Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner

Prachin Lakh Mani Mala

Das Shyam Sundar · 2011/01

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चीन-लेख-मणि--
प्रथम खण्ड
:0:
डाक्तर कीलहान के लेख की सहायता
श्यामसुन्दर दास,
बी० ए०
द्वारा
सङ्कलित तथा सम्पादित
और
काशी नागरीप्रचारिणी सभा
द्वारा प्रकाशित ।
1903
BENARES:
Printed at the Tara Printing Works.

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भूमिका। देश की उन्नति और सुधार के लिये सय प्रकार की पोथियों में से इतिहास से यह कर अच्छी और जरूरी दूसरी पोथी नहीं है। इसको पढ़ कर लोग यह जान सकते है कि फिस जाति की उमति क्या क्या करने से हुई है और फिन किन बुराइयों के जाने से देश की अवस्था बुरी होगई है। इन बातों को जान कर देश का भला चाहने वाले और उसके लिये उद्योग करने वाले यदि किसी बुराई के बीज को जमता देखें तो वे उसके आगे चल कर यड़ी मारी बुराई और हानि का ध्यान कर के उसके नारा करने का उपाय सोच सकते है और बहुत से दूसरे उपायों से अपने देश को भलाई पहुँचा के उसका उद्धार कर सकते हैं । इन्हीं कारणों से इतिहास की पोथियां घड़ी आवश्यक है। परन्तु बड़े खेद की बात है कि हमारे देश में इतिहास का पूरा अभाव है । नाम लेने को राजतरंगिणी एक इतिहास की पुरानी पुस्तक मिलती है । पहिले इसफो फरहण ने सन् १९४८ के लगभग रचना प्रारम्भ किया था और पीछे और लोगों ने उसे समाप्त किया । इस ग्रन्थ में जिन जिम राजागों का नाम आया है उन्होंने कितने दिनों तक राज्य किया इसकी गिनती दिनों तक की है पर यदि उस पुस्तक की भली भांति नांच की जाय तो यह मिलता है कि सन् संवतों में ही सबसे अधिक इस ग्रन्थ के रचयिता चुके हैं। अशोक के समय में एक हजार घर्ष का अन्तर डाल दिया है। मिहिर कुल का समय ईस्वी से ७०४-६३४ धर्ष पूर्व लिखा है जब कि उसका ठीक समय ५३० ई० है। इसी प्रकार से और और भूलें इसमें भरी हैं जिससे हम इस पुस्तक का ऐतिहासिफ यातों में पूरा पूरा सहारा नहीं लें सकते। पुराणों में अवश्य घंशावलिए मिलती हैं परन्तु अनेक स्थानों में एक घंशावली एक पुराण में एक प्रकार दी है तो दूसरे में दूसरे प्रकार से और सन संवत का तो कहीं नाम भी नहीं लिया ।

-- चन्द करतो है। दूसरे फयिता में लिखे जाने से अत्युक्ति की उसमें इतनी भरमार है कि ठिकाना नहीं लगता। इसलिये यदि हम संस्कृत के प्राचीन ग्रन्थों के सहारे से. भारतवर्ष का पुराना मौर सधा इति हास लिखा चाहे तो शायद इससे बड़ी भूल हम दूसरी न कर सफेंगे। हमारे एक प्यारे मित्र का कहना है कि यहुत पुराने समय : से अद्भुत बातों वा वस्तुओं को देवतुल्य मान उनकी पूजा करना और उन पर भक्ति भाव रखना भी भारतवासियों की नस नस में एमा समा गया है कि उन यानों की छान चीन करने और सभी सशी घटनाओं के जानने का फभी उन्हें स्वप्न भी नहीं आता। अपने इस कथन के प्रमाण में उन्होंने कहा कि अमरोहे में एक पीर साहय की दरगाह है जहां लाखों लोग जाते हैं। यह स्थान गंगा के उस पार है। जय इस दरगाह के पुजारी या उनके सेवक हिन्दू यात्रियों को इस पार स लेने माते हैं और जब वे उन्हें लेकर गंगा के निकट पहुंचते हैं तो कहने लगते हैं कि तुम लोग अपनी आँख क्योंकि गंगा के दर्शन कर पीर साहय के पास जाओगे तो तुम्हारी मुराद पूरी न होगा। विचारे सीधे साधे अथवा स्वार्थान्ध हिन्दु अपनी आँखें बन्द कर लेते हैं। यही मुख्य कारण है कि यहां इति- हास की सामिग्री के रहते भी अब तक कोई अच्छा इतिहास न यन सका ।:भारतवर्ष का सश्या पुराना इतिहास यदि किसी के "सहारे से धन सफता है तो ये शिलालेख और दानपत्र हैं जो दान और धर्म और न फिइतिहास की दृष्टि से लिखे गए थे। इस सेम में हम यह नहीं दिखाया चाहते कि इन दानपत्रों का कैसे पता लगा और इनसे अय तक किन फिन नई थानों का ज्ञान हमें प्राप्त हुआ । इसे हम किसी दूसरे लेख में लिखने का उद्योग करेंगे। शाज इस ऐतिहासिक सामिमी को हम हिन्ही पाठकों की भेंट करते है। इसमें ७९६ दानपत्रों का सारांश दिया गया है जिसके सहारे से पाठकगण यहुन से ऐतिहासिक पुरुषों का ठीक ठीक समय स्थिर कर सकेंगे । जिम जिस पुस्तक में इन खेलों का पूरा पूरा वृत्तान्त छपा है उनके नाम भी सांकेतिक रूप में पहिली ही पंक्ति में लिम दिए गए हैं। उन मांफेतिफ अक्षरों से किन किन पुस्तकों का, भाग्य है उमे हम नीचे स्पष्ट लिग्न देते है जिससे पाठकों को उन- .

(१) मा० स० इ० = Acheological Survey of India (२)मा० स० ० = Archeological Survey of IVestern India (३) ए० इ०% Epigraphia Indica. (३) ३००- Indian Inseriptions. (४) जी० मो० जे०=Zetsh D. Aforg. Ges. (6) ro tio=Asiatic Researches (1) çota aro go=Antiquarian Remains Bombay Presidency. (८) के० टे० ० इ० %DCave Temples of Vestern India. (९) फो० मि० ए०%Colebrooke's miscellaneous Essay's. (१०) गु०५० =Gupta Inscriptions. (११)ज० अ० मो०सी०%DJournal American Oriental Society. (१२) जय० ए० सी०=Journal Bengat Astatic Society (१३) ज० रा० ए० स:=DJournal, Royal Asintic Society. (१४)इ०ए०= = Indian Antiquary (१५) प्रा०ले. मा० o=Prachinlekhamala. (१६) प्रो० या ५० सो= Proceedings, Bengal Asiatic Society. (१७) मो०० ज०%DProfessor Bendall's Journey. (१८) चा० ० = Bombay Gazetteer. (१६) बी० जी०Viener Zeitschrift. (20) 3770 = Bhavanagar Inscriptions. (27) Teur=Annals and Antiquities of Rajsthan. (२२) रा०मि० यु० ग०=DDr. R. L. Mittra's Buddha Gaya. इन्हीं पाइस पुस्तकों से ये दानपत्र फे लेग्य इकठे किएगए हैं। इस संग्रह से यह न समझना चाहिए कि अयतफ इतने ही लेनों फा पता लगा है । इससे कहीं अधिक शियालेनों और दानपनी का पृतान्त छप चुका है । इस याफी के अंश को भी हम फिमी समय पाठकों के सम्मुरा उपस्थित करने का उद्योग फरेंगे यदि हमें यह ज्ञात हुआ कि हमारे इस परिश्रम से किसी को भी लाम पहुंचा और हिन्दी प्रेमियों की कुछ भी रुचि इम ओर दुई । इस संग्रह में निक्ष लिखित संवतों के लख दिएगए है।इस्वी सन में उ.

नफी गणना भी हम पाठकों के सूचनार्थ नीचे दे देते हैं। वि० सं० विक्रम संवत् (प्रारम्भकाल इस्वी से ५७ वर्ष पूर्व) मा० सं०= शक संवत् (प्रारम्भकाल १७८ ई०) फ० सं०= फलचुरी-चेदि-संवत् (प्रारम्भकाल २५०ई०) गु० सं० = गुप्तवल्लभी संवत् (प्रारम्भकाख ३१६ ई०) ६० सं० हर्प संवत् (प्रारम्भफाल ६०६ ई०) ने० सं० = नेवार संवत् (प्रारम्भकाल ८८० ई०) सौ०सं०= लौकिक संघत-दुसरा नाम-सप्तर्षि संवत् (भारम्भकाल ८२४ ई०) ग्रा० सं०-शास्त्र संवत् (प्रारम्भकाल १६२४ ई०): धु० सं० = युद्ध के निर्वाण का संवत् (प्रारम्भकाल इस्वी से १३७ वर्ष पूर्व) ल० सं०= लक्ष्मणसेन संवत् (प्रारम्भकाल ११७ ई ) सिं०सं०%=सिंह संवत् (प्रारम्भकाल १११४.ई०) म० सं० - मुहम्मद या हिजरी संवत् ( प्रारम्भ ६०२ ई०) सन० सं०-यंगाली सन् संवत् (प्रारम्भकाल ७०५ ई०). अ० सं०- मलाई या इलाही संवत् ('भारम्भकाल १५५३) हमारी इच्छा थी कि इन सब संवतों का कुछ कुछ वृतान्त इस भूमिका में दे देते परन्तु लेख बढ़ जाने के भय ने हमें ऐसा करने से रोका । अस्तु जिन लोगों की इस विषय में कुछ भी रुचि होगी घे इसका पता स्वयं लगा लेंगे।. अन्त में हमें अव केवल इतना निवेदन करना है कि यह सूची हमने डाक्टर फिलहान के संग्रह से ली है । हिन्दी हस्तलिखित पुस्तफों की रिपोर्ट लिखने में हमें अनेक दानपत्रों को खोजना पड़ा जिसके लिये हमे अनेक पुस्तकें उलटनी पड़ी, अन्त में डाक्टर कि- 'लहान का संग्रह हमारे हाथ लगा जिससे हमें बड़ी सहायता मिली । यह समझ कर फि दूसरे लोगों को भी ऐसी आवश्यकता पड़ सकती है हमने उसे हिन्दी में लिखने का साहस किया। आशा है कि हमारे इस परिश्रम से इतिहास प्रेमी लोग लाभ उठावेंगे और हमें उत्साहित करेंगे जिससे इसका दूसरा भाग भी हम आमे चलकर उनके अर्पण कर सकें।

प्राचीन-लेख-मणि-माला।
प्रथम खण्ड।
1
(१) मालय विक्रम संवत के शिला लेख ।
(१)
वि० सं० ४२८- गु० इ० पृष्ट २९३ । व्याघ्रराट के प्रपौत्र,
पशोराट के पौत्र तथा यशोवर्धन के पुत्र "परिक विष्णुवर्धन" का
विगपगढ़स्तूप पर लेख ।
(२)
वि० सं० ४८० (!) गु० ३० पृष्ठ ७४ | नरवर्मन के
पुत्र (!) "विश्ववर्मन" के समय का गङ्गधार में लेख जिसमें राजा
के मन्त्री मयूराक्ष के कई मंदिरो के बनवाने का वर्णन है ।
(३)
वि० सं० ४९३ और ५२९- गु० इ० पृष्ठ ८१ । “कुमार
गुप्त" (प्रथम ) और उसके अधीनस्थ दशपुर के नायक "विश्ववर्मन"
के पुत्र “बन्धुवर्मन " के समय का लेख जो मन्दसौर में है और जिसे
घरसभट्ट ने सङ्कलित किया ।
वि० सं० ५८९- गु० इ० पृष्ठ १५२- रागाधिराम "यशो-
धर्मन विष्णुवर्धन" के समय का मन्दसोर में शिलालेख जिसमें
,

विष्णुवर्धन के एक मंत्री धर्मदोष के छोटे भाई दक्ष (1) के अपने
मृत चचा अभयदत्त के स्मरणार्थ एक कूप के बनवाने का वर्णन है।
लेख गोविन्द का खोदा हुआ है ।
(१)
वि० सं० ७१८- ए० इ० माग'४ पृष्ठ ३१ । गुहिल रामा
"अपराजित" के समय का उदयपुर (राजपुताना) में शिलालेख जिस
में राजा के सेनापति महाराज वराहसिंह की स्त्री के एक मन्दिर बनवाने
का वर्णन है । यह लेख दामोदर के पौत्र और 'ब्रह्मचारी के पुत्र द्वारा
सद्विलित है।
वि० सं० ७४६-३० ए० भाग ५ पृष्ठ: १८१ | "दुर्गगण"
के समय का झालरापाटन में शिलालेख । यह सर्वगुप्त भट्ट द्वारा
सङ्कलित है।
वि० सं० ७७०-राजस्थान भाग १ पृष्ठ ७९९-कर्नल टाड ने
“चित्तौर के गोरी राजाओं" के एक शिलालेख का जो मानसरोवर
(चित्तौर) के तट पर एक स्तम्भ पर खुदा था, भाषान्तर किया है ।
उममें लिखा है कि संवतसर के ७७० वर्ष बीतने पर मनुष्यों के स्वामी
मालवा के राजा ने यह सरोवर बनवाया । अब यह शिलालेख बृटिश
म्यूमिपम में है।
(८)
वि० सं०७९४-३० ए० भाग १२ पृष्ठ १५५ । सौराष्ट्र
के महाराजाधिराज "जाइक देव" का दानपत्र ( सन्दिग्ध ) जो
भूमिलिका में दिया गया था । समय ठीक नहीं है ।
वि० सं०.७९५-३० ए० भाग १९ पृष्ठ ५७ । मौर्यवंशीय

७ रामा “धवल" के मित्र संकुफ के पुत्र राजकुमार "शिवगण" का शिलालेख । इसे सुरभी भट्ट के पुत्र देवत ने सङ्कलित किया और द्वारशिव के पुत्र शिवनाग ने खोदा । (१०) वि० सं० ८११-राजस्थान भाग २ पृष्ठ ७६४ ! कर्नल टाड । लिखते हैं कि चित्तौर में उन्हें एक शिलालेख मिला था जिसका समय सवत ८११ माघ सुदी ५ वृहस्पतिवार था । इ० ९० भाग १९ पृष्ठ ३७३ देखो। (११) वि० सं० ८४७-जी० मो० जे० भाग ३८ पृष्ठ १४७ राया इ० ए० भाग १४ पृष्ठ ४५ ! सामन्त "देवदत्त" का (बौद्धधर्म सम्बन्धी ) शेरगढ़ ( कोटा ) वाला शिलालेख । विन्दुनाग का पुत्र पमनाग, उसका सर्वनाग जिसने "श्री" से विवाह किया, उनका देव- दत्त हुआ। वि० सं० ८९८-जी० मो० जे० भाग ४० पृष्ठ ३९ । चालान “चण्डमहामेन" का धोलपुर में शिलालेख । ईसुक का पुत्र माहपराम जिसने कर्णहल्ला ( जो सती हुई) से विवाह किया । उनका पुत्र चण्ड (चण्ड महासेन ) हुआ। (१३) वि० सं०९१८-ज० रो० ए० सो०-१८९५ पृष्ठ ५१६ पणिहार ( प्रतिहार ) “कक्कुक " का बटपाल में गिराख । वी- वली इस प्रकार दी है । ब्राह्मण "हरिश्चन्द्र" और उसकी क्षत्राणी पत्नी "भद्रा" का पुत्र "रस्जिल", उसका "नरहण" (नरभट), उसका "नाहण" (नागभट ), उसका "तात, उसका "जसबद्धन" ( यशो- वर्धन ), उसका "चन्दुक", उसका "सिल्टुक", उसका "झोट", - •स० ये० उसका "भिल्लुक", उसका "कक्क" जिसने "दुर्लभ देवी" से विवाह किया, उनका "कक्कुक" । (१४) वि० सं० ९१९- ए० ३० भाग ४ पृष्ठ ३१० तथा आ. • ३० भाग १० । (कन्नोज के) महाराजाधिराम "भोजदेव". और उनके अधीनस्थ लुअच्छगिर ( देवगढ़) के नायक महासामन्त "विष्णुराम" के समय का शिलालेख जो देवगढ़ के एक जैनी स्तूप पर है। (१५) वि० सं० ९३२- ए० इ० भाग १ पृष्ठ १५६ । (कन्नौज के) रामदेव के पुत्र (!) आदिवराह (भोजदेव) के समय का ग्वालियर में शिलालेख । (१६) वि० सं० ९३३- ५० इ० भाग. १ पृष्ठ १५९ । ( कन्नौम के) भोजदेव के समय का ग्वालियर में शिलालेख । (१७) वि० सं०९६०- ए० इ० भाग १ पृष्ठ १७३ । सीयंडोणी (सिरोनी खुर्द) का शिलालेख जिसमें बहुत से गर्थदानों का वर्णन है जिन्हें भिन्न भिन्न पुरुषों ने देवताओं के निमित्त संवत् ९६० से संवत् १०२५ तक में दिया । इसका समय ( कन्नौज के भोजदेव के उत्त- राधिकारी ) महाराजाधिराज महेन्द्रपालदेव के राजत्वकाल का है। (१८) वि० सं० ९६० इ० ए० भाग १७ पृष्ठ २०२ । महासा- मन्ताधिपति "गुणराज" और "उन्दभट" के समय का तेहरीवाला स्मारकलेख । (१९) वि० सं० ९६४-९० इ० 'भाग १ पृष्ठ १७३ | सीयडोणी . ३

का शिलालेख जिनगे ( कन्नोंज के ) भोजदेव के उत्तराधिकारी
महाराजाधिराज महेन्द्रपालदेव के समय का महासामन्ताधिपति उन्दभट्ट
के दानपत्र का वर्णन और उसका समय है।
(२०)
वि० सं० ९३६-आ० स० आ० इ० भाग १० पृष्ठ १३
ग्यारिसपुर के खण्डित शिलालेख का समय ।
(२१)
वि० सं० ९६५-ए० इ० भाग १ पृष्ठ १७४ । सायडोणी के
शिलालेख का समय।
(२२)
वि० सं० ९६७-९० इ० भाग १ पृष्ठ १७४ । सायडोणी के
शिलालेख का समय ।
(२३)
वि० सं० ९६९-ए. इ० भाग १ पृष्ट १७५ । सायडोणी
के सामन्त महायजाधिराज “ धूरभट्ट " के राजत्यकाळ का सिपोणी
में शिलालेख ।
(२४)
वि० सं० ९७३-ज० ब० ए० सो० भाग ६२ पृष्ठ ३१४ ।
हस्तिकुण्री के हरिवर्मन के पुत्र राष्ट्रकूट "विदग्ध" के समय का
वीजपुर में शिलालेख ।
(२५)
वि० सं० ९७४-३० ए० भाग १६ पृष्ठ १७४ । [ कन्नौज के]
महेन्द्रपाबदेव के उत्तराधिकारी महाराजाधिराज “महिपालदेव" के
समय का असनी (फतेहपुर हस्वा) में शिलालेख ।
वि० सं०२८१-३० ए० भाग १३ पृष्ट २५१ योगी "वकुलन"

का टूटा हुआ शिलालेख जिसे देवानन्द ने सङ्कलित किया था. और
जो अब वृटिश म्यूजियम में है।
(२७)
वि० सं० ९८३-३० ए० भाग १३ पृष्ठ २५० । योगी
"वकुलज" का शिलालेख जो अब वृटिश म्यजियम में है ।'
(२८)
वि० सं० ९९१-९० इ० भाग १ पृष्ठ १७७ । सियडोणी
शिलालेख का समय ।
(२९)
वि० सं० ९९४-९० इ० भाग १ पृष्ठ १७६ । सियडोणी
शिलालेख क, समय।
7
(३०)
वि० सं० ९९६-०व० ए० सो०. माग-६२.पृष्ठ ३१४ ।
बाजपुर का शिलालेख जिप्तमें हस्तिकुंडी के विदग्ध के पुत्र राष्ट्रकूट,
"मम्मट" के राजत्वकाल का समय है।
(३१);
: वि० सं०.१००५-ए० इ० भाग १ पृष्ट १७७ : सियडोणी
का शिलालेख जिसमें (कन्नौज के) क्षितिपालदेव के उत्तराधिकारी,
महाराजाधिराज "देवपालदेव" और सियडोणी के सामन्त महारा-
नाधिराज "निश्कलङ्क" के राजत्वकाल का समय है ।
(३२)
वि० सं० २००६-९० री० भाग १ पृष्ट २८४ । एक संस्कृत
शिलालेख जो मिस्टर विलमट को बुद्ध गया में मिला था और जिसका
अनुवाद चार्लम विल्किस ने किया था । इसमें विक्रमादित्य के नवरत्नों
में से "अमरदेव" का वर्णन है।

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( १२ ) (३८) वि० सं० १०१३-९० इ० भाग २ पृष्ठ १२४ । विग्रहराज के हर्ष शिलालेख में हर्ष (शिव) के एक मन्दिर के बनने का समय । (३९) वि० सं० २०१६- ए० इ० भाग ३ पृष्ठ २६६ । गुरजर प्रतिहार वंश के सामंत और उसकी पत्नी लच्छुका के पुत्र महाराजा- धिराज "मथनदेव" का राजोरगढ़ ( अलवर ) का शिलालेख जो कि (कन्नौज के) क्षितिपालदेव के उत्तराधिकारी महाराजाधिराज "विजय- पालदेव" के राजत्वकाल का है। (४० ०) वि० सं० १०२५-५० इ० भाग १ पृष्ठ १७८ । सियडोणी का शिलालेख जिसमें सियडोणी के सामन्त महाराजाधिराज "निश्क- लंक" के राजत्वकाल का समय है। . . (४१). वि० सं० १०२७-८० इ० भाग २ पृष्ठ १२४ । विग्रहराज के हर्ष शिलालेख में शैव सन्यासी अल्लट की मृत्यु का समय । वि० सं० १०२८-भा० इ० पृष्ठ ७० । गुहिक "नरवाहन" का उदयपुर ( राजपूताना ) में खण्डित शिलालेख जिसे आदित्यनाग के पुत्र आम्रकवि ने सङ्कलित किया । . वि० सं० १०२ [८]-डाक्टर बजेस् के फोटो से ( आ. स० इ० भाग २३ पृष्ठ १२५ ) महाराजाधिराज "चामुण्डराज" के राजत्यकाल का निमतोर ( राजपुताना ) में शिलालेख । (४४) वि० सं० २०३०-९० इ० भाग २ पृष्ठ ११९ । चाहमान

-
( १३ )
"विग्रहराज" वा हर्प गिलालेख जिस चीरफ के पुत्र वीरनाग ने
सङ्कलित किया |
चाहमान वश में गूचक (प्रथम), उसका पुन चन्दराज, उसका
पुत्र गूनक (द्वितीय), उसका पुन चन्दन ( जिसने तोमर राजकुमार
रुद्रेन रुद्रपाल (1) को पराजित किया ), उसका पुन वाक्पतिराज
(जिसने तन्त्रपाल को पराजित किया ), उसका पुत्र सिंहराज (जो
किसी "लवण" का समकालीन था), उसका पुन विग्रहराज । महाराजा
धिराज सिंहराज का एक भाई जिसका नाम वत्सराज था और (निग्रहराज
का छोड कर) तीन बेटे दुर्लभराज, चन्द्रराज और गोनिन्दराज थे।
(४५)
वि० सं० १०३० वी० जी० माग ५ पृष्ठ ३००। चौलुस्प
मूलराज प्रथम का बडोदा ( पाटन ) में दानपत्र |
(४६)
वि० सं० २०३१-इ० ए० माग ६ पृष्ठ ११ । धरमपुरी
(इन्दौर ) के परमार महाराजाधिराज वाकपति राजदेव का दानपत्र
जो उज्जयनी में दिया गया था | वशाली इस प्रकार है। कृष्णराज,
वैरिसिंह, सीयक, वाकपतिराज अमोघवर्ष ।
(४७)
वि० सं० १०३४-ज० बे० ए० सो० भाग ३१ पृष्ठ ३९३ ।
[कच्छपघाट] महाराजाधिराज वज्रदामन के समय का ग्वालियर में एक
जैन मूर्तिपद पर सण्डित शिलालेस ।
(४८)
वि० सं० १०३४-राजस्थान भाग १ पृष्ठ ८०२। कर्नल टाड
सतपुर के एक शिलालेख का अनुवाद देते हैं जो गुहिल शक्तिकुमार
के समय का ज्ञात होता है।

- (३८) वि० सं० १०१३-९० इ० भाग २ पृष्ठ १२४ । विग्रहराज के हर्ष शिवालेख में हर्ष (शिव) के एक मन्दिर के बनने का समय ! (३९) वि० सं० १०१६- ए० इ० भाग ३ पृष्ठ २६६ । गुरनर प्रतिहार वंश के सामंत और उसकी पत्नी लच्छुका के पुत्र महाराजा- धिराज "मथनदेव" का राजोरगढ़ ( अलबर ) का शिलालेख जो कि (कन्नौज के) क्षितिपाळदेव के उत्तराधिकारी महाराजाधिराज "विजय- पालदेव" के राजत्वकाल का है । (४०) वि० सं० १०२५-५० इ० भाग १ पृष्ठ १७८ । सियडोणी का शिलालेख जिसमें सियडोणी के सामन्त महाराजाधिराज "निश्क- लंक" के राजत्यकाल का समय है। (४१) वि० सं० १०२७-ए० इ० भाग २ पृष्ठ १२४ । विग्रहराज के हर्प शिलालेख में शैव सन्यासी अल्लट की मृत्यु का समय । (४२) वि० सं० १०२८-भा० इ०. पृष्ठ ७० । गुहिल "नरवाहन" का उदयपुर ( राजपूताना ) में खण्डित शिलालेख जिसे आदित्यनाग के पुत्र आम्रकवि ने सङ्कलित किया । (४३) वि० सं० १०२ [८]-डाक्टर वजेस् के फोटो से (आ. • स० इ० भाग २३ पृष्ठ १२५ ) महाराजाधिराज "चामुण्डराज" के राजत्वकाल का निमतोर ( राजपुताना ) में शिलालेख । (४४) वि० सं० १०३०-९१ इ० भाग २ पृष्ठ ११९ । चाहमान 1

-
( ३ )
"विग्रहराज" का हर्प शिलाख जिस थारुक के पुत्र धीरनाग ने
सङ्कलित किया।
चाहमान वश में गूपक (प्रथम), उसका पुत्र चन्द्रराज, उसका
पुर गूषक (द्वितीय), उसका पुत्र चन्दन ( जिसने तोमर राजकुमार
रुद्रेन रुद्रपाल ( 2 ) को पराजित किया ), उसका पुत्र वाक्पतिराज
(जिमने तन्त्रपाल को पराजित किया ), उसका पुत्र सिंहराज ( जो
किसी "लवण" का समकालीन था), उसका पुत्र विग्रहराज । महाराजा
धिराज सिंहराज का एक भाई जिसका नाम वत्सराज था और (विग्रहराज
फा छोड कर) तीन बेटे दुर्लभराज, चन्द्रराज और गोनिन्दराज थे।
(४१)
वि० सं० १०३० वी० जी० माग ५ पृष्ठ ३०० । चौलुक्य
भूलराज प्रथम का वडोदा ( पाटन ) में दानपत्र ।
वि० सं० १०३१-इ० ए० माग ६ पृष्ठ ५१ । धरमपुरी
(इन्दौर ) के परमार महाराजाधिराज वाकपति राजदेव का दानपत्र
जो उज्जयनी में दिया गया था। वशादी इस प्रकार है । रुणराज,
वैरिसिंह, सीपक, वाफपतिराज अमोघर्ष ।
(४७)
वि० सं० १०३४-ज० वे० ९० सो० भाग ३१ पृष्ठ ३९३ ॥
[कच्छपघाट] महाराजाधिराज बज्रदामन के समय का ग्वालियर में एक
जन मूर्तिपद पर खण्डित शिलालेख |
(४८)
वि० सं० १०३४-राजस्थान भाग १ पृष्ठ ८०२१ कर्नल टाड
सतपुर के एक शिलालेख का अनुवाद देते हैं जो गुहिल शक्तिकुमार
के समय का ज्ञात होता है।

(१४ ) (४९) वि० सं० १०३६-३० ए० भाग २४ पृष्ट १६० तथा इ० इ० । परमार महाराजाधिराज वाकपतिराजदेव का उज्जैन ( इण्डि- या आफिस ) का दानपत्र जो भगवतपुर में दिया गया था और गुण- पुर में लिखा गया था। (१०) वि० सं० १०४३--इ० ए० भाग ६ पृष्ठ १९१ । महाराना- धिराज राजि के पुत्र चौलुकिक (चौलुक्य) महाराजाधिराज मूलराज- प्रथम का कड़ी में दानपत्र जो अणहिल पाटक में दिया गया था । - (५१) वि० मं० १.०४९-१० इ० भाग १ पृष्ठ ७७ । छिन्द वंश के "लल्ल" का देवल ( इलाहावास ) में शिलालेख जिसे भट्ट शिवरुद्र के पुत्र नेहिल ने सङ्कलित किया था । च्यवन ऋषि के वंश में धैरखरमन, उसका पुत्र भूपण, उसका छोटा भाई मल्हण जिसने चुलुकीश्वर वंश की अणहिला से विवाह किया, उनका पुत्र लल्ल जिसने लक्ष्मी से विवाह किया । (१२) वि० सं० १०५१-ची जी भाग ५ पृष्ठ ३०० । चौलुक्य मूलराज प्रथम का बरोदा का दानपत्र । (५३) वि० सं० १०५३-ज० ब० ए० सो० पुस्तक ६२ भाग १ पृष्ठ ३११ हस्तिकुण्डी के राष्ट्रकूट धवल का बीजपुर ( जोधपुर ) में शिलालेख जिसे सूर्याचार्य ने संकलित किया । हरिवर्मन, उसका पुत्र विदग्ध, उसका पुत्र मम्मट उसका पुत्र धवल (परमार मुञ्जराज, दुर्लभगज, चौलुक्य मूलराज प्रथम, धरणीवराह तथा महेन्द्र वा महीन्द्र ? का समकालीन ) उसका पुत्र बालप्रसाद । ।

(५४)
वि० सं० १०५५-३०१० भाग १६ पृष्ट १०२ । कालजर
को चन्देल गहाराजाधिराज धगदेव ना नयीरा ( अब बङ्गाल का ए
शियाटिक मोसायटी) का दानपत्र जो काशिका में दिया गया था।
चद्रानेय मुनि के ग म हर्प, उसमा पुत्र यशोमैन, रसा
घङ्ग हुआ।
वि० सं० १०५८-९०३० भाग १ पृष्ठ १४८ तथा आ०स०३०
भाग २१ । प्र-पति वश के कोकल का ग्वजुराहो में शिलालेख |
अतियशोगल अथवा यशोगल ( जो पद्मावती में आकर बसा ),
उसका पुत्र माइट, उमका पुत्र जयदेव, उसका पुत्र सेक्कल वा सेक्कल्ल
उसका छोटा माई कोक्कल वा कोककल्ल हुआ ।
(५६)
वि० सं० १०५९-ए० ० भाग १ पृष्ठ १४० तथा आ०स०३०
भाग २१ चन्देल्ल धनदेव का खजुराहो में शिलालेख जो उसकी मृत्यु
के पश्चात् स्थापित किया गया ओर जिसे नन्दन के पौत्र तया बलभद्र
के पुत्र राम ने सकलित किया ।
चन्द्रात्रेय मुनि के वश में न नुक, उसका पुत्र याकपति, उसका
पुन विजय, उसका पुत्र राहिल, उसका हर्प जिसने कछुका से विवाह
किया, उनका पुत्र यशोवर्मन जिसने पुष्पा से विराह किया, उनका
पुन धङ्ग।
(५७)
वि० सं० १०७८-३० ए० भाग ६ पृष्ट ५३ । परमार महा-
राजाधिराज भोजन का उज्जैन में दानपत्र जो धारा में दिया गया था।
वशायरी इम प्रमार ह-माचर, नापतिराज, मिगुगन, भोग ।
.
,

- (४९) वि० सं० १०३६-३० ए० भाग २४ पृष्ठ १६० तथा इ. इ० | परमार महाराजाधिराज वाकपतिराजदेव का उजेन ( इण्डि- या आफिस ) का दानपत्र जो भगवतपुर में दिया गया था और गुण- पुर में लिखा गया था। (५०) वि० सं० १०४३-३० ए० भाग ६ पृष्ट १९१ । महाराजा- धिराज राजि के पुत्र,चौलुकिक (चौलुक्य) महाराजाधिराज मूलराज- प्रथम का कड़ी में दानपत्र जो अणहिल पाटक में दिया गया था । : (५१) वि० सं० २०४९, ए ० इ० भाग १ पृष्ठ ७७ | छिन्द वंश के "लल्ल" का देवल ( इलाहाबास ) में शिलालेख जिसे भट्ट नियरुद्र के पुत्र नेहिल ने सङ्कलित किया था। च्यवन ऋषि के वंश में वैश्वरमन, उसका पुत्र भूपण, उसका छोटा भाई मल्हण जिसने चुलुकीश्वर वंश की अणहिला से विवाह किया, उनका पुत्र लल्ल जिसने लक्ष्मी से विवाह किया । (१२) वि० सं० १०५१-वी० जी भाग ५ पृष्ठ ३०० । चौलुक्य मूलराज प्रथम का बरोदा का दानपत्र । (५३) वि० सं० १.०५३-ज० १० ए० सो० पुस्तक ६२ भाग १ पृष्ठ ३११ हस्तिकुण्डी के राष्ट्रकूट धवल का बीजपुर ( जोधपुर ) में शिलालेख जिसे सूर्याचार्य ने संकलित किया । हरिवर्मन, उसका पुत्र विदग्ध, उसका पुत्र मम्मट उसका पुत्र धवल (परमार मुञराज, दुर्लभराज, चौलुक्य मूलराज प्रथम, धरणीवराह तथा महेन्द्र वा महीन्द्र ? का समकालीन ) उसका पुत्र बालप्रसाद ।

(५४) वि० सं० १००५-३०५० भाग १६ पृष्ट २०२ / कालजर के चन्देल गहाराजाधिराज धनदेव का नन्यौरा ( अब बङ्गाल की ए- शियाटिक मोसायटी) का दानपत्र जो काशिका में दिया गया था। चन्द्रानेय मुनि के वश म हर्ष, उसका पुत्र यशोवर्मन, उसका घड हुआ । (५५) वि० सं० १०५८-ए०३० भाग १ पृष्ट १४८ तथा आ०स०३० भाग २१॥ ग्रहपति रश के कोझल का खजुराहो में शिलालेख । अतियशोवल अथवा यशोग्ल ( जो पद्मावती में आकर वसा ), उसका पुत्र माहट, उसका पुत्र जयदेव, उसका पुत्र सेक्कल वा सेस्कल्ल उसका छोटा भाई कोक्कल वा कोक्कल्ल हुआ । (५६) वि० सं० १०५९-९० इ० भाग १ पृष्ठ १४ ० तथा आ०स०३० भाग २१ चन्देल्ल धनदेव का खजुराहो में शिलालेख जो उसकी मृत्यु के पश्चात् स्थापित किया गया और जिसे नन्दन के पौन तथा वलभद्र के पुत्र राम ने सकलित किया | चन्द्रात्रेय मुनि के वश में नन्नुक, उसका पुन वाकपति, उसका पुर विजय, उसका पुत्र राहिल, उसका हर्प जिसने कञ्छुका से विवाह किया, उनका पुन यशोवर्मन जिसने पुप्पा से विवाह किया, उनका पुन धन। वि० मं०१०७८-इ० ए० भाग ६ पृष्ठ ५३ १ परमार महा- राजाधिराज मोजदेव का उज्जन में दानपत्र जो धारा में दिया गया था। चमार्ग इस प्रकार है-गीत्रक, नाकपतिराज, मियुगज, भोग ।

( १४ ) (४९) वि० सं० १०३६-३० ९० भाग २४ पृष्ट १६० तथा, इ० इ० । परमार महाराजाधिराज वाकपतिराजदेव का उज्जैन ( इण्डि- या आफिस ) का दानपत्र जो भगवतपुर में दिया गया था और गुण- पुर में लिखा गया था। (५०) वि० सं० १०४३-इ० ए० भाग ६ पृष्ठ १९१ । महाराजा- धिराज राजि के पुत्र, चौलुकिक (चौलुक्य) महाराजाधिराज मूलराज- प्रथम का कड़ी में दानपत्र जो अणहिल पाटक में दिया गया था । (५१) वि० सं० १०४९-५० इ० भाग १ पृष्ट ७७ । छिन्द वंश के "लल्ल" का देवल ( इलाहाबास ) में शिलालेख जिसे भट्ट शिवरुद्र । के पुत्र नेहिल ने सङ्कलित किया था । च्यवन ऋषि के वंश में वैरवरमन, उसका पुत्र भूषण, उसका छोटा भाई मल्हण जिसने चुलुकीश्वर वंश की अणहिला से विवाह किया, उनका पुत्र लल्ल जिसने लक्ष्मी से विवाह किया । (५२) वि० सं० १०५१-बी० जी भाग ५ पृष्ठ ३०० । चौलुक्य मूलराज मथम का वरोदा का दानपत्र | (५३) वि० सं० २०५३-ज० ब० ए० सो० पुस्तक ६२ भाग १ पृष्ट ३११ हस्निकुण्डी के राष्ट्रवाट धवल का वीजपुर (जोधपुर ) में शिलालेख जिसे सूर्याचार्य ने संकलित किया। हरिवर्मन, उसका पुत्र विदग्ध, उसका पुत्र मम्मट उसका पुत्र धवल (परमार मुञराज, दुर्लभगज, चौलुक्य मूलराज प्रथम, धरणीवराह तथा महेन्द्र या महीन्द्र ? का समकालीन ) उसका पुत्र वालप्रसाद ।। .

