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Panipat Ki Chothi Ladhayi
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पानीपत की चौथी लडाई (एकांकी संग्रह)
OL
मविप्रेगरुत
भाषा विभाग पंजाब के सहयोग द्वारा प्रमाणित
पानीपत की चौथी लड़ाई सुरेश शर्मा
पानीपत की चौथी लडाई
(एकांकी संग्रह)
सुरेश शर्मा
प्रथम संस्करण 1990
प्रकाशक
सवेरा प्रकाशन
एन एफ 134 भीतर माई हीरी गेट
जालघर-144001
फपोजिंग
पालमा पोजिंग हाऊम,
मान माक्टि अडडा टाडा,
जालघर।
मुद्रफ
सटो प्रिंटज पगवाडा गेट
जालघर।
चित्रकार
सुययन
PANIPAT KI CHOTHI LADHAYI
(Onc Act Play)
BY
Suroshi Sharma
Published by
Sixera Parkashan,
NF 13 Inside Ma Hiran Gate
Jalandhar.144 001
Fint Edition
1990
Pree
R. 50
भूमिका 'पानीपत की चौथी लडाई इन विचारको के धोत्र मे पजाब के युवा नाटककार श्री सुरेश शर्मा की अयाय शोषण, भ्रष्टाचार सत्तालोलुपता और धर्माधता के विरुद्ध एक नई मोर्चाव दी है। जव भी जीवन के गलत मूल्यो के विरुद्ध बोई युवा स्वर अपनी आवाज उठाता है तो उसे एक महासमर डने के लिए अपनी कमर कसनी पड़ती है। आदर्शों की पुन स्थापना के लिए अपन इस पनि नाटक संग्रह के साथ श्री सुरेश शर्मा भी 'पानीपत की चौथी लढाई' नडन की घोषणा कर रहे है । जुझार तवर विसी भी नई क्लम का यौवन हाता है । इस यौवन का स्वागत है । श्री सुरेश शर्मा क्सिी पहचान की हडबडी म नही लगते इससे पूर्व वह पजाव क जान पहचान त्रिवेट के खिलाडी रह चुके है। सतत अध्यवसाय और साधना करन का प्रशिक्षण उसके पास है और खेल के मैदान की तरह लेखन के मैदान म भी फाऊन न खेलने की कसम उहाने ले रखा है उनका विनम्र व्यक्तित्व और अग्रज लेखका के प्रति सम्मान का भाव मुझे बताता है । सम्भवत साहित्य और नाटक के प्रति समपण का यह भाव उहे अपने पिता श्री हेमराज शर्मा से मिला है, जो पजाब के सुप्रसिद्ध रगर्मों और पजाय के विरयात मीडिया नाटक निर्देशक हैं। इस सग्रह मे सकलिन नाटका म से तीन नाटका न मुझे विशेष रूप से प्रभावित किया। पानीपत की चौथी लगाई जो आज के युगसत्या स मुह नही मोड रही। हमार समाज में गजनीति की आयाधामी आज एक नावदान मे तबदील हो चुकी है और इस पर धर्मा धता का मुलम्मा हमे पिछली सदी क अधेरो मे भटक्न पर विवश कर रहा है। सुरण शर्मा इस क्टु विभीपिका से क्तगय नहीं हैं, बल्कि उनकी क्लग इसका पर्दाफाश करने के लिए व्यग्य का हथियार अपना लेती है, व्यग्य जो स्थितिया के प्रति आक्रोश से पैदा होता है । व्यग्य जो परिवतन का आान करता है। मुरश शर्मा का एक और नाटक 'फूलो की चुभन आपको शिक्षा क्षेत्र मे ले जाता है। कौन नहीं जानता आज शिक्षा एक दुकान बन चुकी है और शिक्षक फेरी वाला की तरह हार लगा वर अपना माल बेचते हुए अधिक से अधिक माल समेटन का प्रयाम करते है। लेकिन सुरेश शर्मा के इस नाटक म एक ऐसा स्कूल टीचर भी है जा अपने सिद्धा ता और आदश के लिए जीता है और जानबूझ कर की गयी गलती को कभी माफ नहीं करता। प्राय आदशवादी चरिना का निबटारा नाटक म एक त्रासद अ त के साथ कर दिया जाता है। लेकिन सुरेश शर्मा सहज लिखते हैं इसलिए इस नाटक मे कोई प्रासद अत दने का आग्रह उहोंने नही रखा। - - इस सग्रह में उनका एक और नाटा है 'नई मुबह । नाटप या मूलक्थ्य यह है कि एक स यामी के जीवन से ग.-4 TT जीवन अधिक कठिन होता है अगर उसे सही ढंग से निवाह। जाये। अपनी छोटी सी उम्र म ही सुरेश शमा इस सत्य को पहचान पाये गहरे पानी पैठ साधु । सुरेश शर्मा का संग्रह ध्वनि नाटयो के क्षेत्र म उनका पहला प्रयास है । ये सभी नाटक इससे पूर्व आकाशवाणी जाल धर से प्रसारित होकर श्रोताओ के द्वारा खूब सराहे गये थे। श्री सुरेश शर्मा ने पिना रिसी लाग लपट के ज्या का त्यो उह अपन पाठका के सामने प्रस्तुत कर दिया। फैशन के मुताविक टोक पीट कर उह ववजह मचीय नाटक बनाने का प्रयास नहीं किया। लेकिन इस बावजूद जय ये नाटक अपन पाठका से बतियाते हैं तो एक वात स्पष्ट कर देते हैं कि ध्वनि नाटको म भी अपनी बात कहन की अव शक्ति होती है, और वह आज के साहित्य का एक सशक्न हिस्सा पानीपत की चौथी लडाई के साथ श्री सुरेश शर्मा न नाटक के क्षेत्र में अपनी पहचान की लडाई शुरू कर दी है। मैं जानता हूँ अभी उह वहुत मील पत्थर चलना है । लेकिन साहित्य के क्षेत्र में एक और युवा सर न अपनी ईमानदारी लड ई की शुरआत तो की । स्वागत । -सुरेश सेठ 175 ग्रीन पाक मुरप बस स्टैंड के सामने जाल र नगर-144001 मेरी बात करते हैं। अत एक निकेट के दायरे से लेखक के दायरे तक का सफर मेरे जीवन के कडवे मीठे अनुभवो का सकलन मेरी लेखनी का आधार है । इसीलिये मेरे सभा नाटक काल्पनिक नही लगते । मेरे अधिकतर नाटक सामाजिक बुराईयो को उजागर करने की चेष्ठा मेरे नाटको के पात्र यथाथ से जुड़े हुए हैं। पानीपत की चौथी लडाई का राजनीतिज्ञ भगवानदास, जो अपन् आपको भगवान समझता है, समूची मानव जाति को कतव्यो के लिए प्रेरित वरता है, और उनके अधिकारो को अपने स्वार्थी कदमो से कुचल कर सत्ता का सुख भागता है। जब मानव को होश आता है तो भगवान का नये प्रभु का ज म दता है। स्कूल का अध्यापक विद्यान द अनुशासन प्रिय है। जान बूझ कर की गई गलती को क्षमा करना उस सिद्धातो के विरद्ध है। यह बात वो घर मे भी नहीं भूलता और अपा बेटे विकास के साथ वही व्यवहार करता है जो स्कूल म दूसरे बच्चो के साथ। विद्यान द का अपने सिद्धातो से प्रेम ही उसे अपने बेटे से दूर से जाता है। अत मे बेटे को अहसास होता है कि उसने अपने पिता (अपने भगवान) के चरणा मे वो फूल अपण किये जो सुश्बू नहीं चुभन देते रहे। कहते हैं कि देश के भविष्य का निर्माण अध्यापक करते हैं और वही अध्यापक जब जिदाबाद और मुदाबाद के नारे लगाते हैं तो क्या प्रभाव डालते हैं उस पीढी पर जिनके हाथो हम इस देश का भविष्य सौंपना चाहत हैं इसान का नैतिक पतन इस सीमा तक हो चुका है कि लोगो की भलाई लिये इक्ट्ठा क्यिा हुआ दान भी अपो स्वार्थों की पूर्ती के लिये प्रयोग में लाता है । लेकिन फिर भी प्रकृति का यह नियम है कि हर अधेरी रात के बाद एक नई सुबह होती है। मेरा यह प्रस्तुत प्रथम समलन पाठनो तक पहुँच सका इससे अधिक प्रसनता की बात मेरे लिये और क्या हो सकती है। पाठकगणो का प्रोत्साहन ही मेरी लेखनी को एक नई दिशा प्रदान कर सकता है। -सुरेश शर्मा
क्रम
9
इसानियत
फूलो की चुभन 26
निर्माण 45
नई सुबह 62
पतझड के फूल 74
पानीपत की चौथी लडाई 90
अनजान रिश्ते 103
इन्सानियतः पात्र परिचय रोनी जॉन पीटर फिलिप मारथा बेरी डाक्टर नस जूली वकील जौन पोटर जौन पीटर जौन पोटर जौन पीटर कितनी बार पढेगा यह लटर ? जब तक दिल नही भर जाता। किसका है। मेरी पत्नी वा। क्या बहुत मुहब्बत करती है तुमसे ? बहुत । कितनी गहराई है उस प्यार म? समुद्र की गहराई का अत हो सकता है मगर मैक्मीन के प्यार का कोई अन नहीं । बल्कि मैं ता यही बहू गा वि प्यार का मतलव बाता मे नहीं अनुभव में ज ना जाता है। म मामले म मेरा अनुभव तो बिल्कुल भी नहीं है। जर शादी कर लोगे तापती पत्नी ने पवित्र रिश्ते को भी समय लोगे। क्या लिखती है तुम्हारी पत्नी । सब मुछ ता नही मगर इस दात तुपे जरुर बताउगा मैं वाप बनने वाला है । (खुशी से) सच । जीन पोटर जोन पीटर जोन " 10 पीटर जोन पीटर जौन पीटर जोन पीटर जीन पीटर हा और तभी तो इस बार बार पढ़ रहा है । यह लटर पदार पित्तनो खुशी होती है शायद इसमा अदाजा तुम न लगा सका। मुझे मालूम है पीटर (हम पौजियो यो सिप इन पत्रों का ही तो रतनार रहता है । कभी सुशी कभी गम । सुशी और गम नया कई महत्व नहीं है हमारे लिए हम तापम का तामीन ही घर सरत हैं। न जाने यच आडर आ जाए विउठो और दुश्मना कपून से धरती ताल पर दो । (वादल जार से गरजते हैं। बाज मौसम कुछ ज्यादा हो खराव है। यह मोमम भी पूसार फौजी कमाडर जैसा लगता है। (हसा है। विल्युल सर डेनिम जैसा जो दुश्मनी पर मौत का कहर बरसा देता था। और खुद भी मौत से मात खा गया। क्ल मंस मटन रौनी से मुलाकात हुई थी। क्या रहा था उहोंने । यही कि इटेतीजस की रिपोट के मुताबिक भोडर किसी भी समय तुल सकता है। पडोसी मुलक से वैस भी हमार सम्बध कभी अच्छे नही रहे। उनका बाडर के माय माथ फोजो का जमाव आने वाली तवाही वा संकेत ही तो है। अब शामद दुश्मन उतना कमज़ोर नहीं है। उसका 90 प्रतिशन बजट डिफ्स पर ही खच हो रहा है (दूर से गोनिया चलने की आवाज) लगता है वोडर के उस पार फायरिंग हो रही है। यह ता पिछले एक महीने से हो रहा है । तभी तो बोडर पर टैस है । वो फिलिप जा गया। कहा थे अब तप तुम? हैडक्वाटर गया था? कोई लैटर तो नही थी। तुम दोनो का एक एव लेटर वहा आया था मैं ले आया हू 1 ये लो। (होना अपन अपने लटर खोलत है) मैं वाप बन गया फिलिप मेरे घर लड़का पदा हुआ है आन मैं बहुत सुश हूँ। तुम सब को मिठाई सिताउगा ! क्या बात है गेन तुम्हारी माखों में जोन पीटर जौन पीटर जौन पीटर फिलिप पीटर फिलिप पोटर भासू ? फिलिप क्या हुआ जोन मरी मा नही रही । वो मुझे बहुत प्यार करती थी।
पीटर १ जोन आई एम सौरी जोन । मैं अपन बच्चे की पुशी नही मनाउगा। कुछ लिसा लेटर म यह सब मे हुआ रात यो ठीक ठार थी मगर सुबह हुई तो मैं भी कितना अभागा हू ना मा यी इच्छा भी पूरी 7 वर सका । हमशा यही रहती थी कि वेटा शादी कर लो मेरा क्या भरासा (गेता है। दिल छाटा न करो जोन ? मरना तासान ये अपन बम म नहीं है । तुम एपलीये मन निरा दो । घर म तुम्हारी जर रस होगी। हा हा जोन पीटर ठीर बहता है । पीटर जाना तो तुझे भी चाहिए । नहीं फिलिप मैं घर नही जाऊगा। फिलिप पीटर फिलिप पोटर फिलिप पीटर क्या, जॉन - पीटर जोन पीटर जीन पीटर फिलिप जौन वी मा घ स्वगवास होन व बाद मेरे लिए कोई खुशी करना भी अच्छा नहीं होगा। क्सी बातें करते हो पीटर । तुम्हारी पत्नी को इस समय तुम्हारी भी जरुरत है । तुम्हारा पहला बच्चा है न । सभी तुम्हारा इतजार कर रहे होंगे। नहीं जोन में नहीं जाऊगा । तो फि मैं भी नहीं जाऊगा। तुम्हारा जाना बहुत ज्यादा जरूरी है। वोई जरूरी नहीं। अब मैं तुम्ह से समझाऊ । तुम दोना ही बिना वजह अपना समय नष्ट कर रह हो । तुम दोना का ही जाना है । तुम दाना अपनी अपनी अपलेकेशन लिखो मैं हैडक्वाटर जावर तुम्हारी छुट्टी मजूर पराव लाता है । तब तक तुम लोग अपना सामान वाध लो। गीत अतराल लगता है फिलिप आ गया। तुमने अपना सामान वाध लिया न । हा पीटर (पिलिप दर आता है। अपना अपना सामान खोल दो तुम्हारी छुट्टी मजूर नहीं हुई। मगर क्यो जग शुरू होने वाली है। तो क्या अपनी मा की मौत पश्चात् मैं घर भी नहीं जा सकता । क्या सनिक नियम इतन कठोर होते हैं । जोन मैं जानता हूँ इस समय तुम्हारे जजबात को ठेस पहुंची है। अगर हम फौजी ही जजबात में फंस गए तो क्या होगा ? जोन पीटर फिलप फ्लिप जौन फ्लिप जोन फिलप 12 जोन पीटर जोन फिनप पीटर फिनप रोनी मगर हम यह क्यो भूल जाते है कि हम भी इसान हैं। हमारे सीना म दिल नही पत्थर के टुकडे हैं । अगर ऐसा है तो बहुत जल सारी दुनिया अस्तित्व हीन हो जाएगी। मैं तो चाहता हूँ कि छोड यह नौकरी और भाग जाऊँ यहा से । तुम ऐसा भी नहीं कर मरने क्या इमे देशद्रोह समझा जायेगा। बाहर जीप के स्कन की आवाज आती है। मैं देराता है कौन है ? (पाज) कंप्टन रोनी है। (रौनी अन्दर आता है तीनो मैल्यूट मारते हो। बैठिए सर । जौन मुझे तुम्हारी मा में चले जाने का दुख है। मगर फौजी कानून मुताबिक तुम्ह छुटटी नही मिल सकती। यममा और मैं उम्मी- करता हूँ कि तुम इसे एक बत्तव्य परायण सनिक की तरह सहन करोगे और इस देश के लिए मर मिटन का तैयार रहोगे। यस सर पीटर तुम्हारी खुशी भी इस समय तुम्हे घर नहीं जाने देगी। यस सर क्यापि दुश्मन ने सरहद के पार अपनी फौजो का जमाव इस हद तक कर लिया है कि लडाई जरूर होगी। हमे ऊपर से आडर मिल चुका है कि कोई भी मैनिक छुट्टी पर नहीं जाएगा। जौन रोनी जौन रौनी पीटर पीटर यस सर पीटर रोनी सवता। सैनिक प्रशासन की बुनियाद अनुशासा है और अनुशासन के दायरे मे रहकर ही हम अपन दुश्मन को लडाई के मैदान म हरा सकते है। सर अगर जोन को दो तीन दिन के लिए छुटटी मिल जाती तो नहीं पीटर । फौज का वानून जजबात को नहीं मानता और यह कानून सब पर एक समान लागू होता है। इसम ता में भी कुछ नही पर ठोर है सर अगर यह सनिय कानून मुझ मरी मरी हुई मा का चेहरा भी नहीं दवन द सकता ता में नहीं जोन सैनिक का ता जजबाती हान का भी कोई अधिकार नहीं । जजात के भवर म फम पर क्या तुम दुश्मना का नाश कर सकोगे। कौन दुश्मन और से दुश्मन सर' वही जो मरहद वे उस पार रहते हैं। या बेगुनाह योग भी जिनरा हम जैसे सनिया मे बाई सम्बध नही । दुश्मनों की धरती पर रहने वाला से दोस्ती की उम्मीद ववकूफ लोग करत हैं और तुम भी बवप हो। रोनी जौन रोनी जौन 13 जौन रोनी आई एम सारी सर । मेरा यह मतलब नहीं था। तुम जो भी साचते हो वो सिफ दिल मे रखो। जुबान पर लाने की इजाजत यह सैनिक कानून विसी को नहीं दता। यस मर और मुझे उम्मीद है कि आईदा तुम हाशियार रहाग । जौन रौनी जौन रौनी यस सर मैं बस तुम लोगो को यही बतान आया था कि तुम दोनों की छुट्टी मजूर नही हुई और अपने-2 हथियारी क साथ तैयार रहो लडाई कभी भी शुरू हो सकती है (कैप्टन रौनी कमरे स बाहर चला जाता है) जौन यस पर यम सर पीटर फिलप पीटर जौन फिलप जौन फिलप जौन पीटर जौन तुम्हे कैप्टन माहब के सामने एसी बातें नहीं करनी चाहिए थी। वो तुमसे नाराज भी हो सकत थ और फाज म अफसर के नाराज़ होने का मतलव तुम अच्छी तरह जानते हो। लकिन मैंन कोई गलत बात नहीं की। गलत और सही का अतर सिफ अफमर लागा क ही अधिकार मे है हमारा अधिकार तो सिफ हुक्म मानना है । हम मान न हुए केवल शतरज + माहर हुए और वा भी प्यादे जा खुद कदम कदम पर मरते है अपने बादशाह का सिहासन सलामत रखने लिए। दूर से बम के धमाके की आवाज साथ मे गोलियो की आवाज़)। यह गोरिया की आवाज सुन रहे हो जोन ) हा सुन रहा हूँ। लगता है अब की बार तबाही बहुत ज्यादा होगी। सगीत बतराल लडाई के मैदान मे (धीमे स्वर म) हमे उस गामने वाली दुश्मन के चौकी पर हमला करना है। यस सर ऊपर से वायग्लस पर हमे आडर मिला है कि हमे इस चौकी पर हर हाल में कब्जा करना है दुश्मन इसा चौको स अपने क्षेत्र को नियत्रित करता है । हम ज़मीन पर लेटकर आग बढना है। ओ के सर दन स्टाट । (पाज) जहा तक हो सर फायर करने की नौवत नहीं आनी रोनी पीटर रोनी फिलप रोनी चाहिए।
जौन जौन रोनी फिलप गैनी पोटर रोनी पीटर रोनी पीटर सर क्या हम पाव जादमी यह काम पर सवंग' हमे ऐसा करना होगा। आत्महत्या ही होगी और युछ नहीं। देश से प्यार मग्न वाले ऐसा नहीं साचते। सर लगता है वहा पचास पाठ मंनिय तो हगि हो। ज्यादा भी हर मात है अगर तुम सय को इसकी चिंता नहीं वरना चाहिए हग सिप रग चासो दे नजदीप जाबर अपने आपको पेडा क पीछे छिपाए रखेंगे जैम ही हमारी पोजें पहुंच जाएगी हम अटर करेंगे। पोज कर तप आ जाएगी" कुछ कहा नहीं जा सकता। हम तजार करना है तव तर जव तब हम पीछे से सिगनल नहीं मिलता। यस स । (पाज) सर वा देखिए दुश्मना टंक हमारी मीमा की तरफ बढ़ रहे हैं (उडते जहाजा सरी आवाज एयरपोस ने भी अटैय कर लिया लगता है विमवारी गोलिया की आवाज । सर अब क्या करें। अपने आप को बचाना। दुश्मन की नवरा म आन स पहल किमी सुरक्षित स्थान पर छिप जाओ। (भागने बनमी की आवाज)। सर वो दखिए हम मिगनल मिल रहा है। हमागे फोजो न भी अटैक कर दिया है। मगर अब हम चौपी पर वजा नहीं कर सकते। बहुन देर हो चुकी है। हम तो पस चुके है। अब क्या करें मर बाई तरफ पोजें नही है उधर भागो। मगर वो तो दुश्मन पा इलाका है। जानता हूँ मगर इसके सिवा और कुछ नही किया जा सकता। भागो (भागते हैं गोलिया की सामान जहाज उडन की आवाज भोषण लडाई) सगीत अतराल (राहता है। दू से गालिया चलने की भी आवाज) लगता ह इम होश आ रहा है। (क्गहन हुए रहा है मैं ? भगवा का नाव पास शुग है जो तुम्ह हाश जागा मैं कहा हूँ' कौन हैं आप? एक बन्नमीत्र औरत जिसमा सब कुछ खत्म हो गया (गोरिया बनने की आवाज) लदार अभी तब चल रही है । मर दूसरे सायी रोनी फिलप रोनी फ्लिप नी मारथा गैनी मारथा रोनी 15 मर गए । उनका अतिम संस्कार मैंने कर दिया था। कितने थे वो? मारथा गेनी मारथा रोनी मारथा तीन । रोनी मारथा रोनी मारथा मगर हम तो पाच थे। कौन बचा होगा? बचा भी होगा या चिथडे हो गया होगा उसवी शरीर या कही पडा होगा लावारिस चील कौओं के लिए। मैं कितने दिनो से वेहोश हूँ? सात दिन । मैंने तो उम्मीद ही छोड दी थी। यह पटिटया। मैंने की है। नम रह चुकी हूँ न । तुम्हारी किम्मत अच्छी थी कि कुछ दवाईया थी घर म। मैं आपका यह एहसान यह मेरा फज था। लड़ाई शुरू हुए सात दिन हो गए। इन सात दिना में हमारी फौजो ने दुश्मन को तबाह कर दिया होगा। मैं दुश्मना को छोडू गा नहीं आह अभी तुम इस काबिल नही हो कि दो कदम भी चल सको । जब ठीक हो जाओगे तो जो जी में आए करना। (कराहते हुए) जोश मे तो मैं यह भी भूल गया कि मैं तो खुद मौत के मुह से वापिस आया हूँ। आपका यह उपवार मैं कभी नहीं भूलू गा रोनो मारथा रोनी मारथा रोनी मां जी। मारथा रौती मारथा रोनी मारथा तुम्हारा यह मा कहना बहुत अच्छा लगा क्याकि सात दिन से मेरे बच्चों ने मुझे मा नहीं कहा। कहा हैं आपके बेटे? उनकी हत्या कर दी गई। हत्या । मगर विहाने ? उन लोगो ने जो वास्द के व्यापारी वन कर सारी दुनिया में मौत बाटने रोनी मारथा रोनी माग्था रौनी मैं कुछ समझा नहीं। फौज मे नौकरी करते हो। दुश्मनो को मौत के घाट उतारने के लिए उतावले हो मगर फिर वारूद के व्यापारिया के बारे मे अनजान हो। तो तुम्हारे बेटे इस लड़ाई में मारे गए। हा फिर तो वो शहीद हो गए अपने वतन की खातिर । वो फौज मे नौकरी नहीं करते थे और ना ही उहाने विसी माजादी के लिए विसी का खून विया तो फिर शहीद कैसे हो गए ? मारथा 16 रोनी मारथा रौनी मारथा रोनी मारथा । आपकी बातें मेरी समझ में नहीं आती। तुम्ह बाराम की जरूरत है। (लम्बी सास लेते हुए) ठीव कहती है आप, लेकिन शरीर मा य दनदनाती हुई गोलिया, मडराती हुई मौत क्या आराम हो सकता (वम का धमाका)। लगता है कोई गाला नज़दीर ही फ्टा है। क्तिनी करीब थी मौ- चारो तरफ लाशा के अम्बार तडपते लोगो की चीखें पानी से सस्ता बेगुनाहों का बहता सून । यह सब क्या है ? कहा ले जा रहे हस अपने आपका (वात्त वाटते हुए) बस कीजिए भगवान के लिए ऐमा मत नहो । मैं सैनिक है आपकी बातें कही मुझे कमजोर न कर दें। अगर मेरी कही हुई बाता में तुम्ह तकलीफ होती है या तुम खुद सच्च को झूठ का लबादा पहनाकर अपनी आसो से दूर रखना चाहते हो तो एसी बातें नहीं बरगी। वैसे भी तुम्हें आराम की मस्त जरूरत है। ठीव कहती हैं आप । बहुत थक गया हूँ। मुझे आराम ही करना चा (पान) सुनिए। कहो मैंने आपसे पहले भी पूछा था मगर आपन जवाब नहीं दिया यह के सी जगह है ? रहा हूँ मैं, उस जगह जिसे तुम दुश्मनों की धरती कहने हो। क्या? हो वैप्टन मैं भी तुम्हारी दुश्मन हूँ। नही आप झूठ बात रही है। मैंने जिन्दगी म कभी झूठ नहीं होना । कैप्टन यह रही तुम्हारी स्टेनग उठाओ और खत्म कर दो अपने दुश्मन को। (भावुक हारर) नहीं नहीं एसा कभी नहीं हो सकता। दुश्मन साथ हमदर्दी । जब मैं उरमी था तब आप भी तो मुझे सत्म कर सकती थी। जान लेना ता सैनिको का काम है । मैं ता एक नस हूँ। मैं आप पर गोली नहा धला सरता। मगर क्यो? इम क्या था जवार शायद मैं जीवन भर न दे सक। मगर मैं जानती हूँ। मारथा मारथा मारथा रोनी मारथा रोनी मारथा रोनी मारथा रोनी मारथा मारथा 17 रोनी क्या? मारथा रोनी मारथा रोनी मारथा रोनी माग्था रोनी मारथा यही कि तुम समझ रहे हा कि मैंने तुम्हारी जान बचाकर तुम पर कोई एहसान किया है। सच यह ही तो है। स मैं अपने ज़मीर की आवाज़ कुचल कर अपनी जान बचाने वाले की जान ले लू । तुम्हाग ज़मीर है। जमीर तो हर इन्सान मे होता है मगर कभी कभी मर जमर जाता है । जमीर मरता नही सो जरूर जाता है। मग तुम्हारा जमीर शायद मर चुका है । उठाओ अपनी स्टेनगन और (घात काटते हुए) प्लीज मा जी ऐसा मत कहिए (रोता है) मुझे माफ कर देना मेरे बच्चे । मुझे तुम्हे तकनीफ पहुंचाने का कोई हक नहीं। फौज म रहते हुए मैं भी मानवता यो भूल' चुना थ । अब ऐसा नहीं है । मा जी। अब यह आर खून नहीं रहेगा मगर मैं कर भी क्या सकता हूँ? वाकई तुम कुछ नही कर सकते। क्योकि तुम्हार देश का शासक लाशो के सिंहासन पर बठ पर राज करना चाहता है। लोगो को रोटी का निवाला दने की बजाए उनके हाथ मे बान्द का गाला थमाना चाहता है । देश की सुरक्षा भी तो ज़रूरी है। तभी तो हमन दूसरे देशो से बहुत स हथियार खरीदे। किससे डर है आपको? हमसे जिहान हमेशा जाति का सदेश दुनियों के चारा तरफ बिखेरा। दूसर दश भी ता है जिनकी सरहदें हमारे दश के साथ लगती हैं । मगर अव तो हम पर ही हुआ न । हम पर युद्ध थोप पर आपने शासक हमारी उनति के रास्ते में बाधा बनना चाहते हैं । ऐसी बात नहीं है। ऐसी ही है। (पाज) हर दश की अपनी समस्याए होती हैं। उन समस्याओ से पडोसी देश फायदा उठाने की कोशिश करें तो (इतने मे चार पाच सैनिक अदर दाखिल होते है। पकड लो इह (रौनी पर नजर पडती है) ओह सर आप (सत्यूट करता है) हम तो समये थे कि मर गया ह मैं यस सर । यह बुढ़िया कौन है' रोनी मारथा रोनी मारथा रोनी मारथा रोनी जौन 018 रोनी जोन रोनी जान रोनी जान रोनी - - जोन एक औरत जिसका सब कुछ खत्म हो गया। मगर यह तो अभी जिंदा है | बैरी इस बुढिया को बाहर से जाकर शूट कर दो। नहीं जॉन तुम ऐसा नहीं कर सकते । दुश्मो के साथ हमदर्दी । मैं कुछ समया नही सर । यह ने औरत हमारी दुश्मन नही है । सरहद के इम पार रहने वाला हर कोई हमारा दुश्मन है हमारी दुश्मनी तो उनसे है जो हथियार उठाकर हमारा मुकाबला करते हैं यह मासूम लोग तो सर जाप ही वहा करते थे कि सैनिक को जजबाती होने का कोई अधिकार नहीं । मगर आज आप खुद तव मैने इसानियत को इतना करीब से नहीं देखा था। और आज दयनी इसानियत वो भी एक दुश्मन की। जौन तुम शायद मूल रहे हो कि मैं तुम्हाग आफ्सिर है । मैं जानता है सर मार फौज का कानून सब पर एक समान लागू होता है । दुश्मन का जिंदा छोडना कानून की अवहेलना है और यह मैं नहीं होने दूगा। अपने आफ्सिर का हुक्म 7 मारना भी एक बहुत बड़ा अपराध है। इस बात का तुम्हें अदाजा तो होगा। रोनी লীন रोनी जौन रौनी यस सर जोन रोनी ता फिर मैं तुम्हाग आफिसर तुम्हें हुक्म देता हूँ कि इस औरत को छोड दो। लेकिन सर। जौन रौनी जौन (ऊँची आवाज म) इदज माई जाडर जौन । अण्डरस्ट: । (हाफता है) (जमे उसे ऊँचा बोनने म बहुत जप्ट हुआ हा) ओ के सर । मगर मैं आपकी शिकायत हायर अथारटी से जरूर बगा और उनसे पूछू गा वि फौज म भावुक होने का हर क्या मिफ आफ्सिर को ही है हम जैसे प्यान जा अपन