Adarsh Library, Jaipur
Masiha Ka Ziwan
Front matter
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मसीह का जीवन
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मसीह का जीवन
लेरिका : ई. जी. व्हाइट
मोरिएन्टल यौरमंग पहिगाऊग,
गोगरी पारं, प्रा.
LIFE OF CHRIST (Hindi) by Ellen G. White Registered September 1, 1980, 10,000 copies, Owned by the Oriental Watchman Publishing House, Salisbury Park, Poona 411 001, India; printed and published by V. Raju at and for the Oriental Watch- 11:21 Publishing Ilouse, Salisbury Park, Poona 411 001, Indi:.
भूमिका
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विषय सूची ममा जम ... ... ... ... ... ... ... नाशिपियोगी मार मिर प्रिया मगीराबासा गदिश परतिरमा परीक्षा भारम्भिा गाना मगारfren ... ... ... ... ... ... FITI पा-7 ... .. प्रापरणारा ... .. ८. .. दिर में गावराmifina
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मसीह का जन्म
यमुफ तथा मरियम, जो चुछ ममय ये पश्चात् योश के पार्थिव
माता-पिता कहलाए गए, गलोल पती पर स्थित, नामरत के छोटे
नगर के निवामीथे।
पमुफदाऊद राजा का वाज था। जर जनगणना का आदेश
प्रमारित पिया गया तो उमे अपन पिता-पितामह दाऊद में नगर
चतलहम में आना नाम लिपाने के लिए जाना पडा।
यह थका देने वालो यात्रा यी वा उम यग में यात्रा के माधन
उधनी थे। मरियम भी अपने पति रे माथ यो। यह पर्वत
के कार वगायनरहम नगर को चाई पर पहने रे पारण थक
पर गर हा गई थी।
उगरी मिली विधाम-स्थल पर पहुच पर विश्राम वरन की इक
परतु नगर री मराए नागों में पहले ही भर की थी। वहा
धनवाना तथा सम्मानित किया की मेवा का उचित प्रबन्ध था, परन्तु
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मसाह का जन्म
इन दोन यात्रिया व। पही स्थान प्राप्त न हाने व कारण एक गौशाला
म आश्रय रना पडा जहा पा रपे जात थे।
यगुफ तथा मरियम के पास सासारिप धन-सम्पत्ति नहीं थी परन्तु
उनय पाम परमश्वर या प्रम था, इस कारण उनको सत्ताप तया
शाति प्राप्त थी। व स्वर्गीय सम्राट ही स तान थे जो कि उनका
शीघ्र ही आश्चर्यजाक सम्मान प्रदान करने जा रहा था।
समस्त यात्रा में स्वगदूत उन सरसर रह थ और राग्नि का जब
ये विश्राम कर रहे थे तब भा स्वगदूतो न उनका अकेला नहीं छोडा,
व अभी भी उना साथ थ।
इसी स्थान पर एक नापी छन तर यो मुक्तिदाता का जन्म
हुआ, उस कपड में रपेट पर चसी में रखा गया । उम महान
सवशक्तिमान में पुत्र या परनी में रखा गया।
ध्या पर आन स पहल या स्वर्गीय सना या सनापति था। भार
में अत्यधिक मम्मानित तथा प्रशमित पुत्र मृष्टि की रचना के ममय
उसकी महिमा क गीत गा रहे थे। जब वह अपन सिंहासन पर बैठा
सा उन्हात उसषी महिमा या न दग सका पारण उमम अपने
मुख छिपा लिए थे।
पिर भा महिमायुक्त याशु न असहाय तथा निधन पापिपा स प्रम
दिया और मवर श रूप धारण किया जिसम यह हमारे लिए दुस
उठा पर मृत्यु महन पर गर्व ।
: और यह (मरियम) पहिरोटा पुत्र जनी और उस पर मरूपटकर
चरती में रगा।
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ममीहवा जन्म यीशु अपने पिता निस्ट रह कर मम्राट ये वय नया मकुट पहन पर उपस्थित रह मरता था परन्तु हमार लिए उमन स्वर्गीय अधिकार और महिमा का त्याग कर पृथ्वी को निर्धनता स्वीकार थी। उमने म्वा का अपना उच्च अधिकार त्याग देना स्वीकार किया और स्वगदूतो की मगति छाड दो जो उसगे प्रेम करते थे। म्वर्गीय ममूह की प्रशमा या उमने दुष्ट मनुप्पो के उपहाम तथा निन्दा में परिणित कर लिया जाना और घर लिया। हममे प्रेम परने के कारण, उमगे पठिनाईपूण जीवन तथा लग्नापूर्ण मृत्य स्वीकार की। यह मय पोश न इमलिए दिया कि वह हम पर परमश्वर में प्रेम को प्रक्ट पर मा । उगन पृथ्वी पर रह पर हम पर यह प्रकट पर दिया कि हम परमश्वर वा आज्ञाकारिता के अन्तर्गत विम प्रहार उमे सम्मानित करके उसकी इच्छा पूरी पर साते हैं। उमर यह इग. लिए दिया कि हम उसके उदाहरण का अनुमरण करत हए अनन्त चाल तक स्वर्गीय म्यानो में उसने माय वाम पर मक्त है। यहूदियो के महायाजर और अधिकारी योग का स्वागत पग्न लिए तैयार नथे । उनका ज्ञात था कि मक्तिदाता वा आगमन निकट है परन्तु वे इग आशा में पेट हा ये ९ि वह एक मालिशारी राजा ये रूप में पृथ्वी पर आतगा और उनका महान नया धनवान बना देगा। ममीह का असहाय बार में म्वाकार करने पर उनके अभिमान या ठेस पहुंचनी थी। " और उन्होन (गडेरिया7) तुम्न जाकर मरियम मोर IT और पानी में उम बालर का पाया।
१४ मसीह का जीवन सो जब मसीह ने जन्म लिया, परमेश्वर ने यह तथ्य उन पर प्रका- शित नहीं किया । उसने यह सुसमाचार गड़ेरियों को दिया जो वैत. लहम के पहाड़ों तथा आसपास के क्षेत्रों में अपने झुण्डों की रखवाली कर रहे थे । ये भले मनुष्य थे और रात्रि के समय प्रतिज्ञा किए हुए मुक्तिदाता के विषय में बातचीत करते रहते थे और उसके आने के लिए इतनी अधिक प्रार्थना करते थे कि परमेश्वर ने उनको शिक्षा देने के लिए अपने सिंहासन के सन्मुख उपस्थित रहने वाले सन्देश वाहकों को भेजा। " और प्रभु का एक दूत उनके पास आ खड़ा हुआ, और प्रभु का तेज उनके चारों ओर च मका, और वे बहुत डर गए । तब स्वर्गदूत ने उनसे कहा, मत डरो; क्योकि देखो मैं तुम्हे बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं, जो सब लोगों के लिए होगा । कि दाऊद के नगर मे आज तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है । " ( लूका २:९-११) - मन्दिर में यगुफ और मरियम दोनो ही यहूदी थे और अपने राष्ट्र की विधिया का पालन सरने वाले थे । जब यीश छ सप्ताह का हो गया तो वे हमे यहार म ये मन्दिर में परमेश्वर के सन्मुस ले कर आए । या उम व्यवस्था व अनवर कायं था जा परमेश्वर ने इस्राएल को दी पी, और योग पो मभी बातो में आज्ञावारी होना बावश्यक था । सो - परमेश्वर का पुत्र स्वर्ग वा राजकुमार, अपना उदाहरण प्रस्तुत करके हमे शिक्षा देता है कि हम सब वो परमेश्वर की आज्ञाओ का पालन परना चाहिए। वेवल परिवार में पहलौठे वारय को ही इस प्रकार परमेश्वर के मामुम प्रस्तुत किया जाता या । यह औपचारिक्ता एक घटना को मसीह का जीवन स्मरण रखने के लिए नियुक्त की गई थी जो कि सैकड़ों वर्ष पहले घटी थी। जब इस्रायल की सन्तान मिस्र में दासता का जीवन व्यतीत कर रही थी तो प्रभु ने उनको स्वतंत्र करने के लिए मूसा को भेजा। उसने मूसा को फिरीन राजा के पास जा कर यह कहने की आजा दी, 'यहोवा यों कहता है, कि इस्राएल मेरा पुत्र वरन मेरा जेठा है, और जो मै तुझसे कह चुका हूं, कि मेरे पुत्र को जाने दे कि वह मेरी सेवा करे, और तू ने अब तक उसे जाने नहीं दिया, इस कारण मै अब तेरे पुत्र वरन तेरे जेठे को घात करूंगा।" निर्गमन ४:२२,२३ । मूसा ने यह सन्देश राजा तक पहुंचा दिया परंतु फिरीन का उत्तर यह था, " यहोवा कोन है, कि मैं उसका वचन मान कर इन्साएलियों को जाने दूं? मैं यहोवा को नहीं जानता, और मैं इवाएलियों को नहीं जाने दूंगा।" निर्गमन ५:२ । फिर प्रभु ने मिन्त्रियों पर भयानक विपत्तियां भेजीं। इन विपत्तियों में अन्तिम विपत्ति यह थी कि ममस्त मित्री परिवारों के पहलोठे, राजा से ले कर दाम तक के सभी पहलोठे मार डाले गए । प्रभु ने मूसा को बताया कि प्रत्येक इस्राएली परिवार को एक मेम्ना बलि करके उसका लोहू अपने घर की चौखट पर लगाने की माज्ञा दे । यह एक चिन्ह था कि मृत्यु का दूत इस्राएलियों के घरों पर यह चिन्ह देखकर उनके किसी पहलोठे को घात न करे, परन्तु यह विपत्ति निर्दय तथा अभिमानी मिन्त्रियों पर ही पड़े । "फगह" का यह रक्त यहदियों के लिए ममीह के रक्त का प्रतिनिधित्व करना था। क्योंकि नियुक्त समय पर परमेश्वर अपने पुत्र का उसी एप में लिदान करने जा रहा था जिगरूप में यह मेम्ना बलिदान मन्दिर में पिया गया या; ताकि जो कोई उन पर विश्वास करे वह अनन्त मृत्यु ने बच सके। मसीह हमारा फमह कहलाता है। (१) उसी के रक्त से विश्वास द्वारा हमारा उद्धार (२) होता है। मी प्रत्येक इस्राएली परिवार इमीलिए अपने पहलौठे को मन्दिर में लाया करता था, इसके द्वारा वे स्मरण करते थे कि उनके बच्चे परमेश्वर द्वारा किस प्रकार उस विपत्ति से बचा लिए गए थे और किस प्रकार सभी लोग पाप तथा अनन्त मृत्यु से बच सकते जो वालव' इस रीति से मन्दिर मे प्रस्तुत किया जाता था, उसे महायाजक अपनी गोद में ले कर उसे वेदी के सन्मुख ले जा कर ऊपर उठा देता था। इस प्रकार वह निष्ठापूर्वक परमेश्वर को मरिन किया जाता था। इसके पश्चात् बालक को फिर अपनी माता की गोद में रख दिया जाता था, और उसका नाम एक पुस्तक या चर्म पत्र पर लिए लिया जाता था जिस में समस्त इम्राएलियो के पहनोटो के नाम लिखे हुए होते थे। इसी प्रकार जो मसीह के गत द्वारा वचाए जाते है, उनके नाम जीवन की पुस्तक मे लिखे हुए पाए जाएगे। व्यवस्या के अनुसार यूसुफ और मरियम यीशु को महायाजक के पाम ले गए । माता-पिता प्रतिदिन अपने-अपने बच्चो को महायाजक ये पाम लाते रहते थे सो जब यूसुफ और मरियम, यीशु को उसके पान ले गए तो महायाजक ने उस में कोई असाधारण बात नही देशो। वे माशशरण कोटि के लोग थे । योशु को उसने मात्र एक (१) दुरिल्ययो ५७ (२) इफिसियो १७ २ १८ मसीह का जीवन असहाय शिशु के रूप में देखा । महायाजक को ज्ञात ही नहीं था कि वह इस समय संसार के मुक्तिदाता को अपनी गोद में लिए हुए है जो की स्वर्गीय मन्दिर का महायाजक है । परन्तु यदि वह परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करने वाला होता तो यह तथ्य उसे निश्चय ही ज्ञात होता क्योंकि प्रभु उसे स्वयं ही उसे इस विषय पर शिक्षित कर देता। इस अवसर पर मन्दिर में परमेश्वर के दो सेवक उपस्थित थे- शमीन तथा हन्नाह । दोनों ही परमेश्वर की सेवा करते हुए बढ़े हो चुके थे और उसने उन दोनों पर वह तथ्य स्पष्ट कर दिया जो अभिमानी तथा स्वार्थी याजक पर स्पष्ट न हुआ था। शमीन से प्रतिज्ञा की गई थी कि जब तक वह मुक्तिदाता को अपनी आंखों से न देख लेगा तब तक मृत्यु को न देखेगा। जब उसने यीशु को मन्दिर में देखा तो उसे ज्ञात हो गया कि इसी के आगमन की प्रतिमा की गई है । यीशु के मुखमण्डल पर स्वर्गीय प्रकाश तथा चमक थी और शमीन ने उसे अपनी गोद में ले पर परमेश्वर की स्तुति करते हुए कहा : 'हे स्वामी, अव तू अपने दाम को अपने वचन के अनुसार गान्ति से विदा करता है । क्योंकि मेरी आंखों ने तेरे उद्धार को देन लिया है। जिसे तू ने नव देशों के लोगों के मामने तैयार किया है, कि वह अन्य जातियों को प्रकाग देने के लिए ज्योति, और तेरे निज लोग इयाएल की महिमा हो। (१) इलाह भविष्यतिन, " उनी घड़ी वहां आकर प्रभु का धन्यवाद करने लगी, और इन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की वाट जोहो थे, उसके विषय में बातें करने लगी। (२) १. रूका २:२९ - ३३ २. लूका २:३८ मन्दिर में मो इमप्रसार परमेश्वर सेन लोगों को पाना साशी होने के लिए चुनता है । प्राय गिन लोगो यो न ममार में महान गमना जाता है, ये इमरो वचित रह जाते हैं। अनेक लोग यहूदी महायाजवी और अधियारियों में समान हैं। वे अपनी ही मेवा तथा सम्मान में अभिलापी होते हैं, उनको परमेश्वर यो गेया तया सम्मान की अधिर चिन्ता नहीं होती। इसीलिए परमेश्यर उनको अपनी दया और करूणा के विषय में बताने के लिए नहीं चुनता है। मरियम, यीनुपी माता, मौन मी दूरगामी भविष्यवाणी पर विचार करती रही। उसने अपनी गोद ये बच्चे को देगा और उसे ये बातें स्मरण से आयी जो तलम ये गटेरियो ने उसने पही पी, उसया मन प्रसन्नता और आनन्द से परिपूर्ण हो गया। मौन के मन्दो यो मुन पर उमे यशायाह की भविष्यवाणी म्मरण ही आई। उमेशात पानि ये आश्चर्यजनम मन्द योग के हो विषय में रहे गए हैं। "जो लोग अधियारे में चर रह थे, उन्होंने बटा उजियाग देगा, और जो पोर अन्धयार गे भरे हा मृत्यू में देश में रहते थे, उन पर ज्योति पमी स्वापि हमारे लिए एक बार प उटाम पा, में एक पुत्र दिया गया है और प्रभुता उगने कये पर होगी, और उगरा नाम अद्भुत पिश परने या पराममो परमेयर, अनन्त पाल या पिता, नौर शानिरा राजकुमार रमा जाएगा। उनीप्रभुता गदा बरती रगी, और उगयी शान्ति या अन न होगा, दाए पर उगो दाउदप गिहामन पर इम ममप मेरे पर गवंदा मन्यिाय और धर्म के द्वारा स्पिर पिए और ममारे रहगा।" (३) (३) पगायार ९०
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ज्योतिपियों की मुलाकात
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पनवर की इच्छा यह थी कि पृथ्वी पर ममीह के आगमन के
विपत में दोनों को जान हो जाए। यह याजको का कार्य था कि वे
बाना आगमन के बारे लोगों को शिक्षा दें परन्तु वे स्वयं भी
जो आगमन में अनभित थे। गो पन्नश्वर ने गडेरियों को
বুলা
दे लिए न्यगंदतों को भेजा कि मनीह ने जन्म ले लिया है और
अपो कान नी बता दिया जहां गे उन देव नकते थे।
नयर ता यह अनिताप था कि यहादी तथा दुगर लोग यह
जागविगीह पृथ्वी पर आ चुका है। पूर्व दिगा में दूर देश में
गोषिती नातलं दे जिन्होंने भविष्यवाणियों का अध्ययन किया
पा और ये जानते थे कि गनीह का माननन निट है।
ज्योतिषियों की मुलागात ये मांग विद्वान थे और दर्शनशास्त्र के विशेपन थे। इन्होंने प्रति में परमेश्वर के हाप ये कार्यों का गहन अध्ययन दिया था, और वे परमेश्वर में प्रेम करना सी7 गए थे। उन्ही नक्षत्रों का अध्ययन किया था और वे उनकी गति से भी परिचित थे। वे जापागदर्शन प्रेमी येनार यात्रा करत समय सार नक्षत्रों को निहारते चले थे । यदि उनको आवाग में कोई नया नक्षा दिपा देता था तो ये मे पिमी महान घटना का प्रतोय मानते हुए उमरा स्वागत परते थे। उज गमि यो जय कि ग्वर्गदूत गरियों में पारा वंत हम में पहुंचे तो इन ज्यानिपियो को जामास में एक विचिन योनि दिपाई दी। यह मरिमा वी ज्योति थी गिमो स्वर्गीय मेना को घेर रमापा। जय यद ज्योति अन्तर्धान हा गई ता उन्ही आपाश में एर नया तारा देया। यह देय पर तुरन उनको उग भविष्यगणी गा विचार आया जो पलती है, "यापूध में में एक तारा उदय होगा, और इना. एल में में एक राजदण्ड उडेगा।" (१) गया यह गितारा इस तथ्य या चिन्ह था कि मसीह पृथ्वी पर जा गया है। उन्हों। इमरे पीछे पीछे चला या मरल परपिा, पे यह देगन पापि यह नक्षम उनका या जाता है। यर उनयों यहदिया देश में है गया । तु जर वे पाहालेम नगर में निवट पर तो ग तारे या प्रमानना धीमा पड़ गयाशिये उसने पीछे पाग पामो। जन्मीर परम्पर विचार परप या पिप नियाग दियरी उनका मुक्तिदाता तप सराही परचा दंगे मा ये परमारम में जा पर पूछोरी, "रि मदिया का गमिसाई, पहा है? पयोकि हमा पूर्व में ताग दा है जी उगमा प्रगाम पग्ने आए है । पर मुा पर राम गजा जोर उसे मार माग (१) गिनती:४७ ૨૨ मसीह का जीवन यरूशलेम घबरा गया। उसने लोगों के सब महायाजकों और शास्त्रियों को इकळे करके उनसे पूछा, कि मसीह का जन्म कहां होना चाहिए? उन्होंने उससे कहा, यहदिया के बैतलहम में । क्योंकि भविष्यद्वक्ता द्वारा ऐसा ही लिखा गया है।" (१) हेरोदेस उस राजा के विषय में कुछ नहीं सुनना चाहता था जो कि किसी दिन उसका सिंहासन छीन ले । सो उसने ज्योतिषियों को अकेले बुला कर पूछा कि तुम लोगों ने उसका सितारा कब देखा था। फिर उसने उनको वैतलहम भेज दिया और उनसे कहा, " कि जाकर उस बालक के विषय में ठीक ठीक मालूम करो और जब वह मिल जाए तो मुझे समाचार दो ताकि में भी भा कर उसको प्रणाम फरूं।" (२) जव ज्योतिपियों ने हेरोदेस की बात सुन ली तो वे फिर यात्रा पर चल पड़े। "और देखो, जो तारा उन्होंने पूर्व में देखा था, वह उनके मागे-आगे चला और जहां बालक था, उस जगह के ऊपर पहुंच कर ठहर गया।" (३) 'और उस घर में पहुंच कर उस बालक को उसकी माता मरियम लाप देखा और मुंह के बल गिर कर उसे प्रणाम किया और अपना- अपना धेला खोल कर उसको सोना, और लोहबान और गन्धरस भेंट चदाई।" (४) ज्योतिपियों के पास जो बहुमूल्य वस्तुएं थीं, वे उनको मुक्तिदाता के पान ले आए थे। ऐसा करके उन्होंने हमारे सामने एक उदाहरण १. मत्ती २:२५ ३.मत्ती २:५ २. मत्ती २:८ ४. मत्ती २:११ + दाहिनी ओर के चित्र में : ज्योतिपी आकाश में विचित्र ज्योति देन रहे है।
w प्रस्तुत मसीह का जीवन किया है। अनेक लोग अपने सांसारिक मित्रों को भेंट देते परन्तु स्वर्गीय मित्र को कोई भेंट नहीं चढ़ाते जिसने उनको आशी दी हैं। हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। हमें मसीह के पास अपनी उत्तम ने उत्तम भेंट लानी चाहिए-हमारा समय, हमारा धन, और हमारा प्रम उसके चरणों में अर्पित किया जाना चाहिए । हम निर्धनों की नहायता के द्वारा उसे अपनी भेंट चढ़ा सकते हैं और लोगों को नुनितदाता की शिक्षा दे कार भी उसे भेंट चढ़ा सकते हैं। इस प्रकार हम उनकी सहायता करते हैं जिनके लिए उसने अपने प्राण दिए हैं। ली भेट मनीह महर्ष और मुस्कुरा कर ग्रहण करता है और हमें आलीप देता है।
मिस्र के लिए प्रस्थान
हेरोदेग ने जो ज्योतिपियो गे पापा शिवह जा यर यो मो
प्रणाम करना पाटला पर उगमें मत्यपालेशमात्र भीगया। उसे
भर पा वि मुभिदाता बडा हो पर उमरे गिटागन पर अपना अधि.
पार पर लगा । वर उग वालम या गाजन इच्छा था ताधि
उमरोमरवा डालें।
ज्योतिषी पापिग लोट पर हैरादेग यो पालन यिषय में गा
पी तयारी गर रहे थे, परन्तु परमेचर या एर दा म्पप्न में उापर
प्राटा और उमन जगा दूसरे मार्ग में अपने देश भिजग दिए।
"उन परे ग ये पार देगा. प्रभ ये एर दाने'
याप पो दिमाई पर पहा. उट, उन पास हो
मसीह का जीवन माता को ले कर मित्र देश को भाग जा; और जब तक मैं तुमसे न पाहूं, तब तक वहीं रहना; क्योकि हेरोदेस दम बालक को दंडने पर कि इसे मरवा टाल।" (१) यूगुफ ने भोर तक प्रतीक्षा नहीं की; वह तत्काल ही उठ बैठा और बच्चे तथा उनकी माता को ले कर लम्बी यात्रा पर निकल पड़ा। ज्योतिषियों ने यीशु को बहुमूल्य भेटें चढ़ाई थीं, और इस प्रकार परमेश्वर ने उनकी यात्रा के यचं का प्रबन्ध कर दिया था और यही धन उनके मित्र में रहने के लिए भी पर्याप्त था। वे स्वदेश वापिस लोटने तक उसने अपना निर्वाह करते रहे। इरो देस को जब यह ज्ञात हुआ कि ज्योतिषी दूसरे मार्ग से अपने देण चले गए तो वह मोधित हो उठा। परमेश्वर ने मसीह के विषय में भविष्यमा द्वारा जो कुछ नहा या उससे हेरोदेश माली भांति परिनित था। वह यह भी जानता था कि ज्योतिपियों का नेतृत्व करने लिए किस प्रकार तारे को भेजा गया था। फिर भी या योग को नष्ट कर देने पर तुला हुआ था। उसने कोधित होकर गनिक भेज दिए और, “तलहम और उगो आसपाग के सत्र लड़कों को जो दो वर्ष या उगमे छोटे थे गरवा पाला।" (२) मनुष्य की परमेश्वर के विद्ध रहाई कंगी विचित्र बात है। इन निवार वालों को निर्णय हत्या का दृश्य नीमा भयानक रहा होगा! देनदेन में पहले भी अंक निदंगनापूर्ण कार्य किये थे। फिर स्वर्गदून यूसुफ पर प्रगट हुआ और उगने गहा, "उठ, बाला और उसकी माता कमाल देश में चला जा, धारिः जो बाला के प्राण बना पाहते थे, ने गय मर गए।" (२) (3) मती २.१३ (२) मती २:१६ (२) मत्ती २२० मिय ये लिए प्रस्थान २७ यूमुफ चतलहम में बसने की आगा लगाए हुए था, जहा यीशु या जन्म हुआ था, परन्तु यहूदिया देश के निकट जाने पर उस भात हुआ रि हेरोदेश या पुत्र जगये उत्तराधिकारी के रूप में राम पर रहा है । इमरो यूसुफा यहा जाने से टरा और उसे ज्ञात न हो मया दि अब यया परना उचित है। सा परमेश्वर ने उसरी निर्देश देन में लिए एप स्वर्गदूत भेज दिया। उस स्वर्गदून पो आमा पा पाउन परते हुए यगुफ नामरत में लौट आया।
LORE
मसीह का वाल्यकाल
पीग का वाल्यकाल एक छोटे से पहाड़ी गांव में व्यतीत हुआ।
वह परमेसर का पुत्र था, और पृथ्वी पर किसी भी स्थान पर रह
माता का। उसे किसी भी स्थान पर सम्मान प्राप्त हो सकता था।
परन्तु वह नाजाओं के नालों या धनवान लोगों के घर नहीं गया।
उसने नागरत निधनो के बीच रहना स्वीकार किया।
।
गीन निर्धनों पर यह प्रकट करना चाहता है कि वह उनकी परी-
माको ममाना है। उन वे नमी नष्ट गहन पिए हैं जो निधन
मान पार । बर उनने महानुभूति गता है तथा उनकी सहायता
पर मरता है।
पीक प्रारमिगर. वा. दिपव में वाइबल बनाती " और
वाक बना, और बलवन्त होता, और बुद्धि में परिपूर्ण होता गया,
मगीह पा वात्ययाः २९ और परमेश्वर या अनुग्रह उन पर था।" (१) उसारा मस्तिप उग्सल तथा गतिशील था। "और यीशु युति और डोतोल में और परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में वटा गया।" (२) उनकी बुद्धि तीन थी और अपनी बायु में उममें अधिक विवेय राया विचारसीनता थी। फिर भी यह माधारण पालय ये समान ही व्यवहार करता था। वह बुद्धि तथा डी-डौल में अन्य वाल्यो के गमान ही बढ़ता गया। परतु यीशु गभी बातो में अन्य यानी ये ममान नहीं था। उममा व्यवहार मधुर तथा म्वार्थरहित था। उसये हाय गदा ही दूसरो यो मेवा करने के लिए तत्पर रहते थे। पर मत्यमापी तथा धैर्यवान था और सत्य ये प्रति चट्टान ये समान दृढ रहता था। दूसरो थे प्रति सदस्य रहार और गज्जनता प्रगट परत में वह भी असफल नहीं रहा। अपने घर में तथा जहा भी वह पम्यिन हो, यह सूर्य की किरण ये ममान गुरदायर प्रमाग विपर देता था। वह निधंनो तथा बूढो पा आदर परता था और मूर पानी ये प्रति भी महानुभूति प्रपट परता था। यह छोटे पक्षिया पर भी पयायान था और उमरी निरटता में रहने से प्रत्येर प्राणी प्रमानना अनुभव परता था। मगीह ये युग यदी अपने बच्चा पी निक्षा में प्रति यन सचेत घे। उनरे मिक्षा गस्थान, मागधनालयो मे या जागना व स्थानी पे निपट ही थे और उनमें गिराव रघी पराए जाने । ये शिक्षा बहुत पिटान ममरे जाते थे। यीशु को सना म नही गया पयोकि ये लोग युछ ऐमी शिक्षाए भी देन घे ना गत्य विर. रीत होती थी। परमश्वर में पचन पी अरसा मनुप्प गरी शिक्षाप्रोमा अधिरजपया पिया जागा या और उनी निक्षाए ग्राप परमयर - १.ला २४० २रा २५२ की शिक्षा के विपरीत होती थी जो कि उसने अपने भविष्यद्वक्ता द्वारा उनको दी थी। मसीह काज परमेश्वर ने स्वयं अपने पवित्र आत्मा द्वारा मरियम को वी के पालन-पोषण के लिए आवश्यक निर्देश दिए । मरियम ने यीशु का पवित्र शास्त्र की शिक्षा दी और उसने फिर स्वयं उनको पढ़ कर उनका अध्ययन किया। यीशु ने उन आश्चर्यजनक वस्तुओं का भी अव्ययन किया जिनको परमेश्वर ने आकाश तथा पृथ्वी पर बनाया है। प्रकृति की इस पुस्तक में उसने सूर्य, चन्द्रमा, वृक्ष, पीधे तथा जीव-जन्तुओं को देखा। दिन प्रतिदिन वह उनको देखता रहा और उनसे शिक्षा ग्रहण करने का प्रयत्न करता रहा और उनके बनाए जाने का उद्देश्य खोजता रहा। पवित्र स्वर्गदूत उनके साथ रहते थे और परमेश्वर से सम्बन्धित बातों को समझने में उसकी सहायता करते रहते थे। इस प्रकार वह चील-दील, तथा सामर्थ में बढ़ता चला गया और साथ ही ज्ञान तथा बुद्धिमता में भी बढ़ना रहा। प्रत्येक वालक वैसा ही मान प्राप्त कर सकता है जैसा कि यीशु ने किया। हमें केवल उन्हीं बातों को सीखने में अपना समय व्यय करना चाहिए जो सत्य हैं। सूठी कल्पित बातों से हमें कोई लाभ नहीं हो मगाता । केवल मत्य का हमारे लिए महत्व हो सकता है और इसको हम परमेश्वर के बनन द्वारा और उनके कार्यों में नीख सकते । जब हम उन वस्तुओं का अध्ययन करते हैं तो स्वर्गदूत इन बातों ने गमलने में हमारी महायर ने है। हम इमले परमेश्वर की बिगता और मलाई को वर्गीय पिता है। मे हमारे मस्तिपता को हमारे हृदय दबनते है और हम समान तो हम Prera .
