Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner

Vishwamitr Ki Khoj

Sharma,yadwandar · 2010/12

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2
विश्वामित्र,
वी
स्वोज
यादवेन्द्र शर्मा चन्द्र
निझा
लाशवमन्दिर
दिल्ली-६

सस्करण प्रथम १९५१
®प्रकाधक
मूल्य पिये
प्रार
"मन मिा, हरियाशिलो
मपीमनिषि एवंहीरा
इपिर प्रेस रिस्तो।

में इतना ही कहूँगा- 'विस्वामित्र की सोच मामक इस संग्रह में मेरी कहानियाँ साहीत है। अपनी इन पहानियों के बारे में पुध विक्षेप न कह पर केवस मुझे इतना ही रहना है कि इस साह की सभी कहानियां मेरी पपनी दृष्टि से मेरी मेप्ठ प्रौर पर पपित महानियां। टेकनीक नी तथा भाष भूमि पी एप्टि से इस संग्रह की मेरी प्रत्येक महानी अपने मतग ही ग की है। पम की भावभूमि पर मैंने अपनी म कहानियों में एक नई पीर देने का प्रयास पिया है। प्राधा मिम्म भिन्न प्रकार का इस प्राण करमपासे पाठकों को इम एक संग्रह में ही सब पुष मिल पायेमा । सरिता के संपारक प्रकासक माई भी विश्वनाम श्री का विरोष प्रसाई बिन्होंने "विवामित्र को वोर' नामक कहानी को इस साह में सम्मिमित करने की प्रागदी। साते की होनी बीकानेर पारदे मर्माण

[१]
पम्मी ने मुंह सिकोट कर कहा "मरे पुप भी रह पानती देणे
न मनपान्त कहानियों को पहचानती तुम्हारे समाप को। पा
कमीत रात भर पापा एता है, ऐसी हो गयी हुई बाते सुनाया है।
परमार 1"
"हे पानी ! भरम का मेरे पास कोई इसार महाँ, पर मो कहता
। सोमह माना सब कहता है। एक भूबसूरत पौरख की प्रेम का है।
सुनना चाहती है तो सुन?
पकसी ने कुछ देर तक सोपा पोर पार में सीति-कफ सिर
हिता रिया। पकमा भेव मरी मुस्कान के साथ मोसा, पम्मी धामने
पासे पसोपान गमे में तूने एक मासूख बोरे को चाहोगा।"
जामी ने ग्लुस्ता से कहा "हा- । मपरोपको! पर
दिन से दिसताई नहीं पा है।
"रसी का मेरतो तुझे बताने पाया है। कल पाम ते से मेरी
तबीयत कुछ न की । बम पुट सा पहावा । यहाँ की हर पीर मेरी
चनी को बड़ा पी पी। मापार में यहां से जामौर रोमन
माने पर पर या बम । बिपी की पामें कमरे की प्रत्येक वस्तुको
पन्छी तर देस समता पा। श्री में सुनवाई दो या सुनता कि
उस कमरे में लांसी की यह भयानक मापार हो रही है जिसमें मौत
मर साफ नगर पाते थे। मत मौत का पहरोमांच सतपा जिसके
प्यान करले भर से बन रोपटे बोहो पाते है।
"हेपाली कमरे पछिको इसमे गोर हे तांसी कि मुझे
महसूस हमारिसका कहना मुंहगोमा पागा पर उसकी पली मता
ने पाकर उसे संमाता । ती पीठ पर सपना कोमन हाप र पौर
माने में दर्द (हर वितुम बनापरी पा) मारोती, मर!
पर तुम परेर सम्पोनहीं भून पामोमे तब तक मौत मुम्हारा
पीनही शोपी।
प्रोमोषमे NRमाचार पानेमाती मी

चकवेचकवी की बात पहली रात- राव का पियारा संसार पर मैसे-जैसे पाता मयाबधे-बसे पानी का मन बेचन होता गया। उसने एकबार पारों मोर दवा-यूम्यता, अषिरा पीर भप हाप उठी, “पा पर तक श्यों नहीं सभी पंचों की फाफाष्ट सुनाई पड़ी। पपी पौडग्री हो गई। देता चकमा भागा रोड़ा सा मा रहा है। पाया उसके सामने की शाम पर पाकर बैठ गया-गुपचाप । मम्मी मे पूषा हे पकी। मार देरा रपय गला रामा कैसा रोग की तरह प्यार क्यों मही करता पाने ने मंत्री पाए भोकर झ, "पाल मेण मन उदार प्रिवे पानी गनिया की प्रगीर और मम्मी घरी पोरन पर ये पौरखें हे राम! पौरत-बात पर मगाये हुए पूरे भारोप को मुनकर पपीके ठेगर बदम पये । अपनी भावों को पाने पर प्रमाती हुई मोती "प भी पो मौ सौ को पार विस्ती हर को पानी । भगवान नपाए लमयों से निरोप पौरखों पर पत्याचार-प्रमापारपरने वातीपाति का में रोम ऐम पहनती हूँ। जैसे पर्मगर बमकर धठ से बोल रहे हो? पाल्मे बरा न ही बता स रात मर रही मायब हा पा? परवा तुरन्त उपना । पपने प्रापको मभीर बनाता हुमा मारीस्वर मोशाम कम रात उस स्त्री केपीबन भेदा पता मवाने बमा गया था विस्ने एक पुरपसाबबा पोला पिया पा।

प्रसिदकहानीकार एवं प्रयतम मित्र
पी पेरीप्तात सुप्त को सम्म
कसत्ता प्रयास के मपुर नि tri
की स्मृति में।

चकवे-चकयी की वास पहमी राम- रातका प्रधियारा संसार पर बसे-जैसे पाता मया म-से पानी का मन न होता गया। उसने एक बार बायें पोर देवा-धम्मवा, अपरा और भय ] यह पाप उठी, या प्रब तक क्यों नहीं माया ?" सभी पंडों की फरफाइट मुनाई पड़ी। पकली नौकमी हो मई। रेचा पाया पागा सहापसा मा रहा है।पया उसके सामने की पाह पर पाकर बैठ गवा-गुपचाप । मम्मी ने पूछा है पाये। प्राय देरा रंमप बदमा [मा कैसा रोग की तरह प्यार पर्यो मही का? पावे मे संबी पार पोरकर छ, 'पान मेरा मन वास है प्रिय सकती। यहनिया की प्रबीर और ममापसे गरी पोरन परये पो हे राम! पौरत-पाव पर घमाये हुए मपूरे भापको मुनहर परपीकेटेगर बदम पये । अपनी पारों को पकने पर कमाठी हुई मोमी "युप मी पो मौ सौ से मार विल्मी हम को चमी । भमकान बनाए इन मदों से मिदोप पौरतों पर पत्याचार-प्रमापार करने पामीमाति का में रोम ऐम पहनती से अमराम बनकर ठाठ से बोत हे हो? पामे अपही बवा म रात भर महा पायब रहा था? पातुरन्त समता । अपने पापको गंभीर बमाता हुमा मारीवर में बोमा मिस रात उस स्त्री केपीवन मेद का पठा मपाने चमा गया पारिमने एक पुष्प के साथ बड़ा बोजा पिया पा। । []

[1]
परवी मुंह सिकोड़ कर कहा 'परे पुप भी रहमानती देप
इन मनगइम्त पहानियों को पानामती तुमारे स्वमा को। बर
कनीतू रात भर गायब पता है, ऐसी हो मी रातें सुनाता है।
परमान
हवामी भरम का मेरे पास कोई सार मही पर दो कहता
पोमा पाना सच करता है। एक भूबसूरत पौरख की प्रेम पाहै।
मुनना चाहती है तो सुन
पकली मे पुच रेर तक सोपा पोर बार में सीनि-सूचक सिर
हिना दिया। पाया और भरी मुस्तान के साप बोमा पायी। सामने
पामे प्रतीशान बंगमे में तुने एक प्रसूत पोड़े को रेसा होगा ?"
पम्मी ने सत्तुप्ता से हा "हानी ! मपर है पाये! पर कई
दिन से रिसताईमहीं पा पे है।"
"इसी का भेद तो तुझे पतामे पा रहा।पत साम से ही मेरी
तबीयत दुपयन दी। रम पुट सा पापा । यहाँ की हर पीर मरी
बेनी को बड़ा पी पी। वाचार में महाँ से गा मोर पसी पर
पामे पर परमा पहा । सिरही की पह में कमरे की प्रत्येक वस्तुको
मन्त्री पर रेप समता पास भी में मुनलाई यो मा मुना कि
उत कमरे में मांसी कीमा ममानक पावाग हो रही है जिसमें मौत
मट साफ नगर पाते। सीताबहरोमा मरेशमा सिके
प्पान करने पर पलके रोमटे पोहो जाते है।
गोपनी कमरे पक्तिको पटने मोर से पीसी हुई शिमुम
मासूखामा दिउसका मेगा मुंहगो पा पापमा पर उसरी पली वा
पार समे मामा । बी पीठ पर मामा कोमल हाव रखा मोर
बारों में यह रितुम बनारटी मार मोनी पनि
पर तापमपने सन्देह नहीं भूम पापोने तब तक मोठ मुमारा
वीध नही पोपी।"
पर बोलने कीमोशिप कीपर सगातार पानेवामी पासी

[.] में उसे बोलने नहीं दिया। नवा की पांचों में एक पनीर सी कुटिममा भाष पीपीपी मारीने भपने फूल से कोमान परीर में बसा फत्पर-सा रिम दिपा रखा है? मैने भाव से पहले कभी यह विस्वास भी नहीं किया पाकि नारी इतनी कठोर बन सकती है? 'पर पाप रोमा पुध भन मया पा। समय-समये या पोमा "लवा ! मुझे तुम पर किसी प्रकार का सन्देह नहीं है।" 'मुझे निवास नहीं होता। तुझे तो मेरे हर विस्वास में प्रविश्वास की वाया दीव पड़ती है, पीर यो नदीरे ? माबिर हो म तुम भौरत ही। पाविद होळ पर युभी-भी मुस्काम चिरक सठी बसे यह यह भाव परसा रहा हो किगासपमुष सहै। मता ने इस पर भपिकार मरे सर में कहा "फिर मुषासुरुप से उपचार करने के बाद भी मह भून 1"ठा की प्राजों में प्रश्न पोम रठा । सपर्व के भाव परनिरपेहरे पर भाये पोर पसे। यह टूटवे हुए सर में बोला "तुम मेरे पाप का प्रायश्चित है। इस समय उसकी पात्रों में पानी एक ऐसी पदमा पमक उटी पी, जिसे देख कर मेरा मन भरपाया। वमी उसकी पत्नी मा पिरतीकी भाति मर्गी नही उसकी मुद्रा से साफ मासूम हो पा पा कि यह प्रपन मन के तूफान को बाहर निकासमा पाहती है लेकिन वह एकाएक समस गई माराम दी सस्त परत है तुम्हें पूरी तरह पाराम करना चाहिए ?" पानी पीट बाए हुए सांप की तरह परवि प्रकार कर नामा 'तसा ! म पाएम परोपः पया हम से ज्यादा पाराम में मेरे मस्तिप और रसपी पद्रिबिपियों को निकम्मा कर दिया है।बरा पास बैठीन बंटकर एपबा करोन" पर परविद में उसे पड़ी मिणि निपार से देता पिसमै मता सहम गई। है पानी | नवा पर्यो अहम प्रभी तुमें

[.]
पपरिष्कार महीना।
मुन पत्री ! भरवि के पार पाबत ती हुई बोली
मारे धर्म का मानही. तुम्हारे पाप का प्राषित नहीं कि पस
सम्ह का फल है गिवने ऐप का स पारण कर तुम्हारा सीमा पानी
कर रिया है।" और उस दीन-हीन पुष्प मे पपा उत्तर दिया ? पत्री।
यह टूटे गए सर में एक नापार गनिक की बानि बोना
कभी पीवन में यह नहीं मिमता रिसकी पावपी पाह करवाध
मामी से भाम्य का पासमार मैं इसे परिस्थितिकार या
मरवरी ममझता हूँ। और उसकी पांचों में उसके पन्तर की औला
पनीमूत होकर घसमा ठीकर पीपा पाने होठों पर स्मिठ
रेवाएँ दौडामा हुमा बोसा 'यह भी मेरे लिए पौनाम्प की बात to
तुम गुप हो । मेरे प नाद तून का रप परि तुमारे पीरम को मुस
बना सकता है तो मेरे लिए इससे मुपी की बात पपा होगी। मता 14
काम तुमें गुश रेखना चाहता है वह तुम्हें ।"
नहीं परपिंड दुम मुझे तुप देसमा पहले ही।
क्यों ?"
क्योकि तुम चाहते हो कि मैं तुमारे इशारों पर मारपीर पाएँ
नापना मेरे लिये प्रमाण है। मैं तुम्हारा पिसी भी पर्व पर बमग
का सार मही पोरे सरती।
पानी! या एक नारी का पति प्रेम पोर उसकी मएमा ।
स्तिना बदल पासान ! एक पति से प्रेम पार परी परत
यह रोप! पाह ! बाह
!!
फिर यह सम्य है मितुम मुझे पुमा पुमाकर मारना चाहती हो।"
मदिवाकर कहा
'मही पति सि दिन मारी का मन बना कठोर हो जायेगा
उस दिम मसारीपोमस पापा का पम्त हो पायेगा परणामोंगाम
पुर पापमा पौर सासमार पोरा पोपी।" मा की मांगों में गारपी

[१] वर्षा पम पड़ी। सिसकते हए मोती “यसब मुझ प्यार करता है यह मसर्म नहीं समझ सकी। ममर में इतना महर मानती है कि उसके प्यार में पागंन्च मही पिसे समाष प्रमिक की समा देता है।" 'तुम रोने मनी मता इन मनमोल प्रतिमों को व्यर्थ में मन यान पो मन से बनते है। यंग च्यिा प्रबिर। फिर उसे मांसी पाई। मांसी के साप सून माम खून । यह सिसाता हुपा र स्वर में बोसा चमर मा पायेमा पौर तुम्हारी ल पारी-प्यारी पागों में पोसू देख कर उसे कितना पुरा होगा ? रसकी कविता बाग उरेमी। पार पटेगा कि इस मदमी पक्षकों से पम नहीबह रहे है ये पे मुहार के प्रयुहै। पौध तो इन पासुमों को। मता कराह उठी, 'परिव पुम चुप हो गामो। पापर तुमारा पहम्पमगार मुझे प्रारमबात करने के लिए विवध परे। नारी के मर्म को तुम महीं समम समवे। कितनी राम्ग येरना पीर प्रधान्त हाहा कार के बीरमा प्रपने को बीवित रखती है, या भी तुम नहीं मान एण्ठे । मेनि नारी की सारकोममता पुष्प पी पति परागृत हो ही भावी पौरमा प्रपने समस्त मुखों की बिमारसी रेकर स्पापी बन नाती है। मुझे भी त्यागी बनमा पड़ेया, मायर मुझे बमर से अपना समय रिन्धरकरला पो, टूट पाना पड़े। uta किन्तु वा से यह पुषोती म पानी पी दि हम मये पुग में नये विस्वासों पौरन परम्परामों के साप गिय । अनुचित बन्मन पार पनुषित रस्तप्रेप मर पोर मारी रोगों के लिए प्रा पसर नहीं। लेकिन मैं रेख रही हूँ कि पुरप अपने संस्कार सनी मासानी से नहीं छोड़ सकता । पपनी पिर मापिपत्य को पाना का पं परिगप नहीं कर सकता। चाहे या रिखना ही मया पार पाधुनिक बयों न हो ? है। इस बार हैरी पाटबासी प्रांगामें पाम् भरकर विनती करती हुई बोनी 'मेरे मरे व्यवहार से वनरके मादुरुपय परमामात सोपा, उसे हमारी सीमा पर तरस मायगा। सोषको [ ..] परपिर, मन्दी नए एक बार फिर सोचनो प्रामों से प्यारी पम्मी उस सुमर मारी में हर प्रकार प्रत तक अपने पति को पोना रिमा और अपने प्रेमी का प्रेम निमाया ! पति नम कीर हापा मार पत्नी अपने प्रेमी की, उसकी भाषमा की रसके भापुकहरय की पिम्ता में बुमी पा रही थी। हिपहपौरत बाति भी क्या होती है ।सो कपी पवेरा हो गया है, यि फिर रात को । मेंट होगी। पूसरी राव- मागाध में तारों के म सिम नरे। पास ही महती भाषामा मिसमिमम्मिपित अपममा रही पी। ठीक समय पर पाया माया मौर पम्मी का इन्तजार करने मगा। पवमती बापीपी पर पानी नहीं पाई।पमा मुममा म । उसके मन में हर बात हुपा । से पानी निफरम पारिश पर कामे-जाते बोंबाबो मोमे मगर पाने वर्ग । बह रिचारतमा, "!! पश्वी दुर गामा पती है इसलिए हो रहार मेरा विरोध नहीं करती कि में दो बार-बार दिन कहाँ मापद हवा की पावाकई यह पानी ? पर मान में भारी बात का पता मया कर ही सौस मूमा । बस मा पायेगा । रात अपनी रफ्तार से भाग पपी बीमकिन पानी नहीं पाई। विमुम नहीं पाईपमा बमसुन कर होममा । सूरण की प्रपमणि प्राची में घटी। पहले पपनी गानो। तीसरी राव- पान पानी पहले से ही पाने की प्रतीक्षा करपीपीबोकी रसते ही मह रस्ससित होकर बोसी है प्यार पाने !ने दिन को किस्सा सुनाया वा बह वास्तव में बार ही सच्चा वापर प्राण मेरे । यह एक तरन्न पाम राम रसीर की शाम पर बैठी मला भैरानी मुन रही थी।

बकरे का सारा मासूबा बाक में मिल गया। अपने दुस्से को पर रस्ती पी कर उसने पूछा है बड़ी ! मुझे माफ बनाने की कोशिप पार पायेगी। वह तुम अपनी कहानी पर्यो सुनाने समी?" पहले की इस बात पर बकबी सिमसिता कर हंस पड़ी। कया सहम गया। पम्मी ने मपमी पोच से उसके सिर को पुरेष कर कहा "बर मोर मोर अपनी गरी पा रही थी और में उसकी रायरी ध्यान से सुम रही थी। हैपयेयह मर्दबाति वास्तव में बड़ी मस्कार पाति है इस पर पिपास कर मारी पाति मे सरा ही बोला उठाया है। वना का पानी एक पन के मिये विस्त मौत हो गई। उसने मपनी गौच को पैर की धाप से रणका भौर बोली प्राणेपर ! इन पुस्यों ने स्त्रियों के मोतेपन का बड़ा ही गलत फायना रठाया है। पहले-पहम मारियों के सामने बिस्कुन साये बन कर पाते हैं मोर गाय में ये पा व्यमा तन-मन के मन सग। बात की सास पुरानी है। मता पौर परनिर पितायत में साप साप पड़ते मन्ये परिवारों ये समषित होने के कारण दोनों की पनिष्टता धीन ही पाई। परविर का प्यमहारबार मता के प्रति भत्पम्त मपुर पौर मर्यादित पा समिये मता का पहन प्राण पोरे धीरे प्रीतमा बाना पहनने ममा । पीसे ही फाप्त में रोनों एक दूसरे से प्रेम करने मने निश्चय हुमा किमये सिर से पम्म-भूमि की मोर में बाते हो ये दोनों विवाह परिम मूत्र में ये पायेंगे । पिणा समाप्त करने का भाण मोरे और सचमुच विवाह सावन में बैंप पये तब बारी मारियों व बारे मरों को इस बोड़ी गह गत्पन्न हुई पर एमों में रन मावि ही रिया किया पोड़ी पदा पिरामु ऐ । एषों महाय पूर्वो पसे। विवाह सिर्फ दो सात बार पपिर प्यार एक नई र

[ १२ ]
मी। सर्दी के मौसम में विजय परीर की पान पर हसीनस्सी
पखाईमापाती है पसी प्रकार मरविर के म्यबहार में पेसा पर्पन
होने तने मिठा को इस पर मारधर्म होने सपा । पौर होना भी चाहिये
मेरे बकरे को पति अपनी प्राप्रिपाको एरा पमी घमा में
रखता हो माससे कतरामे दो पत्नी को सन्देह मिश्रित समान होना
होचाहिये।
पकपी होम से बायोमतोतती पक हो। पासमान
ना एक तारा टूट कर सम्मेरे में गुप्त हो गया। पपी की पारी में
प्पा मी तेर उठी।बह मद भरे स्वर में बोसी को पही
मगर पातिक प्रेम पैसे पवित्र नाम पर फांकका देती है।
मेरे मनरावा पिस रोगसता बाना खाकर बिस्तर पर करव
बरस पी पी । पोति परपि मापात पत को बहुत रेर पावा पा।
माता भी पाठोपी कर मेशिन नता को ससडी अनुपस्थिति में न
नहीं पड़ता पा। मापन होकर कप पता करणी दी।
एक बना होगा । टी बगी। मठा मेहार मोसा तो उसके मर
बार निकस पी। परविर माये पर पट्टी बीपी। पट्टी बीप के
सुनका मान बामपक पापा।
'मरा हो गया? उसने हात पूषा । सभीप बड़ी एक मर्पत
सुपर सीबी मगाम्त से कहा भाग इमोंने बहुत प्रपिक पी मी
बी, इसलिये 'बार' की सीरियस रिपो।
"
माननि किरपी?"
"हर रोज पीवे मेरे साथ पय में घमी, र माट।"
सीरियम की बर बर की भापाय परक होती थी।
बिरा श्यातकी इस टीपारे में पाप बार में सोष मीजि
देवा पहले पाप इसे रिवरे पर मेधावीपिये"मापनमा स्नेह भरा
सरपासता की प्रपम टपीमाको मेकरी पत्र
पकम पारियो पास जी मबार खाती पही राधी
।

( १५ )
मता के बीच बता में भी सस पार से कई प्रश्न पूधे पे।
पसके बारे में उसके परिवार के बारे में पौर नसके पौषबारे में
बिमा उत्तर पसर में सक्षिप्त संयत मापा में दिया। उसने यह भी
बताया टिपद उसका निगरी पोस्ट 1 रोमों सहपाठी भी ए
-
हे सत्यवान के प्रमवार पाये । सबेरे श्यों ही प्राविद पी की प्राच
पुती त्यो ही उन्होंने पपनी उनीपी पत्तिों से बिना किसी को पैर पस्फुट
स्वर में कहा, 'रगिया कहाँ है?"
'कौन रबिया ?" मठा मे पूषा ।
'मोह ! तुम
बलव ! तुम्हें पता पामा चाहिये पा। प्ररमिव
मे पाहसान मरेसर में कहा।
'पबा पाता पर तुमारी परती को पकड़ाहट देखकर पाने की
हिम्मत नहीं हुई। पम्मा अब म पमा भविष्य में इतना पपिक मठ
पीना कि यह घराब तुम्हें हो पौने मये । पुर मानिर सता रेगी।
"हिर कर पायेगा । सवा म ममता से पूया।
उस दिन के बाद मेरे को उस फूमती कोमम सता का हम
दिसण होने लगा। मिसे मह प्रेम का अबतार समझती पी रममा बी
पति उसके साप इतना मर्पकर विश्वासपात परेगा यह नसने सप्न में
भी नहीं सोचाया। उसके मस्तिष्क में प्रेम पार पसा के कई दफान
पापे पार पये। अपने धीरे धीरे प्रतिरोध परना पारम्भ किया।
पर परि एक लि पाफ मार्ग में कर दिया किया समी म्पपित
गत बातों में रहा श्रमदान करे। पर यह वो पली पी। उसका
एप सामाणिक परिकारों में प्राप्त रस पति को इतनी सरलता से पोरने
को प्यार नहीं हुमा । बह नित्य ममदा करमे मपी। रोक टोक परमे
नगी पर परिणाम कपमही निरसा।
है परे । यही तुम पुपों का पहार प्रौर पवित्र प्रेम है। मतो

