Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner

Sarat -sahitya Shrekant(chturth Parv)

Kamal Joshi · 2010/12

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सुलम साहित्य मात्र पासिर्षों पुष्प शरत्-साहित्य श्रीकान्त (पतुर्थ पर्व) मनुवादरता कमल जोशी हिन्दी-अन्य-रलार (प्राइवेट लिमिटेड, बम्बई- एफपया पचास मये पसे पोपयों पर बनपरी,.. प्रमाणावर मोसनेविग परार, सिन्द गनार ( HR), रोग, पम- प्रामार, सनम:HEE माती (बनारस) ५०११-१० श्रीकान्त चतुर्थ पर्व माता मेप बीवन एक उपमापी उपरोपीता, मिसको नमनाभर मुम्ता या, ठसा निस्कन सो मिला पहुँचनेका अधिकार और न मिली पुरानेकी मनुमति | मपीन नहीं नि भनेको स्वाधीन कानेकी पछि मी मुसमै न। कासे घेरती हुई रे में बैठा दुमा वारपार यही सोनपापा। खोपरा पाक मेरी दी किरमतम बार-बार पापा परित होता है। मर रमवा अपना पस्ने सायर पा किसीको मी न पा सगा ! पा इस तर सिन्दगी कार मा ? परम्नको पार भाई। दूसरेकी हप्तासे दूसरे परमे वर्ष बाद प एकर इस घरीरको तो पोरसे पौरनकी भोर आगे पदावा गा, लेकिन, ममको न जाने किस रसातरको भार सदावा या। भावपार-बार पुकारनेर मी उस विदा हुए मनकी मोर भाइर ना मिलती, पर्ग कमी-कमी पीप पटका ममुसरण कानमें भा गया, रिमी, शिना रोयना पाचान पाता किपा मम्मा-विरवास करने पर प्यवाद। पातममार यहाँ माप हूँ भार मेरे सीरनमें राम मी मत है। मदा-किनारे राबोर सिमित प्रतिमा मन्तिम मिहवरको मानी मार देसर मौय-माध करनेडा, कस्ना परदेश, मस्नेहो पाता देने कोई मौ र परमार नहीं मापा है। उस तरफ सब परो गया, नभित । गपा, पर पर पर रिटना , पर रिसने कई मेर ईसक। पर पुण् दिनही तो फि।पुमार प्रहार मप वियर गरने गया। देव गिरीश गामा मुन्ने लिए मैटा, बैटन ही माम्पमें इस ऐसा मिला -- ४ भीकान्त स्तिना मापरिमक पा उतना ही भपरिसीम । न अपने गुपते पापा और न मानी गस्तीसे सोपानी, रिमी भाव स्वीकार करना पड़ा कि मैंने उसे सो दिसा -मेरे ससारमै म मिन्यकर अति हो और पी। पासासा, पर पासना नि एक दिन बम्म पहुंचायेगी। मेदिन यह मानने पुारीका पर पेरना है। पररा बिल भरपर, भाव-सिर्फ पप ही सत्य है। पेण पावामानों इस पपर बल्नेपकोई भन्त नहीं "मरे, पर मोचन्त" पाचपासी न पाकि गाड़ी रोशनपर बरी।। देस्ता किमारे गोरगरा गंगा पसी वा साम्रा साबड़ी एकमा,-तीनों गईन र भोर बयार गरी-पोरगपरे प्रसार गावे माये भोर मिरगमने माम एकाएक थम गये। पापा बोमे "उप सी मीप है।वहाँ एक तुमनेकी मी गुग्गा नहा यह टीन-तीन भादमी ।। माप रमा तो पापी सीबा मा" "माइये, कार पवाय पण दिया। नीन भारते कार भाये भोर चिठना ताम्मन पमीपे रत दिपा । बाराने 0, "परणपरारा किया रमागतो नही देना पागया।" मैंने करा, "ना में सेवामाता" गार्गको इचिप रे भग्ना पर्टम्प पूरा पर माय, तर डोम निभिन्त रोभारामने रे । मारो पूरनपर गंगा मे मे मोर मम गाम, मोर पंरपा पारामा एयर हो गपारे भीत! जरामर एार एकरम रम्नीमा हो गया। हाँ तन ! कुन महाम मणेदारपणे पपे एक रिसीव नहीपरपोरोपण मरेगवे" महानोरे उतरको भाण नहीं करा, आग्रा न मिनेर पुरानी म्पना। सासन पलार्षिकरने लिए यामममया प्रम भामे और पाउनरीही सारी मनी-पाप गर पप गिरने गरन रिमी भरा पोप पत्र मानुरा। मानती मलरिर र मना पा।१, पेतही वो गोल- ।

चतुर्प पर्ष सोय, पूजवा कि दोन पर्वन मूल तो नहीं माई।-हाँ यो पञ्पर रस दो-दो-पार पेरे, पोड़ा दही-ऐसा ही तुमने कमी तापान होगा मेरा, कसम सादर करतब। नहीं नहीं, रिसा पानी पसे सर मो राये, पंद, ऐरे-गरको वो रे नहीं पी हो, ऐसे मेगों कैसे देना चाहिए पर स्पे।" पटने पया मारध कम्पका रुपम पाम्न किया । मतएक, ट्रेनमें ही मसमपर्म याचिव सीप मिट गमे । साते हुए परने बगा कि मेरे ही माप पारी मनहोनी हुमा करती है, तो इस बार की लिए मैं दोस्पर उपपेकी कीमतभा पार न पुन लिया मऊ। यह सबर उने पारी बार मिल मई में गर्माम भी मौकरी करने गा है। पैगरीदी गाव मारा स्नेह करने, और मारमीय धनकी समझे में पंटेमरमें हो पनिट हो गई, पोधि में कोई दूसप तो या नहीं। मी मणी सापारण मर रस पानेकी, रम गोय तो नहीं पा टेम्नि ऐराने में मुम्मर थेट मा हुई किबारा उस गुपोका बम्पन सम्म मकर पये याने पदने बारेमें रागा आने का, “पा ऐची सुन्दर दोदित सीमाबार तुमारे नाटक और नापिक मी हार मान बा । उस परको नम्दानी) एक ऐसी दिखी बिपी किमाई माय मात रिनोरमार पन्द्रा की पुष्टो सेर मा पहुँचे।" पगाश्मी ठास रिसीने गत भी नहीं लिया से उस व्यकी कमी कोई बात हुई , पर रिसीडो वारताना! दूसरे दिन गारो स्टेशनार यादी ठारी तो मुझे मी उतरना पड़ा । उस बत परीष रसाये। और बचपर स्नानाहार न होनेपर विच मरर पनेही मानवेरोनों में चिन्तित हो उठे। मकान पहुंचनेपर मेरी साविरदारीसी सीमा म रही। पांच-सात दिन भरती गाँव-मरम सिांगे पर उन्दोनमा किमर में ही हैं। यहाँका पैरो मी मनोमगा। सापाचीन पारिया एम पर मागामी पैशास महीने में ही चम्पप रो सप । पो रिस्तेदार को माँ ये उरें गुम हेने में बात में उठी। रोपा दीने पुरति स्पा, "ते हो, it मापने फोन पर पारसे मोई भी नहीं पाय" ६ श्रीकान्त मैं पास सदाचन प्य, सिर पिन्दित हुमा, मोर उठ पारस्य। मण मने कर दी दोराने गा कि हाँ मने मसूरी दो नही मामा देखो गया कि पीए कोई पुरी परनाम पर बार इसलिए न्य नेम वारस ही न या । पुसकी माँ कहाँ थी । एक दिन निमारको एकाएक दर पिसारे मी एण्न रोगपे। मुझे कोई नहीं भने रेखा पादतामोद प्रमोद और टी-मया मी होने च्या, पर मेरे ही सिर परेमी, सिर्फ पोदे दिनोंदर है-एन-धन सभी भारी भोर पर मम मानेगे। गरम वाचया मनको पनि नहाँ मिस्ती-मवारपार मी नहीं निएम पया। ऐसे एक मचानक एक सुपोग मिन। गाने पूज, "वरदारी कोई मरो पा नहीं ! उवधी मम्मत है।' गोर गाकर सारे गंगापूर का पेश, “माप गौने ट्रावण भेग सिर परनामा पमुमसिर २tr' पारारपार पोदी रखा मरम्मे पते रे,हिर पोमे, "। मननीया" 'पर में समीर स्पिर नहार पापा हूँ।" "मही र पावे हा मारगे।गी उसमें पारे पारदरासी पपाऊँया परपुरु मेम्नि मध्ये परा-पाय बसोबार समीपरी से रंग।" 'पराम्परनामा" "होरि हिमपद मेरा" लसी में और पेंग्य रीसे एक पर पारपदोसरी तबांना मा गाँ। राना बाना भनुरोग अभियान मत महापा। मा पुराने करा, 'ऐगा दान भागा ना देय रस मण वर नाबादिप पाना और बाउ है भर गयो पारी परना मर्ग माठ है। पपट रा रा हो पर मनुनारिनरी पारी मार। समरी राग हैं। प्रारम्ने जिगरा परी। गनुमाप R हमारे एप पेशाती है। मुनारि रोग व उना में मीरा दी, ~ ममागिन, रमनको

पतुर्थ पर्व
सानपाद गमेगी। इसकी ऐसो सादर है कि समुद्रपर रामे
समुद्रण सून अप मोर पसी हुई होम ममी भी पानीम माय सप । इमा
ऐसा धन रोगा तो किसका होमा !
पाचेगाने पाले बाबाको मुगार भरने परका पता बग दिरा।
फा, "मेरे लिए एक स्पषिकी पर मेना बस्तीहै उनपनेपर मैं पम्प हो
बागा।" बाबा मेरा राम पार पद्गद् रुपये बासे, "देवो भार, मासको
मत मारो। उन जय रामशा-गुहार ना मिफ्नी मसम्मति न दे।"
में बोण, "मेरा विभात कि मसम्मान प्रकट न करेंगे। बस्कि खुश होकर
दी सम्मतिरंगे।
बापाने माशीर्वाद दिया, "मारे मकानपर कसाई, मैया ।"
“पांच दिन बाद दो भाइये।"
पसी म भोर गा दीदीने पस्नेतक माफर मौनुमोई पाप मुस
विवाध्यिा।
मन-ही-मन परा, दरदीर चिन्नु र मष्टा ही हुमा कि एक प्रभाव
बमन रे मामा । मैंने इस प्रकार निासंगप रिशासकर बिपाकिस विपाम
रामपरमेशमात्र मी मापचिन परेगी।
२
स्टेशनपर पहुंचते ही ट्रेन पूर गर । मय ट्रेन मानेमें रो पटकी रेर थी।
समय हाम्ने उपाय पोजरा पारि एक मित्र मिट गये। एक मुसम्मान
युपपने दुख देख मेरी मोर रेमवे यर पूज, "मार कान्त है।"
"मुसे नहरी पान सो ! मैं गौर" पार ठन्ने मय साप औरत
रादिया पीटर उपद पर गाई मोर बोरसे परे पिटारा,
"नो, हमारे पर परो । गान्ध रहे थे,-जाते। भर पनेत्री चमत
नहाँ-पहो।"
सर मेरा पात्याबा मित्र, उधमे मोर भार कार बम एमा, रमेणास
कुछ मापा पागड पैदा । ऐसा गा हि उम्र पहनो साफ-साय उरका
ए पायरन कम होने की बयप गया है। पहले भी टम्मी परदस्तीते

८ भीधम्ट बनेम उपर न घा, मनपा सरार पर मेरी दुमिन्ताभी सीब नप सिपम पम भाव पतकोवा मुझे किसी रानी माता म सब उसी मामीरता मोर यासमें रिस्पारनेही एडि भाव मुहम नरी है। पर या छोानेपाम पनी था। मेरा पैग टम्ने दुर टय चिौर कुम्मे मुयम उat Rपर रिना रख दिया । र सरसो पराम बाहर थपा मोर मा मागा टीर पर मुभम रोग, पगे।" पानेका कोई उग्रप नहाँसमाना रिहा है। पापा पुजाक गैर मैप पाठणमा सोहै। मरे से उसका मकान एक कोस दूर पा सरी नदी किनारे । पपन्न बन्दूक पचा उतीसे रमा पा । उसके स्तिकी एक पुरानी , उसको सेपर नरावनाये, माम बर्गम और मरमामि पूसकर म पनीर मोपरि दिपा पसे । बरनमें अनेक बार रटी गवार्य है-उसकी में निषा गुरु, ष मैरच मकर मुझे पसार परेटी है। उनकी समीर-बापरायटी-परी बात की। गने उपर गोरने मम्न रिया, "उने नेताओं पे, पन्त !" बौ-उसका एक मधित विसरम २दिपा । पूल “टम कर मसा परते हो, गोर" "मी नहीं।" "तुमामो मप्टी तय" " गार योनों मस रोमा-पानमायो "परीनहानी" मामी मर ग मन-री-मन से लिपपर इसीलिए पो बिसे पापनेपन पदावा कोई बात परनेको ना मिली दो पूज, "मारी पुरानी - पिने सर करा, पण में उनकी परफेर उकार और रसीदी । म शिकार खेल्ने पापाटो मरा पचान नहीं रख- पाव - चतुर्प पर्ष "पर क्या गोहद तो तुम दिम-यत मीर पीछे पागल थे" "पासप।किन मा बहुत दिनों से जोर दिया है।" गोरमा एक परिचय और रियादि। उन दिनोप मैंरगानी भनगर प्राम्हपना सा पा,-किसी मापक मोर रिसा भी लिपर) द, माभा मोर पनि स्मादि काम्प ग्राम पान-बायको मानवा मा पानी का शान मुघन तो सब या मर म मात्रा पर मुझे पार कमें उन दिनों मणिपुरण पुर और रिसीव सितवीरानीपानी उन मरस सुनार पुनः पुन उति हो उठवा था। पूण, "मेर, टन रिन्य तरें एविवारस मी तुर रामायण रिसने परमा, यासंबस अर मीमा गया !-" और पग-मरमें गम्भीर ऐ गया। बोडा, "बर घोपमा कमी मावा उसपर वो पपा पर बात बिराएंग्य तर स उसे सिप एंगा। विना रिमा, पडो न, माव सारी यव वर्षे मुनाऊँगा वो मी खत्म न होगा।" "कावे क्या हो और "नाम धठकाणा" मत परिप्रतिमा उत्तकी भारी भोर मर पमा उठे। सन्दी of विस्मप परिसरा। तयारिमा पुमा मोबदुप पननिह भाये-मुझे बारदस्ती पवार सारी पवनाम्पबा होम करख-रे मरीमर मरीयो। पुर। मी मोरर, या पोरे दी पाग पदमारी पामुत किलो तौर परते हैं, र परम्मको पा पार पानी, पही पनन हए पूज। वो टीका गारको एक सरोवर किया था, MARन र सामाई, पाले मुन बगे, रियल पावें रोगी।" रिस मी वर राय नही परस्पर एकर मानो पुण्ण माने भाप "मुपासतोपीरव सोयो। ऐमा स्वार नीदमा पदी" पोरने र पानीमारिपा। हा, "पुमा सम सार लागे

श्रीकान्त
पर रोते-रावं गान फेंक ग्री-इस को मिन-बिनने सुना है मपने मौत
नहीं रोक सभाकान्त"
मौलश में मी रोक मग, इको सम्भावना कम है। प्रा,
"फिन्तु-" गौहर ने कहा "हमारे उस बड़े नगनर पायताकी तुम पार
न १ उके मारे नाम दम है। बतनी बात मार करण', 'गौहर, बसपा
अंग पदो न, मुग्ण'मता, 'रेय, प्रम मुसम्मानी सम्वान कभी ना
हो। पेसा माता मारे शरीरम ममी बामण रट पारित है।'
'नपनद' नाम पर भगा नहीं होता, इसलिए मार मा गया। मनन में
गौरक गाँव ही है। पूण, "यही हा पका! नो साम व मारे
पिणीका पहा सगड़ा हुमा पा,-चठियों पामे पी और मामम म"
मारने मा मेकिन पिवयी मने उली मा पम्ती:-
ने उसकी जमीन, पापा, मर हतारिनो कामदे मीयम परपा
दिया पारिन ने उसका सामा और मान म तिराव गरीब
है। रात-दिन रावा मा-मामा महा रोख मोबाम्त"
मम तो नहीं दोय, परन्तु साठी काम्म मते पुण् ऐसा ही मदान
जगा याप्पा, "भर हो ऐना बन्द हो पपान "
गौहरने करा, "शन आरमी पाई मम।मारे उसने उस
एक पुरिया था, ता पहुच मेग परखे हैं। उसके मकामा प्रहरी
रेद बीपेश प्रमका बीमारे उतरे हरेक परको परीने माने त
गाया है। नाती-पोते बहुत से , सरीर पने लिए पैते -
रि, मेयी नकोन सानेपाम है।"
"पर टीम उठे मीयो।"
"सोय देना और प्रशाम्त । माला सामने ही माम पाये
पर टी मारे मरते-मुझे बहुत गुस होता है माई। श्रम
रिम मेरे सब बगीचे प्यापारी योग हैं, कि पापर्यचा नही
रजा परिपाकारती, मारे मावी टोप-चार साम्सा
पटेहोरोफ रिपान"
"पिता और मन-स-मन , कुपो लागी पर हो। उसकी

चतुर्य पर्प पति पदि गम नगनचाँद यतिद्वरित काम ठठा सके दो मुरसान हो मा समस्या और मिकी नी सम्पति गित मतम, अमर रसमादी ना तुम्नो काममै न भाये। गमग पेपरबीचोंबीपीमार है। गाडीडी लिपीको एमएफ or सोहर गौहरने पार सिर निकारते हुए कहा, "शिपी हमारा मनुमा हो यामीपत गोहरने का बसतो पुधरते हुए अपने बार- ' रामाय दिना" सपी (मास्ता है। मसर पनर एस ने रास्तेकी सूची पूर्णको पीनपर महायने दिया, उससे समय मोर विरको माया। में मार शेर बोग, "पिने बसवको नहीं दुस्मया। बावादक इतब पमध यार तुला -मठ मारको बन्दन व्यगे, वो पपदमही मार हामिोबायग्न।" मेरप्ने ईकर, "पर देतांगे पर पार। पोतरेर दो पेपर FAR , कोई भार कोमते टन गाय माती है। सामनेगा यमुनका पासपी श्येदे मर गया है, उसमें एक बार मामी की मसाल भमा मही , पोरगुपो गुष्ठर हमारे पारी मोर आमरगी। भोर मर पार मौरसे माम मा गरे। मुरा मधु-मस्यिोम मेरेना । टिने नीमाठ, जिनी कुमु और रिनी भोगी गान! इस बक पादरी यत, इस परण तो मी रोपमा मानी ! पार पमपी रिमाया तिमी पदि पुरी एनोगे मारी पान सपेगी। मेकिन इस पर यों ही नहीं गगमाई, या पालेरा देश है। इस भयपा पाने मी भई पिक नो, पमता मापसे एक पर सर मिल्ने मरको देर है। माय मार गुमीप परगे।" भामयसीमापर मातरिष्यसे मुबऐ गानी मुरबार पुन्मा, नवा टीम उस दिन पेन्पो और नमी नावरको मेख दो बसम्म, मित्र- मिनमें ऐसा दो बारम अस है।

भीकाम्त
गोबर मुसामान पीर-सम्पदामन। सुना गया। उस पिचमह
गये। रामपरी और दूझे गीत मानगाकर मिश्श माँगते थे। उनकी
पानी र नारिकाकी मविक गौस-पाररािकी पानी उन उन दिनों पर
गत मयि भी। पेरिन यौहर पिता विमति मेदार सिम्परत मौर पारका
फारवर करने लगे और अपने पर लिए पडती व्यपराव लपैरकर मेर
गपे। परन्तु पम्म बाप देवी मापारी बार नही-बलियाका काम
और संगीत प्रति भनुपग ही उत्तम है। बता पिताकी मीमो मेहनते सरत
समीन-चपराव और खेती-बारीका मन्तम सा परिणाम होमा, मान और
सारा विषय है।
मेर को उनका मान पान वा पा । वैवते पार नहीं।
मापाप्रपर कारकीबापीकापनाई तपोवनम स्मातारित होगया। उस
एक बार मां से देखने का।
उत प्राम पपसे में पति की दुर्गम्बा भी पार मादी है।
किन्तु पोपीहर बार माक्म हो गया कि शपकी उस याद साप मापकी
भोसते रेलने का मना महा दो ठी। पारध्यापी मानेकी मा
मविण सनाख्न । मिकी पत्फोकी परिकल्पना बएि नही है। कोई
रेगा, ऐसी दुराध मा को ना खाइना ही नहीं सकार या मरम्मतका
सम्माना भी मेरो मनसे बाल उमप पदी पुछ गई। गांववासे व्यन्ते
किषिपतमा भाम्योग - मिठी मी दिन पल्लोपमें
अपये रहीये। थम कि पुम्मानुमसे वार एस सारेक्स
देना पठारमा पकभौर विकसि , मान सोबना मी
उनपिपास्ता।
ग्स सहकपर बहुभारी सचित और स्पीकत पाए और मितीको समपरको
स्यठी हुई हमारी गाड़ी सिर्फ पास बोरते मप्रवर गी थी। ऐसे ही
पर गौहर एकाएक पो पोरते चिल ठा, "गायीमान ! और नए और
महाँ -पपरम को।"
•म-मानम रमा मेलम्मान। सोर रामाल RAS
उमरियामापापपरपावर धिामापते।