मसीह का बाल्यकाल ३१ प्रतिवर्ष यूसुफ तथा मरियम पसह का पर्व मनाने के लिए यरू- पालम जाते थे। जब यीशु की अवस्था बारह वर्ष की हो गई तो वे उम भी अपने साथ ले गए। पह यात्रा बहुत आनन्ददायक थी। उस युग में लोग या तो पैदल यात्रा परते थे या कुछ लाग वैलो तथा गदहो पर सवार होकर यरूशलेम जाते थे। यह यात्रा अनेक दिना में पूरी होती थी । देश में सभी भागों से और दूसरे देशो से भी लोग इस फसह के पर्व में सम्मिलित होन पे लिए यरूशलेम पहुचते थे। एय स्थान के निवासी प्राय सामुहिय यात्रा करते थे और इस प्रकार यात्रिया के बड़े दल बन जात थे। यह पध्वं मार्च के अन्तिम सप्ताह में या अप्रैल के प्रथम सप्ताह में थायाजित किया जाता था। यह ऋतु फिलीस्तीन देश में बसन्त ऋतु हाती थी और समस्त दश इस समय भाति-भाति के मुन्दर पूला तथा हरियाली से आच्छादित होता था और सर्वत्र पक्षियो या मधुर गान सुनाई देता था। यात्रा करते हुए माता-पिता, इयाएर के लिए दिए गए परमेश्वर के महान आश्चर्यकों का अपां बच्चा के सन्मस वर्णन करते जाते थे और वे प्राय अपने यचा ये गाय दाऊद राजा प गिय मुन्दर गीत भी गाते थे । ममीह युग में परमश्वर की सेवा के प्रति यहूदी उत्साहहीन और ठडे हा चुपे य। वे परमश्वर की भलाई को अपक्षा सातारिक मुग-समृद्धि ये इचव थे। परन्तु ये बातें यीशु में नहीं थी। उसे परमश्वर ये विषय में विचार करन में आनन्द प्राप्त होता था । जब वे मन्दिर में पहुंच ता उसन वहा याजका का सेवा-कार्य करत हुए देखा। पह भी उपामना परनवाला ये साय परमेश्वर का दण्डवत परन पे रिए अपा जय कि वे प्रार्थना करन के लिए भूमि पर झुके और उमरे भी उन माप मिल कर परमेश्वर की स्तुति में गीत गाए। नामरत से यररेम की दूरी रगभग ७० मील यो।
मसीह का जीवन प्रत्येक दिन प्रातःकाल तथा सन्ध्याकाल एक मेम्ना बेदी पर बलि- दान गारो चढ़ाया जाता था। यह मुगितदाता के बलिदान होने का प्रतीक था। जब यीशु ने निर्दोष मम्ने को देखा तो पवित्र आत्मा ने उसे उगका अर्थ नगा दिया। उसे ज्ञात हो गया कि वह स्वयं भी परमेश्वर का मेम्ना है जिसे गनुप्यों को पापों के लिए बलिदान होना है। - मस्तिष्क में रो विचार लिए यीशु पाहीं एकान्त में जाना चाहता था । गोगह मन्दिर में अपने माता-पिता के गार नहीं ठहरा और जब में अपने घर वापिग लीटे तो वह उनके माथ नहीं था। मन्दिर से शुमामा एक रमाल भी वहां स्थापित किया गया था जिनमें श्री शिक्षा देते थे और गुछ समय पश्चात् यीशु पसीन्यान पर पांच गया। वह भी महान ग चरणों के पारा अन्य शिष्यों के समान बट गया और उगते शब्दों को गुनने लगा । गगीह के विषय में गादियो की धारणा अनुचित धी। यीशु इसको जानता पा, पर, उसने विद्वानों की बातो ना मन नही किया । उगने ज्ञान प्राप्त करने वाले शिष्य समान अपने शिक्षकों से प्रश्न पूछा। उगने गावाट वियागता के ५३ अध्याय के विषय मे प्रश्न तिया जिसमें गुपितदाता की मृत्यु का वर्णन लिया गया है। उसने या अध्याय उनको पार कर सुनाया और एमका अ पूछा। नीमका कोई उतर न दे सके। उन्होने यीणु से प्रश्न करने भाजनकार दिए और उगका विमानमा शान देगकार आश्चर्य गित गाए। उन्होंने देखा किया कि वायलमा उसको उनकी अपेक्षा कमी अधिमा भान है। उन्होंने यह भी देगा कि उनकी शिक्षा अनुचित, परन्तु मिनी अन्य बात पर विश्वास करने के लिए वे तत्पर गली में।
मसीह वा बाल्यकाल फिर भी यीशु ने नम्रता और सज्जनता प्रगट योर इस पारण वे उस पर क्रोधित नहीं हुए। वे उसको अपने विद्यायों ये रूप में रखने के इच्छुक थे और वे उससे भी यही अपेक्षा रसते थे पि वह भी बाइबल की वैसी ही शिक्षा दे जैसी वे देते थे। जब यूसुफ और मरियम अपनी यात्रा से पर की ओर लौटे, तो उन्होंने यह ध्यान नहीं दिया कि यीशु पीछे छूट गया है। उनका विचार था कि वह अपने यात्री मित्रों के साथ होगा, परन्तु रात्रि में पडाय डालने पर उनका वह न दिखाई दिया। उन्होंने सभी लोगो में उसपी गोज की परन्तु उनकी यह सोज व्यर्थ हुई। यूगुफ और मरियम पर भय छा गया । उनले स्मरण आया गि हेरोदेम ने शिशु काल में उसे किस प्रकार मरवा डालने का प्रयत्न दिया था। उनको भय था कि वही किसी प्रकार की विपत्ति उस पर न पड़ गई हो । सोक्ति हृदय से वे शीघ्र ही यरूशलेम लौट गए, परन्तु तीन दिन की खोज के पश्चात् ही वे उससे मिल सके । उसमे फिर मिलने पर उनकी प्रसमता या ठिकाना न रहा, पिर भी मरियम या विचार था कि उनको छोड़ने में वही दोपी था, इसलिए उगने कहा,"ह पुत्र, तू ने क्यों हमसे ऐसा व्यवहार किया? देस, में और तेरा पिता युद्धते हुए तुझे टूटने थे। "तुम मुझे क्यों टूटने थे" योग न उत्तर दिया, क्या नहीं जानते थे पि मुझे अपने पिता के भवन में हाना अवश्य है ?" ? इन शब्दो को व्यक्त परत हुए योग ने ऊपर आवारा पी ओर मरेत दिया । उमसे मस पर एक ऐमी ज्योति थी जिसे देश पर " । १ लपा २४८,४९ ३४ मसीह का जीवन उनको आश्चर्य हो रहा था । यीशु को ज्ञात था कि वह परमेश्वर का पुत्र था, और वह वही कार्य कर रहा था जिसको करने के लिए उसके पिता ने उसे पृथ्वी पर भेजा था। मरियम उसके गन्दों को आजीवन नहीं भूली। आगामी वर्षों में उसने स्पष्टता से इन शब्दों का अर्थ समझ लिया । यूनुफ और मरियम को यीशु से प्रेम था, फिर भी वे उने वापस ले जाने में अनावधान रहे थे । वे उन कार्य को भूल गए थे जो कि परमेश्वर ने उनको करने के लिए दिया था। उनकी एक दिन की उपेक्षा के कारण यीशु उनमे पृथक हो गया था। इसी प्रकार आज भी अनेक मुक्तिदाता की मगति छोट कर उमसे पृथक हो जाते है। जब हमें उसके विषय में विचार करना अच्छा नहीं लगता या हम उनसे प्रार्थना नहीं करते और जब हम निकम्मी बातचीत करते है या बुरी बाते बोलते हैं तो हम मसीह ने स्वयं को पृथक करते है । उसके बिना हम दुसी और शोकित हो जाते है । परन्तु यदि वास्तव में हम उनकी नति चाहते है तो वह नदा हमारे साथ रहता है। वह उन सब के नाय रहता है, जो उनकी उपस्थिति के इच्छुक होते है। वह निर्धन मे निर्धन परिवार को भी ज्योति ने परिपूर्ण कर देता है और अत्यन्त शोफित हृदय में भी प्रमन्नता भर देता है । यद्यपि उसे ज्ञान था कि वह परमेश्वर का पुन था, वह यूसुफ और मरियम के नाथ नासरत वापन लौट गया । वह तीन वर्ष तक, "उनके आधीन रहा । वह जो न्वर्ग का मेनापति था, इस पृथ्वी पर आज्ञाकारी तथा प्रेमी पुन रहा। वे महान बातें जो मन्दिर में मेवा करने के कारण उनके मस्तिप्त मे जम गई थी, उनके हृदय में घिरी रही । वह अपना नियुक्त कार्य करने के लिए पोर को समय की प्रतीक्षा करता रहा । यीशु एक निधन किमान के परिवार में रहा । उसने मच्चाः मगीह पायाल्यात गाय प्रममतापूर परिवार के निर्वाह में अपना यागदान दिया। जब या यायं परा योग्य हो गया तो उगो एवं व्यवसाय सीर रिया और यमुप वे माय बाई पो दूयान में यानं परता रहा। गाधारण मजदूर पे ममा जग मोटें यपदे ये वस्त्र पहा और छोटे नगर पी गरिया में पायंवरा आता जा रहा । उन अपना गांसारिक जीवा मुगी बना ये रिए अपनी अगरि सिया प्रयोग ही पिया। बाल्यया या युवावस्था में परियम कराय पर उगता गरीर तथा मस्तिप शमसा बन गया। उगा अपणीमति पाग प्रसार उपयोग पिया जिसम उसरा म्याम्थ्य बना रह और भी उपगागी पार्य गुचार रूप में पूर्ण हा गर । उमा ना कुछ भी पिया उत्तम रीति म पिया। यह ममी वाता में यहा तर नि अपर औशारा प्रयोग में भी निपुणता प्राप्त परा पा इणा था। अपना उदाहरण प्रस्तुत परप उसा हमें शिक्षा दी हिम परियमी नाना पाहिए और अपन काय सावधानी र माय उचित प म बग्न पारिए क्यारि यायं स ही मनुष्य मम्मानित हाता या एरो पायं परा पाहिए जा स्वय हमार गिा तथा दुमगर गिा भी रामदायर हो । परमसर न पाप हमें आगोप य म प्राय दिया है और वह उन बच्चा से प्रम गाता पारिवारिष कार्यों में हाथ बटान है । र सपा यय पिता या भार हवा परत है । एम बच्च अपन परिय यलिए भी आगीप का कारण बना। जा पर युवतियां अपन यार्या द्वारा परमवर र का प्रयाग गरत हैं और जा उचित पद मागम उचित हताहै, गमार गिा उपयागा 'मद्ध यहाँ अपना स्थान बना पर उस पर है ।म गव जा त्रास मन - म 1 Thed KAN -- WA PAN संघर्ष के दिन यहूदी शिक्षकों ने लोगों के लिए अनेक नियम बना रखे थे और वे उनसे ऐसे कार्य करने को कहते थे जिनकी परमेश्वर ने आज्ञा नहीं दी थी। यहां तक कि बालक-बालिकाओं को भी इन नियमों को सील कर इनका पालन करना होता था । परन्तु यीशु ने रब्बियों की शिक्षा को सीखने का प्रयास नहीं किया । वह इन शिक्षकों के प्रति अममान प्रकट करने में विशेष मावधान रहता था, परन्तु वह पविन शास्त्र का अध्ययन करता और परमेश्वर की व्यवस्था का पालन करता था । प्रायः लोग उसकी निन्दा करते रहते थे क्योंकि वह वने कार्य नहीं करता था जिनको दूसरे लोग किया करते थे। फिर वह वाइवल द्वारा उन पर स्पष्ट कर देता था कि उचित क्या है। -
मघर्ष । दि
1
पीग मदा ही दूसरा पा प्रमग्न ग्ने या प्रयाग परता था।
मि पर नग्र तथा दयालु स्वभाव पा नग्युवा था रिए रखी
उगगे अपनी इच्या जनगार पापं करवाने की माना गाए रहने
थे। परन्तु वे इम में पूर्णतया नगा रो। जब वे मन नपने
नियमी ये पाटन का अनुरोध पग्ने धे तो वह उनमे प्रश्न कसा या
गि वामपनपी इस विषय में क्या शिक्षा दी । जो युछ वादय में
किया था, वह यही परता था।
गगे रबी प्रोधित हो उठे। उनमा मान या पिउनयी मिसाए
यादवल की शिक्षाओं के प्रतिकूल है और फिर भी पोर मारा उनका
पालन न पिए जाने के कारण ये उनमें गुड़ धे। उन्होंने इन विषय
पर उगरे माता-पिता में उममी गितायत यी, और यो यो दोपी
टहराया गया जिमगो गहन परना पठिन था।
योगरे भाई रचियो पा पक्ष लेने थे, उनघा कहना था कि इन
शिक्षारोपी पा, परमेश्वर में मम्मी ये ममान आदर पिया
जाना चाहिए। ये लोगों नेताओ गेम्पप रो उठा ममदाने ये
किए यीगरी निन्दा पिया परते थे।
रबी दूगरे लोगो मे बय या उच्च ममतने घे और माधारण
लोगो गे नहीं मिलने नुसने थे। निर्धनों तथा अशिक्षित रागो या वै
तुम नमो धे । पहा तर पिये रोगी तथा दुवं7 व्यरितया को
पूर्णतया उपेक्षा पर देने थे।
पोग ने प्रत्येर व्यक्ति से प्रेम रिया और उनमें अपनी रवि
प्रगट Tी। जो भी दीन-दुशी उमगे मिला, उगन उमरी महायता
परी या प्रपन दिया। उगरपान लागागा दन र fm अधिक
धानी होता था पग पर दूसरों की सहायता करन वे स्वय
मा नासा पा। जब उगरे नाई दीन-दुपिया ने कटु वचन
योगे तो यउन्ही लागा रे पाम जा पर काम नम्रता न चाल
मसीह का जीवन - कर उनको प्रोत्साहित करता था । जो लोग भूखे-प्यासे होते थे, वह उनको अपना ठंडा पानी तथा अपना भोजन खिला कार सन्तुष्ट पार देता था। इन कार्यों से उसके भाई उमगे अप्रसन्न रहते थे। वे उसे धमका कर घराने का प्रयास करते थे परन्तु वह जो कुछ परमेश्वर ने पाहा था, वही करता था और मदा ही उचित कार्य करता रहता था। यीशु को अनेक प्रकार की परीक्षाओं का सामना करना पड़ा। शैतान गदा ही उस पर प्रबल होने की बात में बैठा रहता था। यदि वह यीशु ने एक भी अनुचित कार्य करवाने में सफल हो जाता या जगगे एक भी अनुपयगत शब्द गाहलचाने में सफल हो जाता तो वह फिर मुक्तिदाता न रह जाता और नमस्त संसार नष्ट हो जाता। शैतान ग तथ्य मे परिचित था, इसीलिए वह यीशु को पाप में डालने का मरममा प्रयत्न किया करता था। मुक्तिदाता की गुरक्षा लिए स्वर्गदूत सदा उपस्थित रहते थे, फिर भी अन्धकार की पाक्तियों में उसका निरन्तर गंधर्ष होता रहता था । हम में गे एक को भी अंगी भयानक परीक्षाओं का मामना नहीं करना पड़ा जैसा कि उगनी करना पड़ा था। पर प्रत्येक परीक्षा के लिए उनका एक ही उत्तर होता था : "लिया।" अपने भाइयों के अनुचित कार्यों की भी उगने निन्दा नहीं की परा उनमो बताया कि परमेयर दस विषय में क्या जागरता बहुत दुष्ट नगर था, यहां के नवयुवा तथा बच्चे यीशु में अपने ही दुकान मारने के लिए निरन्तर पाहने रहते थे। यह भालक तथा प्रगन्ननित्त युवक या इलिए उनको उनकी गंगति प्रिय जगी थी। परन्तु उगवरीय सिद्धान्तों ने उन नोध को
गंपर्ष दिन
माया दिया था । उमे पाय. अनुचित सायं न करने के यारण
दरखोर तथा पायर पहा जाता था । छोटी छोटी बातो पर पान
आपषित करने पे पारण उगपा उपहाग दिया जाता था। इन गयमा
उगो पाम यही उत्तर होता था, यह दिया है, " परमेसर मा भय
बुद्धि या मूल है और पराई मे परे रहना ही शान है।
यीनु ने अपने अधिकारी के लिए सभी विवाद नहीं दिया। जब
उसपे गाय पट व्यवहार किया गया तो उसने धैर्यपूर्व जगे गटन
पिया । यह मूरि मरज ही भलाई परने पर महमत हो जाता था
और वाद-विवाद भी नहीं परता था, इसलिए प्राय उमा यायों को
अनायश्वर ही कठिन बना दिया जाता था फिर भी यह निरत्माहित
नहीं होता था पोषि उगे शात पानि परमेश्वर ने दंग पर
मुसरा रहा है।
उगे गयगे अधिश रामता एरान में परमेश्वर गाय रहने में
होती थी। जब यह अपना पाय गमाप्त पर देशा पा तो यह प्यान
परने पे लिए मेतो तया हरी पाटियों में या पहार पर
परमेश्वर में प्रामंना परने पटा जाता था । पर पानर पसी को
अपने रचयिता मी म्नुति में गान परते हुए गुनगा था और म्पप भी
उगरे माय ही परमेयर पी स्तुति के गीत गाने लगता था। मुनि
गान परो परो भोर या प्रकाश उदया जाता था। भोर पो
गूर्योदय गे पहरे मदा ही यह रिमी निर्जन स्याा में पाया जाता
पा। यहा जमे वादयामा अध्ययन परते तया परमेयर के विषय
में विचार पररोए देगा जाता था। इन पानी में शान्ति प्रापा
परले ये पर पर प्रतिदिन अपा पतंच पा पाग्न सरन में निगा
पिसोट आता पा और परिश्रम तपा धेयं पा उगरण मन
परतापा।
१ अन्यूय २८ २८
४० मसीह का जीवन - वह जहां भी होता था, उसकी उपस्थिति स्वर्गदूतों को निकट ले आती प्रतीत होती थी। उसके गुद्ध तथा पवित्र जीवन का प्रभाव सभी वर्गों के लोग अनुभव करते थे। वह सभी लोगों से मिलता- जुलता था । उसकी भेंट कर, विचारहीन, दुर्जन, अन्यायी महमूल लेने वालों, अपव्ययी, अधर्मी सामरियों, मूर्तिपूजक सैनिकों तथा अशिक्षित किसानों से होती रहती थी, परन्तु उसके गब्द सभी के लिए महानुभूति से पूर्ण होते थे । उसने थके हुए लोगों को देखा जो कि भारी बोज उठाने पर बाध्य कर दिए गए थे। उसने उनका भार उठाने में उनकी नहायता की और उनको परमेश्वर के प्रेम, भलाई तथा दयालुता की शिक्षा दी जो उसने स्वयं प्रकृति से सीखी थी। उसने उनको अपने गुणों पर दृष्टिपात करने की शिक्षा दी और उनको बताया कि यदि वे अपने गुणों का सदुपयोग करें तो उनको अनन्त आगी प्राप्त हो सकती है। उसने अपना उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उनको निवाया कि जीवन का प्रत्येक क्षण बहुमूल्य है और उसको गले कामों में प्रयोग किया जाना चाहिए । उसने किसी मानव को तुच्छ नहीं समझा परन्तु अनानी और क्रूर व्यक्ति को भी प्रोत्मा- हन दे कर ऊपर उठाने का प्रयास किया। उसने ऐसे लोगों को बताया कि परमेश्वर उनने अपनी गन्तान नमान प्रेम करता है और उनका चरित्र भी उत्तम बन सकता है। एक प्रकार मान्न अवस्था में यीशु ने अपने बाल्यकाल मे ही दूसरों की भलाई के लिए कार्य किया। उनके विद्वान पक्षक नया उनके नाई भी उसको कार्य को करने से नहीं रोक सके। उसने जीवन अभिमाद को सच्चाई के नाय स्पष्ट किया गोंकि वह मंगार की ज्योनि बनने जा रहा था।
वपतिस्मा
जय ममीर के मार्वजनिर मेया-गाय पाने पा गमय गया,
तो गर्वप्रथम यह यरदा नदी में गया और उगो यूहना मे यतिस्मा
त्रिया।
पूहमा को मुशिदाता fए मार्ग प्रान परम पे लिए भेजा
गया था। उसने जंगल में प्रभार पराए परा पा, " परमेश्वर पा
राज्य निरट आ गया है मन पिराभा और मुगमागार पर बिन्याग
परो।"१ उमरा उपदेन मुनने ये गि विशाल भोट एविही
जाती थी। और लोग पापा राजगीर पर नागदन
नदी में पस्मिात
परमेश्वर पटना या मा म करा दिला पाहिघिमी दिन
मगीर, उमरे पान पार जर दन पा प्राय रमा।
।
मरएम १५
गगाह का जीवन
मायामागे या प्रतिना भी की थी कि उसे एक निन्ह दिया
नाएगा जियगे यह गमा गये कि मसीह कौन । जब यीशु उसने
पास रचाती सा ने उगो मग पर गुरविणेप चिन्त, देगे और
उगमः पवित्र जीवन मा आभाग गा गार उगगे नाहा, " गो सेरे हाय
ग वर्णमा की आवश्यकता है, और मेरे पाग आया है।?"
"गीण उगा या उत्तर दिया कि अब ती गादी होने ,
गामिनी नग गव धार्मिकता को पूरा करना उचित
और वो यह कानो उगम मगमगल पर सीसी
मग यातिदिमादीमी ममीन ली थी।
मी मामा मलिनाला न गरदा नदी स्वच्छ जल में ले गया
और का उमर लोगों में सामने उसकी बानिरमा दिया ।
योग बातिमा लिए नहीं लिया कि उसे पापांग परनाताप
गरिने जानमाला भी, गागि गागामी पाप नही किया था।
मामा उदारण प्रगत किया।
14 पानी निकाल कार पर आगामी उगा पटने टेक कार
प्राना की रात गल गया और गहिमा की किरणें उग पर
नगगी, "मीर उमा परमेश्वर न. आत्मा नो गनार की ना
और 31रमात ना।"२ उसका मुगाथा परीर
कांगमा प्राममान उठा।
कि. या पायाणी, “यः गंग प्रिय पुन, जिगगे में
मग पर पानीमा मामा आ गार ठहरी ना हमारे
F: म मा पनीर भी। मिलाना हमारे लिए एक
MPAWA KA
चपतिस्मा
४३
उदाहरण वन पर आया; और जिम प्रसार परमेसर ने निश्चिा
प में मनोह की प्रार्थना गुनी, उमी प्रार पर हमारी प्रार्थना
गुनेगा । अत्यन्त तुच्छ, अन्यन्त पापो तया अत्यन्त पणित मनुप्प भी
अब उमा द्वारा परमेश्वर के निकट पहुच मरते हैं । जब म पीस
ये नाम में परमेश्वर पिता से निपट पाते हैं तो वही म्वर्गीय वाणी
हमें भी गुनाई देती है जो योग यो मुनाई दी थी : “ यह मेरा प्रिय
पुत्र है, जिससे में प्रमान है।
॥
८६ मसीह का जीवन कहां जा रहा था तो वह उसको परीक्षा करने के लिए वहीं पहुंच गया। जब यीशु यरदन से लौटा तो उसका चेहरा परमेश्वर की महिमा से प्रकागमान हो रहा था परन्तु जंगल में प्रविष्ट होते ही वह महिमा की ज्योति अन्तर्धान हो गई थी। उस पर संसार के पापों का भार लदा हुआ था, उसके चेहरे से ऐना शोक और व्यथा प्रकट हो रही थी जैसी मनुष्य ने कभी अनुभव नहीं की। वह पापियों के लिए ऐसा कष्ट सहन कर रहा था। आदम और हव्या ने अदन की वाटिका में वजित फल को खा कार परमेश्वर की आना का उल्लंघन किया था। उनकी अवज्ञा- कारिता में पाप, दुःन तथा मृत्यु आयें । मसीह आनाकारिता का उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए संमार में आया। जगल में चालीस दिन तक उपवान करने के पश्चात्, अपने पिता की इच्छा से पृथक हो जाने की आशंका में उसने भोजन तक प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया। हमार आदि माता-पिता के मन्मुम जो परीक्षाएं आयीं उन में प्रमग परीक्षा नूव को शान्त करना था। इन लम्बे उगवान द्वारा यीशु की यह स्पष्ट करना था कि भूग को भी नियंत्रित किया जा जहान मनुष्य की धारा परीक्षा एमालर करता है कि भूम ने मानव शरीर दुर्वल हो जाना है और मस्तिष्क पर भी आवरण या आता है । तब जान नमा लेता है कि उनके द्वारा मनुष्य को गरलता ने चला गाकर नष्ट किया जा सकता है। परन्तु मसीह दाहिनी ओर से चित्र में- "यीशु ने उगो (गतान) पहा; यह भी जिला, किन आने परमेश्वर की परीक्षा न कर।
} ४६ मसीह का जीवन कहाँ जा रहा था तो वह उसको परीक्षा करने के लिए वहीं पहुंच जब यीशु यरदन से लौटा तो उमका चेहरा परमेश्वर की महिमा से प्रकागमान हो रहा था परन्तु जंगल में प्रविष्ट होते ही वह महिमा की ज्योति अन्तर्धान हो गई थी। उस पर संसार के पापों का भार लदा हुआ था, उसके चेहरे से ऐमा शोक और व्यथा प्रकट हो रही थी जैसी मनुष्य ने कनी अनुभव नहीं की। वह पापियों के लिए ऐसा कष्ट सहन कर रहा था। आदम और हब्बा ने अदन की वाटिका में वजित फल को खा कर परमेश्वर की आना का उल्लंघन किया था। उनकी अवज्ञा- कारिता में पाप, दुःन तथा मृत्यु आयें । मसीह आज्ञाकारिता का उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए संसार में आया। जगल में चालीस दिन तक उपयोग करने के पश्चात्, अपने पिता की इच्छा से पृथक हो जाने की आगंका में उगने नांजन तक प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया। हमारे आदि माता-पिता के सन्मुग जो परीक्षाएं आयीं उन में प्रमग परीक्षा नूग को शान्त करना था। इस लम्बे उगवान द्वारा बीग का यह पष्ट तरना था कि भून को भी नियंत्रित किया जा नाता है। । गतान मनुष्य की दीमाग परीक्षा लिए करता है कि भूप ग मानव पीर बंद हो जाता है और मस्तिष्क पर भी आवरण या जाना है। तब संतान नमज लेना है किसके द्वारा मनुष्य को सरलता से छला जा कर नष्ट किया जा सकता है। परन्तु मसीह । दाहिनी ओर के चित्र नं- " योग ने उनसे (ोतान) पहा; यह भी जिया कि प्रा आने परमेश्वर की परीक्षा न कर।
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४६ मसीह का जीवन कहां जा रहा था सो वह उसको परीक्षा करने के लिए वहीं पहुंच गया। जब यीशु परदन ने लौटा तो उनका चेहरा परमेश्वर की महिमा से प्रकाशमान हो रहा था परन्तु जंगल में प्रविष्ट होते ही वह महिमा की ज्योति अन्तर्धान हो गई थी। उस पर संसार के पापों का भार लदा हुआ था, उनके चेहरे से ऐमा शोक और व्यथा प्रकट हो रही थी जैसी मनुष्य ने कनी अनुभव नहीं की। वह पापियों के लिए ऐसा कष्ट सहन कर रहा था। आदम और हव्या ने अदन की वाटिका में वजित फल को खा कर परमेश्वर की आगा का जयघन किया था। उनकी अवजा- कारिता में पाप, दुःय तथा मृत्यु आयें । मसीह आनाकारिता का उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए संमार में आया। जगल में नालीन दिन तमा उपवान करने के पश्चात्, अपने पिता की टच्छा से पृथक हो जाने की आगंगा में जाने भोगन तक प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया। हमारे आदि माता-पिता के गन्मुग जो परीक्षाएं आयीं उन में प्रमग परीक्षा प को शान्त करना था। इन लम्य उपबाम द्वारा यी की यह स्पष्ट करना था कि भूष को भी नियंत्रित किया जा गवान मनुष्य कोटक बाग परीक्षा लिए करता है कि भून में मानव शरीर दुर्वन्न हो जाता है और मस्तिष्क पर भी आवरण घर जाला । तब नाग नमत देना है किमी द्वारा मनुष्य को परवा ने चला जाकर नष्ट किया जा सकता है। परन्नु मसीह - दाहिनी ओर से निम में- "यीशु ने उगी (गैतान) कहा; यह भी का, कि तू प्रनु अरने परमेश्वर की परीक्षा न कर। "
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८८ मसीह का जीवन का उदाहरण हमें यह शिक्षा देता है कि प्रत्येक अनुचित इच्छा पर मनुष्य प्रवल हो सकता है। हमारी भूख हम पर गासन नहीं कर सकती; उस पर हमारा नियंत्रण होना चाहिए। जब शैतान प्रथम बार मसीह पर प्रगट हुआ तो वह ज्योति का दूत प्रतीत हो रहा था। उसने स्वयं को स्वर्गीय संदेशवाहक बताया। उसने मसीह से कहा कि पिता परमेश्वर की उसके प्रति कदापि यह इच्छा नहीं है कि इस प्रकार का कष्ट सहन करे। उसने कष्ट सहन करने पर सहमति प्रगट कर दी है और यही पर्याप्त है। जब यीशु भूख की पीड़ाएं महन कर रहा था तो शैतान ने उससे कहा: " यदि तू परमेश्वर का पुत्र है तो इन पत्थरों से कह दे कि ये रोटियां बन जाएं ?" ? परन्तु यीशु अपने जीवन द्वारा हमारे लिए एक आदर्श स्थापित करने के लिए आया था, समलिए उनको भी वही कष्ट सहन करने थे जो हम करते हैं; वह अपनी भलाई के लिए आश्चर्य कर्म भी नही गार गाता था । उसके आश्चयं कम तो सदा ही दूसरों की भलाई के लिए होते थे। जतान की मांग के उत्तर में उसने कहा : " लिया है कि मनुष्य केवल रोटी ही में नहीं, परन्तु हर एक बगन से जो परमेश्वर के मुख से निकलना है, जीवित रहेगा। म प्रकार उसने स्पष्ट कर दिया कि अपने लिए भोजन की व्यवस्था करने की अपेक्षा, परमेश्वर के वचन के पालन का कहीं अधिया महत्व है। जो लोग परमेश्वर की भानाओं का पालन करते उगने साथ परमेश्वर की यह प्रतिना है कि उनको इस जीवन की २ मत्ती ४ २ गती ४:४
परीक्षा
गभी यायश्यप यस्तुएं दी जाएंगी तमा मानेवाले जीवन भी भी
उगरे माप प्रतिमा की गई है।
मंतान दम प्रपम तपा अत्यन्त मरल्यपूर्ण परीक्षा में मनोर पर
प्रय न हो गरा, यर फिर उगे या गरम में मदरसे परे पर से
गया और उसमे यहाः
।
पनि परमेश्वर पा पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा :
पोरिपिा है. रिया सेरे विषय में अपने स्वर्गदूतो पो मामा
देगा; और ये तुरे हापा टाप उठा लंगे, यही ऐमा न हो मितेरे
पाया मोपरपर गटेगरी। मत्ती ४:६।
"
भान ने यहा परमेश्वर या यपन उना परोए मगीर में
उसारण पा अनुगप दिया। परतु या प्रतिमा उनो लिए नहीं
जो जान-या पर गारा मोर। परमेश्वर ने मीर को
पर आसानी दी थी पिया पने आप को पगरे में नीचे गिरा
है। योग मा पो नमन परले गिा नहीं पर माता पा,
उगने पर.