[१४] पाती हूँ कि तुम सा को सात समुन्सर पार भेर रिया बाप तो पम्या पम्ये! मरबिर से उपेक्षित तिरसात पौर प्रवाहित भता पार की साधारण सहामुमूवि में पारय मारमीयता के दर्शन करने लगी। उस रात के बाद समय प्राय पताके पर पाठा पा। बस मे पहमे परिर से भयदा किया समस्या समातकीपानी पर परषिद ने पही बात उसे नही वो उसने मता मोही पी कि मेरे पधिपत मामने अपने है। स्मामाणिकप से सवा और गमन पनिष्ट होते नये । दोनों उस की बात परते पक बात तो शेषरी वर-पटोप मा करने कामपा कर रिम हम्सा र मेते थे। नवा पति के प्रत्यापार से पीडित पी पौर बमर पाप मनावमा हो । चित्रकारीहर बीवन नियहि करवा पा । प्रम से यषित रस पात्मा में सतारे तो में जीवन के महाम् एवं पवित्र पररान न किये। पृम्मी प्रपनी पुरी पर पूमती ही। छ महीने में बता पौर परविर का पति-पत्नी का सम्बन नाम मात्र पा रह गया। मता भी पब इस म्पहार की भारी सीहो एकी बी। परनिए क्या रखा है उस से उसे परा भी सरोकार नहीं था। पर गसम ही रमपीवन का सहारा बन गया था। पाये। अब स्नेह की सरिता समाती है तब मा कासम एतना विपास मौर पवार हो पता कि मर इसमें पावन परम मुख की पसभि परता है।वही प्राप्ति पमय पर पापा। महिन पर पूठे प्यार की गारा हरी नहीं रहती । एकरिन गिया में परिकी प्राणों पर पानी फेरकर किसी शिरिषयन साहस के साप बिाहर मिया । उस समय स नियो मरविर का पाप नपा उतरा। पसे महमूस मा कि रशिया में उसके साप को प्रेम सीता राईकी उसकी कीमत उसे बहुत महली पड़ी है। रिया में काफी पसेर निपे है। मेरे सिरमौर पर कामशागे तर पया परमहम नहीं मरा।

[ १५ ] बह फिर भी मता से दूर रहना या पौर मता ने उस पानपर के प्रति बना ही बन्द कर दिया था। एक हौ रबिया द्वारा समी बोट मोर दूसरा बलर के प्रति मता का प्रपार स्नेह एम सी माती पौर दुस एमपी बहती उन दोनों की गिम्दगी मे भरविर के मम में मास्य पाग को बाम रिया। अब यह टों उपास पीर मौन ठा मता मौर अमर के काको मुनता बाईसी के गहने हुए फम्पर उसके कानों में गर्म तेम से लगते थे पर भूगी प्रफर में यह मौन हा निषस रहा। माहिर एक दिन मता और बहन ममूरी पाने का निरषय किया । परविर पम प्रपमे को रोक नहीं सका । पति के अधिकार को भावना उसके इलय को पान्दोनित करने लगी। वह माया पौर मता से गोसा "म तुम्हे ममूरी मही पाने एमा।" "क्यों! मताने पाश्चर्य से पूछा। "तोम तुम्हारे पौर अमर बारे में पहन से ही गलत धारणा मनाये हुए है पोर ममूरीबाने पर तो "मार को तो हम पर विश्वास है कि हमारा स्तो ।" परमिंद में परसी बात को सुनी-मनमुनी पर कहा 'कम दरबान रसोई बनाने वाले महापर से कह पापा कि पपनी बीबी पी पार- मत बम बापू की है। बेचारे परविंद गारो उसने बारका व्हापानमाया । इस मेरी गैरव सहन नहीं कर सकती। रेषा पता महाराय माहेरी कोम । सुरतो सब भूम-माम कर जिस तिष के मुहमारते फिररी पोर बीवी अपने जन्मे हिवपी के सापकहीवामी नहीं सकती। मिस हिवेपी म ग्तक दुस। को सुम बनाया पौर उस दिन की शरण म्पबा को कम किया। पर मेरी बीर और स प्रतीमी सता ने कहा मापी पौर पर पामेगी। पर माप मेरे परमानों कोषमार मल्यापार र समय तो में अपने जीवन एप पर्मो को मुखी से पर्यो म गुगार ?* "मुगापे, पर तुम यहां नहीं पा चम्ती।"

शुक घोला, सुन राजा
एक मारवार में हीरामनता पारसिहमीप से भोपए
संग्राम * परषात नापा गया था कि सिंहस प प रागा स्पर्य एस
पुसी पौर चतुर गुरुको सहजता से नहीं देना चाया पाप भी
हो पारित के प्रतापी राणा के समन सिंहन मरेप को पारित होना
पड़ा और होमम प्राप्त कर लिया गया।
पर-पनं रागा और मुझ में इतनी भारी परमीया हो पर
जितनी रागा मरत पार हिरण में पी। रागा पक पण-भर भी उस
भुकका रिसोम सहन नहीं कर सकता वा पौर गुफ भी उस मनुराप
कारण प्रपले पतीवो भूम पपा पारपास भी पणा है
पर पुन-मिम पया बा से प्राण पर से।
एक दिन सम्पूर्ण दपार मगा पा राम रपार पीच पण मे गुरु
से पूछा “नों हीरामन इमारी मृत्यु हो मातब?"
होण्मन में गम्भीर घर में कहा, 'मुसु निपचप है पर विपोग
महीं। वियोम का पाठप एप ममापि सहन नहीं कर सका।
“फिर?"
'यरि मापका स्वगाम मुझमे पूर्व हुमा दो म मी प्रपने प्राण
त्पाप मा [ मैं पापके बिना एक पम भी नहीं प सकता।
पमा परि समस्त रारीहीयमान इस कपम पर यो प्रसन्न
हए। रमि रामा की परवान्त प्रपसा की कि यह काही स्वामि
संपोप की बात करिये रि पा रेहान्त मुके पूर्व ही मया ।
एक इस संताप को सल नहीं कर सका। पहरामा को साप पर
[१]

[ १९ ]
निरन्तर मापता रहा और पन्त में मर पया।
सम में पप्सरापों मम्म उन दोनों का पुन मिलम मा । रामा
भी विकास प्रवृत्ति दिन-प्रतिदिम माती मई। हीपमन का कार्य गा-
पन पप्परामों का मनोरजन करना। पर्प पर पर्प पीठ पए।
प्रपाराएँ एक से मापन होकर बोली "हम तुम से उन गई है।
एक-सी कमाएँ, एक-सा कमानक पौर एक सा परिणाम ! परि तुम में
कुछ ममापन महीं है तब हमें कहानियां मत सुनाया रो।'
मुरका मुख उदास हो गया। उसने समस्त परिक पुण्ण उपमिपर
सपा पन्य प्रचलित कमाएँ सुना है। अब यह बेचारा महीं समझ पा
पहा माफि मह पर क्या सुनाएँ । इपर राजा भी उससे पट हो गया।
उसकी प्रतिमा का पहास करने समा ।
बफ नरकसग में प्रमण च्यिा मेकिन नवीनवा नाम की
यहाँको बस्त ही नहीं पी। रागा उस पर प्रत्यम्त भेपित मा भार
पप्पएं उससे सीपे मुह बात भी करना पसम्ब नहीं पानी पी । बाप
पर बहुत सीमा।
रागाकी पिता यह पई। गुरु चार दिन से कहीं माम पया पा।
अप्सराएँ मी पर अपने मन को कोस पीपा कि क्यों ये हीरामन B
मारामहरी उठने हमारी कितनी सपा की थी।
पांच दिन मुरित-बान पुक माय । राना में रानी से पूषा क्यों
इतने दिन कहाँ रहे।"
गुरु पर रिया, "मृत्यु-मोड में ?"
प्रामप्रमों कान पोहोपए।
'हो यो पए।
पापके लिए धनया माने के लिए।'
"पया साए ?"
"महाराय मरयुतोककी पया पपी नहीं है । यहाँ पर्म की नमा
'पारों का बोनाता है। साम्यपार समारबार पुगीबार मापीरार

[ २. ]
पामागार प्रपतिवार, प्रयोमबार हामापार, पालीवार पार न माने
पापा पारी पर मैं पापको यहाँ की एक पा सुमागा यह पमा
प्रबीरापी में प्रेम नए पका प्रतिनिधिल करती है।मई कमिकमें
मियी गाहमा किमास्वामटेकनिक का मतलब नहीं मममता ।
मुफबोना-"सुन रागा हानी इस तप प्रारम्भ होती है-
रुपान मेंबरपास
एक माका है उसड़ी पलीच की एक सहेकी
मिस 'ग' । पबसर पाकर को अपने प्रेम-याम में फंसा मेती
है। मरीबी से तप । उनका प्र म प्लेटोनिक नहीं इस मिट्टी में पता
प्पार । दोनों अपने अपने परों से बहाने बना कर मानते है पर वृप्त
होते है। कमी-कमी रिपुम बिनास के सागर में प्राकार पचानक
पूफा-'पिर हमारे प्रेम का परिसाम ?'' उचाती है "तुम
बरे कायरहो कर की पार भिन्ता पो हो?"
पाता पुमाष प्रसनी कहानी
पम्प के हाथ कांप रहे पे बसे मसके दोनों हादों को मकमा मार
मया हो । उसने बरी मुश्किल से पपनी मिती निवासिनी पली माता की
चिट्ठी बोसो पार उसे
दुबारा पाने नमा-
'पूग्यो ! पाप का पमिमा । पर गत देन है। ऐसा मामूरा
होता है कि पान वार से मेरा तमाम पर भूमस पाएमा ।
मुतस पाने से इस पीड़ा से मृत्यु पात पन्थी है। मैं अपने हरप में
कोमल भावना पार पपूरी प्रमितापाएँ मिए मरमाना पसर कमी
पदि पाप पोरन-रीप मुम्मे के पूर्व प्रपना पर्यन मुझे हो ? पापा
सुताब-सा पहरा पार पपर मेरे पापे धूम पाई। मोह पावन
टूटने के लिए समसा रहे है । पिषित पनुपूति पन्तर मेनिस में
पर्णन नहीं कर सकती। फिर मी भापम प्रार्थना है कि पत्र पाठेही
प्राप रिस्सी रवाना हो पाए । मारकी देर पहा मरेपरपी।
पापकी अपनी-बना

[' २१ ]
स्वम किकम्प पिमू-सा पाहा। उसके मापे बन्दा का
फुयाय पण पार पागर मुह माप उठा। पनाको कोटरमायिनी
प्रांगों में पावन पौर मृत्यु का सम्मा-प्माषित पेपर्प । एफल्पनामों में
उसे पाचाम बना दिया। मार पर बदमण उमर माए ।
स्मात से अपने पसीने पोकर पहपुर्सी पर बैठ गया। चिट्ठी को
सीने पर रख कर अपने पाप को भारबम्त काता हा मोमासी
है मापनहोमी ? म तव में बिसकुल स्वस्प पोर पार मरणासन्न ।
पारपर्य? इसके विचारों ने पसे पय दिमा यह सब भाम्प के म ।
पप्रत्यापित सपकी ष्टि चिट्ठी के दूसरे पार मई। उसने बस्दी से
पड़ा। मेलों में ज्योति पमा उठी । पपर्गे पर पापा भरी मुस्कान भाष
मई सता ने मोतियों से सम्मों में लिखा था-"स्सस्मनी से पर
कर पाराने की परत महीं । यह सो पापकी कमा 'मुक्ति का पाहान'
का एक पप है। यह कहानी मुग प्रिय ममी। माप मारी के
पम्तर में पितमा पेठकर सिबममम स मिलाप
-स्नेहसवा
स्तम्स के होठों पर बमरी मुस्तम मात्र उही। उसने पाठको फिर
म लिया।
सिरा मुमाब रो मरिया-
पापों में पारपर्य भर कर स्नेहलता से पूया “देखो पमा
मीयों में से मुम्बर पाम दुना है।
पनिष्ट मोमियो चम्दा पोर स्नेहलता के तहे-देबठे पो मारियों
मे
एक प्रत्यन गमात्मक प्राप्त पुल दिया था।
पदा पपनी धीर हरि को नया पर मारती बौसी 'प्रप
पौर संगन का यही पर होता है। समन बना के माम पर अपनी
तरनी मे हती पोर पी पीर मुम्पुराई तुम्हाग पमीम ने
मुम पर नहीं देखा तो हम में मरीन ग भाप पापा ?
तुम्हारे पार ने मुझ नपा पीयन रिया में म्हारा रिम महमे गि

[ २ ]
परामर
महिः पपनी इसमें शुझिया मा कलेसा बात है। तुम णे
मेरी सपी बहिन-सी हो।
तमी पन्दाको प्टि इस बामे की प्रोर पई । पाने पर कोई
तीसरी मातीमाच पी पी। बना रखे समेत करके पूषा "यह
सीसरी महती कौन है?
मता कपिप गुस्से से बोनी "मैं इन मकड़ियों के वानरान को नहीं
मानती।
चम्बा तीपणे मोरी ममी को सही। पाने कीवी महीने
मोटी मकड़ी का स्वागत किया । चन्दा मे उपसकर कहा "यह तीसरी
भी मकड़ी ही है पौर में पामे बामे सर मिया-बोयी होंगे।"
नता पौंक पड़ी। 'मियां-बीवी?
और पते-देखते पीने साए वाला पोर दिया क्योंकि पागन्तुक
मामी से उसका पति प्यार करन मगा। बड़ी मसी पपमी उपेया सह
नहीं सकी। दोनों में मान-पुरा प्रारम्भ हो पया। पाम टूट पाएन
बाम हो गया।
बता बोमी "प्यार में स्वतन्त्रता होनी चाहिये ।
बरा असे पर्प मरीष्टि से देखती रही।
मन्मा मम और मू-
पर रिटर्म नपामा पानी पर वाय ए मण
कमरे में पुम । तता अपने बाप बातों में कमी कर हीपी।
अपन सेट संममरमरो बहरे पर पागर पाकर उसने एक बार
पप कप को सप निहारा रिसरे पपरों पर मर स्मित पाएँ मापी
"इतो सता "नम पापा उसके समीप भाये । पाने बाए हार
की पेमियों को उसके बालों में पतमा पर बोले, “देशी यह देखो हमने
प्राधिर इसे मारही रिया।"
पीपे में मरी मकड़ी का प्रतिविम्ब चार नवा एक बार पिक

। २३ ] पड़ी। इवत पाना की मोर सम्मुख होकर बोतो "पाप मो मत हैरत । इस प्रकार किसी को नहीं मारमा चाहिये।" 'पर्यो, तुम महीं चामती लता मा कम्यस्त मेरी ममों पर नाच मे नया । मूओं पर फर्नम की मू पो पर पोर पर भी पुम्हारी 'पाटी' के सामने । उसमे हमारा सा मगायनाया।पहने ममी रेना मा पोटामा मामा भी पापड़ी मूपों पर नाचता है' में उसके म्यम्य को समम गया पौर मेप में पाकर इसे मारे बम भेर दिया। ना ! यह एकम की मूप है। मेरी मूमों से मने बातो को में पोती नहीं मार गा ! मूट नहीं कर पा! एक महीं पूरी पाच मोमी मा पा । मेरी मूव गर्मिग ! यह मेरी मुहै कस्म विस्कर्स। पतम गत उत्तमित हो गये। मवा भयभीत-सी अपने पास कोरेपने मपी। कसमें पोर से पहराम करके पा रही हो गर्मिग ' मत से यह वो मारा है, मा सोम फर पाता है। नम ने मोको पारे से बाहर फेंक दिया। पापस पारयेयोने, “पापा हामता पा पार वापस रामसान पा ही है। क्या वह अपने पति से नहीं मिली। "मही उसकी पुट्टियां समाप्त हो पाई।" "पोर म पापा पमे पये। सवा र मस्तिफ में ये शब पूरते ऐकम मू. मास गोसी पोर पांच गोभी पह पसीने से तरबतर हो गई। उसका 'मेकमप' सार हो गया। वरपूर पाए और मटोमिलना पदा के गाने मारलता अपने पो पुपरम सममम मनी। सम्पपगार पाएं । मपत्र रम म्प पप पर ऐ ऐ पार पी. एक पत्र पायापासपप मे सिसापा-माला मो प्राधा

[१४]
मिहार मेरी मारमा प्रकाफि भानन्द का अनुभव करेगी। या
तापो हो कर मार से मिला बासे?
अपने पापुनिक कमरे की पाराम मचमनी धम्मा पर पड़ी पड़ी
मता करप बरन ही पी। बार-बार यह प्रपना मुंह पपिये में छिपा
मेवी पी। उसके समीप पर मासिह-पत्र पड़ा था । उसमें पता की एक
कहानी मारे पी पी। पहमहामी स्सस्स में संपोषित करके प्रकामित
कपई पी। कहानी में एक रिपणा का चित्रण पा । प्रेम का विषय
पा। प्रेम हो पता भी सम्म से प्रेम करने ममोह एक
बार उस पुस्प को प्रापय देवीबो इवने प्यारे मत लिया करता है।
"मिस माहिमा-गह परपूर ।" नोकर मे उसका ध्यान अप यिा।
रहदो। मा कहा और मौकरपसा मया ।
मता भारी मन लिए ग्ठी । रेना किनौकर एग की फांकों
साप बाम मी रस पगा है। तण भर लिए उसका पाए मर्म हो
मया कि पापा पवा है किमय भी तमीवनहीं। मैं पापा से
से 'रिसमिस' करपामी । मानक वह सात हो गई । मते सण
कपम मार हो पाए-शानदय सबनीव-सा कोमम पीर काला
का प्रमवार होता है। सापर-धा पम्मीर और हिमाषम-सा धीतम
होता है। रमे बहकने मत दो प्रिये ।" मिापन हो गई। नगद
बह बाइसे काटी बड़ी फकों को छोटे एमों में परिसत करने
लगी। काट कर मारें एक-एकरकमाने मपी । विचारों की
उम्मयता के कारण उसके हाप का जपून हिरकर पारवा मिय।
हुरा फिरर पपा।
मायामा पठी-" वापूर पर घिरे तो पूर करे
वापूर पा पर गिरे हो दान करे । पर बीप
भी कायम है।बीर कभी नहीं करता।" मता व प्रौर पम्भीर।
कुपरेर पार पह नमन रोमी "बार भी भी माप को प्राप्त नहीं
होता, प्रारमा कमी मारी मरती । पारमा भास्मिक प्रेम सम्प

[ २ ]
पारिमक प्रेम कमी। पारिमक प्यार "महान प्रेम ! भावमय ।
सवारे मन में पारिमक प्रेम की सिरणे विकीर्य होकर प्रकाप-ब में
परिणत हो गई।
उसने सम्मको तुरत पर निबा-तुम ममुक दिन, प्रमुफ पाड़ी
से पापापो।
प्रथम प्रासे ममिका पात
स्वम रिस्सी रपामा हुमा । रिस्मी स्टेपन पर मता पामता से
सम्म को प्रवामा रसीबी बार-बार बामपने बैग से सम्म
कानिक निकामकरसही दी।
पापी माई।
मवा मे रेखा एक मत्यम्त मूबसूरत मौरबान की गहरेजीसे पामे
धीमों में ती पो किसी को सोर रही है। वह पीरे-धीरे
ससि टि से भारी पोर देखती रसके समीप गई। पीछे से पनपान
बन कर अपने मात स्वर में पुरा-स्प !"
सम्म तुरन्त मता की पोर पूमा । उसके मुंह से पवित्र के हीरों
की भाँति टूटवे पर निम्मे रि पर 'मता
पर उसे देखता
हा-प्रपमक पौर निम्तर।
मिए पमिए ।
कुसी मे सामान उठाया। दोनों साप-माप बसे ।
"हनो मवा तुम कहो " पदम' कहीं से बार में में
तरह पाटपके।
बह पबरा गई। गोली "पोह बहिन जीवो मरे में है। पाप चिट्ठी
सि तो मेरा मी नमस्ते कह दीपिएमा।"
सम्म ईपन परेशान पोर विभूम।
“बनिए पाचावी।" सवा पानी या स्परूप तुरव सर समझ
पया। मार गिसेन प्रवेश पर हीरोनमा सम्म प्रभिनय । सता
भाषाकोरियमी विगो रिमा र मोर माई। पर पाकर

[४]
पिर मेरी प्रारमा मनौकिक मानम्ब का पनुमा परेगी।मरा
बसामोपलवार से मिमा बाये।
अपने प्रामुनि कमरेडो पाएमए महममी पप्या पर पोपड़ी
मारे पास हो पा । बार-बार पद पपना मा पिये में पिता
मेवी मी। उसके समीप एक मासिक-पर पड़ा था। इसमें सवा की एक
कहानी ममापी पी। यह मामी साप में संगोषित को प्रकाशित
कराई थी। कहानी में एक पिपमा पापिस पा । प्रम का विवरण
पा। प्रम हो मता भी साप से प्रम करने मना है। एक
गार उघ पुस्म को मतपती धो धने प्यारे सात मिना करता है।
मिस पाहिवा-या तर नौकर मै उसका प्यान माया ।
"रखो।" मताहापौर मौकरना मरा।
मता पारी मन लिए रठी ना किनार पर की का
पार पाय भी रम गयरसमस मामिए उधका पारा मर्म हो
पमा परेसा पपा बिरामी समीर नहीं । म पापा से करार
से समिध सापी । पचानक यह पस्त होना । म साप
समसार हो पाए-~षमय नवनीत-सा कोमस पोर जम्मा
का पवार होता है। सागर-सर मम्मीर पर हिमापस मा पीतम
हता है। उसे बहाने मत दो प्रिये । बह निरम हो । पद
बह पा से काटी हरीकों को छोटे टुपों में पीसत करने
ममी। काट कर यह एक-एक कराने गयी। विचारों की
वामपका कारण हामकापुर पिपर बाइपरमा निप।
हमा फिर ममा।
पहागास्टी-बार पर थिरे तो भएर है
उपुर पाइपर गिर वो दरगटे पर और
“र पर
भी कायम है।परमी नहीपरता। बता एख भोर मम्भीरत
मोरोसी "बीचमी भी नास को प्राप्त नही
होता पारमर कमी नहीं पाती। प्रारमा मारिमाम-14 स्पस्प