चतुर्य पर्व
स्तने या इस रस से बार-मेगा मामम दो-से फा-मरने से
सापेमम मेक अगर मदन किये । म तो बनाए सम्पयना से।
गादी फगई। दो सपाग यक्षा उनके गांव चनेका। स्मार
गौरने श, "भीकाम्य, सार बाभो। मैं ग से देशम विभन्न
उपभो पो।"
"पद गाड़ी और मागे नाही पण
"नही देखो न, पण न।"
पापीक्षिण मोर गाया मोर कोटेदार पेड़ और पेट की पनी
सम्मति शाता प्रधानमो कारण गौरकीपर गी भविष सर्व
हो गई। गारीको भन्दा पुसानेकाको प्रस्न । मध या मोलिभपर
भादमी में हाधिपारी साब BRR न पुरे मे पायम सर उसक
कपदोन पटना अनिवार्य है। मसरण किसामुसार बम प्रातिक
न्य मनिषनीप पर। उसने रेमको पेपर रता और मैने विणेने
पमा दवाया। इस म एम रोम माटिकी रेच गायले उपरे । गि
पासमा यो जाम चुनी। माम सगाया कि मायाराम पन्त
पनि पन्द्रमा मा रिस मारा। अपर पूर्षिमा मात-पात लिपि
पी, भवरष समाधम पनि गम्भीर निग्रीवः पदम सिर उपर भा
जाम को पिपारेमें नप हो । मचनबारों मोर सनोग
पना बन है। बहुत सम्भव है कि यम उसका पोपम नमोर
पुगण पणा दो भार उमाश भानिय पुधार वा गाना परिणे
माकपना देखा। बात पर सो दुए मस्स पचाने सहार मोयन
भार पमूतोको धागे मोरसे परिमात पर पहै। नर नगर पावेशी
सप्रेरपासे सारा मन नरम हो गवना र उदाहुए पका
गोट पायापर। मौकरने मार पारी पेठा पेसी मोर पर
हैं। मोरन वस्त्र रिसावे पुए पा, "हम एक कमरे में रो। देरामा र
मुन्दरमा मातीहै।"
मनम्मत नहीं है। ऐप्प, रिधिमी सी बारेमरसी एकी
दुई मों और पर्येने गमान पन भीतर मर कमेको मर दिया,
तमसमे मीसा है। पर दे पाते ही जरी मसा उन सा

श्रीकान्त उसे संसारमै पर धूम मचबामगा। पापादा पदाला नहीं है। प्रत्यय और हम उन्ने सि पोड़ी-सी गम मौर मोखी पीली थी। इसमें नहीं थी, और शायर समन भी नहीं मिग । पेगव न बने र भोर से पा कविता प्रेम र य । सम्मोकिया प्रेम उसको थियो सून ही पापा-कपार संसारका म-कुछ सत्ती नब में मर्पहीन हो गया है।मनी मनेक रफ्नामें उसे माद ।। मामे बैठा हुमा पीपीची का गुनगुनार माचि भी करता था। उस पर पुनकर पा नहीं सो पाकि त भास भयो माग्देवी भरने सर्च पनकी एक परी कर किसी दिन पुरता करेंगी। पर ममन्त भागफ्ना एग्रम भारमनिरनमें सपारेको विराम नही विश्राम नहीं। रोनेपर ग मा सोचमे गा कि पारा बार मुहात हुई। इन बारा बाँस उमने न पार्षिक साकोसाबकि देवर मोर एक रबनाई वार तरी पराक मेकॉत्रा पार पमा पर हिमा है। पर पर वित्त काममें मागा! बनता है कि काममै नही मामेमा । गौहर मान नहीं है पर उसकी एमर तपसाको मावार्षता रमरण कर पाय भी मन दुखी होता है। सोचता किन भने तिने शोमादीन, गबहीन फूल मेम मामा मन्तराख लियते । और फिर अपने माप दी मुक्य बाते है । परन्तु विरत विमान परि उसकी कोई सम्पदो पर गौरकी सपना मी म्पर्प नहीं हुई होगी। गोहरने बहुत परे दो पुतारकर मेरो नार लोग दी। सब पर स्वत बने या न बने। उसकी हम पी लिवन्त पिम मनिमत योग कोचर होमा-सौन्दरकी मम्मी मातीसे देखकर पम्प हो। उसका मार पुछ ऐख पा कि मानों में विगतसे पैटर पाया है। उसका म्यमा पागचे बैठा था। मनुरोप यम्ने उपाय महा था। भपएप एपमा पोकर वैयार होना पा । प्राचीरसे छोए पर मधमे बामुनी परमपिक हिस्से में म्पवयी मोर मपिम्मै माटी वा परी पी। पाकरिती अपनी पन्य नियंब -तथापि एक पोष-से बिऔर दूसराम मी सायों म।। उसकी इज ये कि परे से फक मुझे उपहार पर पेड़ में दख्ने मोरे थे कि पनेका कोई उपाय नही कप। उन्ने मुझे पाएमसनमाण र पार में ओपीते मनाया पोना।

७ सातुर्य पर मादायमा मा कमे। मममा ढोर बरसे निरम हो स (अर्थात् सम्बन) इक उप-पर्वम नबोच रिमाप लिये दम गारपरसे सात गाा। र सरकार और सम्मान सय हिसार उसने मना किया। T, "मेरा यार मत पापा, देखो।" मोरने वापसते का, "लोरे" नपीने मार दिपा, “ो रोसीन सिपार हो गये। बार-द सोको प्रहरी मेरम्परे पीछेर गया। "मारेसन "सा मैंने देखा है। नका सामे-आदीमें लगे बम पते परसोयर बना" "चो माईबाधम मारी गोर।" " बस ये मौर सिगार बप पागल होती ते - विसीय साग पथ पन्ना दरये । तामा पास माम मामम। मतएक, प्राविको घोम देखने कमै भयही पर रास्में दोनों मोर मामा परे । न पहुंचते सपा पार कीर-मगोपाल पर-पर भावान करते हुए माम पुरमको मेरम मांगना मुंभौर पर मीतर पुस मसे। ससे पर्थम आमा मा मिरर पिसी ही दर हो गया था, जो व सिनेमा हरे रास्ते पाच-सह हिस्सा रामरम्मान मुरमित-मिति पय मरसे दो भी मौकी परियों, हम पारमा यो मनको चेतावनी | गोदार मानुसार सरपट पाना होने मा नमिए स्त्री पोष और दिम दिन हमारे मनु- बर अमोम सपणे । भाबोर और में,-पानी मौत दोर मादा ने जयदेशपएमटे ही रयान त्यास र मारे गोवा नदी इस गली स्यमा मी हरपाली है। पापी बाथप मत रुपमा पानी पर्ष हो गई। उस २

ग्रीकान्त
साप पारे साप पर मार मपरिमेव सेवार और कार गुफ र मिसर
गई। और शिशिर और धूपमै सहकर उसने सारी मगरको पुर्णम्पस
मर-कुष्ट बना रिपा है। नरी उप पार पुन दूर सेमर पेमे में पर
थे। उनपर नजर पदी, ऐपिन इस पक परिको मो उस भोर
पि मारम्ति करना और नीमगा। उसने कहा, "मे, पर मौर।"
"मपम, पो।"
मग रूमाल पाकिलो मच्छीमगी।"
पस "पप गैगी माई, मांगी। मम्ने प्रमोम इम इन
इक्विामें पितो, में पड़कर गा।"
"शायर इसीखिए, गोपी आरमी एक पार भूटकर मी पर्ने वहाँ
रेखते।"
"नहीं। रेलवे-देखते उन मारि को पई है। मई, भोलोजी मच और
कानीकी बपि एक नहीं पायेचारिक बनको अपनी
मौलो ल्नेपर स्प्रेम मोरिव हो पवे, बर मही बामठे उस स्पा है।
दुनिपार पाम या पात मा। भोलोरे रिम्प को एक साधारण पाना
मा बहुत मामी-सी बस्तु है बौरिकी माषाम 'नयी सरि' से बाटी है।
तुम रेवते मी मप है और में नए रेल का मामी सत्य है।
पए तुम दुखी मत होना गोहर ।"
तो मयेर उमप यस्म उसने न अमे किचनी भौर कपा-मा पाएँ
रिखानेकी की। पपत्र मस्के पण प्रत्येक ता-पोषावक मामो
रकम पाबाना एमा। म भने का एक पेड़की म भोपवितरि
कोर बर माप और उससे सिनवाण पाप मा मी हर राख
पा। रथ ठते रेलकर गोदर सिर-सा उठा। उसकी मौहम्म
भाई -4 टमुरको भोर देकर यह सखया समझ गया किमतरमें
ने तिनी नाका मनमय (या। पर ये मानी जसोई
पुनः वापर प्राप्त कर पा मा, सो बस भरनी होशियारी
कारब नहीं इसका परम तो गहरा समाव ।। प्रमो मति मेरा
मेष बहुत १० भन्ने माप दो कमरो महा। पतासे मुम्मसात नही हुई,
पोनि मन्म गया कि परमै टो माठियापर सम्म-मायला

पतुर्थ पप ई।बफ्तफ गाँव-गारमे निविदा-माव रघन नही हुए हैं, mta हुए यो पानी योहा मोर सूत पानेकीण इस यो। पैर, पर पहुंचार गौहरने अपना पापा मेरे सामने हाबिर कर दिया । ऐख मारमी संसारमै पिरलीगा दिसे उसका परिणाम देलार मम म मया । बोय, "विना पो सुध ना मिगी भीषन्स, भार वर्षे अपनी सब-सर पय ऐनी रोगी महामहोपी सार साफ यी रोई रहना बहस नही था, तो मी मिती पारिकामे इस पापा को बाद एक, मेरे सास दिन काम्माहोपना र मये। कामकी बात बाने दो, किन्तु सपन सामर्षम (स ममुष्पा से परिपप मिय, पर मिना सुन्दर पा उखना ही विस्मयकारका एक दिन मौरने का, "भील, पर्म बर्मा पाने क्या बात है। हम दोनारी माना करने पर कोई नहीं है, तो भामो न हम दामो मार पता एक साथीबन रिव" कर में दो हमारी र कम नहीं। माई, न पेरोकी मापा ममता , और न उन बातयात कर सम्वा, पिर इस पर्मे से पगारो दिनमें पारडंगा।" मोदरने यम्मार हारहा, "में उनकी भाषा वार मा । मुपदार-पग विचार रखे" "पर सोम मी समाप्ति परना मुरिस गौरने परब्यावे तोपर पर रिपा, कहा, ", हाँ, पर हो समा" एपरिन मुबह अपनी सम्परा मशेरबाप भापार रेखा पदनई पार ठहने प्ठात् रिवार पद पर री और मेरी भार पूमार प्रश्न रिया, 'म भागा, इमने महिलाको प्यार रियाtm पास बात पर अगर रामदामी र मनी भास्वम कमी Reीची उतम गापा रशीय मोर उम्पगन समस्त विवरण ! म मेरो बबन दिसा शह भादमागी बनुमति मग एंगा,-को परमिश मी उसमें मोग्न पी। िमेवीको .

भीकान्त
उस पर पाकरम ही पड़ी हुई थी। गौहर प्रम सप्तरमै तिर प्रा,
गोरने“परि कमी प्यार करो, पर कभी ऐसा दिन भाये तो
मुलाना मीभन्द
"नर पाऐगे।"
"कुछ मी नाँ। तर ति तुम गोंड बीप बार कुछ दिन पार
भागा।"
"और अगर उस पक पकी तो मुझे सार देना। बाकी
बाव पपा छोड़ गये, पर मेरे कामम वोमा नही,- पावर म
कांगोकाममाय"
उनका वर्गका ऐख पाकिमनवे ही मासोंसे मधु निर
पो। पा, "भा, पर मौ बार गण । पर प्रर्वाद रोकी
कमी बरतनपो।"
मेयनेरिन गौर फिर मेरा बैग उठाकर प्रस्तुत गया। इसकी
जमत न पी, नवीन तो पमं मया मधमरा हो गपा, पर उसने एकन
उनी । ऐनमें बैठाकर पा भौठोकी क्य रो उठा बोम, "मेरे विरको रूम
भीमात बचाने पाहे एक दिन पिर माना फिर एक बार
मुभकारोबाप"
भारतकी उपेक्षा न कर सप्रबरन दिया कि मि त्रिपा
पर ऊँगा।
"माचा पगार फुण-संवार रोगे म"
पावन मोरिया । मानो म बाने स्पिनी र बम बगा।
सात मान न पहुंचा, तर प्राय सपा से गई थी। चौखम्पर
पैर रस्ते मिकरान हुए, पर मैर कोई नहीं सप रतन था।
"पापातूm
"में मोर पन्ने पटा है। एक की।" एम म किती
प्रानामा उपरा "यर मेम्नेर मी सो विधी मि"
जनने परा, "पागस्पा किसान, यगर और गारप प्रमाणि

पतुर्य पर्व
२१
है। मौकी चिट्टी मगर एक मारमा बिना लाये पीये मौर साये पर माम
आपमें ये रोपय दुभा न आये, तो सोन वापगी ! भाप दो सा बनते,
पोंछ-मूठ पूजये।"
बारमै मुना र खनका पर मभियोग छ। मोरिखुदरी उपत
रोपर बा पर द्विी मम्ने साप गया है। मादम हुभ्य कि ट्रेनी मौर मौर
पाहार बगैराकी मम्पपरपा कारण उनका मिस गा गया है। सर
करा,"सफर मा रिही पोछे पईया, परपासे ठरे खानेकान्तम्पम पर।"
खनने पैरोकी पूर र मनाम किया और , "चलिये।"
३
सारते पौकाता हुमा रख्न दाति हुआ।
"पर रखन, पैर मर गया !"
"मी मार परे कुछ मी पापा, सेन्नि इम्परे सच बंगाय
प्राप्नों मपा और कोई रखोह बनाना मी गन्ना । उनले मागे वो इन
मारने महाराको घनवरी भाप ममता है।"
मुझे पार नही किरोन प्रान्डी रसोरको मपटा-या या रोपेकी
पम्पा बारेमें रखनस कमी मने पास कोदो, पर रतनको रिटना बना
उसे यही पहुभा किमुपपुर मोम का सूप सम्र है। मगर
पर पाठ न होठी हो या पमिमी रोमाबारेमें ऐटी निरपेड गबन
सकळ । उम्ने पा, “गाडोमे परोये कम ना लगे, दापर मार
रिना-"
"चो भम्म रखन, पारे समरेमें पार बरामरमें बिना रिणाबा,
कारबाजोगी।"
मापने करो रिलिए उत्तणन पी1 ऐसा व्यापा पाकिम
इमर रोग पायो मान्म ही है।
रतनने परंपी से एक नियम निकासार मेरे पाप ररिया। पोसे
डोट मोर रिपा दुम्य था। बाग, “गम सील रहिवासी शित
पहले रिना fer! मनारी गनेकी सप्ट नहीगी। सारे
मगर ऐसा मुग और पाप-"

२२ श्रीकान्त "कितुलजार मपीमराव " रत्नने र गम्भार र पहा, "ऐवरीमो छाता है। गुम्देवकोपले मकान बाहरी हिस्त गुरुवार है। मौतर रारातियों का और नई गर्ने मावर पाहार रोपन कर रया है, और सारे उपर स मों में मसनको मानि। ऐसी यस्को पुर्ण कौन परेगा। लेकिन में बहुत पुराना नीवर अतिका माई-नमो नी भन्दा मुगा नारिया मा सवा पा । इसीलिए यो उमरिन रोम्नपर मोनॉममु मयेक सभा या निरन बिना पारि परदेणम नौगीकमी होनेस को एक बार बार बार ३२ । बानवा मापी सेवा करनेपर मी उसी मौकी सेवा होगी। धर्मका पठन नहीं होगा।" में मी नही समय, सिपाप तावा रण। पाने गा, “रुबी मा उममी गई, पोड़ा-बहुत पसार पारमा मौन गये है। अगर रोपवे बिलोर मीन विडए पा यम । सनरी बोर सम्पर हो गया। म्यनमसमोर धेरपर सनाने प्राम पाकिमा पराखिने रिवाजा पात भर मी साफ न हुई पर एक पाया की जमने ल गई। पाकिर ने भगा "माने तो पर मानी गोलार रेप मानेम मते कम रो दय मेरी मौकरी पर भी है। पख दुर्च मग नापन गरबा मी समता, निमो नाताबा म सवा ना बारम सिरसा न मा, उस एक निवासी प्रणित मेसी तरह समेप हो जायगा पा का मारनेत्री मी फुर्सत नहा रंगा । यह मौकी मायनगी महावासो मेरे रेवाप्रभाधीपर पर्य पाठकों पर स्मरण कराना भापक कि परफ्नमें रखना मेरे दिनो मपम समर्म विधा प्राप्त कर पुत। पु र पा, "माने मना कर दिया है, इमिए भी प्रणा न। परमे कुछ पा पापाने पिा, अम्मानॊा एक परखा नहीं दिपा । एरोगमा भौर मी, मोर उनकी मांगो पेपर फेरी एक रित योग और गार निसपा । पर पाये मी परतापी, मेरी नौरल माईदीपरा गई। वाय दुसड़ा उन्ने गुना, बेन सपक

धतुर्प पथ
२२
कुछ नहीं मा। क बर्ष बाद मन निरन किया, 'मी, मनको
रेसनकी पम, मगर कुछ दिनोंकी घुमिर खाती-- सर सय,
र भामोये न प दिन दाम पर पारसी देते हुए मा रहन,
पारासे बसगमा मतरना भैया, बोइछ माय बच गपा है उसे इस
पण पर सेना ।' गटरी लोसर देता है तो पांच-टो पर है। पहले तो
मनी भासापर विश्वास नहीं हुमा। ऐसा लगा, मानो में परस्पाम
खन रेग पा । मेरो उसी मति गरमा मा उम्सी-सीपी बाप से
माद तार फुल-३० , सावा मनपाच रिन
नहीं है, क्योरिमा मौरम्प बानेहोबारी"
मन पर मारा नहीं की पी, पुरबाप मुनने बगा।
ऐन्न गावि पुणदिनों अप और धोम्ने रवन कसा। बोला,
"माँ बरवीता वर्ना हायसे उठ देण । परको मौरिया,
मिथिए उठने पर लोग सिपा कम निचोडे एए एसमा श्रीमत :-
समठो पारामे पार उसे सम्पपारी वा सवा। सलिए उसको
सनी भमिर रोगी। मुरम पा नही जानता लिमब मी मौन एक
गाना रेचनेर पेठे पर महान वैवार से समवे।"
में मी पाम बनता था। लार करा, "एमी पावपर पास
रसन भी मा । योन्त्र, "ठन पाठ है। माँ ऐनो मेन
भारत परीर सर्वस प्यार मिलारको ए साली रे, म्भिर
सिमी रि नहीं। पर नहरी सना भापन्दिा पते मांगे
पभपती मोम रोगो, झोर बरन रिता उन्दै मोर
रिए दोगनेकी गारत मा उत रिन कापीते भामरा से
बनेरीपमतमा राम देता वीर पुमा है, इसका सारमा पर पा
रहते हैं। गुरु मायमा मी उनसे पम्सार कामे मिसोtm
पर मुसदा उनीपुर पिप शिपा, सौ गारो खन,
म निकासार रख पगद मना । उसमे एनी traint