, - (५४) वि० सं० १००८-३०७० भाग १: पाट २०२ | कालजर के चन्देल महाराजाधिराज धनदेव बा नन्यौरा ( अब बङ्गाल की ए- शियाटिक मोसायटी ) का दानपत्र जो नागिना में दिया गया था । चन्द्रानेय मुनि के यश म हर्प, उसका पुत्र यगोवर्मन, उसका घन हुआ। (१५) वि० सं० १००८--ए०३० भाग १ पृष्ट १४८ तथा आ०स०३० भाग २१। प्रहपति वश के कोकल का खजुराहो में शिलालेग्य । अतियशोवल अथवा यशोनल ( जो पद्मावती में आकर बसा ), उसका पुत्र माहट, उसका पुत्र जयदेन, उसका पुत्र सेक्कल वा सेक्कल्ल उसका छोटा भाई कोक्कल ना कोक्कल्ल हुआ । वि० सं० १०५९-९० इ० भाग १ पृष्ठ १४ ० तथा आ०स०३० भाग २१ चन्देल्ल धगदेव का खजुराहो में शिरालेख जो उसकी मृत्यु के पश्चात् स्थापित किया गया और जिसे नन्दन के पौत्र तथा वलभद्र के पुत्र राम ने सकलित किया । चन्द्रानेय मुनि के वश में नन्नुक, उसका पुन वाकपति, उसका पुन विजय, उसका पुत्र राहिल, उसका हर्ष जिसने कछुका से विवाह किया, उनका पुत्र यशोमन जिसने पुप्पा विवाह किया, उनका पुन घग। (५७) वि० मं० १०७८-३० ए० भाग ६ पृष्ट ५३ / परमार महा- राजाधिराज भोजदेव का उज्जन में दानपत्र जो धारा म दिया गया था। वशावरी इस प्रकार है-मीचा, नाकातिरान, मियुगन, गोन | ,

( १८)
(६९)
वि० सं० १.१.१७-त्रा० ग० भाग १ पृष्ठ ४७२ । देवराम
के पौत्र तया धन्धुक के पुत्र परमार महाराजाधिराज कृष्णराज के
राजन्यकाल का भिनमाल (श्रीमाल) में शिलालेख ।-
वि० सं० ११२३-बा० ग० भाग १ पृष्ट ४७३ । [परमारं]
महाराजाधिराज कृष्णराज के राजत्वकाल का भीनमाल ( श्रीमाल)
में खण्डित शिलालेख ।
(७१)
वि० सं० ११३४ और · ११३५-डाक्टर फुहरर की एक
प्रतिलिपि से । ( कलचुरी वंश के ) महाराजाधिराज मर्यादासागरदेव के
उत्तराधिकारी महाराजाधिराज सोढदेव का कल्ह जिला गोरखपुर, में,
(अब लखनऊ म्यूजियम) दानपत्र जो गण्डकी नदी पर धुलियाघट्ट में
दिया गया था ।
.
वि० सं १.१.३६-३० ए० भाग २२ पृष्ठ ८० 1. परमार
चामुण्डराज के अधूना में शिलालेख का नोटिस जिसे . विजयसाधार
के छोटे भाई तथा सुमतिसाधार के पुत्र चन्द्र ने सङ्कलित किया ।
परमार नायक के वंश में वैरिसिंह, उसका लघु भ्राता डम्बरसिंह,
उसके वंश में कडूदेव ( जिसने मालब राजा हर्प के एक- शत्रु, कर्नाट
के शासक को पराजित किया ), उसका पुत्र चण्डप, उसका पुत्र सत्य--
राज, उसका मण्डनदेव, उसका पुत्र चामुण्डराज ( जिसने सिन्धुराज को
पराजित किया।
(७३)
वि० सं० ११३७-३० ए० भाग २० पृष्ट ८३ । परम्पर
उदयादित्य का उदयपुर (ग्वालियर ) में शिलालेख ।
1

( १६ ) (७४) वि० सं० ११.४५-५० इ० भागपृष्ठ२३७तथा आ० स०६० भाग २० । कन्छपघाट महाराजाधिराम विक्रमसिंह का दुबकुन्द में शिलालेख जिसे शान्तिपेण के पुत्र विजयक्राति ने सङ्कलित किया। कच्छपघाट घंश में युवराज, उसका पुत्र अर्जुन जो ( चन्देल्ल) विद्याधर का सहायक था और जिसने ( कन्नौज के ) राज्यपाल को युद्ध में मारा, उसका पुत्र अभिमन्यु (जो भोज का समकालीन था ) उसका पुत्र विजयपाल, उसका पुत्र विक्रमसिंह । (७६) वि० सं० ११४८-५० इ० जाग १ पृष्ठ ३१७ । चौलुक्य महाराजाधिराज कर्णदेव त्रैलोक्यमल्ल का सूनक में दानपन जो अण- हिलपाटक में दिया गया था। वि० सं० ११५०-३० ए० भाग १५ पृष्ट ३६ तथा प्रा० ले० मा० भाग १ पृष्ठ ८१ । कच्छपघाट महिपालदेव का ग्वालियर में सासबहू के मन्दिर में गिलालेख जिसे राम के पौत्र तथा गोविन्द के पुत्र मणिकण्ठ ने सङ्कलित किया । कच्छपघाट (कच्छपारि ) वश में लक्ष्मण, उसका पुत्र वजदामन (निप्सने गाधिनगर अर्थात कन्नौज के अनुशासक को पराजित किया और गोपाद्रि अर्थात ग्वालियर को विजय किया) मङ्गलराज, कीर्तिराज, उसका पुत्र मूलदेव जिसे भुवनपाल और त्रैलोक्यमल्ल भी कहते हैं और जिमने देवव्रता से विवाह किया, उनका पुत्र देवपाल, उमका पुत्र पद्मपाल, जिसका उत्तराधिकारी महीपाल भुदनैकमल हुआ जो कि सूर्यपाल का पुत्र था परन्तु जो पापाल का भाई काहा गया है । (७७) वि० सं० ११५२--आ०स०३० भा०२०पृष्ट १०२ । दुव- कुण्ड के जैनस्तूप का शिलालेख | वि० सं० ११५४-३० ए० भाग १८ पृष्ठ ११ । कलीन के महाराजाधिराज मदनपालदेव का बङ्गाल एशियाटिक सोसायटी वाला दानपत्र जिसमें मदनपालदेव के पिता चन्द्रदेव के वाराणसी में दान का वर्णन है। यशोविग्रह, उसका पुत्र महीचन्द्र, उसका पुत्र चन्द्रदेव (जिसने कन्यकुब्न अर्थात् कन्नौज का राज्य पाया था), उसका पुत्र मदनपाल, (मदनदेव) वि० सं० ११५४-३० ए०. भाग १८:पृष्ठ २२८ तथा आ. १० इ० भाग १० १ चन्देल कीर्तिवर्मन तथा उसके मंत्री वत्सराज का देवगढ़ का शिलालेख । चन्देल्ल वंश में विद्याधर, उसका पुत्र विजयपाल, उसका पुत्र कीर्तिवर्मन। (८०) वि० सं०.११६१-६० ९० भाग १४ पृष्ट १.०३.कनीज महाराजपुत्र गोविन्दचन्द्रदेव का बसाही (अब लखनउ म्यूजियम) याला दानपत्र जो यमुना के तट पर आसतिका में दिया गया था। गाहड़वाल वैश में महल का पुत्र चन्द्रदेव (जो भोज और कर्ण के पश्चात पृथ्वी का रक्षा था और जिसने अपनी राजधानी कन्याकुब्ज में स्थापित की); उसका पुत्र मदनपाल, उसका पुत्र गोविन्दचन्द्र । (८१). वि० सं० ११६१-३०,९० माग १५ पृष्ठ २०२ । कच्छप- घाट महिपालदेव के उत्तराधिकारी का ग्वालियर (अब लखनऊ म्यू- जियम में खण्डित शिला लेख जिसे यशोदेव ने सङ्कलित किया था ।

( २१ ) भुग्नपाल, उसका पुत्र अपराजित देवपाल, उसका पुत्र पद्मपाल, महपिाल। (८२) वि० स० ११६१-९० इ० भाग २ पृष्ठ १८२ । परमार नरवर्मदेव का नागपुर म्यूजियम में शिलालेख (इसे कदाचित नरवर्म देव ने स्वयं सङ्कलित किया था) नायक परमार के वंश में वैरिसिंह, उसका पुत्र सीयक, उसका पुन मुजराज, उसका लघुभ्राता सिंधुराज, उसका पुत्र भोज, उसका सम्बन्धी उदयादित्य (जिसने चेदिकर्ण को पराजित किया ), उसका पुत्र लक्ष्मदेव, उसका भाई नरजर्मन । (८३) वि० स० ११६२-ए० इ० भाग २ पृष्ट ३१९ । कन्नौज के महाराजपुन गोपिन्दचन्द्रदेव का कमौली (अब लखनऊ म्यूजियम ) में दानपत्र जो गंगा के तट पर विष्णुपुर में दिया गया था। गाडवाल वंश में महीयल का पुन चन्द्रदेव, उसका पुत्र मदनपाल इसका पुत्र गोविन्दचन्द्र | २३ पक्ति में गोविन्दचन्द्र की माता राल्ह- देवी का वर्णन है। (८४) वि० स० ११६३-( ११६४-के स्थान पर)-ज. रा० ए० सो० १८९६ पृष्ट ७८७ । कनौज के मदनपालदेव तना उसकी (१) रानी पृथ्वीश्रिका का दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था । वि० सं० ११६४-ट्रा० रो० ए० सो० भाग १ पृष्ट २२६ । हरौटा के मधुकरघर में एक शिलालेख जो परमार नरवर्मन के राजार काल का है और जिसमें एक सूर्यग्रहण (!) का वर्णन है । इस शिलालेख में सिन्युराज (सिन्धुल :), भोज, उद्यादित्य और नरवर्मन का वर्णन है।

( २४ ) . (९७) वि० सं० ११७७-ज० ब० ए० सो० भाग ३१: पृष्ट १२३ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का दानपत्र जिसने ( कलचुरी ) राजा यशःकर्णदेव की दान की हुई भूमि । की स्वी- कृति है। (९८): वि० सं० ११७७-ज० ए० ओ०. सो० भाग ६ पृष्ट ६४२॥ कच्छपघाट महाराजाधिराज वीरसिंहदेव का दानपत्र जो नलपुर के किले में दिया गया था । कच्छपघाट वंश में गगनसिंह, उसका उत्तराधिकारी शरदसिंह, उसका पुत्र लक्ष्मीदेवी से वारसिंह । (९९) वि० सं० ११७८-९० इ० भाग ४ पृष्ठ ११० । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का कमौली ( अब लखनऊ म्यूजि- यम ) में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था। (१००) वि० सं० १९८१-ज० व०. ए. सो० भाग ६६ पृष्ठ ११४ कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव तथा उनकी माता राल्ह- णदेवी का, बनारस में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था। (.१०१) वि० सं० १९८२-८०. इ० भाग ४ पृष्ठ १०० । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का कमौली ( अब लखनऊ - म्यूजि- यम) में दानपत्र जो गङ्गा के तट पर मदप्रतिहार (अप्रतिहार ?) में दिया गया था ।.. . वि० सं० ११८२-(११८३ के स्थान पर)--ज० २०.

। ( २५ ) ए० सो० भाग २७ पृष्ठ २४२ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोवि- न्दचन्द्रदेव का दानपत्र जो गंगा के तट पर ईशप्रतिष्ठान में दिया गया था । (१०३) वि० सं० १९८४-९० इ० भाग ४ पृष्ठ १११ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का कमौली ( अब लखनऊ म्पूजि- यम ) में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था । (१०४) वि० सं० १९८५-ज०म०ए०सो० भाग ५६ पृष्ठ ११९ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का बनारस में दानपत्र नो वाराणसी में दिया गया था। (१०५) वि० सं० ११८६-आ०स०३० भाग,२१ पृष्ठ ३४ | चन्देल्ल महाराज मदनवर्मदेव के समय का कालञ्जर के स्तूप पर लेख | 4 वि० सं० ११८७-आ०स०३० माग २१ पृष्ठ ३४ | चन्देल्ल मदनवमदेव का कालजर स्तूप पर लेख । (१०५) वि० सं० १९८७-जय०ए०सी० भाग ५६ पृष्ट १०८' । कनौन के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का खान ( अत्र लखनऊ म्यूनियम ) में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था । - . . . वि० सं० ११८८-आ०स०ई० भाग २१ पृष्ठ ३६ तथा ज०म०ए०सी० भाग १७ पृष्ठ ३२१ । कालजर के चन्देल महा- राजाधिराज मदनवर्मदेव के समय का कालेञ्जर चट्टान पर लेख ।. ४ - . (१०९) -वि० सं० ११८८-३०९० भाग १९ पृष्ठ २४९ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का ले ( अब लखनऊ म्यूजियम) में दानपत्र जो बनारस में दिया गया था। (११०) वि० सं० १९८९-९०६० भाग ५ पृष्ठ ११४ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव तथा उनकी माता महाराज्ञी राहण देवी का पाली ( अब लखनऊ म्यूजियम ) में दानपत्र । (१११) वि० सं० ११९० इ०ए० भाग ६ पृष्ठ ५५ । पृथ्वीपालदेव के उत्तराधिकारी तिहुणपालदेव, उनके उत्तराधिकारी महाराजाधिराज विज- यपालदेव का इङ्गनोड़ में शिलालेख । (११२) वि० सं० ११९०-९०३०.माग ४ पृष्ट ११२ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का कमौली ( अब लखनऊ म्यूजि- यम) में दानपत्र। (११३) वि० सं० ११९०-६० ए० भाग १६ पृष्ट २०८ । काल- जर, के चन्देल्ल महाराजाधिराज मदनवर्मदेव का बान्दा जिले ( अब यङ्गगल एशियाटिक सोसायटी) में दानपत्र जा भैलस्वामिन के निकट • दिया गया था। इसका समय ठीक नहीं है। .: चन्द्रात्रेय के वंश में जो जयशक्ति, विजयशक्ति तथा अन्य राजकुमारों से प्रसिद्ध हो चुकी थी कीर्तिवर्मन; तब 'पृथ्वीवर्मन, और उसके पीछे मदनवर्मन हुए।

( २७ ) (११४) वि० सं० ११९१-ए०३० भाग ४ पृष्ठ १३१ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव के राजत्वकाल का सिङ्गर महाराज- पुत्र वत्सराजदेव ( लोहडदेव) का कमौली ( अब लखनऊ म्यूनि- यम ) में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था । (११५) वि० स० ११९१-इ०ए० भाग १९ पृष्ठ ३९३ । परमार महाराजाधिराज यशोवर्मदेव का दानपत्र जो धारा में दिया गया था और जिसे उसके पुत्र और उत्तराधिकारी महाकुमार लक्ष्मीनर्मदेव ने अपने उग्जैन वाले दानपत्र में सात १२०० में स्वीकार किया था। (१११) वि० सं० ११९२-०३०ए०सी०भाग १७ पृष्ठ ३२२ तथा आ०स०३० माग २१ पृष्ठ ३५ । कालभर में चट्टान की मूर्ति का शिलालेख) (११७) वि० सं० ११९२-इ०ए० भाग १९ पृष्ठ ३४९ तथा इ०३० नम्बर ११ । परमार महाराज यशोवर्मदेव का उज्जैन (अब रोयल एशियाटिक सोसायटी ) में दूसरा दानपत्र | इसमें एक मोमलदेवी का वर्णन है जो कदाचित यशोवर्मन की माता थी। ( ११८) वि० सं० १९९४-आ०स०३० भाग २१ पृष्ठ ३१ । काल- जर में नीलकण्ट मन्दिर के निकट एक गुहा में शिलालेख । (११९) वि० सं० ११९५-आ० स० ० ई० नम्बर २ । चौलुक्य महाराजाधिराज जयसिहदेव के राजत्नकाल का भद्रेश्वरसाला खण्डित शिलालेख ।

वि० . ( २६.) (१०९) - वि० सं० ११८८-३०९० भाग १९ पृष्ट २४९ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का रेने (अब लखनऊ म्पूजियम), में दानपत्र जो बनारस में दिया गया था। (११०) वि० सं० ११८९-ए०३० भाग १ पृष्ठ १.१४ । कन्नौन के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव तथा उनकी माता महाराज्ञी राल्हण देवी का पाली ( अब लखनऊ म्यूजियम ) में दानपत्र । (१११) ० सं० ११९०-३०९० भाग ६ पृष्ठ १५ । पृथ्वीपालदेव के उत्तराधिकारी तिहुणपालदेव, उनके उत्तराधिकारी महाराजाधिराज विज- यपालदेव का इङ्गनोड में शिलालेख । (११२) वि० सं० ११९०-९०३० माग, ४ पृष्ट ११२ । कन्नौज के 'महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का कमौली ( अब लखनऊ म्यूजि- यम) में दानपत्र। (११३) : वि० सं० ११९०-३० ए० भाग १६ पृष्ठ २०८ । काल- जर के चन्देल्ल महाराजाधिराज मदनवर्मदेव का बान्दा जिले ( अब बङ्गाल एशियाटिक सोसायटी) में दानपत्र' जा भैलस्वामिन के निकट • दिया गया था। इसका समय ठीक नहीं है। ...चन्द्रात्रेय के वंश में जो जयशक्ति, विनयशक्ति तथा अन्य राजकुमारों से प्रसिद्ध हो चुकी थी कीर्तिवर्मन; तब पृथ्वीवर्मन, और उसके पीछे मदनवर्मन हुए। - , ( २७ ) (११४) वि० सं० ११९१-२०३० भाग ४ पृष्ठ १३१ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव के राजत्वकाल का सिङ्गर महाराज- पुत्र वत्सराजदेव (लोद्दडदेव ) का कमौली ( अब लखनऊ म्यूजि- यम ) में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था । (११५) वि० सं०.११९१-इ०ए० भाग १९ पृष्ठ ३९३ । परमार महाराजाधिराज यशोवर्मदेव का दानपत्र जो धारा में दिया गया था और जिसे उसके पुत्र और उत्तराधिकारी महाकुमार लक्ष्मीबर्मदेव ने अपने उज्जैन वाले दानपत्र में संयत १२०० में स्वीकार किया था। (१११) वि० सं० ११९२-ज०व०ए०सो०भाग १७ पृष्ठ ३२२ तथा आ०स०३०माग २१ पृष्ठ ३५ । कालजर में चट्टान की मूर्ति का शिलालेख। (११७) वि० सं० ११९२-इ०ए० भाग १९ पृष्ठ ३४९ तथा इ०३० नम्बर ५१ । परमार महाराज यशोवर्मदेव का उज्जैन ( अब रोयल एशियाटिक सोसायटी ) में दूसरा दानपत्र । इसमें एक मोमलदेवी का वर्णन है जो कदाचित यशोवर्मन की माता थी। (११८) वि० सं० ११९४-आ०स०३० भाग २१ पृष्ठ ३१ । काल- जर में नीलकण्ट मन्दिर के निकट एक गुहा में शिलालेख । (११९) वि० सं० ११९५-आ० स० वे० ई० नम्बर २ । चौलुक्य महाराजाधिराज जयसिंहदेव के राजत्वकाल का भद्रेश्वरवाला खण्डित शिलालेख ।

(२८) र (१२०) वि० सं० २१९६-९० इ० माग २ पृष्ठ ३६१ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का कमौली (भव लखनऊ म्यूजियम) में दान पत्र जो वाराणासी में दिया गया था। (१२१) वि० सं० ११९६-३० ए० भाग १० पृष्ठ १५९ । चौलुक्य, जयसिंहदेव के राजत्वकाल का दोहद में शिलालेख । (१२२) वि० सं० १९९७-९० इ० मागं ४ पृष्ठ ११४ । कन्नौजा के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का कामौली (अब लखनऊ म्यूजियम) में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था। '(१२३ ). वि० सं० १.१९८-९० इ० भाग ४ पृष्ठ ११३ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का कमोली (अब लखनऊ म्यूजियम) में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था। . (-१२४) वि० सं० ११९९-इ०ए० भाग १८ पृष्ठ-२१.। कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव तथा महाराजपुत्र राज्यपालदेव का गगहा ( अब ब्रिटिश म्यूजियम ) में दानपत्र । " (१२५) वि० सं०५१९९-आ० स०.३० भाग-३ 'पृष्ठ १८-६० । गढ़वा के मन्दिर के स्तूपों के शिलालेख । (१२६) वि० सं० १२००-३०ए० माग १९ 'पृष्ठ ३६१ तथा इ०३० नम्बर २५०। परमार महाकुमार लक्ष्मीवर्मदेव का उज्जैन ( अब रोयल एशियाटिक सोसायटी ) में दानपत्र । इसमें उस दानपत्र को स्वीकार -- ५ ( २६ ) किया है जो उसके पिता महाराजाधिराज यशोधर्मदेव ने संवन ११९१ में दिया था। + उदयादित्य, नरबर्मन, यशोवर्मन, महाकुमार, लक्ष्मीबर्मन । (१२७) वि० सं० १२००-ए०३० मांग ४ पृष्ठ ११५ । कन्नौज के - महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का कमौली (अब लखनऊ म्यूजियम) में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था। (१२८) वि० सं०.१२०१ ( १२०२ के स्थान पर) ए०३० भाग १ पृष्ठं ११५ । कन्नौज के महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का मछ- लोशहर ( अब लखनऊ म्यूजियम ) में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था। ( १२९) वि० सं० १२०२-एरि० व. पृष्ठ १७९ तथा भा० ३० पृष्ठ १५८ 1 [ जपसिंह ] सिद्धराज के उत्तराधिकारी चौलुक्य कुमार- पाल के राजत्वकाल का गुहिलवंश के कुछ जनों का मङ्गोल (मङ्गलपुर) में शिलालेख जिस प्रसर्वज्ञ ने संकलित किया । (१३०) वि० सं० १२०२-३०ए० भाग १० पृष्ठ ११९ । गोद्रहक के महामण्डलेश्वर वापनदेव के समय के वि०सं० ११९६ के दो- हद शिलालेख के पश्चातलेख में समय । -.१३१) वि० सं० १२०५-२० इ० -भाग १ पृष्ठ १५३ । ग्रहपातिवंश - . नाशिनासाठी

( ३० )
(१३२)
वि०
० सं० १२०७-आ० स० इ० भाग १० पृष्ठ ९७।
चान्दपुर में वराह की प्रतिमा के नीचे लेख ।
वि० सं० १२०७-आ० स० इ० भाग १ पृष्ठ ९६ । कन्नौज ,
के गोविन्दचन्द्रदेव की रानी गोसल्लदेवी के समय का हथियादह
के स्तूप पर शिलालेख ।
(१३४)
वि० सं० १२०७-आ० स० इ० भाग २० पृष्ठ ४६, तथा
ए. इ० भाग २ पृष्ठ २७६ । महाराजाधिराज [अ] जयपालदेव
के समय का महावन में शिलालेख |
(१३५)
वि० सं० १२०७-ए० इ० भाग २ पृष्ठ ४२२ । चौलुक्य
कुमारपालदेव का चित्तौरगढ़ में खण्डित शिलालेख जिसे जपकीर्ति
ने सङ्कलित किया ।
मूलराज प्रथम,
सिद्धराज, कुमारपाल ( शाकम्भार
के अनुशासक को पराजित किया तथा स्पादलक्ष देश को उजाड़ा )
(१३६)
वि० सं० १२०८-ए० इ० भाग १ पृष्ट २९६ कुमारपाल
के राजत्वकाल का बड़नगर का शिलालेख जिसे श्रीपाल ने सङ्कलित
किया था।
चुलुक्य के वंश में मूलराज प्रथम ( जिसने चापोत्कट राजकुमारों
को पराजित किया ), उसका पुत्र चामुण्डराज, उसका पुत्र बल्लभराज,
उसका भाई दुलर्भराज, भीम प्रथम, उसका पुत्र कर्ण, उसका पुत्र
नयसिंह सिद्धाधिराज, कुमारपाल (जिसने अर्णोराज को पराजित किया)।

(१३७)
वि० सं० १२०८-ए० इ० भाग ५ पृष्ठ ११७ । कन्नौज के
महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव तथा उसकी रानी पद्रमहादेवी
महाराशी गोसलदेवी का बयान (अब लखनऊ म्यूजियम ) मे
दानपन जो वाराणसी में दिया गया था । समय ठीक नहीं है।
(१३८)
वि० स० १२०८-आ० स० इ० भाग २१ पृष्ट ४९ ।
चन्देल्ल मदनवर्मन के राजत्यकाल का अजयगढ में शिलालेख ।
(१३९)
वि० सं० १२०८-ज० रो० ए० सो० १८९८ पृष्ठ १०१।
प्रहपति यश के कुछ लोगों का होनिमेन म्यूजियम में जैनमूर्ति का
शिलालेख।
(१४०)
वि०म० १२०९-भा० १० पृष्ठ १७२ । चौलुक्य महाराजा-
धिराज कुमारपालदेव के राजत्यकाल का केण्ड में खण्डित शिलालेख
जिसमें
नदूल
के महाराज आल्हणदेव की एक आज्ञा तथा महाराजपुन
फेव्हणदेव का वर्णन है।
(१४१)
वि० सं० १२१०-३०ए० भाग २० पृष्ठ२१०
अजमेर का
शिलालेख जिममें शाकम्भरी के चाहमान महाराजाधिरान विग्रहराजदेन
के बनाए हुए हरकोलि नाटक के कुछ भाग हैं।
(१४२)
वि०
० स० १२११-ए० ई० भाग ४ पृष्ठ ११६ । कनौज के
महाराजाधिराज गोविन्दचन्द्रदेव का कमाली (अब रखनऊ म्यूजियम)
में दानपन जो नाराणासी में दिया गया था।

(१६४ )
वि०
० सं० १२२७-आ० स० इ० भाग २१ . पृष्ठ, ४९ ॥
अजयगढ़ के ऊपरी फाटक पर शिलालेख |
( १६५)
वि० सं० १२२८-इ० ए० भाग २५ पृष्ठ २०६ तथा ज..
व० ए० सो० भाग ६४ पृष्ठ १५६ । कालजराधिपति चन्देल्ल
महाराजाधिराज परमारदिदेव का इच्छावर में दानपत्र जो विलासपुर में
दिया गया था ।
वि० सं० १२२८-९० इ० भाग ४ पृष्ठ १२२ । कनौज
के महाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का कमौली (अब लखनऊ म्यूजियम)
में दानपत्र जो वेणी के तद पर प्रयाग में दिया गया था ।
( १६७ )
वि० सं० १२२९-इ० ए० भाग १८ पृष्ठ ३४७ । चौलु..
क्य महाराजाधिराज अजयपालदेव के राजत्वकाल का उदयपुर.
(ग्वालियर ) में शिलालेख ।
( १६८)
वि० सं० १२३०-ए० इ० भाग ४ पृष्ठ १२४ । कन्नौज
के महाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का कमौली (अव लखनऊ म्यूजियम)
में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था।
वि० सं० १२३१-९० इ० भाग ४, पृष्ठ १२५ । कन्नौज
के महाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का कमौली (अव. लखनऊ म्यूजियम)
में दानपत्र जो काशी में दिया गया था। समय ठीक नहीं है।
(१७०.).
वि० सं० १२३१, (१२३२ के स्थान पर ?)-इ० ए०

भाग १८ पृष्ठ ८२ । जयसिंहदेव के उत्तराधिकारी कुमारपालदेव के
उत्तराधिकारी चौलुक्य महाराजाधिराज अजयपालदेन के राजत्वकाल
का दानपन जिसमें चाहुयाण (चाहुमान ) श के महामण्डलश्चर
वैजल्लदेव के दान का उल्लेख है। यह ब्राह्मणपाटक में लिखा गया
था । यह दानपत्र सपत् १२३५ में खोदा गया था ।
( १७१)
वि० सं० १२३२-९० इ० भाग ४ पृष्ठ १२७ । कनौन
के महाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का कमौली (अब लखनऊ म्यूजियम)
मैं दानपत्र जो काशी में दिया गया था और जिसमें राजा के पुत्र
हरिश्चन्द्र का वर्णन है।
(१७२ )
वि० सं० १२३२-३० ए० भाग १८ पृष्ठ १३० । कन्नौज
के महाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का बनारस कालेज में दानपत्र जो
बाराणसी में दिया गया था और जिसमें राजा के पुत्र हरिश्चन्द्र का
वर्णन है।
(१७३)
वि० सं० १२३२--आ० स० इ० भाग ३ पृष्ठ १२५ ॥
गोविन्दपालदेव के राजस्वकाल का गया में शिलालेख ।
( १७४ )
वि० सं० १२३३-ए० इ० भाग ४ पृष्ठ १२९ । कन्नौन के
महाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का कमौली ( अब लखनऊ म्यूजियम)
में दानपन जो वाराणसी में दिया गया था ।
(१७५)
वि० सं० १२३३-३० ए० भाग १८ पृष्ठ १३५ । कन्नौज
के महाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का बङ्गाल एशियाटिक सोसायटी में
दानपन जो वाराणसी में दिया गमा था ।
1

( १७६ )
वि० सं० १२३३-इ० ए० भाग १८ पृष्ठ १३७ कन्नौज
के महाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का बङ्गाल एशियाटिक सोसायटी में
दूसरा दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था।
( १७७)
वि० सं० १२३३--ज० ब० ए० सो० भाग ३८ पृष्ठ २६ ।
बुलंदशहर से अनंग का दानपत्र । इसमे ये नाम दिए हैं-चन्द्रक,
धरणीबराथ, प्रभास, भैरव, रुद्र, गोविन्दराज, यशोधर, हरदत्त, त्रिभुवना-
दित्य, भोगादित्य, कुलादित्य, विक्रमादित्य, पद्मादित्य, भोजदेव, सहजा-
दित्य, ( राजराज ? ) अनङ्ग ।
(१७८)
वि० सं० १२३४-इ० ए० भाग १८ पृष्ठ १३८ । कन्नौ-
ज के महाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का बङ्गाल एशियाटिक सोसायटी
में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था ।
( १७९ )
वि० सं० १२३५ और १२३६-० ब० ए० सो० भाग
७ पृष्ठ ७३६ । परमार महाकुमार हरिश्चन्द्र देव का पिप्लिआ नगर में
दानपत्र जो नरमदा के तट पर किसी स्थान पर दिया गया था।
उदयादित्य, नरवर्मन, यशोवर्मन, जयवर्मन, महाकुमार हरिश्चन्द्र
जो
महाकुमार
लक्ष्मीवर्मन के पुत्र
( १८०)
वि० सं० १२३६-३० ए० भाग १८ पृष्ठ १४० । कन्नौज
के महाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का बंगाल एशियाटिक सोसायटी में
दानपत्र जो गंगा के तट पर रण्डवै में दिया गया था।
(१८१ )
वि० सं० १२३६-३० ए० भाग १८ पृष्ठ १४१ । कन्नौज

( ३९ ) के माहाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का बंगाल एशियाटिक सोसायटी में दुसरा दानपत्र जो गंगा के तट पर रण्ड में दिया गया था। (१८२ ) वि० सं० १२३६-३० ए० भाग १८ पृष्ट १४२ । कन्नौज के महाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का बंगाल एशियाटिक सोसायटा में दूसरा दानपत्र जो गंगा के तट पर रण्ड में दिया गया था। (१८३ ) वि० ० स० १२३९-आ० स० इ० भाग १० तथा भाग २१ पृष्ठ १७३ व १७४ | अर्णोराज के पौत्र तथा सोमेश्वर के पुत्र चाह- मान पृथ्वीराज का जेजाकभुक्ति के चन्देल्ल परमारदिदेव के परा- जित करने का मदनपुर में शिलालेख । ( १८४ ) वि० सं० १२३९-बो० ग० भाग १ पृष्ठ ४७४ । महाराज पुत्र (१) जयतसिंहदेव (१) के गजत्यकाल का भिमाल (श्रीमाल) में शिलालेख । (१८५) वि० सं० १२४-(?)-प्रो० ब० ए० सो० १८८० पृष्ठ ७७ । बुद्धगया का बौद्ध शिलालेख जिसमें कन्नौज के जयचन्द्रदेव का वर्णन है और जिमे सीद के पुत्र मनोरथ ने सङ्कलित किया था। (१८६) वि० सं० १२४०-डाक्टर बरगेस की प्रतिलिपियों से । चन्दे- ल्ल परमारदिदेव के राजत्यकाल का कालज्जर की चट्टान पर शिलालेख । (१८७) वि०म० १२४०-आ० स० इ० भाग २१ पृष्ठ ७२ । महोबा के दुर्ग को दीवाल का खण्डित शिलालेख ।

(१.८८): :
वि० सं १२४३-आ. स० इ० भाग २१ पृष्ट.५० | अजय
गढ़ के ऊपरी फाटका पर का शिलालेख ।
(१८९)
वि०सं० १२४३--इ० ए० भाग १५ पृष्ठ १० तथा इ० इ० नम्बर
१३ । कन्नौज के महाराजाधिराज जयचन्द्रदेव का फैजाबाद (अब रायल
एशियाटिक सोसायटी) में दानपत्र जो वाराणसी में दिया गया था ।
(१९०)
वि० सं० १२४४-आ० स० भाग २० पृष्ठ ९० ।
तहनगढ़ दुर्ग के फाटक पर के स्तूप का शिलालेख ।
(१९१)
वि० सं० १२४४-आ० स० इ० भाग ६ पृष्ठ १५६ । चाहमान
पृथ्वीराजदेव के राजत्वकाल का बीसलपुर स्तूप का शिलालेख ।
(१९२)
वि० सं० १२४७( ? )-ए० इ० भाग १ पृष्ठ ४७ । रनपुर
के पृथ्वीदेव तृतीय के समय का रत्नपुर ( अत्र नागपुर म्यूजियम ) में
शिलालेख जिसे रत्नसिंह के पुत्रं देवगण ने सङ्कलित किया था ।
(१९३)
वि० सं०.५२५२-ए० इ० भाग १ पृष्ठ २०८ । चन्देल्ल
परमारदिदेव और उसके मंत्री सल्लक्षण तथा (उसके पुत्र) पुर्षोत्तम
का वधारी ( अब लखनऊ म्यूजियम ) में शिलालेख जिसे लक्ष्मीधर
के पौत्र तथा गदाधर के पुत्र देवधर ने सङ्कलित किया था ।
चन्द्रात्रेय राजकुमारों में मदनवर्मन, उसका पुत्र यशोवर्मन,
उसका पुत्र परमर्दिन ।
( १९४)
वि० सं० १२५३-३० ए० भाग १७ पुष्ट २३८ | तृका लिङ्गा-
३

धिपति कलहुरी (छेदो) महाराजाधिरान विजयदेव के राजल काल का ककरेडी के महाराणा सलसणवर्मदेव का रविा ( अव बृटिश म्यूजियम ) में दानपत्र जो ककरेडी में दिया गया था। धाहिल्ल, वाजूक, दन्दूक, खोजक, जयर्मन, उसका पुत्र यत्सराज, उसके पुत्र कीर्तिवर्मन और सलखणर्मन (१९०) वि० सं० १२५३-आ० स० इ० भाग ११ पृष्ठ १२९ । कन्नौज के एक अनुशासक का बेल्खर स्तूप पर शिलालेख । (१९६) वि० सं० १२५६-३० ए० भाग ११ पृष्ठ ७१ । चौलुक्प महाराजाधिराज भीमदेव द्वितीय का पादन में दानपत्र जा अणहिलपाटक में दिया गया था । मूलराज प्रथम, चामुण्डराज, दुर्लभराज, भीम प्रथम, कर्णरैलोक्य- मल्ल, जयसिंह सिद्धयचक्रवर्तिन, कुमारपाल, अजयपाल, मूलरान द्वितीय, भीम द्वितीय, अभिनरसिद्धराज । ( १९७) वि० सं० १००६-३० ए० भाग १६ पृष्ठ २५४ । परमार महाकुमार उदयवर्मदेव का भूपाल में दानपत्र जो रे के तट पर गुणा डाघ में दिया गया था। यशोवर्मन, जपर्मन, महाकुमार लक्ष्मीनर्मन, महाकुमार हरिश्चन्द्र, उसका पुन महाकुमार उदयर्मन । (१९८) नि० सं० १२५८-ज० ब० ए० सो० माग १७ पृष्ठ २१२ तथा आ० स० इ० भाग २१ पृष्ठ ३७ | चन्देल परमरदिदेव का कालजर में शिलालेख जिसे उसने स्वप सङ्कलित किया था। ६

( २ )
।
(१९९)
वि० सं० १२६३-३० ए० भाग पृष्ठ १९४ । चौलुस्प
महाराजाधिराज भीमदेव द्वितीय का कड़ी में दानपत्र जो अणहिलपा-
टक में दिया गया था।
(२००)
वि० सं० १२६२-बाग० भाग १ पृष्ट ४७४ । महाराजा-.
धिराज उदयसिंहदेव के राजत्वकाल का भिमाल (श्रीमाल) में
शिलालेख ।
(२०१)
वि० सं० १२६४-इ०ए० भाग ११ पृष्ठ ३३७ । चौलुक्य
महाराजाधिराज भीमदेव द्वितीय के राजत्वकाल का मेहर राजा जगमष्ठ
का तिमाणा में दानपत्र जो तिंबाणक में दिया गया था।
(२०२)
वि० सं० १२६५-३० ए० भाग ११ पृष्ठ २२१ । चौलुक्य
महाराजाधिराज भीमदेव द्वितीय के राजत्वकाल का आबू पर्वत पर
शिलालेख, जिस समय परमार माण्डलिक धारावर्पदेव (जिसके युवराम
प्रहादनदेव थे) चन्द्रावती में राज्य करते थे। यह लक्ष्मीधर द्वारा
संकलित किया गया था।
(२०३)
वि० सं० १२६६-३० ए० भाग १८ पृष्ठ ११२ तथा इ० इ०
नम्बर ११ । चौलुक्य महाराजाधिराज भीमदेव द्वितीय के राजत्वकाल
का गयल एशियाटिक सोसायटी में दानपत्र जो अणहिल्लपाटक में
दिया गया था ।
(२०४)
वि० सं० १२६७-० व०ए० सो० भाग ५ पृष्ठ ३७८।।
1

परमार अर्जुनवर्मदेव का पिप्लिआनगर में दानपत्र जो मण्डपदुर्ग में दिया गया था। परमार वंश में भोज, उसके पीछे उदयादित्य, उसका पुत्र नरवर्मन, उसका पुत्र यशोवर्मन, उसका पुत्र अजयवर्मन उसका पुन विन्ध्यवर्मन, उसका पुत्र सुभटवर्मन, उसका पुत्र अर्जुन ( अर्जुनवर्मन ) जिसने नयसिंह को पराजित किया । (२०५) वि० सं० १२६९-आ० स० इ० भाग २१ पृष्ठ ५० चन्देल्ल राजा त्रैलोक्यवर्मदेव के राजत्वकाल का अजयगढ़ में शिलालेख। (२०६) वि० सं० १२७०-० अ० ओ० सो० भाग ७ पृष्ठ ३२ । परमार महाराज अर्जुनवर्मदेव का भूपाल में दानपर जो भृगुकच्छ में दिया गया था। (२०७) वि० सं० १२७२-ज० अ० ओ० सो० माग ७ पृष्ठ २५ । परमार महाराज अर्जुनवर्मदेव का भूपाल में दानपत्र जो रेवा और कपिला के सङ्गम पर अमरेश्वर तीर्थ में दिया गया था। (२०८) वि० सं० १२७२-९० रि० वा० प्रे० पृष्ठ १८६ । मेहर राजा रणसिंह के समय का शियाल बेट मूर्ति का शिलालेख | इसका समय ठीक नहीं है। (२०९) वि० सं० १२७३-९० इ० भाग २ पृष्ठ ४३९ तथा भा०३० पृष्ठ १९५ । चौलुक्य भीमदेव द्वितीय के समय का वेरावल ( सोम- नाथदेव पदन ) में खण्डित शिलालेख जिसमें श्रीधर और वस्वाकुल वंश (४४ ) के और लोगों तथा मूलराज प्रथम से लेकर भीमदेव द्वितीय तक अण- हिलवाड़ के चौलुक्य राजाओं की प्रशंसा है। (२१०) वि० सं० १२७३-ज० ब० ९० सो० भाग १९ पृष्ठ ४९४ जौनपुर जिले का शिलालेख जिसमें एक रेहननामा है । ( २११) वि० सं० १२७४-बा० ग० भाग १ पृष्ठ ४७५ । महाराजा- धिराज उदयसिंहदेव के राजत्वकाल का भिमाल (श्रीमाले ) में खण्डित शिलालेख । वि० सं० १२(७)५-भा० इ० पृष्ठ २०५ । चौलुक्य महाराजा- धिराज भीमदेव द्वितीय के राजत्वकाल का भराणा का खण्डित शिलालेख । (२१३) वि० सं० १२७५-३० ए० भाग २० पृष्ठ ३११ तथा के० टे० ० इ० पृष्ठ १ १ ० । धारा के परमार महाराजाधिराज देवपालदेव के राजत्वकाल का हरसौदा ( अव. अमेरिकन ओरिएण्टेल सोसायटीः) में शिलालेख। (२१४) वि० सं० १२७९-ए० इ० भाग ४ पृष्ठ ३११ । राजा (क्षितीन्द्र) मताप के समय का रोहतासगढ़ की चट्टान पर शिलालेख । (२१५) वि० सं० १२८०-३० ए० भाग ६ पृष्ठ १९६ । चौलुक्य महाराजाधिराज जयन्तसिंहदेव का कडी में दानपत्र जो अणहिलपुर • में दिया गया था-1 मूलराजःप्रथम, चामुण्डराज, मरलभराज, दुर्लभराज, इसके. आगे - भीम द्वितीय तक संग्व्या १९६ के ऐसा, उसके पश्चात उसके स्थान पर जयन्तसिंह-अभिनवसिद्धराज | (२१६) वि० सं० १०८३-इ० ए० भाग ६ पृष्ठ १९९ । चौलक्य महाराजाधिराज भीमदेव द्वितीय का कडा में दानपत्र जा अणहिलया टक में दिया गया था। मूलराज प्रथम, चामुण्डराज, वल्लभराज, दुर्लभराज, इसके पीछे भीम द्वितीय तक संख्या १९६ ऐसा । (२१७) वि० सं० १२८६-३० ए० भाग २० पृष्ठ ८३ । धारा के परमार देवपालदेव के राजन्त्रकाल का उदयपुर (ग्वालियर ) में शिलालेख । (२१८) वि० सं० १२८७-इ० ए० भाग ६ पृष्ठ २०१ । चालुक्य महाराजाधिराज भीमदेव द्वितीय का कडी में दानपन जो अणहिलपाटक में दिया गया था। इसका समय ठीक नहीं है। (२१९) वि० सं० १२८७(?)-काथगटे सम्पादित सोमेश्वरकृत कीर्तिको मुदी, एपेंडिक्स वी० तपा भा० इ० पृष्ठ २१८ । चालुक्य महाराजाधि- राज भीमदेव द्वितीय तथा चन्द्रावती के परमार महामण्डलेश्वर रान- कुर सोमसिंहदेन (जिमका पुत्र कान्हणदेव था ) के राजत्वकाल का आबू पर्वत पर शिलालेख जिसम लवणप्रसाददेव के पुन चौलुक्य(बघेला) महामण्डलेश्वर राणक वीरधवलदेव का वर्णन है। ( २२०) वि० सं० १२८७(१)-ए० रा० माग १६ पृष्ठ ३० । काय

.
घटे सम्पादित सोमेश्वरकृत-कीर्तिकौमुदी एपेंडिक्स ए०, तथा भा० इ०
पृष्ठ १७४ । आबू पर्वत का शिलालेख जिसमें वीरधवल के मंत्री वस्तु-
पाल और तेजहपाल की (सोमेश्वर से ) प्रशंसा है और चौलुक्य,
(बघेला ) अर्णोराज, लवणप्रसाद और वीरधवल तथा चन्द्रावती के
परमार धूमराज, धन्धुक, ध्रुवभट, रामदेव, उसके छोटे भाई यशोधवल
(जिसने चालुक्य कुमारपाल
के शत्रु, मालव के राजा बल्लाल को परा-
जित किया ), उसके पुत्र धारावर्ष, उसके छोटे भाई प्रह्लादन (जो
सामन्तसिंह से लडा) धारावर्ष के पुत्र सोमसिंहदेव और उसके पुत्र
कृष्णराजदेव का वर्णन है।
(२२१)
वि० सं० १२८८-इ० ए० भाग ६ पृष्ठ २०३। चौलुक्य महा-
राजाधिराज भीमदेव द्वितीय का कडी में दानपत्र जो अणहिलपाटक
में दिया गया था ।
(२२२)
वि० सं० १२८८-आ० स० वे० इ० भाग २ पृष्ठ १७० ।
मंत्री वस्तुपाल और तेजहपाल के मन्दिर का गिरनार में शिलालेख जिसमें
चौलुक्य (बधेला ) लवणप्रसाददेव तथा उसके पुत्र बीरधवलदेव का
वर्णन है।
(२२३)
वि० सं० १२८८ अथवा १२८९-आ० स० वे० इ० भागर
पृष्ठ १७३ तथा ए० रो० बा० प्रे० पृष्ठ ३१५ । मंत्री वस्तुपाल का
गिरनार में शिलालेख |
(२२४)
वि० सं० १२८९-३० ए० भाग २० पृष्ठ ८३ । धारा के
परमार महाराजाधिराज देवपालदेव के राजत्वकाल का उदयपुर'
( ग्वालियर ) में शिलालेख ।
-
.

