Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner

Vat Vaidana

Nanuram Sanskarta · 2011/03

PDF Proofread

Front matter

No text on this page.

वावेक्षण- (राजस्थानी पहाणिया) ক কাবিনা লাহানীকলিং

উর্নিং
উত?
০া চালান

POm. Turan
1 पापीगरिषिक्षा मात्र
गम, 1991
प्रभार प्रिन, माड़ा, पर (ix)
तापोnt form पार xि मारा:
VAT VAIDANA (Short Stories)
By NANURAV SANSLARTA TRI

निरख-परख वडी खुशी री बात है क राजस्थानी भाषा रा स्याणा पुराणा बूढा कहाणीकार साहित्य महोपाध्याय श्री नानूराम सस्कर्ता री झवो लिखी कहाण्या री पोथी 'वात वदारणा मिली। बाची बचाई, घणो प्राछो दाय पाई। समाज वोवारी गुलाबी कहाण्या रा सरस-सुवादला, खट्टा मीठा सफेद दागा मन मुफीद रच्या-पच्या । भाषा साहित्य री वधोतरी दरसाव हरख उपज्यो । पोथी सरळ हेत मिमता साथै लोक भाषा र अंडे महतब ने उजाले। श्री सस्कर्ता जी सैइक्ड कहाण्या लिखी है । पण इण पोथी मे पुराणा री, इतिहास री, राजनीति तथा मिनख समाज र मुख दुख री कहाण्या माडी प्रोपाई है । धम ईमान, समै वडो बलवान, झर झापू ट, मजाकियो माणस, मूळी री गूग सुहागरासो, गाव री लारली बात, गुरु-वरागी, गांवाबू इलाज, भल्ल मल्ल री चुघर इत्याद कहाणी-दाणा जोस लुभारणा भाव जचं, धरा पुराण भर कूड साच दो कहाण्या सरगल सराबोर इधक रग व्यग तरणी है। श्री सम्बा गाव मे वसं, अगछ्या सदभ खोज-लिख । गावारी भीतरी समस्यावा रा समाधान जारी- पिछाणं । नीत-मुरजादा रोत प्रयावा तथा गाव मिनखाप र मौलाकरण में पूरी प्रास्था प्रगटावै । क्यू के इणा रो लिखयो सदा मू गावाबू रयो है, जको राजस्थानी लोक जीवण री सापडत सोबो उघाडगो चावं। शहरी - लोगा ने, बाहरी बखाण भावे नी भावे पण होयै कमती समझ टूक बैठे। राजस्थान री निजू कहाणी परम्परा ने सस्कर्ता जी तो सागी ढब लिया वर्ग-ढोवै । गांवा रा लू ठा हादसा हस रीझ । वै क्व-"गावा ने जाण्या बिना शहरी लोगा रो जीतयो ठ?" इयं वात मे म्हारी जोख-परख सस्कर्ता जी नै घणे मान वधाई अरपे । बूढा र लिखण मोज् बरक्त वधं- सबै, मालिक सू या ही चावना वरी जावै । (दिपावली-2043) जयपुर लक्ष्मी कुमारी चूण्डावत विगत पना परिच मम वगै बलवान लिछमी अर भूपाजी धरम इमान गुर जर वरागी उटदाद क्रमाच 9 13 19 23 30 36 40 45 50 57 64 70 76 गावरी नारनी बात मजाकियो मिनख मदकमावू झर भाघूट लक्कडवग्यो सुहागरासो मूळी री गूग अग्रेजी अनुस्ठान भल्ल मल्ल री चुघरै धरा पुराण गावाव इलाज 82 89 94 101 107

No text on this page.

No text on this page.

सारा विद्वाना बतायो है क लोक कथा रो ससू वडो उत्स भारतवप है। कहाणी रो मूळ तत्व विश्व साहित्य पुराण ग्रय रिगवेद री स्तुत्या र रूपम मिल । भाषा साहित्य र विग्यानिया, अग्रेजा अर दूजा-दूजा साहिति किया इ याद लोगा इयं के गाट नै खरो करी मोहर छाप मानी है । बफी तो यो तथ्य ही सिद्ध कर दियो'क ससार री लाक का'प्या रो मूळ स्थान भारत है और उर्व काण्या बठं सू पछ सार चराचरत था खुलक मुलक म फ्ली है । उगा तो जायण रा सग रास्ता ही लिख बताया है। इतिहास, रामायण, अवदान मर जातक कथावा रा मठ थेड र ढिग, ढळ गळं तया खिंड-पजे । गुणाबढ री 'वृहत्कथा', पचता एव हितोपदेश मे नीति शिक्षा आद मनोरजण प्रधान का ण्या है, जया सूं सारं ससार में कहाणी महार मरीज्या है। जूनी का'ग्या रो वेग-बहाव व्यजना प्रधान रूपमा, रयात माण वारजा, चिलत चतराया तथा वातावरण री प्रधानता वगैर हबोळा मू उछळनो उफणतो वग्या है। भारत र साहित्य म कहाणी रो असी (जीवत) उण्यारो ऋग्वद रायमपमी जैहा असख्य लाक्षणिक सबाद, रिसि मुनियां, गुरू-विधाना र वखाण-पास्यावा तया गीतारे प्रवपनो म जोयो जा सर । पण यतमान पहाणी रो म्यातनावो हम्में उनीमको पाताची सू सरु हयो मानीन । उ म साध्य लिम्य समस्त पुराण साहित्य म अहो का पयां मिली है, जिणा म साहित्य री मोरळी मारी पाम मास र चतराई रो अडू हो उजाम मि पम । इणी महागी प्रमाा में राजस्थान रो योगदान स मूमिर रयो है, सो राजस्थानी भाषा पहाणीशारा भर पणियो प्रेमिया न मापरं प्रदेशरी प्रापीन पाया रातागा-याणा पदी नी मुमापा पाय । प्राचीन वातावरण र पारा तार-नागा भर परतरी सपाई बितया पारा-पीट माययरीम गूगाय र कोई मा पगावा गमाया। 27 मामा दोग, माठ जाय । गुग प्रभाव तुओ। नदबायागुको पला सामो, युगाणायो। सबिना गया पराराभर चिना परमानहानीमा पगी मिला। भट पानीमा मिसरी परगरा नूनी है। पहाती महाग रामायण, अपुरी मीछाररा वारा या परनाम-समान प्रणमाम यो गुरपा पापं । भगक मार पाटर र मापन 10/447 - . बरणण मर घटणा पगा पाँचौ । हिन्दी कहाणी री पैल भलाई कोई, अगेजी अर बगला री गल्प सू मानो पण राजस्थानी कहाणी साहित्य तो मापरी मदीनी नै निजू गुरू सम्पदा है। कहाणी ने देई जणा आपणी नहीं, शॉट स्टारी या गळप माण लिखें गिण। वे लिखार इणी दो ओपरा नावा रा लेखण व अनुवाद करता माव नहीं पार्ट पोमा अर पळे। कीरै सारै ? घर खीर साहित्य री कढी घर तो कर । भीडरी खुशी, साहित्य वधं, भलाई लिखो। दरसण जाग राजस्थानी रै कहाणी देवरे, सिंघ दवार दरूज आग गळप स्टोरी रै गळत ययण-वाकरा डग्गळिया मे धूड फूस रळायर सदीनी कथावात कळा नै जडा मूळ सू जळा देवण रो भरम दम्म भरे। आज री मुडदी तालीम रै थोथ मोथै जोर, आपने साबित करणं खातर ठाळा वायर मगलो जुग बोघ ओढे । पुराणा प्रयोजणा माथ गौजिय पाल्य प्रामर ग्यान, रोमास भावना अर माग्ल भाषा-साहित्य सास्तर रे पग फेरै रेणकारी रेत वणावता टीख । एक मनोरजण री प्रधानता रोप्राचीन चलणसार सिक्को माकड वध, बडहर मद गद मच्यो खडयो है । सस्कृति माण, कारी-कुटको चेमा साघो करमा राम्खा। रयात जात, देश री वात, नीव नामून वण्यो रेव तो चोखो काम हो । पग तो पूरा लागण दर्य नही, कूड-बसर रो अगर हर वखत खिंडावै बखेरें। विग्यानी वाता, विरादरी रा नेम तथा वणावटी करम मरम रा भवाडिया काय से जणा समझे। धिंगाडिया पच ना वणो, पळगोड तक- वाद रो पडौक माथै ठाया मत फिरा। हाफेई बाई पूछ लेसी । वधणदभो हरेक रोमाण-लाभ, सै न टावर ज्यू थपथपाई रीत ना टाळो। तीसा हो, निमळा नै क्यू तडाछो? अणमणिया पखेरुवा ज्यू उडणदमो सुस- सुख गिगण पथ, पण था आप आणद सू मल्लाई रे मोटे रथ बैठा पक्ष निहारो उणा रो चढण गिगरथ । पेलोडी पीढी आळा न गांदा इतिहासी म्प वणन रज, कोई अणगढ टोळ मेल, माटी niree वणाव-सजाव तो सीमट बजरी र पडपच क्यू रेत राय, nat लगावो? रचणदयो सहरी वाजा अर सागा, गायणदशा HERE गीत तथा भजन, साहितिया सुहण खेता म तीखी मृग और । + णिया अगुवा नै लाघडा लघणदयो दुखी अर मन मरियोडा तथा कोरो मिनख नाव धरावणिया सार्थ वैठण-उठण रो मेल मिलाप करणदयो हम्में तो । भखावटै री कुदरती वेळा मे झरते इमरत रा छेडला दो च्यार गुटकिया लेवणा चावा। रोही रा महकता फूल पानहा, ज्होडा-सरावरा रै दूधिये जळ तया दडाछट भाजत वेग वाय साथै म्हारी काय जिनडी ने बेथाग तिरती वगणदयो तिक्क्डम, दरबजाळ तथा लूठाई जस ने जरू झालेचालो, कुण खोस पाल ? पण कोरी फकीरी फाकामस्ती मोज नै प्रगतिवाद र फरेब म क्यू कचोवो फमावो? जावणदयो रसातळ में कोई जावं तो थारो काई खावं? क्यू हान चून राईमीरी लगावा ? थे तो ऊचा मठधारी हो-जठ लोक लाज, लोक धरम इत्याद पाप पुण्य ही नी पौंच सके । कूड क्थण, छळगारी नूत अर मदद संजोग उच्छाव रा थोथा भरोसा रो भार म्हा माथ मत लादो। अनोखे चिमत्कार बिना काला भखणा अर सर खपाणो खारो आव लाग। पण लोक-चावणा! मिनख री जलमजात साथण, आथण दिन] नानी दादी भर ढाढी ढोल्या सू सुणी गुणी आटू वाण एक स्यात नी छूट । कर रै लाम खूटे टगग्या। 'चाह जठ राह , झलग्या उळझग्या। जकडि- योडा चढा-ऊतरा, हाफळा मारा। कोई वाचे ना बाच, साचं विसवास तरळो करा | विद्वाना री तेज तुरसाई लखा तोखिया राखा पथ्या रा खोटा तुरा खुर्रा नी झाला। पोथी लेय र वणा सामं जास्या तो मळगले उर अरपण कर आस्या। चाव सो साख राख देखा-कहाणी खडियो सळियो वातो हू । सौ, नई छपी अर घणी सारी लिखियोडी है । पर हम्में हाथा जाडी रोकार है, नूई कहाणी म म्हारी सामी पडी हार है तथा भेट भाव से दाडिम-अनार री मा 'वात वेदाणा' 'मनवार है। इण मे गावा र सुम्ब दुख री अनुभूत्या साहित्यागी चेस्टावा अर हेत मिमताळी सीस चेतणावा ने दिल खोल'र लिखी भाषी है। जवान मीठापो कमती होसी, पण हिडदै री ऊडी सवेदणा सू सरगळ इम्बाडोल है। प्यारा जो पाठक इण रे सावै मिनखाप रे दरसणा प्रसण होमी तो निस्तै म्हारो कल्याण हो जासी। -लेखक । पण पाणा पतबोनी चास्या, 12/ वात वेदाणा - -- समै वडो बलवान चटखाणा कुळ नोडा मकोडा ज्यू वध्या पर अडभिडर आगीने गया। पाप कपडया, झोड पोड पसरचा अर मतवाला जादव दारू रे जोर मापसरी री राड , मरया नीवडया। छेकड आत्म गिलाणी अर भरपूर उदासी र सण मण सोपे अपवाद अवसाद री लाय झळा मे माटा मनवा ही तुरडीजग्या । राजा त्रिस्ण रया न कोई दाऊद्वारिका डरी- मरी जर जळजळाकार वणी-तणी खाऊ खाऊं करवा लागी । राण्या, कुळ बहुवा समस्त लोरी भर आखी जीया जूण विलविला उठी। भाजता म्हासता बडूबा आप अपरा अढा तक्या। सूर वीरा री सरणा सभाळी। सैसू लूठो उबारणियौ अर मलौकी मिनखपणो विस्ण रा हो सो ही गया। हम्मै लागा उणा र सागडद साथी अरजण नै बलायो अरबतायो के दवा- राखमा री नया विदवे वश मिरी निम्ण र रावळे री मिनखा वायरी बिलखी अक्ली महिनावा छोळा रोळा सू कापती डिडावती कळप कुरै समदर रे पाणी रो बोळो दूर सू फलता आवतो सुण्यो अर समरथ जन आप आपरो जावतो करण क्या। उवै मौके उद्धव रै बलावै मुजब वीर मरजण द्वारका आय र राजराण्या कुवराण्याने सारो माल मत्ता समेत रथ बैल्या म बिठायर हथनापुर ले टुरचा। आग उवा नै लामी घोही जातरा सारू बीहड वन मारगाम लुटेरा आभीर, जाट, भाट इत्याद मोकळा तस्कर डाकुवा रा छोटा मोटा अणगिणत टोळा मिल्या । वै आखा, वीर-भादर अरजण आहा बारकर फिरग्या अर उर्वर सरणारथी रथ- समै बडा बलवान /13 - घोडा तथा हाय्यानं घेरा परा कम खडा हुया। सगळा धन, आमूखण अर बुवराण्या वराण्या ने हठ पंदल करण तातर सोस ले जायण रोआपरो सदोनो कोत्तो बताया। अरजण ने दकाल मारी अर दीखत द्विव क्या के- "दरा सारा रय घोडा हाथो, माल मत्ता साथी, अलर-सम्तर, गणा- गाना, होरा पना, बना माणक, अमोलख सागवा-पीटा, गोडवा गलेचा, पचनझारी-लोटा, रेशमी तम्यू च दोवा, मेवा मिष्ठान, तेल फ्लल वगैर बधना धन वभव आखो म्हाने मुळावो। पछ दौता तिणा घाल'र मुखिया जपो हाथ जोड र म्हार सागै बगो आगे आयर म्हा आमीर जात सुनारं बुळपत सू प्राणदान मागताग, भाग जोग सू मिलजावे तो वा साली आपरो प्यारोजी-जोर लिया तही लगा जावो । नी तो अकड करदयाला पाधरी, म्हारो यो सक्ड हुकम है।" या बात सुणो, जद अरजण रो लाग्यारा डारा लाल हुग्या। काळो खोखीनर साप सो सूमायो फुफाया । बोल्या--"अरे दुम्ट नोगाआ काई जबान काटोम्हार साय राज घराण री राण्या कुवराण्या है। पगथे मन जाणो कोनी दीसो ? आळखो तो सरी गाडीव धारी अरजण हू , नळे इसी जबान काढी तो जीभ तालव ही नी नाडवै म खीच'र बार वाढदयूला । बोली दूजी चू करी तो चौकाळा गिटा नाखूलो। हम्मै थारो जाण मूळियो आयोहा है। मूढा मोठा चावळा रं माफक धुळचा गळया लिया फिरोला? जाणा कनी म्हारो "अरजण री बात बाटर बी चाल ही उवै सारा जणा हसीरा फुवारा सा छोडता बोल्या-"अरे तू अरजण है या थोपो थूल गरजण-जकारोहम्में ठी लाग जासी । नहीं तो रथ सू हठे आय र झटपट गऊ वणज्या अर साथ वाळी केसर वरणी, गज गहणी, ऊजळदती मिजाजण दारावा, फूठरी फररी चीतालको सुहागण्या सोन- वरगो डील धारणी, देवारी परीसी दीदारू रूप धारणी, चाद मुखडारी भलेरी जळे री चादणी फैलावणी, मुळक महक मानखा खेलावणी नख लगाया खून आय अही फूल जेडी कोमळ कायाळी मनोहारी माण माथवा पावणी अमी हलाहल रस सुजस लोयणा-नस सिख मिणगारा दव लदी, पुस्व वास सुगघ जिसही पडकरी गुमानण मद भरी पारी कयी अत - पुरवासणी सुरगी कुळ बहुवा चचल मानेतण सोहणी राजकुवारिया इत्याद सग गोरडया म्हाने सटकस सूप र जल्द मना जावा--नौ दो ग्यार, . 14/वात वेदाणा १ नही ता खोपडी तोड दी जावली तम्हारी तुरन्त ओपरी लाठ्या सू "अरे नालायक धाडवी नरो म्हार सामण सू उलात्तर जायर पळो मरो। म्हारे सिर भळे क्यू पाप काळूठो चाढो? हाय रे नीच बद- मासो ! जीवण सू पापग्या लागो। जद हो तो अन सू आतरो पालो अर क्न आयर म्हार मू अडर चालो मूढ़ा खूडा रावण रा सा बणा देवूलो। मार्थ थारै कडालिया वाघ्योडा नी दोस, भळे ही खुल्ला खेलो हो' मरो नाव पार्थ, हथनापुर रो अमीर-इन्द्रप्रस्थ रोधणी। आखी दुनिया साखी भरे । बापडा गेले वगता विणजारा सार्या ने थे लूट'र हिल्योडा हवोला? हरेक हथियार चलावण म ससार आघूतो हू | म्हारं गाडीव री गुण- गाथा स् थे ओजू अजाण हो, जक रा साण चढया तीखा वाण समस्त चराचर म अटाळ काळ-माळ गिणी ज ' उर्व सू तकडबघ सूरवीर भूमत भादर खाया, जया रा धरण माथे लोटग्या बळी माया। छाती ताई लोही भरी सरिता में झुलाया। दम रा हजारा भीखम, करण, जैदरय सा करडा अडक अभमानी नरेसा नै म्हैं हराया सागी अरजण ह । हुक्म था वाही रो देवाळ लेवाळ, मारी जिनही नासणो कर धनुरघर वाजू । मरे खरी कूवरो! ये म्हार सू परिया जापरा र डाको मारा! अरजण भले लताई-~-अधम माणसा | म्हारं सू क्यू कुबध कमावा ? मै मत. पुररी गुणसोल औरता जका रै सूरज दरसणा रोही टोटो हो। संग द्वारकाधीस क्रिमण रा परम सरूपा, बेटया तया बेटा-पोता अर कुटम्ब्या री पहुवा हैं । इणारा सोळोज तवडा सभाव, बेजोड ग्यान जान, दण्या- म्हा देव्या रो सरप पूज पुण्य नाव मालर सिरी क्रिम्ण सरव पान-गुकान प्रचलित, जक नये वन कुटिया सुजीव वे जाणो दुरुसत र जुल मे हा साली हापा, जुग जुग रीरीत मुरजादावा भाग'र सवारी चतुरगणी- भट्ठार असोपी फौज नं परा पौडाई । म्हा पाण्ड पुत्रारा माघमाण करमो मर गयो राज, पूठो दरायो । या सारो शाम जगत पूज सिरोविण राही पो। गवारोरखाको, करम जोग रो अवधू जोगी अध्यात्म मागीवाल तपा मरण आयोग रोपर हिनवारी सालोणी भेडो हतो। उनी ग्मानी ध्यानी, स्वाभिमानी सिरी पिम्ग रोमरी पर लिक्ष्मी अर परम बहना बटपा, पाता बरघु-वायवा री बहु पार भेळी है। आज भाषी भागहोपी मर्म बराबलवान/15 वणी पाख क्टी री भात अघ जग, सगवग नणा नौर बुवाव है । आपसरी री क्टबढ, राह झोड म दारू पी पियर सारा जादव मरग्याजको सोक भूलगी, पण सिरी त्रिण भगवान आणद घण, राजावा रो राजेस्वर, सता महता मन व्हालो, दव नरा रुखाला, आत्मग्यानी जीव, हम्में वैकुठवास रमण करण, घरण सू चरण चक अमरा सग ऊचो वा सिंघा गयो। उवो दुख माड री घणी ज्यू इया महिलावा रे हिवडा म धुख ताल है। क्यूके हम री रावती जगत जूण रो अरु माटा मानखो विलोण हुग्यो। मरघट न्यू मथरा, दाझती मी द्वारका, लिकोलडी मुजा पाथ, भो भरपा परिजण मर दलदाऊ आप ये रो तो कठेई पत्तो बुडबुडो ही नी चाल्यो। पण एक रात पूरै कोप सू समदर वघ आयो। परबत री चट्टाणा सो उवैरी ऊची तरगा, उमडी अर पुरा-नगरा गढ-नगरा रा गढ कोट, महल माक्रिया, हाट-बाजर अरहर जीव जंगम नै मगम जोड लिपटायर अडड गडड भडड गाजती भाजती परळ मचावती परी वध रयो। 'गतस्य सोचन नास्ति बीती सो गई ! पण म्हें अरजण ओजू जीवू भलोक ? वै ही भुजा अर वो ही गाडीव, त्रिस्ण नी तो काई हवं? पाथ तो सागी हूँ। अरे नीच सस्वरो खरो। म्हारे रास्त सू आघहा गिडो रिडोपिडो । म्हैं पा जडी छोटी जगळी जात-जूण माथ, हाथ उठाणो नी धावू । थाने मारण री टक्कर नी, टीको लेणो है। जावो छोडू, खावो-कमावो, म्हार हाप सू कुमौत क्यू भरी ?" पाडवी वाल्या-तू अरजण, खरजण कुई हवा-म्हाने ? पण लाय रो पावणो क्या वण? सिंघार वन क्सिो सनेसा भाळ? अठं आभीरजात सुता रो जनपद मेतर है । इदर प्रस्य हथनापुर, द्वारवा अर निम्ण, मथरा री वरही वाता अठं जायक नी चालली। गाडीव रै रोब री जस्त नहीं । म्ह तो पार मलरी कैवा हो । रथ सू हठ आज्या म्हारै आर्गे उवाण पगा होयर म्हार साग, जको पाला अट र अघपत बने। उव ही पनं जीवणदान वक्म सक । वार साम सारा रतन जवाहर, गणा गाभा, जुवान राण्या वराण्या कचण वामण्या, की म्हान उद वस्तुवा सभळादया। पी मल बुर सार समझ है तो म्हारी भयो मान, नही तो अबार घडी आध घडी म आभीर जातारा जत्था, टाटिया रास्ता सा चिमट चूय खाजावता। मोटा मोटा टुडगरा, टाट 16/वान वेदाणा भाई मुतब - त्तथा तक्डबध टाडूर, लटूर रा लैटूर आवैला। बै आपरं धुतका, बरगा तडा खोटणा अर भाठा दगडा सू भोडको भान नाखैला। हाडका झिगर- झिगत कोचरडो काढ देवला। पछ बात काई ताब खाली नही | थार जीव री खर चावं तो आखी माल मता देय'र हथनापुर द्वारिका जठे जवे, अठ सू सावत हाड गोडा लिया होळे से पढज्या।" अरजण रे भावगी वणगी करे ता सफा जोजरो काई करें? बोल्यो-"आ के आफन । आफताव माथे बादळा रो घेरो। आभीरा अर जात सुवना रा टिट्ठी दळ उमडया आ पोच्या है। रुको रुको गाडीव झलाओ। म्है अरजण करूं सगळा रा सिर छेदण | पण मोह, भारी भो | या काई बीत हम्मै ठा लाग, चामडी चरमरावै, चेतो वापर है। गाडीव तो सम ही नहीं । पग घूज, हाथ कांप । इत्तो भार कया बघग्यो ? घनख बाण हैठ पडं। खैर नीच हाकुवो देखो-उवो रथ रणवास रो है, जर म पण मातण राण्या विराज । राजवशारी ऐन-कानून, उठी मत जावो। मारवा जावोला' म्है उणा रो रुखालो, बाई भालो' या आखा न पोढा देवूलो। पण काळज मे लाट पडे। मरीर छ महोणारे तावल रो सो सूनो, तिसाळा आवं । नास खुली साम बघग्यो जाणो रक्त से पाणी वणग्यो। डील निरजीव माटी रो ठिरडो जमग्यो। हूँणी रा पावडा है, चाय ऊँचला देव दाना सग, सस माख्या सू अरजण री निपुसक्ता निहारो। लिलाड माथे पसेवरा साळिया खुलग्या, आ या सू आसू चौमरा चालग्या । पाथ आज जीवतो ही मरग्यो, लार ता ल्हास ऊबरी है, खाली खाड पड़ी है। हाय रे । तो धक्का घूम करता तथा गळ गोता देवता ले चाल्या बापडी अमीर लुगायडयो नै । बरे नाई । योडी तो राजवस री आवरू राणा, मरद होयर लुगाया मार्य हाय उठाया । इया औरता ने नही, मन गाळी पाल रले जावा । गुलामी रो तरा पारा सारो हीडो टोक्ला जी सू जित्तजी सू करता रैसू । बदेई म्हें दुरजोषण नै नौरनी शरयो, पप पारो सेवर वण र बूला मणा रो म्हारी नामवरी नै बनाम मत करो। मामीर पारया सामने मार नामो, पर्छ म्हारे मितर सिरीनिणरी असाह-अभागी, मेक्ली औरता रो पीसा-ठरडोपळा सको। पण म्हारी आस्या फोडे बिना । समें वही बलवान/17 धिंगाणं इया राण्या नै खच्या नाण्या ले जावो, बाहु टूटग्या मर भाग फूटग्या म्हारा तो। घरम-करम सग पियाळा जा घस्या पूग्या। बतावो तो कोई म्हैं हथनापुर जाय'र सिरी धमराज ने काई बता वूलाब पूछला किरणरो रणवास कठ आवै। जद म्हें पाछो कवूला? भीम, नकुल, द्रौपदी, सुभदा, बधु बाधव पुरवासी अर स्याणो लुगाया मेरी मैमा मात्र फूल वरसावण नै अडीव है । हाय । म्है हम्मै बठे कदमकाळ ही जावू नही । जीवल जी म्हारो काळो मूढो कुण देखैला? अभागो पाथ मरग्यो, पण मौत मोजू आगर अभी दोम । भीखम, द्रोण, अधिरथ सुवन से गया बैकुण्ठ वास, खाली म्है रयो पापी, या कुलखणो दिन देखण भर वस माय कळक चादण खातर। पर लाचारी म्हारी कान करो, जस भोम रा देवाळ सखा क्रिष्ण अर नमा खमा सिकारो | थारी लाज आज म्हार मुराप रळी गई गुजरी । दुष्ट आभीरा रे इलाके मे मेरो खत्रीपणो खतम हुग्यो । वन माहें लाय लागी हबड हलोळा झाळा उठी अर सारा जीव जत, भो भरिया भाज छूटया। सूर विसूज्यो, परळ माची जर रावा-कका होय' हाय हुया । क्या काय कया-- दिन पळटना, दसा पळटी, पळटया हाय क बाण । काबा लूटी गापिका, बे अरजण 4 वाण ॥ 1 16/वार वेदाता

No text on this page.