૨૪ भीकान्त कमी न रेली पी। मा, "पाम्, हम दो नौम-पाकर, ये हम प स्मारे कानोंको नहीं मननी चाहिए । यह छ।" एन पत्रपर मिमने टिए पप गरा। शबरमभाठ बजेपासे अमर परम पूर्ति नहीं पायेगी । दो बड़ी सारे माम।एकोमा माया हो गया है। पटीम र पाम बार मैंने उसे रेस्प या तो उस उसकी उम्र सोमा-स्वराकी बीभर सभी वर्षका युवा पकिन पापना वर्षाम पानसार पर मादमी पन गरा। भासा म स्लो मरि मान नौकरी मास्तम्मान-पोषम सामम्स न रख प्रध हो, तो इसमें विस्मयकी कौन-सी पात। पूजी सार यम्मीची गम्मीर मेलाका पता न दो को भोर म गुरु रेषको दी मात मिला। मेरे मन में ये दो बायें बात देखक मठी या। पो पानसे मंत्रित पमरेको सम्मोहरको रेतारो सोचे। उनके हामी जित्पर नारा रेसनेका मौका नहीं मिमी, पर, पहलपार माया कि मसर ऐसे तो नाकि पाने सोपो सकिम फिर मी भो न । म पा पर उसने पाव वपानी ग्विा है। पर उसे र या कि मैं मारन, बरि घम्से भासिए मापनीते पाई। भाचार और भावरणम यमयामी उस युग प्राप्ती है। पर निवेदनकी मरच्या रकी परिकपा मी बार नहा भाव उख्ने मेरे सामने की पर हो कि 'प्रेम रती है।' उख्ने बितिी है-मेरी माना भनु मनुमति देकर | वो मी, न बने क्या है सनेमे बने माँ रामाने भा। उवाम्प-मन्त्री बार भा गई। उस दिन गुम्- म्पायपी अठणलामै उता पाना मिलना करो गा पा । बारमै पर पररी ऐडा-पात पात लिपा होगा। भवरण नगर समाधी गर, परविनामध्ये मधुरखाकी उसके पचम भाण एना भम्पान है। इस पम्ही मन्ति बाम मन माप मत करने - मापाडा चतुर्प पर्व मध्यम पर मोर क्या प्रेमी ! मनुमति देकर मामूरी एम-नामनाकी दो गाइने हाँगी,--यही वो परस्मिन सोमकर पाना पुरू करते ही दे दिए पारका और कुछ मी पार न पा । पत्र बना नहाँ, मेकिन मापा और मग तिनी उरक मोर सहम समझी मी, उतनी नहा है। मेरे भाषेवनका उधर उसने इस तरा रिया। "काशीपाम "मपाम ठपयन्त विकास निरन । "इस पार मिडाकर कुछ ये एप तुमारी गिनी पड़ी। तो मी पा समहमें महाभाया कि तुम पागल हो गये हो पा में । तुमने जयद यह समास किया मैंने हमें पड़ा हुमा पा लिया था। पर तुम बापरे दुए मही थे, तुम बहुत तपस्यापार मिले थे, बहुत मारपना याद । इसीलिए, बिदा देने मासिकम नहीं। मुझे स्पाय करने मालिकाना सत्यापिकार सुमारे पाम नहीं है। "तुम्हें पार नही, पूमे बल्ले बनसे करी तोर, उनकी माग [पकर, सिवम तुम परण फिपा था। राम र पुम बनेकी बगतेतून पाने पवा पा, मक मानाकार रंग तुम नही पापान तये | पालिकाको पूया भपं उमरिन तुमारे गसेमें पा। परम्नु मारे हरपपर रकरेसासे बो से मंत्रित कर देती थी, वह ठारी नम्में नहीं पड़ी। पर गिरी नम्टे संचार कुछ भी छिपा नहाँप का, उनके पार पौम मेय पर निवेदन पहुंच गया था। "उस पार भाई दुर्योगकी रात । कासे मेने मापापडी पोरना कदो मिनु भास्नमै बाम या मोर कोई, इस बीपनमें बपा ममें देवा बाई पापा सो-तोत सन रेल पी थी, पर सोते ही पुरुषा मुझे Ranarte मैं पागल हो जाउंगी। तब उन मुबार जिला पान उगाकर पेटती है, उसका नाम नहीं लिया जाय । बिससे मनेकी रात नहीं है। उनकी एमा से मेरे बगदीश्वरकी धमा है। इसमें गलती नहीं है, मनेर मी । पाँ में नर्मप। "ता पारिएको बाद मेरे पुरे दिनकी पत भार, ऐनों मोनाकी परीधनीकोसने गुम्य दिसा। पर बरोरा मनुमा समस्त परिस

भीकान्त
है! उस वकार मनिपने भावरण बाहर उसम क्या और कुछ
पापी नही।
है। मपाव पम्प पराप उसे मैंने पार-बार देशा। नगर
ऐसा म सेवा, भिात दिनोंषा गपस परि मेरे रूमळ मनागत मने नि:शेष
पास पर मेवा, वो तुम फिर मुझे मिले। मेरे ही पोम गार निकम
कौन तोप बता!
"मुजसे तुम चारच पर्प पो हो, तो मी तुको पावापा
मुझे धोमा मही देवा । मैं माही परकी गयी , सीपको सचाईत वर्ष
पार पर पुग्ने बाद पोक्न राप मोर नहीं करती। मुझे प्रम व मस
उमलना,बारे तिनीरी परम यौन दो। भगर पर बात दम्परे
मनमै सनमक मि मुनापरम्मापसे मी बामे, तो इससे बहार धर्मको पात
मेरे लिए और कोर नाबालिग येया पाया है। उसकी
परमा गई-मारी थी बार उन मेगो बमने में किस मासे
मगीरपामामान से साँपो !
"परि दम पम्प बीमार पमे तो सेवा कौन लेगा-पैर और में मारे
मकान पारसे ही मोकर मरते तार हार और भाउंगी। पर
मीवित रान करते हो।
"अपर पश्न करोगे, वो पा मेथी ऐसा नियमन का। पर
मग्न बारे 50 मे से, उसका स्वार देने को मिमोशये मेरे उपर मी,
बमारे उपर है। फिर मी मपर तुम विपुल 50 म सोर ये-
रिश इतना पप रो या दो में उपार रेलम्ची, परमेयनी नही
पामी,-मन रेसो, अर भस्मोकार मतरना।
"तुम तोरते है कि गुम्पने मुझे मुकिला मंत्र दिया। प्रोने पपत्र
रुपन रिमा मुनाने धर्मकी प्राधिकरी, और तुमने सिtiot
मार-पोस । ऐसी मन्मय।
"पूण्टी । न तो ने वेस क्यों उप प मा प, पर उसके
पासक थे। तुम इराना पारा बेप सकते थे भौर पर बार
"मुझे मापा पीNehta प्रोफत मर हो गया, म

पतुर्य पर्ष
निमाप पाटी। पर बोम स्मों मानते। सलिए नहीं
सामने नहीं पादिर। मैरी प्रमना मनेक बार रि माफर बम
। इस मानी समझ हो!
"होना या पानीको पाप पा मिल गई, मुझे उसे निर्मक
करना ही पागा | पर भाब भगर टमा मूह सोत ही सून गाय, तो पड़ा
एयपग्ण मेरा बस्तर, पूजा मवना, र आयगी सुनन्दा, पो दंगे मेरे
गुपपर।
"रोष्णा में मरना न बाती। पर मेरे भामान बरामण्ण
मगर तुमने गोरिचारको छोर रो। अगर तुम ने तो में
पीएंगी, पर उठेन से सहगी। मुझे बनते से लिए यह बता रियाको
पूर्व मस्त होगा रत पुन उरपडी भरोशाम बेठे यनेका पद भा मेरे पास
नदी।वि।
गहामी!"
पुराप मा। निमित स्टोर मनुणनकी परमसिपि मेर
उसने एक भोरम मुझे रिपु निषित कर दिया। इस बीरनमें उस पिएममें
पोरन ए पर मोर दुए न त ! रनि:संशरपूबर पर मपम दुमा
क्या नरसप । र सो बार मुझे पग पर रोग्य, इस परेम
गरमी हिपुछ पुप है। अपर उपदेशीसे मर्य दुई एक रिकी मोर मी
दिन रोगी, मपमा स्वरीर मुझे दो तय करेयी । सन इस पर अप्पारण
हो गए एक ही मुन्दर । रारा मोरस समस्त समुह
मार गिर रोये। उग मरोश दे पाक परनेच बरतनी,
मनुमति मिलने में कोई रपमा । रमेश मा पा पर निरिप
भापति दोसान मार पप उखने प मोर और-मारमा मेय,
यही बहुत है।
एम मार दई मान लिए भापोम्न लियो ममसर से
पाया। दो भाष्योर सम्लोमटे कामोर यर मापर मिसे
रोतगे, प प्रास-परता मराठी पाने रिनोवरना और
मन्नारदमे मरण भार मिटा रोग्य । पाप्मनायटे
मारमा । समान, यी समसमे गा माथ। उननिर्मम

भीकात
का, मादीन पुष्पिा और पाक बारेमें मन-ही-मन सोपहर एक जोर
दय तिनग ठिक हो उप पूसरी भोर पर्ष प्रपारर्वनको निराणसे बिन हुए
परिवारमा समभागी पनीको मोर मी पाय उत्पीडित करनेकी बात
तोच ती हवसको टहनी ही मपा पहुंची। पर उपार मानेपर
सेय मा पदुत गन्तक सम्म पा । पंरकी पात भन्ने देर नहीं थमी, पर
गंगा मागकी पाप बराबर भाने गी। बन रह उस गोरफी स्मृति
कमी मिर नहीं सकती। इस पनकी मंगा-जमुनाकी पण एक मि पहा
भार मिची मी भोर पोरे भरसेवक पारपास प्रवाहित हो एन पहाँ पर
माया हो गई थी। एक बचपने परमाया दिन भासे मारे, तो
। मधुर मानन्दसे उम्मसमोर ठमीही तय नियम बनाते पस्पषिक स्तव
है। दिन में हमने प्रचनापी निरासे पकनूतरेको कर नही
व्यापा नफे मुख्यान दियबाद-विचारते गरममा हाम्त पोपम
पूमाप महा माये । पोजमेग यही बानवे किफिर एक दिन
स्म और मारेंगे, फिर सी-पुणी गुरु सेगी और फिर परम्प होग्य भूस्वामिनी
रीन-दुनियाँका बा मोर सत्तार | पर सम्भावना तो मम से गई :-
ममातकी विकसित मतिम दिनमा दुम मानकर हो गई है पर
पावसनम मी नहाँसोगे ।
मोगाम नौद मी, निमकीन रम्नी माताकामी भोर तिनी मागे
पाने मी, खनी ही पापा ने गील पारात तमाम हो। सिफ
पी एकविता मानो मुझे मोपपत्र पर रखेगा।
बीती रानी मनमरर मनमे मा माती है। बीरभूम दिले पा
तपयमा मनपर भूतकी पर पती मैया काम-भागम सी हुई
एममी ऐनी स्निपदाप भतार सामने बफ मम भावनम
परितिका ऐसा मास्वादन म पिपा, पर पार नहीं भाय ।
भावक पका ही गापम मा पा । र यमरीकी
पते परीकमग्रीमो , मात्र पाहीमा पनी कि मैं नौरोम
मरिसी मोरन पीमार पाया। सन बने फाँकी एक
मस पेरपर ठी, एबमाप्र प्रेई प्रश्न ही नहीवनी बड़ी

चतुर्य पर्व दुग्नामे पापाने मनमें स्थान नारे सती । संघरफी न पीठ पर भनेको पितर सकती है रा पशु मसम्मत है, -पा उस व्य मनप्प है। मौत हो इसके निकर एक भोर ग गये गुमेव भोर एक मोर प गपे उपप और उपवास । चिदीम उसने मुझे मरन रिपामा। शुरामत पर सो गपा पा रखनी पुकार गुनार सटठा तो काफी बत हो गया था । उन्ने , “न माने जैन एकमे महाप ग्रेडा-गादी ममी भाय।" पारा । गाडी किराये परमो हुमा । खनन मा, "सायमें एक स्वय भयर मtti" बाद। यह वेधर्म मारमी उठे रहर मप्रनतर पसीट पारे। मुगा प्राय विकासे म्पन शे गा पा "ठमें उस कमरे पर लामो पान, में मुंएप पोकर भावा ||" यापार मैं नी स्नान-माम पगा। पटे-मर पार भैयो हो पाने मे अपर सम्पर्थना की, मानो 40 उना अतिपि, 'मानो देय भामो । पत मीन" भने मनाम दिया। पाने पुकार मचई पाँगई।" पंरतीकिनारे खड़ी पर गया रेलकी पी, उधने पर भाकर मुसे ममतार हिरा। बापने का "शुभा शादी पासे एक बार रेममा पास्ती भी। पारिमा र छोपा मीमा पठे। गवमा हारबरमै वारय दुभ-पर-परयोगार गार अनेत्री अनंत कुमारी नी है। इसलिए साप व भाग । सोग किमोकामे सपने को उ एक पर दिला पढ़। हलकीपरी-माने भाणार सर, " ऐखही माम्प वेप मीदो।" मेरे इण पने पासे दो पुर पोमे, "मैं इतनी बदी ना ईग्य भैग धिम बारें और परिवार-मार काम पूरा पना रोगा-- उरे पुशे मिलेगी। अनवे दो दो पेय, कि मप्रमि पहोवे ३, राप्रपा, भेपासि पणिपनि ।' ऐसे पर भारी

भीयम्स
सपनेपर किसी तक रनको मानही होगी । हमारे गौर गोत्र
ठो विश्वासमा सकुछ रसते हैं। पहाकिम, सभी
तो राशि दी म्पारी है।
पंदू म । स्मापार मचान्तर नी-मनमा।
नमा हुभ लगवार रहन माविम मचकर रे गा । येसो देखा
औरत रखने पार पाबाने कस, "ऐसा व्यय किस भादमी की
जनन पौरन ही का, “बीहा, देला स्पो न। मकानमें कर
पायू बीमार पे-"
"भो, वमी यो पानि पापाना एमा पाप
"मी"पर ठनपभ मा ।
बारा र मत्पश्च यम्भौर से गरा पूर्व मादमी ठरे, अपर मेरी
पाव भाव मा गई । पुरावा निमा दम म्मा हुए गोमे, "माने ए दिन
देवार माया पप । पाव मनमरिन । मेरो भाशीबारपाय
पेसेवी परम पर पढ़। मूख्न मागरम बोसमी बी विष्ठी । मोफरको
एफपार मे नही सकपा करो
कमी पानेको म मिथ तो किस्य रसिक का रिसा, "नहीं।"
"नही । मरीमो माया पनेक रन बटुव ममम है।-पंचाय।"
"पंग बल महाँ ! मैं दिवार नही र समता ।"
बाबाने पुरको दोबारसे पाकर रख रिपा । पोप रेकार में वार गया
हिमापुर रिय पार से ये है। गरेको बहुत शान्त और मम्मर नापर
पा, "खय मापाचन पर उससे पूय हो गया है। सी म्पारको पात
रंग मनका मामा योमहवपन रे मानेपर माना परनेपर से
पंटू पाठ किये सिाबार देख यौ। और दरबारोडी मार खन
परायेला बाप्पी तय माछम हो गया।
मैंने कहा, "चन सर वो नही मावा पा, या माप मी पनवे ।
मोर मैं भी। मा कि एक प्यारी अनुमति मानेम पमी हो
कता"

पतु पर्य
"अनुमति न मिली।"
"नहीं।"
माग एक एप टारर बोमे, पपरई पिा पाते किसमियार का
सबबर स्पये रो। पाशर मानेपर भोर भी मेरोगे!
म्या परते
सहनने कमरे कुरामा माइया एक पार और सदर
"वसरो। तुमसरा नाम मात्र
"खनन मुन्दर समसार हो।
"कायम "
भावी पास शायद का पटीयों क्या करती है।"
स्वपने में उपर उमर का, "इस साधारते भापको मह"
पायावर मोमे, “नायर होते हो गए, शेष करनेकी दो
को मारमा गोबीन, सीखिए पर सरनेकी मोती है।
शपर उतरे पास मौसमी का पाना 1-रुपमा मम्ही क्यो"
एखान दिन पाई मार रिय हो पाया, और दो मिनर पार
लिमा हुमा मैर पाया और दुख पपमै पार या पयामा
किपापा बोरवेमारी उठनोए। बोमे, "राहये तो मा,
ज्य पापना गयो। गुरनाक पहनकर पाते खबर
अमे दीरात साप पोते गार नि गये।"
लेशियार देवा और सरा, "रानको बाजेपर भाप एवार मत
सबसे । सिा पास हर पसेका गोरेगे। सिर सर सर
माने मपनी मोमहर बीड़ी पारी की थी-रोग मीषनरी
पुगो । पाते हैं मगर दूसरी पारीरये।"
सदरीले इम्बी गर्ने मुझसे पहले नहाँ मा । कुछपवित होपर
पूछा, "तुपारे वापरयर पर नदी २ सम्वे।"
इन मिरमिरा, "मी नहीं। पिणको रेक मतमो
मिस्ते । सहयोग पते मेरे अरे माई पदमा पद हो गर ।
रिमा बमपर उसकी दोनों समाई।

भीकाम्स
रमने से सचिव दिपा पुमा पनरोगे ! सनकोफ्नमें कर दिया
डोसा उसका यह मतलीकराण कर्ष बनना से पोगा। नपन
पाधि समधने बिना मांग है। ट्रेनमें पड़े और रो सिगार मुशे वो
सम्म फरेम सा । एकमेको काटते हुए एक दूसरे फोम स गया ।
सस्नेका ठपाप पोकते ही रिमाप गर्म हो गपा और उस निण मी पति
श्रेषऔर विकको बैमा पी। और मावान पाया! मनाने गापा
पापर न पहुँप पस्वेमे को सही-गमते मर पर। पर यह भारत मिति
दोन है। मपी न्यबाना किया भावी पिची तय मौनी मेगा और
उसे मेरे सकारता पा एक पार पड गवादोरि मायेपा, उप पारे
से मोहो, परे बसूस करेगा। यह इस बार उनी पाकिम स्प
महाध्पो मी सपथपे । एक ही उपाय है पति पति । टिम
खरीदने म्पा पर मालमै स्पानामा, रिकर पासेसे पीरिक गये।
मता पूरी मेमा पार करना होगा और उसमें भी मयत दिनको
एक उपाप मौरविमान बदीपा बास, बाराको सोम्नेसमी
व मिळे । पर हनी मछी च्या पनी बारीक मिमी किन्नु सिकार
हा प्राण पग्रमे समादम मन्स ऐती माफ हो गई कि मभरेषा
प्रान ही गोष,पार पा शाम् ।
कि मेरा गुप्त ठोग कहाँ खनकी मम्म न मा बाप । पर मारकर
दो गालियर पति रम्माही मी पारख । प्रधाची मसा भार
मारा पसरा गया है। पूज, "विशाब कर सामरी
ज्पना चाहते हो रहन!"
नने प्रेग्न दीवार दिवा, "ये नहीं । भान रोपारको मैंने मौको एक
पोस्ट गरिपा: पैग्मे मुझे चार-पोष निर्भर रोटात
खोबण्य (- मद्यपत्रम) और चक्ति पोखपमै (विधिमालाना) पिना
से नहीं पतामा पिर सभाया हो, ना कोई ठिकाना महो।'
मन करा, "परयो ग्रीनो सस्ता है।
"भी नहीं स रिमा गमोहुए बाकी कान भीतर
दरमहा है।"

मनु पर्य
"पर बिदाका पवाब-"
"यी, दीजियेन। सही बिस्ट्रीसे मेब दूंगा। उस मानम मोदी
सी लोग्नेका सारस पम मी नहीं करेगा।"
पुपचाप पैठाया। नाईन जमने एक मोहरीर महाब। सर
प्रसबोर कर दिया।
पते पटवारा पोंकी पातका प्रचार कर गये थे। परन्तु कोई इस
पातका प्रम मकरसेकि उन्होंने हदयी ठराव पामपिक सामाईकारण
पेज किया हो ऐसा पर गयाना गपे।
रखनने टीसी पातका भवाय स्यामा। पा, "पा, मगर माप
नाराबन हो तो एक बात।"
"म्या पावखन"
रतनने हुए संप्रेचर साप करा, "हाई पर रुपये वो कम रकम नहीं
मायू, कौन होते है मित्री शरीलिए भापन हवना पमा पामस्वार
देनेको रास मन्त्रमा पर पूदा बारा रो या मोर कोई, सेमिन
भणा मारमी नही है। उसे देने काना भप्या नातुमा बाबू।"
उसरा मन्सप मुनकर वे मनिष्पनीर मानन्द मिला सेरी मनको बोर
मी मिहा मोर पड़ी में पाहता य । तपारि, भग्नौ मापान विचित् सदाका
मापसरेर बाडा, "काना टौर म हुभा-सो रखन।"
एठन मोम, "पा, निश्यप टी नरीमा । पये मी वा कम मरी
मोर रिन्थिए,-परिये थे।"
औरतो"नेपा, " महीगे।"
भामपने घोड़ी देशाने पर खनन , “ोग पो !"
मैंने "ही रोग्य हो पा र ! गारपिाही नहीं
१और रिप, यही पोन बानव र उन पद में पहां रांगा पा बमा
नयाप
रएन एपमर पुर पारख । पेय, "पा, माप पाको पाचन नही
। उस मारमानोर्म मोर मन मरमान फूटर नही पाहै। ऐपोषय,
मारा मंगकर पाय-ममबार र सपे रिसी-नरमी वा पदभार
परी मासे मुगपत न देगी तो पो डाय बर पाका बस्या