(४७) (२२५) वि० सं० १२९५-इ० ९० भाग ६ पृष्ठ २०५ । चौलुक्य महाराजाधिराज भीमदेव द्वितीय का कड़ी में दानपत्र जो अणहिल्ल. पाटक में दिया गया था। (२२६) वि० सं० १२९६-इ० ए० भाग ६ पृष्ठ २०६ । चौलुक्य महाराजाधिराज भीमदेव द्वितीय का कड़ी में दानपत्र जो अणहिल्ल- पाटक में दिया गया था। (२२७) वि० सं० १२९६-ए० इ० भाग १ पृष्ठ ११९ । कीराम में वैद्यनाथ के मन्दिर का जैन शिलालेख । (२२८) वि० सं० १२९७-३० ए० भाग १७ पृष्ठ २३१ । त्रिकाल- गाधिपति चन्देल्ल महाराजाधिराज त्रैलोक्यवर्मदेव के राजन्यकाल का ककरेडी के महाराणक कुमारपालदेव का रीवा ( अब वृटिश म्यूजि- यम) में दानपत्र | कौरव वश में महाराणक धीहिल्ल, उसका पुत्र दुर्जय, उसका पुन शोजर्मन, उसका पुत्र जयवर्मन, उसका पुत्र वत्सरान, उसका पुत्र सलशणर्मन उसका पुत्र हरिराज, उसका पुत्र कुमारपाल । (२२९) वि० सं० ५२९८-३० ए० भाग १७ पृष्ठ २३५ । चन्देल महाराज त्रैलोक्यमल्ल के राजत्वकाल का ककरेडी के महाराणा हरि- राजदेव का रीगा ( अब वृटिश म्यूजियम ) में दानपत्र । धाहिल्ल से यत्सराज तक संख्या २२८ में वत्सरान का पुत्र की- तिवर्मन, उसका भाई सल्पणार्मन, उसका पुत्र [4] आह [3] धर्मन, उसका भाई हरिराज।

(४८) (.२३०) वि० सं०.१२९९-३० ए० भागः६ पृष्ठ-२०८ । चौलुक्य महाराजाधिराज तृभुवनपालदेव का कड़ी में दानपत्र जो अणहिल्लपा- टक में दिया गया था । । मूलराज प्रथम से भीम द्वितीय तक के लिये संख्या २१६ देखो; भीम द्वितीय के पश्चात त्रिभुवनपाल | (२३१) वि० सं० १३००-ए० री० पृष्ठ १८६ । शियालबेट की. मूर्ति का शिलालेख । (२३२) वि० सं० १३०५-बा० ग० भाग १ पृष्ठ ४७६ । महाराजा- धिराज [ उदय ] सिंहदेव के राजत्वकाल का भिमाल (श्रीमाल) में खण्डित शिलालेख । (२३३) वि० सं० १३११-९० इ० भाग: १: पृष्ठ २५ । बीरधवल के पुत्र चौलुक्य ( बघेला ) चीसलदेव का दभोई का खण्डित शिलालेख जिसे सोमेश्वर मे सङ्कलित किया । (२३४) वि० सं० १३१२-३० ए० भाग २० पृष्ठ ८४ । धारा के परमार महाराजाधिराज जयसिंहदेव के राजत्वकाल का रहतगढ़ में शिलालेख । (२३५) वि० सं० १३१५-२० रि० वा. प्रे० पृष्ठ १८६ । शियाल- -बेट की मूर्ति का शिलालेख । (२३६) वि० सं० १३१७-इ० ए० भाग ६ पृष्ठ ३१० । चौलुक्य (४९ ) (पावला ) महाराजाधिराज वीसलदेव के राज काल का कडी में दानपत्र निममें मण्डली के लूणपमाजदेव के पौत्र तथा समामसिंह के महामण्डलेश्वर राणक सामन्तसिंहदेव के दान का उल्लेख है। (२३७) वि० सं० १३१७-ए० इ० भाग १ पृष्ट ३२७ तथा आ० स० ३० भाग २१ चन्देल वीरवर्मन तथा उसकी रानी कल्याणदेवी का अजयगढ चहान का शिलालेख, जिसे वत्सराज के पौत्र तथा हरिपाल के पुत्र ने सङ्कलित किया । चन्द्रनश में कीर्तिर्मन (जिस ने चेदी कर्ण को पराजित किया ) उस का पुत्र सरलक्षण, जयर्मन, पृथ्वीवर्मन, मदन, परमर्दिन, त्रैलोक्यव- मैन, उस का पुत्र वीरनर्मन जिस ने महेश्वर और वीसलदेवी की पुत्री कल्याणदेवी से विराह किया । यह वीसलदेवी कुमार गोविन्दराज की पुती थी और महेश्वर ददीचि जाति के बादल का पौत्र तथा श्रीपाल का पुत्र था। (२३८) वि० सं० १३१८-डाक्टर बरगेप्स की एक प्रतिलिपि से । चन्देल वीरवर्मन (1) का झासी (अब लखनऊ म्यनियम ) में शिलालेख । (२३९) वि० मं० १३२०-३० ए० भाग ११ पृष्ठ ३४३ तथा भा० इ० पृष्ठ २२४ चौलुस्प ( वाघेल ) महाराजाधिराज अर्जुनदेव के राजकाल का वीयनल में शिलालेग्य । *प्रन्थकार ने सर्वत्र गिलालस लिखा है इस स यह नहीं कह सकत कि कौन तामूलपह भीर कौन शिलालस । ७ -- (२४०) वि० सं० १३२०- योग भाग १ पृष्ट ४७७ । भितमाल (श्रीमाल ) का शिलालेख जिसे सुभट ने संकलित किया था। (२४१) वि० सं० १३२४-ज० ३० ए० सो० भाग ५५ 1 पृष्ट ४६॥ मेवाड़ के गुहिल महाराज तेजहसिंहदेव के रानकाल का चित्तौरगढ़ में शिलालेख । (२४२) वि० सं० १३२५-आ० स० इ० भाग ३ पृष्ठ १२७ गयासुद्दीन बल्वन (2) के समय का वनराजदेव (1) का गया में शिलालेख। (२४३) वि० सं० १३२५--आ० स० इ० भाग २१ पृष्ठ ५१, चन्देल वीरवर्मन के राजकाल का अनपगढ़ में शिलालेख । (२४४) वि० सं० १३२६-डाक्टर हुला की प्रतिलिपि से , धारा के परमार जैसिंघदेव (नसिंहदेव ) के राजकाल का पधारों में शिलालेख । (२४५) वि० सं० १३२९-३० ए० भाग ११ पृष्ठ १०६ कोदि- णार का शिलालेख जिसमें चौलुक्य ( वाघेला ) वीसलदेव के कवि नानाक की प्रशंसा है और जिसे गणपतिव्यास ने सङ्कलित किया था। (२४६ ) वि० सं० १३३०-वो० गे० भाग १ पृष्ठ ४७८ , भिनमाल (श्रीमाल ) का खण्डित शिलालेख जिसमें महाराजाधिगम उदयसिंह- देव का नाम आया है-इसे सुभट ने संकलित किया ।

(११) (२४७) वि० सं० १३३१-३० ए० भाग २२ पृष्ठ ८०, मा०३० पृष्ठ ७४, तथा आ० स० इ० भाग २३ , मेढपाट ( मेवाड ) के गुहि- लवंश का चित्तोर में शिलालेख जिसे वेदशर्मन ने सकलित किया । इस में नीचेलिखे राजाओं की प्रशंसा है-वप्पा, गुहिल, भोज, श्रील, कलभोज, मल्लट, भर्तृभट, सिंह, महायक, शम्माण, अल्लट, नरवाहन, शक्तिकुमार, आमप्रसाद, शुचिनानि, नरवर्मन । (२४८) वि० सं० १३३२-३० ए, भाग २१ पृष्ठ २७७ । चौलुक्य (घाघेला ) महाराजाधिराज सारङ्गदेव के राजकाल का खोखा का खण्डित शिलालेख। (२४९) वि० सं० १३३३-वो० ग० भाग १ पृष्ठ ४८० , महाराज- कुल [चा] चिगदेव के राजकाल का भिनमाल ( श्रीमाल ) में शिलालेख जिसे सुभट ने सकलित किया । (२५०) वि० सं० १३३४-वो० ग० भाग १ पृष्ठ २८१, महाराज- कुल चाचिग के राजकाल का भिनमाल (श्रीमाल ) में शिलालेख । चाहुमान वंश में महागजकुल समरसिंह ; उसका पुत्र महाराजा- धिराज उदयसिंहदेन ; उसका पुत्र वाहटसिंह ; और [ उसका पुत्र '] चामुण्डराजदेव । ( २५१) वि० सं० १३३0-ज० ब० ए० सो० माग २२ पृष्ठ १८ ॥ मेदपाट ( मेवाड ) के तेजहसिंह और उनकी स्त्री जयतल्लदेवी के पुत्र गुहिल मामर सिंह के रानकाल का चित्तौरगढ में शिलालेग्य ।

( ५२ ) (२५२) वि० सं० १३३५-डाक्टर वरगेस की एक प्रतिलिपि से, चौलु- क्य ( वाघेला.) महाराजाधिराज सारङ्गदेव के राजकाल का वृटिश म्यूजियम में शिलालेख। (२५३) वि० सं० १३३७-ज० ब० ए० सो० भाग ४३ पृष्ठ १०३, हम्मीर गयासदीन (गिया मुद्दीन वल्वन) के समय का रोहतक जिले के बाहर गांव की "पालम बावली" का शिलालेख । हरियाणक देश में पहिले तोमर लोग राज्य करते थे, उसके पश्चात् चौहान लोग और उसके पश्चात् निचेलिखे शक राजालोग साहवदीन ( शहाबुद्दीन गोरी ), शुद्धवदीन ( कुतबुद्दीन ऐवक ), अस- मसदीन ( शमसुद्दीन अलतभिश), पेरुज-साहि ( रुक्नुद्दीन फीरोजशाह प्रथम ) जलालदीन ( जलालुद्दीन ), मौजदीन ( मुईजुद्दीन बहराम ), अलावदीन ( अलाउद्दीन मसऊद ), नसरदीन ( नासिरुद्दीन महमूद ); और गयासदीन ( गियासुद्दीन वलबन)। (२५४) वि० सं० १३३७-आ० स० इ० माग-२१ पृष्ठ ५२ । च- न्देल वीरवर्मदेव के राजकाल का अजयगढ़ की चट्टान पर शिलालेख । (२५५) वि० सं० १३३७-आ० स० इ० भाग २१ पृष्ठ ७४ । का- लभराधिपति चन्देल महाराजाधिराज वीरवर्मदेव का राहि में दानपत्र , चन्द्रात्रेय राजकुमारों के वंश में मदनवर्मन. त्रैलोक्यचर्मन, वीरव- मन 'इस वंश में प्रसिद्ध ये लोग हुए, जयशक्ति और विजयशक्ति आदि। . (२५६) वि० सं० १३३९-यो ० ग० भाग १ पृष्ट २८३ , महारान- फुल साम्बतसिंहदेव (1) के राजकाल का भिनमाल (श्रीमाल ) में खण्डित गिगलेख। (२५७) वि० सं० १३४०-ए० इ० भाग ४ पृष्ठ ३१३ महाराज- कुल साम्य (म?) न्तींसहदेव के राजकाल का रूपादेवी का 'बु' ( अब जोधपुर ) में शिलालेख । समरसिंह ; उस का उत्तराधिकारी उदयसिंह ; उस का पुन चाहुमान चार ( चाच); उस की पुत्री (लक्ष्मीदेवी से ) रूपादेनी जो राजा तेजसिंह की पत्नी हुई और जिस का पुत्र क्षेत्रसिंह हुआ । (२५८) वि० सं० १३४०-डाक्टर बरगेस की एक प्रतिलिपि से, का- लजर का शिलालेख । (२६९) वि० सं० १३४०-डाक्टर हानली की एक प्रतिलिपि से । चन्देल वीरवर्मदेव के राजकाल का गर्ह का शिलालेख जिममे एक स्त्री के सती होने का वर्णन है। (२६०) वि० सं० १३४२-३० ए० भाग १६ पृष्ट ३४७ तथा भा० इ० पृष्ठ ८४ , मेदपाट (मेवाड ) के गुहिल समरसिंह का आबू पर्वत पर शिलालेख (२) जिम प्रियपद के पुत्र बेदशर्मन ने सकग्नि किया था। इस शिलालेख में नाचेलिखे गुहिल राजाओं की प्रशसा है वप्प ( वप्पन ) गुहिल भोज, शील कालभोज, भर्तभट, सिंह, महा- जिक, शुम्मान (खुम्मन ), ऊल्ल्ट, नरवाहन, शक्ति कुमार, शुचिर्मन, नरतर्मन, कोतिर्मन, घरट, वैरिसिंह, विजयसिंह, जरिसिंह, चोड, विकु- मसिंह, क्षेमसिह, सामन्तसिंह, कुमामिह, मयनसिंह, पद्मसिंह, नेत्रसिह, तेतहमिह, और समरसिंह। . , , , ( ५६ ) अज - " (२७३) वि० सं० १३७२-आ० स० इ० भाग २१ पृष्ट ५२, यगढ़ के द्वार के स्तूप पर का शिलालेख (१७४) वि० सं० १३७३-डाक्टर फुहेर की प्रतिलिपि से । सुलतान कुतबुदी (कुत्खुद्दीन ) के राजकाल का जोधपुर में शिलालेख । (२७५) वि० सं० १३७७-९० रि० भाग १६ पृष्ठ २८२ । : आबू पर्वत का एक खण्डित शिलालेख | इस शिलालेख में सिन्धुपुत्र, लक्ष्मण, शाकम्भरी का माणिक्प, अधिराज (१)............दन्दन (!), कीर्तिपाल, समरसिंह, उदयसिंह, मानवसिंह, प्रताप, आदि का वर्णन है। (२७६) वि० सं० १३८०-सर ए० कनिंघम की एक प्रतिलिपि से उदयपुर (ग्वालियर ) का शिलालेख (२७७) वि० सं० १३८४-प्रो० ब० ए० सो० १८७३ पृष्ठ १०५ , महमन्द साहि ( मुहम्मद इन्न तुगलक ) के समय का दिल्ली म्यूजि- यम में शिला लेख। (२७८) वि० सं० १३८४-ए० ३० भाग १ पृष्ठ ९३ । महम्मद साहि ( मुहम्मद इब्न तुगलक ) के समय का दिल्ली म्यूजियम में एक दूसरा शिलालेख । इस शिलालेख में म्लेच्छ महावदीन ( शहाबुद्दीन गोरी ) को प्रथम तुरस' लिखा है जिसने दिल्लिका (दिल्ली) में राज्य किया ।

(२७९)
वि० सं० १३८४-३० ए० भाग १५ पृष्ठ ३६० | मेहर के
नायक ठेपक (देवक) का हायसिना (अब भावनगर म्यूजियम)
में शिला लेख | इस लेख में पहिले चन्द्र (?) वंश में एक राना
शगार (खणर) का वर्णन है, जिप्त के अंश में नसधवल (यशो
धवल) हुआ जिस ने सूर्यवंश की प्रियमला से विवाह क्रिया और उस
से तीन पुत्र, मल्ल, मण्डल और मेलिग हुए । इस लेख में फिर लिखा
है कि वाशलराज (वाखलराम) के वंश में नागार्जुन (मण्डलीक का
) हुआ, जिप्त के पुत्र महानन्द ने मङ्गलराज (?) की कन्या
रूपा से विवाह किया । इस से टेपक उत्पन्न हुआ। इस मेहर ठंपक को
रामा महिस ने रामपदवी दी और वह वल्लादिन्य के बंशवाले (जो सूर्य
विकल का वंशम था) राजा कुन्तराज के आधीन था ।
(२८०)
वि० सं० १३८७-आ० स० के० ३० नम्बर २ 'चन्द्रा-
पती के चाहुमान तेझसिंह (8) के राजकाल का आवूपर्वत पर
शिलालेख
(२८१)
वि० सं० १३९०-आ० स० इ० भाग २१ पृष्ठ १४३ ।
केवटी-कुण्ड के स्तूप का शिलालेख ।
(२८२)
वि० सं० १३१०-ज० ब० ए० सो० भाग ५ पृष्ठ ३४२॥
मुहम्मद इन्न तुगलक (?) के समय का चुनार के दुर्ग में शिला-
लेख।
:
(२८३)
वि० सं० १३९४-सर ए० कनिंघम की एक प्रति लिप
से । उदयपुर (ग्वालियर) के दो शिलालेख ।
-

(५८)
(२८१)
वि० सं० १३१४-इ० ए० भाग २ पृष्ठ २५६ । चन्द्रा-
वती के तेझसिंह के पुत्र चाहुमान राजा कान्दणदेव के राजकाल.
का आबूपर्वत पर शिलालेख ।
( २८५)
वि०सं० १३९७-आ० स० इ० भाग २१ पृष्ठ १४३ ।
सूकस्थान के महाराज हमीरदेव के राजकाल के केवटीकुण्ड के तीन
स्मारक स्तूंपों के शिलालेख ।
(२८६)
वि० सं० १४०४-आ० स० इ० भाग २१ पृष्ठ १९ ।
सिधितुङ्ग (?) के राजकाल का मर्फ दुर्ग पर शिलालेख ।
(२८७)
वि० सं० १४०४-आ० स० इ० भाग ९ पृष्ठ ३४ । महा-
रांज वीरराजदेव () की रानियों के सती स्तूपों के रामपुर में
शिलालेख।
(२८८)
वि० ० सं० १४१२-आ० स इ० भाग ९ | उचहुडनगर के
महाराज वीररामदेव के राजकाल का कारीतलाई में शिला-
ख।
(२८९)
वि० सं० १४२१-इ० ए० भाग २० पृष्ठ ३१४ [सुलतान
पियरोज साह (फोरोज शाह) के राजकाल में गया के अनु-
शासक कुलचन्द का गया में शिलालेख ।
ठाकुर कुलचन्द (कुलचन्दक), कुमार व्याघ्र (व्याघ्रराज)
के वंश के टाकुर ढाला के पौत्र तथा ठाकुर हेमराज के पुत्र थे।

( ५ ) (२९०) वि० सं० १४३७-३० ए० भाग ८ पृष्ठ १८६ तथा १० रि० वा० प्रे० पृष्ठ १८१ । प्रभास के वाजक नायक भर्म तथा उसके मन्त्री कर्मसिंह के समय का धामलेज में शिलालेख । (२९) वि० सं० १४३९--आ० स० इ० भाग ६ पृष्ठ ७९ । बाउ- गूनर यश के आसलदेव के पुत्र महाराजाधिराज गोगादेव के समय का और सुलतान पीरोजसाहि (फीरोजशाह) के रानकाल का माचाडी (अलवर के निकट ) में शिलालेख | (२९२) वि० सं० १४४२-९० रि०या० ० पृष्ठ १८५ । राष्ट्रोड (राष्ट्रकूट) वंश के नायक भर्म के समय का वीयरल में शिलालेख । ( २९३) वि० सं० १४४३-आ० स० इ० भाग ३ पृष्ठ १८ । महा- सार के राजा नाथदेव के गमकाल का मसार (महासार) की जेन- मूर्ति पर शिलालेख | (२९४ ) वि० सं० १४४५-आ० स० इ० भाग १७ पृष्ठ ४१ । बोरमदेव के सतीस्तूप का शिलालेख । (२९५) वि० सं० १४४५-५० रि० या० ० पृष्ठ १७८ | चूढा- समा के कुछ नायकों का वन्थली (जूनागढ़) में शिलालेख । इस शिलालेख में शङ्गार (खगार), जपसिंह, महिपति, मोकल- सिंह आदि का वर्णन है। ( २९६) वि० सं० १४४५-५० रि० या प्रे० पृष्ठ १८३ । पतुंश- वंश के कुछ नापकों का चोरसाड (जूनागढ) में शिलालेख ।

इस शिलालेख में लूणिग, उसके पुत्र भीमसिंह, उसके पुत्र
लावण्यपाल, उसके पुत्र लक्ष्मसिंह, लझ और कक्षणपाल, ' लक्ष्मसिंह के
पुत्र राजसिंहआदि का वर्णन है।
(२९७)
वि० सं० १४५२-५० रि० पृष्ठ १७९ । योगिनी पुर (दिल्ली)
के नसरथ (नसरत शाह) और गुजरात के दफर खां (जफर खा)
के समय का मडग्रोल में शिलालेख |
(२९८)
वि० सं० १४५५-मिथिला के देवसिंह के पुत्र महाराजा-
धिराज शिवसिंहदेव का विहार (दरभङ्गा) (सन्दिग्ध !) में दानपत्र
जो पण्डितविद्यापतिको दिया गया था।
(२९९)
वि० सं० १४५८-३० ए० भाग २२ पृष्ठ ८३ । रायपुर
के महाराजाधिराज ब्रह्मदेव तथा उसके मंत्री नायक हाजिरामदेव के
समय का रायपुर (अब नागपुर म्यूजियम) में शिलालेख ।
लशमिदेव (लक्ष्मीदेव), उसका पुत्र सिंघ (सिंह), उसका पुत्र
रामचन्द्र, उसका पुत्र हरिरायब्रह्मन (ब्रह्मदेव अथवा रायमलदेव)
(३००)
वि० सं० १४६६-आ० स० इ० भाग २१ पृष्ठ १८ ।
महिपति परमदिन का रासिन में शिलालेख |
(३०१)
वि० सं० १४६७-ज० ब० ए० सो० भाग ३१ पृष्ठ ४२२ ।
महाराजाधिरान वीरङ्ग (अथवा (वीरम?) देव का ग्वालियर में
शिलालेख

(११) वि० सं० १४७०-(१४७१ के स्थान पर)-ए० इ० भाग २ पृष्ठ २३० खल्बाटिका के कलचुति (कलचुरी) हरिब्रह्मदेव (ब्रह्मदेव) के समय का खलारी में शिलालेख जिसे मिश्रदामोदर ने सड्कलित किया था। अहिहय (हैहय) वंश के कलचुति ( कलचुरी) शाखा में सिंहण, उसका पुत्र रामदेव (जिस ने भोणिङ्गदेव को लड़ाई में मार डाला), उस का पुत्र हरिब्रह्मदेव । ( ३०३) वि० सं० १४७३-५० रि० वा० प्रे० पृष्ठ १७६ । चूडा. समा के नायक जयसिंह द्वितीय के समय का जूनागढ़ (गिरनार) में शिलालेख भिसे घाँधर के पौत्र तथा मत्रीसिंह के पुत्र शामल न सहकालित किया। यदुवंश में मण्डलीक प्रथम, उसका पुत्र महिपाल, उस का पुत्र खगार, उस का पुत्र जयसिंह प्रथम, उसका पुत्र मुक्तसिंह, उस का पुत्र मण्ड- लोक द्वितीय, उम का छोटा भाई मेलिंग, उस का पुत्र जयसिंह द्वितीय । (३०४) वि० सं० १४८१-ज० ब० ए० सो० भाग ५२ पृष्ठ ७० । साहि आलम्भक मालया का इशङ्गगोरी उर्फ अल्प मां (जिस ने माण्डू [मण्डपपुर] को बसाया) के समय का देवगढ (अब कलकत्ता म्यूजियम ) का जैन शिलालेख । (३०५) वि० सं० १४८५-९० इ० भाग २ पृष्ठ ४ १ ० तथा भा० इ० पृष्ठ ९६ । मादपाट ( मेवाड ) के गुहिल मोकल का चित्तौरगढ में शिलालेख जिसे भट्टविष्णु के पुत्र एफनाथ ने सङ्कालत किया । गुहिल्वंश में अरिसिंह, उस का पुन हम्मीर, उस का पुत्र क्षेत्र, , ( ६२ ) उस का पुत्र लक्षसिंह, उसका पुत्र मोकल (जिसने यवनों के राजा पौरोज अर्धात सुलतान फीरोजशाह को पराजित किया)। (३०६) वि० सं० १४९३-डाक्टर बर्गेस की एक प्रतिलिपि से देवगढ का जैन शिलालेख। (३०७) वि० सं० १४१४-भा० इ० पृष्ठ ११२ । मेदपाट (मेवाड़.) के मोकल के पुत्र गुहिल कुम्भकर्ण के राजकाल का नागड़ में मेन शिलालेख । (३०८) वि० सं० १४९६-ज० ब० ए० सो भाग १६ पृष्ठ १२२१ ॥ भैरवेन्द्र का ऊमंगा (बिहार) में शिलालेख । ऊमंगा नगर में चन्द्रवंशी भूमिपाल था, उस का पुत्र कुमारपाल, उस का पुत्र लक्ष्मणपाल उस का पुत्र चन्द्रपाल उस का पुत्र नयनपाल उस का पुत्र सबढपाल, उस का पुत्र अभयदेव, उस का पुत्र भल्लदेव, उस का पुत्र केशिराज, उस का पुत्र वरसिंहदेव, उस का पुत्र भानुदेव, उस का पुत्र सोमेश्वर, उस का पुत्र भैरवेन्द्र । (३०९) वि० सं० १४९६-भा० इ० पृष्ठ ११४ तथा प्रा० ले० मा० भाग २ पृष्ठ २८ । मेदपाट ( मेवाड़) के गुहिल राणाकुम्भकर्ण के राजकाल का सादडी में जैन शिलालेख । इस शिलालेख में निम्नलिखित गुहिल राजाओं की नामावली है:- बप्प, गुहिल, भोज, शील, कालभोज, भर्तृभट, सिंह, महायक, खुम्माण, अल्लट, नरवाहन, शक्तिकुमार, सुचित्रर्मन, कीर्तिवर्मन, योगराज,वंश- पाल, वैरिसिंह, धीरसिंह, अरिसिंह, चोडसिंह, विक्रमसिंह, रपासिंह, खेमासिंह " , मा० । सामन्तसिंह, बुमारांसह, मयनांसंह, पद्मसिंह जैत्रसिंह. तेजस्विसिंह, समरसिंह, भुवनसिंह, (जिसने चाहुमान राजा कौतुर और सुल्तान, अल्लापदान को पराजित किया ), उस का पुत्र जयसिंह, लक्ष्मसिंह (नि स ने माल्य राजा गोगादेव को पराजित किया ) उस का पुत्र अजयसिंह, उस का भाई अरिसिंह, हम्मीर, खेतसिंह, लक्ष, उस का पुर मोकल, कुम्भकर्ण । (३१०) वि० सं० १४९७-ज० ब० ए० सो माग ३१ पृष्ट ४२२॥ महाराजाधिराज डुगरेन्द्रदेव के राजकाल का मालियर में शिलालेख । (३११) वि० सं० १५००भा० इ० पृष्ठ १६२ तथा प्रा० ले. भाग २ पृष्ठ २६ महुदा का शिलालेख जिम में गुहिल्ल सारङ्ग की पृथ्वी पर श्रेष्ठिन् मोकल के तालान बनाने का वर्णन है । (३१२) वि० सं० १५०३-सर ए० वनिंघम की प्रतिलिपि से | उदय- पुर (मारियर) का शिलालेग्य । (३१३) वि० सं० १८१०-०२० ए० सी० भाग ३१ पृष्ट ४२३ तथा डास्टर वर्गस की एक प्रतिलिपि । महाराजाधिराज डुगरेन्द्रदेव के राजकाल का ग्वालियर में शिगलेख । (३१४) वि० स० १०१७-आ० स० इ० भग २३ । चितौरगढ में गृहिल कुम्भकर्ण के नीतिस्तम्भ के ऊपरी भाग या शिगलेरा (३१५) वि० मं० १८१६-आ० स० इ० भाग ३ पृष्ट १११ । गया में गयामुरी देवी के मन्दिर का गिलालेख ! मर ए० फनिहम के लिये जो वृतान्तलिखा गया था उस के अनुसार इस लेख में निम्नलिखित नाम है.... सिन्धुराज, दामी (प्रथम); सन्देवर; दामी ( द्वितीय ); महीपाल; देवीदास; सूर्यदाम; उस का पुत्र शक्तिसिंह, उस का पुत्र मदन । (३१६) वि० सं० १५४५-भा० इ० पृष्ठ ११७ | मैदपाट ( मेवाड़.) के कुम्भकर्ण के पुत्र गुहिल राजमल के समय का उदयपुर (राजः पुताना ) में शिलालेख जिस केशव-शोटिङ्ग के पौत्र तथा अतृ के पुत्र महेश्वर ने सङ्कलित किया था । इस शिलालेख में गुहिल राजा अरिसिंह, हमीर, क्षेत्रसिंह, लक्षसिंह, मोकल, कुम्भकर्ण तथा राजमल की विशेषतः प्रशंसा है। (३१७) वि० सं० १५५३-५० रि० बा० प्रे० पृष्ठ २६६ । बोरसद में एक कुएं की सीढ़ी पर का शिलालेख । (३१८) वि० सं० १५५५-५० रि० वा० प्रे० पृष्ठ २६४ । पातसाह महमूद ( सुलतान महमूद बैकर ) के राजकाल का दण्डाहिदेश के वाघेल वीरसिंह की पत्नी राणी रुणादेवी का अडालिज के कुएं का शिलालेख । वाघेल मोकलसिंह, उस का पुत्र कर्ण, उस का पुत्र मूलराज, उस का पुत्र महीप, उस का पुत्र वीरसिंह जिस ने रुडादेवी से विवाह किया, उन के पुत्र वरसिंह और जेत्र (? जैत्र) ( ३१९) वि० सं० १५५६-३० ए० भाग ४ पृष्ठ ३६८ तथा ए० रि० वा प्रे० पृष्ठ २५४ और ए० इ० भाग ४ पृष्ठ २९८ । पातु- साह महमूद (मुलतान महमूद बैकर) के राजकाल का वाई- हरीर का अहमदाबाद के कुऐं का शिलालेख | (३२०) वि० सं० १५५६ तथा १५६१-न० ब० ए० सो० भाग १६ पृष्ठ ७९ । भेदपाट (मेवाड) के गुहिल राजमल्ल (कुम्भकर्ण का पुत्र) तथा उसकी पत्नी शृंगारदेवी [ जो कि मरुस्थलि (मारवाड़) के रणमल्ल के पुत्र राजकुमार योध की पुत्री थी] कानगरी ( चित्तौर के निकट) में शिला लेख जिसे जोटिङ्गकेशव के पौत्र तथा अतृ के पुत्र महेश ने सङ्कलित किया था। (३२१) वि० ० स० १५५७(१)-गुहिल रायमल्ल (राजमछ) के राज- काल का नारले में शिलालेख | (३२२) वि० सं० २५८१-आ० स० इ० भाग ५ पृष्ठ १४४ । सुलतान इब्राहीम लोदी के राजकाल का दिल्ली सिवालिक स्तूप पर शिलालेख । (३२३) वि० सं० १५८७-८० इ० भाग २ पृष्ठ ४२ तथा भा० इ० पृष्ठ १३४ । पुण्डरीक के मन्दिर के सप्तम जीर्णोद्धार का शिला- लेख जिस में गुजरात के सुलतान महिमूद (महमूद बैकर ), मदाफर साह (मुजफर द्वितीय) और बाहदर साह (बहादुर) तथा चित्रकूट के गुहिल राजा कुम्भराज, उस के पुत्र राजमल्ल, उस के पुत्र सप्रामसिंह और उसके पुर रनसिंह का वर्णन है । इसे लावण्यसमय ने संकलित किया था । (३२४) वि० सं० १५९५-प्रो० ब० ए० सो० १८७१ पृष्ठ ११ । सम्राट हुमाऊं (हुमायूं) के राजकाल का तिल्वेगामपुर में शिक्षा- लेख। ९ . . ज (३२५) वि० सं० १५९७ (१५५७ के स्थान पर ! )-भा० ३० पृष्ठ १४० । मेदपाट के कुम्भकर्ण के पुत्र गुहिल राणा रायमल्ल (राम- मल) तथा उस के पुत्र महाकुमार पृथ्वीराज के समय का नारले में शिलालेख । (३२६) वि० सं० १६४६-प्रो० ब० ए० सो० १८७५ पृष्ठ ८३ सम्राट अकबर तथा उस के मंत्री टोडरमल के समय का बनारस में शिलालेख (३२७) वि० सं० २६५०९० इ० भाग २ पृष्ठ ५ शत्रुञ्जय आदी- श्वर के मंन्दिर का शिलालेख जिस में तपागच्छ के कुछ जनों की प्रशंसा तथा सम्राट अकब्बर (अकंबर ) का वर्णन है । इसे हेमविजय ने सङ्कलित किया था। (३२८) वि० सं० १६५१ तथा १६५२-ए० इ० भाग १ पृष्ठ ३२३ अण हिलबाड में वाडीपुर-पार्श्वनाथ के मन्दिर का शिलालेख नित में वृहत- -खरतर गच्च की पट्टावली है । इस का समय सम्राट अकबर ( अकबर ) के राजकाल का है। (३२९ वि० सं० १६५२-इ० ए० भाग २ पृष्ठ ५९ । सम्राट अक- वर के राजकाल का शत्रुञ्जय का जैन शिलालेख | (३३०) वि० सं० १६५४-प्रो० ब० ए० से ० १८७६ पृष्ठ ११ महाराजाधिराज मानसिंह के समय का रोहतास में शिलालेख । ८ - वि. सं. १६५४-मा० ३० पृष्ठ १४४ । मेघाड के महाराणा अमरसिंहजी के राजकाल का सादडी में शिलालेख । वि० सं० १६७५-ए० इ० भाग २ पृष्ठ ६० । सम्राट जहांगीर के राजकाल का शत्रुजय का जैन शिलालेख । (३३३) वि० सं० १६७५ और १६७६-५० इ० भाग २ पृष्ठ ६४ । हालार (हलार प्रान्त ) में नवीनपुर ( नवा नगर ) के याम शत्रुशल्य के पुत्र जसवन्त के समय का शनुमय में जैन शिलालेख । (३३४) वि० सं० १६८०-० ५० ए० स० १८७५ पृष्ठ ८२ । 'चन्द्रवंश के राजकुमार वासुदेव के समय का बनारस में शिलालेख । (३३५) वि० सं० १९८३-९० इ० भाग २ पृष्ठ ६८ । सम्राट निहा- णगीर ( जहांगीर ) के राजकाल का शत्रुञ्जय का जैन शिलालेख जिसे देवसागर ने सङ्कलित किया। (३३६) वि० सं० १६८६-९० इ० भाग २ पृष्ट ७२ । सम्राट शाहा- ज्याहा (शाहजहां ) के राजकाल का शत्रुञ्जय का जैन शिलालेख । (३३७) वि० सं० १६८८-ज० व० ए० सी० भाग ८ पृष्ठ १९५ । रोहतास दुर्ग के कोथोटिय फाटक के ऊपर की पटिया पर तोमर मित्र- सेन का शिलालेख जिसे कृष्णदेव के पुत्र शिवदेव ने संकलित किया था। तोमर वंश में गोपाचल ( ग्वालियर ) में वीरसिंह, उस का पुत्र उद्ध- रण, उस का पुत्र वीरम, उस का पुत्र गणपति, उस का पुत्र हूंगुरासंह (डूंग- . , " (१८) रासह ? ), उस का पुत्र कीर्तिसिंह, उस का पुत्र कारयाणसाहि, उस का पुत्र मानसाहि, उस का पुत्र विक्रमसाहि, उस का पुत्र रामसाहि, टस का, पुत्र शालिवाहन, उस के पुत्र श्यामसाहि और मित्रसेन (जो शाहिमरला लदीन के समकालीन थे) (३२८) वि० सं० १६८९-९० इ० भाग १ पृष्ठ ३०१ । वि० सं० १२०८ के बडनगर शिलालेख (संख्या १३६ ) के पुनः नवीन कर- के देने का समय । (३३९) वि० सं० १७१७-आ० स० इ० भाग २१ पृष्ठ १२१ । चम्बा का शिलालेख। (३४०) वि० सं० १७१८, १७२२ तथा १७३२-भा० इ० पृष्ठ १४५ और ११० । राजनगर कांकरोली के शिलालेख जिस में रणग्छोड के " राजप्रशस्तिमहाकाव्य " के द्वितीय और तृतीय सर्ग हैं। (३४१) वि० सं० १७२४-ज० अ० ओ० सो० भाग ७ पृष्ठ ४ । गढ़ादेश के राज हृदयेश तथा उनकी रानी मुन्दरीदेवी का रामनगर में मिलालेख जिसे मण्डन के पुत्र जय गोविन्द ने संकलित किया था। इस शिलालेख में निम्नलिखित राजाओं का वर्णन है:-यादवराय ( गढ़ादेश का एक सम्राट), माधवसिंह, जगन्नाथ, रघुनाथ, रुद्रदेव, बिहारीसिंह, नरसिंहदेव, सूर्पभानु, यासुदेव, गोपाल साहि, भूपाल साहि, गोपीनाथ, रामचन्द्र, सुरतानसिंह, हरिहरदेव, कृष्णदेव, जगत सिंह, महासिंह; दुर्जनमल्ल, यशहकर्ण, प्रतापादित्य, यशश्चन्द्र, मनोहरासिंह, गोविन्दसिंह, रामचन्द्र, कर्ण, रत्नसेन, कमलनयन, नरहरिदेव, वीरसिंह, त्रिभुवनराय, पृथ्वीराज, भारतीचन्द्र, मदनसिंह, उग्रसेन, रामसाहि, तारा- . " , " चन्द्र, उदयसिंह, भानुमित्र, भवानीदास, सिसिंह, हरिनारायण, सब- लार्सह, राजसिंह, दादीराय, गोरक्षदास, अर्जुनासंह, सग्रामसाहि, दलपति जिस ने दुर्गावती से विवाह किया, उन का पुत्र वीरनारापण, दलपति का लघुभ्राता चन्द्रसाहि, उस का पुत्र मधुकरसाहि, प्रेमनारायण (प्रेमसा- हि ), हृदयेश जिस ने सुन्दरीदेवी से विवाह किया, उन की पुत्री (1) मृगावती। (३४२) वि० सं० १७७०- भा० इ० पृष्ठ १५५ । मेगाड के राणा समामसिंह के समय का उदयपुर ( राजपूताना) में शिलालेख । (३४३) वि० सं० १८६१-प्रो० ब० ए० सो० १८६९ पृष्ठ २०४ सम्भलपुर के नायक जयन्तसिंह की पत्नी रनकुमारिका का नागपुर में दानपत्र। (३४४) वि० सं० १८७४, १८७५ तथा १८७७-३० ए० भाग ९ पृष्ठ १९३ । महाराजाधिराज रणवाहादूरशाह की विधवा ललित निपुरसुन्दरीदेवी का उन के पौत्र महाराजाधिराज राजेन्द्रविक्रमशाह के समय का नेपाल में शिलालेख । पृथ्वीनारायणशाह, उस का पुन सिंहप्रतापशाह, उस का पुत्र रण बाहादुर शाह, उस का पुत्र गीरवाणयुद्धविक्रमशाह, उस का पुन राजेन्द्र विक्रमशाह। ( ३४५) वि० सं० १८७६- आ० स० इ० भाग ३ पृष्ठ २७० । मसार ( महासार ) का जैन शिलालेख । (३४६) वि० सं० १८८१- ९० इ० भाग २ पृष्ठ २४४ । पभोसा का जैन शिलालेख।