"प भी लिया frगू प्रा या परमेचर मी परोसा न पर।"
में अपने ग्यगी frnीद-मास पर पूरा भरोमारा माहित
पर. में उन म्यान पानी नाना पालि सोना में नहीं
भेजा हमें पर पानी परना पात निगरे एमने में
यतिरिना।
परिमेयर सरानिधान । और यमा परे लिए र
मन्तिम परि अनागिताको अपम्पा में भी
मसीह का जीवन । वे सुरक्षित हैं। परन्तु यह कल्पना मात्र है। परमेश्वर उनके पाप क्षमा कर देता है जो उससे क्षमा मांग कर पाप को त्याग देते है। परन्तु जो जान-बूज कर पाप करते रहते हैं; वह उनको आशीप प्रदान नहीं करेगा। शैतान अब अपने वास्तविक रूप में उसके सन्मुख आया। वह अन्ध- कार के राजकुमार के रूप में प्रकट हुआ । वह यीशु को एक ऊंचे पर्वत के निखर पर ले गया और उसने उसे संसार के समस्त राज्य दियाए । नगरों पर सूर्य की अद्भुत किरणें चमक रही थी, संगमरमर के बने महलों में चहल-पहल दिखाई दे रही थी। गुन्दर वाटिकाएं तथा उद्यान फल-फूलों से लदे हुए भव्य दिखाई दे रहे थे । खेत तथा अंगूरों के बाग भी दिखाई दे रहे थे, तब गंतान ने कहा : मत्ती ४:१॥ यदि तु गिर कर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुजे दे दूंगा। एम. क्षण तक पीनु ने उन दृश्य को देखा । फिर उसने उस ओर से अपना मुगा फेर लिया। जैतान ने आतपंक ज्योति में नंगार को उनके सन्मुग प्रस्तुत किया था, परन्तु मुक्तिदाता ने इस उपरी गुन्दरता के भीतर देना । उसने गंगार की दुष्टता तथा पाप और परमेश्वर ने पृथकता को देगा । ये सभी कष्ट मनुप्पो हारा तान की उपासना और परमेश्वर ने पृथक हो जाने के परिणामस्वरुप उत्पन्न दा थे। मसीह का हदय इन लालमा पूर्ण था कि उन नब का उद्धार कर दे जो गटक गए है। वह अवन की वाटिका में भी अधिक भव्य स्पान गंगार को उपलब्ध कराने के लिए लालायित था । यह मनुष्य को पावर के मार्ग पर ले आने के लिए उत्सुक था। मनुप्यो के लिए ही वह इन परीक्षाओं का सामना कर रहा था। उसको इन परीक्षा पर प्रबल या विजयी होगा पा निमगे ये भी परीक्षाओ पर विजयी हो ग और स्वर्गदूतो मी समाना प्राप्त पर गर्व और परमेर पी गगान बहलाने के अधिकारी वन गमें। मंतान ने उन गिर पर प्रणाम करने की माग प्रामा, गगीद ने उरार दिया: "हे मैतान दूर हो ना, पोयि लिया है. पिपू अपने प्रभु परमे- पर यो प्रणाम पर, और सेवन गी मी मागना पर।" मत्ती ४.१०॥ गमार पे प्रति प्रेम, अधिकार पी वागना और जीरन या ग- गभी एप जो मनुप्प गो गो सार भारपित परी जगरा परमे- पर मी उपामगा परने से रोर देहा, म अन्तिम परीक्षा में मीर में गन्मुग प्रस्तुा पिया गया। शैतान ने गागामिति ऐश्वर्य मगीर पो देने की प्रतिमा मी यावर दुष्टा गिरानी गो सीमार पर। दमी प्रसार भान आग भी अनुपिा पायों दारा लाभ प्राप्त परने गनुप्पोमा प्रेरित । पर हमारे पान में पुगाते हुए रा है, “म ममार में मपा प्राप्त रने लिए नुमा गरी गया परनी चाहिए। मगर सापान करणे में हिशेष प्रपाम पी जायपता नहीं है। मेरे मुहार पाल परा और में गुमर। धन-गनान, नादर. गम्माग और प्रगामा । मर गुजारा या गीगार परन गे हम मंतान की उपासना मरत है। गा पपस में मिान प्रान हा। मगीर ने हमें बता दिया मि परीक्षा रे गमय हने ा सरना पादित जसरि उगने मंजान गेरा, "दूर। रा, रीमान पाला दम भागा मी भाना न पर गा।
५० मसीह का जीवन वे सुरक्षित हैं। परन्तु यह कल्पना मात्र है। परमेश्वर उनके पाप क्षमा कर देता है जो उससे क्षमा मांग कर पाप को त्याग देते हैं। परन्तु जो जान-बूझ कर पाप करते रहते हैं; वह उनको आशीप प्रदान नहीं करेगा। शैतान अब अपने वास्तविक रूप में उसके सन्मुख माया। वह अन्ध- कार के राजकुमार के रूप में प्रकट हुआ। वह यीशु को एक ऊंचे पर्वत के शिखर पर ले गया और उसने उसे संसार के समस्त राज्य दिखाए। नगरों पर सूर्य की अद्भुत किरणें चमक रही थीं, संगमरमर के बने महलों में चहल-पहल दिखाई दे रही थी। सुन्दर वाटिकाएं तथा उद्यान फल-फूलों से लदे हुए भव्य दिखाई दे रहे थे । येत तथा अंगूरों के वाग भी दिखाई दे रहे थे, तब मैतान ने पहा : मत्ती ४:२। यदि तु गिर कर मुझे प्रणाम करे, तो मै यह सब कुछ तुने दे दूंगा। एक क्षण तक यीशु ने इस दृश्य को देखा । फिर उसने उस ओर से अपना मुन फेर लिया। जैतान ने आयर्पक ज्योति में गंगार को जग मनमुरा प्रस्तुत किया था, परन्तु मुक्तिदाता ने इन ऊपरी मुन्दरता के भीतर देगा । उगने गंगार की दुष्टता तथा पाप और परमेश्वर में पृथकाता को देखा । ये मनी कष्ट मनुष्यों द्वारा मैतान की उपासना और परमेयर से पृथक हो जाने से परिणामस्वरूप उत्तम हुए थे। मनीह का हदय मदालसा ने पूर्ण था फि उन सब का उद्धार पर जो भटक गए है । वह अदन की वाटिका में भी अधिक नव्य रमान मंगार की उपलब्ध कराने के लिए लालायित था । वह मनुष्य को परमेश्वर के मार्ग पर ले आने लिए उत्सुक था । मनुष्यों के लिए हो वह इन परीक्षाओं का सामना कर रहा था। उसको इन परीक्षा पर प्रथम सपा विजयी होगा मा निगगे ये भी परीक्षाओ पर विजयी हो गर और ग्वर्गदूतों पी गमानता प्राप्त पर मरें और परमेश्वर पीगगापराने में अधिकारी या मरें। मंसान ने उमगे गिर पर प्रणाम करने को माग प्रापी, मगीत नेसर दिया: "तान दूर हो जा, मारिपिा है, जितू जाने प्रभु परमे- र प्रणाम पर, और चल उगी पी पागमा पर।" मती .१०। गगार प्रतिम, अधिपार पौ यामना और जीवन पा गवं- गभी गुम जो मनुष्य पोसती गोर आपिा परी उमरो परम- पर की उपागा परने मे रोरदा, हग अन्तिम परीक्षा में मगीर पे मामुग प्रा लिया गया। संतान ने मानासि धन-ममत्ति ऐश्वर मगीर यो देने की प्रतिमा पी रियर दुष्टता के मिसालो यो रवीगार पर है। इगी प्रसार तान आज भी अनुचित पार्यों दारा पाभ प्राप्त पर पाए मनुप्पी या प्रेरित रसा। या रगारे पान में पुगगाते हुए रहा है, "ग मनार में मपा प्राप्त रा से लिए नुमा गरी मया परनी चाहिए । सत्य पा पापरने पे लिए विशेष प्रयाग परस पी जायणपता नहीं है। मेरे गुशाय पा पा न परा और में नुमरा धन-सम्पति, आदर- सम्मान और प्रममता दूगा।" उग गुतावा पो स्वीकार परल से हमतान पी आमना करते हैं। मगे यल में पितान प्राप्त हाता। मगीर नेने या यिा हैसि परीक्षा के समय हमें क्या परना पाहिए जर रि उमने गंतान गे पहा, "दूर हो जा," परीक्षा लन पालम मामा सरी पटना न पर ममा। ।
५२ मसीह का जीवन विद्रोहियों का प्रमुख नेता घृणा, क्रोध तथा व्याकुलता से पूर्ण हो कर संसार के मुक्तिदाता की उपस्थिति से भाग निकला। प्रतिरोध कुछ समय के लिए समाप्त हो गया। आदम जिस परीक्षा में असफल रहा था, मसीह उसमें पूर्ण रूप से विजयी हुआ। सो इस प्रकार हम परीक्षाओं को रोकने में सफल हो सकते हैं । प्रभु हम से कहता है, " शैतान का सामना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा, परमेश्वर के निकट आओ तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा।" याकूब ४ :७, ८ ।
प्रारम्भिक सेवा-काल
जा-मे मसीरियरन न पा आया जहां परमा
बसम्मादापागवारगरपा। उग गमय घर
भरिया द्वारा उगो पाम पुरपिा भेजे गाजा पार
पापं सपा यामि अधिगर पिया परर'
पे। ये उगाए पनि पापा ममागा.पा रियार या
पर भरिप्पागा' या मूगा। ममा गागर में
उमर परा, "मैं ही। पिर उस गि।
"
रिपो' सामिाा भजन या पार
गूस पिएर में मापा'
गाजर दिया, मारामविकाग!
में पुस्ताय TOTE. frगुरपामा
.
मसीह का जीवन प्राचीन युग में जब एक राजा एक देश से दूसरे देश की यात्रा करता था तो उसके रथ के आगे मार्ग सुधारने के कुछ व्यक्तियों को भेजा जाता था। उनको पड़ काटने होते थे, मार्ग के पत्थर हटाने होते थे और गढ़हों को भरना पड़ता था ताकि राजा का मार्ग सीधा बन सके । सो जब स्वर्ग का राजा यीशु इस पृथ्वी पर आने वाला था तो उसका मार्ग सुधारने के लिए यूहन्ना वपतिस्मा देने वाले को भेजा गया ताकि वह लोगों को अपने पापों से पश्चाताप करने की गिक्षा दे। जब यूहन्ना यरूशलेम ने आए दूतों के प्रश्न का उत्तर दे रहा था तो उसने यीशु को नदी के तट पर खड़े हुए देखा । उसका चेहरा चमकने लगा और उसने अपने हाथ फैलाते हुए कहा : तुम्हारे बीच एक व्यक्ति सड़ा है जिसे तुम नहीं जानते; अर्थात मेरे बाद आने वाला है, जिसकी जूती के बन्ध, मैं सोलने योग्य नहीं।" यूहना १:२६, २७ । लोगों पर उनका गहरा प्रभाव पड़ा, मसीहा उनके बीच में सड़ा था । वे उगता ने उग व्यक्ति को सोजने लगे जिसके विषय में यूहमा ने कहा था । परन्तु यीशु भीट में मिल गया था इसलिए लोग जीन देगा मो। हमरे दिन फिर यहना ने वीग को देखा और उसकी भोर संकेत फार तर निल्लाकर कहा, "देखो, परमेश्वर का मेम्ना जो जगत के पाद उठा ले जाना है। किर मामा ने लोगों को वह निन्ह बनाया जो मसीह के बपतिम्म नमय उनने देगा पा, "मैने देखा और गवाही दी है," फिर उगने पहा, "कि यही परमेश्वर का पुत्र है।" गृहन्ना १:२९, ३४ ।
प्रारम्भिर मेवा-पार
आदरया भय सपा नापमं घषित अवस्या में मुनापारी ने
योग मीनार देगा। ये परम्पर एर दूगरे में पूछन र पपा पर
मगीर
उत्तरोने देगा रि यौन में मागारिय भय या माया मोई
पिन नही । उमरे पात्र मागपि निधन लाग पहना।
पग उगा पीर सपा पोहए पेहरे पर पुछ एंगी विनापी
जिगने इन एदयो मा पानि पर दिया था। मरे पर पर
अधिपार तथा प्रतिष्ठा विचमा पीगिरी दृष्टि रापा मगाशी
अलौगिर गहराया अपयनीय प्रेम प्रगट हो रहा पा ।
पर परारंम मे ना दूत भेजे गए पे ये पीन पी और आर.
बित नहीयूरमा ने धंगे मस नहीं पर थे जिनरा गाने पी
जारे दाय में इच्छा पी।ये मोहा पो पर महाा पिजापा
में प्रगट होगी आगा गाए ५ पे। उन्ही देगा fr पो मा
युल नहीं पर रापा, मायेरामा पर मामट गए।
दूसरे दिन पिर यूहमा ने योग पो दगा और पिर पर गि
उठा। "दंगा, परमनर या मेम्मा है।' या रे दापि
उगरे मिरट गडे ए पे, ये योग में पीछे हानिए । उता गरी
मिक्षाी पो गुना और उगरे निप्प या गान दा निया में
में सिम सपा दूगरा या पाटियाग मी मा
भाई मान पापी ये पागमापा जिगरा गाम उगा पारग
रगा।दूगर हिमपी-पागोममर मार्ग में ममी र अन्य
निप्प पापा famir-तुग पारंग हो -
तुम उमा भेट पी. एम मित्र ITI भाग।
मम ममापीपर मामा भागमभागर
पाररिया पर मारारारा
मौर it मित्र या मारी गोर दार मनमानी का
मसीह का जीवन । करना चाहिए। जैसे ही उसे यीशु का ज्ञान हो जाता है, उसे दूसरों को बताना चाहिए कि उसे कसा आश्चर्यजनक मित्र मिल गया है। यह कार्य सभी छोटे-बड़ों द्वारा किया जाना चाहिए। गलील के काना में यीशु अपने शिष्यों सहित एक विवाह के भोज में सम्मिलित हुआ। उपस्थित जनों के सन्मुख वहां उसकी आश्चर्य- जनक शक्ति का प्रदर्शन होना था। ऐसे अवसरों पर उस देश में दाखरस पिलाने की प्रथा थी । भोज समाप्त होने से पहले दाखरस घट गया। दाखरस का अभाव अतिथि- मत्कार का अभाव माना जाता था और इसको बहुत बड़ा अनादर समझा जाता था। दासरस के अभाव के विषय में योग को सूचित कर दिया गया। उसने नौकरों को आज्ञा दी कि वे पत्थर के सभी छः बढ़े मटकों को पानी से भर दें, फिर उसने कहा, अव निकाल कर भोज के प्रधान के पास ले जाओ।" यूहन्ना २:८ । पानी अब दासरस बन गया था। यह दाखरस पहले दिए गए दासरन से कहीं अधिक उत्तम था और यह सभी के लिए पर्याप्त भी था। इस आश्चर्यकम को करने के पश्चात् ही यीशु वहां से चला गया था। उनके चले जाने के पश्चात् ही अतिथियों को ज्ञात हुआ कि उसने क्या किया था। विवाह के भोज के अवसर पर मनीह का यह उपहार एक चिन्ह पा। जल बपतिका प्रतीक और दादरममयमा का प्रति- निधित्व करता है जो कि गंगार के लिए बहाया जाने वाला था। वीगुमेको दायरल बनाया यह उत्तेजित करने वाली मदिरा नही धीमी गदिरा नगा उत्पन्न कारके दुराचार का कारण बनती और इसका प्रयोग करने के लिए परमेश्वर ने हमें वजित किया है। "सायमध व्हा मारने वाला और मदिरा हल्ला मचाने वाली जो
प्रारम्भिर मेवा-ल
U
पोई उगरे पारण पूर यरता है, पर यदिमान नहीं।" "रापि
अन्त में पर मपं की नाई गरे और TT TRIT गा
है।" नीतिवचन २०१, २३ ३२ ।
दम भोज में जो दागरण प्रयोग किया गया यारपुर राया मी
अगरो पा रम था। यह बैगा ही रख पा जिगो विप में पनागर
भविष्यमा न कहा है, "जिम माति दागोमो गु में जब
नया दागमधु भर आता है यसरि उगमें आगार।
यशायाह ६५८॥
विवाह में सम्मिलित होरर यीशु न यह प्रगट गिगे अय.
मरो पर एक दूसरे से भेंट परला आयपयर । यह मांगी मा प्रगत
देखना चाहता था। प्राय वर उनी परा में जा पर उममेंट पगा
था और उनी चिन्ताओ और प्यापुराओ या HIT में पी
सहायता पिया परता रहता था, और उन पर परमेश्या प्रेम
सया उसी भाई या स्पष्ट परता रहता था।
यह जहा कही भी हाता था, गदा ऐमसी पारंपा।
जब सभी उसरे ईश्वरीय मन्दश का नाप पिरा गाण
जागा या, यह मुरित ये मत्य या उग पर गष्ट पाशा पा।
एप दिन जब यह गामरिया देश महाना नागे । गा
पा तो यह एप पंग पर विधाम पर या या| THE TET
एर ग्त्री पुए पर जन भरन या. और T417
जल मागा।
स्त्री या यह मुार या आम मा ram
जाति मे मा म प प य । पर ममी. Prir
पनि यह उगम मागीता या 13.Ter
पर मनरावी या या यधिर HIT
मसीह का जीवन करना चाहिए । जैसे ही उसे यीशु का ज्ञान हो जाता है, उसे दूसरों को बताना चाहिए कि उसे कैसा आश्चर्यजनक मित्र मिल गया है। यह कार्य सभी छोटे-बड़ों द्वारा किया जाना चाहिए। गलील के काना में यीशु अपने शिष्यों सहित एक विवाह के भोज में सम्मिलित हुआ। उपस्थित जनों के सन्मुख वहां उसकी आश्चर्य- जनक शक्ति का प्रदर्शन होना था। ऐसे अवसरों पर उस देश में दाखरस पिलाने की प्रथा थी। भोज समाप्त होने से पहले दाखरस घट गया। दाखरस का अभाव अतिथि- सत्कार का अभाव माना जाता था और इसको बहुत बड़ा अनादर समझा जाता था। दाखरस के अभाव के विषय में यीशु को सूचित पार दिया गया। उसने नौकरों की आज्ञा दी कि वे पत्थर के सभी छ: बढ़े मटकों को पानी से भर दें, फिर उसने कहा, " अब निकाल कर भोज के प्रधान के पास ले जाओ।" यूहन्ना २:८ । पानी अब दाखरम बन गया था। यह दाखरस पहले दिए गए दायरस से कहीं अधिक उत्तम था और यह सभी के लिए पर्याप्त भी था। इन आरचयंकर्म को करने के पश्चात् ही यीशु वहां से चला गया या। उस चले जाने के पश्चात् ही अतिथियों को ज्ञात हुआ कि उसने पपा पिया था। विवाह के भोज के अवसर पर मनीह का यह उपहार एक चिन्ह था। जलवपतिन्मे का प्रतीक और वापरम उसको रमत का प्रति- निधित्व करता, जो कि गंगार के लिए वहाया जाने वाला था । पीशु ने जो दायरा बनाया वह उत्तेजित करने वाली मदिरा नही भी। ऐगी गदिता नमा उत्पन्न कार दुनानार का कारण बनती नीरममा प्रयोग करने के लिए परमेश्वर ने हमें जिन किया है "दारमध व्हा करने वाला और मदिरा हल्ला मचाने वाली है। जो प्रारम्भिर मेवा-भाल " पोई उग पारण पूफ परता है. यह बुद्धिमान नहीं।" १ " क्योकि अन्त में यह गपं सी नाई रमता है और परल में ममान माटता है।" नीतियचन २०:१; २३.३२ । ग भोज में जो दागरण प्रयोग किया गया यह शुद्ध तथा मीठे अंगरो पा रग था। यह पंगा ही रग था जिगरे विषय में यशायाह गविप्पदासा ने पता है, “जिग भाति दाग के रिमो गुन् में जर नया दागमय भर आता है गयोगि उममें आशीप है। पगापार ६५:८। विवाह में मम्मिस्ति होर यो ने यह प्रगट दिया कि ऐमे अव- गरो पर एक दूसरे से भेंट यरना आवश्यक है । यह लोगो को प्रमान दंगना चाहता था। प्राय. यह उनपे परी में जा पर उनने भेंट परता पा और उनयी चिन्ताओ और प्याकुलताओ यो भुलाने में उनकी सरायना पिया परता रहता था, और उन पर परमेश्वर के प्रेम तपा उगी भलाई यो स्पष्ट करता रहता था। पर जहा यही भी होता था, सदा ऐसे ही यायं परना रहता था। जब पभी उसपे ईश्वरीय सन्देश यो सुनने में लिए ददय को गाला जाता था, यह मुश्ति ये मत्य यो उग पर स्पष्ट कर देना था। एप दिन जब यह सामरिया ये देश में होता हुआ आगे जा रहा पा तो यह एक पंए पर विधाम करने के लिए बंट गया । उमी गमय एप ग्त्री गुए पर जल भरने आई, और उगगे जगने पीन के लिए जा मांगा। स्त्री यो पर गुन पर पहा आरप हा पोरि यादी मामरी जाति मोगा में पा मरते थे। परन्तु ममीर में उगम हा कि यदि यर उमगे मामती ता यह उमे पीने के लिए जीवन माजदेना, यह गुनार को या आप अधिर या गया। नर पोन ने पहा .
५८ मसीह का जीवन जो कोई उस जल में से पीएगा, जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्त काल तक प्यासा न होगा; वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिए उमड़ता रहेगा।" यूहना ४:१३, १४ । जीवन-जल का अर्थ पवित्र आत्मा है। जैसे कि एक थके हुए यात्री को शीतल जल की आवश्यकता होती है, वैसे ही हमारे हृदयों को परमेश्वर की आत्मा की आवश्यकता है। वह जो ऐसा जल पीता है, कभी प्यासा न होगा। पवित्र आत्मा हमारे हृदयों में प्रेम उत्पन्न कर देता है। उससे हमारी लालसाएं शान्त हो जाती हैं और हम सांसारिक धन, आदर तथा आमोद प्रमोद की ओर आकर्षित नहीं होते हैं। और इससे हमारे हृदय में ऐसा आनन्द अनुभव होता है जिसको हम दूसरों को भी देना चाहते हैं। यह हमारे हृदय में जल के तोते के समान उमड़ने लगता है और उससे चारों ओर आशीप वह निकलती है। और जिसके अन्दर परमेश्वर की मात्मा वास करती है, वह मनीह के साथ उसके राज्य में अनन्त काल तक रहेगा । विश्वान के माय नको हृदय में ग्रहण करना ही अनन्त जीवन का आरम्भ है। मसीह ने उन स्त्री को बताया कि यदि वह उससे मांगे तो वह गे बरमूल्य आगीप प्रदान करेगा। नी प्रकार यह हमें भी आशीप देतास्नीने परमेश्वर की आनाओं का उल्लंघन किया था और मनोद ने उनपर प्रन्ट कर दिया कि वह उनके जीवन के पापों मे पनिनित । परन्तु नाव ही उसने उस पर यह भी स्पष्ट कर विका शिकागका मित्र और उसने अंग करता है तथा उसके हृदय में उनके प्रति ममा तथा स्नेह है और यदि वह अपने पापों को त्यागने पर सहमत हो तो परमेश्वर उसे अपनी नन्तान के समान रहण करने को तैयार है।
प्रारम्भिर मेवा-या
उगे यह जानरर पितनी प्रसन्नता हुई होगी! प्रमग्न प्रस्ट परती
ई यर नगर में पहुंच गई और उगने लोगो मे यहा कि वे चल पर
पीसोदेगें।
सोनोग गरे गाय पुए पर आए और उन्होंने उससे पुछ गमय
पर यही रहने का अनुरोध पिया । यह उन गाय दो दिन ता रहा
योर उगने उनको गिक्षा दी और यात लोगो ने उगरे वपन यो मुना।
उन्होंने अपने पापी मे पश्चात्ताप पिया और उसे अपना मुशिदाता
रसार परी उस पर विश्वाम दिया।
अपने गेवा-गाल में मगीह दो बार अपने नगर नासरत में गया।
प्रपन बार यह मन दिन ये यहा पे आराधनाटय में गया ।
यहाँ हम मगीहा ये यापों विषय में यशायाह की भविष्यवाणी
पदो-गि प्रकार यह पगालो यो सममापार गुनाता, दुगियों को
मान्त्वनादना, अन्धो यो दृष्टिदेता तथा पुचले गए लोगो यो छुडाता था।
Pिr. उगने लगा पो याया पि यह भविष्यवाणी आज उन
समग पूरी हुई। यह ये पायं स्यर कर रहा था।
नगमा पो गुरर गुराने वाला ये हृदय आनन्द मे भर गए।
जना विनाम पियादि जिग मुग्निदाता पे आगमन यो प्रतिमा यी
गई. पी. पर योगी । उनपे हृदय पविर आत्मा की गति से
पित गए और उन्ली प्रभु की स्तुति तया जपनयार दिया।
पिर उनी म्मरण हो आया कि पीनु रिम प्रभार एप या ये
कारयोग गाया। दो ओर पार उगको पाईपी
दूराम में गुरु से माप पायं परने दगा पा। यद्यपि जीवन भर
उमने प्रेम तपा दसपूपं पापं रिए पे उनको पिर भी विनाम न
आमिनी मगी।
६० मसीह का जीवन ऐसे विचारों द्वारा उन्होंने शैतान के लिए अपने मस्तिष्कों को नियंत्रित करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। फिर मुक्तिदाता के विरुद्ध उनके मन में क्रोध उत्पन्न हो गया। वे उसका विरोध करते हुए चिल्लाने लगे और उसको मार डालने का विचार करने लगे। वे उसे एक ऊंचे पर्वत पर ले गए ताकि उसे ढकेलकर नीचे गिरा दें। परन्तु स्वर्गदूत उसकी सुरक्षा के लिए उपस्थित थे। वह चुपचाप भीड़ में से निकल गया और वे उसे न पा सके। दूसरी बार जब वह नासरत में आया तब भी लोग उसे स्वीकार करने के लिए तैयार न हुए । वह चला गया और फिर कभी नासरत न लीटा। मसीह ने उन लोगों के लिए कार्य किया जो उसकी सहायता के इच्छुक थे और समस्त स्थानों पर लोगों की भीड़ उसे घेरे रहती थी। जब यह शिक्षा देता तथा चंगाई प्रदान करता था तो लोग आनंदित हो उठते थे। उस समय पृथ्वी पर स्वर्ग आ जाता था और लोग करणा- निधान मुक्तिदाता को देख कर आत्मविभोर हो जाते थे।
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६२ मसीह का जीवन परन्तु उनकी आशाएं सांसारिक महानता प्राप्त करने पर केन्द्रित थीं। उनके हृदय में धन-सम्पत्ति, पद तथा अधिकार की लालसा थी और इसको वे अपनी कल्पित धार्मिकता का प्रतिफल मानते थे। वे माशा लगाए बैठे थे की मसीहा इस पृथ्वी पर आकर अपना राज्य स्थापित करेगा और लोगों पर एक शक्तिशाली राजा के समान शासन करेगा। उनका विचार था कि उसके आने पर उनको सभी सांसारिका आशीपें प्रचुर मात्रा में प्राप्त हो जाएगी। यीशु को जात था कि उसकी ऐसी आशा पूरी न होने के कारण वे निराश हो जाएंगे। वह उनकी आकांक्षाओं से कहीं अधिक उत्तम वातों की शिक्षा देने के लिए आया था। वह इसलिए आया था कि परमेश्वर की सच्ची उपासना उनमें पुनःस्थापित हो जाए। वह शुद्ध हृदय का धर्म स्थापित करना चाहता था जिससे शुद्ध जीवन तवा पवित्र चरित्र प्रकाशित होता है। उसने अपने हृदयस्पर्शी पहाड़ी उपदेश में उन पर स्पष्ट कर दिया कि परमेश्वर की दृष्टि में किन बातों का महत्त्व है और किन वस्तुओं से वास्तविक प्रसन्नता प्राप्त होती है। मुक्तिदाता के शियों पर भी रब्बियों की शिक्षा का व्यापक प्रभाव था इसीलिए मसीह ने सर्वप्रथम इनको अपनी शिक्षाओं से अवगत किया । उनको जो शिक्षा दी गई वह हमारे लिए भी इतनी ही उप- योगी है। हमें भी उसको सीखने की उतनी ही आवश्यकता है। धन्य हैं वे जो मन के दीन है" मत्ती ५:३-१२, मसीह में पहा । मन के दीन ये लोग होते हैं जो अपनी पापी दगा से परिचित होते हैं और अपनी आवश्याता को समलते हैं। वे जानते हैं कि स्वयं वे भले कार्य नहीं कर सरते। वे परमेश्वर की सहायता के अभिलापी होते हैं और ऐगे ही लोगों को परमेश्वर द्वारा माशी मगीरी जिलाएं " प्रसाशी जाती हैं। " क्योकि जो महान और उत्तम और मदेव पिर रहता, और जिमरा नाम पवित्र है, यह या कहता है, मै कचे पर और पवित्र म्यान में निवास करता हूं,और उसके सम भी रहता है, जो मेदित और नम है, बिनम्र लोगो हृदय और मदित मोनो रे मन यो हर्षित ।" यमायाह ५७:१५ । "धन्न जो मोर करते हैं।" इमरा आराम उन लोगो से नही है जो पुटपुटाते तथा शिकायतें करते रहते हैं और जो मुंह शिमा और गिर भगाए घर-उधर घूमते रहते हैं। इसका अर्थ यह मिजो लोग सत्यनिष्ठा से अपने पापी पर शोक व्यक्त करते हैं और परमेश्वर में रमा यी याचना करते हैं, वे सब मुफ्त में क्षमा माग परेंगे। परमेश्वर कहता है, " में उनके शोक का दूर करके उन्हें आनदित परगा, मैं उन्हें शाति दूगा, और दुख के बदले अानन्दगा। विवाह ३११३ । "न्य पे जो नम है।" ममीह कहता है, "मुझसे सीखो, मगार में नग और मन में दीन ।। मत्ती ११:२९ । जब उससे दुसंहार दिया गया, उगने चुराई के प्रति भलाई दिखाई । ऐसा पर उसने हमारे सन्मग एक उदाहरण प्रस्तुत किया कि हमें भी एमाही परना चाहिए। "धन्य है वे जो धर्म के भूरे और प्यासे हैं।" धार्मिकता भला पारंला है।पर परमेश्वर की व्यवस्था की आनाकारिता है क्योकि पसमा द्वारा ही धामिरना के मिसान्न निर्धारित किए गए हैं। मापस बताती है, "वो तेरी मब आज्ञाए धर्ममय है। मापन गहिना ११९:१७२ 1 इस व्यवस्था को अपना उदाहरण प्रस्तुत पर मीर ने पालन करना लागो यो सिसाया। व्यवस्था की पाकिसता उमरे जीवन में हमें सफाई से दिखाई देती है । हम धर्म रेगे और बाग तय होते हैं जब हमारे समस्त विचार, शब्द तपा पापं मनोह पे ममान होते हैं। " " ६४ मसीह का जीवन " मत्ती और हम मसीह के समान बन सकते हैं यदि हम वास्तव में उसके समान बनने के इच्छुक होते हैं । हमारा जीवन उसको जीवन के समान बन सकता है, और हमारे कार्य परमेश्वर की व्यवस्था के अनुरूप वन सकते हैं। पवित्र आत्मा हमारे हृदय में परमेश्वर का प्रेम भर देता है और हमें उसकी इच्छा पूरी करने में प्रसन्नता होती है। माता-पिता अपने बालकों को अच्छी वस्तुएं देने को जितने उत्सुक होते हैं उनसे कहीं अधिक परमेश्वर हमें अपनी आत्मा प्रदान करने के लिए उत्सुक है। उसने प्रतिज्ञा की है, “ मांगो तो तुम्हें दिया जाएगा। ७:७ । " वे सब जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं तृप्त किए जायेंगे।" " धन्य हैं वे जो दयावन्त हैं।" दयालु होना दूसरों को नाय उससे भी अच्छा व्यवहार करना है जिसके वे योग्य हैं। परमेश्वर ने हमारे साथ ऐसा ही व्यवहार किया है । उसे दयालुता प्रगट करने में प्रन- नता होती है । यह धन्यवाद न करनेवालों तथा दुष्टों पर भी दयालु है । वह हमें भी एक दूसरे के साथ ऐना ही व्यवहार करने की शिक्षा देता है। वह कहता है, " एक दूसरे पर कृपालु, और करुणामय हो, और जो परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।" इफिलियों ४:३२ । "धन्य है ये जो मन के शुद्ध है।" हम वास्तव में जो कुछ हैं और अपने बित्य में जो कुछ कहते हैं, परमेश्वर को हमारी उसने भी पाही अधिक चिन्ता है। उसे यह चिन्ता नहीं है कि हम मिलने सुन्दर नया आकर्षक दिखाई देने है, परन्तु वह हमारे हदयों की शुद्धता दाता है। मन की शुद्धता ही हमारे शब्द नया कार्य उचित ही मगते । राजा दाऊद ने प्रार्थना की, " हे परमेश्वर मेरे अन्दर मुद्ध मन उत्पन्न कार।" "मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे मनमुर पहण हो, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले ।" मजन मंहिता ,१:१०; १९:१४ । यही हमारी भी प्रार्थना होनी चाहिए। -
ममीशी मिक्षाए
६५
"धन्य है, ये जो मेरु परन वाले हैं।" यह व्यक्ति निगरे हृदय
में मग मी नम्रता तथा दीनता या यात्मा है,पदा ही मल पराने
यापित दागा। ऐमी मारमा पर यो उत्तेजित नही परती
भोर र उत्तर नरी देती । यह परिवार यो प्रगनता प्रदान परती
और भाग-नाम प लिए मधुर मान्ति तया आसीए या पारण
बासी।
"धन्य । ये जा धम पारण गाए जाते हैं।" ममीरात
पारि उमा नाम प पारण उगो अगर मिप्या या बन्दीगर में साग
जाएगा और वरना गा मार टा7 जाएगा। पतु उगा उसको
यापारिवाता रे पारण उनमार मग्न पी भावन्यपना
गी। ।जा ममीर म प्रम परा और उगर पीछे प, उनको
पो. या शत नही पाया गाती। वर पेर म्पान पर नरे
माप ये रा मार मरत है परन पर उापा पंगा
जोया देगा जिगरा ममी मत नहीं और उगा गपुट
दमा ना भी नहीं मुएिगा । और उना साग दूगर लोग भगीर
पी प्राण परेंगे। मशिदाता न अरन गिप्पा ग परा।
"
"गुम जमा की ज्योति हा । मनी १४ । यो नापी
गगगार पा र सी गग्य में जानयागया। पर
नियामाप्रेमी-सादीथी। रानीपमागि
बममागापासप्रगामी यमी अन्धकार में मरनी।
पडामा म गुरमिपा में मार।
गीर मी भानापियामा अनारमन में एम.