राजा की रक्षा के लिए मरते है कटते है मगर कहते कुछ नहीं । क्या इम फौज म सैनिक व ग्लब के साथ पाय कानून भी बदलता है मरी मा मर गई मगर मुझे छुटटी नहीं मिली। क्यो, (धीमी आयाज म) मुझे दूम है जौन यि मैं तुम्ह छुटटो नहीं दे मका क्यामि स्थिति मा वग्न की इजाजत नहीं देती थी। मगर इम दुश्मन की जान पचान की इजाजत देनी है। रोनी जोन । * 19 ar वैरी गुड । प्टन यह महोत्रीहरी रिस्पर रोनी जोन तुम समझते क्या नहीं' जोन कमाकि मैं समझना ही नहीं चाहता। मैं तो केवल एक ही बात जानता दि यह औरत हमारी दुश्मन है जिसको बचा पर आपने अपने खि मुसीरतें सडी वरती हैं। रोनी (बहुत धीमी आवाज मे) देखो जोन मेरी हालत इस ममय ठीक नही है मुझे यहा से ले ननो । स औरत को मारना नहीं यह मेरी कंग बरी लगता है सर बेहोश हो गए । जौन अब तो इम बुढिया का मारना और भी आसान हो गया। कैप्टन रोनी का तो मालूम भी नही होगा। बैरी नहीं जोन मैं तुम्ह ऐसा नहीं करने दूगा। मारथा इसे मत रोको बेटे। इन दुनिया मे अब जिंदा रहन सा बाई मक्सद नही है । मुझे मारने से शायद इसके कधे पर एक तगमा और लग जाए। जीन तो फिर तैयार हो जाओ। बैरी वेवकूफी मत करो जोन । निहत्ये और मिविलियन पर गोली चलाने की इजाजत दसानियत नहीं देती। जोन मगर हमारा फौजी शासन तो देता है। बैगे फौजी शासन यह भी रहता है रि मृत्यु स लड रह जरमी आफ्मिर को जल्द स जल्ल हासपिटल पहुंचानो। तुम्हारा साथी ठीक महता है। इसकी हालत ठीक नहीं है। यह मन समझना कि मैं मौत से डर पर ऐसा कर रही हू । इमकी जिदगी नम ज्यादा कीमती है। बैरी उठाओ जीन । जल्दी परो। जौन तेरी किस्मत बहुत अच्छी है बुढिया। कुईक जोन कुईक । (क्रमो की आवाज़ और हन्दी गांग) (भावुक हो कर) कौन कहता है कि महर कदम पर रहने वार ममी दुश्मन ही होते हैं। डॉक्टर हैलो बैप्टन सा फोन कर रहे हो' रौनी ठीवह डाक्टर। डाक्टर गुड | नस टेम्परेचर नस नामलसर डाक्टर और होता ता मायद दच मी माता। डाक्टर क्या तटाजभी यही मारथा मारथा सगीत मनरार 20 हॉक्टर रौनी डॉक्टर रोती डॉक्टर रोनी नही सीज फायर हो चुना है। थक गाड लडाई से डर लगने लगा है क्या? नही ता फिर डरता हू दि एक दूसरे से आगे निक्लन की दौड मे कही यह दुनिया ही खत्म न हो जाए। मैं कुछ समझा नहीं। डॉक्टर तुम्ह सब से ज्यादा खुशी वव होती है । जब मैं किसी को मौत के मुह म वापिस ले आता है। तो तुम भी मानते हो कि जान लने से जान बचाना ज्यादा जरूरी है । डॉक्टर रोनी डॉक्टर रोनी डॉक्टर रोनी डॉक्टर रोनी डॉटर रोनी साक्टर तो फिर क्या आज इसान ऐसी चीजो का आविष्कार कर रहा है जिससे सिक मौत ही मिलती है। कंप्टन जैसी तुम्हारी सोच है मैं उसकी सराहना करता हू । मगर हमें अपन दिल की बात जुबान पर लान का कोई अधिकार नहीं है । मगर क्या ? क्यापि हमार दश म प्रजातत्र नहीं है यहा + फौजी शासक के पानो म लागा वै दिला के धडकन की आवाज नही पहुँचती जानत हो क्या ? क्यापि तडपते लोगा की चौसा की आवाज़ ज्यादा ऊची है । जब सब कुछ जानते ही हो ता ऐसा क्यो साचते हो? डाक्टर यह भी तो जरूरी नहीं कि मेरा दिमाग भी वही सोचे जैसा इस देश पर शासन करने वाले सोचते हैं । तुम्हारी वाता स देश द्रोह की गध आती है। मह सच नहीं है डॉक्टर । मुझे भी इस देश से उतना ही प्यार है जितना कि तुम्हे । लेकिन अपने जज़दाता को रोकना मेरे लिए बहुत कठिन है । बहुत कठिन है डॉक्टर। रिलक्म कैप्टन रिलक्स (पाज) क्मा मरे पर सूचना मिजवा दी डॉक्टर। सप्टन । तीन दिन पहले टेलीग्राम दे दिया था। तो फिर वा अभी तक क्यों नहीं आई ? डॉक्टर डॉक्टर रोनी डॉक्टर रोमी डॉक्टर धीरज रखा। तुम शायद नहीं जानत इस समय मुझे अपनी पत्नी को स्तिनी कमी महसम हो रही है।
21 डाक्टर गैनी डाकर हम भी तो तुम्हारे पास हैं । मगर तुम भी उचित कहन की हिम्मत नही रखत । मुझे तो यहा वही घुटन महसूस हो रही है। मगर मैं तुम्ह अभी बिस्तर से उठने को इजाजत नहीं दे सकता। (नस अन्दर आती है) सर कोई जूली नाम की लडकी कैप्टन रोनी से मिलने आई है । जूली आ गई । डॉक्टर वो मेरी पत्नी है। ठीक है मैं अदर भेजता मस रोनी हू । थक्य डाक्टर। डाक्टर रोनी डॉस्टर रौनी डाक्टर जूली रौनी जूनी रौनी जूली शायद अब तुम्हें इस घुटन मे थोडी सी राहत मिले । हा डॉक्टर । मेरी जूली के विचार मुझसे अलग नहीं है । वो अपना दिमाग रखती है और अपनी मर्जी के मुताविव सोचती है)। ठीक है मैं उस भेजता हूं डॉक्टर बाहर जाता है जूली आती है । यह तुम्ह क्या हो गया रौनी (रोती है) नही जूली नहीं रोना नहीं (जूली रोए जा रही है) मैं अभी जिन्दा हू जूली। भगवान के लिए ऐसा मत कहिए । मरें आपने दुश्मन । दुश्मन जो सरहद के उस पार रहते है । उहांने ही तो तुम्हारा यह हाल किया १ गैनी जूली रौनी जूली रोनी नहीं जूली आज अगर मैं जिंदा हूँ तो उस नैक औरत को बनौलत जिसकी इसानियत ने मुझे यह मिखाया कि सरहद के पार रहन वाले भी तो दोस्त हो सकते है। दुश्मन दास्त नही हुआ करते । जूली मुझे यह जरम लडाई ने दिये है । मैं जानती है। तम सब कुछ नहीं जानती। मैं बताता हू । लडाई म दुश्मना से बचत हुए हम भाग रहे थे कि नजदीक ही एक बम फ्टा और आखो के आगे अ धेरा ही अधेरा। जब आख खुली तो एक बूढी औरत जिसे तुम दुश्मन कहती हो मेरे जरमो पर मरहम रख रही थी। क्या जूली रोनी हा जूली । अगर वो औरत न होती तो तुम सुहागन नही विधवा होती। जूली रोनी तो क्या मरे मुहाग को दुश्मन न बचाया। उसे दुश्मन बना दोस्ती का अपमान है।
22 जूली रोनी जूली रोनी डाक्टर रौनी डाक्टर रोनी जूली डाक्टर रोनी डॉक्टर जाइ एम सारी रोनी । मैं ता ममयी थी जूली अब शायद मैं फौज म न रह सक मैं तो पहले ही तुम्हे बहती थी मगर तुम पर तो सैनिए बनने का भूत सवार था। सैनिक होना बुरी बात नहीं है जूली। मगर जनता की भावनाआवा कुचल कर मैनिक सामाज्य तले निर्दीप मिलियन को मौत के घाट उतारना मुझे अच्छा नहीं लगा डॉक्टर अदर पाता है। सारी मैन जापको डिस्टब किया लकिन आना भी जारी था। क्या कोई खास बात है डाक्टर' हा रोनी । यू आर अडर अरैस्ट । वा? क्या । अण्डर अरैस्ट । लडाई म यहादुरी म लडने वाले को मैडल की जगह पैदा यह सब क्या है डॉक्टर मुझे अभी अभी आडर मिले है अगर दरखना चाहो तो तुमन ता पढा ही होगा तुम ही बता दो क्या लिखा है ? तुम पर देश द्रोही होने का इल्जाम है । तुम्हारे स्वस्थ होने के बा तुम पर सनिक अदालत म मुहमा चलेगा। तब तक तुम यहा नजरबद रहागे और तुम स काई मिन नहीं सकता। मैं भी नहीं। आप भी नही मैडम । बाहर आर्मी कास्टेवल पहरा देन के लिए आ गए हैं अब आपका जाना होगा। तो क्या मैं रोनी स मिल भी नहीं सकू गौ ? टस लिए जापवो हैडक्वाटर म इजाजत लेनी पड़ेगी। जाआजूली जाओ। इस सनिय शासन के नियम भी बडे कठोर हाते हैं मरे साथ कही तुम भी जेल की मासा म न पहुच जाओ। तब तो मैं अपन आपको खुशनसीब समझूगी। ही जूती ऐसा मन माचना। पर जाओ अपन साम समुर का ख्यात रखना । अब बूढा या महार की जररत है। जिसे सिफ तुमन ही दया है। मैं शायः जिगी म आन बान तूफान का सामना कर सक गा पा नहीं। मगीत अन्तराल रोनी पर मनिष अदालत म मुबद्दमा चरता है। तुम इस आरभी को जानत हो जी। গুলী डॉक्टर जूली डाक्टर जूली रोनी 7 औन 23 वकील जोन वकील कौन है यह ? कैप्टन रौनी । जी मैं इनके अधीन काम करता हू तुम्हे जा पूछा जाए सिफ उसी का जवाब दो। जी। इक्कीस दिसम्बर शाम पाच बजे तुम कहा थे । कैप्टन रोनी के पास जो उस समय जरमी हालत विस्तर पर पड़ा था। और कौन कौन थे वहा मेरे साथ मेरा साथी वैरी और एक दुश्मन । कैप्टन गैनी के खिलाफ रिपोट तुमने ही लिखवाई थी। जी। जो कुछ भी हुआ विस्तार से बताआ । मैं बताता हू वहा क्या हुआ था ? (गुस्से स) रोनी । सैनिक अदालत के नियमो की जानकारी रखते हो या १ वकील जौन वकील जौन वकील जौन वकील रोनो . । बनल । नहीं। रौनी कनल वकील जौन वकील -1 यस वनल। तो जब तुमसे कुछ पूछी जाए तभी बोलना । कायवाही जारी रखो। हा तो जोन वहा जो कुछ भी हुआ अदालत को बताया जाए। मैं और बैरी जब एव घर म गए ता वहा वैपन गैनी थे और वही पर जब मैंने एक दुश्मन को शूट करना चाहा तो कैप्टन रोनी न मुझे ऐसा न करने का हुक्म दिया और मैंने वो हुक्म माना । क्योकि कैप्टन रौनी मेर भाफिमर है। अब किसी भी तरह का कोई शक नहीं रह जाता कि कैप्टन रोनी के ऊपर जा देशद्रोही होन का मुकद्दमा चल रहा है उचित है या नहीं। अगर फौज म कैप्टन गैनी जम लोग दुश्मनो के साथ हमदर्दी करने लगे ना दश के दुश्मन जव चाहे हम गुलामी की जजीरा मे जकड सकते हैं । वैप्टन रोनी का अपराव मामूली नहीं है । इमसे हसारी डिफस को भी खतरा हो माता है। इसलिए मैं अदालत से रिक्वेस्ट कगा कि इसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। तुम्हे अपनी सफाई म कुछ कहना है पाज) मरे ऊपर लगाया गया इल्जाम कि मैंन दुश्मन व साथ हमदर्दी की है वेबुनियाद है। बार बार यह कहा गया कि मैंन एक दुश्मन की जान बचाई । मैं अदालत से पूछना चाहूगा कि यो दुश्मन कोन था ? (पाज) वो दुश्मन एव लाचार और वदनसीब बूढी औरत थी जिसन मुझे जन्मी हालत में मौत की दहलीज से वापिस खीच कर मेरी जान १ पनल रोनी यस बनल।
24 वकील रोनी वकील रोनी वकील बचाई । लडाई म उम के घर के सभी लोग मारे गए । वा मुझे मारकर उनका बदला भी ले सकती थी। मगर उसकी इसानियत न उसे ऐमा करने की इजाजत नहीं दी और अब मुझसे यह पूछा जा रहा है कि मैंने इसानियत व मुह पर तमाचा क्यो नही मारा' ।ताली बजाता है) एक्मीनट । पंप्टन रीनी सैनिक हान के साथ-साथ एक अच्छे कहानीनार भी है। मिनटो में एक दिलचस्प वाक्य उहोंने अदालत को बताया जा यह दर्शाता है कि कैप्टन रोनी भावना म बह कर फौज के उस नियम को भूल गया पि फौज का निर्माण जज़बात की बुनियाद पर नहीं होता। फौज मे नौकरी करन वाले भी तो इसान हैं पत्थरो के तराशे हुए बुव नही। तुम्हारी बातो से सोफीसदी गद्दार होने की बू आती है। मैं अदालत से इसकी सख्त सजा की सिफारिश करता है ताकि दोबारा कोई कैप्टन रौनी जैसा बनने की कोशिश न करे। मैं अदालत से पछना चाहता हू दुनिया के क्सि कानून मे लिखा है कि सिवलियन पर गोलिया चलाई जाए। जिस देश के तुम नागरिक हो वहां किसी दूसरी दुनिया का कोई भी कानून नहीं माना जाता। तो फिर बदल डालो इस कानून को जिसम इसानियत की हत्या होतो हो। बदल डालो इस सैनिक शासन को जिसम इसान के मुह से गेटी के नवाले छीन कर हाथ मे बदुर थमाई जाती हो। (गुस्स से) कैप्टा रौनी। इस अदालत मे ऊँचा बोलना भी एक अपराध इस देश म ज म लेना भी एक बहुत बड़ा अपराध है बनल साहब । जहा बच्चा जन्म लेते ही विदेशी ताकता का कज़दार होता । तुम शायद भूल रहे हो कि तुम कहा हो और क्सिसे बात कर रहे हा ? नही सर मैं बिल्कुल नही भूला कि मैं विसस बात कर रहा हू । मुझे सब कुछ याद है और ये भी याद है कि किस तरह पिछले दस साला से प्रजातत्र का लालच देकर तानाशाही के चाबुक से भालीभाली जनता का मास नोचा जा रहा है । अब बहुत हो चुका रोनी। जब तुम्हे इस अदालत से रहम की उम्मीर नही रखनी चाहिए । इस देश के कानून के अनुसार हर देशद्रोही को मौत की सजा मिलती है और तुम्हारा देशद्रोही होना भी प्रमाणित हो चुका है इसलिए तुम्ह मजाए मौत मुनाई जाती है । रौनी कनल रौनी कनल रोनी क्नल 25 (हंसता है। इस सैनिक शासन से और उम्मीद भी क्या रखी जा सकती है । (पाज) मैं मौन से नहीं डरता। जिसने जम लिया है उसकी मृत्यु भी होगी। मगर मृत्यु स्वाभाविक होनी चाहिए। लेकिन इस धरती के तानाशाह शासक जीवन और मरण की मोहर अपनी इच्छा से लगाते हैं । मौत की सज़ा मेरे लिए सजा नही एहसान है मुझ पर इस घुटन मे तो सास लेना भी मुशिल हो गया था। भगवान से जाकर पूछू गा वि इसान को इतना अक्लम द क्या बनाया कि वो अपने ही आविप्यारो से अपना ही सवनाश पर रहा है । पूछू गा वि आज सभ्यता इतनी उनति क्यो कर गई कि आज इन्सान दूसरे के हिस्से की रोटी छीनना अपना अधिकार समझता है । क्यो आज प्रजातत्र पर तानाशाही की हुकूमत है । क्यो आज स्याह अधेरे रोशनियो को निगल रहे है। अगर ऐसा ही होता रहेगा तो मुये दूसरे जम की कोई इच्छा नहीं।
फूलो को चुभन पात्र परिचय विद्यान पावती विकास अयोध्या प्रसार सुमित्रा मुरेश प्रिसिपल सुनार एक आदमी चपड़ासी अयाध्याप्रसाद अपाध्या प्रसाद (प्रिमिपल के कमरे म एक आदमी जाता है, जिसका नाम अयोध्या प्रसाद है) क्या मैं मदर आ सकता है। प्रिंसिपल ओह, सेठ जी आप ' आपको इजाजत लेने की क्या जरूरत है ? आप तो मालिक हैं आप ही घदे से तो यह स्तूत चलता है । हूँ ! मेरे ही चद से यह स्कूल चरता है शायद यह बात भूल चुका है विद्यानद । आप उसे महा बुलाइये इसी वक्त । प्रिंसिपल अभी पीरियड खत्म होन म कुछ समय है और क्लास बोच में छोडकर अयोध्या प्रसाद वो यहा आ नही सरता, यही बहना चाहते हैं न आप। प्रिमिपत्त जी हा ! विधानद जी र कुछ अमूल हैं जिह व रिसा भी कीमत पर नहीं तोडेग । बाप पाच मिनट इतजार मीजिय । उनका नैनस्ट पीरियड भी है । मैं गूचना भिजवा दना हूँ । (घण्टी बजाता है। पहामी अशा आता है। सपनामी एंगा पिश जी म मा बि मन वाया। पपदामी त्री वहन अन्हा । (बाहर पता जाता है। 16 27 प्रिमिपल अयोध्या प्रसाद प्रिसिपल अयोध्या प्रसाद प्रिंसिपल अयोध्या प्रसाद प्रिंसिपल अयोध्या प्रसाद प्रिंसिपल वो 51 मिनट में पहुंच ही जाएँग । आखिर बात क्या है ? मुझे भी तो बताइय सठ जी प्रिंसिपल साहब आप उसे अच्छी तरह से समझा दीजिये दि ऐमी हरक्त अयोध्या प्रसाद फिर दोबारा सहन नहीं करेगा। क्या कोई गलती हो गई है विद्यान- जी से ? बहुत बड़ी गलती की है । उसने मेरी औलाद के मुंह पर नही, बत्यि भेर मुह पर तमाचा मारा है। तो क्या सुरश को हा क्ल उसने सुरेश की पिटाई की । अयाध्या प्रसाद के स्तूत का एक मामूली सा मास्टर, अयाध्या प्रसाद के ही लडके के साथ इस तरह का बर्तान को । मेरे लिए यह बहुत शम की बात है। मगर मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हू कि उसने यह सब बेवजह नहीं किया होगा। मैं यह सब कुछ नही जानता । सुरेश इस स्कूल के सभी विद्यार्थिया से अलग है क्यो कि वा मेरा लडका है और उससे सबका व्यवहार भी अलग ही होना चाहिये । जी मैं आपका सदेश सब तक पहुचा दूगा। (स्कूल मे पीरियड खत्म होन की घण्टी बजती है और साथ में बच्चों का शोर गूजता है विद्यानद के कदमो की आवाज आर उसका प्रिंसिपल के आफिस का दरवाजा खोलना) 'क्या मैं अदर आ सकता हूँ? आईये विद्यानद जी, हम आपका ही इतजार कर रहे थे । वैठिये । नमस्कार सेठ जी। सेठ जी आप से नाराज हैं। क्या मुझसे कोई भूल हुई। वहुत बडी भूल विद्यानद ! तुमने अपनी हैसियत को नजर अदाज करके मेरे गिरबान पर हाथ डालन की भूल की ? मैने अपनी हैसियत भूल कर आपके गिरबान पर हाथ डाला ? मठ जी मैं कभी भी अपनी हसियत नहीं भूला । हमेशा यह याद रखता हू पि मैं इस स्कूल का एक मामूली सा अध्यापक हूँ। आपका गिरवान तो बहुत ऊचा है उस तक मेरा हाथ नही पहुच सकता। तो फिर क्यो मारा था मेरे लडके के गाल पर तमाचा? क्यापि उसने अनुशासन तोडा था। और तुम यह भी भूल गये कि वो किसका लडका है ? मरी क्लास में पढ़ने वाला प्रत्यक विद्यार्थी एक समान है। मेग विद्यानद प्रिसिपल विद्यानद प्रिंसिपल विद्यानद अयोध्या प्रसाद विद्यानद । . अयोध्या प्रसाद विद्यानद अयोध्या प्रसाद विद्याद 28 अयोध्या प्रसाद विद्यानद - अयोध्या प्रसाद प्रिसिपल आदमी चपडासी व्यवहार सभी के साथ एक जैसा होता है। जान बूझ कर की गई गनती को क्षमा नहीं किया जा सकता । अनुशामन की सीमा लाप कर अभद्र व्यवहार करने वाले को सजा जरूर मिलेगी। चाह वो आपका ही लडका क्यो ना हो । विद्यानद तुम यह भूल रहे हो कि तुम किसमे बात कर रहे हो । सेठ जी में अच्छी तरह जानता हूं कि मैं क्सिसे बात कर रहा हूँ मैं उस पिता से बात कर रहा है जो अपने बेटे का भविष्य उज् वल बनाने की बजाए उसे गुमनामी के अधेरे म धकेलने की कोशिश कर रहा है । मैं यहा ज्यादा देर नहीं स्कू गा क्याकि कुछ विद्यार्थी लाइब्रेरी म मेरा इतजार कर रहे होंगे । जाने से पहले इतना ज़रूर कहूगा कि आप उसक भविष्य से खिलवाड कर रहे हैं सेठ जी! (विद्यानद वा प्रस्थान) दखा प्रिंसिपल साहब, किस प्रकार अपनी जुवान से जहर घोल रहा था । अब और सहन नहीं होता। सेठ जी आप इस स्कूल में सब कुछ है । कोई फैसला करने से पहले आप हर पहलू पर अच्छी तरह से सोच विचार लें। (बाहर चपडासी एक आदमी को अदर आन से रोकता है) मैं प्रिंसिपल से मिले बगैर नही जाऊगा। आज प्रिंसिपल साहब किसी से नहीं मिलेंगे अदर मीटिंग हो रहा है । तुम अदर नहीं जा सकते । मैं जरूर जाऊगा। मै प्रिंसिपल से मिलना चाहता हू । (शोर प्रिसिपल तक पहुचता है) क्या बात है ? यह शोर क्या मचा रखा है ? साहब यह आदमी (इतनी दर म वो आदमी प्रवेश करता है) साहब मैं बहुत दूर से आपसे मिलन आया हू और यह अंदर आने ही नहीं देता था। आप वैठिये । तुम जाओ। साहब मैं एक गरीब आदमी हू । सडक के एक काने म छावडी लगाता ह और रात को रिक्शा भी चलाना पडता है तब वही जावर परिवार का गुजारा मुश्किल से हो पाता है। मैं आपक लिय क्या कर सकता हूँ मेरा लडका इमी स्कूल मे पढत है। कर उसने बताया कि जिम क्लास म वा पढता है वहा या अनुशासन ना के बराबर है और उसका भविष्य वहा सुरक्षित नहीं है । फिर क्या चाहते हैं आप? आदमी प्रिसिपल चपडासी आदमी प्रिसिपल आदगी १ प्रिंसीपल आदमी प्रिमीपल 29 आदमी प्रिंसीपल आदमी , . . प्रिंमीपन आदमी प्रिंसीपल मै चाहता हूँ कि आप उसका सैक्शन बदलकर विद्यानन्द जी के पाम कर दें, बस फिर मैं निश्चित हो जाऊँगा। शायद आप विद्यान द जी की बैत के बारे मे कूछ नही जानत वो अपन विद्यार्थिया के साथ कठोरता मे पश जाते है। कठोर रवया तो कभी कभी मा बाप भी अपने बच्चा क माथ अपनाते है और गुरु का दर्जा उनसे कम नहीं है साहब, अगर मेरा लडका गलती करेगा तो उसे सजा मिलनी ही चाहिये । नभी तो उस अच्छे बुरे का ज्ञान होगा। मैं ता यही चाहता हूँ साहब कि मेरी दिन रात की महनत व्यथ ना जाए और मेरे बच्चे का मुस्तकबिल ऊँचा हो। यह तभी मुमकिन हागा जब वो विद्यान द से पढ़ेगा। ठीक है उसका संक्शन चेंज हा जाएगा। आप बाहर इतजार कीजिये। बहुत बहुत धयवाद साह्न । मैं आपमे वाद म मिलता हूँ। (वाहर चला जाता है) जब आप ही बताए सेठ जी, एक तरफ आप है और दूसरी तरफ यह गरीर जादमी जा जपन वटे का विद्यान द से पढवाना चाहता है। जब फैसला आपके हाथ में है। होगा तो वही जो आप चाहग । जगर आप मेरी राय जानना चाहते है तो मैं यही कहूँगा कि अध्यापक और विद्यार्थी व पवित्र रिश्ते के दरम्यान मा बाप को नहीं आना चाहि। आप ठीक कहते हैं प्रिंसीप न साहब ! वटे के प्यार न मेरी आखो के सामन नासमझी की दीवार खडी कर दी थी। सगीत अतराल विद्यानद का घर उसकी वीवी पावती और वटा विकास विकास बटे। क्या बात है मा ? यह ले खाना खा ले। ओह हो मम्मी आज फिर दाल ? बटे तेरे पिता जी को अच्छी लगती है ना इसीलिये बनाई थी। उनको अच्छी लगती है तो उह ही सिलाओ । मैं यह बिल्कुल नही पाऊँगा। अच्छे बच्चे जिद नही क्यिा करते। मैं कोई अच्छा वच्चा नही हूँ। अयाध्या प्रसाद पावती विकास पावती विकास पावती विकास पावती विकास 30 पावती तू तो मेरा वडा अच्छा बेटा है आ मेरे पास आ, मैं तुझे अपन हाय से खिलाती हूँ। विकास विद्यानद पावती विद्यानद विराम विद्यानन पार्वती विद्यानद पावती विद्यानद मैं यह खाना भी नहीं खाऊँगा (और हाथ स खाने की थाला नीचे फेंक देता है और उसी समय विद्यानद भी आता है) (गुम्से में) विकास । यह क्या बत्तमीजी है ? यह क्यो क्यिा' रहने भी दौजिये बच्चा है, गरती हो गई। यह गलती इमन जानबूझ कर की है इसने खाने का नाचे पैक कर जान का अपमान किया है। क्या १ क्याफि मुझे यह दाल अच्छी नहीं लगती। (थप्पड मारता है) आगे जुबान चलाता है ' (बच्चा गेता है) अब बस भी कीजिय । मार ही डालेंगे क्या? चन बेटें आ मेरे साथ। पावती तुम्हारी यही बातें तो उस बार बार गलती करने के लिय उक्साती है। माँ हूँ ना । पत्थर दिल तो नहीं, नापकी तरह । तो तुम क्या समझती हो कि मरे मोने में जो धडरता है वो दिल नही' नही पावती ऐसा मत कहो में नहीं चाहता कि मोदी ममता और बाप या प्यार बेटे को आसमान की बुलदियों को छूने मे बाधा बन जाए। मगर जापवा यह मरत रवैया उमकै दिल मबही आप लिय नफरत ना भर दल बेटा (रोत हुए) मां क्या पिता जी मुझे बिलकुल प्यार नहीं करत ? परत है बेटे, बहुत प्यार करत हैं तुझे! नहीं मां वो ता मना ही मुझे पीटत रहत हैं । एसा क्यो मा ? इसम भी गाय तरी ही वाई मलाइ हो। (समीन तराल) घाय या आपरे लिय? नही तिनही कर रहा । विवाम वा आप में एक शिकायत है। मुझमे ' क्या शिवायत है उसे ' उगाया है कि आप उस प्यार नही पात । उगा यह स्थान ठीक नहीं है पावनी। एप पिता अपने बेटेम प्यार नहीं करता यह असभर है। तुम क्या समझती होरि उस पावती विकास पावती विकास पावती पावती বিয়ান पापती विद्यान पायी বিতান १ 31 पावती विद्यानद पावती विद्यानद विकास विद्यानद सजा देकर मुझे कोई खुशी होती है ? सजा उसे मिलती है और / निशान मेरे दिल पर बनते है, मगर मैं विकास की तरह वो निशान तुम्हे दिखा नही सक्ता क्या करूं अनुशासनहीनता भी तो बर्दाश्त नहीं होती। पावती मैं चाहता हू विकास को इस समाज की ऊँच- नीच की समझ अच्छी बुरी बाता का ज्ञान वडा का आदर और जिंदगी मे कुछ बनने की लालसा हो अगर इन सब बातो के लिये कभी कभी मैं सख्ती से पेश आता है तो कोई गलती ता नही करता। मैं आपको अच्छी तरह समझती हूँ मगर क्या कर मेरे सीने में भी दिल है जिसमे मा की ममता बूट कूट कर भरी हुई है। मुझसे उसका इस तरह रोना महन नहीं होता। सहन करना ही होगा पावती। अगर ऐसा नही करोगी तो उसके भविष्य की इमारत की नीव कमजोर पड जाएगी। विकास कहा है ? यही है । बड़े प्यार से समझाना पडा उसे । विकास इधर आओ बेटे। जी। बेटे तुम्हारे पास दो घण्टे का समय है तुम खेलना चाहो तो बाहर जाकर अपने दोस्ता के साथ खेल आओ। हा हा बेटे जाओ। नही मा, दिल नही कर रहा । जाओ बेटे, जिद नहीं करते । रहने दो पावती अगर वो नहीं जाना चाहता तो जैसी उसकी इच्छा (विकास चला जाता है।) देखा अभी तक आपसे नाराज है। मगर इसका मुये कोई दुख नही है कि बेटा, बाप से नाराज है । मैं ता अपना फज़ पूरा कर रहा हू । जब मेरे हाथो से खिला हुआ फूल अपनी सुगध चारो तरफ बिखेरेगा उस वक्त मुझे कितनी युशी होगी शायद इसका अदाजा तुम ना लगा सको। (दो घण्टे पश्चात (सगीत अतिगल) मा में जरा बाहर खेल जाऊँ? विकास! जी। वहा जा रहे हा पावती विकास पावती विद्यानद . पावती विद्यानद । विकास विद्यानद विकास विद्यानद " 32 खेलने । विकास विद्यानद पावती विद्यानद बिकास पावती विद्यानद विकास विद्यानन्द पावती