( ७० ) : (३४७) वि० सं० १९१५ तथा १९१७- आ० स० इ० माग २१ पृष्ठ १३६ । महाराजाधिराज श्रीसिंहदेव (i) का चबा का दान पत्र । विक्रम संवत् के विना समय के शिलालेख । (३४८) गुप्त इ० पृष्ठ १४६ । राजा यशोधर्मन (निस के आधीन राजा मिहिरकुल था) का मन्दसोरस्तूप पर शिलालेख जिसे कक के पुत्र 'वासुल ने सङ्कलित किया तथा गोविन्द ने खोदा था । (३४९) ज० रो० ए० सो० १८९४ पृष्ठ ४ । प्रतिहार बाउक का जोधपुर में शिलालेख । ब्राह्मण हरिचन्द्र के उस की क्षत्राणी पत्नी से चार पुत्र थे, भोग- भट, कक्क, रजिल और दद्द, रजिल्ल का पुत्र नरभट पेल्लापेल्ली, उस का पुत्र नागभट जिस ने जज्जिकादेवी से विवाह किया, उस के ओर भोज, तात का पुत्र यशोवर्धन, उस का पुत्र चन्दुक, उस का पुत्र शिलुक वा शीलुक (जिस ने भट्टिकदेवराम को पराजित किया), उस का पुत्र झोट, उस का पुत्र भिल्लादित्य, उस का पुत्र कक्क जिस ने पदिनी से विवाह किया, उन का पुत्र बाउक ( जिस ने उस मयूर को मारा जिस ने नन्दावल्ल को पराजित किया था । (३६०) ए० इ० भाग.१ पृष्ठ २४४ । कन्नौज के महेन्द्रपालदेव के राजकाल का पेहेवा (पहोआ, अब लाहोर म्यूजियम ) में शिलालेख जिस में तोमरवंश के कुछ जनों के विष्णु के मन्दिर वनवाने का वर्णन है । इसी वंश में राजा नाउल थे, उन के एक सन्तान, वजूट ने मङ्गल- देवी से विवाह किया, उन का पुत्र जज्जुक जिस ने चन्द्र और नायिका , पुन तात ( ७१ ) से विवाह किया, उन के पुत्र गोग्ग, पूर्णराज, तथा देवराज । (इसे भट्टराम के पुत्र मु (?) ने मङ्कलित किया। , ए०३० भाग १ पृष्ठ १२२ तथा आ० स० इ० भाग २१ । चन्देल्ल का खजुराहो में खण्डित शिलालेख जिस में जेजाक मिजाक और हर्षदेव तथा ( कनौज के) क्षितिपालदेव का वर्णन है। (३५२) ए० इ० भाग १८ पृष्ठ २३७ तथा आ० स० इ० भाग १०॥ महाराजाधिराज यशोवर्मन के पौत्र तथा कृष्णाप और उसकी स्त्री आसन के पुन चद्रेल्लदेवलब्धि के दुदहि में शिलालेख । (३५३) ए० इ० भाग १ पृष्ठ २२१ तथा आ० स० इ० भाग २१ चन्द्रेल का महोगा (अब लखनऊ म्यूजियम ) में खण्डित शिलालेख जिस में जेजा और उस के लघुभ्राता वीजा, धग, उस के पुत्र गण्ड, उस के पुत्र विद्याधर (जो धारा] के भोजदेव का समकालीन [१] था), विजयपाल (जो चेदी गागेयदेव का समकालीन था), और उस के पुन कीनियर्मन ( जिस ने लक्ष्मीकर्ण अर्थात् चेदीकर्ण को विजय किया) का वर्णन है। ( ३५४) ए० इ० भाग १ पृष्ठ १९७१ चन्देल्ल मदनपर्मदेव का मऊ (पा कलकत्ता म्यूजियम ) में खण्डित शिलालेख जिस में धन, पुत्र गण्ड, उस के पुत्र विद्याधर, उस के पुत्र विजयपाल, पुन कीर्तिवर्मन, उस के पुत्र सलक्षणर्मन, उसके पुत्र जयवर्मन, सलक्षणर्मन के लघुभ्राता पृथ्वीवर्मन, और पृथ्वीवर्मन के पुत्र मदनर्मन का वर्णन है। (३५५) ज० ब० ए० सो० भाग १७ पृष्ठ ३१७ तथा आ. उस के उस के स०३० - ( ७२ ) भाग २१ पृष्ठ ३९ । चन्देल्ल का कालजर में खण्डित शिलालेख.. निस में विनयपाल, चेदीकर्ण, जयवर्मन, मदनवर्मन उस के लघुभ्राता प्रतापवर्मन और वीरवर्मन का वर्णन है। (३५६) ए० इ० भाग १ पृष्ठ ३३३ तथा आ० स० इ० भाग २१ । चन्देल्ल भोजवर्मन के समय का अजयगढ़ की चट्टान का शिलालेख जि- स में वास्तव्य कायस्थजाति के कुछ जनों का वर्णन तथा चन्देल्ला गण्ड, कीर्तिवर्मन, परमर्दिन, त्रैलोक्यवर्मन और भोजवर्मन का उल्लेख है । (३५७) मो० वे० ज० पृष्ठ ८२ । अर ( राजपुताना उदयपुर के निकट ) का खण्डित शिलालेख जिस में [ गुहिल ] राजा शक्तिकुमार का नाम है। (३५८) भा० इ० पृष्ठ ७२ । उदयपुर ( राजपुनाना ) का खण्डित शिला- लेख जिप्त में (गुहिल ) राजा शक्तिकुमार और शुचिर्मन का नाम है। ( ३१९) ए० इ० भाग १ पृष्ठ २३३ । मालवा के परमार अनुशासकों का उदयपुर (ग्वालियर ) में खण्डित शिलालेख जिस में परमार की वं. शावली यों दी है, उपेन्द्रराज, उस का पुत्र वैरिसिंह प्रथम, उस का पुत्र सीयक, उस का पुत्र वाक्पति प्रथम, उस का पुत्र वैरिसिंह द्वितीय, वज्रट, उस का पुत्र हर्ष (जिस ने ) [ राष्टकूट ] राजा खोटिंग को पराजित किया ), उसका पुत्र वाक्पति द्वितीय (जिस ने त्रिपुरी के युवराज द्वि- तीय को जीता ), उस का लघुभ्राता सिन्धुराज, उस का पुत्रभोजराज (जो इन्द्ररथ तोग्गल [ ? ] और [चालुक्य ] भीम [ प्रथम ] से लड़ा था), और उदयादिस ।

( ७३ )
,
.
.
(३६.)
ए० ई० भाग १ पृष्ठ ३५० तथा ३०३० नम्बर ५२ । पर
मार महाराजाधिराज जयवर्मदेव का उज्जैन ( अत्र रायल एशियाटिक
सोसायटी) में प्रथम दानपन जो वर्धमानपुर में दिया गया था ।
उदयादित्य, नरवर्मन, यशोनर्भन, जयमन ।
(३६१)
ए० इ० भाग १ पृष्ठ २१५ । सल्लमणसिंह का झामी (अत्र
रखनऊ म्यूजियम ) में खण्डिन शिलालेग्व जिममें क्या ज, नायक
सीका और मामक (2), रक्खट और रजहपाल, राजदेवा, [चन्देल्ल]
कीर्तिवर्मन, गणपाल (1) अति के [ परमार ] उदयादित्य, नृसिंह,
होर वा हीराशु ( १ ) और सल्लेशसिंह का वर्णन है ।
(३६०)
भा० इ० पृष्ठ २०६ । चौलुक्य महाराजाधिराज कुमारपालदेव
के राजकाल का रत्नपुर ( मारवाड ) में खण्डित शिलालेख जिमम
पनपाक्षदेव अथवा उसकी रानी महाराज्ञी गिरिजादेवी थी एक आज्ञा
तथा महाराज रायपालदेव का वर्णन है।
(३६३)
भा० इ० पृष्ठ २१४ । चौदस्य ( वाघेला) विश्वलदेव का
कोम्मे में अपूरा शिलालेग्य । अर्णोगज ने सलक्षण देवी मे चिनाह किया
उनका पुत्र लपणप्रसाद जिसने मदन दी से विवाह किया, उनका पुत्र
धीर धनल जिसने चयजल देवी से विवाह किया, उनका पुत्र विसरदय ।
(३६४)
आ० स० वे० इ० भाग २ पृष्ट १०९ तथा ५. रि० वो.
प्रे० पृष्ठ ३०२ । चुडासमा नायकों का गिरनार मे खण्डिन गिला.
रख । यादनपश में मण्डलीक (प्रथम), उमा पुत्र नवरन, उसका
-

(७५) पुन महिपाल ( प्रथम ) पगार (खगार ), जयसिंह, मोकलसिंह, मेलग, महिपाल (द्वितीय), और उसका पुत्र मण्डलीक (द्वितीय)। (२) शक संवत के शिलालेख। (३६५) श० सं० ४००-इ० ० भाग १० पृष्ठ २८३ । मार्क ( भटार्क) के पुत्र गुहसेन के पुत्र महाराजाधिराज धरसेनदेव का बम्बई एशियाटिक सोसायटी में ( सन्दिग्ध ) दानपात्र जो बलभी में दिया गया था। (३६१) श० सं० ४००-६० ए० भाग ७ पृष्ठ ६३ । दद (दद) प्रथम के पुत्र जयभट्ट ( जयभट ) वीतराग के पुत्र गुगर महारामधिराण दद द्वितीय प्रशन्तराग का उमेता ( सन्दिग्ध ) में दानपत्र जो भर- कच्छ ( के फाटक के सामने के तंबू) में दिया गया था। (३६७) श० सं० ४१५-३० ए० भाग १७ पृष्ठ १९९ । दद (दह) पुत्र जयभट्ट ( जयभट ) वीतराग के पुत्र गुरंजर महाराजाधिराज दद्द द्वितीय प्रशान्तराग का बगुम्रा में (सन्दिग्ध) दानपत्र जो भरु- कच्छ ( के फाटक के सामने के तम्बू) में दिया गया था । (३६८) श० सं० ४१७-इ० ए० भाग १३ पृष्ठ ११६ । दद (दद्द) प्रथम के पुत्र, जयभटवीतराग के पुत्र गुरजर महाराजाधिराज दद्द द्वितीय प्रशान्तराग का इलाओ ( सन्दिग्ध ) में दानपत्र जो भरुकन्छ (के फाटक के सामने के तम्बू) में दिया गया था । प्रथम के - . . , . श०सं०६३१-३० ए० भाग १८ पृष्ट २३४ । राष्ट्रकूट नन्दराज युद्धामुर का मुलत.न (मध्यप्रदेश) में दानपत्र । राष्ट्रकूट वंश में दुर्गराम, उसका पुत्र गोविन्दराज, उसका पुत्र (!) स्वामिकराज, उसका पुत्र नन्दराज युद्धासुर । (३७०) श० सं० ७२६ (?)-ए. इ० भाग १ पृष्ठ ११२ । कीरग्राम के राजानक लक्ष्मण चन्द्र के समय का तथा तृगत (जा- लन्धर ) के राजा जयच्चन्द्र के राजकाल का वैजनाथ में शिलालेख (दूसरी प्रशस्ति ) जिसे भृङ्गक के पुत्र राम ने सङ्कलित किया । इस शिलालेख में कारग्राम के निम्नलिखित राजान का वर्णन है—क्रन्द, उसका पुत्र बुद्ध, उसका (!) पुत्र विग्रह, उसका पुत्र ब्रह्मन, उसका पुत्र डोम्बक, उसका पुत्र भुवन, उसका पुत्र कल्हण, उसका पुत्र विल्हण जिसने तृगत के राजा हृदयचन्द्र की कन्या लक्ष- णिका से विवाह किया । उनके पुत्र पम और लक्ष्मण (लक्ष्मणचन्द्र जिसने मयतल्ला से विवाह किया ) (३७१) श० सं० ७८४-कन्नौज के महाराजाधिराज भोजदेव तथा उसके अधीनस्थ लुअन्छगिर (देवगढ़) के अनुशासक महासामन्त विष्णुम के राजकाल का देवगढ़ जैन स्तूप पर शिलालेख । (३७२) श० सं० ८३६-इ० ए० भाग १२ पृष्ठ १९३ । राजाधिरान महीपाल देव के अधीनस्थ चाप महासामन्ताधिपति धरणीवराह का हड्डाला में दानपत्र जो वर्धमान में दिया गया था । चापवंश में विक्रमार्क, उसका पुत्र अड्डक, उसका पुत्र पुलकोसि, उसका पुत्र ध्रुवमट, उसका छोटाभाई धरणावराह । -

( ७६ )
( ३७३)
श० सं० ९४०-ची० जी० भाग ७ पृष्ठ ८८ | निम्बार्क के
पुत्र वारप्प का पौत्र तथा गोग्गिराज के पुत्र, लाटदेश के चालुक्य
महामण्डलेश्वर कीतिराज के राजकाल का सूरत में दानपत्र जिस
कुन्दराज के पौत्र तथा अमृतराज के पुत्र राष्ट्रकूट नायक सम्वुरान
के दान का उल्लेख है।
(३७४)
श० सं० ९६०-९० इ० भाग पृष्ठ १९० । तृकलिङ्गाधि-
पति गङ्ग महाराजाधिराज बज्रहस्तदेव के राज्याभिषेक का समय
जैसा कि नडगाम के श० सं० ९७९ के दानपत्र में दिया है।
(३७५)
श० सं० १७२-इ० ए० भाग १२ पृष्ठ २०१ । लाटदेश
के चौलुक्य त्रिलोचनपाल का सूरत में दानपत्र |
चौलुक्यवंश में (जोकि पौराणिक चौलुक्य तथा कन्याकुञ्ज की
एक राष्ट्रकूट राजकुमारी से चला वारप्पराज, उसका पुत्र गोग्गिराज,
उसका पुत्र कीर्तिराज, उसका पुत्र वत्सराज, उसका पुत्र त्रिलोचनपति
(त्रिलोचनपाल)।
( ३७६ )
श०सं० ९७१-इ० ए० भाग ४ पृष्ठ १८९ । त्रिकलिङ्गा-
धिपति गङ्ग महाराजाधिराज बज्रहस्तदेव का नडगाम (जिला गञ्जम)
में दानपत्र जी कलिङ्गनगर में दिया गया था ।
निकलिङ्गवंश में (१) महाराज गुणमहाराव (२) उसका पुत्र
बजूहस्त (जिसने ४ ४ वर्ष राज्य किया), (३) उसका पुत्र गुण्डम
(३ वर्ष), (४) उसका छोटाभाई कामार्णव (३५ वर्ष, (५) उसका
छोटा भाई विनयादित्य ( ३ वर्ष ), (६) कामार्णव का पुत्र वजूहस्त

" ( ८७ ) अनियंकभीम ( ३५ वर्ष), (७) उसका सब से बड़ा पुत्र कामार्णय (३ वर्ष), उसका छोटा भाई गुण्डम (३ वर्ष), (१) उसका, (दूसरी माता से भाई ) मधु-कामार्णव (१९ वर्ष), (१०) वज्रहस्त-कामा- णव (७) का दुम्ब वश की विनयमहादेवी से पुत्र । (३७७) शा० सं०९१९-३० ए० भाग १८ पृष्ठ १६३ । त्रिकलिङ्गाधिपति गंग महाराजाधिराज अनन्त वर्मन-चोडगंगदेव के राज्याभिषेक का सभय जैसा कि उसके विजगापटम) के श०सं १००३ के दानपत्र में दिया है (संख्या ३७८)। (३७८) श० सं० १००३-इ० ए० भाग १८ पृष्ठ १६२ । त्रिकलिंगा- धिपति गग महाराजाधिराज अनन्त वर्मन-चोड़गंगदेव का बिज़गपटम (अब मद्रास म्यूजियम ) में दानपत्र जो कलिंग नगर में दिया गया था । वंशावली, बज्रहस्त (१०) तक संख्या ३७६ में दो है; (११) उसका पुत्र राजराज प्रथम (८वर्प), (१२) उसका पुत्र, राजेन्द्रनोल की कन्या राजसुन्दरी से, अनन्त बर्मन-चोडगंग। (३७९) श० सं० १०४०-३० ए० भाग १८ पृष्ठ १६६ । त्रिकलि- गाधिपति गंग राजाविराज महाराज अनन्तवर्मन-चोड गंगदेव का निमगपटम ( अब मद्रास म्यूमिपम ) में दान पत्र जो सिन्दूरपोर में दिया गया था | अनन्त (विष्णु) में चन्द्र तदनन्तर गांगेय तक, उस से कोलाहल तक (जो गंगा वाड़ी कोलाहलपुर का संस्थापक था), और उसके पुत्र विरोचन तक की वंशावली दी है । इसके आगे कोला- हलपुर के ८१ राजाओं का वर्णन कर के इस प्रकार वंशावली दी है- धीरसिंह जिसके पांच पुत्र कामाये ( प्रयम् ) दानापे, गुणार्ण्य (प्रथम) - - चन्द्रवंश में पुरुषोत्तम; उस का पुत्र मधु सूदन उस का पुत्र या सुदेव; उस का पुत्र दामोदर । (३८६) श० सं० १२१७--(१२१८ के स्थान पर.)-ज० ब० ए० सो० भाग ६५ पृष्ठ २३५ । [ कलिंग के ] गंग राजा नरसिंह: देव द्वितीय के इक्कीसवें वर्ष का केन्दु पाटन ( उरीसा में ) में दान- पत्र जो रमणा में दिया गया था । विष्णु से चन्द्र तदनन्तर गांगेय तक, उस से कोलाहलअनन्तर्वमन तक जिस ने कोलाहलपुर बसाया, और उसके पीछे अनेक राजाओं की वंशावली दी है। उन के पीछे कामार्णव और अन्य चार राजाओं ने कलिंग पर अधिकार जमाया । इस गंग वंश में कामार्णव के वंशधर ये हुए । (१) वजहस्त जिसने नङ्ग से विवाह किया (२) उसका पुन पहिला राजराज जिसने राजसुन्दरी से विवाह किया (३) उनका पुत्र चोड़गंग जिसने ७० वर्ष राज्य किया (४) उसका पुत्र स्तुरि- कामोदिनी से कामार्णव हुआ जिसका आभिषेक शक १०६४ में हुआ और जिसने १० वर्ष राज्य (५) सूर्य वंश की इनदिरा से चौड़गंगा का पुत्र राधव हुआ जिसने १५ वर्षे राज्य किया (६) चन्द्सेखा से चोड़गग का पुत्र इसरा राजराज हुआ जिसने २५ वर्ष राज्य किया (७) उस का छोटा भाई अनियाङ्कमीम हुआ जिसने १० वर्ष राज्य किया (८) उस का पुत्र वाघल्ल देवी से तीसरा राज राग हुआ जिसने १७ वर्ष राज्य किया (९) उस का पुत्र चालुन्य वंश की मानं कुनदेवी से अनंग भीम हुआ जिसने ३४ वर्ष राज्य किया (१०) उसका पुत्र कस्तूरादेवी से पहिला नरसिंह हुआ जिसने ३३ वर्ष राज्य किया (११) उस का पुत्र मालन राजा का कन्या सीतादेवी से पहिला हुआ जिसने ऊचालुका वंश की जाकरलदेवी से विवाह किया और जो अपने राजकाल के १८ चे वर्ष में मरा (१२) उसका पुत्र इसरा नरसिंह हुआ।

( ८१ ) (३८७) श० सं० १३०४-मुलतान पीरोजसाहि (फीरोज़ शाह) फे राजकाल का बडगूजरक्श के आसल देव के पुत्र महाराजा- धिराज गोगादेव के समय का माचाडी ( अलपर के निकट ) में शि- लालेख । (३६८) श० सं० १३०५-० ३० ए० सो० भाग ६४ पृष्ठ १३६ । [ कलिंग के ] गग राना नरसिंह देव चतुर्थ के अठवें वर्ष का पुरी ( उडीसा) मे दान पत्र जो वाराणासि-कटक (?) में दिया गया था। (१२) नरसिंह [द्वितीय ] तक की घशावली सरया ३६७ में ( उसने ३४ वर्ष राज्य किया ) (१३) उसका पुत्र, चोडदेवी से, भानुदेव [ द्वितीय ] ( २४ वर्ष ), (१४) उसका पुत्र. लक्ष्मी से, नरसिंह [ तृतीय ] ( २४ वर्ष ), (१५) उसका पुन, कमलदेवी से भानुदेव [ तृतीय ] ( २६ वर्ष ), (१६) उसका पुत्र, चालुक्य वंश की हीरादेवी से, नरसिंह [ चतुर्थ ] (३८९) श० सं० १३१६ (१३१७ के स्थान पर )-ज० ब० ए० सो० भाग ६४ पृष्ठ १५१ । [ कलिंग के ] गंग राजा नरसिंह देव चतुर्थ के बाईसवें तथा तेईस वर्ष का पुरी ( उड़ीसी में) का दान- पत्र जो वाराणासि-कूटक (?) में दिया गया था । ( ३९०) श० सं० १३२१-[ मिथिला के ] देव सिंह के पुत्र महाराजा- धिराज शिवसिंहदेव का निहार ( दरभंगा ) में (संदिग्ध ) दान- पत्र जिसमें एक दान का वर्णन है जो कवि विद्यापति को दिया गया था।

श० सं० १३२२ ( १.३२३ के स्थान पर ) रायपुर के महा- राजाधिराज ब्रह्मदेव तथा उस के मंत्री, नायक हाजिराज देव के समय का रायपुर में शिलालेख। ( ३९२) श०सं० १३३४ (१३३६ के स्थान पर )-खल वाटिका के कलचुटि ( कलचुरि ) हरिब्रह्मदेव (ब्रह्मदेव ) के समय का खलारि में शिलालेख। (३९३) श० सं० १३४६-साहि आलम्भक के समय का देवगढ़ का जैन शिलालेख। (३९४) श० सं० १३५८-देवगढ़ का जैन शिलालेख । (३९५) श० सं० १३७७-३० ए० भाग २० पृष्ठ ३९१ । कटक (उड़ीसा ) के कपिल-गजपति के समकालीन और सामंत (1) कोण्डवीडु के गाणदेव का किस्तन जिले में दानपत्र । इस शिलालेख में कटक के सूर्यवंशो कपिलेन्द्रगणपति ( कपिल- कुम्भिरान ), जो कि उस समय राज्य करता था, की प्रशंसा है । उस के वंश में (!) चन्द्रदेव हुआ; उस का पुत्र गुहिदेव पात्र; उसका पुत्र कोराडवीडु का गाणदेव ( उपनाम रौतराय या राहत्तराय)। ( ३९६) श० सं० १४२०-'पातसाह' महमूद (सुलतान महमूद बैकर) के राजकाल का, दराडाहिदेश के बाघेल वीरसिंह की पत्नी, रानी सड़ादेवी का अडालिज कुएं का शिलालेख | 1, ( ३९७) श० सं० १४२१-'पातुप्ताह' महमूद (सुलतान महमूद वैकर ) के रागमाल का वाई हरीर का अहमदाबाद के कुए का शिरालेख । (३९८) श० सं० १४२६-मेदपाट ( मेवाड ) के गुहिल राजमल्ल और उसकी पत्नी शृङ्गारदेवी का नगरी (चित्तौर के निकट ) में शिला- लेख। ( ३९९) ० सं० १४५३-पुरादरीक के मन्दिर के सातवें वार मरम्मत होने का शत्रुनय में शिलालख । (४००) श० सं० १४६०-सम्राट हुमाऊ ( हुमायू ) के राजकाल का तिलचेगामपुर में बिलालेख । (४०१) ० सं० १५२०-[ मेवाड़ के ] महाराणा अमरसिंह जी के राजकाल का सादड़ी में शिलालेख । (४०२) ० सं० १५४१-नवीनपुर ( नानगर ) के याम शत्रुशस्य के पुत्र जसवन्त के समय का शत्रुनय में जैन शिलालेख । (४०३) श०सं० १५५१-सम्राट शाहाज्याहाम् (शाहजहा ) के राज- काल का सनुजय में जैन शिलालेख । (४०४) श० सं० १५८२-चम्बा के एक शिलालेख को नोटिस ।

( ८४ )
(४०५)
श० सं० १६३५-मेवाड़ के राणा संग्रामसिह के समय का
उदयपुर ( राजपुताना ) में शिलालेख ।
,
(४) कलचुरी-चेदि संवत् के शिलालेख ।
(४०६)
क० सं० १७४-गु० इ० पृष्ठ ११८ । महाराज जयनाथ का
कातिलाई में दानपत्र जो उच्चकल्प में दिया गया था।
महाराज ओघदेव, कुमारदेवी से उसका पुत्र महाराज कुमारदेव,
जयस्वामिनी से उसका पुत्र महाराज जयस्वामिन, रामदेवी से उसका
पुत्र महाराज व्याघ्र, अझित देवी से, उसका पुत्र महाराज जयनाथ ।
(४०७)
क० सं० १७७-गु० इ० पृष्ठ १२२ । महाराज जयनाथ का
खोह में दानपत्र जो उच्चकल्प में दिया गया था
(४०८)
क० सं० १९३-गु० इ० पृष्ठ १२६-महाराज शर्वनाथ का
खोह में दानपत्र जो उच्चकल्प में दिया गया था।
जयनाथ तक वंशावली जैसी संख्या ४०६ में, उसका पुत्र मुरु-
ण्ड देवी से महाराज शर्वनाथ ।
(४०९)
क० सं० १९७-गु० इ० पृष्ठ १३३ | महाराज शर्वनाथ का
खोह में दूसरा दानपत्र ।
(४१०)
क० सं० २०७-ज० व० ए० सो० भाग १६ पृष्ठ ३४७ ।
कुटकवंश के महाराज दहसेन का पर्दि (सूरत जिले में) में दान
पत्र जो आम्रका में दिया गया था।
.

(८५)
(४११)
क० सं० २१४-गु० इ० पृष्ठ १३६ । महाराज शर्मनाथ का
खोह में दान पत्र जो उच्चकल्प में दिया गया था।
(४१२)
क० सं० २४५-के. टे. वे० इ० पृष्ठ ५८ । डाकर बर्ड का
कहेरी तामूपत्र जिसमें कृष्णगिरि के महानिहार में एक चैत्य बनाने
का समय है । इस लेख का समय कुटक के राजकाल का है।
(४१३)
क० सं० ३४६-९० इ० भाग २ पृष्ठ २० । [गुरजर राजा
का ? ] सावेडा में दूसरा दानपत्र ।
(४१४)
क० सं० ३८०-
o-ज० रो० ए० सो माग १ पृष्ठ २७३ तथा
इ० ए० भाग १३ पृष्ठ ८२ । गुरजर दद्द द्वितीय प्रशान्तराग
का कैर में दानपत्र जो नान्दीपुरी में दिया गया था।
गुरजर राज्यवश में सामन्त दद्द (प्रयम ), उसका पुत्र जयभट
(प्रथम), वीतयग, उसका पुत्र दह (द्वितीय ) प्रशान्तराग |
(४१५)
क० सं० ३८५-ज० रो० ए० सो० भाग १ पृष्ठ २७३ तथा
इ० ए० भाग १३ पृष्ठ ८८ । गुरजर दद्दद्वितीयमशान्तराग के
समय का कैर में दानपत्र जो नान्दीपुरी में दिया गया था।
०
क० सं० ३९१-९० इ० माग २ पृष्ठ २१ । दद्द के सम्बन्धी
वथा वीतराग के पुत्र रणग्रह का [ रणग्रह के भाई (2) गुरजर दद्द
द्वतीय प्रशान्तराग के समय का ] साखेडा में दूसरा दानपत्र ।
(४१७)
क० सं० ३९२-९० इ० भाग ५ पृष्ठ ३९ । [जयभट प्रथम]

. ( ८६ ) वीतराग के पुत्र गुर्जर दद्द द्वितीय प्रशान्तराग का साझेडा में दान पत्र जो नान्दीपुर में दिया गया था। (४१८) क० सं० ३९२-९० इ० भाग ५ पृष्ठ ३९ । [नयभट प्रथम] बीतराग के पुत्र गुर्जर दद्द द्वितीय प्रशान्तराग का साझेडा में दूमरा दानपत्र जो नान्दीपुर में दिया गया था। (४१९) क० सं० ३९४-इ० ए० भाग ७ पृष्ठ २४८ गुरजर चौलुक्य विजयराज का कैर ( अब रायल एशियाटिक सोसायटी) में दानपत्र जो विजयपुर में दिया गया था । चौलुक्यों के वंश में जपसिंहराज, उसका पुत्र बुद्धवराज (उपनाम : वल्लभ-रणविक्रान्त), उसका पुत्र विजयराज । (४२०) क० सं० ४०६-इ० ए० भाग १८ पृष्ठ २६७ । सेन्द्रक निकुम्भल्लशक्ति का बगुमा (अब वृटिश म्यूजियम ) में दानपत्र । सेन्द्रक राजाओं के वंश में भाणुशक्ति, उसका पुत्र आदित्यशक्ति, उसका पुत्र पृथिवीवछभ-निकुम्भशक्ति । (४२१) क० सं० ४२१-ज० ब० ए० सो० भाग १६ पृष्ठ २ । गुज- रात के चालुक्य युवराज श्याश्रय-शीलादिस का नौसारी में दान- पत्र जो नत्रसारिका में दिया गया था । चौलुक्यों के वंश में पुलकेशि-वैलभ, उसका पुत्र धराश्रय-जयसिंह- वर्मन ( महाराजाधिराज विक्रमादित्य-सत्याश्रय-पृथिवी-वष्ठभ का छोटा भाई ), उसका पुत्र युवराज श्न्याश्रय-शीलादित्य । (४२२) क० सं० ४४३-ची० ओ का० पृष्ठ २२५ । पश्चिमी चलुक्य.

- " विनयादित्य ससाश्रय-वल्लभ के समय का गुजरात चलुक्य युवराज न्याश्रय-शीलादित्य का सूरत में दानपर जो कार्मणेय के समाप कुसुमेश्वर में दिया गया था । महाराज सत्याश्रय-पुलकेशि वल्लभ (जिसने उत्तरखण्ड के राजा हर्षवर्धन को पराजित किया था ), उसका पुत्र महाराज विक्रमादित्य- सत्याधय बल्लभ, उसका पुन महाराजाधिराज पिनयादित्य सत्याश्रय श्री- धिनीवल्लभ, उसका चाचा धराश्रय जयसिंह वर्मन, उसका पुत्र युवराज श्रयाश्रय शीलादित्य । (४२३) क० सं० ४५६-इ० ए० भाग १३ पृष्ठ ७७। गुरजर जयभट तृतीय का नौसारी में दानपत्र जो कायावतार मे दिया गया था। महाराज कर्ण के पश में दद [ द्वितीय ] ( जिसने हर्षदेव से पराजित किए हुए वल्लभी के एक राजा की रक्षा की थी), उसका पुर जयभट [ द्वितीय ], उसका पुत्र दद्द [ तृतीय ] बाहुसहाय, उसका पुत्र जयभट [ तृतीय । (४२४) क० सं० ४८६-इ० ए० भाग ५ पृष्ठ ११३ } गुरजर जयभट तृतीय का कारी में दानपत्र । (४२५) क० सं० ४९०वी० ओ० का ० पृष्ठ २३ ० 1 गुजरात के चालुक्य पुलकेशिराज का नौसारी में दानपत्र । महाराजाधिराज सत्याश्रय पृथिवीवल्लभ-कीर्तिवर्मराज, उसका पुत्र सत्याश्रय पुलकेशि वल्लभ (जिसने उत्तराखण्ड के राजा हर्षवर्धन को पराजित किया ), उसका पुत्र सत्याश्रय विक्रमादित्यराज, उसका छोटा भाई धराश्रय जयसिंहनर्मराज, उसका पुत्र जयाश्रय मङ्गलरसराज, उसका । छोटाभाई पुलकेशिराज ( जिसने राजा श्रीवल्लभ से अवनिजनाश्रय का नाम ) तथा उसकी और उपाधियां पाई थीं)। .. (४२६) क० सं० ७२४-३० ए० भाग २० पृष्ठ ८५ | योगी प्रशान्त. शिव तथा मत्तमयूर के अन्य जनों का चन्द्रहे में शिलालेख जिसे मेहुकं के पौत्र तथा जेईक और अमरिका के पुत्र धांसट ने सङ्कलित किया था। (४२७) क० सं० ७८९ (?)-आ० स० इ० भाग २१ पृष्ठ ११३॥ कलचुरि ( चेदि ) गङ्गेयदेव का पिआवन की चट्टान पर शिलालेख ।, (४२८) क० सं० ७९३-९० इ० भाग २ पृष्ठ ३०५ । त्रिकलिङ्गाधि- पति कलचुरि ( चेदि ) महाराजाधिराज कर्णदेव का बनारस में दानपत्र जो प्रयाग में वेणी के तट पर दिया गया था । हैहय वंश में कोकल [ प्रथम ] ( जो भोज, वल्लभराज, चित्रकूट के चन्देल्ल हर्ष तथा शङ्करगण का समकालीन था और जिसने चन्देल्ल राजकुमारी नट्टा ( नट्टदेवी ) से विवाह किया ), उसका पुत्र प्रसिद्धधवल, उनका पुत्र बालहर्ष और युवराज [ प्रथम ], युवराज का पुत्र लक्ष्मणराज, उसका पुत्र शङ्करगण और युवराज [ द्वितीय ], युवराज का पुत्र कोक्कठ [ द्वितीय ], उसका पुत्र गेङ्गय, उसका पुत्र कर्ण । (४२९) क० सं० ८४०-- आ० स० इ० भाग १७ पृष्ठ ३१ । राणक गोपालदेव के राजकाल का बोरमदेओ में शिलालेख । (४३०) क० सं०८६६-ए० इ० भाग १ पृष्ठ ३४ | रत्नपुर के जाजल्ल- देव प्रथम का रत्नपुर (अब नागपुर म्यूजियम ) में शिलालेख । .

- हैहयवश में चेदि का राजा कोकल्ल था जिसके अठारह पुत्रों में से सबसे बड़ा पुन निपुरी का राजा हुआ। उस के एक छोटे पुत्र की सन्तति कलिङ्गराज ने दक्षिणकोशल को विजय किया, उसका पुत्र कमलराज, उसका पुत्र रत्नराज ( रत्नेश ) [ प्रथम ] जिसने कोमो मण्डल के वजूक की पुत्री नोनल्ल से विवाह किया, उनका पुत्र पृथ्वीश (पृथ्वीदेव ) [ प्रथम ] जिसने राजल्ला से विवाह किया, उनका पुत्र जाजल [ प्रथम ] ( जो किसी सोमेश्वर का समकालीन था)। (४३१) क० सं० ८७४-ए० इ० भाग २ पृष्ठ ३ । कलचुरी (चेदि) महाराजाधिराज यशहकर्णदेव का जबलपुर ( अब नागपुर म्यूजियम ) में प्रथमशिलालेख । कलचुरिश में त्रिपुरी का युगराज [ द्वितीय ], उसका पुत्र कोकल्ल [ द्वितीय ], उसका पुत्र गङ्गेयदेन विक्रमादित्य, उसका पुत्र कर्ण जिसने हूणराजकुमारी आपल्लदेवी से विवाह किया, उनका पुत्र यशहकर्ण । (४३२) क० सं० ८९३-३० ए० भाग २० पृष्ठ ८४ | रनपुर के पृथ्थीदव द्वितीय के राजकाल का कुण्ड में खण्डितशिलालेख । इस शिलालेख में रानी लच्छल्लदेवी, रत्नदेव (1), तथा किसी वल्लभराज का उल्लेख है। क० सं० ८९६-३० ए० भाग १७ पृष्ठ १३९ । रत्नपुर के पृथ्वीदेव द्वितीय के समय का नायक जगपाल (जगमिह ) का राजिम में शिलालेख जिसे जसोधर के पुत्र नमानन्द ने सङ्कलित किया था । इस शिलालेख में जाजल्ल ( प्रथम ) रत्नदेव द्वितीय और पृथिवीदेव (द्वितीय) का उल्लेख तथा नगपाल के वंश का वर्णन है जिस का प्रारम्भ टाकुरसाहिल्ल से हुआ नो उस रानमालवंश का एक उस . भूषण था जिसने पंचहंसवंश को आनन्दित किया था । साहिंल्ल का एक छोटा भाई वासुदेव और तीन पुत्र भाथिल, देसक और स्वामी थे | स्वामी के लडके जयदेव और देवसिंह हुए जिसमें से एक का पुत्र जरा- पाल हुआ जिसके गामक और जयतसिंह दो छोटे भाई हुए । (४३४) क० सं० ८९८-आ० स० इ० भाग ९ पृष्ठ ८६ तथा सर ए. कनिंघम की प्रतिलिपि । किसी सेओरिनारापन के शिलालेख का समय। (४३५) क० सं० ९०२-इ० ए० भाग १८ पृष्ठ २१० । कलचुरि (चैदि ) गयाकर्णदेव तथा उसके पुत्र युवराज नरसिंह के समय का तेवर में शिलालेख जिसे धरणीधर के पुत्र पृथ्वीधर ने सङ्कलित किया था। आत्रेयगोत्र में कर्ण, उसका पुत्र यशहकर्ण, उसका पुत्र गया- कर्ण, उसका पुत्र युवराज नरसिंह, (४३) क० सं० ९०७-ए० इ० भाग २ पृष्ठ १० · तथा के०: टे. वे० इ० पृष्ठ १०७ गयकर्ण देव की विधवा कलचुरि (चेदि.) रानी अल्हण देवी का, उसके पुत्र नरसिंहदेव के राजकाल का भेरघाट ( अब अमेरिकन ओरिएण्टल सोसायटी) में शिलालेख जिसे. धरणीधर के पुत्र शशिधर ने सङ्कलित किया था । चन्द्रवंशी सहमर्जुिन के वंश में कोकल्ल [ द्वितीय ], उसका पुत्र गङ्गेय, उसका पुत्र कर्ण, उसका पुत्र यशहकर्ण, उसका पुत्र गयकर्ण. जिसने विजयसिंह (जो हंसपाल के पुत्र गुहिल वैरिसिंह का पुत्र था'); तथा उसकी रानी श्यामलदेवी (जो मालय के परमार उदयादित्य की पुत्री थी ) की एक पुत्री अल्हणदेवी से विवाह किया, उनके पुत्र नर- सिंह तथा जयसिंह हुए। .

(४३७) "क० सं० ९०९-इ० ए० भाग १८ पृष्ठ २१२ तथा भा० स. ई० भाग १ | त्रिकलिङ्गाधिपति कलचुरि (चेदि ) नरसिंहदेव के समय का काल पहाड चट्टान पर शिलालेख । (४३८) क० सं० ९१०-आ० स० इ० भाग १७ । रत्नपुर के पृथ्वी- देव द्वितीय के राजकाल के रत्नपुर ( अब नागपुर म्यूजियम ) में एक शिलालेख का समय । -- क० सं० ९१९-९० इ० भाग १ पृष्ठ ४० । रत्नपु रके जाज- लदेव द्वितीय के समय का महार (अब नागपुर म्यूजियम) में शिलालेख जिसे वास्तव्यवंश के मामे के पुत्र रत्नसिंह ने सङ्कलित किया था । चन्द्रवंश में रत्नदेव द्वितीय ( जिसने चोडगङ्ग को पराजित किया था ), उसका पुत्र पृथ्वीदेव द्वितीय, उसका पुत्र जाजल्ल द्वितीय । (४४० क० सं० ९२६-इ० ए० भाग १७ पृष्ठ २२६ । त्रिकलिङ्गा- धिपति कलचुरि (चेदि ) महाराजाधिराज जयसिंहदेव के राज- काल का, कक्करोडिका के महाराणक कीर्तिवर्मन का रीवां ( अब- ब्रिटिश म्यूजियम ) में दानपत्र । कौरवश में महाराणक जयवर्मन, उसका पुत्र महाराणक पत्स- 'राज, उसका पुत्र महाराणक कीर्तिवर्मन । ) . क० सं०९२८-आ० स० इ० भाग ९ पृष्ठ १११ तथा इ० पृष्ठ ११ । भेरघाट का शिलालेख । (४४२) क० सं० ९२८-९० इ० भाग २ पृष्ठ १८ तथा के. टे.

