्पेन गिनि परशे तोपकर बोलनेहारा। रारा मन राण्ड लसमलक्ष्यं चापिक्षिय मामिम्मपनम् । सपना मल न करके सोचमतको संस्थापन करे, श्य (जिसका लक्षण नहीं किया गया) में सक्षणमा जना अतियाह, (भतील ६६ अन्यदेहे वाह प्रपणम् ). ( जिगको जहाँ रहना चाहिये वम्ने निमें भी स. दूसरे देदमें पहुंगानेहारा । गाम जीवनतरव (सूक्ष्म यदि रहजाय तो बद ससाण अनिमामिशेषने पितयार. पारीर ) । पगादि पुभ समधी समाप्ति होनेपर पार्थिव सादे । जसै गरिन यसक्षम, कोमात भोग देनेदारा। तेजानेवाला. आदिगी सींगवाले हैं। जमे पृथिरीका सागपाल अतिपादक, (अतील तिं दे पाहपति देहान्तरं प्राश्य तो गन्धी स्थिति केवल पृथिवीहीमें उति यति) पर पुल। इस (धूल के नर होमानी जोको वायुभादिमें उगका प्रसंग होमो भनिनामि समानी । दूसरे देश में पहुंचा देता है। "मीण पुण्ये मयलोकं भोर जी धूममें पहली ता उरमें से 4. दिशान्ति" भरविरचित एक देव ( Ved) जो जीवको उगा जलमें प्रसंग होमेर अनियति मानी गरे शरीर से जाता है. विक पिानृत होयगा । मारलगया. अतिपादनम् (भविबानिय युर)। यतीत होना । | अतिशनि., (पी) मतिनगिन् । यति गुगरना । बहुत परिश्रम करना । पहारना । पात भारी सति बगाधनगामी २१F... पोहा उगना । भारी गोमा भेगदेना। धीमी बात बहुत सामी, बाकीय Eिnwr.. निगुंफ होना. भागारमामयवाणा (नि.) नि अतिपादिका, (नि.) अविवाहः अनि अस• टन् । मी. प्रा. स.ऐबकारण (वि.) भनिन-fri पार (म परिपाला)।गरे सरीरमें जागकनेहारा. रामान रिसीसीसाममहो अतिपादित, (.) मरिस्पद गिएर त । बलागा। अतिवारी, (t. ) fer mere बीतगया पाताल निवासी जीव ।- स्मारीर. दिया..दFिITTER अतिपिकट, (पु.) भीमायेन पिकट, मा. रा.। हाथी परामयदेनेहारा (त्रि.). अतिताप, (I.) अxिt weet अतिपिपरा (सी.) भनिभामा विर्ष भया. स.। अविकान्त यहां भ...irmire भानयागीबेलीविषयो परनहारी. (वि.) साति, भा. ( गाभारत गमारगर्भ ५. भी. अतिशयित, (.) from cene कारवामी निरल जाना । पारदोजाना ।हापजाना 1)मि अतिति, (सी.) भतिजतिन् । पाती होगे | अतितायित, (.) WHAPrer. परोसीयो मारनेदारा उपमिद. अतितापिन्, (R) Matrni अतिगर(नि.) Hिपर पुरातन (पुरा पर उसामु. मा)ीनी उमापला. (पु.)तमा अतिशयोनि, (*) मगर.. मन्त्र जिस भक्षर गारो एक गहरापन भारते। forwari FrwATE.. -का(डी.) गांजो कमी पर नहीं ससी. असिधि, (.) से एए. अतितास, (R) Are Rimer अतिवेगित (वि.) (ब) गरिस गामो. अतिपंध, (I.SATTA) अनितापन, (.) retuge 1 परमेग "ए" P.Arthrit अनिल,(प.) uct Har, ww.niferRRAN अनिकादिर, (f.) Pare रमुरके तोर पर न (Act) अनिली, ...rentre( रामसर (प.). R)rrr. अतिwww.(...) CITIrain (.. Katrajभारम करने लायक 1 1 ६। पनादिना निगरे पग घोडा पनो शपर, ( २६ ) अबर, (त्रि.) अत्तुं सालं अस अद्-वर्तरि कम । सानेके भद्वयाविन्, (त्रि.) अद्वयं अस्त्यर्थे विनिः छन्दनि । समाववाटया सह. दो ( देव और पितृयान ) मागाँसे रहित. अप, (मत्र.) अस्मिन्नहनि दम्गदस निरातः सप्त. अद्वयु, (त्रि.) द्वयं द्विप्रधारः अस्ति अस वा-जाना म्। बाद दिन । भाजने लेकर. य० । द्वैत (दो प्रनर ) से रहित । भीतर और बारिसे अद्यतन, (नि.) ययमः, अनुंडागमय । सानी समरूप ( एकरूर). बनु । श्रियं र । यदतनी । भाववाली चीज. अद्वितीय, (नि.) म द्वितीयः सदगो यस्य न. ।। समन्ये, (भच)दम्पन्दस इदानीनील निसत.। अर. भाने समान दूसरेके विना । केवल । एक परमात्मा । अपीना, (की. ) अशः परदिने वा प्रसोन्यते । अद्विपेण्य, (त्रि.) न० त.। न दि एन्य । न विरोध समापसम्पटिलेषः । धान का कठ जानेगी। वह गर्भ- वटीती विजिगप्रम निस्ट आरहाहो. अद्वेषस्, (त्रि.) द्विप अमुन् । न त । देष (और) लद्रव्य, (२.) २. द.। न द्रव्यम् । निमूत्यवमु । रहित । ५.पु.। वैर न करना. माचीन नियोजन पदार्य । निकम्मी धोत्र. अद्धत, (त्रि.) द्विधा इन मेदं गतं द्वीतं तस मार सद्रि, () भनिन् । पर्वत । स । सूर्य । एक सनास्ति यस य.। सजातीयादि मेपर और परमरमा. सादिकपी, () : अदिनाला गिरिबालमूरिका रम्याद पं सन्या । गान्तिात् । अद्धतयादिन, (त्रि.) अद्वनं सर्व एर विदामा रोगन परती भागाजिता नान एक मेल. तीति, पणिनि । जो कुछ है सभी चैतन्यमयी ऐमा बोलनेहारा । सीपीमें चांदी, और रस्सीमें जने की अदिला (2.) भार. कुमार श्रीला. आप की प्रतीति होती है और उनके यथार्य हान हर परनिगमानो बीउ है । पित्री. जैसे यादी और सॉपकी बुद्धि निान होजातीहै, है भनिन, (२.)ो परे जनत.। मिटाना हमन्यायी नामने प्रतिस। ही यह चराचर प्राय चतन्य आत्मामें प्रतीत हो गई मौर चैतन्य आत्माके यथार्थ ज्ञान होनेपर सम्मत Thi. नपा.() भोरमदनपा । पाती. थासम्बर निगत होजाता है, इस प्रकार कथन पहने येदान्ती। पुशेिष (जो संपूर्ण बाहिरकी बार दिभिन्-र.(पु.) मीनिन निहित.। मानमम्प स्वीकार करता है). भनि (4) मा... | अधःक्षिप्त, (नि.) मधोमुखेन क्षिप्तम्, शिल ri (र पत्र ली है) ता। नीचे मुगः मार खा गया। शुक्रामा यः । अदिगद, (5.) tar र मना । हिमालय धांध में किया गया। नीचे रखा गया. अपन, (नि.) माथि पनं साधीनतया या अदिमार(:.) । मेयर पम्प य० । माया, सदाभारित परा पनीर भी वे उग धनको भनी अपने सारे (:.) virwitter.हिना, भारविन भोग नहीं सले, क्योंकि ये भो जिगर काते हैं पर उनके भाभी लिये ये दोनों को बार(..).मार्टर (भने ममत्र) tra | मर (अमें दमे पुत्रारमन्त्र य एमाधना गृता । यसरी T) पायाने सतम्मन्दनम्"सीरमीचनम्. Prer : अधय, (f.) पयः नील ५. बर (1.) शार, (:.: writaमां अब भी(श्री.) मुगनि पुन भर rt.rani तरमशः नम The Rewar jire.अपन, (fa. ) UTIBAn: ri Mani raterniti. . तं.. अनुरा.

घमण, [भधिकार, - धमर्ण, (त्रि.) अवश्य देयं अगं तन् अध्मं शोध्यं यस एक अर्थको प्रतिपादन करनेहारा न्यायसमूह विष- ब. । ऋण सेनेहारा । कर्जा रटानेहारा । कर्जाई. य, संशय, पूर्वपक्ष, मिझोत, निर्णयखरुप पांच अंगोंको धिमाल.(म.) अधर्म अधर्म•ायरण । पाँव । पाद. बोधन करनेहारा वाक्यसमुदाय । तर विचारनेके योग्य धर, (पु.) न भियते, पर अच् न० स०। पर वा वाश्यको विषय, क्या यह है या नहिं इस प्रकार नीचेका ओट (होट)। पृथिवी के साथ न मिला हुआ। विषयीभूत वाक्यार्थमें संशय करना विकरूप, संशयासद नीचे । तल (त्रि.). दोनों पक्षोके बीच असत् '(झूठे) पक्षमे युक्ति- धिरात्. (भव्य.) अधर+प्रथमायाः पञ्चभ्याः सप्तम्या दर्शन वाक्य पूर्वपक्ष, पूर्वपक्षोक्त युक्तिको खण्डन कर वा आति यन्त्यलोपः । नीशा भाग। नीचेसे. सत् ( सचे) पक्षमें युक्तिको दिसानेहारा वाक्य मि. धिरेण, (अध्य.) अधरस्मिन् देशे, काले, दिशि वा दान्त, अनन्तर सिद्धान्तमें सिद्ध हुए अर्थका उपसंहार अपर एनप् नीचे। पश्चिम दिशा. ( समाप्त) करनेहारा वाक्य निर्णायकवाक्य कदाजाता घिरेस, (अन्य ) अपरस्मिनहि, अपर एएम् । है। (इसका विस्तार वाचसत्यभिधानमें बहुत पाया परदिन । परसो जो भावेगा. जाता है). धिरोत्तर, (वि.) पधरः-उत्तरश्च । स..। उत्कृष्ट | अधिकरणविचाल, (पु.) अधिकरणस्य विचाल. भ. और निष्ट । नीचे और ऊपर । छोटा था। बुरा और न्ययाकरणं, पि+चल्मपम् इतः। द्रव्यमी दशाके मेदसे अच्छा । मघरं च तत् उत्तरम् । वर्म• । दुष्ट (रा) संख्याका भेद करना। एकबो अनेक बनाना वा भने- उत्तर. कको एक करना इति भाष्यम् । एक राशिके पांच भाग धिरोष्ठ, (पु.) अधर मोटः । कर्म । नीचेका होट. करने किंवा पशखरपको इकठा करलेना (पचिोंक एक धर्म, (पु.) भियतेऽनेन, +मनिन् , विरोधे नन करना)। यह अधिकरणकी सख्याका विचाल समझना. धर्मका विरोधी वेदद्वारा निषेप किये गये कामसे उत्पन | अधिकरणिका, (पु.) (अधिकरणं आश्रयतया अस्ति दुरा पाप । जीवोंको मारना । पुण्यरूप धर्मसे शून्य थस्य टन् ) जिसका आप्रय अधिकरण (कचहरीका (नि.) गुण किया धर्ममे रहित परमन (न.) स्थान ) है। न्याय करनेदारा । मजिस्ट्रेट । राजपुरुष. धाशय्या, (सी.) शीफ्यप् शय्या ७ त । पृषि- | अधिकादि, (त्रि.) अधिका ऋदिः यस्य । जिसकी बहुन वीपर लोटना, भूनियन. घधरः, (पु.) थध कर्मगि सेयादी घरतीति च+८ । अधिकर्मन्, (न.) ( अधिक कर्म ) उत्कृष्ट या मुख्य चोर । नीचस्थानमें जानेहारा (त्रि.) नियां सीप, काम । सरबराही। सिरपर निरीक्षण. धिस्, (अय.) भघर+अगि, अपरशब्दम्थाने अया- | अधिकर्मिक, (पु.)(न.) अधिकृत्य कर्मगेऽतं देशश्च । पाताल । पोई स्थान जो नीचे हो । अर्थवशसे अधि+कर्मण+ट । दुपाना मालिक । हा सामी। प्रथमा पद्यमी और रातमी विभक्केि अभी अनुमान दुकानदारोंसे गिराया देनेदारा. किये जाते है. अधिकयाश्योक्ति, (बी.) अधिकवाक्यस उक्तिः। बाव विस्तात् , (भव्य.) अपर+असाति। अध शब्दकी भांति पाश्यका कहना । किसी पातको पन बहाकर पहना. नीचेश अर्थ. अधिकाधिक-साप्तविक, (त्रि.) सारा रातरसे धि, (अव्य.) न+या+कि । अधिकार । ऐवयं । । अधिक मोलवाला. ज्यादती । भाधीयते दुसमनेनेति भा+धा+किंवा हस। अधिकाल, (पु.) अधिकोशात् । परमो धारण करने. मनकी पीडा (पु.). हारे योधाओंरो कवरी सतारेदिये गांधीगई परिम धिक, (त्रि.) अधिक । ज्यादा । अनेक । अथालं आदि .। जिसमा भर अधिक हो। बहुए पा कारभेद. जियादा भावाला (वि.). धिकरण, (न) भाधिक ल्युर् । भाधय (जैसे अधिकाधिक (नि.) अधिकार अधिकः । अधिक न्यायाधिकरण)व्यापरणशास्त्रमें प्रसिदकर्ता और कर्म- (बहुन ) से अधिक द्वारा कियाका माधय अधिकरण नाम कारक (अर्थात् अधिकाम, (वि.) अधिकः कामः यस । गुर इला. राममी विभक्ति) जमे "मेहे स्थास्लाम पचति" यदि बाटा।बाकामी. उदाहरणमे घर कर्ताद्वारा, और थाली फर्माण, पर- | अधिकार (पु. ) अपि+r+पम् । मरम्म। सीत मरासे पकानारूप कियाका भाव है। "अधिक्रियते (टापूस पिकस्ने रामदन परनेहरा) पैदा निर्णयार्थ विचारोऽस्मिन्"। पूर्वोत्तरमीमांसावमें प्रति विधर । सस (क)। रिनिसेमाराम सम्मादी अविकारविधि,] ( २८) [भविनापर मेज वा पटना. करना. जसे विहित कर्ममें ब्राह्मणादिका अधिकार है । राजाओंका अघिदन्तः, (पु.) अध्यास्टः (दतम्य टारिजातः दन्दः) चचिहादिधारणमें अधिकार है । जैसे हम व्यक्तिको छाता दांतके ऊपर चढ़ा हुआ दांत. पकहने का अधिकार है । प्रकरण । व्याकरणशानमें प्रथम- अधिदेवता, (ग्नी.) देव एव देवता, अविध देवता सूत्र में ग्रहण कियेगये पदादिकी उत्तरमूवम अनुगृत्ति देवताया अपि ईश्वरतान् । मूर्य थादि प्रहम्यरूप देवाने करनी ( अधिकारसूत्र ). इश्वर द्रादि (जिसका आश्रय ले मूर्य आदि मान। अधिकारविधि, (पु.) अधिकारे फलखान्ये विधि काम कर रहेहैं). पानं, वि+या+कि तकर्ममे उपना फल भोगनेवा- | अधिदेवनं, (न०) अपि-टपरि दीयते यत्र । जिम टेको जनानेद्वारी विधि (नियम ) असे "मजेत" इस्मे ऊपर घूत (आ) खेला जाता है । झा खेटनेवई यह सजे फलको भोगनेवाला सगंका थमिलापी योधन किया है. अधिदयत, (न०) देवनैव स्वार्थे मम् । हिरण्यगर्न अधिकारिन्, अधिकारवत् (नि.) (अस्व-इनि-मनुस् अन्तयांमी पुरुष (पु.) वह चक्षुरादि इन्द्रियाँति अनि वा) अधिकारवाला । प्रामानिकः । शचिवाला। हरदार. पाना (आश्रय) सूर्यादि देवताओं को अपने र काम अधिकार्यवचन, (न.) अधिकार्यस्य स्तुतिनिन्दाभ्यां टगाकर चक्षुरादि इन्द्रियोंपर अनुग्रह कता है इसमें दे थारोपितस्य वस्तुपात अतिरिचय वचनम्, वच्+ सम्पूर्ण देवताओं ईश्वर कहते हैं. युद् ६ त• स्तुति वा निन्दाने चारोग कियेगये वस्तु अधिनाथ, (पु.) (अधिकः नायः) परमेश्वर धर्मसे भिनका कयन करा । मुत्सर्यवाद । निन्दायवाद. अधिनाय, (पु.) (नी-पम् अधि नीयवे वायुना अधिर, (दना० टन.) किसी काम करने लायक होना। अधिप, (त्रि.) अधि+या+क । राजा । प्रनु । खानी. वायुसे ऊपर लाया जाता है । मुगन्य. अधिकार होना । किसी काम लिये मुखिया नियत अधिपति, (पु.) अधि+पा+ति । प्रभु । खानी. अधिरुत, (पु.) अधि++ । आमदनी औ सो अधिपाः, (पु.) अधिकाति-पा-किम् | Ved बहुन र देनदारा । माठिक । कर्मजन्य फलन सम्बन्धी। करता है। राना । ईश्वर । खामी. जिसने रिमी कमय थपिनर दिया गया हो (नि.) | अयिपु(पू)एमः, (पु. ) अघिटः पु (पू)। बम अधिरत्य, (अन्य ) उसरी बावन । विषय. अधिप्रज, (नि.) अयिका प्रजा यम्य । यसरी प्रजवाटा अधिक्षिर, तु.. गारी देना । निन्दा करना. बहुत सन्तानवाला (पुरुष). अधिक्षिन, (वि.) अधि+सिन्छ । रक्सागया । निन्दा- अधिमू, (पु. ) अघिमवति सामीभवति । साम्यत्र किया गया निरस्कररियागया. अधिक्षेप, (पु.) अधिक्षियम् । तिरम्पार. वि., मू+किम् । प्रमु । नायक । मानिक, अधिगत, (पु.) अधि+ । जानागया । पायागया । अधिभूत, (न.) भूतं प्रानिमा अपितर वर्तमानम् । प्राधिओमें रहनेवाला। परमान्मा परमाता सर्पयापी पुरत वसर रियागया. अधिगल्लू, (वि.) गम्-तृन् । उम करनेवासा । पानेवाला. अधिमोजनम्, (न. ) अरिक भोजनम्। अधिक (विप अधिगम, (पु.) अधिनियम् । आमा । पना । माया. दा) भोजन (खाना) अधिक भोजन (मूम्यं वा) मम अधीनः, (नि.) अपिगतः इनं । मानीके वध (का अधिमन्यनं, (न. ) मन्य भाये करणे या स्युर् । (त्रि.)। बहुन मोठवाला (कीमती). निद्रलनं टिये बहुत रगहना. अधिगय, (वि.) नहि. दि. मति अधिगदम् अघिमात्र, (त्रि. ) अपित्र माना यस्य। पन - (य.स.)। गमें गदा का दिया मारा. पाया।समीम । बेहए. अधिगुन, (वि.) अधिया यम। मरई या अयि | अघिमाम, (पु.) अघिको रविमामात् पति- राम घिर, प्रतिदिन्दयन्द्रो मयः प्रा. अदिति (पु.) मिस यस्य । अपित कर परिमग । यसरी मंनिग मिन माग । निगमहत्व माटाक (प). दो धमत्र हो। हादका महीना. शशिर,(प.) परमार, मधिलगाया। अधिमांगा, (पु.) पिरो मांगो यत्र पर शिर होरबार प्रयास नोयरोग "दम्य पावन दान महयोयोग- अभिल)Mirzा बारा मन. CARE दोनोय. सोमांम:"s. पुरष । परमेश्वर. मी में दामा. रा..मलमम अधिर] [अधी, अधियक्ष, (पु.) अधिकतः खामितया यहो यस प. अधियासन, (न.) अविश्वस्+णिन् अधिकरणे ल्युत् । विष्ण. 'यहारम्भ होनेसे पहिला दिन, जिसमें देवताका स्थानादि अधियोग, (I.) अधि युथम् । अधिको योगः प्रा. कर्म किया जाता है। भाचे न्युट् । गन्धमाल्यारिसे पूजा- स. । ज्योतिषशास्त्र में प्रसिद्ध यात्राके लिये शुभ योग। दिका संस्कार करना. हए यह है कि गमनसमयके सममें, किंवा हमसे चौये, अधिविद, तुदा• उभ । पहिली खौके जीवित रहनेपरमी पांचवें, सातवें, नव का दावें स्थानमें बुध पृहस्पति विशेष आपत्तिमें दूसरा विवाह करना. शुक्रके मध्यम दोनों एरस्थानपर होना । ऐसे योगर्ने अधिविधा, (सी.) विमा का अधि उपरि विनं यात्रा करनेवालेका कल्याण और शत्रुहानि यह फल दै. विवाहोऽम्याः । प्रथम विवाहिता श्री। जिसपर सौति न अधियोध, (पु.) भाधिश्येन युप्यते, य+अच् । युद्ध में भाई हो ।"भाधिविमनिये देयम्" इति स्मृति । सबसे बड़ा योद्धा (पहादुर). अधिवेत्तृ, (पु.) (विद् वर्तरि तन् ) दूसरा विवाह करने- अधिरय, (नि.)(अध्यारुडो रपं रयिनं वा) स्थपर वाला पति (पहिलीके जीनेपर भी). पदा हुमा ।-पः (पु.) रपवाही । गाडी चलानेवाला । अधिशी, भदा. भात्म•। लेटना। मोजाना । विधान भगदेशका राजा. करना । मिचि । गुलाना. अधिरा-जा, (पु.) अधिराजते राजरिए । राजन् | अधिथया, (पु.) त्रि भावे-अच् । भाशय । भाभार । टच्या महाराजा यक्वी. (श्री+अच् ) । उबालना । गरम करना. अधिराजा (पु.) अधिको एजा प्र• स. टन् । सार्वभौम अधिश्रयण, (न.) अधि परि अयणं पागप स्थापन, चक्रवर्ती राजाओंका राजा बारह मण्डला राजा. धीम् भावेनस्युट् । सुटीके ऊपर टिकाना । चुरीके कार अधिराज्यं-ट्र,(न.) (अधिकृतं राज्यं वा राष्ट्र मन्त्र)। रखकर पकाना । अधिकरणे ल्युट । पाक करनैरा स्थान । करणे स्युट, रित्वात् दी । पुती मूला (प्रनित ). पूरा राज्य । पूरी पातशाहत. अधिययम, (नि.) अधिगतं एवम भाभरणं येन । भूषणं अधिथि, भ्दा• उभा । सोजाना । चना । माधयटेना। (सोनेके ) गहने वा जेवर पाला. ("अधिश्री" भी होता) अभिर चहाना । गरम करना. अधिरह (न.) झार उगना । चरना. अधिधी, (नि.) अधिका भीर्यस्य । बढे पद (दरजे- अधिरुट, (नि.) अधिष्ट-क । पढगया । बढगया. वाला । बरी शोभादाला ) पा धनी । चा राजा. अधिरोहपी, (न.) (अधिनायन-बाना 1-जी अधिषपण, (न.) (अधिारते सोम अप्र परि मु आधारे युद) सोमरस निकालनेका पपर (पत्र) (खो.) अधिरोहः साधनत्वेन यति अस्याः । पोरी। मिदी।पी। सांग. (भावे स्यु) सोमरस निकालना. | अधिष्ठा, भा. पर। किसी के अपर पटना। भधिकार अधिरोहिणी, (प्रो.) अधिक्षमतेऽनया । अधि+१+ (करना) एना । अभय स्टेना. करणे त्युत् "सी" इस मामले प्रसिर क्षती भादिसे । अधिष्ठात, (त्रि.) अधि स्था+सर पर्व । अपक्ष । बना ऊंचे स्थानपर घनेका साधन । पौरिभा. माटिक । जो हरएक पामरे दोने न होने देता है। अधिवचनं, (न.) (अधिकं वचनं पक्षगर्दन पनं परन) प्रबंध करनेहारा । मुन्तज़िन. किसी बातपर भलीभांति बातचीत करना । रिसीके पक्षमें अधिष्ठान, (न.) अधिनस्था+स्युर । बान्नयन बोलना. प्रविन भारोपय अधिषरण अभिधानावर दिन- अधियर, म्वा.प.निवास करना । अपना स्थान बना- सः पितरस्तुन" अधिकरणे स्युटिनगर । रणे ना । रहना. पाना (न.) स्युटि । पहिरा । ममार. अधिपत्र, (वि.) अध्यातं वयं देन। जिसने कपडे अधिरिख, (निक अधिकल परे) । श्री बा frai पहिन लिये हों। पद किये. भारती सपत (गरेमें)। (श्री) अधिशादी। अधियास, (पु.) अधि+वस्+पम् । निवाग। चन्दन विशेर वी. माला आदिसे सरकार । अपि सपति देखा अनेन । अधि(म.) अधिक सदो येणे यार। अधि+वर+पिसरणे भम् । सहके आरम्भ होनेसे अपि । बहुन जसे. प्रथम दिवस जिसमें देवतास्थापन भादि हम अधिहरि (भरत (IN). अपी, बरिनार बनमारनामा अधिपास, दुरा..1 शुगन्धिा (सार) करना. होनापिका भधीत,] [अभार, पदयुका हो. सघीत, (वि.) अधिइमक । पढाहुवा । मावे के। अध्यक्ष, (त्रि.) अधिगतोऽक्षं व्यवहार अत्या. स.। पटना (न.) राजाके छाते पकडने आदिका काम जिसे दियागया अधीतविया (पु.) अघीता विद्या येन । बहुव्री० । हो । आमदनी और सर्चका हिसाव रखनेहारा । अध्य- जिसने विद्या समाप्त करली हो । वेदोंको पड़ चुका. श्योति व्यासोनि अधि+अक्षयच् । व्यापक । चारोंओर अघीति, (स्त्री.) अधि+मफिन् । पढना. फैलाहुआ । अधिगतं मूलतया अक्षं इन्द्रियं गति स.1 अपीतिन्, (त्रि.) अघीतं अनेक । अधी+इनि । जो प्रत्यक्षज्ञान । अर्शआदित्वात् अचि । प्रत्यक्षहानका विर। जो सामने दीससके. अधीन, (नि.) अधिगवं इनं प्रभु, गति• स.। माय- | अध्यग्नि, (अव्य०) अग्नौ अग्निसीपे वा । विभक्यथै सानी- (तामें आगा। अधि+स). प्ये| वा भव्ययी आगम वा आगके पास । अनि अधीर, (वि.) धीरः धैर्यान्वितः न० त० । चचल । साक्षीमें विवाहके समय त्रियोंके तई दियागया धन जो अग्नेको फायनें नहिं रस सका. आदि (न.)। धर्मशानमें इसी अर्थका नियम कियाग- अधीरा, (नि.) अधिक इंदाः प्रा.स. । अधिकप्रभु। या है । यथा-"विवाहकाले यन् स्त्रीभ्यो दीयते शानिम- सार्वभमा चकवी । शाहाँनशाह. निधी । तदध्यमिहनं सद्भिः स्त्रीधनं परिकीर्तितम्" इति. अधीग्या, (त्रि.) अधिक ईश्वरः प्रा. स.। चक्रवती। आयधीन, (नि.) अधिकोऽधीनः प्रा० स० । जो बहुत नियां और । मधीवरी. आधीन हो । दास. सधीट, (म.) अधिकार+भावे । आदरके साय किसी मानके लिये सदा देना । कर्मगि का आदरसे नियोग | अध्ययन, (न.) अधि+इइल्युद् । पटना । गुरुके मु. रिया गया. रासे योलेगयेके अनुसार योलना । केवल अक्षरोंका पार माना, (अब. अस्मिन् काले। शन्दस्य निः। करना 'अध्ययन" है, यह वैदिकमत है। अर्थमहित अक्षरोंका ग्रहण करना (मममयाभर 'अध्ययन" है यह मीर्मासकोका अधुनातन (नि.) मा अनारथुल् । भय दोने- मत समझना चाहिये. पलाए आयर्थ, (वि.) अधिक अर्थ यस घ.। कोई और अपर. (नि.) र निमन. त । समाशील. जो अपने आधेके माथ हो. मप्प, (गमन न• त । निसे नि- आयवसाय, (पु.) अधि+भव+सो+पम् । "यह है- गररादापना रचित नही. सेहीहै" इग प्रकार किसी विषयक विचार में निधन हर. अधोरम, (पु.) पर दिया जायते मन- ना। "आत्मका यह धर्म है" यह नैयायिक पहते हैं। ENri, त। अपर महत्वात् हीन त. "युधिका धर्म है" यह साक्ष्यादिका मत समझना । सौ- एस.गि समन्दियोंमे प्रसनद होता । त्यतत्वकौमुदीमें इसका लक्षण यूं लिया कि जिम म. feedi" न होदते यम्पसमम्मादयोस" इनि. मय इन्दिय विषयोंको प्रहण की है तो प्रत्येक विष अघारिदिया, (4.) मानिस मिडिया अगा की भिन्न वृत्तिये अजीह ऐमें गमय, रजामोगुणको निस बालत्रिम इस माममें तिरस्कार कर युधितिका जो सवगुणको प्रथा करना रहने गरेर माटतय. उमीश नाम अध्ययगाय किया भला काम करने की सोनुन, (२.) र मुत्रनं लोकः कर्म । म. कहते हैं । अथवा चित् गामियमे प्राप्तवतन्या मित्र *मारदार "करना चाहिये" यह नियम परिणाम अयषणाम अामुग्न, (R)ो पूर्ण सबरिया मुम है। उगाहा दिली शोक मेरोतिर बने प्रतिर नत्र (अध्यात्म, (अन्य ) आमनि देहे मनी या विमाना t) Re मरेपर घमय भाजी ययी । यामा, दे, ft वित्त अधिारण दरमोटनगण. स्मृतः" । मोधित (थात्रय ) । प दिया जिम्में भावसाय प्रवर हो। पर (.) "समन्यममुच्यते" गीदना । सभा अरोर (3.) we 4.। ममी भवध मायराय परागी अपन fa दस बहतादिमें यही १.) WORTHः म अप- RATE, (f.) frige । बार rer देशक, हर अध्ययन करनेत्यापना। 4.

सपन, [र । इन्दनाहिता युधि समरवि स्थापच.. व (देगरम) मस पिके म वर्गम पन्दिर, माहित.ra २. अग्निपी. बाममंटने )न...। बेसमत। . ९.मात्र. भनेन पट म.. पार रह (ग- यायादि.11.16. ) मामि पर 4 यस I Titd. पलबमहीन (बी.) मगाम...मेर पा)मी । अगा पार 'hि.)REE.R.Aries 'गवेगवा. न (नि.) मा..... टन्कार पार- मारी गया. परिhिk:- जापान, (. भोगना आपाम(दु.) '7.) Nainitary () बिम 12.) पुननिषum .(वि.)rint परना। Prin आपासित(. शियायवा 10 मायाहार नि.) ...() 1ITOnागर म. (पु.), मर भन्दा एक्नेपर मोम) अनमित(R) rinakaifree सन्तामनकर. भनीप. (in.) Vrs ar aritra ..। रोग-mr wrime स- मित्रस्य अनः, (R)Re...(Niral रामद, (.)ERTR...। भाjr 4 सननि,] ( ३२) [अनन्त - सनग्नि, (पु.) नास्ति अमिः श्रीतः सातौ वा अस्य । श्रीत | अनध्यक्ष, (त्रि.)। म अध्यक्षः न त। जो प्रथम वा सात विपिसे अग्निको स्थापन न करनेहारा गृहस्थ हो। जो प्रकट न हो। जो सयालमें न आमक. यादि । सर्वया अप्पिसे शून्य संन्यासी. सनध्याय, (पु.) अध्यायोऽध्ययनं अमायाथें न० त०।। अनग्निदग्ध, (त्रि.) न अमिना दग्धः । न त । जो पढ़ना । न अधीयतेऽस्मिन् काले इति अधिकरणे धम् । भागसे नहीं जलाया गया. समय जब पढना न चाहिये । जमे "चातुर्मास्यद्वितीय सनध, (त्रि.) नास्ति अर्थ पापं दुःख व्यसनं कालप्यं या मन्वादिषु युगादिषु । अष्टकामु च संक्रान्ती शयने वोपने हरे. यस्य । पापशून्य । दुःखहीन । व्यसन (बुरी आदत) अनध्यायं प्रकुर्वीत ।" और भी जब बिजली गिरे। पित शून्य खिच्छ. काप इत्यादि अनन्यायके काल हैं. मनरा, (त्रि०) बहुशेन त वयः । जो अंकुशमे वरा अननुभावुक, (त्रि०) (न अनुभवितुं शक्तः) नहीं किया जासता । न वशमें रहनेवाला । सनत्र (जैसा सयाल ( अनुभव ) नहीं किया जा सका। ता । अनु कत्रि). भवमें न थासकना. अनहा (नि.) नाति आं आरो यस्य । आकाश । अनन्त, (पु.) नाति अन्तः गुणानां यस्य प० । विव चित्त । कामदेव (पु. ) जिसके अब न हों ऐसा कोई। गुणोंका अन्त न हो। "गन्धर्ष, अप्सरा, मिद्ध, किनर (नि.). उरग, और चारण जिसके गुणोंका पार नहिं पास इसी अनङ्गमीडा, (स्त्री.) अनन क्रीडा तृत. 1 कामदेव वह अनन्त कहा जाता है" ऐसे लक्षणवाला विष्णु सम्मधिनी क्रीडा (खेलन)। एक छन्द. यादल। शेषनाग जिसका बहुत मिर होनेसे अन्त नर बनशेखर, (पु.) दण्डकमेद उन्दोविशेष । जहां - आसक्ता । शेषनागका अवतार पठमा (बलराम) मसे गुरु रघु अक्षरोंकी रचना होती है. अन्तः परिच्छेदः देशतः कालत. वनुतश्च यस्य नाति अनच्छ, (त्रि.) अच्टः निर्मल: न. देश, काल और वन्नुसे जिसका परिमाण नहि हो पर त.। कलपा अनसन । मैला. ययात् परब्रह्म । आकाश । (न.) बडा फेऊ अनजन, (न.)न मज्यते लिप्पवे, अ धर्मनि स्युर न. निन्धुगर नाम वृक्ष । (पु.) अवधि (हद) शून्य ४. भाकाश जिसन निधीस सम्बन्ध नहिं । परब्रह्म । इयत्ता (वह इतना है) शून्य ऐसी कोई वसु जिसकी अमनं दोपस्महिते नारायणे। दोषरहित नारायण । अवधि वा इयत्ता नहिं (त्रि.). (पु.) बोई वस्नु जो दोषरहित हो (नि.). अनन्तगुण, (त्रि.) अनन्ता गुणा यस्स बहु । मन- (असंख्यात ) गुणवाला. अगदुर, (पु.) अनः राकटं वदति, निः । एता नाम अनन्तजित्, (पु.) (अनन्तानि भूतानि जिनवान्, रिगो। धेठ । लियो गति टोपि । मनदही और सयको जीतनेवाला । वासुदेव । आईत देवताका मान बनाही. अनन्तदृष्टिः, (पु.) अनन्ता ध्य. नेत्रापि यस्य बहु सनशु, (नि.)म.तान सोडा. भनन्त नेत्रोंवाला । शिव । इन्द्र. अनति, (मध्य) भनि । न पन. अनन्तर, (त्रि.) नानि अन्तरं व्यवधानं यम। अनझा, (अन्य)न..न Ved न राख । जिसके नीम करक (कारिला ) नहीं । अवकाशरहित. MEI न निश्चित ! -पुरमः । न रादा पुरुष । जो अनन्ततः, or-जा (पु. प्रो.) (भनन्नरम्याः अन- देवना, भितर, मनुष्योन कुसमी प्रयोदन जिद नहीं नरवाया मातुः जायते ) मालामे ऊपरकी जातियाने पिनामे दाता । बसवर्षकी मात्रामे दानिवर्गका पुष जनपनन, (2.)-न. न त । जो आप नहीं वा पुत्री. (दमी भने रमता). अनन्तरजा, (मी.) (अगन्ना भायने) छोटी या sh अनपिन, (हि.)..। न हुन. मगा (बदिन). अनपिगत, (त्रि.)२. द.। नपान दिया । न | अनन्तगमिन्, (पु.) न बन्न गर्भः सम्य, अस्प ने । पारप (नि.)दिगध मंडश पूरा न•त.) दिगो भीतर गर्भ न हो । कुशा नामात्र समास (२.)। मिरचनही मीमा. निगमित्रा बनाया जाता है अनन, (f.)ara..। मात्र । एद- अनन्तयितया, (पु.) अनन्तान् मिजयने पनि rrari (माका) मात्र दर. भनेन । मि शब्द भननको जिर करता है। निरा. दुधिशिका. । -- .

भनन्ता, (५) '(अनय, , अनन्तप्रत, (म.) अननास प्रत उपासमार्थतात् || अनपत्य, (नि.) नाति अपलं यस । सन्तानरहित । भोके पक्षकी पतुर्दशी के दिन करने योग्य अपने पुषहीन । मारिस पर मामये प्रति एकत. अनपत्रप, (नि.) मासि अपरालमा यस ६५.. अनन्ता, (सी.) नामि भन्तोऽस्पाः ६. जिसका अन्त जिसे सम्मा (परम ) नहीं । निलंग (बेशरम). महो। विशस्वनामी भाप । एक प्रकारची जा अनपर, (नि.) नाशि अपरः यस्य 4.1 जिसके पारा जिगमा काम अनन्तगूल है। पाती । कृथियो । पुस । 'दूलग पोई नहीं। अकेला. हरीतकी (हरीर)। आमली (भावल)। गुरुची । अनपाय, (नि.) नास्ति अायः नाशः यस ६५०। अभिमन्य पक्ष । अमिसिया । इयामलता। पिप्पली. जिसका नाश न हो । अक्षय । अविनाशी. अनन्तारमन्, (पु.) अनन्त आत्मा र परमात्मा. अनपावृत, (नि.)न..न लौटनेवाला, अनन्द, (वि.) (न मन्दयति नन्दगिच्यच् ) आनन्द- अनपेक्ष-क्षिन , (नि.) न• त.। सयाल। बेपर- रहित । नासुरा । अप्रसम बाद । उदासीन । असंबद । स्वतन्त्र. अनन्यगतिक, (नि.) भाषि मन्या गतिः यस न. प.। जिसके लिये और कोई उपाय नहीं. अनपेत, (त्रि.) अपेतः गत. न• त• । सो चला मही गया। ओव्दतीत नहीं हुआ अनन्यज, (पु.) नास्ति अन्य यस्मात् तस्मात् जायते जन्म ५ तः । जिसमे मिन्न और ण नहिं भान अनमस्, (•ि ) नास्ति अन्न. रूपं यस्य । Ved. रूपरहित । देशकल। कर्महीन. सम्पूर्ण वस्तुओका भेद उसीका स्वरूप है, तात्पर्य, विष्णु कि उससे उपजा अर्थात् कामदेव. अनप्सरस्-रा, (बी.) म अप्सरा न..जो अपारा अनन्यता, (सी.) अनन्यस भार । वही भनेर । वही- (खगंकी वेश्या ) नहीं । अपराराके अयोग्य. पन । अमिमता. अनभिज्ञ (नि.) म अभिः न त । न जाननेवाला । मनन्यपूर्ण, (पु.) नास्ति अन्या पूर्ण सम्प । जिसकी भक्षा थक्षानी। धेसवर दूसरी और कोई भी नहीं ।-या (मो.) न भन्यः पूर्वो | अनभिम्लान, (नि.) म भगिम्लानः न० त.। न पम्याः । जो किसी मरेकी पहिले नहीं। वह दी जिसका कुम्हलाया हुआ. कोई दूसरा पति नहीं. अनभिनास्त, (त्रि.) Ved. निर्दोष । थे ऐन । निरपराध. अनन्यमान, (नि.) म मन्य भन्यो या माते किसी | अनभिसन्धान, (न) विनर्सकल्प । विनइरादा. दूगरी व्यफिके साथ प्रीति न पग्नेगला. अनभ्यावृत्ति, (प्रा.) पुनरस्ति न करना। दुबारा न कहना. अनन्यपूति, (वि.) न अन्यस्मिन् ध्येयमि हतियम्पमा अनम्याम-, (त्रि.) नास्ति अभ्यासः नैकव्यं यस्य । जो जिसकी ध्येयके बिना दूसरेमें वृत्ति न हो । एकान्तचित्त. निकट न हो । जो दर हो. अमन्यशासन, (नि.) नास्ति अन्यस्य शासनं यस्मिन् । अनम्र, (त्रि.) न अधः मेपः न त । मेघ (पाद) जिसपर दूसरेपी भाज्ञा नहीं चलती । स्वतन्त्र रहित । कुछ मकस्मात् होगया. अनन्यसहरा, (नि.) नाति अन्यः सदा. यस्य (.1 अनम, (पु.)न नमति भन्यान् । प्राण । (जो दूसरों के भसाधारण । जिसके समान दूसरा न हो। निरुपम. धकनेपर नहीं शुकता परन आशीर्वाद देता है). अनन्यसामान्य, साधारण (त्रि.) म अन्यस्यो सागा- अनमित्र, (नि.) नासि ममित्र यस जिसका म्यः । जो दूसरी बीमें एक जैसा नहीं। एकहीमें अधिक कोई नहीं । दुरमन गैर. मीति करनेवाला. अनमीय, (नि.) Ved. नाशि अनीवः रोगः पस अनन्यास, (नि.) न अन्य व रयते । जो दूसरे न. रोगरहित । तंदुरुसा चंगा भला । प्रसन्न । केसमाम न हो। एकही. आराममें रहा हुआ. अनन्यय, (नि.) माहित अन्वयो यत्र १० । अन्दयशून्य | अनघ्र, (त्रि.)न नमःमन ना (शुकनेवाला) सम्बाधरहित । अपलहारा एक मेर. हलीम नहीं. अनप, (त्रि.) म सन्ति आधिवयन आपः । जहाँ अनय, (पु.) अयः गुमायो विधि सरन्यः न. १.। भघिर जलन हो (पर). भाभदर्भाग्य (धुरी रिसमन)। भा रोलश- अनपकरणम्, मन् मिया (म• खी.) ने अपकियते । सोके दाहिनी ओर आना । नयो नीति. नीम्बर न.त.। महानि (शासान) पहुंचाना । (धर्मशान में )लिये हुये नीतियन होना बहजो नीति सुन्य चार परे त्रि.). - । पोन बुधना अनरण्य,] (३४) (श्र अनरण्य, (पु.) सूर्यवंशका एक राजा भनयत्रय, (नि.) मना 7 या पार अनर्गल, (त्रि.) अगलं द्वाररोधासम्म यादवांजेको पनि । निन्दादिल । लार्ग:त. रोकनेवाले थम्मैके बिना (होडेके विना ) 1 प्रतिबन्ध- अनयन, (वि.) न आधेगा। मानल्या नका कशून्य । दिन रोक. यालय । न नाग होनेाला. अनर्घ, (त्रि.) अर्को मून्यं न० य० । अमूल्य । निगम अनयम, (नि.) नाम । न सोदा । र, मोल न हो. अनवग्न, (त्रि.) अपसम्मानः। आगम तक अनर्थ, (पु.) अर्थः प्रयोजनं विरोधे न० त० । प्रयोजन यम्य ३० । लगानार निरन्तर । टाटा अच्छा. विरुद्ध । अनिष्ट (न चाहागया ) प० । अमीष्टरहिन अनवगाय, (नि.) अम्मिन् अर्धे माः यत् - विष्णु (पु.) आप्तकाम होनेरो । अर्थोऽभिधेयः प्रयोजन तटरायडाउन । दन्दा. वा नाम्नि यस्य २० । जिसका अर्थ न हो । जिराका अनवलम्ब-यन, (नि.) न० य० । निराधर । निम प्रयोजन न हो । अर्थरहित मान (त्रि.), अनर्थक, (न० ) अर्थोऽभिधेयोऽप्राशस्त्ये नना प० । उर अनवलोभन, (न. ) पुंगान अनतर चीये मान आधार कोई नहीं । पराधीन, प्रमृति० कपसमासान्तः। समुदायार्थशून्य प्रलाप से कर्तव्य मर्मका मुंफारविरग नाममे अमित. विना वचन । सम्बन्धरहित वाक्य । अर्थ (त्रि.). अनान्तरम्, (न० ) अन्योऽर्थः अर्थान्तरं मयूर० तः। अनयमर, (नि.) ययगरति अग्र, अप+ग+अन् , सा- ततः न० त०। दूसरे अर्थके विना । अमेद। जिसका मरः उचितः काल. ग नामि यम्य या जिमा एकही अर्थ हो. समय नहि न त ठीक गमयका न होना । वनय अनवे, (त्रि.) Ved. जो शिथिल न हो. अनवसान, (वि.) नासि अरमानं यम्य .. अनन् , (नि.) अई हिंसायां फनिन् , अा सपन्नः, २० जिमा अन्त नहीं । अमर । स्थितिरहिन. त. । शत्रुरहित । जो द्वेष करनेके योग्य नहीं. अनबसिन, (वि.) न त । न समाप्त हुआ। अनल, (पु.) नास्ति अलः पर्याप्तिर्यस्य बहुदायदहनेऽपि हुभा। अनिश्चित. तृप्तेरभावात् प० । बहुत वनुश्रीको जलानेपरमी जिसे | अनवस्कर, (त्रि०) अवस्कियते शोभ्यते, अपकावर तृप्ति नहिं होती । अनि । आठ वमुमसे पाचवा वसु । मुदागमः । भवस्करो मल म नामि यस्य । मले कृसिकानामी नक्षत्र जिसकी देवता अमि है। चिता नामसे रहित । साफ । निमंल । विमल. विख्यात चित्रक पृक्ष (पु.)। मेला नामसे प्रसिद्ध अनवस्था, ( स्त्री. ) अबस्या+अ अवस्थितिः न० भादातरक्ष । देहमें स्थित, आयुको धारण करनेहारा अवस्थाका अमार । दरिदता । तकका दोषविशेष । उन पित्तनामी धातु । अव्ययी। नलभिन । तृण आदिसे पायको सिद्ध करने के लिये उपपादकका अनुसरण वाद भिन्न । अन् कलच् । साठ वर्षांम पचासवा वपं. तर्क है । जिम तकंमें टपपाय और उपपादककी विप्रालि अनलप्रमा, (खी.) अनलस्य प्रमेव प्रभा यस्य ३०। नहिं वह तर्क अनवस्था दोपमे दूषित है. ज्योतिष्मतीनामी वेल. अनवस्थान, (न. अवस्या ल्युट न० त. अवयन अनलि, (पु.) अनितासन्, अन् विप् अन् अटियंत्र न ठहरना । य० । वायु (पु.) चञ्चलमत्र प० । वकनामी वृक्ष (इस वृक्षक मधु अर्यात् पुष्परमोंसे (त्रि.). भोरे जीवन धारण करते हैं). अनयान, (अम.) अवानः वासोच्दामः अनयच्छिन्न, (त्रि.) न अवारिक । निरन्तर । ने स्याप्तया । पीचमें श्राम लिये विन । एकही सासके साथ। कटा हुआ। लंगानार. दिन ठहराव ( यति ). अनवधानता, (श्री.) अवधीयते, मनः संयुज्यते वन- अनवाय, (त्रि.) यवद धम् अवायः अवयवः न.." प्यकर्मगि ययास्थितं प्रवसंतजन, अव+या+करणे स्युर । निरखयर । अवयव ( भाग) के जो बिना हो. अवधानं विसनिमेदः तनानि यस तम्य भावः । जिमसे | अनयेक्षण, (न० ) अवयुद । न त । न पर नयममें मन टीक न लग सके । प्रमाद । भूल । परना। न खयाल करना. कर्नयको अन्य जान न करना । धर्तव्यको कर्तव्य अनंश, (नि.) न. ३० । न पत्रिक (यटोंका ) । हिस्साविरमा न देने का अधिकारी. अनयनामित, (नि.) नम्की । न झुकाया अनशन, (न.) अम् न्युद् न त । अधनाभाव ।" गया।नना किया गया, साना । उपवास । भोजनशून्य (त्रि.). भाव स यथा डन करना.

यक्ष, [सन्दन, 1 । T गनश्य, (शि:) नामि अर' यम्य न. 4.1 श्र- अगानुर, (त्रि.) र आगा। न. ६. नटा। रदिगा जिगरे पास घोसा नही. मन. निश्पर, (दि.)-री (डी.) थपिनासी । निर अनामक (नि.) नि म बिगेर निर, (न.) अनिति सदाय, धन्भगुन् । नमः। मा स्थिरमाया लिन गहा। परणे स्युद । ओदन । गात । यावर। अनामत-चीन (f.) नाम न माता (बी.). नि भन्मन् म.स. निया, (वी.) भगवनवारितार य+भर न. म. श्राने माननेवा: गुणी दोष भागेर परमा अगा उगा न होना । अनामन्, (पु.) अxि गुणोंगे गुण पहना। अत्रिमुनिती श्री. अगाय भेक्षय एम.न.भा र मनस्व-स्थिक, (पु.) (म..) पि (ो)- दिन । (I) मान्यति ex. या । जनमानसम्म पुल HERE' गगन (म.) अभिप्राय था । बुग दिन । । अगामनीग, (नि.) मfor train अभागी दिन. म.स.जो ALTRA पगार, (नि.) अह पटिरगे, जम्म• • । म टेटा । अगामपन, ( fear me सीधा. गि म.न.tn. पनाकरण, २ .। इसमय मांगा। म..। या सभ्य, मादिगापना पाल आवास । भर अगाम्य, (fr) ret..... भाल।लगाठी. cिhatter रमाद, (f.) मा.ता। पाया अनारयनिस (f.)RIrrine:::....। एना। सम्यग्र । एपाप । NRI दी। भोगक्षनरी मिलामा पचन । प. पनर, अगाध, (पि.) .. Prem....fr.. नापास्ता, (बी.) पनि भयोग्या पर : Natriarita गातार माम.न.पासमोर बाटो पिमा समाधा(-) ME ..... रोणोदवाया मारामारा, (4rit).mom. जोआदमण गदि frei गया (वि.). अनादर(पु.).namain अनागत, (f.) भागम् त, म. मनाNTarat.fuut दी। भागे ना RTोकमान मा भाग लि. सानादि (पु ... नागनातंपा(.) मो :पुर मrammindi diraro Ferror... (ो मिया) म्यmineer. (E.Cire माग्धिर() मा. PARIगर पर नही पr. अनारन (कि .....--- प्रमाणमिन, (.) पर emarathi PART hair 44. अमादेष. (१६.hrimirmir.. गागर, (६३.) fit orr an ..... era igne समाचार. (इ.) ke. Tr tratimrturl.. Rr. Suren Arr ...। अनादि (tr.irrorm ....tist. अमानप, (पु.) Knti ...। . दर... - rem... Invee (R ।

अनाति कर्मफलं अश्+मिनि न.1.1वा नारा अनारम्मत (नि.) न आरम्भणं आश्रयः। याश्रय-अनाथमिन्, (पु.) नान्ति थाश्रमःभसा रहस्य भनाभू, समाभू, (नि.) आभिमुख्येन भाति इति आभू-मोना मनाजय, (T.)ोमा iiiravin न.तान नुति करनेवाय । न गम्मुग होनेवाला। ७२. दिगि । मानate Ved. (नि.) अनामन् , (न.) अननं अनः अन्+अत्, अन जाग्नं, अनातंय, (f.) • नको माः ITAT- अमयति, रजति, अम् अनि । जीवनको विगाउनेहारा। नमा । ये मोगमी (77) बवासीरका रोग । जिगरा नाम न हो ऐगा मलमाग अनाये, (.) न भायं. । न. १. जो i(र (पु.) इस मारमें वैदिककर्म नहिं होते इगलिगे नाम पुर)ी। जो अदाका पात्र मा. रहित है । नामशून्य (त्रि.). अनार्यक, (ज.) म अनी आयनिय है। अनामय, (पु.) अम्+पम्, आमं तापं याति अनेन, मा+ नगदी मरः । अनायक । अगुरका । का आमयो रोगः न० त० ! रोगका न होना । दारोग्य परे गम्मिन् जाय जन् । अनार्यदलने र थाराम न• य० । रोगशून्य (त्रि.). एभा (नि.) अनामा, (स्त्री० ) ग्रह्मणः चिरइछेदनगाधननया प्रहगायो | अनार्यनिना, (पु.) अनार्यविनिमार फ1. ग्यतात् नाम्ति नाम ग्रहणयोग्यं यस्याः ३० । ममन्नतान् निगता नाममे प्रनित भूनिम्त्र गा. टाप् । इस नामसे प्रसिद्ध मयमा और कनिष्टा अगुली के अनालोचित, (नि.) न आलोचित । न देगा। बीचकी अगुली । म्याथै कः । इमे अनामिकामी कहते हैं, न पियाग गगन परीक्षा किया गया. इसी बगुलीसे महाठेवने ब्रह्माके मिरको काटा था, यह अनायनिन्, (नि. ) गिनि न० न० । न लौटनेर. : पुराणमें प्रसिद्ध है । इसीलिये इस अहुलीको पवित्र करनेके अभावित (नि.) व्यर न. न. । न *- भाशयसे इसमें पवित्र नामक कुश धारण किया जाना है गया। न हानि पहुंचाया गया. अनायत्त, (त्रि.) न वायत्तः । सानि । दूसरेके | अनाबिल, (नि.) न आविटः मलिनः न० त० । आधीन नहीं। खुरमुख्यार. मैगन कीचडवाला । शुद्ध सार. अनायन, (त्रि. ) न सायनं चालन यत्र । न हिट्नै- सनावृत्ति, (ग्री. ) मा++तिन् न त ! वाला । एकान्त । निश्चित । पश्चा. सका न होना । आगमनका न होना । बहु-टा- -अनायास, (पु.) या+यस्।धन् । अल्पार्थे न त । प्रयनका न होना। अल्प यम । थोटी मिहनत । विना (त्रि.)न अभ्यास करनेवाला । न दुहरानेहाय. क्ला । ब० । जो प्रयन नहिं करता (त्रि.). अनावृष्टि, (प्रो.) आईपन्- चिन् न• • मोदीसी वर्षका न होना । खेतीये नाम करने अनायासकृत, (न.) सनायामेन अल्पायनेन कृतं न. टपदव । ईतिओंमेमे एक. त.। थोडेही परिश्रमसे सिद्ध होने योग्य क्वाथ आदि। थोडी मिहनतमे किया गया. अनाश, (त्रि.) नानि आगा यम्य न० व०।दिर आशश नहीं । निराश बेटम्मीद. अनायुप्य, (त्रि.) आयुमै न हिनं न० त० । जो आयुके अनाशक, (पु.) या सम्यक् यथेच्छ आशः अरा, लिये हितकर नहीं। दीर्घ जीवनको नाश करनेवाला (अधिक भोजन थादि). अम्+पम् न त । ययेच्च भोगामाद । अपनी इक अनुगार भोगा न होना । "तमेतं वेदानुवचनेन मा अनारत, (नि.)न भारत. न. त.। न ठहरनेवाला । विविदिन्ति यहेन दानेन तपमानाशनी बुद्धि- न रकनेवाटा । निरन्तर । लगातार. अनाशकायन, (न. ) न नश्यति अनाशकः मन्ना अनारत, (न.) आरम् ,आरतं विरतिः, अत्यन्तामावे मयनं प्रात्युपायः । आमाके पानेका उपाय । नाच न. त. कमी न रहरना । सन्तत। यविरत । अवि- न विवाह हुआ। ध्यानपर. स्टेद । टगातार ३० । कमी न टहरनेहाय (नि.). अनाशिन्, (पु.) न नदयति, ना गिनि न त अनारम्य, (नि.) न. आरल्धुं योग्यः । न प्रारम्भ करने टायक. कर्मफल के न भोगनेहारा । परमेश्वर. । । रहिन । निराधार अनारोग्य, (त्रि.) नामि आरोग्यं यम्मात् न. प.। साम्य ( दन्दुरनी) को विगाहनेवाला. आश्रमरहित । किसी मात्रममें नहीं. अनाश्रय, (त्रि.) न+आ+g+मन थामोवे । मुनेवाला । कानने यघिर (बहिरा).

- नाचन,] [प, नाम्यन्, (नि.) नमाग नि. जिमने भोजन देवता । मली। निमेगे निजधामन्टन्ये नदि किया. विष्णी । जिसकी आंग नही frgI नाम, (नि.) आसवे-निराम्पते हीवन अन इति न निमिपति बरतीति, नि+९ न.7.17 सा: मुगं तनासि पाचनरपेन अब । मुगरहिन । बोल- जो पियाने गुन्य हो (नि.). मेसी शक्तिले रहिन । न बोलगकनेवाला. अनियन्त्रित,(नि.) निपटन...किने नामादित, (नि.) न+मा+गा मिचका । न प्राप्त दाहिर गली निकर गया। न जानेर (..). किया पायानमिन्दा. अनियम, (पु.) म+नियमः न..यसका नास्था, (बी.) अ+था+अ । अम्या सादन...। म होना । अनियमित(त्रि.) मेयर भनादर । भादरका न होना ५० । जिगका बादर न हो. | अनिर, (नि.)मdि in2-म्य १२ नानाय, (त्रि.) म भातायः न..शादित. | पलाया जानेवाला मनपानेको भार नाहत, (म.) आ+6 भावे । आहत दो भागो वा । अनिफना, (नि.) म PET म...I min २. 4. । नया कपम जो न फटा भोर न दुगने भोगा गया। निगमहतो. गया दो। तन्त्रशान्नमें प्रनिश हदय स्थित तादादा | अनिग्य, (I.) पुन , (१२ एनीबाग) यमः। दो मदामयः हासोना म.न.मनपा पुरावा.) सो यत्र स्यने । धनानाभयं तत् पगुनिभिः परि- । घोडा भाषी , r .. पीनितम्" इस पक्षणवाला। परा, पक्ष्यानी, मध्यमा, ! अनिएटनामा परिक्षामा - irr भौरवगरी एग प्रवार दि पतिओंमें मध्यमा- । लानेदाग भायर Pिriyar पारसनादनाद बीजाती , क्योकि यहादय भग(नि.) पर उपजती कोई पातु जो भापान ( पोर) निरपर, (..)RIME we" ....। रहिन (नि.). भारstirrorre नादार, (पि.) म+भादारःम.स. भोगना पाग rma (त्रि.) कर (रोजा). शनिदेय, (पि.) Mirrrrrry नादन, (वि.)म+हे+काम मुलाया गया। म मपम निरपर...it रिमायायाम पुरा गया. गुग, कि जि.ritTI पनिवेत(नि.)मामि निदेन नियमेन बागो यस्य । निगम ( EE निपतनिधाराग्य जो नियममे एक पानपर मद ""41. Nrror) रामदासी, अनिर्धारित, (.).bp.u.trere irre.. निणीर्ण, (f.)मनिस्..लगा मरिघrtv. गया।गादियाभा भविपीप, (३.) foto free नित, (नि.) अन+यान पहुँमा. पिन पर fotyat arti अमिरय, (नि.)RAR..जो सदा मो. अनिद्र(त्रि.)RRon wR..गलत। दिगोntert शनियां (Nirr.kr nafrrrrrr नित, (नि.)...imttenा नसमेत गिरिज, (tc. ) ...rtira... प्रनिभूत, (२.).free...firi Extrar FATE अपात. अभिनि-Apr-HTr प्रनिमित(नि.) ROSER. ... अमिar,{s. S..rr.ki.prerate अनिधि (पु.) Arface ६८.र.wort अमित(....... परmarrit. रा - सम्बन्ध । अनिल,] (३८) [अनीत अनिल, (पु० ) अनिति अनेन भन्+इलच् । वायु ( इसीसे अनिष्टदुष्पधी, (त्रि.) अनिष्टा दुष्टा व घीः यस्य । मर जीव प्राण धारण कते है) साती नक्षत्र जिमी धुरी और बिगड़ी हुई बुद्धिवाला । महानीव. देवता वायु है । "वातः पञ्चागदूनका" इममें कहे हुएके अनिष्टयसन, (पु०) अनिष्टः प्रमहः कर्म । न चाही दुई अनुसार गणदेवताच भेद । आठ वमुओंमेंसे पांचवा वमु. वातका हो जाना । मिथ्या नियम । युक्ति और पदार्प अनिलक, (पु.) अनिलं वातरोग हन्ति, हन+क । ततः प्रायस्ये क । (वयदा ) इस मामले प्रसिद्ध वृक्ष । इसका | अनिष्टानुवन्धिन् , (त्रि.) अनिष्टं अनुषधाति । ४५०d.t फल वातरोगको नाश करता है. अप्रिय विपत्तिको अनुमरण करता है। दुःस टेनेवाल. अनिलथ्याधि, (पु.) अनिलस्यव्याधिः ५० तवायुका | अनिष्टाशंसिन् , (त्रि०) अनिष्टं आशंमते उप० त । रोग। शरीरके भीतर प्रागादि वायुमा विकृत होना. का वृत्तान्त मुनाने या सूचन करनेवाला. अनिलमख, (पु.) अनिलय वायोः सया टम् । वायु- | अनिपत्ति, (श्री. ) न निष्पयते न निर+पदचिन् । का मित्र । अमि. अरामाप्ति । न पुरा होना । अपूर्णता । न सिद्ध होना. अनिलालरू, (पु. ) अनिलो वातरोगस्तस्यान्तकः, अन्तं | अनिष्पत्रम्, (अव्य.) नि.मृत पत्रं पक्षो यत्र तागं न भरते। करोतीति, अन्त+नि+म्बुल् । जीयापुति नाममे प्रसिद्ध यह पाकी जिमका परोंवाला भाग अतिवेगमे न चटनी कारण दूसरी और निकल नहीं सक्ता. अनिदान्नक, (पु.) अनिलस अन्तकः । वायुनाशक । अनिस्तीर्ण, (नि.) न+नि+त+क्त । न लांपा गया। निकला गया। एक ओर न किया गया । लगाया गया दो का वृक्ष । सहारपुष. दूर न किया गया। उत्तर न दिया गया. अनिलामय, (पु. ) अनिलात आमय. शाम त.। अनिस्तीर्णाभियोग, (पु.) न निस्तीर्णः अभियोग और पतरोग. य० । अपनेर लगाये गये दोपका उत्तर न देसम्म अनिटापन, (न.) अनिटापनं मार्गः ५.त.। वायु प्रतिमादी (Defendent). कामगं । पारामा । वायुती मी. अनीक, (न. ) अनिसनेन, अन्नईकन् । सेना (क्या अनिदानान-मापिन्, (नि.) अनितं समाति । वायुको यह जीवनको वचानी है ) । न नीयते अपमार्यतेऽम्मा। राम: । ग (प.) नी+कि य० का हमाभावः । युद्ध ( यहां कोई किमी अनिलोरिन, (R) Renा न विचारित । मरनेमे नहि हटाना). भमानामावगा. अनीकस्य, (पु.) अनीके युद्धे तिष्ठति स्था+क । युन अनिरनम, (वि.) न नितने ननि++भन । न लौटने सेना. पर गमन साग योग्य, अनीकिनी, (स्त्री.) अनीकं युदं प्रयोजनतया भर अनिमार, (पि.) नभितिवारी निवारणं यम्य । जिगका अनीकादनि । लिगका प्रयोजन लडाई करना है । मेगा । दिनापियामा निरन्तर अनिवार्य ।। हाथी आदिती शिंषमायाराठी मेगा । यह मेश गटनेसन निवाण करने योग्य. यह है कि हाथी २१८७ प २१८७ धोड १५:01 अनियिमान, (वि.)न निग्याने मिटन्ति न+नि पैदल १.९१५ गम्पूर्ण योग २१८७०. itre मन । कभी न दहानंदा । शारम न अनीर, (नि.) गामि नी या य। निरामय । सपाटा विधामात. ररहित । अपि । नियोगले. अनिता ( TRA या ममियम 4.। अनीट, (नि.) न नी नीलपर्णः। 7 नी 10 सम्दीन रन । अविरत। (1) आदि । शनीवाजिन पुचि घोडा. गट पारिगि. अटेनका नाम. अनियन, (वि.) नमित न नि । न अनीत, (पु.) नामिशी नियन्ना यय . सारसी जन्न गया नही। भामरोहाग कोई नामोनियमपर पता first..मिन मामी मित्र. धान (f.) : १० । यस अनीश्या, (f.) नाटेन.. नnty Tir frihe यस न..। अपने पहनाको मगर न यादमा मन्चन । गियर मोदी यश नहीं माना राखerr. भगमवावापिस रेण नवरा 1- r अनीश्वरवाद,] (३९) । अनीश्यरयाद, (पु.) मामि ईशर ही बाद यदनं । पर.. माय । श्रान्त पशानी । घटदारय FEE मेघरको न स्वीकार करनेयाला । नामित सारा नाप..रि. अनीद, (मि.) अन..गिकी कोई इच्छा अनुरः, नना उमा। पीछे कागाना. न हो। जिसे कोई पेटा (चार )महो. अनु, (अन्य ) अन्+3 । गगविशेष । राद । अनुबन्द, भ्यः पर. प.हे बिल ग निट । गाहय । रक्षण । पीपा । एथम्भार । भाग । हीन । भायाम । ममी भाव अाम आनाt. अनुयाम, या• उम.fuप.अन । अनुराग अनुफ, (२.) अनुमयले अनुसम्+ । बामनादाला। यामी जिमको विषयी मायन हो. हामा रा प । कि नियमाना। महाना. : सगुफप, गुगपर• अनुगमन सन्यायात के पीछे। गरी वातावर्णन करना (धगदी माला प्रगट करना अनुपम, (पु.) भगुममा दी। धम धारव्यदी. Treran अनुभम , (शष्य. ) अनुरामयते धनु+गम्+बि.ए । धिन | अनुमामणिशा, { पी• ) अशा योkir सामनेटमः भनुपमा अगुवा, भ्या. शा.या पाना (हम करगा) । तरण पर। परिपाritor(tem) परना । पहानुभीि दिगाना मममममी (1) Irint अनुपम्पा (सी.) अनुसम्प। दया । योगा पन्या विषय. अनुरोग, (पु.) girfinger अनुकरण, (न.) मारे मनु++गुर । भनुपरण ।। भाल (परदेशाभाषा, मागान परदिगाना) रोगामादाम... गोगा मो(.). अनुकियनेऽनेनेतिवाणे त्युमपाल परनेमा साधा. - अनुरूर्षण, (पु. ) मायने गोषरेन पण, अनुष्या, १२... Inter: mr-Int inment पाप । यो माघे नेहारी पाने के उपर बंधी or | प्रथम एम प्रण ये गये पता (1) retirin IITHI rit अगदि गावकरियेचना. अनुगत, f.) Mirrrrrrrrrt अनुपारप (पु.) रयते धीयते ही पगिया की जानrti Tarami गरायो दिन तीन पोएमकथा', मो Time ENT" प्रा. प. गाणाप । प्रतिनिधि । के म अगता, (.) •r.orm wt w. । OM मारना। गे "म सम होतो गुमना" र धनुकाप है. 1 अगम, म..kriwar अनुफाम, (दि.)ERTEN Upोकामगर, भारो मुकि। मरतविक । मापते कम 4 Iो पूर्णामीmat. अनुगम.15.)........। अपामीन, (R) IN Irrrn writ disीटल vot अगदान.1.)-re TRArn. Territyurr . | अनुसार, (पु.) देश भर से जागिरम ..freer tretc अनुगर,(R)ware ASIATE (T. Ire. याम, (it.lrkommiteehree part wr. Amir emarh, R..* ... - -- - - M ।

। गया यीन. वाले धूमका दर्शन कर वहाँ (पर्वत आदि )"nt अनुमिति, (बी.) अनु+मि-मादा सिन् । हेतु वाहने अनुपुरुष, (४२) [पर्व अनुपुरुष, (पु.) अनुगतः अन्यं पुरुषम् । किगी पुरुष के अनुमाय, (पु.) अनुमाायी दोषानेन, पीछे २ चरनेवाला । अनुगारी. भूगिय करणे पम् । गुनाओं मिलती भनुपूर्व, (पु.) अनुगनं पूर्व परिपाटी गविग । यथा दाट यादि उत्पन्न होता है। मामथ्यं । र । क्रम । मिलसिलेवार. थलहारमा प्रगिर गमको प्रस्ट करनहारा । अनुम, (नि.) व क न । न वपन किया, न मोया मनोगत मारो मा प्रस्ट करें ये अनुभव जाते है"ग प्रचार सागा मौका पाना. अनुप्टिम, (त्रि. )वप्+त्रिमन (न• ) यीजारोपण (बो०) अनुभूति, (ग्री• ) अनुसूयते अनुभू+न्छिन् । नापी विना ही घट गया. चान । समम न्याय प्रयदादि लक्ष्य हान. अनुमाए, सा० ५० । पाना । याम करना । पहुंचना । अनुमात, (पु.) भनुपनो मातरम् । माईके पीछे हुन्छ। पकदटेना. कनिष्ठ भ्राना । छोटा भाई. अनुमास, (पु.) अनु+प्र+आ+पम् । सरवपश्य (खरीद ) होने परमी तुल्यवर्णकी रचनादाला - अनुमत, (त्रि.) अनु+मन+ । आपही किमी का शार । काव्यालशारविशेष । नुस्यवों की रचना. टगनेर " हां यह कीजिये " पो प्रोत्साहन दिई अनुभव, (पु.) अनु++अच् । सहाय करनेहारा । मानागया । गम्मत । मंजर, धनुचर दार, अनुमति, (मी.) अनु+मन+चिन् । मान रैना। अनुन्छ, भ्वा०। पीछे भागना. देवा करना । गटाद । अनुमन्यते कलाहीनत्वेऽरिपूरि- अनुवन्ध, (पु.) अनु+पन्ध्ययायथं भावादा पम् । विहितयागादिकरणायानुकायतेऽम्यां, अधिकरणे दिन् । यांधना । इच्छापूर्वक दोष करना । वातपित्तादि दोषों से कटारे हीन चन्द्रमावाली शुभ चतुर्दशीयुत पूर्णिमा विधि थप्रधान, घानु, प्रत्यय, वागम, और आदेशमें गुण, वृद्धि | अनुमत्त, (त्रि.) अनु+म+हमें मनकारा हुआ. आदि कार्यविशेपके लिये टगाया गया कोई वर्ण, जो अनुमन्, दिया था। मान लैना । स्वीकार करना. कि पदी मिलिग्रटमें इन् होकर टोप हो पाता है। अनुमन्तृ, (नि.) अनु+मन+नृन् । आप उदासीन र मुख्यको अनुसरण करनहारा अप्रधान । कथन किये कर कार्यमें प्रासदुए दूसरे टन्गाह वाने के लिये बहन गयेको अनुगरण करनेहारा मयन्य । पीछे होनेवाला करनेदारा। मानहारा. शुभ परिणाम 1 शान के प्रारम्भमें कयन करनेके उचित अनुमन्त्र, बुरा मा० । पवित्र मन्त्रोंमे शुद्ध करना, शधिकारी, विषय, प्रयोजन और सम्बन्धी रचना। अनुमरण, (न. ) अनु+मृद् न्युट् । मा मरगया तिर फलका साधन । पुत्र वा मिथ्य जो थपने माता पिता या देह न मिला तो टमी मनाओं आदि ले पूपर भाचार्यय अनुगरम कर्ता है। निरन्तर क्शा होना. चद नियोंका शरीर छोटना । पीछे मरना. अनुयन्धिन् , (नि.) अनुयाति, अनु+यन्ध+गिनि । अनुमान, (न• ) अनु+मि+मा वा+भावादी ल्युट् । सहचर। अनुवर । व्यापादाय । फलाहुमा । निया टीप: (पोटे देशमें रहनेहारे ) का निश्चय करना । जने वन अनुयन्धी, (मी.) अनुयथ्यतेऽतिवाग्न व्याप्रियतेऽनया धूमका व्यापक है तो धूम टसका व्याप्त हुआ इस प्रदर धनु मन्य पम् गोय. सापादिका रोग । हिची । तृष्णा. दोनों कईवार पारम्यान आदिमें सहचार (इमा अनुपम्य, (नि.) थार्य यन्धोऽनुबन्धः स्यन् । यक्षम रहना) देम पीठ कमी पर्वत आदिमें टटरही yि. मारनं रिय बांधीगई गो आदि. #) अनुरलं, (२०) मनु-पश्चात् स्थितं ययम् । पीछे टहरी हुई यह निश्य होता है। करणे युद्ध । अनुमानका भार सेना । सहायक ना. धूम भादि । श्रुतिहीको सत प्रमाण्य है, जहाँ सासद अनुपाच, (पु.) अनुपच् िपश्। पहिले रोग किये. श्रुति नहिं मुनीजाती यहां स्मृतिवायसे भूतिशार मयं चन्दन भाम्पिये रद्दीपन करने के लिये रि का अनुमान करना । इराणगर श्रुतिय अनुमान करने मदन करना पीटे गाना. हारा स्मृतिवाक्यमी अनुमानपदगे कहाजाता है ना अनुमाल, (न.) ममगायो प्राथः । मानगो गया भीमगिक कहते हैं. अनुनय, (पु.) मनु मम्बर । पद न वी म्मरण छिपी पीजी जागा. हो पदिय जन (मो मी गवार | अनुमिला, (सी.) अनुमा इच्छा+अनु+मा+गन् अर' पिन) अनुमान करनेम इप्या. .

अनुमाराः,] (अनुः । अनुमासः, (पु.) अनुगतो मास । अगला महोना ।-सम् | अनुपर्नन, (पु.) अनुगतो वर्ननमाराध्यादेरिटर (अन्य ) प्रत्येक माघ महीनेमाद महीना. अला. स. । अनुसन्युट् । खामी आदिकी । अनुमोद, (पु.) अनु मुद् पम् । चूने जो किया पूरा करना । अनुरोध । लिहाजा सावट । पीर वह मुसको असा लगा । इस प्रकार बोलना । भोरके अनुवंश, (पु.) भनुगतो यतान्तः । परम्पराग मुससे सुखी। मानंद । गुती. न्त । रारान्दानसे मिलता जुलता हाल. अनुम, तुदा• भा• मियते। मप्रे। पीछे मरना. अनुवाक, (पु.) अनु उच्यते पन्धन् । पुत्वं । अनुया, भदा.प.अनुसरण करना । पीछे जाना. विशेष । ए और मज समूह । वेदका अनुयाज, (पु.) अनुस्य+पम् कृत्वाभाव । अमावास्या वेदका भाग । शास्त्रनामले प्रसिद्ध और पौर्णमासीके अग प्रयाज आदि पांच याग, अनुयात्रिफ, (पु.) अनुपात्रा-अनुगमनं मति अय- अनुवाफ्या, (खी.) अनुपपत् पुत्वं । मामी ऋतिग्मेदसे पदाने योग्य देवताके धुलाने टन् । अनुसारी । अनुचर । नौकर. वैदिकस्तोत्र । वैदिक विधि. अनुयायिन् (नि.) अनुस्या+गिनि । सदश । अनुपर। पीछे जानेहारा दास थादि । बिपाप. अनुवाद, (पु.) अनु+सद्धम् । जाने गये मईको अनुयुन, था. आ.। पूछन् । परना. करना । सिक (बनाआ) की रचना । दूपरे ! अनुयोग, (पु.) भन्युज्यते कथनाय नियुज्यते अनु+ आनेहुए अर्थको सन्दसे कहना । बहेहुएको बु+पम् । प्रश्न होनेपर पूछागया कहनेको प्रात भाषामें पहना । तर्जुमा. होता है. अनुयासन, (म.) अनुपएकत्युर । पूर भाति अनुरध्या, (स्त्री.) रथ्यो भन्वायत स्थिता । पदमार्ग । नियुक्त करना । मेहयुफ करना. पावका रास्तापगरपदी, अनुविधा, जु• उभ• । नियम पाना : mem अनुराग, (पु.) अनुरस+पम् । अत्यन्तप्रीति । प्रेम । कहेहुएफे पीछे चलना, अनुरूपो राग प्रा. स. बहुत प्रीति रहारा (नि.).| अनुविधायिन, (नि.) मनु विधान सभा अनुरार, (वि.) रानि मनुगतः प्रा. स.। रातोरात । फर्मावर हुकम माननेवाला. -अब-रात्रौ । प्रत्येक रात्रि । रात पीछे रात. अनुवृत्त, (वि.) मनु+र+क। फेलामा । पाल अनुराधा, (ही.) २७ नक्षत्रोंमें 104 नक्षत्र । अनु पीछे गया । श्रीनिवाला । पीपरनेहारा. गता रापा पिशाया। अत्या. स., अनुत्ति, (श्री.) अनु+त+फिन् । सपने अनुरूथ, सपा- उभ । निरोध करना । रोकना । बन्द वरना (अनुरोधासेदापरेकी मरमन्त। प्रस्य । माकरणशानमें प्रमिड पहिले एचों में अनुरूप, (भव्य.) रूपय सारये योग्यत्वे व अन्य। कियेगो पर आदि अगले सूत्रों पर समानता । एक देगा । मानिन्द । योग्यता । "मर्श- भापति" स योग्य (त्रि.). अनुघेलम् (मध्य.) येलो पैलो कानिल अनुरोध, (.) अनुरप्पम् । रबारट । अनुसरण । अनुपए, दि. ५. : मारना । मरना पेपना. पर रस सेवा र सोम साली भादिक अनुमज्या, (पी.) भनुमकार । मनुगरण साताको पूरा करनेसीया. सेवन । सेवा। पीजरना. अनुलाप, (पु.) मनु पार कर सप्यते सरस्पस् ।पार- अनुमन, (नि.) भवालं में बम बारहना. पारी । धर्ममा । मफ. भनुलेप, (पु.) मनुप्+िमारे एम् । पाव भाग अनुतिर, (२.) वेनन् । मलना । "मणि पम् तमामया बन्दनादि. परी गा. अनुलोम, (पु.) भनुम्सोमन् यसरमे भली. म। अनुताय, (३)नाग स्थाकमामानुगार सिसशिवार, मनप, हिसार। सोनोर बन अनुलोमज, (पु.) अनुलोमेन थाप पाडः, नन् । अनुशापिन, सहनि । Tirt रसिहगो सपिया विहिरो wt बन मेरे सर पर मदिर मारो भा भूपनिरिक गरिने ध्वीरेमभे Imr (मला) बर्थ, अनुगमन, अनुशासन, (न.) अनुसार नगर अनुगा (1) rrrrrrrr हुपम 1 उपदेश । हुगम करना । "ri mi ग.7-TET..1 लागादिना" इति करणे स्पट । थापा (नो त करने के योग्य नाह) गन्दोममे पृपा कर ग पाने योग्य शब्दोस मममाना । जमे पारगमें अमी. अनुगमन, • TH INirrr. ममे गापुराब्दी विवेचना कर धोधन दिया जाता है. अनुपम्या, T. TIMIRMIm गागाinner अनुशी, अदा आ.। ऐटना । किग्री के गाय गो जाना। मनुसन्धान, (.) Eme पछताना. (Trim) fTTTTE (मंचर। अनुशीलन, (न.) अनु. सोलागुर, । कर पार रिचारना । बार बार अभ्यागकरना. अनुगरण, (२.) गाग+TER माना गा पाना । ri" अनुशोचन, (म.) भनु शुन्युट् । हो । "Fil (मी) मान. णिचि युचि" शोक करना (टसी अर्थमे ) "शनुमान- ना" (खी.). अनुगार, मा. ना. अनुश्रय, (पु.) अनुभूयते गुहारम्परया उपारगार अनु अनुमन्यं, (ग) अनुगम् । नाती पीट अभ्यस्यते, श्रूयते एव न तु फेनापि किन्यते वा अनु+४+ अनुम्नरणं, मनुस्माद । रिना कन्दः। अप । गुरुपरम्पराने टयारणके अनन्तर जिगमा अभ्याग भारमनपामा यमी मरे मर किया जाता है, अथवा मुनाही जाता है किसीग या दान कीगः पालो तरी नवगने पर नहिं जाता । घेद । (इसका मुना जानाही राबने माना है) बुद्धिमान्, Vad. अनुम्यून, (त्रि.) अनु+At+कद प्रदित (गुब अनुपन, (पु.) अनु+सनपिन् कुवं । दया । भागति हुआ) निरन्तर मिटनुआ (मेमे अकरा उपन) (किमी वस्तुमें लग जाना ) । एक स्थानमे मुने गये | अनुसार, (पु.) अनुपम् । ददानादि मरदवार पदको दूसरे स्थानमें अन्वयके लिये संचना । सम्बन्ध । मराग एवं माराः धनुगतः मागन् भन्या ।। टदामादि मरकाले होनेने सरवर्गही मर हैं इन अनुष्टुप्, (श्री. ) अनु तुम्भ किए पवं । सरस्वती । पीछा करनेहारा (मरके आश्रय, उगारत कपड़े आर आर अक्षरके पादका छन्द (अक्षरछन्द). बिन्दुमात्रने प्राय दियागया) मुगमदित ननित अनुष्टान, (न०) अनु+स्था मात्र ल्युट् पर्व । वैदशानमें वोलागया ( अनुनाविक) वर्गाका एक नेद "अनुदर विधान किये गये कर्म करना. और विमर्ग" इस प्रकार प्रारम्भ कर "३ मार स्थानके भागी होते हैं "गा कहनेमे अनुदाये अनुष्ण, (नि.) उष्णः दक्षः न त । आजमी । र तयञ्च (ऊपर कहा गया लक्षण हो रहा है। विन्दु(-) मित्र (गीत)। कमल (न.) थालसी जीव नीतकी पीटाके न होनेपरमी चीतपीडा अभिनय (अवस्था-) अनुहरण, (पु:) अनुह+न्युट् । देश, मार, चंद्र मादिसे एक जैसा करना वा दिखाना । समान धर्म नुसरणनट) करताहुआ करने योग्य काममें जड आविष्कार करना. (मूस)की नाई होता है परन्तु चतुर, शीत होनेपरमी टमे कुछ न मानकर कर्तव्य करनेको (अर युद्धि- अनुह, भ्या०प० । अनुकरण । नरट करना. मान्) हुआ उग जाता है, इस प्रकार टन ( मूसंयुद्धि- | अनूक, (पु.) अनु+उन्-ममाायक-कुवं नि. ! पित्र मान्) को टथ्ण और अनुष्ण कहा जाता है । (एक जन्म । कुल । सभाव (न.). काम करने के लिये गरम और दूसरा अर्थात् मुखं जीती अनूचान, (पु.) अनुविच्कान नि० । शिक्षा आदि । माई होता है)।(यहां करनेवाले के अर्थ, कन् प्रत्यय यामहित वेदको पटनेहारा वेदोके अर्थको भनुपरव टाकर ) "अनुग" पदमी सिद्ध होता है. (वर्णन) करने में समर्थ. अनुप्पलिका, (:) अनुष्णा चीतला वहीद, इवाय अनून, (नि.) ऊन+क न० त० । न थोड़ा । परिपूर्ण कायपि, मन । नो वैरकी नाई शीतन हो। "सा क" (मराहुया)। सारा । यहीन (नकम)। नूनं ( निन्दिन) दल वेळ. न. तु.अनिश्चित । जिसका निश्चय न हो. प्रणाम.

[अन्न करण, अनूप, (वि.) भनुगता भापणे या १० अच् स.। अनेकान्तपादिन, (पु.) भसि मासि वा इति एकान्तं भात उत्वम् । जलप्राय देश (ऐसा स्थान कि जहाँ जलही न वदति । वाणिनि २ त । है, या नहिं है, इस जल हो)। उग स्थानमे सदा पास करनेहारा महिष प्रकार नियममे जो महिं बोलता । बौद्धमेद. (भैसा)। "वह देश कि जहाँ बहुत जल, वृक्ष, वान, अनेजत्, (त्रि.) न एजत् । न कोपनेवाला । सदा एक शेय, रोग हों उसे अनुए कहते हैं" । एक देवाविशेष प्रसारका । सर्वदेवरूप ब्रह्म. (पु.)। अनूपरार नामरी प्रसिद्ध एक देश, अनूपन, (न. )अनुपे (जलप्रायदेशे)जायते जन्त। | अनेडः, (पु.)न एडः न त । मूरां । यदमाश । नेवफ. भाश या पदरक इस नामसे प्रसिद्ध । भाईक । यह प्रायः । अनेडम्क, (नि.) एडो बधिरो मूको बचनशक्तिरहितः जलमे उत्पन्न होता है। जो पुछ सजल देशमें उत्पन्न नाम्ति यस्मात् ५ ब. । (काला, योवा) इस प्रयर हो (पि.). प्रसिद्ध मुन्ने और बोलनेरी शकिसे रहित । (डोरा, अनूरु (पु.)नस करू यस प.। सूर्यका सारथि अरुण । गुजा)। पाठधूतं. विनताका सबसे पता पुत्र । अभी गर्भ पूर्ण नहिं हुआ | अनेहस, (पु.) न हन्यते, हन् अनि (धातुको "एह" और मानाने अण्डेको फोड डाला इसरो कर आदि अगोंमें आदेश हो जाता है)। जिसे मारा नहिं जाना । काल. विकलना होगई ऐमा पुराणमें प्रसिद्ध है. अनैकान्तिक, (पु.) एकान्तं नियतं प्रामोति, एकान्तक अनूरसारधि, (पु.) अनूरु सारथिः (रपनियन्ता) टक न• त.। व्यतीचारी (हेतु और साध्या साहचर्या यसरजिनके रथको अनूरु होकता है । सूर्य. भाव अर्थात् कहा न रहना) दुष्ट हेतु । जैसे धूमको अनृच, (पु.) मास्ति अभ्यसतया ऋाकू यस्स अच् स.। मिर करने के लिये अनिको हेतु बहना । जिसकी पाप्ति जिमने वाक् भयात् ऋगादि वेदोंका अभ्यास नहिं किया। (साहचर्यनियम ) नियत नहिं । “अनेकान्त" मी म अन्य अनुपनीत (जिसक्य यज्ञोपवीत नहि हुआ) अर्थमें हो सका है। | अनैपयं, (न.)(न ऐक्य एषम्य भावः यत्) पहुनाका अनुत, (न.) नं (सर्व) न• स. । सत्यमे निम, होना । एक न होना । बहुतायत. भययार्थ (झूठ ) । लोकमें प्रायः ला म्यवहार कयनमें | अनो, (भव्य.) न नो । नहीं. ही देशाजाता है, कहीं वस्तुमभी जैसे र (राधानः | अनोकशायिन, (5.) अनोके अगृहे शेते सीनिनि । भेद) में चांदी थादि । वदा पारी ऐमा शानभी होता है घरमें न सोनेवाला । भरु. (यह मिथ्याज्ञान है)। तदति (त्रि.)..काणिज्य (व्यागर)(न.) इसमें बार बहुत होता है. अनोकह (पु.) बनस राकटस भकं पति हन्ति दन् अन्तु, (पु.)न ऋतु' न..। मोनिम । बहार । जो गड़े की गतिको रोकता है। क्ष. अयथार्थ समय. अनोरत, (नि.) मृतः-न..। इस पवित्र अक्षरसे न सेवा किया. अनेक, (त्रि.) न• त । एकसे मिन बहुत । “पत- न्यनके अटपरिवोर्मयः" इति मापः. अनीदत्य, (न.) न भौर न.त. अकरम न हो ना। पिनयनता. अनेकधा, (अन्य ) अनेकधा प्रारसे. अनेकपा (पु. ) भनेकाभ्मा (पुण्या) aai अनौरस, (त्रि.) उरम्+अण् न त ही घटीले न पिरति पाक । जो मुरा और संहसे पीता है। हादी. उत्सम हुषा ।यो सगा नहीं। जो किसीका माना नहीं। बनावटी | दत्तक (असे पुत्र) अनेकरूप, (नि.) अनेकानि पनि स्थापि अस.। जिसके बहुत रूप हो । चित्ररूप (जिराके रूप माना- | अन्त, (नः) भम् तन् । सप समष । दोषे पु.न. प्रसारके हो) नाश । रोना । सोना (()।नियर भावभंग)। अनेकता, (भव्य.) घोप्याथै कारके गए। बहुत बार पर (पु.) निकट । मनोहर अन्तकरण, (न.)मरणे पुर। अन्तरसम्पन्टो अनेकान्त, (त्रि.)न एक एव मन्त- परिरटेदो यया। तिसपनो नानां दा परणं बन...। जो एक स्पसे नहिं मापा वा रिसर किया जाता । भीतर सपना भया मीर रानहरे भरा जिसके रूपरा निस्मनो। जिसे अधिक मर सापन । असन, मुग मदिध सत्यव उरप इन्दिर बोमन, बुरित मारिप बोरा - सामाजिकै मष्यमैं नशादी अन्तःटिल, (The अन्तःकुटिल, (पु.) अन्नमणे फटिलः । सो बीचमें | अनन, (4.) जो m कुटिल (टेटा) मीचमें टेटे थाकारते. आयौदाला मा. शंस । जिगुका मन (अन्तःकरण ) टेदा हो. अन्नगल, (5.) पालीमा एE. अन्तःपथ, (नि.) अलः ममागतः पन्थाः । मीनर भासा मंहगगमन. मागे । रास्ता. अता, (प.) भन् नागना । मध। बोर।। अन्तःपदवी, (मी.) मुगुम्गामध्यगनः पन्याः । गुपुम्णाना मीधार। निग. सीके बीचका मार्ग, अन्तर, (न.) अन्नं ही का, आर! अन्तःपुरम्, (म.) अन्तः अभ्यन्तरे पुरे-गह । पुरम्य अन्तः स्थितम् । भीतरका घर । अयमा शहरके भीतर । अधि । हा । पहिानेग काटाहिना थापगमे दिलशान हो। रिपउपका मा जनानखाना. भाना : बिना। बाहिरका वीग:माग (ज अन्तःपुर, (न.) अन्तरभ्यन्तरे पुरै गृहं, कर्म । विमें प्रत्यरका उदाहरण है). (अन्दर) इस प्रकार प्रसिद्ध राजाओंगी त्रियों के निवाय- योग्य घर । वहां रहनेमे "राजाकी वी" यह मी अर्थ अन्नगग्नि, (पु.) अन्न-मध्यायः अमिः । मन्त्री धनता है । इसी अर्थमें "अन्तःपुरी" यह भी होता है. यति। मनको पचाने मला जटगमि. अन्तःपुरिक, (I.) अन्तःपुरे नियुक्तः टन् । अन्तःपुरमें | अन्तरक, (नि.) अन्तम येतानि यम्य । अपना ।। नियत किया गया। अन्तःपुरका. करणशानमें प्रति (पातु) और प्रयो इन अन्तःप्रश, (नि.) अन्तः प्रज्ञा यस्य य० । भीतरके हान- प्राविक आश्रित कार्य. वाला । आत्माके जानेवाला । चमका हुआ अपना आप. | अन्तरतम, (नि.) अविशयेन अन्नरः । बहुत मीटर अन्तःसंश, (त्रि.) अन्तः संझा यस्य ब. 1 अन्तः मीतर. यहुनही निस्ट । यहुतही भदर. की संज्ञा चेतना। होशवाला. अन्तरा, (अन्य ) अन्नरेति दहा । निकट । म गिना. अन्तःसत्या, (श्री.) अन्तरभ्यन्तरे गर्भ सर्व प्राणी यस्याः २० । जिसके गर्भ में प्राणी रहे । गर्मिणी श्री. अतरारमा, (पु.) अन्तर्वनी आमा । भीतर द. अन्तःसत्या, (सी.) अन्तः सत्वं जीवः यस्याः ३० । आत्मा । अन्तःकरण (मन)। सन्तियांनी परी जिपके भीतर जीव प्राणी हो गर्भवती स्त्री। गामन औरत. अन्तःकरणका अमिमानी जीव. अन्तःसलिल, (नि.) अन्तः सलिलं यस्य वापृथिवीके अतराय, (पु.) भन्तर व्यायानं अयठे, अन्य नीचे जलबाला । भीतर सरल वृक्षवाटा. विघ्न । रुकावट । फरक मटनेहारा (त्रि.). अन्तःसार, (वि.) अन्तः सारः यस्य य० । मीतरी ] अन्तराल, (२.) अन्तरं मप्पसीमा बारातिर तास्त वउवाला । भीतरके कोषवाटा. आ++क, रम्य स्वम् । मध्य । दीच । सायें । अन्तःस्थ, (त्रि.) अन्तः विष्टति मष्य । दर्मियानमें "मान्तराछ" भी होता है. होना । यीचमें होना । "य----" के लिये व्याकर- | अन्तरि, मदा०प० । अन्त । दोनोंक भीचमें बान की संज्ञा येमी खर और व्यञ्जनों मध्यमें रहते हैं किसीके रासमें सटे होजाना. और तानु आदिके थोडासा छूकर बोले आहे. अन्तरिक्षा (न.) अन्तः सर्गपियो मध्ये ईश्पते, अन्तःस्वेद, (पु.) मन्तः वेदो मदस्यन्दनं धर्मजलं यस्य कर्मपि पम् । अन्तः सानिमा यस्य पो.। पझे। .। जिसके भीतर मद बहे अथवा पसीनेका अउ बहे। रकारम्य रित्वं या । जो स्वर्ग भोर पृथिवीके बीच । मद पदानहारा दापी । मस हायी. जाता है। अधया जहां नक्षत्र हो। पक्षी और में अन्तक,(पु.) भन्नं करोति, धन्नतिन् करोतीत्यर्थे गिन उचारयोग्य। पृथिवी भोर मूर्यके मध्य में रहनेहारा का बुन् । अन्त करनेहारा । यम । नाश करनहारा (त्रि.). शाका स्थान । महो "अन्तरीक्ष" ऐमा शब्दमी होता अन्तकर (नि.) भन्नं नाचं करोति कृ+ट, उप. . अन्तरित (नि.) अन्तर+दण करि च १ तमा व्यवधानं करोतीति गिदि कर्मणि फवा। अम्टग, (नि.)अनं मरमानं मयति, गम्+पार तिरस्कार किया गया, आना किसी काम भवानना पहुंच गया। अन्तरीप, (पु.) मतमध्ये गता थापोऽस अन्तमा परी मरे . नए परनहारा, बीच आम मन्तरीय, * अन्तरीय, (न.) अन्तरे भाछ । पहिरनेका बस्न । अन्तर्मदायस्थ, (नि.) मन्तः भदस अवस्था यस्य । मामीपर धारण किया गया और दोनों भोरसे बिन कटा जिम हायीका मद भीतर छिपा हो । मीतरफे मदवाला. जो कपडा जानुओं (घुटनों ) को भासदन करसके अन्तर्मनस्, (त्रि.) अन्तर्गत बापन्यापाराक्षमतया "उसे अन्तरीम सहते है" धोती. अन्तरेवस्थितं मनो मस्य । बाहिरके व्यापारको न सहन अन्तराय, भन्ते+भवंभीतरका । अन्दरकी पोशाक। करनेके पारण जिसका मन भीतरही स्थित हो रहा है। "अतिलिचीनाशकान्तरीयम्". जिसका मन एकात्र हो । म्याचलचित. अन्तरे, (अन्य ) भन्तरेति इण+विम् । मध्य । पीच. अन्तमाएका, (सी.) अन्त स्या पदचरस्था मातृका अन्तरेण, (भषा) अन्तरेति, इण । बिना । मष्य. अकारादिवर्णाः। भीतर परीरके चक्रोंसरी भक्षयवसी । अन्तर्गड (नि.) अन्तर्मध्ये गरिव निरर्षक: । प्रीदा भीतरी मा. (गर्दन ) प्रदेशमें उत्पन हुए गलेके मांसपिण्डको जैसे । अन्तर्मुख, (वि.)-खो। अन्तः मुसं यम्म यस्मा था- निष्प्रयोजनता है उसी प्रकार निरर्थक कायके मध्य में जो ब.) भीतर मुंवाला-वाली । मुसमें जानेहारा । भीतरको गह के समान है वह भलार तो नहिं परन्तु उसे पहे. दिसानहाया भीतरका रास्ता तुलजाना । वह चित्त को सिा अथवा दुशारत करते बाहिरकी पनुका परित्याग करके परमात्मामे परमात्मा. सन्तह, (न.) अन्तर्गहस । परफे मध्यमें । हासीमें हीको झुकताहै. सतावरणवाला ( सात परदोंका) स्थानविशेष. अन्तर्मुद्र (वि.) अन्तः मुदा यस्य । जिसके गीतर मोहर अन्तजंटर, (२.) मन्तटरस्म । जठर(पेट ) के बीच । लग शुकी है। भीतरके निशानवाला न. । एक प्रका- शक्षिके पीच एक कोटा. रकी भक्ति अन्तर्जम्म, (पु.) सादनस्थानं जम्भः, दन्तपंपलोरन्तय- | अन्तर्यामिन् , (पु.) अन्तर्मयेऽनुपविश्य रमपति खस. सम् । के भीतर जपाका स्थान. कर्मणि इन्द्रियादीनि जीवं वा मापारयति, सम्मगिया अन्तल, (न.) अन्तरस्य (आय.)।जसके पीच । णिनि । जो भीतर प्रवेश करके निद्रयादिया जीवो जसके मम करने योग्य अघमर्पण मश्रका जप । अपने अपने काममें लगाता है। वायु । "जो भीतर (ऋन परावं चाभीसा• मह मन्त्र है). भावेशकर भात्मा (निजव्यापार अचांद प्रामादिशक्ति) ' अन्तमांत (f.) अन्तः जातः । भीतर उसन्न हुआ. मोसे जीवोंको धारण किंवा पोषण को " ऐसे लदाण- पाला ईश्वर । "मन्तरेष यमयी"लादि पदारमत- अन्तज्योतिः (न.) अन्त ज्योतिरिव प्रकाशक । भीतर यौमित्राह्मणोः। भीतरपी पातको साहारा (वि.). ज्योतिषी तरह प्रसार करनेहारा । अन्तरामा. अन्तद, (पु.) अन्तमध्ये दाहः परस्पम् । देहके अन्तर्षणिः-मिः, (पु.) भत्ता स्थित एवं झाररावं कारमति पन् । भीतर रह रही कारभार भीतर सन्ताप : कोटे( पेट)का सन्ताप, सन्दको गता है। अजाणे। अन्तरिः, (श्री• ) भीतरकी नगर । भारमाची परीक्षा अन्तशिक, (नि.) अन्तर्दश राहामामपन्तररहे नियुक्त करनेवाली अपने आपमें देखना. नियुका । राजाओके घरों में रक्षाये दिये गायादा अन्तर्वार, (३)अन्तर्मन्ये दार । घरके बीचका गुन दांडा. इरम वामन आदि अन्तमान, (न.) अन्तर+या+स्युर् । उिपना । देराने अन्तशिक-मासिकः, (पु.) अन्तर्वशे-से मिपुतः योग्य पदार्थके न देरा सबनेवाले स्थानमें टहरना । मुनि रक् । अन्त पुरा भया । जनानराध रिम धादिरोघरीर कोना. ररावाटी रवाल्या. अन्तर्मि(पु.) अन्तर++कि पासादन (हना)। अन्तख-बावर, (न.) अन्तः स्थित माम् । कोदारकी म्यवधान । (बीच में माना) सिना. पोशाक. अन्तर्निहित, (नि.) अन्त +नि+मा+छ । भीतर र अन्तर्यनी, (बी.) अन्तरस्थ असि मौः । अन्दर नि.गर्भनदी बी. अन्तर्भूत, (नि.) भन्तमये भूता, भूसा । दीरमै अन्तयां, (वि.)बन्तः अन्तरइभर भन्त परीक रहा। पीच गया. गणी धिरेन, भारिपार गे मना अन्तर्भेद. (पु.)भन्तः भेर सम्मिन् . भीतर पर ६.बरलेला अपने परों और एक भेटा मन्तवाले गांमधिदिनसिपी". रियाम - - गया.

अन्दागि, (४८) मन्तयाणि, (नि.) अन्तर्गता अन्तःकरणे स्थिता शान-अन्त्य, (पु.) अन्ते पर्यन्ने वमतीति । बन्दमा वाक्यान्मिका काणी यस 4.1न का हसथ । बहुतसे सवमे पीछे रहे । चाण्टाल । मोया (श्री.) मनाक वाक्योंको जाहारा पग्टित. वनु (त्रि.) मे नक्षत्रोंमें रेवती, रवि अन्तदी, (श्री.)पृथिव्या मयस्थितन्यात अन्तर्वेदीय । अक्षरोम इकार इत्यादि । एक प्रकारी हरिद्वारने ले प्रयाग (बटाहाबाद) तक शशस्थली और १००००००००००००००० प्रभावतं नाम प्रसिद्ध देश. अन्त्यज, (पु.) अन्तोऽयमः सन् जायते । अन्तहस्तिन्, (त्रि.) हनम्य अन्न भवनहमरा । शुद्र । क्योंकि वह ब्राह्मणादि चारोंवोंने नीर हायने लिया हुआ । जहां हाय पहुंच सके. हुआ। “रजक (कपदारंगनेहारा) यर्मचार। अन्तहांस, (पु.) अन्तः हामः यस व० । भीतर हमना नट, वरुट (नीचमेद) कवन (मच्छापा ओट न फुरे । गुमहास. भेद ( नीचभेद ) मित्र" ये सात अन्सन कहे = अन्तहित, (नि.) मन्न+या+6 गुम । दिपाहुआ. इस प्रकार स्मृतिमें कहेगये रजक आदि जो को अन्नईदयं, (म.) हृदयस अन्तः । हश्यका मध्य. उसन हुआ हो (त्रि.). सन्निन्ने)वासिन्,(पु.)अन्ते समीपे यस्तुंशीलं यस्य वय | अन्त्यजन्मन्, (पु.) अन्वं जन्म सभ्य । अष्ट गिन । गाम्या वा उर । जिमना पायही रहनेहा सभाव मामण, क्षत्रिय, वश्यके उम्पन होनी अनन्तर विचाटा । नियां पीपा पाग रहनेहारा (नि.). पाओंमे उपजा. अन्तगण्या, (स्त्री.) उपनं शय्याशी क्यप् । अन्नस्य | अन्त्यधनं, (न. ) अन्यं धनम् । व्याजकी आमीरी नामा, यतु] (त. मरनेरे लिये पृथिवीपर आखीरी धन. हेटग । मगात (क्योति यदो भूनिशयन कराया जाता अन्त्यलोपः, (पु.) अन्त्यः लोपः । आचीरी क्षय ना । आखीरी नारा. अलगद, (पु.) आनं-गुरगारे सीदति-गमयति । गुरुक गरि अन्त्यायमायिन, (पु.) "निपादकी श्री भयावगायी पुनरी उपम कती है यह मसान समतापगापिन, (3.) नगगनां मनं अवमातुं है" इस प्रकार मनुमे कहा गया मुरदारण tion, wifगनि दुर थ । नग के टोलान। "अन्न पग मरम्पति निशि- प्रगिद संकीर्णवर्ण । "बहाल, अपच, क्षमा वैदेहक, मागध, अयोग" ये सात अन्पारम ""रो लापका निधय करे। एक मुनि । "भनयमा अन्तुमार" जी अपनी इस प्रकार हिरासे म्मरण किये चारबालादि. Fri: याद । श्रीमी गा | अन्येष्टि, (श्री.) पटियांगः यन्+निन् । अन बारे अ. মূল বাহারি ইলিম তার। ৪ अग्निर(f.) मायने सामीप्यन-पन्न पम् पातवान विगतर दगा निमिन जो कि समय ३ रन् । जीपम रहे।मय नि। रम(पू.) (.) प्रारी पथ (द) अध, (न.) मायने देदो बन्यतेऽनेन प्रतिबन्ध अनित), 14-.) सो मन्यते यताद । नार देहमा बंधन । तरी पुगती नाग. मायान्नका"नी. आदुक, (.)अन्यते पप्यनेग्नेन अर करने अगिर(.) असे मी नीयत सार हम । हामी पादता वधन (और)। पत्री- *+Arrare. अन्( श्री.) अन्त क्यनेनन निक जान.भन्दै मन, मिन । धन्नने (वीर)। प्रिोपीय. srx. प, नमन.. म. म. मा अमर, टेमरियम आदिश:1. Hary (2.)। बदम अन्य, (f.) RAPatan Frerपभ RA few w744tini । (in) (..).

1 [अन्य, । मन्धम् (न.) मन्मपति । अन्धेरा। हकी भूल। भामारी | अन्धस्, (२.) भरते, असमुन् नम् ५५ । अम । भरिया ।- (पु.) । अन्धपति-निवणिं गच्छति । भान। बावल, इन्द्रिमोर पूरी भाा बलनेवाला संन्यासी । नष्ट इसके अन्धादि:-अहित, (पु.) भन्धः यहिः । अंधा साप । मिलने न मिलने उपयोगी राशीभेद । म.प्र.मि. शतके पिपरहित. समा, मोनि...निके समय भन्धे होते हैं. अधिका,(स्त्री) अन्धयति, अन्ध् न्युम् । रात । जूएका भेद। अन्धक, (दि.) अन्धकिन् । अन्धा ।-कः (पु.) एक देख सिमा नाम औषधी । मान्दुली नामी मेत्रका रोगभेद. का नाम जो थप और दितिका पुत्र है। धीशहरले हसे अन्धु, (पु.) अन्धक । कूप । सूआ. मारामा राही एक सहप भुजा और दो शहर नेत्र अन्धुल, (I.) अन्टलन् । शिरीषका वृक्ष. थे। मी समरदार असें रखकरभी अन्धेके समान फिरता था. | अन्ध, (पु.) म+र । देशभेद । यहाँ के लोग। जातिमेद. अन्धक, (पृ.) भन्धयति-अभ्युर । देशभेद । मुनि- अग्न, (न.) अनिति अनेन-अन्+तन्-अद्यते इति वा-भक भेद । यदुपंक्षीयोंमेंसे एक राजा । हिरण्याक्षका पुत्र । जिसके द्वारा जीता है या जो पाया जाता है। दलमेद । अंधेरा (न.). भात । गीला भन्म कथा अभ। चावल जी आदि कथा मप्र । पृथिवी (क्योंकि वहाँ अभ उपजता है इसलिये अन्धकारिपु. (3.) अन्धकासुरस रेपुः । अधरलके उसे अम कहते हैं). पात्रु। सिर । "अन्धकस्य तमसो रिपो” । मधेरैका शत्रु । अन्नकोष्ठक, (पु. ) अपस्य मीयादेः खल्पं शोष्टमित्र, सूर्य चन्द अमि. अल्पाय कन् । चावल भादिका छोटा कोटा। अमका अन्धकार, (पु. न.) अन्धं परोलिक उप ..। कोठा (युटी) सेशोभाने समति । प्रकाशवान होना। अंधेरा. अनगन्धि, (पु.) भनस्य गन्ध इव गन्धो यस्य य० । इनरा. अधिप, (पु.) अन्धयतीलमा चासो कर । भधेरा मासान्त । अत्रके गन्धके समान जिसका गन्ध हो।मति- राभा । 'अन्य क्षो यत्र'..। जहां अधेरा तूमा हो सार । पेटका रोग।"अमस गन्धो लेशो पत्र".। ऐमा नरम्मेद । "अन्धस्य टपभावस पर" हरिके थोडे अमके भोजनवाला (नि.). नाश होनेका मानो नआ है अर्थात् मोह (बह सम्पूर्ण } अनितलं, (न. ) ममं जठं च । स. ८ । अन्न और जल । इटिक नाशकी कान है). अग्धतमस्,(न.अन्धयति, अन्ध+अच्, शाम्यतिमनेनेति, तम् करणे अनि वर्मा अक्षेरा " - अनदासः, (५०) भन्नेन पालितो दामः । शाक• त । अन्न- भाषपर काम करनेवाला नौकर. सामितं यत्र" ...नरकविशेष । सांस्यशास्त्र में प्रसिद्ध भय विशेषका विषयमभिनिवेश, अन्नप्रासन, (न.) प्राट विधानेन प्रथममाशन प्रानं इत..छठेवा आठ महीने के आदिमें शारीविसे अन्धतामिनः-सं, (पु.न.) पूरा पारा । गाड अधेय। विशेषतः भारमाधोदने मष्ट होनेपर "मैं ही नष्ट बालम आदिको पहिले अन सिलाना. हुआ" इस प्रकारय महान । भारी अंधकारके पादेवाला। अनमय, (पु.) भन्नस विकारः, अम+मिकारा मयद। २० नरकर्मिसे दूसरा जो परस्त्रीगामिओं वा हत्याराको स्थूल शरीर (यह भनहीका पिटार है) । श्रमका विचार मिलता है. (त्रि.)। "अपमयं हि साम्य ! मनः" इति भुतिः. अधमूपिका, (बी.) अन्धं भावं मुष्णाति । मुष्+ अनधिकार, (5.) vिar+पम् (१० । मनका पिकार । धुन् यः । देवताहका रस (इसका सेवन करनेसे अधों लोडू और मांस आदिके पकनेसे उपजा अन्तिम धातुः । कीगी भरि सुल जाती है, मह बंधन में प्रगिर है). भाधमूपिका, (त्री.) अन्ध-टाभावं मुख्याति, मुष- अमादा (नि.) म अत्ति । अन्न सानेवाला । दीमामि । ण्युत् । एक प्रकारका पक्ष या सूण पास जिसका नाम भटीती पटरामिवाला. "देवताड" है इसके सेवनसे अधेडी भावं सुलजाती हैं. अनासन, (न.) अमस विधानेनाशनम् । विधिसे अमका अग्धवर्मन्, (पु.) भन्ध-पूर्यप्राशराहित्यात् धर्म पिलाना अप्रप्राशनके अर्थने. यत्र । वायुका सातको पादा वा लोक जहाँ सूर्यका प्रबार | अन्य, (त्रि.) अन्-भाया• म नि । समान। यह नहीं होता. सानपान. - . अन्याय, (३.) मनग्य पार पkिer ययममें शाrrs बन्चनम,] (५०) अन्यतम, (नि.) बहूनां मध्ये निधारिदै एकम्मिन् । अन्योदय, (पु.) अन्यम्मिन् समवृमिने दरे:- बहुनान एक. उदरस्यन् । जो बानी मानाने मिन्न उदरने पर अन्यतर, (त्रि.)द्वयोर्मध्ये निधारित एलिन् । दोनोममें हो । पिना एक और माता भिन्न हो या प्रदेश नं " अन्योदयम् मंमृष्टिः" इति स्मृतिः। बदी में अन्यतस्त्यः, (पु.) अन्यतो मवः लम् । कुछ और ही यहिन (श्री. ) जो कोई दूसरे के पेटने जात हो ( होगया । शत्रु विस्त. इमी दिये दायभागटीकाइस वचन का माईके पुत्र आदिकोभी " अन्योदय" पदम अन्यत्र, (अथ.) अन्यायल् । विना । व्यतिरेक. होनने ग्रहण किया है. अन्यया, (बश्य) यन्य प्रकाराय याच् । बिना । दूसरी दरह ।छादुर. अन्योन्य, (त्रि.) अन्य+कमव्यतिहार (N अन्ययारादिन, (नि.)मन्वया वाइन् ।औरही प्रय- फियाकरणे) हिन्वं पूर्व मुश्च । परम्पर । अनन्त से बोलट है। दा. " द्विल्य किये जानारनी सर्वनामता होती है" - अन्यथावृत्ति, (वि.) अन्यथा वृत्तिः सम्म । यदलहुए अन्योन्यस्न इत्यादि ममझना । "सलमायने में मकर निमोहुए गपालबाटा. एछ यलदार (न०)" वह साहिलदपंगके 1. दमें देखना चाहिये. अन्ययामिति (छ.) यय करता दिनापि निशि गिक कारण न होनेरी पारीदि हो सके। जैसे अन्योन्यामाय, (१०) अन्योन्यस्मिन् अन्योन्यास - "पट" उपमिले गमय गधे रहनेपरमी टने व । आपसमें एक सारेका न होना । घर मिनी पटानिकी निदि हो मती पटका वनेही पट घटा सदा अमाव है" हैन पर पानी मीनार पा यना सदा है गांमात्र ऐसा नाद होता क्योंकि घटमें भूतदया दिपती शिदिने गधा अन्य पानिद मनाना चा होनेटरमी भूतलपर पटका होना किसी समर दी हो पर काश उपादान हो. है, दीमे यह अन्योन्याभत्र भित्र है. •) मन्दस्मिन् काले दा । उन्नर | अन्योन्याश्रय, (Ft. ) परं अन्योन्यं अपनी श्री+अच् । जो एक दूसरेका अश्रय कता है। पर जापा, (4.) अन्य पूर्वी यमः। द्विा । एक मापेक्ष । न्यायमन में तविशेष । (पु.) बहाने मार दूर्ग पर महगई मो। "य. " ने एक साल ये दसरे जानन भरे। र बर"। "मन पूर्ण पब"। एक श्री और नादिकी उपनिर यि पहिले बानी परे। मारगर कदम पुरर (पु.). यांन दोनों पासर मापेक्ष है। जब दोनों म अम्बर. (3.) भान विन्दे, मन का। अप्रय हो गये तो मापेक्षपेक्षियनिमिता मर ने पुरवार, प्रगा हुआ ( यह दौर). अन्ती (MR.) दुर्ग मर । भन्या. अन्यक्ष, (पि.) अनुगतं पददि-अ... अन्याय (4.) अन्ना अब अitent प्रवक्ष अनुराद। पीया काना। ImriST वर्ग माह । दृषि" भामरे निकट (आय.) अन्यय, (वि.)अनुशन् । पीछा कामद अन्य(.) रा। मगर, 4.माग्य, वाटरको प्रत्यय, (पृ.) भनु अप । वंश। पर irrr-1..साधन अगम्या पोका यादता मम्बाप । TE अनुमानना. ...INR गा.पाय। अन्द..) -मसार रमर Area मदमे मामी mrs. । अदासम्म - चपचीन, [प, न्ययस्यतिरेफिन् , (वि.) माययतिरेगी मोऽम्म । अन्याधेय, (न.) अनु+आ+या+यत् । लोधनविशेष । परोलिरनेहरा विशेष । (जिसमें माय विवाह के पीछे मातापितासे तथा भकलसे एवं भालगे और मीरेक दोनों इन रा) "जंग पहियो निक श्रीको जो कुछ मिलाई। पीछे दीगई बसु (त्रि.). परने में धस हेतु है, यह पहिवाणे महानग ( पावशात्य) अन्याराध, (नि.) अनु+आ+र+क । पीछे पृषकी भारिम, और बाके अभवाले अल आदिमें भागभड मोर पक्ष रिया गया. पगे घटिके राज्य सत्ययव्याप्त और व्यतिरेषभ्याप्त है" आग्यारम्भ,भ्या आ० प्रारम्भ करना । शुरू करना । राना. इस प्रकार म्पायमतमें प्रनित है. अन्यारह भा. प. साथ चाना। विशेषतः चितापर. न्वयव्यामि, (बी.) अन्वयेन व्यानियापन नियततया अन्यारोहणं, (न.) अनु+मा+रह+भन । सीका पति के स्थितिः। अन्यपके साथ नियममें रहना । जहाँ दारीर के साथ चितापर चढ़ना. धूम होगा पदो पर होगा इस प्रकारकी चाप्ति. अन्याम्, अदाआ.। पाम या पीछे बैठना. न्यः, (नि.) अनुगत. अर्थ-प्रा. स.। जिसका अर्थ | अन्यासन, (न.) अनुभआरकन्युट् । पीछे बैठकर रेया स्पष्ट हो । यथार्थ । अपांनुसारी. परना । दुरा । पीछे सोयना । “आधारे ल्युटि" शिल्प- न्यपसर्ग, (पु.) अनु अवस्य पम् । " जैसा चाहते गृह ( पारपाना ) हो परो" इस प्रकारकी आस. अन्याहार्य, (न.) अनु व्याप्ती, भारि मासि आहियते बग्यपाय, (पु.) अन्वयम्यते स्परपारध्यते-अनु+ भनु+मा+ह कर्मणि ध्यत् । प्रतिमास करने योग्य अमा- अव+जय+पम् । दारि अन् वा । वंदा । सन्तान. वास्साके दिन विधान कियागया बाद। 'पितृणां नन्धरका, (त्री.) अनुगना भट-अला. स. पीप मासिक प्राध अन्वहाय विदुर्बुधाः" इति स्मृतिः। माघ-पाल्गुन-और साभिन के प्रष्णपक्षी नरमीको सामिक मासिक धारा याची दक्षिणा. होवाधार अन्याहार्यपचन, (पु.) अन्वाहार्य प्रासान पच्यते- न्यह. (अव्य.) अधिक्षहि । घोप्यायऽव्ययीभावः भन्। नैन-पय्वरणे स्युद। जिसके द्वारा प्रासका अन्न पकाया प्रतिदिन. जाता है। दक्षिणामि । ऋग्वेदकी विधिसे स्थापित अमि. बन्यायानं, (न.) आस्याने अनुगतम् । पहिले वह अनु-र-अन्त्रि, सदा०प० । अनुसरण करना । पीछे जाना । हुए राक्सिर वर्णन. भाना। प्राप्त करना. वन्याचय, (पु.) एक्स प्राधान्यात् अन्य आचीयते अन्धि, गुदा० ५० । चाहना । तालाश करा. पीयवे यत्र-अनु+आ+विक्षाधारे अन् । एक्री प्रधान- तासे जदा दूगरा जलाया जाता है। यही निदरी अन्वीक्षा, (सी.) अनु थवणात् अनु शा धुतार्थ जहा अनोपयकी सिदिभी समझी जाय। जगे भिक्षाके । युक्तायुक्तपोलोचना-अनुई भारे अ । गुनेगये लिये जा यदि गाँको देको त उमे से थाना, यहा भिक्षा- अर्थका युक्तायुध विचार करना। वेदवाश्य मुके सन- नर उसके अर्थका विचार करना। इसीदिये हम कामको हीमें उऐश (सारय ) है गमनमें नहिं, गरी सिदिके अनन्तर गोका साना अनुदिटमी तापसागे निर्दिष्ट पूरा करनेहारी विद्यावा नाम जान्वीक्षिकी बहा जाता है. हुआ है। सयुक । मिलाहुआ। जहाँ मुरयके साथ गोगमी / अन्यीप, (नि.) अनुगता+आपो यत्र । पानीके पास । मिला रहे. जलके पास उदाहुभा. भन्याजे, (अव्य. ) भन्दाजयति भनेन । अनु+आ+जि। अन्वृचम् , (अन्य ) ऋचं मनुगतम् । एक मन्त्र वा श्लो. दुलकी सहायता करना. के धनन्तर मरा. अन्यादेश, (पु.) अनु+आ+दिग्छन् । पूर्वोत्तर | अन्येपण, (न• ) अनुदभावे स्युद । अनुसन्धान ! गदे. किधि कार्यान्तर विधातुं पुनरपदेशे । पहिले एक काम पण । तहकीकात।ना । यहाँ अनुसन्धान सन्दरी यह करनेपर कुछ दूसरासमरनेका शिर उपदेश करना। समाना कि कोई वस्तु व्यवधान आदिसे न दिगती हो जैसा इसने प्यावरण तो पालिया भर इसे न्याय पटाइये उपके जानेका पन करना ।वामा । वह अन्वेषण इस प्रकार म्पायवाटके लिये फिर उपदेश है। कहेगयेवो (स्त्री.) हलो अर्थमें. फिर पहना । अनुवाद अप, (सी.) दु. भारिप हसः । अल । पानी। अन्याधिः, (पु.) अनु-पधात् आधीयतेचा । जमा (सका पावन होना है). मव । "मेरे कहनेपर फलानेगे फलानी या देदे" अप, (प.) पाति-पास । रियोग । रिसर । उ- इस प्रसर जमानत देनेवाला. स्टा । निदान । मानन्द । वजन । चोरी करना.

निर पुत्र. अपत्यदा, (श्री.)यपत्यं तदेवं गर्भ ददाति । गर्भ हाग औषय। इसके सेवन करनेसे गर्म हो गयी। अपरमन,] अपक्रर्मन्, (न.) अपकृष्टकर्म प्रा. । दुष्ट आचरण । अपचायित, (नि.) थप+या+नि+म नि! बुरा अमल करना य० । दुष्ट आचरण करनेहारा (नि.). पूजागया. अपकर्ष, (पु.) अप++माये घर । विगाडना । अपने अपचार, (पु.) अप+र+पम् । अहित पर! कर्तव्यकालमे पहिलेही करना. युराई करना प्रा० ब० । युग आचार । युग it अपकरणम्, (न०) थप++अन । युरा व्यवहार हाल इतके बिना न हो (नि.). करना । हानि नुकसान पहुंचाना. अपचिन, (नि.) अप+चाय+न । चायः वित अपकामः, (पु.) अपगतः कामः कामस्य अमावो वा। पूजागया। नि+नाहान, जुगुप्मा । विद्वेष । घृणा । वर। किसी प्यारी वस्नुमान अपचिति, (श्री.) चाय+चिन्-प्राचिन होना । निरिच्छ, पूजा । विचिन् । हानि । नुकमान । सासय. अपकार, (पु० ) अप++घम् । अनिष्टोत्पादन । बुराई अपची, (पु.) भाटं पय्यने अगा, पब्-कर्म करना । वैर । दुश्मनी. बन्-गोरा । एक व्याधि जिसमें गलेय मात्र अपकारगिर, (स्त्री.) अपकारेण द्वेषेण गीर्यते-ग+किप् । फूल जाता है. भन्मनवाक्य । तिरस्कारका वचन । मिडकना. अपच्यु, वा. या. गिर जाना । चले जाना । मदन्छ। अपह, तना. १०। युराई करना । रोचना । रा ले जाना। नाग होना । मग्ना. घसीटना. अपच्छाय, (नि.) अपगता छाया यम्मात् । अवाहन । अपर, तु.प.बिसरना । पानीको टछलना. विनायेवाला । युरीययावाला. अपष्टष्ट, (नि.) यप+कृष्तक । अयम । नीच । हीन । अपजानः, (पु.) अपकृष्टः जातः । गुणोंमें माटानिट अपने ममयमे प्रथम किया गया. अपजि, भ्वा०प० । हराना । जीतना. अपक्रम, (पु.) अपमृत्य कमो गतिः-यम् पय्-अवृद्धिः । अपमा, प्रया• • । मुकर जाना । निर का पलायन । भागना. छिपाना. अपक्रिया,(सी.) अप++मावेश । द्रोह । वर । अपकार. | अपचीकृतम्, (न.) अपच पच कृतम् न..! अपक्रोश, (पु.) अप+फु घन् । निन्दा करना । " टपक्रोश" इसी अर्थमें. साधारण मातिक पदार्थ जो पांच २ स्थूल पहाई यनाया गया थयात् जो पांचौ पच्चीस नहीं किया । (त्रि.) नानि पो यस्य य० । पक्षहीन । विन- पांच मूदमभूत । पंचतन्मात्रा छन्दादि. पर। जो उखनहीं सता. अपटान्तर, (नि.) पटेन तिरम्करिष्या अन्दरं च । अपक्षेपण, (न०) अप+सिपमन्युट । नीचे फेंकना । नीचे न० त०। जहां पडदेका मामला नहीं । अव्यवहे । स्थानक साय मंयोग होनेका कारण कियाविशेष। पीचरहिन । मुदाहुआ। थामक । मंसक । फम । "अवशेषण" मी यर्थमें. अपगत, (दि. ) थप गम्छ । मरगया । भागगया। अपटी, (श्री. ) अल्पः पटः पटी । न त । कनाटगन्ने गाहुआ। "अपदान्तर" इसी अर्थमें होता है. गया वह गया. प्रसिद्ध कपडेका पडदा. अपगम्, था.. चळे जाना 1 माग जाना. अपटु, (नि.) पक्षान..। रोगी। चतुराईरहित । अपगरः, (पु.) या-निन्दाय गृ- भाये थम् । निन्दा. काम न करमहारा. अपचन, (I. ) Tr+हन्+अप् पनादेशः । देह। शरीरका | अपण्य, (नि.) न पणनीयः अविक्रय । न वचने दर | अपतर्पण, (न. ) अप+तृप्त्युत् । रोग होटेही कुछ अपघात, (पु.)महिनापम् । रीतरह मारना । माना। तृप्त न होना. पुरम मरना. अपत्य (न.) म पनि पितरोऽनेन पत्करणे यत्।" अपच:, (पु.) पर्यु थारः। न पध गम्नकासा । जो त..पुत्र वा कन्याम्पसन्तान. अग्ने यि नहीं पाता । वुण रमोइया । निन्दायमें. अपयय, (पु.) माविम्भ हानि । मुरगान । गर्म देनारी पिया धादि. पाया, म्या ५०। प्रम्यान करना । एकमत होना । घिरद अपत्य, (पु.) अपस्यय शत्रुः ६ त० । ' जगमष राय याला वचार । थवारीत, वंट. अपक्ष, खुरयासचं.

-- -- - । [अपरस्पर (पु.)न पिछने पत्रमस्य । आर ( इसका पत्र | अपमार, मा. भा. भाषते । अभापिटा पभारे । गाली नहोला) निकालना। धुरा कहना. प, (वि.) सपगला त्रासमा यस्मात् ५५.। अपदंश, (म.) अपन+पञ्। गिरना । अपभ्रस्य- वाहीन । बेशरम. ते अधर्महेतुतया पलतेऽनेन" करणे पञ् । जिसके द्वारा प, भ्या. मा. चित होना । लब्बासे शिर मीये निरभाता है। साधुसन्दो मिन अपशब्द । यज्ञादिमें उसके ना टूयाके साथ. यहनेमे पाप उत्सम होताहै. पिष्णु, (हि. अप++न् । मभावमे अपम, (नि.) अपार्टी मीयते मा-बाहुलकात-क । अपकर्ष मावाला. मुटाईपनमे मारा जाता है। Vel. बहुत दरका पा बहुत 1, (म.)ने पन्या नात. मा अन् । कुधप। पुरा- पुराना. गा। "भत्र वा अचोऽभावे अपयिन् इलपि". -न्य (नि.) "पभोऽभाव." अपमान, (न) अप+मि-माझ्या भावे ल्युट । अवज्ञा । । मार्गान होना निरादर । मेदसती य, (वि.) पाय (रोगिभोजने ) हितं, पपिन्+यन् | अपमित्यर, (न• ) अपमितिरपमानः तेन अकं दु.स रोगीको भोजन न रने योग्य । रीमार ररनेहारी. यत्र । जहाँ अपमानसे दुःस होताद । अपमानका कारण दुःरादेनेहारा ऋण ( उधार ) ( कर्जा)। उसके लेने में --पाद, (नि.)-परी-श्री. न परते-मायने-पद्+ निधय उत्तमर्ण ( निस्से उधार लियामाताहै ) के समीप निरादरसे दुःरा होता. दान, (न.) अपदिप्त्युत् । शोधन । साफ करना । करणे स्युद"पटायाम । “अवदान"सी भी होता है. अपमृत्यु, (पु.) अपकृष्टो मृत्युः प्रा. स. । मरनेके पारण रोग आदिके विनाही आपही शन चलाकर पा देश, उदा. प.। निर्देश करना । सूरन करना। दुसरेके द्वारा मरना. तलाना । बहाना करना । दिशति। दिदेशभदिसत. देश, (न.) दिसयोमध्ये अप+दिशा । भन्यमीभाव । अपयान, ( न• ) अपया+भावे ल्युट् । निकलगाना । शाओंग पीचरोणनामले प्रविन. अपर, (न• ) म पूर्यते यत, पृ-अपादाने+अप् न. स.। दिनम्, (अन्य ) दिसयोः मध्ये--अव्यय । दो दिशा हाथीका पिछला भाग । "न पृणाति सन्तोपयति-पृ+अच् बोके वीचमै । मध्य टोक. न त "। शत्रु । मिग्न (त्रि.) पधिम दिशा । ऋग्वे. देसरा, (पु.) अपकदिशक्यम् । लक्ष्य । निशान । ह दादि विद्या (स्त्री.). को थाप्छादन करना । एउ। बहाना । निमित्त । स्थान. अपरक्त, (नि.) अप+र+कतरि क । विरक्त । जो देशिन, (नि.) अपदिशति-पाति । पयर टग । अनुकूल न हो. अपनेको बागारमें छिपाकर चलनेवाला. अपरति, (स्त्री.)अपरम्भापेफिन् । विराग । हरजाना. ध्ये, भा.प.। प्यायति । दायौ। किसी धुरा रापाल | अपरन, (सम्य.) अपर+प्रल । परलोप में । पीछे । रना । किसीको मनसे शाप देना. दूसरे समय. घंसज, (पु.) अपयस्यतेऽनेन अपयंसः वर्णानां | अपात्य, (न.) अपरस्य भावकत्व । अपरनामी न्याय- मेनरूपनामम्पादक या संकरतम्मात् आयवे-जन्स मतमें सामान्यका भेद (जो थोडे देशमें रहे)। यह 16- मिमयों के संगमसे उत्पम हुआ वीर्ण वर्ण । दो प्रकारका बालिक, और देशिक, जैसे "मापसे पोप गहे हुए अक्षरोंसे बना एक भक्षर विगाकर निकला. अपरा" यह कालिक, भौर “पउनासे काशी अपरा" यस्त, (नि.) अस+क। निन्दित । दि. यह देशिक अपराव है । शेष. नागया । नाश कियागया. अपरपक्ष, (पु.) अपरः शेषः पक्षाकर्म गणपक्ष। नयन, (म.) अपनी+भावे स्युत् । दूर करना । जातोराते. अपररात्र, (पु.) अपरे रावे. एक. द. 2 । शनि- नस, (त्रि.) अपगता-पूरीभूला मानिया यम्प । नसादेव शेष यता पहिस्साएतम पिण्यापार. जेसम माक गया । नाक विना. अपरस्पर, (न.) अपरंप पर च-, पूर्वपदे भूष । नोदन, (न.) अपस्नु भावे स्युर । दूर सेजाना। विलासातला किसानरन्तर्य । चमरा बारी रहना। नोवासना. लगातार काम करना । वह और बह । मापसमे भागना. उण्डन करना.

रोक देना । फाट देना सेंचना । लेजाना। खतम या-मो. . अगाय (हिमाय )में प्रतिर अपराजित,] ( ५४ ) अपराजित, (पु.) पराजि+क-न. रा. | शित। अपलार, (T. ) TREET पर विष्णु । एक अपि । न जीताहुआ (प्रि०) दुवा । एक गोपी गोगी राग लताका नाम । दुर्गा कालिका (मुहाँजना )। जयन्ती. विजाना। प्रेम नाका, वृक्ष । अरानाक्ष । शनिनीयक्ष (बी.), अपयन, भामा गती देना। अपराद्धपरक, (पु.) थपरादो (लक्ष्यान् च्युनः ) भिकाशित पृपरको (याणो) यस्य अपराध+य | जिगर वाण लक्ष्य (निशाने ) से गिरगया हो। निगाना - अपया, भा.प.नाना । जनावति। उम्। करनेहारा धनुषधारी. अगाशीत. अपराध, (पु.) अपराध्+भाचे पम् । अकार्यादि | अपयरफ, (न.) भ#r+Tन' मा युन् । इस फरणरूपदोप । पातक । पाप । गुनाह । चुक । मुल. गृह कमरा नंगा पर, अपरान्त, (पु.) अपरम्या अन्तः । पात्रासदेशमेद। अपवर्ग, (पु.) अ+Tण+भाने पत्र । दन । मुष्टि । पश्चिमदेशी । पश्चिमदेशका वासी (नि.). यूरापन. अपराद, (पु.) अपरं अहः । एक० त० टन् । अनादेगः । अपन, (न• ) आत्मा स्युन् । दान । णवं च। विधाविभक्तदिनस्य तृतीये भागे । दिनका मोक्ष । निर्जन । अपने निपा दूसरेका न होना. तीसरा भाग । दिनका शेषभाग. अपयनंन, (न. ) अरणी+मार ल्युट्रं अपरिग्रह, (पु.) परि+यह+अप-अभावा न.त.। टेदा करना । .असंग्रह । पास कुछ न रसना । स्वीकार न करना । माजा दोनों को किसी एक नुस्य व "नास्ति कन्याकोपीनायतिरिक्तः परिग्रहो यम्य"14. मंक्षिप्त करना । अकरना. गोदी और लंगोटी आदिके विना जिसके पास और अपवाद, अदभावे पञ् । निन्दा । अदा।। कुछ नहीं । संन्यासी । जो कुछ भी स्वीकार नहीं বিশাল। বিলিনি যথে। নিৰ বিৰু करता (त्रि.). अपरिच्छिन्न, (त्रि०) परि+छिद्+क्त न० त० । इयत्ता- वेदान्नशानमें प्रसिद्ध मीपीमें प्रतीतहुई चारीक पीही सम्पमै लाम करना । रहित । असीम । जो मापा न जाय । वेहद. अपरिहार्य, (त्रि.) परि+ह ण्यन् न त । असननीय. होजानेपर जैसी की नमी वनुका मान ) । नेद । मित्र विरोध । बाम कायदह अपरेयुस, (अव्य०) अपरस्मिनहनि । अप+एद्युम् । दूसरा दिन । परसों. अपवारण, (न. ) अप++प्पिय् ल्युट । अन्तरं छिरना । व्यवधान । पडदा अपरोक्ष, (न. ) परतः ( अवीतः ) वक्ष्या (इन्द्रियाणा) अपवित, (नि.) अपगता विना यस्मिन् यथाट न भवति पर+अशि++समर्धसन्टच्-नि मुट् । विषयी- न्द्रियसमिकर्षजन्ये प्रत्यक्षरूपे ज्ञाने । विषय और निर्विन । विनरूकावट । न छेडा गया. इन्द्रियके व्यापारसे उपजा प्रत्यक्षरूप ज्ञान । सामने । | अपविद्ध, (त्रि.) अपव्ययक्ति । लक्त । "अआदचि सद्विपये" (त्रि.) जो मामनेहो. प्रत्याख्यात । तिरस्कार कियागया । अपर्णा, (श्री.)न पणांन्यपि भोजनं यस्याः । पत्तेसा. हुआ): "माता पिता दोनोंने किम्वा दोनॉमने । नामी जिसने छोडदिया । हिमालयी कन्या । ("जब एकने जिसे छोट दिया, और कोई दूसरा उने । यह तपस्या निरत भी तो इसने पत्तोंतक खानेका परि- यनाले ऐमा पुत्र अपविद्ध कहा जाता है"। बारह पर माग किया, इसीसे यह नाम प्रसिद्ध हुआ” ) । पार्वती । अपरिया, (ना.) अपगर्न विपं यम्याः ३० । विरले पसोंसे शून्य (नि.). अपर्यान, (त्रि.) परि+आप्क न. त• । असमर्थ । दूर हो जाय । विपहारिणी ( विपनिगलनेहारी ) असम्पूर्ण । शक्तिरहित । जो पूरा न हो. अप, स्वा० उभ० । वृणोति । ते । ववार । वो । अपर्यत्, (वि.) नाति पर्व यस्मिन् दिनै । जिस दिन सूर्य अपन, स्था० आ० । अप हटाना । नाशका और चन्द्रमाका मेट न हो। विनमेल । पर्वके बिना दिन भयां जो यथार्थ समय नहीं । बुरा वक्ष वा युरी बहार. अपवृत्, भ्वा० आ० । पीछे लौटना । लेजाना । थपट, बा..यति । यामलापीत् । निषेध करना । चल देना। जुदा होना । अपवनंते । वा३ ।। करना । नामंजूर करना. निय. छोडदिर प्रतिक्षित पुत्रोंमेंसे एक । मुनवनह. ।

भारत, - । अपवृत्त, (पु.) भा+in+ । परामुखीभून। सीको अपसार, (पु.) अगतं मर () र म माहारा । जिमला आचरण विगः गया हो. ५। रिम्ने म्मरण (यादगिर्ग ) - अपव्यप, दिया. प. ।बुरी तरहगे रिसीके चित्तको नाममे दि रोगका मेर। (उनके और उसमें पानाधना । घर विध्यति । रियाध. टमी गमय सपूर्ण विक िसरपर), अपव्यय, (पु.) भारः-मर्यादी उपाय नाययः। अपहन, अम..नि पन । भरपोदाराना मर्यादा वायदाको लोप पर किया गया नय । । तारन वरना । मग कायमरन लेन. बापिर पर्य। एसे जियादा पर्य. अपहर, भा..हमति । । मार। अपशप (पु.) भzz पद श..। मंत्रता (मगाल) पाग. भिन्न शब्द । ओ पद साफ न हो। विगाया गन्द। अपहन, (नि.) आगामी सो मिति "संगत पादही सचिनी मिला, भूल, मालम्प हटानक रिये प चले। मरण (प) Per भागि भारही मारो बोरेगये भासद पहलाने" निकालागया. यह दक्षिारिकाप है। (नदी भन्यया | अपहार, (पु.) पम् । मि (पान) उचारण करनेमे भगा रोगा)भारद पोरी टियाना एटापErr गर्च, अपोक (पु.) सरगना बोबो यम्मान २० जिसे कोक र हुमा । अशोका पक्ष । शोदरदिन । (त्रि.). अपदा, १.५. re-ritter लोना अपष्टु, (f.) स्था+पु-उणा• विएस । परिर्पलापा. अपम्, (न.) भाप्-भगुन-सम्पथ । भापः कांस्पाया अपर..TIrani हमो मुर पका म्यान उणा..v-अप.वार्य । साना टाTER पामा किया। पवित्रामवालियापाम, अपस्य, (पु.) pariwari अपमर (त्रि.) भर एवं सीदति- राम । पर भी ferrer (maintaertime भीमविरोए । ब्राह्मण बरंगे क्षत्रिय, य, . 'अपर, बा•• forry for artner प्यार भटपमनान । ममीय. 4) बारे । अपन, (म.) मरा+ युरना। दोना। अपाति, (-) want trrr. पोरन. मधीलrthi Tamutar बार. अपपई, (पु.) अप+गर । नाथा । furn नाथ, (I.JUr.aur.ameter "भार पम"रना. भपाय, (I.) भगत सम्म का। एशिय माप . अनिधि, (पु.) farin Er. rrrr. Ite पदिनी । पितृतीयं । पिरती (म.) अपांपति.(पु.mr.me.IRTrum अपपिसातः, (.) भात Free In Frera! अपिल (.)..... In Freोपी nि eath -Orthrotret rrhग) परमा. अपर,... सति ।। रे ।' अार.{.).mrrit.rnmr. artneri र अपार....orrfare ...बरे सा mar ना-NEPALI भरार. (3.) arela (ne fre) अपारद ) wiring nari Frwaftaar REET(Im) m(rt)... ... RT Re , orm (Pretter thr अपार (1.) nirri" irrigmRAr.

अभ्रकप(त्रि.) यनं कपनि पहिलेदार मुनागमय । दादलको हनेकान्य । बदर न"। वे मरको साट वरना सम्युलन, (.) +Trterयुर । अादर अनेर, (पु.) पटना+पत्र न." न्यप्या मुनावि रटनमें अन्य (दि.) अम्,रोगी होना (मुग• रनव.मा. ht Fमन थिटरगतिशम, (7.)भाषिन् धादिः । दना गराधामयनि-अमयते। मेष चाटनेबारा । बादलको नवरा मन्यामान, " अन्याख्यान " अनि++TER अभ्याकाशिन, (न.) अभि+आ+मास 1 झूटा | अभ्युदय, अमिट दा+अच् । मन सबाट । इटा दावा । ऐसे प्रगट करना । प्रगट होना 1 वृद्धि | चूहा मदिर- मी डमी मर्यमें होता है. मुंभारके निमिन कियागया अद् - अभ्यागत, (पु.) अमि+आमा+छ। परमें याया जाता है । द्धिके लिये प्राच. हुआ अतिथि । जो पहिले नहिं देखागया। सामने लाया अम्युदिन, (पु. ) अमित.-मनः । कोई हो (त्रि.). विहितं कर्म यम्मान् । निम्मे .. अभ्यागम, (पु.) अभि आ गम्+मात्र पन् अधिः । हुआ हो । सूर्योदयकालमें निद्रा के काम- विरोध । पास । सामने आना । भोग स्वीकार । फलका के रचित कार्य नहिं किया ऐसा छावनी संबंध । “ साधारे पन्" लाई । समर. अभ्युगम् , अभिटन्गम् न्वा०प० ।- अभ्यागारिक, (पु.) सभ्यागारे तहतकमणि व्याहतः पलना। गच्छति । जगाम । अगनद- टन् । परके व्यापार पुरादिक पालन करने में व्याकुल | अभ्युद्यन, (नि.) अभिनन्दन (घबरायागुवा). आपहुंचा फल आदि । दात । समुद्रा अन्यादा-आनि-आ-दा, उ• •। टेना । पटना । सभ्युपगम, (पु. पहिरना नाला अादि । एक घोउ चुकनेपर बोलना, टेना । पास यागया । सुनार भागमा सम्यादान, (न.) अभि+आ+दा भावे ल्युट् । मानने युक्ति । दलील. होकर देग । मरम्न (E) करना. अभ्युपपत्ति, (स्त्री.) अभि+पद पर अम्यामई, (७०)अभि+मा+मृद साधारे पन् । सद्राम । निवारण कर अमीष्टको पूरा करनेहारा बना बंग "मी पम्" निचोदना. देवरने सन्तानका उत्पन्न करवाना । हन्नर, सम्परा, (पु.) अभि+मग याप्तकरणे पन् । सब- अम्युपाय, (पु.) सनि+उपभइन् अन् ।' की समीर. मंजूर । अच्छा । टपाय. सन्याम,(पु.)नियम-क्षेपेनसनी पम् । पार वार अम्यूढ, (नि.) अभि+बहन्छ । निकटका गाना । पुराग मुन्ना । गुरु कहए या अम्यूह, (पु. ) अनिट+अन् । तर कोरोग रिकार करना । वार बार कहना । न अम्यूह, स्वा. ३० । ऊपरसे बन्द इग्गा (प), नितीन नगे जो अन्नारत (हिरा) अनुमान करना । ऊहति-ते । महान र गरीयाना प्रवाह प्यानादिका वार नाहीत् । आहिट. परमाणः । ही बादमें बार बार टगना । दूसरा और अम्र, जाना । म्यादि पर०मक मेट् । अत्री मीनने देना. अन्यामादन, (न) निमग+शिव्स्युट । ग्रन्न ममेरो पहित करना। गबुरे गामने आना. मादार,(.) यनिमय । थाहार । भोजन । अनंलिङ्क, (त्रि.) अभं लेटि-स्प, इन्। मग पटेना. सम्युच्य, (.) थनि विभिन् । अन्युदय । अम्रि, (प्रो.) यति मलं यस्मद सामना मनः।।दादी बनानुभा वृक्षाल। (अत्री इसी अने) मोमिन ने दाग । यदर कर मोगा(अ)सना । टान, अन्दर , न.प. सौर सिट - आनत्र. बन्दु-, भ. प.दिर अगर, () गाग्नि मार्ग प्रो. रंग । १३.vel दिन (fa.) .

(पि.)मागि मन पम्य+मनम्बरम मन-अमृत(न.) ग+न..मेर. (पु.)-7-11 गुमाघ करना।जाम- 12414 साना (वि.) (3.) हरगन्त्री बन्धु मारनेदाटात (12.)-नापस लिm (ली.)बEArrentic. पीहे मला! 12.10.2R सपा मा.3.1ATEFT 112. + अन ग...मोदी अमेध(.)..Pan"I". (त्रि.) मरम.) पण । (पी.) अमरवा घाल1(Ritter प्रि.) न+मन+लान अनुभव किया गया । न अमित्र, (पु.) अम्भोग होना । ।त. दिया गयान जाना गया. अमुत्र, (अन्य ) अदगावरापाले एम. न.) अमति अनं अत्र" भम् भोगने । थापारे अमन, (नि.) मूर्तिमम् । न• नादान र" भोजनका पात्र । वर्नन । हथियार, आदि निरापरामरimilar ल बिन गयाल । युटिशीन । बेपद हुआ चापीयूर । जल । पौ। अपरियार पु.) गपचाप । न..देवता। अमर. रिश परदपत्र । धनमाया(नि.) पदा। मी योषका पनाने । हीरा । जो अप्दी मरण । (बी.) तुलसी। (म.): गाता । पद (प) गमुष्ट । जो अमृतजटा, (पु.)भगना ARRE नधि.). अगृतीधिनि, (पु.) अमृत ants. ज, (पु.) अमरपूर जि. नार..। गिरिको पयाय गमन frmire पूजा नाम गिदमारण, पदमा मानव र (बी.) गपचापन म..। शादी। अमृतपाना(डी.) api rm । (पु.) Th। गावी मारी । जरायु । तामारी (पीपी. जिग पर भगमन टोirti शामा है, (पु.) अमराणा यदि प..। मुभर पर्यन | अगृनयादी (पी.)Mortgururmeri . (य, (I. ) मगणां आलयः । १. प. वर्ग, अगृतगोदर, (I. ) भRE TRA र अमी. ( श्री. ) अमर+या+"" "" # पदल चामाम योहा ( प ). गलन Fitiमोना निवासस्थान । इन्दपी मगरी. धोरणमात्राr. a, (पु.) * (पु. ) गृति ett+या-मयं म... जो मरे भगनाम्धग, (३) बमोmfare भोगतात. अमेधा, (नि.) riniverse. astree (दि. ) भाषामा घरमा पम् । विशेष । गत। गुगं । योनि रिश पुरी अमेप, (f.) remoir.untin समापन अमोध, (t.) my ....." मर्थन अपन.... - मापर,(..) arrrr. । न.) भगवry | अनुमिल दोमानि (4.)मी । म्यादीमीरी ग हिट - . बानामादि A समागमपार reatr"fer आपर, (..) 4.cmsurred " A. (..). ra mire, (..) mrarti.rets frogramir-Tirture (३.kir (9.) प्रेम मुनासिर Tit. Art ERR को सामानवि- पु.) सम्पन्न -(नि.).

(६६) [tt सम्बा, (मो.) सन्ददे महेनौगम्यते-सम्ममनि | मन, (पु.) अमति सौरभेग दूरं गच्छति । अन्नदा पम् । मादा । सम्बनानी लन्द ! रजनी श्री. मानस वृक्ष । जिसकी मुगन्धि दूर जाती है. अन्यालिका, (.) माझा विचित्रवी मंत्री लो । पाट- अम्ल, (न) भम् । तक । पाठ । सा । पर अ (त्रि.) सम्बिका, (सो.) मा । सासीयजी कन्या । विनि- | अम्लक, (पु.) अयोऽन्यः अामा कन् । मोना। प्रौपंगे छौ । इरानकी माता दुर्गा (जगको समुचाक्ष. समरने)। बम्बावे । रील. अम्लकेशर, (पु.) अम्दः फेरारोऽस । पोनर मन्यु.(२०) भनि-ददारनयन् । उता पानी । - गला चकोरा. नवर. अम्लफल, (न.) तितिरीक्षा नियूडी फिमम. सम्मुरुगा, (.)बिदा पानी. मय, जाना। भ्या• भारम• सफ• सेट् । अपटे | अनुचाम, (२०)मन्वुनि चमरे सवल । अयाय. सेकाउ. अय, (पु.) एति मुग अनेन । इण्+करगे अन्दर अन्युज, (न.) मन्दुले वापते । पनामटारद। मका शुभ कर्म । शुभावह पि । सौभाग्य. (पु.न.) मंग. अयम्पान, (न.) अयः-पीभूत तप्तलाई पीरटेन सम्बुद (3.)ी । मेष । मादल. स्युद। जहाँ तपेढुए सोदेस रस पीना पाना सन्दुधि, (३०) अनून पारिन्देन । था-आधारे कि। अशिय, (नि.) यज्ञाय साधुनं मानि । म एक नरक । “अयस्मान " भी इसी में होता है. ...र. न.. जो महके लिये ठीक नदि । माग () सापुरा(2.) आभू समाः । सपथा। अपन, (म.) अय+भाये म्युर। जाना । दक्षियो और उत्तर दक्षिणमें सूर्यका जाना । "भापारेर म. (T.) मर मिमी। मेप । मार्ग पर आश्रय स्थान. भयर (न.) भगुन् । सोहा । विशेर ।' हापुर.(..) परता. परि यहादेमी बम पपररे निष्ट र मादी (0) in मीनि हमा बलना) भारत (IN) my mगापुरमा भयरकान्त, (पु.) भयगो मणे मानः रमणीय सादिनस् सन" आन्तलौहनामी एकमे पुरा," irreनयुक्त 4.1 फाग रहने हीमे सोहो गवारा गुमा uT. में प्ररि एक प्रचार पपा । सोदेशा freal आरम् (२.) ।।पारी। rritti सयाकार, (I.) me+अण-• Riter कार.(२.) www.er: "मी" * अन्नध्यामी मर्म. यानित, (..) यापन..मोर air.jart रन । "मग मायापिनग"दीन् । RE)दार(२.). मदीपोरान मगागा (नि.) सम् (मानित, (I.) भी जान दादर परोसनेमा. (:.)नाला. अपन, (.) mein मायमिन ARTA गानाम है. सभ.. FE. Hararriयम, (.) म सरा' Fari.) क र मषि, (..) HIMATirit Scritinuestmitram [अरिष्टतातिः ( ६ ) अरद, (त्रि.) यु-मिलाना और म मिलामा कान• त. अरक्षि, (पु.) अनिरनि घसमुष्टिकरः स नास्ति पत्र। मिलाहुआ। मिलाहुआ (न.)दासहप्रसंश्या ..... धीची अहुलिको फैलाकर मुट्टी यांधाहुआ हाथ, (भव्य.) एम् । कोप । गुरसा विषाद । सम्भ्रम। अरथिन्, (नि.) नास्ति रथः यस । जिसके पास स्य. साधर्ममें दूसरेको धुलाने के लिये दान्दके प्रपन जोडजा गाडी नहीं। जो रपमें स्थित होकर युद्ध नहीं करता. ना है। संबोधन (त्रि.) न रदः यस्य । जिसका दांत नहीं । विनदांत योगय, (पु.)भय इव कटिना गोर्याणी यस नि म । जैसा किया। जिसके दांत ट गयेहो. जातिविदोष । गरके वीर्यसे वश्यकन्या सम सन्तानो अरर, (नि.) अरन् । किवाद। कबाट । द्वार । पर्णसंकर दाजा । ढकना योगयाह, (पु.) अनुसार मौर विसर्ग 1 अक्षर अरपिन्द, (न.) भरान् चाहानीय पत्राप्राणि विन्दते । समस्रायमें इनका पाट न होनेपर भी पतणवादि का- विदाश । एप कमल । सारस पक्षी। अगला नीला क. र्य मिस करते हैं । " वाह+अच् कर्म." मल। लालकमल । नीलोफर । तामा तामा ताँगा. अपोधन, (पु.) अयोति हन्यन्तेऽनेन । हन् +erप्-पना- अराजक, (त्रि.) नास्ति राजा यत्र-नरामनिन्-क। जहाँ कोई राजा नहीं । राजहीन देश. देशव- निपौडी नामसे प्रसिद्ध लोहेका मुद्रर. अयोध्या, (सी.) युध+प्यत्न. त. सरयूके तीरपर अपति, (पु.) न राति-ददाति मुसं । राकिन् । न. तशत्रु । दुश्मन. एक नगरी। उत्तरकोशला । श्रीरामगीकी पुरी। जिससे लाई न कीजाय (त्रि.) मराल, (पु.)+विन्-र । अरे भाटादि । माछा अयोनि, (नि.) मास्ति योनिः कारणं यस्य । निष्कारण । + । रार्जका रस । मतवारा हाथी । राल (त्रि.)। टेश। टेदा हाप । (बी.) वेश्या । कंजरी. निल. बिना कारण जिराका उत्पादक भौर कोई नहीं। निज, (पु.) योनी उपचाराद मातरि न जायते । अरि, (पु.) अन् । शत्रु । रथाङ्ग । पहिया । रादिरा. परमेश्वर । श्रीरामजीकी की सीता (श्री.)।जो योनिसे विका । एकी संख्या । ज्योति शारसमें समसे घटा स्थान, नदि उपजा (त्रि.). अरित्र, (न.)च्छत्यनेन । याहालिनाममे प्रविन बेसीके चलानेका काट। नौकाचालनवाट । एषा. र(न)+अच् । चास नाभिनेम्योर्मध्यस्पे का। प. हिन्येकी नाभि भौर नेमिक बीचका की अरिन्दम, (पि.) भरीन् दाम्यति-दमयति वा समुच । जो जल्दी दलतादै (त्रि.)। जनमतमें कालचकका अंश अरिमर्द, (पु. ) गरि रोगरूपं एबुं मनाति । गद् भन्न: पात्रुजेना । दुश्मनोंपर जोरावर । शत्रुओंको दबाने हारा. "खा-"सेवाल। पापर (पु.) स.। सांसीको दूर करनेहारा (नि.)। एनुभोंको भय, अभिम्-वा लस्य रतम् । बस । पर्याप्त जल्दी. तरानेहारा. अरय-क, (५०) भर पीनं पयते चात्योऽमौ । पर अरिमेद, (पु.) अरेविदारिरस्येत्र मेदः सारोऽम्य । निगम कमनि भन्। महाकूर । पानीके रठानेकी कटारिका- सार विदादिरी नाई हो। एका विद्यादिर. वाला आ. अरिपडएक, (न.)षद् च भोर ततः परिमाणाचे पन् । अरजस्, (त्रि.) समुन्नतोपः। न..। रजोगु. पार मारेखामिक पाटाकत• पियाने नीय -के पर्य। बामकोधादिसे रहित । (बी.)कुमारी कन्या योगविशेष । परन्धारी अपनी राशिसे पटा और बा- त्रि.)विनधूर टवा पर यदि हो तो अशुभ है. णि, (पु.) अपि । सूर्य । गनियारीनामी !" अरिपरयर्ग, (पु.) पण्णां वर्गः समुदार पावर्गः।- स्टाति प्रापमलनि" भाग निकालने की कली (परमें रोगा कामकोपीनां पदर्गः (पन, कोश, टोभ,मेडम इसीसे भाग निकालतेये) प्रिया गप, मागस्प अन्त परणके छाभोंग सह). एण्य, (पु.)+आधारेभन्या मर्यवे शेरे बयस्त्राजहाँ भीतर छात्रु. पिनी उमरमें जाय करते हैं। बना जंगल. अरिए, (पु.)रिष्मारनसर न. अरण्यानी, (मी.) महदरम्यं । नि. गैर-भानुलासा स्त्रमनानीमा तिहाजिम पामेडी, पुषमा अनटी है।(म.) महरिपामा। अरति, भिति । कोष । रम्नलिन- नारिता नामी मगरला बम बिरयानी. रिपर न होना । प्रीति न होरा । एरणहट । इसके विरो- रिलाति, (.) ake+eft माउन । गठे मना ब्याक्त होना (बी.). एना (त्रि.) भंटर C.

[ब (१८) सरिटसूदन, । सरिटसूदन, (पु.) अरिटं अपुरै सूदयति । सुत्यु । अर्च, पूजा करना । उभ० भ्या. सक० सेट् । अचंकि विशु (त्रि.) भगुभो दूर करनेहारा. चौद । आर्चिट. अरचि, (पु.)न रुचिर्यत्र । रोगविशेष । बदहजमीके अर्चा, (स्त्री.) अच्+आधारे भा प्रतिमा । सरव साना न चाहना । "इचिः सन्तोपः"न.त.। "भावे अ"। पूजा. सन्तोपाभाव (प्रसन्न न होना). अचिं, (स्रो०) गइन् । आगी लाट । लिए अराज, (पु.) न रुजति । रक । वृक्षविशेष (त्रि.), अर्चित, (त्रि.) अर्चिक । पूजागया । नीरोग । रोगरहित. विष्णु (पु.). असण, (पु.) उनन् । सूर्य । सूर्यश सारथी । गुरु। सं- अर्चिप्मत, (पु.) अविर्विद्यतेऽस्य मनुए । प्पा टाटी। दरहित । एक देव । कोटका मेद । चमकदार (वि.). (.) फेगर । सिंदूर । मजीठ (बी.). अर्ज, अजनकरना-कमाना । भ्वा०पर०सक से अपलोचन, (पु.) अरणे रके लोचने यस । लाग्नेन । आजीन्. अर्जक, (पु.) अजयति रज अण्वुल् । व अरणोदय,(पु.) सरस भरंस तत्तिरणस्योदयो यत्र । (इसकी शाखाओंकी तानोंसे रस्सी बनती सूर्योदय से पहिटी चार पहिये. कतां । इका करनेहारा (नि.). अरन्तुद, (नि.) अपि ममानि तुदति । तुमसर-मुम्च। अर्जन, (न. ) अत्युत् । प्राप्ति । उपा मर्मीमा गोटके स्थलों में एनेहारा. अर्जुन, (पु.) म+उनन् । एक वृक्ष भरधनी, (गो.) सम्युसमः । वश्टिकी श्री। दममुनि पाण्डका मध्यम अर्थात् तीसरा पुर। कोपन्या तोय सारा. नेत्ररोग । मोर । चिटा रंग । नेयमारो अगम, (पु.) । मूर्य । रजारि । मर्म (न.). अर्णव, (पु. ) अामि सन्तस्मिन् । अ परे, (भय.)एनीरगम्बोधन । कोपमे पुलाना. मुद्रा एक प्रकारका एन्द. सरपार (11) मासि रेप-पार यम । पापरहित । ये अर्णस्, (न.) कच्चति । अगुन् पुनरागापमानार. उगा• नद । जल। पानी. पोपण, (वि.)मरप-पनं मस-न..। जिसके अतंन, (न. ) ऋत्युर । निन्दा । एमपरगनिमी. अति, (स्त्री.) म+सिन् । पी- सपी राम। पु• उम• गर• सेट् । अर्थ, मांगना । चु•आ. द्विक मेद । winाटिल. अर्थ, अपं+भावामांदो यथायथं अनु (पु.)ी पर । मूर्य । इन्द्र । तामा। वस्नु । नित्तिा हटना प्रकार । विjिापति भन्दा परक. साथ। रोश्य. संपादन, (पु.) मम प्रिय बन्दनः । था. त. अर्थदूषण, (न.) अर्थम्य अपहर नका मुगना । व्यगनों के मान, सजनप, (पु.)समय । मुनी ।। नाशिमग्नु । (4.) यमुना. अना, (th) अथ+युयामि सांबर, (पु.) भनम् । FTER म. अपंपनि, (पु.) यांनी पनि. बीमा यसरी नाई प्रामे | अप्रयोग, (पु.) अपना र गरिय. घनना माराया देना जार,(पु.) म अटार भामा । मसंग याद, (पु.) व का firetri हना । निन्दनाय दौरान अगंट,(*.)उर ( देम पानेम्य अपंगयर, (f.) मन मर) कादरंस Thोन, दो न.स.न.inwir. 44. Timi अशाच..) FE (:.rimar (iiii। पू. n धनकाव्यय करना .

[ भयमन्, न.1 - गिम, (पु.) अर्थस्य भागम (आ+ाम्प भारित अर्धरात्रः, (पु.) अर्ध राः। रातका आधा। मध्यरात्रि । बनका आना । धनागम । आमदनी. आधीरात. यांन्तरल्यास,(पु.) नार्थसिद्धये अन्यार्घस्य न्यासः। अर्धरात्र, (पु.) अर्धे रातः एक त । अन् । आधीरात. प्रकृत ( पर्तमान ) अर्थकी मिदिके लिये दूसरे भर्यको ले- अर्धच:-चम्, (न.) अर्धा ऋक् । आधा मन्त्र वा श्लोक. आना । अर्यालद्वारका मेद अर्धपीक्षण, (न०) अर्थ पराम्पूर्ण वीक्षणं । पि+ईक्ष ल्यु- पर्धापत्ति, (स्वी.) अर्थस्स अनुकार्यस आपत्ति-सिदिः । पूरा न देखना। कटाक्षरो देखना. था+पद्+फिन् । न कहे गए अर्पका समझना । जैसे देव- अर्धशतम्, (न.) अर्धन सहितं शतम् । आपेसहित दत्त जीताहै परन्तु परमें नहीं तो समसमकते हैं कि या. एकसौ अर्थात् एकसौ पचास १५.. हिर अवश्य होगा । मीमामक अनुमानसे भिन्न रहतेहैं। अर्धावभेदक, (पु.) अर्ध अव निनति-अध+अब+मिद् । नमायिक पतिरेक व्याप्तिज्ञानमे उपजा अनुमानहीं सम एक आधेको फाइनेवाला । आधेसिरकी पीडा. सते अर्धाशनम्, (न.) अर्ध अशनस्य । भोजनका आधा। अर्थिक, (पु.) अर्थयते इसी यावक +कुत्सितायें कन् । आधा भोजन. गोयेहुये राजा पाबुको जगानेके लिये सति करनेहारा । 4. अधासन, (न.) भर्ध मासनस्य । एक. स. । आसनका तालिका भिक्षु । भाट। भिसारी. भाधा भाग । मेहदो प्रकाश करनेहारा सम्मान. अर्थिन् , (नि.) अर्थ+अस्त्यर्धे इनि । यायक । भिक्षुक । अधिक, (नि.)-पी-(सी.)। म अर्हति टन् । आधा सेवक । राहाय । धनी । वादी । धनरहित भाग लेनेवाला. अर्य, (नि.) अर्थात् प्रयोजनादनपेतः । अर्थ+यत् । अधिन्, (नि.) अर्ध अस्त्पर्य इनि । आधा भाग लेनेवाला । न्याय्य । उचित न्यायमे कमाया "कर्मणि यत्"प्रार्थ भाधेका हिस्मेदार. नीय । पण्डित । धनवान् । (न.) शिलाजतु. अधोदय, (पु.) अर्थस सरस पुष्पस उदयो पत्र। अर्द, मारना-भ्या उभ-सक सेट् । अति-ते । आदित्-ट, मापका महीना, अमावास्या तिथि, धवनक्षत्र मोर अर्दन, (न.) अर्द+स्युत् । पीस पहुंचाना । मारना । मां व्यतीत होनेसे एक योग होता है. गना। जाना. अधारक, (म.) अर्ध करो. अर्षोरु तत्र काशवे पाए+ अदित, (नि.) अकादुखी हुआ। लाचार किया पहोंके नीचेतक अोंको ढकनेहारा। उत्त- गया। प्रार्थना करनेवाला मबियोंके पहिरनेका पत्र जो चोलीके समय होता अध, (पु.) अध्यदना-भावादी पम्। पक्ष। टुकड़ा साढी। पागरा. (म.) समानांश । एक जंगा भाग। (नि• ) दोहिस्से अर्पण, (न.) +मिक्स्युर् पुरुष । सम्प्रदान । देना । कियागया. नजर करना। सौपना. अर्धगगा, (सी.) अधं गहायाः । एकदे०रा० । गंगाना- अर्पित, (नि.) अपि+पुछन् । कादियागयाआदि. नादिसे आधा देनेहारी पावरी नदी. अर्धचन्द्र, (पु.) अधं चन्द्रम्य । एकता। चन्दा अ. अर्पिस, (पु.) ना+गिन्+पुर र इमन् ।हस्य । दिउ छाती. एमीया चौद। चांदवी शकलवाला मखूनका जराम । ग. अर्पिसः, (पु.)+ पिरान्हदय हा मोग सहन । गलहत्या । रानुनासिक चिन्ह. अर्धनारीश्वर, (पु.) अर्धाओं या नारी तस्या ईश्वर। अर्य-र्व, मारनामा. पर• सक- सेट् । भवति । महादेव । शिवपार्वतीकी मूर्तिविशेष । हरगोरीरप शिव अधुंद, (म.) म+विच्+उद्दाम नामी से अर्धपारायत, (पु.) भन भन पारादत इव । जिसका दारोफी संख्या .......... (3.) पर्वतरित आधा अंग मधूतरी माई हो । विकण्ठपोत अर्भक, (पु.) म एर सा का पाठक। सूर्य तिरपक्षी. बमजोर बोग. अर्धपारायतः, (पु.) अधः पारावत इस, अर्धन अंगेन | अमः-म, (पु.न.) • था. सापि। पारावत इव । आधे शरीरसे तरी भाति एकप्रशारणा बीमारी । पहुंचने योग्य देश । पन्तम दे। अर्य, (नि.) द सनी । औरस (पु.) अधरथः, (पु.) असम्पूर्णः रपः रखी। पूरा रसी रा" अर्या । मी. नहीं । रपमें बंद कर दूसरे के साथ पुर रनेवाला जो अर्थमन्, (पु.) भर्य मे ना मारिन रपीके रामान पतुर मही. सिरोंवा रारा.

टायकाचाटाक. । संग नदिनुमहिमेबहिराबाहारी अरा, (3.) भाचित्रासापोला यता, (..) सिमा पात्र त्यांनी CHCH...मामा"24. आ, kriATE-makarm रुपन्,] (..) अर्थन्, (पु.) यनिम् । पोहा । इन्द्र । नियां अलम्भूष्णु, (नि.) अलं सामर्थे म ग । स्ना सवंटी. अर्याच, (अन्न) पूर्व । र । निकट । पहिले । पीछे । | अलक, (पु.) अलति-भूषयति मुसं । फुन्तला केश । पागल कुत्ता । जुलफ। (स्त्री.) कुबेरी नारी. अयांचीन, (त्रि.) भयंकाले पथात् पाले भवः स । अलक्त-क, (पु.) न रखो यस्मात् ५ त• रस नम् प्रदिस्त । सिटकापीरेश पैदश । नूतन । नया. सादारस । यसका रंग। यक्षनियांसविशेष. अथुक, (पु.) मरम् । एकाविश लोग जो दक्षिन | अलक्षण, (त्रि.) नासि क्षणं अनुनापर्क वा कि में रहद मेरमहदेवसे गाते गये थे. ६.1 जिसका अनुमान न होसके । बच्चे मन संस्, (न.) इरन । रोगविशेष । बबासीर । गुन्य । २. त• । दुर्भाग्य (यदनसीय). "". अलङ्कार, (पु.) अनं+धम् । भूपण । कर सम, (नि.) दर्शम् मस्त भर । बगसीरत सामिल शान्त्र । काव्यके गुण और दोषको जनाना में दुनित. जेवर । गहना. समान, (नि.) अमात् मृद च । किसीको या अलसक, (नि.) न टगति व्याप्रियते-टमस्या पारनेर ग. नियोग, मुम्ब (पांयका रोग) (पु.)हंसपरी लता (. मग (नि.) मी स्तुर । बहनेगला । बनेकाला. मलात, (पु. न.) सा+कन त । अदम्या मांगरोग्मने मा• भारि-पर• सेट् । मगार । कोइला. rint करा. अलायु-यू, (श्री.)न सम्बते । नक्सविड-निर में म.(.)भम् । योग्य । प्रत्याराईभर. पर परिः । लाड । दुम्सी । कर् । लनाविशेष मांज(5.) पास गापन । पूजा. अलि, (पु.) मलति देशे, जिते, पादित का ris.(a) मा । यसक। गारो | अळिक, (न.) यस्यने भूप्यते । अस्मानित भाति । गल्छन् । प्रमर। कौआ। कोइल । शरणाविष मिर. मम सिलाट । मत्था । मिथ्या। "अर." Mim.(hि.) सापक (3.) असिन्द, (पु.) मस्यते मन्यते अल्-कमी दा संजेके कमरेने पादिरा पोता दर्शक हर vi.(.) rinाम । माहानीया के माग। चैतम. FT. गरिमा, (बी.) न मम् गन् भ । काम करने खदारericनI.भा. रम.। पान होनाइजराहिम. Triram.niममा मारि भाटीर, (नि.) मन्दयीकन टा. पहा सन. (8.) । पानि. भत्रिय । भगसार. अलोदिन, (नि.) नसोदितः । दविरहित । (h.) म सा काम पा. नही मालमत्र अलीक, (IN) मोदी विदितः टक न. वा • Rite बरा! Ved द.५.) RE राश, (.) मा नानानि । माविच, (त्रि)Treat:- बान, (R) Amfxमरे मादी. vie verte.jार्ग : अदाल(.) र बो भाई पर "मामा. (ikit अनुर-, (HREATE .. SECRET . . mire .

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- घोना।पोरना। साफ करना।मार्टमनारामा शवधारण, (०१) अवधारण, (न.) अव++निक्ल्युट् । निश्रयकरण । अयात, (वि.) agar | कागें एक तहकीक करना । पचा निश्चय. टतराहुआ । गीलादुना. अवधि, (पु.) अव+या+कि । सीमा । हद। पाल । अययुक, दि. या। नागना । पदिया। गर्त । गटा। यवमान । अन्त "यापारेकी" बिल, मना । पुष्यने । अयोधि. अवधी, न माना । अवज्ञा करना । बुरा• टम मक०मेट् । अयत्रयः, (3.) कुस्मिनः प्रयः । धुरी मा अवधीरयति, ते । भावधीरत-त. अवमत्र, स्या. प. नोलना। दुकटे १ करना अवधूत, (त्रि.) अवधूक । सत्त । तजाहुआ। समाहीत. तिरस्कृत । रोकाहुआ । कांपाहुभा । (पु०) वर्णाश्रमधर्मको अयमाम, (पु.) व मार-मारे पत्र । रमा' छोटनहारा संन्यासी । केवल आग्माराम. रोशनी । सामान्कार । एल. अवध्य, (नि.) नस्वयम्यन् । न मारनेयोग्य । पवित्र. अवभृथ, (पु.) य+म+क्यन् । प्रगान बहीन अपन, (न.) अव ल्युट् । प्रीणन । तसही । रक्षण । विकशान्तिके अर्थ कथहीन । यही अन्दने र हिफाजत करना । प्रीति, भयम, (त्रि.) अप+अनन् । पापी । गुन्हा अयनम्, भ्वा०प० । झुकना । प्रणाम करना । नीचे लट- माय । दुट । कनीना. काना । ननति । अनंसीत. अवमत, (त्रि.)प्रय+मन+मह । अनाहत । वेदवल अवनत, (वि.) अवनम्+क्त । नत्र । झुकाहुआ. अयमन्, दि.वा. तिरस्कार करनाामन्यता अपनद्ध, (त्रि.) भवनकर्मनि छ । बंघाहुआ। अयमन्तु, (त्रि.) +मन् न् । तिरस्कार का मृदशादि बाजा (न०) वन और भूषणका पहिरना. अभिमानी. अवन, दि. 7. । बाँधना । गाँट टगाना । नद्यति-ते । अयमद, (पु.) अव+मृदु धन् । पीटन 12 अनारमीन् । अनद । थवनद. शत्रुके नगरको विनाश करना । मारना । टन अवनाट, (त्रि०) नवं नासिकायाः अव+नाटच् । चपटी | अयमश, (पु.) अवगत् । आटोचना नाकवाला. | अपमानना, (नी.) भव-चुरा मन्+मावे कुछ अवनि-नी, (प्रो.) अभिनि । भूमि । जनीन. मान करना. अवनिन्, उ० उ०। प्रक्षाटन करना । धोना । साफ अपमानित, (वि.) बाबुरामन्यनले । करना । पोटना । नेनेचिन्छ । निज-निनिजेमिनिजन्- मान कियागया. यनन् । अनिक. अयमानम्, (न.) यव मृा अन । प्रम अयनेजन, (नि.) अव+नि मन । प्रक्षालन करना । घोना । श्राद्ध में कुचारर पानी छिटकना. अवन्तिका, (सी.) अवन्तिषु कापति प्रकाशते । म अवमुच्, तु• प० । मुटा छोट देना । सोड घोडा थादि उतार देना-जैसे पोशाक. टवदेशी राजपानी पिनी, अयम्धन, (त्रि.) अवनतः मूघा अस्य । अयपत्, भ्वा.प.नीचे गिरना । नीचे कूदना । टन- रना । पतति यादीन अवमून, थदा.प.षिमना । रगहना. अयपात, (पु.) थ+पत्-आधारे पञ् । विछ । “मा- अपमृद, क्या. ए. । पीसना । मला वे पम्" । नीचे गिरना । निशान । गिरना. यमदीन अयपात्र, प्रवरं भोजनायोग्य पात्रं यम्य । जिमय पात्र अवयय, (पु.) यव+यु+अच् । अन । मोरनयोग्य न हो। स्टेच्या पात्र, जिमने दूसरे नहीं उपकरण । मापन । न्यायमतमें प्रतिहा, है पमद. टानय और निगमन पांच वाक्य. अपारित, (वि.) यवरात्र । कृस्य निन् । ओ अपनी | अयर, (नि.) थव+o+ । चरम । भई राति मोटा है। त्रिम सम्बन्धी उमे एकही पात्र में नाच (न.) हार्ग जापा पिछला । भोरनरी मतानतिम दियाया. दाल (पु.) पीछे देशाटमें होनेवार अयाशित, (नि.) अायः गमन्दात् पयः जातः । अयाज, (पु.) भवरस्मिन् काले जातः । असहरहदायरों और पच (पाई। माहुया। अपरनि,(श्री.) अव+रम्-माचे चिन् । रना पिनाहटना. अयर,..दामनापी पिर अयरपणं, (बु.) भारगिना हुआ OF If 1 कवाडा. -- ३ 3 अटने पंग मुभा. -- धनाद हो. घा. प. निरोप परना । रोहमा । टहराना । अयलेद, (पु.) व मित्र पत्र भने पटना । रोध । भरोसीन, पटनी. त्रि.) ++कर्मगि छ। भाच्छास्ति । अयलोकन, न.) ++मवेम्पुर । न । देग- बांधाधा अन्त पुरकी गोगनेयोग्य दासी । ना । अनुमंधन 1 दरा करना । " " । श्री (श्री.), भालीका नेत्र. .प.नीटनरनारोहातारोह भरक्षा. | अयलोप, (पु.) व । पाटा वि.) भर+यह+अनंरि भारती । - गा। यूना. अपने स्थानगे उटा अयटोम, (नि.) भयन हेम पदाम्या पु.)वधभावे पथ् । निरोध । गेक। पम्" । राजनीया । रनवाग । राजाकी श्री. अयता (त्रि.) मामि पापमापीन पीन । बेग (पि.) +णिग्-पुर पवमगि छ । अपराय, (नि.) थार गन:-अब रे रापान गया. मन (मथा) परहेगोरेदार, पु.) MIRE+ावे पश् । सवतरण । उतरना। अविष्ट. (f.) eft Irr. I feer घटना “पादाने पम्" । । (पहार भोग- शुता । परिटि दी । अधिकारिद र पर नीचे उतरने है), अपाय, (आर.) (1.). नि.) अवरक्षापम् । श्रावण । पितरंग। अयपाय, (पु.) from ला। गूग। ""दीम. मिमान पु.) अवस+न. भदः । देदका गथ्य- अपथ्यण, (म.) wrim । Tim पर।एगाभा (f.). तुको उताना "रि"FAT NEP (पु.) +विभाधारे घम् । भाय । अपराध, (त्रि.) errrrrram 'परणे पम्"। पानेका साधन ।। निकट रिमा । my Irr | अपएम्म, (पु.) मा. •ा। लटपमा । सम्पते। परे। सोना IPTIMIMIRIRAM. अपमपिपरा, () एen ruri (f.)भएकतरि पमगि वा ।। जिगने पर vr. । गगापित । दिपामा. अचमः, (5.) Wore Irr .in पदा. उभ.1 पाटना-हो- स.. अलिक्ष-रि. अपपथ, (.) merezn.... 1PERATI (त्रि.) निकादिक । मधिना. पुhिrE । रानिमालेभा. अपमा, (पु.). twitter afer. (सी.) रामनाराभादर रीमिrxiic भी. अपस. (.)- rinik ••itrat sem RATE अपरा. प. भरे Trive. 4) RNT Sri on अपमान. (म• Imritrate समी-मुम्पनेप-। अपर-सम.. wearinारा। -(.) .c• ITIEnt: असा. (5.) meinreler. Searest a firms wediatr.। (पु. Jeeterter (.) nrrrrt -- - । 1 अविवेक, (पु.) पि+विच्+धम्-न-त । सदसद्रिा- अपीचि,(पु.) नामि वादिः (मुम) पत्र । ना. अवस्कन्दन,] [ अवस्कन्दन, (न.) अवनस्कन्द मारे ल्युट । तोदना । अयाप्, सा० २० । पाना। लाम करना। मोति- छीनना । गुजरना । उतरना. आप-आपे । आपत्-आधिपत. अवस्कर, (पु.) अव++मंणि अप्-मुद । हाइमे उड़े | अवारपार, (पु.) अयार पार च मा यम्य । अयंत्र हुए कंकर मट्टी आदि । विष्टा । Dह । गुग्ध । लि. दोनों किनारेवाला समुद्र । समुद्रयन्दर, अवस्तात्, (अव्य०) अवरम्मिन् अवरम्मान् अवरं इलथे | अवारपारीण, (त्रि.) अवारपारे गच्छति-न । अम्माति+अ आदेगः । नीचे । नीचसे. पार जानेहाग. अवस्तार, (पु.) अवस्तृ+करणे पन् । जवनिका । अवासस्, (त्रि.) न वामोऽन्य । वनरहित । र कनात । दरी। पटदा. बिना। नंगा । रजसला. अवस्लु, (नि.) कुत्सितार्थे नत् । एक निकम्मी चीज. अवि, (पु.) अब+इन् । सूर्य । नेट। यग । पर्वत स्वामी. अवस्था, (स्त्री०) अवस्था+अ । दया । वायु । है- अवितय, (न०) न विनय मिथ्या । न• त• । मन्य। उत। उमर. अवस्थान, (न.) अव+स्या+भावे ल्युट् । स्थिति । रिहा- अविद्या, (श्री ) विक्यप्-न० त० । विवाभाव । दिद यमा जगह न होना । अहहारका कारण अज्ञान । विद्याली विग- अवस्यन्दन, (न०) अव+स्यन्द+भावे ल्युट् । हिंसन । अययार्थबुद्धि । वेदान्नमनमें भाव किंवा अमरने मारना. कहीं जानेहारी अचेतन (जट) माया (पग्मान्नाकी मार अवस्यु, (त्रि.) अवः रक्षणं तदिच्छति क्यच् इन् Ved- | अविनामार, (पु.) बिना ( व्यापकं ऋते ) ना अनुग्रहकी इच्छावाला । रक्षा चाहनेवाला. (स्थितिः) व्यापकस्थिलनुरोधि सत्तारूपा व्यति । अयस्रंसन, (न०) अव+सन्स+भावे स्युट् । अघ.पनन । व्यापक ( कारण ) के बिना न रहमके । जने यामिक नीचे गीरना. ना भून नहिं रह सक्षा अर्थात् जहां धूम होग वहां अवहार, (पु.) अव+द+करि प। चोर । पानीका अवश्य होनी चाहिये । व्याप्ति. हादी । तन्दुआ । निमवित ब्राह्मणोंका धन चुराना. अविनीत, भव+नी+करि का टसूत । अशिक्षिताना अवहित, (त्रि.) अव+या+का स्थापन किया गया । सा साहुआ। नाफरमाबरदार । (स्त्री०) कुलटा । पर वधान । हुशिार. औरत. अवहेल, (न• बी.) अवहेल्या पप्रय त वा । अना- | अविभक्त, (त्रि.) अपृयक् । नानुदा (पु.) मा दर वेअदबी. न त । समृट । विभागरहित द्रव्य । खानी. अयाशिग्म्, (त्रि.) अवाक् शिरोऽम्य व० । नाचे अविमुक्ता, (न०) वि+मुच्तन त । जिने पर मुरा । पयोमुख. और महादेव नहिं छोडते । काशीक्षेत्र । मुजनित्र । अवाक्ष, (त्रि.) अपनतानि ममागि इन्द्रियाणि यम्स । मुक्त नहिं (त्रि.). जिमी इन्द्रियें झुक गई हैं। मरक्षक । रखवारा. अयिरत, (त्रि.) विरम् मावे कान. य. दिम शून्य । टगानार. अयाझुस, (वि.) यवान् मुसं थम्य । अधोमुग । अविरल, (नि.) न विरलः न• त। पन । नि अवान, (त्रि.) आननं अयं अन्य । निमुन भागा मिलाहुआ। मेघना. झुकही। तिर झुकाये हुए । प्रणाम करनेत्राला. अया, (वि.) धाति । य+अ+हिन् । नायकी भार । भले बुरेका न विचारना । वैवी । बहन, थोर ऐटा देश । (बी.) दक्षिणदिया । ६ व. जी बोल ! अयिभान्त, (वि.) विधम्+स.न.तः । नहिं मत्ा । गुग । पिसा ममय (अन्य ). थाटगातार. अयाध्य, (न.) अवायन कुवनः । अनिन्दित । अयिस्पष्ट, (न.) सिन.. Rमाया मोमिन्दर योग्य है । पवननई । ओ कहने जो सर नहो. नीच मुस. । 1 বিনাে! अशन, (नि.) मयत मिन् । मुटुमा । मा. शेष । दिनांग (न.). समन्दर, (f.) श्रम अन्तर मय थाना.. अशीप (नि.) वीरः (नादि ) नास्ति यम । टर' Heturदर्य दायी। विवाहित बिहीन.

पवे,] [अशीति, - - अधे, सवा+प.। जामा । राममना । सीपना । अव्याप्यत्ति, (नि.) व्याप्य (साधिकरणं देशादिक सा- पहियामा । एति । दयाय । अगात्, कल्येन संबध्य) न वृत्तिः (स्थितिर्यम्य) जो अपने मात्र. अवेक्षण, (न.) अवईस्कभाषे युट् । दर्शन । देशना । यके सम्पूर्ण देशमे न रहे। जैसे घट पृथिवीके एकदेश में मना सगाना । सोचना । "भवेशा" इसी अर्थमें, ही रहताहै इसलिये सल्याप्यवृत्ति है। व्याप्यत्ति तो जा. अपोक्षण, (न.) अव+A+भाचे युट्। Ved. थोडेसे आदि है जो घट आदिमें सम्पूर्ण रूपसे संबद्ध हुआ ही झुके हुए हापसे सींचना. स्थित है यह न्यायमतमें प्रसिद्ध है. अयोद, (त्रि.) अव+उन्द् भावे धम् निपातः नलोप । अव्युत्पन्न, (नि.) वि+उत् +पद्मनन्त । सम्पूर्ण श- आई। गीला. न्दसंबंधी प्रत्येक अङ्गको जानेकी शक्तिका माम ध्युत्पत्ति है उससे भयात् अवयवार्थसे शून्य पद "वह शब्दकी जो अध्य, (त्रि.) अवि+भवायें यन् । भेटमे आया था मेडका धातु प्रत्ययसे सिद्ध नहिं होराका" शब्दके अर्थको न सम्बन्धी. जानेहारा भूर्ग भादि. अध्यतः, (इ. ) वि+अ+क्त-न-त. । विष्णु । बामदेव । अर, फैलना-शा आ सक वेट् । अश्नुते । आशिष्ट-आप्ट । शिव । मू । प्रधान । मामा । परमात्मा । सूक्ष्मरारीर. आनशे अध्यतराग, (पु.)न यो रागोऽहनिमा यस। योजन लाल। अपवर्ण. अय, साना-श्या परसक सेट । अभाति । आशीत् । आरा. अव्यअन, (पु.) मासि व्यानं (शुभलक्षणे ) यम्य । अशन. (पु.) अश्नुते (व्याप्नोति ) अश+स्यु । पीतसाल- । पाधा । भावे स्युत् । व्याप्ति । फलना । भोजन सौगो बिना पशु । पच्छे लक्षणसे शल्य चिहशून्य (त्रि.). (न.)। अम. अध्यप, (पु.) न भ्ययने (पो न चलति)। प्यम् । हरना | अशनाया, (स्त्री. ) अतिलोभेन अशनं इच्छति । अशन+ और पटना-अच् । सर्प । सांप पीके बिना (नि.). क्यच् स्त्रियो भावे म । बहुत लोभसे साना चाहतारै । भूरा. अध्यधिन्, (पु.) पहुचलनेऽपि न व्ययते । व्यम्-इनि । असनायित, (नि.) अशन+क्यच् +कर्तरि क । क्षुधित। अश्व पहा. भूखा. अन्यमिचारिन्, (नि.) रि+अभि+पर+गिनि-न• त.। | अशनि, (पु.) अश्नुते ( सहन्ति ) अस+भनि । मम । किसीमी प्रतिकूल कारणसे न हटायाजाने हारा । न हकने विजुली। वर्क. पाला । म्यायमतमें शुर हेतु (पु.). अशद, (त्रि.) मासि शब्दो, वेदादी वारकशब्दो वा अध्यय, (.) पि+इन+अन. स. । सर विभ- यस्य । पान्दहीन याचकशब्दरहित । प्रधान "ईशते शन्द" तिओं और बच!में एक्सा शन्दमें रहनेहारा धर्मवि- इति सूत्र शेप । जैसे सर्वत्र एकस होनेसे सरादि अव्यय है। शिवः । अशरीर, (नि.) नामि दारीर तदमिमानो वा यस्य । स- विध (पु.) आपन्तरहित । विपारशून्य (त्रि.). कल निषेधरुप देहएन्य परमात्मा। पारीरके अभिमानसे रहित जीवन्मुक्ता "अशरीर वाव सन्तं प्रियाप्रियेन स्रात.". अध्ययीभाष, (पु.) अनम्ययं अध्ययं भवति अनेन । भ. म्यय+चि+भू+करणे पम् । व्याकरणमें प्रसिद्ध एक समास। अशास्त्र, (न.) शास्+करणे ट्रन् न त । वेदादि पिरर जमे "उपयुम्भ"यहाँ अनध्यय भी कुम्भादिपद अव्यय नालिकका हार. बन गया है. अशित, (त्रि.) भर+कर्मणि क । भक्षित । रायाहुआ। । अध्ययस्था, (सी.) वि+व+स्था मरन• त.। असि- रजाहुआ दान्न । अविधि । दानके विरुद्ध उपदेश । नियमान होना. अशितगपीन, (त्रि.) अशितास्तृप्ता गावोऽत्र । जहाँ • अव्ययहाय, (त्रि.) वि+अव++म्पत्-न. स. जिगके अशितम्भय, (नि.) अशितस्तृभो भवलनेन । रा मुमः गाएं रजदी हैं। वह स्थान कि जहां गाएं चरती हैं. साथ डायन या भोजन उचित नहिं । यो व्यवहारके योग्य नहिं । जो अपने धर्मरो गिरगया हो। पतित. ५। तृषिका साधन अनादि गायव्य । सानेकी पोज | अशिश्वी, (बी.) नाशि सिरायंसाः गी । गिदीना अध्ययहित, (त्रि.) वि+भव+या+कर्मगि कन• त.। श्री। बेऔलाद औरत" म्बा के हस्चे" "अशिक्षिा" व्यवधानशून्य । साथ । लगाभा । विना परर. इसी अर्ष में होता है. अध्याछत, (नि.) वि+आ++भमगि-कन० त.। 2.] अशीति, (श्री.) दशानां भवया दाति, दशकं मरगुनिता दान्तमें पीत्ररूप जगतका कारण भान । सांस्यमें प्रधान.] दराविनिमशील देशासमाविषमस्वी. - .

अम,] नपर अशुभ, (न.) मावि शुभं यस्मात् ५५० । पाप । अम- अधान्त, (त्रि.) श्रम भाव सन० त० । हुल । पापी (त्रि.) रत्नर । गातार । "करितः" न या अशेप, (नि.) माति भेषो यम्य । शेपटीन । तमाम । अधि-श्री, (नी.) अ कि । अन्नादिका शान्तिहा. घरमादिका कोण । कोग | धार । अंदर अशोक, (पु.) नानि शोको मसात् ५५० । अशोक रहित (घी). • वृक्ष । बाटाम । पारा । कदुकान (नी.)। शोक- अश्रु-यु, (पु.) अश्रुने व्यानोति नेत्रमा रहित (नि.). (अम् ) कुन् । जो मांग में मरजताई अशोच्य, (२.) मुकर्मगि ण्यत् न० त० । सोच दीयता नहि । चक्षुल । मांसका पानी । श्रीयजो गौर करने लायक नदि. अश्रुत, (त्रि.) श्रु+क-न० त० । यनान्त अशाच, (२.) शुचेमांवः शांचं न• त । शुचितामाव। जो मुना माहि गरा. नाय । विहित वर्मके अनधिकारको सम्पादन करनेहारा अश्लील, (न.) धियं साति गृहाति-लाय. भय । "ब प्यम्" "भागोच्च" इसी में है. लचासम्मादिका माध्यमारा । ठया देनेहारी अन्न, (नि.) अनुते चासोति अनाति वा अग+नन् । या । देहानी जवान । गाठी । गलान. साम । म सनार फैटा हुआ। सानेवाला. अश्लेग, (प्रो.) लि+घम्-न. १० । नक्षत्रवि सभीनपिवता, (प्रो.) अनीत पियत इत्युच्यते यस्यां तारा । इस ५ तारे होते, न.4.नमि रिदाकिनाक मयू. . स.साने पीने के लिये निम- अभ्य, (पु.)मान् । घोटका घोडा. सनक (पु.) मम स धिरः, कार्य का । पपरी अभ्यकर्ण, (पु.) अश्वम्य कर्ण इव पत्र मदरारपिका नाम । दक्षिा दिशामें एक पत्ता पोटके कानटी तरह हो । सालपक्ष। जिसका कान घोटके कानकी तरह हो. अपनगम, (पु.) मर गया मरकतमान । पा || अवसरज, (पु.) अवध मर्ग च, पक्षी मर. ताभ्यो जायते पुंरद्रायः । सचरा । पोडेका भामम, (पु.)पाननं दति (मिति) हन् । पा. अश्वगुर, (पु.) अमम्य गुरमिव भुरे मूलं - अरमन, (पु.) भने यति महत्पनेन वा । करि पना पोडेरे घर के समान है । आगनिदा रामनन् । पोट । मया पथर (न.) जहा. अभ्यम, (पु.) असं हन्नि-इन्ट-र-म आमला,(पु.२.) ममनं पतयी। गुजनृश दस्त । इमरमानमे घोडेवा नाश होजाता मिन्टेटस. अभ्यतर,(पु.) ननुग्भः । स ततुर सामनाल, (२.) मा म न करोति । हाजी गम पोटी में सत्पन हो । सचरा न पृषो. रमनन् । यो पूर्व काहा- अश्याय, न विरं शमशावित fre (ए) र जीरो का पात्र. निशमी क्षतिपमान देता मरम) मनं लिया और दी। पर पीपल । पदमारास मामाचा या नई कारन माग रमे) देदा न रहने के कारण भए पत्र । रमनी. "अमूखमय शाममा प्रदुरव्यय" f= सान. (३.) (बा) मियामन्, (पु.) अषय याम REET एमा, ग.धोकगमन टक्लारियों मानमार, (...)न्न Entri.. मेटी पर अश्वपाल, (.) मन पर बतम(२.) । । पेशी पानेगान लागत अथवाट (T.), स.. म. । - .

पुरा, माले . मध्यमुख, (पु.) मपन्य मुगमित्र मुसमन्य । निरागमु- अर, चमकना- अपना, ऐना मा उम• IT. और। मुरा पोदेफे समान हो। रिवर देवताविशेष. भाति-ने । आपर मध्यमेध, (बु.) भयो मेध्यते (सने ) अत्र । मेम् | अपक्षीण, (त्रि.) न मान पद मानि (मदर- पम् । जिसमें पोग माग जातादै । एक या । (इसमें गि ) यत्र । स (इन) दीगरे जनो एनसे नारा एक प्रकार था पोरेको मन्त्रों मे भान परना पत्र मो. दोनो मे किया गया मप्रतिमल) पोप घ, एक वर्ष के रिये धूमनेको छोड़ देते हैं। जब पवगा. मगरह. +नमें बह पोहा परकोही भट भाताद मे गोई ना पा. आगद-(पु.) गमे तीसरा म. ना, तर उगे मारकर पिरावी बगलो होममें जलते हैं, अगदा-दा, (श्री.) रा में r" उसीका माम अश्वमेध होगाई), मात्र (सारे). अभ्यमेधीप, (पु.) अमेधा दिनः । एRA 14. अएर, (म. अप्पापाः परिम Res मेघा पोग. कन् । पाणिनीरामपदी भन्योm. अध्ययुन, (पी.) मन (४पमुसाकारण) पुश्यने । दा प्रत्येक मेश (भाग) ( नियम जारी पुर। जिवापानी ना हो। की पू. भग) गिमा । "मल्पीयेऽपि भवयुग"सी अर्थमें. अटका (स्त्री) अनिविदार। अभ्यगेधक, (पु.) अरदिप युन् । परवीर- सममी भारि सीन दिन । च, पOM पशा पोको रोग्नेहारा. हमी"अरपा पिता" मरियम AP 'अश्ययार : (पु.) शहरी पुगअण्टर अटन, ([.. यसरि त •पोदेपो रोपनेहारामा पल रनेदाग । सपा अधा, (मया ) भर घarzrm" रोती पोरेपर सहारा । गुटगा. गरधानु, (म.) Irrit. अध्यानन, (वि.) म भोभषः । श्वग+शु-उन । गरे दिन. लिये नरहनेहारा । एकदिन नियोग्य | अपार-६. (पु.) पदभार .ranti दापि पालि। गयामा Intemium अभ्याभिधानी, {पी.) मोऽभिधीयतेऽभिभा. मया । अभिया+पुर । जिसमे पोत एरा जाता है। अपमाल, (पु)AY पर Anew re पोरे बोधोपी एसी । "मामिपानीमादने". wuni (मा.मुख,thi हामारि (T.) तिमपि । भंगा, पाठ) पवार (RTMAtre irrIRL FREER TET(Pram अभ्यारोह (3.) अर्थ Priti mगण । पोरेगा कम रबरt.rrr. " पहा । पुषent रनेदरा । "". मन , meri (अधिन्, (पु.)लि. मा गति ययो । नि!ि २.५, ६, २७,, हुने मके पोते । स च (कीम ) मिनीरा अमान, (२.) गुर २ (tri. पूरबीसे पिन उपमहर पुष fairs (ग) अश्विनी, (4)ोनrrise I nि KTI गिर पो बसे। "" "ह मामी, (or) retireme विम TRa. अधिमीमार, (पु.) RIPTrrie tनी ARE NOT Trir अपमानित (३. भार (RERArtiheera * furternorre...ng K रपा र रोम(m) RITTET Et. अभीप, (.MMERCEe) Pr,neet) - Read t. मार, (..) रस भयोग (MPLET (it). इस vir स. rant . ।

. संगी। धराफा कमजोर नातोक्ता अगाताभगमर्थक त. म. अंगे पटका कपालदुपर्मयोगप गुण अगमा दामयोगविभागादिका अगमवासिकारण यो तिनि । विचार कियेविना काम करनेदारात मपाल,] ( ७८ ) [अच अयंकपाल, (पु.) अष्टमु कपालेषु (मृत्पात्रेयु) संस्कृतः (असहय, (नि.) मासि संख्या इयता यस्य । दिन पुरोडाशः । आठ मट्टीके पात्रोंमें शुद्ध किया गया चरु (घी संख्या न हो। पराधसे लोधगया। बड़ी संख्यापाय आदि)। जिसके द्वारा यज्ञ किया जाता है । यज्ञ. असङ्ग, (पु.) सन्ज्यन् न० त० सगरहित । परमका अष्टाम (पु.) अटो भनानि यस्य । जिसके आठ अंग महादेव । पुत्र, धन, और लोभवासनाको छोडनंद हों। योगविशेष । यम, नियम, आसन, प्राणायाम, वैराग्य । न० व० । विषयकी प्रीतिसे रहित (नि.) प्रत्याहार, ध्यान, धारणा और रामाथि ये आठ योगके असद्गत, (त्रि.) सम्+गम्+क्त-न० त० । सातिरोध भंग है । इनका सरूप अपने २ गब्दके अर्थमें क- तच्छून्य । जो औचितीसे शून्य हो । अयुक्त । विलय हेंगे)। जानु (घुटने या गोडे ) पैर, हाथ, छाती, असङ्गति, (स्त्री०) सम् गम्+क्तिन्-न० त० । बुद्धि, सिर, वचन शोर दृष्टि (नजर ) से किया गया प्रणाम है, जल, दूध, कुशाग्र, दही, घी, चावल, जौ । असत्, (त्रि.) अस्+शतृ-न०त० । सत्से मित्र ।। रह । सगति (मेल) का न होना । अर्थालद्वारमेद. भौर सिसाक (गोरीसरिओं) इस प्रकार आट द्रव्यो- होना । विश्वासविन कियागया होम आदि । अमाप से बनाया गया पूजाका साधन अपं है. "स्त्रियां टीप्" । कुलटा । व्यभिचारिणी श्री. अधादरान, (नि.) बहु• अष्टाधिका दश, अटो च दश ] असद्ह, (पु.) असति (अविद्यमाने ) वस्तुनि का चेति वा । साटमे जियादा दस या आठ और दरा १८ (आग्रह)। न होनेवाली चीजमें हठ करना । बाट रह "पूरणे ढटि" :८ संख्याको पूर्ण करनेहारा । अठारहवा. अष्टादशा, (पु.) अष्टादरा भगानि यत्र । उहा १८ | असपल, (त्रि. ) नास्ति समानः पतिः यस्य । विभ थार हैं । (न.) वैद्यक शाग्नमें प्रसिद्ध एक पाचन है. सौतिन स्त्रीरहित । जो शत्रु न हो । मित्र. अष्टापमाः, (पु.) अतः अष्टमु भागेषु या वक । आट असपिण्ड, (त्रि. ) नास्ति समानः पिण्डः यस्य । विका अगाम देता। रहोडका पुत्र एक प्रसिद्ध ब्राह्मण, पिण्ड (पितरोंके लिये एक चावलोंका गोला ) केसर अधिः, (ना.) सम्पते भूमी शिप्यते, अग+किन् पृषो. संबंध नहीं । जिसका रुधिरसंवन्ध न हो. पनम् । एक मेलमेका पारमा । ६४ अक्षरोंका एन्द. अधा, (.) मापते यास्यतेऽनया, अक्ष करणे छन् । असभ्य, (त्रि.) सभायो अर्हति-यत् न० त० । जो सबने लायक नहि । स्त्रीवर्णन आदि। राल । नीय. पारेपलाने की या यात्रुक या था. अष्टीला (ली.) टिमनुस्यकठिनापमान-रा+क-रस्य लः असमअस, (न.) समजसं (युक्तियुतं) न. गोत पर बीमारी । चोट लगनेगे जो नील जो युक्तियुक्त नहि । जो ठीक नहि । असरत । म पातायातमे उसमा रोग, र राजाका यदा पुत्र (पु.). मर, मकन भरा ऐना भार जाना सक• भ्या. भ. असमद, (वि.) सह मदेन-गर्वण समाना ऐर । भगतिने । वाधीन्-2 । “लावण्यमुत्पाद्य इवारा" नास्ति पत्र । निर्विवाद । जिसमें कोई विवाद न हो. असमय, (पु.) अवकृष्टार्थे न. नाममा १०पर मेद । अनि । अत् । बभूव अयोग्य कास। मौका. अम्,ग-दिवा.परगह मेट् । यति । आस्थन. अगमर्थ, (त्रि.) गमधः शक्त। असंगत (वि.) सम्++म+गुद न• •। गर्भाधा- नसरीने हित । व्याकरणके मस्कारमे शन्य । | असमघायिकारण, (न. ) गमवेनि-सम+AAS भारनिगारा पद असार (भय.) न मानन· । वारदा होता है, उस्मे भित्र द्रव्यो रहनेहारा गुणादि असत.(.) मापन.न.। यगम्गेि अन्य । पटनी मनिराला"मसनः मनमन्वभूर" रति गए। "मन"ar. किया. आ (N) मान पर जो अपम- आमाश्यकारिन् , (नि. ) समीक्ष्य विरिष्य न । #राहोरा या गा. अमान्नमाम, (बु.)२ माद (एन पी हाम राग । मूगं. रदामि बन्दरगर्ने म गर्ग मरिम आगपत्ति, (नि.)न-सम्पतिन् । trxमममम. ममतारी।सी. का हठ. । त. गिनिन. । न्यायमनमें समाविकारण भग . , .. - मार्गमहाल, (f.)-mar I rth. fe..karte Trयान"IPETIT Press (Arien). rry-romart (म.) me meri , rh अमिश (d + rrrr... mein.ndtri M mantra wire, trick, t... -धापायरयार (1.) 4.I mtarm arer MAITRA re'. afirit...... Panam (f.)worrentarinitinue Channel माग him आग, 11.) my Hindi wintroni 'ITR(Summer Immitm ...mmmmm Tv (11) merimer. I ama meERERTILAamwittn जगार, (m.) Aments | {... Raniin IN लपर्ण. (1) Mutat farm ' । MITUmr aur.(.) utth ma... ।।।। ormannment.) artiem (HI).in... ...... W - " mfont ...... Hrn. 1 . ormation.!.) . ५ It'.... MINण (h ... . T *...

असाम्प्रतम्, (अय.) न मानां युदं न० त । अन्त्र, (न.) सम्यते मिष्यते । बम छन् ।। भयुआ। नानुनानिव । अलान्तर । मारह. वाणादि । "करणे ट्रान्" धनुर । तरवार बांटे मसार, (पु.) नायि गारो यस । गारहीन । एउटा अखचिकित्मक, (पु.) अम्नम्य अपरन्दर वृक्षन.त. सारमित न.व. नि.मार "असारः हिमकः । रिन्युन् । ६ त । अव भन्दै सब संसारः". हिमा करनेहारा. अनि, (5.) अम्-वनम्ना फेंकनान् । सा । दरवार, अग्निन्, (नि.) अनं घनुरम्याग्नि-इन् । भद्रा असिमी, (छी.) मौलिता कशादी शुत्रा जरती हारा। किमी किममका सन्न धारण करनेदारा तद्भिमा अबदामादेशः दी च । अन्तःपुरचारिणी अस्थान, (२०) यप्राशस्य न० तः । दाधी । जनाननि जनआनेवाली गोर्गानी विशेष. | अस्थि, (न० ) अपने- अक्थिन् । मायके - नामने प्रनिद यानुनंद. असिगड, (इ.) मस्ते शियदे ! यम्म्दन् । अतिः अस्थिधन्यन, (पु० ) अस्थि अस्यिमयं यदुग्म हिमो गन्डो यत्र । उहां गाल रक्सी जाय । गायरा लि. अन समा०शिव । महादेव. असित, (I.) नितः त्रः । विरोधे न० त० । शुन्नवर्ग- अस्थिपञ्जर, (पु. ) अस्थि पनर दन । होय नित्र । कन्या रंग। गनिह । नस (वि.) मुनि- अस्थिमादित, (पु.) अस्थिनी मटार शिवी. असेचनक, (नि.) नमायने नृयते मनोऽध । ति । अनाधिर, (नि.) नानि माया शिरा बम +युरपन् । गतही पिसारा दर्शन दिने देमुन मन शिगहित । स्थूलमर्गररहिन । नादीरहिन. असद, (वि.) अन+मदिछ । समाची भसेपन, (नि.) मलेर+अन । मेका न करनकाला । अलि, (अन्य ) में "तानम्मि वरिम विदुरन में। हम । देहानिमानी जीव. अमेदित, (वि.) ममेरा न मेरा दिया गया । छोर | अस्मिता (ग्रा. ) अस्मि दाम्य भावः दन् । दर.. गानने प्रति प्रश्न और पुरुषको एr Fit परेपियर-र.(f.) र सविनः परः न प्रय और दीनको एकम्प ममनना. NिRT मैन । यो पनिओ भयदा व लोगॉर अनज, (न.) भग्नात दधिरान रमपान गरे देरी. ग कंपकपर जो लोटू, टपन होताहै। माम् । प(f.) पुत्र सपनः न+मुठ+अग् जो दूसरे के साधीन. पदारमानि अग्यान नही. अम्बतन्त्र, (नि.) नवम्य नत्रः अधीन ।' बल, (५.) ले मुहगः पत्र । साधरे । अम्पस, (पु. ) मानि मतो निद्रा यम । तिने । पिन । मूर्यन नेश पर्वत । "कन "' देसर (वि.) मयुन । RIY क्षम्यापं, (त्रि. :यति-मग यत्-न... •rमर (व.). हेतु धर्मश त्रिी । निपाराम सुगर मसन (म.) पटन। सिर । नय। नव अम्पाय, (f.) न पम्मिन् मिति, न जी मानेमें नही रहताबिशाम । यदिद। अरमन, (.) र म । मूर्य थलसम्याध्याय, (नि.) न मयायो पत्यानं प्ययकीन (मो वेदन पता)। "' बस्द,(:.) अदनं । पर। पमिन्" गिन पालन अम्मानिक, ( .) नमानी यम । जस्ति (8.)ना । . अस्ट(८) । या अग्नि, (पु.) ihndi.ee भद. ..गा। प्रार(firew..fe पतामह, बनाUR.itor ririmarth.).

. ] ह, (अन्य ) प्रशंसा । तारीफ।क्षेपमा फैरना। रोकना. अहित, (पु.) न.ता। शत्रु । जो हिनकासी न हो --ई, (यव्य• ) मैं । अगर । सामसम्बन्धी अभिमान. (नि.)। बीमारीमें रोकी गई खुराक । अमाल. नयु, (नि.) अहं, अहंकारोस्लस्य । अहंन्यु। यहवारी. अहितुण्डिक, (पु.) अहेमु मुर्ग न देव्यति । टन् । अहंकार, (पु.) अहं इति क्रियतेऽनेन I पम् । अमि- साप पकनेहारा । साँप खेलनेहारा. मान । गमर. अहिफेन, (न.) (पु.) अहे: फेन. गरब दीन- राहत, (न.) हन+कन.1.1 नवम्बर । नया वपन। तात् । जो सांप के समान हो । अपील. मेजर्ष । अनाहत । बगैर चोटो. बहन, (म.) म जहानि न त्यजति सर्वथा परिवर्तमान | अहिबुभ, (:) अहेरिव पुत्री प्रीदा यम्य । वि।स. दमा । विशेष । उत्तराभाद्रपद नक्षत्र. र स्वात् न+हायनिन् । सदा घूमता रहताहै । दिन. अहिभुन्, (पु.) चर्टि मुर-किम् । गर । मोर। हिमहमिका, (खी.) अहं अहं शब्दोऽस्त्वत्र । वीणायां नेउला. हा द्वित्वं टन्न टिलोपः । अन्योन्यात्मस्तुति । अपनी प्रगंगा अदिलता, (मी.) पहिलोत्रम्य पर . भरनी । मही सबमें बाद ऐसा कहना. हाताम्यूटी। पानी घेल. हम्पायका, (स्त्री.) मई पूर्वोऽहं पूर्व मत्यभिधानं यत्र । अदिविहिन, (5• ) मा राप र सरिन् । टदाईमें पुर करनेहारे उत्साहपूर्वक पहते हैं कि मैं पहिले जाऊंगामेही पहिले जाउंगा । बढकर लाना. द्विप भूले जि । गएरा इन्द्र । मेरेर निरला । गि है हम्मति, (पी.) बदमल्याकारा मरि ज्ञानं । मन्मक्ति- अहीरणि, (पु) अहीन् बरसरि दी। दिमुपसर्प । दों मुहल्ला मार (नो बनेगे तो म् । अविधा । भोर में औरके धर्मको दिपानेद्दारा भान. साप भाग जाते है ). लावर्गण, (पु.) मा गणः समूहः । दिनोका समूह । १.दिनका मारा. आन, (पु.) मानिएपन पत्र । हार पर कियागया । धर्म मापन होनेपाली मारिन । सहदिप, (म.) महय दिया य । समा० । प्रतिदिन । ध्यानयोग । (म.)(नि.)पुर रोजमरी. महर्मुख, (पु.) असे गुर धादिभगः । दिनका पहला | अनुक, (त्रि. ) हे भyin....res. राभानरहित । फरकी विनिता भाग । प्रायूए । प्रात पात रावेर. पचरहिन पर बिमा । रबर. प्रतिका, महानि हीयते, सोयनितः । स या पन्अहो, (अन्य ) सोच । म तिर हो । मुदा । मृतक पारीरVai. बहुत बोलनेवाला. संबोधन दिया मिरम्ममा सदस्य, (नि.)मलाय भवति।लमें ममता गया। सारीफबाना । बस् एमnिinker 4 (5.)। एडनगरा नाम ।-स्या (सी) 1 गौतमकपिदी अदोषत, (म) म । । । *रामाम होमगोपन समेत सधन. भरपर-भरपी, (पु.) अहः रोती । र । परमादिषात् रातम् । किर । सूर्य । तर अहोरात्र, (पु) माय मर । . मिरा अहाय, (प.):rt. सिद, (प.) सम्बोधन । बाघ । खेद । वर्ष भहस्य, (वि.न.म.ntir-. महार्य, (I.) म. तपाको आ जाय। जो लोग माय (Ir.). आ. (ER) र सार। अदि,(पु.) दिन रिपोर माह पर रामुखर । । । स । पोप लाए ही र पर लाभ ।' मुगापित। मीरा मन. ferrert(m) । अहिंसा, (f.)महिनामा नारो पालामा (मा)Ker पर ७.२ मे गोपन दोसेसर, मालगोपीना अदिजिद.(पु.) हिना सागरस्तरिडाल. titi(पु.)र - पुरायान आचमनीय, (न.) आचमनात मुनासार नमिनु आदिसे कदागया घानमार थानीघ्र, (r) आग्नीध, (न.) अनित्ये अमीन् तम् शरणम । होम आमात-(fr) - करनेहारेका घर । मनुवंशमें प्रियनारा ज्येष्ठ पुत्र. गया। गंगा CITIE आग्नेय, (न.) अग्निर्देवतास्न्यस्य यम् । जिसकी देवता गामा. अमि हो । मुवर्ण । गोना । घी। लालरंग । वरिपुमा माहाम्, (न.) अ "" (महापुराण) । आगवाला । एक नगर । अगम्यमुनि । गमः। बहनगे जोकोहो. (पु.) । “लाग्नेयी" (श्री. ) धौर दक्षिणा मान्य आनिक, (f.) अन मगरलेन नि की दिशा । मिली नी पाहा । प्रतिपक्ष। अग्निदेवता. को प्रशासनिंदारे मेरा का मत्र. नामात अंगमे जा ! आन्याधानिकी, (प्रो.) भन्याधानस्य यनन्य दक्षिणा+उम्। निनय | "मिनरः". माझगोंको देने योग्य धन । यदली दक्षिगा. आगिरम, (I.) frrii मुने आप्रभोजनिक, (पु.) अग्रमोगन नियतं दीयते यश पुत्र ही. व् । वद ब्राह्मण जिसे सरमे पहिले भोजन दिया जाताद सबसे आगे बैठनेवाला ब्रामण. आगाप, (पु.) यार-मर्थे । यदि गीता गीत. आग्रयण, (न०) अंग्रे अयनं मोजन शम्पायन कम- या पृ. इसपव्यत्ययः । नये फटादिका भोजन आनन, २. या । योलना । प्रतिदहार करनेसे पहिले एक प्रकारका यत्र । एक मिशा मम् बलाना । बन काना भाय। बाद पानया थन. सानुग्म्, (अन्य ) चतुपन्दछन् । पीटांना चारतक. आग्रहायणिक, (पु.) आग्रहायणी पर्णिमामी यम्मिन् मामे-टक् । मार्गशिर ( मग्गनिर) का महिना । पूर्णिमा- आचम्, म्या• प० । सायमन करना। वाला माम । "याग्रहायण" इसी अर्थमें होताद. जल पीना बादामति । वन सदर आग्रहायणी, (म्री.) आग्रहायण्या मृगशिरमा नक्षत्र-आचमन, या+म+मये युट् युचा पार्णमासी-अण्-दीप् । मृगशिर नसत्रकाली पीना । मुग आदि धोना । मुन पूर्णिमा । मार्गशीर्ष (मग्गतिर) मामी पार्णमासी. जल डालना । रिहित कनं करने आग्रहारिक, (पु.) अप्रहारोऽप्रमागो नियतं दीयते के लिये दीनवार हायर जलपान करने प्रम टक् । नियमसे त्रिमे पहिला भाग दिया जाय । पहिले जट पीना. पहिले भाग देने योग्य वामण । श्रेष्ठ ब्राह्मण । रत्तम आचमनक, (न.) आरननम्य मुनक्षत्र मामय. अत्र । जहां मुह धोनेका पानी परे। आघट्ट (पु.) थापट्यात रोगान्-ग्युल् । टाटरंग। अपा- पीकसन. मार्ग. आधान, (पु.) या+हन्थन् । थाहनन । चोट । पान्छाया+चम करणे बनीवर वा। "यापारे पञ्" वयस्थान । मारनेकी जगह । कवलपर। पानी. कमाईसाना. आचान्त, (नि.) नवम्त । वाचन आयात, (पु.)माहिन्यम् । चौट । परसर चोट करना. जल पीयागपा. आचार, (पु.) या++मी पम्। धी । “भावे आचाम, (पु.) चमु भावे पञ्। घम्" होम आदि । मविशेषसे देवताविशेष चूमना. आयूणित, (नि.) +jitक । पारित । हिटाया- आचार, (पु.) याच भावे घन्। गया। प्रनिता गुमायागया. आचार्य, (पु.) आ+च+प्यत् । आवृति (वि.) थागती प्रमिला मिरम्य । मेरमै रम- कोहारा । प्रायमन । बहुनमै घनकाला। मूर्य (दु.). पवीत कर का और उपनिषदहिन वैद का पढानहाय । आमाण, (२.) य++5 गन्धप्रदन | गन्या देना। संधूना रिवना. यादि । "नियां टा" आचार्या । आचायांनी. न. मनमंस्थापन कानाम .

भारिपेय, का धनी. गा। परदा करोंका शुष्ट यिक, (पु.) मागम कर्म भावोवा-गुम् । आदफ, (पु.न.) भाभेकते-आवाक्यम्-पृषो। पियंगम । आचार्यचना । सापार्यक परनेला. परों ओररो दस अंगुलमा माप । चारप्रस्थ परिमाण । पारसेर । पटोप्पा । अनाम गिननेका पात्र. स, (वि.) मा+वि+का होत । हाल किया- आढकी, (सी.) भागकते भच्-पृषो । बहरनामी शमी- कापस । बचन । पसाभा । एक रपरा भार पा धान. ५मन आष, (त्रि.) आ+ये+-पो• । युक्त । मिलाहुआ। एन, (वि.) भा+vs+m | रा । पाहुभा । गाभा। आपक, (पि.) भगक एष खा भण् । नीव । छोटा ।सं। पाद, (पु.) भासयतेऽनेन । ए+ मिकरणे स्त्रीपुरुषकी क्रीडा आणि, (पु.) अण्ण-बियो वा । रपट भागे- डादन, (न•) मा++पिम्स्युर । पत्र । कपड़ा। का होल । नोकः ।। कोना. आता (पु.) सास्तकिम्पम् । रोग । सन्ताप । सन्देह । उप, (नि.) भा+डियो स । एलरो ढोलका शन्द भय । डर. रागया। बाटागया । ओररो सोयाहुआ, | आतशन, (म.) भा+अश्ल्युट । पेग ।राक करना । दुरित, (न.) मार+क । शब्दपहित सना । जलाना नारा फेंकना। उपदव । मुसीयत, शेरो पिराना । विसिताकर इसना । नसूनों का दारातत, (नि.) भा+तन्+ । फैला दिया गया। सिकार ., (न.) आयतेऽनेन । भा+मन+पम छ। दिया गया. ।“अबस्दै म"।रेका मांस सादि. | आततायिन्, (त्रि.) आततेन विस्तीर्णेन पारिना क., (न.) अज्ञानी समूहः धुम । गसमूह । अविवं शीलं अस्य । अय् +णिनि । शास्त्र उठाकर जिस- पा मारनेका खभाव है । मारनेको तयारहुआ। महा- जे,(पी.) असन्ति भयो । महन्-न बीभावः । पापी । ७ प्रकारके महापराधी-आग लगानेहारा, दिप- मरभूमि । सभामभूमि । साईकी जगह । गाली । देनेहाण, दानवाला, धनका चोर, खेता चोर, और श्रीरा पोर. जीय, (पु) भागीयतेऽनेन । भाजीवरकरणे पम् । आतन् , सना-उ- 1 फैलाना । विछाना दोकना । तनोति- भाजीविका । जीनेका निर्वाह । "आजीविका" इसी तनुते । ततान-तेने । अतानीद । अतनुत-अनत. में आतप, (पु.) आ+त+पम् । पीडाका कारण । दू, (खी.) लाजवनि । आ+जु+किरदीपः । तन सूरज था भागकी गरगी । धर । प्रकाश । सूर्यका पाह पिना काम करनेहारा शा, (श्री.) भा++भनिदेशा ऐसा करो ऐसा आतएव, (न.) भातपात् नायते ।क। छाता। शासन । हुकम । ज्योतिषप्रसिद लमसे १. वो स्थान. ओ धूपसे बचाता है. ज्य, (न.) आ अज्यते । अन्क्यानोपः । आतर, (पु.) भावरल्पनेन । तसिप् । मीभादिके सरने के लिये भाडा. ज्यभाग, (पु. यायस भागः । होम । माहुतिवि- आनर आतार, (:) आठरति अनेन-ग+आप+प वा। नदीके पार जाने किराया 1 मसूल. शेप पी. आतापि, (पु.) आता । एक देखरा नाम जिसे अनेय, (पु.) अमनाया अपत्यं रक् । हनुमान्, अगरलने निगला. पिक, (न.) भटा चरति, भवो या ठक् । अंगठी | आतापिन्, (त्रि.) बान्तप्+गिन् राबरा (पु.) सेना जंगली. पीलरशी. टोप, (पु.) भानुभम् पृषो• रस्तम् । अपार । आतायिन्, (पु.) भाताय्+गिन् । पौल नाम :- वेग । ओर । वायुये उत्पमहुई पेटकीभीमारी. चिद पक्षी. इम्यर, (I.) पा+पि-अरन्फेकना ।। तुम आतिधेय, (न) भीियये इदम्-वर् । अविपिके लिये अहंकार वाजेपी भावान । भारम्भ । पेग । आगो भोपनादि । "तर सावः" । अतिमिरी पूगा पर । रोयाबादलका गर्जनाबामा स्माापीय शम्म कुशल (पि.)

जातिथ्य,] - आतिथ्य, (न.) अनियरिद-व्यः । अतिथि । अतिथिसेवा. | आरमनीन, (f.) अन्मने हिन+मामीन माग आतिवाहिक, ( त्रि.) अनिवाहे इहलो गत् परलोक. पुष । माला । (नाटक) विक माना हिल पर प्रापणे नियुक्त: ठक् । इस लोको परलोकमें पहुंपानेका नेहारा नदिनकारी. काम करनेहारा । मरेहुएकी सूक्ष्मदेहको दमरे लोक आत्मनेपद, (न. ) आमने या मार्य करतोपनाय पान में पहुंचानेके लिये ईश्वरसे नियत कियागया अर्चि- अठक ग. । अपनेन्दिरी पद । दो पामगे एक गिरने रादिस्थानमें निवास करनेहारा देवविशेष । "मातिवाहि- गंकृत धातुओंका उगारण होता है. कस्ताहिकात्" वे सू० आत्मयान्धय, (पु.) भाग्मनः बान्धरः । अपने वाया। आतिशय्यं, (न.) अतिशय-साथै प्यम् । यहुत ही। मातापी यहिन के सरके । पिताकी बहिनके सारे। बहुतायत । महाराशि, मामके पुत्र ये सब अपने यागु समझने चाहिये. आतिष्ठम् , (न) अतिष्ठस्य भावः भण् । सबके ऊपर आज्ञा चलानेवाला. आत्मम्, (पु.) आत्मनो मनगो देहात वा भवति । आतुजि, (त्रि.) आ++इन् । किसीपर आक्रमण कर- किम् । जो मनमे था देहमे टपजना है । चारमुखकाय नेवाला । हानि पहुंचानेवाला । लेजानेवाला । हिंसा कर. विधाता । कामदेव. नेवाला. आत्मम्मरि, (नि.) आत्मानं निभनि-स-मुम्य । अपनाही आनुर, (त्रि०) पदर्थे-आ+अ+उरच् । पीडित । रोग- पेट भरनेदारा स्वार्थी । लालची । अपनेहीको पालनेहरा, युफ । रोगी । दुसिया. आत्मयोनि, (पु.) आत्मा योनिः अस्य । विष्णु । महर आतृदु, रुघा०प० । वद्दजाना । दु.ख पहुंचाना । धकेलना। देव । प्रमाकामदेव. खोलना । हिंसा करना । तृणत्ति । ततर्द । अतीत् । तृष्ण. | आमिरक्षा, (स्त्री०) आत्मन एव रक्षा यस्या । भने- आतृष्ण, (त्रि.) आ+तृक दुःखी किया गया । वेधा द। अपनी रक्षा गया । काटा गया. | आत्मसात्, ( अत्र्य० ) अपने वायूमें । किसीका अपना । आतोद्य, (न.) आसमन्तात् तुधवे-आ+तुद्+ण्यत् । अपने आधीन. वीणाआदि चार तरहका बाजा । सब प्रकारका वाजा. आत्महन्, (पु.) आत्मानं हतवान् । हुन् किम् । जिसने आत्तगन्धा, (वि.) आत्तो गृहीतोऽरिणा गन्धो गर्यो यस्य । अपनेको मारा । जो अकर्ता अभोक्ता स्वयंप्रभु आनाये दाजुने जिसके अहंकारको दवालिया । शत्रुमे दयाया। कता भोक्ता आदि मानता है। जो अपनेको यथार्थ नई गया। काम. जानता । मूर्ख । जामघाती । अपनेको मारनेहारा जन आत्मगुप्ता, (वि.) आत्मनः गुमः खशक्यैव रक्षितः । आलाशीनामी लता. | आत्माधीन, (पु.) आत्मनोऽधीनः । अपने आधीन । पुत्र । साला । प्राणका आश्रय. आत्मघातिन् , (नि.) आरमानं देहं हन्ति । हन्+णिनि । जो पृयाही आग वा पानीआदिके द्वारा अपने देह- आत्माश्रय, (पु.) आत्मानं आश्रयति । आ+प्रि+अन् । का नाश करे । अपनी हत्या करनेहाराबुदकशी. त• । जो अपना आसरा लेता है। जिसे अपनी अपेक्षा आन्मयोप, (पु.) आत्मानं घोपयति वशन्दैः । आप- आपही हो एमा तर्कका एक दोष. दी अपनेको धुलानेहारा । बावा । दुड । (काका) आत्मीय, (नि.) आत्मनोऽयं-छ । ये अपना है। अपना । (कुकु) इस प्वनिसे अपनेही नामका एकदेश देते हैं. अपना सबंधी. आरमज, (पु.) यात्मनो जायते, आमा वा जायते । जन् | आत्मोद्भया, (सी.) आमनवोद्भवति । भू+अन् । + अपनेसे उसान होता है । वा आपही उपजता अपनेमे उपजे । मापपर्णी वृक्ष। "आत्मा उद्भवो यम्याः है। पुत्र । “आमा व जायते पुन" इति श्रुतिः । कन्या । पुत्र (पु.). "आमजन्मा" इसीअर्थमें होता है। कन्या । सहकी। आत्यन्तिक, (त्रि. ) अन्यन्त-भावायें टक् । बहुत होगया। मनमे उन्पम हुई पुदि (श्री.). अतिशयजात. आमद, (पु.) आत्मा देहः यतेऽत्र । आधारे | आत्ययिक, (नि.) अत्ययः नाशः प्रयोजन अस । पन् । जहाँ शरीर देखा जाता है । दर्पण । शीशा । नाश । तकलीफ देनेहारा । बदफिगमत, आरसी. आत्रेय, (पु.) अप्रेरपत्यं-टक् । अत्रिमुनिशा पुत्र आत्मन्, (पु.) आत्मनिन् । माप । यन । देह । शरीरमा रग धातु । अत्रिके वंशमें हुआ। शिवतीय मान, मन । इति । पुद्धि । पयं । अनि । वायु । जीव । प्रम. एक नदीमा नाम । गो गालको उतरदिशामें है () । - को बारेमी, (आधर्मिक । आत्रेयी. (ही.) म सन्ति त्रिदिनानि कर्मयोग्यानि यस्साः। अदिपु(५)रुप, (पु.) आदौ पुरि देहे वराति । स्य स. पात्र । साथै दम्। जिसके तीन दिन काम बम्पन् । स्वेन आरमना पूरयति जगत् । पूर+उपन् परने योग्य नारी । ऋतुमती स्त्री। एक नदीका नाम । पा-पृल्या हसः । जो पहिले शरीरमें रहताहै। ओ आपही पुन साथै कमि हस्ते " भाषिका भी. सारे जगतको पूर्ण कर्ताद । पहिला जीव हिरण्यगर्भ। आपर्यण, (पु.) अवर्षणा भुमिना दृष्टो येः अण्-तं नारायण. अधीते- वेत्ति वा-पुन भए । तत्र विहितं पा-पुनः भण् । आदिम, (नि.) आदी भवः । आदि+डिमन् । पहिले भधर्षमुनिसे देसागया वेद । अर्थ वेदको जो पता हुआ। आदिका । पहिला. मा जानता है । अथर्ववेदमें विधान कियागया । अपर्ववेद- आदिवराह, (पु.) आदिभवो वराहः । विष्णु । ( यह को पढानेहारा माह्मण । अथर्ववेदमे महागया अभिचार राबसे पहिले वराहरूपसे अवतार प्रहण कर्ता भया). (धुमारण ) आदि काम । अथर्ववेद के अनुगार क्रिया आदिए, (न. ) आश्+िभा क । माता । हुकम । करनेहारा मामण (पुरोहित). आदेश । " कर्मणि फ:"।हुकम दियागया । आदेश आदत्त-आत, (नि.) आ+दा+क । लिया गया। रवी कियागया । व्याकरणपनि स्थानजात जैसे इनके स्थानमें पार किया गया. पण भादेश कियागया है तो भादिर यण् हुआ। कहा- आदर, (पु.) आ+र+कए । प्रतिष्ठा समादर । सम्मान । गया । पहिले बहाण्या । प्रतिनिधी हुभा. आरम्भाबत. आदीनय, (पु.) आ+दी+भा क । आदीनस्य वानं आदर्श, (पु.) आरश्यदेव । श्+आधारे पम् । जिसमें प्राप्ति वाक । दोष । ऐब । क्लेश । दुरा । दुर्दम । जिरो सहा. देसा जाय । दर्पण । शीशा । आइना । टीका । वसमें लाना कठिन है. प्रतिरूप पुसक. आर, तु. आदियते । आदर करना । प्रतिष्टा करना । आदहन, (न.) आदर+मन+आदखते अस्मिन् । जलना इमत करना. हानिपहुंचाना । मारमा । मन (मपान ) । यह स्थान आहत, (वि.) आ+द+कर्तरि की पूजागया । भादरवा- जहो को पदार्थ जटाया जाय. ला। आदर कियागया. आदा, जु• भा. भादत्ते । हैना । स्वीकार करना । भाषय आहश, भ्या• प० । पश्यति । अदर्शत् । अदाक्षीत् । देखना । सेना । भागेसे लेने जाना. तालाश करना । ( णिचि ) दिसाना । सूचन करना. आदान, न.) मा+दा+भाषे स्युत् । ग्रहण । हैना । घो- आदेश, (पु.) आदिश भावे पम् । आमा हुकम । उप- डेका जेवर देश । शिक्षा । विधि नियम । शामन । तिला. आदि, (पु.) मा प्रथमं दीयते एयते । मादा+कि । आदेष्ट, (नि.) (पु.) मारिएत । वह यजमान कि प्रथम । पहिले होना । कारण निकट । प्रकार । हिस्णा । जो पुरोहितको "मेरे इट सम्पादनके लिये कर्म कीजिये" ऐसे बहताहै । यज्ञ करानेहरा । हुक्म करनेहारा । उप- आदिकपि, (पु.) ममदेव । और पारमीनिमुनि. देश करनेहारा. आदितेय, (पु.) अदित्या अपरयं-दछ । अदितिकी रान्ता-आध, (नि.) भादो भवः । दिगा यत् । पहिले हुआ। न। देवता. प्रथम । “अदम्य सानेलायक कोई मनु । धान्य (न.). आदित्य, (पु.) अदितेरपत्यं च । सूर्य । देवता । आघा, (स्त्री.) आदी भवा । शक्ति । सब देवियें । दुर्गा। सूर्यमंडलमें रहनेहारा गुवर्णसरूप विष्णु । आक्का पक्ष । काली । पग्लियादि. मारह सूर्य । “आदिल्या दादा प्रोचा." । पुनमुनदान. आपून, (त्रि.) आदिना उन । भादिश्य । जिसका पुस १ आदिस्यसूनु, (पु.) मुग्रीव । यमरामा पानि । साय महो। "आ+A+क-कर-नत्वर"। अपवा मद्-साना जिनामा मनु । वसत मनु । कणेनामी राजा. इस धातुमे बनसला है। सब काम छोडवल जिसे - आदित्यु, (त्रि.) मा+दा सन्+3 । लेनेपी इच्छा करने पेट भरनेही या सगी रहे। पेट । भूगा. आधमन, (न.) भधीयते । मा+धा मनन् । बन्धः + आदिन, (वि.) अति शी भगिनि । सानेवाला. (gth) पर देनामादि । निक्षेप । अमानत । गिरी. आदिदेव, (पु.) भाक्षरीन्यति-वयं राजते । दिव् अन् आधमर्य, अधमर्गस भाव धर्म वा-यम् । सर होना. ताजो प्रथमही कोग करता है। भापही चमाता आधर्मिय (नि.) अधर्म पनि ठम् । अन्यारी. है। नारायण । शिवजी महाराज भादिकारण बना. साफ नेहरा जो धर्म नारी. . ५ वाय.

""हामायाका-ir [उन्दै , मागे निशिएका जापति, (८) नाधर्पित, (त्रि.) आस । अन्यायमे आक्रमण | आमात, (त्रि.) आ+मा+का गन्दित pि) कियाग । बिमा सराप देमागया । वेइन्साफीमे द आवाज 1 मराहुआ। मडादुआ । वायुरोगमे पेट दाया गया । "मार्गग पतिः पर." इति स्मृतिः आध्मान, (पु.) आ+मा+न्युट् । कायुध रोग आघान, (न.)+धातुर । अमानत । मन्त्रादिसे पाईकी बीमारी । लोहारको फूंकनी। पटना. अमिरराना। "सपने मोमाने च"इति स्मृति । गांधान. आध्यात्मिक, (त्रि.) यात्मानं मनःगरीरादि ... आधार, (पु.) म++पम् । अधिकरण यायय । मा. स मवः ट। शोक, मोह, ज्वरादिम उमर सरा ब्याकरणतिर औषपिक, वाषिक, अभिन्या- आध्यान, (न. ) आमच्य+न्युट् । चिन्ता। सोवाति परनानी अधिकरमारक। मुप्तनी कारबमें पं, पर ! उत्कन्टापूर्वक म्मरण । दडे चावसे याद करन।" आर (मेटीकी) यावाल (मन)। उ. शोकके साथ म्मरण करना. आधि, (पु.) आधीयते यनिनिवेश्यते प्रकाराय मनो- | आध्यापकः, (पु.) अध्यापक एव, साथै न् नेन । बाघकानी पीटा । बढी आया। याय थारमविद्याकी शिक्षा करनेवाला. या समानता दमन. आध्यायिक, (त्रि.) की (नी०) अप्यार टम् । आधिकरनिक, (पु.)अधिकरणे नियुक्तः टक् । कचह पनमें टगा हुआ । वेद पटा हुआ । यधीतवेद. रीने साहुमा । अन् । न्याय धरनेवाला. आध्यासिक, (नि.) की (सी.) अध्यागेन । आधिक्य, (न.) अधिरय भावः प्पम् । अधिकाई । टक । यध्यास (एक वानुमें दूसरीको बहादेव बिसादी। बतायत. उत्पन्न हुआ. आधित, (नि.) मयिक । टेडा । तकनीक | आध्यनिक, (मि.) श्रध्वनि व्यापूनः-अशलो. सिस। पीज. यात्रामें गयाहुआ । मकर करनेहारा । पत्र आपिरिध(नि.) सन् अभिनयान् अपित्य Pामावरम् मिदास गत वायुआदिसे आचरिक, (नि.) अवरक्टम् । जो या करने आपिल, (स.) अपितोमर पन् । मानीका होना । आध्ययंय, (२.) वी (नी. ) अध्ययोः मठ तःहै। पुरोहित । मोमयनका विधान करनेहरा तर. अम् । दनुवेदनें कह गया अपना काम । अपः पाधिमानिक, (वि.) मन यमपनि अनि अपयुंग यजुर्वेद जमेदारा. जामिनट-दितिः। पत्र मार आदिमे आन, (पु.)आनित्यनेन । आ+अन्+करने दिन। आधिग(.) मारय मायः धर्म यम ।। स्थित प्राणवायुग नागिकामे पादिर आना। मुग माग टेना । पंना. पसाहान. पिदनिर, (२.) योदनाय घोर विपदय आनक, (पु.) अनयति गोमादान् करोते । हंटर ले नटत्र का । दूसरे विवाद गिवायुल । बात्रासारा सामा' सारे पुरम परीसिया धन । यि शुदकानेहरा बादल । छपाइकानदारा (नि.) Freeमर ली ये दगा परिषद आननुभिः, (पु.) मानक. प्रोगा। देविशेग्ने सम्य । वमुदेवा नाम । माधु, म. सार । रत होन-गनुत । fr(मोग्गबमें ऐगाड़ी पर |याल (I) गुनारेमरtrअर-अ. अधुनिर, (f.) : मकरम् । दरबटन। मानार, (नि.)ही (. ) . म (8) अयाटगे उमx. आरंद, (.) rrrrry | मानन, (f.) मनम् TRAIN arcणी(R" रिटर नमुन शिव पुरा मानति, (2.) भनी सीमा mire, (..) सो ering the ripture (..). नय, (न. ) T+ना+का । समग मा पगा आनुमानिक, (नि.) Rhi होल । गदा मा पादोंको समता। गुषमा । वन अनुमान प्रम गर्ने फगाभा । शाहुआ (नि.) पोशाक पहिरन । पहागया प्रपना रदन निर" नाना कारोंपर परीपदारना. आनुथपिया, ( निारे बना देर आनन, (म.) ममी बनेन । मा+अन्सारणे पुर। शिदिन का वो पिपान पिन जिरगे गोग देता है। मुग. होमग यःमें गिराया बगा।"on" नलयं, (न.) अनन्तरं एक पारित गायें प्यन् । अनन्तर । हामीय निमदीरी। रिनागरक, 1 पाराही मानुपतिक, (त्रि.)-(.) - गननय (म.) भामग्त भावे गायें राय बनायत । र शियोtime गिनीदिना । देता और ठाम मागया । साभार-. अनानगुग। बसनुरी. मानूग, (त्रि.)-श्री (श्री. म.ri गनर (पु.) आमन्यमा । शुग गया मतदाता. नरोना । भानन्दपाया (नि.)। "साहानमनन्नं | आनृण्यम्, (.) मग प्रम"ति. माण (m). नयम, (२.) भानन्दयणगेम । माkिatre | जान, (18) अन्ना | ram परणे गुर । जिसे प्रगर रहा है। बानेशानेगमय सभावाम पुपालप्रारी मानन्द राजाना । कानगाने गमय आग मित्रोंग मिलना. राम, मानादमय, (I.) मानन्द प्रgus-प्रानु मगर । भ्ययंग(.) Whem mm oriters गिमानभानन्द हो। जीर। बेदागोप गुशिता (गाम)artere सी प्रास गाना(f.) am भर . भानपदार्णप, (३.) मानन्द अर्णव स भीमपर। । पीगी जिसका कानन्द की मtt पामे | आग्नालाय. (R) IREM Terms or भाज्योपोर यात्रामा विशेष .१ INTrt PERIT पायतानन्द माताहिक (.)(.) Writers माग्दि, (पु.) गरिन् । 3 Ien. भरमार मान, (I.) परिसर । IITT मारे पक्ष । मातिा, (# ) #merror ary पाला मारा। Henानवादी, भाष, (..) 430 1 , rrke नाप (3) मानायले योऽनेन । YEntr"WEEK ame * काजल "भारोपीलापन। (1.) "form जोनमा आम्दो, varst. om. in आना(पु.) Amritra ache numerutik. आम्दान. {..) arrer ' ! " भानाति(.) जानुपाय, (A) MINE भाप, आमिर . ) ... reka ARTI Print एETTE PER HIT - . नागप(..) RT 2 irritatinirefer. h. } * er er. 'भानुषी-(... HERNETRER Otorrentmarittee. . - int orntri मा(१.) TRIP अन्वोमि] [पन मान्वीक्षिकी (मी.) अनु वेदश्वगानन्तरं इंशा परी आपान, (न.) आपीयते सम्भय पीयते मुराम। म बनाया सा प्रयोजनं धमाः तत्र सातुः वा टनि न्युट । जहां इको हो कर मापी जाय । मय पत्रिी । विमो द्वारा गनेगये वेदी परीक्षा की जाय । मटार बैटना । च । मद्य पीने की समा। रवि दतियालय मन्तक। सभामरिशाइटम म्हानी. चौडी. मा..सोनिका न्या. ५. भापति। मार। | आपिझर, (न.) ईपर पिसारसम् । थोडा पद मान् । सामति । मुं। मान । प्रात करना । पाना। मर्ग। सोना. आपीड, यापीडअन् । चोटीकी माता ।। सार, (पु.)सायन्। पाट वमुत्रोंमेंसे एक देता। भूगग (जेवर )। परसे बाहिर निकली हुई साम -पम् (२.) (मो मन्दः ) मजयमूह । मुगन वा देना । माटा. उग्रामनप्रदान सारा, आपीन, (२.) ईन् पीतं । प्रा. त.। माथिल सारगा, (..)ोभिः उनमन्डेन गच्ची वही। योदया पीयागया । मम । घोडा पीला। मुरम. रोट महमें ई-बहे । नदी। दो. आपीन, (न.) आ+प्याय+क-पीभाव नम्र मारन, (पु.२.) भन्ने चिन्ता । सा+ कर (हकाना ) रा (पु.) परे पम् । गाउपवते है । । । कय- थोडा मोटा (वि.). सागर परोदरा स्थान । सन । “माये | आपूपिक, (न.) की। पर. शिर्ष सय "परमार ब पूरे बनानेहाग। मानहाय। पूरे याने मादिपि. ) सम्माना दगाः रस् । कडा पेक्नेहारा । पूडोम ममूद । “अधाना धन गा। गरीर रोका करनेदारा। | आपूष्य, (पु.) अपुताय यापु. मा यः । सह ।। म बिग बनगो. माय (fr) retri repमुगिगा | आपूच्या (प्रो.) थामा। भाजपा TIRITE बरनीत. Tra. (2) मगर निभ प्राणी आपोलिम, (न.) लमगे । री, टो, (12)Triनि गर्म हो गया है। १२वी राशि आग, (नि.) विषम । मरोगा । जाति) um.framII रागला । भरोगरे लायक । पाया सामया । मय Cre. पाश्मि रहित । यथा पा रहा । म. (f.) भाई मा-टप । दिन धन्य सत्यवाना. ३ मzि गोआकाम, (f.) मनःप्रगः अमः सामना frre term frमरे frartiगा। गिने अपनी पहा पूरी की होगमा प्रह या। गदा नगा मेरमा । परमेभा. बालम, (.) अस्त । न । पनी । “मामा सानानि (पी.) मा. सर'..। यात्रि। पना गन्दियनियराने (गला राग)का वन Arrantar .:.)नी र मन आगपत, (२.) भाया । गुमा री....)भर मात्र मग । मुर्गाद" तमीदार tra प्रामाद (प्रा.) प्रायलमयी। ...ear पर पyo irr Hd पान, (Fr.) प्रभाग t.rap.imastraa भने - साहन, (१९५ ), [षमुभिक राजापट. - - आशुत, (नि.) भा++6 । नहायाहुआ। "भावे छ" आम, (नि.) मा ईपतु मम्यते-पच्यते । आ+अम्मकर्मी महाना (न.). घम् । अपक। जो पका महि। फलापत्रीक नामी यातमत, (पु.) साठतं वेदाध्ययनानन्तरं यानं प्रतम. रोग। अनपच (पु.). रत्वस्य । वैदपदनेके बनन्तर नहानेहारा । वेद पढा हु. आमगन्धि, (न.) भामस अपम्य गन्ध बगायो यत्र। या। गृहस्थाश्रम न करनेहारा प्राचारीमेद। मानक । इतमम ।कचे मोग आदिके समान गन्धवाला जटवे भदवर्यको समाप्त कर घरमें आया माझग । गृहस्थविशेष. हुए मांसकी गन्ध चित्राके धूमी गन्ध. आयर, (न.) मा सम्यक् बदं । बन्+मावे । ८ आमनस्य, (न.) मप्रशस्न मनो यस तस्य मारः म्यम् । बन्धन । पका पाहुआ “आधारे "प्रेम । मुहबत । मच्छे मनका न होना । दुरादाद । शोक. "कर्मणि क" भूषण ! जेवर । गहना । "करणे " आमन्त्रण, (न.) मा+मत्रान्युट । अभिनन्दन । प्राप्त यो । जूला (पु.)। पाहुआ । काहुका (त्रि.), करना । मुलाना । अवश्यवर्तव्य (मायादि) में मुटना। आयिल, (त्रि.) आ+विल्-फाडनाका कम । काय । निमन्त्रशादाक्त करना. नासाफ. आमय, (पु.) आमं रोग पालनेन+मा।परणे पायें । आयुत्त, (पु.) पानं भाप्+किप, पापमुतनोति । उद्+ आ+मीम् मारना+करणे मच्चा। जिस्से रोगी होताहै।रोग. सना नामोहिमें भगिनीपति (बहनोई) की संहा है. आमयापिन्, (वि.) भामयोऽन्यायोति पनि । आमरण, (न.) मा++कर्मणि ल्युट् । भूषण । जेपर। रोगयुत । रोगी. आमर्दिन, (नि.) आ+मृदसन् । मलने सोयनेला। आमा, (दी) मा+मा+अर् । रीप्ति । चमक । शोमा । दवानेवाला. कान्नि । सुन्दरता । उपमान । वायुका एकप्रकारका रोग. आमर्शन, (वि.) आयुर् । साना विभाग, आमापण, (न.) था+मा+त्युर् । सालाप । भातत्विरा । आमर्प, (I.) म+मृप्पन रीपः । बोध। . परस्परकथन. आमास, (३.) मा+भाग+मन् । प्रवीति । प्रतिविम्य । आमलय-पी,(पु.)मामल+धुन् । बागमारा। । यमक । प्रत्यादिक भारम्भमें संगति दिराागेका आमre, (पु.) भामस्य आशयः । नामि रानो भावला। मामलेगा पेरामडेरा मन, मन्त्राव । अवतरणिका भूमिका । गहरा । समान, श्रीरका माग । पारम्यान न परने पर । मामास्वर, (पु.) मा+भाग+वरम् (४ दा १२ देवगण. जगद. आमिजन, (५.) भमिजनमण् । जन्मसम्बन्धी । पुलस-आमिधा, (सी.) मानियते-गिप्प गरे मलयी। जन्मकालसे कियागया । सम्बन्धी रिशतादार, हुए यूपी दहि उमेरो को शिकार है। पारा माभिजात्य, (म.) अभिजात भावः यम् । कुलमें होना । कौमन्य । पाण्डित्य । चातुर्य । चतुराई । आमिष, (म.पु.) माप-दीपना-गला अच्छी समर पाने पीने और पहिरनेशी पर। रथोर । अमीण्य, (न.) अभौगम्य भाव प्यम् । पौनःपुन्य । रिश्त । मुन्दररूपातम मापस पुष । पारपार होना. मोगर शिष मगर। जम्मा पत्र, भाभीर, (पु. ) मा सम्यक नियं शी। महारामिणशिन, (वि.) मे भाति बए-न् । पसेकरमेद । गोप । गवाम देशभेद।बी.) गोपी। मारा सानेवता भदीरी, बामुन (त्रि.) कामुक मोर. आमीरपति (सी.) भाभीरा पाकिमले पर। ए । पोए।"R" न शिरेतर गोपोंके गांव। एक पायी होताई. (शिए) पहन. मामील, (२.) मा रामम्तार भयं मा मामी आमुष, (म.)भाग । प्राय । (. लीफा एपमारोप (नि.). आभोग, (पु.) बागुम्भारे बापरेका पम् । राणा सूत्रधर सापटी पर छता परिपूर्णता । पूरान दिया मालि. जिग माररावगीश). आम्मुदपिक (वि.) मायुम प्रमोर मामुमि (h.)बामन पारेर सामादि कर्म भरने पर बारामदेवलो धारापन देने परारेरेर. जायला".

माणमा कानावा देना ।गाना।और। । - जाना करणे यन् वा । जिससे उमर जानी जरा रमर विद्यमान है। दीपंजीवी । देवक संजर यत् । आयुका हितकारी बढी टमर देनेहारा I द्रीम पर हुमा सन्नाव। प्रतिलोम । वर्णमालेर पत्र देशदिवंदनाथन । मन्दिर । मायथायोजन, (न.) था युन्युर। रोकार आमुन्यायण,] (च, आमुप्यायण, (त्रि.) अमुन्य स्यानम्य अपत्य-ना. आयति-ती, (प्रो.) या+या+ति वा और । फक्-अलक् । अच्छे वंश पा अच्छे चरियमे प्रसिद्ध पुरपत्री काल । थाने पाला गमय । प्रमाव । फल नेश मन सन्तान । अच्छे वंशमें उत्पन्न हुया इसका वेटा. यास्यम्गिन् । मेठ । लंबाई । प्रापन | पहुंचट. आमृद्, श्या०प० ।मलडाटना । दयाना । माति । ममद। आयतीगयम, (अन्य ) ( आयानि गायन यमर्दीद गमये)। गांश घरमें लौटने का गमा आमृए, तु० प० । सशंकरना । छूना। हाय फेरना। आयत, (नि.) आझ्यन्यरि यीन मृशति । ममर्श । यमाहीत, यद्रीमून । कामें आया. आमोद, (पु.) आ समन्तात् मोदयति । श्रामु| आयत्ति, (श्री. ) आ+यत्+निन् । दर गिच्+अच् । बहुत दूर फैला हुआ गन्ध । गन्ध मात्र । मामयं । ताकन । मीमा । हह । मयांदा। टीड "मावे घन्" हयं । सुशी. दिन । शयन । विनरा या गोना । लंबाई. आमोदिन् , (नि.) थामोदयति मुरमीकरोति-आमोद आयाधुलिक, (नि.) की (मो.) या कृत्यायें गिनिनि । मुखपर मुशबू पैदा करनेहारा कपूर चतुर । चाटारू । दीक्षा उपायमे कार्य शिर करनेदर वगैरह । हपंवान् । सुधी । खुशबूदार । मुगन्ध । गुरायू. आयस, (न.) ययमा निर्मितं तद्विकारो वा ।। आना, भ्वा०प० । परम्परासे यभ्यास करना। मनति। का पात्र आदि । लोहा । टोहेमे बनाहुआ (नि.) मनी। मनासीत्। आयल, (त्रि.) आयरन । सित। फेंका।। आन्नात, (त्रि.) +मा+ता सभ्यत । विचार किया दिया गया। हन। मारा गया। दीदणीकृता देव बिना गया। खयाल किया गया । कहा गया. थाम्नाय, (पु.) आत्रायठे-अम्यस्यते-आ+नायम् । | आयाम, (पु.) या+यम्+पम् । देध्यं । वाई ।रेन देता. जो परंपरासे अभ्यास किया जाता है । वेद । सागम । निग- म। गुरुपरम्परासे आयाहुआ सच्चा उपदेश । वंशकुलके आयास, (७०) या+यम+एन् । परिश्रम । निहन्ट ।। कोविच । दुःस । दरद । मनकी पीडा । उसन क्रममे कहना । "भावे पन्" अभ्यास । यादत। सान्दानी। तरीकह । नसठ । हिदायत. | आयु, (पु.न.) इनस्ट । जीवनकाल । टनर ।। आम्र, (पु.) अम्बाना रोगीहोना यादिमन-दीपंश्च । "मावधिया जटायुं मां" भनि थामा भामका वृक्ष । आमका फ्ल, यायुध, (न.) था+युश्करणे पपये क । प्रहरम आघातक, (पु.) थानं तसं या ईषत् अतति याति । हथियार । थन. याचिन् युटायामानामी वृक्ष मिसवा. आयुर्वेद, (पु.) आयुर्विद्यते लभ्यतेनेन । बिमा साहित, (त्रि.) था प्रेस्टन्माद होना। पागल होना । रना करणे धम् । आयुर्वेत्ति अनेन विज्ञापन । अन् । थानटेन टन्मत्तेनेदाचर्यते । आप्रेद-आचारे किपाक । पागली नाई कहेहुए वचनको दुवारा (निशान ) जताकर जिस्से आयु जानता है । विवारा कहना । वारवार कदागया। व्याकरण एक संज्ञा. उपाह। चिकित्साशान. आम्टा, (नी.) या सम्यक् अम्गे रसो यस्याः । जिसका | आयुप्मस्, (त्रि.) आयुर्विद्यतेऽम्य मनुस् ! बहुत सा रस हो । तिन्तिदीय वृक्ष । धा स्वाद । इमलीका पक्ष. (पु.)। विधम्म आदि योगमिसे तीमा यो आय, (पु.) म्यच् । अय्यम् । म । हानिट । यायुष्य, (त्रि.) भयुः प्रयोजन अस्य । मामदनी । प्रानि धना थाना। त्रियोंके परका रखवार. आयत, (वि.) यायम् च. दीर्घा रंया । येंयागया। अ+यस्य । पतिपत्राटी । पहुन कोशिश करने. | आयोग, (पु.) आयुधम् । काम । हार। चन्दन यादि मेट। तट । किनारा. आयनच्छद (स.) आयतः दीर्घः पदोमाः । विगय | आयोगव, (पु.) अयोगद एव सा । पहाटी रिया. आयतन, (२०) मापनन्तश्च । यत् पापरे युद प्रहा आनिमे हिनकारी । सदा. म . w मम्यान भटमादायी जगह.