। मेकर स लिछमी जी ने इय पूजन औसर मार्थ काठ अर गरीबो री देवी भूवाजी (भूख दावरी) जा टक्रया । उया भूवाजी ने चिडावन री साची। बोल्या "भूवाजी काई मुवाळी सावता डालो? था सू तो दोन- दुबला का डर नी। व ता अया ही दिवाळी रा माल अडा। कोसू ही अधारा पुधारा करो, मला ही माय मडावो, पण चार व कदाच सिरनी नवावै । म्हारा तो धनवत म्हा सू सागीडा राजी है--कोड करै गुण गावं । ये ता दुबळा माथे कोरो दळ दर खिडावो।" भूवाजी डोळा काढ र षडक्या। नौ नाहर वार चीत्ता वण'र गडक्या । वोरया "म्है तो क्या रा गोडा टिका दिया। थारला बडा बडा भाग्या, स्याणा अर दानवीरा न म्हें घणी पार भीख मगायर छोडी है। वे इ चीम्ब रामाऱ्या मरग्या है।" लिछमी जी बोल्या--"तो काई भलो काज करयो? माज रा लोग पाने रडकारी गाळया ठाक । थाडा म्हारा ही कुछध पूजन जोवो चाला आगल नगर म चाला।' इत्तो कय र दोन जण्या आगी न वहीर हुई जर नगर सठ र ढ़की । सेठ लिछमी जी पधारण री अडीक मे पाठ पूजा कर रया हा। दोनू दव्या न हवेली री पेडया चढता देख'र खुसी हुयो, साभेळे चारया । भरोसा बध्यो हाथ जोडया अर दडवत प्रणाम करयो । पग घायर चरणामत ली हो । लिछमीजी रो रूप जाणर कयो, "दोनू देया नाज मलाही म्हा धरा पधारिया। वारणा तेवू बारम्बार घोक देवू ।' वाणिय न लटका करतो जोय'र लिछमी जी न उव सू अक तमासो करण री बात सभी, भूकळो। पण भोळी भूवा कोतव नी समझी। लिछमी जी वाल्या -' सेठ म्ह दोनू दे या यारी पूजा सू प्रसण होय र गर्न वगती हवली आई हा । हम्मै जठ जम' र रस्या अर मोकळा लाभ फळ देन्या । पण सेठ पैला म्हारळा राडो मिटा। ठीक्सर सुणले, क्या नग जो म्हारे साथ आई है केव-बळ बुद्धि अर आवरू मे म्हैं मोटी हू, नपा म्हें द क्वू म्हें मोटी हू। पण म्हा दोनूदा म बढी कुणसी है ? जकी मही बात भने यताणी पडसी । सेट-जीव म जाण्यो के हमक कुराणी हुई। पग अपरला दात दिखायर बोल्मा "कल्याणी पारो यो भोट तो मिनटा म सलटा मिटा देसू, पण -20/वान वेदाणा चाल करर भाप म्हारै घरा ओपाथें भला घरा री धौरा-देव्या दीखा। गण गामै अर वेस वान एक रग हो! म्हारा ही भाग अघडम्या । हम्मैं एकर विराजों लिछमी जी बोल्या--"म्हारा यो फ्सिा था पैला निबटावो जगा बैठा।" सेठ सुभा र भन मन मे तो घणो घबडायो । पण अपरला मना सू तुरत त्यार होय'र अपाव काढयो। वोल्यो-"भगवत्या | थे दोन एकर म्हारै सू अळगा पाच च्यार पावडा चाल'र जावी भर बया ही बरावर चाल'र पाछा म्हार सामै मावो। म्हैं यारी चाल जोवूला भर छोटी बडी फूठरी चाल भेद री जाच सू साचेतो नतीजो दवूला।" लिछमी जी अर भूवा जी (अपहूंत कगाली री अधिस्तानी) दोनू खन खन वरावर खडी हुई अर वणिक पूत सू वहीर होण री इग्या न अडीकबा लागी। सेठ- ' मेजे।" मान टुरण रो कया। दोनू देव्या अक बरोबर मोर रा सा पजा पगला मैलती सुहणी चाल, चाल दी। थोडी दूर अळग ताई पौच्या, लार सू सठ हेलो कियो। बोल्यो-"देव्या या ही सागी चाल दोनू पाछी मुहर चालती भावो, म्हें देख रयो हूँ।" सेठ र हेल साग लिछमी जी अर भूवाजी फूठरा पाळा-पाछा फुरर चाल दिया । सेठ दोना री चाल देखी अर मुळक्या लिछमी जी री पूजा लगन सू निर्णायक वणग्यो। अवा न आगीवाल बालता गोख र ठीक तरा पिछाणा करग्यो । जाणग्यो-" तो अवस लिछमी जी है अर साथै इयारे विरोध में भूवाजी होवणा चाय सा इणी भात सम्मान रो अथळो देवणो पख मे पडसी।" लिछमी जी र बालण सू पैली सागी सुर मेठ बोल पडयो अर बात ने मिठास री जुगती सू मठोर-गाटर क्यो-"दे याजी बया तो था दोनुवा री चाल चोखो-अनोखी है अर उव सारू ही थे दोनूग्यान गुणा वाजीदी हो । पण, माप (लिछमी जी नै) भगवती जी घरा आवता आछा ओपो अर में (भूवाजी नै) देवी जी घर सू पाछा जावता चोखा भूघड । बया चाल-ढाल, रूप रग या दोनुवा रो बरोबर है।" पण घालता वखत मेक घर मे वडता आछा लाग अर दूजा घर, सू बढता चोखा लाग। (लिछमी आई मली भूख गई भली) ओ अतरा - लिछमी अर भूवाजी /21 जबर में है। बाकी तादान म य भवानी दिखाव ओप हो।" लिखमी जो सेउ रो चतुराई ने समझर मन मन मे हो गु गुणाया "वाणियो वाण न वीसर, जे मुरगापत नाय । माहब स लमो कर, (ना) टक्को पइसा पाय । दोना र माळ डर भी मगरा गोता सायर माछा फैसलो सुणाया है।' सेठ री जवान-जुगती अर बूढी पूजा मूलिछमी जी तुस्ठमाण हया अर सावार मवै रा रूख वाज्या। ओजू हो भणी गुणी जात यही जे भर वाणिय री पोड़ी रो माल नी आयोज । पुराणी परम्परा सू महाजना री देखा-देखी मावं लोक म दिवाळी री रात लिछमी जी पूनोजे। हे देवाळ माता । मुख मपत री घिराणी दाता। मोठी जवान जुगती वक्स र सग सागा न साचा पूत वावजो 22/वात वेदाणा घरम ईमान मुगलिया बळी वखत, देस राजधानी री वात, एक बादस्या री बेटी सहनाई नाव सुप्यार जबान सरबजाण, भणी गुणी अर नाच गाण कळा- चुसळ हुती। उवा दयावाण, दातार अर प्रेमी सुभाव री स्या जादी ही। भापर वापर आव लूठ रगील देस राज्य मार्थ आछो सासण करती अर वही बेगम र नाव सू जाणीजती। बादम्या उवै राजकुमारी न दूजी मोलाद सू अल दा साही मोहर छापण राही इधकार दे रारयो। नाच अर गाण आदमी रीजलम जात जाण पिछाण, विनर- गर्वा री दैवत वळा, राग रगरी विरिया आव सग देखणिया मुणनिया रा हिया डोल जावै । जद कदे मैफिल जमै, नसो छा जावै नाच गाण र सभा मडपा रो सिणगार, सफाई छिडकाव, फूलमाळावा, इन-अगरबत्या, चास- प्रकास, गलेचा गोडवा सू खूबसूरत हद । जद इये कोसळ रा रीझाळू जीव इत्ता उदात्त भातरा छुम्नर चतर वण जाव के देखत फूटराप भर गाव- णिया बजावणियों न मन धन ही नही, आपरी जिनहीताई नै नौछावर कर देव। बेगम दाखा र दारू मू त्रिपत रती। उवा आपरी जाणकारी भू वध- की सोमरम वणवाया करती। उव में गुलाब, अगूर मर मेवा मिष्ठान ही रळाया जाता । बेगम रात विरात राग रग रै समै पदे वद विदकती आख्या इत्तो धणो रस नोस लेंवती, जक सू उवरी पीडया परक जाया करती। बेड मोर दासी-बादी, सख्या साथण्या निवता हाथा बाया निर- ढाल डील न पिलग नाख पोढावती पकी वो प्रेम-नसो पार घालती। - घरम ईमान / 23

No text on this page.