धीकान्त और मैस सपमा पल पडेय मोको मन धर्म मावेगी मा , वर स्पेन मही" पर मुनकर निस्ताप रो रैठा या । रुम मुझसे बहुत पारा विमान महान भागमा पापाची इठला हुर्माना मुझे देना ही पोम, कोई निस्वार नही। मनने पौरपाषाको पापाननेम गठी नाही, यात समझ माग सोपे दिन पर गैरकर भागे। भाण प कि इस बार पाकिम का मै उन पप भारत भाग,-पर सबिर हुए मोम ही। बोले, "य दर पर्गिम पम्प पम्प हो रहा है। सरपवे किरबिधुमम पे कमी नहीं सुना । गरीब पवान ऐसा सार कमी किसी ने नहीं देखा। भार देता किम रिजीपी होमो।" पूज "पापी “सी मीनेकी पाल वान ठीक हुई बोध दस दिन बाकी । रचना' पाभ से व्ययग्न भागवार- दोन बोके पर मुहूर्त नहासिक भीतर हो तर एम प्रर्य पूरे करने होंगे । पर सिन्य प्रमारे प्से र पन्द रोगा १० मी नहीं होनमा । पामे मपरी पंको दिी, उसने मम्ने हासे बिसर मे।। पर पहमी को देवा यमित रमको तुमने मनी एणसे पो Rपा, उतम पर नहीं है।" पापार उमने एक पोरया मुममा कागजामा मेरे हाम रिया। शायरि रमेडी कोशिण। बाबाने माना निवास मेरका "काविवार सफ्वाम्म ! वो सा मा, मनीय है पार । उसपि मोलम मामी को बीररी नपरा पंगलमर पुराना रोगा,पाने योग भने तुरते मरायेगा। पा सीप विवास नहीं खा पाता कि मैप भी मही" उस मारमीमें पड़ा लगी। बाराका विद्याप महा पण!-- मपाय! फुटते मने बापते पर स्।ि एक-दो पेश नहा, पर ग्वाटत मे हुए चार पेर। पार्नु पर्थ पत्ता बनती है। इनमें गैमा ने पापविभाग मानषिक मो हार मान।सभागार ।

बतुर्य पर्व 10 सीमा, बाबफे नारामायिक हार मान रंगे, परमस्वीकार नहीं गया। इतमाता विपास हो गया कि मिसनेमाबसे दी नमरानाका पति पोच निकी पुष्ट कर बत दिन ही पार पनि हो गया था। भवएस, दूसरे दिन मुगा में भी पळ दिसा और पात्राने इसकी जांच शुद भानी भोपोर मे मैंने रपे सचमुर हो भपने साथ गिये है, कोई ग्वारपा तो महाँ कर पायोमे- "रता पन्ना देखकर पा सेना ठोसर । मरे माई, हम देखा तो ना प्रारी ,-मूर होते या राठी है।" और वो गान कह पत हो कापी बहा गया। उसापों बिहीच बार भेज दिया है। हित दिया तपास। पता सबसे न २सालकोई और नहा। इस युरिक ए अम्ने गुपसे क्षमा परनेकी मी प्रार्थना कर दी। पपासमप गौर पपा, मान र मारमियोंची दुरिपन्ता दुरई। को भापर मोर सम्मान मिया, उसे रखने लिए काम शद महा है। सम्माध पसारने भोर पाणबार ऐनो उपमा परिमाय बाबूते पर नप दुभा । बर से सूने मिग १ वे ही एमी मौ। सबको पा समरण राने माना कि बहुत स्पबारे में, ऐसा नहीं मादम पाकिस्तारमें और कोई दूसप रतम ग्ना। पर धन गुर उनी माया हुआ है। पर परप्पा, "मनार, किरमतको में नहीं मामता, मो दुरापासब मम्मे पापहसे । देवी-देवता भनुपाकी मिया मी में नही मायवामैं परिपाको रामपुरण देते हैं।" पोमारमी मोर हारे मारे जान्दार बनेकारण उनके यहाँ गोरस मारा पर भरमी उमेत ये मोर पद मरिच ये मान ये मोरात को महाम-माए मरने ही एक सरसे ग्न पावे मान ईन मातम्सने एक मराठा मुनापा और मान-पासने उठो समय रा-पर पुरानी पाानिरी में मगत दुमा । सनीने एक मरीति और साधारण मटि स्मशार मेरी मोर मसम्मान मेरेग । उन बहराग दुग मेप प मारामारी मुस सहन न हुई। मैं पारयोर उठा, "पर तो ना ना न 1८ भीकान्त परिमाणमें भापम बाप, पर या मैं स्वीकार करना पने प्यारेन पाक बार मापका पादुकस प्रक।" " मानी।" "मानी हुर में। न तो परको पापामा भौर न कमाको, फिर मी पसे मर सोपे और भाप न्यूपमें पहुँप पे। इसे कर नीको भौर साप मापने ममी प्रालि माप देवी-रेल्वामीन मनुमा पाठे, पिन पपगारदाप बैंगडीते ऐलागोका हारक मेरे भाई सनसे पनेया । Howariकामाकी सक्त- सयम मुझे ही पता पो।" कमरम पमपाव होनेस मी प्रपद म मेय हक्ने मात्र भौर विपब्ति वयोवे। बापाने माने क्या करने कोशिश की, पर भी मुस्का मा मुम्पकमा सका। धर्म कालिदास बापूने मीपण मूर्ति पारण करा "माप परेमा मामी और कीये" "क्यों रे पा! परम्प महा म सक्ने, मापने सम्माना भी नहीं चास्ता । पर सारा गाँव तुन Int किम फोरेया हैसिर्प मापने ही नही मना । मकोकी माने भाप परे समाहापौर के सभाप मपने ए. पास मच मून दाई पर एक पैन मी कम करनेको गरी नागीन पाप गीत सये महीनेकी नौकरी करवा , भगत देने मी उतम परमही,-सा मापने पानही गेषा कि भापमानो प्परनेर पाना रम पर इना पपा प्रसि भा गया। इस मी हो, मरेने रपये बहुत मेग , माप भी तो में मुर्गा ना। पर पाप पोषाको पपने मकानमै मुमार पोप पर और न सिगा। भोर पामी पार पतपेगा कि भापने एक बार परमी मिधरानबासी पारीकी।" रोप भोर रसेलका हाथ पपा । पारमने पायोचा कि भाइच मर्पकर पय्या होगी और कामियर पाभरापमा परबर मठि व परिना सिौगो मी हे वापस न पनेर। पर, पोड़ी देखकर पटेपने पारम्ने मैंरवार उठा, "मैं पये महीप।" मरा, "इसम्पनी पार किभापगली पदी पहना करे।"

चतुर्य पर्व पारिवास बाजूने मदिरा, "नहीं, पर नहीं। मैन स्वर दिया। किशरोपांगा, इसमें बरा मी न होगा। काविरास मुर्गी पावलियफ काम नहीं करता। भासा नाम सा है?" बाबाने म्पप्र फरसे मय परिचय दिया। कामिद्यस पाने पापानन "मो:--टीक है। नमापके साप एक बार मेरा बहुत बारयत्व पीबदारी मामय पापा।" भागाने कहा, "बी, भाप कुछ मी नही भूबने । ये उनपर भौर रिस्ते में मेरे नाती पावन पब्दिास बाबूने मराम पाठवे का, "ठीक है। मग पहा पा मगर मिप या तो इनारीपादोज । सपरकी राम भाना, या इमारी भोरते उस दिन माग निमग्रणया।" सापर उपस्सिपा । उल्ने परमार नेत्रोसे मेरी मोर देखा और पौरन ही मामीचाररिया। मैंने स्टकर प्रपाम दिया ।स, “पारेवा मी, मेबिन कम कम परमात दिन माफर नाका भन्न ता बाप । पर मैंने बहुत-सी अप्रिय पारा, भाप मुझ सम्म परेंगे।" पारिया बायोमे, "यर सबमप्रिय बातें कही, पर मैंने थमा भी कर दिया है। मम्मे पनेका काम नही मीपत्र प्रमार उपसमें मैंने योदाचा पानेका मी मायोधन किया है। उन्हें पार पना रोगा।" "असामी रोगा", पार फिर रेठ मया । उस दिन पारो मापद रेनेसे सेकर उपस्थित भम्पागों पाने पीने सागरे पाम निर्षिय मुसम्मन्न हो गये। इस मप्पायक प्रारम्भमैं परेशा परेम रित नियममा उस्सेए किया , उस पवित्रमा एक उधारण इरा सिर धरम सि पो एक उदाहरण मानी मोन्से रेला है। पारण, नि सम्पाप, मपरिक्ति, अमामी पीके पापा पान ऐटते कीकहाँ सये पसूम होते हीवहाँ पेपर पसार हाय बोरनेपर पाप माठे निस्वार नीमिया निश, निर्दय दादि योगटोन चमार और उम्दीरको गिरनेस मिचि पोम मिर सरण है, पर प्रतिकार नहा रोठा सकिइले पापर राप प्रतिघर महीपाटो पाप समि। .

भीकास्त
गौहरी सोनम पानपर मानसे मुगावा मुझे देवार
एमा । किन उता मिगव पात मा पाबोध, "भाकर पापया
माधम सिमे पायो मोनो भाये।"
"रा माननमान मममी पासि मा मई।"
"एक भी मरी, पूरा पूरा एक साइम है।"
"कहाँ पती?"
“यहाँ मुपपुरके मलपमें।"पार नवीनने एक निमा मेम, पिर
प, "आप बार मब न तोरे राम और माया ममोपा। ममुपरास
पापाप मरते ही उनकी जगह एक छोरा गया था पया, उसो कोई
पार गप्पा मारावी है। परिवारात गौवे हमारे बाकी ही मिना
यही पाना पते।"
परिज होकर पूज, " मारे बारे मुण्डमान ।। णापा
अपने यामममै उपनेतेगे।"
मषीनने नायन शेर का,"पाउसम्माहितीको मारम
पाशान है।रेमादि-सम्म भी नहीं मानते । बो मौका मिता
से अपने दम्म सीपोषविचार मना"
पूज, "पर उस पार - मैं मारे गएँ म-वाव दिन था, तो पररने
उनोपरेमे कुछ मही का"
नयन पोला म यो पमहायता गुप-भागुन पहिरनोबा।
किसन दिनी होवाम् प्रसाद पास नही गये। पर जैसे ही आप पसे
बैठे ही कापी भीर प्रम लिये बाबू मलामि मा पम।"
मनपनेपर मास्म हुमा परिधावा गाना गाने मोर पोरनानेम
हिमा है। पौहर इस टीमन पंत मा। उसकी पिटा नाम
सम्म पानी गडठिन सयोक्न पप गी और कमा एक पुस्ती
यी-सी मममम पी। देखने में कन्ठी, गाना सफर
पाय है । उसी बावे वर मोग मुग्ध हो गये है। कमी-कमी बोकी
आलए गौर परे पैसे मोज। पवारेकी पुरानी बार की

चतुर्थ पर्प
होकर गिर गई थी, गौहरने अपने ससे उसकी मरम्मत करा दी। यह
काम वसने उस सम्प्रदायर होयो भगोपर पुपचाप दो दिपा है।"
मुझे याद भाया कि बरस्नम इस मनाक बारेमें माठे मुनी या। पुराने
समान महासमु एक मद शिम्पने इस मलाइकी प्रविग की थी। बस
शिप्प-परम मनुवार व इसमें पास करते मा ।। भस्पन्त काम
का हुन् । पा, "नबीन, मो एक पार मताड़ा दिला सकोगे।"
मानने सर रिचार इमार स्पिा । पोय, "मुझे बहुत काम भीर
भाप दो सौ रे मारमी६, पुरीन सोब सरेंगे। माप कोससे
ध्याय दूर नहीं, इस सामने रास्लेसे उत्तरी मोर सोपेपनेपरी मापको
रिमाई पपग्य, पिसीसे पूण्ा नह पोगा । सामनेवासे तागपो नीचे
दान-पौटा हो यी रोगी। दूरसे ही काम मावान पप अपगी,-
दना नहीं पड़ेगा।
मेरे भने प्रस्ताव नबीनने एस्ते को पसन्द नहीं किया । मैंने पूण, "गों
सा होवा-दीवन !"
नपीनने कहा, "रा, दिन-पतगी भौर परवार पैन नही मिती।"
मैंने तरा,"या तो मानपीनाथ, गोरो परम।"
इतबार नपान मी इंग, बोध, "रों, बारस। पर सियेगा लिया
पमहावापान नुनकर माँ माप युर ही न भरा।"
"तं, या रोग है।" पाकर ईमता हुमा पैतरे पर कमसला
भागों में बनेए पदिला।
भत्ताइस वा पापा रापद प्रम से पुरी थी। पूरसे पोर्टन पा
मी परतापनि तो मुनाई नहीं दी, पर मुप्राचीन मका घेरन
रामवर मा गरा, जिसके नीमे स्टी र दी है। र एमति दिखाई
नदी दिपा । परसोन पपगी रेप रेदी-मेदी र पररे किनारे किनारे
नरीमोर रायगई है। मनुमान कि उमर पापद रिसीसे कुछ तर
मिले, भवएप उपर ही पैर पदाये। गन्दी महीं की। धर्म-संकीम से
दोनरोनिारे एक परिपत भौर पोररते पुरी पूण् उप्प भूमिम
पौर और एमी एक पति पेटे।-मार गाया कि ये री मैरागी
पारा-मारपर्तमान अधिकारी मीरा पिनायोनेसीपगले

भीखम्त
गो उस पर समाा महार मना नहीं माप, पाबायो एप
मच्छी तयसे देख सका। रेसनेम पर भारमी मर और पी पवित्र
पन पसाप साम, दुषम-पकडा होने कारण पुसमा मास होव
है, पर बार मकोका सामने भोर हुए, -राको मारा
नही,पोड़ी है। मौसम और मुंपर एक स्थानिक सोच
भाप है। उनम और मराब नही ध्ा समघे मी ते
पाय नहीं बन पा दोनोम पिसीने भी मेरे भागमन और उपस्थितपर
पप मी या दोनों ही नदी पार पमिम विगतम मात्र गापे स्तम्प
बने थे। नाना रंग र नाना प्रारक मेहराब प्रवीगाम
छाप पारस पत्रमा चमक, मानो पाठक याच मापुस्कर
खप्य वारा वरित हो या है। बहुत नीचे शिल्पा र प्रायोनी
पेड़-पौधे, मानो इनका कामत नहोमानो। काले,फेर, पोमे-
नाना पाटे-पाटे बादपर उठ पत मी मस्तगत सूसकी भोप सि से
यी थी, और से ही किसी दुए पर राम रमी तमा
पापनेते तबीरन पूरा भार हो पा रो। मा मानन्द पर दीपा,--
कोकि इतने विकारने भाकर कान म रिरे और इससे किस
जीन में।
मस स्मावोगा नयन पोड़ा-सा हिरवा पर यौरवाने साफ कर मा
है। सामने उस सम प्रमे और पोरे पानोपर मेय-मेये रेसमोम
चममा मौर बाप्प पारेका माछ पाम्पाव हो पार मिमिम या
है, मानो सुनार सोमेपर सोना पिसकर राम और यारो। at
कसे नम में बन-मसिकार लिया और मानो स्वर्ग गरमते खरी
आम म्शे उठी है। नई मठस विलियो
उनम्बाकी एक-सवीश्री विचित्र मधुखासे प्रनाम भविपम मादी
पास और सह-विचको भादमी गा-मरणको व्यबैठ
हुए, एवम समेर महीने मी कपि ।। परथमः पास पी
मबार देलने म माना है। ननने पाया कि पिाँच एक
पा रहा है और उसमें कमला मी नसे है।
पुनय, "मीर

चतुर्प पर्य
प्यान मंग कर गोदर इलरिकी मेसी मोर वास्ता र गया।
बाराीने उसे परिभकर कहा, "गुथा, येही तुम्सरे मौकात न"
गौहरने टेलीसे उठकर मुझे पो परते बाहुपाम भाबर कर दिया, इस
व्यरि से उसका पा मावेग साना सी मही वाहवा हो। किसी व्य में
अपनेको मुफर बैठ गया। बोग, "गुखारने मुझे एकाएक से पान
मा"
बाबाजीने राय हिमपा, "यह नहीं होग्य गुमाई, इससे भावर पापा
'मी' पाद देना रोगा। दरदीपोरस भायेगा।"
मैंने करा, "मला, बार दिया । भन्न एकाएक मुझे बैते पाबाना ।"
बागानीने करा, "एकाएक रेने पापानमा ! तुम ये दापन हमारे
पपाने हुए हो गुवाई, भोर मारी दोनों मौत तो रसको समुद्रव्ये रखते
होमसोम मर गाठी है। जिस दिन माता पार पी, उसकी ऐनो मस
मी ऐसी ही पी, उसे देखते ही पहचान गया भोर मोठ उदय,
मामता रखने दिनों का पी" म भाकर मो मानी हो गई तो उसका
मारि-मन्त, विय-विपद नहापा। पही तो सापना गुसाई, इसोको तो
परमरसडी दौमा ।
मैंने का, "कमवा देने वो माया गुपई, पापों"
पाना गा तुप हुए। पोडे, "उसे दोगे। पर गुस्वरें तुम उसस
भारिरित मही हो, पम्दापनमें उसे भनेक बार देखा। छापर मन गये हो,
पर रोक पापान ज्यभोगे किया ममता है। गुमाएँ, उसे एक पार
गुम" बार पापाजाने गौरको पुधरने रणय पिया। एक
निकरा 'गुमरेबोले, "मीरात तुरेने पाप"
पौरपते बने। बाद पूछा, "माई, मेरे पारेम गरी पाउँ णपद
गोहरने तुम पवा"
बाबानीने सिर रिवार 0, "हर बताया है। उससे
'गुवाई म सब दिन से नहीं भाये। तो उसने कभोकात मासे
।' पर भी उसने गामि रिहा भाभोगे। परमम्पटम
पुमा कम बाबमेरा।"
मनार स्तोको ठोस रपर मन-दीमान मने , राग

भीयम्त
किवाखमम किसी मरिक अपातयक सिकारणो मुझे देखते
सेमही पापान गये। इस मौ हो, पा मानना ही पोगा कि पारेमें इस
क्षेत्रमें उन मन्ज गाव नरी है।
बावामी मोदीबन पड़े। कमसे कम असाधु मतिमही परम हुए।
बात सखा पर पापाने सरासे पोधार पर किया किन बने क्यों
गौरने मेरी नपा-मर्यात् जिना या पनवीन मेगौते पर दी।
कविता और गरमपम - मनका कुछ विमानते
माम हुए।
पोरी देर बाद ही गौदागर जप मनवा नाकर सरि हुई। उन
तीसमे मारा नहीं रोगी,-सामन, इमरा परन, आपमै कुल पूनिया ।
परततकी,-सोनेको मौसमी। पाहणेरे-मेरे नहीं, गिराकर
पीठम हमरो।। गोम बसीडी माय और एपड़ी कि भीतर मी
प्रकोपमागहै। छापे मापेन बहुव मारा माउपर नी । अपना साके
पर तो पा, पर इस पस कुछ मिर पवा।। उत मुरन मोर वेसार
मत्यात मारवानिपत हो गया स्वस्थप मापाचोने भ्याकिम निका
और भरेका मात्र दो से परिचित भौर पम्नेका ग मी पोथी
प्पयन पात गुरु भी। औरत समझ गया बनी रहती प्रापी
नही है। उसने किच स्पकी भूमिका महापापी । मेरी भोर स्पेये रेतारका
“हो गुस्माई, पाबान सस्ते हो"
मैंने मा, "न । किन ऐव पाकिसे मारेला है।"
एमपीने , "अभ्यापनम रेता था। दो गुस्से नही मुना "
"हो मुना। पर मजे क्म-मर कभी मन नहीं गया।"
बप्पीने का "गने से नहीं ! पर पुरानी पावस मचाना
पार महाभा रही है। परी गापै पप गारबते, पर-पडी माम
पर हमारे गमे पानाते-स पूछ गरे।"परकार पाहायगो पार
गारे-बरिस्नी
मैने पर समझा कि मगर । परमार महापर सध
कि मेप मा, गुहार मप्र, मोटी, "पतो पो भरमे गोरे
,

चतुर्प पर्प
मीवर पगे।
मैंने कहा, "गले रास्ते हमें बहुत र बाना होगा। फिर मारेंगे।"
मेणबीने पूछा, "यहाँका पता किसने बताया ! नवीनने ।
" ठसीने।"
"मारवाकी पातमी बताई।"
", पवाईबी।"
लबारेमे तुम सावधान नहीं किया 8 श्पपीका या तोड़कर अचानक
बाहर मी बापाका सम्वा "
मते हुए बाबा, "रों, यह मौका है।"
पचपीस पड़ी। दोस्रो, "नवीन होधिपार मोती है। उसकी बाते म
मानकर मष्णा नहीं किया।"
भैपनीने सामान नहीं दिपा । प्रेरको दिखाते हुए करा, "गुमाईने
नौरीने लिए विदेशबारे थे। पर मारे वो कोई नहीं
पर नोकरी करोगे।"
"परस्पा
"हम यो परती।। योस्दिीका मारतो कोई मन नहीं सता "
"यह मानता 1 पेराग्गीये मेरे लिए नई नहीं।"
पेणगीने ईसारा, "समझी। पापद प्रति मन नहीपरटी"
"वहीं, गारिन स्थन नहीं करती।"
गरोठ सारसी। पोरी, "तुमाप काम सम्ठा। मोटर
भाभो उन मोगमेने तुम्हारा परियर कराए। यहाँ समापन।"
'मुना है, पर भयरमधेरेंगे।"
देगी रिनी, बोगी, "भमे हम पेटने होमों रंगी। भपकार
रतो तागा दी । दरबाना । माभो।"
"रम्प
रेग्मयोने परा, "गौर । गौर".
"और गोर" करते हुए मैने भी मनुसरण किया।
• पोर पोरोप-महापबु पापेश्मोसे है।