बायोपन,] (५) [क, । . । -- । आयोधन, (२.) आयुष्+आधारे रसुद । साधी माररनु, (नि.) गन् । कर पाने जगह । पुरस्थान । "भावे स्युर" याना । मारना। इस करनेवाला. युद। वध, आरह, भ्या. प.1 पटना । कारको उ.ना. आर, (पु.) यसरि पम् । मंगटप्रद । शनिग्रह । आरुढ, (वि.) आपदा पढगा. मीटा सहा फल । भेद। पीतल । कोण । निरा। आरोग्य, (न.) यरोगय भवः पम् । रोगका न होन। धुरा । रान्तरेका पेड. तन्दुरुनी । आराम. आर(रा)च,(पु.) था++पञ्-मस्या दमान आरोप, (पु.) बाद+मिसरने तुर । र एक् तरहकी आवाज. धर्मका प्रतीत होना। जैसे "ग्रीमें गान"पन आरफ्ट, (पु. म.) आर पित्तलं यूटयति-अन् । पीत परना । स्थापन कयना मानना । पर एन. सा भूषण । पित्तलाभरण । पीतलका जेवर । पीतल । आशरः, (पु.) आ++यन । ममि च । । पित्तल, राक्षम । बायुविा. आरज, (पु.) भारो देशे जायते । जन्+ । अरब आशप, (न.) भादोः भवः-अण् । सीमना । पेग । . देशाग पोदा. खेगी । अहीरनार निघाभार. आरण्यक, (I.) अरण्ये भव । मनुपादियुम् । जंगठी आरोद, (पु.) आरह पम् । मोहर ।। रासा । अध्याय । न्याय । इनगाफ । विहारस्थान । दर्य । एम्बई । उनम शिवा पाई। #बौना स्थान । दापी । वेदा अरषिोप म.) परिमाणरिशेर "भारम्यवमधील प"ति मनु.. आदिः, (पु.) सम्म भर- sam आरति, (सी.) मारम्+फिन् । उपरम । हटना । निध राज । दानि । कर्णधीर । परम ति। टहराव. आसाद, (पु.) भरण । Cra आरय, (पु.)पा-सप: रथः । छोरी । एक परनेवाला. पोोपालगे पलानेवाली गाडी. आपा, (iv) प्राममा smeena भाराध, (त्रि.) पा+म+ । पिसा गया । भार-आच(.)- (डी.) rk ar NRIT भरिया गया रस्नेवाला । महामारी. भारमटी, (बी.) भारभ्यतेऽनया । आरम् मटि आर्थीक, (नि.) र पो भाine र मराकाम । मटरों की एक प्रकारकी रचना। पनमें are: आय, (पु.) मेष-भर eart पारम्भ, (पु.) मा+र+पम् गमय । एन । तरा। दगोमना पाणी । पारदी । उपम । बोशिश। पथ । मारना । आणुनि, (पु.) Wories बांधार प्रमावना, भनिमन्यु. पारा, (सी.) ++अच् । घमा पारनेगा भीगर । आर्त, (1.) CRITIKI रोहेप भल. पेभरम. मारा, (सपा) समीप । पारा । मनहर. आतंय, (म.पहा Irere माराविषः (म.) मारपि लिन टम् । मंगमी पर निमी को रोनालिस आदित्य, (.) जान पर बहनो समय भी दिएर. हेरहारम तारामनामे. आर्थिक (1) Trior मापन, (म.) मधमपुर । र ।। रहा भार मोरपानापामाशा. माराम, (पु.)Triwaरेम समयमा पनि Meira-आई.(नि.) nिt.. माद, (पु.) आग, (..) 1 1 मेलामाच. राम. ५.a. .

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अपन, [भाशा - - आपर्जन, (न.) बाम+अन । नीचेही पोर शुकना । | आपिद्ध, (नि.) भाव्य का पिद्ध । वेधागया। टेढा । । देना । जीवना. शिबल दियागया । फेंगया। दवायागया । मूसं. आवरण, (नि.) मा+अन । हिरानेवाला । बंद करने-आयिफरण-मार,(म• पु.) आविम्+T+अन । प्रकट पाला ।-णम् (न.) उिगना । रोकना. वरना । जाहिर करना । दिसाना, आचरणशक्ति, (सी.) पारणम्य शफिः । मानसिक आविष्ट, (त्रि.) भाविक । भूतादिमे दबायागया। अपिया जो वास्तविक पदार्थ के सहपर पडदा टाल- भावेशयुक्त । दयाहुआ। दासिलहुआ। मराहुआ. देती है. आविस्, ( भव्य.) प्रसार । जाहिर । ( आविर्भाव आर्जित, (वि.) आज+ पिक । आइत । (भाविधार), लप्पागया । शुगया गया । फेंका गया । दियागया। आवी, (खो०)। अवीः एव खार्थे अण् । गर्भवती स्त्री. नीचे कियागया आयीत, (नि.)। मा+ये+फ । धारिन । पहिराहुआ। आपन, (पु.) आरम्भावादी पम् । चरके सरूपसे प्रविष्ट हुमा । चला गया। व्यतीत हुआ. जलका भापही पूमना । धुंबर देशविशेष । गोललोटना। आधीतिन्, (पु.)। भावीत इति । दक्षिण दहिने कंधे- पोडेका चिट (पीडी ओर रोमसमूद) । चिन्ता । पर यज्ञोपवीत धारण करनेवाला प्राक्षण. मेघराजविशेष । मादिक पातु । ममिओंन शहत. आवुक, (पु.) भवति पालयति उप सहायो कन् । शायर्तक, (वि.) यावर्त एष मार्थे कन् । पार ९ घूम (नाश्योक्तिमें ) जनक । पिता. नेवाला -कः (पु.) एक प्राकारका रादरमेद. आयू, वा-या. • उभाबाच्छादन करना। दांकना। आपतन, (न.) आ+ra+निम्न्युट् । दूध पादिका छिपाना । वृणोति । वृणाति । वरयति. मालोदन (रिटकना-सपना) । औटाना । मिठोना । गालना. आवृत्, भ्या. मा. । देना । बकशना । (ved) किसीकी आपर्तित, (त्रि.) आमत+निव-क । बैटायागया। ओर लौटना । पुना । मिचि झुकना । भावजयधि. अभ्यास कियागया । गुणाीयागया। मियादा कियागया. आवृत्, भ्वा. आ.। ठौटना । घूमना । भावर्तते । यते । आवश्यक, (त्रि.) अवश्यं भव्यः । युम् । नियतकृत्य । धपति जारीफाम. आवृत, (त्रि.) आ++का ढकाहुआ। भाच्छादन रिया- आवमय, (पु.) आवसति अत्रयम्म्मथन् । निवा- संस्थान । रहनेकी जगह । घर फटिया। विश्रामस्थान । आवृत्त, (त्रि.) था+++ । हाहा । निन । भागमकी जहग । तविशेष. बेटाहुआ । मभ्यस्त । गुपित. आपाप, (पु.) आस्वप्नमणि पत्र संज्ञायो गन् । थाल. आत्ति, (स्त्री.) भा++जिन् । अभ्यारा । पारवार वाल । र पालनेके लिये जला कुष्ठी पाचविशेष । फेदना । योना । शनुदी चिन्ता । दुसरेके राजयी | आवेग, (पु.) मा+पिज्+धम् । पबराहट । चिन्ता । चिन्ता। नीचे कपर भूमि । विषमस्थान । प्रधानहोम । आरामी। शोक। दुरा। भय । जल्दी । परदार- यदा होम. एका र आवारक, (नि.) ++ । आप्टादन करनेवाला। आवेश, (पु.) आ+विश+पम् । सर । तकवा । दिपानेवाला। निरोध करनेवाला+रोकनेवाला. संरम्भ । कोष । गुस्था । मभिनिवेता । ठ। मनुसंध । आवारिः, (पु.) भा+इन् । आपण । दुकान । तबेला. दाखिल होना । जैसे भूतका दाखिल होना । प्रदोसर । आवास, पु.) था+वम् आधारे घम् । कामस्थान । आशिक, (नि.) आवेशे गृहे भाभागलो वा रम् । पर आदि. परका । घरमें भागया । असाधारण सीयवान्पादि। आवाहन, (न) भावह+मिल्खुट् । समीप आने गाय अपना रिदतेदार अंगरह । अतिथि । महमान । लिये देवताओंको बुलाना । नजीक साना । घुलाना. सादरवाल. आधिक, (न.) अविना तहोना निर्मिनं रह । मेरो आवेएक, (पु.) थावेरपति-प्युल् । अवरपरक । वालोंमे बना कम्पल । उनका । मेषर्मबन्धी (वि.). टोपनहारा प्रचार ( सीत) वगैरह (पेटा) आयिम, (पु.) खा+पियर्तरि क । उदिम । घर-आरादा, (की.) बादादिमाग को। याभा । विशेष. गया. गुणना टोटना. भूतादिसे रोग. संशय.

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अपवारा. टमा, परमो माग - । - 7 न मारा, (पु.) भारदो पूर्णमाऽस्मिन् मासे क्षण । मा. आमिच्, ३. प. पनीरा धीर कि बरन। पाठ । (दास) महीना. तीचना पीला करना। मरना. PTE, (म.) र पप्तौक्टून् । आवास । भन्तरिय । आसित, (नि.) भाग गया I मामा. आमिपारं, (म.) रिपरा सांग मर-अ । हर. अश्मयाभाटा भाग । दिया. वारती धारपर चलनी मानिएक प्रकार निर. -गर, अ. भा. भामं । भारात्यक भागिष्ट । मामि। आसुति, (सी.) मा++चिन् । मनाना निकालना. भागिता भागीन । पटना । विश्राम राना । नियाग -1 आमुर, (पु.) भगरसम्बन्धी दिन परने. हारा । माट प्रमादिमिर I मिबर, गए, टना-दा- म .. ऐ । पारने । मानिए. पन्या, पिना, दाउपर गरपिरोपरापू म. (अन्य ) स्मरण । परना । पोष । गन्माए । लेना। जैसे भोलर पनु गरीव है. अहंकार सिकना. मामेचना (नि.)नायो यो । सक, (नि.) भाकामा निरत । राब गुद । बा मन मई पर। बाम छोपर एही में सामाना निमार । निल (म.) डिटकारागीचना. गरगा (म.) भाग पम् । गिनिवेश । एकातरा भामेघ, (पु.) Trte mart हठ । भोगती अमिषारनेका भभिमानाचामा एप. यान में मनेकी दि. सति, (खी• ) भाग लिन् । गर्ग ! गेछ । म । शाररेषा, (पी. ) भामे Twitter निकट । म्यायमनमें न्यययोग्य दोनों पदायाँवो बिमा प्राति। एमापार म... पारर बोलना. तरह ऐया मा. दः, (पु.) भागीदारी सम्मिन् प्रयाले । निपातः । आरकरदन, (म.) Cairnet • प्रयल संसार जिसमें समाजाता है दाग गुर । निरादर राना mare देवी (4.) भागने भायाम् । सामाना है जिरा बना धारे पुः पर छोराय पीवी ।भारामारपी. गाना (पु.) feriree गगन, (म.) भागस्युर । उपवेशन । र । पीरापालामा " rtant "आधारे 'स्वर" पीठ पगा। दीमा | गापः, (पु.)aper : ... सन्देश । Ifou भारि राणाके । चोगसे एक नेवाला (रेरित भदियो रोहर हरना)। मराम जानिक (नि.)नि पhriRI पाना । भाइ बोगके भगोने लीरा (पपागनारि)। परकोटी fmastram और (पु.). मादरा वापर गुरेश, v... समय, (नि.) भासद राय : चार पो" rtal " उपस्थित आस्तीर्ण, (f.) karte fire गरप, (3.) भगरते। भानिएR. आरया. (2.) । परपरागत समोर, पार. tr भी। मान, () मा गम्पुिर । शानिएपन । हे देना । रमा मामा । मिना । सब जाना। आरपान, (.) Wri | मर. अनratrina भारपा (पु.) me. I रहे हग ORRENarentice (RR. Knr. INTERem Hd"र"NTER २riyri Wrer:- मारिया (3.) मा RRINT . Fiferritror Trutarred मागिm.(..)rammar ARRARNATrय. C. 10 M.

आइभ्वा.प.मुकारना। वृष्णनामामाम . तस्य भावः कम्-श्रीलात टाप । यहंधरसे सन्ध्या तर्पण आदि। भोजन (.) समूह ।। आहाद, (पु.) या वाक्यम् । आनन्दा अहंकारसे बुलाना हियति । जहावा या ११, (पु.) अन्य विष्णोरपत्यम् । अनि न्तान । कामदेव यायेदम् । श्य। कहाभा वचन । तिरस्कार । दयाद दिला आहार, (पु.) पापित थाहरणायना। किसी।जाना। भ्वा. पर-सह.भनिदा अपविता मासादन] मास्फालन, (२.) आ+साल बटना-रगडना-गि स्युत्। आहार्य, (नि.) anist TH चलन । चलाना । धसना । पछाहना रगडना मारना, शाय। सानयोग। भागनु दिर आस्फोट, (पु.) मारफुट्स्मन् । या । पहिल्या मागेकी जगह । कतिमा बनादी । नोंका भुजाओवर हायसे टोकना । तालटोकना। (पुस्ती रनेदारे जेवर वगेद. करने समय सम टोकते है ।कापना । नामविकाश. आहाय, (I.) या देशात आमाक, (त्रि.) की (धी०) श्राम्माकीन । अस्मद् गोयादि पानी पीने के लिये पथर अादित अण्-सय् अस्माकादेशः । हमारा । हम लोगोंका. जला स्थान । पुरना । गाई । युगानीमा आस्य, (१०) अस्यवे प्रायोऽन। यस आधारे प्यत् । आहिन, (नि.) था+ita ! यस जहां मारा डाला जाता है । मुस । मुंग मध्यभाग । पित । टियागया । सालाना कम कियागया. मुखका (त्रि.). आस्थपन, (न.) यास्यमेव पत्रं अस । जिसका मुखही अहिनुण्डिक, (नि.) महिनादेन रमतरर पत्र हो । पन। कमल. मुंमेलनाद । साप पकनेहाग । मदारी. आस्था, (घी) याम् भावे क्यप् । स्थिति । भासन । आहुति, (श्री.) मा+पिन् । देवता के रहे टहरना । निवारा. पहार अमिमें घी सलना ! देवतारे हये। दान करना. आस्थासव, (पु.) भास्सस्स आमवः प्रसवः ६१.। का मदालादायुिथु।डार. | आइतिः, (बी.) मा+हे+चिन् । जुलाना । पुरा आनय, (पु०) वासवति मनोऽनेन । करणे अप् । जिस्से आहेय, (न. ) अहेरिदं दक् । सौपनी कुत्र ।।। मन वह जाता है । लेशा दुःख। तकलीफ । “भाये अप्"। आहो, (अन्य० ) प्रश्न । सवाल । विडत्य। निरन्तर वहना. आस्वनित, आखान्त (वि.) थाखन्नत । शन्दित । आहोपुरुपिका, (ना० ) यहमेव पुरपा र शब्द किया गया । बुलाया गया. आस्वाद, (पु.) या+सद् कर्मणि पन् । रस । मुाद । यानी बहाइंश खयाल । पत्रन्य यामोत्कर्ष। "मावे घम्"। स्वाद लेना. आहोस्त्रित्, (अन्य ) विकल्प । सन्देह । प्रन्न।' आइफ, (पु.) आ+हन्द-कन् । एक प्रकारकी नाक- की व्याभि. आदिक, (वि.) हा साध्यं टम् । दिनभर आदत, (त्रि.) आहन्+क । ताइन कियागया । चोट दियागया । हात । जानादुमा । दशा । बाजा (पु.)। हिमा । सदाकी किया. पुराना दा नया काटा (न.). आहन, २.८.। वाइन करना । मारना । अपने शरी-] आइय, (पु.) आदेदा । नाम । जूझी. रका कोई अंग कम होने से यात्मनेपद होजाता है। जैसे आह्वान, (न.) माहेमन्युट् । आकारण । भादवे शिरसाहन्ति । जपान । अवधीत् । हतः, मुटाना. आदय, १.) आयन्तेऽरयोऽन । आहे अ-सम्प्रया- रणे गुगः । जहाँ पत्रु बुलाये जाते हैं । युदलढाई। मायदेन "#स्य" । जहाँ देवताओंको दिया. इ जातादि। या होम. पाहयनीय, (पु.) यानं अति छ । गृहस्थी के अमिसे देकर दोमके लिये संस्कार कियागया भनि । “माझ्य. नायर"।दनीय । हवन योग्य । होम सायक. रानी। निन्दा । सम्बोधन. नाच करना। भोजन। याना "HAR(ण), IT पास माना। " अगात् । एवंल. जानेकी इच्छा. प"दि.

नया(पु.)शु पाकरोनि । सुस्मा++3. तुम्बी। बक्सवमनुसबेटा । सूर्यवंशी प्रथम रागा. [म. याद करना । अधिपूर्वक एव हित । अदा• पर. इतरेतर, (नि.) लरदिस्यम् । अन्योन्य । पारराने सक• अगिट् । भयेति । अध्यषीद । भधीयन् . परस्पर । नियः, Enj (पु.)मु । गा । मीठे रमवाला पौटा. इतरेगुस्, (अन्य ) अन्यस्मिनहनि । दूसरे दिन । अगले सुकाण्ड, (पु.) क्षोः काण्ड व पाण्डोऽस्स। काया दिन। और रोज. इतस्, (अय्य.) यहाँसे । मुझसे इस ओर । यहाँ । पत्र, (पु.) सो पत्र व पत्रं सम्प। जिसका पता इपर । इसमें अबमे. मकामा हो। पन्यमेव जुआर. इतस्ततः, (अब.) अस्मिन् तस्मिन् । इममें रग । इधर उधर. भूमती, (मी.) वस्तुगोऽस्त्वस्यो-मढए । बिरमें ग- इति, (अन्य ) देठ । प्राशन । निदन । प्रबार । रोया रस हो । एर नदी रामाप्ति । प्रकरण । ममा निघटनामनामा शुर, (पु.) शुगन्ध राति-तारमसाना । अवधारण । यवस्था । परामर्शमान । प्रारम्मग. तरह । शन्द सापको प्रकार करनेहारा। प्रतिया Frभुसार, (पु.)त. गुर । पटा गार. योतकनसके योगमें प्रपमा दिमाखदोदीकी समी दितीयारे पापमी भाता है। बारके सो प्रकारनेहा. प्यालिका, (बी.) वरिष पली व्यामोधियुत् । इतिकर्तव्यता, (सी.) तिर्न सम्म भार । बाराही पदरक सेरेंगे म ने मार ए, जाना-रदिए भ्या. पर• एक सेट् । तिऐसीद. परनेसायक जाना-ददित या पर. राह• सेट् । सति । ऐसीद, रतिमाये, (भया) मस्मिन् । पदना- अभिपूर्व एव रित् । अदा• बात्म• सहरतिद, (अन्य) उपदेशपरम्परा मे Smar. अनिट् । अदीदे । म पैट-अप्यगीर । अपित्रगे । बी. क्षेत्र । गुना । गुनाया बराबर मे "मर प्यत-मप्यमीप्यत भूत ता" नदी पर साहित, (न.) गि+रू । अभिप्रायले प्रकाश परनदारी देता नही. की किया । मनोमित्राय । भाशय । पता इतिहास, (पु.) पति पायो । Titan+y | "शिरामे पुरो(et द. (3.) Hि+ उपगलं पति-पय भर्ष, धाम, और मोक्ष) प्रय तर तपस्वियोपरा हिंगोर।"0" इसी भ में, दुष" से माणसे पुक्त पर HARYA DIRECI(सी.)। यह मेरे लिये रोष प्रकार महाभारत, रामायण, श्रीभग 4. १ मनोधर्मविशेष । पुस मौर उराग यापन । भामाश धर्म।त्पम् (प.) बनेर भरेष। हम बरसे। पररय, (पु.) तेऽयो । एयरए । मरणका देशहर, (.)माप्सन । यो पररपति नारायण । परमामा परत्रि.). स्या, (at.) प+भा परप । बोलत राए । पर, (२.) मारपति।। दान । मिलाप "वर्मपि प्" । प्रतिमा पानी. पसरहित म परेरापुंशक (5.) सपर। हासा.(बी.)लमालापम् । गोरिणी। घा भूमि । सर्ग | Tv I म मगरपी (..) र Arrit रेशीमारी. दो मिनेपदेनाr: रण, माना- अपर• R.RRIतसर है।arki.. ल, (1.) का । माप fing IT.राम...।। मागितामा तर, (वि.) मे नाम.(th)(सं.)kt एमरजेपामरा. सपोरेगarte तिरपा (स.) सारसे IMee. स्परेkertrrenार. T 1 - रव्यात. सार 17 पर . मान. (.) मन्द्रगोप, (पु.)दो गोलो रस- पाने वाद निगरी र ..(..) कीममा हाल रंगरा बीना। पटवीजर, IR FIनिकी । राजाल,(न.)लंग को परमन् । मामा मतुराईने नेत्रर पर re.(Irrrror जिम बमुग मी र नगमा भर मादिगे या मोर सपने ना करती। मायाका काम । एक, .: मदनालिक (नि.) व सिर t. हमारी मात्रा रननेहारा । मारी।। 7.1.15 की। जागा. लजित्. (.) नं गिन् । सो fr... भागी। मोनो जीगा गाना r.--.मी.धनुगः (२.) म नु मनोर है। मारा गयुमे करे - i.ro.rrrrat पारण. : rainramin वनीक (T.) मी retaile राहायोगेनीला बनारसी (2.) यानमेरो प्रात orm पप मानो एक मोती है। *. १६३. 1.com। एमांग (सी.)माल दो। सभाहना मे। एETAL (सी.) TRE HEART मग तीर * IF THETI, (.) द Time funjTTr गुन. (7.)11. rain मन मनमा पाणी, (2.) itam wm | Parmatha Futanी मर 44 १ धाम-ग. vam () मा मदर Humastram iform, (akm Tir HERE . hi, tum.04.1 1/.. . 4 ri, Harrt .

दायरान,] (1.} [ष्टि, . छोटी तरवार. F यायतन, (म.) १. । इन्द्रियोंग विधाममान । इला, (सी.) इल्मक । भूमि । पृथिवी । गौ । वाणी । न्द्रियार्थमनिकर्ष, (पु.) इन्द्रियाणा अर्थ (सस्व जम्बुद्वीपके ९ वर्षोभेसे एक । वैवखतमनुरी पन्या युपकी - रिपये. सद) गपिवर्ष सम्यन्ध । हनियोग अपने घी (पह विष्णुके वरमे पुष होकर महादेवके शापसे .- अपने विषयों के साप सम्बन्ध (रिदता) सक्ष ज्ञानका स्वी होगई। बुधने उसे विवाह कर पुस्रषाको उत्सम किया। - पारण इन्द्रिय और विषयवा सेयोग ( मेल). यह चरित्र पुराणमें प्रसिद्ध है). घचमकना, भ्यादिआ. १. सेट। त्यते । ऐन्धिट | इलावृत, (न. ) इटा पृथिवी पृता येन । जो पृथिवीषो धन, (न. ) ध्यतेऽमिरनेन । इन्ध-करणे स्युर । घेरे हुए है । जम्बुद्वीपके नौ दर्भिसे एकाचारों सीमावाला जिससे भाग अलनी । काष्ठ। लकड़ी। बादन. देश। "पधान्माल्यवतः प्राप्यो गन्धमादनशैलता। इलागतं (पु.) इण+भ-मिथ । हस्छौ । हामी । बाटकी काया। नीलगिरेर्याम्पतो निषधादुदन"। जगत्के ९ भागों से एक. दली, (सी.) इमदन-सीप् । हायछुरी । करवालिका । मकणा, (सी.) मोपपदा ममा दाता । गजपि- प्पली । पीपल. मनिमीलिका, (स्त्री.) इभ हसिनं अपि निमीलया इल्वल, (पु.) इल्मपलब्-नि• गुणाभाव । अत्यन्त चयल मस्यविशेष । एकप्रकारका मच्छ। देयमेद (जिसे (सेवनान् निद्रापयति) ।जिमका सेवन करनेमे हाथीको- वसिष्ठने नाश किया । मृगशिरके पाँच तारे (Rt.), भी नौद मागाय । भहा । भांग । विजया । भोगटी. 'भपालक, (पु. ) इभं पालयति । जो हाथीको पाटताहै। य, (अन्य ) सादृश्य । पराबरी । उत्प्रेक्षा । मानौं । फैलना । इदित । भ्वा-पर•सक सेट् । इन्दति । ऐन्वीत्. इखिएक । महोत. थोडा । वाश्यारधार. म्य, (वि.)भं हरिनं अईति-यत् । रे धनपाला। श, जाना-सरकना । दिवा पर•सक सेद । इष्यनि । ऐषीत्, आयाराजा. भ्या, (पी.) इम+यन्स्टाप् । हसिनी । हपिनी. पए, चाहना । नुदा परन्तक सेट् । इच्छति । ऐषीत् । पित्, (त्रि.) इदं परिमाणं गस्य । इदम्यतुम् । एतावत् । एपिता-एटा. इप, (पु.) इए-जाना+कि । जिसमें जयकी इच्छा करने. हारे यात्रा कर्तेहैं। आश्विनमास । अस्मुका महिना. पत्ता, (खी.) इयतो भावः तम् । इतनेरा होना। सीमा। हर । परिमाण । माप । सख्या । गिनती. इपु, (पु.) प्यते हिंस्यतेऽनेन । जिस्से मारते है (खी.) (म्मद, (पु.)रया अलेन मापति वर्षते। रा+म+ ठकित् हसथ । वाण । दीर । पाँची संध्या. पए सः मुम्च । जो पानीमे दो वनानि । रिजनी पुषि, (पु.) (मी.) इपको धीयन्टेन । भान । पाप्यामल । समुहती माग (जो घोटीकी शकलमें है). माणाधारतूण । बाणका भाभय पूण । तस । जहाँ बाण रा, (स्त्री.) र । ई-कामं राति । रा+कमा । भूमि । रहसे जॉय. पृथ्वी । पाणी । मुरा। मव । शराघ । जल । श्रम । र, (नि.) इक । पूजित । आदर दियागया । अमिलथिन । चाहागया । पियारा । "य" (हारि- रावती, (श्री.) इरो भूमिं भवति । भवानी। का काम ) एरण्डका वृक्ष (पु.)। संस्कार (न. ॥ षटमास । एक नीका नाम जो पंजायमें है, जिसे रु- धीमी कहते हैं । यह पत्थरोंकोमी फाडकर जमीनपर इटका, (बी.) इस्तकन् । मो मादिका बनाया माती. एक कारग्रमीय कम।ट. रिण, (न.) इन्+किय । ऊपरभूमि ( जहां बीज-इश, (सी.) श्यतेऽनया । यज-करणे । धमीरा । है पोसागया नहिं उपचना)।भासरेके विमा । अन्य । सूना. जहीरा दरहत. श, (I.). वाण । स्पति । राजा विधापूर्त, (२०) पूर्त पदोः समाहार पूर्वपदार्थ । यपि, (आ) (सी.) उर्व+आर-पो• । रार । मग्निहोत्र, तप, सल, यक, दान, वेररक्षा, आतिप्य, नकारी।पटी माउ. पदेव और प्यान भारि धर्मार्य (४), और सोना भक- । जाना-फेंकना सर । नुहा, पर बापली, भा, तालाद, देवमन्दिर, ममदान और रावा ल, फेकना पुरा तम एक सेट् । एलपविशे। दिलर-स. गाना आदि पूर्व राजाताहै। बहनोंकी भलाईसपन. लपिला, (पी.) पुलस्यमुनिकी श्री। मावा । इष्टि, (धी.) याचिन् । यश संपाश्रमापरहने । इसी सबंघसे उमेरका नाम ऐठविल है. । "इकिन्" ममिलाप । इच्छा । चाह । स्वाहिश. . श्यपरी स्त्री. चाह । धर्मका कार्य. -- - समेत होना, मी, मूगा,मोनाशिना (सी.)चिनी भाष, हन् are इम, (१०२) इम, (त्रि.) इ इच्छायो-कर्मणि मक् । इच्छा करने-ईश, (नि.) अन्येव दर्गनं अस्य । इदम् वाला । चाहनेवाला ।-मः (पु.) कामदेव । वमन्त. इशादेशे दोघः । नाहन। जो देखने में ऐसा है। इण्या,-प्यं (पु.न.) इप्क्यप् । वमन्त । यहार. "" ईदृशः 1 इसी अर्थ में । त्रियां धीर । इध्वसन, (पु.) ः सम्यते क्षिप्यतेऽनेन । यस्+त्युत् । ईप्सा, (नी.) आतुं इच्छा, आप सन्म: .. ६त.। धनु इण्यास, (पु.) इपः अस्यन्तेऽनेन । अस्यश् । ६० ईप्सित, (नि.) या+गन्+क्त । भानुनिष्ट । जिस्से तीर फेंकतेहैं । चाप । धनुप् । "इन् अस्यति चाहागया । इट। अपेक्षित । जरी. अण्" । बाण चलानेझारा (नि.). इह, ( भव्य ) अस्मिन् काले । इससमय । इसदेशमें ।।ईर, जाना । चुरा• उम• । पक्षे भ्वा० पर० सहा: ईप्सु, (नि.) आप् सन्+उ । पानेकी इच्छा करनेट इस दिशामें. इहत्य, (नि.) इह सप् । यहांका। इस स्थानका । इस ईरयति-ते । इरति । ऐरिरतू-त । ऐरीत् संसारका. ईरिण, (नि.) ईरइनन् । जंगली । वह स्थानक भीज बोया गया नहीं उगता. (ई) ईरित, (त्रि.) रक्त । मेजा गया। प्रेरणा किया पर ई, (सी.) अस्य विष्णोः पनी गम् । विष्णुकी ली । चलाया गया। कहागया. टक्ष्मी । (पु.) कामदेवका नाम । ( अव्यः ) दिटका ईम, (न.) ईमक् । व्रण । घाव । फोटा। दटना । दादा शोक । गुस्सा । अनुकम्पा । मित्रांनी । "ईम" मी होताहै. प्रलक्ष । धरना. ६, चाहना-स। जाना और फैलना-सका अदा पर इ, ईपी करना । हमद करना । भ्वा० पर• यह धनिदाएन । ऐषीद इयति. बाना दिया• आत्म• राक. अनिद । इयते। ऐट. ईर्ष्या-पी, (नी.) ईय+अ । वि, देशना । भ्वा० आत्म• सक० सेट् । ईक्षते । ऐशिष्ट. दूसरेफी बदाईको न सहारना । र । हमद । क्षिण, (न. ) भावे भ्युत् । दर्शन । देशना । "करणे पालु, (त्रि.) ईपां सति । ला+दु । ईयुष्छ ।। म्यु" नेिर । रा. की वृद्धि न देखसकनेहारा. सनिक, (नि.)शिशुभाशुभदर्शनं शिल्पं बस्स टन् । वि.ईला, (सी. ) ईदक डस्य रखम् । पृथिवी । यो टार। जिम जीवन मा वा पुरे फल कहनेसे चलता है।सपी रेसार फल कहनेहारा । देव । ज्योतिषी. ईलित, (त्रि.) इंड्स-दस्य खम् । सन इंदा, (पी.) ईस्म । दरांन । देखना. क्षित, () (+) देसा हुआ। ध्यान दिया थ, (पु.) ऐभयं होना । हुक्मत करना । म मा..देखना. इंसित, (f.)-तृत् । देखनेवाला । सयाल कर. सक• सैद । ईटे । इशिगे। इपिये। ऐपिटा श, (नि.) शक । आशा चलानेवाला । अपि हीरनामसार करना । पुरा. म. राक• सैन् । नेवाला ।- (पु.) सामी । मासिक । हा मरया. यतारिन. हामुत करना । मरहना । बा. याममा. सैट् । शिनम्, (न.) र+मयुट् । आमा चलाना । htritied. रना। इश्तिभार. (श्री.) ईमामा। तारीर. ईशान, (I.) k+यानम् । महादेव । परमेयर : इंडित, (ft.tirregति रयागया। दसा. श्री माट मूर्तिों में सूर्यको भून । म ति, (:.) ईस्टेटरिन् मंदी प्रकार কৈখাগি गौ । नुति. किमागमा. मामी (त्रि.). म. एरिनारमना मारक?. ऐपयामें गबर मानिना !" तिन mir) अब ने भाग । इस * मशिद, () । मानिया भर -: (.) महरा मामा.

[उभ्य, (11) - . . पर, (पु.) वरन् । महादेव । कामदेव । पात:- | उसणं, (न.) उक्षाल्युट् । गौचना : सींचनेद्वारा राजति. सके अनुसार लेश-कर्म विपावासयोंसे ने एआहुआ ला देना. पुरषविदोष । पेतम्यत्मा । सर्व सामध्यपाला परमेश्वर । उक्षतर, (पु.) तनुरुक्षा, उझन् तनुत्वेचें परन् । तीसरी प्रभवादिके मध्य में एक परिसरा नाम । पहिला । भवस्थाको पहुंया हुआ पैल । बड़ा बैल । महापभ. मामी (नि.) "स्त्रियो सी" वरी। दुर्गा । ससाभेद. उक्षन्, (नि.) उकिनिन् । बड़ा । सींचनेवाला (शा. ईन्, (भ्वा० उ) भाग जाना । उम्माना । बचाना । पु.) भ-बैल । सूर्य. सिला नुपना । तालाव करना । देना । पाकमण करना । उक्षित, (नि.) उक्ष+क । सीवागया । गीला किया गया। भारना । ईपति-ते। ऐषीत् । इपिटु । ईपित. शुद्ध किया गया। सुगन्धित किया गया. ईप, (पु.) ईश(त्रि.) सामी । मालिक । महा-उ,जाना । भ्वा० पर• सक० सेट् । ओसति । आसीत् । देव । परमेश्वर उवोस. ईपत्, (अव्य.) भल्प । थोदा । किषित् । पुछ. उख, (खी.) उस+क । पाकपात्र । पकानेकेलिये पात्र । ईपरकर, (पु.) पत्+• सल् । रेश। अल्प : पोटाया। देशका । हाँडी. अल्पप्रयाससाध्य (त्रि.) थोडे यनसे घिद होनेहाय. उन, उन्र । गवान्तादेशः । महादेव । वायुकी मूर्ति धारण ईपदुष्ण, (5.) पदकृता' इति-त । अल्पतप्त । मन्दोष । करनेहारे शिवजी। क्षत्रियसे विवाही गई शुदामें उत्पन्न । योग तपाहुआ (गरम). संकीर्ण ( दोगला) वर्ण । मुद्दोजना । उलट (वि.) ईपा, (सी.) ईसालदण्ड । हलका डा (फाल). जोरका । बडा । सख्त । वचा । यदानी । कोपी । गुस्सा- ईपिका, (वी.) ईव "इवे प्रतिकृती" इति कन् । करनेहारा । नक्षत्रसमूह । एक प्रकारका विष (बीसीए) हस्तिनेत्रगोलक । हामीकी आँसका गोलक (रेला)। उनी। निर्दय (बेरहम) श्री. दूलिका । मूरत जिसनेवालेकी कलम । अनमेद. इपि(पी)का, (सी.) इगलादी कुन् अत इत्वम् । उप्रकाण्ड, (पु.) उन. काण्डोऽस्सा करेला । कारवे. हाशमेद. कान्ता। पास तिनका. ईद, पेशारना-हत करना । भा• आ• अक० सेट् । उप्रगन्ध, (पु.)वप्रः गन्ध. पुप्पेऽस्य । जिसके फूलमें मही गन्ध हो। चम्मका चमेली । चम्बा कटफल । ईहते। ऐहिट. अर्जक लशुन । सन । हींग (न.) तेजगन्ध- ईदा, (स्त्री.)। था। उधम । वाम्या । कोशिश. वाला (त्रि.). इंदित, (नि.) हक मृगित । गोजागया । धुंदा उप्रता-त्य, (बी• न.) उप्र+तल् नत्व । भीषणता । उरा- गया । चाहागया । प्रार्थना कियागया । "भावे क" वनापन । तेजपना । कोष. इटावाह. उप्रधन्वन्, (पु.) उमं धनुर्यस्य १. अनस• जि. राका धनुप् बडा वेज हो। शिव । इन्द्र । तेज धनुर- उ, दाम्द करना आवाजकरना-भ्या-आत्म• सक• अनिट् । बाला (त्रि.) अवते । औट. उप्रम्पश्य, (वि.) उप्रं पश्यति, उप्रदर सश+मुम् । दरा- उ, (अन्य.) सम्बोधन । बुटाना । बोधय वचन । गुस्से बनी इशिवाला। भयानक । दुष्ट । बदमारा. से बोलना । दया। हुकम । विस्मय । यिनी । “अन्+ | उप्रथपस्, (पु.) उमं उत्कटं धयः कर्णो यस । जिसका "शिवजी. कान तेज हो अर्थात् उपदेशको भटही प्रहण परले। उक्त, (त्रि.) बच्नक । पपित । हागया । एक रोमहर्पणका पुत्र पौराणिक ( पुराणजदारा), अक्षरके पादक छन्द (स्त्री.) "भावे " पन । उनसेन, (पु.) उमा सेना अस्प । जिसरी सेना जोरावर कहना (न.). हो । यदुवंशमें हुआ बाहुक नाम हंसा पिता । राश। उक्तिः, (बी.)वचिन् । कपन । रहना. मयुरा नगरीय राजा तराष्ट्रम पुत्र. उपय, (न.) द+पक नौ प्रकार के सामवेदा एक उच्, दबा करना । सापक होना । दि. पर• सब-सेट् । भाग । सामवेदन प्रधान भइ । महाबतास्य या प्राण. सम्पति। औरत् । चीर. उपयशास, (पु.) उक्यानि सामावरवशमामि शंमति | जयपं, (न.) उच-स्तूयते मनेन, पदमपन् । जिसे शंस+विपनि जो सामभागदी प्रशंसा रखा है। यमन. मुनि श्रीमती है।तुति करने मन्त्रानोत्र उनु, सोचना (भ्वा० पर.सा. सेट् ) । उक्षति भौशीत् । उचथ्य, (वि.) उपस्पर । क्षति करने योग्य । हरी- उसारभूत. - . फकेवर, चित, (१.r) . - मारणामारना. - उचित, (नि.) उच्क्त । वनिमया । लाया । मु- उन्लोषण, (f.) mantra नामिव । यया । टीकारामागया। परिचित । शु. गुरानेदाग. बाहुआ. उन्याय, (.)+HI- TE उच्च, (नि.) क्षिप्य वाहू चीयते । उद्+चि । जो मंगाई भुजा टटाकर पकडे । उन्नत । ऊंचा. उदिन, (f.) arfi Star उच्चतर, (पु.) कर्म• नारिकेल निरेलका दरन्त. बंधातुमा. उद्घाटन, (२०) र चदगि ल्युट् । उत्पाटन । उच्चाम,(पु.) उपगप । अनगंगया। टसाइना । अपनी जगहमे अलग करना । तत्रोक "अ. ओर जानेहाग गांग। आगापित मिचारमेद" । "उचाटनं सदेशाधेशनं परिकीर्तितम्". | उच्चासन, (न. ) Trयु । मामलेगा उधार, (पु.) उद् चर+पिच्यम् । ट्यारण । कहना । उह, दानीका बटोरना । तुदा पास "कर्मणि धम्" । विष्टा । मल. नि । मोटीन. उच्चायच, (त्रि०) उदक् उत्कृष्टं च अवाक् थपकृष्टया मयू | उ, बांधना-गम मारना । . पर• • मैद।१६ नि० । बढे छोटे कईमेद । तरहनरहके । सनेक प्रकारक. ) उसायि(य)नी, (मी.) विक्रमादिलकी रस उलन (१), (१०) उता चूड़ा यस्य डम्य लयम् । भानीपुरी. जिसकी चोटी उंची हो । यजोय स्थित वनसण्ट । इण्ड | उनासन, (न) उद्+जग्+मारनामा मन ऊपरका कोना । झण्डा । झण्डे के ऊपर बंधाहुआ भूपण. उचैःश्रवस्, (पु.) उच्चम्मतं प्रयोऽन्य । जिसके कान ) उबृम्भ, (पु.) उद्+म्भि+पत्र । विश्व किन कंचेहों। टंचे कानवाला समुद्रसे उपजा इन्दका वाहन म्फुटन । फूटना. (सवारी ) घोडा । "उचै. टचरा गणौति-श्रु+श्रमुन्उज्वल, (नि.) उद्+ज्वल अम् । दीन । चार वधिर । वहिरा. साफ । मिहुआ । सर्ग । (न.) ररस (ए: उघुट, (न. ) "उचए+थुप्+क। टयघोषणा । दण्टी- उन्झ्, छोडना-नुदा पर० मक सेट् । उच्चति । साडौण्डी. उन्टन, (पु.) (न.) उभियुर । धन्या उस्, (अव्य. ) ऊंचा यहा । टम्या । पूरा पूरा. वाजारआदिमें गिरेहुए. वेग्नेके पीछे बाहे उच्छास्त्र, (त्रि.) उद्तं धात् । ग. स. । यतिकान्त यादिकी कशिओंका देना. शान्न । सानको लांघगया । शास्त्रविरुद्ध । अधर्मका काम, | उदज, (पु.न.) रटेभ्यो जायते-जन्द! उच्छिख, (वि.) उद्गता शिखा यस्य । प्रा. व. जिसकी हुई शाला । मुनि वा ऋषिौंका घर । पर्णशाय. साट वा जिसका थागेका माग ऊंचा हो। बागेसे ऊंचा. उद्, इसहाकरना-पर० स० सेट् । योडति । आमेर उछिति, (पी.) उद्+दितिन् । टम्छेद । नाश । उडु, (त्री० न० ) उड+दु । नक्षत्र । तारा ।' "श्रीलिङ्गमें वा रुद्" उछिटीन्ध्र, (न. रच्छिर्स गिलीन्नं । ऊपरको उटा उदु(इ)प, (पु. न.) टहनि जले पाति-पाक । । शिलीन्ध्र । छया । झुंन । मशरूममे मराहुआ. (पु.) चाद. उन्सिष्ट, त्रि.) उदशिप्त । मुक्तावशिष्ट । सानेसे 4.| उडु(इ)पति, (पु.) रनों पतिः । तारोंका माठिक। बरहा । छोडागया । जहा. जलासामी वरण. रसीपक, (न.) उत्थापितं शय्यान रत्तोल्य स्थापितं उड़ामर, (त्रि.) उलटं डामरम् । अत्यन्त प्रचार पीपं सम्मिन् व. का । छत्रसे रटाकर जिग्रर निर र. जोरका सबसे ऊंचा. वसापायाधीपोपचान । तकिया। महाना। वादिया. उहीन, (न.) उद्दी+क्त । पक्षिओंच ऊपरजाना। उच्न, (त्रि)ट विमानता फूला हुआ। बदाहुआ. उत, (अन्य ) विलय । समुचय । वितर्क ! उसल, (वि.) रद्नं दलातः । ग. स.जो असथं । बहुनही । सुन्दैह । मोर मी । क्यान मार्समे निकटगया । बंपनरहित । माठिविना । वि. मस्कार । मुझमनुय । बगैर सरकं । नियमक विना। उतथ्य, (पु.) अहिरासे श्रम धीमें उत्सममा । नपीकेको होदवर. का बरा भाई. रच्छेद, (पु.) र दिया । छैदल । दोडना । - उताहो, (अन्य ) विकस । सन्देह । प्रत्र । ऐमा का ऐमा. वाह - . अथवा. नारन नवाद करना.

[उनसभाम, (नि.) उगनं मनोस । उद्++नि. । उन्म- उत्पात, (त्रि.) उद्धान्त । उत्पाटित । उपाइागया. नरक । जिसका मन और जहग घल्पगया । उरामनवला. [ उत्तंस, (पु.) उद्वसि+अन् । कर्णभरण । कानका ट, (पु.) सतीच । टमटम् । गत । क्षेत्र । भूषण । शिरोभूषण । शिरखा जैवर. अलगमा । वाण दारचीनी (न.) मखदादी (पु.). उत्तप्त, (त्रि.) उद+त+क्त । सन्तप्त । तपाहुआ । गरम । ण्टा, (बी.) उद्+कहि+भ । र सभके पूरा सात । नहायाहुआ । शुष्क मोस । सूराहुभा मोरा (न.). करने के लिये मनी चिन्ता । फिडर । नाहीगई रतु- उत्तमर्ण, (पु.) उत्तम ऋण अस्य । जिराका कर्जा भटा देरमोन महारना । दुस। आरामी। किसी पियारी हो । कर्ज देनेहारा । महाजन । ऋणदाता. सीप्रकोपवाहिरा । पोक. उत्तमसाहस, (न.) दाभेद । परी राजा । १... का कन्धर, (त्रि.) उन्नता कन्धरा भस्य । ऊंची गर्दन कईओके मतमें ५...०६जार पणकी सजा। बड़ी दि. सेरी. कम्प, भा• मा । कपना । परभराना । कम्पते। (उत्तमाहू, (न.) कर्म• मस्तक । माथा । गिर । शरीरमा बाम्पे भकम्पिट. सबसे अच्छा अग. र, (पु.) र अप् । धान आदिका बहा | उत्तम्भ, (पु.) उद्+सम्भपम् । तदरना। पकडना । हरना। पाव भादिका फैलाना । पासा फैलाना. रोकना । भारारा देना । पुराईसे हटजाना । भाराम करना. कर्ष(पु.) उद्धप्पम् । मतिराय । बहुत । जियादा. | उत्तर, (न.) उत्तीर्यते प्रकृताभियोगोऽनेन । उद+त+अप् । कर, (पु.) जगमायके पासका देश । उसीसा उन्क, जिसके द्वारा कियेगये सवालको तरमकें । राज के निकट "-उत्पः सन् साति "व्याध । शिकारी । भार. वारीसे किये हुए सवालको साफ करना । उत्तर नाम पाहक रोहा रटानेदार. व्यवहारका भदोपके तोडने पचन विर राजाका कलिका, (मो.) सहरमधुन् । उकया। काम आदिसे पुत्र (पु.)। उदीची (उत्तर) दिशा । पिण्टराजाकी याद करना. कन्या (स्त्री.)। अच्छा । ऊंचा। लायका पीछे, काय (पु.) पम् । पानीको बहा करना । (उत्तरकोशला, (खी. ) अयोध्या माम नगरी । रामचन्द्र- भौर ऊपर उछालना । फेंकना, जीकी जन्मभूमि. कीर्ण, (त्रि.) उद्+क+का । फेंकागया। फैलायागया। उत्तरद, (न.) उत्तर आनं। कर्म• । शमवादि । सिलाया गया । उल्लिसिनातवैध । वेधागया। पहागया. द्वारो स्थदाह । दाजेके ऊपरकी लकरी । ऊंची तरतो. पुण, (पु.) उद्+पुण+क । —। वालोंगा पीडा. पाला (1.) सोच, (पु.) उदयन्+पम् । अन्यायका काम करने के उत्तरछद, (पु.) कर्म । शम्योपर्यास्तरणवन्न । ऐनके लिये पारी (मर) किम्बा प्रतिवादी (महालह) से पर बिछानेका कप विछाना । कारका कपडा धन सेना । पुस । रिसलवडी. उत्तरपक्ष, (पु.) वाद (मुराहिसा ) में पूर्वपक्ष । पहिरो माम, (पु.) उद्+कम+धम् धादिः । गुलम । उलटा । उटायागया रायाल । मलदेने योग्य । सिद्धान्तपक्ष (स- उलदाक्रम । उखलना। नियमविपदी बिलसिला छोडकर. लेडा जवार) कान्त, (नि.) उत्+म+कचला गया। बाहिर उत्तरमीमांसा, (बी.) कर्म•। अगला विचार । फैसले गया। निकल गया. बात । मममीमोगा (माका विचार )। येदान्तदर्शन. मोश, (पु.) उ कुरा । कुररीपरी । | उत्सरा, (सो.) प्रेतकी पितृप्ति होनेपर एपिटीकरण विशना. पीसी धादकियायें । उत्तरदिशा, बाल, देश (प.). रेक्ष, ...फेंकना । उठाना । जगहपर घर देना। उत्तरात्, (भया) उत्तरदिशा । उत्तरकी ओर । उत्तर. मारना । क्षिपति। निक्षेप सीत. काल. रेक्षप्त, (नि.) कपरको फेंकदिया । पकः लिया गया। उत्तराधिकारिन्, (नि.) उत्तर अधिरोति । अधि+ तारन किया गया. गिनि । पहिले पानीका राव (काना) समाप्त होने- क्षेपण, (म.) उद्+हिप्स्युर। उम्रक्षेपण । अपर पर उसी सम्बंधसे ना कायम करनेहारे अधिकारको पेरना । "मणि ल्युर" परा। "करणे युद" धान पाये पुत्र पात्र आदि दावाद । वारिस परीर. मरनेकी सरसी. उत्तराभास, (पु.) उत्तरनियाभासते। भाभम् अन् । खन् ,भ्वा-ए.सोदना।पोद गलनाासननिचवान। जो तरी नाई प्रति होटोत्तर शराब कर । अमानीत् । सनः राभवाय. पण.१४

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(10) स, (पु.) उत्ा । पर्वत सारिणे बहेहुए पानीके 'उत्सूत्र, (त्रि.) उसान्न गाम् । मृतको साध गमा। गिरनेकी जगह । बहता हुआ पानी । परना । निजर. सूतमे अलग कर दिया गया गुल गया. सा, (पु.) गम्+पम् । कोड । गोद । वृच्छा ।। उत्पूरः, (पु.) उकालः सूर-पूर्ण : मूबंको साप गया। गोदगे निकलगया (वि.). सायं । रानका समय । दोनोगमर मिले । सजन, (म.) उत् ++मन । ऊपर फरना । दयाना मप्या. ऊपरको. उत्पए, (वि.) उद्गस्त । स । पक। सद, स्वा. प.दुली होना । नास होना। तबाह दियागया होना । सीदति । समाद । भगदत् । सप्र. सन, (प्रि.) उस्माना गया । तयाद होगया. उरसेक, (पु.) उदमिय+पम् । असार । रियाद । सर्ग, (I.) उद्यापम् । म्याकरण पहागया उठाकर बाहिर सीमना. भयानकायुमा चलाना । सामान्य नियम । म्याय ना उसेप, (पु.) उशिष पम् । चERI देना । या भेद. उंचा. सर्पण, (म.) उमाप्स्युर । पोखर आगेगाना।। उदक, (म.) उन्नपल-मलोरथ नि. ।। सपना. "उदम्"मी, सया, (सी.) उग+पत् । गी को बरके गाए | उदया, (बी.) . मन मिलाने योग्य है।गर्भके योग्य अवस्थावानी गी. भांति । यत् । गोपीये दिन महार। सिप,(पु.) उa++मप् । भानन्दको उत्सम निदाए बदमदीदी. पाम विवाह आदि सी. उदगद्रि, (पु.) उपर उना Mera (सपरफेस (पु. 4.) हिमालयकी अंगना मारि हिमालय सोग (जहाँ बीपुरषोंमें पीसके लिये मापी ऐरेत उदयन, (.) स यो were I PIC होगालाई अपान मरागही कारण होता है । जिसने जि. भाधय in नावर पाली बना लिया ) "पारसबाईनान्" एः. उदम, (वि.)mireme रमहा भ्या. भा.। शामभ्यं राना । उत्साह परना। उपहा (पु.) । ... गला परना। दिसग करना । सहते। सेहे। भरा. परेका बममा हिमोर. रसादन, (.) माइनि+मयुर । निकालना। जयन, (2) raitra मारा पाना । पारिश परमा ! भगा नादपि, (पु.) Narentre पन गरेर. वनमै रोग पलाना मला साफ. परमा गुगनिध. A-उददेश Mater: वाली परमोंगे मनमा उपटना मिलना. गरण, (.) उपवियुर । निकाला। पाना सामना । हिलना । मी पौरो गरी जगदम्त. (• ) गोल newifety परना. होगा।MITTEriry गह (पु.) मगर दिम पर उपन्या () व ( TR कपा MET | रामभोप भरडसेkिafe.. गुण । उदापा. (3.)arria hawar सिन., (.) मत र । मारी। उनोस | tv उपाय, (...) merican-r दुभा माये IRRमर सिप :...बनार नि। भम पुrer इगर... गुष, (..). पुरात IRehre are सोrrai Ram(.) नर wet रसोनिगरrint. . गर उदर, महा। महाभा. . उदर, (न. ) उद+अए । र । पेट । मामि और म. मी. (10) Razirmir.. मौका बीच । “आधारे अप्" युद्ध । लगई । "zz+r +अप-उदो दलोपत्र" पेटका रोग, उटीर्ण, (नि.) र ITrty उदरम्भरि, (वि.) उदा विभनि । मगि+मुमय । पार यज्ञ किये बिन अपना पेटली भरनेहारा । भुधिन । पेह. उट (नि.) Pan I fire उदरावर्त, (पु.) उदरे थावर्न इव गम्भीरस्वात् । गहरी धागो । माया होनेसे पेटपर मानी पानीका भार (चफ) है। नानि । उहत, (पि.) गर । उसका नाफ। धुनी. ॐ गणा निराशा उदरिणी, (खी.) उदरे गोऽस्त्वम्याः इनि । जिगके ( उनमनीय, (न.) उदगम्+अनीयर । पेटमैं गर्भ हो । गर्भवती । गर्भशली । अन्तर्यनी । हमन दोमाफ करा. पाली. उदाढ, (म.) गाद+5। अनिता उदक, (पु.) उद्+अर्क-अर्थ वा पञ् । उत्तरकालमें होने अगन । बद्भुतही. वाले फलवाला शुभ वा अशुम कर्म । नतीजा। परिणाम । उहात, (पु.) यति गाम । उद्ग- दके गानहाग. उचिस्, (पु.) उद् ऊर्य अचिंः रश्मिः अस्य । ऊंची | उदार, (पु.) ++पत्र । उगमन, लाटाला । ऊंची शिसावाली याग । अधिक कान्नि होनेमे उहीय, (पु.) उद्गयर । एक सामवेदाम कामदेव । ऊधरेता। वीर्यका कार जाना होनेसे शि- उद्वर्ण, (त्रि.) उद+गी। यम करना ना पत्री। ऊची टाट. उदः, (पु.) उदाहन्-नि. । अंट। बहुत दं- उदयसित, (न०) उद+अब+डि+क । गृह । घर में पीछे रहता है जमे "जागीद्ध." प्रशन उदात्त, (पु.) उ+आ+दा+फ । ऊंचे स्वरमे उधारण कि उद्धपण, (१०) उद्+2+न्युर् । पिमना । 'यागया वर्ण (अक्षर)। मनोहर । वडा । दाता (नि.) सलवारभेद । ऊंची आवाज । ऊंचा । अच्छा । चमकने- गोटी रगह। मुरली करना. वाला बढावाजा. | उदाटक, (पु.न.) उद्+घट्+पिच बुल् । निकालने के लिये एक प्रकारकी कला । अरष उदान, (पु.) उद्+अन्+घम् । गलेकी हवा । नाभि । । सांपका मेद. "करण रयुट्" उद्धाटनम् (न.) इसीअपने हे ल्यु" प्रतिबंधनिराम । एकावटका दूरकरना उदार, (नि.) उझारा+क । दाता । वडा । सीधा। वनुका बंधन मोटना । कुनी। चाची चतुर । गम्भीर । असाधारण (सास) । मुलादिल. उदासीन, (नि.) उ आग्+शानम् । रागद्वेपरहित । म- उद्यान, (पु.) उद्दनम्यम् । आरम्भ ध्यस्थ । दो जीतनेवालों में किसीवामी पक्ष (लिहाज ) न- पिसटना । प्राणायामका कुम्भकका करनेहारा । टपेक्षक। वैपवाह । किसीसे सम्बन्ध न मदराशन। किसी ग्रन्थका मागविशेष रउनहारा. उद्दान, (न०)उद्दी+ल्युट् । यांधना । पुस उदाहरण, (म.) उद्+मा++मात्र ल्युट् । किसी धा- उद्दामन, (नि.) उद्गतं दानः । जो रस्सी तको एक जगह दिखाकर सम्पूर्ण स्थानपर निश्चय करना । लगयाहो । बंधन रहित । मुला । विनरोम निदिक ठिये कहागया हटान्त। प्रकृती निदिके लिये सुदमुख्तार । वदासख्त । "उत्कृष्ट र निदर्शनयर उपोद्धात । मिसाल, अत्रं यम्य"। जिमका पारानामी अब बहु उदाहत, (नि.) टाहाका टान्तम्मापसे उपन्यास वरुण (पु.). • कियागया। ममालके सौरपर दिखाया गया। कहागया. उद्दित, (नि.) उत्+दो+ । बाधा हुआ. उदित, (वि.) उद्या इहागया । उहण+क्त । दटा। उद्दिय, तु. ३० । सूचन करना । इशारा की निकला। बदा. करना । जतलाना । विख्यात करना । बतलान उदीच्य, (वि.) उरीचि उनरकासगदी भरः यत् । उता. ते । दिदेश-दिदिन । अदिसत्- अदिदान. काल (थानेवाला बट) में होनहारी चौर । गादती | उदिष्ट, (नि.) उददिक । उपदिष्ट ।। (सरखदी) नईके उत्तर पश्चिमका माग। उत्तरका । गया । चाहागया | दमें प्रचारक वि जयनानी गन्यदव्य. मापन (न.). मे - - .

(उदित, - चमक. पावाला. अपन, (न.) दहीप्+विन न्युर । प्राग । - उमुद्ध, (त्रि.) उद्बुध्नक । विकभित । सिलाहुआ। पानी पकानेदाराभर राय पहेगये रस मारियो जागाहुआ। आनीहुई धम्के सम्बधी हानसे जागाहुआ समस्यनेहारे पदमा आदि रिभाव । मामाना. बतुका सार । जैसे हाथीको देराकर अनुभव कियेहुए य, (पु.) उदिम्प । अनुसन्धान । ना। त. हसिपक (महारत )का सयाल होजाना (ये न्यायादि मतमें खीरार कियागयाहै). 'सागरना योजना । अभिलाषा इच्छा । पाहा निशान । रिये नामरर सेक्षेप बग्नुमा नाम लेना. उहण, (न.) उत्+हसन । यदि । मडना । उन्नति । साप, (पु.) उद++पम । पलायन । भागना । दौडना. योत, (पु. ) उद पु+पम् । प्रकाश रोशनी उद्बोध, (I. ) उद्+अध्यम् । पोगे समश । पहियान । याहास. दत, (I. ) उझन् क । राजमाद । राजाभोंगा पहिल. ) उमट, (पु.) उद्भद अच् । फच्छु। एज (चावल आदिके बान । (वि.) बोलने में या चपला विनाविचारे पोल. छोटनेश कामदेताहै)। अच्छे आशयवाला । महाशम । प्र- नेवाला । भविनीत । न सोसाहुगा । बहसी । अहंकारी । पर । बहुत अच्छा । प्रन्यसे बाहिरका श्लोक आदि । फुट- मगर । कपरको रटायेहुये । उटाहुआ । यहा सस्त जो- कल । सूर्य । प्रसिद्ध । मशहूर. उद्य, (पु.) उभ अप् । उत्पत्ति । जन्म । पैदाइश । निकलना. सुरण, (न.) उस भावे स्युर । एटकारा। कउतारना । उगना "मगि स्युः" । वमन कियागया | उद्भिज, (नि.) उद्+मिनत्ति-किप्-उद्भित् तथा सन् जा- यते-जन्छ । पृथिवी फाडकर उत्समहुआ पक्ष । मारी 'ममादि. भादि। भाजी। नपा तात । राव स्थावर. शुर्प, (न.पु.) उदाहप+निव+पम् । सम्पद । सुशी उद्भिद्, (वि.) भूमि उद्भिनत्ति-उभिद्+ किए। दक्ष, (विवाह आदि), स्याहार । बीपी (विशेषकरके तृण, सासणे, वाही और लतारूप पाँच प्रकारका स्थापर यह - धर्मसम्बन्धी) परदोम्सवादि. (पु.). अषण, (न.) उद्+हर+णिच्+युद् । रोमाश । शरीरके उद्भूत, (नि.) उद्भ+क्त । उत्पन्न । प्रगटहुआ। न्याय. -रोमा सडा होना मतमें प्रत्यक्ष योग्य । जिसे ओससे देस सके. य, (पु.) उद्++अप् । यस्य अभि । पृणदेवय उद्भेद, (पु.) उद्भियतेऽनं पत्र पम् । जिससे शरीर ऊप- पियारा यादव विशेष ( यह पानीका बहाभक्त हुआहै)। रको उठताहै । रोमाघ । शरीरपर रोमका सा होना। जन्म पिदाइश । "भावे धम्" फुरना. शार,(पु.) उद्भियते । उह+कर्मणि धम् । जो | उकम, (पु.) उद्राम्यत्यनेन । उद्+भ्रम्+पश्-आदिः। जाया जाता है। जिम शोधन करना परताहै। ऋण । जिस्से चित्त बहुत घूमताहै । उद्वेग । न्याकुलता। घबरा- कर्ज । "भावे पम्" । मुक्ति । छुटकारा । बचाना । बाहिर हट । सन्देहहोना । भूल । फिकर । घूमना. निकालना । सम्पदा उद्यत, (नि.) उदयम् क । तयारहुभा। ऊंचे कियागया। प्रन्धका अभ्याय. दुर, (नि.) उगना धू, अम्मात् । भर निकल गया है जिस्मै । बोझेसे स्वतन्त्र हुआ। बेरोक होगया । सत्र उद्यम, (पु.) ठ+यम् पञ्-आदिः । उद्योग । हिम्मत । दिलेरी । परिश्रम । मिहनत । कोशिश। तयारी. सूत, (त्रि.) उद्धमा उत्क्षिप्त । उटायागया । कागया. उद्यान, (न. ) उदया+आधारे स्युर् 1 जाना संरकरना । गुनन, (न.) उद्ध+गिच्+त्युत् । उक्षेपण । ऊपर : बागचाका आकीडन । विलासरनेश वागदराया। फेकना । उछालना रित, (नि.) उद्+ह-ध वा का उठायागया। उसलागया। उचायः, (पु.) उद यु+पम् । मिलाना । इदा करना. । खुद्रायागया । जुदा किया गया । नाश कियागया । सानेसे उपासः, (पु.) उदस्यम् घम् । श्यन । कोशिश. Ved. होशगया। रक्षा कियागया. उद्योग, (पु.) स्क्युरम्पम् । पत्र पेशा। उदम । -दिन्धन, (.) उन्ध् न्यु । गटेमें राली लगाकर उत्साह कोशिश अपनेको माधना | पाशगंधन । फासीलगाना। अपनेको उदित, (नि.) भद्रका अतिशवित जियादा । + स्टपदेना. आराय. अपिल बहुआ.

रदिन्, (११) घसना। छटना. बेलति. . उद्विच्, स्या या प्रायः कर्मवाच्चमें प्रयुक्त होता है। उद्वेग, (I.) r+fri+प । नियम अतिक्रमण करना । पना। (पंचमीके गाय आता है) विरह ( निष्ठोडा) मेग हारना । सा "ममेवोदिच्यते तव जन्मनः" रिणति । रिरेय । मंगोम्मान " निपला जो हिले नई । बन्दी अरिवत् । रिका. | उदजन, (वि.) उद् विजयन । मन के उद्रेक, (पु.) उरिन्थम् । वृदिः । वदना । टपक्रम । व्याकुल करनेवाला । किमी के विलये इमानेर पारम्मा नीमच पेठ, ना भीम । उकर दुमदेना । गोड. उद्वर्तन, (न) त्यतेऽनेन । उनि मिच्न न्युट । उद्धेजपित, (नि.) उबिजनृत् । भानछ । र जिसे शरीर अच्छा बनायाजाय । शरीरके साफ करनेका उद्वजि(गि)न-अब, (नि.) टनि+गिन् चुना दव्यआदि। "मावे स्युट मिलेपन । चन्दन लगाना । पयरानेवाला । नाश करनेवाला । दुःम पहुंचने का दिन । नानुध । वेआरम. उद्वर्तनं, (न.) उन्+अन । ऊपर जाना । उदय होना। उद्वेदि, (त्रि.) उनका वैदिः यत्र । अंचे मिहमन्त्र बाहिर निकलना । सम्पत्ति । टन्नति । इपर टपर टोटना । उदल, (नि.) दूनो वेटा । किनारेमे बहर चन्दन आदि उगाना । शरीरको मुगन्धित व्यों मर्यादा तोरनहारा मटना । कदाचार. उदल्ल, म्वा.प. कापना । सहरना । इयर पर उदाहु, (त्रि.) उद्गती पाहूर्यस्य । जिसकी मुना ऊंचे हो। भुजा कपरको रटाये. उद्वेलित, (त्रि.) उद्वैल्मन । कांप गया। उदह, (पु.) उदहति ऊर्ष नयति पितॄन् । वह अन् । लगा।-तं (न.) करिना । कंच, पितरोंको कपर (खगादि लोकमें) टेजाताहै । पुत्र । उद्देष्ठन, (न.) उददै न्युट् । हाथ और कच्वं वदति+अच् "प्रबहवायुके कारकी हवा". कधन । जुरांवां। दमान । पगडी । “ उद्वान्त, (पु.) उद्गन यान्तं अन्तजेलं असान् । प्रा. नात् ” (नि.) मुलाहुआ (बंधनम ). बजिस भीतरका उठ बाहिर निकला। मदरहित | उन्द, गीला करना-रघा पर• अक• सैट् । हाथी । उद्+यम् का दहीण । बाहिर निकाला । ककीया. योन्दीत, उद्धासन, ट+शु वम् युद् । मारण : मारना । "टद्वम् | उन्दर, (पु.) दन्द अरु । मूरिक । चूहा। +नि+त्युद" । विसर्जन । विदाकरवाना। छोडना. रन्दुर" टन्दु उदाह, (पु.) उम्बा पम् । विवाह । शारी । परिणय. / उन्न, (नि.) उन्दत । आई । गीय । - उद्विम, (नि.) विज+फ । उद्वेगयुक्छ । पवण्या दयावाला. हुआ । दुःखद करने की शक्ति न होनेसे घबराये हुए उन्नति, (R) उनम्मक्किन् । वृद्धि ।" उन्नत, (त्रि.) उद+नम्न । उच्च । ऊंचा महा- हुआ. उद्य । गाउकी श्री. रखी, मा. आ.दिखना । विचारला । सयाल करना। पहियापाश । इशाख । प्रशिष्ट इशितः. उन्नद्ध, (त्रि.) दानह त । अच्छी तरह उडीलणं, (न.) उन्+ विस्+अतः । ऊपर देखना । उन्नमित, (पि.) उनम्नगिनत । प्रयागया दन । नेत्र. कियागया. उडान, पु. ५०। पंमा काना। किसी पर या सामने उन्नयन, (१०) उनी+न्युद् । यिनक । दलीत ।। । पंचना । राजपति. उन्नयन, (नि.) कारको ठटायेहुए नेत्रोंवाला हरमाथा सरोजाना। याना । पूर निक. ना करनाअल सँचना । रस है ना। बताय. मवार करना। अनुमान करना. उहन, (नि.) दो वरन । गत.। अच्छी बारमे उनम, (म.) टन्नता नामा मानदारांना पारिसका चालकलन अच्छा हो । " उन । रिना कागया (कारो). उग्निद्र, (त्रि.) लता निश मुद्रा यम्य । विमा सच, (नि.) सन 17। या हुआ मन, आता रहा । शिखहुआ । जागाभा. समान लगया। मार गया । उनी, भ्या- पारने नाहमला एमा। अनिता पारी। मुख, दशाना नबिनपात्यामा। " - तया 1 यस्थ । रमादेश नारपटा. टस [संप, उपनेत (वि.) व+नी+तृच् । उटानेवाला । अनुमान गर- उन्मूलन, (न.) वम विनम्न्युर । सरगटन । रा- नेवाला. उना । जसे निकाटना. उन्मतक, (पु.) उमजल । गले तक पानी | उन्मेष, (पु.) सदन निष्पम् । नेय आदिवा मोलना । राडे होकर तपसा करनेहारा सपखी । पानीपर यो प्रस. सरनेहारा (पि.) उप, (अन्य.) गमीपता । पामहोना । अधिकाम उम्मत, (पु.) उदमद-करणे ॥ । परा । मुयकुन्द साहय । आरम्म. पक्ष । "परिक" उन्मादाला । पागल । महके आये. उपकन्छ (त्रि.) उपगत बटं। भग... । रावास (नि.) पास पहुंगा । निस्ट गरेवेपाम । गांवपदीया योगी उन्मद, (नि.) उलो मदो होडम्य । जिसे मद पर. उपलनेही चाल. गया । पागल । "करणे अच्" मादाय । नोकी भीश. | उपकरण, (२.) पकियतेऽनेन । र । उन्मनर, (नि.) उमानं मनोऽस्य । उसो हुए दिह जिरगे उपकार किया जाताद। प्रपान न 1 से दासा । जिसका मन भोर अगर गया हो। जिगरा दिख भोजनादिमें पजन (गना-नारदा)। सनिध पर पायम माहि. पलंग भादि । महानेद्य मावन मन मसिएर पुन उम्मनर-मार, (नि.) उसान्तं मन अस्य । व्याकुल मादिरामा भादि टियाग गधन. मनवाला । पुस । बेभाराम । उगरे हुए मनवारा. उपकार, (पु.) H+पम् । रगतीमगये. उग्मय, (पु.) उद्+मन्थम । 11 मारना । फलस हुए पुपमादि। अनुकूमामांकी. | उपकारक, (वि.) ममतुल । Errn उम्माप,(पु.) उन्मभ्यतेऽनेन । उ मसारण पम् । 'प्रोपे शपि भरने सरि"Ter. मांग देर मृग भादिर पगाने लिये लगाया गया रेखा बनामा राममा परमा सम्पर. पूरयन्त्र (फंदा) । " भाये पम्" । मारना । साह | उपकार्य, (वि.) ++ Irt are पाना । लाचारसरमा. हायक राजमार(gric. उग्माद, (पु.) उद्+म+पम । वित्तविभ्रम । दिल्या जभवन (श्री.). हुत घूमना । भूतानि प्रवेश करनेरो ता पारमम | उपकूप, (पु.) पगार क...ो त रहना । पिएरेमो मदेवसे कोई एक प्रभारी सबा पसा सोदाम (AECa). दसा । किसी शरीरके रोगगे पुलिा स्थिर न रहना । | उपक्रम, समापन समार.. पागलपना। पागल. हिला भिरमालITIfEREM... उन्मादम, (पु.) उद+म+निय युट् । उन्मत्तानेदारा | उपोश(.) पपुलमाRit भामरे एक बाण, निए । सभर (1) tiritrrer. उग्मान, (40) उद+मा+भरणे युद्ध परिमाणमा साधन उपकोए. (पु.) Wite Irise तोरामा भारि मापना. निन्दायानेहारा (वि.)लि. उन्मार्ग, (नि.) स्तान्तः माग । मागसे कर गया। उप(), (२.) पर -- परिगत मार्गपर पारण (पु.) लिलमार्ग । नारमार, दुराचार - (भर.)मिनमासे. उपपि... REATERIT रिमपित, (वि.) दीपपुर । पूरभा। लगमा । दिन बिल दुमा योगमा समभा. जामीस्टम, (२.) १९मील+दर । उम्मेर। जीप, (I.) +iremified भिमानासत्या. म. जागुए(नि.) पुणे परिसर दुमत (वि.)विन्द । रोडो रेसमें एमेरा. Thimirrit उम्गुन (f.) सापुर wife रमुERator उमगतं.] (११२) उपगत, (त्रि.) उपगम्+क । मोकन । मानागया । उपजापक्र, (नि.) उपम+बुन्। ' पहुंचा। जानागया. वाला । मया । बिरोध बढानवाया । बर। उपगम, (पु.) उपगम्+घञ्-अदिः । पासवाना । मी. उपजीविका, (नी.) दाजीवति । र कार। जाना. टाप । रोजी जीनका साधन । इति । उपगीति, (प्रो.) उपग+चिन् । आयामन्दका भेद। उपजीविन्, (त्रि.) उपजीब+चिन् । गाना. भागरेमें पहुआ नाकर. उपगृह, (वि.) उप+गुम्यन् । मादिनकरनयोग्य । उपजीव्य, (नि.) उपजी ग्यत् । गायक मिलनेटायक "भावे यत्" मिलना. उपजुए, (वि.) पशुपक । ग्राम । पहुंच उपगृहन, (न.) म+गुन्युट । आदिगन । मिलना। लाया गावा म्वीकार किया गया आश्रय प्रहण । पकडना. मेगा किया गया । प्यार किया गया. •उपग्रह, (पु.) उपग्रह अप् । काराबन्धन । जेलम्याना ।। उपना, (श्री. ) उहा+कर्मनि बत् । = जेल में डाटना । मिहानहोना । "कर्मगि धन्” की । विना आपही समझन्टेना । "माचे घ"ID धूमकेनु आदि प्रह. उपढीक, गिजन्त -मैटा करना । सादर मेट च उपमाहा, (न.) उर+प्रयत् । अढाकन । भेटा । नाकति. नजराना मिहयांनीके लायक. उपढीकन, (न.) सपा वर्मनि उपघात, (पु.)सदन घम् । अपकाररानाचा रोग। चोट. टरद्दार टिरायन. उपमः, (पु.) उरम्हन+क । संनिकृष्ट । आश्रय । पासका | उपतापः, (पु.) टप+नप्यम् । उता धामुरा स्थान । धाश्रय । महारा। स्थिति। रक्षा। जो विपति । व्यथा धोक. किसीपर वा किसीसे हो. उपत्यका, (नी.) सरन् । पर्वतके नि उपचक्रः, (पु.) टागनः यांचयाकं । एक प्रकारका | उपदंश, (पु.) टपदनायित् । माया रवा पी. शराब पीने के माय बच्चा टमनेवाडी मत उपचनुस्, (२) उपगतं चY: इस । नेत्र समान लगा चटनी । टपयरोगनेद । एक प्रकारही इंकमा दिनकी बीमारी । दंशन । टंकलगाना । उपचय, (I. ) Tr+पि+अन् । पदि । वरना । टन्नति । उपदर्शक, (पु.) पदापिच्म्युन् । ज्योतिष में समर्म (टा १. वां और ११ वां स्थान. उपरिन, (नि. ) T+पर्छ । उपानिन । मेवा किया- उपदशक, (त्रि.) उपदाण्युन् । दिखने दरवान । दिसलानहाग (त्रि.). गया। नायागया. (पु.) मार्गदर्शक द्वारपाल । माशी. उपचम-म, (अन्य.) चर्म चमई पर या चमके निकट. उपदा, (मी.) दर+दा। अर् । दन्कोर उपयर्य, (श्री.दयप वित्मिा । हिम्मत। मेवा. बहो। मेट. उपाय, (पु.) उरदीयने मंस्क्रियतेऽगा नि.निगका उपशु, वा. प. दमना ! तामा करना मकर किया। मैं मम्रीगई याग. कर्मवाच्य । दिमाई देना मिचि । दिखाना।। उपवार, (इ.)+च+याचित्रमा हिकमतामया। जनलाना । परिचित करना किसी व्यरिये बाहर धनीलाम कामीको मुा काना. पंम एग्ना। वर्णन करना । पसति।। उपचित, (त्रि.) विनादामामा । या शन् । थदर्श । दयति । दृश्यते । यदा हुशानदार टियागया. उपदेश, (पु.) ठप+दिश+धम् । उपग्छन्द, धुर..चपदमा करना । प्रेमा काना। पीहई बात का कहना । मन की बात - गगान्दयति । अनिन्दन, साना । प्रान करनेद्वारा वचन. उपतरम्, (अय.) पुरे मन्मम । बुद्धम. स्पदंष्ट्र, (f.) टर+दिश+नृव । शिक्षा देता उपरान...1ोटमा त कला (वर. पु.) for: गुहा घोशा शप्पा सारान।कार. धावा. समाति,(.)ने मान उपद्य, (T.) eg+अ । ट। THR(5.) पदा एम। भया को गुम्न जाने हंटीवार (गा)महती. दया। ऐनक. गुमान [m ह, भ्या..पाम ही मामना । किसी के सामने भागना। उपनिषद्, (.) टनितिन :- माक्रमण परना। सहपनि । म अन् । एम. मया । दरनिरिकार दुन, (नि.) उप+8+ I पाउ । घबरायाहुआ। हो जानावित विवादन करने मुसीपत, पनामा. द्वारा पेटका निगमगान्तमा. धा, (बी.) प+या+अन् । धर्म भरिकी रचना. वहोना । धर्म मान । पग पग्न । में मधिऑधी परीक्षा परना। एलान्यावरणमें पिछले रणी पिया. पक्षात पहिटा. | उपनी, मा० १. ।। ९ ग्या, जु.रभा स्थापन करना । राना । किसी बा नाय । मनमीत् । अनित पी मौर्य रगना । दधाति । पत्ते । दी। ६ । उपनेत्र, (.) नेत्रम् त्रिो । परन् । भधित. मागके पग पर Irr मैत्रमा पारगयामाग पधातु, (पु.) पमितः पातुमिः । सर्ण मानिन धातुओं के Trय (मर्णमाक्षिर, तारमारि, उपम्याग, (३.) crefits । । अप, ter, रीति, सिग्दर, शिलाज) । यी अपनाचना पागm मnि- गात पा (मसे दुप, टोमे एज, मापसे चर्मा, बहाना । भेदो गमी, अस्थिगे हात मागे माल, पीयो भोगा). उपनि, (.) Ter | ram पधान, (२.) उपधायने शिरोऽत्र होशिप प्रियगाati. जाय । शिरोधान । रिहाना । बन्दर । प्राय । पिपार । उपपति, (2) rease पिता एक प्रराररामा. Mitri पधि, (पु.) धा । ती बागो मोरही | उपा. (म.) Cers.r. In प्रभारी प्रकाश परमारपट । एमापा परिपा. बोलाया पद Retar Pra पपूपिन, (नि.) पाक । आगमरण । . timrarrrrrrrrrrr. समान मनदीप ताप पुक्त । इराणे पrgभा. PEmmarthern पमा, भ्या. प. पूषना । पलना । धाम। "" tree अपार पनन, (I. ) मम् । परताati. उपपद्य (नि.) ... गया परात. पनम्। पा.प.धमा । एना inment मोर उपपातर,(..) Esti. गया. पनय, (.) मी । उपनन । मr. सरे से ये पुणे पण एका पादन, (..) errore.sxer rea मे जोजोमहालावर रिक्षा भी। (५) भी (प), पार पा र (FATRE उपपुर,(..) Strait our. भरमार. से) मा. उपपुरा, (..)i se re पनयम, (-) र स्तर ( curam उपनगर.(पु.) nee Trm..., Artimrakar RRiter... - hwat Tiger . मतलय. उपराध, (3.) +१+पा भानाव १] . (१४) उपतु, मा. आ.तरना । टोट पोट होना पानीका 1 कट | उपयोगिता, (श्री. ) उपयोगिनो माः इन्। रसाना । । । मोट. होना अयवहोना । मौका । जमरन । हत उपमुत, (नि.) उपय+6 1 पीडित । मुसीबत में पडादुमा । पानीमें इबगया । उपन. उपयोगिन्, (त्रि.) उपायुज्+पिनुम् । एत उपबृंहित, (त्रि.) महा। वन । बाहुआ. अनुल । योग्य काममें लगाना । इसका उपभोग, (पु.) मुझपञ् । भोजनादिने सहान- कामदेनेलायक । फायदामन्द । ठीक. हुआ मुमय अनुमव । भोग । मुसा गाना । सादलेना. | उपरत्त, (पु.) परमात । गत उपमद, (पु.) पम् । माटोइन । रिटकना। राहुसे पहुआ चन्द्रमा और सूर्य । सन । कारना । पहिले धर्मको रिपाकर दूसरेको कायम | उपरत, दि. २० । कर्मवाच्ये । साल होना । । परज्यते भगवान् चन्द्रागिचि । रंगना ।। उपमा, (.)2+मा+अ । साहस । समानता । उपरत, (नि.) परम्स । विरत । हर बराबरी । सहारनेद. मारागया।मृतामराहुआ। सक्यमनाओंनेर उपमातू, (मो.) टनिता मात्रा । माताके गमान | उपरति, (सी.) परम्+तिन् । पित दुर्गनाटा । सोदेवी माता। पात्री। दाई। मारमी वस्तुची प्रानि होनेपरमी उदासीन होना मम्मीनी- मरज भारि सवी मानतुल्य हैं. इन्द्रियोंको हटाना। जीवन, स्वामित, और उपमान, (म.) समीपदेनन । उ+मा+युद। जिसमें दिक होनेपरमी अत्यन्त इच्छा न करन्स । मगिरगाव । जो "चांदके समान मुस" पुरुषमा मयं विद नहि होमवा" की पुत्र सो कन्द टावर पीकदमीमें मुराकी उपमा दीगई। " मगदुर" मन । गमान होनेरी ममम. उपरवं, (न.) उपमिन रमेन । रनके भार , उपनिनि, (..) artic+feन् । गारपान । उपमा. गया। गांग रन । होटा रन । काय । मंग। प.() योगी नियन् । या उपरम्, भ्या. ५.। कभी आरमनाशी मी | "बरे गमन मुग" यहाँ मुग उपमेय है. करना हिटगाना। समाप्त करना. nam, (.)सम्म । यो पार करनेवाला। उपराग, (पु.) उपरपम् । मर्म में . प्रदश । राहु । टपदव । निन्दा । यमन । TET..पार पर श्री बनाना हा अर्यमें उपराम, (पु. ) उपरम्पम् । निमि। हर गानेरी । टापउने । ययाम । योंमें बराग्य भायम । शान्ति. है। मांग. उपरि, Tre, (:.) IE+पयामि । विहशाई। उपरिशम् उपप, (न.) गतं साम प,न.पर माना। प्रर्थना करना। मानतामे नाक साम मिस्ता चला अाद नारिय त्रोटक मावि घरगोन सारा,() रायyि | माग- दिनर, (.) । प्राधिन । अनुगेर। अपनी और करने Prer को देने पटना। मगर । महायता । मम . उमण, (पु.) नीयतानी रिय उपुर(R) ITIRE item. पनि धिष्ठापानीमा Fre. Tam, (२.) मीरयम मगाब-पास पुर...यान यमन्त्राधारे और मामे मम्म rrrr मा पुग. (: .नाना रात. संभावर पात्र है | रामे fayer मनम. कार। (इनो और पनी रिमतिर मेम ए. ।

niru. { *.) mean irromसाम... Trt Prem..)Mirmirmirmirmirmir.Trum In। . REM ....erik | भा. (Eि.INEAMm. om Imrrit"ratrintere' .rifm.:... Premaram पर...) 2014 ram Protriarraimirman tirit Hamar mumaunmat I minium, (.miri after पण In Tam (int)। पतन (12.) farmer rait.or.Trar freein "पपर• IT.IMAmi PIRetropritream, गwिefririts. पण...) or rem ww. द... घर AHE wr merertRITI re. प.(पु.)ER.RAMERI TERI ryति, (.mire IMANIPाना MEEEPTETretrint marateTru NCR मम पना. पपE Kurn imme eni Mirr(s) और ( गया)। PrmastramMir"Mark REILI भारत ना. rre. (3. ) Nepal EarterlistFAT. ..न चला। भोको ngitaanोदिया. पिपाप, Cancer EIRE उपमर, (.) सनमराता। mirमा. Arifmret पास पम्भारोम(नि.). पपाय (Intra । मन प्र.(पु.) IRE+प् । पौरपर राप ranामा पाruarit. गररममारनामा परगना. पपविध... TAINम है। पमनपापम, (पु.) उपगम्यम् पम् । उपहार । wam.मावि बना समसमाधिना रोकनारजना मारा. उपणियति, गमभ. प. मा सरकार | उपरष्यान, (म.) उम्रपानेऽनेन । पेम्स्युर । भगमन. दिग्धोती. उपहार, (पु.) उरमामलापम् । समाप्ति । इमा एन, (२.) मनभार । रक्षिण (दिना) परनाना. निराहुए इदे भगर्भ परया बापणे अपन, (ती. ) उपसलिन् । सेवा । मिसना । पदमा (ने) बयाना पूजा पी.(.) eu+krte मारीन धारण राना उपसर्ग, (पु.) पयसम्पम् । रोगका रियर नुनीम प्रथम तीन वर्ष से मारल गया पोपाव भाभको सूचन परनेहारा महाभूताधिकारका बात। अदपज म्यावरण "प्र परा" भादि को कियारे साथ जुड़ते है. उपानिन, (f.) पdि विडम् । सिा | उपसर्गः, (I.) उप+ए+पम्। माथि । बीमारी । पित। पintainशेष धारणारा, हानिमिण. द (T• ) उसनः योन। बदके समान । - उपरगन, (२. ) उपायममुद । भमुहमा भमभान । गीण विशेषण समापात्र में प्रथमान्तनिधि विपति - पंध, (.) ERHITY पटनेवाला. छोडना । प्रतिनिधि एपी बगदपर काम करनेदारा. - , समूर्यक, । - उपसूर्यक, (न.) टरगर्न मयं सूर्यमिव चन्दं वा । मझायां | उपहस्तिका, (श्री.) टपगता हन्न । कन् । चन्द्रमा वा सूर्य के पास मदयाकार (गोलाकृति) गुयली । संदूक । पान मुरआदि रसनेमा परिघ (घेरा)। सूर्य के पास पहुंचगया. उपहार, (पु.) उपहाघ । टपदीन । उपम्, भ्वा० प० । सम्मुस जाना । पहुँचना। निकट से- अव्य. स.” (समीपार्थ) हारके पर चना । सरति । असार । भगात् । एत. उपहार, (पु.) टप+ह अस् । युद्ध । उपरन्तु. प.। गुला वहा देना। देना। मिलना। एकान्त । निकट नजदीक, सुदना । किसीके गाय माना । उत्पन्न होना । नाश | उपहित, (नि.) पधा+ला । स्थान होना। मजति । समन । असार 1 मुष्ट, रखया गया। किसीपर या किमी रक्नु उपमए, (न.) टप+मन्स मिलाहुआ। दवाया हुआ। समानतारा गया. मेथुन । भोग । “प्र" आदि उपसगवाला । "प्रभाव" "मिट" (त्रि.). उपह, (भ्या. प.) साना । पास बना हरति । जहार । सहापीन. उपसेक, (पु.) उप+डिपम् । सौपकर कोमट करना, उपस्कर, (पु.) दर++भप्-मुट्न । व्यपनादिको शुद्ध | उपाकरण, (न०) उप+आ++न्युन । करनेा साधन । मसाला । घरमें रहनेव साधन । गृहकी नेऊ) डालकर वेदको पढना । सावन मई बनु । साधन । माननी । भूपन । निन्दा । कटर। दोप. दिन करनेटायक वैधम्म । संस्कार करके मारना प्रारम्भ. उपस्कारः, (पु.) प++पम् । परिशिष्ट । कोई वस्नु र रह गई। एक बात भूपित करने के लिये दूसरीका उपार, तना• २० साना । पहुंचाना 1 म- जोर देना. युटाना । देना । पाना । किमी विभिन्न मन स्पस्ट, ता. उमा तयार करना। भूपित करना । समाना। उपांशु, (अन्य ) उपअनन्छ । निर्जन । पचना । रोति । कुरते । चकार । यो । पीत् । यसकाम । दिपाहुआ । विनाजाने । दूसरा थाला. तामें मनको टगाकर अपनेही मुग्नेटायक उपस्य, (नि.) टर+याक । निष्टयती 1 पास रहने ओट थोडासा हिलें ऐमा जप टशशु का- पासपु.भंग (गोद)। मध्यभाग । स्थः स्यं प्र उपास्यदेवताके मन्त्रादिया जा करना ( रातिदिन्द । रिंग वा योनि. म्याटनगुन." इति मनुः अगम्या, मा• उम• निष्ट सरना । अपना माग टेना । | उपाख्यान, (न.) टप+आ+या+न्युर म माना। पहुँचना । मेरा करना । मिति । उपनिवे। प्राचीन वृन्न कहना । पुराना हाल बयान सम्बग्थिन. "रामोपल्यानमत्रर" इति महाभारतम्. उपम्यान, (नि.) +था+नन् । से। नौकर । उपागम, (पु. ) ५+आ+गम्यम् । यो पहुंरगा । युरोहिननेद. गीरागमन । पाम आना । पहुंचना. सम्यान, (२.) या युद् । टोप स्थितिः । प? | उपान (न.) उपमिनं अन । गति शारदाना । निकट होना । नारी । नमस्कार। प्रधानध महायक । शारीरके हाथ पांव रागनहुन टोग. अमित, (वि.) entire । मर्मास्थित । दागिर। उपाजे, (अन्य ) दुर्दली सहायता करना भगुडीयें उपाश हुये।" " माहो नाएंः । शापहुआ। इस रियादुआ । टपा-पान, (I.) writera ईति मन रिया सामागया । वह हामी Tri.(पु.)टरम्म+गर्छ । एना। नहाना " दिन यत्र"। जिममें इन्द्रियोदो हुने उपादान, (२.) Tri+ता+युर। स्टे घे पर मुम यदिश्यमय Trii राना।"राम"जी. स्नाने उपयोंमे इन्द्रियोस सायं सानो प्राण या गत समग, ... रामः । मोहन, एआरणमीमारियो अलंकार (3)मादिक हात पाने उपर.(f.) arrporari !! पता, मोर गदा या प्रिय रनम मा. पहायमगे हायर पर - प्रगद नई मा.

.] [समस्या, भल सेवा . 1 देश. (.) मादाम्यात मजा उपार, पदा- भा०। पामचंठना । एक भोर मंदना । सेवा. मेहरा । प्रधान । गुरप। रनेरया। मनोहर। गाना । पूजा करना । नियाग करना । पहुंचना । उपास्ते। समायो। उमावि. पि.(पु.) rमा+vah । धर्मरी मिला। उपासक, (नि.) उप+भगमधुन् । उपासना करनेहारा । विशेषण उपदिाभेद होतानुपाधियाना पदापि नहिं से पता "परियषम् । अपने धर्मको उपासन, (न.) उप+भम् स्युट् । पराभ्यारा । तीर चला- गरे गार पाने हारा । अमेण (गा). नेमे रिश। शभूषा सेवा । देयतादिराभाराश्न (श्री). ने भी उनको मुशार, भौर जवामा पल अपनी उपास्ति, (बी.) उप+भाग+लिन् । उपासना । देवतापी यो पटिम (पिलर) में हेगका पमता है,.. सेवा । निमत. रिये यहां दर्पण भादि नालापन आरित प्रसार करने । उपेक्षा,(M) सम्शुल्। दो विपाद ( मुशाहिरा) पाधिम्यायमतमे हेतुके बभिचार (देव और गा. करनेवालोदी गीतहारके साथ जिरारा सर्श नहिं । उन पचकामदना) को दिसाहारा साध्यमें व्यापक दोनोंसे ये गये हर्षविषादसे धन्य । उदासीन । जो प्रदी. राधनमें व्यापक पदय भई । एउ। नाम । विह।। कार (बदला) टेनेमें उथत नहिं होता । बेपर्वाह. दम्ब पालनेकी पबराहट. उपेक्षा, (बी.) उप+स+w | त्याग । छोडना । "ये मेरे. ज्याय, (पु.) उपेल मधीयतेम्मात् । उपाधि दिये नो" इस प्रभारी उदासीनता । बेपर्वाही. स्पम् । पाम जावर निस्से पटा जार । जो जीविका ये पेर या येवो किसी एदेशको पटारे । पाने उपेन्द्र, (३०) उपगत इन्हें अनुजलात् ।जो छोटा भाई होनेसे न्दके पारा गया। विष्णु । वह कश्यपसे अदितिमें TO । उन्माद । " दरम्यापी, सप्यायानी" (प्रो.). इन्द्र के पीछे वामनरूपसे उत्पन हुआ. नद (श्री.) उप++नशिप् । उपसर्गधे रोपे जाता है। वर्मगदुम । चमडेकी पहावें । ती. उपेन्द्रपा, (सी.) ग्यारह अक्षरके पादवाला एक प्रसिद्ध न्ति, (पु. ) उपमित भन्तेन । प्रा. रा. । निकट । न. उपेय, (नि.) उपदण्यत् । उपायये विसहोनेलायक । एन्दोमेद. पदीय प्रान्त शिराराकोण पानेयोग्य. ग्रिय, (नि.) उपान्ते भव. यत् । अन्यगमीपभव । अ- उपोट, (वि.) तपस + । समीप । नजदीक विवाहा. तसे पहिल्य य, (पु. ) उपअय्पम् । सापन । उपगम । शासित। उपोदात, (पु.) उपमहन्+पम् । प्रकृतीपपादक :- शत्रुओंको भाधीन करने के लिये चार कारणाम, पान, दाहरण । अमली बातो सिद्ध करनेदारी मसाला बसती भेद, दण्ड सर्पको वर्णन करने के लिये दूसरे अर्धा बमान करना । (२.) उपअय्+प्युट। दोपकारक उपहार । दूप. रेको प्रगमरनेहारी मेट। समीर गमन । पारा जाना. ऐसी चिन्ता कि जिस्से प्रातकी सिद्धि हो. रः, (पु.) प+कर्मणि पम् । निकटता । समापना। उपोषण, (म.) उप+उ+स्युर । उपवारा । दिन रात कुछ पूरा भूला अपराधा पार 1 गुनाह नयाना रोजह । फाका. परत, (त्रि.) उप+आ+र+क । नित्त । हटगया । उप्त, (नि.) + । कृतवापधाग्य । योगाभा धान्य । बोयाहुआ पेडका पीज । बीजागया. चलागी. रिम्, भ्या..विलास करना । लेउना । मना विनोद / उतहट, (नि.) पूर्व प्राप्त पथान -पूर्वधालेल्यारि स.14- पर लिपहलाना । किसी पातमें प्रसन्म होना । किसी हिले बोया गया पीछे रोचा गया । बीज बोनेके अनन्तर पातसे पिरत होना (हटना )। उपारमति । पारधीत् । रोचा गया लेत. कोमल होना । तुदा• पर• मक. ऐ । उन्जवि. लग्म, (पु.) उप+आ+सभ्यम मुम्ब । निन्दापूर्वक / उभ, (त्रि.)दिर• उ+भक । द्वय । दो। इसरा समासमें दरवचन । किसीशी पहिले निन्दा करके पुरा वचन कहना। प्रयोग नहिं । समासमें संदेव उभय हो जाता है। उम् दोष । उलाहना । परसरयूषण । भाप दोष लगाना। +अयर दरी काना. उभयतस् (भव्य०) उम्मतसिल्लातो अयः । दोनो ओर. वृत्त, (वि.) उप+आ+in+क । थमको पर हरनेके उभयत्र, (अव्य.) दोनों स्थान । दोनों जगह. लिये पार २ पृथिवीपर लोटनेहारा घोझा लोगया. उभयथा, (भन्य.) दोनों प्रदर। दोनों तरह. हुआनोटबंदी. पिन, - उपारत कर्ण,] (१२०) -- बीचमें टाटना. ऊणु, ढांकना । अदा० उभ० सक० सेद । ऊोति-ऊर्जुमे । अपचन, (नि.) ऊपमनुर-मन्य वः । आणावीत्-आणुवीत्-आगवीत् । आणविष्ट. काहरवाली जमीन. ऊर्य, (त्रि.)उ हाइ+ पो० उरादेशः । ऊंचा । ऊपर. अम्मन्, (पु.) अप+मनिन् । प्रीम । मा. ऊर्यकण्ठी,(स्त्री.) ऊर्ध्वः कण्ठः मुखं अस्याः । ३०॥ गोरा. व्याकरणमें कहे गये गरम वायुमहिन = हीप् । जिसका मुख ऊंचे हो । महाशतावरीलता । वेल. गये ग-प-ग-ह-का चार अक्षर. अर्घजानु, (त्रि.) जानुनी यस्य । जिमके घुटने जह, विनर्क करना । ददील करना । बा. ऊंचे हो । मोटे घुटनो ( गोगों) वाला. सेट् । कहते। आहिट. ऊपंगु, (त्रि.) ऊचे जानुनी यस्य । ( जानुशन्दको | उह, (पु.) उपन् । बितकं । दन्छि । विकल्पसे तु आदेश होता है)। अपरका भाग । मोटे नतीजा निकालना । अध्याहार । ठेहुर- घुटनोबाला. लगाकर वाक्य पूरा करना । किमी पदको - ऊर्यपाद (पु.) ऊवाः पृटस्थाः पादा अस्य । जिसके क्षाको पूर्ण करना । अन्वयके योग्य दिन चारों पाव पीटपर हो । शरम नाम हायीका शत्रु-एक की कल्पना करना । जैसे "पार्वणे सोन्या- प्रकारका पशु। भाट पवित्राला जीव. यह वचन टीक है परन्तु एकोद्दिष्टने F ऊर्यपुण्ड, (पु.) ऊर्ध्वः ऊर्ध्वमुखः पुण्डः इक्षुयष्टिरित्र । नहिं वनता इमलिये "सौम्यः" ए= ऊंचे मुखवाला गरेकी टोरीकी नाई। माथेपर ऊंचे कपना करनी पड़ी. मुखबाला । पौडे गौची तरह वीन रेखाओंके सरूपा अहा, (श्री.) अहम । श्रीलान् टा। तिलकभेद । एक प्रकारका ऊंचा टीका । प्रायः वष्णव थर्थ पूरा न होने के कारण दूसरे शब्द लोक माथेपर लगाते हैं, ऊर्यम्, (अव्य.) ऊंचा. हिनी, (स्त्री० ) उड्दन्दी । सेना । कम्यरेतस्, (पु.) वं न पतत् रेतो यस्य । जिसका वीर्य कंधेको जाता है अर्थात् नहिं गिरता। महादेवजी। क, जाना-भ्वा०पर०सक अनिट् । ऋच्छति । आर सनादि । संन्यासी । भीष्मपितामह. ऋ, जाना होत्यादि पर०सक अनिट् । इति । ऊम्पेलिग (पु.) उध्वं उत्कृष्टं लिविहं अस्य । जिसका क, हिंमारना मारना स्वा०पर०सक अनिष्ट निशान उत्तम है। महादेव । "ऊप्पलिम विरूपाक्ष" आपीन्. सत्यारमन्त्रः स्थ, (न०) ऋथक् । धन । दालनात ऊप्पलोक, (पु.) कर्म । ऊंचा टोक । सगं । बहिश्त. धर्मशानमें प्रसिद्ध दायका धन । बडोला कि अमि, (पु.)(बी.)+मिन्यतेस्थ । तर । लहर । जो तकसीम करनेलायक है। बढोका दम 'बैंग । और । उनी । पीटा। चाह । युभुक्षा | कक्ष, (पु.) पस-किय । मक। रीउ नई करनेके योग्य है. (भूत) आदि । (जसे भून पियाग प्राणी, शोड मोह मनी, जरा ( युदेपा ) मृत्यु (मौत ) शरीर- लगन्धा, (मो.) शान् गन्धति हिननि मेषआदि राशि (पु.न.). पीये कर्मिये है")। एकप्रकारची पोटेकी चाल. अमिका, (खो-) अमिरिक कामति । छ । सहरको क्षगिरि, (पु.) कर्म । पर्वतोंका मेद । ऋपिजालि वृक्ष । महाश्वेता । क्षौरविदारी. तरह चमकनेहारी । अंगूठी । “म्बार्थे कन्" रहर आदि. उभिमानिन्, (पु.) अमिमा यत्सस इनि । निमकी प्रक्षराज, (पु.) क्षाणां राजा-त• टच् । दशीकनार हो । समुद्र । समुंदर. जाम्बवान् । चांद. ऋग्वेद, (पु.) पानो वेद । जिस दिन उर्मिला,(पी.) मगरी श्री. वर्णित है । जिममें परमामाकी महिमा वर्णन जन, (पु.) ) सारी नई प्रमात । मुबह । देवस) वेदोंमसे एक । ज्योतिर्मय परममा गण जिमके देवता है अर्थात् जिममें सरिक ऊरण, (त्रि.) न्यु । पप । पिपलीमूल । पीता। भर अपरा देवसर श्रीपरमात्माको बुबा ममोक्षती नानाविध थनिलाबाओका वर्णन 'ऊ, (नि.) मत योरः । गरी नवली जग पदमेर। सुबगे पुराना पेरा हिन्दुओं देश रहो बोयाममा मोर गा. (निबन्ध) पुसा. चन्दनबादि. मर

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एकक (नि.)एका हर या विमरी- मतिनापतित्रा।(पशिपिन पुरा रसर,(.) संपाला पा(.14(न.) परं पाणीयोगमा ऋषि,1 (१२२) ऋपि, (पु.) इन्-विच । वेदमन्त्र देगनेहारा मुनि । एकचर, (त्रि.) एक: गन् चरति। अनुपान करनेयोग्य कर्मो जनानंहारा सूत्रोंका कां । पिचरनेहारा । यला घूमनेवाला । गांव में थाचार्य । गोत्र और प्रवरको चलानेहारा मुनि । तपा। एकजाति, (पु.) एका जातिजननं यत्र । मत्स्यविशेष. घार जन्म होताहै । ए (इसका 1 ऋपिया, (पु.) ऋषियोंके लिये यत्र । प्रनया । वेदका "एकजन्मा". एकजातीय, (त्रि.) एकः प्रकारों विध ऋष्टि, (मी.) ऋ-करणे चिन् । दोनॉोर धारावाला जातीयर । नुत्यप्रकार । एक सा (तरवार). ऋष्य, (पु.) क्यम् । मृगमेद । एक प्रकारका हरिण. एकतम, (त्रि.)एकान्तमच् । बहुदाई । दिम निश्चय कियागया एक । बहुनान र ऋष्यमूक, (पु.) यो मृगो मूडो यत्र । पम्यागरोवरक पाग ठेहुए वृक्षोंवाला एक पर्वत (रामायणमें प्रशिद्ध | एकतर, (त्रि.) एक+डतरन्। दोनोंक दी है)जहाँ रामचन्द्रनी मुग्रीवके पाग पुछकालके प्रिये रहे. निश्चय कियागया एक । दोनॉमिमे एक। ऋभ्यरत(पु.) ऋष्यस मृगमेदस्य शामिव गई अस्य । एकतस्, (यव्य.) एक ओरसे. एक हरिपके सीग नाई जिगके सींग है । विमाण्डक एकतान, (नि.) एकं वानयति । मु• टन ऋषिका पुत्र । टोमगद नाम राजाची कन्या (जो राजा मरोसा करना अण् । जो एकार विकसक दशरथने इसे दीदी) । शान्ताका पति । मुनिविशेष. चिनत्ति । जिसका सयाल एकहीं और ऋच, (नि.)न् । (वेदमें) वडा ऊंचा। अच्छा। में लगे चित्तवाला. देगनेायका इन्द्र और यमिका नाम, एकत्र, (अन्य ) एक+बल् । एकस्मिन्न्याने नमग-पर. र, जाग । उहो. पर• गर• सेट् । भारति भारीत् । पकत्व, (न.) एकात । एक्य । एकान ही । साम्य । वराबर । सायुज मुखि भर धात प्येय अमंद हो जाता है. (मना)बयाना र निन्दा । डरना । छादी (.)और देवताओं की माता (पी.) यादगिरी। एकदण्डिन्, (पु.) एक: कंबर: RE गरा। भाव (पु.)देव । दया. शून्यो दग्दोऽस्वालि। जो केवल का है । पिसायोपवीत आदि नाहै ल.(मन)मा और दयोंकी माता पृथिवी । पहाट. एकदन्त, (पु.) एकः दलोज्य । विमा हो । गणेश । (एकदंष्ट्र) इसी अर्थमें हो एकदा, (थय) एक+काले दान् । एक (आप) देवी माता । देवनी । महादेव (पु.) किसीवर. मोमा (.) (.). प [ नंगला । कागा । ए.(ध) । दया । याद करना । पिन करना। या अनिनं पश्यति । [+freो पुरन । frm (बु.), देमता अर्थात् जिमे मिनभावन । दिन एफ, (वि.) समन् । एकरी मण्या । मुस्य । केजर पकया, (अव्य.) एकप्रकारे पाम् । हरी । गमनमणा योग. एस.(.) मगहरायोला. एकपक्ष, (नि.)ए: पभः सय । विमान सार, (वि.) योजनं धम्य । निगाएकी महाद. दान करना थापगमें पर पानी, (श्री. ) एE: यमानः अनन्यो । त्या. मनुष्य । गिगा पाया पुर,(.)ोटमा । पि atta तर सपना (सनल)मनीयं, हरीन. सामुदाब (g.ire (2.)गणारा. কাল पविणे बायरामय गारभेद -- चमक रहादायकवनी १२ मण्इटका राजा. स्पारणम् । उदातादिम धन्य एक एवम सरवा उचारण एकाश्रय, (पि.)एर सत्रयो दम. मिरासी Fiकरीबातरा नियो। एक ओर मनवाला । एकादाद(पु.)स्मिन् विडेreोवरम्। PRATकन, (पि.) एक मारिन् । भसहाय । जिसरी। .(१२५) पदी, (प्रो.) एकः पादोऽस्याम् । डीए । पदभावः ।) एकादान, (नि.) एकच दस र आलम् ।एक भार रामापिथ. दग।" संख्या. पदे, (अन्य ) एकस्पस्के । अकस्मात् । अचानक एकादशवार, (न.) एकादरा द्वारानि यत्र । जहा ग्यारह कही वार । "वयमेकपदे निरागमम्" इति कुमारः, दाजे हैं । शरीरनामी नगर (वहाँ नाविका, श्रोत्र, नेत्र "पिङ्ग (पु.) एक नेत्रं पिकं आप जिगी एक मारा दो २ छ मुसके हुए, एक मुरा, नानिगहित नीचे के तीन, ली है। कुरेर । वह पार्वतीको दोपहरिसे देपता भया । और ब्रह्मरन रमतरह "दाजे हैं). इगके शापसे इसका नेत्र जाता रहा फिर महादेवजीकी एकादशी (सी.) एकादगानां पूरणी 1 11 ही पूरण- प्रसनतासे उसकी आसमें पीलापन होगया (पुराणकथा). करनेहारी।दोनों पक्षों में प्रतिपदासे रेकर प्रग भिनामत, (पु.न.) आधा दिन बीतजानेपर जो निय करनेवाली तिपि । जदो हरिवामरवत होता है. मसे साता है रात्रिको कुछ नहिं भोजन कर्ता, उसे एक-एकान्न, (नि.) एE: अन्नी निश्चयो यच । जहां रवाही 1. "मक कहते हैं ऐसा मत अर्थात् नियम. निषय हो। अल्लन्न । जसरी ।बहुनही । पोला ।त. यटिका, (बी.) एका परिरिय मावली यन्याः १. एकान्ततस्, (भव्य.) सान्त तागत । अन्यनियरी। ran। लाठीकेसमान जिगपी एकही सीहो । एकला । नसहारा । जार होनेहारा।लमात्र । मिय। “एकावटीदार. ज्यादद. माज, (पु.) एको राजते शिप् । सार्वभौम । एकही ) एकान, (नि.) एकालमैवानं भरय यत्राही भोजन मियाजाना है। सामानदारा । सभा विशति, (बी.) एकाधिका विशति.। एक ऊपर धीम। एकवार गानेका प्रत. पदवीग संध्या. एकाप्रपितति, (श्री.) एमेन म विशायिन-भाष धीर, (पु.) एको धीरः । कर्म । एक, यहादुर। दस बाम, एकवीम । उनीगी संसा. बडा धीर एकक्ष. एकाना (श्री.) एसः भन्दो कोमन म्या frut नाफा, (पु.)एक: पापोऽस्य । जिगरा एकही पुर सवाभा (उमर ) परिगलानी, हो । एक गुरपाले गपा आदि पोरानगवर भरम. एकायन, (वि.)एक अपन विषयो पस। सोही शेर, (पु.) एकः शेषो यत्र । जहाँ एक बादी रहे। विषयमें लगा है। और विषयोंगे रियो । यावरण में प्रति समागवा मेद। जो पुत्र और पुत्री एवानमन. (दोनोका एकोप) "पु" होना है. एकापाठी, (श्री.) भारी मादिनि । मजि. भुति, (t.) एका अभिमा उदानादिन्या भुतिः ऑकी लदी। एक साहार । अर्थाraभैर वरना । पीसार यमें प्रगिस उशत अनुदास, भीर हरि- भायर सेमनारमति. तवा विभाग नियबिनबोलना. एकाह(पु.). महा। हिगु. भम् । “भET. कासगं, (Fr.) एम्मिन् सर्गो निपयो पत्र । जहा पुती"वि पुस्तम् । एकदिन. एकदिनमें ए भोजन पाना । दिपने कार र मदनोईन भोला. परनारा (त्रि.) 'कास, (पु.) एक भक्षि या पद्मदिरावीएपीमाप, (पु.) एस एम म ICCfurti. भौगोपीभामा (त्रि.) पन् । बहुपएक शालार. 'फा (३०) रियो यम्मा शिम पियकीय, (वि.) mata (t) - INE एकहो। और विषय पर श्रीर मनाय पनि एपमा काम पाहिए. () मिग ter वर्ग रोजा. रोगपती ए.ke. 'फारस, (वि.) सदानम्पापेमारपेभरने मार शिदि (श्री.) पनप ए, पदम.... एक पहारी मिथि (nिtra ), मा. शुर.: म ment Pro FDM rina सामने । यह. - परिभव तिरस्कार । हिकारन । थोड़ापन । निश्चय । हा. पेन्दय, (न) इन्दुर्देवतास । जिसका देवता । ऐन्द्र (त्रि.) इन्द्रस्येदम् । इन्द+अण् । इदया पुत्र, टोक और धनकी कामना (स्त्री.) ल्युत् । मुनारय पेन्द्रजालिक, (नि.) इन्द्रजालेन चरति दिर विचरता है। मायाकरनेहारा । एलिया (बायर) इरावान् । समुहातग्रमवः भण् । जटाशाले स्थान (११४ ) एड़, (पु०) इल्मोना-अय् । मेष । मेढा । बधिर । बहिरा। कार, (ft.)सामग मा । होरा (त्रि.). पंकाम्य, (न.) पर यमा मगर र एड़क, (पु.) इल्युल् । भेट । वनका यकरा । 'यम् ।गत होना। हार। सींगोंवाला मेटा। हरएक मेढा । मौलान् टाप् । पदमा आमाहोना, मेड. ऐकान्निक, (त्रि.)पानं सगी टा पड़मूक, (नि.) श्रुतिरहिन एदो यधिरधागो मूकः । गुंगा नेहाग अगाभिनागन नेहारा ।। औ बहिरा पुरुष. १3 मजदूत. एण, (पु.) इ-ण । कृष्णवर्णमृग। पालेरंगका हरिण । स्त्रियाँ ऐकाहिक, (4.) एकाहे भवः । कर एणी. दिनमें होनेगाटा । एक दिनको लापकर इन् एणतिलक, (पु.) एणतिलक इव चिई। जिगका निशान दिनको छोडकर होनहारा गर । तस्यादा। हरिण हो । मृगाराचन्द । चन्द्रमा । माहवाय. एणाजिन, (न.) एणस्य अजिनम् । हरिणका चमडा. पथ्यमयार होनेदाग यर (ता-गा) (३- ऐक्य, (न.) एम्म मात्रः । एक+प्यम् । अर्म- पत, (त्रि.) (पु.) इण्+तन् । हरिण (पु.) थाया। करवर्ण । चितकबरा रंग । पितकयरे रंगवाटा । स्त्रियां पेलय, (नि.) सोविरः +अन् । सपना मेल । जोर, एनी। रंगवरंगी । चमकनेवाली. पतद्, (त), (नि.) इण्-आदि-नुक्य । पुरोवती । ऐझ्याक (पु. ) शायोगोप्रापयम्-सम्, नि. गुडआदि. ए, वदना । भ्वा० था. अक० सेट् । एधते। ऐपिट. पंचमें उत्पन्न हुआ। मूर्यवंशी राजा. एघस्, (न०) दध्यतेऽग्निरनेन । इन्धन अनि । जिस्म आग पेहद, (न.) वयाः फलं-फले अश् तम्प न सुन्। भडकती है। नि• नलोप । गुणश्च । काष्ठ । काट । यदी. ऐण, (नि.) एणम्य कृष्णमृगम्य इदम् अम् । वृक्षय फल । हिंगोटया फल । तपन्विोंय वृध. एपित, (त्रि.) एक । वृदियुक्त। वटाहुआ । बढगया. एनस, (न० ) इण्अमुन्-नुट्च । पाप । अपराध । दोष । रेणेय, (नि.) एण्या इदं टक् । काठी हरिश्चन का चमडा आदि. गुनाह. परका, (ग्री०) इण्+रक् । गांटरहित तृण । एराधासविशेष. आदि. एरण्ट, (पु.) ईरयति वायुं मलं वा । इमण्टन् । नि ऐतिह, (न. ) इविह पारम्पर्योपदेशः खायें पर। गुणश्च । जो हवा या मलको दूर का है। एक पेट, मरा। चटावा सिलसिलेवार उपदेश । " पला, (प्रो.) इलायच् । एलानामी रता। इलायिची. वृक्षपर यक्ष रहता है" इत्यादि वापदादाने का उपदेश । किमीने जानकर नहिं कहा। एव, (अव्य.) सादृश्य । यरावरी । अवधारण । तहकीकात । तारीखी. पयम्, (भव्य- .) सादृश्य । मुगावहत । इसप्रकार । ऐसा निधय । म्वीकार । माना। प्रभा मवाल, मृगशिरानक्षत्र चन्द्रमाका (त्रि.)। (स्रो• दीप्). पर, जाना । माम• सक० सेट् । एपते । ऐपिष्ट. पपण, (पु.) एप्म्स्यु । लोहेश बाण । युन् । इच्छा। नक्षत्र (न.) त्रियां छीप् । ऐन्दी. काटा । “स्सायें " "एपगिच" इसी अर्थ होता है. ऐ पेन्द्रि, (पु.) इन्द्रम्य अपन्यं इम् । इन्द्रय पुत्र पे,(थव्य. )म्मरण । युटना । शिव (पु.). अर्जुन । मुग्रीव वानर । काकः । कौआ. एकमत्य, (न.) एकमतम्य भावः। यत् । एकतरहका ऐरायत, (पु.) इरा जलानि सन्यस्य । भाशय । एकाग्य. कागारिक, (त्रि.) एवं श्रमहायं भगार प्रयोगनं अस्स में होनेवाला । समुदमे निकला इन्द्रका राधी, बोटे स्थानार निगम प्रयोजन निद होता है। पेरिण, (न•) इरिणे उपर भवा । चार पर. दन (निमक). हडे । इतिहासी मोना | रामदरसा मेघाला १. 1 . (न.) रा अब KP मम होनेवाला। ओण, अरमारण काग। मिलन प.गर. मेद । श्रीगी-पत. (पु.) इपया अपय । लारा बेटा । दुधमा पुर। ओन, (नि.) माता । मन्नान । मr. हुभारिरीन. पेल, (I.) लपिलाया क्षरयम् । पिला वेदा । ओतु, (त्रि.) मर+नुन्+मनमः । ती, (सी.) शानो देवता अभयाः । महादेश जिगमा ओदन, (I.) मनोत्र : ता। उत्तर भी पूरे अन्दरी या. अमर लामा । टोm (A) र भावः । सपना । भगिमा भारि ओम् (m.) म+मन् । ८ प्रकारकी विभूमि जो अनिमा, महिमा, फरिमा, भर म् इन मीने में TATER Imes रेमा, प्रामि, प्राताम्य, शिव, वि. गोसार मनाएगा मंदन: ए.(अप.) अग्मिन् नि । मनमाना । निपालना लावरग. ओर, (I.See mar किया, (वि.)लोक भवः माला 14. ओपपि-पी, (बी.) प.. गिलोका की मोरोपायो। (E) भयपालान् । एलोक में होने. tी। पन । लामरणानियेगये करके गये माला बदन आदि प्रमियर राभनुम भागिलो. ओषधिप्राय, (पु...Searn re.. ओ पर शिपायाने मन्या) दागिरी मारण । साओपन । पुहामा । या. frमारपुर २.) नगर परिया भोप, (I.MRthat warra .(पु.) उ.नि.पापीला १. (न.) अमुन् । प्रत्वम् । एए । पर भोपुर, (I.) Trm a fre. भयमापनाद. समानtar एमी, (-)ो अधयः रग इन भयोधी, (.) an written.." माजी ममी भोजनबाद। पीरा । भnिrner ओएप, (पु.).riatrena.rn माता-जाना-साना र समरसना जिना पाप पाटा भोलातीत. (• ) RTE ART असे ओशोपमपाल, (*. ) बना-मानादि. .(.)मन् । परम भोम्सना या (21) बरामि दान से NCERT atterft. भार,(RTAITrm thir Irri PERger"rt जाम आए. (1) Mann.. Tri RIROIRiRM. भाचिती, I (५.. Mhatrnereiपिल, SRRIERTAIN PRImat मा भारको रेस"terest. irector-- Amar Prv.. ए. (i) mrari AMIT Pretremists. Ver mr r.

गदगे या पुत्र. जमानती(.) मगर नामेश्य भाय औपयिक (नि.) उपम+Ine । सनातन र पन्दन। म गंगार रहला । सायमे लान हुआ। पनि । तीजमे मिटा. wagan आपसर्गिक, (पु.) उगल नि पत्रिपती उरला रोगनेदार राम औरम, (२.) उरश्रय मेरी मम्। Here.) TIRTRITIES औरत्रक, (न.) उरभागांना मेरा मन (गर) गि ('.) सन टन् । भात - आग्म, (I.) सागा निर्भिमा मी मंसार रोगामी मा भा.(::. बरेत । पेट मगा। पुत्र । धमंगालो हार iry आदेशिक, (2.) या Tane - IETIgl. देयं का प्रभावितरण Fr... TET ।घनाभ या गया पासादिक । मरने के दिन देर were - । निगर नयागा दान (in) rrrrrrratri मंगगृह । " हिन्का. Fr.R.Print. औष, (I. ) उम्पापये am at १४.:.rriranामान लगाना. पाना (पो माग समी mittarim Rinभैर। में मुनिगे उपत्र हो । ठग र (Timent दमियोमा है । गगरीन । भापनिमा irr (8.04 ! TAPA HE (म.) उमानो गा - पी. .....(म: आलषय (T.)ोपिन को min. • ".", 'T नग, (न. ) शनगा amraftar tir( ) ntranet . HTR(Niner भर (न.) TE manmantuati irr .:. . .1115 daror ... yone wm 4' 4.) मा . . म.th.xxt. . TH . 4 s = a 17 tráng: tr : 1.

पगल.(.):- 3.दामा-माना । THI (2.11 by -IPमाया गर्य। मप्र fings Freefrom बामवीट । मेरा मन पदर, (..)zrrrrrr- प्राय II गुग । fumin (2.) Twifer zi. htri-:- (पु.) पनाग । प्रमेन पुत्र MI. पृir rinit rrrr- राममा जगाच्या मागी (1) मधमा गोमा पाम, (4) Mom.rr.. परास मग प्रति माना। .. (म.)inetri for .Iw.rr.rr. ...... • fulne का भाव स योग, योग, (0) 11. Irearth... योगी अंगभगे बमारी. T(पु.) 43. In wो thermiri... .. rr.. Pr" mar .. मात्. (7.) failको नेहानदेय न.(पु.) 44-1..ांनी पा. लि. (I) Inter गोr (2) int........... : - m.(..) fere in गेम aim mit dharm . पा ...' Er.w.mitent. WRITTurn.m म " .. . ... . mrit Rst fornar... anR.१५(1) we 11 and Inter fromrat TAR Nxm... yamantr. पा. (3.).mmm.cn Amit On Trta . 6 .

कामुरा, ( १२८) 1 करमुख, (पु.) कास मुरां इस मुसं अस । जिसका मुरत | कजलरोधक, (म.) (पु.) फजलं रोगी कांकरीके मुराकी नाई हो । सन्दरा । संहासी. णि अच् । दीपकका आधार । काल, (पु.) कं मुरां पिरो वा कालयति क्षिपति । को चमकता है. पर अन् । तर (चना) मोरारहित शरीरके आरम्भ कञ्चक, (पु.) कचिकिन् । करनेहारा अस्थिऑन समूह । हरिओंका पिंजरा । हही. लोहेका वर्म । चोसा । अंगरसा। केंचुनी। सर कहालमालिन्, (I. ) कालानो माला अति अस्य इन् । कञ्चकालुः, (पु.) कयक आछ । जिमी मला अस्थिपिजरी है । छ । शिव । महादेव. | पञ्चुकिन् , (पु.) कशुकाइन् । राजाओं का-४, (पु.) पति। कंगनी । धान्यभेद । मो. अधिकारी । दान । द्वारपाल । HIV जिरहपहिरे हुए (नि.) रनवासकी रक्षा कच्, सन्द करना । भ्वा परामक सेट् । कचति । अक. चणकनाम मुनि । जिसने अंगरसा पहिराहुआई फोर-शाबाचीन. फझक, (पु.) कः केश इव कायति । रेस फ, मंधनावर करनारामा पर इस्ति सक सेट्। कयति। पक्षी। उसका काला रंग धोनेसे वालोंकी र यामीन. कोयल. कच् धनः सका चमाना-अक भ्वा आ सेट् । कयते । कार, (पु.) के जतं जारयति । ३ ब्रह्मा । उदर । पेट (न.) अपि "art" कम्. (पु.) अन् । केश । पाल । मृहसतिका पुत्र। अर्थमें होता है. पता भेष बात । दमिनी (स.)। "भाव" फट जाना वरसना (भ्वा० पर• सर. मेर) पारागारर. अकटीत् । अकाटीत. भागि, (.) पररपर कपः सह प्रहत्य प्राप्त यु-कट, (पु.) कदम-कर्मगि प वा । एक मगर सरेके पालोको पारकर किया स्थान। कमरका पासा । हलिगण्डस्य । ग.(प.)। एक कपूर । हल्दी. पहुत । काल । तृण । मुर्देका रघ । तरता । रमरान । मशान काही आदिका रस्सा ! घटाई- पर.(f.)मा पसी । पु+यह+म-कदादेशः । नाग10 (.). (मन्त्री.) कद युन् । मेशला भाम पर भाग । पर्वतका नितम्बस्थान । पर्वतके पास (az.) मते ही कम् । पीयते निधीयते म.विडियो. मस द अपनी भूषण । कडा । हाथीदांत । पहिया । रामपानी रदारी न ।। माल । प्रश्न । सून । धानोन । दायरा । जमीन । सेना. पतसरे मन. फटम, (पु.) कट मरते । मुकि-दीव । (f.) भिना+ । केन जलेन पृाति, विद्याधर । अपनी इच्चासे को कारण प्रायदेश र स्थान जिदा कम, (पु.) मध। न. मेगा राक्षग । पासा मेसनेवाला । एक कीग । शुभ दिनारा । पुनागडम । केशरका statman (पु.नी. (शिकस ) होनेगे राजाका विनाश ।। Por(s) मा । कुर्म। एए । कटाश (पु.) कटं गा भशी व्यापी पाटवायाधीनना गरमाया बिनने बला । एक प्रकार. परम तरे देगना : पान तिरपी मगर पपुर(.)ी । Term। कटापन, (म.) दम तृणामनम भर iग जमिन बदमच कटाद, (I.)ति माला far मा नती है। पारणगूठा सम. सामानपत्र बर,... मग मल परrint. Pr-Minor. परि-टी, (t.)। । परर(strदम्पत "वा. भाने करत, () अपने ।' malnirn(:) wwwt(r.). हIN कटक, ।

पा प्रायो । प्रोअन् । स्टस क्या कठिनी, (सी.) बठिन नी । अक्षर लिरानेगा साधन । पटिदेशका मांसपिण्ट । कटी । पमर । एकदम्य । चाकमी । राडियामधी. कठोर, (त्रि.) कठओरन् । कठिन । सस्त । पूर्ण । पदव । कारवेश करेला. भराहुआ. .)स्टी धार्य सूत्र-शाक । कमरपर धारण कटोरता, (सी.) कटोर-तलवाल कठोरत्वं-न० । कठोर- पार्परा (कपा) का ( सोना चारी)का इना. पना। सस्तपन. तमागी । मेसरा । कापी। घुनसी । गोट. कटोरीभूत, (त्रि.) कटोर+चिभूत। कठोर रास्त- । दूषण । दुष्ट कार्य । रसभेदारा। तेज होगया। "कटोरीभूतः दिवमः" मध्याहसमय । दुप. दयू । शुगए । बटुपी सता (स्त्री.) पम्पक । हिरवा समय. पटोल । नीम. फर, हर्ष फरना-सुश होना।मा इदित् । उभ- राक० सेट् । 5.)पटुः कन्दो मूलं यस्य । जिसकी जा कण्डति-ते भिण्डीत्-अकण्डिर. शिश (गजना) । अदरक । सगुन । टस्सन. फड़, भेदन करना-मादना और रक्षा करना पचाना । चुरा० पु.) पदः फीटः सार्थे कन् । माक । मप्टर. इदित् । कन्डयनि-ते, अवकण्डत्-त. 1.) कटनी. णो यस्य । जिसकी आवाज कर, साना । नुदा० पर• सक• सेट् । कति । अकाहीत- वितिर) दिभि पक्षी। रिटहरा परिंदा. अघटीत. पु•म•) ः मन्धिः अरू । जिसकी गांठ | कहर, (न.) कडं गिरति-गृणाति का अच्-नि० मुम् । पिप्पलीमूल । पीपीकी जा। पुण्ठीमूत । म्मो और मूंग आदिकी जा। पुस । घास । तूही. कटहरीय, (त्रि.) काही अर्हति । पुस भक्षण करनेपाले पु.) कटु एदः पत्रं यम्य । जिसका पत्ता गी आदि । तूपी सानेवाले पशु । उंगर. सगरमस टिगर. -)टना अयं । टुत्रिका तीन कडवी चीजें । | कड़ार, (पु.) गह-मींचना आरम् । गको क होजातादै । पिझल वर्ण । पीला रंग। पीले रंगठी गोई चीज (नि.) उ, काली मिरच. दारा नीकर । गुलाम. डी.) कटुदले यस्या. करवे पत्तोंराष्टी। हियारी यूटी. कह, कर्कश होना । सस्त होना । भ्वा० पर• अक० सेट् । काति। भकहीद. स्त्री.) बीजं यस्याः । जिमदा बीज करा कण, जाना । भ्वा० पर• एक सेट् । कशति । अकाणीत- भकणीत. कादं विपाके पर राति । रा+कापनेपर नसको देती है। कालरसी. फण, भ्या. ए. कणति । पणित । शन्द करना । तु.) कटुमीणो रमो प्यनियम्य । जिसका शब्द लाना । विपत्तिमें जैसे । सोटा होना । चाना । पहुंचना. मेकी मेंडक. कण, (पु.) कण्अन् । धान्य आदिवा अति सूक्ष्म । कर+परन् । तक । पाछ । मान । चटनी। कनियो । देश । बहुत योग। पनीरफ। पनका जीरा चाहसे म्मरण परना) पुरा• उम. पक्षे या कणजीरफ, (न.) म. जीरका छोटा जीरा. • सेट् इदित् । पण्टपति-ते। भयरष्टत्-है। कणभक्ष, (पु.) भक्ष+अम् । उर.। काली चिडिया । पणाद मुनि । "रणभक्षक" यही अर्थ. ल करना वा सही इसे याद करना ) इस्ति कणिक, (पु.) कणो पिपदेऽम्य । अवर्षे टन् । गोधूम- • सर-सेद । (प्रायः-यह धातु उत् उपसर्गके पूर्ण (बारा)। ममता । मंदा । बहुत टोय हिस्म । बा)। उत्कृष्टवै । उदाधि अमिमन्याश (श्री.). ) ठ+अन् । मुनिभेद । ऋग्वेदकी शाराा । उम | कणेर, (पु.) र+एर । प्रकार का नेरा पक्ष । बानेदारा. पेश्या ।हाधिनी (खी.). प्र.) हनन् । कूर। मेहरम । फटोर । फण्टक, (पु.)(न.) करि+दुन्। मे नोचा काटा । उस्त । सन्ध । रोकाहा। थाली (सी.) शुमा । रोमाघ शरीर रोमोयराना होगा। मच्छी काची.. हो। सप्रसे था,..बो और बहान पप..

पम । कमल। प.{".MOTकामा (पु.) पर ITE: पहायीsfer काम, (.) Irrt 414141 rs (१३४) फमट, (पु.) यम् अन् । कच्चन । अच्यु । मंन्यानि- कम्बलिन्, (नि.) कम्बल अनि अयें इन क्षेत्र अलार (न.) स्टयाला 1-: (पु.) म : बैल. फमण्डलु, (पु.न.) माडनं मारः कय जलम्य मर कम्यु, (पु.न.) कम्+उ-युक् । गर । - सति जो पानीसरी सजावटको प्रहा करे । रंगवरंगी 1 घोंगा. मन्दालों का उलय। मी वा कडीका पात्र जो कम्पुप्पी, (ग्री०) कम्यु- राम इस पुन निभुलोक हाथमें रगते हैं। साशा चौपाभोंका मैद. फूल ग्रह के समान है । गापुम्पी. कमन, (नि.) अमरते । कम्म्यु । कामुरु । कानी । कम्पोज, (पु.) कवि+ोज । हाधीका सभिसामुन्दर । यशोगा. भेद । देगनेद । हिन्दुमान उनरमें एक कमनच्छद (इ.) दमनः मुन्दरः सोऽम्य। जिसका काम, (नि.) कम्+र । मोगडी इच्छा करना परन्दर ६ । कासी। गुग. मनोहर । मुंदर. कमनीय, (नि.) कम् अनीयर् । मनोहर । कामना- कर, (३०) यस् । कु+अच् वा पहला मायनेटारा मुन्दर । यदुन रंदा. राजाके लेनेयोग्य सिराज या ममूल । बता कमल, (२.) जलं मी भाति । कम्+अ+ ही जर मजा देनाद । गा। हाथी की मुंटहमनामी नक्षत्र १ पल । दम । दोशाय । मृगपि । मारमासी फरक, (पु.) वायुन् । करंजारा । पर (.) (२.). पक्ष । कचनालका पक्ष । वाला र बननगर, (२.) कमतागं गमरः । कमल+ सपी गोपरी । कमाल (पु.न.) वर्षांपल । ओला । गा. गर. पामा (.) प रयः । अयंशादियान करकपन्याय, (पु.) करगन्दप काम अनामनाराणी । मुन्दरमो. करगम्यायोगमा तामलमताचीतनार्थः - माला (..) मलयो मम्या । जो कम कंगाद यद्यपि हमके भूपाही सम.. कर "क" कहने में हायमे लगाहुआ ऐधः मान, (:.) मां भगनं यम । विगा इस प्रकारची मगाल. erzer. करकण्टक, (पु.) करम्य का IF दी, (4.) माना गनूर देयो का । कमल+ कांटा है। नम । नसून । नी. गाना. करकाजल, (न.) कराया - मा.(.) नो टायम् । नमुः करकाम्यन्दिजट । ओलों वहा पानी. करकाम्मम्, (पु.) करकाया सम्म (R)माम् । बमुक। समी। शवदी । निमय जल मोली जलसमान हो। यामरेल. ...। अपिट । गित , काप्रद (पु.) काम्य वधूकरभ्य वरेण प्रो रामरपा मारनावा चटना. जा पर एक हापरी परताहै। पन्न, (f.) पनवना पाया। पनि फरक (1) तय भत्र ।। .:.) पत्र ! यि बापना. वस्तु पं. जान पामेर । । -, (:.)firez। मटरवरी।। ममरमर l in । iसनी" कादशी Pt. RI .airtent fkrar rother Than४ - (1) फिरमाया । प्र.(पु.) या confirm! मया करपात्र, (म.) Wपात्रं जानिशेषपान । mastyr. महारपीजनेश पाहै । छापाम उमाकर (पु.) गन् । गमः । गल। भागमें पानी देने का उलने सेल । कर्म । हसा. गम्भार गौदुगे दोन माय पपानाथापार. करपाल, (पु.) १t पालकी । पात् । हायको टिन्, (पु.) : mः भार नि । सातादगा। तलवार । "शयो बन टाप् मत nी | "हापी लागे। गोटा. भ, (म.) Refreी में गया (11.1 करपीन, (न.) करम गरम्य परेण पीनं महणेन rami) धन पारगम पहागापारमा भेद। मदन मत्र । पूर्व दायका बाके हापसे पार कर क्षेत्र दिय। गरीर । "मारे सुर" मलना हो हो। शिवाह. का पिने सममें उपमा दिया जमेिद। 1. फरपाल, (I.) करम्प बालः शिशुरिव । हाथका मानो बचा है। मरानएन । नी । "करे कालो गतियंस", -वापिप (पु.)नो माया अधिपः । इदि हायमें जिगमी गति है।रा। तलवार. नौमामी और भामा. "-, (I. ) r+अन् । मधुर। मधुमकिराओंका : करम, (I.) +अभन् । करे भाति । भाया । मणि- पंपसे हे निशातक हायका मापदेश । कोहनीरो पीची. नारालपर । पारण्डप पी। कोगारिता तक वापस पाहिला भाग हाधीका बचा। कंट- पमा पूलोका पत्र पडी मारकाटे- प्रबमा नगीनाम गन्धरम । ऊंट । "करभरण्टक- देवी दीमापातरोग (बी.) टा. गरे" मापः. ल,(पु.) ६. सरल । यी तण। हाप.करमर्दन (पु.) महाति । गृह यु । परमया वृक्ष । ता, (२.) रस-भविष्टा करना । भादर करना। रह परचा । हायमलना. रना पम् । करे तालो सम्म । विपु तात वापर फरमाला, (पी.) पर परालिपर्व मालेव जपसन्या. पापमेद । (परताल) सायपर सही मा हेतुतात् । अंगुलिओंकी गांद जपकी गिनतीया कारण का माता मंगाया सी. होनेसे मानो माला नाई है। अनामियके मध्यसे लेकर ताटी (बी.) परी साठे यत्र । पम् । तार+पम ददिनीयऔर तर्जनीके मूलपर्यन्त परमाला है। भगुलिओ- तारकोल । जो पबनाये जाने हरवल मैदरा गाटोकी माय जो जपसंख्याके लिये है. पनि सहतात. परम्प, (नि.) +भम्वच् । मिश्रित । मिलाहुआ । तोया, (बी.) करम्प गोरीरिवाइबाले शिवकरम्य मिश्रण । मिलना (पु.). सोयान (समकारित) राम्भूतं तोर्य यम्या. । पाई करस्थित, (त्रि.) करम्बो मिश्रणं जातोऽम्य इतम् । साके विवाहममय महादेयके वापरी बदहुए पसीनेरे. जिगवा मेल हुआहै। मधित । मिलाहुआ। जुशहुभा । पानीसे जिगर जल उत्पन होगया । पामरूपदेची "मधुकरनिकरकरम्पिन" जयदेव.. अपने नामसे गिर एक नही. पष, (२०) रात् पतति । पद छन् । दायरो गिर- फरम्भ, (पु.) पेन जलेन रभ्यते पिच्यो । र एम. मुमच दहीसे मिलेहुए सस् । जलसे सींचा जाता है. ताद।राठा कर । लसीको फाउनेहारा । भारा। " एक पत्रं वाहनं यत्र"। हापही जहाँ सवारीह। फरह, (पु.) परे रोइति । सहक । हायमें उगता है। जलपीहा। पानीकी मेल. नरा नसून । नी. पत्रपत्, (पु.) कषत्रं इस पत्रान्तोऽस्सस्य मनुस् । करपाल, (पु.) वर मालपति रक्षति (पु.) परपाल. जिसके पीजभारेके समान मारना । हायको पचाता है। पाण।तरवार. साला ताइ- दारात. करवीर, (पु.) पर वीरपति। पुरा । बार-कमक- पर्ण, (पु.)रः हस इस पर्ण यस्म । जिसका रना-बल सिलाना अन् । हाथो बल देता है। पाण । पना हायकी नाई हो । भ्येट । मिलान । रक एर- तरवार I पण । समाजूस । एक पक्ष । इमशान । or I साल हिट. मसान । एर देशा नाम । सा कन्"। अर्जुन पक्ष । पलय, (पु.)रम्प हसम्म पा इव । हायके कणेरका क्ष. पत्तेवी नाई। अंगुली. । करशाखा, (खी.) करम्य शामेव । मानों हाथी गरे। .

। - - की, कान। घुरा. भ.ग.रानी। भरणन्म "यादागर्ग याप मायrt करशीकर, (१३६) करशीकर, (पु.) करस्य हस्तिहस्तस्य शीकरः। हाथीके | करूप, (पु.) कृ+ऊप । देशभेद. मुंडकी यूंदै । हाथीकी संडसे निकलाहुआ पानीका कणा | करेणु, (पु. ) कृएन । गज । हाथी । हसिनी । इयिनी (कतरा). (स्त्री.). करशूक, (पु.) करस्य शुकः सूचीव । मानो हायकी करोट, (पु० न०) के शिरसि रोटते । रुट् चमकन्छ । सूई है । नख । नौ. अच् । सिरपर चमकती है । सिरकी हही । खोपी। फरसूत्र, (न.) ६ त। विवाहआदिके समय हाथमें मंग "करोटी" यही अर्थ. लके लिये बांधागया सूत । कंगन. कर्क, हसना । पर०मक सेट् । कति । अकौत, करहाट, (पु.) कर हाटयति दीपयति । हट्-प्रकाशक- | कर्क, (पु.) करोति कृणोति क्रियते वा । कृ+क । तन्म रना+णि अण् । किरणको चमकाताहै । पद्म आदिका मूल न इत्वम् । वहि । आग। चिट घोदा । दर्पण । शीशा। (जड)। मदनरक्ष । पिण्डीवृक्ष । देशका मैद. कुलीर । केकडा । कर्कटगृक्ष । कण्टक । मेप आदिसे चीची फरहाटक, (पु.) कर हाटयति । हर-चमकना+णिच् + | राशि । घट । पडा । (पु. स्त्री.) वा दी. ण्युल् । हायको प्रकाश कर्ताहै । मदनवृक्ष । ६त.। कर्कट, (पु.)कर्क+अटन् । छोटा आवला । करन । हस्तका भूषण । मुवर्ण । हाथका जेवर । सोना. कर्करेटपक्षी । जलजन्तुका भेद । कुलीर । केकडा । मी कराल, (त्रि.) +अप् । करो विशेप. तस्मै अलति राशि । शाल्मलीवक्ष । सिम्बल का पेड। "सा बन्' पर्याप्नोति । अल-पूरा-होना+अच् । जो विशेप (भय कर्कटक । यही अर्थ. आदि )के लिये पूरा है । विकट । मयानक । तेलका भेद | कर्कटशृङ्गी, (त्री.) कर्कट इव - यस्याः । जिस सम (गजनतेल) 1 सर्जरसवाला तेल । तैलधुना (न.)। केकडेकी नाई हो ( काडसिङ्गी ) वृक्षभेदं । "खायें कन" पन्तुर । नतोप्रत । ऊंचानीचा । ऊंचा (त्रि.)। अनन्त कर्कटमिका. मूलनानी वृक्षका भेद. फर्कन्धू, (खी. ) कर्क कण्टकं दधाति । धा+कू । ले फरास्फोट, (पु.) करेण आस्फोटः शब्दो यत्र । जहा मुम् ( जो कांटेको धारण कर्ताह ) । यदरीफल । बेर। दायी आवाज होती। वश स्थल । छातीकी जगह । वृक्षविशेष । उनाव. कोटकर रक्सीगई एक भुजा । दुसरे हाथकी चोटसे ) कर्करा, (पु.) करे कशति । कर-आवाज करना । अन् । गर करना । साल टोकना ३ त-भुजाका टोकना. पृषो । कर्कः काठिन्यं अस्त्यर्थे श । कृ. फेंकना+दिन् । फरिणी, (सी.) करिन् सीप् । हसिनी । हपिनी । गौ। कर । कश्-मारना +अच्-कर्म वा कर (करमचा)। देवतामेद. मांसीको दूरकरमेहारा । व गमा तरवार । रारत! करिदारफ, (पु.) करिणं हमाति हिनलि। +"युल् । वेजहना । कठोर । साहसी । क्रूर । निर्दय । बेरहम । हाथीहो पाता है। सिंह शेर. सरस्पर्शवाला (नि.). फरिन् , (पु.) करः मुष्टाण्डः अस्ति इत्सय इनिः। फसार, (न.) वकं हास शेतता सरति गच्छति । एक जिम मुंडका टंडा हो।हनी । हाथी. अण् । करम्भ । दधिसक्तु । दहीसे मिलाहुआ था करी, (पु.)+रन् । पट । या । वंगार। वांमकी पुट । शिही। दरीर साहस्तिदन्तमूल । हाथी कार, (पु.) कर्क हाम श्वेतां ऋच्छति । । माया पेटा. दांत की जा (बी.). फकोट, (पु.) कोट । सापका भेद । नाग। करीप, (यु.न.) +पन् । एकगोमय । सूबा गोया । "माय कन्" कर्कोटकनाम साप से पिप (देखने होमे जिगसी जहर च-जानी है) कहते हैं । विवाद करण,(पु.)नारामा रमा नेद । काशनानी ककिदोलनामी दास्त. मेदन । मनाय । दमित । रगावला । —र, (पु.) क कर । मो० ॥ (कपूर ) मान्य। (3)(नि.)दया (बी.) सप्. হিসাব रमाविसम्म, (३. ) शरणान्वितो मित्रसम्म : कन, पीडादरमा । भ्वा० पर. म. मेद । । पररसर' from । अरार में यात्रा सनद शिब भटमा रना. परमार,(नि.) मयर । हो - It (r.) "Tी आवतं. - . मास.

[कपांग, - - . कधी । अन. . (पु.)मा पना । भम् । पम प्रहगा. कारण, (I.) सामी येन धनि अम्प की । मि किये जो पंपाला IT योन्दिप । निगो पाग बाम र धनशोभा यम्य । पानी निदर। भगवाया जाएगी। पुर। जिगी शोभा वापर हो । पसी पो रथय पारा। दीन शुगपाता और । भत्रि । मेरी बाहन मै• 1 ऐसी रथो रामान पवारी । पर उटाई पानीपरीपा. जानेवाली सवारी । पालरीरोगी आदि. कर्णपाटी, (41-) पर्ण गप्प बोरः । भापार्थे । कणीपुत, (पु.) पर्याः समानु गुतः । बसकी माया घोटालीसा कनराराह. बेटा मागुर । कंगराक्षरा. कर्णगूप, (म.)..मल पानकी मैल. फणेशप, (पु.) पणे जगी। जप्सम् । सम्यो भार । कर्णजलका, (पी.) कणे जालोर। शनपरी । पनरा. कानमें धीरे बोलता है। सूचक । गुगलखोर । पिशुन । । "कर्णजन्दका". गल । मीच । पुरीसलाह देनेवाला. कर्णशाद, (R• ) प । वर्ण+माह । वर्णमूल । करं, शिथिल होगा-नीला होना । पुरा• उ• • ऐद । बनयतिते । अचवतंत्-त. कर्णपार, (पु.) मागचालनद भारत | कर्तन, (न.) एती-काटना । कृत+रयुट् । ऐदन । काट- गिम्+मण । जो मेरी पलाने दाल (पप्पा पा हाला) को मारके दैरसे गूत निकालनेका व्यापार । कातना. परता। माविका मदद कतरी, (श्री.) कृत्+पम् । कर्स राति । रा+क-सीम् । पर्णपाटी, (श्री.) कर्ण पालयति । पाल्भग् । कानका कराणी । दी। कटारी। के मादिके काटनेका साधन । पाटा । स प्रकारका पाना भूपण । बालीबाला. कर्णपू (५० ) कणं पूरयोि । पूर+अ । जो कानको कर्तव्य, (पि.) सन्तव्य । काटने के लायक । “पुत्रः ससा वा भ्राता वा पिता या मंदिदा गुरु' । रिपुस्थानेषु भरता । पामरण । पाना भूषण । मोटोपला नीसा- बर्मन्त कर्तया भूनिमियता". बमल । शिरीषका । अशोक । इनके पूरीठे | कर्म, (वि.) इतन् । कारक । करनेहारा । व्याकरणमें बीकान भूपित किये जाते है । "पूरक". महापया दूसरे कारकोंश प्रेरक । क्रियाका आप्रय। सतय कर्णपति, (नि.)३ बधिर बहिरा । जिसको खमुलार)। चतुरानन । मामा (पु.), शान मानसोप (पु.). कर्णवेध, (३०) पिपम् । ६ . वह संस्कार करका, (बी.) इन्+-भाषः । बझायो कन् । छोटी दरवार। चार उमें कानोसरी येधन करते हैं. कर्द, यति शम्द करना । पुरी आपार करना । पेटकी फर्णयेर, (पु.)ी वेष्टरेट बनेन । जिरी शान घरे भावान करना । भ्या• पर• मक- सेट् । कति । अक- पाते हैं। ल । पासा । "पणुल्" कर्णवेटफ । इसी । “भावे युद" कर्णावरण (पानका पादा) (न.). कर्द, कई अन् । कर्दम । कीया. कर्णाली, (बी.) कर्णम्य आपुलीव । कर्णगोलक। कर्दम, दर्दभम् । पर। कीया । पाए । प्रनामे छायाम कानबीचका भावासापानका जो पतली हिलीगे उत्पाहुभा प्रमापनि विशेष । मांस (म.) कोचावाला बाहुभा होता है, जिसपर वायुर छगनेसे दाद मुनाई (नि.) "कर्दम" । एक प्रकारके धान. कर्पट (T•म.) मणि विन् । परम्परः । पुराना कर्णाट, (प.) रामनाथसे लेके धीरंगतक देश । काव्यकी कामाचौथा। मेला कपडा । "करम्य पट:"5.1 रीति (बी.) दीप. गरमी आदि पोछनेके लिये हाप सामा परेका फर्णि, (पु.) कर्णभइन् । शरमेद । तीर । कण्टारिका । टुवमा गरीरंगका कपः । रमाल । उरणां, फर्णिका, (खी.) कर्ण+प्युल । परिणाम । हाधीक कर्पद (पु.) T+भान् । कपाल | सोपरी । कटाह । एक की नोक । हापक बीचकी अंगुली (मध्यमा)।मानका प्रकारका सार । भगीरता | बगही । किसी भूपण । पपीजकोष । ईरानी। कुहिनी। कमला । तोपरी. थनिमन्य पक्ष भजनी वृक्ष. कर्परांश, (पु.) परम्य अंशः । कारका अंश । कर्णिकार, (पु.) कणिका ऋष्यति । भण् । उप. स्रापारा रेतार. (गणियारी) पक्षमेद । बनेरका दरमा करवा पूल। पपांस, (पु. न.) पारा । पत्रयोनि । कारा बारण। पाग । कसा ।समे । "पांयी". . छोटा गन्दल. पप.१८ उभ 'अशुभ कर्म सग (मा - गगो देuri Primart की, कग्ननि, (5.) मांगों मा काग्रे गा मनि। फर्मव्यतिहार, (पु.) पि+अति+ह+धम् । स्रो एर । मदिर । "मा. हारः ३ त• । आरममें एकजानिरा RI कर्मकर, (5.) करोति ।। मृय। नर । कामका बदलना । मे आपसमें ताइन रई. मार्गानेन्द्र (नि.). कर्मभूग, (पु.) की शुरः काममें बहादुर । यस कर्मकाण्ड, (पु.) मंगो समूहः । कन्दन् । कसम्ह । प्रारम्मझियेगये कामको समाप्त करनेहाय । समप्रतिमान सहारा वेद मान. कामसरनेदारा. मंकार, (५.) वर्माभन् । टोहमारक । टोहार । कममत(पु.) कर्मनि सरः आगतिः। माना पुराना मिना न करनेन्ट । बेगार। में कता हूं, इस्मे यह फल भोगूंगा इसमा दाहा वेशा कम लगना. मंत्र, (न.) कर्ममा विधनार टनिन क्षेत्रम् । पाम कर्मसंन्यासिन्, (पु.) जो वैदरिहित को करनेघसम्मान । माय । हिन्दुमान. लाग कोहै । राम् नि+अग्+गिनि । मद मोरे कमंट, (वि.): कुर। कनाट । किसाग । मेहारा पति. कमंसानिन्, (पु.) गाशात् पसी। . कर्मय(नि.) - Tः । मनापन् । काममें यन्द्र । यम । काल। पृथिवी। देजा जत। ममें मदर । मके रकबेन । टनगर आमगायेनी और फर्मसिदि, (यो.) ताइट और भनि तो प्राति. मनोमभा। कांपश, (पु.) . . । क्रियमाशी । यो FREET पासोपारको हाग। किये और न कियो मनेगा rhit हमा फमार, (पु.) म अचति । भम् । इर्मत Ma(:.) art अनि मोदार । रमान आदिजी एकसार rera rum मागशेर । it-it-MAIT कर्मिष्ट, (वि.) अतिशयेन को। पर.(..).... मान गया कामसनेमामा कियादा जन । काममें ramme furnमगर सगा. कर्मेन्द्रिय, (न.) मंगो किया साधनभून दिया पर,(a.lar til Tu..। प्रिया दिनेन्दिय । Tue इनमे पाता चरना et किया दी है. न. (iii har कब कर, साना बाया. भ. १t" * आर. arrer में गो में करंट (T.) । दोगी मंगो पार 10.)... Narma art riwarik Tr नाना errare. ह, (I.) nirmire परर.14.) र Itna (f.) - RE . ... chine , (.) ki remitrint 74(.). in (IT) iTRI ARE** म. Ter. त:. I.marit, theirains (.) in + C = 1; * * * - vinetrn.

पाल, [कलावत्, । कर्षफल, (पु.) क तन्मात्रं फलं अस । जिसका फल | पालम्य, (प.) कभम्बन् । दस सः । नालिका शाक। सोलदमागेका हो । विभीतर. वृक्ष । बहेज। आमलमी। बलमीशाकार। तीर. (बी.) रा. कलरय, (पु.) हासप्रयः । कलो सोऽम्म । मीही फर्षिणी, (सी.) णिनि । शारिणीदा । रालीन । भावाभवाला । कोदल । कबूतर । मीठा भोर धीमाशद. कपिका पोदेशी लगामका सोहा. कलल, (पु.न.) कल्वलय् जरायु नामक गर्भके दाम कार्दि, (भप.) अस्मिन् काले । रिम्हल् पादेशः । नेहरा चमा रिससमय । वय. फलयित-, (पु.) फलं पा()ते। पति (पगि) कार्दचित्, (भव्य )हिं+चित् । रिसीसमय. जाना । अन् पृषो. अतइलम् । चटक । चिडिया । पक्षी। वेतचामर । इन्द्रयव । इन्द्रजी. कल, गिनती परना । गक• भाषाजकरना । अ.भा. आत्म- सेट् । बलते । धवलिष्ट, कलश, (पु.) कलं पादं समति । शु+जाना+। पट। गति जाना गिनना। पुरा• उम. राक पेन । पलपति- पा। धागर । चौतीग सेरवा मार. ते । अषीकला-त. कलह, (पु.)(न.) फल दन्ति । हन्छ । विवाद । पाल, प्रेरण करना। मुरा• उम• सक.. सेट् । कालयति-ते । सगडा । युद्ध । सडाई । अलिकोप । तलगारका मियान, अचीवलतू-त. कलहंस, (पु.)क्लप्रधानो हंसः । मीठी आपाजवाला हंग। फल, (पु.) कल् शब्दकरना-पम्-आदिः। मधुराव्यक्तशन्द । राजहंस । कादम्बहरा । राजाओंमें उत्तम । परमात्मा । मीठी और धीमी भावान। सालपक्ष । अजीर्ण । बदह तेरह अक्षरों के पादवाला एन्दोमेद, जमी. कला, (खी.) बल+अन् । चन्द्रमाके मण्डलका १९ पो फलकण्ट, (पु.) कलः फलान्वित कण्ठोऽस । जिसके भाग । दिवेगये धनका लाभ होने योग्य अंश । राद । गरेमें मीठी आवाज हो । बोकिल । कोइल । हंग। पारा समयका परिमाण । ज्योतिरके अनुमार राशीके सीग या । कबूतर । "खियां सी" कलकण्ठी. भागका साटवा भाग । नीका।येथी। कपट । विभूति । फलकल, (पु.) लकारः प्रकारे द्वित्वम् । कोलाहल । सामय । संख्श । गिनती । मरीचिती स्त्री । चीसद रीला रा. प्रकारका गाना पजाना आदि. फलधोप, (पु.)कलो पोरी यस्य । जिसकी आवाज | फलाद, (पु.) क्लो असं आदते । आदा+क । भाको मीठी हो। कोइल. लेतादै । सर्णकार । सुनार (पद भूषण बनाने के लिये कला, (पु.) कलयति कि । कल् बासी बस्थेति । चिह। दियेगये धनसे अवश्य कोई न कोई अंश ऐटी निशान । अपवाद । तामाभादि धातुओंकी मल (इल. टेताद). सन)अपयश । जटी। दाग. फलानिधि, (पु.) पला निधीयन्तेन । इला+नि+या+ टा. (.) निरादं लपति भाषते । विषसे दिपटे हुए कि पन्द्रमा. अम्बरी मारागया गण (हरिण था पशुविशेष) । पी। फलानुनादिन, (पु.) पलं अनुनाति । शिनि । जो सामफूट । दरारुपयोका मार. पार २ शद करताद। भ्रमर । भीरा । पटक । चिडिया. फलन, (म.) गह+ट्रन् । गम्य : दस : नितम्या कलाप, (पु.) कला अनोति । इल+भारअण् । भूतः । अपनी स्त्री मार्या. समूह । मोरी छ । मलकार । मेराला । तत। करीत, (न.) पालः मलः धोत अस्य । जिसका मल चांदा व्याकरणपिशेष । एक्योंव. धोयागया । सोना । पारी । "कालभूतम्", कलापक, (पु.) लापका साथै रुन् । प्यापके अर्थ । फलापनि, (पु.). कोरिठ। कोइला खूता । पारोकका एर राय. मोर । मीटा और धीमा राम्द | कलापिन्, (पु.) इलमपो बहोऽस्मातीति । इनि । मपूर । फलन, (पु.) वन्स्यु । तयास । बैंतरा स । मोर। मोरपंसके पमान शासवाला पट (बोर)। "भावे स्युर" विहा दाग । एक महीने गर्भ । पटना। पालामाप+मिनिरोपिला बोइल, गिमा "करनात् सर्वभूतानाम्" ही पतिः कलाभूत (पु.) लो विना लामा । पन्द। फलभ, (पु.) बमभन्। पोर वर्षका हापीय बना। चोद. धतूरेगा पेट. कलायत्, (पु.) लाभल मार मसान्द। फलम, (पु.) कल्बम ।रानी । थोर । पन्या भेद. कलादालय (त्रि.).

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(m) (काकपुर, - कायलिरा, (वि.) पलं प्रासं करोति । पिन्क । पास कपायित, (वि.) कपायो रपीतवर्णो जातोऽस इतन् । किया गया । सायागया । फलाहुआ। म्याप्त. जिराका लाल पीला रंग होगयाहै । कसैलवाला. फपाट, (म.) के बात परति । बट्-वेष्टनकरना । पेरलेना । कपापिन्, (नि.) का अस्ति ध, इनि । कपायवाला । भण् । दाजेको रोकनेवाला काठमा टुकड़ा । किवाद । कसैला । साल रंगसे राहुआ । संसारमै मन लगानेवाला "वाटी". पुरुष धादि (पु.) कई एक वृक्षोंका माम। राजूर आदि. कपि, (पु.) + । एक । पाल्मीकिमुनि । भरकर । कष्ट, (न.) पापीग । व्यपा । दर्द। पीनवाला । काव्यकता । ब्रह्मा। पिछला अगला सब जाहारा। जंगल (नि.) सूक्ष्म अर्थ के देखनेहारा । पण्डित (वि.)। रालीन । कस्, वेजकरना-भौरजाना । अदा• इदित, आम. राक. लगाम कवी वा कपि (श्री.). सेट् । बस्ते । भरसिद्ध फयिका, (श्री. ) ६ । संज्ञायां कन् । सलीन । जो | कसनोत्पाटन, (पु.) कसनं कासरोगं उत्पाटयति । त्यु । लोहेका पनाहुभा घोडेके मे लगाम जोडने के लिये दिया वासकक्षा "वासकः कासनाशक" यह वद्यककी उति है. जाताद. कसेरु, कस+ एमागमः । शूकरका पियारा जलकन्दभेद । कयोष्ण, (न• ) ईपदुष्णं । को कयादेशः । ईषदुष्णसी । कस्तीर, (पु.न.) के उलं तीरयति । अच् । नि• मुद् । एक प्रकारका पास । जिसका मूल सूअर साते हैं. थोडा गर्महूना. सराइ धानु. कम्य, (न.)+यत् । पितरोंके उससे दियागया अनादि. कस्तूरिका, (पी.) कस्+ऊर-तुर च । डीप् । कस्तूरी। कर समारना । भ्वा० म.. पर• सेट् । शति । खायें कहस्वे मत त्वं । मृगमद । मृगनाभि, अस्तीत्-अलासीत. फल्हार, (न.) के जले हादते। हाद+अच् । पृषो. दस करा, (बी.)कश+अच् । घोटे आदिको चलाने के लिये राचिद्यकमल. घोटका साधनपदार्थ । कोडा । चावुरू. कांस्य, (न.) कंसेन निष्पादिनं । कंस+म । एकप्रकारका कशिपु, (३) का+कु । नि.। भक। मन्न । वन्न । वाजा । पानपात्र । पीनेका पात्र । ताम्बे और राके मेलका कपा । भोजनाच्छादन । शय्या बिछौना। "सत्या बनाहुआ उपधातु । "साथै कन्" कास्सक (वही भर्थ). शिती कि कशिपो. प्रयासे " भागवतम् कांस्यकार, (पु.) कौस्य++अण् । उप० । कसेरा । फशेय, (पु.न.) गणाति । शू हिंसाकरना । उ एररा- जातिभेद. देश पीटकी हो । मेरुदण्ड । मदण्ड । जलमें उपजा काफ, (पु.) के-दादकरना । पन् तस नेलम् । अपने मूलमेद. नामसे प्रसिद्ध पक्षी। कोमा । एन । लंगडा. कदमल, (न.) कश+कर-मुट्छ । मुच्छ : मोह । पाप । काकचिञ्चा, (सी.) जिसके फलका सिरा कोएके रंगका मेल (बी.) हो।गुजारती । पो. "काचिति" "वाकविधी" फरमीर, (पु.) करारन-मुदच । कश्मीरनामी देश. "काकचा" यही क्ष. काकच्छद, (पु.) काकस्य एन. पक्ष व दो मस्स। कश्मीरज,(पु.) कामीरे जायते। जन्+। कुहुम । कौएके परके समान जिसका पर हो । सानखग। ममोटा. केसर। "क्रमीरजन्मा". कश्यप, (पु.) कक्ष्य मयं पिबति । पाक मरीचिनामसे काफतालीय, (न.) काक (काए) के गमनसमय अया- नकही तालफलका गिरना । एक प्रगरका न्याय । अचानक प्रसिरममाके पुत्रका बेटा। कश्य (मय) के पान करनेसे कश्यप प्रसिद्ध हुआ । मुनिमेद । मृगभेद । होजानेवाली बात । भक्तिसम्भव व्यापार। (ईय) मत्स्यभेद. काकतिन्दुष, (पु.) पाकवर्णः तिन्दुकः। काकपीठका । कप, मारना । भ्या• पर• सक० सेट् । पति । अकयोत. कुचला. अापीत काफपक्ष, (पु.) काकम्प पक्ष हर। एके परके समान कप, (न.)भन् । कटो। कसोटी । परपरका भेद. मसकके दोनों भागमें एक प्रकारकी देशरचना । बालकोंरी कपण, (पु.) प्ल्यु । अपक। करा । "भावे स्युर' सिसाको बारपक्ष पहते हैं। गंगोदि । पटे. घिसना मिली करना (न.). काकपुष्ट, (पु.)गान पुष्ट । एसे पालागया। किला। कपाय, (पु.) कपति कण्ठं । कप+भाय । सोनाक्ष कोहल । खोइलागाएके बिलसे पोएके वको दरकर उराणे राग कोष । अन्तःकरणका दोष । भवास । रसभेद । स्थानमें अपने गेररातीहै, और पानी भरने दिये करीला । लाल पीला मिलाहुभा रणाय । काडा (5.).! इदिसे उसे पाटदी है, बाजिर है. - प्रत्ययः,

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कपलिन, - पपलित, (नि.) पालं पागे करोति । गिन् । प्रारा कापिन, (नि.) पयरका । किया गया । सायागया। फल हुभाषित. निगरात पीला रंगहोगटा. कयाट,(न.पाटीट्वेटनारना। पेरलेना । कापिन्, (वि.)-अनि भय नि। अण् । वांजेको रोज्नेसमपरका सरदार । कसला रसाल रंग रंगठमामरने मन सानेर "वारी". पुरुष मादि (पु.) ईमान्दार. कपि, (पु.) पुस । पम्मीनमुनि । भारकर, (न.)पचा पाया। प्रा। पिन अगला ग आहारा। अंगल (नि.). तुम अपने देखनेहारा । पति (नि.)। रानीन । कग, मारना औरना । मद• • rn. मगाम सीमा पि (श्री.). रोद व भगिर. फयिका (पी.) R। यो एन् । सलीन । कोकासनोपारन, (.) म सकी। लोहेका बनाएमा पोरे मे लगाम मोनेलिये रिया पक्ष"TE TEE. जाता है। पारेर, ग. कामाला फापोज, (म.) पर्ण 1 को वाडेशः । पिणी । पानीर, (पु...) Firmip... एकप्रकाराम गिन योगगमएना. पथ्य, (म.)+यत् । पितरो के रेरो रियागया मनात कारिता, (.) Mut पर सपाना । भा... पर.सेद ।। म.ristia's मासीत्-मासीत. पारदा(.) ka mirr.rani फसा, (श्री.) । पोरे भारि पलामेरे लिये EARTH घोटा साधनपदार्यशापयु. पम्प, (..) mean. Intre पशिपु. (पु.)। नि.। भण। भापत्र । मापनपत्र Fire पभोगनाच्छादन मा " सिली धिपो प्रयागे" भागम. कामगार. (पु.) aat.rr.in. पोर(पु.म.)गणादिंगावरमा me. परमेश देश पीटीपी रामदलगे (पु.)PremRRip... पूलमेर. माम Tashtrict कारमल, (..)स गुरस । गुज । मह । पप गादिशा (2) tam anti मल (1.). gri. ... Eac" परमीद() reta-गुरपामीरम भी है। करमीज,(पु.) जरते। बनाम । सार(पु.) INR REE Nafrance.... मेरा "मोरया". परपप, (५.) ReTRI THपनामतरताहीय, (... (Pitamine FA पुषा (ए) पर) साप र भा । मुनि मेर। पर।। Totart.nic. तपुर. (3.) 1 yr :- । पर.mir... RAMAN (..)TKARI प(.) Cr xi muriter FROMITrain(.) पुर.(.mriter : पराप(5.)tart Time dewataTatter(s) बोका ,ntrt । - काहा, (छी.) कांक्षमाया वह। अमिपाय । काली, (धी-) का+एई। व्यभिचा। काश्मीर, फाकमीठ, (पु.) काात् मीरः । पेचक । सलू. कादित, (नि.) ente7 महा काकली, (घी.) करना । हेपत् कली । कादेशः या ली। किया गया। (.न.मा. सूक्ष्म मथुरशन्दा धीमी मीठी आवाज. | कादिन, (वि.)-II-ग्री) with काकलीरय, (पु.) काकली मधुराव्यको खो यस्य । मीट मंत्री रदी करनेवाला शाहिर धीमे शब्दवाली । कोइल । कोकिल, काच, (पु.) कयत नेन । कराना-व- फाकाक्षिगोलकन्याय, (३०) जेते कोएका एक नेत्र दोनों एक प्रचारकी मी। रेग और एक गोठकमें घूमजाताहै, वैसे जहाँ एकपदाका दोनोंमे मेल हो उपत्र पदा। मोम । कम ट्रिामा वह हटान्त। उभयसम्बन्ध ध्यान्त. काचक, (१०) कान एक-साय क माग काकार, (नि.) कंजलं साकिरनि । जल सिहारनेवाला। पथरामर. पानी सौंचनेवाला. फाचन, पाचन-(न.) का+अन पामठ व काकिणी, (श्री.) कक्चयल होना, तं अणति अण् पृयो । नेका फीता या रामी. पणका चौथा अंश वीस कोटी । एक दमटी । एकमास्मेका [ फायरिन्, (पु.) काचनक-दन् । हम चौथा भाग । “काकिनी" यही अर्थ, हाया दिमाहुआ. काकी, (स्त्री०) काक+दीप् । काएकी त्री । काएश रंग काचलयण, (२• ) काथम्य ख्वणम् । गौरा होनेसे वायसीलता । एक प्रकारकी बेल । कानी. | काचित, (नि.)काचे शिस्य वितं धृतं पुष फाकु, (स्त्री.) काक+दण् । शोक और भय मादिसे शादरा धृतपदार्थ । सिंपर पनी हुई वग्नु. वदटना । अलंकारमें प्रसिद्ध विदछ अर्थकी कल्पना करने काक, (पु.) कार । पाचक । म हारा नम्आदि चन्द । वोक्ति. पक्षी. काकुरस्य, (पु.) काकुत्स्थः सूर्यवंशीयः तृपभेदः । तस्या- काचन, (पु.) कानि-चमकना त्यु । एकार पायं अण् । सूर्यवंशी राजा । इत्वाकु राजा । धीरामचन्द. चंबा । नागकेशर । उभ्यर । धनुरा । 5 काकुद, (न०) काई वनिमेदं ददाति । पत्ते । दा+क। मरी । कायन आदि फट । दीमि । धन ( ताला जिवा इन्दियका थाश्रयस्थान । ताडया. काञ्चनक, (पु.) कायनं इव कायति प्रकाश काकेष्ट, (पु.) काकानां इटः । कौओंका पियारा । निम्ब । जो सोनेके रामान चमकनादै । पक्षिभेद । को नीम । इसका फल काओंको पियारा लगताद. क्यनालका दरम्न । हरिताल (न.), काकोदर, (५०) कुत्सितं अति । अक्सअच् । कोः काञ्चनदली, (नी० ) कामन इव दरं यस्या कादेशः । कार्क ईषद् गतिमन् उदर यस । जिसका पेद पत्त सोनेकी नाई हो । स्वर्णकदली सोनेकी कर पीरे चलनाद । सर्प । सांप. | काश्चनक्षीरी, (ग्री.) काचनं दब क्षीर यम्या काकोल, (पु.) करवघटदोना-सा विच-ओल । जिसका दूध सोनेकी नाई हो । शारिणीलता. द्रोणका । पहागवाया। सांप । एक प्रकारका सूभर। काञ्चनाल, (पु.) क्यानाय दीप्ती अति नरकभेद । रिषभेद (पु. न.)। वायसी। कानी। अल्+अच् । कोविदाररक्ष । कचनालके दरष्टत. अवगंधा (खी.). काश्चि-ची, (प्रो.), काचिदन् वा दी । कास, (चाहना ) वा. रम. इदिन-सक० सेट् । काति। रका भूषण । एकटाहार । गुना करती । ६ कालवे । यहाहीत् । माडिर. तडागी. कास, (वि.) ईपन् रिसर्न भनि यस कोः कादेशः। का,-भ्या. आ० कांचने । काचित । चमरना। त्रिपदी यास थोडीसी बुरी हो। पुरी आँखवाला उन काजलं, (न.) ईपन (का) जठं । घोटामा ३३ घोरामा और कोने में देखना (न.). फासीय, (पु.) या शीवाद अस्मात् । क्षौव् एम् । काण, (पु.) कण-यन्दकरना । पन् । काइ । कुन्मित्तं जलं । अशुद्ध (बुरा) जल. कादयः । विगंग मोगमा म रोजाना। शोमानना। एक बाखबाटा (त्रि.)काणा. मुहावना. काणेयः-र:, (पु.) वाण एय+रोका रविवार काहा, (सी.) अशिम या वाद. सिटी प्रीका केटा. रहा। भूग.. दृष्टा नारी । न पियाही हुदैत्री.

कालीमातः,] (3) 3 -1 वाला, काणेलीमातः, (पु.) काली माता यस्य तदी। कादम्य, (पु.) मिन् अम्बन् । पलहंम । कन्दम । अरिवाहिता वी पुजामभिचारिणीय बेटा. बाण । वागना । "परम्ने मर.बर" पदम्ब (मी काण्ड, (पु.न.) कण-सदारना। दीर्घः । सम्म । अर्थ ) यम्भा । तिनके आश्किा गुजा पक्षण कंधा पाण । ) कादम्बरी, (बी.) इमि मदिन भरे मागेका भवगर । माका । प्रना । पत्थर । नाटिओंका समूह । देशः पदम्बरोबलमाः तम्म दिया कर लिया माहुतसे हिस्गोवाला प्रन्थका प्रकरण । अध्याय । निन मेला हो अर्थात् बलमा (मसानहरले) रानी स्थान । थकली जगह । अपरोटा पक्ष (पु.). पियारीबलभदको नि मगनेरी मी". -काण्डकटुक, (पु.) पाण्डे रफन्धेऽपि पटक. नितः । दम रस राति रामदीप" का। बोला- मारवाडी परेला. मटी मारिता मेना। शरार. कापडतिक, (पु.) पापडे निकभूनिम्र । चिरायता. | कादम्पिनी(.) दम्यानमा arri. काण्डपट, (पु.) बाहर पटः। बनान । परभेद । जिसे पावश्येन गम्ति अयः निशिगमन हिमोग्नेपर पाबा दोमादी है, बलाका भाग । मंघमाला काठ, (नि.) कामानि घटे । यम्य सामागीय । जो कदाचित, (नि.) मा । पानपर जीताहो । सिपाही । अपने पुलकी छमी पवार मगर जो गरे गुलम जाय इसी र परिभसे बह एंगा पादधेय, (.) अपार पहलाता है (पु.)। गुदमा. देवयोनि मेदा माग काण्डीर, (नि.) काण्डो बाणोऽम्यागीरि जिसका कानया, (नि.) पनामर । पत्रक । । पाण हो । भीरन्दाज । बाणधारणपरनेदारा । अपामार्ग शुभाजपाल और (म.) मीट । पारवेल (जी.). पानम, (म.) पमना । दुर Surn. काटे, (I.) मानन्धेन रिप। जो धारा में माधमुष. गासी मायम है। तालमपाना । तृणभेद. कामनामि, (पु.)...Mitr m काय, (पु.) पैन मशीतः भण् । पथमे पागया । (तमे उपना) है पदवी एक परापारा भेद । “अपत्या अण" या पानिधिमेषा-दी. (...) are in नाखertirect. का (मन) निन्दाको प्रकाश पराला हा प्रय. "ह" के साथ बातः प्रल रोता । एE RATE) कालीन, (पु.) मारप true. गाली तिरपार में भाता।"पुर शशी भारत"रातारय भर-बाता-याधी. "कातर (d) meोति । को एकात्म मार-tar । भरना पाप भोगणा रास्त । अधी। गुदेवकर Ki (..) । मनाला दुरा भोगा। लिस। भINT nि()... देवा । पास। "हे ते मनु चिनो पास (*.) म" जो पाम Art, गुलसा नसता. (3.) Twifreir १पास एका पा कावण, (.) rint यासार, (5.) RITre wer.. पात्यापन, (5.) INR NEm। Errrrr... (Neet)मा पर CATEar. पाति(*.p.pitity ot गरानी, () Narent (Miteree Dirt पानिरा (..) MEMirrrr . Prartharaker (2) _पुत्र (नि.). - सपनारपम. . । १४ ITER. .

कार । कोआ. i कीचडसे ढका हुआ - शिला परिवार बारवि] (१४६) [. कारयित, वारविशु (वि.) +पिच नृन् वा इशुन् । कार्तिक, (पु.) कृत्तिकायां जानः अश् । करनेवाला । निद करानेवाला. टपजा । स्कन्द। म्यामिकार्तिक । कृत्तिकादर कारव, (पु.) कति रवीऽस। जिसकी आवाज का हो। पार्णमासी कार्तिकी सा यत्र मासे टक् । कृनियनः वाली पूर्णिमा ( कार्तिकी ) जिम माममें हो । म कारस्कर, (पु.) मई करोति । अप् । नि• मुर् । महीना । कत्तरकी पूनो । शरत् ऋनुका दूसरा मर कार्तिकेय, (पु.) कृतिकानां अपलं तापनि । काग, (श्री) कायद् । नि. दीयः । बंधनागार । जेल. कृत्तिकाओंडी सन्तान (उनके पालन करनेमे ) मना । वदनाना। दूनी । पीपके नीचे काठा पात्र मामिकार्तिक । शिवपुत्र. (गुम्बा) । मुवरिका । मुनारिन. कानिकोत्सव, (पु.) त. । कार्तिक कारागार, (न.) कारंच आगरं । बंधनालय। जेलबाना. प्रतिपदाके दिन करनेयोग्य दीपोन्मत्र । । कारापय, (पु.) लक्ष्मण के पुत्र थाद और चन्द्ररेनुका कालय, (न.) कृत्नम्य भावः प्यम् ।. सरेय हे कानका मेला. राजविषय | देशद. कारि, (मो.) काम् । किया । काम । शिपी । गरी. सारामार । साकल्या मामम्य । पूरा २. पर (नि.). कादमः, (पु.)-मी (मी.), कादम (A){t. कारिका, (श्री.)+युल् । किया । काम । “करि की (स्त्री.) कर्दम अण्-टक्या । कीचडवल । पुन नदीमा मोक कि जिममें अक्षर यो. होनेरी अर्थ बहुत हो । चिया कागगरी । "हमा | कार्पटः, (पु.) कपट-अन् । प्रार्थना करनेजार म्सुर" । साना पीटा। । कृ+युम् । नाई आदिका करनेवाला । गेरुप कपट पहिगला. मारिनेमूह. फार्पटिक, (पु.) कपटेन कापायाभंग पाता कारित, (नि.)zire परवाया गया. गेये कपडोंमे विचरताहै । तीर्थयात्रा हो! पारिन्, (नि.) rinनापनमा करनेवाला. गरी, (4) शही। शशि । कारो कार्पण्य, (न.) कृपणम्य भावः प्यम् । म रा, I रिकी मगादन करने. उचितव्यय (म) को टारके धन इच्छा करना। हीनता. या। पनगांनी यी च्यिा. सागर (.) सम्यग् । म हुए गोद कापांस, (पु.) काम्या फल अग् तम्मा । पियरे या अण् । तूर । ई। कापांमारत । दम् । मा काटा आदि। कांग । कपा. पार, (ii) मगर । कारक । कापांमी, (मी.) +पाग+साग । भर.(पु.). पात्र, (पु.) यति । मितं पति का काम, (त्रि.) मैन्ग । परिश्रमी । मेहनती. are Part परवमी । वन । नागई कार्मण, (नि.) कम शरः । मन (PH) में अपही दमानित चतु। काममें होशियार। योगविधा ।' fre, (fr.) मलं अन्य टङ् । या । कार्मिक (f.)- (मी.) मैन्- । । freeमदते। हटा दयाहारला. बनाया गया । गीले मना. पाय, (२०) रम्य स्त्र । एव व पत्र । दया । कामुक, (पु. ) समगे प्रभारी रा! अंत::रामारिन । धनुर (मत्र सा. (:.)लन पुन्-नवयन् । Tई माने मन कार्य, (२.) योग ।। पना समरणरने (f.) मानमें रहेगये मोगल मम । मा.(.)ो बरामदे म IMATrम प्रायशी ) : RTE (re ) म परगन मरा(it.) हा। तीर्थमेवा. - कपाग1 कना है - - मन्त्रचरना. (0 पाय,] (m) [कालिमन् काश्य, (न:) राय भाव. प्यम् । कृशका होना । कमः कालमूल, (पु.) काउं मूलं अस्य ।। रक्तचित्रकक्ष. जोरी । निर्मलना । सालपक्ष । लाश (पु.)। सा कालरात्रि, (स्त्री.) कालस्य रात्रिः नागिका । पालको नाश करनेहारी । सम्पूर्ण जीवोंचा नाश करनेवाली मृत्यु- कापीपण, (पु.न.) सायं अण। आ+पण+पम् । देवी । यमकी बहिन । कल्पान्तरात्रि । जिसे दीपावली पार्षस्य आपणः । सोलह पण । सोलह पैसा । पण । महते हैं। उसेही कालरात्रि कहते हैं । कार्तिककी पैसा ।पक (पु.) सोना । रुपया. अमावास्थाकी राधिका समय । दीवाली. कार्षिक, (पु.) कर्पस्यायं टम् । पणका चौथा भाग ।काललौह, (न.) कर्म• कृष्णायरा । कालालोहा. एकरुपये माप । एक तोलाभर. कालशाफ, (.) धर्म । पानीय शावभेद । श्रारमें काणं, (नि.)-ef (श्री.) कृष्ण-अण्णसम्बन्धी । काम आनेवाला साग, कृष्णवाला । न्यागवाला । पाले हरिणवाला । बाला. कालसर्प,(पु.) कृष्णसर्प । काला साप । यी विपाला काणिः, (पु.) कृष्णस्य अपवं इम् । कृष्णवी सन्तान । लोप । ( केउदा सांप). फामदेवा एक माम है. कालसूत्र, (न.) कालस्य यमस्य मर इव । दुलालयक। काल, (पु.) कुतिगतं मलति । अल्+अच् पोः पादेशः । सूत्रच्छेदनरूप नरकमेद । हकीस नरकोंमें एक.. काला रेग । काले रंगवाला (त्रि.) लोहा । कपोलक कालस्कन्ध, (पु.) काल कन्धो यस्य । जिगी (न.) कालयति सर्व (पुरा.) कल् अन् । यम । शासा काली हो । तमालाक्ष । सिन्दुकारा। उदुम्बर । महाकाल । शिवजी । नेघर । कोइल । रकचित्रक । जीरका कारामद । क्षण, परी आदि समय (पु.)। ये सम्पूर्ण कार्योंमें निमित्तगरण हैं। पद सूर्यको कियासे पहि- काला, (श्री. ) पाउ+अर्शआदम् । कृष्णशित। काली तिरवी । यक्षगन्धा । मभिधा। मीट। प्रणवीर। घाना जाता है. बाला जीरा । नीलिका नील. कालकण्ठ, (पु.) कालः पाटो यम्य । जिसका गला काला है। मीलवण्ठ । शिवजी । मोर। सजन । दान्यूह। कालागुर, (न.) प्राग्ज्योतिष देशमें उपग काला भगुरपंदन. कलविरडिया. | कालाग्नि, (पु.) कालकार मृत्युमरी मिः । गम्युको कालफूट, (न.) कालं अपि भूदयति, दहति । कूट्+अण् । देनेहारी भाग प्रलयकी आग पालानक ही बर्षमै जो गालो भी जला देता है। विष। गहर। मृत्युका कालिक, (पु.) काले वर्षाकाले बरति । टप । जोरा- मानो समूह है। देवता और दैत्योंकी लडाईमें देवताओं के समय विचरतारागा बगता बाट से मारेगये पृयुमाली देयके सोहसे उत्पन्न हुआ अश्वस्थ कृष्णवर्ण अनुमति" टए । चन्दन । बाटारू । गमिम (मोके पक्ष समान ) की गोद (नियाराको "प्रारीर्घ कालोऽम्प परे टर" और "त. मुनिओंने कालकूट रहा है। एक किसमका जहर. हेन निति कालस्येदंदा "कालमें होनेराला - कालयम, (पु.). मयु । मौत । समयसभाष । समम्बन्धी (वि.) " बालपणेलमा टन् । इतकी रासलत. देवीभेद ।धिकाश । मया पाना पटोहरी कालनियोग, (पु.) गरेन तो नियोगः पलस का पासा । काकीवी । गिदग हरीन । नियोगः । निम्यु+पम् । देवाहा । भरता हुनम । (स्त्री.)। काला सदल की बार कालमे कियागया नियम. कालिक (पु.)सिxि बस्य । । । कालनेमि, (पु.) राक्षसका भेद । हिरण्यकशिपु पुत्र । रा। सांप । सामे। पशिाना बारे शका पति परिप्रदेशका राग। सटी (2.). काटपर्ण, (पु.) कालं कृष्णं पर्ण अभ्य । जिस पता कालिन्दी, (बी.)लिस भरा अन् ।पनि प. काला हो। राक्ष. ती। यमुनानी । अमना. करलपुच्छ, (पु.) पल पुरोस । जिस पूछ कालिन्दी मेदन. (पु.) भिरति रमेनान पर पली हो । गाविशेष । बारहमिद. दिना बन्यपरोति । निम्म्युनोत्रसेनी- कालपृष्ठ (पु.) मजिसरी पीडी को रोल पडद । परन। है।पमेदापी साप । धनुस् । महो एम (पासिंगमें है). भस्म जिपीट मत बारिमन, (.) भराव. . . बचपनुप. बिनसतय.

- (3.)सम्यागनेर। मामी। नृगमंदा काम,(प्रो.) गिविटा स्ट मगर शादीटमें रेड कम फिजात्रा,जी. पर•मा अनियमित पर परमानने र देश का किफीदियि,(पु.)ीति यति । विमान-नि.जोशीगा दी शिक्षिणी, (श्री.) रमित् sh पद परामरामन दिगिल,(पु.) March (१४८) फार्टी, (मो.) काटो वर्गाप्रसन्याः । अच् । ई । काष्ट, (न०) काम्कयन् । इन्धन । हरा में जिमका काला रंग हो । वापिगेर । मस्सगन्याव्याम- काष्ठकदली, (सी.) काष्टमित्र कठिना टन :- देव मादा मची। नये बादलो माला । परीवाद । बनका केला. गाटी गलांजा रात्रिकालाजनी। आपकी दीभ. काष्टकीट, (पु.) ६ न० । काठम दीदा। ३.. फालेय, (पु.) करवं दक् । दलविशेष । कालच काटकुदाल, (पु.)कुं उद्दालयति । दमा न्दन (न.)। कुमा।हन्दी (पु.), शक उद्दालः । ६.1 बेटी आदि म कारप, (त्रि.)(कम-अन् ) विहिन । नियन स्थिर लिये काटका चनाहुआ फोडा. करनेवाटा । कागबन्दी । हम मन्त्रमे क्या करना ! काष्टत, (पु.) काठं तक्षति । किम् । तर चाहिये इस नियमी बदनिहाग. संकर । तरसान । "काटता" इसी अनि काल्पनिक, (वि.) कपनाया भागतः ठक् । कन्यनामे काष्ठलेखक, (पु.) काष्टं विसति । बुल् । पुर- यसारित । बनावटी । कल्पनामे उपना । यारोपित. काष्ठा, (नी० ) काल कयन् । दिशा। पर कात्या,(श्री.) कालः गर्मगरणयोग्यममयःप्रामोश्य यत् । सीमा 1 आमिरी हद्द । अन्ननुकमा यह गाविसका गर्भधारण करने का ममम आपहुंचा. ममयका परिमाग-1, कला ।इल । पानी । फायनिक (नि.) (प्रो.) कान टम् । वच् । काम्, न्या. या । कासते । कानित । बार (म्तरविरह, मंडोआ) पहिना हुआ. करना. कारेंगे,(श्री.) म अटम्प वेरे शरीरं । तम्बदं अम् । कास्-कुत्सित, ( बुरा) शब्दकरना र"मितं मारित्रं वरं यम्याः "मामात् । सेट् । कसते । अचविष्टा कामामामालिन् । " मा ५.. फास, (पु.) काग+धम् । रोगमेद । साह काय, (पु.)रेर माघमा । कपिका काम । काही. पनेरान जिगर्ने कार वा करिके गुण रहे। कामनी, (नी.) का रोग हन्नि । कंडयारी. पापxि.(२.) मपंटारि। मा... परि.. कासार, (पु.) केन जलेनामभ्या मागे । मा. बादान.मा. ग. गे । कागतं । अका- तिरम । यदि बार-न. कासीम, (न.) ः कामः कामी ना हो। सस्त-मायाय. या• मा. मंद । कादयते. हीराकम टपधातुविशेष. टकी साकार । दीमि। चमक । बुद्धिार सिरार.(पु.) १८. म. ए गाया मेंद। कागतिः, (श्री. ) कलिता वा गुमा मात्र पिन । मानेर । एक सर. मार्ग सायका रामग. पती (*)श्रय । पानं नाम नगरी. काल, (न.) मितं हलनि गित । म ! बार, (२.) मा य म । देश का विधान पार! भेद । वही आपात्र मानव rrrrrrमामी. सदर, सामवयं श्रत्र । मुगिन । मृग. विदर, (f.यूमिन मा ।।। EVERIचदा पुत्र (साई नंबर प्रियांनी. दर(.) या । माया धादियानी: fam ..) यम । am: ht. THIRTHI सार(th.) ren.nance में rrit.)ER Oriende. -- वाटिना . .

केय,] [ीटक, 1 फेध, ( अब.) आरम्भ । समुपय। कुछ और. किरात, (पु.) कीर्यन्तेऽवस्फरा अन । कुपर्यन्तदेश- केचन, (अव्य. ) किम्+ चन । न पूरा । थोदा. मं अनानि अण्। मोच्चजातिविशेष । भील। छोटे शरी- फेअल्क, (पु.) मिषित जलति । जल्-डिपाना । क। रवाला । "तप्ताण्डमे लेकर रामक्षेत्रतक फिरातदेश है." - फेसर पहुन महीन तिरिय । फूलकी धुरी । नागकेसर. किरि, (प.) कहा । सूबर। सूभर. केट, जाना । सब ।रना । अक. भा. पर. सेद। किरीट, (पु.न.) कीटन् ।माट । शिरका घेरा। पगड़ी. केटति । अकेटीत्. फेट्ट, ( न• ) किट्न लन्दन् । नहिं होता । धातुओढा | किरीटिन, (पु.) किरीट इनि । अर्जुन । मुकुटकला । कोनसाभी किरीधारी (त्रि.). मल । गेंह. केण, (पु. ) कण्-जाना -अन् । पृरो. भको होला । किर्मी, (पी.) फिरति क्विए । किर मानि मा+क सीए । पलाश । घर । सोनेकी पुनली। लोहेकी पुतली. है। (पेटा) सूका पाव । मांसकी गांठ, पसवा दाग किरि, (पु.) करन-मुद् भागमः । नारतक्ष । फेत्, सन्देह करना रोगरा दूरहोना । भ्वा• पर• सक. राक्षमविशेष । चिरणे । रंगबरंगी. सेट् ।चिकिति । अपिरित्सीत् । रहना अक• बाहना। फिल, (अव्य.) निधर । पात । पछतावा । प्रनिन । गक । तति। अतीत. प्रमाणका प्रकाश करनेवाला । सलवारण । सूठ. कित्, जामा । जहो. र. राम सेट् । विदेति । भकेतीत. किलकिञ्चित, (न.) "हर्षसे रोकर गाना" । त्रिओंका फेतय, (पु.) कि+भावे पाकितेन वाति । दावः । विलासभेद. । जुआरिआ । रग । नीच । चोरनामक गन्धद्रव्य । धतूरा. | किलकिला, (श्री.) फिलकिलेति दी गयो हित्वं ततः केन्सनु, (पु.) विभिन्मापा तनुर्यम्य । जिममा शरीर क्यच् तन शिप् हर्षकी आवाज । शेरको भावान । बहुत छोटा दो । भाट पविश्य कीा। मकसी. वानरोंके शब्दकी नकल करना. केन्तु, ( अन्य.) पूर्ववायके संकोयको जतानेहारा। फिलाटक, (पु.) पकेहुए पका पिण्ड । पच विकार । पहिले बहेगयेसे विरुद्ध अर्थ । फिर क्या। लेकिन, मलाई । खोया। मावा. फेभर, (पु.) कुत्सितो नरः । घोडेका मुग और मनुष्या किल्यिप, (न.) किल्+रिपन् पुर । अपराध । पार । रोगा धर्म और अधर्मका फल । अनिष्ट । सेमार. पारीर । अथवा नरका मुग और घोदेशश शरीर देव- योनिमेद देवताओंका गया. किंपदन्ति-स्ती, (सी.) हिम्मद रातृ+था दी। फेनरेश, (पु.) ६ त.। किमरोंका स्वामी । कुबेर । जनभुति । अपवाद । गधा का सूटा लोकका भार । (हारा). धनवादाता. केषु, (अन्य ) प्रम। पितम्। सादृश्य । स्थान : क्या किया, (अन्य ) पिम्प । अथवा । या । वा. किशार, (पु. ) पुस्मितं शृणाति । पिम मुम् । फेम् (अन्य ) शनिषेध । वितर्क । निन्दा ।क्या. धानके वालपाण। वीर पक्षी माहीसोर. 'फेमु. (भब्य.) विमर्श । सम्भावना । दार. किशलय, (पु.न.) किचिन शलति बलति कपन्-. । केमुन, (अन्य ) मा वितर्क । सब । धिरस्य । भ- पहा । पत्रपत्ता. तिराय। फिर क्या. किशोर, (पु.) पर+ओरन् । नि. दीपा । फेम्पच, (नि.) किं परति । अन् । राम । करण । सूर्य । जवान दगदर्षने पीछे पन्द्रहपरीक. । वह अपने पेट भरनेवोही पाता है, आगन्तुक वा किण, मारना । पुरा• भामसह. सेट् । रिफयो । अतिपिओं के लिये नदि. अचिकित. पु (३)यर, (पु.) पुतिमतः पु(५) ५. देवयो- किष्किन्ध-या, (पु.)। ओष्ट्रदेशका एक पर्वत । निमेद। देवताओंसा गरा। हिमालय और हेमाटके पहासी गुफा (सी.), बीच मनामी जम्मुदीपत्र एक वर्ष. कितु (पु.ली.) पिपरा भंगुटो मार । केयत्, (नि.) श्रम परिमाणे पाप , किमः पादेश, भोरका स्थानापन परिमण, वपयातना परिमाण । किनना. किसलय, (पु...) शिविर मणी । सम्ममा किर, (पु.) का एकर । सूभर. करन-पृ.1 पाखापाना. करण, (पु.)यु । सूर्य । किरण । रवि. कीकर,(पु.)विर सम्गितं सदा पोषामग- करणमालिन्, (I. )रणानो माला परिधभस इनि। घदेश | "प्रेरणे गदा पुष्पा ही पुराणम् । एम। जिस किरणों की माटाहो।सूर्य । सरग, नीष. क कीकरा, (5.) माता का सन्द करता । अच। फीलाल, (.) नीली वहिधिश परी । मा । जो आगी लाटको हटादेवे । । कीवक, (दु.)प्रति म पन-अन् । दरद । "कीला आमः मिना सति" । नाम मोरी टाइन विग पन्दनें है ले यांना (दल बोलेन प्रतिवन्धन अत्यत पाने" सम्पन् । हमन)। मिरर माग । देगा - कीरा, (पु.) "कय बापोरसलं । अनाम् । कीयकाजिद, (.)निदान् । जिभते किए। इंगो यम" जिमन सामी वायुध पुन दिन्न रिमन करने हगाममनेन । "पानिद"। बनर । बन्दर. कधई. कु, मन्दकरना । मा. आ. मह अनिट् । चाले । कीर, पाचनः । नुगटन. मा. भेद । कोटपति-ने । कु, दुगने बन्द करना । उदा. मनमाअसे कुरखें। मात. पीट, (I. ) fer । मोटे मोटा सुदरतम्य । कु, माद काना। अदा• पर. भा. भम् ।। मन मर्य। मगदी। रति । अनन, गर(f.). कु. (ममा) पर निन्दा यंदा सिता टम, (.) द न । । भूनि । पृपिणी (ग्री.). कुद, (पु.) मादा गाय अरंडर से कीदा()ले। जन् । बोंमें TEI. कुसुन्दर, (पु.) ममें दरपति । भन्न (5.) Cyme मनोमी है। १.अन् । नि.। निमोनितम्बन पितोर को पीटीसी नीयों दीप ( टोरे) to (1.).rrrrrfan । अनय होने time INGO I पाराशर,(T.) पिती कगी। करमा एक राजा नको ययाति मे for(:.)Tri hit ना. यागि Tarunोमामा कर्मना. एकर, (.) frनी र...htm. she me ""मेर rare(... (..) में दानमा | "fatCT". .):MerPAINT. टन, (न. ) से भी मदीय' aar mere क्षि, T.पे. । . * Or | क्षिार(THALI मास. म, (40): । Mer... पहल : या भर मनागमभामा पथ, vakanhani... ..nitineer .....min" रण-imare.) t.rrr-नर-... *2", t:

। यातिनी, । - .. - का रोग. - । कुचर, (वि.) पन्मिन पणी पर+भव् । दूसरेके दोष. कुटुम्य, धारण करना । पुरा• भात्म• भक० सेट् । को बहनेहारा. कुटुम्मयते. कुन्, पुराना । भ्वा० पर• सक० सेट् । कोजनि । कुटुम्य, (पु.न.) कम्प+अच् । पोप्यवर्ग। सम्बंधी । अकोजीन्. नातेदार । सन्तान. कुम, (पु.)को पूयियो जायते । जन् । मङ्गटाह । फुटुम्यिनी, (सी.) कुटुम्यानि । पति और पुरवाली । नरमासुर । पक्षमात्र । सीता । कायायनी (स्त्री.). सराहीगईखी। पालवघेवाली ली. कुजाटि-टी. (बी.)। दु+कि कुत । सन्दकटा होना । | कुद, काटन-निन्दाकरना । पुरा• उभ. सक० सेट् । नवा दी । नीहार । कुमागा। युसार । पाला. पायति-ते. कुश्शन, (न. ) इग्ल्युत् । इटिलता । अनादर । गौरा- कुहक, (पु.) ट्+ण्वुलू । सौलावती में प्रसिद्ध गमितका भामेद. । कुञ्चि, (पु.) पण, पुटिल होना । इन् । भाउ मुमोका कुहनी, (बी.) कुत्युटी । (पानी) मरे व्यावहारिकमाप. पुरुषके साथ दूसरेकी बीको मिलानेवाली श्री. कुश्चिक, (पु.) म्+म्युलक्याप् । दादाजीरा । मच्छी- कुट्टमित, (न.) मित्रके साथ मिलनेकी इच्छा होनेपरमी पा मेद । कुनी। चायी। बांगली शासा। रतो. म मानेके लिये हातमा हिलाना । पिसासभेद. फुचित, (न•) क । तगरका फूल । टेडा । मिपु- | कुमल, (पु• न• ) कुद+मलच् । सिलनेपर आई दाहुभा (नि.). कली । एक नरक जहाँ रस्गिोंसे मारकिओं को पीय कुज, (पु.)ो पियां जायते। जन्+ (पु.)। पहुंचाई जाती है। दस्थी । टोरी। चारोंओर लाभोंसे ढकाहुआ बीचशम्य कुर, पयराना-आलस्य करना । अक• I गुदाना । सक. (गुला) पर्वत आदिका स्थानविशेष । संताग्रह । इरित भ्या. १२० सेट् । कुण्ठति । भकुण्ठीत. हापीका दांत. कुठ, (पु.) कुल् अन् । वृक्ष । दरएन. कुजर, (पु.) अम्लयर। हाथी । इस्ती. फुटार, (पु.बी.) कुट्करन् । भरनेद । अल्हाग । है कुअरच्छाय, (पु.) प्रयोदशी और मपानक्षत्रका मेल इस (पु.) होना. फुटार, (पु.) पद+कारन् । वानर । पक्ष । शन बना. नेवाला. कुजराशन, (पु.) शरैः भश्यते अश् पाना+स्यु । कुद, घबराना । भ्या• इदित् । पर• मक- सेट् । पुणवि. पुट, गिटिल होना । तुदा पर• सद• सेद । कुटति । कुह, जलाना । भ्या• इदित् । साम• सक० सेट् । भकुटीत । पुकोट. कुण्डते. कुट, (पु.) कुद+भच् । दुर्ग । फिला । गा । पर्वत । कुड, बवाना । मुरा• इदिन् । उभ• राक• सेट् । गुण्ड- मति-ते. पश। पा(पु.)(न.) पर (स्त्री.)। शिला । अन । हपीडा (पु.) "r". कुह, साना-बालक होना भक• दा• पर• सेट् गी. फुट (पु.)टं गृहस्पति ।।(पु.)। घरका पदा। कुडप (4),(पु.) कुपन् (पवन ) वा सेरका लतागृह. घीया भाग। एक पावभर कुटन, (पु.) पटे पर्यते जायते । जन् (पी) पुहमल, (पु.)(न.) कुम्ममइन् । सिउनेर भाई पक्षमेद (जिसका फल दयब है) कुटे (घटे) जयते कली। नरकविशेष (२.). "अगम्त्यमुनि" । द्रोणाचार्म. कुज्य, (..) यत् । दार । हेपन । कोदाला फुटप, (पु.) दसपन् । मुनि । परके पाराका छोरा कुणप, (पु.) पन् । प्रारहित । मवदेर । वन । १ तोलेभर कमल (२.). मुरदा । दिपार. ।' कुटि(टी),(पु.) अल्पाइटरी ईरन् । पत्तोंकी इरिया. कुण्डल (पु.न.) Tetमावर्षे १ । परीपाली कुटिल, (नि.) कुम्हलन् । 4 । टेढा । भहर । वा मुंदरी । पुष्पल. मुरमुरा।तगराल. कुण्डलिन् (पु.) माल हनि । देनेतरा पुरिटी)पर, (पु.)वा परती । संन्दा सर्प साप. सीका भेद । "इन्टौ जले परवि" पर• अन् । जलमें | कुण्डलिनी, (बी.) गणतं मल नि। पारो तर पसे बीन पेरेजाटो तत्र प्रतिलिसांपदी. , विवरनेवाला शुभर, मायाममथा। भगको गरनेठी शा। । 6 धामी (प्रो.)चि फूलवाला। रवि। थामद। पारिया रोगीif कुम्हिका,] (१२) कुण्डिका, (स्रो०) कुण्ट संदायां कन् । कमण्डलु । थाती। कुपाणि, (नि.) युग्मितः पाणिः अन्य ।। छोटा । कुंडी, हायपाला। वदन । टेटे दायवाला, कुण्डिन्, (पु.) कुटिइनन् । मुनिविशेष । विदर्मनगर । कुपिन्द, (पु.) कृष+किन्दन् । नन्नुवार । दांयेयह देशमेद. कुष्य, (त्रि०) कुन्गिनं पूयने । पूय-कानमा कुतप, (पु.) कुरिमनं तपठि । नप्त्यच् । सूर्य । अनि । युग तरहम फैलाता है। जाति और अवर ब्राह्मण । अतियि । गो। भागिनेय । यहिनका पुन । निन्दिन । दुर आचरण करनेवाय. दोहता । यात्रा । नेपालका कम्बल । कुशके तृण : कुष्य, (न. ) कुप्फ्यप् नि । मोने और दिन के दूसरे पहिरकी पिछी पडीमे वीमरे पहिरती तजम उपधातु । दमा नाममे प्रसिद्ध चतु। मंत्र पहिली पीतक समय. में बिना और मय धातु. फुतस्, (अन्य ) प्रश्न । सवाल । छिपाना । कहाँमे ।। क्योंकर. कुबेर, (पु.) कुम्वति धनं परन्। नोएछ । राजा । नन्दी वृक्ष कुतुप, (पु.) कुत: पच् । छोटासा चमडेका कुया । कुन्गितं वरं देदोऽन्य" गि घीका पात्र. देह बुरा हो । मूमं (नि.). कुतूहल, (न०) कुतुं चर्ममय नेहपात्रं हलति टिमति ।। कुम्ज, (पु.) इंपन् टम्जं आजवं अन्य । म की योटीसी कोमलना हो । कुवटा (त्रि.)। हल्क्यच् । यपूर्व (अत्रीय) वस्तुके देखनमें यन्न करना। अपामार्ग । अपुरकांटा. बच्दा । यीच (त्रि.)। निहायत शक. कुर, (अव्य.) कस्मिन् स्थाने वा काले । किमजगह वा | कुमार, (पु.) कुमारयति क्रीडति । कुन्मिटी न किमकमें। कहां। कव. की मारयति दुष्टान् वा । नाता पनी । कति कुरस, निन्दा करना । चुरा• अन्म• सक० सेट् । फुगयते. व्योतिमें युवगत । निन्धुनद । वरणात कुत्सा, (खी.) कुत्+म+टा । निन्दा । परिवाद. कुरिमठ, (न.) कुम्मन । कुष्टनाम थापय । निन्दा कुमारभृत्या, (नी. ) भृश्यम् । ६ त.। किया हुआ (नि.). ममिणीकी मेया. फुथ, (पु.सी.) कय् अन् । हामीकी पीठका रंगीव-कुमारिका, (प्रो.) कुमार+" वयनि प्रयने स्सा कन् । पाच वर्षी विवाह विना कन्या । कुदाल, (पु.न.) कुं भूमि रहालयति । दद दल्+अग काम । भारतवर्षयदनेद । “वगंदा क. । कोविदारराक्ष । कचनालका दरख्त । कएपी कुमारिकाम्ये" इति निद्धान्तशिरोमरि.. नामा । पृथ्वीको मोदनेश मन्त्र । आगार । कोदाल कुमारी, (मी. ) कुमार+टीए । नवदिया (न.). नीनंद। अपराजिना। मोटरी लाइची । कर कुनप,(पु.) वह रोग कि जिसमें नामनों का रंग बदल १२ वर्षकी अविवाहिता कन्या । दयामा पर्श. बादाद । कुन रोगाला जन (नि.). कुमुद, (न. ) की मूमा मोदत । मुद्रा। कुन्त, (पु.) मुनि टनति । दन्त । शुकः । गरे। कल्हार । किमल । वानरनंद दरनेट । धुम धान्य । प्रसुनामी सन्ध्र । म । मेटा । वाग्म. कुमुदिनी, (नी.) कुमुदाना समूह इनि कुन्तट,(पु.) नं दुन्नाभासर सति । ला+क । “अन्सधैं दनि. " कुमुदवारी पुरिमी ( कशापानेध पात्र । एयदेशनेद. मुदधला. कुन्ति, (.) कमसिन् । देशमेद । युधिष्टिर श्रादिरी | कुमुदयान्यय, (पु.) ६ न. । चन्द्रम् मटा (मो.) वाटा । दह शामन गाय भैरमी कुमुदत, (त्रि.) मुद+मतुपाई निक वृषा गर्न बन्या दी। पुत्ररहित निमोरो पितान मन्द वि. किराँर पसंमे मिला है। कम्मी. दुन्द, (पु.) ई भूमि दापति पति वा । दे-दो बार नि• कुम्म, (पु.) कुं भूमि कुन्मितं वा टम्ममा मन् । (द) पदावा । पन्दुर नाम ग्रन्थय । भूनिरन । मानव निविदा परागा. मांग गोरे। एम्भवन पुत्र । पाच पगलि. पा. पर मेट् । हुयी। मारी राशि। गुग्गुरु का बालक. - - वसन 1 द (पु.) HIMIRसिरपुरा, (-)सररर रिटरे। म्भक,] (१५) [पुलधारक, कुम्भक, (पु.) कुम्भ इव वायति निचलतया प्रागते। कुख्यक, (पु.) ईपन राति । शद करना+हायो एन् । क । वास प्रश्वासको छोडकर प्राणवायुका रोकना उवह रमिट । पीतमिन्दी। (कुटनी) पुरस. रूप प्राणायामका अंग। जिसमें वायु न बाहिर भौर | कुरयिल्य, (पु.) कुशु बिच इव । परागनि । नहीं भीतरको जाय अयोत् मध्यमें रोकलिया जाय । मानिक. जसे घटा भराहुआ नहीं डोलता. कुरुविन्द, (पु.) उरन् पिन्दति । विदुश-मुम् । म्भकर्ण, (पु.) कुम्भ इव कणों अम्य । जिसके कान मोथा। वुल्माए । दर्पण । शीशा । हिट्छल । हींग । पर- पडेके समान । रावणका छोटा भाई । राक्षसका भेद। राग मनि (न.). (रामसे मारा गया). कुरुपिस्त, (पु.) पुणु विस्त । पर टोले गोनेर म्भकार,(पु.) कुम्भं करोति । कृ+भण् । उर० । कुमार। एक मार. जातिमेद । युभ पक्षी. कुरपश, (पु.) पुसा जनपदाना रागन । द्वारम जम्मयोनि, (पु.) इम्भो योनिः उत्पत्तिस्थानं यस्य । तरितम्य बहुपक् । ठेगु करने जो घडेसे उपजा । अगस्त्यमुनि । “धुम्भगम्भव"। भीष्मपितामह द्रोणाचार्य । द्रोणपुष्पी. कुरुप्य, (म.) सत् मयं न पसरवत् । गम्भाण्ड, (पु.)पुम्भासरः अण्डा पडेके समान अण्टा। के समान हि होनेसे । मनमा पापा पे । बाणामुरका मन्त्री । “माण्ड" यही अर्थ. कु(फ) दं, खेलना । भ्वा० आम• भक० सेट् । (१) इम्मिन् (पु.) कुम्भ मरल इनि । हाथी । पुम्गीर । ते । बा(दि. बु(कोदन, (न.) (1) युर । पार. म्भिल, () एम्भ अस्त्व लन् । घोर । पालमछ। पुर्प, (पु.) पुरनीला !ि अम् । जानु । भोकरे भर्षो पुरानेवाला । श्याल । साल. घटना । गोडा मोरि. म्भीपाका, (पु.) कुम्भ्यो तलपटे पाको यस्मिन् । पुर्पत, (वि.)()। माना। तेल परेमें जा पाते हैं। "जा यमके पावर पारकारनेदारा. तपेहुए हेलमें डालकर रांधते है" ऐसे टक्षणवाला | बुल्, बोधना-मेलारना । भापर. पोलीसपोणीत म्भीर, (५. ) अभिने हस्तिनं अपि रिमपि । जोस(.) इल्क । यश । अपनी से देर र हाथीपोभी दिला देतादै । इर+भण् । (कुम्भीर ) जाल- परहरीर. + साजन्तु । तंदुमा. फुलक, (म.) इल्म-हापर ररामदारना (उदा. पर... सेट् । प्रति । पुणेर। वार बनेए पार हा सारा कोरी. परवा पक्ष (पु.) रह () को पी । अन् । " पोटापा कुटकुण्डलिनी, (टी.) पु उपस writi लाल (ताम) और हरिणो सपना रो" गुगभेद । दाक्ति । पुलहरोले उप Irt. परिणमात्र पली राधि। हर free r. हारर, (I.) पते । परारदारना। उसोत पसी। मोहे समन जिमेर. पुरम, (f.) सिरसा(पर) हरप, (पु.) तो रगोन । जो पुरा रा हो । मसा भेद । पुरे साला (नि.) गोखिममा (st.)! पुज, (f.) से सटे र । पुराण (पु.). पुस्मार. ॥ नरकका मेद. । 11 सेसे पुरोरा दक्षिण और पूर्व भर। भर. मंग IN. भत । परीपन मा. भूमगी। if Ve . पोष, (..) मारक. (5) SC मतपत्रम् । स ke एप र तारापुरमर. "" - रामचन्दनीके पुत्रपुरारी पुरी या राजपानी कुटी लि)५ (पु.) कुमार या रेरक । कट कुशिक, (पु.)+अस्प टन् । अमरि विधानिया पिता मुनिमेद। "कुमा"tif कुलपति,] फुलपति, (पु.) ६२० । मुनिविशेष | "जो दस हजार कुख्य, कुल्दाहाहोनाक्यम् । अग्यि । हो । मुनिओंको अनादिरी पालता और विद्या पटाताहै"। "कुट भव."+पन् । अञ् युलमें उसका सेनाका मालिक. कुर ययपस्टाम् । यनावटी छोड़ी नदी। नहा। फुलपर्वत, (पु.) की पृथिव्यां टीयते । टो+ड । महेन्द्र, कुयग, (न.) कुगिनं काम् । सीगक (सैमा) मलय, सह्य, शुक्तिमान् , ऋक्षपर्यंत, विन्ध्य, और पारि-कुवलय, (न.) कोवलयं इस शोमाहेनुवत् । न यात्र ये सात फुलपर्यत है। "कुलानल" यही अर्थ. विद्याकमल । नीलकमल, फुलंधरः, (त्रि.) कुल++पय् मुम् । कुलरो धारण फुयलयापीड, (वि.) कुवलयं कापीडा भवन करनेवाला.. नीले कमलके भूगगनाला जन । एक देल जिसने हर कुलधर्म, (पु.) कुलस्य धर्मः ५० त० । कुल (खान्दान) रूप धारण कियाथा और इणीसे मारा गया. का धर्म ( कर्तव्य). फुयाद, (त्रि.) कुन्मितं वदति अग् । दूसरे देवर- फुलविद्या, (पी.) कुलागता विद्या । कुलकी परम्भरासे घाला । “मा घम्" । कम्मितवाक्य । दुवचन. भारही विद्या. कुविन्द, (पु.) कुं भूमि विन्दति । विद+ध | SH कुलवतं, (न.) कुलस्य व्रतं प० त० । कुलका प्रत (नियम). शुदजातिसरी वीके गर्ममें विश्वमा उत्पन्नहुआ वन फुलाचार, (पु.) ६त.। कुलोचित धर्म । कुलका कुवेणि-पी, (सी.) इस्मितं गन्ते मय जब धर्म । "जीव, प्रकृतितत्त्व, दिशा, काल, आकाश, वेग+इन वा । मम्याघानी । मच्छिांची टोरी. पृथिवी, जल, तेज और वायु" इन सबको "कुल" | कुश, (पु० न०) को शेते। वी+ । कुमार कहते हैं । उक्त सकलमें जो ब्रह्मकी बुद्धिसे विकल्प (घास ) रामचन्दनीका पुत्र । घोके समुद्राने गित रहित व्यवहार करना, इसीको कुटाचार कहते हैं इस द्वीप (जनीरा) पापी । मत । पतला । कृन. प्रकारका ज्ञान. कुरायज, (पु.) जनकराजाका छोटा माई. कुलाय, (पु.) कुठं पक्षिसंघानोऽयतेऽत्र । अय्यम् । कुशपुप्प, (न• ) कुगाकार पुष्पं अस्य । जिसके पक्षिओंका घर । नीड । थालना । कोई जगह । “को कुशाकी नाई हो । प्रन्यिपर्ण वृक्ष. लायो गतिः अस्मात्" शरीर । देह. कुशबुद्धि, (नि.) कुशा इव तीक्ष्णा बुद्धिः मस।। कुलाल, (पु.) कुलाकालन् । कुठं भति, मल् अण् । समान तीक्ष्ण ( तेज ) बुद्धिवाला. कुम्भकार । कुम्हार । ककुम पक्षी. कुराल, (न.) कुस् कलन् । कल्याण ।मुस । मुम्ही (. कुलिक, (पु.) कुल् यस्त्यर्थे टन् । आट नागोंमेंसे एक । कुशान् ठाति । ला+क । चतुर (नि.) कान भर एक साग । समयविशेष । कुलमें सबसे अच्छा (नि.). कुशस्थल, (न.) ६ त । कोज देश । सामान फुलि (पु.) की पृथिव्यां निति धरणायं गच्छति अच् । द्वारका (धी.) ही. जो पृथिवीपर विचरने के लिये जाताहै । चटक । चिडिया। कुशा, (नी. ) कुश्क । लगाम । रस्सी । मपुर धूम्याट (पिता)।दुरे विहवाला (न.). कुशाग्रम्, (न.) कुचाया अनं-प.त.। कुलिन्, (पु.) कुछ सस्त्यर्थे इनि । पर्यत । अच्छे दीक्ष्ण मोक. बुलवाय (नि.). कुशाग्रीय, (त्रि.) शास छ । बहुत अतिसूक्ष्म, कुलिश, (पु.) (न• ) बुले हाने शेते । शी+८ । इछिनं कुशाचीरम, (न. ) कश्या निर्मितं चीर । पर्वतं पति शोया। वन । थस्थिसहार वृक्ष । बनाई गई पाशार. मापनेर. कुशासनम्, (न.) कुशाया आसन-य. 8.1 कुली, (मो.) की टीयतेची । कटारी। यीसाठी, फुटीन, (पु.) पुरे भावरे भवः । स । अच्छा घोटा। कुशायती, (प्रा.) अस्वयं मनुस् । मयर अछे लग (नि.)। कुलावारवाला (त्रि.). (en)मंत्री पं. रवि. कुमार, (पु.)रतिक-समायोऽस्मिन्य। 18 वदेहा. माटे छोकन माद । दयाय नमार. शिन्, (वि.) शान् । कुल मिलाकर । নানা बुझीपल,] सीलय, (पु.) सिनं शीतं अलर्थे । । शीलं कुसुमलता सी.) समानो लता। पूट 3. भाति । और देश यसको प्रसिद्ध करनेवाला । नट । | कुमुमायनम्, (२०) इममानो शयनन् । पूलें या मात्यक । मांगनेवाला । बाल्मीरमुनि । माट. (ऐज). शीलय, (पु.)दि... राय सवय । किमि.। कुसुमलयका, (पु.) पना मा । रामजीके दोनों पुत्र. ल, (पु.) इरमुलन् । गुफामि । सोही भाग! कुसुमाकर, (पु.). पू यात । गत अमका बोटा । इंट आदिशा बनामा धान्य भादि रखने "नूनी बुगुमाकरः" गीता. हायर जगह । भमोला. कुसुमापीर, (पु.) वमना मीरमान। पर शेशय, (म.) से जले होते । +अ अलर । माला । फूलोंघा भूषण (जैवर) कमल । सारणपक्षी एनेस . कुमुमायुध, (पु.) भायुपं भय । ति मोदकम्, (न.) यु उदकं । जलरो मिला हुमा शन है।बामदेव पुरातूण. र, रोचना-क्या. पर• तक सेद । इप्याति । अकोपीन | कुसुमासय, (न• गुमायणम्प माग रमश मरापूला मा । पूरात । II, (पु.) पुणाति । साकु । पनर सूर्य । पटोंकी सराव. आगरीर. कुसुमित, (हि.) गमभन । माया (२.) पुष्पा रोग दे पा । इसथन् । एक पूल निषसमाये एक दवाईयोहा । पा. कुसुमेपु. (३.) पनि सो पम्प Infra धारि.(पु.). विट्मदिर । पटोल । धन. दिन, (नि.) माल इनि । रोगगुरु । कुसुमोचय, (पु.)गुमना एव । गुपका माय (पु.मा पित्तदेनुसार । पाण्डेषु घुमुमोग्यल, (f.) : ...। बीजेषु पस्य जिसके मॉमें थोडीसी गर्म हो। पूलोसे चमकील. दुमनामी पक्ष । शिवजी के गणदेवताका भेद । "नियां मुम्भ, (म.) [+हाभ Tiroin और"हनाभेद । दुर्गा मा. गुम्मा | The ": हर, भारिइन परना । दिवा. र. . सेट् । पुस्पति पति, (.) मिना ot.icaie are सतमोतीत पित, (.) । मनपर । भावद मगर । पुरशुभ, (.) Tetrig. धोगविता अन् । सो नि.ing: हसीद (म.)गे निर्भय होकर इसीहोदेरमोशी र पर चीतना । दुर ... नाभाटगुणा विमानाद।गरपानामयोग. एम, (.) [+मर । । फल । और TT (RE.) mer" मेध रोगभेद रामपाका-पवन, (पु.) मुलन कर hittornाता। भनु यस.स.पू (क-आय आदि) र (1.) सिरानुर म. पुर.(पु.)! MANIKTI- रामपुर, (.) नामसे Rare देशापुर मेरा Efeeirrormer TI..(..) .र- रामपुरम, (..) SRIS(or) Kinar for in पपरर. परामपन्. (I) Marn. (3.) refri एमपी, (Rt.) TRA.Mt. राम राम • मिpिet ( Teri mr..... Frt . .

- - प्रशासनम्, (1.) नुमाया भाग-4.ip पिपत्रतिमन मेरा "" कुलपति, (१५४) फुलपति, (पु.) ६२० । मुनिविशेष । "जो दस हजार कुल्य, कुल्-इकट्टाहोनाक्यप् । अस्थि । हो । एव । मुनिओंको अनादिरी पालता और विद्या पटाताहै"। "कुठे भवः"क्यन् । अच्छे कुलमै उपना का सेनाका मालिक. कुलस्क्यपस्टाप् । बनावटी छोटी नदी । नहर।। फुलपर्वत, (पु.) को पृथिव्यां लीयते । ली+४ । महेन्द्र, कुपङ्ग, (न.) कुत्सितं वङ्गम् । सीसक (सीमा) मलय, सन, पुतिमान, ऋक्षपर्वत, विन्थ्य, और पारि- कुपलय, (न०) कोलयं इत्र शोमाहेतुन्वात् ।। यार ये सात कुलपर्वत हैं। "कुलायल" यही अर्थ. चिधकमल नीलाकमल. फुलंधरः, (नि.) कुम+पच् मुम् । कुलको धारण | कुवलयापीड, (त्रि०) कुवलयं आपीडा भूत करनेवाला नीले कमटके भूषणवाला जन । एक दल जिमने कुलधर्म,(पु.) कुलस धर्मः ५० त० । कुल (खान्दान) रूप धारण कियाया और कृष्णजीसे मारा गया. छ धर्म (घर) फुयाद, (त्रि.) कुत्सितं वदति अन् । दूसरेन। फुलविद्या, (बी.) कुलागता विद्या । कुलकी परम्परासे वाला । "भावे धम्” । कुत्मितवाक्य । पुरावचन, भारही मिया. कुपिन्द, (पु.) कुं भूमि विन्दति । विदा ।। कुटयतं, (न.) दुरस मतं प० त० । कुटका व्रत (नियम). शूद्रजातिकी त्रीके गर्ममें विधकमासे उत्पन्नहुका र कुलाचार, (पु.) ६.। कुलोचिन धर्म । फुलका कुवेणि-णी, (पी.) कुत्सितं वैगन्ते मया धर्म । “जीव, प्रकृतितत्त्व, दिशा, काल, आकार, येण+इन् वा । मस्याघानी । मछिओंठी टोरी. दिदी, बट, सेज और वायु" इन गयो " कुरा, (पु.न.) को शेते। धी+द । कुम रही है। उस सप्लमें जो ब्रह्मकी पुदिसे विकल्प (घास ) रामचन्दनीका पुत्र । पीके समुदने । रहित ब्याहार करना, इसीचे कुटाचार कहते हैं इस- द्वीप (जजीरा) पापी । मत । पतला । य. प्रघरधन. कुशध्वज, (पु.) जनकराजाका छोटा भाई. मुलाय, (I. ) कुठं पशिगंपादोऽयतेन । भम्पम् । कुरापुप्प, (न. ) कुशाकार पुष्पं सम्य । जिन पशिओप पर।मी। थालना । कोई जगह । “को कुशाकी नाई हो । प्रन्थिपर्ण वृक्ष, सायो मतिः अम्मार" शरीर । देह. | कुशयुद्धि, (नि.) कुशा इव तीक्ष्णा पुदि यम। पुलाल, (पु.) पुस्मालन् । कुठं भटति, अर अम् । समान दीषण ( तेज ) बुद्धिनाला. चुम्मर । इन्टर । काम पसी. कुराल, (म.)कुर कलन् । कल्याण । मुग । मुन्न । पुरिक,(पु.)पुरमा टन् । भाट नागमिमे एक। कुशान् गाति । ला+क । चतुर (वि.) कामे एकाप । एमपि । फुलमें सबसे अच्छा (नि.). कुरास्थल, (न.) त• । कनौत देव । पुटिङ्ग (पु.)पिया द्विति चरगार्थ गति थन् । द्वारका (स्त्री.) सीप शे दिन चिरनेर ठिये जताई। चटकाया। कुशा, (श्री.) कुश+क । लगाम । ररमो मां- भूमर (fn)। पुरे विहारा (२.). कुशाप्रम्, (२.) वाया अग्रंय.तपुरको पुलिन्, (पु.) बुलायर इनि । पर्वत । अच्छ दी नोक. लय (त्रि.). कुशानीय, (नि.) चामंच। गत अतिमुश्म. दुलिया, (३. ) (4.) ले हम शेटे । यो । पुटिनं कुवाधारम, (२. ) कुछया निर्मितं पोर ।। पर। बन्न । थिमहर १३ । बनाई गई पांगार. एटी(की.) टीयर : बी. भामन । शारी बनी चराई. टीन, (पु.) टेभारे मा. ४ । भा थोडा । । पुनापती, (श्री. ) मरम्मण्य मनु । म बष्ट (fr.)रपत्र (वि.). समबन्द पुत्र. सीपुरीमा राम परी टि() मार। शिका (प.) रन् । म (2)rti प्रकार () Ur. ति, (RERRITEMinger " सुमकामुका-पापधन्वन्, (पु.) मुमानि अमुक%D | माकनुमयती, (बी.)मुमम्मनुपए। लवाडी। वह प्रतीत (१५५) पुशीलप, (दु.) शासन पी आर द । सौलं | कुसुमलता(स्त्री. ) मुमानो सना । फूलोंकी बेल. की। और देशमें पाको प्रसिद्ध करनेवाला । मर। कुसुमायनम्, (न.) कुसुमानो शयनम् । फूलों की शय्या पापामांगनेलवाल्मीरमुनि । माद. (ऐन). कुशीलप, (पु.)... लवथ । •ि नि.1 | कुसुमस्तरका, (पु.) पमुमानो सवकः । फूलोंका रामजीके दोनों पुत्र गुच्छा. कुराल, (इ.) पद । तुषाभि । सोही भाग। कुसुमाकर, (पु.)। फूलों की रागन । वसन्त ऋतु । असा कोय । ईट आदिका बनाभा धान्य भादि रसने. "ऋतूना मुमाकरः" गीता. सापस अगदी मोला. कुममापीड, (पु.) कुसुमाना आपीड:-भूपणम् । फूलों की - फुलोराय, (म.) इसे जले दोवे । शो+अच्-अठर । माला । फूलोंका भूषण (जेवर). समल। पारसपशीरनेका पक्ष पुशोदकम् (२.) मयुफ उदकं । जलसे मेला हुआ कुसुमायुध, (पु.) कुसुमं भायुध अस्य । जिसका फूल शव है। कामदेव. कुशवा तण. -ret, फुर, पेचना-क्या पर• सरु० सेट् । कुपाति। अग्रेपीत. कुसुमासय, (न•) कुमुमन्य तरसस्य आसवः । फूलके रसा मय। फूलका मधु । फूलका मय । शरत । पुपायु, (I.) पुपाति । इप्याकु । पानर सूर्य । फूलोंकी शराय, भागीदारीर. कुसुमित, (त्रि.) पुसुममनन् । फूलवाला। जिसपर कुछ, (न.) दुष्पाति रोगं दे पा । पुस्यन् । एक फूल निक्त बाये हों. रोग । एकदमाईकोहरपु. अष्टारि, (पु.) ६त. विटादिर । पटोल । गन्धक. कुसुमेपु. (पु.) कुमुमानि वो यस । फूल जिसके बाण हैं। कामदेव. कुटिन्, (नि.) अस्त्य इनि । कुरोगयुष । कुसुमोपय, (पु.) कुमुमानो उच्चयः । फूलोंका समूह । गुच्छा. कुप्माण्ड, (पु.) ईन् अप्ना पित्तहेतुतात् । अण्डेषु कुसुमोज्ज्यल, (त्रि०) कुसुमैः उरचलः । तृत। पीजेषु पस्य राक। जिसके बीज पोजीसी गर्मी हो। फूलोंसे यमधीला. उमदानानी पक्ष । शिवजीके गणदेववारा मेद । “निया कुसुम्म, (न.) एक्दम्म । फूल जिसमें बहुत हों ऐसा टी" । लताभेद । दुर्गा । उमा. वृक्ष । कुमुम्भा । फूल । "खा" क । कमण्डलु. अलिङ्गन करना । दिया• पर• सक. सेट् । इसति । कुएति, (सी.) कुत्सिता गतिः । रा+क्तिन् । शटता। असत् । कोसीद शरारत । जादूगरी. - पुसित, (५• ) उम्+छ । जनपद । आवाद नगर । कुस्तुम, (पु.) कुं भूमि ईपद् वा सुभाति । तुम्+ पुसीद, (म.) जो निर्भय होकर दुखीहोतेहुएसेमी चार कुह, आधर्यहोना । पुरा- आत्म• सक• सैट् । हस्ते अन् । नलोपः नि. विष्णु । समुद्र. या आटगुणा लियाजाता है । सूद । ब्याज । अर्यप्रयोग. सुम, (न.) कम्मर । फूल । फल । खीरज | कुह, (भव्य.) कुत्र । "कहा" इसी अर्थमें होताहै. नेमका रोगनेद. कुहक, (२०) पुरसगुल् । इन्दजालकी मायासे किसी बनुशा औरही प्रचाके दोसना । माया ।इन्दगाल ।। धनु यम्य-य- स.पूल (असोक-आय आदिक) ही जादूगरी । तं (त्रि.) जिसका धनुर है।वामदेव. कुहर, (पु.) कुं हरति । ह+अन् । गुहा । पुरा । नाग- कुसुमपुर, (न.) पटना नामसे प्रसिद देश । पाटलीपुत्र भेट गटामिद गला । करन । एकप्रकारका माप. "कुमुम" यहीअर्थ. कुतु-, (खी.) काठा । वह अमावस्या कुसुमपुरम् (न.) मुमानों पुरम् । पाटलीपुत्र (पटना) कि जिसने बन्दमा कस्य मौर चतुकीसे नगररा नाम है. पुष हो।लय पुसुमवत् (नि.) मुममतुए। फूझेदाटय. शुरु.) यस निमो बी. जिवशे मागि अनुधर्म (फूल) आगया हो।तार करना अरु. सेट। कठीशी. r TA , (१५६) 4. कुल, (पु.) भूषितम्यादा गहनकरी सहजार रुपमण्डूकापी, (पु. स्त्री०) कर देनदारामिह निगन. मैडक । एक अपरिचित (अनजान चिका, (बी.) विर-महा छन् । तलिय । जिमको संगारका कुछ ज्ञान नहीं, बचपन्न । "वृति". लोगोंग्रेही जानता है । किसीको वेसमझरे लिये. फूज, दारगाना.पर• सुर सेट जति-भाजन जित, (न.) पीकी भावान । दशब्द. कृपयन्त्रम्, ( ) पय यन्त्रम् । पानी निकाटनेशी मशीन (कला), ट, (3.) भ । की पन का। अगसमुनि । पर (इ.) (मी.)न हिन्नानाधान दिशदेरकृपयनटिका-घटी, (सी.) E सेंधमार।पमा माया रिचार्य बनुध दांकना। मएममें जल निकालने के लिये अरहा पीसा दुछ। इनका बा । मुगं। मृगोंके लगाई गई पहिये. पनेरला । पर (पु.). कृपा, (पु.) कक्षा क-हायें यो ममयके लिये बनावटी भूमा।। हत्, (दु.) निम्पान्तं करोति । निश्च सन्द । स्टा । धुतं । दागज । पटे गुया चूतडों के नीचेन मुरामा लिा। चिताके नीचे गडाचन मसार:-मगर, (दु.) परोतिम्वति । मुही मप्या पर्यंत वा वृक्ष । किसी नार (ग) रा. नरहके वीचका पन्यर. पटना, (-) या । मोटे कपी, (प्रो.) पई । डोटीन्ह । गो चं, (पु• न. ) पुर्यते । कुरक्चर-निट परपन, (1.)2.प. माटे पमंगला स्थान- पाएछ । दमं । मोरकी पूए । चरण । गिर. परमार,(..) मा. क्वंशी, (पु.) पूर्व मश्रु तन की परम.(.)। युर (साई). रिपाठीक गमान हो । नारिरेट । re, (kr.) rtertair पांग, (पु.) गुटी । भंगिया. Tm..(f.) घर समन निकम, (पु.) कुरिगतः की या निरको यare ग बनीन बलयले ददा एक प्रकारका वायु. रमन (T.) कर्मयक, (न• ) मांकार बाम् । सान..मनापागला. परिको मायक । अगादि सह भाकारका. पार, (:.) प्रारम्ग यागार, P, (२.)ी था। माना. कमपृष्ठ-गृम, (२.) कर्मम । कमांयनार, (.) म मालारः ।। Trm.(.) RIPा। मार मिणुका. कला-नाम्या पर.ग. मेर।। (1.) र ई । मेरा म रिग दो (पु.) attire. कोरर (:.) र टायर पर.:.irrita दtu परास्त Trực tỷ - 1; K = (1+ ) : राय: fan नाम ...? । र, *Fis retirurtir. म. म. water में र Ja +- [T.:.

[तोपभोग, नाँ। । बीतंत- तात. हुआ अन. । सना उमसा. भनिन् । परो । पुर। रतम्, (अम०)"म" हम अर्थमै । बस । निषेध । भात. रोकना. ना । उदा. पर० स० सेट् । किसी। भरारीन् । तलक्षण, (त्रि.) वृतानि लक्षणामि क्षरा । जिसके लक्षण कियेगये हों। गुणोंसे प्रसिस कियागया. T, (पु.) कण सप्टेन बक्ति । ष बोलना. एतपिध, (वि.) ता अभ्या पिया येन । जिसने RITEमोर । सरट पक्षी. वियाका मभ्याग किया । अभ्यरूविध : विद्वान्, का, (सी.) परति । अद्युल कृतपीर्य, (पु.) कृतं वीर्य अनेन । एकवीरराजाका बपि आइत्वम् । प्रीवा कंपी जगह । पण्णी. पुत्र । बती । एक राजा. (म.) सानोऽन्तादेशः । 2 । दुरा। एतथम, (नि.) कृत. प्रमो येन । (जिराने मिहनत मा पर पापाटदेनेवारय प्राजापल भारि प्रता की हो । महोत्साही । बरे पाववाला. रोग. कृतस्यद (पु.) कृतः सरो पत्र । सोनेके अजने की पटना। पर• सक० सेट् । कनं । इन्तति। जगह । सोनेरी सान. कृतहस्त, (वि.) कृत' अभ्यता' हनो येन । जिसके कीर्तन करना । पु• उभ• राक सेट् । पोर्तयति-ते। हापौ बाण आदि चलानेकी चतुराई हो । तिरंदाज सीसा- (२.) + । देवताओंच चारहजार वर्ष । कताअलि, (पु.) जो हाथ जोग्नेके समान पत्तोंको प्योंके मानसे १७२८... वर्ष। सलयुग। पूरा। सिकोट लेताहै। सबाला । हाय जोडेहुए (नि.). । बस । फल । रागया (नि.). एतारमन्, (पु.) कृतः शिक्षितः संस्कृती या भात्मा (म.) शुन् । मनावटी । सूटीकल्पना अन्तःकरणं यस्य । जिसका वित्त सीसाहुआ है। जिसन मन साफ । शिक्षितचित्त । शुद्धान्तःकरण. गया. मन्, (दि.)। इन धर्म। येन । जो अपना काम | एतात्यय, (पु.) कृतस्य कर्मजन्यभोगस्य भत्ययो:- धुप है। यर । परमात्मा । संन्यासी. वसानं । कर्मसे उत्पनदुए भोगका अन्त । भोगके बिना कियेगये कर्मका नाश. य, (नि.) हवं कर्तव्यं येन । जो अपना । रसुकाहो । लायं । रामाप्तपर्य । पन्य । विज्ञान, | एतान्त, (पु.) कृतः अन्तो येन । जिराने भन्त कर- लिया। पिशान्तको जानाहुआ। हातलियान्त । "पूतो ब-किया, (नि.) य येन जिसने अपना नाशी येन" । नाशकरनेवाला । देव । पाप । यम. जिन मिर कर लिया है। कामयाब, एतार्थ, (वि.) कृत. अर्थः प्रयोजनं येन । जिसने ण, (त्रि.)तः क्षण समयो येन । जिसे समय काम करलिया । यतकाम. उगया हो ।सन्धावकाश. एन्तात्र, (त्रि.) कृतं शिक्षितं भवं येन । जिसने अख. (नि.) हन्तिानका जो कियेलो नाश का पलाना धीरा लियाहो । शिक्षितान. है। उपकारी अपयर करनेहारा । "कृतामे एति, (बी.) +जिन् । पुरुषका प्रयन । पर्ताका स्त निष्पतिः" पुराणम् व्यापार । २. अक्षरके पादवाला न्दोमेद. (पु.) कृतं पूनार्म यस । जिसय भूमाकर्म एतिन, (पु.) तमनेन । पण्डित । योग । पुष्पान् । अण्डनसंस्कार) हो चुका है. चार साधुरतार्थ. (नि.) कृतं जानाति करियेचे जाहारा । कृतोदक, (नि.) कृतः उदकसंस्कारः यस्य । ब• सः। जिसका तर्पण पा जलपालिसंस्कार किया गया हो। (त्रि.) तोरार जानाति । । जो अपनी दिया हुआ. पेगये उरकारको जानता है। उलट कर उपरार एतोमाह (त्रि.) तः उमाहः येन । ३०.जिसका नेवाला. विवाह होगया हो. (वि.) कना समाविता धीर्येन । बिगने - छतोपकार, (नि.) उरभारः या..। उप- अभ्यास अन्त कारणको उद किया. कार किया गया। सहायता पहुंचाया गया. णारा, (I.) झियेगये पुष्प और पापस भोगकेतोपमोग, (वि.)तः उपभोगः येन । जिसका भोग ना नाश होना । तिहानि । पुश्यपापी हानि. भोग लिया है। किसी बातु काममें सा पुका - ।

(१५८) । कृत्त, (नि.) तरह । काटागया । घेराहुआ. कृमिन, (पु.) मि इन्ति । हन्क । मादी । कृत्ति, (नि.) कृतिन् । चमडा । मोजस्त्र. हल्दी (घी) धूपपत्रा. कृत्तिका, (बी.) वृतचिन्संझायां कन् । अश्विनीसे | सत्य, छोटाकरना । दिवा. परसक० मेट् । तीसरा तारा. अकृशन् । थकीत. पत्तियासस, (पु.) इतिश्चम पाम्रो यम्य 1 चमडा ) छदा, (त्रि.) च । नि० । थोदा महंन । जिनका करता है । वृत्ति यस्वे । धम्ममुन् । वा। शिवजी महाराज. रशतनुः, (स्त्री.) कृश तनुः यया । जित एन, (वि.) कृानु । अच्छा काम करनेवाला । प्रतिमान्, पवटा है। कोमल शरीरवाली । कृशोदरी, हत्य, (10) कृश्यम् । काम । व्याकरणमें कहेगये | शशाङ्क (वि.) यानि महानि यस्य । कम म्वन, क्य, तथ्य, अनीयर, यत्, केटिम प्रलय (पु.) बाला पतला. परननायक (त्रि.) शानु, (पु.) कृण्मयानुक् । माग | चिना- निम, (२.) कृति सेनन । पिलवा । माचल- समानुरेतस्, (पु.) यानी वही तो सम्म पर। पर प्रकारका निमक । नुरस्कनाम गन्धदव्य । जिमरा वीर्य पाहे । शिवरी। पार्वती गरह प्रयरक पुनि एक (पु.) पनावटी (नि.), सहारसकी इसलिये आगमें फेंगया। यहां मुदवना. समान कार्तिकेय हुआ. एयर, (न.) पत्र । साय । पानी । युक्षि । कोर। मेयना । नुदा. म. म. अनिद । सम्पूर्व (नि.). अहमद-याट. पन्लन, (न. ) युट् । नि• मुम्च । काटना । ऐदन. रुप, सेंचना । भ्या. पर० सक• अनिद्र । ईत एना करनामचना करना । भ्या. आम. । धीद-अकाहीत् । अक्षत, पर रद्दमें टम• पर• वेट् । कागते । कृपक, (पु.) मुन् । समय । वह। मापन । पापिट-अहम । स्नान । पिसे. नेवाला (प्र.) मेतीकरनेवाला. ने। पीपिचठे. पर.(पु.)सादनच पुत्र । दोगका साया । कृषि, (त्री.) कृप्त् । वैदयका काम। किश्तथरी. सीपल, (त्रि.) पिः अन्य अमि । १ बाग, (I.) मयुन् । प्रेा। मूर्म। कमीना । खेतीकरनेकाला. रान । र देवासा (नि.). पर, (नि.) वर-कमी कराया गया । सन (4.) म्या । दया । फलयो न पाहकर | कृष्णा, (पु.) +नक् । मगान माण तर मरने या. पगुदेवा पुत्र । देवकीनन्दन । गहिनन्दन हमान, (.) दुत डर दयार । en", वैश्याम । अनुन । पलारंगदौनेमे प्रा नीलाम।नीलेरंगवाला (मि.). Tre (f. ) : ENETपदुए। कृष्णगन्ध, (पु.) कृष्ण प्रः गन्धोऽम्य । हप्पळपायन, (पु.) दीर मा । पञ् । (i)ीन पुत्री. पराशर यमुनाडीसमें जन्म हुआ। पुर हर(.)। ८२९ । पैट । टोय । उपस, (पु.) प्रतिपदा समय ए. दिपि।मामय समय । माया. योनि, (5.) म अन्य मोड । रालोद (R) अपमान । मुगा । बभिम. मि.(:.)मनदारा enteमयमंन्, (पु.) कृष्णं वर्म मस पेटर म. कास।भाग महाWिIT निय, (.) न्। सो randi दरम।। रेशमी सामंत, (.) या म. .

(ग)र, [केदारिक, । गुत्तररंधन. हपसा(सार, (पु.) णयागो पारः (सारः) | केश, (पु.) लिस्यो लिभाति वा लिगाम ललो. पापरा पालपारमग । हरिणा मेद । जो बाला पारस शो वा । वरण दैत्यभेद । विष्णु । बाल । माचित्रित हो । टासीकारत. मयधातुरा उपधातुविशेष. कृष्णसखः-सारपिः, (५.) णस्य सपा पा रुष्णस्य | फेशपाशी, (प्रो.) केश+पास+जी । शिसा । बोदी। सारथिः-टप्स धीरया मित्र या रपवाही न. देशोंके धीरती पूग (सी). हष्णाजिन, (न.) प्रसार हरिणका चमडा. फेशमाफ, (न.) केशान् मार्टि । गृ+प्युल् । कंगी। कतिघा. हष्णाटक, (पु.)णं धणं हानि। ला। कम्प। पुजापत । रतीबद मादी वाली होतीदे. योरार, (पु. ) के जले तीर्यते । श+अए । शेरके कृष्णाएमी, (वी.) यस्य भरमी । कृष्णके जन्मदिन कंधेरी जटा । पोडेके कंधेपरफे वाल । फूलकी तिरी । भावणकृष्णपक्षी भएमी । गोकुलाटमी इसी अर्पमैं. नागफेरारधारस्त । मुपारीका पेड. टिका, (पी.) कृष्णेन । सहायो कन् । राई। राजसप. केश(स)रिन्, (पु.) केश(स )राः सन्त्यम्प इनि। सिंह। शेर । थोड़ा । पुनागा । नागकेसर । वीज. कृप्या, (स्त्री.) अहां पयप् । रोचनेलापक पृथिवी. पूरकाश । तरपूजा हनुमानका पिता । वानरभेद. कैफय, (पु.) देशभेद । सूर्यवंशीय राजाका भेद । दशरप-फेराय, (पु.) फेशी प्रभारी अपि अनुकम्प्यतया पाति राजाकी सी (बी.). पास प्रदा और जीपरमी जो दया कर्ता है। फेवार, (पु.) के मू कशीतं अस । अप् । "देश केशिनं पावि हिनखि वा " विष्णु। केशी- भडारा निनोमताक्षियुक्तपुष । नीची ऊंची अपि- देखके मारनेवाला । सूर्य आदि अंशवाला परमेश्वर । पाला पुरसटीरा. देशाप्रापास्त्ये "अच्छे वालोंवाला. केका, (श्री.) के मूर्मि कायदे कर्मणि ८ भउत्स.पेश(पु.) केशस्य वेशः । वालोंकी सजावट । मोरकी पाणी. केकिन, (पु.) अस्त्प] इनि । मोर । मयूर. | केशिका, (बी.) केशिन इव पायति । के-क । शतापरी केतक, (पु.) कित-निवास करना । युर । केतकीपक्ष। माम एक वृक्ष. क्यो। फेशिन्, (त्रि.) प्रशस्ता केशः सन्सस्स । केशमनि । केतन, (न.) कित+युद् । पर । अण्डा । चिह । काम । भयो बालोंवाला । विष्णु । देयमेव सिंह । शेर. धधात्य. केतु, (पु.) चाय्म क्यादेशः । रोग। पमक । म केशिनिपू(स)दन, (पु.) केशिनं निपूयति हिनस्ति । चिहापातु । नवग्रहोंमेंसे एक ग्रह । धूमकेतु। बीमारी, नि+सूद+वि युट् । केशीको मारनेवाला । कृष्ण । केदार, (पु) के शिरसि दारोऽम्य । पर्वतभेद । केदा-1 है, शब्दकरना । भा. पर• मह• अनिट् । शायपि । "रेशिा" यही अर्थ. रेश्वर महादेव । पृथिवीका भागविशेष । क्यारा. भकासीत्. केनिपात, (I.) के अले. निपातोऽम्य भला सकसः, (पु.) कोप-अण् । कीकरा पुत्र । एक देल । भरिनी भादिरी गतिको रोकनेवालाहालानामसे प्रसिद्ध काह"केनिपातर" यही अर्थ, कैफेय, (पु.) केकयानो राजा, अण् । केकय देशमा एमा फेयूर, (पु.) के पाहुभिरसि याति । या+उर भर वाशाएक. रा. बो भुगाके मिरेपर गलाजाता है । बानु । दाकैफेयी, (श्री.) रेयस्थापत्यं श्री भए । भरती मा । फेरल, (पु.) देशभेद । वह देश कि जहा पेदसे ARE- पसरपकी स्त्री. नेता अभिर नही । क्षत्रियमेद. कैटभजित्, (पु.) भं जितन् । जि+भूते प्ि फेल, दिसाना । भ्दा• पर• राक• ऐ । केसति । अकेलीत, शुरुष। विष्णु मेलि, (पु. स्त्री.) केस्कइन् । परीहास । मसील । रात। कैतकम् (२.) तस्याः पुष-मण् । केतकी (पन) पृषिवी. बेव, सेवाकरना । भ्या. मा. स. पेट रेवते । अविधकै.तय, (२.) फितवस कर्म भस् । कपटता । ल । केयल, (वि.) फेदम्पाटम् । के सरति श्यति । बल्# जूआ था. अन् । अनुस् । एक । भकेला । पूरा । निषय | फेदारिक, (न०)केदार समूहा घुम् । एम् का । क्षेत्रसमुद्र । कियाहुभा हानभेद । एस साफ. (म.). .

करव, - करय, (न.) के उले रवि । यच् । अलु रामा० कोटीर, (पु.) कोटिं ईरयति । इमम् । "केरवो हंसः तस्स प्रियं मम्" कुमुद । टन्पल ! चिट्ठा मुटा जा. कमला शत्रु फोटीश्वर, (पु.) कोट्याः परः । एक करोमर कैरवी, (खी.) केरवाय हिता भम् । चन्दिा । दिवी. फैलास,(पु.) के जले समो लमनं दीप्तिः अस्य प्र. पति (माटिक) नमः । केटमः सटिकः तम्य व अनः यो । पानी में | कोट, (पु.) कुट्म्यम् । नि. । गुनः। दुर्ग। चारहे विमारके रामान धि । वि और कुबेरनी- राजधानीमेद. का स्यान । एक पर्वत है. कोट्टार, (I.) ३+भारम् । भरपहा तूप्रा । दर कैलासपति, (पु.) किरायके पति शंकरराशिव. कैयतं, (पु.) के जले वर्तते । त्मच्-अक् स ततः कोण, (पु.) कुण्+करणे धम्करि अन्वा माय अन् । जो अधिक पानी में रहे। पीवरजाति । आदि बजनेय साधन जो धनुके समान arti मी पकानेहारा. है। परमादिका एक देश । मन्त्रों का निरास कैरल्य, (न.) कैवलम्य पुस्य भावः । सहोना । ग्रह। तरवारकी देज धार. विनामोशा मुछि. कोदण्ड, (न.) कु-सन्दकरना-पि । वेदोमा शिक, (नि.) की-झी• केशटस् । केशकी मांति । मोहता । देश. परमानन्दर कोद्रय, (पु.) कु-पिन् । कोः इति । -अ कशोर, (२.) रिफोरम मारः अन् । किशोरपना । पान्यमेद। माजरा. सदर पगाः मोर पदद यह यह भरया है. कोप, (पु. ) पु+भावे पम् । श्रेष । गुरमा । इसा पूर्व फरस, (पु.)ना ग्रहः पम्। देशों (पाली) होनेसे पित्तका निकार. कोमल, (न.) लन् मुद्। नि• गुणः ।। पोष, (पु.)। पुरम । याया। वृक्ष पानी । म नरम । नामस्ता मनोहर । मुन्दा ( (क)गर . कोयरि(पु.) जठं यटिरिक अम्य (पु.), पोनर(.) नमन् । पुरा साल ओ होता है। जामाशी । “मजयां इन्"। परबार दरा पसी । "कोयटिक". पोषिय, ८ (पु.सौ.) वर । कोदलाशी । रापुर फोरक, (पु.न.) कुठे पर युन् । पार सोशिलार(.in पर पशि पुर्ण की टी। यह सम प्रायः पुंलिंग है. भार irauमरे पर गिरे टाउ फल हो। कोल, (पु.) पु-याने गादीना+अद् । शनिप्रदादा पूरा: मेसा । मिरय पत्र बोरिसर, (९.)..मामा सामान, मेरका फल (न.) पर, (.) पनि पत्र । एका कोलमल, (२०) सम्म बायां स माम् । fre ratee स्टोरी मर्म. र गमन हो।मूठ रोध, (:.) । मेरा । सरना । देगनेद। कोलम्बक, (पु.) कुलमान-मज्ञायां ना In. (2.) या मित्र होलाहल,(पु.) दुपत्र भरलीमन् । বা ল স ধi". मेर.(:.) । दु ।। Re'. कोथिर, (पु.)मादानल टर(:.)..रीना REKगतान का?. रोविकार, (पृ.) मम Armireone ता(..) mग Frekt. म.(.), म । सत्र । Praman entert-2 Cinem Kiran. cfre. . ...