बिकास पावती विद्यानद तुम बाहर खेलने नहीं जा सकते। जाने भी दीजिये ना। तुम बीच मे मत बोलो पावनी । तुम वाहर नहीं जाओगे विकास क्योकि यह तुम्हारा पढने का टाइम है। जब तुम्हारे खेलने का टाइम था, तब मैंने तुम्हे खेलने के लिये कहा था लेकिन तुमने वक्त की एहमियत को नहीं समया । नही मम्मी मैं जाऊँगा मैं जाऊँगा मम्मी । बेटे अपने पापा का कहना मानो जैसा वो कहते हैं वैसा करो। जाआ विकास अपनी किताबें लेकर आओ। नही मम्मी, मैं नही पढू गा मैं जाऊँगा वाहर खेलने के लिये । (गुस्से म) विकास एक मिनट मे अपनी किताबें यहा लाओ वर्ना मैं तुम्हारी खाल उधेड दूगा। जाओ बेटे ज़िद ना करो। अच्छा मम्मी। यह आपका स्कूल नहीं घर है और घर में इस तरह आपको पावती घर हो या स्कूल अनुशासन तो हर जगह ही हाना चाहिये । इस के विना इसान अधूरा है। आपकी बातें तो मेरी समझ से बहुत बाहर की हैं । लेकिन वक्त तुम्ह एक दिन सब कुछ सिखा देगा और तब तुम्हे यह जहसाम होगा कि एक बाप होने के नाते या एक अध्यापक होन के नाते मैंन जा कुछ भी किया उचित ही किया। सोचो पावती जरा साचो तव तुम्हारे दिल को कितनी खुशी होगी। जब लोग कहगे कि यह है विकाम की मा उस विकास की मा जिसका बेटा आज समाज की बहुत ऊँची पदवी पर है। उस दिन मैं ममयू गा कि मेरी महनत वेवार नही गई । (सगीत अतराल) दस साल के अतरार के बाद । सुमित्रा ! आज मेरी जिंदगी का सबसे खुशी का दिन है। यो ता हागा ही। आज हमारा बेटा सुरश पूर दस साल बाद अमेरिका से बहुत बडा डॉस्टर जो बन में आ रहा है । क्तिना बड़ा हो गया होगा वो। आप जितना ऊँचा तो हो ही गया होगा। मुझसे भी ऊंचा मुमित्रा। पावती विद्यानद अयोध्या प्रसाद मुमिना अयोध्या प्रसाद मुमिना अयोध्या प्रमाद 33 सुमित्रा 1 अयोध्या प्रसाद सुमित्रा । अयोध्या प्रसाद सुमित्रा अयोध्या प्रसाद आपने भी तो उमे इम धुल दी पर पहुंचाने के लिये कोई कमर नही छोडी। सुमित्रा जब आज से कोई 15 साल पहले की बात याद करता हू ता ऐसा लगता है कि मैं अपन बेटे के भविष्य के साथ खिलवाड़ करन चला था। मगर विद्यानन्द जी ने मेरी आखें खोल दी और मुझे यह महसूस करवाया कि अपनी औलाद के साथ इतना प्यार ना करो कि वो प्यार उसका दुश्मन बन जाए। और उसके बाद ही तो आपन उसकी हर गलत बात को रोदन के लिये उस पर पाबदिया लगानी शुरू कर दी अगर मैं यह सब कुछ नही करता तो सुरेश जहा आज है वहा कभी न होता। विद्यानद द्वारा दिखाया गया रस्ता कठिन जरूर होता है मगर उस रास्ते से गुजर जाने के बाद इसान जब पीछे मुडकर देखता है तो अपने आप को एक नई दुनिया में महसूम करता है और उस दुनिया की बुनियाद खोखली नहीं होती। वो तो है ही । आप यातें ही करने रहेंगे या सुरेश को लाने एयरर्पोट भी जाएंगे। ओह हा बातो बातो मे तो ध्यान ही नहीं रहा । मैं भी गया और जल्दी ही सुरेश को लेकर आया। (अयोध्या प्रसाद का प्रस्थान । गाडी स्टाट होन की आवाज़ और कार तेजी से भागती है। (सगीत अतराल) (गाडी रुकने की आवाज) तुम इस सामान को चिंता ना करो सुरेश । पहले मम्मी से मिल लो वड़ी देर से तुम्हारा इतजार कर रही होगी। अच्छा पिता जी! आओ अदर चलें । सुमित्रा तो भई तेरे सुरेश को लेकर हम आ भी गये। मा। कितना बड़ा हो गया है रे तू ? क्या कभी अमरीका में मम्मी भी भी याद आई थी? बहुत आई थी मम्मी। कभी कभी तो दिल करता पा वि छोड दू ये सब कुछ और भाग जाऊ अपनी मम्मी व पाम । मगर पिना जी की उम्मीद को नाउम्मीद म कस बदल मक्ता था, शाबास रटे, मुपे तुमसे यही उम्मोद पी। पिता जी आपने आशीर्वाद ने और आपरे अनुशासन ने मुझे इस अयोध्या प्रसाद सुरेश अयोध्या प्रसाद सुरेश নিশ্বা सुरेश अयोध्या प्रसाद सुरेश 34 अयोध्या प्रसाद विद्यान अयोध्या प्रसाद पावती विद्यानद अयोध्या प्रसाद सुरेश विद्यानद काबिल बनाया कि आज जापका बेटा डॉक्टर बन कर आपके सामने खडा है। नही वटे इस ऊचाई तक पहुचन का श्रेय मुझे नही विद्यानद जी को है होन ठीक समय पर चेतावनी देकर मुझे एक गलत रास्ते पर जाने से रोक लिया । मैं चाहूगा कि हम विद्यानद जी के पास चलना चाहिये । तुम्हे मेरे नहीं उनके आर्शीवाद की जरूरत है। (सगीत अतराल) दरवाजा खटखटान की आवाज़ पावती जरा दखना बाहर कौन आया है (पावती दरवाजा खालती है) क्या विद्यानद जी घर पर है " जी आईय। सेठ जी आप 7 आईये बैठिय। विद्यानद जी यह वही सुरश है जिसने आपसे प्रेरणा लेकर डाक्टरी की। यह आज ही अमरिका से आया है । इनके चरण छूओ बेटे। मुझे आशीर्वाद दीजिए गुरुजी कि मैं दुखिया की सेवा कर सकू । सुरेश सच मानो जब मैं अपने विद्यार्थिया को और उनका स्टेटस देखता हू तो बहुत खुशी होती है । जी यह मब तो आपकी ही बदौलत है। विकास कहा है ? दिखाई नहीं दे रहा। विकास माई ऐ एस आफिसर बन गया है बस ट्रेनिंग खत्म करके एक दा दिन म आ जाएगा । यह तो बहुत ही अच्छा है। मुझे पूरा यकीन है कि आपके द्वारा सीचा गया फूला का पौधा अपनी खुशबू चारो तरफ जरूर बिखेरेगा। दूसरा का मुस्तक्विल वनान वाला क्या अपनी औलाद का मुस्तक्विल बनान म काई क्मर छाड रखेगा। विद्यानद जी विकास को आई ए एस करवान म आपको बहुत मेहनत करनी पडी होगी। सेठ जी यह ता मरा पज था। सरश वो तुा अपन हायो म ही गुरु जी मैं आपन लिय यह तोहपा लाया हू । मैंन अगर अपनी डॉक्टरी की मजित तव का रास्ता बिना किसी रवावट ये पूरा सुरेश विद्यानट सुरेश अयोध्या प्रसाद विद्यानत अयोध्या प्रमाद सुरेश 35 बिद्यानद सुरेश विद्यानद किया है तो सिफ आपकी बदौलत और मैं अपने गुरु जी को छोटी सी दक्षिणा देना चाहता हूँ । मेरी गुरु दक्षिणा स्वीकार पीजिये। मैं द्रोणाचाय नहीं है । मैं तो स्कूल का एक मामूली सा अध्यापक हूँ जो अब रिटायर भी हो चुका है । सुरेश, अगर तुम आज इस मजिल तक पहुचे हो तो इसमे तुम्हारी अपनी मेहनत भी तो है । तुम मेरी बदौलत यहा तक नहीं पहुंचे हो अगर ऐसा होता तो मेरी क्लाम का हर विद्यार्थी कुछ न कुछ जरूर बनता । गुरु जी शायद आपको मालूम ना हो कि अम्मी प्रतिशत विद्यार्थी जिहांने आपसे शिक्षा ग्रहण की । आज देश की बडी बडी पदवियो पर काम कर रहे हैं सिफ आपकी बजह स । सुरेपा मैं उन बीस प्रतिशत विद्यार्थियों की बात कर रहा हूँ जो आज गुमनामी के अधेर मे अपना अस्तित्त्व तलाश कर रहे होंगे। क्या वो मेरे विाद्यर्थी नहीं थे ? क्या मैं उनको क्लास म मन लगा कर नही पढाता था। फिर आज उनका भविष्य उज्जवल क्यो नहीं हुआ ' सिफ इसीलिये कि मेरे द्वारा बताया गया रास्ता इहे काटो से भरा हुआ नजर आता था । वे भी तो मेरी ही बगिया के फूल थे। उन उन फूला की चुभन मैं नाज भी अपने सीने में महसूस करता हूँ। मैं तो मिफ रास्ता दिखाता था उस पर चलने वाले अगर अपनी मजिल पा लेते थे तो सिप अपनी मेहनत और लगन के बलबूते पर । विद्यानद जी सुरेश बडे प्यार से यह आपके लिये अमेरिका से लाया है। इसे स्वीकार कीजिये। नहीं सेठ जी मैं उस चीच को वसे स्वीकार कर लू जिसका कि मैं हकदार नही है। आप ही तो हक्दार हैं इसके। आपकी प्रेरणा ने ही तो मेरी सोई हुई भावनाआ को जगाकर मुझे इस काबिल बनाया कि मैं समाज मे सिर ऊँचा करके चल सकू । सुरेश इतना ऊँचा सिर करने मत चलना कि नीचे तुम्हें कुछ दिखाई ही ना दे बेटे नीचे जरूर देखना जब देखोगे तो तुम्हें लोगो की भीड मे भुछ जाने पहचाने गरीब और लाचार चेहर जरूर दिसाई देंगे जो अपने जीवन का एक एक पल इसी आशा के साथ व्यतीत कर रहे हैं कि कोई तो होगा जा उनर धावा पर मरहम रख सके । यही काम तो करना है तुझे । अयोध्या प्रसाद विद्यानद सुरेश विद्यानन्द 36 सुरेश विद्यानद मा 7 विकास पावती विकास पावती विधास मैं ऐसा ही करूंगा। मैंने यह प्रोफैशन अपनाया हो इसीलिय है वि गाव गाव जाकर उन लोगो के काम आ मकू, जो स्वाथ की बुनियाद पर खडे अस्पतालो की इमारता म अपना इलाज करवाने मे अममथ है । मुझे आशीर्वाद दीजिये गुर जी। सुरेश, तुम्हारे विचार सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साय है। मेठ जी आपक घर का चिराग एक दिन इस समाज म फैले हुए अधेर को उजाल म बदल देगा ऐसा मरा विश्वास है। (सगीत अतरान (विकास जाते हुए) मा वहा हो तुम आ गया विकास तू । कैसी रही तरी ट्रेनिंग । एक दम फस्ट क्लास मा । अब तो तेरा बेटा डिप्टी कमिश्नर हो गया है। आज तुम्हारे पिता जी का मेहनत सफल हुई । तेरा लाख लाख शुक्र है भगवान । पिता जी की मेहनत नहीं मा पिता जी की नही मेरी मेहनत कह. मा । उहाने तो सारी जिंदगी वैत का सहारा लेकर मुझे नालायक बनाने में कोई कसर नही छोडी। यह तो मेरी अपनी हिम्ात थी कि आज मैं आई ए एस आफिमर हूँ । विकास' यह क्या कह रहे हो तुम । मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नही थी। मुझे भी पिता जी से ऐसी उम्मीद कभी नहीं थी। उहोने कभी भी मुझे अपनी औलाद की तरह नहीं चाहा । एसा व्यवहार ता लोग दुश्मनो के साथ भी नहीं करते । मेरी पीठ पर उनकी बैत के द्वारा बनाई गई उल्टी मीधी लकीरें मुझसे सिफ यही कहती हैं कि उहाने एक बाप का फज़ अच्छी तरह से नहीं निभाया । वद वर्ग बक्वास । तुम्हे अपन पिता जी के बारे में ऐसा पहले का बोई हक नहीं। तुम्हें क्या मालूम कि वो तुम्हे कितना प्यार करते हैं। प्यार' प्यार का मतलब भी पता है उनका । अगर उहे प्यार था तो अपने असूला से अनुशासन से स्कूल से और अपने हाथ में परडी हुई वत स । अगर नहीं था तो सिर्फ अपनी औलाद से । विवाम तुम्हारी बातो से ऐसा लगता है जैसे तुम्ह अपने पिता जी स नपरत हो गई है। पावती विकास पावती विकास पायनी 37 विवार पावती मुझे उनस नफरत नहीं है मा। मुझे अगर नफरत है तो उनके व्यवहार मे उन तरीका से जो उहोम मुझ पर इस्तेमाल क्यि विकास अगर तुम ऐसा समझते हो तो यह एक बहुत बड़ी गलत फहमी के सिवा और कुछ नहीं है । सोचो जग ठण्डे दिमाग से सोचो कि यह उसी वैत का ही डर था जो तुम्हे दिन रात पढ़न के लिए मजबूर करता था। अगर वा यह सब ना करते तो जहा तुम आज हो कभी ना होते । उहाने तेरी जान बूझ कर की गई गलतिया पर ही हमेशा तुझे सजा दी प्यार करने का मौका तुमने कब दिया उह । मै तो यही समझती हूँ कि उहोने जो कुछ भी क्यिा, ठीर ही किया। • (दरवाजा खुलन की आवाज) ठीक ही तो नहीं किया मा। लगता है तेरे पिता जी आ गये। चेटे उन मामन कोई ऐसी बात मत वग्ना जिमसे उ ह दुख हो । विद्यान द आता है आ गये क्टे? विकास पावती विद्यानद विकास विद्यानद विकास विद्यानद है विकास विकास बेटे जिस पदवी पर तुम आसीन हुए हो उस पर बदनामी के दाग मत लगने देना । गरीब और लाचार लोगो पर जुल्म कभी भी नहीं होने देना। पिता जी, अब वो पहने वाला छाटा सा लडका नहीं है जो हर वक्त आप की कही हुई मातो पर अमल करता रहा । आज मैं एक बहुत बड़ा अफ्सर हूँ और मैं यह आपस वेहतर जानता है कि मुझे क्या करना है और क्या नहीं? गुस्स स) विकास । यह कोई वात बरन का तरीका है तुम्हारा और शायद तुम यह भी भूल गये कि मैं तुम्हारा पिता हूँ। जी नही मैं यह बिल्कुल ही भूला दि थाप मेरे पिता है जो मुंह से नही हाथ में पड़ी हुई बैत से ज्यादा बात करते थे। मुझे सानी करन पर भी तो तुम्ही ने मजबूर किया था। हर वार कोई ना कोई ज़िद जानबूझकर बार बार की गई गलतियां जो सिफ सजा को ही हकदार थी और तुम मुझसे यही उम्मीद रखत थे कि मैं तुम्हें प्यार करूं। प्यार ? यह लफ्ज़ आपके मुह से अच्छा नहीं लगता। देखो विकास, अगर तुम्हे मुझस यह शिकायत है कि मैंने तुझे प्यार नहीं किया या वरना ही नहीं चाहता था तो यह तुम्हारी भूल है। मैं ता वस यही कहूँगा कि एक बाप हान के नाते मुझे जो कुछ विद्यानद विकास विद्यानाद 38 1 विकास विद्यानाद पावती विकास पावती विद्यानद पावती करना चाहिये था मैंन किया । अगर उसके बाद भी तुम्हें मुझसे काई शिकायत ह तो यह तुम्हारी अपनी साच है। मैं तो सिर्फ इतना ही नहेगा कि साना तपपर ही कुदन बनता है। मेरी सोच भी गलत नहीं हो सपती। क्योकि मैं माई ए एस आफ्सिर हूँ। अगर आप समझते ह कि मैं आपकी बदौलत यहा नक पहुंचा हूँ यह सच नहीं है। सच तो यह है कि जैसा व्यवहार आपने मेरे साथ पिया। ऐसा व्यवहार तो लोग घर मे पाले हुए कुत्तो दिल्ली से भी नहीं करते। आपन ता मुझे उन जैसा भी नहीं समझा। (गुस्स स) विवास । अव इससे आग और कुछ कहने की इजाजत मैं तुम्हे नही दंगा। पावती इससे यह दा कि मेरी नज़रो से दूर हो जाए। ऐसा मत कहिय । आपन अपनी जिदगी के सारे फज़ ईमानदारी से पूरे किये हैं । इसका मुझे गुमान है। बस एक फज आपदा और रह गया है, वो भी पूरा कर दीजिये इसकी शादी करके । इसकी भी कोई जरूरत नहीं है मां । मैं शादी कर चुका हूँ। क्या। सुना पावती ? कुछ सुना तुमने ? तुमने अपनी जिनगी या इतना बड़ा फैसला कर लिया और हमे पूछा ता नही । तम्हारे दुश्मन तो नही थे। यह वात नहीं है मा । समय वहुत कम था और मैं आपको सूचना नही भिजवा सका । उह बहुत जल्दी थी। उन लोगा के कहने पर तुमने यह सब कुछ किया और उन लोगो को भूल गया जिनके साथ तुमने अपनी जिदगी के 20 साल बिताए । उम वाप को भूल गया जिसकी मेहनत और लगन के बलबूते पर आज तुम इस जगह पहुंचे हो । उस मा को भूल गये जो इसी सास के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रही है विक्ब उसका बटा वदा होगा और अपने पिता के बुटापे का सहारा बनेगा । मगर इस सववा बहुत अच्छा इनाम दिया है तुमने बेटे । मैं म पात से वव इकार करता हूँ आप सब लोग मेरे साथ चलिये । बहुत वडी कोठी मिली है मुझे नौकर चाकर है आपकी जिदगी आराम से कटेगी वहा । आराम स ही तो नहीं कटेगी वहा । नौकर चाकर कोठी और जितनी भी सुविधायें इक्ट्ठी कर मक्ते हो करो। अगर तुम विकास पावती विकास विद्यान 39 - अयोध्या प्रसाद समझत हो कि इसम तुम मुझे सुख दे सकते हो तो (बात बदलकर, निणय लेते हुए) मैं वहां नहीं जाऊँगा क्याकि मैं तुम पर बोझ नही बनना चाहता । हा अगर तुम्हारी मा जाना चाहे, तो मैं उसे गे। गा नहीं। पावती आपन यह कैसे सोच लिया कि मैं आपको छोडकर इस नालायक औलाद के साथ चली जाऊँगी ? मुझे तो इसे अपनी औलाद कहने म भी शम महसूस होती है। विकास तो ठीक है अगर आप नहीं जाना चाहते तो आपकी इच्छा मैं आपको मजबूर नहीं करूंगा (बाहर निकल जाता है) (सगीत अ तराल) कमरे म पावती की सिसक्यिा गूज रही हैं । सुरेश मा जी, आप हौसला रखिये सब ठीक हो जाएगा। आखिर ये सब हुआ कैसे ? पावती यह ज़रूम औरो के दिये हुए नही हैं । जब अपन ही बेगाना जैसा सलूक करें तो दिल को ठेस पहुँचती ही है। बस यही मदमा पहुँचा है है। सुरेश डडी ! मैं जरा गुरु जी का चैरअप कर लू । (दूसरे कमरे म चला जाता है। तो विद्यानद जी के इस हाल मे पहुँचने का कारण विकास है। पावती भाई साह्म, अब क्या बताऊँ, इह विकास से एसी उम्मीद नहीं थी अपने पिता के साथ इज्जत से पेश आना तो दूर यह तो अयोध्या प्रमाद विवास ऐसा भी हो सकता है ? पावती यही सब कुछ तो यह भी सोचते रहे । मगर जब इहे यह एहसास हुआ कि इनकी औलाद इस हद तक गिर सकती है तो ये सहन न कर सके । जब किसी घर म लडके का जम होता है ता लोग खुशिया मनाते है मिठाईया बाटते है और साथ मे यह भी साचते हैं कि बड़ा होकर यह उनके बुढाप मा सहारा बनेगा। लेकिन उस वक्त उनके दिन पर क्या बीतेगी भाई साहब जब उनी पगिया का फूल उहे खुशबू नही चुभन दे रहा हो। बहन जी मैं जापवा दद अच्छी तरह समझता हूँ। आपको इस तरह मायूस नही हाना चाहिये सब ठीक हो जाएगा सुरेश उह चकअप कर रहा है आइये हम भी चलकर देखते हैं (दूसर कमर में जाते है) सुरेश कुछ मालूम हुआ। सुरेश गुरु जो को यह क्या हो गया है कुछ समझ नहीं आता - अयोध्या प्रसाद - अयाध्याप्रमाद 40 अयोध्या प्रसाद सुरश जयोध्या प्रसाद सुरेश विद्यानद अयोध्या प्रमाद सुरेश विद्यानद पावती अयोध्या प्रसाद तुम्हारी डाक्टरी क्या कहती है ? मेरी डाक्टरी तो यही कहती है कि इ ह जो कुछ हुआ है वो नहीं होना चाहिये था। समझ नहीं जाता कि ऐसा कैसे हो गया । क्या पाई सोयिस बात जी मुझे तो बताते हुए भी (विद्यान द बहुत धीमी आवाज मे जैस बहुत बीमार और तकलीफ हो। बटे । तुम कैसे डाक्टर हो जज़बात के भवर म फसकर इस डाक्टरी पेगे के साथ नाइसाफी मत करो। विद्यान द जी ठीक वहते हैं बटे । तुम्हे इस तरह (बात पाटकर) नहीं हैडी म ही बता सकू गा। लेगिन मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि मुझे क्या हुआ है ? मेरे शरीर वे आधे हिस्स की हरकत बडी देर स रुक चुकी है । मुझे पैरालसिस हो गया है पावती। नही । ऐसा नहीं हो सकता (सिसक्ती है ।। आप इस तरह दिल छोटा ना कीजिये। विद्यान द जी ठीक हो जायेंगे । मुरेश यह सब हुआ कैसे ? ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा वढ जाने स ऐसा हुआ है डंडी। जाखिर क्या परेशानी थी इहे कौन सा ऐसा सदमा था जो आज इहे इस हालत तक पहुंचा गया। इनको सदमा पहुँचाने वाला इनका अपना ही बटा है। विवास लेकिन वो है वहा ? वो बहुत दूर जा चुका है। आंखो मे भी और दिल से भी। विकास ऐसा कर सकता है वभी सोचा भी नहीं था। मैं उस बेवकूफ का अभी इनफाम करता है। रुका वेटे मैं तुमम कुछ कहना चाहता हूं। जी। तुम मेर वारे म विकास को कुछ नहीं बताआगे। मुये बताना ही चाहिये गुरु जी। आज इस घर को उसकी बहुत जरूरत है। उसे ऐसा खुद साचना चाहिये था। अगर उमरे दिल के किसी भी कोन मे मेरे लिय जगह होगी तो वो जहर आयेगा। लेकिन मैं इतना खुदगज नही हूँ कि अपनी बीमारी का सहारा लकर उसे महा बुलाई। মুইদা पावती सुरेश पावती मुरश विद्यानद सुरेश विद्यानद सुरेश विद्यान द 41 सुरेश विद्यानद सुरेश विद्यानद गुरु जी, माफी चाहता हूँ । उसको बुलाना ही होगा। सुरण बेटे तुम्ह याद ही होगा कि एक दिन तुम मेरे पास मुझे गुर दक्षिणा देने आये थे और मैंने इकार कर दिया था। जी मुझे याद है। तो आज मैं तुमसे वो गुरु दक्षिणा मागता हूँ, बोलो बेटे अपने गुरु को गुरुदक्षिणा दोगे? जी। आप जो कहेगे, आपको हर कीमत पर दूंगा। तो फिर सुनो और वचन दो कि तुम विकास को मेरे बारे में कुछ नही बताजोगे । यही तुम्हारी गुरुदक्षिणा है । आप क्या माग रहे हैं विद्यानद जी, विकास तुम्हारा अपना सुरेश विद्यानन्द अयोध्या प्रसाद खून है। विद्यानन्द पावती विद्यानद । सुरश मैं इस बात से कब इकार करता हूं लेकिन जब तक वो अपनी जान बूझकर की गई गलतियो की माफी नहीं मागता मैं उसे अपने दु ख मे शामिल नहीं करूंगा । मुझम अभी इतनी हिम्मत है कि मैं अपने सारे दुख अक्ला सह सकें। क्या माप मुझे भी भूल गये। अर्धागिनी हूँ आपसी और आपकी तकलीफो के आधे हिस्से की वारिस । तुम्हें वैसे भूल सकता हूँ पावती। तुम्ही तो एक वो सहारा हो जिसके महार अव कम से कम जिन्दगी की गाडी घिसट घिसट कर तो चलेगी ही। ऐसा ना कहिये गुरु जी आप ठीक हो जाआगे । (सगीत अतराल) कार सडक पर तेजी से भाग रही है उस गाडी मे विकास और उसकी पत्नी दुबैठे हैं। आज हमारी शादी को पूरा एक साल हो गया है समय इतनी जल्दी बीत गया पता ही नहीं चला। जब समय की रफ्तार तेज हो तो ऐसा होना स्वाभाविक ही है। स्नो। इधर से गुजर ही रहे है तो अपन उन ज्यूलर से मेरे गले के हार के बारे मे पता ही कर लेते हैं । हा हा जरूर । (कार थोडा चलकर रुक जाती है और इजन बद हो जाता है । दरवाजा खोलकर दोना बाहर निकलते हैं) आईये हजूर बैठिय दो काफी नाना भई । इसकी क्या जरूरत है। साहब ऐमा कैसे हो सकता है कि जाप आए और ह ह विकास विकास सुमार विकाम मुनार 42 मुनार विकास सुनार विकास सुनार १ विकास सुनार । विकास सुनार वो हमने गले क हार का आडर दिया था वो तैयार हो गया क्या ? माफ कीजियेगा । वो बहुत वारीयी का काम है थोडा बहुत समय तो लगेगा ही जाप इत्मीनान रखिये आपको एक्दम असली माल का बनाकर दू गा। वा तो ठीक है मगर आप उस हार को मगवायें तो सही, हम देखना चाहते है कि वो क्मि क्डीशन मे है । हा हा जरूर देखिये हजूर । मैं अभी लेकर हाजिर हुआ। देखिये कितनी व्यूटीफुल ज्यूलगे रखी है इन शो क्सीज़ मे । तुमस भी ज्यादा करण? ह ह ह यह देखिय हजूर । यह क्या ? इतना गदा हार आप शायद कोई गलत हार उठा लाये। यह वो हार हो ही नहीं सक्ता जिसका हमने आडर दिया था। ये बिल्कुल वही हार है हजूर अभी इसको फाटनल टच देना वाकी है। मैं नही मानता कि यह वैसा खूबसूरत भी बन सकता है । हजुर सोना तो तपकर ही कुदा होता है। एक अच्छा जेवर बनन तक मोने यो किन किन हालात मे से गुजरना पड़ता ह शायद इस वात या आपको । माफ कीजियेगा हजूर बदतमीजी कर रहा है। पहले सान को गलाया जाता है फिर उस पर वदर्दी स छिलाई भी होती है और ना जान या कुछ नहीं करना पडता फिर यही जासर एक अच्छा गहना बनता है । अब आप यही दख रीजिय ना हजूर, कि आप बाज क्तिने बड़े अफ्सर हैं। अपन मा बाप के अनमाल जेवर । आप की सुदरता को चार चाद लगान की खातिर उन्होंने भी तो आपक साय वही ससूक क्यिा होगा जो मैं आज इम जेपर क साथ कर रहा हू अगर मरा बाप मरे साथ भी एसा मसूर परता तो मैं भी आपकी ही तरह मिमी शहर म बहा अपसर हाता। पितन लिन और लगेंगे, पार पाच दिन ता लग ही जायेंगे। टीप - मदिन :सकी मुदरता मकाई यमा नहीं आनी चाहिए । साइप नलत है। (ताना याहर आन है और गाटा स्टाट हानी है और नजी म भागती है। विधाम को गुनार मी और मां बाप यही बातें याद यानी ) मुगार 43 विद्यानद सुनार पावती सुनार पावती सुनार पावती मैं तो सिफ इतना ही कहूगा कि सोना तपकर ही कुदन बनता है। हा हजूर सोना तो तपकर ही कुदन हाता है। एक अच्छा जेवर बनने तक सोन को किन किन हालात म स गुजरना पड़ता है शायद इम बात का आपको यह उनकी वैत का डर था जा तुम्हें दिन रात पढने पर मजबूर करता था। पहले सोने वो गलाया जाता है फिर उस बदी से छिलाई भी होती है। उहोने हमेशा तेरी जान बूझकर की गई गलतियो के बदले म ही तुझे सजा दी। उ हाने भी तो आप साथ वही सलूक किया होगा जो आज मैं इस जेवर से कर रहा हूँ। उन मा बाप को भूल गया जो यही सोचते रहे कि कब बेटा बडा हागा और उनके बुढापे का सहारा बनेगा। विकास गाडी को एकदम ब्रेक लगता है।) गाडी क्यो रोक दी, क्या बात है आप कुछ परेशान से दिखाई दते है। मा और पिता जो की याद आ गई थी। पता नहीं वो किस हाल म होगे कैसे होंगे मैन तो उनकी सबर तक नहीं ली। (गाती स्टाट और टन होकर एक तरफ मुडती है और तेजी से भागनी है।) आप कहा जा रहे है ? यह रास्ता तो घर की तरफ नहीं जाना। यही रास्ता सिफ घर की ही तरफ जाता है इन्द्र उमर में तरफ जिसम मा होती है पिता हात है। जो पर, पाठीमदिर है इदू और मैंने उस मदिर की परियता में शामिन अपन भगवान के चरणा म वा पनववी, धुमा देत रहे । सिफ चुभन । (गाही के 17ी बागज) आप गाडी तो धीरे चलाइयरी कुछ नहीं होगा इद में घर पर (गारी नर रफ्नार म भागती है और है।) विकास विकास विकास
44
इदू
विकास
पावती
मा जी (रोती है)
यह सब कैसे हुआ मा ? क्यो हुआ ?