. वे० इ० पृष्ठ ११९ गयाकर्ण के पुत्र तथा नरसिंह देव के छोटे माई- कलचुरि (चेदि ) जयसिंहदेव के समय का तेवर (अब अमेरिकन ओरियण्टेल सोसायटी ) में शिलालेख | (४४३) क० सं० ९३२-ज० ब० ए० सो० भाग ८ पृष्ठ '४८१ तथा भाग ३१ पृष्ठ ११६ । कलचुरि (चंदि) विजयसिंहदेव तथा उसकी माता गोसलदेवी का कुम्भी में दानपत्र जो नर्मदा के तट पर त्रिपुरी में दिया गया था । यशहकर्ण तक वंशावली संख्या ४३१ में, यशहकर्ण का पुत्र गयाकर्ण जिसने अल्हणदेवी से विवाह किया, उनका पुत्र नरसिंह, उसका छोटा भाई जयसिंह, उसका पुत्र विजयसिंह, महाकुमार अजयसिंह। (४४४) क० सं० ९३३-इ० ए० भाग २२ पृष्ठ ८२ । रत्नपुर : के रत्नदेव तृतीय के समय का खोरोद में शिलालेख । हैहयवंश में कलिङ्ग, उसका पुत्र कमल, उसका पुत्र रत्नराज [प्रथम ], उसका पुत्र पृथ्वोदेव प्रथम, उसका पुत्र जाजल प्रथम (जि- सने सुवर्णपुर के भुनाल को पराजित किया ), उसका पुत्र रत्नदेव द्वितीय (जिसने कलिङ्ग के चोडगङ्ग को पराजित किया ), उसका पुत्र पृथ्वीदेव द्वितीय उसका पुत्र जाजल्ल द्वितीय जिसने सोमल्लदेवी से विवाह किया , उनका पुत्र रत्नदेव तृतीय । (४४५) क० सं० ९३४-आ० स० इ० भाग १७ । यशोरा सहसपुर में एक मूर्ति पर शिलालेख | पुत्र इस शिलालेख में यशराज के अतिरिक्त रानी लक्ष्मदेवी (कर्ण राजकुमार भाजदेव और राजदेव, तथा राजकुमारी जासल्लदेवी का वर्णना) (४४६) की क० सं० ९५८-आ० स० इ० भाग २१ पृष्ठ १०२ वेशा... में खण्डितशिलालेख । . , ( ३ ) (५) कलचुरी सपत् के पिना समय के शिलालेख । (४४७) गु० इ० पृष्ठ १३० । महारान सर्वनाथ का खोह में प्रथम दानपत्र जो उच्चकल्प में दिया गया था। (४४८) ए० इ० भाग २ पृष्ठ २३ । भोगिकपाल महापिलुपति निरि- हुल्लक ( जिसने कृष्णराज के पुत्र [ कलचुरि ? ] शङ्करण [शङ्करगण] के चरणों का ध्यान किया था) के बलाधिकृत शातिल्ल का साखेडा में प्रथम दानपत्र जो निर्गुण्डिनदक में दिया गया था । (४४९) ए० इ० भाग २ पृष्ठ १७५ । कलचुरि (चेदि ) लक्ष्मणराज तथा उसके मंत्री सोमेश्वर ( युवराज के मंत्री भाकमिश्र का पुत्र था) के समय का कारीतलाई ( अब जबलपुर म्यूजियम ) में खण्डित शिलालेख । इसमें युवराज [ प्रथम ] , [ उसके पुत्र ] लक्ष्मणराग जिसकी रानी राधा थी, और [उनके पुत्र] शङ्क रिंगण) का वर्णन है । (४१०) बि ९० इ० भाग १ पृष्ठ २९४ । कल्चुरि (चेदि ) युवराजदेव ीय का बिरहरि ( अब नागपुर म्यूजियम ) में शिलालेख । (इस लेख के प्रथम अश को स्थिरानन्द के पुत्र श्रीनिवास ने, 'तीय अश को थीर के पुत्र सज्जन ने तथा अंत के श्लोकों को शीग्क सङ्कलित किया था)। हैहयवश में वोकल [ प्रथम ] जिसने दक्षिण में कृष्णराज तथा तर में मोनदेन की सहायता की थी), उसका पुत्र मुग्धतुङ्ग, उसका { केयूरवर्ष पुररान [ प्रथम जिसने जोहला (जो सिंहवर्मन के पात्र , (६४ ) तथा सधन्य के पुत्र चौलुक्प अवनिवर्मन की पुत्री थी) से विवाह किया; उनका पुत्र लक्ष्मणराज; उसका पुत्र शङ्करगण; उसका लघुभ्राता युवराज [ द्वितीय ]-इस शिलालेख में एक शैव योगी मत्तमयूरनाथ के सम्बन्ध में किसी राजा अवन्ति का भी वर्णन है । (४६१) ए० इ० भाग १ पृष्ठ ३६४ | रनोड ( नरोड अथवा नरवड ) का शिलालेख जिसमें कुछ शैवयोगिओं ( कदम्यगुहाधिवासिन, शङ्ख मठिकाधिपति, तेरम्बिपाल, आमर्दकतीर्थनाथ, पुरन्दर, कचयशिव सदाशिव, हृदयेश, और व्योमशिव ) का वर्णन तया (पुरन्दर के सम्बन्ध में ) किसी राजा अवन्ति या अवन्तिवर्मन का वर्णन है जो मत्तमयूर पर रहता था' इसे देवदत्त ने सङ्कलित किया था। (४५२) इ० ए० भाग १८ पृष्ठ २१६ । कलचुरि ( चेदि )जयसिंहदेव का करनवेल में अधूरा शिलालेख । कलचुरी वंश में युवराज द्वितीय, उसका पुत्र कोकल्ल द्वितीय उसका पुत्र गङ्गेय, उसका पुत्र कर्ण, उसका पुत्र यशहकर्ण, उसका पुत्र गयकर्ण निसने [ गुहिल ] विजयसिंह (जो प्रागवाट में हंसपाल के पुत्र वैरिसिंह का पुत्र था ) तथा उसकी पत्नी श्यामलदेवी (जो धारा के परमार उदयादित्य की कन्या थी) की पुत्री अल्हणदेवी से विवाह किया; उनके पुत्र नरसिंह और जयसिंह। (४५३) इ० ए० भाग १८ पृष्ठ २१८ । कलचुरि (चेदि) विजयसिंह- देव के समय का गोपालपुर में खण्डितशिलालेख । इस शिलालेख में कलचुरि राजा कर्ण, यशहकर्ण, गयाकर्ण, नरसिंह, जयसिंह, जिसने गोसलदेवी से विवाह किया, और उनके पुत्र विजय- सिंह का वर्णन है। ।' . ,

( ६५ )
,
(४५४)
इ० ए० भाग २० पृष्ठ ८४ । रत्नपुर के कलचुरि अनुशासकों
का अकलतारा में खण्डितशिलालेख, जिसमें रत्नदेव, हरिगण, चाच्छ.
लदेवी, वल्लभराज, और जयसिंह देव का उल्लेख है।
(४६५)
३० ए० भाग २० पृष्ठ ८४ । रत्नपुर के कलचुरि अनुशासकों
का मुहम्मदपुर में शिलालेख जिसमें जाजल्लदेव, रत्नदेव, पृथ्वीदेव, तथा
पल्लभराम का उल्लेख है।
(४१६)
३० ए० भाग २० पृष्ठ ८५ । तेबर मे एक खण्डितशिलालेख,
जिसमें भीमपाल का उल्लेग्व है ।
.
(६) गुप्तवल्लभी संवत के शिलालेख ।
(४५७)
गु० सं० ८२-गु० इ० पृष्ठ २१ । उदयगिरि की गुहा में
शिलालेख जिसमें महाराजाधिराज चन्द्रगुप्त द्वितीय के अधीनस्थ महा-
राज छगलग के पौत्र तथा महाराज विष्णुदास के पुत्र सनकादिक
महाराज ध (') के एक दान का वर्णन है ।
(४५८)
गु० सं० ८८-गु० इ० पृष्ठ ३७ । महाराजाधिराज चन्द्रगुप्त
द्वितीय के समय का गढवा ( अव कलकत्ता म्यूजियम) में शिलालेख ।
(४५९)
गु० सं० ९३-गु० इ० पृष्ठ ३१ । महाराजाधिरान चन्द्रगुप्त
द्वितीय के समप का साञ्ची में शिलालेख जिसमें काकनादबोट
( अर्थात् साञ्ची) के महाविहार में एक दान का वर्णन है जो आर्य
सिंह को दिया गया था।

(६. ) . (४६०) गु० सं०९६-गु० ३० पृष्ठ ४३ । महाराजाधिराज कुमारगुप्त प्रथम के राजकाल का किसी ध्रुवशर्मन का विल्सड' के स्तूप पर शिलालेख । महाराज गुप्त; उसका पुत्र महाराज घटोत्कच; उसका पुत्र महारा-' जाधिराज चन्द्रगुप्त [ प्रथम ]; उसका पुत्र, लिच्छवि की पुत्री कुमारदेवी से, महाराजाधिराज समुद्रगुप्त; उसका पुत्र, दत्तदेवी से, महाराजाधिराज चन्द्रगुप्त [ द्वितीय ]; उसका पुत्र, ध्रुवदेवी से महाराजाधिराज कुमार- गुप्त [ प्रथम ] | (४६१) गु० सं० ९८-गु० इ० पृष्ठ ४१ । महाराजाधिराज. कुमारगुप्त मथम के समय का गढ़वा (अब कलकत्ता म्यूजियम ) खण्डित शिलालेख । (४६२) गु० सं० १०६-गु० इ०पृष्ठ २५८ । उदयगिरि की गुहा का जैन शिलालेख । (४६३) गु० सं० ११३ (१)-ए० इ० भाग २ पृष्ठ २१० । महा- रामाधिराज कुमारगुप्त प्रथम के राजकाल का मथुरा ( अब लखनऊ म्यूजियम ) को जैनमूर्ति का शिलालेख । ' ( ४६४) गु० सं० १२९-गु० इ० पृष्ठ ४६ । महाराज कुमारगुप्त मथम के राजकाल का मनकुवार में वौद्ध शिलालेख । (४६५) गु० सं० १३१-गु० इ० पृष्ठ २६१ । साञ्ची का शिलालेख निसमें एक दान का वर्णन है जो काकनादबोट ( साञ्ची) के महा- विहार में आर्यसिंह को दिया गया था।

( ९७ )
(४६६)
गु० सं० १३१-गु० इ० पृष्ठ २६३ । मथुरा (अब लखनऊ न्यू-
नियम) को एक बौद्ध मूर्ति का लेख ।
(४६७)
गु० सं० १३६. १३७ तथा १३८-गु० ई० पृष्ठ १८ तथा
भा० इ० पृष्ठ २४ । राजाधिराज स्कन्दगुप्त के समय का आगढ
के चट्टान का शिलालेख निसमें सुराष्ट्र के अनुशासक पर्णदत्त के पुत्र
चक्रपालिन का सुदर्शन झील की बाध को दुरुस्त कराने का उल्लेख है।
(४६८)
गु०
० सं० १३९-गु० ई० पृष्ठ २६७ । महाराज भीमर्वमन के
समय का एक मूर्ति पर को खण्डितशिलालेख |
(४६९)
गु०सं० १४१-गु० इ० पृष्ठ ६६ । स्कन्दगुप्त
के राजेंकाल
का फहाऊ के जैनस्तूप का शिलालेख ।
(७०)
गु० सं० १४६-गु० इ० पृष्ठ ७० । महाराजाधिराज स्कन्दगुप्ते
तथा उनक अधीनस्थ अन्तर्वेदी देश के विषयपति शर्वनाग के
समय का ब्राह्मण देवनिष्णु का इन्दौर में दानपत्र ।
(४७१)
गु० सं० १४८-गु० इ० पृष्ठ २६८ 1 गढ़ना ( अब कलकत्ता
म्यूजियम ) का खण्डित वैष्णशिलालेख ।
(४७३
गु० सं० १५६-गु०ई० पृष्ठ ९५ । महारान देवाध्य के परपौत्रं

..
महाराज प्रभञ्जन के पौत्र तथा महाराज दामोदर के पुत्र परिवाजक
महाराज हस्तिन का खोह (अब लखनऊ म्यूजियम ? ) में दानपत्र ।
(४७३)
गु० सं० (?) १५८-ए० इ० भाग २ पृष्ठ ३६४ [.महा:
राज लक्ष्मण का पाली ( अंब लखनऊ म्यूजियम ) में दानपत्र जो
जयपुर में दिया गया था।
"" ( ४७४)
गु० सं० १६३-गु० इ० पृष्ट १०२ । परिव्राजक महाराज
हस्तिन का खोह ( अब लखनऊ म्यूजियम ) में दानपत्र ।
(४७५)
'गु० सं १६५-गु० इ० पृष्ठ ८९ । बुधगुप्त तथा उसके अधी-
नस्य महाराज सुरामिचन्द्र के समय का ईरान के
स्तूप
का शिलालेख
जिसमें महाराज मातृविष्णु तथा उसके छोटे भाई धन्यविष्णु के एक
'स्तूप बनवाने
का वर्णन है।
ह
(४७६)
गु सं १९१-गु० इ० पृष्ठ ९२ । राजा माधव के पुत्र तथा
किसी राजा भानुगुप्त के अनुगामी ( ? ) गोपराज. की विधवा का
ईरान के सतीस्तूप पर शिलालेख ।
(४७७)
गु० सं० १९१-गु० इ० पृष्ठ १०७ | परिव्राजक महाराज
हस्तिन के समय का मझगवां में दानपत्र ।
(४७८)
गु० सं० २०७-ए० इ० भाग ३ पृष्ठ ३२० । वल्लभी के
महासामन्त महाराज ध्रुवसेन . प्रथम का गणेशगढ़ (बरोदा ) में
दानपत्र जो बल्लभी में दिया गया था ।

,
मैत्रक वश में सेनापति भटक्क ( मटार्क ), उसका पुत्र सेनापति
घरमेन [ प्रथम ] ; उसका छाटा भाई महाराज द्रोणामह, उसका छोटा.
भाई महासामन्त महाराज ध्रुसेन [प्रयम 1
(४७९)
गु० सं० २०७-३०ए० भाग ५ पृष्ठ २०५। वल्लमी के महाराज
ध्रुवसेन प्रथम का भाषनगर में दानपन जो वल्लभी में दिया गया था।
(४८०)
गु० सं० २०९-गु० इ० पृष्ठ ११४ । योगिराज मुशर्मन के
वंश के महाराज दवाइय के पुत्र महाराज प्रभजन के पार, महाराज
दामोदर के पात्र तथा महाराम हस्तिन क पुत्र परिनानक महाराज
संक्षोभ का ग्वोह में दानपत्र ।
(४८१)
गु० सं० २१०-इ० ए० भाग ४ पृष्ट १०५ । वल्लभी के महा.'
सामान्त महाप्रनिहार महादण्डनायर महामातीकृतिक महाराज ध्रुवसेन
मथम का बला में दानपत्र जो गुड्डठीय प्राम में दिया गया था।
-
गु० मं० २१७-ज० स० ए०सो० १८९५ पृष्ठ,३८२ ।
बल्लभी के महाप्रतिहार महादण्डनायक महाराष्रुतिक महासामत
महाराज ध्रुवमन प्रथम का वृटिशम्यूजियम में दानपत्र ।
(४८३)
गु० सं० २२१-बी० जा० भाग ७ पृष्ठ २९७ । वल्लभी के
महाराज ध्रुपसेन प्रथम का गाडिआ-जोगिआ में दानपत्र ।
(४८४)
गु० सं० २३०-गु ० इ० पृष्ठ २७३ । मथुरा (अब लखनऊ
म्यूजियम ) के बौद्धमूर्ति का शिलालेव ।
-

( १०० )
(४८५)
गु० सं० २४० (१२३७ )-३० ए० भाग ७. पृष्ठ ६७.!
वल्लभी के महायज गुहसेन का दानपत्र ।
भटार्क से ध्रुवसेन प्रथम तक की वंशावली संख्या ४७८ में
उसके पश्चात (धरपट्ट [संख्या ४८९ ] को छोड़ कर) महाराज गुहसेन ।
(४८६)
गु० सं० २५६-३० ए० भाग ४ पुष्ठ १७५ । पठभी के
महाराज गुहसेन का वला में द्वितीय दानपत्र |
(४८७)
गु० सं० [२] ४७-३० ए० भाग १४ पृष्ठ ७५ । बला का
खण्डित शिलालेख जिसमें वछंभी के महाराज गुहसेन का नाम है।
(४८८)
गु० सं० २४८-३०ए० भाग ५ पृष्ठ २०७॥ वल्लभी के महाराज
गुहसेन का भावनगर में द्वितीय दानपत्र जो वल्लभी में दिया गया था।
(४८९.)
गु० सं० २५२-भा० इ० पृष्ठ ३१. तथा इ० ए० भाग १५
पृष्ठ १८७ । वल्लभी के सामन्त महाराज धरसन द्वितयि का शर
दानपत्र जो वल्लभी में दिया गया था।
भटार्क से ध्रुवसेन प्रथम तक की वंशावली संख्या ४७८ में,
ध्रुवसेन का छोटा भाई महाराज धरपट; उसका पुत्र महाराज गुहसेन,
उसका पुत्र सामन्त महाराज धरसेन द्वितीय ।
(४९०)
"गु० सं० २५२-गु० ई० पृष्ठ १६५॥ वल्लभी के महाराज धरसेन,
द्वितीय का मालिया (जुनागढ़) में दानपत्र जो वल्लभी में दिया गया था।
(४९१)
गु० सं० २५२-इ०ए० भाग ७ पृष्ठ ६८ | वल्लभी के महाराज
घरसेन द्वितीय का सोरठ (जुनागढ़) में दानपत्र जो बल्लभी में दिया गया था ।
"

(४९२) गु०सं०२५२-३० ए० भाग ८ पृष्ट ३०१ । बल्लभी के महाराज धरसेन द्वितीय का वाम्बे एशियाटिक सोसायटी में दानपत्र जो वल्लभी में दिया गया था । (४९३) गु० सं० २५२-मा० इ० पृष्ठ ३५ । वल्लभी के महाराज धरसेन द्वितीय का कतपुर ( अब भाषनगर म्यूजियम ) में दानपत्र जो भद्रप- तनक (.) में दिया गया था । (४९४) गु० सं० २६९-इ० ए० भाग ६ पृष्ठ ११ । वल्लभी के महा- सामन्त महाराज धरसेन द्वितीय का बला में दानपत्र जो मद्रापात्त (1) में दिया गया था । वशावरी संख्या ४८९ में-इस शिलालेख में दूतक सामन्त शीला- दित्य का उल्लेख है। (४९५) गु० सं० २६९ (?)-गु० इ० पृष्ठ २७६ । बौद्ध गुरु महा- नामन का बुद्ध गया (अब कलकत्ता म्यूजियम ) में शिलालेख । (४९६) गु० सं० २७०-३० ए० भाग ७ पृष्ट ७१ । वल्लभी के महा- सामन्त महाराज धरसेन द्वितीय का अलीना म दानपत्र जो भर्तृटा- हनक (1) में दिया गया था । इस शिलालेख में भी दूतक सामन्त शीलादित्य का उल्लेख है। (४९७) गु० मं० २८६-३० ए० भाग १ पृष्ट ४६ । वल्लभी के शी- लादिस प्रथम धर्मादिस [ धरसन द्वितीय के पुन ] का बला में खण्डित दृसरा दानपन ।

(१०२) । (४९८) गु० सं० २८६-३० ए० भाग १४ पृष्ठ ३२९ । वल्लभी के शीलादिस प्रथम धर्मादिय का पला (अब बाम्बे एशियाटिक सोसा- यटी) में दानपत्र जो बल्लभी में दिया गया था। भटार्क के वंश में गुहसेन; उसका पुत्र धरसेन द्वितीय ; उसका पुत्र शीलादित्य प्रथम धर्मादित्य । (४९९) गु० सं० २२०-३० ए० भाग ९ पृष्ठ २३८ । बल्लभी के शी लादिस प्रथम धर्मादिस का ढाङ्क. ( अत्र राजकोट म्यूजियम) में दानपत्र जो वल्लभी द्वार के सामने होम्य (?) में दिया गया था। इस शिलालेख में दूतका खासह का उलख है । (१००) गु० सं० ३१०-३० ए० भाग ६ पृष्ठ १३ तथा भा० इ० पृष्ठ ४० । वच्छभी के ध्रुवसेन द्वितीय बालादिस का बोटाद ( अब भावनगर म्यूजियम ) में दानपत्र जो वल्लभी में दिया गया था । शीलादित्य प्रथम धर्मादिस तक की वंशावली संख्या ४९८ में; उसका छोटा भाई खरग्रह [ प्रथम ]; उसका पुत्र धरसेन तृतीय; उसका छोटा भाई ध्रुवसन द्वितीय बालादिन्य । (९०१) गु० सं० ३१६-(अथवा ३१८)-इ०ए० भाग १४ पृष्ठ ९८ तथा प्रो० ज० पृष्ठ ७२ । लिच्छवि वंश के महाराज शिवदेव प्रथम का गोलमढि टोल (भाटगांव में) शिलालेख जिसमें एक आज्ञा लिखी हुई है जो महासामन्त अंशुवर्मन की प्रार्थना पर मानगृह में दी गई थी। (५०२) गु० सं० ३२६-ज० ब० ए० सो० भाग १० पृष्ठ ७७ तथा इ० ए० भाग १ पृष्ठ १४ । बल्लभी के महाराजाधिराज धरसेन चतुर्थ का दानपत्र जो वल्लभी में दिया गया था । । ..

में - ध्रुपसेन द्वितीय बालादित्य तक की वंशावली संख्या ५०० र उमका पुन परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर चक्रवर्तिन धरमेन च- तुर्थ । इस शिलालेख में राजगुन ध्रुवसेन को दूतक करके लिया है । (५०३) गु० सं० ३२६-३० ए० भाग १ पृष्ट ४५ । वल्लभी के महा- राजाधिराज ध्रुवसेन चर्तुथ का भावनगर में द्वितीय दानपत्र | (५०४) गु० सं० ३३०-६० ए० भाग ७ पृष्ठ ७३ । वल्लभी के महा- राजाधिराज धरसेन चतुर्थ का अलीना मे दानपर जो भस्कच्छ में दिया गया था। इस शिलालेख में राजदहिती भूपा को दूनक कर के लिखा है । (५०५) गु० सं० ३३०-३० ए० भाग १५ पृष्ठ ३३९ । वल्लभी के महाराजाधिराज धरसेन चर्तुथ का कैर में दानपत्र जो भरुकच्छ में दिया गया था । (५०६) गु० सं० ३३४-ए० इ० भाग १ पृष्ठ ८६ । वल्लभी के ध्रुव- सेन तृतीय का कापड़त्रणज में दानपत्र जो सिरिसिम्मिणिका में दिया गया था। धरमेन चतुर्थ तक की वंशावली सरया ५०२ में; उसका उत्तरा- धिकारो ध्रुवसेन तृतीय नो धरसेन चतुर्थ के दादा [खरग्रह प्रथम ] के [ बड़े ] भाई शीलादित्य प्रथम के पुन डेरभट का पुत्र था। (५०७) गु० सं० ३३७-३० ए० भाग ७ पृष्ठ ७६ । वल्लभी के खर- ग्रह द्वितीय का अलीना में दानपत्र जो पूलेण्डक (१) में दिया गया था। ध्रुवसेन तृतीय तक की वंशावली सख्या १०६ में; उसका बड़ा भाई खरग्रह द्वितीय हुआ।

१०४
,
(५०८)
गु० सं० ३५०-९० इ० भाग ४ पृष्ट ७६ । वल्लभी के शी-
लादिस तृतीय का लुन्सडी में दानपत्र जो खेटक में दिया गया था।
खरग्रह [ द्वितीय ] धर्मादित्य तक की वंशावली संख्या ५०७ में
उसके पश्चात शीलादित्य तृतीय जो खरग्रह द्वितीय के बड़े भाई शीला
दित्य द्वितीय का पुत्र था-इस शिलालेख में राजपुत्र ध्रुवसेन को दूतक
कर के लिखा है।
(५०९)
गु० सं० ३५२-३० ए० भाग ११ पृष्ठ ३०६ तथा भा० इ०
पृष्ठ ४५ । वलभी के शीलादिस तृतीय का लुन्सडी (अब भावनगर
म्यूजियम ) में दानपत्र जो मेघवन में दिया गया था।
वंशावली संख्या ५०८ में-इसमें भी राजपुत्र ध्रुवसेन को दूतक
कर के लिखा है।
(५१०)
गु० सं० ३६५ (१)-ज० व० ए० सो० भाग ७ पृष्ठ ९६८ ।
वल्लभी के शीलादिस तृतीय का कैर में दानपत्र ।
वंशावली संख्या ५०८ में इसमें भी राजपुत्र ध्रुवसेन को दूतक
कर के लिखा है।
(५११)
गु० सं० ३७२-३० ए० भाग ५ पृष्ठ २०९ । बल्लभी के
महाराजाधिराज शीलादिस चतुर्थ का भावनगर में दानपत्र जो वाला-
दित्य के तलाव पर के डेरे में दिया गया था।
शीलादित्य तृतीय तक की वंशावली संख्या ५०८ में; उसका पुत्र
परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर शालादित्य चतुर्थ हुआ । इसमें

राजपुत्र खरग्रह को दूतक करके लिखा है। (५१२) गु० सं० ३७५-चौ० जी०भाग १ पृष्ठ २१३ तथा भा० ३० पृष्ठ ५५ । बल्लभी के महाराजाधिराज शीलादिस चतुर्थ का देवकि (अब भावनगर म्यूजियम) में दानपत्र जो पूर्णीक ग्राम में दिया गया था। बंशावली संख्या १११ में इसमें भी रानपुत्र खरग्रह को दूतक करके लिखा है। (५१३) गु० सं० ३७६-डाक्टर बरगेस की प्रतिलिपि से । वल्लभी के महाराजाधिराज शीलादिस चतुर्थ का दानपत्र । वंशावली संख्या १११ में-इस शिलालेख में भी राजपुत्र खरग्रह को दूतक करके लिखा है। (९१४) गु० सं० ३८२-डाकर क्लीट की प्रतिलिपि से । पल्लभी के महाराजाधिराज शीलादिस चतुर्थ का दानपत्र जो बलभी में दिया गयाथा। अशापली सख्या ५११ में इसमें रामपुन धरसेन को दूतक करके लिखा है। (५१५) गु० सं० ३८६-३० ९० भाग ९ पृष्ठ ११३ । मानदेव का चाइगुनारायण ( काठमाण्डु के निकट ) के स्तूप पर शिलालेख । वृषदेव , उसका पुत्र भारदेन जिसने राज्ययती से विवाह किया उनका पुन मानदेव । (५१) गु० सं० ४०३-ज० बा० ० सो० भाग ११ पृष्ठ ३३५ । पल्लभी के महाराजाधिराज शीलादिस पञ्चम या गोण्डल में दान- पर जो खेटक म दिया गया धा ।

शीलादित्य चतुर्थ तक की वंशावली संख्या ५११.में; उसका पुत्र परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर, शीलादिस पञ्चम हुआ इसमें राजपुत्र शीलादित्य को दूतक करके लिखा है। (५१७) गु० सं० ४०३-० वा ० ९० सो० भाग ११ पृष्ट ३३५- पछभी के महाराजाधिराज शीलादिस पञ्चम का गोण्डल में दानपत्र जो खेटक में दिया गया था। वंशावली संख्या ५१६ में-इसमें भी राजपुत्र शीलादित्य को दूतक करके लिखा है - गु० सं० ४१३-३० ए० भाग ९ पृष्ठ १६७ । मानदेव के समय का देवपाटन ( काटमाण्डु के निकट ) में खण्डित शिलालेख । (५१९) गु० सं० ४३५-३० ए० भाग ९ पृष्ठ १६७ १ महाराज वस- न्तसेन का लगण्टोल ( काटमाण्डु) में खण्डित शिलालेख जो मान- गृह में लिखा गया था। ( ५२०) गु०सं० ४४१-३० ए० भाग ६ पृष्ठ १७ । बच्ची के महा- राजाधिराज शीलादिस छठवें का लूणावाडा में दानपत्र जो गोद्रहन में दिया गया था। शीलादित्य पञ्चम तक की वंशावली संख्या ५१६ में; उसका पुत्र परममधारक महाराजाधिराज परमेश्वर शालादित्य छठवां । (५२१) गु० सं०४४७-गु० इ० पृष्ट १७३ } बल्लभी के महारामा- धिराज शीलादिस सहम धूवट का अलीना (अब रोयल एशियाटिक , सोसायटी) में दानएन जा आनन्दपुर में दिया गया था।

- ( १०७ ) शीलादित्य छठवें तक की वंशावली संख्या ५२० में उसका पुत्र बट, जिसकी पदवी परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर शालादित्य [ सप्तम ] थी। (५२२) गु० सं० ५३५-इ० ए० भाग ९ पृष्ठ .१६८ । लगण्टोल ( काटमाण्ड ) का खण्डित शिलालेख जिसमें राजपुत्र विक्रमसेन को दूतक करके लिखा है। (५२३) गु० सं० ५८५-३० ए० भाग २ पृष्ठ २५७ । जैनक का मोवी में दूसरा दानपत्र । (५२४) गु० सं० ८५०-धी० जी० भाग ३ पृष्ठ ७ तथा भा० इ० पृष्ठ १८६ । पुजेरी भाव वृहस्पति का घेरावल में शिलालेख । इस शिलालेख में चौलुक्य जयसिंह सिद्धराज और कुमारपाल (जिन्हों ने धारा के राजा बल्लाल को पराजित किया था) का वर्णन है । (१२५) गु० सं० ८५० (१)-मा० इ० पृष्ठ १८४ । चौलुक्य कुमा- रपाल के समय का जूनागढ़ में खण्डित शिलालेख । (१२६) गु०सं० ९११-भा० इ० पृष्ठ १६१ । घेलाणा (माङ्गोल के निकट ) का खण्डित शिलालेख । ..(५२७) गु० सं० ९२७-९० ३० भाग ३ पृष्ठ ३०३ । वेरायल की मूर्ति का शिकालेख । (५२८) गु० सं० ९४५-चौलुक्य ( वाघेला ) महाराजाधिराम अर्जुन- देव के राजकाल का वरावल में शिलालेख ।

. . .. दमन, (७) गुप्त वल्लभी संवत के बिना समय के शिलालेख । (५२९) गु० इ० पृष्ठ १४१ । मेहरौली (मिहरौली) के लोहस्तूप पर खुदा हुआ.लेख निसमें पराक्रमी राजा चन्द्र के विजयों का उल्लेख है जो उसकी मृत्यु के पीछे खोदा गया था। (१३०) गु० इ० पृष्ठ १ । महाराजाधिराज समुद्रगुप्त का इलाहाबाद के स्तूप पर शिलालेख, जिसने कोसल के महेन्द्र, महाकान्तार के व्याधू- राज, केरल के मण्टराण, पिष्टपुर के महेन्द्र, कोट्टूर पहाड़ी के स्वामि- दत्त, एरण्डपल्ल के काञ्ची के विष्णुगोप; अवमुक्त के नील राज, पेङ्गी के हस्तिनमन, पलक के उग्रसेन, देवराष्ट्र के कुबेर, कुस्थल- धनन्य तथा दक्षिणापथ के और सब राजाओं को लड़ाई में पकड़ कर फिर छोड़ दिया और रुद्रदेव, मतिल, नागदत्त, चन्द्रवर्मनं, गणपतिनाग, नागसेन, अच्युत, नन्दिन, बलबर्मन तथा आर्यावर्त के और राजाओं को उजाड़ दिया था (इसमें गद्य तथा पद्य में एक काव्य है जिसे ध्रुवभूति के पुत्र सन्धिविग्रहिक कुमारामात्य महादण्डनायक हरिपेण ने सङ्कलित किया था) (५३१) गु० इ० पृष्ठ २० । समुद्रगुप्त का एरण (अंबं कलकत्ता म्यूजियम) में खण्डित शिलालेख । (५३२) गु० इ० पृष्ठ २५६ । महाराजाधिराज समुद्रगुप्त का गया (स- न्दिग्ध ) में दानपत्र जो अयोध्या में दिया गया था । . - गु० इ० पृष्ठ ३६ । चन्द्रगुप्तद्वितीय के समय का उदयगिरि की गुहा का शिलालेख, जिसमें उसके मंत्री, पाटलिपुर के कवि वीरसेन उपनाम शाब की आज्ञा से इस गुफा के खोदे जाने का उल्लेख है।

(५३४)
गु० इ० पृष्ठ २६ । महाराजाधिराज चन्द्रगुप्त द्वितीय का मथुरा
(अब लाहौर म्यूजियम ) में खण्डित शिलालेख ।
गु० इ० पृष्ठ ४०
1 महाराजाधिराज कुमारगुप्त प्रथम के रा-
मकाल का गढ़ना ( अब कलकत्ता म्यूजियम) में खण्डित शिलालेख ।
(१३६)
गु० इ० पृष्ठ २६५ । कुमारगुप्त प्रथम के समय का गढवा
(अब कलकत्ता म्यूजियम ) में खण्डित शिलालेख ।
(५३७)
गु० इ० पृष्ठ ४९ । महाराजानिराज स्कन्दगुप्त के समप का
बिहार के खण्डितस्तूप का शिलालेख ।
कुमारगुप्त प्रथम तक की वशावली सख्या ४६० में; उसका
पुत्र महाराजाधिराज स्कन्दगुप्त ।
(५३८)
गु० इ० पृष्ठ ५३ । स्कन्दगुप्त का भितरी के स्तूप पर शिला-
लेख, जिसमें विष्णु भगवान को एक मूर्ति को स्थापित करने तथा उस
मूर्ति के निमित्त एक ग्रामप्रदान करने का उल्लेख है।
(१३९)
ज० ब० ए० सो० भाग ५८ पृष्ट ८९ तथा ३० ए० भाग १९
पृष्ठ २२५-महारामाधिराज कुमारगुप्त द्वितीय की भितरी ( अब
रखनऊ म्यूजियम ) में मोहर ।
कुमारगुप्त गथम तक की वशावली संख्या ४६० में, उसका पुत्र
अनन्त देवी से, महाराजाधिराज पुरगुप्त; उसका पुत्र, वत्सदेवी से,
महाराजाधिराज नरसिंहगुप्त, उसका पुन, महालक्ष्मी देवी से, महारामा-
धिराज कुमारगुप्त [ द्वितीय ] |
-
,

( ११० )
(५४०)
ए० इ० भाग १ पृष्ठ २३९ । राजाधिराज महाराज तोरमाण
शाह (वा शाही) जऊल का कुर (अब लाहौर म्यूजियम) में
शिलालेख, जिसमें एक बौद्ध मट के बनाने का उल्लेख है।
गु० इ० पृष्ठ १५९-महाराजाधिराज तोरमाण के राजकाल के
प्रथम वर्ष का ईरान के पत्थर पर एक वराह की मूर्ति का शिलालेख,
जिसमें उस मन्दिर का, जिसमें वराह बना है, महाराज मातृविष्णु के
छोटे भाई धन्यविष्णु से बनवाए जाने का उल्लेख है।
(५४२)
गु० इ० पृष्ठ १६२ । तोरमाण के पुत्र मिहिरकुल ( जिसने
पशुपति को पराजित किया था ) के राजकाल के १५ वर्ष का
ग्वालियर (अब कलकत्ता म्यूजियम) में शिलालेख जिसमें गोप (ग्वालियर)
के पर्वत पर किसी मातृचेट नामक मनुष्य से एक सूर्यमन्दिर बनवाए
जाने का उल्लेख है।
(१४३)
गु० इ० पृष्ठ १११ । उच्चकल्स के महाराज शर्वनाथ तथा
परिव्राजक महाराज हस्तिन का भुमरा स्तूप पर शिलालेख ।
(५४४)
भा० इ० पृष्ठ ३० । वाङ्कोडि ( अब भावनगर म्यूजियम ) का.
खण्डित शिलालेख, जिसमें वल्लभी के गुहसेन का नाम है।
(१४५)
इ० ए० भाग १२ पृष्ठ १४८ तथा भा० इ० पृष्ठ ६४:।
एक वल्लभी दान का लेख, जिप्समें खरग्रह के पुत्र धरसेन तृतीय का
वर्णन है और जो वल्लभी में दिया गया था।
,
.

( १११ )
(५४६)
गु० इ० पृष्ठ २७९ । बुद्धगया की बोद्ध मूर्ति का शिलालेख,
जिसमें स्थविर महानामन के उस मूर्ति स्थापित करने का वर्णन है
जो इस लेख के ऊपर स्थित है।
(५४७)
इ० ए० भाग ९ पृष्ठ १६८ । एक खण्डित शिलालेख जो
काठमाण्डू से ५ मील उत्तर शिवपुरी पहाड़ी के निकट मिला था, जिसमें
लिच्छरिश क महाराज शिवदेव प्रथम के कुछ कार्यों का वर्णन है
जो महासामन्त अशुगरमन की प्रार्थना पर किए गए थे । यह मानगृह
में दिया गया था।
(५४८)
भा० ३० पृष्ठ २०८ । भावहस्पति का खाण्डित वेरावल का
शिलालेख, जिसमें चालुक्प (जपसिंह ) सिद्धराज, कुमारपाल, अजयपाल,
मूल राज द्वितीय और भीमदेव द्वितीय का उल्लेग्य है।
(८) हर्प संवत के शिलालेख ।
(५४९)
ह० स० २२-६० इ० भाग ४ पृष्ठ २१० 1 महाराजाधिराज
दर्प का बन्सग्वेर (अब लखनऊ म्यूजियम) में दानपन जो वर्धमानकोटी
में दिया गया था।
महाराज नरनर्धन; उसका पुत्र, पनूिनीदेवी से, महाराज राज्यवर्धन
[प्रथम] ; उसका पुत्र अप्सरोदेवी से, महराज आदित्यवर्धन; उसका पुन,
महासेनगुनदेवी से, महाराजाधिराज प्रभाकरवर्धन, उसका पुत्र, यशो-
मतीदेवी से, महाराजाधिराज राज्पनर्धन द्वितीय (जिसने देवगुप्त तथा
और राजाओं को विजय किया ) उसका रघु भाता महाराजाधिराज
हर्ष । इम शिगलेख में महासामन्त स्कन्दगुप्त और महासामन्त मान (1)
का भी उल्लेख है।
.

( ११२ ) , (५५०) है ० सं० २५-५० इ०, भाग १ पृष्ठ ७२ । महाराजाधिराज हर्प का मधुबन ( अब लखनऊ म्यूजियम ) में दानपत्र जो कपित्यिका में दिया गया था। वंशावली संख्या ५४९ में-इस शिलालेख में महासामन्त स्कन्द- गुप्त और सामन्त महाराज ईश्वरगुप्त का रामपुरुषों की भांति वर्णन है। (५५१) ह० सं० ३४-प्रो० ० ज० पृष्ठ ७४ । महासामन्त अंशुवर्मन का सुन्धारा में शिलालेख जो कैलासकूटभवन में दिया गया था । (५५२) है० सं० ३४-३० ए० भाग ९ पृष्ठ १६९ । महासामन्त अंशुवर्मन का ( काठमाण्डू के निकट) बङ्गमती में खण्डित शिलालेख, जो कैलासकूटभवन में दिया गया था । (१५३) ह० सं० ३९-इ० ए० भाग ९ पृष्ठ १७० । अंशुवर्मन का ( काटमाण्डु के निकट ) देवपाटन में शिलालेख मो कैलासकूटभवन में दिया गया था। इस शिलालेख में युवराम उदयदेव का दूतक की भांति उल्लेख है । इसमें अंशुवर्मन की बहिन भोगदेवी का भी, जो राजपुत्र शूरसेन की पत्नी तथा भोगवर्मन और भाग्यदेवी की माता थी, वर्णन है । (५५४) ह० सं० ४५-३० ए० भाग ९ पृष्ठ १७१ । अंशुवर्मन का ( काठमाण्डु के निकट) सतधारा में शिलालेख । (१५५) ह० सं० ४८-३० ए० भाग ९ पृष्ठ १७१ । विष्णुगुप्त का ( काठमाण्डु के निकट ) ललितपट्टन में शिकालेख, जो कैलासकूट भवन में दिया गया था। .

. इस शिलालेख में मानगृह के सम्बन्ध में महाराज ध्रुवदेव का, 'महाराजाधिराज अंशुवर्मन का तथा दूतक की भांति युवराज विष्णुगुप्त का उल्लेख है। (१५९) ६०.सं०६६-गु० ३० पृष्ठ २१० । मगध के गुप्तवंश के आ- दिससेनदेव के राजकाल का शाहपुर के मूर्ति का शिलालेख, नि- समें बलाधिकृत सालपक्ष का नाकन्द (!) में इस मूर्ति के स्थापन करने का वर्णन है। (५५७) १० सं० ८२-प्रो० ० ज० पृष्ठ ७७ । गैरिधारा का खण्डित शिलालेख, मो केलासकूटभवन में दिया गया था। • इस शिलालेख.में युवराज स्कन्ददेव (1) का दूतक की मांति वर्णन है। (११८) १०.सं० १००-मुन्सिफ़ देवीप्रसाद तथा डाकर फहरर की प्रतिलिपियों से । महाराज भोजदेव प्रथम का दौलतपुरा ( अब नो- धपुर ) में दानपन्न जो महोदय ( कालीन ) में दिया गया था। .... महाराज, देवशक्ति; उस का पुत्र, भार्यकादेवी से, महाराज वत्स- राम, उस का पुत्र, सुन्दरीदेवी से, महाराज नागभट, उसका पुत्र ईश्वरी- देवी से, महाराज रामभद्र, उसका पुत्र, अप्पादेवी से, महारान भोन [ प्रथम ] [ उपनाम प्रभात :-इस शिलालेख में युवराज नागभट का भी दूतक की भांति वर्णन है। (५५९) १० सं० ११९-इ० ए० भाग ९ पृष्ठ १७४ । महाराजाधिराम शिवदव द्वितीय का लगण्टोल (काटमाण्डु) में शिलालेख, जो केला- सकूटभवन में दिया गया था।

. इस शिलालेख में रामपुत्र जयदेव का.दूतक की भांति वर्णन है। (.५६०) ६० सं० १४३-३० ए० भाग ९ पृष्ठ १७९ । महाराजाधिराण शिवदेव द्वितीय का काटमाण्डु में खण्डित शिलालेख । (५६१) ह सं १४५-३० ए० भाग ९ पृष्ठ १७० । ( काठमाण्डु निकट ) ललितपत्तन का खण्डित शिलालेख । इस शिलालेख में युबराज बिजयदेवका दूतक की भांति वर्णन है (५६२) ह० स० १५१-प्रो० ० ज० पृष्ठ ७९ । काटमाण्डु में जैसि के निकट नहर में एक शिलालेख । ' (५६३) ह० सं० १५६---इ० ए० भाग ९. पृष्ठ ७९ । जयदेव परचक्रकाम काटमाण्डु में शिलालेख-पांच श्लोकों को छोड कर, जिसे. कि राजा ने स्वयं बनाया था, इसे बुद्ध कीर्ति ने सङ्कलित किया । सूर्यवंश में लिच्छवि था, उसके कुल में सुपुष्प हुआ जो पुष्पपुर (पाटलिपुत्र में ) जन्मा; उसके पीछे २३ राजाओं के उपरान्त जयदेव हुआ; उसके पीछे ११ राजाओं के उपरान्त वृषदेव हुआ; उसका पुत्र शंकरदेव; उसका पुत्र धर्मदेव; उसका पुत्र मानदेव (संख्या ११५ तथा ५१८ देखो);उस का पुत्र महीदेव; उस का पुत्र वसन्तदेव (संख्या५१५) इसके पश्चात् इस शिलालेख में उदयदेव (जिनका ५५३ में युवराज की भांति वर्णन है) का उल्लेख है, उसका पुत्र नरेन्ददेव, उसका पुत्र शिवदेव द्वितीय ( संख्या ५५९ और ६६०) जिसने मगध के आदि- त्यसेन की नातिन तथा मौखरि भोगवर्मन की पुत्री वत्सदेवी से विवाह किया, उनका पुत्र जयदेव परचक्रकाम जिसने राजा भगदत्त के वंशज और कलिङ्ग, कौशल, गौड़े उद्र आदि के राजा हर्षदेव की पुत्री राज्य: मती, से विवाह किया। .