कौशशरकः, शिलेय, ॥ पत्र । बेटा. कोशफारकः, (पु.) कोर्श करोति वुन् । रेशमका कौमारिकेया (पु.) कुमारिकायाः अपन्यं-ढक्कएर । सजाना पनानेवाला । रेशमी पोटा. कुमारीका पुत्र । कुमारीवा लडका. कोशल, (पु. श्री. ) श्वलय्-नि• गुणः । अयो- कौमुदी, (स्त्री. ) कुमुदानां हर्षदरियं अन् । चांदनी । ध्यापुरी।सा टाप, इसके छुनेसे पुमुद गिलतेहैं । वार्निकी पूर्णिमा । कोदालात्मजा, (स्त्री. ) कोसाना राजा (त.। तस्या- अरमूवी पूर्णिमा. मजा पेटी । रामचन्द्रजीवी माता. फौमोदफी, (स्त्री.) कोः पृषिव्याः पालतात मोदक फोराशुद्धिः, (सी०) गोशस्य मुनिः। पेटको शुद्धि (सफाई). फुमोदको विष्णु तम्येयं अण् । पृथिवीको पाटन करनेहारे कोशाध्यक्षः, (पु.) कोशम्य अध्यक्ष कौश(एजाना) विष्णुची जो हो । गदाया नाम है। (विष्णु की गदा ). का मालिक । राजाची. | फोरय, (पु.) पुरोग्यम् अ । राजाकी मन्तति । कोपशायिका(बी.) कोषे शेते । शी+ग्युल् । पुरी. भतराष्ट्र और पाण्डू के पुत्र (दोनों पुरके वंशमैं मरनेमे ) सानेमें रक्याहुआ पाक. कौरब, (पु. ) पुण्य । दुवंशम वाला शनिय । कोठ, (पु.) उप-उन् । परसा मध्य । धान आदि रखने. कुरवः" पहु.. का पात्र । भोला । वुदिया। भयना (त्रि.). कौल, (नि.) पले रातुले भरः भग् । अच्छे कुता। फोप्या, (न. षष्ण को वादेशः जो हने में योटा गाम तत्र वदेहुए पुलाचारमें लगा हुआ. हो । गरमवनु (नि.). कौलटिनेय, (पु.ली.) मिनुष्या. रात्वा अगर दक फोदल, (पु.)ोहली स्पर्धते । अच् पृ. गुणः । बाजे- नादेशचा मीपमांगनेवाली सती (पवित्रता थी) का फा मेद । सरायका भेद मेटा। "क्लटायाः अपत्यम्"परिचारिणीपीका बेटा। फोकटिका, (I.) पुष्टी माया पादपतनदेशं च पश्यति । कोल्टेय, (पु. श्री. ) धराशाया पापा मग या मारा पदमाश भौरदा पुत्र. टक । पामारी। कीरे आदिके मरने के रसे पाव पहनेवी जगहलो देरानेहारा संन्यासी दम्मी. दक् । यमिरारिणी स्त्रीका पुष । नेपामा वीरनी। कांक्षेपका, (पु.) पक्षी सन्तनं पदः । टकम् । सदा कोल्टेर, (पु. श्री. ) पुलटायाः गया. भार। काय दाईहुई तलवार । तरवार, पुत्र. फौटतक्ष, (.) खनन तन । अपने घरमें दया कौलिक, (नि.) कुमार भागत सर । बुटपरमार पूर्वक काम करनेवाला. चलाभाया । "पुनापरित "कुलम भार । कौटिक (नि.)टेन गान्धनयन्त्रेण पती टक् । मारा "काल बुटपर्म प्रायति टर"। कुलपये पर- चार जीविका करनेवाला व्याप (शारी) जो जाल के पारा तन्त्रमै परामा पिसीमनु आदि बना। पाप पमता है. इलाहा । रापधर्म. कोणप, (पु.) युपपः दावः भयरदेन पियदेऽस्य भण् । जो पोटीन, (न.) की पूपियारीनं यम्मा 13 माम। मुर्दे शाता है। रादर. बोंगे पदाभाया । जिरा । निन्दा ।। कोतुष, (म.) पुराण । | तमा । पसरनोबेश। मममें सार । पुरी अजीब देगनेरावार. पर। मुरगोरी नाई। सलमे पक. कौतूहल (२.) खाऽ । और तमाम रेटून (पु.) एनस अन् । कुरा बरीसाद. अधिपति. कोपीन, (म.) पतनं मदति अपर्याय निपर। कौटेयक, (पु.) भरः पम् । बा . पापी (पि.)। "गोप्यता पुदि अपि पीने, पौतर,(न.) वाला यय । मने पुर। सदापादस्वात्" । छिपानेलया होनेरो पुररपति तपी।सम्परा. भागदन । लंगोटी. कीमारिका, (.) राम पाल । कोपेरी (सी.) परत इस भण् । मेरी। उनर रित| "साय समायरम"। सनी (बदा परयो पास तह)ोसी हाफि मानेद. लिये पौ। पारर । मेयरमा कीमा (म.) मारस भावः अन् । उपरही जिसने अरमपूज. पृभ्यो पोरसे मारा । पोर O PI(उमर),सौगलेय, (३.) । । पारिश्राषि(सी.) इमारी. पदमारानी । , A विचाररी जो फेटायात्राय । सरीदने के लिये दुधानार कौशल्या, (११) कौशल्या, (स्त्री.) कोगलटे भरा ह । रामनन्दनी-मानुपतिः, (पु.)ी पति- की माता. या नुहान करनादा कौशाम्बी, (पी.) कुशाम्बेन नियंता नगरी। पण् । मनुपशुः, (गु.) मनोः पनु । यहा पशु, एनाम पुराने नगरका जो गंगापर है। वनगराजाची नगरी. | मनुपुरुषः, (पु.) मनी. गुप्तः । यारा पुरुष फौशिक, (पु. ) कुशिकम्य गोपापन्यं । कुरा+टम् । अनुमुन्, (पु.) फ्री यमे मिति : कुशिक+अण् वा । विश्वामित्र मुनि । "कोशे भवः" टक् । मुजरिए । यनमें हियगये पीआदिनी म नेवला पकडनेवाला । टाढू । इन्द्र । गुग्गुल । "कोशेऽधि अनि देवता. कृतः टक"। कोशाध्यक्ष गजानची. कौशिकी, (पी.) इग नामकी दुर्ग । एक नी । नाट- मनुरान, (पु.) मा गगने-राशि । मनः है । यशोंका राजा (अमेध). कमें एक वृत्ति. कौशेय, (त्रि.) कोशात् उत्थितं ढर । कीडाके गजाना- ऋतुराज, (पु.) मनो गा । टन् ममा. राजा । अअमेध यज्ञ । राजमय यत्र. से पनाहुआ कपडा । रेशमी काहा. कौसत्यायनिः, (पु.) कौसल्याया अपत्य फिम् । श्रीराम-क्र, मारना । मा. पर• अा• सैट् । क्रयति । अ अन्यथी, चन्द्रजी. प्रयन, (न.) ल्युट् । मारना । काटना । कौसुम्म, (पु.) कुमुम्भावार्थ अण् । वनका युमुम्भा । कन्"ऊंट. शाकभेद । “कुमुम्मेन रक्तं थए” । कुमुम्मे के रंगसे रंगा- ऋदि, रोना । घबराना । अक• । बुलाना । म हुआ कपडा धादि. कौसृतिक,(त्रि.) कुमुल्ला चरति टक् । मायाकरनेवाला। सेट् । कन्दति । अक्रन्दीत. जादूगर । धून. क्रन्दन, (न०) ऋदि-माचे न्युट् । शोक आदिने गिराना । रोना. कौस्तुभ, (पु.) कुं भूमि नुनाति कुस्तुमो जलधिः तत्र भवः अण् । समुद्रसे निकला। विष्णुको छातीपर रहे। कप, पा करना । भ्वा० अक• आत्म• सेट् ।। तेजवाला मणि. अऋपिष्ट. कौस्तुभवक्षस्, (पु.) ६ व० । कौस्तुभो वक्षति यस्य । कम्,जाना । भ्वा० पक्षे दिवा. पर. स. क्रमति । काम्यति. भगवान् विष्णु. माथ, मारना बुरा० उभ• पक्षे भ्वा० पर० सेट् मधयति-ते। कम, (पु.) क्रम-भावकरणादी घम् । पांव रखना क्रयति । अचिक्रयत्-त । महाधीन. जाना । एकके पीछे दूसरा । सिलसिलेवार । प्रस, टेढाहोना । चमकना । बोलना । दिवा० धुरा० पर. हमला. सक० सेट् । प्रस्यति । अक्रसीत्-अनासीत् । कसयवि-ते. कमणः, (पु.) कामति अनेन करणे ल्युए। जिसके 'यूप, दुर्गन्ध रटना ।गीला होना । शब्दकरना । भ्वा० आम. चलता है। पाद। पाँव । अझं। (न. कना । चलनालाघना. अक० सेट् । यते । अनिष्ट । कोपयति-ते. ऋकच, (पु.) यति प्रदति शब्दायते । कम्यच । गाठ- कमिक, (त्रि.) कमात् आगतः टन इक । क्रमने - दार वृक्ष । धारा (पु.न.) ज्योतिष में एक योगका भेद. क्रमानुसार सिलसिलेवार. कचपाद्-द, (पु.) ककथमिव पादी यस वा अन्सली. / क्रमुक, (पु.) क्रम्स्टन् । ततः संज्ञायां कन् । पः। जिसके पाव रेके समान हो। कृकटास । किरला. भदमोया. ऋकर, (पु.)दति शब्दं कर्तुं शीलं अस्य । अचू । जो क्रमेल, (पु.) कामति । कम्-विच् । एलति अन् । क्रशन्द का है। एक प्रकारका दौतर । गरीव भादमी. ऋतु, (पु.) कृयतु । यूवारा वा यूपके विनर यज्ञ । ऋय, (पु.) की+मावे अच् । मोल देकर चीन में सकल्प । मरीच आादि मुनि विशेष । विश्वदेवमेद । इन्दिय । सरीदना. विष्णुन नाम । शति । इच्या । मैटा । पूजा । वुद्धि. ऋयिक, (पु.) क्रयेण जीवति टन् । सो खरीदने में ऋद्धिप(पु.) ऋतुं दैटि। द्विषविप् । यहा वरी है। नियाजन । व्यापारी. देसानावि, काय्य, (वि.) श्री+यत् । "सरीदनेवाले सरी ऋतुष्यसिन्, (पु.) तुं दसया मयति । वंम्+ मिनगिन् । दारे यी ना करनेवाला शिवनी. गई चीने । "कन्यताद" इति नि.. ~~ - कथा (१३) [कोधानला, तन्यपतुमात्र. कन्य, (म.) यत्-रलयोरेस्त्वात् । भाममांस । शुम (पु.) कुन्द विप् । युज । एक प्रकारका सगला, वथामांस. मायाद, (पु.) कम्यं अस्ति । अद्भकिम् । मांस ताहै। कुच, जाना । टेटा होना । अनादर करना । सब पर सेट् । कुषति । अकुमीत. राक्षस । गीध आदि. अञ्च, (पु.) कुकर्मगि पम् । चपर्वत । "अन् माल्याद, (पु.) कम्यं अत्ति । अद् अन् । राक्षस । टा"। एकवीणा. होर । माज । मुके माराशे पानेवाली आग। "प्रन्यादो युए, देशहोना । गले मिलना । पापर• अफ० सेट् । गृतभक्षणे". कुन्यति । सकुन्धीद, कव्याद, (पु.) वयं अति । भकिम् । मांस सानेकु, गुस्सा करना । दिवा• पर• • उपगगंमहिन- वालय । राक्षगगीध. सक• अनिद । कुप्यनि । अकुपन । भृत्य भाभिकुप्याी. प्रशिमत्, (पु.) नशस्य भावः मनिच् । शता। समगोरी। पुष्-धा,(स्त्री.) कु किप्पा टाप् । इचाकी प्राप्ति न शुकना. होनेरो उत्पन्न हुआ वित्तकी वृतिय भेदोष । गुम्मा. मान्त, (पु.) यम् क । घोडा । दवायाहुआ। लापगया। थ, रोना चिटना। सक• मा परअनिट् । मोवापि । पिराहुआ (वि.). अकुक्षत. फ्रान्तदर्शिन् (त्रि.) मन्तं अदीतं पश्यति गिनि। जो अष्ट, (म.) कुश-भावेज रोना । पद परना। आर+ पिछी बातको जानता है। परिवत । कवि । अतीताया. कर्मणि कापुनायागया (नि.). मान्ति, (स्त्री-) मम्+किन् । आश्मण । यहार करना। दशना । जाना । घटना। आकाशके गोलेमें ही ऋ५ (वि.) -धानो कू । टिन । मान । निर्दय । मेरहम । दूसरे के साथ और परनेवाला। गरम । गोल रेसा जहाँसे सूरजगी बना है. बाजपक्षी पक्षी । क्योरिपर्ने पाया मूर्य, मंगल, क्रिमि, (पु.) कम्हनि । इयादेः । मि1 फीडामोडा। पानि, राहु और केतु मह । मुनहरी परनेका परत. छोटी कोटी. कोय, (नि.) को+या। परीदनेराया कोई पौर। क्रिया, (डी.) +भावे दा टाप् । करना । पूराफरना । पाम । भारम्भ । पेष्टा । इन्द्रियोर म्यापार । धारा मोर,(पु.)(म.) कुश्मा होना । अगरना पनी- भर्थ । पदला । पूजा सिमलाना । इलाज परना। गर्भाधा- भाव । रोहयो पन् । अंक । गोर। राक्षम । एभर (पु.) मादि संसार । व्यवहारा एक भाग. पोरी दी और भुजाओंग मध्य । (खी.)। क्रियापद (पु.) म्यवहारका धीगरा पाद । (गाद लेख्य किये गये दावेको पूरा करना । ये तीन पाद है). वाराही (पु.वी.). मियाफल, (२.) (बामा फल । यहादसे ओडारमि, (पु. ) मोडे अरमियरूप । जिगरे पांव गोद होगा. उत्पमा पुष्पापुष्प. शिपायोग, (पु.) योगके लिये किसागरा देवतापा मारा- क्रोध, (पु.) भ+पम् । इसरेन भार (पुणे) पन आदि परने के लिये रित्ती नि मेरा मन मियाममभिदा, (पु.) सम्+अमि++पम् ।। एप्पा गुस्सा किसी कामो बार करना । "कियागमनिहारेण पिरा-बोधात्, (त्रि.) को रोपिने. पन्तं समेतक" माप:- की, मोल लेना । सावि. भ. अ. अनिद । मीणाति-मोधन, (पु.)ोर जर बनाया कोणीते । पीत् । भनेर. देसमशी मोधोबर पण । मे दुष्टतमीलेरी, कीर, सेलना । भ्या- पर• भर सेट् गीत रिकी। रो, मरेकी उमतिम मारर, बस (ो र साना), रथ (योनि), पीडन, (ग)ोरपुर । पहास । मसल रोलन । (गजबाद), पर निना। हाट. शेटना बोधन, (पु.) पुम्स्यु । मेरा श्रीन, (पु.)को सरीरमा । TRISAR पुत्री- तापमे मी एका मोल संगाई पीर (दि.). शोधपता, (.) INintere फीतानुसय, (पु.)ोते अनुसार पचनस शोपहन, (३.) (१ m. सदर सीप्रारकी कुटान मे 12 मररर. शिशसभेनेएस. धानसः, (.) ४ ...mr. - पालापोधी. - क्षेत्रिन्, (१६) - - राहताना. सेपिन्, (त्रि.) क्षेत्र+अस्सय इनि । मतवाला । क्षेत्रमा [क्षोदक्षम, (नि.)ो मते अन् । विचारक स्वामी. वाला । तस्यको निश्चय करनेकेलिये दोष टाके क्षेत्रिय, (पु.) परक्षेत्र देहान्तरे चिकिम्यः । परक्षेत्रः+ चन । पीसनलायक भ-निः । दूसरे देहमें इलज करनेटलायक बाध्य रोग। क्षोदिष्ठ, (नि.) अयं एषां अतिगयेन IE दूसरेके क्षेत्रमें सपना पुत्र । क्षेत्रन पुत्र । क्षेत्रमें उपजा देगः। बहुत छोटा । बहुन कर्माना. हुमा लाय. क्षोम, (पु.) क्षुम+पम् । व्यर्थ इधर टपर हिट क्षेप, (पु.) हिप्स्यम् । पिझेर। निन्दा । अहंसर । मय भादिका कारण अपने कामको न करने लांपना। देरी। मेला मेनना. घबराहट । लजुन. सेपः, (पु.) शिपिन् । फेंकना । इपर टपर हिटना। सोमण, (पु.) सोमयति भुम्+नि+यु । जो भगाँध दिटाना. मानदेवके वाणश मेद । सांस्यमें कहागया पति क्षेपक, (त्रि.) शिप् बुल् । फेंकनेवाला । मेजनेवाला। करनेवाला पुरुष । ईयर. गाली देनेरला । निरादर करनेवाला. भाद्र, (न) भुद्राभिः सरपाभिनित्तम् । शहद क्षेपक, (नि.) हिम्बुल् । फेंग्नवाला । पम् साईं ओसे बनायाहुआ। "अर" सहन. कन् । अन्य धादिमें प्रत्यक्तांके बिना किसी दूसरे टाटा-मोदन, (न.) शादाबायते जन्+ । सहनने ठर गया पट । गुन्टा जोडनेटायक अंक (कुक). मोम । शिक्षक. क्षेपणम्, (न.) मि त्यु । फेरना । मेजना । बठाना । सीधानु, (पु.) कर्म• । माक्षिक मा। मां- विटाना (समय). क्षेपण, (न.) क्षि युर । प्रेरण। नेजना । कना। क्षीम, (पु. न. ) धुमाया अतम्या विकारः भर । (अरसी) की साट ( वत्कल) का बनाना क्षेपनिका, (..) क्षिपठे यात्पन्नया । क्षिप् अनि । रेश्मीवन्न । धनका यमाहुआ काम । शु+म+ शिम (मा) पाते हैं। नौका बठानेका दः । सौर, (न• ) पुरेण नियतं अन् । टस्वरेने किया परमेह. (मुन्दन) आदि। हजामत. क्षेपणीय, (Eि) fr+अनीयर । निन्दिाल मन । क्षीरिकः, (पु.) पुरैग जीवति+भुरटर पर आदि नेमाय मन । रनेलायर कोई धोन. ता है। नापित । ना. ऐपिष्ट, (Fr.) अयंता अनि ति: इटन् । बहुत हणु, तंजारना । मदा पर गड मैट् । दणौती । (7) जाय" मयुरे पिटा देवता " दमा, (प्रो.) क्षमते मारे । दाम् अन् । उvy पृथिवी ऐम, (न.)+मन् । चोग्नानी गन्धव्य । मिदुई | दमामृत, (पु.) मा पृथिवी विनि पाल्पा पदको वरना (पु.न.) बुधत (न.) कुशल विस्य । जीविका पालन कताहै ।ना पर (वि.) मुलि । टपग (न.). पत्र । पहा. सेमिन, (वि.)नाइन् । मुभी। मुशी करना । मा. आ. ग. मैन । सम्प, (नि.)मा यद। मुम देनाय । सारान भरमापिट. पारगा। मम्मा ददरम। मापात् । शानि. दियह प्यारना । • मा. frz. संयोगः। पर. भा. धनिट । रियाना पकोटनामा पर• मा- दी. शीय, (fr.भगतं । दानें मका दिया था, (पु.)सदमन : पीसोनामी ! rrier (2.) खग, मामgir त्रामा मंत्र, (२.) मन्दयामाया यंता, (4)। पर F-(.) trickr | tोहित, (२.fenamitr वंत, मन- म. । (:.)। न ' स.मेmitr, दा, (.) interter, - मा. मेद। है -- हल। पाम. - खट, (पु.) पद अन् । अधापा । कफ । बलगम । (पु.) + । सूर्य । इन्द्रिय । शरीर । पुर । अन्य । प। रितु मानाश । मर्ग । मुरा (२.). खटि, (पु. स्त्री.) सदान् । दशवरथ । मुर्देश तहता. र, हगना । भ्वा० पर• भा• सेट् । रावराति. खटिक, (पु.) सद+टन् । कुबड़े हाथवाला । टेटे हाय- -, (पु.) ले आकाशे गच्यतीति । गम्+ । सूर्य । वाला । राडियामी । लिराने का दन्य (सी.), बना । पाण । पसी । वायु । सूर्य, चन्द्र भादिग्रह. सट्ट, पेरादेना। पुरा• उभ• सक० सेट् । सायति-ते । अचात. -प, (.) रागान् पाति । वाफ। गह: । "राग- मति" यही अर्थ. खदा, (बी.) सद+छन् । माठ काटके सग्डोंसे धनीहुई छेज । पलंग. पति, (बी.)स.। पक्षीकी चाले (गैन, प्रीन, शीन, संघीन, परिरीन, बिरीन, अवरीन, अतिरीन, डीन, सट्वान, (पु.) एक राजा । मानो छेजका अग है। नर. नक, गतागत, प्रावित, सम्पाद) तरह की परि- पजर । मनुष्यवी हरिओका पिंजरा । महादेवका शववि- दोंकी चालें. शेष । पीठका वंश । त• । सदाका अर (न.). गोल, (पु.) सं गोल इव । गोलेकी भांति आकारा। खट्वाभृत्, (पु.) राष्ट्रवाशं विभर्ति । भृ+क्विप्-नुक्र । भूगोलके ऊपर टहराहुभा गोलखरूपवाला आकाश. जो यहाज(नरपार) को धारण वर्ताहै। शिव । बटुकभैरव. र, बांधना । पुरा• उभ• सक० सेट् । सचयति-ते। खट्दारूद, (पु.) सदा अम् । आ++क। नित्यसमा । प्रमादवाला । भूलनेवाला । देपर्वाद । पलंगपर चढाहुभा. अबसवत्-त. नर, (पु.) पाचशे चरति । च । जो यात्रा- | खह, रिडकना। तोडना । भ्वा० आत्म सक सेट् । राण्डवे । में विचरना। राक्षस (पीलिङ्ग में ही होताहै)। असण्डिर. सूर्य । पायु । मह । खबर । आधारमें जानेहारा (नि.) खड्ग (पु.) खडिग : नि• नलोप । गैडेगा सींग। र, (पु.) से चरति-या खेचर । आकाशमें घूमने- गैंडेके सींगवाला । गैंडापशु । चोरनाम गधदव्य । लोह(न.). बाला । पसी । भैप । सूर्य । वायु । दल । भावी सरकोप, (पु.) त.। चमडेका बनाहुआ तरवारमा गंधर्व भादि. ढकना । मिआन । दाल चेत, (नि.) रा+क । धाहुआ। मिसाहुमा । बद्ध । खगपिधान, (न• ) सः पिधीयतेऽनेन । जिसके द्वारा दछ । संयुज. तरवार छिपाई जाती है । तरवारका राजाना । मियान. इ, मथन करना । रिसकना । भ्या. पर एक सेट् । खगिन, (पु.) सन+अस्वधे इनि । गैंडापशु । वह उन पनि । भगाजीत् । अराजीत कि जिसके पास तरवार है. न्, पिंगलाहोना । भा• इदिन पर• सक सेट् । सति । | खण्ड, (पु.) सडि+यम् । भेद । टुकड़ा । गमेका विकार। अराजीद. खाद । एकदेश. न्, (पु• स्त्री.) रामच । दधि । काछौ । यमरा। खण्डकर्ण, (पु.) रा. इब कर्ण कन्दो यस । जिसकी मधानी. जड उकडोंके समान है। शकरकन्दी । आलूका भेद. जलम्, (न.) सस्य जलम् । आकाशका जल। ओस । खण्डधारा, (बी.) मण्डे एकदेशे धारा यस्य । जिसकी आकाशसे टि. धार एकओर हो। कर्तरी । पैंची, जिक, (पु.) से आकाशे जीयते । अपम् । भाजो | खण्डन, (न• ) सण्डितल्युट् । तोडना । फाइना । रा गति सोऽस्पास्तीति टन् । लाजा। पुलिये । तील । करना । निकालना. योटीसी पायु चलनेपरही पे आकाश में उड़ने लगती है. | खण्डंपरशु, (पु.) सण्डयाज खण्ड पर भस्म । जिराफा ज्योतिस्, (पु.) आकाशे ज्योतिः अम्य । जिसका कुल्दास रटाहुआ है । महादेव । महादेव शिष्य परा. प्रकाश भाकारामें हो । रापोतकीट रिटाणा । एक्का. राम। "सण्डपयं" इसी अर्थ होता है. अ-क, (पु.) खजि-चालकी विकलता । टोकन चल- खण्डित, (नि.) गहिरू । फाटागया। तोडगया । सहना । अच् । ण्वुल् । पादविकलाला। लंगडा. दोदरद कियागया । रादिता नायिरा (सी.). अन, (पु.) राञ्ल्यु । एक पक्षी । ममोला । गमन । | खण्डीर, (पु.) पण सीपीगी। पीनमुद्र. जाना (न.). खतिलक, (पु.) पस दिला । सूर्य र, पाहना । ना. पर राक. सेट् । सदी । ससाठी- सद्, पा होना भक । मारना-राक मा• पर• नेट । भरारीन. सहति असाहीत्-अमीन - एच.१२ गदिर, - । । खट, (पु.) मुर्व() अटन् । वह गरे। पासही एक और नगर बम रहाही। और नदी बाहाधिबी । दिलोंका चूर्ण सुटानीचा निर्दय । वरहिम (त्रि.) “से लीयते टो। मुर और दूषण नाम प्रमिर राक्षस रावण प्रधान । बढे सलति, (पु.) स्वल् हिटना। पृ.। हद धोधन करनेदारा। साफ करनेहाय। परमा बलि, (पु.) सादा टनिता दल नाम खण्यानम्, (न.) सरवादितं यानम् । गोंसे चयई गई सलि(टी)न, (पु. न.) से मुखबिरा! या हम्बः जो मुसके कमें छिपी हो।पोरन में स्थित होरही कविका। कटियाल । बोला सदिया, (श्री.) खरः अयठे मुख्यते थम्स्व । जो सलिनी, (नी.) खटानां धान्यमनहरम नि । धान मरने के स्थानोंका अमूह। सन मदिर, (पु.) सद+किरण । गरमी सारी । एक पूरा गम, (T.) गन भनमें और इन्द्राचन्द्रमा. सहंकाराम खदिरसार, (पु.) ६० दिरा की गोंदा गार. वाला निपगमारानिया खद्योत, (पु.) में द्योतते । धुन् भन् । जो मागमै यन, पीडाशीना । घर. माग.. चमकता है। सूर्य। एक प्रकारका फीडा । टिटाना। गति । अगनी, पटयोजना. गजन, (म.) ग+गुट। मान । गुर। सधूप, (पु.) सं भाकाशं धूपयति । धूप+मम् । अागही गुमना. मेल. गर्नु-, (प्र. ) गया कह । गा! सन् , फाइना । गोदना भ्वा० उभ• सकमेटासनति । एकसारका कीटागामारा. असानीत् असनीत् । थसुनिष्ट । सायान् -पन्या, खजुम, (I.) गर्नु कादयन हुन। हर- खनक, (पु.) सन्झ्युन् । मूपिछ । मूमा । चूहा । सन्धि. तस्कर । रामलगाने वाला चोर । पृथिवीको फाउनेवाला सर्द, दंगन । ईकमारना । दमना (वा पर• ४. अनुग । गजटीहोर करनेहाग मारय म. (त्रि.). गर्दति । यमदर्शन, खनन, (न०) सन्मल्युट् । सोदना । पाटना । सन्नटगाना । सपर, (पु.) कारगन्दक ममान पृ• मन गटाकरना. खनि-नी, (स्त्री.)। मन्स वा प् । धातुरन यादिवे भोर । धूनं । नटमाट । मीमका पार पात्रा उपजनेका स्थान । खान । पृथिवीको फाइना । कान. छातामापरी. खनित्र, (न०) खन्न । अप्रमेद । योदनेका हथियार। खव- , जाना मा. पर• मझ• मैद । सर्वत। अवदारण । रंया. सर्प,-वं, (पु.) सवं (4)अन् । कुन्ना खपगग,(पु.) सस्य परागः । आपराकी धूरी । अंधकार. निधिमेद । संख्यानेद (हजार कोट)। नीच।। खपुष्पम् (न०) खस्य पुणम् । आकाशका फूल । कोईभी असंभव नामुमकिन वस्तु. खमूर्तिः, (नी• ) सम्य मूर्तिः आकाराकी मूर्ति (एकठ) शंकरका नाम. मी वहां हो । पर्वतक पासका गांव । मी टक खर, (पु.) सं मुखत्रिलं अतिशयेन अस्ति अस्यार। सल, चलना । हिरना । भ्या. पर• अक. सेंट् सं इन्द्रियं राति । रा+क वा । जिसके मुराका विठ बहुत असालोद पहा हो । गधा । गर्दम । रावय। राक्षसमेद । कटी- खल, (न.) सन्मभन् । धान मटनेस स्वच पृष्ठ । कामदेव । लपक्षी । दीक्ष्ण सर । कटिन सवाला (त्रि.). खस्दूपण, (पु.) सरं टग्रं दुरणं उन्मादकताहेनुहोपो यत्र । आधार शिरमाता है। सूर्य । " वर्गतः दाते * जहां वसन्त टन्माद (पागलपना) उपजहाहै । धत्तूरह । जिसका रंग आवायके समान है। तमाल. दोषवाटा (नि.). गंजका रोग । गंजा (त्रि.). सरध्वंसिन्, (पु.) सरं सरनानानं राइस वंध्यति । खलपू, (नि.) सलं भूमि पुनाति । ध्वनिम्ननिनि । खरनाम राक्षमको नारा करनेवाला । श्रीरामचन्द्रजी. मादी गंगादी. सरशद (पु.)सरम्य शन्दः । गी आवाज. खरताला, (श्री.) सुराग शाला । गोश तदेखा. दिया जाता है. रोम साई बाटी है। मयूरक्षिसा । मौरी कलगी वाना (नि.) । पहिर (चोटी) रमजानानी बैल. ओका समूह (१७) 1 अलु, (अन्य ) । सवाल । निश्चय । राश्यकी शोभा | खारीक, (वि.) गायां वार' । गरी)पमा परनेहारा । विशेष च्या निषेध । वारशे पूरा दरने. अन्य या ईवम् । गारी (१६ होण) माया पर पालाकारण. मोनेश क्षेत्रामागेमर पानआति. इलेकपोत, (पु.) राले धान्यमदनगाने यया पोसाकार, (पु.) गमगद। गदी अपार । मेगवे ता युगपत् पतन्ति। धान मलने के स्थानपर जैसे समान प्रतीत होती है. तर एबहीवार था गिरते हैं पसे विशेषणोंका एपही पिटरनामा पर• बदल अमेटीत. म्यानपर अन्यय होना । म प्रकारका एक म्यायमेद. सिद्, हीन होना । दिया. और या• अम. सा. अल्पा, (श्री.) पलाना समूहः यत् । धान मउनके अनि । गिते । गिन्ते । अगित । पिन स्थानका समूह. सिन, (नि:) गिद्+क। दम्ययुक्त । दुग पामा। बाल, (पु) गलती किप् । गन् । तीन er+ भालसी मेदयुरु. का एकप्रकारका का। काम । गा । पातक । पपी. सिल्, कणिये सुगना । दाना । ऐना । • पर. गा. हा। मशकः । औषध (दपाई ) मलनेका पात्र । गल। सेट् । मिति । भापती गरल. सिल, (नि.) कि । दल ममगार आपाप, (न.)त.। रातको भाकामे बहनेवाला आदि। रिजाल नदिपाया। पानी परफा योग, में सार । पहिले न देगा परिसि(0) परिचा, (स्त्री रास विद्या भावाशी विधा। एक ऋग्वेद आदि धीगून। यदी विद्यार। प्रसारमा ज्योशिशान. महाभारतमें हरिबंश नारायण (नपटने (m) पा (पु.) देशभेद । हिमालय के पागका देश । पतित पुसद (भाषा) सरना। r- क्षत्रिय मेद. अनिदागरते भगोर परवरस, (पु.) पोलनामी फलाला पक्षभेद । जिग | पुम् , पुराना । • पर.ग.in girl भयोजीत रएको महिफेन पदव है। फीम. पाण्डप, (पु.) इन्दरस्य । देहली नगरके पारावा मन. पु. पाना । कर पाना । • म..। गोयी-त । पोरन गात, (२.) गहा। तलावरी मारिए "पूर्त सातादिम" एगी. पुर. सरना सामान पंजाब... गर-रोदाहाभोग जानक, (पु.) गन+पम् । मार्थे पन् । परिणाम। पुर, (पु.) tre "सात पायी।" धमर्ण । पदार। ऋणी. गंधरव्य । म पलास गाद, नाभा. पर • रोट् । सागिरीत. पुरणार-रा, (f.) Trn river w! . वादक (पु.) । पाल् । माणसे नशामा। देवबाभनयलोर-famir remon करदार । नेपला । गया (f.):after" रिटीगरिमारत | पुरारिक, (पु.) Her atters साइतमोहता, (सी.) पादतं मोती सर पर जो नरो से FI अमिधीयते । पात्रो मुहीम मासरोग प्रसार ही निर मो भयो (EिRrICर मराजला. पापपर पादना, (पु.) परभरणे पुर। जिपके द्वारा गाया पुर-गर, सहना । भ ... जाद(..)मा ना भजन ।। (स) () पेपर, (३.) entern... पारिश (त्रि) गरि Eि: मार (पर) रमे पिfer takawrthaरमा पूर (सभा) aft. ४। (..) 'पि.)ोरम् । बनेपाम् (२.) खेर, भेगकार ग. Er.n.. मोकाम. गरि-1 (सी.)i writernet। देर, (3.) सेगी। हतार या मर (1) शे. भांर मन औरण ऐन(५१ है। ".fr बटक, (१५) - . रोटक, (पु.) भेट+बुल् । फलक । टाल | "टकं गगनग्यज, (T.) गगनण पर। पूर्णचापं च" इति दुर्गाध्यानमः का दाना है। मंग । बरमूयं । गा- खेद, (पु.) गिद्यम् । दुग । शोक । दिलकी पाराहट. गगनगद, (नि.) गगन मीती । गा सेय, (न.) सन्स्यन् । परिगा। गाई । गोदनलायक (+) मरगीमत ता. (दि.). सेल, हिलाना जाना । भ्या. पर० गक सेट । मेलति। गगनसिन्धु, (बी.) गगन frgI तारानाम. अरोलीत. खेलन, (न०) मेलमन्युट् । कीटा। मेल । मेलना. गगनम्य, (नि.) गगने निति । नेपालमाथिनामी अर्यमें. खेला, (पी.) कोटा। खेल गेलना. खेब्, सेवाकरना । मा० यात्म मा० सेट् । वेवते । गगनपर्शनः, (पु. ) गगनं माति-शन ३ अविष्ट । यचिवत. हारा । यायु । आट मरलोंमेंमें एक. सेसर, (पु.) खे आकाश व शीघ्रगामिलान गरति । गगनागना (श्री.) गगनम्य माना । म थसरा. स+ अन समा। जल्दी हटनेमे मानों आकाशमें चलती है । अश्वतर । रादर । थन्तर । एकप्रकारका प. गगनाम्यु, (न.) गगनम्य म। अ खोद, गतिप्रतियात चालका रुकना । भ्या• पर• सक. पांरा पानी. सेट् । सोटयति-ते । यचुनोटत्-न. गगनेचर, (पु.) गगने चरति । चर+टक खोटि-टी, (प्रो.) सोट्दव टीम् । चतुर नी । में विचरना है। सूर्य आदि पद । न- अकरमन्द और खचरी (बी.). पक्षी। देवता । राधिोंग चक्र. खोइ, चालका रुकना । भ्वा० पर० सक० सेट् । खोटति । गहा, (श्री.) गम् गन् । अपनेनामी प्र अखोटीन् । अचुखोडत्-त. प। दुर्गा । देवी. खोड, (त्रि.) खोड+अच् । बुध । लंगटा । लामा । लंदा. गगाज,(पु.) गमायां जायते । जन्+ खोर, गतिवैकल्य-चालका टूटना । भ्वा० पर० सक. उपना । मीम। कार्निकय । शिवीने सेट् । खोलति । असोलीत् । अनुसोलन-त. डाला यह महार न सका इमलिये उसने सोर-उ, (त्रि.) सौर (ल्यच् । सा। लंगा । दिया टस्से कार्तिकेय टपजा यह पुगणकथा सहा टूटा. गङ्गादत्त, (पु.) गदया दन। गंगाने प्या, कहना । अदा० पर० सक० सेट् । च्याति । अन्यन्, भीम वा कार्तिकेयका नाम. रयात, (त्रि०) ह्याक । ख्यातिसमन्वित । प्रतिद्धि-गगाद्वारम्, (.) गाया द्वारम् । वाटा। मशहर । कथित । वहागया. स्थान । हरिद्वार. स्यात, (नि.) स्या+या। प्रनिद । जाना गया। नामवाला गङ्गाधर, (पु.) हा धरति । धुन्+अन् पुकारा गया 1 कदा गया। जाना गया. शिवजी (इसने जटामें गंगाको धारण ख्याति, (श्री.) स्या+किन् । प्रशंसा । तुति । तारीफः । पुराण है"। समुद्र माहूरी । कहना. गनापुर, (पु.) गजायाः पुत्रः१० तगं ख्यापक, (त्रि.) म्या+गिच्म्युल् । पुक् च। प्रकाश भीम वा कार्तिकेय । एक प्रकारका नीच करनेहारा । प्रसिद्ध करनेवाला । मगदूर करनेहारा, जिमका काम मुद्दाको लेजाना है। यात्रियों ग ग, (वि.) गम् । (केवल सुमासमें पीछे आतादै ) जो गहाभृत् (पु.) गहां विभर्ति-+किए । ग. जाता। जानेवाला। हिरना । होना। टहरना। करनेवाला शंकर महादेव, रहना । गंधरं । गणेशजीका नाम । छन्दोप्रन्यमें गुरु गहाम्यु-ममम् (२०) गडामा सम्यु+अम्म अक्षरकटिय चिह (पु.) गीत (न.). ज। शुद्ध वृष्टिका जल जो अस्मुवा ui गगन-ग,(न.) गम् युन् । गान्तादेवः। कई कहते गिरता है. हैं कि "ग" का मूल है गे "फागुने गगने फेने गहालहरी, (ना.) गङ्गायाः इलोकान्मिय ५ पलनियन्ति दबंगः" । भातार । पोलादासन्य । पाथ पण्डितका बनाया हुमा एक प्रकारका काय र सगे। पदिस सनिमें दे. करानेवाला ब्राह्मण तापनार,] सायनार:, (पु.)माया आतारः । गलाका पृथिवीपर गजाह, (.) गजगहिता भाका रम । हामी गाय उतरना. जिसका नाम हो। हस्तिनापुर (दि)। "ग" हाएफम्, (न.) गायाः भर अट मोचाना रामहः। यही भर्थ. गगाकी सुदिमें भाट लोश मम्ह. गज, (पु.) गजि+पम्। वहा । आदर न करना। हासागर, (पु.) पायाः सागर । यह स्थान जहाँ "आधारे घ" भाण्डागार । पात्रों पर । मनि । न । समुझमें गहा गिरती है. गायें बांधनेकी गाला । नीचौंका पर काम रछ, (पु.) गम् । क्षरत । लीलावती में प्रतिम शाला (खी.) राप् । दुकान । बाजार। मो. रमेद. | गर, पचना वाहिर निकालना । रग निकालना । म.पर. ज, मदमे पदारना । भ्या• पर अपेद । गजति । सर.. मेट् । गाति । मगार-मगन् । मुर• पर.। अगाजीत् । जगजीत गयी"-बिचानाबाना." जि, (.) ग+अ । हाथी । भाटकी मेरमा ( गिन-गद, (पु.) ग+भ प्रारकी म ()। सी)। मनुष्यची ३. गुलनकका परिमाण । एक विना रोषागाई।व्यापार करा पाया दय जिसे महादेवने माररियाथा. दशमेद. जिच्छापा, (मो.) भाम् मीनेही मपानवाली गति-रि, (पु.) (ख) र प्रयोदशी (इस्में धार रनेरा विशेष पुण्य होनाद) पुरतामे थोडा उनेरेसो समया एम (3) जिता (बी.) गणानां समूदः तम् । हाधिओंका समूह. भादिपच्या जिदन्त, (पु.) गजम्प एती वदनी बस्य । गोशा- (गा, (पु.) ग+31 मागको नेपाल रोग । र जी । हाथीदांतके समान दातवाला (वि.) ६.। गद्ध प) मम रोगरि Ar:0ग । दुला। दादीमा दाँत । परिदन (पु.), जिपुट, (पु.) हापभाषा पढा. गहरि(लि), (डी.) it () सिमिया, (बी.)६.क्ष. रन् । मेरे पी0 जानेही मर (0) जिम्धिनी, (सी.) गमा बध्यन्तेऽत्र । स्युर+११ । गण, गिनना । पुरा• उभ• • । गए। हादीबधिनेकी वाला सालापेला. भीगणानामग-त. जिमस्या, (पी.) गर्भया । जिसे हाथी साते। गण, गणपति वरि बा । रि। भूनगगया। गिनती। -ए..... जपालभा, (डी.) त• बसे पीजवानी गिरिक पो, १ (स) Reir दली. भ्वादि अदादि माद पर PALIKA राजमाप (न.) गजेन हसिनामव नृपेण सहित भार. भादि मामले मात्र (रे) २ यो नाम रस पीनामी राजा जिरा नाम प्रसिद्ध भशापाले "म"tirtrre भा। मिनापुर परणयता दिली कुरसी राजधानी. गणक, (पु) पnि**Fre सोपी जा (१)न, (पु.) रायते । मगि पर । बिपी राठे था। शेरवाना पणदेयता, (.) देवादारसे re..in (श्री.), नु, मि, मन... . गगाजीप, (पु.) गनपाननिरामी बढे । * अम् । न मेरो रारा इन होगा। समाधि भनर मा-rrrr पासIrisोपाल, ". गजानन, (पु.) RRR NA मुलं मागताप, (पु.)htrative Pewt. समान बिग पुरा । "स Amरा पीस महामेरा "पुरा -५. समारोह (.) Tr Center राwि wer Pr"Termire . .re- - गदा, (धी.) गद अच्+टा । अपने नामने गद्दभ्यनि, (पु.) गदा अन्यतः ध्वनिः। कृषिका रचाथा पादरदित पदममूद। यह मार गणप.] (1) गणरूप, (पु.) गणा यहनि पाणि थम् । जिगके बहुनगे ! गाटम्ग, (ल.) गा: अन्यतः मूर्म ।र रूप हो। म थाकका द्रग्न. (पनही ) बामग. गणशस्, (थव्य०) गणान् गणान् इति गग+राम् । अनेक गण्डोल, (I.) गाड वत । बहुववार. पर्यनग गिरेहुए, मोटे पाया RATE EFRE गणान, (नि.) गाय उत्राट, गानां धाऽनं । बहुतों के गाडम्याटी, (पी.) गरम लिये दियागया था। बहुतोंका अन । मट (भग्वार ) गल कपोल. आदिमें यहुतों के लिये दिया गया था। यह अन लिगण्ड, (पु. वी.) गरि+। गोट । स्नान जिसके यहुतसे म्यामी हो । " गणानं गणिनं ति" मनुने निपिर अनमें गिना दे.. गदपर, (पु.) गादयुमानि पानि सम्म । कोडोंवाले हो । केनुमा । शिशुक. गणिका, (नी.) गंगः गमूहोऽप्रत्यस्याः मनृपेन टन् । जिसके बहुतमे पति हो । वेश्या । कंचनी ।। गण्डप, (पु.) गपिन् । मरने हथिनी. पुरी हाथी के मंडरी नोक । आपकी अंगुली. गणित, (न०) गणमाये क । गिनना । "करणे ." गण्य, (नि.) गणपन् । मभ्येय । मग घरने के लायक व्यक्त और अन्यचरूप अंकशान । पाटीगणित रेमा और पीजगणित | "कर्मणि के" गिनती कियागया। गत, (नि.) गम+च । जानागया । पायदुआ गिनागया (नि.). गया । बाम कियागया। गिरगया। समान गणेय, (नि.) गण्य | निलायक । गणनीय. गतागत, (न.) गनं वागतं च । जाना और गणे, (नि.) गण+एर । कनेरका वृक्ष । हदिनी । वेश्या। गया और आया। पलीकी चालवा मेद. कंचनी. गतातंया, (श्री.) नोरयं आनंवः तफलं मी गणेश, (पु.) गणानां देशः । गणोंग मालिक । अपने गत आयो यस्याः । जिसकी गर्भ धारण करने के नामसे प्रसिद्ध देवता। शिवजी. नहि रही । बाम । बूढी. गण्ड, (पु.) गठि+अच् । हाधीठी गाल । गाला । गण्डीरा गति, (श्री.) गम्+भावादी सिन् । जाना । पय । गेहा । चिढ़ । निशान । वीर । घोडेका भूपण (लेवर) ज्ञान । पहुंचना । दशा । यात्रा । सफर । उस वृद्धदा । युलथुला । स्फोटक । फोडा। विष्कम्भादिमें एक कामका फल. योग । पिटक । संकटी. गद, (पु.) गद अन् । श्रीकृष्णका छोटा भाई है। गण्डफ, (पु.) गण्ड-साथै क बिन्न । गण्ड । चित । बीमारी । “भा क"। कयन । कहना । विष । दाग । फोटा । रियोग । चार कौडीका गंडा. गण्डक, (पु.) गह+साथै कन् । अपने नामा पशु । सोहेके कीलवारी। लोहा भन्न । पाटलाक्ष। गा। गंडा (चार कोटी) । अन्तराय । एकावट । अंग । गदा. निमान. गदाग्रज, (पु.) : त । गदका बटा भाई । श्री गण्डकी, (मी.) एक नदीका नाम जो गंगामें यहती है। गडी. | गदाधर, (पु.) गदा घरतीति । पृ. अन् । । । गण्डकीशिला, (श्री.) गाडक्या उसमा मिला । गण्ड श्रीकृष्ण कीमें उपमहुरं मिला (पत्थरका इकडा)। शाल. गदाराति, (पु.).त.। ओपय । दवाई. प्रामविला. गडद, (इ.) गद्दत्सव्यकं गदावि छ । अन् या I गण्डगात्र, (न.) गाहाः सोटवा गाऽवयवे यम्य । और अस्फुट शदी ऐसी आवाज जो प्रगट जिसके शरीरपर सवागर्भ फोटे हों। मीनारल। माता स्य सार मुनाईन पटे। गिरगिटाना. निष्टना. गण्डमिति, (डी.) प्रशसः गहः । हाठिी गालका स्का कसहिन भावाना टीकन निकलना. फटना जिसमें मद बता है । डार मानि ही Ta (4) गद्यत् । इयनीय वाहनेलायक । पर गाल। बहुत टंदा, चोरी और मुन्दर हाकी गाल. गण्डमाला, (श्री.) गाना डोटकाना मात्य । पोते. भोक नदि. बारारा रोग त्रिम पो. नि. गन्त्री, (प्री) गम्यतेऽनया हुन् । सीए । वैवाने और सायक गागागानेवाली, - श्रीरप, (१५) [गन्धाजीय, गद्गारगारी देवोंका गायन. श्रीरथ, (पु.) गन्त्री रप व अमीरधानप्रापरला । गन्धराज, (म.)गंधेन राजते । राज्यच् । जो गंधसे रथरी माई पाहे गये स्थानपर पहुंचा देनेहारा । शंका। चमकता है। चंदन । गुग्गल । अपने नामका पक्ष. गन्धर्ष, (पु.) गंध अर्वति । जाना। अन् । मृग- न्दि, पर करना । पुरा• भामअक. सेट् । गन्धयते । भेद । घोग। कोइल। सर्गका गया। देवयोनिमेद। अजगन्या. निए, हसना । भ्वा०र० स० सेट् । गन्धति । मगधीत, गन्धपेनगर, (पु.न.) गंधर्वाण नगर हव । मानी ग्ध, (पु.) गन्ध अन् । सम्बन्ध । सेश । गंधक महं- गंधर्वाका नगर है। शून्यका आश्रयपुरका खरूप । नीते बार । मुहागना । पिसेगरे पन्दन भादिरा ननिमदन्धि- पीले आदिबादलोरी रचनाका भेद । इन्द्रजाल । “गंध- यसे ग्रहण करने योग्य गुणभेद (बह गन्ध पोच प्रश्न. र्यपुरम्" इसी अर्थ में है. रखा है, जो पूर्ण कियागया, दिमागया, जलाया । गन्धर्वलोक, (पु.) त• । गुअलोकके ऊपर विद्याध. रोरागया, भलीभांति मलागया, प्राणियों के अंगोंसे उपना रोके लोकके नीचेका स्थान. हुआ) पिसाहुला पन्दन आदि. गन्धर्ववेदः (पु.)त.। सामवेदका उपवेद । संगीत. धकचूर्ण, (पु.) गन्धरधानपूर्णः । ऐसा पूर्ण कि विद्या । गाधर्व. जिसमें गंधक बहुत हो। वारदनामी पदार्थ, गन्धलोलुपा, (बी.) गन्धे लोलपा । गन्धका लालच धिकाठ, (न.) गंधयुकं काष्ठं कर्म गुरुचंदन. करनेवाली। मश्खी. न्धमा, (श्री.) गंधं जानाति अनया । पन का जिस्से गन्धयती, (बी.) गं+मनुए-मको ष होता है ।न्यासी गंधको जानता है। नातिका नाक. माता । पृथिवी । वायु और वरुणकी नगरी । मुरा । शराम. धर्तल, (न.) गंधयुक्तम्प चंदनम्य भमिसयोगेन जनित गन्धवल्कल, (न.) गंधो वल्कलेऽस्य । जिसके छिलकेमे तेलं । गंधवाले चंदन आग संयोगसे उत्पम हुमा सेत। गंध हो । दारचीनी । दालचीनीका छिलका अत्तर भादि. गन्धयह (पु.) गंध वहति । वह अच् । ६ त•। वायु। धित्व, (बी.) गंधान्विता सरु यस्याः । जिसका हवा । गंधवाला नायक (सामी) आदि (नि.). छिलका बंधवाला हो। एला। इलायची. गन्धयः (पु.) गधं वहति । गन्धको उठानेवाला । रिधदला, (स्त्री.) गन्धयु दलं यस्याः । जिसके पत्तोंमें वायुवा. गंध हो । अजमोदा । अनवाईन । जवेन. गन्धयारि, (न.) गंधवासितं पारि । गंधवाले न्यसे गुर्ग- पन्धन, (न.) गन्ध भावादिषु स्युट् । उत्माह । दिटेरी । धीवाला जल (पानी). प्रकाशन । जाहिर करना । सूचन । मुगलखोरी। हिंसा । गन्धयाह. (पु.) गन्धं पहति । परभण् । उप० । हवा । वायु । जो गंधको उटातीहै। नासिका । नाक । पन्धपापाण, (पु.) गंधयुक्त पाषाण' । गंधवाला पत्थर। (स्त्री.). गंधक. गन्धशाली, (पु.) गंधप्रधान शालिः ।बरी मुगंधीवाडे गन्धपन्धु, (पु.). थापा । आम दरस्त. चावउ आमोदवारले धान्यभेद । वासमती आदि. गन्धयोगा, (श्री.) गंधो पीजे यस्याः । जिराके दीर गन्धसार, (पु.) गंधयुक्तः सारो यम्प । जिसका सार (बीमों ) में गंध हो । मेषिका साग । मेथी. पंधवाला हो। चंदनका पक्ष. गन्धमादन, (पु• न.) गधेन मादयति । म मिन् युट। गन्धसोम, (म.) गंधार्थ सोमो विधुर्यस्य । पन्द्रमा जिस गंधसे जो मत का है। पर्वतभेद । भ्रमर । भौंरा। को मुगंधीको बहाता है। मुद (एल), चन्द्रमाके उदय वानर । बंदर । गंधक (पु.) होनेसे इस गंध होताद. बान्धमादिनी, (बी.) गंधेन मादयति । मद्+गिन्+ णिनि । लाक्षा। छारा । मुरानामी गंधवाला द्रव्य. | गन्धहारिका, (श्री.) गन्धं गाधमांसी, (बी.) गंधयुता मासी । कर्म । जटामांसी. तयार रनेवाली. भेद । एक पनराति. गन्धा, (2) गंविध गन्धमुखी, (श्री.) गंभो मुसेऽस्याः । जिसके ममें गंध पलियाम्बेसी हो । पुरंदरी । तुंगा । एस. गन्धमृग, (पु.)गंधप्रधानो मृगः परिण) इयोसे बोता है। जिससे बहुत गंध निकला। मारना. बारण1बम्पर जो तिनको मूल. | गरदपुराण, (२०) गरडेन मोर पुरामन । म होना । पदिादा गरुन। गिगमात्राएको गादि (श्री.) गर्ग इति शन्दं राति । Retail गम्दा। न्या. पर. ग. अनिदागजी। अग.गज, बजारकी धायाज काना। मा.पर .. गति । अगीन् । “ग गर्ने क्षणं मह" देगा "ke." मनाती। मनगारा दादी। गन्धान्य, गन्धादय, (पु.)गंधेन यायः । गंधमे मराहुआ । चंद-गम्भीर, (नि.) गीजलं अत्र । मन्ना नरक्ष । नागरंग वृक्ष । गंधवाला दरन (त्रि.)। आगम हुआ नि. जहां पानी जाता है। स्वर्णयुथी (स्त्री०). मन्द । गहिरा। जम्बीर । कमल। शरिर गन्धाक्ष्य, (नि.) गन्धेन मान्यः पूर्णः । मुगन्धिमे मरा (पु.)। "मरे गायव नामा च पिता हुआ। बहुत सुगदार. गम्मारवे दिन, (पु.) गम्मी (मन्दं ) बना गन्धाधिकम्, (न.) गन्धे अधिक । बहुन गंधवाटा । गिन् । अभ्यास की गई शिक्षा भी जो:.:. एकप्रकारका अत्तर. ताद ऐसा हाथी । चमा फाइनमें से अन्न । गन्धापयर्पण, (न.) गन्, अपकर्षति । गन्धको निवा- काटनेमें भी जो अपनेको नहिं ममन्नता उने न रण करना. तामी कहते हैं ऐमा हाथी । "गंभीर दिदा." गन्धाम्बु, (न०) (गन्धयुक्त अयु) गंयनाला जल । गय, (पु.) एक दलका मेद । वानरनेद । मुगंधिवाला (सुशबूदार ) जल. राजा । तीर्थरिशेष (श्री) टा. गन्धार, (पु.) गंधं ऋच्छति । ऋथि । तप• राग। गर, (पु.) ग.निगलना । मोरना। पुकारना। बुन्द्रदाम सिन्दूर । एक प्रकारका सर ( आशन ) देशमेर. यव् वा । विष । जहर । रोग। बीमारी । याबदा गन्धारमन्, (पु.) गन्मयान अदमा । मुगंधिवाला गरल, (न.) गिरति जीवनं । गचलन् । पाया । सल्फर । गंधक निगलनाय । विष । जहर । सर्पविष । म गत्याष्टकम्, (न.) गधानां मयानां समूहः । आट मुग- धिवाले द्रव्य जो देवताओंपर चढाये जाते हैं. गरिमन्, (५०) गुरोमायः इमनिन् । गरदेश । में गन्धाटक, (न• ) गंधानां (गंघद्रव्याणां ) अष्टकं । थाट गरिष्ट, (वि.) अतिशयेन गुहः इष्टन् । बहुम्ही है होना । गौरव । बाई. मुगंधीवाले द्रव्य । चंदन भादि बाट गंधवाली चीज. गन्धिनी, (सी० ) गंधो विद्यते अस्याः इनिः । जिसका गंध गुरुतर" "गरीयान्" हो। मुरानामी गंधवागद्रव्य । शराब. गरुड, (पु.) गया हयते । डी • रारे गन्धेम, (पु.) गन्धप्रधानः इमः । गंधप्रधान हामी । कश्यपका वेटा बिनताके गर्ममे टपजा पक्षियोंकारा बहुत ही उत्तम हाथी. गरड यज, (पु.) गाडी पत्र. (A) गन्योत्तमा, (श्री.) गंधेन रतमा उत्कृष्टय । बहुतही गंध. बिसका चिह गट है। वि. वाली । मदिरा (मय ) | राय, गमस्ति, (पु.) गम्यते (हायवे) गम्-ट-गः (विषयः) हुआ पुराण । पुराणों में से एक. तं यति ( मासयति ) मगफिन् । विषय (पदार्थ को गरुडाप्रज, (पु. ) ६ त० । पिनताका बड़ा पुत्र । सारथी अरुण प्राश करनेवाली। किरण । मयं. गमस्निमत्, (पु.) गनिमतुप् । किरणोंवारा । सूर्य. गर, (पु. ) -य-या उति । पहिओंके आरशने में गमस्तिहान, (पु.) गमनयो हना छ यस्य । जसको कारण पर। पंस. मंचनेमे जिगरी किरणें मानों दाथ हैं। मूर्य । सूरज. गरुम, (पु.) गरन् अनि अन्य मनु मोर गीप (वि.) पति जलं अ। गम् इन् । भाना- गर्ग, (पु.) P+ग ! प्रमाका पुत्र । दावनिप्र स्थान । नीचरी जगद। जिसका तला न प्रभा जाय । गहन । जहां प्रवेश करना कठिन हो। न शिदनका पात्र । कला । पE मच्छय मेद । । हटाया जानदाए. पशु (पु.). मन् । उगमगत: . गम, (पु.) एक प्रा नमा। जीवनकी गर, (२.) गरिन् । गर्ग जायति । पाटीयापासना मागं माध पाट. गाजर । एका मूल (). गम, (नि.) मति (बोपति) +frataयुन्। गांजन, (न.) गह। पालकी भावान। परममावन मे समण हुआ" यह भयाबदबाय. मुनितिर गमना.

(100) गिर्द - . गर्भ स्थान. त. (पु.) एकनन् । पृधियीका दिन । गटा। लिभोंके गर्भयती, (वी.) गी विद्यते अगः । मनुस् । मको नितम्प(पूर गएके स्वरूपका एक अंश । रोगभेद। होता है। सापनगर्भा खी। यथा अमेवाली औरत । आ. हामिलह. “६, साब्द परना । पुरा• उभ• पक्षे• भ्वा० ५०क्षा. गर्भशय्या, (बी.) गर्भस्य शय्या इष स्थानम । गर्भका यह सेट् । गर्दयति-ते । गर्दी । मजगदत्-त. स्थान जो ऐत्रके समान है। "शराकी नाभीके समान भ, (पु.) गर्द+भभच् । गधा । गर्दभ । गंधमा भेद। तीन आवर्त (धेरे ) हैं, इस प्रकारको योनि है, इराके पिशावुमुद तीसरे आवर्तम गर्भशया (गर्भको ऐज) है, जहाँ गर्भवा दिभाण्ड, गर्दभं (गंधविशेष ) समाते । भम् । यो निवाम होताहै." पार न हुआ। जिराके पत्ते घट (बोट) के समान हो गर्भनाय, (पु.) पु+पम् ६ त.। प्रसूतिगाल भाने के ऐसा पक्ष पाइला नामसे प्रसिद्ध पहिले रोग आदिसे गर्भका गिरना. दिभी, (ची. ) गर्द+अभच् । सीए । गोमययोट । गोहेका गर्भनायिन् , (पु.) गर्भ घावयति । पु+गिन्+पिनि । - की। चिसोदियारी । अपराजिता । रागभी। गधी. गर्भको गिरा देता है। हिन्ताल वृक्ष. द, लिप्या लाभ करने की इच्छा करना।नुरा• उभ• सक. सेट् । गर्भपति-ते । बजगदंतू-त. गर्भागार, (न.) गर्भ इवागार । परका मध्य (पीच) दि, (पु.) +पष्+अय् था बहुत चाह । भतिशय भाग । निवाग करनेका स्थान (जगह) । गर्भरूपी पर। स्पृहा । गर्भमाण्ड नामी वृक्ष. तद्धन, (नि.) गम्युम् । उम्पा लोभी. गर्माधान, (न.) गर्भः शुद्धतया आधीयतेऽनेन । जिस- मि, Z+भन् । भ्रूण । तुक ( पीर्य) पौर शोणित (लोह) के द्वारा शुद्ध होकर गर्भ रहगजाताहै। दाधारक । के मेलगे उपमा पारीरके जन्म करनेहारा मासा संस्कारोंमसे गर्भके पामको संस्कृत (साफ) करके वीर्य। पिण्ड (गोलापचा। पुक्षि । बोरा । नाटय में सधिका सींचना. भेद । मम । भाग । पुत्र । गंगा धादि पवित्र नदिओं के गर्भाशय, (पु.) गर्भ आशेतेऽत्र । दी+अन् । जहाँ 3 पागका स्थान. गर्भ सोता है । गर्भका वेटन (परदा पेरनेपाल ) गर्भक, (पु.) गर्भ (पेशमध्ये ) कायनि । । चमन । जरायु । जेर फेोके पीचकी माला फेशमध्यस्थ मास्य. गर्भाष्टम, (पु.) गीत (गर्भप्रहणसमयान ) म गर्भकाल,(पु.) गर्भस्य काल: प.त. गर्भका समय. गर्भधारण करने के समय भाटवा । गर्भप्राणने टेबर गर्मलेशः, (पु.) गर्भम्य सः । गर्भकाश । बमा आठवा महीना अथवा पर्ष (परिरा)। "गारमेर टस होनेर समयमा इ.रा. पुर्वी" मनु- गर्मक्षय (पु.) गर्भस्य सयः । गभंगा माश होजाना या गर्भिणी, (बी.) गर्भावस्याः इति । जिसे गर्भ हो । । गिरजाना. गर्भवाली बौदामिलद. गर्भगृह, (म.) गर्भ इव गृहम् । गर्भधी माई पर । परके गर्भेम्बरः, (पु.) गर्भान् एव ईश्वर । जन्मरा पनी । जन्म- मध्यका भाग । पीचवा मरा. सेही पावती. 'गर्भधातिनी, (बी.) गर्भ रन्ति । एन्+भिनि । लाग, मदकरना । अहंकार करना । भ्या• पर• सक. सेट। लिका पक्ष. गर्पति भगवान गर्भच्युत, (नि.) गर्भत युतः । गर्भसे गिर पटा सा गम्, अहंकार करना । धुरा• भाम सेट् । गर्षयते । मन- गत. गर्भपोषणं, (न•) गर्भम्य पोषणभरणम् । गर्भश्च पुट गर्य, आना-गति । भ्या- पर... सेट् । गति । भगवान्, करना गर्भवा पासना. गर्ष, (पु.) गई बारपाना+पम् । महंगर मी. गर्भद, (पु.) गर्भ पाति र पक्ष । गर्न गर्ष, (पु.) ग+पन् । निमान । अरंकार । मगरी । देनेहारा अधांत इसके रोषन गर्न हो जाता है। पभेद. "धन, प, अमानी,पल, शिक्षा भीरबलको पार गर्मपातक, (पु.) गर्भ पातयति। पत्+मिम् गुस् । दगरों कुलन समाना" हम प्रसर रामे जो गर्भगो गिरा देवा । रसशोभाशन । हाल उना। गा, निन्दा करना । पुरा. दा. भाम. म. । लाल मुद्दोजना. गयदे। अगला गईने । अगा. पप्र.१२ - गहण, गवल, गल, गीग (न.). गवेपणा, (धी.) गप+युन्टाप । मन्वेषण हितकारी, गौशाये। गोसम्बन्धीय । दूध गदित, (त्रि.) मा पतित । गिरपटाहिटगा गह, गहन गादा होना (जैसा कि जंग) मिल होना। गुरा• टग. य. सदावत गहन, (न.) गाह+यु -पृ. 7:13 दु.गाडगम प्रशाजी दागिर होना ( १७८) " गहणं-गा, (म० श्री०) गई युट्, अन । निन्दा । गलिनयायन, (नि.) गरि योदन स्य उपालम्भ । धिकार । गाली. यांचन (जरानी ) नट टोनुका । नहर गीं, (श्री.) गई+भ । निन्दा । गाली. गलिनययम्, (पि.) गरिनं क्यः दया गहित, (नि.) गई+रु | निन्दा कियागया । उपासम्म | जा मुरीदे. कियागया। तिरस्कार कियागया । निषेध कियागया । गल्या, (श्री. ) गलाना ( कण्टाना ) मा ।।। निकट । युरा । तं० न० । उपालंभ वा पापजनक कृत्योंगे दाय (समर). भराहुया काम. गही, (त्रि०) गह+ग्यत् । निन्दाके योग्य । भयंत नीय। गल, (पु.) गल्ल । गाल 1 गडी गमाडा नालायक. गलक, (पु.) गलति+किप-गट तं लावि गांवादिन, (नि.) गद्यं वदति । यद्+गिनि । निन्दा- म्याय कन् । चपर। पानपात्र । मदारीनं . के लायक बोरनाहै। सराव वचन बोलनेवाला। परावका पियाला. निंद्यवादी । “कद्द". गयय, (पु.) गु+भयन् । गां मनान मटेन गल, ग्याना । बहाना । गालना । भ्या. पर० सक० सेट् । बिना पशुका भेद । एकप्रकारका वानर, गलति अगालीत. (पु.) गुड्-गन्दकरना+अर ते सति । र (पु.) गल अच् । कण्ट । गला । सरस (धुना) बदा गन्द करनेहारा । मनमहिष । बना मंत्र दाना । मच्छी. गलफ, (पु.) गल्क्युन्मक । गला। कण्ठ । गर्दन । गयाराति, (नि.) गोः आवृतिः दव आदि. ५ एक प्रकारकी मल्ही. स० । गाकी आकृति ( शकल) वाला. गलकम्बल, (पु.) गठे कम्बउ इव । गलमें मानों कंबल / गयाक्ष, (पु.) गया किरणानां भक्षि स्या है। सामागौनांके गलेमें रहनेहारा मांसका गोटा. किरणों की आस अथांन निकलनेका द्वार है।। गलगण्ड, (पु.)त.। (एरम) एक प्रकाररा रोग. ममान कुलीन नियोंके देखनेका स्थान ! गलग्रह, (पु.) जहाँ श्रारम्भ होकर प्रत्यारंग (पीछे वातायन. हटना) प्रतीत नहिं होता उसे गादि सम्पूर्ण मुनिओने गयेन्द्रः, (पु.) गया इन्द्रः ५० न० । गो गलप्रद कहाहै । फिर न (प्रसारम्भ ) लौटकर शुरु (मालिक)। उत्कृष्ट वृषभ । वेल व साह, होनेवाला पदार्थ । कृष्णपक्षकी चतुर्थी सप्तमी धादि तीन | गयेशः ईश्वरः, (पु.)। गवा ईश. या दिन, प्रयोदशी आदि घर दिनमें आट गलग्रह कहे जाते गौओंकासामी (मालिक). हैं । थाप दालीगई विपत्ति । मच्छीकी चटनी. गयेष, अन्वेषण । तालाशकरना । गोजनाना।। गलनं, (न.) गल्भाव ल्युट्+अन । घृना । गिरना आत्म० सेट् । गर्वपयते । अजगदेषत. पिगलना. गलन्तिफा, (घा.) गल्यो । अल्पाय कन् । सोजना । द्वंट. धोटे जलकी धारावाली गगरिया । शारा । करी । “देवे | गव्य, (नि.) गोविकारः गरि भव । दया गलनि" स्मृतिः वा सर्वत्र यत् । गाका विकार, गामें गल(ले)लनी, (धी.) गले मनो यम्याः या अन्दर स।निसके गले में सन (मम्मा) हो। एगी। यकी. ने । गोवर । गोमूत्र । पीला. गलहम्न, (पु.) गले हमः । निकारने के लिये गरेमें | गम्यूति, (प्रो.) गोयूनिः । कोशयुग । दियागया हाय । गलट्या. गांए मेलें. गया. गलितपुष्टं, (न.) गतिं कुष्क. ग. निदपाय (थे. अजगह-त. इसस)ी: त्रिम अंगुटिये गा मार्गद. गतिनावदल, (नि.) गगनमाः दनाथ यम्य ३.स.निमो ननन रांड गल गये. 'ईश्वरः ।

. जर प्रविध भा. 1 (5.) यान् । नि. नि। कुत्र। गाषि, (तु.) पन्का मा रामारा।। न । रोना। रिममित्रा पिताTEr. पागपाटिन प्यान. गापित, (पु.) गया । TR rtm '', जाना जा. भाम• • अनिद । गा । भगाम. बेटा मित्र. मुनिकतारकामा । • जन्महोना । मार. जुनो। गाधेय, (प.)विस Icart • जगाभिमागणी गान, (न.) #rget Inid. य, (पु.) गाद । गागा पुत्र । नीम ff. गाम्दिनी, (.) Intern योना । धपा गाग्य, (12) rvin: (नि.) me+r की या भा। महाया पाfree fm Pirpret मरगा tri (ग) परिक्षाय । ।पा। वंद गार Irrrrrr... मोतियारियागया । "ltanate mhamirrr...! गान्धा. (f.) Tar.... ..। पिन, (त्रि.)-ती। (मो.)पति भण । ला गम्भ reart (ना)मा मामी (मास) (गणेम)बाला. माधार(पु.) Nire...- .n पित्य, (पु.) गरि-पर । गणेशानी पूजा Birtin; rivenoj mire Err, prema पानवाला ार (म.) गणसी पगा । माता गायर HIrnmUTTIN 21.1 रोना रोना. (२.).rr.. पणिया (1.) गपिका समयम । पया (गाभाग (पु.) er rani ." जी) मोगा पद. माधम . "" or .. froi), (पु. म. ) Trth RELATurar" वा पूर्वपदरी । गौरपाला। मन। भाप एएगाधारी, (t. It wran.ve) : प्रसार Curr पणी(for)पिन, (पु.) for (t) निगारेप, 15.। नमस mratherra-n..... गलाय. (f.)-गम्य । गाने कोय | जो गाजाधिश, S. ) raam.. (4.) प्री-() has I (5) Re ths. ... ... .. रेला na, लस्य मा रोज • भम.. गीर. ( ... ... ....... गाथा 1(60) गा,...... मापE-fe .(5.) uts. गाए.s.in ... tat प.(ix.tarururter जापा.(..)ce In It ग. Entent 3)minttrict ..

निम:... ............" - देगानामा । भेदने बहुत प्रभारी गीगायन, (न.)मीनयमान:Miner (१८) गारिफ, (.) न (Ava) जीवति । गिरिना, (पु.) मिग हें । निगान धित निकायले मबार विषय. गारम्मत, (2.) मामान पठा अन्न । डिमाता गिरिसुन, (पु.) पाय मार पार्वती (नी.. मानिक, (२०) मीना गटन : गर्मक प्रि- गिर्गश, (पु.) गिरः कैम्प महाद्रव. गाय, (5.) पहने ना युः । यी नाम- गिलिन, (वि.) ये काममा अनि मायादुधा। मायागया. गाईसर, (f.)-बी (प्र.) नेयममा गीन, (न. ) मन । बरे करा-पः (पु.) गायक पाने योग्य पात्र या गीतमः, (पु.) गीतम्या गाय (पू.), मात्र कर्म का | अन. गिगाप्रचार। नंग. में बादाम य. गाला, (.) पति + IT मुनि । गीतप्रिय, (वि.) गीदम्य नि गरि,(3.) निन्दा । दुग पचन. मनात,(3.) मायाम या मान्यता हवं करनेकन्या विराम. rrमराम. 'गीतशाग्न, (न.) नियम PITraffiगद लगानाध्या. गंधर्यविधा. ran... मगर पार,(..)rtme+नI IIT मी Him.in.).. कीन गाया। दूसरी प्रारद. Hrithi) MAITR भगा। पौगातार बाना गीता, (वि.) गीत मला द्वारा गायक । गा. गीतमोदिन, (पु.) गर्दन म Fory rary : काय । पनन । माण, (मा.) गनिन् । किन र गीति, (श्री शिन् । अन । गोयाण, (1.)ो fri.:.1.1 Immu में- .. | art Pm (आर) द. गीति, (I.} fan .. Erriaf म. ....Firmain. गु, रा.म. - *. .

-- (10) [गुणिक, । 1 वही अर्थ. । ...), (पु.) गुष्याकृतानि पत्राणि अस्य । गुण, (पु.) गुण+अग्-पम् का । धनुका विलह । धनु पत्ते गुरजी कलके दो। तालका पक्ष । इसका खेचनेकी ररसी । रसी। धरता आदि धर्म । राजाओंके पत्र गुच्छके स्वरूपका है. संधि विग्रह यान आसन वैध और आय के साधन । ट, पुष्यतीनि फलानि अस्स। जिसके फल ज्ञान विनय आदि । सांख्यके मतमें पुरूषके भोगका साधन भांति हों। रीटा। करणा। राजादनी । कतक होनेमे उमे बांधनेहारे सव रज तम पदार्थ। अग्रधान । 1) अमिदमनी । पाकमाची । फेरा । दास (स्त्री०) न्यायमतमें रूप आदि बीवीप पदार्थ । व्याकरणमें अए यो । अलंकार, माधुर्य आदि । दुहराना । तन्तु। नि । भावान करना । गुजति । जुगोज भगुजिष्ट. कना । दादररना । भा. पर• सक० सेट् । गुप्रति. गुपक (पु.) गुण् । दुहराना । भरना+बुल् । भनेवाला। वह राशि जिसके साथ गुणा जाता है। "गुपान्त्यमा गुणकेन स्वी.) गुजि+अच् । एक प्रकारकी लता (वेल) तीन हेन्यात्" लीलावती. । परिमाग (मार)। नगारा ( पह)। मीठी और भावा । रावध पर । रत्ती. गुणतः, (भव्य.) गुण+तमिल् । तीन गुणा (जगत्के सम्पूर्ण पदामि ) के अनुसार सल, रज, तम. सो.) गुरिन् वा । गोलसरूपी गुटिका । की गोली । मूति। शतरजकी नई । साथै कन् । गुगता-त्वं, (स्त्री. न.) गुण+तत्-वा स्व-भावे । गुण- पना । अध्यापन । उत्कृष्टता । धर्म । गुणना । रस्सीपना. सेटन । पेरादाना । लपेटना । मुरा• उभ• सफ सेट् । गुणनं, (न. ) गुण-त्युद् अन् । गुणना । प्रतिम करना । गुणवर्णन करना. ट्यनि-ते । अजुगुण्टत्-त. लपेटना । तोडना । रोकना । तुदा• पर• सक. सेट् । | गुणनिका, (बी.) गुण-भावे यु-स्वार्थे क । अध्ययन अन्याग । मुखमाचनेकी विद्या । नाटककी प्रस्तावना । ति। जुगोड अगुडीत. माला पहार. (5.) गुम्छ । गोठ । हाधीश राप्राह (फन्दा)। गुणनीय, (नि.) गुण+हरणे अनीयर । गुग जरग । देने. उपायः । गन्नेका पकाहुभा रस । ए. योग्य 1 गिन देनेलायक । उपदेश करने योग्य , (पु.) गुडेन प.-या फन् । गुहका गोला। ग। गुदकी बनाई गई एक प्रकारको मय. गुणमय, (पि.) गुण+मयट् । छोटेसे तन्तु (धागे ) बाला। प्रकृति के तीन गुणोंवाला । अच्छे गुणोंवाला । पक-, (पु.) गुरु व मधुरा स्वक् (त्वचा) यम्य । धारमा. राकी त्वचा (माल) गुडके रामान मीठी हो । हाल । ल (२) चीनी. गुणवृक्षक, (पु.) वृक्ष व कायनि । क । गुणानो एप्प, (पु.) गुरु व मधुर पुष्प अस्य । जिगका (नीकाकर्षणरमना बन्धनाधारः) पक्षः। बेडिओंको लपुरके समान मीठा हो। मधूक (महुभा) क्ष. गेंचनेवाली रस्गिओंके बांधनेका आश्रय । मस्तूल. शा, (पु. ) गुरु व मधुरा शिपुः । सालमुहोजना. गुणित, (नि.) गुणधर्मनि । गुणागया। अस्त । का, (स्त्री.) :-विशेष । तोडना । रोकना । माक। चोद कियागया । भरागया। पूरित. गुणिन, (पु.) गुणोऽस्त्वस्य इनि । चिवाल्य । पर। फेश, (पु.) पुसाया (निद्रायाः) ई-पशि. गुणवाला (त्रि.) गन् । नौदको पार करनेवाला । शिव । अर्जुन. गुणीभूत, (नि.) भगुणः गुणः भूतः । चिभूत। य, (पु.) गुप मधुर. आशयः (फलमध्यं) अप्रधान कियापया. प्य । जिसके फलमै गुम्ये मिटाय हो । आगरका | गुणीभूतव्यगर, (२०) गुणीभूत बाप्पांत् पर स. गुड चाहनेवाला. न्याय यत्र । वाच्यार्य (अगष्टी अर्थ) में हो यार ची, (यी.) गुरु बचाना । उ (क) पर। (बाना शक्तिमे जाना गया) भर्ष भपाए (टा) पनं नामकी नागिलोराची वेल हो । बजार बहादुआ मध्यम काय. , मामलाह करना पूरा करना । मुर• उभ से। गुडिक, (पु.) भनि भई टन (१९)। ने णयति-ते। मउगुणत्-त. हए थाक्न पति. - .

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(11) [गूय, । पाबासी.. ज्यारः, पायारार, (पु.) गुरोः पारः । गुमा वार । गुप, (वि.) गुदायम् । फस्छु । पाराण्ड । परमात्मा । परस्पतिवार । वीरवार एकान्त । भग । लिक (न.) रहस । छिराने के लायक निः, (सी.) गुरी प्रतिस्पर्नन । पुरके सन्मुख प्पिाचपहार. गुएराक, (पु.) गुपं कं (मुग) यम्य । गुपं शामितं व्यय, (नि.) गुरु. पपा यस्य । बी पीनवाला । सात 12 था। जिसका मुस छिग हुआहो । जो पीडामेभावर होरहा. पुरा दर्ता है। पुयेरफे धनको पचानेहारा । देव- तर, (पु.) देशभेद । गुजरात (दक्षिण) । जग देवा- योनिभेद. गुपकेभ्यर, (पु.) त•। गुषकों का स्वामी । कुमेर. पंना, (सी.) परो भाना। गुरकी की । अत्यन्त गुहागुरु, (पु.) गुप-गुर. छिपने योग्य गुरु । शिवजी। आदरफे योग्य श्री. गुपकेभर. पंध, (नि.) पुरोः अर्थः । अत्यन्त उपयोगी आवश्यकः ।- गुपभापित, (न• ) गुचं भापितं । लिपीहुई बातचीत । 4: (पु.) गुरुदक्षिणा । शिष्यको चिया पानेकी. रामभाषण. विणी, (स्त्री.) गुरुगंभ म्यस्याः । इनि । नि.बिसे गू, विष्टात्याग । मलका छोडना । दुर. पर• अक० सेट् । गर्भ हो । गर्भवती । गर्भवाली स्त्रो. गुवति । भविष्ट । जुगाव । गूना, पा, (बी.) गुर+ए। गर्भरती। "नहि बभ्या गूद, (40) गूह+क । गुम । छिपाहुआ। का हुआ। विजानाति गुपियरवेदनाम्" । आदरवाली स्त्री पदी स्त्री. गहन । एकान्त (न.). क. (पु.) गुल्+पक्-नि । पाओं की गांठ। पादप्रन्धिा गूढचार-चारिन् (नि.) गूई चरति-चर्-गिन् । रि- गिहा. पर इधर उधर घूमनेवाला. ल्म, (पु.) गुरक्षा करना-पचाना । लपेटना-पर- | गूढज, (पु.) गू गुप्त यथातथा जातः । गूः गन् वा ऐनामर । लयोरक्यम् । प्रधानपुरोंसे भाषय दिया जातः । जन् । छिपाकर पैदाहुआ। लिहुआ उपजा। गया रक्षा करनेहारा पुरयों का समूद। (हाथी १, रथ बारह प्रकारके पुत्रोमेसे एक. पो २५, पदाति ४५) इतनी सरूपारी सेना । एक | गूदपथ, (पु.) गूर पन्थाः । सिपाहुआ मार्ग । गुप्तमार्ग, प्रकारका रोगीहीरोग. गूदपा-३, (पु.) गूहाः पादा अस वा पदाप । ममूल, (न.) गुल्मारति मूलमस । जिसरी जा जिराके पाव दिपेहुए हो । सर्प । सांप शादी के समान हो।आर्दक। अदरक, गूदपुरुष, (पु.) सिपाहुआ पुरए । गुप्तचर । पिधि । स्मपल्ली, (धी.) गुल्माकारा वही । शाके समान जासूद वेव सोमलता. गूदभापितं, (न.) गूहं झापितं । गुमपाता जिजीहुई ()याक, (पु.) गुराक । नि• 1 गुपारी ।मुक । पूगीफल. गुदमैथुन, (पु.) गूरे पेनापि भारयं मयुनं यस्य । जिसे इ, संघरण । टिपाना । हांकना । भा• उभ• एक० सेट् । भोग का कोई भी नहिं देरा रा । बाफ । पोशा. गावि-ते। भीत् । अक्षत् । अहिट-अगा. | गढसाक्षिन्, (पु.) डिशहुआ गरम । अधा ( मर) ह, (पु.) गुदा कार्तिकेय । घोडा । रामचन्दीका अपने प्रयोजनकी तिदिके लिये प्रस (मराल ) मित्रावरमा बामी । चण्यालॉग माप । गदा । विष्णु । उिपहुए वरनको जिसके द्वारा स्पष्ट करणे मनपालादै हम सिंहपुग्टी वेल । पर्वतका गड़ा । इदय (बी.)। "गुहो प्रकारका गवाह । मुदईसे पोपीदा मुहालहके बहार गुभे- प्रविध" इति श्रुति.. दा. (पी.) गु+सर । गुरु । छिपनेस स्थान. गदादा (पु.) गानि महानि भम्प । जिरा भय दाशय, (पु.) पायो (गर्ने) आरोते। सीस अर्थात् शरीररे भाग छिपेहुए हो।उपकरण. जो सोता है । भान । सिंह भादिस्य । बुधिग्दोरपन, (I.) र उत्रमा । गारमे उपमा रहनेदार जीव । भर । "पाराय मादरे इति डि:. एकप्रसार पुत्र"ये तसा पुर" मानी हादित, (नि.) गुहा माहितः । पर (हदयमें) गूप, (३.२.) पर frel I म । गर. । वाला गवाह. रखसा गया.

.] (१८४) ( गूर, उपम करना । चुरा० आत्म• अक. सैन् । गूयंते गृहपति, (पु.) ६ त । गृहका पति । घरमा अजगुरत्. मन्त्री। वीर । धर्म. गूर, मारना। जाना । दिवा थाम सक० सेट् । गूरयते। गृहपतो, (सी.) गृहस्य पनी । Ved. घरी अगूरिट. (सामिनी) । गृहस्थकी स्त्री. गृ, सेक । सायना । भ्वा० पर• सक• अनिट् । गरति । অব. गृहपालः, (पु.) गृहं पालयति। घरको यवर घरका रखवारा. गृज, पनि । चन्दकरना । वा. पर• अक० सेट् । गति। अगजीत्. गृहयालिः, (पु.) गृहम्य बलिः । घरेलू पनि। गृजन, (पु.) पवे (मत्यत्वेन कथ्यते ) रोगेषु । भोजनसे घरके देवता सम्पूर्ण पशुपक्षिाको देने मेटा. जिनयुट् । गाजर । विषवाले पशुका मांस (न.). गृ, टाटच करना। लिप्सा । दिवा. पर० स० सेट् । गृहमणि, (पु.) गृहे मणिरिव । घरमें मानो मरे गृध्यति । भरपत-अगत् । गर्दिन्चा. गृद्धा. प्रदीप दीवा. गृम, (नि.) स्थ४ि । उन्ध । लोमी। लालची. गृहमृग, (पु.) गृहम्य मृगहर। मानो परम 5 गृम, (पु.) कनु । शनि । पसी । गीध । लोभी। पुर। युत्ता. (f.). गृहमेधिन्, (पु.) हैः दाधते (शंगटने) गृध्रराज, (.) ६. गरमा पुत्र । जटायु पक्षी। सहम-मिलना+गिनि । जो घरका संग कते हैं। इन परिओग्र राना गृहमेघीय, (पु.) गृहमेधिनोऽयं छ (ईस)। गृषि(ख) मा गर्भ राति । प्रतिष्-पृ.नि. । कि धर्म. एकर मेरी भी। बराहयन्ता। मदरा भाषध गृहयालु, (वि.) गृह आल । महीना । लेनेवाला. घमहमा । परना। मुरा• भान्म• सक. मेद । गृहयाटिका, (श्री. ) गृहगमीपे माटिका आटम' । पागका छोटा बन । गृहफे समीपका उपयन. अथा. गृ.(२.) मर-घर भने ।ट मी आदिम बना गृदशकुन्तिका, (बी.) गृह पालिका सार- हुभा परररररा- असत्राी औरता नाम। पक्षिणी । परमें पालादुआ पक्षी (परिंदा). मेरमा मन्दिर । एर परकं अर्थ यह शब्द गृहम्य, (पु.) देषु तिष्ठति ( अमिरमत ) मुंबद परेशमें घिस होना । नागार ग्रीके साथ विलगकती है। परमें रहनेवाला ।। पन" मेषाम् । श्री वर्षमैं मी दार द्वितीयाधी । मालपचार. सरासरन्न होता है. गृक्षागत, (पु.) गृहं भागन.। भा+गा। म परम्पोन(यु.सारिन पोन । परका पायानुभा भागातुर । मारमान या पाहुना । परमे मागमा पाधिपः, (पु.) गृहण हाधिपः । पान परिस(२.) शिदोरा । पोलोष (दु.)मला-जननकानापामेंट. दागम, (पु.) (ग्रामी) errम । पागोटाबमूहगान Iri परम (5.) me: जनपदी मधि (-) पदार्थ, (पु.) एहस्य भः । पापा बाम कार। भी परे मन. शारिरित, (.) एनी-r+गृहायप्रदणी, (श्री. ) मानेन । दिगो रममतापर, पापा Tripatti परनामा, (:.)। पराम। घोड देवली. गाणी, (:.) आगर Man पर.(*.रमनntiane पारा in (बार) रा सारी, (२.infer(1.) Mer when । Nimr. .

हो । और ऋषभ - पितार लिया. . दिन, (पु.) हे ए मीन राम्पराये (युरे)। गेह, (न.) गो (गणेशः) पन्धयों दाईहः (सिता घरहीम गजंता है। समाईम पीठ रिणनेवाला। पत्र । जहाँ गणेश पा गंधर्व होनेकी इजा की जाय । पर. टामाइनी। पापुरर। एपमै दरनेवाला । पर ही में, गाना । भ्या• पर• शक० सेट् । गायति । अगासीत. घम मानहारा. त, (नि.)मस्क। मीनार पियागया। मानागा। [गैरिफ, (म.) गिरी भव. (इक)। पर्वत में उपजा नसूर कियागया । प्राप्त । पाया । हारिल किया।हात । उपधातु (छोटा धातु)। सोना । गेरी. नागया। तो पापया, गो (पु.) गम्+डो । म | मै । वर्ग। किरण । वन । त,(वि.) महक रमनि । दिया गया। पका गया. जल । पशु । चाँद । हवा। वायु । सूर्य मामी भीषष। सौरभेयी। गो। दृष्टि । नगर । पाण । सगर्मा, (श्री.) एहीतः गर्भः यया प.रा.। पर्भ- धीर । दिशा । माता । वाणी । भूमी (श्री.). लीबी औरत. तदेह, (नि.)हीतः देहः येन । जिसने पृथिवीपर गोकर्ण, (पु.) गौनेत्रं कर्णो यस्य । ओराही जिसके कानहें । सौर । "गोरिद कर्णो यस्स" 1 जिसके कान गाके रामान हो । भतर। पछेरा। खचरा। एक प्रकारका पशु । तनामन् (त्रि.) गृहीतं नाम पेन । नाम सेनेवाला। गणदेवताका भेद । शेवतीर्थभेद । एकनाम. ममे पुकारा पया. तवेतन, (नि.) गृहीतं पतन येन । जिसने अपनी | गोफील, (पु.) गोः पृथिव्याः कील इव । मानो पृथिवी- की मेरा है।लाल मुसलाहल. निसाह हेली है। मिहनतका फल बुध दिया गया. तार्थ, (नि.) एहीतः अर्थः येन-. . । जिसने | गोकुल, (न.) गो फुलं यत्र । जहाँ गौओंका समूह हो। प्रय प्रयोजन मतलय समश लिया है। समझे हुए मत- गौओंरी जगह । गोष्ठ । गौओंके योधनेका स्थान । यमुनाके निस्ट नन्दके निवासका स्थान । बजनामी प्रसिद्ध दबवाला. तिन्, (नि.) रहीत+पिन् । समक्षा हुआ। अच्छी- स्थान । "गोकुळे रामकेशी" पुराण. रह जान शुध. गोक्षीरं, (न.) गोः क्षीरम् । गौका दूध. (पु.) प्रह+क्यप् । पहागत । परमें फमाहुआ। गोगृष्टिः, (पु.) गोषु एटि-सकृत्प्रसूता गौः । गौओंमें एक शी धौर १३ । मटका द्वार (दाजा)। येदर्भ कहेहुए वार जनी हुई गो. धर्मके प्रयोग (लगा) को जतानेहाय गोमिलसूत्र गोगोष्ठं, (न.) गर्या गोष्टं । गोवा । गोभवन । गोमाके प्रादि अन्य विशेष। असताना पराधीन । जो भाजाद निवासका स्थान. रहिं । अपनी ओरका (नि.) "गृहे भर" यत् । गोप्रासः, (पु.) गर्दा मासः। गौओंको देनेयोग्य मास परम हुआ। परका । वनु (पीज)(न.)"अपने अर्थमें (पास) अप. छन्"। नगर के माहिरका गांव (खी.) राप् गया. गोपात:-पातकः, पानिन्, (पु.) पातपति हत्या विज्ञापन । जताना । जनाना। इत्तिला देना। पुरा. +ण्वुलमागिन् । गौको मारनेवाला. मात्म• एक सेट् । गारयते । अजीगरत. गोघृतं, (न.) गया पुतं । पष्टिका जल । घरमपरान । पन्द आवाज करना । श्या पर• एक सेट् । गृणाति । गाका पी. भगारीत. गोम, (पु.) गोहन्यते यस्मै । इन् सम्प्रदाने टक् (4)। निगरण । निगल जाना। गप्परना। तुदा• पर•सक. जिसके लिये गौ मारीमाती है। अतिपि । महमान । पेट् । गिरति गिलति । अगारीत् अगाटीद. (इसके भानेपर मधुपर्ष के लिये गौका मारना विहित है। + आना गति । भ्या• माम• सक• सेद । गेदते।भगे- ये बहुत पुरानी चाल दी। जिस समय मरीहुई गोरोमी दिए । अजिगे । गेदित्या-गेवा. फिर जीवन देनेरी सामर्थ्य रसतेथे)। "वर्तरि टर"। (ण्ड)क, (पु.) गच्छतीवि गः इन्दुरिव । साथै गोको पातकररेहारा (सई)(त्रि.). कन् । जो चांदकी भांति जाता है। कन्दुरूगेन्द । | गोचर, (पु.) गप (इन्द्रियाणि) परन्ति अस्मिन् । करडेकर बनामा गोल सह शिनाथशे. निजहाँ इन्दि विरदी है। इन्द्रियो चिय "गण्डक " यही अपं. स रस आदि। " गापासस्मिन् " नि...। य, (नि.)गाना+यत् । कर्तरि । गया"भावे यत्" गोनोरे पियरनेस स्थान । देशमात्र । जन्मरास्सेि पता गीति । गाना गीत । कमनि पद" गानेहायक (लि). स्थानमें पूर्व भारिमोशनमा 1 - वर्मन्, (१४) । प्रपरके धान. - गोचर्मन्, (न.) ६ त । गा चमं । गौओंका चमड़ा। गोधन, (न.) गां धनं (समूहः) गोसना पृपिवीच परिमाग (मार) • गन लंबा और ३ "गौरव घनं सम्य" गोधनम् । जिसके ५.१ . गनके निस्ट चोदा. (नि.) गोज, (नि.) गोपियाः जायते-जन्दा पृथिवीसे गोधा, (नी.) गुप्यते (वैष्टयते ) बाहुः भर।। रमन हुआ. घञ् ! जो मुनाको घरलेता है। धनुष्ट कि गोजलं, (न.)गयों जल्न । गाओं वा बलों। मूत्र । बचने के लिये प्रकोष्ठ (आंटी) पर 'करि सच्" गोसार नाममे प्रसिध गोजा, (पी.) पवि (पिचा) धादिस्पेग जायते "शकः ही गोया" मनु:- भवम् । पृथिवीपर घन आदिके से जो उपजता है। गोधूम, (पु.) गुप् ऊम । गोहिनेद । कना। पावभदिगोटोनिन नानी प्रस्त. गोजिद्वा, (श्री.) गोजित। मानों गांगे जीम है। गोधूलि, (पु.) गोभ्य उत्थितो धूलिवंच ले। ताविशेष मोनिका. समय गौओंसे धूल टटवी है । सूर्यके अन लेटर गोपी, (प्रो.) इन्सप नि. गुगः । गोगामी । गोनीय, (पु. ) गोनदै ( दसमीपे देशे). सिममय. धन्य कामना गुन्नानने प्रनिद सावपनकाय । पुराना देशके पास टपन हुआ। पानिनी मुनि । (RE, राप्रपरका मारा मर. गोतम, पुरबपने नाममे प्ररि मुनिनेद. पार, पानुपाठ, व्याकरणका ) कनां. गोनस, (पु.) गोरिव नामा अन्य । विम गोत्र, (I.)(पी) मापते । सानो पृथिवीको समान है। एक प्रकारका सांप. पर पानाम । न । जंगल । क्षेत्र । गोपति, (पु.)त.। गौओंग पी । सारश: ता । एक जातिका समूह । घरके पति शिव । पृथिवीय पति । श्रीमा इन । महमे बहे गये वीरा शादित्य पनि सूर्य । मगंग पति इन्द्र । ऋषम नाम र . | गोपा, (सी.) गां पाति । पाक-टाप् । पर गोरस, (नि.) (माने पर) जायते । जनः । गोपानसी, (मो.) गया (किरणानां ) पन (। Fir. गोपन-मति। मोरी । दारोर पर पोरना (पु.) वन पर्यटन मिनस्ति । मिद गाया गया टेवा पाटबटमी । बमी।। freोनामाइदा देताओस रावा. केागेरठी सी. गोग, (*.) (दः) भनि मणाः । म गोपाल, (पु.) गा (गो-मा भूमिका) ममूर" गोबेल वा पृषिकरी रक्षा करनेहारा । गोर।। एगानन्दजाका पुत्र. दन्त, (२.) मंत्र । अवको यसा कि गोपुर, (न.) : पूर्वन्तं यत्र । पूर। गमन हों।वाला बनी। जादी है। पहरा दास । Fer: (बु.). नमुना. संदान, (२.) () स्पन्न (दिले) गाय, (T I योग्य । fort गोपुरी, (२.) मा दुर्ग । गोनोमय. कर (wife - (ग्ल)। मोगमूह (.). राममा । “जय मोनो- 'गोकाई, (.) Mrati मेकर र, (२.) (मन) यु ।' गीत (1) ref fai-ALI Feritain. rf , (*.) वर्ग (AMA, (न.Trt RETREAt गोमती (4) rest Kiner (...) ।। . - Nirge. .

(10) गौतम, - . , . गेमायु, (पु.) गांकरिता वार्षमिनोति। मा+उम् । जिगसी गोवर्दनधर, (पु.) गोवदनं ( पर्षने ) धारयति । विगी हुई मावाज हो। गगाल गोदः पियार । गन्धर्व, +मच् । पर्वतको उठानेहारा । धीकृष्ण । नन्दजीके नन्दन. मिन्, (वि.) गो+मरत्व भनि । गोगोंगा सामी। गोविन्द, (पु.) गोपिन्दति । विदश गोको लाभ कर्म गोदर (3.). है।यीकृष्ण । पृहस्पति । गौओंका अन्य (सामी). गोमुख, (पु. ) गोरिच मुग अस्प है जिसका मुरा गौके गोशीर्ष, (न.) गो शीर्ष च । गोके गिरफी नाई। समान दोगक्षविशेष । नइ । तंदुआ। मगर । विरघर गोपीः (पर्वतः) "तत्र जातत्वात्" ।मलयके एक देशमें पर । एक प्रकारका पाला। घोरसे कीगई एकप्रकारकी उपजा चन्दन । (२. गोमस्तक (न.). सन्धि (सन ) लेपन । उपमाला रखने के लिये परके / गोष्ठ, संपात सहा होना । भ्वा० आ• अक० सेट् । गोठते। अगोरिष्ट सूतमा बनाहुआ एकप्रकारका रत्र गुनी। हिमालयके एक मोरसे गंगाके गिरने की गुहा। गोमुती। गंगोत्री (स्त्री). गोष्ठ, (न:) गायः तिष्ठन्ति भन । क-पत्वं । जहाँ गोएं गोमूत्रिका, (सी.) गोमूत्र साधनत्वेन अम्या टन् । यो रहरें। गौओंका स्थान : गोवाग। गोशाला । ग्याल । गूजर, गौके सूत्रसे उपजती है। गोमूधमे उपजी लता (एकप्रकारकी | गोठी, (खी• ) गादः ( अनेका पाच ) तिष्ठन्ति अत्र । मेल)एकान्यकी रचना को भारतिसे गोके मूत्रपमान क-वसम् । जहाँ बहुतसी वाणिएं निकलें । सभा ! मजलरा. बनाई हो. | गोप्पर (न.) “गो. पदं "। गौका पांव फंसनेसे गोमेद, (पु.) मनिविदोए । जवाहर । दौरभेद । एक उपजा गदा । गौके पाद जितना । गौओंसे सेवन किया जजीरा. गया देश । वह देश जहाँ बहुतसी गोएं हों (त्रि.). | गोसप, (पु.) गावः सूयन्ते (अध्यन्वे) अत्र। मु+ गोमेध, (पु.) गावो मेश्यन्ते यत्र । मे+आधारे पम् । अप् । जिसमें गौओंको मारकर होम कियाजाय । गोया । नहीं गाएं मारीजानी है। एक प्रयरका पर. गोमेधया गोयानं, (न.) गा यानम् । लोसे चलाया गया यान | गोलन, (पु.) गो. सना इव गुच्छो यस । जिसका (रप)। बैटरी गुला गौके स्तनोंकी नाई हो । चार लडोंगला हार। होयुगं, (न.) गो युग । गाओंका जोडा. गोरसः, (पु.) गवा रसः । गौओंका रग (दूध). गोस्तनी, (बी.) गोरिद सनः (फल) अस्याः । जिसम्म गोरोचना, (स्त्री.) गोभ्यो जाता रोचना (हमिा)। फल गोके सनकी नाई हो । एकप्रकारकी दारा. गाओंसे उपजी हरिदा । अपने नामसे प्रसिद्ध मुगन्धवाला | गोस्थानक, (न.) गवो स्थान साथै कन् । गाओंकी दृष्य । गोके मसकसे निकला पीटेगका पदार्थ जगह। गोष्ठगौओंका पर. गोल, (I. ) गुरु+पम् । ( र भौर छ धमान है)। चारों गौड, (पु.) एक नगरका नाम । बगालेसे लेकर भुवने- सोरणे गोल । मदन (मैना ) या शाम के मरमानेपर हातक एक देश । उस देशके लोग । बहु• । विध्यपर्वतके आरमे उत्पन्न हुआ पुत्र । भूगोल । आकाशका गोला। उत्तर भाग निवास करनेहारे ब्राह्मणपिशेर । बहु.. एक राशि ए ग्रहोंचा जुडना । " साथै छन् " गोलक । गौडी, (खी.) गुइस विकार अण् । गुरुका विकार । सकतीका गेंद. एकप्रकारको मय (शराब)। मिटाई (न.)। अलंकारमें गोलामूल, (3.) गोरिव षणं लालं अन्य । गाके रामान | एकप्रकारकी रीति. जिसकी काली पूछ हो। काले मुसवारा एक प्रकारका | गोण, (नि.) गुणात् भागत +भण् । गुणमे आया । गुणके योगों का हुआ शय अमुल्य कति नि भएँ । गोलास, (पु.) गवि (गोमये ) एरो (जन्म) यस । छोटा । दूसरा व्याकरणमें प्रधानकर निरोधी. जो गोहेमें अपना हो। गोमयकीट । गोहेका ग । गौणपक्ष, (पु.) कर्म । युक्तिका निर्वत भाग । जिम मोर शिलीन्न । दे. ददीली कमजोरी हो. गोलोक, (पु.न.)त.। पटके दहिनी भोरका गोणिक, (नि.) तीन गुणोंवाला (सल, रमम् , तमम् )। स्थान । विष्णु महाराज के निवासी जगह (पु.). गौण। छोटा. गोपन, (पु.) गो पर्दयति । एशिस्यु । गौतम, (पु.) गोतमस्य अपत्यम् । शिप्यो वा अन् । गोत- गोको बढानेद्वारा दायनका एक पर्वत। (भाष आदि मी सन्तान या उसका पेला मरिता पिताना- द्वारा यह गांओंको बहाता)। यहाँ गाएं भली भांति नन्दनामी एक मुनि। पास्यसिंह । भारसार सरि। पलती है. पुरा नाम । न्यानो बनेहारेका नाम. गोका स्तन. . . . वानर. 4 प्रमको भानमताने गोडमी, (१८) गौतमी, (गो.) गोदना म अन् । सतो । ग्रह, (पु. ) प्रअन् । सूर्यादि ना । गंदन गोवमने रखी गई मोटह पक्षाकाठी दिया। भनुग्रह । हटमे पटना । लाईन इन गोदावरी नसोका नाना दोनही श्री कृषी। दुःस देनेहारे पूतना आदि । चन्द्र और पुरदेश विद्या । गोरोचना । कमरी बहिन । दुर्गा. ग्रहण, (न.) प्रा+माकदो स्युन । सीकर। गांधार, (पु.) पापा भाप मार। फेफार पुत्र मानटेना। आदान । लेना। भादर। सूरजका माग । इन्द्रिय. गार, (पु. ) TRARU रेग वि सरिओं । क्षेत्र ग्रहणीहर, (न.) पहनी हरति । हम मुरारदमा पनाविद पर सफा लाटरंग. लीग । महणी रोगो दूर करनेहाय (दि. गौरव, (२०) पुरोमांव का । गुरनादान । सामनेमे ग्रहनायकः, (पु.) प्रहाणां नायकः । र राग मातमन (स्वत). प्रमुश्य सूर्य. गारी, (स.)ो । पटी । अ3 पायी प्रहपति, (पु.)त. महोय सानी । मेन (रजा) रहित कन्या । दी। गोरो. या भार". जनादरणी । मुरादा। आकाश-प्रयाग, (पु.) हेभ्यो याग । प्रहरी कामिनी. दूर करने या टिके लिये मौके रोग है नाशिगर, (R) दीप दासस्थान । पार्वतीले प्रहराजः, (४. ) प्रहाणा राजद प्राम . मार, (.) गम्भा गोट । पुराना प्रहसंगमः, (पु.) महाणां गमः । सूर्य । परस्पर मिलना. महाधार, (पु.). प्रभास TAMIरारना । गुपना । नार (तारा). IVER मागा. मन्यते । प्राम, (पु.) अग्मन् आइलादेशः। लि. गा। सरमेर। रागन दागि ति(R) नार। अगित । मुषा पुरपी को होवे है येगा मरोगना ErIFIERTAIमरगायागया. है। प्रम आदि पानीका बागपत बाद.(:. I मुगना ।पन। "वरण पाने की भूमि हो और दो NITE को मापन । विदामपटक, (पु.) मामय बन्दः । श्री गोरोट पहुंचनेय कारण. Fre(:.) पाय । वन ग्रामः, (1.) मामय पर. : गरिन r) HIबन का पसमा Arth: पुषी । पनाममा, (.) प्रमभ्य कुमार । मोर ! R, (:.) प्रमि । | ग्रामगृहा. (st.) RIP भो ५irector मेना, गमे गहीत. दिल(२.) अप । frम प्राम-, (f.) म TARI ForeEmire (ft.), ग्रामभी. (T• Ri Aur Farmiriदापूर (4.) Trandit (imire (4 (PR(rxrairaमाममा, (..)THRAM प्रमाP)Harirratri Patri ... मेटमः, (.) Tran - कामा - .

प, मामधर्म, (पु.) गामे (भवः ) धर्मः । गौवका धर्म । | मारा, (नि.) मइयत् । रोने लायक । प्रहणयोग्य । मंपुन । सीप नर पिलारा करना । "माय." उपादेय । मासेटायका जागेलाय. प्रामयामक, (पु.)तप्रामके कई प्रपरके प्रीया, (सो.) -नि। कंधरा । गला । गर्दन । कंठ. पाँगो या करानेदारा नीच मानण. प्रीप्म, (पु.) मा+म-नि. । निदाघ । गरमी । पसीना। प्रामाचारः, (पु.) प्रासम्म आचारा। गांचा आधार पसीनेको उपजानेहारी धूप मादि । जेठ हाडका महीना । (रगम-व्यवहार). गर्मावाला (नि.). प्रामाभ्यक्ष, (पु.) प्रामस अध्यक्ष । गांवा सामी पुच, बोरीकरना । जाना मा. पर• राक. सेद । प्रोचति । (मालिक) अप्रयत्-अप्रोचीत । मुचित्वा-अषा. प्रामान्तः, (I.) भामरूप अन्तः1 गावका किनारा । गोरके प्रय, (म.) प्रीवायो भवे भण् । गलेमें हुआ। गलेश पागका स्थान. भूरण ( जेवर). मामीन, (I.) मामे भवः राम् । गोवा पुर। मयेय, (२०) प्रीवायां गवं इन्। प्रीवाभूषण । गलेका कुत्ता । कोभा। गोवा सूभर । गोरमें उपग (नि.). भलंगार गलेका गहना । "प्रेवेयकम्" दकम् । यही अर्ध. प्रामोपाध्यायः, (पु.) प्रमस्थ उपाध्यायः । गोवा पुरो- ग्लिस, भक्षण । साना । मा आन्म• राक• सेद । ग्लराते। हिन अथवा पांधा. अग्लनिष्ट । म्लपित्यानलस्त्वा. प्राम्य, (नि.) प्रामे भरः य । गांवमें हुआ। प्राकृत । ग्लह, भादाने पकडना वा पुरा• उम• पक्षे भ्यासक. नीर । मू । गोपा । (ज्योतिमे) मिथुन आदि वेद । ग्लायलिन्ते । मजालहन-त । ग्लदति । अग्लहीद. राधिमेद । गालीको प्रकट करनेहाय मोड आदिका पचन. ग्ल, (पु.) ग्लह+घ । पूतादी कृते पणे । ज्ये आदिमें प्रास्यकमन, (म.) प्राम्ये कमै । गोववासीका काम । लगाया गया दाद मा शर्त । जुआ। पूत । पाा. इन्द्रियों का मुस. ग्लानि, (श्री.) ग्लै-हर्पक्षय । वीर्यक्षय । दिलका टूटना । किन् । रिटकी घबराहट । थकना हानि । नुकसान । माम्पधर्मः, (पु.) प्राम्यः धर्म:-क. रा. प्रामवासीका कर्मव्या विषयभोग. ऐश न होना । यीमारी. भाग्यपतुः, (पु.) माम्यः पशु । गोवा पशा पाटित ग्लाग्नु, (नि.) म । ग्लानियुक्त । पकाहुया । एवरायाहुभा. भाभ्यधुदिः (मि.) भामा युति यस गांव में निशय ग्लुच, चोरी करना और गति । भ्या• पर• राक• सेद । ग्लोचति । भग्लुचत-अग्टोचीत् । या कला. करनेवाले की पुलिवाला । मूर्स । अज्ञानी । भेसमा. भाम्ययातमा, (सी.) मायाण मावि पारिओको ग्लुञ्च, (चोरी करना और जाना ) भ्वा० पर• राक० सेट् । वसा वेद । ग्लयति । अग्लमत् । अग्लशीत, प्यारी । वैदया।गरी. प्रास्यमुखं, (न.) प्रम्य पुरा । गांववासीका पुरा । इदि. | ग्लेए, देना । गरीबहोना । दुखीहोना । कांपना । हिलना । आना। भ्वाक्षात्म. सकसेद । पिते। अग्लेपिट । अजिग्लेपट माम्याभ्यः, (पु.) प्राम्यः अन्धः । विकर योग गर्दछ । शेचर गधा. | ग्लेन, सेवन सेवा करना । पूजा करना । मा. आमTr. मावर, (पु.) प्रसव-मस्त । । । भावनवि-नन्- सेट । ग्लेवते । मालेविट । अजिग्देवत. घौटना । विन् । पत्थर । पर्वत । मेघ । बादल ।। ग्ले, भन्येपण । बालाशकरना । डना । सोजना । भ्वा. ममवून (पि.). भारम. स. सेर । ग्लेपते। अग्टेपिष्ट । भजग्लेषत, प्रास, (पु.) मग+धम् । गोलमोल अन्नादिदी भाई ग्लै, हसर । पटका अनुभव परना। यानाना । घबराना। भयापर. म. अनिर । लायति भन्दापति, (मास)। इनना था कि जिस्से मुरा भरजाय, माह, (पु.) म+मावे धम् । पकाना । सामाना। ग्लो, (पु.) ग्लैटौ । धन्न । दिन की । कापूर । "करिण" जलवा जीव (संवा वा संसार). पृथिवी. माहक, (पु.)महसुल् । राजपशी सोप पानेशल। देनेवाला (मि.). घ, (पु.) घ । घण्टा । पर शाद। (समासमें माहिन् (त्रि.) मागिन् । पाानेवासाला करने हदके पीछे भताने पानिप, राजपा) माया सेंबाला. मारना । साइन करना | मार करना) (नि.) योहा मुरा.

नागबन्न । घंटीकी यावाज. यन्त्र बनाना. योग्य रामा । टन् । नगरका प्राननागना घटा, (घी) घट्मासनकोशिशासमा । समूहघिण्टिका, (घी) इंद्रा घटायल्पायें कन्या मोथा प्रवाहाटा मजबूत।कटिनासनादर शरीर लोहका मुहर किफायक । सनी दीन संको याममें गुथना।जसे दीनद्या औरदारका ६४है। निविदागाटा मटकार' | घनश्यनिः, (पु.)धनम्य पनिः। मेघगर्जना प्राणहानी मे नाभिान प्राप्त हुआ। तिः सुटिलता" ग प्रकार मंपतो। (इसे मेषा याधर होनेमे ऐमा प, घग्घ, हंसना । भ्या. पर० स० सेट् । पश्यति । थम्पीन, घट्ट, हिलना-युग.। म. गह- सैट् । पवित्रा घट्, चेष्टा । कामकरना । हरकत करना । यह करना । भ्वा० घहन्न. साम० अ० सेट् । घटादि । पटते । अघटिया घटयति. घ, (पु.) पहनेज्य । यम् । नहानेके दगड घट्, सन्द करना । पुरा० उम. थक० सेट् । इदिन् । स्थान । पाट । एक (फीम-मापूर) देवेसर घण्टयति-ते. भावे । हिलाना. घट, (पु.) पट्+अच् । कलम । घटा । जलकी घड़ी 1 | यहाटी, (प्रो.) पाप कुटी-20 तार कुंभराशिका चिह । वीस होणका परिमाण. लेनी कुटिया । ममूलकी चौकी. घटक, (त्रि. ) घटयति (सविशिष्टनमा निम्पयति ) घट्टित, (नि.) प+न । निर्भित । बन्छ। घट+ निवुल् । साथ रहनसे वनानेहारा । वास्य हिलायागया । रंगा गया। घोटागया. सादिके वीचमै पढनेहारा पदार्थ । योत्रक । जोडनेहारा । घण, दीप्ति-चमकना । तना. उम• अक मेट् । ६५ अपने लिये यन करनेहारा । पूरा करनेहाय। दीमा पशुते । यपाणी-अपनीन् । समाविष्ट । निन्दा सिलाई बनानेदारा घण्ट्र, योलना । चमकना या युगक पर पदति वर्ग घटकार:-मृत् , (पु.) घटं करोति । यहा बनानेवाला। घण्टा, (घंट-भन्) घंटी । कामी आदिका बनाए प्रकारका वाजा । अनिवला । कुमार।घुम्मकार. वृटनेद. घटप्रहः, (पु.) पटं गाति । घटा ठानेवाटा । पानी घण्टानादः, (पु.) पटापाः नादः । घन्टामा र मरनेवाला । निधर. घटना, (स्रो० ) यु० घट्म्युन् । संहतकरण । इकडा घण्टापय, (पु.) घंटोपलक्षितः । घंटेमे पहरूम करना। जोहना । मेलना। हाथियों का समूह । रचना । मार्ग (रामा) । घंटेवालों (हाथी आदि) के ए. घटस्थापन, (न.) घटस्य स्थापनं । किसी देवता की प्रति- टाग्रचिट्टा घडेका स्थापन करना. घण्टावन्दः, (पु.) पटायाः सदा । घंटी कर हापिओंघ झुन्ड । मादलॉबी फैलावट (आडम्बर). इसीके समान सम्म होने तादी जीम । पं. घटिका, (स्त्री.) साट पटौंका दशा काल । पी। " पटति विहितकार्यकरणाय" घनिबुल् । विहित घन, (पु.) हन्सर । धनादेशः । र । ' (बदमें कहागया) कार्य करनेके लिये जो लगाता है। दो दः । मुहर्तसम्म ग्रल अपांन दोपदी । "असो घटः कन्" छोटा पहा "काय कन्"। नितम्ब । चूतः. घीयन्त्र,(न.) ६.1 कपसे पानी निकाटनेशी कला। मन्यम नाच । सोहा (न.). भरपः । माल । रसाटन । खोरना । प्रहपीरोगनेद. घनकफ,(पु.) पनप (मेषम्य) का घटोत्कच, (पु.) एक राग । हिदम्या राक्षसी पेटमें वादलकी का है। बादल के पत्थर । गहुँ । मेन्द्र, मानमेनन सपन्न कियागया । यह बा परकमी या और घनच्छद, (पु.) पन. (निविदा) छदः यय वित परक्षेत्र युद्धमें पाण्डवोंदी ओरमे या परन्तु कने गाटे पडेबाला या पादलके पडदेवाला. इन्द्रमे प्रमकीगई अधि (वरमा) से मार दिया. घटोनयः, (पु.) पात् ददाति टर. स. पटर: घटात् आकर । मेपद. जय जिन्दपर योनिः । पदः योनिः सम्य-३० मा घननामि, (पु.) ६. धूम । मंमयाद सभी-..पढेगे सन्न होता है।मार ऋषि घटोनी() पद सपः पयः । रिम पर हसना कारण या दे. पटारपूर है. घनपदग्री, (मी.) तबादलोंगामा पह,मदन । हिनामा सम. म. मेट् । पर। घर यही बादल घूमते हैं. यी सहरू. - घूसा ।

गर [पुर, - - धनरम, (.) पनस रण: (निष्यन्दः) । पदयका रम घीगुः, (पु.) पा अशषः यस्य . . । उष्ण किर. पाली । गहा रस । । पार । पीलपणे (पु.) गोराया। एर्य. गारेमाला (नि.) | धोदकम, (२०) धर्मस उदकं । पसीने का पानी । - धनपती, (सी.) पनप बादीव । मानों बादलकी मेल पसीना. घर्पणी, (स्त्री.) कर्मणि स्युद की। हरिदा । हल्दी. घनश्याम, (प्रि. ) पन र दयामः-उपमित-स. मेपके घस, साना बापर• सक• भनिन् । घषति । अप- समान याम। पविला । बाबाला |-मः (पु.) धीराम । सरा पगा. घसर, (त्रि.) परपमरन् । भक्षणशील । साने. धनसार, (पु.) पनप सार व शीतलवाद । म पालासाह होनेसे मानों पादलका सार है। कापूर । पारद । पारा । पन्न, (पु.) पत्र । दिन । हिंस। मारनेवासा (•ि ). जल । पानी । एक प्रकारक्ष. धाण्टिक (पु.) पटया परति उक् । घंटा लेकर धनागम, (पु.) पनाना (मेपाना ) भागमः यत्र- पिचरता है। राजाओंको जगाने के लिये घंटा बजायकर जिस समय पादल भाजाय वा बाल। पानीसं- खति पहनेहारा । धतूरा घंटा बजानेहाय (त्रि.). मेरा समय (यज) घात, (पु.)हन्पम् । प्रहार। चोट । मारना । अकको धनागमा-उदयः, (पु.) घनस भायमः अथवा उदयः । पूरा करना । गुणना । "करणे पम्" बाण । तीर. मेष (बादल) माना । वर्षानुवतिका समय. घातिन, (नि.) हन् तच्छीला गिनि । धातु मारने के धनायन, (पु.)- निन्दासनेदाला बादल । सभाववाला. मतदापी । बन्योन्यघटन । एक दूसरेको एकलना। निरन्तर । सदा । सदा मारनेवाला (नि.) धानुक, (नि.) हन्सकम् । हिंसा । मारनेवाला । पूर। निर्दय । बेरहम. पनात्यय, (पु.) घनाना अवयः (नाशः) पत्र हाले। घार, (पु.) पृ-सोयना-पम् । सेचन । सौचना । दिडकना, जिस समय बादल हिमाय । शरत्काल । अरस और घातिक, {.) तेन निर्मितः तस्य विकारो का रक् । पत्तसिजा. घीका पनाहुआ। एकप्रकारका साना। प्योर । पीसे धनामय, (पु.) पनः (क) मामयः यस्मात् ५५.। भराहुआ. जिस्मे र (पा) रोग होता है। गरका एक्ष । (दरल) घास, (पु.) परसमणि भम् । गोआरिक साने योग्य घनाम्यु, (न:) पनस्य भन्दु-प• त• । मेपाल । घासिल (पस्हण) अमि । पास. बादलका पानी. धनोपल, (पु.) त• पनस्य उपल हद । परिन होनेसे घु, दादारनाम्दा• आत्म• अक• अनिदा पववेभपोर. मानो बादला पत्थर है। पर तिल । गहा। भोला. लौटना । पीछे हटना । भ्या• भात्म• सक- सेद। घुटवे । मधुटत । अयोटि । अपोरिट घम्बू, जाना । हिलना । भ्या• पर० स० सेट् । धम्मति । अपम्बी घुर, सामनेसे चोटकरना । उस्टकर मारना । तुदा पर. घरह (पु.) भन्। पर भो यम्मात् ५. दा. सह सैद । घुटदि । अधुटीत् । जुपोट. जाता। पराट. धुर, (पु.) शुद+भए । घरणमन्यि । पावरी यांना धर्धर, (.) पुन: पुन परति । यस अच् । चलवे (गुल्फ)। एगी. हुए पानीका दाद (भावार)। गनद । दाजा । एक पुण, घूमना-बैन । दा. भ• मक. सेट् । पी। कारकी सर (आवाज) अपोणीन् । धुगते बमोनिट. धरिका, (श्री.) पर+अलर्षे ठन् । छोरी दी। घुण, (पु.) घु। अपने नामसे प्रति सो एक वाजा । भुनेहुए धान । एक नर (पु.). नेहारादीन, धर्म, (पु.) पृ सौचना+मक् नि• गुण । भमसे पीरितपुर, पद करना। बादार सरना । गुगुगना N. हुएफे अगोंगे पदाहा पानी । पसीना । धूप । गरमी. पर 4. सेर । धुती पोरीच. धर्व, जाना । मा. पर• सक० सेट् । पर्यवि । अपवाद, पुर्धर, (I.) को "पुर" इस प्रकार पद निला है। धर्मान्तः, (पु.) पर्मस मन्तः । गरगीध अन्त वर्षा श. पु(रिया प्रेग। सूमर मागाज. - सृग आदि.

पुर,1, घुप, स्तुति . आनुषिक ( उसके माय)है। समुथय ( अपेक्षाके विना बहुतांश एक काम थादिमें मन्य जमे "पिता और पुत्र गावहो जाता है" यही सामम पिनासी नाई पुरा भी मबंध है। जो योग (मापगमें अपेशावाटोदा एक कर्म में अदा) "पिता और पुत्र आते हैं" या दोनही नारा मंमें भापगमें भरेशागदित अन्यय । गमावर ( (१९२) तारीफ) करना-आविष्करण । जाहिर (प्रगट) घोप, (पु.) योपनि गारः अत्र। गुमरेका करना 1 चुरा० उम• पक्षे भ्वा० पर० सक० सेट् । घोप जहाँ गाई पद की है। आमीरपती । अगा। यनि-ते । पोपति । अनुयूपन्-त । थयुपत. "माये पम्" शब्द । बादली धापान । "कर मार घुरण, (न.) घुम्ाणच् । कुछम । केसर. एक प्रकारकी लना । (ध्यारणमें) वस। चूकः, (पु.) "घु" इति कायति। के+ । "धु" एमा कामी (न.), 'चिहाता है । उल्लू । पेचक, घोपका, (पु.) पोर-पाय क। दिलाने वाला को दिग्डोरा करनेवाला । दादोरा देनेवाला. धूर, मारना-सक० पुराना होना। अ० दिवा० शारम• सैट् । घोषणा, (ग्री. ) पुप्+नियुच् । लोकमें प्रमंद इस 'घूयते । अधूरिट । घूर्णः. रिये ऊंचं शरद करना। टीी। मुनारी । दंडोर हेट. घूर्ण, धूमना । तुदा० उमः सक० रोट् । घूर्णति-ते। घा, गंधळेना । भ्या. पर• अक• टेना-गुड• बन्दा भघूणीन् । अघूर्णिष्ट । पूर्णितः. जिननि । अनामीन् । प्रायः । प्रातः. घृ, सींचना (सेक) भ्वा० पर• सक० अनिट् । घरति । प्राण, (त्रि.) मा कमगि+क्त । मया गया ।-गः (507 सपापीत, f-(न.) गन्ध-मूंपनेकी किया । नानिकानक. घृण, चमकना । तना० उम• धक० सेट् । पृणाति-पृणुते. माणचक्षुम्, (नि.) प्राणं च यम्य । प्रा(ग) घृणा, (बी.) +नक् । कारय । दया । निंदा । घिन. देखनेवाला । अंधा । जो मागमें सूबता जाता है. धृणि, (पु.) +नि नि० किरण । लाट ।तर रहर । सूर्य. | प्राणतर्पण, (पु.) प्राणं (नानि) तयति । धृत, (२०) -चमकना । मावे क । चमक । “वर्तरि " निमत्यु । जो नामिकाको तृप्त की है। भुगीन। चमकाहुआ (त्रि.) सींचनेके अर्थमें "करि " सुम्यू. पानी । पकाहुआ मक्खन । घी. प्राणपाकः, (पु.) प्राणस्य पार्कः । नामिका (ना व्याधि, घृतकुमारी, (सी.) पृतप्रधाना कुमारी। एक बापधी | घातव्य, (त्रि.) प्रा+नव्य । सूंघनेटायक. (दवाई)। इसका पत्ता मटनेपर पीठीनाई बहताहै । प्रय, (वि.) मा-यन् । संघनेके योग्य । सूंघनैलापक. जीमीकंद. धुताची, (पी.) एक अप्परा। रात । चमझनेवाली। पीवाली. (इस अक्षरका बोलचालमें थानेवाला कोई शब्द) धूप, घसना-रगहना । सक. प्रगान होना । अक० म्याऊ, (पु.) दुटि। पियकी इच्छा। भोगी का भाम. सेट् । पपंत । अपर्पिष्ट इच्छा। चिमनीका नाम. घृष्टि (पु.) फिच्। वराह । स्थर। "किन्" कु, सन्द करना । भ्वा० आत्म• अक. अनिद् । पिमना । रगडना. अविष्ट. घोट (क),(पु.) घुट अच्-बुल् था । अथ । घोडा. घोटकारि, (पु.) ६ त महिए भिसा (पोडेका शत्रु). च, (अन्य ) Re अन्याचय ( एककी प्रश्नाने हर घोणा, (पी.) पुरस्म । थोटेकी नाविन। नागा यो साय कहना) जैसे "गोको जा और हर (गयरी). " यही गांव में जानाहि मुश्य और बकरीका दर घोगिन्, (दु.) योगा नामा पनि यस इति । (लंबी) नागावाटा । गकर (इम मंत्री नागा होती है). घोर, (पु.) पुक्यम् । दिद। एक ऋषि । (गांख्य में, গেল। প্রয়ায় এ ঘর্ম। পি (র) (२०) (गात) भयानक । दुर्गम (त्रि.). घोरामन, (पु.) एमनं दः) अमरा दरी यायार, हुओंन मन्त्रय) मेजय भोर पविको बाग मार,(पु.)(२.) पहलमा पम् । छ। हाय आदि मिटेनोंचाही अवय है । और । निपर है। परमाद I. समान । पारण। परमामा कर () - -- (१७) [ोर . , एप्ति।रजना | रापहोना। प्रगमहोना या भया• उम. | चक्रपुफरिणी, (सी.) पन नियत की। दापतिते । अतीत-अशकीत्वयि हरिके पक्रने गई शादी में मसि र, तिप्राश होना। पमना । अदा• परमका एकनी. दावराति । अयशासीत् । असत्. चयाधु, (पु.) पत्रयोः ()। सरोका -त, (न.) पत्+भावे फ। भय । परना । "पत- (मेल करानगे) मानो बंधु है। सूर्य । (दिनदेही - 2"राहुआ। ईरानाभा (त्रि.) सोलह अक्षररे, मय वे मिल जाते हैं) Tदा एक एप (बी.). चप्रभृत, (पु.) एकं बिमति-मीर। जिसमें र, (पु.) पह-नृम होना औरन् । अपने नाम करिष्ठ शी। (बहते हैं कि पदमारणों का पान का है), पामेदिनी, (श्री.) की भिननि (मयो जिसी) पीडित होना । धनि । तपटीफ उठाना । गुरा• उभ. मिन्न गिनि । ओ ववोध भापगमें प्रियोग गरे । र. मेद । पायति । भवरत्-त. रात्रि। रात। (पको ये शिकते १ या मोमें ल, (वि.) पर-अलन् । गोला परेदार, प्रमिय). -, (पु.) किसते अनेन ।+पम क । नि• दिसम् । घामम, (पु.) TV is ture पक्षी पर (पहिया) या पाच । ऐनाके घूमनेहाए। पन्दन भी गरीगो जोग । सबके राब राग । एक प्रकारका पाग: माघमायनिन्, (पु.) (भले) (द का गान (पक्षा) एक प्रकारका मन्त्र । अलावन । या) मा ( गर्यभूमी) बालि भय । रिपेर । (तमे) मूलाधार मादिमें रहनेवाले छ पन। पाणिनि । जो पृथिवीमा mtatrary बनाची पूजा करने के यन्त्र । (पला) एक प्रकारची पाय. यो सबल पृथि पर पूमने retri पना । तेसकी पदी समूहा गांवा समूह पुनः मामी। महरि onior 7 माग । मीकी मूंगा (लक्ष्य भेदही का लिन पार्थ के समान पूपनेहरा । (.)। रता है). सबसे आगे । बहामासी (डी.) फ, (पु.) पकं इस पारपि । क । जिसपी पति-पाय., (पु.) पान र । पो. बीगी भावाज निकलती है। (प्यायाम ) एक प्रा. -काई (मील) एक दोप. परेममा पसी चारिन, (५०) पण पी-उप• • 14% (पदिय) पयार-ल, (पु.) tarearrine) बनाय. सोमनntricitateam(..) घर, (पु.) व (अनमैदं) (फणमा) पति, (.) itate RETRI भारी ११ । एक प्रकार अब (हथिसर) या गुरवाएर कणगएको उगनेहारा । विष्णु । सपि । सर्प । राम. याप्यूद (पु.)nnrn पारा, (श्री.) पास पारा (ब) परदेशी मगोश समिएर मोसम कोच । पदिय बाबालक पाने जो एभग पौणा | पन, (पु.) याने रू.faart (ते)ोती है. नदी (सी.)ी। पामे भारिपा, (.) एपि मनी ने मरी. पा. (पु.) WAR AT (wit) (1) नामन्, (पु.)deम सा सारे माम. संस्थाको सपन free बायरी. "RRHEAmrt. नापक, (पु.) Tech I सेनाविर( sara(a) गमलने से. पानि, (पु.) (क) RIOR तुरा NERur सपनीमा (ense ANIL (1.)ERER पोलिस (5) Are | tentitter २५irmire.

बर, मजर 1प्रकादा मुनि हुआ. चक्रेश्वर, (पु.) चक्रस ईभरः-प०त । सम्पूर्ण प्रयाण्डय चरक, (पु.) चटी (मिनति) धान्य ईश्वर (सामी)। विष्णुका नाम । किसी प्रदेशका अधिक धान्य यादिवो तोमदती है ।चिडिया कारी। जिलाहाकिम. चटकाः । चटकिला (धी.). चनोपजीविन्, (पु.) चक्रेण उपजीवति । तेलके चक्र | घटकाशिरस, (पु.) घटायाः बिरहा) (कोल्ह) से जीता है। तेल निकालनेवाली । हेटी भादमी. गिरकी नाई। पिप्पणीमूल । मय चक्ष, कहना । छोडना । गयाल करना । अदा• थाम | चटु, (पु.) च । पियारा वचन ।।. सक० सेट् । चटे । अस्ट्यत-अख्यत् । (भाष्यके मनमें) आगन । रदर । पेट. अशासीत् । अदात । ( छोटना इस अर्थमें तो)। घटुल, (त्रि.) य+ठलच् । चबउ । - समचशिष्ट ली (पी.). चक्षण, (न.) चमन्युट्-नख्यादेशः । कहना । बोलना । चर, कोष । क्रोध करना । सफाहोना । इदिन् । = भूख बढाने के लिये एक प्रकारकी चटनी. अक० सेट् । चादयति-ते । अचाहन. चक्षुस्, (न.) बकरणे उनि । देखना न भास। घण, जाना । मारना । शब्दकरना और देना। सक० सेट् । यति । अवाणी-अवगीत चक्षुश्रयस्, (पु.) चक्षुषा Zणोति । शु+अमुन् । चाणयति । वा घटादि. चक्षुरेव श्रवः कणों यस्य वा । यससे मुनता है । जिसकी | चणक, (पु.) चग्-देना+कुन् । इस्यभेद । मांसही कान है। सर्प । सांप. छोले चने । एक मुनिका नाम जिसके चक्षुग्य, पु.) चक्षुपे हितः यत् । नेयके लिये हित- कारी। केतक (केवडा)। पुण्डरीक्ष । मुद्दोजना ।) चण्ड, (पु.) चटि-कोप+अ । निन्तिी मुरमा । कबल । आँसका टपकारी (नि.) यजगी। दरख्त । यमके दूत और एक देव । टी धनकुलत्यिका (बी.). (न०) देनीवाटा घोर गुस्सेवाला (त्रि.)" चमण, (न•) कमस्य ल्युट् । वारवार धूमना । चग्दी, चण्डिय. थहुत घूमना । इधर घूमना । तिरछे धूमना. चण्डात्मक, (पु.न.) चन्दा (कोना) पञ्चरी, (घी) च-जाना+धम्-तं साति। ला+क । प्युल् । मुन्दरवियोंका साथै टरओं (d) रको ३ होता है । । श्रमरी । मौरी । तिन्तिीवृक्ष । छोय कोट. "चमरीक" यही वय. चण्डाल, (पु.) चहि लालच । अपनी मान घश्चल, (पु.) चम्मथलच् । त लाति । लाक । रको छ । बदमे ब्राह्मणी में उत्पन्न कियागया संवर्ण (मर कामुक । यहवती । विषयी और वायु । चपल और चण्डांशु, (पु.) चण्डाः (पीनाः ) अशकः अस्थिर (नि.) बिजली धार लक्ष्मी (पी.). सकी किरणे देज हो। सूर्य. च, गति-जाना ! म्या• पर० राक. सेट् । यति । चण्डी, (श्री.) पहि+यदी । धनीत देवी । उसीके माहात्म्यो कहनेमे समय स्तोत्रको पदी कहते हैं. प्रशदलापत्रः, (पु.) चबलानि दयनि यम्य । चंचल चण्डीभ्यः, (५०) पयाः परः । व पत्सवाला सवय पीपला दस्त (पार्यती) का ईश्वर शिव. पदचित्तम्, (त्रि.) यवलं वित्तं यस्य । चंचलचित्त- चण्डः, (पु.) पग्लन् । मूषक । मूसा बारा अस्थिरमनवाय. घशा, (श्री) परस्यन् । र । पटाई। बांकी। घत्, मांगना जाना । म्या.म.निक हेद । निको बनाया पुस । धाराको गुडियां । दिन- धनुशाला, (सी.) चतन्नः पाला या । अपेतीत् । भवतिर. सामने स्थित होरहे धार परोशाला मन्दिर । पञ्च.(पु.)"र+81 पाकर ये" यधू । घोच (पक्षिना) धनुर, (नि.) . वत्सरन् । परी संध्यावासा । "प्रिया" सतनः । "नगरे पपुट, (पु.)ोग पी पोच. धनु (पु.) चत्वरम् । मिला। घट, माना । टोरना । पारना । हरिना । पुरा सम. काममें मासके सामने । मा. है। बीते। मपावत्-त. (नि.). - कोसी पुदली.

[चविधार, प्रकार पा. (म.) तर भगानि पर जिगके चार गचतुर्दशन्, (नि:)..। चतुरधिका दस । चार हाथी, पोग, गाडी, पैदलरप पार भंगोंवाली हर दग । पादाको परया (गिनती) । "तसा नाल, हरा, पीला और पके पार ऐनाके पमान पूरणे र" चतुर्दशः (पोदा)। "लियो" चतुर्दशी। लारे साधन जिसकेसरातरवायोपाडी रोल. बोदवी लिपि रन्ता, (सी.) पतारः अन्ताः यस्पा:-...र चतुर्वि, (अन्य ) तयण रिसा समाहारः-समा। अन्तवारी। पिवी. चार दिशाओंका समूह. सीति, (वि.) तुरधिरः भीतितमः । पुरा- धतुर्गर, (भवः) चत्वारि द्वाराणि यम । यार द्वार रेराया। पर पर भारतीया. (दोनों वाला (परआदि). रशीति, (बी.) पुरविन भीतिपुरासाय | चतुर्धा, (मन्या) प्रकारे या प्रत्ययः । चार प्रकारसे । पार तरहसे. रस-स, (त्रि.) पदमः अधयः-प्रेगा पस। पार चतुला (भया) या प्रकार+यात् । चार पेनस्टा. (तरह). रथ. (नि.) वसः अभय या सानिधनुयाहुः, (I.) चत्वारः पाहवः यस्य । चार हाथोंग्र। मुष्कोण । पंगेना । पार फोनपाला । (ज्योतिमै ) बार भुजावाला । वि. मरो चांपा और आर्या स्थान । "चतुरम" मी होतो. चतुर्भदं, (अपा) चतुर्णा भदाणां समूहः-रामा । पनन, (पु.) पचार भाननानि स । जिनके चार मानपजीवन के कल्याण (धर्म, अर्थ, श्रम, मोक्ष.) पर मुरा हो । ममा । “" re | चतुर्भद (न) सत्वारि भदापि । पर्म, अर्थ, काम, मो. शरूप पारों इस हुए कल्यान । मिलेहुए धर्म भादि चार. गण, (दि.) पणतः गुणाः सम्य । परकार पूणा चतुमुंज, (पु.) चत्वारो भुजा (हवाः) अस्य । जिस- के यार हाप हो। विष्णु. तुभा सोलहको संस्था. चतुर्मुख, (पु.) चत्वारि मुखानि यस्य । चार मुखोवाला । प, (नि.) पूर्ण प्रणः । जिस्से पारपी संख्या र (भर) होती है इस प्रकारका मुरीम (ोया). चतुयुग, (न.) चतुर्णा युग्पना समाहारः । सत्य, प्रेता, पार, चनुपर्यो । मार मार्गो से एक माप । बाया. मापर और कलिस्प चारों युग । "विज्ञेयं तचनुर्युग" ची, (श्री.) पन्द्रमाके पराक्य पीथा दिन । बीपी इति मनुः तिमि । (व्याकरण) भ्यो भ्यर ये तीनों प्रत्यय. चतुर्पर्ग, (पु.) यतुर्णा वर्गः ( समुदाय.) धर्म, अर्थ, पुर्य, (त्रि.)ी। (बी.) चतुर्ण पूरण:-दद । - बाम भोर मोक्ष समूह । चार प्रकारका पुरुषका अर्थ. तको पूरा करनेवाला । चौरया । या बोरथी 1-4 (5) चतुर्वर्ग, (पु.) यवारः वर्ग । मानव जीवनके पार किसी श्रेणीय चाया अक्षर ।- (म.) पीत्या भाप, समूह (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष). पुर्वमन, (नि.) चतुर्थ भर्फ पप । चौरया भोजन कर. धनुर्पर्णः, (पु.) चत्वारो पर्णा येषु प•स• । हिन्दुओंके चार नेवाला । पौरपीवार सानेवाला. वर्ग वा पार जातिएं अर्थात् माण, क्षत्रिय, वैश्य, शुर. पुर्यभान, (नि.) पतुर्य माति-भन्नभि । येक चतुर्पिका, (पी.) चत्वारि वर्षाणि वयो यस्याः (गोः) आय (भामदन) का चीत्था भाग लेनेवाला (प्रजासे) चतुर्विध, (.) बतलो पियाः ( येदमानरूप ) यस्य । इत्यर्थः । चार वर्ष अवस्थावाली गौ । चार वर्षकी गौ. र्थोश (नि.) चतुः भगः यस । पौत्ये भर सार वेदोंके जान्नेहारा । पारों विधादाला भी होता है. (हिस्से ना मागी । पौत्या हिस्सा लेनेवाला 1-0 (-)| धनुर्विधः, (पि.) चततः पियाः अभ्यस्याः येन-०प० । पात्या भाग । चतुर्थाश. चार वेदोको पता हुआ । चारवेदोंबा माता. तुर्याधमः, (पु.) चतुर्थः आधमः यस्य । चात् भायम चतुर्विधा, (बी.) पतसः विशाः-4. स.। चार दि. पाएं। चारों वेद. (न्यास वाला प्राङ्गण. चतुर्विध, (त्रि.) चतरः विधाः यस्य । चार प्रभारवाला । तुर्थीकर्मन्, (न.) मा कर्म । विवाहसे धोदी रात. चार तरहरा. पर कर्तव्य कर्म (रतरसम), चतुर्विधशरीर, (न.) जरायुज, अण्डज, सेन और नुर्वन्त, (पु.) घरवारो दन्ता भस्म । जिसके बार दंत उद्विदार चार प्रसारके शरीर । "चतुर्विधशरीरामि पुन्या दो। ऐरावत । इन्द्रगड इन्जीका सी.' मुच्या पद:"इति. ब्रह्मा. राजा.

मर. (१९४) मुनि हुआ. फेचर, (पु.) पराईभर-पन्त । सम्पूर्ण प्रशासन (चटफ, (पु.) चटति (मिनति ). इंभर (सामी)। विशुम नाम । किसी प्रदेशका अधि धान्य आदिको तोडडालती है। कि हरी जिलदारिम. चदककः । पटकका (घी). चोपजीनिन्, (पु.) चोग उसीवति । सेतके चक घटकाशिरस, (पु.) चटकायाः (ग्रह) में जीता है। देव निकलनेवाली । तेठी भादमी. मिरकी नाई । पिप्पलीमूल । मप. चद, रहना । छोडना । सपाल करना । बरा. आमचटु, (पु.) च । पियारा मका सेट् । बटे। अस्पत-अस्सत् । ( मायके मतमें) आमन । उदर । पेट. समान । मशात । ( छोडना इस अर्थमें तो)/चटुल, (त्रि.) चप्पल । चमक ममभित्र ठी (बी.). पक्षण, (न.) घायुर-नस्यादेशः । बहना । बोलना । (चर, कोर । क्रोध करना । सफ्नहोना । भूग बढाने के लिये कचरो पटनी. अक. सेट् । चन्दयति-ते । अचार भुम् (२.) चरने की । देखना । औरा । घण्, जाना । मारना । शम्मकरना और सह. सेट् । धाति । अचानी- साभयम् (3.) gn गगोते । शुभमुन् । चाणयनि । वा घटादि पुरेर थाको रसमा । भोगमे मुनता है । जिराधी ) चणक, (पु.) य-देना+मुन् । पर गोन।म।गा. सोच चने । एक मुनिका नाम बिग सुधा (3.) मरे कि पाने के लिये दिश- तर (m)। पुरी । गुजिना । चण्ड, (पु.) चरिकोप+अन् । मिनि भारतामोगरा वारी (नि.) मारी। परन । यमके दून और एक देव (२०)जीनाला भोर गुस्मेवासा (नि- राम, (.) "गुर । कारपर घूमना । पाही, यडिया. पर पूमा । पूमना. पामारमक, (I..)मा (करना पी, (..) -बारावी + । अतुल । गुन्दरप्रियोगाभाथे वहओं (43 हम भी कीन्ति छोटा कोट. " Art. घण्ाल, (पु.) पहिरन् । मा पाट,(3.) Nareीमाया। राश्य मानणी वापरयागया। are and sig(पु.) पाडा ( ) # an(R) र मी (श्री.). सीम गोपूर्ण, बनाना । म. पर• • मेद । यी। घणी, (श्री.) परिमादी । - देती । उमौके महाम्यहोराने . मोरोपतीकरते हैं. इटार.(.)ी ने दण | गंगारा, (I.) Inter INTERE. (पर्वती) ofer. बादिन, (.) मनं । नपिन- m:, (i) mitri । मगा। मगा।। प: (..) रम् । १८ । भागनमगना । जाना । Tw.firat मतारामतीत Fruiry : मो. ९. यतुगाला, (2) En ममने किलोपरा .:."aminera पतुर, (नि.). Termire HTRIY":rat पार(:.). बरruirem g. r भने Tamiti - प. (९५) [चपिपर, तुरका (न.) चलान भगानि यस्य । जिसके चार भग चतुर्दशन, (नि:). २. । चतुरधिका दायर हो । हाथी, घोडा, गाडी, पैदलहर पार भंगोंवाली पर दस । चौदह सरला (गिनदी) । "वम्म सेना । लाल, हरा, पीला और पछे पार सेनाके समान पूरणे "चतुर्दश (श्रीदवा)। "नियो" चतुरंगी। पेलरे साधन जिसके हो । सतरंज । भोपाती खेल, बीदवी तिथि. तुरन्ता, (श्री.) चतारः अन्ताः यस्याः-..चार चतुर्दिश, (अन्य )यां रिशा समाहारः-समा। अन्तमाग पिवी. चार दिशाओंका समूह. तुरशीति, (नि.) चतुरधिकः मीडितमः । पुरा-चतुर्दार, (अन्य ) चार द्वारानि स । कार र पियवा । चार ऊपर भरतीवा. (दांगों वाला (परमादि). तुरशीति, (बी.) सरपिग मीकि । परासी धनुर्धा, (मन्य.) प्रकारे धा प्रसः। पर प्रारसे। संख्या. धार तरह, तुरख-र, (नि.) चतर. अथवा कोणाः यस । सरधनुदा, (भन्दः) प्रकार+पन् । पार प्रकर कोनपाटा. (a) . तुरय, (नि.) पतप्तः अभय-प्रेणा यम्य । निधनुषांदु, (पु.) पारः परः स । परायोप चलोग । पायोना । परनपाला । (ज्योतिष्में ) बार शुझावाला । वि. हमरो धापा भौर भाटवां स्थान । "स्तुरम" भी होता. चतुर्भद्र (भमा) पर्णा मद्राणां समा गमः । भार मानवीर रामाण (एम, प.) गुपनन, (पु.) पत्वारि भाननानि यस । जिसके चार मुख से । बमा । "चतुरा" माEिME | चतुर्भद (न• ) वाचारि भदानि । पद, परममो. सस्प पारों हुए भारत मिरेर म मर. तुर्गण, (नि.) चतुणताः गुणाः यस । धारदार गुणा चतुर्भुज, (२) परदारो भुजा (m) चार हाय हो। रिष्ठ हुमा सहरी संस्था. तुर्प, (नि.) पूर्ण पूरणः । जिरो पारखी या पनुप्स, (इ. ) पाचारि सुतनि दस्म । पर इसक्छ । पूर्ण (भर) होती इस प्रकारच दुरीम (भाषा). चतुरंग, (म.) पूर्ण पुग्पना राम राम, क. तुपीरा, बोडस पार भागोंमसे एक मग । माया. द्वापर और तपसरों पुष । यि पर तुर्थी, (श्री.) चन्द्रमाके पक्षच पोषा दिन चांदी लिपि । (म्याकरण ) यो भ्यए ये तीनों प्रत्यय, चतुर्ग, (पु.) पूर्ण वर्ग. (समुदर , ot, तुर्थ, (नि.)-4(डी.) चतुर्ण पूरण र । बा. काम भीर मोक्ष समूह रre sment रोको पूरा करनेवाला । चोरया । या चारही 1-4 (5) चतुर्थर्ग, (३.) एचर वर्ग । माया पोत पिसी गोयामा भार ।- (म.) त्या भाग. समा(पई, म, मे) तुर्षभव, (नि.) भएमा बाधा भोजन र. धनुर्वर्णः, (पु.) परोपई .स.स मेरापरवर रानेर. पर जानिए परररर वर्षभान, (नि.) पूर्व भारि भनि । प्रदेश चतुपिका, (मो.) चार पहिरो (2.) माय (बामदन) बोरया भाग देनेवाल्य (असे पति, (.medient) बलरसरा. तुर्थोरा (नि.) तु. भा. या धोरये और पर देदो जमेरोमrta.. (हसे भी मौका दिया है। पिः (नि.) PERRE -...। फाया भग पोश. नदोर समारोrm. पतुषाधमः, (5.) यम एस धनुर्वित, (..) Break पारो. (सम्पाय) . सब्धि, (horm freeराय। पतुलमन्, (.) सेल परमार Ma(प). बर्दियार, (३)मरपुर, सार पतुरंत, (पु.)रिपोरस TEmothiratram रोपिरोप. एम. हमा. इति मनु- ( १९४) मुनि हुआ. चक्रेश्वर, (पु.) यस ईमरः-प-त. । सम्पूर्ण ब्रह्माण्डा | चटक, (पु.) चटति ( मिनत्ति) धान्य ईथर (स्वामी) विष्णु नाम । किसी प्रदेश अधि. धान्य यादिको तोडडाददी है। विडिमा। कारी। जिलाहाकिन, चटकाः । चटकिका (घी). चकोपजीविन्, (पु.) चकैग उग्नीवति । तेलके चक बटकाशिरस, (पु.) चटकायाः शिश (गेहू) से जीता है। देठ निकालनेवाली । वेठी भादमी. निरकी नाई । पिप्पलीमूल । मत्र. चर, कहना । छोडना । सपान करना । बदा• आत्म.चटु, (पु.) बदक । पियारा पवन म. सेट् । चटे । अस्पन-अध्यत् । (भाय मतमे) आसन । रदर । पेट. भशासीत् । अश्यात । ( छोडना इस अर्थ, नो) घटुल, (त्रि.) चप्#उलच । चयउ। समवक्षित ठी (श्री.). पक्षण, (न.) चश्मयुट्नस्यादेशः । रहना । बोलना । चर, कोरा क्रोध करना । सफाहोना । इपि भूग बढाने के लिये एक प्रचारकी चटनी. अक० सेट् । चन्दयति-ते । अचाहन. पशुम्, (न.) घारगे धन । देसना । और। घण्, जाना । मारना । शब्दकरना भर दे मगर प्रमश. सक० सेट् । यति । अवाणीन-अब पाययम्, (पु.) चरा भगोति । शु+अमुन् । चाणयति।वा घटादि. भरेर घर सस वा । आंससे सुनता है। जिसकी रणक, (पु.) चन्-देना+कुन् । इसमें मोगही भान है।स। मार. छोटे भने । एक मुनिका नाम निगरे पप्प, (5.) भुरे दिः यत् । नेत्र ठिये हितat (बा)। पुरीका । मुहागना । चण्ड, (पु.) चरिकोप अन् । विन्ति। माय । मोगा उकारी (नि.) भगकी। दरख्त । यमके भूत और एक दव। (.). (२.) वेजीकाला और गुम्मेवाण (नि.) प्रस, (.) नम्पनर । बारपर घूमना । पग्दी, चरिद्वय. पासना पर पूमनः । रि पुरना. चण्डात्मक, (पु.म.) या (बोना) as (2) RE+प- w+ । "बुल् । गुन्दरनियोका साधे उदओं (प हमरी । भारी विन्ति। टोटा कोट. चण्डाल, (पु.) हिमाल । मानी पात, (पु.)पत्यष्टलरनेछ । शूदसे मामी में उत्पन्न कियागया संग। andi और वायु पर अण्डांशु, (पु.) पाहाः (वीत्राः) और far (R) धार दमी (बी.). ग्री किरणे तेग हो । सूर्य. बार । R. १. घर• सैद् । पची चण्डी, (श्री.) पति+म+दी । देती । उमी के मादाम्यको एनेगे । मोरोपाटीपाते है. अशष्टटा,(पु.)मरात दयनि सम्म । चार घणीयर, (पु.) VEभा। टाटा (पार्यन)वि. बानिय, (वि.) बदन विनं कमा पवित- यः, (पु.) पाइन् । मगर । ममा। मांगना मामा म्या. भ... स, (2) सम्म । र । बाई ।। अनीस भरत कमाल मा दीपा । निशाला, (.) लात . सामने स्पिनरोपार घilmन्दिर NE.(:.)"hrime"पाव (8) पतुर, (त्रि... पदमार। माया":"fe (:.). र.mire Tri. मने पल (4.). . - (१५) (पविषारीर, Tण (म.yok भगानि सर । जिसके चार भंग धतुर्दशन्, (वि:)...। चतुरधिका ६ । चार रो । दी, योग, गाग, पेदलाप पार भंगोवाली पर दरा । पोदारी बया (गिनवी)। "तस नारा, पीला और पार ऐनारे समान परणे पर" (चौदस)। "लियो" चतुर्दशी । ऐलर पाचन जिसके । सतरजापानीस, पौदवी लिपि तुरन्ता, (की) तारः पन्ता पान...पार चतुर्दिस, (अम.) पतपणा दिसो समाहार:-पमा । अन्तवारीदिदी. चार दिशाओका समूह तुरतीति, (नि.) पुरधिकः मशीतितमः । पुरा- चतुरिं, (बब.) चत्वारि दारामि यस्य । थार द्वार frमदापर करमरपोरा. (पांगो पाठा (परमादि) नुरशीति, (बी.) रविध मसीहिः । मुस्योरी चतुर्धा, (भन्य.) प्रकारे या प्रत्ययः । पार प्रकारसे। पार तपसै. नुरण-र, (नि.) पतमः अधयः-प्रोग्यः स । चार घनु , (भया) या प्रकारधाम् । चार बीरदाया. (त) से. तुरथ, (नि.) पतयः अधयः-प्रेणा पलायनुयां, (पु.) चत्वारः बाहः यस । चार हाथोंदा । चकोण । पंकोना ।पार कोनवाला । (ज्योतिष) चार भुजावाला । विष्णु लासे पीपा भोर भाटा स्थान । चतुरम" मी होतो. चातुर्मद, (बघा) पतुर्णा भदाणा समू-समा । पार मानवजीवन कल्याण (धर्म, अर्थ, घम, मोक्ष.) तुपनन, (पु.) पचारि भारगानि पस । जिसके कार मुरामा "" REETE | चतुर्भद (न• अपारि भद्राणि । धर्म, अर्थ, काम, मो. क्षप पारों में हुए कल्यान । मिटेहुए धर्म आदि चार. तुर्गण, (वि.) पOTr: गुणाः रस । भारदार गुण चतुर्भुज, (पु.) चरवारो भुजा ( हस्ताः ) अस्य । जिस चार हाप हो । विशु, हुआ सोलहकी संख्या. चनुमुंख, (I.) चत्वारि मुखानि यस । चार मुखोपाला । तु, (त्रि.) पूर्ण पूरणः । विस्वे चारको संख्या पूर्ण (भरोटी इस प्रकारप तुरीय (पीया ). चतुपुंग, (.) चतुर्णा पुनो समाहाः । सल, नेता, तुर्थारा, पर्षायः । पार भागोममे एक भाग । पापा. द्वापर और कलिप चारों युग । "विनेयं तचतुर्युग" तुर्थी, (श्री.) चन्द्रमाके पक्षण चीया दिन : चौकी लिपि । (म्याउरण ) मा भ्यस् ये दोनों प्रलय. | धनुर्वर्ग, (इ.) चतुणों वर्गः ( समुदायः) धर्म, अर्ष, तुर्थ, (नि.)-(श्री.) चतुर्णा प्रणः-दद । का- काम भीर मोश समूह । चार प्रकार पुरुषका अर्थ. को पूरा करनेवाला । चोरया । वा चोरी ।-4: (०) धनुर्पर्ग, (३०) चत्वारः वर्गः। मानव जीवन के पार किसी धेणीय पीथा भार ।- (म.) त्या भाग. समूह (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष). तुर्धमता, (वि.) चतुर्थ भकं पस। चौरपा भोजन कर-चतुर्पर्णः, (५०) यत्वारो वर्णा. येषु-ब.स. । हिन्दुओंके चार भवाला हिरवीदारानेवाल वर्ण दस पार जातिएं अर्थात् माक्षण, क्षत्रिय, वैश्य, शा. तुर्धमान, (नि.) पप भगति- भनि । प्रत्येक धनुषिका, (सी.) चत्वारि वर्षाणि वयो यस्याः (गोः) आय (मामदन) का चीत्या भाग वेनैवात्य (प्रजासे) धनुचि, (5) चामो विधा ( दाना ) मस। दल । चार वर्ष भवस्थावाली गौ । चार वर्षकी गो. तुर्थाशः, (त्रि.) चतुर्थः भेशः यस्य । चौरये औश चार वेदोंके गानेदारा।सरों विधावाला भी होताद. ( हिस्से में भागी होत्या हिस्सा लेनेवाटा 1-2 ()/ पार्यपा, (मि.) चतन्नः मिशः अभ्यस्य: येन-1..। चीत्या भाग। चतुषांश, चार वेदोघे पडा हुभा । चारवेदोका हाता. प्नुयायमः, (I.) चतुर्यः आभ्रमः यस । चन्ये आम चतुर्विधा, (प्रो.) पतनः विश-.स.। चार दि. पाएं। चारों पेद. (सेन्यास वाय माण. चतुर्विध, (पि.) चासः पिपाः रस । यार प्रारबाटा। तुर्थीकमन् , (न.) चतुर्यो कर्म । विवाहसे चीयो रात- चार तरहरा. पर रतन्य धर्म (रीतरमम). चतुर्विधशरीर, (न.) जरायुर, बन्दा, सेदर और ग्तुदन्त, (पु.) पस्वारो दन्ता भस्म । जिसके पार दंत उद्भिदरप चार पधारे धनुर्विश्वरीयनि प्रया हो । एरावत । इन्दगर । इन्दनीया. इति मनु - रामा.

1 . भीमाद । मन्दन (न.पानी चादगा, (T.) मम ममम TAM म, प्रामसभाdam चनुर्विचा, (नि.) चतुरधिध पिशविः पस्मिन् । बार चत्वाल, (पु.) चपलच् । होम FIE अभिल बीरावा । पौवीसी सेस्मासहित. युशा. चतुर्दिशति, (61) परमिटा विशतिः । चार जर चद्, मांगना -। भ्वा० . उभ० . निकसेह । पीसीसीसी गिनती । वा उस संस्थामा. भयरी, पनुदः (पु.) भारः वेदाः यस्य । चार वेदशेरो जाने चा, आहाद। रारा होना । प्रमन्न होना और चारा पर• अर• सेट् । इदित् । चन्दन । अपनी चतुरंद, (पु.) ययारियां पयारो म्हा विभागा ) चन्, शन्द करना । भारना । पनति । अचान र मा पसरपति सादि कार्य के लिए जिसके पार भाग है। चन, ( भय.) न पूरा । जो कुछ। मी. : सुश, मरनमान और निरमाया विशु. चन्दन, (पु• न. ) चरिविच्+त्यु ! मापार चतुहायन-८, (वि.) चार हारनानि यस-ब. स.। गंधसार सात चन्दन । एक वानराला चन्दन धेनु, (सी.) चन्दनेन अहिता धेनु । घनुहारसम्, (म.) पर होगा समाहारः । चार पर चन्दन छिडका गया हो। यदि पीर सी भर्नाके पहिले मरजाय तो उमे सर्ग तुम (न.) मामः गम्भ कापति । क ( पार के उदेशमें ऐसी गौ दान की जाती है दियो। में (पर। जिसमें पार हो । भारों पन्दन मरा हो । राजपर बरनके निराना। रा(म. करनेयोग्य धेनु. पुरस.(.) भाग (IN) भग तय । चन्द्र, (पु.) परिर पन्द्रमा । मगर गया। सोला । चार प्रकारका कर । हीरा । पानी । मुन्दर । कारेग । मेर मोटी इलायची । रोशन. (3.1 पचनः प्रयास भापमाः | गद्रक, (पु.) कायति । mm r.. पर माया मानण। मोरके पंसका गांव शाला ""परगना मलाए । मरठी । गुपे मरीग। मरिष. IPTITमाला मागं । भोर. गद्रकला, (श्री.) तयाोगभग (3.) नाना पाकर पति- गोललो हिरगा । विदेशा एका. (A) एक नकारत, (४०) गग्य पान rity मध्य (गे) "मनु" का निधारा नाम *.)re पर मणा 1121 (पाद् (बादको वैगर fatt) For fun) मार Thermat मापन या पाशामि, (.) Tetr" HTTTTTA ore. ()() मा पानि, (T.) अHT MIRRI TRI माम (N) Kari कार ती भौबिमलीबारी11.101 1741217THIMITRA . Hasirhal . पास arrer . मन - } Or । रा नामागः, (p.amr.NEL . (Are rel.पणन (..)" .

चन्द्रनिभ,] ९.) पनीर, - : चन्द्रनिभ, (त्रि.) चम्देष निमः-सः । चन्द्रमाके चन्द्रा, (सी.) पनि । एन्या । इटाप । चन्द्रार। समान चमकनेवाला रोशन । मुन्दर.. चंशे. चन्द्रप्रभा, (श्री.) चन्द्रम प्रभा । पदमारी रानी । चन्द्रातप, (पु.) चन्दम्य बातः (गमनं ) सतः पगी। चोदनी. पाक | चंदोभा । चांदी हिरण । ज्योसा । चांदनी. चन्द्रपाला, (तो.) पन्द्रस्य (करस्य ) बाला इव । चन्द्रापीड, (पु.) चन्द्र आपीट: (रोभून) पर । 1 (समानगंप होनेसे) मानों बापूरकी कन्या है । मोटी चन्द्रमा जिमके सिरका अमार है । शिवजी । सर- इलायची. पीडा पुत्र एक जा चन्द्रभागा, (ख) काश्मीर देशी एक नरी. चन्द्राः, (पु.) पदस अर्ध- । चन्द्रमाय चन्द्रमण्डल, (म.) ६ साबन्दमाषा मण्डलाकार भाषा चन्द्रमा. खम्पा चोदकी गोल पाल. चन्द्रिका, (पी.) बन्दः मापापेन अगि म चन्द्रमस् (पु.) पदं (थाहा) मिमीठे । मानन्द टन् । यन्दमा जिगरा अपना बाप्रय है। सनी। देनेवाला । "क" (क) मावि (दुलयी) मानसि- मोटी इलायची । तेरह बशरके पादसायद. था। बापूरफे समान हीरानेदारा। चन्द । चदमा । द. पन्दोपल, (पु.) पापिया सतः। पहा चन्द्रमुखी, (मो.) चन्द एव मुर्म पस्या:-... जिगता यारा पापर। पन्दालमनि, मुरा पदमारे समान है। प्यारी मुन्दर श्री. पप, पूर्तीकरण-पीसना । गन्तनगर देना चन्द्रमीलि, (पु.) परः मौली । जिसके मायेपर देना । पुरा.बाया. उभ.पर.सेकसी। पन्द्रमा है । पन्द्रसर । शिव शंकर । महादेव. अनीपत-साताबरमर चन्द्रलोकः, (पु.) पदस लोकः । पन्द्रमाका लोक. चपल, (पु.) मंदगी परेपलमामला। परामउगाएर पर। चन्द्रपहरी, (स्त्री.)त. सोमलता । एवमारपी शामिछ। किनभर के लिये हमे TI. वेत. चन्द्रपदन, (वि.) पर व पदनं यस्य । चन्द्रमाणे दुनिीत विकिपा (२.)। पुंची । सराप औरत । भए । foto समान उपपलमुरावाला. मदिरा गिा। *भ । और मे (..) घद(पु.) चन्दन । पन्द्रवंशी राजालोग. पपेट, (पु.)पर-धमाबय (चार)att चन्दयत, (म.) बहस ( पन्द्रलोषात ). (ग) Kाओ परेको (नियम) । चन्द्रमाके लोरमें जाने के लिये नियम । जाती है। भोर । हान्दायण मामी बन.. "मोरमास शिपय समय पद्रमाला (पी.) पार पापरः अस्या । प्रयोग ""। पेशी परके समान चोद जिला अधय है । बाँदनी । पम्, सना ...। "पर अररिय"परम के समान शाम आपमा दिली । परनेवाप्य प्रासादोपरिस्पाचा महतो ऊपरत पर. घमवार, (पु.) पाती । पदोगर, (I.) चाग (भूप) । राती (म) - बन्दमा जिसके गिरका भूपप (जे) रिगे। अनन्दप RIEtaai पूरिसपत. पादासम्मप, (पु.) WAधमर, (पु.)ोमा tre एम सदर पुर । एक nिe मे रस(२) RAIर "सोमपुर" भी हमें । नर्मदा "N" (..) मी (2) पमर, (...) Ente arr पदास, (पु.) पर NCR (1) ARI सागरताप.) पाnि. सबसे। लामो (क) tir८(.) Iron()(..) -

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पनिम, [चमीकर, चन्द्रनिभ, (नि.) पण निभ =HENः । चन्द्रमाके | चन्द्रा, (सो०) चदिर । एका इलायची । चन्द्राता । समान परमेहाला रोगन । मुन्दा.. चंदोआ. चन्द्रप्रभा, (सी.) पदस प्रभा। रन्दमारी रांगनी || चन्द्रातप, (पु.) पदस भातः (गमनं ) सतः पानि । सांदनी पा+दोभा। चांदी करण । ज्योत्या । चोदनी. चन्द्रपाला (सो.) पदस (परम्म) बाला इव । चन्द्रापीड, (पु.) चन्द्रः पापीर: ( शिरोभूषण) यस । (समानगंध होनेसे ) मानों कापरी, न्या है। मोटी पत्रमा जिसके मिरका अलंकार है। शिवजी । तारा- पीडा पुत्र एक राजा. चन्द्रभागा, (बी.) काश्मीरदेशकी एक नी. | चन्द्राधः, (पु.) पन्नस सः । चन्द्रमाका आधा। चन्द्रमण्डल, (न.) १. चन्द्रमाका मण्डलकार भाधा चन्द्रमा. स्वरूप । चादी गोल कल. चन्द्रिका, (श्री.) चन्दः साश्रयत्वेन अलि अस्याः चन्दमर. (पु.) चन्द (भा) मिमीते । मानन्द ठन् । चन्द्रमा जिसका अपना आशय है। चांदनी। देनेवाला । "प" (रे) माति (गुलपति) मा+असि. मोटी इलायची । सेरह अक्षरके पादवाला एक इन्द. था। पापूरके समान सनेहारा । चन्द्र । चन्दमाद.चन्द्रोपल, (पु.) चन्द्रप्रियः उपल । चन्द्रमाका पि- चन्द्रमुखी, (को०) चन्द व मुम्ब यस्पा:-.स. जिसका यारा पत्थर चन्द्रकान्तमणि. मुरा चन्द्रमाके समान है। प्यारी सुन्दर स्त्री. चप, पूर्गीकरण-पोसना । सान्वन-हीमला देना। शान्ति चन्द्रमौलि, (पु.) चन्द्रः माली यस। जिसके मायेपर देना । पुरा-या भ्वा• उभ• सक-सेट चिपयति-से । पन्द्रमा है। चन्दपोरार । शिव । शंकर । महादेव. अचीवपत्-त ।बपति भवापीत् । अवपीद. चन्द्रलोकः, (.) चन्द्रस्य लोकः । बन्दमाका लोक. घपल, (पु.) नर-मंदगति-धीरे १ चसना कल । पारद । पारा । मछली । एक पत्थर । और राजमाप । रगल । चन्द्रपालरी, (सी.) ६. मोमलता । एकपरकी शनिक । छिनभरके लिये रहनेहारा घबराया हुआ। और वेल. चन्द्रवदन, (नि.) चन्द इव बदनं यस । चन्द्रमाके विनीत । अशिक्षित । बेवकूफ (त्रि.) लक्ष्मी । विगे। पुंधली । राराब औरत। मघ । पिप्पली । विजया । समान उपल मुरादाला. मदिरा । बिहा । जीभ । और भार्यारम्दवा मेद (सी.). पदपंसा, (पु.) चन्द्रम्य वंश । चन्द्रवंशी राजालोग, घपेट, (.) चप्-पम । चाय ( सांत्वनाय) भात चन्द्रमत, (न.) चन्द्रम्प ( पन्द्रलोरपतये ).मतं ( गच्छति) इदक । ओ दूसरेको ठंडा करने के लिये (नियम) । पदमारे कमें गाने के लिये नियम । जाती है। फैलीहुई भंगुलीभोवाला हाय । सपेर । चान्द्रायण नामी मत. "राण्डिकोपा याय. शिष्याय चपेटो दशाति" इति माय- चन्द्रशाला, (खी-चन्दा शाला र साधारः असा । प्रयोगात् । "सार्थे गन्"। चपेटकः । यही अर्प. घरके समान चोद जिसका आप्रय है। चोदनी । घम्, साना । भवा• खा. पर• राक• सेट् । चमारी । "चन्द्र पवादियशाला" चन्द्रमाके समान प्रसन्न आचामति । पिचमति । बम्रोति । अचमीरा चलिरया- । करदेवालय पर प्रासादोपरिस्थ गृहपरा चा महलके उपरता पर. चमत्कार, (पु.) घमर ही अब किदवे ।+प । चन्द्रशेखर, (पु.)पन्द्र राई (शिरोभूपणं ) रस। दोशनीताल। (अजीर पीर)को देरासर वित चन्द्रमा जिसके सिरका भूपण (जेवर) है। शिवजी । आनन्दय वारण प्रहा। विम्मयादैरानी । आप । पूर्वदेशमै एक पर्वत.. अपामार्ग पश, चन्द्रसम्भय, (पु.) सम्भवति. अस्मात् सम्भव । चन्द्र चमर, (पु.) चम्मर । भने सस्ता एहरिण । एम्भवः यस्य । पन्द्रमारे उत्पाहुआ। बुध । सी- जिग पछने समर () नामी पंगा बनाते है प्रकार “सोममुत" आदि भी इसी अर्थ । नर्मदा और एक देव "वियो" पमरी । हमर पंसा (न.), नरी और मोटी इलायची (ही.). घमम, (पु. न.) कम्म्मम । प्लान बनानुभा चन्द्रास, (पु.) पन्द्र र हाम (प्रमा) अस। रहा एक । सोनरमीनेश पात्र मा (पु.) पर हसति । जिस प्रकार, बोदके समान हो। पायो (पुपेद होनेते ) चोदो, की इस रहा है। मापीकर, (पु.) सर मानी सोरेटेरनेसन भाग । तरपार । रूपा (म) IN (मी.). (जिम परण सेनेग्रे "नीर"य) .

पन] . ब. (स.) व सेना । (हारी २९, रस २९, चरणारविन्दं, कमलप (२०) चरण ( पोरे २१४, पैदल २५)इतनी संध्याकाली सेना. इस-उप. स.। कमल के समान चरण (1) चन्द, (5.) परम् । मृगनेद ! एक प्रकारका | चरणम्यूह, (.) चरणानो ( वेदना) हम । चना | "कास्पषनमः" इति मापा, शेषेण ऊहः) निरूपणं यत्र जिसमें वेस चारक, (पु.) परिवानान् । केला । देउन । विशेषहरसे वर्णन हो । व्यासका बनायाहुआ चरम, (नि.) घरभिमन् । अन्त माना चमकमाला, (श्री.)त. सोनेके यमकोंसे बना- भासिरी. हुआ प्रियो गडेन अलंकार। दस अक्षरके पदनाम चराचर, (न. ) य+अच् नि । चलने और पदिद। मोनोर. वाला । जगन् । दुनिया समा.दं. गरी अनापित, (दु.)त. सम्मान सामी कर्णराजा. • गमां भात। शिवजी जटा (पु.). सन (को०) मिश्रित संस्कृत काश्य । गय और चरित, (नि.)(न.) (क) पाने निरआर प्रधरा कान्य. पालिया। रलिया जानागार अनुदानाना पनामा पर•सका सेट् । धम्बति । भवम्यीत. वियरना। मनुकर्मआदि न करता। य वाम माम• • सेट् । ययते । अवनिर. कहानी। चाउचाउन । समार. अय, (I.OR+मन् । प्रारम् । कोट । सर । चौकी परित्रम्, (म.) घर-इन । समापार थार: पा.(.JARA महार. परिष्णु, (नि.) पशुन् । बनेपा र (JRSTINATी नीचे डार हैटो- (.) । हव्याश्च । होममें डाली पर उधर घूमनेदारा. CITrarपुनरना. (धो दूध मादि) । पानेका पात्र (भार ...रावती भिकारी. को पी पाकर इस कार रहित, (3) मा भर परे सपो मान-य, ( पाना) रा. भ. सक० सैन् । वर्ष irror गुमनेहारातातिथि। भरपर्चततापितः। चर्चा FIRIN (मोने) मेश, तुमचर्य, माना। सिकना । मगंन । • पर.' गुन.भाग ये दोनों तारे। चर्षति भवति Ma(२.) पालजाने (नि.). पक, (f.) भगुस् । र भाप err.(.)सरगराएर मुनिन नाम परनेवाला पहनेवाला. (e) मुनि के नाम पर (मुग्नीपचंतम्, (२०) र स्युर । मध्याम भएमा । सानिg (Atr). मयुदेन पार पनपी (बी.) भान्सी । एक बाप, (:.२.) मान्ने गर । सिमे पी। भन्दा मेरो कलियर बना भईभरन. मंगलप ग्रंथ । (कविता पार IN "र"रना। मोमोट गा. Crore,(h) भरा। हा पेम) Tre rest (1.) ...IME ग। चलि.(पि.)। सुगमता RT 11. रा.(a.ri (1) TIHIT Entr गर्नया (1.1tameter . . करबरपाना.

पगम] (चावल्यं, चर्मपापम् (म.) चर्मणः पापम् । ढोरा । एक प्रका- चल, जानाभ्वा० पर• एक सेट् । चलति। अचालीत् । रका चमडेसे का हुआ भाजा. चला। चाल. चर्ममय, (त्रि.) चम+मयद । चपडेका मना हुआ. चलच, (बु.) चला चमुः यस्य । चग्रल पुताली वर्ष, आना । साना मा. पा. सक. सेट् । पर्वति।चर्य । पाँचवाला चकोर. अवर्षीत. चलन, (नि.) पलाभावे ल्युट । चलनेवाला । हिलने- चर्मकार, (पु.) धर्म (तन्मयं पाहुयादिक) करोति बाला । कोपनेघाला। (न--पु.) पाद पर (पाप). +अण् । चमडेकी जूती आदि बनानेहारा । चर्मक । चला, (बी.) चलाभच् । चलनेवाली । लक्ष्मी. चमार मोची. चलाचल, (त्रि.) पर अच्-नि• । अत्यन्त पचल। चर्मण्यती, (बी.) धर्म अलि असा । मनुर । नि. काम । वामा (पु.). नदीभेदका माम. चलात्मन्, (त्रि.) चल. आत्मा यस्य । पल सभाव । चर्मदण्ड, (पु.) चर्मणा कृतः दण्डः । चमदेका बनाहुआ यात मनवाला. दंगा पारसकोम. चलित, (नि.) चलाक । कापाहुआ । हिलाहुआ । चर्मन्, (न.) चर+मनिन् । फलक । दाल । चाम । एक पलागया। जुदाहोगया. इन्द्रिय जिस्से एते हैं । "पारीरावरक शास्त्रं धर्म इत्य | चलुः, (5.) घर छन् । जलका टं. भिधीयते". चर्मपादुका, (श्री. ) चर्मनिर्मिता पादुका । चमदेवी घालुका, (पु.) घटना मीयते+कन् । अंजलीभर पानी । पानीफी भुमी. पनीर सहाय । उपानह । जूना. चलेन्द्रिय, (नि.) पानि इन्दिपानि यस्स-4 ... चर्मप्रसेविका, (स्त्री.) चर्मणा प्रसीप्यते । मिव्युत् । पचलन्द्रियोंवाला. (भाग भन्काने के लिये ) धमटेसे धीया जाता है। भ- घलेषुः, (पु.) घस. एः यस । चमत तीरकाला। खानामी यन्त्र । भला घोहनी पंकनी. जिसका तीर एश्य (निशान) पर नहीं लगता. चापकार्तिन, (पु.) धर्म अवमिति । घमहा काट- चपति, (श्री.) चम्पति-भाये । भक्षण करना । साना । नेवाला । जूतीबनानेवाला । मोची. मारना. चर्मिक, (नि.) धर्म+द+कदालनामी हथियार था-चप्, साना । भ्या- उभ• सक० सेट् । पाति-वे । भवा- रण किया हुआ. पीत-अवधीत चर्मिन् , (पु.) चर्म ( फलक) अस्य अस्ति । हनि । लिपपक, (पु.म.) प-करना+पम् । मया । सके पास दाल नामी हथियार हो। स्वचारप चमदेवाला । हाराब पीनेवा पार (पियाला ) । मनिए" पहल । भूस । मरीट पसी । चमडेवाला । सिपाही. एक प्रकारची मप (२.). चर्चा, (बी.) परस्मयम् । नियमका न छोडना । पर चापाल, (पु.) चप्+आलन् । महरा पा बाधने के उपदेश कियेगये प्रतादिरा मनुष्टान । विचरना । गारीमें उिये लकी । यूर (खंया) के मध्यमें देनेयोग्य कोके माना व्यपदारसभावापाना, भांति लपरी का लोहा पदार्थ. घर्ष, राना ( दानोंसे पूरा करना)। चायना । पुरा. मघा, टगना । मा• पर. सक० सेट् । पहति । अहीर, पझे भ्या• परावर्षयति-ते । पर्वति । पर्व अचर-चाकचश्य, (म.) पम्म । पकः | प्रकारे हित। पत्त । अव द. परस्य भावः उमटता प्रकाशानी। चर्पण-गा,(न• श्री.) पर्वम्भावे स्युर । भावना । साना । प्रचाराबमक. साद हिना काटिन भोगन. पाम, (नि.)ी (टी.) पर नि षण् । त्य- घर्षा, (बी.) चमारा थपेस्टगाना । पारना. (गारी) से पूराहा (पुर)।गारीके पहिये. पर्यित, (त्रि.) चयनिरूपाया साया. पावित (नि.)-बी (बी.) चरेण परति । सदरे गया । बाद लिया गया. साप प रखनेशालय 1- (पु.) मार ( चर्य, (वि.) चमसर्मपि पत्-यत् । पानेकारक। पलानेवालाल मिररनेवालादेली. 4 (म.) टिन भोग्न. पाय, (प.) परम् । बा पहिलामबंदी. चर्षणि, (पु.अनि .। पहिले असर होता | चाभुष, (म.) सुनितम। मापने उमा। है।जनमोग। (र) देना । पाल पाना दारा श्रम. पिाय, (4.) पतमम् । पपता MR.. - पाला मनुष्य.

मांट, -- एक मसालिया. . - जाभवाला. चापल, (न.)चपलस्य भावः कर्मवास। होना । दिलको आराम न होना। बिना मोरे घाट, (पु.) चद-मेद । फाइना+थच् । पहिले विश्वारा दे. चातुरी, (सी.) चतुरम्य भावः । तम्येदं वहा कर पीछे धन लेजानेहारा चोर । "चाटचारणदामेषु दनं राई । होगयागे। एल. भवति निष्कलम्" स्मृतिः, घाटकैर, (पु.) चटायाः चटकस्य वा अपत्यं एरक् । चानुमाम्य, (न.) चनुपु मायेषु विद्वितंचाई नाम विधान कियागया । चार महीनोंने मन चिडियाका यथा । चटकापलं. यन्न वा प्रन । भाषाहरी द्वादनीमे है इना चाटु, (पु. न.) चट+गुण । पियारा वचन । झट पियारा वचन । साथै कन्. द्वादशीतक चार महीने (जो शुम कम होती. चाटुकार, (नि.) चाटु करोति उप० स०। झुटाप्यारा चातुर्य, (न. ) चतुरम्य भाव व्य । अनुगई। वचन घोलनेवाला। चापलूसी करनेवाला. चाटुपटु, (पु.) चाटी (मिथ्या परितोषणे वाक्ये) चातुर्येयं, (न.) चलारः (ब्राह्मणादयः) पटुः । झुटेही प्रसन्न करनेवाले वचनमें चनुर । माह । साथै प्यम् । ब्राह्मण आदि चारों वर्ग । “दा पुशामदी। पृ. पको व । "चाटुपटु" विदूषक । नाटकमें मया सृष्टं" गीता । “माये ध्यम्” । “चाटुवर्णकने । वाँका धर्म. पाकिा, (स्त्री.) चाटुः उक्तिः। दूसरे प्रसन्न करने के चातुष्टय, (नि.) चतुष्टयं वेत्तिमम् । आरके हर लिये मुदा कथन । चापलूसीका दयन. चाणकीन, (नि.) बणकस्स भवनं क्षेत्र, सम् । थनों- चान्दनिक, (नि.)-की (श्री.) चंदनेन सम्म छोलोंका खेत. चंदनका बनाहुआ । चंदनसे निकाला हुआ। चाणक्य, (पु.) चकणस्य मुने!नापयं+यन् । चणक- रमसे मुगन्धित कियागया. मुनिके वंशमें हुआ। नो नन्दोंको मारकर चन्द्रगुप्त राज्य चान्द्र, (पु.) चन्द्रः देवता अस्य । तस्यैव- देनेद्वारा विष्णुगुप्त (काटिल्य)। प्रसिद्ध नीतिशास्त्रका जिसका देवता चन्द्रमा है। वा चन्द्रमा यह। यनानिहारा । एक नीतिका पुस्तक. कान्तमगि । तीस वियिओंकाला पौर्णमासीक चाणूर, (पु.) चश्+ऊरण् । कंस राजाका वडा पहिल- वास्यातक एक महीना । चान्द्रायण (0) पान (मल). माका लोक (पु.)।"चन्द्रेण प्रोतं" अन् । बन्द चाणूरसदन, (पु.) चाणूर सूदयति ल्युट् । चाणूरको गया । एक प्रकारका व्याकरण । "तदधीवे"" मारनेहारा। श्रीकृष्णा चान्दव्याकरण पटनेहारा (त्रि.). चाण्डाल, (पु.) बाल एवअण् । घण्टालही चाण्डाउ । चान्द्रमस, (वि.)-सी (श्री. ) चन्दनस' इ. चन्द्रमाके साथ संबंध रसनेवाला चन्द्रमाय वा बन्द चातक, (पु.) चतति ( याचते ) सततं अम्मः (मे) चान्द्रायण, (न. ) बान्द्रः (चन्द्रटोकः) अप्पड़े चनबुल । जो सदा वादलका पानी मांगता है। क्या । अय्युट् णतम् । जिस्से चन्दलो मिलता है पपीहारी. व्रनका मेद. चातकानन्दन, (पु.) घातकं यानन्दयनि-टप. स. चाप, (पु.) चपम्य (वंशमेदम्य) विकारः । पपीहेको भानंद देनदारापाटनु । बसांत. यनाहुआ। "अश्"। घनु । कमान । घातुरतं, (न.) चतुर्भिः सः निघायदे+अम् । चोपड नवमी राशि शेलनेके चार पास्मे. चातुरधिकः, (पु.) चा अर्थेषु विहित + । व्याक. समें चार मित्र अमि शन्दके साथ प्रयोग कियागया करना । प्रयोगनागिन हायपवित्रा हिलाना बना रेकरारी । "प्यम्" चापत्य (यही अर्थ ) यानुपानिक, (नि.) चयं धाश्रमेनु पिहितः टक् । चापिन्, (नि.) भाषः अखि अस्य इनि : पटरी बार भानोंमें विधान कियागया। धारोममें मारका चायहुए. चामर, (I..) यमाय विनरः । बगर । यातुरिषः, (पु.) यवः पनि । रपटी की पूंछा बनादुआ पंगा. को काटा। रथवादी। सास गरयो ! | शामरणाहा पाहिन्, (पु.) पागर गई । पदनाय. बनेकरा. . अखनादरच.

भोकर, । । 7 -मीकर, (न.) षमीकरे (आकरमे) भवः अण् । चिकित्सा, (श्री.) कित्साये सन्मभावे या रोगानीकर. चमीकर नामी सानसे उपजा । सोना । सर्ण। पडूग. करण । रोगका उपाय करना । बीमारी सब करना. मुण्डा, (खी.) पमं (सेना-रियादियमूहा) चिकित्सित, (त्रि.) किन साथै सन् मणि कविहिन्या लाति (आदत) । लाक । आयआदि समूहरूप कियागया। इलाज कियागया. सेनाको प्रहण करनेवाली । दुर्गादेवी । चण्ड और मुण्डको चिफिल्य, (त्रि.) विकिस्पयितुं योग । अर्यि यत् । सानेवाली । “यस्माथण्डं च मुग्दं च गृहीला समुपागता उपायके योग्य (रोग)। इलाज के लायक । (पीमारी) चामुण्डेति सनो लोके स्याता देवी भविष्यति". रोग गुमनलायक जन. = स्पेयक, (न.) चम्पायां भार, ततः साथै छन् । चिकीर्षक, (नि.) मन्नन् । कानेग्रेस पर. पम्पक । चंचेका फूल । नागकेशर । सोना किल्क. नेवाला. गाय, दर्शन। देखना । भ्वा० उम• सक० सेट् । धापति-त। चिकीयां, (स्त्री.) T++अई । कानी । भवायीन्-अचासीत् । अचायिट-अचशस्त. इच्छा । चाह । रारादिया. = पार, (पु.) पर इसरसा था । चर । गुमास । "चारः | चिकीपिन्, (नि.) सन्+क । यहागया । रनेकी पश्यन्ति रागानः" पति नीतिशालम् । चा भावे पर । इच्छा कियागया ।-तं (न.) रल्या इरादा योजना गमन । आना । आधारे पञ्। कारागार (जेठसाना)। चिफी', (त्रि.) सन्+ । करनेटी दरमा करने पदसाना । कृत्रिमविष । बनायटी जहिर (न.). चिकुर, (पु.)वि-इति अध्यकं शब्दं पुरति । गरण, (पु.) पारयति (कीर्ति) चा+गिन्यु । यश जो "पि" इस शन्दयो धीरेमे करे | NIRदि)। को फेटानेहारा । पीर्तिराबारक । नद. एक वृक्ष । पर्वत । और (परिभावि) परीगर । परत । हार, (I.) पर भग। पृहस्पति । मनोहर । मुन्दर । पपल । तरल (वि.). पान्त (नि.). चिप, पीइन। तकलीफ पहुंचाना । पुरा• उभ• सर. से। चिंक्य, (म.) च+पास दुन् । पधित । "साय विष्यति-ते. ध्यम्"। पन्दन आदिसे शरीरको लीपना. चिकण, (पु.)+कि । र, तर "गर्म, (I.) धर्मणा परिवतः रया गण । चमडेसे उका. भापासवरना मच् । पुरक व पत (.) हुआ रए । पारोंऔर पमटेसे मी गाग. चिरना (नि.)। रिसनेम्प गुरुपात (sh.). पांक, (पु.) बारः (लोकसिमः) पाकः (बचन ) चिशिरः, (पु.) बिहार । मू । मृणा. यस्य (प.) जिसका पचन संसारो भच्या लगे। चिदुलासः, (पु.)लि. बहस । Rev. प्रत्याप्रमाणको माहारा होकायनिक (नाशिक) इल नेहारा. मतरे घटानेवाले पति हैं। एक राक्षसका नाम, चिच्छति, (बी.)पि सन्ति । न म । पी, (पी.) पार । गुन्दर । मुन्दर श्री। चोदनी । मन और पुस्तिरी हारत । " रिति पर मिल पति प्रसार सन्ति । दनक । इयर खीरा माम. चान्योय"य. ला, (पु.) पल्म्ण । परकी त । मोला । गरा. विजा, (बी.) "Ram Rरे । पाटनम्, (न.) पल्पनिम् भावे स्युर। हिलनेपला । RKIमलीपदरता. कंपानेवाला. | चिटु, प्रेषण । मेरना म. र. सा. । । मालनी, (सी.) पायते सादि भना। बल्लनिन् अटीर भरणे स्युन । जिसे पानट है। अपने मामा | चित, नाम.. पुर• .er. ६ गन गावाला पानवादि पलाने सनम पदार्य । सेदपाव-पेनर मोदी, नप्पी. चित्, महिरपनापुर- भ ..।। विगीरो. बाप, (पु.) याना निरअर मोरेदी चोरीपाल मोरेगा परी मीटरष्ठ | चित्, (Ra चि, परन-मुमा । परा. पझे भाभर मदि म्यसि पपया । बीमारना समोर दिद, (मw.firewari चिकित्सक (पु.) परोपरयन । रोप सारना। दारमा म सन् ऐप एक चित, (4) Reaten यारय. मुरे बारे मर( Rt." . । F प - - और परियार | चित्राव (पु.) सन्तनुराजाका पुल | चिदाकाश, (म.) विरभाकारी | रायका भाधार होनेसे अनन्यमानो माml भ्यी परवाही। पुमिम भारमा प्रतिnिt पाशासारा बनो नदी मीमी पर शिग्मय, (गु.) विपर AUR ANTANTRArk पिर.:.kital RTIFरिर.) Rahnewwe शित, चिति, (सी.)चिसिन् । चिता । समूह । युमा । (वेदा- चित्रगुप्त, (पु.) यमका भेद । - न्तमे) मिपिपसंवेदन। ऐमा जान कि जिस विषय इति तर्पणम्. कोई नहैं । "निर्विरोगचितिरेव केवला" इति संक्षेपकारी- चित्रपट, (पु.) चित्रः पटः । रंगवरंगी ।। रक। प्रामार ( महल) आरिमें ईटोग्ने गिनतीको जाग्रेके मूर्ति । तसमीर. लिये अंगावमें कहागा "पर" इस नानसे प्रसिद्ध एक चित्रपादा, (स्त्री.) चित्रो पादौ यस्याः पार्य। भागका एक स्थान. हैं । सारिका पसी । मैना इस नामका परित चित्त, (न.)विलवे (असतेऽनेन ) चिन्ता जिस्से | चित्रभानु, (पु.) चित्रा भानवः यस्य ।। जानते है । धुनि । मन । ( वेदान्त) अनुसन्धान । चित्र हो । अमि । माग । सूर्य । विकास (मोवना) सरूपात्ति (सयाल ) याला अन्तःकरण । दरस्त. विलासरी. चित्ररय, (पु.) पिना रथः असा कि चित्तविरेप, (पु.)दितं विक्षिपन्ति (योगात् अपन- है। सूर्य । सूरज । गंधर्वमेव । एक गांव पनि) मिजो चित्तको योगसे हटाते हैं। योका राजा । कश्यपके सोलह पुत्रों से एक. पाने रहेगये योगो विरोधी व्याधिमादि नी. चित्रलेसा, (बी.) अप्सरोमेद । E!! निगरिय (पु.) सितल पिताः मनवस्थानं यस्मात् डकी कन्या) उपाकी सखी (en) ५.जिपने मितस्थिर न रहे। उन्माद रोग। पागल रोके पादवाला एक प्रकारका छन्द. चिपशिखण्डिन्, (३०) चित्रः कि मियामोग, (.) मम्मर मोग भाभोग एकषिपयता। इनि । अजीब चोरीकाला मरीषि, हरिनाम भी सरना । इस कारण अहं. पुलरल्य, पुलह, कतु, Amrऔर भगा. सात मुनि. नि: (20) Aमारे फिन् । रायाल करना । HIPE ISirn. भाई। एक गन्धर्व. Fear (1) गाय भोगिनी जाती | चित्रानी, (खी. ) चित्रं ori मस्या । विगट। अंग हो । मनीटाणेनलीको । बानोला पि. (Effeमाग होना। गिना)।(मूर्ति ) Irvinानुग• उम• • गेद। (माह)मन. दि.(:.fretri | वा लोगः । चिदामारा, (पु.)शित माभागः ( पिप" यह वि एक अन्य निक MaratNERHIRE THI TATEMERI Enो नाना विमा (स.) NिRH A पो मला प है। आमा । पुरोगाला । परमेत me (fr) का एक पण. इन गली मागाही micr(.):r" । (Rev) TIERanापति" पूरा मारण ( यारहरना) RR मो. rors NRI(). चिन्तामणि, (T.) मा । शिशार.(:.) टnिuat. ..पा (मण TATE. दिशा (Ramzatir . पिग्मा (..)ERIEria 1 . पर.

.- र पुष्पी म्, (भन्या)।रिने । . धीम्, मशंगा। राना मा.बा.सर। क्रिय, (नि.) सिम किया सम्या को देरी. पीभति. काम एता है। मसलेटा काम करनेपा। पीर, (म.) विस- पाका प्रासपी. "पानि पिपिम मनि" ति मगरम् । (१) जीपिन्, (पु.) ft मिनि । जो देरल पीण, (नि) च+नव ?. । अयोkine- पीना है। कौआ । जीवकाम । गिघरमा पेट। माई दुभाइमादया। दीपा। कारगर. य । “भवन्यामा, पति, म्याग, हनुमान, विभीषण, पीर, ग्रहण-देना । मानिटरिना | w• रम• wr. घराचार्य और परशुराम ये" सात दरलर भीन सेना चीरती से । मादी अपवित्र । अपिरा. से (नि.). पीय, पमना भुग. रम• .. स्पटी, (पी.) पण भी रिवरसाद भगदं । -त, दिगील. अदम (पु.) को पिताके पर पति पर धीवर, (म.)पिराध नि । r. दाग जानी है । पिनाके परम नियाग परनहारी गुवती पापा । मध्यसोर RAHIMA (मे (पवान रत) (बी.). मादि). स, (नि.) रे भ निदा पीन । पीte Incr बनाr. पुरातन । पुराना. एक र पुराणीपुरम. गम्तन, (वि.)विन+शुल परच । पुरातन । पुराना । परापीमायो...। ifret". पाकिसे. रामाय, (भय.पावन गमन तिरपुर, बारना रोदन । पुरा....।। "तपुए, (I) fatang: यस्म । जिसकी व मर हो।दना । देलक जीनेवाला (नि.). गुरप-बगमा-बाप सरमाम.... होती. अटी (बी.)ftण भति। अटी (प.) शुदल प्रेरणाना मुग. . . . पारी लीरा ।तर. ल, थिस्य । टोलाहोना 1 मा. पर• भा० सेट् । युए, मन्दानि हो ...। सिमधिल बोशीसोपी .m. (I.) भए । धौलनाम पी । इसते हुए पुए, पुमना । मुममा ...rr.o.m. नंबर (नि.. से । पुरवात Y jure.." हाभ, (पु.) प्रिमर पर भभी। भामा (ओररी लेने पारण) tra | पुपा (पु.) १ लोर. पर girh.) पुष, (.) पि-सामना • हलपुर, रेय Tr: ... मोटो भीगा ही। पर .. MEETE और लाहट । यि पसरा. Exam. m. Jinni थुर, राम criters देख. (R) ReorgI grow...ITER. w(in शु3.) yaRIKe Trcui दम, (I.) RI.RArcreen POSIrritrt Ft Pr देश | SWER KATrata Ren(R) (0.12.. पता cirr(T) पुर(:.) irriterst-tri पार, (पु.) RTR crew er Kera TIME... ४. । - 84114.04.1.2100 जाना. . - fanाना.गा.Tera परा, (01.8"te (२.) हा, (को.) पुरस्म-निः । मोरी सिा (चोटी) घेतन, (पु.) चिद युन् । आत्मा । ममारे बने गहनागिनत्र (Pt)। जटि. प्रामी। चतन्यवाला (नि.). स(ा)। पन माग । मागे । म्यानचेतनकी, (बी.) घेतनं करोति ।* (क)। इस बार संसाने "न्यनेने तहरी। जो पेतन पनागले. घेतना, (पी.) चिमटा । मुनिका पानि (5.)..गिरन । रिय मानि. धन. (न.) (दिरा) अनि मग । ल । घेतनायत्, (नि.) चेतना मनुस् । पेपर यरिमगा। निगम जन (नि.)। होशमला. | घेतस्, (न.) विममुन् । पितkar नोरन । पुठ• उभ• सड० सेट् पोजन, (पु.) घेतगः उन्न भम् । विधे "माक्षी घेता को निगुंग" की भुती. (5.) Tr-. । प्राय । भाप । भाम । कामता पार. १. (०), "गा छन्" मान घेतोमुस, (पु.) घेतो मुगद्वार भR IR भार है। (येदान्नमें ) मातिा भनिन itriy• उम• मा. मे । ति . तोविकार, (पु.) पंतग विकर. Rai .:.): रसोग पुगे। मीर नाहीम. रामानीयता वि. (पु.) एकदेश । उग दैरामें गहरे ग." पेरिपति, (पु.) पेरीनो पीः । र ht,(+) () * * दमो पुत्र । "पनि" "नमा smrrian महाभार गीभमे. writri (..). चंद, माना । पटना। पमल होना । मा...' पारे । मेर। धेशति । और TRE (). पेट,(२०), भाकरन मोन " " } { } } } } r/7 : • 1 x 1 पाशा (म मान ) Arr. uir. दिमदा- पदमास । “भायां माता भारोपी पंत, नाना ना... . ५-terr.... IPL ना। #ratna ......Cri(rten) म. आर.मेरा mmm - . . 4:11.2PunHA. ( - 14 : 12... १. गोरल ( Hath .. 2. • ........ 124in in(..) Rurarter.' . ... .rairat and समृद्ध (दोग, . स्पिगृह, (न.) चलस्य समीपे पदम्। (शैकमें) चलके पामका पर. छ,(त्रि.) छो+क ऐदक । काटनेहारा । निर्मल । गफ त्र, (पु.)चित्रा नक्षत्रेण युका पौर्णमासी क्षेत्री सा अस्मि- और पयल। पर (म.). न मासेमण् । जिस महीने में विधा नक्षत्रवाली पूर्णिमा उगल, (पु.)ोस्टलच् गुटम् । एकप्रकारका पशु । छाप । हो। घेतका महिना । "चत्रिका ठक" "कन् पत्रक" वही अर्थ | "क" पदार. छटा, (सी.) छो+अन् । दीप्ति । प्रकाश चमक । पर- त्रिरथ, (पु.) चिघरपेन (गन्धवेग) नित+अण् ।। म्परा लगातार चित्ररय नामी गन्धर्वने बनाया । दुबेरोदान । कुबेरा छत्र, (पु.) +पिन्छन्-हसः । मुंब । विसीधा और पाग 1 उधान, सोयेका साग । साता । एती (न.). (5.) बेरीना (जनपदानां भयं प्यम् । शिशुराल छत्रक, (पु.) इन अयति । केक। एक पक्ष । एक शेदना, (खी.) बुझ्युच् । “चोदना, उपदेश, और विधि प्रकारका पक्षी । “खार्थे कन्" पाता (न.). एकही अर्थो यतलाते हैं। प्रवर्तनावाक्य । उपदेशका प्रधरः-धार', (पु.) त्रं धारयति उप• साता वचन । "चोदनालक्षणोऽर्थो धर्म" इति मीमांगासूत्रम् । धारण करनेवाला 1 छाता उठानेवाला. प्रेरण । तर्जना झिडकना. उभगः (पु.) त्रस्य मरो पत्र । बर्दा छातेवा भंग योध ) पुग्यतू । प्रक्ष । सवाल । पूर्वपक्ष । होगया । नृपनाश । रामाका नाश । धम्य । रमपन । अजीर प्रेरणाके टायक (वि.). पराधीनता । सावेदारी । भखानन्य. रोप (पु.) मुर+अन् । स्तेयकता । चोरी करनेवाला । नाक, (न.) या इव कायति (+) शिलीन. दसरेका रव्य उटालेवानेवाला । एकप्रकारच गंधवाला व्य. छ, छादन-दखिना । पुरा• पक्षे भ्वा० उभ• सर• पेट् । बोल,(म.) धुल्यम् । त्रियोंका काक नामी पावनक पति-ते। जदयनि-ते. कपमा चोटा इस मामले प्रतिर पुरुषोंचा का। द्राविड (पु.) छ । पत्र । पक्षिोंका पर । तमालास। और सालिग बीचका एक देश. प्रन्धिपण. बोली, (बी.) अल्सः घोलः । सीप् । छोटा नुकः । एदन, (न.) पदास्युद् । पर। पर पक्ष । लगा। अगिया. सली | "भावे स्यु" । निधान । दनादारना. योप्य, (त्रि.) पूर+ज्यत् (पु.) पूमने लाएक । - | उदपत्र, (पु.)दार्थ पत्र अस्य । जिसका पत्ता ने दण्ड (गमा ) भादि । एक प्रकार राना (मध्य). के काम आता है। भूपए । भोसर । इनिटोग घोड-स. (म.) मूल प्रयोजनं भस्य भए । भूधार । इसे पहिरवे है. एक संस्कार (जिसमें बालकके थाल उतरवाते हैं)। छदि. (पु.)इन् । पटल । सा परको 4- पोल विकापसे होता है. च्छादन करनेहारा गुणसमूह । भोगत. पौर्य, (म.) बोरस्य भाव.+पत् । घोरपन । चोरी । छमतापस, (पु.) सना (प्लेन) दरमः 1 रमे लुटेरबाजी । एसपन. तरमा करनेबारा । लोगोंरो टपरेटिदेमारतरखी चौर्यपत्ति (स्त्री.) परिव पति । चोरीका स्वभाव. प्रटरनेसे दरमियाँके शो परर. प्यपन, (न.) प्युस्युर धीरे १ना।एक ऋषि नाम. रा। सपषियोंगकाम करनेारा बटानिक(दि. प्यु, गति । जाना । भ्या- भाम• सक• अनिट् । प्यते । धबा करनेवाला). प्योर. छन्, (१०) सरपं बनेन निरिमो प्यु, हास-६मना । सन-पदारना । पुरा• भ. प. द्वारा माम विराजाय पट ज. अनिदा प्यादयति-ते। अध्ययन्स एन्द, (.)-संवरन-टोना परे भरे प्युन्, रक्षण । वगना । बहना । भ्या. परम. सेर् । होनेसे (T (पार) पम् प्रलर मा। प्योति । अप्युनत् । पुष्पोत बप्पोमीद. अभिटादारीनापिनेर. प्युति, (खी.) प्यु+फिन् । क्षरण करना गिरना । उन्दर, (२०) भी। मानो उमे रत. भाना । नाय | "अम्दाने पिर भग. रखनी । एदार । अनिवारी प्योर, (वि.) यु-गतिसरणे मम् । जानेवाय । रा. आमाश | पसे रहित । भाडेसे मजा दोग, (पु.) (सई) शी-IER. सागो मोग्य. पेरपर. - ।

|जिदान, (वि.) पाहारगर पन, (२.) दिय+युरीटम सिमा छिन(त्रि.) कि कारागा Rel टिलता, (f.) हिमा: या nि रागादमिन विंध, (.) fota-पमा (0) छन्न, (त्रि.) छ+ गिक नि । आच्छादित । टका. | छाया, (श्री) छो+ण | आतपामाव । भार हुमा । निजन (एकान्त) तनहा (न.) पान्ति । चमका प्रतिविम्य । परमाही पत्रा छर्द, वमन-ऊपर एक होना । धुरा• उभ• सक० सेट् । रिश्वत । वही । पंक्ति । कतार । सूर्य छदयति-ते. रोक पादवाला एक छन्द छर्दन, (पु.) ई+ मित्यु । नीमका वृक्ष । मदन | छायातनय, (पु.) ६ ० । शनैश्चर। 1 वृक्ष । “माचे युर" वमन (कार छल होना) (न.). छायापुत्र" यही अर्थ । शनवर. छर्दि-दी, (मो.) एपिच्कइन् । वमनरोग। वाहीप् । छायाता-ठमः, (३०) छायाप्रधानसहः । वृक्ष । बहुत सायेदार दल. छल,(न.) सो+कलच् । शटय । शरारत । स्वरुपको छिपा- छायाद्वितीय, (नि.) छाया एवं द्वितीयः पन्चार ना। (न्यायमें) किसी और ता.पर्यमे प्रयोग कियेगये शन्द माय दूसरी छाया है। एकान्त । अकेला. को वारीने दूसरे भर्यमें टगाना । प्रतिवारी दियागमा छायापथः, (पु.) छायायाः पन्याः । जान दूपण जसे पद "नेगलने थाया है क्यों कि इसके पास आकाश. नर कम्बल है” ऐसे वादीद्वारा कहेजानेपर "ना" शब्द छायापुरुष, (पु० ) छायया पुरुष इस । सयने । "नये" मधमें लगाये जानेपरमी प्रतिवाद्वारा "नव". नाई । आकाशमें देगनेलायक अपनी सो कानी (संख्या) की कगनासे यह कहना कि इसके छायाके खम्पका पुरुष । (अपनी परजहीये देना, पास तोही कंबट है मी कम्पल कहाँ है इस प्रकार काश आंस टठाकर देसने छायापुरषदेला हा दोष लगाना. छायाभृत, (पु.) छायां विनि-रिr प्रसना, (श्री. ) सत्करोति+निभाये युम् । पर. धारण करनेवाला । चन्द्रमा। चौद. परना। दूपरेको टगाना. टिकनी, (नी. ) छिक् इति अव्यकं नामिन घाटी, (पं.) एदी ता टाति । ला+कटी । यक शादायवेक्यच् । ती । नाकसे कर साष्टाया। चेल । सन्तति । औलाद. की है (नाकछिकनी) एक प्रकार 10 पति, (सी.) अगार, निति तमो वा निः । असा- टिका (प्रो.) लिक् इति अध्यक्षं शब्द रोते F है। सयौको काटती है। शोमा। कान्ति । विद्, काटना । दया. उम. ग. भनेर । orm, (I.) हो+गन् । जगल परानियां डीम् । छिन्ते । असीत् । अच्छिदत् । असिना 'पुगे । म " यरीम पूष । कचिदिर, (पु.) लिरिन् । कुठार । पुरस्कार रेप (२.). भनि । एकप्रशारकी रस्मी। करवाजा तरका. सागवान, (पु.) गो पर्न अस्व । यारा जिमी छिदुर, (वि.) छिद+करन् । बेरी। गरीन. काटनेदाग । एदनद्रव्य । काटनेका पियार En, (वि.) मैरि-कर्नर या छ । कटाहा । टिन दिद, मदन पाटना । पुरा भ. स. मे I दुग्छ । मोर । "नवगम्युच्छति' ते । अचिरिष्यत्-त. शिक्षा (न. ) दिसा । शिद अन् बाल पार, (नि.) मुगेर सदन एवं, तरी भय+ गर्न । गहा। माघ । (ज्योगपने ) हरे " र सिनम टंगारिया घंटा । (२०) “पुर दर पादा स्युर' नाच्या यया. (२.) सन्दम, (.)दोई समन् । बरहा. गमलाया गया. एमीय. (न.rics ममद निमः, (पु.) : हमः I KE नीटात. धून । म स्थान. एउपर गया ।शिय, -] [जगदम्या, - मानिक, (हि.पा मापिका या परी हुऐका (त्रि.) पियुस् । काटनेगला । विगफ (जुरा)- fm(माया दिनमा बाला. परनेरला. भिम (नि.) dिe भिमप। इधर उपरणे | ऐदन, (नि.) मित्स्युर । पाउनेवाला । जुदा करनेवाला। रा और पाशगया पहुभा न (म.) काटना । जुदा । परना । फारना । नाश -माना, (बी.)छि ममं यस्य जिगमा शिरपटा करना हटाना. ।।दा महाविधामों में एक महाविद्या । दुर्गा । देवी. | डेदि, (वि.) सिन्, बाटनेवाला । तोडनेवाला ।-दि. मूल, (मि.) Eि मूर्ष यस् । परसे पटा हुा । (पु.) सनिन्दा रन. उगी पाबाटी गई हो. ऐदित, (नि.) छिन् । पाटागया । फाडागया. बराद, (पु.) जिनोऽपि रोहते । र । पाटाहुभा | ऐच, (नि.) हिद-मण्यत् । काटने के योग्य । काठनेलायक. मी उगता है। तिला । याची (m.) गिलोया वर्ण-दिक, (पु.) छेदं निवं महति । रक् । पैतप । धेन। वेती पी. वर, (त्रि.) दिया। प.ठाव । वरी । छो, काटना-दिवा- पर, एक भानिट् । पति । अच्छात् । प्मन । पूर्न और काटनेहारा । ऐदन । अच्छासीत. घटना (म.). छोटिका, (बी.) पुरा हु+खुल् । तर्जनी और संशय, (पि.)हिमा संशयः यस । जिगध संशय भेगूठेका राय । गुटकी. रा) बाटा गया हो।काटे गये रहवाला । निस्य-प्यु, जाना भ्वा• भारम• राक• अनिट् । उपवते । देह । संशयादिन । परारिया गया. अपोट. -, काटना । पुरा• उभ• पो दरा• पर• ए. सेट् । कोरयति-त । मुटति । भयुटीन, ज, (पु.) (जि+जनू-वार) (समाराके भन्तमें भाता -कारना । भ्या. पर. राक• ऐ । छोरी। है) उसमें और उस्से पेदाहुभा (अधिनेप्रज, कुल- अच्छोरीत. अ, अलज, भेज), शिवजी । विष्णु । पिता । वेग । हेपन करना । • पा• राक• छे । रति. मुक्ति। विष । (दाशास्त्रमे) गुरमभ्यवाले तीन वर्ण रका, (बी.) दुर+युन् । एकाधार हथियार । (बदार). पुरी।का। चाकू. ज, भक्षण-साना । सका। हसना । अक. भदापर. भडकाना । चमकना।शेलना पनन । कारछटककरना। सेट् । बक्षति । अनक्षीत् । जक्षित वा जग्ध. रा. उभ• पो भया• पर• राक• मेट् । पदयनि-वे। जगधनु (पु.) जगता वधु' व । (सष पदार्थीको कि अवदन् । अविष्टदद । अदर्शन, दिसानेवाला होनेसे) संसारकी मानों भाख है। सूर्य । (पु.) छोरन् । दामक पक्षी । घरमही हिलाहुआ पक्षी । मृग । और हरिण । विदग्ध । चतुर । जगत्, (पु.) गम्+किप-निक वायु । हवा । जंगम (नि.) नागर । नागरक (न.) .. लोक (म.). कानुप्रास, (पु.) कस्य (विदग्धस्य ) प्रियः अभुपा- | अगती, (सी.) गम्+किए । नि. गृथिवी । भुषन । जन । राधाक- । पण्डितका पियारा भनुपास । अनुमाएका शोक । अायुक्षेत्र । दुनियो । १२ भपके पाववाला मेद । शम्दसम्बंधी अलंकार. कोनि, (श्री. ) छकायाः विदग्धामा उक्ति । चतुर- | जगत्माण, (पु.) जगतो प्राण, (जीवन देतत्वात् ।) श्रीका वचन । पेचदार वचन । पोकि (टेदावरन). (जीवनका कारण होनेसे) संसारका मानों प्राण है। रूप भलंकारका मेद. पायु। हवा. तु, (त्रि.) छिद् । हन् । काटनेवाला, जगासाधिन्, (पु.) उगा साक्षीय । (पको साक्षात उदन-काटना । पुरा भ• राक सैट् । दयति-ते. देखने ) पंसारमा मानों शादी (गवाह) है। सूर्य. ८, (पु.) लिम्पन् । काटना । तोरना कारनेवाला। जगत्सेतुः, (पु.) जगतः सेतुः । मगला पुउ । परमामा. भाजक । खण्ड । दका "लाहकचोरिभकरागा" जगत्त्र, (पु.) जगतः स्रष्टा । नगला स्वरैवारा। इनि पुमार.. दकर, (पु.) ईद-छिदं करोति । ऐक निकाटनेवाला । जगदम्या, (मी.) गला भाव वा निस-माता। सरसी काटनेवाला अगषी माता दुर्गा भारदीय माम. हमा शिक्षा एक दुर्गा. जठरयन्त्रणा, यातना, (खी.) जठरस्य या सना। गर्म मीतर लचसे अनुमर कीयांपर | जठरव्यथा, साग, (श्री.)जटरस माय सघा, (.)जन्यदेटिलं गच्छति । "साना" वर्ष- जठराग्निः, (पु.) जर अमिः पेटकी (artyrs जिटरीत,(त्रि.) अजटर: जदर Taarak स, (नि.) जलन (पनीभवति) anal स्टानिधनमिया मला पुराननानेहरा मूहागुंगा दुटिहीना बेभाता पवर्नमें धगम और मगरमीना/.) अगदारमन्,] (१०८) जगदात्मन्, (पु.) जगतः आत्मा । जग्या मामा। जन्, योधन-सलाई करना । भ्वा० पा• = परमात्मा. इदिन् । जमति. अगदाघार, (पु.) ६ त• 1 वायु । इवा । जगत्का जद, संहति । जुडना । इकट्ठा होना (उमे पूरे मात्रय । “कालो हि जगदाधारः" इति स्मृतिः. पर० अक० सेट् । जति । यजादी-अट जगदीशः-पतिः, (पु.) जगता इंशः वा पतिः । जगतीका ) जटा, (खी.) जट अन् । अन्योन्य संप्रदेश मालिका परमेश्वर । परमदेव. जुहुये वाट । प्रतिओपी सिसा । सिंह (मेर जगहुरूः, (पु.) जगतः गुरुः । जगत्का गुरु । परमेश्वर. सदा । जूडा । वृक्षआदिका मूल । जटामांगे। जगद्धात्री (स्त्री.) धा+नृच् । त.। जगन्की माना । रसे वेदका पाट । महादेवी जाता। जटाजूट, (पु.) ६ त । जहानां जी (कर्ष जगद्योनि, (पु.) जगता योनिः उत्पत्तिः यस्लान् । च । जटाओंका पंचन । जटाओंका समूह. जिसे जगन्की टप्पत्ति होती है। शिर । विष्णु । हिरण्य- जटामांमी, (म्रो०) जटां मन्यते । मन्मसन्दर गर्म । कुमार।त. पृथिवी. ने नाममें प्रसिद्ध मुगन्धिवाला द्रव्य. जगन्नाथ, (पु.) इत.! जगत्का नाय (मालिक)। जटायु-, (पु.) अटो याति । याछ। गद विष्णु । विशुन क्षेत्र । विमटपीटका एक भैरव. अच् । जटं (मंदतं ) आयुः अन्य वा। - जग्ध, (त्रि.) मद्भक । वा जश्+क । भुक्त्त । साया- उमर हो । अपने नामका पक्षी । जटौर । गुर- हुआ सा लिया. जटाल, (पु.) जटा अति अन्य लन् । गुम्मत जग्धि, (श्री.) अचिन् । भोजन । खाना । सहमोजन । भोड । कपूर । कापूर । जटावाला (नि.) इको साना. (प्रो.). जयन, (न.) हन्स्य अच्-पृ० । प्रियांकी प्रोणी उटिन्, (पु.) जटा अनि अस्य+इनि । म । (सका अगला भाग । त्रिओंकी कमर । जांघ । पद. पेड । बोडके समान पत्तोंवाला वृक्ष | जटाय ( जयन्य, (सी.) इन्स्य अच्(.)। जघनं इव (इवा- | अटिल, (पु.) उटा अस्त्यर्थे । इलय् । जटावन्न । थे पन्) अपनये नाई । अधम । नीच । चरम । सबसे शेर । ममचारी । जटायुक्त (वि.) जटामांदी 1- सिएला और अहंधरी । गृह (पु.) उपस्थ । दिल. मर । वचा । दमनक्ष (खी.). जघन्यज, (पु.) उपन्ये (चरमे) जायते । अन्स्ट। जठर, (न.) जायते जनुः गर्मो वा अम्मिन् । सबसे पीछे उत्पन्न होता है। पर कनिष्ठ । सरसे छोटा टान्तादेशः । जिममें और वा गर्भ उपजता है। (नि.). वयसी । पेट । वृद्ध । वदाहुआ और कठिन । १८ सम, (नि) गम्+य अच् । गतिशक्तिसमन्वितः। पल- (त्रि.). ने समभ्यंकाय. सट,(न.) पम्पद अन् । पृ.।मन । एकान्त । टनहा। मार (पु.). घुटने बीचका भग। बांध हात. नारिक, (नि.)मा (विशेषः) ६त.। हता पनि वर्षे अंधारबन भात्रीवति । पर- घिती के भीतर (गर्भ में ) हिया. और रोमे पान (रोग)पाटा। पावा। जिस सरदार पटार है।दपाय, जाट, (f.) अंग बदली पाम यणाद। fretin() में बगवेग (कर)- अता, (st.) गाय-भाये । जाना।' व मसरे मोरया माना। मूल देगी. (5.). सरिमन्, (पु.) । मूखंदना. पेटकी पीडा वा टाट. (5र अनुध धन्दराल अवयव । गिटे भी असामया, पु.) उटरम्य मम्मयः । पेढी ( 10 [जनु- - (नि.) अब जाः --मयिक जनथुन, (त्रि.) जनेषु श्रुतः । सोगाने विरुान । सरने या गया। बेहोश किया गया. जानाभामराहूर. 1.) जन्+3 । अन्तमें तका आदेश होता है। जनश्रुति, (स्त्री.) जनानां श्रुतिः । लेगोंडी मुनीहुई पत। पार. किंवदन्ती । अफवाह. R•) जन् । तान्तादेव । रुन्ध भौर कक्षी जनश्रुति, (स्त्री.) जनेषु श्रुतिरेव न रष्टिः साः। रोगों- कंधे और कारा (क) का जोडपलेसे नीचेकी ने मुनाही है देसा नहिं । सचा वा य लोगोंगा वरन । ये. सोयराद । किंवदन्ती अफवाह. न उत्पन्न होना । दिवा• धाम• अक० सेट् । जनसंयाध, (त्रि.) जनानां संराप-प.त.। लोगों । अमनिट । जनयति। जानः. गादी भी .) जन्+अन् । लोक । सोग । पामरलोक । नीर | जनस्थानं, (न.) जनानो स्थानं । लोगों का म्यान आम लोग । महोलोको परका स्क। जीव । वनश एक माग पा पुरुष)। "एवं जनो गृति". जगस्थान, (न.)दनो पाग एक स्थान गरे पु.) जन्+पिच पुल । रिता । बाए । मिथिला रहने की जगह । "जनस्थाने भ्रान्तम्" ती हर. । एक राजा (सीताजीका पिता)। कारण ( सरब) अनापीर्ण, (नि.) अने. भामणे । गाने ARRI- ). हुआ। लोगोंसे गवापर हुआ. ता, (सी.) जनयस्य गुना । ६२ । जनक- जनाचार, (पु.) मनानां भारगोष ग्या । पीतादेवी । धीरामजीवी पनी (स्त्री). भाचार रीतरपमा पालवरान. (श्री.) जनानो समूह- सस् । जनरामूद । भीर। | जनान्तिक, (२.). । जनगगीर । म होग. पाग । मप्रकाश । विपररवी गई र (मारक)। (स्त्री.) जन्+अनि पारी । माता । मो। अभिनय (मकर) करने वाले नो मरम म मुगंधवाला न्य। दया । भलफक । लाराका बातचीत. जटामांसी मजीठ. जनार्णप, (पु.) जनना भरप.. (पु.)जना पपन्ते गजन्ति यत्र । पाप । इष्ठा जनसमुदा जनगमूह. ग जाते है। देश मुका | जनाईन, (पु.) जनः भई रसो त । द.(पु.) जनाना प्रवादा। लोगों भई-गोगनासमणि स्तुद् । लेग पानी ने पिरती अरपादानिंदा. पूरी रियायते। "जनं अमीरमान (पु.) जनाना प्रिय । लोगोंग प्यारा ।सोर युवा" । जो जोदोको (पपो पारण) है। विष्णु । मारापण. प, (पु.) गन+एम्+पिच् मुम्न । परीक्षित जनासन, (७.) जनान् पति+दु पुत्र । सिनापुरकरार राणा बना मलादीमारिय (सका पिता मापसे रसा मरगया, जन-जनाधम, (पु.) अननो बाम मोदी ने सरि दुलो मारनेगी जाने सरि स्थान। शराय. रसा जिगमें नरक माग दिन राब गांप दप जनाभय, (पु.)जनी मेरो मन येपही राग बिसे राम्गरनने महाभारत अमरारपसार. पर दिने एमया)। "जन्मेजय" रंगमी जनि-ती, (क)मम्मो र ।। (पु.) पदप "रखने सहमशिम . (पु.) परिसर । उपत्र परमेराय। । माता (wी.). ..(पु.) महोबो पर एक भगवान (i)संघ पर पदार, (बु.) पकान परमगुए. (या। रखम. पप्र..

। ( २१.) ' (जम्म, (त्रि०) जन्+पिन्क । उत्पन्न कराया गया । | जन्य, (त्रि.) जन् कर्तरि यत् । जायमान । पैदाहुआ। किया गया. " जन्+मिव्+यत्" उत्पाद । पैदाकरनेलगया (पु.) जन्+च् । उत्पन्न करनेवाला । पिता । जनक । पिता । पैदाकरनेवाला । और नई विका हुई स्त्रीके जातीके लोग । अट । अटारी । परीवाद या (स्त्री०) जन्+तृच् डीप् । उत्पन्न करनेवाली। नामी । प्रीति । युद्ध । लडाई और शरीर (पु.) मा. " भावे यत्" जनन । उत्पन्न होना (न.)। माई (पु.) जनानां इन्द्रः ईशः ईश्वरः । लोगोंका इन्द्र सहेली (श्री.). मी) राजा. पु.) जन्मनु । प्राणी । प्राणवाला । अविद्यादोप- / जपू, मनमें योलना । उचारण । बोलना । भ्वा० पर. ससा सेट् । जपति । अनापीत-अनपीत. हमें मात्माका अभिमान करनेवाला । जीव, (पु.) जन्तून कृमीन् हन्ति+टक् । विडा । हिह। जप, (पु.) जप्अच् । वेदके मत्रआदिका पार । योलना । पार २ उचारण करना । मन भादिका मार. । प्रागिओंको मारनेवाला (त्रि.). ल, जन्तवः फले अस्य । जिसके पलमें जीव हों। जपा, (खी.) जप्अच् वा पम्य वा । अपने नामका पर उसका फूल. र । गूलर. जम्, मैथुन-जुडा-भोग करना । भ्या. पर• मा० सेट् । ।, (स्त्री.) जन्तन कीटान् लानि । ला+क । इदित् । जम्मति । अजम्भीत्. ग । काही । इसमें बहुनसे कीटे रहते हैं. (न.) जन+मनि । उत्पत्ति। आद्यक्षणका सम्बंध । जम्, गम्भण । उयामी लेना । भ्वा० आत्म सेट् । जम्भते। अजम्भिर. रहार योनिसे बाहिर थाना । (न्यायमें) अपूर्व- | से सम्बंध । (ज्योतिष) जन्मा नक्षत्र जम्, भक्षण । गाना । भ्या. पर• सक. सेद । जमी। अजमीत. अमलम. मन्, (म.) गन्मना नाम । जन्मधे धारहवें दिनमें | जमदग्नि, (पु.) परशुरामा पिता । एक मुनि. | जम्पती, (पु.नि. प.) जाया च पतिध। • आपा. तेष्टा, (पी• जन्मनः प्रतिया । जन्मका स्थान । या जम् । दम्पती। श्री और पुरुषका जोडा. पदारणी जगह जम्याल, (पु.) जम्पम् जाम् भालाति । भाला। ग(टी.) जन्मना प्राप्ता मारा जन्ममे प्रारा परकीया। शैवल । सेवालातरी केवडा. रामभारा. जम्यालिनी, (बी.) जम्बाल+अनि अर्षे इनि । अंग मि, (डी.) जन्मनः भूमिः । जन्मी पृथिवी । वाली नरी. जम्युम्यू, (श्री.) जन्+नि. । युद्ध । पृ.।पा। म, (.) ..। जन्ममा महीना । जन्म. सामना पक्ष । “उसका फल"इभमे म उस बारिटीम दिनका महीना. का विरणमे मोर। "जाम्बवाये गिन, (वि.) जन्मना रोगः पनि अन्य । शिनि । भी। जामनका फल. मन रोहै. जायुक, (पु.) अम्बु इस कायति ।। गोलार (पु.) जन्मन हेतुः । मन्मय कारण। पंपदा मनुनामी ।" सा बन्" जागुराम भरे। पानाम. ५(२०) अन्य बन्न म. म. पण जन्म । जम्दुदीप, (I.) प्राविधितो ) सर पर दुनिशं. सामनास निकाला टी (Human रं, (२.) मन्दर सन्म-मस्यंमा मासा जप्त, (पु.) नि.in गौर (f.) या अन्य को कहने भय. गुरागानुरग (श्री) (2.) को प्रभावित-जाम. {T.) पिर मंगलम्यालो in.rt (3.) बदमन्ता गरी जम्मा (2.). " जम्भमेदिन] (२) [ज, एक गीध. जम्ममेदिन, (पु.) अम्भं दयं निनति । निगिनि । जरठ, (त्रि.) भरटन् । च । कठोर । रान। जो अम्भ नानी दलको पाता है। इन्द । “ जम्भने। पाडी जदं। जीर्ण । पुराना । पून. दन" आदि। यही भपं. जर, (त्रि.) अन् । पर दूदा जीर्ण । पुराना । जम्भला, (खी.) जम्भं उम्भो साति । Atक । एक जरायुक्त । बुढाप्पेवाला । "निया" जरदोसी. राक्षसी (इसका स्मरण करनेसे उपर (ताप-मुसार) | जरत्कार, (पु.) मनसादेवीका पनि । एकमुनि । मनम नाश हो जाता है और ज्यरके उठनेपर उसके पहिले देवी. (श्री.) भानेहारी उपासीका भी नाश होता है)।" ममुसोत्तरे जादप, (I.) जान गो पल्ममा साम दीरे जम्भसा नाम राक्षसी". जय, (पु.)बिभावे भम् । पत्रुओका अमिभवन (दिर- | जरम्त, (पु.) जाम् । महिष । भगा। (कार-दवाना) । नारायणका पार्थचर (पारा वियरने. (वि.). हारा) । विराट के पुरमें गुम नामवाला युधिष्ठिर । जरा, (श्री.) +मर । माया के सिप पर देवी (श्री.). शिपिल (दीला) हो जाता है। दाया. जयदया, (बी.) जयमधिका दा । जीतो बतानेहारा | जगजीर्ण, (त्रि.) जरा सोम रेमे भीग (पुग)। पाजावायमेद । एक प्रकारका बाजा. शिपिल अगोदाला. जयद्रय, (पु.) जयन् रयो यस्य । जिराका रस पीतनेवाला जरानुर, (त्रि.) जरया भानुर ... रेगे है । सिन्धुदेशका राजा । दुर्योधनका भगिनीपति (गह पीरितादीले भैगोपला. नोई)। महाभारती लडाईमें इसीने अभिमन्युको मारा | जराभीयः, (पु.) जरा भी । पं...पण भौर भाप भर्जुनसे मारागया. देवता । बामदेव । (बुदेपेये पनेरा). जयन्त, (पु.) जिनाच । इन्दके पुत्ररा माम । पदमा। जपयुज, (नि.) जरायुनो मते मागे जाने शिवर्ग । बिराटके पुरमें गुमनामवालय भीम. पुक्त उपजता है। पर-गगाप-कीर र . जयन्ती, (बी.) जय रोगान् । जि• दातृसीए । एक राक्षस-पिशाब और मनुष्य जरयुमागे मोर दुर्गा । “जयन्ती माल्य पाली" मन्त्रा। महीनही होदी है उसे जरायुपते(e) न्दपी कन्याा माम । जरा । इडाप्पा असन्ती क्ष। और होमित (लोह)पयोग र भंव- " साधना (धावण) महीने ष्णपक्षणी भएमी यदि पहजरापुरमा VRITE- रोहिणी मारके साथ दो और भाधीरातले पहिले वादीले जेर निसते. भी उगी कोई कला (भाग) अपस्य से उसका नाम | जराषम्या, (डी.) जरा भRANA परम्ती हो जाता है" इस प्रकार योग (इपी योयमें (2) पुण्य पर श्रीमदेषका जन्म हुभा) पताका । निधान । ग. । जरासंध, (पु.) The RL मम जोर जयपत्र, (म.) जयपूषत्रम् । गीतको जाहारा पत्र। बहादुर थापा अपम रे.. "पहिलो र wिी किसापला निर्णय (पैसा गए रोमको RRC करने के पीछे जो तनेर दिसामा १२ दिदा माय जरास. aor t" तय ग (मरित)। भाजरित, (ल.) मा जिते पुस । घोरे के मारपत्र (An). पूरा साम. जयपाल, (पु.) जयेन पावर पावित जरिन्, (नि.)-(*)पिन असा विएमा जमगोपाल. रिसेपुरkirtan. अया, (Rt.) भिवसन्ती । जाप, (1.) (स)ल. दुर्गा रिस (भंगा-ग ) Art दुई। अरित. (ii. ) virale () TAITRI (सोम) प्री, मोस पाहिए. पिपिएम. जय--1) NIREEr. ...। जप्प, (.).itme"समय" वि.inRitem.15.) (0)xi.rre -- ज 1 जरायता. मानों पानीका हमना है। फेन । गाना Eng ज , फहना । निन्दा करना । तुदा• पर• सक. पेट् । जलधि, (पु.) नमानि पीयन्ने पत्रकार जाति. पानी टहगा है। गमुः । गमुंदर" को जल, आम्छादना । दोकना । मुरा० उम० सक० सेट् । आ. भी मी अर्यौ । मारी मेम्या । एक मिनट लयति-ते. जलघिजा, (श्री.) जल जायने । उन्+ । जल, तेज होना । भ्वा० पर० सक० सेट् । जलति । अना निकलती है । लश्मी. सीत् । जल । जाल:. जलनिधि, (पु.) जगनि निधीपनं भरा जल, (नि.) जालन् । जड । भूगा टंडा । उदर । कि जहाँ पानी टहरते हैं। गमुद्र । चारती मंग्य. पेट । गंधद्रव्य । (ज्योतिप्में ) लपमे चाया पर । पूर्वा- जलनिगम, (पु.) जलानां निर्गमः । जोध निधन पाढा नक्षम (न.) पांच भूतों से एक अर्थात् पानी मी आकि जलसा घूमना । नीचे टहिरोहर, पर्व (न.). कारको जाना । प्रसर । फमील. जलकण्टक, (पु.) जलस्य कण्टक इय । मानों पानीका | जलपाय, (न.) जलं प्रायं यत्र । जहां अधिक पानी कांटा है। काटक । सिंघाडा । कुम्मीर । मंसार. बहुजलदेग. जलकपि, (पु.) जले कपिरिव ! मानों पानीमें बानर | जलयुद्धद, (न. ) त। जरका युलथुला । जीवित है । शिशुमार । जलजन्तुमेद । घडियाल. जलमार्ग, (पु.), न० । प्रणाली । मोरी । ना जलकरङ्क, (पु.) जलस्य कर इस आधारः। सोपरीके समान पानीका धासरा । नारिकेल । नारियल । नरैल । जलमुच्, (.) जलानि मुवी । जो पानी छट। मेघ । बादल । कमलफूल । संख । पानीकी तरंग (लहर). मुकिन् । मेघ । बादल. जलकाक, (पु.) जले काक इव । पानीमें मानों कौआ | जलयन्त्र, (न.) जलाना टग्क्षेपणा यत्रं । पानी के इन है। पानकोडी नामी एक प्रकारका पक्षी. ऊपर फेंकनेकी कला । फोहारा । मुमारा. जलकुन्तल, (पु.) जलस्य कुन्तलः केश इव । मानो पानीकी जुल्फ है। शवाल. जलयानम्, (न.) जलम्य यानं । जलकी सवारी।। जहाज. जलफ्रीडा, (स्त्री.) जलस्य क्रीडा । जटकेली । जलकी सेल । | जलराशि, (पु.) जठम्य राशिः । अलका ममूह 1 सापसमें पानीसे खेल करना. जलवाद्यम्, (न.) जलस्य वायं । जलका वाय (वर) जलयर, (पु.) जले चरति । चटक् । मन्स्य-धर्म प्राह-]. एक प्रकारका बाजा जिसे जलतरगनी कहते हैं. यादि जलके जीव. जलयेतस, (पु.) जले जात. वैतसः । शाका जटचारिन्, (पु.) जले चरति गिनि । जलमे फिरने- उपजाकी । बैतममेद । वन. वाला मत्स्य । मच्छी. जलव्याल, (पु.) जलस्थः व्याल• हिंसः । पार जलज, (पु.) जले जायते । जन्+ 1 पानीमें टपजता मारनेवाला जाव । सर्प । साप । क्रूर (वेरहन) " है । शवाल वा नीरवृक्ष । मत्स्य । मच्छ । (ज्योलिपमें) करनेवाला जन्नु (जीव). कक मान और मकर राशिका पिछला आधा । कमलफूल अलशायिन्, (पु.) जटै (समुदनले ) होते ।। (न.) शंय (पु.न.) पानीमें उपजी वस्तु (वि.). निनि । जो ममुद्रके पानीमें लेटता है (मोटो) जलतरण, (पु.) अरस्य तरङ्गः । जलकी तरंग (सदर). विश्णु । नारायण. जलवादनम्, (न. ) जटम्य तादनम् । जलका ताडन जलशुक्ति, (नी. ) जलम्य शुक्तिरिव । मानो पर करना (टकराना)। कोईमी निरर्थक (निप्रयोजन) किया. सीपी है । एक प्रारका जलवा जीव घो। जलद, (पु.) जलं ददाति दा+क पानी देता है। मेघ । जलहस्तिन, (पु.) उल हमीव। मानों पारीने बादल । कर । कार । पानी देनेवाय (त्रि.). है । प्रह (तन्दुआ) नामी पानीका । अरदागम, (पु.) जलदानां भागमः यस्मिन् समये। पानी में हाथ के स्वरूपका एक जीब. जिग बस बादल पाते हैं । यांगाल । मेपका पानी वर्म-जलद्दाम, (पु.) जलाना हाम इव । (विष्ट - . नंका कास. अरषद (पु.) जलाना घरः। स्थन् । पानी रान समुद्री डाग. परा । बादल पर । समुह । जलधारण करने- जलदास, (पु.)जटम्य हामः । जलमा हाना । बाय (त्रि.). एपपरी मच्छी.

बालय, (११) [उपर, बहुत बोलनेवाला. लात्यय, (पु.) जलस बलयःप हमरका नारजप, (पु.) पापम् । सरेने निरन(टोर पारद ऋतु । इसमें जल वर्सना समाप्त होजाता है. अपने माघे स्थापन (प्रयन) परनहाय बना लाधार, (पु.)त. छोटा तालाव ग तालाव। चाहनेवाले स्था।बता अनागप. समुद्र । "जलं भापरो यस" जिस माथय पानी है। जस्पनम्, (२०) +उ । बोलना ।हना विपर.. Pाटक। सिंपाटा। उसीर (म.) पंदन । पानीमें | अपाक, (त्रि.) बम्पपरन् । बहुनिन्दितादनल टहराहुआ (त्रि.) (इसी प्रकार "जलाशय" भादि राहुन पुरे बचन पोलनेसला वापर पदमी इसी अर्थमें). लापिदेपतसं.(पु.) जलस अधिदेवतः वा-ताजला अस्पत, (त्रि.) जयरामशाला। अपिष्टात देवता पण देवता. बस्वाद लिया गया। बोरनापाना. लाधिपा, (पु.) जलस अधिपः । बलका ईश्वर । परण | जय, (.) I+भर देगा कर () देर. देवला. जयन, (पु.) पुर। बंगात् । नदी बनेगा लाम्यिका, (बी.) जलस्य अम्बिका । गलकी माता । पोहा । एदेश एक जाति. पागा. जपनिका, (श्री.) सनि म । उमपुर लाः, (पु.) अलम्य भाः । मलमें प्रतिनिषित सूर्य पन् । नाना पदा मामा. स्वरूप । पानीका सूर्य. जयम, (म.) +मगर । पाग। "m ** लार्णया, (पु.) जलस्य अर्णयः । पलया समुद्र । वर्षा होता है. ऋतु । मागिमी पहार । बर्मात. जयिन् , (पु.) व अनि अमनिष लाधिन्, (मि.) जलस्य अर्थः भति अस्य+गिनि । जल हो। पोगा ।। पेग (f.). के प्रयोगनवाला । पाठ । प्यासा. गर, मारना ।भारम• रा. सेर । लापत, (पु.) बामणि+अ तापी | जस्, मोदण । गुगना । cि. or..२६। जमी। जलोंग घूमना । भंवर । वरघर, मगरात् । मापीर मामी इमा, (श्री.) जसं बोफो यस्याः जिराका स्थान | जरा, मारना मार मार I Tr.... पानी पीना जोर से जरा-जगार-स. लेचर, (पु.) अले घरति। पर+टर-भार .1 जाम्या, (2) tiwer of पानी में विचरतासादि. ताको "ge. लेन्धन, (पु.) जलागि एष धनानि यस्य । पानीही जाजराणा, (2) my RE .. जिसकी लाहिये वाम्बार । गुरकी अप. तारा CRrfre लेयर, (पु.)त. जया मामी । परण । गगुर. अंश अपरे - लोहार, (पु.) पलानि उपारान्ति एमिः । उद्+ (भभिषय) बre birtet जिनसे पानी करते हैं। देहुए पानीके एनेसे"ter:- निरसनेमात पानीकर परों ओर एगा, R"" समरerstart लोदा, (पु.) प्रधान पर मार ।५..। अजगर (... जिसमे पेरमें पानी भराय । उदरामर रोगभेद । एक पर). प्रसारसा पेरा रोग. साहरणा(*.) र नर । लापर, (ही.) असं भोको गिरा ciframe wit- सना पीनेरी । “ जनेर रनिपुनर" Tr. जE. (5.) घrrer (.. का (2) •ि Irr: जिगर Mtoकाको दीर Vire) St सम्प, चमोजमरामामामा, (.) पारनाम.... सीर । " unt पर जा(..।'

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जापान, । जाल्म का राजा). जातुधान, (.) जातु धान ( समिधानं ) भस्य । भी जामेय, (पु.) जाम्याः भगिन्याः सपत्र+दम् । भगिनी अवसर पाकर जिसे पकड़ते हैं। राक्षस | "यातुधान" भी. उन बिहिनका लामा मनेवो. जानुप (नि.) जनुनो विचार +अण् । घुगागमः । लाख- [जाम्ययन, (पु.) रामायणमें प्रसिद्ध मकरान (री. सपनाहुभा पदार्थ । स्वरा पी. जातूकर्ण, (पु.) एक मुनिका नाम । शिवजीका नाम. जाम्ययती, (स्त्री.) जाम्बवतः अपत्यं भी। जाम्बपान्- जातेष्टि, (त्रो.) य+फिन् इटिः । जात। उत्पनहुएके की स्त्रीरूप सन्तान । कृष्णदेवी भायोमिसे एक । संस्कार के लिये कियागया यह । जातकर्म नामी एक जाम्बवान्की कन्या । सापाको काबू करनेहारी. संस्कार । वह संसार जो जन्मके समय कियाजाता है, | जाम्बूनद, (न.) जम्बूनदे म+अण् । जम्मूनदमें हुमा जातोक्ष, (पु.) जातः प्राप्तशिक्षणीयदशः उक्षा टममा. सर्ण । सोना । एक प्रकारका शुद्ध सोना । धतूरा. लिसाने हायक पवाको पहुचा साँट । जवान साँड. जाया, (बी.) जन्म्यक् । “पति श्रीमें प्रदेशकरके गर्भ जात्य, (नि.) आनो भव यत् । जाति में हुभा । पुलीन । होकर इस संसारमै उपजता है। जायाका कायापन यही घेठ । पन्त । सान्दानी । भन्छा । मुन्दर. कि इसमें पतिही पुत्र रूपसे उत्पन्न होता है"।सी।औरत। जात्याध, (त्रि.)जाती (जन्मनि ) एव अंधः । जन्म- लासे सातवा घर. घ भेषा । जन्मान्ध । “जालन्धो बधिरस्वया" इति म.) जायाजीय, (पु.) जायया जीवति । जी । जो धोके भासरे जीदा है। नट 1 नकल करनेवाला. जात्युसर, (म.) वाला व्याप्तिहीनाम्यो माधयंवैध- `भ्या उत्तरे । हेतु और साध्य के इमा रहनेके नियम जायु, (पु.) जयति रोगगन् । जि+उण् । जो रोगोंगो जीत दिन साधर्म्य और वैधयंसे उत्तर देना । पूरा उत्तर। लेता है। औपप । दवाई। यूटी. असत् उत्तर. आर, (पु.) जीर्यते अनेन । जसरणे पम् । उपानि । जारीयार. जानकी, (बी.) अनास्स इयं+अण् । जो जनककी (सी) हो । पोता. जारज, (त्रि.) जायद चारठे जन्मापारसे पैदा होता जानपद, (वि.) जनपदे भवः । तत आगतो वाषण । है। पारसे उत्पन्न हुआ। कुण्ड । गोलक पुत्र. देवा या देशसे आपाहुआ। विया प्. जाल, (पु.) अल-सम्बरण-दोरना+पम्, बलू मारना । जानु जन्पुण् । राजपामध्यभाग । पद और लातोंके भी. गिन्+अ । जले क्षिप्पये मण वा । जिस्से होते, मा. बध हिस्गा । मुरना । गोहा। "साथै कन्". रतुवा जिसे पानीमें फेंकते हैं। कदमा दशासरीय जाप, (पु.) यए+पम् । चुपचाप मनहीकी प्रार्थना । रोषणा गवाक्ष । छिद। मच्छिोंग्रे पकाने के लिये गुनगुन । नारी जा. राणके सूतका बनाहुमा बानाय (माल)।न सिलीहुरे जापक, (नि.) जए बुल् । जप करनेवाला. कली। उसफल । मोर पशुपक्षिओंके परनेलये पाय (पाई-कंदा)। शाट्य । धूर्तता । दम्भ । पारा । समूर। जाप्य, (नि.) जप्स्यत् । जप करनेयोग्य. इन्दगाल (न.) खाउँ छन् । मोफत । नई लिओंका जायाल, (I.) जगटाया अपत्य अण् । जवासाठी समूह (म.). सन्तान मुनिमेर। एक मुनि. जामदाय, (पु.) अमदभे अपन्यस्यम् । समदभिकी मालक, (२) जाल इस सालतिरेका उनी मोड रादकरता है। बाल । समूहास. सन्तान । जमदमिका पुत्र परशुराम. जालयत, (त्रि.) जाल र रसम । उडिसा । जामा, (सी.) सदन म हीलम् । सन्या । सी कपटीमासारी. पतोहू । न. जालन्धर, (पु.) बालापमान । भारतके नर- जामाद (पु.) आर्या माति मिनोति-मीठे वा हुन् । पयिमा एकपा मोर सदन मध्यप जो स्त्रीको मापता (हरएक बाम उसका देखा है) फेहता (काम विगडनेपर मिलता है) और भारला जालिक, (पु.) सलेन पर रहा। (रस दोष करनेपर शासन मीना) पियारा सामी। पंदरावालसे जीमेशा देवीपीवर ट। लडकीय पति । इहितपत जाई. आमि, (बी.) जन्+मिण नि. गदिमणिनी । बहिन । जात्म, (वि.) गाली इहिना । लरकी भूपा ।।। पुलकी । निडट- अपने दोरणे) मिला। पीसी "मामयो मानि गेहानि" मनु - ग्रियो दीर. . - (न.)। जरान्वित । युद्धाप्येकासा (त्रि.) और विपाद (ज) से रहित शान्त जीव । प्रमको बडा-जीर्णयरन, (त्रि.) (जीनानि याणि यम्य) दिने जाहम्, वाहम्, (10) जाहन्-एक प्रत्यय है। मंझावाचक शब्दोंके जिन्यर, (.) जि+ma टरर माय लगाया जाता और पारीरके किमी अत्याको प्रकार यता है जगे "कर्णजाई" वानवा मूरस्थान, जिन, (पु.) पति गंगार । निना । प्रमाणे सामयी, (पी.) वगंगे आईहुई गंगाको वेगानी देगा नेहारा । युर । रितु "जिया"(नि.). कर जदुराजक्नेि पहिले मुरामे पीलिया पीछे कानके जिए, सेक-गीना । भ्वा० पर• गह. हैद् । बगी : मासे निकाला इमलिये जगु राजपिंकी कन्या होनेसे गंगाशे अजेपी. जाबवी भी कहागया । गंगानदी. जि, जय-जीतना । भ्वा० पर० स० अनिट् । जयति । जिष्णु, (पु.) जिप्नु । अनुन । इन। विशु । म अंजपीत्. माठ वगु । जीरनेवाला (नि.). जिगीपा, (श्री.) जिगन्+अ । जयेच्छा । जीतनेश | जिष्णु, (नि. ) नियु। जीतने पाला । जयकीट, इच्छा । चाह । प्रकर्ष । रयाक । उपम । मिहनत. जिल, (नि.) हा+मन्-दिन्यादि लि. 1 कुटिल। ति जिगीपु, (त्रि.)नि+गन् । जीतने की इच्छा करनेवाला. मन्द । भूमं । तगरका टा. जियत्सा, (स्त्री.) अगन्धमादेशः । मावे । भक्ष- जिह्मग, (पु.) निभं गच्छति । गम्+2 1 जो टेंडा हे णेच्छा। यानेकी इच्छा. चलना है । गम् । माप । मदनका गृक्ष । धीरे जानेवन्य जिघरनु, (त्रि.) भद्रान् पगादेगे-उ । गाने इच्छा कुटिल (नि.). वाला । भूग. जिला, (पी.) लेडि अनया। लिट्या नि.। जिन जिघांसु, (त्रि.) हन्+सन्- । मारनेकी इच्छावाला. चाटता है। रसको जानेवाली इन्द्रिय । रमना । जीन जिज्ञासा, (घी) ज्ञा+मन+मावे अद् । जानकी इच्छा. जयान. जिशामु, (त्रि.) ज्ञातुं इच्छुः । ज्ञा+सन्+3 । जाग्नेी | जिहामूलीय, (पु.) जिद्दामूले भव छ । जीभी पर इच्छा करनेवाला । मुमुक्षु । छूटनेची चाहवाला. हुआ। 2 और समे पहिले आधी विमर्गका हा जित्, (त्रि.) जि+किम् । “समासके पीछे आता है" जीतनेवाला । "कंसजित्". जिद्वाग्द, (पु.) जिव रदो दन्तः चर्वणमाधानं यम। जित, (न.) जि+क (भावे ) जय । जीत "कमगि क"। जीमही जिसके चावनेका माधन है। दन्तहीन । दा- अभिभूत । दवायागया । पराजित । हरादियागया। जीतपाने- विना । जीमहीसे चावनेहारा पक्षी. चाला । वशीकृत । काबू कियागया। आयत्तीकृत. जीन, (त्रि.) ज्या-चयोहानि । अवम्याका घटना। वटा होता, जितकाशिन, (त्रि.) जितेन (जयेन ) काशते (प्रका कृतरिक्त मम्प्रसारण-दीपंच । वृद्ध । बूढा । चर्मबुट् । शते) मिनि । जो जीतसे चमक रहा है । जिताहव । चमडेका होना. जिसने लगाई जाती है । जयी । जीतनेवाला । फनहयाव. जितमन्यु, (त्रि.) जितः मन्युः येन यो जीमूत, (पु.) ज्या+क्किप्-चीः तया जरया मूनो वर जीतनेवाला. मूझ्याधना+क । युद्धप्पेस बंधाहुआ। जो आयशको जीतता है । “जीयते वायुना वा” जो हमारे जितरानु, (नि.)जिताः शत्रवः येन । शत्रुओंको जीतने- जीता जाता है । जि+क-मूद-दीपंश्च । वाटा। विजयी. जितस्यर्ग, (नि.) जितः सर्गः येन । स्वर्गको जीतनेदारा. (जलस्य ) मनः (पटकन्ध )" पानीकी गटटी । मेर। जितात्मन्, (नि.) जितः (वीकृतः) आमा । (इ. बादल । मोया । पर्वत । (पहाड)। देवता पक्ष । इद । कोषानकीलता (बेल). न्द्रियं-मनो वा) येन । जिसने इन्द्रिय वा मनको वश किया है। जितेन्द्रिय. जीर, (पु.) ज्या+रन् । जीरक । जीरा नामी पहा । जिति, (स्त्री.) जि+किन् । जीत । लामा नफा । हारिल. (जो मसालेमें डाला जाता है)। सजा ठरवार । छोटा. जितारि, (वि.) जिताः अरयः येन । जिसने अपने शत्रुटो वा कामशेषादिको जीत लिया है। रि: (.) युद्धदेव | जीर्ण, (पु.) जुल। जीरा । शैलज (बूटी और) जितेन्द्रिय, (नि.) जिवानि (बीतानि) इन्द्रियागि येन जिसने अपनी इन्द्रियोंको वश किया है। "जो मनुष्य जीए (बी.). मुन, देख, छ, सा और मूंपर एग देष नहीं कता" हर जीर्णज्यर, (पु.) जीर्णः ज्वरः । पुराना पर xxस. 1 जयति नमः जीवनम पुण्ने बन्न (करदे) पहिने हों.

बनाया 'जह पउना. जीणोद्धार, (पु.) जोमस्य (भममन्दिरस) इसरो जीयन्मुक्ति, (श्री.) जीपत एव मुक्तिः । जीतेही कर्तृत मदीकरण पत्र । जहाँ टूटे फूटे मन्दिर भादियो नया बना भोकृत्व (मैं इता है में भोफा हूं) से घटना । जीतेही पापा जाय । (संगर) बंधी नित्ति. जीर्णोपानम्, (म.) जीर्ण उद्यानम् फर्म. स.। पुराना जीयपक्षी, (स्त्री.) जीवतः पनी । पद श्री जिराका रचन (बाग). पति जीता है. जीव, प्रापधारण । प्राणोंको एकटना । भ्वा.प.अ. सेर। जीयस्थान, (न.)त. जीवका स्थान । मर्म टिपी. श्रीपति भणीवीट । लिम् । अजिजीवत्-छ । भाजीजिवत्-त. हुई जगह । जहाँ चोट लगनेसे जल्दी प्राण छुटजाय. जीय, (पु.) जोक । देहका अभिमानी । यात्मा। जीण, (स्त्री. ) जीव्+अच् । जीवयतेर दा टाप् । धनु- मनुष्यसे हैकर की माऊतक घेतन । "प्रायोको शे- का चिन्न । जीवन्तिका भीषधी । पचा । पृमिवी । जल। जीवनका उपाय. वक्ष (क्षेत्रको आभेदारा) स्वरूपसे पारण पर्ताहुआ जीव जीयात, (पु. म.) जी आतु । अन्न । जीवन । जीव- कहलाता है" प्राणी । “परणे पम्" जीवनका उपाय "जीनिष्-अध्" पाविशेष । " मावे भम्" प्राणोको | जीपारमन्, (पु.) कर्म । देहका अभिमानी जीय. नकी भाषध । मुर्देको जिलानेवाली दवाई, जीपगृह-मंदिर, (A) जीवस्य रहे । धीरयपरदार. | जीवाधार, (पु.) जीवस आधारः । जीवका आधार। जीयमाद, (पु.) जीवन्तं एकाति जीपमा गमुल् । पीते-जीविका (पी.) जीभ कन्-भत इत्वम् । जीवनका आध्याहृदय. जी पर गया अराधी. उपाय । आजीवन । रोजी. जीयधन, (पु.) जीव एव पनो मूर्तिः (सन्धवशिला- जीवितेश, (पु.)त.। जीवनका मालिक । यम । पाकल १४) यम्य । सैंधे धन (नून)ी भिटाके टुकडे. भाणोंग खामी । जीवन । दमा । सूर्य । पियारा सामी के समान जीवही जिसकी मूर्ति है । हिरण्यगर्भ. (त्रि.). जीयजीय, (5.) बीकान् जीवयतिक । देखनेसे तृप्ति | जीयोपाधि, (पु.) १ त । जीवकी उपाधि | स्वर, करता है। पत्तिजीवोंको । जिलानेहारा। चोर पक्षी. मुषुप्ति और जापत् अवस्था. जीपय, (नि.) जीव-अथ । बडी भायु (उमर ) वाला। जीयोत्सर्गः, (पु.) जीवस्य उत्सर्गः । जीवन (जिदनी) - (पु.) जीवन (जिदगी)। रात कच्छु. जीपन, (म.) जीयदे अनेन । जीव स्युद् । जिस्से जीते शु, रह-ओरसे चलना-वेग । म्या• पर• भक. अनिट् । जवादि । अद:. है। पति । जीविका । जल। यावीन । शाजामकरान । " भावे युद" प्राणोंको धारण करना “ जीवयति"। जुग, लोग-योजना भ्वा पर•स• सैट् । इति । जति. गिन्स्यु । पत्र । जीविक औषध । वायु । लेटे फलोंबाला | जुगुप्सा, (मो.) गुप्-निन्दा करना । साथै सन् अचाप् । पृह (.) निन्दा. जीयनयोनि, (पी.)त। (ग्यायमें) शरीरमें प्राणों के शुटिका, (सी.) जुद्-सहनि-सा होना-टाप्-नि• पृ. चलनेरा कारण इन्द्रियोंसे न जानेयोग्य एक प्रकारचा यम. शिखा । बोरी हुए २ बाठ. जुड, बांधना-जाना । दुदा• पर• पक० सेट् । जति । जीवनदेत, (पु.) ६. जीने के कारण । “विशा- अजोडीद. शिल्प (पारीगरी), मृति (नौकरी) सैश, गौओं रक्षा, अत्, समझना । भ्वा० आरम• राक• सेट् । जोतते. विपणि (दुकानदारी) पति, पुसीद (व्यान), पि (खेती), और मीस मांगना इस प्रकार जीने दगाव है | इन्, गति-आना । उदा. पर. सक• सैद । जुनति. जुर एण्होना । अ. सेवाधरना । सर-रा.भारम• जीयन्ती, (पी.) बीमागे साईं कन् हवे अत सेद । जुपये । भोपिर. त्वम् । गुइची । जीवाध्यशाकावन्दा । हरीतहरीर. जुष्ट, (न.) जुर । उनिहा। सेपित । सेवा जीवन्मुक्त, (नि.) जीवनेय मुफ (संसारः) । कियाहुआ (त्रि.). जिगने जीतेही संसारधे घोदिया । भामाग्रे साक्षात् जुह, (सी.) होति मनमा पनि । जिस्से दोन करनेहारा जिराने भामाको जान लिया। प्रारम्यामांक इर्ता है। पहारा Bान बनाहुमा आधे चंदमाके नाशतक मधुप्तिके समान सवहार करनेदारा।भारमाको सस्पच पावविशेष । पत्तोंग्रबाहमा प्रधारा जानेवाला जीव । प्रमखरूप आत्माको जामेवात्म. यहमपात्र. - - माणका त्याग. -- - पप.१८

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जनसाधन, न] ( ११९) [ज्योतिर निसाधन, (२.) विध्+मिच्-करणे त्यु । (त. ज्येष्ठांशः, (पु.) ज्येष्टस अशा पदभाईकाभाग (हिस्सा)। जागा साधन । इन्द्रिय. उत्तमभाग. नापोह (पु.) अप-हाए । (ता। विस्मरण । ज्यघाश्रम, (पु.) ज्येष्ठ आश्रमो यस्य । सबसे पडे आश्रम- भूलना । ज्ञानका जाता रहना. बाला । "तीनो आधमोंको अनादिद्वारा गृहस्थही धारण रानाभ्यास, (पु.)६.झानका अभ्यास । “उसीधे कर्ता है इस लिये यही बा आश्रम है" गृहस्थाश्रम. सोचना । कहना, भारसमे समाना । और उसीभै सगे | ज्यैष्ठी, (पु.) ज्येष्टानक्षत्रेण युक्ता पौर्णमासी ज्येष्टी ना" इलादिरूपसे ध्यान करने योग्य विषयही चिन्ता, सास्सिन् मासे अण् । अपने नामका चांद्रमास । जेटका मानिन्, (त्रि.) ज्ञानं अस्य अस्तिनि । जानेवाला । महीना. सामान्यानमाला । तत्वज्ञानी । अगली बातको जाभेदारा। ज्येष्ट्य, (न.) ज्येष्ठस्य भावः प्यम् । ज्येष्ठल । पडापन । देवा । ज्योतिषी (पु.). "विप्राणी हानतो ज्येष्टरम्" इति मनु'. नेन्द्रिय, (न.)त.। ज्ञानकी इन्दिय । मुन्ने देखने | ज्योष, (अव्य० ) सम्प्रति । भव । बहुत समय । जस्ती । आदिहानके साधन । कान, श्रीरा, नाक, जीम, सगरूप सवाला प्रश्न इन्द्रिय । अन्त करण । मन. ज्योतिरिङ्ग, (पु.) ज्योतिरिय इति । ग्+अन् । बापक, (वि.)+पिच्यु । जनानेवाला । गिराने- नीकी तरह चमकताहै। राघोत । टणाणा -रिक्षण । पाला । जतलानेवाला ।-कः (पु.) शिक्षक । सिराने. भागकी मस्ती. बाला । आशा करनेवाला । स्वामी 1 मालिक । (न.) ज्योतिर्विद्, (y• ) ज्योतिपा (सूयांना ) गत्यारिक (दरांनमे) किसी नियमके नियत शब्दों से अधिक . वेत्ति । जो सूर्य आदिकी गति र्थशे सूचन करनेवाला नियम. पाल) को जानताहै। विद्+कि । ज्योति शास्त्रको जानेवाला. मापनम्, (न. ) हा+गिन्स्युर् । जतलाना । इत्तिला-ज्योतिशाल, (न.) त• । प्रह और नक्षत्र आदि- देनालिसलाना । सूधन ना. की गति भौर स्वरूपका निधय करनेवाला । स शासके पित, (वि.) का+णिन् । जतलाया गया। इतिला पांच स्कन्ध शास्त्रमै कहे हैं "होरा, गणित, संहिता, केरल दियागया । सूचना दियागया. भौर पन". प्सा, (सी.) जा+सन्+भावे म । आकी इच्छा ज्योतिधा, (न. ६. सूर्यआदि ज्योतिरोन व्य, (नि.) मा+मगि यत् । जाभेके योग्य । समझनेला. पका प्यान करनेयोग्य । प्रत्यक्ष होनेलायक. मण्डल (दायरा । सत्ताईस नक्षत्रोंवाला मेपादि राशिओंका चक. पा, होना । क्या. परभरअनिट् । जिनाति । अभावीत ज्योतिए, (न.) ज्योति. अधिकृल्प हो मन्यः । मोति त्या, (बी.) ज्या । मौनी । धनुषा विहा । भाता। (अह आदि) के विषयमें रचागया अन्य । मिन पनि भूमि । जमीन. ज्योतिशास्त्र । पद्धि । तरपी। "ज्योति" यहीय. व्यानि, (श्री.) या+जिन् । जीर्णता मापन । पुरा- ज्योतिटोम, (पु.) ज्योतीपि स्तोमा यस पलम् । ज्योति नापन । दानि । मुरसान । नी। दया. जिगर सोम (धन का तोत्र) हैं। सोलह अतिशेने ज्यायस, (वि.) अविशयेन पाईयमुनि ज्यादेशः । इको था शिखरने योग्य याविशेष. होतादै । बहुत बड़ा बहुत भूटा । पुढापावाटा । विशय | ज्योतिपत्, (पु.) ज्योतिः अस्ति मस्त मनुर । ज्योति- पानियादी वाला सूर्य । प्रदीप ( जीरा )का एक पर्वत । और युत्, सप्ति-चमकना । भार पर• भा. सेट् । ज्योतति. मालपानी नामी हता (बेल)। राति । एत । (योग. स्पेष्ठ, (नि.) • छन् । देशः । बहुतही यूटा । शाखमें) रित्ती इत्तिय एक मेद । (डी.) । ज्योतिपरालय (नि.). भविमापन भन्दा । भर (पु.)(बम भाई) बड़ी पहिन । भवस्थामें ही वो भाईटी घी (बी- ज्योतिस्, (पु.) होतते दुरवेऽनेन था। पुरमामुन् । टाप् । गंगा । भसमी । भटारखा नक्षत्र (पी.)।। धादि कोज होतापमानासबिस्मे बमपरा जाता है। स्यं । अमि । मोर भेदीय और स्पेटतात, (पु.) तातम्य स्पेतः । पितारे भागे रत्पन्न एनीमिका (पुती ) में देखनेय साधन ।पा। हुआ ताया जेटा. नक्षत्र (तारा)माही बनवता । परभे ज्येषा, (पु.)येष्ठः वर्णः । सबसे ऊंची माधि (माक्षप). पमानहरा वन्य (२.). . "पेटी".