[ २ ] पारिमक प्रेम कम्मी। मारिमा प्यार "महातू प्रेम ! प्रादमप ! सतारे मन में पारिमक प्रेम की किरणे विकीर्ण होकर प्रकार युग में परिसत हो गई। उसने स्वस को तुरन्त पत्र मिसा-"तुम भमुष रिन प्रमुफ पाड़ी से प्रामामो। प्रथम प्रासे मनिका पात स्वम्स दिल्ली रवाना हुमा । दिल्ली स्टेशन पर मता प्रामुखता से ससम्म की प्रतीक्षा कर सीबी। बार-बार यह अपने 1-4य से सम्म का विष निकाम कर रेव प्ही दी। पाही पाई। नवा मे रेखा, एक प्रत्यन्त दूबसूरत नौजवान की महरे नीम पामे + पीपों में मस्ती पार किसी को सोर ही है। मापीरे-धीरे सर्वपित रष्टि से पारों पोर येखती उसके समीप गई। पौधे से मनमान पर कर पपने मृाम सर म पुकारा-"सम्म !" सम्म तुरन्त नवा की पोर पूमा। उसके मासे पनाषिकहीरों की मांति टूटते पम्प निम्मे र पर मता उसे देखता पा-प्रपमा परनिरन्तर । "पसिए' पसिए। कुमी में सामान उठाया। दोनों साप-साप पते । 'हतो मता! तुम कहो " 'मात' कहीं से बार में ही की पदमा परे पह पबरा मई । बोती "मोह बहिन पीवो मर में । माप चिट्ठी सि तो मेरा भी नमस्ते पहरीभिएमा । स्पस्प पिन परेशान पोर गि। "बसिए पापा जी।"नता पनी गई। स्वल्प तुरम्त सब समझ पपा । माटर विमेन प्रवेश पर हीरोइन का सफर पभिनय । सवा भाषा कोनिफर की सिम्मी' दिसा र सौर पाई। पर हुई पार 1 ।

[ २ ]
बोली 'नगम हो जाता सस्म यदि पाषा में पहलान नेते
प्रम हो पावा । बड़े प्रॉपोस। विलायत से स्पा मोट पाए पर
चन्हें एत्ता भी विनामठी ही पसन। बसो परपसी करो।
टेक्सी में टैक्सी पमी।
स्वस्म कता के प्रमुत सौवर्ष पर मुग्ध हो गया ।
प्रतीसरीसेभेंट
ऐसा हमें कोई नही मिसा पिससे हम प्रेम कर सरें।"
"शुदुर्ग करते है, बोगने पर तो प्रमु मी मिल सकते है।"
"मुझे तो नहीं मिला।"
'ऐसा म महिए, इस सस्य-श्यामसा भूमि पर एक-ए-से विधान
रिल लिये बैठे।
"मुझे कोई पसन महीं पाया । सो पसर पाए, पहले से ही
'एमेगा भपने प्यार में नहीं सकते।"
प्रमावका समय ।
स्वस्प माता की एक मेपामिन सहेती से वार्तामाप कर या पा।
बह पाम के एक पपपराने से सम्बन्धित पी।समोनी पी मरेगार
भी नुम रिसपानी पी । सम्म से पूग पुसमिम पर दी। मवा में
भी सस्स को कहा पापियामेपासिन ही हमारे समीमापा को
बाबती है।
पहा मता सबेरे नौ बजे माती पर साम को एक सीटती
पी। इस बीच रोमांस को मेकर मार पपनापों के निवान गुमा
कररी पेबरती पर सो होकर पीर-सितारों पर प्रतिकारों में
पपले पारिमापारी पवित्रतामनकरते।
साव निपीत पये।
इन सात रिलों में मतृप्तिममारा स्पस पण-भर भी शो नहीं
साहयेचन होगा।पह इस एवं पर मा साप वापि नही
पहवा।

२७ ]
माठ दिन नेपामिन साकी में उसकी मानसिक स्पिति को रेल
कर कहा, “सम्म जी । भाप म्यब सिर कार सरीर रहे । रेगि
स्तान में मुसाब की उम्मीर करता गिरी भूईता है।
ससम्म चिन्तित हो गया।
मपरमपकोतस्वीर
कमरे कमरे में एक की मपरमयको तस्वीर बी। या तस्वीर
फस पपनी पीन परली 'प्रेटीम के कहने पर उसे हिमायत में परीप
कर माया पा । पान पर्मत की बीवी को न मासूम क्यो कोषमा पया
दिउसने मगरमच्छ की तस्वीर को गोली मार दी।
गोली को भावाब सुनकर सतारोती-ौरी पाई "क्या हुमा पारी?"
यह पायेग में मोदी- 'गोमी मार दी मारे प्रेकम नही-मही
मगरमम्मको।"
पयों? मता समझ मई-पाटी के प्रम्पस की पपा को।
"बड़ा बठरला है। यह मुझे का भया । मेरी बरामी को वा
पमा। गामों की मानी पार पार्यो की पमक को पा गया । मब एसरे
पर साफ भगाये बैठा है। बातिम पूर्व, मोसेबार !" पारी का धाप
परन काप पाया।
"शामिंग मुझे मत रोगो में इसे एक योषी पौर मारूगी।" पोटी
बिनौवस्तर में कहा।
'पावन ही पाहो माटरी ! यह वासीर मगरमच्छ की एक तूप
सूत तस्वीर "गता में समाया।
"भूगपूरठ । माटी म्पपा से मपिभूत होकर पागाई "यह ममर
भूपमूतो को इस प्रकार पवार पणा है, मिस प्रसार रीमफ सरदी
को। सने मेरे साप पोवा रिया। मैं इसे मास्मी पर मापी
कह कर यह कमरे से बाहर चली गई।
बता में मन-ही-मन कहा, "एफ पौरख ।"

[ २८ J
पोटोनिसरी
स्वमा
मयुर प्रेम के पारिमा पनौष्कि पानन की तापती सिहरण में
यदि तुम वीरन भर बसना स्वीकार नहीं है तो मैं उस पारिमा प्रम
को हरमा करने को तैयार है। सस्म तुम मेरे मापी सुबर सण हो
विप्प हो सर्वस्म हो।
पार में बहुवचन नीन जितनी
'रोमियो' लिए 'रनियट' । मेकिन मेरे पापा मो मॉोगस प्रत
रमाय मिमन संसार है पर एकान्त में ! यत पर पहले ही तुरन्त
भावापौ। --सा
सस्प पार मता का महामिसन हमा। सर-सप, प्रकृति की
सुपय गोरम पर्वत की खौतम पापा में, महा-यही पौरमातही।
इस दिन बार फिर निमोम हो गया । परपन्त पीमा-बनक
भौर पस।
मम्त समय मता में कहा पा "पावर लिखना, मिप सता' करके
सम्बोषित करमा पार 'तुम्हारी मपनी पम्या मार समाप्त करना।
मेम समय सवपदा का है।"
महिमानीसा में
'सोनी प्रेम में अपना भस्तित्व विमोन करने वाला महिवाल
पिनामिनारे अपनी प्रेमिका की यार में इवना तम्मय पौर सुष
हो ममा पा कि उसे या मी पता नहीं चला कि हाँ पौर रिमा
हाम में है ? सुनते है कि एक बार सोनी प्राने में रेर करती वो उसने
अपने हापपासे अपनी पौरोपीर गमा। ममकी इस परम
सीमा पर किस परपररिम इन्सारका तिनही पिणमेपा'
सम्प पर मौ यही तम्मरता पाप्त बी। यह स्तर का कार्यरठे
पणे 'मवासना मिखने मग बया पा। नया माप परिवाए
भी प्रारम्म । परिणाम पानिमा प्रेम रस-दीन मानिक में उसे
रोट दिया।

[२]
फिर क्या था?
उसने तुरन्त इस्तीफा मिररिया-"मैं किसी का ऐसा गुनास
नहीं बो मिश्मिा मुरापाप प्रपनी मौहरी समाथिए।"
घसी दिन उससे मता को मपनी स्थिति से अवगत कर दिया।
पीपे दिन मता पाप मेगा गया दो सौ स्पए का मनिमाग
माया । मोरे मिना पा- 'तुम हो वो सब कुछ है तुम नहीं हो
स्रम्प पहम से रहार गठा 'ऐसी मौकरियां नास्तिनी ही खरोर
सकती है। मतग रिटग रिटाय नम गीगार मि. भट्टाचार्य की
भीगी है बह! माती भतीची !
मता पी चिट्टी पाई पी। बसने मिसा पा-'स्वरुप ! हमारे
तुम्हारे मिमम पर मो नया बीच पनपा उसे मैंने गंपटर पम्दानी की
सहायता से बड़ी मासानी से मर कर रिया है। या तुमारे लिए मुस
बारी है क्योकि पदि प्रकट' को इस मे का पता पम बाणा तोके
तुम्हें मोदी स मार देते क्योंकि मारत हा मी बिमायची ही पसमा
करते है।
तुमने लिखा कि हम विवाह परम? या सम्मर नहीं है? फिर
दिगाह को पानी नहीं। पापुरी मरती नही इस पर बह मेरी
सती है। फिर कम पापा पीर गोमी।
तर पए भेग पीत होणे फिर ममा मैना मेक्नि
अभी दिल्ली मत पाना।
तुम्हारी--मता
रेनों की महर बोरमका सौन्दर्य
स्मस्प का पारा गर्म हो गया। इस प्रकार से रिवार से पयों
यस पीt? माप में पम्रा मान पाएगी। मारतीय स्त्रियों की माति
उपे अन्त में समझौते काही बहारा मेना परेवा । भारदिस्ती पर

पायेगा। तया से कहेना हि परिह उछे सच्चा प्यार करती है पोपी
मील मूठे बम्मनों को दोसर मुठहो पाती।
"मैं तुमारे बिना एक पत मी बीवित मही राधाता । मेरे दिल की
र सांस में तुम पर गई हो। तुमारे वितरण कामे नामों की
महाही मोबीवन का माएवं पौर होन्पर्व है।"मी में अपने
पाप काप्पा-- किसी भी परोपको सहन नहीं सकता।
मन्त्री भाति नमा'को किसी भी मुख में हासिल करमरकर
पीयावीपरी
बह दिल्ली नाहो गया।
अंत शिदिवा --
परमारों रम्मीरें मेकर दिल्ली पहुंचा से रख नेपामिन
नएकी पवा पता किमो मार वितायता पीता-
वा एरोड़ाम पहुँगा । उसका पैम रोग पुकार या पा। मेकिन सबसे
पाने यहाँ पसे 'द रिसनाई पड़ी। मुमो पयाममा
पहा, "यह पामर" पपने पति को प्रसाठा अपार
मामिमनदिया।
मी 'प' यहाँ मा परी । मुसा कर बोली, 'परा
भाई, सिरोमा ही है।
.
'ग' स्नेहसिक सर में धोनी नीयरस महार मेवा श्रीमान
को प्यार से सना और मिस्टरमप भी हमारीको पानी
को पनी बना पर रसियेगा । हमारी से प्रिय पनीर
नाम पर पर होगी। प्रन्या कैमरोख,धरा
पोना।
'' मे बार महा-पितापभीनी। मुझे अपनी
पिरतार नपापा ममपान उसे मौवन में मनरे।
पों को नहीं मन साम्प्रेष प्रतिहिया Nि

[ ३१ ]
प्रता पीर पेरला तिममिमा हा पा ।फेन प्राकास में पंछ कमाए
पंचीकी ठगहापा।
गुरु मे पूछा-"बताइए महापर यह कहानी पापको सी समी?
बीच में ही अप्सराएँ बोन उठी- 'बहुत सुन्दर ! वितुम नई !
क्या इस प्रकार पुरुषों को सस्त बनाइर पारत मस्त प सकती है। तब
तो पूमीवादी युम में हमें भी पाना चाहिए ।
एगा पधिकार-यूर्स स्वर में बोता- लेकिन में तुम सब को
पहा पाने की माझा महीं दे सकता। क्यों गुरु इसका पंत दो पुरा ही
हमा होगा?
सुफ कहा- "सरम को मानन के लिए विज्ञासु बन पाए.
रेसिये, 'म' का परिणाम सा होता है'
कहकर पूरास हो गया ।

11
पूमता-यूमता फिर माया पौर अपने कानों को प्रोपरकोट हैरता
सभा बोला 'रे पर नही है।
पर " उसने मूपी प्रांतों से सिपाही को पूरा, परिपर होता
पो अपने मन को इस तरह रोने देती। होम मापारा पिस्ते की
तय रितविमा हारेषारा।
बीड़ी का पोर का पिते हए सिपाही बोला "गर में
पो महीं पमी भावी नहाँ सती है बचने के लिए प्रोट तो है। उसने
बीड़ी को मारा 'बत मैं तुम्हें पंगर सा देता हूँ।" सिपाही मोड़ा
पारे परा कि साराध स्वर में चिम्मापी, "मो नासपीटे, तेरी पर
माती नहीं है जो हर मा में मा गमने की कोशिश कर पा है।
मायर करेपा हो बस ऐस ही मेना।"
सिपाही की वीड़ी समाप्त हो गयी थी। उसने पपने दोनों हाथ
अपनी गैर में गम मिये। बिसिमानी सी हस कर मांसा "तेरा
ससमी"
पर बोले इसके पहले ही हमी से मपुर सर मुनापा-"मा
पारे-याबाममी-1
'मेय पसम किसी रामन पर नपे में भुतहमा पहा होगा
पारदरी बीवी? उसने अपने सत्तर साप हो सदार पिया।
पनते अंगारे-सा मन सिपाही कोने पर धमा। सिपाही पर
से रहा। उसके म पाइए मौ पचाना पे पण निरम ही मरे,
मेरोपर गामी । हमद वह का भौर मवमार बीमा,
"बपनात काही की, सानी को मार-मारकर-पस फोगामी ।"
'मरे बाह बना पस्दी पर होगा। कोतवाली मे या कर
या रेषा मेरा?"शारा ने नियम रहा।
सहसा होती में से एक-एकर जोर निमाने नमै। सिपाही
को पुप ऐना पड़ा । समौ नीम का पे। इन पो भी को

[५]
बीसी सरी की। बाब हेपर पौर समिती, मयी रूद की पोशाक
पहने । सारा उमें विस्मय-भरी रष्टि से रेख पी पी।
"सठ। एक पतली प्रावाम सापक कामों में पड़ी।
सिपाही प्रपनी पीट पर प्रत्यन्त मुसरी सबाहर निकासने भगा।
सारा की निपाई उस पोर उठ गयी मपर की प्रसिद्ध मतंकी सेठ से
कामीरी पात माप ही पी पीर सेठ उसे एक मद की तरह दोनों
हाष पागे बड़ा कारे हा बा।
मातार पूतों की पोरकी क।
सारा ने देखा सिपाही सेठ को समाम कर पा है और सेठ श्वनी
चापरवाही से एफपया उसकी मोर फेंफ पा है बस कोई गरीब
परामी पुसी हुईही को किसी कुत्त को पता है।
"धर्म नही।" धारा ने मन-ही-मन का पार उसी पपा में
सिनसमट कर सोने का प्रयास करने मगी।
बाद पुहरे के कारण गया। बपनी हवा देश हो गयी और
पोड़ी-बोरी बरफ भी मिरन मनी । सिपाही ठर से तर पापा। भूट
बीड़ी प्रोगरकोट बहाया पौर सारा ।
इसा कमहीं पीपी। उसका दीपापन बजता ही या पदापा।
सारा का दुबला-पवन स्मि प्रपमे बच्चे को विवनी नर्मी रे सकता
माहा पा पर उसका पर सर्व रंग हो हा मा पा सकेर
की परसात में स्वयं इस मयी दी।
चापीय-एक सम्बी बीत, एक टवी सिएराती एटपयाठी
पोपबो पापर रियो से दूरदूर पा ही थी।
सम् सम् मन् नु-हमा की पापाग।
टाटा-रक ! नामदार यों की भयानक पनि। पीसीका
बहरीता पुरी। मंगपानित-सी साप रठी मंशासित-सी मुभी पौर
सिपाही पाम पा कर पड़ी हो पपी। सिपाही पी गया, पायद यह
किसी पौर रिवार में सोया हुमा पा। बीड़ी की साध सके हाप से

[]
र प्रत्यकार में पोटपोट होने सपी। सिपाही को सुनाई रिया
"सिपाही थी, मेरे बनेको प्रोवरकोट कोधिए, महावीर से
पान र मरवाएगाचा यह मेरे पिता रामा है। सब पुर।
सनसनावी हा रो+सर एपीपी! रोती हरका
उनसना पर पारा के घों को सिपाही कान सेमे पाने की
ना कर पी पी। सिपाही एक मस सिमा किसका सिपाहीपन
पापा । पाकर बीमा 'मश्वा प्रब में मासपीट से सिपाही भी हो
रया बस सामी यही प्रोबर-नोवर को नहीं है।"
पारा भी नहीं हटी । उसका बना और बोर रोने मगा।
होती ही पा रही थी।
"परे म क्यों माम-सीमा हो पाई में तो पपमी 50
रिपा करती । मनम, मारक मेरा बन्ना से ।"
हर पारा सिपाईके मरी मा गयौ । पपने सूखे स्वन को प्रसस
नीड़ा को भून कर समे एक बार फिर से पपने बो के मुंह में गम
दया । बमा जोंक की तय इम्साम के जिस्म के मा को प्रसने नया।
एसान की मौ पीड़ा से करी बा ही पी।
सिपाही की मांपों में पासना गाठी इसका भापकर"
"सका पार! चारापाती।
'हाँ इसका बाप ?"-सिपाही बोरसे बोमा ।
की पापा मझे में बहुत मारा सिपाही पी!"
"तर एक पर्व पर में पपना प्रोपरकीट तुझे सिम्ता।
" पौन सीप "पर स्वामी होकर बोमी।
"मुम से घटकर बना होगा।
“पमा कसमानीटे, पर कर टमा होपा।" पर पपने भिस्म की,
पीलाएं मे दूत मपी थी।
परित पोगो कोर से मा मैमा पोर तु मुझे।'

[ १७ ]
बानती महीं, मौत का विस्म पाग की भट्टी होता है।"
"बदमाश
"तू मेरी बात नहीं मानेगी तो रासना मर पाएगा।
बन्ना बन्ना बन्ना ! सारा पराबित हो गया। उसके साममे
बनेका पाप-ताप कर मरमा साकार हो बठा। वह माबुक हो उठी।
मह बसती होकर सोचने लगी “यह ममा सिपाही ठहरा ग्य
मौर धवान कहीं, क्या कर देगा पहउसकी विपारपाग बरसी,
अपनी नीयत को सोटी करेगा तो मैं इसे करपा ही पवा बागी । म
पर अपने पसम से नही गती फिर ममा इससे पर्यो ? पौरबह
बहादुरी के साप मोदी "मा मासपीटे मंठा बा मेरे पास।
सिपाही उससे सट कर बैठ गया "पार की रात कितनी मम्मी है।"
कमेणा पर्म हो गया "पारा सिपाही का हाथ पका रहा
"सो में माइन्हे वो तुझे अपने सीने थे मगा मू मुझे कोई धम
बस नहीं पाती है। मरे, नासपीटे मा को धर्म केसी! पौरबह सिपाही
को अपनी बाहों में कसने ममी।
सिपाही चुप हा-पषस पौर निस्पंद ।
पूम की रात बर्फीमी ठर सनसनाटी हा सिपाही को सपा से
उसके बार में धोमे रह रहे । पौर उसके समीप बेटी एक माँ की
मगत होतो बाहें पी समायो-मीमय हो । पपर्म हो पाई।
पार बमन माग । बासे इस पवित्र पाम से पम पाएमा ।
बहरागा कर पटा पोर वीडियो स्टोसने ममा मेकिन मीडिया
पोररकोट में पी पिसमें एक मां का निपटा पड़ा था। वह पुनः
गविहीन-साटमपा पर माप के जिस्म की पाग सपर्ट
निस पावन ग्रिोही भाग में नम कर साय सिपाही से मट कर
42 पी उससे सिपाही को एसया प्रारमा ही मुसस पमी । वह सारा
के समीप पपिहनही बैठ सका।

[ ]
बह पुन उठा और पीट पर पार निकामने सपा। नानार
पूतों की क ठा पुन मग उठी। पौर सायकापीपी,
"मा, नासपीटे तुझे ठर सप पाएगी पा मुमसे ममकर बैठ गा!
भरे, रेचहर बापी है पा पिसके स्वर में पारसस्प
पा, पपूर्व वारसस्म । पवित्र और पट स्नेह पारा | मुख पर वेब पौर
निर्भयता।

पर्दा, मन और उडान हा। सिनेमा हाम में प्रदरा पर पर मांग धार में किसी सुन्दरी का पेहरा दिसनाई पड़ा। मैं उसे मौर सेरेबने मगा। धीरे-धीरे साच-गार मिरियम-गार में बरमा पौर मिरियम मोर में बदन मया । मुल या मा मानो पद का दुका। मन को पास रोकना चाहा पर पहसा नहीं। सहमने-सहमते मौन मापा मेंहदी ग्य "पाय मह मिनेत्री मेरी प्रेमिका होती। कितना मारक पार पाकक सौरम है इसका ! परिस-सातप की स्फटिक की प्राचीन प्रविमा "पानसरे मितो" भौति इसन बरन सुमठिय और मौसम है।वामीरास दलित पारई की प्रतीक पावमा सरच । मोह तिमा मन्मा होता यह मेरी होती प्रौर में इसका । मन भी पानी उड़ान पर कर नए । मह मि.महाप-सी पती के ठोर चिप्ता- परमा पिपलबोपनी-पभी पोरमी के मौसम के प्रकार से परमासिव पा, प्रब एक परयन्त भी मोटी पौर कुम्म पुरती वीसी से मजा मरे की पात पाहिहीम परीर मामी पुरती पर अपने एबमे-पवमे प्रमी समस पपनी तुवतीबाणी में प्रेम प्रायनकर पी है। यह रसायतमा प्रेमी इस से सफर हपापा रहा है कि पह मेरी प्रेयसी मुमपर गिर तो मेरापुमर निकम पाएमा । एमोटी पुरती रस पर माती धिमी-वगत केटे पटाए पम्प बोस पी-" तुम पर गाम रेती । मतेरी ममा है, मैं तेरे पार में कितनी पुरती हो गई है।"-किवा तुपमापी पी इसलिए शारे पर ठहामानमा कर । पक्ष पौर रस पर मर्मत पपरोपासाय। [१] [ ४.] सोय धाट । हीरो हीरोन को बिगाने के लिए एक मए पात्र की मर्यना। समिए उस पगरणी पर बत की भाति सम्मारिव पुरती एक मीत- "यह पूमती जवानी पाती हुई मपमती पा रही है। कमरा पाये बाता है। बमोज-अप माट। मुष सुपमा से दीप्त मुख । मन को रस मुख-दर्शन से गति मिनी । मान गए पंसमा पए। पार पामा मागे पमुना से गितुम मिलनी शुमती है । पर में प्राप पकाना भार बहनदी पर मिश्य सिर पर हामिए पानी भरने माती पी। मैं न बता पा मार मह मुझे पती भी। कितना पम्या होगा कि अस होरोम को रेपामी पोशाक पहनापी बावी मोरगामी परस्मानी । इस पर पपपुरारी। फिर यह, मा मेरी ममुना घाण पतीव की विस्मृधि-पमट पर मम्पने मगी-मेरा मांग। यह चमरठी हा सणाबिती कवी के समान यमुना पपने पीवन से मायकान्त धीरे-धीरे सम पाती गरी की पोर मा थी। उसके सर में ही मिठास पार मोषमुम्बरा का पीत मपनी बेटी * सर में मररिमिति को पपनी पारबत मपुरिमा से मुगित "शाबर पापी न पा सा मगर सब बाए, म्हारी योगणी की सेना रंग जाए।" मीच मपुर और ग्वष्ट पीत । भी मनाप।" वही मोटी कामेडियन होन पोर पीसी । मैंने सिपिम करणा। मिडियम पार । परपर बही भदौ मोस) इस बार एस मोटी हीरोत ने मेरेगी पोशाक पहन रखी है। पीणा में पसका सूत पर परा काटून" सानप पा है। इस