( ११५ ) (५६४) ह० सं० १५५-३० ए० भाग १५ पृष्ठ ११२ । महाराज महेन्द्रपालदेव का दिघवा दुबौली में दानपत्र जो महोदय (कन्नोज में दिया गया था। महाराज देवशक्ति; उसका पुत्र, भूयिकादेवी से, महाराज वत्सराज उसका पुत्र, सुन्दरीदेवी से, महाराज नागभट्ट, उसका पुत्र ईसटदेवी से, महाराज रामभद्र, उसका पुत्र अम्पादेवी से महाराज भोज प्रथम, पुत्र, चन्द्रभट्टारिकादेवी से, महाराज महेन्द्रपाल [ उपनाम भाक ? ] , . उसका ६० सं० १८४-३० ए० भाग २६ पृष्ठ २९ । किसी विग्रह(:) के राजत्वकाल का पंजाब में शिलालेख । (५६९) ह० सं० १८८-३० ए० भाग १५ पृष्ठ १४० } महाराज विनायकपालदेव का बङ्गाल एशियाटिक सोसायटी में दानवत्र जो महोदय ( कनौज़ ) में दिया गया था । महेन्द्रपाल तक की वंशावली संख्या १६४ मैं, उसका पुत्र, देहनागादेवी से, महाराज भोज द्वितीय, उसका भाई, अर्थात् महीदेवी से पुत्र, महाराज विनायकपाल [ उपनाम हर्प ?] (५६७) ६० सं० २१८-३० ९० भाग २६ पृष्ठ ३१-खजुराहो की मूर्ति का शिलालेख । महेन्द्रपाल का ह० सं० २७६-९० इ० भाग १ पृष्ठ १८६ । कन्नौज के महाराजाधिराज रामभद्रदेव के उत्तराधिकारी महाराजाधिराज भोजदेव के राजत्वकाल का पेहेवा (पेहोआ ) में शिलालेख । (५६९) ह० सं० ५६४-(या १६२१)-३० ए० भाग २६ पृष्ठ २३. ।

( १२८ ) - मदनपाल और देवपाल ; देवपाल का पुत्र भीमपाल ; उसका पुत्र सूर- पाल; उसका पुत्र अमृतपाल; उसका छोटा भाई लखणपाल । इस शिला-." लेख में शैत्र योगी वर्मशिव (जिसका पुर्व निवास अणहिल पाटक में था ) , मूर्ति गण और ईशान शिव ( जो हरियाण देश में सिंह पल्ली के निवासी वसावण का सबसे बड़ा पुत्र था ) का भी वर्णन है (६२८) इ० ए० भाग १६ पृष्ठ ९९ । महाराज रुद्रदास का शिवपुर (खान्देश में ) खण्डित दानपत्र । (६२९) ज० बा० ए० सो० भाग १६ पृष्ठ ९० । राजा मानाङ्ग के प्रपौत्रं देवराज के पौत्र तथा भविष्य के पुत्र राष्ट्रकूट अभिमन्यु का दानपत्र जिसमें एक दान का, जो ( किसी जयसिंह के सामने जो कि कोइ हरि- वत्स का दण्डप्रणेता वर्णन किया गया है ) मानपुर में दिया गया था, वर्णन है । (६३०) आ० सा० के० इ० भाग ४ पृष्ठ १३३ । अजण्टा का कुछ नष्ट शिलालेख जिसमें बौद्ध योगी बुद्धभद्र का एक गुहा बनवाने का वर्णन है । इस शिलालेख में राजा अश्मक के मंत्री भव्यि राज और देवराज का तथा योगी स्थविर अचल का भी वर्णन है। . में मन्दिर . गु० इ० पृष्ठ २८० । साञ्ची (भूपाल राज्य में ) के खण्डित स्तूप का शिलालेख । ऐसा जान पड़ता है कि इसमें गोशूर सिंहबल के पुत्र बिहारस्वामिन रुद्र....के इस स्तूप को दान करने का वर्णन है। (६३२) गु० इ० पृष्ठ १९३ । आरङ्ग (मध्यप्रदेश में, अब नागपुर म्यूजियम ) में महा जयराज का दानपत्र जो शरभपुर में दिया गया था।

(६३३) गु०३० पृष्ठ १९७ । महा-सुदेवराज का रायपुर (मध्यप्रदेश में, अब नागपुर म्युजियम ) में दानपत्र नो शरमपुर में दिया गया था। (६३४) म० व० ए० सो० भाग ३५ पृष्ठ १९६ । महा सुदेवराज के सम्बलपुर ( मध्यप्रदेश में ) में प्रथम और द्वितीय दानपत्र जो शरम- पुर में दिए गए थे। (१३५) क० ब० ए० सो० भाग १७ पृष्ठ ६९ । उदयपुर (ग्वालियर) का शिलालेख जिसमें सूर्य की स्तुति है । आ० स०.३० भाग २१ । कालजर की पहाड़ी पर शिलालेख । इसमें पाण्डव वश के एक राजा उदयन का वर्णन है । (६३७) ए० ३० भाग ४ पृष्ठ २५७ । नागपुर म्यूजियम के एक खण्डित शिलालेख की नोटिस, जिसका एक लीयोग्राफ तथा अनुवाद न० बा० ए० सो० भाग १, पृष्ठ १५१ में दिया है । इस शिलालेख में पहिले -एक राजा सूर्यघोप का उल्लेख है; उसके बहुत पीछे पाण्डव वश के उदयन हुए, उसके चार पुत्र थे जिसमें सब से बडा इन्द्रवल (') से छोटा भारदेव था जिन्हे रण के सारन और चिन्तादुर्ग भी कहते हैं । इसे भास्कर भट्ट ने सङ्कलित किया । (६३८) गु० इ० पृष्ठ २९४ । पाण्डु वश के इन्द्रवल के पुत्र ननदेव के पुत्र कोसलाधिपति राजा तिवरदेव (महाशिवतिवरराज) का राजिम '(मध्य प्रदेश में ) में दानपत्र जो श्रीपुर में दिया गया था। और सब १ ( १२८ ) मदनपाल और देवपाल ; देवपाल का पुत्र भीमपाल ; उसका पुत्र सूर- पाल; उसका पुत्र अमृतपाल; उसका छोटा भाई लखणपाल । इस शिला- लेख में शैव योगी धर्मशिव (जिसका पुर्व निवास अणहिल पाटक में था ) , मूर्ति गण और ईशान शिव ( जो हरियाण देश में सिंह पञ्ली के निवासी वसावण का सबसे बड़ा पुत्र था ) का भी वर्णन है (६२८) इ० ए० भाग १६ पृष्ठ ९९ । महाराज रुद्रदास का शिवपुः ( खान्देश में ) खण्डित दानपत्र । (६२९) ज० बा० ए० सो० भाग १६ पृष्ठ ९० । राजा मानाङ्ग के प्रपोत्र देवराज के पौत्र तथा भविष्य के पुत्र राष्ट्रकूट अभिमन्यु का दानपत्र जिसमें एक दान का, जो ( किसी जपसिंह के सामने जो कि कोइ हरि- वत्स का दण्डप्रणेता वर्णन किया गया है ) मानपुर में दिया गया था, वर्णन है। (६३०) आ० सा० ० इ० भाग ४ पृष्ठ १३३ । अजण्टा का कुछ नष्ट शिलालेख जिसमें बौद्ध योगी बुद्धभद्र का एक गुहा में मन्दिर . बनवाने का वर्णन है । इस शिलालेख में राजा अश्मक के मंत्री भब्धि, राज और देवराज का तथा योगी स्थविर अचल का भी वर्णन है।, (६३१) गु० इ० पृष्ठ २८० । साञ्ची (भूपाल राज्य में ) के खण्डित स्तूप का शिलालेख | ऐसा जान पड़ता है कि इसमें गोशूर सिंहबल के पुत्र बिहारस्वामिन रुद्र....के इस स्तूप को दान करने का वर्णन है। (६३२) गु० इ० पृष्ठ १९३ । आरंङ्ग (मध्यप्रदेश में अब नागपुर म्यूजियम ) में महा-जयराज का दानपत्र जो शरभपुर में दिया गया था।

न कहते हैं। इसे भास्कर भट्ट ने सङ्कलित किया। गु० ३० पृष्ठ २९४ । पाण्डु शक इन्द्रबल के पुत्र नदेय के तिवरदेव (महाशिवतिवरराज)का गमिम (मध्य प्रदेश में) में दानपत्र मोश्रीपुर में दिया गया था। ( १२९ ) गु० ३० पृष्ठ १९७ । महा-भुदेवराज का रायपुर (मध्यप्रदेश में, अब नागपुर म्युजियम ) में दानपत्र नो गरमपुर में दिया गया था । (६३४) भ० व० ए० सो० भाग ३५ पृष्ठ १९६ । महा सुदेवरान के सम्बलपुर ( मध्यप्रदेश में ) में प्रथम और द्वितीय दानपत्र जो शरभ- पुर में दिए गए थे। (६३५) न० ब० ए० सो० भाग १७ पृष्ठ ६९ । उदयपुर (ग्वालिपर ) का शिलालेख जिसमें सूर्य की स्तुति है । आ० स० ३० भाग २१ । कालजर की पहाड़ी पर शिलालेख । इसमै पाण्डय वश के एक राजा उदयन का वर्णन है । (६३७) ९० ३० भाग ४ पृष्ठ २५७ । नागपुर म्यूजियम के एक खण्डित शिलालेख को नोटिस, निसका एक लीयोग्राफ तथा अनुवाद म० मा. ए० सी० भाग १ पृष्ठ १५१ में दिया है । इस शिलालेख में पहिले एक राना सूर्यघोप का उल्लेख है, उसके बहुत पीछे पाण्डव वश के उदयन हुए, उसके चार पुत्र थे जिसमें सब से बडा इन्द्रयल (1) और सब से छोटा भावदेव था जिन्हे रण के सारन और चिन्तादुर्ग भी पुत्र कोसलाधिपति राजा , (६३८) के रामसाही जिले में, अब कलकत्ता म्यूजियम ) में शिलालेख । इसे उमापतिधर ने सङ्कलित किया और मनदास के पोत्र तथा वृहस्पति के पुत्र राणक शूलपाणि ने खोदा । चन्द्रवंश में वीरसेन तथा अन्य, दक्षिणी, अनुशासक थे। उस सेन वंश में सामन्तसेन हुआ; उसका पुत्र. हेमन्तसन: जिसने : यशोदेवी से विवाह किया; उनका पुत्र विजयसेन (:जिसने नान्य, वीर आदि राजाओं को पराजित किया)। ::::: (६७०) ज० ब० ए० सो : भाग ४४. पृष्ठ १.१ । महाराजाधिराज बल्ला- लसेन देव के उत्तराधिकारी ...महाराजाधिराज लक्ष्मणसेनदेव, का तरपन्दिघी में दानपत्र जो विक्रमपुर में दिया गया था. चन्द्रवंश के सेन कुल में हेमन्त हुआ; उसका पुत्र ,विजयसेन उसका पुत्र -बल्लालसेन; उसका पुत्र लक्ष्मणसेन । ज० ब० ए० सो० भाग ७ पृष्ठ ४३ । गौड़ाधिपति महाराजा- धिराज लक्ष्मणसेनदेव के उत्तगधिकारी, गोडाधिपति महाराजाधिराज विषरुपसेनदेव का बेकरगञ्ज में दानपत्र" जो जम्बुग्राम के निकट दिया गया था। चन्द्रवंश में विजयसेन उसका पुत्र बहालसन; उसका पुत्र लक्ष्म- णसेन जिसने........(१) से ; विवाह किया। उनका पुत्र विश्वरुप (विश्वरुपसेन) (६५२.):- १० ब० ए० सो० भाग ५५- पृष्टः९ । गोडाधिपति महाराजा- धिराज लक्ष्मणसेनदेव के उत्तराधिकारी, गौडाधिपति महाराजाधिराग विश्वरुपमेनदेव का मदनपाड में दानपत्र जो फलगुग्राम के निकट दिया गया था । '-

( १३७ )
(६७३)
प्रो० ब० ए० सो० १८८५ पृष्ठ ५१ । राजा ( नृपति ) देव.
खन का दक्क (अशरफपर अब बगाल एशियाटिक सोसायटी) में
दानपना
(६७४)
ज० ब० ए० सो० भाग ९ पृष्ठ ७६७ । प्राग्ज्योतिष के महा-
राजाधिराज वनमालपर्मदेव का तेजपुर ( आसाम ) में दानपत्र ।
आदिवराह (विष्णु ) और पृथ्वी से नरक उत्पन्न हुए, उसके
पुत्र भगदत्त और वजूदत्त | भगदत्त के वंश में प्रालम्भ जिमने जीवदा
से विवाह किया; उनके पुत्र हर्जर जिसने तारा से विवाह किया, उन.
का पुत्र सनमाल।
(६७५)
प्रो० ० ए० सो० १८८० पृष्ठ १४८ । केशवदेव या
सिरहेत ( आसाम ) में दानपत्र ।
चन्द्रवंश में खरवाण (१), उसका पुत्र गोकुल (2 गोल्हण ),
उसका पुन नारायण, उसका पुत्र गोविंद-केशवदेव ।
(६७६)
प्रो० ब० ए० सो० १८८० पृष्ठ १५२ । ईशानदेव का
जिल्हेत (आसाम) में दानपत्र जिसे दासवश के माधर ने सकलित
-
किया।
चद्रवंश में गोकुल ( १ गोल्हण); उसका पुत्र नारायण , उसका
पुत्र केशवदेव ; उसका पुत्र ईशानदेन ।
(६७७)
ज० ब० ए० सो० भाग ४० पृष्ठ १६५ भजनश के
कोहभज के पुत्र दिग्भन के पुत्र रणभञ्जदेष का रामहाटी
(उरीसा में, अब कलकत्ता म्यूजियम ) में दानपत्र ।

( १२८ )
(६७८)
ज० ३० ए० सो० भाग ४० पृष्ठ १६८ । भञ्जवंश के
रणभञ्जदेव, जो कि यहां पर कोभञ्ज का पुत्र वर्णन किया गया है,
के पुत्र राजमजदेव का बामगटी ( यव कलकत्ता म्यूजियम ) में
दानपत्र ।
(६७९)
न० व० ए० सो० भाग ६ पृष्ठ ६६९ । भञ्जवंश · के शत्रु-
मञ्जदेव के पौत्र तथा रणभञ्जदेव के पुत्र नेतृभन्जदेव का गूसूर
( गंजम जिले में ) में दानपत्र ।
--
ज० ब० ए० सो० भाग ५६ पृष्ठ १५९ । भञ्जवंश के
व (!) रणभञ्जदेव के परपौत्र, दिव (:) भनदेव के पौत्र तथा
शिलीभम्नदेव के पुत्र महाराज विद्याधरमजदेव का उरीसा (!"
में दानपत्र ।
(६८१]
ए० इ०, भाग ३ पृष्ठ ३४११ चंद्रवंशी महाराजाधिराज शिवगुप्त
देव के उत्तराधिकारी, त्रिकालंगाधिपति महाराजाधिराज महा-भवगुण
राजदेव [प्रथम] जनमेजयदेव का पटना ( अब बंगाल एशियाटिक
सोसायटी ) में दानपत्र जो कटक में दिया गया था.
(६८२)
ए० इ० भाग ३ पृष्ठ ३४७ । चन्द्रवंशी महाराजाधिराज शिवगु
देव के उत्तराधिकारी, त्रिकलिङ्गाधिपति महाराजाधिराज महा-भवंग
देव [ प्रथम ] का कटक (कटक पा चौदवार उरीसा में) में। दान
जो कटक में दिया गया था।

(६८३) प्रो० ब० ए० सो० १८८२ पृष्ठ ११ तथा ए० इ० भाग ३ = पृष्ठ ३४६ | महाराधिराज महा-भवगुप्तदेव [प्रथम] का उसी समय का कटक (वा चौदवार, अब बङ्गाल एशियाटिक सोसायटी) में दूसरा दानपत्र । (६८४) ए० इ० भाग ३ पृष्ठ ३४६ । महाराजाधिराज महा-भवगुप्तदेव (प्रथम] का उसी समय के कटक (8) में दूसरे दानपत्र की नोटिस । ए० इ० भाग ३ पृष्ट ३५१ तथा ज० ब० ए० सौ० भाग ४६ पृष्ठ १५३ । चन्द्रवंशी महाराजाधिराज महा-भरगुप्तराजदेव [ प्रथम ] जनमेजय के पुत्र तथा उत्तराधिकारी, त्रिकलिङ्गाधिपति महाराजाधिराज महा-शिवगुप्तराजदेव ययातिराजदेव का कटक में दानपत्र भो बिनीतपुर में दिया गया था । ए. इ० भाग ३ पृष्ठ ३५६ । चन्द्रयशी महाराजाधिराज महा-शि- चगुप्तराजदेव ययाति (जो जनमेजय का पुत्र था) के पुन तथा उत्तराधिकारी निकालिंगाधिपति महाराजाधिराज महा-भवगुप्तराजदेव [ द्वितीय, भीमरथदेव का कटक (!) में दानपत्र भो ययातिनगर में दिया गया था। (६८७) ए० इ० भाग ४ पृष्ट २५८। ययातिनगर के चन्द्रवंशी महाराजा- धिराम महा शिवगुप्तरानदेव के उत्तराधिकारी निकलिंगाधिपति महाराजा- धिराज महा-भवगुप्तराजदेव (द्वितीय) के राजत्काल का, मथुर- घंश के वोडा (?) के पुत्र राणक पुन का कुदोपलि (मध्यप्रदेश के सम्बलपुर जिले में अब नागपुर। म्यूजियम) में दानपत्र को पा (!) मण्डापाटी में दिया गया था। (६८८) न० म० ए० सो० भाग ६४ पृष्ठ १२५ 1 महाराज कुलस्तम्भ- देव या रल (ण !) स्तम्भदेव (!) का पुरी ( उरीसा में ) में दानपत्र । (९८९) ९० इ० भाग ३ पृष्ठ ३१३ । महाराजाधिराज विजयराजदेव का इण्डिया ओफिस में दानपत्र जो फाटक में दिया गया था । इस शिलालेख में महाराज्ञी लाग्छदेवी तथा हंसिनीदेवी का वर्णन है। . म. ब० ए० . सो० ० भाग ७ पृष्ठ ५११ । त्रिलिंगाधिपति महाराजाधिराज उद्योतकेसरिराजदेव के रामत्काल का भुवनेश्वर ( उरीसा में ) में किञ्चित् नष्ठ शिलालेख । इस महपुरुषोत्तम ने सह- लित किया । इस शिलालेख के छपे हुए वर्णन के अनुसार इसमें निम्न लिखित उल्लेख है चन्द्रवंशी जनमेजय; उसका पुत्र दीर्घरव और उसका पुत्र अपवार को निरपत्य मर गया; उसके पीछे विचित्रवीर्य (जनमेजय का दूसरा पुत्र), उसका पुत्र अभिमन्यु, उसका पुत्र भण्डाहर, और उसका पुत्र उद्योतकेसरिन् जिसकी माता सूर्यवंश को कोलावती थी। (६९१) न० ३० ए० सो० भागं ६.पृष्ठ ,८९ । भुवनेश्वर (उरीसा में) का शिलालेख जिसमें हरिवर्मदेव के मंन्त्री गट्टमवदेय. उपनाम बालयक- भीभुगङ्ग का प्रशस्ति है । इसे बाचस्पति ने सङ्कलित किया। (६९२०). . :१० म० ए०.सो० भाग ६ पृष्ठ २८० तथा भाग ६६ पृष्ठ १८ - " .

( १४१ )
,
विकलिंग के गग अनियङ्कभीम के समय का भुवनेश्वर ( उरीसा में
में शिलालेख)
इस शिलालेख में पहिले ( गौतमगोत्र के ) राजपुत्र द्वारदेव र
वर्णन है । उसका पुत्र मूलदेन, उसका पुत्र आहिराम, और उसके पु
और पुत्री स्वपनश्वर और सुरमा, इसके पश्चात् चन्द्रवशी चौडगग, उस
का पुत्र राजराज जिसने सुरमा से विवाह किया, और रानराज का छोर
भाई अनियङ्कभीम ।
(१९३)
इ० ए० भाग १ पृष्ठ ३१५ । महाराज पुरुषोतमदेव व
बळसोर ( उरीसा में ) में दानपत्र ।
-
५० इ० भाग ४ पृष्ठ १९९ । कलिंग के महि द्रवर्मदेव के पु
गग महाराजाधिराज महाराज पृथिवीवर्मदेव का गज्जम में दानपत्र जे
श्वेत्क (?) में दिया गया था ।
(९९५)
९० इ० भाग ३ पृष्ठ ४३ । माधवधर्मन का लुगुड (निल
गञ्जम में (अब मद्रास म्पूजियम) में दानपत्र जो कैंगोद में दिया गया था
इस शिलालेख में 'कलिंगदेश में सुप्रसिद्ध ' पुलिन्दसेन,
रणभीत, उसके पुत्र सैन्यभीत (प्रथम) (यशोभीत,)उसके पुत्र सैन्यभीत
(द्वितीय), और उसके पुत्र माधवर्मन का वर्णन है।
(१९६)
९० इ० भाग ४ पृष्ठ १४४ । कलिंगाधिपति महाराज चण्ड
चर्मन का कोमति (गञ्जम जिले में ) में दानपत्र जो सिंहपुर में दिया
गया था।
,

. मभञ्जनवर्मन का चिककोल (जिला गजम में, अब, मद्रास म्पूनि- यम में) में दानपत्र जो शिरपल्लि में दिया गया था । (६९८) गं० सं० (१) ८७-ए० इ० भाग ३ पृष्ठ १२८ ! कलिंग के गंग महाराज इन्द्रवर्मन राजसिंह का अच्युतपुरम (जिला गजम में, अब मद्रास म्यूजियम में) में दानपत्र जो कलिंगनगर में दिया गया था। (६९९) गं० सं० (?)९१-३० ए० भाग १६ पृष्ठ १३४ तथा इ. इ० नम्बर १८ । कलिंग के गंग महाराज इन्द्रवर्मन राजसिंह का मलांकिमेडि ( जिला गञ्जम में, अब मद्रास म्यूजियम में ) में दानपत्र नो कलिंग नगर में दिया गया था। . ७०० गं० सं० (?) १२८-ई० ए० भाग १३ पृष्ठ १२० । कलि- गगङ्ग महाराज इन्द्रवर्मन का चिककोल ( जिला गञ्जम में, अब मद्रास म्यूजियम में ) में दानपत्र जो कलिङ्ग नगर में दिया गया था। . में , गं० सं० (?) १४६ (?)-इ० ए० भाग १३ पृष्ठ १२३ । [ कलिङ्ग के ] गङ्ग महाराज इन्द्रवर्मन का चिककोल (जिला गञ्जम अब मद्रास म्यूजियम में) में दानपत्रं जो कलिङ्ग नगर में दिया गया था। (७०२) गं० सं० (?) १८३-ए० इ० भाग ३ पृष्ठ' १३६ । कलिंग के गुणार्णव के पुत्र गंग महाराज देवेन्द्रवर्मन का चिककोल ( जिला गञ्जम में, अब मद्रास म्यूजियम में) में दानपत्र जो कलिंगनगर में दिया गया था। (७०३) गं० सं० २५४-कलिंग के महाराज अनन्तवर्मन के पुत्र गंग देवेन्द्रवर्मन का विज़गपतम में दानपत्र जो कलिंगनगर में दिया गया था। + ( १४३ ) (७०४ ) गं० सं०५१ (?)-३० ए० भाग १३ पृष्ट २७५ । महा- राज अनन्तवर्मदेव के पुत्र गग देवेन्द्रवर्मदेवे का चिककोल (निता गञ्जम में, अब मद्रास म्यूजियम में ) में दानपत्र जो कलिंग नगर में दिया गया था। (७०५) गं० सं० ३०४-६० इ० भाग ३ पृष्ठ १८ 1 महाराज राजेन्द्र- यमन के पुत्र गग अनन्तवर्मदेव का अल्मण्ड (जिला विजग पतम में) में दानपत्र जो कलिंगनगर में दिया गया था । (७०६) गं० सं० ३५१-३० ए० भाग १४ पृष्ठ ११ । कलिंग के महाराज देवेन्द्रनर्मन के पुत्र गंग ससवर्मदेव का चिककोल ( निला गञ्जम में, अब मद्रास म्यूजियम में ) में दानपत्र जो कलिंगनगर में दिया गया था। (७०७) ए० इ० भाग ३ पृष्ठ २२३ । गग महाराजाधिराज बज्रहस्तदेव के राजकाल का, चोल कामदिराज के पुत्र गंग दारपराज का पा किमेडी (जिला गञ्जम, अन मद्रास म्यूजियम में ) में दानपत्र जो कलिंगनगर में दिया गया था। (७०८) इ० ए० माग ५ पृष्ठ १७६ । महाराज चण्डबर्मन के सर से पुन शालाङ्कापन महाराज रिजयनन्दिवर्मन का कोल्लेरु झील (निला गोदारी) का दानपत्र जो बेंगीपुर में दिया गया था । (७०९) ए० इ० भाग ४ पृष्ट १९५ । विष्णुकुण्डि ( वश ) के महाराज बडे

