Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Kavi Shri Mala Panjabi
Front matter
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कषि-श्री माला
*
पजावी
कवि
माई वीरसिंह
सम्पारक-मनुपादक
प्रीतमसिंह पंछी
PAPA राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा
प्रकाश
मोहनमाल मरम्
राष्ट्रमापा प्रचार समिति
हिन्दीनयर, पर्श
सर्वाधिकार सुरमित
प्रथम संस्करण-1
मई, १९६२
मुस्य- २/-
मएमतात भर
राष्ट्रभापा प्रेत
हिमानमा वर्ण
भामुख हपंच विषय है कि गदभापा-प्रपार-ममिति पर्व अम्ने कार्य वर्ष मन् १९६१ में पूरे कर रही है। म उपलक्ष्यमै माये वामवाले रजत जयन्ती महोत्मक्के अक्सर म ममी भारतीय मापाप्राक माम्य प्रवियोस तपा उनके उत्कृष्ट कम्पका परिचय कवि-बी माव्य' की पन्चास पुस्तकम हिन्दी मनुवाद सहित प्रमति कामकी योजना के अन्तर्गत प्रस्तुत मन्प पाठको समम असा है। पपि किसी भी माषाके ममष्ठ नाट्य-मईका निश्चय करमा एक कठिन कार्य । फिर भी अपने मामाओंको ध्यानमें रमते गप्पमाग्य 34 3म मापाओगे पिटाप यकी की उभपन कार्य सम्पन्न किया गया है। प्रत्येक पुम्सको प्रारम्भमें बिम मापाके पक्किी रचनाप्रांग अपन किया गया है उस मापा मास्पिना परिचय और विशेषत परिचय दिया गया। बिस माषाकेटी अपियांचा पुतय किया गया है, उनम पुनाव करते समय सन १९२० मे पूर्वका माहित्य और १९२० से बाल साहित्य-सतरमे एक विषयमन प्यानमै रमी गई। मम बरन या है कि कममग म १९२ के पूकि सबा १९२० मायके माीत्यमें प्रसारित विचार-माराम विशेष प्रसव अलमाव-सा पया जाता है मो प्रीतमसिंह पन प्रस्तुत पुस्तक्मे संकलित मास्पिको पुगने कपल्यासो मम्पति तया अनूदित बसारी मामीने म रूपमै प्रस्तुत परनमै सम्मोग दिया। पुस्तकम संकलित पित्री मोम्ममिहा सम्पक 'मालमा समाचार अमृतमरके भोजपमे उपतम्चएआ । मपदी आवरण निजाइमोबनवा मे मीही एम मारकरजी (हान म गम्टोरपूर अफ अपी आई, सई) घर मायौग मित्र है उमिमिति समीर आभारी।। मके अतिरिक्त एप तया प्रग्याग्य प्टियाम विनिमया प्रत्यय एवं मरया मायोग मिटा। उन तिमी ममिति अपक्षमता ध्यरत करती है। भाग्य प्रस्तुत मैया परको पिन एवं उपयोगी प्रतीत होगा। hidarin e
अनुक्रमणिका
पृष्ठांक
पम्यापी-साहित्य परिषय [प्रारम्भसे १९२० तक] १
कपि-परिचय
काम्प-सजय
कवि-यी मासा
पजाबी
-
भाई वीरसिंह
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पञ्जाबी साहित्य परिचय [प्रारम्मसे १९२० तक]
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पापी भापा और उसका साहित्य प्रारम्भिक कास ( सन् ८००-१४५० तक) इस मासे समी विद्वान सहमत है कि पयागी साहित्य मा मणिकपिठ उपमें गुप मानकरेयसे पूर्व बमकामा चिन्नु भो कविता उस समय रपी पर उसमहिनी घरमी या मिन-भिन्न प्रदेनकि पापोंजी इलमी मरमारपी कि उसकी भापाकी हम एक मिट्टीमापार सकते है। एसे कारियोमे पोरसनार (ईन् ९४०~१.१) परपट (f सन्८९.- १९) र मुसग ( सन् १२५३-११२५) तुपमा साद मौर नुसरो को पर भार र मारि प्रमुख करिया इनके अलावा पीर (सन् १९८- १५१९) विराम (कबीर समकालीन) मोर नामोर (चौदही सी) की गणना मानी परिपा पा सकती है। उस समय उत्तर-मारत एक एमी उम्त-मापात प्रादुर्भावहा पापा निसन मिन-भिन प्रोपोपियोको एर भूममें पाप दिया था। मार, नामदेव और रबिधामका पम्गाबाई सम्मन्य ही पा किन्तु फिर भी उनकी पनामि रन ममयी प्रति सम्मान प्रभाग स्पर पसे एप्टिगोचर होता है। इन दो रिपोर-पीर, भामरेर बार एपिराम- पविताएं पुस्मन सारमें सम्मिलित है।
भापाडी इस समानताका कारण यह पा कि पम्मायके गोरखपन्पी साधु तवा बाबा फरीब छिप्यपन पुरे प्रदेशों में फैले हुए । मोरसपाधी सामु तो समस्त भारतमें फैले गए। बाबा फरीद पर पेय (सन् १९७१-१२९१) मूफी साहित्य प्रवर्तक माम पाते है। मूध फहर भारतमे मुसलमानो मापममो सामही बार मा बारम्भमें इनका गम इस्लामका प्रचार पा। सूफी मत हिन्दुओ भक्ति-मार्म तमा राम्तका मुसहमानी रूप है। इस मतका बाम इस्थामक सापही हा गया पा! फरीद पार मंच मूर्फ, फाम अपनीम। हमके हाक मुरमन्म साहबमें सम्मिक्षित है। उनम परमात्माका भय रोगा-नमाय मरकका भय सेसारसे एम तमा पप-रुप द्वारा साधना प्ररमा गई है। पापा सीधी-सारं सरक पग परेन उपमार्मोसे मोव-प्रोत है। यपपि फरीच निराधामापी कमि। किन्तु उनकी फपिता यत्र-तब माणापाई दल मी मौजूद है। पूर्वाद मुगस-काम (ई सन् १४५०-१७०० तक) मुर मानमरेपसे पूर्व साहित्यको वर्षा हम कर पुरे विमा पम्बाबी साहित्यका उत्तरोत्तर मिरास तिन पुस्मोकि समय मा मापा रा भावाको नया रूप मिमा। इसी समय सर्वप्रथम गपकी मीरचना मारम्म हुई। यह साहित्य वीम पपियोंमें विमान पा-मूल-स हिय सिव-साहित्य वा रामाण्टिक-साहित्प। इस समय भक्ति-भान्दोमन परापर भा। इस बानीकनक प्रपतक तमा प्रचारक बनारसमें रामानन्द रविरास रामरमारि बपासा पास गौर पतम्य महाप्रभु पयस्थानमें मापाई और रार महाराष्ट्रमें मामदेव का नुपम और पम्याबम मिल गुरुपा सिव पुरुषही भक्ति-आन्दोलन गणित मंग बही इसके गुणरोपोंकी भी मिटाना पाइने । गितमा पोगी उपासना करामामा माम और मार परफा मिन रमोन ग्टकर पिराब पिया। मौन परमारमात्री मति हटपूर्वक और मनको मारफर नही परम् इमी दुनियाम हल हए मुझ को गला पाट पड़ाया। सम्म प्राति परत मनुष्य अपत पर अग्नि गरेमा मापको परमात्माकीमारी उमारत देनते। इनसे बपन भापकी पूषा ममतकरी भमिका स्पोप देतेप मका पिराबकरते। मिच पर्मक प्रर्मक पर मामा (t सन् १९९-१५१९) म कार्य-सत्रमा पिपास पा। लोग तमाम कामार, मममसे पेगापर, पाबुन मरमा ममा और बमदार तममं धमरा प्रचार निमा। frm-मुसलमान नों मनः लिए समान। रमईपमा परिनामामाता या पाव-भाया - (पम्पावी-हिन्दी मिमित मापा) में किसी माती पी। भापका मान गिगात पा। धर्म वर्णन विमान पुण्ण तया प्राकृतिक पर्मनके नहरम बापकी कविताम मिळवे है। बरेल पपमाएँ, सरस मोर साली-भरा मर्मन मापना गा संपात मापकी कषिता पिसप अंग है। अपुरी सहब बपकी बसाधारन काम्प-अधिमाका मेष्ठतम ममूना है। गुरु मानसी फपिता सरस मापा बारा पारे विचारों के म्यक्त परमकी सूची विचमान है। पिता सयम तथा मापा मीमार पन्हे एक महान् कविके रूपमें हमारे सामन का लगाकरखा है। इनके प्रत्यक कायमें एक मटह सचाई मिन्टी है और पाक्य एक मुहावरेको भौति सप्टस्म हो पाते है। भक्ति-मानो- समो य पहले एसे At चिन्होन मारम-मगाम पिचरनके साथ-साथ अपने पर्वमानकीपनकी बनान-सबारमकी प्ररमारी। बाबर यामी में ये एक पीलाका मनुभव करते हुए पावरके माश्मन तथा मत्याचार पिसमपनी माबाबची करते है *मिन सिरि सोलि पड़ीयाँ मापी पाय संपूर। मे सिर कती भूनियन, का विष मार्य पूर्षि। महिला बमर होरियो हुमि रहनि म मितनि हारि। बराहु सौर्मा नीमाहियां का हानि पाप्ति। हीर लिहि माया बरर की रासि । ग्पप पानी पारिए, मतं मिमम पाप्ति।" पुर मानक सिर्फ समाधि लगाते मौर सिर्फ मासा ही नही पपते . अपन दर्द-गि बास होतारीखते है तान्हें रिसाई देता है अत्याचार, पररस्ती कम्यमान काम-धर्मका माप मौर मूठमा चारों बार बोम-बासा। लेकिन मुग मानका ऐस-प्रेम सिर्फ मिमी एक पाति पा धर्म तक सीमित नहीं है। दिन मुसलमान रोनोंपर हो ये भत्माचारोंसे उनकी मारमा कुम्युला रखी है। म हिनुमोका मिरापटमा मूल कारण उनकी पर्यमाम मनावृत्तिको समाते है। कुण्परामाई ई पो भारत-से देसकी मिट्ट में मिला है। कोर्पोमें यह पुराना पात-बान और पन-सान भी मही एपगा। ये मुमति मुकार पन्ते है परापी मापा बोलते है पापी पोशाक पहनते है। फिर एसे नपुंसकोको पुरंपा क्यों महो। पहीचमकी मपन देशवासिमोली मिण्यटडी सर्ममा मौरदेपमें वर्तमान राम्नतिक पाटीदरा बरयाचारक पिर मामान। मग मिट्टी मजल माममता प्राकिटान पुक मानको मतिका महान् बितेरा बना दिया। इनॉन मनुष्य मात्र एक साप मैटन टना एक-दूसरे काम बानमा पाउपदेश रियाईया इमीगमका मुधार करना और एफसरत है। इन्होंन ऐसते-चलने वाले पीते वर्तम्प-निष्ठ बनकर परमारमाही सामना माय बताया है।
पुरमानको अधिकार कविता मौति-रूपमें है। इनकी कषितामें सब रस मौसूप है। उपयुक्त भोंका चपन बातावरण प्रमा मार पिता एसे पकाम मोती है गिनें इन्होन पगी मुगावा मोर कोपरके ताप अपन पोंमें दूसरे गुरगंगररेष (ई सन् १५ ४-१५५२ ) की मात बोडी पलाएँ मिन्दी है। इन्होंने सिर्फ मोहसिन है। इनका परिवारा एकही विपकी कि सेनाको पुरे साप से प्रीति निमानी चाहिए। मापी कठिा सरक- माम्बरसे कोसों पर। गुरु भमरदास ( सन् १४७९-१५.४) अपनी कविता मनुष्य-मानकी एकता तथा गुरवामीकी अटत तपाईका नपरेश देते हैं। कुत-बाप पात-पात - प्रपा मादि पुरााकि विस बापत पोरवार बापान उठाई। मुर नामकली माति भापकी कविता भी विपियवासे परिपूर्ण है। पुरु रामदास ( सन् १५१४-१५८१) को नामामे सिर्प प्रेम-भावना है। पूरी प्रति मम मार प्रमका पर्नन माप पड़ी मिठास साप मी कमिया माय साधारमा सम्म होते किन्तु उनमें एक प्य होना जोपयको मुग्ध करती है। पुर रामरास प्रीति कपि है। ये मनुष्य- माको परमात्मा मन हो पानी प्रणा देते है। गुरु गर्नुनरेष (न् १५६३-१५१) को पानी संमा सारे पुरस मिल है। इनकी कक्विाड़ी भाषा पिम म्याह भामि मिाि पाई पाती है। भापकी भापा, पम्माबक सभी प्रमोंका प्रभाव सप्ट पसे टिमोपर होगा।सको भापान सपने मसाना फारमी भरी मिन्त्री तथा राजस्थानी पयों की भरमार है।यहाँ रमानाबने वर्षनमें संपले काम लिया हो मापी परिणाम विस्वार पर। सान मोर प्रम मिपपरी बाल मपने पापाकी भारतमा रती है। पाईराम ( सन् १५५८-१०) पौष पुर रामरासरे मनगरे। मसर प्ररमी हिरी भाप प्रमग पगित । पुष मनोवन पर एम्पन्न हावा मंग्रह पिया। उसके सियनका भार पाप पर पापा । आप पम्मा उनतालीम भार • पार पम्मानीमापा वा काम्प पिसममें मपूर्ष पामरान रिया है। मपन मुर और गिप्यम सित धर्मकी महिमा सेवा वा पिन प्रठारे पर मिला है। माप कामिनामें मिसनमा प्रमोश पुराण सम्बन्धी नीर प्रालिमान या-सर मिसरा पाए। कमिवाम बोशियारे धमत्तार अधिक भाषामता कम है। इमरम मेयम है। एन मिरर-पाषाएँ हिमी माती है।
७ गुर मोमिन्दसिंहन ( सन् १९६६-१७८) पम्पाबी में बहुत कम रचना का। सिर्फ पपीरी बार पास इसोक उनके पयावी मापा मिस मिळते है। मापका पाकी सारा साहित्य परमापा तया प्राचीन हिन्दा है जिसमें फारमीका रङ्ग भी मिमा हमा है। पपारीमार एक वीरास प्रधान कास्य है। इसमें उमरिया और रोके परकी कपा है। यह एक प्रभावशाली रचना पिसे पापर हमे एप उपास मा बाता मौर एसा अनुभव होन लगता है मानो पानेमाहा स्पर्य पुर ममम मा सबल हा हो। पराकाम पम्मानी में पबिधारे विकासके साथ-साथ गपका भी पम्म मा। प्रारम्भिक काम महापुरपोका पाम-काएं, मोठियां दमा वार्मिक पुस्ताको टीकाएँ मिर्ष मई। गुरु नानकमी पहली परम-साही (कला) भाई बासन को गुरु नानमा मिनी सेवक पा इसरे सिम मुरु भमोरसे मिनाई। इस साईप्पे बनापे संस्करण मिलते हैं। परकी भापा मानी भाषा इतनी निकट है कि इसके प्राचीन होनमें सरह उत्पन्न होता है। सम्भव है कि जगमय तीन मौ वर्ष प्राचीन भाई बाही बन्म-मानी किमी प्रवास सिक मिलावटररी हो। इसके मिस पानी विधि सम्बत् १५९० माल मुरी पम्मी है। चन्म-मानीका एक सम्फरप बितायत पाती बम-मामी भानाता है। पर कामडक साहब न ईस्ट इपिया कम्पनीको पेंट की पी। इसके छ पोंको गोकर मप मारी पारी मतो माई गातेकी पग्म-मानी के सार मत माती है। इम पिम पनी मसरप इन पदोस “बोलो माईनी पुरानी पार होई" यह सिरहाता है कि यह मम्मरण रु पाविन्दसिहके प्रमयकी गिमी प्राधान पागनिपिमे नया करके हमार किया गया होगा क्योकि "माह गुमीकी फाह' गुरु गोविभिहे ममम ही प्रचभित्र पाइम बम-मान में संयमपूर्व मिराम और मरमना-भरा बर्गन एक अन्ग रम पैदा करता है। गग्ममात्रियों (पाओ) साप-माष गुरु मामाकी मिसनमा स्थानां पर हुई गोकमा पीपको नारा मिनी गई मिला है। इन गोप्टियोंही भापा बिनड़ी भाषा है। इनके मनको प्यारमा मान नहीं है। परापालामा समिरी और बाबासाही मार्ग पुल भाषा पस्यमय पिचार और मयमित गरे भीतीय उपाहरप है।
८ सफो तपा भक्सि-मामकी कविता सूत्री मापं मुफी मसके सम्बनमम हम बता भाए है कि इस मतका बाम भारत में मुसममानाने मायममके पाप-साप हमा। प्रारम्ममे यह मत सिर्फ इस्लाम प्रचार तक सीमित पा। पञ्चाबी मापामें इस मतके पहले कपि पम फर। माप पाकर पब इस्लाम मौर हिन धर्मका परस्पर मेक बड़ा तो यहाँके रीति- विाब या धमाका सूफी फकीरों पर प्रभाव पाना म्मामाविक पाापौर धर्म बेवाम्त मौर सिल वर्मन मूफी मतपर गहरा प्रभाष भग। इस मतके पिरासकी यह दूसरी मीनबह सूफी परियोके विचारों में एक कान्तिकारी परिपर्वन माग परन् रामके समूचे काम्पमें एक सा रंग मा मया। सूफी कमियोका काम निजी मनुभगो पीडामसि ग्वरित मा। मा हुसैन (ई.सन् १५१८-१५९९) माहारसे पहनकाले । य प्रसिस करामाती फहीर प। एक किम्मरती है कि इनकी मित्रता एक हिन्दू माके माघाण साप हा गई पाक की हब तक पहुंच गई थी। इसलिए इनका नाम मामोलाइन प्रसिट बा। म मगर मौर गुरु मनरेयसे भी मिले । सर्जव गौर नपा में पर पाक बा। माहारले प्राप्तीमार बागके पास इनकी मजार है। साहसन मुफी विचार-मारा प्रथम पापिया इनकी कारियां प्रसिय है। इनकी कविताक पिपप है-पिणेह प्रीति तथा पय । पावर और माधुर्य इनकी कपिताम है यह पम्मारके नाब किसी सूफी कपिली पिता नहीं मिलता। पीर यहाँ अपन प्रर्मक महर मनुपापी यहाँ पारसैन विमापी मूफी । इसीलिए इनकी कश्तिा सामवाली परिपिके पार है। किसी भी धार्मिक बगानकी कव में नहीी। मुमतान बाहुन ( सन् १९२९-११९.) मनुष्य और परमात्मा एकापत पाठ करने में माम किया है। इनकी पितामे पार इन मी नहीं है परन् सारा गार गार वन है। भापा क्षेत्रीय पम्मापी है पर परमी प्रमावन उस मोर भी पक्लिपासी बना दिया है। मुमतान पाने मगरम विचा-दुरि बरा हरेक प्रकार पार्मिक गरि प्रति मीनता प्रर का। भान भीतर पनी प्ररणारीहै। पाह पर (ई मन् १७२४), मपन आपकी मारपर, पमपाएँ हमार प्रम-प्पामा निमा उपरेस रिया है। इनकी बर्मन-सी सौधा-सारा और भापा ठर" मस्ति-मार्म मुसलमान सूफी कमियोके बमामा इस समय भनेक हिन्द फरिर्पोन भी निर्गण-सनुप और एम-यापापी भक्ति-रसको पम्माती करिता मस्ट किया। इन करियॉन एमपीमा बाम्त नीबाकी मस्मिता और भक्ति द्वारा नीराको साफ बनानक मापनाको महराई साप म्पात किया है। इनकी मीतिमय कमिता मीठी एबापत ठउ फेमीय मापा लिए इस करितापर दुर नाला मराबाई और चार इसनके प्रभारी छाप सप्ट रिपाई पर्व है। भक्ति मार्ग प्रसिय मत कपि काहना गुरु मनरको समकार्मम । इन्होंन सिम और मूफी परियाडी भावनामों सईत ६षा पम्पायसीको मदेव देरास्तके प्रकारले लिए मना पिताम मा। इनके बताना चाहपकि समकालीम बसीराम और पापा भुगर मी इस पारामाकरि। बाबा सम्परा सद राममी सुरु-सन्द साहब सगृहीत है। इस पाक करिमोनीपुर पम्पारमक रचनाएँ भी मिलती है। या करिता मरी और पापनका पिता है किसे मानान सापु-ाग' समझकर कष्टस्मकर लिया था। कवि भूषण माह सिमकिस हमें गुरु हरिमोबिन्द समकालीन तथा सेवक । भुपरा साहका सम्प्रराय मी मग तक पता मा रहा है। इनकी शक्विाका गम विक ठया पार्मिक शिक्षा देना पा। पतन दूसरे मंग्यात्मक परिमाप मुषरा पाहके समकार्मनमानही कमिताका विषम संसारमाया एम्म ५-मापि है। इसके पम्पसे मरे मर्गन पाकर मन प्रयास हो रहा है। रोमाप्टिक कविता इस एप पम्मा ने मनुप्मके सांसारिक प्रमको बरमपिताकी रचना प्रारम्ब हुई। इस प्ररणा पम्याई मे प्रमय-गापाएँ पीजो परमाबमी प्रम-मामी भारमापर ईई पी। सर्वप्रथम इस कविताका रङ्ग परेम मा पपागार पा पर रेम र पारसी उपमाों मोर सम्हॉका जाता गपा। रामा कि साहित्य धार्मिक पारिपके पर सबसे अधिक का पया। पम्मायके प्राविक तमाम पाएरभन मे प्ररणा प्रहसि मार मार्ग प्रमकी भाषामो समयपसे मह सानिय मौर मपिक पक उठा। हीर रोमा मुर्मः पुष मौर फिरमा सार्ग पर महान प्रम पाषाओं मेपर इस समय गनाटक माहिपई रचना हुई। हीर रामा प्रषप-मापारी परिवारे भूत्रम मापन बामा सबस पहनापपिरामोवर बार ईर रामा की यहानी मंशपमें इस प्रकार - पमा वक्त हमारणेसाठेमीले परिवारमे सबसे होगमाका मा। पहा कारयारसे पगा। पर क्विाको मृत्यु हो पाता भागों मौर मामिमोने रसा साब पुर्णवहार परमा पुरुर रिया। हम्रपरले निकर नमा। मम्गातमाही एक सरदार पुषककी पटी होरसे उसको चिनार परिमाको पार करते समय मार अप जम मुलाकात हुई। हीरका अनुपम सौन्दर्य देखते ही पता उसपर मासस हो गया। tar भी कोई कम मुमार महीना हरभी उसे सही निहाम होगा। हीरो पिता भूषाको अपर और परानके लिए एक परफारी कर दी। पिठासे कहकर होग्ने रामाको मन पररमौरर मा रिमा। धीरेचर रोताहा प्रेम सा। हीर पगबने माकर राधासे पिस्ती। हरिकेबापामो रोनाशपांग किया। उनके प्यारका एप सारे पाप भाप प्रकट कर दिया। परिनाम सरप हीरो गरमा सरसर दिसाह कर ले गए। शा पोमीका मेप बनाकर रजपुर पपा। हीरकी मार सहितीपी पापणासे दोनो मामी भाग गए। पीछा करनेपर पो पर गौर का धामन पेप किए पए। कारने मा PT परमारोसे भयभीत कर हीर न पाप । पामार मारका समकालीन और सम्पाहामा रहने वाला। पसकी मापा स्थानीय रजपूर उमरा है। पर नका काम wmar या पठमारी था। रख इस कामम हीर रामा एषा र सात मादिका परिम-निमा गुम्बरमा सरेकाम्पमाराम राई। मिस पिचार पाराणा प्रभार मौ रामारने प्रइन किया है और उसके काम रस समय संकविरा मीर-शिरा मिलता है। हिन्पू-मुसलमानो सामादिक रीति-रिमाम बड़ी समानता रिवा पाती है। हीर निवारके सप एक ग्रामप भी करा तापौर कार्य निगा भी पागण । समाई के लिए बाग तथा मुमम्मानों सिर माह। रामोपणे वमकालीन कपि पीसने मिर्गा माया का प्रपपनामा सरिता परिया है। पर्मन सापारलर फितु कपासीनता पालक मन-पाठे सर, भामाबोडी पाहम कामको भावठा सहायता ली है। पीताम्बरा पमापिस पिनाम एक कमर स्थान है। मि-माहा की इस प्रकार - रिमा समागरम पार का का। माया प्रम्पासवानी (मिक मामा) बेटीस मिकिपापी पहा पापर मो मे भान पापो मेनई। मम्भिार्ये पर तिहबान नमा। माही भी परी पानी पी। मोम प्रमका मपुरा पमा बमपर मिठिी पामार पर निकलना पड़ा मार मा मामा विपासाटेपानी गई। नारसन पिकाइमे पुरिनाम् भाग एप मिसनम मगर मुर्म मगार था। मिया विवाह बाने । रिन मफ्नी मोहीपर सवार होकर भाया और साहको भगा से गया। पर पाय भागीको कुछ और ही मयूर वा। सापक भाइयोंन पीछा किया। मिर्मा एक पाके नीचे माराम कर हावा। सत्रुको सिरपर वाया रेखर साहा पारा गई। रसन सोचा कि मिर्गा मांब मुम्वेही उसने माइयाके साम भिर वायगा मोर उन्हें मार गमेगा। साहनेि अपने माइयोनीबान बचानके पिए मिबकि तीरोंका तरका पेड़ पर टांग किया। इस नए मिर्गा मिहत्वा मारा गया। किम्मरम्ती है कि अपन प्रेमीको मृत्युके पश्चात् साहयान में बारमसत्या करनी। पीतून मिर्मा साहा प्रम भगीन से पेन किया है। इसकी कमा अस्सामामिक हगती है। एक प्रमिका मपन प्रम को पर्व है। मानके अहमें एकेक देती है। प्रमीये भाई से प्रिय है और फिर मिई मृत्यु पानात् एक पार्मनिकीमातिकहती है -~"मिर्ने बाबा पार-पैपम्बर र मए, फिसमा पामा है।" माफी साभाविकतासे स्पष्ट है कि कपिक मानवपरिणमा भस्म भान है। यह मनुष्यको मारीके मिनि म्पमें पेश करता है। पामावर और पानके महापा इस और समाप्टिक कहिए t-साफिर परतुर और महमप। मों कवियोन परकी यह प्रचलित अपप-माषाको पोंमें बाधा है। परनुरिन सस्सी पुर्व मिर्गा माहा मोर भूसफ मुमसा के किस्से निम बोर महमदन होर रामा पानीको बैत मन्दमें वर्गमारमा सीमे हिवार एक नया प्रयास किया है। महमरके मगमग सवा सौ साल बार पारिष साहन इसी में बात महान काम्प भार" की रचना करके अमर कीति अजित की। उत्तराई मुपात कास-पच ( सन् १७००-१८०. तक) मोरगारमा मृत्यु पाचात् मुगल सामाग्य काई मोर पा गया। मराठों और सिलान मनी पनि यहा। महमरगाहमणार्म के मामणके मनुभयौन मारे रेम वारा मा रिया पा। गो गान्तिपूर्ण पावावरम पहले पांच सित गुम्मकि साहित्य-निर्माण के लिए मिमा पा पर मस्म हापुका बा। इलहिए सिख मादिरा पियम म गया। पननैतिक संपर्पन सिप सम्प्रदायका पाम साहित्य-निर्मामी मोरमही भान रिमा। पर मूर्म परि माहिम निर्मानमें परही ये। इन मनपरा अधिकतर माहित्य रीमाणि साहित्य ।। पण का प्रसिर मूर्ष की इस्लेग्राह (६ सन् १९८०-१०५२) मनीहार ( सन् १९९०-१०८५) और बहुए है। गुरुममाह माह मनी मोति मोतमा मू। इन्होंन परमारमा रमा मान्माई एकता मन माए । मुस्तया पारपाका कि परमात्माकी प्राप्तिा एफमाप मार्ग प्रम है। मनुप्प परमात्मासे भयमीत मा से मपना प्रियतम सममकर न हो पाए।