[ ४१ ]
पर बम प्रपने सहे पटका करती है, बाप रे बाप । मन भिन्मा
खारिमारों में तुमन । मन प्रपने पाप के पासरसाल ऐसी
क्यों पास परवे? पण मीसामारिता नहीं ऐसी परनामों में।
रमण म भन का यौप दिया-"अपनी यमुना का पाप भी एकना ही
मोटा पा पर भी विस कामेरियम हीरोइन की सब मौटी नहीं
थी। माहर मनी पीन का विरोध करता पाहता पा रेशा
परमे से उसे बगल सुख मिसता है।"
'मटा'चोर की भावार।
होरो पार की माफी का वा फोड़ दिया है। पीयू नुस्से
में भरपठी।
क्लोर-सप पाट
"तूने मैरा परमों फो" गेनू कहती है।
"तूने मेरा रिस पो पोका।"-तीपे तर रेता है।
पसकों में पोरकी देसी।
'पारस पहानी 1 मे कोई मुभी होगा ।"-मेरा मन
मुंमना करा- मैंने अपने बीवन के बीस ग गौर में गुगगरे ।
पर स प्रकार परा फोरले मने पार कमही रेखा । पिस्म बाटे भी
रिचिती
ग्मा मपुर हो गई।
में यदि पिरमका मेवा होता हो भटमा को इस तरह रहता कि
पोप फी पसरपी पर एक साप पड़ा है। हीणे पहा सिए प्राणो है।
मा मरतो में मुनमुना ही है। पचान यह सांप को हार पोक पाती
है पीर पहा पूर पाता।बह सयभीत हिरणी-सी मायती रिमा
पी- "साप साप मार।
हीरो विमपिकाकर इस पावा।हीरोम रस इसने हुए रेपकर
सिम्म गुस्से में पापाती है। होप में उमरा मॉम मौर निरमाया
है। एक कामोसी कर उसके मुरीत कपोष पर पाबाटी है।मा पार

[ ४२ ]
पटक कर पाती है-मुझे चाहा नहीं, पांत निकात हा है।
साप । हीरोनिक उस पोर रस्ताकि हीरोइन पससे सच्चा
प्यार करती है, इसलिए मापसे रोकती है। पर हीरो ऐसी पारता
हमा साँप को हम में नया मेता है। हीरोइन गोगो पाती है। पर
पा बीमती है तब यह सांप के टुमेको पाती है। मोह तूने सांप
के टुमो कर दिये बोगहार हो । पौर बह पाकर सांप को रखती है।
साप कागज का है। यह मुस्से में ऐंठती हुई कहती है बिना मेरे परे
के पसे । पौर हीरो मुस्कराकर कहता है कि इन पर्यो के बदले तू मुझे
क्यों माही ने मैती । मौर बिट
सगीत का पारम्म । ग्रेजी की पोईकरा वीसी पुन ।
मन परें पर ऐया । उड़ान समीत पारोहन में अपना ताप्तम्य
पोरवठी।
होटम कारस्य ।
घाट भण-मण में परमते जा है।
कोई मतंकी पनम्न-सी पा रही है।
"पो मिस्टर बारी
इसकता तुममे पाँच सका,
मारनामे होगा शारी।"
पुपरेर तक मन इस उटपटांग गीत पर विचारणा पहा फिर गान
ही "महबीत या तुको की विनती। में होता तो कम से कम
भीरब पौरपोरेम मिमका कविसम्मेलन में प्रसिरहपा मीठ का।
पार दिी पेमपि भी क्या गपब माम नबते । मोता
मस्त हो पाते।
पचानक मोठ भौर गएमा ।
मने मुना है कि पिझ्मी कवि महाराज प्रपोपमारियों से सीपीटार
मेरी मेरी पौड़ी का सबूत है प्यार

[]
में हो इतवार,तू सोमबार।"
मेरे समीप बठे हुए एक महाभय ने अपने मित्र से पुसक कर कहा
कि माईक्सा जोरदार पीत सिमा और यह हमको
गया की
माष ही है। यार अपने नौ पाने तो इसी गीत पर पदा हो गए।
समीप का पक पूसरे ही पण फुसफुसा उठा— सन यार।"
मेरा मान मझो मपा।
रोहीनू को अपने पानिजम में प्रामद लिए प्यार भरे सर में रह
रहा है-"सितमगर, पपिक मत ठरूपापो में तुम्हारा पीर तुम्हारा
ही एंपा।
मान प्रतीत की मोर पुन निम-सी सी-में पौर यमुमा ।
खेतों की दोपहरी । बामों की प्रमती हुई सोभी-सोपी हवाएं।
यमुना पौर मेरा प्यार पपने वर्मातर्प पर पा । तब यह एक दिन
पबराफर गेली पी-एम, मेरे पीर तेरे प्यार का निवार से होगा ?
दूव्हा बाझप पौर म मी पौपानमौर फिर पाप?"
मेरे पास कोई रचित पर नहीं पा । पचपन में मानी मोर पारी
से कुछ प्रेम की कहानियां मुनी थी । एक राजकुमार का एक पगमारी
से प्यार हो गया। परकुमार का पाप परमारी को नहीं पाहता पा
इसलिए एप रात रोनों मार गए।
मैंने भी उसे यही कहा- 'पामो यमुना हम दोमो भाप पर्ने।"
भी पर्दे पर हीरो का मुंह होपन चार से टुरकी पोर
मारष मेज-अप।
"हो-हो, हरदा, सी-सी पोर सीटियो
हाम में हलवानी मा पर।
में मन मसोसकर रह गया पपोरि गुस्सा मुम इतना पाया पाकिम
पिटापार पर एक मापण रे देता। पर ।
पुप्पी पौरपोर पुसी।
हीरो पार हीरोइन अपना मापार कर रहे है।
-

[ ]
पगनी फिरकापरबदनी।
में पोर यमुमा ।
पाठीकासी हीरोइन की परह मेरे पापाप में है। मैं भाषातिरेर
में पहताहता है--सितमपर इस पहन वापामो वह मुम
से विमम हो पाती है। हुप नारायणी से पूस्ती है- 'मू यह सितम
मर क्या होता ? पत्तेरे को सारा ममा पुरपोवर र रिया।
सोन काटेम्पो ही सरप कर दिपा । पापा पार की बी सितमपरका
मतसर समझ सकती है सब मेरी ममुना क्यों नहीं समझती
प्रधानक मुझे मेरी भूर्भता पर पुस्मा मापा । भरे इन पिस्मों में
वो चौता पौर राम मी निपुर गंगोतते ।।
भी एक पास पठेने सत्तेजिप होकर या "भरे बमीन रेष
वो सही यह
होरो को पह ही है कि बस पर मुझे अपने में
समा से, क्या परब का पोर!? माम मानवाब
बई का फोमाहम पूर्ण पीरन । मनुम्मों का प्रमाता पा सेनाम।
पश्चित समूह से एक रिटास । मुझे महदहमा-
में सेंसर बोर्डका प्रमत न मने एक पि का पोरमा का।
शिस ऐविहासिक पाय हिास से मिपा पा पा पता नही
मगता पाIो पस
पिरोनी निर्मातापों में चित्र के मुरुपौर व
में ना पर तिस रिया पाकिसपिजीपानी पिसी पर
विहार से सम्बन्धित नहीं है।
यहरयासपास है। उन्हें पाए भरे सर शाहूँ। पान
पापये रविहास को पैसे दोडामारसम माप मोरंगकामकारका
बाप बता पा प्रणपबेटे से प्रारही टीका र राम
पौर मिय में कियह कहानी कास्पनिक या स्थानी मार, ऐसा
ले से पाप बनवा का पम्पा पोहोर साठे।।
सपी पपपरी इट पर।
हराम में मोरपीसी पर एक दो बार सीटिपी भी बनी।

[ग]
समीपवासों में पास माया-हो गई पापी राव मय पर जाने है।"
मिरियार रस रहा है।
होगान हीरो का रातापस पाने का वापरार रही है।
मिासाट
विसन कह रहा है "तुम मेरे रास्ते से हट मापो परसा मसी कागब
के पूमों की तरह सा दिए पापोये।"
दीपेग्मी साह रपट कर कहता है- 'बारेमा कहीं ऐसा न हो
पाए कि मेले पर पाये तूप का पुरमन सरसारका अपराधी
गरे रसपाता है ने दी को पार कर दिया है । मैं तुमे यमलोक
पारप मा।
"म"बिनेन मागे पाता है।
किरमिकांग और रारासिंह की को पुती ।
मिरियम-धाट
रिमेन पौर हीरो की बयानोपड़ी पर पी पम रही है। मा
हामहा रिमेन पोर रही साधारण हीरो । पर माह रहीये। नूग ही
हाय बता पाई। क्यों भगवावा?
गान सबेरेकी मोर पड़ी।
बापरे समय बीबी में मुम्मे पहावा दिपार मने एक ससजसा
कि पार भीमकाय रस्म से ना रह है। मैं एक बार तो उसे सार र
परिवार में पापने पर पता रिमाया कि पहला थाने ति ।
को मारा राह मगा भुपका । दक मोप गोप के मारे रखने
समे । इद मनास्तिक परपोर रेप रेम बिसेन अपनी पावरपन
पूरा प्रारम पडा।
पर मुममे नहीं एा मया । मन पपने मए पड़ौमी में बीमे से
पूधाप माई पपा यह नरम है?"
उसने परत मैरी पोरमारा-माईमाहा एटेर
रमेट लिए पिएपर बताई। पौरे पर पाप दिपारीदिए ।
47

[m]
पसने पुम मुह फेर लिया।
मेरे हरम में उसकी इस रैली का बड़ा मामात पहुंचा। यह एक
तह से भैरागपरेक्ट अपमान पापौर म पा से हट कर फिर सस
भरने मया कभी यह घोंपावसत भरे समीप बैठा म्पति मेरे स्तर में
पा गया तो मैं उसे पाके मार कर निकाल दूगा। बातमीन पिटता से
उत्तर ही नहीं दे सकता। पौर में परकी रोपनी में पसे रेखमे भया
कासा कसूटा मोटा भरा और पंगा । किमी माने दो इसे स्वर
में इस पपमान का पिन-पिमकर बरमापा।
मैं मन ही मन पुटता या।
पाट्स परमे वा पे।
में कामरेर तक अपने भाप में निमम रहा। अचानक हात में
पुन हमषम मनी । मम देवा बिसेन नह पे। पौर अपन कापडा।
पूम-बाफ | फटाफ-सटाकायो मारा परे । यह दुपता-पतमा काने
रियन भी क्या बाप विधा पहा है। बुर बीटीमा पार हाबी सेता
हा।पावसमे दम पनपार निर्मातामों को।
पौर तब हीरो की मार को पुलिस पाती है। मौर हीरो पपनी मोव
पासी प्रेयसी रीनको सीने से ममा मेवा है।
मेरे पौधे ही किसी पौरत में अपने पति से पूपा-मुग्ने क बापू
मर उस मेम साहब का क्या होपा बो से प्यार करती है।"
'इसे ही हो फिल्मी गानीकरोकिन्तक यह पता न पसे
किमाने क्या होन पाना है।
पौर विजमी हीरो रीनू को भिए प्रयास मीत पावा मा पहर की
पोर पापा।
श्री प्रेपसी के पाप का पत्ता ।
मैप साहस हीरोइन से मए सर में पाती-पीनरी कुरबानी
परी मुहमत पेदन (हराये) को मुमसे पीठ हिम।"
फिर भी तुम मेरे पापा पोनी-पार पपनी बनकर होपी।"

[ 8 ]
हीरो रहना से कहता है।
समसालोरमप बाट !
'कसे ?"-मेम साहर प्रयाक रबाती है।
पम्मिकस्त ।
"बहिन होकर। -मीरो का हम अपने हाथ में से मेवा है।
बटासारर रिया सारी पहानीका।
मरा मन ताप उठा
कपाटार है यापूका मुरमा और फुप मही तो गहिन ही बना
री।पाह रे हिंदुस्थान ! सी-कैसी तु मिलती है तेरी परती पर ।
पौर यह विमा हीरो से इतने पारमियों स मर पाया ? मुझे दी
देवो एक पीर से न न सका और मेरी यमुना मुझम सरा के
लिए धीन भी पा । और यह होरोपनास भूट पार गरगी।
में मनाता मा मादर मापा । मुझे मेरे रपार का सापी रमेश मिस
गया। मुफबते ही उत्सासितोपरयोमा-"क्यों पम् तुम भी पिकपर
रेखने पाये हो। भपता कि तुममे सन् १० से २५ तक की तस मी
निकासमी।
"म तो पार भूम ही पया। एक पका-सा मेरे एप पर मया ।
मन पैस करनी है साहब के सामने। उसने पावनी के स्वर में
पहा । मुझे पीसना पा ममा। पोड़ी पासपो पितोहारमा विकार
मपुर सण मेरे सभी हमारे पए।
पौर मैंने महसूस रिमा कि मेरी रगनों पोर मरे विचारों पर
महामूम्प का पाना परवा पाता या हा मोर मुम बम प्राची क्ष
दिल एम-रो पौषयाचीस सादरों पीपम रिसने सपे। परपा मम
यमुना हीरो मुसार, पारधाएँ कहाँ है ? सम्परामावि पास
पाहते पार गर्म
.

मन का पाप मुमताव पीर मानहाँ के प्रमर प्यार के प्रतीक पारमहन के सम्मुस सड़ा-सा म विचार हा पाकिमया में भी अपनी प्रेमसी की मपुर स्मृति म प्रीत का यह अनुपम महामना पाम्मा पन्तर या उत्तर देवा पा पादमी पपनी मौकात से पाये उड़ने समता है उसका मान उसे रोकता है ममावा कावा है-“पबसे किसना के पंच पाताप को बार प्रो मेकिन भरती को मही।' फिर भी पारमी गता है, गा ही नाग है। ममी पापा है। कस्पना के मणिम बान में प्रयास मदुर दिवान बुनता हुमा । वागमन की बाहरी बाहरवीगार पर पूमती हर किसी युवती की मपुर मापार मे मेरा भ्याम भपच्मिा । बापुरती संगमरमर पर प्रति एक फ़्म को स्सप कर बता रही थी, “मुगा । पत्तियां दावे सिरेगामी "हो रापा मका रंग हरा।" "बहुत कमारमक है। में उस युवती को रेप पापा। बहुत मुम्बर पी, बहुच पाठी। पापित मेरे जीवन में ऐसा पपइमीगार पापा पा । मैं रसे रेखता दा। मन पुलाचे मारले तपा । यहाँ ताजमहल की कमा पार कहा रस पातायरस में उत्सम्म होनेवाली कम्पनिक प्रयसी । बस पर पुरती उवा स और इस सम्बद्धमता मन का पाप । मामी कोसता पार उसकी निर्वग्प गान। में मोष पापा।मार मेरे साप बिना पूधे ही हो लिया। [ ४८ ] [ ४१ ] कह रहा पा "पर मारपये मे शाहजहाँ को कैद कर मिया, तब साहाँ पागरे के किले से परंपरी प्राओं से हर रोर तारपास कोसा करता पा । उसे एक पा कि पाक अस्माह की मौसार सनी मापाक पयों पाये बलिए पाबूजी।" गार पहा । म दूसरे विचार में निमग्न नसके पीछे पसने ममा । में सोच रहा पा "यह पुरतो कितनी सुम्पर है ? कार ! मैं ऐसी पत्नी पाता तब तब क्या मुमतान बेगम पर शायहाँ मे प्रपना प्रेम नुटाया ? महायमहत से भी प्रच्ची की स्मृति में एक महम बनगता।' मार मे गिनती स्वर में कहा "ये पाहाहाँ और मुमतान मम की पानी का पौर पसमी ठोक इसके नीचे । बमिए, म भापको पर मेरी टि उस युपती पर जमी हुई पी जो मेरी पोर पीठ लिए अपनी सहेमी या परिन मुपा से मह रही पी सचमुपा समाट पारंपबेर ने मुमतार के नामपर पसंद सपा रिया । वह जितनी दोमन पौर कितनी सरम पी ? पुस मीत पाएंगे पर मुमतार हममा हमारे रिमों में ताना हेगी। "पणा | गहरहां नी पसो से पारिमा प्रेम करता था। उसने भी अपनी मुमतान की पारमा की शांति के लिए पाप पारी महीनामा पपन का परापासपी पम्तिक रिलों में यह मम पुमवार को मार कर रोया करता पा। में एक बार रस पनुपम मुम्बरी को रेसने के लिए उसके पागे से मुरारा मेरिन माम्प की बात है यह तुरत दूसरी पोर मुर पी। सिर्फ ससड़ी गईमा एक माग ही रेप पाया । मरी दमित मस मसाने मनी ", परिदम पुरती मे मेरा म्याह फरारे दी में बीवन मर रमे अपना पाराप्य मान कर पूरता रोमा। पति और पत्नी पाठ प्रममा सहरण पेश करना।" म मा हम्मे पर मो पानष्ठ र परिवना पिपौर एए पाहाहा पौर मुमतान की प्रससी पों

की पोर मा परे । बारमाला पापामा "इन मममी कहाँ
पास होने पर प्रारमी दिवस के मौप पाता है।
पत्रकारपूर्व रास्ता । चमार हाव में मामटेन लिए हमारे साप
पा रहा। राषा में मुषाका हाप पाखापा। मुमा म पूर्ण
पीपी "मने सुना था कि बरसात के दिनों में पूर्व इन कों पर
पाकर परती है। तुम परा उम सुणों को देखना।'
तमी मारमीच में ही बोल पड़ा "बाबूजी! यह वाया
का पर पूरे हो से माती पर हमारमी महल मोमे होते है।
महान पतियों के बारे में विचित्र पार्ने पामते ईशाकि सनकी महानता
कायम है।"
मनि स्पण पिष्ट पारमी की तरह हापौर एक लम्बी सांस मेकर
मन ही मन बीमा 'एमा से पाइहो पाने के बार में अपनी सारी
कम्णा प्यारपौर अपनत्व उसपर उमदा हिप्स की भांति से अपनी
मुरती का पासव संगीत मुनापा । जीवन शतकी भाति सूबसूरत और
धर्म की मांति भट ब पिर-बबनमय हो पाएमा। कितना मारक
पितमा रंगीन पौर विना श्रेष्ठ ।
भी बीच में ही बार मोम पास समय मुझे पसका स्वरमा
पापिकर और कप तगा। मह बोस पापा "विए बापूजी मा
पो पाप पीपे का एका रेष पेम, इसमें हीरा पा रही है
प्रकार से यही सूरब-सा रनामा हवा पा पर इस नुटेरे प्रेमरेजों ने पस
हीरे को भी यहां से निकाय मिपा पौर विनायत ने गए।
गुमा बीच में ही मोम पड़ी, "याकीमती ही होगा, माणिक ?"
"हा बहिन थी ? पार तप से दोना "मुनते किया नामों
काभा । तर यहाँ दिन की उपग्गादा पवावा। सन पानों में
हरमा पपमा पठा। भव मने भी अपना प्यार पानू प्रसंग की पोर
सपामा। बम इस स्मार्य से पापर पागहमें मापसी बातचीत कसे
का भरसर । पाषाणापूर्वक दोसा, "पाम की बात है?

[१] गार मेरे इस प्रस्म पर हिपकिचामा । मगर्ने पता हा मते रस्ते बोला, "सन् तो मुझे मार मही है मनुमान है यही दोस ।" मैं उसकी पनभित्रता पर नहीं मनाया । मुझे रोप तो इसी बात पर होना चाहिए माफि मार्गदक इतने पनपढ़ क्यों है लेकिन मेरे रोपड़ा गयम मुभा का कहाँ से लापरवाही से हट गाना पा। ममे गाहाको पनि साना भरे सर में महा 'तुम कसे गाइरहो ? जर तर तुम्हारी मापण कमा प्रमाणमासी महीं होगी तब तक तुम्हारा म्यापार महीं पसेगा।" तब मैंने उसे एक्षिप्त उपरेप दिया। 'यहाँ बहुत परकार है एपा पनो पस्सी से बाहर बनें।" रामान पम्भीरता से कहा 'समुष मुघा मौरंगर ने मुमवार दीकोख को मजा दिया । पुष्प जाति महुव सापी होती है ?" मेरे मनमें पाया कि पाकर रामा की कमाई परमौर पूछ तुमने सारी पुरुप पाति पर मोचन यों सपाया ! कह दिया कि सारी पुरष पाति स्वार्थी होती है पर तुम पौरखें ? पती पोरेगर मोर फायर ! में एक घणोप में गिर हा पौर प्रत में पसचित्र के वस हरों की तएपरित मुद्रा बना कर भरे स्वर में अपने पाप से मोसा, "प्रपा ! एक पार तुम मराइप पीर पर देखती तो पता पातवा कि इस पुस्य के अन्तर में किसकी तस्वीर परामर में अपना सर्वस्व अर्पस करवामा पह पुगगरी तुमारे सिए माकाय तारे तोड़ कर मे पाए पोपला ? म बीचम-मर मारमा पुनीत प्रीप के मानोक में प्रीतरी पापमता को पहष्ण मा। तुम्हारे हर पम पाने मेरे पप्तर-पायो रिये ये पोर । मुरंप का पार पाप हो पया पापमापार माचरेन मेपर मुम सेर पमा पपा पागारका हा तर गया। उसकी सास प्राचार देर रखी पीबसे ससे यह ग्रहो गया हो दिवा पेसा नहीं देगा । फिर भी यह मेरे पीपे सीधे पोपुल परेकी भांति पापारी होगरपनहापा।

[ १२ ]
मुपा मोर राषा का
र निती पी। मेरा मन सब करे
सणिक भागाए बमित पाप मी काफी दूर माने भर पा
पा। सोचपापा, "पाहाहाँ की उरता पौरकम्मा ने मपने बेटोको
भबत सांचे में सास रिया। पति या तनिक परता से काम मेवा पो संभव
है उसे इस पीड़ित परिणाम से नहीं करामा पाण। स्ना की पगम
पाप की स्वाप निम्न स्पर्ध पाकर मूब गाती है और तब पारमी सभी
प्रन्यायों को विस्मृत कम्पचि की स्थापना में मम माना है । परम
में रामा में सभी पुओं को ऐसे साये में गनूंमा कि पिचित को
मानववा से विमुख नहीं होप। ये पोरगर की भांति पपने पिता के
बमार पौर हिसक नहीं बर्मेमे । सय प्रपा पावन-मरणों में मपना
मस्तक रसार परने पापको मौरवाम्बित समर्मंगे।"
सुरंग समाप्त हो पानी।
रामा पौर मुपा मुरग के बाहर बड़ी पी। इस बार में राशका
पमूम्म सौन्दर्य-सम्मान मुप रेड पारा । पनमया की पपिनी ट्राय की
हेतम इम की रमा पौर मैनहा समी वो उसकी सुम्ररणा के
परती भी। परीफ भी हमा, महर यह सौष कर वानमान
पुम्मा रेखने मया । पपा पोर मुपा दोनों सीरिया स्तर ही पी। म
उन्हें बहाया पी।
प्रधान सुषाका पाव फितमते शिवनगाराम वस्ती से काम बहा
पर उप सन्निकट पहेगा । मुनता । मारपी। "मुषा । मुझे
तो भगवान ने पापी बनाया है पर प्रति होते हुए अन्धी क्यों गई पा
सम्मुप पानी
पायेन दुख पौर कोष मारे में पपा सम्मुखमा पापा।
परे पति मुन्दर कामीकासी परमपम । परब, बिनत बनावटी।
मरता रहा । मुषाको यह पधा नहीं गया वायोमे दम पहले ही
मगही है विसापा।
एष पार पापी पी पापर परन तासमान में माए दो