फडकती मुजावा, गळबढे दोलडो तग तरवार सइकडू सिफाई सवार, नौकर चाकर, अनुचर अर मत्री-मुमाहिब, समह रूप उर्व सार्थ हुता। दरवारी उमरावा सू इय राजकुवार री शान शोक्त चढी रंगत लागती ही। राजकुवार छनरसिघ सहनाईरी सुवारी आवता जोई अर मारग सू सो पावडा उलात्तर घाडे सू उतर'र सडक रै एक पास खडया हु'मा । उदै धणियाणी री नड आई सुवारी ने झुकर मुजरो करयो। कासोद जै बोली तथा सचिव स्या जादी नै राजकुवार वगणरी सूचना सुणाई । वेगम आपरी सुवारी याडी रोको, पछ एक हीरा-पना जडी डबडी में पान रो बीडो मज्यो तथा राजकुमार ने क्वाडया के---"म्हारी सुवारी सार्थ चाले अर मोकळो सोभता आणद वसेर वधार।" सुवारी-टर चाली। शामखोर कुवर छतरसिंघ सामण मुड सलाम वियो, मोट माण पान रो बोडो लियो अर अपूठो चाल'र थोडा अळगो खडो व्हियो । भिस्तीडा सुवारी सू भोत आग सडक माथे पाणीरो पूरस्ळ छिडकाव करता जावा । सईकडा वादी हाथा नागी तरवारा भळकावती, भीट भचीडा खावतीदबी वग ही। उणार कापी तीर बाण कस्या हुता तथा सग छाती काढया, सोस खीच्या, उमाव भरी चाल सू मूचाळवेग भाजी राजी जा रयी। पालकी रे चौगडदै चालता अपरोखे मूढाळा खोजा साने चादी री मठ पकडया अकडधा चवर मोरछळ ढढावे हा । दास खाम हाथा मे सोने चादीरा मुगदर डड लिया पर हटो | पर हटो | रा नारा लगावता आग चाल रया हा । अणीमीत री दासी वादी सान री प्याल्या म जळती सुगध लिया वग ही। वेगम म्हामगेज मे बावळी हुई सोचेडी साचो निसाणो मूलगी, जकोबापडो इसार आयो स्था जादो मिकार, मायो माडया साथो क्यिां बिना बतळायो आपरी फौज सू सज्या सवरमो घोडे चढयो हकार आस चाल हो । वो दूर देस रो अमीर ध्याहण रा भूम्रो नौकर हो, पण साही राज मरियादा कायदै सू सूको लूखा हो। पौंचण री खबर महलायता र दरोगै न पौच चुकी। उवै आछी चळ- पळ सू बुहारा झाडो अर छिडकाव करा दियो । महलायत र जक भाग मे वेगम री ताक तसरीफ होगी, उवो भवन चोखोतरा सजियोहो हो। दीवारा म रगील पञ्चीकारी,पूरा लामा सीसा, कोरीज्योडी छत पर . घरम ईमान /25 1 वेगम दरवार जायण चावतो तर घण ठाट पाट सू बार निमरती। बा आपर साथ मोकळा हाजरिया मिनस लेयर टुरती। उफाला, सिपाही पुडसवार, साजा अर वासीद आर आलम्यारं हनमाप सू हालती। निजी हीजडा 'जो उव र च्यारू मेरी टाक वाया रता हर किणी सामण आवतो देख र धक्का दे नासता तथा दबाळ रै अपमाण सू लेक पास जमा पर पिया करता। वे 'पर हो। परहटा' रामारा सगावता चालता इणी भात सहनाई आवती अर मारग वाणिया गैला छाड दिया करता। राज पथ भीड लथपथ । कोडी नाळ, रान उमराव मिथ्यारी जगत जावा हाट-वामारी सैल सपाटा मार माल्या। इणा अमीरा रा बणाव मिणगार ही सरावण जाग, हरेक साथै पाच दस, दम बोस हाळी बाळदी, भोगळिया र भादर मिनस भाज्या वग हा। घोडा, बग्घी वैल्या माय उर्व मौकीन सिरदार पान चिगळता चालता मटकरी नळी सू धूवा गिटा। चादी मढया चमडा हाका, वग्ध्या घोटारे बरोबर दोडा मिनख हाथा लिया घूट सेंचावण खातर उणा नै लफा फ्फा। पानदाा, इत्रदान, उगाल- दान, स्माल गमछा ही उणारा आपरा यारा चारा आदमी लार लिया चाला । अस्तर सस्तर, गाजा बाजा पर खाजा माटा ही सार्गहा, पण आज सग अमीरजा मस्तीराह वगता अचाणचका ही चमक ऊछळया। ज्य ही स्या जादीरी पालकी जावती दोसी, तुरत सगळा उफाळा होयर निजू टोळा मू सडक र एक पसवाडै घणमाण न हाथ जोड जा ऊभा 'साम मूढा उबा राब उमरावा सिर झवायर तीन विरिया सलाम करी, जकारी नामावळी निजू सचिव सहनाई न पालकी मे अरज रूप पेश कर दी ही। बेगम आज किणो सिकार माथै अचून निसाणा मारण वी, वळी जारयी । पर उवरो निसाणा खाज्योडो सिकार सू परबारकर दूजी सिकार करण में चलायमान हुग्यो। वन वगीच ₹ महलायत मारग म आपर राजरो तावदार, एक घुडसवार जोहंददार तथा रिसालिया राजकुवार टकरग्यो । राजकुवार वडोनेक मिजाज, खानदानी घराणरो राजस्थानी रहीस हो। सो पालकीरा जवाहरात जडया पडदारी छीद सू जोयो। वरस तेईसा चोईमा नंडो, क्वळ डोल दूध मिळो. दाई, गाळमाळ गाभरू जुवान, मुरडोजती मूछा देखवा जोगो दीस्यो। घोळा गाभा बाळानण, 24/वात वाणा फडकती भुजावा, गळबळे दोलडो सेग तरवार संइकडू सिफाई सवार, नौकर-चाकर, अनुचर अर मनी-मुसाहिब, समूह रूप उव सार्थ हुता। दरवारी उमरावा सू इय राजकुवार री शान शौकत चढी रंगत लागती ही। राजवार छतरसिंघ सहनाइरी सुवारी आवता जोई अर मारग सू सौ पावडा उलात्तर घोडं सू उतर र सडक र एक पाख खड्या हुग्यो। उवै धणियाणी री नड आई सुवारी नै झुकर मुजरो करचो। कासोद जै बोली तथा सचिव स्या जादी न राजकुवार वगणरी सूचना सुणाई । वेगम आपरी सुवारी थोड़ी रोकी, पछ एक हीरा पना जडी डबडी म पान रो बीडो नेज्यो तथा राजकुमार ने कवाडयो -"म्हारी सुवारी सार्थ चाल अर मोकळो सोभतो आणद वखेर-बधार।" मुवारी-टर चाली। शामखोर कुवर छतरसिंघ सामणे मुड सलाम वियो, मोट माण पान रो वीडो लियो अर अपूठो चाल'र थोडो अळगो खडोहियो। भिस्तीडा सुवारी सू भोत आग मडक मार्थं पाणीरो पूरस्ळ छिडकाव करता जावा । सईकडा वादी हाथा नागी तरवारा भळकावती, भीड भचीडा खावतीदबी वग ही। उणार काधी तीर-बाण कस्या हुता तथा सग छाती काढया, सोस खीच्या, उमाव भरी चाल सू भूचाळवेग भाजी राजी जा रयो । पालको र चौगडद वालता अपरोक्ष मूढाळा खोगा सान चादी री मूठ पकडया अकडया चवर-मोरछळ दुळावै हा । दास खाम हाथा मे सोने चादीरा मुगदर डड लिया पर हटो। पर हटो | रा नारा लगावता आग चाल रया हा। अणीमीत रो दामी बादी सोने री प्याल्या मे जळती सुगध लिया वग ही । वेगम म्हामगेज मे बावळो हुई सोचेडो साचो निसाणो मूलगी, जकोबापडो इसारै आयो स्था जादो सिकार, मायो माडया सायो कियाँ बिना बतळायो आपरी फौज मू सज्या सवरयो घोडे चढयो हकारे आस चाल हो । वो दूर देस रो अमीर व्याहण रो भूखो नौकर हो पण साही राज मरियादा कायदै सू सूको लूखो हो । पौचण री खबर महलायता र दरोगे न पौंच चुकी। उर्व आछी चळ पंळ सू बुहारा झाडो पर छिडकाव करा दियो। महलायत र जक भाग मे वेगम री ताक तसरीफ होगी, उवो भवन चोखोतरा सजियोहो हो। दीवारा मे रगील पच्चीकारी, पूरा लामा सीसा, कोरीज्योडी छन अर . धरम ईमान/ 25 सुहण भारा फरस, ऊपर रेसमी गलेया विछेडा हा। हाथी दात र शाम सूणा पूराठादो चदणियो पिलग, ऊ वो काटवा चयो तभ्यो पदयो ओपै हो तथा खरं मोत्या री मारिया र हीड हो। पिलग माथे मस मलो गिदरो, नोसक तक्यिा अर ममनद अया। चार मेरी धोक्या सारू इभ, पुस्वा अर सस भातर सिणगार री मलबेली पोजा मेली पही! वगम पूगी भर मीठी महब सूमोहीमूनी मसनद माथ लिटती- सी गुडगी। विमूणी थाडी लेण रे बाद उवा आपर खास दास ने आदेस दियो के 'वो राजपूत सिरदार जको सुवारी साथै म्हाबलाया आयो है, म्हारे अठरण ताई आपरो सरबरा चौकीदार राख तथा अमीर खान पहर बास्त कान काढ वो महलायत बारलो घरमसाळा म आपारा सिपाइडा समेत जा जमै । जरद इतजाम कराया जाव।" सचिव बोल्या--"जो हुकम चेगम साहिवान।" स्या जादी रो दालडो हुक्म सारे अमल मे फिरा दियो पर दोनुवा उमरावा नै आप रो जगासर तबदील-तैनात कर दिया। रात, चादणी घणघार दूधिया होवती जावं हो। सहनाइ छाकरिया- दासिया र हाया दाखा री दारू चास चाढ़ रयो । उर्व जोस राजकुवार छतरसिंघ री सूरत बी माथे मम खळभळी मचा ही। पण व्याह जोग वात दारी र माडी पड़े ही। डाक नही, अनेक राजा स्मा जादा, सनाई माम बादस्या जाण जमीताई तुळर सलाम मुजरा कर तो बादस्या बद चावं ने आप सू हेठ घराण स्या जादी ब्याह दी जाय । इसडै साख सू म्हान घराणे रीमावरू तो घट। पण प्रीत रे घाव मार्थ भेद भाव री मनम पाटोनी वधं । स्था जादो जादा छतरसिघ नै चावं जकी बात दूसर मनसबदार सू छानी नी हैं । उवो पाछो आयर सनाई न क्व~"हम्मै तो बादो (पायदो) पूरो होवणो चाय' म्या जादी उपळोव.. अ आस्त्री वाता पुराणी व्हेगी। स्या जादोरी ब्याह सादी जहांपना नावर मना कर दी ही है। मनमवदार खा-'पण वेगम माहिदा ! था तो सल्तनत हकमत घिराणी हो बादस्या बात हरगज अटका नी सक।" 261 यात वदाणा . - . स्था जादी रीस रोस जबाव दियो-"जावो । जावो | हम्में आछो योही है--बोला बोला आप री तैनाती नौकरी बजावो।" खा सूनै मन उठ चाल्यो। बोल्यो-"हजूर स्या जादो रो हुकम |" सनाई फला रा गुच्छा ऊवा उछाल उछाळ थोडी ताळ सेलतो रयी। पछै दासी नै बने बलाण खातर थाप सू गिदरोवजायो। उवा अगूरी सराव र झीण नस में रगरळी ढळी, अलमस्त, मसनद माथै लिटती-गुडकती सी गिलरा रही। मौजियो खाजो अर बादी दोनू विसवासी माणस खिदमत मे खडा। ढळती रात, मैक्तीवात, चारा कानी देख'र बोली-"उवा राजकुवर पहरै माथै हुसियार खडो हवला देखा-बुलावो।" "जी हुक्म खुदाबद ।" मोजियो बोल्यो स्या जादी क्यो-''जल्द हाजिर करा, म्हैं उ माय म्हारी मैह- रवानगी वरसावणी चावू" वेगम उठी, उनासी खाई। मौजियो बला त्यायो, बादी ने डाट र काढी। छतरसिंघ भवन मे पग धरयो अर लुळतारू मुजरो परघो। बेगम कडी निजर सू मौजिय न ताक्यो, भोछाक्यो वो बापडो बार जापडयो थाक्यो । सफा एकलवाण सम बेगम पिलग कान इसारा वरती बोली--- "मालिक री मैहर आराम करो।" नौजवान राजकुवार एक दम हाक्यो दाक्यो अर ठग्यो। सो रैग्या। वो बोल्यो “स्या जादी चोखो यो ही है, मने वेग म्हारी नौकरी पाळण री हुकम वक्साया जावे। उवा बोली-~-' म्हारै हिडद रा देवता । था काई बोल रया हो? इयै उथळ स म्हारो जी दोरा पण घणोहवै।" उर्व मघरी मुळक मुखडो 'उठायो अर छतरसिंघ ने मीठ सुरा भळे परचायो । "माज आपा राजी रजा एक दिल हो जावा अर इयै सुहणी रग भरी रात रा आणद-मजा मनावा म्हार मन रा प्यारा बालम राजा, मनै अवेळ री बिलकुल ना उम्मीद है, पारी हां,री पूरी हामल चाव छतरसिंह ठौड स् कुठौड नी हुयो । स्था जादी री दारू छकी हरामी आख्या ओज बोढी बढी, पण रोस मार'र बाली--"दिल भरिया घरम-ईमान / 27 मालिक | म्हा ऊ चा बगल बैठ ने डील वघाप मदद बकसो।" दूर खडं छतरसिंह कयो-"खुदारो खौफ रासू। खेद है म्है जडो गवार कार क्दी नी कर सकू । वाळक मत नी, लाक पाळक बाजू । राज काज परोटणियो हूँ। "राजान कानान आछा कुण क्वं?" उवा वाली। "पण म्हारं धरम ईमान मे भगवान र घराजेडा काम बवरम अर बेईमान गिणीज।' राजकुवर कया। उवा बोली- राजी रजा कोई काम अघरम अथवा कुकाम नहीं, म्हारै मन री मरजी है । काम सारणो वेईमानी नही, इमानी अरजी है । छतरसिंघ वताया- 'हैं एक जूजळ घरम रो राजपूत अर साधारण जमी जायदाद रो भोगतो। बेगम स्या जादी ₹ माटे चरित कायदै न कैया हाथ घाल सकू? ठग डाकू नहीं प्रजा प्यारो रक्षक सिरदार हू।" उवा बोली--"तो हम पद हम ऊमर, थे म्हारी इग्यान इकार कर रया हो ।' - 1 छतरसिंघ-'हाथ जोड नै माफी मागू, मन नठ सू पाछा जावण रा दूजो हीलो सभळवो।' उवा भळे बोली-"म्हारै नेणा रा बासी ! आज री बहार सूनी जा रही है, थोडो सुणो गुणो । हें मिनख जूण रै अंतस सू थानै अरपीजू डर-भो, सो कूडो पड जासी, मन भरिया । मागोला वाही जिनस थारी हवला, देस परगना तकात छतरसिंघ कया-'देवण रो वादो इरादो हवै।" वा चट बोली-"मजूर है। 'तो मनै जल्दी बार जावणं री इजाजत बकसी जाव, म्हारी चावना है। भळे इसो मूडो पाठ निराठ काठ पील, कस वस चारै दिल में ही " राखज्यो " कुवर कयो । उवा बोली-' या म्हारी जिद नही, उजडती प्रेम दुनिया है वमापो करो।" उवो बोल्या- 'यार मजहब रे मनसबदार वुवार वाले खाने सूपो।" 28/वात वेदाणा उवा वोली-“ओहो ! समझो वहम, पण म्हैं तो ऊजळे दिल सू चावू प्यारा, खाली थारी मुहब्बत । जद सू म्है थारो घोडे चढियो रसील रूप रोशन दान दबार दे यो है, उणी वखत सू या मोवणी सूरत म्हारै मनड आवसी है । आपो भूल्योडो बावळी वणी जा रयी है। एक पिलग री रही मिळी खुमी री गायक हू। सदीव बुलाया, चट्टो मिल्यो । सग भेट उपहार पाछा मोत्या पण आज डाव आयो है । ओ एका त वखतबास हाथ है, ऊपर आवा, पान चवावो, अग मिलाय र आग बुझायो। कुवर क्यो-"श्रीमती वेगम साहिबा, आपरा वावळवडा हम्मैं मन सफा नी सुवावं, अणसुण्या करतो जावणो पड़े ।" भूख भूजी सिंघणी ज्यू सेनाई राज नाज जोर, गाज उठी। बाली-"अरे' म्हलोण नौकर, थारी या हिम्मत ! म्हारी प्रेम वीण तीनै थ के जाणी? म्हार कोप री ज्वाळा सू कुण उवर सदैलो" पण राजपूत र धरम ईमान री प्रतग्या माथे वेगम री गादड वभकी रो कुई असर नी पडयो । उथळा ही नी दियो । उव तो स्या जादी नै सिर नवायर अभिवादण दियो बर खटाखट बार कढ आयो। वेगम चिडियाडी कळपती कुढतो वाघणी ज्यू पग पटक्ती दहाडती गुरावती जा गोडवे गुढी । गाभरू कुवर फासी सू बदियार्ड खरगासिय दाई मुकळतो कुळकतो कूदतो-उछळना देग्यो तनाती ओहदै तेतीमा, भळे मुड र पाछो ही नी झाक्यो । नाजरिया ना ममझ की नी समझया । - - घरम ईमान/ 29 गुरु अर वैरागी भारत र इतिहास मे प दरवी सताली रो समै पाप-पुण्य मिल्यो, मिस्सा धरम ग्यान बतावणे वाळो वरतारो हो। मुसळमानी पारा, दारा सासण, कट्टर करडा इधकार चालता । सग रजवाहा एक दूजे सू वैर भाव पूरो पाळता भर आप आपर दुसमणा तथा दुरवल जणा वगरा देस रा लोगा मार्थ लूट मार, आगजळी जिसडा पीडित वोवार करया करता हा । ऊपर सू घरम वदळण री बादसाही धमको रै भो सू छुडावणियो कोई नैहानी ढूक्तो। तद देस रा मिनख मारकाट अर मदिरा पीवण मे धणखरा जण सघ वधग्या। धरम ग्यान तथा सिंझ्या बदण जिमा सग नित-नेम बोदार, वभचार इत्याचार अर बलात्कार कानी मुडग्या । जडे तूफान अघट रै वखत मे सगत-ग्यान री वरसा-आसा हुई अर माघा सता तथा कन्या- गुण्या री सीख नसीहत आग आई। घूणी घरम मारग माथै ग्यान उपदेस रा व्हाळा खाळा खळक-रळक चाल वहीर हुया । साच घरम तथा मोट मिनखापाळा सम्प्रदाय ठाळा पण जागा जागा थरपीजण लाग्या । साधारण लोकी नही, स्याणा पुखता, पढया लिख्या अर मालदार मिनख ही साधा- सता री अलौकी सीख र साथ लुळ झुकग्या। उव टेम अक ईश्वर उपा- सणा ही वा रो पैलडा अळवाडो उद्देस्य हो। इय वखत आख देस में नूवा नूवा धरम, सम्प्रदाय एव जात समाजा. री बौछाड वापरी ओसरी । कबीर पथी, दादू पथी, राम सनही विसनोई जसनाथी अर सिक्ख इत्याद अनेक सजीदवा समाज आग आया । सम सारू भारत री भोम माथ सता महता, मोकळा लोगान भगती र गलै 30/वात वेदाणा घाल्या तथा जात सम्प्रदाय वधारया। अधरम सू धापेडी लोका सत-सूरमा ने जोवती-टोवती, घिरती गिरती पडती सी झट आ, गलै लागी तथा साचे गुरुवार सरण जोग आखी दुनिया जजमगी। सिक्ख घरम रो नीव गुरु नानक नाव र क अलोकी साध पुरख लगाई। सत जमारो, साहित सूराप रो इमी झारो, मुद्धा मना म जीवण रो सचार हुय गयो। डील धार-घर, माब पधारया, अघ डूबत जग सता तारचा त्याग-तप, राग-चराग अर लोक हितकारीभाव ना री अक सनळो सगठण वणग्यो। गुरु भौतारी, धरम प्राण, अतस रै अणम ग्यान गिरथ सावरी रचणा करी तथा भगत सिरोमणी वाज्या। ईस्वर रै अस्तित्व अर मैंमारी गैहराई ताई पौंच'र आळू पहर गुण गाण, एकात ध्यान म बिताई। उणारी आत्मा मे औतार असी उजास प्रगटयो जको सीख उपदेसा सू साधारण जनता ताई जा पौंच्यो । देम विदेसा मे ग्यान गरिमा फैली अर गुरु नानक देव घूम फिर र बिना भेद भाव र साचोट रो च्यानणो दिखायो पछ गुरु गादी परम्परा चाली अर सिक्ख समाज सूर-वीरता सू नाव कमायो। गुरुवा री पीढी मे दूजा गुरु अगद अर डोर लिंखला सू अमरदास रामदास, अरजुगदेव, हरगोविद, हरिराम, हरिकिसन, तेगमादर इत्याद गुरुगण, उपदेम भजना रद्वार, ससारी सुखा सू अळग ईश्वर भगती मे लाग्या रया । साथै पीडिता री सायता, गरीबा री मदद अर धरमी थान- मुकान वणाणा पळाया। पण मुगल बादसावार मना म इणा र ठास सुकारजा रा खबरी बाण सूळ ज्यू खुभता रया । उवा घणो विरिया गुरुवा तथा उणा र सेवक सिक्खा ने जेल में राख्या, अभी चाको पिसाई ? माथे तातो चेप्यो नास्यो तथा नस काट काट र घणा री जिनडी गमाई। छेकड बादस्या औरगजेग, छकडले गुरु गोबिन्द सिंघ रे दो बाळका नै घरम न घदळण वेगी जीता जी, गढ री भीता (दीवार) मे चिणवा दिया। जद गुरु गोविन्द सिंघ, बेटा र बलिदान, मुसळमाना रैइयाव पर उर्व वखत रै ढील ढाल सिक्ख सम्प्रदाय सू घणा दुखी होयर जमान ₹ तपसी सत माधोदास रै साहर जा ढक्या। क्यू ने उवै दिना देस मे माधोदास री चमत्कारी सक्ती-भगती डाढी बढी वधी ही। वै वीराल्मा सत, गोदावरी गुरु अर वैरागी/31 'मना . तट कुटिया बास बरा। उवा तीरथा वरता रे बाद अयाव, अत्याचार करगिया दुस्टा रा लाटो ले गया। गुरु गोरिद सिंघ जा परा र कवाया- इण वसत, था जड त्यागी तपसी भोपाळ री सिक्व सम्प्रदायन भारी जरूत है । हम्में आप पजाव पधारो।" माधादास कयो-'"पण म्है जगत तज'र आयोहो माघ पुरस है।" भळ गोविन्द सिंध-"मसार छोटणं रो समें मोजू क्म, जाप तो दस ने मुमळमाना री लगाई इयायी लाय मू उबारणे रा मुकाज झाला । पार जास बळ रो थोग भोग उपभाग वैराग मे नी, देस बचावण रो ओग उधाडा है।" माधोदास बाल्या--"अब साधु न अडो ससारी कार अजोग आप मोमता अर लारली म्हारी सारी सेवा धूड धाणी, राख छाणी हो - जावला। गुरु कया~'दम सेवा ता परमाच्च सेवा है। साधु हव चाय भादर, आप तो भढे सिद्ध पुरस हा । घरम रा रुखाळा वहीजो। देस सवा होता सत वरदान ब , मद अपारो बडा मत है।' माधो स मूल समळ'र वैठ्या, विचार हिडदै चठया अर काना मस कारा कढया जद आसण छोडर ऊमा हुया। उवा फट गुरु गोविन्द सिंघ रोहाथ भाल'र क्यो~"म्हें आपरोषदो हूँ।' बापर हिवडे चेप'र गुरु फरमायो-"आप म्हारा राजनीत रा मुखिया मालिक हो । आवो लवो खड रो पाहुल म्हें थान सिक्ख धरम में दीक्षित कियो चावू । आज थागे नाव गुरु बक्म सिंघ राखीज्या है । मुसळ मान, सिक्सा माथै पजाब में धणा अत्याचार कर । म्हार दो बेटा न सर- हिद स्थान में नवाव वजीर खा जीवता न दीवार मे विणवा दिया । थान पजाब जाय र काम करणाहै। उणा आपरी तरवार, पाच तीर एक नगारा अर झडा तथा पच्चीस सबक साथ देयर ओनू क्या---'सिक्सा रोस्याव ह्याव वधावा आर रासदीव दास रसी। गुरु आदस पजाब गधा, लार वैरागी जा पाँच्यो चिठ हजारा मिला मुवागत करपो अर वार झट नीच मेळा हुया। बठला स मुगल सूबदार हरता पाउने वुन लापहा-नडो गाग्मा। पैल पात क्यल रो एक 32/चात वेदाणा बाट । दिल्ली जावतो मोटो साही खजाना लूटयो अर आपरा सिफाया दिया। कपूरी रै रहीस रोखजाना ही सासर बाट दिया। आग समाना नगर म जलालुद्दीन-'जवें गुरु तेग भादर रो तरवार सू मीम काट्यो र घर नै बाळ जाळ दियो भर दस हजार नडा मुसलमाना ने मारचा। वीर मिक्ख जीत्या, लड़या अर वा माधादास नं वदा वैरागी री पदवी दी। ब्याह भी हुयो, पण सिक्खा रो मान तो आघूतो साधु रो। फौज भेळी पर अर अम्बाला, सवारा, थल दामला, कजपुर इत्याद गाव कस्वा, हायवसू करवा। ओरगजेब दिखणादा जुद्धा मे मच्याहो हो, बद रा कुढिया क्वाडा सुणतो थको सूबदारा न हुकम माथै हुरम उव बद नै मारण रा मल तोरियो। पण वदो अथोग बल दवत वीर, सधौरा रै घणी उम्मान खा जड जालम सूर्वदार नै जुद्ध जीत मार नाख्यो अर मुखळिसगढ नं क्म्जै लेय र लोहगढ वणा लिया। मरहिंद र नबाव, गुरु र दो बालका न दीवार म विणाया, जका लारै उणा री दुखी हुयी दादी मरी तथा बठं रै जगळारी रोडघट म लेयर गावि द सिंघ ने भारी दुख दियो हो। वो आखो अणहणो दु व चेत्ये अर जुद्ध छिड्या बठ रा दो सूरदारा नै सिक्खा मार नात्या। अकर में चालते जुद्ध रै सम वीर वैरागी जुद्ध भोम सू अळगै एकान्त वास मे जाय र मडली म भजन गावणा पळाया। ईस्वर भजना मे सग लीन तरलीन हो रया हा । अचानक एक सिक्ख दूत आय र हरजस मडली में बडघा अर जुद्ध री डरावणी हालत बतायी। कयो-"मुमळमाना री पोज ताडी घणी है, सिवावा न हला राख्या है।" वैरागी चट वाय वग घोर्ड चढियो अर जुद्ध जगा आइक्या । वान देखता ही मुसळमाना रा सेना नाज भीर हुई अर दजीर सा मारीजग्यो। मुगठा री तापा, वदूका अर लडाई री मावळी चीजा वस्ता तथा माल मत्ता खजानो घणा हाय आयो । वद र तीखा वाणा सू भाजता पणा मुमळमान मारीज्या। सिख जीत्या पर सरहिंद नगर म मुसळमान रो वीज नी छाडयो। सुच्चाणद. जर्क गुरु गोविद सिघरं टावरान पकडवाया, उर्व नै जेवडा सू जरू बाथर सर म फेरथो अर सल्ला-खूसटा मार मार पूरो रघो। पजाब न आजाद करवाय वरागी अमरतसर आया और दरवार गुरु अर वैरागी | 33 साहब म सोने जैडो ढेरा धन चाढयो। उ4 री ताकत तरकोव र भाग हजारा लोगा सिक्ख धरम अपणाय र धयवाद लियो। हम्मै तातलवडी राहकाट, मलवारा, मलारकोटला, जिगराव जिसहा गाव अरनगर वैरागी ₹ सासण तल हुया। राव उमराव इत्याद नरेस उणा रा चेला वणग्या । दिल्ली सू लाहोर ताइ र प्रदेस री राजधानी लाहगढ राखी अर गुरु नानक र नाव सू सिक्को चलायो। औरगजेब रै खतम होणं रं बाद बहादरसा (आलम पलो) दिल्ली रीगादी बैठयो। उ फौज भेळी करीअर पजाब लेणो चाया। पण बदा वैरागी री तेज ताकत डर सू मुसळमाना रा पग नी लाग्या। सहारणपुर रै राजा अली मुहम्मद इस्लाम र नाव आखा मुला न ऐका करया, पर राड म वो खुद खतम हुयो अर सहारणपुर वैरागी र हाय आयो। पण गुरुगोबिद सिंघ री दोवडी औरता दिल्ली जावसी जर बढ़ फरुखासियर बादमा वणग्यो । साठ गाठ काई इमी हुई के उवा दोनवा मिल र बदा वैरागी ने राजी करणी चायो। गुरु री एक देवी सुदरी नाव री बदै न कागज घाल्यो लिस्पा 'गुरु रा सेवक हा, जुद्ध बद करा, बादसा सू जागीर मिलसी। व जबाव दियो-"कोरो गुरु सिक्ख नही वैरागी साधु हू । म्हैं म्हारै सठे पराकरम सू गुरु सुता रो बदळो घेरणजुद्धलड । जागीरतथा दया रो भीख हरगज नी मागू।" इय उथळे सू देवी सुदरी बडी नाराज हुई अर उचै सिक्ख सिरदारानं कवाडयो क "वद वरागी ने कोई 'साथ' नी देव अर ना राख ।' सिक्खा अपमाण सरु करयो, वैरागी हि दुवा रो सगठप बणायो । इयं वैर सू बादमा नै मजो हाथ आयो। उवै बदा वैरागी साथ जनेक भातग झगडा छेड दिया। वरागी जुद्ध सू लाहौर लेणो चायो पण सिक्ख ता उळटा साधु रै सामण लडधा। उदास बदो गुरदासपुर आवस्यो। बादसा उर्व लारा भारी मोटी फौज भेजी अर जबरदस्त जग माच्यो। बदै रा सात सौ चालीस स्यामी भगत सनिक पकड लिया अर उन लोह री साकळा सू सठा जक्ड र बाघ लियो तथा मुखिये कर पागो काजी र साम बडो क्यिो। काजी कयो- " अरे फकीर ! मुसलमान वण जावो जिन्दगी बक्स दी जावगी।" H 34/वात वदाणा ३ पण सात सौ चालीस वीर हिन्दु सिफाया मे सू कण ही उथळा ना दियो तथा काजी सू मूढा फोर परार सूग करता थका अपूग खडा हुग्या । काजी भळे क्यो-"खामखा क्यू मरो म्हारी बात पण मानल्या, नहीं तो हण राहण युवाडा सू काट दिया जावोला।" पण व ता टस सू मरा नी हुमा पीट फोरे खडा रया। आखिर सरी क्तल करण री सजा गोली जी। हर हमेस सगळा रे भेळ सू सो सैनिका रा माया वाढणा सरु हुया तथा आठवे रोज बदा वैरागी री बारी आई । काजी पूछमा--"तू केटी मौत चाव?" बद हसतै यकै कयो-"जडीया रे मन भाव" उर्व ₹ च्यारू मेर माला री रोक रोप दीही, जका सेला पर उण रै मात मौ चालीस सिफाया रा सिर टग्योहा हा । सिर टग्या सेलारै उ धेरै म तरवार अर घदा वैरागी रे छोट बाळर ने बठायर कयो । "तरवार सू पार इयं टाबर रा वेगामा टुकड़ा करनाख।" बदा वैरागी धिरणा करतो हुया अपूठो फुरग्यो । जद जल्लादडे बाळक नै काट नाघ्यों अर उप रा टुक्डा वैरागी माय बाय दिया। पछ ताती लाल लोह री सोका वरागी र डील म दोसी अर खीरा सा लाल ताता चीपिया सू मास तोड्यो। जा सू हाच्या दीखण लागी । जल्लादडै अधम सू पूण्या--"इत्ती पीडा मिल तो ही नाखुस नहीं ?" वदा वरागी बोल्यो-"आत्म ग्यानी आली तकलीफा सू अळगो हवे 1" जल्लादई तुरत बदारै पट म खासी सारी ताती सीका कुमा उसी चुभो दी। वैरागी निरास निरजीव हुग्यो जो जके पापी लोग खुल्ला मत्याचार करे, उव न मरया कुण चेत राखें, पण जका भला मागम दुस्टा र हाथा मार दिया जाव-दै बदा जगती र मन सू कदे नी उतरे। - गुरु अर वैरागी/35 ऊट दौड मडाण रो पाणी वारो खारो इलाको, खाखो ही बदळग्यो है । वठ दो-दा, तीन तीत काम री छेनी भेती सू मुकलेरा, हसेरा, खोयेरा, दुलमेरा, कळ कलिया, साधेरा, ऊचाईडो, उदसिया, जेमा जिसा छोटा छाटा एक जोड रा घणेरा गाव है । इया म सू केई उजडग्या, केई वस | कइ ता एक एक दो दो घरा रा रैवास रैया है जर कया, ढाणी र ढब सू जीवण दु ख सैया है । पण लूणकरनसर रो दिखणादी बाड सू ही मीठे पाणी री सरगळ अर साणी भोम री सदीनी सरूआत है। उठ स पाच छ कोस आधा प्रयात पायो, विदवा क्सबो काळू है । सडक्टू साल पल्या री वात है, गाव गौरव री खुल्याडी ख्यात है। उवे पार गाव गावतर आण नाण म उफालो चालणा या ऊटा चढ र जाणा दा ही साधन हा । आज कळेरी सी रेल भर गाडयारी सेळ भेळ नी हो । एकरण एक वटाऊ गिणगौर र तिवार माय आपरी नूई परणेत न लावण वास्तै कळकळिया (मासर) जा रयो हो । मारग म काळू नाव रा एक माटो पर दडोब गाव आया। कालू थापाट चढचोडा गाव, नाव नामून मे चौखळो चाय अर कुरव कायदो दरावै। जक दिना आख जिल रो घडयो जडयो जेवर जच । तहसील लूनकरणसर रा दा मौ दम गाव, उर्व र पल्लं पूजीजै । राजा- महाराजा ही इय गाव ने पायर घणा राजी हुदै। उर्व वखत इयै माय क्दे मूरतसिंघ जी स्याया कद मसिंघ जी फूल्याना समाया जर कद ही 36/वात वेदाणा इय ने राज्य सरकार सालमै राखर पामाया। छेकड काळू गाव नै श्री गगासिंघ जी महाराज आपरी छोटी राणी ₹ चीर वैताल, लाडकुवार, श्री विजयसिंह जी रै टिकाणे चढाय कर आपरै आदश नेह नै उजाळया। काळू सदा सू वामण वाणिया रो गाव, तीन बावनी जमीन, जगा जमा ताल-बाळाब अग्नाडा जहोटा सावण म मळा मगरिया सू झिन। गाव रे बिचाळे लामा चौरम टाडो, च्यारा कूटा माथै च्यार मीठे पाणी रा कवा, दूर दूर रा मिनख मुख सोभा सुण अर इयै गाव म आर वर्म, हाळी दियाळी, वरम रो कोई भी निवार आवे जद गाव रो कण कण नाचण लाग जावै । गिणगौर र तिवार पर तो तीन दिना ताई हार जीत खातर कटारी दौड हुने । सग लोग आप आपरा करला मजार गाव रे बिचाळे भजाण । नडना गाना रा लाग देवण घड पर मनहर मेळा जुड । पल्लूरा ढोल मूडवै अर चुटाल री पणगट तथा कालू रो गणगौरवागड बाजोदी है। बटाऊ ने इथे गाव वाला साधी साइना गिणगौर रै मेळेरी आणदभरी वाता बतावणी पळाई अर पूछयो के ~ "भाईडा यू टेढी पाग वाधे अर टोड मजाये कठे जारियो है ?" बटाऊ वोल्यो-"गाव कळळिया म्हारो सासरी है। बट म्हैं लारले साल परणीज्यो। हमे इय तिवार पर जोदायत नै लावण वेगी जारियो हूँ। म्हारं घरा म्हारी मा मंण आपरी बहू भावज ने आख्या फाडया उडीके । म्हें उर्व न हणे नही त्याजता आग दुव्बरसो (दूसरो साल)लाग जावै, जकै मे नूई परण्याडी लुगाई पैलपोत घरा आवे नहीं । सो फूल गुलाबी पाध बाधव र जाक।" कळकळिया रो नाव मुणता हो उठे बैठधा संग आदमी हस्या! क्यिो--"बावळा | कळळिया म पूरी तीन टापरी है, इय तिवार र दिन बठ काई देखलो? अ रो गौर मगरियो देखनी । (क्वत चाल- के देख कळकळिया सासरो, देखनी मालरी गिणगौर) म्हारे गाव में आप मापर वासरा ईमर गौर च्यारा कवा ऊपर आसी, जद गीता रा गुटका दुळसी । समछडती बदका माय मूमाड करता बूचाड चिपसी जद रूखा मार्थ मोरिया गरळा उठमी। टावर भीता माय पटारा फोडसी अर मैदान में झूठा अटा रा सजाई सेता टोळ दौडसी जद यू अचको मागद ऊट दोड/37 जोड लेसी । माग पडसी, जद पार टोरड रा भाग उघड जासी। आपो आप चाल पहजामो।" चौधरी नार्थ कयो-"चाल म्हार घरा वासो ले । ऊट जवाणदे, लाठी मेल र काठी उतार दे। अट नीर परो, ढोकळिया जीम लेई अर मळा देखर दो दिन पछ सासर चलयो जाई । बढ़ थारा भासडली, कबडल जिसा जुवाई रा गीत सुणोजे अर आतो लुगाई न लैंतो आइज । लोट मे लिम्चा है तो माल मलीदा ही मिल जामी। पण माफत हाथ लाग्योदो काळू रा मेळो चूक र क्यू करमहीण वण।" बटाऊ आपरं घर सू जीम-जूठ कर पाल्या हा। पण वाळू र गुवाड मे चिलम पाणी पीवण खातर पोडो यमग्यो। कन चोखो जेवेडो हा, कळंकळिया विसा नावरे वस हो? नो कोस हो, जको उण र टोरई री एक दा रो पडा हो । चिलम तम्बाखू करी भर काळू री चालती गिल्लरा गप्पा नै हिडदै म भरी। घेताधूक हुग्यो। सबै रोबोड अर वारल गावडे रो गूगो मोड । जावक धुसर, वचकूकर अर भ्यारियो । भच पूगे कट खेंच'र, एकदा साटो गुवाडी ल जा वठाण्यो अर ग्बुद दोकलिया दूक र हाल हुयो । आथण री तीन बजी, ईसर गौर गोर गाव रै गुवाड मळे पधारया । भवाझव बीजळी रा सा झबका सळाब । गाव री गळया मू पैरी आदी लुगाया रा झूतरा च्यारा कानी सू कढया भर गीता रा गोट अपडया । मिनखारी भराड र टाबरारी जोह-ताड रा ताव देखर वटाऊ बगनो सोवणगो । कटा घोडा री घुड दौड देखी जद तो भूलग्यो सासर री सारी सेसी | रात नै सूत्यो, इयं त्यूहार रा तिरवाला माया नीद धुळी अर पुपाल म रगीला जुजाल छाया । दिमूग उठयो अर पाछो मेळ मै जामर मुढा पाहलिया। जी म आई, भारडा लियो अर भाजता अटारी बरोबरी म आपरा टोरडो ताहह पर दियो। काळू म दो दिन रैयो अर मेळ रै कोप-बलोल म बटाऊ भूलग्या जावन माऊ रो क्या। हार-जीत रं आट मे काल बाट रा टाड नगयो अर वाह वाही री मोज चौज म चित्त वहद उफ्णायो । घुडदौड र गुमान मे गेला व ग्ला। बठे वळळिया, कटै काळू ? मेळो देस'र मरवण में 38/वात वेदाणा गावर विसरग्यो रिमा नू पाछो पलाण माढयो, तग खेच्यो भर आप ₹ सागी गेले कट नै टिचकार दियो । बाळू री गौर रो मगरियो देख'र भागी इसो मतवालो वण्यो, जको सासर जाणो मूलग्यो । आथण आणद मगन बापर घरा पाँचवर बाखळ म कट जकाग्यो। जद उरी मा अर बहिन, बीनणी र कोड म भाजी हाफीजी वन आई। पण उवै नै अक्लो आयो देख'रब दोनू सूनी सी हवेगी । होस हुयो जद उर्व मार्य सागोडी उबळ पडी। बोली-"बीनणी ने ल्यायो नही तो क्यू गयो' परण्य नै एक साल तो पूरो हुग्यो भर हमैं दुब्बरसा सरू हुवे । जदही तो मेल्यो हो । पी'र रो के छेडो है ? भेकर थू अठ ले आवतो तो आपा भळे पाछी भेज देवता । मीण मास टावर रह जावती अर आवण जावण री अड- खना बुस जाती। बहू-बट्या आवतो जावती चोखो लाग।" दुम्बरस रो नाव सुण्या भर सौकीन बटाऊडे रे सिर में चेतो आयो। हमैं मौजीमन समझग्यो के हैं तो काळू री गिणगौर देख'र ही पालो मुह आयो है। बीनणी ल्यावणी तो दूर रयी, म्हें तो सासर जावणो ही बिसर बठयो। जद बीनणी कठे सू आवती? मुळ कतै कळपत यो साचो समचार उर्व थापरी मा अरमण नल्या दिया। मायड आप रै अंडे अलोल अलगर जी जामरी सुणी वाता, माथै आपरै भोड मे एक भडीड खालियो पर कियो- 'फूट या भाग फडोदा माथो, राही ने घूमा वैनाथा" (काळू र नाथ बटाऊ नै गुमायो।) - ऊट दौड | 39 कड-साच भडाण सेनर खनला खातीता गपिया पिया तपिया तथा पुखना बातपोस पुरसा री बाळ चेत आवै जद सैजरासर रै गोधूराम बिरामण रो हेरो बतळ करता मिनखा रे मूढाग घेरा घालण लाग जावै । अभलेखा सा आव भर दाद गोधराम रा कोकड टाटका वोलीज़ । सजराजर गाव म पैल्या सारसुत विरामणा रो नमूनादार धडो हो। ठाकुर धनपत सिंघ र इयै गाव दो वासा रो पटवारी गोधूराम--वडो बोलाक, मिस्ठ मजाकी अर कूडी बात न सााच रे ढब दुका जचाय र क्वणियो करामाती तथा सामरय हो। उवा री वान मास्यात गप्प जाणता थका ही सुणनिया लोग साच रो सो रस लेवता मुणता जर हंसता हमता लोट पोट हो जाया करता। पण को कोई बात कडी नी बना सक्तो। रकम लेणो, छूट भेल तथा याव नपास रा काम तो केई दिना गाव मे गोधू दारै हापा सळटता ही हा, पण दूर दूर रा मिनय दरसण मेळा जम र उणारी बाता ही सुण्या करता | वा री वात, खुरापात नी, दिल खुस रजण रो रुतबो बण जाया करती। इस तरा भूरा पूरा, सता महता अर जझार जत्या सत्या री कीरत कथावा रा सजरासर गाव में मदीव हरिया छोगा हालता लेरावता रवता। कस्दै काळू रो काण्ड मोमाही होणे र कारण नखराळो गाव संजरासर घण माद मुरजाद नाचतो दतो लारला वरसा ताई गप्पा गिल्लरा अर कलाळ करतो रवतो। दाने कैवतो- 'क्रस कुमम्ने, क्मग्या फरी उही। अदी मंडी वरमाळ री झडो म्हें बगाल जा टक्यो। पचास री साल, आछा दरमाया . - 40/वात वेदाणा - , मुट्ठी वाणिया र वासे रसोइयो रंग्यो। पण मोमम मार मद्ध करया। गिचपिच कादो, रात्यू पाणी पडे, लार गळ तया चीखल चळा झर वोकरै। बीजळी रा मळाका जमी सचनण कर नास अर लूठ दरिया रा दरसण भरा देव । छोरड पाणी नदया म रळ, जद की सूक्वा वापर। मसावट मुभाखो हवं, म्हैं सभाव र चाढे, माढ गमछो लेयर घटा भर खातर घूमण ने नीसलं, पण छाटा छिडको अर बीजळ पळाका ता करता लारो ही नी छोडे । अक रोज तफ्टी कडकी, माख मिचा नाखी तथा वीजळ क्वरी केळे रे पानकै माथै दै नीच आ पड़ी। म्हें दख्यो-'बर बीजली ।" भर उठाली । अंगरखे री मायली जेब म घाल'र आडी काठी घूडी जडली तथा जाबक मूलग्यो। लहर वणी भावना जागी, द आया दस न ठोका । गोधू की नै पलका खडा हो। दो महीणा मोफ्त में धुवा खै आग्या फाड'र आ सूत्या घर री लूठी धावळ म उघाडो । सुख भर सोय र सागीडी सक्कर नीद धुकाई । जाझर उठ्यो, आडणियो अडायो तो काख नीचले मूझिये म बससिया फाटती बीजल कुवरा रा भवकारा पडचा । झट बटण खोल'र आत र फरणाई, अकास चढती लीक्टी सी दौसी । म्हैं वा का पिछताया। बापडी नै डाढी दबास राखी, सफा मूलग्या । कूड साच कू सूरज भगवान साखी है।' पछ ता दातो ठाकरा र गढ म रोक्ड राजनामचे सू लेय र ब्याह- सावै री मेहमाणदारी ताई र पातिय रा प्रवध अर नेगचार रा सारा सुझाव दिया करतो। रैयत, रजवाडा अर वाणिका वोगारा म रैवर्णरे जोग आछो अणम कुसळ मजाकियो केइजता। पचा म पच अर चौधरना म चौधरा, पण स्याणो समझदार हावता थका गार्ड माथे घड र मनोहारी बात बणा दिया करती। कंवर्ण रो ढग इसी निराळो क सुणनिया मिनखा सामण सिनेमा री सीबी सी उघाड देवता। बी अडो कळाकार हो अर जाणतो क, 'बात म्हारी मुणनिया बजचती नी जाणसी। पण वात रा हंकारा तो फोज रा नगारा ज्यू मघरा-मीठा गूजता ही र सी। लोगडा गडाछा रे वोल मगन होयर मुळकत मन हंसी रा फुवारा छोड थोकरसी मर म्हारै मन री हूस पूरीज जासो।" कूड साच/41 वरतारा बदळया, राजनीत पसरी | गोधूराम रा वाण ढोला पटग्या। ठाकर-ठरा गया, मितगलिया मर घट्या अर गापुराम माय बुगपो पर चंठयो । हम्में कुण गिणती म लेव? चुणाव रा दिन आवं, गांव मे धो मोटरा बुवावं पप नेता लाग गाधूराम ने नी, उणारे बेटा-पाता नै बूझ बतळावं। एकरस पैल. चुडाव र सम परचारी मिनखा सू नरियोडो एक ट्रक गोधूराम र धारण आग आय र ठम्यो। नेतावा नै आया देख र गाव रो लोक डाटो राजी हुयो। मोना मिनावा न ट्रक सू हठा उतरता देख्या जद गाधूराम रो ही मन हरमा हुयो। चूनापो भिटक्यो, कोतुको हाडका जूझ्यो तथा मजाक्यिा ठूढ ठिठोळी करणे वेगी अमूक उठयो। मिनखा रै उछाव मारच मे राळ रिगटाता रीडिया चढ आई। जाण्या-"लाग पल्या मेरी बाता सू क्तिा राजी हुता माण करता थका घडा चावता। व सग बात म्हें मूल्या थाडो ही हू? कोई भा भलाही न बूझो, दाद रंजी म आज आपरी बात कवण री काळज खुमी खुणस खडी हो रची है। कळा, कळा रै वान्त व । कुण इसा हबलो जको दादरी (म्हारी) बात नै कान नी माडलो? आघोडा री आता ने उथळ पुथळ कर नाख ? बूढी जामा म अळबाद आलरी। डोकरा घर में गयो अर छुछ चार रो खारियो भर परो र ट्रक रै भाग ल्या मल्यो। भेला बैठा सग जणा चौक ना हुग्या। जैहिद रा हाय अरा वैरा खिचग्या? पण दादो तो वारिय म फरफरो नीरो स्ळकाव अर ट्रर र मूडाग सरकावै । बेटो गाव रा सरपच, बापू बापू' क्य र घर म बुलाव । पण होकरो ता खारिया झाल्या आयोडा नेतावा र वीचाल रोडघाटी म पज्याडो खडा है। प्रधानजी पूछ-नादा अया काई क्रो?" डप बतावै-'बापडी मटर दूर सू थक्याडी चाली आई है। जाणू दो मु मार लव । च्यार गुवाळिया खा लेमी तो सारी चालसी। लाम पह पडी उगाळी काढनी बगमो। याहो फूम चर लेवण दया, ऊपर सू कुरा मोठा पाणी भले पा दस्यू । गायोग आखा लोग हस्या। पछ प्रधान जी नले वाल्या-"दादा म्हारी सिरसारू (गजरी) 42/वात वेटामा 1" मोटर है। पाणी कोनी, या ता तेल पीर्य जद करो क्वं-"पीय जको तो म्हू जाणू । तेल नी, आ घी किसा कोनी पी लेवे। पण है क्ठे? घरा रा बिलोरणा ही मूधा मारी- जग्या जर उणा रा सरजाम सफा खतम हुग्या। एकरग गगासिंघजी म्हाराजा मटर चढया महाजन राजा हरिसिंघ खन जा रया हा । खेत खनले गैले चढ या कचा , म्हारे खेत म उ4 साल वाणी ही। गाया- मस्या रा मोकळो धोणो हो, रोही म रोम विराज रिया हा खेन, मोठ मनीरा सू भरियोडो देख्या, महाराजा री थाक्योडी मटर जावक ठमर• टमगी। भरी आगीन नी सरको। टस सू मस नी हुई। गगासिंघजी घाप'र म्हार खनै आया, पालागण करया। म्ह आसीरवाद दियो अर खनला सगळा मिनखा खम्मा बाली। बीकाणनाथ बोल्या-"दादा तावडे वळा, मोटर रो तेल निवडग्या।' म्हें क्यो-खम्मा अनदाता। घरती राधणी हो । मतोरा जोमो अर सिट्टा चाबो । तातो रोटियो करदया, पारो करो।' दरबार बोल्या- 'साथै एडोक्म्म है, कॅवर सा है । मोडो हवे, आथण पाछो आवणो है। भळ कदई घात " जद म्हें नम्या अर बोल्यो-- 'तो जणा पधारोसा चढो । मटर वेगी चेल भी ता घी धालसू अर नावडयो ल्या रयो हू।" म्हाराजा सा व जाय र मटर चढिया, म्ह झूपड सू घो रा मोटो मूण (बडो घडो) मोढे ऊ च्यो भर लार मटर नई जा पूग्यो। आग-देखी बापडी पड र तावडे सू याक्याडी दूवळी, छोटी सी क मटरडी होठ तटकाया अर आग्या फाव्या टोटण मी खुरवली पग पाया ऊभी खडी । म्हैं जाता ही धीरो घडा सूओ रो मूआ मूढे माथै माज्या। इलेवरियै जाडी पकडी, म्हैं फट उना दी हो । फ्टकारे हुस्यार होयर चाल पडी। भोपू माज्या अर खख उडी। सर मे बा जवा ज हुई। भाजगी, दीखण सू रयगी, जणा, सगजणा खेत में काम लाग्या ।" दाद घाई वाढ काद'र अंडी घडी वाता सुणाई। दाद री चालती बात साथे बीकानेर रे गेल कानी सू जोप रा हॉरण सुणोज्यो। परचारी नेता आगलो पड़ा मूल्या दठा अर दादरी गल्ला- कूड साच/43 सल्ला सामै मूढा तिडका टिडा राख्या। तुरत लारली पारटी भळे मा पौंची, जब मे जिलं रा एक एम० एल० ए० हा । जीप सू उतरता ही एम० एल० ए० सा'ब चिनाम सा वण्या बैठया प्रधानजी ने लिया लबह धक्का बोल्या-"पडगी पार ! सीयाळो सूरज सिर चढ आयो , थ ओजू अठ ही बेठा हो।' प्रधानजी लजमाना सा हुया अर आखा नताशा नै लेयर ट्रक चढचा । सरपच ने वेरो पड्यो, तुरत ट्रक स पाछा उतार र आपरे धरा भोजन रो भाणो लगा दियो। दादे क्यो-"जीम्या विना जावो पोल थोडी है। अया उतावळ करो जर गोधू सारस्व सू बच'र वगणो हो।" पलडा जाया तमाम नेता सागै ही वोल्या-"दादा था म्हान आज तिरपत कर दीहा, विलाली विदवी बाता स म्हे सारा मुग्ध हुग्या । भोजन री मन म ही-~-नी रयी, जावक भूलग्या । कणो पडसी-संजरासर ऊनो- भूनो, मत सूनो गाव नी, यो तो बातेरी पडित पुरखा रो नमूनो वास है। जद दादै रो लाल, गोपाल सरपच बोल्यो-"हैं या ही चावो के थे लोग बठे सू भूखा नी जावो । बाको म्हारै बापरी कथावा तो कण र लहज सू ही मीठी लाग । साच रा उजाम नी, सफा कूडी घडी मढी चाले। एम० एल० ए० सा'ब भण्या गुण्या मिनख चालतै प्रसग न समझ र बतायो के दादै जेंडा लोक क्थाकारा र कथा सनसा सू ही इण प्रदेस रा नर-नारी आत्म बळिदान र अन्ठ आदरसा न थुथकारया है तो चालो आपणा बोटा ने अठ नी है। दूजी आच | कूड नी साच । संजरासर आपणो है। 44/वार वेदाणा गाँव रो लारली बात गरूर गद बडतो गाव पाक्ड घडो, सार सुव सम्प' चोभीत रस वसं एक बूढा बामण | आगर के -बडूबै माप घरु कामा साथ नाक निवण मन करुण कारजा घणो खसै खट । सवेदणशीळ, सरस मानवी भावना सू वरम साठ पैल्या री धूटी गळ सूटी चावना पाळ उजाळ । रीस रोस अलूणो, सुख सतोखधारी, निस्थ रवास पण सत उपकारी । देवत दुतिया रम, आसथ्या सत्तर मू थोडी कम ! पण सभाव चाक अणम ग्यान मखमै दाता दिल दिया है-पार पाल | पण काठ राड माठ सू काठी, भूवाजी रै भरमाव चाल है । गळ गळ सूणो घास खेत रो निनाणियो काढ । धान रो कोई सोळट- पटाइ ज्याडो टाटूडो बढ । जेटा कुण कर ' साथ रो पडयो है। डील मे पसेव रा खाळा नीचे हास, जनेऊ रा ईला लड सुहणा बास । बाळ रो फोइ मूल्या-चूक्यो लरको लागे। तावडो धमक है, माछर चूट । साग ताती धूड, ईल रो माव कूड पलडी पडवा गाजी, दिन भोत्तरगी जामली बाजी, धान बळ'र जाता रयो। मोटी आस पासडाकुचर, कदास नारा- यण सामाभा ज्यावै तो लोर सर वसता ज्यावा, अही धारणा कमियै री धार झपाझफ गवारी बाळ सी उलाळ है। दरागो डेण मरे पचा कारण खेत गाव सू पोस च्यार पडे । माखर 'करणी सर रो डाडो, डेर हार चिप अडे । पाळ रै ढिस्स सुहणी झुपडी, वगता न जाणा माता देव बलावै । मारग बवता तिस्सा वटावू घणे माण पाणी पीवै । गाव री लारली बात/45 - छिकता जाव है। दो मटीगण मूण (मोटा घडा), पण क्तोक पाणी राखी मंत बारा आडोसी पाडीसी लोटडी कूजिया ही भरणे जावं । डणमुस्कळा गाव नू पाणी ल्याय'र मेल, गैले वगता सण, सो रो सटा वगो मो पो चास ज्यावै । डोपरी लोटा भर भर पावं, मूज वळे नी, लाक-सेवा जी सोरा राख सुधिया साढी दस र टम पर सू आटा पीम आव, साथै धोणाळा स् छाछ रा खाटो कुल्हट ही भरा ल्याव । धणी नै पाथ म पाणी झलावं अर हुर्वं मोस्हारा दरावै । तात रोटिय दपारोअर लावण जगावण त्यागा राख । स्यामी नित सिनानी, धोती कुडतिया धो दवं, डेरै रो बुहारो भाडा कर अर पछ वरतण माज घोयर मिझ्या पाछी गाव जाय । जया राग न चौमासियो घघो धिकावै । घरा एक खोसरी (दुबळी गज) उद री धार कारणी, छ माल रै छोटिय छोरै न जीमा जुठाय र साय ल परा सुवाणना अर लिछमी वोवारू घर खुल्लो गसणा हो चिना मुळाइ पाती मे है। पण वणी लुगाई दोनू गळगूगळ जीत व मू मारो सुची समै गुजार पावली टोरडी खेत म् ही तडप पीटती चाल । अनाण ज्हाड रो उत्तरादो घाट पक्को, कचा, पाणी रो तिखाळा तळ री हाब म नाच चिलक पनक डोक्रा माघा दो, दोग विरिया म हाफ्ना सा भर र बार ल्यावं । गाडा देवणिय जोग डाढा दारा, वारं म घाल र दटिया अर पदी तूम्बा दवोग तथा हैण देय र टोरडी ने टिचकार खडी कर । पछ म्हारी खोचर सूमते अधार पाछो खत ले दुर । एक जाय माडो सा भाको भबकारा पडे, दूजाडी यानी प्रीत पाळ। मारग काई उपाळो आदमी सागै हुज्या ता अरडावती टोरडी माय चहा लवे । मिथ्या र मम काई अकलियो राही म रात वास वगी भामराम र हेर आज्या ताण उर्व वेगी आप जाट री राटी कर अर जीमाव । वमिया जेइ चौसगी गटासी कस्मी इत्याद विरसाणी औजार जे काई बहिया आदमी मागणं आवे तो डाबरा आप काम वाटा होय र भता देव । आटा गुण, लूण, मिरच नर हो रापान सनला पडौसी माग- मूगर ल नाय । गाभा लत्ता नीरो फूम, आपरी राख'र नागले री जरूत 46/यात वदाणा - पूर देव ।कोई वदो आपरै खेत म पाणी वंगी कच्ची कुड वणादे तो भारू राम उर्व रे साथै भीर हवै अर ऊरमा सारू खोदण मे घणो म्हारो देव । लकडी लंडा, लगावण जावण, मिनखा वास्तै मग जोगती चीज वस्ता हर वखत हाजर रास। मिर सिखा, ठह ठारी री वेळा, आधी गिणे न सापो, मोडी वेगोठा लामै सटा आगल बन जा पूर्ण अर कुटको चिरा यत री उमाळी हाथा वणाय र पा आव। गोळा उतरज्य ता मसळ दर्य, हाथ पग टूटयाइ बाध दवै अर जात-पात रै भेदभाव बिना लाहित करें। माय मिनाव न काठ-पूळा, पीपळ तुनछी री लकडी अर नारळ खोपर सू जुगती पोचावै । इस तरा, माण मेवा नी, भगवान री पूजा जाण'र सेवा करें। मिनखा री मोयाब दाब सू नही । पसुवारे होर्ड प्रेम ही हाजर रेव । पाग्या ने चुग्गा वरसावे , साप नै दूध रा कटारा सरकावै, कीडी नगर आटा अर कुत्ता नै रोटी नाखणी क्दी नी भूलै । अकग उनाये आवं जद हिरणारे पाणी खातर गौरव ठीगळा, कारा तगरा माडे अर माद घणा ज्चर उवा न भर आव । मभाव कया जाव ? अभाव हीण जमार पळया है । भगवान रो दिया दुख ही ता सुख री तरिया सवणा जाण, धीर वाण पुरत्र कहीज। से दिन लेक सा नी वीथ । सुम-दु स रा जोडा है। भारूराम साच-"काई हवै छोटो है तो दूजा बटो ही है और एक पोताळी लट ही रामजी दे राखी है। जो ता टिकाणी ही पडे । काळ माटयार हुज्यामी भर पूरै रा भोळा भान नारासी । के कोनी हो? मा की हाना हजारा री ता बाकी सिटी पड़ी है । 'का आय आस हू अर का आवे तास हूँ।' हाटहाळा मालडो ही वाई बुताई करणी पदयाउधारो पुधारा ही नाटचा सडा है। बघ भाई का की सू लेवा? धेरसी उवगे भलाई, नी दसी बा री भलाई। माईना री जी जडी, पर गे लाखोणा चेटो ही गयो ता चोजा री क्सिी चिजारी है। रिपिया र फोर्ड रा विमा सरपा है। मालक मट ही घर री माढली जणा ही धुरिया जगत टढ बाटै।" भास्राम मोटा बेटो वडा वापारी गाय राहर वामा म बलावता तेहा आवता। परसपिय म्प पूग राम नार, वरस बाईम ही नीहा नहीं इस साल घर आइ, लाल पिती गई। बापडे डग न रहागी। सगळे गावरी लारती बात/478 ? री वास ने चेता चूर करगी। बूढळा हरदम चेते त्यावतो वरळ झरळ कर परणाय ने पाच वरस हुग्या, पण हम्मैं जायर घरा नू वा कान वापरयो। नानेरै म जलम्या महीण राहुया । वटा घरा बाया जित नै बाप साध्यो ही नहीं पार पडयो।' डोकरी राव-बाप री तोकगत री मा मरगा, म्हें धारया ही नहीं। लागा क्या- भारूराम ब्याह कर ले, इलेसन कुग पाठमी माटयार सू टावरा रा फाहा देव्या नी जावै । गुवाडा खाग मट ला मूघा मारी जगी।' यात मा, आखर वरम जावता के वार लाग ? वटा हुया जुगानी उठा-वठी करी ! गुवागे न पाछी सूई करती। गुवाहा छापाटा वणग्या। पण हम्मळ पर हुगी। छारा छाटा साल छ व रा, मावसी पूर री भाळी डाळी अर सूची । ऊधी हव ता ही लुगाई । जात काई कर सके ? मेरा घोळा मडग्या, माथ भारी आपदा आ पड़ी। पूरै री बह रा सामा दीखता दुख रात दिन, साझ-मकार काळ ज खुन, जद पर खत, छाती भाठो मेल'र मभाळणा ही तो पह। माळा मिणिया गमा लारली गळो । सो क्यू ही चाही जमी। वी डाळ रा ही दीम , कारो भतीजा वाल न वडा हुज्यासी । भार ईसरगा वाम मभ वसता ही अक्लो मुरजादी मिनख बाजै । वा मिनखा र वास्त सज वत्सलता वरतण वाळो अलीको भारत ओप साम । अहा सूध भाव हरदम उवर हिडद वम। पण वानी जाण क म्हें की रे ही साडा ऊभो आ रयो हूँ। भारराम पदमकाळ यो पपाळ जाळ नी पाठ के हैं लोगारा काज मारू । उव र हिडर म आ बात ही नी आव व म्है कोन हो की देवू साज हू । भारू आप रे भाग मारू हरेक न तन मन धन सू मजाग दवाळ वण्या रव। पाछा लवणा अरसाण जतावणो हरगज नी जाण पण आज र वरतार लोग हिडदै घेखी अर टगी जाम । मन मला मपचूम घरे माय पुरख ने पाणी नी घाम । गला अर छिनोर नर, बधार डोल टवा । दूजा र कुहा आपरा वर्ण, नहा लाग मगा-सवधी मैग हरामखार खायाडा डकारण खातर उघी मीस पाव तथा एक रा दो घर करा दव । दुनिया परायें सुख दुवळी, भल दुर मार काइ जोण ? मरयोडा ने मार । आप रा मुबारथ साज। गुलामी मजूर-गूमा मर, लुक मि । 48/बात बेदाणा पर उगाळे ! छेलको बलकी लगाव, चप्पर को च्हाळे हाल चाल । भोळा स्याणा न भूवाय नाखे मर कर रो पइसो पचा ज्यावं । चेला हा, पण गुम्म कुहाव बोहरा धुरिया माग वर्ग। छाटा-माटा रो मानखा का कर दय । जगती री सोख पूर राववा, आपरै सुमरै सू लह लेव, धन रा ठोकार बता नाखे । नाव-नामून माथे धूड फेर दी। परवार म पाच ही प्राणी हा, हरामडा, दो अर तीन रे जदापण मृदा वडा घरा वसा दिया। भारूराम बाळक पोतं ने गोदी लेवणो चाव खेलावं, बेट पूरै नै मूरै बाके ! पण पूर री बहू छार ने खास ल ज्यावं, गाळा ठाव । कुण रोक- टोक ? जगती तमासा देस । गान री बात नगरान मात देन । गाव री लारली बात / मजाकियो मिनख सठ राठी क्स्व रो मानी तो मिनख हो पास । पडोसरा गावडिया माणस ही राठी सू पूरी मुलाकात मानता। जद कदे मडो म मिल जावता, हरया हो जाया करता, बैठ र भेळा जीमता । वो आपर हाणहार नगर रोता वाल धन सरूप बाजीदा बदो हो। बया तो लोर-बल्लभ, मिलतारू-माणेत चोखो मन-मेलू अर मनोखो मिलणसार मूरत हुतो। जकी गळो क्ढतो, लार हेला हेल मच जाया करती। छात्रारी कोक्ळ कोडी नगर ज्यू जुळवुळर नाळ माळ लेवती।वो ही चाची जी म्हार । काको जी म्हार घरा रै कार म थारै म्हारै रा भेदभाव भूल'र आपरी भावुक्ता वस कनते ही गुवाडै म पला जा वडतो । आग "चाखाजी', चाखोजी" री चेतणा में पुडी पराठा छोड र चाय रो गुटक्यिो गळे उतार परो पूठो मुड जाया करतो। फट से सू कढ़तो जै ज जमुना मया री कैवणो राठी क्दे नी भूलता। सरस भावुक अर साहससीळ मानव । बटवा काळा गुच्छेदार बाळा सूलटारासा भवरिया पडता बुगला छाटेडी सीस सोभा सदीव फ्वती रती। पचेतेर बार कर माईत मरग्या जद दूजा सार्थ वगाले गयो, जका जुवान वण र ब्याह करणे ही पाछो गाव म वडयो, सगाई सरदारशहर बढ़ री बठे ही हुई परणीज'र आया अर घर खोल्यो। तेणव चौणव दस मात्यो। जद पैल्यापोत, गावगोत र लोगा इयै नै जुगत सू जोयो। काना मे वाळा, माथै ममद मोळिया अर उदै रा अठलडा जमायडा आडा पच, स्केच नाव री सीवीरासळ उघडता । गुटगुटियो नारेळिया सो छोटो लूखो 50/वात वदाणा , आख को मूढो, फोळिया वेगी बनारेडी टोडस्या री खपरीवाळी कारा ज्यू ओठा री बणगट, वधती हरी कचन बेलार नाळा सी मुरटीजती मूछा, सफाचट माडी चाटी उतारडी टोपसी सी ठारी, चूपचढी बत्तीसी रा आणद दिया करती। लाम्बी वाया री कमीज, सियाळं री अपरावर अडायेडी काठा सूती सुइटर,पागडी ने त्यागर टोपी धारणवाळे जमाने मे आटा घालेडा काटा सू लडाळम अक मफनर दी माथे लपट लिया करता। ओ स्यामगड रा रामनेमी अर सही विणन करीणयो सेठ थी हरखच द गठी नहीं, दरज रो मजाकियो तथा हमाड जीव, समाज रो गुणी गिणी जणो माड जमनानास राठी हुतो। रास रम्मत, नाटक चेटर अर मैममेजिम जादू गरी म आपर भद्र भावा सू देसती जनता री आतड्या उथल पुथन कर देया करतो । इये री रग रग मे तान पग पग पर नचको तर होठा, लाट अर लिलाड, सारा अग उपाग अभिनय रे मम माज बाजी सुरमे ग्ळ र चरभर री कागे कायल ज्यू चाल पाड लिय करता। अंडा अवसरा इयरा मोखी सागडद गावडिया बाजावाणिया अभिनता अर माम्बा आदमी हस हसर लाट पोट हो जाया करता। क्या । पट दुम्पबा लागतो, कया रै पैसाब रो हानत उफण पडती लोगा रा माम उरक चढ जाया करता। देसणिया पण जमनादासरी नकल गे असल रुतबा पदनापतो। 'मरस्वती नाट्य परिषद स्यामगढ' मडळो रा राठी अकनिन चत भावपिया चित चार चिलत हो। परिषद मे इमा जोमीला चटक धतर गरवेस बदळू द दूजो काई नी हुता। राठी री तीस माल पुराणो बाता चेत आता ही आज लोगारे दिल रा बीयो यचपण दबक्या करण लाग जागो सराड उपड ज्जार अर हुसरडी चट पड़ी हु। राठी माहेपरी म्हाजन हुना, पण हरेप जात विरारी र काम म मापर सेवा भाय स् से जाग रा हाप बनायण न आधी माप ताइ त्यार रवतो । बडा जि दारिल, हममुस जर हिम्मतदान हो। हाम्रो रनिा आरा गाव नै स्वाग दिसाळर पूर्व भाग रामदेवता । पररहिन पलाही 7 टूट पडता मजारिया मिनय/51 । राठी राठ, पाण, सेठ, कंजडा, साधू जर काळ रा साग भरचा करता साथ पटी, ढोल वाळा सायो, वाजा वजावता वगता। राठी आप र धूघरा री घमर घालतो चालतो। सेठ रो साग आछो ओपतो। बाजारो तान मैं पट इसा कूदावतो जका देखणिया टाढो अचूभो करता। सात बाज साय तान मिलवतो थको चसती बीटी नै होठा सू ही जडी घालतो अर मड मू वार कारतो, चटाचट चकमा दिसालता नाचतो। जका दिना नाटक खेलण रो जार री चाळा चालतो। प० राधेश्याम वथावाचक रा लिख्योडा वीर अभिम यु श्रवणकुमार, दानवीर, कणभक्त अम्बरीम जर उवा र ने. सरदारशहर रा वामी सेठ शाभाच द जी जम्म रा बाल विवाह वद्ध विवाह विदुसक जैडा सामाजिक नाटक वठरी मडळी में घणीवार खेलिज्या। राठी उवा म आछा टाटका मेलतो। उव न रिमल री को जरूरत ना पडती। उर्व रा डील ही पूरी रिहसल हुतो वा वधस म राम ढाई सरा, रम्मत रो चाचक बोहरो बर सिनमा रो कुदरती जोकर हुतो। नाच गाण जर हाव भावारी तिरघा कळा उव न मा री कूख मू ही मिल्योटी हो । स्टेज पर आय र भूभतो जद चुप्पा छा चिडया म भाठी पड जाया करता। दरनक दडादड गोबर रा टिगला मा असर पमर फैल जाया करता। कावुलो रे वेस म हीगरो प्रचार करता था काई नी जाणता के यो अभिनय हा रचो है । वो चौक चढतो ही बोलतो. 'यारमारो कोसना भोळाना | हिंग लो हिंग | चोसी सूची जावती। 1 1 “हे ' वद्ध विवाह विदुमर नाटक रो लाभी सठ धिक्कारवद वणतो, लोग र हाथा मू पाच वधाय र मावळे माण स करडावण वरतो अडवामो रगमच मा अभता पण राठी हाफेही का जन टीकी कर परा र कोरी दूगनायता विना सेठ वण जाया करतो। वाणी को लज लुनारू भावा न जनता रो डोटो वा वाही लूट लेवना। मृढे हहफा र माय तुरती टीनाछी मोपी रती। मूछा री मरोट क्षणी रो हयाव अर जुइया घरपाठी मी यानी जनता री हमी रो कारण बण जाया करती। सोल पर रामरज बरमूर पर पाऊर पोत'र बिना वाले मासणी मनी । 52/थात पणा भावतो । हरख र व्हाळ म म्हें ही व जाया करतो अर उर्व माय सवाद करतो हस पडता । राठो स्टज छाडेर ओठा नेपथ्य म घुसता जद पसेव सू हटाडोब, गाभा गीला लिया वडता, पण नाच गाणा म कदे गावो नी राखता? घणो सासी भीड देपर पखडा तोडण लाग जाया करतो जानता हो जमनादान जमनादासारी रट लगाया रासती। अंक वार स्वं रा धणी राजाजी पधारया। बडे अदब म माख गाव रा नजराणा हुयो । जमनादास ही म्हाराजा री भेट चटावण हाउर हुमो सग लाग टम् फरू हुघाडा नजराणा मेंट करा अर धूजता दग्ता अपूठा पा घरा। सेठ राठी आपरा इक्कीस रिपिया महाराजा र कवळा हाथा माथ घर परार हमर मजा म दूजा र नजराणाळा दियोडा रिपिया पट उठा लिया। आपर सिर पर फेर र नाचत से घूम'र, म वणाय'र इमो चिलत नटका रच्यो, जका म्हाराजा री मारी गम्भीरता गइ लारती गळी । रिपिया पाछा आया, उवै राठी र मामणो खुद हमण लागग्या । राजाजी हुघा हरघा, लाग डरया, उवा रा सग हाकम मुसदी हस पडया। म्हाराजा सेठ रो नाव गाव पूथ्यो अर माळा मैरवान बण र रोमरी बजाय राजी हुया, कायदा वक्म्या। राठी रा घर जोराराम गोरधन धूत रै बरोबरी महा। उव रे आर मूथा रो तिमजली हवेली, हरदम झाक्ती र वती। भूपा रो परवार डाढा टाढो, जको जमनादाम सू सोस अर स्याणप रो हर बखत लण देण राखता ।रिपिये-पीसिय र काम म मूथा जाबक माडा अर मडचूस , सफा किन्नी काट जाया करता। टाबर सू लेय'र बुढा ताणी हमदान दिखाना यका चटता उतरता हमस जमनादास री राळ रिगटानी सू मूथा पण हरया भरयो विगसाव लिया वमता । भूषा रै हल राठी र हाथ रो माला छुट जाया करती। राठी जिसो हो भगवान भगत, विसो ही मूथा रो पडौसी सगत | सर्दी गर्मी तथा ब्याह बेमारी मे उबो र कट्दै जमनादास रो पूरा धघो धिक्तो। कातीसर र स जमनादास री खेडी माय मूथा र टावरा री झंडी भोट लागती जका दूजा पाटौम्या सू जावे नी देखी जाती। मूथा अभमान रा घर, राठी इमो रो सर । जुग बीत गयो, पण खेती दाव नी दियो । दो दस आना आग हो मजाकिया मिनख/53 ? रया । राढ मू जेवडा घडो ही घस्यो पण वाणिय रवट रा खाली खेती मू विसा पूरा पडता? अट मरग्या, तागा टूटम्पा बर काला रिप्पड खूटग्या। तीन जण मिल'र साझे म काठ बाई रो भळे वाडा दुकान खाली । राताडी भाडी अर खाती-सुथार घटण वठा । पीजरा, आलमारी, चौखट क्विाड पाटा पीढा रा थाट लगा दिया | गाहक लाग्या, भाव ताव धण्या, जमनादाम ता जापर भावुक सभाव सारू जाणकार मिनसा न उधार हो सळा दीना' लोभ लालच तो हा नहीं, करडा नगाना ही नी कर जद धिगाण कुण लाय र नगदी बरसाव सिनमा वापरचा, राठी न बुढापरे दुखा आ परा घेरयो । नाटका। रा रंग फीका पडचा अर राठी राकळा म अकाळ बडया आजाद पीढ़ी कुण जाणे ये जमनादास बैंक जिदादिल मिनस है । मेसमरिजम म राठी रा साथी साभाचद हाटो वण्यो । विद्यालय में काई जायाजण एकाकी तथा परव मनाइजतो, राठी ने जार याद करना जायतो । कई लोग ब्या-साव रे मोके ही सेल करवा लिया करता | राठी आपरै जादू रै जार टाबरा ने अधारी काठडी मे काळे पडदै माथे भूत री छिया दिखावता अर छन ऊपर मू हाडी उतार नाखतो। काच रा टुकडा उगाळखावणा, पाती न चाग जावणी अर साबती चादर रा दस्तो गिट र रगील फूल काढणा इत्याद तमासा राठी रे डाव हाथरा खेल हुता इया रै खेला रा गाव म लुगायी टावर घणा कोड करता । 'मोट बटेरा ध्याह ता माया, पण राठी रो हाथ सफा अटक्ग्या। उवै आपर माथ घोटी मुलमुल रा साफो (दुम्माला) बाभ्यो। लागा डराया टोक्यो क्या 'बटे र पाहम केसरिया रसूमल ता स वाव, राठोडा गजब परया त पाठा पगडा घुमाया लढकाया है।' राठी रा रिझालू मन हस्या, जाण्या-"काठ अर तगी म हूँ। पन्या म्हारी ताक एक बौधरी ने घरम भाइ वणाण रीनूठी नाव है। अबार जावू, नाज वाटा अर नाको भाल वाढ आए। उवापर मूवढया, गावर ऊच घर चढया। चौधरी आसाजी घरा जाय र माफा उवार मिर पल दीअर पातिया वारा जाप माथ आर लोहा । चौधरी डालो राजी हुया । धन पडी धन भाग ! मजाकियो - पट 54/वात वदाणा सेठ पर आयर परम भाई वणग्या । धापना फाटतो जाट, हरख काड सू बोल्या--"सेठ धरम माइ तो हुयोजका चोसो, पण रिपिया सारा ब्याह म म्हारा वरनणा पडसी । इया ही धरम भाई रोके ठा पड़े । 'भाषातणी भीड भयेला नाज नहीं। भायप पण पूरी पाळणी हव ता खाली हाथा नी, रिपिया रा पावरो एक चहरेमाही मिवर दीपता हायू हाथ लेजावणा पडमी। आदमी म्हारो पुगा आमो।" राठी धड्या रिपिया लिया घरा वडयो, दम्पणिया मुणनिया अधभो करयो । माज र ववत सुख री सीळी वाय अर ठटा लरुवा बठे? चारमेर । काठरी ताती लाय बाज जफड इयाव फळ ग्यान गुण गळ अर कव्वा- साधकारी साजत बीगडं । सेठ राठी र ही राळी लागग्या पैदा हटगी, अढा माय आ जम्या जद सागी जागा जावणो पडयो। पण हम्मै यो देस वगालो नी अगूणो पाकीस्तान वाज | राठी अट ही छोटै स्यू माटो होयो दूजी जागा कठे जाव? पासपारट वणाय'र पाछो लालमणी र पारबती- पुर नेड जा जम्यो। पण सन् पसठ बार कर हिन्दू और मुसलमाना री लडाई सार देश म ओजू चाल पडी। अक दिन आखा भारतवास्या नै पकडण रा परवाणा आग्या। पाकिस्तान सिरकार उवा सगळा नै चूग चुग र जेळ मे जडण लागगी। तक्डी कहाकडी लगाय दी अर रस्ता घाटा मार्थ आपरी पुलिस तैनात कर दी। डारा न जतर, समाचार न पतर, काई ठा कठ ले जा बाडसी ? बासण ही नी देवै । मारा कूट अर घरम भिप्ट करण र वधं पाकिस्तान में सारा भारतीया ने सीधा लगवरगा वणा लिया। राठी मोच्यो डबग्या काळीधार, तुर त चमार रे माग रो मरनाम करयो तयार । आगे गपी, सूई डोरा भर दो च्यार फाटया टूट चा खल्ला खूमडा, चप्पल पर बूटडा अक झोळे में भर लीना । काळी-भूरी पालस री डब्या बुरम-रग अर मेख कोला, टायर रा टुकडा तथा दो च्यार चमडै रा वडछा परी पास सजा लिया। लोव रो जमुरियो हाप मलेय र जूना ठोक्ण रोस्टड अर लाढो झोळे मे दीखता सडा दिया। झोलो हाथ म झाल परो'र रुळतो फिर तो राठी देस काकड र नडे मा पूच्यो। सूरजजी घरा जावता आधे मूढे अपूठा देखा, पपेरू आप र आळा मजाक्यिो मिनख/55 - बैठ'र अदा मेका, डयूटी मू लौटना निफाही डेरे माथे विसराम लेता गहस्थ सुख का मेका हा। "हाथी बादो' पाकीस्तान अर'चगटावादो" हिदम्तान गाया घदा टुरती सामी दी हो। राठी झोळो मेल'र आपर तैमन री गाठ काठी कमी भर काक्ड पुलिस चौकी कने वगतो गयो। फौजी मिफाया री आस्या चढयो अर जोर मू बतलायो--एक सिफाही- 'काथाय जाब?" (कहा जाते हो। राठी-आमी कायाय जावा ना " (मैं कही नही जाता) सिफाही - "तुमी के आछे ? (तुम कौन हो) राठी -"आमी मोची आछी" (मैं मोची हू) मिफाही- तुमी में खान की काजे आस छो' (तुम यहा कैस आय') माची-"आमी आपनार जूतार पालीस कारीते चाई।" (मैं आपके जूता को पॉलीस करना चाहता हू) मिफाई-"इ काज तुमी मोकाले कारोया दीव" (यह काम तुन सवेरे कर देता) पाकीस्तान वगण रे राउँ म विहार मू आय र वस्याडो मुसळमान हवालदार दूर खडा ही हिदी मगरज्यो- 'अरे । ढेड कोई गडबड मन वरना। लगर म रोटी खाकर रात का पडे रहना और सुबह सबके बूट टीव कर देना । खजाची स पूरे पम दिलवा देंगे।' माची- 'हजूर, माई बाप । दा नम्बर ६ कम पर बुनाया हुआ है, मत अव वहा जाकर हाजिर हाना हूँ । उनका काय करक सुवह तुरन आ जागा। हवलदार-'अच्छा जामा, सुबह जा जाना। उद जमीन पर माया टेर पग सलामबरण राइमा माग वणाया उपा हालटार इस दियो । गठी घट हुक्म केर र अधारी पडत पोर खना साठा म सुस्त टिरत दिया लापहा जना "चगडाया। आता ही दीस्या Tीम माळा नारस र वगर्नय दामाद र दामू मोघो मिनी गुपचग्याटिपट पटाप र रमनदीना ठोका सा चौय दिन म आवडपात राठी आपरी पळा चुमनतारै पा जीया गि पग मापनामू मियो मर मरतापरता पम्प म मोटा नामून नास होगयो। 56/यान वाणा मदकमाऊ बारलो गाव । फम रा टापरा । टाळवा टोड चवडा सेता खडा है । गाया- भस्या राधीणा। अवड रा छेड अर बाछडा रा वगैला चर। कूमटार- कर खेजडा रोहिडा र विचाळ छाकोटा अक ढाणी वस । तळ मे कइया, पळ म पाणी । डबी सी तळाई भरी हितोरा खावै । बरसाळो वभक लोक- परलोक री छिया पळकै । आपरी रगीली दुनिया म डबक्तो फिर, मन छा नही, पण आज वो उ नै वुन झा नहीं। दिल रा दरियाव छाला च। मनडो गरूर रागिरथ पढ रया है। नूव गाणा रा गायबी तथा राग रागणी रो रायवी है। धान सू भरिया खेत, मतीरा रा मावा, साग-तरकारी री क्यारी जीमणवारा सू मरीर सिब। रागळी करै अर ताना छ । आपर कठ री किलवारी मे तरासू भरै । डील टूटै अर गरब फूट। गगद वण्यो बैठा है। मुळ माव नही। रूप रो म्हैदरो बरम । वो सदीव सोच के कोई तरस । पण आज जी जजमै नही । सुधिया सासरिय सिधावैलो । खेत मे लारं सोना चम, उवै रो गात घणो गमक । चालतो छिया देख, जकी सिनेमा रील री सीबी-सी मरक । मोवण धारभूवै, घर चाल सूवार तथा आपर ऊपर सागीडो रीझे। जाण-"म्हन घडगी, बा वाड म वडगी।" जागळू धौरा मजेकलं वगत रे जी मे न जाण कठ सू फूठरापै रो घमड घेरा घाल? ऊगती जुवानी रा साचेलो घणी है। इसी ऊजळी अहह आभा कुदरत कया कारी? वो धोरी सग जगती न आप सू फारी जाण । मन मन म ही हस-"म्हें ता म्हें ही हू।" - मदरमाऊ/57 बीच रास्ते खेत म पड साळे, जीजाजी केयर वन घुलायो । बोत्या-"ओ खेत आपणो है, या जाणो नी? घरा सय्या चालस्या। तावडो टाळल्या अर जीमा-जूठो करल्यो। दफारो हग्या, आइ-टढ लगाय ल्यो। पाडोसी हमश अही, चार गावणं रा कोड पर।हण काम छोडेर आ ढूक्सी।' कनल मेता सू सध-साईना आया अर कोई पनजी, जोजोजी, काई बहनाईजो क्वता घणा हरखाया। कण ही गूजरी माग राखी, कंग गोपीन द चाया। काई आरसी अर इढुणी री फरमायस ल्यायो। पण पनजी मगळा नै वह गरब सू पाछा अब ही उथळा दिया के-"आपण घरा चाल र साज बाज सू सग भजन यान सुणाय'र मागीता छका दस्या। रोही म काई फोही दाई बोक'र बाका फाडा।" साळी माळेली अडोक्ती रयो। रामी स्सर जा मूती। आधी ढळगी, पण पनजी कोने ही बाता नै पाती नी मायो। बेली अनजी आपरा सग भजनी भायला बुला ल्यायो । ढालक अर जीझा री जाडया मण झणायगी, पन्नजी पारवा बोलें। कभा होय र गावं। मेक हाथ मे सडताल है अर दूजे म गम । पसेव ने गमछो सू पूछ अर हवा लेवे। बीडया रा मडल सना र सामणे घडी-घडा फक मर खापरा री चिटक्या चलावै । गावतो ही हुक्म कर तथा सामा फरणावै । चौकी माथै मिनखा री चळ पळ लाग रमी है। घर मे लुगाया री गंगट्टमाचरी है। पण पानजी र सामरियो सोखी अनजी ससू आघूतो है। तीन दिन रास्या, जवा गावण मे बीत्या। चौध दिन सागी मारग चाल भीर हुया । पण फुटरापं री बडाई सारी पनजी नही, प्यारी रामी भळ करती धग । वा इये गानरू रूप रा वारणा लेवे अर वारी जाव गळ री मरावणा मे तो डाढो गैली वषगी है। पारवी भजना री पीठ थाप । दूजी दूनिया म आवसी उना। जठ काई सागी अर सघा मैंघो हो नही लाघ । खेत आपरा मा लागे । जका मे आवती वखत आखा पडोसी मान सुणने आया। उव ने बापर घणी रा गुण चतं आया भर हिंडद म ग्यान री पारस लुकायो । अतरपट खुल्या, दे घूजी। पूरी रीझी ही नहीं के बालम री बोली आई- 58/घात वेगणा " "काई जावा ? फूटरापा या गारो बणाव ! इमी कळा अर बोवार वठे पडयो है? म्हे जित्तो रूप जर गुणा रा डळो हूँ । यार बाप मा री सूझ जका म्हन परणाई । टाबरा रो माईन बाजू , पण ओजू ही सुरग री अपमराया मी घणी हेला मारती फिर । रीम अर दाव ही म्हारी माकळी है। स लेवर्ण सू घर काज वण तावणे, नही तो चाल घाडी पावलो ही सही। नित नूवा माख जुडे सापज । चुडलाळी नै घर घर नूतो है।" बाल्या'र बोया। रामीजाण्यो पल्ले बधगी।बमाता काई ठा, काई लिख भाजी ? लारलो गम्यो, आगला जम्या नही । आज रो वरतारो भूडो है तथा भाउखो उठ्योडो ऊडो लखाव है। आपरे गाव रा झुरावा आया। पण हम्मैं पीर पाछी कया जावै ? क्वळा दस्तूर मुट्या, छेक्ट खूटे सू आय' र जुड़ गया । मोकळा वरसा सू माईता री ओळू आई। उवा फटरोप में फस नै लाडेसर वटी नै अठ परणाई। भाई अनू री रीझ ही चेत आई । पण कन बैठे पनजी पैल्या ही के नात्यो के "यारे तो भगवान रा बेटा-बेटी है, म्हार भरास क्सिी पार पह ? म्हे तो फक्कड हा, घर देगी सूका लक्कड हा काळा रा पोरा, कुसम्मा वग्या । पाच वरसा सू घरा दाणो नीप- ज्योडो आखे नी देस्या। 'जळो ही जथा'-टावरा रो जजाल मारकर फिरग्यो। मेक दिन लुक'र भाज भीर हुयो। रामी नावडी भर गाव सू परिया कढत राजा पग पक्डया "पाच बरस पीर रयी, थारो काई घरायो ? आपरी रीत गडया काटता। पइसो तो जाग सुवाडही " और दियो नही ।" बोली- "हाना टाबर, लुगाई रो जमारो । सून गाव म जेली रा वसवो कैया हासी गाव रा आखा लोग आप आपरा बच्चा-खुच्या धन- पसु बर टावर टीवर साथ लेयर खावण वमावण नै मऊ गया। ये ही म्हान साथ ले जावो। दो दिना सू टावर पाणी मार्य परचा राम्या है। वला मूना आय पाढ़े । मन तो बाळा जागा ही नी जुटे । हावळ मानई री कारी वण रखा है। म्हारो कुण धणी है ' पण पनजी बालो बालो पाछो मुह र परा आ मोवै। साल भर रो बाळा नं मा ऊन अर सून बाप रा बोबा पपोळे । महगी अर मुमकल इमी के धान रा तो दरमप मदयमाऊ159