ज्योल्ला, ( २२.) ज्वर, । ज्योत्स्ना, (खी.) ज्योतिः अलि अस्यां । म । उपधालो- ज्यालामुखी, (श्री.) पीटस्यानविशेष । दुर्गा म्या पश्च । जिसका प्रकाश हो। कौमुदी । चांदनी । चन्द्रमा "ज्वालामुग्ल्या महाजिदो देव उन्मत्तभैरवः । अनि की किरण । जी । ज्योतिवाली रात्रि (खी.). मिद्धिकानान्त्री सनो जालन्धरे ममेति" तश्रम्. ज्योतिपिक, (पु.) ज्योतिषां शास्त्रं वेत्ति अधीते वा ठक् | ज्यालापत्र, (पु.) ज्वाला एव वर्क यस्य । लाटही जि= (इक् ) । ज्योति (ग्रह आदि ) ओंके शास्त्रको जानता मुख है। शिव का नाम । अमि. वा पढता है । दैवज्ञ । भाग्यको जानेहारा । ज्योतिषी. ज्वालिन्, (त्रि.) जमणिनि । लाटवाला । चमकनेकर जि, अमिभव-दवाना-तिरस्कार करना । भ्वा० पर० सक० शिवजी महाराजका एक नाम, अनिट् । अयति । अप्रेषीत्. झ जी, वयोहानि । बूढा होना । चुरा. उम० पझे क्या. पर० अक० अनिट् । प्राययति-ते । निणाति, झ, (पु.) सग-संदति-इकट्ठाहोना-ग्रह-पकडना-पिधानवंद रोग-रोगी होना । भ्वा० पर• अक० सेट् । ज्वरति. रना । । झञ्झावात । बडी जोरकी हवा (जिसमें वर्षा साय हो)। बृहस्पति । इन्द्र । ध्वनि । आवाज । नष्ट- ज्वर, (पु.) ज्वर+घ । अपने नामका एक रोग । बुखारकी खोइंगई चीज (त्रि.). भीमारी । ताप । कस्स । युखारकी गर्मी. झग (गि) ति, (अव्य.) शीघ्र । जल्दी । उसी समय ज्वरम, (पु.) ज्वरं हन्ति । हन्स्टक् । ज्वर (युखार एकवारही. को मारता है । गिलोय । गुइची । ज्वरका नाशक (त्रि.) मंजीठ (खी०). झंकार, (पु.) झं इसव्यक्तशब्दस्य कारः । कृ+धा (अ भ्रमर आदिका शब्द । भारेकी आवाज. ज्वरप्रतीकार, (पु.) ज्वरस्य प्रतीकारः । ज्वरका उपाय (इलाज). झंकृति, (त्री.) झन् इत्यव्यक्तशब्दस्य कृतिः । किन ज्वराग्निः, (पु.) ज्वरस अग्निः । ज्वर (बुखार) ) की कांसीआदिकी भावाज. अमिताप (आग). झञ्झा, (खी.) एक प्रकारकी ध्वनि (आवाग) ज्वरान्तक, (पु.) अन्तयति । अन्त तत् करोति णिच् ण्वुल् । वायु (हवा) सत्तह्वा. तल ज्वरको अन्त करनेवाला। नेपालकी नीम । लोहेकी झटू(संहति) इकड़ा होना। भ्या० पर• मकसैद यनीहुई दवाई । युखारको दूर करनेवाली दवाई (नि.). झटति । अझाटीत-अझटीत. ज्वरापहा, (पी.) ज्वर अपहन्ति । अप+हन्छ । झटिति, (अन्य ) शीघ्र । जल्दी । झट । उपौवन ज्वरको दूर कता है । वेल । सौंठ । विल्वपत्र । ज्वरना एकहीवार. शक (नि.). झण, (न.) कार, (पु.)-झणदित्ययकराब्दस्य पर ज्यरित, (त्रि.) खरः सप्रातः अस्य । तारका• इतन् । करणम् । कृ+घ । झमझम करना। करण (Rs. जिसे दुखार होगया हो । ज्वरयुक्त । दुसार चढाहुआ. दिकी आवाज. ज्यल, दीप्ति-चमकना-चलन चलना। भा• पर• मक- सेट। | झम्प, (पु.) शम्+पन झं इति कृत्य पतति । पत्र या अवलति । अज्चालीत् । ज्वलयति । ज्वलः । ज्वाला, बलके साथ ऊपरसे नीचेको गिरना । कूदना । ( प्रिया) ज्यलन, (पु.) ज्वलति । जलता है। यमकताहै । वा युन् । यहि । माग । चित्रकका TV । “भावे स्युट्" झर, (पु.) अप् । निर्शर । शरना। धरनेसे निय दीप्ति चमकना । दाह । जलना. जलका प्रवाह चलनारमन्, (पु.) वलतीति जउनो देरीप्यमान | झर्च () , कहना-शिडकना । तुतः पर० सका है। अरमा (सूर्य की किरणों के पडनेसे) चमन्नाहुआ पत्थर । (B)संवि. पूर्यकान्न मार । सूर्य की पियारी ममि । सूरजका पत्थर | शर, (पु.) मासभरन् । (मांज) वाजेला मेर। रे । ज्यादित, (वि.) बल्दा दाय । अलाहुआ। दी। कलियुग । एकनद । वाजा. धमन हुआ। उमउ । प्रकाशमान । मासर । घमटीला. झलक, (पु.न.) +ग्युल् पृ। कासीका पात्रात स्याल, (पु.) सलग मिशिखा । आगदी साद । प्रचारका पानामंगीराह बोलिग यार यही अर्थ । वरमा (त्रि.). | शलरी, (पी.) आन्। पृ.। एक प्रकार। स्याटनिक (पु.) अहः (गिभर) बिहा यम्य । मागीमाटोल, (ज) नो बटने घाटी माई जिमी, मारना । म गेट् । अपि । ' माप. ।

(१२) (डिम्भ, । एप, लेना-मंदारना । बा• उम• सक- सेट हाति-ते। टिए नोदन-प्रेरणा करना।चलाना। चरा• उभ• सक• सेट् । मसावीन् टेपयति ते. प, (पु.) मध्यते मन ए (अ), भरस । मछ। टिएनी, (सी.) टिएकिम् । टिपा पन्यते तूपठे अच् । मउली । मीनराशि "भावे प (ग)"। तार । गर्मी । अर्थयोतक टीच. धूप । पन (न.). | टीक, गति-जाना । भ्वा० भारम• सका सेट् । टीकते। सपशेतु, (पु.) सयो (मीन ) (मकरः पा) नुः पर। अटीकिट. जिसका निशान (संडा) माली हो । मदन । कामदेवाटीका, (बी.) टोक्न कठिनपदोंका वर्णन दिसाने "शपवेतन" आदि. करनेहारी वृत्ति पोदरी, (सी.) अपस उदरस उदरं यसा:-र.स.। सत्यवतीका नाममासमाता. ठ, (पु.) मण्डल। चन्द्रमाका बिम्ब (खरूप) । सूना । झाट, (पु.) अद्+पि+अच् । पेलोसे ढकाहुआ स्थान । महेश्वर महादेव बढी भाषाज. कान्तार । जगल । मम (फोस या उसमआदिका घोना ठकुर, (पु.) यार। देवनानी प्रतिमा (मूर्ति)। ग्राम- झामक, (न.) गम्+फर्मनि वुल् (क)। बहुत पी. गोंकी एक उपाधि. ड झिगिनी, (को०) . । सिंगिनीका पेड। उल्का घुभाती..(पु.) डी+ (भ)। पाडवामि । समुद्री भाग। झिली, (सी.) सिहति । सिपअन् पृ.। एक प्रकारका शब्द। मादाज । पासपक्षी।शिवजी. कोडाजीपुर उमय (पु.) जम् इति शन्दं इति । ऋउन् । टोरु । छण्ट, (पु.) चन्द अग्-पृ.। समा गुल्म । सी. एक प्रकारका बाजा । कागतिक योपिओंके जानेटाया चमत्कार. स, वृद्धा होना । दिदा• पर• अक० सेट् । मीर्यति । अता-पतक, (न. ) वास मादिका रचाहुआ पात्र । टर. रीत् ।रा. | इयित्य, (पु.) काष्टमयमय । लकडीकर बनाभा हिरन. दाकिनी, (बी.) कानो समूह इनि। लीके पार म.(पु.) (मेल) एक तिरछे जाना । गायन । गाना। पर पनि । बुरखुराना. डामर, (पु.) शिवगीसे पहागया प्रसव । भयानः । ट सफनाक. ८, (3.) + । वामन । बौना । पार । परि । निम्वन । हिण्डिम, (पु.)सिडिइति शन् मनोति प्रकारात गुपचाप । मरेलकी योपरी । रंकार (न.). महजो हिंदि ऐसे शब्द निकालता है। एक मा टक, पिना । पुरा• उभ• सह. सेट् । हदित् । टायनि-ते। वृक्षविशेष. भटटर-त. डिण्डि (ग), (पु.)रिणि इति पदः मसि बस क(पु.) सरि+धम्मन् वा (अ)। कोष। गुस्सा। (पहिले पदको हरी हो जाता है) समुदकी फेन (भाग). राजाना । कोष । तरबार । और पाथर पाउनेका मन्त्र | द्वित्य, (पु.) सका हाथी । सामरूप, पान, विद्वान् , (मोजार )। चार मासेश्य माप । जाप । सनित्र । रंग। मुन्दर, सम्पूर्णशलों के वर्षो बाहार रोई पुष. अइंचार (पु.न.). हिए. इबा होना । पुरा- उभ.पशे या• मा-. दहक, (पु.) सरते पम् (अ) संशयो कन् । जनमुदा । से देपददि-ते। रेपते. चीनी मोहर । एण्या. हि, प्रेरण-चलाना । पुण्• उम• पो भ्यापर. सा. रहार,(पु.)इति अध्यकशन्दम्य पार पम् (ब)। से । इति । सिम्भावि-ते। रिम्मारि. टंधेर । एक प्रकार भादाज । धनुष दिले जाने दिम, सन-मारना । मा. पर• सर. पेट्रोति । आवाज। विस्मयध्वनि. भडेमीद. रन (पु.) किशुन् (भन )एकप्रकार सार। मुहागा. हिप, (पु.) डिविचम् (ब) राम। टिटि,(M) भ, (पु.) टिटि (1) पति अम्परा मापरे । भाटि टिशर नेपाल टिटाडिम्म, (I.)सिनि+अ । सं। पपा "" "खा कन्"पदी अर्थ. यहीबई. गणों में से एक - - भवानदार, टी.] ( २२२ ) - डी, आकाशगे जाना । उडना । भ्वा० आ• अक० रोट् । णिस्, घूमना । अदा• गा रोट् । इति । निस्ते । प्रमिले। उयते । अडविष्ट. अनिसीत् . डीन, (न.)ी+भावे । पक्षिओंकी गति (चाल)। णी, प्रापण -पहुंचाना -टेजाना । भ्या• उम० द्विक अनिट् । उहान उडना. नयति । प्रणयति । भनपीत् । अनेट. डुण्डुभ, (पु.) डण्ड भण्-मावे+द । (दोंदा) एक णु, स्तुनि । तारीफ करना । अदा पर• गफ वेट् । नदि। प्रकारका सांप. प्राति । भनावीत् । अनीपीत् । नुनुविव. त ढ, (पु.) ढका। याजा । कुत्ता कुत्तेकी पूछ। निर्गुण । त, (पु.) तक् गहना-हराना । वाड ()। चोर । छ। गुणहीन । ध्वनि । आवाज । सप. पूछ । गोद । म्लेच्छ । रन। सियारकी पूंछ । छाती। ढंका, (स्त्री) ढक् इति कायति । केक। एक याना । लडाका । चंचल और पुण्य (२०). बड़ा या दूरा बाजा । यशका याजा. तक, दौस्थ्य-दुखी होना । भ्या. पर० सक० सेट् । इदिए । दुण्ढ, अन्वेषण (ईडना । तालाश करना । खोजना) भ्वा० तवति । अतवीत. पर० सक० सेट् । दुण्ढति. तक, (न.) तक्कर । चौथा भाग जलके संयोगमे मयाहुआ दही । छाछ । लस्सी. दुण्ढि, (पु.) दुग्द+इन् । गणेश (काशीमें प्रसिद्ध दुण्डि- राज). | तस्फूर्चिका, (स्त्री.) [छाना] । पकेहुये गर्म दूपर्ने लस्सीके संयोगसे पनीहुई भामिक्षा. ढोक, प्रेरण । चलाना और जाना । भ्या• आत्म० सक० तस्, कार्य । कमजोर करना । काटना। छीलना । बार सेट् । ढोकते । अढौकिष्ट. (पक्षे) खा. पर• सक० वेट् । तक्षति-तक्ष्णोति । - ण क्षीत-अताक्षीत् । (झिटकना)। संतक्षति, (इस "ग" अक्षरके साथ प्रारम्भ होनेवाला ऐसा शब्द कोई तक्षक, (पु.) तक्ष+प्युल् । तर्सान । कारीगर । विश्वकर्मा । नहि कि जिसे संस्कृतमें अधिक बोलचालमें लातेहों। कश्यपका पुत्र । एक नागका नाम. बहुतसे धातु जो धातुपाठमें "" के लिखे जाते हैं तक्षन, (पु.) तक्ष+कनिन् । विश्वकर्मा । तर्खान । चित्र वास्तवमें वे "न" के साथ प्रारम्भ होते हैं । "ण" के नामी नक्षत्र (तारा). साथ लिखनेका कारण यह है कि जिस्से जाना जाय कि तक्षशिला, (स्त्री.) सिंधदेशमें एक नगरी. "" कईएक उपसर्गों [प्र-अन्तर आदि ] के पहिले आनेसे तगर, (पु.) (ढगर ) एक वृक्षका नाम. "" के साथ भी बदला जायगा. | तङ्कन, (न.) तकि+ल्युद (भन ) । दु खसे जीना । उरना. ण, (पु.) णल्-जाना-ड (अ) पो० । ज्ञान । इल्म । तच्छील, (त्रि.) तत् शीलं यस्य । उस खभाववाजा निर्णय । फैसला। भूषण । जेवर । जल । पानी । जलका स्थान । पुरा आदमी । शिवजी । नाहिकी आवाज देना। तज, सिकोडना । धा० पर• सक• वेद । तनन्ति । घखशीश. भतजीत् । अताडीत. नाचना-बतायेके साथ नटका कामकरना-मारना । भ्वा० तः, ऊंचा होना । भ्वा० पर० सक. सेद । तदति । पर. अक० सेट् । नटति-प्रगटति । अनासीत्-अनटीत् । अताटीत-अतटीत. (मारना) अनटति. तट, (नि.) तद्अच् । कूल । किनारा । तीर । जी आदिका कंडा. ण, अव्यक्त शब्द । गुम आवाज करना। भ्या. पर• अक. सेट् । नदति । प्रणदति. तटस्थ, (नि.) तटे तिष्ठति । स्थानक । तीरका । नारेका । पासका । स्वरूपसे भिन्न विशेषण । मध्यस्त पथ, भदर्शन । छिपाना । नाश होना । दिवा. पर• अक. उदासीन पुरुष. चैन । नश्यति । प्रणश्यति । भनेशन-अनशत् । प्रनष्टः. तटाक, (पु.) तटं अकति । बांधना । दिवा• उभ• सक. अनिट् । नाति-ते। घोडेपानीवाला तालाय. प्रगति-ते । अनामीत् । सनद. | तटाग, (पु.) तटं भगति । अग्-टेढानाना+अप (4)' निज, शोधन । यार करना । जुहो• उभ• सक. अनिट् । तलाव (साग). माता प्रति। नैनिता भनिन् । मशीत् । तदा (स) पात,(पु.) । हाथीने सूडको पेट भनित. रना । पीडा । रिनारेपर द्वामीने मुंहले रोलवा. कोई जन. - णद्रा . अक्-टेदाजाना+अ (४) राटिनी, सीसे भपहुआ. जगह । वहां. तटिनी, (पी.) त+अस्ति भर्षे इनि । नदी । दर्या. तस्वज्ञान, (पु.)त.। यथार्थज्ञान । सघाझान । प्रम- तडाग, (पु.) त-चोट लगाना । नि. । तालाव । ज्ञान । महाका जाना. गहा तालाब । हरिण पानेका जाल, | तस्यषिद्, (नि.) तत्वं वेति । ठीक १ जानता है। तडित् (सी.) ताश्यति मेपम् । जो बादलको फटकारती दार्शनिक प्रशके वास्तविक स्वरूपको जान्नेहारा. है। पुरा तनि । विजली. तस्याभियोगः, (पु.) तत्वेन भभियोग । यथार्थ अपराध । सडित्यत्, (पु.) तरित् अस्ति बस्स मनु मकोय । सची मालिश विजलीवाला दादल. तत्पर, (नि.) तत् परे ( उत्तम ) यस । तदूत । उम- में गया। उसी फसगया. सविदर्भ, (पु.) तस्ति गर्ने यस । रिजली जिसके गर्भ (मध्य)में है। बादल । मेघ. तत्परायण, (त्रि.) तदेव पर अयनं यस्य (ल)। तदिल्लता, (स्त्री.) सहित लता इव । रिजली जो बेलके वही जिसका या आश्रय है। तदामक । उसीमें निरंतर सरुपमै है। तीक्ष्ण विजली. लगाहुभा. तडिल्लेखा, (स्त्री.) तडितः लेखा। विजलीश रैगा (सीर). तत्पुरुष, (पु.) मुख्य पुरुष । परमारमा । रामासों से तडिन्मय, (नि.) तडित्+मयद् । बिजलीवाला । पिज- एक 1(जिसमें पहिला पर दूसरे पदके अर्थको जताता है) जैसे "राजपुरपः". तण्डका, (पु.) तरि+प्युल् ()। ममोला । । । तत्पुरुष, (पु.) राः पुरुषः । वह मुख्य पुरुष वा परमात्मा। रंण वन कि जिसमें सम्स (बहुत शम्दोका एकशब्द तत्र, (अन्य ) तस्मिन् वाटादी पल् । उस समय । उरा एकप्रकारका समास जिसमें प्रथम पद प्रधान होता है. हो जाना) बहुल हो । पानी लकी और वृक्षाका स्कन्ध । मायावी । परेवी बललकरनेवाला उन (वि.). तत्रत्य, (अव्य.) तत्र भवः (अव्ययसे सप्)। यहां होने. तण्डुल, (पु.) तरि+उलए । थानोंच सार । चावल । वाला । वहाँकी चीज. तोहरहिन धान. तत्रभवत्, (त्रि.) सः पूग्यो भवान् (प्रथमाके अर्थमें तत् (अन्य ) सन् कि । हेतु । इसलिये। इसकारण. अल् ) कर्म• । पूज्य । पूजा करने के लायक । हजूर सत, (म.) + । वीणा आदि बारा । वायु । हवा (जोमासोंसे परे हो उसके लिये बोला जाता है । इवतो (पु.) पिण्हुआ फैटाहुमा (त्रि.) जाहिर कर्ताद). ततम, (नि.) तहतम् । पहुनोंमेंसे एक । “ततर"। तथा, (अन्य ) प्रकार अपने पाच (था)। राम्य । दोनों से एक. पैसेही । पहिलेकी भौति मानलेना । निधय । उसी तौरपर. सतस्-ततः, (अव्य.) सद्स्तविल । उस पुष वा श्रीसे नयारत, (त्रि.)तपातः इस प्रकार किया गया। से पा उस स्थानसे । वहासे । उसके अनन्तर. ततस्त्य, (नि.) अव्ययसे त्या होता है । भरः। तथागत, (नि.) तथा गतः । ऐसी दशामें हुभा । ऐगो बर्दा होनेहारा ।वहडि. हालत में प्राप्त हुआ. तति, (बी.) तन्+फिन् । श्रेणी । कतार । समूह । फैलना. तथागुण, (नि.) तथा गुणाः यस्य । बेगे गुणों वाला. तत्काल, (पु.)सः कालः । वह समय । वर्तमानयल । तथाच, (अन्य ) पहिले कहेहुए अर्थको पका करना । होरहारामय, उगपरभी। जैसा कि. तत्कालघी, (नि.) तस्मिन् योग्ये समय भीमतिर्यस्य । तपारूप, (नि.) तयारूपं यस्यासे रूप (शत) बाटा. जिसकी ठीक समयपर पुद्धि फुरै । चिरपर आई विप-तथायिध, (वि.) तया विधा रस । बसे प्रचारपाला । तिको दूर करनेवाली भाल. इस तरहवाला तस्त्रिय, (प.) वेतनं पिना किया यम्य । तराइ | सधारयम्, (म.) तथा स्वागारन. पिना काम करनेदारा. तपादिः (भव्य.) निर्शन | मसाला शान्त । प्रतिर तरक्षण, (पु.) स पासी क्षणः । उसी बफ । सही । है।सा कि सपा जल्दीसे. तथ्य, (म.)दया। घर सायद । सर। सच। तत्व, (न.)तन् कि । सतो मावः । स भाषः । सरवालय (त्रि.) सवा सलोपः । सबाई । सम्प । धसानी हालतद्, (वि.) तभरि । पहिले पा । अनि परमात्मा ब्रह्मपन नाचना । बजाना गाना। चित्त। रहानुभा निदार रनेलाक रम पिय । म बस्दा सय २५ पर्य. (न.)"भो तस्यदिति" मोवा किया हुआ .

. । होनेसे नसीम लगाहुआ. नहिं देती। तन न पावि (रक्षति)। पा+शन् । घरीरको नचाचे। वहायाग ।(यह शरीरको तन्तु (पु.) तन्क्लुन् (3) | माह । एur तनय, (पु.) तनोति करम् । दन्त्यन् (यय)।|तन्तुकीट, (पु.)तन्तत्पादकः कीटः। तर तन्तुनाग, (पु.) उन्नुवन दीपः नागःविहाम्यवाद सनिमन्, (पु.) दनोमवः मनिन् । होटेछा होना तम्तुनाम, (पु.) तन्तुः नामी अस्य । यदि सदनन्तर, (नि.) समा अननरः । रगके भगन्ना मनु, (बी.) गन । (पी) याला ।-(अन्य ) गके अगला (मार) ami तदर्थ, (नि.) तम्य अर्थः। उगके प्रयोजनकाला । टया, (गियां वा हीर)मनी-गनु तदई, (नि.) सम्म अहः । उगके योग्य । उनके सार. रानु(न), (I.) मनोः स्त्रा का नाम तदयपि, (अन्य ) यहाँतक. ३। शरीरमे जाना । पुत्र । बेटा । मह (.)। तदयस्थ, (त्रि.) मा अवस्या यम । उम दगारमा जो देह दान हो (नि.). (हारत) घाला. तनुम्याय, (पु.)नी या सम । गिर तदा (भव्य.) तस्मिन् काले दाम् । उग समय ! तय । आया हो । छया वा 6..(श्री.न.). उगवफ. तदात्मन्, (नि.) थमा यम्य । जिगका वह मम्म तनुत्पन्, (नि.) हर्नु सकी। शरीरको छोडनेत्रा हो । टरा स्वचाला. मरनेवाला. तदानीम्, (अव्य.) तस्मिन् काले । तदादानीम् । तनुज, (पु.)तनोः सन्याः जायते। अगर होता है। पत्र । मेटा जा (सी.) पुत्री । नैटी. तय । उसवक. रुदेकचित्त, (नि.) सम्मिन् एकं चित्तं यम्य । उममें एक | तनुम, (न.) तनुं (ई) मायने ।। को बचाता है । कषय । निह । स्युर् । “टनुकरे चित्तपाला । उसीपर एक चित गाये हुए. यही वर्ष. तद्वत, (नि.) तस्मिन् गत मामकः । तदार । एकमन | तनुमना, (प्रो.) तनो (देहम्य ) मना छ । शरीरकी फनी है । नायिका । नाक । । । तहण, (पु.) मारधारविशेष. धारनी. तहणसंविधान, (पु.) तत्र (बहुनीही ) गुणस्य | तनुभृत, (पु. ) तनुं (देई ) विमति । (आत्मचैन ई (विशेषणस्य) संविज्ञानं (शिष्यपरतव्येण योवनं) मन्यते) माकिन् । जो शरीरको आना मानछेदा है पत्र । व्याकरण, बहुव्रीहिसमासका एक मेद । जहां जीव । “या दुम्यता तनुतां". विशेप्यके आधीन होकर विशेषणय ज्ञान हो जैसे "सम्ब- | तनुवार, (न.) तनुं (देह) नोति । अन् । फर्णमानय" यहाँ गुणीभूत कर्णका भी लाना है. जो शरीरको ढांड लेता है। कदव । बिरह । सनद तद्धन, (वि.) तदेव धनं यस्य । जिसका वहीं धन है। तनुस्, (न.) तन्दनि (उम् ) । देह । शरीर पनि कृपण (सूम) । (इसे जितना मिले उसे योहा समझ- | तनूनपान (द),(पु.) तनुं न पातयति । पर कर अपनेमें रतनेही घनका अभिमान करताहै). कि । जो शरीरये न गिरने। अग्नि । भाग । तद्धर्मन्, (वि.) किसी और देयके बिना जिमका रहकरनी सायेदुए अन्नको पानेमे यह देहोर वही धर्म हो "यह अपना धर्म है" ऐमा समझकर - धर्ममें टमाटुआ जन. तद्धित, (पु.) देभ्यः हितः । उनके लिये हितकारी। देती है)। (प) तन्वा नं कृ पाति टनून ध्याकरणमें मामके भागे टगनेवाले प्रत्यय. तत् यत्ति । अदकि जो निदलको रवावे (घी) । खाजाय । यहि भाग. तद्वत्, (अन्य ) तेन तुयं या नुत्या सा घेत किया । तनूह, (न.) उनी रोइति । रहन्छ । जो इटर मके समान कियावाला । रसके समान । "तद्वत् शिवस्य विभुता." उगता है। लोम । रोम । तूं। पशिओंके पर. तन, पटना-विस्तृत होना । टम• सक. सैन् । तनोति. पानीका जीव पिता सन्तान । मोटार ।। तनुते । घतानीनू-श्रवनीत । थत्त-अवनिर. सूतावान। दन्द जो कुटो फैटाता है।पुत्र । बेटा। सहकी । मेठ । वाला कीट (कोटा) रेशमी कीटा. सीवाद (धी.). - दुई। कासंबारीक नाजुकाना. नामिमें सून हो।ता । माडी.

लनियांग, (२१५): [सपम्, । - सन्तुनियाम, (पु.) तन्तुः व नियोगः यस । जिसी | चन्द्रा, (बी.) सन्द्रि+ । आलस्य । संपना । नींद । गोद तातोके समान होतालका वृक्ष. जागोमीटी । प्रमीला. तन्तुपर्षन्, (न.) तन्तोः यज्ञोपवीतस्य दानरूपं पर्य। [वन्द्रालु, (त्रि.) तन्द्रि+मालम् । निदाशील । बहुत सोने- यज्ञोपवीत (जनेऊ) के देने पर्व । सावन (धावण ) वाला. भी पूर्णमा । (पनि वामनभीको जनेऊ दान करनेका ) सन्द्रित, (वि.)तन्दा जाता अस्य-तन्दासतच् । जिसे कंप उत्सव दिया जाता है), आगई है। भालही. तन्तुर-ल, (न.) तन्तः वियते अस्य । २। लच् या तन्द्रिन्, (त्रि.) तन्द्रामात् । आलसी । मुस्त । विधान्त । सातवाला । गृणाल । कमलको हण्डी। में. पाहुभा. तन्तुम, (पु.) तन्तुवर भाति । तानकी तरह चमकता है। सन्मप, (नि.) देव । मयट् । यही । उसी वरूपको सरसोंका पीजीवरस बरछा । बरा. पहुंचा । अमेद । वही । दूप. तन्तुयर्धन, (पु.) तन्तुं शं वर्धयतिसम्स्यु । रावो तन्मय, (नि.) तद् मयट् । उसका बनाया हुआ । उस स- पदानेवाला । विष्णु । भिव. स्पदाला तन्तुयाचं, (म.) सन्तुभिध पार्य। सान्तोंवाला गया। तन्मात्र, (वि.) देव । तदात्मक । वही । उसी एक- उितार।बीन. ला । शब्दस्पर्श-रूप-रस और गंध, तन्तुयाय, (पु.) पन्तून पपति । बन्+अण् उ । ग्धी, (बी.) तनुगे । एक प्रकारको वेल । सानी। जो तातोंगे बोना है। तन्नुपाय । जुलाहा । युभेवाला. नामक दीक्षीणमध्या। पतली बमरवाटी श्री। एक तन्तुयाय, (पु.) तन्तून् पयति । अग् । जो तोतों प्रकारका छन्द चुनता है । जुलाहा मातिविशेष. तप, दाह-जलाना भ्वा० उभ• सक सेट् । सपवि-ते । अता- तन्तुविमद, (बी.) सन्तकः विप्रहे यस्साः । जिसके पीत्-अतपीत् । अतपिट. शारीरमें सोते हों। कदली । मेला। इस सालमें बहुत | तप, (पु.) सप्म्मच (भ) ग्रीष्म । गरमी । जेठ और सूत प्रष्ट होते है. हाडका महीना. सन्तुशाला, (श्री.) सन्नी वपनाय शाला । सात बु. तपलेस, (पु.) तपसः हेयः । सपनामा दुःरा. प्रेका परसूत युरेका घर । जुलादेश पर. तपती, (बी.) तप्+शतृ नि• या नामपाली सूर्यो तन्तुसन्तता (नि.)सन्दनिः उन्नत (यातं) ।ओ स्त्री। एक नई। सूर्यको कम्या (जिसके योगसे पुरु तातोंसे घिराहो । स्यूतवन । सीयागया कपडा. तापत्य कहे जाहे). तन्त्र, (न.) सनन् । सिसन्त । फैसला । औपप । तपन, (पु.) दस्यु (अन) सूर्य । ताए । गरमी । दवाई । कुरम्ब (नया)का कार्य । प्रधान । बग। भागतकक्ष । एक नरक । गर्मीका मौसम (1) जुलाहा । दूसरेके आधीन होकर परना । परिद । भाकका पा । सूर्यधान्तमनि. पोशाक । हे । सबब । अर्य (कार्य) को सिद्ध करने तपनतनय, (पु.) त.। यम । यमुना और समी पारा । संतु हात भाने राज्य चिन्ता परिजन । (ग) स (मो.). नौकर । धाकर । तन्नुवार (जुलादेश सला) प्रबन्ध । तपनमणि, (I.) तपनख मणिः । पूर्वमनि. बन्दोबस्त । शपथ । सम । सौ । धन । पर। पोनेन | तपनारमजा, (बी.) पपनस-सूर्यस्य माना । सूर्य से साधन । कुलाबेदकी एक शाखा । वेदादि शत्र । पुत्री। यमुना. अपने नामसे प्रसिद्ध शिवजीका पाहुआ धान. तपनी, (बी.) ४ (मन) । गोदावरी मी. तक (न) साद भचिरात् महसन (क) तपनीय, (I.) तमनीयर । सोना । परे. जल्दी लियागया ।मवीन बना नया पडा. लायका खाना ही बर्य. समायाप, (२), (पु.) तत्रापि (चन्दल.) (प)- तपारण, (न.) तपा पर वायना ति। पप्बावेमण् । उप.तता । जुलाहा । तोती. राधिका, (बी.) त्रयते । (रि) साथै तपस्, (पु) वप्रथमुन् । माप होना । रिरि पन (6) गिय. ऋतु । जनटोरके सरप । माटेरन । सोचन। छन्थी, (श्री.)वधि । गिलोय । एक प्रभारी मोगा. अपने भाषा शिक्षित पर। पदरच बारिमै सितार हरीरी। रस्सी । एकम।पान औरत. (मोदिप)को नाम पर टार, (२२६) - . उपन्य, (5.) दात रु. (मनतिकदोगनार) । ततकानं, (न.)वतं कायनं । अनिमें दादा दायाबरोजिरो प्रयाहो (जिसमें न तो पुन मुर्ग (सोना), नही) फरमाय । पापनय महीना। ततकुम्म, (पु.) तप्तः कुम्मा पत्र ! TEE "दान (2)माः" । कुन्दनानी पुन (फूल)।तर हो । नरस्ने । एक मरका नान. मस (पि.) ततर (२०) एयरय मा (निपरेटर .)दर परी । टाकत (२) तगाभा जल (पानी) पी और प(r) दमक । दरलाइन करना । मान. पाता है अपार पहिले तीन दिन गनेर दाम्बिन, (f.) दम है इस म बिनि दूपरे तीन दिन गर्म पी पीना मोर दीगरे र (ट)अनार का नाम हाय करनेवाला। मयुको पान करके मन बरना). अदरगान । सोदामसम्, मेदयकाना । तर उना मा.। AN(.) (इ) साnि• पर. भेद । सम्मान दगिनी (2.) दाम्र-पीट ) डीर (१) । मीन । रामना-तान्या. (द)नामिन औरा। तम, (पु.) ताम्मी । तम्भ (4) (1) गो. (एक पा) नमागास (1:14(R) (भागानं) समम्, (न.) तम्+अमुन् (मग् ) । मेल सितादेव निरोध करनेदारा सा भय भोगः ।। tr" निशिगी" (मरोग)। पर (पुनाह) (ary मोर मचर्य (नरनेयोग) विषागth र, (:.) (ख) बम। दर्शनको रोकनेहा दोष"गुगामात Irrfter) एक युग (जिगहे पाप और भाषा हो ) Prorary समरिनी, तमा ( भाग) AA (RELIAN rrrrr.(.m. मेरा।वि। एत. तमाल, (पु.) नमसाला (HI) Prity Ra () मन मा दाग (m) मानवाबोर ( बरमा सिरहलाएर in ... Terra(ar). गनिय, (.) म पनि भाntram (१.infrared भगा IR भी inte(.) TAITERATION (TRAITA पा tre (RT). 1.} PRIMer INR नोट, (.) म. ( . मा (4) ओमी Rurane (E.NET. है ।nia HITIAT दाग, (I.) म { HAND पर irroriarrier () interest 7 : t.mrate in mumerire, (:. - (RArrent *".m4 (arre: है .

मोभित (१२) सिविधा, - तमोभिद, (-)(समा मिनति+मिद किप्) | अरे तरस्थिन्, (पु.) तरएम महत) विनि (पिन्) फाइनेवाला । रापोत । रटाना. कायु । हवा । गः। तेज चलनेवाला शूर (महादुर) तमोविकार, (पु.) तमसो विकारः । अंधेरेका विकार। (पि.) याधि। बीमारी. तरि-री, (सी.) नौका । द्रोणी । बेग । कपटेली पिटारी। तमोवृत, (नि.) तमसात । अंधेरेसे दा हुआ। पि. रूपदेवा पाडा. गडा हुआ। पादलसे दका हुआ। कोषले भरा हुआ. तर(५) खण्ड, (पु.) तरूणो समूहः ताप (रा) ण्ड । तरभु, (पु.)सरे (गति-मार्ग या) क्षियोति । यो राखेशे पक्षोश समूह । पोंके टुकडे. रोकता है। पशुओंनो सानेवाला छोटा मेडिया. तर, (त्रि.) तु+भापे अप् । लांघनेवला । तरनेवाला । तरफा (पु.) तु+माच् (मा) । उर्मी । सहर । वायुसे जीतनेवारा हिलकर पानीका नीचे ऊपर उपलना. तरण, (पु.) + स्युन् । नौका । किश्ती । सर्ग. तरङ्गिणी, (बा.) तप (अस्वर्षे ) इनि (इन) वरण, (पु.) तु+उनन् ( उन)। एरण्डका पक्ष । मोटा (६)लहरोवाली नी । दर्या. जीरा । कुम्नपुष्प । एक प्रकारवर फूल (न.)। नतन (नया)। तरणित, (वि.) सण. सभातः असा इतन् । जात. जवान (त्रि.)। फिर उदयहुआ । गर्म । कोमल । ताजा। तरा। जिसमें लहरे हो । लरीला । लहरोवाला । चंचल. सायः मडीके तेलका पौदा । अवान औरन (बी)। सरण, (पु.) तुम्न्यु (षन) मेलक । मेला । रोका। "इस तरुणी विषम्" हि.प. और वर्ग । भावे युट् (अन) पारजाना । तरना (न.).|तरणज्यर, (पु.) एक ज्वर (घुसार ) जो बसपर सात तरगि, (पु.)-अपि (अनि) । सूर्य । डोंग्य । भाकका दिनतक रहता है। एक सप्ताहतक रहनेवाला साप. दश । किरण और लांबा (मा) मेमोमाजीमी- तयमृग, (पु.) तरोः मृगः । इसका गग । र । यानर. कंद (बी.). तरुराज, (पु.) तरुणों पजा+टन् । दीका राजा । टा. तरंत, (पु.)मा । समा। भारी मेघका पमाधम ब- लका पक्ष । पारिजातक. सना । मैंटक । एक देल । राक्षम् । भक्षा दी (सी.) तशायिन् , (पु.) तरी शेवे-धी+मिनि । इसपर सोने- नीकारी. वाला । पशी। परिदा. तरतम, (वि.) न्यून (एम) अधिक (जियाक्ष) माव- तरणिमन्, (पु.) तरुणदमन् । जवानपना । जवानी । वाला अर्थ । जो शब्दके अन्तमें सगानेसे दोसे एकत्री जवान दुवा. (तर) और बहुतों से एरी (तम) अधिकता जाने तरपिलासिनी, (बी.) पक्षी मानों मितानिनी है। नवमहिम तरपण्य, (न) तरस (नधारिपारयानस्य ) पण्य (5) तक, (पु.) त पञ् ( 8 ) । आकाहा । अभेी बाह। दमौत । बितर्क । क । रासल संभावना । हर नदी भादिके पार पानेका मसूल । नही भादिक पारजानेके लिये देनेलापक पीस (मासूल) "प्रसभरते तर्कः" घे..। विवाद (गडा)म्याया। हेतु । केवल दानोलको मावाला सावदा स्प सरल, (पु.) अतन् । पारके वीचकी मपि । हार । और (देव)ो मानकर मामी माना जाय । जैसे "करि तल । घपल । कामी । विम्बार । धमत्य । वहाँ हुआ यहा भाग न हो तो धूम भी न होगा"। मीमांमा आदि पदार्थ सिचदी । सप्मी । म । शराब (सी.). पाच देशारे साप विरोध न राने वाली तालनयना, (श्री.) सरले नपने रस्सा.द.सापरल पेदानी परीक्षा करना । यभिचार (हेट दोर) नेत्रोंदानी. शंकाको मयनेदारे। न्यायमें पहुए मामय र तरलिन, (वि.) नरल तन् । अंचल । पनेवाला. पर दोष । न जानेहुए अर्थको रोने टी १ बा. तरवारि, (पु.) तर (पणो पनि) दाररवि । जमिन ई, ऐप्ति (पनम्ना) 40. वितम् । गलत ना ! (इन् । ओ दात्रुओंडी पहिरो रोता है। एक करना । चमन करना । पु म पैदरात. ते। अस. तरस, (न.) भगुन् (बम्) । ल । पैग । तेरी । तर, (वि.) (समयुल) व (ठ) वर. बादी बालारोग पीर बनर. हपिया (की.) तस दिला त (लि) की सरसा, (सन्या) क्षति हुन जल्दीर. विधा (एम). वाले प्रलय. तरकार.

तिर्कशानं,] ( २२८) करना. । . तर्कशास्त्रं, (न०) तर्कस शास्त्रं । तर्कका शान । न्यायशास्त्र | तलयात, (पु.)तलेन घातः । हाथी सदन (मंतक). मारना. तर्कामास, (पु.) तस्य मामासः निगमनं । वातका नि- तलयुद्धं, (न.) तलेन युद्धम् । हायकी लिओने चोडमें झूठा हेतु. तर्किन्, (त्रि.) तर्क गिनि । तर्क करनेवाला । दलीलयाज। तललोक, (पु.) तलः लोकः । तल्लोक। नीचे संमा मेयाविक । मंतकी. पाताल. ता, (पु.) कृत्+उ-नि. । एकप्रकारका यन्त्र ( जिसपर तलिन, (नि.) तलाइनन् । पतला। छोटा । पट ।।। रई निकासते हैं ) वेलना । कातनेका साधन. निर्वल. तर्न, मत्संन । झिडकना । चुरा• आत्म सक० सेट् । तर्ज- / तलप्रहार, (पु.) तलेन( चपेटेन) प्रहारः । प्राय यते । अततर्जत् । भ्वा• पर• सक० सेट् । तर्जति । (अ)। चपेट मारना । चपेटका आशव (चोट) सनर्जी. तलातल, (न.) अतलादिमेंसे पांवा पाताल. तजनना, (म० श्री.) त+भावे ल्युट् । झिडकना । नि- वलित, (न.) ताइतच् । मुटमांस । भुनाहुआ मा रादर करना । निन्दा करना । शर्मिदा करना. आ. तर्जित, (नि.) तक । शिडकागया । हराया गया। तलुन, (पु.) तृ+उनन् (उन ) रको स होता है। निन्दा किया गया। निराहार किया गया. हवा । जवान । पहा (त्रि.)जवान औरत (श्री.) तर्जनी, (मो.) तज्यतेऽनया । तमन्युट् (अन)। तल्प, (५०) (न०) तापक् (प) शय्या । छेव ।। जिस्मे झिकते हैं। भंगूठेकी पासी अंगुली. दारा। श्री. वर्ण, (३.) अच् ()। वत्स (पियारा )। तलज, (पु.) लज्-कान्ति-चाहना+अच् (अ) प्युल् (मा. गोका लगा। अभी उत्सम हुआ बघा. बहुत अच्छा (समासमें यह शब्द पीछे रहता है। त, हिंसा (मारना) मा. पर• एक सेट् । तदंति । पने लिङ्गको नहिं छोडता) (माझणीतमनः) भवदार.. तप्ट, (वि.) सक्षक (स)। छोटा कियागया हो। टुकड़े कियागया । गुणामया. तहूं (सी.) ददं द्वा+3 । एकीकी पनी हुई दवी (सी). तष्ट, (पु.) तक्षातृच् । एक प्रारफी जाति । RE तांन. तपंग, (न.) सम्म्युट् । तृमि । रजना । "तृर+मि। भलंकार-राजाना । पुरा• उभ• पो मा. दुर (बन) करना । दाग करना । प्रपन्न करना। परीपुर करनेयोग्य । पांच यज्ञों से पितृय । सक० सेट् । इदित् । रासयवि-ते । संसति । मापन पर एरा देवता कपि और पितरोंको पानी देकर असिौत, तस्, उशेष । कर फेंकना । दिवा. पर .. तम, (नि.) व+विच्या म्यु। सूत करनेवाय । प्रगन्न तस्कर, (पु.) तत् करोति । तद भनि । तस्यति । अतसीत्-अनासीत् । समित्या-तस्त्वा. सरपटामिल करनेयोग्य पार योनेसे एक पितृपर. धति, (IN) पिलातुर ( प्रसत्र) किया गया. साडल्य, (न.) तत् शीठं अस्य यम् (य) fm पीछे पा सामने दूसरे चीनको गुण्नेहाण । यता, सर्व, पति-रसामा•४१.पर• सेट् । ती मतवाद, वही समान है। नियत । तरभार । नियम बम स,(पु.) (4) भनिराकर। तृष्णा । साटरप्य, (.) सदस्यम्य समाव+प्यम् (4)। त (4.)ी (ह) नदः । उपार (समय). होना । पाम होना. दिर नारदम काम पूरा करना । नाका (मो.) एक मी (मे राम दारनपुग.म.पा. पर• मा. हैरपति टकले. मादेशः, (I.)माया: भाti टड, (..) (अ) (बने पि होमपुर. टाया ताना, (नया रिण का गर (ममा)। पर सन्नादुर () सर(:.) र (2.) तस्, बरला. लिया. ।

'सामिण ताया. पटय, (न.)मना (मुनिना) कं भगुडान यस तापश्य, (.) तापानां त्रयं । भाप्यात्मिक आदि ऐसा. भण् (A) जिसका प्रकार सण्डमुनिने व्हाहै । पुरषके रके तीन ताप (BR) नाचको ताण्डव और बीके नाचको सस्य कहते हैं। पुरु- | तापन, (नि.) तप्कणि भाषे युद् । गरम करनेपाल । षोंका नाच । एक प्रकार पास । जोरसे नाचना. जानेवाला, डिपप्रिय, (पु.) ताण्डवं प्रियं रस । पुरषका गाच तापस, (पु.) तपसि राणः अन् (अ) तमालपत्र जिसे पियारा लगता है। शिवरी। नाचन पियारा। (इन दिनों तमारुको भी इसी नामसे बोलते हैं। देज. (त्रि.), पत्ता)"तपः अस्ति अस (अन्)" जो तप कर्ताद ति, (न.) तन्क (3) पंथ । पिता दशरने (सपषी) (नि.)। दमनक पूरा (पु.), लायक । भौर पूजाके लायक (त्रि.)। पियारा । ताया. तितुस्य, (पु.)मावेन तुरूपः । पिताके समान । चाचा । तापसतर, (पु.) सापसोपयुक्तः तरुः । तपखिओं के कामका पर । इहरीका पक्ष (इसके खेल आदिसे पसी. ओंके सर काम पूरे हो). रिकालिक, (त्रि.) तलाले भवठा । उसी समयमें होनेवाला. सापहर, (वि.) तापं हरति । तापको ए परनेवाला । करपर्य, तत्परस भावः पम् (य)। निचोड । मतलय । शीतल करनेवाला । शान्ति (दिलासा ) देनेवाला. इरादा । सहनेवालेकी इच्छा (पाह) अभिप्राय । एक | सापिन्छ-अ, (पु.) पिनं पादयति जयति वा । काम सगना. -जिया (1) पो । वापर कता है। त्यिक, (नि.) तत्वे भवः । सत्त्वमें होनेवाला ।म. तमालका क्ष. सलादरअसल । पारमार्थिक, (तापित, (नि.) सप+मिच्+क । तपायागया । गरम किया दर्य, (न.) तस्मै इदं तदर्थ तस्य भावः प्यम् (य)। गया । पीडा पहुंचाया गया. उसके लिये होना । उसके लिये तोर । टरा बाबत, तापिन्, (त्रि.)वप्+गिनि । तरानेला । किसी प्रकारकी व्याधिसे पीडिता परम करनेवाला । परम. नादात्म्य, (20) बास्मा (खरूप यस) तस्य भावः प्पम् (य)। उसी सम्पन होना। अमेद । एकही | तापी, (बी.) तापयति । अन् । सो (1) बिन्प्य पर्वतमें पधिमोर बहनेराडी एकरी. तारक्ष, (नि.)तसर दर्शनं महा। पदय । यो | तामरस, (म.) तामरे (बले) सरिख । सएस। जो टस नाई रिसलाई देता सरा प्रचारास पैसा. जलमें घोता है। पर सोना । पूरा बारबरोंक तान, (पु.) न+पम् (म)। एक धाग। कमली पादवाला एक उन्द. सति । (संगीतसमें ) रंगी भावात्र (पुर) "तान- | तामस, (I.) तमति (पयो) मरियापुणे या रत प्रदायित्वमियोपगन्तुम्" इ. (वानों की संख्या ४९ उन. भण् (अ) अरे वा अपिया (देसमी) गुगर्ने पास है)। फैलाब पचाया। साप । उन् । नीच। “तमसा (गुणमेदेव) तान, (.) तनो षः । डोटापन । पत्तलापन । सूक्ष्मता. निस+अण् ()" जो तमोगुणवे बना है (सां. तान्तय, (नि.) बी. (त्री.) तोविकार अन् । सन्तु स्पमें) मोगुणसे उत्पाहुए थर आदि (नि.) (सूत) का बना हुवा. "तमसः (राहोः अपत्य)बम्" राहु सन्तान । (ज्यो- तान्त्रिक, (त्रि.) सत्रं (निशान्त) तमाम पानं वा निमें ) राहुल पुर रे । तमसा यता पम् (ब) मधीवे वेद रा ट (इक)। सिवन्त (असली बात) री (1)। रात्रि । रात । वटामापी। बाकी पा मनामके शासपो परता ना मानतात. जिसमें तमोगुण बहुत है (बी.). विसन्त । जिराने जिसन्त जान लिया । ममवारी जो तामसिक, (नि.)पी (डी.) तमा निसिसम् । परमात्मा विषयगे पातचीत कर्ता है। राके भधारसे बना । भराभधेरैके साथ संबंध रखनेराख. जामेहारा. तामिघ, (पु.) तनिध अति अलिन् च (ब)रिस ताप, (पु.) त+पम् (ब) पन्ताए । घोक। गर्मा । भैधेरा हो। (सांस्य) भारद प्रमाण विपर हर । मुस्किस । इरा. (बनुको टल्या सिनेट) समान भंग ताप, (पु.)+पम् । उता गमा. इसके मनसे उपश कोष (गुमा)क्षम (जिसके तापक, (त्रि.)ताल । तपानेपानगरमा देनेवाला। दुरे भावर है) Rife मोहोरा जलानेवाल।--(पु.) जर (पुखार). खपाल. - मगभूतबदम.amarif हागर,(4.} PEATEINitant टाला '(२०) तानुल, (न) मटन् (ल) युक् सालाहै । और | ताम्रसार, (5.) सावर्ग सारं अस । दस स्पोमाताहै। पन्नामले चिद बाबहीन पत्ता। जिसमें गार हो। लालचन्दना यश (क) दानेच गार (न.). ताम्बूलकर (5.) ६. पनन इन्जा । पानदान। तानिक, (पु.) तापानं शिल्पं भव । जो टन नरसनेका पत्र. कना है। "तास भर्य" ठक् (क) ठान्वूलपेटिका, (क) तानस पेटिन्छ । पानी पी. कार (कसेरा) एक आति । तामेय बना हुआ टरी (रवा)। पानदान । पान्तुग. तार, पालन करना-विसार फैलना । भा• wr. दालद-परः, पदः, (पु.) नालंददावि-पारपति सेद । तायते । अतावि-अलापिट । "मित्र! न्य पदाः । पनदान उटनेवाला मूल (नौकर) तार, (पु.) अपने अर्थअन् (अ) जो दवावमा परमेर पान हमार देता है. चलाना । "मिच करणादौ पम् वा"। एक बार नान्दवही (को०) इस वरी। तांबूल (पान) की (सफ मोटी)। प्रमर (भो) देवी प्रकार और सरना । नाप (तारा)। नेत्र (बोर) ta नानापियर, (.) यूटय अधिकारः । पान देनेमा उनीनिका (पुतली) (सी.)। निर्मल (1) रूप । यही उंची भायाज । गहुन ऊंचा । निम( सन(R) रन् पयं अमाह (७)। (त्रि.)। एक प्रभारी मदारिया सामान वेगार जीनेहारा। एक पृहस्पति की प्री (श्री.). तारक, (पु.) तारसति । मृ+मिन्गुर (मा). प्र.(..)ER (1) होगा । एप्रहारय नेवाला । नाविक (माद) मेला और (-) RTI () हा रोग सारा । गोगटी पुनली (श्री.) या (मा) (or)()()(3.).in (इनहि होता). (f.) तारकजित्, (पु.) वाशिम जिस परी(2.) (भा)पर निगर जिगने तारक दयको जीत लिया। बाहिर ranामपिनी एन. कि "तारा". Arr.(:.) (प) की+म तारस्ति (न.) तारध जाताः अ (D (4) कान या भारती निगमे तारे निरल भाये होतारोमा भावा-आम्मान. T, (..) (दमा) तारतम्य, (न.) तरतमयोप. प(4) विश्यामनियारा थोडा । मेरा . १: एन. तारापति, (पु.)... नारा की। T:.) म । मिश्री (४) irtatरा. बदमा। पीनामी बना और। तागण,(.). मानकर (0) पपी। ..rrrrru, (पृ.)TTER (*.rat (amazett माnire. (T.) मनी 1 MIT astr :.:.4 strug kath, ma.T.) (4) Mrns राई • ) 1sarz (krit *ar or next Ltteeti म.भमान. अम4. .

चारार्थ, (१३) (विपि, बना हुआ. सारापर्प, (न.) तारार्णा वर्ष। तारोंकी दृष्टि । वरीना-/ तालिक, (पु.) वालेन (करतलेन) नितः टफ (क) गिरना हाथकी तलोसे बना । पपेट । थप्पड । हापकी तली. तारिणी, (सी.) तारमति । तृपिच्+मिनि (इन्) ई तालु, (न.) तरन्ति अनेन वर्णाः। तृश् (३) रो (३)। तारनेहारी । शिवजीकी बी। पार्यढी । मरी ल होता है । जिस्से अक्षर तैरते हैं। जीभ (इत्रिय) महाविद्या. का आसरा. तारिन (नि.) मिनिनि । तारनेवाला । बचानेवाला. तालुजित, (३०) ताल एव जिहा यस्य । सालही जिसकी तार्किक, (पु.) सर्व वेत्ति अधीते या टक् (क)। जीभ है । पुम्मीर (संसार)। जीभके न होनेपरभी यह जो तर्क दिलील) पो जानता है या पडता है। तर्कशा सालहीसे रसका स्वाद लेता है. लको पड़नेहारा । तर्कशास्त्रको जानिहारा । तईशान गौतम, तायक, (नि.) यी (बी.) तव इदम् । वावकीन (त्रि.) कणाद और गृहस्पति भादिसे रचाहुआ है. (सव दंईन) तेग. तापर्य, (पु.) ताक्षम्य अपत्यं यम् (य) । ता (रसप) तावत्, (मध्य.) तत्परिमाणं अस्य । नि. । उसका इतना की सन्तान । गरु । मरण (सूर्यका सारपि) । साप । माप है। इतना । सारा । माप । भवधि (१६) । निधय। पोडा। सोना । रष. प्रशंसा । सारीफ । वास्यका भूपण (सजावट)। तदा। सायंचनः, (पु.) तायः प्पो यस । गा के इण्डेवाला तब)। इतना बडा. भगवान् विष्णु तिए, जाना । भ्वा० आम• अक० सेट् । तेस्ते। वेका. तार्णः, (नि.)- (खी.) सणस इद-अप । पासका चके । अदेकिट. तिक्त, (पु.) ति+क (स)। कसैलाया छ रसों से एक. तार्तीय, (नि.) तृतीय एव+साथै अण् । तीगरा। तीसरे. तिग्म, ति+मर-जको ग होता है । तीक्ष्ण । तेन । सेज का सम्बन्धी ।-य-(न.) तीसरा भाग (हिस्सा). चीन (त्रि.). वार्तीयीक, (नि.) तृतीय (अपने अर्थम) +ईकक् । तिग्मरश्मि, (पु.) Arमा रहमयः अस। जिरानी येन तीसरा । तृतीय. किरणे हों । सूर्य । सूरज. ताल, (पु.) सल्यम् (ब)। णिच् अन् वा। अपने तिघ, पातन कतल करना । सा• पर• सक- सेट् । नामका पक्ष । हडताल । देवीका सिंहासन गानपरिमाण । तिमोति । अवेपीद रागा बजन (सन्दकी कियारा मान-माप)। दोनों तिन्, तीक्ष्णीकरण । वेषकरना । बुरा• उभ• सक सेट् । हायों पद (ताली बजाना) सीकर बनाहुआ यात्रा। तेजयति-ते. स्मर (दलदारफी मूह)। बारह वार जान (गोहा) र तिन, शमा (मुआफ) करना । अपने हार्यमें सन् (ग) चारोंओर हाय पुमानेसे जितना समय लगता है। ताला. होताहै। भ्या• आत्म• सक सेट् । नितिशते । अति- तालक, (न.) सलमण्वुल् (थर) । जेिको बंद कर. विक्षिष्ट । (जब सन् नहिं होता तो) तेजते । वेजिय. नेकीपटातालाहरवाल. तितउ, (पु.) सामणी । चलनी. तालभ्यज, (पु.) तालचिहितः प्यगः यस्य । जिसके झंडे.] तितिक्षा, (स्त्री.) सिन् । क्षमा करना (माने सर्व रान्- पर तालका निशान बलभदबलराम. थराद ) मा ( मुआपी)। सरेसे कियेगये अपमान तालपत्र, (न.) तालस्य पत्रं स । मानो तालका पत्ता आदि सहारना । शीत (0). (गाँ) आदि कर्णभूषण । कानका जेबरसाईक । एक प्रभारवा मुवर्ण सहारना. निर्मित बानका भूषण. तितिच, (वि) A+सन् (ग)ीत लादि तालपन्त, (म.)ताले (करतले) पन्तं (धन) अस्य । सतरनेवाला । ऐसी जिसे कि जिसमें भोग बिजोग जिसका हापकी तलीपर बंधन होता है। "तालस्य इस नरो आय. सन्तं बसा" जिसका बंधन हालकी भाई हो।ध्यान तित्तिर-R, (पु.) राति समपसन्दी। पपणा (परा) "अपने अर्थम पन्" यही होता है. O+ (अ)साएक भरप की (परिदा)। तालय्य, (नि.) सायं भव+यत् । वामे संबंध रखने. डितिर । टीवर. बाला।-वर्ण. (पु.) बदसे उपारण किया गया अक्षर तिथि-पी. (पु.सी.) बदमपित्य.() तालाप (पु.) सालचिहिवः परः (प.) भस्म । पदमारी पन्दाकाराओके दिगबसे रोनेरा जिसके संपर तालमहोबलभदासदेव. आदि विधि।पदास्या.

भूग। पू. . अर्थमें. . वियर (अव्य०) यक । टेढा। निरुद्ध । काहुआ। पशु। तीक्ष्णकन्द, (पु.) तीक्ष्णः कन्दः (मूल) असा तिल, मेहविकना होना । उदा. पर• अक• अनिद। तीक्ष्णकमन्, (त्रि.) तीक्ष्णं कर्म यस्य । देशमा विट, (पु.) विल्म्क (थ) अपने नाम वृक्षातीदणगन्धा, (पु.) तीक्ष्ण: गन्धः यस्पा:जिसमे दो। हो ।वचारानिकारकंयारी। छोरी इलाची तिटक, (पु.) तिलान् (मर)। विलसन् (क)[तीक्ष्णतण्डला, (श्री.) दीक्ष्णाः तहला यश तिपिश्य, (११) तिथिक्षय, (पु.) लियोनो (नियुपलक्षितचन्दकलाना तिलकट, (म.) निटमा Ig क्षयः यस्मिन् । जिसमें चन्द्रमाकी करोगा एय-नारा होजाता है।दर्श (सूर्य और चन्दमारा मुंगम-मेठ) तिलकलक, (पु.) निलय : । दिलों का अमावास्या । ६ता।लिपिओका नाश. विध्याकाम तिथिपत्री, (पी.) तिथीना पनी । विपि (सारीक) बतिलकालक, (पु.) नि स कालः (न तानेवाली पत्री. निल नाई काला हो। शरीरसर मिलरेखमा तिथिप्रणी,(पु.)विधीन् प्रगयति (सगत्या निष्पादयति) एक प्रकारका रोग. प्राणी+किए । जो अपनी गति (चाल) से विधिओंको तिलतल, (न• ) निलय स्नेहः । तिनलन् ( बनाता है। चन्द्रमा. निटोंका पेह । तिलोरी विमनाई। " नियम तिम्, आदीभाव । गीला होना । भ्वा० पर• थक. सेट् । तेमति । अमीत, तिलधेनु, (श्री.) निलनिर्मिता धेनुः । तिलों तिमि, (पु.) तिम्कइन् (१) मत्स्य । मच्छी । समुद्र । धटे शरीरवाला समुदका मच्छ. गई गी। दान प्रामको (टने) के लिये तिन्नों में बर गो (धेनु). तिमिद्गिल, (पु.) तिमि (मत्स्य) गिरति । गृ-निगल तिलोत्तमा, (प्रो.) रत्नोंका तिल २ (टोटा २ टुडा) जाना सर मुम् च । एक प्रकारका मन्छ। जो तिमि बनाईगई एक समय (मगंकी वेश्या । कंजरी ) मच्छको भी निगल जाता है । वडामारी मच्छ. तिल्य, (न.) तिलाना मवनं (क्षेत्रम् )विल्यं यत् । तिमित, (नि.) तिम्+क (काम)। निश्चल (न हि- तेन. लनेवाला । कायम)। गीला. तिष्टह, (अन्य ) तिष्ठन्ति गावो यत्र । निवित्र तिमिर (न.) तिम्+किरम् (घर)। अंघकार (अंधेरा) गोएं सोनेके लिये ए टहरती है (एक पन्टा वारे। एक प्रकारका नेत्रोंका रोग (पीमारी). तिरस्कृत, (त्रि.) तिरस्कल । तिरस्त्यर किया हुआ। तिष्य, (पु.) तुष्यन्ति अस्मिन् । नुप्म्क्यप् (२) रात गये). वेइकात किया गया. तिरश्चीन, (त्रि.) तिर्यक्मस (अपने अर्थमें) (ईन) पुश्यनक्षत्र । कलियुग । "तिष्यनक्षत्र में उप" अय् टेढा हो गया। “गतं तिरस्थीनमन्सारथैः” इति मापः तिष्यफला, (ना.) तिथ्ये (कलियुगेऽपि) फक ला । पुष्य नक्षत्र में उत्पन्न हुआ (त्रि.). तिरस्, (अव्य.) अंतधान । छिपना। तिरस्कार विश्वदी) तिरछा । पक. ५ व. । कलियुगमें भी जिसका फल होता है। तिरस्करिणी, (स्त्री.) तिरस्म मिनि-नि । जवनिका तीक, यायन (मांगना)। भ्वा० आत्म• दिइ. की। आवटा थामटा. (पडदा) "विरस्करिण्यो जलदा भवन्ति" कुमारः. दीकते। अतीकिट. तिरस्कार, (पु.) तिरस्साघम् । अनादर । बेइजती । तीक्ष्ण, (न.) तिमन (दीर्घ हो गया) 15 झिडक. विरोधान, (न.) विरधामन्युट् (अन)। अन्तघांन । ठडाई । पिय । तेज । लोहा । शन्न (भौजार) छिपना. रहित और मोक्ष चाहनेवाला । योगी (पु... तिरोहित, (नि.) तिरस्या+क (त)। यन्तर्हित । तीक्ष्णकण्टक, (पु.) तीक्ष्णः कष्टकः अस्यादित टिपाहुआ। याच्छादित (टकाहुआ). काटा तेज हो। धतूरा । इहरीवृक्ष । और यांन. पक्षी । टेवा चलनेवाला (त्रि.). जड वेज हो । पलाण्ड । गंडा. तिलति. नेवाला । चालाक । उत्साही । दिठेर. टपकाएल. है - - या। विटा एक प्रकारच घोगा एक प्रकारका रोग। क्षेत्र यावल हों। पिप्पली । मय. . पादिदकः" इति मारम 44 तीरणधारः, (२५) । [. तीक्ष्णधारः, (पु.) तीपणा धारा यस्य । ता तेज पुश्य करना । (सबसे अधिक तापको पहिचानेवाले बहने धारवामा तरवार. हैं कि राम तीयों में बहुत या वीर्य तो मनरी विधि तीक्ष्णपुष्प, (पु.) तीक्ष्णं पुष्पं बस । जिसका सेज फूल पर्यात राहाई दै)। पृथिवीके तीर्थ (जिप प्रभार सरीरके हो । स्वा । लोग । फेतकी (स्त्री.), कईएक स्थान पहुत पवित्र होते हैं पैसेही पृथिवी के तीक्ष्णयुद्धिः, (नि.) तीक्ष्णा पुदिः यस्य । तीक्ष्ण (तेज) पाएक स्थान पुण्यतम अर्यात् बहुतही पुण्यको देनेहारे पुदि (बल) पाला । धनुर । पालाक. हैं जहाँ मान, ग्यान, पान होना पडेही शुभ भाग्यका तीरपरमिः, (पु.) सीणा समयः यस्य । र किरणों फल समझागया है। पृथिवीके अधिक प्रभार, जलके पाला । सूर्य. तेज, और मुनिओंके आश्रय लेनेमे दीयोंका सेवन तीक्ष्णरसः, (पु.) तीक्ष्ण रसः यस्य । वेज रसवाला । पुण्यके देनेहारा है । पवित्र पातोंके सिसानेद्वारा गुरु विषमय रस । कोईमी जहरीला रम । विष । जहर. " मया तीर्थादमिनयविद्या शिक्षिता "म.. तीक्ष्णशूफ, (पु.) धीः एकः समं यस । जिसके | तीर्थकर, (पु.) वीर्य ( हितशासनं आगम ) करोति । आगेगा भाग तेज हो । यस जी । जी. कृ+यक् (स)। हितको कहनेहारे शास्त्रका उपदेश तीक्ष्णायस, (न.) तीक्ष्णं भय +समा । तेज लोहा। करनेवाला । गीतम, कपिल, कणाद आदि । जैन । स्टील । लोहेकी फ्लम । एक प्रकारका लोहा. जैनोंका सन्त । “दीर्थकर"मी इसी अर्थ होताद. सीरणांगुर, (पु.) वीक्ष्या भराव यस्य । तीक्ष्ण (तेज-क. (तीर्थोदकं, (न.) तीर्थस्य उदकं । तीर्थका जाल । पवित्र जल. ठिन ) किरणोंवाला । सूर्य । अमि. तीर्थकमण्डलु, (पु. न.) तीर्थस्य कमण्ड । तीर्धके तीरणोपायः, (पु.) वीक्ष्ण उपायः । कठिन उपाय । जलसे भरा हुआ कमण्डल । संन्यासिओंका पात्र या पडा. तीक्ष्ण (तेज) गाधन. तीर्थकाक:-दाह-पायसः, (पु.) तीस काकः । ती. सीम्, मेदन । गीला करना । निगोना । दिवा• पर• अक. यंका कोमा । भर्यात बहुतही सोभी (लालची) पुरष. सेट् । तीम्यति । अटीभीत् तीर्थदेय, (पु.) तीर्पस देवः । तीर्थकी देता । शिप.. तीर, पारगति । पारजाना । तरजाना । काम समाप्त करना । | तीर्थयात्रा, (बी.) वीर्यस्य यात्रा । तीर्थी मात्रा (मफर), रा• उभ• भक० सेट् । तीरयति-ते। अतितीरत्-त. तीर्थराज, (पु.) तीर्थानी राजाक्टन् । दीर्थीका राम। तीर,(न.) ती+अव (प.)नदीमादिद्य तट (किनारा)। प्रयागराज. बाण । सीर । सीराक (लिफा) (पु.). | सीर्थ विधि, (पु.) वीर्यम्य विधिः । तीधर निवारा कर. तीर्ण, (नि.) + उत्तीर्ण । तैरगया। पारहुआ। ने नियम । तीर्थपर पारने योग्य रीत रमम. अमिभूत । पाया गया। भात (महायाहुआ). | तीर्थसेपिन्, (त्रि.) तीर्थ सेवते गिनि । तोयंडी मेवा तीर्थ, (न.) स्+यक् ()। शा। यह । क्षेत्र (इर. करनेवाला तीर्थयात्री. क्षेत्र आदि) उपाय । लीका रन (फूल)। नरी आदिमतीम्, स्मात्य । मोटा होना । भ्या• पर• अड. सेट् । उतरना । पाट । विद्या आदि गुणोंवाला पात्र । उपाध्याय तीवति । अतीवीत. (पाटा)।पदानेहारा । मन्त्री (सिकत्तरवीर) पानीका स्थान । पवित्र स्थान । यात्राका स्थान । योनि दिन तीम, (पु.) तीर (२) शिजी । लोहा । ति भोर तेग " न सहारा जानेदारा"। एन (नि.) भागम । निदान (आदिकारण)। भाग । एके पासम | गरम । विनहर मिनबूत. - सरोवर (तालाय) कोई पवित्र विषय (जो विशेषकर पिगी पवित्र नदी के तौरपर का पासही हो), "तुन | सीमवेदना, (ग) • असन्ती (दुनहरी मनो पति सीन रिम्" भनु । घरीर, मन मोर दर्द । बानना (पी). पूपिबीके पवित्र स्थान । (शरीरके अगुली के आगे देवतु, (अन्य ) किन्तु । रेरिन । पाद पूरण नदि । भालीओर मूलमै प्राजापत्य, अगूठे मोर बहलिक दीसमें भोर (भी पासपके पहिले नरें अना, परन्तु क्षेत्र और अगुटेके मूल में ग्राम तीर्थ है,)मनके तीर्थ मल, प्रायः पहिले पायो पीछे अनावही मोहिम । एमा, इन्दिओ निह (रोरना), गम जीवापर दया, तिशतभी। परमी और सबके शाप कोमठ रहना, दान, दम । (अपनेको पाव (पु.) पम् (ब)।त (पहा) ग- करना) सन्तोष (सबकरना) प्रमचारी होना बता दी रसा द्वारा नरयेल । और (मोतिर, हरेक तुहावी रक्षा करना, सीसे मटन मना) सरा विशेष भोंने पहिवानीगई मेपरिस) Grt- पचन बोलनातन (अपने भापमो जामा)। परिजरना। बला । जापान (fr) पन.. . 8 . म 4 | तुलसी, (श्री.) तुला सम्यति अम्+ यम् (म) संसारमें भार कोई वृक्ष नहिं । (नुटमी) अपने मामले पवरायादुमा भार रहाई घबराहटकी लडाई (न..तुला, (डी.) तुलाअ (अ)। माहस। बार। तुरगस्कन्ध, (पु.) नुप (समूहअर्थमें ) यन् | तुलापरीक्षा, (खी.) दुलया परीक्षा । ती तहमद, ( १३४) तुगभद्र, (पु.) बहा मस हाथी । दक्षिण देशमें मनामी नुरमयदन, (पु.) नुनम व वदनं अन्य । दिन एक नी (खी.). घोडेकी नाई मुग हो । बियर (एक प्रारी देवता ) तुच्छ, (न.) तुद् किम् (तुदा-व्यथया छपति सोक)। नुरङ्गारि, (पु.)त. काचीरा । महिए। चावलोंसे रहित धान्य । तोः । दुष । हीन । तुगमाह, (पु.) मुरा (येगं ) गहने । दुई ( वदनं निकम्मा । थोडा । सूना (त्रि.). था माहयते ( अभिभवति ) वा विप् अनन् । जो देश तुन, हिंसा । मारना । कनल करना । भ्वा० पर• मक. सहारनाहै अथवा जो वेगवाले दवा लेने है। इद। सेट् । तोजति । अतोजीत. देवताओं राजा. तुइ, द्विधाकरण । दो टुकडे करना । तोडना । भ्वा० तुरि-री,(धी.)। तुइन् वा हो । जुलाहेली टाई पर• सक० सेट् । तोहति । अतोरीत, पनाहुआ थुग्नेय साधन ( औजार). तुण्ड, (न०) तु+अन् (अ)। मुख । मं । चिहरा. | तुरीय, (त्रि.) चतुरमरण अर्थमें .तीय प्रयस हैट है। तुण्डिम-ल, (नि.) तुण्ड+म लच् या । बहुत पोल निपा । चौथा । चार हिस्सोंबाला । दिवाला । ( वेद नेवाला । वही नामि (घुनी ) वाला । "दुन्दिल" यही। नदर्शनमें ) आमाकी चौथी दशा जिसमें यह दार मोगडिया अर्थ, परमात्माके साथ एक हो जाता है । शुद्धबम बिलु तुत्य, स्तुति । सराहना । तारीफ करना । चुरा• टम० रोक. ब्रह्म । तीनोंसे पहिली दशवाला. सेट । नुत्थयति-ते. तुरीयवर्ण, (पु.) कम० । चाची चतुर्य जातिय मनुष्य। तुत्थ, (पु.) तुझ्या (म)। अनि (भाग)। एक शुदवर्ण. • प्रकारका अधन (मुरमा)(न०), तुरुक, (पु.) नुग्+सिक्-मायें कन्-यत्वम् । एक तुद्, व्यथन । पीडा पहुंचाना । तुदा० उम० सक• अनिट् । रका गंधवाला द्रव्य (शिलारस )। तुर्क टोग (बहुवचन नुदति-ते । अतौरसीत् । अनुत्त. तुर्य, (त्रि.) चतुणां पूरणः । त् । नि। चारोंचे। तुन्दकूपी, (घी)हवः कूपः कूपी । नन्दस्य कूपीव । मानों करनेवाटा। चौथा. पेटकी सूई है। नामी (धुनी)। (अपने अर्थ मन् | तुर्य, हिंस । कतलकरना । मारना । भ्वा० पर० स० । (क) "तुन्दकूपिका" यही अर्य. तुवति । मतूर्वीन् । तून. तुम्न, (पु.) मुद्रक (त)। (तुंद ) वृक्ष । पीटा पहुं. तुमु, (पु.) ययातिराजाका पुत्र. चाया गया । कटा गया (त्रि.). | तुल, टन्मान । तोलना । मापना । नुगः उमपड़े। तुम्नवाय, (पु.) तुनं छिन्नं वयति । वेअन् (म)। पर• सक• सेद। तोलयति-ते । तोटति । मलय जो फटेहुएको जोडता है। साँचिक । दर्जी । सूईका तुला शब्दमे निन् होकर "नुख्यति" बनता है. काम करनेवाला. | तुलनं, (न• ) गुल्मन्युट् । बोझा उमना । बराबरी. तुम्, हिंसा । मारना। कनटकरना । दिवा त्या-पर• सक. सेट । नुभ्यति । नुनाविन्धतोमीन. जो परावरीको फेंक देती है अयांत दिसके नुमुल्ल, (३.) तुस्मलक् (तुल ) कलिगम (ययहा) । एक क्ष. नुम्यरु, (पु.) पिस्च् (टा)। एक गंधवं । एक मान । माप । तकरी । एक यहा पात्र (वर्तन ) । सदर राशि । तोलने लडा. बंग । जाई जाना । उ॰ पर अक० सेट् । नुनोति । तुलाफकोटि-टी, (प्रा.) । नुख्या तुला वा कोटको भदोरीन, तापयति ) कुट् या टीप् । नपुर। मुरग, (पु.)रेण ( वेगेन ) गच्छति । गम्+४ (अ)। एक माप. जो यह और या टडी में जाता है। घोडा । चित्त । नुलायर, (त्रि.) तुलाया ( मानदहस्स) मन । दिल. पानेवाला । अन् (2)। वानिमा । (ध) घोडा समूह । ६६.घोडे कंधा. मुटेकी पहिचान. नुग्न, (५०) रेप गच्छति । गम्य मुन् वा । घोडा। मुलापुमप, (पु.) मोरह प्रकार के महादानाने । रित । "दगाम" महाभ होता है. तुलायष्टि, (बी.) नुठायाः यदि ॥ प्रकारका पात्रा. दुर लागा [सृणीकर, . में । . तुलासूत्र, (न.) नुल्ययाः सूत्रं । तकरीका लावा सून. सूर्ण, (न.) (स) । (तको न हो जाता है)। तुलित, (वि.) तुला+तलरोति णिच् (कर्मणि क) परि शीघ्र (जल्दी )। जल्दीवाला (त्रि.). लिन । मापागया। राशीकृत । बराबर कियागया. तूर्य, (म.) तुर। हिंसा । मारनास्पद (य) एक प्रसारमा तुल्य, (त्रि.) तुलया सेमितं यत् । सहशापरावर समान, बाजारी पाजा. तुल्यदर्शन, (त्रि.) दुन्य पश्यति सम्स्यु । परापर दे तूल, पूर्ण। पुरा• आत्म• सर० सेट् । तुलयते । रानेवाला. अनुलत. तुल्यपानं, (न.) तुल्यं पानम् ।।टे मिलकर पीना. सूल, (पु. न.) (तुल्+क)। एक प्रकारको कपास तुल्ययोगिता, (वी.) अर्थालं शरमा एक भेद. ( कपाह)। आकाश । तुंद नामका पक्ष (म.). तुपर, (पु.) तरति (हिनस्ति ) रोगान् । तु+प्वरन् पूलिका, (मो.) सून् अस्त्यर्थे ठन् (क)। साय्या निपा-जो रोगोंगे मारता है। एक प्रकारके धान। (छेज ) का साधन । ण्वुल् (क)। मूर्ति दिरानेय कपाय । कसैला साद । इसैले खादयात्म (त्रि.). साधन । तूली (न्य). सोप । प्रसर करना । रजाना । दिवा. पर• अक तूपर, (पु.) तुवर दीर्घध । वह गौ जिसके साग नहिं । मनिट् । सुप्पति । अनुपत, वह पुरुष जिसकी दाढी महिं निकली । कसैला रम. तुप, (पु.) तुक (8) । विभीतक वृक्ष (पहेग)। तूष्णीक, (नि.) तूष्णी । तूष्णी शीलं यस्य । शीलभमें धानकी साल। अपने नामका पदार्थ । भूसी. कन् (क) मलोप हो जाता है । चुप रहनेहारा. । तुप, (पु.) रम्पावटोका छिलका वा भूसी । तोह. तूप्णीम्, (भव्य.) मीन (चुपचाप ). तुपानल, (पु.) वपस्स अनलः । तोही आग । तोहरो | तूष्णींशील, (नि.) खूष्णीं शीलं भय । मौनावलम्पी । पंदाहुई भाग. सुप रहना जिसका खभाव है (पु.). नुपार, (पु.) पआररु (आर)। हिम (प.)। सूस्त, (न• ) वम्+तन्-पंथ । जटा। महनकेश। पडे. कर्पूर । कपूर । कापूर और शीत (पद) । उसवाला हुए पाल । धर । महीन. (नि.) सुण, भस-साना । तना• उम• सक. सेट् । तृणोति-त- नुषित, (पु.) दुप+कितन् (इत )। तोपआदि बारह वा गोति । तृणुतेस ते । तर्णिखा-राना उत्तीरा गणदेवता. तृण, (न.) तृट् न । भवा लोप होता है। नगर पास वगैरह । तिनका. बुष्टि (सी.) किन् (ति)। सन्तोष (सर) । भकृतार्थ ( जो करना था वह न किया) दशामें भी एणकाण्ड, (न.) तृणानो समूहः । गण्डच् ( का: )। ऐसी पुद्धि होना कि मैं इनार्य (जो करना था सो कर हणसमूह । तिनको देर पुयाई ) हो गया। सोख्यमें नौ प्रकारकी रही है. हणम, (पु.) खणजातीया धमाः । पार। तृणजातिरे तुद् वध । मारना । भ्वा• पर. सक. पेट् । सोहति । वृक्ष ( असार होनेसे) । नारिकेल नारियेल-नरेत) ताल। राजूर. भइत् । अतोहीद " तुहिन, (न.) हनम् (इन)। हिम । परफ। चन्द्र हणधान्य, (तृणे) व पाय । पार.। तिन भाई पान । ऐठी भूमिमें उपजता है कि जिसे वर्पण नई मारा तेज. कियागया । नीवार सा पावल. नुदिनांगु (पु.) दहिना अंशको यस्य । जिसकी किरणे गणराज,(पु.) गणेषु एगवे । रामन् (4)। परफ. हो । चन्दमा । बाद । “हिमांशु." इसी अर्थमें तिच्या। तालमा. होता है. हणशून्यं, (म.) हौस्य । तमों (जिनकों ने एन्य तूण, रोकोच । तिकोना । चुरा• उभ• रा. सेट् । हूण (रहित) । नाविध. । यति-ते । भणतू-त. |हणसिंह(३.) तपेषु सिदइन । जिनमें M. तूण, पूरण । भरना । पुरा• भाम• सर. सेत् । पूजयते । रहाल्ला. अददगतू-त. हाहय, (पु.) सानो मम् । नियम (ना) तूण-णी, (पु. श्री. )। तक। चाण (दीर) पर । धिनका मालि हणीरत्त, (वि.)पिनियनमा पसा दूीर, (पु.) पर्ण (को) पति (सावि) +। तय किया गया। डिरापर भर पस। मदर तररमा टीररपनेसा पात्र. मिश पया. । भाधारतिरक्ष.

पूरा करे, थी। और धातुका पदार्थ । (साख्यमें) म मुगाक्षय, (पु.) चाया (यमय) सयो यम्मान् । तैत्तिरीया, (स्त्री.) वितिरिभ्यः यधिगना (1) दीतरी (यालयमे गुपके साथ विवाद होत यमन कीगई विद्याको वैद्यमायनके शिष्याने टीए बनाकर महश किया यह पनिषत्री कपा) सेयर तृणीयग, तृणीकर, (न. )तृणनिर्मितं मोकः । तिनकोंका बना हुआ | तृह, दिग। माग्ना । नुदा• पर• गर• ये 1 घरमकान. भनहीं । अनुशन, पृण्य, (नि.) तृणानां गमूहः । य । तिनकों का ढेर. नृ, तरण । नरना लियन । हरना । असिमा । ६० तृतीय, (नि.) त्रयाणां पूरण । तृतीय । सम्प्रसारण । मा० पर• गर• गेट । तरी । मनागेत, तीनोंका पूरा करना । वह पदार्थ जो तीन संख्याको तेन्, निगान । देजकरना । पाटना । मा पर. सेट् । तेजति । अतेजी, तृतीया, (श्री.) चन्द्रमाके मण्डलकी तीनवटावाली पटवारी | तेजःफल, (पु.) तेजम्मर फलं यम्य । विपन तीसरी तिथि । तीज. तेगी की है। तेजवलाश. तृतीयाकृत, (नि.) तृतीयं कृतम् । तीरा कियागया। तेजस्, (न०) विज्+भमुन् । टम्य ( गरम) स तिगुना कियागया । तृतीय+ हात (त)। दीन अमिआदि द्रव्या (माध्यमें) शब्द और सर्शतमात्र चार खंचाहुआ क्षेत्र (सेत). स्पतन्मात्रामे उपहुआ भूत (आग) प्रकार तृतीयाप्रकृति, (सी.) त्रीपुंगो अपेक्ष्य तृतीया प्रकृतिः पराक्रम । वीर्य । मम्सन उपना घो। तराने (प्रकारः)। श्री और पुरुष न होकर तीसरा प्रकार । ज्योति । म्यं । शरीरको कान्ति । मोना आदि प- नपुंसक । क्लीव । नपुंसक लिक. द्रव्य । पित्त । अपमान आदिका न सहारना । सद्, अनादर । आदर न करना । स्था• उम• मा० सेट् । सामाविक वल (जोर)। चैतन्यम्बर परम प्रा तृणति । तृन्ते । अतीत्-अतृदन्. ब्रह्म । समयमें मवगुण. टन्ह, हिंसा । मारना । तुदा० पर० सक० सेट् । क्ता वेट् । तेजस्विनी, (मी.) तेजम्+विनि । तेजवानी तूंहति । अतुंहत. ज्योतिष्मती लतावेजरल. प्, प्रीणन । तृप्तहोना । रजना । दिवा. पर० स० वेट् । तेजीयस्, (त्रि.) तजम्विन् अनिशायने यमुनि । तृप्यति । अतपीत् । ताप्सी. टोप। तेजवाला । "देनीयमा न दोगाय को मई यथा" मागवतं. इन, (नि.) तृप्त्र । तृप्त हुआ। प्रसन्न हुआ. इप्ति, (स्त्री० ) तृप्+क्तिन् (A)। बहुत साजानेसे साने- तेजोमय, (नि.) तेजम्प्रचुराय मयट् । बहुत तेजा- की इच्छा न रहना । रजना । प्रसन्न होना. जिसमें प्रधान देज हो । ज्योतिर्मय । प्रकाशवरूपा वृष, प्रीणन । प्रसन्न होना। रजना । तुदा० पर• सक० सेद। तेजोमात्रा, (ना.) तेनमा (सत्वगुणाना) मात्रा (कम दीप । तेजोमयी वाकू" श्रुतिः. तृफति । यतीन्. (वि) फला, (खी.) प्रयाणां फलानां समाहारः। सन्वगुणोंका अंग । इन्द्रिय (भूनोंके साविक म इनकी उत्पति सांख्यमें बोकार की गई है या सम्प्रसारणम् । तीन फलोग इक्या होना । हरीती तेए, कांपना और गिरना । म्या आ० अ० सेट् ।। (हरी)। आमलकी (आवा) और अक्ष (बहेरा) अतपिट. वयस्यास्प तीन फल. प्, तृष्णा । चाहना । दिवाल पर० स० सेट् । तृप्पति । तमन, (न.) तिम् न्यु (अन ) । अादरण । | तेम, (पु.) तिम्-पम् (थ) आदीभाव । गीला होना किया थनृपत् । यतृपीन्. करना । कर्मणि ल्युट् । व्यसन । नाल्दा । भावी । तृप-पा, (टी.) तृप्+विप् 1 भागुरीके मनमें हलन्त होने के कारण पिकापसे टाप् (आ) होताहै। तृष्णा । जस, (न. ) तेजसः विकारः अण् । तेवका दिया बाद । कामदेवरी कन्या. तृपाम, (बी.) ६ तलोम । हृदयका एक स्थान । उत्पन्न हुआ भूत (त्रि.) यमनीला। दिल चाही जगह तृपिन, (त्रि.) तृपा जता अस्स । तार इनन् (इत)तिल(गट पशु । गापा । पाते रियामा। चाहवाला । तृणावाय. करण (न.). शिम लोभ नर होना । म ( वामनाचा सोडना)। . मनको ना. हमालु, (नि.) मृच्या याद या विभागा (तृपात)। या साटचा. पतुर्वेदी एक द्वारा । कृष्णयनः.

(स्वर 1 एक तोला. सिपि-म., (वि.) नतिरीया mrt ति et | तोयकाम, (नि.) तोयं कामले । जली इमागला. पानमा गिरीय पागाको पापा जा. पिभागात पिपाग. तोपत्रीमा, (पी.) तोयस्य मम । जडी फोडा (खेल). तमिरिक, (R.MAR ( मैत्रगौर) भनि अस+ सोयद(पु.) सोय ना। । पानी देनेगला ।' (न-स)शिवरनाम भोग रोगाला. बादल । मेमोषा । पारा । पो (1.). गपिंक (नि.) तीर्थ (दर्शनाच) भनेन+उक | सोयधि, (पु.) तोयानि धीरज । धाकि । जहाँ (1)निसालोपरा | पालो बनानेदारा पानी राये जाते हैं । रामु । समुंदर । "तोगनिधि." रपिल पादशादि. यही भ. तल. (न. ) निलम्य विकारः+मण । नित भरि सिने तोपनिधि, (.) सोयस्य निधिः । जलमा निधि (रा. सपारीरिकनाई तेल बहते हैं । र, सरगों और आना) समुद्र भली भारि मिग्य पदी प्रहप पिकार । तेल. तोयसूचक, (पु.) सोय ( तोयवर्ष ) सूचयति ( रवेण) तटकार, (पु.) न करोति । भए । सेल निकालने सून मुल (भक)। जो अपनी आवाजमे पानीके वर्ग- नेगे जलाता है । मेक । मेंडकामु. नलपिE (म.) ६. तेलको मैल। पल. तोपेश, (पु.) तोयस . । जलका खामी । वरुण तला. (पु.) CET माम (वठंग) 1 टक । देवता. तलंगदेशदे गाडी (दु.) तोरणा, (पु.म.) तुर युद् ( अन)। पाहिरका पर्वाजा । धेनेके कर रके समाको एक लकी । दजेके सदरला, (सी.) तलं पले बसा। जिगरे पल तेल होय निर (बहेग). बादिरय भाग । गर्दन (म.) सलम्पाता (पी.) निलस्य पान: अन । मनि• मुर। मोल, (पु.न.) तुल्#अन् । तोलक । एक प्रकारका या। जहां तिलोंमे बहुत काम या आताहै। पार। मार । पञ्णपति रकिवा (छिनानवे रत्तीका परिमाण) तरनिधिन (दलिया)(नि.). तोप, (पु.)नुपमा पन् । रान्तोष । सयर । तृप्ति । तटीन, (नि.)(न.) तिलाना भवनं क्षेत्र (ईन)। प्रसुचना । । मुशी. तिलौका खेन. तोपण, (नि.) तु+पर्नरि स्यु । प्रसन्न करनेवाला । मु. तैप, (पु.)लिप्यनक्षत्रयुका पापेमासी तेपी साऽस्मिन् मामे शारनेवाला। (न.) (भावे ल्युद) रान्तोष । प्रम- भए । पापमास । पोहा महीना । पोहो पूनों (मो.). मना । तृप्ति। तुमी. तोक, (म.) + अपस । गन्नान । पुष । बेटा सोपित, (नि.) नुस्+पितक । प्रगम लिया गया। तृप्त ली। दुहिता. तोटक, (न• ) दाराशरवादका छन् । पारद अक्षर तोपिन्, (मि) तुष्+निनि । समासके मन्तमें आता है। पारवाला एन्द. प्रसन्न होनेवाला । सम होनेवाला. तोर, अनादर । मेहनत करना । यापर• एक सेट् । तीय, (न.) ( मुरादौ ) पाये भा+अ (1)। सोडति । तुलो मुरज आरिवाशी भावाज. तोत्र, (न.) तुरटन् । गो मादिके ताइन करनेम सायिक, (न.) यः परिमाणे अस+इन् (क) बाजोंने दग्दा । सोचाबुक हामीके चलानेरा रं। आश. जानेगये तीन । मारना गाना मोर बजाना तीनो. तोदन, (न.) तुरतेऽनेन भ्युद (धन)। मुख । । “भावे | सालिक, (पु.) तूच्या जीवनी ठर (३५) जो। तूटी (मू- म्युद" न्यथा । पीडा।दर्द मलिराने में पूची (कलम) से जौतादै) चियार। तोमर, (पु.न.)विन् । तोर्गनो मियतेऽनेन । गृ+ मूर्ति उिसनेवाला । नारा अच् । एक प्रकारका मन्त्र ( रायवास)। एक प्रकारका त्यत, (त्रि.) ख+का छोरा गया. स्वकामि, (पु.)लजा अमिः येन । गाईपल तोय, (न.) विच । तवे (पूर्व) याति । या+फ । जो पूजारो प्रेग्नेवाल्य मानण । समिहोवरहित भएमाता। जल। पानी । पूषादा नक्षत्र (तारा) त्यन्, हानि। नुक्सान । छोहना भोर तोयकाम, (पु.) तोयं कामयते । कम्+ण । जो पानी सक• भनिन् । लजवि । मलाई । चाहना । जलवेतस । पानी बैत । पानी पाइनेवाला. स्वा(नि.) खमरि। छिया हुआ. मोहे दादा. :

[ARA रामल (गाम्पमें)प्रधान(सारे जगमग "प्रिमियत" गुण-गिनती काना (4) (ग)मय तमग full विनाविक,(पु.)विmrut: .. mintwill लागिन्, (२३८) त्यागिन्, (त्रि.) स+पिनुम् (इन ) । दाता । देनेवाला प्रास, (नि.) प्रस्माचे घम् । दरनेवाला । सरमा घर। (यहादर)। जनशील । जिमय स्वभाव खाग -गः (पु.)हर । भय. (रोक्ने ) है । कर्मके पलने छोडनेहारा. त्रि, (त्रि.) बहु• तृ+डि । चीनकी संख्यावाला । ति प्रक, गवि जाना । म्या. यामसक• सेदः । प्रते। निम्न थादेशः पाकिट निंश, (त्रि.) त्रिंशन्मपूरणे दद् (म)। देखने अप, नाशिरम करना । बा. सा• अरु पेट् । पाते। करनेवाला । तीमा. अत्रपिट । पत्रमा शिक, (प्रि०)त्रिंशता क्रोतः युन् (मक) टेर प्रपा, (बी.) अप्+माचे मन । लबा (शन) । अन् । संख्याकाले दम्यसे सरीरी गयी बनु । दीसार समिधारिणी (बदमाश मौरन ) । कुल । फोनि (यश) गई चीज. अपु, (न.) (अप्रिं दृष्ट्वा ) प्रात (सदते ) इल, लजया | त्रिक, (न. ) त्रयाणां सपा+कन (क) दोनों का एन वीमति वा । जो भागो देम शरम कताद। भयका पृष्टवंशके नीचेका भाग । पीठी सीके नीचे हैन टमा दल जाता है । सीसर (रांगा) टीन. कटिका भाग । त्रिफला ( हरी बहेना और अना) अपुरी, (सी.) प्रइट (टट) बी (ई)। मेरी विकट ( सोंट-मप-और मिरच)। मिटेहुए कान भी इटली. त्रिककुद्, (पु.) ग्रीति करतुन्यानि शानि अपुम्, (न.) Teी (म)। रोगा। टीन. (कादके अन्समा लोप हो जाता है)। टीन । अप, (२..) भावाः। प्रयोऽवपया ये समान जिसके तीनों सींग हैं । पिस्ट नामी पर पभर । दोनोग्र भग। या टीन भागमाला । तीनो | त्रिकाल, (न. ) त्रयाणां कालानां समाहारः। (भाग मनु । यी सी (है)। तीन ण्यन और वर्तमान) तीनों गमय । गवर दुपदर और पाय (वि.)। मेद यदि गाममेर (तीनों येद)। निफालश, (पु.) प्रिगलपतिपदायान् जाना । नागेमा शायिनी श्री । अप्ठी युधि. तीनों गमय के पदार्थीको जाहारा । ज्योति। पीनु. (3.) र दनु यस पर (तीनवेद) पर पुछ जाहारा. MEER | शिवका नाम (अपामय.). विष्ट (पु.) नाग कूटानि अम्य । निगडी तन है पीपर्म, (I.)प्रपा (पेपर येण) पिधीयमानी धर्मः । ये हों। संगाके पाग मुरेठ नामी पर्वत ( reatiप्राविद धर्म ।योरोमादितिको, (Nि० ) अय कोगा यम्य । तिमो तीन पपीमुग, (3.)ीर मुर्ग यम । दही निसा हो । सीन नोकोवाला पदार्थ । ( उयोगी) भुग.. नावो और पांच स्थान (न.) पोगन, (f.) प्राय इस च, श्यधिका दावा । विगत, (पु.) तीन । मुशमा नाम एका ईनबार मध्या दिग्दरको पूरा करने उस देशमोगा... (A) : दो तरह त्रिगुण, (नया गुणाना गमार. तर Kart.t() प्रयोद. पम्, भरारादिr. पर. अ. मेद। प्री- उरई। गणनामा गुगल गया (नि.)।तीनगे दियागया. प्रसा. (पू.) प्रमः (7) । सो मीटर त्रिगुणारत, (f.) वर्ण । दास र भरत मम ()। नीनगरला गया arrk. पाप धुरी विगुगामक ( ) यो गुण ( AT (2.). (.)(-mr. (Mr )at() uri जन (4.) are (cial treetin(4) समय में प्रो terire(a.. म.) मा. (Exi w * बुध - .

। निगेन)का (भुर, प्रेणेनि), (I.) श्रीगि नेपानि अम्म जिसकी तीन पिताक, (न.) नि: पाश । जहाँ मान्ने भास है। शिवजी हीन भागकाला, तीन मंडिये । अगीके माप होन रेगामान्य प्रतय,(न.) प्रमाणे अवयवाः, प्रयोऽवपदा येषां पा लगट ( मग मादा) दीन शोंके माय तय। तीनों का हिस्सहमा तीन हिरोदाला । तीनों । यमध्यमा मोर धनानियों और 4 तीन संपावाला (वि.). भगुडौओंको कार रटाना), (पु.) नावाने पर वेदण्ड(न.) प्रयाण दरानो समाहारः । तीन दण्डों- होकर बात करने के अवगरमें ऐगा ही पबन से का समूह । वचन, मन और शरीर के तीनों पहिचाना (अनान्तिक). गया सेन्यास पदयभाश्रम. त्रिपथगा, (श्री.) प्रमाण पयो गमहराया. वैन गरवि गमतीन माग.ग मेसा मे से प्रदण्डिन्, (नि.) रि धमि भार । इमि । है। गंगा । मगीरथी. जिसके पास तीन दिन, मन और शरीरके. दण्डको पारण करनेहारा । एक प्रकारका संन्यासी. त्रिपदी, (खी.) त्रय पसलमः (पातमा हिर होनेर अनन्तर पर हो गया) | Wint दा, (पु.)शियः ॥ येषो । जिगढी तीन (उ7. घेला एक प्रार। हमारी जना, होना मोर ग हो जाना)या हो पात जिनकी बंधनादीगोभधसंगर, मनुष्योगी माई (बाना, बदलना और पटने जाना ) पण विपर्ण, (पु. ) प्रीति नि भEER. नहि । देवता । ग्यधिकाखिरातार र परिमाणं एपो+ एक पत्तने तीन पनामा form. द (1) सेतीग देवता (१२ सूर्य और . बगु धादि). त्रिपाद्. (पु.) अस पार ITE 0. तीन परिyि "रोप विभूति कि. प्रेदशापिप, (पु.) देवतागोंगा पामी (मा. दस्पपरि" y गुला त्रिपिषत् (पु.)निशिस Infra प्रेदशायस (पु.)लिराणा दशाना, विवाना (देवा- जोतनो (दोनों THANA म)बा अध्यक्ष । तीनदा (जापा, सन और गुराप्ति पीता. औको देगनेहारा देवताओं को अपनी भाइसमें रसोदारा। त्रिपुर, (पु. ) म पुय पम्प । हीरात: सर्वसाधी गम देगनेद्वारा हा सर्व (परमामा)। विगु. कातली पण । मसिर (1)ikrit निदेशालय, (5.)त. निदान भालयः । दो. (लारी)imirmit(r.) लामो पानसर्ग. रिकी एकात्वि चिदिप, (पु.)भयो ऐन्यन्ति भर परेरम)। (ग) मा विष्णु और शितानी गहा का है । | निपुण, (A) ATHAR() wik तीन प्रकारमे जो प्रारदिवसापर्ग। की मीन red (mm)cre बापुरा (म.) तीर (Rtterferry for परेल.ekruireer विदिशा (पु.)। देवा । पर"हीदोरामा. त्रिपुर, (पु.) fasri Hiting त्रिदोष, (पु.) दोरा, तिर (d)"ATTEEN Fr परेलमार (रोग) से दोप। सभी तीन (1) समिको रसमा सोसर रोगशिपुराना 13.).rat. विधा, (अप.) किम (प)। होना। शिपुर(..) ने Ter निधामन्, (.)रि पनि एमा परि dir TET (T tric तीनों मामला hirink:.. गिपन (5.) परी । Intrge (s) Porn natuRATPUR)(.." रा. ।

Aristममम.411MANGAIN 4.4.4.1.... निर नजगहनादREE (२४.) विनुयन, (.) प्रसन मान्न मरः । तीनों प्रियेदिन, (पु.) पो थे परन सब ( मल). इन । मेरमा तीनो पारतर. मिनु. () । टने ? निरा (पु.)राजा र हर तरह तमाम 173"Tr" में मो त्रिशिग, (पु.)भिमा- बिगा..मी ()। हए तीन शिEAT IMA रसग । बिशत (न.)। तीन सिट it.): म मन । विगो त्रिशिरस, (पु.) प्रीति नि मा । dir( चिो पर पी. मिर है। एक सग । गर । मुगर । कुबेर Fre... मा.। विशीक, (म.) artin भन । भी की (१)। गिर (f.). ixmi: मन हो। विशूल, (न.) श्री ON (ग) जहां तीन किती मोरार irti) + HTr। निगनिन्, (पु.)शि नि म वाला । गिती मिपाग (IT). Fritr (:. ) Trt | पिन (पु. ) hr aft गण । तीन .. *fretait. IIत. (श्री.) । . वि-(a) ए. गु . एम. * Intract fTER4 विगण, (.) | मंगना नमा गानी ग । मीन गमा -4 14 : () गि-(1) पन, (10)गामा . मा). विश्रीनग, है I amritte Lan) fuी, (.) tant) . 2. 1.1.. . -1 *. . . . . . ...71 (., 416 Arg..... 22.4t ' ला. (२१) स्सिारक ता, (सी.) बीन इता-नि. दक्षिणाग्नि गार्हपल पाहत- त्य, (कार्य) कमजोर होना । भ्या. पर० सक० सेट् । नीय सोनो इकड़ी अनियें । सत्ययुगके पीछे भानेवाला स्वक्षति । भत्वक्षीत. हिन्दुओं युग। एटी रोलवा साधना । पासोंच उंचे होकर गिरना । जिस पास्से तीन अंक है। तीन बीडियो | त्य, सेपरण। किना। छिपाना । तुझ पर• सर० सेट् । स्वचति । अत्वाचीत्-अत्वचीत. ऊंच होकर गिरना । तीनों मिटेहुए. धा, (अध्य• ) त्रि+प्रकाराय धान् । तीन प्रकार । सीन | त्यच्चा, (खी. ) स्वच् +किप् पा टाप् । वल्कल । रा. लदी। जिला चमडाबाल गुडत्वच। दालचीनी. तरहसे । तीनभाग, , पालन । बचाना । भ्वा० आत्म• सका अनिट् । प्रायते। | स्पच, (न.) त्यच्यम् । चमहा । छिलका (पाल)। तेजपात । दालचीनी. गुणिक, (नि.) मिगुणार्थ प्रयच्छति । विगुणा होने के स्वचिसार, (पु. ) त्वचि सारोऽस्य ( सप्तमीका भडक लिये देता है। निगणं प्रहीतुं एकगुणं प्रयुरे । उक् । होता है)। जिसकी त्वचा सार हो । वंश । घाँस. जिगना लेने के लिये एकगुणा देता है । एकगुना देकर विगुना त्यत्, (वि.) तन्+किए । अन्को विकल्पसे तुक् होता लेनेवाला । तीन सरहा एक प्रकारका डा. है) और 1 दूसरा । (यह सर्वनाम है). गुण्य, (न.) प्रयाणां सत्वानां गुणानां समाहारः। तीनों | त्य, वेग । जल्दी करना । जोर करना । भ्या आत्म सका। (सत्व रज तम) गुण । “साथै प्यम्" (य)। तीनों सेट् । त्वरते । मत्वरिट. गुणों के कार्य पुष्परापरूप बाँके फलवाला संसार । स्वय, (बी.) वरम्बर । पेग । जोर । चाहे गये पदार्थको "गुष्पविषसा घेदा." इति पीता. पानेके लिये विलम्बका न सहारना "गिच्" । वरपति । ध, (न.) त्रिप्रकारे । तीन तरह. अत्वरत् । खरा. लोक्य, (न.) त्रयाणां लोकानां समाहारः । "सा | व्यरित, (न.) व। शीघ्र । जल्दी । बल्दीवाला प्यम् (य)"। तीनों (वर्ग मर्त्य पाताल) लोक. कोईभी (त्रि.). लोक्यविजया, (सी.) लोक्यं विजयते ( सेवते, परितोदित, (नि.) त्वरितं यथा तथा उदितं । वद्+ भाधीनं करोति) तीन लोकको जीतती दे (सेवन करनेसे का जल्दी बोल दियागया । शीघ्रोधारित. माधीन की है ) विजिअ ()। भगा। भोग. स्पष्ट, (पु.) खक्षतिच् । देवनाओं का शिल्पी (कारी. विध, (पु.) तिमो विद्याः समाहताः । तीनो विया ली. गर)। विश्वकर्मा । १२ आदिमिसे एक। नि। चित्रानक्षत्र. गई। ऋग् यजुः और सामवेदसा वीनो विद्याओंको जानना या पडता है। तीन येदोंको जानेहारा. स्यारक्ष, (त्रि.) तरस दर्शनं अस्प+यस । वो देरी यम्यक, (३.) प्रीणि अम्पकानि (नेत्राणि ) बस । नई दीसता है। तेरे समान । तेरे जैमा । स्वसासर. जिसकी तीन बारा है । शिवजी (वहीं भायमी | स्याष्ट्र, (पु.) रपत्यम् । विश्वकर्मा सन्तान । इस आदेश माना है इस लिये "त्रियम्बक" मी इसी पत्रागर । पत्रनामी आदित्य । संशा नामवाली की पत्री (दी.)। पित्रानपर. यम्पकसख, (पु.) त । महादेवका मित्र । त्यिप्-पा, (पी.) विभिए वा थर । मि । "पन् समा." पुधेर. प्रथा चमक। रोशनी. यहरपरी, (पु.) प्रयाणां महाँ (विपीना )ों यत्र-त्यिप, एप्ति । चमकना । भ्या. उम• • अनिट् । स्मिन् सौरदिने । सूर्यरा पह दिन कि जिसमें तीन विपति-ते । अस्विषत-अविश्न, निथिओंका भेठ है। तीन विपिओंगे इनहारा सूर-त्यिपांपति, (पु.)। भला उमास । हिरणोप जा एकदिन. (प्रमों) मलिड त्य, (त्रि.) अभ्यस्मिन् । भोर । भिन्न । जता (दर्भ) रसर, स्पति । पट जाना । भ्या• पर. स. से। स्सलिमसारीद स्थापत्र, (न.) स्वगिव पत्र अस। जिस पत्ता दिक- स्सर, (पु.) सामुहि। केकी माई हो। पुत्व । दाउचीनी । तेजगता । हींग तरबारमाबद. (बी.). सा.) हारन 1 अर्थ है). - 4.

- (4 )ीमुआterti । दक्षिणतर, (भच०) दक्षिणमा य, (5.) दु# (म) (पहाट)। परने दक्षिणपूर्या, (पी.) दक्षिणपोः सन्दरबार हमारहारीमाया. दक्षिन और पूर्वके पीसी दिशा । परि. पुर, मातिारन । किन । तर पर. अ. सेट् । दक्षिणमार्ग, (पु.) कर्म । मकान (ii दि। द. नेमारामाल निओके जानेमनेपाटा शुन्कार, (३.) परसदन मरः । पम् एक प्रकारका मार्ग (भार). (2) स्नेि पनि । निरनसग (ो दक्षिणसागर, (पु.) दगिस सागरः । -). ममुक. 4,(R) दो बजे मागासी माला | दक्षिणस्य, (पु.) मी । । और बेठना है। मारपि। रप यानेहर. द दक्षिणा, (सी.) दक्षिणमा (क) पनदेशतातिर बमको पूरी १. (3.)(ग) देना । दादर या+ देनेलासादर (पन) यी पोistant (E) (और) (पी.)। शासात प्रजापविन्या. (ग)(it). .(.) (R)ी मामी । दक्षिणाग्नि, (I.) मैं। यह ए मना मेर Priगोपन (4)। मम। पक्षिणायल, (.) दक्षित भया । गरम रंग मारना. पर्यत । मरमाचल. पर. (२) र (मन) । मासि दक्षिणाचार, (पु.). माने पर rrrrrrories" (शि). करे की दक्षिणार है,orat Mr, (..) (RArmमग तिरह पूजनना। एचचापागा. दक्षिणात् १. (भय.)दशिया treatre मेद । दक्षिणाय, (पु. ) . . 1 मा (14) Critी (नो दणि frmer देश । दिनी औरसर दक्षिणाभिमुग, (.) पश्यिय मनिपुण ।। सर, (:.) डा. भोर मुसीया. (0)NT (ft.). दक्षिणामूति, (I.).ratra रह:: arror rever... दक्षिणायन, (.) शिकणा भदन (बार kar. निगम नाब बिगगमरम। परनामस्वरमा matermerगावक्षिणायन, (t.) with rriar पुत्र rrangITH(.). tral. एलairtiमियमंत्र, (1.) (1) ful Tirrart दक्षिा(E.Smart र १ ( Hrie (tayatr remersity, (.jamanent wi" rr Risiretream Free Free Triratna.net" . . rice - ۲۱۶۲ ۱۳۶۰ (२४१) दिपिकनिका, - पद, (दण्डपातन-गनादेना) पुरा• उभ• राक• सेद् । दण्डाई, (नि.) दण्डस्य अहम् योग्यः । दण्ड (राजा) दण्डयनि-ते। अददण्डत्-त. देनेलायक. ण्ड (ना) +अन् (प)लगु (ठी): दण्डाहत, (न.) दण्डेन आहन्यते । साहना से पोमा पोण । रिसक्नेका डंडा (मपानी)। भौर सेना । चोट कियागया। तकाछ, साठ पलका समय । पृथिवीच एक माप । सूर्यका अनुयर दण्डिन्, (पु.) दण्डअस्ति अय नि । जिसके पास दंडा (मौर) (पु.)। "दण्ड भावे पश् । राजाओंग चौथा हो । यमराज । रामा। द्वारपाल (दान)। सूर्यके पास उपाय ।" दर्तरि अन् (अ)। यमराज. विचरनेहारा । जिनका भेद । चौथे भाश्रमवाला । दण्डी। ण्डका, (खी.)दपक बनमें जनस्थाननामका वन. संन्यासी । काव्यादर्शनाम साहित्यप्रन्यके रवनेहारा एक ण्डकारण्य, (न.) दण्डकनामी राजाका देश (शुकके कवि । दण्डवाला. मापसे वन बनगया)। अनस्थानका मन । एक तीर्थ. दण्ज्य, (त्रि.) दण्डयितुं योग्यः यत् । सजावार । दण्ड देने. ण्डधर-धार, (पु.) द धारयति । प+मिअन् । योग्य (लायक)। जुर्मानेके लायक. हवः अण् वा । दण्ड पाडनेहारा । यमराज । राजा। कु. दत्त, (त्रि.) दा+क । विसष्ट । दियागया ।छोड़ा गया। म्मकार । पसार । जिसके हायम रंदा है (त्रि.). और रखरखा गया । बारह प्रकारके पुर्मिसे एक (दत्तक)। ण्डनायक, (पु.)त.चार प्रकारकी सेनाका मा. एकप्रकार वैश्यकी उपाधि । और दत्तात्रेयनामी भगवानका लिक कोतवाल । सिपाही. एक अवतार "भापेक" दान देना और एकप्रकारका ण्डनीति, (बी.) दण्डो नीयते (बोच्यते ) यया । नी+ दान (न.)। "सार्थे कान् (क)" एकप्रकारका पुत्र । फिन् । जो दण्ड (सजा देना)को बोधन कता है । शुक- जिसे माता और पिता आपही देवे (पु.). मादिसे कहाहुआ नीतिशास्त्र । फौजदारीका कानून. दत्तामदानिक, (न.) दस बारदानं पुनः आदानं भारत यस्मिन्टन् (क) । अारह प्रकारके विवादों (अगों) ण्डपाणि, (पु.) दण्ड पाणणे यम्य । ...। जिसके मेंसे एक (जिसमें दीगई वस्तुको फिर लेलेते हैं। नार. हायमें दण्ड (सजा था दंग है) यमराज । बनारसके दने का व्यवहारका भेद. शिवजीका नाम. ण्डपायथ्य, (न• ) दण्डेन पारप्यं यत्र । जहाँ राजा दत्तात्मन्, (पु.) दत्त आत्मा येन । जिसने अपनेको खा पही देदिया है। एकप्रकारका पुत्र. सरदी है। बटारह प्रकारके विवादों (झगडा )मेंसे एक । दत्रिम, (नि.) दानेन निवृत्त । दात्रिवेन । दाननि राणाओंका एक प्रकारकप व्यसन (धुरी आदत). पत्त । देनेसे हुआ (बनगया)। जिसे माता पिता आप. ण्डयिधि, (पु.) दण्डस्य विधिः । दण्ट (राजा) नि तिका समय जान बापही देखें। दत्तक पुत्र (पु.). यम (कायदा). द, दान देना । धीरन करना । म्या• बा• पक सेट् । दण्डन्यूद, (पु.)(दण्डस म्यूहः-रचना। एक प्रकारसे ददते । अददिष्ट । दददे. सेनाको पंकिओंमें राम करना. दछ (पु.) दद। एसकारका रोग (दाद-धी)। दण्डशास्त्रं, (न.) दण्डविधायक शास्त्रम् । दण्डवा विधान कछुआ. करनेवाला धान । फौजदारी कानून. दगुम (पु.) हुं हन्ति । हन्ट । यो पो र दण्डाजिनं, (न.) दण्डः बजिनं पाट और मगरम. बना है। पामर्दक । दादमईन. दण्डासा, (सी.) दण्डम्य आशा । दम (राजा)ी भाला। दहण, (वि.) दई असि वर्षे न । दादी बीमारीवाला, राजाका हुक्म. पद, (पु.) दरिदा+उ (निपा.)। परीर पमन्य रोग दण्डादण्डि, (अव्य.) दय दण्डेय प्रहल इदं प्रातं युदं। कियाव्यतिहारे (जो एक किया कर्नाद उसे देस दूसरामी दच, देना। पारण डरनाम्या बारम- सक सेट् । पते । वैसाही करे ) इसमाः पूर्वपदरीधः । आपसमें दो | दधि, (न.) हन् (३) दही। एप्रशारण पर बोट के साप कीगई साईटमांगाघाटमबाटी. विचार । और पा(भा+) दिवं धरप रनेदाय दण्डाधिप, (पु.) दणस अधिपाद (स) सामी । गज बारिम । माजिस्ट्रेट. दभिर्विका, (बी.) पीके राय पसाबा दण्डानीफ, (म.)दमस भनी । सेन्यविभाग । फोरम मिशा (ना) मम प स हीराने बोर दिस्मा रीटेज सेना. - दाद। पदी. 1 बराबरत.

अमुरादेय. । दमित, (नि.) दम् कानि. दानशात शन्दको दम आदेश होता है), मिगुए। धेमर देती है। बाजो दानोंक दिये पूरी दम्म, (पु.)६म्म् च () Iair इन्दापट,(पु.)दनामष्टि ब बटन (पदिटेको दम्भोलि, (पु.)पोत (सेवा) RTHA - दघिसार,] दधिसार, (पु.) ६ त । दहीका सार । नवनीत । दन्त्य, (नि.) दन्ते (एन्तमूले था) मवः (कर)। मक्खन । मासन. तकी असे निकला । दांतोंसे निकले" दयदश्य दधीवि-च, (पु.) अयमुनिश मौरस (असली) पुत्र । ऋ यक्षर "दन्तेभ्यः हितः यत्" दांतोंके हिये दिद कर्दमप्रजापतिकी कन्यामें उपजा एक मुनि। त्र दैत्यको दांतोंका हित कहनेहारा. मारनेके लिये जिसकी हडिओटे देवताओंने वन बनाया था. दन्दसूक, (पु०) गहित दशति । दनाम पर दनु, (स्त्री०) कश्यपकी पत्नी (खो.) । दक्षप्रजापतिकी बुरी तरहसे हसता है । सरकनेहारा । सांग. कन्या। दानवमाता । राक्षसोंकी माता । देयोंकी माता. दनम्, दम्म । पाखण्ड करना । खा.पर. पर ऐद दनुज, (३०) दनोआयते । जन्+ड । दनुवै उपजता है। भ्रोति । अदम्मीत्. दर, दंशन । दसनाम्या. पर० सक अनिद ।। दन्त, (पु.) दम्तन् । पर्वपसाधन । चाबनेका साधन । अदाहीत, मुसमेंके दांत. दम्, प्रेरण । चलाना । मेजना । चुरा उम• B. दन्तक, (नि.) दन्ते प्रतिकित् । दांतों में समाहुआ । इदिन् । दम्भयति-ते । अददम्भत्-त. दांत साफ करके जीनेहारा । नागदन्त (स्टी)। पहाडसे | दम्र, (न०) दम्र । अल्प । योस । “बस्न रेढा बाहिर निकलाहुआ पत्थर (पु.). शम्य" इति मारविः. दन्तकाप्ट, (न.) दन्तधावनार्य काठ । दांत साफ करने | दम्, शान्ति करना । दण्ड (सभा) देना । रोकना ।। अक० सेट् । दाम्यति । अदमत् । पदमीत । दन्तच्द, (पु.) दन्दा: हायन्ते अनेन जिस्से दांत के जाते हैं। एशिप हसः । ओष्ट । होट । मोठ. दम, (पु.) दम्यम् । दण्ड (सजा)। बाहिर याँध प्यान करनेलायक विषयसे व्यतिरिक (उस) दन्तचायन, (पु.) दन्तान धावति (शोषयति धाव यसि निवर्तन (हटाना)। बाहिरी तिमोर स्यु (धन)। सदिर (सैर)का वृक्ष । और बकुछ । दा नेको दम कहते हैं"। विश्वर ( विगटने)by मुन । “मापे म्युद" दतिकी साई. कट होनेपरमी मनका (स्थिर) कायम रहना।। दन्तपरक, (न.) दन्त स शुभं पत्रं (दलं) अस्य । (खोटे) अमसे मनको हटाना । कीक । रोश दांतकी नई जिस सफेद पता हो । कुन्दपुष । कुन्द-) दमघोप, (पु.) शिपाता पिता । बन्द ताचपूल. दमयन्ती, (पी.) दम् निन् । नरामय । दन्तीजक, (पु.) दन्तयत् बीजानि यस । जिसके बीज (बी.) दमदोपरी सडकी । मदमरिया. (सी) नोंकी नाई हो । दाडिम । अनारका स. दन्तर (पु.)दन्तश्यानं व अन्य । जिसके मुसमें इन्दियोंकी वृत्तिोको रोक्नेदार जोमा उमर बरे दांत्र हो । यसका विरोधी एक राजा. शको सहारनेहारा. दन्तायात, (पु.) दन्तं बाहन्ति । यादन्यम् । नि-दमु (म्) नम् , (पु.) दम्टनसि-या गर्थः । अच। मूग मिस्तु । "मावे थम् । दातोंमे चोट सगाना दांत कायाय (दयोका राजा वा गुरु). दम्पती, (पु. दि.३०) या पपीय (T दन्तालिका (सी.) दन्नान् पति (मपी) तेभ्यो बालावन् । वा बुल् (पर)। ओदा (औरत साविन्द) बमान. धूर्तता । पाप अभिमान । गहर. tirनाही. माम मात्र RATE TEET मोपे तर दन्तिन, (.) र (२)ोकलारादी. मुदा बिगो गोत्र है. मदर टे। दाएं हर रमा (int . lega दिसक, . . एय, जाना। मारना देना और पालन करना।भा• भारम-पकिर, (पु.)ीव करः फणो यख । दोय कर्ण करोती सक० सेट् । परते । मदारिट. दा कडीके शमान जिसका फन है अथवा जो कडी- एया, (बी.)-भिदा भार। एस (कोशिश) सेमी ही माई फन बनाता है । "कस्अच्" सर्प । सप. दूसरेके दुसको र परनेके लिये इसका उपजना । मि-दर्श, (पु.) सते (माने) चन्द्रासमो यत्र । दगनी. +पम् (भ)। जहाँ चाँद और सूर्यका मेल होता है। दयाल, (नि.) य+आउन् । पायुक्ता दयावान रह अमावास्या तिथि । यज्ञविशेष । “दपूर्णमासाभ्यां मजेत" मादिल । "दवाररपि सण." र धुतिः । “भाये पम्" दर्शन । देराना । अच् । दयित, (पु.) यक । पति (सारिन्द)। पिसारा देसनेहाय (शि.). (त्रि.)ी (भारत) (ो.). दर्शक (पु.) दर्शयति राजाने आगतान् । जो आये हुमोको दर, (भर.) +अ । ईपत् । षोडा ।हर और गहा राशाका दर्शन करावे । दिसानहारा (नि.). (पु.न.) दरकण्ठिका, (प्रो.) दरः कः यस्याः । अपने अपने दर्शन, स्युट् (अन) । जिसे देख है । पास (नेत्र ) खन (गुपना ) । धुदि । धर्म । उपलब्धि । कन्। जिगर को २ (घोडा) कोटा हो । शतावरी, मलाहुआ (हासल) । शीशा । अमात्म (अपनाभाप)। - दरद्, (सी.) अदि । पदाडपर पानीका गिरना शनके उपाय न्याय आदि शान. (प्रपात) । भय । पर्वत । पाण । मोच्छवातिविशेष । दर्शनीय, (नि.) एअनीयर् । मनोहर । दिलपरांद । और हदस । दरद (पु.) सगजाति. देरानेलायक • दरिद्र, (पु.) दरिदा+अन् (आया और)। निर्धन । पनरहित (गरीय)ीन (सिया), दर्शयित, श्+णि तृय । रिसलानेहारा (नि.) द्वारपाल । दरिदा रेहाल होना । गरीब होना । अदा.प.अक. (दर्शन) हाजेपर भायेहुओंनो राजाका दर्शन कराता पद । परिमावि । मदारिमीत-अदरिदासीत. (पु.), । ६ई(I. ) हुनाति रो गन्द उरन् । भाषानो नो दल्, मेदन ! फाइना । तोडना । दलना । भ्या- १० रा. सेट् । दसति । भदालीत् । "Eि" दावयति-ने। 40- पानको दुःस देवे। बादल । मेडा (५)।एक प्रकारका दला-त. पाया। एक पहाड । एकाधारका मटीका पात्र । दक्षिण दल, (न.) दम । ऊंचाई । टुका । पानच्छर एक पर्वतका नाम निराकर संबंध मलमसे है । "सनाविष (मियान )। अपद्रव्य (सोट) । पत्ता बादल । समा- शिवस्माली मलयदईरी" रः। एक प्रकारके चावल, सका पत्ता आधा. प(पी.) दरिदास-fi• (NR)। रोगभेद । एक दलित, (त्रि.) दलका (फूलाहुआ-पिलाहुआ)। प्रकारकी बीमारी. तोडगया । आधा कियागया. दर्प, (पु.) हप-पम्-अप मा । महंधर । गपं । गर। दव, गति-जाना । मा. पर• राक मेट् । हन्ति । दन्वति । एकप्रकारचा हिरन । असारवाएल, अदावीत. पर्पक, (१०) दर्पयति । एमिच्+ग्युर् ( पक)। काम- दय, (5.) दुनोति । दु+अन् । वन । जंगल । मनकी बाग देव । भिमानको उपजनेदार (नि.). "भावे पर पताए । गरमी. 'दर्पण, (पु.) पन्यु (मन)। स परही देसने पर, (पु.) इन-उपताप । गरम होना । सपुम् । गर्मा । का आधार (आसरा) भादर्थ । पीता । एक अप्रतिर भंग आदि जलन. पहाडका नाम. दाग्नि, (पु.)स (पनस) अमिः। अंपल । दर्भ, (पु.) स्प् (गांटना) +धम् (अ) म बा। दावानल. "शा, काश, बल्बल, वीण रोमयाले (पेनट्वाले) पित, (नि.) अविशपेन हुन् । सरकार मौन और शाद"येदर्भ रहे जाते हैं। बारा भादिछ और गुण । बहुतए । यमुनू"वीयम् । यही वर्ष। निर्याप । दर्वि-वा(बी.) पिन ना की। मन (माल्दा) (दर, सति । समाना। मन । इराना । पुरा सम.ME. आदिको उठानेका साधन । देवीसे नाल्दा सीसे निका सेट। इरिए । यति । माग्छ । उम• "ar." लवे और देखते है।रासाये आदिवा शशी-पाचरन. पदार्थ । “सा पन्" इसी में । मोर गोविज्ञा-दशक(-) परिमा नपसन् । रस सता (येन). (पिन्दी) . प्रचारपारा, F .

. वायु,(बु.)मायु (म मरेगई। दशाट, (२४६) दशकण्ठ, (पु.) दश कंटाः यस । जिसके दश गले हैं | | दशविध, (त्रि.) दश विभाः प्रकाराः यन्त्र । साधा दशमुख। रावा. (तरह) का. दशाकर्म, (न.) दश कमांनि । दस प्रसरका संस्कार । | दशसहस्रं, (न.) दा सहस्राणि । दश हजार गांधान, पुंगयन, सीमन्तोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, दशहरा, (त्री०) दशविधानि दगजन्मातिानि च ते निम्फमण, यनप्राशन, चूहाकरण, उपनयन और विवाह, हाति। हाट । दश प्रकार का दस जन्मो दशत्, (पु.) दश परिमाणं अस्य अति । दसोंग समूह. पापोंडो दूर की है। गंगाके जन्म दिन । जेठ मनि दशधा, (अन्य ) राप्रकारे धान् । दस प्रकारका. गुमपक्षी दशमी. दशन्, (त्रि०) दश कनिन् । दस एक संख्या. दशा, (सी.) दम् यद् । निः । नटोर ।। दरान, (पु.) दइयवेऽनेन । जिस्से इसाजाता है। नि. हालत । दिवेशी वत्ती (वही)। "अपेक्षन्ते न बगर "नम लोप" दांत भिसर "करणे त्यु (सन)" पान दशान्तरम् । परोपकारनिरता मानदीस कवच (जिरह) । “माये ल्युट्" दंशन (डमना)। दांत इन्युटः । वभ्रान्त । आँचल (पटना) गर्मी यादिसे चोट गाना. यालकपन । जवानी । युद्धेप्या । काममे उपर्ग विदेशी दशनोच्छिय, (न.) दशनेन उच्छिष्टं यत्र । जहां टस- दसप्रकारकी हालत । योगिनी दशा. ज्या होता है। ओट (होठ ) यादिका घूमना. दशाकर्ष, (पु.) दशया (तलादिक) यापति । दशवट, (पु.) दर बलानि यस्य । जिसके दस बल है। से वेट आदिको सेंचता है। मामअन् । र युरमुनि। दान, चील, क्षमा, वीर्य, ध्यान, रहा, बल, आ। वनाचल । काटेका पटना (ऑवल). राय, प्रनिधि और मान ये दावल हैं. दशाधिपति, (पु.) दशाया अधिपतिः । दायर दरामुजा, (पी.) दश मुना यस्याः । दग मुगावाली सूर्य या अन्य प्रह. दुर्गा (देवी). दशान्त, (पु.) दवायाः यन्तः। पातीका पन्त (! दराम, (नि.) पणना पूरणः+टि-मद् । दधवां। जो दरा- | दशाणं, (पु.) दश ऋगानि (दुर्गनि अलानि गए वी संस्थाको पूरा करदे. जहाँ दस किले का पानी है । एक देशात शनिन्, (नि.) पल अनि । नबी कारकी (प्रो.). टमरवदा।बहुत मूा. दशा, (पु.) यदुराजारा देश । उम्र देशो। दशमी, (श्री.) पूरणी । दगीको पूरा करनेवाठी। दानी प्रियि । मध्ये सारी ऊमर । बहुत बूढी टमर । दशावतार (पु.) दश मीनादयोऽवतारा यम) कामदेव दमी अवस्था (मरणा). यादि जिम दस अवतार । विशु. दशमीम्य, (नि.) दाभ्यां यवस्था विति । स्था+क शाश्य, (पु.) या रपे यम्य । विमरे रखने (१) अहिररात हा । नाम्ने ठारी टमर. पो₹। यद । चाँद । चंद्रमा. मटा । गागादिगी मंगारके पक्षाने प्रीति टीटी दशाश्वमेधिक, (पु.) दश अममेघा E रोगविहीन (जोबत याद नहीं रण मचा). यत्रटन (1) जहां प्रमाने दए अपने रिएन टी टनको पहुंचगये अमित्रोंग बोटा. हैं।काधीनी में एक टीशिहै. दमूल, (२.) व मुनि यत्र । जहा दम रहें हैं।दशाद, (पु.) याना यहां समाहारः । मम । यापमन (मागो यत्रो परनेर)। प्रिय, दिन । “दाई गलकी मौत" इति पी. एक गरी, पटनागिरी, नि. दोन्धन, (पु.) दमा विपनं वा। एरंगेहातीधुर ये दम मूर हैं. मौका है। प्रा. पाय, (पु.) समुदिनुमतीयो दण । रिमन पदय, पाना हरना । दिवा. पर. रामवीरगम लि. दमदगन्मापान-भार, दसत, (५.) ६. एमचन्द (शायदा पुर) | दम्, दर्शन देनायुग अप' मंदादिदगा मगर, दरवरि,(२.) मर-म werin. मIRTrter - (२४.) [. -- . दर, (पु.) दारह गईभ । गया । अश्विनीयुमर दानर, (पु.) द ग phen (पि.) मश्विनीतारा. बगर । दा. दादाजरना या• पा० अनिद । दानि भारी, पानयारि, (३.)... fair पहन, (.) • (अन)।मि। भाग । चित्र- दमदार (..) रादिल । "भारे गुर" पाए । जलना (R) दानी, (पु.) (Fir ददर, (३.)रन् । मुषिक । (मूगा)। पाय. उहर मनुष्य कपिपलानेका पात्र (बर्तन)। म बादिक । दानशील, (नि.) दयरामा "दहरोऽस्मिन् अन्तरा":. पम पर पुरानेर दEANIN, (I.T.निदा दान (HI) पा, दान देना । शुहो• उम. क. गेट् । पारि दो। दापित, (दि.<ifrarerry रियापन INT दानाबारमा बदा. पर.क.मनिरासी। दामन, (बी...(Frtree पदार पोपदी ... दाहायणी, (बी.) पक्षण पाये श्री िim. दामाद हो । अभिनीमारितारा। सतीनानी विषमीरी पनी दामोदा, (पु.) ratn r.) "rrry (सी.). मारि"mmy दाक्षिणाय, (I.) दक्षिणम्यो विधि भवः । सकारागा. (s) are with al.mom (ए)को पक्षणदिशा हो । मारित । मरे। भानीhartertam दविपनी. Marrikrinak rrrrrren दारिण्य, (.) णस्य माय प्यम् भाग. बगत (पु.) को पाएमा "Art att":य (५) दाप,Pram.m.sirit शिक्षणानी चाहिये । कवि (पुरोहित). दाप, (3.) Pittharver. दी.(सी.) सम्म गोगा । पालिन पुषurrantirr kinnr गनिती माला (मा) KAITREE-(Rtwirit.. दान, (पु.) तर पक्षिनिमि. दारि(३)म, (वि.) राक्ष । ति । (म)...amir...) एमालस्य ! नारा "fectr" mAh भाग (5.) km nr k... विस्मिीम:"N. (reate । दाण, न देना ... ( रोनार (s.) Cer. - it.. .IN (७).ontestar. art ल, (। लिग (ree) १९९* (Termane maratee स( MR). {र(पु... to it... . पूर.(पु.) IMER(R 1) Inni Nutantr. पाप-Protor-tram राष, (.JP (derwelr re -1 . म. (..)२Rarane rint.(rrere दाम, - . दारसार,(न.) दास्यु सारं (श्रेट)। लकडियम यदासेर, (पु.)दागपरक् । ऊंट। “दा या पकाने के लिये टहरेहुए. ऐरावत आदि हानी।" (तीर) और वह्नि (याग)।“माक"KIR नाई ( देट) और रेग्न (2.)। "कमंदि- साभी।"भाव स्निगर नदिहोटर ( २४८) E दार, (न.) + । काट । लकड़ी। पीतल । और देवदार दाम, (पु.) + । अपने (दियार ) कारीगर । फाइनेहारा (त्रि.). धीवर । दानके लायकी उपाधि (f दारक, (पु.) कृपानीका सारथी (गादी चलानेहाग). अम्म अप्रादि । दाम या "। जिन अति दर दारुण, (पु.) दारयति चित्तं । हन्टरना+दनन् । चित्रा है। मृय और मेया। किसी रादरस और भयानक रस । दण्वना । दुःसह । मीपण । दासेय, (पु.) दाण्या सायंक (एस) भयका कारण (त्रि.). उपजा । दास । “दायम्य (धीररम्य) या धीपरटी गन्दान । व्यागी माता (सी.) अच्छी सकटी। चन्दन, दारसिता, (नी.) दारमयी निता (मधुरतान)कीकी (एव) दासीका बेटा । कन्+बर्षे. मिशरी (मीटी होनेसे)। दारचीनी । दालचीनी. दासेरक, (पु.) माल्या दैग । टम देशके होगा- दापंट, (न.) दारुवन् निश्चलदया यन्ति यत्र । यसक। दाद, (५०) दक्षपञ् । मम्मीकरण । जमना ।सार जहां लकडीकी नाई चुपचाप होकर घूमते हैं । चिन्तागृह । शरीर आदि तरना. सोचनेका घर । विचार करनेच घर । कचहरी. दाहक, (पु.) दम्पतुल् ()। Az दायाबाट, (न.) (पु.) दारूनि साहन्ति । हन्म्या वा चित्रा । जलानेवाला (नि.)"प्रिया " दाई टान्तादेशः । एक प्रकारका पक्षी ( काटटोरा). दिकर, (पु.)दिर कीयतेऽसी । कृपयर । दावी, (स्रो०) दृश्युम् गौ० टीप् । दियारकी की। फेवाय । तरूण । जवान । युवदी (श्री•). हल्दी। गोजिहा । दारुहरिदा. दिक्चत्रं, (न.) दिगं चकम् । दिशाओं मन्दा दाब, (पु.) दुनोति (दुस)। वन जंगलकी याग। मुंमार. "मारे पय्" तार (गरमी). दिषपति, (पु.)त. दिशाओं ईसर (रा दावाग्नि, (पु.) दावस (वनस्स) अमिः । वनकी बाग। "इन्द्रों पक्षिः पिविनश्चतो वदमो मस्त । कुरेर । पतयः पूछनामपीययः". दावानल ". दायिक, (नि.) देविकायां (नद्यां ) मवः । देविका दिगम्बर (पु.) दिङ् (गत्यं ) एव थन्दर यम् । जिसका कपटा है। शिवजी एक प्रारम बनाया शरीरके मा जिवना जीव मानाय । बनिन । दाय-म्, हिंछन मारना । सा. पर० सेट् । दामो(लो) नाम (नंगा) (पि.) कालिका (श्री.)। दर ति। अदाची(सी)र, कादेकी नाई ढाकने"।तम (अन्धकार-अरा)-- दाय, देना । पुरा• टम सक० सेट् । दाशयति-ते। यदि- दिग्गज, (पु.) 41.1 पूर्व आदि दिवाने की दासत्व. दाश-स, (पु.) दशति मन्यान् । दनु पञ्। नि.। पुदीको वामनः कुमुदोऽधनः । पुषदन्तः जो मसिनाको दमता है (परदता है) "दास्यते मूत्यं मुपतिकश्च दिग्गजाः". अम्मै । दाम्पम् वा” जिम मोर दिया जाताहै । दाग दिग्ध, (पु.) दिम विष जहर से लिपटाका (नॉकर) । माटओर जानेकाला धीवर । मछी पकनेहाण, दातारय, (पु.) दशरथस्य मयं भम् । जो दसरया हो । "दिवाआ" (त्रि.). श्रीरामचन्द्र । “पीपा दायरपाय मयिटी" नाटक. दिनाग, (पु.)दि नागः दाता दाशरथि, (.) सरयण य+यत हुन् । दशरय. (पी)। दिग्गज, पसी सन्तान । श्रीराम, दमन, मरन, बुन. दिग्विजय, (पु.) शिं वित्रयः प..। दासाई (पु.)द (नं) यांना बरंथ । जो उय (जीत)। संसारका विजय. मागे मःमरवा" - दिव्यान, (न.)दिलो मात्रा मंशः। बने टास । विगु । दाई देशमें जमा (नि.). ६.योडागा (नि.). दास, नाम टम. सह. गेट्दा माटी दिति-टी, (श्री.) दोबारा निन् । देशमा मदिर ६ नही हुआ. . -- इन कोग्य एकाको ज,] (४) सरा सावित तेज, (पु.) रितेजायने । जन्+ (ब)। दिशी दिव, (सी.) दिवापि । वर्ग (बदित) । सकारा। उपजा । अमुर । देस्य । “हिनिमुन" यही अर्थ, आम्मान. सा, (वी.) दासन बत् । देने की इजा. दिय, (न.) दिवसायगा। दिनान । जंगल. तु. (त्रि.)दा सन् उ । देनेशी इस परनेवाला. दियस, (पु.) यान्ति पत्र । अगन् । नि । रोज, घे (प), (I.) दिपिएं भारमन इतिच् किम् । दिघममुग्य, (R.) ६ त.। दिनका मुन (x)" पाहखः। दूसरी बार विवाही गई धीग मामी । प्रमाता सवेर. दियसविगम, (पु.) दिवगम्म विगम-प.निन ध, (बी.) विधि धियं सति । सो छ वा पतम् । जो चला जाना । सायं । सशस्यांग. धीरजो तोदे। हिस्टा । दोवार विवाहीहुई भारत । दिपस्पति, (पु.) ६० अनुर राना (T मन) भी भगिनी (बहिन भन ) के न होते छोरीका विवाह । पगडा पति इद । देवनाओस राजा. "ज्येष्ठायो भनूदायो पल्या ऊवायां कनिष्टमागिन्या ". दिपथिधी, (श्री.) 8. दिवग पपिसी । R. धिपति, (पु.) • I भाईके मरगनैपर जो मुन् । स्वर्ग और पृयित्री । मिटाए पषि और गर्ग। उराफीलीम विषयभोगही इच्छामे या धर्म से अनुरक जमीन-आम्मान. होता है। सरी बार विवाहीगई धोरा पनि । विधवाका दिया, (अन्य ) पिकाविण । दिन मेरा पति । बडीके भरियाहे जानेपर विवाहीगई छोटी महिनका दिपावर, (पु.) या दो। दिनराता है ।। पति से (देका) का गम. आरग पूल, पीप, (बी.) +मन्+४ । धारण करनेकी हग दियाकीर्ति, (पु.) सिंध frier गिराम आश्रय देनेकी इच्छा. दिनहीके रामर ( राम) न, (पु.) पनि तमः । जो मधेरेको काटता है। पूर्यको मापित । मामाभा. परोसे पहिचाना गया (.) गाठ पडी वा पार दिखाटन, (पु.) या भसी । दिनमा मत पहिरा समय दिन रोज. (रातको धा होजना) नकर, (पु.) नि करोति मोदपेन । +य । गोदियातन, (वि.) दिवा भा र IRRE अपने उत्पसे निकोबनाता है।एवं पुरज. होनहारा मिटर नक्षय, (I.) जिग दिन तीन थिय दो भागीय दियानिशम् (ne. ) format दिनका मारा. दिन औरत नपति, (३०) ..नका परिपूर्य । भार दियाध, (पु.) रा (1) Are (A) नमणि, (पु.) ने ममिः । (प्रास पर) निके गमय मानो मणि पमा रही है। पूर्व भारत. जो दिनमें अपारोt Aror प्रपिन "पदी नमुखम् (२.) दिमस मुराम् । दिनमा भुरा । प्रात सालारप. दिवाभीत, (पु.)te (IN) नपायनम् (१०) रिमस्य यौवनम् । दिनये जवानी । गा।"EriaNP दिनमभ्य । दुपहिर मादि, (५०) १४. दिनका परम्भ (E)। प्र-दिशामभ्यम् , ( . ) nिtarika सालासरे। शुगर मम्मदिन. नाम्त, (.) (निबन्ध । सिधा | दिपागम (NR) Refore सानार्यसमश. भ, मरण पलाना । इरा. . . मेद ।। दिपावसानम्, (. kr ranfre दिम्भसीनेभिस. टीप, (I.) [ मेरमणिय (kritten होगाभा.प.सर. सेरा हम्मानित दिन() (A) म । नगलनमा-ATian. दरवार- प-Arr..(A) दिधिर( strement सर. सेतोRecr.

- कपडेकी नाई ढाकने"। तमः (अन्यकार-अय) कि दिग्गज,(पु.) ६ता। पूर्व यादि विशान होना पकाने के लिये दोहुए ऐरावत आदि हावी । पुण्डरीको वामनः नदोऽधनः । पुभदन्तः (वीर) और वद्रि (बाग) “मावे कहा नाई(तेल) और रेग्न (न.)। "कर्मति कायसी खी।"भावे फिन और नहिं होता र (३४) धार, (न.)+Tी। पी। और दोहराम, (पु.) TIR ar (दिपार ) कारीगर । फाइनैदाग (नि.). धारा mirtantritth दारक, (पु.) शालीका मारपी (गदी नानेडाग). अम माग" IEEE दारण, (पु.) पारयति नितं। हरनाधिनन् । मित्रा है। Prim". संदरम और भयानक ग । डरावना । मह । मी दासेय, (पु.) A rinsim भयका कारण (वि.). जाना"(m) mins दायसार, (न.) दारा सार (ठ) मिडिया पर पीरती मनानगी.) अच्छी हकी। चन्दन. दासेर, (I.)गा। कंट। "दन्या in दालसिना, (श्री.) पारमयी ना (मारतात.) साडी (ए)ी मेटा नग. मशरी (मीठी होनेसे)।दारचीनी । दालचीनी. दासेरक, (I.) मला सग गरे गए। धापंट, (न.) दासत् निधनया घटन्ति अन । बवाद,(पु.) पम् । मम्मीरणारा पहा लकीकी नाई चुपकर दोर घुमते हैं । चिन्ताह । शरीर रियामाना. सोचनेका घर । रिचार करने पर । करहरी, दाहक, (पु.) दह+गुन (पर)। Eि RATE दावाघाट, (न.) (पु.) दापनि साहन्ति । हनम्या या Far | जानेगला (त्रि.) "प्रियां" ददिर. टान्तादेशः । एक प्रकारका परी (काटटोकरा). दिर, (पु.) कीयतेगी । ALI जो दार्थी, (पी.) मुम् गोही । दियारती एकरी । फंसनाय । रग । गगन । युादी (स्त्री.) हल्दी । गोजिद्धा । दारदरिदा. दिश्ची, (न.) दिशा चक्रम् । दिशाओं मन्ना दाव, (पु.) दुनोति (T+T)।यन । जंगलकी भाग। मंगार. "भावे पय्" ताप (गरमी). दिपति, (पु.)त. दिशाओं ईशा (मा दावाग्नि, (पु.) दावस्स (वनस्स) अग्निः । वनधी भाग। "इन्दो यहि स्पिनिकतो वायो मरन् । इदर है "दावानल ". पनयः पूर्वाशनामधीमराः". दाविक, (त्रि०) देविकायां (नया) मरः । देविका दिगम्यर, (पु.) दिल (सत्यं ) व अन्वर या जिसका है। शिवजी एक सरदार शरीरके मात्र जितना जीव मानहाय । बदाने दाय-म्, हिंछन मारना । सा० पर• सैट् । दामोसो) नाम (नंगा) (पि.) गठिया (ना.) टी। " ति। सदाशी(सी), दाशदेना। चुरा टम. सक० सेट् । दाशयति-ते । अदि. दाश्तू-त. दाश-म, (पु.) दशति मत्स्यान् । दनाप । नि.। जो मटिओंको टसता है ( पकडता है) "दास्यते मन्ये मुप्रतिकश्च दिग्गजाः". अम्मै । दाम्पम् वा” जिसे मोल दिया जाताहै । दाम दिग्ध, (पु.) दिदमक । विष (जहर है छिपहु (नाकर) । मच्छिओंपर जीवाला धीवर । मच्छी पकनारा. दाशरय, (पु.)दारपस्य अयं भम् । जो दवरयम हो। "टिवद्वाना" (वि.). श्रीरामचन्द्र । "प्रीयता दायरमाय मयिटी, नाटक. दिग्नाग, (पु.)दिय नागः पतन दशाओं दातारथि, (पु.) दसरयम्य पाय+मन हम् । दसरथ, (हामी) दिग्गज राजाकी सन्तान श्रीराम, दमण, मत, नुन. दिग्विजय, (पु.) दिशं वित्रयः पाता। दाशाह (पु.)दा (दान) अति । यई अन् । जो विजय (जीत)। संसारका विजय. दानके योग्य है। “चाईवो भवः भग्मा" दवाई- दिखात्र, (न.) दिशो मात्रा मंग्रः । एक देश ।। वंशमें उपजा । विगु । दयाई देशमें जन्मा (त्रि.). ६३० चोटासा (नि.). दास, देना । भ्वा० टम राइक रेट् दारावि मदासीन दिति-ही, (सी.) कोयामी । जिन् । देवी यारिट. गरी हुवा. । । घin (२४९) [दिविषद धास्मान. - ज, (पु.) आयते । जन (4)। शिति | दिव, (सी.) दिव्+दिपि । सर्ग ( यहित ) । आकाश । पजा । असुर । दीप । “मिनिमुत" यही अर्थ, ना, (बी.) दारान+थर । देनेरी चा. दिय, (म• ) दिवसका वर्ग । क्षाकाश । दिन । मन । जंगल, नु, (वि.) दा+सन्+3 । देनेकी पन करनेवाला, दिवस, (पु.) यन्ति पत्र । हो असन् । दिन । रोज. (पू), (पु.) दिधिधू आत्मन इति कच् शिप् । दिघसमुख, (२०) त.। दिनका मुख (गुरू)। • वा हसः। एमरी बार विवाही गई लोग सामी। प्रभात । सवेर. नगारा साविंद. | दिवसविगम, (पु.) दिवमस्य विगमः-प० त० । दिनय य, (बी.) विधि धर्य स्वति । सो ऊ या पलम् । जो चला जाना । सायं । सांस । सूर्यास्व. रजो तोडदे । दिदा । दोवार विदाहीहुई भौरत । दियस्पति, (पु.)त. ! अलक् समा० (सका भागम) मै भगिनी (पहिन-भैन ) के न होते छोटीका विवाह । स्वर्गधपति । इन्द्र । देवताओंका राजा. ज्येष्ठायां मन्दायो सत्ला अदायर्या कनिष्टभगिन्यां च". दियस्पृधियी, (घी) दि.। दिवस् र पृथिवी च । नि. पूपति, (पु.) ६त• । माईके मरजानेपर जो मुन् । वर्ग और पृथिवी। मिटेहुए पृथिवी और स्वर्ग । इसकी सीमें विषयभोगकी इच्छासे किंवा धर्मसे अनुरफ जमीन-आस्मान. होता है। दूसरी बार विवाहीगई नोका पति । विधवाका दिवा, (अन्य ) दिव-शा । दिवस । दिन । रोज. ति । के न विवाहे जानेपर विवाहीगई छोटी महिनका | दिवाकर, (पु.) दिवा करोति । दिन करता है। सूर्य । ति। (देगा) का ससम. काभारिजरा फूल. पा, (बी.) r+सन्+ । धारण करनेकी हथा। दियाफीति, (• ) दिवव कीर्ति कृत्यं यस्य । जिसका काम पायय देनेकी इच्छा. दिनहीके समयमें है ( रातको हनामतका करना मने है) (पु.)धति तमः । जो अंधेरेको काटता है। सूर्यकी नापित । नाई। नोभा. करणोंसे पहिचाना गया (.) गाठ घही या चार दियाटन, (पु.) दिवा अटति । दिनके समय घूमता हे हिरका समय । दिन । रोज. (रातको मधा होजाता है) कौआ, बकर, (पु. ) दिनं करोति सोदयेन । रक् । जो दियातन, (नि.) दिवा भवटपु-ट्न् । स्विाभव । दिन में अपने उदय दिनको बनाना है। सूर्य । सूरज. होनेहाए । त्रिया पी. सय, (I.) जिम नि चीन निषि को भागीय । | दियानिशम्, (अब.) दिया च निशा च तयोः समाहारः । देनका नारा. दिन और रात. अपति, (.). दिनका पति सूर्य । पास सदिपान्ध, (.) दिया (दिने ) अधः (देस न मरनेसे) बमणि, (पु.)रिने मधिः इव (प्रश्या परनेसे )दिनके जो दिनमें अंधा होता । सामू आदि । "किन्धाः डामय मानो मणि चमक रही है। सूर्य । भाका स. प्रागिनः केचित्" धन्दी. मुखम्, (.) दिनस्य मुखम् । रिना भुरा । प्रात.. काल । सवेरा, दियाभीत, (पु.) दिवा (दिवसे) मीतः। दिन के समय वायनम्, (म.) निम्य यौवनम् । दिनये जवानी । दराहुआ। होर। चांद । उ । “दिपामीतमिवान्धकारम्" इति पुमार देनमध्य । दुपहिर. बादि, (पु.)त.दिनका प्रारम्म (16) प्रात:- दियामध्यम्, (न.)मिवादिनस मध्यम् । दिनहरा मध्य । कालसर गुणह. मध्यदिन. नान्त, (पु.) १. दिनका बन्द । दिवसा सव. दियागत्रम् (मध्य) दिशा र प्रिय तयोः समदारः । दिन और रात. सान । सार्यपालधाम सोस. २, प्रेरण। चलाना । पुरा• हम सब मेद हरित दियायसानम्, (.) मिनिस भासनं । दिन दिम्भयति-ते।मदिदिम्भव-त. अन्त (आलिर) सायं सर. हीप, (पु.) सूर्यवंशम होनेवाट्य एक राजा । न पिता दियाराय, (त्रि.)मिया सीमा को दिन मा श्रीम। प्रमभ होना । मा. परसर.सेटाइदिन। गोर दिम्पति दिन्वीत. दियिम, (I.) दिवि जास्ते (ज) भउ म.. जीत चाइना-शन लगाना-स्याहार-र-अलामेरना सगारिधिभर. अतिपरना-शहोना-चमकना । दिवा- पर.क. (और) दिपिपद् (पु.) सिताप-पदम् ।समें एने. सर सेट् । त्यति । अदेवीत् । देविसा । पूला. देखता. पप.१२ कश्यपीधी। "माव चिन्-डीप नहि होटा र दार, दिगम्यर, (पु.)दि (सत्यं) एव सम्वरं यथा करहेकी नाईटाकनेने"। तमः (अन्धकार-मोग) पटने के लिये टदरेहुए ऐरावत आदि हाथी । “ पुण्डरीको वामनः कुमुदोजनः । पुष्पदन्तः साल अम्मै । दाग+यम् वा” जिसे मोल दिया जाताहै । दारा दिग्ध, (पु.) दिका विष (जहर से लिपटादुकार (तीर) और वहि (आग)। "मावेक"हार नाई (तेल) और लेपन (न.)। "कर्मति में | दिग्विजय, (पु.) दिशां विजयः प.. दानके योग्य है। "दगवशे मकः अश्या" दशाई- दिमात्र, (न.) दिशो मात्रा संशः । एक देवा दार, देना । भ्वा टम, सह रोट् दायविन्ते। मरासीन दिति-ठी, (स्त्री.) दोवा बीए ।सिन् । दलात (२४८) दाम, (न.) +3 । बाट । लकडी । पीतल । और दो दाम, (पु.) TIRI मान- (दियार ) कारीगर । फाइनेहारा (त्रि.), धीर । दानके यहाशाखाका दागक, (I.) कृष्णजीका सारथी (गारी चलानेहाग). थम्म सानादि । दाग+म"Iftar दारुण, (पु.) दारयति चितं । -दरना+नन् । चित्रा है। मामेव । ""मी. संदरम भोर मयानक रण । डरावना । दुःमह । मीपण। दासेय, (पु.) या मागं र (ग) भयका कारण (त्रि.). उपना । गा"पागम (पीपरम्म)मा दारासार, (न.) दाणु सार (श्रेष्ठं) सिमीयो पहुन घीपरती गन्नान । व्यागी माला (पी.) अच्छी लकटी । चन्दन. दासेर, (.) दाग+पर । केट"दाम्या प्रकार दारसिता, (स्त्री.) दारमयी शिना (मारतात ) कसीकी (एक)पाधीश पेटा । कन्मा. मिशरी (मीठी होनेसे) । दारचीनी । दालचीनी. दासेरफ(पु.) मालया देश । उग देश लोग गु. दाट, (न.) दास्यत् निधनमा घटन्ति अन । अदा दाद,(५.) दयम् । मम्मीरण । प्रजाना जहां लकडीकी नाई चुपवार होकर घूमते हैं । चिन्तागृह । रीर आदिका ताना. सोचनेका घर । विचार करनेका घर । करहरी. दाहक, (पु.) दग्गुल (थर)। विकार दार्याघाट, (न.) (पु.) दापि आइन्ति । हन् अश्या चित्रा । जलानेगाला (नि.)"त्रियां" दहिर. टान्तादेशः । एक प्रकारका पक्षी ( काटटोकरा). दिकर, (पु.)दिसु कीर्यवे:मी । । जो दे दार्थी, (सी.) दृक्शुण गो० टीए । दियारकी एकदी । फेंग्रजाय । तण । जान । युग्दी (सी.). हल्दी । गोजिहा । दारुहरिदा. दिश्चक्र, (न.) दिशा चन् । दिशाओंन समूह दाव, (पु.) दुनोति (दुण)।यन । जंगलकी याग। संसार. "भावे घम्" ताप (गरमी). दिषपति, (पु.)त. दिशाओं ईसा दावाग्नि, (पु.) दावस्य (वनस्स) अग्निः । वनकी आग। "इन्दो पतिः पितृपतिनैश्चतो वरुणो मस्त । कुबेर पतयः पूर्वादीनामधीवराः". दाविक, (नि.) देविकायां ( नद्यां भवः । देविका जिसकपडा है। शिवजी एक प्रारय बौद्धन्दा शरीरके माप जितना जीव मानहारा । बासनने । दाथ-स, हिसन मारना । सा० पर० सेट् । दाभो(मो) नम (नंगा) (नि.) कालिका (मी.) हो । ति । यदाशी(सी)न्, दा, देना । पुरा. उम० सक० सेट् । दाशयति-ते। यदि- दिग्गज, (त। पूर्व आदि दिशाओंने प्रति दारातू-त. दारा-स, (पु.) दशति मत्स्यान् । दश पन् । निः । जो मच्छिओंको टसता है ( पकडता है) "दासते मूल्य मुमतिकश्च दिग्गजाः". (नौकर) । मच्छिोंपर जीनेवाला धीवर । मच्छी पकडनैहारा. दाशरथ, (पु.)दारयस्थ अयं अश् । जो दारपणा हो। "लिवाहुआ" (त्रि.). श्रीरामचन्द्र । "प्रीयतां दायरथाय मैथिली" नाटकं. दिग्नाग, (पु.) दिशा नागः ५० वा । दिशाओं दासारधि, (पु.) दसरयस अपायचित इम् । दशरय. (हाथी)। दिग्ग एजाकी सन्तान । श्रीराम, दमण, भरत, शत्रुम. दासाई (पु.) दा (दान) अति । यह अए । ओ विजय (गीत) । संसारका विनय. वंश उपना । विगु । दाई देशमें अन्मा (नि.). ६३०। योदासा (मि.). दावानल". नदीमें हुआ. : भाटि थाम्मान. - निनायते । जन+r (अ) दिने दिर, (60) (2) रदिया निमुन" यही सर्प, •)+मन+महादेशीया, दिश, (म.) मार. सामान्+3 देने रसपाने, दियम, (T.) Irrrrr. (पु.) दिई मामन इवनिमय निटियममुग्म, (म.) ८. मात्र (ग)। ..। गरीवार धिवाही सोच हामी। प्रमनगर दियमविगम, (I.REE ....tr 1.)विधि यं म्यति । यो कथा पन्नम् । जो पाया जाना । गायन गोर। हिरदा। दोवार विशाही मोना, दिपपनि, (दु.)....ME. (rer) (बहिन-भर ) के महीने होरी हि Air पपीmer मनहाया सा उदायो नियमगिग्यो ". दियायियी, (*. FIfmare (पु.). माईके मामानेपर जो IMilerthri विषयभोगी ने किया धर्मगे अनुरात दगी भर विषादीगई बीरा पनि । विधवा दिया, (अन्य ) frimar के म विवाद जानेपर दिवादीगो सोरी बदिमा दिपावर, (.) Imtirit (या) का राम. मा श्री.) गन् । पारण परी एका दिवान. (पु.time Timilar at t(trrrrra) पतिमा जो परेको कारता है। नपिनमti पदिधाना गया (.) मा. पवा पर रिपारम, (पु.) tr writer! मय । दिनार ( Mrin पु.) परो मोदगेन । म । मो , दिपातम (f.) Renmitrrit.. निकोषमाए । एस. होने factor पु.) जिन दिन तीन सिधि भाय। दिवामिदाम, (wituatiral पु.)..मा पूर्व भारिपाल, (पु.) (na (r.me.k पु.)ने मनि (HINDEnt MM भारत (A) मि गुम् । दिन गुप्त । रियामाग, (S.Or (d) ।.(..) पौषमम् ।। गाmamrutr... पु.) AERIR (Firri रिकामपा.(Or- Error | .) ARREARRIEW ,रिणाम. (wr.rementar gram शिवसागर(..} Pr-Pre meter •TARKARTER from {th.krrit..it रिkिer t..... Errorike....(Press.itter.

अ - गने तक अनुगार दीशा (मत्रा संदेश) दिवादिस्य, (पि.दिव्य दिव्य दिव्य (मर्गीय) दीधिति, (श्री.) दीधि+गिनसरATE दिनार (२.) । म ब दीनार, (१.) म्यानुरामोनेश मुरि दिवा(वा)हम् ] (२५०) दियो(वा)कस्-स, (पु.) दिवि-दिवं वा ओम् यम्य दिश, भा, (म्री. ) दिशकिप् । माया (दि ५. महारान्त भी होता है। देवता (जिसका सर्गमें दिशा, (घी०) दिनअट । और, स्थान है)। "तारकेण दिवौकसः" इति कुमारः, दिशोमान्, (पु.) दिशः मजान मनि दिवोदास, (पु.) चंद्रवंशी काशीनगरीका एक राजा. वाम भागनेवाला । कांदिशीक । चाल, दिव्य, (न०) दिवि मा यत् । लंग। चंदन । राश्य (इ./दिश्य, (नि.) दिशि मर्वनाम :- सम-सी) । गुग्गल । स्वर्गकी चीन । एक प्रकारका नायक होनेवाला । दिशाओंसे लायागया । जो कुछ दिनों (पु.) "दीव्यते अनेन-दिवाक्यम्" । मनोहर । मुन्दर । विष्ट, (न.) दिग्+क्त । माग्य । किस्मत । सन्त (n अजीब । चमकीला (त्रि.). (पु.)। उपदेश कियागया (त्रि.) दिव्यगन्ध, (पु.) दिव्यो मनोहरो गन्धोऽस्य । जिसका म-(दिष्टान्त, (पु.) दिगम्य (भाग्यस) अन् । नोहर गंध है । गंधक । लीग (न०) 1 छोटी इलाविची अन्त । मरण । मात, (नी)। कर्म• उत्तम गंध (पु.). दिष्टि, (वी. ) दिन मात्रै तिन् । ज्ञापांकर * दिव्यगायन, (न.) कर्म० 1 अजीव गानेहारा । गंधर्व वा। भाग्य। अपना माग। किम्मत मात्र हैन (देवताओं गया). अच्छा भाग्य । कोई मंगलानान्त. दिव्यचक्षुम्, (पु.) दिव्य चक्षुः यस्य । जिसी अनीय दिष्टया, (अन्य ) मला हपं । माग्यसे । मैं बहुना औरा हो। जिसके मुन्दर नेत्र हो । जो ज्ञानकी औस दिए, लेपन । लोपना । थंदन आदि लगाना। भारत रहता है। अंधा. सक० थनिन् । देग्घि-दिग्धे । दिक्षत्-अदिक्षताको दिव्यमान, (न.) दिव्य ज्ञान क. म. विचित्र (सगीय दी, भय । घटना । नाशहोना । दि० आ० अ० । वा हैरान करनेवाला) शान (समझ आश्चर्यज्ञान. यते । अदास । दिग्ये । दीन:. दिव्यतेजस्, (ब्री) दिव्य देतो यस्याः । जिसन आश्चर्य दीक्ष, मुंडवाना 1 यज्ञोपवीत करना। नियम वा अगर रहो।मामी सता। एक प्रकाररी बेल, करना । म्वा. आत्म• मा० सेट् । दोस। दिया, (पु.) दिव्यं पापति टर. स. । आश्चर्य रूपमे दीक्षा, (सी.) दीक्ष+ । नियम । सत्कार Hary दगडाटा । ज्योतिषी. निरव यदुरः" इति रएः । अमीर देनद्वारा मा दिव्यदोहद, (न.) अनीटनिधि (चाहीगई चीजरी का. (तमें)। मनमा उपदेश और यज्ञ । देवी. ममारी ये जो पदार्थ देवताओं को दिया जाता है. दीक्षागुर, (5.) मन्त्रआदिश्य उपदेश करने दिव्यसन, (I.)यः प्रमः । सगीय (माधयंजनक) स्टोप पूराना । भावी माता पूछना. दीक्षान्त, (9.) दीशायाः (प्रयानयागमम दिग्यमानं, (न.) यं मान क.ग.। माधयं मार। मापको यागनेदः)मया मागने । । देव के यर और दिन अनुगार ममयका परिमाग. अन्नमें से उसय अगर समान दिसाय, (पु.) यि रसः । सगी गाडी । भाडा | दीक्षित, (नि.) दीश+5 । सोमयाग भादि । के नियम दिया गया HOTTARA दिश्ययार,(f.) दिग्यानि वयातीयम्य ब.म.निम या है। मामला : (पु.) पुरादिषि, ( अभ्याग ins दिवाना, (पी.) या भगना । कर्म• समधी (देवताओंका गुण) अन (पु.न.)। म अमर मन मन्दी नारी. साहुआ) (नि.) बडा पाइन (पु.३० पच (मनर) आधा मनुब र झापाता. हराउप्रा. दियां, (पु.)य भाव यम..मगदीदीन, (पि.)ो नामित । बन्दी रिया. (रा)। नगरस पल (..). । उपदेशदाता. दर Hin dिi, (..).। मनदिर, Mar दि.2PIRTH. म. माटी (HTMer treatern महरिमtfreeमा. internati.

पर, (२५१) [ दोघांयुए, बहुत देरकी नींद. दीपक, (पु.)प्पा) कन् । दिशा । पान पक्षी । दीर्घप्रीव, (पु.) दीपां प्रीया यस्य । लंबी गर्दनवाला कंठ. एक प्रसरका राग । बेगर । एकप्रकारका अर्थालंकार दीर्घच्छद (पु.) दीपः छदा यस्य । जिसके लंबे पो (म.) कुशल । कामको प्रकाश करनेहाय (त्रि.) होगा. "त्रियो टाप् -अको"। एक प्रथा नाम. दीर्घजक, (पु.) दीर्घा जता यस्य । जिसकी बंसी ला टीपन, (पु.) हीपयति भाणात् जटरानि उत्तेजयति । हों। ऊं। बगुला. दीप+पिन्+त्यु (धन)। जो खाने से पेटकी भागको भ- दीजिह, (पु.) दीपा जिल्ला यस । जिसको लंपी जीभ काताहै। तगरकी जा । पलाण्ड (प्याज)। केसर। है।सर्प सोप, और शासीको दूर करनेदारे । मानवाटा (नि.)। दीर्घतपर, (पु.) तपः यस्य । लंबे तपवाला । बह- मेथी (स्त्री.). वाका पति गोतमपि. 'दीपनीप, (त्रि.भनीय ! प्रवास करनेसोग्य । ' दीर्घदर्शिन, (पु.) दोघांन पश्यति । समिनि । दूरसे जगानेलायक. देसनेहारा । दूरदर्शी पडित और री (मारु) । आ. दीपमालिका, (बी.) पाना माला यस्ता कर भको । नेवाले कामरो जान्नेहारा । दूरसे देसनेवाला (त्रि.) होती है। जिसमें दीवों की कतार हो। दोनोवाली मा- दीघधि (3.) डीपी टिः अस्य । जिसरी संरी नगर पस्या। दीवाली । तीवोंका समूह. हो। पण्डित दीपा दूरगा टिः यया।३०। दूर दीपित, (नि.)ी+क । अमिमें जलाया गया। प्रता जादी है नजर जिसे। दूरवीक्षण पूरथीन । एकपका- किया गया। तेज किया गया. रखी बटा. दीपिन्, (वि.) टीप्+पिनि । नाश करनेवाला । जगाने. दीर्घनाद, (पु.) | नादः अस्य । ( दूर जाने ) जि. पाला। चमकनेवाला । रोशन करनेवाला. सकी श्री मायाज हो । शंख (इसका पद र जाता है). दीप्त, (पु.) दीपक । नीव भोर निंद (पर)। सोना । दीर्घनिद्रा, (पी.) कर्म । संयी नींद । मृत्यु (मौन)। भौर हींग (न.) जलागुआ। पाहुआ। यमबहुआ। दीपलय, (पु. ) दीप पानः अस्य । जिमका संशा पत्ता पमधील (वि.). टीप्तजिहा, (बी.) दीप्ता व्यसन्ती जिहा यम्याः । जिसकी हो। सनका पस ! “कर्म." ला पत्ता (पु. १०)लेरे जीभ जलरही है । उल्हामुनी (पुआतीमुई)।एक- पत्तेवाला (त्रि.). कारकी गीददी । (इसकी जीभ रातो जलती है यह। दीर्घपादप, (पु. ) धर्म । वा । तारा दररत । ri मिर). मुरारीका पक्ष. दीपमूर्ति, (.)ता मूर्ति यस्य । यमपरही मूर्निवाला । दीर्घपृष्ठ, (.) रोष पृष्ठ अस्य । जिसने संदी पीठ हो । सूर्य या विष्णु सर्प । सांप. दीसलोचन, (पु.) रात लोचने यस। बमकदार भागों । दीर्घरागा, (सी.) सेपो (बालस्थानी ) राणे (प) वारा विद्या विशल वितरी, यस्ाः । जिसका रंग बहुत देरता रहता है।रिमा । दीप्तापि, (पु.): पि अरानलो रस जिगमी हल्दी। पिसार करनेवाली औरत. पेटको भाग पा रही है। मगरसमुनि । तेज पेटी दीर्घरात्र, (न• ) दम1 संधीरान । ... रात रात्र भागवाला (वि.). दीप्ति, (पी.) सिन् (ति) । शान्ति । बहुत हाई दीर्घयक, (पु.) वर यस । रे मुगवटा । हामी मुन्दरता । त्रिोंवा एप्रदरका गुण। चमकाम दीर्घसत्र, (न.) धर्म । हुन बाट देनार एक बारा या. उप रो पहारा (नि.) दीप्तिमत्, (नि.) तिमयुर । प्रशासवाला । चमकदार "हदि सरस का पेसरी प्रतिषः दीप्य, (वि)म्पत् । लाश परनेलापागानेलाय. दीर्घसूत्र, (नि.) सण (एपारेन) सूर (भिरि- दीर्घ, (I) एम् (माधीयम् दापिट) सता शाला तकर्म) मम । शिक्षा याममा काम दरसे होता है। पदो मात्राका क्षर जसे "आ"16 (en. प्रारम्भ गरेमी देरमे समापनासर्गि यस)(त्रि.) "म" संदी तात ना) दीर्घकण्डा (पु.) कण्टो यस । जिगम संग गला दीर्घायुष्प, {s.) माहिम ही दमा सेक पाला । संडे गोपाला (दि.). होमय. दीर्घन्धि, (I.) यो प्रन्थिः पर्व सपा विराग गांड दीयुग, (पु.) (3 ) अस। सोपपिम्पली. जिमधीरेम समय संयमा निबटार. . - Pr पाला । देरतक दीपिका ( २५१) दीपिका, (सी.) दीघा एव । निमकी फैलावट लंबी हो। दुरहट, (न.) दुष्टं बहई । दुरी किम्मत । दुचा एक प्रकार जसका स्थान बावली. इंगम । जहां पहुंचना कठिन है । जिन पर दीर्ण, (त्रि.) + 1 विदारित । फाडागया । उराहुआ। जान ग. "मावे " फाटना । टरना (न. दुरधिगम, (नि.) दुःखेन अधिगम्यते । यदि दु, उपतापन । दुःम देना । तपाना । सा. पर० सक० सेट् । +गुल् । जो दुःसमे हामिल किया जाय । दुवा दुनोति । यदावीन् यदापीन् । दूनः । दवयुः. उमे मिलने सायक. दुःख, दुःस करना । चुरा० टम. सक. सेट् । दुःगु दुरधीत, (त्रि.) दुष्टं धधीतः । युरी तरह पदारर यति-ते. दुरण्यवसाय, (पु.) दुष्टः अध्यवमायः क. 511 दुःख, (न.) तुम्+अच् पञ् वा। जो अपनेको सच्या काम । युरा निधय. न सो । चित्तका धर्म । (न्यायमतमें) आमाका घमं । दुरध्ध, (पु.) दुष्टः अवा+अच् । बुरारान्ता । पीडा । तकरीफ और कट । दुःख देनेवाला पदार्थ और ग। दुरीमहक. दुःसवाला (वि.). दुरन्त, (त्रि.) दुयः अन्तः (अपमानं ) साहि दुखमय, (न.) ६ ता, तीन दुःस (याध्यामिक आ- नतीजा है । द्यूत (शिकार), जूआ, म (A चिमौतिक और साधिदविक). आदिका पीना थादि व्यसन (पुरीआदतें)। दुःखटोक, (पु.) दुःसुकरः टोकः । दुःरा देनेहाय लोक । गब पहिले मुख देकर अन्नमें दस देते हैं। सांसारिक जीवन । निल दुःयग्र दृश्य संसार. अन्नः (परिच्छेदः) यस"। जिसका विचार मरमा दुःसशील, (नि.) दुसरं चीठं यस्य । जिसय समाव दुनय । गमीर । गहिरा. दुरादापी है। कटिनठाने प्रगत किया जानेवाला । पुरे | दुराग्रह, (पु.) दुष्ट आप्रदः (निवन्या)। समाववाटा । जिसस वंशमें आना कठिन है. युविरहित भमिनिवेश । (दलील विनाह)" उन्समागर, (पु.) दु.मम्य सागरः । दुमका समुद्र । हटीला (त्रि.). सांसारिजीवन, दुराचार, (पु.) दुष्ट आचारः । युर चाटना रातीत, (वि.) भनीतः । दुःसमें अतिक्रमण सारण। ६ य.. पुरे आचारबास (f.)." पर गया। नितुंग । दुगरहित. भुदुराचारः" गीता. गर्न, (नि.) दुःौन आनः । दुःगमे पीडित । नी. दुरात्मन्, (नि.) दुष्ट मारमा (पितं ) यम्य । पुणे सुमित, (त्रि.) तन् । दुःखी हुआ। पीडित वाला । दुषित जन । दुट चित्ताय (7 एमः । निधन भगत । तं न । वा ग्री). कन्ट,(म.) रिलन्सार पृ.क्षामयर । रेशमी दुराधर्ष, (पु.) दुष्न् (राक्षगान् ) आपला MIRI मदीन कपडा । दुपा. जो गागों का निरम्यार करे। विशेगी ( गरे फेंकनमे मा यादि भागमा है। दुग्ध, (२.) इरादा राजतिरे मनाम पाहुआ दपि पयितुं शक्यम्" -दुर+आ+r+श (" हत्या "र"। योईगई (हतोटा) धेनु (गो) यदि (प.)ति (बहुत भएटा) (नि.)। दुग, (नि.) दुःलेन भा शक्यः । तु रामे " “तिम मुस्टिगे घोडागामी शिक महम(th) "म"दोहन (रंग)(न.). कनका दुन्दुभि, (५) इन्दति शान मत (पूपति) टम् । दुष, (fz.) तु गेन धारापदिन योग । •एले माटदारवाशाबानगए। मंगरिया जगायोटिना ने rite (e) सक्षम । बिर। बह-गरोह, (पु.) दुगन अपने । दुर रा. (पम्मा ) (श्री.). रहा बाना सनम (1) तुर-म (या) TIRER दुध, मुरिात्रीपासपर (ft.). दुगर, (पु.) IEET "टोग Amमाहार दुगनार (1.) मा. दुगन बहना निवडा.11 पुग्दर, (.) रबरी । पति हग (f.). हामि नमो. गगनेलारे पत्र. .

[दुर्मर्याद । - AI (मी.) दुध भाग। दुरी मा (उम्मीद). दांत, (न.) आतं । प्रायमन (इरीआदत)। सदा (नि.)पेन मारापते (गम्यते) भी। भाषद (मुसीमा) •जो सजा नहिं हुआ और सिम् एस पहुंपना पटिन है। दुर+भा सदस्यत् । भनुचित (मामुनासिब) (नि.). दुर्गम्य । पुष । जिसका सामना नहिं कर सके । “भूत दुर्गामा, (नि.) दुर लिन्दितं नाम अस्य । पुरेनामयाला. दुरापर"तीरपु:- इदान्त, (पु.) दुष्टं दान्तं (दमन ) या । जहाँ रोकना t,(म.) (गमनं) नरवादिप्राप्तिः भनेन । मुश्किल है । कलह (जगा) ।दु.खेन दम्पतेस । जिये नरक मारि पुरे स्थानडी प्राप्ति हो । पाप । धुरा मुश्किलमे रोगगया । अशान्त (जिसे शान्ति नहिं) म । सोटा चलन. बा (त्रि.) ता, (म.) दुई उर्फ । पुरा कहा गया । भाप नत. दुर्दिन, (२०) पति तमः इति दिन । दुष्टं दिन 1 प्रा। पत्र (4.) दुःलेन उधिनते असो । दुर+द+ भेषों (बादलों) के आच्छादन (दोकना ) आदिसे अंधे. छिराल । जिसे मुश्किलसे हटाया जाय । दुर्निवार. रेको दर न करसकनेवाला दिन कि जिसका सप प्रतीत पर, (नि.) दुशेन उत्तीयते । दुर्दम्पत् । नहो। बादलोसे अपरा । वर्सना । पानीका बरसना. जिसे कटिनतासे तरसके । दुस्सर । "दुष्टं उत्तर" इरादुर्धर, (पु.) दुध सल् ! एक नरक। एक देल । रत्तर (म.) "दुःखेन मुमधुमिईदये धार्यते, केनापि न धार्यते+या ८, (नि.) ऐन प्रवे (वितायते)। "ह+ राल्" । मोक्षके चाहनेहारे जिसे मुश्किससे हृदयमें धारण सल" । ओहुत दुरासे रामालमें समा जाय। दुर्विज्ञेय. करते है या जो किसीसे मी पकड़ा नदि जाता । विष्णु । दर, (पु.) दुधं समन्तात् ददरं अस । चारों ओरसे वह पदार्थ कि जिसका पकाना वा धारण करना मुश्किल जिसका परिणाम (नतीजा) पराय हो। पुरा पेट जि है (नि.). सका। पूतकार । जुवारिभा । पण । दशर्न । दा। पारगा। दुर्धर्ष, (नि.) दुःखेन पृप्यते। जो मुश्किल से पकडा वा नभा (म.) "इरोदामातो" भाररिः. सहाराभाय । जिसका सामना करना मुश्किल है। अक्षोभ्य। i, (पु.) दुखेन गम्पवे असी । कर्मणि रजिसके पास जो व्याठतासे रहित १. मुस्लिो पहुंचम । एक देव । उस देलको मारनेहारी दुनियार-निवार्य, (त्रि.) दुःखेन निवारयितुं योग्यः । देवी (बी.)। "दुभेन गछति अप" दुर+गम्+आधा. दु:ससे हटाया जानेवाला. २४ पहा पहुंचना टिन है। ऐगा देश पर्वत से दुर्भातम्, (न• ) दुष्टं नीतं पुटिठनीति । पुरी चाल. मादिरी कठिन स्थान बनगया।फोट । किला । गर (न• 2। दुर्गमदेश । उंचा। रासे मिलनेायक (त्रि.)। दुर्यल, (वि.) दृष्ट बलं यस्य । जिसका जोर बुरा है। काम मोध भादि सके धरण फटिनतासे तराजानेवाला निर्षल । कमजोर । कृरा । थोडे मांसवाला. संसार (न.). दुखि, (नि.) दुष्टा युरिः यस्य । पुरी अकलवाला । गंत, (नि.) दुर्गच्छति । दुर+गम+। दोपदो प्राम हुभा । धुरी दशामें पहुंचा. इभंग, (नि.) दुष्टं भगं (भाग्य) यम्य । जिराधी बुरी मंति, (स्त्री.) दु गम्+चिन् । धुरी दश। नरक । विम्मत है।अल्पभाग्य । अभाग्य। वही जो पतिरो निर्धनता. प्रेम नहि कर्ती (स्त्री). न्ध, (पु.) इष्ट गधः । पुरी गंन्ध । ६ य० ।पुरी गंध- | दुर्भिश, (भव्य• ) भिक्षाया अमाव" । समका न मिलना । बाला (वि.) गंदा (पु.). मशाल । केहता काल. गानवमी, (स्त्री.) त.। दुर्गा (देवी) पी नभी। इमंति, (नि.) दुष्टा मतिर्यस्य । जिसकी धुरी अहित है। कार्तिक पक्षकी नवमी (इम दिन जगदात्रीनमक विचारको रोग्नेवाले पापसे जारी बुद्धिवाला। अमिल। दुर्गादी पूजा होती है). देशात मे एक (पु.) प्रा. प.इदि। जन, (वि.) दुष्टः जनः । पुरा भादमी (जिसरी नाई बुरी अहिल. आचरण (चालचलन) करनेसे साधु (मला) भी दूषित | दुर्मनस, (वि.) दुष्ट मन अस । जिसन मन (चिन्ता हो जाता है। नीच (पु.). आदिमे ) या (घबराया) हैं। बिमनम् । विसका र्जर, (त्रि.) भाबरा । दुखेन जरा यस । जो दिल विगामा है. मुस्किलसे पुरानी हो। वह पदार्थ जो मुसिठसे जीर्ण होता] दुर्मर्याद, (त्रि.) दुरा मर्याश यस। जिसकी मर्यादा है। ज्योतिष्मदी स्ना (पी.). (सदाचार) बुरी है । भगिक्षित । भविनीत । दृष्ट. मूह । मेवकूफ. ।

- कर सक्ता. बदमार. है। दुरग थुला दुण्टमा (खी.) आर इन्द । याने हिमीममय मे कुपित होकर अपने दूत, (पु.)दु+फ दीपंच। देश (राग दुर्मरा, २५४) दुमुंख, (पु.) दुष्ट मुसं यस्य । जिगरा में गाय है। दुप, पान । बार जाना । पर काटा 1 दिश. पर। पोडा । मन्दर । एक प्रपरका हाथी । एक दस । अति. थनिट की। पर असा यवारी । कटवा यचन पोलनेद्दारा (नि.). दुष्कर, (न.) तुमीन कीयंने । हम में दुमेघर, (नि.) दृष्टा मेधा अस्य । अगिन् गमा० । जिग गिटाया जाय या पंगा जाय । Raj (ER) की पुरी युद्धि है । मंदबुद्धि । जो चित्तरी विचार नहि "+गल" मुनिटलग करनैलाया (नि.) दुष्कर्मन्, (न.) कर्म• प्रा. म. । युग बना। दुर्योधन, (पु.) दुःखेन युध्यते थगी । युध् युन् (गो । पापाला (नि.). अर्थमें जिसके साथ उटाई करना कठिन है । मृतराष्ट्र दुकृत, (न.) दुटं तं वृतिः । युग काम । राजाका बहा पुत्र । ए राजा । दुःसगे युद्ध करने ६५० । पापी (नि.) योग्य (त्रि.). दुष्ट, (नि.) दुपा । दुवंल । कमजोर । यवन । दुर्लम, (पु.) दुर+लम् एल् । जिसका मिलना मुश्किल दुर्जन । यदआदमी आदि । दोपकाला (दी) है। कचूर । जो मुश्किलसे मिले (त्रि.)। "मानुष्यं .दुलंमं लोके” इति पुराणम. (कुष्ट ) (पु.) । व्यभिचारिणी (बदना) (औरत ) (मो.). दुर्टलित, (न० ) दुष्टं उलितं (ट)। लालू-देष्य । चाहना | दुष्ट, (नि.) दुष्क । विगढगया। दूषित होगा। +क । युरी चाहना। चन्द्रमा आदि न मिलमकनेवाले होगया. पदार्थोंमें चाहना । दुश्चेष्टिन (युरी चाल)। युरै धामय- दुष्टयेनस्-धी-युदि, (नि.) दुष्ट चतः वा दुध वाला । दुधेट ( पदचटन) (नि.). बुद्धिवां यम्य । दुष्ट (निगटे हुए) समावदला. दुष(व)घ, (मारना) भ्वा० पर० सक० सेट् । दुवति । दुष्यत्मन्, (नि.) दुष्टः मान्मा मम्य । दुष्टुम्बमवार घवीत् । दूतः. दुर्वर्ण, (न.) दुष्टोपि वर्ण्यते (रज्यते ) अनेन । जो दुर दुप्य (मोन्न, (पु.) चन्द्रयंका एक राजा । मरदरा (बनआदि)को रंग देता है। अयवा जो मेटेको भी पिता । शकुन्तलाका पति. मुन्दर बना देता है। रजक 1 रंगरेज । बुरैरंगवाला । दुःसहा, (ग्री० ) दुःमेन माने । दुर्-सह-सन् ६ जो मैला (त्रि.) से सहारी जाय । नागदमनी. दुर्विध, (त्रि.) दृष्य विधा यस्य । जिसका प्रकार (हालत) दुःस्य, (नि.) दुःखेन तिष्ठति । स्था+छ । दुसरे दर बुरा है। दरि (निधन)। गरीव । “विगदुविध" है। दीन । मूर्ख । लोनी । टाटची. नेपधं । नीच । मूर्स. दुईद्, दुष्टं हृदयं यस्य । बुरे हृदयवाला (त्रुकै अर्थमें दुःस्थित, (नि.) एक्स्या+क्त । अनम्धित । (दिद निसही हाथादेव होता है ) शत्रु (दुश्मन ) बुरे पित्त- चित्त कायम नहिं कभी कुछ २)। चारह । दुसरा वाला । “दुई दयः " इसी अर्थमें होता है. दुःस्पर्श, (पु.) दु.मेन स्पृश्यतेऽमा । जिसे दुमने । टाक्षेप (ऊपर फेंकना । झुलाना) चुरा० उम• गा. कडिआरी. सेट । दोलयति वै । अदुख्न-त. दुलि-ली, (प्री• ) । दुल्दन् नि । कमटी । कच्छुकी ली। दुइ, दोह । चोना । अदा• टम• अक• अनि एक मुनिका नाम (पु.). दुग्ने। अनुशन्-न । अदुग्ध. दुशासन, (पु. ) दोन मिन्यतेऽसौ । शाग्युत् (अन)। दुइ, पथ । मारना । भ्वा० पर० सक मेट् । देवति। . जिम दुःसमें आशामें रपमानाय । दुर्योधनका टोटा माई।. हन् । भदोहीन धृतराष्ट्रका पुत्र (भारतमें प्रजिद है). दुहितुःपति, (पु.) ६ त• । अनु ममा । पति । जाई. महारत पी चिद वार्म यम्मु धमारे चमार्दवान्। दुहित, (०) दुहनन् । गुग न हुआ और इस इदिगतिः गया । नि• गुता । टहरी। बेटी. दुध्ययन, (पु.) इभेन ध्यानं पतनं यम्य । ओ मुश्कि-मेरा तालीफ उठाना । दिवा-आम• सका। रसे गिरे अपका जिस पर ध्यान मुनि बुख हुआ। पदम गिदिया. हाग। बात पहुंचानेवाला । कानिद. - . - सैदा अपिटादन.

। B. (ल.)।दपि वा। संदेशा पहुंगा. हद, (न.) रहनक नि । सोहा अतिशय भऔर बहुत । . मोया। गास । लबाला ताकनवाला भौर एएत (त्रि.). (म.) या भाषः पर्म गया। त | पदभूमि, (नि.) डा भूमिः अस्म । 1 (मजबून) तीका होना था राम । दूतका बाम । दूतमा सभाव. भूमिवाला । योगाभ्यासमे संरकत अंत करणवाला । ऐगा (नि.) रामो ( मार्ग)में पलने आदिगे वित्त कि जिसे विषयगुराड़ी प्रीति चला नहिं सके. (4) हुआ । बहुत तामा। बहुत दुखी हदमुष्टि, (पु.) हा मुष्टिः यत्र यम्मात् वा । जहाँ पी मुरी है । सङ्ग (तरवार ) । इसके धारण करनेसे (त्रि.) मेन ईयने (प्राप्यते ) इदरक मुमो परी होती है। “ला (अशिथिला ) मुष्टिः यस"। । स्प। विप्रहार। अपोर। जो भासोंसे बिरामी मुसी दीली नदि होती । कृपण । सूम। कंगा । वह धन आदिको मुडोम रस न देने की इच्छासे खतर नि, (पु.) गत् पश्यति । दूरमे देगता है। वधिलेताहै (मुडोमे निकलता नहिं ). गुस् । भागीय. हमत, (त्रि.) प्रतं नियमः अस्य । जिसका पहा न्, (पु.) दुरा (पार्योलते प्राक् ) पश्यी। नियम हो । प्रारम्भ कियेगये कामको फलोदयपर्यन्त गायक उपसनेमे पहिले देखता है। समिनि । (ननीजा निकलनेतक) न छोडनेहारा । एक इकरार दत । दूरसे देगनेहारा (नि.). रनेहारा. (स्त्री.) । गिा । मारना-अाएक प्रकारका पारा. पदसन्धि, (नि.) दृढः सन्धिः सन्धान यस । पके Pण्ड, (न.) दुर्वाण समूह +माण्डम् । वांका जोडदाला. हापामार. हता, (बी.)दियते । काजीरक । जीरा. मि.) + । समासके पीछे भाता है । "जि- | रति, (पु.) किन् । यमडेका पनाहुमा पानीका पात्र । "विगाइनेवाल्या दुरित करनेवाला. मएका एकरकारकी मच्छी. , (नि.)-रिस (बी.) लगिन्म्युल् । दूषित इन्भू (पु.) नि. । नृप । राजा । वा । सूर्य । नेवाला । दाग लगानेवाला । विगाइनेवाला. साप पहिया. (पु.) रावणकी मारपीका बेटा । एक राक्षग। (प, साधन । तकलीफ पहुंचाना । तुदा० पर• सक सेट् । +नि+युर । दोपदान । ऐच लगाना । ऐर (न.). का (बी.) दूषयति ( नेत्रं शिमं करोति ) दुप्, सन्दीपन । भाकाना । या मुरा• उभ• पक्षे भ्या• पर. च्+ण्वुत् । नेत्रमल धोराडी मैल। गित. सक० सेट् । दर्पयति-ते । पनि । परिपत्-त । पर- ।, (नि.) दुप्+गिन् । अभिरास । शादि पंत-त । अदपात. गया । निन्दा कियागया। दोप लगायागया। तोहमत | हा, हर्प-गुशहोना । गर्व-अहंकार करना। पिता पर• मक- सेट् । त्यति । भान् । भदपीत् । दर्पिता । हप्वा. (न.) +गिय । कपडेय बनाहुमा घर । तंबूत, (वि.)प्त । गर्वित । मगहर हुमा. ण देने के लायक (नि.) हाधीकी बेटी (बी.)एफ,देश । तकलीफ उठाना । इदा. परभक० सेट् । । मारना । स्वा. पर• सक• अनिट् । गोलि । एफडि. पापात, इग्ध, (नि.) क । प्रथित । गुथा हुआ। भीत । दिर करना । मुदा• भात्म• सर• अनिद । इसके राभा. हेले भार उपसर्ग रहता है । आदियते ।भाहन. एम्, भएन । गोडना वा चुरा• उभ.पो तुता.पर.सा. रना । भ्या. पर• राक• सैट् । दति। मदारी। पेन् । यतिसे। दभति. णि )दरयति. श, प्रेक्षण । देखना । भ्वा• पर सका भनिट् । परपति । गहना । गि• क्या. पर. सक, पैट् । दीयेति । भदभदाक्षीद पति भवारीत. स्य-दा, (श्री.) स-भावे किए। दा टाप् । देसना । साद, (पु.) शं प्रयादयति । जो नजरको साफ जाता । "करणे कि" नेत्र । आँस 1 दोटी संख्या । रे। पुलस्या । इसका अंजन दासनेसे आँखें साफ हो "करि कि" सारी। गवाह । देराने और जो- विी. हारा (नि.). गामा हुआ.

ढांगला हार, - दयमयन, (न.) देवानां भवनं ना मानों देश पद, पद्, (श्री.) फाइना+आदि गुरु (शुभ) वा देयमानयिद, (न.)ीन ग (irrita हम्पः । पाषाण । पायर। पीगनेरी मिला मिला. देवनागे पाडी गई धिन (गुगा)। गुहा ! एपद्धती, (श्री.) इशद मनुस् (मकोव) एक नदी "मर-देवगायन, (पु.)..देवाओंका गरमाई. सतीदप (1)द्वयोः" इति मनुः। आयर्यायनी पूर्वी देयगुरु, (.) ६. देवा, सीमाको यनानहारी मरसतीम गिरती है. पारिजात, गन्नान, लालसर हरिपदन ये पर दृष्ट, (न.) हक । अपनी वा मयुगी गेनाका भय । देयच्छन्द, (पु.) को छन्यने (प्रतीक देखा गया डर । देशागया । और रफिक (दुनियावी) कर्मनि पत्र देतागि प्रार्थना ध्यानता है। मेर (नि.). हएकूट, (न.) कर्म० । कूटप्रश्न । मुस्किल गवाल । पहेली। देवता, (पु.) ६ न. 1 देवाओं का गुर । वृहलो युमारत. दंयता, (श्री.)मायें तल् । इन्द्र सादि वटा दृष्टान्त, (पु) १ः अन्नः यस्मिन् । जिसमें नाश सीमा | देवदत्त, (पु.) या एनं देयाम आणि और विचार देखा गया हो । मरण । मौत । शास्त्र । ददा "देवता इंगे देव" (वर्गकाग), देवता पर हरण । सिमाल । एक प्रकारका अर्यालबार. गया। हमनामयाला कोई जल । अनुनका शंग। दृष्टि (श्री.) मावे किन् । दधन । देखना । युद्धि । लानेकाला वायु (हवा)। "देवाय दनः" देवनाके अकिल । “करणे चिन्" नेत्र । म्यादीकी संख्या । होश हुआ (नि.). मनका व्यापार. देयदाय, (न०) देवानां प्रियं दारु यम्य । जिवन दृष्टिगोचर, (त्रि.) स्टे गोचरः प्रत्यक्षः । नेप्रका विषय । से (चन्दन) देवताओंको पियारी हैं। एक ! जिसे आरा देश ले, "यह पुंलिप्रमें भी होता है" "अमु पुरः पश्यन दृष्टिपथ, (पु.) दृष्टः पन्याः पयिन्ट+अ समामे । नेरका दायम्" इति र मार्ग । नेत्रका विषय. देवदासी, (स्त्री०) देवं (इन्दियं ) दान दृष्टिपूत, (त्रि.) दृष्टया पूनः । दृष्टिले पवित्र किया. मारना+अण् । जो इन्द्रियको मारती है। के दृष्टिबिनम, (३०) दृष्टः विभ्रमः प० त० । दृष्टिका पिलाय । कंजरी । यनम्न नन. रसमरी शंखोंमे देखना. दृह, बढना । भ्वा० पर• अक० सेट् । दहति । बदहीन् । देवदीप, (पु.) ध्येयु ( इन्द्रियेषु ) नदी (यह इदित् भी होता है)हति । अहीन, में मानों (रुपका प्रकाश करनेमें ) दीपक अर्थ है है। नेत्र । बारा । लोचन. दे, पाठन । पचाना । भ्वा० प्रा० गक अनिट् । दयते । देवदेव, (पु.) देवेषु मध्ये दीव्यति । दिवअन् । *" भदान. ताओंमें चमकना है"। महादेव । कर. देय, (नि.) दा+कर्मगि यन् । देनेयोग्य । टेनलायक. देव, मलना । भ्वा० या० अ० सेट् । देवते । यदेविष्ट. देवन, (पु.) दीन्यति अनेन । दिवाकरण स्युत् ।। भेलना है। पाक । पारमा। "मावे युद् देव, (पु.) दिव+मच् । अमर । देवना। प्रवाशस्वरूप सेल । चमक । व्यवहार । जीतनेशी इच्छा ।। थान्मा । परमेश्वर । ब्राह्मणी उपाधि । और इन्द्रिय तारीफ । (न.) "दीव्यति अत्र -आपारे पुर" । (न.) । पूजाके लायक (वि.) नाट्योक्तिमें राजा (पु.). खेलता है। सेलनेका बाग । कमल. देयक, (पु.) श्रीकृष्णका नाना (मातामह)। देवी देवनदी, (श्री.) ६ त । देवताओंछी नी ।' : पिटा। एक राजा. "धर्मवाधा देवनरी" म. भा.. दे(६)यकी, (डी.) देवराजाकी कन्या । श्रीकृष्णवी माता। देवपण, (देवः पटशिनः पन्या. । अन् । पापुदेवध ली। "यपलायें" "देवी" यही अर्ष. देवनाओंमे पहिचाना गया माग। टारका राष्ट्रा। देदि)यकीनन्दन, (पु.) त.। श्रीरण । गुदेवरा ओंगा राना । छायापय (यमका मार्ग). मेटा "देवमुत". | देयपुरोधस्, (पु.)। देवताओंन पुगे। देयकुमम, (न.) देवानां प्रियं (योग्यं) वा कुमुमन् । देवताओंके लायक न मा डाका सवा लाग. दयखात, (न.) देवेन खातं । सन्+दिलाने सोदा मन्दिर है । वर्ग बहिश्त. - - - . नहि मनाया | दवटा पाग खोदा गया तासाइ बाहि. वच । देवपन । देवणायुम्य.

देवी, (१५) [ देशान्तर देषमणि, (पु.) देरेषु मगिरिव प्राशावात् । देवताओंमें | देवारमन्, (पु.) देवो विष्णुः भारमा यस । विष्णु जिसका (प्रकाशक होनेसे)मानो मणि शिवसी। घोडके सम्पहै। पीपलीका पेर (अश्वत्प)। देवता जैमा । गलेमें रोमापत (बालों की गोलापट)। कोलुभ मगि. देवसरूप. (नि.). देवयान, (न.) ६. । देवरष । देवतारी गागे। देयानांप्रिय, (I.) भल समाः । देवताओं का पियारा। देवताओं राहा। माधरादिमागं । शुक्राचार्यजी न्या बकरा । मूर्स (बेवकूफ) (वि.) (सी.) टी. | देयापि, (पु.) परमाके वंशका एक राजा. देषयोनि, (पु.) देवाः एष योनिः कारणं अस । देव | देवाह, (न.) देवान् अहंति+अण् । जो देवताओंके योग्य नही जिसके कारण है। देरताभो भैशसे उपजे है। मुरपर्ण । सहदेवी लता (बी.) देवयोग्य (नि.). विद्याधर आदि. देयर, (पु.) देवस्मर । पतिरा घोटाभाई, देयालय, (पु.) देवानां आलयः । देवताओंका स्थान देयराज, (पु.) देवाना राजाट समा। देवताओंका (पर)। सर्ग। देवोरी प्रतिमा ( मूर्ति) ओंका पर । "देवायतन" यही अर्थ. देपरात, (पु. ) देवाः एनं रायागु छन् । देवता इसे लें। देयिका, (स्त्री.) दिनुस् । एक नरी (जो दो कोस चोरी और घीस कोस हंपी है)। धतूरा. अभिमन्युका पुत्र । परीक्षित रामा. देवर्षि, (पु.) येदा त्रापि । देव एव सन् ऋपि । ओ देयी (सी.) दीव्यति दिवअण् दी। जो अनेकप्रका- देवताही येदके देरानेहारा है। नारद आदि मुनि. रसे खेलती है। दुर्गा । देवतारी स्त्री। दीप् । (नाटक) देपल, (पु.) एक मुनि । थाराका शिष्य (पेला)। तामिका राजवनिता (पटराणी) : ब्राह्मणसिओंकी धाम्यशपिश बमभाई । "देवान् जीविवार्थ साति+ उपाधि । “देश्यन्ता विप्रयोपितः" इत्युके.. लाक+क" । जो जीपिका के रिये देवताओंको प्रहण देय, (पु.) दिव्ऋ । देवर । वामीका छोटाभाई । पोर. फर्ता है। देषपर जीनेवाला । "सार्थे पन्" यही अर्थ । देवेश, (पु.) त• । देवताओंका सागी । महादेव । एमगरका मानण. उसी स्त्री दुर्गा की. देयलोश, (पु.) त । देवताओंका लोर। मर्ग। देवेए, (पु.) देवानां यः । देवोंका पियारा । गुग्गुल । ईश्वरी सम्पदाहर लोक भूादि व टोक. वनपीजपूरक (स्त्री.). देयपर्धफी, (पु.)त.। देवताओका तीन । कारि-देयोधान, (न.) 6.। देवताओंका पाग । वैवार, गर । विश्वकमां. मिथक, शिवारण, भोर मंदन ये पार बन. देयपत, (पु.) देवं (इन्दिपसेयमनं ) मतं बस । इन्दि देश, दिश्मन् । पृथिवीके गोलेका कोई विभाग 1 हिस्सा । ओंको रोकना जिसका नियम है। मीमा पितामह. मुल्क । पुरु पाचाल आदि प्रसिद्ध जनपर (देश)। देघग्गत्, (अव्य.) देवेभ्यो देयं । देवनाभों को देनेलायक। स्थान (जगह). देवताओंके भाधीन. | देशक, (पु.) दिश+मर्तरि युन् । बागा । भाडा मला. देपसायुज्य, (म.) युनकि-युगक । सह युजेन सयुगः नेवाला । शिक्षक मार्गदर्शक । रास्ता दिखानेकाम. तस्य भावः सायुज्यं । देवेन सायुग्म । देवता के साथ एक देशकालम, (मि.) देशवाली आनाति हा+E+भ । यथार्थ आसनएर घटनेकी योग्यता दिवटाके सार मेल. देश भौर कालको साहारा. देपसेना, (पी.) इन्द्रकी कम्या । पटीनामवाली कार्तिक । यकी स्त्री । सोलई माताओं से एक देता देशज, जात, (वि.) देशात जातः उन्+छ देशसे उपना ओंकी सेना. देशी पदार्थ. पेपसेनापति, (५.) ६.देवताओंकी सेनाभ माठिकादेसर, (नि.) देशे सः । हरमें देखा गया. पार्तिकेया नवा पुर। देवसेनारा पति. देशना, (सी.) सिमिच्युअन । शिक्षा। उपदेश. देपस्य, (न.) जो यन्न करनेवालोग धन है । देवता- देशभापा, (सी.) देशस भाषा । देशरी भाग। मुल्मी देपद्धति, (सी.) सायम्भुवमनी पन्या पिलमुनिटी मा. देशप्यपहार, (पु.) देण्स व्यवहारः । देशापार देयाजीप, (मि.) देवं (देवप्रतिमास) भागेगी। (पाठ-रस). जीभ । देवताकी प्रतिमाके व्यसै पीनेहापूजी देशान्तर (न.) भन्यो देताः । देश परदेश। देरल देगीवी" इसी मर्यमें है. दुसरा मुल्क - सोका धन - देशिक ईमा अण्"ये देवता है भाग्यमानी सन्ममें अर्जन किय गये सुमामो देयत, (पु.न.) देश एवं देना (रिमा) देवताभोंका गमूह (4)(न.)गुतो . | देयतन,(त्रि.)ोभायही भायीन है। सहीवापरासाबोलयर, (f.) एक पर (2) रायण्टा समझनागर एनाया ममपन(rror य, (: .karin नर (स)... यात्री, (.) समthi (३५८) देशिक, (पु.) देशेषु प्रमित +टन् । देशोंमें लगाहुआ। दैत्यगुरु, (पु.) ६ त• । दैलोंका गुह । । । पथिक । रही । देशे । उपदेशे साधु +ठन (इ)। उप "दत्याचार्य". देश करने में अच्छा । गुरु । उपदेश करनेवाला. | दैत्यनिसूदन, (पु.) दैत्यान् निमदति (हैट)। देशिनी, (खी.) दिशति । दिश+गिन् । जायातीहै । मृद+गि ल्यु । दलोंका नाश कता है। दिन मंगूठेके सायकी अगुली । तर्जनी. दैत्यमेदज, (१०) दयानो मेदाबायते । एक गरी 'देशीय, (त्रि.) देो भवः+छमईय ! देशमें होनेवाला । चना । जन् । गुग्गुल । पृथिवी । जमीन. देसी आदमी पा चीज. देत्या, (घी) दैत्यस प्रिया+यन् । दली dिia देश्य, (न.) दिशप्यन् । पूर्वपक्ष । पहिली गय । देशं स्त्री। मुरा (शराब). यति । देशके लायक (त्रि.). दैत्यारि, (पु.)त. दलोंके शत्रु । विशु, देह, (३०) (न•) दिपम् । शारीर । जिस । (स्थूल, दैन, (न.) नस्य भावः । दीनपन । कपरस्त । मुश्न और रणरूप) । ज्योतिपमें टमका स्थान । मयं अप+दिन में होनेहारा (वि.). "घम्" लेपन । लेप करना (चन्दन यादि लगाना). दैनन्दिन, (नि.) दिनं दिन (प्रतिदिनं ) टाका. देहधारक, (५• न• ) देहं धारयति । अनिमयुत् । दैनन्दिनप्रलय, (पु.) त । ब्रह्मा के भन्ने । यण-नि । प्रतिदिन होनेहारा । हररोज होनेअ. जो शरीर पाहता है। यस्थि । हरिय । शरीरकी शी. देहयद, (नि.) देहेन बद्धः-त. त.। देहसहित । देही। अनुगार प्रति दिनका अन्त 1 सम्पूर्ण ररपो पररी थवतार. क्षय (नाश). देहयन्ध, (पु.) देहम्य मन्यः । देहाती रयना। पर दैन्य, (न.) दीनम्प मावः प्यम् (य) निपग ।। होना। दीनता । कायरपना । गरीवी । पांच मिनट देहमान, (नि.) देहं भगत । मयि । देशहित । देष, एन. दादागतं । देवनागे आया। न दैप, गाफ करना । भ्या. परसक. सैट् । दापी मा धरी या जीवन धारण करनेदारा कोई भी पितः मनुष्य. अस्स" देव (विष्णु आदि) जिगा देता है। मृत्. (पु.) रिमान । गो देवको धारता वा पुष्टि जन्ममें वर्जन (HI) याहुआ कर्म (म) सांभरि । जीवनमा । स्व. हायकी अंगुटिओंके आगे देवताओंभाती है। दयात्रा () हो मात (गति) मनेन । या+ का रियाह । तीन प्रकारको भूतों की रचना (5.)" पून २ र । मिस्से पर घटता है।शरीरी गम्बन्धी प्रादहोम आदि (नि.). rer मापन । भोजन । अत्र मारियाना । तया (प.) देव जानाति । chरपला मरण (मौन). दिदी-ft,(d) (टेग्नं ) साति (जाति) e+ (उत्पत्तिय समय) माश्मि जानता है 6. हमःबदा रन दिया जाना है। और पासा । ज्योतिर्विद । ज्योतिषीय मामि १२८पर दवाजी निधि (ज्योती)। ताकरे जानेवारीची (श्री.) भीert. पा, (पु.) ६. । देहरा सार (भगल)। मरामब. रामपादिन, (पु.) भग्यतया परत । (थापा) । मायापीन. मा. दिन, (f.)नि यो नि। पावसा । मा"ए नरभिमान बनाए. देवन, (पु.) गम भरमान (HI) र,(f.)(2....)(३), - Cine.ki. गरी (. । ॥ .

(दीपारिक, वो । टापि पन्धम्. देपसर्ग, (पु.)देत (सम्यगणहत ) सर्गः। ( सोरयमें) दोगमाहिन्, (नि.) दोषान् एव गृहाति म गुणान्+म. गाखिरकी परि (भूतों की रचनामें), गिनि । जो दोषोंकोही लेता है गुणों को नहिं । दुर्जन । देशात, (मन्य) वे अतति । किए। हटात् । भवान "दोषमाही गुणत्यागी चालनीव हि दुर्जन.". कमे । भिरकीयसे. (दोपश, (नि.) दोषान् जानाति महादोषोंको जानता दैविक, (न.) देवो देवता अस्प+8 (क) देवता है। पन्ति । वात भादि दोषोको जाहारा लिकित्सक। भोंके गत में मियागया थार । देवतासे भाया । देवस- हवीम. म्बन्धी । देवताग (नि.). दोपत्रय, (न.) दोपापा श्यं । तीनदोष वात, पित्त, दयी, (बी.) देवस इय+भण् । देवता की । साविक प्रकृति । सख गुणका समाव । देवगम्बन्धिनी । देवताभासी । दोपा, (अन्य ) अन् । रात्रि । रात. "ईदी सम्पद रिमोशाय" गीता. दोपाकर, (पु.) दोषी (रवि) करोति । गो रात बनाता दवोदासी, (धी.) दिवोदासस्य अपर+अनाम् । दिनो. है। परपाद । दोषोय समूह। दोपोंका माधय । दाराकी सन्तान । प्रतर्दन राजा. कसूरवार. देव्य, (न.) देवेन कृतं देवानां इदं रायम् । देवसे | दोपैशक, (नि.) दोषे एष न गुणे एका हर पस्य । गु- प्रियागया । पाजो देवताओंग है। भाग्य । हिम्मत । णको छोड़कर जो केवल दोपहीको देखता है। सल। देवताका (पि.) नीच । बहुत राष. देशिक (4.) देशस्य इदं देशेन या नितिं ठत् । देशका । दोस-पा, (पु.) दर करना+डोमि । भुगा । बाहु. (म्यायमें ) देशसे कियागया खपरा कियाहुभा भेद । विशेषणसम्बन्ध | दोह, (पु.) दुहम्कर्मगि पम् (अ)। दुग्ध । दूध । "भा- देटिक, (नि.) मटं (भागधेयं) एर सर्वसापनं इति यस्य धारे पम्" दोहनपात्र । चोनेका पर्नन (भाग)। मति +टक् । भाग्यही सबका सपना है ऐसी रिवाया। "भावे धम्"। दोहन । योना. भाग्याधीनतावादी. दोहर, (पु.न.) योः (गर्भिणीतदपत्रयोदय) पत्र। दो, छेद-काटना । दिया• पर• गा• अनिद । यति । अदाद, निपा। जदो दोनों (गर्भिणी भौर सन्नान)मा हदय हो। दोग्य, (3.) इतृथ् । दुहनेहारा । योपात । गुबर । गर्भ । "दोहे (भाकर्ष) ददाति" । दामा। गर्भिणीकी वरा मटा । सोनेवासा (नि.)ी (सी.) गए. अमिलापा (चाह)। लालसा । विक ( निशान ) और ग. दोर्दण्ड, (पु.) दोर्दण्ड इव । (लंबा और कामको सिर भका लक्षण (न.) । “पृ• भौर" "दोहदम्" यही पारनेहारा होनेसे) भुग (ग) मानो रंग है। अर्थ है. "भुजदः" यही अर्थ दोहदिनी, (बी.) दोहदः असि अस्पानि । जिसका दोर्मूल. (म.) (न.। भुगका मूलाधा. गर्भ हो । गर्मिणी । गर्भवाली । विहरया।दोहरवाली. दोल, (पु.) भावे पम् । धीहष्णका दोउनका उत्सर । दोहनी, (श्री.) इनतेत्र । आधारे स्युत् । जहाँ धोमा दोलयात्रा । दोलोत्सव । कृष्णको झूलने में मुलाया जाता है. जाता है। धोनेय पात्र (दोहनगर). दोला, (सी.) इम्भ टाप आया। (गेटो) । दोहा, (डी.) एक प्रभरका मात्राछन्द है (प्रायः भाषामें प्रपरकी सवारी । बाग आदिमें खेलने के लिये दोउनयत्र बाता है). (एलने की कला) पींग भादि. दोत्य, (न.) इतम भावः धर्म म्यम् । एतका होना दोलाधिरूट, (वि.) दोल्प अधिसः । पडेपर पस (सपना) दा उसय सम. भा. दौर्मागिनेय, (पु.) दुभंग्पमा भरपा (एस)। इनर दोशिखर, (न.)त. भुगी चोटी । स्कन्ध । भादेवा । दोनों पदोको पति हो जाती है। दुर्भगा (पतिने धामोश. मेहन करनेवाली) श्रीध पुत्र. दोलायमान, (नि.) दोला भामयते। अपशान । दार्मनस, (न.) इर्मनसो भाषणम् (य) पहिली कर्नाहुआ । हललाहुआ । दोलापत्र (पर) पर चरा वा भीतर का एक कारणोंसे मरना दोरम (वभारामी) हुमा. रिय विमानाशिक विन्दासे पबराहट. दोष, (पु.) दुष्पम् । पूरण । ऐर । पाप । गुनाह । बात, दीपारिक, (पु.) द्वारे नियुध । सन् (१०) जेपर पित कर, तीन दोष । (भलंकारमें) इस आदि बिग छगाया गारपाल। परसार प्रतिहारी (बी.) नेहारा इष्ट राम्द। (भ्यायमें ) राग, देव, मोह, द्वाररक्षित.

स पावर, (.mm.the दोमुत्र,] (२६.) दोकुलेय, (त्रि.) इण्टम्प मालम्पदा (एव) । यत्न, (न.) वति (स्यन्दत। निन्दितानने पाटे रान्दान या छोटी जाति. वहनापन, बहनेका कारण पृथिवी जल मेहेरने वाला एक गुण (न्यायमें). दाहिन, (पु.) इतिः अन्य+अन् । दुहिता (एडी)का | द्रवद्रव्य (न.) दयनीति दवं कर्म । पूरा सायदोहतरा दोहना. भादि वहनेसाठी चीज. घायायियी, (प्रो. दि.३०)ीच पृथिवी नसावा-यन्ती, (धी.) g+शतृ । नी । सदए । देशः निवदुर सर्ग पूपिका हा नाम । जमीन- पी. द्रविड, (पु.) एक देश । उम देश के मिशन।। पु. (पु.) विहिर • हनः । ममि । सूर्य । भाद्रविण, (न.)नन् । पित (पन)। ग का दरन । मात्र । दिन (न.). पुर, सभा नमाग । न्या. भा. मा. सेट् । दोतते । द्रव्य, (न.) तुझ्यत् । पीतल । धन । सो भदुदर-मोदिर. (चंदन आदि) पाई । सास । पियार पुनि दी, (4.) पुरस्दन पा गए। शान्ति । दशोमा । (न्यायमें ) पृथिवी आदि ना । (म्पारमने) । कि जिमरा शि और मध्याने मन्वय हो। पुगति, (.) ६१. दिना परि । सूर्य । माकन विचारः" क्षय मिकार । समयदी (h. "सी". द्रव्यपरिग्रह, (पु.)दयम्य परिमाः । पत्ता पुर. (3.)मिनी । म+। धन । दोलन । अधिकार (टेना). कार. द्रव्यसंस्कार, (पु.) क्यम्य संस्कारः । । पूर(.ins भा। पारनेरी रोउ । रेता। की पुदि (साई). दयोध,(पु.) यम भोपः । व्य(पापड. पकार(.) T+ट । पागे भाविकी । सारमा । “दुर" "प्यार" | एन्य, (नि.) रा+तव्य । देशने योग्य ( •ixTT(स). पामा, (.) (सायं का) पूर्णिमा । जाडी | EP. (नि.) नृत् । विचार र पूनः निर्णिमा । भरारी पार)। माशी (गवाह) दमनेहा दा, मरागोना । भागना मा । पनि(.) नियम । मादी fruttratभार नाला. हार (अन्य )बामाको मासि २.(.) । वाम्मनात. दास, पहना । भ्या- पर. म. मेद If न, (..) () प्रामा।।। महान द्राक्षा, (.) नि. antar दोन्न, (प.) राम मनमा लान हिममगाम १४ाराना दाधिमन्, (.) गभर मात एम-(२.)द अग। म । म अमन । बना rriangrमामी. द्वारिष्ट, (2.) antar rn नाम... मेरामना mere bre (FT) द्वार, (.) मेग (" का समूह. xिy ..:.IN:(r) 14.(2) . 1 .. २ दाइ, आगना । भ्या. भा. भसेट् । दाहने । माहिर होद, (पु.) E+पम् । भनि चिन्तन । दुरा सोरन। जाना।भा.पर.सा. अनिट् ।सी।सद, र दुस्मनी. छ. (पु.) पनि जणं । शिया । मो ऊपरपो रहता द्रौपदी, (बी.) हदय मरर को दरमा सारतापायावी. कन्या पाश्री. दुषण, (पु.)न्ति भनेन । नकरणे अप् हसः इन्द्र, (पु.)ोती राहानियतः । दोषार पुर। जित्ने पक्षको मारते हैं। गुगर । पुन्हाग । हुए। निपा- हम ( भेद-गुकिमा)ला (म) मा पारगुरागण । भूमिरपक (पा) मिथुन ( जोडा) चीपुरमा प्रयोग (मेगा)। ।हर, मदन । दुबकी मारना । भ्या• पर• एक. सेन । द्रोगति. (साई) । एकसारदीमगे। गमन गुण, रेशवरना । पूरा पर• सक० सेट् । हुण । महो- (जिसमें दोनों पर प्रपन रा है) छीतरम. गुणस, (त्रि.). इस दीर्पा माशिमा भय । जिसपी पक्षक (गर, (पु.)ीभर समन मो. रामान संधी मारिका (नाक)ो। संबेनामवाटा जन पर रिचरता है। वरपर. दय, (न.) अवधी भरमा:Mr. गुणी, (बी.) gण-कदी (1) काटाम्पुवाहिनी । एप दादोजी पाया। "." fram पारमा जिएगे मेहमसे पानी निकाला. (नि.). सपी । (पीपी) कर्णजयंका पानरा. मा.(मा)स्थ, (पु.)Rirmirrt- रागिरा. राजेपरntirer । हत, (३०) इति कार्य । हुक । अपरयो पता है। (1) स्थित". पजादी मारना । गाना भौर बसाना । और जल्दी। (म.) सीतापाटा (जिसे जल्दी से)। पिलाभा । सापत्यारिदात्, ():- पवारियागेजिनाम- भागामा (त्रि.). स. दुपर, (3.) चन्द्रसमे युधिष्टिर बादिरा धर (गौरा) हास(a) ना Raman. एसराजा. महारा: सिरे ratr.hot. एम.(पु.) (क) अमि मस्य+म लील्य । सला पारिजानापुमेर. द्वादबार, (पु.) roon (m) aafri भनिटरिन्तन पुरा रामालारना । दिवा• पर.बर। बाररररर. इसीभारादिता-रोग्याग. मासनेत्र, (पु.) rt wम्य I fee हरिण, (पु.) मनन् । जान बगर बनेहारा। व रोएसवान नr re पगंगापार शुर. पी । कामना करना । डागारना । मा.प.मर. मादरमहरा,(पु.) In Mat ww.m ऐरोकते. सम. ITrek । सोना । मा. र. भा. भनिर । दाया। Breme दातारमन्, (5.) मर)। । द्रोण, असा । भरा र एक रो। nिe होगापा मा । TRE (IPC) जापर,(.) ktminews. ... सरकारदसmaker म्। tarPravart (प) Tran (तल.) सरtage (PAR).me. Wednt. रिसरा. मोखापन, (.) पर (R) Pामपाल, (.) * . . PRE दोषि- () Re nा. (..) Erokenar care Pramremeren (Referre Arclerina Mir tert. 1 - . - Hero.frrein विप्रा बादाण. होताद) टारचएमवार | डिमारक, (पु.) मातरो मम्यागि रों और सामुदागे पालन . दिगगमन, (..) द्वार,] (२६२) द्वार, (न.) ह+नि अच् । पर यादिसे निकलनेत्री जग जन्ममात्रमें जीनेहार नीच ब्राह्मण, क्षत्रिय और के है। द्वारपाल । दवांन । उपाय । वसीला । मुख । तजवीज. | द्विजराज, (पु०) ताटन् समा । द्विशः द्वारका, (प्रो.)द्वारेण (प्रधनद्वारेण) कायति । का चन्द । चांद। अनन्त । गरदा पनि राम, अच्छे दवजिने शद की है। समुद्रके पास एक दीर्थ द्विजयर, (पु.) द्विजेषु परः । द्विने थे । है। "द्वारावती" यही अर्थ. द्वारकेरा, (पु.) ६ त. दारकाका सामी। श्रीकृष्णदेव. द्विजाति, (पु.) दे जाती (जन्मनी ) यम्।। द्वारप.(त्रि.)द्वार पाति (पाति)। पाका वाजेची रक्षा दो जन्म है)। बामग, क्षत्रिय और वैस (हन्द करनेहाय । द्वारपाठ । “पाल अणमुल् व” यही अर्थ. द्विजित, (पु.) जिड़े यम्य जिसकी दो दवा द्वारयन्त्र, (न.)त. वांजेकी कला । ताला (जंद- (सर)। सल (नीच ) । चोर । साम ।। पालक उसे यग्नेहाण) (त्रि.). दापयती, (प्रो.) द्वाराणि ( मोझोपायाः) सन्ति अस्य । द्वितय, (नि.) दो अवयवो अम्य । विभाग मनु-दीपः । जहाँ मोसक उपाय है । एक तीर्य । "द्वार +अस्य उन्"।"द्वारिका" यही अर्थ. तयप् । दिन्यसंख्यान्वित (दोकी संस्मय) मारिन्, (वि.) द्वार (पाल्यस्वैन ) अनि अस्पदनि । द्वितीय, (वि.) द्वयोः पूरणः । दोको पूरा करने संख्या (न.). जिने दरवाजेशी रक्षा करनी पड़ती है । द्वारपाल । दूगण । दिदीया तिथि (पुत्र) (सी.)। "भर द्वारिंशति, (सो.) पधिका विशतिः । दो च विशतिय द्वितीयारत, (नि. ) द्वितीयं कृता । दूसरा हिस्सा. मार्गदो अधिक वीग । वादो और वीग । बाईम । बाई. नि) 4.1। द्विश्वसंख्या । दोी गिन-विदत्, (नि.)दो दन्दी अम्य । दन्तको सो दोवार करके गेंचा गया। दोबार सेंचा गाग हिक..(पु.) हो को (सगरी) यत्र । जहां दो ककार है। ययामि । दो दांतोंसे पहियानी गई उमरान है। कन्"दोषी मंश्या ।दो संख्या- दोतवाला । ल आदि । नियां और दिदैय, (पु.) दो देवी अस्य+अम् । विगळे हो द्विपुर.(पु.देशादे सम्य । अन्यलोरः । जिमके विशासा नामी नक्षत्र (तारा)। इसके इन्द दोपार () हो।। ऊंट उंट, देवता है. निगु (पु.) मारणमें महागया एक रामाय (निगमें | विधा, (अन्य ) विचार । द्विान् । हो । दाद पहिट रहता है)..। दो गौओं दोतरहसे. मन (रि.). विप, (पु.) द्वाभ्यां (मुगगयो )पिकीय जिगुर, (वि.) सदा मुख्यत । गुण+पत्र का दौसे (म और म) से पीता है। पास। विपद् (पु.) पदे यय । विमानो हिगुणारत, (नि.) yिा टं। स++। या देवतापशी एवम | पशि. पा र संदगा। देर मेगा (47) गया विपदा, (श्री.)दी पादौ अन्याः ( पारो पर न. ति(पु.) सिं । अनाकर उन्मता है। नाम (गि दो पार होते है HIT दिनोंदिन पी (मार. से)मा मम्बार या गया परामर. frix (::) तादो पर अमरो मुल, (पु.) मुझे यसो गर । Frthri. मुमाला (त्रि.). त्रि,(V. या सिरोयदि (यण । रिमोट १३. पा(नोर्ग)। हाला(f.) पि.) feaf (स) RES . 1 [पण । दुस्मन. दरता, (नि.)दिर । (विषाद-मगहा) मिनीपयत्। (दु.) द्वौ अनि अन्दरको दो। दोधार भोलागया । दोवार बदागदा । (म्याकरणमें) दीवाना नद (पा दां) । समुद्र । रमन अभ्यस्वदावाला. (बी.) सी. दरुदा, (सी.) शिकार छदा । बहका दोवार विवाही-दीपिन्, (पु.)दीप भयो । ई-पडी (मि) गई दी. धर्म । सद्भसि भम्यहनि । जिम मा जिते। दरेफ, (पु.)नी रेपी (पाचकनानी) यस्य । जिसके नामको चौता । वाय । एक प्रकारका पप (मेडिया) बतानहारे दो रेफ अर्थात् "कार" है । भ्रमर । भीरा. पचन, (न.) दो दकि, दीवा उप्येते अनेना, संदरण । हरिनामा परपक पनि । दास रहता है या दो मिस्टे रहे जाते हैं । (व्याकरण) उधा, (अन्य ) दिप्रकारे पए हो । दोवो बतानेद्वारा प्रत्यय. दो तरह यार्षिक (निः) इयोः पर्वयोः गवरम् । दो पाप, (पु.) पिम् । विरोध । रासी हुआ। दो परमके चावल आदि, मेदाफ, (5.) को हो यस्य । जिगके दो तुर है। गोदेषण, (वि.) दिप युन् (गर) हुन्न भने प्युदर (म.) बारी, भैग आदि. देशस, (भव्यय) को दो ददाति करोतिमा। दो मा हेप्य, (नि.) दिया () मन र भाव है।पोवार, गुणिश, (नि.) गुण । ओ दुरामा सेमेषो सगुनना। (m प, परकरना। अदा. भ. राक अनिट् । टेरि-मिरे । जीनेवाला Arjपि । पार भरिस-अद्विक्षत. (म.) या नपक्ष, (पु.) दिपात । और कर्ता हुआ । पाहु । मेदाला की ""रम देपन्तप, (पु.) पतं तापयनित-पि-पन्म्हा नियन, (म.) (ग) को (नि.) समुच जोपाएको तपाता है। माओका ता. महारा. दोनोगते,और एV देश, (नि.) इयोः पिष्टक । याय पत्त । दोनोमें टहरता यादिन, (वि.THER AR दोनों गायोग आदि पदार्थ पर बोहमा RNATim मिरर (सम्प)R+गन् । दीवार कीगई किया। दोबार. साति, (t. ) समिका साउदी च समातिय वाघ, (म.) orat मुत्र । नेपालि भात. म भाय। दो करर पत्तर वा दो और शतर । हत्तरी (.) ferter (HEE मेहस्य, (वि.) रहेन एम् ।।शेवर इससे दी RArtant nxn रोषा गारोवार हलो खेगा भात (त्र). पापन, (पु.) (स ) ar arr नदायनी, (बी.)ोनी (योमा) | जिस- दमः । स Antarrtoon की मार दी। दोरी गो. देशोch नगरपया, (डी.) माया । जिप दोtiमातुर, (.) . ARIA rani(भानाम) सन्ह saagri. दारिद्रपात (पु.) rat (मेन्दिरो) गमाल्देिशाम यो । जो रोमों (घर), (..) () nee HEARTrt() से है . Keep mar ( ता. (म)मा (within.. कोप, (.). wr.AMRI tutti नेनोसामुसार, (:.) (स) Rs. NERArth Tre. पर art योको फूंकता है । धतूरा. - । | घनुबंद, (पु.) धनुरः वेदः। यदय टार' पकानेदारा (पि.) चारधनुर।दरसोर धन्य, (पु.) पनाय दितम् । धनके ये दिशा- अमरसादाप्यागरहनेवा: मावा पुण्याला पन देनेद्वारा नीतिला भाने काही पन्य माननेशलाजोr घर(.)नंटर.म.बीहानेशटा पम्यवाद,(पु.) धन्यवधरंगन । धम्यार (.) पमि.IN न(1.) (१.१.नादनप्रन्यन् (नि.) पयनिन् । बदरी" ...] ( २६४) घ धनाधिप, (पु.) ६ त.। कुबेर धर्नोग्र मात्र ध, (पु.) धे-धावा+४ | धर्म । फुयेर और प्रशा । धन धनिक, (पु.न.) घनिवत् कायति । मा (दोलन) (न.). समान शब्द कता है । धन्याक (घर) 'धक, नाशकरना । दुध उभ• सक० सेट् । पश्यनि-ते । (दासत ) (पु.), "धनं विद्यते अन्य दे। सदपकत्-त. पार धन हो (घनी-दौलतमंद)। घट,(पु.) धन अन्यान्तादेशः। तुला । लकडी । तराज् । पंकजा देनेहारा (त्रि.). दिव्य प्रमागरूप एक प्रकारकी परीक्षा। ७ वी रागि. धनिष्टा, (खी०) अतिशयेन घनवटी । घटक, (पु.) एक परिमाण माप (४१ रतिम होताहै). लोप होता है। बहुन धनवानी । माने 'घण, ध्वान । शब्द करना । म्या• पर० सक० सेट् । धणति । नक्षत्र (तारा). भधापा-अपनीत. धनुगुण, (पु.) ६त. नुप्या गुम (arthi धत्तुर, (पु.) धयति धातून् । घा+कर पृ.। जो घानु. चिहा. धनुग्रंह, (प्रादः) (पु.) धनुः शाति धनुर (5 धन्, पानीको न्यन करना । जुही. पर• सक० सेट् । को पकड़नेवाला. दन्ति । अचानी-अपनीत, धनुया, (घी) घनुपः ज्या । धनुनय विन्दा धन्, रस । शब्दकरना । भ्वा० पर• अक० सेट् । धनति । धनुर्धर, (पु.) धनुः धारयति । अन् । शेर अपनीन्-अपनीन्, पकडना। यानुक । दीरन्दाज । दीर बदने धन, (न.) पन्यम् । वम् । अर्थ । दोलन । धन । मेह। धनुर्विद्या, (सी.) धनुषः विद्या । धनुपी है। शिकारा धनिष्ठा नक्षत्र (तारा). धनवय, (पु.) पन जयति । जिस मुम्ब । जो शान कि निगमें रान और अन्न वने मार पनको बदला है। मन । बहि ( आग)। एक हायी। करनेहारे मन्त्र पाये जाते है. रनेवला शरीरका बयु (पेटको फुटा देता है)। धनुदिन, (पु.) पनु यनि । अनुपरिक्षा को घनद, (.) पर्न दमते-दै पाटन-बचाना । जो धनी धनुष्याण, (त्रि.) मनुः पाणी यस्य । किो माना है। मेर। हिवर वृक्ष। "दा+क" धनके नेहरा (त्रि.). पनदण्ट (.) मनस्य दादा पनका दाट (सगा)। धानुष्क। तीरंदाज. घनदानुवर, (पु.) ६.। धनदा अनुचर । यश / धनुम्, (५.) पन्+उनि । पिपला ! (कप्रदेटा) (वेर यो राना होन). राशि (न.). घनदानु (पु.) १. कुन होटा भाई रायग, धनत, (पु.) परम्य पतिः। पना मामी (मासिक). धनपाल,(.) घनं वासयति टा.म.पनय पान सार. पनन्द (त्रि.) धनेर मदाय । धनने मन होनेवाला। हितरी । घरे धारण (नि.). अभिननी. एनर, (.) धम्मदापना. पनाय.(पु.) पनग पर । पाय(वर्ग). मायवन् समानता है. र गुमाग. पा, (.) पन मायः । धन यश RErirg - - धनुर है. धनुप्त्, (पु.) पनुः मसि भयars धन्यमन्य, (नि.) मात्मानं धन्यं मन्यते- - (foret).

न्वन्तरि,] (३६५) [ धर्मनिषि, . " धर्मका स्थान. चलन्तरि, (पु.) धन्यन् (शिल्पशास्त्र) तम्य अन्तं धर्म,(पु.२०) स्मन् । जो (नी-साररूपमें बहे जाते. इयति । अन् । सिरपशाय । ( कारीगरी) विद्या को) पकड़ता है। थुति (वेद) स्मृति (धर्मशास्त्र) में का अन्त करनेहारा । स्वर्गग एक वैद्य (हकीम जो समुद कहा गया कर्म । वर्ममे उपजा गट (शुभ या अशुभ)। के मयन करनेमे नारायणका भरा प्रस्ट हुआ)। दिवो भात्मा (देहको धारण करनेसे) जीव । आचारसभाव। दास नामी काशीग राजा । विक्रमादित्यकी सभामें बैठने उपमा । या मादि । अहिंगा (किसीको न मारना)। हारा एक पण्डित. न्याय-उपनिषद् । यमराज । सत्राश । धनु। (ज्योतिष) बन्धी, (पु.) धन्वं विद्यते अन्यहनि । अर्जुन । काभका स्मसे नवम (नवा ) स्थान । दान आदि (न.). दस्त । दुरालभा । और बकुल । विदग्ध । चतुर । धनुष | धर्मक्षेत्र, (न.) धर्मका क्षेत्र । (सान ) । कुरुक्षेत्र पपड़नेहारा (त्रि.) (जदों कौरव और पाण्डव पुरका पोर युर हुआ)६त.। घम्, शन्दकरना। तुदा०पर० राक सेद। घमति। अधमीद. 'धमक, (पु.) धम्बुल् (क)। फुकनेहारा उद्दार । धर्मगुप्त, (नि.) धर्मःगुप्तः अनेन । धर्मकी रक्षा करनेवाला. लोहार. धर्मचारिणी, (बी.) धर्म (दाम्पत्यधर्म) सी 'धमन, (पु.) धम्यते अनेन । धम्म्त्यु (अन)। नल। घर+णिनि । जो धर्मको कर्ती है। भार्या । जाया । (बी.)। धौंकनी (फंकनी ) के धौने (फुकने हारा । क्रूर । (बेर- ओरू । एक लता (बेल) - हम) (त्रि.). धर्मजिज्ञासा, (श्री.) धर्मस्य जिमगा=(वं इका) 'धमनि-नी, (स्त्री.) धम् अनि वा गैप। नाडी। शिरा । (स्त्री०) धर्म (नियम ) जानेकी इच्छा. -1 श्रीवा (गर्दन)। हल्दी. धर्मदान, (न.) किसी प्रयोजनको चित्त न राके धनं. धम्मिल, (पु.) धम्+विच्+मिल्मक-पृ. । संयतकेश । धुदिसे जो वस्तु पात्र (योग्य पुरषो जाय. • पंधेदुए थाल । मध्यमें फूल रखकर ऊपरसे मोतिओं वा धर्मद्रपी, (श्री. ) धर्मजनको द्रवो यम्मा । बिरामा पहना और किसी भी लडिओंमे बंधाहुमा वालोंका जूड़ा. धर्मको उत्पन्न कर्ताहै।गया "मदानी" घर, (पु.) +अच् । पर्वत (पहाः)काओंका राजा। धर्मभ्यजिन्, (नि.) धनों पर इस अति भयानि । - पोंमेंसे एक । कागिसूस । कपागका सूत्र (धागा पा तार). जिमका धर्म पाण्डेको माई हों । जीपियरे लिया धरण, (पु.) + (अन) एक पहाड । लोक । आदि रराने हारा. गुग । पान । मूर्य । सेतु (पुल)। चावीरा वा दर धर्मपती, (बी.) धर्मा पत्री। धर्मो दिये ली। पहले रतिओंच मार. विवाही गई अपने वर्णखी।कीतिरपीगी। -धरणि,(पु.)+अनि वासी । प्रथिवी (जमीन) वनका मेधा । निक्षमा. कंद (बी.). धर्मपुत्र, (५.) ६ त.। धर्मका पुत्र । युधितिर. । धरणि(णी)घर, (पु.) परणि(णी) धरति । अन् । पर्वत। धर्मपाटक, (पु.) पर्मस पारस पतधर्मको (पहार)। विष्णु । और स(सपूमा अनार). पढानेवाला. परणिपति, (पु.) धरण्याः पतिः । पृथिवीरा पति धर्मराज, (पु.) धर्मम्म रायटन् । पर्म का एस। - (मालिक) राजा. यमराज. धरणीधर, (पु.) परणी पारयति । पृषिधीको उटाता है। धर्मराज, (पु.) धर्मेण राउवे+अन् । धने होभा वादा शेषनाग । विष्णु । पर्वतापहारका राजा । दिग्गज. है। "धर्मस्व राजा र राम-" धर्मग रास । धरा, बी.) +अन् । पृथिवी । गर्भन माराय । (पीच. समरा और युधिरि. की जगह) जरायु । भेद (पी) को डटानेदारी ना. धर्मलक्षण, (न.) धर्मो र भनेन । दशहर। धरारमजा, (सी.) धरायाः भामश। पृथिवी पुत्री। जिसे धर्म पहिचाना जाता है। पति, क्षमा, २ सीना । रामभाया. पोरी, बोर, इन्द्रियों रोना, पी, निमसर धराधर, (पु.) परी पारसति । भव । जो पृथिवीधे धनरमा देदम. पारण पता है । पर्दन । रिण (परर-समरसर). धर्माद (पु.) पम पद धरि ira घरामर,(पु.) धराया भमरा पियापर मनों देवन है।मण | "भूदेव"मदिनमी सी बदा. धर्मरिधि, (३) माघमा धरित्री, (पी.) पम् । र । भिवी । भूमे नीर. पप.१४ ।

नाम "भारेम"RAM पदा, (२६) धनंग्लिस (5.) सति निकोना। धम्य, (नि.) धर्मर सनपेतः, ie धर्ममे न एटाहुआ । या धसे पाने पगार, (.) र न्। धर्ना धर्मसे साभ करनेलाय. पर मेरा मात्र मनु दिने रसभा सी. धर्म, (पु.) पम् । प्रगम (र!" धमाल (वि.) पतं सो मा . (पुरमा)। शातिपंथन (ता मनाना है। कि रारा. (मेत मनमा)। हंगा(मारना ) प्रमान, () मन (अमरारमेन) धर्षण, (म.) मारे गुर (अन)। सन्दासपोर करके पो निषा करना। करना ।ममा करना)। "कमेनिस्तु"t "मम्मे ने गुगे" गीत । वेदमें (पिपारेके मिनेही गातिर सकता रोगकरना. धरित, (न.) भावे सामान (भोग समय प्रदला. मात्र मा-बारपिता "मनिक" ।ग (भमान Break कियाहुभा (नि.)। भगती थी (नरप net Hोजन करनेद्वारा पत्र. गी। गाना । भा. पर. रा. . (1) गमे (37)र. धन्नति अपनी (7.) (गुरु)। पर, (पु.) की धुनोती पुनी परि (मालिक)। Aftrust (नागा भाभी PETIT.) पपर. .(.) (A) निगा | भाप, (पु.) गो (mm) Aft II rulant है। योगी पी गानेदाग. मग मी . ot.)। "ET रंग ()लो गाल और गुजर ( trufterarma मोदी गो (बी.). • ! ) ETMT धमालगा. (T. ) It गन ।' TASTEडा पर है। हंग- ITTER/ना पर ** { !! anite | पगादतिका ( श्री. ) . 13नी atit महीम wrrire -* Mait(T)चपदोलण, (म. ) . । गौ म ।' fuसनेमन. धषित्र, (.) (1) मादेन Hit ++ + + are my' मा, मनापोम नाना- .... Team urg. (T• ) 4g ! 41 mins (.." Rai). " Network m

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धारागृहम्,] (२६८) यहुत बर्गना. धारागृहम् , (न०) पारायाः गृहम् । छमाछम पानी परीने धावित, (नि.) धावक । शुद्ध किया गया। का पर । भुआरेवाला घर (नहानेका कमर). हुआ भागा हुआ. धाराट, (पु.) धाराधं अटति अच् । जो (मेघकी ) धा-धि, भृति । पकाना । रसना । तु• पर० सा. राके लिये घूमता है । पपीहा ( चातक)। घोडा । वाद- धियति । अधेपीत् (सं-के साथ इसका अर्थ लमत्तगज । मल हाथी. करना) धाराधर, (पु.) धारयति । णिच्+अच् हसः जिसकी धिक्, (अव्य० ) अनिष्ट शब्दोंसे भय उपजाब धारा होती है। मेघ । यादल । मेह । मी। मौह. धारानिपात, (पु.) धारायाः निपातः । पृष्टि (वर्ग) ना। निन्दा । "धिर धिम् शक्रजितम्" इति । का गिरना। एमाधम भारी पष्टिका पडना. निन्दाके लायक । छिः, शरम, शोकके अर्यों में प्रायः द्वितीया होती है । "धिक्ता घारावाहिन्, (त्रि.) घारया ( सन्तला ) वहति । यद्दन मदनं च इमाच मी च". निनि । जो निरन्तर बहताहै। निरन्तर गिरनेहारा । धीरे २ लगातार हो रहा । "साथै कन्" "धारावाहिक" यही धिकार, (पु.) धिक्++घञ् । तिरस्कार । अर्प, बेनती. धारासम्पात, (पु.) धाराणां सम्पातः (पतनम् ), धिकृत, (त्रि.) धिक् (निन्दनीयः) कृतः । (पानीकी) धारीका गिरना । महादृष्टि । यडी वर्षा। निन्दाके मोम्य कियागया । निसित । शि- तिरस्कार कियागया. धारिपी, (मो.) u+णिनि । जो धारणकरे भूमि । धिक्ष, सन्दीपन । जगाना। रहना । राम । (जमीन)। गिम्यला पेट. पारिन्, (पु.) मिनि । टोलका यश धारण करने- धिषण, (पु.) धृष्ययु-धिका आदेश । ' अर्थमें अक• भ्वा० आत्म• गेट् । धिक्षते । बारा । आगरा देनेदार । पचानेहारा (नि.). धाराष्ट्र, (पु.) साराष्ट्र (पुरानदेशे) भय अण् । भाएं राजावाले देश हुमा । अथवा गुरामनाम देश- धिपणा, (सी.) भृष्णोति अनया । एक्यु-वि में शुमा । एक गोर । एक हंग (निराधी चोंच और देश । जिस्से धीरज और यहादुरी कता है । युधि पण (प) काले रंग के हो और शरीर विधा हो)। धिष्ण्य, (न.) ५+य-Bि. 1 स्थान । जगई "परराष्ट्र भयं"। धृतराष्ट्र की रान्तान । दुर्यो. पराशक्ति । ताकत और तारा। अमि-आगा घर मारि. रकी आग। और शुक्र (पु.) ऊंचे पदो योग्य- पार्म, (नि.) धर्ममम । धर्मरोधी । धर्मशा. घी, अनादर । रामाल न करता तिरस्कार करना धार्मिक (4) धर्म यति (रालतं अनुशीलयति । करना । रोया करना । दिया भाम. . रहा जिसन निरन्तर धर्मही करनेच अभ्यास है। यते-अघट । पीन.. धर्मसीला धमाधमलाधमो. धी, (पी.) कि सम्प्रमारणं य। पुति पाय, (न.) म मावः प्यम् । टीटपन । निरंचता। शान । गीला रामरा. बरामी. भार. पटना मानना था मेरा और मुदि। पीति, (सी.) +छिन् (नि)। पीगा। भूगल गरण ना. मा... मेरा धावते । मधा. स। (पैदर्भ) भगुलिये। भयाल । अनुरा। बेशमत करनागपालन करना. ("" "" आदेच हाना है तब पामा) धीन्द्रियम्, (न.) या, और with re पार, (.) (धोबी रंग- इदिय. र) Irma अहारा ।। भागनंपीमत्, (पु.) पी (प्रा) नियम सासा- artia) पदन, (.) मयूर न IEEPासपा नree at : मु. TH•m (य"म" देवताओंके गुरु.