[५]
इपयों समर प्यारको सर्प कर मेरे काम में कर रहा या 'रामा
हप्प, रसके पारावत, उसके पुजारी कहाँ बाऐ हो? परा को म,
तेरी सबस्सरी रामा मि-सहाम है, उसे सम्बस से उसे सहारा दो।"
पौर मेरे मन में एक ही पाय पूर रहा था। "रापा पी.
पपी? सिर पर निर्दयी है, कठोर दुए है। ऐसे म्पको इतना या
भभिशाप
पौर में पायमहम रेमाहर भामता ही पा पापा।

दुर्वासा का पहला वरदान
स्टेशन रोड पर स्पित छोट्र-मोटू पोपी की पाम पर मेमा परम
पहने इए एक साधु महाराज ने अपनी माँ बेधी भागार में कहा "क्यों
भाबायचए?
परपार भी पाप का नाम सुनते ही इस तरपनि पसे नाम कपड़े
से मेन पावा।नाकर बोले, 'पे पाए महापादूभपनी
पारस्पाम समामेमा मा "
सात महाराज अपनी चोटी-मोटी मानों को विषिष8 मिष
मिचाने गए सम्मे र म बोमे "बस ! साम-पीमा क्यों हो रहै?
हमने कौन सा अपराब किया परेपार बस, इतमाह पूछा कि बाप
“मरे में कहा प्रपनी जबानबाम तपा नहीं हो सत्त भी
की मेहरबानी से एक भाप में मुंह मोड़पा।"
सरसरी विकरात से हो पठे। मुका तम पयापार
मियर कर बापू बाबा को गेटा- ए मानका बेटा, भाप यहाँ से
महीको मटिका साप नया ग्वारपा r फिरमा सरर पीकी
मोर मुखातिब होर बोला "क्या करें साहस, पेमा दोषों से भी
गए पुरे हो पए काटने पड़े। वको।
पोरगा मगर हिनदिएहते पाने, “एमा पीर त
भूमरम में नहीं देखा। बी वाहन कि पाप कर इसे पसरला
पर ।" मेष मारे उपकी मूर्षे काला माप कर पी की। मा
माम हो रटी भी लेकिन क्या हम पाकिमपना नाम पूपही
कर पाए।
[ ४ ]

[ ५ ]
पार, पिसपिलातीप! पाग-सी सूपौर हमारे महायर मेष
पिए शिवपी केमकी मावि सन्मत्त इम है ये पहर की मतिर्मो में।
पनि ममापेमे, १ कोई मह को इस मूसोप्पासी पारमा यो समान
पूरा कर
सभी बाबा मुना कि एक मरका पीर-पोरे एक मौत पुनमुनाता
पापा-मामामे विस क्षेप में बाबा मम पाये भमान रे
बाबा मुना, विचारा-मामी मक-हरम का पान पा है।
बाबा में पास जाकर पुकारा "बच्चा एपमा।
पमा पी गए । एप बोर कर दिनम सर में मिर मुभए
बोमे कहिए मामा की सबले को क्या पाना है।"
"सानु रो रोग से मूसा है।
"तो किसी होटल में पाइन । यहाँ बहुत याना पड़ा है। पावन से
पर पना?"
"पसा! पैसा 5 में कहा वो पात कापा कार?"
इतना पहनाका रसने बोर से ईसा दिसा प पए और वहां
रफ गए । बार-बार कह रेपे, मनियम भोर कमिसुप।"
तम गमी सच में मरी। भून मोर प्पास के मारे जागा
बीके पेट मे से एक एक हार झेपी प्रमाप मार रहे थे। परलर
पिम्म संसार की सिलेक मापिका मताशार की पुन पादप
ल्सिी पुरती । सर उनै मुनाई पर,-"सापू महारार सापू
महान ।
पापु महाराज में बीधे को मोर देना तो सम । मन में तूफान उस
पौर सोपड़ी में एक गम { रहा मरममा जापाठ मानसा
बही प नहीं मारा ही होते बीमा यही पार मा पोरापारा।
दुरसा बहरी पावता है! ।
मारमा प्रति एम वी मधपए। माम पटे
ए

दुर्वासा का पहला वरदान
स्टेसन रोड पर स्थित घोट-मोटू पोशी की मन पर मेरमा बम
पहने हुए एक साधु महारान ने अपनी गोपू पेसी मागाव में
भता बाप पर पर
सरदार बी बारह का माम मुनते ही इस तरह किये माह पो
से पैस पीकता है । तुनकर बोने, “ऐ साधु महाराज। ।
अपनी
जवान दमाम समायेमा पा
सापू महाराज अपनी छोटी-मोटी मानों को रिपिटक से मिक
मिचाते हुए नम्बे सर मै बोमे "बस ! भास-मीना क्यों हो पा."
हमने कौन सा अपप किया। परे गाईबस इतना ही पूम कि बाप
1
*परे में कहा ई मपनी पमान मगाम नपा नहीं सत्त भी
की मेहरबानी से एक भाप में महतोड़पा।"
सरबार बी रिकपत-से हो उठे। मुसा वन मया । एकानार
शिवा कर सापू पाया गटा-"ऐ पराका बेटा माए यहाँ से
नहीं तो मछिका पारा नसा तारमा ।" फिरपसरवर बी की
पोर मुखातिब होकर बोला, "क्या करें साहर ये साए वो इचों भी
गए गुबरे हो पएकाठे पते ! सबको।
पौर माग समगम दिखाते हुए कामापे, 'एमा पाप इत
भूमग्न में नही रेखा । पी पाहता है कि पाप कर इसे पत्थर बना
। शेष मारे उनकी पूर्व सपा नृत्य कर पी पी पति
माम दो पी पी मेसिन पपा एस्म मा किमपना माप पूरा मही
पर पाए?
[४]

[५]
रोपहर, विसरिताती दुप । प्राम-सी सू पार हमारे महायन
पिए शिवजी के मकी माठि उग्मत्त पूम ऐ पे सहर की गलियों में।
बीम समा रहे है कोई भत्तपो इस भूची-प्यासी पारमा मोसमास
वमा बाग मे सुना कि एक माका धीरे-धीरे एक मीठ गुनगुनाता
माया-मा पाने पिस मेप में बाबा मिल पाये भगवान रे
बारा सुना विधाय-प्रादमी मतपय का पान परता है।
बारा के पास पाकर पुकारा "बन्ना ए बना।
बयानी रस पए । हाप गोरकर विनम्र सर में सिर मुकाते हुए
बोमे "कदिए बापा पो इस बगेको क्या मामा है।"
'सापुरो पेग से मूबाई।
'तो किसी होटल में पा'। यहाँ बहुत बाना पड़ा। बागम से
मेकर कबाब तक।
पर पैसा -
पैसा! पैसा बैंक में मोटो मास बैंकाक काट?"
पवना ह सरका इन पोर से इसा कि बाबा मैप पए पोर बहा से
र मए । बार-बार कह हे पे कमियुप दोर कमिपुम ."
दम ममी साप में मरी दी। भूम और पास + मारे पापा
को पेट मे परे एक एक हाप सी घमाम मार । पचानक
पिस्म संसार की प्रसिद नईद पापिता मतामंगेशकर की
पुन
रिसी मुबती का सर रम्हे मुनाई पड़ा,-"सापू महायर सापू
सापु महारार में पीपे की पोर देखा तो सन्न । मन में तमाम उठा
पौर पीपीम एक पद मा-पान्तमा सामात पातमा
रही स्प, सी पाग नही पोते ची माफ नही पाप मा मोरा बहा ।
दुर्गामा पर देरी परम्हप्ता है ! ।
प्रौर बारा पर्यात पुर्वासा पी पप गए। मारी परम रार हुए

[१]
उसके समीप पसे। समर में बोने, कहो बेटी।
"महापर भाटा..."
“क्या कहा भाटा " प्रांगों को एकसम बरतते हुए एसा दोये
'इम स्पा ऐरे गैरे सत्तू पोर साधु मंगते है या भिखारी बेटी पर
तुम हमारा पपमान कर पी हो। हम मापको चानने पामे परम
मानी पोपी, महादपि दुर्वासा है। परमाण चाहती हो तो भोगन
फरापोरवातीपाटा तो स्त्रियों के लिए है। हम एवातको बोरकर
मन को मन से बोरते।
"धमा कर पीलिए महापर..."
"समा तो मेरे ।"
सा में अपनी मोसी में सोने का और निकात कर रख दिया
पर कहा, "यह सम्पुमी सोना है। संझ में बन्द का बरेली और
दोन रिन बार बोने पो तो पा संरकमी भी सामी नहीं होगी।
परेरका बनाना हो पायेपा । मे मे बेटी मे फिर पमनाना मो।"
दुर्भाधा । मैन पद कर लिए । उनके सूत्रे होठ प्राए में जैसे
किसी मंत्र का जप करऐहो।
स्त्री मे पपनी पांचों सामने सम्पमारको रेखा दो
पकाप-सी पपई। उसने पपनी मांगों को बार-बार मना कि यह
सण है मा सरप पौर तर उसके प्रपरों पर भाप कोरी नाच ये
पौर उसके दोनों हाप सोने कीरी की पोर बर मये।
"खमा सोना । स्त्री नासापित हो सठी।
"पवना क्या । इस भोती में पया?
उन्होंने अपनी मोनी का मुंह पाप बढ़ापा । भी देना तो उन
परत झोमी सोने की मरी हा पी। यह भाव मिलन होगा।
झटपट ससने दुर्वासा माहारा पार पा लिए । एगि रोरन मरे
सर में चोरेमोरे बोले-बरी हम परे सम्पासी त्यागी योपी, हमें
मामी से पपा काम! हम परिपण मरतो यह पडू की बीम,

पौर हम यदि परमानो यह पतन । इसलिए येटी हम तुमें यह स्वस-बान कर रहे है। तुम सोपोपी कि हम भपना स्मार्प सिद्ध करणे है।महीमही, हम तो जातका कस्पारण कर प्रपमे पिथमे बाम का मायश्चित कर रहे है। ठ पेटी पौर ध्यान से देख मेरी मोर । स्त्री ने अपनी राष्टिासा पर टिका है। उसने प्यान से देखा कि दुश पौड़ी तो मफेर पोरवास कातेका। पह उन्हें बरे ध्यान से बने मनी। "अपमे मग्म में में परमात पेपी पापा विप्पु और महेप मे पर मुझे इस पृषी पर इसलिए मेगा मैं यही पुसियों को सेरा कर रमका पापीर। इतना कह सा महापग ने प्रामा -- 'मा बेटी! या साय सोना मे मा पोर इसके बदसे हमें सिर्फ रो रोटी पौर एक पेटा-मोटा घरमा ।पोंकि परमाझ परमारमा का कहना है कि पेपर से ही इस मप्रेमी में पोगा बसे ही देश सोना गुना हो पायेपा। तू मामामात हो बायेगी।" "म प्रमी ताई। पी रत्साह से पमी गई पर उसके मस्तिष्क में पुर्वासा की सफेद राही मार काले बाम वहम बनकर पूमने ममे । ऐसी रिपिता उसने बहुत ही कम रेती पीरिपात काने पोरसी सफेद । मत पाते ही यह उत्सुपता से हाप बोर कर दोसी-महापर पप पर पमा हो मापके बाल कासे पार पाडी सर यो ?" सीएमई। "पारी दादी ।" मिा जी रिमित हो उठे। ग्नक रोनों हाप यंत्र की भांति वारवार की पर माने ममे । घिसिमाते हुए बोने- "मा हरामी मामी भी तो देवतार्यों का प्रमिपाप है। विपण मम पान मे मुझे थाप रिया पा-या दोधी वेरी या सफेर ऐपौ। बस सफेर हो गई। पर ये बात प्रातिका निरोप नही कर सके। अपने नामों को सफेद र सरता है पर पतामों का पाप मी तोपरान होता । समिए है।" स्त्री निवास को इससे प्रारपा नही मिसी। हर मा ने

[८]
मकाकर पीवम प्रताप कला प्रारम्भ किया।
-पार से देसि साम पाने पार कोवापर में मेरा बग्म हुपा पाने
मापि पूर्णता का प्रावार पापा बेटी।
दुर्गासापम पर गांव में सनसनी फैल गई मोंकि तारों
चम्म पर मनसनी पैदा होती ही है। पतति का बम्म एकमाणको
पंजमी से इमा, वो इस्मा। महामुनि परस्य का पोरे 8 माहाराम
हवा का नाम मनुनी के पेट से सर्वात प्रारमी के पेट से। मतनामा
मी धोका पौर समाबो टपरे । तो ये नन बम ते
धारे माग में हमषन मर गई मारपर्य ही क्या? फिर में पायो
अपवार दीपा घोप काम-वेचा पाचोर पर उन पर की मोर
सापेन पाऐ पे । भोर में एक ही सम पूंज पहा पापित
शिपिष....निषित महाधिषित ।
उनके परमाने मपार बम-समूहमा । मापस में कालानी का
पागार पर्म पा। पीर पापस में बातचीत कर पीनी।
ऐसा पन्ना पार पक पैरा मही हा?"
" मा बसी।"
साप तो नहीं।
पोरस पास पठा।
"माहीमा पमेती, किसाप नहींना पर बाराम
पराहोबावा
भीर रस पनर्मम प्रमाप से गासा ऋपि पिवानी परेसान हो
है। पहस्ति रिसपी पुषान पगते ? तारा गनि गरि ठाकुर
कोबरायपुर वाहन ऐकारिम्स के साप पारे। उनके पाठे
और दिन-भिन हो गई। प्रहर में मारता कहा- 'मेरे स्थान
पेपणा पविक रकर नहीं निपा।
"माधाकुर साप मेरे तो होती में माका हमा है।"
"अमीराप्रपमी तपस्या को निष्पत हरी सबमा एक बार

.
[ ११ ]
में पहर मया था यहाँ गरटरों में ऐसे पम्पों को पीछे के बर्तनों में
समाकर रखा है।"
हेरात मेरे माम की रक्षा कला। छोटी-सी पान मध
पोसने के मुख पर गहन अनी सपती"
मास्तर में भपयाम मे रसड़ी प्रार्थना मुन मी । दुर्वासा मरे महीं।
मरने भी से ? भरगान के पाप से ही तो पैदा हुए थे। बड़ी मुषकी
बो नई बात थी, यह नौ दिन ही भार बह मषिक उने पार किया
एनिमदो सीप ही निप्पे पार पाड़ी ही बढ़ी। बात
माई पर हो ।
महापंडित पोपकानन्द की मापकरण के दिन फोरम में फसे पहिसे
की 'वपा गए कि मामकरण का पूरा समा रपया ही मी या
पार पाने महीं।
"भकिन हमारे पुरषों की रीति सवा पांच माने की ही है।" रनके
पिता भमौरपदी मे मील पेणकी।
'महिम पापो पूर्णगों के पंप होवे ही राड़ी-मूथ नहीं निकली
पी।" पोपहानमपीभपने पामे को मारु परमाते हुए बोसे यह बारह
प्राने तीन से माफी की भूष का रैक्स है।"
मपीरप मेप में पागदा रठे-"मार में पाप इसकी राशी भूप,
पर से पैरामा है सबसे बर्गही वर्षा।
मन्द में पोपागदपी की सबा रपया देना ही पड़ा। पीपडानन्दको
रोपार मंत्र का बाप करके कहा- 'नार र मसर से प्रारम्प
होना चाहिए।"
भगीरप मे तुरत पहा-"पदास।"
"मही महीप्रसार।"
'घि पि पर कोई नाम है सरास, रमी प्रमार, रोगा-
मास ! मार तो होना चाहिए पुर्वासा। रेत नहीं है पाप कि
श्रीमान भी धर्म से हो जी मेरमा है। यह प्रकरण मपनी

[.]
भी मांगनीका पा!
पोपडानन्दपी भी मपनी स्मोतिरेरी।
मी एक मरवट छोकरा काम-नाम र प्रबर पर होगा
चाहिये । हो तब महमाम बाव ठीकएंगा-पानी मामा मुम्ना ।
पौरपास पास सभी विस्मा डे-नाड़ी पाना मुम्मा
दादी मामा मुम्ला । मी तालियों से सारा पर पठा।
या सुनावे-मुलाये पुर्वासा बी ने सिगरेट की मारी।विगरेट का
पुमा पासमान की पोर उपाछे हए उमामि से पुराना पुरु
किपा-दुर्गासा कहने समे। सम से पर वे विधाम्पयन करके भाटते
पर बन्ने पमह-वाह पर साड़ी वामा मुन्ना महारविदाये। करने
पार्ज सरम ना तीचा बम होता पा कि कभी-कमा पुसिाप
में विसमिमा उठो पे मार रमों को परबर बन जाने का पाप ने को
मार हो पाते पेमकिन फिर पे मिप्यु भगवान भय से अपना प्रणा
बरस मेवे पाहा कमी-कमीवे मारपीट कर मवे में विससे पतको
स्वप्न में उन्हें बह्मा पिप्पु पार महेस हायवे कहते -भरे, परतो
प्रोन को पान दो महीनो मे मृत्यु-चौक मीमा में पना
परेमा पोरोपान्त हो पाते थे । मघको कार देना चाहते
में मेशिन र यह पा कि पाप के कारस पत्तन र यह मान-सी
मुमायम ही कहीं उस्तरे के स्पर्प से पास की पदमनमी वो
मही-नहीं, या प्रमुपात परान ही पार।।
पर एक रिन पपामा पसिा के कानों में सुनाई पड़ा रियमों में
एक पिता भी उनी पड़ी पर बना मी बरेबरम कर
तामिया बगाने पे पौर माने भगे--
मुन्ना बाड़ी वामा प्यारा
मपठाबह सबसे म्पारा
कोनोमी पारी इससे
हेपाह प्रायम्म पाए
.

[१]
उस पाप्त को इस हए सकरपुरासा ऋपि बोले-तुम हंस
ही हो बेटी ? तुम भी सोचती होगी कि अब महपि धाप तो नहीं रे
सकते इमलिए मुझे भी हसना पाहिए । सो दूब बोर से हसो
बेटी । पर में पूष ? पुर्वासा पीपाद का पन्त किये बिना ही योमे।
हमा एक मिसाप ? पर -।
"पर !" बौक पो पुर्वासा पी
"गात या पियह मिस पार है। प्राप पीना चाहे तो में
भाऊँ?
"बसी महकीमी । वो पितामोगी, पी में हम संतोपी है।"
को
से पूट-फूट उवारते हुए दुर्वासा भी न बोसे-
'पर ही नामा मुग्ला दक्षिका पा पाप पा। किवने ही सोच
उसने हीरामन तोते की तरह रट सिए पे। फिर क्या पा उसकी इग्मत
सारे पार में होने मपी?
एक ऐर उन्हें स्मण में मपपान ने मानापरी-"कृषिराम कुरा
पन की पो मुमा बेटी है म, मह कर में वापसी सम्बी, इसलिए
पाकर माप उसमिए उषित बरमाइए।
तुर्मासा पीताके ही ठाकुर के पर पी मोर पसे। उस समय
उनकी उस पठाए सामीवी।
यार की सुमाया वास्तव में बहुत ही मम्मी पी। इतनी समी
विवना वार का ग पोर उसकी दासी बनी मोटी निवनी रोस ।
धर्माता पी सी बनाना बाप में पहुंचे। सपान सौरम से मरा हपापा।
पराम के करप बीवन में उम्सास भर रहे थे। ग्ने देखते ही मुहम्पा
पति पीत से नतमस्तक होकर बोसी-'नमस्कार।" ऐसा मान्म पहा
कि भपगार मे उसे मी स्वप्न में कह दिया हो रिक्त तुम्हारे यहाँ
मुनियों ने मुनि, पापियों के स्वामी दुर्वासा पी पपार हे ।।
पुसा पी मे हाच रठाकर पाशररिया-स्याण हो देवी
कस्पारा हो, मन की प्राण पूरी हो।

[..]
कीमा पमी कामा।
पोपमानरबी मी मपनी स्वीकृति दी।
तभी एक मरबाट धोकप कह उठा-नाम पसर पर होना
भाीये। हा वर या नाम ही रहेमाही पाना मुम्मा
पौर पास पासबो समीपने पिता काही पावा मुना
सही पाता मुम्ना । रमी शानियों से सायर मूब उठा।
कपा मुनावे-मुमाते पुर्वासा की सिवरेट की मानकर विमटका
दुर्गा प्रासमाम की मोर गाते हुए उन्होंने ये मै पुमकामा सुरु
किया-"ता कहने सपे। हम से घर से विधाम्पबन कर मौते
पब मन्ने बह-माया परने दादी मामा मुमा पाकर पिलाये। कहने
मामी सर में इतना वीजा यहोवा बाकि कभी-कभी दुईसा मेर
मैं विममिमा वळते पे पार मन्त्रों को पावरबा पामे का पाप ने को
तेपार हो पावे पे मेमि फिर से विषयु मपमान रे मन से अपनायरा
परन मेवे पेहमी-कभी ये मारपीट करने के नियमे पव को
सम में सम्मा पिपा पार महेस डौटते पेपर पे-परे, मग तो
गोषको रमाप से नही तो तुझे मृत्यु-मोक के ईभी-पाक में राना
पोमा पोर पाप हो भाते थे। दादी मधो कार देना चाहते
२, मेकिन रममा किसाप के कारण समग मायन-सी
मुमामम रहो कहीं उस्तरे के सर से बास की वएमे सनी को
नहीं-नहीं पद प्रापरत परत ही भेयार।
पर एक दिन मनानक दुर्वासा के कानों में दुमाई.पहारों में
एक कपिता भी उनी पड़ी पर बना मौनतम र
पासिया बगाने सोपोर माने बरे-
मुम्मा मी गामा प्पा
समाह सबसे पाय
कौन कमी पावसे
nanमारा

[१] नसभाखको हप देखकर एसा हदि दोने-म हंस ए हो बेटी ! तुम भी सोचती होगी कि प्रब महपि साप सो इमलिए मुम भी इसना पाहिए । सो दूर मोर से सो बेटी | परमेंदूम है !"युधियी त काम किये बिना ही गोने । "मा एक विमास १ पर. ।" "पर कि पी दुर्गामा भी बात पाहि मिस्क पाहार। पाप पीना चाहे तो स पाळी “सी भलीमी। बो पितापोगी पीये हम सतोपो।" रको हनक से दूर नवासे हुए दुपसा जो पुन बोम- "पर दादी दाता मुन्ना विराममा कुमार पार किसन ही मोष पसने हीरामन तोते दीपए रट लिए थे। फिर था या नमुशीरा सारे पौर में रोने सपी? एपेर उन्हें स्वप्न में भगवान से पाला दी"रार र- इल की मो सुपादेटी है म, बहाद में मारपब सी समीर बाकर पाप रसलिए उदित परमाए । मा मी काही सदर परी और बाल रसी सरपटाए सामपीपी। यार की मुकम्मा पास्तर में गाव ही मी मिमा बासस पोर मामी नी मर्टी fret , दुर्गमा बोसोदे नालाराम में पापा उपास मre. पएम एबीवन में उम्माम पर पे। पति पौल है ना मानोरासीमा कि मान + उम्र मी सण दिartner मुनियों मुनि, त्पादियों की दुनिmil पुमा गौरेहप रयार-for-wrf सम्पानीमामा पूरी