१२ उपकरे, जानकी प्राप्तिरे मोर मार्ग में भूमवा पे। पपका एमा सा बना है कि उसम म प्रिपाबर हम हम मनपा सही बह-सहा पाए। बनी ईबर मौर बदमें मुफी मठके माधारभूत सिद्धान्तोंडी समानता मरिक्त पिठा पाकिमही हर गम्भीर विमौर परहने पेप्या- रमा बङ्गसे मपनी बात करते है। इन मूषी स्विति पाचात् माटिक पिताका पूराए पर प्रारम्म हमा। मुश्मन [र-रामा विसा 4 में मिला। यह मामा पा। मुहमा एनम मार भार्पण तमा नादमयता है। उसने महान पर चार दिपा है दरिम-निमार नहीं। कपिल पन्थायी मुहावरो वा बाजारोको बीमारीगरीसे परिणाम है। हर-Oमा पाकिस्ता सिनसे पूर्व मुभरान हात मुहम्मरके मातियों हसन हुसैनके पर्वलाके मैदानम हुए बलियन सम्म एक "बन मामा भी सिमाना। इस रोनाष्टिक बोरके दूसरे कवि पारसपाह (सन् 1.10.10९ ) म पम्याची पियाको एक रिक्षा प्रदान पारसका मम पियाला परवान पपुर (पश्चिमी पम्भाव) में हुमा पार निवासी मिमा मस्किदमें हामिला छ बसेंबर रनगर बराए। सा में मारकि सार स्टार 'कानूर' मा गए मार कम्पब मुमम पनाम पम मुण बन गए। यहाँ मापन पुरान माता पाटिल की। किमतीकि समाहकारसणारासापाठ थे। पारस मारतमाह 'पाफ्टनमे गए। पूमि यहाँ गार गठ्ठ पाहि पाकर इने गये। मग तक पारमा माफी मनुभवी हा पुरेप। यही पन्हें एक नया मनुमर हुमा। पारमपाइ एक हिमाली भागमरसे प्रेम करने म किन्तु उन्हें निराशाकाही मारेबमा पा। भामभर के भाइयोन वारसाहको दुरी एप रर महाँस बना दिया। फिर मागपोमरी पिसके मामा होस स्पानपर भाकर हमला यहाँ भासपाहन मन मसपा प्रमकी पार निरागमें एकर हार महासम्पनी बनाई। को पूर्ण Tr-पमा प्रणय-भाषाकी पम्बारी में तीन बार किया था पुश काका-तुहीही अपना पर पहोंने रमम प्राप पर उसे नया हरिया। माटई पत्रा पा विस्तार और परिष पिप गर्योन इम मापाम्पो पूर्वमपित पाप्पोमे भर मा रिया। पह एमासान महाराष्पपा निमम बरमान अपनी सारी दी। मनुपरे मन वारयोरा पिप पाम पे बनारपा प्रमाकरित रोम मपी। पामगाहम पूर्व पियामा पा-मन ए आमामारि गा। उरम यसाको हो मगरकी प्रतिमाके में पति पिपा, ममा TH महान मारमा पौरुपको सभाउ मूर्तिकसम दिया है। भारतमाहरे कपा-ममें एमी कोई मस्यामापिता नहीं है। मासमान मपने इस महाकाम्पम पम्मायकी समाविका पता-भागमा चिमनीषा। शिति-रिसाम प्रकृतिका मामु समाषपात पम्माविका विषप रनमें इम बभूतपूर्व सफा मिर्म है। बारससाराम प्रियवा रेनपाली चीन इस मर्मझता। य मय ईमपन पाक सपमें उपस्पित है। मा पस्य हि पावना पहरा मनुभा पा। मन गाव एनिमी मी की। हरेक पाटका पानी पी रवाना। पप्पो म मा कमानी नम पारमवावी। भापाय उस्वार । भारमहा कपिठाईमरी विसपता पापारा प्रकार पावको एसे का भावे किसे य कवितामा महीदों पर मार उसके मदरसे काम- फूटपकी इस सूची पी भापापर पूर्ष अधिकार और विचारों मुकभी हुई तस्वीर है। इसको पिताका मोत पहाणे भरलाई भावि महता पण पाता है। तमी वारसपा पम्माम संस्कृतिका रिमन माti मांगो गीत-मागते भित्र मानों के सम्मुम नाष सम्ले है। महफिले पा-पोमायाँकि रिने भीमाम भाका मा पस्मिोके दाम पोभियों प्रनिमा भूपतिमोर मिसन (सब सानिपौका मिल्कर पर्वा कातना) पार्म भोक सहाईमा प्या अपमादिका विमबारसपाहकाम्पमैं मिता है। भाषी नगीनगारोका प्रयोग है। मबारोमै मारमसाहक मिठा मोहिक नही है। मारो सामायिक जसे प्रयोग करते है। बारसमा काम एक पान और भी है कि नोंन उस समरक समारी दुरापारा मन ही महीं किया कि हमें सुधार लोक मुमार भोलिए। समागका मावस्या अजस्त्री है। भारसपाल होरको भूम-यूम तुपई मारवारतालवी बना दिया है। उन्होंने सामाणिक प्राणियोडी एक गुम्बा पाया है किरिका मद घिमोटे माय मही बना पाहिए। पारसपाहणे महासम्म 'हीर'ईमहापास्तबमें सारे पम्मान रिवार और समर्म को शिका मेयर मियो महान पापा। पारममा पम्मा अमर पपि। मार मी परिधर्म भोर पूरी सम्मायक मोर-माग गरसमाह-हीर कमाई पापर है। हीर'माको पिता एमालेमी समय पर मार कर हामा मौए है। सपना मौस्मिता और सपना है कि और-tमा की पूजी- महानामि पूर्व विस मे पाई। नधीतमा रोमायिक परियाई नमारक बाप-माष रम पमानकी पपल-पुपालन बारामती ताली पिरसे समरिया पर परमप्रिकविता १४ मस्तकी नहीं मिलती। मगाठाप क्ति नापरवाही पार' बहुत प्रसिर है। नगायत मटीसा हरमा बिमा पाहपुर (पश्चिमी पम्याप) निवासी । 'मारर साहीवारको (परनठ माफ पम्पाय हिस्टॉरिकासासाइटी भाप १) मे रामन ममरोमे एम बहादुर हरिकृष्ण कोसन माड़ोसे मुनकर म्पपानी। यह फार नादर पाइक भाक्रममके कोई माधी सरी पाचात् मापी। इसमे भारत योरे रेप-प्रमको उभारा नसा है और मारणा बाईपनी सम्पता निम्दाई गई है। यह मार एतिहासिक पटिसे काफी महत्व रखा। पसम नार पाहके मामभकोई कारकीके साथ चित्रित पिना पया है। उत्तराई मुगस-कार-पाच इस समय पम्पा पचका का विकास हुमा उसका पिपप वही पुराना पा। सानिया (पपाएँ) प्रौपदेय सं -सरत पच में मिली पाती रही। गपरे विकासमें सबसे मभिर काम मा मनीसिंहन रिया। सर्न ममिर ममृतसरके प्रम (पुराणि) और गुरु माविम्मसिहके हसूरी सिन्न एक। सिमपर्म और पसाभापाले मतिरसत मम्य धर्मों मा पिसेपका ससह प्ररमौर गणमापा पर पूर्व मकारबा। इसीलिए इनकी गध-सैसीम हानामी प्रनता है। इनम प्रति प्रम्प हिमानी मा मात्र है जो उस समय मय-साहित्य उत्तप्ट नमूना है। इसमें प्रसिब सिखोकी भारनियां सहीत है। हरेक पानीक साप गुम्मन्ब साहब मिमी माथी प्याम्पा भी कीमई। पम्याची मापा मार साहित्य के मामाचौंका मत है कि भाई मनासिह पम्यादी मरके जन्मराठा है। माई मनीसिली मावि पम्मानी मपको समृरिधानी बनानकातोमें एक बहन माहए है। इनका प्रमिड पत्र पारसमान सिमे पाणु-महारमानों को सामिपा सीधी सरत मापा हिती मिलती है। इस समय पुमनाम पचनससको नाप मिती ई हसरत मुहम्मर साल परीर रविरामीपनियां भी मिस्ती। पर इनकी भाषा इतनी सिपाही है रिमाप पम्भावमलोसे बहुत दरवी नई है। सित राग्य-पात (सम् १८००-१८९० तक) महापम मत सिंहका एग्य मारे पम्माबिर्योग एक मामा पम्प पा। बाठमस नो पप तक भारत विरेगी मागितामाचे पाणला पा। अब उसने एक समोपरी माम ही दी। प्रोसमें मान्ति स्पापित हो मां। माहौर एक बार फिर पपमानी मा मार महीरक भाषा सब पर प्रति होम नबी। यही भाषा म समय के सारिस्य पापा पानाई। महारान रग सिह महापम पा-मिल रिनु उनमें पपनैतिक मुईया म - गुमके साय कसानाकि परसन-निासनई मय ममता पी। सेबों कपिर्योका हत सम्मान करते प। उन्हें भापीरें और पुरस्कार देते थे। यमपि महाराणा गतिहो परकार पाहा फारती फिर में उनके पम्मी भापाके प्रति प्रमन प्ररेले हरेक मागमे कपि बार ऐसा पैदा किए। पम्पार्वती एक ठास रुप मिलना मुम्हमा। इस समय अधिकार माष्टिक कविता रवी यां। मसराम रमवासिक दरबारम गिरती नाग भी प। महाराणा अपने पमान किर्यमीना पीय प्रहम करला पानते ५। अपनी सेनाको मानिक सायि समित काम हिर दात सीसी ममसर मौकर रह। सिमराग्य कामके सबसे ममिक प्रसिद्ध मा प्रतिनिपि कमि हाधम थे। हामम १९६१ हितसमें 40 हए रे मोर १२३० में उनकी मृत्यू हई। एक किम्मरती है कि महायम रणजीतसिंह पिता सरकार महासिकी स्तुति मिची एक कविता सुनानेपर रपीवसिंह उनपर पहुए चुपए। पारे-धीरे राब परवारमै परा बसा मया और इसम महापक एमगीतसिहके मिथप राक- पिम हा पए। उन्हें पामीर मई। हासमी सन्तामें १९४७ तक सिस राम रमे मिमी पार्ग पर पुपर कर्ख ही है। हामम गरे कमा (विमा अमृतसर) के निवासी है। हाधमने री-मपार केला मग्न सारनी-मई पाक सस पु पास तया बाप माह वादि प्रयोको रुपमा ई। इन मन्तिम तीन रचनामोमें भामुम्वा सरस पर्नन विस्तारसे सकोष भापाकी सादगी भारि गुम पाए माते है। सस्सी-मुम् की कहानी इस प्रकार है सस्ती गाम बादशाहो महमोमें पैरा होता है। उसके बम्मके समय हपाविपी बता देते है कि यह काही पदामामे प्रमके पीठ मर पाएगी। बाम अपनी बरमामी और मामा म्यात करते हुए सस्सी पन्नूम बम्द करके मटीमें प्रवाहित करते है। मा सनू तुम्न बालीके हार पर पाता है। बहससीका पालन करता है। उसके पवान हा मालपर तुला रसके निमारको पाप पक्की परला चाइवा है पर सस्ती मामी मही। भावी माम बारमाहो पास पाकर सियत रखा है। सस्सीको काम परबार पेश किया जाता है। मौका हान दिलाकर सम्सी वारसाहको समेत कि उसकी ही बही। उन खिों पिसी मूविकारण एक सौरापरके बागमें यहीच पाहणारे पुर्पका बुव बनाकर ना मिया पा। उसे देखते ही सस: मुग्ध हा भाती है। एक बार बायोग कोई सफिका पर आता है। मसी उ करमा देती है। एक ही पपरगनो सिबमार होती है कि उसे पुमि मिला । बम्तमें पु भाता है। पु पप समरे सौन्दर्यको रेखा वो रसपर एमी गुम हो पाता है। रोनों प्रमी एक ताप हने भरते है। पर होगे गरी महाराष रपतसिंह भी इसी समय मिनी मई पिसकी भाषा मानकी पापी मपाके बहुत निकट है। मनोक पयायमे पैर जमनके पापा सन् २८५४ में मुधियाना-मिमनन पम्पाची कास भी तैयार रिमा। इभी समय मकारनामा और मदमे-मापरी भी पम्मामी ममुगाव प्रकाफ्तिाए। मंप्रेगो राम्य-काल (सन् १८६०-१९२० तक) पम्याग भारतका सबसे अधिक शक्तिधामी राम्म पा। सारे माखपर मपन कर पमा सेनापगोत इसपर यभिशारकिमा। विदेपी पराधीनताम् पम्बायका गहरी नीवमें मुमा पिया। पारों वरफ निराणामारण बीवनमें पार उरासीमता पा पई। १ सन १८७२ में माममारी बानोमन बसा। सफा गस्य सित्तौकी साई मान-मर्यादा सादगो तथा देवाको स्वतन्त्रता लिए एक वाप पैरा करना पा। नामधारियोम विरेगी सरकार, विडेयो सिक्षा बिदेसम सपा प्रत्यक पिो बस्तुमोके पहिणारा प्रचार किया। मामधारी सिद्धि मण गुरु पम- सिंहको भेषमा वारा बर्मा निर्वासित दिए पानसे मोर सनक रमन नीतिक कारण परमादौतन ब-सा गया पर भीवरा मावर पिनपारी मुहमती रही। उस समय साहित्यपर इसका कोई वियप पाव नहीं पड़ा। मंप्रग सरकार पम्पायम माते समय पपन साप यूपी से एसे क्सकॉकी एफ मेना भी सती माईनी पिनको मातृभापा नई पी। इन उ' भाननबारे कसकोकी महायवासे उडी मामयको मापा बना रिमा पया। माग बमकर पम्माबम पिसाका माम्पम उईको बना रिपा पपा ताकि कॉकी मांग यहीसे पूर ली है। पनामी बापू भी सरकारी स्वरोक लिए मैगाए पए। बगाली भाई परी मापा जानकार। इसलिए अपनाका काम उन सिपुर्ण पिया गया। मनमामीबार पम्यादीको सरकार मापा बनानका विरोध भी करते। मारिस्सिापापियोन पम्माची प्रचार पारी एपा। इनके पास न तो पिनासमोरम अधिक मान। णि मी समय मियाम पामारी भापारे प्रथप एक सिंहसमामादोहनन पम्मानी साहित्यमें एक नया मोर काग। सन् १८५. में शिक्षा विभागका पार्शमय हाहौरमै स्पापिय म्यिा गया! मिनामी मापा उर्दू की परीकी पम्मा में मिला देगी यूट समईपी। इनरी मोमड़ी पूरा पल लिए काला बिहारीमा पुरी मानि पिशा सम्पी पुस्तके मिनी मोर इन प्रभार नए पभ्याची गो मीच पड़ी। सन् १८१४ में हाहोरमें बोरिएरह महर बोला गया। इस शिनिपल टीमर रपी भाषामोरे प्रचार पाएन हिमाप्ती । मामेरा गम्य ना मापाचोरा प्रसार परमा पा। इस पात्र पम्माईकी प्रमुपा मई मार पन्नाके प्रपम प्राध्यापर भाई गुरमुतसिंह नियुक्त किए गए। ईसाई पारियोने पम्माबमें बपन प्रचारपे लिए मुधियानाको मपना मेमा मनापा। इन्होंने मुधिपानाकी उप-मापाको प्रचमिण करना प्रयास किया। ९ सन १८४९ में इन्होंन ही सर्वप्रपम मुस्मुनी टापिका भी प्रथम पिमा पा। ई सन १८८२ में पम्मान नियसिटीको स्थापना हुई। इमसे बेपनी साहित्यही जानकारी मने सगी। सामही पम्मामाके पठन-पानसे एक नया पाठकनर्म भी वैयार हो गया। मोरिएष्टम-मासम-कोम्सिको पम्भावी उर्दू हिन्दीकी मक पुस्तकोपर पुरम्बार देनेका भमिकार दिया गया । पम्मान रपस्ट एक कमेटी न पश्यापी पियमा पुस्तकोंक मनुसार प्रारम्म पिए तमा मौहिक रचना योको पुरसत किया। मए पम्यापी साहित्यपर अपना प्रमाव गमवाणा दूसरा बान्दोकन सिंह-सभाका पा। भाई गुरमुत्तसिंह, गमाइसह वादिन काहौर, नामसा धीमान की नाप रती। सिंह-समाओंको संगठित परतेपाती यही एक संस्पा भी। समी मुम्प पहमे मिग-समाकी पाबाएँ स्थापित की गई। सिह-समायोचा मुम्म उरम्प पम्बानीरा प्रचार करना था। इसीके प्रयास पम्यापीका सबसे पहमा पत्र मुरमुर्म माहौरसे १८८ मै प्रापित हुना। उमीसपी सदाके मम्तमे पूसरे पत्र पालसा नेपाफी प्रसिसि हासिक की। सन् १८९९ मे खामसा समाचार का प्रमामन प्रारम्भ हुमा। इसके कर्मधार माई बीरसिह ५ मा प्रभावकालीन सूर्यको प्राति पश्मा-साहित्य मिवियपर उपप इए। सिंह सभा दूसरे पलकॉम कानसिंह, पूरपसिंह मौर परमसिंह हीर ममिक मगर । पूरसिंहन ठिबनेकी एक ना ही चलाई। लोग निवा एक कमिताएँ हिती है। मुझे गुण घुमे मैदान मोर नसे मेव इनकी पुस्तः मसिय पुस्तक है। परमसिंह पाहीरने पामीबार पम्यागौके हास्पपूर्ग निबन्ध एप कविताएँ मिली। म मौनी साहित्यिक पत्रिका सम्पादक भीप। यहाँपर पम्यावीके मझन् पनि धनीएम बाविकको भी नहीं भूमापा मा कायत मा पीपसिंह को ही इनसे पा पद रिया बाता है। रुर पयारी ममी पहान मौर चम्न बादी इनके प्रसिब प्राप्प संग्रह है। सन १९१९ से लेकर पुण्यपतक सिचांकी मेरेगी सरकारमे टकर पाती ही। इस मागोमनही पतामहाक मादी प। उस समय पनवा एक उत्साहमा सम्बारहमा। उसका प्रभाव साहित्य रचनापर भी पा । गुस्मृसिंह मार हासिदा मी प्रसिद्ध है। मास्टर वारामिह भी उपम्यात रिते
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सम्भवत १९२. भास-पास रुपासापरने सर पाटर फाटकी अम्मी
कविता पी सैसी माफ रीमेक का पम्मावीमें बनुवार किया। पासागर
अनुनागडी मापा पम्मानी है।
साहित्यक दृप्टिसे इस समपके साहित्पका कोई विधेप महत्व नहीं है।
हो इसमें कोई सन्द नही किबोन पूर पी भरकर पिया मोर सनके इसमें
अपने साहित्यको बड़ामेकी उलट प्यास पी।
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[नोट-न १९२ से मार सको पम्यापी साहित्यका संक्षिप्त परिचय
'परि-पी माझा पम्बाबी-अमृता प्रीतम मे पिया पपा है।]
भाई वीरसिंह [कवि-परिषय]
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भाई वीरसिंह माईबारसिंहका पग्म पोष दिसमर १८०२ में मा पा। मापके पिता ग परमसिंह परमापारे कपिप और माना पति हमारासिंह संमत तथा पारमीके पितान्प। रनको पार्मिक प्रबोडी टीकाएँ बाट प्रसिरह। पचपनसे मापन पिता मोर मानाचे साहिरिया तथा पार्मिक प्रभाव पाम किया। भाई रसिंहन बमवसरके मिसनरी स्कूममें इसकी मई तक मिक्षा हासिल की। पोड़ी पर मस और भरनी उन्होंने अपन माना मानी हमारासिंहम पी। भाई बारमिरा रारा बाबा काहमिह सिब इनिसके प्रसिद्ध मधेपक वाम कोकामना मन्नान व मो मर मरे समय मुस्तान के मवर्नर मोर मुमतान न पश्यमें उन्हें मगराग यहाहा पा सितार मिला था। मित्र अमके प्रति प्रता मोर मुर्म मनोरे समम मिनोंकी र प्रशासे महायता करतो पारण मिव इतिहामम स महापुस्पका मान मिट्ठा मम नाममे प्रम मोर मम्मान दिया माना पा है। बचपनम ही मामा बग्नता-प्रियप। इनकी रचि मारतकी मार मा प्यापारी मार । ई मन् १८१२ माहोल शिम साप मिमार पर हिन्द प्रन पासा पा पम्माया ममतमाम सबसे पुराना पस है।
- भाई साहका विवाह सन् १८८६सममप हा पमा मा। इनमे से मापिसी पी। भाई सिंह ई सन् १८९८ मेकर अपनी मृत्य पर्यन्त साहित्य- साधनाम सन । भाप सर्वतोमुई प्रविनारे बनी। सब उपम्पास नाटक पामिदम्पास्मा बादि सब मियामोमें इन्हौन सन्ता प्राप्त एमा पूरसिह (महासाम्प) मार बाबा मायसिह ( उपम्मात ) इनकी समर दिया है। माई पीरहिन पाली साहित्माकी हपमम पास साम सेना की। खना सम्मा बरसा पावरही किसी मेलम्की मिमा सन् १८९८ से पूर्वक किट पुर चिनाको हार हम इमाई मठियाको तीन भायोमे गाँट सकते है प्रयम और (सन् १४९८-१९२)में विमपत पानिक मषिप्रधान सित धर्म प्रचारका सामन मकर मामिड उपग्यासोई बना सबसे प्रथम पाई रिसिंहा प्रारम्म म सबसे पहला स्पामा मुरम सन् १८९८ मैं तिला वा। मह उपम्पास पम्बा में सबसे अधिक पठित पुस्तक मानी भाता है। माटक के हातोको सम्पाई सस्करण प्रकाशित हो । मुगारी को मुम्बाका सम्माच एक ऐतिहासिक परना है। इसमें मठापनी पर सिवापरम विपपत शिवपिनागापरणारा मार्ग परिया मया है। पिपसिह (ई सन् १८९९) साप कौर (घ ११) भीसी पार्मिक मम्तम्मी मेकर मिल गए हो पाया है। पा-बस्तु बोर पगली दृष्टि स एषमा नी मापक है। मधार्मिक पना माई रिसिरक पापभीम किसकी पोती। पूसरे और (९ उन् १९.२-१९२ ) में भाई मापन 'यमा खसिह से भगकाम्प बनाकर पम्याना सारित्यकी रिमा ही मारी। महाभाम्मका विपर धर्म समान है। परमाकाम्प मिरस है। भाईरसहन राणा ममता सिर (सन् १९२०)मा एक माटक मी लिवा निसरा मान पम्माप्रामा मादकीम मुरगत है। इसी पन्त परिवार माना है। 'महारेर (ई सन १९२१) मरहमारे (एनम् १९२५) गिनसियाहार ( सन् १९२७) माई मीरमर प्रमिर माप-सपर । करिता पाया पर और मिहिरमिात्रामे गिपदपाशीम मामि भाषा मपिम्पतिमोर मारह नम गति रिप गापायुषी गमे पारपाकी है। मग मारे म पनि प्रारि सीप म पोंमें एक मकिनार देगारमिपा मनवा मनुमा पाई। रिमारमास गपष्ट निम्मा पिमेन पर पारमिााई। बागमोपमि(१४) 'पलपरामरमर २५ (सन् १९२५) 'गुरु नानक चमत्कार ( सन् १९२६) 'सवमन्त कौर (इसरा भामन सन् १९२०) इनके १० पाहित्यके विकासको मीडिपी है। मार्मिक मागॉस मेट पोर भाई वीरसिंहके मम साहित्यन सिभोम समार-मुपारका एक एमिमाती मानधन बड़ा कर दिया था। जिसकी सामायिक पाधि भाई पीरसिंहकी समक्स मेवाकी देन है। अपमापाके महान् डिल करिमा सन्दयसिंह रचित मुर प्रताप मूर्य प्रन्प के सम्पादनमें मापन का परिभमस इस गुरमन लिपि पा टिप्पणियों सहित ई सन् १९९५ में प्रकाशित पिया। परमानी पत्रकारिता मात्र भाई रिमिहने वाला समाचार के प्रकासनसार प्रवेप किया था। उन दिनों पम्यादीम पत्रोषा प्रयापन सपनी प्रारम्भिाग्यस्थामथा। पभमानी पत्रकारिताके इणितामे इस पान एक चेतना मई रिपाका मम रिया। बाकी सि-मुर पत्र प्रापिठहोते हैं, पर कोई पह महीन परवा मौर किसीको मासु साह भरकीही होतं पी। उन दिनों पभ्यापीके किसी पसको जीवनराम ते पनाग मारी साहसका काम सममा पावा पा। भाई पारसिक गप बनाएँ पहले इस परम धारावाहिक स्पसे म्पती पी वत् पात् गम्हें पुस्तकका रूप दे दिया भाता बा। यह पर माई बीरसिंहकी साहित्यिक गतिरिभिकि साब-झाब सिंह-समा मान्दसन का मी प्रतिनिधि पथ माना पाठापा माई मायन सित भमके प्रचार हेतु सामसा ट्रस्ट सेवाइटी मीर रस + रिसमा मुम्प गय सिब-साहित्यका प्रचार भाईवासिही सेपाका देखाए पम्भाब पूनिवर्टि नई सन् १९४९ में मापको परमोफ मोरिएएस कर्मिन २ उपापिसे विभूपित किया मा। सन् १९५२ में माप पम्मान विद्यान परिपके माननीय सदस्य मनोनीत किए गए। ई. सन् १९५५ में भापकी वन्तिम काप्प मुस्तक मेर हामी पमो को साहित्य यार्न हाय५ • का पुरस्कार प्रदान घ्यिा मया। मन मन्तिम विनाम माप ठ कम मिलतम मिन्न ताहमा समाचार रा भाप विचार फिर भी पागों पर परचो । एवं ५। भाई वीरसिंह पनपनका दृप्टिम एमने हुए पक्ष का सम्मानि माप सिम साहित्यक सरस वा कर मापन ममम मधि: सिपा। बाप सिम पिपार-वारा प्रबल समर्म पे किन्तु फिर बाप भापा पिय तमा प्राविवर्मगई इपिमे उप कार्तिक सारियमरप। मापन ग-परोनी युमाना हा पिया। पम्यावा संतति और पनी जी महा मापी रचनामि मिनार या मारमशाही परिवाके महिरित नहीं नहीं मिल पाई बीधिषिय विचार-पारा पिते हुए मी पम्माई मनपर पूरी तरह पए ।