ही दारा हो रया है। मिलगत टक्करी नही, वाट तो भाठ सू ही
करडो वग । पन जी सो-'जीवडा रात र पल्ल मही , जागा ता
सातवो साल है अर पाळणा हुदै । इसी कबत साची है-"जा
मामन म बाप की हिम्मत नौ कर स मा उर्व में आछी तरा पार
पान।' नागा उघाडा भाजता-फिरता भरचड वण रचा है । दा वटा अर
ओर वटी जरा वास्तै मावही, रात दिन फनी किरें। जीवण र नाव
डीसी मरी ल्हाम ढावै । घणी विरिया पर राधणी चेत आव । पण
आज ताणी रिन ही बताया नहीं । आज भीम नाद ने कंगा वाली बात
जमली है । मुणी है जिसी बता दमी। बेटी ने साथ लेय र दाद र परा
पौंच । पटी पूर्छ " दाना' मा व हिम्मटमर वाळा "ममर जी लसाटिया
मामाम मू आया है। वेबठे टायरा रे बाप न बनाये। मे आमाम
जाय र पता लगावो । बाळारे हिया हाट जा ग्यो है म्हार सू दाया
ना जाद।'
भीवादा बिरादरी रापौधरी, सिरप मारला परवा
पण माना ग ठासह पदमा बिना पा घर नहा, माटा सा
पिरतः आग्मी। रारामा मटा मिटाव अर माय सबध कराय।
सरपं पाणी रा टाको ही घर मूमगाव नही पलायगय लेव । पानी
मरम्ब म मागीपारा साग । बान्या-तरीमान पदमाग
सापटी उडाय I हम्म पनाम3 व ता कर घरा आय। हिमा
पघाडी मेम्बाबा पनि म पारो पिकायामर भीसा पुरा
टावरमागरामी, आमा पास भाग ममी।
मागे, मार पार बाबमाटोri गटारगामार म
गेमागमान गयो। गटी मा म, नी• मा ममा पापा
SHIR, मनि पुग माररान 7 1
-TRIनिमगरमच आम
अापीममा आमा पनि नागप"
रिगापामारीपगरमी I TERI THAT
यापी