यह अपने दिल से पूछो ? अपने आप से पूछो ? तुम्ही तो वा फूल
हो, जो अपने माली को खुश्बू नही
(सिसकती है।)
हा मा। मैं ही वो बदनसीब फूल हूँ, जो सारी ज़िदगी पिता जी
को चुभन ही देता रहा (सभी रोते हैं सिसकते हैं ।)
विकास
निर्माण प्रिसिपल वर्मा जानकी प्रिंसिपल मेहता प्रधान भटनागर शर्मा नजिद्र पुष्पा सुभाष अशोक बहादुर मधु सूदन चपडासी एक दूसरा और तीसरा स्वर पप्पा सुभाष पुप्पा सुभाष पुष्पा सुभाष पुष्पा ! क्या बात है बेटे ? आज कालज से बडी जल्दी वापिस आ गया । आज कालेज म हडताल हा गई मा । मगर क्यों? पता नहीं मा यह सब तो वाही जान जिहाने ऐसा किया है । इसमे तो बच्चा की पढाई का बहुत नुक्मान होगा । उहे इससे क्या मा। वो तो बस यही वह रहे हैं कि जब तक उनकी मागें नहीं मानी जाएंगी कालेज नहीं खुलेगा। बच्चो भविष्य वा निर्माण करने वाले आज उस रास्ते पर चल पड़े हैं जिसवी काई मजिल ही नहीं है । विद्या जैसी पवित्र सस्थामा म अगर स्वाथ ने हम तरह अपनी जगह बना ली तो क्या इस दश 4 भविष्य का निर्माण हा सक्गा? (और इसी के साथ नाटक से सम्बधित अनाउसमैंट) (नारे लगाए जा हे है। हमें क्या चाहिए । साफ। इन्साफ आगे- झुकना पडेगा। हर जुल्मो सितम की कार मे-हडताल हमाग नाग है। (नारो शोर म प्रधान की स्पीय) 45 46 प्रधान भटनागर प्रधान दोस्तो । जैसा कि आप सब को यह मालूम ही है कि पिछले एक महीने म हम मब अपने अधिकारी के लिए जिस तरह अपनी बुल द आवाज मैनजमैंट के कानो तक पहुंचा रहे हैं उसम किसी भी तरह की कमी नहीं आनी चाहिए इसके लिए हमारा यह सघप चाहे क्तिना ही लम्वा क्यो न हो जाए । टीचस यूनियन जिदाबाद । हमे इस राष्ट्र का निमाता कहा जाता है। हम लोगो द्वारा ही शिक्षा प्राप्त करके आज कुछ स्वर्थी लोग समाज की ऊंची पदवीयों पर काम कर रहे हैं और वो लोग कितने एहसान फरामोश हैं इसका अदाजा तो आपको हो ही चुका होगा। मगर हम उहे यह बता देना चाहत है कि अगर हमारी मेहनत इस देश के भविष्य का निर्माण कर सकती है तो हमारा रोष इस निर्माण में बाधा भी उत्पन कर सकता है । अगर हमारी मागें मानी न गई तो ऐसा ही होगा। कुछ प्रोफैसर जो हमारे साथ इस स्टराईक मे हिम्सा नही ली रहे उह भी मैं यह बता देना चाहता हूँ कि वो अपणी क्लासेज लगाना वर कर दें नहीं तो उनके साथ अच्छा सलूक नही होगा। (सगीत अतराल) क्या हुआ बेटे यह माथे पर चोट कैसी ? तेरी तो कमीज्ञ पर भी बहुत खून नगा है। मा आज कालेज म वो हुआ। जिसकी इजाजत मानवता, मानव को नहीं देती। आखिर हुआ धया ? कुछ मुझे भी तो बता । आन टोचन के बीच मारपीट हुई/पत्थर तर चले/और निशाना वना में-और मुथ जम कई विद्यार्थी/जो पढ़ लिख कर कुछ बनना चाहत हैं। घोट गहरी तो नहीं है वटे । गही चोटें तो हमार हिंदी में प्रार्फमर/डॉ. मधुसूदन यो भाई है। वो तो बरे ही अच्छे आदमी हैं। सभी तो उनर माथ एमा मजूम हुआ। मगर क्या क्योरि यो अपना पतय्य/विना धिमी स्वाय व पूरा गरा जा पुष्पा सुभाप पुष्पा सुभाप पुष्पा सुभाष पुष्पा सुभाप पुष्पा मुमाल पुष्पा में मममी नगे।
47 सुभाष मा। आज वो स्टराईक मे हिस्सा न लेकर/विद्यार्थियो को पढाने के लिए कलास की तरफ जा रहे थे तो दूसरे ने उहे ऐमा न करने के लिए कहा। जब वो न माने तो मारपीट हुई। कुछ प्रोफैसर! मधुसूदन जी को बचाने के लिए आगे आए/तो फिर पत्थर बाजी पुष्पा सुभाष पुष्पा सुभाष पुष्पा सुभाष पुष्पा सुभाष पुप्पा सभाप पुष्पा कैसा जमाना आ गया। ईमानदारी क्सि बदर क्दम-कदम पर झूठ और फरेब मे मात खा रही है । मगर ऐसा ज्यादा देर तक नहीं होगा। यह हडताल कब तक रहेगी। क्या पता । इम्तहान सर पर आ गए है और पढाई अभी तक पूरी नहीं हुई। बच्चों के भविष्य का क्या होगा? होना क्या है मा ? ज्यादा से ज्यादा फेल हो हो जायेंगे एक साल ही खराव हो जाएगा न उनका । माल खराब हो जाना कोई मामूली बात ता नहीं है। उह इससे क्या? और यह जरूरी भी तो नही कि जो कुछ तुम सोचो/वो भी ऐसा ही सोचे । चनो मुझ जैसा न मा कम से कम ठीक तो सोचें। उहे तो बस एक ही चीज नजर आती है और वह है स्वाथ । मै तो बस यही कहूंगी कि भगवान इह सोचने समझने की शक्ति दें। मा वाप पता नहीं किस तरह क्दम कदम पर परेशानीयो का सामना करके अपन बच्चो को स्कूल कालेजो मे भेजते हैं विकत को वा पढ लिम्ब कर कुछ बन सकें। मगर इ हैं इससे क्या यह माग तो सिफ अपने बारे में ही सोचेंगे। (सगीत अतराल) प्रधान जी आपको प्रिमिपल माह्य बुला रहे । विस सिलसिले म? यह तो मालूम नहीं। अच्छा ठीक है तुम जाओ में इन सभी 7 मामा हा तो साथियो बताआमिना तिरेर हमने तो तुम्हें अपना प्रधान , मदन हम तुम्हार माय (ranामिर है।" तो फिर टोकरें। मान! पहुंचता है। मान' चपडासी प्रधान चपडासी प्रधान भटनागर प्रधान 48 प्रिंसीपल प्रधान प्रिंसीपल प्रधान प्रिंसिपल प्रधान चपडासी प्रिंसिपल चपडासी प्रिंसिपल प्रधान प्रिंसिपल प्रधान प्रिंसिपल हा बैठो। कहिए, जल्दी मे हो ? क्यो। इत्मीनान से बातें करना चाहता हू । ठीक है जब तक आप चाहे। प्रिंसिपल घण्टी बजाता है) यस सर। किसी को भी दर मत आने देना । जी बहुत अच्छा। वाहर चला जाता है) यह हडताल क्व तक चलेगी। यह मैनजमैट पर डिपैड करता है बल्कि मैं तो कहूगा आप पर क्याकि आप ही हमारे और मैनजमैंट के बीच को कडी हैं । देखो उमश मैं तुमसे बडा हू और बडे होने के नाते मैं तुम्हे यही सलाह दगा कि हडताल खत्म कर दो। मगर मैं आपकी यह सलाह मान्न को तैयार नही हू । पिछले एक महीन स जारी सघष को सिप आपके इतना ही नह देने से बद कर दिया जाए। नही नही ऐसा कभी नही होगा। मैंने तुम्हारी सारी मागा के बार मे हाई अथोरटी से बात की थी। मगर उह तुम लोगा से बाई महानूभूति नहीं। इस तरह अधेर मे हाथ पैर मारना भी तो बहुत बडी नादानी है। मेरी मानो तो हडताल खत्म करदा। कुछ प्राप्त किए वगैर ही। जा तुम्ह मैनजमेंट स नहीं मिल सका वा मैं दू गा । मगर किमी और तरीके से। मैं आपका मतलब नहीं समझा। मेरी बात ध्यान ग सुनो । यह ता तुम जानत ही हो कि मैं रिटायर हान वाला हूँ। मगर इम यात ना हमारी म्टराइव स क्या सम्मध । पहले मेरी बात सुना । फिर जो कुछ भी कहना चाहो पहना। टीय है अब नहीं यालू गा पहिए ? मैं मैनजमैंट को एव माल की एक्मटशन के लिए लिया है जिसे शायद यो मजूर ने कर । उह मुझ पर गा है पि मैंने दूमर तरीक मे बहुत पमा वमाया है। उनसागर गसत तो नहीं है। प्रधान प्रिंसिपल प्रधान प्रिंसिपल प्रधान प्रिमिपल प्रधान प्रिमिपल प्रधान 49 प्रिंसिपल प्रधान प्रिंसिपल प्रधान प्रिंसिपल मगर तुम भी कौन से धमराज युधिष्ठर हो। कालेज में घपले बहुत किए है तुमने और अपने मस्पंड होने के डर से इस हडताल घा सहारा ले रहे हो। गुल तो आपने भी कम नहीं खिलाए। यह जो नया ब्लाक बना है 25 लाख का जैसा कि आपके कागजो मे है। कम से कम 5 लाख आपने इधर उधर किए है। अगर हम इसी तरह एक दूसर पर दोप लगाते रहे तो दिन बीत जाएगा । मैं चाहता हूं कि हमें आपस म कुछ तय कर लेना चाहिए । क्योकि हम दोना को ही एक दूसरे की ज़रूरत है। चाहते क्या है आप ? मेरी सर्विस सिफ वार महीने और रह गई है और इन चार महीनो मे तुम जो कुछ भी कर सकते हो करो। तुम्हारी तरफ कोई आंख उठा कर भी नहीं देखेगा और इसके बदले मे तुम्हें हडताल खत्म करने का आश्वासन देना होगा। हडताल तो मैं अभी खत्म कर देता हू । मगर इससे आपको क्या ? आप तो रिटायर हो जायेंगे। अगर हडताल ग्वत्म हो जाती है तो शायद मुझे एक साल और मिल जाए। जगर ना मिल सका तो। यह साचना तुम्हारा काम नहीं है तुम वही करो जो मैं कहता हू । ठीक है ऐसा ही होगा। तुम्हारा घर बहुत छोटा है न । प्रधान प्रिंसिपल प्रधान प्रिंसिपल प्रधान प्रिसिपल प्रधान प्रिसिपल जी। प्रधान प्रिसिपल तुम ऐमा करा वि कालेज मे वा जो मेरी कोठी के साथ जो पाच छह कमरा या बड़ा घर है उसम शिफ्ट कर जाओ। यह मेरी तरफ से दोस्ती का छोटा सा नाहफा । थक्यू सर । मैं बाहर जा के स्टराईर खत्म करने का एतान करता हूँ। अब शायद इस हडताल वे समाप्त हान की वजह से मुपे एक माल और मिल जाए। (सगीत अन्तराल) (पीरीयड को घण्टी बजती है और लडवे क्लास से बाहर आते हैं उनका हल्का सा शोर) थोर वद होता है प्रोफेसर बतमा की आवाज़ क्लास में पहुंचती है) 50 भटनागर अशोक सुभाप अशोष सुभाष अशोक सुभाप अशोक सुभाष अशोक सुभाप अशाव आज मेरी तबीयत ठीश नही इमनिए माप सब लोग फ्री हैं। (उठने या शोर) चलो उठो मुभाष चलकर क्टीन म बैठते हैं। पटीन म बैठन लिए मरे पास पैस नहीं हैं। आ डाट बी सिली। मेरे माथ ऐसी बातें मत किया पर । चल उठ। नहीं यार मन नही परता । तो ठीक है हम भी नहीं जाते । एसा करते हैं कि लाईब्रेरी म चलते ह । मगर विस लिए? नाईनेरी में लोग क्यो जाते हैं ? सुभाष । तुम्ह विताबो के मिवा तो और कुछ दिखाई भी नही देता। इन किताबो के जाल म उलझ कर अपनी आँखो के माथ बेइसाफी मत करो। चादी के बतनो म खाना खाते हो न । इमीलिए ऐसी बातें करते हो। कभी अपने आपका मेरी जगह रन व देखो। सभाप । अगर तुम्हे मेरी बात स दुख पहुँचा है तो मैं माफी चाहता हूँ। नही अशोक ऐसी कोई बात नहीं । म तो सिफ अपनी मजबूरी बता रहा था। तो क्या यह सब विसी मजबूरी वश पर रहे हो । सुभाप अगर तुम्हें पैमा की जरूरत है तो मुझे बताओ। करोडपति बाप का इकलौता बेटा हूँ। इम समस्या का हल अगर पसा से हो सकता तो हर अमीर आदमी पर लिखा हाता। पढ़ लिखकर भी ता आदमी पम कमाने के लिए ही नोकरी करता है और इसकी भी काई गारण्टी नहीं कि उसे नौकरी मिल ही जाएगी। अगर तुम्हारी कही हई बाता पर हर काई अमल करे तो जानते हो क्या होगा? क्या होगा? इम दश के भविष्य का निर्माण नहीं हो पाएगा। गमकी चिता तो उह करनी चाहिए जिह इस देश का क्णधार महा जाता है। सुभाप अशोक सुगाप अशोक सुभाष अशोक सुभाष अशोष 51 सुभाष अशोक सुभाप अशोक सुभाष मगर हम लोगो का भी तो कोई फ्ज़ है। अगर ह कोई अपना फज़ ईमानदारी से पूरा करता चले तो देश के भविष्य का निर्माण अपने आप ही होता चला जाएगा। मुझे किसी से कोई मतलब नही । मगर मैं अपना हर वत्त व्य ईमानदारी से ही कर गा । सुभाष तुम अकेले नहीं हो जो ऐसा सोचते है। तुम मे न जाने क्तिने ही होगे। क्या अच्छे नम्बरा म पास होने के बावजूद भी उन लोगा का नौकरी मिल जाती है। उन्हे नोकरी इसलिए नहीं मिलती क्योरि ऊपर वाले ईमानदार नहीं हैं । अब दूर ही क्यो जाने हो यही देख लो प्रोफैमर साहा न वलास नही ली। क्यावि उनका मूढ नहीं था । क्या वो अपने पेशे से ईमानदार है । जवकि यह वहा जाता है कि टिचर विलड दी नशन । तुमने जो कुछ भी वहा/वो गलत नहीं है । ऐसा म भी मानता हू। अगर में भी तुम्हारी तरह साचू/गा उन लोगा की तरह करू /जो वो करते है। नो जानते हो क्या होगा। इस देश का अस्तित्व अधवार की आगोश में लुप्त हो जाएगा। यह तो तुम मानते ही हो । यि बुछ ऐसे लोग भी है । जा ईमानदारी से अपना हर क्त्तव्य पूरा करते है। और यह लाग अधिकार में छोटे छाटे दीपका समान है जो समाज मे फैले अधेरा म रौशनी नहीं कर सकते । मगर यह टिमटिमाती लो। उन लोगा के लिए एक मास की विरण तो बन सकती है। जो इन अधेरो मे भटक कर अपना अस्तित्व तालाश पर रहे हैं। मगर इसके बाद क्या होगा जब इन टिमटिमाते दोपको वो बत्ती जल जाएगी। मजिल पा लेने वाले इन बुझे हुए दीपका मे नई बत्ती भी नही लगायेंगे और फिर एक दिन कोई दीपक नहीं बचेगा। मैं एसा नहीं मानता अशोर । क्यापि मजिल उह ही मिलेगी जो निस्वाथ अपना हर वत्तय ईमाादारी में पूरा करना चाहते हैं । वाश एसा ही हा। एसा ही होगा | सा मेरा विश्वास है। (सगीत अतरान) मुष्ट पता चला? क्या? प्रिसिपल माहब को अरसटगन नहीं गिनी। अशोक मुभाष अमाप सुभाष अशाप सुभाष मटनागर प्रधान मटनागर 52 प्रधान भटनागर प्रधान प्रिंसिपल प्रधान प्रिसिपल प्रधान प्रिसिपल प्रधान प्रिसिपल प्रधान प्रिंसिपल तुम्ह पर पता चला। कुछ उडती उडती रायर है। ठहरा में नुद ही उनसे पूछता हूँ। (पदमा की आवाज और प्रिमिपन वे पास पहुंचता है) आआ बैठो। वाहर कुछ अपवार सी है कि आपया अक्सटगन नही मिला। यह अफवाह नही सच है। नाक्य जा रहे हैं आप ? यह तो नए प्रिसिपल पी ज्वायनिंग पर डिपड करता है। आ यौन रहा है? आर एस वर्मा। जो एक बहुत ही ईमानदार और सख्त एडमनिस्टरटर है। मगर में इसकी परवाह नहीं करता। अगर उसने स्टाफ को तग विया तो मै यहा ऐसी समस्यायें खडी कर दू गा जिसका समाधान वा कर नही सर्वगा। ठीक कहा तुमने । जव तव ज्वायन नही करता अपनी यूनियन को और मजबूत बरो और मै भी कुछ ऐसा ही हँगा जिससे उसे सिफ मुसीबतें ही झेलनी पडें । तो इसका मतलब है आप मैनेजमट द्वारा एक्सटेशन न मिलन की वजह से वर्मा की राह में काटे विसेरना चाहते हैं। ठीक सोचा तुमने । (घण्टी बजाता है) यस सर। अकाऊट आफिसर शर्मा को भेजना। तो फिर ठोप है आप अपना काम बीजिए मैं अपना करता हूँ। अब चलता है। (बाहर निकल जाता है। आपन सुये बुलाया सर। हा वैठिए । एस समय कालेज अकाऊट म क्तिना पसा है " जी कोई 15 लाख स कुछ दा तीन हजार ऊपर ही होगे। हूँ। ता फिर ऐसा कीजिए की 15 लाख का ड्राफ्ट मैनजमैंट नाम का बनवा लीजिए। यह आप करने क्या जा रहे हैं सर ? ऐसा सवाल आपको कम से कम मुझसे नहीं करना चाहिए। जसा कहता हू आप वैसा ही कीजिए। ओ दे सर। प्रधान प्रिंसिपल चपडासी प्रिसिपल प्रधान शर्मा प्रिसिपल शर्मा प्रिसिपल शर्मा प्रिंसिपल शर्मा 53 प्रिंसिपल शर्मा प्रिंसिपल शर्मा १ प्रधान शर्मा प्रधान शमा प्रधान शर्मा यह काम कल तक हो जाना चाहिए। (फोन वी घण्टी बजती) हैलो कौन वर्मा जी । कहिए कैस है आप तो हम आपका ही इन्तजार कर रहे है जव आ रहे है आप नक्सट वीक ठीक है आपका इतजार रहेगा ओ के ओ के वर्मा जी (फोन नीचे रखता है कुछ और सर। नही बस वो ड्राफ्ट बनवा देना। जी बहुत अच्छा (बाहर निकल जाता है) (पाज) प्रधान जी आप मेरे साथ आईए। क्यो क्या हुआ कमरे म चलकर बातें करते हैं । आईए । पाज) बैठिए । कुछ खास बात हुई लगती है प्रिंसिपल के साय । उहाने मुझे एक ऐसी बात करन के लिए कहा है अगर वो हो गई तो यहा बहुत सी समस्यायें खडी हो जाएगी। कुछ मै भी तो सुनू । उहोने मुझे कालेज अकाऊट के सारे पैसे का ड्राफ्ट बनान के लिए कहा है । वो यह सारा पैसा मनेजमेंट को भेज रहे हैं । अगर ऐसा हो गया तो सारे स्टाफ को तनखाह कहा म मिलेगी। तो इसका मतलब है कि नया प्रिसिपल ज्वायन करन ही वाला है । हा सात दिन बाद । अब आप ही बतायें वि में क्या करूं? आप वही कीजिए जो आपका प्रिंसिपल कहता है। मगर यह तो जाने वाले है। जाने वाले हैं । जभी गए नहीं । जैसा वो बहत हैं वैसा ही कीजिए बापी जा होगा मै सम्भाल लूगा। अच्छा चलता है प्रिसिपल मेहता की विदाई पार्टी का भी इतजाम करना है। (सगीत अतराल। (पार्टी चल रही है और सगीत बज रहा है लागा का हल्का सा शोर) साईलेन्स प्लीज । (गार बद) जैसा कि आप सब जानते ही हैं कि हम सब इस कालज व आदरणीय प्रिंसिपल मेहना साहब को विदाई देन के लिए यहा इक्टठे हुए हैं और साथ मे यह हमारी सुशनसीबी है कि नए प्रिंसिपल श्री आर एस वर्मा जी भी उपस्थित हैं। हमार रिटायड प्रिमिपल मेहता जी ने सदा स्टाफ मे कापरेट किया है और ऐसी उम्मीद हम वर्मा जी से भी करेंगे और उनकी छत्र छाया म यह कालेज आसमान की गलदिया को यूऐगा ऐमा मेरा प्रधान দামী प्रधान शर्मा प्रधान प्रधान 54 प्रिंसिपल महता वर्मा विषयाम है। इस सालेज व स्टाफ ने महता जी को अपनी तरफ स रगीन टी वी दन मा पसला पिया है और यह तोहफा मारी तरफ में यर्मा जी महता माझ पा देंगे। (तालीया) माईश वमा जी । (तालीया) मैन आप लोगा के साथ जितन भी मान विताए उन्हें भूल पाना मेरे लिए बहुत कठिन होगा। मरे साथ स्टाफ के सभी सभा मतभेद भी हुए। मगर हमन एप अच्छे परिवार की तरह ये मतभेद भापम मे मिल बैटपर दूर पिए। घर यो बात घर म ही रहे तो दूसरो या कुछ कह्न का मौका नहीं मिलता। वर्मा जी का म अच्छी तरह जानता है । यह अपना हर क्त्तव्य मेहनत और ईमाननारा स परत है बल्पि में तो यही यहूगा कि इस वानिज की सुविस्मती है जो उहें पर्मा जी जैसा प्रिंसिपल मिला और में उनसे निवेदन करू गा वि वा यहा आपर युछ कह । (तालीयों के बीच वर्मा स्टेज पर आते हैं) आप मव लागा न जो आदर दिया उसके लिए म आपका आभारी है । आप लाग चाहते हैं कि में स्टाफ के साय कापरट करू । ऐसा ही होगा। इसक बदले म भी आपस ऐमी ही उम्मीद करूगा । कहा जाता कि अध्यापक इस देश के बच्चो के भविष्य का निर्माण करते है और इही से ही देश का भविष्य जुडा है । जगर आप वाकई इम देश के भविष्य की बुनियाद मजबूत परना चाहत हैं तो जापको मेह्नत ईमानदारी से अपने क्त्तय्या का पालन अनुशासन के दायरे में रहकर करना पड़ेगा और म उम्मीद करता हू पि आप भी ऐसा ही करेंगे। धयवाद । (तालीयो पी गडगडाहट से वर्मा के भाषण का स्वागत होना है) मगीत अतराल क्या मजदर आ सकता है? आईए शर्मा जी। आपको इजाजत लेने की क्या जरूरत है? वठिए। जी शुनिया। कहिए ? कसे आना हुआ ? आप कुछ परेशान मे लगते है । जी मारी रात सो नही सका। बस यही सोचता रहा कि मुझे आपसे सब कह देना चाहिए । काई भूत हुई आपसे जी । मगर डरता हूँ। देखिए शर्मा जी घबरान की कोई बात नही जा भी है आप हिए। शर्मा वर्मा शर्मा वर्मा মামা वर्मा शर्मा वर्मा शर्मा वर्मा शर्मा वर्मा शर्मा वर्मा शर्मा वर्मा शर्मा वर्मा महता अच्छा आदमी नहीं था। यह मेरे लिए कोई नई बात नहीं है । मगर उसन जो क्यिा ऐमा का ऑप साच भी नहीं सक्ते । कल पदे है क्मचारियो को तनखाह कहा से मिलेगी। क्या कहत है आप शर्मा जी, कालेज अकाऊट म जितना भी पैसा था वो सब मैनजमेंट का मेहता साहब भेज चुके है। मगर क्यो। क्योकि वा आपको स्टाफ के सामने नीचा दिखाना चाहते है । गर्मा जी यह अच्छा दिया जो आपन समय रहते मुझे यह बात बता दी। अब क्या होगा सर ? कल जब स्टाफ को तनखाह नहीं मिलेगी ता क्या? कुछ नही होगा। क्याकि उह क्ल तनखाह जरूर मिलेगी। (टैलो फोन उठाता है। मैनेजमेंट के प्रसिडेंट से मिलाईए । (फोन नीचे रखता है। आप चिता न वीजिए शर्मा जी सब ठीक ही जाएगा। (पाज) (घण्टी बजती है) हैलो नमस्कार आचाय जी यहा एक समस्या खडी कर गए है मेहता साहब और उसके समाधान के लिए आपकी सहायता चाहिए । वो वालेज सवाऊट का साा पमा मनजमट को भेज चुके हैं वा आप तक पहुँच ही चुका होगा यहा पर तो स्टाफ को तनख्वाह देने के लिए कुछ भी नहीं है सव झूठ हा या मेहता ने आपसे यहा अकाउट मे कुछ नहीं है। आप ऐसा कीजिए कि दिल्ली में बैक से बहिए कि वा यहा अपनी प्राच मे यह रि हमे पैस दे दें ठीक है आचाय जी ओ क थैक्यू । (टेलीफान रखता है) शमा जी आप पल बैंक जाकर पेस ले आना। थंक्यू सर । नही शर्मा जी क्यू ता मुये आपका मरना चाहिए जो आपन मुये बता दिया । थैक्यू वैरी मच शर्मा जी। सगीत अतराल T মামী वर्मा वहादुर वर्मा बहादुर वर्मा बहादुर मर्मा यत्ता 30 जी साहब। ro और हमारी शारम पदोन डलवा लामा पंदोल डलवा लिया सर। मगर तुम्हार पाम तो पंस नहीं थे। फिर यह पदाल बहाँ म डलवाया।
बहादुर वर्मा बहादुर वर्मा बहादुर वर्मा बहादुर जानकी वर्मा वर्मा वर्मा शर्मा वर्मा शमा चर्मा कालेज के खाते से माहब । (गुम्से से) क्सिसे पूछ कर । सर यहा तो हमेशा ऐसे ही होता आया है। और तुमन भी मुझे उन लोगो जैसा समझा। माफी चाहता हू साहब । तुम कसरवार हो वहादुर। आगे से ऐसा नही होगा साहय । छोड भी दीजिए अब इसमे इस बेचारे का क्या कसूर । इसको गलती म इमका अपना तो कोई स्वाथ नहीं है न । ठीक है बहादुर । आगे से इस बात का ध्यान रखना कि कभी भी मेरा पसनल काम कालेज के खच से नहीं होना चाहिए और यह लो 300 रु० क्ल कालेज जमा करवा देना। सगीत अतराल (कुछ समय पश्चात् आईए शर्मा जी बैठिए । यह कुछ पिछले महीने के स्पोटस के बिल हैं। लाईए टीजिए । (पढता है) अवेले त्रिवेट या विल बीस हजार का। जो उहाँने प्रक्टिस लिए सामान खरीदा है। प्रैक्टिस पाल 40 रु० की । कौन है त्रिवेट कोच ? जी नजिद्र । तजिद्र कुमार थी वास्तव । उहे युनाऊ ? हा । नही रहने दो। मैं उसे पल बुला लूगा । यह सब हो क्या रहा है शर्मा जी? अब क्या पहें सर। आपको ता मालूम ही है कि मब कुछ जानते हुए भी मेहता साहब न यह सब राक्न को योशिश नहीं थी। मुझे माम हुआ है कि मेहता माहब के नाहर के मुताविक पालेज का हर मच उमेश जाकि यहा मा प्रधान है उसर जरिए हाता है। जी। आप ऐगा योजिए कि एक आदर टाईप पावावर मर पाम लाईए दिमागे महर काम का सच अकाऊट सेक्शन परेगा। मगर इसमे तो प्रधान पहन नाराज होगा। पर कालेज रिमी यो मुणो और नाराजगी मे आग नही पड़ेगा। यहा पर वही होगा का उचित होगा। सगीत या मगिरस न मरे उग गिरगन पर हाय TT जिसरी सरप महमा र दान की भी हिम्मत नहीं जाता पी। शार्मा यर्मा शर्मा घा शर्मा यमा 57 भटनागर प्रधान वर्मा प्रधान वर्मा प्रधान वर्मा अगर कहो तो यूनियन की मीटिंग बुला लें। अभी नहीं । पहले मुझे वर्मा से मिल लने दो । मैं अभी आया तुम यही मेरा इतजार करना । (दरवाजा खोलता है) मुझे आपसे बात करनी है। इस समय में बीजी हू थोडी देर बाद आईए । नही मुझे अभी करनी है। आप कमरे से बाहर निकल जाईए। ऐसा मुझे आज तक किसी ने नहीं कहा । मगर मैं कह रहा है। दोबारा जब भी आओ पूछ कर आआ। न्यू यो कन गो। आपने मेरी बहुत इन्सलट कर दी वर्मा साहब । मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। कोई बात नहीं अब मैं आपसे के प्लेट फाम पर ही बात कह गा। दरवाजा खोलता है और बाहर आता प्रधान भटनागर प्रधान तजिद्र प्रधान तजिद्र वर्मा तजिद्र वर्मा तजिन्द्र वर्मा तजिन्द्र क्या हुआ ? इसका दिमाग दरुस्त करना ही पड़ेगा। आज इसे बताना ही पडेगा कि मेरे बगैर इस कालेज में एक कदम भी बढाना बहुत कठिन है। तुम कहा जा रहे हो तजिद्र कुमार श्रीवास्तव जी। प्रिसिपल साहब न वुलाया है। पिस सिलसिले में? मालूम नहीं। मैं जरा होकर आता है। (प्रिंसिपल के कमरे मे) आपने मुझे बुलाया था सर। आप? जो मैं यहा का क्रिकेट कोच है। अच्छा अच्छा आप है। बैठिए । कसी चल रही है क्रिकेट की टीम । जी बहुत अच्छी । लड़के जी तोड प्रैक्टिस कर रहे हैं। क्या बात है पिछले दो सालों स हम चैम्पियन नही बन रहे । जो वो कुछ अच्छे लडके एकदम ही बी ए करने के बाद कालेज छोड गए थे। इस साल चासेज क्से हैं ? जो बहुत अच्छे है । मुये पूरी उम्मीद है कि चम्पीयन हम ही होगे। गुह । यह जा त्रिक्ट के सामान की खरीद है यह आप करते हैं ? जी हां। यह जो प्रेक्टिम वॉल 40 रु० ३ हिमाव स आपने 10 दजन पगेटी हैं इसस मैं स तुष्ट नहीं है। वर्मा सजिद्र वर्मा तजिद्र धर्मा 58 तजिद्र वर्मा तजिद्र वर्मा तजिद्र वर्मा की ही है। तजिद्र वर्मा तजिद्र वर्मा तजिद्र वर्मा तजिन्द्र वर्मा तजिद्र वर्मा तजिद्र वर्मा तजिद्र में आपका मतलब नहीं समझा सर । मरा कहने का मतलब है कि यह बाल 40 २० की नही है । माफी चाहता हू सर । विकट य वार म पायद आपक। मालूम न हो यह सबसे मेहगा सेल है। निखिल वर्मा को जानते हो? जी वो तो इस देश क बहुत अच्छे खिलाडी है। निखिल मरा बटा है और मैं खुद भी सेलता रहा हूँ और तुम्हारा यह कहना कि मुझे विकेट के बारे में जानकारी नहीं है यह तुम्हारी भूल है। मगर फिर भी यह गेंद 40 २० (दगज मे से एक गेद निकालता है। यही गेंद न । जी हा यही गेंद। यह रहा इस गेंद का बिल 18 रु० । (घबराते हुए मगर उसा तो मुझे उसे ऐसा करने के लिए तुमन ही कहा था। मगर सर मैं यह फाड कब से कर रहे हो ? मुझे माफ कर दीजिए सर। मरे छोटे छोटे बचे हैं कहा जायेंगे । अगर आप माफी मागना चाहते हैं तो लिख पर दीजिए। (सम्भल जाता ह) लिख के तो मैं नहीं दगा। तो फिर तुम्हें क्षमा भी नहीं किया जा सकता। ठीव है जो करना है कीजिए। मैं जा रहा हूँ। (चला जाता है। बिआफिस के बाहर प्रधान खडा है। क्यो क्या हुआ? लगता है मैं सस्पैड हो जाऊगा। मेरे होते हुए न तो यह हुआ है और न ही होगा। सगीत अतराल वहिए क्या कहना चाहत है आप अपने बारे में? मैं अपने बारे में नहीं तजिन्द्र के बारे मे कुछ कहना चाहता है। यहिए ? जिसकी बदौलत आज इस कालेज की टीम इस राज्य में अपना नाम रपती है । जिसकी मेहात से ही इस कालेज के खिलारी दश की टीम म सख रहे है और आपन उस प्रोत्साहा दन की बजाए उस हाय म सम्पशन लटर थमा दिया। मैं पूछना चाहता हूँ क्या? इस क्यो का जवाब तुम मुषस बहतर जानत हो । प्रधान प्रधान वर्मा प्रधान वर्मा प्रधान वर्मा 59 प्रधान वर्मा प्रधान वर्मा प्रधान भटनागर मधुसूदन भटनागर मधुसूदन भटनागर मधुसूदन - मैं कुछ नहीं जानता। मैं इस तरह स्टाफ क साथ ज्यादती नहीं होन दूगा। जान बूझ कर दिए गए झाड का क्षमा नहीं किया जा सकता। किसी भी कीमत पर नही चाह कोई भी हो । तो यह आपका आखरी फैसला है। जी हा। तो फिर आप भी सुन लीजिए वमा जी। आपकी हठधर्मी के कारण ही अव कालेज मे पढाई नहीं हडताल होगी। सगीत अतरात (नारो का शोर) मधुसूदन जो आप कहा जा रहे हैं ? कुछ विद्यार्थी कक्षा म मेरी प्रतीक्षा कर रहे हागे । अदर कोई भी नहीं होगा। आप यहा हमारे साथ बठिए । सर्वप्रथम मैं आपसे केवले यही अनुरोध कर गा वि आप मुझे यहा रोक्ने की चेष्ठा मत कीजिए। और दूसरे । और दूसरे माप का यह कहना दि भीतर कोई भी विद्यार्थी उपस्थित नहीं होगा। सत्य नही है । पढने के इच्छुक विद्यार्थी क्षिा मे होगे और पढान के इच्छुक अध्यापका को रोकना दुखदायी होगा। मधुसूदन जी ठीक रहते हैं भटनागर साहब ! आप हम जान दीजिए। अरमो प्रिसिपल चमनो। आराम से बैठ जाओ। कसे बैठ जायें यहा और क्या वठे ' अगर आप अपने समस्त पत्तव्या का भुलाकर शिष्टाचार एवं अनुशासन की अवहेलना कर रहे हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि हम भी ऐसा ही करें। आराम से बैठ जाओ यहा । जाप हमारे साथ इस तरह की जोर जबरस्ती नहीं कर सकते। जाम से बैठता है कि नहीं कि दिखायें दाना हाथ । मारो साले को । कुछ ज्यादा ही नाशवादी बनता है । अरे अरे सभ्य इसाना जैसी बात पग । यह वोई तगरा है। मैं कहता हू छोड दीजिए। से जाओ इनको यहा से। हम दा कालेज में पढाई नहीं होन देंगे। यह हमारा भी आसरी फैनना है। मगीत अतराल (नारा या तज गार और फिर हरा) एक स्वर भटनागर मधुसूदन भटनागर एक दूसरा तीसरा मधुसूदन एक भटनागर 60 वर्मा जानकी वर्मा 20 दिन हो गए इस स्टराईव को। आप उनकी बात मान क्यो नही लेते? वैसे मान लू जानकी ? अगर इसी तरह इनकी नजायज गागा भै आगे झुप जाऊँ तो लोग सच्चाई, ईमानदारी और आदश की बातें भी सुनमा पसद नही करेंगे। आपके आदर्शों ने भी तो आपको सिवाए दु खो से और कुछ नही दिया। अगर आप के सिद्धा त चटटान की तरह मजबूत हैं तो फिर यो तजिन्द्र को सस्पेंड करने के बाद आप इस तरह गुमसुम जानकी वर्मा जानकी वर्मा जानकी प्रधान भटनागर प्रधान उस बेचारे वे भी बात बच्चे होंगे। तो फिर बहाल कर दीजिए उसे। ऐसा करना मेरे सिद्धातो के खिलाफ है। आपकी बातें तो मेरी समझ में नहीं आती। (नारो की आवाज ऊचा और मैदान म) साथियो। आज हमारी लडाई का वीसवा दिन है और मुये खुशी है कि हम सब क जोश म किसी भी तरह की कोई कमी नहीं आई । हमारा यह सघप अगर बीस महीन भी चलेगा तो भी हम अपन स्टाफ के लिए लड़ेंगे। टीचज यूनियन जिदाबाद मगर हम अफसोस है कि मैनेजमैंट ने हमारे ऊपर एक ऐसा निक्कमा प्रिसिपल थोपा जिस के सीने में दिल नाम की कोई चीज़ ही नहीं है । स्टाफ पर नजायज़ तरीके से रोब डालना कामकाज मे खामिया निकालना और लोगा को सस्पड करने के सिवा इम और आता हो क्या है ? अगर इस कालेन के विद्यार्थीया का नुक्सान हा रहा है तो इसका जिम्मेदार सिफ वर्मा है। अगर इसका बस चले तो हमारे बच्चा र मुह स रोटी के नवाले तक छीन ले और ऐमे इसान को इसान नही जल्लाद कहना चाहिए । शामद घर के आरामदार मोफे पर बैठे हुए उस जल्लाद वे धाना तव मेरी आवाज पहुँच रही होगी। अगर उसम हिम्मत है तो हमारी वाता का जवाव यहा आकर दे। /आवाज धीमी) मैं जानता हूँ वो यहा नही आयगा क्योकि यहा आन लिए गेर का कलेजा चाहिए। आप यहा जा रहे हैं? घा मुझे बुला रह हैं जानरी और मुये वहा जाना ही चाहिए। जानकी यर्मा जानकी वर्मा वर्मा 61 आप वहा मत जाईए । अगर मैं वहा नही जाता तो उनके आरोप जो मुझ पर लग रहे हैं सही समझे जायेंगे। मैं यहा जरूर जाऊगा। (ऊची आवाज में नारे लग रहे हैं और सभी एक दम घुप क्योकि उनकी नजर वर्मा पर पड़ती है वर्मा स्टेज पर पहुंचता है) आप सब लोगा को मुझसे शिकायत है कि मैं स्टाफ के साथ अच्छा व्यवहार नही बरता। मै यहाँ पर आए हुए सभी इन्सानो से पूछता हू कि कोई भी हाथ सडा करके कहे कि मैंने उसे तग किया है । वल जब मधुसूदन जी पलाम म जाना चाहते थे तो आपने उह रोका । उनके साथ आपका व्यवहार देखकर यहा के विद्यार्थी क्या सीख पर जायेंगे । कहा जाता है कि अध्यापक ही देश के भविष्य का निर्माण करते है। मैं पूछना चाहता हूँ आपसे कि इस देश के भविष्य की इमारत वा निर्माण जिदाबाद और मुर्दाबाद ये नारो रो क्यो हो रहा है । क्या आज हर जगह हडताल, अहिंसा शहर बद दश बद और सब कुछ खत्म हो रहा है क्यो ? क्योकि इस देश की बगिया को सीचन से आपसे कही न पही भूल हुई है। देश के भविष्य का निर्माण करने वाले आज खुद जिन्दाबाद, मुर्दाबाद के नारा म अपना अस्तित्व तालाश कर रहे है । आप लोग विद्यार्थियो को क्या शिक्षित करोग जबकि आप सुद शिक्षित नहीं आपको शिकायत है कि कही मैं आपने बच्चो के मुह स रोटी के निवाले न छीन लू । मैं यहा का प्रिंसिपल नही हू । जल्लाद और यही जल्लाद आपस बिनती करता है कि आप इस तरह बच्चो ये भविष्य से खिलवाड मत कीजिए । अगर मरे रहने से आपको दुख पहुँचता है तो मैं यहा और नहीं रहूगा। आई विल रिजाईन । (इतना कह कर स्टेज से चला जाता है) साथियो। आज हमने यह सघप जीत लिया और वर्मा भी चला जायेगा। जब तक वर्मा घर नही पहुँचता हमारे नारो की खुल द आवाज़ उसने बानो तर पहुंचनी चाहिए । टीचज यूनियन (कोई साथ नहीं देता) आप लोग मेरे साथ नारा क्या नहीं लगाते बाला टीचज यूनियन नही अब तुम्हारा कोई साथ नहीं देगा और ना ही हम प्रिंसिपल साहब को यहां से जाने देंगे। तुम्हारा दिमाग तो नही खराब हो गया भटनागर । दिमाग सराव था। अब नहीं है। आज हमे मालूम हुआ कि अध्यापक क्या होता है ? विद्या जैसी पवित्र सस्थाओ में से कम यह जिदाबाद मुर्दाबाद के नारो की आवाज पाहिए। प्रधान भटनागर प्रधान भटनागर .