२६ पाम्प-पसी माईरसिंह एक साधारम-सौगातको भी असाधारण ना नमे रम है। इन प्रति मिरी सबीर है। प्राविमो माला मानी विछोहको पौगाको मोही हरसम्पर्ण पोंमें पाई। यहाँ एक बोरेमोनम विस्तार वही दूसरी मोर मोर मोमे सपना भाव प्रकट करना भी पै पामते है। इनकी मामे बही-पी प्रचारपरजश पानसे काम्य-परापर F पोर भवन पानती है। मसार कपिधारे बापम है। माई बारसिसने प्रसङ्गानुफा कारों का प्रयोग एक मुममें इए कविको मटि किया है। मुहावरो पारामारीको रोपा तमा मोरार बनाया। पिता और महोत पनिष्ट समय है। पोन अपनी कविता सापकी कम पैश कर लिए बनुप्रासोका भी प्ररोग किया। प्रमागित मौर एविहासिक सी साल मदीन परत मीर का प्रमोम मी यिा है। सिन पुगोसी पापीके पहरे बम्पयन कप पुरपामा पानी पापकी करितामे यत्र-तत्र विमरी पर है। कविता संगीत मिन पुगे पाई सिकरिताने पड़ोसको प्रमानता है। को-को परिता तो पाटर स्पर्म ही पाया है। मारप यह है कि मा वारा प्रारम्भिक पीपन शामिक रंगागा और मिस धर्म मनुस्मता हमर पारा - बामी सत्ता अभ्यासके कारण पेसाई मोर रम्मत एए। नारी पापी सलातका एक एसा मोर मोकभी नहीं पता। मित-परम्पराक अनुतार सहकीकी महिमा है। नपा-गाम मुशरोम मुरमा गा मा । पुम्वरका कोई एता नही मिलेमा गोमसोनमे पारगमनमामो मामामीरे मुमा एमाकोप Bा और मार्म बजना माना। माईहिनही मायारोड़ा गया हए । इमो मममें पुरवाया वह समान रम पमा T रिमें वे समानमे ही सुनने पो माए । मार पसरा नाम पाम्पमेधर्म पर मामा मह म र मेगा परिणाम प्रीन पा। मजीतके गवारा यम पारा -1 रमाबना नहालमा रम लोक मोहिर सईको सामनापी बनाती। माईमिरमाई रोमनताशापारा मईन मी एक कोनमा सिप हुए। सभी पिताम मरे ईमे पटक एक मस्लीम सातामा भागई। ।
२७ काय-कस्पना - भाई पारनिही दाम्प मापनाका क्रि करते हुए हम या बात भी रेमंड किनकी परिनाम मपीनता किस हद तक है। सपनीमानकी दृप्टिस भाई पौरमा काम्पमें एक मीनता भस्व प्टि रतनवामो भी एप्टियावर हाती है। भाई माहा महाकाम्प एपा पुरतसिंह के पिरमण्डी पन्दसे सत्पर काम्य प्रवाह हमारे म पनकी पुष्टि कर देता है। इस उनका प्रयान गुरु गोपिन्द मिहन अपनी एकमात्र पाली कविता बाडीपार म सस्मतापूर्वक किया पा। तापत पार-बागम पाह मे पमा में 4 का प्रधान हुवा जिमन मपनी एक महम परम्परा कायम कर की। इसके पापाद पम्मादी माहिय, रामा मुरमसिंह ही एक एमा महाकाम्य है मोमपना सानी महीं रखता। शिरली एन्दो प्रयाम्म पनन इसमें एमबीगवा कई है जो भाई बीसिहको मारी काम्परपनामा पहीं भी प्टिमार नहीं होती। माना बा'माम एक स्वाभाविक मुम । साहित्यम म्प बोर पियरे दोनों पक्षोंका या मा विणा देती है। भाई पीरसिंहमी काप्प-यापनाकी परम लिए ऋषिक पन पर्मनको ममममा भारम्पर " पानि मफ्ना नाय बागन-दर्मन भारतीय समतिक मुमोसे बसे मा ऐ पिठ मारम-दमन मनक महोम उधार लिया है। हम प्टिमे यजगीर मही है ये परम्परावादी है। पगाव महान् रोमामिण गामानोंडी सम्मृमि है प्रम मा सोमयर रहन पापा रायती रविका है। इस भरती कर-कम प्रम और मौरप पर पौरन नास-साना पाच दियो स्पर्म मिन्पाली मान मनाई ती है। यह पूनिट पाट हिटमैनो माग हाप मिलाते है ही गुरु नानक मोर माह मुहमा विदेगियो ारा अपने देषका परों दले रोम रिस पानपर ताप घटा है। उनकी पहलापमा पाप-यापनासा स्प पेमी है वो पानमाहिरिमाम प्रेम एक पिर मारा प्रवाहित हो सकी है। मानाने में महान् पाम किया बह पा पमापी मापाको पर मरामन मन-मापारेर बोम निसागर एक नया प प्रान परमा। मिम ममय भाई साहबन माहित्यिक मामे परम पिया उस समय पानीको मापा मही पत् पेपारोका पोरीनममा बाता मा पम्याबके मधिषर चिन् पनि परमापा, रशिला सिमा ए पोरसाल भमरने प। भाई रमिहक मिरा परममिह समाग मा करि । नुमाई पीरमिान पम्यारी भाषा पर पूर्ण मापा बनानमें दो माधना की यह भी नहीं मनाई पा मार्ग।
२८ प्रहति-वर्णन पम्यावी पिवाडी भाई रसिंहको प्रति वर्षनकी गो रेन । मवितीय है। एनसे पूर्व किसी पापिने पवनी गहराई मौर एकामतासे पाक्षिके साथ एकारममता स्थापित नही की थी। भाई साहब प्रकृतिक सौन्दर्यको देखकर मस्वामें मूम उठते है। कोमम मार्यों को पता लगानी इनकी माम मातिर ण्टाको निहारत ही ठेर परिसे बामन मगती है। समयकामारके सौन्दर्यमा वर्णन करने है तो किसी मनुछ प्रभारते मन मस्तीमै सूप पाता है। करिबरी माप** सौवर्यको रेबार पुर उवा है रोमामा तेरा पता महा परमेखियो बिचमा सरत रेकार महा पपिरोजी मसा कोरी, गमा मोतिया माती, पवित्र मा बाबम्ब हो बीड बेगमही रखा। मामार मुरोर सुनाये पिर सपोत रस छापिमा पुर बाम पर तिरे wि कविता रेप मामा। सर सर र सहिमा हैन रह सार विमाये, महर पेमौर सोस नहाये। से बिहा बोगमामा? [4 माग! पर तेरी प्रथम RRE भाषा में समानीमा प्राधिक मुष्टारा बसपा मेरे समा जमना हो पाता है। तुम्हारा किसी रक पिनास एवं मुसामीपमा मा भारमामै मपानी पस पाती है। तुम ऐपनार मन परला नही । मर और वाम मुताई महीला। फिर पी महता पम पाहै। मौन पग पिता तुममें पाण। मेरे पीलम मम मारमा मान-रिमार हो उठ। न गान पम्मौर एवं पारिप यह *मा पाग भापनिया!] शाारसाएर रना।
फूमोसे पर्म प्रम है। गुरुवारी मगिस और मुकाममा सौन्दर्य में माविक रमें रंग देता है। सारके फूमका वर्णन कीमिए - बती गोर बनाप मैस विपरिमा मिट्टी का पाप में मोरन विधिपा। वज पीता नीर मे मागबपरियों हो पिया में नमपौर तेहाबलिया। बात बप सर * पाणी शिधिया हापा निवारिया। है पुरम पाती । मै बिरला हीत्तिा, निपा कती पह मैमिमा मौलिया। 1 मुत्ता पतन मैनीता भूम मई माप विच पर मामों भूप मैं वापरली पास में रहतारिया नात मै मापो कोरिया हेरा सिमा बिहात नेहोसार सो पुगिय ठाक मै राती मुत्तिा। [में परतीको पाइम * Paा या मिट्टी में भी समाकर मैन प्रोजन प्राप्त पिया है। पहले मापीम पी मरपर पानी पिया है एवं भोपको
पाकर मै माई हुवा। भाकागस मेोंकी गुजार मैन पानी सौपा है।
उस पानीसे मूष महाकर म निसर गया है। सूर्पसे मैन हिरमें कमी है। मपनी
भारमाको उप्णता प्रान करो मैं बड़ा और फूमा-मका हूँ। पादर्भ की पास मोरकर
में रात्रिको सोता हूँ। पारोका पाइस मैन होरिमा ही है। मंपरेको मैन
पहोकार बनाकर विम सिया है वाकि मुम कोई प्रमागरे।
भाई सास प्रातिको कोई पौतिक वस्तु नहीं मानी में से महस्प
पाक्तिका चमत्कार सम्मते। प्रतिरे सवर्षका बना मापंक वन पर
भाई वीरसिंहको करिताम ही मिला है। प्रतिम य मफ्न मपम्प पड़ी महक
देखने है। कपि प्रात काम्म मिले हुए ममायके सौन्दर्यम पिसी मनोगिक परिक
रपन परता.
माम पूररेता
पों ही सी सौर मंगामा
एमासे गोर रिब
तुर्मी बेस हे समो मेरे साइयो ।
किर हो नि मा पए समो
मोत मिकी गरे विच?
मेरे ऐरेबो विशाल साइयाँ
[भाप पर तिमय रपा भंगहाई में पी पी गएर लिने हए
स्निग्म गुलाब तुम बरू पाइने विशाल मेरे प्रियतम! से? मा
पए उम होगी-सी मोर !]
इनकी दृष्टि प्राति ही मामय समागी सारी समस्याओंषा एक भाग
हम है। इनकी पारमा नो मत एक बार प्राति एम्पमय स्पको
पहपान गया वही मुगा है। मुपकी बम्प सासारिए परिमापामि इन
विकास बीह। उनी परसमे य उगमान हरा पाते है।
इए पहले tr
भाई बारमिह प्रातिके ममी एम्पकी गोर परते
प्राति निहारमी समुहै पप पर्ने माग नहीं। पर एक पला गाम है
निममें मनुष्य ऐफ बस्नु पार रम मोगी हो माता । माई माप
परसबकी भाति प्राति चितेरे है। ये मानते है कि प्राति मनुप्पी मोहनी
अपनी मुगर पनि ठार मनुप्पो हरियाला है।
देश-प्रमको भावना सावन भाई वीरमितको अपन युगी धारा! अपना प्रभासि निहित एमका पारा दसर उनकी मामासंपना की है। इस बातमें कोई मनाही हि माई सार उन प्रपतिनीस मामेपको माप-याने मनुहार एवं प्रतिभावादी करि पिस्तुल विधार्मक मादा में मपन सुगकी परिस्थितियों वनुसार एक समन मोर मानतामा कवि मानकर उनके प्रतिभिया- माहोलकी मापता मसार कर देते है। माई रमिहके पावन-पनम मानाप्रम गरमा सामाजिक सेवा बिमप महल प्रात: हिमपाबह मिसाल रिसा देखन-रान एवं बलिदानका पार पाया पमा है भाई वीरसिंहाई कमिवामें वत्र-तत्र विसर पड़ा है। देषकी पारी । गनाराम इनई समता सम्बन्सी एप सम्बी परिवाद, मिस पकी स्मठमवार मिए एक परम्पमा मौर है एक। माई भीमरा मन दसको हरेक परम्परा-~-धर्म सात बार कमा समो मधिक प्रिय है कि ये अपन मापका किमी एक प्रम मा मत भेषा मा नही तते। म एक सन्ने राष्ट्रवारी है। उनका विचार है कि कौनसमा मूर्तिकला पिता करिता मारि सारे प्रसारको कहा है। इनका सहा-सादप मनुष्य- मामकी पूर्व है। महान् परम्पराकै बारित प्राठि एटा प्रय पपया कमी और पोवाकी मनितीय मीरताका बनुभव करी मनुष्य बरबस गा रहा। उसक राम सात मौर वासा सहारा करीम या टोरेका प्ररमा बन गए और इमाको कविता कहा बाम समा। ही मरो लिए बोल्न या मानवाला पषि समाषा प्रतिनिधि मौर मागाण ल गया। पिता एक राष्ट्रकी महमुस्म सम्पति बन गई। प्राचीन पाठसे ही भारतीय दाम्प परम्पप पामिक पाराकी पोपली है। हमारे मा बसूषा याम ही इस परम्परा बम हा है। पम्पनी के प्रथम भूमि मामा पनि पापी महीमें इस मभ्याटिमक पिताकी परम्परामा बाम लाया। इसी कासम पम्मापा बारोडी बार मिली पई। नो पार हो पुस्पन्न माहब सनहाल है। पम्यानी पडा। सबसे शनिपाली परम्पप मम्मात्यावीपी। माप पपी वोमी मार पाषा परी माह सिप मुर इस परम्पराले महान् बारिम ।
पम्मायी करितामे अम्मारमवारी परम्पराको मुफी करितासे मरमाधिक मत मिझा। माईपीरसिंहकी कपिठापर मुकरसनका प्रभाव प्रत्यम है। माई वीरसिंह सिम कपि समय न पारि सिल धर्म 'भा गर्ने परमें मपन पचपनसे मिली पी पिस्तु ममूरे दौरपर पम्मायी साहित्यके वारि कामसे लेकर अपने समय तककी परम्पराको गरिमा बा। प पम्यापी साहित्यके नवयुपके निर्माता । एक मचे पारिसको भौति होम पम्मामी कषिठाको पूर्ण पपिडि पश्य माग बकाया । १. जून १९७६ मे पन्यानी पापा इस माम सम्त-नापिका निधन पचासी पर्पी मासुम हो पानसे पम्पापी घाहित्य-माहा एफ एमा मसन टूट पमा विकी पूति होनी मसम्भव है।
भाई वीरसिंह
[काम्प-सम्पय]
पन्नाची बी.-1
कवि-श्री माता
१ समा
-
ही मास्ते पस्त, समें मे इफ म मनी।
फर कर रहो घरोत, समें सिसकाई कमी।
कि म सकी रोक, मटकबो पाईममी।
मिले भपने बेप, गया टप बझे बनी-
हो। म समास इस ममें मू,
कर सफा उबमा मदिरा।
म्हहरम मापन जापा,
मच गया न मुम्हे मापरा।
३ वेल तुपका
OOD
मोती पागू रसकरा तुपका इह मो प्रेस।
गोरी पैठ गुसाय दी हस हस करा रेक ।
पासो देग अस्पा करा प्यार सपार।
पवान है हो गया प्यारो गोर दियात।
मरगो किरन इस मायसो सैसी एस मुकाय ।
मोरा मत ई पोषरा रे पप्त गिराय।
नित प्यार मिल मावरा करें मदपॉप।
मरमो प्रोप्तम है नित फिर करे अरप ॥
-पण्याची
१ समय
मने बड़ी अनुनय विनय की किन्तु समय ने मेरी एक न
मानी। में पकरती ही रह गई, मगर समय' अपना पल्ला एमा
ले
गया । मैने पर प्रयास पिए, पर उसे रोग म सकी । यपनी तीव्र गतिसे
मह सव सीमाओंकों सांपता हुआ पछा गया।
ऐ मनुष्य ! इस गतिशील समयको तू देव । यह रुकमा महीं
पामता । एष पार जो बीत गया, वह फिर मौटकर नहीं आएगा।
२ भोसकी चूद
मुस्तापे समान पमकती यह ओसको यूव गुलावकी गोदीमें बैठ
हैस-हसार फ्रीडा करती है। अदृश्य देशका वासी यह गुसावका फूल
इसके लिए अपना सारा प्रेम रेग देता है, मौर यह उसको प्रेममय
गादमें रपमान हो गया है। मूर्यकी एक किरण पाएगी। यह इस
ओसकी मुरको अपने में छिपा मयी कि कही वायुका कोई मोगा इसे
घरा पर गिरा म दे।
एसे ही प्रमकी पाकर्पग-शक्ति मनुप्यको मदृश्यसे स्पवान बमा देवी
है, किन्तु उसे फिर अदृश्य बना देनेमाश कोई सर्व पक्तिमान भी है।
कवि-भीमाप्ता- ३ पलपला मिन्हाँ उचाईमा रस्तों, बुद्धिम सार ठो, मत्लो मस्सी उत्पे रिस, मारवा गरियो। प्याप्त मनरिठे मास पुस्क सप बाम उपे रस से सर पड़े मूमा औण प्यारियां ॥१॥ 'सानो सानूं होगा ते 'बहमी होता मासरा ए 'मारे गए निम्हां सामिा पुठों पार तारियां । ॥२॥ बैठ ज्ञानी। बुधो मासे होकर बिन्ध 'बसवत देश सागयो सग गईयो पारिया।"
-पमानी
३ माप-लोक
मिस कैबाईसे पुषि अपने पख पसाकर घरापर मा गिरी, मेरा
मन परपस वहां पहुंचने के लिए आपुलह । वहाँ किसी अदृश्य प्यारेको
मेरे मोठ छू लेग, तो में रस विभोर हो भूमने लग गाऊँगा ॥१॥
मानका दावेदार मेरा मार्ग अवरुडकर पा हो गया है। अप-
विश्वासी कहता है-को पुद्धिसे परे पहुंचनेका प्रयास करते हैं, वही
गिरते है।॥२॥
माम दावेदारो! तुम युसिमी वमें पकड़े मंठे रहो। मने तो
मार-सौरसे मित्रताकी गांठ बांध सी ई ॥३॥
कवि-भी माला- म । दुकही जग तो न्यारी मारे बिच 'पुररत येवो सानू मवरी माई । हुस्न माम पिच परी पोरनी मुशियां महार लाई। पौड़ी में एक मुठ मर सीतो इस विन्द को को माया परग्स टिले माते करवे विन्ध मैदान पुहाया । चश्मे, मासे, मरिश, मीसा निक्के मि समुम्बर । हेरियो मिठिया हवामा बम बागा मिहे मुंगर। बरफी, मी पप्पा ते बरत रत्तो मेरे प्यारे । मरशी माल नमारे पाए उस मुठी विच सारे ॥१॥ मुहपी में भस्मान बाद धरती बस तका के। बह मुठी पोहसो से मुहिया सब कुथ हे तकाके। निस पाय धरती ते मारे ह मुठ हिरामी सारी। मोस पावरमार बप गया एकही जग ततॊ म्यारी॥२॥ है परतो पर 'पूह मामानी मुररता बिराच लिया। धरती रे रस, स्वार, समाये 'रमन असा री कस।२।।
-पञ्चावी ४ दुकही जगसे न्यारी 1 सौन्दर्य सोकमें भीड़ाएं परती हर्पसे मदमाती प्रातिमी देवी मेमे देवी। उसने अपनी मूठमें पर्यत टीले रमणीय मैदान और मरने नदियां प्री भर झीं। ये सव ऐसे थे नसे छोटे-छोटे द्वीप हों। धीतस छाया भीनी हवा और सुन्दर वर्नोकी महक हिम-कण वर्षा धूप और बादल, मीठे मौसमी फस-ये सभी एक दैवी दृश्य सरीखे उसको मूठमें मा गए ॥१॥ दूर व्योमसे पुप्पीको निहारते हुए प्रातिकी दबीने अपनी मुट्ठी बोस दी। नहाँपर वह मूठ गिरी वहाँ संसारकी अनूठी टुकड़ी कश्मीर- का जन्म हो गया ॥२॥ रस मुग य मीर वृक्ष्योंक आयाम लिए यह टुकड़ी देव-मोरसे घरापर उतर पाई॥
३०
कषि-श्री मासा-
४ दुकही जग तो न्यारी
मराणारे विन्द 'कुबरत देवी' सा मगरी माई।
हुस्न-मंटम बिम्म सरी मेग्मी मुशियां छहबर साई।
पौड़ी में एक मुठ भर तीतो इस पिच की की माया
परबत टिम्ये पते करे बिम्म मैरान सुहाया।
परमे, नाले, नदिया, मीसा निक्के सि समुन्नर ।
ठरिया छावा मिठिया हमामा बन बागा बिहे सुरर।
बरफा, मीह, धुप्पी ते बरस पत्ता मेवे प्यारे ।
मरणो नाम मगारे माए उस मुठी विच सारे ॥१॥
मुहमी मे मस्मान सड़ाके घरती बस तका के।
यह मुठी मोहती ते मुहिया सब कुछ हेठ तकाके।
निस पावें धरती ते माके ह मुठ रिकी सारो।
मोस या 'कश्मीर बण गया टुकड़ी मग तो पारी ॥२॥
है धरती पर 'फूह मस्मानी
मुम्बरता विन्च सिके।
परसीरे रस, स्वार, नगारे,
'रमन मरमा दो कसके ॥२॥
पम्यादी । दुकली जगसे न्यारी सौन्दर्म मोकमें कीमाएं करती हर्पसे मवमावी, विकी देवी मैंने देखी। उसने अपनी मूठमें पर्वत टीले रमणीय मैवान और करने मतिमा सीसे मर सी। ये सब ऐसे पस छोटे छोटे टीप हो । शीतल छाया मीमी हवा मोर सुन्दर वर्मोकी महक, हिम-बम वर्षा धूप और बादल मीठे मौसमी फल- सभी एक देवो दृश्य सरोगे उसकी मूठमें मा गए॥१॥ व्योमसे पृषीको निहारत हुए प्रातिकी बीने मपनी मुट्ठी बोस दी । यहाँपर वह मूठ मिरी यहाँ संसारकी अनूठो टुकड़ी कश्मीर- का जन्म हो गया ॥२॥ रस मुगध और दृपोंके मायाम लिए यह टुकड़ी देव-फोकसे घरापर उतर माई||३||
करि-मी माता
५ किक्कर
कर सिरी मर इरिया बस माकानी भाषा
उपरतका रण को प्राप्ति न होरपे पाई।
शहर गिरा महत नहीं मानो पुस्ती डोक म मा।
मह हमेरी पो घुप्प मिल मगे सिर मिन घासा।
सो मरवा दे माती यमे होर सालसा माहीं।
गिठ या परसी, तो सीती ना, टिका, रस माहीं।
फुस्ता, फा, सिहा, रस बोवो रह महोत तुर बायो।
गुस्सी, गुस्सी, चुम्मी दुनिया ! दिन मंगें मर जावा 11
मीह ना पीना पाणी दुमिपा पौण मसके पीया।
सरि तो इसपित मनोणी सरिया हमें टिकीया।
छयो फेर करा माहीं हां पिरकत मिर्गुणियाँ
मेरे बोगा बी है पर हायकुहागा, बुनिया! ॥२॥
-पम्भाबी [स्थिर एवं बरिय मसे बड़ा गपूपमा म मपी एम-वमिस मार प्यान करता हुमा करता है। में माकारी मोर सिर मा किए बड़ा हूँ। भगवानकी बोर मसर मिहार रहा हूँ। मेरी दृष्टि स्पिर नहीं है। मशहर, न प्राम मौर म किसी महस या झोपड़ीकी मुझे सलाम है। मेह हो चाहे बौधी-सारा दिन मगा पा रहार विता देता हूँ। देव-लोकके बिना मुझे मौर कोई सामसा नहीं है। धरतीसे मांगकर मेने ए हाम भूमि ले रखी है यहीं मैं बहता हूँ और यहीं मेरा ठिकाना है। फूमता-फरता, रस टपकाता एक दिन ससारसे बिमा गुरु मागे एकाको पल देता हूँ॥१॥ में गावलेश पानी पी सांसोंमें पवन भरकर जोता है। सदियोंसे स्थिर वा योगी हूँ। म किसीसे मेरो शत्रुता न किसीसे मेरा बर है। मैं तो एक चिरस्त निगुण है। फिर भी संसारसी कुल्हाड़ी सवा मेरे सिरपर रहती है।
कषि-मी माता-
४०
५ किक्कर
का सिरी सर न दुरिमा व भाका माना ।
उपर न तक रम को साति न होरपे पाया।
पाहर गिरा महस मही माहो कुस्ती कम मासी।
मोह होरी गड़े धुष विच मगे सिर दिन पासी।
को मरणारे वासी बरे होर साससा माहीं।
मिठ पास घरती, तो हीती बर्मा, टिका, इस माहीं।
फुस्मा, ला, लि, रस बोर्श ए अपोत र नापी।
कुस्ती, गुस्ती, जुम्ती दुनिया ! बिन मग मर गाव |
मोहपा पी; पाभी दुनिया पौण मबारे बीना।
सरियो तो इसषित मे मोगी सरियो हमें टिकीयो ।
पेसा करावा नाही हा गिरफत मिर्गुणियाँ
मेरे योगा बी है परसे हाय! हापा, दुनिया ! ॥२॥
-पम्माबी
५. वदूल
{स्मिर एवं वपि स्पसे बड़ा बा म भपने एम-पापित भाष
पासपणा हुमा मता
में माकानी और सिर ऊँपा किए घड़ा हूँ। भगवानकी बोर
ऊपर निहार रहा है। मेरी दृष्टि स्पिर नहीं है। म पाहर, म प्राम
और म किसी महत या झोपड़ीकी मुझे तलाश है। मेह हो पाहे
माधी-सारा रिन मगा पा रहकर विता देता हूँ। दष-छाको
बिना मुझे बार कोई सालसा नहीं है। धरतीसे
गकर मैने एक हाप
भूमि से रखी है. पहीं में पढ़ता हूँ मौर पहीं मेरा ठिकाना है।
फूटता-फलता, रस टपकाता, एक दिन ससारसे विना कुछ मामे एकाकी
बस देता हूँ॥१॥
में मामाका पानी पी सांसोंमें परम भरपर पीता हूँ। सदियोंसे
स्पिर व पोगी हूँ। न किसी मरी पत्रुप्ता न किसीस मेरा वैर है।
मैं तो एक पिरफत निगुण है। फिर भी संसारकी मुल्हाड़ी सदा मेरे
सिरपर रहती है ॥२॥
૪૨
कवि-भी माता-
६ अर्वतीपुरे वे संतर
अबतीपुरा को ए पया वाकी,
यो ममिरा रे।
पोत की सम्पता के सार,
बसरे समें रे फेर।
सावी मर ऐ मोस मन से
जिस विष मोतियाबिन्न।
हुनर पधानण दहों पाया,
गुण पी रही ममिमा
'मोश-ममहर' ते 'कार हुनर' यी,
होम ठोक समीन।
राजी करते होरा-ताई,
मापू बमे मरोग।
दुत पूना? 'युत फेर हो पए,
'हमर न परतया, हाय
मर मरके 'मुत फेर उगम पए,
गुम मुंबौग भीवाद?