I. MERE गगी-IATE का नारा पर
Mirrगी भागापिता का गोगापा मारा।
समा मा मापस fim IITTPS
मसीह का जीवन ६६ सुनने वालों के लिए ऐसी शिक्षा नई तथा अद्भुत शिक्षा थी, उसने अनेक बार उनके सन्मुख अपनी शिक्षा को दोहराया। एक बार एक व्यवस्थापक ने उसके पास आकर उससे प्रश्न किया : स्वामी, अनन्त जीवन प्राप्त करने के लिए मैं क्या करूं? लूका १० : २५-२९ । कि व्यवस्था में क्या लिखा है? तू कैसे यीशु ने उससे कहा, पड़ता है ?" । " उसने उत्तर दिया, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी शक्ति और अपनी सारी बुद्धि से प्रेम रख, और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख ।" तूने ठीक उत्तर दिया है," यीशु ने कहा, यही कर तो तू जीवित रहेगा।" व्यवस्थापक ने यह नहीं किया था, उसे ज्ञात था कि उसे दूसरों से अपने समान प्रेम न था। पश्चात्ताप करने की अपेक्षा, उसने अपन स्वार्थी प्रवृत्ति को छिपाने की इच्छा से वहाना प्रस्तुत करते हए कहा मेरा पड़ोसी कौन है ?" महायाजक और रब्बी प्रायः इस प्रश्न पर वाद-विवाद करते ये वे निर्धनों तथा अशिक्षित लोगों को अपना पड़ोसी नहीं समझते और उनके प्रति कोई दया-भाव प्रकट नहीं करते थे। मसीह ने उस इन विवाद में कोई भाग नहीं लिया। उसने इसका उत्तर एक कह द्वारा व्यक्त किया जो कि वास्तव में कुछ समय पहले घट चुकी उसने कहा, एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा था। निर्जन तथा ऊबड़-खाबड़ था और जंगल में से होकर निकलता
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मसीह का जीवन ८ "अव तेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा ?" व्यवस्थापक ने उत्तर दिया : " वही, जिसने उस पर तरस खाया।" फिर यीशु ने कहा, " जा, तू भी ऐसा ही कर । लूका १०:३६, ३७। याजक तथा लेवी परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करने का ढोंग रचते थे परन्तु वास्तव में सामरी ने उसकी आजाओं का पालन किया। उसका हृदय प्रेम तथा करुणा से पूर्ण था। अपरिचित घायल व्यक्ति की देख-भाल करके उसने परमेश्वर तथा मनुष्य के प्रति अपना प्रेम प्रकट किया। एक दूसरे के प्रति भलाई करने से परमेश्वर हमसे प्रसन्न होता है। हम दूसरों के प्रति प्रेम प्रकट करके उसके प्रति प्रेम प्रकट करते हैं। करणा तथा प्रेम से पूर्ण हृदय संसार के समस्त धन से अधि श्रेष्ठ है। जो भले कार्य करते हैं, वे स्वयं को परमेश्वर की मन्त प्रकट करते हैं। ऐसे ही लोग मसीह के साथ उसके राज्य में व करेंगे।
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अच्छा सामरी अच्छे सामरी के दृष्टांत दवारा यीश ने सिखलाया कि जीवन एकांतता में व्यतीत करना नहीं है। दयाल, प्रेमी व सेवा- भक्त जीवन की कीमत दनिया के सब धनों से अधिक है। जो लोग भलाई करने के लिए जीते है, दिखायें कि वे परमेश्वर के पेटे-बेटियां हैं। ये ही हैं जो खूटि के राज्य में उसके साथ रहेंगे।
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गामापान मगीन मष्टिपीकला में गाय सर रिसा और उसी गा फो यमाया पी. "गी यम्यु उगी रे मारा गुजोग।"मामा १: । बम, मातो. या सपा गुन्हा दापोगा: मरण रगना गाnि वानुमी मो ममीद ने बनाया है। और उनी ने गा मोदनापा गाशि उमर ारा मरममा रमरम में गाना प्रात होगी। की निगा को पाना पो पा लिया बनाबिभोर ये पारा गिरोगन निममी का पान परें। दो मनिशा को गोरियाग विर में पाता। एर मत दिन पोन और 3 गिप्प भाराधना में मारे पर हो । मार्ग में उमरोएर में गेही पर EिT ना। भोजन के लिए दो पी पी और हिरो को मा . पी, गो जी मामी युएमा सोही मोर हामी मन पर मतदान गानेनगे। गाजिमी भोर जि iii का पानी पानी को या पुराना परि पर गाने की मारपी, पण गारनियाकार गरपामगी मामी को मायामा पानी गाने मुस्लिम पा बारोग'गी। पर भी fat maro पारामा म ति fear. समारना और माग ri H.HI Hr ना font काग, famr fruitmenion भी नापा।
७२ मसीह का जीवन - जिन्हें याजकों के अतिरिक्त किसी को खाने की अनुमति नहीं थी। उसने ये रोटियां अपने भूखे साथियों को भी दी थीं। यदि भूख की अवस्था में दाऊद के लिए भेंट की पवित्र रोटी खाना उचित था तो सन्त के दिन भूखे शिष्यों का वालें तोड़ कर खाना क्यों उचित नहीं था? सन्त को मनुष्य पर भार बनने के लिए नहीं बनाया गया। यह उनकी भलाई करने तथा उसे शान्ति तथा विश्राम देने के लिए बनाया गया है । इसीलिए हमारे प्रभु ने कहा, सब्त मनुष्य के लिए बनाया गया, मनुष्य सक्त के लिए नहीं।" मरकुस २ : २७ । और ऐसा हुआ कि किसी और सन्त के दिन को वह आरा- धनालय में जा कर उपदेश करने लगा और वहां एक मनुप्य था जिसका दाहिना हाथ मूखा था। और शास्त्री और फरीती उस पर दोप लगाने का अवसर पाने के लिए उसकी ताक में थे, कि देखें कि वह सन्त के दिन चंगा करता है कि नहीं; " परन्तु वह उनके विचार जानता था; इसलिए उसने सूखे हाय वाले मनुष्य से बाहा, उठ, बीच में खड़ा हो, वह उठ खड़ा हुआ। फिर यीशु ने उनसे कहा; मैं तुमसे पूछता हूँ कि सन्त के दिन क्या उचित है, भला करना या बुरा करना; प्राण को बचाना या नागकरना?" और उसने चारों ओर उन सभों को देख कर उस मनुष्य में कहा : अपना हाय बड़ा, और उसका हाय फिर चंगा हो गया ।
गामापा'7 'परतुय माप में बाहर पर भाग में गिर !er हमपी माप मरा परेरा-८। पाग प्रम पराा पर पारिपारि विमार ति माचिरा प ।' उग1 3ाम में गा TFTER हामहीम और करत र दिमें गिर नाग उपर 7f" गप्रतापा: उतर ६ मा मग, मा, माष्य का मय भर म तिर ला गिपराा उाि ।मत्ता.".१२। • गित। गरा अप य. मिपा मारा। मगी- मनपापा-सिपा पीपी और सभी प्पय या पारा nि frani.rr पिपरी उमा परस्पा पागा पासिदा । पाया 7 मगा' पिच में मी पानी पामिर तिमिराभावापानur बाईपर। यहाई पास ET उग्राउ मम्माादी-10 पर ... पप गगम्मापि विगारिपारा पाय आयस्सर, 7 रगबानाग निरा I ना पररा द्वारा भारि Trur मसाररि अगर पराकमा गयोगामा में ७४ मसीह का जीवन से अधिकांश निराश हो चुके थे। पानी हिलने के समय इतनी अधिक भीड़ हो जाती थी कि बहुत से लोग तो किनारे पर भी नहीं पहुंच पाते थे। एक सव्त के दिन यीशु वैथसदा में आया । जव-उसने वहां दुखी लोगों को देखा तो उसके हृदय में दया भर गयी। एक व्यक्ति की दशा। दूसरों से अधिक दयनीय थी, क्योंकि वह अड़तीस वर्ष से अपंग दशा तो में पड़ा हुआ था। कोई डाक्टर उसका उपचार नहीं कर सकता. था। उसे अनेक बार इस तालाव पर लाया गया था परन्तु जब पानी हिलना आरम्भ होता था तो कोई दूसरा व्यक्ति उससे पहले तालाब में उतर पड़ता था। इस सन्त के दिन उसने एक बार फिर तालाब पर पहुंचने का प्रयत्न किया था, परन्तु इस बार भी वह असफल रहा । जब वह घिसटता हुआ अपनी चटाई पर वापस आया जो कि उसका विस्तर था तो यीशु ने उसे देख लिया। उसकी शक्ति लगभग लुप्त हो चुकी थी। यदि उने सहायता न मिलती तो उसकी मृत्यु निश्चित थी । वह लेटा हुआ बार-बार तालाब की ओर देख रहा था, एक प्रेमी चेहरा उस पर सका और उसे यह वाणी सुनाई दी : गया तू चंगा होना चाहता है ?" उस रोगी ने उत्तर दिया, "हे प्रभु, मेरे पास कोई नहीं, कि जब पानी हिलाया जाए तो मुझे तालाब में उतार दे; परन्तु मेरे पहुंचते--पहुंचते दूसरा मुझ ने पहले उतर पड़ता है।" यहन्ना ५:१-११ । जो बात नहीं पा कि जो उसके निकट सड़ा है वह एक तो ही नहीं बन जितने जग पाम बाते हैं, उन पो आरोग्यता प्रदान पर मरता है। मसीह ने उस व्यक्ति ने पन्हा, जठ, अपनी साट ७५ उगमतगरा पा सगरा और उगी में पतिभा पर पारी पर गदा मा और उमेrar-रि गाउगे भनी मानी। उगो मा विगग उमाना यार पानीमा हमा पानीपत मेरो माती मागगा गा भागार मामी यासाये मन नी उगी। मन परिमार या गरी तिनी। उग सिसा "मि पण रिगान मामा, मातो पाट टार' भामराग TIPा, रोर miriranगाटापारीदी। भाग refrriaamr maretari गिलागीमा पर मा 41 मिना पिानीfornar पता PRIME PHENukriwalf-er's पामा:पारामRITErin रिकामाnिrry: 11.47 सीटीपी। पाHिETRINT -... TET घTCHfin imittiri..?" "Err Mirror : nary, ७४ मसीह का जीवन । से अधिकांश निराश हो चुके थे। पानी हिलने के समय इतनी अधिक भीड़ हो जाती थी कि बहुत से लोग तो किनारे पर भी नहीं पहुंच पाते थे। एक सन्त के दिन यीशु वैथसदा में आया । जव-उसने वहां दुखी लोगों को देखा तो उसके हृदय में दया भर गयी । एक व्यक्ति की दशा। दूसरों से अधिक दयनीय थी, क्योंकि वह अड़तीस वर्ष से अपंग दशा तो में पड़ा हुआ था । कोई डाक्टर उसका उपचार नहीं कर सकता था। उसे अनेक बार इस तालाब पर लाया गया था परन्तु जव पानी हिलना आरम्भ होता था तो कोई दूसरा व्यक्ति उससे पहले तालाब में उतर पड़ता था। इस सन्त के दिन उसने एक बार फिर तालाब पर पहुंचने का प्रयत्न किया था, परन्तु इस बार भी वह असफल रहा । जब वह घिसटता हुआ अपनी चटाई पर वापस आया जो कि उसका विस्तर था तो यीशु ने उसे देख लिया। उसकी शक्ति लगभग लुप्त हो चुकी थी। यदि उगे नहायता न मिलती तो उसकी मृत्यु निश्चित थी। वह लेटा हुआ बार-बार तालाब की ओर देख रहा था, एक प्रेमी चेहरा उस पर सुका और उसे यह वागी नुनाई दी : ॥ न्या तू चंगा होना चाहता है ?" उस रोगी ने उत्तर दिया, " हे प्रभु, मेरे पास कोई नहीं, कि जब पानी हिलाया जाए तो मुझे तालाब में उतार दे; परन्तु मेरे पहुंचते--पहुंचते दुसरा मुझ से पहले उपर पड़ता है।" यूहन्ना ५:१-११ । उबात नहीं था कि जो उसके निकट खड़ा है वह एक को ही नहीं बन जितने उसपे पास बाते हैं, उन सब को आरोग्यता प्रदान कार माता है। मनीह ने उस व्यक्ति से कहा, उठ, अपनी लाट उठाकर चल फिर।"
Pणमा पान शरत जापान पर पा प्रवरस पिया मोर गोरीर में पतिमा गया पर पोपरी पर गदा जोग और उगे मारी गया frरपिर माना। उसे जीमा गो गा विराग उठाग और परमेश्वर पो बसाई यरता हमा पग गया। मीप ही उगी पुरण परीगियो गे भेंटाई, माँ भी आरोग्यता मा बालजार अनुभव जामो याया। ये प्रगान HIT नागो, होो गन । दिन गाट -टाने में Eि जगरी निन्दा गीग मापा ने उनको बताया "जिगोगो पगा रिस, मीने मागे पता, माती पाट उठा पर परि।" भय उगरेप्रति 10 ग्रोध हो गया, उग पर दोग मानिमा मातिगे गाट उठगोपी आमा दी थी। माग में समितिम समय उपस्थित पा पदन में सिग्मी गानोदही परमगविलय मेंगारी ATTRा बिमारा मी मिधा देता मदिर में चली गया में TIMITTPए रविनाथेमा ए रब्बिया योनिमा पार पापा । मोरनी माया गुधारन गा f7 पर सिपापमोजिमा मनतिम रोगी या गारो जानती गाट टारी आगदी पी।गरामा Pाकाधिपापापा ममी चार भारपित Tऔर गरगाहापाबागर मिशएगा। imicा। मी मी या सती मागमा मंग तीन Firm और न ही वोट मिला ", ७६ मसीह का जीवन मुक्तिदाता ने उनको बतला दिया कि उसका यह कार्य सन्त की व्यवस्था के अनुरूप है। यह परमेश्वर की इच्छा और उसके कार्य के भी अनुरूप है। "मेरा पिता अब भी कार्य करता है," उसने कहा, " और मैं भी करता हूँ। यूहन्ना ५:१७ । परमेश्वर प्रत्येक प्राणी की देखभाल करता हुआ निरन्तर कार्य करता है । क्या यह कार्य सन्त के दिन बंद हो सकता है ? क्या परमेश्वर अपने सूर्य को सन्त के दिन चमकने से रोक देता है ? क्या उसकी किरणों द्वारा उस दिन भूमि को गर्मी तथा हरि- याली प्राप्त करने से परमेश्वर सूर्य को रोकता है ? क्या उस दिन सरिताओं का प्रवाह रुक जाना चाहिए और समुद्र की लहरों को भी थम जाना चाहिए ? क्या उस दिन अन्न के पौधों या फल-फूलों की वृद्धि रुक जानी चाहिए ? स्वर्ग का कार्य कभी नहीं रुकता और हमें भी सक्ष के दिन भले कार्यों से नहीं रुकना चाहिए । व्यवस्था हमें प्रभु के विश्रामदिन को अपना कार्य करने को वजित करती है। आजीविका के लिए परिश्रम उस दिन अवश्य रुक जाना चाहिए सासांरिक लाभ या आनन्द का कार्य उस दिन नहीं होना चाहिए । परन्तु सन्त व्यर्थ तथा अकर्मण्यता में व्यतीत नहीं होना चाहिए । परमेश्वर ने सृष्टि की रचना का कार्य समाप्त कर मत को विश्राम किया, इसी प्रकार हमें भी विश्राम करना चाहिए। वह उस दिन हमें अपने प्रतिदिन के कायों को करने से वजित करता है। इन दिन हमें पवित्रता के साथ भक्तिपूर्ण जीवन व्यतीत करना चाहिए और पवित्र कार्य करते हुए परमेश्वर की उपासना करनी चाहिए।
पीय अण परषाहा पागाईको एक सा मेई होती, लेकिन जम एक गायमई तो मशाला में फण्ड के साप नहीं रहा। पर सोयी पई पादन नियस गया। आधी में पियारी रात को पहाड़ और तराहपों से होते हए वह पला । जर तफ मे नहीं पाता हमाराम महाँ पाता । इसी तरह, पीय जो अच्छा चापाता र अपने रिया के मीरवाली करता है।
ورم دی ماه همه ي امبير - میمونه و همه अच्छा चरवाहा मतिमा ने स्मय यो परयाहा पहा और wife पायीहए पहा " अठा परया में, में अपनी अंडा को गरी परेमा परमाननी है।" यरमा १०:१४॥ ममीनोपही अपन निप्पा या दो रो. उसने उन मानिदेन या ET सनर माप न रीतो ये उनो यपनी होम सभी frली परगहे को अती भंगगांतोतो. TETम और उमरेलमा ७८ मसीह का जीवन उस देश में चरवाहे रात-दिन अपने झुण्ड की रखवाली करते थे। चरवाहा भेड़ों को जंगलों और पहाड़ी स्यानों से निकालकर हरी- भरी मुखदायी चरागाहों में ले जाता था जहां जल की धाराएं वहती थीं । वह समस्त रात्रि जंगली पशुओं तथा डाकुओं से उनकी रक्षा करता था जो प्राय: उनकी ताक में घूमते रहते थे। वह रोगी तथा दुर्वल भेड़ों का विशेप ध्यान रखता था । छोटे मेम्नों को वह अपनी गोद में उठा कर ले जाता था। भेड़ों का झुण्ड चाहे जितना बड़ा हो, वह झुण्ड की प्रत्येक भेड़ को जानता था । वह प्रत्येक भेड़ का नाम रखता था और प्रत्येक को उसके नाम से सम्बोधित करता था। - इसी प्रकार मसीह, जो स्वर्गीय चरवाहा है अपने झुण्ड की रख- वाली करता है जो समस्त विश्व में विखरा पड़ा है । वह हम में से प्रत्येक के नाम से परिचित है । वह हम में से प्रत्येक के घर से परि- चित है और हमारे घर के प्रत्येक सदस्य को जानता है। वह हम में से प्रत्येक की ऐसी देख-भाल करता है जिसे कि संसार में दूसरा कोई व्यक्ति न हो। चरवाहा अपनी भेड़ों के आगे-आगे चलता था और इस प्रकार सभी खतरों का सामना करता था। वह बनैले हिंसक पशुओं का सामना करता था और टाकुओं से भी लोहा लेता था। कभी-कभी चरवाहा अपनी भेड़ों की रक्षा करते समय मारा भी जाता था। इसी प्रकार मुक्तिदाता अपने शिष्यों के मुण्ड की रक्षा करता है। वह हमारे आगे-आगे चल कर गया है। वह उसी रूप में पृथ्वी पर रहा जैसे हम रहते हैं । वह बालक या फिर नवयुवक हुआ और फिर पुरुष बन गया । वह शैतान और उसकी परीक्षाओं पर प्रबल हुआ इ सो प्रकार हम भी उस पर प्रवल हो सकते हैं। वह हमें बचाने के अन्ग परवात ७९ [मरा परि मर या में नाम भी माया माली पर भेद को गुभाग TITी उनमें में एर भी उग EITTE नीपर गरा . पर परराहे में पाग गौ भोगीप में पर गो मानो या गैर भी राग मीट पर गो भेरीगोना पहना।। अन्यरो राशि में, आपो-रान में पानी भोर दिया उग भंट बोगीजन पनि निमगा और रायताम गगा पगारि उगी भेटन मिल जाए। फिर पर उगरी गारमें उठा और में उग प्रा है। पर पानी म्बी, पादने पानी गांवोFRE- पानी परवा पा प्रमITI पाया। 'मेरे गाप मानर परा, परि मेरी गोई कि है।"मा १५ ४-६। दगी रार हमारा विमाना गवाहा उनी It परगा जो परमपर पहना है, "मनुर गामा रो र भोर पनान भावा। " में गुममे पद रिमी गतिमाएर मारियानी किस में भी मानाभानामा. xिmufram. मोमिया सिर में नही रिमन रिम- RI नहीं।"पुरा १५:। एमnि और हम परमेशरमंदरपराग" मागमा RELATHerrt ८० मसीह का जीवन हों। वह हमें पाप से बचाने के लिए आया । वह हमें अपने झुण्ड में वापस बुला रहा है। जब हम चरवाहे के साथ वापस लौट आते हैं और अपने पापों को त्याग देते हैं, तो मसीह स्वर्ग में अपने स्वर्गदूतों से कहता है : "मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है।" फिर स्वर्ग में स्वर्गदूत आनन्द से परमेश्वर की स्तुति करने लगते हैं और उनके मधुर गान से समस्त स्वर्ग गूंज उठता है । मसीह ने हमारे सन्मुस ऐसा चित्र प्रस्तुत नहीं किया जिसमें कोई शोकग्रस्त चरवाहा विना अपनी भेड़ लिए झुण्ड में वापस लौटा हो। यहां हमारे साथ एक प्रतिना की गई है कि परमेश्वर के झुण्ट से भटकी हुई एक भी भेड़ की उपेक्षा नहीं की जाएगी। एक को भी महागता से वंचित नहीं रखा जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति जो उद्धार को आधीनता से स्वीकार कर लेगा, उसको मुक्तिदाता पाप के जंगल से निकाल कर बचा लेगा। इसलिए झुण्ड से भटके हुए प्रत्येक व्यक्ति को ढाढ़स बांधना चाहिए। अच्छा चरवाहा आपणो खोज रहा है । स्मरण रखिए उसका कार्य, "योग हुओं को ढूंढना और बचाना है।" इसमें उसका आशय आपको बचाने से है । मुक्ति की सम्भावनाओं पर सन्देह करना, उस की बचानेवाली शक्ति पर नन्देह करना है जिमने आपको अपरिमित मूल्य नका कर मोल लिया है । अविश्वास का स्थान विश्वान को लेने दीजिए। उन हाथों की ओर देखिए जो कि आप के लिए छेदे गए, और बचानेवाली शक्ति में आनन्दित रहिए ।
ܐ risܕ ܕ ܨܫ ܐ ܝܐܐ ܕܐ | ܐ . ܬܙ ܕ ܐܫܺܐ ܨ ܨ ܀ ܀ ܀ ܕܐܐܐ ܠܐܐ | ܨܐ܀ ܪܪܐ ܙ ܕ ܝ ܝܐ ܕܬܐ * ܕ ܬ ܐ ܐ ܝ | ܝ ܐ ܫ ܕ ܫܐ ܕܩ1 ܝ ܙܫܝܪ ܢܝܢܫ ܬܐ ܐܝܪ - ܝ -ܙܐ ܐ ܝܢܨܐ ܪܐܬܐ ܫܐ £ ' ܝܬܚܐ ܝܫܚܫ ܚܚܐ ܘ ܘܫܶܐ ܂ܐ 18ܫܐ1 ܝܚܐ ܙ ܨܐܐ ܕ، * ܗܐ ܚ܀ , sܬ ܕܝ ܕܬܐ ܢܝܐ ܢܙ ܬܢܐ ܪ̈ܝܐ ܝܨ ، ܐ ܪ ܐܐ ܐܫܬ ܢ.ܫ ܚܢܚܬ ܐ ܝܐ ܬ ܝܕܢܬܐ ܚܠܐܐ 1 ܙܐ ܫܐܨܐܐܙܝܐܐ ܝܐ ܫܒܕܝܪ ܐܫܐܨ ܝܪܫܐ ܕܝܐ ܬ {Fܐܝ ܫܝܫܐ ::.. * 531 * 15 * * * 1 là 1.4k • ܐ ܢܐ ܐܫܬܬܫܬ ܝܬ ܨܝܐ ܕ ܬܨܝܐ ܐ ܐܫ ܝܬ ܢܫ ܝܐܐ ܚܐܫ ܢܬ1 ܕܐ 3 ܨܐ ܚܫܐ ، ،،، ܕܝܢܚܗܝܙ ܛܙܐܝܫ ܝ.ܐ ܨܐܐ ܕܢܐ ܢ ܝܐ ܬܐ ܪܐܨܫ ܒܝܨܐ ܩ ܐ ܢ ܕ ܬܬ ܨܨ. ܙ مهره ها در مه 1 مته {ل ، به درد ه له ܝܚ ܐ ܢܚܐܐ ܬܐ ܬ. ܐ ܬ ܐ ܚܨܬܬ ܝܝ 8 ܕܐ 8ܬܐ ܬܐ ܝ ܬܫ ܫܬܬ ܬ ܐܬ ܚܝܚܐ 11 ܬܐ ܐ ܝܙ ܢܝܐܫܬ ܕ ܙ ܝܐܐ ܨܐܨ ܐܐܐ ܝ ܐܬ ܐܫܝ ܙܐܬ ܐ | ܢܢ ܐ *ܢܫ ܬܝܐ ܨܚ ܢܐ ܐܚܨܬܬ & ܙ ܬܬܐ ܐܐ ܬܐ ܚܨܬܬ ܘܰܐ، ܀ ܬܐ ܨܝܕܐ ܬ ܝܐܙ ܝܙ ܕ ' ܚܐ ܚܐ ܨܝܬܬܐ ܨܕܢܐ ܢܨܬܐ - 15 ܕܐ ܢܐ ܢܟܢܐ ܕ݁ܝܢܫ ܢܬܐ ܚܨܗܫܐ £ ܨܢ ܨ ܕܚܐܝ ܬܨܚܝ ;ܝ ܚܬܚܘܐܬ ܚܬܐ ܐܘܘ ܫܙ ܝ ܕ ܐܝܺܐ ܝܨ܀ ܝ ८० मसीह का जीवन हों। वह हमें पाप से बचाने के लिए आया। वह हमें अपने झुण्ड में वापस बुला रहा है। जब हम चरवाहे के साथ वापस लौट आते हैं और अपने पापों को त्याग देते हैं, तो मसीह स्वर्ग में अपने स्वर्गदूतों रो कहता है : "मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है।" फिर स्वर्ग में स्वर्गदूत आनन्द से परमेश्वर की स्तुति करने लगते हैं और उनके मधुर गान से समस्त स्वर्ग गूंज उठता है । झुण्ड से मसीह ने हमारे सन्मुख ऐसा चित्र प्रस्तुत नहीं किया जिसमें कोई गोकग्रस्त चरवाहा बिना अपनी भेड़ लिए झुण्ड में वापस लौटा हो। यहां हमारे साथ एक प्रतिज्ञा की गई है कि परमेश्वर के भटकी हुई एक भी भेद की उपेक्षा नहीं की जाएगी । एक को भी सहायता से वंचित नहीं रखा जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति जो उद्धार को आधीनता ने स्वीकार कर लेगा, उसको मुक्तिदाता पाप के जंगल से निकाल कर बना लेगा। इसलिए झुण्ड से भटके हुए प्रत्येक व्यक्ति को ढाढ़स बांधना चाहिए। अच्छा चरवाहा आपको खोज रहा है । स्मरण रखिए उसका कार्य, " बोग हुओं को ढूंढना और बचाना है।" इससे उसका आशय आपको बनाने से है । मुक्ति की सम्भावनाओं पर सन्देह करना, उस की बनानेवाली शक्ति पर सन्देह करना है जिसने आपको अपरिमित मूल्य चुका कर मोल दिया है । अविश्वास का स्थान विश्वास को लेने दीजिए। उन हाथों की ओर देखिए जो कि आप के लिए छेदे गए, और बनानेवाली भक्ति में आनन्दित रहिए।
मन पराना मगर मार में माता और माँ गंगा शिशिरसी 7 मारपरपा, मोगा भाग्मांवोदागरिमी भी गागा पर मनी ट। उमेरे मोमीनरी दिगंदी मेमारामारी। प्रगट दिनार गरा को भी दर पर गरगा । उगममीना नानी, याग पो गुनासो are मानो को गुलरिया और माग पनि यो सम्प frastri | मानि.माति रोग ग मारिरा। मोगुना ही होगा पार गे दुष्ट मामा निरल गयी, friगर भागार मार देग ये पतिर पो मो "पागायन अधिकार और गाम में माप तुर भामामी को पाना मा. और पे निरन गती। मीरा प्रामा पाने पर पारम पानी में कार पगमापा। गरी पानी मार्ग महिला पर जमाए गना आपावर पा. उगने माना रिहा, उगा भर म उRTI सामोर मागिर पाविसापा,"भमा या और Traininाहार उगे पान पिट भागे पड़ा। मनी १२:८-११गी रोपाई उमग महाका जाप finसमाने मिनीटाप भाग 17 मामाको नीतिरिवा। उनमें में एप मर नाईन गरपुर पाग में परनाने र लिग ८२ मसीह का जीवन रहे थे, जव कि योग से उनकी भेंट हुई । उसने उस युवक का हाथ पकड़ कर उसे उठाया और जीवित करके उसे उसकी माता को सौंप दिया। फिर अर्थी उठाने वाले तथा अन्य लोग आनन्द प्रकट करते हुए और परमेश्वर की स्तुति करते हुए अपने अपने घरों को लौट गए। इसी प्रकार याईर की पुत्री को जीवित किया गया और यीशु का शब्द सुनते ही चार दिन का मरा हुआ लाजर कन से बाहर निकल आया। सो जब मसीह इस पृथ्वी पर फिर आएगा तो उसकी वाणी कत्रों फो वेध देगी और, " जो मसीह में मरे हैं, वे पहले जी उठेंगे," वे महिमायुक्त अनन्त जीवन प्राप्त करेंगे और वे, " सदा प्रभु के माथ रहेंगे।' थिम्मलुनीकियों ४ : १६, १७ । अपने मेवा-काल में प्रभु का यह आश्चर्यजनक कार्य था। इस कार्य के विषय में उसने तब बताया जव कि यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने बन्दीगृह में से उसके पास दूत भेजे थे। वह बन्दीगृह में दूसरों पर निर्भर हो गया था और उसे यह व्याकुलता सता रही थी कि यीशु वास्तव में मसीहा था । नो उसने अपने शिष्यों को मुक्तिदाता से पूछने के लिए भेजा था कि, " आने वाला तू ही है या हम किसी दूसरे की बाट जोहें। जब ये दूत मगीह के पास पहुंचे तो उसके नारों ओर रोगियों की भीर एकत्रित थी जिनको यह आरोग्यता प्रदान कर रहा था। ये दून समस्त दिन प्रतीक्षा करते रहे, और वह निरन्तर कार्य करने दुपियों का दुग दूर करता रहा, अन्त में उससे कहा : कुछ तुम मुनते हो और देखते हो, वह सब जा कर यूहन्ना से गह दो, कि अन्धे देगते है और लंगड़े चलते फिरते हैं । कोठी पद्ध जो ८३ fr :: मोरोगामी भोर पणामो मुममापार गुना "गगी !!:-५ । मादीनान गर, "भामामामारिया गा।": पार पतीपर गी गया गमाण पागमय भाउगे मोfruit माय परमजा मारा पागाउ गाय विस्तारित मापा और जदरा पर पापा। मगर उगई मोटरेसी,"प्राया गयाहा अपनी पक्ष भिमा-दा-"पामा १०.११। Frust उमन गारे रोमी गा nि और हमारे ही दुगापा-मारे आगो बाल पाप रिमा ran और भाहमारी तो गि गामिरे पोम पगैहो जाय। हम नामराम में गाने अपना मोरयाग भी प्रथम पायास उगी पर rrenा" ५.-।
यरूशलेम में प्रवेश यीशु फसह का पर्व मनाने के लिए यगन्दलेम के निकट पहुंचा। उसके चारों ओर बड़ी भीड़ एकत्रित हो गई थी क्योंकि लोग फसह के पर्व के लिए बड़ी संख्या में यशलेम जा रहे थे। उसकी आना के अनुसार उसके दो मिप्य एक गदही के बच्चे को ले आए जिन पर चढ़ कर वह यस्गलेम जा रहा था। उन्होंने पशु की पीठ पर अपने वस्त्र विद्या दिए थे और उस पर अपने स्वागी को बैठा दिया था। जैसे ही वह गदही के बच्चे पर सवार हुआ विजयोल्लास के नारों से आकाश गृज उठा । भीड़ ने उमं मसीह राजा की उपाधि दे कर उनका अभिवादन किया। पांच सौ वर्ष भी से पहले भविष्यद्वक्ता ने इन दृश्य के विषय में भविष्यवाणी की थी : " हे निय्योन बहुत ही मगन हो ! हे यरूशलेम जय जयकार कर ! पयोंकि तेरा राजा तेरे पास आएगा; वह धर्मी और उद्धार पाया हुआ है, वह दीन है और गले पर बरन गदहे के बच्चे पर चढ़ा हुआ आएगा।" जलाह ९ : ९ । ।
दाम में प्रथम का भी TRinापमान मार र मरे माने का मार्ग पर Trimum गुमर और 3 मार्ग में 1 नश शिकार पारोग पीनो मागमें गिनागन गा। माग मोगा मार मार मम्मा माननारी अनुमतिमी म अयमा पर firman योगमार, मन में माता पाएका नारामा f: पान ना पापा! sarity में मिला उगरी मन मा प्रकाशिकीमी गति पामारपारिभीनी पान मी भार भानिस कानपणा. मग मुरतमा पाप पर पायागार नीना गीगा . in mmm पारितासन पानामा माग उतारfriमार भीम पटना गारजनन । rform भी मनमानी पागं मार में पर मा... पामार भी जाये। Friगानी भी सर पर Entinीपी ,