नई सुबह पात्र परिचय कृष्ण देव उमाशकर मानव-प्रताप सिंह सुभद्रा विकास रमेश सुनील वेटर अखबार बेचन वाला एक आदमी दूसरा आदमी (आश्रम मे हवन हो रहा है और काई 11 12 मनुष्य मनो का उच्चारण कर रहे हैं और मत्रो को समाप्ती के पश्चात् स्वामी कृष्ण देव अपन प्रवचन सुना रहे हैं।) कृष्ण देव सभी धर्मों का आदर ही सच्ची श्रद्धा है भक्ति है । मानव को यह जान लेना चाहिए कि जितने मत हैं उतने ही पथ और यह सभी पथ जिस स्थान पर पहुंच कर समाप्त होते हैं वहा मानव की मानवता जागरूप होती है। मनुष्य को यह अवश्य समझ लेना चाहिए कि विभिन धर्मों के विविध सम्प्रदाय केवल एक ही परमात्मा की अभिव्यक्तिया हैं। मनुष्य उस प्रभु को कितने ही नामा से पुकारते है। लोगा न इसे कितने ही नामा से विभाजित सा कर दिया है। परतु फिर भी प्रत्येक नाम म उस पालाहार की शक्ति विद्यमान है। मानव को मानवता का सदश इस ससार म इस समाज की दिशाओम बिखेरना चाहिए। मानवता हम इस बात का आदेश दती है कि हम क्सिी भी प्रति गुणा करें एक स्वामी कृष्ण देव की 62 63 सभी कृष्ण देव उमा शकर कृष्ण देव उमाशकर कृष्ण देव उमा पाकर जय स्वामी कृष्ण दव की जय सगीत जतराल उमा शकर। जी गुरुदेव । बहुत समय से एक बात हृदय मे जागृत होने की चेष्ठा कर रही है। आज्ञा कीजिए गुरुदेव । वो जो मानव अवेना काय मे मग्न है। कौन है वो ? इसे इम आश्रम म आए लगभग एक वप होने को है । यह बहुत कम बोलता है और इस आश्रम द्वाग सौंपा गया प्रत्येक काय बड़ी श्रद्धा और लग्न से करता है । इसी कारण वश तो हम पूछ रहे हैं कि यह कौन है ? और क्यो ससार से विरक्त होकर यहा आया है ? लगता है जैसे इसकी आत्मा पर बहुत बडा बोझ हो । तो क्या यह आत्मा का बोझ हल्का करने के लिए इस गाति वन मे उपस्थित हुआ है। ऐसा ही लगता है गुरुदेव । मैं कटिया म जा रहा है। इसे मेरे पास आने के लिए कही। उसे अकेले ही भेजना। जो आज्ञा गुरदेव । (पाज) कृष्ण देव उमा शकर कृष्ण देव उमाशकर कृष्ण देव उमाशंकर उमा शकर मानव मानव उमा शर मानव उमाशकर मानव उमा शकर मानव जी तुम्हे इस समय गुरुदेव के सम्मुख उपस्थित होता है । मुझे गुरुदेव के सम्मुख ? ऐसी ही उनकी इच्छा है। तो चनिए। तुम्हें अकेले ही जाना है । ऐसा ही आदेश है गुरुदेव का । मगर मैं अवेला वैसे सामना कर सकू गा उनका । आप भी साथ चलिए न। उनकी किसी भी आमा का उल्लंघन नहीं किया जा सकता और न ही तुम एसा करने पा साहस वरना। जाओ गुरुदेव इतजार कर रहे होंगे। उमाशकर मानव पया मैं अन्दर आ सकता हूँ?
64 कृष्य देव मानव मृष्ण देव मानव कष्ण देव आओ। बैठो बहुत समय से तुम ससार के समस्त सस सुविधामा का त्याग कर इस आश्रम में श्रद्धा और विश्वास से सभी काय बिना किसी हिचरिचाहट से कर रहे हो ऐसा क्या ? यह तो मेरा क्तव्य है गुरुदेव । तुम्हारा उत्तर जान पर बहुत प्रसनता हुई। यह मेरा सौभाग्य है कि मैं आपको प्रसन कर सका। तुम्हारा वतमान तो बहुत ही सम्मानजनक है और भविष्य भी ऐसा ही होगा। मगर तुम्हारे अतीत के बारे में हम अनभिज हैं और इसे जानने के इच्छा हैं । क्षमा चाहता हू गुरुदेव । मेरा अतीत क्या या शायद यह मैं खुद भी नही जानता। शायद शब्द का उपयोग करव' तुमने प्रश्न का उत्तर अपने आप द दिया । तुम्ह हमारे सम्मुख अपने अतीत के पन्ने पलटन ही होंगे। अब इन पना पर पढने लायक कुछ नही है गुरुदेव । तुम अपने अतीत का छिपान की जितनी चेष्टा करोगे उतनी ही हमारी जानन की जिज्ञासा बढ़ेगी। मानव कृष्ण देव मानव कष्ण देव मानव गुरुदेव मैं कृष्ण देव मानव मैं ज नता हू कि तुम अपना अतीत भुलाने के लिए ही यही जाए हो । मगर अभी तक एसा नहीं हुआ है। आप ठीक कहते हैं गुरुदेव। मैं जितना भी भूलने की कोशिश करता है उतना ही अतीत की यादो के भवर म फसता ही जा रहा हू । मेरी आखा वे आग अर्धरा है। मुझे कुछ दिखाई नहीं देता। मुझे रास्ता दिवाइय गुरुदेव नही तो इस ससार के भयानक अधेरा मे भटक जाऊगा। किसी भी बात का समाधान तब तक असम्भव है जब तक वो बात किसी के सम्मुख कही न जाए। कहो पौन हो तुम वो कौन सा ऐसा पाप है जिसके प्रायश्चित के लिए तुमन इस समाज मा त्याग दिया है । गुरुदेव । मेरा नाम रायबहादुर प्रताप सिंह है। वण देव मानव पलंश बम एक आदमी रायबहादुर प्रताप सिंह जी हम अधे और लाचार लोगो के लिए आश्रम बनाना चाहत हैं। यह तो बडी सुशी की बात है जो आपने मह सब कुछ करन की सोची। प्रताप सिंह दूसरा आदमी प्रताप विकास प्रताप विकास प्रताप एक आदमी प्रताप एक आदमी प्रताप दूसरा 65 हम चाहते हैं कि आप भी इस आश्रम के निर्माण के लिए कुछ चदा विकास। यस सर। चैक बुक है तुम्हारे पास ? जी । यह लीजिए। क्तिन का चैक काट दू? जैसा आप मुनासिब ममझे। यह लीजिए पचास हजार का चर। आपका बहुत बहुत धयवाद सेठ जी। आप ही तो हैं इस शहर के सबसे बडे दान दाता है | इस दरवाजे से कभी भी कोई खाली हाथ नहीं गया। धयवाद तो मुझे आपका करना चाहिए क्योकि आपने मुझे दान देने का अवसर दिया। यह तो आपकी महानता है जो आप ऐसा सोचते हैं । आज तो इसान दूसरा से लिया गया उधार तक वापिस लौटान में कतराते हैं। उनकी बात छोडिए । अगर आपका किसी और चीज की जरूरत पडे तो बिना किसी झिझक के आना। जरूर आएगे मेठ जी। अब हम इजाजत चाहेगे। अच्छा सेठ जी।नमस्कार। नमस्कार अच्छा सर में भी चलता है। सभी फैक्ट्रियो म मचारिया यो तनख्वाह बाटनी है। ठीक है तुम जाओ। अच्छा सर। ओ००। (चला जाता है) मैं कितनी सुशनसीब हू जो आप जैसा पति मिला जो दूसरो का दुख दद अपना ससझता है। मगर सुभद्रा । मुझे अफसोस है कि मैं तुम्हार लिए इस घर की चार दीवारी म सुशिया नही समेट सका। उसकी मर्जी के बिना तो यह प्रति भी परवट नहीं बदल सकती। हम तो फिर भी इन्सान हैं । आखिर उसका यह प्रकोप हम पर ही क्यो। निमित प्रत्यक वस्तु से प्यार करते हैं। नफरत करता है। प्रताप एक जादमी प्रताप विकास प्रताप विकास प्रताप सुभद्रा प्रताप सुभद्रा प्रताप 1 66 सुभद्रा प्रताप सुभद्रा प्रताप सुभद्रा प्रताप सुभद्रा प्रताप ऐसा सच नहीं है। पित क्या नहीं हम औलाद को गुशिया नसीब हुई । क्या सुभद्रा क्यो? शायद वा हमस यही यह रहा हो कि स्वाय से ऊपर उठ कर अपना प्रत्येय माय जा इसान या इसानियत के प्रति है इसी लगन और विश्वास क साथ करते रहो। ता क्या एक बेटे का बाप बहलाना स्वाथ है। औराद म्वाथ नही हाती सुभद्रा । वो तो प्यारा वो एक समदर है जिसम हर कोई डूब जाना चाहता है । औनाद स्वाथ का कारण भी तो या सक्ती है। मगर मैं ऐसा सोच भी नही रास्ता कि औलाद को खातिर लोगा की भलाई के लिए बढे हुए हाथ वापिस खीच लू गा । मगर ऐसा शामद हमारी औलार जहर कर सकती है । इसी लिए शायद हमे औलाद के सुख की बजाए भगवान ने हम लोगा की मेवा करन का अवसर दिया है जो सिफ खुशनमीवो के ही नसीब मे होता है। तुम ठीक कहती हो सुभद्रा। कभी वभी मुझे 7 जाने क्या हो जाता है ? सब कुछ जानते हुए भी अनजान मा बन जाता है । विकाम भी तो अपन बेटे जैसा ही तो है । मैंने भी उसे चीफ कैशियर से ज्यादा अपना बेटा समझा है । मैंन भी उसको आखी म कुछ देखा है । हमारे लिए आदर प्यार और सब कुछ। सुभद्रा विकास बहुत ही अच्छा और मेहनती लडका है । उसमे कुछ करने की क्षमता है और पो बरगा भी। ऐसा मेरा विश्वास है। (सगीत अतराल) [पश्चिमी सगीत वातावरण को उत्तेजर बना रहा है और तीन स्वर ए साथ जाम टकराकर चीयम कहते हैं । विद्यास तुम्हार हाय कौन सी लाटरी लग गई है ? जो रातों । रात जमीर बन गए। लाटी ही लगी मेरे दोस्त । मर हाथ तो एक ऐसा खजाना लगा है जिसका मालिक बहुत ही बेवकूप है। "बेवकूफ ! हा बेवकूफ ! म सिया उसे कोई और नाम निया ही नहीं जा माता। उम वेवकूफ को लोग राय बहादुर प्रताप सिंह सुभद्रा प्रताप सुभद्रा प्रताप रमेश पिसास T सुनील विपास 67 रमेश विकास सुनील विकास सुनील विकास रमेश विक्ग्स सुनील विकास कहते हैं मेरे मालिक जो सिफ दान देता ही अपना फज समझते हैं । उहें तो यह देखने की भी फुसत नहीं कि उनके द्वारा दिया गया पैसा जरूरतमद लोगो के पास पहुचता भी है कि नहीं । उसके पास दौलत तो बहुत होगी ? अरबों रुपये की सम्पत्ति है उसकी। यार विकास इतना बेवकूफ तो नहीं होगा वो जितना तुम उसे समझते हो। तूने भी क्या बात कर दी दास्त । अगर कोई मुये मूर्यो की लिस्ट बनाने के लिए कहे तो सब से पहले मैं राय बहादुर प्रताप सिंह का ही नाम लिखू गा । वो क्यो? क्योकि वा अनादर कर रहा है उस लक्ष्मी बा। जिस हासित करने के लिए इसान इसान नहीं रहता। वो तो दो लत को ठोकरें मार मार कर अपने घर से बाहर निकाल रहा है । यह तो हम ही है जो उसकी पूजा करते है और उसका सही इस्तेमाल करना जानते है । इस बार में बैठार (सभी हसते है) (थोडी शराबी हालत मे) वेटर एवं बोतल स्काच और लाओ। लगता है आज कुछ नम्बा हाथ मारा है । ठीक सोचा मुनील । आज बीस हजार का फायदा हुआ है मुझे। बीस हजार का मगर वो स? बताता हू पहल नई वोतल खुलन दा । यह लीजिए स्वाच की बोतल गर । लाओ (बोतल खोल कर शराय गिलासा म डालता है और सभी चीयस कहत हैं) हा तो क्या पूछ रहे थे तुम " वा बीम हज़ार हा वो। तुम तो जानते ही हो पि हमार मालिक रायबहादुर प्रताप सिंह नही प्रताप सिंह नही दानवीरमण जो हर गे| गरीवा को भोजन खिलात है और वो भी भरपट । पाच सौ स यही ज्यादा भिवारी साना साने हैं राजाना और इसपा इन्तजाम करता हू मैं। मैं दोस्तो में। हर महीने संबही वारी गैह और चावल की खरीट भी ता में ही करता हूँ और मेर मालिक को मुझ पर पूरा भरोसा है । रमेश विकास बदर विकास विकास रमेश विकास 68 सुनील और हमारा यार उस विश्वास में नामन वो तार तार कर रमेश विकास रमेश विकास अगर किसी दिन उसे पता चल गया तो। ऐसा कभी हो ही नहीं सकता क्यो कि उसके पास फुसन हो नही है और दूसरे जिस दिन उसे पता चलेगा उस दिन दवा जाएगा । क्ल के लिए हम अपना आज क्यो कुरबान कर दें। तुम ठीक कहते हो दोस्त । जाम खाली हो गए। इहे निर भरो। अपनी आण की सुहानी शाम के नाम । (जाम भरते है और चीयस कहते है) विकास एव वाम र यार। मुनील विकास सुनील बोलो। विनाम रमेश अब की बार यह सारा राशन हमारे अकल की दुकान से सरीदो कुछ हम भी बहती गगा म हाथ धो लें। ठीक है अब की बार ऐसा ही होगा। दोस्त दोस्त के काम नहीं आएगा तो और कौन आएगा। यह ठीक कहा तुमने विकास । अब की बार अगर तुम्हारा मालिक कोई और फैक्ट्री बनाए तो सिमेट और सरिया हमारे से खरीदना । बहुत दर म पुराना स्टाक पडा है। आधी कीमत पर द दूगा तुझे। दास्त दोस्त के काम नही आएगा तो और कौन आएगा। विकास सुभद्रा মাধ सुभद्रा प्रताप तुम भी ठीक बहते हो यार । एक एक जाम और भरो। (जाम भरे जाते हैं) हम सब की खुशिया में नाम । चीयस । सगीत अतराल (सुबह का उजाला । पक्षी चहचहा रह हैं) यह लीजिए चाय और मह अखबार। लाओ । (चाय 4 एप दा घूट भरता है और अखबार के पने पलटता है। ओ माई गाड । क्या हुआ ? आज इसी शहर म सर्दी से 45 सान मर गए क्यादि जाप पास रहने या बाई ठिकाना ही नहीं था। क्या वार ही इतनी सदी है। सर्दी का एहमास ताम हाता जिना पारा तन ढापने लिए पहा तव नही है। आग की लपटा स शरीर को गर्मी दते हैं बचारे और आखिर आग की ही आगोग में तो सो जाते हैं सदा सदा के लिए। स य पर जम लत हैं और महर पर ही दम मुभद्रा तोडत है।
69 प्रताप सुभद्रा प्रताप सुभद्रा प्रताप सुभद्रा सुभद्रा तुम्हारा कहना सही है। आज इस देश मे क्तिने ही लोग होंगे जि हे सरकार बनान और पलटने के लिए वोट देने का तो हद है मगर जिंदा रहो का नहीं। शास्त्र कहते हैं कि मानव मर्वोत्तम है। मगर कहा है यह सब बातें ' शायर कितावो म कहानिया ही बन कर रह गई हा । हमारे इन बडे बडे लोगा ये धरा में रखे हुए कुत्ते बिल्ले भी सानो से ज्यादा वहतरीन जिदगी जीत हैं। मेरी एक धात मानेंगे आप? क्या मैंने कभी तुम्हारी किसी भी बात से इकार किया है। कहो क्या कहना चाहती हो तुम ' आपन अपनी जिन्दगी में कितनी ही सस्थाओ को चदा दिया है । अगर उनका हिमाव लगाया जाए तो लाखा मे ही होगे। मगर क्या पता आप द्वारा दिया गया पैसा जरूरतमद लोगो तक पहुचता भी है कि नहीं । मैं चाहती है कि आप इन गरीब और बेबम लोगो के रहने के लिए कुछ करें। मैं भी यही साच रहा था सुभद्रा। मगर क्या हम अवेले इतना बड़ा काम कर सकते हैं । मैं मानती है कि यह समस्या पल भर में ही खत्म नहीं हो जाएगी। मगर जो हमसे बन पडे वो तो हमे करना ही चाहिए। परेंगे जरूर करेंगे सुभद्रा । हम एक ऐसे भवन का निर्माण करवायेंगे जिसमे वो लोग रह सके जिनके लिए घर मे रहना एक सपना सा है। शायद आपने यह भी सुना होगा वि सपने भी कभी कभी सच हा जाते है। (सगीत अतराल) (मापिस में पोन बी घण्टी बजती है) हैलो विकास दिस साइड मर आप आ गए.--अभी आया सर । (क्दमा की आवाज़) म आई कम इन । आनो विकाम बैठो। आज तुमन सुबह का अखबार तो दखा प्रताप सुभद्रा प्रताप सुभद्रा विकास प्रताप होगा। यस सर। विकाम प्रताप उसमै तुमन एक यूज यह भी पढी होगी कि सी की वजह स कुछ लोग मर गए क्यानि उनपे पास रहने को घर नहीं थे। जी मैंन पढ़ी थी। विकास 70 प्रताप विकास प्रताप विकाम प्रताप विकास प्रताप विकास प्रताप विकास मैं चाहता हरि ऐस लोगो के रहन र निए एक इमारत का निमाण किया जाए। सर एमम तो रहन सच आएगा। इसकी तुम चिंता T परो और मैं चाहता कि यह सारा काम तुम आनी दस रेप म रा। यह मुछ ब्नंग पर हैं जो तुम्हारे नाम पर। सर में पन आप यो बडा युश गोर समझता हू जो आपन मुज समाबिल समझा। यह सब मैन सुभद्रा ये रहने पर लिया है क्याकि वो तुम्हें कुछ और भी ममलती है और हा यो जो पाप साथ वाली हमारा जमा है मारत पह पर बनगी। सर वा जमीर तो हमन नई फैक्ट्री के लिए खरीदी है। फैक्ट्री प लिए कोई और जमीन खरीद लेंगे। मर शायद आपको मानम न हो म यो जमीन बहुत कीमती है। मार इ साना की जिंदगी से बम । अब यह काम जल्द से जल्द शुरु हो जाना चाहिए। एमा ही होगा सर। (सगीत अतराल) (विकास और रमेश जोर से हसते हैं) ले भई रमेश अव तोतरे दिन भी फिरने वाले हैं। तुम्हारा सारा पराना स्टार’ अब इस इमारत के निर्माण पर लगेगा। अपना वायदा तो याद है न । जाधी कीमत वाला। प वो तो यार आज सुबह हो डैडी न विसी और ठेकेदार को दे दिया पर तू चिंता मत पर हम तुझे पन्द्रह परसट डिस्काऊट देंगे और निल पूर का बनगा । यह को न दोस्तो वाली बात । कुछ अडवास भी चाहिए था। तुम्हारे पास कुछ है, यह दस ठनक धक। रायबहादुर प्रताप सिंह न मेरे नाम से काटे है। तो फिर चलो बैंक चतते । हा चला । फिर उसर राद मुनील को लेकर वहीं बैठत है। हां यह ठीक हेगा। तुम बाहर मेरी गाडी म बैठो मैं घर फान कदू की रात देर से आऊगा (रमेश टेलीफोन नम्बर मिताता है) हैलो कौन डेड एक खुशखबरा पुराना स्टाफ विक गया मेरा दोस्त विकास हा वही जो रायबहादुर विकास . रमश विकास रमेश विकास रमश विकास रमेश ।
71 नही डंड प्रताप सिंह के बहुत नजदोष है डेड वो प्रताप सिंह के लिए एक बहुत बड़ी इमारत बनवा रहा डंड अब तो आपको मानना पडेगा कि हम भी अच्छे विजनसमैन हैं आधी कीमत पर नही पूरी। सिफ पद्रह परसट डिस्काउट का तातच दिया है उसे अच्छा डंड गत को थोडा लेट आऊगा आ०० डड। (सगीत तगल) (पांच महीन बाद) सर आपका महान कार्य सम्पूण हुआ। अब तो लोग आप द्वारा निर्मित उम इमारत म बने घरो म रहबर आपका दुआए दे विकास प्रताप तुमने भी तो बहुत मेहनत की है विकास इसका तुम्ह भी तो इनाम मिलना चाहिए। विकास आपका इतना कह देना ही मरे लिए बहुत बडा इनाम है सर । সাণ आई एम पराउड ऑफ यू माई सन । विकास थैक्यू सर । सर मैं एक महीन की छुट्टी चाहता है। प्रताप क्या कही जा रहे हो? विकास जी दास्तो के साथ पिसी हिल स्टेशन पर प्रताप हां हो जरूर । अब वैसे भी तुम्ह आराम की जरूरत है। तुम्हारी हिल स्टेशन की यात्रा का सारा खच हम देंगे। विकास थैक्यू सर । (सगीत अतराल) (रायबहादुर प्रताप सिंह द्वारा निर्मित भवन के गिरने का शोर और लोगो की चीस पुकार करने की आवाजें । उही आवाजो म स उभरती है अखबार बेचन वाले की आवाज) अखबार बेचन वाला आज की ताजा खबर माज की ताजा खबर रायबहादुर द्वारा निर्मित इमारत ध्वस्त । पचास मारे गए। 125 जख्मी। आज की ताजा खबर। आज की ताजा खबर। रायबहादुर प्रताप सिंह ने गरीबो के लिए घर नहीं कब्रिस्तान बनाए । आज की ताजा खबर आज की ताजा खबर। पल श बैंक समान प्रताप मैंने ही उन लोगो लिए मरघट का निर्माण किया। विकास पर विश्वास करक मन बहुत बडो गलती की। विवास 4 बार मे मुये उसके दोस्तो द्वारा ही पता चला। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तो क्या इसीलिए तुम ससार को त्याग कर यहा आए हो? कृष्ण देव 12 प्रताप हा गुरदेव । इस दुघटना स मर दामन पर एक ऐसा धब्बा लगा जिसे अगर मैं चाहू भी तो माफ नही कर सकता। ता तुम इस संसार मे दूर इस स्थान पर प्रायश्चित करने आए हो। कृष्ण देव प्रताप जी गुरुदेव । कृष्ण देव प्रताप कृष्ण देव प्रताप तुम उस पाप का प्रायश्चित कर रहे हो जो पाप तुमने किया ही नहीं है। यह कैसे हो सकता है ? पापी तुम नहीं वो है जिसने तुम्हार विश्वास से अपने स्वाय की पूर्ती की। दूसरी उद्धार के लिए एकत्रित किए धन का उपयोग अगर मनुष्य अपने स्वार्थों की पूर्ती के लिए करना है तो वह इस समाज मे पापी कलाने का हकदार है। पाप विकास ने किया और प्रायश्चित तुम कर रहे हो। जीवन मरण तो मनुष्य के हाथ नहीं है । तुम बिना किसी स्वाथ के लागा के लिए इमारत बना सकते हो मगर उनका भाग्य तो तुम्हार हाथ म नही। मनुष्य के भाग्य के लिए मनुष्य ही उत्तरदायी है और कोई नहीं । इसी लिए इस दुघटना की जिम्मदारी से मैं अपने आप को अलग नहीं कर सकता। एक प्रश्न पूछना चाहता हू । क्या इस इमारत म आधित मभी लोग मत्यु को प्राप्त हुए ? नही गुरुदेव । उसमे मे कुछ बच भी गए होगे बहुत से उनमे से कुछ ऐस लोग भी हैं जिहे खरोच तक नही आई। तो फिर इन बचने वाले मनुष्या के बारे म तुम क्या पहागे । यह उनका भाग्य था। और जो मत्यु का प्राप्त हुए वो भी तो उनका अपना भाग्य था। तुमने तो अपना कम किया है और प्रत्येक यम अनिवाम रूप से गुण दोष स मिश्रित है मानव का जन्म हुआ है इसीलिए मरण भी होगा। इस जीवन मरण के चक्रव्यूह म अपन भाष को मत उलझाओ मानव । शैट जाआ उस समाज में जिसे त्याग कर तुम यहा आए हा । यौन सा मुह लवर जाऊ गुरुदर । कृष्ण देव प्रताप कृष्ण देव प्रताप कृष्ण देव प्रताप कृष्ण दव कृष्ण देव प्रताप कृष्ण देव 13 संसार को त्याग कर सल्यास ग्रहण करने वाले से ससार में रहबर अपन समस्त यतव्यो को पूरा करने वाला ही श्रेष्ठ है। मेर द्वारा दिया गया वाय लोगो यो सिफ दुस ही तो देता है गुरदेव । क्या करू गा वहा जा कर' ससार के प्रति ऐसा कोई उपकार नहीं दिया जा सकता जो चिरस्थायी हो। विसी व्यक्ति का हम जो भी बुछ सुख दे सकत है वह क्षणिय ही होता है। सुख और दुख पेइरा सतत ज्वर का कोई भी सदा के लिए उपचार नहीं कर सकता । हम इस ससार म सुग को नहीं बढ़ा समते और न ही दुख को। ज्वारभाटा यह उतार चढाव तो ससार की प्रकृति है। इसक विपरीत सोचना तो वैसा ही है जसे यह कहना कि मृत्यु बिना जीवन ये मम्भव है। आप ठीक कहते है गुम्दव । मैं वापई भटक गया था। मैंन तो कोई पाप ही नही दिया। दिया है मानव तुमने एक पाप अवश्य किया है । मैं कौन सा पाप क्यिा है गुत्त्देव । अपनी पत्नी को समाज में अक्ला छोड कर तुमन पाप प्रताप कृष्णदेव प्रताप वृष्ण देव किया है। प्रताप सुभद्रा। कृष्ण देव प्रताप वृष्ण देव हो सुभद्रा जो तुम्हारी अर्धागिनी है तुम्हारे सुख दुख की भागी- दार। उसे अकेला छोड आए मानव । मुझे क्षमा कीजिए गुरुदेव । क्षमा मुझ ने नहीं उससे मागा। इस पाप का प्रायश्चित तो तुम्हें वही करना है। जाओ. मानव उस समाज में वापिस जाओ। आज इस देश को इस समाज को तुम्हारी ज़रूरत है सिफ तुम्हारी । जाओ मौत के मुह म भी जा र बिना तर वितक किए सत्र को सहायता करो। भले ही तुम लाखा बार ठगे जाओ पर मुह से एक बात तब न निकाली। निधन के प्रति दिए गए उपकार पर गव न करना और न ही उससे कृतनता को ही आशा रखना। एक आदश सयासी होन की अपक्षा एक आदश गृहस्थी होना अधिन बठिन है। जाओ मानव उसी मसार म वापिस जाओ। तो देखो नई सुबह का उजाला जो तुम्ह समाज में फैले अधेरो मे भी रास्ता दिखाएगा। ।