-पञ्जाबी
६ भवन्तीपुराके सहार
*यवन्तीपुरा दो मन्दिरोंका ढेर मात्र रह गया है। वीवी सम्यताने
ये भग्नाबगेप समयके हेर फेरकी मोर इंपित कर रहे है।
और मोतियाविन्दवाली उस विकी साठी भर रहे हैं जिसे
फरा-कामसमी परस नहीं रह गई है। धर्माध पुनारी कम्गकी का
करमा मूल मए हैं। मूर्ति-पूजाने फिर सिर उठाया है।
किन्तु हाय ! यह पता कहाँ गई? मर-मरसर 'मूर्तियाँ जम
बाई । पौन है जो फिरसे गुण को गीवन-दान दगा।
• पीनगर मोर मनन मापके बीच दो प्राचीन मनिराक बगहर।
वि-भी माता-
। पालामार
जोगी बरेचनार, शांति बस रही
नहर बहे पिचकार गृप्ती प्रवाह न्यों।
हरिया भरिया बन्न मसमस पाहा,
छाप सहन का रंग शान्ति एक है।
फिर बाई अबशार बाणी बह पिया
मस्प सगीत चार मन मोह रिहा।
रग बसौरी बन्न हिम्मदेवा नसे,
फिर कुस करा रूप हेटो गाव वा ।।१।।
विध फुहारिया गाय उपर आंबा,
कसाबाबियो काम उन्धने ग्या।
मावेशरा पोर पहरू नचान,
पहा मार उछाल पर 'मित्र' रोकपी।
रच्या बारा 'मिथ' फिर से रेपी,
उघस गिरन वा माच हवे हा रिहा।
विध विधात मजीब बारी-री है,
पाम गरा संग मिसतों बची है।
इसरे पार चुफेर पाणी ग्वा,
ठण सिगण ग माघ मासे राम है
मानो सावन माह ह प दिहा।
मो मस्मानों रिग्म हेठा मावा,
इह हेठों वाह पार उम्छम पसरा ।
इसवी धुनि संगीत पमक सुहावनी ।।२।।
डियो इस विचकार फूटे रेशी,
परत मामो आप नप हो माप है।
बह रंग राग मपार बस मोर जो,
फिर मोनू जाप हेठा तिसकरे ॥३॥
-पड्यावी
शालामार
बनार-रूपी योगी परे है। धारिसमी वर्षा हो रही है। वृतिके
प्रवाहकी भांति वीपमें नहर बह रही है। सहन एकापताने रगम रंगी
हरी मरी मखमसी पास पिछी हुई है। भर-भर वहीं भरनेके पानीका
कमरव बरा मोहक है। विस्तीरी रंगकी वमा सिए कुछ पग भागे
फमारों के समरसे हो-होकर वह कसाबाजी बेस रहा है |१||
बह एक मजीव उछल-कूदका मृरप कर रहा है, पाहता है कि
मे रहकर उमा पहुँच पाऊँ, किन्तु आकर्षण' उसे फिर नीचे पटक
देवा है।
वागणे मध्य एक पारा-परी है। उसके पारों बोर पानी
सध्या सग मिसर मठसलिया रता है। गिरफर उठने फिर
गिरमेके ये नृत्य-संगीत ऐसे है जैसे सावनकी फुहार वरस रही हो ।
यह आपाशसे धरापर मरसती है यह भूमिसे राह निकास कपरको
उचलता है। इसकी सगीतमय पनि सुहानी चमक-दमक भूसेका-सा
मामन्द देती है ।।२।।
ऐसा प्रतीत होता है पैसे प्रति स्वयं मुख्य कर रही हो । मपना
रुप रंग, संगीत धिाकर वह फिर मागेकी मोर फिसम पाता है ॥३॥
कवि-भी मासा
६ करदे पत्थर
LI
मारतर नू मार पार्या
'होई मुदत' कहिदी सोई।
पर मारपो पत्परा विच हम तक
सा सो सही होई।
'हाय, हुनर से हाय पिपा,
'हाय रेस की हालत
"हाप हिम फस काहि पाते।
हर शिस पहिली रोई।
२. कपदी कताई
सुपने विध तुसी मिसे मसानूं मसा था गतपकड़ी पाई।
निरा मूर तुसी हरप न माए सारी कमी रहो कसाई।
घा परगा ते सीस निवामा सारे मरने पोह म पाई।
हुसी रन्धे मसौं नो सारी पेया मईया काई।
फिर मा फाने को पर Bा माहे 'बिमसीसहरी
गा पोरा पर मोह मपणी घाहे सानं गया ताई
मिट्टी धमक पह मोई ते दुसौं समा विष मिले,
विमती कर गई परी एम कापूंम पाई।
-पम्जादी
८ घरपराते पापाण
किमदन्ती ह कि मासा पो भस्मसात् हए एक युग बीत गया।
परमराते पापापोंने भी यही घसाया। बौर एक-एफ शिछा गे-रीपर
रहने एगी-
हाय कला-कोषठ! हाय देश !! तेरी यह दशा! तू किका
उतरे फमपी मांति कहॉ विधर मया !
९. कालाईकी कम्पन
तुम सपनेमें पाए । मैंने तुम्हें पार्मिगन-बब पर रिया, किन्तु तुम
सा मवृदय मे। मेरी पकर नही पाए । मेरी पसाई कॉपटी रह गई।
मैने यरवस परणोंपर माथा टेक दिया किन्तु मापा विना स्पर्शके
ही रह गया । तुम ॐो ये, में नीषा । मेरे पाणी वात नहीं थी।
मै पस्छा पकाने लिए मागा। बिमसीसी एहोंगी-सी गतिसे
पला उर गया । मासे-बात वह अपना स्पर्श देता गया।
निपाण मिट्टीम प्राण फंकर तुम रोम रोममें एमें समा गए, पैसे
विजलो फाँध मानेसे पकाचौंध छा गाए ।
*परमार एक बारकालीन मूर्प-मनिला समापप को भी मात-दिवास
एक प्रमियम पा।
कवि-त्री माता- ४८ १० करम, अमल सिर कचौह बना हम सीता, परियों द्वारे फिरिया, पर परोक मग मम पाए, तुन तुम के हमरिया, ॥१॥ भरिया घेत मानरिया में सो, बामा पगित होया,- टिके म पर सिमों ते मेरा पन्चा हो हो दुरिया ।।२।। एक रिन बह कपरोस के गया, मुर्रामर मूहरे धरिया भूठ मूठभर उस उसटापा, सासी सारा करिया ॥३॥ मस मसके फिर घोता इसन, मस इलम पी साही, देखो, इह कपकौत मिसिया। केवस वोग फिर सिपिया I -पन्जागो १० विधा और भमत सिलो प्यासा बनाकर में विद्या के हारपर मिधारी बनकर घूमने ममा। भर परसे भीख मांगकर मैने इस टूस-सकर भर सिया ॥१॥ प्यालेको मरा देखकर समझा, बस में शानी हो गया। मेरे पैर धरा पर कहाँ टिकते? मैं ऊँचा हो, एरियाँ उठाए पसने सगा ॥२॥ एक दिन यह प्याण मैने अपने मुरधिपके भागे पा रवा । उसने जूठन कहकर इसको उमटा, मौर बासी कर दिया ॥३॥ फिर से मस मगर धोया। विधाका सारा मैस उतार दिया। पारस प्यारेको देखो, कमसकी मांति फिर बिस उठा है ।।४।।
कवि-भी मामा-
५०
११ गुलाब दा फुल तोहन पाले ।
गातो मासों तोर म सानू,
असा हट्ट 'महक' काई।
मस माहक में संपे माके
साली कोपबाई।
तू मे इस सोरके गों,
एक बापो ए पासा-
मोह बी पाक मसकरा मेला,
उप महक मस नाई।
२१
पञ्चाबी
११ गुलाबका फूल तोड़नेवालेको
सू गम्से मुझे मत तोड़! मैंने गन्धकी दूकाम सगा रखी है।
झूमनेगामे साव ग्राहक भी था पाएँ, तो भी में किसीको वासी म पाने
दूंगा। तो मेनेपर में तेरे लिए ही रह भाऊगा। वह भी कुछ
क्षणोंकी बात होगी। मेरा स्प-छापम्प एवं सुगन्ध सभी पक्षक
मारते ही नर पाएंगे।
करि-भी मासा- ५२ १२. मिरे पया पंछी [विमोसमात परतवारी] मासम था हवा इसी विष, मासे 'पिंजरा मुहणा'-11१॥ 'मिच मा पा फिर में पुग्यो, किना है मन मुहमा ? 'परतों हीन घरारे कवी । मो मूर्स रिस कर। गम हारे पछी मूंह, सुहमा है जिन-हणा। पासम न रंग सोहमा सगा, मिट्ठी सगी पाणी- वाह वाह कार गुणा री पाई ॥२॥ छह के बासी तापी। पका पिमरे पापे विपोडिया, साफ स्नेहियां मासों, मछ परे बहकार तुहागे मेह इस 'मारो' साणी।
-पम्बावी
१२. पिंजरेका पंछी
[पियरेकी सराहना करनेवाले प्रति]
सुसरी बायुमें सांस लेते हुए जालिम कहता है- पिंपरा कितना
सुम्पर है। ॥१॥
' कठोर दृष्य रखनेवाले मूर्ख ! भीतर बानेपर मै तुमसे पूर्वी नि
पिपरा रिखना मोहक है ! मैं पच विहीन पछी इस धराका बन्दी बम
ममा हूँ। यह मुमत मासावरणमें उड़ान भरनेवालोरे प्राणोका मक्षक है।
सुन्दर रग, मधुर पाणी देव-सुनकर तूने छिपकर जाल फैलाया। मेरे
गुणोकी सूमै अच्छी कद्र पी ॥२॥
सभी रिश्ते-नावे सुरमाकर मुझे पियरेका बन्दी बना दिया ।
मेरी यह गुण-पाहता भाइमें गाय । तेरे संग में कसे मित्रताकी
माठ वाचूं !" ॥३॥
कवि-पी माला-
२.
१३ जीनत देगम
सोहणे सोहमे महरू यसारे
क्षण माइयो सहियो
कोंक परे महमे,
रेकरब रहियो,
पर इनका गुप्त इहा विध,
हर मुक्त विच सिनिया,
पढ़े बाम उस नका मटसमें,
सहियो म मा गायो!
ए मकाने - मरमा रगीता,
भासी बांदा पारा
मासो मास न तो कोई,
गुप्त मकश इकबादा।
यह सी मरम विधोका सहियो
असा निमुटिमा पढ़िया
कार! करे इह नकल मेरा उह,
पासम यो पर ता
२५
१३. जानत दान
ऐ सखि 1 मेरे सुन्दर महगेको देखने पाना । उनी एबीर
परफर बातिको देख-देवार तुम्हाग मम नहीं मरेगा। किन्तु
प्रत्येक विहमें एक गोपनीय बाति भी है जिसे बिना पो नन मेट
पाना । भव नकाश इन आिितयोंमें प्राप राम रहा मा मो कोई
बद्भुत शक्ति एक गोपनीय बातिको उपार जाती थी।
सवियो, मभागिन मने व उस पड़ा सा बह मिछाह की एक
मारुति पी। काश! कभी बह पाश्मि भी मरी म माविका पर
पावा।
कदमो माला-
१५
१४. अन्नरची टेक
सिक सिक रो रो टू टूर के
मम राम गवाई।
पर पंधर न सारी सप्ती,
घा उस पास म भाई।
अम्त हारफे यह गया मगर्ने,
सैसी सैमो अपरा।
सिब सो विच सा गई भम्बर,
ममर सैसी माई। ॥१॥
*सी वी हुप शिव ताप के
मग लपरी माई।
मैं ततो, तसी पई कुके
मस सिपाण ना काई।
में सैसी, म सेती को
मग ममी होया।
मापे प्रोतम वण गिया प्रेमी,
टेका मम्बर पाई। ॥२॥
-पजाबी २४ मीतरकी देक मनमूने सिसकियां मरते रो-रोकर सारी आयु पिता दी । किन्तु मैश न पिपली मौर न उसके पास परमर आई। अन्तमें हतार होकर मगर्ने महाका नाम सेता मौन होकर बैठ गया। रेखामें वह इतना व मय हो गया कि उसके भीतर सैसा बा गई ॥१॥ सैसा इस आक्पणवध मनको दूरती बाई । उसकी मैं सेल में सैश भी पुकारसे भी मजनूं उसे पहपान न पाया। मग जैसाका रूप हो गया। ब भीतरकी टेक मिली तो प्रियतम स्वप ही प्रेमिका वम गया ।।२।।
1८
कवि-श्री माता-
2002
१५. घामा नाठा बल ते इंगियो शाम
-
प्रश्न
सप्त होई परछा एप गये
कि इन्धाबलहूं बारी?
में सरोब कर रहो रही
ते टुरमों को नहीं हारी,
सानो है
पछी मासी
हन सब माराम विच माये,
सहम स्यावसा था रिहा सारे
ते बरस टिक गई सारी।
बरामे दा उत्तर
सीने तिष बिम्हा ने साथी
रह कर माराम महीं बहिरे
नि पासे गा को मीरर
रह रिन रात पये पहिये ।
इको मगन सगोहाबादी
है टोर मनम्त उहा दी,
पसों रे मुकाम म कोई,
सो पास पये लिप्त रहिये
-
-
-पच्याबो १५ बाछा पतका मरना भीर गहरी सन्ध्या सास उस माई है । साये छिप गए हैं। पर इच्छा पठ तू क्यों वहा पला पा रहा है ? न तो तू चुप हो रहा है और न बसते- चमसे पक ही रहा है। सैमानी पछी मौर मासी सम विश्राम करने पसे गये है। पारों ओर स्तब्धता छा गई है तथा समस्त प्रकृति शान्त हो गई है। चश्मेका उत्तर जिनक सीमेमें प्रगति पपपर पानेकी बलवती इच्छा होती है रे मारामसे नहीं बैठले है। प्रेम भीने मपोंमें निद्रा नहीं माती है, में तो सदैब मोसू बहाते है। एक सगन उहें घमाए पाती है। उनकी मति अनन्त होती है। मिसनसे पहले उनका कोई पाव नहीं होसा। वे सदा पसते ही रहते है। 'समीरा एक मरना।
कवि-भी माता
१५. पपामा हाला बल ते गियौ शामा
प्रश्न
सप्त होई परषायें फुप पपे
मिछावस जारी?
मैं सरोष कर हो पही
ते एरनों दो महीं हारी,
सैतानो ते पंछी मासी
इन सब माराम विधाये,
सहम स्वायता धा हिा सारे
ते कुररत टिक गई सारी।
पशमे पा उत्तर -
सीने विच जिल्हा ने माघी
रह कर माराम महीं बहिरे।
नि पाले मैना की नीर
उह रिम रात पये बहिरे ।
को मगन मपो गिदी
है डोर अनम्त रहा हो,
बसतों परे मुकाम न कोई,
सो चाल पये निप्त रहिये ।
पम्दानी
१५ इरशा बलका मरना भीर गहरी सन्ध्या
क्या
?
सांस इस माई है। साये छिप यए हैं। पर इच्छा छ तू
वहा परा मा प्हा है म तो तू चुप हो रहा है और न चर)-
पसते पक ही रहा है। सैलानी पड़ी और मामी सव पियाम करने
पसे गये है। चारों मोर स्तव्यता छा गई है सपा समम्म प्राति पान्मु
हो गई है।
परमेका उत्तर
जिनके सोममें प्रगति पयपर वानकी बमवती इच्छा शानी है,
ये मारामसे नहीं बैठा है। प्रम मोने नपनामें निद्रा नहीं ली है,
तो सदैव मामू बहाते हैं। एक सगन उन्हें कार ी है।
उनकी गति अनन्त होती है। मिस्नम पहर नका को पार नहीं
होता। बमदा पम्न हा हो हैं।
पामारा माना।
कवि-भी माता-
१६ अमर रस
सोहणे हप सुराही प्यासा,
प्रेस दुषी बुम होई।
मुम होई मुस बेस सबम रा,
रेच सुराही रोई।
रोगी वेब सगण इस मामे-
कौड़ी शराब न पाया।
ममत इह मुराही भरिया,
पिये ते पोये मोई।
हर र सुराहियों सानूं.
सोच समुपर बोडे।
वे मुरियो रे बार मश से,
मास मवेसे तोड़े।
रग महारेते मौरंगी,
पोम पुरके मानी।
माण तारे भमर मुसारे,
मुडन मा ऐसा जोड़े।
-पम्माबी १६ भमर रस प्रेमीके हापमें सुराही मोर प्यासा देखकर दुचिमारी हर्षसे बहक उठी। वह प्रेमीका मुख देखकर तो प्रफुल्ल हो गई, किन्तु सुराहीको देखकर रो पड़ी। उसे रोते हुए देखकर प्रेमीने हैसकर कहा- 'मैं करपी शराव महीं साया हूँ। इस सुराहीमें वह अमृत भरा है पो मोमें भी प्राण फूक थे। मुम इस सुराहीमसे एक बूंद पिस दे ताकि में पाशा-निराधाको भूसकर बे-खुदोके मोक्में पहुँच गाऊँ। वहाँ मैं सुन्दर सुहान रंगोवामे भूसमें बैठकर मानन्दमम हो बाऊँ मौर उसकी हिसोर मुझे सदैवके मिए अमर सुख में लीन करो।
कवि-पी माता-
१० कयामीर तो विवेगी
सुहाणीयाँ तों पर विध.स्न गिये,
रित विस-पीरीजाये।
पर तेपो दुरबियां कसमीरे,
सा मा गुल मावे।
मटक हिलोरा घोह तेरीवा,
मोह सारी सीता।
बवासी मसती रे रिहा,
नाम मास पिया माये।।
१८ पुष्तर
DA
गुस्सर तेरा दुमा मसारा
देश बेच रित हरिया
मुसा, गा, सोहपा मुम्या,
तागा, हरिया परिया,
मुम्बरता तर रही ते पत्ते
मस गरियां मरी
निमन फवम मारो रगत
रस मनम्ता परिया।
३
२० कश्मीरसे विदाई
प्रमियोंका विधाह हृदयको उदासीका पावरम योढ़ा देता है,
फिन्तु ऐ कामोर ! तुमसे विश होते समय मुझे कोई पोड़ा नहीं हो रही।
सेरे स्पर्शकी एक हिलोर मेरी बारमामें समा गई है हर्प-विभोर हवा
मैं उस मनुभूतिको मपने सग रिए गा रहा हूँ।
१८ पुष्लर
*तुम्सर । तेरा सुन्दर दृश्य देव कर हृदय शीतस हो गया है।
तू गुप्ता, विवास मुन्दर पवित्र तागा और हरा भरा है।
व सौम्पर्यम परिपूर्ण है 1 तुममें स्वतन्त्रता विचरण कर रही है।
तुम यदृश्य छपि एष मछले रंगाकी धारा प्रवाहित हो रही है।
मीरारापाता।
।
कवि-श्री माता-
१९. चांदनी
सुइया मासों निरके निरके
बारनी रे र सहिमो !
केसों बीमा सुइयाँ उत्ते
आन आम टिकरे ॥१॥
ऐत्या पासा मार दप
पैण चिट्ट पपरी ते
रबों कुर हेठ मर
पाणी उत्ते बिगरे ॥२॥
गहिरो रे रसे उत्ते
तिम मित होनी
पोसे पोसे रस
मर दुमक ठिकले ॥३॥
माप करन पाणी उत्ते
लासा मारण पौग दिय
बारनी रे मेण म्सर
पर बस तकरे ॥४॥
पर भरिया प्यार नास
तके यस परमो रे
तकमा ए सारा, सहिमो
मसही पो हो रिहा |
पानण बन्द बंदराने
वामग ए माय सारा
पामणी दे बानमे मू
देख रोप्त मे हि ॥६॥
६५ -पम्यादी १९. चीवनी हे सखी! पांदनीकी सूईसे भी छोटे पैर देवदारके नुकीले पत्तोंपर भाकर पाते है। ॥५॥ पहास छरोग मारपर श्वेत प्रस्तर पर बाते हैं और पहाँसे कूब कर नीचे बाके जसपर गिरत है। ॥२॥ पहरोंपर सिम-मिस करते हुए श्रीग करते हैं और धीरे धीरे मुक मुकार कदम रखते हैं। ॥३॥ पन्द्रमानी किरणे पानी ऊपर इस तरहसे छिटक रही है मानो ने पानीके अपर मानती हुई कूद रहीं हों। चादनीकी आँखे चन्द्रमाकी बोर देख रही है। ॥४॥ स्नेहमे परिपूर्ण पाव चादनीकी ओर निहार रहा है और उमे देवत-देयते वह स्वय आँख ही बन गया है । ॥५॥ पद्रमा म्पोस्म्ना प्रान मरता रहता है । यद्यपि यह स्वयं प्रमाणमय है मिन्तु फिर भी चादनीका मागेप देखकर मोहित हो रहा है। ॥६॥ कपम्माबी-1 कवि भी माता- चामने रे रुप प्यार भेबरा ए बोरनी , सगातार प्यार पम हे ये रिहा ॥७॥ चरिनो मा मोम रोह हेठो किसे प्यार होर म्यान बम बिष विच उताहाँ मन में हिा ।।८।। माँ मी मालिया ते देतो बनो जगला ते शहरी पिग सममा ते चौबनी है पै रही ॥९॥ राशियां ममीराते गरीबो पापी पुनिया रे सारियो रे हारियो ते चानमा हरेपो ॥१०॥ व्यापी सारे बिसी है सबत किसे विच नाही म्यान माया चम विच पर मिथ 4 रहो ॥११॥ पर प्यारे पागनी ५ पानमो सिबीवे चम बस मात होष स्वार अरला राह रही ।।१२।।
-पत्राबी
चन्द्र प्रकाशरूपी प्यार पांदनीको देता है एवं सतत भू पर
प्यारकी गा करता है। ॥७॥
नीचे पांदनी मम्प किसीने स्नेहके वशीभूत महीं होती है। उसका
ध्याम बम्बमाकी ओर माकर्पित रहता है।
॥८॥
पहे, सरिता मासों खेत, बनों, पगलों, नगरों वपा पार्मोपर
पांदनी छिटक रही है। ॥९॥
रानामों धमिकों, निर्धनों पापियों तपा धामिर्कोन सबके
वारोंपर प्रकाश दे रही है। ॥१०॥
ऐसा दृष्टिगोचर होता है कि चाँदनी सवमें व्याप्त है, परन्तु
किसी सीन नहीं है। इसका ध्यान पन्द्रमामें एगा है और उसी
मोर विपी जा रही है। ॥११॥
राधि पापनीको प्यार करता है क्या चोवनी पदिको आकर्षित
करती है एवं वह घरापर छिटककर भी मानाशका-सा यानन्द अनुभव
कर रही है। ॥१२॥
कवि-भी माता-
५
२० जांदा भाप हो भोहना दे दयार!
म बकरियो पारी,
गुपहरी सूरज सों पकी,
चिनार दो या पत्पर शिक्षा ते बठो मूं,
मेरे राबम ! तेरे सिपाहीने
तेरा हमम सुनाया
'रस्त, हो अषी रात
मा महती साका परवाना
पातशाही महत ॥
पियारे पासे वापरबागा।'
मोहेगा माप मा राना
मपने विचार
हां दसवीए नुसरोए।
मा गया ए रामा,
तेरा तीरी मटिमा ८प।
.
कपीते मोररी
करे अमन्ना परी
फरे हासो समानवी,
में तुरहो पा मधो रात ।
तुरी ते व्हरी,
परे ठुमारी, करे पिरकी,
मा पहुचो हो तेरे बार,
रामा मो! पोहसो निवार!
॥२॥
•पमापी
५० उनके बार में स्वयं जाता हूँ !
मेरे राजन ! बारियां पराती दोपहरीके सूपये सान्त पिनारकी
छायाम शितापर बैठी मुसको तेरे सिपाहीने मामा सुनाई मि आधी
रातको मेरे महरूके पिछवाईका द्वार बटययना। राना समय अपने
कियार बोम देगा। गुदड़ी में हिपा तेरा स राजाको बायोंमें ममा
गया है।
॥१॥
कापती-सिहरती कभी रागाफ सन्दराको हंधी-मजाक समझती
में माघी पवको पल दी। ठुमकती-थिरकती तरे द्वार बा गई हूँ।
राजानी, पिपार खोसो। ॥२॥
कषि-पी मासा-
मेरे मागो मे रे ने मष
मा नो ने पिक यकाश,
छा गया हनेरा बुझेर,
आई ठोहकर सारी मेंरेर
भपी मासा रामा घुट घुट
मा पहुंधो हो तेरे रबार,
रामाची! सोहसो किवा ॥१॥
+
.
तह पईपा मी पूंस हम, हाय !
मुम्स पाए पुरे दी पोग,
मेरे रामा!
गरको ए बिमतो मकाश,
माम पग्नबी ए बलादी फोग।
पुधिमारी ए मना सिर
पर रिला मोबी ए बर शिवार,
तेरे, रामा गी! या शिवाय,
तोस सपने वर पिवारा m
रिये मोगर पिन्वार ?
में मर गई सारे स्वार
तेरे ऐतरेबर रिवार,
सारे मोहा री हाय दुपार!
॥४॥
१
-पजावी
बापाशमें मेरे भाग्यस्पी मेम पा गए है। चारों ओर अंधेरा
पिर माया है। भाशा पल्लेको भींच मीपफर मैं ठोकरें खाती तेरे
वारपर आ गई हूं। राजानी, किवार खोरो! ॥३॥
मेरे राबम ! बूंदा-बांदी हो रही है। पुरवाई पहने लगी है।
यामा बिमती चमा रही है। वादस गरम रहे है। उसकी पमक
मांचोंको पकाचौंध करती हुई पन्द निवार दिवा पाती है। रामानी,
तेरे किवार बन्द है! अपने बन्द किवार खोसो।।
11४11
कहा ह पन्द किवार ? वर्षाकी बौछार खाकर तेरे बन्द पिवार
देवकर, में तो सेरे द्वारपर ही मर गई थी। ॥१॥
करिभी माता ७२ यह तो मेरो है पापणी छन- कुस्ती करतो वो कानिपारी धन, विष बठे मेरे महाराम- रामानी रागा महाराग! किन गए हो मा मेरी करको दो पन्न? किन गई हाँ मा येस या किया? ॥६॥ सकेमोसी रेम बिचकार कोते रामे मे गुस्त मोपार- 'हिर करने में मैन प्यार 'मोह मारे में मेरे पवार 'कि मिल गए मोहता बीमार। 'पर करा मै जिम्हो नू प्या, "जरा भार हो मोह मा रे पवार- "पवार मोहना रा मेरा पवार । 1101
-पजाबी
यह तो मरी अपनी झोपड़ी है। भीतर मरे महाराय राजाओं के
राजा बैठे है। मेरी तिनोंकी झोपरीम कैसे पहुंच गए ? तेरे बन्द
कियार देखकर में कैसे भा गई? ॥६॥
मेरे रामनमे मपने होंठ योसे- वो मुझे प्रेम करते है वही मरे
द्वार पहुंचते हैं, ताकि उन्हें मेरा दीदार हो जाए। पर मै जिन्हें प्रेम
करता हूँ स्वप नमक टारपर जाता हूँ। उमरा बार, मेरा द्वार है । ॥७॥
करि-पी मासा-
१ निकी गोद विष
अग्स मूर रे तरके
नरों से रहो सी सबेर मंगड़ाईयां
पफुटासे दी गोर विच,
एक सिरे गुलाब की पोर विय
तुसी सेस रहे समो मेरे साईयो ।
किन, हो किन! मा गए सी,
मोस मिकी गोर विप?