[ २ ]
'पापकार?" उस दुक पर माया बी में अपनी
पुष हुमा किसे प्रवेसण में एबम्ही कहा है।
में पूर्णता अपि है सुकम्पा। इसनी सम्बी है कि तुओं पर
निक्षमा प्रयन्त मर है।
"मापकौन ?" एप्सने पुनोसर में मा।
वैप पर वो बाब का नारियल का पैर होना चाहिए पररा
इमारे सा मष्टसिधि पाबा साम । पम्पमा तुमारा उदार प्रस
-
पामे
"पाप पायस है।" ने ऐप में पुरा । वपकी रिमाय
मनापटी पुतलियों में स्फतिव से मार
उठे
'पापन ! मुखमा । पारर्य सम्पति का समय पाकर मी हो
पाठा पापामारी हिमपाप गर । एवामी ने
पासका कोमम कर पा लिया।
पर बी! यह संसार प्रम-बान में राहुपा है। मापा और मैं
का मामेभर की पहचान नहीं !स सुबमा रियर
हारपाने हाप को मुकराने के लिए जिम्माने आपापम
लिया । पुर्वाधापी में पिारमठेत पाहे ये मी पर्दे
परपर बनाने को पाठ पे कि विपापी पाप ने मरणो
उमादत्रात प्राण वा हेतु मारे। भार मानूम हुआ कि
के पास में कदम रखते ही गडर से मापार में गम पा ससिर
देसी पोर महामोटे।
तपुडा बाद में मार-मार परसमामा पापोई
मच पुरता हो हम प्रदीप प्रपाकात हो
रटी!माईमहार?
"महापन, या मेण्पना सपाकाहारt"मेर

[५] महात्मा पी को दिया। महात्मा पी से मोती में गमते हुए कहने नगे- 'पब हम भोजन नहीं करेंगे । ठीक तीसरे दिन सन्क पोसना, पोएम पिन हरे सिब हरे !" पौर दुर्वासा भी अपनी सफेर किन्तु कोमन वाही पर हाय फेणे हुए भिवती के साई की तरह मस्ती की पाम में धन पो ऋषि-मुनियों की पप्पाम भूमि पर पौरमा भारतीय ममना पदा से प्रमिभूत होकर पीधे से हाप पोड़ दी थी।

ܐ
भादिश्यत
कहानी की समस्या मयसी पास
मेरी कहानी की नापिका एक बार में सी महसी ममी भी
ऐमी को अपनी चतुराईरस सर्व पात में पर्यापारमा पान
एक प्रत्यन्त प्राति के ममेरे बारा मा यमा पापोर या
मोरा? इम्साम प में पूरा प्रवान, मार्गको अपने पार की पूची
समझने वाला। यही मधेश नारी कोमम मासको दुते की वप
मोष रस बना देता है। प्रकृति का इष्ट पौर समान का निप्पुर
है मधे। यह मछली को पानी से निकाल निकायकर पाता।
फिर शानी को विभिन पाती है। मपनी मावीको
मधेरा हसता है। मदनी पर मोमुपों से पपने पांचम को भिगोती है
तो मध्य अपने एमे को मुरा है हर किया करता है। जीवन से पस्त
होकर मममी पर मेरमा पसौम सीमा पर पहुंचकर कम्म पोलार
करतीta ममेण तापमादीका महासर उठे परमात्मा करने
+सिए प्रेरित करता है।
मयसी, रप और भसामुरा पति
फौरन में संप्पा के बारे होणे प्राधेरै पर भगर र सम्मा
निभापपरी । रसपी माय मुजीपी निससे साफबाहिर होपापा
हिपहपुपर पातेपी पर हर ईमी। इसमे अपने कमरे पर
सरसरी हड़ी पोर रसकी टि एक पुपने सिर पर पाकर
या। बद विष सरोज का पापोपी प्रत्र में साउरिवारमहा
पापा। हाद उसमे ऐपषी । रोपनी जयपरामारी हो
रसिये यह मपने माप पर मुममा धर्म "भार हो हे मैति

ठिकाने नहीं है। मन उसका रसड़ा सा है। कोई भी काम रम से नहीं
होता।"
पसमा सोचते-सोचते रसने हरी बत्ती गुमाकर सफेद रोधमी की।
कमरा पममपा रहा। तस्वीर साफ रिसनाई पर पई। मा पुष भए
तक एस तस्वीर को पर्यमरी सृष्टि से देखती पो और फिर सोफे पर
मेहकर स्वेटर गुमने मगी।
रीवार पर पड़ी की टिक-टिक कमरे की निस्तम्भता में साफ सुनाई
पर यही पी। कापस पो पाह मी पोरती थी यह भी कमरे में महसूस
हो पाती दी।
पड़ी मेरस बनाये।
महक उठी-स।
फिर प्पान से एसपी को रेखा वास्तव में बस ही बने हैं।
उसके हाप पब भी स्लेटर युनने में व्यस्त थे। उसमे बनीठे दी
पुजारा-'काका
एक पस्सी सान पाएका गिसके सिर पर सफेर पास पास की तरह
पौर स्वे पे रिसने बिना माह की कमीर पर कामा मट-मैमा
कोट पहन रखा निषकी पोती पर दान-सम्मी के रंग बिरंगे राम
ममे हुए पापा पार अपनी प्ठोर पाबान में बोला-क्या बेटा।"
"पामा पपा बना पे हो?
'यो तुम कहो।"
“प्रभी मेरे पहने का ही तयार कर ऐसे। परे काका ।"
'रस बन बयेरवाना परेपा र पाठेगी।
तभी दरपागा परवाने की पावार प्राई।
"यो काम कौन है'
पापा बनने को तैयार हमा कि कीमत में उसे रोका-कोई
ऐरा-मेरा हो उसे नहीं पत देना हरेना मेम साहा बाहर गई
हर दो रोग बार मामी।
कापस भीरे से नठार पुमतयाने में
m

[
पिपपई।
काका ने मापारी- 'मेम साहस, भोपान बा।
'पाइये । पुसमचाने से भावारती हुई कोयम निस्सी।
पेहरे पर ली मुसाव पी। पोपापविमकुम समीप पातीरा
बोमी-पापक बिना म साना भी नहीं पा सकती।"
“ी ? भोपाम ने कापस पहरे पर मिलाई समाते हुए कहा।
उसके स्वर मौरष्टि से विस्मय र ठा।
"माई, माप या माये पापको क्या पसन्द होमा सा मुझे क्या
पता? कौसम पुन सोफे पर ठ। पोपान मी कोट स्वारर
सामने सोपे पर बैठ गया ।
"मेरे स्वभाव की सबसे बी विपदा मार सेवा भी
पाना मिस पाप करने सहर्ष सीधर कर सेवा समतोमा
कि मुझे हर किस्म का साना पसन है।"
रिमी सम्बी"
"परिमान, बो भी मिम पाप हो मम्मा !"
" काका दास बना मो" योपाधी मोर जम्मुप होकर कारत
मे फिर पूधाम मापको परर की सभी सपनीमा मुसको?"
"हरिपान तिकी भी हो। सागों को स्वारसा
कौसम मुस्करापो और मोती रात मुप को बना मेमा पार हो
पापहरे पाना । पीपासमी, पाप बिना जाना नहीं था।
नही होगा तोना ही पहेमा ।" पोपामा गम्मिा।
"परे, ममी पाता। पीपालबार । गुर्ग पोरे दी हो गया
है।" पपान का मे अपने दोनों वायुपी की रेमा ।
काबा वा हा बाहर पमा पपा। कौशन पौरोपात के
बेहरे पर की-सी विनोषपूर्ण मुसल पिक उठी।
सतराने पार मोपाय कोयल को पता
पार कक्षामा पोएमा और पाय पसी की। होठ भी सके

[0] रेमी पेपर महिं पर पनपाकार नहीं पी। में पता। मोपान मे मिस्तस्मता में अपनी पावार से मनार पत्तप्त कर दी। “कहाँ ?' कोपस पाप पड़ी। "मस्ते!' उसने उसकी पोर बिना ही कहा । बमो? "पमा, यह कहा की सम्पता है कि मैं उस्तू की तरह मुपचुप बैठा रए और तुम स्टर युनने में म्पत हो।" कोपम का स्वेटर बुनना पारीहा। उसने तनिक निमाहे उठाकर गोपाल की पोर था- में बात के तारतम्प को नहीं तोड़ती है।को तुम पूछते हो उसका बराबर उत्तर रेती पाती है।" मम तरह बात करत का पारी नहीं है। मैं बात करते तर पत्त को भी पनिवार्य सममहाडिमा करने वालों की पात पापस मे पार होती ऐं।" पोरामसर में निर्मीता पी। "मा पार होती है। कोयम भासर विस्तृत ममीर हो गया। स्वेटर पर बनने वाली प्रमुनियो पन पररे लिए सपई। गुनियों के पकने में गोपामगरे पर नातिमा भी इसी रखा और गई। "पौर पर्सि बारम होतो? कौरतसर में एक ऐसा प्रश्न पानी भोपान को मैमिया को मामोर पहा पा। इसमें पोपास की बेतमा कार ठी। मे मिटाता हपा बोता "हो मा पार हमसे पाने बारमो ही करेंगी। रसरसर में प्रेम की पपह उपहास अधिक पा हाकि पिपप अनाग्मुत म हो। तभी बीच में पामे पार कौन से पहा-"पेम साहब पाप नही मिमे ममी एमन बन्द हो पर इतना कहकाराने मपनी पर्दन परसपी की पए मुगा दी। कौम मे सरार स्वर मेर- “तुम्हें तीस शाम हो पर है मेरे यह काम करते मेदिन पीर पर भी तुमसे मौरावापो पैसा हो परको 1 ! +-- । पोर भूमकर पर पूर्ववत स्वर में पण मार लम्बाईमा समिम्मणपणे बोली-"मेरे पे मौकर वित्त ममगाराम है। मनोपरा स्वामी मतिका पार्ट पर करत है वर्ना यह सारा पर नुटारे। यह तो पर- पर में नृत्य या मारा के प्रापोवन में बार बाती हूँ दो पपने सामान वाता लगा कर पाती हूँ सब कहती ई इम मौकरों से में दम है।" दोनों एप हो गये। कमरे में पतीकी टिक-टिप फिर सुनाई परमे मनी । काका मे मोठी बना मी पी जिससे दुरी गर उस कमरे में पमा मा हा पा यहाँ ये दोनों बैठे हुए थे। पोपात का दम पुटमे समा । उसने अपरिचित पी मोति पूष्पा- 'यह पुरी कहाँ से पाताt" कोपस भस्मा पड़ो- परे काका जप हमीर रखाको रेप मही हे हो कि हो भने पारमीठे।" 'तो क्या हुमा कामे पारमय से पूमा। “पोहसब पोपास ! मैं तो इससे परेशान हो गई है। प्रांत मन्मे तो नहीं हो। यह पुरी दुहें रिहताई मही रेहा है।" ह!" से नार में सोते-सोते सपा हो, उस तहकारा बौरा पार पमरे से बाहर निकम पर उसने पारणामा बन्द कर रिया जिससे पुणे पा पाया। "पब तुम बलामो हि पारमी पही वाठे । प्राविर दुममाहट मा बापी। इसकमरतको बरामी पाचही। दिमाम पाट पाट" होगमरे पहरे पर कोप की हरकी रेपा "तुम्हारी तादीर ही कुछ ऐसी रिपो मिलता है पर पूरा पर पर।" उसके सर में सहानुभूतिपूर्ण म्पर पा। हो वास्तव में मेरी हरधर इतनी पर है। मुझे कभी भी एक परमिएन नहीं मिलता पीवन पीसता परमगुग पागार्य प्यासी पुषसमीर ही ऐसी है।"

[१]
"पर में तुम्हें अंग मा मी तो सकता से माप कर पाया
उसके सर में मही उपहास वा यो नवपरिचित प्र यति की प्रपन
पप का प्रेम प्रकट करते समय होता है मिसस मह उसकेमारास होन
पमा कह सके कि रमजाक कर रहा था।
'परे बारे पा मापे है मुझ पम देने बामे ।
'पपों, क्या तुम्हें मरा भरोसा नहीं ? —ष पम्मीर होकर
योपास बोला।
'मरोसा मुझे किसी का मी मरोमा महीं। पौधत होठों पर
मनीबसी
'मुस्तान
पी।
"क्यों । गोपालपी पनि विस्मय से फर गई।
'मारे मरं ए दूमर के पह-यह होत है।
"सारे म।
हो-हो ! सारे मर्द ॥
"माप परा होप में पाकर कीपा समामा पीमिए। --गोपाम
विस्पुन सम्भोर हो गया।
'म बहुव होश में । म का दूसरा नाम ही हम है भूल है।
मेम माहब ! शाप को पांचों प्रमृमियो एक-सी होती है ?"
मफिर सारे मर भी एा मे नही हो । पमो पौर मुरे सभी प्राप
को मिममे। प्राप में पौन मे भवमुग्ण नहीं है।"
'मेरी बात तो गाने रोगिए, लेग्नि में सपाली सरोष बाम
मेरे भीरम का मार कर दिया ।" उसले स्वर मा पा गान्त हो
मपा । इसी पहरी मामी पोपों में अपना मी पमरी । पपनी हटि को
गोपाम पर पमाती हुई पह पानी-पाप नहीं मानने हि मरोग बापू
में मेरे माप रितना बर्बर नगरिया है।म दिमपो एसनो बनाकर
रग दिया। एक (न्मान सपना पीना हो माना है मा मुभ सण
भी में भी पास न पा । प्रारपिताम नही मिनी दुनी

--
-
।म्पया मेरी मस-नस में समा पा है। सच कहती है-इस रिमपी
से पराभूबसूरत औरत की मी तस्वीर में है। स्वर में
नहीं पायेग पा पार पस पायेग के साप ममताइट भी।
'फिर मेम साहेब पाप उस मादमी के साप पती ही पर्यों ?
दुख पीग यातना पसंताप है फिर सम्पप कैसा । यह पति और माप
पत्मीपसी
यह नाटक है। पाविर में का भी सपा ? म बिमा नारी
रोकौड़ी की होती है इसपिए म पर साब अपने सपनायकोरवती
सोम सममें कि इस पोरल में भी अपना मता पुरा एक पति है
पारी एमटा नहीं पागात नहीं है।
'तो पापने मरोरबाको मोट समम एपा है ?"
'पौर क्या।'
मत्सर?'
"मादमी को पुत्ते केस में रेया है एक भयंकर पत्ते केस में ?
यह सरोरवरी मकर सत्ता है जो सीधे सारे-मोपे माम मनुष्या को
पचानक काट पाता है और उसका जहर सम रोम गम में पीरा एक
ऐमी मसाप प्रेरना असा करता है रिमे समकी अनुभूति मदन नहीं
कर सरती। यदि रम पहरो रोम्मागही उपचारमपिया गाए,
तो वह मनुष्य मी मृत्युका कारण बन साता पवा उममा तना
सदरलार प्रसर होता है कि नम म्पत्ति के माम मन पिसा मीन
पी तरहराम हो जाते हैं । इमी तर मरे बीवन पी भयपर भूतों
का लिप मरे मून में पानी पीसप मिनापौर उसने मरी
मुगियों को पतमा परबस बना रिपा है कि प्राने गोमरोग बार
रिला प्रपंप पाती है। जैसे मुझे मालूम होता है कि उसके लिा मेग
कोई अस्तित्व नहीं है। सम माप मे दुर राने में मुझे पारों पोर का
वापरए पिपल गाल परवा है।गमार की प्रादेक प्रदीप पुरे
अपने पर हुई पिशमना मी प्रतीत होती है।कन का तात्पर्य यह है कि
-

[१]
मेरगीवन मुन पद पण प्रतिषम्म के घुटनपार पारर्तन भय से
सिहरने सकते हैं तब मरा मन पमगोर पर बाता है, पार सब सोग
मुझ पुर्वम पहने है । मैं भी स्पीरार करती हैं कि में न
है यह भी समझती है कि मेरे जीवन तो का परत है। मेरी
मृत्यु उस पानी की तापनी मृत्यु होमी गिरामी मनुष्य प्रारक्षिाएँ
उसमी बास पाप्रामानी म नियमने मही देती। मगातार बोमन रहने
से उनका दम पूमन सया। पापोंसाया पर मरममा पमर उठी।
जमे रमके भयम मेरमा मी पान के शिमोरों परम गाना चाहते
हो । म प्र में एकामा सम्पन पा । गोपान ग्मती पोर पाप
बाममी मानि पिम्मय मरी राष्टिमयता रहा। नमो नहर पा
सपप बरसी पहरी रेषा उमा अन्तर की बेरमा मापार कर
ही भो।
जर पर रिकम प्रावस्त हो गई तो बोला- मग मर मिर म
दर्द होने मगा। मुम्म परास्त पारि। पर पार या मरते हैं।"
गोपाप उग। उसरा मस्तिष्क भारी पा विचाराकी उपर पस
उसी मस्तिर में पपीईबी। यह बाहोपना चाहता पा पर एक
मही पा । मापार हो पमना बना-पीरे-धीरे बिना भोग्न हिरा ही।
जहर, मागे प्रोर सापारी
रिमी पनि मे महानि किमी पोयम रह रह
परमा मतापी । मताने मे पाया कि सिपी गपापौर पर मार
हो। गोगन पह मात्र ही पापा दिल ने पुराग - 'गोपाम!"
श्री. मंग पर मेटे-मेटी।गयरे गापुर शिपियों मग
एम पर पापी दुर्ग मागम नी मामा महरा गिरी
है। सीमा परी पा उमा पेपरम भर गिर ग्य
पारिप मीना पनि कामी ई पापी मामी पाने काम
हरामारना है।
विपनारा बोगम ! बिना में राट मा

[ २ ]
रेती।
परिणाम यही होता है। इसलिए मनुष्य को अपनी पानी की निममी
को देखना चाहिए। पानी गिम्दगी का पहास करती है पर गिरपी
भविष्य की मुन्दर परिधि का निर्माण करती है। सुनीता को यह विश्वास
पा कि मेरे रितने भी अपने जीवन भर मपमे ही बने रहेंगे पर
पह यह नहीं गामनी स्पिनी के युग में इन्सान ना पतित हो पुका
है कि यदि सपका बस बने तो यह मनुष्प की चमड़ी से निर्मित एमई
बसु का प्राविष्कार कर । उसके दून से पिसी पेय पदार्म की नवीन
बीपसा कर किनारा निया में बोलता
है। सुनीवा गार हो जाती जो पी साध में की पड़ जाते कीड़ों
से उत्पम दुर्मम उमकी माय को पतामोनापा सपनाही होने
मर गई दो उसका पाए हो पप"-गोपालपी प्रोतों
मैक्टु-पपा पेप बन कर पमा उठा।
'भपाण स्पा मम्वे हो भोपाम ! पिसी में गान गाय और तुमें
पापरबानी मुझे।
तुम सानिमत से गिरते पाए हो?"
की पायरों में मुस्से के साप पोग पानी भी दीव पड़ा।
मन्मानिपत से पिरता है या नहीं पर सुनौता ने पो भी पिया
पन्याही पिया । उमने पार रिटने मौके से पाया है।बह अपनी इस
मम्मी बीमारी में पान पई पौकिसिा में मार उसकेस में हम
नही पटाया। किसी ने उसी के लिए एक पैमा भी रपार मही
रिया । यह गाम पर सब सारे पुराने है। मरे के सामी ६ मेगिन
दुसरा संपीरिता ही मिलता है। इसलिए पसमें अपनी बीमारी की
भपानता बारे में मोरकर पात से बने के लिए या निर्णय
मिा होपा-ममी वो मुझे बनाये जागर मेरे पास है मेरी
मिट्टी पराब हो हम पहले पुमें नर पाना चाहिए। इसलिए या
माई।"
मप कौरप भी होगा पोरान सीमोर विमिर
रंग पी पी मे उमरी बिर ष्टि में उसके पठारपन की पारी

. ? परमर मई [1] पिकायत हो । सने निरम हो मपमे रखे-सूपे गाँव-बानों में मंगुलियो सनई पी में पहरे को रेता पौर सहमती हुई मानुगसा मे भीरे है कह उठी-"मुनीता रा गोरा परम मीता हो गया पाम "दो बार कारण ।" मोपास नीरस शानिए दी तय उत्तर पहा पा। "होटों पर पपड़ी-सी भी बम पी पी म? पोपान | नुमने दो से कि उसके होंठ पिसने प्यारे पे।" कोषमपी प्रागान मे मागुम्वा भी बेदना पी ताप दी। वह उसके बेहरे पर पुन पार्व गमाती हो मोती-'पौर हो रहसती पी पो कितनी पन्धी ममती पी रत मी उमफे मोतियों से सफेद पोर पमपगार पेम गोपाम ! पर यह मोनठी वो बी पाहता पा कि यह बोमती ही होगा मुनीता मर गई उसने पहर तामिया मारमात्मा कर मी 1" कौराम में इस प्रकार बीकार किया से उसके हय में दुग का बोच रुका पाया और समय के साप पपनी पूर्व पनि सए पहा हो। 'संसार को यह परम्परा है कि मनुष्य मरने वाले प्रति इतमा सहरमी बन गया है कि उसकी ममस्त दुराइयां प्रग्याइयां वीराने मम पाती है।" पोपास मम्भीरता से गोमा। "नाही मोपाम नहीं वह मास्तर में बहुत पछी नाकी पी उसने की पिसी का दिल नहीं पाया।" कोपम में अपने पांमुपों को पाया। मोरात, गाव का म्प बरमते हुए सा-"प्रामामौशप में प्रय बसा मुमे बिस्तर बाप कर पारही दिस्मी घोर देना है। पाहमा पार भूटी पर रपे कपो ठीक करने ममा। पौषप उसके पास पाकर ममुमप से बोसी-यदि तुम पार नही मानो तो ?" 'मुझ पाना ही पापा नौकर दो मेरो प्रस्पेर एमा स्वामी के पापीम है मुझे गाना ही पड़ेगा।" पोपाम माने काम में प्यास पा। पार उसे रिस्मी पाये एकता हो हा पा। इस हमले में उसने पहठ [] मारकमा पनिनेत्रीय नतिका कायापीयन के पया-पमा पम्प पसे किया उसे गस्वमपो ममममे मयाामा सो मिनय से सना ही बाम पाया कि मामारी है जिसके सरव के सप्प से परिचित होने के सिए स्प रिमामु को पवनपीम बनना पड़ता है। कोपम उसके मित्र सरोग की नाम-भाष पी पली, साई पामत बाहर तो पनु पित नही होगा। पानवर इसलिए किदो रोटी दुपयों पर अपने मासपूर्ण बीबम को मिटा है व बीपन को मिस पीपन का लेक पर सांस की वरह परम्प है। गोपाम सती प्रत रिस्सी से रवाना हो गया। गारी परम के पांच मिनट पूष उसने फौधन की पाबों में एक मयदेला पाताप वसी पी। सुम्पर युवती, ममानक मौत मुनीता "उसफा पौर-सा मुरा "वम पारेठ "वह परमाई कोपम उपरकर प्रपमे बिस्तर पर सपोरेसमार पर म्वर-करण समर पाये। सारा परीर पमीमा पमीमा हो गया। पपमे पारम से अपना पसीना पोधी हुए उसने सोचा- 'इवती मुखर पुरती दीदवती भयानक मोठ ऐसा क्यों। एक सप्ताह में तमा परि पतन! मरिन गौ ? सिए कि मुनीता पापना कोई माँ है।वो सहो यमुना तो है उसरा प्रयासमा माई र भाई रासीका मार मही रपी।विल्मा एपीन होकर उसने मुनीताको उत्तर दिया पाकिमसी गुमटा एप को एमेगा ही सिका परिष पाप की साधी वापीर है। बहस मतीमार परे। पार मुनीता मे पहर बानिया भर । ! दीपसरे मस्तिष में यह पम पनित्यतिममित होले नानिय पए पुन उसके सनाट र समर मायापार पी-मुनौता!" H

[ ७५ ]
काका मे पार पूषा-क्या बात है मेम साहिब!"
पानी।"
कासा ने दीरकर पानी पिलाया। पोसन कुन पासात हुरैरामी
सपिये में अपनी गर्दन छिपायरीसम मे पर अपने पाप पर तिारा।
उसका भी तो इस संसार में सब एप होते हुए कोई भी नहीं है।
परिचमका भी प्रस्त ? या सरोर को कोसने मगी । मही-मही गंदी
गंदी पामिया निकातन भगी । मपने हाय का पालोश निकामगर रमने
अपने पापको समाध्यिा ।
पूर्णमासी रम्सी पोर फन
पृमणमासी की उग्गयम रात भी। यम-नसे बम् भीम पमन में बड़
पापा से-पैसे कोयम का पायेग उग्र होता जा पा पा। मी-कमी
पहरणमासी की फली हुई पावना को देशभर प्रवीठीमपुर स्मृतिर्पो
में पी गाती पी। माया समगी निमाड़ पता रम्मी पर पड़ी।
काका का नहीं । बह उटी पार उसके पति मे मुनीया हर सौम्पप
पार भपामावा पारिसम गूग ऐप । यद उनै पौर उसन दुमकी
कस्सना में मारातिरेक एवं उम्पादित हार रस्सीको फोका रूप
दिया।
मत निर्जीव मछमी
मेरीपहानी को मामिपा 'पद्यमी' बराबर एक बसहीन ममी के
पो तापजाप कर मिनीर बन पानी है। मरी गुम्पर मारी की
भमान पात्र होती है। "मदरा" स दिनों रिमी माटर कम्पनी
पीईरोन प्रेम में मग्न पहा है। मरेपासमानामन जारी
दी मोत पर पाम् नही बहाना । पामी गुता हो पाता है। मधरा
दुविहीन पानपर हो मया। पूगी ग पानिव यंत्र । पुन पाहीन
इसान ! पुग-मारी पार पामधार | पार का नया गीत
पहानी पोर कहानीकार । होरी पोर हीरोइन । म परे तुप नहीं।
यही पाना पही पाया!