धूिमिका प्रकारके गुग. . ६ (नि.) यिं राति (रा) धियं रियति (ईट | धू, पापना । भ्वा० उभ- ग. चेट् । धवति-ते । भधा. भण ) धीरजवला (हौसलेवाला )। नम्र (हलीम )। वीत् । अधषिष्ट अधोर. लाला भीर पण्डित । राजा यति । बुझिनो प्रेरनेहारा । धू, कोपना । पा पुरा• उभ• पशे तुदा पर• सक० सेट् । दिखा साक्षी (गवाह) और परमेश्रर (पु.) केगर धूनयति-ते। धुवति । अधुन-अधुशीत. म.) एक नायिका । टहरीहुई चित्ती वृत्ति (स्त्री.). धू, कापना । मा• म्यादि. उग• राक• घे । धूनोति. स्तम्, (नि.) धीर चेत. यस । ३० स० । धीर घूनुते । भुनाति-धुनीते. चेत्तवाला । पक्षा। हद धीरजवाला. ता, (स्त्री. ) धीरम्प भावलल् । धीरपना । हौसला. धून, (नि.) छ । कांप गया । चलागया। पंगा किया- गया । छोटा गया । जुदा कियागया । शियागया. प्रशान्त, (पु.) पीर. प्रशान्तश्च । कर्म• रा. धूप, दीप्ति । चमकना । पुरा• उभ• अक। जगाना-रा. केसी काव्य वा नाटकरा नाययः जो धीर भोर शान्त क. मेट् । धूपयति-ते. भाववाला है धूप, सपना-अक• तगना-सक• भ्या• पर सेट् । धरायति. रोदात, (पु.) एक नायक (एक प्रकारका पुर). धूप, (पु.) धूपयति रोगान् (दोषान् वा) ५+अन् । घर, (पु.) दधाति मत्स्यान् । धा+वरन् नि । केव गुग्गल आदि मुगन्धियाले योसे निकलाहुआ धूम (धूओ) त । मच्छी पकानेदारा. उगका साधन ब. शक्ति, (खो.) ६ त• । शुभ्रूण ( सेवा) आदि आठ धूपित, (नि.) धूप क पा भाया अभाव । मार्ग आदि चलनेसे धान्त (थका) हुआ। सन्तार दिया गया. सख, (पु.) धिय. गा । टच्ममा• । धमाल | धूम, (पु.) ध+मक् । गीली लगदीसे उपजा मेप और कम- (वीर ) दुखिरा मित्र. लवा कारण । आगरा झरना. मचिय, (पु.) मन्त्री-वीर । "धीगरा" यही अर्थ. धूमकेतन, (पु.) धूम फेतनो यसाधू निगका सदा चमन । कांपना । बा• उभ• राक• अनिट् । धुनोति. है ।धूम सकेनन । धूएंकी नाई अण्डा उतान(उपदव) धुनुते । अधीपीत् अधोर. रूप अशुभको बतानेहारा एक प्रकारका शारोगा समूह । इ, गन्दीपन । जगाना । रहना। भ्वा० था. राक• सेट् । पुश्ते । अधुष्टि. धूमयोनि, (पु.) धूमः योनि. अस्स । धूम जिपका कारण , (नि.) पु+। सोडागया। कांपगया । सक। है। मेप (पादरा) मोथा (गुनक)स.आग। चिना मित. पीनी लरी ने-नी, (श्री.) सुनोति पेरणारीन् । जो रेतभादिको धूमल, (पु.) धूम (धूमपाण) टायिक । जो कंगाती है । नी (दया). धूएंवाले रंग लेता है। काला और लाल रंग । उरा- 'धुमार, (पु.) पूरव राजाका पुत्र । इन्द्रगोपीना। थाला (त्रि.). (वीरपटूटी). धूम्या, (स्त्री) धूमानो समूहय । धूमय समूह । पूरा (-रा, (श्री.) भु+विप्-वा टाप् । चिन्ता (फिकर )। साधन (दि.). रष आरिफ भागेरा भाग (दिरमा) । गारीका गुं और धूम्र, (पु.) धूम (तपूर्ण) । रा+क-पृ. । गधेके भार (पोशा). रोमकी भौति । पाला और सात रंग । उगवटा (त्रि.) उधर, (नि.) पुरे भारी । ५+गिन्+पद्मुम्-ह- मिल्दक. सध । भावराहक (बोहा उटानेहारा )ल शादि। योझा धूप्रक, (पु.) धूम इस अति । । छंट. महानहारा धूम्रलोचन, (पु.) मे रोपने क्या जिगके नेत्र मिले रीण, (नि.) पुरै बद्दतिग 1 बोशा उटाता है। धेठ । हैं। सर (रस्तर)। महिषासुर नामी एक सेनाग पति (मासिक) य, (वि.)पुर बदनियत् । भार घटानेहारा । भक्षा. धूम्रपर्ण, (पु.) धूप वर्णः सम्य । विगा निगरप प, हिंसा मारना-या• पर• गर० सेट् । धुर्वरि । NY. है।गिरा और लग से पैगरीत गाय मात् । धूल. (वि.) पित्र, (न.) पुत्र । यज्ञ सादिम आगको (अक्षण) निका, (पी.) भूर वर्ण सारे असि सम्पादन (५५) गुडगाना. ६..आग. अच्छा. टारा सांस निकलावा. परवी आवाजसे , मग गाणे. ध्मा, अग्निमंयुन फूंकना । ऐसा शब्द करना कि दि धूर, पप । मारना और जाना (गति)। Nिer. This Iraniforn सेट् । धूनि । अरिष्ट । भू:. धूटि, (५.) वट-संचात ( होना) । गार. (Fr. ) TRI (टोक्यचिन्तायाः) जटिः (गंपातः) भा। जहा प्राम, (T.) (ri) the तीनो लोको चिन्ता हाय हो रही है। सिजीमहागत. from नीर गह धूर्त, (पु.)धुधिर वा । धनूरेका । और ए-नु, (मी.) Agri प्रकारका नायक । समग । जभा मेटनेहारा । मायेनुक(T.) (मन 1 (टग)(नि.). गुग्दरा गिनी (4.) "ने अनि धूर्तक, (पु.) धून ब (वगड )। अमेघेनुकरदन, (पु.) (ने) कन् । जो टगकी नाई है। गगाल (सिआर)। गीत. (मन)। हाणा" मन पर धूपंह, (नि.) पुरै वहति । यद+अन् । मारवाइक। योगा पेनुतुनकर, (गु.) नो. in RIF रटानेहारा । पुरेपर । "ह". जो गीले दान फसगर (गाजर) धूलि-सी, (बी.)। धू+दिक या दी। रजम् । पगग। धेनुया, (मी.) धेनु म परमहमान धूरी । धूल, (कनी नटाने) के हो उगम (चिन्ने धूलियज, (पु.) धूलिः एष पनः थय । घरीही जिग जाता है) घर के नौरपर गई मी. का संहा है। वायु । हवा. धनुफ, (पु.) धेनूना समूदा । धेनु धूसर, (पु.) धूसर । गर्दम (गया) । कंट । कबूतर । 'तलाकार । निरारा साप तेली नाई हो । पाला, विधयं, (न.) धोरण भात +प्यम् ( 1 )। मनी । पीला रा रंगशाला (नि.). धीग्नासंगकारगर होने पर नी मनग्री धूस्तूर, (पु.) धूम्+किप्-तूर+क पृ• या हमः । धतूग. रहना (न विगाना)। न पश्यना. ध, पतन । भ्वा० आत्म• अक• अनिट् । घरते । अत. धेयत, (पु.) एस्सारी गडेमे निकटौडुरं स्थिति टहरना । अक० । पति-पटना-मकः । भ्वा० घोर, गमियानुयं । चालरी चतुराईमा पर- उम० अनिट् । नियते । अधुन. रोद । घोरगी । अधोरीत् । निन् । अदुधौरतून. धू, धारण । पकडना । पुरा• उम• राक. अनिट् । धारय- / धोरण, (न.) धोरति अनेन । घोरत्त्यु स्कुट ति-ते। अदीधरत-त. वा । हाथी, घोडा, गादी आदि मवारी (D धृत, (नि.) कि । कर्मणि । धारण कियागया। उठाया "भावे ल्युद"। एकप्रकारकी घोडेकी चाल. गया आभय दियागया । पहिरा गया।इसिमाल किया गया. धौत, (वि.) पा+क्त लट् । मार्वित ( सा धृतराष्ट्र, (पु.) एक राजा (चन्द्रवंशमें दुर्योधना पिता)। धोयागया। उत्तेजित (मेटाया गया)। और साँप । पक्षी. चांदी (न.). धृति, (सी.) छिन् । तुष्टि । प्रसन्न होना । पकटना । | धौतकोपेय, (न.) कर्म० । धोया हुआ । यो यज्ञ । भादवो योग । मुख । धारणा । (चित्तका किसी एक देशमें एकजाना ) । दुःसमें भी शरीर आदिको रोक- धौरेय, (नि.) धुरं वहृतिटक (एय)। मा नेकी शक्ति । अठारह अक्षरके पादवाला एक छन्द । हारा । बैल आदि. १२ की संख्या. धृतिमत्, (वि.) धृति+मनुप् । धैर्यवाला । इद । पड़ा। निधन । एक चित्तवाला । प्रसन्न । सन्तुष्ट. सक. अनिट् । धमति । अध्मासीद, धृप, प्रागल्भ्य । चतुराई दिखाना । सा० पर० अक० सेट् । मात, (त्रि. धृष्णोति । अघर्षात् । धृष्टः. फूधगया. धृप, सामर्थ्यबन्धन । तानो रोदना । बुरा• मारमा माई माकाहा चाहना सकः। घोरवा हरा अकः भ्वा० पर० सेट्-इदित् । माइति । अफ धृप, क्रोध । गुस्ना करना और अभिभव । दवाना । चुरा• ध्माव, (पु.) माक्षि+अच् । काक टम.पक्षे भ्वा. सक० सेट् । यति-ते। पति. ओंगे शानेहारा । और भिक्षुक (भीसमांगने । से उपजा कपडा. प्मा क । संक्षिव । मकान अक० सेट् । वर्षयते. (कोआ) (१७) नादर . पित, (प्रि.) मानिन्न । मम्म किया गया । बस्, गरि । जाना । विनाश । होना गिरना । भ्वा० भाल मक हो गया। पुंच गया। जलाया गया. अक• सेद । वंगते । “पला" में विकल्पसे दोदा ति, (नि.) य+या गयाल किया गश । गोवा गरा। पस्त, (नि.)पस्क । गिरपमा नट । नाश हो पर चिन्तन किया गया, चलागया. तिव्य, प्पेय (त्रि.) प्य+तव्यस्थत् । प्यान करनेयोग्य । घाइ, पाहना । इराना । शन्द करना । भ्या. पर. मोचनेलायक. सेट-इदित् । वासति । अवांशीन, निम्, (न.) पै+भाचे स्युट । रायाल । चिन्तन । ध्याह, (पु.) वाक्षि+अन् । कोआ। गली। सरोवधेियकी एकतानता. ध्यान, (पु.) वन्+पम् । शद । वाचाव. नियोग, (पु.) ध्यानस्य योगः । थ्यानका योग (• ध्यान्त, (म.) वन्त । नि । अंपर। भ्यास ) । गाद समाधि. धान्तारि, (पु.) • अन्धेरेका शत्रु । निस्थ, (त्रि.)प्याने तिष्ठति । स्थानका प्यानमें स्थित । क्षा चांद और आग. एकचित्त होगया. न 1, भ्या-प. प्यायति ।यात । दया। रिश्यासति । च्यायते। प्यान करना। रायालरना. न, (अव्य.) न धिना (इन्धन) - स्थैर्य-टिकना-पाहोना-जाना-चलना-मारना । भ्वा• तुदा- पेप (गेकना) "कियाके साथ कोरर (अभाव ) और उपमा । साली । टार ध्रपति भुवति । अपील-अभुवीट, (नि.) मोती (पु.) य, (पु.) भु+अच् । शंकु (एकप्रकारका फीत) । विष्णु । नकुट, (.)म+कुट्+अ । नाक महादेव । उत्तानपाइराजाका पुर। एकप्रकारका योग । भासाके आगेका भाग । माषेपर एकवाकी गोलापट । नकुल, (मि.) नाम्नि कुठं बस-- निष्फल सांपका बैरी नैवटा भूगोल के दोनों (टार और दक्षिण) केन्दों (सिरों) के ऊपर भाग। और एक तारा जो स्थिर रहता है। पुनः पिशुन." वासवदता। निधित (पवा) दलील (तर्क)। आधारा (म.)। (पु.)। कुकी । जटाम: सन्तत (गातार ) । न बदलनेवाला । स्थिर (कायम) नका, (न.) नगर (नि.)। " (नाम) में कन्"। एक गीत (न.), सारा दिन बिताकर करना होठा है. मोदय, (.) ध्रुवस्य भाव +प्यम् । पाहोना । स्थिर रहना. रज, गति । जाना । भ्वा० पर• सह. सेट् । पजति. मकम्, (अन्य ) पस, (I.) प्यग्+अन् । झंडा। निशान । एक प्ररि नकचारिन्, (पु.)* पुर । "कुलपर" अपने वंशमें विशेष पुरुय । शाण्डिक जो रातको विराट (कलाल) । बेडीका चप्पा । सेना (बी.)। मे विचरनेहारा कोटी (पुरषका चिर)(पु.न.). मक्कार, (पु.)* पजिन्, (पु.) प्वज+असि (मर्थ इनि । राजा । उल्लू भोर कि- संडेवाला । रथ (य)। मामन । घोडा। सर। नन्दिर, ( Fr- कलाल । मोर. नत्र, (प.) पजिनी, (बी.) पना अस्ति असा +नि । जिसकी । पानी पीना ध्वजा हो । सेना (फोज). पन्, शब्दाबोलना । आवाज निकालना । पुरा. म. सक. • सन और सेद । चनयति. दिन दोनॉम वन, (पु.) वनस्पम् () गन्द (भावान) । मुर. घनि, (पु.) वन्दन् । चीमा मृदंग आदिका बाद । अलंकारमें एक उत्तम कायभेद. रोहना। पासबस,(पु.) पस्+पम् (4) विनाश । .) सविना रिपाल. नक्षत्र . बारी नाह नहाना। रोना। थोडापता युगा घोडा बराबर पिरोघर फरकामादरमा थोर गुमाना. - - । - जिने अमीनीधर्म (रज) नहिं हुआ। वेसी अमाव-अपापम् । मेदे-अघटः पटः । इंच-अनुदान नगम,(धी.) नग एवं मू: (यसिस्थान) यस्साः। जो नट,(पु.)नटी । नदस्य नाटा आदि थमिनय (नकल)करनेद्वारा एकप्रसाधन स्लीपर जीनवाटा । एकप्रकारमा वर्गवर लि नक्षत्रनेगि, (२२) नक्षयनेमि, (पु.) नक्षत्राणां नेमिरिय । मानों नक्षत्रांची नगरन्ध्रकर, (.) "नगम्य र वा धारा है । ध्रुव नामी तारा । चाद । रिश्शु. (बान पर्यन) में एक गुगम का है। नक्षत्रपाठया, (पु.) नक्षत्राणि पठति । पम्वुल । कार्तिकेय (महादयका वा पुर). नक्षत्रों (तारोंको पढनेवाला) । ज्योतिषी. नगरप्रदक्षिणा, (म्री.) नगरम्य प्रदक्षिणा नक्षममाला, (नी.) नक्षत्राणां इस माला । तारोंची नाई नगरकी प्रदक्षिणा । किमी र माला है । २७ मोतिओंका बनाहुआ एक हार । ६ त । तारों की कतार " सब नक्षत्रमाला स्यान्सप्तविंगतिमतिकः" नगरपान, (पु.) नगरम्य प्रान्त । म कोश. (गिरा). नक्षत्रलोक, (पु.) नक्षत्राणां लोकः । नक्षत्रों (तारों )का | नगरमर्दिन, (पु.) नगर मदंपति । ८१० म. In लोक । आकाश. मलनेवाला । मतगाला हायी. नक्षत्रविद्या, (सी.) नक्षत्राणां विद्या 1 तारोंकी विद्या । नगरमार्ग, (पु.) नगरम्य मागः । ५० तु. 15 ज्योतिःशान. रास्ता । वडी महक । राजमार्ग. नक्षयसूचक, (पु.) नक्षत्राणि शुभाशुभतया सूचयति नगाट, (पु.) नगषु (पृशेषु) वटति-अन् । में तुल् । जो तारोंका अच्छा वा बुरा फल कहता है । सिद्धा- घूमना है। वानर । यन्दर. न्तको न जानेहारा ज्योतिषी 1 "णिनि" "नक्षत्रसूची". नगाधिप, (पु.) नगानां अधिपः। पहार नक्षत्रेश, (पु.) ६ त । तारोंका मालिक । चन्द्रमा । हिमालय पर्वत, चांद । नक्षत्रपति" आदि यही अर्थ है. नगौकम,(पु.) नगओगे यम्य । पहाड जिसमा नख, गति । सर्पण 1 जाना । चलना । सना । भ्वा० पर० पक्षी (परिंदा)। शेर । शरम : का. सक० सेट् । नसति । अनखीत्-अनावीत्. नम, (त्रि.) नम्मत । वनरहित । कपडे के दिनः । नख, (पु० न०) नग्न (दिं) अत्र । उहाँ छेक-मुरारा है। दिगम्बर नानी बौदों मेद (पु.)। तीन मैदान नसून । नी अंगुलीका कांटा. (मावरण) को छोदनेहारा जन । "नावडे नखकुहा (पु.) नसान् कुष्यति । नलू- रजकः किं करिष्यति." नोको कूटता-उतारता है । नापित । नाई. नग्निका, (पी.) नमेव+माय कन् । नंगी । यह नखर, (पु० न०) नर राकते। राक । नस । नसून । ना. नखरायुध, (पु० ) नसर थायुधं यस्य । नसून जिसका शस्त्र नानीहन, (नि. ) अनमः ननः कृतः । नानी (आजार ) है । सिंह (शेर) व्याघ्र । (मेडिया) और नंगा किया गया. कुशाह । “नसायुध" यही अर्थ. नज, जीटा। शरम करना मा. था. भर नखानसि, (अव्य.) "नः नः प्रहत्य इदं युद्धं प्रवृत्त"। नजते ।थनजिट । नमः आपसमें नमूनो (नी) की लडाई करना. न(अव्य. नग, (पु.) न गच्छति । गम्+८ । जो नहिं चलता । प. चत (पहाट) वृक्ष (दरत). नगण, (पु.) लघु (एक मायावाला)प तीन अक्षरान गन्चो (नाई गिनी जाती है ) गण+यच्. अपत्ये अशा । विरोधे-अमुरः. नगभिद्, (पु.) नगान् मिनत्ति । मिद किम् । पर्वतीको नद, नृत्य-नाचना और हिंगा-मारना । मा० र पोहता है। इन्द । पहाडौंको तोडनेहारा (त्रि.) सैट् । नटति । अनटी-अनाटीत् । परिनदी. पहाडम निकटदी है। मोटा पत्थर, नग, (न.) (शाः पना का )सन्ति अस्मिन् । नगर । पुर । पदर (जहां अच्छे । काम करनेदार वर्ग हो। बहुत साओम भगदुई भनेक जातिय हो नटन, (२०) नद+त्युद (भन ) | नाच IT और ग देवताओंर स्पन भी हो)। नगरी (श्री.). नटी, (मी.) नथय । सीप (1) नगरजन, (पु.) मदरस्यः समः। नगर रोग. नटरी भौरत. र अण् । जो एक विशेष शब्द निषेष असो अशोक श. पर (२०) औरत. जलप्रसाद का गिरना । मुग• भ• अा. सेट् । नाहरटि-ने. ननु, (अप.) (मान)। पीटना पुराना (पु.) न थन् । नतृग । नः निःपाय !ीगर. धन निन्दा. गा(बी.) नमानी समूह य । नः (धग) । नृपया नगद, (.) मन्दन् । पर महानन्दा पुराना मान ल, (नि.) मा गन्ति अस्य डुलन् । नाकाटा देश. नन्दक, (पु.) नन्दयति । नन्दwिritrr (नि.) नमक । नम । गुमराहुआ। आधा दिन (नवार) और में भन्दगी पीटनेर जन्मही पी (पु.)। नगरी जर (म.). पालनेदारा. 'नासिक, (नि.) मना नाशिक अम्प । जिनका ना मधु, (पु.) मदन भन्दा शुभ है। विपदीनामबाला (गादा). नन्दन, (पु.) नम्दया । म ली, (Rt.) ननं न भम्पाटी I मन और जपन- में। एक. परर.inter मोसमें जिसका भगवा हो। एक मग (Nain (f.), रो, (वी.) नम्पिन् । ममता । पुराना सानहरा मदनादन, १ पृ.) मम मनमो नेहाग । श्री "र" गन्तोष । होना । सरकारना । या. पर. भा. मापनदिनी, (सी.) RIrint सेट् । मन्दा । भगन्दीन । मशः । मदती. भन्दा (22)IPLE. क(पु.) मदुशन् ।ग-भैरव-सोग मारमामापक १) (Errom मनामना. एस.(पु.) म अनुस् । शद । बी बंची भावात्र। मन्दिाम, (पु.)rrior inar. NEnHer (1) पति-राम, (पु.) मीना पार पामरीमो मार मन्दिन, (पु.) righ () भांपनामी गु (i) R++दीप ! गंगा, पमुना मारिन कदिनी (4) I. ante भेन ( Reportrati बायोप्रवाह (एक हजार भार अनुप जितने Rameter मरमें बनेगी मोटी गातीयां. मदिन, (:.10.irm rr... दीज, (पु.) भीपा । पा. मी मापते । पना Materia (A)मना । र भागमभाः । जो मनन्दिपुगण. () reet . जा (२.) 18 SPINNI. दीन, (5.) मारो मामी । रामर । मादी, (पु.) १.rinkir PEPAR (GRATorr) ...... दीमा (क) मा भव । बि मान Ank मी जरी मदत, (5.)-tru interes. trrint. दीप, (५.)rdste rate kutt). मान, (.JPrarthana... प्स, (R) रम्। नगर {5....R. Ire: र.(.). Thtm frre Hi(Rt.) मो.time.kinar...... नगर (Amri (reatividio Preetrintment).....!... INT (w. ग"". -- -- -- - - - [नवशायक, । संख्या. . माला, (सी.) मराणा माला । म योंगो (सिरो) नप, (पु.)नुभम् । सव । शारीफ+अच् । नूतन हुआ माला । "नरमालाविभूषणा" जी पी. (नि.). मेघ, (पु.) गरः मेयते ( वध्यते ) पत्र । निगमें नयप्रह, (पु.) पर्गक । सूर्य आदि नौ प्रह. मनुष्यको मारकर ऐस्कार मिया जाता है। एक यज्ञ । नयति, (सी.)मा दरातः पारमाणे अस्स नि० । नम्वेदी गर्भ मरके मांससे होम किया जाता है. यादन, (पु.)नराः थाहनानि अन्य । मनुष्य जिराकी नषदल, (न.) कर्म । कमलकी पर्णिकाके पाराका सवारी है । युवेर ( उसे मनुष्य दटाते हैं)। जो मनु पत्तानिया पत्ता व्यों उटाया जाय (नि.). नवदुर्गा, (श्री.) मर्म । शैलपुत्री आदि नी दुर्गा की सिंह, (पु.) नरधागा सिंहए । गनुप शेर । नर मूर्तिए. और मिहके मरूपवाण । हिरण्यकशिपुको नाश परनेके | नवकारपुर, (न.) नव द्वाराणि यत्र ताराशं परम् । षह पुर रिये प्रगटहुआ भगरानका एक अवतार 1 "नरः किजिसके नौ दाजे हैं। देहदारीर (इसमें दो कान सिंह " । मनुष्य मानों शेर है। शौर्य भादिसे दो आस, दो नासा और एक मुरा । ये ऊपरके सात अच्छा आदमी. सान ) गुदा और लिग (ये नीचे के दो) इसतरह हैं. स्कन्ध, (पु. ) नर-समूहे स्कन्धः । मरोंका पम्ह । नवधा, ( अव्य.) नवन्+प्रकारे पाच । नवप्रशार । नौ बहुतरो भादमी. सरह. द, (:) मर इन्ट इव । मनुष्य मानो त है। नयधातु, (पु.) कर्म । सोना आदि ९ धातु. रागा । विषय (गहिर निकालनेहारा)। २१ अारके नयन, (नि.) धनुः । ९ की संख्या, | नयनीत, (न.) न नीय। स्म । नी+ । नया निका- पादवाला एक छन्द लागया । दूधका गारमारान. त्तिम, (पु.) नरेणु उत्तम । पुरषोमे उत्तम । नारायण । नवनीतक, (म.) नवनीतस्य विकार किन् । मारानरो बरागी पुरण भोर राजा. मानाया गया। पी। पृत. फ, (पु.) बुल अक) । चारण (तारीफ परनेदारा)। नतृण । नाच के जानेदारा नट नयम, (नि.) नवाना पूरण+टि-मर । ९ फी संख्याको पूरा करनेहारा । नावां ।-मी। "नवमी" एक तिथि (नि.) "नकी" (श्री.). (बी.) 'न, (२.) मृत्+त्युद (मन) नृत्व । भाच. | नयमलिका, (सी.) पर्म• । मामालिका । बहुनालो. मादा भावान करना तथा जाना । राक. भ्वा. दाला पक्ष, पर• सेदा नति-प्रनदति. दिः (पु.) नर्म (परिहार ) ददाति । दा+ को मययम, (.) नवः याः । ऋतु (मौगिम) पर उपने फसीकी पहिली भेट देवताके रिये. मगील देता है। केलिंगचिव । भालके लिये पीर । नयायन, (न• ) ना यादनं । नई जानी। ना (बी.) मालिया (पि.) मी (पी.). नई जवानीवाली. जन, (म.) +गनिन् । परिहारा । हसीटमा । पेलि । नपरा, (न.) नवाना रताना समादारः । १ को श्रीमाणेच. भेल। विक्रमादिखी भारे पति. 'किनी, (श्री.) नल (गरिए अधि) भन्य+ नयरात्र, (न.) नवाना रात्रीणां समाहारः । ९ । और इनि । जिगवी ऐकवादीधी हो। जालान. "पर, (पु.) नल परो युगंधरोऽस्य । इस मामय | नयवयागमन, (म.) ६. नावाः भागमनम् । नई धूप (पिता परगे पति के परमें ) मना. 'लेका, (स्त्री.) मलमा कन्नाम् । नारी । नाली । नरपान, (२०) • । भनाहन नूननवन । पहि. धिय. ती पहिरा गया नया परमानना. लेनीगण्ट (न.) नलिनी+समूटे गए। कमलिनी. मपपल, (न.) मा बना(m). नयशशिभूद, (पु.)ना पनि विभ-माहिए। म.(पु.)नल । पारलो हापका गिना आदेशापार. नये परमाबोधारण करनेवाला. [मपचायक, (पु.) माती, मी. । दुबरका पुर. .'मीशा समूह + की कन्या. कारीगर. हराना न । बना डिगई हो । चतुर्दगीसे मिगहुई | नागाहना, (खी.) नागम्य अनाrter नरसात,(पु.) सम्याउन. । आ++का 'नागाद (पु.) नागेन युना arre मागेन्द्र,(पु.) नागानो इन्दः। kि दार, (१.)()दनियत्र । नहीं नाटक (पु.) काम: पाके पर योग्य एरा काम्य (ne नारार, (पु.)राम माure नवधार,] (२७६) नवश्राद्ध, (न.) कन- १॥३॥1॥९॥११ आदि विपन दि- नागकन्यका, (श्री.) नागानां कन्या नाम करने योग्य पार । ग्यारहवें दिन करनेलायक श्राद. नयमूतिका, (श्री.) न्वं मतं अति अस्याः+ठन (इक), नागदन्त, (पु.) नागम्य दन्न व ... बिसय नयाही प्रसव हुआ है । धेनु । नई प्रस्ता गा. है। घरसे निकली हुई लकडी (मि) नवान, (न.) कर्म• 1 नवान अन्न । नया अनाज । नागपञ्चमी, (श्री.) नागानां पंचनी। ) "नत्र अन्नं यत्र"। नये अनान आने का समय. पंचनी (पांचवां दिन). नर्यान, (नि.) नवस (ईन)। नूतन । नया. नागपाश, (पु.) नागः पाश इना(कर नबोढ़ा, (श्री.) नया का वक+आ। नई विाही होनेमे ) नाग मानो पाश है । वाण दे। गई (स्त्री.) नागर, (त्रि.) नगरे भवः । नगरका । दिर नयोदक, (न.) कर्म । नवजाल । नया पानी। "न यार । नागरमोथा. उदकं यत्र"। नये पानीय समय. नागरक, (पु.) नगरे भरः (बुरे और न नयोदून, (न. ) फर्म• । नवनीत । मसन । नया में) युन् । (अक) चोर । मुरत हिउमेहता निकाल गया (त्रि.). नभ्य, (वि.) नुस्यन् । नूतन । नया. नागराज, (पु.) नागानां राजा समान नए, (नि.) नगद । नरोहित । दिपाहुआ । जो हापीओका राजा। अनन्तनानी सौदा हाथी । हामी. नचेष्टना, (प्रो.) नष्टा मेरा यम्य तम्य भावः तम् । नागराज, (पु.) नागानां राजा-रगन् । (ii) या दोक (अगोम) आदिसे सब राना । शेषनाग. मेटा (1) भोने दिन । बेहोश. नागलता, (सी.) नागाकारा लता तर नाम, (पु.) नzः अमिः यय । प्रमाद (भूठ) शल सांग्जमी है । ताम्बूली (पनी ।) शाले जिगने अमिहोत्र करना रोड दिया। निरनि. मला, (.) नष्टा चन्दाला यम्यम् । निगमें नागलोक, (पु.) ६ त । नागों का तो।। नागान्तक, (प.) नागम्य भन्नाः । मम्म, (२.) हितं नागारे लिये अच्छा । मिरगी वाला। गरः। मयूर । मोर. रोम मिनिहिये नाकम देनेसाया चूर्ण । नागाशन, (पु.) नगान् अभाति । अना पर. मापोंगे माता है। गरुड नहरा गया। बीवीट. नामकला। इनिनापूर. गदि(अव्य.)रोनान न', (5.) चन्द्रगध एक राजा । एक नाग ( गांव ). नाचिकेता, (३०) यति । अगा | मागमत (पु.) दर दामी गमारा बेटा. कही एक कथा. ग, (भz.) सिरान. माट, (पु.)नपन । रानाय । गएरा पान. मारिन, (.). यांम भग। (मिर रहने गांधा). saniहै नाप.(:.) र (ar) भ। ममीमारिका, (पी.) anum Homनाग-ए) '' rrer PRERA) मा () म । " mr (.). पायपरता). .

थिय] रमिय. (पु.) गासनिक । नग विचारा। माता, (सपा) विना । भनेक ( बहुत ) दोनो. बारामाम. नानाजातीय, (नि.) नानाजातीभाईय । कई जानिमें पशाला, (पी.) मारत मापापं पाहा। होने वालाई प्रकारता । कई साहला. या ना ये हाला । मटमन्दिर । नाचने नानारूप, (नि.) माना स्पनि यस । कई सरूप ने जानेवी । नारपर । देवमन्दिरके साम (पाल) वाला. मेरा पर. नानार्थ, (वि.) नानाविधाः भी यस्याः । बहुत नाम प्रशारणम्, (न.) नापस पायम् । नारक दिया। मोर प्रयोजन (मनला )शला. म परिया नानाविध, (नि.) नाना विधाः प्रकाराः यस्य । नाना पाचार्य, (पु.) नापस भाचा प..।नाया (को) प्रारवाला । पई तरहता. भाचार्य । भाषरा सिमानेवाला. नानाथीर्य, (त्रि.) नाना बीयांयि यस्य । कई प्रकारकी योक्तिः, (त्री.) नाट्ये ( नटसममि) उफिः । पातिवाला. नाटकगम्बन्धी पपन नाटकम उपयोगी पचन. गान्तरीयक, (मि.) अन्तरे (व्यवधान) अनुभवति । टे-सी, (बी.)। मद्-भंश गिरना+इन् था दी । (नके अर्धवारो "न" के साथ ममाम होनेरो) नान्त- परीरी शिरा (मापी) । इसकी शाया । परी । रीयं । फिर अपने अर्थमें कन् (क ) होता है । अवश्य- नाही. पल. म्भावी । जहर होनेहारा । फैलाहुआ। व्याप्त. सिन्धम, (पु.) नाग पनी । मा+राए धमादेशः। नान्दी, (खी.) नन्दन्ति देवाः पितरो वा यत्र । मन्द इन् मुम् हसथ । जो चारा भादिरी नालीको पूंकता है। दी । पृ. । जहाँ देवता या पितर प्रसन्न होते हैं। सकारमुनार. "नान्दीधाचं ततः कुयोत्" इति स्मृति । गमृद्धि । दीया, (.) नाभिस्थनारी निस्सरणयक । धुनोमें सम्पदा । हामत । नाटकमें सूत्रधारसे करनेयोग्य एक रहनेहारा नाटिओके निकलने पक. प्रकार मालाचरण. होम (:) नारीव जंपा भम्य । जिसकी सात | नाम्दीमुख, (पु.) मान्य (पयर्थ) पन्धनान्वित मासीके रामानामा पिसारा एक बगला। मुरां यम्य । दिके लिये जिसका मुरा पाया गया है। एकमुनि. मएका पन्दा । "नादी (पतिः) तदर्य प्राथम्"। डीपरीक्षा, (पी.) नायाः परीक्षा । नारीकी परीक्षा विवाहआदिके पहिले किया जानेहारा मालधार । (पहिचान). नान्दीभारमै भोजन करनेहारे पितर. मक, (पु.) न आणः इसितः । जो दुरा नहिं । नान्दीयादिन, (पु.) मान्ययं वदति यादयति था। मरान । मचा मोहर भादि (जिसपर निशान सुदा नाटकके भादिमें मालपाठ करने वा करानेहारा हो) (न.). सूत्रधार । उसके लिये सूर्य (पाजे भादि बजानेहारा प, उपनाप । गरम ऐना। सपना । मांगना । पराशी- नटआदि. यदि देना। भारम• सका। ऐय-हकूमत करना-सेट् । नापित, (पु.) उसरेका काम करनेहारा । एक जातिका मायति । भनाभीत् । नापते । मनापिष्ट (भाशीप). थ, (पु.) माप-ऐस्य+अच् ( अ ) अधिप । खामी । नापितायनि, (पु.) नापित+आयन् । नापित (माई), मालिक । शिवजी । प्रार्थना करनेलायक (नि.). का पुत्र. थयन् (नि.) मायः भनि भय मनु (मोप)। नाभि, (पु.) नयन्ते अत्र, मयते भनेन पा । नाम् जिमका मालिक हो । पराधीन । परतत्र । बचानेहारा. भान्तादेश । १२ राजाओं के चकमा बीच । पहियेही द.(पु.) मायाम् ()। शब्द (आवाज)। भुरी । मुख्य राजा । भौर दानिय । कस्तूरी (सी.)। चन्द्रबिन्दु । कसरी उंची आवास । एक प्रकारकी प्राणों धुनी (पु.ली.)। प्रधान । मुश्य (त्रि.). की हवा (वायु). नाभिज, (पु.) नाभौ जायते । जन+ । जो विष्णुकी देय, (न. ) नया नदस्य का इदक् (एय)। नदी या माभिमैं उपजता है। चतुर्मूग । प्रभा । "नाभिजन्मा". मदरासिन्पवलपण । सेंधानोन । मरी दानदा पानी। नाभिल, (नि.) नाभिः अस्ति भम्पाल । नाभि (नाफ- बाश और वेतम (क)(पु.)नरी (नि.). धुनो) बाला । नानीमे टरजा या भाया. , मांगना ( मायके राय भर्ष)। यामा. सह.माभ्य, (त्रि.) मामि यत् । नामिना ।माभिम !-4 सेट् । मापते. (पु.) शिव. नाम । नाई.

जलसे हिटता है। एकपक्ष । नारियेाबर नार, (न.)नल कमली हमान नाविक (पु.)नाना चसी+2 (1) विचरता। कर्णधार । उदागार ने माग्य, (नि.) नास तीयने ।। नागे तरानादानसमेत धरान न हीगना ।निधन. माना मागम्य, (T.in.१.) ml. सा.नि.सि. " name". नाम-पत ( २७८) नाम, (मम्स) सीसर । रिलय। मरण। सम्भावना । नाराच, (न.) नराणां समूहः । नारे कारन्द।। निन्दा । प्राकस्य । विरल । अनीक (मूल)। कोष, ड (स)। सर्वलोहमय अन्न । हे नामकरण, (न.) नान किाठे अत्र । ल्युट (अन)। वाण । तीर. मिस नाम रपसा जाता है। दसवें सादि दिनमें करने- नारायण, (पु.) "नार" नाम जरना है, सरक एकप्रकार मस्सार. से उपजे हैं, सबसे पहिले बही कि। नामधेय, (२.) नाममाय धेय । नाम । वावरान्द। शांत निवासस्थान है से मनुनी सदर संदा। "वापारम्भनं विकारो नामधेयं" इति श्रुतिः. अर्थ होता है । नरसमूहका आश्रय (अर नामन् , (न) मन्यते थनिधीयते अर्थः अनेन । "नामन् । नारायणक्षेत्र, (न.). : मेगा मन्" नि.बिस्ने अर्थ कहा जाता है। आवारा चार २ हाथ जगह. आदि मायके अयंको बतानहारा संशायद । नाम. नारायणरलि, (पु.) धर्मशायने कहा। नामरोष (वि.) नान एव दोषः अस्य । जिमा केवल चिन जो मरेहुए पापाटीआदिशेम का ग्मय रहा । मत । मरगश । "नाममात्र शेषः । नारायणी, (सी.) विशुटी गति । यो य" जिसमें केउ नान स्वरदा । मरना (पु.). तावरी. नाममाला, (सी.) का माया । नामों की पंक्ति (कना- नारिकेल, (पु.) नाइए-नातिः । केन (इ न वा इलनि चलति ) । कर्म । नाममुद्रा, (सी.)मापः मुशा नामरा चिद । नानी नारी, (सी.) नृ-नर-या जाता+री निक मानानुभागनम्, (.) मा मनु-शासनम् । नाम नारीपणम् , (न.) नायां गन् । । (Triहिंगों का नियम नागरतम्, (न.) नारीपु रस नारेबान । भाष, (पु. ) RT(गा. ) नेता । देशनेहारा । नापन्य, (वि.) पते. अर्थ+यन् । रासस उत्तम नी । जरी औरत. art I ती मी ! सेनामा पनि । ITRA पति वा पनि (यार) राजमबंधी lam (f.). पपिरा.() (भा. नालीक, नाल्या कायति । के। धनु •ारण भाल- मन की प्रेम मगदुई *Tritी होती है भा. माद नारा मार(3.)माम भयं 7 और पानी । ' मष्य (f.)। भोग गर । मार, (पु.) (थर)। "न मन "+ *गाए (f.). नमिरना. घ्न, (.) मान धान पनि। माशक, (नि.) Tri strar FT. नाशन, (वि.)atirang ग.3.1Marrरम बारा म. मार, (:.) (Uruी। 4. Timr. पmire at: । म रा . ............ Pra..irture Kirtanki नास, (I.) नाप (1)। पर। -- re ETI से आसावादिर गररनेरी भरिममिनिदरणभूमि परापण सागोना भादिगा पर मी- rinदिरमहारानी"र." 111 मिसि सा, (डॉ.) नगद । नामिका । पन्धको प्रदन | निफाप्य, (म.) निभौरते गा । नि+पिम्प-पुरम् । - फरनेदारी एसइन्दिर और सदाय, राहा पर. सिका, (खो.) मा शम्दारना+युन् । नाक । नारा।| निशार, (निममयम्) परिभा । रिस्पर विदयी। नाककी मूर्तिकारा भपसर पम् । पन आदिका उरर फेंकना । एना. सिकामल, (पु.) नायिकायाः मह 1 नारा मल. निकाश, (पु.) निमार+प । मूर्तिशाल । असार। सिफ्य, (नि.) नानिकाय हिन:-तत्र भयो वाक्य । दगंन । निष्ट गास (पराबर) (गमागमें की गल), का मानिका ये हितकारी पा उगमें होनहारा । नागा निकुञ्ज, (न.) मिशेषेण को गायो । उन+.. । 1. पजे अधिनीमार (पु.नि..) हनादिपिटिन स्थल । मेल आदिने दकामा म्यान मीर, (न.) नारा परन् । अगर गन्य (आगे | निशुम्भ, (पु.) निम्भ भन् । पृ. ना. जानेहारी पार ) सेनाका गुरा। भागे आनेहारा । थप- राक्षगा पुत्र । नीश गर (नि.). निकुम्मिला, (श्री.)के पधिमकी और स्ति, (स.) अपिचमागता । न होना । "मति वही एक देदी. मामि न जानानि" पाणश्या. निपुरम्प, (म.) Fi+TY-दर ।। स्तिक, (नि.) गामि परलोकादिकं ति मति असा निरत, (नि.) नि+। परिभत । पy ar दन् । जिगका विचार ऐसा है कि "परतर, उगम साधन धर्म या अधर्म, उपरासी (मवाद) भर गया । उपमा उमाया ।। कुछ भी ना" पार्वाक भारि । पर्ग, पर्गका साधन, निएति, (श्री. निvिe I m । भेर । पाटपूत. और परहीनोंरोनमापवाला. सारमारय मारग | rrn ame. स्तिकता, (सी.) नासिवस्य गार' । होना । मिष्यामि । पूठी मजर (गर्ग भारि न गाभर) निकट, (वि.) मा । Ht At are भादिसे निन्दिन । बरामदुम. , (प.) टाएन । माघे । बहुन । सदा । दिह । निषेत, (.) गिरना । wetter | पीपल । पेना । हटना । पाग । भादर देगा। । पराजित घटना रोकना. नित्त (f.) या mirrrr. 'पट (म.) नि+द+अ (1) समीप । पाग. निक (),(पु.) निम-पम् true कर, (पु.)नि++ । गए । सार पित्त (धन)। शब्द । दीनदीभर निश्यि, (नि.) मा पार्षण, (म.) निर्गत कार सेचनेगे निम. नहीं रहता दिनानि Arr. गया। गाय आदि पर भागे सारे ये मापा निक्षित, (वि.) कि.शिपुर पंगापति कर, (I.) नि (म्) अच्प बा(ग)। निर(I. ) निfrarthi किया गया अपना UAN INTEE (Pr. री। पिसार धारिल्ला एयर 1) होtter. कपा (अन्य ) र (पारा) । मप (1) | निशेपण, (R) F+for+ एन. रासमोसी पामा (ही.). निए, (I.) सरि. प्रकोपल, (न.)..प : न निरा. (3.) ...........। म... काम, (..) निसमापम् () । गत । र अनुगर । गागारिस (मारितार... । पर । परमप माप(R• )नि RITAREELATERNER). RuruNReceirome RATE T निषिीम.मा. मा.स. । न 4 है।"

सपना । नितगम्, (अ.) निभRI गिटन, (२.)न्त्रिाथ (गाय) मानिकल, (7.)गितले (wir)- निनान्न, (२.)नियम निन्य, (.) नामा दाmar(f.). मिगर, (२८०) निगर(पु.न.) निगमरन् । त्वम् । राय। निश, (नि.) निहन्धके बर्थन कही। मंगनी । मंगल । परायी. (तावेदार)। गुनितु । गुगा ( निगहिन, (नि.) निमः जातः मम । इदय । पर। "दिगुणान्सनिन " इति टीटादी. मदन । बंपना. निचय, (पु.) निविमान थन् । ... निगद, (३.)निमाइभमान। यौटना। बेटी पचित (बदाहुया) पदार्थ । होने रविन्दना बटाटा समूह। देर निगम, (पु. ) निगम्यतम बनेन वा । रिमा पन् । नियाय, (पु.) नि+विधम् । (s नियर । प्रतिसाद । न्याय पांच माययों में हुआ) धान्य आदि (झोना अदभन्न शिम अदर । थार । बाजार । मैदी भागा। निचिन, (नि.) निविदा व्यत्र । निगमन, (न.) मियुद् (अन) । प्रतिकूल निनोल, (पु.) निम्नन् । प्रकार फटदुआ । सही । मिलाहुआ। दिद (अमिटर) र (गन) को तोडकर प्रात (भमर) निधन करानेहाय न्यायरे पोच छैन थादि रिहाई नानी हैवि) मानने मेसिग "यदि यहां नि है" श्रीपिधानपट (यु) । दुहा का सादर निन्, जु• टमः । नन्छि, ननिरि निगा(ग), (पु.) निगमप-पन वा । भोजन । करना। धोना । सार करना. निज, (न.) नि++ट 1 यर । का निगाल, (1.) निमार-मदन-गान+पम् । भप निटिल, (न.) कपाल । मयासी. (Parmपान, निनम्म, (पु.) नितम्य+अन् । रक्तदान रिमान, (नि.) । निगया गया । शाया गया । कामुरा कामीजन मिस रापिपा गया. हैं। विनोंरी यमरका निवार- शिम (1.) निरन्। लिया गया। गुरु । कंधार किनारा कमर. गिना । नौ मूंगfसाहुमा मोर नितम्यविम्यम् , (न.) निष्प विपन् ।' (पतर). wrify(fr.). रित,..) ratnनि (FREEnा)। नितम्ययती, (प्रो.) निमम ।। ringe rigभा. गजनी औरत रिम..(.)frनामा (१५)। निम्पिनी (श्री.) पर यक (मी)। तिदिन दम्मानीत. nferमामा ने हटाना । rin (it). मायram. n(r): दो गये गत दर है. her (2" (Tuk" (Tai). TH(:.४ाद पर 21 ...REET (vमhिati fari, (..) .. Pravina नि .

" है। म AK -re, (नि.) नित्यं तमः (समा तारजाभा) "नि-निदिप्यासन, (न.) निगन्+अन । निरन्तर पन कानन्देन का तृप्तः" । प्रसस्त मानन्द इम। सगाना । निरन्तर (लगातार) समापि लगन. नानन्द के सामसे सदा हप्त। "नित्यतृप्तो निराश्रयः निदेश, (पु.) निशि+पम् । शयन। भारा स्मृति रहना । निष्ट (पाम ) मन (न). (भव.)पाल । सदा । हमराहसे. निदा, (बी.) नि+दागर । एन । गोगा। एक, (पु.) नित्यं मुकः । सदा मुटाहुमा । दीन जीवी यह अवस्था में रिम मन्दिर शिविर में भी पंधनचे रहिता परमारमा. मादी. स(पु.) • । फनी इलाम रखके जीवन- निधन, (पु.) (न.) नि++यु । माग ।। के लिये विशन कियागया यज्ञ अमिहोत्र भादि. इल | हमसे सस्यान, सपना, (सी.) निस्पं यौवनं यस्याः । निल निधान, (म.) नियाम्पुर । पप मादा) योवन (जवानी ) वाली श्री पीय माम. (खाना) माय (मामा) गाडिन, (त्रि.) नित्यं ।। जाना मसदन । निधि, (पु.) नि++ kaiराता Marकरनेवाला. हेनेरेरियेवियनमें असमारास सत्यस्य, (नि.) निन्यं (भरल) यत् (सर्व) जिगर कोई मारिदि। मगरमे "पनि (गुणभेदो पा) स्त्र विष्टति । स्था+5 । म दिसने "तिष". के पीरमरपी गुणमें रहनेहारा । धैर्य एनेरा। निपीत, (७.) ६त. ।मे। रामरको दबाकर पदा रावणका पाश्रय सेनेहारा. "निधिपी". जसमास, (३) बम- । एक प्रकार समारा । (मा- निधुपन, (म.) नितरा पुर्व (4) स्या समाष । जिसका अर्थ रामापविन मिन पदों में जिरामर जगी रामा मदि भाग)। जुदा भई एकटीमें श्री और पुरवतीr. हुभा । पपा "जमदमि" "जयाप" "बागाविष"निप, भ्या. ए. याशिदीre निपाय, (I.) सर्वथा पर्जनीय पाटाविरोरा सासरIRITTEN Ruk पेदम परधी. भियुग.. () निरर्थ भभि (समत्वार) : निन(ना). (.) मा. योगे प्यास्त.)। सदाही परो भोरसे योगाभ्यास - एदाभारयादrrary हुमा सरकार रक्षाये पर रहारा. दान, (.) निएमपुर । उदाहरण । माल । निम्द• • नन्दति । दिन star परमानसगनापnिer. भागार निन्दक, (पि.) PEvene are पि, (५.) नितरां पते पत्र । जिस समय हुन मते || Reपम् । सय । गरम । मापना निन्दा, (.) निन्दन । ti मिसराम (Ter) निन्दबहरीका हापकर, (I) (धर्म) 401 निरिम मरि. एवं एम. गन, (..) मिला पुरा लिखित, (th.) निरि ram । सो CE (Ret).mum भोगना रे भायला मिपत्य (2) RT गरेर रकरारोपसर. दिग्ध, (नि.) RAREaryा रिपात (s. Pranit दिया."t. पसेमामाRAMr. विपाएन, (40) ePL पिन (..)Artinkart (Mreennes mrar). C Trr. - 11 तालाशपरना गरer. .

-- नीमका वृक्ष. । घोड़ों आदिको काबू कता है। सारपि। | नियन्तृत, (त्रि.)नितरी यन्नृतः । निधन भार प्रतिस्ता एकाहुआ। अच्छोरहा नियम, (पु.) नियम्स्पम् । प्रतिमा कारका व्रत। मीमांसाठी एकादरा रस्सा । वेदच पडना भिरमें मर रेट. नियामक (पु.)नियम्म्युला निमि, (पु.)सके वंश और पदमारे संगमें एक नियोग, (पु.)नि+युमा पम् मासा काममें गाना)"नियुग्यो सिर निमिमारण,(२.) मा व्याप पहाण्या समाथि नियोजन, (1.) निम्युमदार सारेच एदोग अमरविवारण नियोग्य, (त्रि.)नियो पस निपीडित,] (२०) निपीडित, (त्रि.) नितरां पीचिनः । नि+पीडक । निमिमि)प, (पु.) निमेषति । निhि ...! बहुतही पीडा पहुंचाया गया। कृतनिप्पीडन । निचोग एक समय । बांधने सामाविक पुरकनेशन- गया. "भावे यप्" अांखका मीटना. निपुण, (नि.) नि+पुण+मंणि क । प्रवीण । चतुर । निमीलन, (न.) नि+मीमत्युत् 1 मरवा ।।। काममें दक्ष (होशियार). थांसका मीटना. नियन्ध, (पु.) निबन्धम् । अमुक समयपर मैं देऊंगा | निन्न, (त्रि.) निटं मनति । प्राक (S इस प्रकार प्रतिज्ञा करना । रारा । प्रत्यकी रचना । मूत्र नीचे। नीच. रुकनेकी बीमारी (रोग)। बंधन । "निवनाति कोष्टं निम्नगा, (श्री०) निम्नं गच्छति । गम्छ अच्" नीमका वृक्ष । (इसके सेवनसे कोटा-पेटका भाग है। हरएक नदी । दयां । नीचे बानेदात्र ( स्कजाता है.) | निनोन्नत, (त्रि.) निम्नं च तद् उदवं चार निवन्धन, (न.) निवध्यते अनेन भन्न वा+ल्युट् । जिस्से नीचे ऊपर । बंधुर. वा जहां फस जाता है । हेतु (सदब)। बांपना । वीन | निम्य, (५०) निम्बति स्वास्थ्यन् । निमा वाजेका ऊपरला भाग (हिस्सा). निम, (पु.) निमाति । नि+मा+क। व्याज (बहाना ) || निम्लोचन, (न.) नि+म्लु त्युत् । बरा "यदि पिछले पदमें रहे" सदृश । समान (त्रि.) जैसे नियत, (त्रि.) नि+यम् । निश्चित (c) "पितृनिमः" "मातृनिमः" इत्यादि अर्यात् उसके समान. आचारवाला । नियमवाला। जिसकी इदान निभृत, (त्रि.) नि+म+क । घृत (घी)। विनीत । है। निला काम (न.). (सीसाहुआ) निश्चल (न हिलनेहारा) । एकाप । गत | नियति, (स्त्री०) निभ्यम् छिन् । निपन । (उपचार) निर्जन (एकान्त)। असके लिये उपस्थित सत। "नियतिः केन बाध्यते" इति पुन हुआ। छिपनेपर आगया. मठे दुरे काम और पुष्य. निमः, (त्रि.) नि+म+क । इदा हुआ. नियन्त, (पु.) नियच्छति वाहान् । रिम्मत निमधए. (पु.)नि+मन+अथुन् । अवगाहन । दासिठ होना । पान करना । जल भादिमें प्रवेश करना । चुपचाप प्रमु (मालिक)। सजा देनेवाला कोर पर रहरना. (नि.) निमनन, (न.) नि+मम्जास्युर । थवगाह । पल था. दिमें प्रवेश करना । चुपचाप टहरना । निचलस्थिति. निमन्त्रण, (२.) निमश्रास्युत् । श्रार आदिमें भोगनके दिये रोक । इकरार। यकीन मारकर दुलाना। मारून बुलाना. निमरद, नु.प.। मनति । ममम । समांडीत् । मः । पता. निमान, (न.) निमीयते (क्रीयते) अनेन । मा+म्युट् । जिम्ने खरीदते हैं। मुख्य । मोठ । कीमत. हुक्म चल्नेहारा । माटिक (नि.) नियुत, (न.) दाराक्ष संख्या । दम रिमित, (न.) मिनिस्टर । परन । हे । सार । निश्य । आशम)ariety स्थ (रिहार) बिइ। निछन । माविनुमा रामको सूबग | निपोष, (त्रि.)यो, atest पाहा हुन । मेश्य । मुभा. एगाता है। प्रभु । मासिक. रमरिने निव कामे पर अदिमें महाभादि मिटाना।सयम करना. है,हरी मि(सर) निविता- नोटर ट . नुनासिक (पु.) निर्गत: अनुमानित: पस्मात् ।। सामोणे माणिका(माको नहीं बोला जाना. स्मात् । पीप निषलगया । निरोधना। निरवधि rilभीम) 18वार र फरक. Mयय (त्रि.)मानिमन्वयाम्पंपस.स.1 Triपत्रप, (त्रि.)निर्गतः पायावासे निकला-निराछप्ति, (बी.) निम्मचिन् । राप । माशिम दिन निर्दोष. PRIपाय, (वि.) निर्यतः पाय पसाबुपरहिन। निदता, (..)निषदेन टपटे र मिनाहा मामा बारिवाशी.. गरल,(नि.)नि रमा । सिम्से ग| (१४३.) रिस, PAR (अन्य ) भू+किम् । निषेप । नहिं । नियय 1 निरयप्रह, (वि.) निर्गतः अवमहाद । बेरोक । त्रि. यकीन ) निकलना । शाहिर निबंध । भामाद । भिडिपामद | सिने रोम रमि, (पु.) नास्ति अभिः अस्य । जिसने माग नाहि । न होना. अमिसे सिर होनेलारक वैदिक कर्मसे अन्य प्राण | निरय, (नि.) निर्गतः अवभाव । निन्दा निस्ता आदि धीनों रण. हुआ। दोपरहित । और उत्कृट (AT). दापुरा, (नि.) निर्गवः मशात् पो मंश (गैस) निरपयय, (३०) निर्गतः अवयवात् । हस्ते निकल निकलगया। पशून्य जिसे रोक नदि के. गया। परमाणु (सबसे छोटा)। भार(An) अन्य रजन, (वि.) मिर्गत अञ्जनं यस्मात् । जिसे मैल आकाश आदि (नि.). निकल गई । निर्मल (साफ) तमोगुणसे निहालगया निरपशेष, (त्रि. ) निर्गतः भाषः यम्मन् । जिस तम जिस्से निकटगया । परमन । परमात्मा । "निर. पाकी निकलगया । सम्मिन् । रा. अनः साम्यमुपैति दिमम्" इति भुतिः, निरपसित, (त्रि.) निर+सी+ । पात्र पहिर कियागया । (जिसका हानेका पात्र-वर्मन रिसर तिराय, (त्रि.) निर्गतः अतिशपः अस्मात् । पति- पयशत्य । परमोतर। सबसे पहुतही अच्छा. (पार) परनेसेमी पर नदिदा) ema मादिनीचणे. स्थय, (नि.) निर्गतः भत्रया अम्मात् । भाशसे | निरंश, (त्रि.) निर्गन. भैराः अप । गियर रहित । म एकनारा अमायिक । जिसमें छठ मदि. महिं रहा । शाहित । पतित (जो मासे पियापा) रोश, (पु.) निर्गता भनुकोशः यस्माद ।।.स. नपुंसक आदि पुत्र । संक्रान्तिका दिन. निकल गई या जिस्से । निर्दय। बरहम. निरसन, (म.) निरअग्युर । परिकाप । विरएघार करना । मारना । निकलना. निरल, (नि.) नि+अम्क | tोग पा। एतर,(जि.) निर्गत अन्तराद, निर्गत मन्तर का (त्वरितोचारित). पूर पा । Tears तिरपारयागया. निराकरण, (.) मानपुर । (. राना)मानामा. जिप पंच मही। रान्दानरहित । असंबद। पाक्यम निगरिष्णु, (मी.) मामा । रिएक बम्पले साथ संयम रखनेराला. धौल। निशाल नेपला. हटाना. रोगरहित सररर (. प्राशीप्रत्यय पर सिर पान पर रह सकय प्रम। पेश, (नि.) निर्गना अपेक्षा दस्बरेत (भए. पोगो सोनेहारादरम(.) कारल) दिन पह. निरि,(2) निरन् । मर भिमान, (वि.) निर्गतः अमिममो दम्मम् ।। एकोप पर (5)पर स.निल परामिमय बितो. rt पर भरो पर दे रहे Pास ना सिर () दिल । मेरा माप । sh- पहित. निगरप, (हि.) र fri रक, (वि.) नियंका पाई. दाम । रिसे HEL सिपोरव Read Pawot. शिने TEENReमुस्तर (TARA T - F4LOf ( १८४) निम्त,(.) निम्बर । यि समन नागडे | निर्जर, (पु.) निर्गता जरा रस- मरेको मानहाय दानबिरहा हुमा (त्रि.). निकल गया । देवता।गसे रहि- निरुदटसमा, (.)निम्म (शपिदमा) कना। थमत. ओवकार रोग प्रतिर है उसमें प्रतिके निरा, (सी.) निर्गता जरा सा मन के मईये जानेवारी शक्ति, तालाना गिलोय. निति(क) रिसर निन् । प्रतिनि। मारी. निर्मद(पु.) नि+म+प । प- निरान,(२०) निरस्तुर । तापहनके अदाल प्रवाहामरणा. योग करनेस विकार । निर्शन । सन्त । निरिणी, (सी.) निरः भरि ! दहादसे सोचना । मड । प्रमा इनि ।रनेसे निकाल र (इरान). निमदिन, (.) निनानि । किसी काममै निर्णय, (पु.) निम्नी+अच् । नियर wriनिकर । सन सिमागमा । हरया. इलम । सन्देह (क)। पिरोलो। पौर मायबाम एसेन्सि । निरोग(5.)पम् । नारा । तमही । " फैसला. " पुराणम् । म । प्रारोध निर्षित, (नि.) निभनिन्छ । . सिन...) र ( जेवसाना) हयागमा । अपगतमर (निस और नाना रना. निणेजक, (पु.) निमिया । fri3)ी (m) 47। बहो महर रमर । पोपी. kart पत्रिम निदन, (पु.) निरोग पाए rem)(i): AIETIIरहित। देता है । माता (4) (A) (. निस गरे" भाग विना (भाग Irist.), स. , AT निरस (2.). ant पर एम पामारमा || निर्विर, (नि.) faken ar -kNATHMAMI SAR हुभा । पिसनाया हुभा । मौरसा- (w) (th). निर्देश, (I.) निमाला rint(.) (मा)। नौग। मामा भीर गा"ft. Mater Mer. बालानेहरा ए भामामा निन्द: जन । प्रालि प्रोन नि भलो देशगे निकल गया (त्रि.). Amit R निगड (f.) Mr. irf.} मा विदी) दा:.kux ग मी ति met IT Igata (f.). निन, (1.)नि ' (KIRATre | विपण(.mratyagers ri !..)ximirwainst म RTET trentre निitrait) । रोट 4.2 w are reit artN.(:.) tamin A - एक योगी. गंध, (नि.) निर्गता बाधा यस्मात् । जिस्से पीग निषेपण, (न.) नियमस्युट् । भान सारिक नेकल गई। निरूपद्रव । पाधान्य । विनरोक । करना । दान । देना । पितरों के लिये पाद का कलीफके बिना धीमें बीज बोना. य, (पु.) निम्मी अन् । हमनेट भिसा पोगा निपतित, (त्रि.) निमत्+मिम भयरहित (वि.) बेसॉफ. अन्ततक पहुंचायाहुआ. र, (न. ) निशेषेण भरः (भारः) पत्र । जहाँ निपहण, (न.) निम्ह ल्युट् । र जराही मार हो । अतिमात्र । निहायत । उहाद। (गुरु कीगई) रुपा समाप्ति । गहुतही हो (नि.) नाश । नाटककी एक संधि. क्षिक, (मभ्यः) मक्षिकाया अभावः । जहाँ मस्सीम | निर्वाण, (न.) निर्मदा-मावे * मीन होना । एकान्त. मायन्तिक मोक्ष (ऐसा हटना है 4म, (नि.) निर्गतः ममकारः यस्मात् । जिसे मे निति (हटना) । विनाश । रापन जाता रहा) पुरके शरीर आदिमें ममतासे रहित कीचद । “कर्तामें क" नित (T मुक । निधल । शून्य मन ल, (नि.) निर्गतः मसात् । मलसे निकल गया । थरित । (. र, तमः आदि मलसे रहिन । राग आदि मलरहित ब. निर्याद, (पु.) निव- एदीसे रहित । पुर(साफ), "जिस्से मज दूर हो जाता स्टोकनिन्दा चोरत. "तक (निर्मली ) इसका फल पानी मिलानेसे पानी निपण, (न.) निम्न की माय मैल दूर हो जाती है (यह बात प्रसिद्ध है). मार डालना । देना. माम्य, (न.)देवताका विसर्जन करनेके अनन्तर देव- नाको दियागया द्रव्य । देवोटि (देवताका ) देव- निर्षासन, (न.) गि पाक कार पहाये हुए अन्यका बाकी. करना । निहारना । करना । विमान क., (.) निर पुक । चुली (च) उतार चुका और । पूरा घोर दिया । नियरिद (को अपने पस निषाद, (पु.) Frer:- चंदोबस्त । निति पुछमी नदि रसता संपरहिन । बधशून्य (त्रि.). पतम । सिद्धार मोक, (I.) नि मुच्यम् । सर्पकामुक । सापकी निर्विकल्प, (त्रि.)* बेंचुली मोचन (सोना)। भाइ (संजोह का जिरह) विशेष्यविशेष और आकाध (भास्मान). पालापर, गण, (न) नि+या+स्युर् । गापानदेश । हाथीदी सम्बंध FREE धनुधर भाँसका कोना । पशुओंके पौरको बपिनेकी रस्सी। विमान #mir- "अंजीर" रारदे भादिसे निपटना (सफर) और मोक्ष. पांतन, (न.) निय+गि स्युन । बरसादि । वि.-- .उ.स सारग. बर निकालना । प्रतिदान झिरकर देना।देना दार। जनाः सिद+मय म स्थान पर घमर्पण अमानत देना. । घटोटा । जयजा पास, (पु.) निर+यएपम् । पके फूलनेसे निक-नि- हता और समय पाकर टिन हो जाता है। रस । । निकट गोद । परसा (). औरा)मोर पूंद (पु.) निर+ह । • नागदनक (बि)। (1) द्वार (दश) गोंद। पार । शेरार । बोटी. पंचन, (म.)नि पाल्टा धातु और प्रलयरे विक गसे भगानेद्वारी निरक्षिा मर्य :(कार. पूरापना. मोर .

4 निरन (इटाआ)। गया । निति निति, (श्री) निरहिन् । मुख । मुस्थिति । प्रा. निवर्तन, (म.) दोनों ओरमे कौन राममे रहना भिसा हो आना । मोक्ष (छुटकारा)। धादि। सौ वर्ग गन पृथिवी | RATre और मौत. नियहंण, (न), नितरां वहन । निर्वृत्त, (नि.): नित । निष्पन 1 पूरा कियाहुमा स्द मारना "निर्गता वृत्तिः यस्य" वृत्तिरहित । जिसकी कोई जीविका निवसति, (श्री.) नियम अापरे महिं (नि.). निवासस्थान पर. निवेद, (पु.) निविदयम् । अपना अवमान | पाक-निघसथ, (पु.) युप्यते अत्र । निमा सारी। अनुताप । "इतना यदा करनेपरमी काम न बना" हदी प्राम गांव. इस तरह मरताना । उदासीनता । तदासी । पेराग्य । नियसन, (न. ) न्युयते अन । यह 15 संसारके पदायास मुं मोरना. निवस्-आच्छादन-दिना+युट् । १४ । 'निवेश, (पु.) निर्-विरम्यम् । मोग। वेतन (मजदूरी)। नियह, (पु.) नितरां टयते । यहस्य भूच्छन (बेहोशी)। विवाह (साई) प्राप्ति (हासिल). निविद अन् । मात हुकामिमे एक. निव्यंट (त्रि०) निर+वि+यह+का लक (छोडाहुधा) नियात, (पु.) नियनः निस्दा वा वाट 'असमाप्त ('जो सतम नहिं हुआ )। पूरा हुआ। समाह- चायु हटनावा वा एकजाता है। वहान हुआ । ढवा । "उपचित" "जो काम सच्चाइसे पूरा वह जिरह जिस्से शन ( मोनार ) आदि कियागया हो" पूरा दिखलाया गया. मका । और आयय (धामण)। निहरण, (न.) निःशेषेण हरणम् । पूरा २ है जाना। (बेहवा जगह) (वि.). दाह ( अलाना) के लिये शव (मूदा ) आदिका टेहाना नियातक्यच, (पु.) हिरण्यवसि । और निकालना. बेटा । एकदेव. निदाय, (पु.)-निर्दयम् । निशात (फौहुए ) शत्म निधाप, (पु.) न्युप्यते । नियपि (तीर) आदिका उद्धरण (निकालना)। मल, भूत्र था. दिका त्याग थाहारनिहारविहारयोगाः" इति स्मृतिः। नियापक, (पु.) निवप्+वुत् । कोने प्रेत (मगहुआ) के शरीरको जगनेके लिये बाहिर है. जाना । जबसे उखाडना । छोडना । अपनी इच्छा मिनि- निवास, (पु.) नियमआधारे पर रनेवाला. योग (नगद) करना. और आसरा । "जगमिकासो वमुदेवसपनि निहारिन, (पु.) निहरति कर गच्छति ) निन्दनियासिन, (वि.) निवा+निनि । गिनि । र जानेहारा गन्ध जलाने के लिये नाराको बाहिर देवानेहरा (त्रि.). करनेवाला। कार पहिरे हुए. निहाद, (पु.) निधन हादयम् । मन्द । निविड, (त्रि.) नितरां विति (Kr +सान्दीपनामीप्रामोटा। निलय, (I. ) दिदीयते यत्र । तीमय । जहाँ पिर-निविद्, अदा. ए. प्रायः प्रेरणार्थक - हतेदार । मायस्थान । रहनेरी जगह. कहना । सवना । इतिला देना। निलयनम, (२.) नि+सी+अनाटिपना मात्रयस्थान । किया जाता है. निवाम । बाहिर जाना. निीत, (म.) निम का गरे निसीन, (f.)निस्ट्रीमा विषयगया । बंदिया कटलम्पिन यात्रा पोशाक पहिनेर गया टिगया । गिराया । मारा गया गया। नित, (२) निम+मारे सानि दान देना. थावाज. नियचन, (मध्य) मदननियम । रोशरा.. होगया (त्रि.). टम देश निति, (मो.)नि नि । निश्प, स.प.लिटरमा मोना । पीरोग परना। नि । “नितिनु महाप" मनु देना (उमा पा)A:शिरों, नियन, (२.) Refगिया नियन, (4.) प्रिय र आदि मामला पर । भावरण जाहाना - दंबरदयनि

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. करना. निकोपण, (न.) नियुद् । कौडा निष्क्रमण, (न.) निक्रिम ल्युत् । बदर निष्ठा, (नी.) निया+बह । नाद ठेप्म निकालना । खिखार निउर कटौर (सस्त)(नि.)मौAS निष्कल, (वि.) निगंता कला यम्मान् । कागल्य निष्णात, (त्रि.) नितरी माता (1) निया+क पत्तम् । मम्मीनाना वा सारमा नियुग (चतुर) पाया (निप्पत्ति, (धी.) निरस्पद लिन् । पत्रः(1) सम्म भारनि रारी धोरणे निसामना । मला.. निषाद, (२८) निषाद, (पु.) निपीदति मनः पापं वा यस्मिन् । प ( निष्कासित, (नि.) निम्छम् गरि घम् । “निषाद रीति कुवरः" वीणा या गडेमे निस्तीहुई सारिन (निकाला गया)(न.). आज । चाण्डाल । बामगसे शूद्रामें उपजा पारराव नाम | निकिचन, (नि.) नानि किचन दय। - वर्णसंकर । दोगला. कुछ नहीं । निधन, निपादित, (वि.) नि+माणिक । धेटाया गया। निप्पुट, निम्म्कदमक । परके पासा दमा दुःखी किया गया. वाचा । मेल । अन्तःपुर । रनवाम् I निपादिन्, (पु.) निपादयति हस्तिनम् । निसद् निय+ (नी.) इलाइची. गिनि । जो हायीको बाताहै। हस्तिपाल । हस्तिपक । निकुल, (नि.) नामि कुनै यम्य । विश। हाची चटानेवाल्य. सफेल रह गया. निपित्त, (नि.)नि+लिमका सींचा गया । छिना गया. | निप्युपित, (त्रि.) निर्माता निपिद्ध, (वि.) निसिपक । निषेधचा विषय । हटा- निस्वचीकृत साल उतारा गया. याहुआ । रोका गया. निष्पति, (सी.) नितिन् । निटा। निपेक, (पु.)नि+सिक्यम् । गर्भाधान । हमल टहरना। छुटकारा, । पारमादिसे निकलना हो सीचना "निषेत्रादि श्मशानान्तम्" इति मनुः. कृतिः" इति स्मृतिः निपेचनम्, (न.) नि+नियमअन । सींचना । लिडकाव / निष्ठर, (नि.) निर+8 । साथ। काठाहुया. निष्क, मान । मापना । चुरा० आम सक सेट् । निष्क- यति । अनिनिम्कत । प्रादिसे पत्व नहिं होता. (हिस्सों को बाहिर निकाला. निष्फ (पु.न.) निश्चयेन कायति । केक । सोलह मास्नेका परिमाण । १.८ एकसौ आठ रविमर सोना। जाना। चौथे महीने में करनेलायक एक मंत्रा- सोमपण । यादीच जेवर (हार) सोना । एक तरहका सोनेच वर्नन. समाप्ति । नियत्ति नाश । अन्त । मापर निष्कण्टक, (नि.) निगंदाः कष्टाः यस्मात् । 4. स.। जिम से कांटे निकल गये हो। शत्रुरहित । मयरहित. रहना । व्याकरणमें "Entert" दो दर पराधी सरहदया सार दिलवाला. निफम्प, (नि.) निर्गतः कम्पः यस्य । न कांपनेवाला । (d) मन". स्थिर निचल. निष्ठुर (न. ) नि+स्थाटरच् । पत्रकार निष्करण, (नि.) निगंता करणा यस्मात् ।व. स. । नि- दंस । बेरहम. टना वा वचन बोलना (1.) । सर निष्कर्ष, निमा पम् । इयत्तापरिष्ये । इसी बातया निष्पून, (iv) नि+टिव्न्छ । दिन। पर (नियोर) निश्चय । मीन, बेहुनर ! मर राय (जिसका बीयं नारदोत्रा) भएरा (पु.): "I" (भपयाः) सरन्यः । निरव निफलक (नि.) नि: बर: यस तक (दर) विदिशानदीनद. रदिन। देवग. निष्पत्रारति, (सी.) पत्र (2) निकाम, (नि.) गित मा १२ । भारहित । निधारत, (नि.) रन पर पय । कारमाहिला दिया. (द). 1 दुस । त । गुरुये सेवा । धर्म मदिर घमि "गरनिगादप्सियने" पर - [निव, रंगया. घी रात. (त्रि.) निर्+पद+ । शिक्षा समाप्त । पूराहुआ. ! निस्तुपक्षीर, (पु.) नितु भन्तः शस्य क्षीर व शुभ्रं प्रद, (नि.) निर्गतः परिप्रदः सम्मात् । कन्या यम् । तोहगे रहित-जो भीतरसे दूधकी नाई त हो। दी) कोपीन (संगोटी) और पुनः आदिके पिना . गोधूम (कनक)। इसका माटा दूधी नाई चिट घे पास पुन्छ नदि। परमहरा संन्यासी । जिसने रा. होताहै. संग छोडरिया । वजसंग (त्रि.). | निस्तेजस्, (नि.) निर्गत तेजः यस्मात् । जिरामेसे तेज (नि.) निर्गतं फलं यम्मा । मिस्से फल निर (गया) निकल गया हो । शफिरहित । अमिरहित । " फलसे रहित । वेशायदह । पलाल (पु.). नपुंगामातही. (अव्य. ) निषेध । निधय । सावन्य । पूरा २ । निनाव-निधन, (पु.) नि++अ । “पञ् या" नरी। प्रवाह । इयतेनुए चावलोंकी पीछ (माद)। अपक्षरण-बहना. ६ (नि.) निता एदा यस्य । जिसकी इच्छा निस्रप, (नि.) निर्गता नस यस्य । जिराकी लदा (शर्म) की रही। पियों के मुरारी दयासे रदित. जादी रही। येशरम । निर्लन, i, (पु.) नि+र+पम् । सभार । सरूप और राष्टि. निस्त्रिंश, (पु.) निर्गत: त्रिंशय. भलिभ्य+इन् । प, (नि.) निर्गनं रास्वं यत्र । जहाँ दामला न रहा । समा० । जोशीस अंगुलिओंसे निकलगया । सह (तल- शून्य । जिसमें वीर्य नाहिं । कमजोर । जीपरदित. चार ) तीम अंगुलसे अधिकहीको कहते हैं, उससे छोटी म्पात, (पु.) निर्गतः सम्पात (गतागतं) यत्र। दुरी होता है। उसके समान मारनेवाला होने से निर्दय । समें थाना जाना नदि रहा। अधरान । निसीए । मेरहम (नि.. निस्सैगुण्य, (नि.) निष्कान्त. प्रैगुण्यात् । तीन गुणों के रण, (न.)नि सरनि यस्मात् । निग-अपादाने कार्यमे, समारसे या कामादिसे निकलाहुआ । कामना द। जिससे निकलता है। गेहानिद्वार । घर भाविध (इच्या चाह ) आदिरो रहिन । समारसे पारहुआ. जा "भाये युद्” निकलना । मरना । और | निःस्नेहा, (श्री. ) निर्गच्छति मेद यम्मात् । जिस्से भेद निलगया। मतसीका वृक्ष । प्रेमसे रहित (त्रि.). पर, (पु.) निर्गत. सारात् । पारसे निकलगया। निस्य(य)न्द, (पु.) नि+म्यन्द वा घ्यन्द पम् पा. रोडवा था । साररदिन (नि.)। केलेका पक्ष । पलम् । स्पन्दन । “ईपन् क्षरण"-थोडागा वदना । निमा- दली (सी.). ना। "निधान्तं स्पन्दनं यस्मात्"। जिसके पाग रचनहिं गरण, (२०) नि सार्यते अनेन । निर्+र+णिय+ / नि:स्य, (पु.) नासि खं अस । जिसके पास धन महि । (नि.). पृट् । घर भादिगे निकलने का पंप (रास्ता). दरिद निधन । गरीव दुन, (न• ) नि+मृद व्युत् । मारण । मारना ।। | निस्वा-स, निसन्+अप् वा । शन्द । आगन. रदानारा. ता, (स्त्री.) नितरां गता । रात । बहुत फैलगई | निहन, (वि.) निहन्त । मारागया। तल किया गया । लगा हुआ. निहनन, (न.) हिन्+युर । वप । मारना । तलक- Pए, (त्रि.)नि+यान्यन्त । सोडाहुा । खणा रना. आमपाय । बीचमें. निहन्त (f.) निदनन् । मारनेराला । नारकरले. पार्थ, (पु.) "दोनों के भारी समहार जो आप वाला. तर दे गौर कद्दे हुए कामको करे" एक प्रकारका दाग. | निहय, (पु.) नियम । भादान । दुगना । पुस- तरण, (म.) नि+-करणे+व्युर । "भाये युद्ध" नेम्बार । पार जाना । तरना । भौर भिकलना. निहित, (नि.) नि+या+छ । स्थापित । राहुभा । तल, (नि.) निम्न तलं (पतिष्टा) यस्य । दल गुभ । दिपाहुा । रहराभादासाहुमा।"नितराहित" गोल) निमका सला (नीचेगा भाग) हो । दिउ. निमय, (पु.)नि++अप् । राना और प्रसारमे स्थित सार,(पु.) निमेषेण तारः । पूरातरना (पारजाना) होरही वस्तुको औरही प्रामे मूनन करना । पर। उद्धार । पुटकारा पार पहुंचना । पानी इलाको पाना. डिआना. वाण । नुसना. - ओरी । स्यूडी. बहुत हिरारी. दारा. पथ.३७ चालानीले रंगच नीटोएर मात्रा दी। जहां बहुत रहता है। देशभिता वहां वा जिम्मे पास वा वायु हवाला है। विजी महाराजा मयूर (मोर) नीटलोहित, (पु.) नीलः कन्ट, लोहे टेदा) बादल और मुमः (मोया)। "निर्गनः नीशाद (पु.) निवर कौते हिमानिता +यम-दीधः । दिम और वायुदर रमेर निन्वनम्, (३९.) निवनम् (न.) निमन । मुघर जाना। आने नीगतन, (न.) नीम अनुदाय ज्ञानको छिपाना । प्रतिवाद करना. नि। निगेनगर पारि.. निन, (नि.) नियुक। दिमागमा । प्रतिसाद फेरते है। थाहाँ पूरा २ कोट किया गया. यादिगे श्रादर काना । पर निद्रुति, (बी.) नितिन् । टिपाना । मुकरला. पानी दिनाना-पत्रिकामा दिन। निद्वाद, (पु.) नितरों हादः । निमपन् । अयर पीटर पामे पारी मीना-दा- शब्द । ऐसा शब्द कि जिसमवर्थ प्रकट नहि. मागपि । भारती करना । अथिन (म्मा नीकाश, (पु.) निवार+यम्-दीपः । निश्चय । यीन । घोद थादिकी पूजा करनी. अच् । सदृश । समान ( बराबर) । “मनीकानीरज, (बी.) निामा । यीमारी बजसरीखा थादि. (साम्य) "नाना छ यन्माद। विं नीच, (त्रि.) निय ई सदमी चमति । चम् । हुई । रोगरहिन (नि.). पामर । नीव । वामन (वीना)। चारनामी गन्धद्रा नील, (पु.) नीला रंग । काइदा हस्स (पु.). कवर्षका मयांदावन । भारदाना नीचस्, (अव्य.)। नीचे । थोडा । और क्षुद्र (कमीना). पानर । एक निधि (सना) नीड़, (पु.) निविदा इटन्ति पत्र । इल्मक । निवासस्थान । बोडका वृक्ष । इन्दनीलमनि। दीना। रहनेकी जगह । पक्षियोंश कुटाय-आलना (पोसला). बेल । नीले रंगवाला (त्रि.). नीड़ज, (पु०) नीडे जायते । पन्छ । घासलेमें टपजता नीलकण्ठ, (पु.) नीलः कन्यः अन्य दिन है । विहरा । पक्षी । परिदह । "नीहोद्भव" यही अर्य. नीत, (त्रि.) नी+क। रेजाया गया। बताया गया । याम चिडिआ । सान ( ममोला)। चन्दन. किया गया । व्यतीत होगया. नीति, (श्री.) नीयन्वे टन्नीयन्ते अयों अनया। नी+फिन् । नीटा योर वालोन लाल शिवजी । टकं जिसके द्वारा अर्थ समझा जाय । नी+चिन् । शुक्राचार्य आदिसे कहीहुई शानविद्या । एक शान "मावे" पहुंचाना। नीलसन-वासम् , (वि.) नीठ वटा काला और साल मिलाहुआ रंग. 'इसलाकका इटम न्याह (इनसा)। हानिट करना. नीटे वनोबाटा । नीजी पोशाकवाय. नीतिमत्, (त्रि.) नीति+मनुष् । नीतिवाला । नीति में नीलाम्बर, (पु.) नीठं अम्वर क्या चतुर । दाना. नीटा है । बलदेव । धनेश्वर । नोटा राम नीतिशास्त्र, (न.)नीविवोधकं यानं । नौनिविद्या सिखानेहारे २०(त्रि.). शास्त्र । हसति । सुक्यचार्य । कामन्दक । चाणक्य । नीलोत्पल, (न.) कर्म० । इन्दवर ।। विशुशमा आदिके रचेंदुए पञ्चतत्र । हितोपदेश मादि. नीप, (पु.) नोमन । कदम्य । कयूछ । नील अशोका | नीवार, (पु.) निव०पञ् दीर्थः ।। नीय (न.) नीर । निर्गतं यद् अग्निनो वा । जो बागडे नीमिया, (म्रो०)। निन्ययति । बिहे निकटा जलपानी। रस. ध्ये-इन-यो । वामयोंका मान । नीरज, (न.) नीरे जायते । जन्+ । पानीमें हुआ क्रमाबंद. कमल । मोदी । जो पानी में टाजे (त्रि.) एक जटका | नीवृत्, (पु.ली. ) नियतं वर्तते । जीव (पु.). नारद, (पु.) नीरं ददातिदा । मेघ (जो पानी दटोग रहते हैं. दन्दः सम्पाद" में शून्य (पि.). नीरत्न, (नि.) निर्गत रुनं यम्मात् । जिस्से ऐक (मु. रा)निस्टगया । गाद (गाय) पन. (पटदा) कनान । काहाट. नीरस, (पु.) निःपरन् रमः परमात् । जिसने रग निकलनहार, (पु.) निक्ष्यिते । गया । दारिन (अनार) मिन्ने रम नई (पि.). शिविर परक कोण. রুনা वृक्ष। मिया. - . निम् - .

[विशिक, 1 मि गो. प.) पिकरूप । अनुनय । भनीत । इभ । हेतु। नेपका नजिकः, (पु.) निरुफ वेत्ति-अधीते या+अ+ । अपमान । मपदेश । अनुनाए । निधय । टहरू । शन्दोंके प्रतिप्रत्ययको जान्नेहारा. नर्गुण्यम्, (म.) निर्गुणस भाव या निर्गुणपन । गुणों का (सी.) न+फिन् । सव । तारीफ 1 और प्रणाम । न होना. पूजा. नैपुण्यम्, (न०) निणस्य भावः निपुण्यम् । निर्दय होना। , (नि.) मुच-विकल्पसे न होता है। प्रेरित। बेरहमी. पायाभा. नैदेशिक, (पु.) निर्देश करोBि+ठाइक । भानाको माग्ने (त्रि.) नव एवं । नव+तन । नवस्य ः। भभि- पाला। मृल। नौकर. नवीन । नयान "नून" यही वर्ष. नैमष्य, (न.) निर्मलस्य भावः प्यम् । निर्मला । पु.) मुदति पापं । । । पृ. पंः प्रविशेष । शतू स्यता । सफाई | विषयों वैराग्य. दरस्त. नर्लज्यम्, (न.) निलंबस्य भावः+य 1 निलंबपना । शर• (अव्य.) पिवर्क । निषित । स्मरण । वाक्यपूरण । जिंदगी. वायोतन । दलील । यकीनन । याद होना, नेल्यम्, (10) नीलस भावः यद । नीलापन । काला । (२०) न किसक । पादागद पाँवय भूषण । नीला रेग. पटा. नैवेप, (म.) निवेदं (निवेदनं ) अति प्यम् । नि+ ट्रफम्, (न.) निपटनांनाना अभिधानानो या विद्+णिन् कर्मणि यत् सार्थे पण वा। जो निवेदनके कन् । वैदिक शम्दोका शेष (राबाना) (पांच योग्य है। देवताके उदेशसे खोज्नेलायक पदार्थ । देवताके "च्यायोंमें है, जिसपर यास्कने रीका दी है). भागे चहानेका पदार्य. की, (बी.) नीचैः पराम्दं चरवि+यसरी । नःधेयस, (वि.) निःश्रेयाय हित+अण्+सी+सी । निधित धेय (कल्याण )को पहुंचानेवाला । अानंददाता । मोदाका '(स्य)क, (म.) निलं मनुष्टेयम् कन्-टन् वा । नि- देनेवाला. नुष्य । प्रतिदिन करनेटायक. नपध, (पु.) निषधाना (जनपदानां) अयं+अणु । व-ण, (न.) निपुणस भाव+प्पण-क्षण वा । दक्षता । निपघदेशका नलनामा राजा । इसीके विषय में बनाया राई. हुआ अन्य (न.) रा देशमें हुआ और उसका सम्बधी त्तिक, (त्रि.) निमित्तात् भागतम् टक् । पुनजन्म (नि.). दि निमित्तका मात्रयकर कियागया जातेरिआदि । नेप्फम्र्य, (न) निष्कर्मणो भाषः । कामसे रहित होना। बरसे. विधिसे सब कामोंको छोडना । "नकर्मणामनारम्भाष- तिकलय, (पु.) कर्म । “चार हजार (राहर) पर्य" गीता. गोंके पीछे नैमितिक आय होता है" । मदावा दिन दीत रिकक, (पु.) निफे (हेग्नि-पीनारे) नियुजरह । नेपर जगतोंका प्रय, सोने या मोहरोंके काममें गाया गया । कोपाध्यक्ष (पजा- प, (न.) एक तीर्थ । यहाँ निमेष (वियु) ने नची) टंकशालानियुक्त (रासाटिया). त्यय नाश किया. मैगिक,(9.) निष्ठा (संसारसमाप्तिः) प्रयोजनं अस+टक् । मोध, (म.) म्यग्रोधस्य विकारः अण् । वटफल । संसारको समाप्त करना जिसका प्रयोजन है। जो सारा डका फल. जीवन ब्रह्मचारी होकर गुरु के गृहमें निवास का है। एक यिक, (नि.) न्यायं वेत्ति-वधीवे पाठक । जो प्रचरका समचारी । "नि स्थिविन गाहुआ" एकनिध यायको जानता वा पाता है । न्याया। न्यायशालके (पि.). राहाय. नैष्णुर्यम् , (न.) मिनुरस्य भार+य । निरसन निर्दष्टा । स्तर्य, (न.) निरन्तरस भावः+प्यम् । अविरटेद । बेरहमी. हगातार रोना. नैसर्गिक, (वि.) निसर्गेण (खभाषेन) निm+टक् । पिय, (10) निराशत (निष्कामस) भार पम् । स्वभावसे बना।साभाविक दावी. पारन रखना । आशाशून्यत । भावारी रहितपन । विशिष, (त्रि.) निविंशः प्रदर्ण असायद । तर "मेगस परम सम्". भार जिवावरमारसे करनेदाय (नि.)

बनता।देशमा बहानाम्गेनात्र बाल । वाला। नीले रंगका नीलोररमा मोर,(पु.) नीम इमान्यूनील अशोकानीयार, (पु.) नापी राय मुभा (का).fमंत: मीनार, (पु.)तिका निहवनम्, (३९. निद्वयनम्, (न०) नि+अन । मुकर जाना । अपने नीराजन, (न.) नीरस्य शान्सुदास - प्रानको छिपाना । प्रविवार करना. नि। निःशेषेण रामनं अत्र वा नि निबुत, (वि.) नि+छ+क । छिपाया गया । प्रतिवाद फेंकते है । अथवा जहां पूरा १ चांदन। किया गया. आदिसे आदर करना । पहिले दर दर निद्रुति, (सी.) निन्दु किन् । टिपाना । मुकरना. पानी दिसाना-३ पवित्र कपडा दिखद-- निहाद, (पु.) नितरो हादः । निम्हड़पन् । अव्यक पीपटके पत्तेसे पानी सींचना-५ दंडवा शब्द । ऐसा शम कि जिसका अर्थ प्रकट नहि. आरात्रिक। आरती करना । माथिन ( नीकारा, (पु.)निवार+यम्-दीपः । निश्चय । यकीन । घोडे आदिकी पूजा करनी. यच् । सदृश । समान (यरायर) । “यमनीकार" नीरज, (सी.) निरत्ता रुक् । यीमारी वनसरीसा आदि. (सास्थ्य)। "नियत्ता यस्माद । धिन्- नीच, (नि.) नियं ई लक्ष्मी चमति । धम् । हुई। रोगरहित (त्रि.). पामर । नीय । वामन (बौना)। चोरनामी गन्धद्रव्य नील, (पु.) नीला रंग । क । इलाता इस (पु.). फवका मर्यादापर्यत । भारत नीचस्, (थय.)। नीचे। योगा । और क्षुद (कनीना). नीड़, (पु.)निधिता इठन्ति भत्र । इल्म 1 निवासस्थान। पानर । एक निधि (सजाना) 12 बोडका वृक्ष। इन्दनीलमणि । नया रहलेकी चगह । पक्षिओंग फुठाय-आलना (पोसला ). मेल । नीले रंगवाला (नि.). नीज, (5) नीडे जायते । जन् । घोंगटेमें उपजता नीलकण्ठ, (पु.) नीलः कन्डः अन्य दिन है। बिग । पसी । परिदह । "नीरोद्य" यही वर्ष. है। शिवजी महाराज । मयूर (मोर) नीत, (नि.) नी+। लेजाया गया । घलाया गया । लाम चिडिआ । राजन (ममोला)। बन्दन. लिगमारामतीत होगया. नीललोहित, (पु.) नीलः कण्डे, मोहित मीनि(पी.) नीयन् उनीयन्ते भयो अनया । नी+सिन् । नीला भोर वालों में लाल मिनी । उसोग- निगोग भये रामशा पाय । नी+जिन् । भाचार्य गि पर कापिया । एक शान "माये" पहुंचाना। नीलपसन-यासम्, (i) भी जमर्न काला भोर लाल मिलाहुमा रंग. गाना म्याइ (नगर) हागिल करना. नीटे वनोंगाला। नीती पौशासनाअ. नीलिमर, (वि.) नीति+मनुस् । नीलिवाला । नीति | नीलाम्बर, (पु.) नीलं अम्मर मथ। नीला है। बलदेव । दानधर । नी नोनिशान(R) नीषा शा। नीतिविया गिमानेहारे ५. (नि.). यागी। शामाय । कामन्दः । नाणक्य । गीलोत्पल, (न.) • In चिर पात्र । दिनोपदेश आदि. Tue. मार, (.) । निर्गत एव भमिती या । जो आगगे नीम-वी, (प्रो.) । निन्यपी | A PETरीम. যা ধী। লিখীয়া মুন। (2.)रे सपने मन । पानी में हुआ स्मरबंद को पानी में दस (दि.) एक पटया मील, (पु. श्री. ) नियों व 21(:.). रंगद (:.)*TR मेष (को पानी दोग रहते. । मन (fr.). (.) fer (e- +re oiTHREr रामद () (FATEH Afnitare. | मौANTaront Idawn) fr(f.) nिimar M चावट. - - [नैर्विशिक, ! +पूजा. TH है " तय.) पितरूप । अनुनय । अतीत । भि। हेतु। नैरकानशिक (पु.) निरकं वेति-अधीते वा+अण्+ अपमान । खपदेश । भनुताप । निधप उहाइको शन्दोंके प्रकृतिप्रत्ययको जानहारा. नैगुण्यम्, (म.) निर्गुणस भाव+य । निर्गुणपन । गुणों का (सी.) न+फिन् । सव । तारीफ । और प्रणाम । न होना. नपुंण्यम्, (न) निणस्य भावः निष्पम् । निर्दय होना। 1. (त्रि.) मुद्य-विकल्पसे न होता है। प्रेरित। बेरहमी. चलायाहुआ. नैदेशिक, (पु.) निर्देशं करोमिठाइक । आमाको माने- (नि.) नव एव । नवतन । नवम्य नुः । मभि- वाटा। गृल । मौकर. । नवीन । नया । "नून" यही धर्य. | नैर्मल्य, (न.) निर्मलस्य भावः प्यम् । निर्मलता। स. पु.) मुदति पापं । । पू. सपः। दृशविशेष । रातू परता । सफाई। विषयोंसे वैराग्य. दरएल. | नर्लज्यम्, (न.) निवस्य भावः+य । निलंबपना । शर- (अव्य.) पितर्क । मिथित । म्मरण । पाययपूरण । जिंदगी. वायोतन । दलील । यकीनन । याद होना. | नेल्यम्, (न.) नीलम भावः+यत् । नीलापन । काला । (न.) न+किर-पूर+ । पादानद । पाँवा भूषण । नीला रंग. टा. नैवेद्य, (न.) निवेदं (निवेदन) अर्हति+प्यम् । नि हुकम्, (न.) निघण्टना-नाना-अभिधानाना पा विद्+पिच कमणि यत् साथै अण् वा । जो निवेदनके ह+कन् । वैदिक दादोंका कोप (राजाना) (पोच योग्य है। देवताके उदेशसे छोडनेलायक पदार्थ । देवताके • न्यायोंमें है, जिसपर यास्कनै टीका की है). आगे चढानेका पदार्थ सी, (सी.) नीचेः अाम्दं परविन्स्टी । नःश्रेयस, (वि.) नि.धेयसाय हित+अण्+सी+सी । निशित ममी. घेय (कल्याण)को पहुंचानेवाला । आनंददाता । मोक्षका । (स्य)क, (न) निलं अनुष्ठेयम् कन्-टन् पानि देनेवाला. • 'नुष्टेय । प्रतिदिन करनेटायक. नैपध, (पु.) निराधाना (जनपदाना) भयं+अण् । ., -, (न.) निपुणस भाव:+प्यम्-मण् वा । दक्षता। निपघदेश मलनामा राजा । इसी के विषयमें बनाया हुआ पन्थ (न.) उस देशमें हुआ और उसका सम्बधी तक, (नि.) निमित्तात् भागतम् टक् । पुषजन्म (नि.). निमित्तका भाभयकर कियागया जादेरिआदि। नैष्कर्य, (२) निष्कर्मणो भावः । कामसे रहित होना। परसे. विपिसे सब कामोंको छोडना । "न कर्मणामनारम्भाम- सिकलय, (पु.) कर्म । “चार हजार (पहप) प्पय" गीता. ‘गों के पीछे नैमित्तिक सय होता है" । ब्रह्माका दिन पीत | नरिकक, (पु.) निके (हेनि-नारे) नियुजटिए । नेपर जगतोच प्रलय. सोने या मोहरोंके काममें गाया गया। कोरायस (राजा- "प, (0) एक तीर्थ । यहो निमेष (पिपु) ने नची)। कशालानियुष(टक्यालिसा). सपनाच किया. | नैष्ठिक, (पु.) निष्ठा ( संसारसमाप्तिः) प्रयोजनं मस+। मोध,(म.) म्यमोधस्य विकार:+अण् । पटफल । ऐयारको समाप्त करना जिसका प्रयोजन है। जो सारा जीवन ब्रह्मचारी होकर गुरुके रहमें निवास कता है। एक यिक, (त्रि.) म्यायं वेत्ति-अधीते पाठक । जो प्रघरका ब्रह्मचारी । "निशा स्थिति में समाहुआ" एकनिष्ट पायको जानता वा पदता है । म्यायन । म्यायशावक (वि.). बामेदारा. मेष्ठुयम्, (न.) मिटरस्य भाव +य। निदरपन । निर्दपदा । तर्य, (न.) निरन्तरस्य भावः प्यम् । बधिरडेद। बेरहमी. तार दोना. नैसर्गिक, (त्रि.) निसर्पण (सभापेन) निm+e: । य, (न.) निराशस (निष्कामस) भाय +पम्। सभावसे पासाभाविक दरदी. बाद न रखना । भाशाग्रन्यत । भाशासे रहितपन । ननिशिक, (त्रि.) निर्षियः प्रदरण बसस्टम् । तल- मेय परमं गुरम - बार जिसका है। सारठ मानेरा (नि.) . A 1 .

ये। वा स्याना माटकमादिनीना 1 जहाजका टकराना वा टूटजाना. पहुंचानेहारा । नेत्रान्त, (पु.) नेत्रस्य अन्त ।नेत्रका बाहिरी को मिपाल, (पु.)भाने नामगे प्रति सरेरा नो, ( २९२) नो, (अन्य) अभाव । नहिं । न होना. नगम, (नि.) नृन्गंगति । सन्म हिमा नोचेत्, (अय्य.) निषेध । नहिं तो । यदि म हुआ. ऋर। परमोती । कतल करनेदारा । देह ।। मोदनम्, (न०) नु+भावे ल्युट् । प्रेरणा । चलाना । गाय पर करनेदारा, धकेलना. नोधा, (अव्य.) नवप्रकारे । नौ प्रकार । नी तरहसे. नृसिंह, (पु.)ना मिहदा । मनुष्य और दि. नोपस्यात, (त्रि.)न उपतिष्ठति । स्था+तृच् । दूरस्थ । सम्पयाला भगवान्का एक अवतार (oris रक्षा की). दूररहनेहारा दूरका । दुष्ट-वादी । दुरेवचन बोलनेहारा. नौ, (सी.) नुडी । पानीपर तरनेका साधन । वेडी नृसोम, (पु.) ना मोमा चन्द्र इव । तिमन - "नौका". महापुरुष । वा आदमी. नौकर्णधार, (३०) नावः कर्णधारः चाटकः । बेदीन, नय । इन्साफकरना । भ्या० पर० स० सेट् । चलानेवाला । मल्हाह । मला. नारीत् । नरयति ( णिच् ). नौकादण्ड, (पु. ) ६ त । वेडी चलाने के लिये दोनो नेजक, (पु. ) निञ्-शुद्धि+ग्युल् । रजक (क्षेत्री, ओर बंधाहुमा काठका दंडा । चप्पा. करनेहारा (त्रि.). नौयायिन्, (नि.) नावा याति-उप० स० किश्तीमें जाने- नेतृ, (त्रि.) नी+व् । प्रभु । निर्वाहारनेहरा वाला । मुसाफिर. चलानेहारा । पहुंचानेहारा । नीमका वृक्ष (s) नौव्यसनम्, (न०) नावःव्यसनम् । बेटीकी तकलीफ । नेत्र, (न.) नयति नीयते वा अनेन ट्रन् । सपने एक प्रकारका कपडा । वृक्षका मूल (18) नौसाधनम्, (न०) नावां साधनम् । किरितओंका साधन नाही। शलाका और भाख । (पाय). साधन । प्रवर्तक (त्रि.). (पु.) नी+ऋन् । मनुष्य । और पुरुष । नर । "जाती नेमगोचर, (त्रि.) मैत्रयो. गोचरः-प्रत्यय हो" नारी. विषय । आंसोंके सामने प्रतीत होनेवाला. नृकरोटिका, (पी.) ६ त० । नरकपाल । मनुष्यही नेपच्छद (पु.) नेत्रयोः छदा-शावरणम्। यो खोपरी. नेत्रमलम्, (न.) नेत्रयोः मल । शारोंकी में मृग, (पु.)साकुके वंशमें एक राजा. मृत्, नाचना । दिवा• पर० अक• सेट् । नृत्यति । अन- नेत्ररोगहन्, (पु.) नेत्ररोग हन्ति । तीत् । नर्तिप्यति-नरस्यति. काली वृक्ष (मह नेत्रोंके रोगको दूर कताहै ). नेमासनम्, (न.) नेत्राय मान-व• त । मृत्त-त्या,(न.) न्+काक्यप् वा । ताल और स्वरसहित के लिये अंजन (मुमो). विलासवाला धोका निक्षेप नाचना. अधिकार हो । एकप्रकारका राजा । और राजा । बादशाह. नृपति, (पु.) ६ त- 1 कुपैर । और राजा । मनुष्योंडा नग्राम्य-अभम् , (२०) नेत्रम्प अनु । नेत्रदान एक पारका नेत्ररोग. नृपनिय, (पु.)६ त• राजपटाण्टु । बडा पियाज । अस । थांमु. धादिधान्य । और भाप (बाम) । राजाका पियारा। नेत्रोत्मय, (पु.) नेप्रयोः उत्मनः। नेत्रों का अ नेत्रों के लिये मुरादाई कोई पदार्थ, नृपमम, (न.) नृणा सभा-शाला-संहति । राजाओं नेदिष्ट, (नि.) अतिशयन भन्तिकः । र समा वा शाला-। राशके रहने की शाला. ओ यदुनही पास हो । अतिशय निकटम्म नृपन, (पु.) नृवां महः । थनियिका पूजन । "नरया" नदीयस्, (नि.) अतिशयन अन्तिम दही वर्ष. असन्त गमीपस्य । पाहुनही पाग. नयरा (पु.)मा वरदः । मनुश्य और वराह (भा) नेपथ्य, (न.) नी+पिच्-नय नेतुः पयर बात नापा भरतार, नृयाहन, (बु.)मापदनं मम मनुय विमटी गादि। भूमि (भाग). ईचीवर, .

[प, (5.) मगर भाषि (पर) 4 ग्यशित(वि.) निस+अध. क्षिप्त । नीचे मा) । (ग) अमें यह एद गर्ग नाम पाया. ज्यस्त, (त्रि.)निमा लिप्त । फेफागया । लक। (पु.) + निशा दात एके पागका छोडगमा । और गया. पहिरेरा पेरा (परिपि) परती । जिनदेवता याद, (5.) निभद्+पम् ( पर आदेश नहिं होता)। भोगना तुराक सा, (न.) मासे रोए चक्रकी धुरी जो टूट न्याय, (पु.) निईम का पम् । उचित (मुनासिय) । पसी है" नियम्य क्षेत्र । "सार्थे धम्" गीतमसे कहाभा एक शान । प्रतिज्ञा आदि पांचोंको. म. प्रतिपादन करनेहारा एक प्रकारका बाप । नीति । नीति. मेत्ति, (त्रि.) नेमिकता सम्प- मु.। का उपाय । मोग । युति (दलील) 1 दलीलसे मिला. पकपी पारफे समान नियम पालनेवाला. हुआ शान्त (मेशात). मा.सा. नेते। पाना । गरगना. ग्यायशानम्, (न.) न्यायस्य शानम् । तर्फका शास्त्र । ह. (पु.)मेह । पोमा प्रधान पुरोहित जिसकी पुफिविधा, सोयी संस्था. न्यायसूत्रम्, (न.) न्यायस्य सूपाणि । न्यायालके सके. का, (नि.) एक न..जो एक नहि। जो अकेला तपश्य. मौ (प्रायः समासने प्रयुक्त होता है) भ्याप्य, (नि.) न्यायात् अनपेतं+यत् । जो न्यायमे फचर, (नि.) न एकः परति । यतों (समाज में शाहिर नहि । उचिन ( मुनासिय)। युफियुक्त । दलीलरो रहनेवाय. मिलाहुआ. फिटपम्, (न.)निष्टस गावः निकटता । समीरना। म्यास, (पु.) निशम् कर्मणि, भारे या एम् । स्थाप्य. पायहोना । पोखीपना. द्रव्य । रसनेलायक चीन (अमानत )। त्याग देना । किया, (सन्य.)न एकतारक। कई प्रकारले । कई सैन्यास. नरसे, म्युल, (नि.)नि+उज+पम्-फ्त महिं हुआ । अधोमुरा। पभाषाभय, (नि.)न एक भावं माधयते-उप. स. भी पेमें । पुल (I) यज्ञरा एक पान । कुरा । एक भाव (सयाल) मायर न करनेवाला । चल- सुवा । ग्धा (थापा) मारागया. परिणामी. मेकर, (अन्य ) न एटकारे। परयाबटुत । वारपार । न्यून, (वि.) न्यूनयति । नि ऊन-परिमाणे अच् । उन । कधार. कम । गद्य (निन्दाके लायक). म्योजस्, (नि.) निरा। टेड।। दुरा । पदमारा. नेतिर (नि.) नितिं करोति+ट इकादितिरस्कार प करनेवासाजो सररहदय न हो इमान। निर्दय । नीच। प, (५०) पत्-पा-वाह ( समारामें पीछे रहना है)। यी- मा""पचाना । सपर्दारी करना । हकूमत करना । मैगम, (पु.) निगम एव+भण् । नीति । उपनिषत् । प्राविधा (उरामा पानेद्वारा पेदान्तशाय"निगये वायु (हवा)।पत्ता । अण्डा भवाअम् । " वपिग्जन । बनिशा (प्यापारी )। मग- पत्रिम, (नि.) पश्चि-ततो मम् । पाइनित । पा. नेसे निपटाहुआ । पकाकर तयार किया. ग्यकार, (पु.) न्यायम् । नोचकरण । तिरस्कार। पष, (वि.) ५+ज-तस्प वा । पाहुआ। राहुआ । निरादर करना. गुनाहुभा. म्यग्रोध, (पु.) म्यर रणदि । एक्लन् । पटाक्ष । पक, (वि.) पक (सको व होता है) परिणत । बोटला दरस्त । राबवो नीचे करके टहरा हुभा । विष्णु । पवाभा । रट (मजबूत), निारोन्मुरा ना होने चार हायर मापजंडीकास्त. पर आगया.तपाका पाया गया. म्या, (पु.) नितरा भगति । निअर-कुतम् । एक | पका, (पु.) पचति । पकिर । अन् । म । मुनि । एकहरिण जिसके मात सागोने है. पावरालय । मीठोध घर । पालकी पुरिभा म्य, (नि.) निग्नं पयति । नि+अ+पिन् । सीधे । प, टेना पकाना-बबूल करना (परिग्रह ) । मुरा• उ. नीवला । निग्न. सक.सेदभादिमें पर। पश्यतिते । पति.

पक्ष, । पसिन्, (पु.) पक्षस्थति अथ इनि । जिमका पर हो ।पन, थापरण-नांकना । भ्वा०पर.मा. + । जो मझाके चरणों मे उपजताtid' पाची गिनती और धनिटासे परिवार ( २९४) पक्ष, (पु.) पश्+अच् । पचदशदिन । १५ दिन (पम- | पदमल, (नि.) पदम+लन् । नेत्रों के मुन्दा रन् । वाडा । पक्षी । परिंदह । समय । पक्षिओंके पर । "केशरी | पक्ष्य, (नि.)प मर.+यत् । पमबाडने का परे समूह अर्थम" केशपक्ष (बालोंका समूह)। पास । एक ओर होनेवाला । प्रयक पसने बदरन्दर पर । दोहफ्ते । न्यायमें जहां साध्यका संदेहो जैसे पट, (पु.२०) पनिष-निः । न । "पहाडपरयाग है" विरोध । दल। सहाय । मित्र । हाथी । यूरा, पाप. समूह । शरीरका अाधा भाग, पक्ष()ज, (न.) पढे जायते जनताको पक्षक, (पु.) पक्ष इव कायति । कैक । पावदार । समाराः। जो कीचडगे उपजता है । पन I पासेका दवांजा। खिडकी. सारंग. पक्षता, (पी०) पक्षस्य भावः । पक्षका होना । अनुमित्सा- | पदिल, (नि.) पर+अति अर्थे हन्छन् । विरहविशिष्टसिध्यभाव । एक पक्ष पकटना । न्यायशास्त्र में जहां कीचड हो । कर्दमवाला देश. "जहां वहिमत्व (आगका होना ) का निश्चय नहिं वहीं | पद्धेरह, (न०)परे रोहति । सहकार पक्षता होतीहै, उस निश्चय होनेपर यदि अनुमानकी पम ( कमलफूल)। मारस मग । भारस मंत्र इच्छा रहे तो भी होसफीहै नहिं तो नर्हि" इस प्रकार | पशि (ग्नी०) परिक्तिन् । सजातीयसन्दति ।। मानते हैं. कतार । पाँच वा दम अक्षरके पादवाटा हा पक्षति, (स्त्री.) पक्षस्य मूलं-ति । पखवाडेकी जड। गिनती । पृथिवी । गौरव । वडापन । एक पक्षको प्रारम्भ करनेहारी प्रतिपदा । पइया । एकम । प्रपथ । विनार (फैलावट). एक तियि । पक्षिओंके परोंका मूल । परकी जद. पशिदूपक, (पु.) प्राइमें भोजन के हि पक्षद्वयम्, (न.) पक्षस्य द्वयम् । युतिके दोनों ओर । दो णोंकी पाँतिको जो दूषित कर देता है (ii. पक्ष (युक्ति). दुप्+णिच्+युल् । जो पतिके लायक नहे. पक्षपात, (पु.) पक्षे (अन्यायसाहाय्य ) पातः (अभि आदिमें भोजन न देना चाहिये । धूत. निवेशः । एक ओर गिरना ( जहां इन्साफ नहिं )। अन्या- | पतिपायन, (पु.) श्राद्धमें भोजन के हो के लिये राहायता करना । तरफदारी । मुलाजा. णोंकी कतारको जो पवित्र का है । पक्षहोम, (पु.) पक्षाय होमः । एक पक्ष (पसवाडे) में श्राद्धभोजन के लिये बेटेहुओंकी पांग्रे पाठेव समाप्त होनेवाला होम वा यासंबंधी संस्कार वा रीति. विद्वान् आदि. पक्षाघात, (४० ) पक्षस्य आपातः । युक्तिके एक अंशका पक्ष, (नि.) खजि+कु । (पक् आदेश) * टूटजाना. हीन । जो चल नहिं सत्ता । ( श्रीने सम पक्षान्त, (पु.) पक्षस्य अन्तः यत्र । जहां पक्षका अन्त लुंजा । शनैश्वर । शनीचर (पु.). होता है । अमावास्या । और पूर्णिमा तिथि. पच्, पाक-पकाना-भ्वा० उमः सह पक्षामास (पु.) पक्षस्य भाभासाम्प्रतीतिमानम् । मिथ्या- थपाक्षीत् । अपत । पत्रिम । पत. युक्ति । सठी दलील. पच्, व्यत्तीकार । प्रकटकरना । पक्षाहार, (पु.) पक्षे थाहरति ।पक्ष (१५ दिन )में एक- थनिट् । पचठे (अपक). ही बार भोजन करनेवाया. पच्, विसार । फैलाना । चुरा उम सह.. पक्षिणी, (बी.) पश्तुभ्ये सहनी वियेते अस्या+शनिः । पचयति-तै। थपपचत्-त. जिसके दोनों दिन परोंकी तरह हो । दोनों (आनेवाले | पचेलिम, (नि.) पच्+केटिमर् । और वर्तमान ) दिनों में मिलीहुई रात । पक्षिओं का समूह. एकाहुआ. परिन्दह । बाग (दीर) "बिहाम." पशिल, (नि.) पक्ष: माहाय्यं अति अर्थ इलच् । याहा-पन, (पु.) पद्यां (ब्रह्मणः चरणाभ्या) प्यकारक । सहायता देनहारा । महल करनेहारा न्याया भाष्य पनानेहाण करसायन मुनि (यु.) परवाला (वि.). परमन, (२०) पक्षमानिन् । नेवार सोम । धागो पसक, (न.) पयानां अवयवान् । धनायत" इति श्रुतिः. बंद करनेद्वारा रोम (६) निम्मणी । पलक । कमर- पून तिचा विनोग पर । बहुत छोटा सून. युनोत्र (लडाईका मेशन) जाहिरात पप्रति अपात न्याय,] ( २९५) [पयनम्नान, लेता?). समूह । पांच गोएं. फपाय, (पु.) कर्म•। पाचप्रारकी सैली चीजें । पशमना, (सी.) पवसूनाः (प्रापिरपस्यानानि)। सेयों- बम्बु (जामन् जम्म) सामली (सिंवल), पाल्पाल, के मरनेही पांच जगह । "चुरो, पेरणी (चड़ी), उप- कुल और बदर ( देर). स्कर (परकी सामग्री), एण्डनी (पुहारी ) और पनीर कोष, (पु.) पय कोपा इस आवरमा यस । राजानों पा" ये पांच जगह जहां पीटे कीडिओ मरते हैं. घि नाई जिसके पांच पडदे हैं । वेदान्तमें कहाहुआ भ. | पञ्चाग्नि, (पु.) पय अमयः उगमा यस्य । जो पौर समय सादि पांच कोपय अभिमान करनेहारा जीव । अमिओंकी उपासना कर्ता है। पांच अमिशाला (नि.). मा दिए । अन्नमय आदि पाँचकोषदाले देह (न)। पशाङ्ग, (न.) समा० दिगुः । एक वृक्ष के ता (लिम) अनमय कोष) (स्थूल शरीर) प्राणमय, मनोमय और थादि पाँच 1 "विपि, वार, नक्षत्र, योग और परत बेमानमय (लिङ्गशरीर) एवं मानन्दमय (कारणारीर) ये पाँच । जिसके पांच मत है । "जप, होम, तरंग, भ. है सबसे पिछला शरीर मोक्षी दसा । अर्थात् इसी भिषेक और ब्राह्मणभोजन" हा प्रकार तारा पुरष. भानन्दमयकोपरप परीरमें मुक्त पुरष भापही आनन्दा रण। पाँच भंग जिसके वसमें पूर्म (का) मोजा दे. (पु.)। (यह अपने बोरपूर गिर मोशी, (मो.) पयानो कोसानो समाहारः । पाच होसका अंतर (फासलो). खगुम्-दी,(म. सी.)पयानो सदाना रामाहारः पाँच पक्षागृत, (न.) गमा. नि. "प, परंरा (it), पी, दही भोर साइन" ये पांच. पाटों (संव) का समूह । पांच पलंग। पांच भेजे. [गवम्, (म.) पाना गा समाहारापार गौओं पशाल, (पु.) एक देश । २१ रस देश एमाण देशके वासी (बहु.) गव्य, (न.) गोर्विकारः या पपाना गन्यानो समाहारः। पशाली, (बी.) पप (प्ररथं) बली (पी) गोका विकार । पाँच गव्योंघ मेल । दही-दूध-धौ-गोमूत्र भल्+अण् । वनागपुनरिकारी बनी पुनर्ग। गमतर)-और गोदा ये पाँच. गी। एकप्रकार दी. चूडा, (श्री.) पर पूहा यम्पाः । जिसी पाँच चोटी पवारात्, (पी.) पंच परत परिमण भय । । हो। एक अप्सरा. पयापागधी ऐम्या परग. जन, (पु.) पभिः भूनः जन्यते । अन्+पम् (पदि | पशेन्द्रिय, (म.) समा- ft. taree नदि होती)। जिसे पांचों भा उराम कहै । मनुष्य । अ-कान ),सर, नेत्र, गन (भ)(Fathe) एक दल (जिपी पीरो ष्णपन्द्रका परिजन्य नामरणा पाह. पाणी,पार, पपु (ग), (fr) 2. पाखबना). तत्य, (न:) पाँचो तस्य को (पृथिवी-जल-देज वायु | प(पि)अर, (पु.२.) परिभर Amre भोर भागार) मम(राय), मांग-मम्य (मच्छी) मु. इपिओमा समूहाला भविपन्न भार मैन “तपराध महे? पाँच।" पपपपर (रित्ररा) (म.). क्योंकि सबका पदिय मारम). गण, (पु.) पप राणा भस्म । जिसके पांच बाण है। पशि-भीपजिन् वा कराएगाधर (ra बामदेव "पपदार". 40) "म" पिरमर पर 2. पटी, (प.)(Tr) गमा• गि। “अक्षर ती पत्रिकाको (गी). (पीपल) रिल (वि), कट (ोर), पो (मामल), पशतपम्, (fr) eer wifree और भोपानरा एक भाग है जहां राम- समय मित्रों पर पर पन्द्री सीतारमणके साथ निरस्त ऐ(ब्रो ममबार देशोतररर. गोदावरीम प्रशा) मासिक पडो से पाप (8.) मारकर मीनधीर मेसरा । उस दिनरला (नि.) अपरदेशीय, (.) पासीरापरास पसन्मार,(२.)राहना । - रुपमा वायु (उमर). नमसमwrt: साग, (पु.)पापा बरसा se(retreet बोलपमें अनियसin.

सदिर (सर) । उदर (पेट) र ( या माध्यायपाट-अमिहोत्र-अतिथिपूजन-पितृतर्पण और पटोल, (पु.) पट् ओलच् । हम नाम / पटाफटक (बा)। राजारामिहामन ( गति-बाना ना• पर. सह. मेद। पति । भापहज, (न.) पात् जायते ।पनिमपत्रा ट्री) । राणाके गाय मिक्षामनार भारत । पटराणी । "पदिली""R. शिमिना वाचन- रिदुर मल मा.पर..सरपरी पक्षत, ( २९६) पाय, (न०) पश्चाना (यिन्यादिभूतानां ) मावः । पटचर, (न.) पश्यने (सावन) । त्वं । पाँचपन । मरण । मौत (इममें शरीरके पारम्म पटन+चरट् । जीर्णवन । पुराना कमा । करनहारे भूतोंस अपने २ अंशमि प्रवेग होता है) वैधित इव चरदि" चर+अन् । "जो अपनी "पञ्चता". चलताहे" चोर (पु.). पञ्चदश, (त्रि.) पञ्चदशना पूरणः+ठट् । पन्द्रहको पटल, (न०) पदवेष्टन कलन् । छन्दै । ७॥" पूरा करनेहार जिस्से १५ ची संख्या भरजाती है। नेत्रमा रोग। और पटारी । वृक्षविशेष ।' पन्द्रह । पन्द्रहवां "पमदशी" पूर्णिमा । वेदान्तका ग्रन्थ (दु.. एक अन्य है (स्त्री.). पटवासक, (पु.) पटान् वागवान (सार पञ्चधा, (अव्य.) पच प्रकारे । म प्रकार पांचतरहले. जो कपोको मुगन्धीवाला का है । वस्त पञ्चनख, (पु.)पय नसा यम्य । जिसके पाँच नग्न्न हों। हाथी । व्याघ्र ( मेडिआ)। पाँच नखांवाला (त्रि.). वमनवायच । कैमरमादिका चूर्ण । बन्दा । इनर, पञ्चनद, (पु.) पर नद्यो यत्र । जहां पांच नीय हो । पटह, (पु० न०) पदेन हन्यते-हन् । " शब्दं जहाति वा । हावा । पट वाहन ( विवस्ता-इरावती-चन्द्रमागा-शत और विपाशा) 1 पाव नामसे प्रसिद्ध मद्रका देश । काशी, बिन्दुमाधव पटिमन् , (पु.) परन्दमन् । चतुरना । चतुर्वन वा पद २ शब्दको होता है । हावार । ईड दीपके पासकी पाँच नदिये। की। सदी । उपद्रव पञ्चभूत, (न:) पचानां भूतानां समाहारः । पाँच भूनों- का मेल । वैशेषिक आदिसे कहेहुए पृथिवी-जल-देश- पटीप (न. ) पदाइरन् । चटनी (एक) यायु और याताश खरूप पाँच मूत. (खेत) । मेघ (बादल) । वंगुनार (बंटर पञ्चम, (नि.) पञ्चानां पूरणः । पयन्+मट् । जिसे चंदन. पांची संख्या पूरी होती है। पांचवां । +त्रियां दी। पीयस, (नि.) यातायैन पचनु । पचमी तियि. करने में बहुतही चतुर हो. पञ्चमकार, (न.) पयानां (मारादिवानां ) समाहारः। तब कहैहुए मय मांस-मत्स्य मुद्रा और मयुन । पटुजातीय, (नि.) पप्रकार जातीय । ( पाँच शब्द जिनका पहिला वर्ण "म" है). अच्छीतरहका. पशमहापन, (पु.) महान् यहः महायशः । ततः कम। पटुरूप, (त्रि.) प्रशसः पदः । पाँच हसाओंर दोरी दूर करनेदारे पाँच बडे यदक्षा बहुत चतुर. बटियम. मनविशेष (न.). पञ्चमात्य, (पु.) पथमः (सरमेद) आम्यै (तदैक (पह, (२०) पदम् । ८ वा । नगर । मुख देश) सम्य । जिसके गटेमें पधमकी भर निकलती पुरमा (चार)। राम आदिल टेम्पल , है। कोलि । कोइल. पशदापन, (नि.) य हायनानि यम्य पांच वरिमरी कारण कपटा । कौरोप (रेशम)। रमाद'टा. (पु.). पर मरीन पद न बनना पु. टम. था. मेद । पाटप- पदमा, (पी.) प? (शामने ) ( देव दिने। मीटर-न. र, देनर देना-करेटना । बु. टम. सा. ऐट। पटकथन. परमाद(बु.)पातम काटा बनाता है। वा+ननन् । जो बहुत होग भने । पाटी।बा मुष्का पटरी () पनि टी .मय। काराचा (ट) “पर" भनी भये माराम् । पीगत पट (1) म, (न. ) पद (स) जनस (११) [पतिजनमा परिन्दा. . . फरोकरना. " भी(नगमन प्रास) जाना। भा. मा. पतग, (पु.) पाणी मनेन पतः (पक्ष) तेन गटवि. प.पने भनि ग। जो परसे पाता है। पिछाम । पड़ी। मबहार । कपरिक मोत हेना और पंचना । भोर सति सारना। भाभा. ग. सेद । णाय- परम (पु.) पतन सन् गति । गम्+रान् । जो मिर- ने । पपते । "मवहारमै सो"पनि । भएमापीर । ताहुआ आता है। सूर्य (सूरज)। शलभ (मकरी)। अरमापिट भएनिए. राग (पक्षी)। महुएका दरल. 1, (पु.) पायने भनेन । पा+अन् । जिसे सवपतअलि (पु.) पता थालिः यसे। (नमस्कार पारने । मूल्य (पीमत) धन । ताप (तामा) परनेके योग्य होनेसे जिसके लिये दोनों मुड़े हुए हाय एक पेगा । “भावे मम्" । भी (मजदूरी)। पूर्व गिर रहे हैं)। पाणिनी मुनिके सूझेपर भाष्यकी रचना (भा) । ग्लए (दाव), नियम । और म्यवहार । परनेहारा। योगके सूत्र बनानेहारा मोर एक मुनि । पार साकिनी । पीठिसपदिका । अरसीहिये. (यह सॉपके सरूपमें भापासे पाणिनीकी अंजलीमें नि, (म.) पण+भावे स्युर । पिकय । पेचना । गिराया). पतत् (पु.) पत्र पसी । परिदह, पि, (पुत्री.) पर्ण (प्लवदार) पाति । पाक | पतत्र, (पु.) पतन्तं पायते । त्रै+क । पक्षिओंका पर पटहनेद । एकप्रकारका होल । “पणवानकपोमुसाः" जो निरते हुएको बचाना है. इतिगीता. | पतत्रि, (पु.) पत्+अनिन् । पक्षी । पतत्री । परिंदह. पाया, (4.) पण+साधे श्राप तना-भ । व्यपहार । पतप्रिन्, (पु.) पतत्रः बस अस्तिदनि । पक्षी । "नचोपरे मे पनि एणाया" ही भीः. पतत्री। परिदद । परवाला. गपित, (त्रि.) पण+गाय+कात । परादागया। पतगह, (पु.) पतत् (मुतादिभ्यः सपत्) जलादि तारीफ कियागया । "भाप" न होनेपर "पतिं" एकाति । मुरा भादिसे गिरतेहुए जल भादिको टेता ऐगामी होता है. है। पीकदानी । एकप्रकारका पान. तन्य, (नि.) पण तथ्य । वितम्य (सरीदने पतयालु, (पि.) पत्+क्षालन् । पतनशील । पातुक । योग्य)। स्लोगव्य (तारीपरे लायक)। और व्यवहार्य पिरनेवाला. (व्यवहारके योग्य ) +यत् । इसी वर्षमें "प" मी | पताका, (स्त्री.) पत्यते (योध्यते) योधादिभेदः अनया । पत्+भाकम् । जो जुदा २ लडनेवालोंको जत- डित, (पु.) पा (तस्वानुगा धुदिः) जाता भस्य । ला देती है। पांस (लकी) पर देनेलायक तीन को. तार• इतन् । जिसकी बुद्धि सावको पहिचानदी है। नके स्वरूपवाला कपडेका टुकना । सण्डी । सौभाग्य । शाखके तात्पर्य को जाहारा । विद्वान् । आरिम । दाना । नाटकका एक अगाएंदमें एक चक्र. पर । समभवाला. पताकिन् , (पि.) पताका सरल इनि । पताकापारी । 'ण्डितम्मन्य, (पु.) भारमानं पण्डितं मन्यते । जो दाण्डी पकडनेहारा । ज्योतिषने इस हालका दुस- भपनेोपण्डित मानता है. को सूचन करनेद्वारा एक रक (पु.) प्ययीभी, (बी.) त.। विक्रेयद्रव्य । विकेयशाला। पति,(पु.) पादति । भो । खामी । सार्विद । शोदर । बेचनेटायक पदार्थों के वेबनेका स्थान । रिपणि । दुकान । राराम । अधिपति (मालिक) (त्रि.)। प्रियां वा गप्. दह । "वायें कन्"। पथ्यदीपिका "पपशाला", पतित, (त्रि.) पत्नक । गलित । हिलाहुमा । गिरा- गण्यत्री, (बी.) कर्म• । यह श्री जिसे मोल ले हुआ। अपने धर्मसे गिराहुआ. मक है। वेश्या । केजरी. पतिधर्म, (पु.) पत्युः धर्मः। पतिके सम्बन्ध पीय मण्याजीय, (पु.) पण्येन भावीपति । मा+जीमच् । कर्नव्य. जिरारा जीवन (सरीद फरोक्त किये हुए द्रव्यमे ) होता । पतिप्राणा, (स्त्री.) पतिः एव प्राणो यस्याः । पविटी है। पशिग्जम बनियाँ म्यापारी (म्यवहारी). जिसमा प्राण (जीवन) है। पवित्रता स्त्री. पत्, गति । जाना । गिरना । उतरना । नीचे भाना । भ्वा०पतिलहनम् (न.) पत्युःलतुनं तिरस्करणम्। दूसरे पतिसे पर• सक. सेट। पता । अपप्तव, विवाद पर मृताधि तिरस्कार करना. पभ.14 ) Irt मन मिना nr रशास(r.kram- मदिन. स्मैपदम्प (नि.) प्रमः परप्राशना परापरः(3) Arar GILITIोरो मापी Thar...मरापी..(२.) 12. ( १९६) पवत्व, (न.)पमान (पिसारिवाना ) भागः। पटचर, (न.) पठ्यते (भावेश्यने) त। पावरन । मरन । मंत्र (इगर्ने गरीरके भारम्भ पटत चरट् । जीवन । पुराना मगर करनेारे मोम काने १ मंशन प्रवेश होता है) पेटिन इस चरति” चर+अन् । “जो भाने में चलता" चोर (पु.). पञ्चदशा (7.) पमदनों पूरनाट् । पदहको पदल, (न.) पद-बेटन कलन् । RITA- गरनाबिस्ले १५ती संमया मनाती है। नैनरा रोग । और पटारी । विशेष । १५ पदा । पन्दहला "मी" पूर्णमा । शन्तका प्रन्य (पु.). एकजन्य (). परवासक, (पु.) पटान् बागपत ( पनघा, (प.)पर सरे। मप्रकार । पानतरहमे. जो कपडौंको मुगन्धीवाला का है। पसनम्ब, (दु.)पम नगा मा जिनके पान नगन हो। यमनपासक । केमरआदिका गर्ने । पन्ना ri (मेडिमा)पंच नोकला (नि.), पटह, (पु.न.) पटेन हन्यते हन् । पशनद (पु.) नोचा नहो पाँच नये हो (निन्द्रमा और शि)। शन्दं जहाति वा । हा-बार। पटमै नान या पट २ शन्दको छोडता है। परमादेश । हासी विन्दुमाधर पटिम , (5.) पट+इमन् । चतुरता । । की।रारती। उपव. सा.(..) भूगाना समाहारः । पांच भूतों- न म हेहुए प्रतिपटीर, (न.) पदहरन् । चालना (6) Ter पर मा. (सेत) । मेष (मादल) । शगर (ो म.(.) । पामर । निमे शदिर (रोर)। उदर (पेट) ( है। पाशा । प्रिया रोपटीपर, (प.) अतिशपैन पगु ।' ".. करने में बहुमही चतुर हो. CIETY.(.) (ENTATiना) ममहारः । 7 HRS • भौर मंगुन । पानातीय, (f.) पा+rahar (Prefund वर्ग "म"६). Time हारे नायक शायदक्ष । बनत चतुर. पाटन-पितृतर्पण और पटोल, (.) पदमोजन् । मम " बपि (म.). Son:.) . (मगर) भभ (न.प. (न) या नगर । मुदा ir) पिनी भूमिलती . स, (1.) म १:14श्री (पु.). . 111 १५. स. भ. #z : प?- (पहला. (ch. ) यो म ) (M .* .... में। (1),(4.) (Anam पदार...ITriam- अच्छीतरका. - . "RATrana टार*.jarki-fivate , ६'a Timi () पी. मि पापा पागा कमाल वातामा नाम. 7 1 मेरा नाम. वावय. प्ररथ, (पु.) पत्र (पक्ष ) रथ व (गने पिर- मेगा पद्मालय, (पु.) प एव भारः पम । पमलो पर- ) पनासन, (न.) पनाहार भागनं । एक प्रकारय योगा- पनियरा, (A) भो। गर । पजा सन । कमलागन । पान (1) पादयो दाहिने पदर परित है। और दहिने पादको प पर धरना पनपन नामने पतियग, (टी.) मोति-पति गंध पद्मासन, (म.) पदस बारानं । कमलाली- पा (नर) Tीवी सन (घटना )। योगगनमें गिर सरगन. पनिमा (स.) परि (पीसेवन कर यते+ | पधिन्, (पु.) प (बिन्दुग्लं) अगि अमान। किया परना धिमा नियम है। सर , निन्दुगमूहवाला । हो । हामी । कमला (त्रि.). मली ताकी धारा में रहनेहारी पमिनी, (धी.) पमनो गमूहः गयो । पतिया, (स्त्री.) पशु सेवा । पतिी मेरी माभि- बमलोपा रगृह मटोपलादार (2) एक प्रकार गत (श्री.). पशि (पु.) पापिन् । सेन (पदार पोशय, (पु.) पते।बन् । महा । उगरा पंज)। "पिन्" मति (अना) एक बमल में गोता है। रितु. ३ पोटे, ५ पंदल) तनी सरदाना करावी पय, (म) पदं (परणं ) win परन् । स्वागया पर परोश (रोimire र पसी, (नि.) पnि+यो सम्बन्धमे सोप-ना पन, सुर-तारीफ सना ...। तपाकी पदवी जो पपने पत्रिका पनायते. है। विधिगे पियाहीहुई खी. स्थान) पत्र, (ना) परन् । पादनमात्र ( अमवग) अकमल पनरा. (पु.) पन+अगर । चिanie पटियर. पत्ता) । पक्षिओरा पक्ष (पर-पव। . पन्न, (वि.) परक । गरि । PATRI धारदय (पागज) चिट्ठी मनि। पन, (वि.) पर गिराभा । र परमा,(पु.) परस्य इव भा (खण्ड ) यत्र । गया । उतर गया। "पतन"rn(..). भारिपर पत्तोंके टकटोंकी नाई निरागया F पनग, (पु.) पदं ( ) पर भारि । जहाँ पसेसी नाई रचना है पीओ रे पुष.. निराहा से मी । गम् । यस्य । जिराका परा गारीकी नाई साधन है। गणी । सारणी. परिदह. पषगारान, (पु.) पण writing प्रसूचि, (सी.) पत्राणा सूचि इव । पत्तों की सागर. गई है। कण्टक । घाटा । वा. पादा, () कि () जन, (म.) पत्रं (लेसनपत्र ) अज्या अनहोस. संधीगरे । पर म्युट् । जिसके द्वारा सिनेमा पनि सजाया का हर पारा. (..)ntr" पा जाता है। मसी । स्याही. न्, (पु.) पत्रं ( पक्ष ) अति अस्पाने पाटा । पक्षी। शर (वीर)। येन (बार।। पपपपप, (पु.) गाटीपर चदाहुभा)। पर्वत और ताल पाना । भ्वा० पर• सक० सेट् । पयति । अपर रिपपा, (२०) र (m.)। (पु.) पथ अच् । मार्ग । पय । रास्ता क(त्रि.) पन्यानं गच्छति । पथिन् मन् । 1. गुर-९. (8.) पE | खाने के लिये परसे निकलकर मार्ग में जानेहारा भा. T rrita . । . रि। राही. पन, (पु.) पानि । पय । अपामार्ग र पा,(1.) antHITrt ...Turmy (१९८) (Pt. पनिरनी, (..): ममि गमगुर । नि। पप्य, (नि.) ६ (Pitar ki दामोदर र । गाडीला पी. रिया (इसर) के रोगी (tra सेवन करनेटायक व । और किनारा... पर्निचरा, (मी.) । गन् । यह कन्या हारा) । हरीनी (हरी) (..) अचानको मोकार रही है । - पद, मी (जना) दिया• • ENT परिंग, (२.) पटिगर) पीधे पद्, गगी । जाना सहन रानः । पुर• . (र). विन्दा(.) पोः (दीवान) मां पापा. (न.) पहिए । भोक र म मेद । पदते. मेर किशमिल है।मी। साठी किरग (पु.). नेहमी. मेगा. ()ी मेस (नारी-fr. पद, (न.) पद अन् । निह (निा मौज । यह पायक निगरे मन भर म.(.नि । मेन ( महमेदारी हो। भोरापार () 1)(TH), पाग, (पि.) परेन गम्भी। गम् माहे। पैदल. पदापि-धी, (बी.) परिकामे (..).r: rat नापी. पहाजि. (पु.) पायाभ्यां भरती (पर)" पोदारा. पाति, (पु.) पाert मानी। ४...)..(HTM) Im र मारनेक्षा. T (पर गंम) रेगन पदाति, (पु.) ll भाभा । । ना। पारनारीयोमा। १. (:.) (मर ) . पदागिन, (Fr.) Trt amrit चलनेवाला । (T.)ोश. पावित () tar than . 11 (1) t, मान । पा पाय, (पु.) मन ।। ११." माना HIT ..! Tr... araat पति- (t. AIMATAL re: 28सप्रन्य N .

पवर्ग, ( प.. । - पनवपा,(न.) गा+rt मोका | पमादय, (.) बलः सम । पभगर्भ, (पु.) प (विनामिन) गर्भ (en)पमापन, (.) पET RIPer यम । जो विगुलीमाभि (धुनी) के समय में टरता गनाबमानम (-) - है। माग । तदा । पारमुग्नशाला HAIN. । आने पोर पर - बमलकामप्य. पनगन्ध-धि, (नि.) पण य: । बमलदी गंध पसामन, (..) EETri गन (भेटर) FERTr- पनशा-मान-ग-भू-योनि प्रभवः, (I.)जायते । पभिन. (3.) ar) rrrr wr:- जन-समलो पदा. बिपEE.. परतातु. (पु.) पाय तापगली मागीपमिना. (em.) Terrrrr remi मातातील मोramirmiretre- पानाम, (पु.) पर्व मागी यम् । गिनी नाम CEBrain(..) भगमन है।णि पाप. (3.)... Tr पपुगण, (न.) पचं भघि ri+r | गया 4 intime भोप कारामिंग पुगण. पायाध, (.) पारो बन्धः (अधिश:) . (म.) पर ( wit...' या पानाmritri... एपना काली माई है। दमासाधी पार पभपरपु. (पु.)त. पूयं । भ्रमर (मारा ) 41. पन, marth Rem... पुलात्रि "पपत्रि" PER पमभू. (3.) (णिोनोमि () पार। ) निगरी मतिरा न ingh मामिल पनप (3.).veir irrare... है। भगा। "पयोदय" महीना पा. (11.) । पराग, (२.) पार को cufae ma की गमाल II प्राम। मारि. ER पोला, (पी.) Introl arer, (५. | movimar Pr materjRE TH पमतमान, (पु.) पारा 43 farer NIT(PR) (प ) पक्षगानाम'.).... पवार (1.) v Rtari कालtguru. पभाग, (पु.) RIT. Getty I.. PITEReg. पापा.. her .. ret- है। Om (ii) म ।। BRTime PI(i) म rn.tk सा.(पु.) RITEReceir | MURR. Mary कोने Tran पार (Ramakrantertairs ...। rier (3.) tree भारती.(..)t:stresrcer:.:. २r का . में , R ।

- - " -- - (हेतु और साध्यका इछा रहना) विविध परायण, (न.)पर अयनं ( णलम्)। अस्ठान परार । गत तृतीय वत्सर (पिटला परिम परामुख, (त्रि.) पराह (प्रत्यावृतं ) मुर्ष यस्य । पराध, (न.) ऋ+अच् कर्म । चरम सहन पराचितं, (नि.) परेण आचितः (पुरः) व्याप्ती वा। पराध्य, (त्रि.)पराध ( चरममस्या टाचारर/ | परायत, (पु.) परामरयम् । परीनं । दिनमा परावर, (त्रि.) पराभररया और नि। धुमायागया । वदागया । उसया पाया पपजिगु (नि.) पराजि+रशुन् । जीतनेवाला। परासन, (ने.)परा+मगमयुर। मारमा पराप(पु.)(उR) नाम.ne परा, परा, (अव्य.) +आ। विमोक्ष (छुटकारा)। प्रातिलोम्य- परामत्र, (पु.) परा+म+अ । निम्छर । दे (उलटापन ) । प्राधान्य ( वडापन)। घर्षण (युरे यय अभिनय । दयाय । विनाश । तबाही, न कहना )। आभिमुख्य ( सामने ) । लाग (देना) । पराभूत, (नि.) पराभ्क्त । हरायागया । विक्रम ( बहादुरी)। मृश ( निहायत)। गति ( जाना)। दवाया गया। तिरस्कार कियागया. भा (टूटना) । अनादर । तिरस्कार । प्रत्यावृत्ति ( लो- | पराभूति, (श्री.) पराभू+तिन् तिरस्कार ! एज टना) । मूलाधारमें रहनेहारा एक प्रकारका शब्द । पराभरा हार. "परा वह है कि जिस्से अविनाशी पुरुष जानाजाय परामर्श, (पु.) परामप्यन् । युति हो ब्रह्मविद्या (सी.) दूसरी उपसर्ग जो नाश-तिरस्कार- विवेचन (विचार) । न्याय आदिमें कहर लौटना, इन सब अमेिं है. पराक, (पु.) चारह दिनतक उपवाससे सिद्ध होनेयोग्य ज्ञान जैसे यह पर्यत वहिव्याप्य धूमवाला है । प्रायश्चित्तरूप एक प्रकारका प्रत । १२ दिनका फाका । पर्वत, आग है". तरवार । एक प्रकारका रोग । छोटा. परामर्शन, (न.) परामृण्मन् । स्मरण र पराक्रम, (पु.) पराकम् छन् । वल (जोर)। देहज विचार । खयाल. सामभ्यं । वहादुरी. परामृष्ट, (वि.) परा+मृतक । स्पृष्ट । भागवार पराक्रमिन, (वि.) पराक्रमः अस्ति अस्य+इन् । परा गया । विचारागया। दवायागया. कमी। पलपाला । धैर्यवाला । बहादुर. पराक्रान्त, (त्रि.) परा+म+क । दृढ । वहादुर । किसी काममें बहुत लाजाना । उनमान उल्लाहवाला । थाक्रमण किया गया। हमला किया गया। वहुतही लगनेशारा । जमे "धर्मपरायण" (धन लौटाया गया. लगाहुआ)। नत्पर और पियारा (नि.). पराग, (पु.) परागच्छति । परा+गम्+ड । धूलिमात्र । परारि, (यय० ) पूर्वतरवन्मर । पहिले पनि धुर । पुष्परज । फूलोंका रज (जरी) । केसरका चूर्ण आदि । उपराग (ग्रहण) । चन्दन. असन्तरानु (यदाही दुश्मन ) (त्रि.) स्या है मुस जिस्का । विमुरा (मुं मोडेहुए)। आरम्म गिनती।....... किये हुए कामसे हटना. का दूसरा आधा. दूसरेसे हुआ वा पिराहुआ। याचिका दूसरेसे यहाँक यत् । श्रेष्ठ । बहुत अच्छा. पाटाहुक्षा. पराचीन, (त्रि.) पराग्मतः । पराप । परापुरा । मुं पदलना । बदल । लौटना. मोटेहुए । परकाठिक । पिछले ममयका । पुराना. परामय, (बु.) पराजिश्रिय् । परामय । तिरकार। पीछे । पहिला पिछला । नीचे कपर । पानिक हटाना हार, पराजि, मा. आ. (पराजयते ) । शिक्त साना । परावृत्त, (नि.) परात । लौटाहुआ । धरना पर करना. पपजित, (त्रि.) of। जीतागया । वध रिया न्याय-नगा)। सोटा दियागया. गा। किन दियागया। कानूनमे हारगया, पराशर, (पु.) दागदेवता पिता एक मुनि. राविरिया हुआ. पराए (नि.) परागना अगोदय । पापीन, (त्रि.) पनि पाम थापानी था। हो गये। गत मरगया. परमार मार दूसरेरे मातहत. परात, (वि.) परामल निरम (Reet पर (दि.) परम भए यत्रं यत्र । गरेका पालि (हापामा ). मामय है। दूसरे धार नहाए । ...न्य नपरेक मत्र (न.). (शिलादापनि Uk. परायद, भ्वा० मा । परावर्तते । औटना । मुल.

पराइ,1 [पर y पराड, (पु.) पर बा । एकदेशि समा टन् गमामा परिकी, क्या था । परिकार्ण वे । पटना पर देशः । पत्वं । दिनका पिछला भाग । एनिमें कहाआ | परिक्षिन्, (पु.) पनिमन्युमै टमरने सत्रया! अपराठ काल । दिनका पिछला पदिर. पुरवंशका एक राजा । “परिक्षित" ही छट. परि, (अप्य• ) रातः (चारों भोरपे )। पनाम्यापि | परिया, (नि.) परितः मन्यते । वन पर्गे . (बीमारी)। शेप (बाधी)। निरणन (निकालना )। से गोरी जाती है । पुर भारिमें मयुमर प्रश पूडा । भूषण । उपरम । शोक । सन्तोष । बोलना। कम गरिदे गदाप पानी की जगह है. बान । त्याग और नियम. परिसिन, (नि.) परि+पि । शुष। 2 । ‘परिकर, (पु.) परि++मा पर्य(पलंग)। परिवार पायागया । तालीम दियागया. (सान्दान )। सभारम्भ (गुरु) । समूह । थरछी तरह परित्यानि, (मी.) पर यालिन् । निती। से अंगोंको बांधना । बमर कगना । विवेक (वियार) शोरन । प्रतिदि. भौर सहचारी (साथी). परिगत, (वि.) परि+गा। प्रत(m)।1 परिपर्सन, (म.) परिकार भन । काटना । बार- पालना । मया पहुंचाना. (जानागुआ)। गिगा ( भला) र (T परिफर, (पु.) परि+घरे भाईके विवाहे किन दिया गया ) येशित (fryा)(. छोटे भात विवाह परानेवाला पुरोहित । पारनेवाला. परिकर्मन, (न.) बर्म (संकारादि) तत् परमार परिगम-परिगमनम् , (I..) किrar पारों ओर जाना । थे nam पा५. गंगार ( गमावर )शिरमारि जापाइरादा बरना। रिपयार अंगोंर मरनेका दम । भूगण (गहना-जेपर)। उपरिगति, (वि.) R+ran IITE रन । गाना । परीर धोना । (प.सेवक पिपलगमा पिया पियाग' (नौकर ) (नि.). परिकल्पन, (म.) परिवहसिन । रचना गरमा । | परिगट, (नि.) परिगुतn forms पन्त गुग मगाम , निपत करना। निर्णय सना। फिमगरना परिषषित, (वि.) पनिपत । निर्णय मागया। परिएडीत, (नि.) Rer ATTRE रागया। बनायागया। विभाग कियागया।दियागया समाग ri rura Arr. परिषीर्ण. (नि.) परिमाता पिरामा। कियागया। गि पंलाया पिरामा. परिषद, पRERAKen(P) Rय परिणीतंग, (म.) परिमन । घोषित दरमा । पथ (सी) "tte ".. हण्डोराना बदना।बोलनाकार नामम (ग) र पR (url), .. अप्"। पप (म) परिकीर्तित, (वि.) परिनत । पेपित मया- परिध, (I. ) TRA मि. iikram गया मार दिया गया । सा. लोसे महाभा महा। पर (.. m) र (पर) ••• मोदी सरर. परिपत.. परिन पो- पारना । रिमा. परियप, (पु.) kakareerwise परिधाम, (I. ) TRA (मेर FITो र । र) पूनिया परे सेयर Metv )) (i). परिचर्षा, (2) Ferriter- परिषप-मम्, (..) kirtan भREAM RE nr परियार (.keti(rintrik परिहा (त्रि.) kaRrI सामान Krfere wRrkin ཀན་ तर, (.) RINT. I teree refere. (3.) tirorn stories Trrr. (New) ना. -- - वटी नाम । अवयवाया यनादरकर सहारा बिस्से परिमाण किया जाय । मापा बरावरीm गया। युचा मुनानिय । ठीक माना पाया परिमितकय, परिमिता कथा यम्या पोटा बोटनेत परिपिस्य, (त्रि.) परिधी विति। स्थानक । पेरेमें | परिमिताभरण, (वि.) परिमितानि भामरते एमघ । पूरा परिचय । पूरी एमानि (शतिमा)परिमिताहार भोजन, (वि.) परिमितः मारण परिच्छद, परिच्छद, (पु.) परिक्छद्घ हमः । टपकरण (गा- परिनिष्ठिन, (नि.) पर+नि+er+I राई मान ) (हाथी, घोडा, रथ, पंदल वगैरह ) । कपटा गह- विषय पूरी जानादुआ. ना थादि । परिवार । " सेना परिच्छदसम्य "रयुः परिपका, (त्रि.) पर+प+सम । पूरा पर परिच्छेद, (पु.) परि+छिद्धम् । विशेषणमे इय जलाहुआ. ताकरण । खासतौरपर हद पांधनी । प्रत्यके टहिरावकी परिपन, (म.) परिपन्यते (व्यवहियते) नै। जगह ( सर्ग-अध्याय धादि)। सीमा (हर)। विचार. पन् । मूलधन । मूडी. परिजन, (पु.) परिगतः जनः। चारोंओरके रोग। परि परिपन्यक, (पु.) परिपन्थयति (दोषन्यानं वार । प्रतिपाल्यजन ( पालन करनैलायक नीव पुत्रादि), एबुल् वा कन् पन्यादेशः। न्यानं वदिवा पदी परिणत, (त्रि.) परि+नम्+क्त । गलम् । परिपक्क । जो दोपको प्रस्ट कता है वा जो मानने म पकाहुआ। वृद्धिंगत (बढाहुआ)। देमरी अवस्थाको जाता है । शत्रु (दुश्मन). पहुंचा । टेटे दांत चलानेहारा हाथी, परिपन्थिन्, (पु.) परि+न्यिदनि । शत्रु ( परिणय, (पु.) परि+नी+अच् । विवाह । शारी. | परिपाक, (१०) परिपच्यम् । नैपुण्य (वयं परिणाम, (पु.) परि नम्+घन् । प्रकृतिका अन्यथा- उत्तमपाक थिच्छी तरह पकना. भाव । विकार । खमावा बदलना । बदलना । शेष। परिपाटि-टी, (सी.) परिस्पटइन् । अनु।। बाकी । नदीजा अर्यालंकार. विला । कायदह । रीति. परिणाह, (पु.) परिनिड्यन् । विसार । फैलाव. परिमय, (न.) परि++अन् । चहल । अबिर।। परिणेत, (पु.) परि+नी+तृच् । विवाह करनेहारा । कायम न हो. मर्ता । साबिंद. परिवई, (पु.) परिम्यहंघन् । राजा योमर परितम् , ( अव्य. ) परिक्ससिल् । सर्वतः । चारोंओरो. परिमाभाव, परिकअप-धन् वा । अनादर ।। घोटा, रय आदि सामान । हम्सवरपादि परिधर परिताप, (पु.) परितप्यते (मावादौ घम् ) । तपना । दुःख । उष्णता ( गरमी )। शोक ( अफसोस ) । भय परिमाण, (न) परिमाणमन्युट् । निन्दा | स्कार । हिकारत । वेदवती. (दर)।कम्प (कांपना)। एक प्रकारका नरक. परित्राण, (न०) परिक्स्युट् । रक्षण । यचाना । यु- परिभाषा, (नील) परिभाष्य । कृत्रिम नवाली बातचीन । और नियम (कापदह). राईमें लगेहुएको निवारण करना ( हटाना). परिदान, (न.) परिवर्तेन दानम् । दा+त्युट । मिनिमय । विशेष नाम. द्रव्यान्तरप्रहणेन द्रव्यान्तरदान । घटना । एक चीज | परिभूत, (नि.) परि+भूल । निरन । म टेकर दूसरी देना. वेदवत कियागुआ । हिकारत कियागया. परिदेवन, (न.) परि+दिव+युट् । अनुशोचना । वार ! परिमण्डल, (नि.) परितो मण्डलं । २ सोचना । विलार (रोना)। कियेगये कामको सोचना वर्नुलाकार । गोठ शकल. कि "अनुचित किया है". परिमल, (पु. ) परिम अन् । केनर चंदन परिधान, (न.) परि धीयते । पहिरना । परि+ध+क का मटना । मलनेसे निफ्टी भुगन्धि, मंनि न्युट् । परिहितपन्न । पहिण्हुआ कपड़ा. परिमाण, (न.) परिमीयते अनेन । पर+मद परिधि, (पु.) परि+या+कि । चन्द्रमा और सूर्यके पाच मेष (बादल) आदिके निकट होनेसे उसन प्रमाण । समता । परिसर. दुमा पेटन (40) वरूपमें महल । सूर्यकी | परिमित, (त्रि.) परि+मा+छ । नरिमन समा। चन्द्रकी सभा । परिये । गोल । दाय। गूल. कंपनी कासाचारों ओर और पाय. रहता । परिवारका चार । साईमें रपीडो बचा प.स.। योडेरो भूषण (जेवर) पहिण हुभा. कठिये घओर रहाई गेना. परिमितायुस्, (नि.) पिरिमितं आयुः पर। परिनिष्टा, (मो.) परि+निया+मद् । पूर्णकान । पूर्ण आयु (टमर) बाटा. मा(१). चौमासानेवाटा असभोजन. चारोधोरणे । । . .

(मेय, [प, पूर रेमेय, (वि.) R+मा+पन् । मारनेरया । यो परियेष्ठ (पु.) नि-मन मा मा: परिचित्र परिमान, (पु.) प्रा. In रिम्म, (.) परिरम पम मुम्पमा । टार (फ पलायस) आनिमेटगाना । बगरगिरी, जामहागाथे अप्रमादि--. रियन, (न.) परिसम्यते भगुमिः अनेन । परिमाज-र (पु.)य ARE | जिमयुर मारण । मारना । भावे युदा एग। प्रज+पमना । नागा. पायेगी रि(ग), (पु.) परि+पर+माणे एप पाए। परिशिष्ट (म.) परिसर" frater विनिमय । पली । धापारे पत्र । गुग मन्नाय गमय । भर मध नाका भप्यायादि । "परि अग"राम (गु. जयी भगको परामर शेगारागा)।“मारे युद" परिय. रिपद (3.) परिसरमम् । गान वायुभागी एम. परिसलन, (..) shree rarri fr(hyme, (पु.) परिवाचम् दापि । भर. हषय मम " AM बारा निन्दा पाटेका पदनामीमी रियादिनी, (सी.) परिनोबती (Nato परिधि (1.) Thern IF IT . १)ोगा भारोती माई बोलती है। पशिनि । गातारोवाली बीन । निन्दा नेपाली श्री. परि(fr.Amirror (arm.(.) +गि+पम । पुण्यम (ना)परिण, (..) from a tr Irri रिपापित, (नि.) परिसर गिन् । प्रतिम. ( . ) stor...tart पुण्यामा. Primarte.mrime. frare. (पु.) पारवियो नी । गगेन पा । परिप, (I. ) fathemat In । .. पापम् का 0 1 परिजम । मा. परी निभान. परिभाग्ति, 12.) careertime frare. (पु.) परिपम् बा 6 । नमो Arrier I - जापानी और पानी गानेसे IRR | पिर.(..) Charmir...। रिपिन, (in.) पहिले wiliatr wrमय सिमा nrtी rrorirriatre दिन (-) भनुममिले भागा उर. परिपर.) (ram) • रिविनि (पु.) विक्षत भरिदिन गि wthreनेपर wिen recruiTIN ort antran rt (परिपाल, (Retry.mrt amirm.। एमा). भPritierra रिपद,(M) KARTIMATERIWR. (1.Ner (... गुर। परियापण. ( (Ar writtणार .. Tritten (s) RARRORM rinenrhtrin remपा.) Rkm.re retri reet Ire...) eerakritiPा...सन्द -1 . re..

झागया. . जिसे हिन्दुलोग पलाशका पता न मिलनेर पर्णलता, (प्रो.) पर्णानां स्नाा नावही पर्णशाला, (नी.) पर्णनिर्मिता साया पद, (अध्य.)म्मिन् वर्षे+इन् परवान्तादेगःगत. पर्यणी, (खी.)पर्ष+करणे ल्युट् वियो। दिन । नये चंद्रमा दिन । टत्मवादिनी पपल, (त्रि.) पवना गतवर्षमा पदार्थ । पिछपपट, (पु.)पर+अटन् । पारद नाम पर पष, (न.)+न् । नियतवन । मेस्वरमा दुराप (पु.) परिगतः भा. मजा। पलंग! एक प्रकारका मन धन्याग करने योगराहा धीरामना पोल, (वि.) पनि मृत । मागया।पयटन, (म.) परितः भरना था और ना परिराग, परिसर्ग, (पु.) परितः गुज्यते । मृत्यम् । चारों ओ-परेलगज-ज, (पु.) १० । र, से लपेटना (परितो वेष्टन)। चारों ओर जाना (स. राजतं । राज+अ+विप वा । मरेट्दुशेध । भन्तान् गमन). मरहुओंमें प्राता है। यमरात्र । यम।। परिसयी, (नि.) परि++यन् । सर्वतो गमन । परेधुम्, (अव्य.) परिमन्नहनि । पर+5 चारों भोर जाना । सेवा. सरा दिन. परिसंख्या, (स्त्री.) परि गम्+या+अत् । गिनती। परोक्ष, (अन्य ) मणः परम् । (अन्य ) राशि | जमा । नम्बर. धामोंमे परे । अप्रत्यक्ष । छिपहुआ । जो हम परिसंख्यात, (वि.) परि+सम्+या+क। गिनागया । सम- 'परोक्षे दिद" मि. को.. परोभवृत्ति, (त्रि.) परीक्षा निः यम ।। परिस्यन्द, (पु.) परिक्स्यन्द घम् । चारों ओर चल. रहनेवाला. ना। कांपना छ और पत्तेआदिदी रचना । सफाई। पर्जन्य, (पु.) पु मेवन-मीचना अन्द-दो चाकर । नौकर । परिवार. न्छ । मेय । वादल । “यनाइवति पदन्यः" इतर परि(री)हार, (पु.) परिहाध वा दीर्घः । खाग बादलका शब्द. देना । दोपापाकरण । दोष दूर करना । अनादर (वे- पर्ण, हरितमात । हरा होना । चु० उम० ० पर्णयति-ते. जती ) । छोटना । तोडना. परि(री)दाम, (पु.) परि+हस्+घम् वा दीर्घः । केलि । पर्ण, (न. ) नि । पअच् या । पत्र (ट) कोटा। मसील । टा. (पर)। पलाशका वृक्ष (पु.) वाम्बूल (न! पत्तवाला (नि.). परीक्षक, (नि.) प्रमाणेन परीक्षते । परिक्सग्युल् । पर्णन, (पु.) पनिर्मितः नगकारः अवः । प्रमाण (सयूती) की रचनासे विपयको जाचनेद्वारा। परीक्षा करनेहारा । इम्तिहान करनेहारा । मुस्तहिन. हुआ मनुष्यकै सरूपका मुदा । पडाशके पटना परीक्षण, (न.) परिईस ल्युट् । प्रमाणने धनुचा जौकी पीठी मल वा प्रतिनीधि समारदा निसण करना । परखना. परीक्षा, (स्त्री.) परि ईश्+य । दुष्टादृष्टयावलोकन । पानकी वेल. पुण्दै मलाई देखना । प्रमाणसे यनुको पहिचानना । पर्णशय्या, (त्री० ) पर्णानां शय्या । पर "स्मृतिम" युरे भटेको दिसलानेहारा तुला ( तकडी ) विडोना (हेज). क्षादिका प्रमाण (मार). परीक्षित् (पु.) परि+ईश्+किम् । परीक्षा करनेवाला । निर्मित कुटीर । पत्तोंकी बनीहुई बुटिमा. अभिमन्युका पुत्र और अर्जुनका पात्र (पोता) एक पर्णास-ति, (पु.) पर्णानि अम्यति । अम्बत्र । पत्ते फकती है । तुलसी. परीक्षित, (नि.) परिश्च । परीक्षा कियागया। पर, अपानवायुकिया । नीचमे हवा छोदना । १० इम्तिहान दियागया. या मान्म• भर सेद । पदंते । मदिर वसर पिछला परिम । पिछला साल, (पीमारी) मरना. गालामाले वरिप्रा. पतला पटकमेद. मोटा मटीरित्राणे ( रंगरंगी)। और घटोर (पा)(नि.). परम्, (न.) न्यि (nts) और पर्व (लि). पीट भानु भौर सातों बांधना वा हा. । बटगा. घूमना गर करना । पुन पुनमण.

योग, योग, (पु.) परितः अनुयोगः (प्र.)। अच्छी- | पर्यन, (पु.) मतम् । प (+-) मन वराह पूछना सवाल, अन्य त बा। रियो दिने पर पः। स्त, (.) परिगता अन्नं (सीमा) पहुं. एक मुनि। एक मच्छीमाएEATE. बामा । माय बापनाविधी शेष सीमा. पर्वतीय (पु.)पर भवः (TETTE (सी.) पर्यन्तम भूः।मन भास्किी शेष पारिआ. ती मातारपान परिगर । जगद. पर्यन, (न.) निर ।।(HIS. य, (पु.) परियर मारियमयांदा भयः । दण+अन् । एका भाचार (धालयलन) हिजो मात्रा मा में विश्रामय याना पब (म, भोर सयपागे सहिर है । गमयका सोना वर्म- मात्र). पराभूलना. पर्षमाग, (दु.) १: Print. यग्या, (पी.) परि+aratया+अ । विरोध । पीपक्षपान । बरिलाप, टहरना । (गिर ) एक ज. पग्धि, (I.) प... * गान होना । गावित पाना. marriver बल, (नि.) परिमानात विशित (पापांपा(4.) (re).... मा) पनित । गिगा । एन ( माराष्ट्रभा ). सो Trtart tier's पानी.. जि, (म.) पkिaitrgi • I WANT (पो. सी पाटी) । पययन (द)। " र "। परी । पिपर पाम प• Irr. rn .। "पर्ययणम्" पही अर्थ. पा ल, (म.) परि+urt मा । थेट (TS | पर्षद्, (.) RIP I wr. एक)पशि ( रजना) रामभ्यं (सात)। पाहाग पाम "गो... पारण (टाना) र योग्यता (सायापन) बलर" (.) य. (5.) wituर पम् । भगुरम ( farter) पद, मन. पर... in प्रभार (सरीका)। विमान ()। यो चोपदारा से अ (Art) पर राम(न).gr... पशन, (म.) पर्युरो (यते ) स्पुर । भोपा(पुराया पारा) या AIR, पाट, (म.) Fire Rin. दाग (f.) १६+म+क | RAIL TRINATrustrier पागात (. ) (46) or me दास (3.) परिक्रमा । निगम rrrrrrr पित, (f.) mय (REME). पाट, (.) RIPTITICI nोग मरता। mer" m. लिभा NA बिरे एक हर पता (5.) 07 (r) • I - पा, ():- ((tter) famanner. nilertacher Rन, (..) Twinraakra (Ar) (ar) ret.re.the एम. {s...wirement i.rr. . .ru बाया. inमिय(5.) refere.trior It arer Riterare" ".itri..)

दूसरा दिन. जाकी पीठी मला प्रतिनीधि समर दुई माई देखना । प्रमाणसे यमुनुवा पहिचानना । पर्णशय्या, (स्त्री.) पानां सम्मा । पर्णशाला, (खी.) पानिमिटा कन्या अमिमन्युछ पुत्र और पहुंना पत्र (पोटा) एक पणांस-नि, (पु.) पर्णनि सम्पति । पत्रमा पई, वरानवायुक्रिया। नीचेमे काटना परन्, (य.)म्मिन् वरत् परश्चान्तादेशः।मद- पर्यणी, (खा.) पकरी युट् प्रियांका दिन नये चंद्रमाका दिन टिमदिन परत, (त्रि.) पाडापना गदारनर पदार्थ पिपंट,(पु.) भदन् । पारम परत, (.)+पन्ना मरतामा धुप (पु.) परिणत: प्रा. मंगा। पर्दग।एर प्ररथमरक भन्दागरयोदयापीमा दाद,(दि.) meRगृ । मरमदार. पर्यटन, (.) परिभाकरeir परिसर्ग, परिसर्ग, (पु.) परिनः मृज्यने । मन्यम् । चारों ओ.परेनराज-ज्, (पु.) 7. । ट ). रमे लपेटना (परितो वेष्टन )। चारों और जाना (म. राजते । राज+अ+कि वा । मरेहुगेगा। मन्तान् गमन). मराओम प्रमागता है। यमराज । ना। परिसा, (नि. ) परि+क्यन् । सर्वतो गमन 11 परेद्युम्, (थय०) परस्मिनहनि । .. चारों भोर जाना । वा. परिसंप्या, (ना.) परि+गम् ट्या+अट् । गिनती। परोक्ष, (अव्य. .) अनः परम् । (अ) राशि जमा । नम्बर. भागों से परे । प्रत्यक्ष । छिपहुआ। जो परिसंख्यात, (त्रि.) परि+सम्ख्याला गिनागया । सम. "परोझे लिट" मि.को.. झागया. परोक्षपत्ति, (त्रि.) परीक्षा निः बाग रहनेवासा. परिम्यन्द, (पु.) परिकम्यन्यन् । चारों ओर चल. ना । कासना फूल और पत्तादिली रचना । सफाई। पर्जन्य, (पु.) पृषु मैचने-मींचना अन्दर चाकर । नीकर । परिवार. इन्छ । मेर । बादल । "यहाइपति पर है। दादलका सुन्द. परि(सहार, (पु.) परिहापय् वा दीपः । सागपर्ण, हरिनमाव । हरा होना । चु० टन• " देना । दोपाराकरण । दोष दू करना । अनादर (वेइ- पर्णयति-त. स्थती) । छोदना । तोडना. परि(दास, (पु.) परिक्हस्क्यम् वा घः । केटि । पर्ण, (न. ) पृ+न । पर्गम अच् या 1 पत्र (6) श्रीटा। मोल । टा. (पर)। पलाशका दृश्य (पु.) ताबू (" पसेकाला (नि.). परीक्षक, (नि.) प्रमाणेन परीसते । परि ईष्ट ग्युन् । पर्णनर (पु.) पर्णनिर्मितः नराकारः वः । प्रमाण ( सस्ती) ही रचनामे विषयको जाचनहारा । परीक्षा करनेहाय । इम्तिहान करनेहारा । मुम्तहिन. हुआ मनुचके समाका मुभा पटक पर जिसे हिन्दुलोग पलाशका पता न मिलने की परीक्षण, (न.) परि+ईशान्युट् । प्रमागने वनुका निरूपण करना। परसना. पर्णटता, (प्रो.) पानां ना । नागरी परीक्षा, (प्रो.) परि+ईशाम । दुादृष्टवावलोकन । पानी वेड, "स्मृतिमें" पुरे भी दिखलानेहरा नुला (तकी ) वियना (न). मादिका प्रमाण (माप). परीक्षित, (पु.) परि+छ+किम् । परीक्षा करनेवाला । निर्मित कुटीर । पत्तोंकी बनी दुदिला. पत्त फेरनी है। गुदमी. परीशित, (वि.) परिक्षा । परीक्षा कियागया। इन्तहान टियागया. चा• मान्म• अरसेन । पते । आदि दन्मरापिडसावरिमा पिछा साल, (बीमारी) मरना. मुनमलेरिमश. पदय बदकनेद. सावित्रा ( रगती ) और कटोर । (A) (f.). परम्, (२.)ीप्रन्थि (2)भर पर्व (INE). पीटनु भोर मापना TM. - . म. भूमा नाकामा पुन पुनमग.

- (३०) । पलाश, कि जो पात्र . ग. (5.) परितः अनुयोगः (प्रा.)। अच्छी- | पर्पत, (पु.) प+भतच् । पाणि ( भागाः) सन्ति तना । सवाल. अम्मत वा । जिसके हिस्से हों। गिरि । भूपर । पहाड । (पु.) परिगतः अन्तं (सीमा) तक पहुं एक मुनि। एक मच्छी । वृक्ष । एकप्रकारका साग, आ। गोवपापन आदिकी शेप सीमा. - (सी.) पर्यन्तस्य भान आदिको पर्वतीय (पु.) पर्यवे भवः (७)। एक प्रारी जाति । पहाडिआ. कास्थान । परिसर । हरकी अगह. (पु.) परित्यज्य शावलौकिकमर्यादा भयः । | पन्, (1.) वनिप् । उराय । प्रन्धि ( गाठ)। पु. नन् । ऐगा भाचार (चालचलन सकमें विधामवा स्थान । पाँच (चतुर्दशी, अष्टमी, होकन्यवहारसे बाहिर है । समयय सोना । पर्स. अमावास्या, पूर्णिमा और सूर्यका संक्रमण) कार (प. मायमें). भूलना. 1, (सी.) परि+अवस्था अत् । पिरोप। पर्पभाग, (पु.) पर्वणः भागः मणिबंधः । ओकटी. सपात । यसिलाफ टहरना । (मिच् ) हरएक ज. पर्यसन्धि, (पु. ) पर्वणः सन्धिः । पर्वका मेल । पूर्णि- होना । सावित्त करना. मा भौर अमावास्याका मेल । पंद और सूर्यग्रहणका काल. (नि.) परि+भए फेंकनासा : विक्षिप्त (फैया | पर्गुफा, (नी.) पशुः इन फायति (प्रकाशते ) +छ । पतित । गिराहुआ। हत (माराहुआ). जो पुरुहारीकी नाई प्रकाराती है। पार्थस्थअस्थि । (न.) परि+या+युट् । पृ. । मश्वसना (पो. परालीरीही. काठी) । पल्ययन (जार)। " इस्युट्" । पम्, मेह । पियार करना । भ्या• आत्म. सा. सेट् । रणम्" यही भर्ष. पर्षते। अपपिंट. (म. परि+भार+भाये का यथेट (इसा- | पर्षद, (स्त्री.) अदि । सभा । धर्मको प्रदेश )। पूरा १ । सृप्ति (रजना)। सामठ (साकत)। करनेहारा पण्डितोंका समान।" उस्से मसि भने ग (इटाना )। और योग्यता (लायकपन ). बलन्"। राभासद (त्रि.). (पु.) परि+इण् पम् । अनुक्रम (सिलसिला)। पल्, गति जाना । भ्या. पर• पक. सेट् । पलति । (तरीका)। निर्माण (ना)। सम भयंगे अपातीद करनेहारा सन्द । एक जैसे अर्थवाला लफन (पाद). | पल, रक्षण (पचाना ) 1 पुरा• उभ• सक- सेट् । पास. न, (म.) पर्युदच्यते ( उद्रियते ) कमधि स्युन। यति-ते. टाया (चुकाया वा उतारा ) जाय । ऋण । कर्ज. पल, (न.) पलभ । मास । एक प्रकारले समयका (वि.) परि+उद्+अग्+क । निवारित । इटाया पाप । चार वर्षभर वजन । धर्मया साटो हिस्मह. पलगण्ड, (पु.) पलं (मास) गण्डति (गडमिर) .(पु.) परि+उद्भग्पम् । निवारण । एक परोति । जो माराको गालफी नाई कर्ता है। रेप करने. काहटाना. हारा राजाकारीगर. ; (नि.) परिक्रम्य (म्यकालं विकम्य) - पलल, (न.) पल्+कलन् । मारा । पा (पीचा)। ।वम् को अपने समयको विताकर रहा । वासी। लिलावा चूरा । " जो मोमको प्रहण कर्ता है" ।पद पदार्थ क जिसे बने एक पहिरसे पर का राक्षस (पु.). पलाड (पु.) पलं (मार्ग) अग्दति । अह । (स्त्री.) परितः (तादिना एपणा (परीक्षा) पियाज । मूलमेद । एक प्रकारी जा. रद्वारा पदार्यकी परीक्षा । दलील वगेरहमे किसी पलायम, (न.) पअ+युर (सोस रोता है)। रो पहियानना । मन्पेपणा (तालार). र भारिसे एक जगह मोडर परी जगद जाना । गति जाना) या• पर• एक पेट् । पर्वति । पलाल, (पु.न.) पपाउन् । एस्य । पन्य । पाय- नि-भारना । भ्या. पर. स. सेट् । पर्वति । अशा सोनानागापोभाल, पसारा, (म.) पल् गति (नाना)। पतं (मल्न) मिन, (पु.) पर्वणि गच्छति गम्+गिनि । धमाषा अमुटे । बरे नामसरस । "नपस पठादनम्" सनिपिन दिनों में पीसंग करनेवाला. इति माहरा रंग (I.). भागना. . । । .

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1 [पाटव " " आदि धि, (पु.) अपर मधं (पशंका आदेश)। पोषाधं । पासाभिमुग, (नि.) पारस अभिमुराः । पकनेके वीला शापासपर भाग। एरा (पिछला) दिमह । सामने हुआ। पारगया. 'पचान प्रविय" 'शाकुन्तल. पाकिन, (त्रि.) पाकेन नितिइमन् । पाकनिष्पमा पकार ग. (नि.) पथात् भवन स्मिथ् । पोपभर । तपार हुआ. यो । प्रमीचि । महाचलके पास दिशा (मगर) पाक्ष, (त्रि.)-पाक्षी-(स.) पो भवः+अण् । पक्षा- स्त्री.) वाला । परावाडेवाला । पार्टीको बतानेवाला. मायस्था, (को०) पधिमा भवसा । पिली पासपातिक, (त्रि.) यी (सी.) पक्षपातं करोतिक वस्था (हासन)। गन्युवा समय । पपिम दिमावाली. + I पक्षपात (लिहान) करनेवाला. तोहर, (पु.) पश्यन्तं अनाहत्व हरति । भन्। पाक्षिक, (नि.) पक्षनः प्राप्त: । पक्षसे प्राप्तहुआ। भलुक (त.। ओ देखते २ लेजाता है (चुराता है)। एकतरफने आया प्राप्ति और अमाप्ति सम्भावनाका एकप्रकारका बोर गोट फारनेहारा । मुनार. विपर। दोनों में से एक पक्ष हाप देनेहारा । नियम । गन्ती, (स्त्री.) भातृसी। परा पक्षकापसदाडेका. पर प्रकार के पदोंमेंने एक प्रकारकी ( कापी). पाराण्ड, (पु.) पाति हात पा: वेदारिशास्त्रं-तत् सगड• :, पाप । रोकना और अन्य गोठना । भ्वा० उम• सक. पति वेदकी भाज्ञाको दोडनेवाला पाराशी । मकर करने. घेद । वसति-ते । पसीन-अपासीत् । भपछिट. पाय. यम् (न.) पा+सर पर । निवासस्थान-स्ता | पालेय, (नि.) पड़ी भवः दा पनी योग्यः । योजन (स्त्री.) परके कामयजवी देवता. एक पंफि (कतार) ये पैठनेलायक संबंध करनेयोग्य । मिलापके लायक घ, (पु.) मश्रुधारि म्टे जातिमेदावाही रस- नेहारी मोटोकी जाति. पाचक, (पु.) पचति । पच्+ज्बुल् । यहि । भाग- पकानेहारा सूद आदि । खायेगये भाको पचानेहारी । पान । पीना । भ्वा० पर• सक- अनिट् । पिरति । औषधि (नि.)। पित्तपात (न.). मात् । निन् । पाययति. पाचन, (न.) पन्+मिच्+ल्युट । पित्त आदि दोपको । रक्षपा । बचाना । बदा. पर• सर. सेट् । पाति । नाश करनेहारा वैद्यकमें कहाहुआ एक प्रकारका जाप अपासीत् । (पिन् ) पालयति (काढा)। और प्रायश्चित्त ( पछतावा) । “पच्+पिच् तु-म, (पु.) पर परि वा कु• पृ.। धूनि । ऐसीके करि प्यु" । यहि (भाग) : थम्ल (सारस)। लिये देरी कसा लियाहुआ सूरी गोमय (गोमा)। और लाल एरण्ड. एक प्रकारका पपूर. पाञ्चजन्य, (पु.) पयजने (दैत्यभेदे) भवाक्यम् । तुल, (पु.) पांच (पाशुतुन्नं पापं ) अस भस्ति । पसजन नामी दैसमें हुआ। विष्णुका शंख । "पाच- महीके समान पापवाला । पापी । बुस्टा (पदमाश पन्यं रोकेश:"गीता औरत)(बी.)। विभूतिवाला । महादेव (पु.)। पाञ्चनद, (नि.) पचनीमिः निरंतः । पाचनदिमासे घाला (नि.) बना (प्रसिपहुआ)। पंजाबादः (पु.)पंजायगा राजा। क,(बु.) पच्+माचे घम् । पयन । पकाना । परिणाम (बहुवचन) पजादके वासी (ोग). (मतीम) एक देख । " आधारे पम्" स्थानी पाचभौतिक, (नि.) पथभिः भूतैः निति पटक । (पानी ) भादि "पिबति स्तनम् " पा+क बधा (नि.). पृयिव्यादि पांच भूतोंसे सिरहा. (न.) पाजायते । उनका जो पकाने उप- पाश्चाल,(त्रि.) पयालदेचे मा+अण् । स्याल देनमें जता है । वाचलवण. हुमा । नियोग । पाती. (न.) पाकं साति । ला+क । यैषधि । आग पारधर, (पु.) पटरर एव सा मण् । चौरपोर. पाटल, (पु.) पाटपनि । पर+मिसाल । तरच- -कशाला, (स्त्री-६E.। पाकस्थान । पकानेडीज. वर्ण या भौर साल रंग। गुलामी । ररावाला (नि.)। गह । सोईसाना "पाकगृह" । "पाकस्थान" यही अर्थ, पाटलीपुष्प । गुलाबका फूल, फशासन, (पु.) पा(तमामागुर ) शास्ति । शास्+ } पाटलिपुत्र, (न.) पटना नामले प्रति एक नगर. ल्यु । जो पावनामी दसके ऊपर हुक्म पलाताद। इन्द। पाटय, (न.) पटोभाषणम् । पटुता । किसापोग्यता । देवताओंका राजा. होशियारी भारोम्यवदुरस्सी. .

पाठ, । - "अय पेट काटनेवाला ।-(न.) गिराना । पानिधर्म, (5.) पानपानिप्राणस्य धर्मः । विया-/ पाताल, (न.) पन्+आलम् । भिवोर का पातिनि, (पु.) पचनं (पणः) ततः अस्वयं इन पातालगना, (पी.) पानालय ment लया निवासस्थान यस पातारा। | पातित, (पि.)पर+गि+nिा पानुक, (नि.) परम्पसनराशि (पीयमे आदेहुई चीज) को । भनेन का पा+न् प्रियदर" भोजन योगायनंन । arar मीनने जटिका व्यत्र । (3.) पत्र मानापमानत्रयागमित, (नि.) पर (iin 1) गीत (गत.) विना पर (३७.) पाठ, (पु.) पधन् । अक्षरोंका उच्चारण करना । और पाण्ड, (पु.) पडिकु-नि० दी । गुरुके मुखसे मुन कर बोलना । पडना । सपका पदा या. राना। चिटारंग । चेतवर्णवाला एक पाठक (पु.) पठति-पाठयति वा+गुल् । पढनेहारा । एक रोग । और पटोलका वृक्ष (पु.). पढानेहारा. पाण्डपुत्र, (पु.) पाण्डोः पुत्रः । फोन पाठशाला, (स्त्री.) त। पटने पटानेका स्थान । पाठमन्दिर । स्कूल. पाण्डर, (पु.) पाण्डः वर्णः अन्य मानस पाठिन् (पु.) पट+इनि। चित्राक्ष । पाठक (पटानेहारा) श्रित वर्ण । चिटा पीला निला (त्रि.) (नि.) कामलेका रोग (न.). पाठीन, (पु.) पाठिं (पृष्ठं) नमयति । नम्+3 दीर्घः । पाण्ड्या, (पु.) बहुवचन एक नगरा भाई जो पीटको झुका दे। गुग्गुलका वृक्ष । मत्स्यभेद । एक निवासी । भ्यः (पु.) उसी देशमा रार. मटली । “पट+ईनण्" पाठक (पटानेहारा) (त्रि.). पात, (पु.) पन+घम् । पतन । यि । पाणि, (पु.) प+इण् -आमाभावः । कर ( हाय) रक्षित । यचाया हुआ । (नि.) पुलिक पृक्ष. (ज्योतिपमें). पाणिगृहीती, (स्त्री०) पाणिः गृहीतो यस्याः दीप् । हाय | पातक, (न०) पातयाते (अधोगनपत ). पकता है जिसका । भार्या । औरत । त्री. घुल् । नीचे ले जाना है। नीचे रित पाणिग्रहण, (न.) पानि: गृह्यते यत्र । प्र आधारे पारजनक । प्रापिओका वध करना. स्तुर । हात पकड़ा जाता है जिसने । विवाह । शारी. पातसल, (न.) पतादिना प्रचन् । पाणिध, (पु.) पाणि हन्ति । पापिना या हन्ति (वाद- रचेहुए सूत्रोंपर व्याख्यान । “अप मति) हनकट युतम् । हाथ यानेहारा । और इत्यादि महाभाष्यम् । अपने मृदा थादि यात्रा पनानेहारा । पानिताटक । इलादि योगशास्त्रम्. और मदारियादक. पातन, (नि.) पत्+मिल्युक युट का पागितलम्, (न.) पणेः तलम् । हायकी तली. हपपासा. लमसे ४ थी राशी. भर मम् । मध्यामीण पातालनिलया, निवारा यागिन् (पु.): बनानेदाप दासीचा पुत्र । शालानुरीय नामी गांव सान हुआ एक मुनि. पानिनीय, (नि.) पाणिनिमा प्रो, तसेदं पाछ। (ऊपरको). पनि मुनिभे बनायागया माध्याम्पियाकरण, पानिपलय, (पु.) पानिपटा पात्र, (न.-श्री. ) पान (रसति भाग) पान (रम)य गति. पानिपात्र, (वि.) एष पात्रम् । यही पात्र है। अपने रिट पानिमा (सी.) विना या अ + । मागासयमा आदि। रोकने मन मणी, पर (s) Freeta | मर तु । तपाय (4) पात्र ( यात्रे) (RER) tere (दि.)। कुन्दा पूरा Frie (P)(.). श्य । "म" योग (ES)* प्रयत्". Arrrrigerat. लिन (२०) म RINETRI दोनो बनो (." भारिवार - (न.) पीते अः (१)। मिगे पोसाय । पादानुष्ट, (पु.) प. । (पाली) । "art (rert) (4)" से पाहात, (२) पान एयगा। ता है। यमि (भाग) और गर्य. न्यनुसाय । पटरी भेग । " मी ., (म.) पास (रक्षति)। पीयमे था। पापीना। (पी)म"। पविणे . पचाना । सगुन (पर)। जल । पानी । मन (ल. हारी ऐना "पदी" "प". राग शरीरको रक्षा रोजी). पादयन्दन, (म.)ो. बन्दनं-या। प. (f.) पिलिपि । रामे सने एक एरवंदना दाम. जालना । पपि गोगनोवि. पारगारम, (.) (दो)- ...(पु.) पदगियाकिए । परण । पाद । पर । पोच. ...(पु.) पचन ( गम्पो) धनेन परणे पम् । सिमे पादरेयनमा मेष, (म..). है । एरण : पो । पपपाहिगा। दीवारपा पर भा पातु (-) :.farring पटक (पु.) पादपटकप पावरा मानों पर शमीrat. पुर। . पा (पु.) पाईला (पशुपयरस ) पादोरम (..) सारा ताप.. । एक भागमें भाया हुभा (Ri) (पानी)ो । मारक निरा उपागाएकदिनमा पाए. चरण धमा(rrrr) पाच, (म.) प्य (Carr) (ग्रहण,(म.) पादयोः प्रण पत्र । जिनमें पर. परभनी गोपाल। पांव पसररियागया प्रणाग। "अगुप्य | पान, (.) सामान्य .. पादपदमानिया"मनु.. (e). पारिन (पु.) पान पारिनि.. ना: "rutg"Kera" पारगे पलतापदापरल । पारणे पसनदारा पीस पात्र (Ha) पानगोजी (2.) (or) () पचाण, (.) पादरी प्रगते मैन । रणे । गे पांगो पाता है। पशुपाली पाये पानभासम (.) ........ प, (.) १ (ग) nि ( Fat) पोए पानीको मागे पीस पानीप, (..)...... (दा)। पर पा(!) को मारास) Rani rin.. पापी । पावर पीर ।। पानीपत (..) Root .. बगन(म.) पद। TERI SANM राधी (पु.)ो inthetic . . reira.ri x ... विष (R) Ke Prem.. एप, (.) *-... terever free.ti. र . ni) meat t. राम, (.) RIVar.com R (e) समान.........। (5.) CERaranastri mar... ARRORTer PEEr... ) Trigheritam Darn. PAHATभगन. - - गातार सदा माताएटोपी पारम,] (११२) पापर, (पु.) पार हति+ट । जो पापको नाश का पारगामिन, (मि.) पार गरी है। दिल । इनके दानमे पार र होता है । पापनाशक आनेवाला । दुसरे किनारे पार जानेवाट. (नि.). पापपुरुष, (पु.) पापमाः पुरः (पुरमागरः)। पारण, (न.) पार ल्युट् । बान्तभोजन। भोजन करना । "युन्" वही अयं (20) पुरानी गलने पापा मम । गुनाहगार आदमी। पारतभ्य, (पु.) परतन्त्रव्य मारना सबमें बहादुआ माई पक्षि (वासी) में पाखरूप दूसरेके कावूमें रहना । तात्रेसरी. ध्यान करनेत्ययक मनुष्य भायरय पदार्य, पारपिक, (त्रि.) परत्र मवे, हिता पापमय, (नि.) पारः रामः सय । पुरै मंगल होनेहारा । परलोक लिये हितार्ग (ग) वाटा. परलोकमें भला करेगा । और पायो(he पापहन, (वि.) (पा हनि) पार (राई) को में होनेद्वारा. मारने (नाध करने) वाला. पापाग्मन्, (पु.) परशुधः आमा (अन्तःकरणं) यस् । पारद, (त), (पु.) मिच-तन् । पृ.11- निमय मन पारने मरा है । पागन्धित (कपी) जीय. समे होता है। धानुनिशर । परा"te दा" पारदनेहाय (नि.). पारायटर, (म.) ः थारायः स । जिसका पारदार्य, (पु.) परम दारा तदार या दस ने मरदो। धुरे चित्ताला. पापिष्ट, (नि.) अतिधरतमं पार.+छन् । बहुन पापी प्यन् । दूसरेरी श्रीको ही आनी होग। गमन । दूसरे श्री गमन (मोग)" पाररितं" स्मृतिः. पान, (:) भी (मोती) । आप+मनिन् । पारसभ्यन् , (प्र.) पार एवन्सान RITापा । गुनाह देगनेवाला । पण्डित । दाना । पर। सामन, (म.)+मनिन् । मिशिगुनी (गुर) 01 "म" में होता है. यमुझे पूरे तौरपर देपलिया. पारदेशिक (वि.) की (ना.) (पारे । पामर (5.) पनि । हाट । गंधर (जो १) दूसरे देशमें होनेवाला । गरे । पारमार्थिक, (नि.) परमाय (rrit पान, (4.) पर AR+न गुरतीरे रोग- दिना । जो दूसरे सौर धर्म মা বাবা ভাৰসামগা = मा.(Fr. )ीपाः (प्रवीधनः)ग पिपले गोन दोर थर्मो मार डाला पारापर्य, (न. ) परम्पराग पर हैन । ग. (3.) (1) मंगत + । वष में. रहा. Irrior मे भाभत्र माना)। पारयोगश, (पु.) TPTM Khor रHINE (f.). रंगन मMEET) In सा, (:.)। ATमापन होती frमारिन वामानापानुन ग। " ARCH र. (ब) नाम राब• दम. गाराम in ek vart १.सा. ल, (२.) पर राम (*). पालीति (f.) पास riters पाहा । म मरो ! गो. NE (1.) पाप, {.) पा शेगा. (ar) inter पारगार, (I.Diretirst स्व. sindicinrriers HTTETr - भगती.

(1) [प, - २ वध, (पु.) परभधः प्रदरणं अस्स+मण् । कुल्हाडेसे पारिष्ठय, (न.) परि++अन् । +साय अग् । चश्त । परनेहारा+ठक् । "परश्वधिक" यही अर्थ है. थाकुल. पीक, (पु.) एक देश । उस देशके मासी । फारमके। पारिभाष्य, (न.) परिमावाय (रोगप्रशमनाय) दिन+ ..। उस देशका घोडा (पु.)। धरपी घोडा. प्यम् । जो रोगकी शान्तिके लिये हितकारी है। कुछ -रणेय, (त्रि.) परस्त्रिया अपर+दम् इनसदेशः। औषधि । परिभुवः (प्रतिभुवो भावः) प्यम् । प्रति- परज । पराई बीका पुत्र । परस्त्रीगुत. भूभवन । जामिन होना । "साशिव प्रतिमा " इति स्मृति: पित, (पु.) पारात् अपि थापतति प्रेरणा था+ सत्+अच् । दूजाकर भी चला आता है (पियारसे)। पारिभाषिक, (नि.) परिभाषायां मवादक । सामान्य रूपमें होनेवाला । साधारण नियम । सबमे मोकार किया नारावत । दयूतर. पा(वा),(म.) पारे अपार च अति भय+ गया (माना हुआ) सांकेतिका संकेतमे जाना गया रद आदि सबकी बोली में भाया हुभा शन्द. अन् । जिसका पार भवार दोनों हों । समुद्र । समुंदर। शेनों किनारे । "पारावार". पारिमाण्डल्य, (न.) परितो महल सम्म । रायण, (म.) पारे (पमानि) भयते धनेन+अय्+ विद्यमानत्वात् परिमण्डलः (परम) Ram+ स्पुर । जिसके द्वारा एक वामको रातम कर्ता है। प्यम् । सब जगह विधमान होना । न्याय का हुआ (पार पहुंचता है)1 साकल्प (पूरापन ) मन्थ थादिके कारणपनेसे रहित परमाणुका परिमाण (मप)। अगं. भारिसे अन्ततका किसी अन्धका पूरा २ पाट करना. पारिपद, (त्रि.) परिपरि भव । fat r+मम् । सवारीण, (त्रि.) पार भवार व गच्छति राम् । सभामें हुआ वा एता है। माम्य । गभ्य ।समें बटने हारा । मटिगा मेम्बर. तटद्वयगामी। दोनों किनारोंपर जानेहारा । समुद्र के पार जानेहाए। "पारापारीण" यही अर्थ, पारिहार्य, (पु.) परिहियते बसी । Radha घम् । साथै प्यम् । बलय म. राशर,(पु.)पराशरस्य अपत्यं+अण् । पराशरपा बेटा। पैदव्याग । भको होनेसे "पाराशरि" यही अर्थ, पारीण, (नि.) पार गणी । पारम् । । पार जाता हैामको रामपा. गरिन्, (पु.) पराशरेण प्रोकं (मिधुमूत्रं ) मध्ये. यतया अभिम अस्यकानि । जो पराशरसे रघहुए मिग- पार्थ, (पु.) पृपाया अपलं+ar । प्राय पुत्र । को पदता रहता है। मिधुक । सरकर्मो स्वागने- टिर आदि । बनाक्ष । पिसार. दारा संन्यासी. पार्थिय, (३.) पिम्मा म । दिन। गर्य, (पु.) परारप अपाय+यम्परारका बेटा। रामा। "पिता किर, * I TREA पेदव्याग. होनेहारा (नि.):-बी (2.). रिकालिन, (पु.) पार भस हिनि । पारि (HR. | पार्षण, (वि:) पर्ववि (क) मामा नं) तत् पाहात+लिनि । जो परेशानसे पाहता भादिमें होनेहरा । “पवि (कमरम्) ftir ६।मान (पुर रहना) मतको धारण करने हारा पाचं. म"। पति वा एENE (.) पसर. यम (वाणीको एरानेदारा) एस्सारण मुनि. भए । एकारका एक (पु.). अरिजात, (पु.) पार भय पनि पारी ( समु) पार्षन, (I.) पर्दते भाम । । जात जन्+का गमुरमें जाना। देवमानोरा.स. पर्वा (दि. परिणाग्य, (नि.) परिणयकाले साधयम् । (२. पार्वतीनन्दन, (पु.) (Intrपुच्दा धन) ओरिवारसमय मिला. पार्वतीय, (नि.) मा.(E) रिपग्धिक, (पु.) परिपन । म Pि rinा।(गुगर)Rite भादेवायो एमपरले. रिपा(क), (पु.) fru परम परि पानेर, (f.) प भा... (:) मासीमा (र) (पर) रिपारिक, (पु.) I cril : e पानं, (5.). In कारो परमो सान पल (c) र (म). है। एकभार पारिरामर. (द). . एच.४.

पम्पाओगपादना विद्यावा पाभंग,] (गोदा)। प्रायश्चिम । काटने ल फांद । फंदा। हरएक प्रकारचे रस परे यह शब्द शोभाक लिये गाया में पाल, रक्षण (पचाना) चु.भ. सक० सेट् । पालयति-त. पाशक, (पु.) पा+चुल । तर खेलका साधन । गुटिका आदि। पा. पाशपाणि, (पु.) पाधः पानी पस(जिन फांद६)। वरुण । “पाराहन" की बहन पाशच, (वि.पी (श्री.) पो. ना पशुके साथ संबंध रखनेवाला । पाने निक पाशिन्, (पु.) पादाः अग्नि असते वरगदवताका नाम । यमराजा पदक17 पाशुपत, (पु.) पपर्वःस.स पशुपतिका । वा पशुपति बिमा टा। एक अन्ना आजार (न.) महादेवा(te पाशुपतास्रम् (न.) पुरतः । दरका टान जो भजुनने लाम किवाया, यचानेटायक । पाउनलायक । रयाल करनेटायक पाशुपाल्य, (न.) पछन् पालयतिमा पाश्चंग, (पु.) पायं गच्छति गम्+ । पाग नानोपालगिर, (.)rnatin सेयक। परिचारक, पार्श्वनाथ, (पु.) पाश्री नाथः । पाग रहने वाला मानी। पालान, (म.) 0 () जनोंकी देवता. गंजारा " " 13 पाययतिन्, (नि.) पाणे यने । पाग रहनेवाला । गरपी (नि.) परिचारक । मेवक. पालिन, (नि.) पाप.. पाचशय, (नि.) पा शेत+प-ग. शी+। पाग पूगरियागगा. सोने (भयन) वाला. पायय..(2) पुन । दाजु पार्श्वस्य, (त्रि.) पायें नियतिया+a+म | पाग रहने- परि (भाग),नानि । वि. पाला । महाशमाथी, पायकारमज, (.) अरमाः ।। पास्थित, (नि.) पार्थे स्थितः+या+छ । पाय ठहरा पायकी, (.) पार+पदय हुन् । शानिय । गुदर्शन अमिता नन. हुआ। अनुचर. पार्थिक, (मि.) की (सी.) पाभव +टाइक । पाम कार्तिकेय (वर शिव मन्नेि रहें । हुआ । निकटवती । पाग रहनेवाला । क:-(पु.) गह-पायन (5) पयति । पूपिन् । उपना) पुराणमें, घर । साथी । जादूगार । चोर. पार्षद, (पु.) पनि भवः, तत्र स्थितो या+अश् । है। अग्नि (साग)। सामंद। सभास्थ । सभामें बेटाहुआ । मैम्बर । सभ्य । मीर- (न. ) "पाव्यने यनान्युट्छ कि मजलिस. रियाजय । गया । हरीतकी । पाणि, (पु. श्री.) पृष्+नि । नि• । दिः । गुल्फा. (प्री- परिनताको सिंद करनहारा (त्रि.) थोमाग । गिटेके नीचेका हिस्सह । एडी । अंश। पायनयान, (पु.) पादनः घरे । ए- सेनाकी पीठ. यहा(जिसका आवान पावन है). पाणिग्राह, (पु.) पाणि (पृष्टपदं) याति+अण् । पाश (पु.) पन्यते (वयते ) बनेन ।। पीठ । पीछे भाक्षा देनेहाय पीछे रहनेहारा । शत्रु । (दुश्मन). पार्णिघात, (पु.) पाणी घातः । पासकी चोट । सत्ता । लात मारना. पाराः" (अच्छे कानवासा) पाल, (नि.) पालयति (पाल् अच्)। जो बचाता है। पालक, (पु.) पालयति । पाल्बुल् । अश्वरक्षक । घोडेका रखवारा और चित्रकक्ष । बचानेहारा (त्रि.). पालकाप्य, (पु.) एक ऋषिका नाम । करेणुका पुत्र । जिसने पहिले पहिले गाविद्या (हायक वाकरने की) वाला ।-व(न.) पशुओका समूह (म्हारे मिसाई. पालक, (पु.) पालकिप्पाला-अहाते । अधिन् । पला । एकप्रकारका साग । कुन्दुस्पक्ष (म्रो). पालन, (त्रि.) पाल माय स्युन्युट्कासन । रक्षा करनेवाला । बचानवाला । न (न.) रक्षा करना। बचाना।श्चाव. पाटनीय, (नि.) पाल् अनीय । रक्षा करने योग्य । पशु और पक्षिओंको बाचनहारा ME . (प्रतिमादि) . 1- . । . १५. 6F T प, (वि.) पयाद मरः । पत्रिम देशभत्र । पिघट, (न.भिदन् । गा । । देदाग. रोगविशेष भाग दीमाग. ..., (ो.) पाशानां गमूह + : पार्थो का सहा पिण्ट, वाघ (रोकना), मोहना । ६. ए. हरमेर पिच्छति। अविष्ट्री. ख), (पु.) पाति (क्षति दुरितेभ्यः)। पा पिच्छ, (म.) पिटाप । मयुरपुर + - पाः ( वेदधर्म )तं ( पयति (निप्प.. और चूहा (गोटी)()(पु.) पिर करोति)। जो दुराओं (पारों ) में पता है गा पेर मुगरी । बराएपना (1). मका धर्म उगे जो तारता है वा पररहिन ना है । वेदाचारामागी । येक भागारको दोरा. पिन, निभाना । कपनाना । भक) मा (मामा) रन (ना) पेडन्, (पु.) (धनं ) यी । + • उम• ऐरीले मगि । दो धर्मको तोता है। पापा पित्र(२.) पिजिविस () ro (पु.)पिनटि । रिप-चूर्णन | पूराना। पर (पु.)बाल (MAHEN. पीगना ) भानम् । पृ. । जो पीग डालता है। भारत दल () ()(2.). पदारण, (पु.) पापाणं वारशी । तुल् । पिजद, (पु.) पिजिभरन् । तर Isattr कारा । टंक नागी भागार (पणी-पापरको करने (पिधुरी). पिडर, (म.) पिजिभर (or) रवर्ण (ना) मार पी rha hr गी(जाना) 13. गा. पर•ानिद । पियशी. स्थान () Trit ६ (पु.) भपिकायति पिके, "" "ए होता है। मीठा दाविला बोदल. समू। सारा 7(पु.)।Ftr" tग (पु.) र (f.). पाशु. (पु. ) 6. पिक (कोहल) पिट, मानिसमा टोना । भनि .. .(पु.)विजिर्ण (गना म । मूषा । मूगा। . मा. सदर सीट (दिमा) के समान पीला रंग पिटर, (३.) nि mr. (त्रि.)रिताल (.) दुमा पत्र (R).the rint बजट,(पु.) पित्रा जटा दम्य-... पीरी (पर)। "पर" ht. जरावला महादेव पिट.in m. Nam इल, (पु.) पिजिसा पररा:ो. का परम् । एक मामूर्यके पास एनेदारापिटल, (पु.) nिema पाना । एक far (समाना)। एक मुम। मगल. मेगा । मन (krirmi){.. महISTT मपमे दोप्रन्यको बनानेहाय गोपक (पु.*.) सप पुनम राम र कपिणकाच (wra) • • - घरयासी.) शारारि tre IN.(पु.) लिक्षिणी सपा मा. । ".krn. TARA पीसी भाग करी । (Emसरी vिs(R. Jeet। : (r sta want)|दिर"that ) acharthern ream पण्ड (पु.) RITER ""P" : । Tire- पा । TR () मत भATERT) wer 1. ""ग"for M. fePRINIRNE (. पेश. (पु.) .MaARIES) rtew(Pr) मेरेर (र Awarendr(1) m)(s)irret(:)T- पिपर (en) Tr...रे । R. INR taar 1 दी नदि हुआ। देहस्थ धतुविशेष मरन। " पिण्टका यह । पियतिथि, (श्री.) Eि मंध्या (गांन)का समय पिडामा तारे पिनारी वहिनके बेटेदिक निमित्त यर । पितृपं । “रिनु पिण्डोदक्रक्रिया, (त्री.) पिण्डोदकयोः किया। मृतक| पितृयाण, (पु.) पितृनि. यादने बत पिण्याक, (पु.न.) पुण-व्यवहार+आफन् -नि। विपितृलोक, (पु.) ६०। चन्द्रमा पितृव्य, (पु.)पिनु माता पिता पिताकी मनिनीश सन्तान । मुमाबेशर पित, (पु.) पाति ( रक्षति) पातृन् । नि। जनक। पितृसन्निम, (पु.) पित्रा सनिमः (क) पिता दोनों । "पितरः"बहु•३०) बडे टोग | पिच, (न.) अपि+दोक्तातच बाशा पिक:-) पिण्डका-पं. (पु.म.) I finitiन... Settri समान । मनका गोला |-4.भा. पिण्डसार, (पु.) (en. ) fontrafmrTTER.(२.) kiosficer गदरता दरम्म. मग |"""fer". पिण्डद, (वि.) दिशाति+Trय थाना पिग (T.) mari भोजन देनेवाला. पिण्डनियंपणम् (न.) मिन्दा नि नि TT पिणदम, (I.ORRRIEr. धन । पितरीके लिये विठ (मन) शानि(दान). लि., (I.foto पिण्डमान, (वि.) नि भति+मन+गि । गत. infriHIFT मरनेर कके लिये दियेगये पिण्डको रेनेश अधिकारी । (पिणम्, (न. निदान यहुवचन) मृतशिर. की ने हमे देन । पिण्डयश, (पु.) डिस यः । मरेहुए पितरों की ट्रेन करना. पिण्डलोप, (पु.) पिस टोपः। पुरो न होनेगे सागन-या दिन मामा. पितरों के पिता समाप्तहोजाना. पिण्डसंबन्ध, (पु.) पिगम संपन्यः । निन्दा गमन्य पितृतीय, (न.)(न.दिरों दनाक (रिखता) पीडीतक पिग्य संपन्य (जीते हुओघ पिनि, (5.) ६ त.। टिरा पति नी भोर भगूदा मीच. मरेहुओं के साय). पिण्डायस, (न.) पिग्दै (संहनं) अयः। एमा। "पितृगन" यही अर्थ. दीक्ष्णायस । विज रोहा. पितृमम्, (श्री. ) पियां प्रम् इह । पिण्डार, (पु.) पिपई (संधा) इच्छति । अण् । माता है । ( अन्न देने योग कार होने) विककत वृक्ष । क्षपणक (भु का संन्यासी) और गौर (गूजर ग्वाल). पिण्डी-ण्डिका, (घो.) यापलिकी योनिके आकारपाटी पुत्र । पिताक मामा. पिण्डीशूर, (पु.) पिण्ड्यां ( भोजने एव ) नान्यत्र पितृभोजनम्, (न.) पितृगा भोजनम् ।। शरः। जो सानमें ही बहादुर है और जगह नहिं । घर- टदेन दिया गया भोजन. हमें कहकनेहाय । युद्ध आदिमें असमर्थ । पित्या, (पु.) ६. । पित्रुहटेन कर आदिमें जिसकी ताकत नहि. (मरेहुये ) के लिये पिण्ड (चावलोंका गोला ) और णत । विधरने पितर जाते हैं। धून उली मेटा (दान). ला मरेहुए कर्मिओके जाने योग मा (स्ट टोंका चूरा। खल हींग। और वाल्हीक । निल्हक (पु. स्त्री.) पितामह, (पु.) पितुः पिता । पितृ दामह । पिनुः पिताका भाई। चाचा वा टाया. पितार । पिताका पिता । बाचा दास पितृप्यनीय, (. मी. ) पितुः तमा (दारी )(बी. टीप) ब्राय नाम । बहु•३० ।पितर. जो रक्षा कता है। पिता । पाए। "पितर" माता पिनूनुस्य । जो पिटाके समान हो. पित्याधु, (५०), पिनी अंक - बैठक । आसन. एक लोक. (बापशा धादि).

- (110) [पीडन, :- - । • (R) पिसात लाक । तामाजिAINT | पिशाचभाषा, (सी.) (पिसाचानो भाषा)। भूतापी शेष समे भादि बनसा एक प्रकार पत्र । माया (जशन)। बहुत गिरही प्रास्त. पाल । गरमी पावका (नि.). पिशायसभम्, (न.) पिशाचानी राभा । पिशायरी जित, (.) पित्रा लगिन-त.। पितासे लाभ सभा (मगली.). या गया (पमा गया) रोपत्ति. पिशाचालय, (पु.) पिशाचाना बालयः । भूतों का पर। (पि.)पितुः दं, प्रियं वा, पिन आग या अत्यन्त पवित्र स्थान. ह। पितृगम्धी । नि। पितासे भारा। पितृ-पिशित, (न.) पि+ । मास । जटामासी । (स्त्री.) - मा (दस) और मपा नरात्र (तारा)।पि. बाप. रोंगा पिसारा (माप-मो पु.) अमावासा पि पिशुन, (न. ) पिश+उनन् । पाम ( केसर)। नारद -- मी.) और आ (पु.) एनक (गुगलसर) र (निर्द- सन्, (पु.) पदम्पन्नात् । पक्षी । गिरनेवी य-रहम ) (नि.). हवाला (त्रि.). पिए, पूर्णन-पीसना । १. पर राक• अनिट् । पिनधि। धान, (न.) पिया युद् (भम सोप) दिन । सपिपा. उम्दा । उपना दफना. पिट, (न.)विष्तक । सीसक । पिटक । सीसा । पीठी। नर, (वि.) अपिझ्नहरमा सोर। परिहित भूमित (पूरा किया हुआ) दलागया (नि.) या भारि । पहिराहुमा कपमा आदि ।धाहुभा. पिएक, (पु.२.) पिथना (तलपूर्णानां ) विकार+ "नाफ, (पु.न.) पारी। पा+आरन् । नि. वि. कन् । चालों के यूरेका पना हुआ पीठी। एक प्रका- जीका पनुप (समान)। शिवजीका पूलरूपी बोगर । रकमसनिा. *धूलिका बसना. | पिटप, (पु.)पिश्यते, पिष्यसे वा+भम् । पिप्+टप. नाकिन्, (पु.) पिनाक (अरत्य) इनि । पिनाक न्। भुवन । जगत् । सर्ग. -'वाला महादेव. पिटात, (पु.) पिट भता । अत्+अण् । यपकों की मुगल -पासा, (स्त्री.) पातुं छा । पारामा पानेच्छा। धिके लिये रनाहुभा किसी प्रकाररा गंध । केसर -पीने की चाद. भादि अस्ता. पेपासु, (वि.) पातुं इप्युः । पान्+3 । पीनेयी | पिर, जाना-चमकना मुगन्धिलगाना-ओरकरना-मारना और । वारा। पियासा. देना । भापर• एक. रोट् आरिपेसति । पिरा- पेपीलका, (पु.) अपि+पील+ष्णुल् । अा सोप । एक सति । पेरापयति-ते । अपीपसत्त. प्रकारका पीडा। "पिपीलिका काला कीडावा काली पीसी. ( पिहित, (नि.) अपि+या+मका सोप । निरोहित । पेप्पल, (न.) पा+सलच् । (पु.)। जल (पानी)। भाजादित । चंद फियाहुमा । सिपाहुआ. और एक कपडेका दाता । वाथा (पीपलया पेट)। पी, पान-पी । •ि पा• अनिर । पीरसे । पैट। और पक्षी (पु.). "स्यु" नितीय. पियाल, (पु.) पी-पान-पीना+शाटन् । पेशामाल गुरगो। पीट, (पु. न.) पीयते (पिपवे या भा)। पा+टक् । पिट्स वा । पृ. दीपः । पीग (एल)।एक प्रकारका पिल, प्रेरण-चलना । पुठभ• राह सेट् । पेलयति-ते. भारान । प्रतिभोग भारान। बेरीचौरी । यद मगर भपीपटत्-त. जहाँपर देवीके शरीरसे एक राण्ड (क) महो. पित्, सेचन-सौचना । भ्वा० पर• राक• पेट् । पियति । | पोटमर्दिका, (पी.) पीट-नायिकायाः भास मर्दयति+ भपिन्वीत् । “इदिद". टक+नायिकाके पास रहकर उस मायके पिश, अवयर (हिस्सा करना) ३. पर. स. रोट् । साप मिला देने में सहायता करनेवादी एसपी । गुन्दरि- पिंशति । भपेशीतू. ओंको नलपिया (नाब) पिसानेवाली. पिश (पु.) पिसभइन् । कमठरी धूटिके शमान | पीर, गप-मारना-विलोग्न-प्रोश - पकना । . पीला रंग । उसवाला (नि.). उभ• एक सेट। पिशाच, (पु.) पिशित भागाति । अण् । पृ.। जो पीटन, (न. सामादिस अमित मांसको साना है। देवयोनिमेद । एक प्रकारची देवता। भव (शत्रु . और प्रेत । भूत.

पीटा, । पुनय, (पु.) पुमान् गौ । कर्म• पन-सन्म ।।। है। "जैसे" "नरपुङ्गव" "नरः पुजव "म समासका वाक्य "मनुष्यों में अच्छा" इस अपेमें है. पीय, प्रीणन-प्रसन्न होना। पर० सक० सेट् । पीयति । पुच्छ, (न.) पुच्छ अच् (पश्चाद्भाग)। पीडेका हित] ईसे पुष्पको जीत लेता है । राशिम पुह, दीप्तिन्चमकना । अक. पूर्णन पोमना-सर. पुट (न.) पद क । जातिफल (जायाsure) पकाने के लिये मी आदिके रचेहुए दो पात्र ( जिनको नीचे ऊपर पर पीवमें दवाईस जाती है।भामाइन (कना)1(बु.)rte बनानुभा दूध भादि पीने का पात्र दोना (शेन) (01 पीपर, (पि.) याप्परन् । स्थूल । मोटा "हो" व पुटमेद, (पु.)पुर (सेले) भिनतिम को फाहायताई। नही दिन परियो ir पीडा, (बी.) पीड्+अ । व्यथा । दुरा। दरद । त-पुतिक, (.) R.1 पुरा वि ।। । क्लीफ। तरस. था । जिगमा पुरुषसी नाई पीडाफर, (नि.) पीहां करोति+क+अप् । फष्टदायक । रणमें कहादुर मकारविशेषवाला ए. तलीफ देनेवाला । दर्दनाक. शन्द (पु.). पीडित, (नि.) पीड+ । मदित । मलाहुआ। निचो. पुंधली, (मी. ) पुंगः (मः) महाग र दाहुआ । यश्रित । तलीफ पहुंचायागुआ। दुःखित । पान्तर) गच्छतिअन् दी । जो अपने । दुःख दियागया. दूसरे पुरुष के पास जाती है। अमती नी (यो। पीत, (न.) पा+क । पान । पीना । और हरिता । खी)। पदमारा औरत. हरिद्रावर्ण । हल्दीका रंग (पु.) । "कर्मणि" | पुंस्, मर्द-मलना । पु. उम• राक० सेट् । (पीने का काम) पीले रंगवाला (नि.). अपुपुंगत् त. पीतक, (न०) पीत+साथै कन् । फुडम । केसर। और पुंसयन, (न० ) पुमान् मयने अनेन मृत्यु । दिन हरिताल । पीतल. उपजता है। एक प्रकारका गर्भ संस्कार । पीतवासस् , (पु.) पीतं वासो यस्य । जिसका कपडा पीला | पुंस्त्य, (पु.) पुंमः भावः (विहं का) 1 yri है। श्रीकृष्ण पुरुषका निशान । एक प्रकारका अंग । उन पीताम्बर, (पु.) पीतं अम्बरे यस्य । पीले वन्नुवाला। गुरु (धीर्य)। पुलिकपना. विष्णुका नाम । श्रीकृष्ण पुकस (२), (पु.) पुत् (कुरिमतं) कति । पीन, (वि.) प्याय्+क्त सम्प्रसारण । रथूल । मोहा। जाना । भम् । पृ• या श । जो युरी चीन मेड सा है। याण्डाठ । अघम (नीच ) (नि.). वृद्ध । बूढाहुआ । सम्पन्न । भरपूर । पन आदिसे पूर्ण. पीनस, (पु.) पीनं (पीनता ) स्पति । सो पुरुः (पु.) पुमांस सनति । सन्छ । जो मन मोटाईको नाश कर्ता है । नासिकाका रोग । जुकाम । सोदता है। भाणमूल । तीरका निरा । विहार खांसी. गया तीरका हिस्सह । पुष्कल । पूरा । काफी. पीनस्तनी, (बी.) पीनी खनौ यस्याः । मो? स्वनों कुचों- ' पाली श्री (औरत). (बैल) "उत्तरपदमें आनेसे श्रेष्ठ (अग्छ) मा पीनोधी, (श्री) पीने ऊधः अस्याः+हीप् । अन्तमें "अनड्" का आदेश । पीवरोधका गौ। यहुत मो? पनों-वाली गौ. पुच्छ्, प्रमाण (मापना) । भ्वा० पर० अ० से। ति । अपुच्छीत. चीज भभूत। दूध. पील,रोध-रोकना । भ्वा० पर• सक० सेट् । पीलति । ढीग। देर. भपीलीत, पीटु, (पु.) पीलम् । परमाणु । "पालुपाक" "पिटर उभ० सेट् । पोटयति-ते । अप्पुटत् त. पाक" (वैशेषिकोका भेद)। हाथी । हरिओंका टुकडा । पुन, लेप जुना मिलना । पुटति । अपुटीत् । पुरोट, पीव, स्थौल्य-मोटा होना । भ्या. पर• भक० सेट् । पीयति. अपीवीत पीयन् (नि.) यवनिम् । स्थूल । मोटा । भौर पर- पाला । ओरवाला । क्यु (पु.). गन्धा । "r" शतावरी । "टी" तहणी गौ । जवान जावई (बरपर)। नगर । मागा. । पीयूष, (न.) पीय+अपम् । देवताओंके पीनेकी एक पुख, (पु.) ( उन्नया ) पुमाप्त जयति । जि - और फूल. ।

रेशा [धिकार । - - त टिका, (सी.) पुदका साथै पन् । एला । सी. पुण्यश्लोक, (वि.) : (A) और टित, (वि.) पुर। प्रदित (पाहुआ)। पारित । (ममा चरित्र) मानिसका चरित्र पुचो मार पादाभा । (तमें कहानुभा) शादि भन्नमें "ग" है।नल था कार धादियुक्त मन्त्र. पुण्याह, (न.) पुण्यं भरन् गमा । पुर TE, अनादर-भेदमा परना । पु• म. ग. से । - पुण्यात्यायन, (म.) पुत्राय (प्यार उद, मदन मटना-पोगना । दा• पर• राक• रोट् । इरिन् । पाचन (माइरा यादन) पर)। पुती। अगदी कर्मक भारम्भमें उग टिनकी परियrs पुण, धर्मचरपकरण । धर्मका काम करना । • पर• सक. उचारण. मेर । पुननि । पोणीत. पुस्तिका, (बी.) पुत्र ? -- पुण्डरीक, (पु.) पुहिईपनि । थरिकोणार निगा । बावन् । शुद्रमनियारीमा और प्याप ( मेडिया)। मितपम । विद्या कमका पूछ । पुत्र-प्र, (पु.) पुन असले । न चिता पता : मेष (दया) (२.). ( मायागमन पु पुण्डरीकास, (पु.) पुरी र अक्षिणी यम्य+ry | गमा- 1 जिगकी मांग चिोकमलगमान विलाही म को स्थान (पर)(पु.). हैं। रिप्णु । श्रीशणजी. गुण्डपु. ) freक शुभेद । एक प्रकारमा गया। पुषक, (I.) पुरन् ।पुर ( (पाटा) माधवी लता । चित्र निरकारक (९८५७)।त्रिम (F: देवानाम. पर्य५ । "पुत्रिया" (4) पुण्य, (म.) पुनाति । पुष्प । एभार । धर्म । पुरकर्मन, (म.) Swat: पा बाम । उगवाला (त्रि.). पीग (राम ) पुण्यपीर्ति, (वि.) या कनिः यहा। पवित्र यशवाला । पुषकाम्या, (श्री. ) : भए मामबाला गिर. पुरारी. पुण्यहरयम् (म.) पुण्यं यं । पत्रिकाम. पुत्राला (पु.)पुर r पुण्यमंत्रम् (२.) (पुत्र) पवित्र स्थान । तीय. | (या) RS. पुरा (2) पुण्यम, (म.) पुण्य पदम् । पवित्र पर मन्दिर (जहा N - at 4. मक निक्षा मिलती?). समान पुण्यसन, (पु.) पुण्य (राणा) पापी मनः। पुरतिनिधि, (:. Man. पुण्यानेभ्यर, (.) । मुममनी I पुरपर (*. पुधारिनी, पुण्यार, (f.) १ भममा पुषी गर- भरायपुर में आने पुसार, भग 16 Intr पुषभूमि, (at.) SER(Torri) yा । पु... प ONAIREEE म पुग Awer. पुपरणे. (पु.) पुर 2 (OER) में पुन: प्रयास. पुष्पमतम, (म.)riaMIRRITA (TER Freef स्थान. सान । T निकर (पाग) मार पुगाल (1" उमेरी, (३२०) पुटि, (पी.) पुस पुयी या इटिः । यज्-जिन् । पुरमय, (पु.) कारस्थनामी सूस पुराया परे तिरेया। पुत्रनिनिसक पागनेद. पुरतस्, (अव्य.) अप्रतः । भागने. पुर, दिम मारना । नुकसान पहुंचाना । दि. पर० स० पुरन्दर, (पु.) पुरै दारयति । TIR मेद । पुष्पी. जो पुरको फाडता है)। काली मिरर पुदन, (पु.) गउनीही गद-अन् । पुर (पुस्मित) गलो गंगानरी (स्त्री) पसर । १० । असल मरूप । मनोहर दव्य । पुरन्धि-घी, (बी.) पुरं (गेह) पासी परमाणु शरीर । कामा । शिवजी महाराजग एक नाम, गय । गौरा.. याह हमः ।। पुनःपुनर, (सम्य.) म अनीन । पारसार. (पाती है)। बहुत कुदम्पकाली और पुनःपुनः (पु.) नः पुनाति । पुन: एकनी. ग्री। मन परिवारवाडी औरत. पुनःसंस्कार, (३.) पुनर्गरः मेरारः । दूसरीगर पुरश्चरण, (२.) पुरयलम्युन । मंगर (मनन-जनेउ विवाद मादि) होना । (ज्यो. किसी मन्त्रको विक्ष करना (मन्त्रा हिरनिगा "पुनरं" में वरनान हो "r" जिम अभिषेक मोर ग्रामपभोग्ना US का पर मिशहेडए परिने विवाद ऐप सिर पुरस्, (अन्य ) स्मिन् काNit पहिले समय में पुना.(म.) माग (निश्चय) । भेद । किर। पुररामर, (नि.) पुर. ( अ ) Hit जानेहारा. सुनानगरामाग, (I.Prin (निगमे भर ३ / पुरस्कार, (पु. ) पुर[++पन् । मागे करार इनाम. दुबय (1मी पुनः भरि नाः । काटा-पुस्त(नि.) पुरग्+र+छ । एमा। गानन्न । नी. कियागया । मनिशत (दरापमान पुर. (1.) नभात । भगा । बाटा से परागया। मौकत ( मंगgr) rruirगामी । मन्न, (गी बाहुआ). पु. (4) पुदिर होती है (पएकी श्रीपुरलात्, (अय. ) पूरे+प्रभात (पुर बसा fromबनती है)। दुपारा तामागंग. artisfor furभा (३.). पुरंग.15.) गुन । भोमियी । पुगः (भव्य-) पहिल। बीए । म tra (Dist.. सावा. र.(1.) . पुर, (f.) गम Tv..:.) पदम : (ar)ग रापदि , mineratures Life रात्र (न.गि माग r:Inch मरत अमी. 2147, मना) KETE (T.) मा. 'गुण, T.) 31 AMERIE":{म, 4. Pent न... | Print. पुगतन, (.)TER ore...*.... .. ..:.niki (40) : (SE न. IT y" ..*rat maur) from aft.) shant !tº, {} } } { } { } {{".

(१२) [ पुष्कर BIHदरा. त्, (सौ.) (-) पुरी (देई) तनोति । दन् किए। | पुरोहित, (पु.) पुरः (अ) स्टारफलेगु सरीरको फैलाती है। देको भारम्भ करनेवाली शादि धीयते अमो। पाक । लौकिक वा पारलौकिक में जिसे आगे किया जाता है। राजाओंके पर ., (न.). दीपनापन् । विष्टा गूह । (घेदमें) कामोंमें आगे कियाहुआ जन । भागे किया भा ल (पानी), आदि कर्म करानेहारा. (पु.) + । ययाति राजाका छोटा पुत्र । जिसके पुर्ष, पूर्ति-भरना । पूरा करना । भ्वा० पर. सन परण ओंडी परिव संशा हुई। सर्ग । एक देर । पूर्वति । अपूर्वाद. क. नी । प्रचुर (बहुत ) (वि.) पुल, उच्छिति ऊंचा होना । पु• उभ• पक्षे तु.॥ (पु.) रि-देशी पो. पुर आगे जाना। सेट् । पोलपति-ते । पुलति । अपूपुल्न त । पोली पन्+ उप । मनुष्य । देहरूपी दाहरमें सोतादै । पुल, महत्त्व । बा होना । भ्वा- पर० स० सेट् । । सरसे भागे रहलाद (युधि)। आदमी । आत्मा । ति-ते।भपोलीत. पुलक, (पु.) पुल+कासाथै अन् वा । रोमा- कार, (पु.) पुस र एम् । पौर। रोंकी फूट । अंगूठा । कीग । मषिका चित्र । पर एका यत्न । हिम्मत । मिहनत । रोग । पुरुषार्थ । पिआला । हाधीका भोजन । राई । एक प्रका पर्वतकी मो । पिपुर (चौम)। पुल (सेत). किसरिन, (पु.) पुरुषः केसरीव । पुरपसिंह (ोर पुलकित (नि.) (पुलकात पुलकाः । आता ब- पदमी) विष्णुरा नाम (पसिंह) चौपे अवतारमें, जिसके रोंगटे राजे होगये हैं। बडा प्रसन्न हुआ. सिंह (प.) पुरुषः मिह इव । उपनि। पुरष मानों पुलकोद्रम, (पु.) पुलकानो उद्गमः । शारीरके पुत र। पुरषोंमें सेठ (बहुत भा)। "पुरुषनाग" (ओं पा रोगी) मा राहा होना । के होना. ही भर्थ. पुलस्ति-स्प(पु. ) मुनिका नाम. धम, (I.) पुरुषेषु मधमः । पुरषोंमें नीच । बहुन | पुलह, (पु.) एक मुनिका नाम । धान्य (पान वादमी. क्षिप्र । जस्सी. गर्थ, (पु.)त. पुरषका अर्थ । धर्म, अर्थ, काम | पुलाफ, (I.) पल्मक+मण । संक्षेप । पसरल्यास और मोक्षरुप पुरमा प्रयोजन (मतलब ). जविना. गेत्तम, (१.) रुपेणु उत्तमः । कम.या । पुरषोंमें पुलिन, (म.) पुलाइनन् । तोपोत्थिन दद। लिम | विष्णु । भौर उत्तम पुरष. निकला हुआ किनारा । मसाजगीरा. रत, (पु.) पुरुष (प्रनुरालि ) ददामि ( नामानि ) [पुलिन्द, (पु.) पु+किन्दन् । एक प्रकार पाहाल, पर जिसके बहुन नाम हो। इन्द्र । देवनोका राजा. पुलोमजा, (बी.) पुलोमा (अमुरभेदः) समान रयर, (पु.) अपसे इलाम उप फिरागा उर्वशीका यते । जन्+ । पुलोमा नाम दैलसे उसमा पान्त (पियारा)। बन्दवेशी रामा. इन्द्राणी। न्द्रकी नौ। बी. ग, (नि.) पुरः (अंग्रे) गच्छति । म् IN-पुर, पुष्टि-पालना । • पोषण पालना । सह. मी भाग जानेदार और प्रधान "" १० भनिट् । पुष्यति ।मपुरत. पुरोगमः। "मिनि" पुरोगामी. पुषित, (वि.) It Is पटाभारा सास-य, (पु.) पुरो दास्यते । पायसमनि किए रिया. एम् का । जो भागे दिया पाता है । हवि । पी भारिपुष्कर, (म.) पुरसरन् । गम: या द्रब्बा पद. भागेध निय (नोक)। ए er मुख घिस्, (I.)पुरः (अ) पीय? | पायो पानी पास्तर (लिभार) ! म । एकटी भागे किरा जाता है। पुरोहित. m (दर) मगई। रोगासre मागिन, (विपुः () भरदे मयितुम् । रापार (पु.). गुणको र फैल रोष प्रदण रसदारा - पुपारशिया, (40) पुपरससि भागी । पहिले हिस्सेदासा (त्रि.). पुपरखन, (पी.) growtarमो. ।

مع } هه مي { f مر گیا + د ۴ و د t=1 ها به وا و و ه ما و را 4 اما به ما به مع هم هة .همه به به به به في : انطينة ( 21 ) او د باره (1) همه ماه 1.5 : karib! از با ۷۹ ۷۶ ۴۹۶.۴ ۱۲:۰۱ پ ۲ 13 بهم ه ه ه ع 3", {40} (۱۹۹۹. ** . ۴۲۰ ۱۳۲۹۷۹۱ ۲۰۰۰ دو من مانده ای - دحية هدية ( 1 ) ا ( نم، دن) المخدر ، ره نه ده ۰۹ ، دهم شد ۱۱ دي دي ؛ نشد. به ، شي ، دلتا ششده و بلند (۰ ۰ ) د. عده الهه بيمه دهنده مش شه، هند د کيندنه ( من ) k! ! و دا لنبدء و معينة ) نطن نشست درد دلم هستندلع (۰ ) لمنعم دهد هتي ها به سه كه ي. هنن تي شنتنند (۰) لمنسد: حسنه الميه شعي وي) قسط میشن که فیلم هلند (د.) هم له الع दी.] (१५) . यजेत" भुतिः -- एक रोग, . - सर्वनाम है). सायी, (सी.) प्लकतो (इन्दस) पो+णे । पूर्णमास, (पु.) पूर्णमासको निहितः भण् । पूर्णिमाके बन्दकी नो चीनन्दाणी. दिन करने योग्य एक प्रकारका यस । “दर्शपूर्णमासाभ्यो ---तु, (पु.) कनुभिः पूतः । “होंसे पवित्र" । प्ताः विकासम्पादकाः कतवः ( यज्ञाः) यस था। जिसके यह पूर्णिमा, (सी.) किन् । मि.णि (पूरणे) चन्द्र वित्रताको सम्पादन रते हैं। इन्द। देवताओंका राजा. कलापरणं मिमीते मा+। पन्द्रमानी पन्द्रहवी कलाको गा, (श्री.)प्तं करो। पूत+पिच्युम् । पवित्र मरनेहारी तिथि । पूर्णमासी. हता है। हरीती। हरी । एक राक्षसी (जो विषसे पूर्त, (न.) पुर+का नि.तादिकर्म । तालाव, सभा पटेहुए दूधको पिलगती हुई भीष्पाजी मारीगई। भारिका काम । विश्वजन ( सय लोग) के उरेशसे जला शय (सालाव) आदि पनवाकर दान करना । "भाये रू" (खी.) पूफिन् । पवित्रता । पाकीजगी। दुर्गन्ध । पूरण भरना (न.) पाल (समय) एन (काहुभा)। र । रोपिपपास (न.). पूरित ( भराहुआ) (नि.). नक, (म.) पूया (दुर्गन्धेन ) कायति ।। जि- पूर्णकाय, (I.) कास पूर्वः । शरीरका अगला भाग। - समें बड़ी पर पलती है। विधा। गूंह । पूर्तिकरजनागी हिस्सा (विशेषतः पशुओंका) रक्षा(पु.)। एक साग (सी.). पूर्व-वं,-निशारा-बराना । भव । निमन्त्रण-भुष्पना । सक. 'तिगन्ध, (पु.) पतिः (दुष्ट गन्धः) यसाबिसकी धुरी धुरा• उभ• सेद् । पक्षे । भा० । पर.। पूर्व-(4) गंध हो गंधक । और दहीका १२ । दुर्गन्ध (बदलू ). यति । पूर्व(4)ति. (पु.) पूपा । पिरका पीठीका इनाहुभा पू. पूर्ण-प. (नि.)। (६) + । प्रथम । पहिला । पाएका, (बी.) परिमाण रक्षामन् । भाटका रामस्व । सारा । ज्येष्ठ माता ।बा भाई। (मह पम्प (भटमी) उपचारात् तत्सतम्यं धारम् । परम्यसाधना. एका । म । अगहनदि ममी दिन विधान किया- पूर्व-पे-ज, (पु.) पूर्व (4) जायते । उन्+ । ज्येष्ठ हुआ धामापीठीके पसे रिशहोनेहारी भरमी बों भ्राता । बा भाई । जो पहिले उगता है।बी भगि. (पूप) की अष्टमी. नी (बहिन)(श्री.). य, दुर्गन्ध-बदः पालना । मक । मेदन-पाना । सक. पूर्य (4) देय, (पु.)पूर्व (4) देवः (पशाव पाप. दिषा-भारम• सेट् । पूप्यते। अपूरिट रणात् भ्रष्टः) । पहिला देवता पीछे पार करनेसे निर. स्व. (म.) अन् । प्रग (पाव-वा पोग) आदिसे गया । अमुर । देव । अथवा पूर्वः (4) भेट दे। असा देवता. निहलाहुमा सोरका रिकार । एज । पीप, र, पूर्ति भरना-रारा होना-प्रीगन । दिवा आत्म• सक सेट् । पूर्व (प.) देश, (५.) कम । पूर्वध देश । पूर्वी देश । प्रायोभवस्थित जनपद. पूर्वठे । भरि. पूर,(पु.) पूरक अलग समूह । एकप्रकारका पाना। पूर्व (पं पक्ष), (I.) म । पहिटा पक्ष । मारह पावी सफाई प्रसरका पाप (सगग)ल सवार प्रतिरूप पkि. ला अपयर ( भाग) । पहिनी तरफ । ( मीमांगा) पूरक, (पु.) परस्मयुत् । दीगर । एक प्रचारमा नौ ।। जिससे दिल मोरोप्रतिपादन नेवार. भानमें प्रशिद (गुणक) गुणानेहारा । एक प्रकारका पूर्व (पं) पद. (न.) नः । समान पारस पदिश्य प्राणायाम । एक नाविकासे प्राणोंडा कर सेवना । पूरा भाग । पहिला पद । बिगो भन्तने गुर रातिर परनेद्वारा (नि.) प्रेतके परीरको बनानेहारे दस] पूर्व (4) पर्पत, () बम: । पूर्वमा पिण्ड (न.). 'पल । वही सूर्य पहिले दर्शन होता पर्वत। पूरुष, (पु.) पुर+उपन् । पुरुष । नर । भादमी. पूज" यही अपं. पूर्ण, (नि:) पूरज ! नि:। परित । भराहुभासा पूर्व (4) फ (फा)गुनी, (at.) मानसे ग्रt सारा योनिमें दोनों पोंछ परमी, रामी र पूर्णिमा अश्व (तारा) विपियें। (बी.). पूर्व (4) भादपद, (..) भनिने रt पूर्णपात्र, (म.) आर्म• मरामा पार (ब) नक्षत्र (तारा). समय । उपकी उत्पत्ति आदि के समय बोरकर पर पूर्ण (पं)ग, (.) मा एम् । रातमा आदिका देना। दोम अन्त मा क्षिा सपने हो और इस कार मेटने की सारियम पार पुस भाव १५ही पारीसे भाभा एक पात्र. (नाम).

ब्रिगमन प्रापरriTI (३) (4) र.(R) (कान) मनाला पुन, (नि.) एच् मिश्रित निज रकम निदान (मारियल) र (निसान ). पृक्ति, (सी.) जिन् । मिलन.. रिडियम. पृश्यम्, (एच्थन्)। जाना पूर्व (धे)पादिन्. (०) याहारे () नंबर मरना विरमा. ति। मिना परते बमियोप (ममात-या नादिरा), समई-जोडना । मिलना । एनामा सेट । पृ । मटि । ""I मामा, (3.) पूर्व नौमांगा । पई परीक्षा । पृच्, सम । मिलना-जुना । यार। दिल निकर । पदो का विचार (इसी के सेद। पाक्लिाभरनर. मातरमीमांय" का है). पृच्छक, (पु.) पृन्दगुल्मी पूरन, (दु.) नवरा पहिले परनेसोग्य संगी मारमहरनेवाला एचा (श्री. मि । मसरन रान(.) सापोती आयु (अमर) का पूराना । पू. IT पृतना, (सी.) तनन् । सेना () न. (प.)। पदिशा. सौ सेना )।(स्य १४ माम.(.) । पहिले (पूर्वजन्म) की पैदल ११५. य, बोर (फेंकना) मेलामा । • • धि (3.) मा मिस गमुद्र । पायनि-ते. पृथर (मय.) भिम । जुम । नाना।। Hir(..)Timiri (पदोगम) के दिनानि. 17 रापार- यश्य, (1.) पृ भाष: RAM ५ गुगविशेष जाना ।। 4.1:... | मी माधा था | सामना, (सी. ) TRE मा (s नसभा निल AATM Tr... गार (नारा), है। भेष । फरक Tr...) (4) ग./ राजन, (पु.) TTI (TAR ). 4-11 .gir.गो जनकी विनती है। मीका भार ForATTERNATA, (A) (A: मि Nir)()" नरम (ra.) (4) अपम (). Tा. (श्री.) शिमोती 17 ( 4 ) 11. स.पो.पा. (4) थी, (बी. ) ......... . Tirire. (१.). ITatra HTTARTSAPHY ::riasatta (1) Tiance!' 11-1......... ...more ............... Ti (Naren ant Trth. m.tr (३२५ ) (टी, क्ष. (पु.) उदर मस्स । जिसका बस पेट हो। पेटक, (पु.न.) पिटबुल् । पुखर भादि पदापाके मेहा)।परे पेटवाला (नि.). टिकानेके लिये क्षेत्र (त) आदिका इनाहुआ पदार्थ । स्त्री०) भुवगुणयुका। खियो शेप । भूमि । जमी- और रामूह । पठार । टोकरी । संदूक । बेला। देर. की इलाइची बाला जीरा. पेय, (त्रि.) पा-पीना+कर्ममि यत् । पान करनेयोग्य । (पु.) पगति काकु-सम्प्रसारण । रापं । सांप । पीनेलायक । (-न) जल । पानी । दूध । या । बिच्छु । ध्यान ( भेडिया ) । गज (पी)। (स्त्री.) चावलों की सिपी. पेल, कम्प । कांपना । भक. जाना सर. भ्वा. पर• त्रि.) स्पर+नि । प्रध+निया .सर्व बौना। सेट् । पेलति । अपेलीत. । पतला । दुई । बमजोर और खल्प (योग)। पेल, (२०) पेल्म्सच् । पुरुषका चिद (निशन) । (कृष्णजीकी माता) (स्त्री.) एक अंग । अण्डकोष -पताल. भ, (पु.) भियगर्भ । देवीस्नु । देव. पेलय, (नि.) पेल्म्यम् । पेलं पाति । पाक कोमल । । पेटा । श्रीकृष्ण. कृश । विरल । मानक । नरम । कंदा। मुंदर. क-सींचनामा भा• सक० सेट् । पर्वते । अपपिंटपेश(स)ल, (वि.) पिए (ए) अलन् । मुंदर। (म.) +अति । विन्दु। (दाग) बूंद (त्रि.) दक्ष । चतुर । और कोमल । नरम नाजक. नेहारा. पेशि-पी, (स्त्री.) पिशमन् वा ।। मण्डा । मोमपिण। (पु.) अतन् । विद्यो बिन्दुवाला एक प्रकारका मौसका गोला । तलवारकी मिभान । एक नीपिशाची। र । श्वेतबिन्दुयुज मृग । और द. एक राक्षसीन्दका पन (पु.)। जूता. (पु.) प्रपत्+ (संज्ञायां ) कन् । दाण । तीर. पेप, सेवाकरना । निधपकरना । भ्या• था. एक• भेद् । घ,(पु.) धूपतो विन्दोः अक्षर (वाइकरपात्)। पेषते । अपेपिष्ट, मानों पोशा है ( उठानेसे ) वायु । हवा. ज्य, (न:) प्रपद्युऊ ( दधिविन्दएफ) दभिसेक- पेपण, (२.) पिएकत्यु ! पूर्णन : पौरना । " स्युर् " या भाग्यं । शाक । परीकी बूंदोंवाला था दहीसे पेपणी, (बी.) रिष्यते अनया । अनि था औ । पैषण- खल (मीच). पहुआ पृत (पी) दहीसे मिली पी. शिला। पीसनेरी सिला. (पु.) पृष्+ग्निन् । विन्तु द. पेस, जाना । भ्या• पर• सक सेद । पेसति । अपेसीद. ६(त्रि.) पत् उदरे यस्य । पो. नि.। के पेटपर विन्दिा हो । विन्दुगर्भित । पिन्दुवाला। पठीनसि-सी, (पु.) मुनिभेद । एक मुनिम नाम. वाला. पहक, (न.) पितृतः भागतम्+टण् । रिता प्राप्त (1.) पक्शरीरके पीछे भागा पीठ। हुआ।दाय (जायदाद) रिसा. प्रविशेष. पैतृप्यसेय-पीय, (पु. सो.)। रितुः सः अपलो ए. (मम्म.) +। पथात् भाग। पीछेसे । टक्ण् वा । विकी गहिन (भूक्षा)का बेटा. पैत्र, (म.) निः । पिता देवना भर सम्म । थि, (पु.) (पपात् ) गण । बिरामी तिया रिता जिसन देवता है। रानी और र पीछेको हो।भक । भाछ । री. भंगूठेके दौरसा स्थान । पितृतीर्थ विचार- स, (२.)पृटस मोसम् । पीठका मांग. सम्बन्धी । पिता (नि.). श, (पु.)त.पीटका बारा । पीठ (दे. पैशाच, (पु.) रिसान निins । एकप्रकार पाकलमें) सी. विका। जिसमें बरसोटी, या मारी बारिममें (म.) पृाना (सोनागा) समूह+सत् । सो. सम्याम मानेपर भी पालेता (मरा का समूह । एक या टेन पतिपत् । पोटपर विवाहों में बहुतही निन्दित है)।एकरा. गता है। पोराल भारि (वि.). मुनग्यम्, (२.) रिनस भार+मण्यम् । (पु.) पच्+शुन् इन् । उनकारी बुगलगोरी । रतन निन्दा. म जिरा । पर। चारपाई। (ग) और पैटी, (बी.) स RTE करे - प।बादल. सपटी हुयब.

गोर117 HIR-4417NHETan T."'.74.म.पा. वि () थी, (श्री) TRA 14 (411)41निral frire. (1.) That Orrrr (१४) (4),(R) (A) अनेकाटा एन, (पि.) + । मिश्रित । किर रंग निदान (मर करन) सम्म (निशान) पृति, (यो.) किन् । मिलन.. दिया. पृश्यम्, (यूपन्) | RATE पूर्व (प) यादिन्. (१०) दाहारे पूर्व (4) वर- मरना विरमा. दिनाले अभिोग ( माल का नारा), राम-जोना । मिलना नirl रहना पदोलनरा. सेट । फे। सर्विट । ""IL. नाममा, (.) पूर्व मीमोगा । पदिती परीक्षा । पृथ्, म । मिलना-जुला रहेगा। पदन्त सिर । वेद मंड विकार (साके रोट । पृषिमान. हम पर नया"काने हैं). पृच्छक, (पु.) गुमान पूर्वगड(.) ने नमारा पाने करने योग संगीत माम करनेवाला पृच्छा, (खो.) पृचम सम्मान गन्न(f.)hinामा3 (मर) ना पूछना।पूर. PITrरान. पृतना, (श्री.) +नन् । सेना (IN) (R):गे। पदिय गा. सी मेना) (स्य १४१, पी , भाग, (:.) समासः । पहिले (जन्म) का पीपेन १५. य, मोर (फेना) फलाना ।। दि.15.) मामला गुर। पायीले पृषक (गया) भिम । रामनगर TH. (.) Tiwi It (पलिजम) के विनाशा. HT Krianा- याय, (न.) पर भाष. RAM गुगनिदोर माना। TE(...) . गा मापा वा पगारमता, (t. ) एक मामा (मा तमा मात+MATHA TET,(*..) गामा (नारा). है। भैदान। फर. Triri(i) ssts शान, (T• ) THE ( fan HD जनागिनतीय मद मीर +erenTAR (Th, (R) ME (Ar: 4)(): गणम ( Mr. गा, (श्री. Trixtham Tfriinfo, (T.). Trek *.*............ .:.rat krung 6........... ..." १५.८ : ... ... ... ... ..) (१rn १५... Tu... Tी. (ARP) : . * म. - ना "f.) ना। भा. भा. मर• अदाप्यापर्ने । प्रकीर्ण, मो. और मे"-". ५.) भारम्भ । परि । सकिन । गतोमर हुआ । मि और मिमि (2.) से भोरगे ऐना) प्रतिमाहार, प्रीतिन, (त्रि.) ram : hrs (f.) मारम mIIदिर । पुरमा प्रश्न.... of a retri- भन, (2) earz मरा:- पार (माहिर) | INgi. प्रशन (1) TETAPAT पन, (.) पिनियापुष । पशु ।। अधिक मादा Tre ITI RETr मिस ने वा एन, (नि.) RI1. प्रमि, (4) ristirl (1.) पर अधिकार । trarmi Tamactrrrattner" मीण (FAIm) पण शादि irmirm 1. Ir. रण.(.) युर । प्राय । प्रार पदा)RIT (frreir real किती । anitatी लगा free भी ATTRA रोकामा fun (.mammin ) frani कोबरदार मादिगा (rnm) trumeror (पु.) पण । IITiant TRI funnn m..more ALITAREETrenbr re. र, (पु.) ur ar । प्रा । पसर पर (ar) meanा(m) mein (4)1.) प्रतिमाघ, (x.) RIT Time नम, (वि.) mean- बर मा. म. (agati). Plers.gar..xx. .r nिu ram. प्रसनता पा (मध्य) RRIAns. h.) RT : Irr" । माया (पि.) HERY (45). म भिग, (tr... . . . Im.(पु.) प्रमेह (t) Re Oil Reधि, ther mantra (I.1 RTwing | reme IN (NRN)ra (ta.) 'r. (......: • • mr (.) RINT करने area .. (Intra trमर(.) १ RT प.(.) Retre FM, shet.mirint orr . theTRIPR (1.! mea, (:. ) Tran. Frok'. Ruranarrathi धाश्रय Sr.(.)पुरे (नपरे) मामा पाप, (कि.पी.(8) पुन: .पोगण्ड, (३२६) पोगण्ड, (नि.) पवते पुनाति वा+पू पिन् । पागण्डः पाराण, (त्रि.)-णी (श्री०) पुरा एकदेशो यस्य । विकला । न्यूनाधिकार । विगहे साथ संबंध रखनेवाला । पुराने हुए भगवाला । जिसके अंग छोटे बड़े हों। पांचवे निकला। पुराणके जानेवाला. वर्षसे दस वर्षकै नीकी अवस्थावाटा बालक (पु.) पौराणिक, (१०) पुराणं वैति ( "पागण्ड" यही भये. पुराणको जानता वा पाता है। पुर पोरा, (श्री. ) . पुट्स्यन् । पुरपरक्षणान्विता ली। जानेहा. वह वीक जिसके लक्षण पुरुषके हो । दाहडीमुहवाठी स्त्री. पौरप, (न.) पपस भावः कमै वाम पोत, (पु.) तिन् । पालक । नौकारा यान । जहान (नाव) की सवारी । समुद्रकी सवारी । घरका स्थान । या काम । हिम्मत । विक्रम । बहादुरीगे- सपा और दयपरिसधा हाथी (पु.) प. रूपस्येदंस्थम् । कार फ्लेहुए भुग और पोतयगिन्, (पु.) पोते पनि । जहाजमें व्यापारी । प्या परिमाण (माप). नावने यापार करनेहारा. परिपेय, (नि.) यी (घी) नन पोतवाह, (पु.) पोतं (ना) वहति । वह अम् । थाया। पुरका सम्बन्धी । पुरपया बाग नाव घटानेहारा मलाइ पौरोगय, (पु.) पुरः (अ) मा पोष, (पु.) पु+पम् । रक्षाकरना । पालना । परिश- यम्य पुरोगुः । ततः सायें मर । पनेर करना । मायदेना. जिसरी भास है। पाकशालाका अन्य (F पोरक, (पु.) पुतुल्। पुटकरनेवाला । पौरोधसम्, (२०) पुरोधयः कम । देनेवला. कतंय (काम). पोषित, (dि.) पुष्+निच्छ । पाटागया। पुट किया- पौरोभाग्यम्, (न.) पुरोमागस्यन्दो दूसरेके दोष (यूड) को देगनेका सभार. पोपिन पोष्ट, (नि.) पु+विनिम्तन् या। पालनेवाला । पौरोहिस्यम्, (न. ) पुरोहितस्य कमेप। पुरोहितका अधिकार. पोप्या, (I.) पोयाणा (पा माना ) वर्गः (मु. पौर्णमास, (पु.) पाणमाम्या मितिमा मा)। गरि मिना पालन करना उचित है। दिन कियागया एकसारका हर मगर पालनहायक समूह ( माता, पिता, गुरु, सी, एन, यि ). पार (3) देव । उगके वासी ३० ३.। पौयांपर्यम्, (२.) पूर्यापरम्म मात्र या गन् । नेद । एमकारका गला । ५ । पोशा.पोलत्य, (पु. श्री. ) पुरपय मा से संबंध । पालमपातार Ar संत्र, (3.) म mrity . पुरी सन्तान । गा""यात्रीपादी. एसी सन्तान । इयर राय ERA नाम (16) पुनः पुनः इम्य मात्र प्यम् । शथ-पोलामा (म.) पुनोनः भाई पनपा)(सी.) (रा) मन होना. पोनर (पु.) पुन (मायो) मव+म। की कन्या श्रीलामी. दर में पर, (पु.) पुनशपयुका पानी ने । पुन गम्मपनि (गुननंग) +TV frमहीने में (दि.nा (1.). हो। पूग ।। " को "10) THRE { Tit). रगत परमी । नारी (f.). हो निला (Aar गर.).iri | माता बन्द मगर ) नाम ( PARORE(1) TTz. प्यान, (in.) या पर Tamanan, RAI पका. इति श्रुति उप"

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उत्पत्ति. मजेप्सु, (नि.)प्रजायाः इमु आन प्रशा, (प्रो.)+शा+युदिासरमवीर प्रघय, (पु.)++समूह बना । शिथिहाप्रणय, (पु.)+भी+भय मोनापति इतिहपियार)। विधायक प्र), प्रक(का), (पु.) प्रकाश थम् था । पीनी प्रचनम्, (दु.) पित्नी । र अवाजवीणाका शब्द. अशिलवाला (पि.). प्रश्वेडन, (पु.) प्राइवेट ल्यु । नारामान । विपरित प्रच्छ, निगा ना ! तु. पर दिए । लोहेका तीर. मनाशीन, मखर, (नि.) प्राय: सर: । प्रा० स० । अत्यन्तोष । प्रच्छन्न, (न.)z+छ+ । गुनद्वारा घहुत तीपा । हयमना । थोडेका साज । कुछुट । फुत्ता। है। अन्नद्वार (मीताका दवाबह)। अश्वतर (राघर) (पु.). प्रच्छमनस्कर, (पु.) प्रमः दार- प्रख्या, (क्षी.) प्र+या+य । सादृश्य । थरावरी । 3 (नजानागया) चोर. : सरपदमें रहता है। तुत्य अर्थमें "पितृप्रायः " ऐसे प्रच्छदिया, (मी. ) प्रन्सदयति । छ ही " निभ" आदि होते हैं. रोग । अमेकी यीमारी. प्रगण्ड, (पु. ) प्रकटः गण्डः (अवययः )। थच्या गल्ल प्रच्छादन, (न.) प्रच्छाद्यते अनेन । ए. (कपोल )। कोहनी (कूपर ) से ले कक्ष (बगल ). जिम्मे ढोपते हैं। उत्तरीय वन कार में तक भुजा । दुगं (किले ) की दीवार. प्रजन, (पु.)प्रजायवे अनेन । प्रगल्भ, (त्रि.) प्रगल्भ अच् । प्रत्युत्पन्नमति । जिस. की युद्धि समयपर झट पूती है। प्रतिमावाला । हाजिर दिपु पुंगरम्य संयोजनम् । पहिले गर्म करे चल आदिसे मिलाना । पशुओंके गर्न हाने जवाव । एक प्रकारकी नायिका (नी.). प्रगान (नि.) प्रकर्षेण गाढं । गाइभक्त । बहुत गाटा । प्रजा, (ग्री प्र+जन्४ । सन्तति । अनार अत्यन्त । मृत । दृढ । मजवून. प्रगुण, (नि.) प्रकृष्टये गुणो यस्य । सीधे खभाववाला । प्रजाद, (नि.) प्रडां ददातिदाका दक्ष। चतुर. वाला । यध्यापनको दूरकरनेवाला. प्रगृह्य, ( न• ) प्राग्रह यमप् । व्याकरण खरमन्धि न प्रजानन, (नि.) नी (श्री. ) प्रजनन होनेलायक पद. करनेवाला । टसारक. प्रगे, (अव्य.) गीयते पत्र । प्रग के । यतिमातःचाल। प्रजान्तक, (पु.) प्रजा अन्तयति-वा, प्रजा यमराज । मृत्युकी देवता जो उत्पनिमान प्रगोपन, (न.) प्र+गुप्+अन । रक्षण | बचाव. डालता है. अप्रथन, (न.) प्रय् अन । गुथना । युमा । एक प्रजापति, (पु.) ६ त । प्रजाम पते । दुमरेको इकठा करना. नमा । प्रजा रचनेहारा । दक्ष आदिनों प्रग्रह-प्राह, (पु.)प्रप्राप्+पम् था । प्रहण । पक- जामाता ( जाई)। मूर्य । ममि । त्वया । हना । पोडे आदिकी रस्सी । लगाम । किरण । बन्दी । प्रजापती, (बी.) प्रज्ञा विद्यते अस्या भाट । भुज । बाजू. है। जिमी सन्तान हो ऐसी नी । माई- प्रपण, (न), (न.) प्र+हन्+अ । याहिरके दवांजेका पुत्र मी अपना होनेसे). कमरा | मरांडा । लोहेका मूसल (मोला). प्रचण्ड, (मि.) प्रकग चण्डः । मा० । दुधं । यह । उप्रजारी इसा करनेवाला. दुरन्त । दुन्दा प्रतापी. होण, या घोणा यस्य । बडे नाइ- न(युट् । युद्धि । " पाला। ऊंची नावारा. (निशान ) "अच्". प्रचण्टमूर्य, (नि.) प्रचारः सूर्यः यत्र । तीक्ष्ण (त्र) प्रध, (नि.) प्रगते ( विरले ) बानुनी मर्यपाला (देश-स्थान). के स्थान में "शु" होता है। पिरले पुग्ने ( प्रचण्डातप, (पु.) प्रचणः पापः । भीषण (सनी) महीन, (न) att+तो न ) गरमी (भूप). (डाटा) नानी संयोग. प्रयुष (नि.)पुरमा बल । बन. निवांचा शान्ति बहुत सवेर.