४६ धीकात ६ हा कि पावरपमें मेरी रवि और पिपास नहीं है, किन्तु भिमका पियास उनको पापा नहीं पहुँचाण । मनमैं बिन्ध सम्पपता मेरस गुस्तर विपरका मोर-मेर कमी न सोच पाऊँगा। पापि, पार्मिकोंधी में मकि परखा है। विस्मात सामीच मोर सुमात षपूर्ण,-किसीको मी प्रेम नहीं काता, पोनोंत्री से पानी मेरे कानोंम समान मात्र पर्या करती है। विसरमुर प्रमाकियामती भापारमा सामनापा निमा यस्प पेण समापने ही गुप्त है, और यही गाने सहित अपनी दाव। इस पारे पासी भौर सापुकी की बात सयत की है। पम्-वामका विवरण बाहिर करनेकी का नहीं है। पर इस रघ भपर लात् भान्ति पीर नवीन होती दो तो कम किया । इस मौको मर्च मही बने दूग्य । पर पा-मातक निमनपमें मुझे पना ही होग्य । कमसे कम कम्पनिलंग मेसर मन मपर इस देनी-मोरमार-पात पापम्ने पाये और पादोदो, वन संबपर्म विन गुरुपान न ऐगा। मगर माघर रेला किकमरवाका मना नहीपा। पपई मादीबन, पर रतिसित । मत हापिसात् यो नदीमा पर उनके बहुत परविदापमान । नाना उम्र और उप-वर बाकी माविनों नाना कार्मोमें भी कोई ना यो है, कोई मैच पी। कोई फर-मूटपणनी-पार ठारबीके पर मोमकी दैपा रियो । एक मपेवारत छोरी उनकी देणगी मानमग्न हो मैत्री म्या गंप पी और एक रसीक निकर ली नाना रंग पे हुए मेरे-मेरे कप टुपी सागपानी पित पर दंग रत रही। सम्मपर भीमोक्दि बीस स्नानपार पानेंगे। कोई मी तामै नहा। म्ननामम भामर और एकामा देखकर मामय होगा।सने मेरी भोर साध पर निमेय पात्र थिए । यसका माल महा। बोलिये, पर मनी-मन अपहो पाई। इसर समय लामो मा। एक-एक कर रिसे माने एक से गरे । कमठामे कण, मे, मवानो नमस्कार कर भायें। यि, मा, मोक्तामो कि तुमसा र पुका। 'नरे गुहार पर पुा तो श्रा रतुर्य पर मैंने पा, "यों नहीं पुकारती ! तुमारे पाँबा गोरखा गोर गुस्था गया है, तब मैं वो कमते कम समपामा। पर मेरे मम्ने नामने क्या पुराई भी उसाप 'गुसाई'दरोम।" मकवाने ठरणार ये हुए मा, “पर नरी रोग्य गमय नहीं शेणापामाम मैं म B सती ~माण होता है। पाभो।" "मावा, पर भम्पप किसका !" सपर मुनकर तुम क्या ध्येये गुम हो सूप हो" बोरेगी माला प यो पीपा पड़ी और उसने र नीश पर म्मिा । यारगर कमरमें काठे फत्पर और पीतकी पाणी पुगड मूर्तियों है। एक ना, प-सी । पहा मी पौर-प गावियों सामने रगी। माठोपापको पा सेनेडी मी फुरत नहीं है। मधिपूर्वक सारीति प्रपाम पर वार मा गया । गहरयर कमरे भाषा भोर कमरे मिही, पर समार-सपासी सीमा नहीं है। बिना मानोरामाटवे संगोपनही दोवा, पापि पसायाने जम्ने पमदे में एक भोर वाचन रिण दिया। कहा, "वेटो, तुम्हारे गनेश पाखरा ठोसरमा" "मुझेपा भान पी एना पाय" "गे, रसा। मेरे रहते मुम्हें तटोर नागी।" मेघा, "हम लिए नाम पर हरनाराम रोगा।" परीने पा, "पा मार मेरे सपर है। मे रहनेपर माय मिष बरा मनारायन होगा।"राती हुई पी गा। में बलगमा भम्पान्य मारपोस काय माने या सरनुपरी उन पास नए कनेको बरा मी एक महा। मेरी मोर रिटीने पूमार मी नहोणारीब दस मिनर पर पापमपाता औरर मा नाम सम्म परसा उठ गई दी। पूज, "इम लमको मषितारिणी रो" माहवामे मारमा, "हम र गोरिदर्शी रासी और अयनहरा मही है। एक-एपर एक-एप पर है। मेरे पर अभ्ने पार मारवा।" पार उदने मन्दिर उपसे पदार मिरा सिस "माकम् ऐवो पावरानरमा साना ।

मीकाम्त मने प्रा, "ऐवही होगा। ममम, यो गुब्बई और गौहर गुस नहाँ दिमाये" प्पपीने का, "वे भी मावे ही होंगे। मवीम लान करने गरे।" "मी यतको। भौर पर नाम " वेणीने " "गोदर म "ौं, मौहर गुमाई मी।" "पर मुहीमों नही स्नान करावा" पीने करमा, म पिसीको स्नान न पसारे माने भाप पर। मपान्की रक्षा होनेपर एक दिन तुम मी करोगे और उस दिन मना करनेपर भी नहीं मानोगे।" मनेपा, "गोरर मामबान है। पर मेरे पास दो सपा नाम गरीष भावी इस भरण शाबर मेरे प्रति परम्पस्मारसा न हो।" पापर इसारा समझ गई और नाराज होकर कुछ कानेवारी भी पर काम नही। पर मोमी, "गोर गुणाई कुछ भी हों, पर तुम मी गगन । को मारमी र म्पमा कर पूसरेको मौका पार करता है मगवान् उठे मद महा मानते। हमारे कार मी पा होना मारपर्व मा।" मैंने कहा, "वन तो पाएकी बात। मी स्मितमी बिद्य पारोमा ही, सम्म माँगा सम्य,—पर पूच्या किकम्पा मारकी बार तुर्मकरस मि" क्षेपबीने मा, "हमें चार नगरसे मत मांगनी पानी भर हमें सबसपर मिल पाती।" "पर पासर धापा ममावकमा मिकि मुझे सो रेकर गनीका सार नहीं करना पyt" पपीक विस्मित हुई । योमे, "नहीं, ना सर नहीं मिली। पर हुम्प पा परी र गई।" "सारी नही , पिन काटिराए गएर स्पेर माई पहारको चार दूतमे मिलाई सनसे मिसे दुए दोयमे हार पारकर सेनमें उमें प्रमै भाई। इससे में मोर मया ।" ।

चतुर्प पर्य
स्मय मामय शेपमें पद रिसा । पैप्पीने सविस्मय कहा, "स्ते स्पा हो
श्री, पामो विला मनोनी बात हुई।
"परकी दया । सिफ गौहर गुसाई या मरमें गमी नदोरे पानी में
मोते म्यागा, सरम मौर कहीं भी कुछ अनहोनी बात नहीं होगी। उनकी
यम र तिव्य पहिर होगी, बोडो" कार से ही मैंने
पपीभ मुंह देता से समझ पा कि यह बैक नहीं हुभा, चीम्म
बैंप गया || बायोने किन्तु प्रतिवाद नहीं किया, मदिरकी ओर हाप
उठाएर उख्ने सि नियम नमस्कार कर दिया। मानो भपयको समा
करनेकी मिशा माँगी।
एसम्मकी एक यो प्यममें मेराको पूरियाँ लिने हुए सामने गरी
बममेकी मोर नि: गह। उसे देतार कम, "भाव तुमारे यहाँ समारोह
है। वापर कोई तास स्पीशार, नाही"
पप्पपीने , "नी, भाव काई तौहर नहीं है। यह हमारे यहाँका
ऐगा किस्सा है। यारोडी बाते कमी कमी नसावी।"
"खुणेरी बात है। र भागोरन पद रावकारी पारा होता है।"
रचय बोली, "चो मी न । वामें मुरार-मका कोई यादी नही
परिसरोरिन ए मामी को पदही न देखोगे। हम सब
दासीरीयसी, उनकी सेवा परने भयमा संसार दम्परा मोर कोई काम
कोदो महाँ।" परसर टहने मन्दिरही और हम पर फिर एक पर
ममसार रिना।
पूज, "दिनभर तुम मेगडोक्या-करारना रोखt"
रेपनीने करा, "भार यो देना, पही।"
"भार देना मलाम इना, रसाईक थिए ठरपरी नाना, बना,
माम ऐपना, पर मना-ऐसे दो भोर बहुत-काम । म प दिनमा
राविक पीया परती हो।"
पेणगीने परा, ", रिनम्र सिमीपणी"
"पर पान होक पर-परयो काम , समी भौर परखी है।
दम मान-यापनरपरी"
ऐनीपाय, "पती रमाये मन-सामना है।"

श्रीकान्स "या रसोर बनाना, पानी माना, रम्ना-परना, माम मुंपना, प' रंगना,-इसी 'साधना'कावे फैजीने करा, , इसीको अपना पहले।। दास-याम्पिोको इससे बदर सपना हमे भोर माँ मिगी गुण करमावे उसी दोनों सबा भोले यानी भनिरंपवास मपुरखासे परिपूर्ण हो गई। एकाएक मुझे सामा किस मपरिचिता पम्मीका मिलना मुम्बर, उमा बन्दर * मैंने संघारम कमी नहीं देखा। सा, "कमया, तुमारा मकान कहाँ।" मीने मोवठे भोले पोछकर (स्ते दुपा, पाया। "पर पेशीणा स्मशानदी" देव्यपीने का, " पा र मोर पाठक बने पुए पिय मधनका एक होय- गमय । पर मामी मुनाने बह तो मय नगुमाई। मी नपभामो, हमारा मया मा रिता।" कमरा दिया है। उसने पाँव पेपर गा मा एकफ रेपमध रुपय दिखाते हुए कस, "बापानर अकुरगीर मरेम माना । रेता, देर नपरन्त " कारावेचसे पी गई। पर मोर एक छोटेसे तस्स विडोन रिटा। विरोएबोकीपर रिर्ष मोर एक पाम बापूल से १६ पम् ममी कोई प्रदीप अमर पापद धूप गपा, ममय मा मी उसकी गरम भोर पुर्पम मपदुमा पा, पाठ मण्डा परिनमरकी पमम्ति को पीही--अबुर रेयसे मिया र-दूर यता भाया । पर भार्पण महाँ पापा पणे उबरपर पसे विकानेर मेर गया। अने पालिका प्रमग, एक गरपि बनबाने किस एप्पा मुस उपार गई,-अपना प्रपद पर उसीध-इन रिचासे मेरा मन ममातही पात कोच मनुमा कर है। पर सबकुछ मी यशाम हुमा, मानो नमान पपसे परिषित मारने से भारमिपोई पाप भा पहुंचा है। पर पन्द्रा भाई थी कि इसनेम ही से किसीने दरवायोबार मापाची, "नय प्रबार, मरिर महीमोगे। तुम घुमा कोरे।" परपर उठ बैठा। मैंगरे हाप-पीसनपानेडी मामी कानीम

चमुर्य पप
पपी। बाव-से भारमिपौध समवेत कोपरी नौ या गप पर मी
मिनी मपुर पी रतनी ही सर थी। मीरा ष्ठ मा,-पिना माम्से ऐसे
निस्सन्देर भनुमान लिया कि कमवा है। नपीनका पिस्वासस
मोटे स्परने दी उसो मारिसको पात रिया। घोषा किपर मसम्मान नहीं
है भीर बहुत मसंगत भी मही है।
मदिरम पुटकर एक और पुराप 3 मपा, सिौने फिरकर नहीं देखा।
सपकी रमि पाणको पुपर-मूर्तिपर गी यो। बीच तड़ीपुर ममता
कीवन पर रही है-
मानगोपास मय अय यशाशा छालपी,
यशोदारु लास बय अय, अय नंदलातकी ।
नंदलाल जय अप गिरिधारीसाठी
गिरिपारीलाल वय जय गाविल-गापासका।
इन पोडेसे सर मेर मापारण सम्बोंड भाचानसे मौंग गम्मार बस
स्पक मपित होकर फोन स ममृत पितरो उठा, पह मरे प टाकला
परना कठिन है। पर देपालि उपस्पित ग्पतियोमसे रिसीली भी माने एप
ना ६ । गापधरोनी मांगों को पारित कर भर हर मभु सरगी और
गायों गुस्मारस बाप-बीचमै उमा लप्ट-सर से टमाटा है।
सप रमौका ठिक नही है, लेकिन मेरे मनो मावर मी एकाएक न पने बैग
हाने गावारिसारास यामाग भग एक दीवारका सायरिये रेट थे।
पर पटा नही पा करेसवर या मत। और सिर पोड़ी दर पाठेत्री
नाप परिहास-पस प्रमाण ही नहीं, भिसाधारण परवर्मन
निमुन सा परिपा ममीवर साधरण, तुम्ा मोर दुर थी ये
भी मानो रुप पुर्णम भापान ही मनुमा दीप प्रकाराम मनमो
ए मे नगरों में भारत गुन्दर राउटी । मुसमी मानो पेमा रगार परकी
परमपरती पयार्प योग मबार देमयो। मेर पान कर
पीटना एमस्त मामुर उरग रो।
मार्पोदी दस किमुपतासे में पाव ररय पस्त होकर पार पर
भा-रिमने शमी नहीं म्या। दवा मंगको एक कोने
और बटाभोर सही प्राणी करेगा भार उमा प्रीएर पापी

वा, रोशनी ५२ भीकान्त है। पैकी मापासे उठका प्यार मंग नहीं हुमा, पर उस एकात मा पित माती तरफ में मीन किला, पहा स्तम्ब हो समया। पेस ब्या कि मुसाको ती माय मेहर समगा सा मचिमौर किसी दूसरे गोषमै बमे यये है पप में नहीं पापानवा । सम्म हुशार र गया । परमपी वयसे बनव किशन, विपा भोर हुरिम मनसमे पग, वापि न मने सिसी म्पयसे भरी और पन ऐनेमा और से ही मनधन भरपते मौसों कोनोंडे पानीको बहानी पूर मिरने । पता नहीं कि दिनी रेरसे से या पा1 मनमें मनक पसी, "भरे मी गुताई भार उठ बैठा, "न" मई मापै पामधी बफ ना होते हो।" समरेम चौलाई प्रत माता पी ली थी। बोध, "चम्नेसे स्मा सपना होता । नेम धमाका छ गुपयोय एमा।" "पा माराम है। पर बरसा मथर नगे" "दंगा।" "वो फिर, मोक्यो पेरो" "धनको दिसत नही होगी मध्यद वो मियो । मेरी पामग्री र रावको मी परिताप नापनमो।" बैप्पीने सहास्पमा "या अधिकार रेपो, तुम मेमोको मत।" "भाषा मानेपर पर वे सार माधी मने मौका गुबई बना सन्म तो मेरो सानो मोनाका पात्र भाग होनेर रेणा गतानुगत होने मी राब।" माता छतर कुछ मम्मौर हुमा । मा, पोंकी तीन उपना बादि, गुमाई, मपयर व है। गोर गुणांको भी तमने मगर समता है। नीमने भारमी म्म कारिपा, पर महाँधनते लिये पहे मुन्टमानपा-विमाधर्मपित साने महातापा" "पर उमन मापदेपनेपर तो पाम्पम्म मातीख।" पैमाने पा, "पही दो भारत ।। पर मा री मरो, पामो।"

चतुर्थ पर्य फिर कुछ सोरारका, “पा मजद हो मुम्हें पीप-सा करते हो?" "भापचि नहीं। पर गोरर है। वो दोनाको एक सपही रोन ।" "नसपटकर सामोगे।" "मेणारी पो लाता है। बयानमें उसकी माने मुसाको बहुत साया है। और उस उक तुम्हारे प्रवासी भरेषा पापम मीठा नही हावा पा। किमामा मौहर भक, गौहर परिकी नातिकी सोच नहीं कीबाती।" उस मम्पचारम भी पेज मा किवीने एकसको परा दिया। फिर कहा, "गोदर गुवाई नहीं। पासपो गये हमें पता नहीं।" मैन कहा, "मैंने रेला कि गोरर मांगनमें बैठा है। उसे काम मौतर नहीं माने देती।" पैमाने परा, "नी।" "मोदरको भाव मेने देता था। कमरख्या, मेरे मया तुम मायन गई, मि तुम में सपने देखता खप कम ईसी नहीं कर यो रो। गामात नहीं कि मरयम सि एक तरपनी हो।" बणाने इस प्रना कोई पाप नारिपा। पर धुपचाप पार पडो गई। थोड़ी देर बाद से उठने एक हरी पपी राय रोपनी और भवन तय पुर मवारा पान छेपर प्रोण पिा। पहा, "नये गुमार, ममिति सेवाम र दो समता, पर यहाँग सर-१ अकुरजीका सार है।" भने तर सरा, "मो सम्पाली ग्यपाका की बात मी, पेपर नरोते हुए मी तुमारे नये गुबई में पाप है, भविसकी रिकार पर रस-मंग नही पगा। दो मदो-गैरसर लोगो प्रबरा एकरण मोबाडी नही है।" "टाकुरा प्रवाद ऐसे ही वो सापा बाग है," पार और सिर नौगा पर पहनने वारी सायणमग्री एक-एक पर सिस्मिार सब दी। दूसरे दिन गाव तोरे ही नीदर गई। मार्च मगाोपी भागामे वाप मेरमारती पुरू हो गई है। प्रभावी मुरम कोर्टमा पर कान परा-

भीष्यात
पिना सारे ही दहा-सून मर व्यती, हो मी नहीं चीं।"
"माठा, मारा प्रो"
"सीबोका पा गुमाई मेय पर परमीपे मयदेव पी
नाम है।"
"ये रचीचे भौर गौ महीम र मठम बिखप पती हो"
"बहुत दिनोंकक गीगम 0 थी गुपई, मगर कोई #गी कि गाय को
रिपकपार गमको रस बना है।'
“स पासपर सोमपात नही हो तुम संग अधीकी सा
कमीकमा सकोगी बोपदी बगरमा।"
परमपीने स्ने एमा, "तुमास पाली नये गुसाई,-परी होये।"
मैं मी पापा, ", पी। नाचम्मि उममें दो या तो
नही त्य, पब्यि अफस्पाम से निपी मार।'
"बाबाई मी येथे"
"चो माना मी गा"
"नहीं । मानिने रखनी दूर मागे पाने ही नहीं विपाः रस पती
जनावरे दिसा पान का पता कि तुम माविकोठी हो या
।
मी ने गी। योी, "मैं मी पाच ती। इस अगो, पर
इमाठि एक भी बानेपर काम पर अपगा। इस देशम पारे असे में मान्
का नाम पर मिनका भमान नहीं होता। पम्मे न गुपई, नि पर्द।
पापेरापनाम कमी महा रेप पन्मे में समपाल
दिन परेको, एस्टेका नय र मम्मी भोरखामा बाग है।
एम, मोगे नये गुदा म
भषामक उत्तमर भोर तार पात विस्मप हुमा । ण, "मारा
परिमय हुए दो ममी पपीत एपे भी नहीं दप, गुमर इतना निसात
सेगमार" मदाने गा, "
येत परे एक पल मोमो
महायताई ऐनौ पनि । मेरा पासपोम प्रचारमें भी
तमपर मेप भावस्वास महोगा। परमोबानेश बाम एप

चतुर्य पप दिन यहा। भोर यहोम्निारे रेसका पप दो-पा नही गे वोर माना 1 में मना नही रंगी।" पर मचाने मार तार दी, 'अगुरीका प्रबद कमरे में रख दिया गया। मामखाने कहा, "परो तुम्हारे कमरे में पटार टे।" मेरे पमोमें भी बात।" और एक बार टक्के मत्ती तरफ देना। इस पार सेधमात्र भी दाम मी नहीं पर गीहै। पा मी निरिक्षक मैं उपरप्त मात्र, पर पारेसिव कारपसे , उनकी पेली रात मासूम र किया पामिन भरपते से, बरि यहाई बन्पन टोबर माग है तो मानों उसकी मनमें गन मा बाप-ठन ए मा मी विस बन नहीं होगा। उमरेमें मार पाने पेटा । बहुत बढ़िया प्रमार है। मागनेका पापन्न मन्मय बम पता, पर एक बहुत बारी काममे कोई मारणाको कुरा से गपा। मत मारते ही मर चन्द किये हुए प समाप्त करनी पड़ी। बाहर मरनेपर कोई भी नहरन भाषा, हारकारात पसरावी मी न पाने पाँ पमे गये। दो-चीन पुरानी पेलाविणे पूम फिर पो - -रणामको ठाकुरबीर को पुमे शायद मेरी ममप मेनी नगी पा, मिनु भार दिनको जिरोपनीमार मप्पारम पेन्दर दोष उखना भर माया । मन न बने मारोगा, बघा भाममो पर पम भापारी गागप्टन रारा मम्सोवा परिपिता नदी और गहरी खा गुम्म-परमानं वरभूमि, तीनपटपुर मुराद पेटीग मुर और मुरिस्तुत मुक्न । बाव दिनी मनमासकारण पर सनसनाने बगा, परी दूसरी बार बानय सोपरीगा पाकिक मादमी को ही टिक गया, पर टटा और ननदोर मार पहारो गया। पासे तो भारवर्ष दुमा तिरगा मे भारी हो हावा है। उमधी उप मेरे गरी गो, मेर दान पारा रोना मी मनम्मर नहीं है। टिंगला, पुराग-पदस्य, मोरारम एट पारा भाग मी है, पर ा नीरेण मि से गया। मात्रानो मी मी ऐसी मारिए म्पमे रिस्त है। सम्मुतः, रस्नी, पनी और मोरी मरें मी मनुपी रेटो पा सर मुझे एसपने म पा। पूरी सम्म रिमाखिने माम मरने