कथा परिकथा u " सम्मोचन पपा कई एक परिपिता को समोपन पी पती से नहीं पिया पासवाईमेपिम दोन पदों को भेजकर में पुष्प एना सममने सपा कि तुम मुमस पौर मेरी मठों से माराम मही हो। पुम मेरी मार्यो का समर्पन करती हो। सब, सबसे तुम इस मकान में मामी हो में निरन्तर इस विकी की पह तुम्हारे भीरे सीरप * मानुर्य का रष्टिाप रसास्वादन कप्ता हापौर मुम मगठार्षोिं की प्रतीक्षा के पार में विधानस पोपोग परणा हाईमास्व ही मेरे पास पायो ।तुम ही मेरी परिवा की सगीर प्ररणा से मेरी प्राराम्प पीर पप गो पाम हो । तुम्हें एक बार फिर याद रिमा रहा है कि मैंने तुम्हें तीन प दिया तुमने ये तीनों पत्र पाकर अपने पौर मेरे घरवालों से किसी तरह की शिकायत मही को किसी तरह पा विरोध-मारोप नही लिया तब मैंने सममा कि भी मुझे सतना ही चाहती हो गितमा म नग्हें पाहता बयोकि तुम्हारा मौन ही मेरे प्यार की स्पीति है। तुम्हारा नाम क्या है में नहीं मानता । पिपरा ऐसा विश्वास है मेरी कल्पना मा पहना है कि तुम्हारे माता-पिता मे तुमारा नाम मुतार से पम पया रमा होगा ? तुम्हें पारा पुरक अपने को सम्म सममेगा? तुम मुझे अपनी पोर से पीति मिन । समाज और मसार से टकरार भी तुम भापत परेया। एका पार पृषना पाहवा म मुझे सवा पायोस पोर मी मी मगर से मों देखती हो? तुम्हारे रसीदे पपरों पर भूपी ।

[-] मुस्कान क्यों पता है? कभी-कभी मैं इन सब बातों को मेकर पा परेपान हो पाता है। मेकिन इस पत्र का उत्तर महीं पाया तो पाप रमना मैं पहर पाकर पारमहत्या कर मुंगा । सोब मंगा कि मैं किसी के नायक नहीं हूँ। मैं यमागा में तुम्हारे पापूरे पोयीन पटे इम्यगार कस्पा। इस पर भी उत्तर महीं पाया और तुमन कोई परमही की वो मेरी माम तुम्हारी स लिएकी के नीचे मिपी । मरी मौत पा साप पाप सारी गिम्मेवारी तुम्हारी होगी। बस तुम्हारे पत्र का प्यासा भरोत्तम उर्फ फपि कमस" कमि कमम को इस उत्तेजना प पमडी में मरे पर के उमर की पाण मही पी। वह मुबह मुबह ही अपने बरामरे में एसपी मोर एक पमित सेफरट यया। से ही राह पर ही उपकी नयी पोसिन उसके सम्मुप पदास-उदाम प्राकर बैठ गयी । भार समने उसकी मार रेपा भी नहीं। करि महारास का रिस पफ से एपया। उसने सोचा कि भार सने पाय उसके पो को पपने बाप को दिया है । इस पिचार-माम से उस के समाट पर पसीना ए गया । बहरहण हो गया । रमने झट से मीरे प्रांगन में बार देखा उसका बाप बाहियों में उमा हुमा पा। बह पाप पाकर बैठ गया । समने सोचा पिपर यह मरे पिता से पर भी देगी तो उमका पमा अहित होगा। यह पपन पिठा म सार पारया कि यह उसमे ही विवाह करेगा, वह उसके रिना नहीं ए सरता प्रगर उसरी पारी मही हो वह मरमुप पारमह पा र मैया । मरे हरे पर रिम्मी प्रमी की परहसमिम सवा पापी पौर पहपकर गुप्ताव को देखने लगा। तभी एक कापर गोनापार में पारसको परामदे में पड़ा। उसने मपरकर मेरठाया। मनीबापिस पपी। परीर में पान मा पायी । म पड़ा- [ ७८ ] कमसी, में प्रापफी बमकी से र ममी है। मुझे मना कि माप सचमुष प्रारम इस्पा करमे और माप की मास मेरी विकी नीचे पड़ी मिसेमी। महसपना मात्र में मेरा भून परम की तरह बमने आया और मैंने पाप के पो फा उत्तर देन का मिपम किया है। मेरा यह पर पार को मेरे बारे में ही जानकारी मा पौर में जमझती है कि पार इसके गार प्रपना दरारा बदस तो में पमापी है इसलिए मेरे बाप न मेरा नाम रिम्ता रहा है। पपन में में अपनी मां को पा गमी ऐसा सभी महवे है। मेरी बातूनी मौसी कामना कि मेरे चरण यहाँ भी पाते। वहाँ अनिष्ट पाप होता है। वहीं पापा यह 'पारिजात' मुमन्म की मह प्रेमार्गे पी रमन न फैमारे यह मिनारणीय प्रम है। पस्तु। मैं पाप को प बाते बवाना पाही। पहली पात यह कि हमारे क्रम में मेरे लिए गति पर नहीं मिमा व मेरे पिताजी मुझे यहाँ मे पाये । माहा मेरे पापा कोई-कोईमाका भिम ही पायेमा । पर भाप के पषों में एक नयी समस्या परा पर है। मने पाक पहन पत्रा को एक कविता प्रमापही सपनपा पर पापी मरने की पमली। मुझे विषमित कर दिया और मुझे पापको पभोत्तर देने के लिए पान होना परा बार ऐसी जम्दी से बटन बामो पटनाएँ या ने फिल्मों म ही होती है या पग्यारे में ही। पर भापको देगार मुझे च ममी अनुभूति हुई है कि ऐमी पटनामों में सस्प पम होता है। समर में पापोपा बाई हो परने पापो पम्प समगी। म फपमे बहा गुप। मुझे मो पाप पमर रोना कोपमम्द या परिणाम सपा होगा यह हमें परमे दीवान मेमा नाहिये क्यामि यमार पायी है। समार हमारी मोर मान माये, उपनी उठाप इसके पहम ही अपने पाहस र पपने पितानी से हमारे रिसाह देबारे में पायचीत पपकी र मेनी चाहिए। मैं पापको एकमात पौर हाती

[ ]
है कि मेरा बाप इस रिश्ते के लिए पमो ना मही परेमा ।
प्रा में पापस अपने बारे में कुछ कहना चाहती है। मैं तेग बुरि
दी एक घापारण पड़ी निसी मादी । पपगी म स सी एप पाई
एनटीए ही मिना बानती । हाँ पर प्रत्येक काम में माप मुझे
बी. ए.पौर एम. ए० तक की उपापियो दिना पिसी हिफिवाहर
केरे सकते । मुभमे एक पौर विशेषता है यो पाप को साकियों में
परी मिमेयी पहभायक अनुसार पर का बजट बनाना । रस बनट
मे प्रस्प पल मोरना भी शामिम है। पाप पबिपौर मन मुना है
शिकारियों को स्पर्क करने की बाहुन भारत होती है। बात-बात
में अपनी जायराना उरितमा कहते रात को मुझ एतई पसन्द नहीं
है। मुम मम्भीर मामी अन् मगते है बावी पौर बातूनी मही ।
दोसना पानी ही नही। पया पाप पैमी गुण मएकी को अपने सपनों
की रानी बनायो?
विय, सत मुझे रापहर तक मिस ही पाना पाहिए ।
--पिता
मन ने उसी पत्रमा उलर मिपा पा
मेरी प्यारी बिया
तुम्हारा पत्र पाकर मरे मम मन्दिर मुझे ए मरस दीप पस
ठे। मुभ ऐमा मगा कि मेरा मन उन प्रसन्न महरों पर पामियो
पर. हा गोदूम प्राय-फार्म में लिए भागहती ।
में पारमहरपा का पार भी पर प्रपन मन में नहीं माऊँगा। कौर
ऐमा पानमौर इमान होमा गा तुम्हारा प्रणम पाकर मरता चाहेगा ?
लिा मने तुम्हारा नाम पमती से पुनार रख दिया है अब प्रपनी भूल
मुपार करता है। तुम तो बरा हो मोराने पी रहार पोंकि तुमने
मरे मीरम बोरन में बहार जारी है। मरे परमानों में उम पाम दो
पम्म दिया है रिम प्राग मे दिम न गिमते ।।
में अपने पाप से प्रारही पाने विगह गरे में मारा में

[ ..]
मेरा कहना मानना ही पोगा। तुमही मामूम कि मैं भपने माप का
कांता बेटा और मेरी मां का मी पहात होत ऐठी स्पिति में
मेरी बातमी राम सरते।
मुझे पढौ मिपीसीबी बाणही नही है। प्रायः मेरे पैसे
मानु हुदय के पूरक मिए बहुत पही-सिवी गादी एक समस्या
पौर सिरप बार ए पाती है क्योंकि भार की सिभित नापियों
में पवा पौर भक्ति की पहल पर विवाद की शक्ति प्रणिक होती
हैतमा पतियों के कामो म बामिया निकामबह बताना चाहती
किम विलोम प्राप से हार नहीं मान एकटी एपगा।
पीर तुमाय मिएयर मौन मेरे लिए महान परवान ही समझो।
तुमसे यह कहते हुए मुझे समोर हो यार का काण पने
मुपपभी वारी) में एक मिगिर गीतकार पामेनों में मेरा
पीर्ष स्थान पवा है।पोतो की मेमवा मोर मौसिम्पर विप प्यार
रेता मोर माप मी समय पर परोही चिन्तन-मनन
भामर में पोटे भगाता एक शाम + लिए यह यी सभा हो
सम्ताबासकी पली बातूनी मरो। सप मेरी पाप र मेरे
मनोनुरम निम्मती पा ही हो। मपर सारी दुनिया भी हमारा पिप
परेपी वो भी म तुम प्राप्त माविमम
करिबी
पापा पम मिमा पाने पिस मारमीस्वा पीर सावाका परिषय
विवार समे मुझे पत पोर मन दोनों मित है। मुझे पहने ऐसा
मानुस होवा पा कि मुझे कभी भी अपने लिए एक प्रधा पति मही
मितमा पर पब मेरे मन के विपास बात ये है। मैं धमामी में नमामी
कर पायी। यूपे एक पन्या बदमुपर पति निम पापा।
पर में पापणे एक पाखिरी बाम पूमना चाहनीपा माप
परीरसौन्दर्म को
पीपा पारमा ? मान मीषिका
सुमपान पर निराम पाप गौर म बतख पाई। मेरा र
1

पोरा म मुगत कपोस पहरे सगों से भर पाये या मुझे कोई ऐसी बीमारीतम माये जिसमे मेरा उफनता हुमा यौबन गौ से रण पौर बुड़िया की दए गौतम निीर हो माये तो भी या पाप मुझे स्तना ही उत्तमनापूण प्यार करेंगे मुझे इस मगान का बार तुरन्त पीरिये। -चिन्ता प्रिय पाप तुमारा बाम काफी विचारपूर्ण है। प्रादमी के प्रेम प्रससी मकसी रूपको प्रपर करन पासा है। प्रारिमा पौराणिक प्रेम में मैं दो पारिम प्यार को ही मर्योपरि मानता है। इस प्रेम में स्पायीन भोर या की भावना एती है। मैं तुम्हें पाला पर इमठ भी पपिक पापा तुमारी पारमा को। पर मेरी मनिक परीक्षा महो। में अब यह मान पुका-प्यार रिया नहीं गाता हो पाता है। बस पब में पपिकतम गमी का फासला नहीं सह सकता । तुम दोमती क्यों नहीं, एक बार तो पुरारो मरे 'पसम । मम कति पमम जी पर मित्ता, उत्तर दो दिनबारद रही। यह रिश्ता हो इसके पामे में पापको एक पटु सरप मे परिचित कराना चाहती है। ममत- पहमी एम पट मोर रिसी पस्प पा रहना प्यार की उम्रपा पम परता है और पिप जीवन में भरपोर पणा भर देना ! मैं पापम मी माराटी रिपाटु मरप पाइप से प्यार में कमी मही पात देपा पौरम पार पपन पारगौ महीटपे । यह मरी है कि मेप मौन पापविन पन में एमा पिर-मायाप देगा कि पापापविनाएं निरिएकम्पापी म्याति प्रतिफरममी। पाप में पीएम मरमहीं बोगी। प्राप यह सम्धी पाए पानसे है कि मसी परामर में मौन बटी पती है। पर्यो ? रपिय पार पाने

[]
हए स्वर में बोला "माप मुझे ममा करीबिम।"
विपनार रेमिमसिनारा "यह शुरू से ही ऐसी पटपर
पौर पवान दी है। पापम्म मगनुओं पपहारों, रोमियों को यह
मूग सबा देती है। मेरी तो इसने पनि परीक्षाएं
बीच में सरिता नेहा "मैं पार कर पमी प्रामी।"
या यह सरिता वहीं मेपिनाम्मा ने ममी बम कहा,
जिसकी हानिया पागल सी मोरप्रिय हो पी? और एक
मात पर पसीना पा गया।

दार्शनिक
धार मामता भरी टि से सागर और उम्में उरती मार्गको
सररहगहारा भीम रेमो म सागर के मौम्य पर टकराने
बामी इम परस नहरों को कितनी मापुकता से प्राकर मोको पा
करती है भोर पुन बनी पाता है। सैनिन म मौन प्रमी किनारे
को देखा बोलि प्रतिदिन प्रपना अस्तित्व मिटापर मी रूम दूर रहना
चाहता है।
कमा मिभित्र प्रेम है ? ~ौर पर एक गम्भीर हमी ईम
कर मी पर में पोसा- इमलिये मेरा पना मनमानप को
हमेगा पारि भूप मिमा सदर रहना चाहिये ताहि पपना
पस्तिरबम बोने म समय हो सक पौर मीमियम प्राप्पारिमा प्यार में
विपास रसता है।"
पोस ना मपे पमपमाहट के उपरान्त दोपाषण करती हुई
बोमी-फिर पापने मेरे बीवन में पेसने साहस या पिया'
किसी भी परपर की निष्पाण पूति से परि माप मार कर सकते थे
किमीभीसो पपनी पाम्पारिपकमिकाबनारपने
भावनापों-बामनामों को पृप्त र सफ्ते पे मपरा पृष्टा नदी महर
पारि यस्तों को पानी मामसिक प्रवृत्तियों पर प्रतीक मान कर पपमे
मनदीमा मुना सरठे पे पिर मोचीरन पो बिना प्राम
ही पोंरे?
मैने तुम में पवार पर पिया पा
सो मागी दिन मेरी परली हो। " तुम मे प्य र पर भी
करना मरिन तुम्हारे रमनी। बापा मोगापा
पौर भीवर पेपरसाग पदी तर बरसेगा।"
मी मारमा
[ ८५]

प्रधा।
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क्यों ?"-~-प्राम परी रष्टि से पीस
झ बस का रिमा म, मम्मर सेना" फिर पसार
बोसा, तुम बार गुमा सती हो मुमा रम सस्ती हो।
पहनी गई।
विवाह के उपरान्त पेपर की मानसिक स्थिति विधिोबर।
सहाम रात की मुमनों से माती सनी या पर टी इन धौत की
मसिगन में राम करते-करतेमाने मो र एकाएक बोरकर पना
गया पात मान नहीं बान पीरि एकाएक मपनी नौकरी
से इस्तीफा देकर बहुवरपा पमा। पीत को बराबर सते
से पये भेगवा हा । सौत मामाकरवी ही कि मैं तुम्हारे पास प्रामा
पाहती है पर बर से पास टकमे ही नहीं रिसा, पचा नही पर्यो?
फिर एक लि उमने सारकी स्टेमो-साइपिस्ट मिस रोगगरी पात
पर उसपर में तमाचा मार दिया।
रोमनबरी परी अपने घर में माबी। उसे प्यार भी करती थी।
पर एकाएक धेसर का मावरमा स पारपार सने
सारे फ्तर में इस बात की वर्षा कर दीबिरबास मावास्या
है। रन्सिी से बार नहीं कर सकता। पर्चा भोर पर ही
पौर खरी मारियों के प्रति पन्नी मूतिया पर उपके मालिक में
सुती सब पसने घीस को पत्र लिव रिपा, पिपरवार एम. ए.इन
रिपोमी का मस्तक पारकर ठोक काम नहीं रहा है। पाप
दर्द यहा से टीम में पाये।
पौर पर ऐसारकोमापिटर पाई।
प्रेसर विनित-सा होपया। एयर तक मानावस्था में पिसाव
मंठा हा। फिर मेरी पर है पर निकात रममा
गेममे ममा । एकाएक रसीरष्टि सामने सामी रीवार पर प्रति एक
स्पस्मिनाक रिकी पो पैम्प माल पर पहने हर बी पयाम भी

[ . ] प जानो। पार निमकी मासों में सानिमा माई हुईमी । रस चित्र में एक मोपड़ी काप पा जिसकेरके समय एक योगी बैठे । यौवना मत मस्तक मार्ग वय कर रही पी। एकाएक सेसर पिस्ता उख"सप! तुम वास्तव में पूजनीय हो । पुष्प की पोर टि भी नहीं उठातीं। इस वर्ष की भामु में यह बीताप पाप-बम्प पीर परा पीस पो देखो, मुम से सभोग के लिये प्रतियण पातुर रहती है, सपिन मुझे इस पापमय हत्य से रणा है।" पभी उसे पिमी की पमपनि मुनाई पी। उसने भागकर मागा पम्द कर लिया । पीम ने बाहर से पुकारा-"तुम प्रसमय किससे पात कर पेहो ?" सर गर से मोमा-- दुप | मैं पपमी सच्ची समिती से वार्ता पर रहा है। तुम पसी बाम्रो पीस पम इस पबहार से ताप दी। बह जानती थी दिना कसा पपनी पराकाष्ठान पहुँच पुरे है पामर उसका पति शमस हैया हो पायेगा। मेधिन ऐतर परवाही पा रहा था। हमारे देश का पाम्पारमार प्रमर है। विन प्रसिर है। कितने ही महान योगीर इसकी पमर सामना करने परते निर्वाण पा गये भौर मातिरकारी इमे नियमोममा मुममोहै। पुनी मूख' पामर 'मी पातरण के बारयारको देवा म, यह मी प्यारियों से पूर पता है पर गर्वप्रथम रहें ही परमगाता है पर्योकि यह पानना है छिपे प्याणि स्त्रियो। इनमें मौगिक प्रेम की पानी पौरबार पाह! मी भी हाराष्ट्रपिता मा बादशाहपा, बहमपने पापप मे पुरवियों को रसवा पा. पहपाप्यारमपारी पा"-ौर पेगर रोनी हापों से अपना मर पर कर बैठ पपा। ठानीमा राठ दोपरे ठम् । तीन सी परेशानी से नुराग में से पेगरको हरात पो गर मारपार नगादी पी। "सममा-पर हार रहमा बापू पुपतियों में पाप्पा -- [ ] रिमा मापना मरमा पाहता बामहरनका मोर पपमा पारम-निरी परवा पा व मी जीवन के साम-दर्मम मिग रामा पाया पौर मुझे भी ऐषा सम्मापारी मा प्रहण ला पाहिए। मुझे नी पार पील पत पारियों को भारत के प्राचीन पाम्पात्म मार में परिचित कराना चाहिए। इसमें भी एक समा का पायोजन करमा। । उसमें हमारों पुतिया होमी । मुमें मोर पुष्पमालार्य पहमायपे। मेपरकार से पान को मुमारी पौर हा में कोपा-'रोबर देबत परवा होगा पर एक वारस व्यकमरे कोरेता से उसमें हजारो पुतिमा सही हो । गोमा "भाइयो मार महों । इस मौतिक विज्ञान में भारत संसदि को गण ममा दिपा है। हमारी धमाकारपूर्ख मामालि पति का हसकर मामा हमें गहनग मे रन रिया है। भार में फिर अपने उस मुन की पोर पातमा होमा रिस युग में हम पुत्रों में पवे, बसत पर नवे मोर पर एक बीपीका पीत पिताते।" भी एक पामो ससकेमरे के दौरे पापा पोरसे इन पापौर मोगा-"मन पापन ! मम्मरमर पा और यह फिर और पड़ा। "सामोग। में बक मही पापौर बर में एक पोरका पुमका मेज पर पारा रिसे सुनकर पीन पाय पई और किंगा, सटपाटा कापुरम मपी-"परी | पाप पारी पत परे मारपे" रिपार होमिये भूनिये मुनिये।" " मा सामोप पर में मेरे पर्पम, मरीनामिता पर देह कर रहे हैं। मुनो मायो । पाम्माम या पति मिसेस कोमा हाम मिस करते है।महारमा पापीकोही मीगि ।" "मी यो पोती मरे।' से ममा, ऐसा कोहपा। "पीसी से मूसों अपने मिगतों के लिए मला भी एक महलता एवं परम्प पछिका परिषम रेना है। तुम नास्तिक हो, माप माप [१] हो पायेगा। तुम कुछ महीबानते ? हमी पराठी भोर से हंसा-हा हा हा मा। 'इसो ना गोर से हंसो पापियो । मुमै भी देशो कमी किती नारीको स्पस तक नहीं करता है। नारी मर का पठन है। शारीरिक भूत्र पाप है। मेरा रस पाम्पारमबारका रहा है और मैं इसके मुहब की रहा करगा। 'यह एटम बम्ब पड़ा है पो दुनिया के मोगो बगो महीको मर बायोमे।' -रासी फिर पीता। में नहीं मगा। पसर को नमा से दमे कोई कर रहा है- 'तुम मरोप पर मरोग। में नहीं मामा-4 प्रमर है। पारस घर के लिए पान्ति पा पाती है। मचानक उसकी टि तपस्विनी पर पाकर पुन ककी। पेयर की मगा वह उसे अगर हम पी है। गोपाई सर में पहने ममा- "तुम भी मुम्परा ही हो तुम तो मेरी हमरस हो। पाम्पारमबार को पोपा हो? तुम्हारे पाप्यारमगार को नहीं मानती।"-- से भोप भरे स्वर मे पिम्साई। पर मापुरता में नौन मा। पोर पे मुसा मारवा हा पोसा तुम्हें मानना होगा तपस्विनी ! तुझे मामना होमा । क्योंकि तुम हमा ममर्पक हो।"-उसने कि मी टि मे पूरा। में तुम्हार पापमपन की सपरमही है। पास में फिर कहा। तुम नहीं मानती ? मीष पक्षित पोदेगार || पौर तर मे स्वाही दीवारो दीवार पर पारा। ठोर रो सामानको, असा रोबरको मेकिन म पपने पीपन को तुम्हारी इम प्राप्मारिका पाग में नहीं बसने दूमी 1-में दो पर हमेगासिए यही से पती मो समानो अपना परवार।"- १ -पीस बाहर