मेरे ऐरेर विशात सायो ।
-पसाबी
२१ छोटी गोद में
भाय पर उपाको गोदमें ज्योतिर्मय प्रात
अंगड़ाई ले रहा पा, तब एक पिले हुए स्निग्ध
गुहारकी गोदमें तुम खेल रहे थे। तुम इतने
विशाल मेरे प्रियतम् ! कैसे ? हां, पैसे आ गए उस
छोटी-सी गोदमें !
कवि-भी मासा-
२१ निकी गोद विष
मम्स मूर ताके
मों से ही सी सबेर मंगाईयो
पाट फुटासे पी गोव विध,
कलि गुलाब पी पोर विच
तुसी सेस रहे समो मेरे साईया !
किन, हर हिम! मा पए तमो,
मोस निकी गोर विच?
मेरे ऐर परे विसास सोईया ।
1
पम्बाबी
२१ छोटी गोद में
मार व उपाकी गोदमें म्योतिर्मय प्रात
मंगई से रहा मा
सब एक बिसे हुए स्निग्ध
गुमायकी गोदमें तुम बेस रहे थे।
विद्यास मेरे प्रियतम् । कैसे? हाँ कैसे आ गए उस
छोटी-सी गोगमें !
तुम इतने
7
कवि पी माला-
०६
२२ मेरा संदेश
मवे काले कतर
'बीमो माया ,' पोर।
माऐ मंमिसा कट
ते बसिसा नं वीर।
समाएँ कोई संश
को बहावे में पोर?
मीसी पानी ए गर,
चिट्टी
मगे हेसा
ग्राम,
हार होईया रितगीर ।
हां, में सममी हां धीर!
मयाइएँ म, समा मारि सरेशा।
संदेश ।
मुहिमा माना तू
बोर
मेरे पोपा रेग
गा, मेरा संता
॥२॥
चिट्टी बन्ह रियो तेरे गा-
रघत उसके मोर
4
मग दग गए प्रहार
"
उपस उपम भोर
॥३॥
-पजावी । २२ मेरा सन्देश मो काले कबूतर ! तेरा शुभागमन !! तू पाने कितनी मुश्किलें और मजिसे कॉपर बाया है। क्या कोई धैर्य वैधानेमासा सन्देश साया है ? तरे गले में नीला घागा है पर न कोई पाती है और म सन्देछ । पहले ही मैं उदास पी, मा मौर भी अधीर हो गई है। हां, अब घमस गइ । कुछ लामा नहीं बल्कि सन्देश लेने आया है ॥१॥ मेरे प्रियके देशको सौटकर मानेवाले ! मेरा सन्देश ले मा ।।२।। तेरे गले में पाती गाँध देती हूँ- 'पानी इसका-हलकार मा फम्पारा बन गई है पानी उमा-छमकापर।
कषिधी माता- २३ कित्ये हो? फिस्पे हो? को हो, . कूरे नहीं? पूरे हो पर की सब सुणेरी नहीं ॥१॥ किस्मे हो? कोसे हो, बिसरे महो? रिस हो पर मरत नम बर्सेरी नहीं ॥२॥ कित्ये हो? मिसरे महीं? मिमरे हो पर तन मुंह मपदी नहीं ॥१॥ बिरये हो? मरे मुहगे साई! कोसे हो मेरे प्यारे साई। हमी मोसे पर ताप मिसन को समलेरिया समसेरो महीं ll ७९ -पम्यावी २३ कही हो? कहाँ हो ? समीप हो, वोमते क्यो नहीं बोलते हो पर कान आवार नहीं मुनये ॥१॥ कहाँ हो ? धमीप हो पियाई नहीं दते? दिखाई देते हो पर आँखोंमें सूरत समाती महीं है ॥२॥ कहाँ हो? समीप हा, मिस्त महीं? मिश्ते हो पर शरीरसे देह मिपटती नहीं है ॥३॥ कहाँ हो, मेरे प्रियतम ! समीप हो मेरे प्रिय !। समीप हो, पर मिस्नेकी पप सम्हाले नहीं सम्हस्ती Im
कवि-भी माता-
म
२५ मेरे इप्पे लग रहे हन
मेरे चप्पे सग रहे हन
पापियो की छाती से मेरी किश्तो तुरोमा रही है,
होसे होते, सहले सहने, रमके मके।
बिन गया
चप्पे लग रहे हन, किती दुरो वा रही है।
हाँ, किरप कु?
शामा पईयो, रिश्ती बस रही है,
मेरे चप्पियो रे पागो मास समय ही मावाग
चत पल बस धस।
हनेरा हो गया।
रएर हिते पिते रोपे टिमकर हन ।
बप्पे सग रहे हन हि तो पस ही है,
म पसी मा रही है
माता! रिपे?
तार का माए, पामिया विच उसर माए,
हया एमक पई,
तारे पाणियां मास मेसवे हम, मेरो किस्तानी
पास तो बेपरवाह हन।
मेरे अप्पे माग रहे हन, रितो घस ही है
माता! रिमे
-पम्मानो
म
२४ मेरे चप्पू लग रहे है
मेरे पप्पू ठग रहे है। पामीनी छाती पर मेरी नाव धीरे धीरे
मन्पर गठिसे वहती हुई पली जा रही है।
दिम रल गया। पप्पू एग रहे हैं नाव पली वा रही है। हाँ
कहाँ पर' सन्ध्या रस गई, माव पा रही है। मेरे पप्पू पामीकी छातीके
सग एमकर भावान देते हैं-~मल, परु, पल, पल । मन्मकार भिर
माया है।
दूर कहीं दीपक टिमटिमाते है। चप्पू लग रहे है। भाव पस
अभी पली भा रही है। प्रियतम कहाँ ?
वारे निषक बाए। पानीमें उतर माए । पाय पस्ने लगी है।
तारे पानीके सग घेसत है। मेरी मामी पाससे बेपरवाह हैं। मरे
पपू मग रहे हैं। माय पस रही है। प्रियतम कहाँ ?
*पनापमा पर मेरमो पतवारका मो प्रम देवा है।
पामापीबी-
कवि-भी मासा-
Co
ए मेरे पप्पे लग रहे हन
मेरे पापे सग रहे हन
पापियां दी पाती ते मेरी किन्तो तुरी जा रही है,
होले होमे, सहने सहने, उमके समके।
हो, किरपे
?
दिन स गया
पप्पे लग रहे हम, किस्ती टुरी बा रही है।
क
शामा गापा, किती दम पीह,
मेरे चप्पियो रे पाणी मात सगमी भावान
कह ही है-
भम यस चस पत।
हनेरा हो गया।
दरपूर किते किते दीये टिमकरे हन
पप्पे लग रहे हम रिस्ती पस ही है,
म बही जा रही है
पता! पिर?
तारमाए, पापिया विष उत्तर आए,
हवा रुमक प,
सारे पाणियो मास मेसदे हन, मेरी रिस्ती की
पास तों परवाह हन।
मेरे पमे लग रहे हम किती पस रही है,
पाता। फिर?
-पजाबी
२४ मेरे चप्पू तग रहे है
मरे पप्पू लग रहे हैं। पानीसी छाती पर मेरो नाप धीरे धीरे
पर गतिस बहती हुई पसरी ना रही है।
दिन उम गया। पप्पू एग रह है, माव पली गा रही है। हा
कहाँ पर? सन्म्या बल गई, नाव पा रही है। मेरे पपू पानीकी छातीके
वग लगकर बावाम देते है-पस, पस पम पस। अधकार पिर
आया है।
दूर नहीं दीपक टिमटिमाते है। चप्पू मम रहे हैं। नाव बरू
अभी पसी गा रही है। प्रियतम कहाँ ?
सार निकम माए। पानीमें उतर पाए । पाय पस्ने सगी है।
पार पामी सग बसते हैं। मेरी मावी पाससे वपरवाह है। मरे
पप्पू लग रहे हैं। नाम पर रही है। प्रियतम कहाँ ?
बप्प-नारा बह गयो पापापा भी काम देता है।
पम्माबीपी-
कधि भी मासा-
९२
पर मही, मूरन महीं, मेरो बेगो विच पोवा नहीं।
पाणीयां दो छाती ते कोई राह साफ पगरणी
नहीं,
मेरे नितागे चप्प हम।
पाणो बेटी तितकाई मारा है,
ग्यो यों किश्ती टररी है,
टिमको घामगे दूर हो दूर बापरे हन ।
पाणी टहन, महरार हन, हवा जिसी है,
पफियो पारी है, पर हुप ठरर हम,
पाता! अरे मिरमेही
रात तितका तारेकटक गए,
बड़ी सिसफरी मा रही है
पाणी घप्पियो रामह मय हन, ते आपये हम,
चस, चल, चस।
रस्स रासा! विरपे ?
-पम्माबी
पाद नहीं, सूय नहीं। मेरी नापमें दीपप भी नही ह । पानीको
छातीपर काई रास्ता सहक पगाणी नहीं है। मर पप्पू गमगीर है।
पानी नाबको फिससाए जा रहा है।
जैसे-वैस माय पसती है टिमटिमाता आसोक पूर ही दूर मगता
है । पर बाता हुआ पानी पीतस है। गायु तीधी ह, सिपटती जा रही
इ। अप हाप ठिठुरते हैं। प्रियतम, अमी कहाँ ?
रात हल गई। सारे मटम गए । नाव पिसमती जा रही
है। पानी पप्पूओं मुम्बन ऐता हा सहसा है-चल बस पस
पल। पता ता प्रियतम कहाँ ?
इपि-थी माता-
२५.गंगाराम
विच बगल इक नमार बड़ी,
एक तोता बठा रोग है।
र ठरा, तकबा टपरा है,
तक तक के फाहा हुग है॥१॥
मा सहिम कर पहि रा है,
बन भास करे तुर पैरा है।
पक रग करे मत मोरे है,
पक सम्ब को फरकमा है ॥२॥
ॐ गया होतक हरे
मुत मह में माप्त सताया है।
पर दुल हरता इस एमिये ।
कई सेण सार मा माया है ॥३॥
सी पिपस करार बड़ा,
पुगपूर सुहादा महर रिहा ।
इक गर ी तोतिया दी,
इस ते मा बठ अराम सिया I
मम मुमण गल हिसोया ते,
टुक गोरहो पागा मषित बर्ग,
पुराहो हो पहि पहि गोर पण,
फिर बार पुफेरे मगर मरे ॥५॥
५ -पम्यादी २५. गंगाराम' भयसे वह वियावाम नगममें मैठा एस नाता रो रहा है। पौंक उठता है। उछसता है। घर-टघर दख-देखकर बन होता है ॥१॥ ठिठुरता सिरुवा भी बैठ जाता है। मो आशाका पल्ला परो पसता है । टांग उठापर कभी बांस मीन सता है और पकार कभी पद फरफराता है ॥२॥ ऐसी पमराटमें भूख-प्यास सताने मगती है किन्तु इस दुखीमा दुच मिटानबासा कोई मही माया ॥३॥ एक विशाल पीपर का पाएछ हा दूरीपर सदा महरा रहा पा । उड़ान भरती तातॉफी एफ पनि उसपर विश्राम करना रिए माकर पैट गई ॥४॥ पपरवाह टोत जम पिप्परग (पीपरके फल)गात हे वा पेकी राम मम मूम जाती है। पहलहातमार फरत वे पागें मोर निगाह दौडगा है। "पास होनेरी संगम या मिया मिन्टू परा पाता है। भाई वीर्यमाने समिधा एप परार्धन वा माम्पममे स्वाधीनतापी मरमा गाई है।
कदि-यो माता
म
क तोते रिठा दूर पड़ी,
कुई पोर असाग विसस रिहा ।
विच दुख तसीहे पिया किसे,
सम्म हरियाते है डिसा हिा ॥६॥
बह मार गरी पास गिया
मा कहिंग हूं क्यों सिसक रिहा?
ह दुनिया पर्यो दुमिपार वडा
विच सहिम उदासी मुसर रिहा? ॥७॥
आ मार गरी मास मेरे,
से पा उपर पृष गरे ।
मत ऐपों विस्ती गुप्ता मा,
मिग पेट परन बफ मरे
11511
सुण तक कह यत वृष सरा
को मैं पा उपे सकता हो ?
दुई कम वासा मास मही
म सोप सोपगो सकरा हो।' ॥९॥
'शिह , तोता कहिंग मिक सरा,
'तूंगपरी मार भरा।'
पर मारे पर ना सो मा,
हो गगाराम सवार हिा ॥१०॥
ए हास ममोपा सोते में
मही मगे मुगिया ठिा सी,
स गिया भरापा बसम मू
पह मा मुमारस चिटठा सी ॥११॥
-पजाबी
८७
एक तोवेने देना कुछ दूरीपर उनका कोई भाई विनय
रहा है। किसी पत्रमा पोटाम बरहा पर होते हुए भी पर विहीन
मग रहा है ॥६॥
।
सोना एक उगन भरपर उसके पास जागर योमा- क्यों
सुवर रहा है इतना दुखी क्यों है ? उदासी और भयसे पैसे कप
रहा है ? ॥७॥
पम मरे माय उा पर। मैं तुम्हें उस पाक ऊपर से पढूंगा।
कहीं ऐसा म हा कि यहमि म यिनी-मुत्ता मपनी उर-पृतिके शिा
तुम्हें उठा से जाए।
11८11
अगस्त तानने उम पेपी मोर देशार पहा. पया म यहाँ
पा सकता हूँ? को उठानेवासा माप नहीं है । यही सोचकर हिपक्षिा
गासा हूँ ॥९॥
तोतने पर कहा- टि तू पण तो मार पन
फाराने पर भी गंगागम उ न मका । मावार होकर बैठ
गया ॥१०॥
एमी अनोमी वात तोतेन न पहस मुनी पो मार न दगी
पी। वह अपन मापियारो यह ममार पिम्मा मवानके लिए पेपर
गया ॥११॥
कक्-िश्री मासा-
एक सोते रिठा दूर पसरी,
दुई वोर मसाग पिसा रिहा ।
विध दुल तमोह पिया किस,
सम्म हुरिया से है कि रिहा ॥६॥
दह मार उगरी पास गिया
मा कहिंगा हूँ क्यों सिसक हि?
है दुनिया क्यों सियार गगा
विप सहिम बासी मुसक रिहा? ।।७।।
मा मार उगरी मास मेरे,
है पता उपर पृष पड़े।
मत ऐपो विस्तो कुप्ता मा,
निर पट मरम मंचक मरे ॥
सुम तक कहे बस वृध गरा
की म जा रघे सकरा हो ?
पु पुकम वासा मास मही
में सोच सोधगो सकता हो।
'दिह, तोता कहिया मिरु बरा,
'तूंग परी मार मरा ।
पर मारे पर ससरे मा,
मंगाराम सपार रिहा ॥१०॥
ए हात मगोका तोते में
महाँ मर्ग मुपिया ठिा सी,
र पिया मरामा सण ,
वह न सुमारस चिटठा सी ॥११॥
पञ्चामी एक तोतन देवा कुछ दूरीपर उनका कोई भाई विसस रहा है। किसी यन्त्रणा पीगर्म कपड़ा पर होते हुए भी पख विहीन मम रहा है ॥६॥ तोता एक उगन भरकर उसके पास जाकर बोला- तूमों सुबक रहा है ? इवना दुसी क्यों है ? उदासी और भयसे कैसे कॉप रहा है ? ॥७॥ चरू मेरे साप उह पस। मै तुझे उस पेरके ऊपर से परगा। पही ऐसा म हो कि यहाँ कोई विल्ली-मुत्ता अपनी उदर-पूर्तिके रिए तुम्हें उठा ले गाए । ||८॥ भशमत तोतेने उस पेकी भोर देवार कहा- मा म यहाँ पा सकता हूँ? कोई उठानेवाला साम नहीं है । यही सोपकर हिपकिना पाता हूँ ॥९॥ " तोतेमे टिपर कहा 'टि सू पस तो मार ! पंख फाफाने पर भी गंगाराम उर न मका। पार होकर बैठ गया ॥१०॥ एसी अनोखी पात सोतने न पहले मुनी पो मोर न देती पी। यह मपन सापियोंको यह मजेदार किस्सा बतानके लिए पेपर गया ।।११॥
कवि-भी माता-
८८
पा सारा हास मुगापामा
सुम गर हिठाही माई गई।
तर सब ने मालिया तोता है ?'
'की सिर इस माय बसाय प? ॥१२।।
इक कहिया सादिया है।
'तूं पर्यो ए पास पगाई ए?
'विध सहिम पुटिया सबक रिहा
'बयों उरण गाम मुसाई है? ॥१३॥
रो कोहिल गगा राम 'वई।
'म वतनों बिछा हास बड़ा,
"मुख प्रेह ने मार मुकाया हाँ
'दुस सहिम पिया सिर माग कहा। ॥१४॥
एक तोता महिमा 'सबई ।
"हुन हात पतन । मपणे ?
'विष बिरहों जिस रे रोगह?
'विन पहुंषण चाहें मिसरे त! ॥१५।।
मुण मासे पगाराम 'मुप्पो ।
म रव-सोर दा पासी हो।
मुस मोर पहारा भोग पड़े,
दिन रात यहां पिच हासो सो। ॥१६॥
र सोते टुरी पात परे
इस यो त रहना ठीक नहीं,
र पतो उताह पिपस ते
गत बारी उपे बस सही। ॥१७॥
-पम्वादी
उसने वाकर सारी बात बताई । सुनकर तोतोंगी कतार पेरसे नीचे
उतर बाई । सबने देसारमहा-है तो ताठा इसके सिरपर क्या रसा
मा पठी है?" ॥१२॥
एक मोसा-
सुन मो भाई! सूने अपमा यह क्या हाल बना
रखा है । भयभीत-सा गर्यो दुरका जा रहा है। उसनेकी रीति तू क्यों
॥१३॥
भूस गया
गगाराम रोकर कहीं एगा- अपन वेद्यसे विद्युमर में
बहुत महास हूँ। भूख-प्यासमें मुझे निवास बना दिया है। दुख मौर
भयर्स मरा पा रहा हूँ। ॥१४॥
एप पोसा पोलाही भाई तू अपन देशमा कुछ हाम तो
तू कहाँ पहुँपमा पाहता है और रिसके विवाहमें से
--
मुनगर गंगाराम
योसा- सुनो म दव-छापका
पासी हूँ।
रात-गिन मौम पहागनी दुनियाम विपरवा
था ॥१६॥
एस तोतेने बीपमें ही बात टाप दी आरर महा- यह म्यान
ठीक नहीं है। उसपर पर पीपरपर पर बठे। वही चसकर बातें
करेंगे।'
॥१७॥
कवि-भीमासा.
१२
पर बालम मुषा पेट दुरा
बिन मुसके करे मराम नहीं ।
सो रोंये पोरे गगू मे कर
उगत मिगस मा पोहत सा ॥२४॥
हम पुपण हास वितायत वा
रह पमू मास स्वार पहे
में पतियां विष वससि
मिस्से पोवन सा मधिस्त रहे।
में बसप्प , इक महत सिंगा,
मोहोहे मात बगाया सी।
इस मदर पेठया निर्णय सा,
र से निकट म माया सो ।
पु भन्न म इस सकरा सी,
फिर पौम मनायब बारी सो।
से पूरी मिटठी मिसरी सी,
यो पहुस स्यारी सो सो ।
प मेये मिरा मिसये सम
का भोमन सोहणे मरि सी।
कई प्यार तार नित रे सी,
न सोरो त सुपरि सो।
पिन रात मौन ही रहियो सी
ई मासरे ना पोती।
नहीं चिन्ता मारे पहिलो मी
म सो रहमा सिर हो सो" ॥२५॥
-पजाबी दिना फुरुषा किन्तु वासिम भूया पेट बुरा है। इसे दिए आयम कहो है। सो रो-धार गगू पिप्पली निगत हो गया ॥२४॥ । अब विसायतका हाल पूछनेपर गगू चमे के साप महन स्गा-देवतामॉमें मरा बसरा पा, वही जीवन चिन्ताओंसे मुक्त रहता है। मेरे निवासा सिए एक महस पा गो सोहसे बना था। उसके अन्दर में निर्मीक मैठा रहता था। न कोई शत्रु समीप आ सकता पा मौर म काई उसे सार सकता था। फिर बायु भी अजीव लगवी पी और बहुत स्वादिष्ट मोठा मलीदा मिलता पा कई प्रकार फस भी मिलते प। कितने प्रकारक सुन्दर मोगन बात ये। नित्य सार प्यार मिमता पा। रोग गात सुनाते प। यवनि मौन पौ। कभी कोई कठिनाई उपस्थित नहीं होती पी मौर किसी चिन्ताने भी कभी महीं सताया था ॥२५॥ " कवि-भीमासा- यह कहरे गंगा राम हरी, 'मट पछी पर पट पारे सी। मा पूरी' मा मु? कही सी, ' पे पार्टी मारे ती ॥२६॥ - ह भयानक दोसी रहिस भरी, मुण पन्थी सारी गरा। कुम समझ सके मा की होपा, इह की यफरा है सब पि ॥२॥ मा चुप होई तर सोप पनि सब पिमर पुरावे पफे में। मही समम पिया जो उस रिहा, फिर पुछो पुष पुप मरे मे । पुश सिपाणे तोते र गये, म सिमता सो यूप बदा। फ यात पुराण तोते , पोह इस दो विध सी एस पुरा। पा सबने सौस निवापा ए, ते सारा हास मुणापा ए। फिर पुपिया-'यारा रस मसा -पञ्जाबी यह रहार गंगाराम सट पंछी पट पट'' रटने लगता पा। मार-बार कहता पा– बा मसीवा' और नई टोटमे सुनाने लग जाता पा ॥२६॥ यह भयार योली सुनकर सभी तोतोंको पापी टूट गई। उमकी समसमें कुछ भी नहीं आया कि हय सोता क्या वर रहा है? ॥२७॥ पामोगी छा पानपर सामत पिता करसे सब पर गए। उसने जो कुछ कहा फिसीसी समममें नहीं आमा। फिर जब पूछ-पूछकर म्व गए, वो कुछ समतदार ताते उड़ गए। सेमम्मा एक बहुत बरा पेट भा। उसमें एक यूरे तोवेने अपना पाटर बना रखा था। सब जागर नतमस्ता हुए और सारी बातें बताकर पूछा-'हमें यता दावा कुछ तरी समसमें आया ह।" ॥२८॥ पियरे ममारामरो पबसे पहले ही सिपाया पाता है- “बटपर पछी अनुर मुराना सगा दाना पी भपगन। पा गंगाएमा
९६
वि-भीमासा-
उस पूरे कई ममामे पर्ते,
दुनिया के विष पिछे से ।
का हास सुणे से पुधे से,
कई वा पिछले चिठे से।
हैं कहिया मोड़ों मिकसया सो,
से र पिपसे माइया सी।
सक उपरे आये तोते ,
इक पा प्याम बमाया सो॥
मट सार गया रंग पिस्सा ह,
ते हिस्मण पुस्तम हिस्सा है।
मल बक बक के तकरा है,
मियों सिर ते हर बम बिस्सा है।
मुस तिसके मत्ये जोत मही,
बिच सम्बा सिप: ताण महीं
निम तापत दीकुई भान महों,
कस पारी बीई मान नहीं ॥२९॥
उस दावे पुणे नाक पिपा,
है पर पिपा या रारा रिहा ।
मही रेव-तोको पाप्त गिपा,
से ऐये उमे सास रिहा।
फिर मात पियार रे बोस पिपा,
'रस पापू परपुरपार !
'तरे-कोर तो गिर करों,
रे सीते सिर ते दुख को? ॥३०॥
-पजाबी उस याने यमानेके सारे उतार पड़ाव देखे थे। सारी दुनियाँ छान रखी थी। ह' कहकर वह अपनी बोहसे निकला और उपकर पीपल के पेपर मा गया। उस पराये-से सगनेवासे तोतेपर एक गहरी दृष्टि गार यह उसी समय माप गया-रग पीता है। अंगोंमें रीमापन आ गया है। मावोंमें भय-सा समाया हया है, जैस सिरपर कोई विस्ती हो। होंठ दसक गए हैं। मापा ग्मोतिहीन है। रेनोंमें पोई तनाब नहीं। स्वयकी भक्ति में न तो विश्वास है न कोई स्माभिमानका बिल गेप है ॥२९॥ । उस बूरे तोतेको सन्देह हुआ-या तो यह मन्दी रहा है या दास वर-मोक्का पासी नही है। इसकी सांस तो देखो कैसी पूस रही है। फिर विनम्रतासे उसने पूछा- 'प्रिय ! वता तो तूने देव- मोक्स विद्यापर ये मुसीबतें कबसे मोम से ली ?' ||2011 पञ्चादी- कषि-मी मासा रो गैगू भाचे 'सैर करम दर बबाल मग माये सी, चुफ मैनू मात सिपाये सी, फिर लेगे सब मुभाये सी। उह और हि पहम मरे, से परे मबये और रहे, घर मर्ने किररे मिकम गये, मुर रस पाहूं नहीं परत महे ॥३१॥ 'रह गये किसे बस होरस , पट पट के मंसी बहा सो, फिर दुरदर यो पो सबा सा, में हारिया भास करेंगो सा । ॥३२॥ ना कर्हिरा- रस गई। हूं क्लोक पाया ? कि रहो मगत बांग मसा बम बन पा मेगा साणा है?' ॥१५॥ हो, वमोड न भागा है।' कहे गगू राह बसाइया में इस, गो गेस बिसायत तो म देश दिले अपापा से। 11 को उपे मिसरा पोपा हो से फस बराम श सोमा ह? फो रपे स्वारप्त पौग पहे को बसदी पंगा गोमा है? ॥३||
गंगाराम रोकर कहने सगा-'आज मन सैर परनेके रिए
याए, तो मुझे भी उठाार साप सत भाए। ये सब वसमें लोन हो
गए । रेस्ते-वेमत ये गाने मुझे छोरगर किधर निकस गए । फिर उस
जगह सीटकर नहीं आए ॥३१॥
वे किसी दूसरी ओर निकस गए। मैं आंखें फार फार घर-
उधर उन्हें देखता रहा। ॥३२॥
हूँ - सावेन फिर कहा- 'तू हमें बता दव-सोकको
जानकी इन्छा है मा संगरम हमारी भौति रहार भौति भासिके फल
खाकर पीना पाहता है? ॥३३॥
गगाराम योमा- में देव-सोरको गाऊँगा। मुप्त रास्ता बता
यो। इस मस्पिर विसायतस मुप्त मरे दम पहुँचा दा।
'यहाँ क्या गरीका गोसा मिलता है। गया वहाँ बादामको
फसमा योत महता है ? यहाँ पया भीमी बायु बहती है या गंगा-
गोमती बहती है?' ॥१॥
कवि-श्री माता-
चोफेरे मगर
सोते में
गई सी,
पल र मापणी 'म्याग करो'
इक ऐस मम तकाई सी ॥३६।।
सुप गैपू कहिग माता की'
कुम पोसिया किहा मा मारा ए,
रस मारे लिये मनी में,
बिन ढेि समाना मारा ए ॥३७॥
उस परे तोते 'ठीक' किहा ।
नहीं रिटठे बरगा मुपिया हो,
जो हाही माके बरतिया मा
की मास सियाा पुगियो हो
पर तर बो सोय बड़ी ही है
इक सब मूठ तस्करह
कर बसरी निभय मुगिया ये
की सप मचे की सरकार है ?