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मसीह का जीवन : शिप्य प्रेरणा देनेवाली आत्मा से परिपूर्ण हो गए। उन्होंने उत्तर दिया यह आदम तुमको बताएगा, यह स्त्री की सन्तान है, जो सर्प का सिर कुचल डालेगी।" इलाहीम से पूटो, वह तुमको बताएगा, यह मेल्कीसेदेक, शालेम का राजा और शान्ति का दूत है।" याकूब तुमको बताएगा, वह शीलोह यहूदा के गोत्र का है । यशायाह तुमको बताएगा, वह इम्मानुएल, अद्भुत युक्ति करने वाला पराक्रमी परमेश्वर, अनन्त काल का पिता और शान्ति का राजकुमार है। "यिर्मयाह तुमको वताएगा, वह दाऊद की शाखा, प्रभु तथा हमारी धार्मिकता है।" दानिय्येल तुमको बताएगा, "यह मसीहा है । "होगे तुमको बताएगा, वह सेनाओं का प्रभु परमेश्वर है और प्रभु का स्मारक है। यूहना वपतिस्मा देने वाला तुमको बताएगा, वह परमेश्वर का मन्ना है जो जगत के पाप उठ ले जाता है।" महान यहोवा ने अपने सिंहासन से इसके लिए घोपणा की है यह मेरा प्रिय पुत्र है। "हम उसके शिष्य यह घोषित करते हैं, यह यीशु है, जो कि मसीहा है, जीवन का राजकुमार है और मुक्तिदाता है। और यहां तक कि अन्धकार की शक्तियों का राजकुमार तक उसको यह कहते हुए स्वीकार करता है कि मैं तुझे जानता हूं कि परमेश्वर का पवित्र जना " मन्दिर में मे लेन-देन करनेवालों को निकालना मापी में पिट:भा | HIT यां पर उगा मातारी में योग और मा देगा और राजगारनिरा-सिपा। जब का रिमदिर में प्रामा पीर-ग गमरमी ही पर प"माता भेटायर पनि गापा। Artmन पाउरे पग जाया पापा सागर में गाट और.. ruarना Tr-पारिमाTT. PuRi | 1। मो. : Fire र चार शि THERLAR नोटिन रिया पर पड़ी। गरी म शान । र. "Erin या भी। मभा frre माप पामर पर सपा। ME RHEATREATM पा 71 Franापामार राइटिगामी मार दंग ९२ मसीह का जीवन रहे थे । ऐमी महिमा उसने पहले कभी प्रदर्शित नहीं की थी। अव शान्ति लगभग असहय हो गई थी। अन्त में उसने स्पष्ट शब्दों में कहा और उसके शक्तिशाली वचनों ने आंधी के समान लोगों को आन्दोलित कर दिया: " लिया है, मेरा घर प्रार्थना का घर होगा; परन्तु तुमने उसे डाकुओं की खोह बना दिया है ।" लूका १९:४६ । अब उसने उमसे भी अधिक अधिकार प्रदर्शित । किया जो कि तीन वर्ष पूर्व उमने किया था । उसने आना दी : "यहां से इन वस्तुओं को ले जाओ। उसका शब्द सुनते ही एक बार फिर मन्दिर के याजक और अधि- कारी भाग गए। उसके पश्चात् उनको अपने भय पर लज्जा अनुभव हुई । उन्होंने विचार किया कि अब वे कभी इस प्रकार भयभीत हो कर नहीं भागेंगे । फिर भी वे पहले से अधिक भयभीत थे और उसकी भाना सुनते ही मन्दिर से निकल भागे थे । शीघ्र ही प्रांगण ऐसे लोगों से भर गया जो अपने रोगियों को यीशु के पाग लेकर आए थे । उनमें से कुछ मरने वाले थे । उनको अपनी आवश्यकता ज्ञात थी। वे विनयपूर्वक मसीह के चेहरे को देख रहे थे। उनको उनकी ओर देखने में भय की अनुभूति हो रही थी क्योंकि उमने अभी कुछ देर पहले लेन-देन करने वालों को मन्दिर से बाहर निकाल दिया था। परन्तु उन्होंने उनके चेहरे पर अपने प्रति प्रेम और करणा देखी। यीशु ने दया-भाव प्रकट करते हुए रोगियों को अपने निकट बुलाया और उनके हाथ के स्पर्ण माय से उनकी सभी व्याधियां दूर हो गई। उसने प्रेमपूर्वक बच्चों को अपनी गोद में लिया और उनके नन्हें शरीर में मभी व्याधियां दूर कर दी और हंसते-खेलते हुए बच्चे उनकी माताओं को दे दिए। ।
Minimali Trmananमारानी ATTE fir मापे, म1ि: नी. Trint समापामगर real unit मासोदा, मारायी FORaren मोदगा। ARTIMirmiriti Trn. Tum finarra पर भी गमग मर सी यो irzापा TAITHI, RP मा प्रोगाम "मगी : १ ।। unfranमरारामाग frei पसर गाबादंग पर. Anti भर Eि गरि उमा गुप Frent मो.प. TM आगाfrar नारमा भाग 3 Triate में नाका मा ! 7TET." स गुमा मीना ir पाया और पीर परमपुर : मा. HTTER पारा Rferenमोरार उगारा, हार Puranागरा दी AIITUT भRA मारामार यारा r - HAR फसह का पर्च इनाएल की सन्तान ने प्रथम फसह उम समय खाया जब कि वह। भित्र की दासता से मुक्त हुई थी। परमेश्वर ने उनको स्वतंत्र करने की प्रतिज्ञा की थी। उसने उनको बता दिया था कि प्रत्येक मिन्त्री परिवार के पहलोठे को मार दिया जाएगा। उसने इस्राएलियों को बता दिया था कि जिस मेम्ने को वे बलि करें उसका लोहू अपने दरवाजों की चौखटों पर लगा दें ताकि मृत्यु का दूत लोह को देख कर उनको सकुगल छोड़ दे। उनकी यह आज्ञा दी गई थी कि वे मेम्ने को रात्रि में ही भून कर अखमीरी रोटी और करवे गाग के माथ ग्वाएं, कड़वा साग उनकी दागना की कड़वाहट का प्रतीक था। उनको बताया गया था कि वे यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार हो कर उन मेम्ने को बाएं। उनको अपनी अपनी जूतियां पहन कर और हाथ में लाठी लिए हम पूरी तरह तैयार हो कर उस मेम्ने को खाना था। जैना परमेश्वर ने कहा था उन्होंने वैसा ही किया और उसी रात्रि को मिन्त्र को राजा की ओर से उनको माना दी गई कि वे स्वतंत्र है और वे जहां चाहे जा सकते है। प्रातःकाल वे प्रतिमा किये हुए दंग की मोर चल पड़े।
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औरा. मे Farm मार गर्ग fortini TAITTET REME सगा IT मा " भी परिणाम हो l frurnam" मतिम भेंट , या afrat में airman ताराबाग मरमा मरगा पा उमर nfantri for in नरमाया: पारा भाभीकी पारमा मी मोर उनमें प्रार "प.प्राrागा मretrint गमरमर भी पrt भार Trmin पापा पादपरा पा सपासप frमती Hariralarinitinen.furint RELATER. Herit Latrina भासmarriagn. [:ोर मीFिrन कर ३ ९८ मसीह का जीवन यीशु कुछ देर तक प्रतीक्षा करता रहा कि क्या होता है। फिर वह स्वयं मेज पर से उठा। उसने तौलिये से अपनी कमर वांधा और चिलमची में पानी उंडेल कर शिप्यों के पांव घोने आरम्भ कर दिए। उनके वाद-विवाद से उसे बहुत शोक हुआ था, परन्तु उसने कटु गब्दों में उनकी निन्दा नहीं की। उसने अपने शिष्यों के पांव धोकर सेवक का कार्य करते हुए उस पर अपना प्रेम प्रगट किया । जब उसका कार्य समाप्त हो गया तो उसने उनसे कहा, " यदि मैने प्रभु और गुरु हो कर तुम्हारे पांव धोए, तो तुम्हें भी एक दूसरे के पांव धोना चाहिये । क्योंकि मैने तुम्हें नमूना दिखा दिया है कि जैसा मैंने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो। यूहन्ना १३ : १४, १५। इस प्रकार मसीह ने उनको शिक्षा दी कि किस प्रकार उनको एक दूसरे की सहायता करनी चाहिए। अपने लिए उच्च पद की प्राप्ति की इच्छा की अपेक्षा उनमें से प्रत्येक को अपने भाई की सेवा के लिए तत्पर रहना चाहिए। मुक्तिदाता दूसरों के लिए कार्य करने के वास्ते इस संसार में आया। वह उनको बचाने के लिए आया जो पाप के बन्धनों में जकड़े हुए हैं। वह हमसे भी यही चाहता है। अब उनके शिष्य अपनी ईप्या पर लज्जित हो रहे थे। उनके हृदयों में अपने प्रभु के प्रति अधिक प्रेम गर गया था और उनमें एक दूसरे के प्रति भी प्रेम उत्पन्न हो गया था। अब वे मसीह की शिक्षा सुनने के लिए पूर्णतया तैयार हो गए थे । जब वे मेज पर बैठे हुए थे तो यीशु ने रोटी ली और धन्यवाद किया और तोड़ कर शिष्यों को देते हुए कहा, " यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिए दी जाती है, मेरे स्मरण के लिए यही किया करो।
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१०४ मसीह का जीवन उनको बार बार शिक्षा दी थी। सो जब कि मुक्तिदाता को उनकी सहानुभूति तथा प्रार्थनाओं की आवश्यकता थी, वे सो गए थे। यहां तक कि पतरस भी सो गया था। और मसीह का प्रिय शिष्य यूहन्ना, जो उसकी छाती पर झुका था, वह भी सो गया था। निश्चय ही मुक्तिदाता के प्रति अपना प्रेम प्रकट करने के लिए उसे जागते रहना चाहिए था। उसकी प्रार्थना मुक्तिदाता की प्रार्थना में सम्मिलित हो कर उसके दुःख के समय परमेश्वर के निकट पहुंचनी चाहिए थी। मुक्तिदाता अनेक वार समस्त रात्रि अपने शिप्यों के लिए प्रार्थना करता रहा था फिर भी वे उसके लिए एक घन्टा भी न जाग सके । यदि मसीह ने इस समय याकूब और यूहन्ना से यह प्रश्न किया होता, " " जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्या तुम पी सकते हो? और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं तुम ले सकते हो?" वे पहले ही के समान सरलता से यही उत्तर दिये होते, " हमसे हो सकता है। मरकुस १० : ३८, ३९ । मुक्तिदाता का हृदय शिष्यों को दुर्वलता के प्रति सह भरा हुआ था। उसे भय था कि वे उस परीक्षा को । सकेंगे जो उसके दुःख तथा उसकी मृत्यु के कारण उन प फिर भी उसने उनकी दुर्बलता के लिए कड़ी आ की। उसने उनके सन्मख आगामी परीक्षा देख ली औ " जागते रहो और प्रार्थना करते रहो ताकि परीक्षा उसने अपने प्रति उनके कर्तव्य-पालन की में कहा, "आत्मा तो तैयार है, परन्तु शरीर दुई मुक्तिदाता के प्रेम तथा स्नेह का यह कैसा परमेश्वर का पुत्र एक बार फिर व्यथा थक कर अचेत अवस्था में लड़खड़ाता हु आ कर प्रार्थना करने लगा : - u 个 , w 、 गतसमनी में गतसमनी वाग में उस रात को जब यीशु ने प्रार्थना की तो पाप का भयानक बांझ उस पर लदा था।
गतसमनी के उद्यान में १०५ " है मेरे पिता, यदि यह मेरे पिये बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्छा पूरी हो।" मत्ती २६:४२ । इस प्रार्थना में उसने ऐसी व्यथा अनुभव की कि उसका पसीना लोहू की बडी बडी बूदो के समान भूमि पर गिरने लगा। वह फिर सहानुभूति प्राप्त करने की इच्छा से शिष्यो के पास लौट आया और उसने उनको फिर सोते पाया। उसकी उपस्थिति से वे फिर जाग उठे । उन्होने भयभीत हो कर उसके चेहरे को देखा क्योकि उसके चेहरे पर रक्त के धब्बे दिखाई दे रहे थे। वे उसकी मानसिक व्यथा को न समझ सके जो उसके चेहरे से प्रगट हो रही थी। तीसरी बार वह फिर प्रार्थना करने के लिये उसी स्थान पर गया। अव भय का घोर अन्धकार उस पर छा गया था। वह अब परमेश्वर की उपस्थिति से वचित हो गया था। इसके अभाव में उसे भय था कि मान मानव स्वभाव ऐसी परीक्षा सहन न कर सकेगा। तीसरी बार वह फिर पहले के ही समान प्रार्थना करता है। स्वर्गदूत उसको सहायता पहुचाने के लिए उत्सुक हो रहे है, परन्तु ऐसा नहीं हो सकता था। परमेश्वर के पुत्र को वह क्टोरा अवश्य पोना था अन्यथा समस्त ससार का विनाश अवश्यम्भावी था। मसीह मनुष्य की असहाय दशा को देखता है। वह पाप की शक्ति को देखता है । विनाशशील ससार के विलाप का दृश्य उमरे मन्मुख साकार हो उठता है। वह अन्तिम निर्णय कर लेता है । वह किसी भी मूल्य पर पतित मनुष्य को बचाने के लिए कृतसकल्प है। यह स्वर्ग का छाड कर आया है, जहा शुद्धता है, प्रसनता है, महिमा है, और वह पापो में डूबे हुए ससार को बचाने के लिए आया है। वह अपने उद्देश्य से विमी भी दशा में विमुख नहीं हो सकता। अब उमकी प्रार्थना एक आधीन हो जाने वाली प्रार्थना बन जाती है। - १०६ मसीह का जीवन " यदि यह मेरे पिए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्छा पूरी हो। मुक्तिदाता अब मृतक के समान भूमि पर गिर पड़ता है। यहां कोई शिप्य उपस्थित नहीं है जो कि उसके सिर के नीचे अपना हाथ रख दे और उसके विकृत मुख का पसीना पोंछ दे। मसीह यहां अकेला है और उसके इतने अधिक लोगों में से एक भी उसके पास नहीं है। परन्तु परमेश्वर अपने पुत्र के साथ कण्ट भोगता है। स्वर्गदूत उसकी व्यथा को देख रहे हैं । स्वर्ग में सन्नाटा छाया हुआ है, वहां एक भी वीणा नहीं वज रही है । यदि मनुष्य इस स्वर्गीय सेना के आश्चर्य और शोक का दृश्य देख सकता तो उसे यही दिखाई देता कि पिता ने अपनी ज्योति की किरणें, प्रेम तथा महिमा अपने प्रिय पुत्र से पृथक कर दी है, तब वह पाप के भयानक परिणाम को अधिक स्पष्टता से समझ सकता था। अब एक शक्तिशाली दूत मसीह के निकट पहुंच जाता है। यह उस कष्ट सहने वाले अलौकिक व्यक्ति का सिर अपनी गोद में रख लेता है। फिर वह स्वर्ग की ओर संकेत करते हुए कहता है कि वह शैतान पर विजय प्राप्त कर चुका है और इसके फलस्वरूप लाखों व्यक्ति विजयी हो कर उग महिमा के साम्राज्य में प्रविष्ट होने जा रहे हैं। अब मुक्तिदाता के मुख पर स्वर्गीय गान्ति की आभा दिखाई दे रही है। उसने ऐसा असीम कप्ट भोगा जैसा कोई मनुष्य नहीं भोग सकता क्योंकि उसने सभी मनुष्यों के लिए मृत्यु का स्वाद चग्या है । फिर यीशु अपने गियों के पास आता है, और फिर उनको गोने हुए पाता है। यदि वे जागते और प्रार्थना करते रहते तो आने वाली परीक्षा का मामना करने के लिए उनको शक्ति प्राप्त होती।
गतसमनी के उद्यान में १०७ अब इममे वे मो जाने के कारण वचित हा गए और जब परीक्षा की घडी आई तो उसका सामना करने में वे असफल रहे। उनकी ओर शोकपूर्ण दृष्टि डालते हुए मसीह ने कहा सोते रहो, और विश्राम करो, देखो घडी आ पहुची है और मनुष्य पुन पापियो के हाथ पकडवाया जाता है। वह यह कह ही रहा था कि उसे भीड के आने की पगध्वनि सुनाई दी जो कि उसे खोजने के लिए आ रही थी। फिर उसने पहा, "उठो, चलें, देखो मेरा पकडवाने वाला निकट आ पहुचा है। " मत्ती २६ ४५, ४६ । का SS विश्वासघात तथा पकड़ा जाना जब यीशु अपने विश्वासघाती शिप्य मे भेंट करने के लिए आगे बढा तो उसके मग पर व्यथा का कोई मंकेत न था। अपने गिप्यो के आगे पढ़े हो कर उगने पूछा : तुम किस को ढूंढते हो?" उन्होंने उत्तर दिया, " यीशु नामरी को। यीश ने कहा, " मैं ही हूं।" यूहमा १८: ४, ५ । जैसे ही यीश के मन में ये गब्द निकले, वही स्वर्गदूत जो उद्यान में उनकी सेवा कर रहा था उसके और भीड़ के मध्य में आ कर पड़ा हो गया। मुक्तिदाता के मुखमण्डल पर स्वर्गीय ज्योति चमकने नगी और कबूतर के समान एक आकृति ने उसे टाप लिया। श्वरीय महिमा की उपस्थिति में हत्यारी भीद एक पल भी गड़ी न रह सकी। वे लटपड़ाते हुए पीछे हट गए तथा महायाजक, प्राचीन, मैनिक तथा अधिकारी मृतक के ममान भूमि पर गिर पड़े। स्वर्गदूत पीछे हटा और ज्योति अन्तर्धान हो गई, यीशु बनकर निकल सकता था, परन्तु वह वही पा रहा । उगके मुग पर अनीम पान्नि थी और उनमें दृढ आत्मविश्वास था। उनके शिष्य ऐमें विश्वासघात तथा पकडा जाना १०२ - यूहन्ना १८ ८॥ आश्चर्यचकित हो गए थे कि उनके मुख मे एक भी शब्द नहीं निकला। रोमी सैनिक शीघ्र ही उठ कर खडे हो गए। महायाजको और यहूदा के साथ उन्होने यीशु को घेर लिया। वे अपनी दुर्बलता पर लज्जित हो गए थ, और वह कही भाग न निक्ले इमलिए भयभीत भी हा उठे थे । मुक्तिदाता ने फिर उनमे प्रश्न विया "तुम किम का ढुढते हो" फिर उन्होंने वही उत्तर दिया, " यीशु नासरी को।" तब मुक्तिदाता ने कहा, "मैं तो तुमसे कह चुका हूं कि मैं ही हू, यदि मुझे ढूढते हो तो इनको ( शिष्यो की ओर सकेत करते हुए ) जाने दो। ऐसी भयानक परीक्षा की घड़ी में भी मसीह को अपने प्रिय शिप्यो का ध्यान था। वह उनको किसी प्रकार का कप्ट नही सहने देना चाहता था, यद्यपि वह स्वय बन्दीगृह तथा मृत्यु का कप्ट सहन करने जा रहा था। यहूदा, विश्वासघाती अपनी भूमिका को नहीं भूला। वह यीशु के निकट आया और उसने उसे चूमा। यीशु ने उससे कहा, "हे मित्र, जिस काम के लिए तू आया है, उसे कर ले।" मत्ती २६ ५०। फिर उसकी वाणी कांपने लगी, जब कि उसन कहा, "हे यहूदा, क्या तू चूमा ले कर मनुष्य के पुत्र को पडवाता है लूका २२ ४८। यीशु के इन मधुर वचनो से यहूदा का हृदय द्रवित हा जाना चाहिए था, परन्तु इस अवसर पर समस्त नम्रता तथा सम्मान उसके हृदय से निकल गया था, यहूदा ने स्वय को पूर्णतया शैतान का मर्पित कर दिया था। वह साहसपूर्वक प्रभु के सन्मुख खडा रहा " मसीह का जीवन और यह उसको शुद्ध भीड़ के हाथ सीपने में जरा भी लज्जा नहीं अनुभव कर रहा था। यीशु ने विश्वासघाती को चूमा लेने से नहीं रोका। उसने सहन- शीलता, प्रेम तथा दया का एक उदाहरण प्रस्तुत किया। यदि हग उसके गिप्य हैं, तो हमें अपने शत्रुओं के गाथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा कि उसने यहदा के साथ किया । जब हत्यारी भीड़ ने यहदा को यीशु के शरीर को स्पर्श करते देखा जो कि अभी कुछ देर पहले उनकी आंग्यों के सन्मुग्य महिमा रो पूर्ण था, तो उसका माहस बढ़ गया । उन्होंने मुक्तिदाता पर हाथ डाल कर उगे पकर लिया और उसके उन हायों को बांध लिया जो गि गदा मलाई के कार्य करते रहे थे । णियों को यह विचार तक नहीं आया था कि यीशु उनके हाथों में स्वयं को सौंप देगा। वे यह गमा रहे थे कि जिम जानित में उनकी मृतक क. ममान गमि पर गिरने के लिये विवश कर दिया था, वह उनको उग गमय तक अगलाय बनाए रखेगी जब तक कि मनी तथा उमा गहयोगी यहां गे बच पर नहीं निकल जाते । वे निराश तथा कोधित हो गए जब कि उन्होंने रग्गियों द्वारा उनहायों को बांधे जाते देगा जिनमे उनको प्रेम था। पतरग ने क्रोध में भरकर अपनी तलवार गींच ली और अपने स्वामी को समाने का प्रगल किया और इस गंघर्ष में मायाजक के मेवक का कान कट गया। जब यीश ने यह देखा तो उसने रोगी रीनिकों द्वारा प्रकारे गए अपने हायकमा लिए और गाहा, " अब बग करी ।" या २२ : ५१ । और उगला गान कार उगे अच्छा मार दिया । किर मी पतरस में कहा, "अपनी तलवार काटी में रम ले गयोंकि जो गलवार चलाते, ये मर तलवार नाश किए जागे।
विश्वासघात तथा पकडा जाना १११ क्या तू नही समझता कि मैं अपन पिता से विनती कर सकता हूँ, और वह स्वर्गदूतो की वारह पलटन से अधिक मेरे पास अभी उप. स्थित कर देगा ? परन्तु पवित्र शास्त्र की वे बातें कि ऐसा ही होना अवश्य है, क्योकर पूरी होगी?" मत्ती २६ ५२-१४॥ " जो कटोरा पिता ने मुझे दिया है क्या मैं उसे न पीऊ?" यूहन्ना १८ ११। फिर यीशु महायाजको और मन्दिर के अधिकारियो की ओर मुडा जा कि लोगो की एक भीड ले कर वहा पहुचे थे और उसने कहा, — क्या तुम डाकू जान कर मरे पाडने के लिए तलवारें और लाठिया ले कर निकले हो? मै तो हर दिन मन्दिर में तुम्हारे साथ रहकर उपदेश दिया करता था और तब तुमने मुझे न पकडा, परन्तु यह इसलिये हुआ है कि पवित्र शास्त्र की बातें पूरी हो ।" मरकुस १४ ४८, ४९ । शिष्य क्रोधित हो उठे जब कि उन्होने देखा कि मुक्तिदाता ने अपने शत्रुओ के हाथ से स्वय को हडाने का कोई प्रयास नहीं किया। वे उसे ऐसा न करने के लिए दापी ठहराने लगे । वे भीड के सन्मुख उसके आत्मसमर्पण की वास्तविकता को नहीं समझ सके और भय- भीत हो कर उसे छोड कर भाग गए। मसीह न उनके भाग जाने के विषय में पहले ही कह दिया था। उसने कहा था वह घडी आती है वरन आ पहुची कि तुम सब तितर-बितर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे और मुझे अफेला छोड दोगे, तोभी में अकेला नहीं क्योकि पिता मेरे साथ है ।" यूहना १६ ३२ । • देखा " हन्ना महायाजक के सामने गतसमनी के उद्यान से जो भीड़ यीशु के पीछे चल रही थी वह चिल्लाती हुई जा रही थी। मसीह चलते समय शरीर में पीटा अनुभव कर रहा था क्योंकि उसके हाथों को कस कर बांधा गया था और सैनिक उसे चारों ओर से घेरे हुए थे । उसे सबसे पहले हन्ना के घर ले जाया गया जो पहले महायाजक था परन्तु अब उनके स्थान पर उसका दामाद कैफा, महायाजक का कार्य कर रहा था । दुष्ट हन्ना ने बन्दी अवस्था में नासरत के यीशु को देखने की इच्छा प्रकट की थी। वह उसे दण्डित करने के लिए उसके विरुद्ध कुछ प्रमाण भी एकत्रित करने के लिए इच्छुक था । इन बातों को दृष्टि में रखते हुए उसने मुक्तिदाता से उसकी शिक्षाओं तथा उगः शिष्यों के विषय में प्रश्न करने आरम्भ किए । उसके उत्तर में यीशु ने कहा : मैने जगत में खोल कर बातें की, मने मामाओं और भाराधना- लय में जहां नव यहदी इकट्ठा हुआ करते हैं, सदा उपदेश किया और गुप्त में कुछ भी नहीं कहा । नू मुझसे क्यों पृछता है ? सुनने वालों मे पूछा कि मैंने उनसे क्या कहा ? देख वे जानते हैं कि मैंने नया क्या कहा?" यहना १८ : २०, २१ । - हना महायाजक के सामने महायाजको ने यीशु पर दृष्टि रखने के लिए गुप्तचर नियुक्त पर रखे थे जो उसके प्रत्येक शब्द की सूचना उनके पास पहुचा देते थे । ये गुप्तचर उसके उपदेश तथा कार्यों के विषय में सब कुछ जानते थे। उन्होंने उसको अपने प्रश्नो द्वारा जाल में फसाने या प्रयास भी किया था जिससे वे उसे दण्ड दिलवा सरे । इसीलिए मुक्तिदाता ने कहा, "सुनने वाली से पूछ पि मैने उनसे क्या रहा।" अपने गुप्तचरो के पास जा कर उनसे पूछ । जो कुछ मैंने पहा है, उसे वे जानते हैं, वे तुझे बताएंगे कि मेरी शिक्षाए क्या हैं। मसीह के शब्द ऐसे हृदयस्पर्शी थे कि महायाजर यह अनुभव करने लगा किबन्दी उसकी आत्मा के विचार पड़ रहा है। परन्तु महायाजर के मेवको में से एक ने यह विचार करते हुए वि उसने स्वामी को यथोचित सम्मान नहीं दिया जा रहा है, यीशु के मुह पर थप्पड मारते हुए कहा, "तू महायाजर को ऐमा उत्तर देता है।" यीशु ने इसका नम्रतापूर्वक उत्तर देते हुए कहा " यदि मैने बुरा कहा ता उम बुराई पर गवाही दे, परन्तु यदि भला कहा, ता मुझे क्यो मारता है ?" यूहना १८ २२, २३ । ममोह स्वर्गदूतो को विशाल सेना बला सरता था। परन्तु पी पर उसके आने का उद्देश्य ही यह था कि वह मनुष्यो द्वारा अपमान तया निरादर सहन करे और अपने कार्य की आधीनतापूर्वर पूरा करें। हना के घर से मुक्तिदाता को वैपावे महल में ले जाया गया। उस पर सेन्हेट्रीन सभा में मुकदमा चलाया जाना था और जव कि इस समा के सदस्यो का एकत्रित किया जा रहा था ता हमा योर कफा ने उसमे फिर प्रश्न करन बारम्म कर दिए, परन्तु उनको इममे कोई लाभ न मिला। जब सन्दीन समा के सदस्य एकत्रित हो गए ता का अध्यक्ष वे स्थान पर बैठ गया, उसके दोना और न्यार करन ना मा ८ ११४ मसीह का जीवन बैठे थे और उसके सामने रोमी सैनिकों के पहरे में मुक्तिदाता खड़ा हुआ था और उसके पीछ दोप लगाने वाली भीड़ खड़ी हुई थी। तब कैफा ने यीशु को आज्ञा दो कि वह सभा के सन्मुख एक आश्चर्यकर्म कर के दिखाए । परन्तु मुक्तिदाता ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि उसने कैफा के शब्द सुन लिए थे। यदि वह आत्मालों को वेधने वाली वही दृष्टि उन पर डालता जो उसने मन्दिर में लेन-देन करने वालों पर डाली थी तो समस्त हत्यारी भीड़ उसके सामने से भाग जाने पर विवश हो जाती। यहूदी उस समय रोमी राज्य के आधीन थे और उनको किसी को भी मृत्यु दण्ड देने का अधिकार नहीं था। सेन्हेड़ीन सभा केवल मुकद्दमा चला सकती थी परन्तु दण्ड का रोमी शासकों द्वारा अनु- मोदन अनिवार्य था। अपने दुष्ट अभिप्राय की पूर्ति के लिए उनके लिए यह आवश्यक था कि वे मुक्तिदाता में कोई ऐसा दोप खोजें जिसको रोमी राज्य- पाल पूर्ण अपराध स्वीकार करके उनके द्वारा निर्धारित दण्ड का अनुमोदन कर सके। उनके पास इसका पर्याप्त प्रमाण था कि मसीह ने यहूदी प्रथाओं तथा परम्पराओं के विरोध में बहुत कुछ कहा था। उनके लिए यह प्रमाणित करना मरल था कि उसने महायाजकों तथा फरीसियों की निन्दा की थी और उनको पाखण्डी कहा था। परन्तु इन बातों का रोमी शासकों पर किसी प्रकार का प्रभाव पड़ने की सम्भावना नहीं थी, वे फरीसियों के ढोंग से पहले ही तंग आ चुके थे। मसीह पर अनेक आरोप लगाए गए, परन्तु इनमें या नो साक्षियों में विरोधाभान या या प्रमाण इतने दुर्वल थे जो कि रोमी शासक द्वारा स्वीकार नहीं किए जा सकते थे। उन्होंने उस पर लगाए गए भारोपों का उनसे उत्तर प्राप्त करने का प्रयास किया, परन्तु उनने उनकी ऐसी उपेक्षा कर दी जैसे कि उसने उनकी बातें सुनी ही न हमा महायाजक के सामने ११५ हो। मसीह का इस अवसर पर चुप रहना यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा इन शब्दो में व्यक्त किया गया है । " वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुह न खोला; जिस प्रकार भेड वध होने के समय वा भेड ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुह न खोला।" यशायाह ५३ ७। महायाजर अब भयभीत होने लगे थे कि वे उसके विरद्ध कोई ऐमा प्रमाण एकत्रित न कर सकेंगे जिससे वे बन्दी का पीलातुस द्वारा दण्डित करा सकें। उन्होंने एक अन्तिम प्रयास करने का निश्चय किया। महायाजक ने अपना हाथ स्वर्ग की ओर उठा कर यीशु को सम्बोधित करते और शपय दिलाते हुए कहा । "मै तुझे जीयते परमेश्वर की शपथ देता हूं, कि यदि तू परमेश्वर का पुत्र ममीह है, तो हम से कह दे।" मत्ती २६ ६४ । मसीह ने कभी अपने कार्य का इनकार नहीं किया और न ही परमेश्वर से अपने सम्बन्ध का इनकार किया। वह व्यक्तिगत निरादर पर चुप रह सकता था, परन्तु जब कभी उसने कार्य या परमेश्वर से उसके पुत्र-सम्बन्धी विषय पर प्रश्न उत्पन हुआ उसने स्पष्टता तथा निर्णयात्मक रूप में उसका उत्तर दिया। उसका उत्तर सुनने के लिए प्रत्येक व्यक्ति कान लगा कर बैठा हुआ था और प्रत्यैर की दृष्टि उस पर जमी हुई थी जब कि उसने उत्तर दिया 'तू ने आप ही कह दिया। उन दिनो की प्रथा के अनुसार इसी प्रकार का उत्तर दिया जाता था जैसे कि हम आजकल 'हो" या " जैसा आपने कहा वह ठीक है," कह कर उत्तर देते है। यह पूर्णतया स्वीकारात्मक उत्तर होता था। उसका मुखगण्डल फिर स्वर्गीय आभा से चमरने लगा जव कि उसने कहा : " ११४ मसीह का जीवन बैठे थे और उनके सामने रोमी सैनिकों के पहरे में मुक्तिदाता बढ़ा हुवा था और उसके पीछ दोप लगाने वाली भीड़ खड़ी हुई थी। तब कीफा ने यीशु को आज्ञा दी कि वह सभा के सन्मुख एक आश्चर्यकर्म कर के दिखाए। परन्तु मुक्तिदाता ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि उसने फैफा के शब्द सुन लिए थे । यदि वह आत्मानों को बेधने वाली वही दृष्टि उन पर डालता जो उसने मन्दिर में लेन-देन करने वालों पर डाली थी तो समस्त हत्यारी भी उसके गामने ने भाग जाने पर विवश हो जाती। यहदी उस समय रोमी राज्य के आधीन थे और उनकी किसी को भी मृत्यु दण्ड देने का अधिकार नहीं था। सेन्हेटीन ममा केवल मुकदमा चला सकती थी परन्तु दण्ड का नामी शासकों द्वारा अनु- मोदन अनिवार्य था। अपने दुष्ट अभिप्राय की पूर्ति के लिए उनके लिए यह आवश्यक था कि वे मुक्तिदाता में कोई ऐमा दोप सोजें जिसको रोमी राज्य- पा, पूर्ण अपराध रोकार कर उसके द्वारा निर्धारित दर का अनुमोदन कार मले। उनके पान इसका पर्याप्त प्रमाण था कि मनोह ने पहली प्रथाओ तथा परम्पराओं के विरोध में बहुत कुछ कहा था। उसो लिए यह प्रमाणित करना मगर, था कि इसन महायाजकों नमा परामियो की निन्दा की थी और उनकी पासपी नहा था। परतुन बातों का रोगी मानको पर किसी प्रकार का प्रभाव परने की सम्भावना नही थी, वे परीमियो रोग से पहले ही तंग मान । मनी पर अंग आरोप लगाए गए, परन्तु इनमें या नो माक्षियों में विज्ञानाममाया प्रमाण ने दुधन थे जो कि गामी शामक बारावीकार नहीं किए जा नबने थे। उन्होंने उस पर गाए गए भागों का जो उत्तर प्राप्त करने का प्रयास किया, परन्तु उगने उनी खा कर दी बगे कि उसने उनकी बातें गुनी हो न हना महायाजक के सामने खोला। हो । मसीह का इस अवसर पर चुप रहना यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा इन शब्दो में व्यक्त किया गया है : " वह सताया गया, तौभी यह सहता रहा और अपना मुह न सोला; जिस प्रकार भेड वध होने के समय वा भेड ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुह न यशायाह ५३ ७। महायाजव' अब भयभीत होने लगे थे कि वे उसके विरद्ध कोई ऐमा प्रमाण एकत्रित न कर सकेंगे जिससे वे बन्दी को पीलातुस द्वारा दण्डित करा सके। उन्होंने एक अन्तिम प्रयास करने का निश्चय किया। महायाजक ने अपना हाथ स्वर्ग की ओर उठा कर यीशु को सम्बोधित करते और शपथ दिलाते हुए कहा। "मैं तुझे जीवते परमेश्वर की शपथ देता हूँ, कि यदि तू परमेश्वर का पुत्र मसीह है, तो हम से कह दे।" मत्ती २६ ६४ । मसीह ने भी अपने कार्य का इनकार नहीं किया और न ही परमेश्वर से अपने सम्बन्ध का इनकार किया। वह व्यक्तिगत निरादर पर चुप रह सकता था, परन्तु जब कभी उसके कार्य या परमेश्वर से उसके पुन-सम्बन्धी विषय पर प्रश्न उत्पन हुआ उसने स्पष्टता तथा निर्णयात्मक रूप में उसका उत्तर दिया। उसका उत्तर सुनने के लिए प्रत्येक व्यक्ति कान लगा कर बैठा हुआ था और प्रत्येक की दृष्टि उस पर जमी हुई थी जव कि उसने उत्तर दिया 'तू ने आप ही कह दिया।" उन दिनो की प्रथा के अनुसार इसी प्रकार का उत्तर दिया जाता था जैसे कि हम आजकल " हा" या "जैसा आपने कहा वह ठीक है," कह कर उत्तर देते है। यह पूर्णतया स्वीकारात्मक उत्तर होता था। उसका मुखगण्डल फिर स्वर्गीय आभा स चमरने लगा जव कि उसने कहा: " मसीह का जीवन वरन मैं तुम से यह भी कहता हूं, कि अब से तुन मनुष्य के पुत्र को लवंगक्तिमान की दाहिनी ओर बैठे और आकाश के बादलों पर आते देखोगे।" मत्ती २६:६४ ॥ इस वक्तव्य द्वारा मुक्तिदाता ने उसके विपरीत दृश्य प्रस्तुत किया जो उन समय वहाँ दिखायी दे रहा था। उसने उस समय को मोर उनका ध्यान माकर्पित किया जब कि वह श्रेष्ठ न्यायाधीश के रूप में स्वर्ग और पृथ्वी का न्याय करेगा। वह उस समय अपने पिता के सिंहासन पर विराजमान होगा और उसके निर्णय पर पुर्नविचार नहीं हो सकेगा। उसने सुनने वालों के सन्मुख उस दिन का दृश्य प्रस्तुत किया जव कि वह हत्यारी तथा गाली-गलौज करने वाली भीड़ से नहीं घिरा हुआ होगा वरन स्वर्ग की शक्ति तथा महिमा से घिरा हुआ आकाश के वादलों पर बैठ कर पृथ्वी पर आएगा। उसके चारों ओर स्वर्गदूतों को सेना होगी। फिर वह अपने गत्रुओं पर दण्ड की आमा घोपित करेगा और उन दण्ड पाने वालों में उपस्थित भीट भी होगी जो इस समय उस पर दोप लगा रही है। जब यीशु ने स्वयं को परमेश्वर का पुत्र होने की घोषणा की तो संसार के न्यायी महायाजक ने अपने वस्त्र फाड़ डाले, यह उसने भय प्रदर्शित करने के लिए किया । उसने अपने दोनों हाथ स्वर्ग की ओर उठाते हुए कहाः इसने परमेश्वर की निन्दा की है, अब हमें गवाहों का पया प्रयोजन ? देखो, तुमने अभी यह निन्दा नुनी है ! तुम क्या समझने हो ?" न्यागियों ने उत्तर दिया, "वह वध होने के योग्य है। मत्ती २६:६५, ६६ । यहूदियों के कानून के अनुसार बन्दी पर रात्रि में मुकदमा चला नियम के विरुद्ध था । यद्यपि उसको मृत्यु दण्ड देने का निश्चय । - हमा महायाजक के सामने ११७ जा चुका था परन्तु नियम के अनुसार उस पर दिन के समय मुकद्दमा चलाना आवश्यक था। यीशु को हवालात में ले आया गया जहां सैनिकों तथा अन्य लोगो ने उसका अपमान किया और उसे ठठों में उड़ाया। मूर्योदय के समय उसे फिर न्यायियों के सन्मुस ला कर खड़ा कर दिया गया और उनका अन्तिम दण्ड घोपित कर दिया गया। नेताओ तथा साधारण लोगों पर एक शैतानी आवेश छा गया था । लोग जगली पशुओं के समान चिल्ला रहे थे। वे चिल्ल्लाते हुए यीशु पर झपट पडे, " वह अपराधी है, उसे मार डालो!" और यदि वहा सैनिक उपस्थित न होते तो भीड उसे टुकड़े टुकड़े कर देती। परन्तु रोमी अधिकारियों ने बीच में पड़ कर रोक-थाम कर दी और उन्होंने हथियारो के वल पर उत्तेजित भीड़ को पीछे हटा दिया । महायाजक, अधिकारी तथा साधारण लोग सम्मिलित हो कर मुक्तिदाता को गालिया दे कर उसको निन्दा कर रहे थे। उसके सिर को एक पुराने वस्त्र से ढाप दिया गया था, और लोग उसके मुह पर धूंसे मार रहे थे। वे उससे कह रहे थे, " भविष्यवाणी करके वता तुझे किसने मारा ?" मत्ती २६ . ६८ । जब वह वस्त्र हटा लिया गया तो उपहास करने वालो में से एक ने उसको मुह पर थूक दिया। परमेश्वर के स्वर्गदूत सच्चाई के साथ उसके निरादर से सम्बन्धित प्रत्येक कार्य को लिख रहे थे । एक दिन आएगा जब कि जिन्होंने उसके उदास मुख पर थूका और उसे ठट्ठो में उड़ाया, उसका मूर्य के समान चमकता हुआ महिमायुक्त मुख देखेंगे।
Mont- यहूदा । यहादी अधिकारी योग को अपने अधिकार में लेने के लिए उत्गुपन थे परंतु लोगों में विद्रोह हो जाने की आशंका मे वे मुले का में उसे पाइने का नाहन न कर गो । मलिए उन्होंने एक ऐसा व्यक्ति पोज लिया जो गुप्त रूप से उनके साथ विश्वासघात कर उसे उनके हाथ में नांप दे । उनको यहूदा उपयुक्त व्यक्ति दिखाई दिया जो कि चीन के बारह शिष्यों में एक गिप्य था, और यह यह छल. पूर्ण कार्य करने पर सहमत हो गया था। पात्रा में स्वभाव से ही धन के प्रति प्रेम था परन्तु यह मदा ही भाट तया दाट नहीं रहा गा और उसने पहले कभी ऐगा अधम कार्य पारने का विचार तक नहीं किया था। उसने मन ही मन लोन की पामा उमाहित पिया था और फिर लोग ने उस पर अपना नियंजन यापन कराया और उसके फलस्वला अब वह अपने वामी की नांदी तीन दुकानों में बनने पर सहमत हो गया था जो किमका में एक दान का मन होता था । निर्गमन २१:२८-३२ । मागमनी मे. उद्यान में मुस्लिवाना तो गम पार पसरवाने मिनारहो गया था।
यहूदा परन्तु वह परमेश्वर के पुत्र के पीछे पीछे चल रहा था। वह गतममनी के उद्यान से यहूदी अधिकारियो के सन्मुख ले जाये जाने तक उसके साय माय रहा। उसने यह विचार नहीं किया था कि मुक्तिदाता यहूदियो द्वारा स्वय को मार दिए जाने की अनुमति दे देगा। प्रतिक्षण वह आशा लगाए हुए था कि ईश्वरीय शक्ति उसको उनके हाथ से मुक्त कर देगी जमा कि पहले भी कर चुकी थी। परन्तु ममय बीतता रहा और यीशु ने शान्त अवस्था में वे यातनाएं महन पर ली जो उसके सतानेवालो द्वारा उमको दी जा रही थी, वह आधीन हो कर समस्त कष्ट सहन कर रहा था। अब विश्वास- पानी के हृदय में भयानक भय समा गया, उसे ज्ञात हो गया कि वास्तव में उसने अपने स्वामी के साथ विश्वासपात करके पाप दिया है और उसकी मृत्यु का उत्तरदायी वही है । जब मुकद्दमा समाप्त हो गया तो यहूदा अपनी दोपी अन्तत्मिा की यातना अधिक सहन न कर मरा । उस कमरे में तत्काल ही एक चीख मुनाई दी जिसने उपस्थित लोगों में भय उत्पन पर दिया । है वफा, वह पूर्णतया निर्दोष है, उसे मुक्त कर दो, उसने मृत्यु दण्ड पान के लिए कोई अपराध नहीं किया है यहूदा की लम्बी आकृति भीड को चीरती हुई आगे बढती दिखाई दी। उनका मुख उदास तया पीला दिखाई दे रहा था और उसके माये से पसीना बह रहा था । उमने न्याय सिंहामन के सन्मुस पहुंच पर वे चादी तीस टुकडे पर दिए जिनके लिए उसने अपने स्वामी से विश्यामपात दिया था। उसने महायाजक के वस्त्र का छोर पकड लिया और उसमे यीशु वो मुक्त कर देने की विनती करने लगा, उसने कंपा से कहा कि यीशु ने कोई अनुचित कार्य नहीं किया है। कंपा ने गुद हा कर उसे एक ओर हटाते हुए कहा :
१२० मसीह का जीव - " हमें क्या, तु ही जान।"? मत्ती २७ : ४ । यहूदा फिर मुक्तिदाता के चरणों पर गिर पड़ा, उसने स्वीकार कर लिया कि योग परमेश्वर का पुत्र था और उसने यीशु से अनु- रोध किया कि वह अपने शत्रुओं के हाथ से स्वयं को मुक्त कर दे। मुक्तिदाता को ज्ञान था कि यहवा वास्तव में जो कुछ कर नुका था उसके लिए पश्चाताप नहीं कर रहा था। यह झूठा मिप्य इस तथ्य में भयभीत हो उठा था कि उसके इन कार्य के लिए उसे भयानक दण्ट मिलेगा; परन्तु वह वास्तविक गोक प्रगट नहीं कर रहा या क्योंकि उसने निष्कलंक परमेश्वर के पुत्र के साथ विश्वासघात - किया था। फिर भी वीग ने उसे अस्वीकार करने में सम्बन्धित एक भी मब्द नहीं कहा । उसने दयापूर्ण दृष्टि में यहदा की ओर देखते हुए कहा : मनी पड़ी के लिए गंगार में आया हूं।" उपस्थित जन-गमूह आश्चर्यनकित हो कर उसे देखने लगा। अपने विश्वासपाती के प्रति ऐगी उदारता दन कर उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। यहूदा ने देख लिया कि उनका अनुरोध व्यर्थ है, वह कमरे में में चिल्लाकर निकल गया कि अब समय निकल गया है ! मैने देर कर दी है ! उगने अनुनय किया कि उने योग को कम पर चढ़ाए जाने तपः जीवित नहीं रहना नाहिए, यह निराम हां कर चला गया और मापार, अपने आप को फांनी दी। उनी दिन पुष्ट पन्टो के पन्नात् युद्ध गीर 'पोलानुन के न्याय मन जितदाना को कायरी की ओर ले जा रही थी। अn- जान्ही लोगों के चिल्लाने में नीटपली हो गई। मार्ग : किनारे १२१ यहूदा एक सूखे पेड पर यहूदा का मृत शरीर लटका हुआ दिखाई दे रहा था। उसके शव को तत्काल ही उस स्थान से हटा कर गाड दिया गया । परतु अब भीड द्वारा मुक्तिदाता का उपहास वन्द हो गया था और अनेक लोगो के चेहरे भय से पीले पड गए थे । जो मसीह के रवत के प्रति दोपो थे उनमें प्रतिकार प्रारभ हो गया प्रतीत हो रहा था।
पीलातुस के सामने । । नहदीन नमा के न्यायियों द्वारा यीशु को मृत्यु दण्ड देने के नुरन्त बाद उनको रोमी राज्यपाल पीलानुन के मन्मुख ले जाया गया जिससे उनी दर की पुष्टि हो सके और उसे क्रियान्वित किया जा सके। यहूदी महायाजक तथा मन्दिर के अधिकारी पीलातुम के न्याया- लय के अन्दर प्रविष्ट नहीं हो सकते थे। उनकी औपचारिक राष्ट्रीय व्यवस्था के अनुसार ऐसा करने में ये अगुद्ध हो जाते और फिर फराह गान बंचित रह जाते। अपनी मतान्धता के कारण वे यह न देन गरे कि फगह का वास्त- विग ना गमोह है और जब कि उन्होंने उसको अस्वीकार कर दिया पानी यह महाग उत्सव उनके लिए अधीन हो चुका था। जय पीलातुन ने चीन को देगा नो उगे वह श्रेष्ठ चरित्रवान तथा गम्मानित व्यक्ति जान पा । उसके मुम पर अपराध का कोई चिन्त नही दिलाई दिया। फिर पालानुम ने याजकों की ओर देगते हुए कहा : गुग ग गनुप्य पर फिग बान की नालिग करते हो ? " यहना उन पर दोप लगाने वाले उस विषय में विस्तारपूर्वक गुछ नहीं पहना नाते और नीलिए हम प्रग के लिए तैयार नहीं थे।
पीलातुस के सामने १२३ उनको ज्ञात था कि वे रोमी राज्यपाल वे सन्मुख ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकेंगे जिससे वह उसे मृत्यु दण्ड दे सके । सो महायाजको ने यपनी महायता के लिए झूठे गवाह प्रस्तुत किए। " और वे यह कह कर उम पर दोप लगाने लगे, कि हम ने इसे लोगो को वहनाते और कैसर को कर देने से मना करते और अपने बाप को मसीह राजा कहते सुना है।" लुका २३ २ । यह झूठ था, क्योरि मसीह ने स्पष्टता से कमर को उपयुक्त सम्मान देने की शिक्षा दी थी। जव एक व्यवस्थापक ने इसी प्रश्न पर उसे अपनी यातो में फसाने का प्रयास किया था तो उसने उत्तर दिया था: " जो कमर का है, वह कैसर को और जो परमेश्वर का है, वह परमेश्वर को दो।" मत्ती २२ २१ । पीलातुस इन झूठे गवाहो से सन्तुष्ट नहीं हुआ। वह मुक्तिदाता की ओर मुडा और उसने पूछा 'क्या तू यहूदियो का राजा है ? यीशु ने उत्तर दिया तू आप ही कह रहा है।" मत्ती २७ ११ । जव उन्होन यीशु का यह उत्तर सुना तो कैफा तथा उसके सहयोगियों ने पीलातुम से कहा कि अब तो तू ने स्वय उसकी गवाही सुन ली है और जो दोप उन्होने उस पर लगाया था, उसको उसने स्वीकार कर लिया है । वे चिल्ला पडे कि उसे क्रूस पर चढा कर मृत्यु दण्ड दिया जाए। जब यीशु ने अपन दोप लगाने वालो को कोई उत्तर नहीं दिया तो पीलातुम ने उससे कहा क्या तू नही सुनता, कि ये तेरे विरोध में क्तिनी गवाहियां दे " . ॥ 4 " 'परन्तु उसने उसको एक बात का भी उत्तर नहीं दिया। मत्ती २७११॥
१२४ मसीह का जीवन पीलातुस असंमजन में पड़ गया। उसने मसीह में किसी प्रकार के रोप का प्रमाण नहीं पाया और उसको दोप लगाने वालों पर विश्वान नहीं था। उसकी शान्त तथा सीजन्यता ने पूर्ण प्रकृति, दोप लगाने वालों को उत्तेजना तथा आवेश के सर्वथा विपरीत थी। पीलातुन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा, उसकी निदोपता उस पर स्पष्ट हो गई थी। यीशु ने सत्य बात करने के विचार ने पीलातुन यीशु का हाय पकड़ कर एक ओर ले गया और उससे पूछा : क्या तू यहदियों का राजा है ? मसीह ने उसके इस प्रश्न का सीधा उत्तर नहीं दिया, बल्कि उसने प्रश्न किया: क्या तू यह बात अपनी ओर से कहता है या औरों ने मेरे विषय में तुमने कही? परमेश्वर की आत्मा पीलातुन के साथ संघर्ष कर रही थी। मसीह का प्रश्न उसे निकट से अपने हृदय को टटोलने के लिए प्रेरित कर रहा था। पीलातुम इस प्रश्न का अर्थ गमन गया था। उनका हृदय उसके मन्मुल अंगीकार का प्रश्न प्रस्तुत कर रहा था, उनके हृदय में हलनल होने लगी थी। परन्तु उम पर गर्व प्रबल हो गया और उसने उत्तर दिया: क्या में यहूदी र ? नेरी ही जानि और महायाजकों में तुजे मेरे हाथ नीपा, न न गया किया है।' यूहन्ना १८:३३,३५ । पीलातृम के हाथ में वर्णिम अवसर निकल गया । परन्तु यीशु ने उन पर यह प्रगट कर दिया कि यह मांसारिका राजा बन कर इस संगार में नहीं आया है, सलिए उसने कहा : यह गुन पोलातुन में उनमें फिर पूछा; तो जिसे तुम यहदियों ना राजा करते हो, उनो में क्या कार? वे फिर चिल्लाये, कि उसे हम पर ना दे। ।
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१२४ मसीह का जीवन पीलातुन असंमजस में पड़ गया। उसने मसीह में किसी प्रकार के रोप का प्रमाण नहीं पाया और उसको दोप लगाने वालों पर विश्वान नहीं था। उसकी गान्त तथा सौजन्यता से पूर्ण प्रकृति, दोष लगाने वालों की उत्तेजना तया आवेश के सर्वया विपरीत थी। पोलातुल पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा, उसकी निदोपता उस पर सष्ट हो गई थी। यीशु ने सत्य बात करने के विचार से पीलानुन बीग का हाय पकड़ कर एक ओर ले गया और उसने पूछा : " क्या तू यहूदियों का राजा है ? मसीह मे उसके इस प्रश्न का मीधा उत्तर नहीं दिया, बल्कि उससे प्रश्न किया: क्या तू यह बात अपनी ओर से कहता है या औरों ने मेरे विषय में तुझसे कही? परमेश्वर की आत्मा पीलातुन के साथ संघर्ष कर रही थी। ममोह का प्रश्न उसे निकट से अपने हृदय को टटोलने के लिए प्रेरित कर रहा था। पीलातुम इस प्रश्न का अर्थ समा गया था। उसका हृदय इसके सन्मुख अंगीकार का प्रश्न प्रस्तुत कर रहा था, उनके हृदय हलचल होने लगी थी। परन्तु उम पर गवं प्रबल हो गया और उसने उत्तर दिया : " क्या मैं यहुदी हूं ? तेरी ही जाति और महायाजकों ने तुजे मेरे हाथ नांपा, तू ने क्या किया है ? ' यूहन्ना १८:३३,३'५ । पीलातुन के हाथ में स्वर्णिम अवसर निकल गया। परन्तु योग ने उन पर यह प्रगट कर दिया कि वह सांसारिक राजा बन कर उन संसार में नहीं आया है, इसलिए उसने कहा : यह गुन पीलातुन ने उनने फिर पूछा; तो निमे तुम यहदियों का राजा कहते हो, उनको मैं नया कम्? वे फिर चिल्लाये, कि उगे इस पर चढ़ा दे। में ارد برلي १२६ मसीह का जीवन , - " मेरा राज्य इस जगत का नहीं, यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते, कि मैं यहूदियों के हाय न सौंपा जाता, परन्तु अब मेरा राज्य यहां का नहीं। पीलातुस ने उस से पूछा, " तो क्या तू राजा है ? यीशु ने उत्तर दिया कि तू कहता है, क्योंकि मैं राजा हूं; मैने इसलिए जन्म लिया. और इसलिए जगत में आया हूं कि सत्य की गवाही दूं । जो कोई सत्य का है, वह मेरा गब्द सुनता है । पीलातुस के हृदय में मत्व को जानने की इच्छा थी। उसका मस्तिष्क व्याकुल हो गया था। उसने उत्सुकता से मुक्तिदाता के शब्दों को ग्रहण कर लिया और सत्य को जानने के लिए उसके हृदय मे आन्दोलन आरम्भ हो गया । सत्य क्या है और वह किम प्रकार प्राप्त हो सकता है, यह जानने की इच्छा उसमें प्रबल हो उठी। उसने यीशु से पूछा : " सत्य क्या है ?" परन्तु उसने यीशु के उत्तर की प्रतीक्षा नहीं की। न्यायालय के बाहर भीपण कोलाहल होने लगा था । महायाजक तत्काल ही दट की पुष्टि की मांग कर रहे थे और पीलातुम को अवसर के अनुकूल बाहर जाना पड़ा । उसने बाहर निकल कर लोगों से कहा : मैं तो उसमें कुछ दोप नहीं पाता। यूहना १८:३६-३८ । एक मूर्तिपूजक न्यायी द्वारा इन्त्राएली अधिकारियों को जो योग पर दोप लगा रहे थे उनके अधम विश्वासघात तथा पूर की कंसी कटु आलोचना थी। जब महायाजनों और मन्दिर के अधिकारियों ने पीलातुस के ये पद मुने तो उनके क्रोध तथा निराशा की कोई नीना न रही । उन्होंने लम्बे समय से यह पदयंत्र रच रखा था और ये बहुत समय पीलातुस के सामने १२७ से इस अवसर की प्रतीक्षा कर रहे थे। जब उन्होने यीशु के मुक्त कर दिए जाने की सम्भावना देखी ता वे स्वय उसे टुकडे टुकडे कर देने को उद्यत हो गए। उनका अव स्वय पर नियत्रण न रहा । वे खुल कर अपशब्दो का प्रयोग करने लगे । वे मनुष्य से पशु बन गए । अब वे पीलातुस की भी निन्दा करने लगे, वे उसे धमकी देने लगे कि रोमी राजा के प्रति वह निष्ठावान तथा स्वामिभक्त नहीं है । वे उस पर दोप लगाने लगे कि वह यीशु को मृत्युदण्ड देने से इनकार कर रहा है जो कि कंसर का कट्टर विरोधी है । फिर वे चिल्लाने लगे. 'यह गलील से ले कर यहा तक सारे यहूदिया में उपदेश दे दे कर लोगो को वहकाता है ।" लूका २३:५। पीलातुस का इस समय यीशु को मृत्युदण्ड देने का विचार नहीं था । उसको पूरा निश्चय था कि वह निर्दोप है । परन्तु जब उसने सुना कि मसीह गलील का निवासी है, तो उसने उसको हेरोदेस के पास भेजने का निर्णय किया, जो कि उस प्रान्त का शासक था और इस समय यरूशलेम में उपस्थित था। इस प्रकार पोलातुस ने इस मुकद्दमे का दायित्व अपने पर से हटा कर हेरोदेस पर टालने का विचार किया। यीशु भूख से अचेत तथा दुर्वल हो चुका था, रानि में न साने के कारण वह थक कर चूर हो चुका था। उसके साथ लोगो ने निर्दयतापूर्ण व्यवहार किया था जिससे उसे शारीरिक पीडा भी अनुभव हो रही थी। परतु पीलातुस ने फिर उसको सैनिको के हाथ में सौंप दिया और वे उसे निर्दयी भीड़ में फिर खीच कर ले गए जो उसका अपमान करने पर प्रसनता अनुभव कर रही थी।
हेरोदेस के सामने हेरोदेन की यीशु से पहले भेंट नहीं हुई थी परन्तु वह उसे उसे देखने का बहुत इच्छुक था और उसका कोई आश्चर्यकमं देखना चाहता था । जैने ही मुक्तिदाता को उसके सामने ला कर मना किया गया, भीड़ उसे जुल्म करने लगी कोई कुछ चिल्ला रहा था और कोई कुछ। हेरोदेस ने उनको नप रहने का आदेश दिया क्योंकि वह बन्दी से कुछ प्रश्न पूछना चाहता था। उसने मनीह के पीले तथा उदान चेहरे को उत्सुकता तथा दया- भाव ने देवा । उनके यीशु के मुखमण्डल पर शुद्धता तथा बुद्धिमता के चिन्ह देने । वह भी पीलातुम के समान सन्तुष्ट हो गया और उसे जात हो गया कि ईया तथा डाह के कारण ही यहूदी उग पर सूट आरोप लगा रहे थे। हेरोदेस ने उससे एक आश्चर्यकम दिलाने का अनुरोध किया । उसने प्रतिमा की कि आश्चर्यकम देग लेने के पश्चात् वह उसे मुगत कर देगा । उसके आदेश पर अनेक अपंग तथा विकृत शरीर के योगी अन्दर लाए गए और जमने वीग को उनको नंगा करने की बाशा दी। परन्तु मुक्तिदाता हरोदेन के नन्मुग चुपचाप मना रहा जगे कि उसने न गुछ देखा हो और न ही कुछ गुना हो ।
हरादेस के सामन परमश्वर व पुत्र में मनुष्य का स्वम्प और स्वभाव धारण किया था। उसके लिए ऐसी परिस्थिति में मनुष्य के समान ही कार्य करना आवश्यक था। इसलिए उत्सुक्ता को शान्त करने या स्वय वा दुप तथा अनादर से मुक्त करने पे लिए वह कोई आश्चर्यकर्म नही करे सकता था । उसके लिए यह आवश्यक था कि वह मनुप्य में समान ऐसी परिस्थिति में समस्त दुख और मष्ट सहन करें। जब हेरोदम ने उससे आश्चर्यवर्म करने का अनुरोध किया तो उसके दाप लगान वाले भयभीत हो उठे । वे उसकी ईश्वरीय शक्ति के प्रदर्शन के भय से आतरित हो उठे थे। ऐसा प्रदर्शन उनकी याज. नाओ के लिए भयानक आघात सिद्ध हो सकता था और सम्भवत उाको मृत्यु का कारण भी बन सकता था। सो उन्हाने चिल्लाना आरम्भ कर दिया कि वह शैतान के सरदार वैलजब्बूल की सहायता से आश्चयकम परता है। अनेक वर्ष पहले हरादेस यूहना बपतिस्मा देने वाले की शिक्षा सुन चुका था। इन शिक्षाओ का उस पर गहरा प्रभाव पड़ा था परतु उसने अपना पापपूर्ण अमयमी जीवन नही त्यागा था। इसलिए उसका हृदय कठार हो गया था और नशे की अवस्था में उसन हरोदियाम का प्रसन करने लिए यूहन्ना का सिर कटवा दिया था । अव उसमा हृदय पहले से भी अधिक कठोर हो गया। वह यीशु की चुप्पी को सहन नहीं कर सका। उसका चेहरा दारुण पष्ट से काला पट गया और उसने शोध से भर पर मुक्तिदाता मा धमकाना आरम्भ कर दिया जो अभी भी शान्त खड़ा हुआ था। मसीह टूटे हृदया का चगा करने के लिए इम ममार में आया था । वह पाप मे पीडित हृदय को चगा करन के लिये यदि कुछ शब्द वोल कर किमी को लाभ पहुचा सक्ता ता वह वभी चुप न रहता। परन्तु उन लिए उसके पास कोई शब्द नहीं है जा जान वृक्ष कर मत्य का अपने अपवित्र परो तले रौंद देते हैं ।
१३० मसीह का जीवन मुक्तिदाता ऐने शब्द बोल सकता था जो कि उस कठोर हृदय वाले राजा के कानों को वैध सकते थे। वह उसके जीवन के पापों को उस पर प्रगट करके उसे भयभीत कर सकता था जिससे वह कांप कर उसके चरणों में गिर सकता था। वह आने वाले विनाश से उसे परिचित करा कर उसे आतंकित कर सकता था। परन्तु मसीह की चुप्पी उसके लिए इन बातों से भी अधिक असह्य हो उठी थी। उसके कान जो मानव कष्टों को सुनने के लिए सदा तत्पर रहते थे, उनके लिए हेरोदेस की आज्ञा का कोई महत्व न था। उसका हृदय जो अधम से अधम पापी के लिए द्रवित हो जाता था, उस कठोर हृदय वाले राजा के लिए द्रवित नहीं हुआ जिसे मुक्तिदाता की कोई आवश्यकता अनुभव नहीं हो रही थी। क्रोध में भर कर, हेरोदेस भीड़ की ओर मुड़ा और उसने यीशु की निन्दा करते हुए उसे कपटी कह कर सम्बोधित किया । परन्तु उस पर दोप लगाने वाले जानते थे कि वह कपटी नहीं था। फिर राजा ने निर्लज्जता प्रदर्शित करते हुए परमेश्वर के पुत्र के लिए अपशब्द कह कर उसका उपहाम करना आरम्भ कर दिया । तव हेरोदेश ने अपने सिपाहियों के साथ उनका अपमान करके ठट्ठों में उठाया, और भटकीला वस्त्र पहना कर उसे पीलानुम के पान लोटा दिया ।" लूका २३:११ । जब दुष्ट राजा ने देखा कि यीशु मभी निगदर शान्तिपूर्वक सहन कर रहा है तो वह भयभीत हो उठा, वह समझ गया कि उसके गन्मुग पड़ा हुआ व्यक्ति माधारण मनुष्य नहीं है । वह इस विचार से व्याकुल हो गया कि बन्दी निश्चय ही कोई स्वर्गीय व्यक्ति है जो एन पृथ्वी पर किमी उद्देश्य को पूरा करने के लिए आया है। हेरोदेन को योग के मृत्युदण्ट की पुष्टि करने का नाम न हुआ । उनने इस भयानक दायित्व में बनने के लिए मक्तिदाता को फिर पीलानुन के पास भेज दिया।
पीलातुस द्वारा दण्ड दिया जाना जब यहूदी हेरोदेस के पास से लौट कर मुक्तिदाता का साथ ले पर फिर पीलातुस के पास पहुचे तो वह बहुत अप्रसन हुआ और उसन उनसे पूछा कि वे यीशु से क्या करना चाहते हैं। उसने उनका स्मरण दिलाया कि वह पहले ही उससे पूछ-ताछ कर चुका और उसमें उसने कोइ दोप नही पाया। उसने उनको यह भी बताया वि उहाँने उस पर अनेक आरोप लगाए परन्तु वे उनमें से एक भी आरोप प्रमाणित नहीं कर सके। इससे भी अधिक वे उस हेरोदेस के पास ले जा चुके जो स्वय भी यहूदी था और उसने भी उसमें मृत्युदण्ड देन योग्य कोइ दोष नही पाया है । परतु दोष उगाने वालो को सतुष्ट करने की इच्छा से उमने पहा इसलिए मैं उस पिटवा कर छोड दता हू। का २३ १६। यहा पोलातुस न अपनी दुबलता प्रकट की। उसने स्वीकार कर लिया था कि यीश पूर्णतया निर्दोप था फिर वह उसको क्या दण्ड देना चाहता था यह अनुचित बात के साथ समझोता था । यहूदी इस तथ्य का पूरे मुक्दम में नहीं भूले । उन्होने पीलातुस को जो ?