, राग्यो है । बेगा जावो भळे कठे ही रम जामी।" मा-बेटी दानू बोलती- चालती फीस पडो, दादरी छाती नी रची वडी बाप बारा टाबरा रो दुम दरोनी गया। वोल्या-"बेटा कैयदे तेरी मा नै, आजकाल में कोई चोखो वार दख'र ना जासू 'न'सट न फूड प्यारो ।' लाघणो तो म्हार सार है नहीं, पण बीस-तीम दिन गोता तथा गबना तो मोकळा पा आमू । काल सौ पचास रिपिया रा ब दोवस्त करू, थारे आघा दिया पाछा नाव धन, जद दे दिया। नही तो विसा वैम पड़ जक दादै रा पाना हा।" दानो गुहाटी गयो अर पूछणो सम् करयो--"मेक विरामण, नाव पनागम, पतीम चाळीम रै माय माय गाव रिडी मू रळता नोकळग्यो। पाच मात माल सू जामाम में बाल, साधू गोडा वताव कणाही दे या मुण्यो हुव ता बतावो ।' दादा ढाबा टावा डोल अर छैनाती विरादरी र लागा म् घणो पूछताछ करता फफ पण टीगरा रा भाग जाग नही, पन्ने रा पत्ता नाग नही। छेक्ड जेक दिन सुराख लागी । ६ नजी रजनाणा सिवसागर म र माधू उघडया है । दादा गतोरात जा पूग्यो। हट गाडी म सुरंग करण सू सिवजो र मिदर म ठिाणा पाया। दाने जाप र मठ रा निवाइ खडखडाया। अगी अवधूत माय वठा मस्त माळा पेर। जटाजूट, माळकट किंवाटा री भचामच बाज। पण माता भागळ सात नही । बठयो ही वझे- 'बुण है ? मरी भगती मे भिजात पडता है । मरि खुलेगा नहीं।' दादो- म्हारान जारी वारज है अरर से सालदयो।" पापू-"बच्चा अब मदिर नही सुलेगा बल आणा । दादा-"वावा, म्हें ही मिवजी रो भगत हू, साधु म्हाराज री त्रिपा हा जाये तो दरसप परल्यू । यपा है। साधू - "अरे वावा | तुम घरवारी लोग कैस होत हा पकडावे भजन म याचा शालत फिरन हा। तुम तो कुछ परत परत नहीं, हमारी एमयाबो उजाडण जाना। दादा-- 'सापू महाराजजी सही परमाणी है। पण हैं धपं दूरसू चलायर आयो है । दरमा दिरावा याच सा!" । मदरमाऊ/61 'भरडभट्ट माधू- - 'अच्छा वावा। फरत पाच मिनट के लिय मटिर सान देता हू । मैं हारा तुम जीते ।। ।। भागळ खिची सट।" माटाघाळो हुग्यो, दादो भाळो बणग्यो। चपापी बात चौड आयगी जद दादा वाल्यो-"पना ओ के साग है ? लुगाई रो राय र डिया फोड लिया। टावर अडोकता झोक्ता आधा हुम्या। बेटी रा बाप सापृ ही जे होवपो हो तो व्याह क्यू करयो। दम चाल अर अब तेरी गुवाडी सभाछ। मफा नटग्यो। बोल्यो-"भेख ने बट्टो लगावू नहीं । तपस्या न घूवा चढावू वैया? थे जाणा यारा टाबर जाण । पनं रो तो मसारा नातो जावर जातो रया।' दादो बोल्यो-'भेख ता माधू रो चोखो पण साधू कीन ही दुख देव, आ बात कठ लिखी है ? भेख भगवो राख, पण नातेला रो जमारोही थारे दरसणा सू सुधार । भरथरी ता सातू पीढया तारी' मा भैण अर लुगाई ने बराबर बतळाय र भिरया मागी। जैक, दो पीढी रो उद्धार तो आज र साधु म्हाराज रोही फरज है। घर रा ही नही, माख गावरा माणस सेवा करसी। जागिया डड-कमडळ उठावोअर गाव चाल र धूणो धुखावो म्हाराज | देस मे पूजी जो परदेस अर परभोम में अठ वुण जाण? बावै उठायो चिमठो मर झोळो, चढग्यो रेल, दादा रच त्याया गाव रिडी म खेल । छकह तो परचायपर प नाराम कवा देणो है। घर म बाड लियो तेज काढ दियो, दरसणा वेगी भीड लाग रयी है। बाबो फोका, मोयो मू यो बैठो है दादो इयानका कामा म सदा सू सठो है। सतबार्ड पाछो बतळाय के ' पनिया गाभा बदळ र झीटा उतरायले । की मिनखार टोळ हुण्या । बरोडा म्हान भाई परमग्या म हेठा मत दिखाळ । घणा ही ठिठ कर दिया। मिनख अर मिनखा रा जायोडो है तो मिनख वणग्या। मिनखा री कैयो मान अर ओ मेख (भगवो) अळगा बाळ।' पवरहरा भाग्वी छिया अक्कड उतरगी अर घरवारी बणग्या । सरजाम जुटाया सत मगत राखी। रामोरं जी री मोदणी खिली --- 62/वात वेदाणा गाण बजाण र कोड में पग नी टिक।पनजी रा पाखा काळजे मडया है। चोराण सू पाछो आयोडो सौ धन सभाळण-सुणन री धुखण धुत । आसोज री सुवायली बरमा म् सूकी खेती पागरी। जमाने से पूरी आस बधी। समै री टूटी लडी पाछी सधी। आप अलायदै सूता है, बारी आया सू गावला। पैली कनला गावडा म् आयोडा सतसगी लोग बाणी बाल। अनजी, पनजी सू मिलणो चाव । पण बठे तो भजनपूगै ना वाणी, हसल न घोडी ले उडी मलाणी। अलख नावो सत है। रात भर जागण अर दिनूगै द'रा पालागण घण भजन-कीरतणारे उछाव मे भरपी उठाई अर भजनीक जुलस टुरयो। टाबरा रै फरज अदा हुयो । पण रामी र लामो हकबाळ आगी। समो, कुसमो हुग्या। बात चाली।बैमाता रो लेख विसरायो। केया भेख सरायो तथा केई मिनख मदकमावूपर्ण री खुसर फुमर करता' पाणी वारं जा आया । लेस मे मेख नी लागे। - मदननाऊ163 माधू- --"अच्छा वावा | फक्त पाच मिनट के लिये मदिर खान देता हूँ। मैं हारा तुम जीते।" 'भरड भट्ट ।। भागळ खिची खट।" माढा घाळा हुग्यो, दादो भाळो बणग्यो । चपा चुपी बात चौडे आयगी जद दादा बोल्यो-"प ना ओ के साग है ? लुगाई रो राय र डिया फोड लिया। टावर अडीकता झोक्ता आपा हुग्या। वटी रा बाप साध ही जे होवणो हो तो ब्याह क्यू करचो देस चाल अर अब तेरी गुवाडी मभा। मफा नटग्यो। बोल्यो-"भेख नै बट्टो लगावू नही। तपस्या न घूदो चढावू कैया? ये जाणा पारा टाबर जाण । पनै रो तो ससारी नातो जावक जातो रयो।' दादो बोल्यो-"भेख ता माधू रो चोखो पण साधू कोने ही दुख देव, मा बात कठं लिखी है ? भेख भगवो राख, पण नातेला रो जमारो ही चार दरसणा सू सुधार भरथरी ता सातू पीढया तारी। मा मंण अर लुगाई ने बरोबर बतळाय'र भिरया मागी। जेक, दो पीढी रो उद्धार ता आज रै साधु म्हाराज रोही परज है। घर रा ही नही आख गाव रा माणस मेवा करसी। जागिया इह-पमडळ उठावोअर गाव चाल र घूणी घुखावो म्हाराज | देस मे पूजी जो परदेस अर परभोम मे अठ कुण जाणं बाब उठायो चिमठा अर झोळो, चढग्यो रल, दादो रच ल्यायो गाव रिडी म खेल । छैकह तो परचायर पनाराम क्वा देणो है । घर म बाड लियो तेज काढ दियो, दरसणा दगी भीड लाग रयी है। बाबा फोका, मोया मू यो बैठो है दादो इयानका कामा म सदा सू सटा है। सतवार्ड पाछा बतळाय के पनिया गाभा बदळ र मोटा उतरायल । कामिनखार डोट हुज्या। वरीडा म्हानं भाइ परमग्या म हेठा मत दिखाळ । पणा ही ठिठ पर दिया। मिनख अर मिनखारा जायोडो है तो मिनख बणग्या । मिन वा रोक्यो मान अर ओ मेख (भगवो) मळगा वाळ ।" पपरहरी आन्वी छिया-अक्वड उतरगी अर घरदारी वणग्या । सरजाम जुटाया सत मगत राखी। रामी जी री मोदणी मिली 62/पात वेगणा । गाण बजाण र कोड मे पगनी टिक । पनजी रा पाखा काळजे मडया है। चोरागै सू पाछो आयोडो सो धन सभाळण-सुणन री धुखण घुख । आसोज री सुवायली बरमा म् सूकी खेती पागरी। जमाने री पूरी आस बधी। समरी टूटी लडी पाछी सघी। आप अलायद सूता है, वारी आया सू गावला। पली कनला गावडा स् आयाडा सतसगी लोग बाणी वान। अनजी, पनजी मू मिलणो चाव । पण बठे तो भजनपूगै ना बाणी, हसल ने घोडी ले उटी अलाणी । अलख नावा सत है। रात भर जागण अर दिनूगै देरा पालागण घण भजन-कीरतण उछाव में अरथी उठाई भर भजनीक जुलस टुरयो । टाबरा र फरज अदा हुयो । पण रामी र लामी ढकबाळ आगी। समो, कुसमो हुग्या। बात चाली। बेमाता रो लेख विसरायो। केया भेख सरायो तथा केई मिनख मदकमावूपण री खुसर फुसर करता' पाणी वार जा आया। लेख में मेष नी लागे। मदकमाऊ/63 झर झाधूट घुड़िया ढेवा, पत्थर बुवार चचल चादडो, लरखापारो लाडा। मा. बाप रा प्यारी दूज लम्वर छारो। पत्तळ छागटा, टम्मरका करतो फिर घिरे। पर गुवाड रा दर्म रानी हवै। उलाड पपो सर्व । उवी रागळी कर, मरा रिझा नाख । ढोलकडी कूट जद तो गळी बगता कम्प र भाक । काई रामलीला परं वला, भात भातीला साग धुटिया नरें। दरसकारी आतडया उथळ पुषळ मर दर्व। हसाय मारे । मजाकिया मर पाट में सळी रिगटोळा करता मा वाप सू ही नी चूक । पग लुळनार वीडो लाग थुधवारो पात, वाहवाही दवं । वै-'ई रो ही नाव सिलधार है। घुरी अंडा मेळा मगरिया पर खेल तमासा र मोका रयात राख । चीचह मा चढ, होठ हाल, आगळया फरफरावं । गुण गुणावता रेव भाड भवाव । दरमका ने जोवे, तुरता फुरत की मडचूसिय मिनस रोहसीलो टोटका पटाफ्ट वणाय र कोक्ड मेल देव सुगनिया बदा हसता हुया हाल हुग्याव । नीद काढण रीनफो लेंवता खिल शिलाता आप-आपरै घरा जावे। इयं रावापइसो नावडयो छोटै था न ही नरड नारयो । गोडा देदिया। उर्व माडू आपर इये लाडेमर स्याङ, टीगर 7 मस बरिय री जुडत जरू जक्ड नै ब्याह दियो । हावडी सटाण डाबड़ी स परणा सरक्यो। घुड्डिय गळे एवं ओबधू उवागळ, भबरव झटपाळी मीटल बीनणी ल्याढ कोई। ओमथ्या म बरोबर पण उवा अकूरही रो धन दिन दणी बघो-सधी । पाला, 64/वात वेदाणा - चवदव वरम मे सासर आई। यूमडोसी अळग पळक, अडक मोथी भाली। उण रा मोगरी सा माढा भर माट वरगा पग, दग दग करता धूजरैया हा। मूढा ओवरा मो जडयो सख्या। उण र सुमर घणं याड फरमाया- "बोनसी पारी सामू रामजी रो जीव अर मीटी वाली वाळी दानणदाली है। बास म धनवाळ जाटा रा छाकाटा गुवाडा, उवारे घरा हजाराजिनावरा राजेनड भूछर । छाल्यावा चाय दूध, खाली हाथ नी माइ । आपा तो भळ गवैया, पूरी दस्ती सू पर वस्ता अर सामणे नरसती कळा धार है। राजी राजी गावणा बजावणो सीखा बटा। तीखो वालणो चानणी पिछाणा "पछ डण आपरी आसीस मार दस रो नोट भलाया। घर ग्रिस्थ, घाटा फासी, धुरिय री जबाध मस्त फकीरी माय लूण मिरच लवडी रीतक्डी गरद चि त्या चढगा। झब्बा झोळ राड उल पागडा उठझाड, मस्त मनारी न मार मध करी। पण छार हिम्मत नी हारी। उवा आलमगिरी जाम विस्वास मू पहलवानी मे जा क्या । खेल्या कूदयो अर अखाड दौड वडया। आप स टूण न उछाळ वाया। मिनखा म म आगळी घाली, अचूभो करवा । वया-- रे धाळो च भरिया गजब गुदार। माटा माटा तोगड लडधा न उ नाळ उळटाव । साचो कर दो मोटो देख र डरिये ना, छाटो देख र अडिये ना।' जित्ता मू विती वात्ता। काई वाल्या-"भो विगाड दिया। बानिय वा दिघा छोररी मलाई रो जार जमारो। मण पक्का पत्यरगळ म लटका दिया । गाणो बजाणा गयो ज्यू ही कुस्ती अर अखाडा माल छ महोणाम गयो ही जागो। मोटचार रा दत्त जलमस्त चित्त हुवै, जको ही नाम काम उजाळ । लुगाई टाबरा री बाम सू कालजा खजज्य । छारो तो मायाळा हो, पण माथाळो ढग्गळ इण न ऊचो हरगज वधण देव नहीं। दूजा वाल्या-"क्यू झूला भिगत करा, दूजा रा कथ्य छडण मक सार है ? आप-आपरी निवेडो फाडो सीडो नो । पैल्या तो कोई बुरक्या ही नही, कवतारचा आपणी पारपी सीख के कारको है। हम्मै कोरा थूक विलोवणा है।' बद वकवोही सुणो वाम गाळा पूरो जीदोरो परयो । ब धुद्धिय न एक वधिय कलाकार रा समाण देवता। आडौमी पाडोमी उण सू भारी सनेव राखता । उवै खेनर मे खाली उवो ही नाच गाण राकळा- 1 कत्यक 1 झर माघूट 165 कार हो । लय ताल रो चाखा इभ्याम, गूधरा री घमर सू हर किस्म रा बाल काढर लोका रो मन प्रसण कर देंवतो। देखणिया सुणनिया सग अचू भो करता। गणेश वदणा रो नमूनो निहारता ही थामला सा चरण घरता सायात गणेशजी सामा दीख जावता। विडद विनायक पिरक थिरक थई ताता थैया, थो यों हूँ , पवाग थुन थुन, दिग दिग दिग थेई लोग भाठ री मूरती वण जावता । घुटडो रयाली, मोटराळा सू सघ- मैंघ जाण ची ह धाली। सुरताल जाग, जागण जम्मा मे खुस करदय गाण । तातो तवलची, हैरा सा चाल । रग रग हालती रवै । ताबड धिन ताबड धिन तिडड धिना तिडह बिना री जवान हरवखत टेर टिर। नारया फुरै डोल कामडी ज्यू लुळे, नसडी हलाळा खाव। टलेवर लाग तई खडे खडा ताक, दास पड्डियो सामणे झाक । पज्यो रयो । माया, गाणा सुणाया, खलासी रो खोरसो सयो अर झट स्टेयरिंग झाल लियो। पण पग वडो गाही र ब्रेक ताई पुरानी पाच । जरे वाह घट्टिया । घुडियो जा लाग्यो जपर म एक मिनिस्टर री वार सेवा । सिंचाई मत्री री कोठी उणारी कार गाडी रो इलेवर रेग्यो । चालती रो नाव गाडी । माटा बुम्बोई जा आयो। हम्मै यो कीर सारै पाछा आप'र मात भाम र खेतराय मुख्यालय रेवण लाग्यो। जननारा हतुला तथा मददगार, पाणं तैमील ताई रा काम सार । अस्पताळ रा हवो चाय, उपज मडो रा भला पचायत समिति मुळावो, भलाई कोई निजामत, धुड्डियो लागा र साथै जाव अर लटवारी लुळतारू जवान सू काम पूरा करावै । सापटी सो मूढो चिरफाड मो आरया तया लापडी सो तखतूळियो रिगदो डोल लोह दिल रासै। मोटा माटा हावमा सू हाथ मिलाव साथ उठे-बैट, खावै पीव । चसको हाय माग्यो, ह्याय खलग्यो। डेढ दो वरस म समचे तसीत खेतर में खातोलो नेतो चपग्यो। कमाई रो चेतो उघडग्यो। निळा रो जमी खोसी, पिणार थप्पड जमाइ, क्या न राव सू ठग्या जर आख दिखाय न डाट पिलाई। सेत घर घिणाय कब्जा, आछा उसटड पला दियो। 66/वात बदामा - -- हाय म नीमटो, गळं म रुद्राक्ष री घणी मोटी मही माळा एक दिन राख पाल रमापरं गाव आपा | गार आळा देख्यो मिदर म एक फोर घोक देवण चौक मार्थ पसरधा पडयो है। मिनया तायर जोया--अरे मुष्टियो 'लागडा कनं गया जवा सू पल्या ही हाथ उठायर बाल दिया- "सा रहा बच्चा मालक रीसर है | म्हार देगी उण रे घर रा इसा हो लेख हा। खुद हाथ परडर सडयो कर दियो। कबीर सोता क्या करे, जागन की कर चा। यह दम हीरा लाल है, गिन गिन गुरु का साप । कबीर मन तो एक है, चाहे जहा लगाय। चाहे हरि की भक्ति कर, चाहे विषय वमाय । व पाटक दो च्यार कवीर री साखी बोल दो, बोल्यो मन परतख परचो हुग्यो।" कनला लोगा हाय जोड लिया, लुगाया परसाद ले आई अर टावर पगे पडग्या। धुडियो घेवरनाथ नाव सू पूजीजण लागग्यो। मोटर माळा पूरी साम भरो क्यो-"पाच साला सू बराबर वाणो गाव, जत-सत स चाल । कुण रोक, माधा-सतारी सगत कर । हुक्म हुग्या पट बुलग्या तया भवन बुहार। म्हार स्टाफ तो इये फकीर री चाखी नाक निवण भाल राती है । साप सळीटा लटयोडा तो सइक्डा रोवता आया अर हसता मलता गया है। म्ह ता इय र सरण ही वगा । म्टेरियग हाथ भरता ही नावो लेना।" एक टराइवर वाल्यो-"राजा-जागी, अगन जळ है भाई । मैं घणी प्रोन ही नी पाळ । एक दिन म्हे उतावळ में 2856 नबर वाळी गाडी ने बिना धोक पाधरी स्टाट कर टोर दीही। धूर्ण रे रस्तै सू सो पावडा ही सरक्या हुवाला, इत्तै नै तो भड भच्च भचीड बोलग्यो। टायर पिचर हुग्यो। धिकायर पाछी ल्याया, परमादी बोली,जद सागो चक्क, चेप मार्च थाल'र जातरा पूरी वरी।" खन खडे खतासी कयो-"अबकै एक लूल पागळ न म्ह रूट री बस मे नाख'र बाब र सरण ल्याया। धूर्ण पौचर धोक दिखाई पट पग ले लिया। दवको कूदतो पाछा मुडयो, सागळा सग साच परच राजीखुशी पाछा ठिकाण पौंच्या।" बाप मासू भारया, मा करळाई । वेटा साधू वणग्यो, जो म नी रयी भैर झाबूट 167 सोराई। खन गया धोळा री गरम वेगी खोळा म ले लियो। कयो- "बेटा आपण घर चाल | छोरी कूक भू दाज, म्हारा बोदो जमारा डाडो लाजै वेगा मा भेख नाख ।" वरनाथ मार कान मे मारी फूक, वोल्यो- "राजरी दणदारी चनो चाढा लाखारी नहरी सहरी जमीन मेख मे हाथ लाग । कडू कूडम्ब रो तकदीर ऊघडे जाग। रोवता कूक्ता पाछा गिड ज्यावा। माल उटावू चिलमा पक्की चोस् । फाज में भरती थोडो ही हुयो हू ? मौज मस्ती वैठो गल्ला मारू दफै हवो अठ सू । सटकै र डणनी डेणियो खुरडा धमता घरा आवदया। मिरच रोटी खाय र सूता जक दिनगराइ सत्या ही नहीं। गाव र भोत बार रोड जोड री जागा, राज कुम्भाणो वास वसाव है। बठ ही स्कून अर वठैई अस्पताळ, गावा नै खाली करावण वेगी साळ काटया है। कूमटा काट जर वारटया वाढ, पण मी कानला सूबो चौगान पामो, माडिया दा बैठा है। भगवा गाभा जट क्ट काळो दुमाल धाटो, तूम्बी अर तासळी' हिरणिय री गोनी कार हवं जिया ठोढी मा मूडूमी री वूजी सा थोडा साक् बाळ तथा एक बच्ची इटा री साळ म मिर घसाया गाळमाळ गट्टो सा एक पटल पट्टा साधुडा उचो नीचा व अर मामली सडक न घडी घडा दस जोव । आर सी पी री जमीन, मौला रा वाडा वाकी थाळा प बड़ी वत्ती वधकी जमीन माथ लपचेगुवा रा लालची क्वजा डाढा करी ज्वाडा है । शिवजी, हडमानजी गागाजी रामदवजी, जाम्भोजी, जमनाथजी, हरिराम जी सनापी माता करणीजी पर पाळका माई जंडा मक्ड दबी देवतावारा धार्मिक वजा नै देख र भेख धारी माधू ही अंडा बाज करण न जमघट सू आ धमक्या । पाच पाच पट्टा जिती जागा घरली और घर कोलावणा बैठा। राजरा नोटिग मामला चाल्या अर हर आदमी न क्वजा उठावण रा रा ओडर वरमा। अफमर आया पण माडिया नी उठया, साव नटग्या। घेवरनाय अगडी स सू आग आयो अर चीमटा बजावा । बोल्यो-"अख निरजण निराकार, जमीन रिमी ससारी बाबार। बदो कुछ तो खुदा का साफ रखा। फीरा को भी चमन दो।" 68/वात वदाणा 7 स्कूल रो भवन वणग्या, कमठाणो चाले। मजूर चेजारा लोपे-पोते, सिमलो स्ताई कर । जाळणा बढे, कब्जा लागे । आखा कारीगर खावा- पीवो तथा सोवा उठो, उठ ही करें। जाग-सजोग, एक रात छात माथ सूता बीमा मिनखा म सू च्यार जणा नै काळ भगवान आप र काम छाट बुलाया। सापा किमा मनेस | मण मणक आधी री कोमळी सख- चूड आई जर धारा जुवाना रै गजब जहरीला चपकिया सा चेपगी। गहळ म उबर उठचा, जी दारा हुवतो बतायो। झागूड आग्या, वठ रुरुग्या । दुवा दारू रो भाजा हासड घणी करी, अळी गई। लवर लागग्यो उव मोहल्ल तकडा अF चाळो छाग्यो। कदेई कोई पटवारी, बणाई कोई सनार, आज्याव धक्क, वैरणती द ज्याव धार। जाडखो हवं जका रै। साचा औखद लाग ज्यावे, नही ता ऊभी चोटी ऊम ग्वाड जा पौंच भगवान र मोट दरवार "माडा कर मलार घरा परया परा।"एस दिन सिंझ्यारी, उवै वास र सग माधुवा सैल सतसगत करी जर नोजा पिस्ता बादाम पाल'र दूधिया भाग घटाइ । माय न जूना ताम्बाळा गोटिया पइसा घस्या, धतूरा वीज रगड्या मटका भर'र छाणी अर गडवो गडवो चोसी। रात सू भखावट शाई गाजै री चिलमारा गोट सा चाढ दिया। धूवै रा कुरलिपा उपाड नाख्या। ना मे धुत्त, धेवरनाथ वावळी बुत्त वणग्यो । माडोसो बोल्यो-~- "अरे पोगी। वेगा मा घरे पुगावो मावड़ी सू तो मिलतू पोटळी पोगी। डव्या आवै, कठ रुक, थूक सूक । जीप ल्यावो, जीभ सच । उतारभो भव, सनाळो क्यजी, क्दास प्राण बचे। गाव ले जायर डाक्टर न बलादो।" मूरज री उगाळी, जीप आई। गौरीधण चप्पट चूधी मारया सू चमको उठी। पैट बुशॉट माग्या, भगवा पूरिया खात वगाया। चादा बरवाडी बोली, गाळा र मूकण सुणाया। क्यो-"मर जाणा व मास्यायो धन नीप जालिया वीग्ध म वीस मण गहू ? गिरणी साव, क्मिी यामळी पीगी? भाग पियोडी लागी । ढागी।" डाक्टर कया--"डवणो परेब पर, ढोली आळा सख-नबरा दिसाळे । इ र तो सखचूड नेड कर ही पत्योडो कोनी।" कोरो झूठा पडयो, दखा देखी मरयो। और झापूट 169 ल्कडवग्यो सावळमर वाम, अक लूखी सूकी भाम तथा फोडे नोई रो रवास मा यो जावै । वो बीकाण प्रदेस मे विगसाव री दीठ जोत सू ओजू मळगो अर अजूबा इलाका वाज। थोडा उमरादै पामै पडाला खेत पर नहरी खाळा पू रूखा कोरियाळी छीदी पतळो हरियाळी आग्या म जुमड आवं 'पण अठ मु दिखणादै छेड इला म पजाबी पण रो पडत जावा नड नी लावावै । इयं री ते सोलो तालिका में धाराळा छोटा छाटा गावडा वस। लाग मीधा मरळ अर निस्कपट, उवा अणभणिया सादा गावा रे बीचाल आजकळे कदे बदे फाळतू, फरेवधारी, सागंगारा धूत लोग ही आ धमके। अठरा लोग नी जाण सकै के व खोटा रदखळ खोला है अर वे आपरी बोदी यू अर गदी वाण सू जनता साथै पेस आवता थका मला मिनखाने सागोडा फिडाव। पण उणारी सासरवति न व्यवस्था और अधिकारी तकात नी समझ सके। कारण गावडिया माणस उवा र घाख री पूरी पोल ही नी खाल सकैक क्यिा एक पळगोडपलीत आपरै खरीदेडे माळी पान (उपाधिपन) २ पाण फूड रा कामण रच र भोळा मिनखा नै हामी रिस्वत सू रळावै । साब जिल रो नामी जूनो गजिटेड हैडमास्टर, भाग जाग सू क्सव री हायर सेकण्डरी म मा पूच्यो । नाव तो मण्डदत्त पण लाग बाग जीकल कोळियाळा दस्तखत दग्व र लार सू लक्व इदत्त कव । क्यू व अघि कार मू सड्याडी आवरू माय हाकम गे घाव मोटो छाक ज्यू माथ मल्या अट आया वडया। आपर लारल वीसा वरसा म इये मूमळ रा मारदार 70/ वान वदाणा । कबाडा विघोडा हा। नीकानेर जिल मे ही नहीं, श्रीगगानगर अर चूरू ताई री स्कूला म बापष्ठा मास्टरा अर चपरास्या री जिनडी बरबाद करी बताइ जावै । भणनिया असख चतर अर स्याणा टावरानै घूस मिले बिना फैल करया है अर गिजा गूगिया लाबरा न टक्का अठ'र आगली किलास मे टरकाया चढाया है । ठाली बैठया इसा कबाडा री कथा आपरै दोस्त मितराने सदीव स्वय सुणावो कर । गप्पीबाज कदेई खाती, करेई सुनार पण कणाही आपनै गुजर गोड बामण बता नाखै। अर दूज र पसाब पडता ही मामळ नी राख । पाठसाला मे आवत ही उव चौथी स्रणी रैमवारचा माथ रोव गाठणो पळा दियो । बारला मास्टरा रा अव ओक बढर इसा घणा धूसखोर बाघ देख्योडा, हां मे हा मिलाबपी पळा लीनी । साव सा'ब कैवता आग सग आखा आछी माडीपी जाया करता । लार सू लक्क्डदत्त क्वता रता। लोग वात कर- "दत्त कुलछणो जीव, इसा मिनख सस्था मे नी राखणो चाय । स्कूल मे धूवा काढे अर टावर विगाड ।" साची है-बार रिपियारी बोडी क रात मे बाळन्य, दारू मीट यारो भार मे हमस इग्यारै बज्या अठ। उच रै झुठण स पली चपडासी बीडया रा बडल अर इडा रोकटर कन ल्या मेल। दो बडल अर पाणी रो डोल पाखान मे राख देव । सा व साप सो सूसावतो फूफावतो हाथ मे तूल्या री हबडो लिया बड मर फारिग होयर आवै, जत नै फटकार बोसो बोड्या फूल गेर । पेट हलावतो पाडा सो मेक बज्या दुपार, रोम रो साळा पोचे । विद्याल रंवारड री दोरी सोरी क फेरी गडको मार'र दो वजा देवै। चपडासी रोल्यायोडो खाणो खावै अर बीडी सिलगाय'र धूस रा हुकम काढे । चार वज्या घरा चाल पड़े । दूजा र भरोस स्कूल चलावै । दिया वत्ती र टेम आपरी जवाज मडळी घरा बुलावे । मजलिस जमै । माल री चिलमा चाल। चादी बण जावे जद सुलफिया यार विसर पड़े । जार अर जुवारी जमै तास रा पत्ता खीच। रात रा दो चपडासी फुरवा लगाधोडा हाजर रैव । ठडी नी हुवै, धुवै रा गोट अपडे, रात काळी हवै। कदे बदे काई लकटबग्यो/71 चपडासी माळी भाळी नूई आयोडी अध्यापिका बाई न ही परचा ठगाल्या बाडै । जडो चडी विलिया तोड, लीला तो लक्कडदत्त री घणी करेडी है। भणारी वात, आखी साखी समेत जीवती मासी गिटर रेवणो पड। घणी काई क्या? पायोडो हुवे जद घर री वैन वेटी तथा वेट री बहू न ही जा झाल । बापडी जोयड धावा धूड नाखती खल्ला मार'र आवरू अवार पण अटल मैफिल लीला इणारी अक दा वज्या बखास्त हवं अर बो बागदो खाणो लेवै । या ही हाक्मी हर रोजानी चर्या है। वुरै मिनख रो मतळव राखमी रगटा झगडा करणिया कुमाणस अंडा राखसी कबाडा क जका ने दस र दूजा मिनख डरता थका दरसणा सू ही मूढा लकोवै । राखसी जीवण बुराई पर आगण जपणाण सू वण । या तो भागणारी काई गिणती नी, बुराई री कोई सीमा नहीं, दुनिया म अक सू जेक बघर बुरा माणस हुया है अर ओतू लाध! पण केई चुराया इसी है जका माथ आचरण कर'र वो कुजीव रासस सू वत्तो दुरो वण जाव अर नरक नडाल्यै। जनाव दत्त समैसर नी कि क्मचारी न भुगताण दराव अर नी साची तरक्की री सिफारस कर। हक री छुट्टी मसाण दव कोनी। अनुसासण राखणो जाणं नहीं, कोरो चमचा मू काम कार्ड। छात्र फिकर खुल्ला घूम फिर अर आचाय रो अनुकरण पकडं । प्याला भर अर वडळ फाड, हावप रा लावा लूटे। आपसी बाता कर-'पढाई म काई घरया है री नकल छूट म है-~जका हैडमास्टर ने दाम काम दिया मिलसी।' एव छात्र बोल्पो-"अरे भाई । काल रात राव ट्रक बीकानेर ग्यो हैडमास्टर जी जव म स्कूल रो मावळा हटवा समान घणसरो मापरे परा भेज्यो। मने बलायर कयो-'पाम होवणो है तो प्रयागसाळा सू सामान ल्याप र ट्रक माय लाट' म्हें उलातर मेल्याही दो वही जाजमा तबलारी जोडी, बटरी कमरा, गस, ताम्ब रा माटोबळमा, वत री पुरस्या, चार बडा बाळटया इत्याद चीना आधी ढलया ताइ ढोय र सादी। दूज छात्र कयो-"साळा | तु भ्रिस्ट अर चोर है। साला रो सारो पास 7 अवलतो 721 बात देदाणा होवणो है भाया सामान रातू रात लदा दियो।" पैल. उथळा दियो-"थे किसा सचला हो? हैडमास्टर रै सुगल पखाडा रात्यू हाडता-रोवता फिरो।" परिघा खटा आखा छात्र कै माथै ही बोल्या--"आपा ने तो पास 1 पोल मत उघाडो । परीक्षा नंडी है, दोना दीना सू जावाला। घरवाळा मेता रै कामा लेजा दुकाबला। चाले जित्तै चालण दयो पोल पटी।" पोथी पढनो आतर अभी अक छात्र हस'र बाल्यो–“भाइडा था जाणता होना भेडियरी जात रो अक जगली जिनावर हुवै । जका कदे बद रात रो गावा म जानडै अर घरा मूता साल छ मीणा रा छोटक्या टावरा न उठा ले जावै। हिदी वाळा उर्व जिनावर न वाई क्व ? बो हो आपरळो तकडो सा'ब है। हा! जनता इयं रा नाव रारयो है लाड- जको दत्त री जग्या बग्यो लग्या साळ आना साच है, क वो बिना कारण ही आपरै मातहता नै मार वर कर ।' आप कवोला कतरोक वै? म्हें वतावुला बेहद | आप भळे भोला पण बेहद कतरा ? म्हैं पवूला-आप काई भो, लाखा म या वानकी मेज ही है। मसलन मेक- अफसर अडा हव-जको आप रो काज छोड र दूज मिनख रो काम वगाव-~वो दवता वार्ज । दूजो-अडो हवे जको आप रो काज ही वाव अर आगल माणस गे ही सुधार देव-जगती उण न मिनख क्य। तीना-जंडा हवै नका निजू फायदा करण खातर दूसरं दुरवळ रा काम नस्ट कर'रनुक्साणपोचावे-जगती उण रो रायम नानो वार्ड । बोया--- अहो हवं जको आपरो तो कई लाभ नी कर सके पण बदळ पारगे तो बुमाया कर ही नास-या वाचणिया मिरदार बनावाला उवे लट न साई क्यो जाव?" लक्कडदत्त री दुसमणी ' कुदरती कळा है, जो म भूडापा, मूर- खापो अर जरीलो जोस-नसो भळ । कुवाण है-मरोज मर जावो, हावा री लुगदी वण जावं । पण दत्त बदा आपरी बाण सू हरगिज बाज नो आव । निलाबित परावण म, चाज सीट दिरावण म र ढिममिम रे मादेसा सार आपरा अधीनस्थ लोगा वेगी रात दिन काजिया काळा - साडवग्या/73 कर अर यितिया हो थासिस लिसनो रंव, मर पचे। पूरी मीत्री नी भावे, सागण वारता सुणो। छ साल पल्या लारल गाव रा कारनामा मिर लिया रत मावळमर आयो उव रैनाव भ्रिष्टाचार वभचार ग छप्याडा पैम्फलट पाय बठ रा छात्र ले दूक्या अर अठ छायावाम रा टाबरा ने बचाय र भडका दिया। छात्रा हडताल कर दी। पण तिनमान र फर मू एक भला मास्टर दत्त री गिडगिडाहट र चक्कर म आग्या अर स्टाफ मिटिंग कायम रसाय र छात्रा ने मदरसे बाडरिया। दत्त भर आखा मास्टरा स्थानीय जाण र उर्व जून मास्टरनं हो स्टाफ सचिव चुण लिया। क्लासा लागगी अर भणाई सब हुगी, दत्त र लोहा घिर आया। काळिया काज चाल्या। कुम्हारा सू माटक्या रो फूडो मोल चूकप गै रमीद वणाई। दफ्तर र स्टानरो मामान री वीमत सू दसगुणी भर पाई करवाई। फरनीचर अर भवन मरम्मत रा बिल दवाई पाणी तथा जाया भत्ता री रकम मजूरी ली। आपरा इया कामा मे स्टाफ री सलरी रो ध्यान समैसर कदे नी धारचो। आपरा वेतन बिल जुदो वणाय'र पास करा मगावं पण लारना पडो कूव म । सचिव आप र पद रो त्याग पत्र पेम करयो । दत्त मफा इकार करना दियो ।पण स्टाफ री वेतन कूफ चालती रयी। मिगरट, सराब अर जुबारचा म जमगी। उर्व छात्रावास उठा दिया। दर भा, सराधिया वादल सा खिडग्या। मणवत्ति बणग्या। सचिव देख्यो लक्कड रग वाळवा लाग्या। जार रा अत्याचार भर परपीडण को मचिव पणा नी मक्यो । मोनवण र मफा मास खीच लियो। मेज माथ मुक्को वाजतो मुण्या "रगड दूगा। रगड दूगा। सबको मजा चखा गा।" एर हरिजन लिखार बाबू ने साग रळाय'र कबाडा पळा दिया । यो जद लारल कमबै सू सिवायतो तबादल र दाब भजायोडो आयो, बूढ गहक ज्यू दातरी बता! हम्मै पारको खडका धमका सुण र सचिव दफ्तर मजा बडयो। दत बरस पडयो अर बोल्यो- 'सबको देख लूगा । मैं साटा सोसूमावतो वोरयो-"मेरा कोई क्या बिगाड लेगा?" दारू 74/वात वेदाणा । री तेज गिंघ सू सचिव रो माथा फूट पड्या। देख्यो उ4 री आरया खच रयी है। दत्त बोल्या-"मैं प्राथमिर क्या पाठशाला का माइना रांगा, निरीक्षव जी ने हमारे शाम ऑडर भिजवाया है। सोपो हो नी पडयो। चार चोर | हाकी हाग्यो । सचिव ही लागा र भेला भाज भीर हुयो । जाग जायर भीड मडगी। है वहनजी र क्वाटर मे रोवण री अवाज आई। मायला बूटो, दा जुवाना कूद'र जोयो।" "लक्कडबग्घा है।" बार सडी भीड़ ने बताया । अक जण आपरी रिवाल- वर ताण र पूठो उथलो दियो । क्या-"क्विाड खोल र काढो-आवणदयो खतम करा । गाव मे क्या हिलग्यो । भळे कीरा ही टाबर ले जासी।" गुनी झालर मायने सू दिखळाया के-"यो तो टावर लेजावणो मासर नी , लुगाया परडण वाळा वुमाणस लकडबग्यो है ।" सा'ब री मूरत जायर आयोडा सा लोग उबर मूढ थूक्ता थका आप आपरै धरा टरवा। लकडधो75 सुहागरासो - सगळा रे मन माथे सदा सू उपरी भाळप अर नामरदी री कडी साची भाख छायोडी हो । घर घुसिया डरपोक, वविस्वासी अर गोल वठर खावण-वोण जिस समावा री उवै री बाता गाव मे ही नहीं, दूजा गावा मे हो जा पोची। उचे रो मन सफा कारपाण, हरजगा कुढनो कापतो रेवता । एक अलबेली वाण बणघट रो डील हा उव रो। डरू फक, अकेली कुवारी छोरी री तरिया हरेक आदमी ने दखना अर पछ उर्व क्न पोच्या दान् हाथा री आगळया गूथर मद पाछो नीचे नाखतो थको पणाम क देवता । जद आगला मिनख ही कुमल समाचार पूछ लेंवता। गले मे माता जी भैरूजी गे छालो एक मूरता अर देवता वारा फनडा पंग्या घर री पाळ अर आगण बीचा आवाजावो परतो रखना। गळी म कोई योपरो अपरोसा मिनख दीख जावतो जद खिडकी री बारी पाठी जड लेवतो या भाज'र मोहै रा क्विाड बद कर लिया करता। फळम मे बहर कोई नूत पाताळो हैलो मारता नद उवै मिनख नै आळपर ही-हो ही हसता हुया हमारो भरतो। छेक्ड जापरी रटो रटाई बात बालतो अरमोट सरबजाण आदमी री भात उवैन चतर समभावणी री चेस्टा बतावतो जानो-माई म्हारं वार जावणियो पुण है ? माजी ने मांगन है अर मन पलेट मीठो पावरी हार पर री सागीती मनाही है 'धेगीसो वात वताय र मुद मार्ग टुरता । थापाइ न पाछा टोरवतो पर पोटरीयारी ममडा वग्ना को माडो जहरी पर लालमा म भासतो मामता नाजर माजी ने आखो क्या पता दिया करती। 1.