में पुछो जो पुग पियारे जी!
रे उत्तर मसा मिहाम करो
इस जगस वासी पामा ५
पुस मस्त रिमो साहास परो॥३८॥
मो मरर मुनर मिसिया सी
विध मिसरे मुखिपे पसरे से
को पर उतरने होया सी
पा रस मूकदो रसते से ?" ॥३९॥
१०१
-पजाबी
यह कहकर पूरे तोतेने अपने पारों भोर निगाह दौड़ाई ।
तोतोंकी तारकी ओर समेत फिया कि परा ध्यान करो ॥३६॥
गंगाराम बोसा-क्या कहूँ। कहने सुमनेकी बात नहीं।
अपनी आँखों देकार ही पता पमता है । मिना देसे कुछ समझमें नहीं
यावा।
।।३७॥
भूगा टोता बोला-'ठीक है दसने-सुमने यन्तर है।
अपने साथ नहीं बीती, सुनी गातका क्या मूत्य है? फिर भी
सोप-विचार बड़ी पीग है। एप सच-मूठका तरानू भी है यो सुनी
पातमा निर्णय देनेकी क्षमता रखता है। में गो कुछ पूर्दू उसका उत्तर
देकर निहास करना। हम पंगसके पीप कुछ शिक्षा प्रहण
करेंगे।' ॥३॥
'हो, वो पो निवासके लिए मन्दिर मिसा पा और जिसमें रहकर
तुम सुसी पे-या वह चारों तरफसे बन्द पा या उसके दो रास्ते
पे?' ॥३९॥
कवि-भी माता- यह कहने में तोते मे, बोफेरे नगर हाई सी, मस गर मापणी 'म्याम करो' इक ऐस मा सकाई सी ॥१६॥ सुण गंगू कहिंग 'आमा की' कुन पोतिया रिहा ना जाए, रस मावे देसिये मनी से, बिन गिटठे समझ मा मांग ए उस पुरे तोसे 'डोक किहा। नहीं रिटठे परगा मुणिया हो, मोहही माके परतिपा मा की नात सियासी पुपिया हो पर सर वो सोप पड़ी है पर सब मूठ का तस्कर है पर बसको निमप मुभिया, को सप पवे की सस्था है ? म पुफा नो कुन पिपारे जी! रे उत्तर मसो निहास करो इस जगप्त पाप्ती पाना मुं पुम मत रिमो लाहास करो ॥३८॥ जो मेर मुना मिसिया सौ रिप मिसरे मुलिमे प्रसरे से की मन परफ़े होपा ती पा उसको रसते मे ?"
-पम्मानी
यह कहकर पूवे तोवेमे अपने चारों बोर निगाह दौड़ाई।
तोतोंकी वारकी ओर समेत पिया कि बरा ध्यान रो ॥३६॥
मगाराम बोसा- क्या पहूँ। कहने-सुननेकी मात महीं।
अपनी आँखों देखकर हो पता चलता है। पिमा देस, कुछ समझमें नहीं
॥३७॥
यावा।
बूड़ा सोता योमा-'ठीक है दसने-सुनने में अन्तर है। यो
अपने साम महीं बीती सुनी वासका क्या मूस्य ह ? फिर भी
सोप-विचार मड़ी भी है। एक सप-मूठका तराजू भी है को सुनी
गातका निर्णय देमेकी क्षमता रखता है। में पो कुछ पूर्वी उसका उत्तर
देकर निहाल करना । हम अंगसके बीच कुछ शिक्षा ग्रहण
करेंगे। ॥३॥
'हो, तो यो निवासके लिए मन्दिर मिठा पा मोर पिसमें हार
तुम सुसी पे-रया रह चारों तरफसे बन पापा उसके दो रास्ते
पे?' ॥३९॥
वि-भी माता- १०२ गें- एक रसता उमप हैगा सी, पर बन्द सरा उह को सी। मत कोई मर्ने मा माये, इस गत तो सुनिया सैया सी। सन रसते चार युफेरे भी, धुप पौम मुसी मा नारी सी। र मैनू रता मा वो सी, ई मान बहा म माबी सी ।।४०॥ पर तोता-पर पसी ताकी मार दी पप्त किस रेलोसग मारण सी? में बस ना तेरे रसी सी तो इस रा कह को कारण सी? मे मिरा चाहे मिकता में पोई तेरी मासी मनरा सी? बमा मरगी पे सी तू विच पिया सिर घुमरा सी ? मो तूं पारे रसा है को रस तो बाहर मारा स? सो विधे रहके पान ही रंग सरा सै? Iran रहमा तों - पगाराम-सी बतिया रे पा सरा, पस मेरे रतम माग सी । रह बनी ना, एक रातो बा, मासे तमा वाटा सो। रह रसते मोम बहारीने वा चानण स्वागा रे सन। पर मर्ने मन्दरे रसरे सम, रह पते रप करो सन IN२॥
१०३ पञ्जाबी गंगाराम-उसका एक ही रास्ता मा गोहमेघा बन्द रहता था। मुझे कोई खा न पाए, इस वातसे निश्चिन्त होकर मैं सोता था। रास्ते तो चारों तरफ और भी थे। मुली धूप माती थी। मुझे पिसी प्रकारमा भय नहीं रहता था। न कोई वठा ही मुझे पकर सकसी पी ॥४०॥ यूगा तोता-पह सो बता मन्दिरसी सिमी तोसने और वन्द परनका अधिकार पिसके पास पा? तेरे पक्षमी अगर बात नहीं पी पो इसका क्या कारण पा? यदि तरा दिस बाहर निकलनमो चाहता था तो क्या तेरी याप्त कोई मानता था? या पिर तू परायोंक माघीम सिर खुबमाता ही रह पाता पा? षो मार तूने बताय क्या उनमसे कभी वाहर भी भाग मा, या भीतर रहकर ही दर्शन देता-पता पा? गगाराम-सब कुछ दवतामोंके गगमें पा। मेरे बगो पोई बात नहीं पी। मेरे गिर्द एक तगड़ा पाग था। वे मौज-बहारसे रास्ते वायु प्रमाण और मानन्द दते पे 1 पर मुझे भीतर ही रखत प। मेरे मामिक मेरी रक्षा करते ।।४
कवि-भी मासा-
पहा तोता-मो अमृत साणे मिलने से
उह यो ते मापे सी
या मुंह मंगिया दो देने सो
बो ते सगरे मापे सी ॥१॥
गगाराम-नो भावे उहना मां पिया ने
निर गाता बांगू रे सी
में मंगण कोसों संगो साँ
नो बाण माप करे सी ॥
गगा तोता-में बात करे कोई उम्हा दा
त भास संग्रा हसा सी,
ते तपों चक
परी सी
रह मा मा पिया बसमा सी।
तर तन सोटी परी सी
ते पूरी बम
ना गत म गातो बारी:
कुई मात सिरे न मानी सी ? Immun
रहारी सी?
मगाराम- म मपराय कमा सो
तरको गफह पांडा सा ।
पर म बोवा बग रहिवां सा,
पस सगरे नहीं दुनारो सा।
यह कहिया सटपट पछो हो,
फिर गगू बोसो पारा ए।
मुग तोता घोण रठौरा ए,
ते मगती पस पतारा ए ॥४॥
१०५
-पम्माबी
मा तोता-चो अमृत-रूपी भोमन तुझे मिलने पे, क्या ये
स्य देते थे, मा मांगनेपर मिझते थे? यो तेरे मां-बापके
समाम थे। irl
गंगाराम-उन मां-बापकी जो इम्छा होती थी, भपने वासकोंकी
भौति मुझे खानेको मिस पाप्ता पा । मांगनसे में माता पा सो दना
होता वे स्वय ही दे देते थे।
॥४४॥
यूगा तोता-पदि मपन सग खेलते उनके किसी बाहाके तू
काट बैठता था और वह पाकर मां-बापा बता दता पा, तो तुझे
पीटा गाता मोर मसीदा बन्द कर दिया गावा पा या फिर बात
टाम दी पाती पौ। और तरे सिर कोई मुसीबत नहीं पाती
पी? ॥४२॥
गंमाराम-पदि में अपराध पर बैठता पा तो उस कित्येका फल
भी मिम गाता पा । पर मेरा यहाँ ता बरा पमता में मिसीमा दिस
महीं दुगावा पा। यह हार गंगाराम सपट पंछी पी बोसी
घोप्ने ग पाता है। सुनकर तोता गर्दम सही कर सेता है और
गात मागे बढ़ाता है।
॥४६॥
कवि-मी मामा- १०६ गा तोता-ह बोती मिस विच बोसे हूँ यह रेष लोक रो वामी है? को रमस बी बसी त है या कठ करनी ठाणी है ? में समझे तो समझावी तूं की इस ना सिट्टा नाता ऐ? री मेत समन्स तू सीते हन को वित्तो वध पछाता ए? ॥७॥ गंगाराम-म समाप्त नहीं में पी मोमा, नो बोमण सोई मकस करी । उह रीक्षण एम्हा मकप्ता ते, म मशीकरन से मकाम करो Iren इह सुगके सोता हस पिपा, सिर फेर गर हिरा है। 'पुम सममिया बरमरारो, किस पाए पिपारा रहिरा ह ? नहीं रेव-सोक रावासी है, मही रेबो रसते पाया है। रस मानुन दररे परतो मे, विष बनी पर रसाया है।' !
१०७ पञ्चायो बड़ा तोसालो मोसी पर सू बोल रहा है क्या यह देव- सोककी वापी है ? इसका कोई रहस्य-तुम्हें बसाया गया है या रटो- रटाा हैपरि तू सममता है तो हमें भी यवा किसका क्या मर्य हमा' या सव रहस्य तूने मान लिये है, और जिसकी पहनाम करतो पी, कर पुका है? गगाराम-भूम म्षय को पता नहीं कि में गया वोमताई। को बोमते है, उसकी नफर करना मुझे पाता है। ये मेरी नहम्पर प्रसन्न होत है। मेरा काम उन्हें प्रसन्न रखना है IEl यह मुमकर यूा तोता हंस दिया । फिर तोतोंकी क्वारसो समोधित करते हुए रहने सगा 'कुछ समझमें आया पिरजीवियो! यह सपना माई हो रहा है? यह किमी देव-मोका पासी नहीं। न यह देवतामा मार्मका ही अनुयायी ह । महतो धरतीये ममुप्पों द्वारा बन्दी रमाकर रखा गया एप सोताह कभी मासा वम हो अपरन सारे तरपक गये, पये बिट बिट सारे तको है। मा बहरे है, वस पगू तकरे को है। पा गंगू पूरी बहरे है, फिर हे मसर दुवि ह। मत किररे दूर करेंग में कोई वतनी तुरिया आये है। हग पूरे तोते माह मरी, फिर मग मका रहा है। जो असी परेमा शेरी सी से हेमू मरके मारा है। मा रमये चम्मे मैन मरे, र से रसीसे रग परे। वित्र गर मामा माम मरे, रह पावा ऐ मरगस परे ॥५॥ हे सब तो ये गण वामे, मरता तो बी परे परे। दिमा मासणे, बिन सम्या तर गगन ऐ। पौग महाग, परती तसि पाणी हर पो हो रिस-पीर मुनो, मुग मरास पारी राते ।
पचाबी १०१ बापर्य-अकित हो सभी बाँके । एक दूसरेकी ओर देखने सये। कभी दूरे सोतेको, कभी गगारामको देखते हुए मेंपते हैं। गंगू मापेपर सेवर गसकर इधर-उधर निगाह दौड़ाता है कि कहीं उसकी बोर-सवर मेनेबारा कोई देशवासी घसा या रहा, दिसाई पर पाए । बब पूरा दोसा एक निश्वास सफर अपनी मा आकापाकी ओर उठासा है। मो से कभी रोई नहीं पी उममसे बांसुओंकी दो पूद दुलक पड़ती है। ये रसिया मा एकटक माकानी ओर सगी प्रार्षमामें गुरु माती ह॥५०॥ ऐ सबसे अचे! देव-सोरसे भी परे बसनेवासे !! हम बिना पोंसले, पंख मिहीन बाकाक्षके वासी है। पवन पानी, धरती मौर वाकापणी तुम पोग पहचानते हो । मुन्न पशुपी भी प्रार्थना मुनो प्रियतम ! अपमी पा-दृप्टिस हमें कभी गठिपस न करना ।
कवि-मी मासा.
सप्ता
सार्ने
रम सुततर गते,
सापो
परतम्तर मा करे करावी,
सरा पामर रहे।
मुंह तपिपे ना करे कैरा,
करे गुहामी मावे माँ,
सास बमा म हिरमत पायों,
सारी मुस मुहाबों मा ।
ये रे बस पाके सानू,
मन ही मोम गुवायों ना।
मानारो हक तेरा रिता
सब मूं पान
पृष्ठ प्रमु ए रात म मुस्से,
रिती ॥ रहाई तूं।
मासी हेठ किसे दो मरी
पपरे मास
म सगे कबी।
जंगल
यासा पेशक ऐषों,
माड़ो महत , शहर वा।
तन , रमण पुगी मिसे पर,
पुत परे मा सस ।
बेगर साडी बोम जिसारों,
हफ हक दिन पैट मरे ।
पेट भरे चहि कमा रह गये,
पुप्त मा साही पदे मरे ।
-पञ्जाबो सदा हमें स्वत न रखना । बन्दीबानेसे हम कोसों दूर रहें । पराधीमता कमी म दिखाना । खुमे बाकासमें हम सदा अपने पक्ष फरफमते रहे । सभी किसी दास म वर्ने मोर न ही हमें कोई पियरेका दी बनाए । पास बनकर कहीं हमारी स्वाधीनता न छिन गाए । परायेन वधर्म जाकर हम अपने मनकी मौग म बो दें। स्वाधीनताका गो अधिकार हमें दिया है, वह सबको देमा । हमारी इभ्याओंको कोई जबरदस्ती कुषस न सके । न कोई वाधा पहुँपाए । न हमें कोई ठग सके। हम अगष्टके वासी मसे हमें महसो नगरौंकी इच्छा नहीं । सरीरको ठोकने लिए खुशीकाफी है, पर हमारी स्वरा सा बनी रहे। मठ ही हम सारा दिन पोगा* युग घुगार अपना पेट मरें, या बाली रह पाएँ। हमारी भागादी म छोममा!
कवि-भी मामा- कम फिरावी सानू, रातों रात उरावी सानूं। प्रोफे प्रोक टपाले सानू, कौरे फसी रिमावों सान् । बन परबत मत बनी पहाड़ी, रेत पहों पा देवों तूं। मुमन रिसा हक समस न, देने की म सेनी हूं। मान बान कि शान असायी तेरे साण रतावी प्यार माप माफ, प्रमुत दूमी कैर मा पापों तू। और करन ते आसण रासो, न देव करावी मा। पाग पिजरे वेग भूरिया ऐसे सली मिसानों ना। सम्म मसारे पैर असारे रित सारे मू रोक करे । धामो ऐसे असा ओर पाय हप पसे सरिया मौज फिरिया बाग कि बिस्सा आण पचे। मार गिहमे राप्ती नामों कुत सारो बहि माश हुये। मर तक इस मसा बोंबीचे पुस विध उस मुबारा बहे ॥१॥ म मेसी -पजाबी । हम पेड-पेर, मालपर फरकते रहें। घेरे में कामे फल खाकर ही हम पी सगे। वन पर्वत मस्पसकहोंपर भी रह सँग। भागादीका जो मधिकार हम सबको दिया है, यह सदा बना रहे। तेरे सहारे हमारी आम-शान कायम रहे। ऐ भगवन् ! तुम्हारे प्रेमकी कैदरे बिना हमें कोई दूसरी कैद म देखनी परे। जो वन्दी बनाकर देवताओं के दर्शन कराते हैं, पिंजरेमें गाकर मलीका प्रलोभन पते हैं, ऐसे दामबीर हर्मे महीं पाहिए । ऐसे धर्मात्मा-पुरुपोंकी सगनिसे हम दूर ही भसे हैं जो हमार पक्ष पर और हृदयको गतिविहीन बना दें मार मलेमें रस्सो रामार हापमें मगाम पर में। किसी रखमालकी सहायताके बगैर खुमे पाका उड़ान भरने मौजसे घूमत ममे ही पिसी या वावमा शिकार बन पाएँ। हमारे सारे गुसमा नाश हो पाए। जब तक हममेंस एक भी बीवित है स्वतत्रताको साम सेता ह ॥११॥ . प्रा के पावन पम्पायरे ही पुछ मम्मी निर्मामे पाय पार है। अन्य भारतीयोंके लिए यह एक मपरिचित बन है। पम्यागीबी-८ कविमो मासा- विद्या रह पाप इफ मरास होर है सायो । मेहर करी रेकन मुमी पशु मसी हो पशु रवानी बेशक सदमे समम गुगी । रह मा मरुम असा देवी उह तहसीब रिवावी मा। उह सम्यता पर हावा, सिखा मा। मास पाम ते पान पियरे सिखलाये भो पम्प सोरर बोट बहाने दुनिया परी पाये पो बनाय महाले मुरता करत कराये हो । तेरे र सुततर पररे ताण मुराये को। एस हरन से जाच मसानूं साया करे सिपाई मो। प! मसो में चार रखी मानुप परे यमाई मा। पहे अंगसी पहे पा रप राने चाहे पनाई मा। पुस पयग से मरत ना देवी पुस पोरण मात्र सिपाईमा । 'पत रग पी मरत घेयी पुल पर! राम विवादों में सोग गुसाम -पजाबी एक प्रार्थना और है प्रियतम ! हम पषु है। पशु ही , गुणहीन ही भले । हम उस शिक्षा गुण कमी प्रहम न करें, उस सभ्यवासे दूर रहें जो पात फैसाकर पिमरेका धन्दी बनाना सिखाती है। पच नोचकर पो दूसरों की स्वतन्त्रता छीनती है। लोगोंको पराधीन गनाकर बैठा देतो ह । तेरे पैदा किए स्वसत्र मनुष्योंको गो पपये वसमें कर देती है। किसीसी स्वतत्रवाको छीनना हम कभी न सीखें मम हो जगसी महमाएँ, मनुष्य कमी न घन सकें। स्वतन्त्रता वेपने की बुटि नहीं पाहिए। स्वतन्त्रता छीनने' के ग म सीवें। स्वतत्र रहनेपी आन भौर स्वत ताकी सान आँखामें बनी रहे।
कवि-भीमासा-
दुम काये पूत पात कराइये,
पुस रे पास बनायों तूं।
मम मरे ना करे मसाग,
गच को रिस साये नौ ।
शो हे मम मरी मसारे
का करे सिर मावे मा।
पैरत ठरन पून नावे,
मग रगो विष रसे नी।
मुमा सारियो ताण काम रहे
मा उचेरो तस्के भी।
मोठे तमे ताग विच सिये,
गररन माका मरी रहे।
सोर हे हिक साठी भरिमा
र पा धौम मा कवे बहे ।।१२।।
११५
-पमादी
बम हापों हम स्वतन्त्रता वार, दास कमी न बनें। हमार भीतरको
बिनमारी का सुनगती रहे। कभी साहस म हो । सदा प्रफर मन
में कभी कोई सष्ट न जाए। खूनको वान सदा गरमाए रखें।
नमोम बान परी रह । रामू वानकर हम बार उठाकर दख सकें।
बोका तनाव कमी डीसा न हो । मर्दन सीधी बनी है। हमारे
सोने बौर मुगाोंमें सक्ति बनी रहे। भयभीत हो हम कभी गदन
म मुकाएँ। ॥१२॥
मम मारो रामों पण एव पात रसा मुन्दर परिपाप हुमा है। इनकी मात्राम पमा मापुर्य एष मागास वरप प्रवाह गूब मिहना है। भी नपामा पापप्या गाम्बा भावुक है। करम पी के मुपनाम मय परिना परले। उप पी परपया पिय मी मारिन गप पाप। नी रचनामोमें भाष-पूर्व पण भपन माप निरिकी धारारे समान भरन। प्राीम मी मीन भागाका हर पलवारी इन पिता बहीही पुग्न और मरम हसी है। सपाना मम्प प्रसिर पपिपापानुस पत्यनारायण माराममह पानी नापनि नुग्माण गरिपि पापिपनु मादि है। तृतीय सरपाम-कास जिम पर हिदीमारियम यापारी प्रतिम्मिा पा तत्वामीन परिस्पिरिकारे पारण प्रमनिरा मावि हुमा मे ही तमा साहित्पमें भी हमा। पार पता निश्यिा पारंपारी कविता समिरि हुमा। निय महापुरले भारम्भ TRA पूर्व सा रे रसिलाना हा नपराणा सारीपापी पी। ममार मम्पम पम बापित चिमनाक पाग गात राहा। पालम मालका परम्प मानक सामन जाताकी तरा पापा। महार मचाएमा मा। स्वावा भाषना साप गप्पागा मापन गोर पर हा पा। मिनी पागनरा मन मोर उल इन पराम मामारा। म पनिम्पितिवाम गरिहापमित हो गया। उसने रेया मिलना रेनमारमें गिरनामा सम्पनी रणनामापगमे तिना ही था से पापा तो जमानार ही है। मन पारंपारी पनि पम्पमारे मामापसे मी परमापित पिपनाम मिनाले ममा wिण पान मय। माम्पमारी निवारपारारा गयपारी पनिार निर्माण प्रभाव पड़ा। इमभापनिपामधारा प्राम्माहिरा मरमागिय परिषर बरपासना होमाम बना सम्पुपरपिता मगम में रिलीन हो गई। म पारे मित्र परिपी भारंगम पीमितामा पाप पी-श्री . मान सातापम प्रापान । म पत्तिा पिप भापरे मतिर Tuोंको तो हित रानी रहे ईबो मूर्त है पण गह! तोव्हें.पहरप्तिाहै। दमा निमारमारा मापा मामा- तिर समान बार मप्या राग पाब-हत-हिरप रत, कापानिक-नयनवाला कताप्राप्तिका-मिला बाहिप नब कविता लिए। फिर यह पिता से दागी इसका प्रभाव क्या हापा? ये कहते है- हितमेवाती, हिलानेबाही बरतमेवाती बरहानेबाही महरी मीरको हटामेवाती पूर्ण बीवन प्ररान करनेवाली हैमरविता। यह कपि वन प्राम्सिसे ही मनुष्ट नही बह एक ममीन सामारिक एवं माषिक म्पपस्थाकी स्थापनासी प्ररणा भी देता है। मी पी का प्रसिर मुक्काम्प-समह महाप्रम्मान है। भनिसेष्टि मुम्बारावी प्रमविवादी विचारधाराका बाही कसारमा बगसे म्मान करते है। मनिलीमा इनकी करितामोका साह है। माप (भागबनुन मकर पारी) प्रमयमा बालान करमामोमें प्रमुग । स्वमेवाहम् मामर पुस्तक में माप कविताएं सग्रहीत ।। हालमें ही मापका निवासी नामक लानाम्प प्रभागित हुमाई। पीरमम् नारापनबाबू मति यथार्थवादी कवितामों के प्रसिर कमि है। मतिमयीन मैसी एप नीम रिचारपाप धापकी कविता चलता है पाहमाचम् स्टिसापम् (मि में दिया) तीर पाति मारिमापकी प्रसिर रचनाएँ है। बापी मृत्यु हाल ही में हुई। भी सम्मटि मूरि, पी रस्मको एमाम, पी पट्टाभि भी दुन्दुति माम्लोमनपुम आदि इस धारा प्रसिर कम है। पापनमूर्ष एपिमीनापशास्त्री परोसी (म्पम्प कविता) मिखनमें सिद्ध हत है। मशिनन नामक इनका रोशी पर मेरा भाई अमिर है। हैदराबार परियामें पीरागरपी प्रमुख है। माप मी प्रकार मिोंमें मिपुषवाके माप लिन सकते है। मापी मरिताम सम्म मम म्पत्तिपा मारना- बाँका सबस और स्वामापिस प्रमाह है। मस्निपारा एगीमा मारिभापरे प्रसिब काम्प-संपा है। मस्तिष्कम् हो मगरेटरी मापर्व एक मित्र पनिा। सबम विचार मनायाई परिम्स प्रमूतहसरामरमीमहो- है नही पहनने मारमहा रेरिमा मिनात तो नपे पर पाते है समताके सामने (माय मेरे)। - पानानि नारायण मी मारायण रेती रस पत्यनारायणाचार्य रामग नेपंगानारे मिर पाप है। इस प्रसार मानिस तेग पपिता पनि बगहा पर अपनी मारित्यमे प्ररणा प्राण प्रारम्भ हुई पी तपापि मानी रिगपतामोगरा ग्रामन फर मिम्म निम्न पात्रामें प्रवाहित ती हुई माधुनिक भारतीय साहित्यम मपन रिगिप्ट स्पानपर विपमान है। यह मादाम बग-अयनमें रोम में एनामें मापाम पाम्परेमी मपा एकतामा भार उगवा पिप्यकी मार भामरहासी है। मारक भामुनिः मान्य माहिएप नायर मन मानोंराषिभागवतापी मोसा मगर या अपनी नारर परम्पराम मत्यधिक प्रमाणित है। मुनके बिना चिम्परिधानपर मातापनीमार साहित्यका ही प्रभाव परिमदिन होता है। १.बी पानीक उत्तराचे पारा नाटप ममाग्न माग्य प्रान्त गुम पूमार पारमी मार हिली मादरों प्रग्नग गामा पूम मचा री। न मारापी मोरप्रिपनाम प्रसारित होर तेन्ना भाटर रना करम मौर उग अभिनीत राम सिप पुण् उस्माही युबरु सनमें भाए। प्रत्येक नगरमें एमया रो माटप-नमागकी स्थापना हुई। बांग्रो प्रयास मान्यता मान कोपरप्पप्या पनुन और मारपीटी पामम् पन्नुम भी इनमें मान नेप। तेर मार मारपरा प्रारम्भिर पुन मनुगाराकर और मनुकरणात्मक पादाभानिए मान्य माहिप्पर परिप्या श्रीधीरेननिगम पनुमने पालन एमापनी पामेरामार मार्म मासिा मनुवार पिया। अभियान गालत पो पापोली पराममे धिा बनुमार एए, पर पिमपम पनुका बानुगार पट माना जाता है। पीयेमुगटप पापीन उत्तर रामपति और एरे सभी नापास पौगागर मुम्पापपुग्ने देगीर मा निपाति पापान मुलाम सम्पाटि मान रामापण पारि धमार पालीवाल मागानन गुपी राम। मानली मापी पितामति सामामिामय पान: मी माटमारा मनुगत रिया है। मासा नगर पोपुरी मर म मर्ग भारिपमा ममी माता मापोरा मेमे अनुसार मात्र मे म पपरा मारका अनुसार भीतल ओर मागामिनु म | सारि को मार निधीसागरा पारामा अनुगर मगर।