मसीह का जीवन कि रोमी राज्यपाल था पहले भी धमकी दी थी अब उसी का लाभ उठाते हुए वे यीशु के मृत्युदण्ड के लिए उस पर दबाव डालने लगे। अब भीड़ बन्दी के जीवन का अन्त कर देने के लिए अधिक जोर से चिल्लाने लगी। जब पीलातुस इसी असमंजस में पड़ा हुआ था कि उसे नया करना चाहिए, उसकी पत्नी का एक पत्र उसके सन्मुख प्रस्तुत किया गया जिसमें लिखा था : " तू उस धर्मी के मामले में हाथ मत डालना; क्योकि मैने आज स्वप्न में उसके कारण बहुत दुःख उठाया मत्ती २७ : १९ । इस सन्देश को पढ़ते ही पीलातुस के चेहरे का रंग उड़ गया; परन्तु उसकी दुविधा को देख कर भीद और अधिक जोर से चिल्लाने लगी। पीलातुन ने देख लिया कि कुछ न कुछ उसे करना ही पड़ेगा। फसह के पर्व पर एक बन्दी को मुक्त कर देने की प्रथा प्रचलित थी और यह लोगों की इच्छा पर निर्भर था, वे जिसे मुक्त कराने की मांग करते थे, उसे छोड़ दिया जाता था । रोमी सैनिकों ने अभी कुछ दिन पहले बरमव्या नाम के एक कुख्यात डाकू को गिरफ्तार किया था । वह डाकू, लुटेरा तथा हत्यारा था । सी पीलातुस ने अब भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा : तुम किस को चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए छोड़ दूं? बर. अव्या को या यीशु को जो मसीह कहलाता है' ? मत्तो २७ : १७ । उन्होंने उत्तर दिया, “ बरनव्या को।" लूका २३:१८ । पीलातुस स्तब्ध रह गया, उने बहुत आश्चर्य हुआ और वह निगाग हो गया। अपने ही निर्णय को अस्वीकार गररे और लोगों से चिल्लाने से प्रभावित हो कर उसने भीट पर अपना नियंत्रण तया प्रतिष्ठागा दी थी। अब यह भीड़ के हाथ का गिलौना बन नमा पीलातुम द्वारा दण्ड दिया जाना १३ । . 3 . था। वे उमसे अपनी इच्छा पूरी करवा सकते थे । फिर उसने पूछा याशु को जो मसीह कहलाता है, क्या करू?" उन्होंने एक स्वर में चिल्ल्ला वर कहा, "वह क्रम पर चढ़ाया जाए राज्यपाल ने कहा, क्यों उसने क्या बुराई की है 'परन्तु वे और भी चिल्ला चिल्ला कर कहने लगे, वह क्रम : चढाया जाए।" मत्ती २७ -२, २३ । पीठातुस का चेहरा पीला पड गया जब उसने सुना, " वह अ पर चढाया जाय। " उसे यह विचार तव नही आया था कि नोट यहा तक पहुंच जाएगी। उसने बार बार यीश का निर्दोष घोधि विया या परन्तु फिर भी भीड यह माग कर रही थी कि भयानय यातना वा मृत्यु दण्ड दिया जाए । उसने फिर प्रश्न किय 'क्या उसने क्या बुराई को है ?" फिर वही ध्वनि गूज उठी, " उसे क्रूस पर चढा । स पर चढा पोलातुम ने उनकी सहानुभूति अजित करने का अन्तिम प्रय किया। वह चषित, दुवैल, घावो से पूर्ण यीशु को उनके सन्म वाहर ले आया। 'और सिपाहियो ने काटो का मुकुट गूथ कर उसक सिर पर र और उसे बैजनी वस्त्र पहनाया। और उसके पास था आकर कह लगे, हे यहदियो ये राजा प्रणाम । और उसे थप्पड भी मारे । यहना १९२,३। उन्होन उसरे मुह पर थूका, किसी ने उसके हाथ से वह मरक छीन लिया जा उसके हाथ में पहले पकडा दिया गया था और उ का उमके मिर पर मारने लगे। इससे काटे उसके सिर में अधि गहर घुम गए और सिर से रक्त को धाराए वह निकली जिम मारा शरीर लाहुलहान हो गया।
मसीह का जीवन गतान ने सैनिकों का नेतृत्व किया और उन्होंने मुक्तिदाता को अपगन्द कह कर उसका अपमान किया। शैतान चाहना था कि इसने वह उत्तेजित हो कर अपने को मुक्त करने के लिए कोई आश्चर्य कर्म करे और समस्त मुक्ति की योजना इस प्रकार विफल हो जाए। इस भयानक परीक्षा मे उसके मानवीय स्वभाव भी एक असफलता परमेश्वर के पुत्र को अपूर्ण बलिदान सिद्ध कर सकती थी और ग प्रकार मनुष्य का उद्धार असम्भव बना सकती थी। परन्तु वह जो स्वर्गीय सेना को आदेश दे सकता था और एक पल में पवित्र स्वर्गदूत को सेना को अपनी सहायता के लिए प्रस्तुत कर सकता था, उनमें से केवल एक स्वर्गदूत समस्त उत्तेजित भीड़ पर प्रबल हो सकता था . वह जो स्वयं अपनी अलौकिका महिमा द्वारा स्वयं को यातनाओं से एक क्षण में मुक्त कर सकता था-जुद्ध भीड़ की यातनाओं को आदरयुक्त धैर्य तथा माहन के साथ नम्रता. पूर्वक सहन कर रहा था। जव कि अपनी निर्मम यातनाओं के कार्य द्वारा ये मनुप्य ने माक्षात् शैतान बन गए थे, उसकी नम्रता तथा धयं उसे मानवता से ऊपर उठा कर उसका ईश्वरीय स्वभाव प्रगट करते हुए उनका परमेश्वर के साथ सीधा सम्बन्ध प्रमाणित कर रहे थे। पीलातुन पर मुक्तिदाता , असीम धैर्य का गहरा प्रभाव पड़ा। उगने परमच्या को न्यायालय में उपस्थित करने की आशा दी। फिर उसने दोनों बन्दियों को भी सन्मुग प्रस्तुत किया । फिर उसने मुगितदाता की ओर संकेत करते हुए कहा, "देगी यह गुरुप, ..योनि मैं उसमें कई दोष नही पाता! यहना १२ : ५, ६ यहां परमेश्वर का पुल कांटों गा मुकुट पहने और भसीना उपहानपूर्ण बन्न पहने गहा था। यह कामर नल नंगा था । बम पोट में मोड़ों की मार से बात की धाराएं बह रही थी। मा पीलातुम द्वारा दण्ड दिया जाना चहरा रक्त रजित था और उम पर थकावट तथा पीडा के चिन्ह विद्यमान थे परन्तु फिर भी वह ऐसा सुन्दर दिखाई दे रहा था जैसा दि पहले कभी नहीं दिखाई दिया था। उसके मुस पर सौजन्यता और अपने क्रूर शत्रुओ के प्रति सद्भाव दृष्टिगाचर हो रहा था। उसके ठीक विपरीत दूसरा वन्दी खडा हुआ था, उसके मुस पर दृष्टि डालने से ही स्पष्ट हो रहा था कि वह क्रूर हत्यारा है। देगनेवालो में कुछ ऐसे व्यक्ति थे जिनकी यीशु के प्रति सहानु- भूति थी। यहा तक कि महायाजक तथा अधिकारी भी यह स्वीकार कर लेने पर विवश हो गए थे कि यह जैसे अपने विषय में घोषणा करता था वैसा ही है । परतु वे समर्पण के लिए तैयार नही थे । उन्हाने ही भीड में उत्तेजना और आवेश उत्पन्न किया था इसलिए महायाजव, मन्दिर के अधिकारी तथा भीड फिर चिल्लान लगी- उस क्रूम पर चढा स पर चढा। अन्त में पीलातुस का धैर्य समाप्त हो गया, उसन उनस कहा तुम ही उम ल कर ग्रूस पर चढाओ, क्याकि में उसमें काई दाप नही पाता। यूहन्ना १९ ५, ६। पीलातुस न मुक्तिदाता को मुक्त करन का बहुत प्रयास किया, परतु यहूदी फिर चिल्ला उठे 'यदि तू इसको छोड देगा तो तेरी भक्ति कमर की आर नही। यूहना १९ १२। यह पीलातुस के मर्मस्थल पर आघात था, उसका पहल ही रामी शामक सन्देह की दृष्टि स दखत थे और वह जानता था कि इस प्रकार की उसके विराध में एक ही शिवायत उसका विनाश कर देगी। " " मसीह का जीवन " जव पीलातुम ने देखा कि कुछ बन नहीं पड़ता परन्तु इसके विपरीत हुल्लड़ होता जाता है, तो उसने पानी लेकर भीड़ के सामने अपने हाथ धोए, और कहा; मै इस धर्मों के लोहू ने निर्दोष हूं, तुम ही जानो।" मत्ती २७ : २४ । पीलातुस ने व्यर्थ ही मसीह के मृत्यु दण्ड से स्वयं को मुक्त करने का प्रयास किया । यदि उसने आरम्भ में ही तात्कालिक दृढ़ता का परिचय दिया होता और अपनी धारणा तथा इच्छा को समुचित रूप में क्रियान्वित किया होता तो भीड़ उम पर प्रबल न हो पाती, वे उस पर अपना नियंत्रण कभी न स्थापित कर पाते। अपनी अनिश्चितता के कारण ही उसका विनाश हुआ। जब उसने देख लिया कि वह यीशु को मुक्त करने में असमर्थ है तो उसने अपना नामांरिक मान और पद बनाए रखना उनित समझा । अपनी सांसारिक शक्ति को खो देने की अपेक्षा उमने एक निर्दोप व्यक्ति के बलिदान को अधिक महत्व दिया । भीट की मांग के आगे झुकते हुए उनने यीशु को कोड़े लगवाए और उसे मूग पर चलाने के लिए उनके हाथ में सांप दिया । परन्तु अपना बचाव करने का प्रयत्न करने के पश्चात् भी जिन बात का उने भय था, वह उग पर आ पड़ी। उसका सम्मान उनसे छीन लिया गया और उसे ऊंचे पद से हटा दिया गया। उसका गर्व टूट गया और मनीह के गलीव पर चढ़ाए जाने के कुछ ही समय के बाद उसने आत्महन्या कर ली। मो जो लोग इस प्रकार पाप से समझौता कर लेते हैं. अपने ऊपर मोक तथा विनाम लाते है । " मा मार्ग है, "जो मनप्य को ठीक देव पनता है, परन्तु उसके अल में मृत्यु ही मिलता है । नीतिवचन १८:१२ । जब पीलानुम ने मसीह के लोह गे स्वयं गो नियॉप वॉपित किया, तो .पा ने यीशु को निन्दा करते हुए उत्तर दिया, "मका को हम पर और हमारी मन्नान पर। मत्ती २३:५॥ * पीलातुस द्वारा दण्ड दिया जाना और यही भयानर शब्द बार बार महायाजको और लोगो ने दोहगए। इस प्रकार उन्होंने अपने ऊपर भयानक दण्ड की आज्ञा दी, उन्होंने अपनी सन्तान को यह दण्ड उत्तराधिकार के रूप में दे दिया। लगभग चालीस वपो पश्चात यह दण्ड अक्षरश यरुशलेम के विनाश के रूप उनवे सन्मुख आया । यह दण्ड अक्षरश उन पर घटा जब कि वे निन्दित अवस्था में ममस्त ससार में तितर बितर हो गए आज भी उनके दशज पथ्वी पर इधर उधर भटक रहे है । अन्तिम समय में यह दो गुणा उन पर घटेगा तब दृश्य पूर्णतया बदर जाएगा और यही यीशु ' आएगा, "और जो परमेश्वर को नहीं पहचानते और हमारे प्रभु यीशु को नहीं मानते उनसे पलटा लेगा। २ थिस्सलुनीक्यिो १ ८। तब वे पहाडो और चट्टानो मे कहेंगे " कि हम पर गिर पड़ो और हमें उसके मुह से जो सिंहासन पर बैठा है, और मेम्ने के प्रकोप से छिपा लो क्योकि उसके प्रकोप का भपानक दिन आ पहुंचा है अव कान ठहर सकता है ?" प्रकाशित वापय ६.१६, १७ । " th . कलवरी भीद चिल्लाती हुई यीशु को साथ ले कर कलवरी की ओर चल पड़ी। जब यीशु पीलातुस के न्यायालय के फाटक से बाहर निकला तो वह भारी बम जो वरमया के लिये तैयार किया गया था, उसके घायल कन्धों पर रख दिया गया। दो डाकुओं पर भी पूरा लाद दिए गए जो कि यीशु के माथ ही रूम पर चढ़ाए जाने वाले थे। शक्ति और पीड़ित मुक्तिदाता उस भारी क्रूस को उठाकर न में जा सका, कुछ ही कादम चलने के बाद वह अचेत होकर उन भारी नाम के नीचे गिर पड़ा। जब उसे हांग आया तो फिर कम उस पर रख दिया गया। यह कदमदता हुआ गुछ गज़ तक गया और फिर मृतका के समान भूमि पर गिर गया। उसका उत्पीडित करने वालों पर सपाट हो गया कि म नारी भूम को ले जाना उसके लिए सम्भव नहीं है। अब वे व्यागुल हो गए और किमी से व्यक्ति को गांजने लगे जी उमा म उठाकर ले। जब वे उन जगह जिन कलवरी नाहते है पहुँच, तो उन्होंने यह उमे प्रग पर नटाया !
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१८० मसीह का जीवन उमी समय उनको शमौन कुरेनी दिखाई दिया जो कि विपरीत दिगा से अपने मार्ग पर चला आ रहा था। उन्होंने उसको पकड़ लिया और कलवरी तक ऊस उठा कर ले जाने पर वाध्य कर दिया। गमीन का पुत्र मसीह का शिष्य था, परन्तु स्वयं उसने मुक्तिदाता को स्वीकार नहीं किया था। मुक्तिदाता के लिए क्रस उठा कर चलने के कारण शमीन ने कुछ समय के पश्चात् उसको अपना मुक्तिदाता स्वीकार कर लिया। वह जीवन पर्यत इस कार्य के लिए परमेश्वर के प्रति आभार प्रकट करता रहा। कलवरी पर घटनेवाली घटनाएं देस कर और यीशु द्वारा कहे गए शब्द मुनकर शमौन ने यीशु को परमेश्वर का पुत्र तथा अपना मुक्तिदाता स्वीकार किया। क्रूम पर चढ़ाए जाने के स्थान पर पहुंच कर दण्डित व्यक्तियों को यातना के क्रूमों पर बांध दिया गया। दोनों डाकुओं ने बांधने बालों से संघर्ष करके स्वयं को मुक्त करने का प्रयास किया परन्तु मुक्तिदाता ने उनका कोई विरोध नहीं किया । यीश की माता भी इन भयानक यात्रा में यीशु के माथ कलवरी तक आई थी। जब वह भार के नीचे गिर कर दब गया था नो वह उनकी सेवा करने के लिए आगे बढ़ी थी, परन्तु उनको पीग तक नहीं पहुंचने दिया गया था। प्रत्येक पग पर वह उसे देख कर आशा कर रही थी कि वह स्वयं को उन भयानक शत्रुओं ने मयत करने के लिए अपनी परमेश्वर-प्रदत्त नदिन का प्रदर्शन करेगा। अब वह यात्रा के अन्त तक पहुंच नुन थी, उसने ठागुओं को क्रूम पर बांधे जाने देखा, उसने असमंजम की काथा महन की! पमा बह, जिमनं मृतकों को जीवित कर दिया था, स्वयं नतो काम पर नहाने की अनुमति देगा? क्या परमेश्वर का पुन यस प्रकार नियतामवंक मार डाला जाएगा? क्या उसके ममीसा होने पर उमगा जो विश्वास था 7 उनिन था ?
कलवरी उसने घूस पर उसके हाथा का खीचे जाते दखा- व हाथ जा सदा हा दुखियो को आशीप देन के लिए आग बढते थे। हयोडा और कीलें ले आई गई और उसने नम मास में ये कीलें ठार दी गई। इस हृदय विदारक दृश्य से शोषित शिप्य पीशु की माता को जा अचेत हो गई थी, उठा कर दूर ले गए। यीशु न किसी प्रकार की शिकायत नहीं की। उसका चेहरा शान्त बना रहा और उसरे माथे पर पसीन की बडी बडी बूदें उभर आयो। वह अकेला ही हौद में दासे रोद रहा था और देश के किसी व्यक्ति न उसका साथ नही दिया। यशायाह ६३ ३ । जव सैनिक अपना कार्य कर रह थे तो यीशु का दिमाग अपनी पीहा से हट कर अपन उत्पीडित करने वाला के भयानक प्रतिकार पर वैद्रित हो गया जिसका उनको एक दिन अवश्य सामना करना पडेगा। उस उनकी अज्ञानता पर दया आने लगी और उसने उनके लिए प्रार्थना की। है पिता, इनको क्षमा कर क्योकि ये नहीं जानते कि क्या कर लका २३ ३४ । मसीह अपने पिता को उपस्थिति में मनुष्यो का प्रतिनिधित्व परने का अधिकार अजित कर रहा था। उसकी इस प्रार्थना का समरत ससार ने उत्साह के साथ स्वीकार किया है। उसने इसमें प्रत्येक पापी को सम्मिलित किया है जो भूत, वर्तमान तथा भविष्य में इस संसार में रहेगा। जव भी हम पाप करते है मसीह को घायल करते है। वह हमारे लिए अपने छिपे हुए हाथो को परमेश्वर के सिंहासन के ऊपर उठा पर कहता है, " उनको क्षमा कर क्योकि वे नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं।
१८२ मसीह का जीवन जैसे ही यीशु को क्रूस पर कीलों से जड़ दिया गया, क्रूस को बलवान मनप्यों ने झटके से उस गढ़हे में खड़ा कर दिया जिसे क्रूस को गाड़ने के लिए पहले से तैयार कर लिया गया था। इससे परमे. श्वर के पुत्र की पीड़ा चरम सीमा पर पहुंच गई। पीलातुन ने फिर एक तख्ती पर लातीनी, यूनानी तथा इब्री भाषा में लिखवा कर कूस के ऊपर टंगवा दिया जिसे सभी व्यक्ति देख सके। उन तस्ती पर लिखा था: " यीशु नासरी, यहूदियों का राजा। यहूदियों ने यह वाक्य परिवर्तित करने का उससे अनुरोध किया। महायाजक ने उससे कहा 'यहूदियों का राजा मत लिख, वरन यह लिख कि उसने कहा कि मैं यहूदियों का राजा हूं। परन्तु अपनी दुर्बलता के कारण पीलातुम अपने पर बहुत कोधित था, उसने मन्दिर के अधिकारियों और महायाजकों की पूर्णतया उपेक्षा करते हुए कहा : मैने जो लिख दिया सो लिख दिया।" यूहन्ना १९:१२,२१,२२ । जैसे ही यीशु के जूस को सीधा खड़ा किया गया, एक भयानक दृश्य दिखाई देने लगा। महायाजक, मन्दिर के अधिकारी तथा शास्त्री एल. नाथ मिल कर भीट के साथ मरते हुए परमेश्वर के पुत्र का उपहास करने लगे: यदि तू यहूदियों का राजा है तो अपने आप को बचा। एका २३:३७। म ने औरों को बनाया और अपने को नहीं बचा सकता। यह तो साल का राजा है। अब वृम पर से उतर आए, तो हम जसपर विश्वास या। उर्मी परमेश्वर पर भरोमा माहै, यदि यह दमको चाहता है. तो अब म छुड़ा ले क्योंकि हमने कहा था कि में परमेश्वर का पुत्र हैं। "मत्ती २७:४२,४३ । - पलवरी और मार्ग में जाने वाले सिर हिला हिला कर और यह कह वर उमरी निन्दा करते थे कि वाह । मन्दिर के ढानेवाले और तीन दिन में बनानेवाले। फम पर मे उतर कर अपने आप को बचा ले । " मरकुम १५२९,३० । ममोह गम में उतर मकता था। परन्तु यदि वह ऐसा कर देता तो हम भी उद्धार न पा मक्ते। वह हमारे ही लिए मरने के लिये तैयार हुआ था। वह हमारे ही अपराधो के लिए घायर किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया, हमारी ही शान्ति के लिए उस पर ताडना पडी, कि उमके कोडे खाने से हम चगे हो जायें। यशायाह ५३ ५। "
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१४५ मसीह की मृत्यु रात्रि के समान गहन अन्धकार छा गया था। यह अलौकिक अन्धकार पूरे तीन घन्टे छाया रहा। भीड पर एक अज्ञात भय छा गया था। उसका उपहास और निन्दा अब बन्द हो चुकी थी। स्त्री-पुरुष और बच्चे भयभीत हो कर भूमि पर पड़े हुए थे। कभी कभी बादलो में बिजली की चमक दिखाई दे जाती थी जिसके प्रकाश में मुक्तिदाता का कूस दिखाई पडने लगता था। सभी का विचार था कि उनसे प्रतिकार लेने का अवसर आ गया था। नवे घन्टे में लोगो के ऊपर से अन्धकार हट गया, परन्तु मुक्ति. दाता पर अन्धकार छाया रहा। जब वह पर टगा हुआ था तो उम पर बिजलियां गिरती प्रतीत हो रही थी। उसी समय उसने निराशा व्यक्त करते हुए चिल्ला कर कहा . " है मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर तू ने मुझे क्यो छोड़ दिया?" परम १५ ३४॥ इसी बीच यरूशलेम और यहूदिया में अन्धकार छा गया था और सभी लोगो को दृष्टि यरूशलेम नगर को दिशा में लगी हुई थी। उन्होंने देखा कि नगर के ऊपर भयानक रूप से बिजलिया चमक रही थी। अकस्मात् ही क्रूस पर से अन्धकार उठ गया और स्पष्ट विजयी स्वर में समस्त पृथ्वी पर यह ध्वनि गूजती सुनाई दी 'पूरा हुआ।' पूहन्ना १९३० । " पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाय मापता हूं।" वा २३ ४६१ धूम ये चारो ओर प्रकाश फैल गया और मुक्तिदाता का चेहरा महिमा से पूर्ण हो कर सूर्य के समान चमका । फिर उमने अपना मिर झुकाया और प्राण त्याग दिए। ...१० १४६ मसीह का जीवन । क्रूस के आसपास खड़ी भीड़ पत्थर के समान स्थिर हो कर अपनी सांस रोक मुक्तिदाता की ओर देखने लगी। पृथ्वी पर फिर अन्धकार छा गया और बादलों की भीषण गर्जना के समान शब्द सुनाई दिया और साथ ही पृथ्वी भूकम्प के कारण डोलने लगी। भूकम्प के कारण लोग एक दूसरे के ऊपर भूमि पर गिर पड़े । उनमें भयानक भगदड़ मच गई। आसपास के पहाड़ों की चट्टानें तड़क गयीं और उन पर से लुढ़क कर मैदानों में आ गिरी । कन्ने खुल गई और अनेक मृतक कत्रों में से जीवित हो कर निकल आए। समस्त सृष्टि छोटे छोटे कणों में विभक्त होती प्रतीत होने लगी। महायाजक, अधिकारी, सैनिक तथा अन्य लोग भयभीत हो कर औंधे मुंह भूमि पर गिर पड़े। मसीह की मृत्यु के समय कुछ याजक यरूशलेम के मन्दिर में सेवा कार्य कर रहे थे । उन्होंने भी भूकम्प के झटके अनुभव किए और उसी समय मन्दिर का पर्दा जो पवित्र स्थान से परम पवित्र स्थान को पृथक करता था, ऊपर से नीचे फट कर दो टुकड़े हो गया । यह पर्दा उसी अदृश्य हाथ ने फाड़ा था जिसने बेलगस्मर राजा के महल की दीवार पर लिया था। अब पृथ्वी पर परम पवित्र स्थान की कोई आवश्यकता नहीं नही। अब उसकी पवित्रता समाप्त हो गई थी। अब परमेश्वर की उपस्थिति उा परम पवित्र स्थान पर कभी अनुभव नहीं की जाएगी। परमेश्वर की स्वीकृति या अस्वीकृति अब महायाजका मे पटने पर लटक बहुमूल्य पत्थरों पर कभी नहीं गमगी, या उस पत्थर पर छाया कभी नहीं पड़ेगी। अब मन्दिर में पशुओं का बलिदान महत्वहीन हो गया था । पर- मंग्वर के भने ने अपना बलिदान देगार मंगार के पानी की नि, ददी थी।
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ऋस महिमा से सूरज प्रकाश ने ऋस को घेर लिया और मुक्तिदाता का चेहरा सूरज की नाई चमका । "परन्तु वह हमार' ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमार' अधर्म के कामो के हत फ,चला गया; हमारी ही शान्ति के लिए उस पर ताड़ना पड़ी, कि उसके कोड़े खाने से हम लोग चंगे हो जायं" (यशायाह ५३:५) मसीह की मृत्यु १४७ जब बलवरी ये म पर मसीह की मृत्य हुई, ता यहूदी तथा अन्यजाति के लिए समान रूप में नया मार्ग प्रशस्त हा गया । जग मुक्तिदाता ने चिल्ला कर कहा, 'पूरा हुआ ।' ता स्वर्गदूत जयजयकार करने लगे। मुक्ति की महान याजना पूरी हो चुकी थी। जानाजारिता का जीवन व्यतीत करवं आदम पी सन्तान परमेश्वर ये मन्मुख अव उपस्थित हा सक्ती थी। शैतान पराजित हो गया, उसका साम्राज्य टोन यिा गया।
PROR M यूसुफ की कब्र में रोमी साम्राज्य के विरुद्ध राजद्रोह करने के अपराध में मुक्ति- दाता को मृत्युदण्ड दिया गया था। ऐसे कारणों से मारे जाने वाले लोगों को गाड़ने के लिए एक पृथक स्थान होता था । यीशु का प्रिय शिष्य यूहन्ना इस विचार मात्र से कांप उठा था कि उसका स्वामी क्रूर सैनिकों द्वारा असम्मानित रूप में गाड़ा जाएगा परन्तु इसको रोकने के लिए कोई उपाय नहीं मूझ रहा था क्योंकि पीलातुम तक उसकी पहुंच न थी। ऐसे दुखद समय में निकुदेमुम तथा अरमतिया का यगुफ इस शिष्य की सहायता के लिए आ पहुंचे । ये दोनों ही व्यक्ति सेनहेड़ीन सभा के सदस्य थे और पीलातुन से उनका परिचय था। दोनों है व्यक्ति धनवान तथा प्रभावशाली थे। उन्होंने संकल्प कर लिया । कि मुक्तिदाता को सम्मानपूर्वक दफनाना उचित है । यूमुफ साहमपूर्वक पीलातुस के पास पहुंचा, और उसने ३ यीशु का शव मांगा । यह जान लेने के पश्चात् कि वास्तव में की मृत्य हो चुकी है उसने यूसुफ की विनती स्वीकार कर ली । जब यमुफ यीशु का शव मांगने पीलातुन के पास चला गर निदेमुग ने उनके शरीर के गार जाने मे सम्बन्धित आ यूगुफ की वर में तैयारियां कर ली। उस युग में यह प्रथा थी जि मृतर ये शव को धारीर मूती चादर में मुगन्धित ममाले और इस डाल कर लपेटा जाता था। यह आवश्यप औपधियो की सहायता से गव को सहने से बचाने का एक उपाय था । सो नितुदेमुस लगभग सोपौंड गन्धरस तथा लोहबान की अमूल्य भेंट ले आया। पहशलेम में उच्च से उच्च सम्भावित व्यक्ति का भी ऐसा सम्मान प्राप्त नहीं हो सकता था । यीशु के दौन शिष्य धनवान अधिकारियो द्वारा अपन स्वामी का ऐमा सम्मान देख कर आश्चर्यचकित हो गये थे। शिष्य मसीह की मृत्यु के कारण अत्यन्त निराश तया शोक्ति थे, वे यह तथ्य भूल गए थे कि उसन उनको बता दिया था कि उसर साथ ऐमा होना अनिवार्य है । उनका कोई आशा नहीं थी। मुक्तिदाता को जीवित अवस्था में यूसुफ तथा निदेनम दारा में से किसी न भी खुल रूप में उसे अपना मुक्तिदाता स्वीकार नहीं दिया था। परन्तु उन्होंने उमकी शिक्षाए सुनी थी और उसकी सवामी को निक्ट से ध्यानपूर्व दसा था। यद्यपि शिष्य उममी अपन विषय में यही हुई उन वाता का भूल गए थ ना उगन अपनी मृत्य के विषय में उनका पहले ही बता दी थी परन्तु यूसुफ तया निकुदमुम को ये बातें स्मरण यो । यीशु की मृत्यु म सम्बन्धित ममी दृश्य जिनके कारण शिष्य निराश हो गए थे और उनका विश्वास डगमगा चुका था, इन अधिकारियाय लिए प्रमाण बन गए थे कि वही सच्चा ममोहा था और अब व दृढता स विश्वामिया की गति में आ बडे ऐस अवसर पर इन धनवान तथा सम्मानित व्यक्तिया की सहा. यता की शिष्या का बहुत आवश्यकता थी। अब व अपन मत १५० मसीह का जीवन के लिए कुछ कर सकते थे जो पहले इन निर्धन शिष्यों के लिए करना असम्भव था। सावधानी से सम्मानपूर्वक उन्होंने योशु के शव को क्रूस स नीने उतारा। उनकी आंखों से सहानुभूति के आंसू बह निकले जब उन्होंने उसकी घायल तथा रक्तरंजित आकृति देखी। यूसुफ ने अपने लिए एक चट्टान में नई कन खुदवा रखी थी । यह उसने अपने प्रयोग के लिए वनवाई थी परन्तु अब उसने यीशु के लिए इसको सुधार कर तैयार कर दिया। उसके शव को महीन मूर्ती चादर में मसालों और मुगन्धित गन्धरस के साथ लपेटा गया जो कि निकुदेमुस ले कर आया था और फिर उद्धारकर्ता को कल के अन्दर रख दिया गया। थ यद्यपि यहूदी अधिकारी मसीह को मार डालने में सफल हो गए परन्तु अभी भी उनको चैन न था। वे उसकी महान शक्ति में परिचित थे। उनमें से कुछ लाज़र की कब्र के सामने खड़े हुए थे और उन्होंने लाजर को कत्र में से जीवित अवस्था में बाहर निकलते देखा था, अब वे कांप रहे थे । उनको भय था कि मसीह स्वयं जीवित हो कर उनके सन्मुख फिर खड़ा हो सकता है। उन्होंने उसको लोगों की भीड़ के सामने यह कहते मुना था कि उसे अपना प्राण देने का भी अधिकार है और उसे वापिस लेने का भी अधिकार है। उनतो उनके शब्द याद आए जब कि उसने कहा था, मन्दिर को टा दो, और, मै उसे तीन दिन में खड़ा कर दूंगा। यूहना २:१९ । और वे जानते थे कि उसने अपने शरीर के विषय में यह कहा है।