श्रीकाठ
एनैः शनैः मारठी और कौन माप्त हो गया। प्रार्थना पती
माकर देवान प्रसाद रस गई, पर मिली पदेस मा पा उत्तव
नहीं मिले। बाहर मेनेंसी बातचीत और भाने-बनेको भागममी मध
शान्त हो गई। पर सोचार कम उसक मानेकी पम्मापना नहार, भोगन
शिया भोर पाप-मुंहबोकरीप पुता हो गया।
पर उस पर गत रात थी, काम भनक पड़ी, "नये गुखाई।"
अगर उठ बैठा | मनसारलदी ममम्ता माहिस्ता-पारिस्ता मोही,
“माई का सिए पायद मन ही मन पदुत पुरी रोपेकों
नये गुमाई।"
", मुली एमा।
सनम ए पैप्पणी पुप से, फिर पोम, 'मंगलम पा मारमी उमसे
स्पा कायापा"
"तुमने रेप पापा"
"*
“म पाप किया तमाप पर है-मर्थत् , तुम्बरे खमानित
भाचा मुखाविकमारी उभी कष्ठीमार हुई है।"
"तुमने विम्यास किमा"
"न, नहीं मिा
एवमरएि फिर मौन पर रेचदाने कहा, "उसने मेरे सम्पर भौर
परिमबारेमै कुछ खप न किया।"
"किया था।"
"भौर मेरी बठिका"
", अन मी।"
बपीने कुछ महरा, "मनोगे मेरे पचपनका विदास । र
दुर्ममा रोप
"तो एने, मैंन मुनमा पाहवा !"
“उस्ते सा प्रपद्य कमाय! म मुझे बहुत मागी शे। पहले
सपा मग मीर पर फिर कोसमी मुथामावर

समुर्य पर्व रे इस मगनको रिर्पक नर करनेसे मा पररा ऐगा, क्यामो इस पार पम्मवी बहुत देखक मौन गो। पा समझमे न मापा लिमय- परम धुपचाप सही समारोहै। पूज, "स्पा सोप पोहो" "सोब या किसनुर्म नहीं बने एंगी।" "ठो तिसअनेरोमी "पने कभी न गौ ! परमाणु एक हो , हो यो। सारी मगीन" " पता, पद सगी।" देवाने मिरर कहा, पर दी। पार, सूरो।" पर कर ठम्नेरी मार मापार रामदार नरेगी पीय परी और का, “सोभो गुनाई,मैं पी।" पाहार मासे पै बाहर निकल गई और गारठे बहुत ही सारनी म दापय मी चन्द बिपनीने भाव से पार-पार पप यही कि उसका पूर्वतिरम भुना में प्रणा नागा "भुनना मैं पारवान पर भगर मुर्ने हो पपा नगा।" देगने सवाल किया, "रा नही येगे। मुनर औरत-मार सरी सो मारते।" "मैं मापनाम पायोगी, मी भम्पाय या ना। परवानता उसे सुनकर और दो मोरणे नसे पार पाणी भरसपाल मा बामता पर दुर्ग पर मही खाना पापणा । पुरए भीरते, नि गत मार पर दवा है और रात पर मामना। समयो एण्ोगे उमते मी एव सदा मीरा मैने म इसे मुनो । भोर मम्मी औरों भी देनी पर दो मी मुझे मा नहीं गये!" "नाटी। "घरमा मेय सम्र है। मरो तुमने मी बहामी । गुनने लिए मैं बसी उम्नुस्मत-लाभ और - १२ भीयम्त काँचपास पानी मुसस नही मी काही तो क्या t" वैप्पणी काफी देखकर हो र सोक्ती पी। इसी पार नयनक पठ मैठी, "मा गुसाई, तुम पूर्वमन्म मोर मागसे समपर विस करते हो" "मही" "नदीमामा तुम सोते से कियेहाते समुप नही." "मेरे सोचने के लिए पूरी बात बाते , पापर मह सब सोचने दिए मुझे समय नहीं मिला। पणी फिर चमर मौन पार पोन्ट, "एक पम्ना तुम पसायी लियास करोगे ? यरकीकी भोर मुंह कर पाती कि तुमठे छठ नही मैंने फिर कहा "वो गयी है । एकदिन गौहर गुगार मुस्से सुना कि उनकी पाठशाम का एक मित्र उनपर भागा। सोचा कि भारमी एक दिन मी यहाँ भाष बिना नही पापा मम्ने रफ्नमित्र साप सात रन से मय हाकिर सोचा रिमाला प्रामक मित्र है वो भनापास ही मुसलमान पर पड़ा रारा किसीसे मी मारय । उसका पाना मी कोई नहीं! एम्नेपर मेहर गुरईने मी और यही बात की। कहा कि संसार, उसका मना करने पर कोई नहीं रखए उसे र नही, चिन्ता मी नहीं है। मन ही मन ममातिा । ऐसा ही होगा । पूम, गुबई हमारे मित्रका क्या नाम है। नाम मुनकर से पौंक गई। बनते दो से गुसाई, पानाम मुझे महाहमा पहिए।" किर पोम, "यनवा मारे मरसे दो मुना है।' भगोने पास, "पूज, गुमाप मित्र ऐपनेमे देख। उपसा गुणानि यो का उमम कुछ हिस्ता टोकानों में या, और कुछ म । पर पर मौवर पान ऐने गौ। तुम स्पाइपर दोगे कि पेय मारमी सो महायचे नाम सुनकर ही पगारोब्धय । पर पर सिर्फ नाम सुनकर मरते पागल हो यती १ गुबई "ठापार" 1 -

पथ पप
पीने १७, "टपाद दुद मी (स्ने स्मी पर भून न सन । सप
ममत्रा मुझे मेरा एकही पात मार माने ज्यी कि तुम कर मानोगे,
धर्म मानी मान्स देए भी।"
मुनार पुर रहा, पर उसईबहरेकी मोर देखकर स न सका।
भाषीने रा, "ममी तो पर पामको तुम भायेरो, पर भाव एम
असारमें मुग पारा हमर प्रेम नहीं करता। पूम्म मगर सप न होठा
य एक दिनमै पर मनम्मद बात सम्म हो सकती।"
कुछ वारकर उन्ने रिस, "मैं बनती है। तुम पने नहीं भाये
से और योगे मी नपरे मिनी मी शार्पना क्रों न, तुम दो-एक
दिन बाद एक पभोगे। पर मैं सपही सापटी रामपपापो
मैं वर मासे गरी" पर पार उखने मरम्म भोफामे भारी
दामा
में पुप रोया। इन पोरते समरनेवनी रस और प्रशा मागम
एमपी मनप निरेदन पानी म पाले मधे कमी दिखबमें पड़ी थी
मोर न रोकी हुवानी ही मुनी दी। और भम्नी मोठा देख या
किपा अभिनय भी नहीं है। माता देखने में मुन्दर है, निरसर मू मी
नही टसची पात-पीत, उसका पाना, उसका भारपार पर उसकी
मलिपि-सेवाको मान्तरिक परप पर मुझे भीगी मोर समपो
सानेपामा और रसिम्की मत्युकित पैसा करने में मैंने कमी मी नही
की। पर मोदी लत पर परिपति हानी गरी पपगी, मगर
मायरनमे, मम संयनमे मेरे मापुर मष्ठित भामराम भाय मन
ऐसी से परिपूर्ण दो पमा-परमा एमर मी पहले सानता ।
मानों में राति रोग्या। पन्दादिमिरमापसे दो साप मीर रामपित
रो, पनि प्रारी मनपन दिन्द्री पामते एएस मा
पवई शान्त र निराला न ला कि हिम अाम मटमें
से पगप यो एक पूरा यार होकर यम बुरी ठप
गा। पर न पैपनकी मामा माप मोरे ऐसे मनमा पारित
माय प्रेमी की परमाई मिस हो न मरिमोमपार माना
ना में थी किएर मुल्यो

भीयान्त
इपनी भवारी सकी। ष, एकाएक मेय मूल बनाया
मपा! मापनमा प्रपोग्न मी मुहम शेष नाना पाणही
मौमासा किया भग्नी पत्रमुरिमा म रोम र म नितिन
देयौ। रमा यहाँ मोर नही पना पारिए । पापु-ग मि-मा, पीस
विपाक इस स्थानको माहोगा।
एगाकरेनी चांस हो ठी, "मो बार परेप पाव बो
मंगाई गुमाई।"
"भीमाणिमिमी"
"भारमोको पर मेगा । बार्ड, पार करा, देणे, पर्स
माम मध"
"नहानि बनाना बाबती"
पैमाने पसार मही दिमा सिप मिमकर री यां।
सपनेबार उस और लिपर समरने जैसी एक बार-सी
यी। पापान भाभमकी भवस्था नहीं है पर मनाए भी
सते ना वारग गई किया पीज मुझे माफी पाठी और परमे
भारमी मेकर उसने मैपया मौसी। तो नियतवनका इमिाथ नए
बामा और वर्तमामा मी नहीं। सभामा मिमीर
मस नही पा मग पौन-सुननेपर बायको होती है।
ताप, पाउसमानी मुमकिपामा नहीं चाण, बनाने पिपर
पारमिर पी, मैं तुम्नेको राय नहीं। मुझे कामही
है, बलि प्रयोग ना। पारन उसीका है। भले ठे दुरात
मगोको समय सोबठे हुए स्पस्त रेखा कि मुझे क्वापे और उसके
सकी हानि नही मिलेगी,-ममम पर पिसी द्वामी महा पापी
है। मुना मेप भीमस' माम कमा चारण मारहमी पध
वहाँव वा उता परमपम गुम्न है और उन पर मकते स्थि
मारे नाम इस रैको एकाने पायद इस पारी को
और उसने सोही स्मार्म गम वनवागरम शाकीमार र
पीनपाए।
मोमो ऐसा समयमै पिसापडी कोई बात न । रकम्पप

पतुर्य पर्व
फ्नामे मारष्ठ-मान पते हुऐ भी उसकी एकत नाये मत मात्र मी सासद
रसका तब नही पा सही है, पामसहाय भपरिक्स माचिस निरवपिन
मार-पिन्सस उपारो संग्रा करनेमें शायद भार हान्त है-दुपिपासे
पादित है। उसका पापपर विप्रान्त मन भरने मनवान ही न पाने का
मसम्म लोग्ने माणरपसे दुर हुमा, पेणगी उसका पता नहीं पनवी
इसीबिर भागमा बार-बार परिसर अपने विगत-बम म परपर राय
पोसार ममापी सान्त्वना मांग रही है। उनकी पाते सुनकर समप्त सम्वा
नाम भीपात को दो पायेर बनाकर माजा भपनी नाब देना
पाती।
पैम्पपी पाप से मार । नांपरस्प है पीकर पहुच पात मिग ।
मनुप्पल मन स्तिनी मास्पनीसे परिवर्तित रो बायोभय मानों उस
सिम्मकार शिकायत नहाँ।
पूण, "मरा, तुम क्या करवारो"
सममलवाने विरा, "नहीं, सुनार पनियों। पर मारे निकर तो कोई
प्रमेर नही दोनों ही पक
"मसेकम मेरे निकर वो एक दी। दोनों ही एकशे पति
पोगनार भी कोई मुस्तान नहीं।"
पारने पा, "ऐसा रीमो लगता है। तुमने दो गोली मार पका
भी पापा है।"
"हम नहीं जानती । गोरर पापधी तया मही, उसे अपनी मांग
लमार मियालना न्य, भपनेको भूप मा, ऐना महा मनुप कमी
य। उसकी माँ ऐसी पी। एक बार परफ्नमें गौर पिटाराप
उन गारी व मुझे पार है। उगीने रितीको शिर एव से रपये।
रिये इमीनासे सगा सदा हुमा । गोरो वा परमियम भादमी
थे।ाम तो हमारे माप गये । पुण्पाद पोरे पोरे मार देता
गरमी पार पौ। गौर पिता बारेमें पुनेर पर दो उमौने
कोई बसार मा दिपा । पर हमारे मुरी भोर तापते हुए ये एक बार कि-
सिहायरस पड़ा मोमोसे पानीकी पुण् नीचे गिर पड़ी। पर उनकी
भादापी।"

भीनम्त
देवपीने प्रश्न किया, "इतम (सनेको पौन-सी बात!"
"मने भी तो यही सोचा । परमपि म गईणे मोठे
पाँच कर बोली, 'मैं देख मूर्स औरत क्यो मोसे पेर मर करी
और में गिना जाये उपवास कर गुस्से में -मुन ही, चाय
इसकी क्या बात है। मोर इस पर सपही सनका परा बमिमान में
श्रेष-पुकार बफ हो गया। दा मुखमोगा ममा मौर कोई मा
बानता कि मौका या सिना पम गुष है।"
पपीने प्रश्न किया, "तुम सा मुम्मोगी हो, गुसाई"
कुछ स्यिस्य यमा । पामारी सोचा कि तो होगकर यह प्र
मेम मा पोमा । का, 'सब कुल सा पुरी मोगमा परवा
कमलटा, सगको देखकर मी तो सच पता है। इस मोरी मामा
भावमा निकर सामने कुछ नहीं सीला"
"पर पर वो मेरे यि परामा नहीं है।"
और भोई प्रश्न पर मेरे अरसे मह निकम,-पिष्फुट निस्करोगमा
देवकी पद भी सरेर पुप पी। रिप बोड़कर बोली, "तुम
फिनती करणी गुणई, एक बार मेरी पुत्री पार्वे सुन को-"
"मी मात कहो"
पर नपस्ने बही तो देखा कि प्रना ना मायम नहीं है। मे
पप र नीचा दिरे हुए उसे भी काफी रेखक तुप राना पड़ा । म उत
पार नहीं मानी। मन्तान में विक्यौ र त उसने एक बार मैं आप
उठाकर देखा तो मुहे मी ऐसाया कि उसके सामायिक परेफर मार
एक पास बमकमा गई है। बोकी, "मस्कार मममी ही मय पुष्पा
हमारे को गुम्बई का किया मानो फूलको माग है जो मकर मे ना
धमती पलायने ही नबर माण! पापा पापी फर इसीरिक
इसे सरेकर बदा पो नहाती। मितो मे इस पपपर मान्य । मिम
हो बापगा ! मुनो । ति म्रतम, इसम्म परलप बोतार न
देवपीने कम,
मेरे संकोची चम्म म रही। भान्तिम पार मिनटी कर कहा, "मौरी-
सिनेविरम मुझे रिपस्पी नहीं है, उस्मुमता मी मा, और उस

पतुर्य पर्य
मुन्ना मुझे कमी मप्स भी नहीं या कमाता । मुझे नही मालम कि तुम्हारी
वैष्णव-सपनाम मारनायिौन मागका निर्देश महानोंने लिया
परमपने गुप्त प्रपाको भनात करनेकी सरित बिनय हो मगर तुमारे
प्रारमिच पान हो भने म्पति मिचर्यगे कि ऐसी मा
नि धनना एस परिहरगता है। मुझे मापदरो, समय, समभवा
मापस पापागा, पद सिर पीबनमै रमी मगोपी मुख्य
का भी नहीं होगी।
मीन 40, "मवे वो पहले दोरा गुमाई, प्रमोन मारा नही,
मेप, पर पा क्या तुम सर पारोसे परसवार एमागे मुन्नमव मही
रोगी!-ना ऐसा कमी नहाँ दो सरखा । मेरा मन पावा फिर मुमत्रत
होगी,-मैं पड़ी भार (गी। पर सा पास्तवमें मेरे बारेम इ० मी
पन्ने पीरपा मारी ना हमेशा सा सिक एक मनुमान मोर सन्दका
येयोगे"
प्रन पिया, "माजबनम मिस भादमीसे मेरी मुयात , रिसे तुम
भाममम पुग्ने महा रे, मिठा उपापसे गुम भागना पाटी-पा क्या
पाखव मारा कोई नही होता रिगुरु पराया है।"
"किससे माग यी, पर तुम समा गये गुताई।"
", ऐसा वो सपना पर मौन "
"या कौन है। मेरे ए मोर परम्भ नर-पनामा। सीरियता
निरन्तर रोएर मगरान्से कहती प्रमु, में मारा-मनुप वि
हनी बरदम्तमा परे मन निकाह, जिम मेरि मायनी त मेर
नही हो मेरो गरी साधना मर्प हो पापणी"
उससभा से मेरे मामानि परपी, मैं पुराण ।
ऐपीने पा, "रि मी, एक दिन उससे पारा मेप अपना कोई नते
प,--सार इराना पार पिसीने भी किसी न रिया ोगा।" उसा
रूपन मुनर विस्मपी सीमा नहीं दो और हम मुम्प रमन तुम्नामें
रस प्रेम पारी इस्ति मोर मो परो स्मरण र मेरा मन वही
सिगा।
दिसटी पेप्नदोने मेरा मारेगार पर मार दिया। गुना, पाठो

६८
श्रीकान्त
उला पिार परिषप-उममीवरचा परिचय हो।"
श्रणाने पाना गुरु बिना, "मेरे भौर मी दोहोर माई, पर मनापकी
में सम्मेवी बेरी भी। हम भी रहनेवाले ६ पर कि स्वामी म्मापारी
भावमी में, उनका मापार पसाचे पा, विमिर बचपनते ही में सामे
मे। पात्रे साप माँ गौर मकान हो यती पी। मैं पूरे दिनों में
अगर कभी गोषबाती तो महाने मरते नाना पाट। यहाँ गया मुझे
माय मी र भगा । चेमे मेरी यी हु और सभी उममें
कायम हमने तो दिया। उनके नामकी यी गुबई, माप
नाम गोहर गुणा मुंह सुनकर मैं पोर पड़ी। इसलिए 'नये गुणानामते
पुकारतीय माम पुनपर नौगम्ती।'
"पर मैं समट गया, उसके बाद
पैमाने का, “मान मिसाप मायै मुमचा हुई पी राम नाम
मम मामाय मुनीम पा।" पर पा उपपतरि मौवा,
रियो, "मेरी उम्र सीस की ही तर मेरे संवान ऐनेत्री
सम्पमा पु-"
वैम्पमा कानेगी, "मम्ममा एक तिरीन मतीबा मारे ही मनम
पता पा । स्विाये उसे बाज पदावे थे। उनमे मुझसे बप मेगवा।
पा मसे ना प्यार रखा था बिल सीमा मही। उसे कुमार मा,
'तीन तुम भोर कमी वो माया नहीं है माई, इस पिपिय मन्तिम
पार मुझे पोटी-सी मर। मुझे पर परेवा बार लरिरा'
पाठेगो पामे बात न समाप, पर उसकी समझमें भागा वो
उम्मवाय मुर्दे पर प्रेशर ममा का, ये मन ए माई, में
चमी सीकर मा देना होगा। इसमयमा मेरे थिए और कोई पूराप
पचा महा।
"मा नुनहर पीरो रोमेश बोसा पाना। या मुझे ऐक्य समाया
भरौदी पार पुकार था। उमेरमा मापत, मिनी रणदुई
उही मला मी ये लामो महो हावा बारा गायोम, उपर
00, मामात बसर और कोई महापाप मा।। एक पापकर और

थमुपपद
एक सरस्व पाप गर तुम रास्ता बोना पाठी हो। पर सम्पसे
पपरा पा सरीरारी मगर तुमने स्पिर या दो दीदी, तो में कमी मदर
नही। इस पतिरिक्ष मौरबो दुख मी तुम थारे दोगी, उसका
में काम पनगा। उनकारण मैं मर न सकी।
"प्रमश: गिरे कानों में बात पहुँची। वे निशान मैते दो शास्त
और गिरी प्रति मनुप थे। मासे कुछ नहीं कहा पर मदे, पर्मठे पो
तीन दिवस ठिोनेसे म उसीरि गुरुदेव परामरावे मुझे लेकर
नारीर माये। पर राशि में मोर मम्मपदीश पर रेप्पो पर्व मोर
स प्रत्येकी माय और हुमतीतरी मा भदरसादार नई गतिसे हमारी
जीरो । ठहसे प्रपका प्रायश्चित्त रोगा पाना, सहमी परतो पी पर
इस मराठेपर लिाि गभर्म भापा उसकी माँ होकरपा नही करतो
पागी, मेरी मापी देरना दूर से गई। उपोग भायोजन होने पर,
परोया मेमो, पा और कुछ करो, मेरा पपा नामकरण हुआ--
मटा । किमर मी पर माटम नहीं था कि सागर पये देने
बपन परवानीने ममपो गनी किया है। पर एकाएक न बनेकों
पादीका दिन मागे बड़ा दिपा पपा, पापर एक मार। मन्मप बहुव कम
दिल्लई परता, नापो मन में मोरी होती थी। ऐनि
रग इसाद रि घम दिन भापा । स्नान र पवित्र होकर पन्य
मनसे ठाकुरको मात्र माग सपने रिपे प्रवीणाम यया। टरान पोरेते
पाये एक बार देल पपे, पर ममपास नवीन पेपरवेश देवा, दो
भराना सारे मन मीवर पिये रोड़। पाठीमही पानीमा
मानन्दसी पी पापणी,पपद दामोरादरी यो। पर (पण पुरळार
उता की पूम मापेर गाई। पर धमाल ऐनामा सा
"हमारी पुरानी राधे बार-को पार से माई। टईने मेरी
परवरिण की पी उनीमरस दिन सपना प्रणमुना।"
नि पुरानी गवई, मगध मारी रोगपा भोर टी पामें
पॉम या गरिबीमोग्ने मानी।
पार- मिनर र पूण, "उन्ने सगरम पापा!"
रेणरानेर, "उहने रजा ममप भान परपसे