भारी राग "सामाभिरामेयर गत र प्रणापा। म १९ धागा गमतीन पगमपुर रायम् की मारा मगामा मानिस मारा मामा । म १८७५ म थी भाषिकामा वामदेव माम्डीन मन्दक पग्य मामक मौकिक माटमकी स्वर्य मौलिक नाटकारबमाकर, उनका प्रदर्शन कर, मोरमिप बनान पाठे प्रथम नाटककार और मभिनवा पी धर्मपरम पमप्माचार्य है। उन्होंन बस्मारि नगरमें सरस मिनाली समाही स्पापना की। इस समान माम्प प्रान्तम प्रपमत पारसी कम्पनियंकि मनुकरगपर नाटकॉका मभिनय किया। ममाचार्मनान में मधिक मारक मिला और म समी नाटक भिमात हा पुरे है। (पना नाटक पुस्तकाकार प्रकामित हए है।) न माटी कपाबस्तु यमपि पौराणिक है, फिर भी पटना-सम्बिधान गौर करपना-वातुके कारण म नाटक पपष्ट लोकप्रिय है। विमानतीयम् विपार पारंगार , बन्नहास बमिनी बारि इनके प्रसिय मार है। मकोको एस्पीम विमापित कला प्रोमो वीर एपिमोगका बिपना सम्म सात भापक पुमान्त मारि पश्चिमी माटको प्रमापसे इनके नाटकोंमें समाविष्ट हए है। विपार सारंगपर तेलगुका प्रपम दुमान्त नाटक माना पाता है। वर्तमान रामनतिर धार्मिक मौर सामारिए समस्यागोको बाचार्यजीन अपने पौमिक माटकोंमे भी स्वान रिया है। श्री राममार्मिक र पनम्य सेमामकिपारण माप प्रवेश बाम नाटक पितामह के रुपमे यार करता है। उसी पलारी मगरमें एक दूसरे का साहस हुए है यह भी कोलापसम् पीनिमायराम । इनोन मी माटोंकी पनाकर उन्हें मभिमीत कराया है। लोग बानी-रिमास मारक समा की स्थापना की। इन्होंन प्रपा नाटक परिष (संभार मारकों का इतिहास) मिना को एक पष्ठ परिषपारमा मौर मामोचनात्मक रावसाहन भी काफी नाटक सिम है। मुदिनी परिमय बिरय मगर पम्प पवनमु प्रतापानमरीयम मवासमा सत्य हरिरापम पादुका पट्टामिपम आदि इनके प्रसिद्ध माटक है। विजयनगर पम्प पतनम् बहती कोप्रिय हुमा है। भौतिक रुपमै एतिहासिक मार पोपथिक नाटकीकी रचनाके प्रति रिल एगीन मसठ तमिल और पर्छ नाटकारे मनुवाद भी प्रस्तुत रिए । पहोंन र मामानिमार मार प्रासनाती भी सपना दी है। प 'आन्ध एतिहासिर माटा-पितामह के मामले प्रसिद्ध है। प्रतापसीयम पा बाँगई -यीन मौमिक नारा मीम देठाप शास्त्रीया इनमें-प्रताप यमु मामापर्वय प्रतापरा मौर नितमी मुमतानोरे इतिहास समपित। तेलुगुके एतिहामिक नाटपाम अपना मिमिष्ट समान रखता है। इस बार बिमा-शिष्टप बसि पात्रापित भाप:- प्रमाग गूपम पम्प मादि माहै। प्रतापरामर्ष पौपम्पसमग भासः योगम सपनीमार Fिमाना। पारि-नेमा-२ - १८ पानुगरि हामीमरसिंहरापनाने सगभग तीस मारको रचनाकर, भान्य पामपिया # म्याति प्राण क। इमरे नाटका पास पट्टाभिप गपाराम विपनारायण बहुमहारपिप माटक है। ये मारक-रचनामे पप मौर गीताया गपीई मरवले है। धी चितम्मति सामीमामिामा मागापाम भाग्य माट- क्षारा पप्ठ औरबारप्रियमाटरहा। इस मारपी गिर्न प्रतियां बिकी। उनी पापा रिनी इमरे मारपदी विक्री हों। प्रसन्न-याच परिमानार- प्रसार परित इमरे मम्प प्रमिर माग है। ममामामारकोपर सपा मारकारा प्रभार अपेवात पिप पर हास्य गौर पम्पयुक्त वामाप अपनीमाटकोपा निमा। भी निरनिट मुमा सिमा पागमो उपोरमजयमुनु विमा प्रमिर Parमरे मपुर पप जमताली पानपर पा गए है। इस नाटसाप्पापी- स्पा (भीरप्परा इन-बा) दृश्य या मार्मिक और प्रभापगानी बन पाई। एदान मामाग्तार मापारित ए और नाटा भी हिप है। श्री बनियमिक मामीराममा भिगा तस्पषि भी पापी मा- प्रिय बना है। मनाटा पच गोहीमपुर है। मगुरे मामपि मारपोर्म भी पुगा मारामा बन्पापुस (१८९७) गगिर।ग मागको मिग मतर सपो मारा पा पर मार मी गया। गई पानी रपमै मामारि पानापास पानी । बप्पा-प्रपा बार-सा पाया (पर गुम पा र मरी) म पालीके पुरसिम न मातिा मारि निमग एमा। यह मार मामावि मुपारको दपिग्मे पाहिला परा है। लामाटामीनोगपर उसना पग नहीं गता। ग मारमा प्रमुग पार मिगम भाग्य प्रानमामि पाप-गा बर मया है जीसदी मार पोसार माग गनिधि है। परवर्ती मामानि मारणेपर पम्पागमम् पाप्रमार ण पगिलिता।। पगियार ािप मायनागपगन पिता उपग्पामो पिरता मार लाम भी मामी प्रतिमा ' । मनमामा' मनापमा मगन मा भारे मुल नाटा। मादाम पापम् (फिराट मरागवा मामा) mfmमापाप निशिरामार प्रपन रिपा। असामागोनिग्गिामीमगर रामानयार समागमपण पमनागपग नाग नी पामगर नागपगराप गियापेपर मुगार Frमामनगर बाजी प्रमुग 1 प्रारीन मारता र पन्य पुरामा मानिमिारपोगपिराम प्रम पानी गाष्टिसागपाल पपा। और पीस पर परिसर स्थित होता है। नये सत्वामाही एनाओंकी सामग्री बहुत कुछ वर्तमाम सामारिक समस्याओंपर ही मामारित है। इसमें बम पपा ही प्रयोग किया पया है। भाषा पाहरण सम्मान न होकर गोवपातही है। रचना-विधान मौर रसमस प्राधपर अधिकारिक पााचात्य प्रभाव एप्टिमोपर हावा है। माचार्य मात्रके नाटकाम मध्यवर्गीय परिवारों समम्बार्मोगा प्रभाव सामी चित्रम मिता है। सामान्य मनुष्य के हायमें वर्तमान परिस्थितिले प्रति परिमशिव हातपास मम नामारि मनावृत्तियषि विश्पर्मे मीभाप सिहस्त है। भकार (माका मान) पप्पा (मा) 'म यापकी प्रमुल बनाएँ है। कोपस्से मेंकट रामापरने मपने माटकोमें सामाषिक दुराचारोंका नगन या पोरसार गम्दोंमें किया है। श्री पिनिमको प पाणु (पामीण सुमती) में किसान भी मारार संपर्पका मुनर विधा है। मी बुनियापूका भारम पम्पन बोली भीमन्नाके पारिस , मिण्ट रामदासरे मास्टरनी पुनर्गम भी माटा। इसके अतिरिक्त नरसराय रि भूप प्रम्प पराममूर्वि नरसिंहपर मारि स्माठिराप्त माटासार। माना पाता है कि ममता मगम कोमी रानी हजार भारक सिम मम । एकाको गत दो रासपा नाटक सिसनकी प्रथा पम हाती पा ही है मौर एशोपियारा प्रधान मनमा पा रहा है। मुस्पतमा कासेर मौर स्पू मापिक उत्मक रपममप्यमें मोर मासिक पोंमें प्रभागना मिष मए इन एमियों पर पधिमी प्रभार अभिड है। मास भूपू माय म्यायानाम भी पी पी राममन्नार तमसुरे समयम एगाकर मान पान है। नई एपापियोंमें मध्यपीय समाकी धमम्माओं मोर पुमामोशप्रभावपासी वियप मिलता है। 'ममी रेस मरं है? प्मसर्प राप धिमा भारि भी पममन्नार मुसित परीकी है। पी गुझिपाटी मेटापहरे मम्मॉपर फायरफा पहरा प्रभाष है। संपुष्पा समन्या पुरपा दमम मौर कीटामॉकी पर्स म बिमात मम्म रुपमै परबाही पोरदार गयो म्पन्च किया है। माहीमाप उमा भार्गो, सिदाम्नामे सहमतम हो पर नामाभिम्पति पुसमा प्रभाव मौर रिमिकको पकार उन्हें मराहना ही पाहगा। पी मिम्पिाटि पाममाएपके ममोडी मार हाम्पमे युक्त पानीको बार-बार पनि विषम पर है। गरेमा एमाराम एनिहामि एपकी मिलने में शिशत है। पिता राम मकारि विषमारे की भी मामा मम्माभिधामीन भी मज पाम किये है। १९४ारेगारमोन पपा (मा)+षिण की मोर मधिक ध्यान । बुषिवायुमा उमामप्पाप व विप्परभिता इस नप दृष्टिकोमके २२ - कटरमनस्याका मधुमावती काही मुनिर एगिहासिर उपम्पास है। मी तेम्नरिमूरिका पपिरनान मंगोमिया) गामा परिपका प्रसारमाही वि बरिठरताहै। हेम्म समस्याबोको लेकर पास लिसनवार्मोमें भी मुरपाटि पर बममरा प्रपम म्मान है। भायोंमे पाम्बिके साप बाम का रचनाकासह मपना मानीमही गता। शगिरेगा बामनीम् ममीना मैगाम भारि मार प्रमिस पपाम है। पी पनिकास हनुमन्तण भादिन बाम पा अनुकरण पिया है। दास्पप्रधान उपम्पास सिमसालोंमें भी मुनि मानिसपम मरसिहाराष मोसपाटि मामिह मास्त्री फसमूत्रम गरमपीमाप पास्त्री मारिप्रमुग है। मरसिंहा परके उपम्याम भरेम होते है। उनके रपम्प मॉकी नायिरा पान्ठम मायके पाटकॉका पुतषित परली पती है। मामिह मास्त्रीय परिमटर पानीसम की एर-गापति पर हम बिना नहीं पाया वाता। मनामानिए पबियोगी माधार बनाएर हिराबामाम परिवटिपिट अमराप गावर पिणाप्रमुगदम्परामा 'साई' स्वपन भारिमें मनोविाना मार-माप सपा मम्मिान भीमन्छा बन पड़ा है। मामले परे फोन पूनके पर भारि उपन्पानाम मनके गरेका सिम हुया है। सोरठ राषकोगा पिनाप पानी और बुषिराबूने मनोविपनारमा उपम्पाम मिगहै। पिनिमट्टी मुमायबरे लता (पोर मा) नार्यर उपम्याता पनी और निर्भन परिवारानीवन अन्तरो मुस्पट म्पसे विविध पिया गया है। मरान नामा क्षित भापा मापीने पापा उपनाममे भनाई मरमर कौन मारय मामर दीन सामारिक उरम्पान निगहै। इनमें निम्न और मम्मम पनी समस्यामा मुना विनमा है। माम मृत्युन बमकी नानी बामरी पानमे तनुग गम्यान गारिपकी पाची माचाएँ दी। भागात गनूनी उपामारी रामी मासी।। इनममे T बन्ने भाग भी प्रामा । भाग पागल मूरि मामिपरापत मा सम्रास गि। TOमा नाम भी उन ग्यानापना। पनि मरम्मानी पा मुर्गममा परिष (पोनर) पुर्ण कामीनरमपाम्पारा गुमा अपार्मा (मामासि) माननी पा सपा बाबमुम्परा रपया मानाप नगनीय है। परमानय भागमा जापानानिरिसामना पूपि गम्पामा मनुगामार हो .
मापका माम इस प्रकार मानपा उपम्पास साहित्य निषि उपन्यास-रपनाति मुसम्पम है। अनुसार मनुष्रम साप-माप विभिन्न प्रतियोके भौतिक गौर भेष्ठ उपम्पामोंकी भी रखमा हुई है। तेहग उपम्यामका विपक-माहित्यमें विशिष्ट स्थान है। कहानी यूरोपीय साहित्य सम्पर्षसे माधुनिक भानप मच पाहिलपमें भाई विभिन्न पाहिस्पिा प्रन्नियोंमें कहानीमा मिगिप्ट स्थान है। पश्चिमी महानिमोरे मिगि सिविमान एक एकनीक्से सम्पन्न होरर मारी तेममु कमानी पनना समारको षण् कहानियोंमें हासीमा रही है। गपकी ममी विधाभोग भीगणम करममा वीरमतिगमहायों समाम विधाम है प्रारम्भ मही हुमा । स्म भी गुरगाम मप्पारावन १९१० में अपनी में एक महानी हिनी। उसके बाद मुमार भादि तेसग कहानियां तिनका बापन पा-साहित्यका भीमनग किया। परम पटराम पास्त्रीन भोग-कानियामकी कपात्रा ममे 'नाम पम्प विति मौर क्पा सरित्सागर मामक तीन माहानी-संग्रह प्रकाषित पिए। श्री चममति काम गरमिहमनी रामम्बामायावती चमत्कार मजा विरपा गुम्छम् भारि कहानी-मयह प्राममें पाए। प्रान मार ननका सामनस्य मिभिन्न विषयोंको बापार बनापर मिसनमात मुपारपारी मेला है पी देगरि मिपम शास्त्री। भामुनिक सभ्यतापर में ही पोट कले एए सम्म प्रधान भीर मामोपमोमी मानी तिमन मिगस्त प चिन्ता रोनितु। भी पार मुब्रह्मम्प मास्की पहानिर्योम भु पहाना छ गप परिमित या पो परिचमी प्रभावमे परे है। सहर मुनदर मातांताप मोर पपाई पटनानको मेकर इनकी एक-एक पानी ममुखको है। यह मालिापही पूरी पानी मिलना इनकी पिता है। प्री महापगमत भिषाका स्वामी मारिवापिरान् शिवमात्र सत्यनारायण मादि भी मुअमिर हार्मचार।। स्प मोर पसारमे भरी हुई मानियों लिए प्रसिटी पटिगरि दम्पप। भावमा म म मारमें और भाषा में निपती नीनमा हानबामे नाहै भी मुरिपाटि रचतम्। माहित्य इतिगममें रिपयपा बिहार काग 2 मामोमे प्रमिर है। विरोधी दसकी एमाताधना साल हुए भी अपन माषपर भबन बने थे। मुम्पन मेम समस्याको मार गिनी पापी कहानियां कार्य प्रमिर है। *श्री पासमम्मि पड्मयुगी मिनी गुयन नामापान मन् १९५२ में पिस कहानी प्रतियोगितामें हिनीय पुष्पार प्राण करई। हाप पी भाग मिला 'मानवकपम शीर्षक पहा कोमी रकम पुपार प्राप्त हमा है।
- दूपमा महानाने मी मुनिमामिपम नतिहागरी कान्तम् तमस् प्रान्तकी बकि प्रतिनिधि। मापनी पहानिया पसान मोर पान (निक जीपनको मार हाम्पसे पर ली है। इन महामियोंमें पानम् की नापिरा बनाकर गृहस्प-चापना मुना चिम पिया गया है। कामष्टि हनुमच्यास्मी और मोसपाटि मामिह मास्त्रीन मन्ठी मानिया मिली है। समष्टि पापित्यपूर्ण है ता मोसपाटिरी ती मी माह। पापासम्मि पामरागुमे पहानि कम मिपी पर प्रम्पक महान अपने रिशिप मि मिन प्रति है। मारपापा-बस्नु सर मुन्दर घटनाएं,मपुर मानसिाप माविन मरे गरम पार बामगा एि है। विमलपुरमा पनि पाम स्लिीय पुरार प्राप्त कर वेमा पानीको मात प्रदाम पिया। श्री परम मार मानियोंमें मरन उपनामको सार्प पिया है। मानी पहामिपा वाम पकनारे पनि जीवनमारक साप-माष भामुनिक मम्पना पारप पिमनकामे नागरिर जि भी मिले है। 4 गोपिम एक संगत महानगर है। मानसिा मसीमा और मापारे परम हितमारनामारबाही प्रभावगामीरममे परत परते। एतिहामि परमा मानिस परिस्थितियो पसिना मानमितिकापना और तुम निम्नभिन्न सातापनी मम्मर पना परमपाम है मीनापन्न। मामानि और रानगिर सम्पासामे प्रचारित फनक कारण इनपानिया हरपी मोसा मम्मियी मधिक प्रभावित पाता है। भब नपानी गरम बुषिबागा अपना विगिर स्थान है। अपनी प्राम्मा पारगारम बापमान महामीगिण परिष समीरा अपपिक मनापा। रचनाबा टिपार होगामे समान मापी पुत्तत्तिको समानता पाण्या, मानारमा मार प्रतिमार। हरयो मार-मार पनि मानिलाईन पार निगम है। हमीरपा पूर्ण अधिकार रामनियाम रिया का निर्ममा समय है। m uiriiग निमहिमामयसारी पाना पागाई भैगोम सनतम मार पनीर श्रीमती मानी पानी परामिपोरा भी frre पान। मनाम पर गर्म पागल बनियापान मारेग पागात पागर पद "मारा नामित पिनामूति भारि अम्पाया। ई परिसरात राम प्रसान पारिया गिमगर भागाला गोपालपी मामले माती गरि पनगारि निगए।
२५ प्रस्ती बासिरी मातारेपी इतितम सरम्पती देवी भीमती (गैर) पीलीन भी मई कहानिया सिसी है। नवगिरि इनिदिनी मामी मुतापना रानी बानकी रानी भारि मेसिकाएँ ममी ममी इस मममें प्रवेश करही है। इनका भविप्प मम रिवाई देवा है। परम्प और अन्य भारतीय मापामापी मनेक मप्ठ कहानियों सुनार मनुगाराने तेन्पुका कपा-माहित्य सम्पन्न हा पुका है। मसापरलपा और हि प्रमचनस देनमुरहाना साहित्य पाठक अत्यधिक प्रभावित रहे है। जीवनिया तेनुमुर्मे कारमाबाएँ और मनियों में मधिक सम्पामें मिनी मा है। बारेमतिम फ्लु और चितामा मर्म नरसिहारामी मारमकमाएं, उनके पापना पितरोमरिन उस समय सामाजिक एवं साहित्यिक प्रवृत्तियोंका परिचय लवामी है। मान्य मर रमुर प्रकाराम पनुन कोपा अष्टप्यस्य पम्प, मम्परेवर मारपणी माविक मायकमाएँ साहित्यमें ही नहीं मापक पापस मानसरे इतिहासमें विसप स्पाम मंपिकारिणी है। मेरि प्रभाकर भारी पहा प्रभाकरम से मुरु मारमाया नहीं, पर उनकतावा बीवनाती बगर विमपवापर प्रकाश गमनाम है। मिनिमम पम और पिसानिमीन ई भूगर बाममिपी मिली है। स्थामी चिरन्तनानमाकी प्रमाण मार विनामदाडी पनी पिप उस्मम्म है। इसके अतिरिका मार मी महान पक्लिोबिन-पाएं हिसी महैि। मातोपना मानापनारमा साहित्य पन्मशता ममी बारेममिमी है। म परिष गिदी साहित्यमें मियबन्धु विनीर के समान ही भाग्य साहित्य समी प्राचीन भाहित्पारोनी एवं रपमाॉपर प्रथम गती है। मुराम श्रीराम मूर्तिकी गरिमनिमुन में एमी ही रचना है। हर उस्तेस्प रचनामा गम्मि रामगिमारेती (Sir CR Reddy)रा पपितमत्वाचारम् पेपाम पर मुझप पार्वा महामारत परिवमु मनमाण पानीमा मना मोर सारस्वताप्लोम्म पुरपति नारामपाषाका प्रबन्न नायिकाएं गिबनाम मरपनारापमा मनपर्क प्रमम पा+मितार्थक्ति' करार राम एपप्पनीमा महामारा परिता विमर्ममम र प्रभाकर गास्ना पार पीनापम मारिवहै। साहित्यक इतिहामोम बरि येण्ट नारायणरावा संग्रह मान्य-बागमय परिषमु मा सम्परागरा विजयनगर सापामा मान्य माध्यममम् इरपष्टि मीतारामका मधिमाहिरीएर मरि पर रमपम्परा रसिपाय परित परिणम निारयोलपटरानीमा रनिगाभाबुन परित्र उस्तेवनीय है। अनुसंधानात्मक सोम श्री बी. रामरामा मामप मार मागमयम् पी भागवानीका नायपुर्ण' भी के.पी पमकोट गास्मीका विपन शिव और रात पी पीरमारामा मान्य माहिरपपर भजनीका प्रभार सम्मग मीप है। तेस नापारी सत्सलि बौर विमासपर में पितुरि नारायणराव में गपि गोगिमामयारिकोप रामाप्मम्या पसात चिन सीताराम स्वामी गाम्मी पाप पर फितु तेलगु मामोषनारमा माहिरप मर्यनारमा साहित्पनी अपेगा बहुत पम है। हरावावम स्थित माग्य मागमत परिप , भीकममा पापोम मान मिा t निमें मुरपरषु प्रताप एमआरमोंका मामाभिक इतिहाम' 'मनमागत भापलपरमिभन्न विधामापन 'माग्यबारगमय परिष ममिधामम सूर्यनारायण गाम्नागीरा पाम्पामगार नाह विपरप मुम्प है। निगम पनाम पानुगरि सामानरमियराबके माी पभाग (पा परिमनो सेपटाले ममान म्यापारमा एन मालोचनारमा है।) मुनर कापी (रणा पत्रिमा प्रनिर मारक) के विषय निवन्ध कामरानु काममा सामनराय निबग्धापति 'मस्मपति पीस तर पनि एति मिा प्रधान का कोण मारणम्पानी भाषा और साहित्यपर मेन प्रमित है। नरनिरित'माला'माग्यपरिमारिरिमिप्र परिरामीम समय-समयपर पानी जमा सेग प्रमाणित होते है। इस प्रकार से पारिप पौरवाही मरिमास मम्पम विश्व-साहित्य तिराम मान पिगिट स्पानामधिकारी बना हमा है।
कारि वेंकटेश्वरराव
और
पिंगलि लक्ष्मीकान्तम
[फागि परिचय]
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कारि वेंकटेश्वरराव
और
पिंगलि लक्ष्मीकान्तम
हे माहिप इतिहास रो पनियों आप रचा पया नाम प्रयास
पीश्यम् ।। यह पप-काम्प मम्मि ममय मा पनिंगन (मी पतीस उत्तप)
मामारोपियोंगरापा गया। एकपरम पहुना तो ममिय
परव-म प्रभार ममम पापको बना हाती पी। इस परियुगमा
साहित्य मामिक रानमें गर्ग पपिसोके दर्शन होते है। ल परिपुम्नों
नियनि-मेर कम र एन कपड, मकर-पार्वतीपर गुन गुन
परिम वा बारिक नाम लिए ग मान है। "प प्रसार दा मानिया मिश्रा,
एपनि ममान तारमी प्रपा माम माम्म प्रहा है। प्रति।
माहामि माना है। माम्प-सिगना । मी माधान * परल ममय
*माधान राप्रपात पयामान मोर लापमान।
में मोहापाडी उनी र (पिप मोर पन) मा और नगुम श्रमम
नौमागु पोरे प्रथम पाप गाना मार मन परमी पपाका सिर मुनाना पाई।
अपान में पारपार मा परिना मुनाना मात्र या पापाग पुराण
परिपाटीग्निना प्रारम्य पारिबाटामा पिल्सी एफहीममर एमा रामना
पाया है।।
मनाबभाम
३० संगों का ममत ८ मा १.. पून्होका उनी इन्पर विभिन्न विपर्योपर भाष कविता रपार मी पपोका समसे मुना रेता पा पह परियुम्म । म फपियुमोमें मी निरपरिकर ममम (रिचार्म तिक्ष्याति पात्री मौर पळपिल र गाम्धी) अति प्रसिर है। भापनिक रेमा कवियोम रनो बानमे प्रापरा गिप्य है वाकई परीस। एक प्रारमै माधुनिर नेकपु-नाम्पमाहित्य स मूर्प है गिनः प्रमा भारतम्य सपा। इम पपिपुरमा समप्रतिष्ठ मिप्या पिगहिनारिवामि है। एक मी पिपनि समान्तममी है तो दूसरे कारि कारगर है। भीड़प्पोबरपरके दरबार मुशमिश कमि पिपति मूरमारे संग है मामीकान्तमगी। मामीकान्तीश सम्म सप्पा रिमेक चम्मपस्ति सानो भातमुर नामक वाचने १. पनवरी सन् १८९४ को हुमा पा। भारी मावारा माम मुटुमसम्मा तया पितारा नाम श्री टएनम है। पैपटापारापीका पाम आप्पा गिल कादर नामक प्राममें १५ माटूबर १८९५ को हुमा पा। माप मी पटाप्पा पुत्र पे परमपने छोट दावानले गीर रिए पर यहाँ बाप रत्ता रिए गए 4 रन बता नाम ( माता-पिता) मम्मा मार मोगप्पा । सामानराम्तमी के पिता बस्सपरिक पमोरारके मामुरालंका में मायके मुषिया बन जीवनयापन करणे थे। मामाकान्तमने मैट्रिक तक मनापट्टनम् के हिगासमर्म और एफ. ए (इटर) बौरी ए बहीके मोबस कामेजसे म्यिा। १९. मगर माप भी कयाम पा ऐन तर तिसहिष्ट पगिर्योने मतीपट्टगम्मे तापमान किया। उसे देखते ही सामीकान्तमनीम कविता की रकम पाई। उसकबारकट पास्त्रीवासे भापीर्वाद प्राप्यार आप हगमप तीन वर्ष तक पीके महा ऐ। यहाँ मापन सस्म्स मोर माम भापार्मोपा मम्पयन छिया। सन् १९१९ मे बी.ए पास करके बाद भापकी नियुक्ति मोबिक पाठसाग मान्य मापा मम्पापके पापरपी। चारवर्ष के बार माप उसी कासेगमें प्राम्यापक बमे। पुन पार गर्प बाय पाप मास पिस्मरिचालय रिसर्ष फेतो बने। दोन साड बार सम्याउरके परस्पती महस-स्तकालपमें ठकरमापने का प्राचीन वाम- पर प्रयोग मनयन किया। मापने १९५० में माास विश्वविचाम्पसे एम ए की परामा पत्ती की। उन् १९५१में माप मान्य विश्वविद्यालयर टेमपिमायके माचार्यके परपर नियुक्त पाए। यहसि मरकाप ग्रहण करके पाषात् ह-सात वर्प माप पाकापवाकि विषयमा केनमें संसद विमापके निरोमा हे। बारमा माप विस्पतिक पॅक्टरवर पिपरिचाम्पमें कप गिमारके बम्मम एवं प्रोफेसरके परपर है।६८ पर्पम इस परपर नियुक्त होना मापको मित्रता और मोम्पवाका महत प्रमाण है। बाप केन्द्रीय साहित्य-मकारमा मी सरस्प है।