वो पोपलमाटी, लघडो, अर ढीलो ढग्गळ सो थूल मधूळ डोलाळ घनवतो धणी डोक्रो, ऊन अर बौछरडो नी लाडेसर ढोल हो। लीवर र मरीज री टानिक दवा बोतल रै ठकसी ऊडी-सूडी , डनलप रे तकिये ज्यू लथ पथ भिचतो-उभरतो पेट तथा धूम. थाग भाग झुक्यो फिरता- घिरतो। गोळ बोरिय री गुठली सी गुदली आख्या, कोडी नाळसा छीदा पतळा दाढी मूछ रा माळ, जवारे मरदानगी नस माथे घरा आयाडा लुगाई टाबरा मू मुळक मुळकर वगनी बाता किया करता। लाड उवैरी जलम धूटी साय घोळ र पायोडो हो । घणोसारो खिलाणे पिलाणं वगी उव री मा-दादी अर बाप इत्ता घणा नारा करता, जये आप भूखा मरता भाख दिन र जाया करता। पण अंडे लाड रे पाण ही वो घणा घणा माथ पत्तो। प्यार पुचकारणा र वखत उवो क्ड रोवणं तकात रा ताणा- बाणा बुण नेवतो। उव सग 'लाडी-लाडी' करता, जद वा माथा सूनाय र मा दादी नै हरामजादी अर गड ताई रा सबद बक देवतो। बैं मूढे में क्या दावता जद वो उवा रै घूसा मारतो जातो। छैक्ड कोई उडलो पाडोसी उर्व न डरा धमकाय'र जीमावता तथा घर परवार मैं थोडी ठड चापरती। थोडो बडो हुया-माईता, काज्या कुम्हारा री एन दो बहू बट्या न उवैरी धरम मैण वणा दी ही ? लघर्ड र वावळवडा मे की कमी नी भाई। माईता मदरम तो नी मेल्यो, पण विद्या देवण न गोमती हैड- माम्टग्णी ने घरा ही बला ती ही। मा घणो घणो जीमावती-दावती रवती । लघडो आया काढतो मीचतो बिना मन गासिया गिटतो जावतो। मान मरज्या तू मरज्या क्वतो हुयो वणावटी विस घोलतो, गाळा ठोकतो पर मा बिना इय र घडी मरतो नही । सग मनावणा भूतावणा मा कन चटी करावती! मा मिनट रही अवलो छोडती नहीं । वो बिलडी सू ही इर,क्ला वारै पग घर ही नहीं। मा रो मजदूरी,एक आख रो के उघाई बर के मीच ? च्यार घराचीच आख्या देखण जाग एक ही तो औलाद है। दुखियारा मारत जद ही दबोम्या रासता । उवो नित हमेम खेलण री जीम परता । वाम रा टाबर ही बाळ सुलभ हेत सू उलळ पुलळ आवता। पर लघडा डफोल लुक लुयर क्विाडो र विजोक्ला माखर देम्या करता। मुहागरासो/77 दादी आरया री सेन मू कूडो सुवाणन रा साग भरती। मा बारणे आया बाळका न 'जावो जावो' कैयर पाछा तगड काढती। बाप मंडी लुकावणी बाता स डाढो राजी होवतो अर खखारा करता बीडी सिलगायर नचीतो सो जावता । इस तरा लघड माथै घर वाळा रो पूरी देख-भाळ निर्गदास्ती चालती। 1 क्नलो वैद्य घध सू ऊघो, टाबरा मे बैठे उठ नावडो रुधो । लव ₹ माईता ने बतायो-"टाबर नै थे खेल प्रवति म राखो, घराडियो मत वणावा मदरस मेलो भणावो-गुणावो आपणे इये कुवर रै डर भोरी ग्रथो वा रयी है। डाढा फोडा घालेली । म्हारा मनाविग्यान है, बाळक ने लुवाया राखणं सू डरोक हुज्यावं जको सुभाव जीवण र अदरूणी स्वास्थ्य रो भयावणो वैरी हुव । दादी बोली |--'घणा भणा गुणार म्हा न नौकरी कोनी कराणी। माठर थोडो ही बणाणो है ! यो तो सेठ दणसी अर माठर जिसा मिनख इय र लार फिरसी।" कदे दी लघडो माल पावण वेगी खुदत्यार हो जावतो अर हाया जीम लेंवतो। कवतो-"हमें जुबान वणना है नो दिसावर री दुकाना म्हार ही जामनै ऊभी चाल । वापूजी तो माचा पकडग्या, पण म्है सा पीपर मोटो हो जावू अर वेगो सो बठे जाय र धूवा उपाड दस्यू । मुनीमडा गुमास्तिया री रटका क्दा शाख सू । " इयं बात सू घर वाळा घणा रानी हुया करता । दादी खोळ मे बैठावती यको युथकारा नासती-सूण गठडी बापती तथा सिरमाथै हाथ फेरती। एक बार जडा खगदा हुयो क लघडा एक नाजतं छोर लार पर सू बार कढग्यो। मा दादी नारे भान भीर दुई। बाप हाफ्ता लकडी र ठेगै लाघडा दे नाल्यो। वो धुनिया लपाड भागली गळी में छारा रो खेल देखतो लामा! मादा रेजीम जी मायो । वो ही तो घणो राजी हुयो। उवो ग ग साइ लादेसर पाछा अक्ला परानी जा सक्यो। उबो पाळोक्ड मग्य हाट कटकायर मारया पाड स्या । भळे ता वो वारली वाता घरा बैठा ही सुण दल लिया करता पण धूजता हरता बार रद नी बहनोदूजा रा टावर तरमता, पाउवं सरपर अग्माण पगाप मना मिस्ठान पल्या रताना पवार र 78/वात धगणा लाखा रो लेखो? दूमरा टावरा ने माटी रा ही नी मिलता पण उवै वर्गा सोनं चादी रा रम्मतिया पगाम अडता गडता जद मा दादी भेळा करती मेलती। वो लाडेसर उलाडो उवा रे हाथ खोमर वगा दिया करतो। सूवै मैंना रो पीजरा तो हाथा उठाया फिरता। वो ऊत नहीं, घण लाड काह सू बोछरडो बग्घू वणग्या । होळी दिवाळी उवैरी धरम बहणा मिलण आवती, नौ-नो ताळ कूदण लाग जावता । उवा नै चूरी री थली खोल'र धिंगाण खुलावतो। मा देवारी नाक निवाण हाय जाडती, गणा सिराण मेलती अर एक आगळी टाळ र ओट राखती जीमती । गुवाड में लोटी ढाळती सुनार रोटी राळती अर घरा सायार्ड मिनस रा पग चुगर लूण मिलाती थकी चूल म वाळती ही। मढे म राब री चिमटी, लिलाड ऊपर वभूती रो टीका, पितर रै ना. धाक दिराय' र लघडे रे मगरा रोजी ने थापी दिया करती ही। उवा आखा दिखाळणना, रात जगावणो अर भोग मतपाई जैडा ट्णा टसमण तथा माळा टटपज पूरा करती। दादी पोत माथै हर हमेस टक्को पइसो फेर'र बारा रै छारा नै वाटती । इस तरा लधदै री खैर मनाईजती। एक दिन लाडेगर लघर्ड चादी री वणी एक थोपो चिटकाली चुपके सापरी कुम्हारी मैण न सूप दो ही अर के दिया-"बताव नहीं । बात रोठा लाग्यो जर घर रा सग मडचूसिया डाढा राजी हुया । बहनडी बापडी उवा चिडी पाछी दवण लागी घर वाळा सफा नाटग्या । लघर्ड हसत मुळकत भाट माथ पटवर टुक्डा कर दिया अर बार फरणा दिया। पर घरवाळा उवै नै जाब नी हुटकार सक्या । वा दादी रे घणा हज, उव न वा रोज रिप्पड देवती अर घर म सोने चादी रीवूरेडी सिलावा रो ॥ बेरोवतांवती रवती। 1 दादी मरगी, ढाल ढलगी। वाप घटता पूरा कर हो । उवै रे ब्याह रो जमवार पुराणिय मनीम रो बेटो वण्या। नदी कराडै रूस ज्यू बाप लामा हुपा पर लघर्ड रै ब्याह रा तेटो आया। उवो पळगाड नाव सुपता ही उछळ पडयो । लोगारी घोडी अर हथणी गाईजती मापरं वारण आग पर किती उवै घणो विरिया सुणी गुणी। उवो मारा घणो लाडेमर अलौल सुपारो वहडखो टोघड व्याह र कोड म सागोडो ल्हाढ वणग्यो । पर बनहो सुहागरासो/79

No text on this page.

इव । उवा देवी खफसेड कुशळ लीप-पोप, कारी कुटको वराव अर देवता म जिसडो घर उघाड देव। 'सुहाग रास' मरदानी महिला, थूळ मथूळ घम्माघोडी कागज हाथ चमू करै अर सामा वाल्या धणी रे थप्पड थरका देवै। नाजर नाव रै रज- नान, घर रो आखो जटवर पीवर ले वडे। लघडोलार पर सागी घर अक्लो रवै भूखो भटव फिर क्यारी ल्याव अर काई वस्न वणाव हाथ वटा वैठो। घराडियो, की जाण न वूझ, डरू फरू हुयाडो डबके-टाल । बाईकर' टावर पणाळी लाटवाळी आदत्त दुसमण वण र फाडा घाल भाळ २ यौली कुण छोर्ड ? छेकड वैक री जमा पूजी रक्म रा हिसाब जर परदेस री दुकाना रो काम, सासराळा साळा तथा साढू मिल र साम । सूत सार, चूनो चाढे, केठा कीरा पग वाढ ? किण रा बाधै सरब तेराताळा, मण र नाव आखा लुग्गो तुग्गो ले लग। घर पकड लेवे, सासरै रवणो चावै, पण पीवरियाळा लारा छाडे नही। लोगा म लघडे रा भाळा- पणो, ढील अर मूल चोड आ ज्यावं । सुहाग रास उळझा पडग्यो । ? , सुहागरासो/81 - मूळी री गूग मडी | मळे री भीड । भात मतीली दुकाना लाग रयो। चौवटै मे वा ओपरी छिया जिया भी। घणी अचपळी हस खिले, डोळा काढ, आतरं कभा माणसासू छाटा लेव। पूछ जकानं लटक सू डकराव। क्व- जा रे । रस्तो नाप | थार जिसी केई पाबूटी पडी देखी है ।' फीकी लाली, तीखो सुरमा तथा पालम प्यार मूढे टोकी-ळिया चेप्याटा हा । उजास सू लिलाट आपता रघाड खाव हा। पला र लायार्ड वधिया पाउडर सू थोबडो यह र चाखा स्प सजा आई। सादी साडी मोडी मोढा नकली बाळ राळया अर हरिय लाउज री मराहम गूजरी व ढो। मोटे चौकाळ सोन री चूप चढायली, जके कदई मूढा दिखाळी री सासू सू मिलियोडी हो । मात्या जडो इढूणी माथै चीकणी नागळयोडी घडवली अर हवा हालती उवा लामी लडछ लुगाई भरिय बाजारा हाट- माठ जा जमी। गैल वगता चौक ना हुया, टाबर गुघाया तथा मडी रा मिनख उवक'र खडा हुग्या। डोकरया डरी छाकरया चिमकी अर पलदार खडा ही तिडकी जग्या। लोग लफ्या, हाका हुया, तुळ माचग्या भर कोट फारम ताई खबर जा लघो। बाता रा गडाछा गुजरी री गप्पा, लाग बाग रीझग्या, निताक नी कर मया । बतळावण करें दूध रा भाव बापी। उवा कब--'दानुवा वखता रो टमाटेम पुगा देमू अर सतवार्ड र हिसाव मारू पइसा लसू । 'दुरमख री दाझ,' धन पसवा समत कनाळ री कराड पास पाणी सारू चौर्ड चौगान बैठा हा। काळ जाळ सू झुलसी- ज्योहा बाद रोटी राजी हा। सात दिना सू वैसी री उधार पासावा . 82/वात वेदाणा - 7 नहीं।' पण लोकी लबार, उनै सुने पडताळ पूरी करणी चाव । काई के भूतणी वडयोडी है, काई क्व माड अर कोई रहळी वताव है। सैलून सारनी होटल मू कढ र हाफोज्यो हेमो बायो आयो पर आख मुचाय र गूजरी नै तपाई। ओळवी, बोती सुणी वफारो क्ढया । "अरे आ तो देव नायाळी बीचेटडी छारी मूळकी मै ली मर कठसू चाल'र आई बळी है ? सुगा, माया सराब हुग्यो, जका पुन वग्याडी वावळवडा करती फिर परणाई पत्ताई दो टाबरा रीमा, कीर सार कमाद मदी, सात भारा लाग । पण सासराळा से मरग्या के ? है ही गर्दवाळ । वार क्यू कदण दवे ? आपणा फरज घरा ले चाला। बेचारी र वारी वात पोरी है। जुवाईड नै बला र सनझा देस्या। परणीज्यो है ता इरा बदायस्त राख । म्हाने भळे हेठा क्यू निखळ ? बागरी छाट परण्याडी लगाई तो गावा गाव, ठिट करती फिर । का माईता ने बनार सूप दम्या ।" डोकर हाथ मान न माथ सू मघली उतारी अर बाल्या- "मूळकी घरा चार त ने तरी चाची बुलावै ।" गूजरी सैथरी बथरी ऊभी रयी। बचपण रो नानो सुण्या, अमली चेते आई। टपक र कार रे साग हायली । ठीक ठिकाण जा बठी। ग्गा हुयो मिनख खराब मायाळा बाजै साफ मनरो र आत्मा ग्यानी | वाडी साची दिखती जर शोभती वाता रिगला सळकाव जका सू सुणणिया लापारी रग रग राजी हो ज्यादै। भोळो गूगा ब्रह्मग्यानी भापर अपराधा रा हकारा टावरा नै दरावं । पण उव ने काई फोटो माडी बात री उळटी सीख देव तो मान नही तथा खुलजा व तो आप बीती सुणा वोरै। मूठको मन मन मुळी, पण काकी आग कूक पडी। उवा वर्ण लागी "काकी मरळा जामी तीन गावा में तडा खाय'रआयाजददेवाराम नाव सू एक कोझ क्स्व में अस्पताळ ₹ कम्पाउडर री रोटी सक्तो। सफाई र आख खोरम माफर दम रो महीणो पावता। जून वखन री जाण चावळिय र जाळ सरकारी अस्पताल रे पाण राज री नौकरी वणगी। कुरप-जायद ठाटियो ठटग्यो। म्है म्हार बाप ने झाड बुहार तथा टाव- ठोकर, वासण भाटा धावण-माजण म पूरो स्हारो देवती। पण टाली ऊभी मूळो री गूग/83 - - गळी वगणियास आळ मध्याही पर वगे। मदग्म जायनिया टावरा रीमा पहा दया परती । भणगिया धारा चूकना ? उब मन दाननी दाननी करता या चिडायता राज जावता । म्हारा दात माटा माटामा दूजा ने हाटा रे पगवाह लटकता दीयता। मांटानिरळन मिगत इसटाहा व मापन एप मा य री स्याहनादी मममना । नाग बाग, मुलगी नाव म बनायना, गोरी चालता चारल गावा रा लागबमार बनार नं मफासान लापता या मू मन यिना माग टुबडा दग मिल जाना। चटारडी जवान हुगी, फूई राम वगती पिरती या लॅबती। पंरण वगी वगा पूर पल्लो ही माग-नाग नावनी । म्हारी मा ता बाप मू अलदै गावडे रवती । भापर व्याह र आठ वग्म पछ उकिनी वू बडे र मू सुनिया ८ ' मूवी गे याप दागी गर होण औलाद, भापर वाप दाद रं गाद म हाडा मू पटीजर पढयोनो है छाट घिटाया। या मात वरम री टागरी न मन घाट चढाय र जिल र पाने पाणी, मर जावडया। इधकारचा मू उपा नाग्या मूवा पच्या अर चाम वाम जमायती हैं आवर कमनगी हाडे गाड डिनाळ पण घटिया अबक्न जुवानी आई। वगा विगडायला चया बनमामा म्हार डोल डाळा गडाया। जिगी वमोणी हरक्ता मू म्हें उबळ आई। मरदानी बाघरही बाग, धपावू गाठा ठोक्ती। घण सू राटा भगडा खाटपामर उव वारण एक दामन मेलुवा सू मुलाकात कणा घणी पटी। पण नारी पण री रुवाळी, जाण नीमको क 'सुगाई जातरी सुभावी भान मरदा सू जुरा हव । वा उणा री बरोरी म हरगज नी आ मक्ला । माटियार बतरा ही उलाडपणा क्ग, काइ वध घट गुण क्व पण सुधो लुगाई वापडी मेली खडी किणी आपता र सम की दर्द सू बाल लेवं ता देखणिया चट मखौल करणी मा कर देव तथा तुरत छ त रो फ्नवा क्स नाव"मन मंडी घणी नाव जादो उपाधी बकमीज्याडी है। म्हें सातर कवत ही कहीजी- राडरी रा छारा बिगडे बर राटिय री छोरी।' वाह रे महारा आध विमवान आळा, भेट भरिया दश लसदाद भूटमूठ तुगाई जात न वद वतावणिया मिनस ही अचाखा गिणीज अर थारी उनळो कूख सू उपजोडी मा मैणा न मूड तारयवाण ज्यू जोदन। कासी साचणं मळकी मन री साफ है । लुबाबो छिपायो जाबक । 84/वात बेदाणा 1 . । नो राखे । उवा बीती बाता माधी माची बतावै । "क वाण जोगडो म्हारा सुभाव ही टाबरपण मे सख्या नौ रयो । सागी वापरो ही कैणौ ता क्दी मा यो नहीं! तादिस्ट उठावू विसन प्रणालियो। कम्पाउडर रे घर सू चारी रो टक्को पइयो पच्यो अर माटा डादा ताणी हाथ वध्यो खया। पी एम आ सा व सफाखानै री निगराणी भाया, रात ने सूता री हाय सू घडी खोल उचका लाई। वं अठीन उठीने दख हारथा, माटा अफ्मर की रो नाव लेवता । ठानी डटा सा पड़ा मूनो हाथ लिया रेल चढग्या। लार सू म्है फटसार घटी रा फार घडावर नारया। एक दिन इचाज र बुवाटर मू टावरा रा कपडा काढ लाई। कपा उहर सा'ब मनोरलाल लि ही लबडधक्क । क्या-'मूळवी एक घर ता डाक ही छोउया करै। प्यारा चारी अर पीरा दगा देणा कद सू माया और तो हुई सो सग गई करी, पण पी एम ओ साबरी घडी उडा जेब म धरी । तू छारी म्हारी निजरा सू सफा गई परी। बेटो रोजमारो घणा लाज । जव ने लापत लाग वाबळी । म्ह तो भार वाप लार टाळो करावा, उव रो उछाव वधावा। पण हीणपण री वाता पुखता चौडे आवै। उनके दिया-'देवा थारो काई उलातर घर सोधले, राज रो कुवाटर खाली कर दे भाया।' चाप, वापडो म्हार परवाडा रे नित्त सवा ओळपा सू मागीडा आखतीजग्यो। मनै फेरा देवण री फिराक में फिरणे लाग्यो । उणारी भाजा हामड देखन मनोरलाल थोडा मोळा पडग्या, धमग्यो। पण म्हागे सूगली वाता रोजिरो काफी वधग्यो। एक दिन जात विरादरी आळो एक कनलो आदमी मने दखण न इस्पताळ आ ढक्या । ठा लाग्यो के वाबलियो म्हारै व्याह रो बात करें। दोन धणी एक धध, सगा वणनिया रा पशा रळ मिळग्या । घरा बायोडा रो नाव रामजी, उवा म्हरे हाय सामो पिया वापरा झलाया चायो । हैं फ्ट खोस'र खट आनर जा ऊभी । चार देवणिय री जाडा चिपगी। बाप बताया-'पोडी बोछरडी है।' रामूजी क्यो-"योडा दात ही मोटा है मूळी री गूग/85 .