यूमुफ की कम में यहूदा ने उनको यह सब बता दिया था जो ममोह ने यमालेम की यात्रा करने से पहले अपने शिष्यो को बताया था : देखो हम यरूशलेम को जाते हैं, और मनुष्य का पुत्र महायाजको और मास्त्रियो वे हाथ पकड़वाया जाएगा, और वे उसे पात ये योग्य ठहराएगे । और उमदा अन्य जातियों के हाय मागे, शिवे उस ठट्ठो में उड़ाए, और कोडे मारे, और ऋग पर चढाए, और वह तीसरे दिन जिलाया जाएगा।" मत्ती २० १८,१९. उनको अब अनेर वातें याद जाई जो उमने अपने पुनर्जीवित हो ठने के विषय में रही थी। वे उन बातो को न भूल गरे । अपने पिता शैतान के ही समान वे विश्वास करते और वापते रहे। उन पर सभी प्रकार में म्पष्ट कर दिया गया था कि योग पर- श्वर का पुत्र था। अब वे रात्रि में मो भी नहीं मरे, उमा जीवित रहने की अपेक्षा उसकी मृत्यु उनको अधिक व्यायुल पर रही थी। उम का क्व में ही रसन का मल्ल बरवें उन्होंने पीटातुम से पत्र पर मुहर लगान और उसकी रमवारी दिए जाने का निवेदन किया। पीलातुस ने महायात्रा के रहने पर मैनिको का पहरा निएका करते हुए कहा : "तुम्हारे पाम पहरुए तो हैं, जात्रा, अग्नी ममता के अनुमार रखवाली करो। सा वै पहरुओं को माप रे पर गए, और पापर पर मुहर लगा कर बद्र री रसवानी की।" मनी , ६५, ६६ ।
वह जीवित हो उठा है मुक्तिदाता की कत्र की अत्यधिक सावधानी ने चौकसी कारने का प्रवन्ध किया गया था, और प्रवेश द्वार पर एक विशाल पत्थर लगा दिया गया था। इस पत्थर पर रोमी मुहर इस प्रकार लगा दी गई थो जिमने महर टूटे बिना पत्यर को नहीं हटाया जा सकता था। मन्त्र के चारो ओर रोमी सैनिकों का पहरा था। उगको आदेश दिया गया था कि अत्यधिक मावधानी से यीशु के शव की चौकनी करें। उनमें से कुछ निरन्तर कत्र के चारों ओर घमते रहते थे और गु, कार के द्वार पर बैठे विश्राम करते थे। परन्तु पत्र पर अन्य शक्तिशाली पहरेदार भी उपस्थित थे। जिलशाली स्वगंदून गी वहा उपस्थित थे। इनमें से एक स्वर्गदूत अपनी दिन का प्रयोग कर समस्त रोमी गना का मंहारकार समाधा। गप्तामा प्रथम दिन की गति धीरे धीरे व्यतीत होती रही समे परले घनघोर अन्धकार की घनी आ मांगी। क. अत्यधिक सक्तिगाली स्वगंदन स्वर्ग में नीना कपा। नहग बिमली के समान चमक रहा था और उसके बाद यह जीवित हो उठा है । 4 ममान उज्ज्वल थे। उसने अपने मार्ग से अन्धकार का हटा दिया और उसकी महिमा से आयाश प्रकाशित हो गया। सोते हुए रोमी संनिय जाग उठे और उठ पर पडे हो गए। उन्होंने आदरयुक्त भय के साथ आश्चर्यचक्ति हो कर स्वगं वी और देसा और उस प्रकाश की ओर देखा जो उनवे निक्ट आता जा रहा था। इम शक्तिशाली स्वर्गदूत ये आने पर पृथ्वी काप उठी। वह मगलमय सन्देश ले कर आया था और उसके आने की गति तथा शक्ति ने पृथ्वी को शक्तिशाली भूपम्प के समान हिला दिया। मनिया, अधियारी तथा पहरेदार मृतक ने समान भूमि पर गिर पड़े। इनके अतिरिक्त पत्र पर कुछ अन्य पहरेदार भी उपस्थित थे। दुष्ट दूत भी यहा हाजिर थे। क्योकि परमेश्वर के पुरा की मृत्यु हो चुकी थी, उस शव का वे अपने अधिकार में ले लेना चाहते थे और उमको सौंप देना चाहते थे जिसका मृत्यु पर अधिकार है - अर्थात शैतान को। दांतान के दूत वहाँ इमलिए उपस्थित थे कि यीशु के शव का उनके हाथ से कोई शक्ति न छोन सबै । परन्तु परमेश्वर के सिंहासन वे निकट रहने वाला दूत जैम ही क्य पर पहुचा वे भयभीत हो कर वहा से भाग गए। स्वर्गदूत ने पर वे द्वार पर लगे विशाल पत्थर का एक छोटे ककड ये समान उठा पर लुढवा दिया फिर अपनी वाणी से जिस द्वारा पृथ्वी काप गयी उमन कहा योग, परमेश्वर के पुत्र, बाहर निकर आ। तेरा पिता तुझ . " बुलाता है। फिर वह जिमका मृत्य तथा क्य पर अधिकार था रन से बाहर निकल आया । उमन पत्र में बाहर निकल कर घाषणा मसीह का जीवन की, “ पुनरुत्थान और जीवन में ही हूँ। और स्वर्गीय सेना ने सपा कर उगे दण्वत किया और स्तुति के गीत गा कर उसका अभिवादन किया। योग् मृत्यु पर विजयी हो कर बाहर निकल आया । उनकी उपस्थिति में पृथ्वी कांप गयीं, बिजलियां नमक गयीं और बादल के गरजन हुए। जब यीशु ने अपने प्राण दिए ये तो उस समय भी भूकम्प आया था और जब वह मृत्यु पर विजयी हुआ तो उस समय भी पृथ्वी भूकम्प में कांपने लगी थी। स्वर्गदूत के आगमन पर उसके दूत भाग निकले थे इससे शैतान उन पर बहुत कोधित हुआ । उसे आशा थी कि यीशु पुनर्जीवित नहीं होगा और मुक्ति की योजना असफल हो जाएगी। परन्तु जब उगने यीशु को मृत्य पर विजयी होते देखा तो उसकी आशा में पानी फिर गया । शैतान को अब बात हो गया कि उस साम्राज्य का अन्त आ गया है और उसका विनाग भी निकट आ गया है।
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जाआ, और मेरे गिप्यो को सूचित कर दो १५७ भूमि कापती प्रतीत हुई। वे भागती हुई क्व्र पर पहुंची और उनका आश्चयं अधिक बढ गया जब कि उन्होंने कव पर लगा पत्यर लुढका हुआ देखा । उस समय वहा कोई रोमी सैनिक भी नहीं दिखाई दे रहा था। पद्र पर सबसे पहले पहुचने वाली स्त्री मरियम मगदलोनी थी। उसने जन क्य पर से पत्थर हटा हुआ देखा तो दौडती हुई शिप्यो को सूचित परने के लिए वह उनके पास पहुच गई। जब अन्य स्त्रिया वहा पहुची तो उन्होने कन के ऊपर एक ज्योति चमक्ती देखी और जव उन्होंने अन्दर देखा तोक्न खाली पाया। जब ये आश्चर्यचकित हो कर इधर-उघर टहल रही थी तो उन्होने एव युवा को चमकीले वस्त्र पहने क्र के निकट बैठे देखा । यह वही स्वर्गदूत था जिसने मन पर से पत्थर को लुढ़काया था। वे भयभीत हो वर भागने में लिए पीछे मुडी परन्तु स्वर्गदूत ने उनसे कहा " तुम मत डरो. मैं जानता है कि तुम यीशु को जो क्रूस पर चढाया गया था, दूढनी हो। वह यहा नहीं है, परन्तु अपने वचन के भनुमार जी उठा है, आओ, यह स्थान देखो, जहा प्रभु पडा था । 'और शीघ्र जा कर उसके चेलो से कहो, कि वह मृतको में से जी उठा है, और देखो, वह तुमसे पहले गलील को जाता है वहां उसमा दर्शन पाओगे।' मत्ती २८ ५-७ । जैसे ही स्त्रियों ने फिर क्व के अन्दर झार कर देखा, उन्होंने एक दूसरे स्वर्गदूत को देसा, जिसने स्त्रियों से पूछा 'तुम जीयते को मरे हुओ में क्यो ढूढती हो? वह यहा नही, परतु जी उठा है, स्मरण परो, वि उसने गलील में रहते हुए तुमसे . - ॥ 'सप्ताह से पहिले दिन भोर होते ही वह जी उठ कर पहिले पहिल मरियम मगदलिनी को दिखायी दिया।
मसीह का कहा था कि अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ में वाया जाए और कम पर चढ़ाया जाए; और तीसरे दिन जी लूका २८ . ५-७ । स्वर्गदूतो ने मसीह की मृत्यु तथा पुनर्जीवित होने का तथ्य उन पष्ट किया। उन्होंने स्त्रियों को यीशु के वे बचन स्मरण कराए जो उ. अपने विषय में कहे थे और अपनी मृत्यु तथा पुनर्जीवित हो उठने विषय में उनको पहले ही बता दिया था। अब वे वीग के गन्दों का अर्थ समझ गयी थी और उनमें नई आशा तथा नया साहम जागृत हो गया था, वे अब भागती हुई इन गुभमन्देश को पहुंचाने के लिए शिष्यों के पास पहुंच गई मनियम एम दृप्य का देखने के लिए उस समय वहां उपस्थित नहीं थी । परन्तु अब पनरम और यूहन्ना के माथ कद्र पर लौट आयी थी। जब वे यमगलेम कोलीट गए तो मरियम वही ठहर गई। उसे वह म्यान छोडना उपवन न जान पडा जब तक कि उगे यह ज्ञात न हो जाए कि यीशु के शरीर का क्या हुआ । जब वह नही हुई गो रही थी, तो उसने एक वाणी गुनी जो उनसे पूछ रही थी : 'हे नारी नु क्यों रोती है ? और किम को हननी है ? उम नेत्र अUओं में ऐगे पूर्ण थे कि उगे दिखाई नहीं दिया कि गो बोलने वाला कोन है। उमा मन में विनार आया कि यह माली और उसने नम्रतापूर्वक गर्ग पाहा : नारा, यदि तुने उगे उठा लिया है. तो मजमे कहा कि उसे in ओर भाऊगी।' मा किनारमा कि यदि धगवान शनि कीनाम्यामी लाभिया मामान नाम्यान ममता जा रहा हो तो कर स्वयं नको मिनी म्यान का प्रबन्ध नरेगी। पर अब स्वयं ममीद की भी गा पानी में सुनाई दी। उसने कहा, 'मरियम ।' , जाओ और मेरे गिप्यो को मूचित कर दो उमने तुरत अपने आगू पोछ लिए और मुक्तिदाता को सड हुए देगा । वह भूल गई थी कि उसे यूस पर चढाया गया था और आनदित हार उसने अपने हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा, " रब्यूनी अर्थात् है तव यीश ने कहा, “ मुझे मत छू क्योकि में अब तक पिता के पास ऊपर नहीं गया, परन्तु मेरे भाइयो पे पास जाकर उन से कह दे, कि में अपने पिता और तुम्हारे पिता, और अपने परमेश्वर और तुम्हारे परमेश्वर के पास ऊपर जाता हूँ।" यूहन्ना २० १६,१८ ! यीशु ने अपने लोगो द्वारा अपना सम्मान तव तक स्वीकार नहीं रिया जब तक कि उसे यह निश्चय नही हो गया जि पिता ने उसके बलिदान को स्वीकार कर लिया है। वह ऊपर स्वर्ग पर चढ गया और उमने स्वय परमेश्वर के मुख से पापी मनुष्यों के प्रति अपने प्राय- श्चित की स्वीकृति या आश्वासन प्राप्त कर लिया और उसके रक्त के द्वारा मनुष्य अनत जोयन प्राप्त कर सकता है इसका भी परमेश्वर द्वारा उसका निश्चय दिला दिया गया। जीवन के राजकुमार या आवाश और पृथ्वी का समस्त अधिकार द दिया गया और तब वह अपन अनुयायियों के पाम पृथ्वी पर लौट आया जिससे वह पापी ममार में उनका अपनी शक्ति तथा महिमा में महभागी बना मरे।
Hrite गवाह मसीह के पुनर्जीवित ही उठने के दिन दोपहर बाद, उसके दो शिष्य इम्माऊस नामक गांव को जा रहे थे, यह छोटा कस्वा यरूशलेम से लगभग आठ मील दूर था। पिछले दिनों जो घटनायें घटी थीं, उनसे वे बहुत व्याकुल हो रहे घे, विशेष रूप में वे स्त्रियों की सूचना से चकित रह गए थे जिन्होंने बताया था कि उन्होंने स्वर्गदूतों को देखा है और यीशु को पुनर्जीवित हो जाने के पश्चात् देवा है। वे अब प्रार्थना और ध्यान करने के लिए अपने घरों को लौट रहे थे और उनको आगा थी कि प्रार्थना द्वारा उनको इन घटनाओं की वास्तविकता को समझने के लिए जान का प्रकाश प्रदान किया जाएगा जिनके विषय में वे अभी तक अन्धकार में थे। जब ये यामा कर रहे थे तो मार्ग में एक अपरिचित व्यक्ति उनके साथ हो लिया परंतु वे अपनी बातचीत में इतने व्यस्त थे कि उनकी उगनी उपस्थिति का आभाग नहीं हुमा । न व्यक्तियों पर शोक का इतना भार था कि चलने-चलते ये रो से थे । मनरीह रे प्रेमी हृदय ने उनका दुःय नमः लिया और उसने काकीनांगिदनपा निश्नन कर लिया। ।
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१६२ मसीह का जीवन यदि भारभ्म में ही मुक्तिदाता स्वयं को उन पर प्रगट कर देता तो वे सन्तुष्ट हो जाते । अपनी प्रसन्नता के कारण वे उसकी सभी वातों को सुनने की आवश्यकता अनुभव न करते । परन्तु उनके लिए यह जानना आवश्यक था कि पुराने नियम में उसके कार्य के लिए जो सभी प्रकार की भविप्यवाणियां की गई हैं, उनको वे भली भांति नमल लें। इसी पर उनका विश्वास आधारित होना चाहिए था। मसीह ने उनको आश्वस्त करने के लिए कोई पाश्चर्य कर्म नहीं किया परन्तु पवित्र शास्त्र को स्पष्ट करना उसका प्रथम कार्य था । उन्होंने उसकी मृत्यु को सभी आगाओं का अन्त समझ लिया था । अब उसने भविप्यद्वक्ताओं की भविष्यवाणी से स्पष्ट कर दिया कि उनके विश्वास का सबसे अधिक दृढ प्रमाण यही था । इन शिप्यों को शिक्षा देते हुए मसीह ने उसके कार्य के प्रति पुराने नियम की साक्षी के महत्व को भी प्रगट किया । आज अनेक लोग पुराने नियम की उपेक्षा करके उसे अस्वीकार कर देते हैं, उनका कहना यह है कि अब इसकी आवश्यकता नहीं रही है। परन्तु मसीह की शिक्षा यह नहीं है । उसकी दृष्टि में पुराने नियम सतना उच्च सम्मान था कि उसने एक बार कहा, और भविष्यक्ताओं की नहीं सुनते, तो यदि मरे हुओं में से कोई भी भी उठे तो भी उसकी नहीं मानेंगे । लूका १६ : ३१ । जब सूर्य अस्त हो रहा था तो शिष्य अपने घर पहुंच गए। यीशु ने लंग ऐगा जान पड़ा कि वह आगे बढ़ना चाहता है । पर नियमो पृषत होना महन नहीं कर मरे, जिनने उनके पप आनन्य और हर्ष ने पूर्ण कर दिए थे। नलिा उनि उ कहा, "हमारे गाव द; गयोति नन्ध्या ही नती और दिन अब बात टल गया। माया भोजन गीत हो तगार हो गया और योग अपने नियम में. पगार मेज पर गया । जब वे मूसा
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१६८ मसीह का जीवन - उसने पाहा मेरे प्रभु, मेरे परमेश्वर ।" यूहन्ना २० : २८ । ऊपर वाली कोठरी में मसीह ने फिर अपने विषय में पविद्यमान को उन पर स्पष्ट किया। फिर उसने अपने शिप्यों को बताया कि पापों की क्षमा और पश्चाताप का उसके नाम के द्वारा समस्त संसार में जा कर प्रचार करो और इसका प्रारम्भ यरूशलेम से करी । अपने स्वर्ग पर चढ़ने से पहले उसने उनसे कहा, " जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामयं पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहुदिया और सामरिया में और पृथ्वी के छोर तक मेरे गवाह होगे।" " और देखो जगत के अन्त तक मैं तुम्हारे साथ हूं। प्रेरितों के काम १:८; मत्ती २८:२० । अपने जीवन को संगार के लिए बलिदान कर देने के विषय में कहा कि तुम मेरे गवाह रहे हो । जो कुछ मुझ पर बीता है यह मय तुमने अपनी आंखों से देखा है। जो अपने पापों से पश्चाताप करता है, उसे मै सहर्ष स्वीकार करता हूं। जो लोग चाहते है, उनका परमेश्वर से फिर मेल हो सकता है और वे अनन्त जीवन प्राप्त गार मलते हैं। यह दया गा मन्देश मै तुम्हारे हार में सौंपता हूं जो मेरे शिष्य हो। यह मग सभी जातियों तथा मनी भाषाओं के बोलने वालों का पहुंचाना तुम्हारा गर्नका है। पृथ्वी के दोर तापले जाओ परन्तु स्मरण नगी कि में गदा तुम्हा गंग। विश्वास तथा नरामा बसते हा परिश्रम करो ययोंकि मै तुमको कनी नी मगा। महिनावाबारा नियों को गौना गया कार्य सभी विधागिनों से लिए मंगार अन्त तक ममी के प्रत्येक विग्यानी का कार्य । जो मन में जीवन प्राप्त करते है. गका यह दाकि कदमो मान के लिए कार्य करें ।
गयाह मीट का मभी उपदेश नहीं दे सक्ते परन्तु व्यक्तिगत सेवा सभी पर मरत हैं। जो दूसरा या क्प्ट दूर करने के लिए सवा का कार्य परत है और जा आवश्यकता में पड़े हुए लागा की महायता करते हैं मोर जा शाक्ति लोगो या शान्ति देते हैं और जो पारिया पर मसीह या क्षमा यरन वाला प्रेम प्रगट करते है, वही मसीह के गवाह हैं।
(Aara वही यीशु पृथ्वी पर मुक्तिदाता का कार्य पूरा हो चुका था। अब उनक मन स्वर्गीय पर जाने का समय आ चुका था। यह विजय प्राप्त कार मामा और ब वर परमेयर के सिंहासन पर महिमा और प्रकार पूर्ण कर फिर अपना प्राप्त की जा रहा था। बोन अ वर्गारोहण के लिए जैतून पं. पहा को नन दिया। अपने चार शिष्यों को मामले कर, वह उस पार की और नाम नापर सियों को गढ़ माता नहीं पा को अपने स्वामी माय मी या अलिम मेंट थी। चरी चो गागं से मुक्तिदाता ने को अन्तिम नि थिए । उनको छोटल में पह, उसने यह बतुमार प्रकिया जो जो प्रत्येक अनुयायी लागि तथा प्रेरणादायक और गाया नामदेव तुम्हारे मंग मनी नापारमा नियातनिद पहंग गए । गा कामगा और मियां न चारों म वही यीशु घेर लिया। उमरे मुखमण्डल से प्रकाश को रेसाए फूटती प्रतीत हो रही थी और वह उनकी ओर प्रेमपूर्ण दृष्टि से देख रहा था। उनके कानों में मुक्तिदाता के मधुर वचन गूज रहे थे। हाथ उठावर उनको आशीप देते हुए, वह धीरे-धीरे उनसे ऊपर उठा लिया गया। जब वह ऊपर पहुच गया तो आदरयुक्त भय से पीडित शिष्य अपनी आसे फाड फाड कर अपने प्रभु की अन्तिम सला देसने के लिए आकाश को देखने लगे। एक महिमायुक्त वादल ने उसको उनकी भासो से ओझल कर दिया। उसी क्षण उनको म्वर्गदूतो का मधुर गान सुनाई देने लगा। जय कि शिष्य ऊपर देख रहे थे तो उनके कानो में मधुर संगीत के ममान शन्द गूज उठे। उन्होने मुड़ कर दो स्वर्गदूतो को मनुष्यो के रूप में देखा जिन्होंने उनसे कहा "हे गलीलो पुरुषो, तुम क्यो खडे स्वर्ग की ओर देख रहे हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्वर्ग को जाते देखा है, उसी रीति से वह फिर आएगा।" प्रेरितो ये काम १११ । ये स्वर्गदूत उस स्वर्गदूता के दल के सदस्य थे जो यीशु को पृथ्वी से स्वर्ग तक लिवाने के लिए आए थे। वे उन लोगो पर जो पृथ्वी पर छुट गए थे, अपनी सहानुभूति तथा प्रेम प्रगट करने के अभिप्राय से यह आश्वासन देने के लिए ठहर गए थे कि उनकी यह पृथकता सदा के लिए नहीं है। यीशु ने उनमे फिर आने की प्रतिज्ञा की थी, क्योंकि उसने कहा है तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो, मुझ पर भी विश्वास रखो । मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते तो मैं तुमसे कह देता, क्योकि मै तुम्हारे लिए जगह तैयार करने जाता है । और यदि में जावर तुम्हारे लिए " ।
१६८ मसीह का जीवन जगह तैयार करूं, तो फिर आ कर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा कि जहां में रहूं, यहां तुम भी रही । यहना १४ : १-६॥ स्वर्गदूतों ने शिष्यों को बताया कि मनीह " उसी रीति से फिर आएगा ' जिम रीति में उन्होंने उनको स्वर्ग जाते देखा था। वह मगरीर पर उठाया गया और उन्होंने उसे जाते हुए देखा । जब यह ऊपर पहुंचा तो बादल ने उनको उनकी दृष्टि ने छिना लिया। वह फिर बादल पर बैठ कर आएगा और ॥ प्रत्येक आंग उंगे देगी। प्रकाशित वापय १ : ७ । हनांक ने माक्षी दी, " देना, प्रभु अपने लागी पवित्रों के साथ आया किमयका न्याय पारे। यहूदा १४,१५ ॥ पालुम प्रेरित सी दृश्य की प्रस्तुत करते हुए पाहता है : क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग में उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दुन गा शब्द गुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही पूंगी जागनी और जो मनीह में मरे हैं वे पहले जी उठेंगे । " तब हम जो जीवित और बने रहेंगे, उन गाव बादलों पर उठा लिए जाएंगे, सिया में प्रभु से मिले और ग गीति में हम गदा प्रभु गाय रहेंगे।" विस्मलुनीकियों ४ : १६,१७ । म प्रकार पृथ्वी पर अपने स्वामि मातों को नदा पान, तक मन मानने के लिए लंगे आएगा।
1 | بها اد जीवित यीश आज यीश प्रत्येक सआदमी के दिल के दरयाज के पास बड़ा होकर अंदर आने के लिए सरपटाता है । यह जयरन अंदर नहीं जायेगा । यह स्वैच्छिक स्वीकृति चाहता है। वह पहला है, "देश्य, में दार पर पड़ा सा खटपटाता ; र्याद याई मेरा सन्द सुनपर दार सोलंगा, तो उसके पास भीतर जायर में उसके साप भोजन मंगा, और यह मर साय" (प्रकाशित याश्य ३:२०) ।
उनका स्वर्ग पर उठाया गया प्रभु जब शिष्य यरूशलेम लौटे तो लोग उनको आश्चर्यचकित हो कर देखने लगे। उनके स्वामी के मुकद्दमे तथा क्रूस पर चढाए जाने के पश्चात् उनका विचार था कि अब वे नीची दृष्टि करके सदा लज्जा अनुभव करते रहेंगे । उनवे शत्रु उनके मुख पर शोक और पराजय देखने के इच्छुक थे । इसके विपरीत उनके मुख पर प्रसन्नता और विजय के चिन्ह दिखाई दे रहे थे । उनके मुख पर स्वर्गीय आभा थी। वे निराश तथा शोक्ति नहीं थे वरन परमेश्वर की स्तुति करते हुए उसे धन्यवाद दे रहे थे। आनन्द से परिपूर्ण अवस्था में उन्होंने मसीह के जीवित हो उठने तथा स्वर्गारोहण की आश्चर्यजनक कथा लोगो को सुनाई और उनकी माक्षी को अनेर लागो ने स्वीकार किया। शिप्यो यो भविष्य के प्रति अब किसी प्रकार का अविश्वास नहीं या । उनको ज्ञान था कि उनका प्रभु स्वर्ग में है और उसकी उनके साय पूर्ण सहानुभूति है । वे जानते थे कि अपने रक्त के आधार पर वह परमेश्वर से उनके लिए विनती कर रहा है। वह अपने कोलो से ममीह का जीवन छिदे हुए हाथ-पैर परमेश्वर पिता को दिखा रहा था और यह उस मूल्य का प्रमाण या जो कि अपने द्वारा उदार प्राप्त करने वालों के लिए उसने चुगाया था। उनको जात था कि वह फिर आएगा और उनके साथ पवित्र स्वर्गदूत होंगे और उन्होंने उत्सुकता में प्रसन्नतापूर्वक उम घड़ी की प्रतीक्षा की। जब जनुन पहाड़ पर यीशु उनकी आलों से ओझल हा गया था, तो उनकी भेंट स्वर्गीय मेना गे हुई थी जो स्तुति के गीत गाते हा उमे नारों ओर से घेर गार वगं ना ले गई थी। परमेश्वर के नगर के फाटक पर अन्य स्वर्गदूत उनके आगमन की प्रतीक्षा कार से है । जब यी फाटकों पर पहंचता है तो उसले नाथ आने वाले कागदूत विजयलिलाम में फाटया पर गरे स्वगंदतों तो सम्बोधित करते हुए गहने है । है फाटकी, अपने गिर ऊन करो; गनानन महावी, कंन हो जाओ; परिप्रतापी राणा प्रदेश पगा। फाटक पर गगनों ने गहा : गट प्रनापीगजा कान: ? योगाला नही ह ह कि उनको यह बात नहीं, कि गाणी गा कोन : पान थे प्रगंगा और स्तुति का उत्तर गुना के " मीनापशाने बाग, व्यगंदा मधर गंगीन में गाना पहले। मेयर मामी और पनाम: रोमो पुस में पानी।" जनहिना २८ : -2 | मगर नीलकाने मोरगान उनका स्वर्ग पर उठाया गया प्रम १७१ समस्त स्वर्गीय सना अपने प्रधान सेनापति के प्रति सम्मान प्रकट परन की प्रतीक्षा में खडी है । वे प्रतीक्षा कर रहे है जव कि वह अपने पिता र साथ सिंहासन पर विराजमान हो। परन्तु वह अभी महिमा का मुकुट और स्वर्गीय वस्त्र पहनना स्वीकार नहीं कर सकता । उसे पृथ्वी पर अपने चुन हुए लागा के प्रति परमश्वर पिता से अभी एक विनती करनी है । वह स्वर्ग में उस समय तर सम्मान प्राप्त करना स्वीकार नही कर सकता जब तय कि पृथ्वी पर उसकी कलीसिया को मान्यता प्राप्त नहीं होती और उस स्वीकार नहीं कर लिया जाता। वह कहता है कि जहा यह है, वहा उसरे लोग भी होगे । यदि उस महिमा दी जा रही है ता उसमें उनका भी सहभागी होना चाहिये। वे जो पृथ्वी पर उस नाम में षष्ट सहन करते है, उनको उसके राज्य में प्रमुता प्राप्त करनी चाहिए। इसलिए मसीह परमेश्वर से अपनी क्लीसिया के लिए विनती परता है । वह उनके साथ अपनी एकरूपता स्थापित करता है, और उनके प्रति अगाड प्रेम प्रक्ट परता हुआ उनके अधिकार तथा पद का सुरक्षित रसन के लिए विनती करता है जिनको उसन अपने रक्त द्वारा मोल लिया है। उसकी विनती के उत्तर में परमश्वर पिता द्वारा यह पापणा की जाती है . परमश्वर के सव स्वगदूत उसका दण्डवत पर।" इब्रानिया १६ । प्रममतापूर्वक समस्त स्वर्गीय सना उद्धारपत्ता कादण्डवत करती है। असस्य स्वर्गदूत उसर सामने झुर कर उसे दण्डवत परत है और समस्त स्वर्ग में स्तुति का मधुर सगीत गूज उठता है।
मनीह का जीवन । - " वध किया हआ मेम्ना ही मामयं, और धग, और जान, और पक्नि, और आदर, और महिमा और धन्यवाद के योग्य है। प्रगत वापय ५:१२। मनीह के अनुयायी, " उम प्रिय में स्वीकार कर लिए जाते है । स्वर्गीय मेना की उपस्थिति में परमेश्वर ने मनीत के माथ अपनी वाचा का अनुमोदन लिया कि वर पश्चाताप करने वाले तथा आज्ञाकारी मनुष्यों को स्वीकार परेगा और अपने पुत्र के समान ही उनमे प्रेम करेगा । जहां उनका उद्धारकर्ता होगा वहां उनके हाग उदार पाने वाले लोग भी होगे। अन्धकार में गजमार पर परमेश्वर या पुन विजयी हआ है और उसने पाप तथा मृत्य पर विजय प्राप्त की है। स्वगं अब उसकी न्तुनि ने गूंज रहा :: जो मिहामन पर बैठा, उगया, और मेम्ने का धन्यवाद, और आदर, और महिमा, और गज्य, युगानुयुग गरे । प्रकाणित रिय'५:१३
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