पतझड के फूल पात्र परिचय वीना अशोक विमला रामदयाल सावित्री मुकेश अमर शाति सतोष इस्पैक्टर रामदीन लडके कीम रामू अशोक अशोक (रात के 12 बजे का समय आसमान पर बादल गज रहे थे । दूर कहीं कुत्ता के रोने की आवाज़ ! एक शराबी फिल्मी गाना गुनगुनाता हुआ आ रहा है। मुझे दुनिया वालो शराबी न समझो मैं पीता नही हू पिलाई गई है । (इतने मे एक कुत्ता भौंकता हुआ शराबी के नज़दीक आता है ।) साले डराता है मुझे ? चल भाग यहा से कुत्ता कही का (लात मारता है और कुत्ता चू चू करता दूर भागता है) हमे भौंक कर डराता था। हम भी अपनी बीबी से नहीं डरे। साली जब भी शराब पीने से रोक्ती है तो ऐसे ही पिटाई होती है उसकी । (इतने मे बादल जोर से गरजते हैं। (चिल्लाकर) खामोश । इस तरह गरज कर तुम हमे डरा नही सक्ते । हमारे साथ हमारी मयूबा है। यह शराब हा हा यह शराब । इसके अशोक 74 75 विमला बिमला अशान बिमला दम पर हम मारी दुनिया से टकरा सकते है हा हा सारी दुनिया से (जार स हसता है) (सगीत अतराल) (एक वच्ची के रान की आवाज) चुप हो जा मेरी बच्ची चुप हो जा। अगर तेरे रोते हुए तरा वाप आ गया तो फिर हम दोनो को खैर नहीं। (बच्ची और ज्यादा राती है और साथ माथ माँ भी 1) तुझे पता ह जब तरा बाप नश म लडखडाता हुआ आएगा। (इसके साथ दरवाजा जोर स खटखट ता है) लो आ गया अब चुप हो जा नही तो वो तुझे रोता हुआ देख रोज की तरह आज मुझे फिर मारेगा । चुप हो जा (दरवाजा फिर जोर स खटखटाया जाता है। (विमला जाकर दरवाजा खोलती है। (पराब के नशे मे) मैं क्व स दरवाजा खटखटा रहा था । तुझे सुनाई नहीं दिया ? कहा गई थी तू' मैंने कहा जाना था। यही बैठी दूसरे कमरे म बच्ची को चुप करा रही थी । देखो कैसे रो रही है । इस रोने के सिवा और कुछ आता ही नहीं है। मगर तू बता कितू कहा गई थी? यही ता थी बच्ची के पास । दखा। मुझे वेवकूफ बनान की काशिश मत करो। असल बात तो यह है कि तू बच्ची के पास नहीं थी। अगर तुम उस पास होती तो वो रोती ही क्यो" मेरी ता समझ म कुछ नही जाता 4 क्या कहना चाहते हो तुम ? मैं क्या कहना चाहता हू ' व्हरो बताता हूँ। मैं रात को रोज़ लेट आता हू ।। 12 बजे तक इंग दौरान तुम कहा जाती हो ? शराब न तो तुम्हारा दिमाग सराव कर दिया है। मैं बहा जाऊगी" कहीं भी मैं कौन सा पैहरा विठा रखा है। तुम रही भी जानी होगी पिछले दरवाजे से। हे भगवान। हा हाँ वहो ? क्या कहना चाहती हो एव क्या गई ? मेरे में इतनी ताकत रहा जो में किसी को कुछ कह सकू । अगर मैं ऐसा वर सक्ती तो शायद तुम मराव कभी न पीत । यह तो मरी अपनी ही कमजोरी थी। । अशाक बिमला अशोक विमला अशोक बिमला अशोक बिमला अशोक विमला 76 अशोक । विमला अशोक विमला अशोक हूँ। मेरी अपनी ही कमजोरी थी। अव एसा कर अपनी कमजोरा छोड और वहादुरा की तरह सच सच बता कि पिछले दरवाजे स रिम मिलने गई थी। (गुस्स स) वम परो में अब और नही सुन सकती । मैं सब कुछ सन सक्ती हू मह मरती हूँ मगर यह नहीं बर्दाशत कर सकती कि कोई मुझे चरित्रहीन कहे और वो भी मेरा अपना ही पति । जा शराव व ना में मारी सीमाए लाप कर पता नहीं क्या उल्टा सीधा वक्ता रहता है। हरामजादी 'तमाचा मारता है) जुवान चलाती है और वा भी अपने पति परमेश्वर पर। (व्यग्य से) है पति परमश्वर बनन की काबलियत है तुममे । वा भा भी शराब के नशे म अधे होकर अपनी औलाद अपनी बीवी अपन सुनहरे ससार को भूल नहीं जाते। वो तुम्हारी तरह जानवर बनकर अपनी वावी से एसा मनूक नही करत जैसा मैं न जान क्तिन हा सालो से सहन करती आ रही है। (हसकर) हा हा हा हा वा क्या पीटंगे अपनी बीवी को ? वो तो उस चरण दवाएगे। ला मैं तुम्हारे चरण दबा देता हूँ । भागो मत मैं तुम्हारे चरण दवाउगा। (और विनोद उमे पकडकर मारना शुरू घर देता है और वो चीवती चिल्लाती है) देखो मेरी तरफ जव क्दम बढाने की कोशिश मत करना नहीं तो जुबान चलाती है (मारता है और वो चीखती है) तूने मेरे मुह तमाचा माग मैं तुम्ह नही छोडू गा । अब नहीं छोडू गा तुये। रक जाओ वहा । तुम्हारे रहते मेगे वच्ची का भविष्य सुरक्षित नहीं है । जगर उसके लिए मुझे विधवा भी बनना पडे ता बनू गी। कहती ह स्व जाआ। यह सब्जी काटने वाला चाकू लेवर डरा रही हा । तू क्या मैं तुम्हे नही छोड़ गा । (और इस तरह दाना गुत्थम गुत्या हो जाते है आर फिर एक्दम विमला की चीख गूजती है और एक आवाज़ जो अशोष की अतरात्मा की है जोर से हँसती है) हा हा हा हा (शराब या नशा उतर जाता है) कौन हो तुम यह सवान तुम मुझ- स पूछ रह ह या 'पन आप म । तुग वापर बहुत वहादुर हा इतन बहादर पि अपनी बीवी का कत्ल करन स भी नही चूचे। बिमला अशोक विमला में अशाव आवाज १ अशाव आवाज 77 अशाक आवाज अशोक आवाज मैंने इसका कत्ल नहीं क्यिा ? मैं ता इसे डरा रहा था। चाकू मेर हाय मे नहीं इसके हाथ में था। मगर फिर भी बेचारी तुम्हार जुल्म की चच्ची म पिसते हुए इस दुनिया से नाता तोडकर सदा के लिए चली गई। इसके जिम्मेदार सिफ तुम हो तुम। नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता यह तो महज एक ऐक्सीडट था। लेकिन फिर भी कत्ल फ्रल ही है और तुम इससे अपने आपको अलग नहा कर सकते । तुम अपनी जिस महबूबा क बलबूते पथरीली चट्टानो से टकरा जाने को क्षमता रखत थे वा तुम्हारी महबूबा कहा है । शराब महबूबा नहीं हो सकती, वो तो कलक है इस समाज पर और साथ म तुम जैस लोग जो पति पत्नी के बीच यह ब्लक्ति महबूबा लाकर खटी कर दते हो। इस शराब के नशे मे अधे होकर उस वफादार पत्नी का खून कर दिया जो आधी जाधी रात तक तुम्हारा इतजार करती थी। क्या काई एसा दिन भी था जिस दिन तुमन उसे न पीटा हो । तुम हमान नहीं हो अशोक तुम इसान की खाल में एक वो खतरनाक जानवर हो जिसको इस समाज म रहने का कोई हक नहीं है । तुम जैसे न जान क्तिन ही इसान इस समाज को गदला किए हुए है और तुम्ह इम समाज म रहन का कोई हक नहीं है । तुम' कातिल हा हा हां तुम कातिल हा । तुम्ह जिदा रहन का कोई हक नहीं है । हा हा तुम्ह कोई हक नही है । तुम कातिल हा कातिल हा कातिल हो । हा बिमला मैं ही तुम्हारा कातिल हू । मारी जिदगी दुख ही तो देता रहा तुझे । मैं तुम्हारा कातिल हूँ और मुगो जिदा रहन का कोई हक नहीं है। (मगीत अतराल) टेलीफोन की घण्टी बजती है) पुलिस स्टेशन क्या ' खून हो गया आप यहा स बोल रहे है ? ठी ह हम अभी पहुच रह हैं । रामदीन यस सर। रामदीन डीफ्स कालोनी म एक औरत का क्ल हा गया है। जीप वाहर निकालो। वहुन बन्छा साहब । (जीप वारदात की जगह पर पहुँचनी है। आप लागा में से पोन किस महिला न किया था। जी मैंन । अशोक इन्सपेक्टर रामदीन इसपैक्टर रामदीन इन्सपेक्टर सनोप 78 इसपैक्टर सतोप इसपैक्टर । रामदीन इसपैक्टर इन्सान वाहो सतोप आपका नाम। जी सताप वर्मा। आप मेरे साथ आइए । मौका देखना है। रामदीन तुम यहीं दरवाजे पर ठहरा । और कोई भी अदर न जाने पाए। यस सर । (दानो अदर आते है) आह माई भाड । आखिर समझ नहीं आता कि आज क्या गया है ? मिसेज वमा आपको इन दोनो लाशा के बारे में कम पता चला। इसपैक्टर साहब ! मेरे पति किमी दसरे शहर टूर पर गये हुए हैं । मैं अपन पिसी रिश्तेदार का मिलने जा रही थी। सोचा कही वो पार से ना ही न जाये तो मैं घर की चाबी इनको दन आई थी। दरवाजा आधा मुला हुआ था। सबसे पहले मैंने बिमला की लाश देखी तो आपना पान कर दिया। ओह आई सी (इतन म वच्ची के रोने की आवाज आती है) यह गेन की आवाज? इनकी एक छ मास की बेटी है शायद वो रो रही होगी। मैं दखता इसपैक्टर इन्सपेक्टर सोर सपैक्टर सतोष हासकार सतीप মধ্য रामतीन ओह तो यह पोछे छोड गए इस नही सी जान पाममाज , भयानप थपेडे सान के लिए । अब इस वेचारी मा क्या होगा? इसपंन्टर साहब ' सुना ह इस लड़की को युआ इसी शहर म वहीं रहती है किसी तरह पता लगाकर यह बच्ची उसको सौंप सकते हैं। हा वह ठीक रहेगा । आप उनका एडम नाट परवा दीजिए। एटग्म तो मुझे भी नहीं पता । हा मच गाद आया शायद हमारी पड़ोमन कमला या मालूम हा में उम भेज देती हूँ। हो प्लीज जरा जल्ली भिजवा नीनि।। (सतोष वहा स पल देती है। गाहब यह बनी मुझे द दीजिए आभागी । सय नसीम म भी को याप पा प्यार नहीं लिया होगा । तुम ठीक रहते हैं। रामलीन यह मय शुध यही म म नही हो जाएगा। दोनों मी गाती रामपानल माया जगी भर सबली ॥ आरन गुपार प ग जयनगी मोशिश परगा। मगर गावामम भाग यमनीमायादाप? गान ! पाप तुम ममान यो हो ना ने यह ममात्र पारा या मोगमा पनि दोभी मी तिमा CI HIT 7 मि पर पून मन भी गर्दा उपमा 79 सतोष पखु डिया कोमल नही पथरीली होगी। हा रामदीन पथरीली। (सतोष का कमरे में प्रवेश) इसपेक्टर साहब मैंने कमला को भेज दिया है। वो कह रही थी कि इसको बुआ को लेकर आ जाऊगी। वो नजदीक हो वही रहती है क्या आप बता सक्ती हैं कि इसने अपनी बीवी का खून क्यो किया इसपैक्टर होगा। सतोप इसपैक्टर जी मैं ठीक तरह से तो नहीं जानती मगर अक्सर इनकी लडाई होती रहती पी। अशोक को विमला के चालचलन पर शक था । मेरा ख्याल है इसी वजह से उसने इसका खून किया होगा और बेचारा खुद भी शम के मारे आत्महत्या कर बैठा। हूँ। तो यह बात है । अक्सर ऐसे केसो मे ऐसा ही होता है । रामदीन इन दोना लाशो को पोस्टमाटम के लिए भिजवा दो। बहुत अच्छा माहब । (रामदीन लाशो को उठवाने में लग जाता है थोडी देर मे लडकी की बुर और उसरा पति कमरे में प्रवेश भरते हैं ।) इसपैक्टर साहब यह सब कैसे हुना? इसके बारे मे ठीक तरह से तो मैं कुछ नहीं कह सक्ता मगर मिसिज सतोप वर्मा का कहना है कि अशोक को अपनी बीवी पर शक था रामदीन अमर इसपैक्टर किवा शाति सतोष शाति बस कीजिए इमर्पक्टर साहब यह सच नहीं है । सतोप किसी पर तोहमत लगाने से पहले सच की गहराई तक पहुंचना चाहिए । मैं क्या साग मुहल्ला यही कहता है कि हर रोज रात को अशोक अपनी बीवी को पीटता और उसे होन तक कहता था। (बच्ची गेती है) मत रो मेरी बच्ची । तुम मां के प्यार से वचित नहीं रहोगी। मैं तुझे मौ वा प्यार दूगी। (सगीत अतराल) (बोस साल बाद जब वह लहकी बडी हो जाती है) वीना बेटे। आई मम्मी । कहिए? बेटे कॉलेज का टाइम हो गया और तुम अभी तक कहा मम्मी अभी तो पूरे पचास मिनट पडे हैं वस पापा का नाश्ता तैयार कर लू। तुम रहन दो मैं सद पर न गी । शाति वीना शान्ति दीना शाति 80 वीना अमर बीना शाति अमर मुकेश वीना मुकेश वीना मुकेश मम्मी । यह केस हा सरता है ? मैं चरती ह रसाई म वही सब कुछ जल ही न जाये । (अमर या प्रवेश नाश्ता तैयार हुआ कि नहीं। (दूसर कमर से) अभी लाई पापा । यह लडको तो मुझे बस पाम करने हो नहीं देती। कालेज की पढ़ाई और उमर वाद घर का मारा काम । विचुल मो घी तरह लगती है। वहीं शपत वही आवाज । शाति मैं अपन आप या पिनना सुशनसीब समयता हू जव वीना की नरफ देखता हू । ऐसी वेटी भगवान हर किसी को द । (मगीत अतरार) (कालेज म विद्यार्थिया का शार) हैला वीना। हैलो मुक्श । क्स हो। बस ठीक हू । आजक्ल पढाई क्सी चल रही है। कुछ खास नहीं बस थोडा बहुत ही पढ़ा जाता है। मैं सब जानता ह वीना तुम मुझे एस ही बना रही हो । इतना ज्यादा न पढ़ा करो आँखें खराव हो जायेगी विसी दिर। कभी फुसत निकाल कर धर उधर भी दव लिया बगे। मेरा मतलब है हमारी तरफ । (सिफ हस दती है) वीना आज एसा करत ह कि दो पीरियड खाली है वही घूमत हैं ? न वाया न यह काम मुथसे नहीं होगा मैं तो खाली टाईम म घूमन बजाए लाईब्रेरीम वैठना ज्यादा पसाद क्रूगी। मुझे पहले ही मालूम था कि तुम यही कहोगी। तो फिर तुम भी क्या नही चाते मरे साथ । इम लाईब्रेरी में तो क्या Trया की किसी भी जगह तुम्हारे साथ आखें वट किए जा सयंता हूँ। मगर मैं ता तुम्हार साथ तभी चल गी जय तुम मासे खाल के चलोगे । ठोकर खा गये तो तो तम सम्भाल लेना। । चीना मुकेश वीना की मुकेश वीना मुकेश वीना मुकेश वीना मुकेश चीना हा वीना। मुझे वा बात करने लिए कह रहे हो जो तुम्ह करनी चाहिए । पर होडो माओ मदर चलें। सिगीत अतराल) (दरवाजा खटपटान की आवाज) 81 अमर शाति वीना शाति वीना शाति अमर शाति अमर - शान्ति शाति देखना जरा शायद वीना कॉलेज मे आई होगी। (दरराजा खुलता है) शान्ति अब तो चाय का एक प्याला पिला दो अब तो वीना भी आ गई है। अभी लाई। मम्मी । आप वैठिए चाय में बना कर लाती हू । नही वीता तुम कॉलेज से आ रही हो और कुछ थकी हुई भी हो। तुम आराम करो, चाय में बना लाती हूँ। ऐसा तो मम्मी हो ही नहीं मरता । (रसोई घर की तरफ जाती ) यह लडकी में पता नहीं किस मिटटी की बनी हुई है। जिस भी घर में जायेगी सभी को खुश रखेगी । मैं तो सिफ इतना ही यहूगा शान्ति विजाज कल ऐसी लडकिया तो यस कहानियो मे मिलती है। (भावुक) अगर आज इस मा बाप जिदा होत तो क्तिन म्खुश होते। अब बीती बातें दोहराने से क्या फायदा ? जाने वाले तो चले गए वैविन दे गए कुछ यादें क्डवी मी। अशोक ता ऐसा न था। फिर श्यो उसने बिमला वो मार डाला। यह ता भगवान ही जानता होगा कि उसने ऐसा क्यो क्यिा ? मगर जहाँ न मैं समझती है कि इसम दोप अशोक का ही होगा। जब में उसन शराब पीनी शुरू की इस उमी दिन स बिमला को मुसीबता क काले साये ने अपने मनहूस पजो म जबड लिया। यह तो अशोक खुशकिस्मत था कि उसको विमता जैसी पत्नी मिली थी। विस्मत के लिखे को कौन टाल सकता है । अब क्या पता हमारी वी की किस्मत म क्या लिखा होगा? अच्छा ही होगा शाति। वीना जसी: टेलीजेट लडकी के लिए हम कोई रिश्ता तालाश कग्न की जरूरत नहीं पड़ेगी। वो तो खुद चल कर आएगा हमारे घर ता (वीना का प्रवेश) कोन सुद चलकर आग्गा हमारे घर पापा ? तेरा रिश्ता। ओह नो पापा । मैं अपन मम्मी पापा को छोड़कर कही नही जाऊगी । बेटी । एक न एक दिन तो हर लड़की को जाना है अपने नए घर म अपने मा बाप को छोडकर । मम्मी। (सगीत अतराल) (कॉलेज के विद्यार्थियों का शोर) अमर शाति अमर वीना अमर वीना शाति वीना 82 मुकेश वीना मुकेश हैलो वीना बंगी हो। बहुत अच्छी तुम सुनाओ? आई एम पाईन । वीना आज जेम्स बांड की नई फिल्म लगी है चलोगी। नहीं मुक्श । सारी आई काट गा। मगर क्या। वीना मुकेश वीना मुश वीना मुशि वीगा रामदयाल सावित्री रामदयाल रामू रामदयाल इसका तो मुये भी पता नही । मुक्श एर यात पूछु । हा हा मुकेश । न जान कितनी बार तुम मुझे पिक्चर और वही घूमन के लिए कह चुनै हो मगर मेर हर बार दवार वरन पर भी तुम वीना । मुझे मालूम है कि तुम हर वार मुझे चार करती आई हो और करती रहोगी मगर फिर भी न जान क्यो मुझे ऐमा लगता है कि कभी न कभी यह पत्थर दिल तो जर पिघलेगा। मुकेश यह दिल पत्थर का नही है। यह घडवता भी है और कभी कभी तो यह बहुत तेज धडकता है। (पीरियड शुरू होने की घण्टी बजती है) पीरियड शुरू हो गया। बची हुई बातें फिर कभी सही । आओ कलास मे चलें। (सगीत अतराल) (बाहर में आते हुए) सावित्री । मुकेश पा गया कालेज से ? जी अभी नही। नौकर से कहो कि चाय लाए। ठहरो मै ही कह देता ह । रामू जी मालिक। चाय लाओ। साथ मे कुछ खाने को भी नाऊ मालिक' नना। (रामू जाता है सावित्री आज फैक्ट्री म किशन च द लाया था वो मुकेश को माग रहा था अपनी लडकी मज के लिए। तो आपन हा कर दी क्या हाँ ? मुकेश से पूछे बिना हो । इसकी मैं जमरत नहीं समझता। क्या वो आपकी बात मान जाएगा" रामू रामदयाल रामदयाल सावित्री रासदयान सावित्री गमदयाल 83 रामू रामदयाल उसे माननी ही होगी। इस घर के जितने भी फैसले है वो घर के बडे लोग ही करते आये हैं। उसे मेग यह फैसला मानना ही पडेगा। सावित्री वो भी तो एक जिद्दी बाप का जिद्दी बेटा है। रामदयाल मैं भी सुनना नही चाहता। इस घर मे वही होगा जो मैं चाहगा। (बाहर स्कूटर आने और रकन बी आवाज) सावित्री लगता है मुवेश आ गया। मालिक चाय। रामदयाल रख दो । गमू मुकेश को मेरे पास आने को कहो। रामू बहुत अच्छा मालिक । (नोकर आता है) सावित्री चाय लीजिए। रामन्याल (प्याला लेकर चाय की चुम्विया लेता है।। सावित्री देखिए आप उसे प्यार में रामदयाल मावित्री मैं कोई उसका दुश्मन ता नही है और जो कुछ भी कगा उसकी भलाई के लिए ही मुकेश अदर आना है) मुकेश आप ने मुझे बुलाया पापा) रामदयाल हा । वेटा! मुकेश मैं चाहता हूँ कि जब तुम अपनी जिम्मेदारी को समझो । अब मैं भी ता बूढा हो गया: । अब तो किसी न ह मुने से खेलन वा दित करता है। मैं कुछ समझा ही पापा। रामदयाल बेटे मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे साथ फैक्टरी में हाथ बटाओ और घर मै मां का हाथ बटान के लिये किसी को ले आओ। मुक्श आपया मतलब है कि सावित्री हा बेटा बडी देर मे इस घर म गहनाईयो मे आवाज नहीं गजी। रामदयाल हा बेटा अब तुम शादी पर ही ला । मुकेश पापा मैं भी बहुन दिनो मे आपसे एक बात कहना चाहता था मगर हिम्मत नहीं कर पाता। वीना बहुत अच्छी लड़की है पापा । इस पर के लिए वही उपयुक्त है। "ामदयाल यह वीना कौन है? मुग मेरे साथ वॉर मे पढनी है। रामन्यात पढती है तुम जैस अमोरजादो वा उपन वशती है । मुझे। पापा आपका विना जान विमी ये गारे म ऐमा नहीं रहना चाहिए । रामदयाम तुम भी मान सार वर गुन ला तुम्हारेगी वही होगी जहां में मुनेश १ चाहगा।
84 मुकर सावित्री मुकेश मुक्श रामदयाल माविनी रामदयाल मुकेश नही पापा शादी मैंने करनी है और वहीं का गा जहाँ मैं चाहू गा। बेटे जिद्द मत करो अपने पापा का हा माना। मजू बहुत अच्छी की है। मगर मम्मी मैन क्य कहा दि वो बुरी है। तो फिर उसके साथ तुम्हे शादी करनी ही पडेगी। मै अगर शादी का गा तो सिफ वीना म । मुकेश ! अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी तो मैं तुम्ह इस घर स वेदखल कर दूंगा। यह आप क्या कह रहे है। वही जो मुझे कहना चाहिए। पापा । आपको यह शानो शौक्त मह दौलत और पुरानी परम्पराओं मे जकडा यह घर आपको ही मुबारक । जिस दिन भी आप कहगे इस पर स चला जाऊगा । (चला जाता है) एक लड़की की खातिर यह हमे भी छोडन को तैयार हो गया। आखिर यह वीना है कौन ? (सगीत अ तगल) वीना वेटे । कन तुम कालेज छटन के बाद जाती मा जाना। पापा । क्या मैं घर कभी लेट भी आई हु ? नहीं नहीं बेटे तुम तो सदा टाइम पर ही आई हो । मगर क्ल चुछ म्पैशल बान है प हमीलिए रह रहा था। (खुशी से) स्पैशन । पापा मुझे भी ताओ न क्या स्पेशल बात है राम अमर वीना अमर वीना कल अमर तुम ही इसे बना दो शाति और अच्छी तरह फुसत म कभी समझा भी दना। शाति वीना अमर वीना बेटे । बल बुध लोग तुम्ह दम्बन कनिए मा रह हैं। लडका बहुत अच्छा है। वैप मनोरी कता है। लवे की मा और कुछ जान पहचान थी औरतें आयेंगी। (युझे मन से जो। क्या बात है वीना ? बुछ नही पापा। बेटी अगर तुझे यह शादी पस द नहीं तो मुझे बता ६ । हम ता तरी सुशी म ही सुशी है। मेटो मा याप कभी भी विगी या बुरा नहीं सोचते । अगर नहीं मम्मी ऐमी कोई बात नहीं है। वाना अमर मात्रि 85 शाति मुझे तुम पर पूरा भरोसा है वीना मरी बेटी। (सगीत अतराल) (कालेज के विद्यार्थिया शार) हैलो मुकेश । वीना मुकेश वीना हैलो। मुकेश वीना मुकेश धीना मुकश वीना मुकश क्या बात है मुकेश ' आज रोज की तरह तुम मुझे गेट पर नही मिले और तुम्हारे चेहरे से परशानी भी साफ पलक्ती हुई नजर आ रही है । क्या बात है? कोई खास बात नहीं वस एसे ही। क्या ऐसे ही? वीना । मेरे मा बाप मेरी शादी करना चाहते हैं। (खुशी सा सच । काग्रेचुलेशन मुकेश । तुम्ह ता खुश हाना चाहिए। नही बीना यह शादी मेरी मर्जी के खिलाफ है । तो इसका मतलब है तुम किसी और को चाहत हो। हा वीना मै वाकई किसी और को चाहता हूँ और वो हो तुम । मै न जाने कब से कुछ कहना चाहते हुए भी कुछ न यह मका । यहा कॉलज म मुझे अगर किमी का सदा इतज़ार रहा है तो केवल तुम्हारा । हाँ वीना सिफ तुम्हाग और आज न जान स कुछ हिम्मत करके मैन अपनी दिल की किताब तुम्हार सामन खाल दी है जिसके हर पने पर सिफ तुम्हारा ही नाम है। मैं यह भी जानता हूँ कि तुम मुये चाहती हो । वीना तुम एक बार हा कह दा अगर मरे मा वाप हमारी शादी से सहमत न भी हुए तब भी हम किसी दूसरी जगह जाकर रह लेंगे। मुकेश तुम यह कह क्या रह हो' तुम अपने मा बाप को छोड़ने के लिए तैयार हो और वह भी मेरी खातिर एक लडकी की सातिर । तुम उस मां को छाढने के लिए तैयार हा जिसन तुम्ह जम दते समय न जाने कैसी वैसी त लीफें सही हागी । उस मां को जो सागे सारी रात जागकर भी अपन बच्चे को सुलान की काशिश करती है । मुकेश क्या तुम जानते हो कि भगवान ने मां क्यों बनाई , नहीं ? सिप इसलिए क्योकि भगवान खुद हर ममय, हर घर म मौजूद नहीं रह सक्ता इसलिए उसन औरत को मा का रूप दिया । मा के साथ साथ बाप का स्तबा भी कम नही है । उहाने जी ताड महनत करके तुम्हारी जिनगी की हर जरूरत को पूरा करन वी कोशिश की होगी। वीना मुकेश वीना 86 1 वाता अपन वटे से यही उम्मीद लगाए बैठे होंगे कि अब उनका बटा जवान हो गया है और वा कुछ पल चन का सास लेंगे व्यग स) मगर यहा तो उनका बेटा अपने छोटे से स्वाथ की खातिर अपने उस फ्ज स मुह माड हा है जो उसका उसके मा वाप प्रति है। वीना। मुकेश वीना नही मुवंश न्ही । मुये रावा मत माज मुझे भी बुध बह लैन दो। णायद तुम्ह याद होगा कि उस दिन मैंन वह था मुदेश यह दिल पत्थर का नहीं है यह भी धन्यता है और कभी कभी तो यह बहुत जोर स वक्ता है। मगर मुकेश कभी कभी यह किसी के सामने श्रद्धा स झुक भी जाता है। मुकेश हम अपने बडो को भूल नहीं जाना चाहिए। माँ बाप कभी भी अपन बच्चों का पुरा नहीं चाहते मगर बच्चे कभी कभी ऐसी बातें साचन लग जाते हैं जो उह नही साचनी चाहिए। वीना। मुकेश दोना मुकेश शायद तुम्ह मालूम नही माज मुझे भी देखन के लिए बाई आ रहा है। तुमस बिछुडने का मुझ दुख तो बहुत होगा मगर मा बाप द फैमल को मानन से मैं इकार नहीं कर सकती। अच्छा वीना चलता है। (सगीत अतराल) वाहर स्कूटर रन की आवाज । मुवंश कमर मैं आता है।) मुकेश रामू। मुकेश रामू मुक्श मुदेश रामू सावित्री मुक्श सावित्री जी छाट मालिय। मम्मी पापापही नजर नहीं आ रहे। वा बाजार कुछ खरीददारी करने गए हैं। कुछ लाऊँ छोटे मालिन । नही दिन नहीं कत (बाहर कार में वन नी आवाज) लगता है मालिश आ गए। मैं जाता हूँ कार स सामान निगलने । (अदर आती है) मा आए बटे' जी मम्मी। बेटे तुमन ल स कुछ नही माया मागिर वा तुम्हारे पिता है । क्या उह इतना भी हर नही, रहन दा सावित्री सममाना उस पाहिए जो बान को मगम मरे । उस सहरीने तो उसकी यांखों आग ना समझो वो दीवार सही बर दी 87 है। मैंने अपनी जिन्दगी मे ऐसी बहुत सी लडकियां देखी ह जो दौलत हासिल करने के लिए क्सिी हद तक भी गिर सकती हैं। मुक्श नही पापा प्लीज' धीना बारे में ऐसा मत कहिए। यह हमारे सानदान की बदनसीबी है कि आप उसे इस घर में लाना नही चाहते। हा मा मैं सच कहता हूँ । सावित्री आप मुकेश की बात मान क्यो नही लेत? मुवंश नहीं मा पापा से ऐसा कहो का कोई फायदा नहीं। यह जहा भी पहगे मैं शादी कर लू गा। सावित्री (खुशी से, सच बेटे। मुकेश हा मा। रामदयाल तो अक्ल ठिकाने आ ही गई बरखुरदार का। मुकेश यह अक्ल ठिका? शायद जिदगी भर न आती अगर वो मुझे मेरा कतव्य याद न दिलाती जो मेरा मेरे मां बाप के प्रति है। हा पापा यह सब उसी लडकी की बदौलत हुआ है जिससे कि आपने न जाने क्या कुछ कह डाला। रामदयाल तो क्या वो लडकी? मुवंश हा पापा उसने तो मुझे मजबूर कर दिया कि मैं अपने प्यार को भूल जाक अगर इसमे माँ बाप को खुशी मिलती हैं। पापा वो कहती है कि औलाद को यह नहीं भूलना चाहिए कि आज वो जिस स्थान पर पहुचा उसके पीछे उसके मा बाप की न जाने कितको हो कुर्बानियों होगी और वक्त आने पर मा बाप की खातिर औलाद को भी सब कुछ कुर्बान कर देना चाहिए। पापा में वहां शादी करूगा जहां आप पहेंगे। रामदपाल मुकेश मैं वीना से मिलना चाहता हूँ । अभी इसी वक्त । (सगीत अतराल) (काल बैल बजती है। लगता है वो लाग आ गए। दरवाजा खोलती हैं। आईए बैठिए । सतोय यहन जी ऐसा लगता है जैसे आपको पहले भी कही देखा है। मगर कुछ याद नहीं आ रहा। गाति मुझ भी एसा ही लगता है। लवे वो भी माय ले आने वो भी लडकी देख लेता। लडने की मां मेरा बना वो कभी नहीं टाल सक्ता आखिर मा हू न बस मापदी लहवी की तारीफ बहुत सुनी है। शाति 88 शाति शाति में अपनी बेटी की तारीफ करती अच्छी तो नही लगती मगर इतना ही कहूगी वि कभी भी आपको शिकायत का मौका नहीं देगी। सतोप (अपन आप स) समझ नहीं आ रहा कि इस औरत को कहा देखा है ? लड़के की मा लड़की को ता बुलाई। अभी बुलाती हूँ । वीना रटे जग चाय तो लाना। सतोप (अपन आपस) कुछ समझ नही आता कहाँ दवा है। लडके को मां वाकई आपकी सड़की तो बहुत सुदर है जैसा सुना था वमा हो पाया। शाति वहन जी आप तो कुछ खा नही रह क्सिी ख्याली म खोए लगत हैं ? सतोप नही नहीं एसी कोई बात नहीं । लड की मा बहन जी आपको लहवी ता अब हमारी हुई। सतोष (अपन आप) हो अब याद जाया। आज से बीस साल पहले नहीं यह वही लडनी तो नहीं जो उस वक्त छ महीने की थी। सडचे की मां अब कोई अच्छा सा महूत निक्लवा कर हम इसे अपने साथ ले जायेंगे। सतीष लड़के की मा शाति सतोप लड़के की मां सतोप लडर को मो सतोप आप मरे साथ बाहर आईए आपसे एक बात करनी है । वहन जी मैं अभी आई। हा हाँ जार । एक साइड पर जाकर । मैं तो बहती हूँ की यह बात यही पर खत्म कर दी। मगर क्या? क्योकि यह लडको इनकी अपनी नही है । आज स वीस साल पहले इस लडकी क वाप न अपनी वीवा की हया कर दी थी क्योकि उस शक था कि वो चरित्रहीन है। अच्छा किया जो तुमन मुझे बता दिया । आओ अदर चलें । वह्न जी आप स एक सवाल पूछना चाहते ह और हम उम्मीद है कि आप भूठ नहीं बोलेंगे। क्या वीना आपकी ही अपनी तडका है ? मैं समयो नही आप कहना क्या चाह्त है ? अगर मरी नहीं भा है तो इसस क्या पर पड़ता है । लडरी नो जमी है आप मामन ही है । फर्क पड़ता है । मैं जानना चाहती हू कि हम ना चिराग लेकर जाना चाहत। वो हमारे गानलान वा रोशन वरगा या दि उस जना दगी वीना आपत्री ही लड़की है न । आप वासती क्यो नहीं ? यह कुछ नही बतायेंगी। मगर में जानती हूँ यी वीना को अपना सपी नगे याद योजिए आज स बाई वीस वग्ग पहल एर आमी एव चरित्रहीन औरत की हत्या की थी और बार मर भी मारम शाति लटर की मौ सताप ? 