डरतो सो बाप बोल्या-चौकाळ रा च्यार ऊपरला दात, चौडार योडा बडा है।' उवा क्या- 'क्मिा गाव यारा धर्म ? रूप तो माता दियोडो . बाप गिटगिडायो- व्याह ता इयं आवती पीपळ पुयू रोही राखा, अपूछ मावो है । टावर मोटा है, म्हार चौकीदारी आळा सामा घत ।' रामूजी बोल्या--"यारी वाई रोकाइ नाव है बापू बतायो- 'मूळको ? म्ह सुण्यो, सिर म डाग री सी लागी। रामूजी क्यो - "म्हारे डावडे रा नाव डेडरियो है।' दानुवा बैरनी वरडी बालो मिलाण खाया, म्हारै जी मे जी आयो। नडा मावा घर री साफ सफाई पळाई। बाप मनं बतलाइ। "मूठी म्हैं काडाई बाली-"हा बापू।" अर छोरी | आज तरी मा आवली। साथै भाई बहन ही हासी। ब्याह री खुसी चोगणी वध ज्यासी रीत नग वतावण रा फाडा नी रैवै । "मा' म्ह पण अचूमै सू बोली-' वापू थान ही दरया जाण्या व मरे बापू मनै पाळ पोस' र मोटी करी जर थोडा आकडा ही सिखा दिया है।' नही बटी काल तेरी मार आवण रो सागू समाचार आया है । उर्व ने तर व्याह राठा पडया पर भेद भावी रीस रास न छोड र चालगी है। दपार री रल माथै साम आवण का लिस्यो है। म्हैं छुट्टी माथ हू। मनारलालजी र जरिये जास्या अर ब्याह रा समान ही उवा र भरास भेळो करस्या। दिन कठ ब्याह हुया, सासर जाइ । लाड काड रा थाथा येड, गाट उपाड चाढ दिया । सुसरै ही नहीं , दाद सुभर ताई रा पग पकडाई हुई। सिक्का सू छल्याडी काथळी म हाय घनाया। हाम्बाळा पइमा गोटिया र सवाय रुपिय रो हानो नी हो। बाही बार आळी जजमानी चाकरी घूमती निजर चढी। ये आपर बाप दाद रा गाव छोड र गुवाडया से काम करण वास्त उत्तरादन आयाडा हा। पण मोटधार च्यार आवडा सीस्याहयो मिल्यो जको गुमास्नागिरी ने पग फावो। म्हें चारा रो घाटी मालानी परम 86/बात बेदाणा में ही जाणगी के ईघर मे तो आ इत्ती जीवती जड है, पक्डर जरू झान लेणी पाय। सोपो सण-मण हुयो, सासू मन लारले छपरिय म सुवाणगी। दहा घट खुल्ली फिरयाडी है राडघट मे आयगी । पण थोडी वाळ म पति देव बरोबर आ विराज्या। बोत्या-~'सासरा है । नूवा नातेला लागा सू आछो प्यार-प्रेम जाडणो हो जस रो कारण वर्ण। पण घणी लाज ही की मार रोनी हवं । म्हैं झट समझगी-'अर या तो लपर लखणा लाडो, मुरगी स्हारी फस जासी । सुख अर मौज मजा। पैलडो काम आपणो मुगतो रो परमो है खुल्ला, का अग्ला रेवणे रो जावा जचावणा है । बतळाई, मुर अपूठी बटगी। बोली-"छपरिया म नीद कीन आव म्हें तो कमरा मे ही बिना पसै पदी नी सूनी । इयै घर म अठ क्या रया ? जासी?" ? । वोत्या--"धर कोझ घर लारल गाव म रेग्पा । अठ तो सिर धमावण ने दो टापरी जमीदार सू माग र लियाडी है । म्हार माथे मकान दसजा' म्हन म्हारै अचूक निसाणे सू सतोप हुया। सुब्या-मरद कित्ता चाला हवं? सगला सू लड झगडे ना, मना कर, पण लुगाई नकर कट्टर जाग ही नाड नीची कर लवे । करे नी जूझ सके । साची कूडी सुण्या गाव, दुरकै ही नही। विलडी चण्या रवै । बोल्यो-"हम्मक नोकरी जावतो यनै पोरै सू सीधी साथै लेजाम अर बठ आपा कम्पनी रो क्वारटर लेयर रै लेस्या। घर आळा म्हलीण अठे किसा काम कर रहार उणा सगळा ने पाछा गाव तगड देस्यू ।' म्हार सायवजी एक पर रा दो घर करया, साथ सगळा रा मन ही चीर फाड राळया। माईता नै भरमाप'र गाव कानी काढ दिया। म्हारी भाव फोर बदळ'र मेम राख लियो । बापू री सीख लेवा देवा पळाईज्यो । म्हारो भाग जाग्यो, राजस करण लागी । सागोडी बूझ बूभाकही वणगी। घणी ही म्हारो कोरा सरोढ ही नही, साग बचाकर छटल है। उसे रकवर्ण सू आखा पखार जापरी जलमभोम र गाव सावळ सरिय गया परो। रुपिय पइस री काउ-पोल मे अकर तो वहालै साझ आळी जमीन ॥ मूळी री मूग 187 दोरी-मोरी उणाने ही बैच नै चेमा सार्थ काम चलायो। कई साल पडया मरया । मरता-पडता राडू सू जेवडो घसता रया। पण अस भळे सुसरो म्हाखनै मागण मा बैठो। जद म्हारळ वाप ने ले साथ'र थारळो जुवाई गया उवा खने गाव अर और पइमा लेपणिये लोभ में उवा बरमा री बेचेडी सागी जगा जमी रो पाछो घणी आप वण बठो।म्हें ही भेळी ही। जमी वाळा जोर जचायो जद माया मू आया ठोक्या गाळया रा भूषण, घर रागिण्या न पारका। सारा म्हारे सू डरता परका करता भाज वहीर हुया वबज वेगी बठे ही थोडा काकरा अर इट लाग्या । म्हा, थाम्हान लायर चेजा पळा लियो। बडे भळे पाल्या जद बाथेडे ₹ अलावा म्हारा वाप राजतेज ले चढयो । लोगा अचूमै सू कया-"थूक्योडोचाट लियो।" काकी, वखाण बोचाळे ही मूळको री बात बोटर बोली-"मूळो हम्मै घणा दळिया न दळ : म्हार सू काई छानो कानी । यापी लोद अर जादा गूग ववरण सू ही थारो दिमाग खराव हुयो है सागी नावो मुणर उवा को सहूर जाई, जजमी' बोली-"काको मेरो बाप ही स्यानियो है। उवो ही ओजू संग माणसा आगे मूळकी नाव सू बतळावं । काई हवै दात वहा है तो, म्हैं तो मैम माफर साजबाज , मूढा उघाडे, गुदी गुदा वाघे मैडम डील डॉल है । थार पगे पडू -वाकोसा नै के परा'र म्हार बाप मू मूळको नाव बतळा- चणा छोटाय दे। पर्छ देख म्हारो दिमाग किसोक हवै। रोस्ट बळू, लहाय राजी रेवू । लोगा मू लगार विगाड दी। मने पारौ जूवाइ जाणे, हाथा माथे धुकाव अर मेम मा'व-मेम साव कवतै रोजी सूक। जद मूळकी नाव बयाडो क्या सदै ? सामी वाप रा ही मूढा तोड नाखू A - 88/वात वेदाणा अग्रेजी अनुस्ठान बाल रै एक खूण म बैठी डाकरी जापर वटै री अग्रेजी पढाइ रो असर चितारे कळप-"की लूण लक्षण कानी, पाघरो टोघड है। भण्यो है पण गुण्यो नही। इत्तो मोटा लडधो हुग्यो, कुनडी भेको खाव। विस्कुट जर चाय, सागै चटावै । पालाजद क्वै-'आ तो अंग्रेजी जात री कुत्ती है। साट वेवल रै कुत री सागण पड पोती लम्मी नाव री कुतटी है । रिश्वत रादा हजार बाळया जद हाथ लागी है। हजार नफै रा देवण खातर नोरा भळे घणा काढ। हेली री इज्जत वधारण वाली है। वग बड़ा हास्टर अर जज घेरा पाल । दखण आव अर लेवण लल चावै। पण म्हान इय ने बेच र किमी झोळी लेवणी है। म्हारै तो या बडी मानीत है। लामी आरबळ अर मोटी मत्ता लम्मी रे ही प्रताप सू हामी। भण्या गुण्या रा म्हारा कुत्ता कुत्तो इप्ट देव हवं ।' सगाई पताई रो क्वा ता सुण ही कोयनी क्दै-'म्हारै तो क्लब ही गिरस्थ है। ब्याह रो वाई वाळा? अग्रेजी सस्करती में नित नवा ब्याह है।' जळाय-हाय ग्वाव, पट-बूट पर है पर बडिज्यो वग।" मोख बैठी मायड आज री भणाई नै बिसरावै अर मवर ने स्याणो करण वेगी भरूजी ने मामो नाव । भवर आपरा नाव हाफे ही पार लीना । बोजापन विलियम बतावै अर ससू मोटो गिणावै । आवती जवानी, जावती अक्कल अर आज री ऊधा भणाई उव ने सागीडो आयो बणा रास्यो है। बो आपरी सूहागण भागण मा न ही राड के नाख। वाप र बतळाया बटका भर। बटर पेसाब करणा ता अळगो रया, गडबडी न गोदी लिया, खडो ही खल्ला परया सावं। अग्रेजी अनुस्ठान/89 । "सूट रो गाठियो अर नाव पसारी।" आठवी दमवी ताणी ए बी सी डी राई आरडा नीख र वडा अलाढो अर उडा बगडा वण रहमा है। कुनडी माथै दोलडा मिनब राखे । हुवाव धुवाव नहीं ता नोपरा रा फूल माढ दय भूवा अर दादी ताणी भीठ हाये। उवा र जामा, भाया अर काका ने ही कानी छोड । पर म मावळा जणा है, पण इये मू डरता स राजीव जाव। माऊ उवं न कनन मू राणा चाया विलियम उलटा गुरराया— 'देखा मम्मी में जा काई काम करता उमम तेरा डिसीन वित्तुल नहीं चाहता। माता पिता ने अपने सुगानद के लिए पैदा कर दिया। हम भी उमा लिए स्वतत्रह मना करन नमी कौन-मी बात । आज जाठ बज्या रात न विनियम नब र सग साच्या माथ अग्रेता डाम करसी। घणा मिनख लुगाई मिल'र खासी पोमी भर खुल्ला हम बालमी । जर वेगी विलियम रा मन दिनूग सू दबक्या कूद । उव माना नै आपरी सारी बाता बता दी है । क्यू क किमारपणा कढता या कुलछ पण मोकळा देवता जावं नी। बाप समझगर मिनस। चोटी जनेऊ धार। पूजा पाठ करे अर धरमात्मा वाज। मा हाथा पावं वाव, घोव माज अर करडी उछताई राख । वटै रा लाड-काड कर। एक ही है। एक आख रो के मीच अर काइ उगार्ड । वागा र मवर रो अणक्यिा कर वुण? पण अकूरडी माथे चढणा चाव नही । घरा माळी मात्र मता, पूत गिदी रो गदेड वप । गुवाड र पाडौमी अर हाळी वाळदया र ण म हाले । मा एकलियो हार (सिंघ) बणाव चावै, पण पून गादा राम्वाज काढता लापरवा मौज कर। मिश्या विलियम माढा पाच बज्या विना साया ही नौकर मूस्टर वार क्ढा लेव । उव ने आज जमीरी फक्मन रा डबा आवं। कदेइ साल पला कनन वगत कलचर प्रोफेसर साथै बो अंग्रेजी डास म एकरस गघोडो हा । लाग र लुगाया राजापसी मुह मिल पन्ना, गळ वाष घालेडी मुवाळी अर वाटा गिदरा मार्थ माय गुदना पडना विय नै चोखो तर्ग चेत हा । हमैं कळयुगी जवानी रै पलड पगोथिय खानी सरवतो स्कूटर र हैंडल न हाप पाल-"गुड इवनिंग, मम्मी। 50/वात वेदाणा "जीवतो र बेटा।" फटण फट्टटण फट फट करतो फटफटियो तुरत उडतो पको अग्रजी डेरा र बोळे लुक जावै । विलियम नै डाम रो कोड लागरियो है । मा बधा बधाओ मिध करा जिमा सन्द कैय कर, ही जठे ही बैठ जाव । उण री क्याडी सीख सरगम ताई वाले नहीं ! "यू आर नाट वाकिंग फास्ट विलियम " एक मंडी जवान लुगाई री उवाज आई। विलियम मे थोडो चेतो बापरयो। पग भारू होरचा, बाजा सू लारी चाला। नौसोखीयो विलियम सरमावै घणो हो । धन, जोबन अर ठाकरी मिल्या पछे विलियम जाबर बावळो हाग्यो। नस मे चूच, पसवा गुडग्यो फुरणी बाजी, चेतो मुडग्या । आथूणी मभ्यता आभा, मूपनैलो लागी- मरी लम्मी भूखी मर रही है। मैं अब इस घर म नही रहूगा । सजे सजाय मजे कनव के मिवाय पहा हैं | घर म मान क गहन और रुपये हैं, वे सारे मेरे हैं। खरचूगा, खाऊगा, मुझे मना करन वाला कौन है ? इंडी आल्डमैन, मार्केटिंग क्या जाने ? इसीलिए स्कूल छोडकर क्रिश्चयन कालेज मे आया है। पढ़ना है न लिखना, फक्त मौज कर लेनी है । मम्मी मैनी बुढिया, जल्दी से जल्दी मरने वाली है । रास्ता साफ हो जायेगा। नौकरा का हटर मार मारकर सीधे कर दूगा । मेरी प्यारी लम्मी प्यासी मर रही है।' मुभाखा हुयो, गडबडा आया, क्लब म रात रा ऐंठा पडघा वासण रडमहाया। मारया उडाई, मूडो चाटया, वाको नीचिज्या विलियम रो फाटया । गास्त रा चिवळयोडा पडया टुण्डा लेवण लट्टा जूटया जद उवै रै गाला न माछरा चूटया। पट पडापड थप्पड सावना थवा उठ बैटया हुया। क्लब रा आखा मिनस उठ उठ र आपर घरा जा रया हा । सल्लर गिणिया सा बढता उडता खल्ला खायेडा सा धुधी निजर आ रया हो । गहमा मापस री मे करा पोरका, विलियम न सास आया जोर का । या सपन में रीस वळतो आंख मसळना सूका होटा सू बरडायो-"मेरो लम्मी! अम्मी" विलियम मारे जीव री जडी, बुळ री लडी रो ओरतो मुमेर, मापन घणा स्यानो माने। पण सफा सरळगठ, आडू भर ठोठ' भादम्यो म अप्रेजी अनुस्टान/91 मागणो भरयोडो रव, के भाग्या रे हाजरी सू लार कुण जावं पण विलियम रो सुभाव सग बाक्रो बतावै। घर मे वह जद लोग बाग, एक पग रे ताण कभ जाये । पाणी, दूध, चाय, दाळ भात, दही-पापड सारी वस्तुवा त्यार राख, तो ही विलियमकोई चीज सराव नहीं। कोई रो एक दा कवा लेय मर पाछो मुड जादै । मा नै रोजीना डाट अर हाटल र खाणे री बहाई छाट । कुतिया नै वन बैठा र छवाव अर भळे भौत भात भुलावतो वार जावे। आव जद लम्मी मम्मी करतो ही यावे। पण कुतडी आज माळ- भो ही घर मू कढगी। सुतत्रता री सैल म उतावळी हुवाडी लम्मी मामली महक चढगी। च्यारा कानले माल सू लदघोडा ट्रका रा हाण चाज्या, गडकडी गूगी वैरी हुगी। बीच म आगो अर चिगीजर मरगी। कचूमर कढग्यो। विलियम रो नौकर लम्मी मम्मी करतो लारं भाज'र आया पण सिबदी रो सनाण लाडयोडी मडक पर लिदरडो लाया । हाम उटग्या, होलियो मूइजग्यो अर माईत मा मरग्या। खाल काट लेसी, हाड तोड दसी, डरते मरन घरा जाय र मा न वियो। मगठा रा मूढा उतर गिया । " मठाठ र मीट म डबल रोटी खाइ। होटल सू तिरपत होय र घरा मूढो सिफळिया सा लेयर बावडयो । रात भर रै थाकेल सू थिगतो बडयो अर रिडयो-पिडया सो मार्च गुडग्यो। पडता ही घरू मिनखा नै उदास जोया अर विलियम पूछयो-- क्या हुआ 1" कोई नहीं बाल्यो। भळे गरज र केया- 'बोलते क्यो नही?' जद धूजतो सो बाप बोल्यो-~"तेरी लम्मो मर गई है।' विलियम समझग्यो अर हाठो म ही गुणगुणश्यो-"मम्मी । क्न खडा तमाम मिनस घणा डरवा, पण वात भरमा गरमी मे ही दब गयो । विलियम मम्मी मरण रै भरोस में राजी खुगी सा रैयो। लागा रोथोडो जी जम्यो । अगाडीमोडरपाछल पोर उठयो। सिव्या रो पौर। मराविया रो जोर। हम्मैं जाय र डील जाबा हठको हुयो है। क्लाळा चढ अर लम्मी नै वुलावै। पण लम्मी बापडी आवै क्ठ सू? वा ता काल ही ट्रक मू किचरीज'र सरगा सिधार गई। 921 वात वेदाणा

विलियम लम्मी हाळे नौकर ने धमकार पूछ्यो-"लम्मी कहा है ?"
नौकर-"उवा तो जापन बताई नी-काल ही माटर नीचे दव'र
मरगी।"
बोल्यो 1-'मम्मी नही ?"
अर डागर ज्यू अरडायो-"हाय लम्मी एऽ।। मेरी अम्मी ए."
मा आसू पूछनी माकळा रुपिया धामै, वाप ढूकता गाळा ठोके । पण
'विलियम रोवतो व ही नहीं।
क्वं-"फादर मेरी कुतिया मर गई, मैं भी जीवूगा नही। मरना
एक बार है।"
समक आधी रा पाडौमी राळो सुण'र भाज्या आया नै बूटयो--
"ओ काई तिगडो है ?" विलियम ने कुतडी खातर रोवता दख र घणा
हस्या अर बोल्या-"गड मरघो, घर रो ऐंठवाडो (जूठन) गयो । कोई
दूजी पाळ लेई रोवणो भळे क्यारो है ? सग मोहल्ले री नीद विडार दी।
माईन ही मिनखा रा मर जाव है।"
बोया--"माईत मर जाते तो इतना रोना नही आता। मम्मी मर
जाती काई बात नहीं थी। पर लम्मी बडा धोखा दे गई है।'
अग्रेजी अनुस्ठान 193

भल्लै-मल्लै री चुधरै लुगाई भगत हैडमास्टर जी डब्बल नही, तिरवल चौबल एम० ए०, पण मोती गे मा नै पूछ्या बिना पमाव नो अतर। म्हारो मेक सगा-साचो जोरू गुलाम, साख पात अर सग घर कामा मे टक्क मण पीसतो फिर। तीजी म्हार क्षेत्र जलमस्त तथा दिलदार बाई, उवा जीजाजी सू सागौडा हीहा करावं, धूपटा अडावं । इया सगळा नै क्दे वदे दखण रो काम पड़े, जद म्हारो राम ही पप्पु. पोत री दादी नै जीकार सू बतळावण री जी म कर । पण जब काळे वरस, बेक मिनिस्टर र धर रो धारो देखण रो म्हारो काम पडग्यो । उवै घर री अधपढी मूढे चढी, नक्चडी बीबी आपर धणी नै बेपरवाह तू ता करती थकी नाक चणा चबावै ही। देखी मिनिस्टर वापटा दूज रै सामणं बीबी ग हुक्म पोख हो अर म्हारी फाटेडी आम्या सू आत्मा री लपटा न सवतो गुण गोख हो। म्है मन मन मे ही अंक लाक कैबत रटतो हा के-"गाडी रोपाचरो जर बिगडायल लुगाई रो चाचरो भायो ही चोखो।" मिनिस्टर जीमे क्टै हो अर मनै बतावण चावो बीवी मू आपने अळग तथा जपरोखो। पण म्हें चोघो, चारा रो चाटयो पैल्या सू ही जाण पिछाण हो क मिनिस्टर री श्रीमती-धर लिछमी री या, स्याणी पुराणी सदा री वतळ है । दूबळे मरद री बीवी ने दख-सुण र म्हारो मन फाट ग्यो। लुगाया रे नेह सू सफा हाठग्यो। पप्पुड री दादी रा इमा भाग कठे हा के उवा थकार सू बतळाई जाये। आज री राजनीति मे मिनखपण (मानवता) रो चुणाव वोटा मू दिया जाव । जको भडाणी जिसी भोळी जन सम्कृति सारू अधा फळाप । 94/वात वेदाणा

No text on this page.