प्रीत + . न्, (पु.) प्रणयः (प्रेम ) अम्ति मस्यादनि । प्रेम | प्रतारण,(न.) प्रस्तृ+निमयुर । वंचन । टगना "दु" वाला। मतां । नायक. प्रतारण. (पु.) प्रकण भूपते अनेन । अप् । निस्से प्रति, (अन्य )माप्ति । फैलाना । मन भाग । उलटकर तुति की जाती है। ओंकार । वेदके धादिमें पढने. देनाको ओर । फिर. याद प्रतिकमन्, (म.) प्रति मिनिन् । त्रिम भूला बना 7; (पु.) प्रानम्यम् । ऊंचाराद । साना रोग. वटी सजावट । राजाना. ल, (पु.)प्रनिम्+पम् । प्रणति । गुना (भाठ मंगों- (प्रति(ती)कार, (पु.) प्रतिकशाप था । वरत व्यापारविशेष). यांनन । बदला निकालना । येहुए सरकारका सही व्य, (नि.) प्र+नी+प्यत् । भगम्मत । य । प्रीति. अपकार परके शोधन पाना रोग आदिकी मणि। य। इस्मन । पीविरहिन । साधु और पियारा (प्रिय). इलाज हटाना. मान, (म.) प्रणिधीयते । प्र+नि+या+म्युन । प्रयन । प्रति(ती)काश (4),(त्रि.)। प्रतिपंपाने शिश । अमिनिवेश। एक बातपर तुलझाना। योगशास्त्र | घम् वा । तुल्लागारमTEtr. "ध्यान"या बांधना. पि, (पु. ) अमिधीयते । प्र+निया कि पर। दून प्रतिफल, (fr. ) प्रतिरूपं कुलं पशः भाय । पिराधका- सामननाला पिटारगरिपोमावर पुस-राफिआ)। अनुचर ( मौकर-चाकर )। पाचन करनेदारा मांगना ) और अपधान । पयास. पत्, मा. ६० पतनि । अपातीत् । किसी भी प्रतिपति, (पी.) sि++पिन् । सीतार। हगवीर । मुभाफिर । प्रतिनिधियरी. किना । प्रणाम करना । आदरसे परोपर गिरना । प्रतिक्षण, (प.) क्षणं माय । सी रामकरना. भगीरण बारर. पात, (पु.)+नि+पर+पम् । मुरूना । प्रणाम । तद्विद्धिप्रणिपातेन"गीता. प्रतिक्षिम, (नि.) रिलिप प्रेरित गण। पितपुरवार, (मम्य.) प्रणिपात: पुरः परति सपा भधिक्षिप्त शिवागतासादित राnि उपा ममरकारले पाप. निरादर वियागुभा. पातशिक्षा, (डी.) प्रणिपातस्य शिक्षा प्रणाम प्रतिदम् (अन्य ) rict-अम. TIMR. रना सिखलाना। एक्ने शिक्षा (प). सहित (नि.)प्रनि+या+प्राप्त यस प्रतिमा, (पु.) किमान पसाभा । समाभिमें सपाहुआ. रियेगये पर देगा। सेना पगार बीत, (त्रि.) नी+को पद पदापि मतियातन, (.) प्रतिमा रिमार रण पारि पानेमे बदल गया हो। शिय। पाहुमा । पया हमा। और फियाहा चार गई ममि प्रतिपदा, (.)TRATror (पु.)। यहा पारिशेष (बी.). अभिप्ररनुप | भार अनुमोरिया मेव (पु.) प्रमोसर । भारत । हेररसा। मडिपारदीर पनानेवाला पारासिया नैराका. भतिष्ठाया, (.) on Ir.itra णेय, (वि.) नीर। अधीन । बापू तारारारा भारमा. एPOP. पति, (t.) +सन चिन्न । पिसारा पाये। तिहा,(..):Arunार निन, (.)प्राइस एक पुरानी रंग ""( Repr तिल, ( .mirar Rat) (r) लोरिओगार(पु.), प्रताप, (पु.)प्रसार मानिस(Fireater. पाए. rnkracere. पप.१ मारना. - - रहयत. प्रमाप्रिना रचनेहारादा आदिनार जामाता(जगाई)। सूर्य । अमिता। है।जिमी सन्तान हो एमीनीमार प्रमा, (प्रो.) ++ बुदिमाग कम्य में ""नामले पप, (.)ERRY मू। बागाविविप्राय (तु.)AIRArtm नहynt! प्रक(का),] (१२८) प्रक(का)ण, (पु.) प्रक्कम घम् वा । भीनको प्रचेतस्, (पु.) प्रचिन् यति । वर. अवाज । वीणाका सन्द. अञ्छदिलयाला (त्रि.). प्रश्वेडन, (पु.) प्रवे+ल्यु । नाराचान्न । विपरित प्रच्छ, जिनासा । पूछना । तु पर द्वि० लोहेवा तीर. समाक्षीन. प्रखर, (नि.) प्रकृष्टः सरः । प्रा. ग. । अत्यन्तौ । प्रच्छन, (न.) प्रसदाक। Hasir बहुत तीपा । हयमना । घोडेका साज । छुट । कुत्ता । हा सन्नद्वार (मीतरका दवांह). अवतर (सधर) (पु.). प्रच्छमतस्कर (पु.) प्रच्छमः टमा प्रस्या, (मी.) प्र+स्या साहश्य बरावरी । 3. (नजानागया) चोर. : सरपइमें रहता है। तुल्य पर्थमें " पितृप्रत्यः" ऐसे प्रच्छदिका, (सी० ) प्रश्यति । ही "निम" आदि होते हैं. रोग । हामी सीमारी, प्रगण्ड, (पु. ) प्रकट: गण्डः ( अवयवः) । थच्या गल प्रच्छादन, (न• ) प्रायवे अनेन । (कपोल)। कोहनी (कर) से है कक्ष ( वगल ). निस्से दांपते हैं। उत्तरीय वन ऊपर- दक भुजा । दुर्ग (हिले ) की दीवार. प्रजन, (पु.) प्रजायते अनेन । प्रार- प्रगल्म, (नि.)प्रगमस्मन् । प्रत्युत्पन्नमति । जिम. की थुद्धि समयपर झट प्रती है । प्रतिमावाला । हाजिर दिषु पुंगरस संयोजनम् । पहिले ममी पल आदिसे मिटाना पशुओंके गर्न बने अभाव । एक प्रकारकी नायिका (प्रो.). उत्पति. प्रगाद, (प्रि. ) प्रकण गाउँ । गाहव । यहुत गाढा । मजा(नी• प्रजन् । सन्दति । जना अत्यन्त माहरा मजबूत. प्रगुण, (नि.) प्रये गुणो यस । सीधे समाववाटा । प्रजाद, (त्रि.) प्रां ददाति दERIF सचिनुर. वाला । बंध्यापनको दूरकरनेवाला. प्रध, न.)+म+क्यप् । व्याकरणमें सरमन्घिन होनेसापक पद. प्रजानन, (वि.) नी (श्री.) प्रजनन करनेवाला । उत्पादक मंगे, (अन्य )प्रायवे पत्र के अतिप्रातःकाल । मजान्तक, (पु.) प्रजो अन्तयति- बार यमराज । मृत्युकी देवता जो दानित प्रगोपन, (२.)z+गुरअन । रक्षण । बचाव. दालता है. प्रमयन, (२.) प्रयन । गुथना । युमा । एक प्रजापति, (पु.) ६. माय पते।। दुगरेकोमा करना. मप्र प्रह, (पु.)++म+यम् वा । प्रदश । पर. रना । पोडे मादिकी रस्मी । लगाम । हिरण । बन्दी । प्रजापती, (मो.) प्रजा दिने भय मटमुरावा प्रपा (न), (२.)zr+अ । बाहिरके वांजेका पुत्र मी सपना होने ). रामराबादका मूमल (मोटा). प्रजेप्ट, (मि.) प्रमायाः ई =अhr प्रय(नि.) प्रग थारः प्रादुरी । उद। उप्राइसा करनेवाल: प्रायोन. (f.) हा योगा यम्य । बडे नाक-कान, (युद् । सुधि । इसे प्रधाम, (पि.) प्राः सूर्यः यत्र । तीण (वेज), () () गरी अन्य दरम(पर). (मी). प्रगुप(.)ला. nि. मत गर. . - (२५) (शीशल, . T -(पु.) पयः (R) अनि सस्यनि । प्रेम | मनारण,(न.)++मिन्युर। पंचन । ठगना "गुम्" पालमा मापा. (पु.) प्राण नूरले भनेन । प्रान+अप् । शिरमे मति, (स.) माता फैलगना । मग माग । उलटकर सीपी जाती है।मौकार । ऐके शादिम पदने देना सामोरफिर. प्रतिकर्मन्, (न) प्रति++मनिन् । त्रिम भूपा। बना- --(पु.)प्रनम्+पम् । चास कराना रोग. पटी रागावटसजाना. (पु.)+नम् पम् । प्रणाति । एना (भा भंगों- प्रति(सी)कार, (पु.) प्रवि++यम् मा रोपः । वैरनि. मपारविशेष) पोतन । बदला निकालना । येहुए सपकारता साही ज्य, (नि.)म+नी+पभगम्मत । देय प्रीति सरकार करके दोषन करना रोग भादिको किया । पारमन । प्रीतिरहिन । माधु और पियारा (प्रिय ). ! बलात्रा हटाना. गन, (R) प्रविधीयते । प्र+निस्वारस्युर। मन प्रति(सी)काश (n),(नि.)। प्रतिरूपं काशते । काश+ शिश । समिनिसा समानपर दुलमाना। योगसान। पम् वा दीपं । त्यसा । सदशा धमक । एक "प्यान"सायामधना. पि, (पु.) प्रविधीयते । प्रनिया परदूत प्रतिफूल, (f.) प्रतिरूप कूलं पक्षः अस्य । विपदपावा. सा । अननुकूल । विरुद्ध । परपरा । विरुद्धपक्षको अवलम्पन एम-भूपिमा), अनुर ( मंडर-भाकर)। पापन करनेहारा. मांगना) और सपमान याल. - पर, भा. प। पतति । अपरावीत् । रिसीक आने प्रतिकृति, (प.) प्रति++छिन् । प्रतिमा । पारस । तरापीर । मुआफिक । प्रतिनिधि । बजी । पराबरी. ना । प्रणाम परना । सदरमे चरणोंपर गिरना। प्रतिक्षण, (अन्य ) दाणे धणे व्याप्य । व्याप्ती अध्ययी । गपात, (पु.)+नि+पद+पम् । इना। प्रणाम । अगीक्ष्ण । पार बार. "तदिदिणिपादेन"गीता. प्रतिक्षिप्त, (त्रि.) प्रति+दिप्मा प्रेषित । भेजाभा । 'rपातपुरतसर, (भन्य.) प्रणिपातः पुरः परति रया | अपिक्षिप्त । शिकागया । माधित । टूटगमा । तिरस्कृत । अपाममस्पराप. निरादर रियाहुभा. पातशिक्षा, (बी.) प्रणिपानस । प्रणाम प्रतिगृहम्, (भव्य.) गृहग्रह-अध्य. स. । प्रतिपर । हर. करना सिखलाना। एनेकी शिक्षा (इल्म). मेदित, (नि.) प्रनिया+ । प्राप्तो पाया स्थापित। प्रतिग्रह(.) प्रतिप्रहमप् । खोकार रठ। धर्मार्थ रक्सामा । समाधिमें सगामा. दियेगये इम्पका देना । सेनाकी पीठ । दान सेना । पूर्व. गीत, (.) नीरू । वह पदाकि जिरा रूप प्रतियातन, (न.) प्रतिमान साथै गिप् म्युत् । मारण। रसारि पानेसे बदल गया हो। शि। काहुआ। मारना. रपया था मौर कियाहुभा। यह संस्कार की गई भमि प्रतिच्छन्दए, (.)दा अभिप्रायः प्रतिगतः छन्दः । (पु.)। यसका पारिशेप (पी.). मभिप्रायानुरूप । भाशयके अनुसार इरादेके मुआफिक। गेत (पु.) नी+मुन् । मारक । क्षेत्रानेवाला। प्रतिरूपसरावीर. बनानेवामा उत्पन्न करनेवाला । शिक्षा देनेवाला. प्रतिच्छाया, (बी.) प्रतिरूपा पाया । प्रा• । प्रतिमा । य, (नि.) प्रनी+यत् । वास । अधीन । कामै वणवीर । एकची धाया। प्रतिरुपतासाश्य । एकजैसी थापामा. तति, (बी.) प्रसन्नचिन् । पिसार । पलाय । पाटी। प्रतिमा, (श्री.) प्रतिमा+रतम्यतयोपदेशाकरार। नावेल. पाप्यावेन पक्षनिर्देश। साभ्यसरूपसे पधको कहना। 'तन, (पु.) प्राशुर भट्च । पुरातन पदार्थ । पुरानी चीज. "पर्वत पहिवाला है" (यहाँ पहिमापसे पर्वतका निर्देश तिल, (न.)प्राट तल । पातालविशेष । " सलं अस्य" किया है)। व्यवहार (दावा ) जैसे इसने मेरा अमुक फेलीहुई अंगुलिओंवाला बाप । चपेर (पु.). पदार्थ लिया है देता नहि "युद" "प्रतिज्ञानम्". प्रताप, (पु.)प्रतिपयम् । कोष मौर दण्डसे उपजा तेज। प्रतिक्षात, (त्रि.) प्रति । पहिला कामा प्रति. स्पताप मीआरका ए. हाच विषय । घार कियागया. - एक परमें, > . एकलका होना. पा.४५ -- - गया उत्तरारदिनाnix प्रा.रामान. - प्रतियोगीविरुद्ध पक्षबालारिणे. प्रति लोमनुस्मन् । जो भायो l अतिसय,(3.)प्रत+++थए । निरिकी फिर प्रतिलोमा, (पु.) प्रतिमा प्रतियचन, (२.) प्रतिमा पनि प्रतिपात, (नि.)प्रगतो ri प्रतिपादिन, (पु.) in दि मान्यवरITNI प्रतिदान, (३३.) प्रतिदान, (न. ) प्रतिरूप (मुल्यहां ) दानं । प्रा. रा. प्रतिमा, (स्त्री० ) प्रतिमाम । बुद्धि विनिमय । बदला । तुल्पस दान एक चीज देकर दूसरी इतीकी अकिल. लेना । न्यस द्रव्यका फिर अर्पण करना । अमानत हवाले प्रतिभू, (पु.) प्रतिनिधिः भवति । एकी करना. है। लग्नक । जामिन. प्रतिध्वनि, (पु.) प्रतिरूपः निः। प्रतिशब्द । एक जमी प्रतिमन्दिरम्, ( अव्य. ) मन्दिर-.. थावान | गूंज. एक) मन्दिर (घर) में. प्रतिभ्यान, (पु.) प्रतिवन्धन् । प्रविशन्द । गूंज । प्रतिमा, (सी. ) प्रति+मा+य । सामा उलटाहुआ शन्द. करना । मृत्तिकाशिलादिमूर्ति । मद्ये वाम प्रतिनमु, (.) प्रतिनिहितः नप्ता । पौत्रः । प्रा. पोतेका वीर । सदा (समान । एक वैमा )(it) पोटा । पढपोता। प्रपौत्र. "देवप्रतिष्टा". प्रतिनिधि, (पु.) प्रतिनिधीयते । तुत्यरूपतया स्थाप्य प्रतिमान, ( न०) प्रतिमीयतेनेन 124 ठे)। प्रति+नी+या+कि । प्रतिरूप । वैसी पालवाला । प्रतिविम्य । परमाही । प्रतिमा. अपनी जगह वैशाही कायम करना । इमनी 1 प्रतिमा । प्रतिमुक्क, (त्रि. ) प्रति+मुन्मछ । परदेशात तस्पीर. और छोडाहुआ। यांचागया । परा प्रतिनियांतनम् , (न• ) प्रतिकूलं नियांवनं । लौटादेना। प्रतियन, (पु.) प्रति यत् । नत् । पाला मुदिना. मइ । निग्रह । रोकना । एक चीन प्रतिनिविष्ट, (नि.) प्रतिनि+विश+क । भमिमानी । दालना । संस्कार । टेना मेहनती।" सस्वसमापवाय । उलटा। युटिल. ५० । एक जैसा या करनेहारा (1) प्रतिपस, (पु. ) प्रतिकूलः पक्षो यस्य । पिस्ट पावाला। प्रतियातना, (मी. ) प्रति पासवे अन्य। यु। म्पहार । विस्त प्रतिवारी यासंलाफ बोलनेहारा। युन् । प्रतिमा तसवीर प्रा.स.स एक जैसी पीटा. प्रतिपति, (सी.) प्रतिपद छिन् । प्रवृत्ति । प्रागल्भ्य । प्रतियोगिन, (नि.) प्रतिरूपं ।। पारस । पराई । गोरत । प्राप्तिा पदरी प्राप्ति । कर्न- परान. प्रतिपदा (मो.) प्रतिपचते (दशम्यते ) पक्ष. अनया। प्रतिक्रिम् । पराको थारम्भ करनेवाली मियि । प्रति- प्रतिरूप, (२०) प्रतिगर्न । पापा एम. प्रतिपत्र, (नि.) प्रतिमा अयान । जानागुआ। (समान एक जगा)(नि.). सात मानना । पिकान बरवाटा. प्रतिलोम, (नि.) प्रगित सोम (मा मतिपादन, (न.) प्रतिनियुट । पन देना। विपरीत । टा. सम्मरर पैदा होना. वर्षी यो नाच वर्षी gri. प्रतिवन्य, (पु.) प्रतिमायापम् । अयंत्रतिपात । कामरा मेरादोगला. रहल। प्रतिरोया । रोजनाचा (दि.). प्रतिपट,(पु.)प्रीलंक पर दियमासा त्रु । दय" समन बाला (दि.)"यो में टिटो. प्रतिदिन(म.)प्रगविakname. दिन (2.) मयं मम देना। मेन (नि.). - - नुम् । विरुद्ध सुदना है। प्रति समर अमावका प्रतिकूल संघवाला ने तग्रवीर। परमही "प्रतिगतं कामय।' या भाग और (1) दि । 1 (शि), (नि.) प्रलासमं दरति (हि.प्रतिसर्ग, (पु.) प्रतिरूपः प्रतिकूलो दा गर्ग । सामे प्रतिविम्+विम्) का गिनि । पास रहनेहारा । टिके पीछे दस आदि प्रजापतिओंगे सरि । विस्त । हासभयासी । परके निकट बाय करमेहारा । रचना। प्रलय. प्रतिसीरा, (बी.) प्रति सिनोति रियटे दा। रही। पान, (न.) प्रति वि+या+युद् । प्रटीवार । जवनिका किनाता परदा. पदलातेना. मतिमूर्यफ, (पु.) प्रतिषः एकमा कन् । टासूर्य- रोध, (पु.) प्रति+भावे पम् । राप । कमल । सूर्यपी रामा । सके समान वाटारमा प्रतिबंध । विन । निरोष । तिरस्कार । और (फिरसा ). (चोरी) "म". मतिएए, (नि.) प्रति एक प्रत्याहात विसर श, (पु.) प्रवि+विश्+पम् । प्रतिवेशी। पडोसी। मियागया। भेजागया. पाया. प्रतियए, (त्रि.) प्रति+पम। मेगा कर शिन (नि.) नी (बी.) प्रति+विण+णिनि । (निषेध) कर दियागया । दियागया । मातोगदा. खीमपाया: परके साप निवास करनेवाला. प्रतिहत, (नि.) प्रतिकार या शेक- शासन, (न.) प्रति+me+युट् । निकट भत्यादि- गया । टलटकर माराभा. बादा करना । हुक्म करना । सिर माहा बसि-मति(ती)दार, (पु.) प्रतिपदा । घण्टर हुकम । “भप्रतिशागनं मगर" रघुः. चोट करना । वां"" द्वारपालान । त्या, (श्री.) प्रति+ये+मर । सीतको म्याधि । (नि.)। "पिनि" नीहारी "मी"cite. ला । "प्रतिश्यान", "प्रतिश्याय" गी थी अर्थमें. प्रतीक, (पु.) प्रतिस्मन् । म.पं: ।। दिया । निकर। रीमा प्रय, (पु.) प्रतिधीयते । प्रति+वि+अच् । यहा 41 समा। पर। भासरा. | प्रतीक्षा, (पी.) प्रति+to+RI ला Trai भय, (पु.) प्रति++भए । सीकर कपूल ए. जगरना भाशा. समान टेना. | प्रतीत्य, (वि.) प्रतिशत् । पर Ander धुन, (पी.) प्रतिरूपं भूयते । शु+रिए। एक बेगा पाप्रतीक्षा कियागया ना जाता है । प्रतिशब्द । प्रतिपनि । गूंज । प्रतिज्ञा ।।मतीचीन, (नि.) या मा परमें होनेवाला । "" ""पदी. पेप, (पु.) प्रति+विध+पम् । निय। रोना। प्रतीत, (पि.) प्रति+INTAITRIN. मा पर" ऐसा हटाना. Prerत जनाभा । . मि, (पु.) प्रति सम्भ+पम् । प्रतिबंध। ऐक । चाहिन । बीमामामारपर. सारट मि प्रतीति, (डी.) परिन् । र ।। छा, (बी.) प्रति स्थाta । क्षिी दियो । सतीमारीमति. या मालि समाप्ति । पर अक्षरोंके पासारामतीप, (नि.)ीम-1 • MP.II र पन्दारिसरकारमादिकी समामिमें बरगबन्दराज याचा भार I भारा "मतीपसिनी, (2.) (PH) । प्रतिधा" लिभुति एलिन् बोरियोसन छापपित, (त्रि.) सिनियर नियतरराशामरने | प्रतापपपमम् (4.) framin. तेहित, (वि.) Atet | रनमा दर से लगा. reगमा सितारा । राजतिमा किरा । समततीर(.) MIRRIA तेसर, (पु.) यम । हेरा freere तोर (5) पारि पय एम(ग). kiहसरे शिलापुर +पाभावी रखना वानरसना प्रतोली, - । प्रकारका शब्द नेहारा विश्वासी। प्रतिगत। लटकर मार मिनि । शत्रु दुश्मन। "प्रतिकूल अपठे" (धर्मशान-कानून) में चार प्रचार करो प्रत्ययाय, (यु.) प्रति सम्वम् । सीर(पु.) त्रिलं धनी दमानियती सेना प्रायवेक्षण-प्रत्ययेा, (म.पी.) भिकार शियामारयाPer (१२) प्रतोली, (श्री) प्रतुल अच् । गए । रया। गली-प्रत्यपकार, (पु.) प्रनिरतः अरकारः । कूचा । शहरके वीचका मार्ग । हह यादिके पामका रास्ता. बदला । उलटकर अपकार (पुराई ) करना. प्रत्त, (त्रि.) प्रदा+7 I दियागया। देवालागया । मैठा प्रत्यमिमा, (सी.) प्रति अमिमा कियागया। विवाहमें दियागया । विवाहागया. चान्ना. प्रस, (त्रि.)प्रन । पुरातन 1 पुराना. प्रत्यभियोग, (पु.) प्रतिरूपोऽभियोगः । ". प्रत्यक्ष, (भव्य) प्रतिरूपं अक्षणः । अव्ययी• अच्। आंसके सवाउ । अभियुक (मुद्दालअ) ने सामने । इन्द्रियोंसे उत्पन्न हुआ हान । इन्द्रियजन्य ज्ञान । (सवाल) "अच् उसवाला" (त्रि.). प्रत्यमिवाद, (पु.) प्रति अभिस्वदलिया प्रत्यक्षकृता-कक, (स्त्री०) प्रत्यक्ष कृता । साक्षात् देव टकर वंदना करना । आविष्का वचन । " ताको संबोधन करनेवाला राक (गीत). भिवादन" (न.). प्रत्यक्षशानम्, (न.) प्रत्यक्षं ज्ञानं । साक्षात् अनुभवसे प्राप्त प्रत्यय, (पु.) प्रति+इण अन् । शपय । से। हुआ शान. जाना । विधाम । अधीन । शब्द । शिश प्रत्यक्षदर्शन-दर्शिन्, (पु.) प्रत्यक्षं पश्यति स्मन+ आधार । निश्चय । साहु । मजेदार । सन वा इन् । साक्षात् देखनेवाला । अखिोंसे देखनेवाला. घानु वा नामको निमित्तकर विधान TE प्रत्यक्षदर, (नि.) प्रत्यक्षं यः । साक्षात् (मखोंके सामने) देसागया. प्रत्ययकारिन्-कारक, (नि.) प्रसवं । प्रत्यक्षपरीक्षणम्, (न.) प्रसई परीक्षणं । साक्षात् परीक्षा बुर वा। निश्चय करने वा करानेशला. करना (परपना । हम्मिहान टेना). प्रत्ययित, नि०) प्रति अन्+रू । प्राप्त प्रत्यक्षप्रमा, (पी• ) प्रत्यक्षं प्रमा । इन्द्रियोंसे प्रत्यक्ष हुआ प्रत्यर्थिन्, (नि.) प्रत्यर्थयते । प्रति+अशा ईन । निवितान. प्रत्यक्षममाण, (न.) प्रलक्षं प्रमाणम् । प्रत्यक्ष होनेका हारमें प्रत्यर्थी । मुद्दालय. प्रमाण (सबून). प्रत्यक्षफल, (नि.) प्रत्यक्षं फलं यस्य । व्यक्ष (प्रकट-ना- प्रत्यर्पण, (म.) प्रति+र+निन् पुष्+युर । हिर) फलबाग. फिरदेना । लियेहुए नया फिरदेना । औटना. प्रत्यक्षमोग, (५०) प्रमशः भोगः । इन्द्रियों के सामने प्रत्ययययम् , (अन्य ) भव्य अश्या (४- पायाभा भोग. प्रत्येक (हरएक) भगमें। विस्तारसे. प्रत्यक्षवादिन, (पु.) प्रत्यक्षं बदति गिनि । नेय आदि प्रत्ययसान, (न.) प्रति+अव+सो+स्युर । इन्दियों जानीगई बात (सबूती ) को मौकार करने मत्स्यसित, (वि.) प्रति+अब+सो+er ( बाया। एयरा बाद मो मेवठ प्रत्यक्ष प्रमाणही लिया। सालिया. प्रत्यक्षविहित (नि.)प्रय विदितम् । साशा विधान प्रत्ययस्कन्द, (पु.) प्रतिसपसन्द ! याया। बदमाशात् आज्ञा दियागया. प्रसन, (त्रि. ) प्रतिगतं ममं (अप्रयम्) प्रा० । आगेहुआ। प्रत्ययस्थान, ()दे । विदो एक प्रचारका औषध (म.) मनाराया. है। निरम बोलने प्ररथ, (नि.) aataहिन् । पथिम पाला पिछला समय । पश्चिमा देश विधिम दिया "प्रारी". गुनाह ऐप nि. Feedijk. प्रस्तल(पु.)मा पलं मन गया । मलाल्यार, (Naturter म्टेदार देश । पमय देश (त्रि.). इनहर निधार. साना.

[प्रदो - , - ग मागमनम, (I...) - +9 | अभं(त्रि.) पहिला गर्भ । पहि। पहिला fr. (E): या+निमा नि.मरामदियमः, (पु.)प्रपमा विगः । पहिला दिन. प्रथमपुर, (पु.) प्रथमः पुरुषः । पहिला पुग्प ( भनेः .टा(पु.) Thiruire | निगारप। मे गिराग) नाम कारवाना, मपमारन, (म.) पर्व यौवनम् । पहिलो जवानी निपन (म.)ी-मानी+मन । रमापी गरानीवीदासन पुरया Tfrie मधमपयर (म.) प्रपमं पयः । पहिली उमर (भायु mहीर.(म.) witer I भरीि- प्रथमपिरद, (पु.) एम. पिए। पहिला दियो विपरोसा दिने पौरो सासे (ग). Pter होना पदपारी पंतगामामति। मपमवृत्तान्त, (पु.) प्रथमः पत्तान्तः । पहिली का पायाम (वि.) "भार"मे उरा. (न)। पहिली भवस्था. पारम(R)zit+भाग। यातिनिरस्य ।। मपमगुरुत, (न.) प्रपर्म पातम् । पहिल पुष्प (ने पान)। पहिली लिहरबानी (दया)। पहिठी सेवा. पाचार(3.) पण । पी गपना । योग- मधमाधम, (I.) प्रथम भाधमः । पहिला भाधम "दिगोपने विषयोंगे निराकरण हटाना"। मनवांभम. पिरा हेना पार "म" शादि. अपमेतर, (मि.) प्रथमार हतः । पहिलेसे दूसरा. युयम, (पु.)पम । युरो रिये उद्योग मथित, (नि.) प्रथयात । मशहूर । प्रसिद्ध (हिम्मत) प्रधान प्रयोजन गंगमे अपाना भाभ परना । प्रदेश कार्य में जो पहिले पहिले वरना उचित है। मथिमन्, (पु.) योभायः । बोरा होना । पृर निन् । स्थाय। मोटाई। मोटापन, प्युत्तर, (म.) निम्न थप । जिसका टीक उत्तर प्रदर,(पु.) प्रह+अप् । पिदारण । फाइना । भा हो। रजरपटतरवपन । जबयप जवार. तोरना । एक घरप योनिका रोग, त्युिस्थान, (म. ) प्रसिद्स्यायुर । मभ्युपान । प्रदीप, (पु.)ीका0पीवा । रीमा । लैम्प आये हुएवं सम्मानके लिये भारानसे उटना । भागेसे | प्रदीपन, (पु.) प्रीपयति जठरामि । प्रदीप गिम्+स्यु जो पेटकी भागको भड़काता है। एक प्रकारका विष (ज मत्युग्पनमति (वि.) प्रत्युपमा (तत्कालोचिता)मति हिर)। बमयनेहारा (नि.). सम्म । रगबाटमें रचित रिवाला । जिसकी अति प्रदीश, (नि.) प्रीप्+क जगाया हुमा । रोशन किया समयपर पूनी हो. मायुहमनीय, (म.) प्रतिम गम्+अनीयर् । भागेसे | प्रदीमा, (पि.) प्रक्षा प्रदा यस्य । अगी रे दुद्धि टनेलायक । पातवषयुग्म । धोयेहुए दो पारे । उपस्था- बाला । दीक्ष्ण पुरिवाला. के सायकः । पूजाकरने के योग्य (नि.). मत्यूर, (पु. ) प्रत्युपति (एजति ) कामुगान् । उपरोगी मदुए, (नि.) प्रामुष्क । विगहगया । नीर । यद भाशपापी।पुरा. होना । प्रभात । भवेर । दिनका मुरा । कामिभोको प्रदेश, (पु. ) शिपम् । एकदेश । एक जिलद पाता।बाट मुमिरो एक. देश । मुख भित्तिा वार. मत्युद, (पु.)ी+उ+पम् । पिन । रसायट. प्रदेश(शि)मी, (बी.) प्रश्यिते अनया । प्रति प्रथ, प्रसिद्ध होना । भा. भा. सर० सेट् । प्रथते। भा- करणे स्युटी । तभी ( अंगूठे के साथरी भगुली) पिठ । "म" प्रथा. हसीमे वस्नुषा निर्देश कियाजाता है। मिनि "प्रदेशिनी" मयम, (वि.) प्रअमन् । प्रधान । । भाय । यही भयं. पहिला । "अग्" में सर्वनाम. प्रदोष, (नि.) प्रादुप्कम पुरा । को दोष (ऐष) प्रथमकल्पित, (त्रि.) प्रथमं वरिपतः । पहिले चिन्तन बाठा । पूक भून । सार्यकाल । रजनीमुग। रातका (ययाल) रिया गया. प्रारंभ । प्रदोष 'माना . उठना. गया.

दापहिला प्रशासन . मोसे पहिली गन्धके न्युन हो जानार (3.)प्ररम्य पदं। 4.8.1 परि भागाप्रमय,(पु.) ममममम मायामी(RTI) प्रमा, (3.) ZIHIRi प्रधुम्न, (पु.) प्रा पुत्रं (बलं) यस्य । जिपका वडा प्रपितामह (पु.) प्रजातः सिन्ही कन्नर बल हो । कंदर्प । कामदेव । श्रीकृष्णजीका पुत्र ( वेटा), पितामहो वा। निल बागा (दक्ष प्रद्रय, (पु.) प्रथिए । पसायन । मागना । यम् "प्रदान ययवा अच्छा याया मजाके जनक व" यही अर्थ है. टत्पन्न करनेद्दारा चार मुखवाला बना प्रधन, (न.)+घायु । युद्ध । लगाई । जंग, पध्याग उसकी। श्री। गैर (सी) प्रधान, (न.) या+त्युत् । सांस्यमतमें सिद्ध होगई। प्रपौत्र, (पु.) प्रगतः कारणतया पत्रं ।' सबरजसमोस तीन गुणोंवाली प्रकृति । उसका कार्य पोतका पुत्र । पडपोता. बुदितत्त्व । परमात्मा प्रशस्त । यहुन अच्छा । और सचिव प्रफुल्ल (नि.) पुल-खिलाना मत् 11 (वीर)। सैनापतिओंका अध्यक्ष (मालिक)(पु.)। सिलाहुा । "प्रकुल्त" यही वर्ष । श्रेष्ठ ( बहुत अच्छा) (नि.). प्रधानपुर, (.) प्रधानः पुरुषः । राज्यमें मटा प्रसिद्ध प्रबन्धकल्पना, (मी. ) ६ त. In प्रयन्ध, (७.) प्र+बंधायच् । मंदम। यो का मुख्य पुस्खाशंकरका नाम. थोडासा सल मौर. बहुनही मिया (छ)। प्रधानमन्निन्, (पु.) प्रधानः मत्रः । मुख्य मन्त्री रचना. (पीर). प्रयाल, (न.) प्रकग वलति । वाम। प्रधानामात्य, (पु.) प्रभानः अमात्यः । मुख्य मंत्री। कांपता है । नवपक्षन । नया पाटन। गुस वीर. मूंगा । मीनका उग्ढा. प्रधि, (I. ) प्रधीयन्ते काष्टानि अग्र । प्रधाकि । उहाँ प्रयुद्ध (नि.) प्रयुष्+छ । जगहु । करि रवी जाती है। पहिये के भागरूप लकडिओके शिशिता बरं. जानेमा स्थान । रमकी नानि । पहिया । पुरा. प्रयोध, (पु.) युभम् । प्रा प्रध्यान, (न.) प्रा प्यानं । गाहा सपाल । मनका जागना । नीदसे रहित होना. पूरा एक धोर सगजाना. प्रयोधन, (न.) ++मियर अपच, (I.)पपिपराना+पम् । फेयव । मंशार। स्यापन । हावय। प्रतारणा टगना, रहीपन करना । आगना । प्राशयुरि, (मि.) माये-करटे पुरिः यस्य । धून । वंचक । प्रयोधनी (सी.) प्रबुध्यते अनया ! प्राधिन, (.) पम् । बिस्ता । फेटायागया। जिससे जागता है । दुरालमा । तर पूवर्णन रियामा समय मिशु जागता है। भालन, (२.) मन । मिरना । मृत्यु । मौत। (का) के साक्षी एका " अर्थ "z+कवि+पिनिगर मानित, (.) । मिरगया । नारा होगया। प्रमजन, (न. ) प्रमाति तृगाईन् । प्रक तिनो भादि तोहता है।युत या (स.) या पासमान हित- प्रभाद, (पु.) मा मा अम्मान । ५. कारटार, पाण होता है। नीमा श. मारपत्रममा म.(त्रि.) anातारपर्ने मागदा। ग। • ब. मग ए "ve (*. दी था । पर क म । प्रमागत (IN) Kinate TATErof. ल, (: .मराल retur | प्रमविष्णु, (f.) RITORIES mittथाना पुराना. RAFTERem, मदकाना. ठगनेवाला । रारा. - .

[प्रयास, . . --.(पु.) प्रभो परोति। अच् । प्रकार सता प्रमाण, (न.) प्रमीयते अनेन । जिस्मे समा ज्ञान हो। - । एक मीमामाशात्रके बनानेहारा. यथार्थ हानका साधन । इद्रिस भादि। मर्यादा । दान। mन.) प्र+मा+क । प्रा भातं भत्र । जिस समय सब बोलनेवाला । हेतु कारण। प्रमाता । "भावे युद"। -प्रकार होता है। प्रात पाल । सवेर । मुबह. राथा हान. (पु.)प्र+भूपिन् । रागाओंका कोष ( रागाना) प्रमातामह (पु.) प्रारम्धो मातामहो येन (भारन्थ पंदा -~-ड (राजा) से उत्पन्न हुआ तेज तेज । सामभ्यं । रोप होता है । जिस्से "नाना" का प्रारम्भ होता है। पडनाना । नानेका पिता । उसकी ली "ही" प्रमातामही ..(पु.) एकप्रकारका धी। "प्रभास पुफराणि" (पहनानी). प्रमाद,(पु.)+म+पम् । अनवधानता। बेपरवाही। (पु.) प्र+मिद्+का प्रवन्मदगज । वह हाथी कर्तव्यको अवर्तव्य रामशकर न वरना और भवर्तव्यको की मस्सी चू रही हो । मद बहानेहारा हादी । प्रमे वर्तच समझ करना. । फरकवाला (नि.). प्रमापण, (म.) प्र+मीम् हिंसा-मारना+सा गिन-आर पु.) ++ । विष्णु । पद । पारद (पारा)। पुस्युर । मारण । मारना. मी (अधिपति ) (वि.). प्रमिति, (श्री)प्र+मा+किन् । प्रमा । पपाशान । राधा. r, (पु.) प्र+भू+क । अनुर। बहुत । उरत । (निक जाना। ठीक २ जागा. “हुआ) ऊचा. प्रमीत, (हि.):+मीम्-हिंसा+गत । मरगया। पाके १, (भव्य.) तदारभ्य। सरसे लेकर । "बहुमोहि लिये मारागया पशु भासमै यह शब्द पीछे रहता है"। "इन्द्रप्रमनयो देवाः". | प्रमीला, (सी.) प्रमील्म तदा । कंचना । और (नि.) प्रामक मरा होगा। जिसको भारी मूंदना. 'मा चढगया है। | ममुक्त, (त्रि.) प्र+मुम्+ । सोल दियागया । सतन्त्र 4. (पु.) प्र+म+अच् । शिवजीरा एक अनुचर फियागया. नोकर ) । और पोग। हरीतकी (हरीड) (पी.) प्रमुग, (न.) प्रष्टं मुसं (भारम्भः) । बारम्भ । पन, (न.)प्र+म+मयुर । वप । मारना ।श पहुं उसे लेकर बहुमोहि एमासमें यह पीछे रहता है। उस. पाना रिटोडन. बाला । मान्य । पहिरा मोर घेष्ठ (गत मा) जिसरा पाधिप, (पु.)। प्रमयोका खामी। शिवजी मु सामने हो (मि.) समूह । गुगरी (पु.). महादेव. प्रमुदित, (वि.) प्रमुद्युत । । गपिन्, (नि.)+म+गिनि । साचार परदेनेवाला । प्रसन्न । स भय+विध++पुरा समार- मेरा देनेहारा. प्रमेह, (पु.) । जेर । येश। भैस । "रणे बुझेर मपित, (वि.) प्रमप्। साचार कियागया । प्रमोद, (पुगीरी. पर पहुंचाया गया. प्रयत, (धि, (पु.) प्रसापन विधिः । यसमा नियम मदयन, (न.) प्रमदस (स) पनं । राम पन्त पुर रागपट. (स्प्रेग) या दन । एमके पिठाण करने के लिये प्रथम विशेष, (पु.) प्रसाधना विशेषः । बिष. शेरि (सरावट) भी सवार ग्मदा, (-) प्रमापति अनया+सप् । जिसे बहुत धिका, (पी.) प्राधि+निन् 'स्मार। मस हो जावाद । उत्तम योपिदा । इतनश्री । बहुत सरती । संसार एनेराst. . r डंग)। एकदाग, गुन्दर सी. प्रमनस (नि.)प्रारं मनो एस ( पदास्प होता 'प्रसापित, (पि.) प्रतिदिन कम स है)जिसरा मन बहुत तर होता है । पित्त ।। माग पूरा रिसागर दिल. प्रसार, (पु.) प्रयममा मंगरोग। प्रमा, (डी.)+मा+भर । हिस्से पदार्परा रियरहो। स्था जन । राधा । प्रमरदिवाना रेसा प्रसारण, (२०) refereदुर । Rom 8 रनरहे.

अनन(1.24.24n है दुम(5.) (ब)। जिसमा प्रपितामह (पु.) प्रतः दिन नारायानीमन (बेटा). शिमोगा जिस ग ( महार(.) । पानीमा "n अपना असायनजारे नार.. रूम रनेदाय मार मुगार नं.12.) Firmनाई। अंग. पारगा उगरी धीर पान. (मर । कारमा रगो मपान, (पु.) प्रगतः कामास FEn* की। गाय पोठेमपुर । पोता. main र गरि पुस, (fz• ) प्रान्-गिरना। सिना ) "न" यह भी (5.) नाम र धरना, (सी.). प्रयग्य, (प.) भन्। .. PERMITTER. पोरा और पनी AT(et स, (5.) नः R. I र मन्त्री ना. प्रशल, (२.) बनती।' औरणामसर । मयाmirat FATEHRI मयुर, (वि.) प्र+पुस । र । " मूंगाबीना. rint.AIRT. प्रोप, (पु.)पपप । ' (..) मन मन मागमा । माग रहित मापन, (.) The (ut | गर। बनना । mar rrnvi मयोधनी (8.) भाग : farmनामा " समjantant et "EATERMENT Trrint.ru-17 HAR, (.) gate Farminuter wr .............. ( Tiwwe..." भारमा. ... | T11. ft.) mein ki ग.3.aminat (w) . . .. 1. . 1 617 E(पु.)बलाअन् । बलो बलवानपि मद (सौ. पलि, (पु.)लान् । मोपहार । पूमाली भेट । राज बिलवाला होरर मी मल है। बलदेव और गत्य स्टेने योग्य माग (कर-सिरान) । उपसर । उपर गोद). चामरद । चौरी । एस्थर करनेलापक पाचपों •म, (पु.) बलेन रमदे । रमतर पम् । इनका "भूतपन्न" । "बलिकर्म सत कुर्यात्" इति स्पति Pा भाई । रोहिणीका नन्दन ( प्रियपुत्र)। "समर्पण" एक दल । विरोचनमा पुत्र । जरा (पाप) से चर्म शि.पेल होना (बी.) वा । सिरि। "हस्य ति, (व्य) पल+अतिराये मनुस् "म" यो"-" यदा पश्येत् बजीलितमात्मनः" इति स्मृतिः। उदय ता है । भतिशय । बहुतही बउविसिर । (पलवाय) यष । पेटका अंग । “वलित्रयं चार बभार माना। त्रि.). कुमारः। गुदामें अंकुरके स्वरूपमा मासका पिण्ड. र्धन, (नि.) बलं वर्धयति । बलको बढानेवाला । पालयसिन्, (पु.) बलि प्वमसति । संस्थानात एक वैरिक कर्मका भनि।"पाधिक बलवर्धन." सति । गन्गनिन् मिनि । जो बलि देखो अपने स्था- विन्यास, (पु.) पलाना (सैन्याना ) विशेष न्यासः गिराता है । विष्णु (सामनखरूपमें उसय ऐसा न हुभा), स्थापनम् ) । प्यूर । एक प्रसारका सेनाको सडा करना। यलिन्न भ), (वि.) बलि+भस्त्व इन भवा। वो नाची रचना. वाला । जरा (देपा) से दीले घमरेकला. शालिन्, (नि)मलेन पालते। दाल+गिनि । एतसे योमता बलविशिष्ट । बलवाला। ओरादर. यलिन्, (वि.) पलं अस्ति मस इनि । बलबाराको दाला। ऊंट भैसा । रेल । गार (एअर)। बलरा सूदन, (पु.) बलं ( तमाम यमुरे) सूहम्म्यु,' पलिनन्दन, पुत्र'-गुन, (पु.) (बलेः नन्दनः) 4 बल नामी देखको नारा कता है। इन्द्र । "बलनिपूदनः". पुत्र । पाप नामा दल. "(सी.) बलं अस्ति भस्याः । बलवाली । विश्वामित्र मुनिसे रामचन्द्रको दीगई एकप्रपरकी अन्नविदा. पलिपुर, (पु.) सलिना (सोपहारमध्येण ) पुः । पुर कापूमारी मेटाके दबडे पलगया । काकामा। दाका, (को०) ( कम्पनं ) अति ( गति ) यलिभुन, (पु.) मति (गोरबारदम्य ) रहस्य अभि । जो कांप जाता है। परमेद। एक प्रकारका बगला । रसग्रेणि। बगलों की कतार पियारी श्री। पति का भरे। कि । पूरा साधना पदार्थ पास्य गई बलियो पाता है। वायस मा. प्रणचिनी. ree,(पु.) बलं अटति (ददाति) बट्सम् । जो यलि(टी)मुख, (पु.) पति (सी) यु मुकं भस्म बल (ओर) देवी है । मह । भूगी. पाक । जिसका मुख बलि (हिनाटा है। बन्दर. लाद, (व.) बल+अत्+किम् । हटात् । औरमे । पलिछ, (वि. ) अतिगयन बडी । बलिन छन् । ए जोरावरी । अब न । (पपम्यन्त “बल" राके भाप इसी गाना नही पोंकि "बलारपर" इला- पउपाय । मसालवान् ।। (." की लिसिके लिये इसे भवरर सीधार परवाही पड़ेगा) पलिसमन्, (न.) तमिर खान "परिपुर लात्कार, (पु.) बह++पम् । वउपूर्वक पर । बलिहन, (पु.)। पति हन्ति । पउिये मारेरटा गोरसे बना (ठाकरण). दलानुग, (३) अनु जायते । अनुसन्। ६ पटीपस, (वि.) अपिरान दी। पy जभण्टा भाई धीमी. बहुत जोरताप पलाय, (पु.) बलस भरः (स्थान) यापम् । बस. पलीयर्द, (पु.) मीरपर ।। (समीर) र की जगणनामी क्ष. बौदहावीरोपी १ पलाराति, (पु.) उप (TREE मुरस) बसविः। परनामी लाश ।। "र" ही अपं. पल्प, (२.) पदर दिला तर बलाहक, (पु.) (मनं ) भागविता बमा मुसहरला र हुन् । यो नहिं पता है। मेष (एस) । मुश। अविरल ()() धामोशी परंच (पहा) और माप इरिनाम म. R. 2. AR कालो पात मेषोभसे एमपरको ९. रासस) " 4 . . 1 हाटसमान। (३४६) पटाना -- "मावे थप्" वरण! कबूल करना। बीती दन्त्रि, (पु.)बंधूत्राप्यारा देवना। कामदेवाघम-पल, जीना। मारना । निम्पश-पयाना यल, (न.) बल्अ । सन्य सेना देवा बल्वाला (त्रि.)।कोमा।बळदेश । पटक्ष,(पु.)बलं चाय सम्म URIm माघर बिदय । दोगामाबगरा , भरपरकपु.)बल दीरमा (और) पटना है। या AIRTANT निवारा काम एप्रचारसभानाला भना• टम• सक० सेट् । पति-ते । भवन स.मम्य (तन)। म्यस्य । मोटो र वीर्य । देह । शरीराला . यध्यभूमि, (खी.) हन्माचे यत्-यधादेगः । यथ्यस्य बनाय, (पु.) (नि.) बन्य् यत् । समापन भूमिः । मारनेलायक जगह (स्थान)। श्मशान । ममान । फलमे अन्य मानिएफला फलरहिता वधा स्थान । “मध्यस्थान". नीय (स्कनेलायक ) (नि.)। पुत्र ( यन, (न) बन्ध+ट्रन् । "न" का लोप । सीसक। (जिसे पुत्र नहिं होता) त्रियां टा. बलराम सीसा । चमडेकी रस्सी (तसमा) (स्त्री०). यच्याककाँटी, (घी) यध्याया म घन्, याचन । मांगना । तना आत्म० द्विक० सेट् । यनुते । खान ) कोंटी । पुत्र देने वांझ बेटा भवनिष्ट पिला वेट. नेवाली कोटी (याझ करोड) बूटी। यन्द, बन्धन । योधना । श्या० पर० सक० अनिट् । थत इत्वम्"। यही अर्थ. बनाति । अभान्सीत. वत्र, गति । जाना । भ्वा० पर• सर । पन्ध, (पु.) बन्य+पन् । संयमन । रोकना । निगड अवधीन्. (संकली ) आदिसे किसीकी गति (चाल) को रोकना । यमृ. (पु.) मृ+ (द्विरवं) । बस पांधना । "कमणि पन्” देह । शरीर । ऋण (क) विष्णु । नकुल । नेवला । वद्धि । अगा एक योधन (चुकाना ) के विश्वासके लिये रखा गया द्रव्य देश । टस देशके वासी । ३. द. rat (कोई चीज)।याधि. रंग। (पु.)। पीलेरंगवाला (त्रि.) यन्धक, (३) बन्+ण्वुल् । विनिमय । यदला । तुल्यरूप, यमुधातु, (पु.) कर्म• वर्ग । सोना । द्रव्य ( एक जैसी चीज ) देकर किसी दूसरे द्रव्यको यद- और गेरी ( सालचाक). टना (परिवतं आपि । (म.) गिरवी रक्सी हुई चीनी यम्रपाहन, (पु. ) अर्जुनका बेटा ( चिनजाने । पुंधली । थमती ली। व्यभिचारिणी । टिनार भौरत । पर, (न• ) ययम् ।। कुम केसर । अन्य। नियां दीप. अदरक । “मगि अप्" । जामाता (जान्न यन्धन, (न.) अन्ध+मावे न्युट् । निगद आदिसे संयमन देवता आदिसे आशा करनेलायक । धून माग पुरने (रोकना) बांधना । और पप (मारना)। " करणे युद" । रस्सी. त्रिफला । मैदा । बानी । हरिद्रा ( स्रो) पन्धनस्तम्भ, (५. ) ६ त । पिनेका थमा (पमा ) यई, गति । जाना । म्या- पर. सा. दे। हसियमनट । हापीके पांघनेकी सकती । यालान । भवदि. गबंधन लि. पई, दना । मारना । स्तुति करना । और पर यग्यनयनन्, (२.) ६.बांधनेका पर जैराना। भात्म• सम• सैद । बहवे । अहिट दखाना । "कारागार" "बंधनागर" शादी | यह, ( न. ) यई+अय् । मयूरपिच्छ । मोरक बर्षमे . पत्र परीवार. समान - गोरी . सानु नसाचर्मव्यसनादाग। निग्रान, बन्यु, (पु.) पनि मनः (येहादिना) +3 Iो सिकार आदिमे मनको बांध रेता है।जाता जातामा समादि । मामेरे बेटा थापिरामित्र । पिता। मदार भाई देस (पु.). पन्धुना, (पी.) बंधु+मावे हल् । मा समूहै। बंधुरन । iपुकाममूर. ल्यु,(२)पंकार । मुट । श्रीमामलों वाला (वि.). पा मारनपालीम । राना (अंबानीया) (नि.)या। मना सन् (..) देना (नि.). परपुर,(दि.)पार । भारत । एप भा। पसरप (T) बलेन मी। रारा । मुन्दा । वयप एर . । . RA (w) गोयेंद). नाकी रचना. • (पु.)अच् । चलो बलवानपि मदः ( सोपलि,(पु.)बलन् । पूजोपहार । पूजाकी मैट । राजासे बिलवाला होकर भी भरा है। बलदेव और गश्य लेने योग्य भाग (कर-खिराज) । उपसत्र । उपदक । चामरदण्ड । चौरी । गृहस्थसे करनेलायक पांचयोमेसे मि, (पु.)रलेन रमते । रम्+वर्तरि घम् । इणका "भूतयः" । "यलिकर्म ततः कुर्यात्" इति स्मतिः। -7 भाई । रोहिणीका नन्दन ( प्रियपुर)। "सैकर्षण" एक दैत्य । विरोचन पुत्र । जरा (बुढापा) से चर्मका म". शियेल होना (धी.) वा दी । सिलडि । “पदस्थस्तु त्. (भव्य.) पल तिराये मनुस् "म" को "" यदा पारेत् क्लीपलितमात्मनः” इति मतिः । उदराव ता है। अतिशय । बहुतही बलविशिश । (पलवाला) यव । पेटका अंग। “वलित्रयं चार मभार बाला" इति दि.) कुमारः । गुदामें अंकुरके सरूपग मांसका पिण्ड. ग्धन, (नि.) पलं वर्धयति । बलको बढानेवाला। पलिसिन्, (पु.) बलि सियति । सस्थानात् पात. रिक कर्मका अनि । “पाटिके बलवर्धन." यति । पनए+णि णिनि । जो पति दलको अपने स्थानमे घेन्यास, (पु.) पलानो (सेन्याना ) विशेष न्यारा मिराता है । विष्णु (सामनखरूपमें उसका ऐसा नाम स्थापनम् ) । प्यूह । एक प्रकारका सेनाको पडा करना। पलिन्न भ),(नि.)।रलि+अस्त्यर्षे इन भवा। रलि. शालिन्, (नि.) पठेन शुलते । शल्+णिनि । यसै पलिन, (नि.) लं अखि अस्य इनि । बलवाया । और पाला | जरा (बुझेपा) से दी चमडेवाला. गोमता है। बसविशिष्। बलबाला । जोरावर. वाला । ऊंट । भैसा । ल । शार (सूभर)। बलराम. इरन, (पु.) एल (तक्षामकं अमुरे) सु स्यु । ल मामी दलको नारा कता है। इन्द | "बललिपूदनः पलिनन्दन, पुत्र:-मुत, (पु.) (पले नन्दनः ) महिना 1, (श्री. ) पलं अस्ति अस्या । घटवाली । विश्वामित्र पलिपुष्ट, (पु. ) शलिना ( पूजोपहारष्येण ) पुट: 1 EYE पुराण नामा दल. निसे रामचन्दको दीगई एक प्रारी अनविया. का पूजाकी मेटाके यो पलगया । पासाकीमारच. का, (श्री.) बलं (कम्पनं ) अति ( गच्छति)। स+अन् । ओ कॉप जाता है। यकद । एक प्रकारका पलिभुज, (पु.) बलि (पोरदारसम्य) परस्यात. गिमा बाणि । बगलोंकी बनारस पियारी ली। बलि का भुटे। किम् । पूमाके गाधनसा पदार्थ वा पदस्पसे दीगई रलिको पाता है। बाकाबायस मा.st. रणयिनी. द,(पु.) बलं अटति (दाति ) भट्म्मम् । जो पलि(ली)मुख, (५०) बलि (सो ) यु मुख भस्म । लि (जोर ) देवी है। मुद्रामगी. • जिसका मुख बजि (मिति) वाला है। दि, (भव्य) पल+म+किए । इटात् । भोरमे । नोरावरी । अचानक । (पसम्यन्त लादक यलिए.(नि.) अविशयेन बली । बलिन्छन् । एक आप इसकी गतार्थता नहीं क्योंकि "बलारधार" ला- पलकाला भियनालयान । उद्र । कंठ (पु.)- की तिरिके दिये इसे भवरप सोचार करनाही पडेगा). पलिसमन्, (न.) त. ठिा पर IT । बलिपुर". स्किार, (पु.) बल++षम् । उपूर्वक करण । यलिहन, (.)ति त यिो मारनेवाला । गोरसे करना (हठाकरण). विशु. अनुग, (पु. ) भनु मारते । अनुसन्६.पीयस, (वि.) भविशयन पो । बठिन् । बरा छोटा भाई भीष्णजी. य, (I. ) बलस्य भयः (स्थान ) । पम् । बलपलीय, (सीमा (नाव) परी. श्रीजगह परणनामी पक्ष. बौतौररावीसी ची द्वाराति, (पु.) बलस्य (तमाम पुरय) बाविः । पलनामी दसका तुइन। "ब' यही ब. पल्प, (म.)बलर दितं पर। अपर पशु ग्राहक, (पु.)बले (मन) भागाभा बीबी दुरारबार हुन् । नहिं पता। मेष (बादव) । मुस्ता। अतिबल ()(को०). इपा । मोषण । पर्वत (पर) और मागमे प्रल बोरे हिनाय ARE R. R. कान के मान मेपासे पिके पार पोलोनेसे एक हाल. बहुत पोरवाल.

(३४) नियां ही. पण्यभूमि, (पी.) हन् भावे यत्-यथादेशः । यध्यप याय, (पु.) (नि.) । मा भूमिः । मारनेलायक जगह (स्थान)। श्मशान । ममान । फरमे अन्य निकलाफ वधका स्थान | "वयस्थान". मीय (सनेसायक) (f.). पुन यन, (न.) यन्ध ट्रन् । “न" का लोप । सीगक । (जिसे पुत्र नहि होना)ो टार, सीसा । चमटेकी रस्सी (तसमा) (श्री.). यन्याककोटी, (श्री.) अध्याया आ घन्, याचन । मांगना । तना• आरम. द्विक० सेट् । धनुते । यात् ) कोटी । पुत्र देनेमे बन मोटर भवनिष्ट । पत्वा वेद, नगाली कोटी (याम कर) यूटी। यन्यू, यन्धन । यांधना । श्या० पर• सक• अनिट् । थन इसम्"। वही अय. बनाति । भान्सीत. यन्त्र, गति । जाना न्या. र.53. पन्ध, (पु.) बन्ध्यन् । संयमन । रोकना । निगर अवधीन्. (संकली ) आदिसे किसीकी गति (चाल) को रोकना । यः (पु.) मृ+ (दि) । बार बांधना। "कर्मगि धन्" देद । शरीर । ऋण (क) विष्णु । नाल । नेवला । वम । आगाएत शोधन (चुकाना ) के विश्वास के लिये रक्सा गया दृश्य देश । टम देशके वासी।ब.क.ग. (कोई चीज)। आधि. रंग। (पु.)। पीलेरंगशाला (नि.) यन्धक, (पु) वन्ण्वुल् । विनिमय । बदला । तुल्याप यमुधातु, (पु.) कर्म• मयं । मोना । द्रव्य ( एक जैसी चीज ) देकर किसी दूसरे द्रव्यको पद- और गेरी (टालचाक). टना (परिवर्त माथि । (न०) गिरवी रखी हुई चीनी यमुपादन, (पु. ) अर्जुनका बेटा (नि पुंश्चली । असती स्त्री । व्यभिचारिणी । छिनार मौरत। यर, ( न• ) अ । । कुन कैसर । वृन् अदरक । “कर्मनि अप्" जामाता (आई यन्धन, (न.) वन्य मावे ल्युट् । निगड आदिसे संयमन (रोकना ) बांधना । और वध (मारना)। " करणे युद" रजु । रस्सी. त्रिफला । मेदा । बासी । हरिदा (नौ). पन्धनस्तम्म, (पु.)त. वांधनेश यंमा (संमा) पर्य, गति । जाना वापर सर ।' हस्तिसंयमनकाष्ठ । हामीके बांधनेकी उकडी । भालान । सर्वद गजबंधन । किला. यई, देना । मारना । स्तुति करना । और रोड' पन्धनवेश्मन्, (न.)६त. बांधनेका घर राजेठखाना। आत्म• सक• सेन । बहते । अहिट कैदखाना । “कारागार" "बंधनागार" आदि इसी | यह, ( न• ) बह+अच् । मयूरपिच्छ । मोरन पंह। । अर्थमे हैं. पत्र। परीवार. यन्धित, (5.) बंध्दम । प्यारका देवता । वामदेव । यम- यल्, जीना । माग्ना । निम्पा-यपान । का पंखाचर्मव्यत्रन दाग । निशान, देवता आदिमे याचा करनेलापका पूर्व करर "भाव थप्" वरण। कबूल करना। खीरा भवा. टम•सकसेट् । वरविते । अब न्यु,(पु.) यानि मनः (हादिना)। बंधाटाजो/ यस्ट, (न.) बल्+अच् । सन्य । सेना देर। सामभ्य (तकन).ब.लामोगाई। पालाम वीय दह। धीर। पारिरचना यलक्ष, (पु.) पर्ल हायति भस्मात् । मागि गावविर पहिए । होराईमा बगळा । भारद, (पु.)बलं ददातिवापरण (और) घटता है। वर्ग AIATI नेवाय काम । एकप्रकारही मागाला बन्धुद,(दि.)बाट भवनन । झुध मा पलक्ष्य, (पु.)बलेन व्यतिदिनमा एकदेता।बटरामा श्रीमदेवास बलवाला (नि.): कोआ । बा । पर पघुप. कना है। बादिलो देवो वा।। । पियार आदिसे मनको बांध देता है। इति । जाठमा- गुरपुत्रादि । मामेक बेटा यादि । बांधव । मित्र । पिता। मता । भाई। एक वृक्ष. पन्धुता, ( श्री.) बंधु+मावे तल् । वा समूहे । धुन । बंधुओं का समूह बं+परन् । मुस्ट । बीच विह। विटों का देस (पु.). । पाय (नि.). पक्षी मनोहर । नत्र हटीम । उसलानत (ऊंचानीया) (त्रि.) वेश्या । कंजरी । राहु । मन (पी.). नहरा (नि.). प्रपत्र रहाहर । मुन्दर । वैश्याम एक देवाएस. MP (w) नाची रचना. - ६.(पु.) बल्लभ । मलो पटवानपि मदः (सौ. पालि, (पु.)बलनन् । जोरहार । पूजाकी मेट । राजासे ') बलवाला होकर भी भा है। बलरेर और गश्य देने योग्य भाग (कर-सिराज) । उपहा । उपश्य । चामरदण्ड । चौरी । गृहस्थसे करनेलायक पाँचयोमैसे ग्म, (पु.) लेन रमते । ममर्तरि घम् । णा "भूतय" । "बलिकम ततः कुर्यात्" इति स्पतिः। 7 भाई । रोहिणीका नन्दन ( प्रियपुत्र)। "संकर्षण" एक दैत्य । पिरोपना पुत्र । जरा (बुदापा) से चर्मका शि.पेत होना (ौ.) वा सीए । सिलडि । “गृहस्थस्तु स्. ( भव्य.) बल+अतिशये मतुए "म" को"" यदा पश्येत् बलीपलितमात्मनः" इति स्मृतिः । उदराव- सा है । भविशय । बहुतही एलविशिष्ट । (पटवाला) पद। पेटका अंग। "वलियर्य चाय पभार बाला" इति शि.) सुमारः। गुदामें अंकुरके स्वरूपका मांसका पिण्ड, धन, (नि.) पलं वर्धयति । बलको बढानेवाला। पलिवंसिन्, (पु.) बलि प्पसयति । स्वस्थानात् पात. रिक कर्म अमि। "पारिके बलवर्धनः" यति । पन्ग+णि णिनि । जो मलि दत्यको अपने स्थानसे घेन्यास, (पु.) पलानो (सैन्याना ) विशेषेण न्याराः गिराता है । विष्णु (धामनखरूपमें उसका ऐसा नाम स्थापनम् ) । प्यूह । एक प्रकारका सेनाको राडा करना । यलिन्भ),(नि.)। बलि अस्त्यर्थे इनु म था। बलि शालिन्, (त्रि. ) बलेन शलवे । शल्मणिनि । पलमै पलिन्, (नि.) बलं अस्ति अस्प इनि । बलवाला । जोर- वाला । जरा (पुरेपा ) से ढीले चमडेवाला. मिता है। बलविशिष्ट । रखवाला । मोरावर. वाला । ऊंट । भैंसा । बैल । शकर (सूअर)। पलाम. सूदन, (पु.) बलं (तभामर्क अमु ) सद्+त्यु ।। 3 नामी देसको नाश का है। इन्द। "बलनिपूदनः पलिनन्दन, पुत्र-मुन, (पु.) (इलेः नन्दनः ) बलिका पुत्रापाण नामा दैत्य. , (स्त्री- ) पलं अखि अस्याः । बलवानी । विश्वामित्र यलिपुट, (पु.) बलिना ( पूजोपहारथ्येण ) पुट: । पुर+ निसे रामचन्दको दीगई एक प्रकारकी महाविद्या. का पूजाकी मेटाके व्यसे पलगया । कारकोमा।को. का, (सौ.) बलं (कारनं ) अति (गरपति )। |i+अच् । जो बाप जाता है। बाद एक प्रकार यलिभुज , (पु.) बलि (पोपहार) गृहस्थदत गला । रुणि । बगलों की कतार । पियारी ली। बलि या भुर। पिए। पूजाके साधनहर पदार्थ वा रहस्से शिनी. गई बलियो राता है। पाक । वायस । कोमा । को. ट, (पु.) बलं अति (पदाति ) अद्भच् । जो ) पलि(ली)मुख, (पु.) बलि (सी) युधं मुखं भस्म । 'ल (जोर ) देती है । मुर। मंगी. पाक । जिसका मुख बलि ( झिलडि) वाला है। पान. दि, (अन्य.) बल+म+कि । हटात् । बोरसे । रावरी । अचानक । (पम्पन्त “ल पलिष्ठ, (•ि ) अतिशयेन बनी । बलिन्दन् । पात य इसकी गवाना नहीं क्योंकि "बलारकार" इत्या- लवाला । असनबलवान् । उष्ट्र । कंठ (पु.). देसी सिटिके लिये इसे भरप सोचार करनाही पडेगा). पलिसमन्, (न.) 11. । बठिका घर । पावाद । "बलिपुर". कार, (पु.) T+E+पम् । उपूर्वक करण । पलिहन, (पु.)। बलिं हन्ति । बलियो मारनेवाला । कोरसे काना (इयाकरण). विष्णु. नुम, (इ. ) अनु जायते । अनुजन् । तपटीयर, (त्रि.) अविश्येन बली। पढिन्रम । भाटा भाई धीरगली. बहुत जोरवाला. य, (पु. ) बलस्य भय. (स्थान) य+पम् । बल- यलीपर्द, (पु.) हिप्पर ।। (मौर) ut. की जगह । वरुणनामी पर. बोसो दाविलीपासोरिया राति. (पु.) लस्य (तमामामुरस्य) अरातिः । पलनामी रसका शत्रु । इन्द्र । "व" यही भयं. पल्प, (न) लार हितं । बलवत् । प्रपन । हर, (पु.) बल (सर) मारहाति । भामा बरी दी। नाम और बल पर । हुन् । जो महिपता है। मेष (माइत) । मुसा। अतिदा (क)(मी.) भुथा। मोथा। पर्वत (पहार)। भौर नागमे । प्रार-बार इमि-बाना ।मा. भार• म. रा. काल के सात मेपोंर्भसे एका विझे पार पोषों से एक दाब(ते. - पण्यभूमि, . घण्यभूमि, (सी.) हन्भाचे यत्-बधादेशः । यध्यम यगय, (पु.) (पि.) मा भूमिः । मारनेलायक जगह (स्थान) मिशान । ममान । फलगे अन्य शामिल करना वधका स्थान । “यव्यस्थान". मीय (मानेलाय) (वि.) पुणे यन्न, (न.) पन्धन् । "न" का लोप । सौगक । (जिमे पुत्र न होता टि. सीसा । चमटेकी रस्सी (तरामा) (स्त्री०). यन्याककाँटी, (मी.) पण्याचा सर्व घन्, यावन । मांगना । तना० सारम• द्विक० सेट् । मनु । वात् ) कोटी । पुन देने में काम और अवनिष्ट पिला वेट. नयाटी कोटी (मांस करोड) पूरी यन्, यन्धन । बांधना | श्या. पर• सक, अनिट् । सन इत्यम्" । वही भये. : पनाति । भान्सीत. यन्त्र, गति । जाना । न्या. पर. सा. यन्ध, (पु.) वन्ध्क्यम् । संयमन । रोकना । निगड अवधी. (संकली ) आदिसे किसीकी गति (चल ) को रोकना । यः (पु. ) मृ+ (दिवं) । वन बांधना । “कमगि धन्" देद । शरीर । ऋण (क) विशु । नाल । नेवला । वदि । आग। द्योधन (चुकाना) के विश्वासके लिये रखा गया द्रव्य दछ । टम देशके वासी । व. द. नविन (कोई चीज )। आधि. रंग। (पु.)। पीलेरंगवारा (नि.) पन्धक, (पु) वन्+ण्वुल् । विनिमय । बदला । मुख्यम्पयनुधातु, (पु.) कर्म• वर्ग । सोचा । दव्य ( एक जैसी चीज ) देकर किसी दूसरे द्रव्यो यद- और गेरी (लालयाक). लना (परिवतं आदि । (न०) गिरवी रयसी हुई ची। ययाहन, (पु. ) अर्जुनका बेटा (RTI पुंश्चली । थसदी त्री। व्यभिचारिणी। छिनार भारत । यर, (न. ) अम् ।। कुन केसर । वृक्छन् ।। नियां दीप. अदरक । “धर्मनि अप्" । जामाता (न यन्धन, (न.) बन्+भावे न्युट् । निगड आदि संयमन (रोकना) बांधना । और वध (मारना)। " करणे युद" रजु । रस्सी. विष्टा । मैदा । पानी । हरिदा (श्री), पन्धनस्तम्म, (पु.)तवांधनेका थमा (संभा) य, गति । जाना या परसा ।। हाससंयमनकाष्ठ । हापीके बांधनेकी सकी । सायन । भवद. गरबंधन । किला. यई, देना। मारना । स्तुति करना । और रेट' यन्धनवेदनन्, (न०) ६ त.। बांधनेका घर जैसाना। आत्म• सक० सेट् । बहते । अहिट कैदखाना । "कारागार" "बंधनागार" यादि इसी यह, (न. ) यह अच् । मयूपिच्छ । मोर पंजा अर्थमे हैं. पत्र । परीवार. -- टेदना आदिमे याचा करनेलापका पूर्व मौर "भावे अदरण। कबूल करना। दल यन्घित्र, (पु.) बंध्याप्यारका देवता। कामदेवाचम- यल,जीनामाना । निस्पन-बान । ना. टम•सक सेटवरनि-ते। अब यल, (न.) बल्झअच् । सैन्य । सेनादेश स.मभ्य (तकन).स्व। मोराई। मंधालाम वीबदेह। शरीर। पत्र।। पामार / बविरबाहिरा । होराइंस बिगा भारपस्दा (पु.)बददातिसार नेवाटा काम। एकप्रसाधी मागाहा बन्धुर,(वि.) बन्द भवनत । झुध मापलक्ष्य, (पु.)बटेनीव्यति। दिपा. एहसता बिटएमा श्रीमदेवmr. . बलबाला (त्रि.)। कौआ । बलदेश । बाग ना है । दलोदिको वो वा । .. । - पंसाचर्मव्यत्रन दाग। निशान. यन्धु, (पु.) बनानि मनः (मेहादिना ) । बंध । जो पियार आदिसे मनको बांध लेता है।शात । जात । मा- दुलपुत्रादि । मामेके बेटा यादि । पिन । मित्रपिता। मदा। भाई । एक वृक्ष. पन्धुता, (पी.) बंधु+मावे तल् । वा समूहे । बंधुन । बंधुओं का समूह पधुप (२०) परन् । मुस्ट । श्रीन विह। तिटों पही । मनोहर । नत्र हटीम । उठाना (ऊरानीचा) (त्रि.) वेश्या । कंत्ररी । । सत् (मी.). देल (पु.). यलक्ष, (पु.) यळं वायति मम्माद । (ोर) घटता है। वर्ग । वाला (वि.). SHITA Riti IA देनेहए (त्रि.). अमरवाया। हर मुन्दर । वदयाराम एक डेवताएका .] (w) तोद). - ता । द, (पु.) बल्+अच् । चलो बलवानपि भार (सो. पलि, (पु.)लिइन् । पूजोपहार । पूजाकी भेट । राजासे .)। बलवाला होकर भी भला है। बलदेव और गरय लेने योग्य माप (कर-सिराज)। उपलर । उपाव । यापरण्य । घोरी । गृहस्थसे करनेलायक पांचयहोमसे म, (पु.)बलेन रमते । रम्र्तरि पम् । कृष्णा "भूतयः" । "बलिकर्म ततः कुर्यात्" इति स्मृतिः । -भाई। रोहिणीका नन्दन (प्रियपुत्र)। "संकर्षण" एक दैत्य । विरोवनका पुत्र । जरा (बुढापा) से चर्मका वि.येल होना (डी.) या दी । शिलडि । “एहस्थस्तु । त, ( भव्य.) पल अतिशये मनुस् "म" को"" यदा पश्येत् पालीपलितमात्मनः" इति स्मृतिः । उदराव- है। जिराय। बहुतही मलविशिष्ट । (पलपाला) यद। पेटवा अंग। "वलित्रयं चाहयभार बाला" इति त्रि.). कुमारः। गुशमें अंकुरके स्वरूपमा मासका पिड. धिन, (त्रि.) ले वर्धयति । बलको घढानेवाला। पलिवंसिन्, (पु.) बलि सपति । खस्थानात् पात- रिक कर्मरामि पाटिके बलवर्धन." यति । पम् णिच् मिनि । जो बलि दत्यको अपने स्थानसे गिराता है । विष्णु (वामनसरूपमें उसका ऐसा नाम घेन्यास, (पु.) पलाना (सैन्यानां ) विशेषेण न्यासः स्थापनम् ) । प्यूह । एक प्रकारका ऐनाको पा करना। यलिन्-(म), (नि.)। बलि+अस्त्यर्थे इन म था। बरि- नारी रचना. वाला । जरा (बुढेश) मे दी चमडेवाला. शालिन्, (नि.) बलेन लवे । पाल्म गिनि । पलसे गोमता है। बलविशिष्ट । बलगला । जोरावर. यलिन्, (त्रि.) मले अति अस्प इनि । बलवारस । जोर- वाला। ऊंट । भैंसा । ल । शकर (सूअर) बराम सूदन, (पु.) बलं (तमामकं अमुर) सूकम्यु, यलिनन्दन, पुत्रः-मुन, (पु.) (बलेः नन्दनः) भलिका लि नामी दलको नाचना । इन्द्र । "बलनिषदनः". , (स्त्री• ) पलं अस्ति अस्याः । बलवाली । विश्वामित्र यलिपुष्ट, (पु. ) बलिना ( पूजोपहाटम्येण ) पुष्ट: । पुरन पुत्र । वाण नामा दल. मनिसे रामचन्द्रको गई एक प्रकारची अवविधा. । पूजाची भेटाके द्रव्य से पलगया । कार। कौमाat. शका (सी.) (कम्पन) भकति ( गच्छति)। अ+अच् । जो कांप जाता है । बरमेद । एक प्रकार पलिभुन्, (पु.) बलि (पोपहारगम्यं ) गृहस्थदत्त- बगला । पाणिगोपी कतार । पियारी श्री। बलिं वा मुर। किए। पूजा साधनाल पदार्थ वा गृहस्से दीगई बलिको साता है। वायग । कौमा।कां. प्रणयिनी. हार, (पु.) बल अदति (ददाति ) अट् अन् । जो | पलि(ली)मुख, (३०) बलि (ली ) युङ मुख अस्प । पल ( ओर) देती है। मुर। मुंगी, शाक।जिसका मुख बलि (हिति) वाला है।बान- बन्दर. लात्, (अव्य.) बल+मत+बि । हटात् । जोरमे । जोरावरी । अचानक । (पम्पन्त " "द यलिए. (नि.) अविशयेन बसी । इलिनमान् । गत साप मी गतायता नहीं क्योंकि "बलात्कार" इत्या- बलवाला । भसन्तबलवान् । दृष्ट्र । कंठ (पु.) रिकी लिसिके लिये इसे अवश्य खीकार करनाही पडेगा). पलिसमन्, (न.) ६ तबिडिा पर। टाउ । "पतिपुर". लात्कार, (पु.) बल तापम् । उपूर्वक करण । पलिहन, (पु.)। बलिं हन्ति । उिदो मारनेवाला । जोरसे करना (हठाकरण). विष्णु. लानुज, (पु.) अनु जायते । अनु+जना घटीयस, (नि.) भनियन बड़ी । बदिन । बसमा छटा भाई । श्रीकृष्णजी. बलाय, (इ. ) बलस अयः (स्थान) मपम् । बल-पटीयर्द, (पु.) मिस ।। (मौर) समt. की जगह परुणनामी वृक्ष. बौतीपदाविदाई।पटे पसीधी। रळाराति, (पु.) बलम (नामामुरस्य) बरातिः । पलनामी दलका शत्रु ।। "बलरानु' यही भयं. पल्प,(न.) स्टार हितं । पलपत् । प्रपन पर। पलाइक, (पु.) (मन) भागात वादा सीबी । नारद । और बलया । हुन् । यो मरता है। मेष (बादल) । मुन्न। अतिबल्य (बेड)(सी.). इपायोपा पर्यन (पहा) और मागमेदारबर, इरिगना मा. भान. भा. रा. फालके पान मेमिसे एक विके चार पोदामसे एक. ६)हते. बहुत जोरवाला.

. - विरोचनका पुत्राएदसा एकही प(प), (१४८) घ(वड, (त्रि.) (वं )हि+कुन लोपः । चीन | यहुविक्रम, (नि.)। यह पिथमा एक आदे अनेक संख्यावाला । विपुल । बहुत । "त्रियां या वासा । यदायहादर। यी शनिवार छीप्" । वही (पट्टी)। बहु. याहुगयिन्, (त्रि.) । यहु व्याः घ(घ )हुकर, (वि.)(व )हनि किरति । कृ+म. (सर्च ) वाला । याफर सर्च करनेक च । बहुतोंको फेंकती है। (फराय) मानकर । साफ । यहुयीहि, (त्रि.) ६.1 :- करनेहारा । साइदेनेझारा । संमार्जनी (पी०) युहारी। घानवाला । व्याकरणमें कदाहुआ +अच् । ६त. (जिसमें प्रायः सन्यही पद प्रधान हो यहुक्षम, (नि.) बहु क्षमा यस्य । वढी क्षमा करनेवाला । घहुशस्, (अव्य.) । (4)x+5 सहारनेवाला. बहुतवार । कईवार. घहुतिथ, (नि.) (ध)हूनी पुराणः । म(बो इट् यदुशल्य, (पु.) ६ य० । रफादर । तिथुक्य । अनेक संख्यात । बहुत संख्या (गिन्ती अनेक कीलोंवाला (त्रि.). घाला)। "काले गते बहुविधे" इत्युदरः यहसूति, (स्त्री.) ६०। पनेक प्रम बहुच, (अव्य. .) (क)हुपु प्रल् । बहुतोंमें । बहुतसे सनानयाला (त्रि.. समय थादिमें. याहुस्लामिक, (नि.) बहवः साम यत्व, (पु.)६०। यहुतसी त्वयावाला । भूज-मो. सामिओं ( मालिकों) वाला. जपत्ता पेठ. यहूदक, (पु.) (यहूनि ददानि यस यहुदर्शक-दर्शिन, (त्रि.)। बहु पश्यति । बहुत देखने रका संन्यासी जो एक स्थानपर न रहन बलाचतुर. का जल पीता है. यहुदायिन्, (वि.) बहु ददाति । बहुत देनेवाला ।। यदर्थ, (नि.) बहवः अयोः यस्य । उदार । फिमाज. बहुत पदार्थवाला । असाधारण । बार- पशुधन, (वि.) बहु धनं यस्य । वडे धनवाला । धनी ।। यदाशिन, (नि.) बहु भन्नाति । दौलतमंद. पहुधा, (सव्यः) म( व प्रकारे भाच् । भनेक प्रका- / य(ब)देव, (पु.)। भच्-सभा र।कई तरहसे. वाला । ऋग्वेद । सूरू (गीत) ( यहपुत्र, (पु.) (प)दवः पुत्रा व पर्णानि अस्य । (नि.)। टसी घी (श्री. ). बहुतसे पुनोरी नाई जिसके पत्ते हो । सप्तच्छद । सनी / याउय, (न. ) यवानां समूह +अण् । बहुत पोटे । माझग (पु.)। बार बहुपतीक, (पु.) बहुपः परन्यः यस । बहुत नियों. घोटीम उपभावि । समुदकी भाग(s यही अयं. यदुनज, (नि.) ६.। जियरी बहुत सन्तान हो। याडयेय, (७०) (दिव.) बायाः भाग्य- शार (सूअर)(पु.)। प्रजाके समान पहुत तृणवाला कुमार ( दोनों). होनेमे मुंजा तृन. याहव्य, (म.) बाइपे यत् । मिश बहुमरी, (पी.) संसा होने का न हुआ। पा(याग, (पु.) या शब्द एला। बहुत मित्राला । मुटसीश . संज्ञायां करि घम् । पर। टीका बामल, (पु.) ६. बहुत मउवाटा। सीवासीया, पर(पु.) सरम (धुना), शिश। । हिरण्यगर्न । हामदेश और केश (बा) | नाना- याणिय, (न. ) बनियो माया म ! पुस (वाणापर)(श्री... साना तमासा (नि.). परवा वनम विहादी- गुल, () () । मि."" का मगैरह ( मोड ऐना भोर बना It). भक्टा । राबनि ति। यानि-गी, (पी.) । बलि शासन मग । और पाला (.) दादा मागकामवालय । (fa• ) 3 ( • ). बी. नेका श. पाटा. का समूह --

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. - रिकार बुलयुला. (घोहना). या पवम् निष्ठ पर याटुज, (पु.) बाहुभ्यो (अप्रथाभ्या) आयने । जन्+7। शुदि, (.TTfrrari II प्रमाली भुजाओरो उपना । त्रिया रात्री बार राजन्यः" गौ काया मम इति पुतिः परिगामरान... याहुत्र, (पु.न.) बाहुँ प्रायते । + । अत्र (भो. निाअनःरण. आर) की चोटमे ययने के लिये हायमें पंथामा सोहा युदिपून, (f.) मुंद पूर्व सन्य। वा चमहाभादि. गा।गदान. याहुमूल, (न.) • गुजामी नह । कटा । योस । युनिशालिन् गगन, (नि.) युमा दिम शोभायमान । बुद्धिमान् । अवरनंद थायुद्ध, (म.) त । मुत्राओंमे लदना । मयुद्ध । शुद्धिहीन, (नि.) युमा हीन । पहलवानोसरी कुस्ती. वेभरिन । मा। हर याहुल, (पु.) यहुलानां (कृत्तिमना ) अयं (मामी) । यद्धिमत्, (नि.) पुलि+मनुर । पुष्टि लग् । जो वृत्तिकाओं (कई एक तारे ) का मालिक है। युद्धीन्द्रिय, (म.) ६. । बुद्धिरी इन्द्रि वहि । भाग। "बहुलामियुका पौर्णमासी+अग्" भर्तिक मन, चन, नेत्र ( आंग), मिना (न (कत्ता) की पूर्णिमा तियि (श्री.) "या था मामे गिया (नाक), ये मानकी इन्दि । पुनरण्" । कार्तिका महीना (पु.), युट्युद, (न.) बुर• पृ. । पानीका में याहुलेय, (पु.) बहुलानां अपर । हतिराओंरी सन्तान । कार्तिकेय । महादेवका वडा पुत्र. युप,इन-जाना मा. उम• सह. भेद। चाहत्क्षेपम्, (अन्य ) । बाडोः टरक्षेपः यथा तया । अरोधीन-अयोपि। वीविट । मोपः। भुनानीको टटाकर. युथ, जामा । दिवा- अन्न सक• अनिद् याशिखरम्, (म.) बाहोः शिसरम् । भुजा ( बोह) | बुध, (पु.) पग्टित । समझनेवाला । दान का कपरला माग (चोटी)। कंधा. नो द्वारा में चन्द्रमाले उपम हुआ पुर। वि( विद, आक्रोश । जिल्लाना । कसम खाना । शाप देना। यजना, (पु.) युधः जनः । दान्त वा' भवा. पर• एक सेट् । वेटति । थवेटी. परिदा वा शिक्षितलोग. विद्, अवयर जुदा २ करना । वा. पर• सक० सेट् । बुधरन, (न. ) बुधप्रिय रनं । शाह । इदित् । विन्दति ।यविन्दीत् रन । मरकनमगि पन्ना. बिन्दु (पु.) विदि । विद्+उनि वा । अन्यांश । बुधाष्टमी, (श्री. ) वुधारयुता अपनी योहा हिस्सह. रमहिन बटनी । शरस मष्टनी । और बिल, मेदना । बा चुप हम• पक्षे तु• पर• सक् सेट् । देव्यति-ते । बेलति । अविस्तू-त । अवटीत. धित, (नि.)भ्वा० टम• J+5 पर विस-क्षेप, फेंकना । दि. पर. स. सेट् । विस्यति । अयिम अवेसत. बुध, (२०) बंधन. "न" घोर । यीमत्स, (त्रि.) या निन्दाकरनासाथै सन्-कर्मणि पम् । आदेश । वृक्षका मूल (ज:)। और मूलम पापी गुनाहगार । गुगिन । निन्दा छियाटुआ । और शिजी (पु.). gणाका विषय (पिनके टायक) । न (पु.)। युभुक्षा, (सी.) मुमन्+अ । भो सुधा मूल पुस, राति म । कुत्ते वादिनी भावान करना । भोर | मुक्षित, (नि.) बुभुक्षा+नार• पर करना । चु• टम• पक्षे मा. पर• सह. सेट् । दुर. जिसे भूम ला भाई। "मुक्षितः कि यतिन्ते । बुद्धति बुभुन्सा, (प्रो.) बोढें इला-सन् पुजा (7.) पुर+मन् । हायस्थमामपिण्ड । हरयमें एक इटा (साहिर) मांगका गोला (द) और दय, युभूग, (श्री.)महिलाम-मन्+अई। पुर, (३) पुष । भगवतारमेद। भगवान्ता युग-). (A) पुष्यते (उसपने) नयम (९) भतार (डिस्में देन्योरी मोहने ये देर और टम में रहेगये मध निन्दा गा. धान। फमे पिना पान। हमा (मामा) (03.). यहादु•बरी- इसी बनाना . " - सायकएकमत. गया. एम. "भुरी दिछ .. ३, (त्रि.)ती (सी.) ही पा । पीय प्रलचारिन्, (पु.) (म)(वेदाय तद् प्रहणाय) -ला । तास्तकारा चरति च+मिनि । वेद पढने के लिये की है। यहोपवीत -भारण्यकम्, (२.) हद भारम्पकम् ।बापनमें (जनेउ) के अनन्तर पहिले आश्रमवाले ब्राह्मण आदि दनेायक । प्रसिद्ध उपनिषद्दा नाम । शतपथ ब्राह्मणके तीन वर्ण । स्त्रीका संगन करनेहारा । ब्रह्मचारीके प्रतको अन्तिम भापाय. करनेहारी स्त्री (स्त्री.) बी. र, (त्रि.)-वी (मो.) पिज्यस्य इदं अण् । विस्व | प्र(म)लस, (त्रि.) (म) (द), तुरीयं शुर- विस) का पना हुभा । विल्य पक्षसे दका हुआ. तन्यं वा जानाति वेत्ति । ज्ञा+क । घेद वा शुद्ध चतन्यको जामेहारा. च, (पु.) युध्+पन् । हान । आषा । भौर जागरण जागना)। "दुर+ण" दानवाला (त्रि.)"यु" | परम हमान, (न.)त. त्रिगुणावनिसमातीततुरी- यशरर्चतन्यविषयशान । तीन गुणोंवारेसे परे चोये शुद्ध बोधक । जामेहारा (नि.). चैतन्यक जापा. चकर, (पु.) गोधं (निदान्ते जागरण) करोति । (घ)लण्य, (न०)म(म)मणे (वेदाय ) प्रभवति । गुरु क+अन् । यो रस पीत जानेपर जगाता है। राषीके चैनन्यज्ञानाय वा साधु । (म)मणे हितो था यत् । अन्तमें जगानेहारा वैतालिक भाट । जतानेहारी (खौ.). माह्मण और वेदोकी रक्षा करनेहारा विष्णु । साह्मणका धर्म. घम, (न.) पु+णिय+युट् । विज्ञापन । जताना। ()लतीर्थ, (न.)स.। मामाका तीर्थ । पुष्कर इदिनदार नोटिस । जागरण । जागना. तीर्ध । पुष्करराज । कमलकी जा. बनी (बी.) बोप्यते अनया । बुध्+मिच्न्युम्ही। प्र(म)लन्य, (न.) (ब)मणो भावः । स्व । मन पिपली । मघ । ( इससे मूर्षित हुआ जगाया जाता है। पन । ऋत्विग्विशेष । ब्रह्माका धर्म । शुतुरीय प्रभाव । पतिककी एकादशी. निर्विचार ब्रह्मी प्राप्ति. धि, (पु.) भइन् । अश्वत्यक्ष । पीपलका दरस्त। ग्रहदण्ड, (पु.)त. प्रमका दशः । प्रक्षणसे किया समाधिविशेष । जामेदारा (शाता) (नि.). पया अभिशापरूप दण्डन (राजा)। साक्षणकी बददुभा। पा, सुषमण+युपस्य अपत्य । पुरदेवका पुत्र । पुरयाका माह्मणी रष्टि (साठी). नाम, (म)सदाय, (पु.)(ब)नि (पे) या पेशाय- द(म-देन प्रोक्तं+यण् । युरो रयागया निरीश्वर यनसमाप्त विप्राय वा राज्ञा दीयते । दा+मर्मनि पम् । बाद (जिसमें ईपरको नहिं माना जाता) कान । बोस गुरुके घरसे विद्या पडके आयेहुए प्रमणको जो धन दिया शान के पढनेहारा (नि.). जाता है। रामाविशय देथे भने । सटे हुए मानगो देनेलापक धन प, उत्सर्ग-सोहना भौर विभाग-जुदा करना । पु• उभ• राक. सेदोपति-ते । अयुगुक्त त. प्र(म)सन, (न.) मनिन् । वैदरा । ल। सबस।भमसी । यथार्थ । करीय (चोदी 1.दरना। भा• पर.सह. सेमणविभत्र दशास) सर्वगुण.तीत ( गुणोंसे परे बिार) बिम- भीत-हामीत जब स.फ मोर पिसाप (FARR) हिरवप । ति, (बी.) प्रतनोति । प्र+मन+सिन् 1.1 " विधा माण । अत्तिविशेष (एक प्रकार रोta) पोता है।साल । बहु विस्तार बहुत पलाना "धी" भी. प्र(म)लनाल, (न.)ी मनिनिया के पास दीर्थ- प, (पु.) बंधन-"" का मादेश होता है। सूर्य। विशेष. भRTI शिव इसका मूल । मन "मी" होता है. (मलनिर्याण, (२.) (R)पिनियां (BR): म)लफूर्य, (म.) एक प्रकारका मत (जिसमें पोर्ण प्रनमें विधम (भाराम) सारा पाना । सम्पूर्ण मामीको दिन रात उपवास गरे नि प्रातःकात भनयाँ निन(होना । परमानन्द (हुन नुरी). दूध, दही, घी, गोमूत्र भौर गोवर मिलाकर पीते हैं). प्र(म)ह्मपुत्र, (पु.)मणः पुत्र प (पिता)। म)मचर्य, (न.) ममणे (वेदलाभार) पर्यते पk दीय रंग होनेसे मानो बाप पुर। पिच (गर)। पद । वेद नये सारण पर्ता है। वेद जाके उत्तर देशमें प्रति सनद (बहार) क्षेत्र लिये सोपवीत के अनंतरामाधम सीसभोगसे (खास मह) सरस्टी नई (की.)ERHIT से रहित होना । मधुन राहिल।रिदिपा कम बना। शप हुई है.

वैशया । मिप्रमाणे टन किया। चार सम्म प्रम)लराक्षस, (पु.) (म)मा (मिनोपि) कुप्र(लसूत्र, (न.) (ब)माने (वेद चितं सूत्रम् । चैद पटने के समय पर (म)माप, (पु.) (म)मा (विटा) चतुमुग्रहहत्या, (ग्री.)हनस्वयम् ।। ब्राह्मणको मारनेवाला । विग्रहायाकारी । प्र(म)ह्मर्पिदेश, (पु.) ६.1 अनधिओंका देश।(माहुत, (न.)(ब) (विर हुनं (दत्तम् ) मामा का अनियिक हो यतिः । वेद पढ़ने के समय गुरुके ममने (घ)दयचंस, (न.) ममगा (वेदाध्ययनेन) तंवः प्रहाणी, (स्त्री.)(अ) मागं (थानया) अन्+ मित्रप्रकि । माकी शक्ति परत [ग्रलाण्ट (न.)(त.)ममाघFi जनहारा अंदेरे यसमें भुक्नकोष (समर ( चेतन्यं) सर्वात्महतया । पति-वेनिया"1ोय()लावत, (पु.) देशभेद सरसटी और है।शाम कहेगये "सत्र "मोजाग्रेवाला प्रसासन, (न.)()मले म ईभरका प्यान करने के लिये भासन ( पाम)मारी, (म)लपुरी, (डी.) ६.प्रदी पुगे । प्रती (प्र)विधा, (.) पारानाका स्थान । हरयादिल । के भापारशसान। नोइमेन ने गुरुवार सत्यलोक । कासी. पर गिा जो नीर मोमrat प्र(म)मयाधु, (पु.) (4)मा । कियो : उद- नगरी मिला. को यस्य । जिसके सपन करनेझारा । ग्राम है। मित्रा- (म)धि (A), (पु.) चाररहित । ग्राम थापारणे हित । निन्दा सायक। पाठवि (R)न्दु। काम करनेहारा । जातिसे मामा (कामगे नह)। त्रि- (4)न्दुः । ये पाने के ममय मुडे नुख्य महानि। मामा के समान माट थादि. जनकी बूंद म(म)लभूय, (न. ) मागो भावः । भूयम् । प्रम(म)वयंयनं, (न.) मटारह पुराणजित । भाव । ममान । तरसायुज्य । प्रसके साथ मिटना. १४...रहै). प्र(म)लया, (पु. ) मनानिमित्त यः । ये (म)बसंहिता, (ना.) गोंड भारत करनहारा एक मो अम्मायका एक अन्य. या । वेदका पढना और पहाना. (घ)लरन्ध्र, (न) • I मनका रन्ध्र (मुगगटेड)। प्र(म)वमायुज्य, (न.) मह धुनदि रतमात्र (निर) में स्थित अन्न प्रालिका कारण की मयुक्तम्य मायः गायुग्यं । द.an मसरन । के साथ मिलना. जगह । उस दि (गुरास )ो निकलनेर जीवा मन (म), (पु.) (xiy होजाना मुनाजाता है। मिरकी खोपरी में एक ऐक है नहीं समायिके समय प्राची प्रातिके लिये योगिजन प्यान गाविशेष अनिता अवतार।। लगाते हैं. पति का पति. ममिः राक्षसः । वामग होकर मी दुरे काम करनेसे राक्षस है । राक्षसके सरूपको प्राप्तहुआ एक प्रकारका भून । "अपहृत्स्य च विप्रख भवति प्रमरायः" इति मनुः. बारीक स्त्र । वेदान्तक मूस दुल्यो वा ऋपिः (वैदस्य) सनी । बाह्मण या चारमुस- रना । विहनन । प्राणको मारना. घाले (प्रभा) के समान ऋषि (वैदवा सरण करनेहाय)। ग्रसदन, (नि.) (अ)मा हतवान् । वैदका स्मरण करनेद्वारे पशिष्ट क्षादि ऋषि. कुरक्षेत्र मादि चारो देश । कुरक्षेत्र, मत्स्य, पाचाल और शरमैन । जहां नामण मा ऋपि रहते हैं. निस गृहस्य के करनेटायक पोच योनिन अदिति प्र(प्र)बलोक, (पु.) ६. ममम लोक । प्रना- करनास्ट सनिशेष. मिष्ठानमुत्रन । यह लोक जहाँ मानिसम) (मसालि. (5.) (ब)ो ( लो। तुरीय (वानों यवस्थासे परे) प्रमका सहप. वा स्वर जाग्रे लिये हातोंका सिकोडना. (क्षेत्रः) अच् समा । वेद पढ़ने में स्पन्न हुआ वेत्र। "मवर्चमधामस्य कुयादिप्रय पथमे" इति मनुः अप्रजनना" इति पुगणम् (मलयादिन, (पु.) (ब) (वेद) (पति) गिनि । पैदपाय वेद पढनेहारा । "() " चैतन्यही एप माप"ऐगा बोरतावा जानता नदियों के वचन देश (मुक). "इतन्य पति-बोधयति" वो गुदवान्यहो जानता मा समतामोधन करनेहारा शान. बेटना) सरितकमासन दि. सूत्र । उने । यसोरीत प्रति - [भगवर, . " . . मा)ल, ( (म.) पण इदम् । प्रमका । मासे ! भत्तामण्ड, (पु.न.) (सचावलोकी मोड । चार- दागया । पाला टीका लोप । अंगुठेगा मूल (एक लोकी पीठ. तीर्थ )। इस तीर्थ माझणोंगे भाचमन करने का विधान भवरचि, (पी.) भातस्य सधिः । (भोजन) की है। पुराण । विवाहभेद । पारा (पु.)। रामाका इजा भूस. धर्म (पु.). भक्तवत्सल, (त्रि.) भक्तल वलाल मक्क (भजनकरने. मष्ठ, (त्रि.) गिरायेन साम-दं जानातिनछन् । पैद. बाला-पूजक) का पियारा । मतोंपर दया करनेवाला. पालका पूर्णशानी । म पखित । पवित्र भक्तशाला, (सी.) भवस्य शाला भोजनएह । सानेका ल, (त्रि.)-भी-स्त्री. प्रण इद-तेन प्रोकं वा अन् । बापमरा. . (पना अपका परमात्मागमाझाँका नमकाभिलाप, (पु.) भरसभमस भमिलापः । क्षम का । वैदिक । रिव्य । पवित्र । - (पु.) आठ प्रकारके (राक)की साधा. विवाहोंमें एक जिसमें कन्या भलंकृत करके घरको दी जाती | भक्ति (पी.) भफिन् । मनन । सेवा । आराधना । और कोई मेटा बरसे नहीं लीजाती सर्वोत्तम. चित्तको आराधनामें लगाना । विभाग (बोट)। गौणी (मा)लण, (पु.)-(4) चिदं) पुरं परचैतन्य पत्ति । उपचार । अवयव भंगी। रचना । यसा (विश्वास)। मामेति अभीवे वा मत् । जो पेदपा पुन परम् चत. "भवति विरतभक्तिः" रघु.. को जानता वा पता है । "मणः अपयंस "भक्तिमान, (त्रि.) भषिं भजवि-भन्नभि । भक्ति प्रमाकी सन्तान (मुरासे सपना)। विप्र । भाग करनेवाला. जाति । “(मजानाति मा(मा)म. । परम(म) भक्तियोग, (पु.) भफिरेव योग- (एकामचित्ताति)। को जामेहारा (त्रि.) प्रेमसे चित्तका एकही भोर लगवाना । भक्तिरूपी योग. r(मा)लणय, (पु.) मा(मा)मणं ( जातिमात्रेण | भतः, (त्रि.) भक्तृन् । भक्ति करनेवाला । नुति करने भारमान ) भूते । को केवत जातिसे अपने को साक्षण वात्य । पूजा करनेवाला. कहता है । कदाचारवान् पिन । पुरे भाचार मामण, भत, भदन । साना । सु. उभ• सक० सेट् । भारति- सणसाद, (भन्य.) बाह्मण+साति-आधीना । ते। "भक्षति." प्रादणके माधीन (पवूमें). भक्षक, (त्रि.) शिका (स्त्री.) भरण्युत् । नेपाला। (मा)मण्य, (न.) मा (मा) मानो समूहः भावो वा गा. म्यम् । मानों का समूह का होना । विप्रसमूह । मान-भक्षण, (त्रि.)-सी (श्री.) मस्यन् । गानेवाला । गोंगपर्म विपत्तामाक्षणपन. (1.) (भावे युद) साना. ग(मा)समुहूर्त, (पु.) महा देवता अस+अए । भक्षशेष, (५०) भवस्य शेषः । पाने पा हुआ. कर्म । अरुणके उदय होनेसे पहिली परिये । रातो भक्षित, (त्रि.) भएका गाया गया। सं(म.) सना. भिडले पदिरी बाधी दो पहियो. भक्ष्य, (त्रि.) मसर्मनि यत् । सनेरायक। मोजनके कपन । रहना । बदा. उभ• दिक. सेट् । प्रवीति- योग्य । -स्य (म.) कोई धीर सानेलारक । पाने बाह । मूवे । भयोवन-अबोचत. पदार्थ । साया। भोजन. | भग, (पु.न.) भगा । सूर्य । अनिमा भामि काउ । प्रकार ऐपर्य। की। और परा । मीन । म, (म.) मा । नक्षत्र (सारा) मेष लादि राशि वैराग्य । योनिमा माहात्म्मान धर्म । मोस। भौर प्रह। शुशरा (पु.) भन्। प्रमर (भारा)। सौभाग्य सन्ति । और पदमा । गुर र सुपके भारित । भरम भूल । बारि गुहवाला "भगण." दीरा स्थान (कुस). 'भक्त (पु.न.) भन्। अम । राना । और ओदन | भगदत्त, (पु.) महाभारत में प्रति सरावा. (भात)। भरिपुष । भक्ति करनेवाला । रिमा भगन्द, (.) भगं ( उपमुफमप्यानं ) - (सेंटागा) (दि.). पर मुम्ब"। एक प्रभात रोग (बो भगो मतकंस, (I. ) भाम्य ः भभी पाली (कपी). पाता) मकदास, (पु.) भगेन (भपात्रलाभेन) सः भगपद, (4) भगं (दि)मति सम- (भगीतदासभाका) जिलभोजनपरही जो दाप होना तुम् । "म" ""होगा। मरिम. सौकार वा दै। पन्दा प्रसार रोमेले एक भरदुर्ग (की.और. न - " - पत्र-४५ प्रगन्नना। भ्वा. मा.भा.? मररस्याण बरना.... भागीत् । अभगीत् । अपीमगानामा पवन पोरनेवाला। मोड"माया महर. (fh.) is free मा मरगत (T.) मरिनाम् ""st मा. (2.) गगनं (अन) कामद,(.) भनि. 4" .... प.)rrerhitr/ मद्रासन(f.) Ritin *र.: +14... मन (2.)114rtu भगाकुर, (पु.) मग (गुलाने) भंडर इन । गुदा- मट, पोषण पालना । भ्या. पर• स.. पर मनो अंगुर है। रोगकारी दीमारी. सभाटीद अमटीत् । "बोलना" भगिनी, (मो.) मन (पत्रः) विदितो व्यादाने मटित्र, (२०) मल्झनाम को अनि समान।रिता मारिने दब लेनमें जिसे पमहुआ मांग आदि । कवार. मन बना पाता है। सोदरा । ममा । बहिन मिन. मह, (पु.) मटतन् । सतिष्ठानिकी मीरय, (पु.)ससंग दिलीपराजय पुत्र एक राजा ( तारीफ) अ पाठ करके जाने (जिग्ने गंभ पिर लारा है ). सानिन्न । मालिकाना वेद और मन(नि.)मा पराजित । हारगा और राग्डित (धनुर शात्रवेता) (स्टम)।" अनुपासाहत" इति नाटकम. महार, (I.) म (मानितं) हर मननयम,(पु.) मा परमो पत्र । जहां प्रारम्भ हट पूज्या पूजा के लापता मग । कलंकारने काहुना एक कायय दोष. महारक, (दु.) मद भाषा बोलना मानिस, (वि.) ममा प्रतिहा येन । प्रतिज्ञा (करार) "युल् । कर्म-नासोनिय राजपूत मामनोरय, (नि.) मतः मनोरथः सम । निगरा मनो- महिनी, (बी.) म (सामि) 6 (5) नहीं हुमा (टट गया)। निरत्माह. हो । मानी हो । नासत भारत, (पि.) मा ऐन । भरने प्रा (नियम) को अभिषेक न मिला । महनामिनार मद, परिभाषय, बहुन बोलना ।भा म. मन(R)मा सच । निगहारप भारते (Prern. मण, कथन कहनाभा पर. मासे मा. (3.)mirmiriशिमगा। Trianx (महर)। रिल । ममिति, (सो.) मगरिन । fore परनामे एक प्रहरी मण्ड(पु.) महिन् । treननामा निगम (पानी rauritint(ITI) और भाग (श्री.). नंरिशादा" ही परमतम 1, (.) मदनामी टी. मदद सोना । मयन । ...(.) IT. गि। HTRI नगा रचना। अग्विट. गा। ड (गर)। : । फार। मान। मन्दया. st. पर गया(नि.), मर,rria.... imirear र.ri Eritr... .. remi-diroiTutorial अभाला मान (HI) पण ( trucinating - INTEREArrianiim.

रग,] । । । तुरग, (न) भदाः दुरगा या । जहाँ भई पो मरवय, (२.) मरण होते हैं । जम्युमेपके मने एक "भा". हिन्दुमन, -पदा, (बी.) ...। मास (R) इस पद भरतानस, (पु.) ६.net पामा । जिनके पार चलो भाई हैं। एरं, और उत्तर भारपदा (नक्षत्र द्वारे). मकाज, (पु.) मारिरीक पीटम्, (पु.) मई पीटम् । दीमिमान् भागन । एपरिगे या सिगया रिEि. पादशाही पुरणी। गिद्दामन, मग, (पु.) प्रगा।माने स्थय, (म.) भदाय श्रीयते । धौ+ पत्याक विसी । योति पाये (प) लिये मेरेदन किया जाना है। पंदनरगु । संसला पेट. ग्तगत श्रयं देना गरेर दामन, (म.) भाय (टोपीमाय) भामते अत्र। मत (3.) rfreeी लोके परवाणके दिये जिगर रते हैं। राम् "भा- पादगार । म पालन पाए -(r पारे स्यु" भूगगन । राणा बागन. हाग)(नि.) प. (40) विमेधि अम्मात् । गी+भन् । जिसे ते माशाक, (पु.) म (प) Trm ६ । भया । “भावे गच्" रनार माया पुषIrri ण (: परर, (त्रि.) भय परोति । न+मुमा । को भय | महार, (पु.) भनी सिंह ! ! (2.) । "rime", देता है। भावारण । रापना । एक (पु.). गामगे पर पदन्,ि (नि.) भयं दयी। मय दिलानेवाला । भा, मधिAmarifrrer .. यमद (त्रि.) म प्रददाति । भर पाता । रापना. गहरriential:- यदेनु, (पु.) मया देवापारण (सबर). भागना (20) TRArImmm थानक, (पु.) बिसी भगत । भी+भापजिये राता है।प्र। भेरिया । एए । एसपिच गई. Errrrr. o.m.mit" पना (पि.) (पु.) + । पिजियादा "भ-.-.)rmurt(d) " भरण पो । पास पहारा (त्रि.) farmi). rm, (R• गुर। परन । मयारी थोरण । पारभर.rrmir. ........ (Prefe) र धारण (पामा) । रा मात्र (B)ोरला (2.) १५. भर. IntralTreatm पभुन (वि.) भाभी (नने ) ।। जोमस मगर परापना. - . ल, (पु.) Rt time से मल (47) (I...In ORALE) Fire Rat HAITEDY .. iruin(A) TR(P), भप.पु.) Irrier और (1) एya Yam(ar) a.rammart (RATra) CER | rrton rurms Trt RTer (5) RTER PREPurr (5•....) Mr. (.).n RRB Tirkirt "भव: HD RIPT Rekrrials Pustomer rintere (दिसावकारल) में कदामा माग्य (rin- मात्रा, (श्री.) मगन् । अमियकारक चरत्थित मागिनेय, (पु.) भगिन्या माह। (ना बेटा । समूपुत्र । मनवाँ। टम भागीरथी, (खी.) मगीरथेन माना मम्मन्, (न.) मम्मारिन् । (मवार) डे माग्य, (न.) भयपुर मटे और रैशेगाने काम। "Prime महारर,(त्रि.) MITRfrमामा, पारण, शुतारका ISr. (मांग) टानादम्। "irhar प्रवरा ...Pीमावर, मनाmire. मासन, (.)मादी भनेका भवाद(8), (१५६) भवाहा(न), (त्रि.) भवतः तव न दर्शनं अन्य। माग, (पु.) ममावे छन् । मानकर भवन++किप्टक् । कम् वा । तुमारी नाई दीगना है। ध" अंश । टुकड़ा । इ(चट्टीई) भवतुल्यजन । आपके ममान जन. (दिम्या)। एकदैन । एक दुकान भवानी, (स्त्री.) भवस्य पनी । भव दोप-आनुव । किम्मर । एक राशिका तीसरा भाग (R. शिवमायां । शिवजीकी नी । पार्वती । दुर्गा. मागधेय, (न.) माग(मायें ) चना मदितव्य, (न) भूमविष्यति करि च । नि० तव्यन् । "मागेन धीयते अमावास्यत् । राजा याय मन्च । जहर होनेलायक । जार होगा. देनेलायक कर (सिराज ), " मोम मयितव्यता, (नी.) भवितव्यय भावः+दल् । भवस्य- घा+सम्प्रदाने यत् । जिने अंग दिया बयान म्भाव । जसर होना । और मारय । किम्मत. मपिटाशक मविष्णु, (वि.) भूमणच् । भवनशील । होनेवाला। मागयत, (त्रि.) मगवतः मनाया याद होनहार. वा धम् । मगवान् वा भगवतीश महामान भगवान्की वाचत । टनके गुणों वानमा भविष्य-त्, (पु.) मुलूटः संप्रेति धन-स्य-रच् पृ. पातलोपः भाविकार । होनेशरा समय । पानेवाला | मागास, (अन्य ) मार्ग मार्ग ददते ।।।। और टापुराण (न.). वछ । रम कालमें होनहारा पदार्थ (नि.)। नियां मागय देना. पे-लम्च मागहर, (पि.) मागं (अ) हरी A मन्य, (त्रि.) भूरि नि० यत् । मावि । होनेहारा। काति) ह+अच् । जो अविकारी होनेने हन्ना होगा। और मंगल (कल्याण)(न.)श्म । राख । अंशमाही । अंग टेनहारा । हिस्सह पता और योग्य (न.) रमवाला (त्रि.). मागहार, (पु.) मज्यते इति भागो किन मर, अरमन्द युत्तेनी आवाज करना । भौकना । ना. हरनम् । दिमाग करनेटायकका लेना im पर• एक मेट् । मपति । यमपीत् । समार. मपक (पु.) मस्कृत् । गुर । कुत्ता. का रिमाग करना (बाँटना). मस्, पनाना-दनि । वडा मिना ! सा. जुहो. मागिन, मनिन् । मराविधिक पर. इंद् । बलि । अनामीत-अममीन. हिस्सेदार. पबिशेष आग मुरगानेहारी यमदेशी कला । घ. कनी। पूंछन । सरनाई। माक । दनदेश यंदा । यी । मनवौदी. "मत्रा" नि "मप्रिय" (छोटा बेला ). मसर,(न. मम्म करीत। र । मम्मीट मामी पार भगीरयमे साई गई मंगा। रोगविर। एक बीमारी रिस्में बदतमा माननगरमी शीचा" कुमार.. भून वही बनी रहे । "मम "वाय मागुरि, (पु.) पत्र भी सहरको वर्ष (स)रत (मोना). एक मुनि. का विरीि विनटी । सा. मलतापिन्, (प.) मसन देते । मम्म (शाह) पर भाग्योदय, (पु.) भायम्य उदयः । पर" मागवान् । हिमेशा (f.). मरे (टर) fotoनाम. मा. (ब) म न ममा करोति । माहान (माया मापा माले ममतपतीपूरभारएन्टनामनामा. (2) मम (Er). मेदाभात्रीमान. म.,(..) Immity RHERE.. पापसागर. .

संस्कृत भाषा य, (नि.) भाज्यते पिमन्यते । भाज्सर्मपि यत् । भारक, (पु.) मारे पाति । भार+ठ । मारवादक । भजनीय । बाटनेलायक. मोसा उठानेहारा. क. (न.) भट्-पोरण-पालनापुल् । दूसरेके पर दा भारत, भरतान् ( भरतवंसान ) अधिकृत्य कृतो प्रन्यः+ स्वारी आदिको भोगने के लिये उसके स्वामीको पेनेलायक भर। भारः (वेदारि शास्त्रेभ्योऽपि सारांशः अखि भस्य निभाशा फिराया. दा)। वह अन्य कि जिसमें भरतवंशके लोकों का वर्णन :, (पु.) भास अनुयायी भए । भा (इमारल । सपा जिससे वेदादि शाम्रोसे मी सारभाग लिया- -मीमांसदर्गनरा कर्ताका अनुसरण करनेवाला. गया है । वेदव्यासका बनाया हुआ लास श्लोकका अन्य । T, (पु.) भण्+यम् । स (देशनेलायस) कापा "भरतेन विहितं तस्येदं वा सम्" भरतसे निशान लगा. गया था भरतरा । जम्बुद्धीपके भीतरका एक वर्ष (भारत- ड, (न.) मा+अण्डय् मण् साथै अण् पा । पात्र । वर्ष)। "भरतस्य गोत्रापत्यंअण्" भरत राजाके वंशमें नगर्तन । तेल रसने पात्र । एक प्रकारका पर। हुआ। “भरवेन मुनिना प्रोकं भण्" भरत मुनिसे बना. नांगर पिपिओंका मूलपन । पूंगी। नीके दोनों किनारों के यागया नाटकशास्त्र आदि (न.) “तदधीयते+पुनरण" मिमा । भण्डस भाव:त्मण । मोडका चरित्र (न.). उसे पढते हैं । नट । और भाग. शाला, (सी.) भाण्डाना शाला । भांडो (वर्तनो | भारती, (पी.) भू+अतन् । साथै अण् । वाक्य (पचन)। और तरह-सान पानके पा)का पर. बचनी अघिदेवता (जिसके माधय पचन रहता है)। डारिन्, (पु.) भाई सति । श+चिनि । सरस्वती । पक्षिविशेष । अलंकारमें एक प्रकारकी पत्ति। भण्डारी । जिसे अत्र आदि व्यवाले घरों अधिकार दियागया है। | भारद्वाज, (पु.) भरद्वाजस्य गोत्रापत्यं+अण् । भरद्वाजके पदया, (पु.) माण्डि (भुरादापार) वहति भण् । गोत्रम हुआ । गोत्रको चटानेहारा एक मुनि । द्रोणाचार्य । जो गुटीररावा । मापित । नाई। मौआ। माण्टिाभ- अगस्त्यमुनि । व्यापार पक्षी । और यहसतिका पुत्र । त्व लन् । “माग्दिल" यही अर्य. पनी कपास (बी.)ी. ते, (त्री• ) भा+छिन् । योमा । यमक । मनोहरता. मारयटि, (सी.) भार बहना यष्टिः । शाकः । मोझा उठानेके लिये लाठी । भारवहनदण्ड । मार उदानेका दण्डा. (पु.) मद्रामियुक्ता पौर्णमासी भादौ सा यस्मिन् मासे+भए । चैतसे घटा मदीना ( भादों )। उस मही- भारयाह-, (पु.) भारे वहति । मण+दिः था। मेकी पूर्णिमा (स्त्री.) बी । “भदेव सा अम्" पूर्व भार उठानेवाला । भारवाही । गुल् । “भारवाहकः" और उत्तर भारपदतारे (न.). इधी अर्यमें है. मातुर, (पु.) भद्रायाः सलाः मातुः भपरयंम्भ भारथि, (पु.) किरातार्जुनीय पके बनानेवाला । दरच् । सदीरा पुत्र. नु, (पु.) भा+नु । सूर्य । भारका दक्ष । किरण । भापकान्त, (वि.) भारेण बाकान्तः । मार (बोझ) दाहुआ (लदा हुआ). स्वामी। राजा. भारोपजीपिन्, (त्रि.) भारेण उपरीवति । बोशा होकर नुमत् , (पु.) भानुः किरणः अस्ति बम्प । मनुः । जीविका ( रोजी) कमानेवाला. किरणपाला । सूर्य | "भानुमाठी" इसी वर्ष में, | भागेय, (पु.) गोरपल तमोबापत्यं पा+अए । मृगुती नुमती, (बी.) विक्रमादित्ल राजासी पनी (डी.). संतान या उसके गोत्र हुआ । गुाचार्य । परशुराम । म्, कोध । गुस्सा करना । सफा होना ।भवा. भा. पन्दी। दीर पलानेवाला । और पी। "टेन प्रोत्र, अक० सेट् । भामते. वेनाधीता, बालाबा अर"। उस्से हीगई, पगई। म, (पु.) भाम्यम् । कोष (गुस्मा) और रीति जानीयई । वेद प्रनिट एक प्रसरती पिक्ष । पार्षदी। (पमक)। "कर्तरि बच्" सूर्य । फोपवाली औरत हामी । और तो (दूर),नियो गम्. भामिनी (बी.). भार्या, (मी.) मान्यत् । विधिने रिवाहीगई थी। पाउन मिनी, (बी.) भाम् यिनि । सपशीला दी। बोध करने के सायक (त्रि.). करनेवाली श्री । श्रीमात्र एक औरत. भार्याट, (वि.) मामा भाति । भररी होगे वैसा ८, (पु.) पम् । गुएत्वपरिमाण । मोशेवाच्य माप । बनाकर जीनेवाटा. पोहोवाला इन्य । बीस लाच माप । माउ बार दोध माल, (२.) मारुन् । बाट । मसासारामोश परिमाण । बोसा. परम हिस्सद एकवि, मातात,(.)अया Thre - कारी पेश होरही है। मेरा मायुर (न.) भूस्वाम समुध मायुधा"शीमगामा मापमान(f.)ri hीय (मला)' मारक, (त्रि.) मारire (१५८) मारचन्द्र (पु.) माले चन्द्रः यस । जिसके मसक- मावस्थिर, (त्रि.) भावे स्थिरः। मरने । (माये)प चन्द्रमा है। सिनीय नाम. जड पकट गया (जम गया). मालदर्शन, (न.) माटे सवेकर्मगि ल्युट् । माये- मायादेतम्, (न) माये अद्वैत । मगर पर दिखाई देता है। जिन्दर सिंयूर. उपादान कारण । (जैसे मय हाडेश) भालनेर, (पु.) माले नेयं अस । जिसके मायेपर आग | भावानुगा, (श्री.) माई (पदार्य) tr" है। शिवजी । “माटोचन" धादि इसी अर्यमें. यति । गम् । पदर अर्थ मालाड (पु.) मारय इन यो यस्य, माले मो यस्य कती है छया। टीका अभिारदा मा । मायेने भाई निशानवासा, था जिसके मायेपर पीछे रहनेहारा (नि.). निशान है।मेदएर प्रचारका | करपत्रनामी भावान्तरम्। (न.) अन्यो मातम अत्र (भोर) संगसी । रोहितनामी मच्छ । महापु. दूसरा सयाला दुसरा भाव. सके यि । शिव और युआ। मायेका निशान । मायामास, पु.) मावस भामममा निम्बाठा भादमी. अटा मनलय, मालु(), (पु.) भाव सार्थे भन्। वा • मायाय, (पु.) मावस्य अर्थः । अगली बार हनः मनका ऋश । रीछ । "भाउ" कमी शन्दमा वाश्यका सागर नही य. मायित, (त्रि.) निय् । म E माय, (पु.)मावि (चिन्तति) पदायांन् । यु. म. अच् । प्राप्त (पाया)। । सnिtr नाटाने नाना पाचिना (करं तरहरे पदोंके और मिलाहुमा । पालयामाहा Har) भावयति (इप माविषम्, (न) भूनिधन् । टोनी टे (र १) भ+नियम" ही अवस्था पाताल). (i) मानेदार मानम AT (मन के बद । मानिनी (श्री. ) भा. (रेटर) Pr) गंर (पमाना) और (कोना) अन्या+हनिः । एकोणिो मरापिम् । प्य, पिट, पा कि. ग माग (सपा) और मारय । भरियावालाती (भागो समय )" मापर,(पु.) मध शिकार पदा. पत्र । सदा (टागानंग) (f.). माथ्य, (वि.) म्यत् । होने. मार.(f.) गम्यः। भवने रटाया। मार, बन-बाना मRI ग. धमपिट. . (नि.) (विगे काय पानेा : सन् मार) माय । मम्मी 147. माण, (.) मा पुराना । ६५ मार, (.) पिता जी एट एटा माग, (t. ) म ! Han रेम रस : IRI यान। Tre । मनाने (..) पर, (:.) र (MR) (स) viru मार (1.) . . or Eartrtztri) afarivarta मारत, (.jairam (4.im.

(१५९) (मिमा - हीबार m, (नि.) गाशिनि (गमागरे बन्नमें) मिरा (म.) मि.नि.कमा हिराह रमेदाला का. दीवार, (म.) मी माया करनेदारा प्रत्यविशेष । मित्त, (म.) मिनि तमन मः । भाग । दुकान पनीय (गया) (नि.). बिमामा भा. भा. भक. सेट् । भागते । मित्ति, (सी.) मिचिन् । तोना । मिर-करमा रभागिष्ट. रोकार. २. (ल.) भार+किम् । म । रोशनी । मग । | भित्ति, (बी.) भिफिन् । पर आदिकी दीवार दोना। विभाग करना। मौका अपरार, 8. (पु.) भएपम्-अच् बा । दीप्ति । धमक । गोष्ठ। भिद्, विधाकरण । दो टुकरे करना । विशेष करण जियाद गोवा । युपुर । ता । और एक. करना । स्था• उम• रा. अनिद् । भिनत्ति । मिन्ते पक, (वि.) भाम्+शुलभ प्रहार करनेवाला। अभिदत्-अभासीत्-अमित बमानेवाला. भिदा, (बी.) भिअर् । पिदारण । फाइना देवीक मुर, (त्रि.) भाग्+परन् । मिसील । पमने. रण । दो इकटे करना । विशेषकरण । जियादा करना. पाता। और रपरिक (बोर) पीर (बहादुर) (पु.)। मिदुर, (न.) मिद्+करच् । बा । "इच्" मिदिर दुसषध । (न.). (यही अर्थ) । क्षाक्ष । पाकडका दरख्त । तोडने स्थर, (I.) भार्स परोति । भागह-रन् । पाला (त्रि.). भालो पा है। सूर्य । अग्नि (आग ) । दीर (4. J मिन्दिपाल, (पु.) भिदि-फाना+इन-भिन्दि-भेद पर)। AT पक्ष । निसन्तशिरोमणि नाम प्रन्य. पालयति । पाल्+अण् । हायसे फेंकनेलायक नालीके बनानेदारा पण्डित. सपका भन्न (औजार)। स्वप्रमाण । एक औजार स्थिरमिय, (पु.) ६. मंग पियारा । पराग- जोहायके माप हो।हायसे चलानेका तीर. मगि (नि) भिष्य, (.) भि+ । विदारित । फाढदिया गया स्थिर, (नि.) भाग-परन् । दीप्तियुक्त। समकने. मिश्रित । मिलाया गया । रात । मिलाहुभा। अन्य बाला । सूर्य । दिन । भाडा । भमि (भाग)) भौर प्रफुटित । फूटगया । तोर दिया। जुदा किया. (पु.). भिनभिनात्मन्, (पु.) मिशः प्रकारः । प्रकारे द्विस्वम् । स्यत्, (पु.) भाम् असि अर्थे मनुप् "म" ग्रे "व" तारा आरमा यस्य । जिसका स्वरूप शुदा हो होता है। सूर्य । आफफा रा । और वीर (बहादुर)। पणका छोले, यमकनेवाला (नि.). मिन्नोदर, (पु.) भिम उदर यस्य । दूसरी (मि) मथ, भासालचकरना। राकमांगना-द्रिकालेश। द्वितीयासे उपम हुमा । सौतेला भाई. तारिफ देना। • भा• आत्म सेट् । भिक्षते। थभि- मिमक्रम, (नि.) भिमः क्रम. येन । निपमसे बाहिर मिर. हुआ. मक्षा (स्त्री.) भिक्षम । यात्रा । मांगना । प्रार्थना भिन्नगति, (नि.) भिमा गतिः यस्य । टटीहुई चालवाग. करना। मीस. भिप्रदर्शिन्, (त्रि.) भित्रं पश्यति । मेद देसनेवाला । मक्षा, (नि.) भिहापाकन् । निशाकारक । मीरा पक्षाती. मांगनेहारा । संन्यासी । नियां ही । “भिटाकी". | भिन्नदेश, (वि.) भिमः देशः यस्य । भिन २ देशमें मक्षारन, (न.) भिदाय यटनम् । निशा (मीक) के रहनेवाला. भिसमांद (त्रि.मिना भयादा येन । उचित नियम प्रक्षाशिन, (नि.) भिक्षाला मनानि । अश्+मिनि । (कायदा) को तोडनेवाला. जो भीरा पाकर जीता है। मांगनेवाला फीर । सन्यासी. भिन्नचि, (नि.) मिना रुचिः मस्य । मिन (उदा) मक्ष (पु.) भिउ । फकीर । न्यासी । चौथे भा. रुचि (खाद ) वाला. अमवारमा भिनयभन्, (नि.) मिनं ममै यस्ता मम (ोगें। मेष (पु. स्त्री.) मिकम् । भिक्षोपजीवी । स्थान) पर पाय लगाया गया. मीरापर जीनेहारा । फकीर । संन्यासी । “भरी" | मिसम्बर, (वि.) भिन. स्वरः पस्य । भिम (उदा) सर- (मो.). वाला बदली हुई भावाजवाला.. - रिये घूमना दिनीमा सन् गरी गम्IRE मुनगान्तक,(पु.).mr- (:.) । युभुममम, (4.) भुर (1) मनागपएनओtarveerut भा.)rntry निल] (३६.) . मिल, मेदन (डना) पु.1. पक्षे नु• पर० स० सेट् । भीष्माष्टमी, (सी.) तीन मेलपति-ते। मिली । भमिला-त । अभगत, शरीर छोडनेका दिन मापके मरे मिल, (पु.) मिलाता । म्लेच्चजातिभेद । एक जंगली (इगलिये इस दिन सब वो मार मामीला दोष दरस्त. चाहिये). मिर, रौपदीकार-रोगा डाय करना । पर० स० मुक्त, (त्रि.) मुकर्मनि । सेट् । पति । सीद, "मावे छ" भक्षण । साना ( मिरन, (पु.)निपत (चिकित्सवे) । मि+अजिक् । जन । भोग । एक करना. जो रोगमा इलाज कता है। वैध । हीम । रोगप्रती- मुक्कसमुन्झित, (त्रि.) पूर्व (लकं)। भोजनोत्तर मदत मिस्सटा, (बी.) भिस्मा (अ) रीते । छोटा गया थम आदि । दग्यान । महुआ था । मिनिटा" मुक्तिमद, (पु.) मुलि ( भोग) मोगरा "मिस्किटा" "मिमि" मिमिय", (सत्सायायमदयघात ) से मेरा मी, मस्सा भरण-पालना-सक प्रयादि.पर. है ( योदे या मायाजाता है)(R बलिट् । मीनाति-मिनाति । मभगोत. भुम, (नि.) भुज-मौटन अना । मी, (.) मीहि । भय । बरना । सोक. दुटिल कियागया । इकमा । एमाहेक मीनि, (पी.) मोडिन् । भय (१)। कम्प। मुन्, माण-साना । आ० । पारमा पर मः।""मीदः । भगुरूराहुआ. भनिन् । मुलं मन । मशीद मने पुर्ण मीन, (E) मेरी अम्मार । भीमह । निस्से मी)। "वं मरम्मानित मोकोम। reमरठ। महर कारगरावना । मया. nm । भीमौन । भम्लता ( मान- मुज, (पु. सी.) मुग्यतेऽनेन । मुस्ता क)()()(बी.)। "मीमा देवीधि मुगा रहापासीलावतीने भरा frममतमीजीपी. फोनवाला दोरा शरिर ।। भीगरपा(.) : पर: पानी मंडी शामा. erring. मुमग, (पु.) मुबाग-रेशान कम, (:.) दुपए मनुर (टोटा माई)। PRAYER (कर) इन्दीरे यदना है। गांगर का रामरा पाहा. (2.) मा एमादी । HTTEE भीमने टाणा) मुनगान (पु.) भुगन् भन." र (fr) kr मय, । रानाला मो सातादेगा। rrie. #re,(..) रामदा। दिल दोभा मतद।गी।" मा ५ ().cm. r-ttarrera (f.). "८, (पार मला म । मरा (HETTER मा.).in" MAY (intent Twitter मुलाग्यनम, (.) gri in Forse.narar REET बरे माटी (NSETh Parihantini "भुग मुगा (T.) मुत्र, मन गली पत्र .

पर (२) [भूत . सामी रामा. तर, (न.) भुभमोरन्तरं (मध्य) । बाजुओका मून, (म.) भूक न्याय । मुनासिर । रचित । पृथियो, तापकोटामोद. जल, तेज, वायु, और पाचश रूप, गंध भति विशेष प्य, (पु.) मुकिम्यन् । दास । रोग । सतत्र । गुणवाले रथ । यथाएं । टीक । वाafts । अगगे। ला। हवसूत्र । हापरा एन (मेरा) दासी (गोली) मौर तत्वका अनुसन्धान पिशाच मादि।मरायोगि. और वेश्या (चनी) (मी). मोश रामाणस (पु.) तीन (पीता)। .न, (.) भवति पत्र । भूमयुन् । होता है इसमें सारा ।गल (वि.)ी अनुवी।हिया. गिन् । हुनि । लोग । श्राकार । भास्मान 11 की | भूतम, (पु.) भूने हाल । हन्टर । जगत्र ( भोग- पत्र)। इसमें धारण करनेरो पालो मन मा ult नकोप, (पु.) भुरनस कोप इव । मानों संसारका मागजाते । भूतं (प्राग) नि (N 'अजाना है । भूगोल । पृथिवीका गोला । ज्योतिमा एक पोलि)" ओ भाली गंपरा निरस्कार बर्नारे । मन- लगुन । भौर राष्ट्र (53)। भूलनाराक (गलों निशा-भरः, (.) भुवनस्य इंदा । पृथिवीका करनेहारा) (त्रि.)।रमी (बी.)प. परंसी (न नित्रप, (न. ) भुवनानां म । तीनों भुवन (वर्ग, | भूतगतुर्दशी, (श्री. ) 1 मार्ग, पाताल) तस्या पदावा )। यमी रियारी बरंगी रे उपमे उगमें दीपक दिया जाता है शानि () नपापनी, (खी.) भुग्नं पावयति । गारसे पवित्र के कृष्णक्षी पारंसी । अमरी । Mist करनेवाली । श्रीगंगानीका माम. पोदय । कार्तिकरण एवंदी. निम, (:) भुरनं निभनि । पृथिवीको पालने । भूधाबी, (श्री. ) भूतानि (जार) परी इबासा (भाभय). धनवासिन्, (त्रि.) भुवन थालि । पिवीपर भाशा एन् । जो जीवोंगे धारणा. पनानेाला. भूननाथ, (पु.) तातोमा मागि पर(भय.)माकासम्म गरा मोट. एभाष । "मायो भन"mum प्रामि । पाना । पु. भा. सा• मेट् । भावमवे । भदी- भूतनातन, (म. ) मानिनsirmafring.. भवत भो भूलोको मा बाम INin पाना । मा. म. सा. सेट् । भवाते। अमर माश रहारा ETER)समोN (पु.). भनपार, (पु.) भूतानिए. (Avaire) दिपक करनागर । मोरना और मिडागासक. भरा होने पर मुरिसराtime. रा.स.सदाभाषपीपीग-न. भूतभापन, (I.) भान (Nirasat सत्ता होना । पर• • सेट् । मरि सभा, (अन) Akg+ Tren. .(-)ति । प्रविधी । जमीन । र या माता।"भू (सराप) भR" free । स्थानमा पामि (भाग). भारना inert (I) पम्प, (पु.) शुम पापः ।पनि भूपाल. उनघतो. दा, (पु.) भुग (धिसः) । दिदीमा भूनपह, (I.) भार (म) गानोपानदेवलापान (न::rk tri भूगोल, (पु.) भूयो । उपरपरसा पृधि star योग (vt. पाल (m): "RT समास भोगे 1). "भूमी भूगht. 'मोनिशी TET / भूतरः, (म.) भोग Artime । " सान.. ter. भूधापा, (m.) gran RTE भूताधि, (..) Prett पnि ( मरणो रहा मापदबादी ) मtrar भूगा. (410)ो राय (मर) HTTER पर 4k.. । पnिratkers नमवित .

-- । मृदा, (:.) मां भरे मुनि (पालीमा)/ मरिगम, (पु.) ( मानी कमन्बिोझा सेनामी मन, (: .gifr(बाद, पगली बा) गरिमाय, (.)य मया Mmme मन्त्र, (:.) ut..""मुगिनयम, (पु.)में marti (३६२) भूनहर, (पृ.) भूतानि हाति (अपसारयति ) छाअन् । भूमिज, (पु.) भूमेजायते । AM मतोको मगा देता है । गुग्गुन । गुग्गल, जता है। माल नामी ग्रह । नरम मूतात्मन्, (पु.) मतानि (भियानि पंचद्रव्यानि ) म। जो पृथिवीमें दरबना है (नि.) सत है । परनन । "सर्व गलिदंगा तबटान्" इति भूमिजीविन्, (f.) भूम्या ति। शुधिः । भूतोन सर हिरण्यम । मण। बटुक (थामदन ) पर जीनेवाला. भैरवा कर टन सोन. मूलारि, (5.) ६ त । मनोका त्रु । हाँग । इसके गंधसे मनिपुत्र, (पु.) भूमेः पुत्रः । भूकमत मूमिदेव, (पु.) भूमो देवः । कृमिवार भूत भाग जाते है. मंगलप्रद. भूगायाम, (पु.) मूतानां (प्राना ) मात्रागः (अ.भूमि(मी)म्ह, (पु.) या भूमौ । रमा वन्ह ) । विष्णु। और रिमीनऊ यूटा । बहे- भूमिष्ठ, (.) मी नियति । यो जो पृथिवीपर उगता है। बा । दरका. भूति, (क) मालिन् । मान । होना । अनिमा सादि है। मध्य । पृथिवीपर ARIET) भरारम भर (मदासी भूमिरपथ, (पु.) भूमि रटानि ।। मामहरा रामनिजात जन्म । और परिनाम मनिओं। मनुस्य । एक प्रकारका मदार, (पु)मांसी (गनी ) मुभाय । ममीन्द्र, (पु. ) भूमी इन तारित wry म जो पितीको मोदता है। स(). भूयर, ( भय.) पुनः । किर ( मुल.(.)ी। पिर माना देना है। इयम् (त्रि.). Ma(r). मूयिष्ठ, (पि.) भतिशयेन गा." मुपा.(1.) की रिपो धारण शानही. ar. भूगोन्पस, ( भय.) पुन: पुनः । म. (3.)। भूमीपा । पृथियो । योषिध, (4.) भूय. या यम । ' राम" मारावा. मासा । बहुधिषित माद(:. Jiveीभाभी। पृथि- मरि, (पु.) मफिन् । विष्णु । feran" (गोवा) (A) रा(२.) matttianा पसा है। माल । गल: kirtratiपा है। गगाली Tam. मरिनाम, (मा.)मीर -- अंधा. राजा. . - "मगर ":"ty-airएन * 1. मो(1.) भूप। ... what Mer (4) META(Attatra) MaraH ९ *injre tamiमान, (:.)

(२) [ मेदक, . मेंसे एक. Pr मान समाना।• उभ• पझे भ्वापर• सर. भूमाभीष्ट, (पु.) श्रमिक । त• । भौरेष ट् । भूषयति-से । भूषति. पियारा। आमवा वृक्ष. ., (.) भूप्यतेऽनेन । भूकरणे त्युत् । जिस्से भृति (पु.) भगिक्टन् । शिवजीके पास रहनेवालों- जाया जाता है। अलंकार । जेवर । गहना । मुाट । भृज, भजन-भूषा । भ्वा० मा. सह. रोट् । भजते । मम गा(श्री.) भूप+भ । मण्डनकिया । समावट. विष्ट । मृजः रेत, (नि.) भूक । अलंकृत । सजाया गया । | भूतक, (त्रि.) भ+त । साथै कन् । पेतनदारा कर्मकर! सजाहुआ. मादूरी लेकर काम करनेहारा । मजदूर । “भूतकाभ्यापको णु, (नि.) भानु । भवनशील । होनेवाला । होनहार. यष" इति मनु.. -वर्ग, (पु.) भुव खगः । पृथिवीका वर्ग (यहित) भृति, ( सी. ) भकिन् । गरण । पोषण । पालना । 'मुमेरपर्वत. "करणे चिन्" चेतन । मजदूरी । और मूल्य । मोल. = 1, भरण-पाटना । भ्वा० उभ• सक• अनिट् । भरती-ते । भृतिभुन्, (त्रि.) भृति ( वेतन ) मुहै। उन+किए । अमापाद. चेतनोपजीवी वर्मकर । मजदूरी लेकर काम करनेदारा धारण करना । पोषण पालना । जु• उभ• मक• अनिट् । विभर्ति विभृते । अभापति । अमृत. मजदूर. कुंस-श, (.) । ध्रुवा इंमा (शा) दलितलापन भृत्य, (पु. ) भूक्षयप्नुकूच । दास । गुलाम । भरणीय (पालन करने लायक) (नि.) । "भावे क्य" .. यस्य । पृ.।"६"को गम्प्रगारण होता है। जो भीसे पालना (बी.) टाए "भूस्या". अपने हृदयकी घटाको प्रकट कता है। स्त्रीका वंश भृत्याध्यापन, (न.) भन्येन अध्यापनम् । नौकर के 1 धारण करनेहारा नट. पढाना । पीस लेकर वेद पढाना. कुटि-टी, (सी.) मूरः पूटिः (महि) मम्प्रसारणम् भृत्यपर्ग, (पु.) मृत्यानो वर्गः । बहुतसे मृत्य। गत वागे । भौका दिया करना । भूभा । भौका चढाना. नौकर । मौकरोंकी जमात. गु, (पु.) भ्रग्ज्+क-ए । एक मुनि । शिव । गुरप्रद । भृ(म्र )मि, (पु.) भ्रम् इन् । पृ• वा सम्प्रसारणम् । पर्वतयानु । पहारकी चोटी । जमदमि । और ऊंची जगह । घूर्णा । वायुमेद । दाबरोला । पानी बादिका घूमना । भूगोगोंगापरयं+अण् (बहुवचनमें लोप हो आता है)। भृगुके वंशका (...). भूथ अधःपतन । नीचे गिरना । दिवा- पर.प. सेट् । गु, (पु. एक ऋषिका नाम : भृगुवंशके चलानेवाला । मृश्यति । अभृशत्-अभी । पला पेट्. मनिकी धाटके साथ उत्पन होने इसका नाम भृगु हुमा. भृश, (न.) मानक । बारिशय । जियादा । बहुत । उस- गुतनय-नन्दन, (पु.) मृगोः तनयः । मृगुफा पत्र । वाला (वि.). पुकाचार्य । परशुराम. भृष्ट, (नि.) प्रस्जक । जटोपसेक ( पानी सॉरने ) भृगुपति, भगूणां (भागंदवंशस) पतिः । गृगुके वंशका बिना रेत और मागके संयोगसे पाहुआ। भुनामा. पति । परशुराम । उनकी इसने हैहयपति (सर्ववीर्य) भू, भर्जन-भंजना-भसन-शिडकना-भरण-पालना । वापर. से रक्षा की दी. सक. सेट् । मृणाति । बमारीत्. भृगुमुत, (पु.) ६.। परशुराम । भौर शुष्यचार्य. मेक, (पु.) भी छन् । मेहसासुरमौर मेप(मादल). (पु.) भू+गन् तरच । भ्रमर भीग । कलिङ्गपशी। मेर, (पु.) मी । मेष । मेगा मेरा । एक ऋषिका नाम. मापन ! जार । यार । भार (सोने आदिका पात्र) मेष, (वि.) भिस्मृन् । फारनेवाला । तोरनेवाला, पौर शहरोल । भार(.). भेद, (पु.) निदान । पृथरथरण । स रा । भृक्ष (पु.) +गन् किवानर सरी काटी मासी। परक । एतुपारनेरेभार पारोमेंसे दीखरा मेठ एकप्रसारण कीराबडा काटा भोरा. तोरसाउना । पाइना न्यायमा बन्दोसाभार (m भारिट-रि, (पु.) माद स्टतिमिच् । इन् वा पृ.। सरेमें न होना)। घटसे पटा मेर भत इत्वम् । शिवपावरमेद । विपरीके पास रहनेवा- घटमें पटनदि रहना. भों से एक शिषीया द्वारपाउ । शिवजीका दरबान । भेदक, (नि.) निल् । पानी परने पर मिरर । "". बारे मेदसतोमररर. , । . - HITIET.ITHIrrr.." .. - . . गांगोगगरपातानीगंगा। नन्, (१४) मेददगिन्, टि-बुद्धि, (त्रि.) में पति, मेदय राष्टिः | भोगकर, (नि.) भोग डरोति । मेन ( पाया। मेदने देगनेवाला । मेद नगरकला । मेदी मुगानेवाला. पनि । मसारको परमात्मा भिन्न भिनन करनेवाला. मोगगुच्छ, (न. ) भोगाय गुग्छ । मेदन, (वि.) मेदयते । मिन्यु । फाइनेवाला । (पीस). काटनेट । "मुर" धिरेनन । दमटेना । जुताप मोर मोगगृद, (न.) भोगस गृह । मोरन । पाय। और भंस्टताग (पु.२.) "मिर+माये कमरा । जनानखाना । अंत:पुर । जनार मनुर । विदारम । फारना. मोगतृष्णा, (सी.) मोगा हम्मा । मेदयादिन, (5.) परततातो माने (सहार) सालगा (इसा) (मर)। सनी का ग. राशिम ठहरना । यर नि मेदित,(f.)। विदारिन । पामगया (भनय योटना). मिश्र (नाटक) मोगदेद, (पु.) मयते गुग शाही मार 22.(नि.) । विदा । फाग्नेलाया । कर्म । रिमें मुगम भोगा, रि(रनेटक)। "निमेश मेगामि यत्" पारका फल भोगनेके लिये समर भोगदे पाते" कीमती मेरी (4) #+ । । | भोगभूमि, (श्री. ) भोगस्य मम (सग जगह । मारता (हिन्दुस्तान ) मे ते र(T.) र ! "" "" होगा।नरी. देकर भोग होता है। कर्म म. Httin (m) m"मोगमतक, (I.) भोगाय मः करनेवाला मै rrIT••गर मेरा भगीने. | भोगवती, (डी.) भोग- (म sm,(.khan (गंगम) यी । t.iterattim. irr... भग। दाईके पी गया, (.) भोगस्य पदका 1 Adr" Fire(*) मान, ... Treो । निशा । गौम मानिन्, (.) भाग भने । गद) शरीर विमा साप्रामा (गांम)। (4.)arinा। 4. । भौग नाई। मांगाला (f.)। भोगने (नि.). (..) पर 4 मार. मोनियतम, (पु.) Star ran is भोगा, (.) भागलो भोग्य, (40MARATHI Anth) {1.karen writ"मोर, (T.). ki (1.), आयो । म "B" को ""inator - . *.marat मंत्रा, (40) Aug. Baatei. .

साग,] (१९५) [भातय, " नित्याग, (पु.) भेजनस्य स्थान । भोजनका छोरना। | प्रम्, पटना-प्मना । दिवा• पर• सक० सेट् । भ्राम्यवि. तरगना। रोजा रसना. अभ्रमीत्. नभूमि, (बी.) भोजनम्य भूमिः । भोजनस्थान । भ्रम, (पु.) भ्रम्पम् । प्याज्ञान । हठी यमज । भौर जनशाला।साने स्मरा. सापसे स्थित पदार्थक किसी बोरही रूरूपसे जामा । नियम, (त्रि.) भोजने व्यय । भोजन (साने) में जलनिगमस्थान । पानीके निकलने की जगह । पानीका उगा हुआ. सरना । कुन्द (6) भ्रमण (पूमना). नव्यय, (पु.) भोजनस व्ययः । भोपनका व्यप भ्रमण, (२०) प्रम्म्म्युमन । पूमना । चार लगाना । अपरागत सर्च). इधर उधर टहना. हनीय, (त्रि.) मुन्+यनीयर । सानेयोग्य । भक्ष- भ्रमर, (पु.) भ्रम करन् । मधुर । भौग. गीय खानेटायक. भ्रमरक, (पु.) भ्रमर इस फायति । कि । माथेपर पित, (त्रि.) भुज्+गियतिन् । सुलानेवाला । सरक रही भौरेके समान पूर्णकुन्तल (जुल्फें ). गलनेवाटा. भ्रमराभिटीन, (त्रि.) भ्रमरैः अभिलीनः ।भोगसे पिर- जिन्, (नि.) मु+चिनिइन् (समासके अन्तमें हुआ (व्याप्त)। प्रमरोंसे भाकान्त. भातादै) सानेवारी । पालनेवाला. भ्रमरफरण्डक, (पु.)भमराणा करण्टकः । मौका ऐदूक । ज्य, (त्रि.) भुज्यत् । मणीय दयमात्र । सानेकी भौरोटी मरीहुई रोटीपी संदूकरी ( चारोंके पाय होती मोईपीन. है प्रकारा (रोशनी ) को बुझाने के लिये भौरों (म. -राक (पु.) भोटान । एक देशका माम. पिराओं) को छोड़ देते है. -तिक, (त्रि.) भूतानि ( पृषिव्यारी नि-पिशाचान् वा भ्रमरयाधा, (बी.) धमराणा नाश धमरोंकी बाधा अधिात जातानि)। भूत+ठक । पृपिदी श्रादि दा पिधा- (तरलीफ). चौसे पायेहुए उपदव । च्याधि (बीमारी ) आदि. भ्रमरविलसित, (न) भ्रमराणां पिलविदम् । भ्रमरों- म, (नि.) भी (दो.) भूमेरपश्यं तम्या इदं वाम । मोदीधेला एक प्रकारका छन्द. पृथिवीसम्बन्धी । पृथिवीय । जो पृथिवीपर हो । पृषि- म्र, मधपतन । नीचे गिरना । दिया• पर• सक० सेट् । वीय बनाहुआ।-मः । मंगलप्रद । तारनामी दल। प्रश्यति । अधाशीद-अनशीत् ।पला वेद, पानी । रोशनी । आकाश । अनिऋपिका नाम (पु.)|ए, (त्रि.) अन । च्युत । गिरपदा । अपापतित । गी । जनककी कन्या । सीता (मो.). बुटाएवा. मरता, (न.) भीमप्रियं र । शाक. । मंगटरा भ्रसून, पाक (पकाना) । दु. ३. सकभनिन् । पियाण मावाल मूंगा. मयति । अनाक्षीत. मिक, (नि.) भूमी अधिकृत +ठक् । भूमपर मधिगर | मान, सति-चमकना । भ्या. था. अक• सेट् । मारते । रियागया । पृपिवीपर जीनेहारा । जिमीदार । ममाजिष्ट. भूम्याधिकारी. प्राजिष्णु, (नि.) भ्राम्हणुन् । तिशील । पमरने- रिफ, (नि.) भूरिणि (मणे) अधिकृत टिन् । पाला. खगणाध्यक्ष । राजार सजानेमें सोनेपर अधिकार रसनेमात, (पु.) धा+सन् । पृ. । एक पितासे हुभा । हारा । सजाने भधिकारी । पेशाध्यक्ष । रागनची. भाई। सगाभाई. यस्, भय-दरना। भा. भा. भक० सेट् । भ्यसते। प्रागन्धि-गन्धिर, (नि.) भातुः गापः पत्र . स । अभ्यविध. भाईशी गपवाडा । नाम मात्र भाईचारा (वास्तविक माईप रण, शब्द करना । या• पर. स. सेट् । भ्रपति। धर्म प्रेरनेवाय माई) माणीत-अभ्रणीत, नाज, (पु.) प्रादुर्भयते । जन्+ । प्रानुपर । अकुंश-स, (पु.) वा (m) यस । ४. नि. । भाईमा लाभदीश उसलर (मी)(प्रो.). पीरा घेष ( मेरा) धारण र नाचनेहारा नट. भ्राजापा, (श्री.) मानुजारा मां की भरकर टि-टी, (बी.)। बः पुरिः (भंग ).पा । प्रारमितीया, (सी.) के पास विदीया। भ्रूभा । भीका चढाना. भाईसाहले समतिवीरा भीगने. बम्, पलना । भा• पर• एक सेट् । प्रमति । अप्रम- भ्रातृम्प, (पु.) प्रपुर । भातायर । माईप अभ्रमीद 'पत्रु (इस्मन). . साचार 7.पापः।एzrrrr- शायरामाला भ्रातृल,] (१६६) " • (गदी ) भूल । एक भ्रातृत्व, (न.) प्रातृत्व । प्रादमांवः । भाईपन । भाईचारा. म, (पु.)माका चन्द्र । चांद xि भ्रास्श्वगुर, (पु.) प्रातापि ( पत्युज्येष्टभ्रातापि ) स्वरस्थानीयः। पितृतुल्यत्वात् । सामीका यहा भाई समय । मधुमदन । निर. (पिताके समान होने से यह भी समुर माना जाता है) मरु, भूष-मजाना-गति-जाना। मा• • • मात्रीय, (पु.) धातुः अपत्यं, इदं वा । प्रानुपुत्रः। इदिन् । महते. माईका सडका । माईका (प्रातृसम्बन्धी )(नि.). मकर, (पु.) मनुष्यं कृणाति (हिननि) मान्त, () प्रम+मावे का भ्रमण । घूमना । "कर्म. जलजन्नुमैद । मगरमच्छ । कामदेव रिक" (भूलाहुआ) मिथ्या हानवाला । धूमनेवाला बारह राशिओंमेमे दसवी दादानन्दर शान (नि.) 'मं (विर्ष) किरति ". म्रान्ति, (सी.) श्रचिन् । भ्रमण । घूमना । अयथार्थ- मकरयुण्डल, (पु.) मराति xi(": जान ही समन.. एक कानका गहना । जिमका मरमर म्रान्तिमत्, (भ्रान्तिवाला) अलंकारमै अर्यालंकारमेद. मकरमेलन, (पु.) मकरः (म) भ्राम, (पु.) प्रम् अण् । इधर उधर घूमना । मोह । प्रम (पो ) यमा जिमय रंदा महो। कामदेव । "कन्दपं" "मकरकेतुः" कह भ्रामक, (पु.) ग्रामयठि । धम्+ण्वुल् । शमान । गीदद। मकरध्वज, (पु.) मकरः परः यम मिमार । घुमानेहाय (नि.)।(भुनानेवाला). वाला। कामदेव. भ्रामर, (न.) भ्रमरेण सम्पादितं, सस्य वासिन् । मकरन्द, (पु.) मकरं अपि पति ( भारने बनाया । मधु । राहत । भ्रमरसम्बन्धि (भारेका) दो-अवसादने। तोडना.भुम् । पर (नि.)। मस्तान्त (गुम्बक पपर)(पु.). राहत । फूला रस । कुशक्षा मित्र माष्टः (२०) अनः इदं+अन् । भाम्मान (आकाश) मकरसंक्रमण, (न. ) मकर मेनन । मनराव (भुग पान-काही ) (पु.न.). राशिमें परिणाम (जाना). मु(सु)कम, (पु.) मृतः कुंमा यस प. यामः । मारिन्, (पु. ) मकराः मन्त्रात धीराप बनानायन-वाय पुरस. समुद्र (स)कुटि(टी), (श्री.) ६ त... वाहनः। कोपरी मकुट, (म. ) मरि-गजाना-FTII get । भावाना. मुटताज. म्, (पी.) प्रम् । नपनोप्यरोमराजी । भौगो पर मकुर, (पु. ) मरिम् । पृ. । नि। रोम (माटो)ी हतार भी। मवे. सालासदाः । शुमारी छ। योप, (:) ६०० । भाका यदाना मिरेत (शारद ). मदा, गति-जाना । श्या. मा. ग. । पोस्तानयि भयो हावा चलाना । मौका फेंकना. पिट. मन, पास-नाद करना । निश्चय करना । चाइना मोर (मा, रोप-गुरण करना-Tा होना परला • सम्म• मा. मंद । गयी. मा. मंद । माति । भमशीन घन.(पु.) भूगायम् । नियों गर्ने । और बालक मापीय, (पु.)मर्श (महत) र एम सुपर, (नि.) चूर्ण (गर्म) नानागमंत्री विप वीर्य हो मातानिreal हमारास “fr" "नहा" यही वर्ष. मनि(सी)का (पी. ) मम ।। अंश, रमनाया• मा. पर है । ग्रेनों । . भ्रम्हा भर. मा. म.मंद। मा. मांग-मनागना-बानाम.. मीभमानी,धमनः। मार, (पु.) मनापा( मर(1) पम्प स्थापिरवा. महास,IR..मा.तिने. (नि.). स्टार RCEIR - मा. म. पर. न... मरमर (10) [मार, + . - है, (पु.) मारते (अपो गम्यते) मनेन । मगि मात्य, (२.) मंगलाय हिनं यत् । चंदन । सोमा । छ । पृ.। जिसे नीचे लाता है। मर्ग (दो) पापं गिदुर । और दही। हरिर (मुंघर)। भोर मंपस पर- दधाति । पाकाको दोष वा पाप धारण कर्ता। मेवारा (पि.)। बोर। पिल. देश । उस देश शेग (..). मप, उपनाकरण-उपाकरना । ठगाना अभिमानी होना। भार, (पु.) मग राजा । जरासन्धराशा ये पूजकरना । पाना । सक• बिमाना । भक. पा. भारम• सेट् । इदिन् । मयते । समपिष्ट. घोमया, (मी.) मापदेशे पाहुयेन उद्भवति ।। मपपिका, (बी.) यह बाद संभावाचक पदके पीछे गन् । पिप्पाली । मप इस देशमें बहुत होती है. रहता है। मोर भरनी जातिमें भोको सिख कता है। तर-ल बरना । भएकी तेत भादि करना । अक असे "गोमवर्षिा" एक बहुत ऊंदा गौ मा त । गी-जाना । निन्दा करना और भारम्भ (गुला) प्रशसबिहुत अच्छा. क. मा. मारम• सैद । इति । मदते। ममदिर. मनन, (न.) मराज युट् । सान । नहाना. ", मरण । सजाना । भ्वा० पर• पक सेट् । इन्दि । मनसमुदय, (न.) महात् समुद्भवति । सम्+उ++ वदति-भमहीद अन् । ५ त.। मजासे उपजता । एक । वीर्य। रेत। मनि. पद, (पु.) मर+।"" "" होता है। मघः (पूजा)। अव म । "म" को "" होता है। मना, (बी.) मस्मरक्याप् । अस्थिसार । हरिओंका सार । वृक्षका सार अंश. रामपयन्तीमपयतः उनीप्रोप"मी". मनाज, (म.) मन्बातो जायते । जन् । जो मबासे ग्यन, (पु.) महनिन् । निन्दामपा । म- उत्पन होता है। भूमिसे उपजा गुग्गल. 'पदानी । मपोनः । उदार (पुलारित)(नि.)। उस- 'सीखी "मपोनी" . मनारस, (.) मजाया. रस. (परिपाकः)। मवाका पकना । वीर्य । मनि. 'ग, (खी.) महाप । "" को "" होता है। मश्वि नीसे दरावा नक्षत्र (तारा) । ये पॉर तारोके सरूपमें | मञ्च, (:) मचिउच्माय । उंचरा होना+पम् । सदा । होनेमे बहुवचन भी होता है। "पितरः स्पृहमन्सहमर. मग । दोसा बनाभा अंग भासन । मप. विशेष. -फागुमपामुच"स्मृति.. मअरि-री, (पी.) मा वाचति । शान्-शक. दुर, (पु• ) मरिन् । दर्पण । पौया । माईना. पर. या ली। मई उत्पन्न हुई कोमल पतेके मु, (अन्य ) मरि+उन् । शीघ्रता । जल्दी । मश । सरूपी पालरी । मिंजर । मुक्का । मोती । दिल नामी बहुत ।.।"" "" भी होता है. सवा (पेल ) मौर तुलसी. मल, (पु.) मगि+अलन् । भूमिमुत । पृथिवीका पुत्र । मअिष्टा, (पी.) अतिशयेन मजिमनी+छन् । एक मेल । एक प्रा । प्रशस्त । मसता चाहेहुए अर्थती निदि। मजीठ. उसवाला (नि.) दुर्गा कुशा (खी.). मीर, (न.) म शब्द करना+परन् । पुर।जर। मलकाल, (पु.) महलस काल मंगला रामय । पजेचा पाय पहिरनेका जेबर। दधिमन्यनदण्ड बन्य। शुचीकारक सम्भ। मथा (था, नीधी रस्सी बांधनेका रांबा. मिलच्छाय, (पु.) मंगला या यस्य । जिराबी भण्डी मड, (त्रि.) म+उन् । मनोहर । दिलको बच्चा लगने- - ज्या हो । बटाक्षापाका इत. बालागिबसूरत. गिलपाठक, (पु.) मालार्थ मुति पठति । पमन्युस् । मञ्जुयोर, (पु.) तत्रमे एक उपासना करनेलायक भलाई के लिये प्रशंसाओं से पढता है । नुतिपाठक. देवता । अच्छे शम्पाला (नि.) अपारा (डी.). नालपदा, (बी.) मजलं प्रददाति । प्रमाल | मजुभापिन्, माव-पारिन् , (त्रि.) मधु भाषते-बदली -देती है। हरिदा हरदी. यक्तिमधुरभाषी। मीठा बोलनेवाला. मद्दलयाप, (म.) मंगलकर वायम् । मंगलके समयमा मजुल, (नि.) मउलन् । मनोहर । गारत । जल- पाग। मुरी-जूनिये दोल. रेक पक्षी (ममोला) (पु.)ह स्थान जो सतामोमे मगलसूत्र, (न.) मालकर सूत्रम् । परिक जीवन आचादित हो। निकुन्त (म.). पर्यन्त विवाहिता नौसे धारण किया गया मंगल (सशी) मनुष, (वि.) मा पर्ने यस । सुन्दर मुखवाला । काल (कंगन), मुन्दर.

. । है।गुरुच। (पानवाडि) Tal प्रकारस सोपएक जंगली प31 समरने कीबई उन्माद (पगल मधु, (२.) मन्+71"""" (शर)(मो. पानी मfrm M. (म) ().xnxn •(३५.) मद, (पु.) म अच् । हतिगण्डजल । हाथीदी गालका मदलेखा, (प्रो.) मदस्य लेखा। पानी (मसी) । धामोद । सुश । अहंकार । धीय । मस्तीकी रेसा. मृगमद । दस्तूरी। मत्तता वा मनी । कल्याण करने मदविद्वल, (त्रि.) मदन विदाई द्वारा पदार्थ. मदकट, (पु.) मटेन कटति । कम्यच् । राण्ड । सांद। (पागल-व्याकुल) होगया । मद ( होगया. चीनी । “मदोस्कट". मदफल, (पु.) मदेन कलति । कल्यच् । मत्तहम्नी । मदात्यय, (पु.) मदस्य अत्ययः ।। ममदापी । मदोत्कट । बहुत मस । और सव्यक्त (जियादवी ) अधिक मद्य ( शस्त्र) (नामाम ) शन्द धरनेवाला (नि.). (सिरदर्द) गर्दाका होजाना. मदगन्ध, (पु.) मदस्य (हतिदानस्य) २ गन्धः अस्य । मदान्ध, (त्रि.) मदेन अन्य । म हाथीक मदके समान जिसका गंध है । सप्तच्छद वृक्ष । (कुछ नहीं शता)। बदा भारी ना पीके- मदिरा (राय) (श्री.). मदालापिन्, (पु.) मदन लालाति।। मदयर, (पु.) मदेन जातः ज्वरः । अहंकारसे उपजा मस्तीसे बोलती है। कोकिल । कोइल. जर (दुसार ) । वटा थभिमान. मदिरा, (प्रो.) मकरन् । मासा मददिप, (पु.) मदप्रधानः द्विपः । यदी मस्तीवाला तरही शराय । (ये "मावीर" मोर हादीमूनी हाथी । डरावना हाथी. प्रकारकी होती है। और मत्त राना मदन, (पु.) मायति अनेन । म करणे स्युट् । जिरमे सदिर (लाल सैर) (पु.). मन होता दा मुश होता है। कामदेव । घटयतका मदोत्कट, (पु.) मदेन ( दानव दता । यसन्त । मीयम । एक वृक्ष । मुरा (शराप) सः)। मस्तीसे जोरमें आयाटुआ । (डी.). मदिरा ( शराय ) (सी.)। मदार मदनचनुशी, (ग्री० ) मदनम्य ( तदुपागनायां ) चतुः मदोदप्र, (पु.) मटेन ददनः (उप्र) दंगाबामदेवी रागना करनेरी चतुर्दशी (धेती -प्रा । नारी (प्रो.). परतुरंधी). मदोस्त, (नि.) मदन उस्तः । मासे मदनमोहन, (पु.) मदन मपि मोहयति । मुहागिन्+ ग्यु । कामको भी मोह लेता है। श्रीकृष्णदेव. मदन लेगा, (पु.) मदनम्य ऐय. । कामदेवता पत्र । मदनयत, (वि.) मदनस्य पर धीमनः। कामदेवके वर्गमकर । दोगला । वाला। (अपनगर) में होगया. .मरनमदन, (२.)त. कामदेवश पर श्री महर, (पु.) मदर-गुल्य । (भारत) Rafter मग । (मोतिपमें ) एमगे गाना स्थान. मध, (न.) मापति भनेन । बरगे । मदनातक, धारः, दमनः, दाना, नाशन:-रिपुः (पु.) मदरस अन्टः । नव नाय ररनेवाय । शिवनम (पु.) मदर । देशभियो । पुश होता है। मदिरा गर (मत मदनावस्या, (सी.) मदनाराया। रामदेवयं कोई . १) (अवनी दमदा हैं।.. मदनगर (प.) मदरमा टमः । रामदारमत्र हा म । म (न) ()()मा कोरम है. atrikrt. अभी भी मौern पंग महा ति, (::) taarसमंत । मेर (i). (43) 1. (E.IERS (Ran)(f.). "त." (a.. मम. मह (पु.) मन्+उ-पृ० पातुको "म" sri मच्छ. । . हा) (ATTESin" (10) मिन्ध, -- . .. - (पु.) मधु करोगी (सचिर निधारयति) मधुपन, (म.) मधुलाधिष्ठित रन । पर जहाँ- म् । राहत (ता) बनाता है। अमर । भीरा. "मधु" दल निवास पता है। मधुरा क्षेत्रमे बन ८, (पु.) मधु (मधुर ) सीरे सस । मीठे पूर• है।विकिपा मगरीत मधुरता एक वन. ।सरकादरहत. मधुयीम, (पु.) मधु (मधु) पी एस । मीठे पीज. (न.) मधुनो जापते। जन्+८ । राहदसे उप बाला दाहिन । अनार. है । विषयक (मोम)। मदल । मेदवे उपरी मधुयार, (पु.) मधुनो मान्य कारः (कला) र १ (खी.). मरण पीना 1 दाराबरी वारी. द, (पु.) मधुनामापुर जितवान् । जिभूते किए। मधुशेष, (पु.न.) मनः ऐका (रविष्यम्) । नि मधु नामी दलाो शीतलिया । विष्णु. राहतका बासी (म) मा । मोम. --, (म.) मधूना (मधुराणो) । दीन मौटे। मधुमस, (पु.) मधोगाम्य गण (सार) 6, पृत (पो) और मिरारी. सबसन्तका मित्र बामदेव । "मधुमपि". (पु.) मा पिणी । पाहन (रस) पीता मधुमदन, (पु.) म (कामापुर ) II । प्रमर (भीरा ) । न पीनेवाला (f.). (जीवानां भगमरम, मनेर) गपीरा। म. (म.) पम् । मधुनः परें योगो पत्र । एमयुर मधुनामी लो मरमा समें शदना मेठ हो।पसी के पात्र राहुभा जीवों के भले कर पुरे पकान पर है। जिसमें हाहत मिला और अपराही पारसे धीरण “मधु" मा गरी मी हो। दही, पी, पानी, राहत मौर मिसरी ये ५ चीजे. पाहलके एसको पामर भरा। "Im री, (पी.) मधोदेवस्य पुरी। मधु नामी देसी सूबवे (भर)पुर री" मधमा। मधुरा. पाली. क्षिया, (खो.) मधुसमाविका मश्किा । दाहत | मधुरयर, (पु.) मधुः (मधुर.) खर सम्म -शा करनेवाली मारी। पाइतली मारी। एकसारका भावाम दैजिगातिला. (सर)बाल (वि.). - रत्, (f.) मा. (मभुरग) अति मनुए। मधुदन, (पु.) मधुनम सफाierrurati दि रसवाला । माधुरन् । एपनी । योगशास्त्री एनजि । मनामी को लियोगिनती एकप्रभारी पित्ती प्रतिवेदमें मारामाणुि । मारप. लिए "मधुवाला" लागि तीन या । तबमें एक देवी मष्ठिर (म.) मधुन ful (Tirs. ता। मोम । म | ratort पटि, (सी.) मधुरा 4()मीठी । अमे. ही। गना. मधुपम (पु.म.) मा Ev (r." (पु.) मधु (मा) । मस्ति मला "म (एका सर) मरा दुर्ग । अ ""IPE मानिस मौसा (ग। (मी रा मायमपर. 'हा) (गन्ना) आदि । मनोरर (माल) माय, (पु.मर video rai (पियारा) (पि.) गाए। पसार (Tr) mitr mr (पान) INT20 (पु.). हिमा ()() A पुस, (पु.) म्धुम व गो पसार समय बटर Orege HAVE MARK (नौ)। (3) APRIN । रिषभ (2.), रिरररररर रा, (.) माती तो मग er (*.) Error वाणिपिशरार. (पु.)प ( r) dि. (.) (m) fre २r (4rt-1(tt.) rint :मंता (5.) Rit i Chettrinar . - तेऽये" कुमारः मभ्यमलोक (पु.) कर्म० यिनी। (यह पातालोर/मन्, पूजा करना । म ायर करना-प्रार मध्यमसंग्रह, (पु.) कर्म । मरेकी श्रीको गुगन्धिवाली मन्, जामा-दिवा०मा० सम• अनिरामयो। माला, मूषण और वन्न मेजन एवं साने पीनेकी चीजोंसे मनःपति, (पु.) मनमः पतिः । मनमबर्ग मध्यमसाहन (पु.) कर्म• । रिचला साग (दिरी। मनःपून, (नि.) मनमा पतः। मनमें पकिर पाना। फेरना आदि।डोरगे कोई काम करना पांच मनादिला, (सी.) मन शन्दवाच्या सिमा लाल रंगश एक प्रगरका पातु (गे)। वितरिना निः" इति कुमारः।(5.). इस्मे । मन्दियप्रवर्तक भातरिविमा परिकस्यमा पतिता भंगाराम भाधार, ग्यायमनमें पाशानका साधनine मनमा, (श्री. मन मसरामो मी माना। बागुरी भगिनी (बहन) मध्यतम्, (३७) मध्यतस्, (न०) मध्य+तगिन् । प्रथमा, फामी और मध्ययनिन्, (नि.) मये बर्न । सप्तमी के अर्थ वर्तमान मध्यशनका साथीच, यीवमें रहना है। यादिप्रतिवादी यार और मीच में, প্রণা দ্বিয় fং হয় । मायदेश, (पु.) कर्म। किसी चीजका गीचका माग। करनेहारा । अपने को न सिर मर । हिमालय और विन्ध्य पर्वतका यीच, गुरुक्षेत्र अर्थको गम्पादन करनेहाग । काम (बिनशन ) से पहिले और प्रयाग (थलाहाबाद ) के (मध्यस्थ)। यीचमें पड़ा । मुस्मिक. पविकी ओर "मध्यदेश" कहा है। एक देश. मध्यन्दिन, (न.)मध्यं दिनस्य । धडा समा० । दिनका मध्यस्थ, (पु.) मये तिष्ठति । स्या- है। मान्यवनीं । उदासीन । "माध्यस्पन धीच । मायाह (दुपहिर). मध्यम, (नि.) मध्ये मयः।म। मध्यमव । बीचमें हुआ। मध्या, (त्री० ) नियां टार । थीचका । विचला । सात खरोंमें पांच खर (मुर) एक छन्द । नायिका विशेष । मध्यमा म (पु.) अंगुल. मध्यमपदलोपिन्, (पु.) मध्यमपदस्य लोपः अस्ति अस्यानि । जिसके यीचमें आये पदका लोप होना मध्यान, (पु.) मयं सः । एइ. स. ए है । व्याकरण में प्रगिद्ध "शासपाथिय" (शाकप्रियः बहादेश। तीन भागमें बाँटेग्य दिनयर पार्थिवः ) आदि समार विशेष. पांच भागमें वांटेहुए दिनका तीसरा भार ( मध्यमपाण्डय, (पु० ) कम० ( पहिटै और पिछडे दोनों मायालय, (पु.) मधुना ( पुष्परसैन ) दुपहिर । कुनुकाल. के बीच होनेसे ) अर्जुन । विचला पाण्डका पुत्र. मध्यमभृतक, (पु.) कर्म । “मध्यमस्तु कृपीवल:" मधु (दाग) पृहके फूलों के रस बार खेती करनेवाला नीकर । किसान. (राय). स्वर्गलोकके बीच में है)। "मध्यमखोकपालः" इति रघुः। पर० सेट् । मनति. पीचका लोक. मन्, यहंकार करना । अक. पु. आ० थमीमनत. मध्यमवयस्क, (त्रि.) मध्यमवयः यस्य । मध्यम (बीचकी) भायु (उमर)वाला । माटी (सामी) मन्, योप-जाना । तना० ० सह. अवस्थावाला. सोम दिसाना । मध्यम (नीमा पकानारूप ) विवाद, निक)। विष्णूका नाम दिना सोचे काम करना) दूपरेके का? आदिको परका : (गजा) गिंए (पु.). मायमा, (बी.) मध्यम रजरका नारी । वह खी हिनिमे महीनेशन (रज पूल ) याचुका हो। यीची मनस्, (२.) मन्यने अनेन । अंगुली । रमठ यादिरी कणिका (m)। हस्यमें टम बमरी थादिम एकप्रकारकी वाणी। एक यसनेवाला भीतरराइविय। (स प्रारी घी (औरत) माविष. .मध्यमादरण, (न.) बीजगणितमें प्रसिद्ध अयक्ष (माम दम) मान (मारतानेहारी गगना । मंछ. (). माणपत्र, (पु.) मपं यंत्रः। एशिगवद् गमा। एटर निसीप भएर भाषण पत्री. । सेद। निष्ट मनी चिन्तन कियागया। हमें हम मनमा 1] (१५) [मन्त्रदर्शिन, । मनके पुलाव .., (पु.) मनगि आयो । मन्+ । रासगीका | मनोपाहिन्, (वि.) मनः पहाति। मनको पकानेवाला । पने भाए। मनमें उपसता है। कामदेव । "मनो भार्पण करनेवाला. यही भई है. मनोजय, (त्रि.) जु+अन् । मनोजवं येगवत् नमनाय दाय, (पु.) मनाने शेने । भव वा माह । मन. पम्मिन् । पिपुल्य । पिताके समान । "मनस व जयो सोना है। कामदेव । "मन" यही अर्थ होता है। यस" मनके समान है येग जिसरा । पो येगवाला । नधि (पी.) मनसः पतिः। मनपी रचना (दुनि (नि.) आगली जीभ (श्री.). मनोमवृद्धि, (पु.) मनोजस्य (कामस्य) पृद्धिर्यस्साय काय, (पु.) कृ+पम् । मनसः कारो म्यापारमेदः । ५. । कामदेव की पृषि (पती) होती है जिसे । तक पुरामें तापर होना । हिलका मुग पाहना. कामशिक्ष. मनोग, (त्रि.) मनो जानाति (ज्ञापयति) पोधनाय ताप, (पु.) मनरावापः (अनुतापः)। मन प्रवणीकरोति अन्तर्भाषितष्पर्षे मा+क। मनको जताता पना । मनदी पीडा. है वा समानेको झुकाता है। मनोहर । मनको रोंयने- स्थन्, (नि.) प्ररास्ते मनः अस्ति मस । असा वाला । गुन्दर । मन शिला । मदिरा (बी.). नदइसका । प्रशमनराअच्छे मनवाला "चिनि" ना । परिन्त । पदे दिलवाला । गोपाल | मनोभय, (पु. ) मनगि भवति । भू अन् । मन में होता हैं । कामदेव । “मनोज" "मनोभू" इत्यादि-यही अर्थ. 'सरमनामी पशु" (पु.)। "बीलिमे ही होता है" दे दिलवाली अपदा मगर (महंकार करनेवाली) | मनोरथ, (पु. ) मन एव रथ. अत्र । मनरा रथ इस वा । रोरत । दाना अपया धर्मात्मा श्री । दुर्गाका भाम । मनही है प यहाँ । मनका मानों रमाइला । बदकी मा. त्याहिस. एक, (पम्य• ) ईपन् (थोडा ) । मन्द ( पीरे)। मनोरम, (नि.) मनो रमयति । रम्+पिन् । भन्-उप. गोशासा. मनको प्रसन्न कर्ता है। मनोहर । गुन्दर । गोरोचना । थी, (सी.) मनोः पनौ । या को-और य । | मनोहर, (वि.) मनो हरति (मदर्शनाय ) अप् । (खी.). नुकीली. अपने देराने के लिये मनको सेंचता है। रुचिर । मुन्दर । ति, (नि.) या• मन्+क । ज्ञात । जानाहा. मनोहर । कुंदका प्रम (पु.)। सोना (म.). पा, (सी.) गर । मनरा ईपा । - । धुद्धि। माज, मार्जन-पोग्ना । सक• । वनिनाद करना-अक. प्रकिल । इच्चा । चाह । रामप्त । सयाल । (वेदमें) पूत (गीत). भा• पर• सेट् । ममति । अमजीत. मन्तु, (पु.) मन्+कुराट्च । अपराध । कसूर । मनुष्य पिन्, (पु.) मनीरा अति असहनि । मनीषा- भादमी । और प्रजापति (प्रजाका मालिक). बगला । पण्डित । युधियुक्त । फिलवाला (पि.). मन्त्र, (पु.) मत्रिग । गुप्तभाषण । छिपाहुआ बोलना। , (बी.) मन+उ । मनुशी स्त्री। एक प्रजापति । गलाह । देवता भादिको सिद्ध करनेके लिये तत्रादि- धर्मशान के बनानेवाला । भौर खयम्भु (ममा ) से उत्पन्न में कहाहुभा शमविशेष । वेदका हिरमह. हुआ मुनि (पु.). मन्त्रपुराल, (त्रि.) मने पलः । उपदेश (राला) (अ, (पु.) मनो ( सायम्भुवातं.) जायते । नन्। देनेमें चतुर (पिआना). मनु भा । मनुष्य मन्त्रजित (पु.) मत्र एा जिा (आस्वादनसाधनं) प्य, (बु.) गनोरपत्यं । यर एन । मनमी संता. अस । मन्त्रही है जीभ (साद सेनेका साधन )जिसकी। न । मानय । मनुष्पी जाति । नियां जाती गप्. भमि ( आग)। ( मन्त्र दियेहुए हरिको छेता है). यधर्मन्, (पु.) मनुष्यस्य इस धर्मो मस्य ( मरवाहन- मप्रस, (नि.) मत्र जानातिहास- मनोभे- खात्)। भनिन् समा• । नरवाहन (भनुयोर माने हारा । धुविकरावा । उपदेश देनेवाला । नेक सलाह- हारा) होनेसे मनुष्य के समान है धर्म जिराका । कुबेर । देनेवाला. धनराजा. मन्त्रणं णा, (न• श्री.) मत्रयुद् । मन विचार । गोगन, (वि.) मनः गतं । मनमें गया हुभा । मनमें सला । उपदेशा. रहनेवाग । मनगा। इसमें घिरा हुआ। भीतरका । मन्त्रदर्शिन्, (वि.) मन्त्रं पायति । पदके सूत्रों (गीतों) गुम । विहुमा. कोरेसनेवाघ्यावंदरो भली मान्ति माहाराण. - (गृह) या मर्दित, (त्रि.) चु• मृद्धका भूणित । मलागया। पीसा-मलधारिन्, (पु.) मलं धारयति । मलको पत्र महीना । सूर्य की संचान्तिसे पर शरा (पडधा) अमावास्यातक बन्दमाधमपीकर अधिकमास । बढाहुआ महीना लादरामया. भर्मश(त्रि.) मर्म जानाति । लिपीहुई यातको जाग्नेवाला । मलय, (पु.) मल कयन् । दक्षिणमें एड (1 उपवन (छोटावन)। नन्दनवन । नाभीवनात मलयस, (न.) मलये (पर्वते)जायते । मलय पदाइ उपजता चंदनामा मलाफपिन्, (पु.) मतं भाकीमत मलारि, (पु.) मलम (jati कायु सर्वधायच्याएरता महरसख, ( .j मरत्सख, (पु.) मरुतः (वायोः) सखा (टच्) । मर्मस्पृश, (नि.) मर्म ( प्राणस्थानं ) स्ट यायुका मित्र । इन्द्र । अग्नि (भाग)। और चित्रक किन् । जो जीवन के स्थानको हता है । मः मामी दवाका वृक्ष. मर्मपीडक. मरुदान्दोल, (न०) मतं आन्दोलयति अनेन+करणे | मर्या, (सर०) प्रियते ( अवशिष्यते ) का? घम् । हवा (वायु) को हिलाता है इस्से । व्यजन। यत् । सीमा । हद्द । (स्त्रीलिज भी होता है)।' पा. यत्" मनुष्य (पु.). -मरुदिए, (पु. ) मरुतां (देवानां ) इष्टः । देवताओंका मर्यादा, (स्त्री. ) मर्यायां ( सीमाया ) दीपडे । पियारा । गुग्गुल । गुग्गुलु. अच् । परि आदीयते वा। परि आम्दाइ । मरभू, (पु.)७२० । मरुभूमियंत्र। मारवाड देश । "प" को "म" । न्याय्यपथस्थिति ।। कर्म । निर्जलभू । जलरहित पृथिवी. (उचित-इन्साफयाले ) मार्गमें रहना । सीना । मरुस्थलं-स्थली, (न० वी०) मरोः स्थलं । निजल और कूल । तट. प्रदेश (जंगल) का स्थान । मारवाडकी भूमि. मल, ति-पकडना-कावूकरना । भ्वा० मा• . मर्क, गति । जाना । पर० सक० सेट् । मर्कति । अमीत. मलते। अमलिट. मर्कट, (पु. ) म अटन् । वानर । वंदर। कर्णनाभ । मल, (पु.) मृज्यते (शोभ्यते ) मृजयी मकही । एक पक्षी. जो (प्रायश्चित्तद्वारा) साफ किया जाता है मर्फटीजाल, (न. ) छन्दोमन्थमें एक प्रस्ताव जिसमें (गुनाह) । पुरीष । विष्टा ( लघु और गुरुके विचारको जाने के लिये एक चक्र. कियाजाता है। लोहे आदिका मल । कलंक । भर्फर, (पु.) गर्व+अरच् । भृङ्गराज वृक्ष । भांड। याँझ वसन हुआ पसीना और श्लेष्म ( खखार) यादि औरत (स्त्री). कृपण । स्म । वात पित्त और कफ । मैल. मर्त, महण (पकडना ) ७० उभ० सक० सेट् । मर्चयति- मलम, (पु.) मलं ( विष्ठा ) हन्ति ( रेचयति ) अममर्चव-त. का मलको खाली करनेवाला । शाल्मलीन मत, (पु.) मक्वन् । मनुष्य । और पृथिवीका लोक । "मलहा" यही अर्थ. "वहाँहुआ" यत् । “मर्त्यः" मनुष्य. मलद्राचिन् , (पु० ) मलं द्रावयति ( रेग्याति)।।। मर्दन, (न.) मृत्यु । गात्रपादादिसंवाहन । मुट्टी णिच-अण् । मलको पिघलाता है। चापी करना । चूर्णन । पूरा करना । पीसना । मलना. गोटा. मर्थ, गति । भ्वा० पर० एक० सेट् । मर्यति । अमर्यात्, मलमास, (पु. कमलः (दुष्टः ) माम' ) मैप ( मर्मछिद्-भिद्-छदिन्-मेदिन, (नि.) माणि शिनत्ति जीवनस्थान (जिगर) को काटनेवाला । जोडोंकी जगहको • पारनेवाला. दुसरेकी निवं बातोंको जामेदारा. चंदन उपजता है। उस पर्वतके पागल मर्मस (पु.) मर्म जानाति । हा+क । तत्वश । छिपी- हुई बातको जानेदारा। दाना । रहसके पानेद्वारा । ऋषभदेवका एक पुत्र "मर्म गित" यही अर्थ, ममन, (न.) ग+मनिन् । जीवनस्थान । जोनी जगह। मथिस्थान । जोड़ों की जगह। और तात्पर्य । मतलव । मई मागाभ्या• पर• सक• पेट् । मबंधी । अम. चाराला पाजा. ममंद(पु.) मान-मर च । घरों और एमोरी HTT(III) मामाला (मो.). जयपाल - (हवा) (पु.)। उस देशमै उपा (२०). मलावरोध, (5) मलय ::

(१४) की दाल. श। नरम. राय, (पु.) मलस्य भारायः । मलके रहनेघ स्थान । मसिधान, (न.) मसिः घीयते अत्राधारे युद् । पेट. जहाँ स्याही गली जाती है। पात । दात (श्री.) लेन, (नि.) मल+अत्यथै इनव् । मलयुक्त । मैल. भी होता है। बी. वाला । मला । दूषित । और माता नि "मली" मसिपण्य, (.) मसिः (तदुपलक्षितं अक्षर) एवं यही अर्थ । मुहागा. पथ्यं (विक्रय ) यस्य । स्याहीसे पहिचानाहुगा अक्षरही 'लेनमुप, (पु.) मलिन मुरां यस । जिसका मैला जिसका सौदा है। लेरानोपजीविन् ।लिसनेकी जीविका मुरा है। बहि (भाग) । उराका पहिले धूमओ करनेहारा । मुनशी । गायू. होनेसे काला मुष होता है । और पानर (मंदर)। मसूरा, (बी.) मस्मरन् । मसूर । मसूर ( मसरी) क्रूर (बेरहम ) और भीय (त्रि.). लिम्लुच, (पु.) मली (मरिसकर्मानहत्वेन दुष्टः मसूरिका, (श्री) मसूरेवाइवा कन् । फनी (पूपरे सन् म्लोचति (गच्चति) म्युच्+ । बेदमें कहेहुए। पुरुषों के साथ पराई त्रियों को मिलानेपाली भौरत)। पेच. काँके अयोग्य दोनेसे पलाजाना है अर्थात् इसमें ककी बीमारी. शुभ कार्य न हो सके। मलमास । वायु (हवा)। भरण, (त्रि.) मग-कण । सिग्ध । चिकना । और मक- अमि (भाग) और तरकर (चोर ). लीमस, (नि.) मलईमराच् । मलिन । मैला । लोहा. (मस्क, गति । जाना । भ्या. पर० भक० सेट् । भस्कार । लोपहत, (नि.) मलेन उपहतः । मलसे माराहुआ अमरिकर. (निगम हुआ). मस्कर, (पु.) मस्मरन् । वंश ( बोस)। काला ल, पति-पकना । भ्वा- भा. भक० सेट् । महते । योस । “भावे भर" गति (जाना) । और कान अमडिर. (जात्रा). ल, (पु.) मा अथ् । बाहुयुदकारक । भुगोसे मस्करिन्, (पु.) मस्करो (हानं ) गतिवस्ति अप लडाई करनेवाला । पहिलदान । बलवान । वर्तन । इनि । ज्ञान का विवाला । "मार (म मई) (पात्र ) । कपोल (गालगत ) । देशविशेष । जागी शीलं अस्प । मा++हनि" । जिसका सभार मधे विशेष. निषेध करनेका है। "मरकरमस्करिणी" इति नि। मलभू, (खी• ) महकीडनस्य (बाहुपुरस) योग्या म परिमाजका संन्यासी। विधिसे कर्मका परित्यागरनेवाला (स्यानम् )। भुजाओंसे लाई करनेके टायक जगह । भिY (फीर-साध)। भौर पन्द्रमा । पदि. भयाला एकदेश । पहिलवानों (पो) के सहने की जगह मराज, मान (नहाना )• पर• • भनिन । ममाति। मसयुद्ध, (-).। पहिलवानों की साई । पाहु. अमाहीत् । ममः. मस्तक, (म.) मगरू । मलक (माया) । उप मालार, (पु.) माद इस ऋषि । अन् । पहिल. (ऊंचा ) (त्रि.)। भौर पीर (सहारन्) बानकी तरह पाता है। रागविशेष ! एक रागिणी। मस्तक (8.) ६ त• । माको चिरना । बसन्तरागरी रागिनी । मेपरागी रागिनी. शिर स्थित मया । गिरफी मजा (पीके सहपमें A- मलिही,(श्री.) मा इन-वा दी । महिला (मालती- माई)। मनिका (मगर) की बेल )। महायाँ बन् । एक प्रकारका ईस (जिराध मस्तमूलक, (न• ) मस्तस्य मूलं हर (कर्ड छन् ) । शरीर गाय और बोच एवं धरण सास होते हैं). मापेशी मानों ना है। शिरोधरा। सिरको रटानेटरी मथ, पनि । आवास करना । षोध परना। सर. गर्दन । गम. पर लेट् । मशति । मममीत्-अमासीत. मस्तिष, (न.) मसारिन् । मति (परिशीने) मशक, (पु.) मए पुन् । एक प्रकारका पी। मच्छर. मुपति मुगी (सानासि पृ. । मस्य. मशि-सी, (सी.) मश (ग)मन् पा रोप् । पत्र मेहकर पा । मापेमें बने सम्पप एक पाई। तिरानेरासस्थाही वाई. मापामारना । भ्या.पर.सा. सेट् । मी । म मख, (न. मरारपिनमा दिदापारी पीदा ममापीद मरही. मर, परिणाम-गरसना-परना गरिमाण-मापना । दि. प.मा, पूरा करना । मा. प. प. से। माती। A. सेरामस्पीभमगत् । कमसीन कम होन अमी. पर."

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(११) [मदा-महावारणी, नाद, (पु.) महन् नादः अस्य । जिसका बम पद महाप्रसाद, (पु.)मा प्रसाद । प्रसन्नता-पुशी । विष्णु है। गा (हाथी)। गर्जन्मेघ । गाजने (गबने वाला भादि देवताओंको निवेदन कियाहुआ । देवनैवेद्य (देव. बादल । सिंह (शेर)। और ऊंट. ताको निवेदन कर प्रसाद लेना उचित है). निद्रा, (सी.) कर्म । बरी नींद । मरण । मान । महाप्राण, (पु.) महान् (बहुकालस्थायिला ) भेष्टः प्राणः (इसमें फिर नाहिं उटते). भस्य । (बहुन समयतक रहनेसे) जिसका प्राण बहुत हानिशा, (श्री.)ी रात । रात्रिके बीचले दो पहिर. भया है। द्रोण नामी एक प्रकारका काया। कर्म । हानुभाव, (पु.) महान् अनुभाव' भाशयो पल । धारके उधारण (बोलना) करनेका मान प्रयाविशेष भिसका मन आशय (सयाल) हो। महाराय । नेक. (एक प्रकारका बाहिरमे हुआ यन-कोशिश). हापथ, (पु.) कर्म । गा मार्ग । राजमार्ग । राजा | महाफल, (पु.) महत (पत्रापेक्षया) वृक्षर फलं अस्य । राहक । बरी सडक । हिमालयके उत्तरमें स्वर्गके चानेका पत्तरी अपेक्षा (मनिस्वत) जिसका फल यहा हो। बिल्व- रक्ष (बिल्वका दररत) इन्दवारुणी (खी.). दापना, (पु.) कर्म• । आठ नागों से एक । एक नाग | महायल, (पु.) महत् पतं यस्य । जिसका बा पल (स)। धेरका खजाना (निधि)। अयुन छोटी (जोर) है। वायु (हवा) और बुर (अवतार)। संख्या । एक पाम परी गिन्ती (संख्या)। उस संख्या मलवाला (नि.) "महत एवं यस्मात्" ५५ । सीसक बाला। एक राजा. (सीमा) (२.). “हापातक, (न.) बडा पातक (पाप)। प्रमहरया। महायागु, (त्रि.) महान् बाहुः यस्य । मुगा (ब) मामणको मारना) मुरापान (शराबका पीना) स्तेय पालाशकिमान् । ताकतमंद. (चोरी करना ) गुगनागम (गुरुकी पीके साथ संभोग | महामायण, (पु.) महान् प्रानणः । बडा वा शिक्षित करना ) और इन चारों के साथ भेल परना (तत्संसर्ग) ये ब्राह्मण । नीच या निन्दाके योग्य मानण. पाँच "महापातक" हैं. महाभाग, (त्रि.) महान् भागः यस्य । बरे भाग्यवाला। हापुराण, (म.) सटि आदि ग्यारह लक्षणोंवाला प्यास भाग्यशर । धन्य । बडा दौलतमन्द. मुनिका रमहुआ पुगणविशेष महाभागयत, (न.) महत् भागवतम् । बा भागार। हापुरष, (पु.) कर्म• । बा पुष । गुरयेध । देवता- अहारहमेसे एक पुराण. सीमें बहुन भन्दा । भौर नारायण । “वदे महापुरुष ! ते महाभारत, (पु.म.) "किसी समय सम्पूर्ण देवता- चरणारविन्दं" इति भागवतम्. ओंने मिलकर सात मरहस्य चारों पैदों और भारतको पदापूजा, (बी.) मदती पूजा ।बरी पूरा । विशेष अवस. तोलकर देखा तो यही सबसे अधिक (जियादा) मा रोपर श्रीगई सास पूजा. तमीसे इमा नाम "महामारते (बा भारत)" मा। "महापृछ, (पु.) महत घट यस । बडी ऊंची पीठवाला। भ्यास देवका रपाहुमा शख भोरका एक अन्य. महाभाष्य, (न.) महद भाष्यम् । बा भाप्य (पारया)। महाप्रतीहार, (I.) महान् प्रतीहारः । मुख्य द्वारपाल । पाणिनीके सूत्रोपर पतञ्जलि मुनिकी बीमास्था. साम दान. महामीता, (खी.) कर्मालबालता (एनेहीसे मार महाप्रपञ्च (पु.) महान् प्रपथः । बा पिसा । बगे जानी है इस्से बहुत रनेवाली है) ।बहुत राहुभा दुनियो । बा जगत्, (वि.). महाप्रभु, (पु.) मदान् प्रभुः।रासामी. महाभूत, (म.) कर्म• 1 की पारपसरप होनेसे मोटे महाप्रलय, (पु.) में ही प्रलय । "प्रमोदिनावणाने हो गये बडे पृथिवी, पल, वेग, पायु और शाम ये जायमानः सर्वभूतक्षयः प्रलय." (प्रथा एर दिन परि भूत बाभूत (नि.). समाप्त हो जानेपर उपमहुआ पम्पूर्ण भूतोवा मारा अलर | मदामर, (नि.) महान् मरः यस । हुन मन ६) "तस्यैव मानेन शतपावसाने हायमानस्तु महान् (मतदारा) दोगया। मामल प्रलय." (उसी के अपने मापसे एक सौ वर्ष बीत जानेपर | महामनर, (नि.) मार रहार मनः (तारा) उपमहुमा महाप्रलय होता है)बह समय कि जब उर. असा जिसके मनय व्यापार बा महार। बेहुए पदार्थो भी आम नहि रहना । अथवा रह तुला दिला दिलर पियार पाल कि जब उपरनेलायर भारका अधिकरण (अवलय महा-मायारणी, (बी.) एभरका योग । निगर, भासरा)ोई नह। दीन करा नाच । प्राय एक शभियानक, एभ कोममदिन यमरारे में त्रयोदशी. उष्ट्राट - सावरित. ।

4(1) Net - विदारताना(Her: महागगन (3.). Unre (२.) महामहोगन्याय, (5.) महान महान् गया। महाराज-()क, (पु.) मान पार (RTI) मगे सिर । पर पृ.इस वारदो सौ र विमगरीर निरो जाती है. महामार, (वि.) गुनगा बहुत महाराणी, (सी.) मानी । (स) रानी । राजारी मुस शाने पर। मान मादी देश महा- महारात्रि, (बी• ) " सम्म करते करने पाररानेका होता है उसेही महाराधि गो।" महाभार । राप्रमै भाभीसा ! महामाया(2.)। बस्मिन् सत्यममो नारमा माया । और भारी महाराष्ट्र (पू. ) . महादेव है। सारे जग रग महारोग, (I.) . और एक प्रभारी को (सी.) है। जाम महा अविधा (R) दुर्गा । "महा- मदारीद्र (नि.) मा रोज 1 मा भाउ रोग (बीमारिमा)। माITTE रे जगर"tी. (+) मामी । की मार (मौत ) महारय, (.) रोः मयंकभन्। ४. -श्री (सी.) दुर्गा माम. IATीमारी. -..).IERR(भूगी IT कविशेष. महार्य, (.) महान् ः (मी) (..) rti को मारा। कामोतोबडे मोलामा प. (..) (5) 74। गर महाप, (पु.)THE महालय, (पु.) मन (मारित) TT (:.10tो बीता। माना है) मलय (1) rr(:.11..)... एक पासा)(न.) :) wrir (wnो सनो TIME. (14. It Samrore(NRNir जहा पूपयापरमामा गमे Imat.MART-44.(en), महाप(7.)मा 34/244011*मनगी मादागा,(4.).101144 Man tranRTrirat-m १ कामा पूर्ण कारो मानहानeet (i) meltmas . + Tariyar एमा (पु.) नावि अवीचि (सुसं) यत्र । कर्मः। महादयिस, (न.) महा हविः । बडा हविः। शुद्ध महि । सुससे रहित । एक नरक. किया हुआ मक्खन । पी. (पु.) कर्म । बा बहादुर । गाड । हनुमा- महि-ही, (सी.) महान् वा हो । पृथिवी । मालप. (शेर)। महकी अग्नि (आग) । वन । देशमें एक नरी ( मही). । कोकिल (कोइल) । धनुर्धर (तिरंदाज ). महिका, (श्री. ) मद्यते । महाकन् । हिम । पर्फ. (पु.)4. बरे वीर्यवाला (त्रि.). महिन्, (पु.) महतो भावः । महाव । बडापन पडाई। (पु.) कर्म । सी पीमारी । महारोग ईश्वरका एक ऐश्वर्य । भाट रिद्धिों में से एक. दि). म(मि)हिर, (पु.) मह ( मिह) फिरच् । सूर्य । सूरज. ते, (सी.) कर्म• । वेदमें "भूः" "भुवः" महि(६)ला, (सी.) महालच् । योषित् । औरत । तीन मन्त्र स्त्री। प्रियजुलता । रेणुका नामी गंपका द्रव्य । मत्ता घी। (न.) कर्म । दुष्टरण। यश जराम । यहाफोडा. मल औरन । "महेला". (न.) कर्म।। अतिशयनन । पावन । शर- महिप, (पु.) मह+टिपच् । अपने नामसे प्रसिद्ध एक दुर्गापूजा आदि । सारह वर्षका एक प्रत. पशु । भैसा । महिपामुर (भैसेके स्वरूपका एक देत्य) । ,(पु.) मद्दती फिः यम्य । पदी शक्तिवाला। राजाकी कृताभिषेका (जिसका राजाके साथ अभिषेक कार्तिकेय. हुआ) खी। महिषजातिरी स्त्री । भोर एक औषध (पु.) कर्म । तत्रमें एक प्रकारको जप. (वाई). जो मनुष्योकी खोपदीसे बनाई जाती है । कान महिषायज, (पु.) महिष पजः (चिह-वाहनत्वेन) पके पीचकी हड्डी । बडा शंस । “पाण्; दध्मी अस्य । जिसकी सवारी भैसा है । यमराज । "महिप- "इति गीता. वाहन" यही अर्थ. (पु.) कर्म• । राजधतूरा । यदा धूर्त (नि.). महिषमर्दिनी, (खी.) महिषं ( महिपामुर) महाति । (त्रि.) महान् शन्दः यस्य । पडे शब्द (भा- मृद्+णिनि+गी। त। महिपको मल गलती है। पाला. दुर्गामेद । एक देवी. (नि.) महान् ( उदारः) भाशयः यस्य । बडे महिषासुर, (पु.) रम्भनामी दैत्यसे महिषी उत्पन्न ला । महानुभावः । दिलावर । फैयाज । साहिय. कियागया एक दैत्य । महिषनामी गुग्गुल. (पु.) महती पाला यस । बडी शालावाला। महीक्षित्, (पु.) महीं क्षयते (ईटे)। क्षि-ऐश्वर्यहा. री हस्थ. मत करना । किप्-नुक्न । पिवीपर हमा (आमा) न, (त्रि.) महत् शासन यस्य । बरी भाशा कर्ता है। नृप । राजा. ) पाला । बगो दाक्तिवाला ।- (न• ) सरिकी | मदीज, (म.) मया जायते । जन् ! पृपिपीसे उप- जता है। भाईका अदरका माटनामी मह। और नर. (पु.)पर्म मामीर (अहीर) बमशन । कामुर (पु.). नि, (न.) कर्म• बासी । यहाँ सम्पूर्ण एक | महीभ, (पु.) महीं पारयति । । पृथिवीको धारण त सब जीयोकी फिर उत्पत्ति न होने के लिये पर्ता है। पर्वत (पहाड) अन् । “महीघर" यही अर्ष. साधार होनेसे ऐसा रहा है।पज मसान. महीप्राचीर, (न.) मह्याः प्राचीर स (भावरकरदात्)। 1, (पु.) महान् भयणः । पुरदेवषा नाम । पृथिवीका मानो प्राचौर (सफोल) है (क्योंकि यह यासी. एपिवीको विहुए है)। समुद्र । समुंदर. (बी.) कर्म । पाश्चिन (अरस्) Ex-महीभृत्, (७०) महाँ विमति (पारसति-पालना) अटमी. भ+पि। पृथिवीधे धारण ा पालन गर्दा है। परंत पिन, (न.) कर्म•एक प्रत जो सात दिनमें (पहार) और राजा. होता है। महीयस, (वि.) अतिसयेन महान् । मारम। (पु.) महसी सेना वस्य । बार्तिकेय (जिमनी पति महान् । गुता महतो महीयान" भुदि. ना है)। बी सेनाका अधिपति (मालिक) महीयमान, (नि.) महीयते । मदीदा - ). नम् । पूजापूरकर सुरक्षाा भेट.

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, - न्य, (न.) माल एव मरलाय हितं पाप्यम् । "मा" शिवजी के साथ रहनेवाली माठ माताएँ (मी. ल पा मालके लिये दिनवारी । और महलका माहेश्वरी यादो-धाराही मेधावीमारी-चामुण्डा और शकि चन । मलाई के लिये उपहारी. का)। जननी (माँ)। पृयिवी। मिमी । लक्ष्मी । का, (-)मझम्युल् । मक्षिामाती. रेवनी । न्दवारणी । चटामांसी । यसपाटमें गिर re, (न.) मजिष्टया रक+अ । मजीटगे रंगाहुआ देवीची शषिये (बी.). ल रंग । उगपाला (नि.) मायका, (श्री.) माता दरबाय नमय। -(पु.) मन्+मरन् । टान्तादेशः । ततः साथै दाई । प्रवाणी भारि चण्डीमें प्रसिद देवकी मूनि । ।। सूर्यम्य पारिपार्न भनि भरण का । सूर्यका पारि- प्रकार आदि उधाम ४९वर्ण जिनमे सम्पूर्ण शब्द न. शिक (मामपाग एनेवाला) एक गण. जाने है। सर । मातृमान् माता । मा. प, (पु.) मनोः अपल+अण् । भल्पा पर्व भाप मात्याशु, (पु.) ६... । माला Y ("Tir. नरक मनुष्य । डोटी उमर भादमी । "साथै पन्"। पा पुत्रा मानुमांया हाः । सानुकानावर विकेया मागकपमाः" इसी ममें "मातृवान्या" भी होता. पीन, (त्रि.) माणवस्य इद+राम्। बालकाला । सकसम्बन्धी. माधमण्डलम्, (म.)मानुष मागसम्माया भ, (म.) माणवानो समूहः यत् । बालोका पमहः मातृयामल, (पु.) मा वागतः । माग किरा । (देविभो.) मण्डल (समूह). अफ्य, (२.) माणिरिय कायति ।वि।साथै राम् । कानियका एक माम. पिक लाल रंगका एक छिपकली. मावस्यय (श्री.) 6.मी भकिमी। बपन्ध-मन्य, (न.) मणियाय (मन्य) पर्यते भवः। "ममा समा" मामृप्या. । मणिबन्ध (मन्प) पहाडमै हुभा । संघव लवण । मातृप्यप्रेय, (पु.)मानुप्या मerimar धानोन. मीषा पुत्र । मसीका । "मनुष्य". पा(पु.) मतहम्य मुने भयम् +अ । पत्र हामी। मात्र,(म. मान् । सारस्प (ER) + प्रारी किरात (भील)ीजीपीपलका सादा मदारियामोमेंसे एक (बी.). अपधारणा (नियम) । लर (Nimirm। पोगा परिमाणमर पर red re रपिता (पी.) माता पिता पाइने मात्र मा. परने के समरपा(मगर). रादेशः । माता और पिता । पो मावरानर। हीरे तने समय त्व जानुमान (ोपत्रा). में. परभाग्यपबिओने art.. रिभ्यन् (पु.) मातरि (भाषा) N (ई- संत (सी.) । "#M Aur feer निन् । भटर मा• । भाषामे पता वि- मान्" विमे शिपयार -वायु (). दति। "मावासचमुबार लि.(पु.) मन ही । लाल । मतला तर नम् । मतली संतान । दका पारदी ( माशप्तक, (म.) देते होती बनेकाल). प्रकारानेर SENTER 7 () मामा । अनमी को । "favti Ru• मागण्न्दर-सत्त, (.) RIT (m. माता" : सरोक्ने समर) से पद रामद (पु.)मतिमामा । म मात्रामला, (2) मगर भद्र India । (पु.)मiता माल्प् । माना। माशा, (५.rai । तर . (विजय) सम्म fertis. (पु.) गजीएसए.. सदा (म) परमार, मास, (२.)TRATHI ..(नि.)स । पुEER - PARTNERMI"...

भागतो या. मीमांगते. - - (रोक ) होत 4 - पार ब्रह्माजीसे रचाहुआ एक प्रकारका सरोवर। कावा भ्रमरके समान। माधुकरी वृत्तिः।भ्रमरकी जीविका। मानसालय, (पु.) मानसःआलयः यसामनार (बीके निकट न जाना)अलब्धता (लालची। ब्रह्माके संकल्पसे उपजा एक तालाब। जिस निवास का है। हस ( इसका उमी सरोवरसे परी मानित, (त्रि.) मन्+ णित प्रतिष्ठित । आर। मानिन्, (त्रि.) मान्+इनि, मन+णिनि । करनेवाला । ध्यान करनेवाला। मानेवाला । हमा माप, (१) माथ, (पु.) मपापम् । पाया । गार्ग । रामा । बर मागग्य, (म.) म मां मन्थन । निलोना । रिडकना. रहना उदागी )ना । पर माथुर, (नि.) ममुरायो माः । मथुरायाः भागः ना। मीनगीमामा. मथुराका था मयुरारो भाया । मथुरानगरीभतः । सन) माकपल, (I.) मा । माली (भार) गमान विग मोम माद, (पु.) मद+यम् । दपं । महकार । गर । मोर हो। मान, मिनार काना भा• • • गुशी. मादक, (नि.) मादयति । मशिन्+। मर कर- मान्, पूनाना पा पुग- म पोम- वा है। मतवारा करनेवाला पदार्ग । "मारि" फर्नर मेट् । मानगरिने मानति । ममीमा "युन् । दात्यूह (पपीहा ) (पु.). मान, (न.) मागुन । परिमाण । म मादन, (न•) मादयति । मशिन्स्यु । सांग। लोग। गादिगे को माना। प्रमाग गीनका र कामदेव । और मदनक्ष (पु.)। विजया (मांग) किया। मनपन् । अनिमान गई घरसम्म (स्त्री.). মানা, (5) মালয় সন্মি: (কল माक्षःश (२), (नि.) मम र दर्शनं भरा + जिम्मे मान (इबल)का बंधन (रे सट विप् था। ममतुल्यदर्शन । जो मेरे समान दी. राधा गुनाह भूल। चूरू. सता है। मेरेसमान. मानरन्ध्रा, (श्री.) मानाय (कालना भाद्री, (स्त्री.) मदे भवा+मण् । मद्रदेशमें हुई। पा. यम्या । ममयके प्रमाणको जाय लिग दिन राजाकी दूसरी स्त्री (भारत)। और अतिविपर. दिया है। तामेका बनागुआ ऐकवाला समय भाद्रीनन्दन, (पु.) मायाः नन्दनः । मादीका प्यारा । मानय, (पु.) मनोरपत्य मण् । मनुष्य कारण एक प्रकारका घटीयन्त्र (धी). नकुल । सहदेव. माधय, (५०) माया धवः। लक्ष्मीका पति । नारायण। मानवधर्मशास्त्र, (न. ) मनुना प्रोकं धर्मग "मधु+खार्थेऽण्" वसन्त । बहार । “मधुने पुष्परसाय कहागया धर्मशास्त्र. मद्याय वा) हितः अण्"। वैशाराका महीना ( इसमें बहुत मानवराक्षस, (पु.) मानवः राक्षसः कर्म - फूल होते है इसलिये उनका रस निकालनेको हितकारी ध्यके खरूपमें राक्षस (दैत्य ). है ) मधूकरक्ष (महुआ)। इसके फूलोंसे मय (शराब) मानस, (न) मन एव+अण् । मन । दिल केला निकाली जाती है। "मधु बाहुल्येन अस्ति अस्याः अण्" जिसम्म बहुतायतसे मधु होता है। वासन्ती | मानसनत, (न.) मनसा कृतं मानसं । 4 लता (स्त्री) माधवीलता, (नी• ) बसन्ती भेल. सल (सच बोलना )। अस्तेय ( चोरी न करण) , माधुकर, (नि.)-री (स्त्री.)मधुकर अप भ्रमर (भौरों) भौंरा जैसे प्रत्येक कूलसे मधु शहतको इकट्ठा कर्ता वैसेही भिन्न २ द्वारसे प्राप्तकीगई भिक्षा. स्थान है। हंस. माधुर, (न०) मधु राति (भ्रमरेभ्यो ददाति ) ण+क-साथै मानसोक, (त्रि.) मानसं उत्कष्ठते। । अण् । भारोंके तई यहुत फूलका रस देता है। मलिकाका उत्कण्ठित (चाहवाला). फूल । मालती. मानसौकस्, (१०) मानस ओको यस्य । जो मानता माभ्य, (नि.) मध्य+अण् । मध्यम। वीचका । मध्यमै होनेवाला. माध्यन्दिन, (न.) मन्यन्दिनं एषमण् । मध्यमदिन । गया। इजन किया हुआ. दिनका वीचला भाग। कमजुर्वेदकी एक शासा. माध्यम, (नि.मी (स्त्री.) मध्यम अन् । बीचबारा । धीचा आना है. - त्रियां ठी, -- कियाहुआ दत। अहिंसा (किसी प्राणीको न भE . . मानमरोबर (१८५) [मागरधर, F (सी.) मान+हनि । फलीमा । और मान घर- मायापिन्, (नि.) माया अस्ति भर्थे शिनि । मापार ली (श्री). माया रचनेवाला । ऐन्दनानिक । मदारी । लिया. - (पु.) मनोरयं भण्-गुहय । मगुका । मानव माषिक, (नि.) माया भरित अन्य+न् । मा। दमी " ततो जातो त्रियो " मानुषी । मारी. मदारी । कारी. य, (न.) मनुष्यस भावः यत् । मनुष्यल । मागः | मायु, (पु.) मा+यु । देशस्थपित । शरीरका ATA न।आदमी. T, (२.) मन्दस भाषा+प्यम् । धीमापन । मुर्गपन । मायू, (न.) मयूराणो समूहः । तस्येदं या+अम् । मपूर- पन । रोग। धीमारी। धुराई । गुस्सी। न्यूनता । संप । मोरोभ समूह । मयूरगम्बन्धी । मोरवाला मी. (नि.) पाय, (पु.) मा (इन्द) पयति । धेच् । सूर्य- मार, (पु.) मृ+पम् । मारण । मान। "मारयति"। म+ सी राजाका नाम । पुवनावका पुन (हरके अपने गिच्+अच । मार लगा है। मामदेव । पिन । टसे निकला)। जब यह पेटसे पाहिर साया तो ऋषि परा. ने कहा " एष धास्पति " (किसे यह प्राशन करेगा), मारक, (पु.) मृ+गिन्+ण्वुल् । मुनिका बारे सी समय इन्द्रने स्वर्गसे भीपे आकर कहा कि "मो वन् दा। मारण । मारना। कतल परना। पति" (मुसे पान (दूध पीना) करेगा) तगीरी (पाज). एका ऐसा नाम हुआ. मारकस्थान, (पु.) मारने की जगह । अम्मरममे सात मय, (नि.)-बी (पी.) मन्मप+अण् । मन्मथ और दूसरा स्थान. हामदेव ) वाला था मन्मपरा । कामदेव (प्यारा ) मारण, (म) +गि युद् । मारना. मारि, (श्री.) + गिहम् । मरण करना। पार हुभा. "मारी"मांत बरा. य, (पु.) माम् पूजाकरमा+मपि यत् । पूल। पूजाके लायक मारिप, (पु.) रिदिगा । मलारना । निरutri "मा" शप्पक साप समागोता। मार मका, (नि.) मम इदं । भम्पद+वम् ममावेश । माग. (मार्य ) Anो निकारण करनेसे गला दो. कधी। मुशाये संबंध रानेवाला । मेराराम् । "मामीन". मारीय, (पु.)तामा राखी । मा या (स.) माम्य । नत्यं । पट । जादजाल मारतारमज, (पु.). ध ।। (मकर) एक प्रशारणा राक्षरा. मादिमियापुति(टेमघारणाएर प्रचारका और भीमसेन । "मी"म. अमान । पादया। दम्म ! पाए । मौ ! पुरी भापति, (पु.) मरतः भपरन् । पोस् माता (मा)। ईश्वरकी उपाधि । अपरितपटनराधिपा सक्कि (एक ऐसी तक जोम बन सपनेराली पाये मामा पाप बेटा. भी नारे) मार्कण्ड(पु.) मा बा.स. सतानाjire.in यारत् (पु.) मायर्या (दजालं) परोति ही अर्थ शिप्रा माल एपनेवाला । मदारी मीगर. यादेवीगुत, (पु.)..। मायादेवीन पुत्र । मार्ग, (पु.) अन्वेशण सारा सरर. उम• पक्षे म.. . हैद । रिसे। उरदेश मगी। ममार्गस । सररर" गयामयोग, (I.) या प्रयोग । म सिमीम••rir सामापरता | मार्ग,(पु.) --गरमा मायायोधिन्, () मने | Cust वारसाirt. पराग भार्ग, (.mi+wersपर। मायापयन, (.)माराया ICIRISM मदरासाचनमा - मायापार, (पु.) माया (एमागरा (SVER RAIN(). र) (मेरलेय एस म १). (ore) । . प.४१ मालाकार माला बनानेवाला। Riture"2124 मालिक, (पु.) माला (तभिर्माणं) nिi मालकार। माली। एक जानिए (आपराशरी गंगा) की प्रतिभा नही अमिशिसाक्ष दुरालभा (श्री.) मारि(वि.) र (तद्वादन नियं) अस्वय/मालिन्य, (न.) महिनम्य माप मारंच, (.) गोमंत्रः। सोमलपन। मृदय । परमादर, (पु.) मा (समी परेस) 1/11 मालेय, (वि.) मालायां मा+ xam- माल,(पु.) ममायां पत्र । एका मानिमालय, (न.) माला+Tumhar गुमल"या" Twin (R)माथेरies 0"" Ingrettes सीमा (क)। मुरre (: .rr(सम)ीज।मासि (1.)ी Mirmire मार्गशोधक,] (३८६) मार्गशोधक, (पु.) मार्गस्य शोधकः । मार्गका , संस्कार | मालतीपत्री, (स्त्री०) मालया इस पर (धफाई ) करनेवाला. पत्ता मालतीके समान हो । जलवत्री । मार्गस्थ, (त्रि.) भागे तिष्ठति । मार्गमें रहनेवाला। मालतीफल, (न०) मालयाः (तदनार पयिक मुसाफिर. जायफल. मार्गशिर । (५. ) मृगशिरेण युका पौर्णमासी+यण् । मालभारिफ, (त्रि.) मालागो मारो सा यत्र मासे । पुनः अण् । मृगशिर नक्षत्र- पहिले पदको हस हो जाता है। माल पाली पूर्णिमा । जिस महीनेमें वैसी पूर्णिमा हो। अगहन । मालय, (पु.) अवन्तिदेश (माया देस साहायण (मगर)। उसकी पूर्णिमा (स्त्री.). राग। भैरव रागनी स्त्री. मार्गित, (त्रि.) मार्ग+रू । अन्वेषित । तलाश कियागया। मालयाधीशः इन्द्रः-नृपतिः, (पु.) माया दंडागया. मालवदेशका राजा. मान, मार्बन-साफकरना । सक० ध्वनि-दाद करना-अक / मालविका, (त्री० ) माल भाडा गि पुरा• उम• सेट् । मार्जयति-ते । अममात्-त. त्यूही. मार्जन, (२०) मार्ज+त्युट् । पोंछकर साफ करना । स-मालाकार, (पु.) मालां करोति । FAI माला, (बी.) मल्मसंज्ञायां कर पात म्माजनी (बुहारी) (पी.). मार्जना, (ली. ) संस्कार । सफाई । एक प्रश्नरका माय मालादीप, (न. ) अलंकारमें अपनी है। माली । एक प्रकारका वर्णसंकर ( (वाजा) का शन्द. मानार-त,(पु.) गारन् । वा रस्य लः । विडाल। रिहा । " ततः संसायो कन्" मयूर । मोर. नानेवाला (त्रि.). माशांस(सी)य, (पु.) । माजर (स) साथै छ। मालिका, (ना.) माला इस छन् । मri, गुर+आस् । रस लयं या। विडाल । विद्या और शर मालतीको भेल । मोवाकरण । गदेशमा (पायावर्ग) कापसोधन । शरीरकी सफाई (म.). एक नरी। मुरा (शराब)। मार्जित, (पु.)मा+। दोभित । साफ किमाहुआ। मारकी रमा या घटनी (जिमें दही, घी, मरिय, मालिन्, (पु.) माला (शि) म पल मादि पौने मिटा कारकी गुगंधि दी जाती है). मानण्ट (पु.) गते गाई भा+अश् । शक । मरेहुए। (नि.)। माडीकी पी (Aka) RS मोमें हुआ। पूर्व । भारका वृक्ष । शुकर । सूभर. मासिस (पु.) मतिच्या निर्मित+अ । मोसे बनाभा । परिपाला । गुग्नय। मीका (नि.). पनामलाजन. सोमदारटा. विश्व । कपिल्य. दुसरी र सरनेमे टिप निषल जाना. मारि, (20) मरिन् । छोधन । राम. पर अच्छीमाया बनानारा. मारा. (२.) मर-त् । 430 पन (खा)। गोडसाम पर (सं). मालदी (*.) (e)मा कालानि (देश) मनमानी। माएesi. । भनी। माला । "पाशाक्षमालिकाम्भोज " ही मन पादवाला एक इन्द। गौरी । पानगरी।। . मात्ययर, (f.) मायं मन बलायर () water (१७) । (पु.) मा महायाघम् । मोहिनेद (आप)। एक | माहाकुल, (त्रि.) महाउने भव भए । मनोका। माण (मागा)। एक प्रकार तोल । भूगं । एक यो पुलमें उपा। "स"। "महीन" ही करका रोग मो. अर्थ. र्थिक, (पु.) माघ (मापरिमितं स्वर्ण) यति | माहारम्य, (न.) महात्मनो भारम् । मान । छिनति-भादति) । वर्ष-काटनाग्युल् । रूपंधर महिमा । महत्त्व. उनार )। मागाभर मोना राट सेता है या पुरा लेना है. माहिप, (म.) महिप्या परम् अन् । महिती (भम) ग. ,(न.) माषाणां भान (क्षेत्र) राम् । जिय खेतमें बाप भादि " महिपम इदम् "+अन् माय र उपमते हो । मारमोहिमवनयोग्य क्षेत्रमा । भारि (वि.). सभ्यं" सी भर्य होता है. माहिष्मती, (पी.) एक नगरी । हर राम पर (पु.) माति (परिस्टिननि) खगरा कारम् । राजधानी समुन् । अपनी गति से समयको मार देता है। चन्द्र माविष्य, (पु.) महिन्या माय । विपने कप ६ । चन्द्रमा । पीय दिना समय । निगहिनामक शिवन्यागै टया पभा मेरार पटमहीना. माहेन्द्र, (पु.) मलम + A PETIRोनमें , (पु.)मा एव+भण् । चंद्रापदि । शिरिनात्मक महेन्द्र सम्बन्धी एक गमय (स) ल । धीरा दिन खमय । पद (गार-शावन बाद और की सी (सपी) (क) आपके मेदगे) पार प्रकारका रोला है । पान्द्रमाग । | माहेय, (पु.) | Mirmirera दीना । " मग-मापनापरणे पम्" मायाभर. समान । मंगल Ameri erm (23) बक, (पि.)ी (बी.) मागे भए +रम् । गो (m.). नागके नाथ संबन्ध रानेदाला । प्रत्येक महीने होनेवाला। मादेश्यर, (नि.) मटेर अगि जाग देने योग्य । भति । तनपाए. अण् । मरेपर (सिव पर nxn देय, (त्रि.) मारीन देय. । एक महीने में देनेलपर. पारिता (पिपि) " *मेर। रन, (म.) माए नयी नी । गोमराजीलता । PRERNO माग ((.).. कवेत. मधेश, (पु.) मागस्य प्रवेश । महीनेा प्रवेछ । मि, पेप-मरना • उभ• m. rinki.it ने । भामसत् । गम-. उर.(I. ) मम्-कापना+पम् । ग (परिमार्ण ) | मिष्ट, रप मरमः । • • ता. T+ । भचम मारपीरा । पापरणे (सए) | मित, (नि.) Rare Icer गम्त, (पु.) मगर (सौरप) पादस्यमा मन्तः । vieोसkar Irrinks: परामरामहरा भरगान माद। कान्ति (पए राशि परी जना). मितगम, (पु.16 (.. मादार, (पि.) आरती। महीने सम्मुर । मम Crust-। रबार तामा mirtickrt. रिक, (वि.) से भाम् । मनेगा। मित, (पु.) RArry. ये एRT मितपक (5.) there । ससा दिन बरनेसर(.) र पाएमा Eth... मीन, (वि.) recाएकाने पुरर मितभुन(f.)एर । महोत. रममे irr. पोरपासिमी, (6)हिरमितम्यापिर. (R) ke vf Rurt. TrER REntre स. (ER) Orika. मिति (4.)kr.nirmire ear. waer. In विप(reior star. Rit-kre .

देना । मिभ्यागता छठी नालिश । अभिन्युज+पम् । मिहिका, (बी.) मिक्कन् । भाRM मियामति, (श्री) निभ्याभूतस्य ममीः। मन+लिन्। मीट (त्रि.) म+का भूमिपूmr. मान, (पु.)भी+नाम" ११Cीमगानामा Pr निसानाम"Pram मानापा(m.) मोरस ( माधणामficti एमालtivitiews मित्र] (१८) मिनन, (नि.) मित्रं हन्ति । मित्रको मारनेवाला । मित्रत्री मिश्र-स, योजन-मिलाना । चुरा उन हासा करनेवाला. मिथ(स)यति-ते. मिश्यु, (पु.) मित्रं याति । या+कु । मित्रवत्सल। मिश्र, (नि.) मियाअन् । संयुत । मदा मिनका पियारा (भगला) पदमें आयाहुआ श्रेष्ठ (हा मिमलाम, (पु.) मित्राणां लाभः । मित्रों की प्राप्ति अर्धमें होता है। जैसे "आर्यमित्राः । (मिलाप). एक प्रकारका हायी । ज्योतिपमें कृतिम मिथ्, यप-मारना । मिलना । सक० भ्वा० उभ० सेट् । मेषति-ते. (तारा) का गण (समूह) (.) मिधस्, (अन्य ) मिथ्+अमुन् । रहसि । अकेले । एका- मिश्रकावण, (न. ) मिश्रकनामकं वन । (त्रि.). मतमें बापसमें. मिथिला, (श्री. ) मिथ्+कितन् । अपने नामसे प्रसिद्ध मिश्रव्यवहार, (पु.) ठीलापती मा और णल होता है । इन्द्रोयान एमा राजधानी तिरहुत । जनक राजाकी पुरी. मिथुन, (म.) मिध्वनन् । सी और पुरुष (जोडा-मदं (एक प्रकारकी गिनती). भोर औरत) । मेपसे तीसरी राशि । विषयके लिये मिए, सेयन-सींचना भ्या- पर. सेट् । दे। मिलना जोडा. "क्ला पेट्". मिथ्या, (अन्य ) मिथ्+क्यप् । अयथार्थ । जो ठीक महि। मिप्, पराभिभवेच्या-दूसरेको दबानेही इन गान अगलाठ. प० सक० सेट् । मिषति । अमेषीद. मिथ्यारष्टि, (सी.) अभ्या-सफल सापि अफलत्वेन हरिः । मिप, (२.) मिप्तक । एल । बहाना । | फलगाते पदार्थको भी फलरहित देसना । नास्तिकता। नासिरूपना । फलपाळे गी येदमें कहेहुए कर्मको फलर. | मिपिका, (पी.) मेषोकन् । जटामाडौ ।। दित जामा । भूल. की औषध. मिष्यानिरसन, (न. ) मस्या निरस्पतेऽनेन । निर्+ मिष्ट, (त्रि.) मिप्छ । हाल । सौरपर अम्। फेरना । करणे हयुद् । शपथ । कगमसरी । कराम सरकारहरना. (नि.). मिष्यामिपोग, (पु.) भिष्याभूतेन (भरारीन) गमि- | मिह रोचन-यना । भ्या पर• सा. योगः (रान्तिरे वेदनम्)। राजाके पारा रा रापाल अमिशत "गने मेराया देना है"म प्रहर झर बनाकर पालावरफ. परबाग सवाल करना. मिहिर, (पु.) मिहीरन् । सूर्य । भार मिष्यामिांगन, (म.) मियाभूनेन (भरात्येन) अमि. बादल (मेप)। वायु (सा) गगम् (पर) कटक । “ मूने मेरा गोना दिपकी राभास एक परिक्षत. भुपया पियाना. नियामिताप, (पु.) मियाभूनेन (भगोन) भिमी, मारना । बया. भ. स. (र. (भार)यारपारा कलंक (तोहमत). भमापौत् ।भमास । मौनः नयर निग्रम भूल । भोर में भरा जात्रा. मिद, राम पर ऐट माग, (३) in निदहरा... मितीमतौर। डि. शिदोरखा । म ९. ऐर ।। for-र (म)रा.प.भा. 11. कियाहुआ । मधुररस (मीरा रस) (3) मी, पप-मारना। दिवा. मा. भी . मीएम, (5.) मीतम ! मीनरेगन, (पु.) मारो बानी .

[मुरान, । का मोदी. FI, शम्दकरना । भक० जाना । सक. या• पर पेर। मुजफण्ट, (नि.) मुक्तः पयः पेन । सुढे गडेवाला। सीमति. उंची भाषण (विहार)। (म.) FORT नांसक, (5.) मीमांसा वेति-अपीते पा पुन् । भीमा (रोना) कुंचे. पाको मानता बापड़ता है। मीमामाशासो जाहारा | मुक्तकर, (पि.) मुखः परः येन । मुले पाल्य पर। मौर उसको पहनेहारा । "मान् साथै सन् गुल्"।परी गुला दिल । दानी. क्षमादान्तकारक । फैसला करनेवाला । पराल पर. मुक्तकेश, (वि.) मुख देश-देन । गुले लोग. नेवाला. मुकलन, (त्रि.) मुख लम्बा येन । निलंब । न 'मांसा, (सी.) मान्ममा सन्-य । विचारसे तत्त्वारा सामनेवाला निर्णय (फैसला) करना । उसे प्रतिपादन करनेहारा एक मुक्कामा (नि.) मुरुः गगो विपरागति देन । जिमने प्रकारका अंथ । म अन्यके दो भाग है (एक भाग पम्पूर्ण विषयों रंग दिया है। परमारंपरी धर्मको प्रतिपादन कर्ता है वह जेमिनिमुनिय स्वाहा (पु.). और पूर्वमीमांसा नामो प्रगिरदै । एवं दूसरा भाग मानविषयको निरूपण कता है और पेदान्त नामसे मिः | मुक्तहस्त, (मि:) मुक (दानाय प्रणारित, महती यार )मो पेन । जिगने देने ये ना है यह म्यारादेवने वर्णन किया है)। वियर । इनाफ। परीक्षा दिया भपाद रोका नहिं । इरानल 17 देने. निमेष-मौटना-मंदारना (अंगा कासा) भ्या. बाठा । पयास. पर. अकपेट् । मौली । मोटीद, मुका, (श्री.) एन्ज पोपीमो रिकता र सन (न.) मील+त्यु । मुरण । वंदकरना । मीटना । शिमोहना. मुक्तात्मन्, (नि.) एकमा पस (इपरतो) गोलित, (नि.) मोल्न । बाकुट । म पिलाहुमा । एटे हुए भामागला मोशमामा. सिदामा. मुक्तामर, (बी.) ytो । प्र+र+सी।६। वि, दोना । दीभवन । भ्या• पर• भक० सेट् । मी. पति (सीपी). जिसमीदीत मुस्तापाल, (म.) पुषण फारसी नुर, (पु.) मोचपति भीवान् । बप गुप-छ। महेश । लवादापाल । सीताल। र (पूर) परा महादेव. बनायारा भरिप्रधान मुपु (.) मु.पृ. """"। मोक्ष । पुट- मुक्तापटी, (को०) मुपाया भारती (RA.). पारा। उत्सर्ग लाग. भोसर, पायात्रा गुरय पन्थ. गुट, (पु.) मटि-सिरोभूषण । सररा देवर। भुवस्फोट, (पु.की.) ( fa):। गुरुवर सोर। मोदीपुरमा मुकुन्द, (पु.) मी.। एम् । मोक्ष मुक्ति, (मी.) 5हिन् । बर। ए पो देता है। वि. अपनसे रहिवरोगा। माके मेने भसगस गुबुम, (भार.) निषांप रस निRATE समाधि. निति (ऐगा इसमामा रिस) मुपुर, (पु.) भजि हरप् । पृ. पण ।। व (भरे जवान मर) पास HITRE ( II)। AT. भामरेराने सन. पक्ष मालतीरात. मुण, (२.) पन्५ परे । गुकुल, (पु.३.) मरिन पृ. tunet " एमctre पडीगारीर (दिम)भामा (R). भारति() NR सप र मादित, (२) पालतम् । जिसमें सरप (B) परसे निराश ( MERI साईरिस लिया Irit (ध) PRON (Ethe गुर(पि.) गुपका (भा) म)स) Ire जिप दुरारारोपात (गर) बा. गुप्ताक (पु.) एशि मुरा, (पु.) एलरबर र भापती Adi अगरसे (0) is RET A TE पाय(पि.) एerst- वाम.

a (घी) टाप. नाई. रामदेवर जटा देनमें मुगनिमा भाग मुरल (न.) गिनी.".. गुदा (सा.)माMike मुसनिरीक्षक, (३९) मुखनिरीक्षक, (त्रि.) मुरां (इतरवदनं) निरीक्षते+मुचुकुन्द, (पु.) मुस्+कुः मुनुः कुन्द म्वत् । सलस । बालसी । मुस्ख । वह " यदि दूसरा फूलोंवाला वृक्ष । एक राजा. अपना काम करेगा तो मैं नहिं करंण" इस आशयसे दूस-मुन्न, शब्द करना-अकः । साफ करना-सः ।। रेके मुखो देशताहुआ अपने काममें नहि लगता. पक्षे भ्वा० पर० सेट् । मोजयति-ते । मेरो। मुखपूरण, (न०) मुसं पूरयति । पूर+त्यु । गण्डूपमित भी इसी अर्थमें" मुजयति-ते । मुभी। जल । चुटभर पानी । मुसको भरदेता है. अमुधीत. मुखभूपण, (न.) मुसं भूपयति । भूत्यु । मुखको । मुअ, (पु.) मुजि+अच् । मुंज । एक NT' सजदिता है । ताम्बूल । पान. जिस्से रस्सी बनाई जाती है. मुखर, (वि.) मुसं (मुराव्यापार-कथनं ) राति (आ- मुइ, केशादिच्छेद । वालोंका काटना और कह (र- दते-करोति ) रा+क । जो कह डालता है। अप्रियवादी भ्वा० सक० सेट्-इदित् । मुन्नति । अनुकर कावा बोटनेवाला । अप्रवादी । आगे बोलनेवाला । - मुण्ड, (पु• न०) मुक्किमपि एन् । मन्दा रल । कोआ। और शंस. मत्या । सिर । एक देल । नापित (नाई। मुखरित, (त्रि.) मुसर व आचरति । मुरार+कि+क। (शारण और पत्रविहीन) वृक्ष (पु.) धन्दायमान । शन्द करनेवाला. (नि०) (मूंडाहुआ)। महाभाभी मुसलागल, (पु.) मुरा लागलं इव भूमिविदारक यस्स। जिगका मुष हलकी नाई पृथिवीको फाडनेवाला है। मुण्डक, (पु.) मुण्डयति । मुडिर' सुधर सूअर. मुख्यालम, (पु.), ता दाडिमा । अनारका दस्त) मुण्डन, (न.) मुडि+माये स्युर । के(' (इसका फल मुराहो पियारा लगता है)। मुराका कटवाना । वपन | मुंडधाना । मुना. पिसारा (नि.) मुसयास, (पु.) मुरां पारायसी (गरभीकरोति }+अम् । मुण्डफल, (पु.) मुण्ई शिर र फले भन्य मुरायो मुगन्धिाटा कती है । गंपतृण । कर्पूर । काफर. मुण्डिन्, (पु.) मुण्टयति । मुकिसिमले फल शिरकीनाई हो । मारियेल । मारिकेत बरे मुरायासन, (७.) मुगं पारायति । पाशिरयु । मुराको वाला । नापित । नाई। नौमा. गुर्गपाला (हार) कता है । भन्दा गंध । उग. पर (दि.). मद्, ह (एसी करना) मा.मा.. देते। अमोरिट. मुखप्रादान, (:) विधा++प्युट् । ६ . । मुरा- मुद्-दा, (प्रो.) मुदामि वा था । गरम । मुरा सोहनापलाना. घाममाण धावप मुखशोधन, (२०) मुम चोधयति । सुध+पिच्यु । मुदिर, (पु.) मुनिरन् । मेष (13) मुनो देता है। दालचीनी । कारस (कोटा (बागी ) (नि.) रस)(5.). मुद्रा (पु.) मुहागरलेन । मंग । एक मुखमार, (I.) at a g । T• । मुसा | मुहार, (२) मुरं गिरति । P10 राररानी मुराने बाहुश्रा पानी. लनी । मोइली । दुरगर । फूलों का १८ (3 मुसाति, (3.) म एव स्नुि हानेन दादक. है।गरी भाग, रोग। बना नृग (पाग)। मुख्य, (f.) ममे (म) मद यत् । वारि हुमा । प्रियाग यागावर मात RELI (मक्षा). द्वार.(नि.) । देश । म मोहर (भंगी। १.रावर । एक PRETIRTH मथाhiTerest घर rint.४.१९. मन्द। hiram गदापत्र, (..)Emother हत .

हिम, [ मुटिवन्ध, - . . - " राक्षस, (न•) मुश्या प्रातः राक्षसः पस्मिन्-तार मुरज, (पु.) मुरात् (वेष्टनात) जायते । जन् । पटक बिभेदोपचारातामासः । विशारादत्तरा रचाहुआ घेरनेसे उपजता है। मृदंग । एक प्रकारका बाजा । किनाटका सुचेरकी नी । (नियो टा) गतिपि, (सी.) मुद्रपा लिपिः । पाच प्रकारके लिए- मुररिपु, (पु.) ६.। मुरदैलगा पातु । विष्णु । "पुरारी" मेमे एक । एपके अक्षर. "मुरमपन". इंफा, (स्त्री.) मुदेव । शुदा वा मुदा पाकन् । सोने या | मुरला, (स्त्री.)मरे साति । ला । नर्मदा नी । एक- चोरीय पनामा अंगुलिमें स्थित अंकोंके साधन करने. पाना । मुरली । सरी. अफ एक पदार्थ । मोहर । रूपया. मुरलीधर, (पु.) मुरली धरति । अन् । श्रीकृष्ण । देत, (त्रि.) मुदा जाला भसदतम् । प्रकाशित । "मुरलीवादन". r हिपहुभा । अंक्ति । पराामा. मुर्छ, मोहमूछित होना । मधहोना । यद्धि-बढना । मू. रा, (अन्य ) निम्या । हठ । फायदा । प्या. सर्पति । अमूच्छीत् । भावे । मून । मूछिनम्. -ने, (पु.) मन्+इन्-पृ• उत्तम् । ऋषि । पविप्रपुर । | मुर्मुर, (पु.) मुरक । पृ. द्वित्वम् । नुपानि । तुम (तोह)- सैत । मकासतिगालामारा। बुद। पाणिनि । की माग । कंद । कामदेव । और सूर्यका घोडा. "जिसका मन दुरा पाउस महिं होता, मुसमे जिग- मुश(सोली, (स्त्री.) मुमुन् या अनुक्-पृ. "प" को रो पानादि, पाराना, भय, और क्रोधसे रहित, स्थिर. "" । सालामूली, मुमलीदवाई । मृदगोधिका । युभिवाला मुनि होताहे" स्थिरचित्त भोर विषय बार छिपकली (निन् ) । पलराम (पु.). मासे रहित जम (ये मनु, भनि, विष्णु, हारीत आदि | मुए, जन्छन् (लूटना)। श्या• पर० विक० सेट् । मु. हैं)।राप्त संख्या। सातकी गिनती. गाति । थमोपीत. नित्रयम्, (न.) मुनीना असम् । तीन मुनि (पाणिनि- मुप-(स-श-)ल, (पु.) म+कलन्।. । पस्य वा सः (शः) पालायन-पतप्रलि. था। अयोप्र । जिसके भागे लोहा लगाहुआ होता है ऐसा निपुदय, (पु.) (मुनिषु पुशव:) मुनिओंमें थान भादि कूटनेका राभन । एक पक्ष । मोहला मुंगली. प्रसिद्ध पावस मुनि. | मुपित, (नि.) मप्+क । अपहनासजन । चुराया हुआ। निभेषज, (न• ) मुनीनां मैगज हर । मुनिओंकी मानों वह जन कि जिसकी चोरी होगई। दवाई है। हरीतकी (हीर)। भगल मुनि । पुछ मुष्क, (पु.) मुस्कर । पुरुषका विझविशेष । अस्कोप । पताल । घण्टापाइलनामी पतरकर चोर । मोटा. 'निवृत्ति, (नि.) मुनीना सिः यस । मुनिओंधी जी. | मुफशून्य, (पु.) ३त. पण (पताल) से रहित । पिका । मुनिकी मान्ति जीवनका निर्वाह करनेवाला. राजाओं के अत पुर (जनानाने ) रसवाय । सोजा । 'सुनीन्द्र (पु.) मुनिः इन्द्रस । मुनि मानो इन्द्र है। नपुंसक. पुरदेव । त-पिश्रेष्ठ । मुनियों में बहुत मा. मुष्टि, (पु.श्री) मुकिन् । पापानि । पाहुना हाय। उन्या, (बी.) तालकमें प्रसिद्ध जन्मके वर्षसे टेकर एक मुसी। पल (चार तोले)म परिमाण (मार) किन् । १पर्ष । लासे एक राशिरा अन्तर (फरक ) इसी चुराना (स्त्री.). ।। अर्धमें "मुथहा". मुरामुष्टि, (अन्य ) मिपो मुसिदारकरणम् । बापरामें मुन्पन्न, (न.) मुनियोग्यं भाम् । मुनिओं के लायक अम। मुसीओंने लडना. । मीवार पन्दादि सारके पावन्द आदि. मुश्कि, (पु.) मुना मासीक स राजाका एक मुमुच, (नि.) मोकुं इतः । मुसन्+ । मोक्षरी मात्र (पहिलपान) "मुशिमोपणं प्रयोजन सम्ब"न् । इटावाला । जो संसारसे घटना पाहता है। पति (पु.). मुरना जिसका माला । सकार । मुनार. 'मुमचान, (पु.) मच्+फान-पृ. दीपः । मेघ (गदल). मुटिकान्तक, (पु.) (द.। पलदेव (य मुक्षित समर्प, (नि.) म इच्छु । मसन् । भामसमरण । दलको मारनेसे ऐसा नाम). ओ मरने की इच्चासे पा है । जिराधी मौत नजीक है. मुगिन्धय, (पु.) मुटं पति । समुन् र । बी. मुर, बैटन । पेरटेना। मु. पर. सका सेट् । मुरति ।. पीता है। बालकापबा. मोरीन, | मुएिपन्य, (पु.) मुभो पत्र । महामो दी तो मुर, (पु.) मुर+क। एक २२ । बेन । परना । एक है। संप्रद । जमा करना । . "मन" गन्धदाय ।त्रियो टाप. मुहिधाधना. नसाना. Ank मशीनोकानीमुnिmarg गर पणिमयमा "UNT मुग, (३९२) मुस-(प-श) लिन्, (पु.) मुम (५) (स) समस्त्वये मूर्धन्य, (नि.) भू भार पर पनि बतदेव । पतग्रन. जात । मायेमें उपजा। "कर, मुस्त, (पु.) (सी.) मुस्ताथन् । मोवे टाप् । मुसक। वर्ण (पु.). मोया । वनविशेष मूर्धन, (पु.) म+कनिन्-र । मलार मुह, मोह चित्त्य । अनुप होना । दि. उभ• पक सेट् । म्र्धयेष्टन, (न.) मूर्धा येष्टस्ते अनेक मुपति । सवार। मोहिदा । मोरया । मोडा. द्वारा (शिर) लपेटा जाता है। मुहिर, (पु.) रिन् । सामदेव । मूर्स । रु. मूर्धाभिषिक्त, (पु.) म अभिनय मुहम्, (म.) पन-पुन्य । पारवार. अभिषेक कियाहुआ। राजीता ket मुहनं, (दु.न.) हुस-धनुको "मुद" का भागम राजा । वर्णसेकर । एडजकी। मो. रोता है । करह शग मापन समय दिला हा मर्या, (स्त्री.) +अन् । भाने बने भग। नियूनाधिक पटिकापरूप काल। योडासा फम पजिवामा दोषी पायोडासा समय। मूल, प्रतिष्ठा । कायम होना । लिया। परममिन्दार । ज्योतिषी (5.). मा• उम• अक• सेट् । ममीसे।। म.-मनाया- भा. सा. सेट् । माते । समविष्ट. | मूल, रोपण । लगाना । पुरा. भ. nik मुर(5.) मम मादी । एदला दीन। यतिते. Manी। गंगा (पि.). मूल, (२.) मूल । शिका (njita) मूड, (.)। मूर्ग पर मा। एक। निIN ( पेजोंगे दहाभा स्न) IN गूलधन (पंजी) । मन्तिा (म) माना (:.) Tro+गुम् । “गर (भाग)। पाय । पिपली मूल । रीमा नादुमा रागान प्राप्त होता है, मन्य । उभीसा न (N.). REntनाबही जाती है" गए मूगर, (म.) गूग+संशया SHARE म. (जा)। पी (गका माप भी माना एस.)। मोद। बेहोसी । भाग- गुणकर्मन्, (म.) मून ( भन्ने एकिना) : Audोमाग होती दशा । करणारिक । गन्ना (SH करतेने का काम । पहिला काम (R) Fritrim न्। गुट । मठ, (म. ) मन (TAN भकिन(f.) मालम् । मुम्वाला। जगमाला (1.). मूलनि, (श्री.) मा (मा) ए.(f.) । न । मूला। समानाप्रमाint, CAREमपीसन, मि, देवगाही or करें (*),५८। र In मुलायान, (.) Finant परममा ( मुलाया...' TA teri kerayभाषा (| प.) 2.4G(R.) Hin":{"tit sirriran":. C + (Tr} (११) [ मगाशी, (न.) मूलाय (पटादिकारणतन्वादये ) इदं यत् । मृगनेत्रा, (सी.) मृगः (मृगशिरोनक्षत्रं) ने व ने के लिये दियागया धन । मोल । कीमत । मुत्र. (प्रकाशक) पत्र (रात्रिषु)। जिन रात्रिओंमें मृग- एण्ठन । घटना । भ्वा० पर• सक० सेट् । भूषति । शिर तारा आपकी तरह प्रकाश कर्ता है । मार्गशिरकी षीत. रात्रिये । हरिणके समान चपल नेत्रोंवाली सी (औरत). :,(पु.) (सी.) मूग्युन् । प्रीत्वे टाप् । बा | मृगपति, (पु.) । त•1 गृगाणा (पशूनां ) पतिः । बम् । मूगा । आ । उन्दुरु. पशुओं का मालिक । सिंह (शेर)। " मृगेन्द्र" आदि इसी भर्यमें है. क. (पु.) मुकिन् । उन्गुरु । मूमा । पूआ. , (बी.) मूत्रणीम् । गोने आदिके पिलानेका मृगयन्धनी, (पी.) गूगो बध्यते अनया । बन्धात्युदर प् । जिस्से पशु यापलिया जाता है। पशुओंको पाँध- मा अटाली. नेका आल. पृति-मरना । तु. लट्, लोद, लह, विधिलिह, ठ, मृगमद, (पु.) मृगस्य मदः (गः ) यस्मात् । हरिणको लिंडमें भात्मनेपद और लकारों में परस्मैपद होता जिस्से अभिमान होता है। कस्तूरी. INT• अनिट् । प्रियते । अमृत । ममार । माति । मृगया, (स्त्री० ) मृगं याति अनया। या+क । जिस्से पीर. पशुपर झपटता है। शिकार । हेर । भाखेटक. पड, (पु.) मुनिविशेष । एक मुनिका नाम. मृगयु, (पु.) मृग+अति अथे यु । हरिणवाला । प्रमा भन्वेषण। तालाशकरना। और मांगना।पु.भा. (हरिणके खरूपमें इसका सिर काटागया था)गाल क• सेट् । मृगयते । अमगत. (गीदड) भादि एक प्रकारका व्यापार । सिआर । व्याध । (पु.) मृगा। पशुमात्र । हरिण । एक हामी । शिवारी. अश्विनीसे पाँचवा नक्षत्र (तारा)। "मग्भावे अच्" | मृगराज, (पु.) मृगाणा (परनो) राणा । टच् । पशु- अन्वेषण (इंदना-तालारा करना)। मांगना । और एक ओंका राजा । सिंह (शेर) "मृगेण राजवे" अन् । बस । कस्तूरी । और मकर राशि (पु.). हरिणसे शोभता है। चन्द्रमा । चांद । “मृगार" गामिनी, (बी.) मृग व गश्चति । गम्+गिनि । "शशाट". मृगतुल्यगमनवदी । हरिणके रामान जानेहारी. मृगलक्षण, (पु.) गूगो लक्षणं यस्म । हरिण जिराका लक्षण (निशान ) है । चन्द्र । चाँद । मृगा"भादि. जीपन, (पु.) गर्ग (सन्मासादिभिः) जीवति । ओ पशुओंके मांस आदिसे जीता। व्याघ्र । शिकारी। मृगयधाजीय, (पु.) मृगवन भाजीवति । जीव+अन् । पशुओंको मारनेसे जिसका जीवन होता है। व्याध । शिधारी. णा, (बी.) मृग्युच्याए । नहुए द्रव्यका सो. मृगपादन, (पु.) मृगो वाहनं यस्य । हरिण जिसकी रावारी है। वायु। हवा। धावन् हरिणरस्थ" इति तृष्णा, (खी.) गुणार्णा तृप्णेव ( तृष्णाहेदलात् )। प्यानम्. मानो हरिणों की सालच है (लालचका कारण होनेसे)। मृगव्यथ, (न.) मृगान् म्यपवे मत्र । जिसमें पशुओंको सूर्य की किरणोंमें जलभ्रान्ति (पानीका सयाल होना)। पीडा पहुंचती है। मृगया । शिकार । अहेर. जलरहित देशमें दुरसे सूर्यकी किरणों को देख सृष्णारे मृगशाय, (पु.) मृगम्य शापा-पोतक । मृग (हरिण) पीरितहुए गगजलकी भ्रान्तिणे वार १ घूमते हैं परन्तु पानी नदि मिलता। निर्जल देशमै रैतपर गिरीहुई | मृगशिरस, (न• पु.) मृगस्य इव शिरः अस्य । जिसका किरण पानीका खयाल. चिर परिणके समान है। भभिनीसे पांचो तारा। शिका, (पु.) मृगं दाति । एल् । पशुको " मृगशिरा"" मृगशीर्षन्" "मृगशीर्ष" एण्ही भर्य. दसता है। कुकुर । कुत्ता. मृगयेष्ठ, (पु.) मृगेषु श्रेष्ठ । मृगोंने घेठ । सिंह शेर. गधूर्तक, (पु.) मृगे धर्तकः । पशुओंमें धूर्त ( रा. | मृगहन्, (पु.) मृगान् हन्ति । गगों से मारता है। व्याप चरा)भगाल। सियार गीदड, शिधारी. गनाभि, (पु.) मृगस्य नाभिः (नाभिजन्यः)। हरिण- मृगासी, (सी.) गृगस्य व भक्षि (पु) रस्य । की भाभि (धुमीसे उत्पम हुभा)स्तूरी । एक प्रकार पच् समागे । विसा पूल हरिपके समान है। हा परिण. विद्या हरिण एमान नेपाली श्री. " जीव ल्यु. जना। तालारा. " पय. ५० रणाशीच । शव (मुदो)। मरने की अपवित्रता। पातक.मुध, (न.) मृध्यते अत्रा का युद्ध लड़ाई। मृतवत्सा, (बी.) मृतो परसो यस्या ।जिसका पियारा मृथ, सर्शन (छूना)। प्रणिधान-सयाल करना (३९) मृगाण्डा, (सी.) गण (नति गगनी...) मागरिका) मायने । अन् । सोही मामी रहनेहारे मागके गोमे नाना है। करी. rana मोरोfri Tiram) गृगादन, (.) मृगान् भात। अस्तु । शुगर। छोटामेडिया । पशुओंगे राना है। "मणाला" शी मागा. (R) it मा हरि अर्थ है. मर निमोगिने मन र मृगाराति, (पु.) . पशुओंकाश pm हि । माना शेर । मेडिया. मृतिका (मो.) मृगायिध, (५.) मग विषयी। महिए। पहिलेको मृत्यु. (१.) गुरु! म । र वीर्घ होता है। पशुओं येधता है।न्या (बिहारी ). रियोग ( अलग होना) मर मरन मृगित, (नि.) मृगरू। भन्नेपित। साताशगा. काम. हुआ। मांगागया. मृत्युनाराक, (3.) मयुं नागपत। मृगेन्द्र, (I.) मृगः इन्द्र इव । पशुला भानों राजा है। (पारा)(गायन किया शुभका सिंह । और. पारा गृगुको नारा हना है ) मंत्र मृगेन्द्रघटक, (पु.) मृगेन्द्र इन हिंसमटर: (पक्षी)। शेरकी नाई हिंसा करनेवाला पी सैन । पान परिदा. मृत्लागा, (श्री.) । मृदा प्रसन्न प्रराम रतिया । पदुत मास मी । सुशन सुन, शोधन (साफकरना ) और (भूगग ) सजाना । वा । मृदु, क्षोद (भूगरना )। क्या. १० चुरा• उम• पक्षे पदा• सर. पेट् । माया-ते। गाति । अमदी. मार्टि । अमीमृजर-त-मममात्-त । ममाति अमाशीत मूद-दा, (मी. ) मयते । भुयते । मन अमृक्षत. मृदा" मी. भूजा, (सी० ) मजअड् । मार्जन । साफकरना. मृदमा (3.) मृद+मान् । कास्यनेद। मृद्, तोपण (प्रसन्न करना) । अया. और, दु. पर. सक० सेट् । मृड्णाति । मृति । अमडीत. मृदु, (नि.) मृद+कु। कोमल (नरम, मृड, (पु.), मृड्क। शिव । उसी पनी (सी.) वा सीप्" मृद्री-मृदुः। चित्रा, अनुराधा, कोप-आनुक्क्ष. रेवती तारे. मृण, हिंसा (मारना ) तु. ५० स० सेट् । मृणति । मृदुत्वच्-च, (पु.) मृदु वह लगा अमींद. जिसका छिलका मुलायम हो। भूर्जपत्र। भव मृणाल, (म० ) मृण+कालन् । कमलफूलकी डण्डीका सूत । मृदुमापिन्, (त्रि. ) मृदु भापते । कोमन और वीरणमूल । में । "मृणाती". मीठा ( मधुर ) बोलनेवाला. मृणालिन्, (पु.) मृणालं विद्यते अस्सलन् । “ मृणालं मृदुल, (न.) मृद् कुलय् । अल ( प ) ततः-समूहे-तधुक्तदेशे वा इनि"। कमलफूलकी (नरम) (त्रि.). उण्डीके सूतवाला। भवाला । विसताका मृदुस्पर्श, (नि.) मृदु स्पर्शः यस्य र कोमा समूह । और कमलोंवाला देश । कमलोंकी चेल (स्त्री.). सर्शवाला. मृत, (न.) मृ+भावे । मरण । मरना । उसके समान मृदुहृदय, (निः) मृदु हृदयं यस । दासको उपजानेहारा मागनेका व्यापार (याचितक वृत्ति). मृद्धीका (स्त्री) मृदुलायें ईछन् । शादी मृतक, (न.) मनेन (भरणेन) कायति । कैक । म- पीलीदाख. मृतकल्प, (नि.) दसमाप्तो मृतः । मृतकल्पप् । मुष, आदीभावगीलाहोना । मा० उभ० २१ मृतप्राय । मरनेवाला । मरनेपर आपहुंचा. मर्थति-ते. मही। . बाजा. (पानी (बेटा ) मरगया। मरीहुई सन्तानकाली स्त्री (औरत) और गो। "मृतवरसा च या नारी" इति तश्रम् . सक- अनिट् । मृशति । अमाशीत-अमाता - इओंने इसे "मृष्" ऐसा लिखा है.

- ( Tr (5.) ६.इन्द्रियावामीfg. माद्रि (पु.) मागत. 1) पकप्रत (प्रमा)। जनरोमाग इंग, (वि.) या है थे. रोयें सो गो है) रानभा. इंग्म्य, (पु.) () पी।किल न(नि.) गानगे धम्य । हाचित । प्रगट वर्मा है। रविभव मम गई जिमरा दिल है. दरम्पजननी, (श्री.) ६.gr (नि.) समागम यमः जिगई 'होगरे, मानों प्रगनाए हैं. हेदन, (२.)+तुर । भनि ". सकिन । धानन्द । ह (ग) न. दिया, (थी.) भगवा (मेडीबाग)ो। य.) । गंगोपन । बुलाना. """"tmtiभोरे :- नादर परना । भ्या• बा• मरदरते. एसमारदीया (मा)। " frari श्री.) पर निन् । f• I जिसमे मारणे उपाय बम" TEM. । बाण (दर)। आगदी शिण (2) Ren(ोटेक Afrre)r.rr. रण । हराएका ज । हाधन. १.मंदावभरेसि. पु. शुन् । पारण (गर)। अनुगिणीकiv) पोप, याप्य (पोहे देवा, एनेदारा) । भोर फल. it (अन्य ) बधन 1 Tr. रही.) देनाशयमानम् । हेरन । पारना, (E) IRELami . mtil पंग (Territer PR(नि.) हेतु नि मग । हेनुबाला। कालोबला बालापार्य । वि. हिम, (f.) । पग, (पु.) देशसभामागते । म "। मोना main ..... तो का आभाग । गागागपसी मी पदार्थ. है। भएका सामागग (दोष)हमम, (+ II win.....' पाप पोय प्रशासनानपार-पटना पाल). in (m)। दिनापिनाmaithiभी दोष सर (प.) पर रोती. हमपान. (R) : ......। PAR)गन् । रण (गोणा)। पर ITTER Eritra ...। का परिमाण (गा मोस)। गायोगा कर kiraftary (12)। 11.17 (रि)। "Naren...'' (पु.) ईय-समय भूपर्ण । पार्यो threath..) नागना बना है। गुरसार । गर. दिपादीन, (.) Hits। ..(पु.) हेमरपोरस । जिगीर- RTor its.." . पाएर पर नम:... (१) मिनिन् । स (1) vji राय, (I. Internet हिमाप. (..:) गुरमा पथ (र. REntretatr: पर (R) (im) रोल. (पु.) RE.(पु.)ti irrent म । (tt. Intere: are 10RATOPint. रोष, (..:- सम-सम.(..) एम् । ITRINATH होषित... " .... R. (MERIME "entrepartme.। द.irni.innar r Amittimirm । तस्पेदं पुनरण् । गुदाया। विनोसमें वरूपभेदने यह उनका पुन (gal मेराट,(.) मेरो पम्। मेहसी पीतामादितामगुन, (२.) मिनेन (HI) श्री भी गुस्यो राहुभा mret(m कम (यामें मात्र श्री और परमो मेला मिल्देशनमा मेपपिन्, (३९६) मेघापिन्, (पु.) मेघा अस्वयं विनि । अच्छी षकल- मेपाण्ड, (पु.) मेश्य भन्ड ए वाला । शुराग । तोतारशी । मेघावाला (त्रि.) त्रियां अंडाही जिसका भाड है। हन्द (ii और। "मेधावती". नाश होनेपर मेपहीका अंडर मेधातिथि, (पु.) मनु हितापर टीन करनेवाला । अह (पुराणमें). यदीका पिता. मेह, (पु.) मिह पम् । प्राय । शार मेधिर, (त्रि.) मेघा अस्व इरन् । मेघावाला । अच्छी विशेष । सुजारानी बीमारी । “अन्.. मुचिवाला। | मेहनी, (श्री.) मेहं इन्ति । नया मेधिष्ठ, (त्रि.) अविशयेन मेघावान् । इछन् । मतोर्नुस् । (हली)। इसी जड गीता रहार मार मुभिवादा जन । विसी न भूलनेवाली पुद्धि हो. बीमारी दूर हो जाती है यह और इस मेध्य, (नि.) मेम्पत् । पवित्र (पाक)। और शुचि | मेहन, (न.) मिद्यते धनेन । निमारने का (मा)। " मेयाय ( यज्ञाय) हिवः" जो यसके लिये लिंग । "कर्मम्मि ल्युत् " भूत (मा) उरथरी हो। मग (बारा)। सदिर (सैरकी लम्सी) मूत्रोत्सर्ग । मृतका छोडना । पेशाब करर. और दव (जो) (पु.) । केतकी । पुष्पी । मैत्र, (न.) मियो देवता भन्साभन्। रोनना (स.). मेनका(सी.) मि+नर । (सर्वेश्याभेद) एक प्रारकी "मित्रो देवता अस" "मित्रा मी वेग (जरी)। " मेनेर" छन् । हिमाल- श्री (भारत). अ " भनुराधा नक्षत्र (न.) मित्रसे पाया। मुहासन्धी (I.) मनशाममा, (सी.)। भेनकासी काकी । हिमा. भण् । मित्र । और माण. rani दुर्गा । पार्वती । " मेनागुता " यही भर्ष. मेनापरण, (पु.) मिथ पर मेना. (a) नि । दिमाज्यपत्री। पितरों की मनसे गयोः अपत्य भए । मित्र और कण - मेरपी (.) (मी)न्धवे । पम् । अगस्य । वरिष्ठ। । "मे गोमटनेमारे यमान साल हाय हो जाते है. मेर.(f.) मामिला था। परिमेय । मापनेलायक । मैत्रेय, मित्रायाः अपत्यद । मिriti मेर, (.) मि । म उनका एक पति मैथिली, (सी.) मिथिलाया भर (e) बारे काम। फलावावविशेष । पजी। सीता।" म सोमपा (ग) विशेष, देशका (पु.). रमा(.) मनुने ग्यापारमनु. मेटर,(f.) का मिलना । मिलान kटापन् । मग । मंड, मैनाक, (पु.) मनाया। मेटा (2.) किया। नीला " ए. मर्म मिना. र (प.) (मम) मा मई FrtaAM). भामा (ECR). #tram .rigina .(:.) res (r) • EARN ag। Nove nrwr (EHATNA । दोती "प्यम्" "मयं " इसी और पुखदेव मिपिनाया हम . मेरेय, (पु.) मिगपा ( मा...' - (२९) . - इराक, (नि.) मोदर न्युलअक । पुटकारा देनेवाला | मोनिकमर, (पु.) मासिमना गरः । मोतिओं पत्र (ला) करनेवाला. पार. गणं, (न.) (मोस्स्युर्+अन) मुशाग । पुन्टा मोत्री, (सो.) मुजय इसमन् । टिमुर । पमरण र देना पचाना | गांट खोलना. एन । तापी। विहरी जो बनी मेमटा (a) मेन, (नि.) मोइनिनिइन् । मोती इन्छा करने मौजीवन्ध (न), (I.) मा (मेनुकसाय पाला । गर्वथा (विलाल) एटाहुमा. यत्र । जिसमें दगी पिते है। सनराकर। (नि.) मईप-अचू-चा इत्वं । निरर्थक (वेसया यज्ञोपवीतही गम। "मोबन्ध उमः परं नाले Fr) और हीन (मोटा). रखा" इति स्मृति । तापीय पिना (म.)"दि स, (पु.) मुच्युल । मोक्ष (नजात ) । केटेग म.भीवन्धन" स्पति.. "कल (बदली)। कोर शोभाजन (पोजना )। वैराग्य | मादर, (न.) महम्य भार+प्यम् । महरना । । : पारा (वि.). टक, (न.) मुदगुल् । धार पितरों को देने के लिये मोहल्य, (पु.) मुटम्प पुनः अनन्यसम्रपटावे. टेटे दो शाके पो. द्वारा एक मुनि । महल मुनि र धायित, (न.) एक प्रकारको निओंधी अमिलाप माहीन, (म.) मन भरत क्षेत्र। मूंग . -(पाह) गोग्य नेत. -६,(पु.) मुद्रपिम् । हर्ष । नुपी. मीन, (म.) मुनेभारः । मुनिपना । मे दुक, (पु.) मोदयी। मुद्+मिन्दुल् । उसीडेता रदिन होना । "उपरे, मयुने, परप्रयाये, हमने। है। एक प्रभारमा साना (सायमेद) (मा) (स. भाने, भोगनवाले प पर मोगमायो"पुन. द्वा) Tकरनेवाला (वि.) एक प्रकारका दोगला | मानिन्, (नि.) मा भनि भनि Mt (हार). रहित जो मोज मदि पुरानेर मुनि (1.) दिनी, (मी.) मोदी । पुर+मि मिति । भ. मौरजिया (नि.) मुमान wिw.twitte मोदा बजवाइन I मEिE (मालती)। पूपिया रसूरी। पनीस । दाम गौर मदिरा [ मीय, (म.) मूर्तस्य यम् । पूर्ण mu. प.(पु.) मुणाति । मुरम् । पुराता है। जता मूर्मत तसर । धीर । चोर. | मीधी, (मी.) (1) Spiries गोषण, (म.) परस्युद। एन । दुटना दन । भूर्व बेलामा सरोकार पाटनमारना. गुण बिमान. द, (पु.) पम् । मूळ । बेहोसी । मान || मोल, (I.)ति : बायो com मेरामा प्रति (श्रम) 2 साधन (परम)। जाना मूबी समय भेदान्त भविधाएर ति । य सरीर भाषिजरा । पुरा से wift मा भभिमान । (ये मेरे सदनपर) (सन राम माति) dant. नोदादिल, (-) दस item भारी मोर chà sd stars". (गा-ममर) पाल। मोरपी पर. मोरि(पु.श्री.) मृग भएभरना मोहन, (पु.) मोहनी । गुर विस्मयु । पाग (. होरेषतः। Att()। होदा रदेशा) मा पररार मटा (बर ) और rI am (और) मोरो रनेदारा (वि.) (विदोप). (५.)। (..). मोदरात्रि (डी.) ने भाग (FN) मीसल, (.) MIRRrkariwar) पर परोपर एक प्राम के साथ नियर (2) मारो। ramभारोमामी. लोर।" Tre. मोटिन, (f.) Suffer । मेरमा Nex fa मागिल (.) 8.गो. मनिषाप्रपा(20)ke | re ORATEELAM.

. निवास करनेलाय वृक्ष वशक्षा बोडका म्लेच्छ, (पु.) म्लेच्छन् । अपशब्द (बुरा ववन) यक्षरात्रि, (त्रि.) यक्षप्रिया रात्रिः। यही रात । कार्तिककी पूर्णिमारात्रि। कार्तिक (कता) समान है अर्थात् धनका केवल रक्षक (रखा १) यक्षाणां आमलक समि म मोहन, (.) मह (triri) htt काम(4) Neem + I गुहाशमानदारे IT. *THratri नोजोमी 12. योग.(1.1 मा. (मसाग) र ३ (मन) मे सोना मा.पर .. मेरा मानती। rrr. पथ, मोजनमोरना । शान | पागलेसमुन. (म.)* साफ बोरगान आदि माना। मु... मगे मोग सेट् । प्रशासी रो. प्रक्षण, (२) मयुर । मैयोजन (जोदना )। Tara राधीकरण (करना) रोग। गैर मा पार मुगमन, म.पा. गा• मनिन (पर्सन). गीमा घ्रद्, सोर-भूरा करना-पीगना । ना. मा. ग. । प्रदभिमदिर. य, (पु.) | | । मा। ध्रदिमन्, (पु.) गोमांतः । गहमानन् । मागः । (जाना ) । मेरम (कार करना) aat मृदुत्व । कोमटान | माना. गा। (जाने)(नि.). प्रदिष्ठ, (त्रि.) शिरायेन मान् महादेगः । मन या. ( न. ) में (भगम) करो। फोमल । बहुत मुलायम मेयम पाीि (पाली)। डेय। नियमाण, (नि.) गुला• मा+शानन् । प्रायन । मागम मांगपिटालिनी ओर मारगर मराहुभासा । मरनेपर माया. जानेवारी एसी बीमारी. म्लान, (नि.) + । मलिन । मैला । म्लानियुक्त। यद, पूना करना । गु. मा. स. सैट् । । ग्लानिवाला जिराका यीय आय हो गुफा कमाया हुआ। हैरान । विषण्ण (पकामा)। राधा. यह, (पु.) यक्ष्यते ( यक्ष कर्मनि पर ग्लानि, (पी.) म्ला+फिन् । कान्तिाय । मटिन होना। एक प्रकारका देवता । उसका घर (मालिक)- मुरमा जाना. इन्दका घर. म्लानिः, (स्त्री० ) (म्लक्तिन्+नि ) उमलाना । शय | यसकर्दम, (पु.) यक्षप्रियः कर्दमः। होना । थकना । उदासहोना. कदम । “कमर, कस्तुरी, कार, चंदन कर म्लानु, (त्रि.) म्लनु । कुमलाया हुआ । पतला समभाग ( एक जितना ) मिलाहुआ केधा या होगया। थक गया. लिए, (न०) म्लेच्छ्। नि० । अविस्पष्ट वाक्य । यह वचन जो साफ नहिं । ऐसे वचनवाटा और सुरक्षा | यक्षधूप, (पु. ) यज्ञे (पूजने ) योग्यो । याहुभा (नि.). जो पूजनमें उचित है। सरस । धुना । एल म्लेच्छ्, अपशब्द ( पुरा वचन बोलना-साफ न बोलना-जंग- यक्षराज, (पु.) यक्षाणा राजा । उच् सभा लिओंके समान बोलना) वा नु• उभ• पक्षे भ्वा० पर० अक- सेट् । म्लेच्छयति-ते। म्लेच्छति. शोभता है । "यक्षराद". विगटी हुई बोली। "म्लेच्छो ह वा यदपशन्दः" इति काम करनेवाली कोम (पु.) पापरत (गुनाहगार) यावत्त, (पु.) यक्षेण वित्तः सदा (त्रि.) (किरात, शबर, पुलिंदादि)। हिहल (हींग) परन्तु कमी काममें नहीं लाता. म्लेच्छकन्द, (पु.) म्लेच्छप्रियः कन्दः । म्लेच्छोंका ! यक्षामलक, (न. पियारा कन्द (जड)। दशुन । लखन । पियाज. अययन. यक्षतरु, (पु.) यक्षाणां बायोग्यः वर । राजा । कुबेर । "यक्षेषु राजते" राज-किए । का फल.