समागमें प्राप्त विपर-मारता मापन मुष्ट मम्पारन पिया मोर उमर सम्मको मपनी एक विस्तापूर्ण भूमिकारे मात्र माप विपरिणामयारा प्रमाणि पापापा है। भीमेरि प्रभाकर मास्त्री नारा सम्पादित रमलाय रामायममुकमिए मिमी मूमिका समर्म मातम कित्ताको प्रणित कामवाली है। 'मधुर पति गग्यम् इनई एक मुमरालि है। पिम पगिलराव पणनाषके मुगर म्यागेका सरल र मरम मनुसार प्रस्तुत किया है। गौतमी प्यासमुप भार पाहिस्पिा एवं मामोचनामक मानोंका मह है। इन वरित मापन का पुस्तकामिए भूषिताएँ हिलो मार गिभिम पत्र-पमिमाम समय-समयपर कई पालियम सेब भी मिला है। मारामार्म में पले समय मापन सहा मगम सभी माटो रिया सपा प्रमारित किए है। युवावस्था मफम भमिनगरे रूपमें भीमा प्रसिद्ध गरसर पूषगाँव परवा नाम पतपट पा पर सबसे कार में मार गम मए, वरने कार पाताए। पपनमें ही मापको माप र न पोर में लिया था। बापी प्रारम्भिक पाई तो पादरम ही हुई। ८ वी मला रिपारा पाकर, महमि बाप मह पम् पर। यही मापको समारान्तमदी मभीमगति प्राप्त हुई मौर मेगापिड रेलमारलीही सेमरा मुभबमर प्राप्त एमा। स्वयं पति ममा मृनिए पिगम का तुगतो मासम्म पिहितामगुरापन मगषिपानि पाधि का गौरोष पसरवा तु बसन् ।' [मुकिपिनि कामीसम्मकी मति मोर पुरषा पिन्ट रटगामागीली पान ही मुम पपि बनाया है। हमारे परिणामस्वपरिता करो में मपनी इसिी परममाहीमाता।] भार सन् १९मेर मर्म पम् पित नपनापमा निम्मपात बन। उमरे बार मापने वापर प्रमिडमाणाहिक प्पिा परिता सम्पा- एना मार मगामा। मन "ता मरापूर म बायको निमारा। मामानी मार गारगर्व एम रविनम्र गिप्प गिम्हान मान मापी निमीलिमपर भी उसे निपडिशरीर ही माना मी पाप मनुम भी नामीपान-स्टार कपि या पिमतिमार पषि ला पाहिए था। पर प्रान मम्प्रगपो मनाप पुण्याम्प तो मोनों ररिपोन मिपाररिप। रनपर माम दोपलग रमणशामिनपरोसरि मुस्सुम्ममह मानरमवम् माहिमाम सोनति मिपार मिय है मौरपुर पाप्प १० - सौ वर्मक समत या १. पांच उनकी इन्यापर विभिन्न विपर्योपर माग फरिता रबार समी पोको प्रममे मुना रेता पा पहपरिमुग्म । इन परिपुर्मि मी तिरपति-ष्ट करप (रिवार्म निरपति शास्त्री मौर बलपि मट पास्मी) गति प्रसित है। माधुनिक तेषमु कपिमाम उनके बहुमसे प्रपा शिप्य ह तो कई परोन। एक प्रसारमे माधुनिक-तमा सम्पगारिएपके ये एसे मूर्पी रिनो प्रमायम जब तम्य फैस पड़ा। इम कापियुम्मक सम्पप्रतिष्ठ पियोंमें पिममिमादूरि-पि है। एक मी पिगमि मातम वायूमरे पारि स्टारराव है। पीरप्परेवग्यस परवार मुसि बि पिमति मूरपके के है सवमीमास्तमी। मामीकान्तमीका पाम सप्मा जिसके बामपस्ति वापरले मातमुए मामक बाधम १ बनवरी सन् १८९४ो हुमा पा। पापड़ी माता नाम पदम्मम्मा तमा पिनासा माम श्री मेष्टरमम है। देष्टावरणपनीमा जम्म इप्पा मिलेकार मामा पाममें १५ वरदूषर १५९५ को हुआ था। माप मी गप्पय्यारे पुत्र पर अपने छोटे बाराही गौर दिए गए । यहाँ माप दत्तक रिए पए प न पत्तका नाम (माठा-पिता ) हरमम्मा मार कोगप्या पे। मामीकान्तमसीके पिता पमपस्ति पमीगरीके मामुचका में गायके मुखिया बन जीवनयापन करते थे। मामीकान्तममीने मैट्रिक तक मनापट्टनम् । हिए हाइम्फममे मोर एफ ए (पटर ) मोरबी ए बही मोबत पातेबसे किया। १. म परमाप पीताम पर ऐप तब विपति-पटकापियोंने मछलीपट्टनम्में पवावधान किया। उसे देगवेहीलामीकान्तमा पपिता करनेकी पाई। उसके बारष्ट पास्मीनासे मार प्राप्तरर माप बगभग तीन वर्ष तक मुष्पीके यहाँ हे। यहाँ मापने प्रसाद मौर मान्य मापामोरा मन्या सम्पयन मिया। मन् १९१९ में पी ए पास करनया मापकी नियुक्ति नोबिक पाठमामा माम्प मापा मम्मापाके परपरहुरंगी। चारपवार माप उसी मामेरौ प्राम्मापक बने । पुन बार पर्प बाप माप मद्रास पिस्वपिपासपके रिसर्च फतो बने। दीन पाहार तम्बामरके परस्ती महम्-स्तकाध्यम हमारमापन की प्राचीन वास- पा प्रत्याका मम्मपन दिया। मापने १९४ में मप्राप्त विश्वविचारपसे एम ए की परीमा उत्तीर्म की। सन् १९४१ में माप मान्य पिम्पषिधालयके नुपु दिमागर माचार्य के परपर नियुक्त हुए। महाँस बरकाप प्रहल करने के पश्चात् पह-सात पर्प माप माषागाके पिवयबामा केशम सतत विमायके निरीक्षक है। भाषणम भाप तिरपतिके सर विस्वविचारूप तेमा रिमागके मम्मम एक प्रोफेसरके परपर है । १८ वर्षमे इस परपर नियुक्त होना मापकी पिता और पोप्पणाका मत प्रमाण है। माप माय माहिष-मामाले मी सबस्य है।
दम्बाउरम प्राप्त विपर-भात कामापन सुष्ठ सम्पारन मिया और उस अन्वा मफ्नी एक मित्तापून भूमिपके साथ मान्य विम्यविधात्या प्रकासित कराया है। पीर प्रमाकर शास्त्री पाण सम्पारित रंगनाम रामायणमुकहिए हिदी मूमिका कार्मानमा मित्ताको प्रश्चित करना है। मधुर पणित- एग्पम् इमरी एक मुन्दर इति । विमर्मे पगितरार पगन्नायके मुन्दर सोहोंका सरक करम अनुसार प्रस्तुत किया है। मालनी म्याममुस बापक साहिस्मिक एष मालोचनामा मन का मंग्रह है। इन मतिरित मापम का पुवकों के लिए भूमिमाएँ सिमी भौर विभिम पत्र-पत्रिीय ममय-समयपर का पाणित्यपूर्ण मेव भी सिख है। बारामबापी में एस धम्म मापन समतो सगभम सभी नाटकॉो या रपा प्रमारित लिए है। पुमावस्पा, सपा ममिनपाक स्पर्मे भावाप प्रसिरा स्टपरराप पूछि पररा नाम 'कापट मा पर भबसे ये सादर में माकर बस पए, तबमे काीि कहलाए। बचपन ही मापको मापके जे पाशने पौर म लिया पा। मापी प्रारम्मि पड़ाई तो कारमें ही हुई। की मा उडिगामें पड़ार, महमि धाप महमीपट्टपम् पर। हमापको हामीलानमारी पनी मंगति प्रान और पेपिष्टपास्त्रीको सेवामा मुपमा प्राप्त मा। स्वप पनि मोम मुनिए पिपति का मुकवि तो सपासम्म अपिहिमगुरापन मुंगरिमानि मावि में पागे पचामरेतु सफल। [गरि पियति मामीकामकी मनि और मुग्या कह स्टाम्प्रीनाकी सपा मुम पवि बनाया। इसके परिणाममा पुरविशा फरक में मपनी बुसिी पनाही माना। मार मन्मMEमर्षपदम् बिन ममनापासक मिन्सपास बन थे। उपरे पार मापन बान्धी प्रपिर मारिए ता पत्रिका के सम्पा एना मार माना। मन २ तक मरममाप उसकारी निभाया। मर्म मन्त्री मौर परम परिपुम्मा धिप्प है चिन्होंने पन्न नामो रिमी एरर सिनार मी उपे तिरपनिवेस्टीय हो माना है गमी पामरा भाकामी मपीकाम-रसर कपि या गिमिमारि पहिला पाहिए पा। पर प्राचीन मम्प्रदाय मनुस्प हुए काम्प दो न l पपिपान मिलारमिला। उनपर माम तामस्मभान ही पिसे पर। पास मुखर-मग्रह सोवरनामम् मारि पाप रोनाने मिधार मिन है मौर पर राम .
३२ और रचनाएँ मरूप-अरूप मिली है। मापन अपनी रचनामोमे परम्परा और मुरार भाभाषक साम अपने मस्तित्व भी पापम एपा है। प्रस्तुत गम श्री कारि बेपटापररावीपर ही मिना है फिर भी मामीमालमर्ग के बिना पररावया पून परिचम मही दिया था सस्ता । मा पता परिचय मौर रानाकाप्पा (र मरपनीको रचनाकि अतिरिल) मे उमरण रिए गए है। इन दोनों पियों संगमन कालान्तरमें वन्मुखका म्प प्रारम किया है। काररिकी बहनकी माली पिगमि सामेकी पत्नी है । परइम मम्बग्पड़ी मया उनका माहित्यिक ममम प्रगार है। पाकर बागानु बाह पोप परी, मम्मीर मेहरा नीमार माफ बनी सफर मूंछ मोटे मा पम्मा बनी भौहें BP-IPासे पुस्त मम्मा सिप हायमे ताकीनी पडी पायॉमे पगिताऊ चप्पम पारीका मुना परमपर काश्मीरी पास या पारीरार पारीका उत्तरीय महम पन हमालका मम्मा-परता पुर- संपर्मे या कादूरियारे पाम परप एष उनकी ममपास पनन है। -( पप्पमूर्ति) २ बीरातीके प्रारम्भ म पट्टमम् माग्य साहित्यिक मराटिक चेतनाका दिन बना इपापा। स पयदि संतारामया मरियप्पण कर सास्त्री पैसे प्रसिर पनि उसी नगरमें पापरले प। महापर मारिरीक वनका अस्पभिक मागीता। भापका परम कि एक पनी परिवार, हुमा वा मत मापके सामने भाषिक समस्या कर्म नही पी। मसहयोग-आम्दोमममें भाग मेनक कारण मापन पाईदरी। सन् १९५ सरपा बसा या गाए। मापी रचनामापर गाधामका प्रभाव है। परनीतिक बार साहिय बगतही मला सर्वस्व बर मया। एमा' पत्रिकाका सम्पादनको समय मान्य प्रदेशकरगमे साहित्यिक भापण र मापन मफ्नी गित्ता एक प्रभावशाली मापासे झोगोको मुग्ध कर लिया पा। १९४५ में मब साहिय परिपरके तेनासी मधिपनमे समा पतिक परसे पारिवीन को भापक रिया उसम्म साहित्यमे एक विशिष्ट स्थान है। रचनाओं परिणामकी दृप्टिसे काहिली कवितायोको संरया भमिक नही है। पर मापन को भी मिपा उसने साहित्पमें अपना महत्वपूर्ण सान बना लिया है। पार्वि भपनी मिगी प्रतियां पामस्य पपमु पुग्मिष्टा (मन्दिरकी पटिया) 'मागाश्य, माऊर' (मेरेकोर मेरा गौर) है। इसके मतिरिक्त समय-समयपर पत्रिकालीमे प्रकापित परिवाएँ है। पिगम्मिारि पियुयके नामपर १९२३ में वारि (प्रथा बपति दिन) नामक कविता-सपा प्रमापित गा। मान्य साहित्यमे इस विषयको वमरवीति रेनवाया हाथ सौन्दरनन्दपु है जिसका प्रसाधन उन् १९५४ मेहमा पा। मह काप्प पारेक्टमामाको पष्ठि- पूतिके समाप्प समय गुमतिमा स्पमें उनके परमकमसोमे समर्पित पिया पगा पा। माठीपदपके नापरिको के बीवनमे विरपति-ष्ट मिमोके प्रति मा-भक्तिसे ३३ - प्ररित मोहारा सम्पम्न पा समारोह मान्ध साहित्य के इतिहासमें ही एक रमनीय एवं परिस्मरणीय घटना है। इस समारोहमें पकिपिगियोंन काम्पके उपहारोके पमें अपनी मुम्समिमा भादवपनको पम्य मामा। इस प्रकार समपित सादर मन्दम् वेमग-चारपानी सेवाम प्रस्तुत गपू कुमुमी पुरमित तमाम मोरंग मपिषु डाम्बार भस्मनुतन पवधानवियु समयकारपर्मन प्रतिमा बीनरोकिने सोलत अपितु बादमापुरिकिरिनार चिननामचिबन्धित कविताकम्प मेह परिनम बेसि येतबार पूर्णकामु स्यागिय मोपियन गुरुनि कपमोगुर्पोरेनी विस्त सम्म महत परिपुकोनुगाफ या प्रचापि प्राप्त मातोनु प्रतारकमलबाप्ति। [पामो मत एमाज सादर समपित भेटमा सीकार पलेवासे बापमान माम बारिवा-पाटमा प्रम प्रचसित करमपामे पानोम म बरमानमा पाइमाभुयक लिए प्रसिस मापन ही परमपर मानपाती करिता-सम्पापर एक पली सम पासन करनेगा पूर्व पाम त्पामी मार भोपी को हमारे मुरु उनके भनसे उपम होने लिए यह डाटा-सा काम्प मान्य-सरस्वताके मयम-गोरा प्रसार प्राप्तम मापन गर्ने ।] पौमएम हाय गुणिम् मरे भोग मेरा गांव इन तीन कविता मौकी पर सपा में प्रसापित किया गया है। इस काप्प भएको पापिन मपन गमाई सर्पवामी एमप्णमासीका दिम स्मृतिम समषित पिया है। -महम्पी पातमागे वीबी निर्म पर ध्यान दिए बिना पुमान पूमन एमपात इम हो पाईशया भाम बिना मि पिठोकामन-पासन पिया था। मनु पर्पक प्रपम परिवाम गरिन यी दिनयता साप अपना परिचय रि। म पनियोंगो पातर पनिरीमपास ही नहीं मपितु महायता एवं मामारीबा भी पता चलता है। म पारि-1 . प्रस्तुत कविता भरे होम मैए मांग पर पिनाम फिजमते मुन्न हारे लिए, कारिणीने मपने मंगला मौरभपने पामरायमम वन रिपाई। रमोन पहा. अप्रपलम्मगा भाऊ ममिटि भवनमाम्म मामकपनमुन म वामनान रसगुरोपि शममारम्मर भूहिषिकादि। [ सहमहीमें प्राप्त पोड़ी-सी कविता मरमेकी सामर्पको अपनापनसे सवा बनाना चाहा। यह भी मापा किससे फ्लिपनमे उडम हा मईया।] पर प्रसार इस पषितारे अन्तर्गत रबिन भपने परिवार मौर अपन बग्यु बाग्मांश काम्पमय परिचय दिया। बादर ग्राम मानमे पहन इन पका माम मापटपु पा। पादूरमे मार गिर रागाके मारेगानुसार उस गोगम पटवारीक परका निर्वाह परने हे ठपसे बार्ति कहलाए। इन परिताम गांपर्क परिवारमानोंकी मापसी मित्रता सौम्म्यता और सौहार्दमा नम्बर पन किया है। यह वन नवा रनके परिवार सीमित है, अपितु पाचाग्य प्रमाके हममें म मानवासे प्रत्यक मातीय मार्ग परिवार के लिए लागू होता है। पाला पत्रमग मानते हुए भी हायमें उमानेगामी बेपलाके मारे गांपकी प्राचीन गा सम्प्रदाय प्रपाएँ मौर वर्षमान परिस्थितिका प्रमाणानी पिन म्यिा है। इस पवितामें प्राचीन गांवों सम्पमता सम्मिलित प्रयास परस्पर सौमनम्पके साप मान अवनति स्वार्थपरापमठास पहायक वन स्मिा गया है। करिके पूर्व मान्य साहिस्म, प्रबन्धपरमेश्वर मौर पम्भुराम' मामसे प्ररित पर्रन के बारप। ये मोष पहले परमाग म पते थे वही से कमपटम् और फिर फाटूर पहुंच गए। यह गौर पहसे बहुत गरीष रणमें पा। लेकिन र पासकोरेरणा मरीपर (निजवाड़ाके पास) बारका निर्माण फरणे ही पस प्रान्तकीमायापार हो गई। भूमि उपपास बनी मौर सोना उगलने मगी। माफी नहसे पानी कार तक पगा। इस तरहसे मानों पिसानोंका पुष्प प्रगाह ही नासि होकर बहन का हो। फसत कादूर भर मममीरा निवास बन गया इस गांव के समीएमकामे मिमगुहार पवे बोर परिकी रमतिम रिमा किसी मरमा हाम यते। कपिन मात पाहमें नीदसे मामनगाहे गौरा पाही मुम्बर पर्नन दिया है। बारां बकतार मापसमें एक परिवार होपों-सा बाम करते। सचमुच गरेकर मारपर्य हाता है उस समयकी और मारकी परि स्थितियोंमें कितना मन्तर भा गया है। *मान्य प्रत्यक परिवारका मफ्ना एक मेरा नाम होता है मिसे परका नाम' (Surname) कहते । प्रत्यक पतितके नाम पहले सम्म नाम मोड्नेकी प्रचा। - परले गत माममेत चिरिमि पंचोलाराम मुप्पतिसमेत? [मामीप बीवनमामा सारा माघर्ष विगाममा मौर हाय! पापच्चमाल- मपास पहमि टप पा] तम समय तोप पाप मन करते रह एमी मावही पर उठ पापका पए-नए मिडौकी वा पिाना या समीको पुष्पर्म मिररमा उन्हें माता पा। भारतीय प्रामीण पापनामार्म ही ममा भयनन होते गए-सै बार विकास पपित हो रय मोर सन मुनमय दिनों का स्मरण कर पविता कोमतपय गित हो उठा। इस प्रकार कविताम पारिवारिक जीवनकी मरिमा भारतीय पीवनमा वीर विगप पौ बाम्प प्रामीम मार पारिवारिक जीवनका प्रभावगामी वर्णन पिया पया। इम सम्पम कई मविपोक्ति नहीं कि भीषमषन मान्ध पारिक प्रियतम भगवान है मीर उनकी मापा परमय ही है। क्या माहिल्यमें क्या निक जापन-~यहाँ मुभिर नही पह पविध माम प्रतिमानित मा मुमाई परमा। राम पनीने बनवाम पासपोपी मनिशा मभिषाम भार आन्य प्राण वाचारप्प और पौरारिमारापरवाया मा। उप पावन-म्मृतिको पार करतमाते बारम्पान मार रिह भाप रप पत्र-साइपिपीचर ही है। माग पुरषोत्तमपी पुनीत पापा पागबाल महापामा मान्ध-साहित्य भरा पड़ा है। पारितीन मी रामकी माषाको एक नए स्पमें पामा । पारपास्प प्रभागो कारण हमार देगकामनापिन पौपिक मापामां- कोमए स्पर्मे देखने मोरपिनियनमा प्रयास लिया है। इनमें माम माइटेड मापुमूवन तामाम सर्वपम सिमा बाता है। परनगम भागमाम संसाटिका पिपार-पारा रिस्पनाएं गए पाप सई पर पारिवार रारा परिण पारलीय विचारपाय भनुगमही है। राबरे पिया पुसाय परम मिष्फामान मार मानी परेवा मामात्र । एने पुनप्पा पूर है पमा रमा य मफ्न पिता मारमन्नानमे प्रदीप्त पा। कपिल पाममप इस नाम लरही पापा इस परम्पर पाठमोरी दृष्टि बापितुराई। राम विष्णु भगवान न परममसोमम पा जी रमाश्म तीन पग्मोम ही पपरानो मामिम्मी प्रापिरा सा अमितापी पा। पुरारि बसुमार मण पामा वृत्तान म प्रार। मनासनम्वन मारियपि एक बार भगवान रमन गरल पाठ पहुँमा उपजिप मामारपानान गर्न मदर जाममे रात। अधिनयर मार दिया कि तुम ऐनों पृमीपर बम हो। जय-विनय रोमो पिमिलाने सन में भगवान भी माए। जबपिॉन पार पिसीपनमा - प्रस्तुत कविता मेरे मोग मेरा गांव पीर कविताम पिपनस मुक्त हालक लिए, कारिनीम मपन गाबीर मपने प्रामा हमम मगन दिया है। उम्हाने पहा है। मामलम्ममा मात्र नपिनहि बनतेसम्म मांभकपनमुन ग तामनु मेषु महान रसगुरोपि सुषमारम्मषु हिचिोटि। [सारहीमें प्राण माही-सी परिवा करनेकी सामर्पको मपन गमनसे पता बनाना चाहा। यह भी मोचा कि इसमे पिनसे उगम हा मईया।] इस प्रकार इस पिता बानर्गत रविन भपन परिवार और अपन बन्धु पापाका काप्यमय परिषय रिपा है। पादूर ग्राममें मानसे पामे इमरे परका नाम* मपटपु वा। बादरमे माकर भूमिमी रामारे बारेशानुसार उस गोषमें परमारक परका निर्वाह करते थे, तबसे कार कहलाए। इस कवितामें गौरके परिवारपासपी मापी मित्रता सौरम्पता और सौहारा मुन्दरवन पिया। यह पर्गन न पिस उमड़ परिवार का सीमित है, मपिनु पापचास्य प्रभार सम्पर्क न भानबासे प्रत्यक भारतीय मार्ग परिवार के लिए लागू होता है। पापा मग मानते हुए भी हमें उमग्नेकामी देनारे मारे पावकी प्राचीन गया सम्प्रदाय प्रषाएँ मौरमान परिस्थितियों प्रभावणसी सिप पिया है। इस कविता प्राचीन माबोकी सम्पमता सम्मिमित प्रयाच परस्परके सोमनस्पके साप वर्तमान बपनति स्पार्पपपपनताका दरयापक पन पिया गया है। रबिके पूर्व माग्य साहित्पमें 'प्रबन्धपरमेश्वर और पम्पुरात' माम प्रसिद्ध पनि केबसगरे। म कोग पहले परस्वाग में एते पे पही से कसपटम् मौर फिर फादर पहुँच मए। यह गौर पहने बहुत गरीष बधाम पा। कफिन और पासकि पप्पा मीपर (विजयवाड़ाके पास) का निर्माण पणे ही उस प्रान्तकी कायापालट हो पई। भूमि सपबाट पनी मौर सोना उपहने समी। तप्पाकी महरोसे पानी कादूर तक पंचा। इस नएसे मानों पियानों का पुष्प प्रमाही महसे होकरयाने ठगा हो। फलत काटूद सब लक्ष्मी निवास बन पगा। इस मारके समी कुरुवा मिसयुमर हवे मौर गायकी रमतिमें बिना किसी भेदभाव हापटाते। पिने प्रावधाप मीरसे बामनवाते मषिका पाही मुम्बर वर्णन किया है। चारों पकिलोग मापसमे एक परिवार के लोगों-सा पनि करणे। सचमुच यह बार बारचर्य ऐताकि उस समयही गौर गायत्री परि स्पितियोंमतिमा बन्तरमा गया। "मान्य प्रत्यक परिवारका बपना एक मंच माम होता है जिसे परका नाम (Sumame) कहते है। प्रत्येक पति नायके पहले मंगका नाम पोड़नेकी प्रपा है। - पले त मायममम पिरिगि पपोकाय मुपतितक? [ग्रामीण भागनका सारा मापुर्य बिमा गया मार हाप! यह पम्ममन- पपाम पहरीम स्पा पा?] रम समय सोम पाप पर्मम करते रहे हो एमी बात नहीं है, पर उम पापको एनपरे मिजानकी बाम पिपाना मा उनीको पुष्प नर्म मिरकरना उन्हें म माता पा। मारलीय प्रामीण जीवनक मार्ग ही ममः भानत हो गए-मे देकर परिसहरम स्पमित हो उदा मार नन मुममय दिनोंका स्मरण कर कविता कामसामरिकहो उठा। इस प्रकार परिनामें पारिवारिक पनाही गरिमा भारतीय जीवन मार्ग पौर विप अपन मान्य ग्रामीण गौर पारिवारिक बीवनमा प्रभावशाली बमन पिया गया है। इस सम्पर्म कोई भविमपोक्ति नहीं है कि भीषमपत मान्य मानिस प्रिपतम भगरानी मौर उनही मापा परमपम दी। क्या साहिममें क्या निष जीवन-या मुनिए, नहीं बह परिण नाम प्रतिमानित हाता मुनाई पाया। राम न बनाम पारी मवधिमा मधिराग भाग मान्य प्रशाम कारब मार मासापरीके मिनारापर ही बिताया था। उस पापन-स्मृतिको गान परममामे मनकाम्पान मौर रिह माप पधर्म पत्रमा टिपीचर है। मर्मासुरपातमी पुनील गावा पानवाल महानुभाषामे मान्य-साहित्य मरा पड़ा है। पारिनीन मी पमा मापा एक नए अपमें गाया है। पारस्प प्रमारपारण हमारे गाम्नीपियान पौराणिक मापानी- फोनए अपमे लन मार चिनियमाप्रपाम विमा है। इनमें बंगातके मारत मधुमून ला माम सर्वप्रथम मिया गाया है। पर इन मेषकोंन भारतीय संमतिकी निार-पाराके रिस सपनाएँ की काम्प रप है पर मारतीय राबणा परिष मागणीप विचारधारा मनुषही है। पाने पिता पुनस्य पाम मिष्यवान मोर मानी ५। रेवो मापात हा प। एमे पुलम्पसा पुत्र है रायप। रमाइपय अपन पिनाके माग्यमानये प्रीण पा। पिन पौनएर बन्य' नाम लारही पास इन परस्पर पाठकोंकी दृष्टि मारपित है। रापप गिण ममबानो म पाममनोसमे पा रोगमाषम तीन गम्मॉमें हो भपपाना मामिप्पनी प्राणिमा रपट मभिमापी या ! पुरादि मनुमार पप मम्ममा मृत्तान्त बम प्रभार है। मनामनम्न मावि पि एक बार भगवानर न पलंग पर ना जसपियर नामसारपापाने रहें सदर पानमा। अपित पीर मा यिा कि तुम रोमों पृषीपर गग्म ता। पाप सों मिपान मग सनमें भमान भी माए। र परिपॉन मार रिमोचनमा