[6]
सीम बाहर से निकला।
"पसी यहाँ मैं तुम नहीं मानेमा की मी नहीं पाने
मारपस्विनी ठहो रहरी उपस्थिती।'
11
"तपस्विनी
~पौर ऐहर विकी की पह
र गया।
पीनी मार कर होए होश
बिरामीमा नतास तरमाथाप गहवामा सापा
को पररवण भर के लिए पात होगवा पा मार रस नीषा में
किसी भी सिसकियां सुनाई पाही की।

विश्वामित्र की खोज
पग्रह मगस्त का दोपहर का समय पा नाम किसे के तोरण द्वार
पर सष्टि संचानक ब्रह्मा विष्णु पौर महेय प्याकुलता से प्रतीमारत
ममनों से दूर साफ पर रेख ऐ में।
पुप र पी। महेस ने दिया भगवान पट्ट का पररा र मिया
पा पर पका ताप उस पीने दुपट्ट से नहीं कर पा पा) सब परेशान
* सर बिवित पे दुषित मे।
अन्त में मस्मारह्मागी ने कहा, "यह विश्वामित्र महान पापि
है। भगवान माने बिना रहे-मुने कहां गायब हो जाता है ! पौर पर
महात्माची समस्त पापुओं का संगठन का स्वर्ग में मांग कर रहे हैं कि
हमें हमारा विवामित्र पाहिए । पाकिसप परेशान करन बामे
पानिक सिहाय । यह न करे दोस्तान महमवो सरयारह ।
काममों ने नाफा-दम कर रखा है।"
तमीहरने की पाबाज माई “बन मा मन प्रपिनायक बय
H
विप मे तुरन्त एक रोप में पंप कर मारे मरा दिया ।
उनका कहना पा किया होती में वनों की तरह इस RT मे प्रपाम
भीको टोपी पर पाँव मपबह यह पमरर मे ती तुरन्त
कार पाए । पर रनसे मांग पी पाएमी लिहमें हमारा विश्वामित्र हो
सगे भारर मृत्युमो में पिराठा है परना प्राणामी कुमार में
भारणी परामय निश्चित है।
भी 'मापपण नागपए!ौपनि प्रसाफ्ठे भारी पपारे ।
पार रमका प ही गाना हुपा पा । हाई पर रेसमी पैट, पर
[१]

[ २ ]
पौर पमे मै गमेरकी बनी हुई टाई। हार में बीसा को बमह
सम्पसन र रमा सिमुजही की जमा पापा पनि
काम म गौ पापामना प्रत्पत कठिन हो जाता, मोदि एक पहर के
कपाशमी मने हो बो मिमते हैं।
विषयों में एक साथ सीमा से पूमा : "यो भारब, सिमिम का
पीपमा
'बम गमा महाराजा गया।
बता रहा बवाहाबरा नुस्ताने तो वीथिए।" कहकर
भारपनीमनी-मबो सांस सने सब पए।
"पति पानन्द ! प्रति भामह नारद कोकोटिक अम्मशाद।"
पारकर भगबाम करने पमी दिमम निकास पर मियाम से कहा,
"स आसमानीबात पर रोदम माने सपनाए।
मारपी ने तुरस्त पर की पोर मह से देखा-"पाप हम पुरानी
निमम पापपों पोहए सीलिए, यह विमोर पाए । पारर
बीपजी बसे।
हो हो। हरे! या क्या ना मागतो या हो
मन्दाकारी है। इसे टूना भी महापाप है। मोदर रम
पौरतविदेशियों की मापा सारे पैसे माह ही पामाषा
वरपार में गा पटका हे।" भगवान बर पाना मद दुसरी
पोर
पुमा
मारपरी ने प्रपनी सफाई पेश को मान युग में पातिभर
मान मापा जान पलाता है मेसोरसा की ष्टि से है।
पौर हिर पाप तो ममारि रममे पामे है।
"सो पोt!"पारी पुरा । पर सब पर नही बम
प्रपों पर धमम? हमारी चितम हो मम्मी हरदो पाराही
पिगमे।
मिना।

[१५]
भगवान मारपनी को सममाया "म्पर्य में समय मष्ट करना हम
बसे रेसों के लिए भपसर नहीं है, मारनी। माप विस्वामित्र के बारे
में अपनी विस्तृत विज्ञप्ति उपस्थित करें।
मारदमी सिगरेट का कम माम से दीपत हुए पाम "मेरे प्रारर
पीय दबो, सर्वप्रथम में मपप पहण करता कियो कहगा वह सत्य ही
कहूँगा।"
"हमें हमारा विश्वास है। प्रयागी मे कहा।
"मैं विश्वामित्र को गड में ताला पीकानेर पहर में
पहा" मारपती ने कपा मारय की। मह शहर रेगिस्तान के मध्य में
स्पित है पौर परा ही गुफ है। मांति माति के लोग यहां निवास करते
हैपौर मावि-मातिपपों में मोग मण।
'म भी भ्रमण परता-करता योगागर म पहुंचा। देखता है कि
पहर में एक परमून हसपम मच गई है। ऐमा प्रतीत हो रहा पा
विहीं स परयन्त गुम ममाचार मिमा है।
पार में अपने पते के सर का माहोपी पी पपस्पा
में
पुबन
मे
परपहा 'परे मारा समाचार क्या होगामी गाना
इपा होगा।
'नही।
"नही तो मिी रानी हुपा हेपा।"
'टो पिी रामकुमार हुमा होगा।"
माी मही नही मारली मनता परे।
“रि हमारी समझ में मिी दासी रहमा होमा । पों
मागी
'साप पकन , पिगमु । पानीपी मारा पिपरेट पर सभी
हुई पी।

[१४]
सरस महोबो ममहा!" माररानी ने अपने पसे की टाई
कृष रीना रहा "मैं हमचम का कारणले लगा कि मेरी
मासिका के एया में सेव की भीनी भीनी नमकीम सुपंप माई । सेब गया
-उसे मना ही मानिए। मेरे मुहम तो पानी पा गया।"
मगवान पर विसनिमा रहँस पड़े। 'पामी भर पाया तो परीष
गौ महीं लिया।
"बरट समाप्त हो गया। यह मम्मी भी तो भगवान विष्णु के
पर में ही तो है। हमारे मन की दो मन में ही पपई। बस कमवन्त
दुपामार ने मेरा मूटयूट रेखकर मेरे मन के भाव को तुरन्त सानिमा
किल सादर के पास छाम्न-मोपाम है पीर पुरस्कार गर्वन स्मर
मैं पनापने समा.
"बानी की पान निती
दिम पीसीपेजमोवासी।
फिर भी पास दिखाए
हो बापूजी समझ पाए।
सारेगप्पा मारेशप्पा साईपरा
मारती मम मूम कर पा रहे है। उन्होंने पंसे ऐ गाना बम
किया से ही विष पिस्ता पो माह, पार ! ऐना नाम नम्बर
पीठाम स्त्रिी पुप में नहीं मुना । सरन रामायनी, स्पष्ट माप पौर
हपाठी इतान । बार बार
"माई नार"कारी दिन मुमते हुए बोले "मह पीतो हमें
पी सिपापाठी मुनकर मस्त हो पाएगी।"
पंकर की पनानी पापार पर प्रमा, विष्णु पौर मारती मुस्करा
पोरम सरप पए।
"माने की कोई पासासाठा नहीं मारपती मे "ग
.

[७] मौत हो ऐसा है। इसमें पनता-बनार्दन में मनोभाव। यहाँ के फिल्म निर्मातामों का कहना है कि इससे भारतवर्ष केसों का नैतिक पतन कमी भी नहीं हो सकता । हो तो में उस रामार की बात का हा पा। उमी समय एक पछि मे मा कर उस दुकानरार से परा 'मुना मोगिया, पोये बरपान के बाहर एक महान योपी माया हुमा है। या मोरिन से समाधि मगाए है। उम के गेनों हापा में शुमार रम पापा है।पमो हम भी पर्यन कर पाएँ । बरूप पर। ऐसे महारमापों के दम दम कमिकास में पही होते हैं। मैं अभी एकान बन करो तुम्हारे साप चमता है।" मारती ने कहा 'मेरी भी निजाता पापत हुई। मैं भी उस पोर पीमता स परण उगता हमा बम पड़ा।" गोमे परवाने के बाहर एक बपीपी पी पहाँ मुस्स म्प से मोग मुबह पाम पगिरि से निहत रोने पाते हैं। यह एक पुफा में माहारमा राबमा रखा था। उसके हाप में वास्तव में पुमार उग पाया था। एस पामे में रीया पा रहा पा उसका प्रकार सीपे महारमा + मास पर पा रहा था। ममता हुपा भात उमरेप की महिमा मा हा पा। यमपी ममापिस पाया सम्मुष माया को एपषित करने का एकही पामी रपोईपी पिसमें माया चमक पी थी। रख पत्र में रो रो पति पुसते पे पौरपीन ही रम्हें पापस नीट पाना पाखा पा । म उम महान मारमा की मीनापषिक काम कपुर स्याना पाहता पा। इममिए मम निवरी को हम सारी पटी मुंद में रप नी। पर में रिसी को नही दीस पापा पौर मुम सब दिपाई परहे । "पोड़ी देर बाद मेरी दृष्टि एक पापन्त सपती परसामिनी मन भापती पर पी रसने रेपमी पीठ पात्र पहन सोपे उन पीत परमों में सपा पीतम माति भिम पापा से मीरमधीर । म

[५]
पावों कारों से मार समीत-मारी उत्तम हो रही पी। संजन-से
मपनो में रवि मारमो-मी मादाता नामों पर प्राणिमा का मेपन,
क्या या महापन देपार मपना मन भी पाप में पा मया ।
त्यामराम मम पिया इस बार मंगूर बनीमा पीक्या?
नारानी में पए पर पह सौषर कि पुरानी बात पुन म म
पा बा साहाने लावाया "यह पुरतो प्रत्यंत मावति से
पौगीगर (पन करते-करते उसने पो ही उसके पाप पुए रमों ही
पोपी ने अपनी मासोर।"
पाप! पिरेर मारनी की पोर फटी भाग मे देस कर
छाप बोले । “
पारी महीना !"
'यद पारोप उस पर मत नपाइए । यह तो उसके मम्मगाव
समारोंगा प्रभाव है।"
'कसे। विष्णु में पूछा
'पहन पूरी पटमा नो मुनिए ।" माररानी प्रास्त होपरयो ।
"तुम ममप पुफा में कोई पन्य प्राणी नहीं था। दुरटी पर पीरिक
पारमा परगोमोबाती रही। वा सामेमामुपासीर में पा
ली ! असमानी ! साक्षात ईसर । मभी मेरा मन सर्प में विवरण
कर पापा पर तुम्हारे हामी काममा में हमारी समापि को भग
कर दिया है तुम्हें पाग है।
'मुभवी 1 पंप प्रर्वम पुमकिन हा रठा । पारोंन मेब मुमपान
भावी पीरा मोमो 'प्रम में एक मापतीपी परत मारती
बहू है। जीपना हर मुग पुभ है परमाने पिम पर करण में
बीम है। भगवान में पुष । मुहावमा पारी । उसके गिना मग
समान है।"
"मापर्य! योगी ने मपनीसीचड़ी परिभाकर टेसर में
हा-पनी सती मारी सेवान न होगा महान पारपर्यनीबान

[ १७ ]
है। देवी, में अपने बहानेर से पुरापारिणी के भी संतान उत्पात करा
सपण हूँ।'
"महापग यदि मेरे मतान हो गई तो म पापको मालामाल कर
यो। अपने पुत्र का माम मापके नाम प्रापर्क माम पर गाय ही रात पी।"
पहर मुमती सापू के परण मोर पे दबाने पगी। पापूको रोमांच
हो रहा था । उसे पुरसूदी भी हो रही थी।
'मरा पोर पोर में स्वामो तुम्हारा नापाग होमा बल्याण
होगा बाती पापो। उत्तमना में मारे योपा की पावर र रही
पी पुरती म मिति पटिस देय रही पी से मुक्षिम्म पोगा ने
प्रपन की समामा बरा हट पापो हाँ पर प्याम कर सुना में बह
प्रर र बामा अपि, मिसने एक पप्सरा को जिस मा कम देया
करते है एक ऐसी पुत्री का पान दिया जिसका मटा पावती सम्राट
बना।
'सारी पृषी पा राणा ! पुरती की प्राम प्रारमय से स्थिर हो गई।
'पप्सरा पीन पी महारार ?
'पोपी पर से पहा पह प्रप्परा मेना पी-एमपी पप्सरा।
पसी र माके के नाम पर मामा नाम भारत परा देयो
करपहा "पापान गप भार पदमान मए उस मिटमेमो।"
रमा मे वेग सर में कहा, "मैं तो पहस ही गाना पापिद
रिसी मुरी में होगा।"
नाररावी उन नोंको पर पहा
शिवामित्र पहा
"है सुन्दरी पार पत पो र समस्त भर पा पाना हर वो
तुप पाना। एक बात मा ध्यान एमा रिशिवामित्रोपपाको
गम्भीरतापूर पार पाता।'नो बादािमित्र ने रमे पहामी
दी 'परि तुमने पिगी ये भी यह मह पिा कि योगीपरपुरा

[ १८ ]
पार्वा की है तो हम तुम भयंकर साप देव विमसे तुमारे कभी भी
सवाम नहीं होगी।
"युवती ने एक बार फिर उसके पैर पाए और पती पर।'
इस कमा में सबको मामन मा पापा पत. बि पपने मम
भमा को रोके रुपा म प पे, मारावी सिपरेट बम र पे
उसे युनते हुए गामि पुन पाना मारंम किया
म अपने केबर को नहीं रोष प्रका । मैं मे उस अंगूठी
मुंह से बाहर निपाता और विश्वामित्र का जाप कर प्यार में
पूवा महामुनि' इस सेपक को पहनामा " पर नियामिन मोमे,
कौन-मार भाई! तुम यहाँ से?"
"भाई, बोगने । उपरे से कहा मोप हो गये थे?"
'चोर ! मैं तो गौ तोपर्व वा या सर्वस विस्मृतरफ
माम रवा तुम तो गानडे हो बेगु-पगम अपने कारों को
पीप्रमही रयाग साता।"
"पर, मैया, दुम यह से मान पावे हो कि पाने वासी सती सुन्दर
या नहीं ?" मैंने उरमुस्ता मे पूपा । “तुमारी ठो पनि बम पी।
विवामित्र ने विहस पर कहा 'मेरी परमपानकी के बीच क
रस्सी बंपी हई । रस रासीको मादर मेरा पेसा पर रोवार पीटा
है तो मैं बस इस्म को जान पाता है।"
"बार माई पारपा अव तुम्हारे ।"
"तभी तीन युगों में मुफा में प्रवेश किया। मो तुरन्त पटी
अपने मुंह में रखी पौर मीप हो गया । मिमित्र तुरन्त समाभि
सपा । ये मारेरोगर पार पागपाल पाते । रासे उन
तीनों । मोपीपरको पायरी वृत्त पामास पीपीपमाएँ प्रान
की मोर पन्ठ में रहनि तप
मिस की ही पण मला
देनी पाहिए।

[११]
"या मुनकर में दो सिर से पार तक काप यमा-पार योपीराम
कीर नहीं।
"विपमित्र पौर पर बनाइरह पए तक पद पर
"पे । एकमानेरकर पाती में से दस-दस पांच मोट रठार
अपनी वेब में रप मिए। फिर बोसा 'मारतफरीह परा प्रम से परेंगे।
'तमी इमरे मे पर पर साफ कर शिवामित्र की राड़ी को
माधिस दिलारी बस फिर क्या था । पुनार फेर सापू बाबा मागे
नोपों ने समन रि यह कोई सार बाबा पा चमत्कार है, इसलिए ये
पाग बुधन दी पिम्ता पोर हाम मोहर की विनती करने नये
पर पामीर तक र योगीराब का रोमा पीसना बम्द महीं हुप्रा तो
सोग सस्प तप्प से परिचित हुए।
माररबी मे भिरेव पीरष्टि बनाकर भपने मामों पर भूक मगावर
मोमुमों का प्रदर्शन किया। फिर बोसे 'राक्टरों ने कहा है कि अब
सापूजी की राड़ी में बीच-बीच में मगे रहेंगे यह सुनकर विवामिन
पये की तप रितण पो।"
'रोने रोने जैसा कर्म करपे भमा ही पम पाएंगे।
'महरितनी हेप बात है कि वह मारी देतो यही जप-तप भूमकर
पापापार करने उपर परे । हे राम हा ने पापावाप प्रकट पिया।
विष्णु ने पुषहने के लिए पपनामा योमा ही पाकिमीचे से
पोरगी पाप पाई। 'पग्रह प्रसस्त निघागर महात्मा पापी
पी पप! "हमारे तामिवाबार 1"
रिया भपपार मबी पी पी पप मुनकर पार पटककर बोले
"नारा मपमान हमारे हरेहए पृप्पी प्राणी की अपरयार !
दम पापीनी पर मानहानि का मामला सम में घमापये किमतामों के
होते हुए रनरी उपकारों ?

[१५]
पार्ग की है तो हम तुम्हें मार पाप रेगिसे तुमारे कभी भी
संतान नहीं होगी।
'पुषती ने एक बार फिर रसके पैर दबाए और चमी पा।'
इसकपा में सबको प्रानन्द मा हावा प्रत प्रिदेव प्रपन मन
ममा को रोकपा नुन ऐ मारपणी निगरेट बम कर पुके थे
उसे बुझाते हुए उन्होंने पुन पहना प्रारंभ किया
में अपने के वार को महीं रोक सका। उस पेटीको
मुरबार निकासा पौर विश्वामित्र का पा पका कर प्यार में
पृचा 'मामुनि' इस सेवक को पहचाना ?" पर विश्वामित्र बोले
कान-माए माई! तुम यहाँ कसे ?"
"भातुर्म सोस्ने । चुपके से कहाँ सोप हो गये थे?"
'सोर 1 में वो बहो सौन्दर्य रेलता यहाँ सर्वस विस्मृत कर .
मार मार तुम को पाल हो -यमान मरने संस्कारों को
पौम नही स्याम सप्ता।"
"पर, मपा तुम यह कैसे पान गाते हो कि पाने वासी पुरती मुमर
१ या नहीं ?" मरे गरमुम्पा मे पूपा । "तुमारी तो पायें बनी।
मित्र न बिहस रकहा “मेरी परमपानकी मोरे एक
रस्मी हुई। उस रस्सी को बाहर मैरा मा पर दरोगार पीता
है वो मम हाप को पान पाता है।"
"बार माई माह [ या अन् तुम्हारे !"
"मी वीन पुरी में गुम में प्रवेश दिया। मी तुरन्त अनूठी
अपने मुंह में एमी पौर मीप हो गया। विवामिन तुम्त समापि
सपा नेताको वरपर पापारामान पाते थे। पाने म
तीनो योनीर को पारी लंबामाप डॉमी की उपमाएं प्रान
की पौर मठ में गाम पप प्पिा किस की राह में पाप नमा
देनी पाहिए।

[ ] "यह मुनकर में दो सिर से पार तक प यया- प्राब मोपीराब कौहर महीं। "विश्वामित्र प्रौर पर बनकर बैठ गए ।सरके धम- विवर्षा कर रहे थे। एकसाने पाकर पाप्ती में से दस-दस के पौष मोट उठाकर अपनी वेब में रख लिए। फिरोमा भारतफरीह परा प्रम से परेपे । "मी इनर पर-उपर ताक पर विश्वामित्र की दाड़ी को माधिम रिलारी बस फिर क्या था ! पुपार पर पर साप बागा माये नोपों में सममा कि यह कोई सा बामा का चमत्कार । समिए में पाम गुमान की पिन्टा पोर हा मोड़ कर उनकी विनती करने मगे, परबाही देर तक पर योगोराम का रोमा पीसना बन्द नहीं हपा तो मोप सत्य के तम्य मे परिचित हुए। मारपनी विपकी टिपचाकर अपने गार्मों पर नपाकर पामुमों का प्रदर्शन दिया। फिर गोसे 'शटरों ने कहा है कि भय मापूधी की पारी में बीप-बीच में पर रहेमे या सुनकर विश्वामित्र बनेकी पद रिमप पो। "रोने से रोने वो सार्म पर बैमा ही पस पाएंगे। 'यह रिवनी हेय बात हिपहा मारो देखो वहाँ जप-अप भूतकर पापागार से रतर पो रेराम I" हा पाचावाप प्रस्ट पिया। विष्णु मे पुष्पहने के लिए अपना मह पोता ही पाकिमीच से पोर की पार पाई। पन्द्रह पपस्व गिदार !"महारमा पौत्री पीपय !" "(मारे नेता निदाबाद !" विगु भगवान पपी दी की यप मुनार पार पटारमोते, "हमारा अपमान हमारे होठे हुए पृप्पी के प्राणी पी ग्यार! इस पापीनी पर मानहानि मामलासप में समाये निदेवलापों होते हए रनरी पार पयों।"

[...]
नाररानी मे वायसनहारों को मनमना कर नियम पिया पर
युम बरन पुका है पर उमकी भयकार होपी को पमताजनारन में सम्मे
भापण देना गाना। मुनर योजनाएं बनाना बानता पाहीलरों के नाम
पी दुहाई रेकर अपना उम्स सीमा करना गामा मह पपमा भारत
पप है यहाँ में पुपार गा कर पी सबकोपामारे सकता है
बहा ग्य-जयनार पराना चिलुम सरत बातममा परेको मात्रा
दीपिए, पबर हो रही। प्रणाम !" मारदजी पायसन पर 'ए मेरे दिम
पही पौर चम गम की दृमियो मे दिम मर गया की बम बगाव
बगाले गिता मन्दिर की पोर प्रस्पाम कर गए ।

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Vishwamitr Ki Khoj

Author
Sharma,yadwandar
Title
Vishwamitr Ki Khoj
File name
Vishwamitr Ki Khoj
Text
OCR done
Citation
1961
Published
2010/12
Publisher
Delhi,vidhya Prakashan Mandir
Language
Sanskrit
Pages
106
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
Literature
DLI number
514840
Barcode
4990010022517.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
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