89 हत्या कर बैठा । वहा एक 6 महीने की बच्ची भी थी और वही बच्ची आज बडी हो गई है शादी के लायक । लडके की मां भगर वो हमारे घर की बहु नहीं बनेगी। शाति बहन जी ऐसा मत कहिए । मैं आपके पाव पडती हू इसके मा वाप की सजा इस बच्ची को मत दीजिए। इसकी मां चरित्रहीन नहीं थी। सतोप आपके इतना कह देने से यह समाज क्या मान जायेगा? इस पतझड रूपी समाज में ऐसी कलिया कभी नही सिलती अगर गलती से कभी खिल कर फूल बन भो गई तो उन फलो मे खुशबू नही होती । मैं तो बस इतना ही कहूगी की पतझड मे फूल नहीं खिलते । आईए चनें। लडब को माँ चलिए । (दोना बाहर जाती हैं) वीना भी क्या मैं आपकी बेटी मही हू ? क्या मेरी मा शाति नहीं बेटी यह सब झूठ है। वीना तो फिर यह लोग मुये इस तरह ठुकरा कर क्यो चले गए ? क्या वाकई मैं पतझड का फूल है ? क्या यह समाज इसी तरह बेकसूर लोगो को सजा देता रहेगा ? मैं पूछती हूँ इस समाज से और समाज से उन ठेकेदारा से कि मेरा कसूर क्या है ? शाति तुम्हारा कोई कसूर नहीं है। वीना मगर सजा तो मुझे मिल ही गई। ठीक ही कहती यी वो औरत । पतझड में फूल तो नहीं खिलते। रामूदयाल (घाहर से आते हुए) पतझड मे फूल खिलेंगे वेटा जरूर खिलेंगे। माति ? वीना मुकेश तुम? मुकेश हो वीना यह मेरे डैडी हैं ? मैंने बाहर स सब सुन लिया है ? पतझड समाज नही यह लोग खुद हैं और पतझर को हो तरह सूख चुका है इनका जमीर । तुम पतझड का नही अब मरी दगिया का फूल हो । रामदयाल - -- - पानीपत की चौथी लडाई पात्र परिचय मानव भगवान राधा डॉक्टर नसं सुनार इसपेक्टर एर पास्टेबल दूसरा पांस्टेबल प्रभुदयाल নার মত বাল্য एक औरत मानव पानीपत के इतिहास के पने सून की स्याही से तलवार की नाक द्वारा लिखे गए । पानीपत के इतिहास में आज तक नवल तीन लड़ाईयां लड़ी जा चुगे हैं। परत चौथी लडाई का वर्णन इतिहास के किसी भी पने पर नहीं है । यह लडाई कब शुरू हुई और वब समाप्त होगी इसके बारे में कोई नही जानता। यह लडाई उन दुश्मनो के साथ नहीं है जो भारत अर्थात् सोने की चिडिया को अपने पिंजर म बंद करना चाहते थे। यह लडाई 'रन लोगो के साथ भी नहीं है जिहोंने घर में शरण मागने में बहाने घर के मालिक को ही गुलामी की जजीरो म जकड लिया । यह लड़ाई तो उन लोगा के साथ है जो स्वतन भारत के स्वतन नागरिको के अधिकार अपने विशाल महलो की बुनियागे मे दफ्न कर लते हैं। (एक इसान को सूखार हसी और इसी हसी मे गू जती नारों की आवाज) हम क्या चाहिए -इसाफ 90 91 भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान अधिकार है। इन्साफ हमारा अधिकारो की लडाई जीत रहेगे, जीत के रहेगे। (और यह हमी और भयानक जाती है। इस वुलद नारो के बीच गोलीया चलने की आवाजें और लोगो की भगदड, घोसें। हसी और भयानकता अपने म समेट लेती है। यह लोग जैस ब धो की भीड अपन अधिकारी की प्राप्ति में लिए मौत की दीवार से अपने सिर टकरा रहे हो। (फिर हसना है और लोगो को चीसो प्रकार का शोर थम जाता है मगर भगवान दास की हमी विशाल भवन से टक्गर और भयानकता उत्पन कर रही है। आप इस तरह हस क्यो रहे हैं ? क्योकि उहें मालूम ही नही कि उनक अधिकार तो मेरे पास सुरक्षित हैं । मगर तुम कौन हो ? मैं इस पहर में नया आया हू और आपको जानता भी नहीं। कौन हैं आप? मैं भगवान हूँ। भगवान ' मगर वो तो ऊपर रहता है। मैं धरती पर रहने वाला छोटा भगवान हूँ | भगवान दाम । दास देवल इसका जो मुझसे भी बड़ा भगवान है (हसता है) क्यो आए हो यहा? अपन अधिकारा की तालाश म । लेकिन तुम्हें कैसे मालूम हुआ नि तुम्हारे अधिकार यहा है मुझे बताया गया है कि इस शहर के नागरिको के अधिकार यही है। हा इस विशाल महत की बनियादो मे दफन है और इन अधिकारी को लौटा घर में इस महल की बुनियार को खोखला नही होन दूंगा। तो फिर शायद मैं गलत जगह जा गया है। अच्छा चलता है। ठहरा जी क्या नाम है तुम्हारा? मानव क्या परते हो? मानव भगवान 7 माव ना भगवा मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान 9. मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान आज मानय पर ही यया समता है ' पुट पुट मरल मे मिया । स्तिती माग्यता है तुमम? या पायदा सी योग्यता मागे अयोग्य सोगोय पदमा समे पनी जाती हो। याग्यता इगलिए कुचली जाती है मयापि अयोग्य लागा को मिमी या सरक्षण प्राप्त होता है। तुम्हें भी सरक्षण की आवश्यकता है। मुझे सिफ भगवान का सरक्षण चाहिए। मैं ही भगवान है। मैं आपकी बात नहीं कर रहा । तो फिर विमती घर रहे हो ? जिसको जाजत पे बिना इसान साग भी नहीं ले सकता। मरी इजाजत पे बिना भी कोई सांस नहीं ले सकता। (तीन चार गोलिया चलने की आवास) इन गालियो यो आवाज सुनी तुमने ? (डरते हुए) हा इन गोलिया से कुछ इमाना वो सासें रय गई। लोग मुझे भगवान कहते हैं। उह कम वरन ५ लिए मे ही प्रेरित परता हू और उसपा फल भी मृये ही प्राप्त हाना है डरावनी हसी) मुझे आपसे डर लगता है। तुम्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं। तुम मेरी शरण में हो। तुम्हारे अधिकार मेरे पास हैं और उचित समय पर तुम्हें लौटा दूगा। वो समय व आयगा ? आयेगा भी या नहीं। अवश्य आयेगा मानव । मगर कब जब तुम्ह अधिकारो की आवश्यक्ता ही नही होगी। मैं कुछ समझा नहीं। ममझने की इच्छा छोड़ दो सब कुछ समझ जाओगे । आप ता एक पहेगी बनते जा रहे हैं। भगवान एक ऐसी पहली है जिसे काई भी हल नहीं कर सकता। मैं इसे जरूर हल करके रहूगा । ऐसी चेष्ठा भी कभी मत करना। मगर क्या? मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव 93 भगवान मानव भगवान मानन हॉक्टर जिस दिन भगवान की पहेली हल हो गई उस दिक भगवान अस्तित्वहीन हो जायेगा। मुझे अस्तित्वहीन करने की काशिश करोगे तो तुम्हारी भी सास रुक जायेगी। नही नही ऐसा मत कीजिएगा। (हसते हुए) भगवान की बात जल्दी समझ जाते हो । मेर बार म तो सब कुछ जान लिया अपन बार में कुछ नहीं बताओगे हम जानने को उत्सुक है। म उस गरीब मा का बेटा हूँ जिसन दिन रात लोगो के कपडे सिल सिल कर मुझे एम ए तक शिक्षा दिलाई। वो सारी जिदगी यही समझती रही कि पढन के बाद मेरा बेटा नौकरी करेगा और मैं सुख का साम लगी। मगर कहा। नौकरी मिलनी दूर मा ने चारपाई पकड ली। मा के इलाज के लिए कहा कहा नहीं गया। सरकारी हस्पतालो मे गरीब की कोई परवाह नहीं करता। फिर प्राईवट हस्पताल की दवाईया की लिस्ट बढती गई और घर का सामान घटता गया और एक दिन (फलश बैंक) तुम्हारी मा की हालत खराब है। इ है इलाज के लिए दिल्ली ले जाना होगा । बहुत खच आगेगा। र सकागे ? हाँ हा डाक्टर साहब मां की जि दगी व लिए अगर बिवना भी पडे तो पीछे नहीं हटू गा। मेरा एक दोस्त वहा है। मैं उसे लेटर लिख दूगा। तुम्ह दस हजार का इतजाम करना होगा। इससे ज्यादा भी खच हो सकता है। जी बहुत अच्छा। (चलते हुए) नस। यस सर यह क्ल चले जायेंगे इनका हिमाब दस लेना । ओ के सर (चलते पदमा की आवाज) मा (पाज) मा (बहुत धीमी और कमजोर आवाज) है। ठीक हो न। हू ठीर हूँ । मानव बेटा क्या बात है ' तू कुछ परेशान है। हा मा मुझे नहीं बतायेगा? मानव डॉक्टर मानव डॉक्टर नस डॉक्टर नस मानव मानव राधा मानव राधा 94 मानव राधा अब क्या बताऊ मां। तेरे इलाज के लिए दिल्ली जाना है। यहा पर भी पैसे देने है। कहा से आयेंगे इतने पैसे । तू मेरी चिता छोड बेटा, इलाज से कुछ नही होगा। जितनी लिखी हागी जी लू गी। नही मा, मैं तुम्हारा इलाज जरूर करवाऊगा। मां जो जेवर तुमने मेरी शादी के लिए रखे हैं, क्या न उहें वेच दें? ही बटा, उहें नही बेचना वो तो मरी होने वाली बहु मानव राधा के लिए है। मानव रामा नस मानव नस मानव राधा मा जेवरा का क्या है ? फिर बन सकते हैं परतु मा तो दोबारा नहीं मिल सकती। तुम्हे मेरी सौग घ मा, मुझे जेवर बैंच लेने दे। अपनी सौगध के बल पर अपनी बात मनवाने की तेरी आदत ही जायेगी। मेरी कमजोरी जानता है न । जा जैसी तेरी मर्जी वैसा कर। सारे जेवर काले सदा म हैं तथा चाबी भगवान शिव की मूर्ति के पीछे है । यह आपका 6550/ रु० का विल इसे पे कर दीजिए। (हेगनी मे) इतना ज्यादा बिल । यह हमारे कसैशनल चाजिस है । (चली जाती है) यह ता सरासर लूट है। वेटा तू यह सब छोड और जेवर-बेच आ । जा जल्दी जा और जल्दी आना। अच्छा मा (सगीत अतराल) आओ बाबू जी कौन सा जेवर दिखाऊ । (बौखलाए हुए) जी जी मैं जेवर खरोदन नहीं बेचने आया है। जेवर वचने आए हो। जी हा यह दखिए । जल्दी म हूँ इसकी कीमत लगायें मेरे पास समय नही है समय नहीं है । ठहरो धम काटे पर तोल कर लू । इन सब के लगभग चानीम हज़ार रुपये वनेंगे। जी मजूर है जल्दी दीजिए। (अपन आप मे) साठ हजार का माल चालीस म द रहा है । जल धारी वा होगा। क्या माच रहे हैं आप? मानव सुनार मानव सुनार मानव मुनार मानव सुनार मानव 95 सुनार मानव सुनार सुनार इसपैक्टर मानव इन्सपेक्टर मानव इसपेक्टर मानव इसपैक्टर कुछ नहीं कुछ नहीं। भाप दो मिनट बैठिए मैं घर से पैसे मगवाता हूँ । आजकल समय खराब है न इतना कैश दुकान पर नहीं रखता। ठीक है आप जग जल्दी कर दीजिए। अदर से फोन करता ह (पाज) फोन डायल करता है। हेलो पुलिस स्टेशन जी मैं रामदयाल ज्यूलर बोल रहा हू मेरी दुकान पर एक आदमी शायद चोरी का माल बेचने आया है जी हा ठीक है जी आप जल्दी आ जाईए । (फोन रखता है! (पाज) बस दो मिनट में पैसे पहुच रहे है। (घडी की टिक टिक) जीप आ कर रकती है) यही है साहब पक्ड ली इसे यह सब क्या है ? थाने चल कर पता चलेगा। मैं कुछ समझा नही। वो हम समझा देंगे। देखिए शायद आपको कोई गलतफहमी हुई है। मगर इस डण्डे को कभी गलतफहसी नहीं होती। इस चोर को जीप मे डालो। पल ओए। मेरी बात तो सुनिए । आराम से जीप में बैठ जा इसमे ही भलाई है चलो। आप मेरे साथ ऐसी जबरदस्ती नहीं कर मरते । ओ अन्दर जीप मे बैठ। देखिए आप जो कर रहे हैं ठीक नहीं है। क्या जुम क्यिा है मैंने। यो भी बनायेंगे चिता मत कर पहले याने चल । नही मैं यही जानना चाहता है । यह मेरा अधिकार है। उहा के जीप म हालो इसे मैं बताऊंगा वि अधिकार क्या होता है (जोर से उठाओ इमे । मेरी मा हास्पिटल में बीमार है यह जेवर उसके हैं। (जीप स्टाट होती है। ऐसी महानि हम दिन में बहुत बार सुनते हैं । पली। * एक मानव दूसरा मानव एक मानव इन्सपेक्टर इन्सपेक्टर मानव इन्सपटर 96 मानव (दूर होती मायार) मैं सच मह रहाई सपंपटर साहर भगवान प लिए एसा मत पीजिए मेरी मां मर जायेगी। {पमेश र समाप्त) और मेरी मां मर गई। मेरे अधिमार जैन यी सलामो में पीछे म तारते रहे। मां की चिता को अग्नि मी न द सका। नापारिग समा पर उस जला दिया गया। पुलिस स्टेशन म मुझमे पोरा पे गिरोह पे यार पूछा गया जिसे मैं जानता तप नही था। कोई मेरी बात पर यकीन नही परता। सारे जेवर मालूम नहीं यहां गए । समाज पी जरा में मैं घोर बन गया। मेर अधियार मुझम दिन गए और उन्ही अधिकारा यी तालाश म आप तक पहुंचा है। तुम सही जगह पर आय हो मानव । जब तर तुम मरे साप हो तुम्हे अधिकारो के पीछे भागने की कोई आवश्यकता नही वो अपने आप ही तुम तप पहुच जायेंगे। भगवान मानव भगवान मानव भगवान अपने अधिकारो की सुरक्षा के लिए दूसरो पे अधिकार छीन लो। अगर हर सान ऐसा परने लगे तो अनर्थ नहीं हो जाएगा। इसकी चिता तुम्ह नहीं करनी चाहिए। मानव । तुम्हें जीने का अधिकार मिला है और तुम्हें जीना होगा। इस रूक्षेत्र के युद्ध म कोई पिसी का अपना नहीं है। सभी स्वार्थों के तीर चलाकर एक दूसरे का गला काट रहे है। अगर तुम्हे अपना गला वचाना है तो आधुनिक युग के शोर करते बान चलाने होंगे। शायद आप ठीक कहते हैं। शायद शब्द का उपयोग मेरे सामने फिर कभी मत करना मानव । भगवान जो भी कहते हैं सत्य ही रहते हैं। जी (फोन को घण्टी बजती है। में भगवान बोल रहा हू (शेर की दहाड समाप्त और बिल्ली की तरह) में तो दास हू आपका जी मैंन ? नहीं नहीं भगवान मैं तो ऐसा स्वपन मे भी नहीं सोच सक्ता सायद प्रतिद्धदी ने गलत सूचना आप तक पहुंचाई होगी नहीं नहीं प्रभु मेरा मह मतलब नहीं था जी जी लेविन मैं अस्तित्वहीन मानव भगवान मानव भगवान 97 हो जाऊगा। भगवान मुझे आपके आर्शीवाद की जरूरत है क्या ? नहीं मिलेगा नही नहीं प्रभु मैं मर जागा (रोन लगता है) ऐसा मत करें भगवा में कही या नही रहूगा । हैलो हैलो। (फोन नीचे रखता है। मैं लुट गमा बरवाद हो गया। (मानव ज़ोर जोर से हसता ) जर भगवान रोता है और मानव हसता है तो जानते हो क्या होता है ? मानव क्या . भगवान ताडव । मानव ताडव। भगवान हा ताइव । चारो तरफ प्रलय । भाई से भाई वा क्ल । धम से धम का टकराव । भगवान से भगवान की लहाई। मासूम बच्चा के मुह मे मां के दूध की बजाए मां का खून । चारो तरफ बिखरी लावारिस सड़ी हुई लाशें । इमे कहते है ताडव । हो हा ताडव (जोर से हसता है और उसी हंसी के बीच बम के विस्फोट गोलियो की आवाज़ और लोगो की भगदड चीखो पुकार) अखबार बेचने वाला आज की ताजा खबर आज की ताजा खवर शहर में वई जगह वम विस्फोट । अज्ञात लोगो द्वारा नर सहार। 50 मारे गए, 10 जरमी आज की ताजा खबर। आज की ताजा खबर (सगीत अतराल) (भगवान दास फोन के नम्बर डायल करता है) भगवान मैं भगवान बोल रहा हूँ मरी बात ध्यान से सुनो। मल शहर मे हडताल होगी और शाम को एक बहुत बडा जलसा जिसका हम सम्बोधित करेंगे। ज्यादा से ज्यादा लोगो की भीड इक्टठी होनी चाहिए यह हमारा शक्ति परीक्षण है और उस जलसे में एक बहुत बड़ा रिस्फोट होगा जो आवाज़ ज्यादा करे नुक्सान कम । (बहुत लोगो की भीड और उस भीड को सम्बोधित कर रहे भगवान दास) भगवान आज फिर स्वतत्र भारत को गुलामी की जजीरो से जकडा की कोशिश की जा रही है। हमे सावधान रहना है उन पडयत्र कारियों से जो हंसने खेलते भारत को काल का ग्रास बना रहे हैं । हमे होशियार रहना है उन लोगो से जो धम को ढाल बना 98 मानव भगवान मानव मानव भगवान पर अपन साप की पूर्ति पर रहे हैं 1 मैं पूछता हदि यह कहा पा साफ है कि मासूम और निर्दोष सोगा के मन से इस धरती पर पलरित इतिहाम लिग जाए । (दो तीन भीषण विस्फोट और भगदही कुछ दश घेदुएमन मेरी आवाज को बद करना चाहते हैं मैं उहें बता देना चाहता हविजुल्म और अयाय के खिलाफ मगे यह जग आज से शुरू होती है इस पानीपत की ऐतिहामिय धरती से मैं पानीपत को चौथी लडाई वा माह वान करता हूँ । (यान में फुसफसाते हुए) गाडी तयार है आपको निकल चलना चाहिए। (धीमे मे) ठीक है गाडी स्टाट रमो। (ऊँची आवाज से लोगो वा शोर और विस्फोट) सब कुछ तैयार है आईए। (गाडी के पास पहुचते हैं दरवाजा बंद होने को जावाज गाडी चलती है) इम भगदड मे न जाने कितने लोग पाव तले कुचले गए घुछ बच्चा को कुचले जाते हुए तो मैंने भी देखा है। वो तो ठीक है अब मेरी बात सुनो कल सुबह के अखबारा में पहले पने पर हमारी सबर बडे बडे अक्षरो म उपनी होगी कि हम पर कातिलाना हमला हुआ। हम बाल बाल बच गए। समझ गए। जी। मुझे घर छोड देना और गाडी ले जाना। इस प्रोफस में नोटो के बडल हैं । आज से इहें तुम हमारे लिए खच करोगे । जी बहुत अच्छा। खच करने में सकोच मत करना। नहीं कर गा। (गाडी रुक्ती है) सारे इतजाम करके जल्दी लौट आना। तुम्हारा परिचय कुछ लोगो से रिवाऊगा। जल्ली आना। जली आऊगा आप चि ता न कीजिए। तो फिर जात्रो। (गाडी आगे बढ़ती है। (सगीत अतराल) मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव भावान 99 भगवास प्रमुदयाल भगवान प्रभुदयाल भगवान आओ प्रभुदयाल में तुम्हारा हो इतजार कर रहा था। क्या समाचार लाए? बड़े भगवान का सिंहासन डोलन लगा है। (हसते हुए) डोलेगा अभी और डालेगा। उस पर बैठना उसके लिए मुश्किल हो जायेगा। वो सिंहासन तो आपके योग्य है । हा और वो ही मेरी मजिल है और दो ही मेरा अधिकार है। अपने अधिकार की प्राप्ति के लिए मैं उसकी राह मे अनत काटे बिछा दूगा जो उस अपनी पलको न उठाने पड़ेंगे। और आपका छोटा सिंहासन । वो तुम्हारा होगा प्रभुदयाल । प्रभुदयाल भगवान प्रभुदयाल भगवान प्रभुदयाल भगवान प्रभुदयाल भगवान प्रभुदयाल भगवान और वा मानव । मानय तो हम जैस लोगो को सत्ता तक पहुचाने में सहायता परता है। उससे डगे की पोई आवश्यक्ता नही । मानव नो एक कठपुतली है । जैसा नचायेंग वैसा ही नावेगा। अगामी चुनावो के बारे में क्या साचा है' वो हम जोतंग । हमरर धम के लोग हम अपना उत्तराधिकारी बनायेंगे। तो फिर इसमें लिए हम आज से काय शुरू कर देना चाहिए। इपकी कोई आवश्यकता नही। यह काम चुनाव में दो दिन पहले होगा। दो दिन का समय कम नहीं क्या' दो दिन भी बहुत है क्योकि धम की गति बहुत तेज होती है। यह एक क्षण मे एक दिनारे स दूसरे किनारे पहुँच जाता है। इस राजनीति की शतग्ज मै आपको मात देना पठिन है। क्याकि मेरे मोहरे अपनी इच्छा स चत्तत हैं वो खेत के नियमो हुए नहीं है । मेरा सबसे सशक्त मोहरा तो वो मला आ रहा है मानव । मानव शक्ति । (हसता है) आओ मानव बैठो। (मानव बैठता है) इनसे शायद तुम पहली बार मिल रहे हो। बद को प्रभुदयान कहते हैं। तुममे मिन कर बहुत प्रसनना प्रभुदयाल भगवान प्रभुत्याल भगवान सबधे प्रभुदयाल मानव जी मुये भी।
1c0 भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान সকাল राधा मानव राधा मानव क्मा समाचार लाए हो ? आप द्वारा कहा गया हर काय सम्पन कर आया हू । हम तुमसे प्रसन है मानव । लो पियो । जी में शराब नहीं पीता। यह शराब नहीं सौम रस है मानव । सोमरस हा इसे देवता लोग पीते है। ता फिर मैं इसे कैसे पी सकता हूँ। मैं तो मान हूँ ! (हसता है। यह भी सत्य है। अच्छा जी थव पाना चाहता हूँ । ठीक है जाना । कल तुम्ह एक बडे काय यो सम्पन करता है। जाओ मानव जाओ । हिमता है और जाम टकराते हैं) आपके बड़े सिंहासन के नाम । (मगीत अतराल) मानव रठी वेटा। (नीद मे) कौन माँ। उठो बेटा। थोडा और सोने दोन। अगर मानव इसी तरह सोता रहा ता सुवह कभी नही आएगी। उठो मानव मर साथ आआ 1 मुझे वहा ले जा रही हो मा ? मुछ दिपाने (पाज) वा देखो। (एक औरत जोर जोर म रो रही है। (रोती है। मेरा एक ही सहारा था वो भी दन जालिमो ने छीन लिया (रोती है) मह वा मां है जिसरा इकलौता बटा मसे छीन लिया गया। उस तरफ विधवा को देखो जा चद्र पटे की सुहागिन रह सरी । आओ। नहीं मां नहीं रुक जाओ। क्यो हर गए ? मैं ता तुम्ह रमी रान्त ले जा रही है जिमया frर्माण परत मे तुमन भगवान दाग को सहयोग दिया। मेरे साप भी योन मा अन्धा मय हुआ । एर गदी मन्त्री को मारन लिए पह सारी नहीं मि मार तालाब महोपहर दो। मानव राधा मानव ओरत राधा मानव प्रा मानप गया 101 मानव राधा मानव राधा मानव मानव भगवान तुम कहा जा रही हो माँ रुको। मुझे हाथ मत लगाना। तुम्हारे हाथो से इसानी खून की बू आनी है। मा रक जाओ। दूर होती आवाज) अगर तू मुझे खुश दखना चाहता है तो तुम्ह गुमराही वी दलदल से निकलना होगा। रुक जाओ मा। (जोर स) मा। (पाज) तो क्या यह सपना था ? तो क्या मां की आत्मा को मुक्ति नहीं मिली ? क्या मेर हायो से इसानी खून को बू आती है। मां जाने से पहले इस दलदल से निकलने का रास्ता तो बता देती। मां ने ठीक पहा कि मैं एक गन्दी मछली को सजा देन के लिए तालाब म जहर डालता रहा। (निश्चय परत हुए) मगर अब एसा नहीं रूगा। मुझे रास्ता मिल गया माँ । रास्ता मिल गया। (सगीत अपराल) बाहर लोग आपकी प्रतीक्षा कर रह हैं। आआ मानव आओ-आज हम बहुत प्रसन है। हम पण सिंहासन मिलन वाला है। तब ता आज हम गोमरम जरूर पीयेंगे । हा हम बडे भगवान हा गए और तुग दयता सा बाही गए। जाआ वहा से विदेशी सामरमय जाम अपो लिए और हमार लिए भी बना कर लामा । जो नाशा भगवा (शराय गिलाग महाली की आपात्र) मानिस (जाम टपरापर) हमारी गफलता मिए (मी भायात्र) पीने के बाद यह जाम इतना पन्या पण लगा? क्यापि इसम जहर था। (डरते हुए। जहर । हो जहर। इस धरती में गागर पा पार यार मेगा. जो जहर पिता या भगवाापी गरह उगे तुम्ई दी गीगा। क्योयि तुम भगवान हो। तुम्हारी गायरा विमा गा| सास तक नहीं स समता । (घुटे गल स) मगे सांग बदहा रही। तुम मुछ क्षणा ये महमान भगवास दाग ।।। यह पानीपत को चोयी साई मारे गापही जायेगी। मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव भगवान मानव 102 भगवान मानव १ प्रभुदयाल मानव प्रभुदयाल मानव प्रभुदयाल तुमन मेरे साथ धोखा दिया है (मर जाता है) तुम्हारे मरने से इतिहास का एक कलक्ति अध्याय समाप्त हुमा ) लगता है कोई आ रहा है। इसे सोफे के पीछे छिपा दू) (छिपाता है) (आते हुए भगवान जी रहा है ? यस अभी आते हैं बैठिए (पाज) आपसे एक बात पूछू पूछो। अगर भगवान दास जी मर जायें तो जो इसान यह खबर मुझ तक पहुचायेगा मैं उसे सोन से तोल दूगा। मग यह तुम क्यो पूछ रहे हो ? क्याकि वो मृत्यु लोक को प्राप्त हो गए । असम्भप। यह देखिए। (प्रभुदयाल जोर जोर स हसता है । डरावनी हँसी) आप इस तरह हस क्यो रहे हैं ? क्योकि अब मैं प्रभु ? । (फिर हसता है) क्या ? एक और भगवान । तो क्या इस लडाई का कभी बत नहीं होगा? मानव प्रभुदयाल मानव मानव प्रभुदयाल मानव अनजान रिश्ते पात्र परिचय मदन निमला अरूण रजनी विद्या रमेश हरीश मोहन मधु লেহা मनोज मा पुरुप स्वर लड़वी स्वर हाईवर विधा अरूण रजनी अरूण रजनी विद्या अरूप विद्या (काल बल बजती है) बहू देखना तो कौन है? अच्छा माजी। (दरवाजा खोलती है) पर आप इतनी जल्दी मा गए आफिस से। हा रजनी। (अदर तिा है) क्या बात है? कुछ नहीं । एक गिलास पानी पिलाना । अभी लाई । (पानी लने नाती है) क्या बात है बेटा' कुछ परेशान दिखाई देते हो। कुछ खास नहीं भो। इसका मतलब कुछ न कुछ जरूर है । मुझे नहीं बतायोगे। लीजिए पानी । (पानी पीन की आवाज) क्या बात है? 103 104 क्या बात है? बताओ न अरुण। मां मेरी दिल्ली ट्रासफर हो गई। अरुण विद्या अरुण रजनी विद्या अरण विद्या अरूण विद्या क्या? क्या? हा मां। बेटा तू मुझे दफनर ले चल मैं मेरे साहब से मिलना चाहती हूँ। उससे क्या होगा? मैं उह बताऊँगी कि अभी एक ही माह ता हआ है तेरे बाप का साया हमारे सर से उठे हुए। तू ही तो एक सहारा है अगर तू ही चला गया ता कैसे होगा यह सब कुछ (सिसक्ती है) मैं बडे साहब से मिला था और उसे घर की हालत की जानकारी दी। तो क्या कहा उहोंने ? कहते हैं चिंता मत कर मे हैड आफिस बात करूगा और तुझे वापिस সব विद्या अरूण बुला लू गा। विद्या अहण विद्या अरूण विद्या अरूण ऐसा हो जाएगा। वहा तो ऐसा ही है। बटा तरे बिना मां जिदगी में इतने उतार चढाव तो आते ही हैं अगर इनसे ही इन्सान धवरा जाए तो मेरी जगह अगर तू होता तो पता चलता जिदगी म सिफ दुख ही उठाए है। अगर हमारी स्मित मे दुख लिखें है तो उठाने भी तो हम ही पड़ेंग। क्यों न मुस्करा कर उठाए जायें। तेरी यही हिम्मत तो सारे दुख भुला कर कुछ नया सोचन कि प्रेरणा देती है वेटे वग्ना तेरे पिता की मौत बाद यह घर बियर ना जाता। मां तुम इस घर की बुनियाद हो तुम कमज़ोर कभी मत होना यह घर कभी नहीं बिखरेगा। मा मैं दिल्ली जान को तैयारी कर लू । आओ रजनी । (दोना कमरे मे पहुंचते हैं। क्या बात है रजनी बहुत चुप विद्या अरुण चुप हो। रजनी अम्ण (हेसन वा प्रपाम करती हुई) में ' है है नहीं तो। क्या अपन मन की उदासी मुझस छिपा सक्ती हा ?