ने अक साडी री खरीद स, स रवाला सदोष खातर खरीद राखे । घर री बात, माण अपमाण कुण देखें ? आपरं इलाके मे तो भलजी, सिंघ री खाल ओट र नीसर। हम्मै वाप जर वटै री भली मूडी छत्तीसी-सेवालार नै सामी दीखवा लागी। लडी सरळ सीधी भर भलाई मरी' दूजी दोरी, दगबाज, बधकारी | मल्ला अणपढ बूढो, पुखता पुरख जनता रो सुद मनो हिमा यती। भण्यो-गुण्या भरलो जम्मवारी-अजाण, मूढ लाभी, लाकी नै चक्मै चूचावणिया, जबै रै काम कामा वडा उप याम लिखो जा सके। इकातर रे चुणाव म मागीडा गाघा अमू नग्या। काम कर'र ता पदर वरसा मे का ठारचा कोनी, कारा लुगाई रै चेला न पाळया पास्या। जनता भलहै न हा जिसो जाण लियो । अपरग्रेड मे जावणे वेगी घर घुसिय घणा ही तरळा हाफळा लिया, पण ताद जाबर खाई नही। जद पाछी अठ ही ढोल मे पोल बजावणी पळाई। नूवा च्यार चुनिदा उम्मीदवारा रे माथ मच्योडा वाघो मिला'र खडो हुया अर पुराणो पापी वाज्यो। जियो तेली, नारगियो ढाढी, पनिया खाती, डालियो डाकोत अर सनियो तेवग, सग जणा मरवरा म जुटया। दाळ माठ रा टोक्णा तथा टोलडामाटा मोवा चटा दिया। खरच खाया अर पारटी रा नारा लगाया। लामा धोठा चाळा पैर र बाटा खातर टाबर लेवण हाळा सा रूप जीना में चढग्या। गावो गाव माटा नेतावा रै गुणा रा गीत गाया, अर पायो रा काम बताया। गरीबा न पाच वरसा वेगी भळे गाडा लागग्या। बाळा इलाको पीदै बठग्यो। भलजी जीतग्यो, आग रो आखरी हब को . ग्यो। वा लागी, बाप ने ठा लागी, रात क्द गई मानूम ही नी पडा। होकरो वगो मो झुठ'र हा घा लियो। दूध सा बाळा रै साथ कुडत भर साप रा रग, अक मक मिला लिया। रिनगै सारं गाव म खुसी रा वाळ खिरता नीठा। गोगा सूपना पाडया के-' भल्लू नै आज बधाई दी जाती अर इलाकै भर रा मौजीज आदमी अवै रै गळ नोटा री माळा घालस। आयणग जीमण जनमरी वेळा मिनखा रा मिलणा मेळा है। वापी आम्याग पळत खेत रा आग? अमड आया। गडी गटही हाथ वसू की 96/वात वेदाणा अर सैर री सुआरी र आटिय जा जम्यो। "मेरो बेटो जीतग्या, वाडार के दाल वाजे?" बाप री छाती छाबड हुगी। टिगस कतार घर कानला मैलो लियो। आग बगल म हरचद दवारा लाग रया। आव ना चावला हुवा अर हाथ मिलाइजा "राम रामस्या । राम रामम्या । दिन थाडो है जीमा।" कोलोमीटर री कास लिया व गल पूच्यो अर जीपारी भीड न चीर र माय नै बढ्यो । बीजली री सळपळाट तथा छाट वाग र फूला री मैं कार सू मलजी रा मन बासा कूदना लाग्यो। विछायन हो री, कुरस्या गे कतार जळग ताणी जोरी । रग विरगा फुवारा र फोटू मिनखा रे मलै जोग पचना । काजू विणको रै भेळ खुल्ला सीज्या घटिया चावल खोटिय रा पुडी पराठा, साग दाळ अर छोटिय केळा री छोडी पलटा मेजा माथै सहरी मैंमाना री दिखावटी मनवार कराव ही। ग्वख भरी फ्लेटी नामा मे सुगध चढी अर मनजी रे मूढ री सळा वढी । यकेडे भूख जुमाव में ग्वावर्ण रे चाव खोयो. डार मूधार भट फळमे सू पग- परम सरकाया। गबकै'र, सामण मम (भल्ल री भू) छाटी आगी। वडीफट | झाल पूचिया र पिछाड घीम लेयगी अर गाया री म्हार मे लारन बैठाण आई। डैग हक्को बको हुग्यो। बोली 'सुणो । आगण अबार पारटो री चोजा चाल, लार सू कोई कुत्ता बिरला कूद र चाखळ नी जा वडै । ग्यात रास जा, बावडा गाय टोघडान ही चरा पा देई।" "तिसो पाणी तो पियू ?" मम वानी "तिस भूख सू रिसा मिनख मरे । घर मायने मती आ बो। मोटा माटा आफिमर अर नेता आ रया है। तन देखर माजना जावली । पाणी रो ढाल भरयो पडयो है । कोई धपावू रो पीयो भलाइ। कुत्ता-वागता हो लिक चोस, खुल्ले मूढे रो है। भूख भाजगी, नाद नाटगी । तापडधिंग सुण बोक्री , काना कोम कारती रयो । रात भवावट रो रूप ले लिया। वो कुत्ता काढे हा चौं र पट मे लडता बिलिया ने कण ही घेरया बतलाया नहीं । बटा बहू सग सारा , डोकरैरो की ठानी? सेत वीज्यो सोच्यो, रास लाटण मलजी क्या - पण । भल्ल मल्ल रीपर/97 ताणी , क्सिाण लाय लूवा रा फाडा देण्या, खेती नै हरी नरो जागो । पण कारा खडका-भडका सुगर अबक्या डबक्यो , बलाण काइ नी आयो बडीक तो जा लेयर बड्यो के "भल्ला मोटा माटा आफिसर माणसा क्ने, मन मिलावतो थको के सी-"ज म्हारा बापजा है, जका रै पुण्य पाण म्ह वरसा सू जीततो थको माण मायाब समेत विधान सभा रा मेम्बर बणू । पण भूख तिस रो ही नी पूथ्यो। जे आज इये (भल) री मा हर तो मने जाण ।" मलजी ने रात री रोडघट म भल्ल री मा, र-रेर चेत आई। छेक्ड हिया पछाडी लेय र मचली माथ पडग्या। चावतो तो अन ठोकर क्याडी ताड दावतो। विचारा रै व्हालै अजाळो चिनक आयो। मम रा बडका तडका सुणीज्या । अवा भल्लजी न के रघो-"वूढियो तो काले ही आ मरया। म्हें रात रोक दियो, नही तो मिनसा म मानखो विगाड देता। काई दख लेंवतो तो स्यान रा टक्का बट ज्यावता। इज्जत धूड मे मिल जाती। अया तो म्हैं सोच राखी गुवाळा क्यर बार नै टिप्पा द आवती! पण माय नै जाया न, वण ही पूछयो । थ मूढे चढा राग्या है, सुधिया ही गळ गोना देय र लारल बारणे काढो नी। भल्लजी बात्यो-"ठा है, यो वाम थू ही कर अर तुरता पुरत तगडा डागडी सू टटा भान जका भळे नी बारड । सूरजनगण नोक्ले ज मू पली या काम कर'र टटो मुका। लोग बधाई रेवण भळे आवला, जी, सार जावलो। वेगी तायर ओलाया। या सू काई छानो है। मन बतावण री पद जरत पडै ? भूतर ही पाछा नी मा जिसो ब दोबस्त कर नाख बाभी रे डोला बाप धाप नो है, पलातर रा पाप है।' डोकरैरा खापरा सा कानहा सटा हग्या । रात भर जैर रा गुटका गिटत री जारया तणगी जाण्या- बटा'र बहू और ही डाला छाटिया ही लुबग्यो । अ सै म्हारै मू लाजा मर दोसै? आ वटा बहुवा र सुख, म्हें घणी विरिया भूखा सोया र सागे मनस्यावा मारो । मुह मायलो काढ र दियो । हाथा पोपीस र पाळश। हुवाया घुबाया । गाती पोटा तोडचा पुजाण म्हारो जोवन कया ढळचा? रात दिन खोरमै खाया। वाया सू वर पाळया अर इया न पढ़ा लिखा र मुखी वणाण रा यो पतबा लिया। 98/वात वेदाणा विपता मे सीज'र राता आरया काटी जद जाय र वेटा मल्या अर जावरू वणी गाढी । भणाई नै सोनो चादी, धन पसु अर घर गुवाडी आइ हाया बच र रोटी रा सासा मोल लिया। कनला गावा मार्थ भागवानी री धार हुती, जैन नीचे नाख'र कगाली री साख औढी । इया री मावटी मरी जद म्हू बूढो नी हो तोस मू पाछा ही तणे हो। मगळा भायाँ पर- मग्या दूज ब्याह वेगी जोर देर समझायो, पण अक नी मानी। लोगा री मोटी मोटी बेटया र साथ हुवण वाळे म्हार माय ने आया गयो करया। दोलडा बेटा र भा, आख मीच बठयो। काई ठा मौसी कंडोक होसी? मल्ल रो मूढा लाल होय'र घर सू कढयो, भल्लै री मेम भान र पाछी घर म बडी। अठ पोरो भूखो मरतो ओठा गाव ढूक्यो । पावले रा चिनासा भगडा रेल मे चाब्या। जगती जुगळी कर, याता वणाव-"डैण सोडिलो इक्ल खोरिया अर अणखचूण है। करम ठोक भूजाक्डो, वळोक्डो, अक्लो ही राजो रे । बेटा मिनिस्टर घरा आधा-पीमै, कुत्ता खा' आया गया री भीड लागी रव । जोधपुर, बगलो, जैपर काठी, बेटा नेता, सुहणा पाता पानी, कह बै रा ठाठ लाग रया है। पण यो तो ठालो-भूला, ठिय सू ठरकार खार्य जद ही रज पतीजे । बोदळी जुवार, ठूडिया री कार दाकरा हाथा पो पीस'र घाळियो वसाव ।" ढिय रो निस्तै है के-मणतिय जीण मे ही सार है- 'गाडा-बळद पगा है ठेसण वाळो जगा लकडवारी टाल चलावणी चाखी रसी। आ बहू-बटा रै भरास चिणा चाबर कित्तादिन काढस्या करमहीण जाळमोर वपटी, अमीर वणी फोकटिया नेता, कार सू नफरत करता भोटा न फाकी गिटा'र पार का वोटा सू आपरा स्वारथ माज । किसा सवाकार कर? कूडी घोखवाजी आज रा कागरी लाग घणी चलावै । काम सागी बाप रा । सार नहीं। हाथा काम करै अर मिनखापो पाळं जका साचा जीणा - जागो।' दूज मीण ही चाधरी मल्लाराम र मोणती वा पार गावा गात्र नाव पालियो । गाडा जर टरक झूलळया आव जाव । ढाण्या सू दूर्व सैराने भल्ल मल्लै री चुघर /99 चाल लक्कड अर ठूढ ठरवं सू विक । नफै पर नफो, लाखा लेखो , इयो टाल मल्लाराम ने लालकर'र आछ ठेकदार रे रूप मे पाछो ओळखादोहा देखता देखता चौधरी रो वोपार ठेका देग्यो। मोवळा मिनख इणा री टाल माथै हाल हो रया है। वर्ड ढग री कार करता चोखा गुजारा चलाव । माज मल्लाराम री टाल क्सिाण मजूरा री मोटी सस्था रा काज सार। पण भला सिंघ री बेईमान नतागिरी कोग कूड रा कामण रच, साच सू तो बाप ने ही गर नही। "बाप रै किसी टाल वाज? लुगावडी तो घणी विरिया भल्ल नै हो भूखा सुवाण दवै।' चतरा री चौक्स चुघर चाल । 100/वात बेदाणा धरा पुराण डॉफर काळजा काढ ही, लूरी लबडधक्क ले रारया। मिनखा नै खड- बडो चढे हो, रीळ सू दात बाजा । कोई जरूरी काम ही बार वग हो। सहर री मडका माध छोड पडी। बो गळा, रोजीन तावड छिया अर पाऊँ पून म मागी मडक' माय गोता खावतो फिरतो। गरमी सरदी मे छाती ताण्या, वरसा वीजळी सू सुम्ब दुख माण्या बो पागल, लोगा री हाट-दुकाना आग पगाम पडयो मिलतो हा। मूढ री मासी उडावतो ध्याय-व्यॉय बोलता, भूखो मरतो जद कट्टर धरमी लागा रे हाथी सू नाख्योग भगडा भुजिया चाव खातो। पूनमजी पान वाळे री दुकान वनली प्याऊ री खेळ सू धाबा भर'र पाणी पीवतो । पण पुलिस रा बादमी दखतो तो नीचा ने ढूड घाल'र जोवता । एक दो साल सू सगळार सपो मैंधा हुग्यो हो। मुमळमाना आग हाथ ही माड लेंवतो । केई चतर मिया इये में देख र आपरी र लिलाडरी भौवा ऊची खेचता थका दीयामी आन्या चौडी उधाढ लेवता । अर दूमरा रे सामणे क्वता के-"पचारा वावठा फकीर है।" जासूमी मरयादा सू गगै रो मैंदरो मुरझायोडो हो। उवै रै हिडदै रा जुलमी भाव च' माथ ढक्योडा रखता । बो पाळं मे भेळो हुवै हो, पण मन म मोकळा मस्त हो । दस भगती खातर ढिल सू जूझ हो । या, हर समाचार आपर वतन पौधा रयो हो । जकी उवै रै हिंडद री बात नै काई नी पिछाण सक्यो। बीकाणी वास, विसवासा रा बाहळा, भरोसा रा मडार अर खातरी घरा पुराण/101 रा अठ खुल्ला बाळा है । धरम भीरू देम, धरमात्मा लोग, अल्हट नगर रा अलवेळा जाग, पागल नै जणो जणो पुडी अचार अर मीठा विचार वाटण न तागग्यो । हिदवाणी धग नै हासो आवै, उवै रा पूत आपर पगा माय कुल्हाटी क्यू बावै ? "अ लाग हजार वरसा मू जट रैवे, पण इण घरती रा वफादार नी, अफगानीस्तान जिस मुळा न जापरो देम कंव । वरमा भारत रो लूण पाणी खाया अर व नै फोड पाडर जापरो जदग पाणो बणायो । मळे ही यो हि दवाणी लावता इया वगी जापरो दया भाव नी छोड ! ऊपरवा सूबरया न जचा ऊचा जादा बंटाव जर विसलं घरम ने मारी छूट बक्स राख है। हि दवा नै नियोजण जको मुसलमाना र परवार विकाम रो आयोजण! आयावरती बापर मीळ सभाव सू अक औरत वरतो। पण इया फागडदा पुड लोगा न दा चार वीवो सू ही नी रया है मरतो। क्यू के बठं तो मविधान री घरम निरपेक्षता खुली है, दया भाव रो दरुजो उघाडो है । जाप कमाया कामडा विण ने दीज दास वाळी क्वत न धरती माता साचे साची है । बागला देस म तोबा छाई, प्रधान मनी (गाधी) री खुरमी मरण आयोटा न दया देवण वेगी थग्थराई । देस विदेमा हत्या री होळी रा समाचार घाल्या, वेया यादिया रे पापा नै जोय र जगत ने बतावण चाल्या। विमाण चढता बसत फौना न सावधान रवण राफरमायो जर सचित्रा न सचेत कर र भो भगायो । नागरिका नै मनसो कया ये - 4 खुद खतरै री जिम्मेवारी न समझे 1 म्हैं सग दमा न बागना देश म भाइ आफन वाळी बात जता र वेगी मुद जावूला । हमलो हवे तो जुड जाया , फोग्न पौंच जासू मन धारै बीच पाया । अधिकरया रा हुक्म हुया। मिल्टरी आवारा मिनखा रा रिकार मागा । पुलस वाळा रा गडका गाज्या अर दस नम्बरिया र माथै जुत धाज्या। धाण चौकी सू हमालदार चढया । उवा विरेमी जासूम जाया जा माथ गूगा वाळा ही पकडीज र रोया। जाप थापर मोहल्ला म यारी- ज्यारी मडळया निगराणी वगी निकळो । काट गट राड मायाळी दुकाना क्न गोता खावणियो एक गलो पक्डोज्यो, जको पाकीस्थानी खुफिया लाध्यो । कहिटू माई उवरी आधी हिमरा चढया अर पाच-मात दुवाना 102/वात वेदा सू कढया । क्यो-"या तो वावळो है । दो तीन वरसा सू अ पडचा फिर है ।" हवालदार तुरत परचा परसायो । बावळ फकीर री कमर नीचे स्याडा छोटो विदसी वायरलेस बढा दिखाया। बावळ जापरो फाट- योडा हाफ्पट काटो बाधर पट हालदार र हाथ सू वायरलैस सिमट री सड़क पर नीच नसा दियो । पण जामूसडा पुलिस री पक्ड सू चटनी सक्या। सागोडोजरकाईज्यो अर नंग साची वाता हकारयो। इयै बाव ळिय बनायो के--"म्हें पाच साल सूजट जासूसी करू । दा साल नागौर म र कर आया हू।" पुलस री इधकी रीस उमग जमी अर गरज गफलन गमी । दूजोडो तस्वर नळे फमकर निसर गया। आग चोर अर लार मिफाया रा जोर नालम जासूमडा जूनाडे गढ री ग्वाई मे सरधम ऊमरग्या । पुलस रा कटो पैरो लाग गयो, मिनसा रा मेळा छाग्यो। जेवटा ल्याया अर मायन बड र वारं काढयो । नागरिक देखण खातर कोसीनाळ दाइ उळल्या जर मगरिय र एक म्प माय पळटया । दा सिफाया घोर र बडी घाली हर आपर थाण खानी लेयर टुरचा । केई मिनस पुलस र लार पाल्या। पण केई थोथो थूक उछालना आर घरा हाल्या। घणखरा लोग तो उव रो कूटा मारो देखणो चाव हा, पण के ई खबर नवीम खूसट, उव रै मूढ री बात सुण नै सातर लफा हा । छेकटताणी थाण पर छीड नी रह मकी, पाछी भाजी नोड हुगी, सग लोग कुटतरी सू राजी हा । बूटा री अंडी वाडी बाजी, थाणदारजी आया, मासकारी गाळा काढी अर दो उळाय खळमाया । क्यिो-"हरामजादा तेरै पर मेरी पहल ही आस थी । शराब को टुवान पर दखा था, उसी दिन से तरे पीछे मिपाइ लगा दिय थे। मगर दुवानदार के विश्वास दिलाने पर ही इतन दिन छाडे रखा। कल वह पागल फीर पक्डा गया, तव तेरा पीछा किया । भागन मे कौन छोडता था?" वार खडी लागा आपसरी मे चरचा छेनी- "या कवरजी र घरा राजीना रोटी खावणजावतो अर उवा री माटर म चढ र एक दो विरिया नाळ रै हवाई अडडे ही जाय र आयो हो । पुलस बापडी काई कर? कारो दोम देवा । जापा ही तो इस्या विस्या मिनवा न माय वडाय र राखा।" वे या कया-.-"कमाई रा में हो तो मारग है। तस्सरी व्यापार मे - घरा पुराण/103 - अट इया सू ही चाल है" मूढ जिती बाता चाल पड़ी। राठोडी लेज पल्लेदार धोती परवा अक सौखीन आदमी उवै थाण बायो अर थाणेदार र खनै बैठ र गुणगुणायो । यो मिनस चोर रे साथ मिल्याडा ओजू छुटावणो चाव हो । इय र सिर माथे आटेदार केसरिया साफा अर डील पर पूरा काट हो, चोखो पुखता माणम लसाव हो। इय ने देख र पौडयोडे जासूम रोवण रा घणा भाव बणाया। पण पुलस थापेदार री भावुकता मे थोडा ही फरक नी पडयो। चट्टो उपळा दय कर आयोडे सिफारसी मिनख नै या सू बार किया। चार न पर्छ घिनकार पगेर सी० आई० डी० डार म दिया। धर-पक्ड री ला लगन चाली, खाज खपत सू नगर रानडा अळगा खूणो रया नी खाली । सोधा अर साधु नाय जर नक्टा, भोळा भर भगत माखा लोग लाय री लपट भेळा आया। पकड ग चकामा चढया जद दुममी जासूसणा रा काळज्या क्ढया। वे अठं रो आपरा अधूरा काम पूरा करता था भाज छुट्या । सग लुक छिप र गैल लाग्या। मेक जाते कन जासूस आपरे वतन रो वाम, नाळ रै हवाई अडडै रो नकमा वणा वणो चायो। पण नक्सो ऊनार वतावण रा काम काळ न आपर बन बुलाव र बरोबर हो। सा उव साधा-काळ | काळ करतो आसी ही अर छाडे नी, चोटा पकडर साथ ल जामी भी। मरण सू पला मुलक रामा काम ता करणो ही चाय ' उर्व सिझ्या पडे जाय नै साधू र यस म नाउ रे नजीक मेक घावची रं घेरे नकली डेर रो घणो घुवाया। गत पड़ी भर खबर भेजण खातर जुगत लदी। या माधू काले कोक्ड मू पदर पाम्पान रे घाम जा बहला। सुदा सू खरियत मागता सबर दपा मम् पर है। जातो वरता छाती घर दिन री दन्योडी सारी मीमा स्यारा पर नाटर एराडराम ही हुम्यारी झोळी मू ट्रा समीटर काट र पवनी पळाद । दुममी ज मूम, यहड मू उलानर वठो निटर काम कर रया हा। उन टम बापड री गस्तवगी इस अडड मू दा तीन विमान उडथा। पाडा कचा घट र चाल्या हो इत्त न ता उवा रा वायरलम अटर रेखन बट माइप गमूम रा वोल्याडा (पाकीस्थान जायता) समपार मुगाया साग्या । उटमा विमाणा म पानां.. री रोट-टहावण सारगी। जमरा आपगरी 104/वात "पा सलाह-मोचना करी अर दडाछट पायलेटा ने पाछा नाळ रै अडड विमाण घेर उतारण राहीला मुळायो। पायलेटा धीराक सी वायाजी रा पालणा सा विमाण नीचे ल्यायर थाम्या। कमाटर सा'ब पैरदार सिफाया रे हुवल- दारा न अडड ₹ इडद-गिडद दा-नोन मील खोज करण रो खौफनाक परारा हुकम क्यिो। हुवलदार अडडे री नाका वधी सू निकळ र जीपा तू दुसमणी अत्तो पत्तो जोवण नाग्या अर भाग जाग सू सीधा माधू खानी मुडया । इयान आवता देख'र अक्लो वोलता माडा वोला रया। माळा न गळ म पाल, बाळा मे वभूत बिखेरया तूमडी चकी अर आपरा डड कमडल भोळी र नाळिया गाठ देंवतो थको मावटण लाग्यो । हुवलदार खनै जाय नै हाथ जाटया अर मस्तर पाती दिखाळन री मोलिय मू अरज करी तथा अडड री नीमा सू दूर जावणा राजादस भाळायो । ओनिय फकीर चीपटो उठाया अर करामाती बाणी म उवामी खामत क्वणा पळायो- "अलख भजा, मो भगत है। भगत लोग साधु सत को तग नहीं किया करत बच्चा । हमारे क्या यहा क्या वहा? हम ता रमत राम हैं । फक्कड हैं । यहा नही आग सही। चले जायेंगे। सभी भूमि गापाल 'अफ्टी राडी रोवणा रोया, झोळा पकडया अर दिखाण मू बाठो काठो हुयो। हुवलदार जासूसी मता खिंडार खटका कियो, बाव जी रा हाथ बाध र जीप मे नाख लिया। अडड र अफ्सरा बता सूती, मपीड उपाडया, सिफाया सिट्टी मी कूट र घाण घाल दियो। नसो देय कर मगळी बाता हकराय नाखी। भेखधारी जासूस बताया के- - "म्है वरमा सू भीखेया ठेकदार रे घरा मावतो-उठतो अर सावतो पीवतो जासूमी करतो यो हूँ। म्हारी उणा सार्थ साठ गाठ ही । म्है उवा न कोडा रो व्योपार करावतो । अमल, माना विदेसी साडी अर घडी जिसी चीजा विना फूल री छडी पावीम्यान मू टेक्दार रै घरा आय पडी विक है । मीण मे लावा रा माल कापड मू पार करा ल्याया करतो। म्ह पाकीस्थान र मो० आई० डी० मे बनल रे पदमाथ हूँ। मोणो भी म्हारो मोकळा है । सरदिस र माथ देस सेवारी हमन पाळणे सातर ही अठं दर गुजर रया है। रवा री ही दि हवं' 1 . घरा पुराण/105 - कोई नो पिछाण पायो भारत म मुसळ मान हुता ही हि दवा सार्थ खायो. पिया। विना माग मेहरवानी पाई अर जद ही आज या कुटळविदया चौडे आई है। इय अरिय रा सारा समचार म्हारै सू माखर पार पोच्या है। मीण मास मू जावतो आवतो रयो हूँ। म्हारो क्वीला वठं म्हारी तिणखा पर मौज करै । म्है अ6 ठदार जिस्या तस्करी करणिया साझ स वत्तो कमावतो रयो हू ।' कवत थक ने वेहोसी आयगी। बूटारी ठोकरा अर डडार गडीडा बडीडा म कापतो डील होगळू हो रयो हा । नस म धुत कर परा र बेडया रै गणा म जयपुर री गाडी घढा दियो। पगो पग रेकाड रजिस्टड करवाय दियो। पर्छ पाछी पकड चालो। पूलस वाळा उर्व ठेवदार अर दूना तस्करी वेपार करणिया रा सोज क्ढ्या, खोट खोटर खाटा पर चादया। हाला- यता मे दाट दिया, सगळा रा साख सबूत नाट किया। ठेवेदार री जमानत नब्बे लाख री मागी, पचाम सू कम किण नै हो नी छोडयो । जणो जणी चारारे खव चढया अर आप-आपरै वेल्या री जमानत सू अक रोक जणो बार बढयो। लाडकोड सू छूट र घर आया, धरती माता रै भलापणे भर भाळापर्ण रा गुण गाया। नुगरा भारत री ऊपरी जं बोली जद सुणनिया लोगा उवा मतवाद री खोळी खाली। कयो- "साच नै आच कानी, कट चढय ने कुत्तो नी खाव । आई अवळाई या ही तो आव। . 106/वात दा गावावू इलाज बीकानेर म जैया भडाण मारवाड मझ बैया ही बरतारं सू अजाण मालाणी रो इलाको बाज । लोक कोरा धनवाळ, पसुपाल अर खोड रूसाळे, जिनडी रा मुख साधण बढ़ ओजू जाबर नी वापरया है। ना,रेल अर ना ही नाटक चेटक तथा सेल-वेल है। लोकी खाली खपत करती थकी कुतरी अण जीयं मर । सिक्मा है न सफाखानो, “याव है न डड जम्बानो । बरसे बिना याही नी अर मादगी म दुवाई नी | मिाखाप रो राम रुखाळा है । सामरा दाई रामरै डार डोल डबके । वास ढाणी, ऊडो पाणी अर लाग भाळा भेड आळो लाणी है। मनस्या कर जको ही उठ जा कतर उतार ल्यावं । सागोडा सूधा है । ना, करनकाई नैकागे, च्या करे ने चकारो। अठरा वासी आज र जुग स् पचासी साल लार वर्ग। आय गय री पूजा कर, राज तेज सू डर अर ठगा रा घर भरै । ढाढी ने औ राणो, वैद ने स्याणो तथा विरामण नै सरब मारयात राम रो रूप माने । दूजो कोनं ही जाणं न बुझे । सोचे न सूझ । या कैवत इया मार्थ पूरी टूर के देखी मे सीधै री सोच, लेणा एक न देणा दोय। इया रो तो सावरो ही सायक है, भाळा रे भगवान अर आधा री छोदा गाव जर छोदा पाळा घर, पर की घर में कोई नै सिर सिखा होम र ताव चढज्ज तथा बमार पहजै तो गरणियो मच ज्याद। सग लोग भेळा होय र पूछ ताछ करण ने आव । बेकर री बात गाव मे चौधरी र डाबडे ने जोर रा ताव चढग्या । । माखी राम उडावै। गावावू इलाज | 107 , । - सनीपान वणगी अर वो बावरवडा करतो थको वलण न लागग्यो । वात, ताप री मुगता ही आखा गाव चौर नो हुग्यो। भाजा नासण करी अर दाना दाठीक मिनस रातू रात जाय'र दूजे गावड मू भट स्याणो बुला ल्याया । स्याग बायर चट चौधरी रे वेटरी नवज टाही, जद जाय र वसती री कास की कम होई । दूध म जावण सा लाग्या, लोग जम्या अर सामो भाग्या। सगळा रेजीमय्यावम आ गियो। पण स्याणा आयो जका ही स्याणा नहीं, जखाणा जाट, अर अकड उस्ताद । नाइ दख परा'र मूढा सुजा लिया। बाल्या न चाल्यो टूपोजर करडा ठठ वणग्यो । कणाही वडक सो देव, हाठा मे ही की नाव सा लेव अर घर आळा माथै भूज वळ । रोम में आठो टुरड हाय र फुफावै । काटन र क्वै म्हैं हमें के रू' थारा हियो फूटेडा हा के ? मनै इत्तो मानो काकर बलाया? रोगी र तो घणा दिना मू सरद गरम भेळो हो रही है । इमो म्हैं किसा भगवान हूँ जका जरडकर दोना ने भेळी भान नाग्वू | दव्योडो रागी क्या झाल्यो जाव? पण मिनख रो काम, जवाब देऊ ता दुरनाम ! इय गेग र हुई (सूइ) रोजलाज करणा पड हो । (ममझ्याक नी मूई रो) वगा सा हुई ल्यायो। आजकळे आ ही अलाज चाल।' गाव आळा भेळा भेळा हुवा अर सग मुणता रिया। ता व ग्रामो फोन री मूया ने जाणा अर ना हो वाई गैस वत्ती या दूजी वत्ती कळ हाळी नं पिछाणा। बार तो आडणिया मेखलियो सीवण पाळी मूया ही घरा लाधै ही। भाज्या अर माप आपरं घरा सू सोज र माकळी आछी माडी सूई व्याया। गाव री लुगाया इत्त ने बाडया चढगी अर उपराडै कर सप मपाटिया करण नै लागगी। बूढी डोक्रा डरी अर आपस री मे बाता मरू करी । बोनी- 'बिरया | ओर विरतत चाल्यो है अ? बिमाक पताल वापरचा है। म्है तो राग ही मोकळा देख्या, स्याही घणा ही आया । पण मूया स तो राग कण ही आछो नी करयो । आज ताई तो कुलडियाळी उकाळी अर चिडी खेतियाळे काढे रा ही औखदहा । घासा घटियो जर झाडो झपटा ही करोचता । पीह पर चाचवा तथा साई सूजन माथ सोगडी-टोइया बावना 108/वात वदाणा 7 ज्यावै। - . कावता विरा, सूयाळो स्याणो तो आज ही सुण्यो इत्त नं पछ दूजाडी दाटी यूडळी बोली-"मनं तो हमें रामजी उठाय लेवं तो चोखा रव' बोनी आग्या सू नूवा नूया कौनक रासादे या नी जाद।" स्थाण सूया जाई अर पाछी फरणाई। वाल्यो-"दीमै योनी ? सग वागदा दीमा अटकळ ह ही बमोक, काई मिनख ही है ' राम निसर ग्यो थारो । रागी वरडावे, रोग करडो वधता जायै अर ये बाठा माठा आटा-टूटी सूया ल्यार दिग्वाळा | आग कोइ डागरा थोटो ही है ? मिनप रा काम है नी ? मोटी र मखरी हुई त्यावा । नक्साण नी पूच वगा वाम पर घाला| का मन वजनाई दगऊ हो? मोटी अर हसरी हुई विना काम ताजा नहीं। नही है तो जावक नाट ज्यावै, जका म्हू म्हारा गना लू । माद मिनस नं हाथ घालणो हसी-खेल थोडो ही है ? स्यण री लूठी दबडक सू घर बाळा मैग दडवीजग्या अर हाथा जाडी करण नै लगया। वोल्याबार गाव राजाया आघा चूसा हा, की कानो जाणा | म्हारी आग्या अधारो थारी चाड च्यानणा है। माय परय डावड री चित्या मे चूर होरया। उपार नी मूझे। हाथा वामण छूटरचा है, पट म पाखाल चाल गया है। म्हारी मूरखता माथ धूळिया दवा पर सूई रा अलाज करणो हाय म लेवो सा | म्हारै तो ५ राम वरामर हो। मालर हो सा | उवारस्यो तो उबरस्या। गुवाडी ग दीया बुझ । मानखा दरावो सा | डूबती नौका नै वेगी पराडै लगावा, पार उतारो" हनामिनख भाज'र गया। गुदडा म डारा घालण आळो लामो माटो कर सूया म त्याया अर सगवा स्याण न सूपी । स्याण माग्या चाढी अर सूया मामन आयोडी माय सू अंक ऊजळी देख'र काढी । लुगाया टाबरा स्यू घर खाली करायो अर चेमार रा कुडतियो फाड र अळगो वगाया। एक क्यिाळं मास मे लामी सगळी घमोड दी। अबूणो रखने मू माढ ताणी चोड़ दी । ताव में सृती चौधरी रो बेटो चिमक्यो, चिरळाचा अर जार मू अरडायो। जद स्याणो क्यो-वैस।। वस। हमें हाफेही सायरा माय जासी । सूई साची जगा लागगी है ।" लोगा हाथ जोड लीना रोग, रिपडा सू स्याण रा गूझा भर दीना । 1 । गाचावू इलाज/109 जेक कवत है- 'ढाणी म ढोलण ही भूवा 'दूध पीये पर चूरम। जीम गाव म आडू हकीम अरड पनाव। छार रो हाथ पीडा सू सूज घर- घरो लोक बूझ तथा स्याणो गूज क्व-"दवो, रोग हमें टावर र डोल सू बढ अर एक जगा आवै हूइरे को चर हू धार जाव । डेढ दो दिना म हफा (मफा) उठ जाही। रेयो खया रधी रेस्प हुवै आही, उरण री कोई बात नहीं। मरण री पुळ टळ गई। अलाज परो अकरो असर उठाव । रागी नै गाभा हू जरू दाबटे रारया, खोभा जावत रोग रा चालला।" पलाण पाछो माडयो घासियो घाल'र स्माणो पुगायो। पण चौधरी बोल्यो 'बटे र सायरा नही आयो। रात दिन कूक बकरियो बोक जिया विलार। हाथ हाथी रे पग र लगभग होरिया है, काई दूजा हेदको ल्यावो म्हार सू ना जायडै रा रोवणो सेयो नी जाव ।' उवै टम भाग सू कोई मद्रियो मिनख आय मिल्यो । रोपणा सुण र उव रोगी ने खनले सहर रे मफाखान वेगा ले जावण करडी मला दोनी। वळदा गाडी पर गूटडा चिछाय र मुवाण्या पर महर खानी लेय र चाल्या। छारो हावतो जुवान हो, देखण हाळी ज्यान न वित्या लागगी । महर पोंच्या पर आव टळा । मफाखानै म डाकघर अर कम्पाउडरा छोर न देस्यो। पण छारा जापर हाथ माथ टूजा हाथ नी लगावण दवै । अळग सू ही गूधाव, टोळी मारै अर गाभा फार्ड। डाक्टर पूछयो-'क्या हुआ? यह हाथ कैसे पक रहा है सोजन क्या आ गया है ? छोरं रा बाप बोल्यो--'तप चढ्या अर बरडावा लाग्यो। जद स्याण सूई दीनीसा।" डाक्टर भळे पूछयो-"कौनसी सूइ दी थी और कहा स खरीदी घो। चौधरी वाप क्व-"लामी माटो खरी सूई ही मा। नवी नकोर गारिया खन सूलियोडी ही। चाढना ही छोरा चिपळा उठया अर चेतो कर लिया। नही ता गूम ठूम पडयो। पनिसिलीन की थी क्या? 7 इतना डॉक्टर पूच्या 110/दान वेदाणा बार बनाय-'परपामोतन हाळी ही होगा। सोदर हाळी ही। माता रानी बर परान गोयण हाली मोटी इ हो। म्ह तो भरमर रया और लामा उमरा नई मू ही मीयो ता । गईम कोई याट मा हा। पारमा पठाही, म्यागं पूरी मो:म धाप दानी। बाप बतायाग बीच विवाद ही बिलबिला अरनिपात हाय तापा तया पर 'पिरा मचा रात्रा है। टाटर रिया टाव, हाय सागता ही हारा रोष। नाट लाहरायाफरहासा। गदर दम र घर आळा माय भूज वडवं । पद---"अरे मूरमा । यह मूई तिन गडा दी?' बाप पर-"स्पाण दोनी सा मसरी मूई लगाई। आप वम मती पराकाई बाटो नीलो नी हो । विसयार रासा सा, उधकी मूई ही। दम बामा म मू एरवी हो। माता माल्या , डायटर जी सवा दुप माल्या | रागी रे माईला न गार निकाठी अर औजार मगाय र टावर र नियम मू मूइ पाछी, यादा लाही राप रा नूनिया भीर हुस। हाथ र मलम लगाय र पाटी बाघ दी। गाळी देय र यह माथ भुयाण दिया। बड़े सनय प्यार सू थप पपाया भर तुरत आधा घर देवण रा धीरज बघाया । पछ पाणार समीनार न रिपाट परी अर आपरं असपताल लाया । पचायत समिति राप्रधान अर वी० डी० आ० नळे डाक्टर र चपरासी सार्थ आया। सग जाग सफाखान बड्या । डाक्टर सूई री मारी यार बनावता था जहया । रागो रे हाय मू यादेडा गुनमा ल्याय र दिवाळया अर टापटर र परम न पाळया । बार गावा र मिसारो मूरखता माथै आयादा आसा पाणार चौधरी न भया-विमन गायी थी' नाम वनाओ। मैं उमका हयाडी लगाकर चालान करूगा। चौधरी क्यो- ' स्याणाहामा । मसरी मूई लगायी। उव र हथ- कडी काइ वान री गायोमामायरा आयो नी आया, उर्व रो काई कसूर? वा काई नगवान याहाही हो ? म्हार ता यापडे गुण ही रियो, गुण न आगण या माना। डाक्टर बाईक मुइना का पलो चाढणी आदमी हस्या-वस्था। गावा इलाज/111

-
।
दारी है नी।"
धाणदार भळे
पूछ्या वह तुम्हारे गाव का था क्या? उस अनाडी
वंद्य का नाम क्या था?"
चौधरी क्यो-"गाव रोठा कानी सा? गैल वगतो वटाऊ हो।
म्हार ता छारे रो अलाज मन सू करयो सा । बापडे आपरा काम छाड'र
म्हारो पल्या करया। म्हा सू तो का कूडी कहो नी , सूई रो अलाज हर
काइ थोडी ही कर सके।
प्रधान बीच विचाव करतो वाल्यो। "गाव रा आदमी डोपा हव'
काई पूछो ? करसार काम नै अब्बौं आप पणो बधावो मतीना, गरीब
मारचा जामी । म्हार कण सू ही माफी दिरावो थाणेदार साब' म्है ग्राम
सेवक न मेल'र हणेरी घडी मगर ताई सार इलाके म डूडी पिटाय दसू ।
भळे कोइ इमो काम नी करसी-करासी ।
पुलिस थाणेदार चौधरी नै कयो-"चौधरी जी आज तो मुझ
प्रधान जी की राय मान कर पकन आपको एक मौका देना पड़ रहा है,
आइदा एसा इलाज फिर कभी करवा लिया तो सदको जेल भिजवा दूगा
चौधरी उथळो दियो-"क्याने सा! इसी मती रया | सखरी सूई
हो , आजबळ तो सुणा, सूई रो ही अलास चाल। स्याणा नै जळ कुण
समके।
112/वात बदामा

No text on this page.

No text on this page.

Vat Vaidana

Author
Nanuram Sanskarta
Title
Vat Vaidana
File name
Vat Vaidana
Text
OCR done
Citation
1961
Published
2011/03
Publisher
Kavita Prakashan Teliwada Bikaner
Language
Sanskrit
Pages
119
Library
Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Classification
Literature
DLI number
551203
Barcode
4990010031967.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
j0dezY1WgB4
Download PDF

Vat Vaidana