. भीकाम्त बीच पर पकी मांग पेय पठा। मुझे मादम नही पा, खनिए ककपर पूम रिमा मम्मय मोरे बहसे रानी दुमा ।। और पिता मी धायर पसे देनेको पार | रायने भा, 'उपाय क्या हैरी रा! म्यमम मी तो भावन नहीं है, परिर हो जानेपर पति, कुम, म्यम-स यम बायया ।' मम्मपने मतमै बात भन्तम बाहिर कर दी।कमा कि कपि पाटो बिम्मेदार हैव, मिम्मेदारी उमा मतीम यतीन । मता परिना रोष उसे भफ्नी पाति अग्नी तो पीस इबारते कम नही छोड़ सकता । पिप बारका पितृल स्वीकार करना,- पर मी तो कम मुकि नहीं। "पतीन भन्ने कमरेमें देख पा गापा, उसे दुबार मात एनाई गई। सुनकर पाते तो या पाच दुमा सहा गा। फिर मोग हा पाठ है। पापा मम्मप गर्न ठठा, 'अपी, नीच, मममम । बोम्बाद से वाना-कपड़ा भौर कामेव पानवारपरी बनाया, उपका ने सनिय बिना पैसे का सापको में मानिसले पर गया। गेरा प कि मो-पप-हीन सपा भारमी बनेगा। जी ही,'पापाने जसे खप वा पाती भीर मि पौरखमा । बोम्म 'पापाव साने गुर मफ्ने अरसेपो और तुम पर करते हो।' "बवीन पीक उसमोर मोम, 'उपा ने पुर मेप नाम मिा। पर पदो कमी छ माँ गोष्ता, ना पड़ा समाचार ये उनके मरसेमी बाहर नही निक “ममप और एक पार किन उदय, 'भा भी हमारा पाग, माया, पैतान, माने मासिकसे वो पूछ रेस्मा प्रते।' "म्पनिम्ने अनुमोपन करते हुए कगा, ।' "पवनवे पूज, 'चुरीराने मेप माम थिमा है" "मारिने पर मिलाकर कहा, 'हो।' "मिलाये पर क्या तुम मानता था। इसके बाद उसने और कोई प्रदिपरमही किय। सपऐ कुछ रेखा को एक बार परि-पार पथ गरा । पाहोचा, पापहीचाने | "परिवाने उम्मए नहीं मानी रितीने भाकर सार पतर्प पर्ष ७१ दो। सब रोड पर मोर ला किमारे रे मला एक कोनेमें गसेमें रस्सी पामे पतीन ब गा" पैगरिका, "परमही बनती कि मौकी मारमासाबिए अमि पारलर पर रिया नगुमाई। शयर न हो या पद इस गानेते री पद से गाती हो, पण मी हो, गुम दिन NिD दिल्लीन ए मोर भागे सगा। लबाद गंगा स्नान र मोर पवित्र हो, माघ और हिल स्मापे र ममप गुमाई पफ्निी पाफ्तरमोना एम बस ये हुए सीपमें मार सिहो गये।" एक महतो ए मौन गार पो किराने गौ, "उस दिन गहरप मस्त सम्म टाकुरी पारपणे 1 गैय माई । मम्मी मारवटा ए हो गई, पर पापिनी उपाधी अपरिपा इस बीपनमें दूर न दुर नये गुसाई।" "उपार" देणाने ररया, मोर वार नाम दिया । समा गया कि माने समान दर गेगारी देखा हम दोनों ही पर बैठे थे। उसारमा सुनने मात्रा प्रारो ठटा । र सोप पाप प्रम करना पिव। पानी पाने माई मा कण्ठसे तुरा, 'गुगर, पनवे सा, संचारमै पाप नामकी पीर स्वनी मगर क्यो" जमाने सामुदायिक एक उपसे अन, पर दुमा परमार पपपपराम मिसे।" राख्ने प्रयुचरम परा, "ना आनठी किमान सा पाहै। पर उस दिन मैंने मासेही भन्ने मा भनुमार सम गुणाई, साप म तिने पेगोगो से दुए सुनोगे कि पण मी नावा। पने मादमिरोप उधरम र मम्नी पाठ पारित करना पाएंगे। पर लोहा और पार नीला यम ममप मोर माप में पुर। मा दम रोगोप हुए नामा। मार ठाबो में ले जना परमी, पर ऐसा रो मही , सारद मन्ते निरस्य पौर पिदारगेगा पनो मामात्यारा बड़ा पप, म उसीसे रापानी गोपापापभितरमा । पो गुण, मते और मरिमर ज भीकान्त सममिर घरमे पाहै। पर ऐम होता इसी तय ममवार घर मपनी परिषी रणार इस रिपय बार पर कोई प्रयरा नहीं। पुति और माध,-कोई मी मयिक महादतपापि पी पार किया कि उनविकी घोकामा स्मदिन पर पच परपर पम्मर पाप-पुम्मको उपमय मन की और उठते खनाना पाई। “मग्य, उपवारमा हुमा " या मनकर या ना मानो पास होकर कर उठी, "सप पबमो गुमाई इसकबाद भी मेरी बातें सुननेकी रम होती है।" "उपरिपाठीहै।" बनवाने पा, "मेरा मामोस कमम तुमारे पन फिर पापडछ देखक पुपचाप मेरी पोर रेल-रेलवे पारिकाने व्या, "मेर पार रिन बार एक म्यभा मा पा एम्प । उसे गया नारे पित पर मंगम नाफर पर मेर आई । पिवयने रोकर कहा, 'भा में नहीं पसवाया "ये मब माप मत पीप, माप पर मैर पाए । पप गुम्स रिया, मा भाप मेरी फिरकर" पिताजीने पूम "श्रीपर्म लबर रोगी न बेयर" "नही पिताी मेसर मेनकीप भव पेध मोविएगा।" "पर उपा, मारी मौ भन मी बोषित है।" मगोनपिवासी र मेरी टी-समी मंसिका ना कि उपय मर गई। मौको एम्स ये होगा, पर माफी विचा, धनकर और मी मारा इम होगा । मोवामा पोएर विगार बसे गये।" म पुपा पा, ममता पाने पी, "पाटमें पपपा पा-ममनन विका कर में भी निरपरा-उपमिक मए, मारामनाम पयेथे, मैं मी पापो" देवपीने पुकारा पार ने वीर्य, सिने पर मोर कितने पेरेनीचे बनेकरिन पर गो- "पापमय पर कमें ययुमोकी मौसीकी पर सिरप ये एमने चतुर्य पर्य बगनासी नही, ममता " मपीईस परी1 योमे, "अगरी मेोदी पर भावरान निर्मक, मन पारेमे अनसकी बाते नाना पाहिए गुवाई ।" "नहाना, मामी। मतिराम भदा चाप उनकी कहानी सुनना पाखसमस रवा पा नहीं सी, पर रखी हुई सी जि मी न सकी । बोबी, "को वागावी मम करते हैं उनसे सब बाते सोहार नहीं भी बापी, हमारे पापम पातम मनाही" "हो यने । सपा काम नग, पर एक बात बतामा । गुणईमा परिकारासपरामि कममताने संबोपटे बीमार भोर कापरावरा, "मगार नहीं करना चाहिए, मेरे गुपदेव है गुमाए।" "गुरुदेर ! तुम्ने सम्हा दोघी" "मी, दोशनी, र उतने ही पूम्नीय ।" "पर स्नी पारी मावों पारासियों का-" कमरम्याने रिसीम पारकर कहा, "हर मेरीतर उनमें पिया १राना मी उनाने सार दिया।" "निमपीया पर प्रकोपा पना-- पास ऐसीरी एक गाना-पावि र योगोपी-उत्तम को कोई पोरनी-- पपीने मुह रोडारा, "तुम पेगोने पर हर मापसी मगरी गापा, मगदौर भार कमी पुण् देना वो मीदिए मासानीस पम्प कर सकते हो। हमारे परे गुगारंग संन्यासी, उनप उपास परनेते पपरा गूलन गुमाई-ऐमी वा निमा गनपर माना।" असीगोंसे मर गम्भीरताते पुण् मम रो गया। देवपीने पर सर अप मुतगत दुए गा, "रो दिन हम पेग पाव पी मोन गुन्पर जिस गुणाकरिए नागी, मुझे तो दम पार करते है, और मी यदि मुगसम तो एममे नाम पर वापमोसा उपमुपदं गा मेर समारमै यो है। पतीनको मैं मार मी मा भूब ऐति हो, मैं परम पप्पम गुरारोगे!"

भीकाम्त
रुपया । सगो बारेमें एकरम न बानव हो, सो मात
नही। मापती बाकी मारकी पारमा गई ।फिन्त मगर परमेकी
मा भोर प्राचिनी पी। मीनके प्रावरिपक्की परना परी भामेषनाराष
प-पकर मुझे रमना कर देव भी।
देवीने मचानक मन कसा, "क्यों गुणई, इस उम्तक मी स्पमुष
तुम्ने कमी किसीको पार नहीं किया ।
"तुमाए स्पा एसा होता माता
"मेरा म्याग नहीं। उमाप मन मलम पैरामीका मन 1--
उदासीनका-विसीडी व्यापम कमी किटी पर नही मानोगे।"
मैंने (सकर कहा, "की उपया तो मी नही मय, पाणे
सुनने में बहुत-कुछ गायब है। मैप प्रेमपान सचमुच ही परियो
हो तो उस कामाम इन्की मनापानपर मम हो चपगा।" कैची से,
गोटी, "एकी कोई बात न गुणाई, पाखनमै गरि कोई होगी, मेरे
माता पर विपास नहीं करेगी और हमारी मधुमिश्रित पाकी मी का
ख्यान मरमही पा सकेगी।"
"तो फिर उसे कुस किस पातकाहो न पामको, परन्तु उसले निकर
योवहीनी येसी ।"
रेणीने र रिभकरमा, "ऐप नहीं रोष गुसाई । स्पडा सान छ
कमी नहीं सकता। मरीन उमछ, कारप मझे ही उनके लिए स्टम
रो को भी उनका मन्तर निरन्तर मभुमुल दो पेगा । मिपाका कारणे देखते
हो इसी वय इस पोस माने सिक्ने प्रेम भागे । पर पप निप
राम ना, उनकी सारी अपना मानी पाय की सूही बायप
मिया दोभा-मग ती मी एका नहीं हुई।"
कुण्यर कर ना मानो भवानर मन ही मन मोह उटी, "२ र मर्मत
दो मे नहीं, ब्एि प्रापहीन निक मार्टिको निरचा करते से
मन बी दिनमै ही उठता है-दोषते पारित मोमब
फारम पम्नेको दिन-राठ ठगते हुए मरे बाये। ऐते होमेको देतारको
सुम मेग हमाय महाप्ट करना सीखोरो -पर मैं पापा मम्मा
पोपगई, इसलमान सपड़ी एक पात मी तुम नहीं समझाये । पर

। चतुर्थ पर्य परि तमारी ई पेना, तुम उसे मोदी भूमधमो, पर यह तो नहीं भूल सकेगो, और न म उही मौका पानी पी सूलेगा।" मैंने सीपर रिया कि उसके रहम्मका प्रपम मंध मैने समस्य, पर अन्तिम मेशन प्रतिवादा, "तुम पा मुससे पही पाना चाहती हो माता, मिस प्यार करनेश नाम होस पाना " "इतकी बात तो नहीं रही गुवाई की मांलो पानीसी पात।" “पर माया ऐनी तो एकही। सिर्फ दौडा र मेर।" भैरपपीने करा, "नहीं गुणगारोनों एक नामवो मौका र-पर भोर म माबका । मोरते महस्से रखो दी ओर र उससे रखना वापर तुम समझोगे "बर पुण्मदा समगा वो फिर मुप्तवे यह सब करती होगे।" मरना बरामी महागाई। प्रेमी प्रस्तविष्यको रमाका रखमा मना दाई रिया परवा न खोबदी कि मारी यति उनसे मग । म गेगी और हम गोरे प्यारो प्राविमियम दोग पा विस्तार और हम पार गम्मरणा, म ग पाइवे हो उपाय और एम पारती पन्ति । बानवे दो गुम्प, ल मेमरे नसे हम मौतर दी मौतर रिखना रती है। कई उन्मारते मारे एपकी पान नहीं पाती।" में फुल मन एरना चाहता था, जिसने मेरी मोर पानी नदिया भीर मा मागर्म होना परोरा, रा रमाए र मी महा है, माय भाना मी ना। पोरगी परन्ता गित रिन रमता, र उनी रन म निभास रर माराम पाटी। मोदी नये गुमार, प्रेमीको सो प्राप्ति, मिस लिए, निमरवाती मोशा भौर दुख नही है।पर पी तुमसे कोई कमी नही पती" " पापपूर्व पनी होमही पटी!" परीने रस, "निरपपूर यनती हैं। सीलिए तो तुमारी मगर मुझे गन नही होती। माधप हुमा । 40, "गारे निरमाई टोभी नहीं मौसमरवा!" उपने 10,"यन-सपर महा की, पर मारा पर उससीन पगी मन,

-
भोफाम्त
मान्म इसे वर भाभारते मरा इस मोर मी झोया"
"पर इन दिनों की तुमने मुझे ना सपना टिया
"धनगा, साकिम प्यार मा।"
सुनकर मन ही मन , प्रम्हारे दुम भौर माला मौन प्रमेय
इतनी रे बाद भा महा माय ! प्रवम होता है, पविभाम पूग और
रस मारापनामा परिणाम देख ही दोन है।
"पारमा पासा पोपममता!"
" म"
"पर हमारा बा-तप, तमारा मन, म्हारी रातदिनकी ठाकर-सेना,-
स्न का माहोमा, क्यो"
पाने पा, "ar पे म मेरे लिए पौर मी बा, पौर मी पार्षद
चटगे । बम्मे म गुवाई, सस- मेर-मार दोनों बने गोपनियो।'
मैंने सिरिसरा, "पा नही पेग्म कमाया, मैं बम भ
हा। सपने पामे गौरव बारेमै बाननेकी होती है।"
चीन सि निमपात गोरर हा, "गोगो बारेमे । महाँ, उसे सस्नेका
तुम्हारा काम नाचमुचनामोगे।"
पढ़या ।"
स्वमसि स्तम्ब कर पाने 50, मच्चइस मामममें परिम
रिमी मानोगे गुबई,दो कमाण्ठाको न तोब पाभोगे ।"
इस पयमै सम्हम बाकि भावहाँ एक सच यता मी पित नों।
पर उसी समय म्मन कोई मामला हो भौन बन्द कर परे पेर
करतापा 'यमोमे को। यही बेरकर दो भाये किसान
दिन रस्मे --हो म | सीधे नहीं।'
गतको विमेनेस प्य हुमा सोच रहा था कि ये कौन एकही पर
में मारकरी पर उम्मीपते। सिमी पावपागल
न पारा मनाय, मि, मन मषि-ऐसे दोबाने तिने
नाम नहीन पने पिटनी रानपामा ६पर सपको अब भी

चतुर्य पर्व
प्रैन-v प्रति र सका। दिनको होता , भिषण, पप्प
मावर पर पैर मदाने गापा मी हावी भन्ने हो भन्दा बिरोप,
---दास पयों नहीं होता। मन कावास्मेिरा पा मानात पसर
है, पन्य थनारी पस्पामा। तो शिदूसरे ही पण उन मनकी दोनी
भोसों में भी क्यों मर भाते हैं। रि, बियर, माति, मन, इन तब पाकी
सरिकसपी वाचनासाठी।
फिर मचाना ही पारिए, पीछे एमठे काम ही पसेगा। और तो मी
परी। पही सोचने हगा किसनेको देने संपन्न करें। बसना एक
रास्ता मानता मागापरबाना । हिरापाणी नर्सरर मानेकी
छग दिवाना नही कारमा पनि मही, प्रपोम्ना, -कम्पका विस्तृत
रिपरप ना सिर्फ मैं य मोर मर में नास सरप परनार मारिष्कारण
मार ठन प्रेगोंपर पोद देना बो पर गये , पर निमप र ािस
भरतना रोगानी, टाकुरबीची मंद आरती होनर पामेही पर
परम पर सरप पान परगा। पर दिखतरे देवा पा
परे गममेव मस्या पात है। न्नि उसे गने दो। साचने, मोर
नही तो पर्माने रियो मेग्म, उसमे एक काम पर मी होगा बाता में
मैन म रेमो दरममावासो पाप होर पागना परेग्न, परिपपर
बानेश गुपोग नही मिरेगा । मो दुरुपये मेरे पुरखेडा ये 10
पवर पपने लिए बारी हैं।
बहुत राव मो वरार मई मारनारमास शिपायोउंगा
न पर मीरपनपने समो गपा ! पता नपिनी र
सोपा, र भगना ऐसा लगा कि स्पन ग्यना मुम ररा। एक बार राराह
गि गगरपद ममोरर ममान नहीं भा है, सिर सापारि
पपद प्रपूर मातमारती एक मई, पर पानी परेश मुनिमित
Tमा निनार न है। मन मरिनुन मिदासर मी नहीं रखी, मौस
पोसार देगा मानीय सम्वा। पिनों में प्रमातीतुरम मीटे पप्पा
नारामा मागन पश।
सागिप गोराम साप, पंडी पन पाडे।
रखनीयो मम्म मपी, दिनने पट मोठे।

मीफास्त "गुमाईची, भोर मिसनी देखा सोमोगे! ठो।" समैनेपर ल य । मखरी उठाई, पूर्वकी लिखी गईt- सामनेकी मार-णनामे पुपित बंग-मम्योपो गुण नीचेका ए। उनी सपमसे दिखाई दिया किम्पका का मासेमा रंगका भाभत है, से भी गत पुर प्रामः मन्तम भाग मा गई हो।- मनम कपमा-सी होने कगी। बमगीवर सामने मापाः- को घेर ये। उन क्लोकी प्राध्याहर बार-बार कानाम माने गी। ऐसा गने गा पाप सम्म होगी। बानीका, मुगु भोर सामा पधिोका देश है। मानो, या उनकी पगपानी नचा सरमौर पर पार बम्ब (मोमम्प) उनमेन और काम काबा मा पर हैमोरिन पकली मीह रेसार गवाहो पाना पड़ता है। तय-व्यती प, क्य-स्पर्धी मापा मोर रंग-बिरंगी पोशाकका बहुत ही विचित्र समाध है।पको ममापारी पोरन गमार बर्ष भगमिठ महे । नाद बुरा मानेकी भारत पाई गई । उम्से मामममा मानो राप-महबोकर ये वारी करणे।। मन परे दिन पम्ने नाम-पानका मोल पा रोगा। समसका उस्तार पकते मी महा मोर कर रत मीर नहीं बरते। मंतर बरोपवन यर कमी बन्द मी बाप, परन्तु पाइर इस मम्मी पन्न होने की सम्मान नहीं है। पापर मेरे बो, मो-भरेका चार नहीं है। हम और समय पारेपा न , गाना तुम मुन्ना पोगा। इस रेकी, पत्म होग, यही म्पषस्था, से नियम है। पार मापा, र सारी दोपहरी-मर पापा बनमें दो पपौर उम्प गोत्री 'पिरा-पि' पुरको भविभान्त सेसे मेरी वा निसा कामणि दुमा मा पर मेरी ही व्य मुम्बइमा को साफ ना-निारे पर और मी फोर प्ठते बार-बार उन रिलार पर मी नेत्रुप नही कर सका था। माम मफा कि इस देशम मोर नरी मावो उनोस सब महादेम भा पहुंचनेपर तो मनुष्य को पा पावामी दो रिनका उपद्रव भर मी एक नहीं सुभा पाचारण और मीमोगा-सा मिधेसवा, जिसी समय गत गरेका कप पार भामा । परन्छ, म पाप सिसक पम्नेका मी मौका माया, महरियाली