ड , । जी, (बी.) (यक्षस्य पन्नी ) यक्षी स्त्री । कुवेरकी | यशान्त, (पु.) त । अवस्य । यही समाभिने का नाम है। दुगांची सेवामें रहनेवाली कोई बी. मान (न्हाना ) यहका शेप. नी, (बी.) यक्ष्माणं इन्ति । हन्-टक्की । | यक्षिक, (पु.) यज्ञ' (यहा) मान्यत्वेन अस्ति अस गीके रोगको नाश की है।दाक्षादारा। किसमिस. (टन)। पलाश । पलाशका दरल्ल (इसकी कहिये गन्, (पु.) यमनिन् । रोगमेद । एक प्रकारको यहमें काम आती है). मारी । मिर्गी. यशिय, (नि.) यहाय हितः।प। यहके लिये मला। देवताकी पूजा करना । दान देना और आदर करना। यज्ञके कामके लायक । दापरयुग (पु.). 'वा• उम• अनिट् । यजति-ते । भयाक्षीत् । अयट. -ति, (पु.) यज्+अतिन् । | यशियप्रदेश, (पु.).1 "यह काम करनेसायक एक प्रकारका याग देश । जिस देश सभावसे कृष्णसार (बिलाल काय) - यज्ञ)। “यजतिषु ये यजामहे" ति श्रुतिः. हरिण विचरता है"पद देश. -न, (पु.) ययुद् । होता आदिसे मन्त्र पढकर पनिमें घी आदि दालना । यज्ञ । साह्मणके एह कामासे | यनेयर, (पु.) यास्य प्रवर्तयिता ईश्वरः । यह पला- एक । “देवयजनः" देवताका यज्ञ करनेवाला (नि.). नेहारा विष्णु. मान, (.) यशानन् । होता (पुरोहित ) | यज्ञोपवीत, (न. ) यझेन सात उपवीतम् । यही पारिको नियोग करनेहारा । पूजा करनेवाला । यह संस्कार कियागया उपवीत । यागस । उपनयनका- आदिक करनेवाला. रसे पपिय कियाटुमा तिहरा उंचे याआल्य धेगे (येंद, (पु.) यजुर्ग (ऋवसामभिन्नानी मन्त्राणां) दहिनी इक्षिकी भोर एटकरा एक प्रकार पा। प्रतिपादको वेद । और सामसे मिस मन्त्राको जनेऊ. बतानेहारा वेद । बहस और कृष्णके भेदसे दो | यज्यन्, (I.) पभूने जानिए । विधिसे पहरानेसा. प्रकार है. य, यश-कोशिश करना मा. भा. भ. पेट् । रिटासी मुस्, (२.) यज्+उनि । ऋक् और सामसे मिह पद अनिट् । पतवे। भविष्ट -विभागसे रहित मन्त्रविशेष । यजुर्वेद. यत, (नि.) यय्+क । निरोध किया गया । स गया। (पु.) यज्+भावे । यह माप । किसी प्रकारकी तापमें रखा हुमा । माझा पता गया। मेटा. हुभा. तपशु, (. ) यज्ञका पशु (जिसकी यह बलियतर, (अन्य ) तमिल् । यम्पार । मिरगे । जाती है) । पोडा । साग । बकरा. हपुरुष, (पु.) यशस्पः पुरषः। यहखरप पुरष । यतम, (नि.) एका मध्ये स। पदमाम । मैले विष्णु सभूषण, (पु.) यह भूषयति । भूरगिन्+त्यु । शेवदर्भ । विशीशा. पतमानस, (वि.) पतं मान पैन । मनको तर. नेय योग्य, (पु.) यझे योग्यः । अम्बर (इसी सध्येि यममें काम मादी)।यहके लायक. पतमत, (वि.) मतं येन । नियम पालनेला शपाली, (पी.) यहाथी की। यह के लिये भेल । मत पालनेवाला । रापा एनेवाल। सोमलना. पत(त्रि.) मनोमध्ये वर । न रोदने सपरा, (पु.)यहरूपो बयः । पासाप पर। भादिवराह भगवान्गा अवतारविशेष. पतारमन, (वि.) : भामा समावेश सपाट, (पु.)ता। यहस्थान । यी जगह. पानेवाल।दियोको रोपाला. सूत्र, (म.) कार्य योग्य साया सुषं । म यति. (पु.) मते मेनगोल (पन्मय. बरका के लिये संपर रिमा। उपर। रणरो एनारिये रत्र है। यज्ञोपवीत । जनेऊ. म्यादी "सम्पले मित्र परिन्"atte शिस्थाणु, (पु.) बस स्थाणुः । बहर भा. सी। दोपब रेमो views सात (पु.) सभा (साधनस्पेन)अलि भर यो सय iिr (घर) (..).(m. भए । बम्पर (गूलर) सरि (और परल), समवेत रेप ) "ती" mir fre (नया मोर पत्तोसे २५ सम्पादर). सिद (दि.

यन्,ि1 जब. " . यन्त्रण, (न.) यत्रिनियमन पवाटि, (अम्ब.) अनुप्यम् । भानुमध्ये यम, मैगुन-भोगकरना। या... भगमन (n)MAHairs यतिन्, (पु.) यमनं-यतं । यम् क । यतं भनेन । इनि। यथोचित, ( अव्य.) उचितस अनतिन । जिसने इन्द्रियोंको दमन किया है। संन्यासी । परिवा न लांघना। औचित्य । ययायोग्य । । तक । विधवा ( बेवा-रेसी)(खी.). (नि.). यस, (पु.) यत्नत् । आयास । कोशिश । उद्योग। यद्, (त्रिः) सर्वनाम जो। यस्मात् (वित हिम्मत । शेषिकमें एक प्रारका गुण (जो प्रवृत्ति, यदा, (भव्य ) यान् । मस्मिन् कडे।। निति और जीवनयोनिमेसे तीन प्रकारका है)। वह "भारमा गुण है ऐसा नैयापिक कहते हैं । यदि, (अन्य ) यद् निन्-इन् पिलोर "चित्ता गुण है" सांस्य और वेदान्तिओंका मत है. जो। अगर यत्र, (अन्य ) यद्यत् । यस्मिन् । जिसमें । जहाँ. यदु, (पु.) ययातिराजाका ATTER सोचन-निकोडना । वा. चु० उम• पक्षे भ्वा० पर. श्रीकृष्णजीका अवतार हुआ)। "तसमे पक. सेट । इदित् । यत्रयति-ते। यति. बहुषु तस्य लस्। यदु के वंशमें हुआ पधा, (अन्य ) याप्रकारे थाल् । येन प्रकारेण । जिस (२०५०). तरह जिस प्रकारसे । जैसे. यदुनाथ, (पु.) यदुनो मायः। या यपाकाम, (अन्च.) कार्म अनतिकम्य । भव्ययी। करनेसे )। श्रीकृष्णदेव । “मापनि " दो इसके मनुगार । साचन्य । यपेटता । मरजीके मुआ.) यहच्छा, (सी.) यत्+II+अ-an किसाया बाहे. खरता । अपनी इचासे मवाना । साभार ययाकम, (अन्य) कमस भानुरूप्यं तस अनतिकमो | पहच्छासंवाद, (पु.) या सर साभपती मानुगार । निलसिलेवार. (अचानक ) बातचीत (गुप्त) पपासात, (वि.) जातं ( समयनिशेष ) अनतिकम्य यन्त, (पु.) यम्तन् । सारपि । पारी पर भग भनी भन् । जैसा पंदा हुआ और हाधीको पालनेवाला । संघमाज ( देश भर मीर । योहफ. रसराला (त्रि.). पपारच, (सप. :) तथा भगतिकम्य । गनतितो यन्त्र, (न.) यत्रि+अच् । रायमन ( रोहता) पाक निगममा जसा का होना आमन । ज्योतिषकको देखने का माvti ५.ना।" यथायथम्" इसी अर्प. पदार्थ कला ( कल ) । एक प्रकारका पण पार्य, (मा.) म मनीम्य । भव्ययी । म यत्रगृह (न)लपराते नि भारutterमरता । पाई । कान टूटना। पर। कोपा. सर" "गय । गथ (नि.). पपा (प.)मई (योग्यता) मननियम्य । अध्ययी। बचाना और बधन (बोधना)।" सगरमा माईये मन् । मसनादार्थ (नि.. (श्री.) गर पारंपर्ष, (पु.) यथा । यथायोग) वर्णयति । यन्त्रित 6) पत्र AREIN । यो वर्णन नां है।बर । ल । किया हुआबलिया गया। मगमा माद लगाया गया. थमदारादर मुक भयागौर पार, (र.) मा भनुम् । सम्पपी." यम, वारनिता मा. प. मा. agोपा. मी भयंमी. (w.) (स) स्तुं योग यम, (पु.) बम्पम् । मा Pएर म बोभाया ई. मद्रास या एक - . म. मट.(FRAN - Ist.. माग kranti *(i), Mar Gautan) शि.] [गोदर . । कोटि, (पु.ली.) संगसे पूर्वी ओर देवताओंसे | ययन, (पु.) यु+ । देश । उस देश के स्प्रेग .. याण कीपई पुरी. 4.1 वेग । गोर। बहुत जल्दी चलनेबल पेना। (त्रि.जि.प.) यमः (एदा, एकत्र गर्ने सह गोधूम । आधा जति । गुगर टेगवेगात्र २) सन् जायते । अन्हा एकही समयमें एक-गर्ममें (पि.). पर हुए दो) (). ययनप्रिय, (न.)तावनों का पिसारा । मरेर । एम, (पु.) यमस्य हमः । यमग पक्ष । यसरे वा. मिरच. के पास शाल्मली (सिंबल आरक्ष. पपनानी, (श्री.) नानो शिरि श्रीर-अद्वारा द्वितीया, (श्री.) ६. । कार्तिक (क) के यवनोंकी टिपि । नुरकोवा हायका दिया. अपक्षय दितीया (). ययनारि, (पु.) पवनम्र अरिः । सपना सन । दपि, (पु.) मुनिविशेष । एक प्रकार मुनि. धोरण पानी, (श्री. ) यमः पीयठे चम्याम् । यमका निवाग. पयनिका (श्री.) युदन्ति भयो । शुकापुर सरसन्। भाग मिलने।नातागनिहा स्थानासमी नगरी. न, (.) यम्युट् । पंधन । बांधना भोर हटना । एपनी, (खी.) युभयुदासी । पानी पम पर। पषनकी श्री. "यमयति यु" समराज (पु.). यमय (म.) पाशी प्रपं दम माना राज, (.) त.। (चौदह) योगा रागा। जिरारामप्यारसदार. सोधे नियमपर चलानेहारा राजा । र गमा। यस, (म.) पु+भमन् । गा. प्रेतोका राजा। धर्मराज। “यों में शोभता है" यथागू, (बी.) यूयने (A) युग । पानांगे साहुमा एक प्रकार से। ल, (.) मर्म (योग) at I युग्म । गिat. गोगान्दावनके पास एकस।" यमलार्जुन ". पपिछ (नि.) मरिसर दुपा । मकर . वाहन, (पु.) यमें पायी (स्थानात् स्थानान्तर) बमान मानाbaat भयो । मनमा मिस यु । यमको एक जगह एण्य, (म.) सना भने रोग परी जगपर ले जाता है। महिप । भगा। यमरा- मेत । "युत्ता पर "itram परापारी. मिलते माप (बारामtr(E.) पानी (श्री.) पति अभिमान्य भनमा । समयपरदा (पु.) armr me raree करणे युर-ममालम् । जो बरसी मन्दतारी परनहारा बाजाICE Errer कतारमोदा । समानियाभरपेन अन. पाप, (नि.) Cir Nur frre tv गुना, (बी.) यम उनन् । wharti at | नमना ही बनी। एक "Nirat मी। यमी बदिन । सूर्य की पन्या । दुगो. पाति, (पु.) एस ( पायोः क) याति (स) यशस्, (16) गम्भमा गी. अस्म जिगरबा समान गती है। म पसभा "स्य समरेrtite पुत्र। एक गया। (गने पबदा देवयानीको मामी । मारी. rreी, बसे गोपुर से रपए . (*) treatv हमर का भोग भोगे मी पर बिमrce (th.) भा, पी पियो निर रामजी पाय, (.) rrrr"--- तपमा हुमा -यु. (पु.) एपिंपरा वितो बगार ग. जोर (3.) Tert: प. (पु.) मा “सागर ने PREITIER.SHERPre हर दिने समोर." (). पार, (.) रस्त मरोहर (hrrry सर , सुग्य, सर्वनाम है। आपनुदारा। यह टीम योश्त, (न.) युध्यते धनेन । ris युधिष्टिर(पु.) युधि (युद्ध) स्थिरः “गवियुधियां योग, (पु.) पुत्भावादी पम् । संयोग। माय । बमारिधार विरा पार पयोग मनीतिमा(- औशमा मौर परमप्रामा (४०४) युग्य, (न.) युगं अर्हति यत् । जिसके साथ जूला लगाना | युवखलति, (त्री.) युवतिः एव सटते । चाहिये। वाहन । सवारी । यान । "जूलेको उठानेवाला" ही सिरकी गंजी है। एक प्रकार के रोगजानने 'घोडाआदि. "युवजरती" इसी अर्यमें है. युच्छ्, प्रमाद (भूलना)। बेपर्वाह होना । भ्वा० पर० सक० युवति-ती, (बी.)। युवति हो या सेद । युच्छति । अयुच्छीत. स्त्री। जवान औरत । युवन+डीम् । “यून हे युज, संगम-मिलना-जुड़ना । चु० उभ० पक्षे भ्वा० ५० सक० युवन् , (नि.) युकनिन् । श्रेष्ठ र बहुत गन्ना सेद । योजयति-ते। योजति. बलवाला । जवान । सोलह परिसतक " युज, युति (जुइना ) रुधा० उम• सक० अनिट् । युनक्ति न्तर तरुण अर्थात् "जवान" कहाजाता है : युद्धे। उयुहे। प्रयुझे। नियुक्ति। अयुजत्-अयोशीत- युवनाश्व, (पु.) सूर्यवंशमें हुआ भाषटर' अयुक्त. एक राजा. युन्, योयु-जुना और समाधि लगाना । दिया. अक० भ• युवराज, (पु.) युवव राजाक्टव् समाः ।। निद । युज्यते । अयुक्त. राजा । राजाके लायक कुछ काम करना युन, (पु.) दि. युज+किप् । समाधिवाला । युक्-युजौ । (राजकुमार). २० युक्किए । संयोगवाला । मिलाहुआ (त्रि.) युह, युप्, भजन (सेवा करना ) पर० स० ठेइ । । युआन, (पु.) युज+शानच् । योगविशेषवाला । भावनाके अयोपीत. साथ सम्पूर्ण पदार्थोको जानेहारा। "चिन्तासहकृतोऽपरः” युप्मत् , (नि० ) युप्-मदिछ । भवत्शन्दो पो योगविद्यासे सब कुछ जामेहारा योगी । रथसारथि । गाडी. वान । और विप्र (ब्राह्मण). जैसा है. युत्, (दीप्ति ) चमकना । भ्वा० आ० अक० सेट् । योतते। यूक, (५० स्त्री. ) यूझिए-छन् । माप । भयोतिष्ट. (स्त्री.) टाप. युत, (नि.) युक्छ। संयुक्त । मलाहुआ और न मिलाहुआ. यूति, (सी.) यु+सिन् । नि० । दीर्घः। कि युतफा (पु.) यु+क। युत्क्क या । ततः स्वायें कन् । मिलाप मिलाना. संशय । शक । युग । जोगा। श्रीके कपडेका पहा (कि- युथ, (न. ) युझ्या ! पृ० । दीर्घः । समाईन नारा)। पावके आगेका भाग । यौतुकधन । दहेज एकजातका समूह । समूह. (दान) | मैत्रीकरण । दोस्ती लगाना। संयुक्त ( मिला- ययनाथ, (पु.) ६ त । दन्यगवप्रभात ।। हुभा)(नि.). ओंका सार । "यूथप" आदि इसी अर्थत है। युतयेध, (पु.) पिवाहआदिमें स्याग देनेलामक चंदमाके यूप, (न) युपछ । पृ । दीर्थः । गो साय पापग्रहोंका योग (जुझना). नेकी लकी संस्कार कीगई एक प्रकार का युर, (म.) युध+काशनआदि चलानेका व्यापार (काम)। रहाई । संग्राम. नेके लिये एक संभाजयसभामा पुस्, पुरसडाई करना । दिवा. आ• गक• भनिन् । (पु.). दुप्यते । अयुर यु-धा, (बी.) युध+कि । वा टाप् । युर। जंग। अयूपीत हाई. युधान, (पु.) युकिनन् । रटनेवाला । क्षत्रिय, Feet:"इति सम् I में स्थिर (सयम पहा).पा. पमेंट 1 युमित, (मलग) (न मिलाना)... मासेामवीर युयुधान, (..) बुधरान । इन्द । नामी mirarary. का संवा । और यारी समापिका विदेश यूप, वध (मारना ) भया. पर. सा. हे। दाम । ज्दे के साथ दल बाधने की परमी नामयोग.

11 - रस, (न.) राय दुरं पित्तं यस्मात् । जिस्से लोहके रक्षापत्र, (पु.) रक्षार्थ पत्रं भस्य । जिसका पता रक्षाके ये पित्त बिया जाता है। एक प्रकारका रोग। "रकपि लिये हो । भोजपत्रम वृक्ष । भूर्जपतरू. त् भवेत् बास." इति षषषम् रक्षित, (बी.) रम्क। रक्षा कियाहुमा । हिफाजत क्षण, (न.). लोह (लन) का दाना। कियागया. घरावण । लोहू बहाना (निक्लयाना). | रक्षित, (त्रि.) रस्य । रक्षा करनेवाला । पचानेवाला. रपि, (बी.) रकवर्णा यधिः क्षम्याः । जिगकी सता रक्षियर्ग, (पु.) रक्षिणा वर्गः । सैन्यादिराक । सेना बेल) लाल रंगकी हो । मंजिष्टा । मजीठ । साथै आदिका रसवारा । रसवारोंका गमूह । बहुतसे सिपाही । न" यही स. बहुत पहिरवाले. - वर्ग, (पु.) रधानां वर्गः ( समुरायः) । माल रंगवा- | रक्षोभ, (न.) रक्षो हन्ति । इन्+टक् । राक्षसको मारता का समूह । दाडिम (अनार) । विशुरु (केस्म्)। है।काषिक । बाजी और हींग । इनका गंध सूंघनेसे मक्षा (हास ), बंधूक, हरिदा (हरी), जवा, यमुम्भे- राक्षस भाग जाते हैं । माहातकाक्षा और चिटो सरिओं । पूल, मजिया (मडीठ), और अलकवरूपसमूह. (वेतमप) (पु.)। ऋग्वेद आदिमें प्रनिल "पृणुष्व. पृटि (बी.)त. सोही वां । देवसे किया पाजः" इसादि सूक्त (गीत) विशेष(न.) पचा (स्त्री.)। आ एक प्रकारका उपदव । सून की बारिश, राक्षसोंको घात करनेवाला कोई दव्य (पदार्थ) (नि.), सरोरद, (न.) फर्म । लाल कमल । रकपन. रक्षोहन, (पु.) रसो हन्ति । हन् कि । गुग्गुरु ( इस- सर्पप, (पु.) कर्म• । लालमरियौं । रातिका । रत्ती. का गंध सूंघनेसे राक्षस भाग जाते हैं) भौर विही (गोरी) सार, (न.) रक्त सार. अस्य । लाल सारवाला । सरिओं। राक्षसको मारनेवाला (नि.)। "रक्षोहा पल- रक्तचन्दन । लाल चंदन । अम्लवेतम (पु.)अम्लवेत. गहन" श्रुतिः- सौगन्धिक, (न.) कर्म• रिकवर्णकार । लाल | रख्, सर्पण ( सर्कना ) । भ्वा०० भ० सेट् । राति । रंगवारा कमल. भरसीद-अराखी. शक्ष, (पु.) रके अक्षिणी यस्य+पच् समा०। जिगरी | रग, गति (जाना)। भ्वा० भा० सेट् । हदित् । रगति । लाल औरोहों । पारावत । मीठी भावाज निचलनेवाला अरंगीत, कबूतर । महिष (भमा) । चकोर । भौर सारज । राल | रघ, गति (जाना ) । भ्या• मा• सक• बैट् । दरिन् । भातवाला । क्रूर (बेरहम ) और अन (नि.) टी. रस्ते । अरविष्ट राग, (न.) रकं स यस्य-यस्सादा । पुम । कसर । | रपु, (पु.) लघु-उ । "ल" को "र" होता है । सूर्यके मंगरप्रद (पु.) प्रवाल (मूंगा) (पु.न.)। मशीट वंशमें दिलीप राजाका पुत्र । “रपो अपर" अण (बहुव- (स्रो.). चनमें प्रत्ययका लोप होना है)। रघुके वशमें भज भारि तिः, (बी.) र+क्तिन् । प्रमान होना। प्यार होना । क्षत्रिय ।..।"तान् अधिकृत्य नो अन्य अण" अनुराग होना । मनोहरता । थाराफि।भक्ति। मुहम्यत. उनके विषय में प्रन्थ बनायागया। भारयायिका ( अण्वा क्तिका, (श्री.)रय कन् अत एवं । गुणा । रती। सोप होता है)। कालिदाससे रचाहुआ उनीस सर्गका महा- एकमाए. काव्यविशेष (पु.) भू, पालन (रक्षा करना-बचाना)। भा. राक• ५० रोदन रघुनन्दन, (पु.) रघुन नन्दयति । नन्द+गिन्यु । ए. रक्षनि । अरक्षीत. धोको प्रगान कर्ता है।दशरथका बा पुत्र धीरामचन्द्र. सासम, (म.) रसगां ( राक्षमाना ) सभा । राक्षगोंका | रघुनाथ, (पु.) रपूणा नाय (रक्षरतात-घटत्वात् वा । रघुओं का स्वामी (मालिक रक्षा करनेसे वा उनमें बहुत क्षक, (त्रि.) र+बुल् । रक्षाकर्ता । रक्षावरनेवाला. अच्छा होनेसे धीरामचन्द्र । "रघुपतिः". क्षस्, (न.) रक्ष्यते इपिः अस्मात् । र अपदानेऽगुन्। रघुपर, (पु.) रसुतु परः (धेट.) । रनोंमें पात जितो यज्ञका हविः (पी भादि) पाया जाता है। राक्षम. भाा श्रीरामयाद क्षा, (बी.) रक्षमाम् । रक्षण । पचाना । सरयूह (पु.) रघुपु उपरः (रक्षारिभारधारक) रद् टाप् । जनु (लास) भोर भस (गा-गाक) (श्री.) वहाअन् । राने रक्षा आदि योसको रटानहारा । दरा- रस अन् । रक्षक । बचानेवाला (वि.). स्थय बन पुर (बेटा)। श्रीरामचन्द्र महाराज. क्षाकरण्यावरण्ड, (पु.न.) राय पहाड (नि.) Eि+भ । सपण (सून)। और.६ (मा रक्षाका करण्टक (गंडा-समीन)। एक आइटी टोरी. रह (पु.)ी । गुगविशेष । एक प्रकार हरण योद, और लालरंग (गु.) लातरंगा (7 "अरकारकमेम मन पलाया अर्थान-तकपा(T•रकाण मmRNA यो, (पु.) युध्यन् । दुद्धार्ता । साई करनेवाला । यौवनकण्टफ, (पु.न.) 11 बहादुर जवानीका मानों कांटेसी नाई निरन योध, (पु.) उम्मन् । युद्धकारक । अंग करनेारा । फोडा. "मावे पम्" । गुर लड़ाई । जंग. योयनदर्प, (पु.) यौवनस दः ।। योधन, (न.) यु+मावे तुर। गुरु । लाई । जंग। यौवनदशा, (सी.) कर्म । सादर । "करपे युद" भर आदि भागुध (औजार) "कर्तरि यौवनलक्षण, (न.) मारत स्तु" गुरुकता लाई करनेवाला । जंगी (पु.). योपसराय, (.) योधाय (युसार ) मराव ( भागा- यौवनस्थ, (नि.) योने बम । और गुन्दरता (नागरी) नं)। योधाओंश युमके लिये आपसमें युलाना. होगया । विवाह करदेने के सा. योनि, (पु. का. ) युनि। मनिशारिक उपजनेशी जगह। यौनाध्य, (I.) मांधाता राजा Trant भार (गन-कान) । कारग ( सरर)।ा । नियोयराज्य, (म.) योग अभि ।। सोका कारण (गाय) चिड (निशान ) । फुग । अभिषेक दियागया । पिता ते ग्गुनी नाम नक्षन (तारा)।बाप. मिलना । युपराजका काम. योनिन, (न. ) योनिरपानाम् जायते । जन्+ । योनि-योमा (त्रि.) मा। का नाम मिलता है। एक प्रकारका शरीर । मनुष्य यामाफीन, } युष्मालादेश पुममा पोनिमुटा. (प.) पोबारा मुश । तन्त्री देतापी Tोनिमा गुडिओं को गिरगना. (पु.) पनि माग । उपत। देसकी अमि. पर (2) समसायो। नारी । औरत. परिण (4) FEET | Hom, रहर, (न. ) रहिआगुन् । पेग । । जावीपन. (f.) TETT+मितिमा दाही. रन, (म.) र ( करणे) nikar im (M) । "युक्त अधिरतः तामा । निराकर ariRIोजीर. मामी भात (T.) "मो "ग र (tr.) (पागमा) •..अगम्बन्धमे ममम । (पि.)। गुप्ता (ती) (t.), arre"""" armfriगा. Nikim" गोलाक. (4.) (ree ) nirm | | गमपूर्ण, (.) . ETA KARAN 14 KEERTA"11. रजना (श्री. ) Trwari र):" “RT. २.) (irur: writer, TANT (1.011 (1) + ^-^ “Fi + c + 7 +1 - 1 NE t...mom auraril . कियान, (.).. (iyana 14 Pritatin (...'

(..) 1 4 पेत्त(२.) रसाय र पित्तं सम्मत् । जिग्मे मो रक्षापत्र, (पु.) भन । विगा शो ये पिन बिगा जाता है।एर प्रारण रोग। त्रिपि. दिय हो। भोजपत्रमा पर नगदे बाग." तिम्, रक्षित, (सी.) Ater मः । मोक्षण,(न.)ताह (नन) का गाना। कियागया. धिररावण । सह पदाना (निश्श्याना). रमित (वि.) सम्म । रारार. यपि (बी.) रचरणी परिः भम्याः । जिगरी हता नमियां, (पृ.) जि . । ल) माल रंगी हो । मंसिर । मीट | " भागियरा । गरोस गया। -rrr" वही पर्थ. वर्ग, (पु.)रताना वर्ग (गमुदायः ) लाल रंगया- सोना (म.) शेरनि । गोमात का समूदादादिम (भार) tr (m)। fettn IT mer (लाप), धूप, दादा (0) असा गम्भ राधा भाग IIFE हो पूल, मनिया (मनीठ ), और अलताना. (गर)(पु.)micat: Form वृष्टि, (बी.) 6. और दो गया. पार"TET (PR) fti(a)(). मा एक प्रकारका उपप गारिता. राक्षागोको पातमागम (IN)(f.) रोग, (म.) धर्म। र मल पा. रसादन, (पु.)ोhिmir हमर्पण (पु.) • । टानगरियो । राजिमा । नी. पासपोगे Mite (it) पार, (भ ... सारः भर साज हारवाला। गम्भिीक्षण (f.). "Pr.. सपन्दन । लाल मंदन । भम्हवेत (पु.) मालपेत. महन" . सागन्धिक, (म.)• IVवर्णपतर । लाल | रग, गर्पण (आना) 7. M.in. रंगवारा कमस. भरती-भतीर (पु.)रक्त भक्षिणी पम्मामा- जिगी ft Enre.maritree भारोहो पातमीठीभावाज निकाल्नेवाला पपूलर । गाईप (भगा) । घोर । भोर तारA INTv, ग (जाना) Ir. w• • थे। नापूर (हम)। और मन (धि-) । fans. (म.) यय-यम्मा ITYA | सर ।, पु. (पु.) "se" """ मंगलप (पु. ) ( गा) (••) म बाबा Nm.my. बन मोrtheart..." (सी.) सिन् । गा रोना । मारा। सत्रिय.." pur.n: भनुरागरोना । मनोहरला । भगत भकिमुरपर. at Areatmn:- निका, (A) गा ली। FDirtyrentre समाप. ri (5. U, पान ( HI).m....।। एनन्दन, 15.10PM-F..... NIRAren ar :: म. (R• ) At (समाना ) सभा मरनाथ, (I. ) . (.: सर ग(HRrat... (12)RINTIrrr. amit (.) April (5.) 1 ) -ruti (CR)vrrrkires , m. (a) Term en wer.(s) are: m() (F)(..) ..."tin Arr (1.). १८::.1:: mamri,(...)""entr... NEE4 Imran (retrinandit. प..) meancret म 4 शाहोनेकेपी चार पीrur भाग(बी)-1. (४.८) - रज.(पु.) रनि+अ । एक प्रकारका भानु (रांगा)।"रजताचल, (पु.) पित: ARY मावे पम् । राग | "आधारे पञ्" रणभूमि (जंगकी के लिये कल्पना कियाहुआ बोटमा पर। ह)। और नाम्याथान (समानी जगह)। "करणे शुभ्रः अचलः" चोरीकी नाईपा.' "मूर (नाच)। (महागा). पहाड "रजतगिरिः" मादि-यही है. गज, (न.) रहार (सपनोजयते) अन् । राह ! रजन, (न.) रज+सु । राग । र, पहले उसत होता है। गिर । मिंधर । मन्भूर. रजनी, (सी.) रज्यते भत्र । रस्सने रजनीयक, (पु.) सेन (रहनेन ) जगति । जीमयु । ने जीता है। रंगरेज । हिलारी । एक प्रकारका रजनीकर, (पु.) रजनी । RIR (रान)। हरिद्रा (ल्दी) कारीगर ।R । मूरत दिरानेवाला । नामजीवी । है। बन्दागोद हमारके जीवन रजनीचर, (पु.) रजन्या पसी । बार जर, (पु.) (रसनं रख)ददाति । दा+क। टंकग। फिरता है। राक्षग । मोर । र देनेवाला. पामि, (.) म सरपम् । कम । नाय | रजनीजल, (म.) रजन्या जाता मारने मान । और मभूम (पहिलवानों का मीहार । पर्फ. रजनीमुरा, (न.) ६ त ताim मनार.() (राम) मातारा उत्पादिका। HEAT (गारा)। और कुदिनी रजए, (.) रसगुन् । "न)। (ME और मामला मादिगे राग प्रेम फूलों की करी । पराग ।। सार .. नेवात्म प्राविका गुणविशेष. (b)ो । कर्म। गुग हो यसल, (म.) मा भनिगम रजोगुणवाला । मति (भगा) (grant मार, (1.) (राजन) मागण्याने (वा) तुमनी (श्री.) rariamग मानाचार जो जाना | रश, (-) +3. I avatant कारीगर गिने। दाम । येणी । गुन. रजक, (न.) सपी Hits द्वारा, (T.) (मामा) भानसी प्रीति राय (प.) (e) | Pा । मन न. (A)ो मनेन । ११ (4)mart गदार ?ना है। नए । infram. (पी.) 111"मारे "Intr गए.(..) ।।दर (महाम) (1.) - . पदन । मणि (मनी) artiuitm गुमना (ग) rer (2) ... 4. मे। Putrition हनी, ( श्री.) marke (MRI (Ram (:.) m41()Mitra.... more...m(.mrani) Entegrertiti ,] [ रथगुप्ति, . उत्प- ४.या ४८ ..रा, (सी.) ( पुरा) पुसा जूग । युका रिसादीप, (पु.न.) रममयो द्वीपः । रमोटा दीप (ज. १. जीरा)। तत्र भगतके रामुइमें रहने के कारण ज्यान मक (पु.) रणः (पदः) सप्रश्वरः । दिवं । परनेलायक रोग बनाहुभा अन्तरीप. शादी पन् । रोग । परराहट । रिसर । रमपारायण, (म.) मानो पारायणं (साकल्येन स्था. नं)। सम्पूर्ण मोका पूरा स्थान । जहाँ गर रस कुल, (म.)रणे व किम् । मुलपुर । का रहते हैं. परी जंग रहामुल्य, (न.) रमेषु मुस्यं । रमों में सास (भम्बल )। क.(म.) राम मांतरण (पुर)का आ (साधन)। हीरकाहीरा. मी पुखरात्र । धनुष्यबाण । तरकार. रसपती, (सी.) हानि सन्ति भयो+मनुस् । "म" जिर, (म.) रणम्य भजिरम् । युदय भान (मंदा- को "व" होता है। मोवाली । पृथिवी । जमीन । रम- ')। पुसक्षेत्र बाना (मि.). पेत, (नि.) रणात् अपेत । युस्से बाहिर हुआ | रतसानु, (पु.) रमानि सानो अस । जिसकी चोटीपर भागहुपा) रम हो । मुमेरुपर्वत । मुमेरका पहाड, यमिन, (पु.): (रिफलः) (प्रजाहीनत्वात् ) रसास्, (श्री.) रमानि सूते । सू+किए । रनोको उत्पम पाश्रमः ममि भम्य । सन्तान न होनेरी जिगा आधम वर्ती है। पृथिवी. नेष्फर (पेफायदा) है। "यालीस या भठनालीस वर्ष रवाकर, (पु.) तारांकी सान । समुद्र रनोंकी उमरमें जो बीमे घिर गया हो"बीसे ( तिका स्थान । मनिओंकी सान, परी उमरमें )विगाहमा पुरष. रताभरण, (न.) रमपटितं श्राभरणम् । शाक• । (म.) गम्भावे । रमण । कीन करना । रमोंसे राहुआ भूषण (जेवर)। जमऊ गहना. सोहचत । बी और पुरुषका संगम (भापगमें मेल-जुना) रक्षावली, (स्त्री.)त.। रनोंकी कतार । रमोंका भपुन । भोग । और । गुप (गोड 1 "रि" समूह । उनन बनाहुमा हार । वत्रागडी पन्नी अनुरक (प्रीति में फमगया-आशक) (त्रि.) "बावली अधिकृत्य कृतः प्रन्य+अण्" भास्यायिका (बी.) रम्+किन् । राग । भौति । मुरापत । (जिसमें रमावलीका वर्णन है)। एक नाटिका (जिसे गुष । गारमण । भोग विख्यगरना। कामदेवरी श्रीहर्षने बनाया है.) रखी. रति, (पु.बी.) पनि । बसमुष्टिहसपरिमाणम् । पति, (पु.)... रनिरा मालिक । दर्प ।। बंधीहुई मुट्ठीवाले हायका माप । स्त्रीत्वे वाडी, कामदेव । "रतिकान्न" "रतिप्रिय" "रतिरमण" एकही रथ, (पु.) रम्यते भनेन । म था । रम्+कयन् । जिसे अर्थ है. आनंद उठाते हैं । एक प्रकारकी सवारी । गाडी । और पन्ध, (पु.) तस बन्धः । रस (श्री पुरुष त्रीग) शरीर ( जिस्म)। "मात्मानं रथिनं विदि शरीर रथ- सबंध (रचना)। भोगके समय श्री पुरुषका परतर मेव प" इति श्रुतिः । पाद ( पाँव)। बेत. मिटाए. रथकटया, (स्त्री.) रथाना समूहः । रथ+कापन् । रयों- तेरस, (पु.) रते. रसः । भोगका खाद (मगा)। वा समूह. भोगविलासका मुरा. रथकार, (पु.) र परोति । कृ+मच्-अग् वा । रप. तेसर्पस्यम्, (म.) (रते. सर्वसं ) भोगविलासन निर्माणकारक वर्णसंकरविशेष । पारी बनानेवाला (एन. मारा धन (साराम्बाद). धार) एक प्रचारका दोगल्या वसांन. न (न.) रमते मात्र । रमन (सान्तादेशः)। जहाँ सा | रथापर, (पु• न• ) रपस्य भूगरः । रप (गारी) होता है। माणिक्य (मणि ) आदि परयर । अपनी । धुरा. जाति में पेश (बहुन अमा) मानिक और हीए. रपक्षोभ (पु.) रपस क्षोभः । गाध पर उधर सकूट, (पु.) रनमयकूटःषम्य । जिमी बोटी हिलना ( होये रुगना) रनों हो। एक पहाड, रपगुप्ति, (खी.) रपय मुप्तिः । शत्रवारपा रमा उप- सगर्भ, (पु.) रमयुकं गर्भ मप्यं यस्य । जिसके दीव | चारात् तत् स्थानम् । रथा वह स्थान में बहा पडे. रमरों । समुद्र । और कमेर । पृथिवी (जमीन)। हुएशन (सरदारमादि) ग्रे रोहलिया जासच है। अच्छे पुरवाली औरत (स्त्री.). पध.५२ रपय गुमस्थान.

स्थान. "रम्+मावे ल्युट्" मुरत क्रीडा । भोगविधान। रदच्छद (पु.)रदान छादयति । एगि वा हस्तः। रमा, (श्री.) रमयति । रम+ अमात्र रमगयी, रथचयो, (मो.) रयम धयां 1 गाडीही यात्रा (मकर), ग (Ramzn. रथन्तर, (नि.) रथेन तरी । मगर मुम् । । रय. (गाना) मा. उभअन्य। नेता रम लेजानेवाला । "अमिसा पूर"मामा अमरी" । " गायागया एक गामवेदका मय. मारने-शिकार करने में मो) ' रथयात्रा, (खी) रथस्य यात्रा । रथकी मात्रा (पर. गाना) होता है. ना)। आपाट ( हाइ) के शुभपशी दितीयाके न रन्तिदेय, (पु.) रही करलेलायक एक टाव । इरा मूर्तिको रसमें बेटासर एक राजा और गुणाकार, मनुष्य चलते हैं. रथाङ्ग, (न.) अमरते (गम्यते ) अनेन । अगि+करणे ज्धन, (न.)-पार (पकाना) यु. पम्। ६ त । चक । पहिया । "रया शब्दः वाचण्येन (न. ) रम् । पुकाम पकाना। रीधना. अस्ति मस्य+अच्" । राजशन्द जिसका धारक है। चक्रवाक (चकवा ) (पु.). मुराग । दूसग । दोष । ऐक । मोवप को रथाङ्गपाणि, (पु.) रथा (च) पाणी यम्य । जिग- के हाथमे चक्र है । चक्रधर विष्णु । चकको धारण करनेव, गरी ( जाना) गर. ५० । छन्द करना 14 वाला, परमेश्वर, भ्वा० सेट् । इदिन् । रम्बनि-ते । अरवीर रथाम्र, (पु.) रय व आत्रियते असा । आ+म+क । रम्, आमुश्य (किसी वसुके लिये बनुन एक बेतसवृक्ष । बेतका दरख्त. करना । गले मिलना । ना. मा. अ. रथारोहिन्, (पु.) रयं आरोहति । आ++गिनि । रभते । अरन्थ । निन् । रम्भयति. रथपर चढता है। रथी । रथपर चढाहुआ। और रथ-) रम्, शन्द करना । भ्या आ० अर• सैन् । इवेद पर युद्ध करनेहारा. ते। अरम्मिट. रथिक, (पु.) रयः (युद्धसाधनाधारस्वेन) अति अस्य+ रमस, (पु.) रम् असत् । धेग । तेत्री), ठन् । रय जिसके युद्ध करनेके लिये साधन है । रथी। औत्सुक्म । वही वाह । पहिले और पिजडेन रथपर चढकर लड़ाई करनेवाला । "इर" रयिरस“इन" रथिनः। "इनि" रथी । ये सब एकही अर्थमें. क्रीडा-खेलना। भोगविलास करनामा रथोपस्थ, (न. ) रथस्य उपस्थ इव । गाडीका मानो उप- अनिट् । रमते । विरमति । परमात । बग्न स्थ है । रथका मध्य ( भीच). सीत् "" राम रथ्य, (पु.)रयं वहतियत् । रथको लेजानेवाला पो. रम, (पु.) रम् अच् । कान्त । पियारा । और कामदेव. डा। रथस इदं" यत् । रथसम्बन्धी ( रथका ) (वि.)। रमण, (a) रमयति । रमणियन्त्यु ! "रथस्य ( तद्गमनस) योग्या सरणिः" । गाडी जानेके लायक सडक । प्रशस्तपथ (बहुत अच्छी सडक)। यीच- मालिक । जंयुद्वीपमें "रम्यक" नाम एक वर्ष । का रास्ता । गली । “स्थाना समूहः, यत्" । रयोंका समूह (बहुत गाडिये )(स्त्री.). ल्युत् रद्, उत्खात् (उखाडना ) सोदना । भ्वा० ५० स० सेट् । रदति । अरादीत् । अरदीत. जिस्से मानंद भोगते हैं। नारी । औरत र अप रद, (पु.) रदति ( उत्खनति ) । र अन् । खोदता रमणीय, (.) रम्यते अन् । रम्+आधारे शुद्ध है। टुकडे २ कर्ता है। दन्त । दाँत । "भावे अच्" स्व सूरत. उत्खनन । खोदना. रमल, (न.) एक प्रकारका ज्योति-शास्त्र, दांतीको ढांकता है। ओष्ठ । ओठ। होठ । "रदनच्छद". देती है. रदन, (पु. ) रस्त्यु । दंत । दांत । "भावे युट्" रमापति, (पु.) ६ त• । रमाश पति । विदारणा फाइना. रख, हसन ( मारना )। पाक ( पकाना ) । वि०५० स./रमाप्रिय, (AT समीका पिाए।" बेटू । रयति. छल । विष्णु (पु.). करना. गधा । हेपण । महारिष्ट । बढी तकलीका बीच - पटोलमूल। नीमकी जड़। “हर" पर अगला भाग । (न.)। "रभ्यते भनया . - ३ [रसायन; . - . • (पु.) मिसि । रेणुपूरी। और महिषामु. फ्लप मधु ( मीटा)। मलंकारशामें संचारी, स्यमिक .. दिशा बदलाबदली । रेना । एक अपारा । पारी, सहकारीसे प्रकट होनेठारक, रति आदि स्थायिभा. या (जरी)। गौओंका सद भावान)। भौर पदाला मार आदि। (बैल)। वीर्य । राग (गुह- "(पार्वती) (बी.). पत)। (बहना)। पारद (पारा)। और जल (नि.) रम्यवे पत्र+यर । मुंदर । गौर दलका (पानी), गंधरम (पु.न.). गोर करनेवाला) । पा(पं) और बकास । रसकर, (न.) रसेन करस । रससे मानों कापूर पोरगूल (न.) "मायो रन्" असूदीपके नीलामो है। एक प्रकारका गंधवाला पदार्थ । कर्पूररस । पारा । रसा फूल. i, (बी.) रम्य भर+यर | जिसमें ग्रेग किया रसम्म, (पु.) रस (पारदं) हन्ति । हन+ टक् । पारेको ता है। यति । राल. मारता है। मुहागा. गति-जाना । मा. आ. पा. सेट् । रयते-भरविष्ट. रसज, (न.) रसात् ( भुषापात् ) प्रथमधातोजीयते । (पु.) रय्मन् । बेग । देगी । और प्रवाह. जन्म । सायेहुए भमके सारका पहिली धातुमे उप- (पु.) रम् कि । "" मोप होनेपर "तुर" पता है। रपिर लोहू । सून | "गने आदिके दबसे धर्म.। एक भूप. उपजता है" गुरु मौर मय कीट (शरारका कीडा) (पु.). , पवि (जाना ) भ्या. मा. स. सेट् । इदिन् । रसमा, (श्री. ) रस जानाति अनया । हा । व भरपिष्ट. जिस्से रसको जानता है। जिहा। जीभ । रस जानेका (पु.) स्वनि-शदारनाभि । न्द । भाग. सापन । जीभके स्थानकी इन्दिय. रा, (पु.) फ्युच् । कोहिल । कोइल । भौर उष्ट्र । रसतेजस्, (न) रसस्य (भुजामसारस्प) तेजः (सारः) । ट। पाद करनेवाला । भोर तीक्ष्ण । सेज (दि.). गायेहुए अनके सारका तेज । रधिर । लोहू । मून. रसन, (न.) रत्युत् । खाद । मन्बा और ध्वनि (पु.) दन् । सूर्य। सूरज । और अक्ष। (द) । "करणे स्युर । जिहा । जीभ | "पिते. भारा प. ज, (पु.) रवीयते । जन् । एयंसे उपजता है। रसना, (पी.) रसते अनया । रम्+करणे स्युट् । टाम् । नने रणने सितापीनि" नेवपम्, शनि । सावर्णिमनु । बदसतमनु । मुभीष वानर । यम जिस्से रस लिया जाता है। जिला । जीभ । तागी । यमुना (श्री.)। "रवितनय" आदि-इसी वर्ष में. और रस्सी. नेत्र, (पु.) रपि. नेत्रं यम्य । सूर्य जिसकी भारा है। रसयज, (पु.) रसेपु-रसो पा राजा इव येष्टत्वात-राजते। रगोंमें चमकता है-षा रस मानों राजा है। पारद । पारा. परत, (E. ) ये प्रिय र । सूर्यका पियारा रन । रसयती, (सी.) रस ( भाखापदव्यं) अस्ति बस्यो मानका भोर तामा. मनु । मस्य यः। जिसमें साद सेनेलायक समादि पदार्थ लोद, (म.) रवः प्रियं स्टीई धानुः । सूर्यका पियारा है। पारस्थान । पानेही जगह परमोईसाना । महानस. घातु । सामा. २, स्खन ( छन्दहरना ) । भ्या० ५० अ० सेट् । साति. रसशोधन, (न• ) र ( पारद-द्रवीभूतं द्रव्य-स्यणरिया) पोधयति, शुभ्+गिन्+त्यु । पारा, वहाहुभा पदार्थ, अप- ना, (बी.) रक्स्यु । यी । तागी । और पा सोने आदिको जो साफ करदेता है। टंकण । मुहागा, जिहा । जीभ. इम, (I. ) भनि । धानो इट् । रण+मि या फिरणा रसा, (पी.) पारजः रसः (मापुर्यादिरूपः) अस्ति मस्या +अन् । पाहुभा भीटा भादि रस जिमका है। घोरे मादिकी रस्सी (लगाम)। भौर पप (मठ) (न.). पृषिधी । दारा. , भाम्पाद-खादलेना । • •स• सेट् । रगयति-ते. रसातल, (न.) रसायाः तलं । एक पाताल । पिवीरा स, (पु.) रस्सवेअम् । शास्वाय । साइलेनेलायक। तला। भूमिके नीरेका सात पडदा. रगना (जीम ) इन्द्रियमे प्रहण करनेलायक माधुर्य | रसामास, (पु.) रस हर भाभारावे । मा+भाग+भन् । (भिटारा ) आदि गुणविशेष । वह छह प्रकारचा है). रसी नाई प्रतीत होता है, वास्तविक नहीं. मधुर ( भीटा) अम्ल (गुरम् ) लवण (सलोना) रसायन, (न.) रसस्य अपने इस । रसका मानों पर है। (कावा) विक (तीसा) कपाय (रीला)। शरीर. १। एस्सी । उटी (मर)। एक में पाये हुए भामादिका पहिला परिणाम (बदलना)। दिर)। एक औषर (दवाई) इम एक प्रकारका धातु । मीटे भात रसवाला गुड आदि । पर होजाती है. विष्णु रोम(बालो बनायागया एस्कारमा - - --- न त्याग (छोडना)।चु० उ. सक० सेट् । रहयति-ते. रागारु, (त्रि.) राग आरत् ।जो दानकी भ- गोप्य । छिपानेलायक ।याधाय । ठीकपन । निजन । रागिणी, (बी.) रागः अस्ति असा.दनि । गीतका अंग। एक प्रकारका खाारायवाली तवाली औरत)। गुस्सेवाला। अनुरस (S रहित, (त्रि.) रहस्यामा कर्मणि छ । यर्जित । सोइराकप, (न.रहो। अयं विकारी शामि। रमायनकला,] () रसायनफला, (बी.) गायन इन फलं ययाः । जिग-ग, दान (टेना) और प्रदन (टेना), का फल रसायन की नाई हो । हरीतरी हरीर, गर भनिन् । राति । भगीर. रसाल, (न.) रसं मालानि । आफ्ला+क । मिहा। ग, (मी.) राशि । कांचन (मोना)। एक पुशवदार चीज । गंधररा । पिरारिणी (एक पीने. देना. का पदार्थ )। पूर्वा (दर)। और दादा (दाग किग-गका, (श्री.) + प्रतिपदा (एनमा मिस ) (श्री.)। भान (आम) १ (देस-गन्ना)। पनस । गोधूम । गेहूं । पाँडागमा (पु.). पूर्णमासी । पूरे गंद्रमावाली निवि । एक रसास्वादिन, (पु.) सं (पुर ) लामादते । आ+ राक्षस, (पु.) र एक्स्यायें था। जिमे पहिले पहिले रज (53) आई हो. स्वद्+णिनि । फूलके रमरा साद देता है। भ्रमर । भौरा । मधुर (मीठा ) पा मार आदिका मादलेने- जाति (जो प्राणियों की हिंमा भी है) मन्त्रीका नाम । एक प्रकारका विवाह । जर्म वाला (नि.) स्त्रियां छीपू. सजातिकी श्री। "क्षम इद अग्।" सक्षना रसिक, (पु.) सं घेत्ति (अनुभवति )+छन् । सारमः । नामी पक्षी । अश्व (घोडा) । मौर हाथी । रमा गसेन्द्र, (पु.) राक्षण इन्द्र इस श्रे त्रियां ही । इंट्रा । दाड । चण्डिका. ' रसके जानेवाला और रसवाला (त्रि.). मानो इन्द्र है। विधवाका वा पुत्र । रा. रसेन्द्र, (पु.) रसः (द्रवीभूतः ) इन्द्र इव श्रेष्टत्वात् ।। रामा, (स्त्री.) लक्ष्यते अनया । ...... पिघलाहुआ, मानो इन्द्र है (मवमें अच्छा होनेसे)। वृद्धिः । लभ्य रथ । लामा । लाख. पारद । पारा. शोधन ( साफ करना)। भूषण ( सवा रसोत्तम, (पु.) रस उत्तमो यस्य । जिसका उत्तम खाद रण ( हटाना)। सका। सामर्थ्य ( सादर है । मुद्ग । मृगी. रस्य, (न०) रसात् ( भुक्तानपरिणामात् ) आगत.+यत् । यग, (पु.) र भावे घन् । नि. एक अक• भ्वा० पर• सेट् । राखति । अरावीत खायेहुए अन्नके पाकसे आया । रधिर । लोहू । “रस्यते वर्णन (बयान करना)। प्रीति (प्रमत्र है (आखाद्यते ) रस्त्यात्"। आखाद्य (खाद लेनेलायक राग (प्रेमकरना) । राजा । और र (त्रि.) "रस्याः निग्याः स्थिरा हृद्याः" इति गीता. घन् रंह, गति-जाना । चु० उ० अक० सैट् । रेहयति-ते । परर " तेन रक्तं रागात रहस्. (न० ) र असुन् । वेग । तेजी । जोर. छह राग हैं-भैरव-कौशिक-हिंदोल-दीपक रह, गति । जाना । भ्वा० पर० सक० सेट् । इदित् । रह- राग । प्रत्येक रागकी छह रागिनी हैं)। गुरु ति । भरमीत रह, त्याग (छोटना) । भ्वा० पर० सक० सेट् । रहति । अंग लाल है। मंजिधा। मजीठ।३ त.. यही अर्थ (बी.). रहस, (न.) रहसमुन् । निर्जन । एकान्त । अकेले । ताहै परन्तु उसे पूर्ण नहिं करता. (अन्य ) 'रहस्य, (त्रि.) रहास भवः यत् । एकान्तमें हुआ। गोप्य । छिपानेलायक । पोशीदद. नेवाला)। कामुक (चाहनेहारा । रतियुक रहस्यमेद, (पु.) रहस्यस्य मेदः । गुप्त यातका सोल (भोगविलास करनेवाला ) (वि.) देना (प्रकाश कराना )। समझमें न आसनेपाली राघ, (शक्ति)लायक होना-समर्थ होगा । बात । अद्वतमाया. सक. सेट् । राघवे । भरापिट. रहस्याख्यायिन, (नि.) रहस्य आख्याति । गुप्त बात राय, (पु) रयोः गोयापत्य अन् । राई (छिपी हुई बात को कहनेवाला । रहस्यका वला. उस कुल में प्रधान धीयमचन्दजी महाराज "करणे " लालरंग। उम रंगवानी इति पाणिनिमूचम्। पञ्” बसन्त आदि नामसे प्रसिद्ध खरविर - । । रागाङ्गी, (श्री.) यगयुक्तं अजै यस्याको भरहीत. दियाहा.

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राजरा,] (r) T राजाका धन. " राजस, (नि.) जगा निर्मित:+अण् । रजोगुणगे उपनगगी, (पी.)ी। हुआ कमेन्द्रिय (वाक् पानि-पाद-पायु-उग)। और निन् शीर वा । गनी गाती प्रगिद्धि के लिये कियागया फर्म ( काम ). गाय, (म.गणे मार या राजसभा, (न• स्त्री.) गर्ग ( नृपाण) गमा। गमा होना या काम. मोरी सभा । नृपगमाज. राजसूय, (पु.) राज्ञा सूयते कण्डातेऽस्मिन् । मूपाय । गमा प्रजाघ पालन मादि. राजाका करनेलायक एकयज्ञ. राजस्य, (न०) राते देयं (कम्पम् ) पनम् । गज्या, (म. ) . । राणा राजाको देनेलायक (कर-मस्ल-गिराज) पन । ६त.। मुह-कोर-राट-दुर्ग और बर)। गद, (पु.) र पत्-पृ. हवम् राजहंस, (पु.) हंसाना राजा (श्रेष्टनात्)।पर नि.। रा" (श्री.). एक हंस (जिसकी चोंच और चरण साल हो और रंग | राढीय, (नि.) गहो निवामः विद्या हो)। फलईस । " राजा हम इव (सारपदणा)। उत्पन्न हुआ. राजा मानों हम है ( सारप्रहण करनेसे ) । अरछा राजा. | रात्रि-ग्री, (बी.) रात्रि या राजादन, (न.) राज्ञा अयने । भद् । कर्ममि ल्युट् । अपने , देगमें सूर्यमण्डलके न (उसके फल और मोजके लायनाकर ) राजामे माया हरियादी. जाता है। पियालयक्ष (जिमकै फल और मीजमे लड्डुप- रात्रिकर, (पु.) रात्रि करोति । - नाकर राजासे साये जाते हैं )। क्षीरिका । और केमु. किरण: अमवा" रानको राजाधिकारिन्, (पु.) राजानं अधिकरोति । सकारी रातमें होती हैं। चना चांद और अफसर ( अधिकारी) न्यायकी। जन्न । इन्साफ कर- गघि(श)चर, (पु.) रात्री चरति नेवाला. रानमें विचरता है। राक्षस । उस राजाधिष्ठान, (२०) राज्ञः-अभिष्ठानं । राजधानी । राजाके रात्रिमणि, (पु.) रात्री मणिः इव । निवासका नगर। समय मानों मनिह (प्रशासवाला है राजान, (पु.) भाम्राणां राजा ( श्रेष्ठत्वात् ) नि०आम्र विप. रानिवासस्, (न०) रावांस इन अ राजाग्ल, (पु.) अम्लानां राजा ( श्रेष्ठत्वात् ) पर. (कपडेकी नाई) दाकनेहारा । म नि.। आम्लवैतस । अबतवेत । सहा वेत. " रातके समय पहिरनेठायक कपड़ा राजाह, ( म. ) राजानं अर्हति । अई+अण् । अगुरुचंदन , रात्रिविगम, (पु.) ६ त• राय राजाके लायक ( त्रि०)। जम्बू (जामन )(सी.). प्रभातसमय, राजि-जी, (खी.) राज्+इन-वा डीप् । श्रेणि (कतार) रात्रिहास, (पु.) रात्रिहांस इव (श पंकि। रेसा (लकीर )। " राजते"। रा+युत् । मानो हासा (चि-सफेद होनेसे )। श्वेतसर्पप. रान्यन्ध, (त्रि.) राम्रो अधः (टिक्षय राजिल, (पु.) राज्कलन् । इण्डम सर्प । डोडासाप । जो देस नहिं सका । कौआ बादि. जलका साप. राद्ध, (नि.) रा+कतरि-कर्मणि का राजीव, (न.) राजी (दलराजी) अस्ति अस्य था। हुआ)। पक (पकाहुआ). कमाल । एक हरिण । एक मत्स्य (मच्छ ) । हामी। राधान्त, (पु.) राधः ( सिद्धा) यस्मात् । ५. जिस्से तत्वालि- राजेन्द्र, (पु.) राजा इन्द्र इव (श्रेष्टत्वात् )। बहुत सिमान्त । नतीजा। संदेह उटाकर बारी अच्मा होनेसे ) राजा मानो इन्द्र है (जिसका चार पक्षका निराकरण कर यथार्थ पक्षप योजन १६ गतक अधिकार है उसे राजा-रागरासे मी वन । “वादिप्रतिवादिनिणाताई.". सागुण अधिडारवाला। मालेश्वर और मालेबरसे | राघ, लिदि-माधना । भक । निष्पादन , दाग अधिक अधिकारवाय “राजेन्द कदाजाता और पाक (पटना) स. खा. है) कि प्रशारका का राजा. भनिट् । रामोनि । राध्यति । रासी । . और सारस (पु.).

-- (१५) (रागभ, . एक नदी. (A) रा न्युर् । साधन (पूरा परना) । पाना । | रामानुज, (पु.) प्रसिद्ध धर्मप्राकका नाम । येदान्तकी _R होना । "रा णिच् युन्" । पूजा करना । यप्. एक शागा (विशिष्टाइन )का प्रवर्तक भौर मी अनेक , (स्त्री.) रामन् । पार्वती। परमारमानी एक ग्रंथोंका रचनेहारा. 'ति। श्रीराम के पापसे चन्दादनमें उपगी पभानुी कन्या रामायण, (न•) रामस भयन (चरितं ) अधिकृत्य पानगोपी । कर्ण की पालन करनेहारी और माता (मा). तो प्रन्योऽण् । रामनार के चरित्रको प्रतिपादन करनेद्वारा किान्त, (पु.) १. राधाका कान्त (पिसारा) वाल्मीकिमुनिका बनायाहुआ एक प्रकारका महाकाव्य. कृष्ण "राधावलम" आदि. राप, (पु.)+पम् । शप भावाज । बोलना. तनय, (पु.) त• राधारा पुत्र । कण । हरायण, (पु.) पणस अपत्यम् अण् । रावयति शत्रून् । rमारी अपस्थामें सूर्यसे कुन्तीके गर्भमें उपजा । कुन्तीने णिस्यु या वणवी सन्तान वा जो शत्रुओंको रुलाता - पाप करदिया, सूतफी पनी राधाने पाला. है। लंकाका मालिक राक्षस. रमण, (पु.) राधायाः रमणः । राधाफे साथ प्यार रायणगङ्गा, (श्री.) रावणनिर्मिता गरा नी । रावणसे करनेयात्म भीकृष्ण. बनाईगई गहा नरी । सिंहल (लंका-सीलोन ) के देशमै पि, (पु.) रापामा अपरम्स् । राधाकी सन्तान । रणे. रावणारि, (पु.) ६.1 रावणका शत्रु । धीरामचद्र । 1, (पु.) रमस्करि घम् गया । परशराम । दशरथका "रावणान्तक" आदि. 41 पुत्र श्रीरामचन्द्र । और बलराम । मनोहर । वस्रावणि, (पु.) रावणस्य अपत्यम्मत न् । मेघनाद- रत । और शुभ (पि.). मामी रावणका बडा पुत्र. गिरि, (I.) रामाश्रितः गिरिः । चित्रकूटपर्वत राय, शद-आवाज करना । भ्वा० आ• अफ० सेट् । (पनवासमें गयेहुए रामने इसीका पहिले माधय लिया). राशतें। बराशिz. मचन्द्र, (पु.) रामचन्द्र इस (भाहादरवाद)। राम राशि, (पु.) अधुते (न्यानोति ) अएक्दन । धातुको मानों चन्द्रमा (भानंद देनेसे) दशरथका वा पुत्र हटका आगम होता है । धान्य आदिका पुष (समूह) । 'धीराम. ज्योतिषका बारहको अंश मेप आदि यक मौरभ- मजननी, (बी.) ६.। रामकी माता । बमुदेवी यक्त गण । समूह । दर. पली ( औरत ) रोहिणी । जमदमिकी पत्नी रेणुन। राशिचक्र, (न.) राशिघटितं पकं (सत्तम् )। राशि- दसरथरी पनी कौशल्या. ओंका पनाहुआ एक । मेष आदि बारह राशिवाला, मणीयक, (न.) रमणीयस्य भाषः । रमणीयं एएना। गोलाकार (गोलसरूपवाला), वायुके कारण पूर्वसे पषि- रमणीय+युम् । रमणीयत्व । मनोहरपन । मनोहर. मकी ओर निरन्तर धूमनेवाला ज्योतिरखरूप पफ. मतरणी, (बी.) रामा (अभिरामा ) तरुणीव । सेओ- राशिभोग, (पु.) राशीना खखगल्या प्रहभोंग । भु+ सीकूलाराम श्री सीता और रेवती. पम्-कुत्वं । सूर्य आदि प्रहोंका अपनी १ गति के अनुसार मदूत, (पु.) रामस्य दुतः (वार्ताहरः ) हनूमान् (वही राशिओम जाना. रामचन्द्रको पातको मकामे पीताके पास पहुंचाताहुआ ). राशी(शिस्त, (पु.) अराशिः राशि का राशि+ मनयमी, (स्त्री.) रामस्य अन्माधारो नवमी । राम अभूनतनावेरिष-तदर्थे समासोश। देरी । पुत्रीहत । जन्मकी नवमी। रके पक्षकी ममी. इकमा कियागया। एक जगह लगामागया. मभद्र, (पु.) राम एष भरः (मालदायकवाद)। राष्ट्र (न:) पर+ट्रन् । जनपद । देश । राज्य । उप- रामही कल्याण मा पियारा है (भलाई करनेसे)। धीराम. दव । मुधोबत. मयालम, (म.) रामस्य पक्ष (प्रियम् ) । रामका | राष्ट्रिय, (पु.) राष्ट्र भषः । पनायोतिम रागा पियारा । भूर्जपत्र (भोजपत्र) पहरामने बनवासाधममें साल (साला). पियारा समझकर धारण किया. राय, पव-भाषान करन्य मा. बा.स. सेट् । रागते. सामसस, (पु.) त.। टन् । रामका मित्र । मुभीव रास, (पु.) र+पम् । यस्+पम् वा । धन्दा पनि । (वानरोग्र राग). भावान सत्य (भंगरी) बोधकर दो पीर मामा,(बी.) रम्+गिन्तरि पम् । गीतभादि वागे एक प्रकारकी कीम (सेल)। श्रीरप्पभगरानी लीया पाहारी मारी (ौरत)। मारी। नहीपा पर पोटाहत । गोगा। राय (0). महाशकागोरोचना बागेती. रासभ, (पु.) राम्भ । मम । यस .

वुल् । सोने के जेवर बनाना हमार शान. प्रति++भावेदारोग दूर होनेका उपाय 1 रिपथहारिन्, (त्रि.) रिक्थं (प्राह्यत्वेन) अस्ति अस्य+ एकपतिक्रिया, (स्त्री.) रुजः प्रतिक्रिया रिए, जाना । भ्वा० पर. सक. सेट-इदिए । रिमति ।। रुपमकारक, (पु.) म (तनिर्मित रिक्षण, (न.) रिगि+ल्युत् । स्खलन । सिसकना रांगना. रुक्मिन्, (पु.) रुक्म विद्यते अस्पने तर रागमन, रासमण्डल, (म.) रागा माडतं मालागारेण प्रगित (कार) मणं यत्र । राराके लिये ( संगती बांधकर दो के बी. पथा• उम. रा. नियामक चर्ग ठहरेहुए खेलनेगे) जहाँ मण्डलाकार दायरा रिपु, (पु.) RTER.2.1 काम बांधकर ), पूमते हैं । यी सेल करने की जगह । श्री. कृष्णजीके राग करनेका, स्थान । एक प्रकारका मन्दारिपुयातिनी, (पी.) हिनि । रासेश्वरी (श्री) ६ त । राराकी मालिक । राधिका. मेरा शत्रुको मारनेवाला (वि.), राना, (वी.) रस्+न। इस नामकी एक चेल । रागनयेत. रिपुजय, (नि.) जयति । निन् । रा, (पुर) रहाउण् । त्याग । छोडना । छोटयाला । नेवाला । एक राजा (पु.). ज्योतियफमें सूर्यको किरणों के न छुनेसे उत्पन्नहुई पृथिवी मी रिक, वप ( मारना) 10. ५० ५० मे ।। घायाका आश्रय एक ग्रह । सिंहिकाका बेटा (एक रामस). रिफफ, (पु.) रिम-४० । मने का राहुदर्शन, (न. ) राहोर्दर्शनं यत्र । जिसमें राहुरा दर्शन | रिसा, (बी.) रम् सन्+अ । रमगेना होता है। चंद्रमा और सूर्यका उपरागरूप महण । चन्द्रमा नेकी चाह (स्वाहिश). और सूर्यका उपराग होनेपरही यह दीप गा है। रिय, गति-जाना या १० म० सेट् ॥ इन्।ि अन्यथा नहि. रिए, हिंगा (कतलकरना )। तु. पर• सर. राहुमूर्धभिद्, (पु.) राहोः (सिंहिकामुतस्य ) मूर्धानं रिशति । मरिश मिनति । भिद्+किए। राहुके माथेको तोडता है । विष्णु। रिदय (प्य ), (पु. ) रिदयते । मिस क्या। अमृत पीने के समय देवताओंकी कतार में देवरूपसे स्थित रिट, (न.) रिक । मंगत । और भर होकर अमृत पीतेहुएको देख विष्णुने उसका सिर तोडा. पुरा "भावे क" नाश और पार (गुग राहुरत, (न०) रहोः प्रियं रनम् । एक सास रत्र । आदिवाला (नि.)। सह ( तरवार){३ गोमेदरन.- रिटि, (खी.) रिप्-रि-वा+सिन् । अशुभ ।। राहुसूतकम् , (न.) राहोः सूतकम् । राहु (दैल-सिरके रका शन्न ( औजार )। "चिच्" रत्ना है- खरूपमें ) का जन्म । सूर्य वा चन्द्रमाका प्रण. री, क्षरण-बहना । दि. मा.अ० अनिद । रोपवे - रिक्त, (त्रि.) रिव्+क्त । शून्य। साली। सूना ।वन । निरर्थक । रीटा, (बी.) रीठक् (तस्य न इत्वम् । रीठा. रिक्तभाण्ड, (न.) रिक्तं भाण्डम् । तेल आदिसे शून्य | रीढा, (स्त्री०) रिड्रू । अवना : अवमान भोडा ( वर्तन). मानी । न माना. रिक्तहस्त, (वि.) रिक्तो ( धनादिशून्यो ) हस्तो यस्य । रीण, (नि.) क । हरित । शुन । बहगा। जिसका हाथ धनआदिसे शून्य है । सालीहाथ । निर्धन । ति, (स्त्री) रीतिन् । पित्तल । प्रधान गरीब । बहुत दान आदिसे जिसका धन खर्च होगया. रिक्ता, (सी.) रिक्त । दोनों पक्षोकी चतुर्थी । नवमी आदि रचना । तरीक. और चतुर्दशी तिथियें. रु, प्वनि (शब्दकरना) अदा. प. भ. रिपथ, (न०) रिबन्धक् । धन । मिताक्षरामें कहाहुआ शातिक्रिया, (स्त्री.) इजः प्रतिक्रिया ( अप्रतिबंध ( न रुकनेवाला) दाय (बिरसा ). इनि । दोयहारी । विरसालेनेवाला । दायाद । शरीक (रोग-बीमारी का इलाज रिख, (सर्पण ) सर्कना । भ्वा० प. सक० सेट् । इदित् । रुम, (२०) र मन्-नि-पुत्वम् रिक्षति. धतूरा लोहा । नागकेशर. अरिजीत, - बेफायदा. । वहना । सीमा । गति । जाना । समाचार बेटी • रिष्, ईपर्क (मिलना) और वियोग (अलग होना )। सोना है। एकरामा। सोने का सामी (१०) । रेवति (भरीरिचत् न)।अरेचीत. भीष्ाककी कन्या.

, रुधिर, - -अन् (म.) सप्र । रोगका पर । मल । विछ । सदित (न.) भावे रू। कन्दन । चिल्लाना । रोना । "परि रु" कृतरोदन । जो रोया है। रोनेवाला *६, (हि.स. वा रोपः । भषिक्षण । समें चिकनाई न हो । निह । और कठोर । सस्त. एच (नि.) स्क। भाउरणादिवेष्टित । परदे मादिसे (नि.)। रोगान्वित । बीमार 1 रोगवाला। पेराहुआ। रोकागया। मंदहिया। काहुआ. - । टेडा. पदा (पु.) रोरिति । द्रक् । रोता है। शिवजीकी । प्रीति ( प्रगान होना )। (चमकना )। भ्या. एकमूर्ति । "सोऽरोरीत् यदरोदीत्तत् समस्य ववम् ' • मद् । रोचते (भरवत्-मरोचिष्ट), भज एकपात " इति श्रुतिः। अहिएंध्य, विरूपाक्ष, -6 (A) रुपन् । समी। सर्जिकाहार । अभा- मुरेश्वर, जयन्त, माहुरूप, श्यंबक, अपराजित, परखत, सावित्र, हर, और शम्भु इस प्रकार शिवजीकी ग्यारह रण (घोदेवा जेवर) । माला । मुहाग्य । भौर निमक । न । भोर स्तर (पु.). मूर्तिये. न्, (बी.) कि वा टाप् । सप्ति । प्रकाश । मोरगज, (पु.) स्यात् जायते । जन्म से उपजता है।शिवजीके वीर्यसे उत्पन हुआ। पारद ( पारा). भा. :-पी, (नील) किन्दा सीम् । अनुराग । मुदत्यता रदजटा, (सो.) यस जटेव पिनत्वात् । जटिक्लात् । Ta (धा (इच्छा)। अभिलाष । किरण । शोभा। मानो रसकी जटा है ( पीली और मटावाली होनेसे एक प्रकारची घेलशंकरजटावेल. भुमा । भूरा । गोरोचना । एक प्रजापति (पु.). पदमिया, (श्री.) त· । यी पियारी। हरीतकी । फिर, (नि.) रविं करोति++सर । साद देनेवाला । हरीड। और दुर्गा । देवी. दलपसंद. सदापशति, (स्त्री.) खामिका विंशतिः । यद वीसी धामन, (पु.) रीतेः पानाम् । प्रकाशका जिसका खामी रद है। प्रभव आदि साठ मिले अन्तकी र। सूर्य. पीसी. र,(नि.) रचि राति (पदाति ) +मनोहर । रसायणि, (पु.) चौदह मनुढेमसे थारा मनु. सन्दर। भौर मधुर ( मीटा )। रुचि (हरया) को देता सदाकोड, (न. ) दस्य बाकीग या । जहाँ रदजी खेत (पदा कता है )। बेसर और ग (न.). करें।मशान । मसान । मरपट. प, (f.) स्चये हित: यन् । पिके लिये हितकारी स्वाक्ष, (पु.)स्य अशीव-ष । मानो यी भाव है। (पण)। गुन्दर। भीर रुपिटर। पति । कताक्ष अपने नामवाला. रुद्राणी, (स्त्री.) दस पनी । सहकी-आनुव । दकी 1. भान (तीना) ३. पर• सर भनिन् । जति । श्री शिवपन्नी । पार्वती । शिवकी भौरत । ग्यारह बार- भरोजीन् । हागः सकी हारी. (मा), (सी.) रकिए । वा टापु । एज्+भया । रुद्रारि, (पु.) मा भरिर्यस्य । ८ जिराय पनु है। रोग (बीमारी)। भंग । टूटना । मेथी । मेठी । कोद. बामदेव. फर, (म) का (रोग) करोति । अन् । दायास, (पु.) ६. रद के निराग करनेश स्थान। रोगको कर्मा है। कमरेग (रामारोगा) फळ । रोग बलास । काशी मशान (ममान ). करनेवाला (त्रि.). इद्रिय, (त्रि.)मस भयंपादय । सकारा से इचार्य (चोरी करना ) भ्या• पर• एक सेट् । इदित् । उत्पन हुआ। रावना । (रमें) मुनिरा बधारण कटति. परना । मुख पहुंचाना । यदा,एक मा. रोध (रोकना)। समीति चमकना । अक• पुरा, काम (पाहना-मामा)। भा• र भनिट् । गाय उभ• वैद् । रोटयति-ते. इस मामुळे साप अनु उपसर्ग सपना है। अनुरप्पते । अन्याय होता है। मसकसे शून्य शरीर (जिस्म) करंधाया, बावरण (रोनाली त, (.) साख । भावान । पशु और पक्षी स्परिक धिर, (म. दू, रोदन (रोना) मा.र.भा. रोशी। मरस्त्रोत पप. ५३ । भादिता शब्द . "स्यूक". अरोपीत.. रंग) आकार (खरूप)।एक अनका या उद्रव-उरम होना । भ्या. प. अ. अनिट् । रोहति । रूपधारिन्, (वि.)रूपं धारयति । rif वाला। सूबसूरत । दूसरा वेश नेहरा, (बी.) अगले पदमें रहनेसे "ठस्से निकला" अर्थ रूपवत्, (नि.) प+मनुष-"म" al रुपा (नि.) अथिचित्रण । स्सा। जो किना रूपसंपद-संपति, (श्री.)स सदा रुपाजीया, (बी.) (सीन्द) बनाने के लिये जो गोना माnिkr भार (जेवर)भादिबनाना मोरारी"साय"हएsurari ब) (रामीला दी कपित, (.) RT रुधिरपायिन् ,] (४१८) रुधिरपायिन् , (५०) रुधिर पियति । रुधिर (लोहु ) रूढ़ि, (सी.) नातिन् । जन्म। पर पीताहै । दत्यः (मराहुरी)। प्रकृति और प्रयाक बन रुप, आकुलीकरण-घयराना । विगाडना । (वेद) यदी पीडा विन समुदाय गतिम वर्षका वोन राहारना । दि० प० २० सेट् । रुप्यति । धरानः "डित्य". अरोपीत. रूप, स्पान्वितकरण शकलवाला इनाना । रमा, (सी.) +मक् । मुग्रीव वानरकी भार्या (औरत)। सेट् । रूपयति-ते । अरमान-त. लवण राक्षसका स्थान । एक देश, रुप, (न.) रुपक । भावे अच् वा । हा करू, (पु.) कु । मृगविशेष । एक प्रकारका हरिण, सौन्दर्य (ममूरती)। पशु नाम। स्यु, (पु.) +यु । एरण्डका द्रत । " फन् " एरण्ड । वृत्ति (प्रन्यको दुबारा पड़ना) । देव नाटक भादि । लोक । शन्द और पर यश, हिंसा (कतलकरना मारना) तु. ५० स० अनिट् । टगानेसे बनाहुआ शब्द। और विजन शति । अक्षत. याला (त्रि.)। "अगले पदमें रुप्, (वघ) मारना। भ्वा० प. सक० सेट् । रोपाते । "पितृम्पसनयः" पिता के समान पुन (गिन्ती). सर, क्रोध (गुस्सा करना)। दि० ५० अक० रोट् । रुप्यति । रूपक, (न.) पयति मात्र । रुप्मसन् । थरपत् भरोपीत. प्रदर्शक दृश्यकाव्यप्रमेद । नकल (मान रा-पा, (त्री.) रु+किप-वा टाप् । मोघ । कोप । दिसानेहारा एक प्रकारका देखनेलापात थति अस्य युग्" रूपवाला । । गुस्मा. रुपित, (वि.) रुपक वा इद् । क्रोधयुक्त । गुम्मेयाला । (त्रि.)। "पाखा कन्" ! तीन रत्तीका मापाची. .भरसन् रख (नि.) रहक्क । जात । उपना । उत्समहुआ। दूवा (साग बनानेवाला) होता है । जमे "भूरद" (पृथिवीसे उपजा-गस) चिट्ट आदि पवाटा । सौन्दयुक्त (नाम "वारिरह" पानीसे निकला-कमल. सन, पारष्य-सतहोना-कटोरोना और राहोना । पुरा. रूपशालिन्, (त्रि. ) स्पेग हासते । भा• भा• ऐट् । स्थयति-ते । अरुक्षत्-त. मुन्दर. नहिं । और हमे रहित । छ (पु.)। दन्ती पूरी गुन्दरता । वही भारी मादी (थी.). रुक्षगन्ध, (पु.) सो गन्धो यस । निमन गंध समा दै। गुग्गुल. कंजरी. प्रगित (माहर)!"भय अनित्यच्" बिगी (गिरि) हो । प्रति (43) और प्रायके मी अशा न करई समुरायदि (गारे दादशी और दादा। मुन्दर (पु.). को जमानहाय सदमे ":" "il.". ज्याध्यक्ष, (I.) ये भया । न.) किरन यसा पो गई है मानी मारकासाची. ह,( मागिनाना) । ननर यमामका दायत. | हिमा. "ट". - त्व मूरती सेकर जीती है। "story 5. (fr) + । जात । यानहुआ 1 निकला । और 'रुप्य, (न. ) पाय मान्यते व म

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लोमिन, . । लेकमें जानाहुआ वा मशहूर।लोकपि.द। रक्तवर्ण। सालरंग।एन0(.)' सोत(पु.न.)+रिन् । सं जहाति । हामी (7) मिलना ।पा.पर .. (१८) लोमिन्, (त्रि.) लुभ् णिनि । दूसरेके द्रोंमें बहुत लोहकिट, (न.) ६ त० । लोहेका मैप, तृष्णावाला। लालची. लोहद्राचिन्, (पु.) ओहानि (धमकी लोभ्य, (पु.) लम् यत् । मुद्ग । मूंग। लालचके लायक पदार्थ दुणिच् गिनि । जो धातुप एक (नि.). है। सोहागा. लोम, (न०) लुमिन् । शरीरपर उत्पन्नहुआ वालोके | लोहित, (न.) हइतन् । स्य । खरूपका रोऔं नाम द्रव्य । उसवाला पूंछ. दन और रुचिर (लोह) लाल मुद्दोजन । लोमकर्ण, (पु.) लोमबहुलो कर्णी यस्य । जिसके कान (पु.)। उसवाला (त्रि.). पहुतरोऑवाले हैं । शशक । सहा. लोहितग्रीव, (पु.) लोहिता प्रीदा यस्य ।। लोमकूप, (पु.) लोग्ना कूप इव । रोआंका मानो खुआ ण्टवाला । अग्निदेवताका नाम. है। रोआंका आनय बिन्दुका खरूप । गतं । रोआं । लोहिताक्ष, (पु.) लोहिवे अक्षिणी गर । मुरास. लोमन, (न.) लोमानि हन्ति । हन्सक जिसकी लाल आँसे है। विष्णु। और कर रोआँको लाल ऑसवाला (त्रि.) नाश कर्ता है। एक प्रकारका रोग (टाक). लोहिताङ्ग, (३०) लोहिनं मां असाद लोमपाद, (पु.) लोमयुको पादौ अस्स । जिसके पाव मंगलग्रह । काम्पिल वृक्ष. रोआँवाले हैं । अंगदेशका एक राजा. लोहितायस, (पु.) लोहिवं अब अन् लोमश, (पु.) लोमानि बाहुल्येन सन्ति अस्स+श । जिसके शरीरपर बहुत रोम हैं । एकमुनि । रोआँवाला लोहिनी, (खी.) लोहितवर्ण । श्रिया कर लोहा । ताम्र । तामा । एक प्रकारका सात (त्रि.). लोमहर्पण, (न.) लोनो हर्षण हर्पजनकव्यापार इन लोहोत्तम, (२०) लोहेषु (धातुः) त "न" होता है । लालरंगवाली स्त्री (औरत) उद्भेद इति यावत् । रोआँका खुश होना (प्रकट होना- निकलना) रोमाय (रोआंका सडेहोना) । "लोमानि लोकायतिक, (न.) लोकायत (चा उत्तम । स्वर्ण । सोना. हर्षयति उत्तमकथया" "हपणि+स्यु" । जो अच्छी कथासे रोमोंको सुश कर्ता है म्यासदेवका शिष्य (थेला)। सूतके वंशम हुआ इस नामका पौराणिक. लोल, (नि.) लोइ अच् । उस्स लः । सतृष्ण । लालची लौकिक, (मि.) लोके विदित ( प्रधिको और चल । जिहा (जीम)। और लक्ष्मी (खी.). टोलजिह, (नि.) लोला जिदा यस्य । अचल (हिलने- लौकिका, (नि.) लौकिकं जानातिrk व्यवहारों को जानेहारा । लौकिक रीत रसमा पाली) जीभवाला । लालची । लोमी. लोलासि, (न.) सोलं अक्षि । पाल नेत्र (स)। लौकिकाग्नि, (५०) कम• । विधिये न गई आग. हिलनेवाली शाख । अक्षिका (सी.) बधल नेत्रोंवाली लौर, उन्माद (पागल होना ) भ्वा० । पर" पी (भारत) सौइति. सोलुप, (वि.) हम्म्यहम्अच्-पृ• भस्य वा-पः । अति- लोह, (पु. ) लोई एव । खाऽन् । लोहा। सोमयुक्त बहुत लालवाला. टोन, रोहति, (असा होना) भ्या. भा• पक० सेट् । लोहज, (न.) महात् जायते । जन् ।। जता है। मादूर टोट । भोटिट. टोर, (पु.न.) स्यन् वा । गृसिर । महीका लोहमाण्ड, (पु.) सोहस्य विकारा। रेला । म । देला । और सोहेकी मैल । हमल, दया । यह । सोहेका पात्र (वर्तन ). सौदिस्य, (न.) सोहितस माRRIA टोन, (पु.) मो इन्ति (मर्दपी) हा रेट. रोटोनिशा मुदर दि. - अधीते वा+ठण् । चाकिमतको आहारा मतका ज्ञाता. एका पारा । अगुइन (न.). भावीत, टोहार. (मीची, (ग) माना: गया. १५. सुर- भरोल intent. मापौर (२९) [[वाज पकते। च पकवृत्ति, (पु.) एक इव खापरा वृत्तिया यस्य । जिसी चेष्टा वगडे नाई अपने मतलब लिखकर- पु.) वा । वायु (हवा)। राहु । मन्त्रण (स. ह)। सान्त्वन (तसही)। कल्याण (भलाई) बल-| नेहारी है। दूसरेको ठगनेवाला जीव. ला । समुद्र । माघ (मेडिया ) । वमन (बरदा)। पकयतिन् , (क), (पु.) वयत अस्त्यर्षे इनि टन् वा । अगलेके व्रतको धारण करनेहारा बकरतधर, र पंदना करना । परण (पु.न.)। साश्यार्वमें , भष्य.) "मणीयोष्ट्रस्य लम्बेते" इति. घफुल, (पु.) वकि+शुलच् । नलोपः । इस नामका फूलों- याला स. , वाक्य । नि नुम् । पुत्रपौत्रआदि सन्तानका समूह । ..क प्रकारका तृण । योस । पीटका अपयव (हिस्सा)। घा, (गनि) जाना । भ्वा० भा• स. सेन् । अवकिट. ४ (गा) । और साला । एक प्रकारका धागा यक्तव्य, (न.) ५+तव्य । पुत्सित । निन्दित । हीन । लियां टीए)। "वंशीकलेन पडिशेन" इति वृन्दाव और दुष्ट । कथनीय । कहनेलायक (वि.) "भावे क" कयन (कहना)(न.) फर, (वि.) पंसं करोति । वंश (सान्दान) के | यक्त (वि.) उचितं बहु पक्किा पन्तृन् । मुनासिब । चलनेवालाशप्रवर्तक. बहुत बोटनेवाला. कर्पूररोचना, (बी.) करे इस रोचते । इच् न्यु ! यत्र, (न.) पति अनेन+ट्रन् । जिस्से बोलता है। मुरा। त। शरोचना । बंसलोचन । कपूरकी नाई मुर्ग- मूं। एक प्रकारका रूपमा । एक प्रकारका द. विवाटा. घपत्रशोधिन्, (पु.) पात्र शोधयति । घरनिन्। ज, (पु.) पंसात् जायते । जन्+ बांसके पक्षसे णिनि । जम्बीर (नींबू)। मुराको साफ करनेवाला वामूठ उपमहुभा जोंके सरूपका एक पदार्थ । अच्छे कुलमें (पान ) आदि (नि.) उत्पभहुआ (त्रि.)। वंशरोचना (स्त्रिया टाप् ). यात्रासय, (पु.) वयस आसवं ल । मुराय मानो तण्डुल, (पु.) .त.1वांससे उपजा दावलोके मय है । अधररस । होटका रस. सम्पका पदार्थ । वासके चावल. पत्र, (न.) पकिनरन् । पृ• न लोपः । नपा (म0 राघर, (त्रि.) धरति । वंशको पकता है। कुलको टेट) । शनैयर । शनीचर। मंगलप्रद । पत्रिपुर पलानेवाला । वंशवधन" इसी भर्थ में. दल । और तिरामाना । उसवालम (टेग)(नि.)। पराकरा, (श्री.) वंशम्य शरेव । दासी मानो "राहुकेतू सदा की" इति ज्योतिषम्. सोमवंशलोचनपदार्थ । तबाशीर. | पक्रतुण्ड, (पु.) टेटे मुखवाला । "मुर्ग नस" हास्थपिल,(न.) बारह अक्षरके पादवाला एक प्रका- गणेशजी. यभाय, (पु.) पका भारः ।टेडा भार ()। टेडापन । एटिलना । छल. शाम, (न.) पंसस भर्म (मूल)। पंकी । पुलमें पहिला. पकाल, (पु.) वापि मानि असाटेगोटा। हंस । कुटिल अवयवपाला (नि.) •टिक। जीप, (पु.) पंथी (संवार्य) घरति । शन् । टेता शरीर (नन). पसरीबजानेवाला पीपी. पषिम, (म.) कप भाषामनिन् । कोटिपाटेशन. इय, (नि.) पंछ (पवले) जात । अछे कुटमें मोति, (सी.) • । इटिलोक्ति । देशावरन (पर उपजा सान्दानी. बारका गीपन है)का अंग । और गारपर। कोटिल्य (कुटिल होगा)। हिम्र होना । म । मित्रा. जाना (गति)। राक. भा. भा० सेट् । इति । य, रोग (गु-सारना) भा. पर• गह से दामहति । पंका। अविर भवोर क, (पु.) पकि भन् । पृ. "न" पर होता है। पक्षस, (न.) बरम्भमन् गरन सटरम् । इस नामका पसी । गला। एक फूटोवाला दस्त । पुरा पक्ष(स)स्थल (म.) : कम- एक पक्षण (जिसे भीमसेनने मारा था) एक प्रार पःमण्डी दी. राईकानेरीकला । धीरणसे मारगया एल. पोज, (पु.) परते। wि कपश्चा, (म.) कार्तिक (en) के सपने हानमनिन । “शेगार एकादशीसे लेकर पर शिथिये.

५ घन्। । . . पचनीय, (नि.) वयनीयर । कथनीय । कहने के पश्चन, (.) पश्मयुर । प्रतारण । बगर नियति । स्था+फा अडासमा• पचनपर ठहरता यजल, (पु.) उलया फरना (भुलाना) । "यु" बचना (220) अशोकाक्षा वेतगाक्ष (चैतहास)|* वोह, यक्षोरह, (पु.) पक्षसि रोहति । सहक । छातीपर | यचा, (त्री०) अन् । "व" इस न १ - उत्पन्न होता है। सन । मम्मा । पिसान. गति (जाना) भ्वा० पर• सर० मेट । पख्, (गति) जाना । भ्वा० पर० सक. सेद । इदित् । अवाजीतं । भाजी, वहति. यन, (पु.न.) वरन् । हीरक (tr घगाह, (पु.) अव+गा+पन् । "अ" के अका लोप विकल्पसे होता है। "अवगाहन" । सान । नहाना. इन्द्रका एक अत्र । (यह दधीचि मुनि गयाथा)।बालक । एक लोहा। वघ, गति (जाना)। निन्दा करना । और शुरू करना । म्म आदि सत्ताईस योगोंमेंसे एक (न.)। सफ० । जय (जल्दी जागा)। भक. भ्वा० आ. सेट श्रीकृष्णका पड़पोता । एकराजा (पु.) इंदित् । बंपते. वज्रचर्मन्, (पु.) वनं इस कठिनं चर्म पर घङ्क, (पु.) वकि+घम् । नदीवक । नदीकी टेड । पल्य- चमडा वमकी नाई सख्त हो । गडकर यन । पलाना । काठीका मोहढा. घग, (न.) पगि+अच् । एक प्रकारका धानु । रांगा । वनदन्त, (पु.) वनं इव कठिनो दन्तो अन्य दांत पनकी नाई सस्त हो । शूकर (स्य "रनाकरसे ले ब्रह्मपुत्रतक धंगदेश है" । एकदेश । पु. ५०व० । चन्द्रवंशी एक राजा (पु.). मूषिक (मूसा)। "वनदान" यही अर्थ. बङ्गजा (म.) वंगात् जायते । जन्ड । वंगसे उपमा । वज्रधर, (पु.) वघ्नं धरति । पृ+अन् । सिन्दूर । वंगदेशमै उत्पन्न हुआ (त्रि.). मृत्" पननिर्घोप, (पु.) ६त.। वनग्री अपर वाशुल्वज, (न०) वंगशुल्वाभ्यां (रंगताम्राभ्यां ) जायते। "वननिष्पेप". जन्ड । रांगा और तामासे मिलाहुआ एक धातु । वज्रपाणि, (पु.) वनं पाणी यस्य । जिसके कांसी, है। इन्द्र । "वहस्त" "वनकर" घनसेन, (३०) व इव शुभ्रा सेना (पुरुष) अस्य । यज्रपात-पतन, (३० न• ) वभस्य पात:। रांगेकी नाई जिसका फूल चिटा है । वकवृक्ष. राना । बिजलीका गिरना. पगारि, (पु.) ६ त । हरिताल । यह रांगे धातुको यजपुर, (न.) घन इव कठिन पुरा जलादेती है. पडदा बजकी नाई सख्त है । औषध (मां बच्, कहना । अदा दिक० पर• अनिट् । वकि । सवो- पात्र (वर्तन ) "औषधीपारनपात्र". चत्वका चनमय, (नि.)वनात्मक । मयट् । पत्र वचन, (न०) वच् न्युट । कथन (कहना) । वाक्य फिकरा ) । सोठ । व्याकरणमें सख्याके अर्थवाला सुए. यजिन्, (पु. ) व अति भस्य इति । तिरूप प्रत्यय. पचनप्राहिन्, (नि.) वपनं गृहाति ( तदनुसारेण यशा (प्रतारण) ठगना । भ्वा० पर० भाचरति) प्रणिनि । जो वचनके अनुसार आचरण कना है। वचन में रहनेवाला । वशीभूत । कावूमें रहने पक, (पु.) पनि-मुन् । गत ।। वेद । वयति-अवयीत. सायक । निन्दाके लायक । और लोकापवार । तोहमत. चीजको भौरतरहसे वर्णन करके हमरेको पचनेस्थित, (नि.) वचने (पाश्ये-तदुपविष्टाचारे) है। पाश्या टी २ पालन करनेवाला । पश, भाया दुआ. पचम, (न.)वचू+अमुन् । बाक्य । वचन. पक (टेटा) (नि.). पयमांपति, (पु.) ६. मउ प.हराति । पद, (वैटन) पेरना । दिनाकरना Iyo.ri परपी-ते. देवगुर. पवाकर, (नि.) पक्षः रोल I म । वयनको पद, (धिमाजन) हिया करता | SANTHAL धमे दमा ! "वयसकस." पर• • रोद।क्ति रसीले बदलू-सा भयभीत सहत. . वाला. (नीच) और प्रतारक (उगनेवाला) 18{ [पू(5)टी, एति. गरों. । (धन) पहना । भ्वा० पर. कि. सेत् । इदिर । यरसफ, (न.) परा इषवाः कन् । पुष्पकालीस । यी. हीरा-वसीस । इनयर (इन्द्रजी) और वत्स (वा) (स्तेय) चोरी करना । पर० राक. सेट् । इदिद। परसत, (पु.श्री.) Y: ता.+तर । यस । छोटा (३) बम्मन् । इस नामका एपक्ष । सनी बनी बामा दम्य । छोटा सांड. ई तात । रही. पसिनाम, (पु.) वत्मान् (पशुशिश्न)मभ्यति (हिनस्ति) क(पु.)पदमुन् । पिटकमेव । पहा. नभए । पशुओंके बचको मारता है। एक प्रकारका (बी.) बट अच्डीप् । गोलस्वरूपरा पदार्य । विष ।। जहिर गे। "सार्थ कन हम." । "बटिय" यही अर्थ. यत्सपत्तन, (न.) वस्सस्स (बागराजस) पतनं । बस- T(I.) पदउ । माणवक । बालक । भौर मनचारी. रामाका नगर । उत्तरदेशमें कौशाम्बी नाम नगरी. क (पु.) व उक । बालक । भैरवपिरोए । एक यत्सपाल, (पु.) वत्सान् पालयति । पाम् अण् । पादों को पालता है। श्रीकृष्ण. ", सामर्थ्य (ताकतवाला होना)। भ्वा० पर• अक सेट् परसर, (पु.) वर सरन् । बारह महीनेरा मज । बरिस. ठति । भवाठी-अवठीतू, पत्सराज, (पु.) चंद्रवंशका एक राजा. १५(पु.) बट्+अरन् । मूर्स । बेवकूष । और अगष्ट ।। यत्सरान्तक, (पु.) पारम्प अन्तं करोति । मन्त। प्रारसा वर्णसंकर । पाठ । लथा (त्रि.). पिण्पुल् । बरिसको समाप्त कर्ता है। फाल्गुन ", (विभजन) बाँटना । पुरा• उभ• सक० सेट् । (फागन ) का महीना (पर्ष ऐनमे शुरू होता है). पित् । वाहपति-ते. यस्सल, मि.) परमं शाति सास । प्रेरक पारवाला। (टन) पेरादेगा । भ्या. बा. सक. सेट् । पडते. पियारा । "वात्सल्यरम" (पु.)। उसवाला (नि.). "मि-भी, (सी.) पन्यते (आरपते) भर । वह पत्सवाला,.बी.) परमानो पारा । रोध पर । अभिमाग । जहाँ पहते हैं । एमा । पहचूहा। पोवाडा. परी घोटी । सादामस्थगृह । महलके सिरका घर. पद्, मृत ( मारना) मा । मभिराइन (E.). स, (न.) पदइन् । बाहि सति । शोक । मच्छि भा• सेट् । इदित् । परमते । मन्दिर. ओंको पकाने के लिये रे लोहे के बाटेवाला पदार्थ पद्, (आप) कोलना (संदेशा देना) भा. भ. मी परहनेवाली पुण्डी. सक- सेट् । ददाति-से यार । भरदिए. (नि.) मा । सस । त् । श्रेष्ठ । पद् (पाधि), बोलना । भ्वा • परसा. सेमी. पद (नि.) पदम रचा। बोलनेल. 'टफ, (५.) बद+पम् । साथै पन् । भावे दुल् । यदन, (न• ) उरतेऽनेन । परम्पर पुर । dि विभाग (बोटनेवाला) । हिगा करनेवाला. बोलागता है। मुरा ।। "भारे पुरान '1, (मध्य) सारस्य (बराबरी ). पहना (म.). (भन्या ) इन्+क । खेद (तहीफ) । अनुकम्पा | पदा(द)न्य, (५.) मम्म । • दाः । (दया)। हर्ष (सी)। विस्मय (टैरानी } भामश्रण पदाम, (२.) बहभागन् । एक प्रमरम. भूरिदायीलापन दान देनेवाला । तण्ड, (पु.) +तरिभि (एक मुनिका नाम. पदायक (पु.) मन पदी । भन्। R.1 तंस, (३.) अप+in+पम् । "" के माप । एक पाना भाग (जेपर)। शेरार (पोटी) । शिरा पधू. (गो.) र गिहार परिन् । भूषणरएकप्रबरपा गहना रानाल. Ye | पिपरसे पति राधे है। तोका (स्त्री.) अवगतं तो पसाः । "" के भयो । कारण nिtrt पुर । ""राजिमका संतान एरोगया । संसान पपूजन, (पु.).inगा. स, (भ.ग्यापक्ष स्थल (जग)ोरप(पु)ी, (डी.) .. पशि (रा)(ब) और मर (गरिंग) मारीपर " मोटरसरा" तलनेमाल

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(पारागि . न - पु.न.) सप्पन । यहाँ बोरा जाता है। दुर्गन-परण, (न.) युद् । म्यादिवानाय जामात्रारभ्यर्थ- रिलेका नगरमादिचापोरालाई मानालन्यापारमेदः । कम्पाभादि देनेके लिये जापाईको लाया मीरा रानापूरी।मिनारा। और एक प्रचरणी प्रार्थना करना । सपेटना (पेन)। पुरो. (सीसा) । अनस । पिना । प्राचीर (सपील)। हितआदिको क्रियानों में गानेके लिये पूजना । उष्ट्र प्रशाणी (पु.). (ऊंट) । प्राकार (कोट रापील) । गौर वरणास । गति (जाना)भ्या• पर• पक सेट् । बभ्रति । बनारस (काशी )ी उत्तर पीमागी एक नदी (दर्ग) (बी.). मार (वमन-उपर एल करना)। भ्या- पर• सक. घरण्ड, (पु.) +भण्दन् । एक प्रकारका का रोग। हापियो लडाईम भराडा. बमा भषमीतू । ""मयु।"" वामः, (म.) पम्+त्युत् । मदन (मटना) । दन | परता. (सो.) मनन् । हखिकक्षास्थरजु । हाथी की पेटीतरामा. ) बर्दन (मांगना) । और सव निकारना । (सन ) (पु.), परत्यय, (पु.)वरालवा यस्य । जिराका डिलका वडा है। नीमका दहन. (सी.) पम्+इन् । एन ।2। भमि (आग) | पाद, (नि.) पर ददाति । दा+क । अभीष्टदाता । चाही- •)। धूर्त (सपा) (नि.). गई वस्तुये देनेद्दारा । भौर प्रसन्न (श हो गया)। ., (पु.) पम्+विचक । नोहार । जिराने बमन पन्या (लड़की)। अश्वगंधा। भादिल्लभता । दुर्गा (स्त्री.), ।कीगई. परदाचतुर्थी, (स्त्री.) मापके ग्रामपक्षकी चतुर्थी. गति) जाना । भ्या• मा• राक सेट् । पयवे। परम्, (अय.) +मम् । इषदमीट । योदा प्यारा । विष्ट. बहुत अच्छा। बेहतर. 1(न.) अम्मगुन्-पीभावः । पिग । परिदद । पररचि, (वि.) वरा रचिः यस्य । भरखी प्रीतिकाला । नेपालपन आदिअवस्था। उमर। भौर जवानी. पाणिनिमुनिके सूत्रोंपर वार्तिक बनानेवाला कात्यायन or)स्य, (पु.) क्यसि विति । मित्र (दोस)। मुनि। पिकमादित्यमी समाका एक पण्डित. 3.) युगा (जपान) (खी.) "वयस्था" मामलायरलम्ध, (पु.) वर उत्कर्ष. पुष्पेषु सन्धो यैन । फूलोंमें । गिलोए । छोठी इलायची । सहेली । जवान जिगने सखापन साम किया है। परनि । चम्पर्क (देवा फूल)। प्राप्तरर । जिमने व हासिल किया है (पु.) पयसा नुल्यः+यत् । एक सी उमरवाला। (त्रि.). पानवयरक । सखी । सदेली । (खियो टार). परपणिनी, स्त्री.) परः बैठो पर्णः प्रसंसा अस्ति अस्यानि । तारीफलाटी । उत्तम सीनेटभीरत। ",(न.) पय्+उनन् । कान । इलम । दानाई । देव- । यस हल्दी रोचना। पार्वतीआदि. पा मंदिर (पु.)।तरीका । नियम, 'पस, (पु.) यो यौवनं धते । पाअमुन् । जवा. परततु, (बी.) वरा तनुः यस्याः । मुन्दर श्री। भो पारीवाली. धारण का है।वरण जवान. परपणिनी, (सी.) परः वर्ण. असाः । बरछे रंगारी श्री 'ईश (चाहना )।धु•३.स. सेट् । परयति-से. (भौरत)। बहुतही उत्कृष्ट मुरा (विहरे वाली बी. (न.) वियते । अम् । परपम् वा । म । पराक, (पु.) पाइन् । गिरी। युद्ध (न.) सिर । मनागमीट (थोडा प्यारा)। "वर प्रणान् भवर (छोटा )। शोचनीय (चारा ) (नि.), -रत्यक्ष्ये" इति तत्रं । “भाये अप" "ब+प वा" | परान (न.) कर्म । मसक (माया)। "नियते" आ. या (चाह)। याचन (मांगना)। भादरण (पदा)। वियते (अायते)। अप् । कर्म• । गुच । सदा । पोर घेरन (घेरा)।"वर्मणि अप्" अभीष्ट (प्यारा)। मोनि । युग । ६.गर (हाथी) । विष्णु । और पार पेष्ट (राहुन अच्छा) (नि.)। यार । गुग्गळ । बामदेव (पु.) । अणे अंगोवाला (त्रि.) प्रवाई । और पति (साविन्द) (पु.). दारचीनी (म.) स्वी+खियां गए. (ना) +मटन् । इन्दनामी छ । एक प्रकारका | परागिन, (पु.) पराई अखि भस्पानि । मले। -पीटा। और हंस (पु.ली.) भगवालालम्लपेतुरा भवलता भयो भावाग(त्रि.). पत्र. ५५ . वि. ।

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- (१५) [वर्ष, "नी" माह ...(सी), (सी.) पणांना लेखनसाधन तूलिः, यतिन् , (नि.) शिनि । वर्तनशील (प्रायः रामा- के सिनेका साधनरुप लि । लेसनी । बलम समें पीछे रहता है) । रहनेवाला । ठहरनेवाला । कन् । यही भयं. सीटनेवाला. ... (पु.म.)..। वो धर्म । प्राह्मण पर्तिष्णु, (वि.) वृष्णन् । वर्तनशील । रहनेवाला । वोका क्षमाधारण (साग) धर्म । जगे प्रामणका • होनेवाला. परना, पाना, दान लेना भादि, क्षत्रियका पर्नुल, (नि.) +उलन् । गोलसरूावाला पदार्थ । औरापालन भादिः गोल । गाजर (न.) कर, (पु.) सकी। सम्मम् । वर्णतः सरर यमन, (न. ) मनिन् । पथ । रास्म । वाद । आयार । रा मेल दोगला । मूर्धाभिषिक आदि आदि । तरीका। ओसरा पडदा. गरते मकरः" गीता. पर्ध, छेदन (काटना)-पूरा करना । सु. ३. स. सेट् । (सी.) वां भारानि मसान्ते अनया । म वर्धयति-ते. मजिस्से मसरोंके निशान येजाते हैं। लेशनी। यर्धक, (पु.) मग्नुल् । मादाणयष्टि (बामनहाटी)। पूराकरनेवाला । भरनेवाला । काटनेवाला । छेदक. "मन्, (पु.) वर्ण आत्मा सम्म यस । असरोंके | यकिन, (पु.) वर्धश वर्धः असि अस्यहनि । वश । सवाला । ध्वनितरूपसे विलक्षण आकार आदि बाई तान. परवाला एक प्रकारचन्द. पर्धन, (न०) वध ल्युट् । काटना । और पूरण (भरला)। , (स्त्री.) वर्णा अक्षरापि लेख्यत्वेन सन्ति असा+ +णिच् न्यु । पृद्धिकारक । बढानेहारा (त्रि.) ।जिसमे अक्षर लिखे जाते हैं। लेसनी । फलम. " स्यु" । वृद्धियुक । बदाहुआ । (नि.)। T, (नि.) वर्ण+क । स्तुन (तारीफ कियागमा)। न कियागया । और स्पान्तरापादित (मेस बदला- | पर्धमान, (पु.) ५+शानच् । एरेशका दरूत पृदिशील । बाहुमा (त्रि.) । पाराव (प्रकारका मौका न..(पु.)वर्ण बस्ति बस्यहनि । रंगवाला । चित्र- पात्र । कुडा)। पियाला । विष्णु । धनिओंका एक घर । भूरत लिरानेवाला । लिसनवाला । भौर ग्रह्मचारी । एक देश । एक नगर । बाहुमा (त्रि.). अप बी पिदितो महेश्वरः" इति मारः । माग | पर्धापन, (न.) व (ऐ) करोति । गिम्- वादिजाति। “दर्णिनी हिरो स्त्र" स्मृतिः. आपच-रालो भावे ल्युट् । नारी काटनेके रमेका भेग- (पु.) +ण्युत् । एक प्रकारका पक्षी । माई । खरूप एक प्रकारका संस्कार । नारीवेदन. तिका "वका" इसी में । घोडेवा सुर. यर्धिष्णु, (त्रि.) स्थष्णन् । इद्धिशील। पाहुमा. न, (न.) पद स्युर् । इति । जीविका रोजी धर्मन्, (न.) मनिन् । कवच । साह । संगोह । 'मिच भाषे ल्युट" स्थापन (ठिकाना) । "णिद् क्षत्रियकी उपाधि (पु.) नामके पीछे आता है. परणे स्युर" जीवनका उपाय (न.)। "त्यु" । पमहर, (I.) वर्म हरति । अन् । सपर भारण जीविकावाला । रहनेवाला (त्रि.)। वायस । कौआ। करनेलाय अवस्थाविशेष । सरुण । जवान. (पु.). यमित, (वि.) धर्म करोति । णिच+छ । जिरह पहि- नी, (श्री.) वर्षेने पादौ मप्र । जहाँ पर चलते हैं। रेहुए । इतसभाह । भौर हिम्मत कियेहुए (उपुक). पीराना । "इन्+णि आधारे स्युर" पथ । बाट । [पणा, (पी.) गरिति दणति हाम्दार अम्। पर । शद करनेवाली एक प्रभारी माती । स्वाह। मरती. मान, (I.) पानम् । भारम्भापरिसमाप्तमल पर्ष, (६) र, (न.) व (4) भस्न् । हग पीलम होरहा । हाल । मौजूर । पुरू किया।जोसतम चरन । और गधरस । पामर (नौर)। मूर्ग (नि.)। "तमियान्ति पर्वः" इसुटः । एवरे । बार- ति-ता, (डी.) मन-बागे । सः । लिखना । सो दल (पु.). नरनाभन । भाराका कबल। परपर टेप परना। वर्ष, (पु.) अन् । पटि (पर्सना) । अगरण रीपदया। दीवेकी बत्ती पी. एक भाग और अनुप । "रि अ" मेर तिक, (पु.) +तिरन् । पटेरनामी पक्षी "पर (पास)। और बारह महीनेश समय (क). अन् पतं तत्र साधु हितो वा छन् । भार (मोहा), दरिम । "प्रभव" आदि साबरम (पु.).. . नरहुआ. - ܗ ܚ ܥܘ 4 . में . वृत्तिस्थानवादामहाभाष्यम्। बारि "रदमोभनया" बिरगे बढ़ रहामाता है। याटिका, (श्री)बन्धमे होनेहाला- सेट् । वाहते भया" मार पानीmuerriti पाग्यत, (४." पाग्यत, (वि.) वाक् यतो येन । जिसने योलनेवाली वाजपेय, (पु०,१०) वा (अग्रेतर) इन्द्रियको रोका है । मौन । चुपचाप रहनेवाला । एक प्रकारका यज्ञ। जिसने भाव "बाग्यतन्त्रिसवनं वरेत्" इति स्मृतिः. होता है. पाय, (नि.) वार खरूपं+मयट् । चस्य कः । वाक्य- वाजसनेयिन्, (पु.) वाजसनेय खरूप शान्न । शास्त्र (जिसका स्वरूप वाक्य है)। +इनि । यजुर्वेदकी एक शाखाओ। (वामपी ) सरखती । फसाहत. और उसमें कहीगई रीतिके पानती, (बी.) एक नदी (जो हिमालयकी ऊची "शदा वाजसने यिनः" इति स्मृति: चोटीसे निकल मिथिला देशके पास होकर वहती है)। वाजिन्, (५०) वान वेगः पशो वा कति र एक दया. तेजी था पर हो । घोटक (फोग). पायम, (वि.) वायां यच्छति । वावास्यम्-स मुम् (त्रि.), हसय । वानिओंको रोकता है । मितभाषी । थोडा याजिन, (न• ) वाजिभ्यो देयम् । बोतनेवाला । मोनावलम्बी मुनि (चुपरहनेवाला सन्त)(पु.). यक । भामिक्षानि मतजल । मामिला (57 पाचक, (पु.) वक्ति (अमिधारत्या बोधयति ) ण्वुल् दही डालनेसे जो फुटसे बनाते है ARE "संकेत कियेहुए अर्थको जो साक्षात् पहता है" एक ताकत (शशि)। भरता (बारी). संन्दका असली अर्थ । कथक (कहनेहारा) (नि.)। याजिमक्ष, (पु.) वाजिभि भारत ! "कनयति यच्+निच-युल्” -पुराण आदि पदने पदाने ६त. घोडका साना रावणक' या वाचनेदारा (वि.) "पानक. पूजितो येन" पुराणम्. / वाजीकरण, (न.) अपाची वात गर। पाचन, (न.) यन्+पिन् साथै या गिच्युट् । पटन । +चि++स्युट् । जिगके द्रा पाना । पाथन (पहना) । "यु" पटन (पटना) है। वह चीज (दवाई क पोत (1) (सी.) पोडेकी नाई भोग । यावनिक, (वि.) वनेन नित+ठक् । पचनसे हुआ । प्रकारकी वीर्यको पहिः (प्रो) यमिप्पारित पार भारित वाणीरो फियाहुआ पाप. पान्छा, (खी.) या गनिगम या पायापति, (पु.) १. । मगर समा । वाणीका स्वाहिश. नेमित्तमे अपना प्रा fri. पाट, (पु.) वस) पाए, (बी.), दास्य । पवन । कहना । वाणी । refr.नि. या राबगिन्द्रिय । बोलनेगी इन्दिय. परकी धोर । माग1) बहिः (RTER पाया. (वि.) ककुमाया बाहुल्येऽम्य आदम् । पार, ठाय (नहानगरले बाहिर प अति भयो । बहुन पुरा बोटनेवाला । “मालम् यायेय,(पु.) पायो.न) भार पारिक, (वि.) पाना इतम् । पान्+टक । वाणीमे भागमवीमुलीवानल. Kष पनिपाति पार. पाचोयुक्ति, (.) ६. भर ममा. रतने दिमझ गई दील। अवनती इगर । और मोकार (म.). सई (friear)मदा बचन, पास (२.) बदामी परन सा देश। पर (स्त मा) रकान (बहला), "Nira बबन रहा। गडी. गाया आरिri . पाह (न.) नि. In तायतदारया (f.). मान"" । पाण, (पु.) पण र - पारपार (1.)ri(पामु) होनसm (1) amrri (न, (पु.) TIANE TET (PER) (द) (१.). मिनmadruralim - -jain)मानिस+का पयल। पारस्पायन, (पु.)पररास्य गोत्रापर्व पुवा। कारस्य। [कार (खी.) परी पर भारत । नाचनेवाली ला पातारि, (पु.) पानस्य (रोगभेरस) भरिः। माईकी मय औरत पराब पीनेवाली भारत, बीमारीका शत्रु । एरण्डका पक्ष | शनमूली । शेफालिका । (श्री.) पणा-या दो। धुभा । परन । पुमे. यवानी । भागी । यही । विडंग । चतुका (लारा). - "" पाय । वचन । बोलना । शन्द। पाति, (पु.) पा+फिन् । षायु । हवा. पातिक, (पु.) वातात् भागता ठक् । हवासे आया । बाईकी जाना सेवा करना । मुखीकरना । सक• घु•३० सेट् । पीमारी. यति ते. ..(पु.) थारू । सर्ग (एना मात्र विशेष गुणवाला पातीय, (न.) पाताय (पातनिातरे ) हितमा माईको दूर करने के लिये भला । काक्षिक । कांडी. । पवन (हवा) । और बारीमा एक पात्र। नेवाला (गन्त) (नि.)यार । ढीठ । मायक. पातुल, (पु.) वाताना समूह +उतन् । वातका समूह केन, (त्रि.) पातोऽस्ति भस्वाइनि पुर घ । वात- शास्सर । जिसे हवाकी बीमारी होगई (पाईसे बीमार) की। यानके रोगवारा । जिसे वायुकी बीमारी है. (त्रि.). फतु, (पु.) 16.हवाका मा । धूलि । धूर । | पातूल, (नि.) पात+अत्यर्थे ऊलन् । माईके रोगवाला पागत (उन्मत्त)। समूहके भर्यमें ऊलन् । पातसमूह बज, (पु.)त. मेप । पारल. (पु.). गमी, (सी.) बानं प्रमिणोति । प्र+माई । हवाके | पात्या, (प्रो.) वातानो समूहः यत् । पातसमूह । बहुत लाशाता है। सीम्रग मृगा। जल्दी जानेवाला पत्रपट भांधी. ३८१ बात दुष्ट र रुधिर पत्र । वायुसे पारसक, (न.) परसानां समूह+युम । वत्ससंघ । बछ- (ब) ३२ । जहा। एक प्रकारका रोग । गडि पोसल्य, (न. ) वरालस्य भाव +व्यम् । पुत्रआदिम प्रेह- मेंका समूह । बहुत बछडे. "। तनमरप् । वातरे भवन को जतानेहारा एक प्रकारका रस । पियार । मुहन्दन । मेहविशेष. पागत)। प्रयोजनशून्य (चिन- काः । टारा ।रपत्र (भारा)। यात्सा (पु.) पत्मस्य अपलायम् । गोत्रको चलानेदारा मुनिविशेष । बत्सकी सन्तान. . . (11. rectr. Arrortant FIRST20 : रोगको उपमाहारी चीन) तर "जवान" के भर्यमें फर। बासुके गोत्र (40) मैं उपमहुआ न्यायसूत्रपर भाष्य रचनेहारा "पक्षिस" नाम दिन जनितो म्याधिः। शार। मुनि । वरपके पंशमै उत्पा हुआ एक युवा। कामसूत्र जारी । वानगेगा बाईचा रोग. (विषयभोगसम्बन्धी शिक्षाओं के प्रकार)के रचनेवाला प (पाननिानये) भवते असा । मुनि. A) लिये जो साया जाता है । अपम्। पाद, (पु.) वयम् । तस्यभुमया स्थनम् । अपनी RITIN. बानके जाने की इजा (भापममें) पहना (बातचीत मापि, (पु.) भगस्यसे माश कियागया एक देय. करना) । "प्रमाणनसाधनोपालम्मा मिशताविपर: सापिस्दन, (पु.) मातापि पदयति (हिनस्ति)। पापोपपना पक्षशीपक्षारिमहो पादः" । प्रमाय और पू+न्यु । बानापिको मारता है। अगरस माम मुनि. तर माधनाला विसन्त अविरोधी, पांच (प्रतिज्ञा तामोवा, (मी.) पातेन भामोदो यसाः। बागे पारि) अवयवोंसे पूर्ण, दोनों पक्षों में एकको खीकार जिसडी मुगन्धि उम्ती है। परतूरी. करना । एक प्रकारका विधारवर वापयविशेष (या). तायम, (.) वातस्स अयनं पतिः येन । जिसे हवा ] पादन, (म.) पदमिन्माणि म्युट् । जोपराया माता -निकलती है।रोखाबारी। सिागवाक्ष “वात- देगदंग मारिवाश! "मावे युद" गदय मारिया स्येव शीघ्रं भयनं (गतिः) भय" ।दवारी माई जो पमानापाजेश राय -हुत चलता है। पक्ष । पोग (पु.), पादर, (.) पद मासा. विर+भामा मतायु, (पु.) पान भयो । भय्+उ । हलाय और बनाभा । पागले एनसे बनाभा कपा। सूत्री मात्र बलता है।परिण। हिरन. (ग). पप.५१ पारिद, (४) . देर हो । समुद्र. । भवः । वृक्षाजीवी । व्याजपर जीनेवास ( वारिद, (न.) वारि ददाति । दा+क । पानीको देता है। यातायह, (पु.) वातो आवहति । - मेघ ( वादल) | और मोथा । जलदाता (पानी देने घाती लेजाता है। खेती वा र वाला । (नि.). एक प्रकारका बनियो वासेठवाबारे वारिधारा, (खी.) वारेःरा धारा । धारप्रवाह वृष्टि हक । हाल पहुंचानेहारा (नि.)। (वांका होना). धानिक, (न.) यत्तिरूपेण कृतो कम पारिधि, (पु.) वारीणि धीयन्ते अम्मिन् । घा+कि । सरुपसे रवागया ग्रन्थ । ६ ता । जिसमें पानी खखे जाते हैं। समुद । इसी अन्यविशेष । सूत्रमें न कहेगये आदि प्रकार "वारिनिधिः" आदि. करनेहारा एक प्रय । "उत्तानुवाद वारिमसि, (पु०) वारि (जलं) मतिः इव (नीलता-पातिककार, (पु.) वार्तिकं करोति । यी वार्तिकम्" पादक) यस्य । जिसका पानी स्वाहीके समान नीले रंगका हो । मेघ । बादल. वर्णन) करनेवाला । कात्यायन मुनिका बार पारिराशि, (पु.) वारीणां राशयः अत्र । जहां पानीके वार्धक्य, (10) वृशानां समूहः तसभा प्यन् । कुल च । बुढा । वा बान IE पारिरह, (न. ) यारिणि रोहति । सहक । पानी में पाधि, (पु.) वारि (जलान ) धीयन्ते । पन । “यूटोंका समूह" वार्धक (न.), उगता है। पछ । कमलका फूल । जो पानी में उत्पन्न उप० । जहां पानी रहते हैं। समुद्र । ईड- हुआ है (त्रि.). वारिवाह, (पु.) वारीणि वहति । वह अण् । पानीको वा(पि, (पु.) वृया जीवतिइश् । अठाता है। मेघ । वादल. वाटा । व्याजाडिया । वृक्षारीयी । "वाय पारिश, (पु.) वारिणि (समुदजले) शेते। शी। वाधुपिन, (नि.) वृद्धि+मस्त्यय इति । समुंदरके पानी में सोता है। विष्णु । नारायण. सूदखोर. पारीश, (पु.) ६ ८० । जलका मालिक । समुद्र । और वार्धय, (न. ) वाषेर्मानः प्यम् । धान्य धरण । “वारिनाथ". धान भादिके बढनेका उपाय । ऋणदार पारण, (न०) वरणस्यैदेअण् । मरणका यह । पानी । याणिस, (पु.) वारि ( जलं.) पपते जलाधरणका (त्रि.). वाद्रीणसा (नातिका) मस्ययात्वं ।। पाणि, (पु.) वरुणकी सन्तान+इन् । अगस्त्यमुनि पानी भरा रहता है। गण्डक (गैर)- (पडेसे उपजने और मेत्रावरुणकी सन्तान होनेसे ). जसः" एक पशुविशेष. पारणी, (पी.) वरुणः देवता अस्य । वरुणस्य इदं या+ वामण, (न.) वर्मणां समूहा अणू या घी । जिसका देवता पक्षण है पदणी "पश्चिम दिशा । मदिरा (पराव) । शतभिषा नक्षत्र- यामुच्, (पु.) वारि (जलानि ) मुमति । पानीको छोहता है । मेष । पाइल. बाली चैत्र (घेत) मासके कृष्णपक्षकी प्रयोदशी। यार्षिक, (नि. ) वर्ष वर्षामु या भार घरणी स्त्री. पातं, (न.) पति अग् । भारोग्य (सन्दुरनी)। निरा- बरिसमें हुमा । वहालमा वर्गात एक मय (किसी रोगका न होना)। और वृत्तिशील । बरसके पीछे करनेलायर पूजा । (निया विध रोमवाना (दुर्ग । सेतीका काम । पाहा आपल्या नारिया जनश्रुति (होग-उपवार) पितान्त (हाल)। और साली स्याहुआ भूतार मा (श्री.). पाठांच, (पु.) मात (भाग्य) क्षारयति (गम. पाईस्पस्य, (न. सविना प्रोमो मांड)। म नि म । जो तन्दुरली (भारोग्य) हरदगन । मना। निमा दीप्यू. शिक। "तेन प्रोक समा* IF उगरानीतिशानाला "(.) । “दानापुरेषा गुणग- पाल, (R) वन नि+मण । " कुकाम, संजोह. - काले महापूजा किया या चा"F १६प रामारी सन्तान । जाप . दएको पता है। यह बारार कि. (3.) meatml पागना, (NR) । प्रमोगा। देशममा Trmir AREERITTIरय मामाकी समसमे परमा r-2(पु.)EETrirat. रगत (रही सामा)। समारना. पापण.(पु.) नास दर गन्ने भरभ । पाप, (ft.) रा. पारा उगमापन्नमसियाराभोर Prithimitr. मे मा । मार पीयु । मर Pre Triram TALI (ग) RTI राम रभा (R). Pr...ता. पर मेला पूर्ण (को०). THE HEREMपापभपन मनिर सदनम्, (म.) (गस भरनं) नित (एने) पर। पर (). पाय.entre)ar.1 - पासपछि, (सी.) सार तिर भारि पक्षि. rr (Term.or ..और। भोगिरीसा. "नम्तिीमी. पास (• म.) एमरन् । सिरा (दिन) ए. पाशित (म.)गरे । शिमोगा. रममय (5.). PanRaiger पुरना. यासपरता, (को०)बगारतो भविस तो न्या पाशिमा, (..) ािर ।मारकादिवान उरा (प्रलय) र (गोप रोश)। यस परित्रो प्रशिक्षारनेहारा एक पानि(m)r. (..) (ER) तानसे दीमई (नि.). RAPEECH I यासर (न.) गम्भी। पत्र । पश, पागागार, (२.) कासयोग्य भागारम् । रहनेलापक पर। शिम गठ । सरिताल। रमनपरोपरामरा. Pri(R) (1.). पासि-की, (पी.) बसम्मादी । कुलारभेद। एक पाथ, (.) एRIसपासप (पुरमा) प्रपरपरागाराना. Serim (नि)(पु.). पासित, (वि.) बाग+ । मुरमीकृत । सुशार किया पाप-(पु.) (पुर । उमा। भार। हुभा उ (भमा पानी) सोमु । "हापा" यासित, (नि.) रास्+ । मुगंधित । पराशर किरा पार, गुरमीकरण (पार करना)। यु.र. सर. गया । पहिराया परा । प्रशिद हुभा. पोदशीसासर-त. पायु, (पु.)वम् उए । विष्णु । मारायण पार, (पु.) पम्पम् ।। र यो पा पारकि, (प.) (गुना) रमेन पावति । स एष माधान । एना। "स" वारा। और मुर्गध। जोमसे सम्म कर्मा है। सर्पराज । सांपोस राजा. पासुदेव, (पु.) बमुरेरस साल+भए मुदेवी य- सिक, (पु.) यमपुत् । इस मामरा । बाँसा • देन केन प्रकारेण माराम असनारा: यामः पातुरा, (मी.) वस्कार' पृमिकी । (जमीन)। रात्रि मिफसज्जा, (प.) मारी नाविध (श्री)"जो (रात)। श्री (भारत)।यिनी. अपने गजेटुए मंदिर सजगर सफार रहटी है. पार, (सी.) वाम् । मायोक्ति बासा (सोगा. गरगृह (२.) पासयोग्यं गृहम् । रहनेटायर पर। 4). अप्पर पर वीरन मा (य. जहाँ शयन भादि पास्तय, (न.) वस्तु एवभिए । पीमही । सलभूत पदाएं। १). भसठी। ठीकठी. पासनेयी, (पी.) बमनये हिवाद । रहनके लिये पास्तविक, (वि.) बटनो मिति । पसे बना। भली । रात्रि । राना बसनियोग्य (रहनेसायक) (त्रि.)। सतमिरापही बना । सलभूतपदार्थ । असपी पीर। "यनेषु मासतयेषु" इति भी. टीटीस. पासन, (म.) स्युर । मुरमीररण (सुशबूदार ए. पास्तथ, (नि.) वसति । बम्+तम्य । नि. बासरा । मा) पूरन । पूरना । क्यकप वासस्थान । रहनेहारा । निकाय परनेलायक जगद। और समति (ए. एनेक अगर । मोरान (जात्रा). मा)(पु.) . म्तान । वि. - -

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Arrini.] ( विगत - nि(n). (E.INE (परन् । प्रायिफ्रमादिस्य, (पु.) विक्रमेण लिमयेगे ल | मानों में है। मामने प्रसिद्ध एक राजा (इसके विषपा. (श्री.) पेण पप्पो भना । । गमरम राबतही प्रचार था-दशीसे रोवत् चलना EMIमर. ६)। "किमा" यहीय. निफमित, (वि.) um (रायुक्त । विकामिन, (पु.) पिकम् गिनि । सिंह (और) और सिमा. jि । विगयुग (बहार) (मि.). दिपा (पु.) fur+पम । मानेरम्यकपरिणम । विशय, (पु.) विमो+भम् । मोत सेएर गरे के पा मगोतामे परना । पीलीभीमारी। (जे)को प्राप्त करनेहारा व्यापार । पेपना. विश्यानुतप, (पु.) पियस अनुगमः (पहातापः)। रिकारदेव (पु.) गिरा हेतुः । वित्त गित पेनार पीछे परतावा. (गिने )ोनेका पारण (गाधन-गबर). विपिक, (पु.) रिया भति यस+ठन् । पिनेता । शिकारिन्, (नि.) मिनि । विकारवाला । पदरने. पेचनेवाला. पास विपासानेवाला विमयिन्, (नि.) पि+कि+पिनि । विझयाना । थे. विकार.(पु.) रिस पाल । विगाहुभा-बगियर (भिरिका पाम न परनेलासक) पिकाल, (पु.) विसरू । सिंह (शेर)। गमय । टीनामा मेया । राक्षमोका समय । दिन शूर (बहादुर)। "भावे क"। विक्रम । पहादुरी. असा समय. विकाग्ति, (स्त्री.) वि+म+किन् । पादविशेष, पिपास, (म.) पिर..रहःभोले । प्रा। परारना । पसना । पोडेकी गति (उपना). चमर भाग्मामार्ग. यहादुरी ।पाकि । प्रवेश विकाशिन, (.) मालिनि । प्रालि । यिक्रिया, (मी.) मि++7 । विकार । पर एमकनेवाला । किसिमक्षा. थास्थित और राम्ररी दिर रही) व है। अन्यथा पिफिर, (पु.) fEC । विहण । परदा । गौर पुशा। परिणाम (भरतरासे बदलना). "शियन" । पिन र हरनेरेलिये गई। धनगर (गोर गरिओं) भारि. विक्रय)R+कि+यत् । विकरयोग्य पदार्थ । वेच. विकिरण, (म.) दि । निक्षेप । फेंकना । गिन । मारना । पान (जापा) । भारता यि (वि.) वि++क। पालीभाव । परराहट । TN (पु.)..किरणसे रहित (गैर) (त्रि.). विषीर्ण, (.) RE+ । विशिप्त (काहुभा): पिलिन, (नि.) पिल्दिन । आई (गीला ) । शीर्ण फेवागया. (उदाहुआ) और जीर्ण (पुराना ). विकृति, (पु.) सूर्यवंशमें RTI राजाका पुत्र .। एक | पिझेप, (.) शिशिप्पञ् । राग (घोडना) । प्रेरण (चलाना) और दूर करना । फेंकना. विवर्षाण, (नि.) xि+शानन् । हो हेतु राशीका | विक्षेपाक्ति, (.) पिशेपस्य ( दूरीकरणस्य ) अनिका सब यिह पुत्री सत्ति लादि) से जिसके शक्ति करनेको उत्तम करनेहारी सकि। येशन्तमें रोया योगये। शितिप्राप्त । विगहरा कहीगई एक प्रकारकी भरियाकी ताकत । पहभाषित पिएल, (नि.) वि+r+5 बीभाग । निन्दावाला हो माण्डो रच देती है. गया । मलिनीत । मंठा होगमा। मौर रोगयुक्त । विख, (नि.) विगता नासिका यस्य । सादेशः । गतनाशिक । बीमार होगया. जिसघनाक दूर होयगा । नकला। "ध्यादेशः " मिति, (पु.) R+r+किचा रोग। बीमारी. "विख्य" भी. विक्रम, (5.) पिशेषेण कामति । बहुत उत्साह कर्ता है। विख्यात, (नि.) रिशेपेण ख्यातः (प्रतिशः)। बहुत fr+मम् पम् भच्या विविक्रम विष्णु (वामनावतार)। मशहूर हुआ. विकमादित्य राज मुभाये पम्" क्रमण । पाँव रसना । विगणन, (न.) विशेषेण गगनम् । गण+युत् । बहुत "करणे पन्" (पाद) । बहुन बहादुरी गिला । ऋण (कर्जा) घुमा देने के लिया रकमय गिजा. (शार्याशियलिमा मयं (ताकन) 16. पारो विगत, (नि.) विगम्+फ । प्रमादरहित । खजर। दादर विशेषगत । बहुत गया । भौर भगत (दर गया) नैना पातायाहा. . - १७

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विमरता, विरमा शग, विभाधना, (Rt.) ए प्रकारका अलंकार (जिसमे - विमर्य, (पु.) गप्पम् । पिचार । नाटकमा एक करे रिना पार्यकी पत्ति प्रतीत होती है) विभावरी, (ख) विभावनिप्-दी-यनोरए । आदि। पिमल, (मि. ) विगतो मो यस्मात् । निस्मे मतदा रात हिन्दी नी. हुआ । खच्च (साफ) टि। विगतो मलो समा"। • पिभायसु, (पु.) भित्ता दमर गय । जिराती अगलाय क्षेत्रमें एक प्रारकी देवी (धी.) करने बहुत समानेवाली है। सूर्य । भाकराल । विमासू, (सी.) रिक्षा माता । मातृसपनी । मारी भागात्रिकाएक हार. तिनसावेती मो. विभाप, (पु.)पि+भु+पिचक्याम् ( साहिलाय )| यिमारज, (पु.) पिमातुशैयते । जन्+८ । सौतेला भाई. परीराममो स्वरूपको उपभ करनेवाली कोई एफ | पिमान, (F•म•) वि+मन+घम् । वि+मा+त्युदपा । भवस्था (हालत) (भावके तीन मुन्य विभाग से एक). देवयान । देवताओंकी गाडी । रथ । यक्रवतीका एक विमापा (बी.) पिरसा भाश। विभाष : निषेध । पर । पोरा (पु.) हरएक सवारी और परिमाण शिवरुप । ग्याकरणमें एक पसमें होनेवाला विरल्प (माप) (न.). विधान । "नति विभा"। दोनों तरह. विमानचारिन्, (नि.)(विमाने चरति)। विमान (वर्गकी पिभिन, (नि.)nि+भिक । प्रकाशित । यमकामा। गारी)में घूमनेगला. विदलित । शिलाहुभा । विभत । बाटाहुभा । अशविमार्ग, (पु.) पिरलो मार्गः । पुरा सा । कुपथ । मलंगहुआ. सराव सडक । निन्दिताचार । बुरा चालचलन. विभीतक, (I.) ोिषेग मीत इव । इका छन् । यिमुख, (मि.) विष्ट (अननुकूल) मुरा भस्य । मानों बहुत राहुभा है। पडेगा इस्त. पखिलाफ मुसवाला । दुस्मन । पहिर्मुख । मौर नित विभीषण, (पु.) विशेषेण भीषयते शायून् । भी+गिच- (हटाहुशा)। मुंमोहुए. गुर र न्यु । जो शत्रुओरो बहुत डराता है । को पिमुद्र, (त्रि.) रिगता मुदा (मालीभावः) मस्य । भाई । राक्षस । नतृण. जिसका बंदहोना शुभाविकसित । सिलाभा । मोहरविन. विभीपिका, (सी.) वि+भी+पिच्-मुरुच । धारवर्षनिर्देशे यिम्य, (पु• न• ) धोक्यन्-मुम् हसौ। दर्पण (शीशा- प्युल् । भयप्रदर्शन । टर दिखाना । र. आईना ) में प्रतीत होरही परडाहीका माधय । और पिभु, (पु.) विभूदा सर्वमूर्नसंयुक्त। सब शकाल- कमण्डल । सूर्य भादिया मण्डल (दायरा) । भौर वालोंमे मिलाहुा । प्रगु । मालिक । तावतवाला । कृकलाग (किरला)(पु.)। "विम्बायाः फलं+भण् तस महादेव । मोर सर"विम्बिकाफल. विभूति, (सी.) पि+भू+स्ति । भस । गा। पाक । यियत्, (न.) पि+यम्+किप-मटोप नुक् । भाकाय । भगिमा धादि आर प्रकारा ऐपर्य. पिमूग, (पी.) विभूम । शोभा । और भूपण । यियद्गा, (त्री.) पियत्स्था गंगा । भाग्राी गंगा । राजाना। गहना. वर्गकी गंगा मंदाकिनी. यिनम, (पु.) वि+भ्रम्+पम् । खिोंके गारका अंग । यियात, (नि.) वि+या+फ Yए । बीठ । पेसरम । एक प्रकारकी घेरा (हवंत) बहुत घूमना । शोभा । निर्लन संदेह । और भ्रमण ( घूमना) बिओंका विलारा. यियोग, (पु.) पिपुर थन् । पिरछेद । विछोरा।। विधान, (वि.) विधा+लिए । भूरण (जेवर गहना) तपशिगौरा मेल. भादिसे चमभा. वियोगिन्, (पु.)वियुस्+पिनुश् । चम्पार । सरा विमत, (नि.) मिन्+5 । विरदमतियुज । बरिलाक पक्षी । विछोडेवाला (वि.). रायवाला । गैरमतवाला । दुस्मन. घिरता, (नि.) विरहाका विच्छिन्न । जस । मौर विमनस्सा, (नि.) विक्षिप्तं मनो यस्य वाकप् । चिन्ता विरत । हटाहुभा । मुम्वत. (फिकर ) आदिसे न्याउलचित्त ( पररायेहुए दिलवाला). चिरचित, (त्रि.) वरम् । त । किसाहुभा । (पु.) विषयवेऽसी । विमृदयम् । कला बनायागया । निर्मित. • IN | "भावे पम्" मर्दन । मलना । पटना. विरजस्, (पी.) विगतं रो यसः । जिप सीसे व (म.) विश्मयुट् । परामर्श । खोर । हुरहुआ।गताना श्रीरहित खी। जिसे महीनंग • । धित दलील । "मम्" वहीं अर्थ (पु.). ऋतु भाना संदहोगया। रजोगुषसे दिव (वि.). आम्मान.

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रिमारना,] बिरसम्, अग. विभायना, (बी.) एक प्रकारका अलंकार (जिममें का. | पिमर्ष, (पु.) मिन् । दिकर। नरकका एक रजोरिना कार्य की उत्पत्ति प्रतीत होती है). विभावरी, (बी.) विभा+वनिप्-दीप्-वनौरम् । रात्रि । विमल, (नि.) ठिी मागे सम्म लिये म' ए रात ही कुटनी. दुभाहाल(ग) istrRोमा विभावसु (पु.) विभायुक्ता पमष थम्य । बिगड़ी शसाय क्षेत्रमें एक प्रभारी सी () किरणें पहुन धमझनेवाली हैं। सूर्य । भावा इरत । विमान, (डी.) सिसा माता । मामाको भाग। चित्र (कहार. गनिन । मतेरी मा. विभाप, (पु.) विभु+मित्र+या अ (रादित्वान ), पिमाराज, (५. ) विमानुपते । जन+ टेल. शरीर मनके खापरो उत्पक करनेवाली कोई एक [पिमान, (पु•म• ) f+मन+पम् । विमान्दुर । भवस्था (हालत) (भावके तीन मुश्य विभागोंगे एक) देवयान । देवनाओंगारी र । रासस विभाषा, (बी.) विमा भाषा । वि+भाष+थ । निषेध । पर । पोरा (पु.) ME Trt और न पिाप । प्यावरणमें एक पक्षमें होनेवादा विकल्प (मार ) (२.) विधान "नति विभाषा"।दोनों तर विमानवारिन्,(त्रि.)(Irमाने पी) मन (ri पिभिन्न, (वि.) पि+भिक । प्रकाशित । चमबाटुमा । नाहीपूमने बिदलित । पिलाहुभा । विभक्त । बाटाहुमा । जस । विमार्ग, (पु.) पिदो FLIST PE IT . गलगहुआ. पराब सरक। निनिदापारात पिभीतफा, (3.) शेषेण भीत इव । वाचे गन् । पिमुख, (नि.) दिल (M)si ma मानों पद्धत राहुना है।हेरेया दरात. बपिताप. गुगरला । पुरुन । दिमुंग । ति विभीषण, (पु.) विशेषेण मीपते पाचून् । भी+णिय. (टन) मुं. मुक् प म्यु। जो राशुओरो बहुत डराता है । तरणको विगुदा (पि.) दिगपा गुदा (STI) re | भाई राक्षस । नलतृण. जिसबा होना मा । felm forge मोहरदिन. विभीपिका, (मी.) गीणिय्-गुरुच । धारवयनिदो दिग्प, (पु.) मन मुच (th "पुल् । भय प्रदर्शन दिसाना । रा. भना) में ही retr want विभु (पु.) विभूमि मून संयुक्त । स सरल बाप । New Kr (HI) पालोंसे मिलामा । प्रगु । मात्रिकालावनारा । सलग (R) (पु.). "farrammer महादेश और प्रा. एर" वि. विभूति, (सी.) विभूतिन् । भस्म । गा । साप । विपत् (म.) fipm । भगिमा आदिमा प्रकारा ऐप विभूग, (पी.) पि+भूम शोभा । और भूषण । विपासा, () Her Inter राजाना गिना. मीटर. पिनम, (पु.) पिम्+एम् । लिओ गारमा भग । पिपात, (R• ) ferrrrrritten एक प्रभारी पेय (6) धूमना ।।मा । सहारमण (पूमना) लिमोबिलास. | वियोग, (पु.) RTE Imire विधान, (नि. RE+हिए। (और मरना), .facमेर बादिसे पा. रिपोगिर, (I.kartererner विमत, (R) मिदिरसमरिमुष्प chur {fh.) रममात्य । इरमन. पित, (.) Arrrrrr" विमनएस (f.) मनो मन THArcणाला (NNL) भारत (ए) विनि, (.) Are TRY । बिमई (पु.)freest I निम्। शमिर" अरेस विरसम्(*) Arrift मिमान (R) KORBA "Ma(5.).

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मेध(आ)म, विध(धा)म, (पु.) विधम्क्यम्-या वृद्धिः। विराम। विश्वस्त, (वि.) निम्छा जानविन एटना । साराम । किये चारहे पामका अवसान (भंत), जिसपर भरोगा नया हो"विविन' पिथम्भ, (पु.) विस्थम्म्म्यम् । विभाग (मरोमा)। विपना श्री (बेगा मौरत (श्री.), प्रत्यय । केलिकलद (श्रीगसंबंधी गडा)। और वध विश्वाधी, (पी.) विश्वं ममति । जति (कतार). अपारा विधम्भालाप, (पु.) (विधम्भस भालापः) विश्वासकी निश्यान्मन्, (पु.) विसं श्रन्मा स्मा बातचीत । मुहमगुध संभाषण । शिश्वाससे मराहुआ। बामा है|frg नारायण । पाममा. परसर संभाषण (रातधीत अथवा वार्तालाप), विश्वामित्र, (पु.) विभिम (दिले विधाय, (पु.) विभु+पम् । प्रविधि । ओर स्याठे होता है)। संसार जिगामित्र है। (मगरी). विध पुत्र । एकरा. विभुत, (पु.)विश्रु+क । विस्थान । माहूर । प्रसिद्ध पिभ्वारान, (.) रितु र चिलिए, (वि.) विभिन । वियुक (विद्या भा-भल विवों में चमकनाविधीक और गहुभा) और शिपित (दी) विश्वापाठ, (3) पम्म। विशेष, (पु.) विरिपस्यम् । वियोग । विछोरा और जिसे गोरधना ढीलापन. विश्वास, (पु.) पिम् । " यिभ्य (1.) विएगा । संसार । दुनिओ उगम इसतरह एR तताय । पर। अभिमानी जीवात्मा (पु.)। भारके देवताविशेष ( विध्यदेय, (पु. ....): भाग २०.)। साल (प्रा)(नि.) (इसी अर्पमें सर्व- नामसेदा होती है). प्रजेगये दंग ( मारिन । पियफर्मन्, (5.) विश्वेषु म (मागरो यस्य) जिसका विध्या (पु.) • Inveer काम राब स्थानमें हैं। सूर्य । देवसिपी । (देवताओर "". कारीगर) एक मुनि । और परमेश्वर. विश्वरत, (पु.) दिए करोति । TR | विषको तो पिए, हामि (पं.सना ) I. Ex. m.. शिविरे । विचरा परम. है। विपरमां और परमेशर. विश्ववेत, (पु.) व केतः असा परके सब जितमा पिर, (..) fe+frifakt शंगनिरय. पिप, (.) + A Mitraat विश्व(प्यासेन, (5.) यि () पी सेना बस्य ।। पर)। एमास (rwadem जिसमे सेना परित्रहो (विष्णु ) मिगस (मो.) निर(पु...) पिय(प्योप, (अन्य ) वि पि सः । विषाक्ट, (पु. पप fnme बारोंओर । निकामी (र मोर बानेवाला) (दि.) पिलधारिणी, (बी.) Nि भारी। दिन विषम (S.)(m.)A (ो पर) nin (Tr) विध्यपसन्, (पु.) िली (भार) । r+ (पास) firsify सनिन् । अग । पदमा । देशमा सिमांकर पृथिवी. विपद, (I.Onोस विश्वम्भर, (पु.) N निभा (समरसम्)। Irvो पाता।वि(ि.) विभ्यरेतरर, (I.) बिर्थ तो रस रिसे संसार पिया (..) पाना परता है। गुरुय. विश्ववेदरा, (पु.) INTERमार शिरला.(s) fr जानता है। Trire. मिथएन, (पु.) एपि{ Marmirm सरासरगम itrarST - विषम,] विपम, (त्रि.) विगतो विरुद्धो वा समः । असम । जो | विपुष, (न.) विधु (दिनराग्योः साम्यं ) वाति-व पराबर नहिं । अयुग्म (जो जोडा नहिं ) मे तीन वह समय कि जब रात और दिन बराबर हो जाता पांच आदि । ऊंचा नीचा । दारण । सहल । सन्ट । "पियुवत्" यही भयं. एक प्रकारका पद्य (न. .. विप्छ, ( हिंसा ) कतलकरना-मारना । चु० आ• स. विपमच्छद, (पु.) विपमाः (अयुग्माः) छदाः यस्य । विष्कयते । दर्शन (देखना)। उम० । विष्क्रय सप्तच्छद । सतीनेका दस्त. अविविश्कर-त. विषमज्वर, (पु.) विपम उग्रो ज्वरः । सख्तबुखार. विष्कम्भ, (पु.) विस्कम्म् अन् । सूर्य और च विपमनयन, (पु.) पिषमाणि (अयुग्मानि) श्रीणि योग (मेल) से उपन्न हुआ पहिला मोग । वि. नयनानि अस्य । जिसके तीन नेत्र हैं। महादेव । शिवजी. फैलाय । प्रतिबंध । रोक । नाटकका एक अंग ( विषमस्थ, (त्रि.) विपमे (उन्नतानते संकटे वा) ति. मध्यपात्रके द्वारा पीछे और आगेका धनान्त र एति । स्था+क । ऊंचे नीचे वा सकटमें ठहिरता है । उप कहाजाता है)। योगिओंका एक बंध । वृक्ष । की द्रषप्राप्त । मुसीयतमें पडाहुआ । संकटमें आया । और कील. ऊंची नीची जगहपर ठहिराहुआ. विष्टप, (न.) विश+कपन्+तुद् च । भुवन । विपमशिष्ट, (न०) विपर्म शिष्टं ( शासनं)। अनुचित जगत् । संसार. शासन । ना मुनासिव सजा. विष्टन्ध, (त्रि.) विस्तम्भ+ । प्रतिरुद्ध । रुका विपमायुध, (पु.) विषमाणि (अयुग्मानि-पध) आयु अवरुद्ध धानि ( वाणाः ) यस्य । जिसके पाँच तीर हैं । कामदेव. | विएम्भिन्, (त्रि.) विस्तम्भ+गिनि । प्रतिबंध विपय, (पु.) विपिण्वन्ति (विषयिणं संयनन्ति खात्मक. रोहनेहारा । एक रोगको उपजानेहारा. तया) वि+पि+अच् । जो अपने खरूपसे विषयीको यौध | विष्टर, (पु.) विस्तृ+अप् । पत्वं । कुशाला बना लेते है। इन्द्रियोंसे जानेगये शब्दादि । मजमून । और देश. एक आसन । हरएक भासन । वृक्ष, विपयिन्, (न.) विषयः अस्ति अस+इनि । विषय- विष्टरथयस, (पु.) विटरः (कुशमुपिरिय) 1 पाला । ज्ञान (जामा)। और इन्द्रिय । विषयासक्त (कर्णी) अस्य । पुशारी मुहीके समान जिसके कान (विषयोंमें फंसाहुआ) (नि.)। राजा । कामदेव । और विष्णु. शब्द (पु.). विष्टि, (स्त्री. ) विश्+क्तिन्-चिच् वा । चेतन ( सनसन विपलता, (खी.) विषव्याप्ता इस लता । बेल मानो के बिना भार भादि उठानेका दुस । मजदूरी काम जहिरसे पिरी है। इन्द्रवादणी वेल. वर्षण (वर्मना)।प्रेषण । भेजना । सातका बरण विपविद्या, (घी) विषाय (तनिवृत्तये ) विद्या । बहिर काम करनेहारा नौकर । मजार मजीके बिना । दूर करनेका इल्म । विष दूर करने मन्त्रको जाना. करनेवाला (पु.). विपवैद्य, (पु.) विषे (विपापहरे) वैद्य. (पिटि- यिष्ठा, (सी.) विविधं तिष्ठति । स्था+क-पापम् । पुरी स्मकः) । विष दूर करने में हीम । विषमत्रविद्यावाला. विपान, (न. ) विष्कानम् । पशुका सीग । हाथी पा विष्णु, (५.) पिप ( व्यापन-फैलना ) गुरु । म्या सूभरका दान । कुरोषध । और क्षीरसाकोली. फलाहुआ-जो ( सय स्थान है)। परमेभर । विषाद, (पु.) रि+पद्यम् । अवाद । जाता । (भाग)। शुक्स | धर्मशायक बनाने मुनि। बामुदत. विगतक, (पु.) विषम्य अन्तक । पहिरका मानो विष्णुगुम, (पु.) चाणक्य पडित । यदि पाय- यमराज है। शिवासि दर करनेवाला (वि.). पहिलनामगे प्ररियामाया रचनेवाला है. निगराति. (पु.) ६ तपिपका शत्रु । काला धतूरा। विष्णुनेल, (२.) वैयक (विमा ) में प्रतिमा शिमा, (.) विरंभास्य यस्य । रिसके मुममें माहिर विष्णुर, (न) विष्णोः पपी (AIR) ₹। ममिसिहुए मुगाला भिटा"। म्या होनी मानो शिशुपnिtiwarmirer- शिटी (सी.)fret न मागभन्य रितु (MR.Resय । बसी । और नाना- सवगरगिल । सारिपुम्समेलमा. . मला गृह. । दिलवरना. रानेल. t मिमा - विष्णुमाया, (मो.) तापियो (परमेशरस) (पिगृत, (Nि.) पिएक दिसौर्य । फलाहुआ. मापा । परममापी भपटपटनापरीयसी (जो न ग | पिपरपर, (पि. ) पि+ए+वरम् । पिरारणशील । फै= सो उसे भी बनाउनमें बहुतही चर) भविद्यागलि । पाला । (सियो नी ) उमदी मधिष्ठात्री (माथR ) दुर्गा. | पिरामर, (नि.) forमरप् । विसरणशील । मेर- विष्णुरथा (पु.) विष्णो रप व मानो विष्णु की गाड़ी वाला. है। गरम यिएए, (नि.) वियन्न । प्रेरित । भेजाहुआ विष्णुरात, (I.) विना रात, वि रायाद् जीयनं छोडाहुआ। शिप्त । फे.कागया. भस्मे । एक । विशुभे रिसागया । विष्णुने जिये औदन | पिस्त, (पु.न.) विस्-उत्सर्ग (छोना) F रिया । परीक्षित नामी राजा (बद गर्भहीमें अभयामाके नेद । पर्ण वर्ष । सोने की मोहर । अस्सी रत्तीका प पयरे वनकर मरगया, परन्तु विशुने फिर जिलाया) माण (मार). पर रपा महाभारत में प्रनिदहै. विस्तार, (पु.) विस्तृ+संज्ञायां करि पम् । विटप विकार, (पु.) वि+फर निच-अन् । भर्गुणरर्पण । पासामोंका फैलाए । "भाचे पम्" अन्तीर्ण राए। फमानके शिधरने पद कार. (पलापट )। और समासके वाश्य, पोग समूद. विप्य, (वि.) रिपेग भ्य । विपत् । जरूरमारनेके विस्तीर्ण, (नि.) विस्तृत । विपुल । फैला हुगा गायक । जदिरमे मार पालनके लायक । विपाप. विशाल संवा. विप्वफ्सेन, (पु.) विधी सेना यस् । दिसटी असो यिस्फुलिझ (पु.) पिस्फुरति । विस्फुर+5 या पार सर सेना है। विपर पहुएको रानेवाला । और अन्य । चमकनेवाले निशानद्वारा । पविकण विशुरु गोमरी एक । प्रियंगु (स्त्री.). भागका कतरा । एक प्रकारका रिप. पिप्याण, (न.) विपन्-पम् । पवगये। भोजन राना । विस्फोट, (पु.) विस्फुटति । विस्फुद अच् । पहु घटता है (विषफोडा) पदार्थ । “साय कन्" पिस, (न.) पिरो । मृणाल । बमलली दी। प्रकारका फोडा. विस, उत्पगं (ोजना ) दा. पर• राक• रोट् । विस्यति। विस्मय, (पु.) वि+म्मि+अन् । भार्य । बहुत भवेसीद अजीब । एक रस. विसंयाद, (पु.) वि+सम्+व+पम् । विप्रलम्भ । वयन । विसापन, (पु.) मि+म्मि+पिच्+मन्+आत् ल्यु गनारसी पदार्थ विषयमें उल्टा पहना. जो ईरान करदे । इदका इन्दजालवा समाशा । मोर विसकुसुम, (म.) पिरायुकं दुगुमं । कमलफूलकी कामदेव । गंधर्वोका पुर (म.) "विलायनम्" मही दण्डीवाला फूल प. वर्ष. यिमदूर, (पु.) विशियो संकटो यस्मात् । ५ १० । विस्मित, (नि.) वि+मिका विस्मययुष । इरानाभा- जिरसे राक्ट होता है। सिंह । शेराहुरी दश. यिसनाभि, (श्री. ) विसं नाभी यस्य । जिसकी मामि | विस्मृत, (मि.) पि+म+क । स्मरणापिरय । भूलगया- विय है। चिनी भौर पराका रागृह. विस्मृति, (सी.) विमसिन् । स्मरणाभाव । मूलना. विसर, (पु.) वि+एअप् । रार्इ । भौर पिसार । विस, (२.) पिस्रक् । भामगन्धि । कया गंध । फैलाव. आधगंप. यिसर्ग, (पु.) वि+यज्ञ+यम् । दान देना । साग । विसगन्धि, (पु.) पिनस्प हप गन्धः मसाः । जिसका मोहना। अलका याग । मोक्ष (गुटकारा) और प्रलय. गंधरगंधके समान है। " रामा." हरिताल । यिमजन, (न.) पि+एल्युत्। दान । देना । साग । ताल. छोरना । यि+णि त्युर । प्रेरण । भेजना. विनम्भ, (पु.) तिसम्भ+पन् । विषाय । प्रारम। विसर्पण, (न•) विगत्युत् । प्रधार । फलान । परिचय. राना । भागनाना. मिसम्मिन् (वि.)विसम्म+निनि । विभासपाटा । विसिनी, (पी.) पिसाना समूहः । तो देशो मा मुहम्मदी. इनि । पमरों का समूह । मोर पटना (बेड). घिनसा, (बी.) विसनम् । रापा विचिका, (पी.) Rशिष्टा सूचीर । वाथै रन् । विहग, (पु.) मिति ।। मानो पीएई है। एक प्रकारका रोगामा. पभी। परिदर. .

टिजीवन,] वृष्टिजीवन , (नि.) वृष्टिः जीवनं यस्य वा पृष्टा जीवति- वेणि-णी, (सी.) वेग्कइन्-या हो । जी+ल्युअन । वर्षासे पालागया घा आई (गीला) केशोंकी रचना । गुप्त । जलका समूह । जर होगया (नगर)। जलमे पूर्ण होगया । जलसे पलने देवदारका दख्त । एक नरी । यह स्थान :- वाला । बिसरा जीवन जल है। चातक । पपीहा नामसे यमुना और सरस्वती मिलजाती हैं. प्रसिद्ध पक्षी. | घेणीर, (पु.) वेण+ईरन् । अरिष्टाक्ष । नोमा वृष्टिभू, (पु.) वृष्टी (तदुपलक्षिते काले मवति । वर्षा- वेणीसंहार, (पु.) (बेग्याः संहारः) में से पहिचानेहुए समय (पति) में होता है। मेऊ । चूडा (वालों) बांधना। मेंडक । वर्षामें हुआ (नि.). वृष्टिसंपात, (पु.) टेः संपातः । सृष्टिका गिरना । | घेणु, (पु.) वेण+उ । वंश (वास) । योस वंसी (एक प्रकारका वाना)। जली. पानीच धाराप्रवाह वरसना. वृष्णि, (पु.) नि । यादवोंका वंश । श्रीकृष्ण । और घेणुज, (पु.) वेणुतो जायते । जन् । जीके स्वरूपका यावत. बादत. घृणिगर्भ, (पु.) वृष्णिः (यादवकुल) गर्ने यस्य । येणुध्म, (पु.) येणु (वशी ) धमति । म जिसके गर्भ में यादवोंय कुल है। श्रीकृष्णमहाराज. पाक । मंसीयजानेमाला. पृष्ण, (नि.) पद । धारामाह बरसनेके योग्य । येणुयाद, (नि.) घेणुं यादयनि । म वियेन्दिय शषिको पानेवाला । बाजीकरण. वेणुवाद । बंसी बजानेवाला । यसी वजा येतन, (न.) भन्तनन्-वीभाषः । किये- पृमि (पमाना) • उभ• राम• पो भ्वा• पर. मजारी. दिर पसीने माहितसाही । अहीत. घेतनजीयिन् , (पु.) (यानेन जोशी) गृह मन (मारना) और यदि (पाना)। भ्या. (मगदूरी) पर जीनेवाला. प.गर• मेरही। भारत । भवहीत. येतनादान, (न.) ६.। कर्म दक्षिणा (E गृल (1) Trt।मार ।। प्रियो दीप. ऐना । एक प्रकारका म्यादार. पृएती, () यो । पार । आवाग । कण्टरा- | घेतर, (पु.) भगभगुन गुरूम-यीभाषः। प्रसारकरीबी मशरो पाराला एक एन्द । एस. उपा. तस्यत्, (वि.) येनगः असि + पृजानु, (पु.) र मानु हिरणो यस्य । ब? पनवासा देश. रणरावि. येताल, (पु.) मरिच-यीभाषः | TE वृष्य, (पु.) यः मम । बरवाला । एक प्रकारका पहिलान (म) PREE पत्र (वर्तन) । सामदा एक भूतने प्रोगया है (भूतापिति शत) एक अनुगर (नौकर) द्वारपाल । दरान, परारति, (पु.) यः (बाच ) प । पृ.नि. पेन, (नि.) fम । जाता । माहारा ।। माहा आन (गुर). हामिल करनेवाला. संग, (.) from । परसा बोर । नीत्र, (T.) मायामः । मेरा यन्त्र (क) ।पमें | यंत्रधर, (T.) Extreमर ल. दामोश En गिर, (:.) गाव नाना । (श्रावती, (मो.) गंगा () (f.) मरममावा ग().rin ranima HTT" शिमग । हेवनाम (excom) वागन (40) in it म... दररमा र. (T.Sitti irmire -:.}ist Irritam arrant TERR-0ammu - पेक्षाभ, . - । - घेदगर्भ, (पु.) येशे गर्भ यस्य । निमो भीतर पेर है। धेदिन, (.) विपिनि । पण्डित हिम्पगमे । शम्पूर्ण दस्मरण बरनेद्वारा हिरण्यगर्भ. जानेवाला (वि.). घेदन, (न.) लिमयुद् । हान ( नामा)। मुरा हुया येध, (पु.) विपम् । पेपन । बोधना । नक्षत्राने मारिका अनुभव करना । और विवाह पुम् "वेदना" स्वागया एकप्रकार योग (जिने विपर मादिम (स्त्री) रवागना इचिन है). घेदपारग, (पु.) वेदाना पार ( अन्नं पीमा) गति | घेघका, (म.) विष+गुरु । करारा पति । गम्+४ । घेदोंकी सीमानक पचगया । सारे पेदोंको एकनां (बेधनेवाला) (नि.)नि लगने. आमदारासममवेदानिश. पेपर, (पु.) शि+भामा गुग । सिम्पर्म । 'वेदमात, (सी) । पेदोंकी माता । गायत्रीमहा जगमा रचनेद्वारा । वितु । एवं परिगा। मन्त्र (वेदोंको बचानेसे). महाजानेवला. येदविद्, (पु.) पेदं वेति । विकिप् । पेदो जानता | येधित, (3.) पेधः गत अस्य । र म । - है। विष्णु । वेदको लाभेदारा (नि.), गया (i). (मुगगरिमा). 'पेदपिहित, (नि.) (घेदेन विहितः) पेदने विधान | धेधिनी, (बी. ) fre+fair anit भारा)या गया. येपू, रिना या. मा. मा. रोदर वेदव्यास, (पु.) वेदान् स्यस्पति (पिभिमशागायेन पेपर, (३. ) ये पू+मगुर । पापा । पृथक करोति) +अस्+अण् । भिन्न भिन्न भागापगे घेपन, (R.) पेपद रामल धेदीको उदाए पनी है। पराशरका पुत्र । सत्यवधी | धेम, (पु.) ये+मन् । पायदाः । Sher. गर्भसे उपज एक मुनि. |घेल, पालन (दिलाना ) । प. प. गा. घेदर, (पु.) विद्+अनन् । देता । आमेदारा. भवेली, पेदार (म.) येदम्प भर सामानों थेदका अंग थेट, (म. ) बेगम । मन। नगर । (राप्रपा पाने )। शिक्षा, कल्प, व्याकरण, पत्त । सगुस्सा (M) (20). निरक, और ज्योतिष भा. 'पेदादि, (.) मैदस्य मादिरिष । मानों पेदमा मारिन्द (बाम) ना । भ• e. m.tr "चलागले विभी". उसका पाटाने समय पहिले उपारण किया जाना से)। प्रणय । भोकार. पता, (पु.) जर घेदान्त, (I.)त. पैदवा भग्न । पेदा शिरोभाग पान. () पुर । kutte (IT) | प्रो प्रतिपादन परनेशरा उपनिष्प सोटना : CRIMभा पर। मन्थविशेष । उरारा उपचार करनेदारा शारीरिक एकापेक्षित, (. ) Team माप्य भी "पा (fri) दाधिप, (.) • । दया मालिक । ऋग्वेरका (f.) पदरी, यजुर्वेदमा एक, सामदेखा मगर र सदा सामी हाशिम (१)। और पिy वेषी, (१) पriter- 12 दान्तिन, (R) दो यान अग्नि पर सन RRRR PRINT. ..." निजि राजकारदाश्रो (बरtaartihar. सामेदारापातामा स, (पु.) frre Karaort पेवाभ्यास, (पु.) । यस पटना, किन बनरगर । triket मागमाप परमार (MR) (outer). बरना. हापारिन्, (पु.) पेशि (Sury | होकर (म) ( Antert बगी दिन(पु.) सामाग-समिता, (.( Pr(r- दिशा (META Rer Erre) Thitr listt. पेदिए. (RORE Irrier . । . -- Par4 वेशनाग,] करना. घेशयास, (पु.) गम्प यागः । वेश्याओनिगग- याचिय, (म.) सिनियम भार - स्थान (रहनेकी जगह). की शकलपन । विदागना अजीयना । वि- पेश्मन्, (न.) विश्मनिन् । गृह । घर. पेजयन्त, (तु.) जियने । #िजि घेश्मभू, (डी.) त• । घर परनेलायक जगह । इन्द्रका प्रागाद (महल)। और एक दं- गृहकरणाई म्यान. (मी) जयन्तीयन (श्री.). घेश्य, (न.) विश्+ज्यत् । पेशाय हितं पा+यन् । पैजिक, (न.) बीजेन निनाटक । गिए ( धेशके लायक । वेश्यालय (कंचनीका घर) और स्यावार का तेत । "योजके लिये हितकारी" । मा योषित् ( मोलकी ओरत-कंजरी) (श्री.). ठक्" कारण । वीनका (नि.). घेष्टन, (न. ) वेट्युत् । कर्णशउली । कानका पोलाइ। वैज्ञानिक, (पु.) पिनानाय साधुन्छन् । निर उष्णीप (पगडी-फा)। कूष्माण्ड (पेटा) और प्राचीर आर । "विज्ञानकी मायत बनायागया अन्य (राफील)। शहरपनाह । घेरा (पु.). शास्त्र । उसे पढनेहारा (नि.). वेष्टित, (नि.) वेशभक्त । प्राचीर (शहरपानाह-मफील) वेडालयत, (न.) विडालम्य इदं+भण् । तदि आदिसे पिराहुआ। और सर । एकाहुआ । रोकाहुआ. विलेके समाववाला प्रत | "जिसमें धर्म के झण्डेय वेस, (गति) जाना । भ्वा. पर० सक० सेट् । येसति । प्यजाके समान सदा ऊंचे रसता है और जिस अवेसीत. की है" प्रकट होकर धर्मका आचरण और घेसन, (म.) वेस्+त्युट् । द्विदल । छोले । छोयोका पूरा. वेहार, (पु.) हि+घम् । पृ. । इम नामका एक देश. येणव, (न०) वेणूनां फलम् अण् । बांसका फर- घे, (अव्य.) वा+डे । पादको पूरण कर्ता है । अनुनय । (त्रि.). प्रार्थना । निश्चय और संबोधन (युलाना ). घेकक्ष, (म.) विशेषेण कक्षति (व्याप्नोति ) अण् । बहु- वैणविक, (त्रि.) येणोविकार:+अण् । वगर्व ( शिल्पं अस्ति अस्य+ठन् । वासरी वाजेका काम तही फैलता है। एक प्रकारका हार । जिसे टेढाकरके वंशीवादक (बांसरी बनानेवाला). कोख (कच्छ) की ओर लटकाते हैं “चुन्” । छातीपर | वैणिक, (त्रि.) वीणा-तद्वादन-शिल्प अस+ यज्ञोपवीत (जनेऊ) के सरूपसे धारण कियाहुआ एक वजानेवाला. प्रकारका हार. वैण्य-न्य, (पु.) वेण(न)स्य अपत्यं मम् । वैकङ्कत, (पु.) विकात+खार्थेऽण् । एक प्रकारका दख्त । पृथुनामी राजा. "विकंकतका" (त्रि.) | घेतंसिक, (नि.) वितंसेन ( मृगपक्ष्यादिबन्धन धैकल्पिक, (नि.) विकल्पेन प्राप्तः भवो वा+ठक् । पक्षसे चरति ठक् । जो पशुपक्षिाको फंसाकर जी- प्राप्त । मुख्तारी । चाहे वह दूसरा । दोनों से एक. मांस वेचकर जीनेवाला शिकारी (व्याध). वैकल्य, (न०) विकलस्य भाव+ष्यम् । विकलता । वैतनिफ, (नि.) वेतनेन जीवति+ठक् । मजदूरी धैकुण्ठ, (पु.) विकुण्ठे भवः+अण् । विविधा कुण्टा माया वाला । काम करनेवाला मृत्य (नौकर) आदि. यस्य । साथै अण् । “विकुण्ठमें हुआ था जिसकी माया कई वैतरणि-णी, (खी.) वितरणेन (दानेन) सम्पर्क तरहसे कुण्ठा (खुंडी) है"। विष्णु । गरुड । इन्द्र. छोप् वा पृ• हसः । जिसे दानसे लाप सके हैं धैरत, (न.) विकृतस्य भाव.+अण् । विकार । यदलना. जके दर्वाजेके पासकी नदी (दया)। "यमद्वारे तप्ता वैतरणी नदी" इति पुराणम्, घेखरी, (सी.) विशेषेण सं राति । रा+क । खार्थे भण् । अर्थको जतानेहारा कण्ठ (गला) आदि स्थानमें | पैतानिक, (पु.) वितानस्य अयं+ठक् । वेदकी उधारण कियागया अक्षरोंका धनाहुआ शब्द. अमिका स्थापन करना. पेखानस, (पु.) विसन्+ । अन-अमु । कर्म । साथै | येतालिक, (त्रि.) विविधः तालः (मालगीतादि भण् । वानप्रस्थ ( तीसरे भायममें दाखिल हुआ)। एक वेन व्यवहरति+ठक् । मंगलको उत्पम करनेहारी छ तपस्वी. राजाओंको जगानेहारा मागध (भाट) आदि. बैगुण्य, (न.) मिगतो विस्तो वा गुणोऽस्य । तस्य भावः | यैतालीय, (पु.) एक प्रकारका मापाचन्द प्यम् । “जहाँ जो चाहिये" उसे और खरूपमें बना | पैदग्ध, (न.) (सी.) विदग्धस्य (चतुरस्य ) भाषा- देना। विगाइना । भन्यायस्व (बेइन्साफी)। अगम्पमत्व लियां की । चातुर्य । चतुराई । हुशिमारी ध्य" भी. बेम घबराहट पूरा न होना.

भ, पिन - । पैदर्भ, (पु.) विदर्भाणा (अनपदाना ) अण् । विद नायिक, (नि.) विनये सारे भंदेशा गगा। एक प्रकार काभ्यरचना (बी.)। "विदमें मवा"+भए । मलराजाकी श्री दमयन्ती (०). नाशिक, (पु.) विन माविल हो । येदिक, (पु.) वेदं पति-धीते वा+टन् । यदको नाम एमी अमंगुर (मिमा हटन). दारा मानण : "वेदेषु विदित."+ठा । वेदमें पहुभा । नेहायरसटमेहरा (:.). पि.) प्रिया कर. | परीत्य, (.) निम्म मात्र उन । पदुष्य, (म.) पिदुषो भावः । पिम्+म्यम् । विद्वान्का भय, (म.) विभोर I feer ifree पिरयंय. होना । पालियापन, जलान पर्य, (न.) पिहरे भरायम् । एक प्रकारका मपि । जिरायपाल और पीला है। विकी मासके समान घमास, (R) nrrier. होता है। मूंगा. मुल्य, (R.) मा. 'देह, (पु.) विशेषेण देहः (उपवयः ) दम्य । म मात्र, (Bभगा। घहोना । मोडले म् । बिरामी हुर दिहोडी ६ । रमिगाम । मेलान । पाrtime म्यापारी आदमी । बनिया । इसे समानित में (ब) उपरी एक भार । "" "देटिकः" अनि मात्रेय, (पु.) मिwrt.nidin rHitr "विहाना राम"+भण् । रामानक. परिमा यदेही, (पी.) विदेहेषु (मथिलादेशेषु) भवामन पाटण, (ir.) आपाई Pratiroen मिभिलामीता । जनकपी बन्यामप। पmurern बनियानी. पास. (stram.rrithr पंच,(पु.) या ति अस्प+मण | मिसे पिया से। वो extet. पण्डित । भिषम कीम सरयर. पाप्रपा (पु.) A writers are पंचम, (.) (विरिता.) भविष्य को sut बन्। धीमी साविर बनायागया । सगात्र (एमावामी. पंचाय, (.kewwwecan teace. पंचनाप, (पु.) सानो माप । यो (ोमो) FAST. माथ (मामा) भवन्तरीमा माम. पासी, ( .mere area पात, (I.) ती विद्युत हर-मम् । () गाविसमा निगरो हापमा, पालिी (*.) ki irani or (वि.)भित भागत गन् । विपिन tvaarttt. Imater सियामा । विधान विभा पंधार, (I.) fery wer I went मायुमर आदि गरिविक्षन पति, (पु.) FAITHI. म. परत्तय, (..) Krem R... *reat (निविषाभ बस कि. नियमन (..) (inment, प, (I.)ोते | Re - सर धर्म, (..)ne. At ENI RE . HIR..ree .. , REETrendererature धार, (..) ferr writ Pritute (RTI rer. *:* :* *.. कोय, (I.) rrr Return PRIMAnt . :

शनिक, (४४२) ओंका समूह. शकुनिक, (पु.) शकुनेन (पक्षिवधादिना ) जीवति। शाणित, (त्रि.) शाण+शिय-क । वीपी ठन् । जो पक्षिओंको मारकर जीता है। पक्षिओंको मार कियाहुआ. नेहारा. शाण्डिल्य, (पु०) शण्डिलस्य मात्रयम् शाकुन्तलेय, (पु.) शकुन्तलाया अपलटर (म्य)। चलानेहारा, मक्तिशालके बनानेहारा एक मुने दुभ्यन्तराजाका बेटा, शकुन्तलाके गर्भसे उपजा। भरत आग. राजा. शात, (10) शोक । मुस । उसवाला । शाक, (त्रि.) शकिः देवता भस्य भएँ । तश्रम कहाहुभा कमजोर, और तेज (नि.)- शकिदेवीकी उपासना करनेहारा. शातकुम्भ, (न.) शताम्मे भवनमा शात्तीक, (पु.) शकिः प्रहरणं भस्य ईका । शचि( ताक (सोना)। धतूरा । और करवीर (पु.). त-पी) से लडनेहारा. शातन, (न०) शो+पिच-तत्व स्युर ।। शाक्य, (पु.)शपम् । तम साधु +यत् । युद्धदेव. डोटासरना । वेजकरना । और विनाशन (वि. शाक्यसिंह, (पु.) शाक्यवंशे सिंह इस । शाश्यके वंशमें "जायते पाशातनम्" इति मीमांमा । सना. मानों पर है। विशेष. शात्रय, (पु.) शत्रुः एव साग । Ry। शास, (न्याप्ति) फैलना । भ्वा० पर• राक• सेट् । शास. "तस्य भाव. संघो या" अम् । वेर । पुरन जिससाखीव. शारा, (पु.)पाए अन् । कृतिघका पुत्र ।कन्द (सा. शाद, (पु.) शापम् । कदम (पीपर)। मनिक)का मेरा भाई । गणविशेष । प्रथा भाग । यालरण. गोहान पामेशऔर दस्तका हिसाबाली। शादहरित, (पु.) शादेन हरितः (तर्ग लाल । मन्तिा (नमक) भौर मेदका एक भाग सालदेग । नयेषामवाली पृथिवी. शादल, (पु.) शादाः सन्ति भन्। भागानगर, (न.) पार नगरराजगडी मुल्क पाराध intr"पापुर" माद मी. शान्, मेदन (फाहना) मा. म. सा. से शापामग, (पु.)मास्यो गमः । गठीपर वा गलौका रान् । शीशारानिने । शीशा सौन् । ममी- र शान, (पु.) शान्मन् । पत्रों (भोगा शागार(पु.) गापाया (वागाया) : (तदि. करनेद्वारा एक यन्त्र. पकनारमार)। दमे देहुए काम को न करनेमे शान्त, (नि.) शम् । शममुक्त। सीतानी शासो छोडकर काम भाचार्य । पर रणमि मास्मिन परना. (पु.)। होमपाद रामाधी रन्या पर शापित, (पु.)समा मम मममी । लीवाला। मी । (श्री.). स्नागराए भाग । एकाविशेष, सरितनय, (पु.) शालनो भागम् । मार(पु.) । पत्र । बा (भियोग). गन्नान । गीतामा । "म: CHH सरर, (..)गुर। पासा (भियो नांगम शालन, (I.) र सुगमा बन्द सापन, (पु.)। देर मत्र"एर मा युवा नो भने हिमी गशशाणाग, (पु.) THERE I Mor (frice गरि रिसरमा (२.). Arm(ममाt). .(.) RTrयम् । घटानागानामन्-थैर, (.)EMES ल, (.)Firs I RE -शानि, (2) Airpali rreiram AIMimom (HI) PART- hिememe, (.) entres are AANTAR. वाली जगह T - (at) इस भादि. शाप, (पु.) अप्पम् । "तेरा धुरा हो" इस प्रकार शारीरिक, (नि.) परीरे भागेर कहना । लानत । पथ सम्म । माँ. शापायर, (पु.) पाप एव अझ यस । गारही जिसका शारक, (नि.) वाम् । हिमा करने मौजार है। मुनि । एन. करनेदारा. साप्दयोध, (पु.) सन्देन नितअण् । शन्दी बना- बाफर, (त्रि.) शय काम भयभर । मा । धन्वय (संबंध) का बोध । दाद इनसे (रादि वाली जयर (जहाँ र, रोटे, टरममा एक प्रकारका हान । फरकी पूरी १ समम (भर्थानके लिहानसे). शा, (नि.) स्व विधर मोगमा सादिक, (पु.) शन्द (पम्दमाधुताशार हान्ने) वेति पदार्थ । विगु पदर (कमान र समीठे पाठक । शन्दकी शुद्धिको जताने हारे मगरको (पु.) भदरक (म.) जाभेदाराव्याकरणशास्रके भावाला. शान्,ि (पु.) ममि भयनि ।। शामित्र, (.) शम् णिच्हाच् । पके बांधनेगा सान. धन पानेहारा (नि.). भाग्यरी, (श्री.) गम्बरेण निति+मणी । पाम्बर-माईल(I.) +उ मन-Cit मामी देखसे रचीगई । माया । इन्द्रजाल आदि, मेरिया । एक परी राम (IRO साम्भय, (पु.) सम्भोरय+मण् । गुग्गल (राभुग) मार। नुभयम) एक खि (अहिर)। शिवजीका पुत्र । और देवदाद। शार्दूलपिारित, (.) on to शिवगीला और उसका उपागक (त्रि.)। दुर्गा (श्री.) दपि. ग(पा)यक, (पु.) दो (ो) युन् । बाग ( सीर)। शार्प, (म.) या हम HD और तरि (राज) भंधरा. शार, (न.) शार+अन् । पम् वा । पर्युरवणं । रंगम-शाद, उपनगरमा । मा• • - रंगी । उसवाला (त्रि.). शारज, (पु.) t (gt) मा यस्य । शा। शाल, (पु.) पाल PART (Pr- जिसका अंग रंगारंगी है। पपीहा (परिमारिण। एकता " समय हामी । भीरा । और मौर शालाम, (I.) mai (ri) (r: पारद (म.) दि ममि । मिल बाहि। का गुर तुम । और हरी मूंग (पु.)।जो हारत् पालमें से "पग मन् । mmtrrrrate (नि.), "वो पमलदाटी" सरलती । "धेतर मस्ति यम" (श्री) शानियास, (पु.) ...Ire. शारदिक, (.) बिभर्ष भाद रोगो वाहम् । पार राम (पुर) मामा पार । उस कालकी बीमारी (पु.) पालभनित (2) re पारदीया (पी.) व भा एण् । एलरने ससक दुर्गापी पू. पारि-री, (मी.)। पारा (पा), ला, (rritori artat (मैना)|sin परम । शामायण, (5.) सारिपाल, (...) पल (Ricer iral पर.. सासार(3.) rat muT16: शारीर (4.)era Interte NEkan RET EVER RIN (R) (पु.).en mrts.) Pranarter. सो पारे "Hrith पारन, {Shrirrent 1 m र w t"..1 nic, के मर Trki (Ecry meer (5) rer rint: UNRITYe witecterme. -- शाली, है ( vex) शाली, (खी.) शाल्मअच् ही । काला जीरा. शास्त्रव्युत्पत्ति, (सी.) शास्त्रम्य व्युत शालीन, (त्रि.) शाला अर्हति । स । धृष्ट ( ढीद)। चतुराई । वेदादि शानों की चमकदार समा धेशरम. शानिन्, (नि.) शानं वेति-अधीते यार शालु, (२०) शाम उम् । शालूक । कसैला पदार्थ । जानेहारा. भेरू (मेंटक) (पु.). शास्त्रीय, (त्रि.) शामेण विहितः । श- शालूर, (पु.) शाल्मरन् । मेक । भंडक । हा. धर्मआदि. शालोत्तरीय, (पु.) शलोतरे ( प्रामे ) भवः शालो- शास्य, (वि.) शाग यत् । उपदेशकरने तर गाँवमें उपजा । पाणिनिमुनि. भादि. शाल्मल, (पु. ) शाल्मलम् । गिम्बलका दस्त । इसके शि, छेदन काटना । भ्याः उभ• राक• अनि शिनुते । पपीत् । अशेट. निशानवाला एक द्वीप ( जजीरा). शाल्व, (पु.) शालव । एक देश. शिशपा, (बी.) शिवं पाति । पा+पृ.। शाय, (पु.) शवयम् । शिशु । बचा साथै कन् । शि(सिक्थ, (न.) मिथक्-कुक्क्ष । "शक" मुर्देच. को "श" विकासे । मोम । मधुरिम शायर, (पु.) शावगति (विकारमति ) शर+गि+ शिष्य, (न.सी.) शिश+यन्, शि+याका इठन । "साय बन्." अरन् । विगाइदेना है। पप। अपराध । गुनाद । और स्टेपका इग्न । "शवरसे कहाहुभा+अग" शकरगे किया- रस्तीका पनाहुगा पदा. उभा मीमामा माय । “शरका" (त्रि.). शिवियत, (नि.) शिम (शिरप) मापरी, (पी.) गरम प्रिया भण् । मीलनी । शुक- शिफ्य+णिय-कर्मणि । छिकके भागरेपर प्रारी रिया (हम). पदार्य छिपर ससाहुमा. मापन, (नि.) गाभा मा भण् । बाहुआ । रानन । शिक्ष, ममारा करना । भा. भा. रा. से। लिगा. अशिशिष्ट. शाग,संगा (तरना)। भा. भा. रा. गेट् । शिक्षा, (सी.) शिश। पथ । राणा। परावेद । मगर इस पतो गाय "माइ" रहता है। सीमा । भ्याग | मरो उचारणको भागिता पैदका एक भग। पविशेष शिक्षा इति । विधा । म. गा, पर देना । मा. en TY. रोटरसाद शिक्षागुफ, (. ) . त । पिया देनेदारा । " भार हमारे परिदे "भार" रहना है । भाशास्ने । नेदार Mrfe. गम्, मन ( पदाना ) पद गदा. पा. शिक्षित, (ft.) शिक्षा माता मण वाजल्यापी । जिगने माग पत्र देरमा भगत, होशियार मशागीमामा. शासन, (३) युद । होटेको दिदगाधन, शि(खा), (पु.) शि मी मा सानाधराया। मादेना । हुक्म देना त. मोरपिछीपी. गरनार, (पु.),न नि अन् । जसको शिला (पु.) fair शिवगिT.NET गति (वि.) मारकर मा. शिलपिन्, (1.) frm frants म. (.) हिने। मना "ITERATURE शिवा (4) fan Mantr" R, (Fr.) rip In what free irroriter सिरिन, (पृ. ) fruitm Kristeeureter) a. Enjra for(Amitram । । RSITमा. - , शिखारन्द] गाजर. - - - - शिसाफन्द, (म.) शिरा हव बन्दः अस्य । गगन । शिफाकन्द, (पु.)दिपमाला, शिरफल, (पु.) रिस फल कार । जिसका पल दिशमिया, (पु.)शिसिनो बहेपेज इस । मानों भागडा निरके समान हो।मरिचेलमेट, संग। धूम । धूगो. शिरसगल, (न.णि नंत (पर)। शिखिन, (पु.)शिसा अलि बस्यहनि । बहीवाला। मिरता मानो मूल है (सपनिमे) सिरदर्द मोर । भाग । विस । केनुप्रइ । पपुल। शिण, (न.) अन् । नि. । ममा Rt पोगाण | मेथी । बोटीवाला (नि.). आगेनिग. शिखिप्रिय, (पु.)शिशिनं भ्रीणयति । प्री+कापुरः शिरसिरह (पु.) शिरि । मटर पर छोरावर सरपर जमनासारण. शिपिमोदा, (खी.) शिगिनं मोदपति मुद्रागिच्+भम् । निरस्क, (म.) शिति यति (प्र) अजमोश भरन. गिरपर घमरना है। निमाण टोप, शिखियाहन, (पु.) शिली (मयूरः ) पानं यस । भित्र, (२.) शिदने । aran. जिराकी सवारी मोर है। बार्तिकेय, धागा पीपा पमी. शिनु, (I. ) शिक् गुरुय । ( राजिना) कारण शिरा, (पु. J PAIN मा+य | FII. शिघ, आमाण सूचना । भ्वा० ५. रा. मेदस्ति । गि, (.) मी मार पल (1) FARRENTrtain.). विपयति. शिवाण, (न.) शिघि+गानम् । पृ. गावम् । पाषा शिराल, (वि.) निरा भरि माने | tri पान देसी मला नारी मैल। भोर शेम (बलगम). शिरापुन. शिन्, भरफुटप्यनि-धावाजवा साफ गुनाई - पाना । शिरीप, (पु.) gilr I FATERTrn इस्तिवा • उभ• पो भदा. स. रोट् । शिजय. तिते । । ( याने गा रहने शिगेगा, (न. ) शिग्य (Hin) एम् । घराशा galth मसिंगीत शिमा, (पी.) पिजिम । भूषणा । गहने (पर) शिरोज, (I• ) feer Rea- बी भापार | "शिजिम" धनुर्गुण । माना लि. शिजिनी, (श्री. मिलिलिनि । मानरा शिगेधारा, () (riyett..। मादेश शित, (वि.) शोक । दुख (मजोर ) । सापित। शिगेधि, (..) Ric.tr निरntra. शित (s) ft R+T. नि. शिरोमणि, (I. ) frre - I formere यो (0). ने | Rator) : शिता, (पु.) (eणः ) TR | तेज. परर पोषशायरी शिगेर, (पु.)HARfreere: शिति, (I.) सिकिन् । भूप (भेजनेश EMAIArtist ! उस गान (f.). 'शिरोध, (1.) रम् fhte in frre शितिकण्ठ, (पु.) : यस गिरा 2t. पारा. सिद, HARPATI......... सिभिल, (नि.) अविल..। मर बारीमा निए.(.)। Firr re शिनि, (I.) Ator : (५) rittire kr ("} (मन (:)) । Eritrinter... सिम, (I.RETV I सर (Pre)....।। PREnimort - . जलियामा. । ।

प्रमादिन् । पदायेदिन, (पु.) दो मिन्दी । पिपिनि । उप. शूल, (पु. न.) शल्क । एक बीमारी (रोर)। रे स.वारजातिकी छोरो विवाह करनेहारा । "शहावेरी लोहे का काला । और त्रिशूल । AMR) । र पतला" रमतिः मुनि । भौर ९ का योग (पु.). भूना, (सी.) पिबधिकरगेत । प्रानिवयस्थान । जीबोके मारनेरी जगह । क्याभोंच पर. शुलयातन, (न.) पातयति । इनपिम् मान्य, (नि.) भूनाये हितं (हमपान करवान्) यस् । गुलदिए, (पु.) ६ त.। दशा मेरी । म. दर्द दूर कर्ता है । मयूर भोजमा (जहाँ प्रानियों को सही मारग है)। भाय । सारी । मिसुमात्र । नुका । और अभाव (न | शूलधन्यन्, (पु) पनु आयुध भय ऐना)। जो पूरी नई । बम । और तुम्छ (त्रि.). रामा•। त्रिशुल निगका परदेसिपी. गन्यादी, (सं.) या पदवी । सूनी राजा साली | शूलधर, (७.) भारयी । धार+r पगाली । अन्मा (और)का रागा. पाता है। शिरणी. अन्यमना मनरू, (नि.) सत्यं मनो गस । शून्य (एने) | शूलधारिन्, (पु.) शां धरती । पालिम वि. मगरागमनाला. दुर्गा (सी.). भूगगरिन, (पु.) एवं (मभामा गई कारणतया) | Tलगाणि, (पु.) पाणी यश । दिगो । परिनि । गोर । जो रायका कारण मिशत है। शिजी. "Err" गा(कार)। "पहिले शुलारत, (PT.) न पिया (पास) परमामा हा। मोदेगारिकी फीस पेपार पा T.rrm रोना. भा. रा. सेत् । शलिक, (f.) र (पामा ) witm Timrinगना । • TH• • छन् । गीगार पाके पकापामा माग । शालिन्, (पु.) नमामि शोग (5.र (पर)। falm शित भार ( जो नार) गहाग (Tr.). (")। भी । गफ । शिष्य, (R) नगर । नार पर (3) मादी. गांगा. मर. (:.) मा मो) मा गोशदमन मारना । गा• प. • । गणात । " । (ग) है । पर IIivat राधीन.. श, (ग)गान(1.) NEHATI rite. (.)र, योfr. को लेता है। भारी। .rrentrera. नानीम १. ४... में । १३ । 'गारिका, (श्री. ) trum भाषा :- (4.)aximum नागेना. शक्षण (T.) (1) Immi' uttrakt #4100 Ta (ate) ए.(4.) 1.HEMATrti -Fitral). Army 4%eraneer, पत्रमा (1. It imat • * - *- * {शवलिनी, न - प्रा.(.)rismat (मगर) MIR राप्रम्, (म.) hieryम् । बचा हुमा मन.. HTTE की शान है । भदरक । गोठरामन्दरेशर, (पु.) निशा (ममामा अन्धं) अधीने वेत्ति या+ जापुर (सदर). भम् । शिक्षा (सरका विषय) अन्धको पढ़ता था पार. (3.) (FIR) भसी । मम । जाना है।"कन्" 1 शिश्क यही अर्थ. Pा भोर पर । पापप । बराहा हान्दा- शेगरिक, (पु.) सिगरे गाठ । घोटीपर हुआ । Arr. सरका निरा । अपामार्ग. आमा, (I.) (मो.) की भनेन । प्रदत्य, (म.) शीतस्य भान +यम् । शीतलता । रही। ममदापामारा एकरम ।। उपवाई । मान. तर र पूरा भराव । जेपर. नधिल्य, (न.) शिथिलमा भाव+प्यम् । टोलापन । हारिन्, (.)ER अम्पायेम भमि अम्पानि ।। (माटगयोग). मिनेसे पुन म बा । । गगरी । मेय, (पु.) शिनोप्रापठक् । शासकिनाम यादा. और हाल (R)ी र पहिने हुए (पुरेश) दौल, (न.) शिलायो भव +अ । पत्थरोमें उपजा गन्ध. इन्य । "शिलाः सन्ति अस्स+अण्" निलोंगला । पहाड रहित (पु.)zi पनि भनि । गोगाला । (पु.). मेष (टा)। भारतवर्षमा एक सीमापा । पहारा शेटज, (न.) शेले (पर्वते ) जायते । जन् । पर्व- एक मुनि (रस) गदाला (नि.), समें उत्पम होता है। एक प्रकारका गंधाव्य । गजपिप्पली एन, (नि.)। पर. । पासा. और दुर्गा (सी.) शुष, अपानारद पर मारना । भा. भा. सारसा दीरधर, (पु.) संतं ( गोवर्धनपर्वतं ) धरति । प+अच् । स. १. रोए । पता पट् । शते । अपर । गोवर्धन पहारको उठाता है। श्रीकृष्णदेवजी. राषिप्यते. सूप टेन (बारना) भ्या. उभ• भा.दापसावेट् । शैलभित्ति, (पु.) शलं मिनप्ति । भिदक्षिन् । पाथर- फाउनेका औजार. पाति-रो. नोटराज,(पु.)ऐलाना राजाराटच् समा- पहाटोंका राजा। मोनर(पु.) विजानाभिरत् । पृ. । शिसा । हिमालय. पोटी । माटो बारका पूजनेसी जातात, शैलशियिर, (म.) शेलानो शिविर इव । पहारेकी रोक, (पु.म.)ी+फन् । शिम । गि। धी+fy- मानों छावनी है। राम । समुंदर. शैलसुता, (सी.) त। पहाडकी लडकी । पार्वती. शेफालिका (डी.) शेरते इति शेफा अलयो २१ दलाम, (न) दौलस माम् । पहाडकी चोटी. गए । जहा भीरे सोरहे है । फूलदार पक्ष । मुहांजना | शेलाट, (पु.) दल अटति । अट्+अण् । पहाइमें घूमता है। शेर । भील । सिंह । किरात. शेमुग्गी(1),(सी.) +विन् । शेः (मोहा) तं मुष्णाति गुप्कजो मोह (म- मेरा) को चुरा लेती है । पुदि शैलालिन, (5.) शिटालिना मुनिना प्रोक्त (नटसूत्र) भधीयते+लिनि । शिलालिमुनिसे कहेहुए नटोंके नियमोंको पढ़ते हैं। शेष । नट. दोष, (पु.) शोषन् । पुरणका पिहाशिम । ग. रोवधि, (पु.) से (धनादिमोह तस अधिः दात शैली, (पी.) शीलं एव+साथै अण् हो । चारिश्र । नियम । सी. मोहवी सीमा। पप्रभादिनीप्रसारका निधि (राजाना). शेयाल, (न• ) शेते+पिन् । वलने-धम् । शैवाल से- शैलप, (:) शिरस्य पाय+अण् । नः । विशा बाल शिवाल। पानी कार सवार होता है, दस्त । धून । तलदेनेहारा. दोष, (I.) शिष्+अन् । अनन्त । सांपाका राजा । एक रोप, (न• ) शिवं अधिस तो प्रध+भ । पदया. सोप । बाकी. राका बनायाहुआ शिवजी के प्रभावशे वर्णन करनेद्वारा महा- तापिन्, (पु.) (शेषे होते ) शेषनागार शयन. पुराणविशेष । "शिशे देवना अस्स+म" शिवत्रीय (सोने ) बाला । विष्णु. मक (नि.)। "तस्पेदं मन्" शिवा (नि.). शेपा, (बी.) शिष्पम् । निर्माण मास्यादि देवतापर शेयलिनी, (बी.) शंकगनि सन्ति अम्पा घटीई मालाभादि। दोषामिप ---- . बानी नगी ।

सवाल, (४९९) नेमा दख्त. मुफा। मोती. शैयाल, (न. ) शी+पालन+साथै अग् । सेवाल । पानीमें गोफ, (पु.) +फन् । घोष । सोज. उपजा पदार्धविशेष । "कृष्णदेवका एक घोडा"। घोडा. शोभन, (न०) शोमो । गुम्यु। मनन शैव्य, (पु.)शिवर्गोवापत्य+यम् । शिविके गोत्रमें उपजा पांचवां योग (पु.)। शोभावाला (त्रि०) शोमा, (स्त्री.) शुभ+ । दीप्ति । चमक । प्रकार- शैशव, (म०) शिशोर्भावः अण् । पचपन । शिशुपाल । शोभाजन, (पु.) शोमाय मन्यते । अनुस्युत् ।। घालअवस्था. शैशिर, (पु.) शिशिरं प्रियं यस्स+मण् । कालीविडिआ। शोप, (पु.) शुपन् । हवा आदिसे पानीको सदीमें सुश रहती है । "शिशिरे भवः"+अण् । शीत कठिन करना । सुचना । "मुच देता है"If कालमें हुआ (नि.). बीमारी. शो, तीक्ष्णीकरण (तेजकरना)। दि०५० स० अनिट् । श्यति। दोपण, (न० ) शुप्ल्युट् । चूसकर रस पीना अशा-शशासीत्. मुकाना । कामदेव । एक तीर. शोक, (पु.) शु+घम् । पियारेके विरहसे हुआ दुःरा-शौक, (२०) गुमनां समूहः अग् ! सुसमुदाय । रूप एकप्रकारका चित्तका व्यापार । अपसोस. तोते. शोकारि, (पु.) ६ त० । शोकका शत्रु । कदम्यका वृक्ष । शौकर, (२०) शूकरम इदं अण् । एक ती. कदम्बकाद्रस्त. शोकाविष्ट, उपहत । विह्वल, (नि.) शोकेन आविष्टः । शौक्तिकेय, (न.) शुक्तिमायो भवम् । सीपीने शोकसे भराहुआ। शोकमें पड़ा हुआ. शोचिप्केश, (पु.) शोचिः केश इव यस्य । जिसकी शौलय, (पु.) गुगस भाव+प्यन् । श्वेतता रि- चिरंग. चमक (वेज) बालोंके समान है । वहि (आग)। शौच, (न• ) शुधमावः अण् । शुभि (सकाई) चित्रकार शोचिस्, (न.) शु+इति । प्रभा । प्रकाश । चमक । प्रता । पाकीजगी "न खानेलायक चीनकोनस रोपिः निन्दितोंके साथ संग न करना और अपने धर्म का शीय कहलाता है". शोच्य, (नि.) शुन् यत् । धुइ । कमीना । छोटा । शौटीर, (पु.) शीट् ( अहंकार करना) ईरन् । त्यागी दयाके लायक । अफसोसके लायक । बेचारा । गरीव, शोण, गति ( जाना)। सक- । वर्ण रेगना । अ. भ्वा० और यहादुर । भहकारवाला (नि.). प. सेट् । घोणति-अशोणीत. शौर, गई मगहरहोना । भ्वा० ५. सा. केदशोरी शोण, (२०) शो+अ । सिन्दूर (सिंधूर)। और भगौडीत. रधिर (लोह) । टालगन्ना । मंगलमह । आग (1) शौण्ड, (नि.) गुण्डाया ( मुराया ) अमिताभ शोणित, (न. ) शो इतन् । (रथिर । लोहु ). शरायमें लगाहुआ। मत्त (मनवारा । और दक्ष (पर) शोणितपुर, (म• ) शोषितं इस रफ पुरम् । लोहूदी नाई शौण्डिक, (पु. ) गुण्डा (मरा ) पग्यं अभय । १० माहरबागामुरका नगर (मुक). घवेक्नेहारा । कलाली एक जाति. शोणोपल, (5• ) कर्म । सालपत्यर । माणिक्य (माणा) शौण्डीर, (पु.) गुण्डा (गः) अस्ति असाल मनि. सार्थेऽम् । कलाल । अहंचारवाला (नि.). गोय, (.) Itथन् । हाथ पांव आदियो फुलादनेहारा शोर, (पु.) झायो भव मण् । यहासे अपचा है सोर चौद्धोदनि, (पु.) मुद्धोदनस्य माम् ।। शोधामी, (श्री.) शोथं इन्ति । हन् । शासपों । शेष । शुमोदनी सन्तान, सोर दर परनानी दवाई (त्रि.). शनिक, (पु.) शुनरस भाग्यमन् ! Ash सोधन, (न.) पनि ज्युर । जय । पराई। एक पुनि । "यः छौनाइयः" मा. पु.. far (र)। मनमा सोना । दोष हटाना । और वानिक, (पु.) पूना ( भाविधरथानं ) प्रयोजनमा शे रण । “मति भरणे म्युर और" ठर। औयों के मारनेरा मरने से rin ()(ग्री) गणागपासीसिरी. शोपित, (R) । मादि हर शामिक ( INTERE Erirgarh ।

तर,] - शौरि, (पु.) र गोधारणम् । यादयविशेष । मुसियामल,(पु.) सामवर्ण सादि । साम । पिपलारसे या सूर्या पुन । विष्णु । श्रीकृष्ण । भोर पानेश्वर. रंगवाला (त्रि.) शौर्य, (म.) पूरस भाव.+प्यम् । बहादुरी । वीर्य । श्यामलता, (सी.) कर्म । एक येल । बालापन। मोर राफि. सालका शालारंग । हरारंग. सालिक, (पु.) गुरुके अधि+रा । करतेनेका | श्यामरायली, (पु.) दिवगन (सामौ राइली पोसान काम करनेहारा । महानिआ। तहसीलदार. (काले) भौर रावल ( विचित्र-रमपमया)। समारके शायस्तिक, (नि.) (परदिने )मा । श्वम्+ठक् द्वारके रसक (रसबारे) से पते । पर माताले उदच । आनेवाले दिनमें रहनेहारा पदार्थ । कलय. यमके कुत्ते. शीफल, (पु.) पुष्कलं (उपमांस) पण्यं सम्पाभण । | श्यामसुन्दर, (पु.) सामः अपि गुन्दरः गोकर सूके मौसका सौदाकरनेवाला । रके मांसको अपनेहारा । मी गुन्दर है।धीरण । "श्याममुन्दर! तेस." "सूके मोसको सानेहाय" (नि.). इति भागवतम्. भुत्, शरण (पहना ) भ्वा• पर• अक० सेट् । धोतति । श्यामा, (बी.)मन् । एपीपप (राई)पर अधुतत्-अधोवीव. श्री जो भी प्रगत नाई। रमुना । रात्रि (1)। व्युत, पारण (पहना)भ्या-पर-भक सोचना-राक. सेट। गिलो । गुग्गल । नील हिदी।पिपल मपाती। योती । अभ्युसत्-अध्योतीत सासिंग (सली इरन)। गए। योत, (पु.) समन्तात् सेवन । पारोऔर सींचना । एकप्रभारी औरत (कीनकालमें निगो भंग गरम से मौर गरमी में समारहीसे लोगो ध्युत् पम्. रमसान, (म.) इमान (वाः ) शेरते पत्र । दी+भा- समान हो). मन् । “मन् सन्दसे पाप-शान (भी होता है )" शव यामाग, (पु.)साम (हरिपूर्ण) भस । धिपण (म) के जमानेका स्थान । मसान । मुर्दा जलाने सरीर हरेरेगका हो । पुपमह। पालेदारी (दि.) नियोग. जगह प्रमशानयासिन, (पु.) मगने वसति । दम्+गिनि । स्याल, (पु.) माउन् । पनीt साय । "याविर" मी. मसानमें रहता है। महादेव । और बटुक भैरव । मसा- निओ (पापडाल ) आदि (नि.). याय, (पु.) सरन् । परrra मधु, (म.)दम (मुरा) भूयदे ( लक्ष्यते) अभेन । (नि.). धुपुरषा मुंडिएने पहिचाना जाता है। दाडी. यापदत्, (नि.)पो एलोप्सा के रंगके निराला. मधुमुखी, (श्री.) मधु गुगे यस्तार । जिराके मुखपर पाही है। । पुररके सक्षणवा पोटापुरती. यापदन्त, (पु.) सभहीने मिसन १. तापलेल (.). "TTः एमभुल, (पु.) मधु पियवे सलम् । दाटीवाला। स्पारयन्ता "रति पाहिया. मधुपर्धक, (पु.) मधु पयति ( निति )+स्येत, (३)साल । म (RT-मेर)। गुत् । दारी काटता है। नापित पुरस्कार । उस. उसाला (नि.)। और।""" रेसे पामारनेहारामा प्यान, (वि.) । बन गया होगा। पेन, (.) NAREN)। एकगया । “पपपायानार्दमन्". सपेरण। इसमाला (नि.) पाम, (पु.) मा । दार प्रो र, गगी (रना) HTRA दीपाकोट(पट) नीलामा परामक, (I.यामेवार पन् । एशारम पर. स्पेनमा, (20) संगम स्तोत्र श्यामण्ठ, (पु.) काम सजिसरपरा rarentre म है। मयूर (मौर)। पि मोला भष, र (क)भि..... पारा पक्षी. स्यामार्ष, (पु.)सम पसरले पराभलपु..... अमेय (2) उपौदी (गम में असम), भरपात.

अम्। . - . धर. धावनी, शु+मिली। धमेनाम ५ () ()(..)। श्री, (11)..... 4441 MINM...HTTA प्रत्,J. थत्, (अम०) श्री+उति । श्रदा । विश्वास । इमान । श्रयणगोचर, (वि.) श्रवणस्य गोचरः । । गुरु और वेदान्तपर विश्वास. सुग्नेमें आगया. बांधना । छुडाना गोरं वय ( मारना)। चु० उ० प्रविष्ठा, (खी.)। भूयते । शुभम् । प्रा (2) पक्षे न्या. पर० स० सेट् । भ्राथयति-ते। प्रयति । अस्ति अस्याः मतुम् । भतिशयेन प्रादीन (यन और दाखल). पका लोप । बहुत मशहूर पनिठा तारा. अयन, (न.) प्रत्युत् । वध (मारना) । कोशिश | श्रवस, (न) भूयते अनेन । शुमति । बिस्ले या करना (मन) और प्रतिहर्ष (सुशहोना ). है। कर्ण । धान । कर्मणि अनि । कीर्ति । पर. थक्षा, (खी.) अद्या+अड् । आदर । गुरु और वेदान्तके श्रा, पाक-पकाना । अदा०प० स० अनिट् । पानी पचनौर विश्वास । स्पृहा (इच्छा)। सफाई (शुद्धि)। सीत् । पयति. धर्मके काभमें प्रशय (विश्वास-निश्चय ) । इमान । थाण, (नि.) भात । पक । पकाहुआ। या यकीन. सिवडी) (सी.). श्रद्धालु, (सी.) प्रदा+आउन् स्टहावदी । चाहवाली। थार, (२०) श्रद्धा (हेनुन्येन) भसित भसा अशाश(त्रि.). धन्यू, मन्मन (गुयना)। भौर पध (मारना)। चु. श्रद्धासे उपजता है । पितापितामहादिको प्राने है २० पो. मा. पर• सक० सेट् । श्रन्थयति-ते । पादेय, (पु.) भादोरेस्यानां पितृणा देशः । लायक द्रव्य । “अस्ति भ+अम्" पक्षाला (110) धन्भी सम्दीत मोचन (गुगना) और कार २ सुशहोना । पया. भाध में मुलायेगानेदारे पितरोंका देना। मरवाए .. सेट् । धीमधीर, मुनि, भागन, (न.) आन्ध+गुर । प्रन्यन रपना । गुथना. भारदेयता, (सी.) भाटे देवता (सतायो। पिन, (1.) utम् । पहिसघ । पर । भासमें दियेहुये व्यकी देवता पितर | Marat देवताः" एतिः. धम्, मा रममाण (सील उगना)। भक. भाद्धिक, (नि.) श्राद्धे देय पाया तय भयान पहा कोट धाम्यति । अप्रमत् । मन-मासिकमा मायन्येन भनि मणा२ अस्य पा+टन् । थायमें देनेलायक पराको शार. "INT. भर, (पु.) पम्पम्न मि। सेवा मिह- भारमै दान कियेहुएको सानदारा. राणा अभ्याग. धान्त, (नि.) अरू धमाला । मेहनती भमप, (पु.) RTI I र यति (गम्यापी)। सिनेन्द्रिय । पाहुया. for tra (f.)। अमांगी। मुन्दर श्री भान्तसंपादनम्, (न.) मातम पाल । हुएको आराम पहुँचाना ( मीयापी सना). भनिन, (f.) । धमज । मेहननी । धायण, (पु.) भागेन गुन्हा पर्णिमामा म मागे TENT पूना हो । भग्न, नT.war. सेत् । प्राभी. गासनका महीना । "बानगे IIM HAR पर, (पु.) firsa । अधर । भगाए। प्रत्याशिंग. “टर (.)at s. ४. अनेन 18,471 सि मुवी शि, गेयाना ... है।) Tit. aft-न. (२.) . । प्रिन, (f.) frre dt (+EERI"" RITE: मदिन () परम पम् । धी. (..) first. ...rr. ..! Int her हो भ. - धीरमदेव,] धिमा 1 धीरभदेय, (पु.) पर जाना+भमा विभिन्। धीयनन्तनाथ, (.) नग - मा सम्पूर्ण विद्यारि पार जानेवाला एक मुनि। जनोय (२.पी.) । मनर । दिपार पहिला दीपंकर अयान (अवतार), नही मरायण भारत धीमजितनाथ, (पु.) कि (म..) श यागी जने अंदा (भा). नाथः । मास (1)सीमेगी न पीतामा श्रीधर्मनाथ, (पु.) मन (पु.म.) Fre सपनेहाय खामी (मालिक) । जनों का दुगरा तीर्थर में पांपेपर (भरतार) जियप्रवाह में रहे मो. धीसभयनाथ, (पु.) राम्+भू+मर () म माघ । बाममीजेगम में पदारAir (1) गरिमाचार भाशा चलानेवाला । जनशीगराती. कर मान (भवतार). श्रीमाग्निनाश, (पु.) refr (1) Tr माय निर: पू En धीमभिनन्दन, (पु.) अभिनन्द+अन । अभिनन्द Parnnetter (7) पति (पीपयनिम्) । पाने भत्तोपो गर्यथा होता. हित परनेशाला । जेनों का पाधा दीपार (भवतार). शुनाथ, (पु.) एच. HTI इगा. जगमपर | ram" श्रीरामसिनाप, (पु.) तु+मन+निन् (१) । गुप मारिया (क. मी.) it माघ । भणी (निर्मल) पार mar धुरिमाली रक्षापरनेवाला । अनौका पावा तीकर oileTR (11) अर्थात (बनार) धाननाथ, (.)(r) श्रीपप्रमु, (पु.) पर+मन्-+-२ () सण माप | Trurat Fre... घन मादारीरवी एबमारियोंपर चालला मार (1) योगिरामा अनोगा तीरमत (ARTI). धामातीमाप, (पु.) antara...। भीपुर्यनाथ, (पु.) EKTRNण-P• । समानी पोगो raire मपथ । बन पा रहारा माप (मी)। मान- रामा। नोमा मानवी ती (भक्तार) समय : (ATTA धीपत्रम. (पु.) पदिए । सपी नाभा । सामुनि एमन, 15. ) .. ९.... रापोभानन्द उपत्रानेहरा कामी । R. mami and mantra मोता anant सीकर अर्थात् (AITRI'm भारविधिमाघ, (पु.) put tमाय । (MAmrit मापूर्ण नियमो (पानूनी) पर भार! परमेषसः । धाम मीमाप, (पु.) Isotram... अनोतमाम (माnt) MENT (भषा) trin RT... धीमानसमाप, (पु.) Rhetant then ( र अलि ल Mawti भीभरिरममी. (१) nrrit... बारा मात्र भरजनोशमा हो .....:....:. (IT). धीधाममाय. (पु.)ीन free me सिर,in undere, (I. m.tr. I ne , ४ : Neी पूर्ण नगी । Arter (ITI). श्रीरापर, (पु.) mein REPR. भीमराwrt.:. : .. (५) भोविमरमाप, (.) 1 2 (th. (५.....Reaturitin -RIfraterfer surarht:() 44 Mirrrr एक बेल. । धारप, (पु.) युद्ध क्या । शोभावाला रामा । धुतकीर्ति, (पी.) शवासी काsar- कागुनमा समशहै। भारत, (.) गम् | Vir. धुतापनम(.) Far । शुसि(श्री.) भु.नि. (4) धीरण्ट, धीरुण्ड, (पु.) धीः (शोमा) कण्ठे अस्स । जिसके नीरङ्गपत्तन, (न.) निया रास पत्तनं । । गलेमें शोभा है। शिवत्री । हस्तिनापुरके उत्तरपश्चिमकी शोभाके खेलनेका नगर है। दक्षिणमें एक देश. भोर पुरजाललदेश. श्रीराम, (पु.) भीशन्दयुक्तो राम । श्रीमतरता धीकर, (२.) धियं करोति । अच् । लालकमलका दशरथम पुत्र । एक राजा । धीरामचनावार फूल । विष्णु । दाय ( विरसा) के विषय में प्रय बनाने श्रील, (नि.) श्री अस्ति भर्थे लन् । शोभाया हारा एक पण्डित । शोभाकारक (सजानेहारा) (शि.). श्रीकान्त, (5.) त । विशु । "धीनाय” "श्रीपति" धीलता, (स्त्री.) धीयुक्ता सता । महान्योतिची उप दावाला । दौलतमन्द. आदि मी. श्रीखण्ड, (न:) त्रियः सण्ड इव यत्र । जहाँ शोभाका श्रीवत्स, (५०) वदति महावं । पदस । भीतर त सा है। चंदन. श्रीगर्म, (पु.) श्रीः गर्भे यस्य । जिसके गर्भमै शोभा विष्णुका कौस्तुभमणि । तीर सफेद मो - ओर मुडी लोमावली (रोगामी हार) । है। पिशु ।स। तरवार. झण्डा । एक राजाका सास घर. श्रीधन, (७०)धिया पुसा धनः। बहुतपुद्धिाला। एक भुर। धीरा (T.) धिया गुको बादः । म त धीनः, (न.) प्रियाः चकं ( यत्रभेदः) । त्रिपुरा-धीयास (पुलिये मासः ( सौरभ ) अ । विनों भवनामसे एक. गुन्दरी पूरा भर । एक प्रकारका तन्त्रसम्बन्धी पक(पत्र). सुगन्धि सभी के लिये है। सरला मर. धीज, (3) श्रियः जायते । गन् । मनीरो उपजता श्रीविद्या, (सी.) प्रिये (विवर्णय) विशपर्व, बर्ष मी. और काम के लिये एर पिया मिपुरगुन्दरी (5.) पिर (प) पदाति । पन देता है। शादीश, (पु.)स. समीका सामी 1 : सपुर भरनेसरा (नि.). धु, भाग (मुमा) सा- पर. सर भनि । ने धापर, (३.) पिणी । अन् । विशु । शाल. अनापीत, FEATI(म.). श्रुत, (म.) भूयने । भुत । मुना main भामिन, (पु.) Art (नित वाग. (म) । उगका मान । "भूतानित."net सस)| Ritesari | मी महुन निवाग माणद्वारा महण याहुभा । HTA (HRA ht.in पर (1.). भीर्ष, (.). पर्ने भय । गिरेपन सभी (नि.) मल । धुनदेवी, (पी.) भुय (ग) माय पुर, (. ) .समरे । ममीका पुत्र (भाई) शुनयोध, (T.) मा गोपी TIHAR मेटा. पुष, (२.) पुषन् । सार (भोग). माएETuम्प. ressNARभुप्रिया, (.) ( 47 ) पण 1 ५४ भुनाया है arun) TRE ARAL म(न). + "भुता (पिया) की " | RATE . 14. HERamya) or sarls । यिोना (w.) Ireat अविजीवित शि, - पथ । शमा. . - . श्रुतिजीविका, (टी.) शुनि जीवयति (मूलतयाऽनुग- श्रोण, मंगात सहा होगा मा. म. टी. रति) जीवनस्युत् । वेदको जीवन देती है (मूलभूत भोगिरणी), (स्त्री.) श्रोइन् पा र पिटि (मा)। वेदका पीछा करता है)मा । धर्मशान, श्रुतिधम्, (म.) धुनेः देयम् । श्रुतिका धीमान श्रोणिफलक, (म.) निः फल त । मन्टोर (विरोध) पदिक विधिका परसर पिरोय. (प्रामारि) १६.टिर (कमरम). श्रुतिघर, (नि.) भुल्या पतिअन् । जो गुनहीगे | श्रोशिविम्यम्, (न.) भाष्य बिमम् ।। गब एमालेता (पारणकर्ता) है. गोलकार. श्रुतिमूल, (म.) धुतिरेष मून (धर्मके प्रमाण होने ) धोतव्य, (.) त्रुस्तन्य । गुहार घेदही जा है । धर्मको जनलानेहारा पेदाप प्रमाण । थोत्रम्, (म.) शु+गुन्हा पाव (i. 16. पक्षमारि। भौर घेदशास्त्र में कहाभा धर्मादि । का ग (जोर)। भैरहन्द्रिय तपाना मूल. धोत्र, (म.) भूयते अनेन । धुन् । श्रुतियर्जित, (नि.) धुग परितः । पद पा कानमे साधन पान. रहिन । एक । घेदय पाट म करनेदारा । धिरोत्रिय, (पु.)थुन (२६) itane बहिरा रा. भुति+पम् । वेद । वाम मा I str ri भुतिषेध, (पु.) धुनः (वर्गम्य) बंध पत्र । जिसमें पानको बाया जाता है। वर्णवेधनागी एस्तार | धीर, (नि.) श्रुतi freir I ATA Rer wer परकार. गया । धर्ममादि मर्दपपThe भुस्यनुमान, (पु.) भूयते इति श्रुतिः (दादा) तय भनि (पु.). भनुप्रागः । वादमा अनुपात (लाटकर गेही हदसा धीनाम.(.) एम् | Artery भाना) दालंकार. (अवयन शाम) धायुक्त (नि.) भुनी (प) सतः । पदम पिन | धीर (4.) (-) पियानुभा धर्ममादि पस्य भर मे " Tram ५(प)पा, (बी.) शु(3)+ । यहा एक पात्र । माया tram. (महाका हाप). धापर, (प.) gritin( भेदी, (Rt.) अभ्य (सहरणाय) बीते । । भानाOr प. । मिनमा प्रयोग मिलाने ये माण, (f.) meanR. ) भगवान पाएमा एकसारा गिनतीका प्रार ममोरर (Treatmiker Imr. दिगाव. Hing........ भेगिरी), (Rt.) धि+निमा सीप । निरहित कि। HI (परातो बिना)। जमल, प, (पु.).merties angi. घेपर, (.) येन प्रसारण । मदेश । दीवार पुन सराहने लायक । धर्म मोक्ष म (भा)। अपने-4...। न (f.)गत (ME) (की.). धेयोधिन, (वि.) धेय अपर । म (A) (..).mrrittharti आपला पोरासने भेट (पु.) RECEदेर । गत सामाविषय, (5.) - kritire wrC परेर । MIRETI ARTH १५(..) र (नि.), माम्म, {R.JPIRITTHALIL पिन्, (.) (HERER I font or, tears rate In.fr. ke Prerattifers (rhat) htrakuteTIT. ति (f.).riritTr[Arprt- घोष, (३.) Wory । र । ... (1)(m.) मारे - भाप . . २८..

पा, सिद्धिा हासिल होना। खा.मोर दिया-पा.. पडशीति, -- केका" इति रघुः. करना) "व्यजेट पड्वर्ग" इति भटिः । ज्योविप्म क्षेत्र, पाण्मासिक,(न०) पठे मासे म+ठम् । मरेरक है। मुख, (पु.)षद् मुखानि यम्य । छमुवामासानिकार्तिक.पि, पंध (बांधना)सा.क्या...अनिता ईसा-मारना और गतिमाना । स. तु. प. अनिट् । पिट, अनादर (पेशवा करना) मा...। (पि...)। पो+र+10th गैस्त्या पिघ, गति(जाना) मा. प. स. मेरा (५..) पडशीति, (श्री.) पाधिका अशीतिः। छ ऊपर अस्सी। पष्टि, (स्त्री०) पगुपिता दगतिः । नि. । छ मुन्दुर छियासी, सूर्यका एक प्रकारका संक्रमण, दगके साय । साठकी संख्या (गिननी)। उस समपत्र. पडशीतिमुख, (न.) षडशीतेः मुसम् । पडशीति नाम पष्टितम, (त्रि.) पटेः पूरणः+तमद् । दिने सबै संक्रान्तिका मुस. संख्या पूरी होगाय । त्रियां की । साठवौं । सो. पडानन, (पु.) पट् माननानि यस्य । जिसके छ मुस हैं। पष्टिसंवत्सर, (पु. ५०.) पटिगुनिता । कार्तिकेय । स्वामिकार्तिक. ज्योतिपमें प्रसिद्ध प्रभव भादि साठ वरिस (व). पडूमि, (पु.) षट् ऊर्मयः (ऐश्वर्याणि ) यस। छ | पष्ठ, (त्रि.) पणां पूरणः । पपस्टट्युव । जिन ऐश्वर्योवाला परमेश्वर संख्या पूरी हो । छटा । स्त्रिया हो । छी. पड्गय, (नि.)पभिः गोभिः आयुफः शकटः हलो वा। पाठक, (त्रि.) पष्टो भाग+कन् । छटा हिस्सा. अन् समा० । छ बैलोंवाला छकडा वा छ वैलोंसे संचा- पष्ठांश, (पु.) कर्मः । रक्षा करने के बदले प्रश्न गया हल । "पग्णां गर्वा समाहारः" द्विगुः । छ गौएं (न०). लेनेलायक उत्पन्नहुए शस्य (खेती) का छठा भाग पगुण, (पु.) पड्भिः (गुणिताः) गुणाः । शाळ० । राजाका कर (मासूल). राजाओंके सन्धिआदि छ गुण, पष्ठान्न, (त्रि.)पष्टो दिवसस्य पष्टः काल. अनवर पड्मन्थि, (न.) पद् प्रन्थयः अस्य । छ गोठवाला। जनस्य वा कालो यस्य । दिनके छठे भागमें भोजना पिप्पलीमूल (मप)छ पर्थ ( गांठ ) वाला (नि.). Jugn, (त्री० ) पण्णा पूरणी-उद्-युट्टीम् ।। पहज, (पु.)पइभ्यो नासादिस्थानेभ्यो जायते । जन्नड । नासाआदि छ स्थानोंसे निकलता है (नासा, गला, अदी, खामिकार्तिककी स्त्रीरूप एक प्रकारकी मातृका (मा) ताल, जीभ और दांत ) एक खर। "पड्जसंवादिनी | पस्, खप्न (सोना) । अदा० ५० अ० सैद् (रे आता है) सस्ति. पदीर्घ, (पु.) पड्मिगुमिता दीर्घाः । तत्रमें आ, ई, पस्ज़, (सर्पग) फैलना-सरकना । भ्वा० ५० स० ।। क, ऐ, ओ, अः इस प्रकार छ दीर्घ. सबति. पधा, (अन्य ) षष्+प्रकारे पाच । पत्रकार । छ । पह, क्षमा (सहारना)। भ्वा० सा• सक. तरहसे. असहीत्. पहरस, (पु. ) षण्णा रसानां समाहारः । छ रस पाइगुण्य, (न०) पद् गुणा एकाध्य १ राजाऔर आदि छ उपाय. (मधुर-मीटा, लवण-सलूना, तिक-तीसा, कपाय-कमैला, अम्ल-खा और कटु-कडवा). पाण्मातुर, (पु.) पणो मातृणां अपत्य अ-ri पपर्ग, (पु.)त.। छोंका वर्ग ( समूह ) 1 काम, रपरः । छ माताओंका बेटा । कार्तिकेय (इसप्रेटर शोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य (दूसरेके शुभसे वैर कृत्तिका, गंगा, पृथिवी, और पार्वती इमर माता हैं. होग, देशण, मांग, द्वादशक, त्रिंशासक. पण, दान (देना)। तना• उम• स. मेद । सनोति । सनुते. भार (वैदिक प्रसासे कियागया फर्म). प (श)ण्ड,(पु.) पह-पृ. ।। (बैल)। नपुंसक (हीडा)। पप्रभादिका समूह (पु.न.). अनिट् । सानोति । राप्पति । असारमौर, पण्ड, (पु.)प-गृ. । नपुंसक ( हीजडा ). पान्त्व, सामयुत सम्पादन (दिलासादेना) । " रा.सेद । सान्त्वयनि-ते. सद्, शिवार (दिसा हटना-अरसोग करना)।क्षक। गिनुते । सिनाति-निनीते । अमेचीन-अमेट. संटति. ज, (टना) म्या• ५० म० भनिन् । समति । पिङ्ग, (I.) पिद-गन् । पृ. । विद । सम्परा मी. (टी)निल्द. भरोधी सेट् ।। , एक दिन कम छठे महीनेमें करनेलायक RE, सोदति । अपर clien पि, (५." [संक्षोभ, उ.रा.. पि, तन्दगिभार (सन फैलाना-सीना) दि. ५. रा. पोडशोपचार, (पु. ५० व.) षोडश संख्याता उप- सेट् । हीव्यति. चारा । पूजारी सोलह चीजें। जैसे-आसन, सागत पु, सोमरारा निकालना और मपना । खा. (भलेआये), पाय, अय, आचमनीयक, मधुपर्क, नहाना । पक- अनिट् । पिर- सेट् । मुनोति-अनुते । आवमन, मान, वस्त्र, भूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, असावीत-समोर. नेवेद्य और वंदन. पू, प्रमव-उत्पन होना (पैदाहोना)। सदा• या• राक• पोढा, (अध्य.) षट् प्रकारेधाम् । नि०। प्रकार । सेट् । सूते । अरापिष्ट. छतरहसे. ५, प्रगर (पदाहोना)। दि• सा• सक० सेट् । सूयते । पोदान्यास, (पु.) पोदा ( षद् प्रकारः) न्यासः । तन्नमें असपिष्ट-असोट. छ प्रकारका न्यामविशेष. पू, क्षेप (फेंकना)। नु. ५. सक. पेट् । सुवति । सा-टु, स्तुति-बड़ाई करना-तारीफ करना । बदा० उभ• सक. अनिट् । तीति-सवीति । तुवे. पूद, निवारण (टाना) । मा• en• सक० सेट् । सूदते। ध्यै, येन-लपेटना-घेरादेना । सक. । दीप्ति-चमकना । समूनिष्ट भक• भा० पर० अनिट् । स्वायति. ये, पाराधन (सेदारना) । उपभोग (राशी करना)। एम्, संवरण-छिपाना । भ्वा० ५० स० सेट् । स्थगति । और मासरादेना (आय) या• उ• स० सेट् । सेपति-रो. अस्थगीत. पो, नाशदोना । अक दि. पर. अनिट् । स्पति । असा प्टा, गति-निवृत्ति (ठहरना)। भ्वा० प. अक• अनिट् । भसासीत, तिष्ठति । अस्थान, पोस्, (पु.) षट् दन्ना यस्य । दन्तको इन धादेश छिन्, निरास (मुससे श्वेमआदिका निकालना ) धूचना । होता है। निदोतके लायक उमरवाला बैल आदि. भ्वा० पर• सक० सेट् । धीवति । अठेवीत् । टीवनम् । पोडमा, (पु.) पोशानां प्रण +ट् । जिस्से सोलहकी "टीव्यति" भी होता है. संख्या भरजाय । सोलहवा । चन्द्रमाकी कला (सोलहवा ट्यूत, (त्रि.) प्टिव्+ । निरस (गया) । और भाग) । त्रिपुरसुन्दरी (बी.). वांत (वमनकियाहुआ). पोडशक, (न.) पोडश परिमाणं अन्य+क्न् । पोशणा, शोधन (माफ करना-नहाना )। माति । अनासीतू. संख्यान पस्त । सोलद चीजें । प्रेत के लिये दोगई रिणह, प्रीति (प्यारकरना) । दि. ५. स. वेद । विगति. ह चीजे-जैसे पृथिवी, क्षासन, जल, वन, दीपक, अभ, मि, ईषधास्य ( थोडा हसना-मुसकाना)। भा. भा. ताम्बूल (पान), ए (साता), गंध, माला, फल, अ. अनिट् । म्मयते । अस्मेष्ट. पाया (हेज-पलंग), पादुका (पॉवरी-स), गो, प्यद्, प्यारकरना और चाटना । मा• भा• गा० सेट् । सरते। भखदिष्ट मोसा (कांचन ), और चारी । पितरोंके कृत्य दान करनेलायक स्वर्ण आदि सोलह. आलिङ्गन (गलेमिलना) ।भाभा• मानिन् । स्वजने । असन्त. पोडशन्, (त्रि...) पऽयिका दश । नि.। छ ऊपर दम । सोलदमी सख्या । उस संस्थावाला. प्यप, रायन (सोना) बदा• प.प. अनिर । सपिति। पोडशमातृका, (श्री.) पोडश पंख्या मातरः । सोरह अस्खासीत्. माएं । सोलह दुर्गा-जसे-गौरी, पमा, राची, मेधा, मा. | यिद्, गात्रप्रक्षरण (नहाना )। दि. पर. स. पाने । वित्री, विजया, जया, देवमेना, सधा, सादा, माता, खिचति । अस्तिदत. लोकमाना, शान्ति, पुटि, धृति और तुष्टि. पोडशा (पु.) पोडग च्याणि शहानि पम्प । गुग्गल स(पु.) सो । पिणु । राई (सांप) । र । क्षादि सोलह पीओका बनाहुआ धूप, मिहग (परिदा-पक्षी) यह सही पहिले सम्-गम-तुल्य- पोहशादिः (पु.) षोडश परयः (घरणाः) यस्य । सह-महाशके अर्थ में लगाया जारी है। जैसे-सपुत्र रामार्द- सोन्ह पाँववाला । वर्कट (पेकडा). पोडभार, (न.) पोश थारामि (ोणाः) यस्य । संक्षेप (पु.) मम् शिप् पम् । बहुत से अपने छोटे वाक्य सोलह फोनवाला । सोलह पोबारा कमल । एक यंत्र. आदिसे प्रकाश वरना । मुस्तमिर. पोडशिन्, (पु.) पोटश कला वियन्ते असनि । संक्षोभ, (३०) सम्वम् एम् । चाशम्य । चंदा । सोलह कलाबाला । चन्द्रमा । सोमरस डालनेका पात्र. क्षोम | पल्ट. प्या. सम-राधन आदि सम्युकीट संरम्म (पु.) सम्रभ+य गुमर । कोर(मा)- भलीभांति सेवाकरना । सम्यर चिन्तनम संख्द(त्रि.) सम्+६६। प्रेत (भाग संपाहिन्,] (५०१) संपाहिन्, (पु.) सम्प्रड्+णिनि । कुटज नाम दस्त। सं(य)याम, (पु.) सम्म्यम् यत् वा वृद्धिः ।। सञ्चयकारक (जमा करनेहारा-इकक्षा करनेवाला) (त्रि.). प्रकारका नियम, जो वनका अंग होनेसे एक दिन संघ, (पु.) सम् हन्ड नि० 1 समूह । यहुतमे जीव । कियाजाता है । इन्द्रियनिग्रह ( इन्द्रियों न रोकन धन् । पकामेल (पु.): बंधन । बांधना. संघर्ष, (पु.) सम्मप्यम् । अन्योन्यदृढसंयोग । संयमन, (न०) सम्यम्-त्युत् । बंधन (योपना भापसकी रगड । भापसमें पका मेल, मा । चतुःशालगृह (चौसाडीवाला घर). संश, (न.) सम्हा+क । एक प्रकारका गंधवाला द्रव्य । संयमनी, (पी.) संयम्यते अत्र । जहां यांग जाना। सम्+ज्ञा+अड् । चेतना (होश)। बुद्धि (अफल) । सम्म्यम् ल्युट् । यमाधिनपुरी । यमी नगरी. भारया (नाम) । हाथ आदिके अर्थको जतलाना संयमिन्, (पु. ) सम्+यम् णिनि-न पृद्धि। एक 5 (इशारा)। गायत्री । और सूर्यकी स्त्री (जोरूनी०). इन्द्रियोंको रोकनेहारा (त्रि.). संह(शा)पन, (न०) सम्+शा+णिच्-पुक् (मारनेके संयाव, (पु. ) सम्यक् पृतादिभिः यूयते ( मित्र भर्थम) हस हो जाता है । ल्युट् । मारण (मारना) (दूसरे अर्थमें हख नहिं होता)। ज्ञान (जाना) अतलाना गोधूमचूर्णादि अन्न । जहां आदि साप आदि भलीभांति मिलायाजाता है । सम्झ्युपम् । (इस्तिहार) तिन् । “संज्ञप्तिः” इसी अर्थमें है (पी.). आदिसे पकाहुआ गोधूमचूर्ण ( आआदि)। संशामुत, (पु.) संज्ञायाः ( सूर्यपळ्याः) सुतः । सूर्यकी संयुज, (नि.) सम्यक् युनक्ति । स्त्रीका बेटा । शनेश्वर । शनि. अच्छीतरह जोडता है । गुणोंसे भराहुा । जागा संधु, (त्रि.) संहते जानुनी यस्य ("जानु" के स्थान संयुक्त. "" का आदेश होता है) । संहतजानुक । घुटने- संयुक्त, (नि.) सम्युज्क्छ । संयोगवाजा पर (गो) टेकेहुए. संज्यर, (पु.) सम्+ज्वर+भप् । अप्ति (भाग) से मिलाहुआ. उपजा ताप । सेक. संयुग, (न.) संयुज्यतेऽत्र । सम्झ्युमा । । संमद, (पु.) राम्+मृद्धम् । आपसकी रगड ( एकपर जको ग । जहां जोडाजाता है। मिना है। एका गिरना). लडाई । जंग. संयत, (बी.) संयम्यतेऽत्र । सम्भ्यम् क्रिप्-नुक् च । | संयुत, (नि.) सम्न्युकि । संयुक्त । अभी जहाँ बंध जाता है । युद्ध (हाई-जंग ). मिलाहुआ. संयत, (त्रि.) गम्म्यम्+क । बद्ध (बंधाहुआ)। संयोग, (पुर जिगने शात्रा नियम पाटन किया है: गुण । सम्बन्धमात्रा मेल. भौगोवाला यंद कीगई आसावाला. संयतालि, (वि.) संयतः भन्नलिः यस । प्रार्थनाके समय मोडे गये दोनों हाथोंवाला. संपतात्मन्, (नि.) सयतः मान्मा येन । जितेन्द्रियः । बिसने अपने मनको करयामा संराधन, (म.) सम्राहायुद्ध । राम्या क्षेत्र पशीतता. संपताधार, (हि.) संयतः माहारः यस । संयमपूर्वक सोचना. सानेला । परिमित (मनहुआ) माहार (साना) संसप, (पु.) गम्यम् । गन् भाषा हाय. संपतमान, (हि.) माया येन । प्रागोरो दरा संपता, (वि.) बंधन पर पैन । जिमने भाग संरोध(.) गम्पपश् । रोपन ( हेन) दिदा मी. संपन्न (म सम्पन्न । - संद, ets I am I पि सानिमारबलनेर. सम्झ्यु+धम् । मेलन । मेऊमा जोडना । कियासे उत्पन्नहुभा द्रव्यो आश्रमाने मिलायाहुआ। किमी दूसरे पदार्थ से जोडाहुभा पार आकोश ( निन्दा)। उत्साह (दिलेरी ) वेग (और) M जातातुर । निमा भार निकउआ reti -- सेलर,] (५.) [संवेशन, संलय, (पु.) समीयते इन्दिरम्यापारोऽन । सम्+लौ+ संपाहन, (न.) सम्+यह+विच्नत्युत् । भारआदिका भन्। जहाँ कोई भी इन्द्रियोहा सापार नहीं रहता। उठाना । भेगसम्मर्दन । मुरीचापी करना. निन्दा (नौद)। मोर मलय. संविन, (त्रि.) राम्+ विक । उशिम (पपराया- संलाप, (पु.) सम्सप्पम् । परसर कथन । माप हुआ)। किसी चाहीगई वस्तु के न मिलने या भय आदिसे समें रहना । प्रेम साप भापममें बातचीत करना । उराडेहुए दिलवाला. एकान्तम कहना. संवित्ति, (स्त्री.) सम्+विकफिन् । हान (समक्ष )। संपत्सद(पु.) वसन्ति ऋतरः अत्र । सम्स्वम्। प्रतिपत्ति । युधि । और अंगीकार ( मानटेना). सरन् । जिसमें ऋतु (मीराम ) वाम का है। वत्सर । परिण (रा), संविद, (सी.) सम्+विकिप् । हान । प्रतिपति । बुद्धि । अंगीकार । समाधि । नाम आचार । संकेत । संपत्, (मध्य.) विक्रमादिसके राज्यसे चला पाक । युद्ध (मई-जंग) सोष (सुशी). (राम). संपर्त, (पु.) सम्यक् बलवे (परावरते ) अन । संविदा, (स्त्री.) सेवियते मनपा । सम्+विकिप्+ सम्+र+मिच्+पम् । जिसमें समें सब कुछ बदल जाता है। राए । हान होता है इस्से। भंगा ( भांग)।लिदि । "सविदासक्योमध्ये सविदेव गरीयसी" इति तन्त्रम्. प्रलयका समय । एक मुनि धर्मशालके बनानेहारा । मेष । (बहुत पानीवाला पादल)। मेघराज. । संविधतिक्रम, (पु.) सेपिदः ( अजीकारस्य) पति- कम. यत्र । इकरार करके बदलते हैं जिगर्भ । अंगीकार संघर्तक, (म.) सम्+र+पिण्युत् । बलदेवलाल करके उशन करनेके कारणसे उपजा विवाद (एक (बलदेवका हल )। "तत. अति अर्थे+भच्" बल- प्रकारका पडा). देव । इदानल ( समुदकी भाग) (पु.). संयर्तक, (पु.) सम्++अक् । एक प्रग्ररका (प्रल | संविदित, (नि.) सम्+पिन् । अंगीकृत (माना- का) बादल । प्रत्यकी अमि । बवानल (ज्वारभाटा) संविधान, (न• ) राम्+विधा+युट् । उपाय । रचना. हुभा)। भलीभाति जानाहुआ. बलरामका नाम :-+ (न.) बलरामका हल. संपतिका, (टी.) सम्+र+अक् । कमटका नया संवीक्षण, (न•) सम्यग् वीक्ष्यते (अन्विप्यते) का। पत्ताहीपनिसा दीवेकी एट. सम्+विकई स्युत् । एट (पाहीगई ) बस्तुको पाने के संपतिका, (सी.) सम्+7+ग्युल-टाप्-अको ।। दीप लिये अन्वेषण ( तालारा) परना । भलीभांति देखना. (ए)आदिषी शिया (पट)। कमल भारिका केस- | संघीत, (नि.) सम्+म्येम्+क्क । भात (काहुआ )। रके पास दल ( पत्ता)। नयापत्ता. एव (रुघाभा)। “सम्+पि+इण्+" मिलाहुआ. संपर्धक, (नि.) सम्+सम्+णि ग्युत् । सम्मानना- | संवृत, (वि.) सम्म क । आगत (बाहुआ)। कारी (सत करनेहारा)। बढानेहारा (दिनारक). छिपायाहुआ। "तस्य सातमन्त्रस्य"ए. संयलित, (नि.) राम्वत् कामिलित (मिराहुआ). संवृतमन्त्र, (नि.) सः मन्त्र यस्य । किन हुए मन्त्र संघसथ, (पु.) सदन्ति अस्मिन् (निवास गर्ने हैं (सलाद) बाला । जो अपनी बातो टिकाये रसदा है। इसमें ) माग (गाँव) । बहुन अंगों के निवासका स्थान । | संवृत्त, (नि.) सम्+NT | होगा । पूरा मा । इटिमा. इकमा किया गया. संपह, (पु.) सम्यक् पहात । राम्यहम्म । सात का-संवेग, (पु.) गम्+विज्ञापम् । (र) मारिसे स्वर युभ में से एक (भीतरह बहती है). (जली करना)। पूरा वेग (बोर)। सम्पमेगा. संपार, (पु.) सम्++धम् । शिक्षामन्यमें कहाहुआ | संघेद, (पु.) सम्+पिद पम् । बान (आमा) युन् । वोंको उपारण करने के लिये एक प्रपरका पाय "संवेदना" (बी.). (बाहिररा) प्रयन । सगोपन (रिपारा). संपेश, (पु.) गम्यक् विसति पत्र । मन् विरारम् । संयास, (पु.) संवसति भत्र । राम्स+पम् । भनी भतीभात प्रवेश करता है गनै । निदा (*)। भांति रहता है इसमें। पर (पर)। पुरवागिओंग (सम्पूर्वक विधातु निदारे भर्यमें है), जैसा कि पुरसे बाहिर रहनेायक खुला स्थान. "सविटः शयने नि मनाय" लिए. संपाद, (पु.) सेवाहपति । राम्सदमपम् । भंगगमर्दक संवेशन, (२.) गन् विश गि+दुर । म । (भगोको मलनेहारा) मुनीचापी करनेहग। "वुल्" भोग करना (भोगरे पीछे निन्द्रा मशिक वैसे र भर्ष हुमा) शकमै पढाहुआ. संगति, (श्री.) सम्+य+तिन् । रोगास HTTA । संएटा (पु.) सम्म्य विभाग भरतर संभ्रय, (पु.) सम् +अ अंगीकार INRI • प्रताने फिर अपने पनों में संबंध रसबाराrint "संगरम्य दुग" पति विमनस संस्कार, (पु.) मन्स ETAH मार महरर नेता Mirr. संत्र्यान,] (५०४ संव्यान, (न०) संघीयते । सम्+व्येभ्-कर्मणि ल्युट् । संसक्त, (वि.) सम्+म+क्त । मिलिन । मिटहुन्छ । उत्तरीय वन ( ऊपर ओढनेका कपडा)। हरएक कपडा. बंधाहुआ। बहुत निकट (नजदीक . संशप्तक, (पु.) सम्यक् सप्तं (अङ्गीकारः) यस्य+कप् । संसक्तमनस्, (त्रि.) संसक्तं मनः यस्य । फसे हुए मेर- प्रतिज्ञा करके संग्रामसे न लौटनेहारा सेनाका पुरुष. वाला । जिमने अपना मन किसी जगह लगा रखा है. संशय, (पु० ) सम्+शी+अच् । सन्देह (शक ) । एक | संसद्, (स्त्री०) संसीदति अस्याम् । सम् सः । धर्ममें होना और न होना । विरुद्ध 'धोका संदेह । जिसमें भलीभांति बैठता है । सभा। कमेटी । म “जैसे पर्वत पहिवाला है या नहीं" "यह स्याण (शाखा- संसरण, (न. ) सम्+म+त्युद । अपने अटट ( दिविहीन वृक्ष-ठोंठ) है वा पुरुष". और पुण्य ) से बंधाहुआ देहका अंगीकार करना संशयच्छेदिन, (त्रि.) संशयं छिनत्ति । संशय (शक) संसार । वहना । गमन । चलना । युद्धका आरम्मान को काटनेवाला । हर तरहके शकको दूर करनेवाला. संसर्ग, (पु०) सम्+सृजन छन् । सम्बन्ध । मेल। है. संशयस्थ, (त्रि.) संशये तिष्ठति । स्था+क । संशययुक्त । गके अनन्तर "जो तेरा धन है वह मेरा है" इस मसे एकही स्थानमें इकट्ठा रहनारूप सम्बन्ध ( मेरी संशयात्मन्, (पु.) संशय आत्मनि यस्य । जिसको संसर्गाभाव, (पु.) संसर्गस्य अभाव । मेलका न हेच "अपनेमें" संदेह है । संदिग्धान्तःकरण । “संशयात्मा ध्वंस, प्रागभाव और अत्यन्ताभावरूप-मेदसे मित्र बना विनश्यति" इति गीता । संदेह करनेहारा. (न होना). संशयालु, (त्रि०) संशय+अस्ति अर्थे भालन् । संशय- संसार, (पु.) संसरति अस्मात् । सम्+पाप पाला । शही। जिसे संदेह रहता है. है इस्से । मिथ्याज्ञानसे उपजी संस्काररूप वामना । देश संशयित, (नि.) सम्+शी+तृय् । संशय करनेहारा । आरम्भ करनेहारा अदृष्टविशेष । "आधारे पन्" । सदेहकर्ता. दुनिओ । “भावे घम्" सगति । मिलना. संशरण, (न:) संशीर्यतेऽनेन । सम्++त्युट् । जिरसे संसारचक्र(न), (संसारस्य चक्रं ) संमारका बछ । पर पहुत टूटता है । रणारम्भ । युद्धका प्रारम्भ (शुरू)। मरणका प्रवाह. हमदा. संसारमार्ग, (पु.) ६ त । संसारका पप (सा)। संशित, (त्रि.) राम्शी+ । सम्पादित प्रतविषयक योनिद्वार (योनिहीसे बाहिर निकलने पर भार या । किसी प्रतको पूरा करनेका यन करनेहारा । तेज मोहपना है). दिया हुमा । मठीभांति पूरा कियाहुआ । निर्णय संसारमोक्ष, (पु.) ( संसारात् मोशः) संशार (जन्म- रियाहुआ. मरणप्रसाद) से छुटकारा । अतिम घुटकारा ।। संशितमत, (नि.) संशितं (सम्यक् सम्पादितं ) प्रतं मन । भीमति मतको पूरा करनेहा संसारिन्, (नि.) संसरति (भाष्यभेदेन देन । अपना नियम पूरा किया. संशुद्धि, (प्रो.) राम्रा छिन् । राम्यक् शोधन । संसार, सम्यक् समान था । बन्धी साई । देहारिमार्जन । शरीरआदिकी गमाई. संस्थान, (वि.) राम्य+ । शीत भादिमे शिकाहुआ. गिनत । सभावहीने बनगया। मानिनामा, संश्रय, (पु.) राम्+धि+अच् । साथय । भागरा । संगति। मेल. सनी जगह । निकामस्थान. बदर मुभा । मुबह।। "प" "संधान" मी मध. संधुत,(वि.) म्यु+स । गीता हिया- सभा। औरनिगाभा । "भारे" मेष, संगटिन, (पु.) मगर मनन नि । treet संसिर,(f.)सम्+fets । भासित मि. माहि. रहश्रा, संर(पु.) Eifer । भनि । मिना । पापः मोडमा । नजात। संयुग्यते ) । राम्+म+णिनि । किगी पुण्यपापोत शरीरके साथ जुड़ता है। शरीरका अभिमानी और .

रार संस्कार, (पु.) गम्+कापम् गुद्र । शुकरना । संहार, (पु.) सम्हाघम् । प्रलय । नारा (तब गणीसा कारण अनुमयमे उपजा सारमाना एक गुण । एक नरक. पृधिपीआदि चारोम रहनेधारा “ वेग" नामी गुण । संदिता, (श्री. ) सम्यक् हितं (प्रतिपा) मस्या सके सम्मागसे उत्पाहुआ माल (लिआकत था अछीपानको वर्णन की है। मनु भादिसे र परणरीरिसे रामौत्र साधनप्रकार (बनानेरा दर)। धर्मशास्त्र । पुराण । इतिहास (सारीख आदि)। मादिरा बेदमें कोहुए बाँकी योग्यताच साधन, को प्रतिपादन करनेहारा वेदका भाग. गर्भाधानादि कियाओं का समूह । पाक (परना-रसोई)। संवति, (श्री• ) राम्हफिन् । बहुतोंसे भुलाया विवाहादिदग प्रचारका धर्म | संद्वादिन, (त्रि.) सहरणिनि । पाद करनेडा संस्कारपूत, (नि.) (स्कारेण पूलः) परिक रीतिसे सकणे, (त्रि.) सह कर्णेन । श्रुविशील । मुने पवित्र किया गया। विद्यामे गुर किया हुभा. कानवाला. संस्थत, (नि.) सम्++जगद् च । मेरमार (साफ) | सकर्मक, (त्रि.) सह कर्मणा+कप् । म्याकरणमैं कर किमाहुभा पदार्य । म्यारणादि लक्षणके आधीन साधन कियाको जतलागेहारा धातु ( जिसका फल १ बारा पद पाहुआ। महाभा । और शोधित (मारु परता है). पियाहुआ) सवाल, (मि.) सह कलया । "पद" को "स" का। संस्थतोचि, (सी.) (संरहना उतिः) संस्कार किया होता है। सम्पूर्ण (सारा)। कलासहित । हुमरजाने गया परन । राफ दीगई पाणी (ोली). सकारण, (वि.) सह कारणेन । वारणके माय । संस्तर, (पु.) राम्त। यस । सल्या (रोज जमे मीका कार्य "" है. पलंग)। पत्तोंडी बनी हुई शय्या ( पलंग ) विवरा सकारा, (पु.) रायम् । सह काशेन । मन संलय, (पु.) सम्+तुथिस् । परिचय (वारुपीयत) समीप । पाम. घटीतरह प्रसंगा कियाहुआ. सफुल्य, (नि.) समाने दुले भव+यत् । एकही संस्त्याय, (पु.) रामनवपम् । मपात । गाई । हुआ । अपनेसे ऊंचे वा नीचे भाटवी पीडीतक पुर समूह । दायभाग (विरसा) टेनेमें अपनेसे कार संस्थ, (नि.) सम् स्थानक । अवस्थित (टिशाहुआ) नीचे पांचवीपीकोई पुरष । जातभाई. धीर मृत (मरगया ). सरत्, (भव्य.) एकवार. संस्थिता (मि. ) सम्+या+क । मृत । ( मराहुआ )। सरत्नज, (५.) सकृत् ( एकवार ) प्रजायते । # हा एकवार उत्पन्न होता है। कौमा। काक । ए पंदाहुए पन्धानवाला (नि.). संरकुट, (नि.) सम्पुर । पिकनित । सिलाहुभा. सहसाला(ली), (मो.) सकृत् फलति । फल संस्फोट, (पु.) सम् फट्+पम् । पुर। जंग | लढाई. एकवार फलता है। बदली (रेलेला प्रस्त). संदन, (नि.) सम्+इन+कास (पका)। मिराहुभा । सत्ता, (नि.) सशक । भाराक (पंसाहुआ ) । अपि दूसरे के साथ मिलाहुभा। "संदतपरार्थत्वात्" इति सांस्यम्. प्लगाहुभा. संदतजानु, (नि.) (संहनी आन् यस)। मलेहुए सह (पु.) सन्छन् । मृत्यवादिनूर्ण (भुने हुए (जरेहुए) घुटनोंवाला. (भादिक पूरा) सतु संदतस्तनी, (स्त्री.) (संहना स्तनो यस्याः)। एक दूसरेसे सक्रिय, (न.) सम् स्थिन् । कर (पा) पाटावर मिलेहुए सनोवाली स्त्री । पनसनी. गारीका जोर. संहति, (सी.) सन्म्हन+क्तिन् । समूह (हुतया मेल)। सरि, (त्रिः) सह (समानं ) रयायवे । हाल सम्पम् हनन । भलीभांति चोट लगाना. सौहार्दयुष (प्रेमगहित ) गमानप्रीतिकरनेहारा. संहनन, (न.) सहन्यते (पयर्थ गण्यते) । सम्+ ! सखी, (श्री.) ससिसीए । सहरी (पापन) सहेडी. हनयुद् । देह । दारीर । संघात (समूह)। भोर क्ष (मारना). | सत्प, (ल.) युभाव याना मित्रवादी संहर्ष, (पु.) सम्रा दई । सम्प्पन् । आनन्द सगर, (पु.) सह परेण (ग) पिर (हि (सी)। “सहपठि बनेन" प्रमत्र होता है इस्ले । के साप उरया सूर्यवंशका एक राश! "मरमा वायु (दवा). न" की पुराणम् । रिमाला (f.) फैलाव । पर. भरतीवर राहुआ पभ. (

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रागम,] '(५०७) मिनरन, सगम, (पु.) सम् गम्पन्न वृद्धि । संगति (मेल)। सचिय, (पु.) सच्+इन् । पाक । सहाय (मद्दनकरने. स्त्री और पुरुषका संभोग । नदीआदिका नद (बड़ा हारा)। मंत्री । वजीर. दया) आदिके साथ मिलनेका स्थान । “गंगासागर- सचेतन, (त्रि.) सह चेतनया । विशिक्षानयुक्त । विशेष. सामः" इति पुगणम्. ज्ञानवाला। अच्छीसमझवाला । चेतनाके साथ । होसके सगर, (पु.) संगीर्यते । सम्++अ । आपद् (मुसी साथ । होशिआर. पत)। युद्ध (जंग-लड़ाई) । प्रतिश (इकरार)। सचेष्ट, (पु.) सच-सच्+अच् । तथाभूतः मन् 12ः । कामकरनेहारा । विष (जहिर ) शमीका वृक्ष. थाम्र । आम (अंब) । "सह चेश्या" चेयनित । सङ्गव, (पु.) संगता गावो दोहनाय अन काले नि.। पालाक (त्रि.). जिस समय गोएं चोनेके लिये इकटी होती है । प्रातः- सचिदानन्द, (पु.) सत् (निस) लिन् (चैतन्य) फालके अनन्तरके तीन मुहूर्त (छ पडिये). थानन्दः (मुखस्वरूपं) त्रिपद । कर्म• । निसान और सझिन्, (त्रि.) सम्+पिनुण् । संगयुक्त । संगवाला। मुखस्वरूप ग्रन । परमात्मा. साथी । भोगी । शहबती । स्त्रियां दीप्. सप्द्र, (पु.) कर्म- । भच्या शर । गोर (गाला)। सङ्गीत, (न.) सम्+ग+क । दर्शनके लिये नाट्य, गीत, गूजर । और मापित। नाई. वाद्यनिक । नाचना गाना-बजाना-तीनों । उन तीनोंको सजाति, (पु.) रामाना जाति. थय । एकजातिकात्र । प्रतिपादन (वर्णन) करनेहारा पंथ । “कर्मणि "। समान वर्णसे समान वर्णवाली कन्या में उपम हियाहुमा गीत । भलीभांति गायाहुआ (नि.). पुत्र । समानातिवाला (नि.). सवीर्ण, (नि.) सम्++रक । वीकृत । मानाहुआ. सजातीय, (त्रि.) माना जाति ब1ि0 (t). सनद, (पु.) राम्+प्रह+यप् । माय । इका। राक्षेप । समानधर्मवाला । अपनीजातिका. पोचाया । बहुत अर्थवाले पापोंको एक स्थानमें जोडना. सजु(जू)स, (अन्य ) पदार्थे । मापके सर्पमें, सनहणी, (स्त्री.) संचिता प्रणी । इस नामका एक | सम, (वि.) सज+अन् । मध । साभा । रोग। कन्जी. सनर । "समा" अयोजन (लगाना-जोना)। पर समाम, (पु.) संप्राम-लड़ाई करना+घम् । युद्ध । जंग। (सजाहुभा) । "रातो जायते-r+r" ITI (महे ।। बढाई. उपजाहुभा । अथषा सत्मे हुमा (नि.). सहामपटद, (पु.) (ता। युद्धका पाना । रणवाद्य- सजन, (त्रि.) रागनगिचम्प्युर । रहसके लिये परम विशेष. स्थापन । सम्+युद् । मायोजन (मोना) । सन् सदादिन् (पु.) सम्यक् ग्रहाति मलं । सम्म+णिनि । जन.। भला मानुर । मरटी पुलने उपहाभा (पु.)। भलीभांति मलको लेता है। पुटाक्ष । मलको रोक राजाभादिके पटने के लिये हादीरा समामा. नेवाला (मलावटम्भक)। संप्रद (सहा) करनेहारा | सञ्चय, (पु.) राम्+मिम । समूह । और er (त्रि.). सद्ध, (पु.) सम्हन्+पम् । पजातीयसमूह । एकजातिदा- सचयिन्, (पु.) सम्+चिकहनि । रमाकर । रमा लोका मेल । समूह । बहुत से इको रहनेवाले लोप. नेहारा. सहर, (पु.) समपद्यम् । परस्सरसंपर्पण । आपगमें सवार, (पु.) सधी अनेन । सम्मा-पभोग रगना । भीगटन। गांठना । पका पहिया. "" वा पम् । सेतु (पुल)। (HR) भर- सहर्ष, (पु.) सम्+पृष्पम् । परसस्पर्षण । आपमें आदिवाइमरी एरिआना "भाममा रगडना । पीसना । भागमें रहना । साहराद. सार, (भव्य.) संपायीप्सा राम् । भूरिश । सो सझारिन्, (I.) सम्पर+मिले । रतु (c) होकर बहुतही समूह अपर नगाररसादिक नुगारीमा सहात, (पु.) सम्मन+पम् । समूह । एक नरक। हरा (वि.). सम्पम् हनन (भगठीतरह चोट लगना)। बोष सहित, (हि.) सम्e काल- पका मेला और बम सचि(पी), (सी.) रामान्दार । दाणी । सवयन, (२०) महायुम् । नववी. समले परपुमा पाल(RETER) ।

. . एक जैसा. दोन पायगे भाग 2 m tr feat HCHHI सन्यानटिन, (५१२) (समास सन्ध्यानटिन्, (पु.), सन्ध्यायां नटति । नट्+णिनि । सनिपातनुद्, (पु.) सन्निपातं (विशेष संध्याके समय नाचता है। शिव । शंकर. नुदति । नु+क्रिप् । जो तीन दोषोंने उत्सबार व सन्ध्यान, (न.) सन्ध्याकालिकं अभं इव। मानो संध्या रको दूर कर्ता है । नेपालनिम्ब । नेपालदेखि समयका बादल है । सुवर्ण । गेरी। सांझका बादल, (निम्म). सम्याराग, (न०) सन्न्याया इव रागः अस्य । संध्याको सन्निवन्धन, (न०) सम्यक् निबन्धनम् । नाई जिसका रा है । सिन्दूर । सँधूर. तरह यांधना। पका यांधना । कई स्थानों में स्थित सन्याराम, (पु.) सन्यायो रमते । रम्पम् । जो वाक्योंको एक स्थानपर संकलन (इसारमा): 'सन्ध्यानाम श्री रमण कती है । प्रा. तदुपयोगी (उम कामको पूरा करनेहारा ) प्रवर्षी सन्न, (पु.) चौदति । स क । पियालका वृक्ष । अवसन सन्निभ, (त्रि.) सम्+निभा क । मदन । समन ७२० । अच्छी जीविकावाला (त्रि.). (निर्वल-कमजोर घटाहुआ-दुसीहुआ) (त्रि.)i“खार्थे कन्" सर्व । वामन । वाना. सन्नत, (त्रि.) सम्+न+कं । प्रणत (मुकाहुआ) । सनिवेश, (पु.) सम्+विर आधारे पत्र । पुणे शब्द करनेदारा. हिरका देश । भावे एम् । सम्यस्थिति । मन ठहरना। रावा। अखाडा. सनद, (नि.) सम्+ नक । कृतसमाह । संजोद | सनिहित, (वि. ) सम्+नि+या+क: निकटस्थ ।। पहिरेहुए । तयारहुआ। पंधाहुआ । उत्पन्नहुआ. समय, (पु.) सम्+नी+अन् । समूह । बहुतसा. टहिराहुा । नजदीक । “कर्मामानिहित ने मोर और मलीभांति स्थापित (रक्सागया)। मारे समदन, (न.) राम्+नह+ ल्युट् । वर्मप्रहण । संजोह नाय ( नजदीकहोना)(न.). पहिरना । उद्योग । हिम्मत । पूरा पंधन. सन्निहितापाय, (त्रि.) समिहितः अपाय नाश कर सनाद, (पु.) समग्रते। सम्बनड्पम् । संजोया । निकट नाशवाला । जिसका नाश तयारही है । धर्म । परीतरह बांधाजाता है. हर । विनश्वर । असार. समिकर, (पु.) सम्+नि+पापम् । सान्निध्य । निक- सभ्यस्त, (त्रि.) सम्+निअम्+रु | निक्षित वारपागहोना । "यत्तगमिकों हि क्षणार्धमपि शास्यते" खसागया । डालागया । अनीता सागर पुराणम् । विषय और इन्द्रिया सम्बन्ध ( व्यापार । जगहुभा । अर्पित (दियागया), न्यायमतमे जनसाग सामान्य क्षण और योगजधर्मपिसध्यास, (पु.) गम्+नि+अ+पम् । “ ऐप समजली किरप्रसा साधन एक उपाय. कर्मगौ न्यासं सभ्यास करयो पिए." मी मगर रायिकत, (.) सम्+ निरस्त्युत् । सनिधान । अचल भत्तिप कलको छोड काल सांगार पर निष्टोना । नमक होना. कामनासे कियेगये कमों का सामनाही गमग सनिधान, (न.) सम्+नि+या+मयुद् । नेकय । यामी. काम्यकर्मपरित्याग हो रोग्यास | होगा । पाहोना. विधान रियेहुए कर्मों का रिधान (AIR) .. निधि, (पु.) सम्+नि+या+दि । सामान्य । पाग- भांति त्याग करना । उग योग्य पोया ना । "पनि हिदिया विषय। कमेच्या (क्षेत्र) में करतेलायत पुगर्भ गिर निगम मतविशेष सविनित, (नि.) गम्+निसव । मिला। गन्यागिन्, (पु.) गम्+अनि म पं. भायमालापत्र . एडिभामरसदा. गरस, (I.) गमनः पशःt पर समिशन(.) PAR+पम् । मेटन । मिलना। RANोरना। नाग। मिना । पहा परत भागो मोint एर । सर (पुनरा) यि (प.). पर (free) fra fiग साकारण, (.) मद पपेग (27) ri.rrrrary frrenसम्पन्न तर fertir (1) गने " kirtan at (4) Markn ना.) .