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प्राचीन-लेख-मणि-माला की अनुक्रमणिका। ठा . अकबर या अकबर या प्रकवर, समाद ३२६, ३२७, ३२८, ३२६ अगरेज ३४५,३४६ अचल, बोट स्थविर ६३० अचल धर्मन समरपाल, शिवलपुराधिपति १२२ अच्युस, आर्यावर्त का एक राजा ५५० प्रदूक, चापाधिपति ३७२ अजयपाल, चौलुक्य राजा १६०, १००, १९६, ५४८. [अ] जयपाल, राजा १५४ अजय वर्मन, परमार रागा २०४ अजय सिंह, गुहिल राजा ३० अजय सिह, कलचुरि राजा ४५ अजित, शूरीन का नायक ६११ अजितमान,मायक ६५०, अमित देवी , उरचकल्पाधिपति ध्यान की रानी ४.. श्रणाहिल, नडूल का चाहमान नायक १४८ अपहिला, मल्हण की रानी ११ अणहिलपाटक या प्रणहिजपुर वा अणहिलपादक वा अपहिलवाटक, नगर (प. पहिलवाड)५०,६१,०५, १६, १६६, २०३, २१५, २१६,२१८, २२१, २२१, २२६,२०,०५२,६०१,१२७, प्रतियपावल या यशामल, महपति पय का एक पुरुष ५५ द्वतात, अजुन कृष्णराज (वा कृष्णग') नायक १५ अधिराज (१)नायक २०५ घना नायक २०७ घना भीम. पूर्वी गा का रामा १८६ अना भीम, या अनियत भीम, पूर्वी गत का गमा ८५६५ अनन्त देवी यम कुमार गुप्त की रानी, अनन्न यन, पूर्वग का गभा 1,601,००५ मनम्स वर्मन् गोरिरामा ५०,५७८ अनन्त वर्मन्-चौडगा, पूर्वी गङ्ग का राजा ३७६, ३७६, ३८० अनन्त वर्मन्, कोलाहल, गारांजा ३१६ अनियत भीम वा अनङ्ग भीम, पूर्वी गङ्ग का राजा ३८६, १२ अनियत भीम, पूर्वी गर के एक वजहस्त का उपनाम ३७६ अन्तर्वेदी, देश ४७० अपराजित, हिल राजा ५ अपराजिन, कच्छपघाट देदपाल का उपनाम ८९ अपवार, तृमलिक का राजा ६० अप्पा देवी, महोदयाधिपति रामभद्र की रानी ५५८५६४, अमतीदार (श मद मतीहार (1) नगर १०१ अन्सर मिया, अजित की रानी ६११ अप्सरी देवी, राज्यवर्धन प्रथम की रानी ५४६ अभयचन्द्र जैन सूरि ५४२ अभयदत्त अभयदेव, उमाधिपति ३०८ अभिमन्यु, कच्छपघाट का राजा ७४ अभिमन्यु, राष्ट्र क्रूट का नायक ६२६ अभिमन्यु, विकलिङ्गाधिपति ६० अभिनवसिद्धराज, उपनाम चौलुक्य भीम द्वितीय १६६ अभिनवमिद्धराज, उपनाम चालुक्य जयन्त सिह २१५ अमर, कवि २६५ अमरदेव ३२ अमर मल्ल वा नरेन्द्रमल्ल, नेपाल का राजा ५८६,५८७ अमर सिंह, मेवाड का राजा ३३१ अमरेश्वर तीर्थ, स्थान २०७ अमोघ वर्ष, उपनाम परमार धापतिराज ५६ अम्बा, बीरबाहु की रानी ७१४ अमृतपाल, दोदामयूता राष्ट्रकूट नायक ६२७ अमृतराज, राष्ट्रकूट नायक ३७३ अयोध्या, नगर ५३२. ६५० अरिसित रहिल राजा २६०,३०५,३०६, ३१६ श्रर्नुन, कच्छपघाट राजा ७४ अर्जुन वा अर्जुन वेष, बघेला राजा २३६, २६२,२६८ अर्जुन वा अर्जुन वन, परमार राजा २०१, २०६, २०७ अर्जुन सिंह, गढांश का नायक ३४१ अगिज (वा प्रारण्यराज)नायक ६४ प्रोगन शाकम्भरी का चारमान गजा २३६, १८३ प्रोराज वेपला राजा २२०,३६३ अर्व, पर्नय (श्रावू ) २७५ अलायदीन वा अल्लावदीन मुलतान (अलाउद्दीन मसऊद ) २५३, ३०१ भन्दा दोवी, गयकर्ण की रानी ५३६, १४३, १५२ अहट, गुहिल राजा २५७, २६०,३०१ घर दोष योगी ११ धनावहीन, अर्थात् अलावदीन ३०२ भयमुक्ता नगर वा देश ५० भयनिजनाश्रम, पुलकोरीराज का उपनाम ५२५ अवनिर्वमा, चौलुक्य नायक १५० अवन्ति, देश ३६१ धयन्ति या अवन्तिवर्मन, मत्तमयूर नायक ५५०, ५५१ अवन्तिवर्मन, मगध (१) का राजा ५७१ अयानदेव, शाकम्भरी का चाहमान राजा १५९ अशुवर्मन, नेपाल का राजा ५०२५४०, ५५१, ५५२, ५५३, ५५४, ५५५ अश्मक, जाति ६३० भ्रशोकबल्ल सपादलन का राजा ५९७ ०९८,५९९ असमसदीन, सुलतान (शम्सुद्दीन अल्तमिश) २५२ अहिहय या हेदय ३०२ अहिराम, नायक ६९० अहियमन, नायक ७२५ श्रागियाम, यश ६६८ यात्रय गोच ५३५ प्रादि सिर, मगध का राजा ६५० आदित्य भेगिक, सान्धि विग्रहिक १२३ घाहित्य शक्ति, सन्दकाधिपति ४२० प्रादित्य सेन, मगध का गुप्त वशी राजा ९५६, ५६३, ५७२, ६७३ ०७४ प्रादित्य वर्धन, कन्नोज का राजा ५४९ श्रादित्य धर्मन, राजा ६१७ श्रादित्य वर्मन मौसरि का राजा ५७६ श्रादिवराह, उपनाम कन्नौज का राजा भोज १५ प्रानन्नपुर नगर (प्रानन्द) ५२१ श्रामीयनाय, शेष योगी ४५१ प्रामा श्रामूका, नगर ११० घाम प्रसाद गुहिल राजा २४७ प्रारण्यराज (या अषोराज)नायक ६५ कवि ४२ 1 प्रार्य धर्मन, सिद्ध पुर का नायक ६२२ भार्यावर्त, देश ५३० भाल्हण नदूल का चाहमान नायक ११०, १५८ प्रावलरेवी, कलचुरि कर्ण की रानी ४३१ शासट, राजा ६१५ प्रासतिका, नगर ८० ८६ प्रासफ खान (आसफ खा) ३११ श्रास, कृष्पप की रानी ३५२ ग्रासलदव, वडगूजर का नायक २२१ प्रासल देव, नलपुर का नायक २७० श्रासाराज, नवून का चाहुमान नायक १५८ भोपदेव, उच्चकल्प का नायक ५०६ गणपड, नगर (इङ्गणोड ) १११ इज्जा देवी, मगध क विष्णु गुप्त की रानी ५७५ इन्दिरा, घोडगा की रानी ३८६ इन्द्रबल, नायक ६३७ ६३८१३९ इन्द्रभट्टारक, राजा वही जो इन्द्रभट्टारक वर्मन ७१० इन्द्रभट्टारकवर्मन, विष्णुकुण्डिन का राजा ७०९ इन्द्ररथ, राजा ३५९ इन्द्रराज,राजा ६६० इन्द्रवर्मन, पूर्वी गा का राजा ७००,००१ इन्द्रवर्मन राजासंह, पूर्वी गङ्ग का राजा ६९८,६१९ इन्द्रधिराज, नायक ७१० इब्राहीम लोदी, सुल्तान ३२२ इगण, राजा ६२५ इशानदेव, शेष योगी ६२७ ईशानधर्मन, मोसरि राजा ५७२, ५७६ ईशाप्रतिष्ठान, नगर १०२ ईश्वरगुप्त, ५५०, दिवरवर्मन, मोखरियश का राजा ५७५, १७६ ईश्वरवर्मन, सिंघपुर का नायक ६२२ ईश्वरा, सिंघपुर की राजकुमारी ६२२ ईसटादेवी, महोदय के नायक नागभट की रानी ५५८ ५६१, ईमुक, चाहमान नायक १२२ जपसेन, गदादेश का नायक ३५ उपसन, पलक्क का राजा २० उपहानगर, २८८ उच्चकल्प, नगर ५०६ १०७ १०८,१११, ५४३ उज्जयनी नगर (उज्जैन) ४६ बदेश (उडीसा) ५६३ उपनगज नायक ६४ नदयपुर (.)नगर २७६ वस्यकर्ण-निश सिह, नायक.. उदयाव, मपाल का युवराज तथा राजा ५५३ ५६१ त्यन, नायक ६३६६३७,६३९ उदयन कवि ६९० उदयपुर मगर (ग्वालियर का उदयपुर) १५२ उश्यमान, नामक ६५० उदयवर्मन, परमार राजा १९७ उदयसिंह, बहुमान राजा २०० २१२ २२२ २४६ २५०, २५० उदयसिह, गदादेश का नायक ३५१ उपयसिंह, राजा २७५ उदया, रानी ५५५ नदयादिस्य परमार राजा ६८ ७३ ८२,८५.१२६, १७९,२०१ ३५९ १६०,३६९१६,१५२ सदायिन् , कवि १६ उद्यातकसरिन्, हकाला का राजा ६९० उरण, ग्वालियर वा तोमर नायक ३३० ग्दभट, नायक १८,१९ उपगुप्ता, मोखरि ईश्वरवर्मन की रानी ५७६ उपन्द्रगुप्त, नायक ६५६ उपन्द्रराज परमार राजा ३०९ उमापतिधर, कयि ६६९ कमला, मगर (ऊगा) ३०८ कर्जयन्ततीर्थ, स्थान १५९ एकनाय, कवि३०५ एरण्डपल, नगर ५३० क ककरडी (वही जो कक्करडिका) नगर (करि) १९१ २२८,२२१ कक्क प्रातहार नायक, १५ ३४९ कस्करधिका वही जा ककोडी, माम १४० कम्कामतिहार नायक, काव, पामार मायक २ 1 - कच्छपचार वा कच्छपारि, पश ४७,६५, ७४, ७६, ८२, ९८ कञ्छुका, चन्देल र की रानी ३०,५६ कट, नगर (कर्रा) २ ककट, बाराणसि कटक देखो कटका नगर ३९५, ६८१, ६८२, ६८९ कराडला, महिषराम की रानी १२ करम्यगुहाधिवासिन, शैव योगी ३०१ कनौज नगर १५, १५, १६, १७, १८, १९, २५, ३२, ३९, ६०, ७५, ७८, ८०, ८३, ४, ८६, ७, ८८,८९ ९१, १२, १३, १४, १५, ९७, ९९, १००, १०१, १०२, १०३, १०४, १०७ १०९, ११० ११२, ११४, १२०, १०२, १२३, १२४, २२७, १२८, २३३, १६०, १४२, १५, १५७, १०८, १६०, १६३, १६६, २६८, १६९, १०१, १७२, २७४, २७, १७६, १७८, १८०, १८९, ९८२, १८५, १८९, १९५, ३५०, ३५१, ५५८,५६५, ५६६ ५६८,८७१,५७२,६६०, कन्द, कोरपाम का नायक ३७० कन्यकुब्ज वा कन्याकुब्ज, नगर (कन्नौज), ७८, ८०, ३६१, ३७५ कपिस्थिका, नगर ५५० कपिलगजपति वा कपिलकुम्भिराज वा कपिलेन्द्रगजथाही, कटक का राजा ३९५ कपिलवर्धन, नायक ६२२ कमल वा कमल राज, कलचुरि का नायक ५३०,५४४ कमलरेनी, मगध के देवगुप्त की रानी ५७४ कमलदेवी, नरसिंह हतीय का रानी ३८८ कमलनयन, गढादेश का नायक ३४१ कमलराज वा कमल, कलचुरि का नायक ५३०,४४४ कमा, देश ५७७ करिवर्ष, सालिवाहन का उपनाम ६१५ कर्ण, चालुक्य राजा ७५, १३६, १९६ कर्ण, गढादेश का नायक ३९ कर्ण, राजा ८० कर्ण, राजा, गुर्जर राजाओं का पूर्वपुरुष ५१३ कर्ण कलचुरि राजा ८१, २३७, ३५५, ४२८, ४११, ५३५, ५३६, ४५२, ४५३ कर्ण, बघेल नायक ३१८ कर्णब्रेलोक्यमल्ल, यही जो चोलुक्य कर्ण ७२, १९६ कर्णाट, देश ७२ कमचन्द्र, तगर्त का राजा ५९३ कर्मसिंह, भर्म का मत्री २२० कलचुति, यही जो कलचुरि ३०२ कलचुरि घश ७१, ९७, १४७, १९४, ४२७ ५२८ २३१.१३५, ४५६, ४३७, ४४०, १४२, ४५३,४८, १४९,१५०, ४५२, १५३, ४५४,४५५, - कालिग देश ३९९, १८६, ३८८, ३८९, ४४४:५६३, ६६९, ६९५,६९५, ६९०, ६९८, ६९९, 0000०१,७०२, ००३,७०६० काला या कलिङ्गराज, बालचुरि नायक ५३०, ५४४ कलिङ्गनगर वा कालिकानगर, नगर (मुखलिङ्गम् ) ३७६, ३७८, ३८०,६९८, ६९९, ७००, ७.१.७०२,७०३,७०१, ७०५,७०६, ७०७ कलिराज या कलिङ्ग कलचुरि नायक ५३०, १४४ कलिङ्गलाइकुरा, पूर्वागड़ का राजा ३७१ कल्यादेवी, वीरवर्मन की रानी २३० कल्याण साहि, ग्वालियर का तोमरबंशी नायक ३३७ कल्याण, कीरमाम का नायक ३०० कवशिव, रोव योगी १५१ कस्तूरिदेवी, अनाभीम की रानी ३८६ । कस्तूरिका मोदनी, चोडगा की रानी ३६७, ३८६ याकनादबोट, नगर (सांथि) ४५९, ५६५ काय प्रथम और द्वितीय, नायक ६५६ काञ्ची, नगर ५३० कान्दाल, मगर ७१० कान्हड़देव, चन्द्रावती का पाहुमान नायक २०५ कान्दडदेव, चन्द्रावती का परमार नायक २१९ कामदेव सिंह, कामदा का नायक ५० कामरूप, देश ६६६ कामार्णव. पूर्वी गङ्ग का राजा ३७६, ३७१, ३८६ कायावतार, नगर ४२३ कारुपदेश ३४५ कार्तियपुर, नगर ६२५ कार्मणेय, नगर ५२२ कालम्जा, नगर ५४,६६, १०८, १९३, १५३, १५१ १६५, २५९ कालभोज, गुहिल राजा २४७.२६०.३०२ कानिका, नगर ५४ काशी, नगर (बनारस ) १६९, १७१. ६२३ कौतुक, पाहमान राजा ३०९ कीर, देश ३५ कीरमाम, नगर ३७०,५९१ कीर्तिपाल, राजा २७५ कीनिराज, लादेश का चौलुक्य (का पालुक्य?) नायक ३७३, ३७५, कीर्तिराज, कच्छपघात घंश का राजा ७६ कीर्तिराज, राष्ट्रकूट वंशी नायक ६५२ - कीर्तिवर्मन, चन्दन राजा ७२, २९३, २३७, ३५३, ३०१ १.६ १६. कीर्तिवर्मन, गुहिल राजा २६०, ३०९ कीर्तिवर्मन, ककरेंडी का नायक १९, २२९, ४२० कीतिसिंह, ग्वालियर का तोमर नायक ३३७ कुखुट्टी, मुलतान (कुत्बुद्दीन )२७४ कुन्दराज. राष्ट्रकूट नायक ३०३ कुबेर, देवराष्ट्र का राजा ५३० कुमार गुप्त प्रथम, गुमपशी राजा ३.४६०, १६१, ५६३, १६४, ५१५, ५१६, ५०, ५५ कुमार गुप्त द्वितीय, गुप्तवशीरामा ५३९ कुमार गुप्त, मगध का गुप्त यशी राजा ५७२ कुमार देव, उच्चकल्प का नायक ४०६ कुमार देवी, चन्द्रगुप्त प्रथम की रानी ४६० कुमार देवी, प्रोपदेव की रानी ५०६ कुमारपाल, चौलुक्य राजा २१९, ११५५ १३६ १४०, १५०, १००, १९६० २२०. ३१२, ५२५,५५८ कुमारपाल, ककरेडी का नायक २२८ कुमारपाल, पालवशी राजा ६६६ कुमारपाल ऊमड़ा का नायक ३०८ कुमारारोहा राहिल राजा २६०, ३०९ कुम्भकर्ण वा कुम्भराज. पहिल राजा ३००, ३०९, १४, ११६. ३२०, ३२३, ३२५ कुम्भिराज, वही जो गजपति ३९५ कुलचन्द, गया का शासक २८९ कुलदेवी, ब्रह्मपाल धर्मन की रानी ७११ कुलभट, शूरसेन वश का नायक ६११ कुलस्तम्भ वा [रल (ण) स्तम्भ ], नायक ६८८ कुलादित्य, नायक १७७ कुसुमेश्वर, नगर ५२२ कुस्थलपुर नगर ५३० कुन्तराज, राजा १७९ कृत कीर्ति विजयपुर के एक नायक का मत्री ६२६ कृष्णगिरि, नगर (कर्णहरि ) १२ कृष्णगुप्त, मगध का गुप्त वशी राजा ५७२ कृष्णदास, नायक ६४६ कृष्णदेव गदादेश का नायक ३४१ कृष्णनमिन् कवि ६३९ कृष्णप, चन्दन का नायक' ३५२ रणराज (या अडत कृष्णराज) नायक ६४ कृष्णराज कलचुरि(१)राजा ४४८ कृष्णराज पन्द्रावती का परमार नायक २२० कृमणराज परमार राजा २६ कृष्णराज राष्ट्रकुट राजा कृष्ण द्वितीय ४२० करवप वही जा कलचुरि युवराज प्रथम ५५० केरल दश ५३० कल्हण मल का चाहमान राजकुमार १४० करात्र घही जो गोविन्द केशव ६७०६७६ केशिराज ऊमहा का नायर ३०८ केटार नगर ६९५ कैलासकूट भवन नपाल में राजयभन ५५१ ५५० ५५३ ५५५ ५५७ ५९ काकल वा कोकल प्रथा कलचुार राजा १२८ ५३० ४५० कोकल वा कोकल द्वितीय कलधुरि राजा ४२८ ५३१ ५६ ५५२ कोकल वा काकल ग्रहपात वश का पुष ५५ काहभन्न नायक ६०० ६७८ काहहरवत्स ६२९ कार पहाडी ५३० काण दी जादिन्य सन की रानी ५७२ १७३ ५०५ कोण्डराज ६५१ पाण्डवाडु मगर ३९५ कोमा मण्डल प्रदेश ४३० पागल या कोलाहल अनन्त वमन गङ्ग का राजा ३७१ ३८६ वालाहलपुर नगर (कालार) ३०९ ३८६ कारापती उद्यान सरिल की माता ६९० कोसल या काल दश ५३० ५६३ ६३८ कौरव यश २२८ ४४. कौशाम्ब मण्डल प्रदेश ६२ शितिपाल कनौज का एजा ३१३९ ३५१ क्षेत्र या क्षाहवा तासह गुहिल राजा ३०५ ३.१ ३१६ क्षेत्रासह राकुमार २५७ अमसिह या समसिंह गुहिल राजा २६० ३०९ सगार (पगार) रामा २७१ सहार ( पदार) युद्धासमा कमी नायब २९५ सयरानगर ९९ परमह प्रयम वल्लभी राजा ५०० ५०६ ५४५ २ परमह द्वितीय धर्माश्रिय, बल्लभी राजा ५०० ००८ स्परमह वल्लभां गजकुमार ४९०,५१९. ५१२, ५२३ खरवाण (?), गायक ६७० सल्याटिका, नगर (खारि) ३०२ खस, जाति ५९९ खेटक, ग्राम (र) ५०८,५१६, ५१७ खतसिह या क्षेत्र वा क्षेत्रसिंह, याहल राजा ३०५, ३०९, ३१६ खमसिंह वा क्षममिह, शाहल राजा २६०, ३०९ खुडडीय, ग्राम ४८५ खुम्माण (पुम्माण), गुहिल राजा २४७ २६०, ३०९ खाजूक वा पाजर्मन, ककरडा का नायक १९४, २२४ खागि, राष्ट्रकूट वशी नायक ३५९ ग गगन सिंह, कच्छपघाट पशी राजा ९८ गावा गाज वरा ३७६, ३७८, ३७२, ३८०, ३८६, ३८८, ३८९, ६९२, ६९५, ६९८,000- ७०१,७००,७०३, ००४,७०५, ७०६,७०० गहदेव, नेपाल का राजा ५८६ गङ्गाधर, मगब्राह्मण कषि ३८१ गडवाडी, देश ३७१ गहा, नदी ६० ८३ ९४, १०१ १०२, १८०, १८२, १८२ गजपति कटरुक राजा कापन का उपनाम ३९५ गजरथपुर, नगर ६०० गहाश, देश ३४१ गण्ड बन्नल राजा ३५३,३५५,३५६ गण्डका, नही ७२ गणपाल (१)नायक ३६१ गणपति, नलपुर का नायक २६७,२७० गणपति, ग्यालियर का तोमर नायक ३२७ गणपति नाग, आर्यावर्त का राजा ५३. गतणति ध्यास, कवि २४५ गया, नगर १७३.२०१ ५९७,६६८ गयाकर्ण, वा गयकर्ण, कलचुरि राजा ४३५. ४३६, ४५२, १४३, ४५२, १५६ गयामुदीन, मुल्तान (गिमायुहीन बल्वन) २४२, २५३ गवाथुमन, माम (कुमार काट ) ५७१ गाय, गा का गजा ३७९, ३८६ गाय नय करि राजा ३५३, ४२०, ४२८,५३१, ५३६, ४५२ गाजम, गापक ४३५ गाण्डीया या ९० गाधिनगरमा गाधिपुर गर ( नाज पारडम 1८.८३८. गियासुरीन बलचन मुग्नान 10 २५: गिरिजा देवी पनपा की गनी ३६२ गीर्वाण युद्ध विक्रम शाह पान का राजा ३५४ गुमपुर ग्राम ४९ शुपमा पूर्वागत का गाना १९ सुगराज नायर १९ गुमार्णव पूर्वी गड का गजा ३०० ००० गुणावगक नन्न धाउपनाम५० गुण्डम पूगा का राजा ३७ ३७९ गुप्त रासा४६० गुमगना (चन्द्र गुम प्रथम र दिनीय कमारगुप्त प्रथम भार विनीय नासिंहगुप्त पुरगुम समद्रगुप्त भार स्कन्रगुप्त देया) गुनगजा मगरका ५०६ ० ८७३८७४ गुजर रा ३६६ ३६० ३६८ ४३ ०५१०४१६ १७ ११.०३ ४२४ शुर्जर प्रतिहार पा ३९ गुपाडायट म्याT१९७ सुसन वल्लभी राजा ३६.२८.१४६ १८७ १८८ १८० १९८ ४४ गहिनेव पाय याण्डवाडु का नायक ३२५ राहिल वश ५३५ १२४८ १२८ २४९०४७ २५१ २६० २६५ ३०५ ३०७ ३.९ ३.१ ३१६ ३०० ३०१३०३१२५ ३.७ ३५८४३६ ४५२ गुहिर राजा २४७२६०३०९ गुवक प्रथम और दिनीय चाहमान राजा ४५ गाकुल (या गाणायक ६७० ६७६ गागाइप माल्य कागजा ३०९ गोगादेव पडगुजर का नाया २९१ गोग्ग नामर शायर ३५० गाग्गिराज चालुक्य (या चालुक्य ) सारदेश का नायक १७३ ३७५ गोदहक नगर (गाधू) २३०५२० गाप ना गोपाचल या गापाद्र था गाप गिरि पर्यत या देश (ग्वालियर). १० ३१३ ३३७ ०४२ गापराज नायक ४७६ गापाल प्रथम] पालवनी राजा ६५३ ६५१ ६५६ ६५७ ६६० गोपाल, गाधिपुर (कन्नौज) का गजा ९६ गोपाल, नलपुर का नायक २६७, २७०, गोपाल द्वितीय, पालवशी राजा ६६२ गोपाल, वादामयता का राष्ट्रकूट नायक ६२६ गोपालदर, नायक १२२ गोपालसाहि, गढदिश का नायक ४१ गोपीनाथ, गहादेश का नायक ३५२ गोमतिकोट्टक, स्थान ५७४ गोरतास, गढादेश का नायक ३४१ गोविन्द केशव, नायक ६७५ गोविन्द, ४,३४८ गोविन्दचन्द्र, कनीज का राजा ८०, ८३, ८६, ८७, ८८,८९, ११, ९२, ९३ ९५, ९५, ६७,१६, १००, १०१, १०२, १०३, १०५, १०७, १०९, १९०, ११२, ११५, १२९ १२२, १२३, २२५, २२७, १२८, १३३, १३७, १५२, २५५, १६३, गोविन्दचन्द्र, कवि ()६२७ गोविन्दपाल, पाल (२) रशी राजा १७३ गोविन्दराज, चाहमान राजकुमार १४ गोविन्दराज नायक २७७,२३७ गोविन्दराज, राष्ट्रकूदवशी नायक ३६९ गोविन्द सिंह, गढांदा का नायक ३५१ गोशूर सिहयल ६३१ गोसलेदवी, गोविन्दचन्द्र की रानी १३३, १३७ गौसलदेवी, कलचुरि जयसिह की रानी १५३, ४५३ गोड, देश ५६, ५६३,६६६,६७१, ६७२ गौतम, गोत्र ६९२ गौतमी पुत्र, धाकाटक राजकुमार ६४१ महपाति दश ५६, १३१, १३९, १४६ घ घटोकच, राजा, गुप्त का पुत्र १६० घृतदेवी, धन्धुक (बन्धुक)की गनी ६४ च चक्रपाणि, मग माझमा ३६१ माकपालित सुराष्ट्र या शासक वायुध गजा ६६. चण्ड वा चण्डमहारान चाहयाण नायक १२ पण्डप परमारनायक ७२ पण्डका पाम ६२५६२६ पण्डयन काल का राजा ६९६ पण्डपर्मन शालकायन गगा ७०८ गण्डौहर त कलिङ्गाधिपति ६९० पन्दन चाहमान राजा ४४ पन्दुव प्रतिहार का नायक १६ ३४९ पन्ह यश ३५ ३६५४५६ ६६ ७१ ९ ९० १०५ १०६ १०८ १.३ २६ २४३ १४६ १५९ १५३ २५० १६५, १८३ १८६ १९३ २९८ २०५ २२८ २२९ २३७ २३८, २४३ २५४ २५५ २०९ २६० ३१ ३५३ ३५१ ३५९ ३५६ ३६९, ४२८ चन्द्र कवि ७२ गन्द्र वादामटूना का राष्ट्रकूट नायक ६२० पन्द्र ५२९ चन्द्रक(१) नायक १७३ चन्द्रगुप्त ६३ चन्द्रगुप्त नायक६३९ चन्द्रगुप्त प्रथम गुप्तपशी राजा ४६. चन्द्रगुप्त द्वितीय गुप्तयशी राजा४५७ १५८ ४५९, ४६० ५३३ ५३५ चन्द्रगुप्त जालन्धर का राजकुमार ६२२ चन्द्रदेव वन्नाज का राजा ७८ २०८३ ८६ ८७ १५५ १६३ चन्द्रलमा पन्तम ३५२ चन्द्रदेव कोण्डवीडु का नायक ३९५ चन्द्रपाल ऊमा घानायक ३९८ पन्द्रभट्टारिकादेवी महेदिय क नायक भाज प्रथम की रानी ५६४ चन्द्रराज चाहमााराजा४ चन्द्रराज चाहमान राजकुमार ४४ पन्द्रलखा, घोडगा की रानी ३८६ चन्द्रयमन मार्यावत वा राजा ५३० चन्द्रसाहि गदादश का नायक ३४१ चन्द्रा, जजूक की रानी ३५० 'चन्द्रात्रेय ऋषि वा (चन्द्रल) वश ३५, ५५ ५६ ११३ १५३ १९५ २१९ चन्द्रावती नगर २०२ २१९ २२० २१ ( १४ ) . पलुश्य या १९१२॥ ४२२. १२० चाच ( या चार) या चाधिग २५७ चाचिग चाहमान राजा२४९, २५० [चा दल नायक २३७ चाप वश ३७० चापाकट वदा १३६ मामुण्डगज, चाहुमान गजा २०० यामुण्डगज चालुक्य राजा १३६, २९६, १५, २१६ चामुण्डराम राजा चामुण्डराज परमार नायक ७२ चालुक्य वरा, ३८६,३८८ चालुक्य (वा चौलुक्य'), यश ३७३ चार (या चाच) वा चाचिग २५७ चाड, नलपुर का नायक २७० चाहमान, वश ३५ ४४, १४१ १५१.७६ २६१, २६२, १८३.९९५ चाहताण, वा १२ चाहमान वश १४८, २५०, ०५७, २८० २८४,३०९ चाहुयाण यश190 चित्रकूट, नगर (चितार ) ३२३ चिकट, ग्राम वा दश ५२८ चिन्तादुग, भवन का उपनाम ६३० चुलुकीश्वर यश ५१ पूडासना, वरा २९५ ३०३, ३६५, चेदि. देश ८२, १४७ १९५, २३७, ३५३ ३५५, ४२७, ५२८, ५३०, ११, ५३५, ४३६ ५३७,४५०, ४५२, ५५३.४४९, ४५०, ४५२, १५३, चोड वश ३७९ माइ वा चोइसिंह, गुहिल राजा २६०,३०९ चोडगा पूर्वी गावे अनन्त वर्मन का उपनाम १९२. ३७८,३७९ ३८०, ३८६, ५३ ४१४,६९२ चौदहवी, नगसंह द्वितीय की रानी ३८८, पारकामनिराज गर का नायक ७०७ चौलुम्य, वश १५, ५०, ५२ ५३, ६१, ७५ ११९, १२१, १२९, २३५, १३६, १४, १५ १६७,२७०,५९६, १९९ ००१ २०० ००३. २०१२१० २१०, २१६, २२८. २१ २२०, २२१, २२५ २२६, २३०, ३६२. ३०२, ४५०, ५२४, ५२५, ५४८,६०४. चौदस्य वाचला वश २१९, २२०, २२२ २३३, २३६. २३९, २५५, २४८,२५२, २६ लोकका पा चौलुक्य यश ५० : প্ৰৱল বয় व्यवन कपा, छिन्दवश के उत्पन्न करने पाल ५१. जाग, सनकानिक का नायक ४५७ दिग ग्राम ६५. दिन पश ५१ ५९० छोहल मायक्र १५७ अम्वुवामा जिल्ल तेरमाण शाह (या शाह) का उपनाम ५४० राह गदादरा का नायक ३४१ भगनाथ गदादश का नायक ३४१ जगपाल ना जगसिह नायक ४३३ जगम मेहर का नायक २०१ मजक, कवि ११ अज्जिका देवी, प्रतिहार मागभट्ट की . १४९ जन्तुक तामर मायक ३५० अनम जय महाभव गुरुप्रयम का उपनाम ६६१, ६८० ६८६ भामजय तालिका राजा ६९० जन्तापुर, पाम ३७९ ग्राम ६७१ जयरातिमा नेपालका राजकुमार ५०० जय गाविन्द, कयि ३४१ जयपन्द्र, कनीज का पजा १५८ १५८, १६३ १६६ १६ १३१ ११, १७२ 1७४, १७० १७६, १७८ १८० १८१, १८२ १८५, १८९ अयचन्द्र, तृमत का राजा ३३०, ५९२ गयासमा नेपाल का गमा ५४४ जयसन्हावी, यहिन सेजसिंह को रानी २५१ गयन सिंह (?), राजा (1] १८१ यता सिंह मादेश का नायक ५९७ नत्सिह नायक ५३३ गयोच, नाय ४३३ नयर पार का लिच्छवि रामा ५६५ जयदे महपान यश का पुरुष ५५ जयत्य नेपाल का राजकुमार १५१ जयशपाचककाम नपा कागजा जयधर्ममल, नेपाल का राजा ५८४ जयनाथ, उपकप का माय: ४०६ १०७, १०८,४७ जायन्तराज नेपाल का गजकुमार ५८५ जयन्नसिंह, चौलुक्य राजा २२० जयन्तसिंह सम्बलपुर का नायरु ३४३ जयपाल, पालशी राजा ६६० जयपुर, ग्राम ४७३ जयप्रतापमाल, नेपाल का राजा ५८६ ८८७ जयभट प्रथम वीतराग, गुर्जर राजा ३६६, ३६७, ३६८, ४२४, ४१७ १६ जयभट द्वितीय, गुजरराजा ४२३ जयभट तृतीय ४२३, ५२१ जयभैरव जयजोतिमल का दामार कर जयमाल, प्राग्ज्योतिष का राजा ७१४ जयलक्ष्मी, नेपाल की राजकुमारी ५८५ जयवर्मन् चन्दल राजा १०, २३७, ३५४, ३५५ जयवर्मन्, ककरेडी का नायक १९४, २२८, ४४० जयवर्मन्, परमार राजा १७९, १९७, ३१० जयशकि, चन्देल्ल राजा ३५, २१३, १५३ २५५ जयाश्रय-मङ्गलरसराज गुजरात का घोलुक्य नायक ५२९ जयसिंह नायक (१) ६२९ जयसिह चालुक्य राजा ११९, २२१, १२१ १३६ १७०, १९६, ५२५, ११६ जयसिह डा समा के नायक २६५ ३०३, ३६१ जयासिंह, गुहिल राजा ३०१ जयसिंह, राजा २०४ जयसिंह, कलचुरि राजा ५३६,४०, ४५२, ४४३, ४५२, ४५३, ५५४ जयसिंहपरमार राजा ६७, २३४, २५१ २०२ जासह गुजरात का चालुक्य नायक ११९ जयसिंह सिद्धचक्रवती, वहीं जो चौलुक्य जयसिंह १९६ जयसिंह-सिद्धराज, १२९, ५२४, ५५८ जय सिंह सिष्टाधिराज, जयस्कन्ध, नायक ७२५ जयस्थितिराजमल, नेपाल का राजा 4६३, ५०४ जयस्वामिन्, उच्चकल्प का नायक ५०६ जवस्वामिनी, मोखरि हरिवर्मन की रानी ५७६ जयस्वामिनी, कुमारदेव की रानी ४०६ " . - , ( १६ ) गम पाल बिरधवल का मत्री २२०, २२२ मन सिंह पन्द्रावती का चारमान गायक २८० २८१ मार सिंह यासजस्वी सिंह पहिल रामा २५१ २५१ १६० ३०१ तशस्वी सिंह गुछिन तसिंह का उपमाम ३०१ वनिपाल वयागी ४५१ सागल (रामा ३५९ नामर बा ४४ २५३ ३१७ ३५० साएमाण ५५१५८२ नारमाण साह (मासाही) जस्ल राजा ११० स्यागासह प्रागस्यानिष का राजा ७११ विकाला १९१ २०८ ३७६ ३७८ ३७१ ३८० ५२८ ५३७ ४. ६.१ ६८२, ६८५६८६ ६८७ ६९० ६९२ विगर्न देश ३७१,५९१ ५९५ प्रिपुरी ग्राम (वर) ३५९ १३० १३१ १४२ प्रमुवनपाल चालुक्य राग २३० त्रिभुवनपाल वादामयाा का राष्ट्रकूट नायक ६२० त्रिभुवनपाल पुवराज ६५६ विभुवनय गदाइश का नायक ३४१ मिभुवनादित्य नायक १७७ बिलयनपाल कनौज का राजा ६० ग्रिगेषनपाल या त्रिलोचनपनि लाट इशया चालुक्य नायक ३७९ वाक्यमह वगंगा क्यवर्मन २२९ प्रैलाग्यमाल करडप घाट क मूलदेष का उपानाम ७६ लाग्यवान चन्दल राजा २०५ २२८ २३७ २९५ ३५६ पाक्यसिंह रायाग्दिये का उपनाम ३८३ द ६(१) दक्षिणकाल देश ३० पाक्षणापथदेश ५३० दण्डाहिश इश ३१ इतनयी मुद्रगुप्त की रानी ५६० पत्तवर्मन सिंघपुर का नायक ६२२ दर पयम गुजर राजा ३६६ ३६ ३४४ वह हिनीय प्रशान्तराग गुर्जा राजा ३६६ २८७ ३६८४१५९० १९६ १२५ ११.