105 रजनी अरूण रजनी अरूण रजनी अरूण रजनी अहण मैं तो आपके सामने एक खुली किताब हूँ छिपाने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। अगर इसी तरह तुमने मुझे दिल्ली भेजा नो कैसे बिताऊँगा अपने दिन । प्लीज़ रजनी ऐसा मत कहिए। जब किसी की कोई प्रिय वस्तु उसकी आँखो से ओझल हो रही हो तो उदास होना तो स्वभाविक ही है ना। गरे पगली मैं कोई सदा के लिए ता नहीं जा रहा । आप दिल्ली रहेगे कहा ? मोहन के पास । कौन मोहन - मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त है जिस दिन हमारी शादी हुई इत्तफाक से उसी दिन उसकी भी शादी थी इसलिए तुम उससे नहीं मिल सकी। मगर आप गाजियाबाद में मेरी मौसी के यहा क्यो नहीं रह लेते दिल्ली के पास ही तो है। नही रजनी रिश्ते तभी बने रहते है जब तक इसान दूर दूर ही रहे । कैसी बात परते है । आप । मौसी तो आपको बहुत मानती है । वो नाराज होगी जब उसे मालूम होगा कि आप किसी दोस्त के यहा रजनी अरूण रजनी टिके हैं। अरूण रजनी अरण रजनी अरूण मोहन कोई आम दोस्त नहीं है रजनी अपना से भी बढ़कर । एक ही तो इमान है मेरे जीवन मे जिसे दोस्त कह सक' सच्चा दोस्त । अगर आपको उस पर इतना भरोसा है तो ठीक है। बच्चे अभी तक स्कूल से नही आए । टाईम तो हो गया। बस अभी आ जायेंगे। तो फिर क्सि गाडी स जा रहे है आप ' आज रात की। रेलगाडी के चलने की आवाज़ (सगीत अतराल) (काल बैल बजती है । दरवाजा खुलता है।) (हेरानी से) अरे अरूण तुम यहा। अन्दर जाने के लिए नहीं यहागे ? ओ सारी अरूण ! अदर आओ । बैठो 1 मधु इधर आना जरा। जी। नमस्त भाभी। नमस्ते । . मान अक्षण मोहन मधु अरूण मधु 106 मोहन मधु अरण मधु अरूण मोहन मधु मोहन अरूण मोहन अरूण मोहन अरूण मोहन अरूण मधु यह मेरा दोस्त अरूण है जिसका जिार में अक्सर तुमसे परता रहता है। अच्छा तो आप है, जी। अकेले ही आ गए भाभी को क्यो नही लाए ? जी वो फिर आ जाएगी। वाते ही करोगी या अरूण को कुछ खिलाओगी भी। ओह हा अभी लाई । (चली जाती है) बडी देर बाद दिल्ली आए हो तुम । हा यार घर गृहस्थि मे कहा निकला जाता है। हा यह नो ठीक । मगर दिल्ली कैसे आए ? मेरी ट्रासपर हो गई है। रहने का अभी कोई इतजाम तो नहीं क्यिा ? स्टेशन स सीधे तुम्हारे पास ही आ रहा हूँ। वस तो फिर ठीक है। तुम यही रहोग मेरे पास और भाभी को भी यही बुलवा लो। नही माहन वो यहा नही आ सकती। मां के पास भी तो किसी को रहना चाहिए। तुम्हारे पिता जी तो हैं। पिछले माह उनका देहात हो गया था। ओह नो। रात को सीने म हल्का सा दद हुआ और सुबह चारपाई पर उनकी लाश थी। वहा मैनेजर साहर से बात की थी कहते थे कि तुम वहा जाकर ज्वायन तो करो मैं तुम्हें वापिस बुला लूगा । लीजिए। ले अरूण । (चाय की चुम्क्यिा लेता है) भाभी चाय तो बहुत अच्छी बनाई है। अब तो रोज मिलेगी ऐसी चाय । मधु अरूण हमारे पास रहगा इसकी यहा ट्रासफर हो गई है। यह तो बहुत अच्छी बात है । लीजिए 7 भाई साहब आप तो कुछ सा ही नहीं रहे। इमे अपना ही घर समझो अरण। तभी तो मीधा यही पहुंचा है। पव उवायन करना है। आज ही। मोहन अरूण मान अरूण मधु मोहन मरूण मोहन मधु मोहन अरण मोहन 107 मोहन मधु मधु मोहन मधु मोहन मधु मोहन मधु मोहन मधु माहन मधु महन मधु ठीक है मैं चेंज कर लू रास्ते म तुम्हे ड्राप कर दूंगा। मधु बात सुनना वो मेरे अपडे निकाल देना । अच्छा जी। (दोनो दूसरे कमर मे पहुचते हैं। (फुसफुगाते हुए) कब तक रहेगा यह ? पह रहा था जल्ली ट्रासफर यापिस हो जायेगी। मेरा स्याल दो तीन महीन नग ही जायेंगे। तो क्या दो महीने यहा रहेगा ? आहिस्ता आहिस्ता चोलो। दा महीन यही रहेगा। मजबूरी है। काम कहा करता है ? बैंक मे। तब तो इसे मैं ज्यादा देर टिक्ने नहीं दूगी। नही मधु ऐसा मत करना। मेरा यह मतलब नहीं था। ता फिर मेरे मामा जी की पहचान बैर के एम डी से है उनसे कहकर इसकी वापिस ट्रासफर करवा दूगी। हा यह बात ठीक रहेगी। हम दोनो दफ्तर चलते है तू अपने मामा से वान कर लेना। आप वेफित्र रहना । इससी ट्रांसफर ता हुई समझा। (सगीत अतराल) (बाजार का शोर यार मुझे तो यकीन ही नही आ रहा कि सात दिन बाद मेरी वापिस ट्रासफर हो गई। हो तुम्हारे मनजर साह्व र कोशिश की होगी। जाकर उनका थक्स करूगा । अरूण यार आज चकरा दे। नही आज लच तू करवायगा । नही भई आज तो तेरे से ही खाऊँगा। सवाल ही पैदा नहीं होता। क्यो भई? पिछले दो दिन से तो मेर से ही सा रहा है । और जो तू सात दिन से मेरे घर से ही सा रहा है वो मोहन । मोहन मधु मोहन अरूण मोहन अरूण मोहन अहण मोहन अरूण मोहन अरूण 108 मोहन अरूण मोहन अरूण मोहन अरूण मोहन आई एम सारी मेरा यह मतलब नहीं था। दोस्त यह बात कह कर तुमन मेरा दिल दुखाया है। मैं तेरे इस एहसान का बोझ लेकर नहीं जाऊँगा। यह लो दो सौ रुपये मेर सात दिन तुम्हारे घर ठहरन के बदले । सी बच्चा जैसी बातें कर रह हा। इसे जेब म रखो। यह पैस वापिस जेब म नही जायेंगे किसी भी कीमत पर नहीं । और यह पैस में भी नहीं लू गा किसी भी कीमत पर नही । नहीं लेगा। नहीं। (अरूण वहा पास ही खडे एव भिखारी को देख उसे आवाज जगाता है) जी। क्या नाम है तुम्हारा। जी मदन । यह लो दो सौ रुपए। (हैरानी से) दा सौ। इधर ला चल भाग यहां स । देखो मोहन तुम्ह इससे रुपए छीनन का काई हक नही । लाओ म्पए इधर दो। यह लो जो जी म आए कगे। मदन अरूण मदन जरूण मदन मोहन अहण मोहन अरूण मदन यह लो। एम लेकिन बावू जी बाबू जी रुकिए तो सही बाबू जी आई नाट बगर (भावुक होकर) आई एम नाट बंगर (ज्यादा भावुक हाकर) आई एम नाट बंगर रोते हुए) आई एम नाट बगर । (सगीत जतराल) मा मा मदन माँ मदन । आ गया मदन। यह ले मा खा । खूब खा । मैं जानता हूँ कि तू कल से भूखी है । तू भी खा बेटे। हा मा मैं भी खाऊगा भर पेट खाऊगा । मेर पास पैसे भी हैं यह देख मा मदन 180 रुपए। मा . मदन मा क्हा स आए तेर पास यह पैमे ? काई सज्जन भिखारी समझ के दे गया। (भावुक होकर) ह भगवान क्या अब यह दिन भी दसने थे ? मैंन उस बहुत आवाजें लगाई मा कि मैं भिखारी नहीं हू मगर वा मालूम नही भीड म कहा गुम हो गया। मदन 109 मा चलो यही भगवान की मर्जी। सात-आठ दिन तो आराम से रोटी सा सकेंगे। मान मा मदन माँ मदन और उसके बाद मा। वो उसके बाद देखा जाएगा। नहीं मग अगर भगवान ने अचानक यह दो सौ रुपए मेरे हवाले किए इसका जरूर गेई मतलव है। कुछ मुझे भी तो बता। मा अब नौकरी के चक्कर में मारा मारा नहीं फिरू गा क्योकि मुझे मालूम हो गया है कि यह मेर नसीव मे नहीं है । तो फिर क्या करेगा। इन 80 रुपया से फलो की एक छाबडी लगाऊँगा । जो कुछ कमाई हुई मा बटा रोटी भी खा लेंगे। ठोर सोचा है तूने बेटा । तो फिर ठीक है कल से यह काम शुरु कर दूंगा। भगवान तुम्हे मफलता दे । (सगीत अतराल) मा मदन मा भदन मनोज मदन राजेश मनोज (बाजार का शोर घडी की टिक टिक) दो प्लेट और वनायी। अच्छा साहब। यार इसकी फूट चाट तो बहुत बढ़िया है। फ्ल अच्छे और साफ सुथरे है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि खुद साफ सुथरा है। लीलिए साहव । यह लो पैसे। मदन राजेश मदन राजेश मदन मनोज मदन जी यह लीजिए। 1 क्या बात है भई 2 स्पए वापिस कर रहे हो। साहब आज मारकीट मे फूट थोडा सस्ता मिल गया । कमाल है एसा तो कोई नहीं करता। साहब प्रापिट कम और सेल ज्यादा यही मरा इमान है। यह बात गलत है। इस दुनिया मे अगर ऊँचे उडना चाहते हो तो ऐभा कभी मत सोचना । मगर क्यो साहब? देखो यह बेईमानी नहीं बिज़नस है। विजनस म जिस काम मे ज्यादा मुनाफा होता है लोग उसे ही करते हैं न । राजेश 11 मदन राजेश 110 जी साहन। मदन राजेश सदन राजेश मदन সহ্য मदन राजेश मदन मनोज मदन राजेश मनोज राजेश मगर तुम तो अपना मुनाफा अभी स कम कर रहे हो जो बुरी बात है। लेकिन साहब ईमानदागे। यह जो तुम इतने साफ और ताजे फल बेच रहे हो यही बहुत बड़ी ईमानदारी है। यह लो 2 रुपए अपने पास रसो। थक्यू वैरी मच सर। पढे लिखे हो? जी। क्तिना। बी ए क्यिा है। (हेगनी से) क्या? हा साहव । और यह काम कही नौकरी ही कर लेते। साहब आप तो ऐसे कहत है स मैंन अपना इतजार कर रही नौकरी को ठुकरा कर शोर के लिए यह काम शुरू किया है। इसका पहना ठीक है यार । आज नीवरी कहा मिलती है। ठीक है अगर तुमने यह काम शुरू लिया है तो अच्छी बात है। मुझे विश्वास है कि तुम तरसी जसरोगे और हा मुनाफा जाडन की बनाए उमे सच करो और ज्यादा फल लाओ और ज्यादा मुनाफा कमाओ! ऐसा ही करूगा। वो मामने मेरा आफिस है। मग नाम राजेश है कभी किसी चीज़ की जरूरत हो तो बताना। जी बहुत अच्छा। मनोज चला जाए। हाँ चलो (दोनो चले जाते हैं) (मोटर साईकल रुक्ता हैं। दो प्लेट चाट लगाना यार- माफ करना चावू जी आज तो फल जल्दी खत्म हो गए। जोह ना। यार तेरी चाट की तारीफ सुनकर दो किलोमीटर का सफर परखे यहा आए हैं और कहता है कि मव खत्म । अभी तो दो ही वजे हैं । क्या बिजनेस करेगा तू ? हाँ यार । ज्यादा फूट सरीदो हम कल आयेंगे । क्या डालिंग' ओह यस । रिजव सम फूटस पार अस । मदन राजेश मदन राजेश मोज पुस्प स्वर मदन लडकी स्वर पुरुय स्वर लडकी स्वर पुष्प स्वर सहवी स्वर 111 पुरुष स्वर मदन लडकी मदन लडकी मदन पुरुष लड़की मदन मदन राजेश मदन राजेश मदन क्या बात करती हो हनी । इस वेचारे को भला अग्रेजी समझ आयेगी। आई अडरस्टेड एवरी थिंग सर । (हैरानी से) वट। आई एम ग्रेजुएट मैडम । मगर फिर भी यह काम ? पाम करने म क्या बुराई है ? गुड । (माटर साईकल स्टाट) हम कल आयेंगे। बाय। बाय मंडम । (माटर साईक्स चला जाता है) (सगीत अतराल) (घडी की टिक टिक) राजेश जो आपसे एक सलाह लेनी थी। हां हां हो। भगवान की दया से अब मेरा कामकाज भी ठीक हो गया है । मैं इसे और आगे बढ़ाना चाहता हूँ। यह तो बहुत अच्छी बात है। तो फिर क्या सोचा है तुमने मैंने ऐसी फूट चाट की छावडीया अलग अलग जगह पर लगाने के लिए दस आदमीयो से बात की है । फूट उह खरीद कर मैं दू गा और हर एक से बीस रुपए प्राफिट मे से लू गा । वाकी सब उनके । आईडिया तो तुम्हारा बुरा नहीं है। क्या वो सभी आदमी भरोसे के ह । जी हा बहुत भरोस के। तो फिर देर किस बात की । पैसो की जरुरत तो नहीं। जी नही । भगवान की दया से 2 साल मे काफी पैसा जोड लिया है। तो फिर ठीक है जल्द से जल्द यह काम शुरू कर दो। वैसे कब तक तुम्हारा इरादा है। कल से । (घडी की टिक टिक) गुड । (सगीत अतराल) (कार सडक पर भाग रही है) ड्राईवर वो जो स्कूटर अभी अभी पास से गुजरा है उमवा पीछा करो। ओ के सर । (कार रुक्ती और टन लेती है) ध्यान से ज्यादा रेश होने की जरूरत नहीं है। (कार भागती है और वे लगते हैं) राजेश मदन राजेश मदन राजेश मदन राजेश मदन . ड्राईवर मदन 112 मोहन मदन क्यो वे ध्यान से नहीं चल सकता। इसमे इसका कोई दोष रही है मैंन ही इसे आपका पीछा करने के लिए कहा था। क्यो? क्योकि मुझे आप से कुछ काम है । मोहन मदन मोहन मदन मोहन मदन पाहिए? । मोहन मदन मोहन मदन मोहन मदन मोहन मदन मोहन मदन मोहन यहा नहीं। तो फिर। यह रहा मेरा काड । अगर आप कहे तो मैं आपके पास आ सकता हू नहीं नहीं मैं ही आपके पास आ जाऊंगा। थक्यू । कब आना होगा अगर आज शाम किसी भी वक्त आ जाएँ मैं घर पर ही रहूंगा। बाई द वे आप मुझसे मिलना क्या चाहते हैं ? मैं तो आपको जानता तक नहीं। लेविन मैं जापको जानता हूँ। (हैरानी से) मुझे ? हाँ आपको। मगर क्स। मैं आपको आज शाम बताऊंगा। अजीव पहेली है। जिंदगी भी तो एक अजीब पहेली है। कभी कभी नसका सही हल भी गलत साबित होता है और कभी कभी गलत हल भी सही हो जाता है। काफी दिलचस्प हसान है आप । तो फिर आज शाम आ रहे है न आप " अब तो आना ही पडगा। मैं आपका इतजार रूंगा । तो फिर इजाजत है। ओक ड्राईवर चलो। (गाडी स्टाट होती है और चलती है। (सगीत अतराला आपसे कोई मिलने आया है । कह रहा था आपन उसे बुलाया है । ही निमला मैं उसी का ही इतजार कर रहा हूँ | उसे भेज दो और हाँ चाय पानी का भी इतजाम कर देना। यह मोहन मदन मोहन मदन मोहन मदन निमला मदन -- 113 निमला मोहन मदन मोहन मदन मोहन मदन मोहन जो अच्छा। (निमताये कदमो की आवाज) आप अन्दर जाइए वो आपका ही इतजार बर हे हैं। थक्यू । (दरवाजा खोलना है) वैलवम आईए वैठिए पाज) क्या मैं आपका नाम जान समता हू। (हैरानी से)वट । कमाल है आप तो यह रह ये जाा कि आप मुझे जानते हैं और आप अब मेरा नाम पूछ रह है। ऐसी पहेली तो मैंने जिन्दगी में नहीं सुनी। मैंने कहा था न कि जिदगी एक अजीब पहेली है। कभी कभी इसका सही हल भी गलत सावित होता है और कभी भी गलत हल भी सही हो जाता है। मैं कुछ समझा नहीं। पहेली का सही हल यह है दि मैं आपको जानता हू और यही हल गलन हो गया क्यापि मैने आपका नाम पूछा। जीनीयस रियली यू आर जीनियस । मुरे आप से मिलकर बहुत खुशी हुई। लेकिन जितनी खुशी मुये हुई उसका अदाजा पायद आप न लगा सक । आज भगवान न मुझे आपमे मिलाकर मुझे क्ज़ से मुक्त कराने की कृपा की। कज कसा कैसा वज कैसी बातें कर रहे हैं आप । आज से 15 साल पहले कनाट प्लेस मे कस्तूरबा गाधी रोड पर आप अपने दास्त के साथ पगड रहे थे और उसने उस झगडे को निपटाने के लिए एक भिखारी का 200 २० दिए । हाँ दिए थे। वो पहेली का गलत हल था जो भिखारी के लिए सही साबित हुआ। आप कैस जानते हैं ? क्यापि वा भिखारी में है। यकीन नहीं आता। उसी 200 रुपये की बदौलत आज मेरे पास इतना पैसा है जिसको गिनती मैं खुद नहीं कर सकता क्या नाम था आपके उस दोस्त वा। मदन माह्न मदन मोहन मदन मोहन मदन मोहन मदन अहण। मोहन मदन मैं अरूण का कज़ दार हूँ । मेरी जितनी भी सम्पत्ति है उसके आधे हिस्सा उसे देकर मे वज़ से मुक्त होना चाहता हू । कहाँ है वो ? वा अब इस दुनिया में नहीं है। मोह नो। मोहन मदन 114 माहन उसे उन कसर था। उसकी मौतम चार में मुझे बहुत याद म पता चला। माहन मदन सोहन मदन मोहन मदन मोहन मदन निमल कोई और तो होगा उसका ? मेग मतलब है पत्नी बच्चे । उसके दा लटर और पत्नी थी और मां। मैं उनके पास लखनऊ गया था मगर वहा मालूम हुआ मि अम्ण की मौत के तीन महीने बाद उसकी मा भी चल बसी। अम्ण के इलाज के लिए घर गिरवी रखा था उसे भी वेचना पड़ा। अब उसकी पत्नी और बच्चे कहा हैं मैं नहो जानता। अगर कभी उसकी पत्नी दिखाई दे तो मुझे बताना मैं उसके हिस्से की सम्पत्ति उमे मौंप देना चाहता हूँ । शायद इसम मैं आपकी काई मदत नही कर मक्ता । क्यो। क्योकि मैंन आज तक उसकी पत्नी को नहीं देखा। तो क्या मैं इस ज स कभी मुक्त नहीं हो सकू गा । धीरज रखिए। आपने ही ता कहा कि जिदगी एक पहेली है और दुनिया में ऐसी कोई पहेली नही है जिसका कोई हल ही न हो। इतन म रजनी और निमला चाय का सामान लेकर अदर आते हैं) निमला यह कौन है? ड्राईवर वहादुर इमे लाया है । यह रहा था यह पढ़ी लिखी भी बच्चो वो पढा लिग्वा भी देगी। नौकरी के लिए आई है। क्या नाम है तुम्हारा। जी रजनी। क्या तुम्हें यह काम करना अच्छा लगेगा' पेट की भूख मजबूरी के सामने अच्छे बुर काम का कोई भेद नहीं होता। और कोन कोन है तुम्हारे घर मे । मेरे दो वटे जो कॉलेज में पढ़ रहे हैं । और तुम्हार पति। उनका देहात हो चुका है। वैरी संड । निमना इसे रख लो। जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया । ठीक है अब तुम जाओ क्ल सुवह आना। जी बहुत अच्छा नमस्ते। नमस्ते । (चनी जाती है) बेचारी, अम्रतमद लगती है। मदन रजनी मदन रजनी मान रजनी रजनी मान रजनी निमला रजनी मदन मदन 115 निमला मोहन मदन मोहन मदन बहादुर कह रहा था कि बड़ी मेहनती है। आप चीनी क्तिनी लेंगे। जी एक चम्मच । ओह सारी मोहन जी बातो ये मैं भूल ही गया था। नही नहीं ऐसी कोई बात नहीं। यह लीजिएन । मेरी आपसे यही रिक्वेस्ट है कि अरूण के परिवार को तालाश करने मे आप मेरी सहायता कीजिए। जो भी खच आएगा मैं दूगा। नहीं सच की कोई बात नहीं यह तो मरा फज़ । वसे मदन जी आप जा कर रहे हैं ऐसी बातें सिफ कहानिया म मिलती हैं। मैं तो कुछ नहीं पर रहा । मैं तो उस इसान को अपने लिए भगवान मानता हू जिसने मुझे आज इस मुकाम तक पहुचाया। यह सब कुछ तो उसी का है। अच्छा अब इजाजत चाहू।। क्सिी और जगह जाना है । आप मेरा यह काम परवा दें मैं आपका यह एहसान जिदगी भर नहीं मोहन मदन मोहन मदन भूलू गा। मोहन निमला मदन निमला मदन आप चिता न कीजिए अरुण का परिवार जरूर मिलेगा ऐसा मेरा विश्वास है । अच्छा जी चलता हू । नमस्ते । नमस्ते । (चना जाता है) कौन या यह १ यह वही सान है निमल। जिम साथ झगडकर इसके दोस्त न आज से कोई 15 साल पहले 200 रुपए दिए थे जिसकी बदौलत आज मैं यहा तक पहुंचा है । यह मुझे आज सुबह अचानक ही मिल गया और मैंने उसे यहां बुला लिया। तो इसके दोस्त का पता चला। वो दोस्त मर चुका है और अब उमक परिवार वी तालाश म इसकी सहायता लू गा और अपनी आधी सम्पत्ति उसकी पत्नी के नाम कर दूंगा। पता नही वो बेचारे कहां और किस हाल म हागे । यह तो भगवान ही जानता है ! (सगीत मतगल) दखा भदया इस शट को छाड दो यह मरी है और तुम इसे नहीं पहन निमला मदन रमेश सक्ते। দীছ रमेश मैंन दोस्त की पार्टी पर जाना है इस कमीज के सिवा इस घर म और है ही क्या जिसे पहनकर कही जाया जा सके। मगर यह तो मेरी है। रमेश 116 हरीश रमेश हरीश रमेश हरीश रमेश हरीश रमेश रमेश रजनी रमेश रजनी मानता हूँ यह तुम्हारी है। तो फिर ठीक है शरीफ आदमीयो की तरह इसे छोड दो । देवकूफ कही के मेरी वान को समयने की कोशिश कर । न न बिल्कुल नहीं तुम यह कमीज छोड दो। इसे ज्यादा मत खीचो फ्ट जाएगी। मेरी कमीज़ छोड दीजिए। मेरा रयाल है तू बातो से मानने वाला नहीं है । (उमे मारता है) (गुस्से से) यह सरासर ज्यादती है भया एक तो मुझ से मेरी कमीज़ छीनी जा रही है और दूसरे पोरा जा रहा है । यह ज्यादती है । (कमीज फटने की आवाज) (गुस्सा और रोते हुए) यह क्या किया तुमने। मैं तुम्हें नहीं छोडू गा। (दानी मे मारपीट और वतन गिग्न की आवाज) (गुस्म से) यह क्या हो रहा है ? यह दखा मा देखो इसने क्या किया है ? शम आनी चाहिए तुम लोगा को (भावुक) मैं न जाने क्या मुसीवतें उठा-उठा कर तुम लोगा को कुछ बनाना चाहती हूँ और तुम हो कि (रोती है) मुझे माफ कर दा मा। आज जगर तुम्हारे पिता जिदा होते तो ऐसी बातें करने की तुम्हारी हिम्मत होती । बोलो चुप क्यो हो अच्छा फायदा उठा रह हो मा की ममता का। अगर तेरा बड़ा भाई तेरी कमीज पहन लेता तो क्या फक पडता । मगर नहीं तुम तो कुत्ते की दुम की तरह रहोगे। हा हा मै ता कुत्ता ही हूँ बल्पि उमसे भी बदत्तर पो ता झूठन खा कर भी पेट पाल लेता है मुझे तो वा भी नसीब नहीं। फिकर मत करो अब वो भी मिल जाएगी। मुये किसी मदन सठ क यहा नौकरी मिल गई है दो जून की राटी ता वहा से मिल ही जाएगी। (रोती है है भगवान क्या यह दिन भी दिखाने थे। मत रा मां भगवान पर भरासा रखो अगर वो दिन नहीं रहे ता यह दिन भी नहीं रहेंगे। (सगीत अतराल) हरीश रजनी रमेश रजनी हरीश मदन (इटरवाम वजने की आवाज) हा कहो क्या है? ठीर है उसे भेज दो। (दरवाजा खुलता है) आयो मोहन बैठो कह पता चला ?
117 मोहन मान मोह्न - मोहन माहन रजनी अरुण की पत्नी की मौसी गाजियावाद में रहती हो । विसी से मालूम होने के बाद में वहा गया तो पता चला कि उनके हसबैंड वा नवादला बगलौर हा गया और वो सारे बैंगलौर चल गए । आज शाम को फलाईट म तुम बैंगलोर क्यो नही चले जाते । ठीक है मैं चला जाता है। (इटरकाम उठाता है। ऐमा परो लाज शाम की फ्लाईट से मोहन कुमार बंगलौर जायेंगे किसी भी कीमत पर सीट चाहिए और जब यह जायें तो इहें दस हजार रपर दे दिए जायें। (इटरकाम रखता है) इतने पैसा की क्या जरूरत है जरूरत है मोहन, इसे तुमसे ज्यादा मैं जानता है। प्लीज़ किसी भी तरह मुझे वो परिवार तालाश कर दीजिए। जिस तरह यह कडिया जुह रही है मुझे उम्मीद है कि मैं उहे तालाश कर लू गा । अच्छा इजाजत चाहता हूँ । ओ + । आल द बैम्ट (सगीत अतगल) बीवी जी यह साथ वाला पोरशन बिल्कुल खाली पड़ा है और सफाई भी वहा रोज हाती है । साहव रे इस पर इतन पैसे क्यो वर्वाद घर दिए । विस के लिए। रजनी इसके मालिश वी तालाश जारी है जब वो मिल जाएगा उसे सौंप दिया जाएगा। इसवे मानिव तो आप लोग है। नही रजनी इमना मानिय कोई और है। कुछ समझो नहीं बीती जी । (बार बार हान की आवाज) लगता है वा आ गए। फिर भी फुलत म बताकगी। (आत हुए निमला जल्दी साना लगवा दो। मुझे मल्दो यही जाना है। खाना ता टेबल पर है। गुह । वा नई नौपगनी कैसी है। बहुत अच्छी । साना भा आज उगी ने बनाया है पायेंगे तो पा असगा। (टनीपान की पष्टी यजती ह) हैलो मान दिम माई हा वा आ गए है ठीक है मैं अभी पह मिनट म प?म रहा हूँ। (टेनोफोन नीचे रखता है) आप जा रहे हैं। हो निमना। निमला । । লনী निमला रजनी निमला निमला निमता मिता 118 निमला मदन तिमला रजनी নিল। रजनी निमला रजनी निमला रजनी निमला साना तो खाते जायें। समय नही है । तुम लोग खा लेना। रुक्एि तो सही क्या फायदा ऐमी दौलत का जो दो पल चैन म नहीं बैठन देती। यह दौलत है ही ऐसी चीज़ वीबी जो ना हो तो चैन नही हो तो भी चैन नहीं। हा यह तो है। आप कुछ बतान वाली थी उस साथ वाले पोरशन के बारे में। फिर कभी बताऊंगी । तूने अगर घर जाना है तो जा। अच्छा जी । बीवी जी आप बच्चा वो पढाने के बारे मे कह रही थी मगर बच्चे दिवाई नही लिए कहा हैं वो। शिमला म पढते हैं जब छुटिटयो म जाएंगे तो पटा लेना बडा मुश्किल पढाई है उसको । अच्छा तू जा सुबह जल्दी आ जाना। अच्छा जी। और मुन वा विचन से कुछ खाना ले जाना घर बार ही बाहर फैकना पडेगा। (सगीत अतराल) जब मैं उनके ठिकाने पहुचा तो मालूम हुआ कि सारा परिवार अमेरिका चला गया। तो क्या उनके मिलन की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई। उम्मीद पर तो दुनिया कायम है । आप हिम्मत न छाडिए । साहब जी आपस काम है । बीबी जी घर पर नहीं हैं अगर होती तो उनसे ही कह दती। हो हो कहा। क्ल मेर पनि का श्राद है। कुछ पैसा को ज़रूरत थी तनख्वाह में से काट लीजिएगा। यह तो सौ रुपया हमारी तरफ से । भगवान से प्राथना करना नि जिसको हम तालाश कर रहे हैं वो जल्दी मिल जाए। नही साहब मैं अपने पति का श्राद जपन ही पंसा से करू गी। मुझे पचास ही चाहिएँ । भगवान से प्रायना जर वरूगी। चला अच्छा यह लो पचास रुपए । घयवाद । (चली जाती है) बड़ा म्बाभिमान है इस औरत म। हा मान । वैचारी विधवा है किमी अच्छे घराने की लगती है मजबूरी मे सब कुछ कर रही है। मोहन मदन मोहन रजनी मदन रजसी मदन रजनी मदन रजनी माहन 119 मोहन मदन अच्छा मदन जी फिर मैं चलता है अगर कही से उनके बारे म पता चलेगा तो बताऊंगा। जरूर मुझे इतजार रहेगा। (घडी की टिक टिक) सगीत अन्तराल) (पश्चिमी सगीत और पार्टी मे लोगो का हल्का सा शोर) यार हर साल तुम कोई न कोई नया प्राजक्ट शुरू कर देते हो क्या करोगे इतनी दौलत का। बहुत अच्छे विजनेस मैन बन गए हो । यह सब तो आपसे ही मीखा है। (नशे म) मैं सोचता हू कि नौकरी छोडकर फूट ,की छाबडी लगा राजेश मदन मनोज लू । राजेश मदन मोहन मदन राजेश मधु मदन मधु मोहन मदन मोहन शी ऐसी बातें न करो मनोज । वन दीजिए यह कोई झूठ थोडे ही बह रहा है। एक मिनट मदन जी। ऐक्स्वयूस मी ओ यस जहर। अच्छा भाई साहब अब हम इजाजत चाहते हैं। भाभी जी थाडी देर और रुकते । रात वहुत हो गई इजाजत चाहेंगे। हो मदन । साना खा लिया। जी हा । मदन मधु मदन निमला मदा निमला मदन मोहन मदन तो फिर ठीव ऐस यू विश । अच्छा भाई साहब नमस्ते । नमस्ते। सुनिए वो ड्राईवर कहाँ है ? यो वर्मा जी को छोड़ने गया है। रजनी ने घर जाना या दर हो गई कंस जाएगी अब । मान। हो रहो। अगर तुम बुरा न मनाओ तो रजनी वो घर छोड देना शायद रास्ते म ही पड़े। हा हा जरूर कहाँ है वो? यो उधर है आईये। (संगीत अतराल) (पार में चलने की आवार) मोहन निमता 120 रजनी मोहन हगेश रजनी रमेश मोह्न रजनी मोहन वस वा सामन वाले मकान के आगे रोक दीजिए। कार रखती है और घर के अदर लडाई झगडे की आवाज सुनाई दे रही है । बतनो के खडकन की आवाज भी) है भगवान इन लोगो न तो मेरा जीना हाम कर दिया । (दरवाजा खोनवर अदर जाती है। मधु तुम बैठा ने देखता है क्या हो रहा है। मैं आज तुझे नही छोडू गा। रोज रोज का झगडा आज खत्म ही कर दूंगा। कुछ शम करो तुम दोना। मां देव तर वटे को क्तिमा मारा है इसन देख । छोटा हू न । हाथ नही उठा सकता इसी का नजायज फायदा उठाता है यह । मगर अब मैं तेरा निहाज नही करू गा हां मा नही करू गा इसका लिहाज । क्या बात है यह लडाई क्या हो रही थी। ओह माप माफ कीजिएगा यह दोनो भाई भूमे थे भूख से लड रहे थे। (अपन आप से) अर यह अरूण की तस्वीर यहा । यह तस्वीर क्सिकी है। मेरे पति और इन दोना के पिता । ओह माई गाड़। आप इहे जानते हैं ? हमने तुम्ह वहा कहीं नहीं तालाश किया भाभी। भाभी। हां भाभी अब तुम्हारे बच्चा को भूख से लडना नहीं पड़ेगा। दल का सवरा तुम्हारे हा बच्चो के लिए वो खुशिण लकर आयेगा जिमको उम्मीद इसान वेवल सपनो म करता है। यह आप क्या कह रहे हैं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है । सुबह का इजार करो भाभी सब समय आ जाएगा। रजनी माहन रजनी रजनी माहन रजनी मोहन (सगीत अनराल) मान रजनी (सुवह वा उसाला पक्षी चहचहा रह है) बार के रुक्न की आवाद। आईए । (दरवाजा रटपटाया जाता है और दरवाजा खुलता है।) इतनी मुवह मुझे बुला लिया हाता मालिा। आपका ही ता न आया है रजना जी। मैं आपकी नौरती है मातिय । आप मुझस नौयग जमा ही मलूर करें। मान रजती नही उनी जो हमारा रिश्ता मानिक नाबर या नही है । तो फिर क्या रिस्ता है।
121 मदन १ रजनी मदन रजनी मदन रमेश हरीश मदन मदन मोहन यहा कुछ रिश्ते ऐसे होते है जिनको कोई नाम ही नहीं दिया जा सकता। आप अपन बच्चा के साथ मेरे साथ चलिए। मगर पहा उस पर गे जो वरसो से आपका इतज़ार कर रहा है। मैं कुछ समझी नहीं। यह सब क्या है ? मैं आपको सब समझा द् गा । तुम लोग अपनी मा को गाडी में विठाओ वो तुम्हारी अपनी गाडी है । हमारी अपनी गाडी। मगर कैस, बताऊंगा सब कुछ बताऊँगा। बाहर गाडी खडी है जरूरी सामान समेट ला मैं आपका बगले मे इतजार कर रहा हू । आयो मोहन । (सगीत अतराल) मोहन मैं चाहता हूं कि इहें आप ही शुरू से लेकर अब तक की बता दो। जो बहुत अच्छा। भाभी याद करो आज स कोई पद्रह साल पहले अरूण की ट्रासपर दिल्ली हुई थी और वो अपने एक दोस्त के ठहरा था वो दोस्त माह्न मैं ही हूँ। तो क्या वो आपसे लड कर गए थे जी वो मेरी गलती थी मेरे मुह से कोई ऐसी वात निकल गई थी। जी मैं सब जानती हूँ उन्होने मुये बता दिया था और यह भी बताया था कि उहोने आपरो 100 रुपए देने चाह और आपके इकार करने पर वो पैसे उसन एव भिखारी को दे दिए थे । वो भिखारी मैं हू । (हैरानी से) असम्भव और उही 201 रुपए की बदौलत आज मैं यहा तक पहुंचा हू । मेरी हालत उस वक्त क्या थी शायद इसका अदाजा आप न लगा सकें। खर हाडो । मेरी जितनी भी सम्पत्ति है उसके आधे की आप हकदार हैं और यह रह उसके कागजात । साथ वाला पोरशन जो बडी देर से खाली पडा है आपरा है। आपकी सारी सम्पत्ति वितनी बल्यू ही होगी। यही कोई बीस बाईस करोड । हे भगवान यह मैं क्या सुन रहा हूँ? पही आप हमारे साय मजाक तो नहीं कर रह । भावुरता) अगर यह मजान है तो भगवान के लिए एमा मत पीजिए । सहन सही कर सगी मैं । मिसानी है। रजनी मोहन रजनी । मदन रजनी मदन रमेश रमेश रजनी 122 मोहन मदन - हरीश मदन रमश यह मजाक नहीं है भाभी ठोस हवीक्त है यह सब कुछ तुम्हारा भी है। अगर आप कारावार से अलग होना चाहते हैं या कोई और काम करना च हत ह तो टसकी आपको पूरी आजादी है। नही अक्ल हम ऐसे ही मिल जुल कर काम करेंगे। मुझे तुम्हारा यह उत्तर सुन कर खुशी हुई बेटे वहुत खुशी। (सगीत अतराल) (टैलीफान के डायल धूमते है। हैलो मी होटल मैनेजर से बात करवायो हाय सतीश कैमे हो मैं रमेश ऐसा है आज रात एक पार्टी अरेज करनी है शराव जार शवाव का प्रबध भी करना होगा हो जाया ना ? गुड ओ के सी यू दियर (टेलीफोन नीचे रखता है) सगीत अतराल) (रात का समय बादल गरज रहे है और हवा भी तेज है) रात के 12 बजने को है रमेश अभी तक नहीं आया। जा जायेगा तू उसकी चिना छोड़ दे । से छोड दू बेटा बाहर मौसम भी ता बहुत खराब है। मौसम नो थाडी टर के लिये खराब होता है अगर औलाद खराब हो वैरी गुड रजनी हरीश रजनी हरीश जाये ता रजनी हरीश रजनी हरीश रजनी क्या बात है तु मुझसे कुछ छिपा रहा है । हा मग जाज मदन अकल' ने मुझे बुलाया था। क्या कहा उहाने। यही की रमेश का सम्भागी वो उस रास्त की तरफ बढ़ रहा जहा इसान : नमीब म अ घेरा के सिवा कुछ नहीं होता । जुआ, शराब औरन क्या क्या शौक नही पाल रखे उसने । क्या ? तुमन मुझे पहले क्या नहीं बताया। (दरवाजा खुलता है और वाटली का शोर तेज होता है) (नगम) भेर खिलाफ क्या साजिश की जा रही है ? तू शराव पा घर आया है। शराब नही पीऊगा तो नागा की बातें कैसे सुनु गा। बौन सी बातें कैसी बातें यही वि राता रात कौन मा सजाना हाथ लग गया हमारे । तुम्ह मालूम तो है। रमेश रजनी रमेश रजनी रमेश रजनी इन अनजान रिश्तों का यह समान कभी मायना नहीं देता। हिले इनमवत हो पाता है) बादल गरायो। मा इसी बाबा का दामन मनाना यह होश मे म... वटै मुमो पर दिठा दे। मेरे-सीने 21 मारामम मा बाराम।डाक्टरको सुसा" दरवाह) अग्रमा की दीपन अचाना tra, यह मानना भिया । या अन्ना 123 मेश मगर नोगों को शाहन्दी। जनी कौन सी रमेश यही कि 200 १०हाँ बननाबात कुछ और ही है। . रजनी क्या है? हरीश ओ देवकूफ जा कर मोरा मानन्ही ह कि तू क्या बर रजनी तू चुप र हरी हा वा क्या बात है। रमेश तुम्हारा मन सेठ से क्या रिश्ता है। हरीश (गुस्से से) ग्भेग। रजनी तुम्ह मगे कसम हरीश बार एज नपत्र भी बोला। यह वात लोगो ने पूरी रमेश हा नहीं में पूछता हू तरा क्या रिता है उसके साथ ? रजनी जिगी म कुछ रिश्त एसे होत हैं जिनका कोई नाम नहीं होता। उह जनमान रिस्त रहत हैं। रमेश म्पष्ट हान चाहिय । (बादलमा वान क्या रिश्ता है तेरा বতী (चाटा मारतो है) कमीन माकना है। रमेश भुसे शक नहीं यकीन है कि त चाँजहान है । লন। नहीं (वादन म है। रमेश तू चरित्रहीन है तू तिहीन है चरित्र तू बारठी दोन्ही रजनी हरीन हरीश हास्टर का दुन्दा दानि । रजनी हरी दटे तू परितहीन है . तू चुप . बदनापनीत सोfuk: नदीदा निमना रजनी वरदान। या कि
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रजनी
मदन
रजनी
।
-
मदन
रजनी
लेकिन यह रिश्ता तुम्हारे सामने भी स्पष्ट हो जाना चाहिए। बताई
क्या पिता हमारा।
कुछ रिश्ते ऐस होत है जिनवा कोई नाम नहीं होता।
समाज को नाम वाला रिश्ता चाहिए। वो क्या रिश्ता है ।
वो ही जो एष भाई का बहन के साथ होता है।
हरीश जब तेरा भाई नीद-से जागे तो उसे बता देना कि
अनजान नहीं है । पवित्र है
(मर जाती है)
माँ (जार-जोर मे गेता है) नही मां नहीं अब जिदी
देखने का समय साया तो तू चली गई।
जिन्दगी की पहली का भी कभी सही हल भी गलत साबित होता
है । क्या आज समाज बा इनना पतन हो गया कि हर इसान पहली
को अपन अपने तरीके से हल करना चाहता है क्यो यह समाज अनजान
रिश्तो को अपनी गदी नज़र से देखता है।
हरीश
मदन
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