(11) रासी .4 - योग. स्पस, (पु.) Vा पति (पाने ) पर+न | सप्तकी, (स्त्री• ) रातभिः (सौः) इव कायति ( (शदा- "मह"""एरही भर्यमे गाय पन तां यते) | सा मुके समान शब्द कती है। है। सभमें माना जाम करना चाहता है। मेराला तहागी. ससचरयारिंशत्, (बी.) राप्ताधिका पत्यारिंशत् । सपती, (सी.) गमानः पनि सम्माः "गप्" और शाबासात ऊपर पानीरा । ताली। उसरत्यावाला "" हो। गमान (गी) पतिवाली । एक (नि.). भावाती सी (जिगसी परी पिरोधिनी मातिनभो सप्ताद, (पु.) सप्त राप्त प्रमाः (प्रतिपत्र ) यस्य । जि. दिन-गरी ला एकही सामीवाली भूमि सके हरएक पत्ते के साथ सात १ पत हो। सतीनेभरत. भारि (ल अर्थ "मपति" भी होता है). | सप्तजित, (पु.) गत बिदा इस (भासादसाधनानि) सपदि (मम्म.) गह पदते । पाइन् "सह" को अर्पियो यस्स । जिसकी सातला जिलाओं के समान है। "n"पायी पता । तदा । उसी समय । बहिआग. सप्तग्याल, (पु.) सप्त "काली" इत्यादयः ज्याला पस्य । "काली" "कराली" प्रचति जिसकी सात लाटें हूँ सपर, पूना रना (खत परनामादि. पर• गर. भमिश्राग. मेदापपलिजमपाद, सपी (पी.) ग+यभटाए। पूना । भादर । सप्ततन्तु, (पु.) सप्तभिः "भू" आदिभिः (महाव्या- तिमि) तन्यते । तन्न् । “भू" भारि सात "सोदंगरयांविधिमानेन" इति पुर. महाप्यातिभोंसे जिनका निस्तार कियाजाता है । यज्ञ । सपाद(बी.) गद पादेन (परणेन-चतुपाशेन )। पाद (योग) गहिन पोवपाल चतुषांश ( वीहिरसे) सप्तति, (नी. ) सप्तगुणिता दाति नि• । सत्तरदी संख्या। उस संख्यावाला. पपिण्ड, (नि.) ममान. तिः (सरदारम्भदेव ) सप्ततितम, (मि.) सप्ततेः पूरण क्तमा । जिसे "गार". यस्य । एषही देरमे भारम्म होनेयोग्य देदवाय हाति की संख्या भरजातीहै । सत्तरवा. विशेष । परादरी । रिददार । जातियें माक्षात्-परम्परा- | सप्तदश, (त्रि.) मतदशानो पूरणः+इट् । रातारयो । भविपरम्परा ही देदारभ्य (परीरसे उत्तम होने जिस्से सतारवी सख्या पूरी होती है. सायक)इसीलिये " सपिण्डत्व" है। एकराम्बन्धी सप्तदीपा, (बी. ) सप्त ( जम्बूलभतमः) दीपा यस्याः । जिगरा पितरोको प्रेतपिण्ड देने में किसी न किसी प्रथरसे "जम्यू" आदि गान द्वीप (जीरे) हाती पृथिवी. सम्बपरहे।दाय (चिरा ) हेने अधिकारी. सप्तधा, ( मम्म.) सप्तन+प्रकारे पाच । सात प्रथर । सपिण्डीकरण, (म.) सह पिण्डेन-रातः अभूक्तदापे मान सरहमे. व++युर । पिश साप कियागया। मिअयागया । सप्तधातु, (पु.प.प.) राप्तगुमिता पाताः । रम, प्रेतपन दुगने के लिये प्रेतके धरो बरनेलायक पिता अम, मांस, मेद, अस्थि, मवा मोर एक (वीर्य) प भाकि पिजीका समन्वय । एकही स्थानमें मिलानेदारा शरीरकी मात धाव धानविशेष. सप्तन्, (पु• त्रि.) सप्तनिन् । सात । मातरोत्सावाला, सपिण्डीरत, (नि.) सह पिशः (पित्रादिपिण्डः ) / सप्तपदी, (पी.) सप्तानो पदानां समाहारः । गर । सपिण्डः सतः चिसिमणि फ।जिसके लिये "स. विवाह के समय सात फेरिये । सात घोर । सात दशम्प vिीकरण" पास किया है वह मृतक (मराहुआ) | सप्तपर्ण, (पु.) सप्त सप्त पानि म । जिसके प्रति जन (ोई हो)। "ये सपिडीताः प्रे" त पत्ते के साथ मान र पते।सतौनेगा पक्ष छातिम. स्मृतिः, सप्तपाताल, (न.) समाहारदिगुः । पात्रादि । “मता सपीति, (स्त्री.) पा+फिन् । पीति (पानं) । सह आदि पृथिवीके मोपे सान मोर. एकत्र पीतिः हावि (जात बरादरी) के साथ मिलकर सतमति, (ो...) सप्त संख्याताः प्रातयः । भोजन (साना ). सोहममें प्रसिद्ध "महतार"आदिमात प्रहतियें। धोलाद पदायाच हेतु होने "प्रतिपन" और प्रतिरापर्य सप्तक, (२.) सप्ताना अवरकन् । सान संख्या (गिन्दी)। "सम प्रमाणे भस्स-कन्"। सानदी संख्या होनेसे इन्हें ( सात प्रतिओं) "मिनिपर" भी है। "स्वामी" आदिराबाकेमात अंगासात समार. बाला (वि.). पप.६५

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(410) [अमेष, निजी उदा. गोग. समि, (बी.) समिन्यतेऽनया । सम्झन्थ्+शिप् ।पमुच्चम), (३.) गम्+2+धि+पर। काठ । लकी होमके लिये पाटविशेष पारि मन्युमति । शुत ऊंचाहोना । विटेष (इस्लो)। समिध, (.) समिप्यते । । । सवारी। ऊंचाई।मेष. भोपानद्धा भाग. समुष्मित, (नि.) समयि । मनुत । समिन्धन, (न. ) सम्न्युट् । पाट मन्धी पाहुन हुआ. तरदायमना. ममुलित, (पु) गम्मा लि । म समीक, (न.) गम् । युट । अंग । सई. धनका थारों ओर मा । मेरे समीकरण, (न.) भगमः गमः क्रियते भनेन । गम्+ हुआ। समनार लि. चिस्युट् (भन ) । अगम (जो पराया महि) से समुसिन, (f.) हाथ ISIT: सम (परावर) करना । बीजगणितमे न माना गया. उगमन । मर्गी गरी प्रार ओको मारे लिये प्रक्रियाविशेष न्यायपनको माना. समीक्षा (न.) सम्म शितेऽनेन । जिसे भलीभांति समुदाय, (पु.) mean I g देरानागांस्यदर्शन । "भावे पष्" । पर्यारोदन । मामिलामे प्रार(REETT(). चारोंभोरमे सोरना कमसमा "शमीक्षा") पुदिामीमोरासायला श्रीराप. । समुसित, (Hि• IRRITATE INCr. समीश्यकारिन्, (त्रि.) ममीश्य करोमिनि । उपर । प्रभु सापये भलीभात सोपारामा मात्राम, (5.) RTET गमन करना मोमrr गोर, (.) retri समीचीन, (नि.) गम्यम् भवः । सम्+म+irat समविदापुरम-kirtThree गया था। भोर रात (1)य. mगुग्ध, (हि.) CRrowin. समीप, (f.) संगता भाषः यत्र । हो पागी मिस ""IPIRE IN TRI जातानिकट । पास समीर, (पु.) सम्यक् रयी। सम्म43 | गुरपान. (0) Erem : .. (वा) • "समोर". "4" Marram. समीरल, (पु.) गम्+यु (मन) । (था}। समुपध, (•ि ) सम... ter kr पथिक (ही). समीरिता (बी.)mmitener । पिता (दी। समुत्कार. (3.) E+ree. More ri) रत, असे ताराम. समीदिशा (4) सम्रक गौर । पसारा । सगुपित (t.) from मपि.) गम् । सम्पर उपक ।। 1 euretrintirls.) न (योग्य) समुन्सा(5.) IErren.net सपुर ) PARभन् । रोहीन र । REP MAAR Remaa mein सगुभारमर, (२.) Reorantie. पाति ore.) MERIC । TirstNT सम्पु सा(tee) गा m Tower, Remixtrartr. Pmereforere त । सगुरो. Kroker me समुदय,] ( ५१८) . समुदय, (पु०) सम् उदाइ अच् । समूह । युद्ध | समुद्रमेखला, (स्त्री.) समुद्रः मेराला शहर (जंग)। बढना । और दिन । ज्योतिष्में लम (न.). स्वात् यस्याः। पर लेनेके कारण समुद्र विजय दर समुदीरण, (न०) सम्+उद्ई ल्युट् । अच्छीतरह है। पृथिवी. कहना. समुद्रयान, (न०) यायतेऽनेन । याम्न्युत् ॥ ११ समुद्ग, (पु.) सम्+उ+ गम् । सम्पुटक । सम्पुटके पोत । जहाज । समुद्रके तरनेग्न साधनविशेष. आकारमें संश्लेष करनेहारा पदार्थ । सन्दूक । पछी । समु(द्रि)द्रीय, (त्रि.) समुद्र भवाः पाबाई दमें होनेवाला पदार्य । जो चीज समुझमें हो. समुद्गम, (पु.) सम् उद्गम्+पन् । ऊपर जाना । समुद्रह, (नि.) सम्+उद्यहा । थे। स्ने उत्पति. अच्छः । अच्छीतरद उठानेहारा. समुद्गीत, (नि.) सम्+उद्+क्त । ऊंचे गायागया । उञ्चीत. समुन्दन, (न•) सम्+उन्दु युद् । समाना घडा गीलापन । भीगना. समुद्रीण, (नि.) सम्+उद्गृ+रू । पमित । ऊपर एल कियाहुभा। उगलाहुआ। उठायाहुआ। और कहा- समुन्न, (न.) सम्+उन् । लिभ ।। हुआ. भीगाहुआ. समुदिए, (नि. ) सम्यक् उद्दिष्टं । उद्+दिन+क्त । भन्छ- समुन्नत, (नि.) सम्+उनम् च । एक प्रात रोच (प्रयोजन ) वाला पदार्थ । भलीभांति बतलाया- (मोजार ) (पु.). समुन्नति, (बी.) राम्जनम् सिन् । समुस्त, (नि.) सम्+उद्दन्+क । असन्त पगला । उवाई । "प्रायः पयोधररामुमतिरत्र हेर" सामन्याविनीत । बहुत मूग ( जो नम या समुन्नर, (त्रि. ) सम्+उद्नहरू ! format) अभिमानी. मानी। पण्डितम्मन्यामाने आपको परिका। समुलरण, (२०) सरयु । सतोमन । टटाना। निला (मंगना )। सायहुए गमका हारा। प्रभु । भौर समुन्त । उपमहुमा । " उगकर बोडगाभा. पर (टन) मौर उराना । "वर्मनि म्युर"। writrge मोर उगाहाहुभा. समुभय, (पु.) सम्+उ+नी+मस् । अपार । लेजाना। मरीतरह सेनाया गया। बार in गुन्प(पु.) मम । समुपति । पदा- रा. मल, (fu• ) गम् ++ । रामुग्पन्न । पैदा- सचिन, (नि. ) सम्यक् उपचितम् । पायाभा. मुफ्त (f.)मयम् । पूरे टचमवला. समुपयिषण, (नि.) POETRare it मुपन, (.) सन्+र+पापम् । पूरा प्रयत्न पागगया । पयगया. (). सगुपोड, (नि.) मम+man+m । गंगा मुन(पु.) मारना । गम्+मारक मगत । पैमा. न मन परसय पर। "मद मुश्या" । रास, (पु.) गम्गापम् । पात्र (अ) (पि.). पवितीमाधिशोरना. रा.(:.)म्मदर । मनी रामद (f.) मम्मा ! mir, पारप. Rभा एपमा । “पामग टमा(१) मा । म ः। भुन । gifs गया | in Imपा ।" पर.(:.) al Fitra (). मारस्य । *रे : 'ग(f.)ite: art"ht. गररंगन, (.) म NRIre गर, (I.) Antim I RHIT प्रकाश करना, ग बहुत किया . nium " . वाला. बाप दोनोंओरसे व्याप्त होकर गित रोया (त्रि.) सम्प, (पु.)गा. समूहनी, (५९) .[सम्प्रेर, समूहनी, (बी.) गम्यतेऽनया। जो हकका परलेती | सम्पुटक, (पु. ) सम्पुटपति । गम्+पुर अन्नसाय गुन् । । पुहारी । “भावे युद सम्मान । (मा) । समुद्र । संदक । मभूषा । पिटारी । धड़ा- पोउना (म.) समूहा, (पु. ) सम्+अ+म्पत् । यहियामि। यही धाप. | सम्पूर्ण, (नि.) सम्पूर+क्क । परिपूर्ण । चारोंथोरसे समृद्ध (नि.) सम्यक् शर ऋभ्याबहुन सम्प. भराहुा । पूरा ३। समप्र । सारा । एक प्रकारकी एक- दापासा । मतिम बहुत पूटा. दशी (खी.) टाप. 1 समृद्धि, (को०) सम्यक् ऋषिः । सम्+ऋध्+चिन् । | सम्पना, (नि.) गम्+पृच्+क । मधिन । मिलाहुा । बहुत-गम्पदा दलित. समेत, (वि.) सम्+आ+इन्छ । समागत । आया- सम्पति, (प.) गम्+प्रति । समाहारद्वन्दः । इदानीम् । बंधामा. हुआ और संगत । मिलाआ. समेधित, (वि.) सम्+ए+पिन्क । संवर्धित. अधुना अव. समोदक, (न• ) राम ( अर्धभागेन) तुरूप उदकं यत्र । सम्प्रतिपत्ति, (स्त्री.) समं प्रतिपयदेफिन् । पारीसे भाधापानी मिलाकर मपे (रिडके ) हुए दहीसे उत्पन कहेहुए भको सीकार करना (मामा) एक प्रकारका हुआ तविशेष (पाछ-लस्सी) । "सह मोदकेन" उत्तर. जिसके पारा लादै (मोदरसहित) (नि.) सम्पदाद, (त्रि.) यम्प्रादास्तृन् । पान कता । देने. र सम्पत्ति, (सी.) सम्+पद+किन् । अतिविभव : बहुत एभयं । वही दौलत । जिसे जैसा चाहिये उमका वसाही | सम्पदान, (न.) सम्++दा+भावे युद् । सम्पत् । होना । धन. प्रदान । मलीभौति देना । “सम्प्रीयते भस्म स्युर" सम्पद, (श्री.) पम्प+विप् । विभा । सम्पत्ति । जिसे दिपाजाय । "कर्मणा सममिति र सम्प्रदान" दालन हिरामत. इति पाणिनिदानकदेश्य. सम्पन्न, (वि.) सम्पर्क साधित । सावित किया | सम्प्रधारणा, (श्री.) सम्+++निय+गुप् (आन)। आपराम्पदावाला. योग्य वा अयोग्यका विचार पर पर्चा निधररना। त सम्पराप, (पु.) सम्+परा+र+अन् । युर । जग। निथय. हाई आपदा. सम्प्रयोग, (पु.) सम्+++पम् । परिभादि भी । सम्परायिक, (न.) समारायाय (आपदे) हितम् । यासे धनादिका विनियोग (दगाना)। मेल । टन (इक)। भापत्तिके लिये हितकारी । युद्ध । अंग। सम्बन्ध । विषय मुराफे दिये मेल । महोना । भग- लडाई।" सम्परापि"मी. मोनि जोडना. सम्पर्क, (पु.) सम् ++पम् । सम्बन्ध । मेल. सम्पपिन्, (नि.) गम्++पिणन् । सम्पन्धवाला । सम्प्रसाद, (पु.) सम्प्र+म+पम् । योगमारियायमें मेलबाला. चिनी निर्मलता (सपाई ) को पूरा करनेदारा एयप्र. रायन । "भाये पम्" भन्यो प्रणमता (सरी). पा, (नील) सम्यक् (भतदिन) पतति । पत्र । अचानरही गिरती है। विद्युत् । विजी. सम्प्रमाधन, (म.) सम्++साथ+सिरपे स्तुर । त्याक, (पु.) गम्यर पाको यस्मात् । जिस्से भली- पटक (रा-पू) मारि भूरण (जेपर) 1 "भ'पे भाति पार होता है । भारवध पक्ष । इसके गानेसे पम्" भूषणकिरा ( राजाना ). सायाहुआ मन आदि भलीभाति पर सका है. सम्ममारण, (न.) सम्घास+विन्दुर । राम्पम् जपात, (पु.) सम्पत्+पम् । एक प्रकार पक्षी पिधारना । अशी तरह फैलाना। पाकरण: * :- (परिंदा) की गति (चाल) । अष्टी तरह गिरना. के स्थानमें जायमान "TR" एकाला . पाति, (पु.) सम्पद गिम्दन् । जटायु (जर- | सम्प्रहार (पु.) साहस्ते पत्र । सम्पम् । पक्षी)बा माई । “सान्"रही भर्ष. पुरजंग।" मा पञ्"पोट थाना । सम्पुद, (पु.) प्रम+उ+ । पुरषक पक्ष । जो दोनों भोरसे भलीभांति पुट (पउदा दोनेकी धरत) समान | सम्माप्ति, (बी.) मारिन् । रो। मिला हुआ । एल्गनिम पदार्थ निमामिराले नासिरोयमे एक- "सामः सम्पुटो जाप्य." जितन्त्रम्.

सम्मोसन, (न.) तुर । र सोच-सम्भूति, (स.) सालिन् । सम सरकार रजिसन. सन्मान. सन्हा (वि.) सालिन् । शिनी। शिसम्भोग. (पु.) सम्पुर । म म। "राजा" "मला मेयमगरी गत ()। " - सम्म (पु.) म्रु संपाय । भो" सम्भ्रम, (पु.) साप । मा ( मनन । जज (२.) उसमा मेग। सरा (rtart) सन्बन्ध,(इ.) । मेमन । मेल । मेगेन। भया| आTHE INTE नाहन । “सम्मन् यो सम्मान, (मो.) मन जित् । भाभी पूरन है। सारी (f.). भानी अनिसा (वार) सार.(.)RRरन् । 7 । माना। सम्ममोपतिन(M) मे my- र(सरगमली । (गोली) भाभा । सपने मम्मा.(पु.) सम्म(t) म(..)। पीएम (पने मन । RREN (IT.). Hari, "rr.ruwr। मो. जंग। "भोकभोमाTTE mire गागाग, (पु.) RAHATTER ...Trirat RITTी गम्मान (२०) RAJ गोला Tour* मान मार्गमी. (मी.) यो । मप- Pre' writerarm । भात ("" RTE लिगामे ।। Infere, (I. Surat III Tia गरम गण. (... f- Ar:...1. ! Nirm) : मान (HI. ) Angi (' मागमापाने. WAALI THAK ..!! मन (H• ) : मीन सागर. (170) मम ।' kartat 441 • Ar" } 4:44 GHI . . १. 4.... A growinition . TRA TA NAA 2 - . A- Har+5 404 4.४५ रापा [. - परवा. (मी.) र (मने) नि. गनिन, (3.1.2() एक प्रभारी बरसो नाकामना । पहलमानी. निरनि, (... - रिज, (२.) परन् जायते । म TRAIL. मम " रिमा, (बी.) गद रसमा प्रगती थी । यदी Aren,(t.kym रमोगुणवाला (नि.)मन् समा. 1गुण गाथ. Em. गिट, (पु.)+मटन TT Ire. मगर, (पु.rrrr (Pr रण, (म.)द । गमन जाना)। ( freeutrar रिणि-मी, (पी.)मनि । पथ (Om)(Free Ri Mart गल(in.riml"Erry .' ** Trमा, (पी.) मी पूर्ण। की पम्माका मामीणता माग गगु. (पु.) uter : पातु (ना) + S I योगा | mm.in.) antn rismrir.rs. पापवहारी एक.0 (श्री.). re, (I.) । पीता (40) नगामा... mirr... ....... उदार (नाला) .. (ता)(2.)। faye (41). गग. () अम | Sitar (AI) .iml)..........." "गदी" मी Mitte "nt artREn" (" RE गा। ५......" (म.) गशीन (लेन माना। माना । स ( नासा ) | rare it.(..).x.m+ (M) (4.): "m ment aty"tion nfirm. (R) जायते । ब. ir. aor मा । पामत ! " तत. nian (:..:..... सद (R) Ent) m। पापमम Ini, ... (401 tak वन(पु.) an) TER:. . . merHAG () ... win. { ..)..store.m पोtararthritmahrt kr (INE "'IN" rmi me, Pr: (२.) un (...) (RM weet... ** Pritain(s) • Irrrrrः।' 13.)kaka सपंराज,] गरी, (पी.) गायनियर""arinire सदम्, (4.)मनग्नपरोभरमतिदिन, (पु.) मरे सरपिया से पिर भPart पर शुभरने दुरासयति(7.)मा वगनीसिविदा (पु.) ANIMer ( ५१२) सर्पराज, (पु.) सर्पाणां राजा (टच् समः.)। सांपोंका सर्वतोमुरा, (न०) सर्वतः मुरां भस। चारोरेका राजा । वासुसी । एक साप. पाला। जल। आगरा। शिवजी । । संभ। सर्पसंत्रिन्, (पु.) सर्पाणां सत्रं अति अस्य । सांपोंका आत्मा । ब्राह्मण । और अग्नि (पु.). यज्ञकरनेवाला। राजा जनमेजयका नाम (इसी राजाने | सर्वत्र, (भव्य.) सर्व+अल् । रास्मिन् काले । साह "सर्पष्टि" नाम यज्ञ कियाया). में । हरवत । हरदेशमें । सर दिशाओम । समस्या साशन, (.पु०) सर्प अश्नाति । अश+न्युट् । सांपको सर्वत्रगामिन्, (पु.) सर्वत्र गच्छति । गम्।। खाता है । मयूर । मोर । और गरुड. जगहमे जाता है। वायु (हवा)। सव स्थानमें जाने। सर्पिणी, (स्त्री०) सृज्+णिनि । साँपकी ली। सप्पनी । (त्रि.) जानेवाला (नि.). सर्वथा, (अव्य.) सर्वप्रकार-था । मातरह सर्पिस, (न.) सपइनि । साफ किया हुआ मक्सन । तरहसे. एक प्रकारका पी. सर्वदमन, (पु.) सर्वान् दमयति । दम्पनिम्। सप्ट, (न.) सर्पाणां इष्टः । सांपोंका पियारा। चंदनका सयको दमन ( यश-कावूमें ) कता है। सुपन्दरा वृक्ष. भरतराजा। सर्व दमन कर्ता ( सबमे का रहर सर्प, सर्पण (जाना-फैलना)। भ्वा०प० स० सेट् । सर्वति । (नि.). असऊद. सर्पदर्शिन् , (पु.) सर्व समभावेन पश्यति । तरको सर्प, (पु.) सर्प+अन् । शिव। और विष्णु । सम्पूर्ण सयको एकही भावसे देखता है। युद्ध । और पर (सारा-राब)। सकल (त्रि.). सर्वदधा (सबसे देरानेहारा) (वि.) सर्वसहा, (स्त्री.) सर्व सहते । रान्सम् च । सयरो सहा- | सर्पदा, ( भव्य ) सर्व+दाच्। रार समन, देश, और है." रती है। पृथिवी । भूमि । जमीन । सबकुछ सहारनेवाली में। सदा। हमेश. सर्यधुरीण, (नि.) सर्वा पुरै यही। स (r) सफर (पू.) सर्व करोति । कृ+तृच् । सबको पनाता सारा पोझा ( भार ) उठाने हारा। पपा (int) है। पारमुखयाला ममा । भौर परमेश्वर रावके आगेहुशा. सर्पकमाण, (पि.) सर्वकर्मभ्यः अलं । रा(ईन)। राय- | सर्वनाम, (पु.) सर्वेषां नाम (सयका मम) पाम करनेदारा। जो सय करसता है. रणमै कार्यविशेषके लिये कीगई (ग) पर सर्पसार,(पु.) सः क्षारमयः। सारा सारा। सायन भादि शब्दभेद. नामनिरपरा. सर्वभक्ष, (स्त्री.) मश+मम् । उन। भग" एपंग, (२०) गर्न गति । गम् । जल (पानी)। गए कुछ सानेहारा (नि.). दिवर्ग, परमेशर, कापु (सा) और भारमा (पु.)। समगला, (मी.) योनि मलानि भाप । मारह हारा (नि.). मंगल ( मुग) होते हैं रमे । ५.।दुगो । ममा सार, (पु.) सात पग-गुम् य । सो समय, (A) सर्वात्मरः । मया । सागर मग । पार । सहमे बहानेहरा (नि.). परमेपर (पु.). सर्पजनीन, (वि.) मईजनेषु विदितस (ईन)। सपरसोत्तम, (.) पु रसेतु उनमः । मीरा ति । एवादिली. अछाममनोनयम. सर्वश(3.) बनगो जाना है। सयपत्र, (पु.) गवां रात्रिः । अव एमा। लिएर परमभर । सब कुछ जाहारा। माउ गत्रि. (fr.)दु (..). समट,(.२.) मी नि (ER) पम। मा. रसद पर पाए है। (th.). and . सावरगाiti (F)(:. wittari (1.).

पर्ववेदए, (५३) मान . . सर्ववेदम, (पु.) मानि (धनानि) चेदयते (लाम-मविकररक, (न.) गह-विकल्पनाविपर। यते) पापाय ददाति । विद्यालयमारनागिन+यनि । येदान्दमें "न, हेकी रेटी हर सद धनौरो पात्रके तई देता है। गांमदक्षिणक (पारे एक प्रकारका प्यान दे।" दर में मोरे धनकी दक्षिणामय) यह। "विश्वजिन्" नामक यन गम्मन्यो धन्दन कामानि । र करनेदारा. धादि कि निगमे त्रिपुरी मनीगे. सपेवेशिन्, (पु.) पेश. (पार्यन्येन) अम्ति मविकाग, (त्रि.) गद्द किन गए। भस्य । जो गर भैग बनाता है। नट (नकल परनेहाग) प्राताईतार पत्र विपिन yिr. ससनहन, (न.) सपा रामदन (युरार्थ गढीकरण) [मपितर्क-गदिमगं, (वि.) किन गा. यत्र । जहा लाई टिये सवत्रो तयार किया जाता है। * गाए। गोचनेवाला । अपरामर मारी ऐनाको तयार करके युद्धकी यात्रा करना. पिपरवाला सर्पसद, (पु.) मदते अन् । गुग्गुल । सबछ गहा- पवित, (पु.) गावWritert स्नेहारा (त्रि.). बनानेारा परमामा ! "ging ससिनि, (पु.) सवेंपो मितिः अम्मा । गरको fre दरसे होती है। श्रीफल विल्वका श. मयिध, (नि.) तिन दिन "r) सर्पम्य, (न.) वर्म• सरलधन । गारापन. "ग" | MA(m) सर्पदित, (न.) गोश हितं । मरिच । ५.। आिमे मयिम्मय, (वि.) गाविमा atra. हिन (उपकार ) होता है (त्रि.). याजा भयभ. सांगीण, (नि.) सवाहाणि म्यानोति । ग (न)। गत (नि.) मह दिल "Prrig. पव भों में फैलजानेदारा ( रानिध्यापक)। "रावाजीणे योन । निकर मार (m) र (२) तालचे" भरि पन, (त्रि.) Prant (Tom सर्याधीन, (नि.) गर्वेषां मनं (सवं क्षत्र) का मुंगे. (Arien) IS (REE)ithgl.." ग (इन)। रायके भन्न था सब मनको खाता है। राव-पन्यपाचिन, (पु.) गो (mi... नि। र गिर सर्या सिद्ध, (पु.) साँपु पर्थेषु तिः । गए अमि गये, (पु.) मे orting पिर (कामवाब)। पुरदेर । सम्पूर्ण पाहीगई . नभरना पण (.). परसापा, (..) territten सार, (पु.) सर्व महः । रग् रामा• हादेश । । भोल' (f.) पारादिन. पसन, (.) Pirguthor: मपंप, (I.) T++गुरुय । गरियो । गसो । रास- मामा. मेद. सम्म, (..) RITrainent ससिल, (न.) गलाउन् । जार । पानी. सप, (पु.) सूयते । सन्मए । यस पन्नान । R.(भर.) (Nirmir.. "स" सूर्य 1 Mir (TETN ). (कार) (np.t सपन, (न.) गुग्गुर। रा र मन । म निकारनामसर । सोमा दीना । पत्र मग मर मरे..) बायपर, (.) ममा यो पसलमा पानीरमरपालामावार, (5.RASERArera NE-..mitre रयर्ष, (पु.) मनोद यस बार मारा जीग ern प्रमेवार । गे"" नगे गुब "rer TRIrrit.} """Int(I.) सारित, {h.( स्पारण. (पि.) पाए। tention समक्षक भन.

राहगमन] [स - . . बेटा. सहगमन, (न०) सहगम् न्युट् । सायजाना । साध- सहस्रधारा, (सी.) सहसमुभिता धारा । हजार मरना. धार। देवतासे मान करनेकेलिये बहुत दिने (से सहचर, (नि. सह चरवि । चरस्ट । साथ चलता वाले यन्त्र (कला) से निकले हुए पहुतसे जली 4 है । वयस्य । ससा । मित्र । प्रतिबंधक (रोकनेहारा)। सहस्रनयन, (पु.) सहसं नयनानि मस ।। सहाय (मदतगर)। और अनुचर (सेवक-नीकर). ऑसवाला इद । “सहसनैन" भारि मी इसी वर्षों सहज, (पु.) सह जायते । जन्+ऽ । साथ उत्पन होता सहसपत्र, (न.) सहर पनापि यस । हमारपतोक है। सहोदर । भाई । और निसर्ग (सभाव) । साथ पा । कमलका फूल । “सहसर". उठाहुआ । (त्रि.) । ज्योतिप्मै जन्मलमसे तीसरा सहस्रपाद्, (पु.) राहय (पदः) पादा मा स्थान (न.). "पाद" का आदेश होता है। बहुतसे पावाग सहजमिन, (न.) सहज (स्वभावनि) मिजं । सामा विष्णु । परमेभर । "सहस्साशा सहागर" ही पु- विक मिन । बहिनका लडका आदि. सूक्तम् । “राइयगद" मी होता है. सहजारि, (पु.) सहजः परिः । साभाविक शत्रु । सहस्रभुज, (पु.) महरं भुजा मा । बमुतमी भु सापनाता (सौतेला भाई)। पितृव्यपुत्र । चाचे वाला। विष्णु। कार्तवीर्याजुन । साणामुर । "साग' सहस्रगिसर, (पु.) गहतं शिराराणी अस । बहुत सहदेय, (पु.) सह दीव्यति । रियम । मादीका चोटिओवाजाकिय पर्वत पुत्र । पाण्डवविशेष । साथ सेलता है । सांपली आँरा (पी.). सहस्रांशु, (पु.) सहस असतो यम । बरण सदधर्मिणी, (बी) राह ( रामानः) धर्मः असि वाला । सूर्य । और भारत. असा नि । एक जरो धर्मशाली । पत्रीबी औरत. सहनाक्ष, (पु.) महर्य अशीणि मम्याप समाग । बार नैनालन्द । विगु । और ईभर. सहन, (न.) परमायुर । क्षमा (सहारना)। शीत, रण, पारि बोधे गहाला सहाय । सहारने सहबार, (न. ) महर्ष भाराः (कोणा ) मा । म मीन (नि.). कोनोगाला । मिरमें यमा नागके नीचे हमार पनी. सहपान, (२.) मह पानम् । गाधीना। होकर पास फमलाल. अपपीना सचिन, (नि.) गहनं अभिभग । एमारा. मदमोजन, (२.) (ए) मोजनम् । एकजगद सहाय, (पु. ) राह एतिरणअन् । गाल आता है। सीना. गहवरगामी । मालगार । भनुर: । “अगा सहमरप, (२.)(गदेन ग) एक रिनारोहणेन महाय ए"वि कुमार. मरन् । मरेर पनि य एपितर पर मरना. सहायता, (श्री.) महायानी भगूर +मानामा सरगति-याम, (.) महरष वाम । साथ गाविसमा गरापी र दोनो सिहागन, (न.) गर आपने नाम घटना । एजागन, सारम्, (न)। (और) । साने सहित(fr.) मम्मा दि. IT.IMer from। Fiti (पर) महरा (बु.). Ratnासनगा सरसा, (.) ल । औरतरी । मरम्म fult.(f.) म+नुस् । मranik म) Mitra". गरम (पु.) (प) ) सहिष्ण, (f.) समाहार, (4) मई, Mizाला, (.)TTISr बरस (0) । हम दम.. महल, (.) 414 राriterrivTm. Risrthatakamkrt KRIEName srirh. are. TRE 2 REra न, (T.Sta(apuriHITI "!xi Unt - ज्योक्ति ( ५२५) [पानिक, सदोक्ति, (बी.) सह उक्तिः । साथ कहना । जहाँ | सांसिद्धिक, (नि.) संसिदिः (सभावगिदिः) तया "ग" दरी उक्ति हो । एक अर्थसंबंधी अलशार. नियंतः+टण् । सभावविद । साभाविक । जो आपसे सहोटज, (पु.न.) सहते भातपादि भय । सह+अन् सापही पना हो । युदरतन. • जहां धूप आदि सहारता है । मुनिओंकी पर्ण- | साक्षम्, (अभ्यः) सह अति । साहिल । साथ (त. शाला। पत्तोंची पुटि. तीया विभक्ति के साथ होता है). सहोद, (पु.) सह ऊदा येन । साथ विवाही है जिस- साकल्य, (न• ) सकलस्स भाव मध्यम् । समुदाय । ने । गर्भवाली स्त्रीके साथ विवाह करनेके अनन्तर उराके साराही । “खार्थे भ्यम्" । सारा । होमके लिये मिलेहुए जो पुर उपम होता है "सहोइज" भी. तिल आदि द्रव्य. सहोदर, (पु.) राह (समानं ) उदरे यस्य । एक पेट ] साकाह, (नि.) सह भावाड़या । सामिलाए । इमा बाटा । एकही गर्भमें उपजा माई । सगा भाई । मदिन । सहित । चाहके साय । शान्दबोधके उपयोगी माता- (स्त्री.). वाला पदविशेष. स, (न.) सदायस्य भावः यत् । निः। साहाय्य । साकार, (त्रि.) सह भाकारेण (मूर्त्या) मरिशिष्ट । सहायपन । सहारनेलायक । (नि.)। पहार (पु.). मूर्तिवाला । शकलयाला । गोंगला । सावयव. सा, (स्त्री.) सोगोरी । लक्ष्मी । वह. सांकर्य, (न.) सेकरम्प भावव्यम् । न्यायमें आतिका साकेत, (न.) पाकिसवे भारतः । गइ मानेन । अयोध्यापुर । “जनस्य साकेतनिवागिनः" इति रतुः । गायक (रोक्नेहारा) एक दोष । एकमें दूसरेका मिल- अयोध्यानगरी. मांस्य, (न.) संख्यायते अत्र । संख्या ( सम्यग् ज्ञानम् ) साक्षान्, (भव्य०) सह अशी । म भागादेवः । सा बसि अत्र+अण् । जिसमें गिनाजाता है। जिसमें प्रत्यक्ष । आँखों के सामने । और उसका पिप (ो टीक हान होता है। "एका तेऽमिहिता साध्ये" गीता । सामने मेरा सका है)। “पर IT बरोशात मूलप्रति आदि पदार्थोकी गिनती होती है इसमें । मन" इति धुति. अण् । कपिलका रचाहुआ दर्शनशान । (जिसमें प्रकृति | साक्षात्कार, (पु.) साक्षात्++पम् । यस सामने. पुरुष और तत्वोंका वर्णन है)। सारयका योग (पु.). साक्षिन्, (दि.) सह अक्षिानि । सारस्य इनि वा नि. । सामने देरानेहाय । “त्रिका " साह (वि.) सह अडेन । अंगयुक्ता भगगहिना पूरा २. सांप्रामिक, (नि.) संप्रामाय प्रभवति+टम् । युद्धके लिये परमेश्वर (पु.) । "साक्षी पेन पो निर" समर्थ होता है। सेनापति । सेनाका मालिक । कप्तान । इति श्रुतिः । (यही साशी पैनन्यसम्म रेमारी. भाषामें माना है). पुदके उपयोगी रप आदि. सांघातिक, (वि.) संपाताय हितं य । संपातबारक। साश्य, (न.) गणिो भावः म सर गारा वटा करनेहारााग्योतिमै जन्मनक्षतक सोलवा नक्षत्र. पाम गवाही। “य साक्ष्यमन्तं "रिमति सांयात्रिक, (पु.) सम्यक् यात्राये अल+रण । जहार | सागर, (पु.) सागरेण निनि+मण् । गगामे बना । (पोत) से व्यापार करनेदाराध्यापारी. समुदा एसेरया. सांयुगीन, (नि.) एंयुगे साधु-+ (ईन)। रण | सागरगामिनी, (पी.) सागर गयी। परिन। (जंग) में कुशल (चालाक) मगधम् । गमुरधे बादी है। जिनम् । नील छोटी सी. सांवत्सर, (पु.) संदगर वेति धीवे वा+अण् । वर्ष- सबंधी ज्ञानको प्राश करनेहारे पात्रको जाने का पदने- | सागरमेखसा, (मो.) सामरो सन । ममा हारा ज्योतिशाशे जाहारा ज्योतिषी मानों जिसमे तडागी ।दिर, सांयादिक, (पु.) पम्यवादाय अलंटण । जो भगभांति | सागपलय, (पु.) मगर माया दस Arg शावार्य करणका है। याचिका न्यायशात्र महारा. पर है।पा। एस. सांशपिक, (वि.) संशयं आपप्रायम् । शनिदान । सागरायप, (.) गार बम मा । समर दिमहास।दि. सन्देह, पाहुआ । शकी। रायवाला, सांसारिका, (नि.) संसायर हित-सच भरो बास मानिक, (पु.) कर मिन-बरि । संसारका हितकारी पदार्थ भरा संसारमें उत्पन हुमा। ८३ (पर) Tet (पर) पर। अमिष (बामपन) परर. संसारी,

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पापी, (समानाधिकरणम्, पर्वत । पदाट सायी, (स.) साधु दौ । पवित्रता सी ( जो पतिके | साप्तपदीन, (२.) सप्तमिः पदैः ( उपरिवैः ) नितिन साथ सायाके समान रहती है)। भग प्यम् (ईन)। सान पदों के बोलनेसे घनी । रास्य । नि. सानन्द, (नि.) सह मानन्देन । मानन्दसहित । सुश. प्रता। सौहार्द । प्रेम. सानु, (I.न.) गन्+उम् । पर्वतकी पोटी (प्रस्थ )। साप्तपीरुप, (वि.) सप्त पुरुषान् सानोति मग् । सात पन । पथ । आगे. पुरुषोतक फैलता है । सतपुरुषव्यापर. सानुज, (न.) सानी जायते । अन् । प्रपोण्डरीक । साफल्य, (न.) सफलस्य भावः प्यञ् । पूरा होना । सा- नम्धुराक्ष (पु.), सहानुजेन । अनुजमहित (भाईके धक्य । अर्थ के सिद्ध करनेवाला होना । सम्पूर्णता । राफ. साथ) (नि.) सानुमत् , (पु.) सानु अस्ति मस्स+मनुस् । चोटीवाल। साम्, सान्त्वन (पान्त फरना) • • रा. गेट् । सा- मयति-ते । अससामन्-त. सान्तपन, (म.) मन्तापयति । सम्+त+पिच्+त्युद- सामग, (पु.) साम (तद् वेदं ) गायति । रामरेदके स्वाऽण् । अछीतरह तपाता है। दो दिनोंमें निद होने- सामग्री, (श्री..) रामप्रस भावः ( पूरा दोना )। हाय प्रतविरोष. +प्यम् । रामसता (सारापन) (सी.)कारणगह । सान्तर, (न.) सह अन्तरेण । सादेश। विरल । फरक और दम्य (श्री). (व्यवधान) के साथ. सामवम्य, (न) समासम्म भयम् । सीपिल । सान्तानिक, (त्रि.) सन्तान प्रयोजन अस्प+ठक् । स अच्छपन । मुनानिय होना. न्तानका साधन विधानविशेष । जिस्मे सन्तान होती है इस सामन् , (न.) सो मनिन् । “म दूत पीमहे". प्रकारका विधान. दिवेदविशेष । राजाओके लिये रानुकोबा ने म. सान्त्वन, (न.) सान्त्य्क्ल्युत् । भानुकूल्यकरण । अच्छी २ यविशेष । और प्यारे परन भादिरो शानन करना । पसी पाते मुनाकर मोधो पर करना । ठण्डा करना । पान पांधने की रखी। स्त्री. और मनको प्रसन्नता देनेहारा वचन । प्यार. सामन्त, (पु.) सेमिट. अन्न (एश) यस सम- सान्दीपनि, (पु.) सन्दीपनस्य अपत्यहम् । परीपनकी मः । तम्प ईश्वर+भम् । बग्ने देशके पाग रहनेहार है. सन्तान । बलराम और कृष्णजीया आचार्य । अवन्तिपुरमें शरा सामी राजा पर रामारोतरावर निवासकरनेहारा एक मुनि. (सिरात्र ) देता है। परदाग । रा भरने . (नि.) भारिरक् । राह अन्द्रेण । निषिः। सामयिफ, (नि.) राम भर पितो मान् (m) समय (ज) पर हुभारसमरत (ोर) गाढा । मृदु । कोमल । नरम । मिग्ध चिकना । और (मनोहर ) । वन (जगल) (न.). | सामयोनि, (पु.) साम योनि (पत्तिस्थानं ) । सामसे उत्पागुआ। एली ("रमले सूर्यो साभ्य, (नि.) सन्ध्याय भव +अ । संध्यागातिक । दोनों अण्डकापाको हाथ में देर मन सौ (4) सांस समय को गाया-तब हादी गिरे")।मंग. सानिध्य, (म• ) गनिपिरेषाप्यम् । नैकय । समीपता । सामर्य, (न. ) समर्पस भवनमान पासपन । पामहोना । पास बल (जोर)। राति। कोदा। सेना-ria सानिपातिक, (वि.) समिधातार (निशेपिसारार) आगतः । तेन निती वाटत् । तीन दोगेरे पिगडने सामदिन, (पु.) सम येतिविति । समय थाया या हुभा । सप्रियतमे उपश रोग। "रिमारे सामि- सभाला. पातिके" युमार सामाजिक, (5.) दो बार सापत्य, (पु.) सपन एवम्साथै एम् । (उपन) जरग जिमरा है। सन्म मर "मपन्या भवः । तस्या अपत्वं दायिम् । सपनी (सी- म) र पुष । “सापन". सामानकर म्. () शिरपंरप हम भरपरी पर रगत रोग (Mrre सापिण्प, (न.) पिण्डस भरारम् । सपिगला रामन (पावर) र । t et (एकजातपना )। दाय (निरसा) और संच (87- समर संगमिर- रिमना)म्बीघर परमेके उपयोगी बारिता धर्म " गरिमाम. पिण साप्ता" मिति: सान्द्रा - टीम्ना- सामान्य, (५२०) सो . सामान्य, (२०) समानस्य भाव पम् । सारस प्रयोजक सायम, ( मया) दिनाना । सांस!"शा रात्री धर्म । वरावरीको जतलानेहारा धर्म जने "मुख कमलकू. उगटः लके समान सुन्दर है" इलास्मेिं मुन्दरता भारि साय) सायात, (पु.) सारोहः । सन् । सहारे प्यन्"समान एवं" द्रव्य, गुण और फर्ममें तुल्य सरूपये दिनमा सन्त । सोस । दिनका क्षेत्र पंचों भागो- रहनेहारी जाति. मुहूर्त होता है. सामान्यलक्षणा, (स्वी.) सामान्य ( साधारपधर्मः) सायुज्य, (न.) सद युनति। पुहिए। देश रक्ष यसाः । एक जैसे धर्मको जतलानेहारी। न्यायमें "रायुर" सस भार+प्यम् । साप जम्नः । पाप मार- "अलोकिक प्रत्यक्षा एक उपाय-से एक "पद" के मुसिमें से एम्ही स्थान हो सायोनार आने “पटलका सामान्यधर्मशान" से सम्पूर्ण घटत्व मुक्ति. चालेका मान होता है । अलौकिक सन्निविशेष. सार, (न.) गाथम् । सार मनमा । जापन I माया सामान्यप्रतिपत्तिपूर्वकम् , (अव्य.) सामान्या प्रतिपत्तिः नुगारमानीत (मारान) लोहा मोरवन (जंगा) पूर्व रया तथा । समान प्रतिष्ठा के साथ। बराबर सादर पल (जोर)। स्थिर अंश (पादिरगा)म(m) (इवत) गाय. म (नि.). सामान्याः (सी.) समानेवासा पन्-टाए । साधारण सारगन्ध, (पु.) सारः गन्धो पम्प । म । (बाम) खी। वेश्या । जरी. सामि, (अन्य ) ORन् । । आमा । "सामिपटि | सारय, (पु.) गरपाभिः नितम् । मतियों मना । "धन. मपान सौर गमीप्य, (म.) समीरस भरमा मा पम् । नालसारङ्ग, (I. ) T+भा । भाग (पी)। हरिण । हामी। भोरा ।। राजन सोना । निगमाक. कायाकग । मोर । काम।। कमान मुनयः, (म.) गमुगोस युग (म) यदिटी रेमा सो म भोर भाशुभ पक्षको (गहना)। कमाल।। माना। कोहल । वाल । शेर । भूमि । गौर गि. पm (ोधा बना और पुरुषोत सारङ्गिक, (पु.) गार (गर्ग) हनि+5 () freere to: १) "गामुषित" भी पशुको मारता है। व्यापार. गागापित,(0) ER (भाई) परलो अप सारज, (म.) मा (कपमा) नागो। बन्। ममे मनालीन मानन. rep ().ग परलोरगिला. MISE () मन (f.). गारणि-गी, (श्री. ) THIमनकामी । छोटा । सोरहो मारोगा नम्, (४.) सम्मान-अनुयुत । उति migriterat२, मोतिराशेत. गारशि, (पु.) यानि । गहन (1) मादित, (f.) मन मा. प्राय (एके Fert मा (भा). हर निकाला। ( मागगनmari. र, (२.)हम मपम इदमr. Ratirstोगमा . गाना (श्री.) Atuti rat मार, (PAR मर पर का। मारमंग, (I.) भाम: ( Rm we FEATrrent (7) Earth ATTAmr(*) (ब) Per. मार, (*:) (r), साग, (m.) गाtext. k! ( aut. सास, (..) (म) wat arrI . Hit SCAIN (R.)

बणिजन. सारस्वत, [साह, सारस्वत, (पु.) सरसती देवता अस । सरसला इदै | सार्पप, (त्रि.) सर्वपम्य विकार अम् । परमोश बाबा पा+अश् । जिसकी देवी सरसती है पा सरसतीका यह । वेलआदि । “अदुष्टं सा ततं" इति स्मृतिः. विष्का दण्डा। एकदेश । पाँच गांडों से एकप्रसारका | साल, (पु.) गल्न पम् । हरएक १ । इस नामका पक्ष । ब्राह्मण । सरखतीसे पालन कियाहुआ एकमुनि । प्रमाका प्राकार । शहरपनाह दिनरूप कल्पविशेष । सरसतीवाला (त्रि.). | सालनिर्यास, (पु.) ६. । सर्जरम । धुना । ल. सारस्वतकल्प, (पु.) कर्म । तत्रमै सरखतीची उपा- सालमनिका, (स्त्री.) सालं भक्ति । म+Trict सनाके लिये एक प्रकार । इस नामका प्रमाका दिन. बादिका पनाहुमा बनावटी खेलका मापन । पुनी सारि-री, (पु.ली.) राइन् । वानीप् । पासका पास्सा. पुनरी । शी। बेश्या । जरी. सारिका, (बी.) सरति (गटति ) य+ग्युल् । एक पक्षी | साल्प, (पु.) सल्वरनिन् । भेछ। कर मेर। (मना). सार्य, (पु.) यापम् साये । समूह । जीवोंका समूह। सालोक्य, (न.) पमानः कः अस्य । ERT+ "म अर्थन" धनसहित । पनिओंका ममूर। धनी प्यम् । पाँच प्रभारी मुक्तिमगे परने उगमन (दालतमी) (वि.) कन् । "सार्थक" दाद. साथ एकदी लोक गारना मुनि सार्यघाह, (पु.) सायं पहन । परम्भण् । व्यापारी। सास्य, (पु.)... सामना गदेरपरमात. सावधान, (नि.) यह भवन निरन साई, (नि.) सह आदेण। आवायुज । गीलेपनके माथ।। है। सचेतन होशियार । मनोमिनिरेगयुत्त । सार. गीला. सायन, (.) सब (गोमदाग-4) ratna साथै, (अन्य ) साहित्य । साथ । "सह अर्धन" सार्ध । बददिन कि सोमपान Ant भाधेके साथ (त्रि.). यज्ञका अन्त । पूरे तीस दिनका मन (at).mm. पार्प, (न.) सपों देवता अस्स+अण् । जिसका देवता साँप | सा(शा)यर, (पु.) योगनिन (gr) है। आटेषा नक्षत्र (तारा). अपवादालंक. सार्पिफ, (वि.) सर्पिषा संस्कृत+टण (क)। धीमें | सापर्ण, (पु.) गादी भर +मण । Mantr. संस्कार कियागया न्यजन (नादा) मादि. देवी से उपगभारी मतम् ।"on" सार्वजनीन, (नि.) सणु जनेषु विदितः तम् (ईन) सापित्र, (पु.) विमा देवा Marefrankre द्विपदादिः । मबजनों में जानाहुआ। सर्पलोकप्रशिक्ष. सूर्य है। प्रिम (NR)... सार्वत्रिक, (नि.) सर्वन भर (क) र समयमै गै। गायत्रो । ससानी"at मादि (नि.)। पोरन (.) rimi सापंधानुक, (न.) सबंधातून पामोरिस प्यारणमें सूर्य । तस्येन् । महामु (पु.) लिट् । लोट् । ७ । विधिलिए। इन पारों के प्रत्यय. सावित्रीपतित:RE(I-ENGER) सार्वभौतिक, (नि.) मणि भूतानि बमोसिटम् । निरागस irrey "दोनों पदोको दि होती है"। म जीवों में फैलनेहारा। रएका पोलेम सर्वभूतन्यापक भीt. सार्वभीम, (पु.) सर्वस्या भूमेः । गगु भीड सारिधीनता (समर म विदितो बाम। सारी प्रपिदीय मारिए mलिये प्रयोग समेritten पृथिवी (नगरों बारहुभा । बकरती राम ब. (a) Met. वह उत्तर दिशादी, साधा, (.) entration सायलीकिक, (त्रि.) सरेंलोरे पिलिम्। पिर साय, (नि.) मा पेच girit पनि सोपोंमें मारा" राम सर्वर सशबिरार डिभी. साफिभतिक, (वि.) पनि प्रभावित सारवर्ष, (.) A WE बारामाराrt PNE रम् (%), रिमधिोरे Ke Reपड़ा। "तमिल" माद असम.

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- सिद्धपीठ, (५१.) [ सीमा, जिनविशेष. सिद्धपीट, (पु.३०) कर्म । लिमोंका स्थान (जहाँ सिन्धुराज, (पु.)न्धूना एका+टच् । नदिया। लाखदार पलिदान कियागया है, कोडवार होम और महा. मुद, विक्षाका मन्त्र जपागया हो) सिन्धुवार, (पु.) अच्सी जावस घोश । जिन प सिद्धपुर, (न.) कर्म• लंकाके नीचे एक पुर है. आका घोडा। पारसी पोना. सिद्धविद्या, (सी.) शिक्षा विद्या (मन्धः ) यस्याः । जि- सिन्धुसंगम, (पु.) मिध्वोः (नदोः) मीममुद्रयोः सन मन्त्र सिद्ध है। "काली" धादि दस महाविद्या. वा संगमः । दो नदिओं दा नदी और समुद्र मेल । "मः सिद्धसाधन, (न. ) सिद्धस्स (निधितस्य ) साधनं (अनु. पत्र"वह जहाँ हो (त्रि.). मानम् ) यायमें एकप्रनरका दोष जिसमें उस बनुका | सिम, (पु.) सप्मक् । पृ. । एक ताला (सरोर)। अनुमान कियाजाता है जिसका पहिलेसे निश्चय होरहा है. चन्द्रमा । गर्माध पानी । और धर्म (पहीना)। उब. सिद्धान्त, (पु.) सिद्धः (निश्चितः ) अन्तः यम्मात् । यिनी नगरीके पास एक नदी (दो) (बी.) . जिसे अन्त ( असली बात ) का निश्चय होता है। प्रमाण प्रातरङ्गानिलकम्पिदामु"तिरः. भादि देकर पूर्वपक्ष ( पहिले कीगई दलील ) को तोडकर | सिम, (पु.) लिमन् । सर्व । पब । हम बर्ष मांगाम, असली पक्षको स्थापन करनेहारा वाक्यसमूह । वारी और | सीक, सेचन-गौचना । म्या• मा. स. हे । कोले। प्रतिवादीसे निधय कियाहुआ अर्थ । ज्योति शास्त्रविशेप. सेरिट सिमार्थ-क, (पु.) सिद्ध. अर्थ. यस्मात् । जिस्से प्रयो- | सीकर, (पु.) डोक्यते (शिष्यवे) भनेनीमा अन सिद्ध होता है।५व. वा कप । श्वेतसर्पप (चिटो जलकण । पानी कशी (क). सरसों ) । वटीपक्ष । ६५०। प्रसिद्ध अर्थ (नि.)। सीता, (श्री.) शि+नI. मातीमा फाल्या हलचलाने की रण्डी बनण्रम्प. सिद्धि, (बी.) निकिन् । ऋदिनाम औषध । योगवि- | सीतापति, (पु.) 6. श्रीराम । डा. शेप । अन्तर्धान (छिपना)। निष्पत्ति (एक कामका सीतायाः पति, (पु.) RIME TRA. पूराहोना)। पाक ( पकना-रसोई)। पादुका (खडाब)। मोक्ष । सम्पदा । “अणिमा" धादि आठ प्रकारका ऐभयं। सीत्कार, (.) "हो" ती NATRATI बुदि। "प्रभाव" भारि तीन शाकिये. +पम् । अनुराग (प्रेम मुहम्म) से हम सिरिद, (पु.) सिद्धि ददाति । दा+। बटुकभैरव । ही करना. विदिके देनेहारा (त्रि.). सीधु (पु.) सिथ् 1. IN (Rit. सिद्धियोग, (पु.) तिमिहेतुर्योगः । सिदिकारण योग । हुए रससे सारा माविस). ज्योतिप्में एकआदि धारमाहित नन्दा" आदि. मीधुरम, (पु.)ोधोरण (म: Are fru सिमल, (नि.)विध्मन् मस्त्य लन् । किलास रोगवाला। स्वाद (मा) पपी मोतिषesire. सिनीयाली, (खी.) दिना (श्वेता ) चन्द्राला बली सीमन्त, (पु.) ः बन्नः । (भारयति ) अ-कीप् । चतुर्दशीवाली अमावास्या. मार्गरे एमान बनायो सिन्दु(न्)पार, (पु.) गिन्धं ( यजमदं ) पारदति । महाँनेरनेसास र +अण् । मिसिन्दास "मुकारल्यापीकतरिन्धुपारम्"शी | सीमन्तिनी (22) Tetry कुमारः (इसमें बहुत गप होता है। पूरशिहै.) सिन्दूर, (२०) स्पन्दुजरन् । सम्प्रसारणम् । गल पिच सीमन्तोनयन, (..) FER (Citreer. पूर्णविशेष । सिंधूर । संधूर । शरिशेष (पु.). रन (२) (tta) सिन्धु, (पु.) पन्छ । सम्प्रगारम । "" "* नमी या करारोtere होता है। राकमद () एप। एक देश और मप (ret मर)। उस सामन्, र देशका बासी (पु....) (13) पनीर* सिन्धुर, (पु.)सिंध: (पद सस्य आणि सीमा, (tter(Eesan), पालीवाला भी. बन्दश्च (7) कोही. म.

[मुनक्षम्, । कृति,(श्री){++हिन् । पुष्वा मंगला पड़ा काम.सुवसुस्, (पु.) 5 :मया और माधिप,] (५३२) माधिप, (पु.) सीमायाः अधिपः । सीमाके पासका सुख, (न.) मुख+घन् । पुष्यसे उपनहुआ गुणविशेष राजा । पड़ोसी राजा. आनंद । नियायिक आदि" इसे आत्माय धर्म मानते मान्त, (पु.) सीमायाः अन्तः। सीमाका अवसान हैं । सांख्य आदि "चित्त” का । "मुखं अस्य अस्ति+अन् (ह)। सीमाका कोन. वा" सुखी (त्रि.). माविवाद, (पु.) सीमायां विवादः । अठारह प्रकारके सुखजात, (त्रि.) जातं सुमं अस्य । परनिपातः । जाता- विवादोंमेंसे "सीमा" के विषयमें झगडा. नन्द (जिसे आनन्द प्राप्त हुआ है)। "मुखजातः मुरा- मासन्धि, (पु.) सीमायाः संधिः । दो सीमाओं(हदों) पीतः" इति भटि. का मेल, सुखमाज, (त्रि०) मुसं भजते । भन्धि । सुखवारा. -र,(पु.) सिर । पृ. । सूर्य । आकका वृक्ष । और हल. सुखरात्रिका, (स्त्री०) मुसा रात्रिः यस्याः । ५ व० कम्। रध्वज (पु.) सीरः (हलः-तचिहितः ) ध्वजः यस्य । जिस्से मुखकी रात होती है । आश्रिनमास (अस्सू) की जिसके झंडेपर हलका चिन्ह (नशान ) है । जनकराजा. दीपान्विता (जिस रात्रिमें दीपकोंका प्रकाश कियाजता पाणि, (पु०) सीरः (हलः) पाणी यस्य । जिसके है-दीवाली ) अमावास्या ( इसमें इमीका पूजन कर्ते हैं). हाथमें हल है । मलदेव । बलराम. सुखधव-श्रुति, (त्रि.) मुत्रु श्रवः अवर्ण यस्य । मुझे रिन्, (पु.) सीरः (हल) अस्ति अस्य आयुधत्वेन । मधुर (मीठा). जिसका शख्न हल है। बलराम । बलभद्र. सुखाधार, (पु.) मुखाना आधारः । मुसोका आश्रय (से)वन, (न०) सिव्ल्युट् । नि० वा दीर्घः । सीवन । खर्ग । कर्म• मुखदेनेवाला निवासस्थान. सन्तुसन्तान । तातफलाना। सीना. सुखावह, (त्रि.) मुखं आवहति (जनयति)। आस्व (भव्य. ) पूजा । अच्छा । अतिशय ( बहुत ). अन् । मुसजनक । मुखको उपजानेहारा. करा, (स्त्री० ) मुखेन क्रियते दुद्यते वा । सु++सल् । सुखोत्सय, (पु० ) मुखकर उत्सवो यस्मात् । २५० जिसे मुश्शीला गो (जिसे सहजहीसे चो लेते हैं)।जो मुखसे मुखदेनेहारा उत्सव होता है । पति (मालिक)। कर्म हो (नि.). आनंद करनेहारा उत्सव (पु.). कल, (पु० ) मुष्ठ कल्यते (स्यायते ) असौ । मु+कल् सुगत, मुटु गच्छति (जानाति )। गम्+कर्तरि का यह +धम् । यह जन जो “दाता" "भोका” आदि गुणोंसे अच्छा जानता है । वुद्धदेव ( यह "निर्वाण" को शान्ति प्रसिद्ध है। यह शब्द जो मुकर, मधुर, और व्यक्त हो. मानता है) कर्मन (पु.) मुटु कर्म• यस्मात् । जिस्से अच्छा का- सुगन्ध, (न. ) मुथु गन्धः अस्य । इन माई होता । म म होता है। विष्कम्भ आदिमें सातवा योग । अच्छे काम- तैल । छोटाजीरा । कमल । चन्दन । मुगग्धपदाकाली पाला (त्रि.)। अच्छा काम (न.). दुकान (नि.). काण्ड, (पु.) मुटु कटाण्डः अस्य ।अच्छी शाखावाला वृक्ष. मुगन्धि, (पु. ) मुनु गन्धः । इत्ममाम । इष्टगन्ध । पाई कामा, (खी.) मुगु काम्यते असौ । मु+कम्पम् । प्रायमाणा स्ता । अच्छी कामनावाला (वि.). (त्रि.)। खुशब्दार. कमारा, (सी.) मु+कुमार+अच-पम् वा । जातिपक्ष । सुगृहीतनामन्, (पु.) गुगृहीत ( प्रातः स्मरणीय) नाम नवमालिया। कदली (केला)। और मारती । बहुत यस्य । जिसका नाम प्रातःकाल स्मरण करना चाहिये। कोमल (नार) । मुन्दर कुमारअवस्थावाला (नि.) पवित्रयरावाला जन. (श्री.)ी. रत, (नि.) मु++कि । पुण्य करनेहारा । धार्मिक चोरकनामी वृक्ष (वि.). इत, (२.) मु+zte | पुष्य। धर्म । भौर। शुभ । वजन (२.). - । गई सुशव । मुरभि । "गु गन्धा मस्य" । सुगन्धवाला सुप्रन्थि, (पु.) मुगु अन्यिः यस । भयो मारा। 'सुप्रीय, (पु.) गुयु प्रीवा अस । मन्छे (व). बाला । भीमका पोडा । सूर्परा पुर। पर रामा । मुन्दर मौवावासा (नि.). इनिन (वि.) एवं अनेन । इतिः । पुचवाला । महाड भामर्म भरावा. माई जिममा पाएमा पुग्दा नै माला (नि.) माझी भाग (..)

राजपत्र (न.) तर (त्रि.). मेरा (नि.). निकोडागया (त्रि.). । ५.निलका फूल। 5• मुन्दरबल (न.). मक, (न.) मु(स्) भावे । म (स) (अन्न) दम्मार भागतम् । उत्पत्ति (बालक बारिक सुदामन, (पु.)7. Art m)ोनेसे वायसन्। अननहा सगौर (रवि रएकप्राररा अशोर। "सूतके मृत तथा" उन्, (पु.) मुधु तपाी। मु+तरम्पनि । बहुत पायावाला। मुनि (पु.)मुन्दर दपराय (दि.)। रए । नियर किये हुए अर्पप बहुत उपितरोना ( सुxि.भपाए पम्, (लय.) मु"भनिसर" के अमें बम द)"धन्वा तदयालेररातराया निरीश्मन मुतां ए नेत्रवारी) देशातो बहुत पन एउधम्पन्, (पि.)"पाप (नानीरजरगल भारमम, (पु.) मुम्पसमISIS दिदी, (की.) मुमनि । SITEST रण, (पु.)x. मराITRA (५१३) 15. को चरित्रा, (स.) चरित्रं यस्याः। पर सरकारी सुनु, (5.) 5. नारिकेला । नरेन्द इस्तान स्टेट को अपने पालवाल (वि.) प्रा० रुप कंग (दि.) । सुसामन्, (पु.) मा । मन्न् । मुग्जिर, (.) प्रा. बहुत चिरका समर । हुन (३०)। मनमति परः।दारोघर. - रेपपुर, (5.) मुचिर (हुशालिकमायुः) यस । सुत्यन्, (3.) मुनि । यो मापन रा. हारा । मोमरसके नामाकरमाने. बहुत देरतक उमर हो । देवया । बहुत ममता सुदण्ड, (पु.) मा ५०1अन्य हा (परमोशे ) मा. ोटर, (5• )1 सूक्ष्मयम्य (महीन काम) । "मय सुदर, (5.) अन्य ("पारमा फरवरू" महीन कपडे धारण किमहुआ (वि.) इस में "" बचा): बल (२०) चोभनं बतं रसात् । जिस्से मस पानी उमरहे माय मनुव मानपुर की (सरल) हो । “अबस्य से गिर मम " मुन, (5.) +5 पुत्र । कम्पा (स्लो टाप् ) । निप्पी है (मादार) मुदर्शन, (२.) • दुर (र) सिईदेव है। IRRese(.). है। मेष (दत) MEAN(). GE CHATRA "पदर इतकं सम्मात्" इति स्मृति:- नाच रे मर (.)me. भनुन्, (पु. स्त्री.) मुटु तनु वा बाजा। परवाडी नारी । औरत. गुदि. (म.) मी. IE: पारस पगा. है। सूर्य (सर)। "मुष्ट तप अस्प" । असे मुदिन, (१०) xi. rm to I .पि.). मुदिनार. ( . ) मन (Fine mer.. प्रास सिर. "पः । यहाँ धेनु सुपुरा. (5.) दाला मनु' पुdore (..! परम गति(OER)ntic रहtirroriarror स्तर (पू. .) मुधु ततं मामले पर । Ayers." सुधर्मर, { *•) Meritten • ट (प). हता भा, (... गान, (R) मुस गई. अति भाप । माता रे Meri विR (re are (Priy(ME rrig. (3.) re treRorrier । • मुन्दर तपसा (न.). हरे रविवहुआ. - साबिशेष मनिट, (पु.) (नि.) मीम (पु.). (f.) मीम (पु.) ." गुलर (नि.)

जीविन्, ( ५३४ )। [सुभग, । आजीविन्, (पु.). मुधो (ठेपनम्व्यं ) भाजीवति । सुपर्णकेतु, (पु.) मुर्णः (गः) केतुः यस्य । जिसके वो पली चूने भादिका काम करके जीता है । पलगण्ड । झण्डेपर गाय चिन्ह है। मिष्णु. राज । कारीगर. निधि, (पु.) मुधा निधीयते अत्र । नि+या+कि । सुपर्वन्, (पु.) मुषः पर्व यस । भरछे पर्दवाला । दाता। अमृत रक्खाजाता है यहाँ । चन्द्रमा । और काफूर (कपूर). सुपोत, (न• ) प्रा. गर ( गाजर)। गुन्दर पीलारंग। बाग । यांस । और घूओ। प्रा• सुन्दर पर्व (न.), हर, (पु.) मुां हरति । ह अच् । भमृतको हरण- इता है। गरुड । "सुधाहारक". (पु.)। उसवाला (त्रि.). हो, (५०) मुटु धीः यस्य । जिसकी अच्छी (अमित) सुपुष्प, (न.)शाल मेगा फूल । तूल (ई) और खीओंका रस (जो महीने के पीछे होताहै). पण्डित । "मुमु धीः" | अच्छी अकिल (बी.) “मुन्नु ध्यायति” मुये किम् । निः । अली पुद्धि- सुप्, (त्री•) न्याउरणमें "" "3" "जम्"प्रभी प्रास. मटा (त्रि.). मुप्त, (न• ) समावे त-सम्प्रमारणम् । निशा (नीद)। पेन्द्य, (पु.) सुपया सह उद्भवति । उ भू अन् । और शयन (सोना) । "कर्तरिक" सोपाहुभा (नि.). नन्तके साथ निकलता है। धन्वंतरी मामा योको सुप्ति, (सी.) सप्+तिन् । शयन (सोना) । निशा पदा हकीम ) । ५त.। हरीड (बी). (नींद)। और मुगना. द, (न.) मुटु मन्दयति । मुनिन्द्+अच् । अच्छी सुप्रतिभा, (सी.) मुटु श्रीमा यसाः । ५.। रह भानन्द फर्ता है। पतरामका मुगल (मोहला)। जिस्से कोई प्रकारी ममशीली दुधि उत्पन्न होती है। रिपके पास रहनेहारा ( सराा वा सेवक) । एक मुरा। (शराब)। उगल (पमडीसी) पुति.. भारस राजामा पर । भानन्द उपजानेहारा (त्रि.). उसकाला (नि.) ग्ग, (३.) मुटु नपने समाजिगरी में (नेत्र) मुममा, (बी.) मा प्रभा यस्था । विर गणपमा हो । गण । हरिण । नारी (पी.) । अच्छी होती है । समिनिद्वार । मुन्दर कति (मरणवमा) वटा (पि.). वाला (वि.) प्रा. भग्छी ति (श्री.). (सी)शीर.(पु.) गर नासौरः (मप्रगन्यं ) यस्य । गुमभात, (२.) प्रा. । एम (मलाई) को पूरा गो गानेदारी सेना बहुत भगदी है। इन्छ । (अतलाना ) करनेद्वारा प्रातः (मौर) गमय । मोर गोस. उगगमय पानेलाया मंगलवपन. ER, (f.) मुनिम्++लम् । भान्तोसत | गुभयुनागर, (पु.) गुपयुक्तः शरो पैन । शौभाग विमापा पलता है (मीर पाने) ति, (.) नीतिया। जिमी मगही पभने भभ्यागी पशुपकाला. है। (भमा । मुमरीति (सी.).. ८, (प.) एक मन (नीम ) दामि गुदाप, (पु.) तापम् । मापन I मन, मुमान, (पु.) मुमार गुनगाभा. कनार ) र रन्दर बडा रंग । (पु.)भनमी । र (1) मुसमरा, (श्री.) ++ । मामनामा मन, .(पु.)रार पर (दर). मुसग(श्री. ) Tran+पम् । प्रगामी (40) र, (f.) पन्द्र अग्न् । एक. । मनोर। गाभा (fr.). पत्र: । ""। रन्न हो। yिr. गुरगाव, (1.)मोन ( मनायामेन ) प्रा । सार(पु.). जोगी जाला. पर :(.)न्दर पदमा पद (रम")। मन मासी गुती 28 (रस) मन परfr.), माल, (पु.)मामamerent (1.) 12. एक प्रष्टा र:(R) सीता मदर (2.). Brears.एदाराना (Fr.). मग, (.) (Rat Art (.):.) म I free . र र पदर en( reat Firma i Asosire (no) ।

मुगागा, गरिन् वाला बझा. पा (त्रि.). सुमणामुन, (पु.) मुभगायाः मुतः । सुभगा (पति सुयोधन, (पु.) मुसेन युप्यते सो । मु युध्+युन् । शिकारी) का पुत्र । सामागिनेय. धृतराष्ट्र राजाका पुत्र दुर्योधन. सुमन (पु.) गुरेन मज्यते । जो सहजसे स्टजाता है। सुर, (पु.) मुनु रात ( ददाति अभीटम्) | T+कः । महापम् । मारिदेलपक्ष । नरेलका दस्त. अच्छी तरह अभिलाषा पूरी कता है । देवता। सूर्य । मुभर, (I.) मुन्दर गोसा । मच्छा शूरवीर (बहादुर). और पंडित. रामद, (पु.) मुष्ट भदं यम्मात् । जिस्से मच्न फल्याण मुरगुरु, (पु.)त.। पृहस्पति । देवताओंका गुरु. होता है । विष्णु । ०। अच्छे मंगलवाला (नि.)। सुरज (न.) मुघु रखो यस्मात् । ५ २० । हींग । प्रा० । रूमलता । धीरप्पाकी भगिनी (महिन )(बी) मुरंग । एक प्रकारका मय. मुमदेश, (.) त । अर्जुन । "मुभदापति" आदि भी. सुरज्येष्ठ, (पु.) ५ त । देवताओंमें पड़ा । चार मुग. मुमिस, (नि.) मुखेन लभ्या भिक्षा यत्र। बहुत अन्नवाला समय (जब भीस सहजसे मिलसी है )। मुगल, सुरत, (न.) मुरम् भावे की स्वीपुरका मेगमरूप मुभूति, (3.) मुटु भवति । मुभूि+चिच् । एक पण्डित । (आपसमें इलाहोना) एक प्रकारकी खेल। “करि" पुन्दर पर्य। (स्त्री.)। ६५ । उसबाला । बहुत रत ( पियारमें पाया) (नि.). (नि.)। रिस्वध श (पु.). मुरथ,(पु.) मधु रथ अस्य । चंदवंशी एक रामा। "मुरयो मुमरा, (न.) मुटु मृशम् । बहुतही रस (पदा) उस- नाम रामाभूत" इति घण्टी । गुन्दर स्थवान्य (त्रि.). सुरदार, (न.) सुरप्रियं (मुरलोरपर्यन्तं उरिष्ट्रवा) दारु । मुख(म्), (बी.) मुधु भूः यसा+वा कड् । अच्छे भी- देवताओंका पियारा वा सर्गतक ऊंचा । देवदाराश. पडी। नारी । औरत । बरछे भीवाटा (वि). सुरदीर्घिका, (स्त्री.) गुराणो सपिरेव । मानों देवताओं मुमदन, (पु.) मुटु मदयवि कोकिटान् । मणिच्ल्यु । मावनी है। गंगा । "मुरवापी". पोपोइलोकोमलीभांति मसकता है । औम । आम. सुरदिए, (पु.) मुरान् देटि। दिए किए। देवताओं के गाय मुमधुर, (म.) प्रा. । बहुत पियारा पचन । और विरोध कर्ता है । अगर । दैत्य । देवोया दानव (वि.). सान्त्वन पाक्य (शान्तिकरानेका वचन) । बडे मीठे सुरधनुस्, (न)त. देवताओं की रमन । इन्दपनुः रसवाला (नि.). सुरपति, (पु.) तान्द । देवताओंघ मर. समनस्, (न.) गुष्ठ मनो यस्मात् । जिस्से अटा मन होता है। पुष्प । फूल । " इसे बहुवचन मानते | सुरपथ, (पु.) मुराणां पन्या यर । बच् समा देवताओंच मार्ग है। आयशा भाम्मान. है"।पच्छे चित्तवाला (त्रि.) प्रा. अन्डा मन (न.). सुमित्रा, (ख) मणी माता दशरथकी एक सुरपादप, (.) त• । देवताओंन मा. मुमुख, (पु.) मुटु मुसं अस्मात् अन्य दा। जिसका सेवन | सुरपुरी, (श्री.) त । देवताओं की पुरी | मराटी. एनेसे अच्छा मुख होता है या जिगका अच्छा मुख है। सुरभि, (न.) मुरम्मइन् । स (गोमा)। और मुन्दर । पम्पक (सम्रा)।जयरलाक्षागमन । गणेशजी । पण्डित । मच्छे मुसवाला (त्रि.). मुगंध । चेता महीना । और पण्डित (पु.) पिया। मुमेखल, (पु.) मुटु मेसला यस्मात् । २२० । बिस्तो अन्डी तागी बनती है। मुनका वृक्ष । ५. मुन्दर एक देवी । गौ । मुरा। मुलसी और पूयिरी। (बी.) तहागीवाला (वि.). धीर मच्छे गंधाला । मनोहर। मोर प्रतिर (दि.). सुमेघस, (खी.) गुपु मेधा अस्या । ५० । अनिच् । पुराणे, (पु.) गुरमियः इपिः । देवताओं जिस्से पछी भूमि हो जाती है । ज्योतिष्मती लता । शापि । नारदआदिशति 14. । सुन्दर मेधायुक्त (बी बुद्धिवाला) (नि.). मुरलोर, (पु.) मुरमा लोक । शोध मोर (निवास करनेसन)।स। "मरपुर की. नभेर, (पु.) एक पर्वत ( पहाड) । जपमालाई मुरपामन, (.) मुरादाबादी देविकोप मार्गअर. E-(ख), (पु.) एकदेशन नाम। उसके बासी (पु.) मुरषली, (डी.) मुरप्रिया र दाभोमरिये देल । मुलसी. मसि यस्यअन् । यमुनाका स्थान जिसे पियारा है। गुरपरिन्, (बी) ६...पुर (स). ओध विरोधी (दि.). । सिरका मोटा दाना. सामुन, (पु.) यमुनामा इदम् । मुगु यामुनं शिवत्वेन विपु । वत्सराम एक महल पहार और बादल.

मुरसमन्, ( ५१६) मुर मुरसान्, (न०)(मुरागां सभ) देवताओंका घर । खग। मुवर्ण, (न.) सुत्रु वर्गः अस । अच्छेरंगवाला । हर बहिस्त. नामका धातु ( सोना )। "मुटु वर्गः (स्पे-अशरे का सुरसरिद, (बी.) मुराणां सरित । देवताओंडी नरी । गहा. मस"। मुन्दररूप (सकल) बाल और मुन्दर मार मुरस्थानम्,(न.) मुराणो स्थानम् । देवताओंका स्थान । पाला (त्रि.)। "न मुंवर्गमी तनुः परे ननु सा पारि देवमंदिर. सावरी तया" नेपधम्. सुरमुन्दरी, (सी.) मुरप्रिया मुन्दरी । देवताओंकी सुवर्णकार, (पु.) मुर्ग (मुगर्गमयभूपगारि) रोती । पियारी मुन्दरी । मेनका आदि अप्सरा । एक योगिनी. +अच् । सोनेका भूपग (गहना) भादि बनानेहारा । मुरा, (स्त्री.) सुर+++रक पा । भए । पत्र, मुनार । मनिभारामुनिराकार जानिमे. मुराजन्, (पु.) मुनु (पूजितः) राजा (टच् नहिं | सुवर्णपृष्ठ, (त्रि.) मुनगं पृष्ठे यस्य । जिसकी पीडा होता ) । मुन्दर राजा (अच्चा राजा) । ६.। वह सोना है। कोट किया हुआ। सोनेके गिष्टवाग. देश कि जिसका स्वामी मुन्दर राजा है (नि.). मुराजीविन्, (पु.) मुरो आजीवति । आ+जी+गिनि । सुवर्णरेतस्, (पु.) मार्ग रेतः यस्य । सोने के दौरान शिवजी. जिमग्री जीविन शराबर है। शाण्डिक । कलाल. पुराप, (नि.) मुरां पिबति । पमान करनेहारा. सुययस, (सी.) मुत्र वयः अस्याः । भरठी उमरगी। प्रौढा (भरजोन) (सी.). मुरापगा, (पी.) त । देवताओंकी नही । गंगा. पुरापान, (न• ) मुरा पीपने अनेन । “पारणे स्युट्" । सुवास, (I. ) गुपु वासः । भाण गन्ध ( उगा)। और मुराका निवाम । अछी गंभाला और 3 जिस गायनगे पार पी जाती है। भादेश । पदनी । निरामबाला (रामिनासादित) (4.). "भाये गुर" राय पीना । मुरायाः पानं येषां गलं । रोशराब पीते हैं। पूर्व देशके लोग (पु.). सुयासिनी, (बी.) गुमेन गती । गुम्बा पनि । गुमसे बराती है । पिरकासता सिगा पुष बाम . मुराई (न.) मुरान (देवन् ) भी । मईभम् । नेहारी (बी.). जोवामा हरिवंदन. मुराष्ट्र (पु.).स.एच ( मुरट). गयिन. (पु.) पु वेति । पहिरडी तरह मुरूप, (२.) मुन्दा राम । गुन्दर है जिगह। जानता है। पण्डित । "गुगु विद्यते (मभ्यते). हल (R)। मुन्दर पा(नि.)। पति। साभारि" । अरछी मिलती है। गुण भरीर की (J...मदरस(२.). ( गुणा या श्री.). पुरेश्य, (5.) परः हराने (पम्प)मामा-त.। गुपित, (पु.) गीत ( गुणन wिi) भारी। हो देवाने मानि। तभी (st.). गुणों वाली श्रीको पाता है। भागि. गुरोट, (5.) मा इन्द्रः (गः रामा) दे सुधिनीता, (श्री. ) g+पि+नी+। गुशीला गो। भमाल गोभी नयनावाला (लीम)(.. मटा सान्दममी. गरोभर, (पु.) (परमईपर। गुपीर, (I.) मा गले मौ । पौन (ग) रस (मा)न्दा मंगा (.) एक. गार गाना (नि.) (प्रा.)। सुरोटन, (पु.) मरेपुरम। देवता उनम । सूब मुन्दा पर()(.). मुपेद, (5.) मरः म (द)। गुपीयं, (4.) माया IMint FREET ()। मामा प्रिो. (३र). एलर, (.) और टम। मरनन्न सामे गाल, (.) पण । MR) य(नि.)... सुटोटम, (:.) IReware गुरे?(१.) (म) मा मन्दा (नि.) Rigrar femments गरेम,(7.). www.+। " (irrit ) RTH TERो Prim!NTRA(Errr (1) गोर.(:) (nematur sĩ,{; } itast 4 rự (Remoteeth.)

। (१७) [सूफ, मुनी (40) i(नि.) रिगा पुपेण, (पू.) गा धनपति । सेनों करोति । भन्-पत्यम् । FEE मुम्दा प्रपारा । पेनस (देव)। विकित्सक (संशानियासी हदीम)। और एक धानर (बंदर). जर्मन. (3.) मन् । गत (पूर्ण)यम मुह, अय.) मुसा+कु । भतिशय (बहुतरी)। भराव ( बहुत असा)। भोर राल ( ठीक). मुशिप (.) Men भी मामात्य । मुसंस्स्त, (नि.) मु+सम्++फ मुम् च । बडे या RAMANI महिमा (बोरी) (ोशिस )से धीमादि दबके साप पग्रहुआ व्यजन (f.)(रोपनी)(बी.), (नाल्दा) आरि. करीत. 8.) पंदनात () मुसम्पद, (खो.) प्रा. | मराठी सम्पदा । मौभाग्य । PM (IR.). भी सम्पदावाला । ६० मुसमर (भदा दौलत- Bir(8.) माय । मरणे समावपाला। मंद) (दि.) गिरे परिवार (वि.) {सुमाग्य, (नि.) मुसैन साध्य । मुरा (भाराम से भीर (6.) TEN अप IN लेभा है पूरा होनेलायक । धारामसे इलाज करनेलायक मुखसे famerinter (पदसत है)। मुन्दर शोभा- पर होनेयोग्य. मुस्थ, (त्रि.) मुखेन विठति । स्थाय । मुससे रहता है। नीरोग । मुस, सुचना (पु.) भूपते । गु++ । परछी तरह ती मुनि सुनात, (नि.) मुधु मातः । मु+मा+क । जिसने मंगल दम्यासे मान किया है। अच्छी तरह नहायाहुभा. परामा रमाबनायाहुमा एक प्रत्य। मुन्दर गुमागया । (वि.) । "दाय मुथुतेन | सुस्पर्श, (नि.) मुपू सर्भः यम्य । अच्छे स्पर्शदाता पवमोचन पम्. छने भच्चा । मानन्ददायक पुरिए, (नि.) मुनि । गुमयुक्त (अटो मुक्षित, (नि.) मा+तृप्त ( राहुआ) । और विहित (किसाहुआ) प्रा. गुन्दरहित (अच्छी मलाई)। Regमा) परामिलामा (न.): ५.० भागी बीभ । एक प्रकारकी (सी.), पुरम, (पु.) गुन्दर. समः । प्रा. पतम् । शोभन (AGAR सम (TOR) बमोमा (सी.). मुहर(I.) मा हृदयं यस्य ("मित्र" के में "द" आदेश होता है)। जिसका अच्य इस सुपिर, (म.) इमिर । । "" "" होता है । मिर (दोख पार) । ज्योति में लमसे धोया ति मुरास. स्थान (घर). पुषीम, (पु. ) मुल भीमा यस्य । भरठी सीमावारा । मुदय, (वि.) मुटु हरसं यस्य । बिका भला सीतट पर्य। उसकाला और मनो (मनोहर) (नि.), हाय है। प्रशस्त मनरक (अच्छे मनवाला) प्रा.। सुपुत, (म.) मुस+मावे। वह भवम्भा (हालत अच्छा चित (न.). Em) जिममें भोगाभा नरोई अभिलाषा का मुहाल, (२०) महदेव बलम् । मित्ररूप सेना (मित्रही दोनोईया (मुपना ) देवा है" हानशून्य "वर्त "स अवस्थावाला (त्रि.). स, (मो.) सूकिए । सूति (सन्तति-औलार) । प्रसर सुमि, (सी.) मुसकिन् । पुरीत नाही मनका (सन्तान)। क्षेप (फैकना) और भैजना. संयोग होना (मिलना)। सहानसे शून्य होना । धेश सूकर, (पु.) "" इति अन्य सदं रोति । नमें गर पदापासे पूस्थहोना । भवस्थाविशेष | "मुषुप्ति मच् । को "सू" यह धीरेसे अन्द है। यह पटे सकले प्रलोने"भुति.. (सभर) । कुम्भधार (भार) । एक प्रभार पा (मृग) मुपुत्रा, (सी.) "मुपु" इति अव्यकं धन्द मायति यत्र। HINTEE प्राणवायु "मुपु" हम अन्य सब भूत, (म.) मुभम । मुन्दरस्पन (अच्छा-दा पहना)। एकही भयंसे प्रतिपादन (सन) रनेद्वारा (बाहिरकी इन्दिरसे न पहिचानेडायक आवार) का (जिसमें एकही देवताले संवोपन कैयागया है) अभ्यागता है। सबमें मेरश (पीटने लंबी मत्रोंय समूह । भे "धीम" "एसम्" इलादि। सी) के बाहर और पिता नाडियों ये सब वेदमें बहुत हैं. मध्यमें एक सक्ष्म (महीन) नारी. पन.१८ जोर है). ।

(५८) [स । - सूक्ष्म, (न. ) सून्-लन् । कतर (छल)। फरेव पारमाके | सूततनय, (पु.) सूतस्य तनयः । सूतका पुत्र । भारत साथ संबंध रखनेहारा पदार्थ । और एक अलंकार । प्रसिद्ध राधामुत कर्ण (इसे सूतने पालन कियाथा). कतक (इमली) वृक्ष । (पु.)। बहुत छोटे परिमाण | सूति, (प्रो.) सू+तिन् । प्रसय । उत्पत्ति (पैसाहोना) (माप) पाला । महीन । और मल्ल (छोटा) (त्रि.). "सूयते (कम्मते) सोमः पत्र । सू+आधारे चिन्' सूक्ष्मदर्शिन, (त्रि०) सूक्ष्मं पश्यति । गिनि सूक्ष्म सोमरस निकालनेच स्थान. (महीन भामसंबंधीविषय) को देखता है। अलन्त सूतिका, (खी०) सूक-कन् ("अ" को "") मुबुद्धि । बहुतही अच्छी युद्धि (भकिल) वाला। जिसकी नवप्रसूता श्री। नई सूई हुई औरत. बुदि शाके अप्रभाग (नोक) के समान तेज है. सूतिकागार, (न.) सतिकाया निशागयोग्य आपारे । सूक्ष्मबुद्धि, (सी.) सूरमा पुदिः । सूक्ष्म ( महीन ) पुद्धि नई सूईहूई स्त्रीके निशानयोग्य पर । प्रगूत होने का स्थान (मकिल)। अत्यन्त कठिन अर्थको समझलेनेवाली बुद्धि | सूत्थान, (नि.) सु उत्यानं (उयोगः) यस । सूक्ष्मभूत, (न.) कर्म । वेदान्तमें प्रसिद्ध अपधीकृत उद्योग (हिम्मत) बाला । चतुर । काम करने कराल (जो अमी पाँचोंसे पचीस नहि कियेगये) एपिवी भादि सूत्या, (प्रो.) यय-नि• । या भेगम पांच भूतोंके सूक्ष्म (महीन) अंशविशेष (भाग). विशेष (नहाना)। और सोमरमका पीना. सूक्ष्मैला, (स्त्री.) कर्म । धुदैठा (छोटी इलाइची) सूत्याशीच, (न:) विनिमित्त माशीनम् । गुजराती इलाइची. निमित्तसे प्राप्तहुई अपवित्रता । एला । जननार. सूप, पैशुन्य-मीतरसे बैरकरना-मुगलसोरीकरना । पुरा० ) सूत्र, मन्थन (गोडना) वेग (फोटना)। उभ• सर पेट् । सूलपति-ते । अमुमूचन-त. मक- सेट् । सूरयनि-ते । अमुपान. गलक, (नि.) मूली (मन्तपति) । मगर सूत्र, (न.) सूत्र+अन् । पक्षमापन । साधन । तात (सा)। भागा । (भा) । मन्दर (दिल-रित) से घेर कर्ता है। नियम । प्रनार । प्रमंग। शा. पिन (पुगलगोर) और बोपर (सूचना देनेदारा)। रोशेष दिसनेचा नियम. तर नेवार सत्ता मिल्ला । पिशाच । पटा । मारक प्ररि पारनामी प्रधान (मुटय) मा. गुलकण्ठ, (पु) पूर्व का गुपन, (न.) सू मयुर । ईयन (मारना) । और है। मामण (चित्र) सूत्रधार, (पु.) सूर्य पचि-दी,(.) एम्स-सा बीर । सिसा (नोट)। (तमाशा) के गाधनो पीपनमापन । कीने माधन। अपने नामरी प्रतिद्ध अण् । नाटक प्रगंगा महेश पवा। सई. मुख्य नाइदलि गर (नगर). एचिक (f.) मूरिः (तया भोवन) मि अधिसूचमिद (पु.) एवं: मसरन् (पर)। जो नई सीने म्यापार (कारी. मामे मतमो पाइता है री) है। दर। "विम" (श्री.) हामीसी श्रीबी दरवी. संगमरमर नेला. गयन्त्र,(.). सचित, (नि.) मन । चित (भा) । * (अयमा) र दिशा (मरा ). । गर, (पु.)सरी सीमुख, (.) र एमं असम (टप मु(T को) कमर free मुल है। ()। सी गान, (.). एस. (5.)-मन-वर-मांगा। (irriमरे बसे उपलगायादा, (*. (स): (A) बन्द (सर) RE (गन, (.) एप पर ((:..), (3) ( Terma(n) . सूना, (भेनुसन्ध सूना, (पी.) + (उसे "" होता है)। प्राणी- सूर्याचन्द्र-सूर्याचन्द्रमसी, (पु.) रमन (मूर्य- अपस्थान । जीवों के मारनेछ जगह । “पासूना गृह चन्दप-बदमाश) र्य और चन्दमा. स्थस्य" ही मनुः । सनया (क)। हाथी एंड । स्यालोर, (पु.)। दंग प्रकल मांसका घेवना. धुराद तेज. सुनु, (पु.) मनु । पुत्र । अनुज (छोटामाई)। सूर्याश्मन, (पु.) मंत्रियः मानिय सूर्य । भाकका रस । बाकी (कन्या)बी. वाज, पन्धर । पूर्यकान्तमानि. स्तृत, (२.) मुनृत्यति अनेन । गुस्मा । अच्छी तरह सूर्योद, (पु.) सूर्यण (सूर्यासम्मलेन) : (FAT). नाचता से । सथा भोर पियारा चना और का सूर्य हिरमे समय पहुँग हुआ बहिष. मंगल । उरावाला (नि) एम(न), (R•) परनिन् । नमन । सूप, (पु.) मुन्धेन पीयते । गु+पा+क । पृ.। मुमसे होडीके पास हिरगा । पपाय पते पीयाजाता है। मानविशेष । एक प्रकारमा नास्दा । विच" स्मृति दाल रसोई. सुगाल, (पु.) मालन् । समा(Rt. सूपकार, (पु.) सूपं करोति । अण् । पाचक । रसोइया. पणि, (पु.) मनिन । गनु । भर (wisment सूपात (न.) सूपस्य (तरसंस्कारक) म । उपकरण । (बी.) का शेर । "गणी" मी. दाल आदि माल्देको साफ करनेहारा साधन । हो । हिपति, (पी.) भावे चिन् । गमन (ग)। सूर, (पु.) सवति (प्रेरयी) कर्मणि लोकाम् ।। "वरणम" पर (Br). कन् । कोंको काममें लगाता है। सूर्य । भोर भई एयर, (I.) arre । गमन । पर। (आर) का सूर+का पण्डित । दाना. श्रीमें होता है (ग) सूरत, (त्रि.) सूरम्+क 1 पृ. दयालु । मिहान । हाल पर, मी ()... mitTTE सूरगत, (पु.). सूर्यका सारथि। मरण । गह- एमर, (५०) एवमर। Primr.) का बडाभाई. एए, (दि.)। RA ( Mr. सहित(पु.) +जिन् । सूर्य । भाका रस एक यादव। मा । जाभा । Perrrrr aartun मोर पण्डित । "रादा पश्यन्ति सूरयः"भुति सूरिन्, (पु.) सूर+णि । पण्डित । चतुर । ना. गणता, (बी.) व ना अन्य एटि, (st• ) एमपिन् । र (Mere). मंसाररवनाम"हमारा श्री तह जिगके मरा (गतून-ब) सरपकी (मामा)। "ar agre"typer बहिन (भगिनी) सूर्य, (पु.) u+पए । निर्धः । दिवापर । गरम । सेक (पु.) STAR (प).mott पारस एक देव. सूर्यकान्त, (पु.) पूर्यस्य बान्त. (भिः) । सूर्यत सेकपाज, (१०) कारेगा Arket.. रियारारिमणि । बिहारी मपि । विरा मणि जो सूरीका सम्बन्ध पाकर जलता है। ले(पु.) fruittidar मानसीसी है। परि (rar) men.) एप्रहण, (म.) एस (रामा तरामन्तभूसा) सेयन, (म.) भने । महणम् ( भामयम्)। सूरमय रासे ( रा मैं बा प्रथिवी यासे) पाना । सोविय र (भाग) हां रिसे मत सेटु. (.) kirrrrrenter) मामणरूप (मामा) न । र से (5.)हर से near एपंज, (पु.) पांच मारते । बस से | 2 In रोता नियमान मनुष बनर । "सूर्यपुत्र" मी । गुना 8 (सेतुरन्ध, (.).tick kre एपी, (क)पूर्वस्व मार्सrrential पर ARनार m. श्री ()() (और). पुत्र मन मौर सोम. पालामा .

सेतुमेदिन,] (५४०) [ सोद- सेतुमेदिन, (त्रि.) सेतुं मिनति । पुलको तोडनेवाला । सेनापति । फौजका मालिक (कप्तान) का धर्म (काम दंती वृक्ष (पु.) "सैनापत्यमुपेत्य वः" कुमारः सेत्र, (म.) सि+ष्ट्रन् । बेदी । निगढ । हयकदी. सैनिक, (पु.) सेनायां समवैति ठक् । सेनामें मिलाहुअ सेना, (स्त्री.) सि+न । सह इनेन (प्रभुणा वा) । खामी हाथी घोडा आदि । फौजी. पा प्रमुके साथ । सैन्य । चमू । फौज. सैन्धव, (न०) सिन्धुनदीसमीपे देशे भव+अण् । मिन्ट सेनाङ्ग, (न०) ६ त । हाथी, घोडा, रथ और पैदलका नदीके निकट देशमें उपजा। एक प्रकारका लवण (लून- समूह । ओर सेनाका उपकरण (साधन). नोन)। मैंधानोन । “सिंघुके निकटहुआ" अम् सेनाचर, (पु.) सेनायां चरति । चरट । सेनागामी । घोटक । घोडा (वह सिंधुदेश (समुद्र) के निकट सेनामें जानेवाला । "सेनाचरीभवदिभान" इति नैषधम्. अरब देशमें उपजा है). सेनानी, (पु.) सेना (देवसेना या) नयति । ना. सैन्धवधन, (पु. ) सैन्धवम्मेव धनः । सैन्धवशिला विप् । सेना वा देवताओंकी सेनाको लेजाता है। (संघानोनकी सिल) के समान चारों ओरसे एकरस कार्तिकेय (सेनापति)। महादेवका बडा पुत्र. खरूप। चिदानन्द (चैतन्य और आनन्द) खरूप परमेश्वर. सेनापति,(.) ६ त० । कार्तिकेय सेनाका पति। कफ्तान्. सैन्य, (पु.) सेनायां समवैति । य । सेनामें मिलता सेनामुख, (न०) ६ त० सैन्याप्र । सेनाका मुस है । मिलाहुआ हाथी घोडा आदि। “सेनाका समूह" (आगा)। हाथी घोडा आदिकी विशेषसंख्या. ध्यम् (न.). सैरन्ध्री, (खी.) सीर (हलं) धरति । ५+क-मुम्च । सेनारक्ष, (पु.) सेनां रक्षति । रक्ष+अण् । सेनाकी सीरन्ध्रः (कृपकः) तस्येदं शिल्पकर्म । अत् । तन् रक्षा करनेहारा । पहरुआ. अस्य अस्ति+अच् । डीप । हलजोतनेवाले (किसान) सेफ, (पु.) सि+फ। शेफ । पुरुषका विशेष चिन्ह । लिंग. के कामवाली । दुसरेके परमे रहनेहारी वाधीना सेवक, (पु.) सिव+बुल् । सीवनकर्ता । सीनेहारा । (अपनी इच्छापर चलनेवाली ) शिल्पकारिणी ( कारीगर) दरजी । “सेक्+ण्वुल्" । भृत्य (नौकर ) । दास स्त्री (औरत) 1 "(सैरन्ध्री )" भी होताहै. (गुलाम)। और अनुचर (त्रि.). |सैरिम, (पु.) सीरे (हले-तरहने ) इम इस शूरः । सेयधि, (पु.) सेवं दधाति । पा+कि । जिसकी सेवा +साथै अण् । हलके उठानेमें हाथोकी नाईमहातुर है। करनी पड़ती है। शंस आदि निधि । सजाना. महिष । भैसा । "सेवे सैरिभमर्दिनीमिह महालक्ष्मी"मिति सेवन, (न.) सित्-सेव् वा ल्युट् । सूई आदिसे कपडे महालक्ष्मीभ्यानम्. आदिवा जोडना । सीना । आसरालेना । भोगना । सैपाल, (न.) सेवाये (मीनागेनो उपभोगाय) गलति बांधना । पूजना । "सीव्यते अनया"+त्युदं । सूची (पर्यामोति) अच् । सेवासः । तत +साय भए । (सई) (स्त्री.) डी. जो मच्छो आदिके भोगनेके लिये बहुत है । शेवास। सेवा, (घी) सेप्थ । मजन आराधन । भोगना । (पानीका जंगाल)। साथै कन् । यही बर्ष है. भामएलेना । नाकरी. सोट, (नि.) सइ+तृच-वा इद अभाव । शान्त । सहा. सेयित, (त्रि.) सेवक । पूजागया। सेवाफियाहुआ। रागया। क्षमाशील । कतरि क (त्रि.). थासरालियागया। भोर भोगागया. सोढ, (त्रि.) सद+मृत् (पिकल्पमे इद नहिं होता)। सेप्य, (म.) सेवायत् । असत्य (पीपल)। सेवाके सहनकतां । सहारनेहारा । क्षमाशील. सायक (नि.). सोत्कण्ठ, (त्रि.) गह उन्श्या । बहुतसी हो संहिकेय, (पु.) सिंहिकायाँ भवः । मिहिका (रा गाथ। प्यारी बनुके निमनेशी इच्छा पिसार (देश) ससी) में हुआ। राहु । "उमा अग्स (राम्नान) कोन सहारनेहा. रह (एस) गहिय" यही अयं है. सोयास, (न.) sta+अपम् । गा दान। सकत, (२.) निकमाः सन्नि अन् । बर्दा रेल पियारे पचन शाय । गरे भाले पो मी है । गुन पाउरा (तबल्य नई बाहिरा सट मोरही बर्ष मना कर बोलना । पिपरन । (नारा) दुत रेटीरी अगइ (नि.), सोवृस्टन । सरावहाम्य (बहुलाई हगवा) (3.). शान्ति, (२०) मिरान्त वैनिट (१) शिसोदय, (नि.) गह उपपत्र ( अननमा पा)। न (बमबनवान्टमिय सभा । सदरमुभा । सभा । सभाला। समाया (२.) हेगरतः मा । • यन् । दबडे साप रहा.

मोदर, . म दवाया हुआ. सोदर, (पु.) मह (समान) उदरे यस्य । एक पेटवाला। सोमयाग,(पु.) गोलो IRE. एक ही पेटमें हुवा । माई (सयामाई)। भगिनी हाग माम पता (विगने - (हिन) (बी.). ६)यीच. सोदय, (पु.) गह (समाने ) उदरे यातयत् । मोमयाजिन्, (पु.) सोत. सादेश । एक पेटमें मोनेवाला । माता । ( पगाभाई)। रममे या नाग । भगिनी (बहिन) (श्री.). मोमलना, (श्री.) गम्मन् । २.rrat सोन्माद, (पु.) रह उन्मादेन । पागलपनवे, य । Bा (र). उन्मत (पागल) 1 उन्मरिण । नशे में रहनेहारा, मोमा, (पु.) मे IN सोपलप(पु.) मह उपलकेन । वही पिरतिगे दवाया में परि गया। राहु या चंद्रमा कायासे पका हुआ । शत्रुओंमे गोमवार, (पु.) Extr rink जिEArtiran. सोपाधि(क), (२.) तह उपाधिना ।दा कर । उपाधि गोमशिपिन्, (3.) Efit Iteen साथ । प्ररिलाभ (उलटवारपाना ) की भाशागे या नि । मोमrnt- गया दानादि । किसी विशेष गुणको धारण परनेदारा। गोपिना (5.) Trt भावश्यक (जी) (नि.) Trirantainment सोपान, (म.) उप+मन+भावे पण । गह रिचमानः | गोमागुन (पु.) irry , rinary उपानः (उपरिगतिः) अनेन । आिगे कर भागने निये कीमperst हैं। थानेका साधन सासरी आदिवा बाहुभा पदार्थ । गोमाता (2.) ...tr or term परगपी. पण) (.)*Arnet सोम, (पु.) पु+मन् । चन्द्रमा 1 m (Atrगोमगर (0) ne ( em) mr.. परेर । यमरा वायु (M) ( प्रभाग पानी adortrimum मेरा) देता। जल (पानी) गोममता (2) nिt Greakniantrw.. पपरामा गाभपता मोर किरण । "Er. या" पार्वती के गाप : शिवसी । पानरोग लागी गुर। मो. (fr. ) Trotram सोमगर्भ, (पु.) गोमय गर्भ (स्थानम् ) । पनामा (RIrr) rrrrror बनारस मोक्षा स्थान । रिमारमण. सोमन, (.) गीमार गायने । जन् गोमामहे । पीनेणे उजाप (v) पन्द्रा पालो गम, (.) teevr rte (नि.) (पु.). सोमतीर्थ, (.) गोयेन त.nापना तपस्यामाबितेतीप्रमte KItnmore, सोमप, (पु.)ो (METRICोमगार, (.) परम पीरा"fam" "माहीt. सोमपीति(वि), (I.)नि । गोमालक्षित (Rare r44 - •*** कामको पीरे "दि. सोमरा, (I.STERTY IT any wer र+ierrrrri- पyme forryte.smritwar पर (R)(..) गोम. (3.) (Kriyar Altrative inerterNare ... । - . M सौचिका (५४२) [सौवरित *, "सौजन्यं यश" इत्युद्भटा. . . सौचिक, (पु.) सूची (तत्कर्म सीवनं) उपजीवति- सौभरि, (पु.) एक मुनि (जिसे मच्छिओंटी क्रीड छन् । सूईका काम करके जीता है । सीनेवाला 1. दरजी. पर मोह होगया था) 'सौजन्य, (न०) सुजनस्य भावः प्यन् । भलेमानुषका सौभागिनेय, (सुभगाया अपत्यं+डक् इनादेशः । दोन होना । मुजनता । मटमानसी । और अच्छा व्यवहार । पदोंको वृद्धि होती है । मुभगा (पतिकी पियारी श्रो) का पुत्र । उसकी कन्या। (स्रो०). सौत्र, पाणिन्यादिमिः सूत्रेण (कर्मविशेषाय) पठितः+ | सौभाग्य, (न.) मुभगस्य भावः ध्यन् । द्विपदवृद्धिः अण् । पाणिनीआदि मुनिओंसे किसी विशेष कामके लिये प्रियत्वे साथै प्यन् । सिन्धूर । टण (सुहागा) सूत्रद्वारा पढाहुआ । भ्वादिविगेरह दशगणोंमें होनेवा विष्कम्भादिमें चौया योग । पु० । अच्छी किस्मत (न.) लोंसे भिन्न केवल सूत्रमें पढे हुए धातु. सौमिक, (पु.) सौभं कामचारिपुर-तग्निर्माण) शिल्प सौत्रामणी,(स्त्री.) मुत्रामा (इन्द्रः) देवता मस्य+अण् । अस्स+ठण् । कामचारिपुर (अपनी इच्छासे विचरनेहार जिसका देवता इन्द्र है । एक प्रकारका यज्ञ इसीमें ब्राह्मणों मगर) को रचना करनेके व्यापारको जानेहारा । ऐन्द्र कोमी मुरापान-शराबका पीना विहित (वेदमें कहा हुआ) जालिका मदारी. है। “सोनामग्या मुरां पिबेत्" इति श्रुतिः.' सौमनस्य, (न• ) मुमनसो भावः+ध्यम् । अच्छे मनका सौदामनी, (बी०) सुदामा (पर्वतमेदः) तत्प्रान्तभव- होना । प्रशस्तचित्तता । धाद्धका पिण्ड देने के पीछे त्वात अण् । विद्युत् ( विजली)। यह बिलारके मुदामा ब्राह्मणके हाथमें फूल देनेका मन्त्र. नाम पर्वतके एक देशमें उत्पन्न हुई। और एक अप्सरा । सौमित्र, (त्रि.) पु• मुमित्रायां भवः+अ+इन् वा । ऐरावतहाथीकी त्री "सौदानी” (नि.) सुमित्रामें हुआ । लक्ष्मण. सौदायिक, (न० ) मुदायात् (बन्धुकुलात् ) आगतः+3ण् । सौम्य, (त्रि.) मोमो देवता अस्प+य्यण् । सोम (चन्द्रमा) बन्धुकुल (माता-पिता-भाई+पति ) से आया । एकप्रका- देवतावाला (जिसका देवता चन्द्रमा है)। "मोम-दा-यः। रका श्रीधन (जो पति आदिसे पाया है). साथै अण् । चन्द्रमाके समान । मनोहर । गुन्दर । सौदास, (३०) चन्द्रवंशी कल्माषपाद नामक राजा. (नि.)। युध। पु.)। शुभप्रह। आदि समराशि। सोमरम पीनेवाला मानण (पु.). सौध, (पु० न) मुधया (लेपनद्रव्येण) रकम् अण् । सौम्यग्रह, (पु.) कर्म• ज्योतिष्में चन्द्र-युध-गुरु-शुक- राजसदन मेद । एक प्रकारका राजाका महल । मुधा. रूप शुभग्रह. सम्बन्धी (अमृतका) (वि.). सौनिक, (पु.) सूना (वध्यस्थानं ) तदुपलक्षितमासादि सौम्यनामन्, (त्रि.) सौम्यं नाम यस्य । गुमदायक पाप्यारे मामवाला. पण्यं अस्स+ठण् । पातकरने की जगह (उस्मे पहिचाना सौर (पु.) सूरम्य इदम् । सूरो देवता अप+अ वा ! । गया मांसआदि) है सौदा-व्यापार जिसका । मांस (मास) को कयविक्रय (मोल लेना और वेचना सरीद सूर्यका पुत्र । शनैधर । यमराज । सूर्यदेवतापाला । फरोल) करके जीनेहारा । व्याध (शकारी)। कसाई. सौरम, (२.) मुरमेषिः । अच्छागन्ध । मुगन्धीवाला । (नि.)। नियां भी । "मारी". सौन्दर्य, (न.) मुन्दरस भावःस्प्यम् । अच् । अण् ा । केगर (न.). मनोहरला । मुन्दरता । सूब सूरती । अंगोंकी ठीक रथना. | सौरमेय, (३. ) गुरमेरपयंदक (एय) गो । श्रीमें सौपर्ण, (न.) गुष्ट पानि-तदूपं अहंति+अण् । अच्छे टीप् । “तस्सा इदं तु" "गुरमिसम्बन्धी" (गोरा) पत्ताके रंगवाली । मरकनमनि । पना. (त्रि.). सापर्णेय, (पु.) मुपाः (विननाया ) अपसम्+टन् । सौरलोक, (पु.) गौर होडः । सूर्य का सौर (गाजी बिनतारी सन्नान गरा. दुनिया). सौतिक, (नि.) गुप्तिकाले (रात्री) माउन् । रातमें सौराष्ट्र, (पु.) मुषु राष्ट्र मन्म अगिमग ! विप हुआ। पनी लड़ाई। गोयेहुओं के विषयमें किया हुआ मा राज है । एकदेश (सुगन)। "पुराने मा" अन्य । महाभारत एपर्व (हिस्सा). मम् । गुराष्ट्रदेश में हुआ। (नि.) एnि (..). सोम, (२०) मा एवंद्र को मान । मायामा सीरिक, (वि.) मुबं (पार निर्माण ) Art मन् । भलीमानि मा होसमें प्रसारित है। एम हरि- अन्य+यविषय कम ताम्बर वन बनाया है। धन्दप बरामनगर, समय पात्र निमांग रमेश, सीमा (5.) मुभायां माः मम् । मुमदार । सालिक, (I.) खनिकरण +rt ! भयो अनिमन्नु रने पर। पुरोहिन (म माया). चारता । 1 [सम्बरम, । Hier-::ension) Art (I.) । विशेष मंग। मम्मा । rupur m Inter जानी विगन. art (IIT) Mगनन, (..) तुर पर (माराज) बाल (मेष) मा. tiretr.Trim) TRIVARTANPUR, (I.) यी मनको पीता है। after (Primart गर गम् - Info (गत शारदा) । time. (R.) rritam प्रो रसा हो । "पदी" गनप, (५. सन किती ! - सनको पीता rintm. (or) (MM) दम रोश। ३)पाटाहाबला । यो रार. ग्लनयर, (पु.).सनोपयोगा । मोदेखनौका पादर(.) तो भार मन I AM Kyn. (e) CUT HIN... तनपुग्यम्-गृत-सिण, (२.) मानस मुराम् । सन (इ) मुरा (यूपी), म. (I.रत (IT TER) नापित, (.marg मेप । बादल । मोया। me (परसापुर). नियमांत और रोग. न, (.)पुर । नाना । एनालगाग, (पु.) सनयो: बारागः । सीके लनोंपर नगाशमान भासिनोच लेप. re. (S.ने (गार पम् । नायर, (न.) सनयो. मन्तरे । सुनौका मध्य ५. शामा। (जीम) । पायी. NELinामगद । सानाभोग, (पु.) ER.सन (मम्मा) मी परि- artim । Timedia पर। पूर्णता पलावर mer : RE Hn (दिरमा ) । "Teri नांशुकम, (न. सनयोः भगुतम् । सनोलो टालने- दशामिल"dtra. पाना बत्र (m). , s.) मा भारः । अापम् स्तरित, (२०) उन्माये छ। मेए (बादल }का सन्द । १ बचता नाशीका स्थान (राना), और कोश भादिका साद । "कमि " वाला अपनी. पाय, (नि.) पन्दु मुन (गिरगया)। गलित। लम्प, (10) ने गायत् । लन हुआ। ६५. are I मराभा । रामभा र थलागया । "भाये " स्तन्धरोमन, (५.) सम्पानि रोमानि यस । पके पटना (म.). रोमाल्याएकर । भा. साम्म, पोटपरना (प्रपात) या उभ• स. सेट् । तम्घलोयन, (नि.) समे छोयने या । न हिलने- tories मम्मी-भरकम्भिz. पाली भापकाला। निरीष न फडानेवाले नेवाला विवार (पटना) R. भा• पर• पेद । स्त. (देवताओंका नेत्र ऐसा ही होता है). परस्पदिए. स्तम्, लम्भन (रोकना) होना- अकरना कियाको स्पद, पालना । मा. प. स. सेर। सतही। रोना । एक भ्वा० भा• पेद । इदित् । सम्भवे। बरवाटीद भवभिप. सलना (40) स्वल्लभाये स्युर । बटन (चलना )तम, (I.) पासम्बन् । पृ. । शारी। सूप (पास)। गिरना. गुच्छालारोबा. पलित, (+) मा टेपुर (टपुट) आदिन येस्तारमा (पु.) सम्मे रमते । मक समा. प्रान हर बीरी (पहाडणे) मापासे गिरगा। मादि शास-गरमा का मामें रमण तो है (ता मार गिरना | " "चलाहुभा (त्रि.). है) सी. इतन, भेषधम (मादलकी भाारमा) पु. उम• स्तम्भ, रोधन (रोकना) । प्रया• खा. ५. स. सेट। छरदसतिचे मारतू. कावारे लालमोविनसभा मनमीत.

(५४) (Ameer । । स्तन्म, (.) मम्नान । स्थमा (पाररांग यम्ब)। तेपिन्, (त्रि.) सेन ससि असाहन। पय- "मात्र पन्बा होन्न । रमना. रक। दूपरेस पार्ष पुरानेहारा । "सो. में". स्तन्मन, (न.) सम्म् (वारना )"भरे स्तुद" जस्तोक, (पु.) मुसप । म (A) औरया- परम । दरहित करना । रोकदेना । "रगे स्तुर" किन्तु (पानी से )। अल (योग) (1.). टन र बन्ने सपन एक प्रयोग (ममत)। स्तोत्र, (न. ) सु+ट्रन् । सा तरीक। पगई। "मम्मानिन्नु" मानदेवके पांच सामने एक. स्लर, (5.) अ । प्रांगा । और ही (तारीक, स्तोम, (पु.) तुम्+पम् । गान (1) भारत को कर्म और सभात मादि सुती ना. m). मक, (.) युन् • वा । गुना. पूरा करने की पदविशेष (मिमा उनी) मे सामवेद """"प्रभी। रोना सम्मन. मर, (नि.)। मुनिगरा। ब करने. करनेय. स्तोम्, आत्मगुगारिकरण (भपने गुगोप्रा काला) मिन्ति, (न.) मिरे ।मता । गोलारन । Y• उभ• साल से लोमसीते। गोमाल. बरस (न दिन्ना) (निभा) स्लोम, (पु.) स्पोम्पम् । शुभमन्ना । गमा।। गरम । " " जनमत (जो हितमा नह) और ससा (ईसारी)। म (भाषा)। पन । गा। स (लेजी)। गौर कोहे हा ram (4.)। दुर. (3.) ।गा ।गुती का हुआ। पा (टेग) (1.). PIrrr. रुपान, (न.) मारेल ("" "" am मि.(...) IRE. Hiगा। है)।मेह (निना)। पनता (गगन)। भी (लामा) । माता । और प्रभावन ।। पर,(.)। पानुरामा "क" मंडनिकारक (47 रनेदा)। मोर गय करनेवाला (.). पुस (Per)... । मुगुनी न्य, महती ( होना) मोर पनि ( भाषामा)। मा... भनिहालीगीत (::MIRMAfबी, (श्री. मनु । गोपिए । नागे । भैरण । जनानी. *Int() मान । गा। क (7) मिला । पीगित (न.) विपा मार दी। नमानापोनिगमग. ke tar)द. मा. मन:। लीगी(T.) मोरी मनो भोर है। . " (i) M.PE (ITI)। मानिन, ( T• ) fanfat Afnai ...... Frma (famit wist) मामrt: write | were. • न. म. मायन, (4.) tarurat (() र.)er. 14.4. में। सापर्म, (1.).1 (* प्रोत्री, (क) Rrtal •rk inthartar () क. श्रम(:.) In Tr...." १ . Fee : .. २idh Fmen (TRAINE toty Yami antetwa A. ruarthr.

बी.) (५४५) [स्थानीय, - .. । सीलिए (पु.) निया NAAT (तत्काय) मा स्थपुट, (नि.) निति । स्था+ । स्थं पुटं यत्र । पिपमो. पासिंग विधान हिमागमामाकरणमें बहे हुए सरपरवाला मतप्रदेश रेती मोर उघी जगह | "स्थपुटगतमपि कव्य. विष । स्वीकारिन (नशान)(म.). मयममति" इति मालतीमाधषम् । कठिन स्थानमें विचर- मीया (पु.)ीशीभूत । बीके भाधीन हुभा. नेहारा जीव (पु.). वीविधेय, (पु.)... लोके मसमें रहनेहारा. स्थल, स्थान (ठहरना) भ्वा.प. अक सेद् । स्थलति । भीमण, (म.) विमा संग्रहण कर । एक प्रवार भरपाठीत. सिर (Mer), जिधर्भ वगरेकी श्रीको हरण किया | स्थल, (म.बी.) स्थल्भव । जलरो रहित अहनिम जाता है। खीरा पररना. (जो बनावटी माहि खाभाषिक) पृथिवीका भाग । स्त्रील. खीराम, (म.) कोण सभा बिमभं (नपुंसक होता पक्षमें जीत्। "बनस्थली मर्मरपत्रमोक्षा" इति कुमारः। ६) खिोल समाज. थल । बनावटी भूभाग (न.). बीसेवा (पी.) तापीय संभोग। भोगके द्वारा स्थलयमन, (नस्थलस्य परम । पल (पिवी-जमीन) मारीकी गेषा. कामार्ग (रावा). श्रण, (न.) बिया इमम् । मम् । श्रीका सभाव । और : स्थलारविन्दम्-कमल कमलिनी, (न.) स्थलस्य अरवि. बियोबा रामूर (j)।बीय भाषामे रहनेहारा । भौर | दम् । एल (पृथिवीपर उसन हुभा)का कमलफूल. श्रील(नि.). | स्थलेशय, (पु.) स्थले शेते । शी+अन् । अल समा । स्था (नि.) था। स्थिीिपील । टदरनेपाला । (प्रायः राह (सूअर) और (एक) प्रकारका हरिण) आदि यह किसी पदके पीछेदी लगता है)-पदस्थ । मार्गस्थ । पशु । यलपर सोनेवाला (नि.). निष्टाय । रहस्थ. स्थविर, (म.) स्था+किर। "स्थव" का आदेश । शैलेय- म्यर, एमरण (दापना) मा. पर. 8. सेट् । स्थगति । नामी गन्धन्य । चार मुरावाला मामा (पु.)। भवल। अरणगीद. सिरान हिलगेवाला और पूरा (त्रि.) महाधावणी स्थगन, (२.)ग्रयुदरमाधान पना. स्थगित, (नि.) स्थग+ । बालरोहित । दीपा- स्थयिष्ठ, (वि.) अतिशयेन भूल+छन् । "ल"का लोप हुभा । जिआमा. होनेपर गुण हुआ। भतिाद। बहुत चूम। "य" स्थगी, (श्री.) सम्यते अनया । "पम्" के वर्षमें "" होनेपर "स्थवीमान्" मी सी भर्प (सी.). । दाता है इसे । तामूल (पान)का पान । स्थाणु, (पु.) स्थान | पृ. पलम् । शिवगी । भौर शाखा पानामा (डाली ) से रहितास (टौंठ) । पूटा (मि.). स्थण्डिल, (न.) स्थलाल-न । "" को ":" रोता | स्थान, (पु.) स्थास्युट् । स्थिति (ठहरना)। रामानता। है। पावर पीना अंगन । यडा (जो थारोंगोरगे अवकाश (जगह) । राति (रहना)। अन्यकी सन्धि । समान हो)। "निषेदुषी स्थपिल एप केवले" इति कुमार । भाजन (वर्तन)। निकट (पाग)। व्याकरण प्रमंग यहरे लिये परकार किया था स्थान । और होमके लिये (धादिश्यमान "यण" आदिका कारण स्वरूप "र" पुण्डके प्रतिनिधि ( उसकी जगह) सहपसे पालुध (रेत) आदि)। जगह मादिरे करनेलायक मण्डलविशेष । “निरस भौर नैमित्तिक | स्थानाध्यक्ष, (पु.) स्थानस्य गप्पदाः । स्थानमा सामी बम स्थन्डिलपरही करना चाहिये, वह एक हाथभर रेतय (मालिक)। निरीक्षक । लिगका मधिपारी. बनावे" यातन्त्रका शिक्षान्त. स्थानिक (त्रि.) स्याने अधिस्त टक् । स्थानाप्पए। स्थण्डिलशापिन्, (.) स्थगिले (यत्वरे ) वे स्थानाधिपति । स्थान मालिक (मतवाद) गिनि । प्रतके लिये पत्र (चौतामांगन | स्थानिन्, (पि.) स्थान बस्स अस्ति त्यापेन । स्थान चारोंभोरसे तुली जगह पर सोनेवाला । थोपर सोनेवाला. रक्षक। स्थान (पह) रक्षा करनेहाय। स्थान स्थण्डिलेशय, (पु.) स्थण्डिले शेते । अच-भलक समा। (प्रसंगः)। अखि अर्षे पनि । प्याररणमें बारिश्यमान प्रतके लिये पवरपर सोनेवाला. "यम्" भारिसकारण "र" आदि। "स्थानिस्तदेयोड- स्थपति, (पु.) स्था। उसका पति । गुपी (अन्तः नाविधी" इति पाणिनिः. पुरमें रहनेहारा हा प्रामण)। सिलिलमेद । एप्रनर- स्थानीय, (म.) स्थीयते अस्मिन् । स्था+भाधारे बीयर | नकारीगर । रामा। इर। अधीरा (मालिक)। "r. जहां राते हैं। मगर (मुप)। "सान (स.). सतिसर" नामक यज्ञ करनेदारा। बहुत अच्चा । जि स्थानस "निसाम परतावा देस। (त्रि.). स्थानाला (नि.).

राने,] (ग्निग्ध, . कास्त. स्थाने, (भव्य.) स्थान । योग्यता । और आचिल (म. स्थिरधी, (त्रि.) स्थिरा धीः यस्य । अवल (न हिलने नातियपन)। ठीक है । सल । थरावरी. पाली-पो निधयवाली )बुद्धिवाला. स्थापन, (न.) स्थानि ल्युत् । टिकाना। आरोपण। स्थिरमति, (खो.) स्थिरा मतिः। पकी भकिल ।। चढाना (यमकरना)। और "पुंसवन" नाम.गर्भका स्थिरचित्त । पके दिलवाला । सिरयुद्धिवाला (नि.)। संस्कार-युच् । “स्थापना" यही अर्ध । रसना. "अनिकेतः स्थिरमतिः" इति गीता. स्थापित, (नि.) स्थानिस । निधित पका। निवे. स्थिरयौवन, (न) स्थिरे यौवनं (पही जानी)। बहुत गित (टीकायाहुआ-रक्सागया)। और न्यस्त. देरतक. रहनेवाला.जीवन | "स्थिर यौरनं अस्स" पसी स्थामन्, (न.) स्था+मनिन् । राति । ताकन । शिरता। जवानीवाला। विद्याधर आदि (एक प्रकारकी देवना)। पकिआई.. देरतक रहनेवाले यौवन (जोगनाला (नि.) स्थायिन् , (नि.) स्था+तिनि । स्थितिशील । रहनेवाला । स्थिरायुस्, (पु.) स्थिर आयुः यस । देला स्थानी अलंकारमें रसके अनुकूल "रति" आदिभाव (पु.). (कायम) रहनेसे पड़ी उमरवाला । शामली (निंबल). स्थायुफ, (त्रि.) स्था+उछन् । स्थितिशील (ठहरनेवाला)। एक प्रामाधिपत (एक गांवका मालिक) (पु.). रथूल, यहण (बदना) पु• उभ. सा. मेट् । स्यूनयनि-ते स्थाल, (न.) स्थी (विष्टी) भन्नादि भय । जिममें | स्थूल, (नि.) स्थलाभन् । पीवर । मोटा और समूह माम भादि रसया जाता है । याल (भभपात्र)। पाक- स्थय, (पु.) स्थीयते (पिकादनिर्णायकाया) भनी । पात्र (देचर-हांसी)। पाली । बीर. स्था+यत् । जिसे किसी पिवार (मगडे) को मिटाने के म्यालीपुलाक, (पु.) स्थाजीरथाः पुलागः (सण्गुणः) लिये स्थिर (कायम) किया जाता है। विवादमें सेशका पनि समन् । पालीके पारत जिगमें है। एक निर्णय करनेहारा। जूरी। और पुरोहित । शिरा (नि.). प्रारम न्याय जमे देसकसी एकचावल का पाक देश स्य, (नि.) अनिशयेन स्थिर.। ईयगु। सादेशः । परपरे पोरा भनुमान दोजाता है। यदि बहुत पका. दिने एकदाना मलमया तो सारेही गहुए रामगने, | स्थैर्य, (न.) स्थिरस्य भारतम्यम् । सिरता । परिपाई। व भागा प्रयोग एकही समयपर हुभा है. मजबूती. एखापर, (f.) परम् । भयपन (जो हिलता नहि)। स्थौल्य, (ग) स्थूराम्य भाव+म्यम् । पीपरा । मोटाई । FAT (बदाम) (एस) आदि। मोटापन. cिtres (पु.)। पनुप Fra (न. ). अपन, (न.) मा+णिन्-पुकास्युर। शर मारिणे गणित स्थापि, (३०) भार मान । वृक्षणा। करना ।हाना । मान. रतारी । (गर) परम बीतने पर होता है. अय, (पु.) यम । परण । दारण । बहना जना. ग्यालर, (5.) म स कन् । अलंकार (गहना. मातक, (पु.) मा+मारे फ। भानं गम भनिन् । गर)ी. वैर पाने के अनन्तर गृहस्थाश्रममें सोने के लिये स्प(r.) स्थए। स्थितिशील । दिराहा । मान (न्हाना) करनेहारा । गुरुके पाग पराममा हात. रहे परमें आने नियमान करनेवाला. स्थित, (f.)Trafeez। हिमामाआ। सातकमत, ( बिउ वि. प्रकार"अलामे व न्यायमा परे।" पिनास (f.) समा मटि स्मृतः far (RRB) रा. मान, (न.) मास्यु । बोरन (TEL स्थिति (4) refreeमका (नियम)मय. पर ( मरामानीय, (त्रि.) मनाय छ । मनोitt. (E) (मापन ) (2) मर स्थिर, (5.) । (र)। टेदन | सायु, ( श्री. ) (PAN) को मन TIMIRATRIKA firi Mantri m(ced cheta. (E) (FRatio(fter three निर(.) र समान fun) (ATTA) (1.). FREETIN (:.). न.)त. माना जाने का । .

किता (५४) [स्कृति, पदी" कुमार. - । निग्धता, (.) मिग्धम भत्रः । मेह । चिकनाई। स्पृहयालु, (नि.) Z+भालन् । स्पृहाशील । चाहनेवाला. प्रियता. स्पृहा, (स्त्री) स्पृह अच्छा (पाह)। "मेथुने स्पृहा. मुत, (पु.): । क्षरित । पहा हुमा जलआदि. मनपा (श्री) मा । पुत्रवधू । पुरी की। बहु । नं. स्पा, (त्रि.) रहस्यत् । वाञ्छनीय । चाहनेलायक मंद.(पु.) मिपम । प्रेम (पिसार )। तेलआदि | सफद, विशीर्णता ( फटना ) अक• भ्या. पर• सेट् । एफ- रस रिशेष । म्यायमें गुणविशेष (जिस्मे एक पदार्य जल्दी रति । भस्फटीत् । अरफाटीन्. जालता है). स्फटि (टी) क, (पु.) स्फटिरि (री) व । इषार्थे कन्। अपन, (म.) मिमि स्युट् । तेल आदिरा मलना. ' इसनामकी मणि सूर्यकान्तमणि (आनशीशीशा)। पिल्लीर । मेदभ (बी.) . प (बलगम ) नामी शरीरका साथै भम् । “स्फटिक " यही अर्थ (न). धनुरिरोप । घेदका पात्र । प्रेमा स्थान. स्फाटिकाचल, (पु.) स्फटिक इस शुभ्र. अचल.। निहोरके दिन, (पु.) मि+गिनि । वस (मित्र)। बंधु । मेह गमान चिश पर्यंता फैलासपर्वत (पहाड)1 विटोरका पहाड. बाला (नि.) स्फार, वृद्धि (बदना) भ्वा० मा० अक० सेट् । फायति । स्पद्, पाम (योडागा कापना)। भ्वा० आ• अक. अस्फायि । भरकाविष्ट । स्फीतः, मेट् । इन्दि ( स्पन्दते ) । मन्दिष्ट. स्फाति (सी.) स्फाय+फिन् । यदि ( पढना ). स्पन्द, (पु.) सदिक्पम् । पिचरन । योगसा हिलना । स्फार, (पु.) फायन । वर्णयुदुद । सोनेका पुलबुला। पोजसा कापना । एक प्रकार किया। आरा फटका और विपुल (चौडा)। चमकाहुआ । और बहुत (त्रि.). नाआदि. स्फारण, (न.) फर+णिच् (स्कारादेश) स्युट् । विका- स्पध, (हर्ष, बहुत प्राप्त होना )। (पराभिभवेच्छा ! शन-खिलाना. दूसरेको दबाने की इच्छा करना)। भ्वा• आ• सका स्फिच्, (वि.) स्काय्+डिन् । कटिदेश । नितम्ब । चूतर रोद । सर्वते । अस्सर्धिट. स्किर, (नि.) स्फय्+किरच् । प्रचुर (बहुत)। और स्पर्धा, (श्री. ) स्पर्ध+म। संहा। सुशी। दूसरेको विस्तृत । बढाहुआ. दखानेकी इच्छा । साम्य । बराबरी । उन्नति । तरकी. स्फुट्, विशश ( खिलना) । नुदा• अक० सेट् । स्फुटति । स्पनी, प्रहण (पकडना)। और तेय (चुराना )। चु• अस्फुटीत् । पुस्फोट. उ.रा. सेट् । पर्ययति-ते। अपपर्शत्-न. स्फुट, (नि.) स्फुट+क । विकसित । सिलाहुआ।व्यक्त पर्स, (पु.) शं-रश भन् पम् वा । न्यायमें स्वमिन्द्रिय- जाहिर)। भिन्न (इटगया)। और विश। ज्योतिपमें प्रान (स्वचा चमडा इन्द्रियसे जिसका प्रत्यक्ष होता है) मेषादि राशिओंके अशविशेषोंमें स्थित हो रहे सूर्यादि- गुणविशेष । पटना रोग । युद्ध (जग)। गुमचर हिरा मह (पु.) सांपका फन (स्त्री.). दुभा दूत)। भौर उपपातक (छोटा पातक वायु (हवा) स्फुटन, (न.) स्फुटस्युत् । विकफन (सिलना )। फूट- (पु.) नेवासा (त्रि.) "क" से ले "म"तकवर्ण (पु.). ना। विदलीभाव 1 फटकर निकलना. स्पथ, अन्य (गांठना ) और बांधना भ्वा• उभ• सकरपुर, सूर्ति (फुरना )। तु.प. म. सेट् । हरति । रोट् । सशनि-ते. अस्फुरीत् । पुस्फोर. स्परा, (पु.) सशअन् । घर । दूत । युर (जंग)। स्फुरण, (न.) फुर+युत् । ईपन पन्दन । योगमा को- गुप्तचर (जासूद). पना+यु । (खी.) वही अर्थ. स्पष्ट, (वि.) सश्रू । नि। व्यक्त । प्रस्ट स्फुट । साफ. स्फुर्ज, वनशब्द (मादल के गाजने की आवाज करना )भ्या. स्पर, (त्रि.)+क । तसर्य। एआहुआ "भावे प. अ. सेट् । जति । अस्फूर्भात. क"एना (न.). स्फुल, (न.) स्फुत् । हिलमा-कोपनाकर पर। स्पृटास्सृष्टि, (न.) भावे की नस्पृहलिन् । स्पृष्टिच अस्पृष्टिय द्वयोः समाहार' । सासर्थ । छूना और स्फुलिङ्ग (पु.ली.) स्कुल्हा । "ए" यह धीमी नएना. आवाज निस्तदीजिस्ते।तिनि+पम् । पृ.बाबाग- 'गृह, इच्दा (चाहना)। कु.उ. सक• सेट् । पति की कनी.. अपम्पृहद-त. फर्ज, (पु.)। पापातमन्द । जरिने. स्पृहणीय, (नि.) भनीयर । वाग्छनीय ( याहने. लायक) और श्लाघ्य (मराहनेगायक), "अहो बनागि स्फति, (पी.) हाफर का छिन् । पुरना । सिक स्पृहणीयवीर्यः" इति कुमार, ना। चमरनेवाटी अदिउ प्रविभा. - की आवाज.

स्फूर्तिमन, (५४८) [थमन्तक, । । स्फूर्तिमत्, (पु.) स्फूतिः अस्ति अस्य+मनुप् । पाशुपत सरासव, (पु.) सरोद्दीपक आसवः । कामको महकाने- नामी एक प्रकारका शिवभक्त प्रतिभावाला । फुर्तिवाला। हारामय) एक प्रकारका जो आपपर (नहिं चढाया गया)। और सिलाहुआ (नि.) लाला (मुखकी लार)। कामिओंका उसके पीनेसे काम स्फेयर, (नि.) अतिशयेन रिफरः । इयम् । एकादेशः । बडा चमता है. अतिप्रचुर। पहुतही । स्त्री०में डीप् । ईष्ठन् । “स्फेटः" | स्मार्त, (त्रि.) स्मृती विहितः। स्मृति पैत्ति-अधीते वा यही अर्थ. +अम् । धर्मशास्त्रमें विधान किया हुआ मानआदि। स्मृति- स्फोट, (पु.) स्फुटति अर्थः यस्मात् । स्फुटक्यम् । जिस्से तिशास्त्रके जाने वा पढनेहारा. अर्थ फूटता (निकलता) है। अर्थको जतलानेहारा अा. | सि अनादर-और विस्मय ( हैरान होना) (७० आ० स० रोंसे पहिचानागया पूरा शन्दविशेप । वामगविशेष । फोडा. सेट्) । स्माययते । असिस्मयत । दूसरेसे विस्मय होनेपर स्फोटक, (पु.) स्फुट्+ण्वुल् । धणविशेष (फोडा)। और "साययति" ऐसाही होता है । यह भ्वादिमेंमी होता है विदारक ( फाडनेहारा ) फोडनेवाला. और अनिद है । स्सयते । अस्मेष्ट. स्फोटन, (न.) स्फुट्ल्यु । विदारण ( फाडना )। और | लित, (न) स्मि+च । ईपक्षास्य । मोडासा हसना । विक. विकाशन (खिलाना)। मणिको वेधनकरनेका एक प्रका• सित । सिलाहुआ। और हैरान हुआ ( विस्मित ) (वि.). रका यन्त्र (स्त्री.). स्मृ-स्मरण, (याद करना)। भ्वा० प. सक. अनिद्. स्फोटायन, (पु.) स्फोट एव अयनं यस्य । व्याकरणके जानेहारा एक मुनि (जो शब्दके अर्थको प्रणीति ", स्मृत, (त्रि.) स्मृ+छ । कृतस्मरण । याद किया हुआ। स्मृतिविषय. हीको खीकार कर्ता है) । “भवद् स्फोटायनस्य" इति स्मृति, (स्त्री. ) स्मृक्तिन् । अनुभव कीहुई वनुका पाणिनिः. उद्बोधसहकार ( उस चीजको जागादेनेहारा कारण) स्फ्य, (न.) स्फास्यत् । नि० । सग (तर्वारके स्वरू. से संस्कारके आधीन ज्ञानविशेष । यादसारी। याददान। पमें एक प्रकारका यशके लिये काष्ठ (लकडी ). "मर्यते वेदधर्मः अनेन " करणे क्तिन् । सरण किया- स्म, (अव्य.) स्मि+ड । अतीत (पीतगया)। पादका पूरा जाता है वेदका धर्म जिस्से । धर्मका उपदेश करनेहारा शास्त्र । वेदसम्बन्धी अर्थक अनुभवसे उत्पन्न हुआ। वेदके सय, (पु.) सि+अच् । गर्व । अहंकार (मगरूरी)। और अर्थको अनुवाद (कहेहुए अर्थको फिर कहना किसी दूसरी अद्भुत (आश्चर्य). आदि भाषामें ) करनेहारा मुनिओंसे रवाहुआ वाक्यरूप सर, (पु.) सरति प्रियं अनेन । स्मृ+अच् । स्मरणकर्ता शान।"वेदोऽसिलो धर्ममूलं स्मृतिशीले य तद्विदाम्" मनु है पियारेको इस्से । कामदेव । “भावे अप्" याद करना. स्मृतिहेतु, (पु.) स्मृतिका कारण । सस्कार । यासनाप सरगृह, (न.) सरस्य गृहं इव । कामदेवका मानों पर गुणविशेष. है। स्त्रीका एक प्रकारका विशेष चिन्ह । स्मरमन्दिर । स्मेर, (नि.) मिरन् । विकसित । खिलाहुआ । थोडा- योनि । कुस । भग. सरण, (न.) स्मृल्युट् । एक प्रकारका ज्ञान जो जानी- स्यव, (पु.) सन्दक । वेग । जोर. सा हसरहा । "महाजनः स्मेरमुखो भविष्यति" कुमारः. हुई वस्तुके अनुभवाधीन संस्कारसे उत्पन्न होता है अर्थात् स्यन्द, सवण (पहना )। भ्वा० आ• छह लट्-सम् उद्बोधक सहकारसे उपजा)। याद करना । सोचना. उभ• अक. वेद । स्यन्दते । अस्पद अस्यन्दिर-असन्त. सरदशा, (खो.) स्मरकृता दश । कामिओंकी कामदेवसे स्यन्द, (पु.) स्यन्द्धम् । क्षरण । बहाना । चूना । वगना गई " नयनप्रीति" ( आखका पियार आदि दसदा स्पन्दन, (म.) स्पन्द भावे ल्युत् । क्षरण । बहना । "कर्तरि (हाउत). ल्यु"। अल (पानी) न.। रय । और तिनिसास (पु.). सरयल्लम, (पु.) सरस्य घनमः । कामदेवका प्यारा । स्यन्दनारोह, (पु.) स्पन्दनं आरोहति ( युद्धार्थ ) वसन्त ऋतु. आ+रुह अन् । रथपर चढकर लड़ाई करनेहारा. सरदर, मरे हरति (माशयति ) । हाल । कामदेवको स्थन्दिन्, (नि.) स्यन्द्+णिनि प्रसवी । पहनेवाला । लाला नाश का है। महादेव "स्मरमर्दन" मी. (पर) प्. मराकुल, भानुर-अति-उग्मुक, (नि.) स्मरेण आकुलः। सत्र, (नि.) स्यन्दुक । युत । वहाहुआ (पानी आदि) कामदेवसे पाल (पवण्या) हुआ. स्थत, शदारना । भ्या• पर.अ. सेट् । म्पमति । भ. मरा, (:) मरस बार इस । कामदेवका मानों स्वमीद, अधुरा है (इत्तेजक होनेसे ) । नस ( नानून-लहूं)। जा-यमन्तक, (पु.) स्यम् मच्-कत् । भीरपणी के हाथी भा) मसाले भात (बोट) से निओन काम भडकना है. एक मगि ( उसके बहुनही गुग ). करना. - ( ५४९) गिन स्यूत, (नि.) निष्क । मूई आदिसे सीआगया । कपास्रोतोधन, (न.) सोनी मां। मनोक प्राrt आदि । सूतका मनाहुआ पात्र (पु.) "सोत" यही अर्थ, निकट मावीरदेशमें हुआ अन । गीरदेखन पत्र । स्यत्ति, (सी• ) सिक्तिन् । परंआदिसे कपडेका सीवन मुरया. (सीना). स्रोतोयदा, (श्री.) सोनमा वाल (ति)। संसन, (२०) संग+णि स्युर । अपर गयेहुए। नीचे अन् । प्रारम्प दी है। मी (सा). गिराना नीचे गिराना, स, (न.) सन् । पन (दोन)। (7) संसिन, (मि.) म्+णिनि । अध पतनशील । नीचे भोर गति (विरादरीग) (पु.)ी (मा) गिरनेवाला. (त्रि.) "म" और "अमीर" Art वग्यत, (वि.) मक् (माल्य) अति भसम्मनु । "म" को गर्वनाममा हो जाती है. "" । वयम् । मालावाला । मालापहिरेहुए । “घग्वी" स्वकर्मन्, (१०) मय । अपने RT धन, (बी.) यज्यते । सञ्+धिन् । नि.1 माला । माय. पर्म "समनिरतः"मर सन्स, पतन (गिरना)। भ्या. भा. दरमें मायक ज्यकीय, (नि.) समयम् । गए। घेद् । संसते । असरात अगिर. भाना. विश्वास करना । मा. भा. सामं उभ• राक. । संगत, (नि.)म्पिन भनि (78. सेट् । सम्भते । असमत्-असम्भिट. अपने मनगर । imrte म(ना)य, (पु.) गु+अप्पम् वा । धरण । बढ़ना । बात । और मनीमनमें । nire " अच्" । निर । मरना. जनोंके गुमेलाय पर मnिtum प्रयण, (२.) युस्यु । मृगल । मूनका पानी (पेशाब)। सायबरे (.). भौर पमै (पसीना)। "भावे युद" शरण । बहना. मपन्त, (बी.) g+सिच्ची । म (दो) । एक स्य, दि.) या भ• I gram बहरा निर्मक (स)TT(MNare घोषधी । रात (बहनेवाला) (नि.)। त्रियोग, (पु.) ((. घए (पु.) सम्+न् । अगतके बनानेदारा पारमुख स्वप्न (नि.) RRER (MH) m। बाला रहा। भोर सिवनी।रिका (त्रि.). भपनी करनेrarrrrram रस्त, (त्रि.) सन्ग+ । प्युन । पतित । गिराष्ट्रभा. (Tror). अस्तर, (पु.) सन्तरन् । भागन. ग्रह, (म.) पुतरित । द्वार । उट । जस्ती. वामणि, (पु.) et. thin घु, गति (आना) राकरण (एना) मा.मा... (म.) साप (को) । भनिन् । सवति । भगवत, भपने मे हम-ter एम, (पु.) एक देश (पटना), (शेड) St(I)(5.) (art) गुप्, (पी.)ga-विपिन । बरपा (प.. (m.)। अपनेरो r(N), गोरके पत्ते के सापाला RERA Rोग गाभा खान, (पु.) (स) भुगार माप जितना यम एक पात्र । एका. भने समान freest giati गुत, (नि.) एक मनमावि (पामा पानी. writ) और गल (गया) पत्ती (श्री.), गुप, (पु.) (मी.)सासरि (पर) anter अपने intent बगरमा हावभर पसर(श्री) स्वमस (स.) aaratee रेल पोत,(म.) एसर । मोतस् । सोता । । ओरसे भापही पानी निकलना. माता (2.) (ntra) ream me पोतर. (..) तरी । श्रमसे ही पानी नि. एRur, लना । लस (2) बर,(.)मए मानrkare सोतसाद (नि.)ोलि म " में "" (R) (ate सप,(5.) NR I win बोनम्पिनी, (Rana RAGI.. पा()(in.) .

स्वधा, विर्गाच रचना. . स्वधा, (अव्य०) +आपृ० । "द" को "," होता | स्वर, (पु.) स्वर+अच् । स+अप् वा । उदात्त (ऊंचा है। पितर-देवताओंके उद्देश (प्रयोजन ) से हपि (घी अनुदात्त (नीचा) और सरित (मलाहुआ) रूप आदि) का देना । खेन धयति । धे+क आप् । एक दुर्ग अक्षरके उच्चारण करनेत्रा यमविशेष । तत्र में प्राणा (स्त्री०) "नमः खाहार्य खधाये" इति पितृगाया. वायुका व्यापार विशेष । गानेशी आवाज. स्यधाप्रिय, (पु.) खधाशिना प्रियः । शाक० । सधाको | स्वरभङ्ग, (पु.) सरम्य भगः यस्मात् । जिस्से आवा खानेवालांका पियारा । कृष्णतिल (कालेतिल)। "खधा" एकजाती है। एकप्रकारका रोग। ६ तवरका टूटन इस शन्दसे उपलक्षित (पहिचानेहुए) श्राद्धआदिका | स्वरस, (पु.) यस्य रसः (रागः)। अपना अभिप्रा पियारा पिताआदि. (आशय)। अपना मतलब । वाक्यमें एकसारख खधामुन्, (पु.) खधा इत्यनेन त्यक्तद्रव्यं मुझे भुन्। कि । "स्वधा" इस शब्दसे छोडेहुए पदार्थको साताहै। स्वराज, (पु.) खेनैव राजते । राज्+शिप् । आपही पितृगण । पितरोंका समूह । और देवता. प्रकाशित होताहै (चमकता है)। ईश्वर । "अयष्यमित्र स्वधिति(ती), (खी.) । खेन धीयते । धा+किय् वा खराट्" इति भागवतम् । वेदका एक छन्द. टीप् । कुटार । कुहाडा । कुहाड! । परश्वध "स्वयितिः". खरापगा, (स्त्री.) स्वः (वर्गस्य) आपगा । खगंकी खन, शब्द (आवाजकरना) चु० उ० स० सेट् । नदी गंगा. खनति अवनीत अखानीत. स्वरित, (पु.) स्वरः जातः अस्य+इतच् । एक स्वर । जो स्वन, (नि.) खन् अप । शब्द (आवाज). उदात्त और अनुदात्तके मेलसे उत्पन्न होता है खरवाला स्वनित, (नि.) खन्+कर्तरि क । शन्दित । आवाज (नि.). कियाहुआ। "भावे क" । शब्द । आवाज । और वाद-खरु, (पु.) स्+ । वन । यूप ( यज्ञका संभा) का लका गर्जन (गर्जना) (न०). टुकडा । तीर । सूर्यको किरण ! एकप्रकारका विच्छु. खपन, (न..) स्वप्फ्ल्युत् । शयन । सोना । नींद । निद्रा. | स्वरुचि, (त्रि.) स्वस्यैव रुचिः (प्रवर्तिका ) म्यकृत्ये यस्य । स्वम, (पु.) खप्+नन् । नींद,। सोना । सोयेहुएका मनका अपने काममे जिसकी अपनीही इच्छा है । खातव्य । ज्ञानविशेष । सुपना. आजाद । ६ त. 1 अपनी अभिलाषा ( इच्छा)(स्त्री.). स्वभाव, (पु.) खस्य भावः निसर्ग । अपना धर्म । | स्वरूप, (न०) खस रूपम् । अपना रूप । खभाव मिजाजाशील. "खमेव रूपम्" । अपना पदार्थ । "ख" यपास स्वभावोक्ति, (त्री.) स्वभावस्य उक्तिः अत्र । स्वभावका यति । रूप+अण् । यथाखरूप (जिसका जिमका जमा कथन है इसमें । अर्थसम्बन्धी अलंकारविशेष । ६ त.। सरूप है ) जामेहारा । पण्डित (पु.) । "खेन सभावका कथन (कहना) (म्बभावेनैव ) रूपं अस्य" । जो खभावहीसे रूपवाला खभू, (पु.) सेनेव भवति । भकिम् । आपहीसे होता. है। मनोज्ञ (मनोहर)(त्रि.), है। ब्रह्मा । विष्णु । शिवजी। और कामदेव. स्वरूपसम्यन्ध, (पु.) म्वरूपं सम्बन्धः । स्वल्पयोवी स्वयंवर, (पु.) खय (आत्मना) वरः (घरणम् ) संबन्धः । न्यायमें अपना सम्बन्ध (जिमका संबंध अप- आपही वरना । सभामें कन्याका थापही अपने पतिको नेही साय है)। ६ पदार्थासे भिमपदार्थविशेष । जमे वरलेना । "स्वयं वृणुते पतिम्" अच् । आपही पति विषयल और प्रतियोगित्व । अपने हपका गम्बन्ध. परनेवाली सड़की (बी.) स्वरोदय, (पु.) सराणा उदयः यत्र । जहाँ खरों (भाग- सयंमंत, (पु.) म्वयं (भामना ) कृतः । आप बनाया । विशेषों ) से शुभ वा अशुभका ज्ञान होता है । सत्र कृत्रिमपुर । बनावटी सका । भाप किया (त्रि.). शास्त्र विशेष. खयंदत, (पु.) खयं (भान्मनेर) मतु पितृमातृभ्यो स्वर्ग, (प.) वरिति (गीयते) । गे+क। मुकर 'दतः । वह लडका कि जिगने अपने आपही दियादै पम् वा । दुरसमे न मिलाहुभा गुमसमूह । देशलाभोंका (रिता पा भातासे नहिं दियागया)। "दत्तामा तु स्वयं निवासस्थान । पढे मुसरी जगह. दत्तः"पी स्मृतिः स्वगनाथ, (पु.)त• । सर्गश खामी । न्द । सपम् (अन्य )अप्समुआमना आदी आप. "सपति" मी. खयम्मु. (पु.) सयममा थापा । प्रमा. पगंय, (स्त्री.) तामाकी श्री । भगा. 'सा, (अमः)शविन् । वर्ग । वह स्थान है जहां दुरावांचल, (पु.) मगरोग्य अयल: । गोडा नहपरलोका देवताओ निजामस्थान और टा. पहार । गुमेपर्यत. । 1 . .

सांगैन्, [मार्य, । स्वर्गिन्, (पु.) सर्ग अखि अन्य भोगत्वेन इनिः । वर्ग सत्रीय, (पु.)मनु मात्र (ईस)। बनम बेय। जिसका भोगनेलायक है । देवता स्वर्गवासी (त्रि.). भागिनेय । भगिनीमुन । बहिनीला (). स्साकस, (पु.) खमं ओो यस। वर्ग है स्थान स्वागत, (न.) मुखेन भागतम् । मुमा । मुगने जिसका। देवता. आना । भटे आना । नत् थप अनि-अ" गर, स्वर्ण, (न.) मुहमण (वर्ण ) यस । जिसका मचा रंग म्यानि-नी, (पु.श्री.) नेत्र अनति । ये है। कांचन । मोना। धतूरा नागकेगर। चिरिंगश साग, फदा सारा पूर्वी एक प्रो. स्वर्णकाय, (पु.) खर्ण इव (पीनः ) कायः अस्य । म्यादी प्रीति (प्रमाहोना )। मादलेन ।। सोमेकी नाई दिसका पीला शरीर है। गा. मादते । अयाटिर. स्वर्णकार, (पु.) खणं (पर्णमय भलादि ) करोति । म्याद, (पु.) मगर गाम । गा नुन Y+अण् । सोमेका भूरण-जेवर-गहना आदि बनाता है। मादटेना । प्रमुमोना और टा. मुनार । एक जाति. म्याद, (पु.)म+उम् । मीण। म्यणंदी (स्त्री.)त. । सर्गकी नी। गगा. (सदा-गया)। माग्न र मनहर (in.) fort खानु, (पु.) व (स ) भानु. ( दीमि. ) अस। पाटीप. वामे चमक इसकी। गहु. पापीन, (नि.)मा वन्तीन । न । स्पर्लोक (पु.) म एव लोक' (भुवनम् ) । मर्गलोक । भागाराने पीन वर्ग । बहिन । । त• वर्गका लोक. पाधीनपतिका, (की.)ran KRI स्पयापी, (स्त्री) व (सर्गस्य ) वापीव । सांकी मानो जिसका पतिमीatirorart). बायटी।गा. स्वर्वेश्या, (श्री. ) (वर्गस्य ) वेश्या । सर्गयी "मधीनमध" (पिसी). कंगरी मेनका भादि अपारा, म्यान, (म.) (RPr(m). म्यप, (वि.) मुनु भापम् । प्रा० । बहुत योग । हा. स्वाप (५०) म+एम् । सेनानिri स्पयासिनी, (ख• ) सस्मिन् (पित्रालये) बरा + स्थापनेय, (4.) (समय) गिनि। पिताके परमें रहती है। चिरालनक पिता घरमैं धन लगी। रहनेहारी स्त्री (चाहे विषाहीहुई हो अश्या इमारी हो ). • स्याभाविक, (f.) 4. (N) खय, (बी.) मु+अस्+अन् । ममिनी । दिन सभासे मा arre Art मस्ति, (अन्य ) मुलगीन् । क्षेम । आशित। "सर"KHfc. कल्याण । भौर पुष्पादिमीफारमयन (मगीहरबरन). पामिन, (Eि-Rena k Cit स्वस्तिक, (पु.न.) सी (भाय) हिन् । बाला| अपने treatm कल्याणदेनेहारा । एपमारत पर । एप्रसार मान श्रीमती मrimire. (टना)। एकप्रकार न्य. एनमुनिका पास (पु.) लियाचन, (२.) खि (भार) विरासचनम्। सायम्भुष, (पु.)rry बरved जाणारा मंगलबार रानाबारे प्ररम्भमें कि सम्मुर RRE(4) (ट)ीति के लिये अपनेहाया TRIrrent (or){th." मोकारयाण बहाना मारना "प ममपुर. स्वस्तिवाचनिक, (त्रि.) स्वनिराधनार तिं (ता' सागर, (५.) (क) rinar भागतंत्र भवन् । मगरासापागला समें SITE(: (re करनेसे प्रामदुमा १७ पदार्थ (गु म) Tem. रा) सस्पयन, (R) (भ) (MH) स्थापर, (२.anskri यस्मात् । इभ (8)मर रोग किये। म मा दिया मागविष (.) यो', स्वस्थ, (वि.) (परवि (मा मुमेनमा) TOINRITE3.) सर . गुम (ग) Tre "TI मविही wirr"..गरम सान्,ि] ( ५५१) । स्वार्थिक, (नि.) खायें विहिवार (क)। व्याकर- •पर्ने कहाहुभा सार्थ (अपना भर्ष ) में विधान किया-६, (अन्य ) हाड । पादको पूरा करनेके लिये । सम्बोधन ह हुआ प्रलय. स्वास्थ्य, (न.) संस्थल भावः म्यम् । मारोग्य । (दुलाना)। और प्रसिद्ध (मगर)। शिषयी। जउ । भाराम । सन्तोष (प्रसनता)। भौर मुख. शुन्य । मंगल (पु.). इंस, (पु.) अन् । पृ.। इस नामघा एक साहा, (भव..) मु+आहे+डा-ति । देवताके उद्देश (परिंदा)। वह राजा जिसके शरीरपर कोई भी रोग (प्रयोजन ) से हवि (घीआदि) का त्यागना (छोडना)। नहिं । विशु । सूर्य । परमात्मा "हंस तनी समिति अमिदेवता स्त्री "साहमेव हविर्भुजम्" इति एः। भौर परन्तम्" नेश्यम् । मत्सर (गरेका शुभ देरा न सहना) • एक दुर्गा (सी.) । "नमः साहाय सघाय" इनि एकप्रकारका मति (सन्यासी) । एकपरका मंत्र । पिनाया. एक्पयरी शरीरमें वायुमै पेटा (डिया)। स्याहामिय, (पु.)त.। साहाध पियारा । अमि । एकप्रकारका पोडा । सुमेरु पर्वत (पहा)। शिगी। श्रेष्ठ । बहुता। भजामत्र अशर "घर"रो सादामुन, (पु.) "साहा" इति मग समयं मुहै। बाहिर जाता और "सकार" से फिर प्रदेश करता है। मुकिर । "साहा" इस मन्त्रसे छोडेगये पदार्थको "हंस" यह मन्त्र जीव निरन्तर जाता रहता है. माता है। देवी देवता. म्बिद्, (मन्य) मिकिम् । प्रर (मवाल)। पादपुरण. हंसक, (पु.) हंसा कायनि (शमायवे)। । हंसी नाई शन्द इता है। पाटा (पौरा यिन, (नि.) मिरा पर्मगुरू । पसीनेवाला. पर)। नूपुर (हाजर)।रा. म्वीकार, (पु.) समर मरधारः (करण)। Afr+हंसगामिनी, (खी.) हंग इस (गा) गयी। गम्। पम् नमानेको माना करना । अंगीकार । माना। शिनि । हंगरी नाई कोमल जाती है। धीरे मागणी श्री । "हमेन गम्यति" हगडे माप (उमार पा) यीय, (नि.) (स)।त.मगम्बन्धी। जाती है णिनि ।। भाणी । एक शक्ति. भागापार नादिरा (सो.). हिंगनादिनी, (श्री.) हंगरे रामान बदला है। म्यू. पद (ना)। भर• मा• प• ये। हाथीधी गति (बाल)। तली (गामभेगमाली). सरासरीरमा कोइली माति माला (बोलना), और नि म्वप्मा (श्री.)सम्पदाहा सनी भमिला (पाद). पता) भारी (गुणी) प्रारमे Bairat सेमामृत्यु, (३) मेडया मृत्युः पम्प । भानी परने में है। मय। भानी इशागे दंगमाला, (बी.)।त. पfa (सार) मा झाल्य (नि.) स्थित होरहा मोका गर । ईगीर. द, (पु.) मेद विद्या पन् । धर्म । पदौना। गमी. इंगयुयन्, (पु. ) हग युवा । मकान मसोस दर, (.) मेरबार । पाने टाना है। दंगरप, (पु.) रंग, रय. (मार्न यण) a free नमसरनेमा (नि.). रथ (गाडी) है। अनुमंग (गारमुगाभा) | वदनी, (.) मिले (प) अनय । मि. "हमान" भादिमी. मपुर । होय च । । । भूत्रस पात्र हंगगन, (पु.) मानो एसर tim (रना) ८.) समाचार हंसामर(पु.) | TIMI (m I attel (2.) a (fr.). मी, () Riterte मीर (f.) अष। त्रि अरे. Mere (A) tel AT Tiririt (दरर) (4.).' । (r) मंत (f. Sikaransit anा, (4.) tar 2 2.. (Neem) कोईर,(4.) *. (At).n(REn) ... ... । कमर).

- [हरिपन्दन, दह, (पु.) हरस्ट । यविक्रयस्थान (मोललेने और इन्तु, (नि.) इन तूच् । हननकर्ता । मारनेवाला । जिसरा घेचनेकी जगह)। "प्रतिहापये परराजात्" इति नैषधम्. स्वभाव दूसरेको मारनेका पड़गया है। मे। हनी. पहचौरफ, (पु.) हे (माशित स्थाने) एष चौरः ।हन, (त्रि.) हरू । जिमने मटल्याग किया है। कृत. सर्थे फन् । ती जगह पर चोरीकरनेवाला । हाका चोर. पुरीपोत्सर्ग. एट, (पु.) हा । बलात्कार । ओरकरना । जोरावरी. इम्भा(म्मा), (सौ.) हम्मा । हम्म् अर्वा । गौओंरी हटयोग, (पु.) हयात्कारेण योग । हटकरके परमामाके ध्वनि (धावाज)।५ । "हम्वा" मी. साथ जुना । प्राणायाम (प्राणोंग रोडना) आदि हए, गति (आना).. अक भ्वा०प० सेट् । यति । कियाके अभ्यासमे उत्पन हुआ राजयोग के पिनाही पर भहपीद. मान्माका साक्षात्काररूप चित्ती पत्तिका रोकना. हय, (पु.) हय्-दिवा अच् । घोटक । घोदा. ह, (म.)हर । पृ. । अस्थि । हो (हाड-दा) हयनीय, (पु.) हयस्य इस पीपा प्रीवा अस्प । घोदेशी कन् । एकाति. नाद जिसकी लंदी गर्दन है । विष्णुका एक अवतार । दण्डा, (बी.) इन्दा । षडा मोका पात्र (धन)। और एक दैत्य । “हयग्रीववधोपेतं तदै भागवतं विदुः" होगे । "हण्डे" नाटकमें नीयका सम्बोधन (नीचको इति पुराणम् । दुर्गा (श्री.). मुलाना). हर, (पु.) अच् । सर । अनि (भाग)। गम हन, (त्रि.) हनक । नास्ति । नाशहुआ। प्रतिहत । (गधा) । और विभाजक (बोटनेश)। हमारे मारागया । बाधाहुआ । भाशासे रहित । और गुणाहुआ। थप् । हरण (लेजाना)। और विभाजन (बांटना). "माय "। मारना । और गुणना (न.). हरण, (न.) हमारे स्युत् । स्थानान्वरकरण । गरी इतक, (त्रि.) हत प (नरमायलात.) कन् । मानों जगहपर लेजाना । और विभाजन (बोदना)। "मैमि मराहुआ है। राहुआ। पयागुजरा. स्युद्" योतकादि (दाज-दहेश) में देनेलायक धन. दरासायस, (नि.) हतः साध्वराः यस । दूर होगया | हरगौरी, (श्री.) हरदेहादिरा गौरी । महादेव जाये देभय जिगका । निर्भय । भयरो रहित । निडर. देहको टेनेहारी पार्वती । अर्धनारीश्वररुप दिनी भार दतारा, (नि.) तामाश यस जिसगी भाशा जाती पार्वतीका मूर्तिविशेष । इन्दाशिवरायटी।... रही। शाम्य । दयारहित । भौर पिगुन (युगलसोर). हरतेगस, (न.) त• । महादेवा देव । पारद इति, (बी.) हनु+चिन् । हनन (मारना)। और गुणना. (पारा) और शिवजीका धीर्य । “हरपीर" भकिमी हत्या, (श्री.) पयप् । मारना (वय)। प्रापवियो इसी अर्थने. पानुकूलव्यापार (प्राणोंते विद्योडनेका काम) । रि.सीको हरशेखरा, (पी.) हरस पर भागन बगि प्राणों से जुदाकरना। महत्या सुरापन" स्मृति.. अस्पः+गन् । महादेवका सिर दिसा निवासस्थान है। इद् (विष्टोत्सर्ग) मलछोडना (हगना)। भ्वा० मा । गंगा. ६दते । अददिर, हरि, (पु.) दन् । विष्णु । (र) । दन, पथ (मारना) । गति (जाना) बदा. पर. स. (गोप)। वानर (बंदर) मे (मकर)। बन्द अनिट् । हन्ति । अाधीत् । "युर्ण हन्ति कृशोदरी" (घोर)। सूर्य । वायु (वा)। सभ (योग)। न. इत्यादिमें अलवारशालके जामेहारे। "गति" अर्थमें मानते रात्र महादेर । मारि गदने है (इसीको निहतार्थता-असली षका रटना एते है). एक। मयूर (मोर)। होलि (मेल) रिंग । एक ६नु(न)म, (पु.) नु (नअस्ति अर्षे मनु । (तोता) । महरिनामक परमार प्रथा टोपीवाला । रामचन्द्रजीरा अनुयर (सेदक)। अजनाके पनानेहाय पश्टितालाप (पीठ मार र गर्भसे उत्पन्नहुमा पायु (हवा) पुत्रा एक विशेष पावर. रंग । उपकाला (नि.) । "हरि रिदिए निय बार्जिभिः"विर. पन्त, (भन्दा) हनन । हर्ष (मुधी)। दया । विषाद (मनका टना) । आर्मि (पी)। किसी वाक्यका परिका, (पु.) (पट) सम। भारम्भ । धेद गोवाग।पि।बिप मर (Care दन्तकार, (पु.) (न्त (हर्षस) भारः (परणम्) ! देता). "इन्त" इलस कारः (टधारणम्) वा । पम् । हरिचन्दन, (न.) (प) सिं बदलम् । गुशीरा करना । या "" (परी) इस पदम इन्द्ररा पियारा पन्दन । नुप उधारण करना । अतिपिरोनेलार । (दो)। नियम ममरे सर पर और इन्तसम्दा प्रयोग. एमा स्वर है हरिण, वाला. हरिण, (पु.) हमइनन् । इस नामा पशु । हिरन ! शिव । हरियासर, (२.) हरिप्रिय वासरं । हरिका पियार विष्णु । हंस । विद्या रंग । उसबाला (नि.). एकादशीका दिन । भोर द्वादशीका पहिला पार (हि हरिपद्य, (पु.) हरिणस व मीतं हदयं धस।जिस• हरिवादन, (न.) हरि वाहपति (स्थानान्तरं नय का हदय हिरनधी नाई डरता है। मीर। दरपोक । डरने पद+ गित्यु । हरिको दूभरे स्थानपर ले जाता है। सवारी | गहरात.. हरिणाक्षी, (प्रो.) हरिणस्य इव अशिणी यस्साः पन् हरिवीज, (न.)हरेः पीजं ( उत्पतिधारणत्वेन) समाधी । जिराके नेत्र हिरनके समान हैं ऐसी सी । अस्सअन् । हरिके पीजरो उत्पाहुआ । हरिताल हारेणके समान नेत्रोंवाती (वि.)।हाविलानिनी नाम ताल । "हरितालं हरेज लपम्या बीज मन-शिला" गंधवाला द्रव्य. पंचकम्. हरिणाडू (पु.) हरिणः (शशनामकः मृगः) अंरः (दि. हरिशयन, (न.) हरेः शयनं ( निद्रा), पिपुडी- ) घरे (कोडे ) वा यस । राशनामी हरिणके चितुवा- हरेः शयनं यत्र तापलक्षित. कालः । वह रामय - था। पा जिरी गोरमें हरिण है। चन्द (चांद)। हरि योगनिद्रामें सोते हैं। भाषाढको एमसीसे चन्द्रमा. कार्तिस्रा द्वादशीतक चार महिनों का समय. परित, (पु.) हाइति । नीला और पीला रंग मिलाहुगा। हरिश्चन्द्र, (पु.) हरिः चन्द्र स ( ऋषिभधम गुद् । और पत्तोरा रंग उगवाला (नि.) सूर्यग घोग। गंग । है)। हरि मानों चन्द्रमा है । सूर्यवराम शिष शेर (गिह) सूर्य । और रितु (पु.). एक राना (ऋपिसे भिन्न भने मुर नादि होता)।। रिवाल, (न.) (मीतपर्णस) तालः (प्रनिटा) यथा नहीं होगी प्रतिया है। पीले रंगका एक प्रा. हरिसंकीर्तन, (न. ) हरेः (हरिनाम ) कीर्तन (5 (पटवारदात. नम् )। श्रीविष्णुका नाम उचारण करता। हरिनाम से हरिताटिका (श्री.)होः सातः (ताल) यस्यो। "सकले निष्फलं राजन् हरिमान पिना" पुराणम् प.मी तीला. दरिदय, (पु.) हरिसण. दयः यस्य । विगायो। दग्विार, (२.) (प्रभः) द्वार (रोना )। रेगा है। इन्द्र । "हरिया हरिनिय बासिन करिनासंग (कारनेगे) नामका तीर्थ. हरिनामन्. (३०) रेन'महामने था। हरिया नाम दरिहर, (पू.)हरियुको हर. । एErriवियर . malekh ना गिरा नाम है" मूग । एक आधा हरि और मराभापा हासिक नारायण, हरिनेर, (२.) पत। मानों hthani दरिदर्शन, (न.) हरिहरयोः nिt हिमभट। ६१. श्रांग। एकापियारा मान वर करा int मिरा नेत्र है (संबनने)। पेच कोका गंगम होता है। परिपुर (पाना) nee और एक ही. हरिमान (5.) हरिपूर्णः मारः। हरे गली मी। हरीतकी, (.) १ (पीता करारा (ar । मंज्ञायां इन्डोग नAS PETN (Irr- हरिमर(f.) (i) मfry भन्न का फ7 पीसा होता): "Ekt:- (म सभामटर) fry भनि पिता माना गोदामा"म. मेरे मनकार दि. (f.) । मुहास पर (3} भर में टया गाण्य" । , ( नयमाव । भने upshrarter. Ric गहरा (3.). । प्रा.)RM. हभिर, (19) traft :: संत (IN) (REA) मगर Arthri(R) म. ItARITRIFT(c) Er. rrie... ध (मन) Pri,Tiwari firtast. (.jbritict (141ement . - - . ।

ह, हत, (पु.) यी (AZA+ युसरादबु.) गुरी देता है (पाहोगई दो देनेगेम्मि मोई पालोरी।" में चोदा योग । चरानेहरा (नि.) "र" म्हण(ला)... | हर्ष (म.). पोरा(चार माण, (पु.) नाडीचे पान एक पा(R,{3. Meri देवता रचित (निगरा दिन प्रगम है)(वि.). शुवक गि (Ferr). हरिणी, (बी.)न्+िमिनि-री । विजया ( Tीपन, (म.) Imm स्नेहारी) भांगकारक (पी)(ft.) मालि() rmirr: दति (नि.) प्रात: भयमा जाननमी. (..) rinkurrin Mar: (la.fr से (inn) • • • 2 seri) minimir अदान inmtar-r. दल, (२) २ (अन्य ) भनेन । धन, (3Arthr... CHलास. हलधर, (पु. ध (अयुध येन) भाग of.).. हलको दानामे पर नो । बम titre (..marrn. (ोतीवानेदारागिन (नि.) rwari gk tran दरभूति, (की.) हलेन (MI ) ft.imeणा रसिका सन (.rimar nir.. दला, (ख)ी हीयते । मालिनी ने नि.cterior पनग (स) पृथि जल (4) दलायुध, (३) न धागुप्यार । साथ. तra (interra ना. दलाल, (पु.)भा fram) सापुर. (rror trate दलके गमान गया। । । दलिन, (पु.) भान ARTY नि । १३ तलनी, (.11 aurat Inाबलमhara) (1.) दय, (वि.) (इल) with ONE tiny.rr....... imithlam" समुद्र" यन् (.) हप, (पु.):४१ १.१ (PR) Krem (Hr । पिन, (.) +gee रोम | mrters एपनी, (NR) at II IRArr. पीच, (interime" ररियार(२.). Cirteers रशिप, (4.inrker १५)'.re हायन,] ( ५५६) हिमकर काम. हायन, (पु.) जहाति (अम्बु)। हाल्युनिः । नीहि । हि, (अव्य.) हा हि वाडि। हेतु (समय) । अवधारण- धान। (भावं) जहाति । वत्सर (परिस)। आगकी लाट (निश्चय )विशेष । प्रश्न (सवाल ) हेतुका उपदेश ( क्यों. (स्त्री०). कि)। शोक । श्लोरुका पूराकरना. हार, (पु.) हकर्मणि छन् । एकप्रकारकी मोतिओंठी | हिंसक, (पु.) हिस्+युत्। व्यान (मेडिया आदि हिंमक माला । माला । "कर्तरि+धम्" । वाँटनेहारा । भाजऊ. (मारनेवाला) पशु। और शत्रु (दुश्मन)। हिंसाकरने. हारक, (पु.) हल् । चोर-धून । सचय। भाजक हारा (त्रि.). अंक । चुरानेहारा (नि.). | हिंसा, (स्त्री.) हिंम् । षध (मारना)। पातन (कतरू. हारावली, (स्त्री.)हार इव पावती। हारकी नाई कतार । करना)। किसीको प्राणोंसे अलग करना और जोरआदिका मुक्कावली (मोतिओंका हार)। "क्षारहारावली" इति गंगास्तव । पुरुषोत्तमका यनायाहुमा एक कोप. हिंस्र, (नि.) हि । हिंसशील । मारनेवाला । घोर हारिद्र, (पु.) हरिद्रया रकाम्अण् । कदम्ब ( कदम) का (रारना). दस्त, (इसका फूल बहुत पीला होता है)। हरदीसे | हिण, शब्दकरना । कूकना । भ्वा० उ० अ० सेट् । हिक- रंगाहुआ (नि.). ति ते. हारिन्, (नि.) हारः अस्ति यस्य+इनि । हणिनि वा । हिछ, हिंसा (मारना)। तु. मा. स. सेट् । हिकयते । हारक (चुरानेहारा)। हारवाला और मनोहारी (मुन्दर). अजिहिकत. हारीत, (पु.)ह+गिच-इतम् । एक मुनि धर्मशान बनाने हिया, (मो.)। हि+ ! एकप्रकारका रोग( हिची ). हारा । एक पक्षी (मना)। और कितव (धूनराचरा). हिगुर, (न.) न०) हिमं गरछति । गम्+छ । नि। हो । रामः- हार्द, (.) हृदयस्य कर्म अण् । "हद्" का आदेश होता है। मेह (पियार)। प्रेम । "हदि भपः विहितो वा हिड, गति (जाना )। धूमना । भ्या. आ• स• सेद। देशका वृक्ष (निराका रस हिश होताहै). म"दपसे हुआ था जानागया । हृदयका या हृदयमें इदित् । हिण्डते. जानाहुआ (पि.). हार्य, (पु.) हियतेऽगी। हम्पत् । विगीतक वृक्ष हिडिम्य, (पु.) एक राक्षस (वह गीमसेनमे मारागया)। म्या । उस रामराकी भगिनी (पहिन) (त्रियो टाप). (महेन) हरणीय (जानेलासक) (नि.). हित, (नि.) धा+। हिया। गत (बीतगया)। हाल, (पु.)लः मन्त्रि मसान् । हल एय वा अण। पश्य (हितकारी)। और मंगल (भलाई). हलवाला । बलराम । भीर हल. हाला, (स्त्री.) हल्पम् । मद (नग)। तालरी | हितकारिन्, (नि.) हितं करोति । गिनि । शुभ- कारक । भलाई कानेहारा । हितकरनेदारा. हालादर, (पु.न.) हाले हलनि । हल्भर । एक- हितपिन्, (नि.) दित इच। गिनि । दिनी मारा पिप (जदिर)। एक कीडा। मयं (पी.) इच्या (चाह करनेहारा । हितेच्याकारी. हितोपदेश, (पु.)हितम्य उपदेशः । गलामा देश । पालिका (नि.) हटेन एनति (हटमे रोदना, है)। हिनके लिये उपदेश । विश्णुशमांशा रबाडा नीतितिर हलवर (हलये वनहारा): टिगान | "दला प्रहरणं : को प्रतिमनारनेहारा . "हट विमा सण है। हलमे पुरकरनेदारा। हिन्दोल, (पु.) हिन्दो पम् । पृ. दोलन । लना । "इटम्स का टाट" हला. श्रावण( पावनमहीना) में धान पामा एप, (पु.)+म् । नि.न (बुलाना), नियों. नेने भगान्का शुमानास प्रहार बाए कारभरने व पं. रागमनाम. शास्तिर, (२०) मिना + । पिनोंच गई. हिम, (न.) म । मागे fegमा पानी चाम्लिन न.)धिना (ग) Piनगर (अ)। वन (कलरा)फोरम (पूना)। Birat रमिनारया (हदिन पुर) दिली. (नि.)। यही पसी । मागरमोथा (t.)। पार, (२.)परमा। परमात मघरायग (मार) भोर पं. (4) सपा राजार,(बु.)तराम (iii) । मालपर (4) पारriureti ६.सन र स्या... अरे । हिमा, (I.) : (him ) fanth ९२१), । चराब. - हिमगिरि, . दिमगिरि, (पु.) दिममयो गिरिः। हिमप्रभानो याEि RT) (मी पापहार । दा हो बहुत पर है। दिमाग मा पदार व में T" गीrare हिमप्रस्थ, (पु.) हिम' प्रथः यम । शीतल चोटीवाला। हिमालया पर्यंत (पदार) हिमवन्, (पु.) हिमानी (प्राचुण) मम्मि अ+ हिरास::- JIR. मनु । "म" को "व" होता है । जहा बन बकं होती | दिग्द, () मारट (Tr) है। हिमालय पी. दिमसंदति, (स्त्री) ६. । हिमगमूह । बरफ दर दिवोदशी(r) ५.३० ५.१ १. दिमांशु, (पु.) हिमाः भैशव अस्व । शीतलकिरणों of पाटा। पंद्रमा। चोदा और परपार सिरHr (Prime हिमागम(पु.) हिमम्प भागम' यत्र । जिगमें पर भाती है । अप्रदायणी (गग्गर) और पाप (पू) दिव, mtre)... सम्म दो महीनोंकान (माविम) दिमाद्विजा, (स्त्री.) दिमादी जायते । अन् । मा- दुप. (Emaitrrt सयमै जापन होती है। क्षीरिणी । पानी। और गगा. हिमादितनया, (बी.) । दिमागी पुगि, 17..... .... दुगी । पाती. दिमानी, (खी.) हिमाना गेहति । मी-अनुन |10 (AR.11 fer (1) हिमगमूह । बरफला "भागता बाजरेबगानी" rintrum. म. {i...। ........ दिमापति, (पु.).. । परफा राग । भाका पक्षभाग. मEिTE }tt. It warr) दिमाख्या (पु.) हिमान भारय एसपहार दिमाज(.) हिमकाले जायते अन । ort (rt atram सजता।पत । पमलपल. तीमा... दिरण्मय, (नि.) हिरण्याRi+मयर • Ins पनाहगा । खिया ली। "मादी II" tr(............ उत्तररामचरितम् । मी बामसे (न.।। 1. मरस हमारा परम । "MRAपुषी एरियार " होयम् दिरय, (म.) दिर (6) पुर। दिरण्यकशिपु (पु.)(पो fre दिसण्यामिपुरान. (पु.)ी । Ek पारिको मारा fry हिरण्यगर्भ, (पु.) AN ( Rice (E Irri) | TRITI re rr.ts: (Rat-).! हिरण्यरेता (5.ht Re for ", mtiri(RJATRur.

हार्यन,] सायन, (पु.) जहानि (अम्बु)। हास्युनिः । प्रीहि । हि, (अय.) हादि याहि । हेतु (गर) आधार पान : (भा) जहानि । वार (परिग)। आगी लाट (निश्रय विमेष । प्रश्न (गवाल) हेनुका अडेग (को (वी.). कि) शोक । मोकका पूरारना. हार, (१०) कर्मणि पन् । एकपकारकी मोतिओंकी | हिंसक, (पु.) हिम्+प्युला यात्र ( मेडिया आदि हिंग = माला । माला । "कर्तरिकपन्" 1 वाँटनेहारा । भानक. (मारनेवाला) पशु । और शत्रु (रमन)। हिमाकरने हारफ, (पु.) हज्युल् । चोर-धून । रावय। भाजक हाय (त्रि.). अंक । चुरानेहारा (नि.). हिंसा,(बी.) हिंग्या यय (मारना)। पानन (कतर- हारापली, (स्त्री.)हार इस भावली। हारकी नाई कमार। करना)। किसीको प्रागोंसे मलग करना और जोरआदिक मुक्तावली (मोतिओंका हार), "Zारहारावती" इति काम, गंगासवः । पुरुषोत्तमका पनायाहुमा एक कोप. हिंस्र, (नि.) हिंगर । हिंगाचीउ । मारनेवाला । घोर हारिद्र, (पु.) हरिद्रया रका अण् । कदम्ब (कदम) का (रावना). द्रल, (इसका फूल यहुत पीला होता है)। हदीसे ( हिम्, शम्पारना । कना। भ्या० उ० म० सेट् । हिक- रेगाहुआ (नि.). ति ते. हारिन् , (त्रि.) हारः अस्ति अस्य+इनि । हमिनि वा । हिद, हिंसा ( मारना)। चु० आ० स० सेट् । हिक्यते । हारक (चुरानेहारा)। हारवाला और मनोहारी (मुन्दर). अजिहित. हारीत, (पु.) ह+णिच्-इतच् । एक मुनि धर्मशान यनाने- हिका, (Rt.)। हिक+अ । एकप्रकारका रोग( हिचकी ). झारा । एक पक्षी (मैना)। और कितव (धूर्नसचरा). हाई, ( न० ) हृदयस्य कर्म अण् । "हद्" का आदेश होता दिङ्ग, (न० ) हिमं गच्छति । गम्+छ । नि । होड् । रामठ- है। स्नेह (पियार)। प्रेम। "हदि भयः विहितो वा हिड, गति (जाना )। धूमना । भ्या. आ. स. सेद । देशका वृक्ष (जिसका रम हिश होताहै). अण्" । हृदयसे हुआ वा जानागया । हृदयका पा हदयमें इदित् । हिण्डते. जानाहुआ (त्रि.). हिडिम्ब, (पु.) एक राक्षस (वह मीमसेनमे मारागया)। हार्य, (पु.) हियतेऽसौ। हुण्यत् । विमीतक वृक्ष म्या । उस राक्षसकी भगिनी (वहिन) (त्रियां टाप). (बहेडा ) हरणीय (लेजानेलायक) (नि.):.. हित, (त्रि.) धा+क्त। हि+कया। गत (बीतगया)। हाल, (पु.) हलः अस्ति अस्स+अग् । हल एव वा+अए । पथ्य (हितकारी)। और मंगल (भलाई). हलवाला । बलराम । और हल. हाला, (बी.) हल्झ्धन् । मद (नशा)। तालरसकी हितकारिन्, (नि.) हितं करोति । कृगिनि । शुभ- रिक । मलाई करनेहारा । हितकरने हालाहल, (पु० न०) हालेव हलति । हल्+यम् । एक-/ हितैपिन्, (त्रि.) हितं इच्छति । इप्+गिनि । हितकी प्रकारका विप (जहिर)। एक कीडा। मयं (स्त्री.) इच्छा (चाह )करनेहारा । हितेच्छाकारी. हो. हितोपदेश, (पु.) हितस्य उपदेशः। भलाईका उपदेश । हालिका, (नि.) हलेन खनति (हलसे सोदता है)। हितके लिये उपदेश । विष्णुशर्माका रचाहुआ नीतिविषय- हलकर्षक (हलखेचनेहारा)। किसान । “हला प्रहरणं को प्रतिपादनकरनेहारा अंथ. अस्प" हल जिसका शर है। हलसे शुद्धकरनेहारा । हिन्दोल, (पु.) हिन्दोल्पम् । १० । दोलन । झूलना। "हलस्य इदं वा ठक्छन्" हलका, । श्रावण( सावनमहीना )के शुक्लपक्षमें विधान कियाहुआ हाय, (पु.) हेयम् । नि० । आहान ( (बुलाना )। त्रियों झूलनेसे भगवानका झुलानारूप एकप्रकारका उत्मव । एक की मजारभावसे उपजी चेटा. हास्तिक, (न.) इस्तिनां समूहः+ठण । हापिओका समूह. | हिम, (न०) हि+मक् । आकाशसे गिराहुक्षा पानीका दास्तिन, (न.) हसिना (नृपेण ) नित नगरे (भा)। कण ( कतरा)। शीतलसर्थ (डाए), उगवाला इति राजा बनायागया । ( हस्तिनापुर) दिल्ली. (नि.)। छोटी इलाइची । मागरमोत्या (पी.)। हास्य, (न०) हम्म्यत् । हमना । अलंकारका रसविशेष. अग्रहायण (मगर) और पोप (पोह) स्वरूप दाहाकार, (पु.) हा हा इसम्य कारः। कृतं । हाहा. (मौनिम) । चंदनका प्रल । चन्द (चांद) गोर करना। युर(लडाईका शब्द। शोकरी भावांत. कापूर (पु.). दिपटना और जाना। सा-पसक गिर । हिनोति । हिमकर, (पु.) हिमः काः (हिरणः) यस ! निधी भरे पी. हिरण वर्फ है । चन्द्र (चांद), भौर मार . । शराब. . . . रागका नाम. ।

हिमगिरि, 1 ( ५५७) r । माया मान हिमगिरि, (पु.) हिममयो गिरिःहिमप्रधानो पा गिरिः। EिMENT) हिरण्यं वायति (प्रापयरि ) का पहार । बा जहाँ बहुत पर्फ है। हिमालयका • भींडा पहुंचाना है । "दिरम्परा पहा. पारित न । गोमेकी भुजाके समान जिसके हिममस्थ, (I.) हिमः प्रन्यः मस्य । शीतल चोटीवाला । तरंगेमहादेव । शोणनामी एक नर हिमालयका पर्वत ( पहा). हिमवत्, (पु.) हिमानी (प्राचुग) अपि अत्र हिरण्यास(3) पा पुर। एक देल. मतुर । "म" को "व" होता है। जहां बहुत एक होती | हिरक (1) दिउकिन-सद् च । वर्जन (रोकना )। है। हिमालय पर्वत. स्याय) हिमसंहति, (सी.) त.. हिमममूह । यरफका देर / हिलोल (एनी) 3० उ.. स० सेट् । हिन्दी- हिमांशु, (पु.) हिमाः भंशव' अस । शीतलकिरणों सयति-ते. बालाचंदमा । बोद । और कपूर । काफूर. हिलोललाअन् । तरंग (लहर)+पन् । दिमागम, (इ.) हिमस्य आगमः यत्र । जिसमें बरफ शुल्पना माती है । अप्रहायणी (मग्गर) और पीप (पूरा ) दिव, प्रीपन (करना) सा. ५. एक सेट् । इति । खरूप दो महीनोंका ऋतु (मीनिम), हिन्वति । महन्दी। हिमाद्विजा, (स्त्री.) हिमादी जायते । जन् । हिमा- हियुक, (किन । नि. । ज्योतिष लमसे ध्यमें उत्पन्न होती है। क्षोरिणी । पार्वती । और गंग्य. दिमाद्वितनया, (श्री.), त• । हिमालयकी पुत्री । हिस्, १५ (गे) वा जु•३. रुपा• ५० सक. रोट् । दुगा । पार्थ दी. हदिन निति सियति-ते । यहिंसीत् । अजि हिंसद-त. हिमानी, (बी.) हिमानां सहति । हिमपीप्-आनुच ।। ही, (म.) । विम्पय (ईरानी) । दुरा। हिमगमूह । बरफका देर । “आगता बत जरेव हिमानी" विवाद,AIN TEना) और शोक. हीन, (f.)ही। "त" को "न" होता है । जन हिमाराति, (पु.) त• । परफका शत्रु । सूर्य । (म) । निन्द्रा लायक । और अधम (नीच). भाकका पक्ष ।थाग. होनवाश्निपू.) कर्म । पूर्वबाद (पहिरा गा). दिमालय, (पु.) हिमानो आलय । परफॉप पर। को पोडारा किसी औरका अबलम्बन का है। एक पहाट. अंगठी शे टोटकर किसी दूसरे विषयमै धरा- हिमान, (न) हिमकाले जायते जन्+ । शीतके समय मेरा । माया बारी (माई) धर्मगन में, बजता है। उत्पल । कमलफूल. होना ) अ यय । मभावसे न्यून (म) हिरण्मय, (मि.) हिरण्पारम+मयट् । निः। मोग भगवाटा । अगा। खंगा। लाभादि । स्त्रियां दाग, बनाहुमा । त्रियों की । "हिरण्मयी सीताप्रतिकृति "दीर (न.नि.वन । और हीरा । नि। उत्तररामचरितम् । भी कामेछे एक (न.)। सूर्य सोर र र नि (और) (पु.)। साथै छन् । मण्डलमें रहनेहारा परम म । “य एष हिरण्मयः पुरषो होरामा श्यते हिरण्यार" छान्दोग्यम्, होमूमरना (पोभनिय डालना) । इहो.प. हिरण्य, (न.) हिरणमेव (साथै) यन् । सुवर्ण । सोना । रानी महापौत. द्वार) सयजय भारः । पम् । हिरण्यकशिपु, (पु.) एक देव (बह कश्यप पिलिमें उप..धम्बा (रोजन) सदको नारा "मनानं महाराणा हिरण्यकशिपुहन्, (पु.) हन+किए । त.. हिर- प्यकशिपुको मारनेहारा । विष्णु s, natinyiना) भा. भा. ग. सेट् । हिरण्यगर्भ, (पु.) हिरण्य (वर्णभाण्डे) गर्भ (र. इदि. तिस्थानं ) अन्य । सोनेके अंडेसे निकला । पारमुपहु,( मर (ग)। पौरको रोने हाला ममा (वह सोनेके अंडेसे निकला था)। शाल. हि धिः कसा मीत (मेरा), प्राममूर्तिविशेष. हुन (. दरवार में मनासार हिरण्यरेतस्, (पु.) हिरण्यं रेत यस। जिसका वीर्य CHER मा भर सोभा है । यहि (भाग) और विकास . धतूरा । धन. हुआ). TE हायन,] । हिमकर, काम. . । हायन, (पु.) जहाति (अम्बु)। हा+ल्यु नि । नीहि । हि, { अव्य.) हा हि याहि हेतु (गर)। अवधारण- धान । (भावं) जहाति । वत्सर (वरिस)। आगकी लाट (निश्रय )विशेष । प्रश्न (गपाल) हेनुका प्रदेश (क्यों. (खी०). कि)। शोक । लोकका पूराकरना. हार, (पु.) हाकमणि धन् । एकप्रकारकी मोतिओंकी हिंसक, (पु.) हिंग्+ण्वुल्। व्याघ्र (मेडिया )आदि हिंगक माला । माला । "कर्तरि+धम्" । बाँटनेहारा । भाजक. (मारनेवाला) पशु । और शत्रु (दुश्मन)। हिंमाकरने- हारफ, (पु.) ह+ण्वुल् । चोर- धूतं । सचरा। भाजक हारा (त्रि.). अंक । चुरानेहारा (नि.). | हिंसा, (खी.) हिंम्म । पप (मारना)। घातन (कतल. हारायली, (स्त्री.) हार इव भावली। हारकी नाई कतार । करना)। किसीको प्राणोंसे अलग करना और जोरआदिका मुक्तावली (मोतिओंका हार), "कारहारावली" इति गंगास्तवः । पुरुषोत्तमका यनायाहुमा एक कोष. हिंस्र, (त्रि.) हिंएर । हिंसाशील । मारनेवाला। घोर हारिद्र, (पु.) हरिद्रया रता+अण् । कदम्य ( कदम) का (रावना) द्रस्त, (इसका फूल बहुत पीला होता है) हल्दीसे हिम्, शब्दकरना । कूकना । भ्वा० उ० अ० सेट् । हिक- रंगाहुआ (त्रि.). ति-ते. हारिन्, (वि०) हारः अस्ति अस्य इनि । हगिनि वा। हिम्, हिंसा (मारना)। नु० आ० स० सेट् । हिफयते । हारक (चुरानेहारा ) । हारवाला और मनोहारी (मुन्दर). अजिहिकत. हारीत, (पु.) हाणिच्-इतम् । एक मुनि धर्मशान बनाने । हिका, (बी.)। हि+अ । एकप्रकारका रोग( हिची ). • हारा । एक पक्षी ( मैना) । और कितव (धूतसचरा). हिङ्गु, ( न० ) हिमं गरछति । गम्+दु । नि । हीड् । रामः- हार्द, (न०) हृदयस्य · कर्म अण् । “हृद्" का आदेश होता है। मेह (पियार)। प्रेम। "हृदि भवः विहितो वा हिड, गति (जाना)। धूमना । भ्या. आ• रा० सेट् । देशका यूक्ष (जिराका रस हिम होताहै). भग्"। हृदयसे हुआ या जानागया। हृदयका था हृदयमें इदित् । हिण्डते. जानाहुआ (नि.). हार्य, (पु.) हियतेऽसी। हुण्यत् । विगीतक वृक्ष | हिडिम्व, (पु.) एक राक्षस (वह मीमसेनमे मारागया)। म्या । उस राक्षसकी भगिनी (यहिन) (त्रियो टा). (महेगा) हरणीय (लेजानेलायक) (त्रि.).. हित, (नि.) धा+। हि+कया। गत (पीतगया)। हाल, (पु.) हलः अस्ति अस्थ+अण् । हल एव बा+अए । हलवाला । यलराम । और पथ्य (हितकारी)। शोर मंगल (भलाई). हल. . हाला, (खी०) हल्ल्यम् । मद (नशा)। तालरसकी / हितकारिन्, (नि.) हितं करोति । +णिनि । शुभ- कारक । भलाई करनेहारा । हितकरनेदारा. हालाहल, (पु. २०) हालेप हलति । हल्क्यच । एक-/ हितैपिन्, (त्रि.) हितं इति । इप्+पिनि । दिती प्रकारका विष (नहिर)। एक की। मयं (पी.) इच्छा (पाह)करनेहारा । हितेच्याकारी. पेप. हितोपदेश, (पु.) हितस्य उपदेश. । गलाईका उपदेश । हालिया, (नि.) हटेन एनति (हलसे सोदता है)। हितके लिये उपदेश । विष्णुशर्माका रचाहुआ नीतिविषय. हलपंक (हलमेचनेदारा)। किसान । "हमा प्रहरणं को प्रतिपादनकरनेद्वारा ग्रंथ. धम्म" हल जिसका शव है। हलसे मुझकरनेदारा। हिन्दोल, (पु.) हिन्दोलापम् । १. । दोलन । झुलना । "हलम्य इदं षा टक्टम्" हलका. भाषण( सावनमहीना) गुरुपक्षमें विधान फियाटुमा हाय, (५.) देयम् । नि. । आहान (पुलाना)। नियों झूलनेमे भगवान् का शुलानास्प एकप्रकारका उरण एक कारभावसे उपजी पेशा शास्तिक, (न.) हसिना समूह टम् । हायिओं का गमूह. दिम, (न.) हिमा । भाकाशमे गिरामा पानीका दास्तिन, (म.) हस्तिना (पेश नगरे (भ), कग ( कतरा) पीनल (हाना)। उसकाला दसिपकारी बनायागया। (हस्तिनापुर) दि. (त्रि.)। छोटी इल्मची । मागरमोरपा (पी.)। हाम्य, (न.) यत् । हगना । अलंकार रमरिमेष, अग्रहायण (मागर) और पार (पोह) मा हाहाकाप (पु.)हारारम्प कारः। स । हाह! (मौगिम)। चंदनका दल । पाद (चार) और परना । युन(R) दा शोर भाज. पगार (पु.). हिवाला और जाना। सा. ५. स. अनिर । दिनोति । हिमकर, (I.)म: () ग । तिमी immsमद (4)। मौरबार . शराष. रागा नाम.

-- हिमगिरि (पु.) हिममयो गिरि हिमानो मा.हि.) रिमं पाहणी (प्रापी) पहा रा जो बहुत है। दिमाग TET पहुंगाना है। हरपाणी पाशित "1" । सोही भुशार समान जिसके हिमप्रस्थ, (पु.)दिमा सातत बोटीला Faattiमहादेव । होणनागी एक मद हिमागापर्यंत (पदा). दिमपन्, (I.) हिमानी (प्राउण) भलि भ+ | शिरप्यास) पुष । एक दल. मनुस् । "म" को "" होता है। जहां बहुत प होती | दिराम (410) फिक्रुट् च । वर्जन (रोकना)। है। हिमालय पर्व स्वाग.in दिमसंदति, (सी.) ६. हिमगमूह । रफमा टेर. दिलोल (ना) गु. 3. रा. सेटू । दिलो- हिमांशु. (पु.) हिमाः भर सस । शीतपरिणा सयनि-ते. पाटामा । पद और पूर । कार. हितोल ..) शन् । तरेग (बहर)+घम् । दिमागम, (पु.) हिमस भागमः यर । जिसमें बरफ गुल्पना/ भावी है । अप्रहायणी (मगर) और पोप (पूम) | दिव, मोपम (करना) • • •। हरिए । सम्पदो महीनोंगा (मीनिम). दिमादिशा, (सी.) हिमादी जायते । अन् । हिमा हियुफ ( नारा । निज्योतिषी मासे B IN होती है। कोरिणी । पार्वती और गंगा, - चीया म हिमाद्रितनया, (बी.)त• । हिमालयकी पुत्री । दिर, ग (बरमा) वासु. ३. रुपा १. क. सेन । दुर्गा । पार्यती. इदिन निसियति-रो। मासी । बजितिसर-त. दिमानी, (पी.) हिमानो संदनि । हिमीप्-आनुन । दी, (भना) गि (हैरानी) । दु.रा। हिमगमूह । बरफा देर । "आगता मत जरेप हिमानी" सामना)। और शोक. हीन, (ii)ी। "स" को "म" होता है। उन हिमाराति, (पु.) ६. । परफका पशु । सूर्य । (कम) निन्दा हायक । और अधम (नीच). दीनयामि.)। पूर्वकार (पहिला गम) हिमालय, (इ.) हिमाना भाल्यः । परफोर पर । को छोरोसी और अबसम्मन कता है। एक पहा. भगो टोकरी गरे पियोधरा- दिमाज, (न.) हिमकाले जायत जन् । शीतके समय नेपामारामारी (ग) धर्मशास्त्रमै. रस्ता है। उत्पल । कमलल. दीनान भो यस्य । मभावशे न्यून (कम) हिरण्मय, (नि.) हिरण्पारम+मयट् । नि.। सोनेगा भगवानसंगा । छलाभादि । स्त्रिया मा गए. पनाहुआ । नियां भी । "हिरण्मयी सीताप्रतिपति" हीर, (Firsinमम । भोर हीरा । शिश। उत्तररामचरितम् । नी वामसे एक (म.)। सूर्य साप मोर निद (और) (पु.)। सा छन् । मण्डल, रहनहारा परम प्रम। "य एष हिरण्मयः पुरुषो मा. स्यते हिरण्यादा " हान्दोग्यम्. मरना ( योगारिया बालना) । स. प. दिरण्य, (न.) हिरणमेव (सार्थ) यत् । गार्ग । सोमा। रामहोपात धतूरा। धन. द्वहार, (.. लयकम्प पाल पम् । हिरण्यकशिपु, (पु.) एक देश (द करयरसे शनिमें रेगूसक (रोको पानेहरा) हुआ). राया जाना "मौन मारणापि हिरण्यकशिपुहन, (पु.) हन्+किप् । ६त. हिर- ध्यकशिपुको मारनेहारा । विष्णु. भा. भा. ग. सेना हिरण्यगर्भ, (.) हिरण्य (पर्णभाई) गर्भः (प. इदिन म तिथान) यस्य । सोने से निकला। पारगुरा पाला मना (यह सोनके अंडसे निकला था)। शाल. लिये प्राममूनिविशेष दिरण्यरेतर, (पु.) हिरण्यं रेतः यस। जिसका वीर्य सोमा है। महि (आग)। और चिय भाउआग. उप..

हायन,] काम. - शायन, (पु.) जहागी (मनु)। हानि । नीति (हि, (ग)ntarfs (गर) | धान। (भावं) जहा। वागर (परिग) मागती पाट (निमावि (ग) हेतुका सादेश (को- (बी) क)मोका सोका पूगरना. द्वार, (पु.) हमणि पम् । एकप्रकारची मोनिओ | हिमश, (पु.) दिग्गुल। यात्र ( मैडिया प्रादिगिक माला । माला । "कर्नरि+पम्" । यौटनेहारा । भानक. (मारनेवाला) पर। और (मन), हिंगाकार झारफ, (पु.) हल् । बोर- धून । रारा । मानक हारा (त्रि.). अंक । चुरानेहारा (त्रि.) हिंसा, (खी.) हिंग्य । यच (मारना) पातन (कतर दारायली, (पी.) हार व भावी हारी नाई फसार । करना)। किसी को प्राणोंमे अलग करना भोर जोरादिका मुक्कावली (मोतिओका हार)। "हारहारापती" इति गंगासवः । पुरुषोत्तमका यनायाहुमा एक को हिन, (नि.) हिंगर । हिंगाचील। मारनेवाला । घोर दारिद्र, (पु.) हरिद्रया रा+अण् । कदम्म ( कदम) का (रामना). द्रल, (सका फूल बहुत पीला होता है)। हल्दी हिम्, शन्दकरना । कूकना । भ्वा० ३० अ० सेट् । हिक- रंगाहुआ (नि.) तिते. हारिन्, (नि.) हारः अस्ति भस्य+इनि । गिनि वा। हिल, हिंसा (मारना)। • आ० स० सेट् । हिक्यते । हारक (चुरानेहारा)। हारवाला भोर मनोहारी (मुन्दर). अजिहिकत. हारीत, (पु.) हाणिन्-इतम् । एक मुनि धर्मगाम पनाने हिझा, (सो.), हिम+अ । एकप्रकारका रोग( हिचकी ). हारा । एक पक्षी (मैना) । और कितय (धूनसघरा). हिड्नु, (न• ) हिमं गच्छति । गम्+छ । नि 1 ही । रामठ- हार्द, (न.) हृदयस्य · फर्म अण् । “हृद्" का आदेश होता है। मेह (पियार)। प्रेम। "हदि भवः विहितो वा हिड, गति (जाना) । धूमना । भ्या. आ० स० सेट् । देशका वृक्ष (जिराका रम हिर होताहै). अण्" । हृदयसे हुधा या नानागया । हृदयका वा हृदयमै इदित् । हिण्डते. जानाहुआ (नि.). हार्य, (पु.) हियतेऽसी। हण्यत् । विगीतक वृक्ष हिडिम्य, (पु.) एक राक्षस (वह मीयसेनसे मारागया)। म्वा । उस राक्षसकी भगिनी (वहिन) (स्त्रियां टाप् ). (बहेटा) हरणीय ( लेजानेलायक) (त्रि. हित, (नि.) धा+क। हि+कया। गत (वीतगया)। हाल, (पु.) हलः अस्ति अस्य+अण् । हल एव माअम् । पथ्य (हितकारी)। और मंगल (भलाई). हलवाला । बलराम । और हल. हाला, (स्त्री०) हल्+घन् । मद (नशा)। तालरसकी | हितकारिन्, (त्रि.) हितं करोति । कृपिनि । शुभ- कारक । भलाईकरनेहारा । हितकरनेहारा. हालाहल, (पु० न०) हालेव हलति । हल् अन् । एक- | हितैपिन्, (त्रि.) हितं इच्छति । इप्+णिनि । हितकी । प्रकारका विष (जहिर), एक कीडा । मया (त्री.) इच्छा (चाह)करनेहारा । हितेच्छाकारी. टीप्. हितोपदेश, (पु.) हितस्य उपदेशः। भलाईका उपदेश । शालिक, (त्रि.) हलेन खनति (हलसे सोदता है)। हितके लिये उपदेश । विष्णुशर्माका रचाहुआ नीतिविषय- हलकर्षक (लखेचनेहारा)। किसान । “हलः पहरण को प्रतिपादनकरनेहारा अंथ. अस्य" हल जिसका शस्त्र है। हतसे शुद्ध करनेहारा । हिन्दोल, (पु.) हिन्दोल्पम् । पृ. । दोलन । झूलना। "हलस्य इदं वाटल्यम्" हलका. . श्रावण( सावनमहीना )के शुक्लपक्षमें विधान कियाहुआ हाय, (पु०) धम् । निः । आह्वान (पुलाना)। त्रियों झूलनेसे भगवान्का झुलानारूप एकप्रकारका उत्सव । एक की कारभावसे उपजी चेष्टा. हास्तिक, (न.) हस्तिनो समूहः+ठण । हायिओंका समूह. हिम, (न०) हि+मक् । आकाशसे गिराहुआ पानीका दास्तिन, (न.) हस्तिना (नृपेण ) निवृत्तं नगर (भण्)। कण (कतरा)। शीतलसर्थ (डण्डा छूना)। उसवाला हस्तिराजासे बनायागया। (हस्तिनापुर ) दिल्ली. (नि.)। छोटी इलाइची । नागरमोत्था (स्त्री.)। हास्य, (न०) हस्+प्यत् । हसना । अलंकारका रसविशेष. अप्रहायण (मगर) और पोप (पोह) सरूपऋतु हाहाकार, (पु.) हा हा इत्यस्य कारः । तपश् । हाहा. (मौगिम) । चंदनका दहन । चन्द्र (चांद) और करना । युद्ध(सडाई का शब्द । शोककी भाज. काफूर (पु.). हि,पटना और जाना । सा०प० सक• अनिद । दिनोति । | हिमकर, (पु.) हिमः करः (किरणः) यस । जिसी भोपीत. किरण यर्फ है । कृय । चन्द्र (चांद)। भौर कार. शराब, रागका नाम. - मगिरि, 1 हिमगिरि, (.) हिममयो गिरिः। हिमप्रधानो पा ARI) हिरण्यं वाहन (प्राय) का पहार । जहाँ बस पफ है। हमारा -भाई। शोसा पहुंचाना है । "हिरयाणाः पदाह भारत न." । गोप्रेमी भुजाके समान जिसके हिमप्रस्थ, (पु.) हिमः प्ररथः । शीतल घोटीवाला। (महादेव । शोणनामी एक नद हिमालयका पर्वत (पहा). दिमवत्, (इ.) हिमानी (प्राधुर्येण) अस्ति भर+ हिरण्यापम पुत्र । एक देख. मार। "म" को "व" होता है । जहाँ बहुत पकं होती | द्विरक (4)-कर-सट् । पर्जन (रोकना )। है।हिमालय पर्वा. दिमसंहति, (खी.)त. हिमगमूह । एफा देर. हिलोला (ना) पु. 3. स. सेट् । हिलो- दिमांनु, (पु.) हिमाः भंशवः अस्य । शीतलकिरणों यति-ते.) पलापंद्रमा । चोदा और कपूर पार. दिलोल(वोल्मन् । तरंग (लहर)+पम् । दिमागम, (I.) हिमस्स आगम- यन । जिसमें बरफ शुल्पना भावी है । अप्रहायणी (मगर) और पीप (स) (हिब, श्रीगन (करना) सा.प. स० सेट् । इस्ति । खरूप दो महीनोवा ऋतु (मानिम). हिन्वति । शाहिन्वीत. हिमाद्विसा, (सी.) हिमादी आयते । अन् । दिमा- ( हियुया(Aदियाउका । नि• । ज्योतिषम समये लयमै उत्तम होती है । होरिणी । पाती। और गंग. -श्रीया स्थान दिमादितनया, (बी.), त• । हिमालयकी पुत्री । हिस. वध (गरना) या पु. उ. रधा• १० सफ• सैट् । दुगा। पार्षदी. दिनविासपति-ते । हिंसीर । मजिसित्-त. हिमानी, (सी.) हिमानों मंहति । हिमम्मी-आनुक्च । ही, (भR.)। विस्मय (रानी) । दुरा। हिमरामूह । बरफला देर । "आगता पन रेष हिमानी" विषाद(s) और शोक. हीन, (I.te "" को "न" होता है । ऊन हिमाराति. (पु.) त• । परफा शायु । सूर्य । (क) निन्दा के लायक । और अपम (मीय). भाकका रक्षा भाग. हीनयादि.)पर्ने । पूर्वकार (पहिला बगल). हिमालय, (पु.) हिमाना मालय. । परफोर पर। को, दोहार की औरका अबलम्बन का है। संमती घोटर किसी सरे विषय परा- एक पहार, द्विमान, (न.) हिमपाले जायते अन् । फीतके समय नेहारासाररावारी (माई) धर्मशाखमैं. सजता है। उत्पल । कमलफूल, होना मा यस । खभावसे न्यून (म) हिरण्मय, (वि.) हिरण्यात्ममयट् । नि.। मोनेका भेगसंगालाभारि सियाबीर, बनाहुमा । रिया की । "हिरण्मयी सीताप्रतिति"दीप (न.नि. । वन । भोर होस । शिश। उत्तररामचरितम् । नी वर्षों से एक (न.)। सूर्य मार रारमिद (और)(पु.)। सा रन् । मण्डलमै रहनेहारा परम प्रन। “य एर हिरण्मय पुस्यो होराए। स्यते हिरण्यादा." आन्दोग्यम्. द, होमुएता पौभारिप गलना) । शो.. हिरण्य, (न.) हिरणमेव (खा) यत् । मुवर्ण । सोमा। रासी । अहीपीद. धराधन. हार, (:.)लयम कारः पम् । दिरण्यफशिपु, (पु.) एक दल (यह कश्यपले निमें उप.VEETरा (सेरको जाने) हुआ). राग मौन मारणार हिरण्यकशिपुरन, (पु.) हन् कि । हिर. भ्यासिको मारनेहारा। विष्णु. दुइ, ) मा. पा. स. सेट् । दिरण्यगर्भ, (पु.) हिरण्यं (वर्णभाई) गर्भः (टर. इदिद। सिस्थानं ) बस । सोने से निकला । पारगुस-, ([11 (दस)। चोर ने पालाममा (बह सोनके अंडेसे निकराया)। सल- हिरे दिमा मोरयत (मेय) माममूनि विशेष. हुन । देशमा चल्ने मार हिरण्यरेतस, (पु.) हरम्प रेत. यस। जिसका कोई A gमा भरे सोमा है। (बाम)। और विपास. होन (न:

। हायन,] दिनर, हायन, (पु.) जहाति (मनु)। हा+त्यु-नि: । ग्रीहि । हि, (आय.) हा हि वाडि। हेतु (गर)। आधारण- धान । (भावं) जहाति । घन्सर (परिरा)। आगही लाट (निश्चय )विशेष । प्रश्न (मवाल) हेनुरा टरदेश (क्यों. (स्त्री.). कि)। शोक । लोकका पूगरना. हार, (पु.) हवमणि पन् । एकप्रकारको मोतिभागी हिंसक, (पु.) हिंग्युत्। व्यान (मेडिया आदि हिंग माला । माला । "कर्तरि+धम्" । पाँटनेहारा । माज. (मारनेवाला) पशु । और शत्रु (दुस्मन), हिंमारने हारफ, (पु.) ह+ण्वुल् । चोर- धूतं । सचरा ! भाजक हारा (त्रि.). अंक । चुरानेहारा (नि.), हिंसा, (श्री. ) हिंग्या वध (मारना ) 1 पातन ( हारायली, (स्त्री०) हार व भावली। हारकी नाई कतार । (कतर- करना)। किसीको प्राणों से अलग करना और जोरादिका 'मुक्तावली (मोतिओंका हार)। "रकारहारावली" इति काम. गंगासवः । पुरुषोत्तमका पनायाहुया एक कोप. हिंस्र, (त्रि.) हिम्म। हिंगाचीउ । मारनेवाला। घोर हारिद्र, (पु.) हरिद्रया रक्ता+अण् । कदम्ब (कदम) का (रापना) दख्त, (इसका फूल बहुत पीला होता है)। हरदीसे हिए, शन्दकरना। कूकना । भ्वा० उ० अ० सेट् । हिक- रैगाहुआ (त्रि०). ति-ते. हारिन् , (नि.) हारः अस्ति अस्य+इनि । हामिनि वा । हिछ, हिंसा ( मारना)। बु. आ० स० सेट् । हिकयते । हारक (चुरानेहारा)। हारवाला और मनोहारी (मुन्दर). अजिहिकत. डारीत, (पु.) ह+णिच्-इतच् । एक मुनि धर्मशान यनाने- | हिका, (खी.)। हिक+अ । एकप्रकारका रोग(हिवकी ). हारा । एक पक्षी (मैना)। और कितव (धूनेसचरा).. हिङ्ग, (न० ) हिमं गच्छति । गम्छ । नि । हीड् । रामठ- हार्द, (न०) हृदयस्य · फर्म अण् । “हृद्" का आदेश होता है। लेह (पियार)। प्रेम । "हृदि भवः विहितो वा हिट, गति (जाना) । घूमना । भ्वा० आ• स० सेट् । देशका वृक्ष (जिसका रम हिश होताहै). अण्" । हृदयसे हुआ था जानागया । हृदयका वा हृदयमें इदित् । हिण्डते. जानाहुआ (नि.). कार्य, (पु.) हियतेऽसौ। हण्यत् । विमीतक वृक्ष हिडिम्ब, (पु.) एक राक्षस (वह मीमसेनसे मारागया)। म्या । उस राक्षसकी भगिनी (वहिन) (त्रियां टाप् ). (बहेडा) हरणीय (लेजानेलायक) (त्रि.)::. हित, (त्रि.) धा+क। हिक्क या। गत (वीतगया)। बल, (पु.) हलः अस्ति अस्य अ । हल एव वा+अण् । पम्य (हितकारी)। और मंगल (मलाई). हलवाला । बलराम । और हल. ला, (स्त्री०) हल्थ । मद (नशा)। तालरसकी / हितकारिन्, (त्रि.) हितं करोति । कृ+णिनि । शुभ- कारक । भलाईकरनेहारा । हितकरनेहारा. लाहल, (पु० न०) हालेव हलति । हल्+अन् । एक- | हितैपिन्, (त्रि.) हितं इच्छति । इप्+णिनि । हितकी प्रकारका विप (जहिर)। एक कीडा । मया (त्री.) इच्छा (चाह )करनेहारा । हितेच्दाकारी. होप, हितोपदेश, (पु.) हितस्य उपदेशः। भलाईका उपदेश । लेक, (त्रि.) हलेन सनति (हलसे सोदता है)। हितके लिये उपदेश । विष्णुशर्माका रचाहुआ नीतिविषय- हलकर्षक (हतखेचनेहारा)। किसान । "हला प्रहरणं को प्रतिपादनकरनेहारा ग्रंथ. अस्य" हल जिसका शत्र है। हलसे शुद्धकरनेहारा। हिन्दोल, (पु.) हिन्दो घम् । पृ. । दोलन । झूलना। "हलस्य इदं वा टक्छम्" हलका. . श्रावण( सावनमहीना )के शुकृपक्षमें विधान कियाहुआ -, (पु.) घम् । नि० । आहान (धुलाना) । स्त्रियों झूलनेसे भगवान्का झुलानारूप एकप्रकारका उत्सव । एक की मारभावसे उपजी चेष्टा. स्तक, (न.) हस्तिनां समूहः ठण । हाथिओंका समूह. | हिम, (न०) हिक्मक् । आकाशसे गिराहुमा पानीका स्तन, (२०) हसिना (नृपेण ) नित नगर (अण)। कण (कतरा)। शीतलसर (इग्दा छूना)। उरावाला स्तिराजासे यनायागया। (हस्तिनापुर) दिली. (नि.)। छोटी इलाइची । नागरमोत्या (खी.)। र, (न.) हम्प्यत् । हमना । अलंकारका रसविशेष. अग्रहायण (मग्गर) और पोप (पोह) सपऋतु कार, (पु.) हा हा इत्यस्य कारः । पम् । हाहा (मागिम) । चंदनका दस्त । चन्द्र (पाद) और रना । युद्ध(साई) कामाद । शोककी भाज. काफूर (पु.). बढना और जाना । सा. प. सक• अनिन् । दिनोति । हिमकर, (पु.) हिमः करः (हिरणः) यम्प । जिराकी हिरण वर्फ है । कान् । बन्द (पर)। और कार - शराव. . -- . - रागका नाम. हैपीन.

दिमगिरि, . हिमगिरि, (पु.) हिममयो गिरिः। हिमप्रधानो पारिन (1) बा पहाड । जहाँ बहुम प है। हिमाया •भ... एक है । पहा. मेड है ....' । रोन हिमप्रस्थ, (पु.) हिम प्रायः यमीतल घोटीवाला। Marn हिमालमरा पर्वत (पहार) दिमपन्, (पु.) हिमानी (प्राचुण) अनि अत्र+हिरण्यास": An Fri.. मनुस् । "ग" को "व" होता है। जहाँ बहुत पर होती / दिया, (.:-रदर (Pri है। हिमालय पर्वत. दिमसंहति, (पी.) 5. हिमगम् । वरपका देर । टिदोला ) . . . . . . . पालादमा । पाद और पूर वापर. दिलोन :: He (Part दिमागम, (पु.) हिमम्य भागमः पत्र । जिगर्ग बार भाती है । अमदायणी (मगर) और पार () दिव(Hrm)...Prima कर दो महीनों का भानु (रिम), द्विमादिजा, (सी.) हमारी मायने । गा-(r.firs ...:mirm लयमै उत्पन्न होती है। क्षीरिणी । पाती। गौर गंगा. karar हिमाद्रिननया, (खी.)त. । हिमालयकी पुत्री । दिए, ............. दुगां । पायेटी. दिमानी, (जी.) हिमाना गरिः । दिगली-मारपसी(ta re (Pre) हिमगमूह परपसार । "भागता बाबरेबगी" Hysianri. म. (11.1: * *"...... दिमाराति, (पु.) • I रा रा रा रा । (२) '' Prerart... भाका पक्षमाग. टीमfeet....Art: Parer) दिमालय, (पु.) हिमानी मालयः । मोर। 4. Are ... एसपहा. दिमाज, (म.) हिमपाले जायते अन् । साय गया। • ALEntre भजतापलबमलपल. हीना ! ...) दिरण्मय, (वि.)हिरपारम+मपर । nि नाभा । "मी "thr. (................. उत्तररामचरितम् । मी बर्षा मेसे एक(न.)। समें रहनेतरा परम RAI " TERE पुग्यो हरयन हिरण्य"दोयम्, दिरण्य, (.)पमेव (स) गा। दिरण्यकशिपु. (३.) (A KE मा) दिरपासिपुरन (पु.) । for ' पारिgirnetry हिरण्यगर्भ, (I.) A (Ari) ( fire) थम्य Diet | Re...'' PERSr wifermen हिरण्यरेता (5) fast (R)RATE.

. Trन, (पु.)ी (मनु)-नि। मोहिदि, (गया) हा यानी।। (सर) मा पना () जीवनर (बारेम)। लीला (नियर)(IN) देश (. क) शोक। भोरका पूरारना. TR() निन् । मारने मोतिभोंदी हिंसक, (पु.) गुलामत्र (मडियामा मान्य मम "R" बटनेहारा । भावर, (मारनेत्राग) पशु । और ग (रमन)। गार. रिक, (.) हम । पोर. पू । सरा। भावक । रनेहरा (नि.). हिंसा, (खी.) हिंगाप(मारना)। पर (Cr. रारती (सी.)हर की। हारीन पर। करना)। किसी को प्रायोते मग मरना भार और मुख्यरी (दिर), हा" ही गंगा नगाएको हिंम्र, (नि.) गानीमरने रिड, (5.) रब (कान) (सरना). , (ME र दीर होग है)दिश, गदारना। कना। मा० उ.म.न. ग(दि.) अग्नि.(E.rr. मि मनाने का विश, हिमा ( मारना )। गु. 3. स. सेवा)। (Tamrnगारी ( TR). राविति. त्र, (:.मनाने निमा (श्री.), ETER रोग(तिमी). Primar) (ोगा). तु. ( न. ) लिम गात । मनिहोर। म. ..rentr"महा का Ter (जिगment) (7) "भा का ग (जाना )। मना । wro an-n .। शीर।दिला. हिरिम्प, (T.) एक राग (45 गीगगेको गागा)। Hitri re ! " था। उग रानी गनिमी (बीन) (Inter). हित(f.) मा Ram | (mm) rrty. kamkriKI । (HI)। मोर मंगल (भाई). दिनानि, (fr) ki air RI Prem.in.) (r) । पा । भागने दागदा". C... Tripari - तिषित, (IN) Miसी।।११ ( Narer. नग,(T.) मोगः। Hthi antar Eriti titiligarh Erit Litra re aari काग. we are है। Virमोड, (.) 11.41 । Unternauni gril Irrigat । Frierroritrina {WS . *: rrr. antt...मार,... (1) 4M A Kirth हिमगिरि(पु.हम हमको Rirt innr ni तक है। हमारा rritr हिमाय, (पु.) हमः या यमाला हिमालयापर्यत (पट). हिमपन्, (पु.) हिमानी (प्राग) भनि अz+दिwerermiri मगर । "म" को "" बोल है। जान.( Amritin है। हिमालय पर्या दिमदति, (iv) मिरपुर । पहा.enize: १५...... दिमांगु (पु.) हिमाः भाव an Mantra MAN. पदमा पदभार दिमागम, (पु.) हिमम्य भागम' पर । मि र माता है । महायणी (गग्गा) हा दर {Prim.trxrir... मरोमानिया का (मागम ) दिमाद्रिमा, (.) मा जायते । Re Pritain.xi लयमै उसमोतीhirt पानी Arg. दिमाधिनगया, (sी.) गाय shirm. :- दुर्गा । पारि दिमानी, (.) हिमाना कि । Ematlgarges/1(rk. . . . . . inr (...) हिमामूपाला " हिमाराति. (३.). । । भासमाभाग Errurler, ritain हिमालय, (I.) इमामो भरम Panta . 4. .. - F दिमान, (म.) द्विाA ART against गमताtara मनात दिमय, (fr.) Kar R+TRE ... बमामा । कि "दो togy,.. murarपम् । c. । .. ममेरा IRRC NEar' fran"apan दिस्य, (.) (NNRI RANI पा, दिपशि. (Sarn ter arre ( Sere ! .. **** frater from Errons.(पु.) km Irrian Prera) wisment krt.. + . . होनार (K. Timtaw trt.

हायन,] । हिमकर, . हायन, (पु.)वहाति (अम्बु)। हास्युनिः। मोहि। हि, (व्य) हा हि वाडि । हेतु (सबर)। भाधारण. धान । (भावं) जहाति । वत्सर (बारेम)। आगही लाट (निथय )विशेष । प्रभ (सवाल) हेतुका उपदेश (क्यों. (खो.. कि)। शोक । मोरका पूराझरना. हार, (पु.) धर्मगि भन्। एकप्रकारको मोतिओंधी | हिंसक, (पु.)हिए+मुत्। व्याघ्र (भेडिमा आदि हिंगक माला । माला । "वर्तरिक्य" । बाँटनेहारा। भाजा. (मारनेवाला) पशु । और शत्रु (दुस्मन), हिंसाधरने. हारफ, (पु.) हवुत् । चोर- धून । राचरा। मानक हारा (त्रि.). मेक । चुरानेहारा (वि.). हिंसा, (सी.) हिंम् । पप (मारना)। पान (17- दारावली, (सी.) हार इन सावड़ी। हारकी नाई कनार । करना)। किसीको प्राणोंसे अलग करना भोर जोरासिस सुचव (मोतिओंभ हार)। "यारहारावती" इति काम. गंगासरः । पुस्योत्तमा मनायाहुया एक कोप. हिंन, (नि.) हिंगर। हिमाचीत । मारनेराला । पोर हारिद, (पु.) हरिदया रामम् । कदम्य (दम) का (रापना). दल, (इमा फूल बहुत पीला होता है)। हीसे हिया, शन्दकरना । फूकना । भ्वा० उ० ० सेट् । निर. रंगदुआ (नि.). दारिन्, (नि.) हारः अस्ति यस पनि । हामिनि वा । हिम्, हिंसा ( मारना)। गु. भा. रा. सैन । दिकयो। हारक (पुरानेहारा) हारवाला भोर मनोहारी (मुन्दर). अनिहित. धारीत, (पु.)हनिन्-इतन् । एक मुनि धर्मशान पनाने हिमा, (सी.)। हिr+r । एकप्रकारका रोग( दियकी ). हारा । एक पक्ष (मना)। भारतिय (पूनगरा). चार (म) म म क्षण | "" का आदेश होता हिता (न. ) दिमं गरयति । गम्छ । । । होस् । रामड. (INR)। न । “ER भर. विहितो या हिण, गति (जाना)। मना । भा. भा. रा. और। देशग वृक्ष (जिसका रग हि होता). अन्"। माया नागरायका या हृदयमै इति । दिगते. सानुभा (नि.). विधिम्य, (पु.) एक राग (47 भीमनगे मारागा)। पार्य, (3.) बिदेगी। हम। मिमी पक्ष म्या । उस राक्षमकी भगिनी (पहिन) (निषert). (ग)(मेटार) (it). हिग, (त्रि.) धा+m Ram| (पीपया)। हाल, (पु.) भनि । हल एप भए । पम्य (दितकारी)। गौर मंगल (मलाई). रसायन रन. ला. (m.) ल्छन् । म (नशा)। भारी हितकारिन्, (नि.) हितं करोति । पिनि। . पार । भलाई मरनेहारा । दिपारनेदाग. लाल, (पु.२०) र दी। हाथय । - द्वितपिव, (मि.) दिछी पनि । ती Here fr(अदर)। एक भी। मा.श्री.) रहा (पाह)रिनेहारा । दिनकारी. हितोपदेश, (T.) हितमा । एरिस (प.) रटेन पर ( रोदना)। निमगे उपदेश । xिणुगाभा mm. (लमेn), RAI "इट प्रहा मोदनारनेहाय. wr उजिम है। हलने reहिन्योल(.) होम | Timi "दरबालन्टर प्रग( सापनमहीना ) एमे ring (5.) निभदन (ग).fi. परेने भगानाPITRITIES नसत. मान. लिर, (२.tar+पधादिम, (२.) time मा Argut arter लिम, (२.tar(inant () (M) (मा), airy (नि.), सही नाम1 (2.)। (माया) - 1 (4) Art आर.19.rer. ६.rr... 341 मर () (1) ti Antistat(4) May प - .

हिमगिरि, पहाड . , सयनि-ते. हिमगिरि, (पु.) हिममयो गिरिः। हिमप्रधानो पा गिरिः। हिरमं बादशी (प्रापयति) । पहाड । था जहाँ बहुत यफ है। हिमालपा भन्। सोजा पहुंचाता है। "हिरप्पारणाः भाररिव तार" गोरी भुजाके गमान जिसके हिमप्रस्थ, (पु.) हिम' प्रस्थः यस । शीतल चोटीवाला। Fataमहादेव । शोणनामी एक नद हिमालयका पर्वत (पहार). हिमयत्, (पु.) हिमानी (प्राचुर्पण) अस्त्रि भन+ | हिरण्योy.) पग पुत्र । एक देख. माम् । "म" को "व" होता है। जहाँ बहुत बर्फ होती | हिरक (ar) देफिक्-सट् च । पर्जन (रोकना )। है। हिमालय पर्वत. लाग. दिमसंहति, (बी.) ६त. हिमसमूह । परफना देर. हिलोल्नी) . 3. स. सेट् । हिलो. दिमांध, (पु.) हिमाः भंशवः भव । शीतलकिरणों- पाला । चंदमा। बांदा और कपूर । कार. हिलोलोल अन् । तरंग (लहर)पिन् । हिमागम, (पु.) हिमस्य आगमः यत्र । जिममें बरफ शुभना: मादी है । अप्रहायणी (मग्गर) और पोप (पूस)| दिव, मोra (करना) मा ५० स- ऐ । हस्ति। सम्पदो महीनोंवा ऋतु (मीनिम), हिन्यात दिनार हिमाद्रिजा, (बी.) हिमादी जायते । जन् । हिमा- हियुष, (..) सिउरुत् । नि• । सोतिम समो लयमै उत्पल होती है। सीरिणी । पार्वती। और गंग्न. माया मान- हिमाद्वितनया, (स्त्री.) त• । हिमाल्यकी पुत्रो । विस, पथ (मारना) मा पु. ३. स्था. 4. 15. वेद । दुर्गा । पार्वती. इदिन् सरक्षिते । महिंसीर । लजिगित्-त. दिमानी, (पी.) हिमानां सहतिः । हिमपी-आनुक्य । ही, (अ.) पिम्मय (हैरानी) 1 TI हिमगमूह । परफका देर । "आगता पत जरैव हिमानी" विषाsataran) मोर कोर. दीन, (fiहीर"" को "न" है। न हिमाराति, (पु.). । बरफका यु । सूर्य । (कम) लाभारा । और भयम (मीर). दीनवादिए.) कर्म । पूर्वकार (पहिला गा). हिमालय, (पु.) हिमानी भालयः । परफो का घर । को दोहारो किसी और आलम्पन पता है। भगती र टोरमसी गरे रिपरने पग- दिमाज, (म.) हिमाले जायते अन् । शीतके समय मेहराभरा (माई) पमेगावमे. उपजता है। उपलबमलफूल. टीना दोन भने बन्य । मभारसे न्यून (म) हिरण्मय, (.) हिरण्यात्म+मयट् । नि. । सोमेका भगायारंगा सामाश्रिया सागर. बनाहुआ । स्त्रियां की। "हिरण्मयी सीताप्रतिप्रति." हीर, (न.जि हो सि उत्तररामचरितम् । नी वामसे एक (म.)। सूर्य सौर मिन (और)(पु.)। सान। मालमें रहनेदारा परम ब्रन । “म एप हिरण्मय पुरषो श्यते हिरण्याक्षः" हान्दोग्यम्, होम भविषालना) । इरो.प. हिरण्य, (न.) हिरणमेव (साथै) यत् । मुरणे । सोमा। राम हार (.)बमपर परम् । हिरण्यकशिपु, (पु.) एक देव (वापसपने हरिमें धर (रोलोजअनेर) हुआ). TELE:- Mirrister दिरण्यकशिपुन्, (पु.) शिप् । दिर. पकशिपुको मारनेहारा । विष्णु, हिरण्यगर्भ, (पु.) हिरण्यं (स्वभा) गर्भ. (em. सिस्थानं ) अस । सोने के अरेसे निकला। पारणत-((१०)। भरपरी पासासमा (रह सोमके डेसे निकला था)। ल. मिल सागर (य). प्राममूतिविशेष. पार से पार हिरण्यरेतर, (पु.) हिर रेत. यस । जिसका 2 4. सिरमा गो सोमा दैहि (TN) और विवाह भाकका पक्ष । आग. एक पहा. धतूरा। धन.

हायन, ( ५५६) काम. हायन, (पु.) जहाति (अमु)। हाल्यु-नि। मोहि । | हि, (अन्य ) हा-हे या+डि । हेतु (राय) 1 अवधारण- धान। (भा) जहानि । पसर (परिस)। भागही लाट (निश्चय विशेष प्रा (सवाल) हेतु उपदेश (क्यों. (बी.). कि) शोक । लोकका पूराकरना. हार, (पु.) नंगि पन् । एम्पकारको मोतिओमी | हिंसक, (पु.) हिस्+प्युल। पान (मेडियादि हिंग माला । माला । "कर्तरिधिम्" 1 वॉटनेहारा । भाजक. (मारनेवाला) पगु । और शनु (दुश्मन)। हमारने- हारफ, (पु.) हयुत् । चोर- धूतं । रारा। मानक हारा (त्रि.). अंक। चुरानेहारा (त्रि.). हिंसा, (सी.) हिम्सा घ( मारना)। पातन (क्त हारावली, (सी.)हार व भावनी। हारकी नाई कतार । करना)। किसीको प्रागोंसे अलग करना भोर जोरारिका मुच्यवती (मोतिओंका हार)। "सारहारावली" इति गंगामकः । पुरषोत्तमा यनायाहुया एक कोष. हिंस्र, (नि.) हिंएर । हिंगाचीउ । मारनेवाय । पोर हारिद्र, (पु.) हरिद्रया रजा अग् । कदम्ब ( कदम) का (रावना). दरत, (इगका फूत बहुत पीला होता है)। हस्से | हिण, शब्दकरना । कुकना । भ्या० ३० अ० सेट् । है. रंगाहुका (पि.). ति-ते. दारिन्, (वि.) हारः अस्ति अस्वाइनि । हामिनि वा । हिमा, हिंसा ( मारना)। नु• आ. स. रोट् । हिक्यते । हार (मुरानेहाण)। हारकाला और मनोहारी (गुन्दर). अमिहिकत. क्षरीत, (पु.) हरिम्-इनन् । एक मुनि धर्मशान मनाने-क्षिणा, (प.), हिr+अ । एकप्रकारका रोग(दियो ). पारा । एक परी (मैना) और स्तिर (गचरा). हिल, (न. ) हिमं गरनि । गम्छ नि । हो । रमऽ. दाद,(.) यस रम सन् । "" का आदेश होता है। (पर)। प्रेम। "हरि भाः पिहितो का हिड, गति (जाना)। धूमना । मा. आ. रा. सेर। देशका वृक्ष (जिगमा रम होताहै ). w" मा पा जानासावा हदयमें इस्ति । दिमते. जानुमा (नि.). हापं, (पु.)। हम। मिीना पक्ष हिसिम्य, (पु.) एक राक्षग (बर भीमगेनमे मारागपा)। म्या । उग राधमकी भगिनी (पदिन) (नियो टार). (ग) (मेरलायर) (नि.). . . दित, (नि.) पा+। हि+या। गत (पीतगपा)। हाल, (पु.) भनि म । हल एण। पम्य (हितकारी)। गौर मंगत (मलाई). हरयानाऔरल, ला, () एम् । (नशा)। मालरमकी दिनकारिन्, (नि.) हितं करो। गिरि। म. कारक । भलादेकानेहारा । दिनकरनेद्वारा. रातार, (पु.न.) ली। हलाअम् । एक. हिनपिन, (नि.) हिनं इसी। पाणिने । Read Fera fr(E)। पर की। मच (.पी.) इसा (चाह )रनहारा । दिप्यारी. हितोपदेश (पु.) हितमा गोरः । म गोश। एर (.) न मरी (लभ सौदा)। तो उपदेश । गिरबा IT. हद (हटगेमहाग), forme | "इल प्रहा को प्रतिदिनकरनेझारा अंग. "डिमा है। लोग हिन्दोल, (पु.) Rो । .दोना। "दरम्"लए. श्रावण( सारनमदीना) Rangm हार, (३.) । नि.IET (बापग) थियो । भने भमानमानसा पराए मारने, रनिर, (.jrate. दिपमा, द्विम, (२) मा म रिमा नाter स्न..jr(पFit (4): (en) (ना) AAT (ft.)। (2.)। (20) IET LETTE (मामा) (प) am: (HR) रा (1) Triram ६. रा. ...more ft.(:.). (ex 44 fith Treeti(1), AAT - raम.

मिनिरि, [हुत, 1 . हिमगिरि, (पु.) हिममयो गिरि हिंगप्रधानो या गिरिः। हिरण्यं वाहपति (प्रापयति) पहा पहा । पा जहाँ बहुत पर्फ है। हिमालयका - 14 सोना पहुंचाता है । "हरयाणाः पहाड पारिव नः । सोने की भुजाके समान जिसके हिमप्रस्थ, (पु.) दिमः प्रस्थः यस शीतल चोटीवाला। तरंग (महादेव । शोणनामी एक मद हिमालयापर्यंत (पहार) हिमपन्, (पु.) हिमानी (साग) सस्ति अत्र+ हिरण्या) सापय पुत्र । एक देव, मदए । "म" को "व" होता है। वहाँ बहुत बर्फ होती ) विरार (+उकि-हद् च । वर्जन (रोकना )। है। हिमालय पर्वत. दिमसंहति, (श्री. स. । हिमरामूह । बरफडा देर हिलोलो (नी) ०.३० स० सेट् । हिमो- दिमांगु. (पु.) हिमाः अंशवः अस्य । शीतलकिरणों सयजिते. बाला । पदमा । चोदा और कपूर । कार. दिलोदार+अन् । तरंग (लहर पन् । दिमागम, (पु.) हिमम्म भागमः यत्र । जिसमें बरफ शुलना:- भाती है। अमहायणी (मग्गर) और पीप (पूम) हिव, प्रोणम (करना) मा० . ० सेट् । दिए । स्वरूप दो महीनोंका ऋतु (मौखिम ), दिन्यतिर द्विमाद्विजा, (स्त्री.) हिमादी जायते । अन् । हिमा-हिबुफ, (३०) पिस । नि. । ज्योतिष समले लय में उपस होती है। क्षीरिणी। पार्वती। और गंगा. -चांपा साम हिमादितनया, (खी.) ६ त• । हिमालयी पुनो । हिस्, मध (भरना) दा मुउ• धाप. पक खेद । दुर्गा । पार्वती. इदिसपनि । महिंसी । अनिहिंगद-स. दिमानी, (सी.) हिमानां संहतिः । हिम-आनुक्य । ही, (अय.) ही। पिम्मय (रानी) । दु। हिमगह परफका देर । "भागता पन जरेव हिमानी" घिरा (ना)। और शोक. रयुकट हीन, (ही। "" को "न" होता है। कन हिमाराति, (पु.) • । परफला शगु । सूर्य । (म)। निन्दा लामक । और मपम (मीर). भाकका आग. हीनवादिन(पु.) गर्गपूर्वबाद (पहिला गा). दिमालय, (पु.) हिमानो बालयः । परफो। पर। को पोकार किसी औरका अबलम्बन कता है। एसपहा.. अगली को टोडर किसी गरे विषयमें . हिमाज(न.) हिमशले जायते जन् । हीतके समय नेहाए । परामरी (शा) धर्मयात्री. सजता है। उत्पल । कमलल. हीना हान यसभावसे न्यून (1) हिरण्मप, (नि.) हिरप्पाम+मपट् । निः। सोग अंगारसंगमा दिसाआदि। श्रिाप बनाहुा । वियोशी । "हिरण्मयी सीताप्रतिकृति"र, (.JPriमि. वा । और हीरा । शि। उत्तररामचरितम् । नौ वर्षों से एक (न.)। सूर्य सोप TIRE (और)(पु.)।सा गन् । मण्डलमें रहनेहारा परम प्रम। “य एष हिरण्मय पुरषो एयते हिरण्याक्ष."न्दोग्यम्. रोमहर र काभाविध गलना) । अहो.प. दिरण्य, (न.) हिरणमेव (सा) यत् । मुराण । सोमा । रामहोपीद, हार, (.) हत्यसम्म पम् । हिरण्यकशिपु, (पु.) एक देल (बह पश्यपसे दिशीमें उप.. धगचा (रोरो जनर) हुआ) न । यो मारी हिरण्यकशिपुहन्, (पु.) हन कि । (ताहिर. याशिपुधे मारनेहारा । विष्णु. हुद Art) मा. . म. है। दिरण्यगर्भ, (पु.) हिरण्य (सभा) गर्भ (सर. सिस्थान ) अस । सो अंडेसे निकला । भारगुण-(श (सात)। चोरो रेले बालामा (बह सोके अंडेसे निहरा था)। शाल- पित (मेरा) प्राममूर्तिथिोप. कार से प्रार हिरण्यरेतर, (पु.) हिरण्यं रेत. स्व । जिसका की। Mariate Ric सोभा है । यहि (IN)। और विकास रोन न. धतूरा धन. - हायन, हिमर, काम. हायन, (पु.) जहाति (सम्यु)। हाल्लु-नि1 ग्रोहि । हि, (अन्य ) हा-हे चा+डि। हेतु ( राबय) । अवधारण- धान । (भावं) जहाति । वत्सर (वारिस )। भागरी लाट (निधय विशेष । प्रश्न (सवाल) हेतुका उपदेश (क्यो- (स्त्री.). कि)। शोक । भोकका पूराफरना. हार, (पु.) हकमणि पन् । एक्यकारकी मोतियाधी | हिंसक, (पु.) हिस्+ग्युल्। व्याघ्र (मेडिया )आदि हिंसक माला । माला । "वतरि+धम्" । बाँटनेहारा । भागक. (मारनेवाला) पY। शोर शत्रु (दुश्मन)। हिमाकरने- हारफ, (पु.) हवुत् । चोर- धन । रावरा। भाजक हारा (त्रि.). अंक । चुरानेहारा (त्रि.). हिंसा, (धी.) हिंस्म । वध (मारना)। पातन (कतर- हारापली, (खी०) हार व भावली। हारकी नाई कतार । करना)। किसीको प्रागोंसे अलग करना और जोरआदिका मुकावली (मोतिओंका हार)। "मारहारावती" इति गंगामवः । पुरुषोत्तमका पनायाहुमा एक कोप. हिंस्र, (नि) हिंसर । हिंसाशील । मारनेवाय । घोर हारिद्र, (पु.) हरिदया रका+अण् । कदम्ब (फदम) का (रायना) दरत, (इसका फूल बहुत पीला होता है)। हरीसे | हिया, शन्दकरना । कूकना । भ्वा० ३० अ० सेट् । हिज. रेगाहुआ (नि.). तिते. दारिन्, (नि.) हारः अस्ति अस्य+इनि । हामिनि वा । हिदा, हिंसा ( मारना)। • आ० स० सेट् । हिश्यते । हारक (चरानेहारा)। हारपाला और मनोहारी (मुन्दर). अजिहिकत. दारीत, (पु.)हनिन्-दलन् । एक मुनि धर्मशान मनाने हिफा, (यो.)। हि+अ । एकप्रकारका रोग(हिमी ). दारा । एक पक्षी (मना)। और कितव (धूपंगचरा). हाई. (न. ) यस बम भन्। "" का आदेश होता. हिना (न• ) हिमं गछति । गम्छ । नि । ही । रामइ. है। (रिपर)। प्रेम। "हरि भरः विहितो वा हिस, गति (जाना)। घूमना । मा. आ. रा. से। देशका वृक्ष (जिराका रम हित होताहै). "।दायगे हुमाया जानागया ।हरयामा हरयमें रदिर । हिण्डते. सानामुश्रा (नि.). हिपिम्य, (पु.) एक राक्षम (बह भीमसेनमे मारागया)। साप, (पु.) हिनेगी। हाया। मीनाः पक्ष | म्या । उस राक्षसकी गगिनी ( महिन) (निया टा). (बहन)रीय (नाराय) (नि.). हित, (नि.) धा+का+या। गत (मीनगया)। पाट,(पु.) पनि समस्यन् । हल एक + । पम्य (हितकारी) गौर मंगल (मलाई), दलालारामोदन. पाया, (पी.) पम् । म (नशा)लासको हितकारिन्, (नि.) हितं करोति । णिनि । शुभ. कारक । भलाई करने हारा । हिनकरनेदारा. । परार. हालादर, (पु.न.) हाले। हल्कगन् । एक- ( हितपित, (नि.) किसी। एमिनि । तिमी परि (दिर)। मा (.श्री.) इच्छा (चार)रमेहारा । हिनच्याहारी. हितोपदेश, (पु.) हिनप उपदेशः। मलादेश। रात्रि (त्रि.) टेन सनि लिने सोना है)। हितके दिये उपदेश । विष्णुशमांग रवाभा भी. हला टिमरनेहरा), हिमान । “प्रमाण को दिनहारा मंग. " उतिमा न है। लने सानदारा। हिन्दोल, (I.) हिन्दोकानम् । पृ.। दीनाना। "मराटन" (ला. भाषण(सापनमहीना ) II Arrigआ हार, (इ.1 निसन (), पिन ने मगमन्हा सुभानामा पास परपसा शनि, (.) मिना दिने गर. दिम, (२.) म । आy Amभा पानी लिन) (नरेश Piant ()' (रा) नियमन (माका)। AT Frrrrri(Taki. (f.) ही ली । माय: (Ni). (Sriram भगमन (मामा) में पंच (र) : र(x.rerneru (म) । HINE (1) पEETrrrrrrr. ..... ४२ । का दिमाग (:.) म... (IN) An fire MERIA () - . - नाम, हिमगिरि, । - हिमगिरि, (पु.) हिममयो गिरि हिमप्रगानो यागिरि हिमाली फंसा पहाट । वा जहाँ बहुत पर्व है। हिमायरा t "पवन-17 , गोमुताके हिमप्रस्थ, (पु.) हिमः प्रस्थः यस्य । शीतल घोटीवाला। तर ( मोज । ना- हिमालयका पर्वत (पहा). हिमवत्, (पु.) हिमानी (प्राचुण) अनि अत्र दिरण्याम पुत्र Arr. मतम् । "म" को "व" होता है। जहां बहुत कम होती दिक, (41)2-बिह-सदन । पन ( है। हिमालय पी. दिमसंहति, (डी.) ६.। हिमगमूह । बरफका ढेर, दिल्लोरो) यु. ३. स. मेर हिमांशु, (पु.) हिमाः भंशव सस्य । शीतलहिरणों- पाला। चंदमा। चोद । और कपूर वापूर दिलोर (Port (HI). दिमागम, (पु.) हिमस्य भागमः यत्र । जिसमें परफ, एप भादी है । अप्रहायणी (मगर) और पौष (पूम) हिद, मीन (Pre)....।। सम्पदो महीनोंका व (मागिम). माद्रिता, (सी.) हिमादी जायने । अन् । हिमा-विध ( • I WANTr यमें उस होती है। सीरिणी । पाती। और गंगा. पद्वितनया, (सी.).. । दिमालयकी पुत्री / दिए, पE)... ..raat गां पार्वती. ranike-INTrrer नी, (बी.) हिमानो मेहति । हिमपी-भानुभवही, (UR-Sh () गमूह। परफार। "आगता गरेर हिगानी" पद) दीम, (intre | """ art 4 दिमाराति, (पु.). । परफागु । पूर्व । (म) IravatIL हीनयादिन{...rator irrrrr दिमालय, (पु.) हिमान! बालय । परपोय । एक पहार दिमाज, (म.) हिमपाटे जायते जन्तये समय मेहएet(statrek टरमा उपल। मलफूल. मा. dwi imater) हिरण्मप, (नि.) हिरण्यामयपद् । नि. म बनाभा । त्रियोग । "रिमारी सीमार" (Maiks.14xtram उत्तररामचरितम् । मी पोंमेले (न.)। सपि fr(r)(:."। माली रहनेहारा परम "रा दिम पुरको परते दिरण्यात." आन्दोग्यम् .viatreni... दिरण्य, (म.) हिरण (M) यत् । पुरा समा। धनुराधन. दिरण्यकशिपु, (I.) एकल (रपसे में ven (kri - RA RETREE रण्याशिपुटन, (I.) । (र. पारियो मारनेरा. m, (पु.) (ब) (र He) अ | Tapersar.te... i :) * r^ ENTECT (ो सल): परेतर, (I.) RI for ki का.. . आकय पक्ष।आग - ।

Padma Chandra Kosha

Author
Shastri P. Ganesh Udit
Title
Padma Chandra Kosha
File name
Padma Chandra Kosha
Text
OCR done
Citation
1925
Published
2011/07
Publisher
Lahore, Meharchand Laxmandas
Language
Sanskrit
Pages
526
Library
Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
DLI number
313706
Barcode
99999990311143.00
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Banasthali University
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