( २० ) दा हत्तीय बाहुसहाय, गुर्जर राजा १२५ दह, प्रतिहार नायक ३४९ पधीचि, एक पंश के संस्थापक २३७ इन्दन (1) राजा (?) २७५ पन्दूक, ककरंडी का नायक १९४ एफरखान, सुलतान (जफर एया) २९७ दमन, एरण्डपान का राजा ५५० दयिविष्णु, पालवंशी गोपाल प्रथम का दावा ६५६ दलपति, गढ़ादेश का नायक ३४१ दशपुर, माम (दशोर षा मन्दसोर) दशरथ, अशोकनाल का भाई ५९९ शरथ, मग बाह्मण ३८१ दहसेन, कूट का नायक ४१० दादीराय, गढ़ादेश का नायक ३११ दानाणय, गङ्ग का राजा ३७६ दामोदर, नायक ३८५ दामोदर, मग ब्राह्मण ३८९ दामोदर, परिव्राजक राजा ४७२, १८० दामोर, कवि ५ दामोदर या मिश्र दामोदर ३०२ दामोदर गुप्त, मगध का गुप्त वंशी राजा ५७२ पारपराज, गङ्गका नायक ७०७ दास, वंश ६७६ दाहाल, देश १७ दिग्भान, नायक ६० शिव (2) भज्ज. नायक ६४० दिया करवर्मन, राजा ६१० शियाकरधर्भन महींपडल सिद्धपुर का नायक ३२२ दीर्घरव, कलिङ्ग का रामा ६९० दुइडा, वल्लभी राजकुमार १८२, ५८२, ५८५, १६, १५८,५००, दुर्गगण ६ दुर्गदामन, धरसन का नायक ६११ दुर्गभट, गुरसन का नायक ९११ दुर्गराज, राष्ट्रकूट का नायक ३६९ दुर्गावती, दलपति को रानी ३४१ दुर्जनमल, गहाश का नायक ३४१ दुर्जय, कारंडी का नायक २२८ धर्मादिश्य, विजयपुर का नायक ६२६ धर्मावनीक का उपनाम ६५२ धवल, मार्यवशी राजा धरत, इस्तिकडी का राष्ट्ट नायक ५३ एवला, का (? कराना बालारिष्य की रानी ६२३ धारा, माम ५७ ६०, ११५.२१२, २२४, २३४, २५४२७२, ३५३, १५२, ५२४ धारावर्ष, चन्द्रायनी, का परमार नायक २१२. २२०, पाहिम, करी का नायक १९४, २२८, २२९ भासद, कवि५२६ पीरनाग, ऋषि ५५ धुनिआयह स्थान १ धुमराज, पन्द्रावती का परमार नायक २२० धूरभट, मीयाणा का शासक २३ धृतराष्ट्र नायक ६५६ धवमट, पाप का नायक ३७२ धनभर, चन्द्रायसी का परमार नाय २२० याव, नेपाल का लिच्छवि राजा ५५५,५७९ अधी, चन्द्रगुप्त वित्तीय को रानी ५६० प्रवर्मन ५६० अवसेन, प्रथम, यहभी, राजा ४७८, ५०१, ४८१,५८२, १८३ ४८५ ५८९ भवरोग द्विनीय बालादित्य, पल्लभी राजा ५००, ५०२ ध्रुवसन नृतीय बल्लभी राजा ५०६,५०७ धर्वसन, वसभी राजकुमार ५०२, ५०३, ५०८, ५०९, ५१० अभट, पालादित्य मातम का उपनाम ५२१ न . नगर, पाम (वही जो कलिङ्ग नगर) ३७९ मङ्गमा. पूगिन के यदस्त की रानी ३८६ नहा या नहोत्री, कोकल प्रथम की रानी ४२८ नल, पाम (नदोल) १४०,१४८ नन्दप्रभजनबर्मन, कलि का राजा ६९७ नन्दराज युद्धासुर, राष्ट्रकूद का नायक ३६९ नन्सवल, नायक ३४९ नन्दिन, प्रायवर्त में राजा ५३० नन्दिन, बा ५९० नमगुणावगक, राप्रकृट का नायक ६५० बनवव वा गन्नश्वर, नायक ६३८,६३९ नन्नुक चन्दल राजा ५-५६ ( २४ ) नभूतिषण्डक, पाम ६५० मयणकनिदेवी, गोविनचन्द्र की रानी ९५ मथनपाल, जमता का नायक १०५ मयपाल, पानवशी रामा ६६१, ६६५ नरक, विष्णुभगवान तथा पृथ्वी का पुय ६७४, ०११, ७, १४ नरभट था णरहड, प्रतिहार नायक १५.३४९ मरवर्धन, कन्नौज का रामा ५४९ घरवर्मन, नायक २ नरवमन, गुहिल राजा २४७, २६० नरवमन, परमार रामा ८२, ८५, ९१५, १२६, १७१, २०१, १६. भरवाहन, साहिल रामा ३४,५२, २४७,२६.३०१ नरवाहनान, नायक ५७५ नरसिंहगवाश का नायक ३४१ नरसिह, कलचुरि का राजा १४७, ४३५,५६, १५०, ४५२, ४५, ४५२, ५५५ नरसिंह वा हार्सह प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ, पूर्वी नाका राजा १४ [३८८,५८९ नरसिंह गुप्त, गुप्तवशी राजा ५३९ नरहरिदेव, गढ़ावेश का नायक ३५१ नरेन्द्रदेव, नेपाल का राजा १६५ नरेन्द्रमल पा अमरमाल, नेपाल का राजा ५८६, ५८० नर्मदा, नवी १७९, ५४३ मलपुर, किला ९८ मलपुर, माम२६०,२७० मवघन, पुडासमा का नायक ३६१ मयसारिका, माम ( नौसारी) १२१ नयीनपुर, पाम (नवानगर) १५ नसरथ, सुलनान ( नसरतशाह) २९७ नसरदीन, सुलतान (नासिरुद्दीन महमूद ) २५३ नमतशाह, सुलतान २९७ मागदत्त, आर्यावर्त में राजा ५५० नागदत्त, कवि ६२६ नागभट, महोदय का नायक ५५८, ५६४ नागभट, महीश्य को राजकुमार ५५८ नागभट (णाहड), प्रतिहार नायरा १३, ३४९ नागभट्ट नायक ६१२ (२७) पुरुषोत्तम मावानज ३१ पुरुषानम, परेल परमारी का मत्री १९३ पुस्शनम बही जा मह पुरधानम.९० पुरुशानम सिंह, कमादेश का नायक ५०० पुरकाशराज भयानजनाश्रय, गुजरात का चालुक्य नायक १२५ पुल शिवल्लभ, पूर्वी चालुक्य राजा सत्याश्रय पुनकशिन हनीय ४२१ पुनकास, चापशी नायक ३७२ पुलिंग सन काल का नायक ६९५ पुष्पपुर, ग्राम यही जो पाटलिपुष ५६॥ पुष्यण मायक ७१५ पुनपाक्ष नायक ३६२ पूर्णपाल नायक ६४ पूर्णाज नोमर नायक ३० भूक, ग्राम ०१२ उनपरक ( पाम ५०७ मृधिषिमूल, राजा १० पृथिविवर्मन् पूर्वी गङ्ग का राजा ६९४ पिवित्रण, वाकाटक यशी गजा ६५०, ६४१ ६५४ पिरीपाल नदूल का चाहमान नायक ३५८ इथिवीवल्लभ, निकुम्भक्ति का उपनाम ५२० इम पाम (पेहेवा पहाण) ५६८ वृथ्वीदेव प्रथम, रनपुर का नायक ४५०, ५४४ तस्पीदव द्वितीय, रस्नपुर का नायक ४५२, १३, ४३८ १९, wi, १९५ नथ्वीन हनीय रत्नपुर का नायक १९२ अध्यीधर कवि ५३५ पृथ्वी नारायण पाह पाल का राजा ३५४ चवीपान राजा १११ पृथ्वीराश, चाहमान रागा १५६, १६२ १८६, १९१ पृथ्वीराज गढाइश का नायक ३१ ध्वीराज राहिल राजकमार ३२५ स्त्रीवर्मन् पनेन राजा १३३, १५३, २३० १५४ योश, वही जा पृथ्वीदेव प्रथम १३० थ्षाश्रिका कनीम क मा मापाल की रानी (e यमला असधवार की राना २०१ बराज सा मुनमान (रुष नहीन फीरोजशाह मथम) २५५ रोज यपनी का राजा ( फाराज शाह) ३७५ नोनल्ला, रत्नराज प्रथम की रानी ५३. मोहना, युपराज प्रथम की रानी ४५० पञ्षहस, यदा १३३ पञ्चाल देश ६२७ पडिहार (मतिहार) यश ५ पभनाग, नायक १२ पमपाल, कच्छपघात व राजा ७६,१ पपसिंह, रहिन राजा २६०, ३०९ पचारित्य, नायक १७७ पद्मावती, ग्राम ५५ पद्मिनी करक की रानी ३४९ परचक्र काम, नेपाल क राजा जयदेव का उपनाम ५६३ परवल राष्ट्रकूट यशी नायक ६५७ पामर्दिन नायक ३०० परमान, धनल्ल राजा ६९,७०,१५३ १५४,१६५,१८३,१५६,१९३, १९८२३७ २५५ ३ परमार, यदा ४५ ४९, ५३, ५७, ६७ ६६, ७२, ७३, ८२,८५, ११५, ११७, १२६, २७९, २९७, २०२ २०५,२०६ २०७, २१३, २१७ २१९, २२०, २२४, २३२, २४४, २७२, परियाजक, घश ४७२, ४७१, ४७३, ४८० ५४३॥ पर्णादन मुराष्ट्र का शासक १६७ परक, पाम बादश ५३० पशुपति राजा ५४२ पाटलिपुत्र, पाम (पटना) ४३३, ४५८, ६५६, ५६५ पाण्डव, वश ६३६, ६३७, ६३८ पाण्डवर्मन् नायक ६२४ पार्थिव जाति (१) ६१८ पियरोंज साद, मुस्तान ( फीरोज शाह) २८९ विरपुर, माम ५५० पुञ्ज नायक ६८७ पुष्पा चन्दन यशोवर्मन की रानी ५६ पुरगुप्त, गुप्तवा राजा ५३९ पुरन्दर गाव यागा १.१ पुरन्नरपाल, प्राग्ज्यातिष का राजकुमार १५ पुरषोत्तम नायक ३८५, ६९२ २७ ) ज्यांना मग माग ३० पुस्पोनम चनेल परमाईन का मनी १९३ पुनम यही जा भट्ट पुरवात्तम ६९० पुरुषात्तम सिंह, कमदेिश का नायक ५२७ पुताशिराज भवनिजनाश्रय, गुजरात कालुक्य नायक ४२५ पुलशिवभ, पूर्वी चालुक्य राजा सत्याश्रय पुलकेशिन् द्वितीय ४२१ पुरकास, चापयशी नायक ३७२ पुनि रान कलिका नायक ६९५ पुष्पपुर, पाम, यही जो पाटलिपुत्र ५६१ पुण्य नायक ७१५ पूनपास, नायक ३६२ पूर्णपाल नायक ६५ पूर्णगज तोमर नायक :५० पूर्णांक ग्राम ५१२ प्लण्डक (.) ग्राम ५०७ पृथिविमूर, राजा ७१० पृथिविवर्मन् पूर्वी गा का राजा ६०५ पृथिविषण, याकाटक सी गजा ६५०, ६५१, ६१४ पृथिवीपाल नटूल का चाहुमान नायक १४८ भूपियीवरम, निकुम्भल्लनि का उपनाम ४२० पृथक माम (पहेया पेहा)५६८ पृथ्वीदेव प्रथम रनपुर का नायक ४३०, १४५ पृथ्वीदर दिनीय, रत्नपुर का नायक १३२, ५३३, ४३८, ५३९ ४४४, ४५५ पृथ्वीर हनीय रहनपुर का नायक २९२ पृथ्वीपर, कपि ४३५ पृथ्वी नारायण शाह नेपाल का राजा ३४४ पृथ्वीपाल, राजा १११ पृथ्वीराज पाहमान राजा १५६, १६२ १८३, १९१ पृथ्वीगज, गढांदर का नायक ३४९ पृथ्वीराज, एडिल राजकुमार ३२५ पृथ्वीवर्मन् चनेल राजा ११३, १५६, २७, १९१ पृथ्वीश, वही जा पृथ्वीदेव प्रथम १३० पृथ्वीपिका, काग के राजा मदनपात की रानी (Ur पृथमक्षा गसधवान की पना २०१ परुन माह गुलमान ( स्यनुही फशिल शाह प्रथम ) २५५ पराज, यानी या राजा (फाराज शाह) १५ ( २८ ) रोज साहि. सुलतान (फीरोज़ शार )२९१ पेला पेलि नाभट का उपनाम ३४९ पोपण (मर्य) या ६१५ प्रकाश्त्यि, काशी (?) का राजा १२३ प्रताप, नायक १४ प्रताप, राजा २७५ प्रताप या प्रतापमा, वही जो जय प्रताप मल ५८६, ५८०, प्रतापधयल, जापिल का नायक १४५, १५१, १६० प्रतापमाल, वही जो जय प्रताप मल ५८० प्रतापमल्ल वाघेला राजकुमार २१९, २६२, २६५ प्रतापधर्मन्, चन्देल राजकुमार ३५५ प्रतापान्त्यि, गढ़ानेश का नायक ३५१ प्रतिहार (पडिहार ) रा १३.३४९ प्रदीपयर्मन, सिद्धपुर का नायक ६२२ प्रवालिका, वरुणसन की रानी ६१५ प्रमजन, परिवाजक राजा १७२, ५८० प्रभाकर, राजा ७१० प्रभाकर यर्धन, कन्नोज का राजा ५४९ प्रभावतिराप्ता, रुद्रसन द्वितीय की रानी ६५० प्रभास, नायक १७७ प्रभास, महोदय के नायक भान प्रथम का उपनाम (?) ५५० प्रभास, माम २९० प्रयाग, (इलाहाबाद )६०, २६६, ५२८ प्रयरपुर, माम ६१९, ६२१ प्रवासेन प्रथम, वाकाटक वंशी राजा ६५१,६५५ प्रवरसेन द्वितीय, वाकाटक वंशी राजा ६५१, ६४२.६५३, ६४४, प्रशान्तगग, दर द्वितीय का उपनाम ३६६, ३६७, ३६८, ४१४,१५, १६, ११७, ५१८, प्रशान्त शिर, योगी १२६ प्रमर्वत, कवि २२९ प्रसिद्धध्वल, वही जो कलचुरि मुन्धतु १२८ प्रल्हादन, चन्द्रावती का परमार नायक २०२, २२० प्रागज्योतिप, देश ६६६, ६७४, ७१९, ७१२, ७२३, ७२४ प्रागवाट, देश ४५२ गणनारायण, विहारनगरी का नायक ५८६ प्रालम्भ, प्राग्ज्योतिष का राजा पर ( २६ ) कक्क पारसन यी नायक ६११ फल्णुप्राम ६०२ फोराजशाह मुलता।२८५ २९१,३०५ म बन्धुवर्मन नशपुरा का शासर ३ बम या पप्पक गुहिल रामा १७२६०३०९ रत्नवर्मन, नायक ६२४ बलयर्मन राभा ६१० पलवमन, भायर्त का राजा १० बलदर्मन, पाराग्यातिप का राजा ११४ मलादिस्य वलिङ्गाधिपात ३७१ मलिराज नडूल का चाटुमान नायक १५८ महाल मालव का राजा २२० ५२५ बालसेन सेनवशी राजा६७०,६०१ बाई सरीर ३११ बाउक प्रतिहार नायक ३५९ बापलदेवी, अनियडू की रानी ३८६ बारप बा बारप्पराज चौलुक्य (पायालुक्य ?) लादेश का नायक ३७३, ३०५ बालप्रसाद, स्तिकुण्डी का राट नायक १३ पालभसाद नल का चाहमान नायक १४८ बालयलभी मजा भट्ट भवदेव का उपनाम ६८९ बाल हर्ष, कलचुरि का नायक २८ चार साह सुल्तान (बहादुर) ३२३ पाहुन माम २७९ बाइसहाय, तृतीय दद का सपनाम ४२३ बालादिन्य, काशी ("का राजा ३२३ मालगादित्य मगध (१) का गजा ५७४ मालारन्य रितीय धवसन का उपनाम ५.. चालान शिष गुप्त का उपनाम ६३९ बिल्हण कीरग्राम का नायक ३00 बुद्ध, कीरपाम का नायक ३७. युद्धकीर्ति कषि ५६३ खुद्धभद्र बौद्धयागी ६३० बुद्धवर्मगज गुजरात का चौलुक्य नायक ४५९ पृहत खाटरगत ३२८ वृहदह ग्राम ६२४ बापिदव किसी पालवशी का मनी ६६६ माधिपमन्, चौद्ध योगी ६१९ बह्मक्षारय जाति 898 ब्रह्मर, रायपुर वा कलचुरि नायक २९९, ३०२ मन् कार ग्राम का नायक ३७० ब्रह्मपालबमन प्रागज्यातिष का राजा ७१३, ४१२ ७१३ नागपादक,ग्राम १७० भक्तापुरी ग्राम (भान गाव) ५८१ भगदत्त, राजा वा राजवश ५६३ अगदत्त प्रागज्योतिष का कल्पित राजा ६७४ ७२५ ७१३ ७१४ भगवत्पुर, ग्राम ४९ भगीरथ, राजा ६५१ भञ्ज, वश६७७,६७८,६७९ ६८० भटकक वा भगक, वल्लभी का नायक ३६५ १७२ ४७८,४८५ ४९४ भट्ट पुरुषात्तम कवि ६९० भट्ट भयदव वालवल्लभी भुजा, राजा हरिवर्मन् का मत्री ६९१ भट्ट सर्वगुप्त, कवि मध वसुदेव कवि ६२२ भट्टार्क अथवा भटार्क बलभी राजा ३६५ भाहिक देवराज नायक ३४९ भद्र, दश ६५६ भद्र, कवि ५७१ भद्रपतनक (?), याम १९३ भद्रा हरिश्चन्द्र की पती १३ ३४९ भद्रापात्त (1) माम १९४ मरुकच्छ माम (प्रोच) ३६६, ३६७, ३६८, ५८७, १८८ भाहनक (1) ग्राम ४९६ भर्तृभट, गुहिल राजा २४७ २६०, ३०९ अम प्रभास का नायक २९०, २१२ भवक्ष्य नायक ६१० -- भवनाग भारशिव या गायक ६१ मानी दास गदार नायक ३११ भवानी ज्वालामुखा ताम ९३ भविष्य रायकर का गायक ६२१ भाराज किसी अदमक राजा का मंत्री ६.. भाक महान्याधिपति महन्द्रपाल वा उपनाम ५६४ माकमित्र युवराज प्रथम का मन्त्रां ४४९ भाग्यवी पालवशी राज्यपाल की राना ६६२ माग्यावा नरसन तथा अगुवमन की बाहन भागाली की पुरी ५५५ माणुशक्ति सन्दक का नायक ५२. भान (0) अधिकारी ५१९ भामुरत राजा १७६ भानुरेर उमङ्गाधिपति ३०८ भानुदव प्रथम रितीय भोर तृतीय पूर्वागड़ क रामा १८६ १४८ भानुापत्र गदादशवनायक ३५१ भायिल मायक ४३३ भारतीचन्द्र गदादेश का नायक ३५१ भाराव जाति या वश ६४२ भाव वृहस्पति पुजरी ०२१ ५१८ भास्कर नायक ३८३ भास्वरभट कवि ६३० भस्वर यमन रिपुषवल सिंघपुर का नायक १२२ भिक्षुस नाय ६५६ मित्रादित्य या भिलक प्रतिहार नायक १३ ११८ भीम मिथिला का राजा ६६६ भीम प्रथम चालुक्य राजा ६१ १३६ १९६ ३५९ भीम रितीय चालुम्य राजा १९६ १९९ २०१ २०२ २०३ २०६ २२२ २२५ २१६, २२८२१९१२१ २२५, २२६ २३. ५४४ भीम द्वितीय वा प्रथम (.)चालुक्य राजा ६०१ भीमपाल नायक (.)४५६ भीमपा वादामगता का राष्ट्रकर नायब ६२७ भामरथ महामदगुप्त द्वितीय का उपनाम ६८ भीमवमन् नायक ४६८ भीमसिंह परतश नायक २१६ भुजबल मुदणपुर का नायक ५४४ भुवन कीरमाम का नायक ७० भुवनदरा विवर्मन की माता पुषनपान, बोदामयता का राष्ट्रकूट नायक ६२७ मुवनपाल, उपपास मूलदेव का उपनाम ७६, मुवनसिंह राहिल राजा ३०९ मुवनेकमाल, कच्छपघात पशा महीपाल का उपनाम ७६ भूपा या भूवा, वलभी राजकुमारी १८७, १८८ भूपालसाहि, गदादेश का नायक :४१ भूपालसिंह, नेपाल का राजा ५८६ भूपालन्द्रमाल, नेपाल का राजा ५८९ भूमिपाल, ऊमजा का नायक ३०८ भूमिलिका, पाम (भूमूली) भूयिका देवी, देवयक्ति की रानी ५६४, ५५८ भूवा वा भूपा ५८७, १८८ भूपण, छिन्द का नायक ५१ भएकच्छ, पाम.२०६ भैरव, नायक १०० भरवन्द्र, ऊमा का नायक ३०८ भैलस्वामिन् , याम (भिल्सा) ११३ भोगभद, प्रतिहार नायक ३४९ भौगयी, अंशुवर्मन की यहिन ५५३ भोगावस्य, नायक १७० भोगवर्मन्, मौसार का राजा ५६३ भोगयर्मन् , पूरसंन और भोगदेयी का पुत्र ५५३ भाग, कन्नौज का राजा १४, १५, १६, १७, १९, ४२०, ४५०, ५६८ भोज, हिल राजा २४७, २६०,३०९ भोज, राजा ८० भोज प्रथम, महोदय का नायक ५५८, ५६४ भोज द्वितीय ५६६ भोज, परमार राजा ५७,६७,७४, ८२, ८५.२०१,३५३, ३५९ भोज तिहार नायक ३४१ भौजदय, नायक १७७,४४५ भोजवर्मन, चन्दल गजा २६५, १५६ भाटवर्मन् , राजा ६१६ भोनिदेय, नायक ३०२ भौम, पंश ७११ भरपालिमान, माम ६५० " मदनवर्मन गन्देश राजा १०५ १०६ १०८ १३ १३१४३२१४ १५ १६ ११३ পৰ ৰা যায় প্লাঙ্কাগ ২ सय ३८० १५६ ५६३ ५७२ ५७३ ५७) ६५० रणदरी (या सदगुणदयो ? } राजामिनीय की रानी ३८६ मारली सामा शूट को पानी ३५० मानरराज जयाश्रय का उपनाम ४२५ महाराज नायक २०९ সাল খান বাংলা ও मनुननिन्, कदि ५१७ स्टम सिंह सालवाहन का उपनाम६१५ महा श६८७ मागकण्ड कषि ७६ मण्दराज करत का राजा ५३० मण्डन परमार गायक ७० मण्डरदुग पाम २०४ पपुर पाम (माण्ड) ३०४ माइल नायक २७६ চন্ধি স্বামী মণ মাংনায় দুভাগীরথী নায় ১৪ ১৫ मण्डी ग्राम २३६ मरीक मायक २०६ भतिल मायावत का राजा ५३. मत्तमयूर एक सम्प्रदाय का यागी २६ मत्तमयुर प्राम ५५१ मत्तभया नायशष यागी ५५० मपनत्व गर्जनिटार नाय ३१ मयन विंद गुहिल रामा २६० ३०० मदन नायक ३१० महा गारपुर (कन्नाज) का राजा (1)९६ मदन वही नाचल मदनयमान २३७ माए कही जा कन्नौज का राजा मदनलार ७८ সনী লম্বা মৰা ধ্বী না ? मलमान काज का गा०८ ८ ८३ १८७ १५० १६३ मदार पाल शीगजा ६६७ मनपाल पानामयता का रायकर नायक ६२० मजिल ७२६ मदनसिह गढादेश का नायक ३४१ मदमतीहार ( वा अप्रतीहार') ग्राम १०१ मदाफर-साह, सुलतान (मुजफ्फर द्वितीय) ३२३ मेशलि, जयादित्य का मत्री ६२६ मधुकर साहि, गढादेश का नायक ३४१ मधु-कामार्णव, पूर्वी गड़ का राजा ३७६, ३७६ मधुमती, पाम (महुवा) २३५ मधुसूदन, नायक ३८५ मनोरथ, मग ब्राह्मण ३८२ मनोरय, (मुरारि का पुत्र) कवि ६६६ मनोरथ (सीद का पुत्र), कवि १८५ मनोहर सिंह गढादेश का नायक ३४१ मम्म (रिवर्मन्) ५७१ मम्मट, इस्तिकुण्डी का राष्ट्रकूट वंशी नायक ३०, ५६ मयतला, लक्ष्मणचन्द्र की रानी ३७० मयू नगरी, ग्राम २२० मयूर. नायक ३४६ मयूराक्ष, विश्ववर्मन का मत्री२ मरुस्थली, देश (मारवाड) ३२० मर्यादा सागर कलचुरि (२) अशी राजा ७१ मह, नायक २७९ मलम,यदिल राजा २४७ महदेव, जमङ्गा का नायक ३०८ मन्त्रण छिन्द वंशी नायक ५२ महमन्द साहि वा महम्मद साहि, सुलतान (मुहम्मद इब्र तुगलक) २७७, २७८ महमूद वा महमूद, सुलतान (महिमूट बेकर) ३१८,३२३ महम्मद साह (युहम्मत शाह) ५६४ महाकान्तार, देश ५३. महाजयराज, नायक ६३२ महानन्द, नायक २७२ महानामन, बोद्ध ४९५, ०४६ महाभवगुप्त प्रथम जनमेजय, नृफलिङ्ग का राजा १८१,६८२ ६८३. ३८४ ६८५ महाभवगुप्त द्वितीय भीमरय, कलिङ्ग का राजा ६८६ ६८७ मयायक या महायिक, गुहिल राजा २४७, २६०, ३०९ महालक्ष्मी, गुहिलरानी ३४ महालक्ष्मी देवी (:), नसिह गुप्त की रानी ५३९ हारा गुप्त ययान, कलिङ्ग का गजा ६७८, ६८ महाशिव तिवराज कौसल का नायक ६३८ महासार. यान (मसार)२९३ महासिंह, गहादश का नायक ३४९ महामुदव राज. नायर ६३३, ६३४ महासन गुप्ता, मगध का गुप्तपशी राजा ५७२ महासन गुप्त देसी. प्रारिन्यवर्धन की रानी ५४९ महिमल पा महीतल वा महीयल, कन्नोजक राजा चन्द्रदेव का पिना ८०, ८१.८६ महिन्द्रवर्मन, पूर्वा गत का राजा ६४ महिपाल, नायक ६४ महिपाल, प्रथम मार तिद्वीय, घूा समा वसी नायक ३०३ ३६४ महिषराम, चाहवान नायक १२ महीपपल, सिंघपुर के नायक दिया कर धर्मन का उपनाम ६२२ महीचन्द्र, ७८,८७, १५५, १६॥ महीतल वा महीयल, यही जा महिअल ८३, ८५ महीदेव, नेपाल का लिच्छवि राजा ५६३ महीदवी देवी, महोदय के नायक महेन्द्रपाल की रानी ५६६ महाधर. मग ब्राह्मण, ३८१ महीन्द्र (वा महेन्द्र), राजा ५४ महीन्द्र मल्ल (महेन्द्रमा), नेपाल का गजा ५८७ महीप, वाघेला नायक ३१८ महीपति, घडासमावशी नायक २१५ महीपाल, नायक ३१५ महीपाल, राजा ३७२ महापाल, कच्छपघात वशी राजा ७३. ८ महीपाल, कन्नौज का राजा २५ महीपाल, पाल वशी राजा ५९, ६६२, ६६३, ६६५ महीश, राजा २०१ महन्द्र, नदूल का बाहुमान नायक ११८ महन्द्र (था महीन्द्र), राजा ५३ महेन्द्र, कासनका राजा ५३० मंहन्द्र, पिटपुर का राजा ५३० महन्द्र मल्ल, नेपाल का राजा ५८५, ५८६, ५०० महेन्द्रपाल कन्नौज का राजा १७, १९, २५, ३५० महन्द्रपाल, महोदय का नाया ५६५, ०६६ मदेशया महश्वर, काव ३१६,३२० महेश्वर, नायक २३७ महेशर नाग, नायक ११२ महोदय, ग्राम (कन्नोज ) ५५८, ५६४, ५६६, ६६० महमुद वैकर. सुलतान ३१८, ६१९, ३२३ माणिक्य, शाकम्भरी राजा २७५ माणिक्यवर्भन राजा ६१६ मातृघट, ५५२ मातृविष्णु, नायक १७२, ५४१ मातृशर्मन, कवि ६४ माधव, भानुगुप्त का सामत (?) १७६ माधव, कवि ३५, ६७४ माधवगुत, मगध का गुप्तवंशी राजा ५७२, ५७४ माधववर्मन, कलिङ्ग का नायक ६९५ माधयवर्मन, विष्णुकुण्डिन का राजा ७०९ माधवसिह, गढदिश का नायक ३५१ मान, वश ३८१ मानगृह, नेपाल में राज सश्न ५०१, ५१९, ५४७, ५०५, ५७९ मानदेव, नेपाल का लिच्छवि राजा ५२५, ५१८, ५६३ मानदेन, नेपाल का राजा ५८२ मानपुर, माम६२९ मानवासिह, राजा २७५ मानसाहि, ग्वालियर का तीभर नायक ३३७ मानसिंह, राजा ३३० मानाडू राष्ट्रकूट व नायक ६२९ मामक (?), नायक ३६१ मारसिंह, गङ्ग का राजा ३७९ मालव, दश ७२, २२०, ३०४,३०९, ३५९, ३८६, ५३६ माहट, प्रहपति वश का पुरुष ५५ मित्रवर्मन, नायक ७१० मित्रसेन, ग्वालियर का तोमर नायक ३३७ मिथिरा, देश ५८७, ६००, ६६६ मिश्र दामोदर, कवि३०२ मिहिरकुल, राजा ३४८, ५५२ मिाहरलक्ष्मी, रविपण की रानी ६१४ मुइजुद्दीन यहाम, सुलतान २५३ मुक्तसिंह, चूडासमा वशी नायक ३०३ मुखर, वहीं जो मौसरि ५७५ मुग्धतु, वही जो कलचुरि प्रसिद्धधवल ४५१ मुजफ्फर द्वितीय, मुलतान ३२३ ( ३७ ) मुजगज परमार राजा ५३,८२ मुद्रगिरि, ग्राम (मुगेर)६५७ ६६. मुपरि कदि ६६८ मुण्डावी या मुरण्डस्वामिनी, जयनाय की रानी ४०८, ४११ मुहम्मा इन तुगरम, मुलतान २७७, २७८ २८२ मुहम्मद शाह ५९४ मूर्निगण, शव योगा ६२७ मुरव, नायक ६९२ मूलदय, कच्छपघात वशी राजा ७६ भनाज प्रथम, चालुक्य राजा ४५, ५० ५२, ५३, १३५, २५६, १९६, २०९, २१५ २१६, मूलाज द्वितीय, चोलुक्य राजा १९६, ५५८ मूलराज, वाघल नायक ३२८ मृपावनी, गदादेश के नायक हत्येश की पुत्री ( १ )३५१ मेयचन्द्र, तगर्त का रामा ५९३ मपश्न माम ५०९ मेवपाट, श (मेवाड )२५७ २५१, २६०, २६५, ३०५, २०७४३०९ ३२.६. १२०, ३२५ महवर्मन्, राजा ६१७ मला या मलिंग, पूड़ा समावशी नायक ३०३ ३६१ मेलिग, नायक २०९ मेहर दा २०१,२०८,२७९ मंधक, या ५७८ मामल, साहिल राजा ३०५,३०७ ३०९ ३१६ मोकल १११ मोकल सिंह, पूसासमावशी नायर २६४, २९५ मामसिंह, यापा मावस ३१८ भोमन देवी, परमार यशोवर्मन को मामा (२), २९७ मीटरि, वश ५६३, ०७२, ५०५, ८७३, ५७७ ७८ मौर्य पध९ २७८, ०११ घरपान गया का नायक ९८ यक्षमा भनापुरी का पासक ५१ यक्षमन मेपातकापमा ५८६, ५०० पवमन् , मोखरि राजा ५७८ पशर्मा, सिंपपुर का नायक ६२२ पतिका, रंगन नायक देवराम की गनी ३११ (४० ) राजकुलगच्छ ५९२ राजदर, नायक ४४५ राजभञ्ज, नायक ६७८ राजमती, जयप्रतापमल्ल की रानी ५६८ राजमल्ल, सहिल राजा ३१६, ३२०, ३२१, ३२३, ३२५ राजमाल, वश ४३३ गजराज प्रथम, पूर्वी गा का राजा ३७८, ३७१, ३८६ राजराज द्वितीय, पूर्वो गह का राजा ३८६, ६९२ राजराज तृतीय पूर्वी गङ्ग का राजा ३६६ राजलदेवी, रानी ३६१ राजल्ददवी, स्थितिमल्ल की रानी ५८५ राजला, पृथ्वीव प्रथम की रानी ४३० राजसिंह, गढादेश का नायक ३४२ राजसिंह, पढ्श घसी नायक २९६ राजसिह, इन्द्रवर्मन का उपनाम ६९८, ६९९ राजसुन्दरी, राजराज प्रथम की गनी ३७८, ३७९, ३८६ राजि, चालुक्य राजा ५० राजेन्द्रचोल, चोड का राजा ३७८ राजेन्द्रवर्मन, पूर्वी गङ्ग का राजा ४०२ राजेन्द्र विक्रमशाह, नेपाल का राजा ३४४ राज्यपाल, कन्नौज (?) का राजा ६०, ८२ राज्यपाल, पालवंशी राजा ६०२ गज्यपाल, कन्नौज के गजा गोविन्दचन्द्र का पुत्र २२५ राज्यपाल, पालशी देवपाल का पुत्र ६५७ गज्यपुर, माम (शजोरगढ) ३९ राज्यमती, जयदेव परचक्रकाम की रानी ५६३ राज्याती, धर्मदेव की रानी ५१५ राज्यवर्धन प्रथम, कन्नौज का राजा ५५९, ५७० राज्यवर्धन द्वितीय, कन्नौज का राजा ५४९ राम, कीरयाम का नायक ३७० राम (बलभद्र का पुत्र), कवि ५६ राम (भृङ्गक का पुत्र), ३७०, ५९१ रामकीर्ति, कवि १३५ रामचन्द्र, गढादेश का नायक ३४२ रामचन्द्र वा रामदन, कलचुरि का नायक २९९ रामदेय, चन्द्रावती का परमार नायक २२० रामदेव, वही जो कनाज का राजा रामचन्द्र १५ (४१) रामोवी, जयस्वीमिन् की पनी १०१ रामपाल, पाल वशी राजा ६६६ रामभद्र मनोज का राजा ५६८ रामभद्र, महादय का नायक ५५८,५६१ रामसाहि, गदादेश का नायक ३४९ रामसाहि, ग्वालियर का तोमर नायक ३० रामसिंह, नेपाल का राजा ५८६ रायपाल नायक ३६२ रायपुर, माम २९९ रायब्रह्मप, रायपुर का कल तुरि नायक २९५ ३०३ रायमल्ल, वही जी राजमल ३२१ ३२५ रायारिदेव-लोक्यसिंह, नायक ३८५ सल्हदेवी या राम्हणदेवी कन्नाज के राजा गोविन्द पन्द्र की माता८१,९७ ११०, १२५ राष्ट्रकूट या २५, ३०, ५३, ३५९, ३६९ ३७३,३७५३०९, ६२७, १२९, ६५७ ६६२ नागड (राष्ट्रकूट), यश २१२ राडा, लक्ष्मणराम की रानी ४१९ राहिन चन्देल राजा ३५ ५६ रातराय, यही जो रोतराय ३९५ रिपुघल, भास्करवर्मन का उपनाम १२२ रीन फीरोजशाह प्रथम, सुलतान २५३ रुद्रनायक १०० विहारस्वामिन् ६३१ रुद्रनासानायक ६२८ रुद्रदय, गदादेश का नायक १११ उदय भार्यावर्त का राजा . रुद्रमान, मगध का मानवशी नायक ३१ रुद्रसेन प्रथम वाकाटक वशी राजा ६५१, ६४ कसन मितीय, याकारक था राजा ६११ रुद्रपाल (1) तोमर राजकुमार ४४ रुडादेवी, यापल वीसिंह की रानी ३१० रूपमती, भयप्रतापमल्ल की रानी ५८६ रूपा महानन्द की रानी २७९ रूपानेगी, याहुमान राजकुमारी २५० रेमुणा भाम १४६ या मदी (ना) १९ २०० रोनराय वा रातराब, गाणदेय का उपनाम ३१५ ६ ।

( ४४ ) पगजर, वश २९१ यविद पाम १६६ वन्सवामन, शूरसन यश का नायक ६११ पत्सदेवी, पुरराम की रानी ५३९ पत्सदेवी, शिवदेव द्वितीय की रानी ५६३ । यस्सभट्टि कवि वत्सराज चाहमान राजकुमार ५५ पस्सराज, लाटदेश का चौलुक्य (वा चौलुक्य) नायक १७५ वत्सराज कारेडी का नायक १९४, २२८, २२९, १४० घरसराज, महोदय का नायक, ५६४, ५५८ वत्सराग, चन्देल कीर्तिवर्मन का मत्री ७९ वत्सराज सिङ्गर यश का नायक ११४ घनमालधर्मन, माग्ज्योतिष का राजा ६७४, १४ पनराजदेव (२), नायक २५२ बन्धुक (धा धन्धुक)नायक ६५ पप्पट, पालवशी गोपाल प्रथम का पिता ६५६ घशपाल, राहिल, राजा ३०९ षयजलदया, वीरधवल की रानी ३६१ परसिह, उमङ्गा का नायक ३०८ घरसिंह, वाघेला नायक ३१८ पराहदेव (१)किसी वाटक या के राजा का ममी ६५४ पराह सिंह सेनापति ५ परिक, जाति १ वरुणसेन, नायक ६१५ वर्णमान, मगध का मानवशी राजा ३१ वर्धमान, घाम ३०२ वर्धमानकोटी, पाम ५५९ वर्धमानपुर, ग्राम ३६० धर्मशिय, शैव योगी ६२७ बलभी, माम ३६५, ५२३, ४७८,५७९, १८१, १८२, १८३, २०५५८६, ५८७, १८८, ५८९, ४९०, १९१, १९२ १९॥ ४६४, ४९६, १९७ ४९८, ४९९, ५०१, ५०२, ५०३, ५०४, ५०५, ५०६ ५००, ५०८, ५०६, ५१०,५१९, ५१२॥ ५१३, ५१५,१६,५१७, ५२०, ५२, ५५५,५५५ वामदेव, नायक ३०३ बालभराज, मसकर ५५५, ५५५ पालभराज, चौक्लय रामा १३६, २१५, २१६ -- पलभराम, वही जो कृष्णराभ, राष्ट्रकूट महितीय २८ पलादित्य, नायक २७१ दल्लर, बाह्मणों की एक जाति ६५५ सन्तदेव या दसन्तसन, मेपात का लिविजा ११.१६॥ परान्तपाल, पानवशी महीपाल का पुष ९१ वसन्तसेन, बद्दी भी वसन्तदेव ५६३ पसावण ६२७ वसुदेव, यही जो भह परेव ६२२ वाइल, पंश २०९ पस्तुपाला २२०, २२२, २२६ साकार या पाकाटक, बा ६४०, ६५१, ६५२, १४१,३१, (४५, ६५६.४१ पाक्पान, चरम राजा ३५, ५६ थापनिराज,चारमान शशा माकपासिराज, परमार पा ४६, १९, ५०,६७, ३५१ पाकपाल पालवी राजा ६६. पारखल राग (पापलराम), नायक २०९ पापैल, १८ पापना, वंश २१९, २२०, २२, २३, २०, २१९, २१५, २५८, २५२, २५२, २९८, १५॥ पापस्पति, कवि ६९१ पाजक, इंश २९० पाक, ककोडी का माय ९४ पाणदेष, नेपाल का पत्रा ५१ थापनीव, गोद्रहक का मायक.. पा(१)मण्डापाटी, पाम ६८० पाराणसी, भाम (अनारस)८,418,८९, ११.१९, ११, १००,१०१, १०१. १०७, ११११, १२०, १२२, १२३, १२८, १३७, १५२, १४५, १६८, १७२. १७५, १७९, १०६, १७८,१८९ पारायसिन्कटक या वागणसि-करक, भाम (1१८३८५ पार्षदुर्ग, ग्राम १५९ पापलराज (पाखलराज), नायक २०१ वासुदेव, ६५, ३३५, ३८५,५५५ वासुदेव, गवादेश का नायक ४१ पासुल, वधि ३४८ पास्तव्य, या ३५६, १९ वाह [१] वर्मन, ककोडी का नायक २२ पाहधासत, पाहुमान रामा २५० विक्रमपुर, माम ७० रामसाहि, ग्वालियर का मगर मायक ३१० -- - (४८) विष्णुवर्धन, वही जो यशोधर्मन् विष्णवर्धन ? विष्णुवर्धन, परिकवंशी नायक १ विदारनगरी, ग्राम ५८६ विहारिसिंह, गढ़ादेश कामाय ३५९ यीजा, यही सो विजयदाक्ति ३५३ वीतराग, जयभट यम का उपनाम ३६६, ३६७, ३६८, ११५, ४१६, १७,४१. पीर, राजा ६६९ पीरन (या वारम) देव, नायक ३०१ वीरधवल, २१९, २२०, २२२. २३३, २६२, २६८ वीरवाहु, प्रागज्योतिष का रामा ७१४ वीरनारायण, गहादेश का नायक ३४१ वीरनारायण, विहार का नायक ५८६ वीरम, ग्वालियर का तोमर नायक ३५० वीरम (या धीरग?) देव, नायक ३०१ बारराजदेव (?), नायक २८७ वीररामदेव, उचहड नगर का नायक २८८ वीरवर्मन, चन्देल राजा, २३७, २३८,२५३, २५९, २५१, २५५, २५९ वीरसिह, गढ़ादेश का नायक ११ धीरसिंह, गा का राजा ३७९ वीरसिंह, राहिल राजा ३०९ वीरसिंह, करछपघात धेशी राजा ९८ धीरसिंह, ग्वालियर का तोमर नायक ३३० वीरसिंह, सण्डाहिदेश का बाधेल नायक ३१ वीरसेन, जिसे शाब भी कहते हैं, चन्द्रगुप्त द्वितीय का मंत्री, ५॥ वीरसेन, सेनवंशी राजा ६६९ विसलदेव, वाघेला राज्ञा २५३०.२३६, २५५. २६२ वीसलदेव-विमहराज, शाकम्भरी का चाहमान राजा १५१ वृद्रिवर्मन् , सिंघपुर का नायक ६२२ वृषदेव, नेपाल का लिरवि राजा ५१५, ५६१ वेगादेवा, इष्टगण की रानी ६२९ वङ्गी, माम वा देश ५५० वडीपुर, ग्राम ७०८ बेणी, नदी १६६, ४२८ दशर्मन् , कवि २४७,२६० देसलदेवी (१) महेश्वर की रानी २३७ पैनादेव, थाइमाण नायक १७० - 1 - T श ऐया. यानिष का रामा ३६६ र हिल राजा २६०, ३०९ भरतर्मन, चिन्म का नायक ५॥ सिंह. गुहिल गजा २६०.३१९, ४३६. १५२ तिसंह परमारामा १६.७२, ५२. ३५१ मांडा (:) गायक ६८० बावामाना. भाग ६२७ । प्या उपकल्प का नायक १०६ प्यानमा प्याराज. नायक २८९ सावंत, प्रायविषण का शासक ६४० ध्याराज. मायक २८९ प्याराज, महाकान्नार देश का गमा ५० वापरावरिकशी मायर' प्योमाय, पर योगी ४५१ प्रणभममायक. है शक. मुरास्मान (किसी के भा):५३. २७१ किकुमार हिल जा ५८,२५७,२६०, ३०६, ३५६, १५८ समिसिंह, मायक १५ पानिासिह नेपालका राजा ५८६ परगण, रामा ५२८, पारगण, मालचुरि राजा १२८,४४६. १५० शरण (ग) मलगुरि (१) राजा ४८ घदूरवन नल का लिच्छवि गजा ५१५, ५६॥ माझमाउकानिपत योगी ४५१ गज.६५१ भा.नायक ७९ पाल्य भयौनपुर का नायक II मिन, करपात की जा १८ । शासपुर. पाम १२,६३३.६३५ मगुम, यही जा भह शगुन । गवना कठगुन का मामन 10 गंमाय, काय का माग १८,५०६,११,४४७,५१५ नयमन. नायक १४ मेयमन गगा ५१ कार्यवगंग, मागमा ५३६ ७ ( ५० ) मासानायक ६५९ शशिधर ५३६ शान्ति सनापति ४४४ शाच वही जो चन्द्रगुप्त द्वितीय का मत्री : शामल (.) ऋषि ३०५ शार्दूल वा शालबमन, मासरि राजा ५७७, ५७८ शालवायन वश ७०८ शास्तम्भ या सालस्तम्भ प्रागज्यानिय का राजा ७११, ७१५ शालिवाहन ग्वालियर का तामर नायक दाहजाहा, सम्राट ३६ शिखरस्वामनी, मजयंसन की रानी १४ शिलामञ्ज नायक ६० शिल्लुक याशिलक या सालक प्रतिहार नायक १३. ३४९ शिव, कारि२७० शिपमण नायक ९ सियगुन त कार का गजा ६८१ ६२ शियगुप्न-बालाजुन नायक ६७ ६३९ शियस्य कवि ३३७ शिवश्व प्रथम नपान का लिच्छवि राजा ५०१०१७ शिवाय माय नेपाल का राजा ५५९, ५६०, ५६३ शिवसिंह, गढादेश का नायक ३४२ शिवसिंह मिाथन का राजा ६०० विर्मामह नपान का राजा ५८५ ५८६ ५८७ शिशुपाल गजा (१)६८ शीन गुहिल गजा २४७ ०६० ३०९ पीलादित्य. पाश्रय-शील्गदित्य शालाहित्य प्रथम धावत्य बल्लभी राजा १२७ ४९८, १९९, ५००, ५०६ शानादित्य द्वितीय नाभी राजकुमार ५०८ सीगारय मताय वसभी राजा ५०४.०११.५११ दगीगादित्य चतुर्थ मलमा गजा १ ० १३. ५.४, ५१६ भानगरिय पञ्चम सभा राजा १६ ५७ ५.० वीगान्य एथा पलभा गजा ५२. ५०१ शीनाविन्य सानवा ना. याभागमा ५२२ सानाडिन्य गल्लभी राजकमा ४९४ १९६ ५००, ५०६, २७ शुभिर्मम गाई गजा २७ २६०, ३०९ ३५६ एक, गायक"६६४ - T -4 -- .

एक गया कानावर ६६८ शशा, पायंशी गमा ६०१ पास याहान्यूना काराकर नायक ६२७ सामन, पश६१ शुरासन भागांयाका पनि ५ विसी, राजमल की गनी २० लाडय कक्षिा का नायक ६९५ ধৰিয়াৰ, না এই श्यामलती, गुहिल विजयासह की पनी १५६.१५२ ट्यागमारिवानिया का मोगर नायक ३७ श्री, सर्भणार की रानी ११ श्रीधर, स्वाकुल पा का पुगर २.९ श्रीधानमान, नाया ६५० श्रीनाथपापि मायक ६४ श्रीनिवास नेपाल कागजा ५८८, २९. श्रीनियार, कदि ४५० श्रीपान, नायक २३० श्रीपाल, कौष २३६ श्रीपुर, मान (सिरपुर ) ६८.६३. श्रीमती, माधष गुप्त की रानी ५७२.५७३ । श्रीमाल, पाम (भिमान) ६९, ७०, १८१,२००, २११. २३२, २५६,२५०,२९६,२६१२६ श्रीवल्लभ, पश्चिमी चालुक्य राजा २२५ श्रीसिंहदेव (?), गजा अधाश्रय-शीलाविष्य, गुजरात का चालुक्य नायक ५२, ५२२ पेस्क (1) प्राम९९४ प पगार (खगार) राजा २७६ पहा (खार), पडासमा का मायक २९५.३.१.१६४ पदरा, १२९८ पाहजहां सम्रा १३६ पिटाशीनभारी, सुलतान २५१, २०५, २५६ अदुवान, सुलतान (फुतहीन ऐबक ) २५५ धुम्माण (सुम्माण), गुहिल राजा २४७, २६०, 101 पोजवर्मन् वा खोजक, कवरेंदी का नायक २६४, २३८. स सहपाक, नायक

पारगारी पाम भापखा ३०४
त्यचन्न गर्न का राजा ३७०
हाया गटाश का नायक १४१
यश ययागी १५०
हमन्तसन सनशा राजा ६६९६०.
हमराज रायक८९
हमावजय कषि
हरभ्वपाल कन्नाश का राजा
इय या ३०२ ४५८ ५२९ १४४ १५० ६६०
--

शुद्धि पत्र । पनि छाशुद्ध . . १. पृष्ठ २०८ ९ ५. Art ५ ६१७. १०. के लगभग १६ १८मे याबदा दिया गया- गास गागयमन (पारम्भ काल ५०) २५ जसमदन स... शामा.मा. भाग पृ उनाक उमका का छोड़ कर का छोड़कर ३०म०६ सीपक सीयक 'यह प्रशस्त विमहाराज से विवाह किया" हनना लेखन काम मियाना ध्यामा भना भना पदान ११ परभ माथिका पृथ्वीश्रीका ४ वश में २१ २५ २४ २१ महाराजाधिराज गनमा लक्ष्मीची गल्हगी नोड महाराजाधिगश दानपत्र मयमादेवी रान्हदेनी जोडा . २६ १० ० गावर २और ५६ । नम्बर ३ पृष्ट पति शुद्र २४ -- ३० . . ९ . ८ r . पृष्ट ४८ वि.सं. विसं. पृष्ठ ३१ नम्बर २५० नम्बा ५० महाकुमार मीवर्मन महाकुमार लक्ष्मीवन जयकीनन সর্দিজৰিমন केण्ड कलधु। कालचुरी जब ए ज.स.ए. पचा चाचा गया था यह पाक में होना चाहिए में मानपत्र जा काशा में में दानपत्र जा काशीम धरणीवगथ धरधराह परगनिन परमदिन पृष्ठ २३८ पृष्ठ २१२ पृष्ठ ३१३ पृष्ट १० धीहिम्म पाहिल "राबा.. हरिपाल के पुम ने हरिपाल के पुत्र रत्नपाल ने दाचि दधीचि पृष्ट ३५३ वि सं १३२९ यि. स, २३२८ मराज कानभाज शुम्माण पुम्माण शुचियानि शुर्चिवर्मन पोखा खासंग गि, स २३३२ भाग २२पष्ट १८ भाग ५५ पृष्ठ १८ सामा सिंह पृष्ठ 3 पृष्ठ १०० निच लिये नीचे लिण्य अलभिश গলনায় मदि काहि मनतर्मन, गानवर्मन, परमान r ८ . . - १ष्ठ २१२ 7 । -- . . २३ . - ३ ममा सिंह ५२ ( ३ ) पृध पनि शुद्ध ०२ पृष्ठ २८३ घप्पर शील कालभोज जिक शुभ्मान (एम्माम) २४ विकुमसिंह साम्बरससिह दव पृष्ठ ४८३ चप्पक सील कालभोज थिक पुम्मण (गुम्भाण) भट विक्रममि साम्बतसिंह श्व mo६० घेरावज पृष्ठ ४८६ १३४८ पृष्ठ ८४ ६ २ पीरावल पृष्ठ २८६ वि०स०२३४९ पृष्ठ ८२ पृष्ठ ५२ २०२३ २ २७ शाकम्भरीका तुरस वि०स०१३८४ बागार (खगर) याशलराज टेपक वाललादिन्य ग्रा०स०५०३० तझासह फुहार शाकम्भरीके तुरष्क वि०स० १३८६ पगार (खगार) वाषलराज उपक वन्जादित्य प्रा०.३०इ. . ५७ " तन सिंह ३ १२ ठाकुर बडगुजर घेरावल पगार लक्ष नयमिदद पृष्ठ १०६ और २६ मनपाट टाकुर वाउगुजर वीरास वाधार नझ लामिदव पृष्ठ १७६ मादपार सवाल २ ६१ १ ६२ ८ पंक्ति अशुद्ध २१ ३ योगराज, वैराट, मेवपाट भा०६०, २ ७० ७१ ९ ७२ ७ ७३ १ ३ १२ ३ ११ योगराज, भेदपाट भा०५०, पृष्ठ २७० विक्रम संवत चन्द्र कृष्णाप यासर्व चन्देल्ला (राजपुनाना) भाग १ तथा ३०३० (२) शक संवत मयान्तराग मुलतान राजान कम्नीज विष्णुम गुणमहारांव कामार्य दानार्थ गुणार्ण्य कामार्थे दानाN कामाये रणार्य गुणार्ण्य कामार्य ७५ ... (२)विक्रम संवत चन्द्रा कृष्णप अासर्या चन्दल (राजपुताना) भाग १९ तथा६०६० (३)शक संवम मशान्तरा मुलताई राजानक कन्नौज विष्णुरम गुणमहार्णव ফামাগৰ সানাগৰ गुणाणव कामार्णव सानार्णव कामार्णव যাযন্ত गुणार्गव कामार्गाव ३ ७ उ " 11 ५ मधुकामार्ण्य शिलालेख का पृष्ध २८३ ८ সঘামান शिलालेख को पष्ठ २४२ निदाह नङ्गमा ... निपत ८० नड़ पंक्ति स्तुरि- राज्य चौड़गंगा चन्दसख ... गनियाङ्कीम पालुन्य मान कुनदेनी मालमराजाका इग्रा ऊचालुका इसरा यारागासिटक करतार- राज्य किया घोडगंग चन्द्रटसा दूसरा अनियङ्कभीम पजराज चाद्धस्य मडकुणादवी मालव राजा की भानुदेव हुया घालुक्य दूसरा वाराणसि कदक सख्या ३८६ वागणसि-कटक महाराज जयनाथ २६ संख्या ३६७ १० २० वाराणासि-कूटक भहाराज-जयनाथ ६ १४ कर के समय का मत्तमयूर के गडयंदव कर्डहरी कर मे का मत्तमयूर वंश के गोगायव गांजय नांना २४ मोनल्ल लछल्सदेची शिलालेख मे ठाकुर पाहिल्ल जरापाल गङ्गय लाच्छल्लोवी शिलालेख में रस्नपुर के ठक्कुर साहिब रत्नपुरके ८ गाय रत्नपुर के शान्सिल निगिडपदक कोक्कल [मयम [प्रथम ] जिसने नाहग রানি निर्गुण्डिाक कोक्कल [ प्रथम [प्रथम जिराने जाहस १ ર छाशुद्ध ८ १६ २० कचव शिव जयसिंह देव गङ्गेय सनकादिक म्यूजियम गु० स०१३१ जूनागद समयका पृष्ट ६६ सुरमिचन्द्र के पात्र जा यल्लभी गोलमटि टोल तथा भा०३० शङ्करदेव जिसने, कवचशिव जयसिंहदेय गान्य सनकानिक म्यूनियम ए०सं० १३५ जनागढ़ समय का कोसम में ६ ९ २६ २२ सुश्मिचन्द्र के प्रपौत्र जी बल्लभी गोलभाढिदोल तथा भा०६० शङ्करंदव, उसका पुत्र धर्मदेव जिसने जाइक मेमोल कुमारएम प्रथम (या शादि) जाऊल २० ३ ११० १९१ २४ ९ जैनक माहोल कुमारगुप्त पम (वा शाही) जऊल मद १५ वर्ष खरग्रह के मंशुवरमन खण्डित वरावल का महराज महासामन्त भान निष्णुगुप्त ईमरी देवी के निकट ह.स. १५६ पृष्ट ७९ पाचककाम दुचोली-मैं ... १५२ वर्ष खरयह प्रथम के अशुवर्मन वेरावल का खण्डित महाराज महासामन्त महाराज भान । जिष्णुगुप्त ईसटादेवी के मन्दिर के निकट १९.२० पृष्ठ १७८ पाचककामका -दुर्बोली में ३ पंक्ति अशुद्ध ६ ईसटाची महेन्द्रपाल दामपत्र ८ २० ईसट देवी महेन्द्रपाल दानव ६५५ मैं १०सं०५६४ पृष्ठ २३ मागध वयोवरणार्क कमलादेवी हामन्तवर्मन मूर्ति शिवसिंह, २४ ३ ११० २५ १६ १२१ १२२ पृष्ठ ३२ मगध স্থাষাবান্ধ कमलदेवी নলবর্মন मूर्ति शिवासह, उसका पुत्र हरिहरसिंह गोगेको छिन्द वंशी सदर ममोल ( मालगपुर) ए रि-बा.. पृष्ठ ३१२ आपहिल्वाड़ भाग १७ वर्मावर चित्र मर्ति के दान किएनाने का वृद्रिवर्मन बर्मन-महीयत जालन्धर पो.वं.ए.सो. वेगांदनी मदाली सहलित पुर्व निवास माना चारों का सरिछिन्द मागील (माङ्गलपुर) ए.मि. वा.. आदिल्सा भाग ५७ यसवर औरचित्र मूर्ति का খ্রমন धर्मन महिवाल जाम-धव । पी. वा. ए.सो. विगांदी मडोली १२४ १२५ १२६ २० ६ ... १२८ पुर्व निवास माना ... .. भाव भयंदव सरिन। सारन (८) पनि २ ७ ६ २३३ तिवरस्वमिहाशिवतिपरराज) नायरदेव (महाशिवती वाकाटक्रस वाकाटक उसके उसके भरवसेन भवरसेन तिष्याम तिष्याम्र पृष्ठ २८३ पृष्ट २८४ श्रीध्यतमान श्राधौतमान छिङ्गल छिड़ला दृतक पग्णादवी रण्णादेवी तिव निग्यदवी यज्ञपाल यक्षपान पात्र पौत्र भाग ५५ भाग ६५ जिल्दत सिल्दत रामहाडी बामहाडी महागाधिराज महागजाधिराजा १६ १६ भण्डाहर भीभुजङ्ग का २४ १६ ३४२ भ्यजियम) में ( यशामांत) शिरपल्लि मर्गकिमडि খাদ্ভাবন पृयी पश्वर चण्डीदर भीभूजा की युगुड म्यूजियम म) योभीत, सारपल्ली पाकिमडि शालकायन पृथ्वी पेश्वर

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Prachin Lakh Mani Mala

Author
Das Shyam Sundar
Title
Prachin Lakh Mani Mala
File name
Prachin Lakh Mani Mala
Text
OCR done
Citation
1903
Published
2011/01
Publisher
Tara Printing Press Kashi
Language
Sanskrit
Pages
178
Library
Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
Classification
Literature
DLI number
546265
Barcode
4990010024757.00
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C-DAK, Kolkata
Digital publisher
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