चतुप पर
सापते काम विगा पुरा था। नाराज होकर बोय, "मैं 'गोपाई भी नही
रमौर मेरे विपीनेमें हार मी नहीं है। इस समय भाषी पतको सोदेते बनेकी
मथ को सोयाबरत योm
पेणगीने पारा, "पत है गुहारे, तुमारी तो भार मुरली गादीसे
पारचे बनेको त यो! मुँहनाप पोहो, मैं पाप पार र मती है।
नदाना नहीं। भारत नरी, बीमार पर सस्ते हो।"
ki, बीमार पर सवाt। मुसाकी गाड़ी में बर मेरा होमी पान
बागा, पर पायो बलामो कि तुम इस विसरम इतना उत्तार क्यों है।"
उसने करा, "और रिसी उदने पासे में दर्द से रास्सेवक पहुँमा
को माना पानी गुनाई।" उसका पारा सर नहीं दिलाई रिसा, पर
समरे हुए बाकी मोर रेखार की रवनी म रोपनीम मी यापन गया
सिनेमांस, मानते नियरहर पैपी गिर रोया।'
"मुझे पहुँगाकर रि आभम पर पामोगीम"
पैमाने परा, ""
पोपी उस डोरी-ती पैटीको रिजनेचर पर रखने का, “यर पा
बगापग। रास्ते में दोषिपारी रपना,-रये एक पार देर।"
पाए पुण्यारे लिए एम नवम | फिर करा, "मग्रठा, इमा
इस यस्तर माना मिप्यारे। एक दिन मारा नाम पा उप, मात्र मीही
उपो-रामी महोबरम सप्रे"
"वरो, मतामो
"हम भीगो कि मुसने रपये गिनने दिमों पर गिन पटा
पर या इम सच समावी रोगे परठे कुछ मोर । मोर ते पुछ
मोर उौ रूपये । पने पाले मेरो गुमाईची शिसपर
पाईप माममोपले इमाय नाम पारा मदारकार
पापुर दी। मैं मी पर मैन पारग, "भाव मुए पनी
पण it"
पोदी र भोर होगा उसनेम इसे गरम
"रम ममीस्पा'

श्रीकान्त "मुझे मम । म पुनने गयी।" "इस भारीर महाराण' "नही रसिका ! माकी पूरी पर मैं दुनकर बाती हैं । नयाँ खगको कहो।" 'उनमे म्यने भन्याम्म । पहाँ से दिन र पा परया पाकिसकी मा पर मामा समस्त गुम-म्बर कममता माँ पान पाती है। सब पस्पनीम उब्बा गोबो उम्प, तिलो मनसे और बोपरि सबिनम कुमटण या पटेल सनी लन प्रधान की भी पिताना मने पात मा पर मो मो मेप मा - मी मालम-यमी पर ON पावना पगार पारे।मह मिसमी बदोर्पनावित परी निष्पाप दुतिय पवने निमित मर-मारी यिर पगे। समर्म सिट दिसे, माने औध पर मायब मामय राम मनोम हो गया कि मानो दलको मान्तरिक माकप पारे समय यही वा। बोचा, अगवा गात ते मोसमार मात्र को समी समान। पर पर मानी भोर अपने सीने गा एकममाम र पप समसभापठनी रिणAR वाम कारा, "और मा पोर्टमा AE पो, हमारे साप पार न पड़े।" पसीने सामने स्नान मी किया है, की मी मी बाहेर- पदारे पुपए पूरे पूर्ण होती।" ने पा, "पू मावाने देना,पर मम्मे मीणा र पाने को दो पर मीणारीबापम दोयी।" बरीने मा " पारनेत्र बननादी, औरे-गरे। ५- तुरीवर ही है।" "तेम साप पर मुमुवध योपार पवें वोरम एमे मारी मेहनत म रोयी।" पर भयो । पोय, "परनाम सपा नाई मपण, पमेयाबाने पाप-पीपमोरसको

पतु पर्ष
माझमी गरोदी दूरपर प्रदेश बरा। ने पासर पम्पनी
मंटरसे पटा। सिर मयप्रकारमदीनही लेप
फारर पप रेन्बा रिजरो गई। पी भाग-मामेभर में पीए
पम, वारपन्न मालिकही नरदेन पर गार।
पा, "मया, रास्ता बानी भेगी।"
"ना, कमले कम मानव दमारे रियम्या पानानार पाना पोगा।"
"ममा एक मनुम्प रखोदी"
फोन- मनुगम"
"रामे तुम रानी यमोपी।"
"बने मारा स्पा गुरुमान है।"
बापनहरीमा, पुरोगा।
"सुपरी मारने काही मन्ने मेरभो, रिसने देते
र म मर र ममेरा दिया है, रोटम भव सा म्मम्वटी हो -
मुम्बा, मो दुम बहाचे पडे याये, मर मर प पर एक मारसे
ग्गरागरन नागे, को।"
“मा पटा, पापमुरादाने"
पान बरन दिन, कुदेर राद गुनगुनार पर -
पगिरासको मुन पिनादिनी, मुमदुम दानो मार।
मुना कारन प्रीति कर बा, दुम मी बारिग ॥
सनम कपा, "सरकार !"
"मगारमेर न मद"
बा, "टो पुण् और गामा-
परने देने
माम मापा-
पगिदाम परेमुन पिनादिनी, प्रीति बाठ न मारे।
प्रीतिक पारन प्रान गंवाये, भागिर प्रीति पारे।
सर सम्रपेय, "इस पार"
परने सारदा, "पार मेरनी, पर पहै।"
इसकन। एनो पुपरोयामा रकाने

८२ ग्रीनम्त कि इतपते नवदीक बार और इक पर इस बार पपपर उन्ना राब पाप पर मनवा का नापब महाँ होगी, बाप नारेली, रविन पीज्य र नई पार, हे मी एक महान गाया ठेसी पीरे और युपपणे पार भा पहुंचा। प्रकिनार र यि हुमा माधमधमेशा एक बनाया। यानीकी निक पूरे सिम पाठे कमाते है। खुदी र बामें झपकार नहीं है र स्सेय में सन्ना नी दुमा है। त्रि में देख माया लि हुए बकरे खप बगीचा मानो सारो । सामने परेको हुए मुरे बम्धी माने को कहा, परम्नु, उस प्रस 04 पुख रम्नीमा पम्पमै ये निकी मधुर करते एस सुरिको पति है। और ते भपिक मनको इम्प बाम बीका दिन सम्म इन भाग्येक पापाने सादे ये एक- दूसते मि ए के 84 प्रचार-निमें रेयमार पूरे और ये मे हुई मासे गौकी दिपकी मोर मानो जाये पे 1 पोसमी ने सरे प्रपा पर न उठा चय सम्म एमेटा निवास बाकी मपेतनाम र भग। वा नहीं जाय भाग ना मा कम । पूर्व ARमय मोतिर्मपका भामरा और उसकी मद महिला बग पाडा तसे गा। पर कामी भौर पसे, शेमा और पैरम मौर. भापित पते परिमास सम्मुनका अपन,- fमर पेच बलि पापी माप मारपीन रिकी ममुप मापा दो। सम्मा, ममता और मवाचित विमले मेय वम मन्तर पर माटेदी परिपूर्ण हो का, अम्म काय, "बरस नमें तुम्ने भनेर कुन-दई पाये , पर्यना करा किस पार तुम वर्ष की सखियो पाली मार कर सामने पदम परमास पो० पो को किसने मामले परप देना और सामान धर्म रोग या गुणाई "मनी बात मम्मे पाय न पने की परंगी मग यो की सहम उस दरसर मन मन ही मन त माविम हो गया। कोई पर मा यसको स्नेशिए परमधान सीधी रेघ म रीय पतुर्य पष तरफ सफल नहीं हुई, मन्तम अहोगा। पैगपीने मीवर प्रवेश किया, साप ही मैंने मी। फ बोरवे हुए उसने खुद होगा, "मैं मुरुम ही है गुसाई। चिनो पार-पम मानेको निोदन पर रिसारासी कमी परियाग नहीं करेगे।" छन्दोमा किम कामी साफ नहीं है, पर पा कानेका साहस भी नहीं एमा स्तिकहो। वाम सरसे गुनगुनाने भगी- गठेमें इमाम माणिगेकी मनु मागाहूंगी, और कानॊमें नवास, श्याम गुण-पके पासँगी। इमाम ही धनुरागर्नेगे, पीव पट सुन्दर पहनूंगी, योगिनी बन करके बन पन, और पप पमपर मटगी । करे यदुनाथपास- पीत ऐकना पड़ा। कहा, "पतुनापासको यने रो, पर झारीको भावाब सुन पो हो, सौमेग नहीं !' उसने मेरी मोर रेलकर मृदुभाससे सिर एसकर दिया- धर्म भौर कर्म समी नावें, नहीं रखी हूँ मैं इससे। ही इस पफरमें पड़कर, बाप पा पैटूमीवमसे ॥ "मग्ण, नये गुया, मावे हो किपरे म मारमी मौरीका गाना नहाँ मुनना पारवे, उने बहुत पुरा भाग।" मैंने कहा, "बानत्य ।न्ति में उन 'म बम ना है।" " पापा यमर मुझे ऐनमा "टरप्रापर भारती एकहो गई है उम्परेन यनेसे उसमें कमी पपगी। "यह मिया मा गुब्बा ।" "ना।" "सो, सो तुम मोपनते हो। रमाबाव मते की स्नेि रिमेन पनेपर बरगी सेवाम पमुख ती कमी हो सकती है। इसपर सा दम विचारते हो" "। मसे पियने कहा नहीं समस्या, मने पर मानी मासोते

श्रीकान्त
उसने भौर नहीं प्रा, न बने से मन्यमनस भाषसे सबकाया
पर मेरे मरकी भोर तामती दी और उदार मनवोदने गी।
रमिता मर पनेस बोम, “पम, मा मौर ना ।"
"गुमर नर्स ने
"हो, उने हम नही पोमच बहस मयबारको निरन कर देती।
पगे, भव"
ठबम हो गया है। पर पा मठ प्रामः एकान्तम पर कोई पाव
माव-माता नर्स, इसएि तर मी या पथ बन-हीन पा और मामी
पात-पाते एक बार फिर पी मन किया, 'तुम मा पमुच माविका
जापायी।"
"पार-बार या माठ पूजनेसे प्रममा मम होगा गुम्बई ।"
इस बार मी मात्र नरेला, हि मने-अपने पूम, व दो बार
बार या पावसा पूस्वास्से मेरा काम !
मठम मेकर देखा किस पार समीग बार निकामग
है। रस बहारीपरी भाषाब म्पस्त हाकर दुपारीबादी मचाई भी
माहम मा किपा मगह-माणी ना थी कि व्याकुरको निद्रा मग करने
बाम पा । पाठन सुमता है।
हम दोनो मने रेला, पर रिखी मी देसनेमे जान पा
कम उम्र होने कारप ति पया एक पर मुस्तर्ण भौर पर नाच
पापा ठाकुरबास माझा पठी है। उt पास गया रबार कम
प्ताने ना तुरसे मन करकापसौ मौसमी
किन्न उतने में सम नहीं उठाया । कमलवाने पर मोम प्रमेय
किपा, और मैं मी अपने कमरेमालिक हुमा ।
स्नान मोर भार पप्प और सपासमा सम्पन्न हुमा । प्रम मादार
मेरे बानेकी पाती। गिने सोच्ने गरा तो देखा कि कुरा
मोमेभौर उमें व्यक। मुझे देखते ही बोम, "नये गुबई, परि
माये हो तो कुछ मेरी लापता पी बरो। पा सिरद र पीरिममा
समय ऐनी बहिनीको एक बार मा गया , क्या ऐया एक मत

। चतुर्य पर्व नही माता । पासम्वी रंगदन दो कमोम कुमट गयो न गुबई ।" मतएव ठाकुरपाम पुन्नर गम्ने पैठ गया। उस दिन पाना मागे का। दूसरे दिन में महीं भौर उसके पादमारे दिन मौन। मैं मोदी ममी र तोरनेट साभी बन मना । प्रमावर्म, मप्पाहमें, सन्याको,- कुछ-कुछ काम पर मुझसे यही मेती है। इसी प्रकार स्वप्नकी क्य दिन करने मो । प्रम, सहरपतामे, मानन्दम, मायफ्नामें, भैम, गन्ध, काठनमें, परिमारमान, मो कोई किन नहीं, फिर मी प्रीप मन पीच-बीरमें समग से मरीना कर उठा कि पासा सिम्पायर होपारकारे सम्पत्य वोररहन मोरे-से निबार सिौनीक पीछे पहना पागपन कर ये होइन र भात्म मनामे मनुप्स क्ति कैसे पता है। फिर भी पर मागा), 'बर भी नहीं बना पाता | इस रफ मोरिया कम , दिन मी इस समय भनेक ोग परमस्त हो ।। गौहर ल एक दिन भापा प, फिर नही भागा । उसकी सोसार देने का समय भी नहीं निकाह पाव ! बा मेरी रक्षा मी दुई! बमा मन मम मोर पिारसे मर गया, पर मैं कर पाया गति- रोपसे ना एक दिन पान सप मान गा ! स्पिर करा, मर नहीं, पारे कुछ मीमों न होस या बगामेदार मुझे मागना ही पड़ेगा। पर रोज रात मपम रेणवी मार बगा देवी।। प्रमातीसरम नव कविका नीद उड़ा देनेथ पर गीत भकि मोर प्रेमा विना रण मायरन होवाइमत् उत्तर नहीं देता, कान गाकर मनवा पवा।। मोलकोम मांस मा बाना चाहते है। मखारी ठाकर बस पास मोर बाप सोड देती है तब नाराज होकर उठ बैठता है, और मुंर पो परे परमार साय पर वा। पर दिनोंत्री भादतकी पगते मात्र अपने-माप दी नौद मुझ गई। कमरेमें मापार। एक पर ऐस मा विगत ममी सम्म नहीं हुई पस्तु फिर दो हुमा । मोना होकार वार मामा, रेम कि यह पाँ है, देय हो गया है। वितार देते ही मारा भार सही से गई। शतका ऐष मनात मफ्लुत बहराइम पाडे महा रेला पा। र पूज, "गारीमीयत सा मणी ना।"

स भीकाम्त उसने म्मन ती सकरपा, "गुलाई, दस बीच गपे।" "मो से" "हरित मारवैसी का नहीं बचपर महीं उठी।" 'वो भाव बोपने कौन गा!" मॉमन एक मोर एस भरम्ने गरी पेहम कुछ पोस पूजन, उहाँको दिखापर बोडी, "इस पको किसी तय मासे काम पहरण ।" "पर यकुरई गडी माग" "माम माम पनाहगी।" हुनपर मन नपाने रेखा हो गया, उन्ही निर्यब सिमेनोप ! परा, "नहार में गोरा है।" "ये व्यभो पर इसने मेरे मध मान्मे । बीमार पापमोमे।" "वो गुसाईये नहाँ रिपई रे ।" मतीने मा, "वो यहाँ माँ, पर अपने गुरवक्ते मि ने माप ग " करेंगे।" "या तो पता नहीं सुनाई।" इने रिनोसे मठमै राते हुए मी रागी सरकाराम प पनिम्ना नहीं हुई इस मेरे मने बोलते भोर कुछ उनी निर्मित स्वभावकारण। रेली मुले सुनकर और भफ्नी मोनो रेसार बार गया इस मारमाम न पर, म मनाचार मोर म मासरीरका बाप । उनका भपि कांश समय मम्ने मन समोमें रेणा धर्मग्रन्पा साथ पीत होता है। इन गोधर्म-मम न मेरी मारपान विधात पर किसी पानी नार, लिनेकी मंगी इवनी सक गम्भौर पप्प विचात भौर निमते मानिस पेची मरपूर यती है किसन मत भौर पपई रिम भामेमना करनेमें मि सोपीना पति गुम्न होता है। माने माप दो पासमा अपनी कि पतई करना रिम नि । एक दिन एक मामी-सी एकरने पर मुस्कुराते हुए इस वय पुपवार देपो रह गये कि कुमाई मारे मेमरसे और पनि म । उत्तगरते ही मैं पपवाण उमसे पवार पम है। सिम एक पबना हाइम्म पीपनी परमे इन्नी मासे पो

बतुर्य पर्व
पनेर म निरपमिगन रसके भनुगमनमें निमग्न पनेपर मी, रिची शान्ति
मौर की निर्माताको पपुष्प बनाये रखनेका यस्य उनसे पूछ पगा । पर
पपाय इस यात्रामे मर पावर न मिया । मन ही मन पारि
कमी परिभाना मा, योरेगा पपमा ।
नयाँ मोमें मी ठाकुरोकी मूर्तिको भाम वीरपर बामपर ममग मोर
कोई रन पर सम्या, पर माश्रमम गा रीति नहीं है। अकुरका एक
पण पुपरी बार पब, पाब मी या मार पपरीवि पूज्य र गरा।
पर प्रकारको भाका मार भाव बहुए मुहार मा पड़ा । देगी पत्नी
बासी है मौर में काम करय अवारय-यकर खप पर सिटरो
उटा है। मुहार पर सपा पागलपन समारो पर। भान मीना न
पण । मनेको अपर पापार माया कि घर मे दिनोंसे वहाँ म
सविपत्ति समप इन होगीको से और बढ़सेवार सता मामधे मी
कोपीय।
और मी दो दिन प गये, जितु मर मौर म। माता स्वरप हो गई
६ पय और गहमा-मस्वती बोन। पहिनों की वरीयत मी टो गई है।
परिकापसा अमको और मामे, उनसे विरा मांगने गया । गुणईवीन
रा, "बमोगे गुसाई मन पर भागे।"
"मातो नहीं पता गुसाईबी।"
"सेनि कम वो ऐ-रोकर मममी पपगी।"
या पानार मन ही मन गएर विगत इनके कानोंमें ये स्मारो गत
पांच मा।40,"परसों ने सगी ?"
गुसाईपने बय सारसा, "पद राम नः पनते !"
"नहीं।"
"उसका समाप ही ऐसा रिसोई पहेबानेर पा छोकम भएमपशे
गठी।"
यह बात मोर मी दुरी गीपा, "सिपी भारत हो घोरपरनेकी
एसोरेगी। मैं उसे रोकने सम्ण " पर या करा और मकी
माखोकी रफ रेसन फेय दीपा किदेखा, मेरे पीछे मरवा दी।
परिकारास्ने पुष्पित सरम परा, "उपर नायबर दोन गुवामुग

८८ श्रीकान्त सिमामा नहीं कर सकी और बीमार पापामते पपुवाम म्पिा भनेकर मो रिपे । मापस मुलते नए स्क्ये ती दुल प्रारकर यीभी। और रि देणा-यागौ पातमा-सार करने मम्मा। किन्तु मगर कमी प्रमाग पहा मानाने मितारिपाको पनि पारे पभोगे न गुवाई।" मिचकर बाहर न मापा, माया यसपर वीवीपीना। पर परमात् परमारोगा II स्नेकन वाने सिना साने और सुननेकी पसना कर ली थी। नर पर। मनुमब पर या प कवितकी ताजी पनि भवरमै प्रेरे बारे सचित हो परन्तु सप्तम मौनी बोधा पाहावामा भनीशु मन ऐसी मनोमन समाये अपनी मांदा नारटगा! नसीन भा पहुँच र प्रहरी तगम भागा, क्योकि परम्स माया र महाँ म । सामवरणमा, "या का नमीन, पायो वहाँ मी मामा भाग मीन विशेष विधिनायोम, "किसी पनगर भूम ये मे, नाना-जाना बरकररिमा कही सासकामेको तर मिगी निमित्त मा अपमा।" " मबीन, उसी समय करना होगा।" "माम किया कोई । वा, पामें धूम मकर मैं मफ्नी धन तो ना! Rो 11 एक बार उनसे और पूछ।" 'न" "चही कमा।" "र उसेमा मास्म रोग्य नवीन " पना बना ली।" और माया ममैं उन स्थानको मठ मारा। पा, "बाप मान, समय नहीं बन। रबीमार होने कारण गाम्चार दिन बराबर मीना निर" मनने विमट नही किया । माराज होकर , "at अनार खसुर्य पर्व सप मानती है। वैषी कौन-सा मन नहीं बनती :-पास्मा नहीं कर सम्टी परिमापनपी फसे पड़ी होती तो उसका भात मराना मौरन पनालार निमा औपने पाप वन पप पैसे माने मजबूते मारपे" उसे शान्त करने लिए मा, मरम्मा सपे पर क्या करेगी, नाना रेमबीमाम पटी, गाना गापर, मौत माँगकर गपुर-रेस्ताको बारी है।रोफे दो मुझी साठी होतो और मा ! शवस्सि मुझे यो ऐय नही मालम्पो मिचारिणी नवीन मीन का ठता शेकर पोम, "मस्ने ए नहीं-रोम मी पनते है। देखने में मीना मोसी पी वी गरे। ऐसदी चाय और सी हो पाता। दो पापायी मो मेमी ना, मोंने परिमोश प्रय एकपका-मरो पावरला ठाकुर-सेवा मामपर ग्न गोगोओ जमा-पूजी और एक ये पाहिले नानचंद Radit मर सरसफल सुना है कि भतार नाम बीत वीणा सम्पन खरोरी गई है। इन मी नहीं या पान, सेमीन एक दिन गियों पेरमें चमगा।" कस, "पर परमाणाणाद सपना और तमापासन पाता मोफम नहीं नपारने प्रेरन सीबार रा, "मारोपापूर्व अपना सिवान। पर करिए, विमा म स दिन सामसार रेदी पर नाम रस बीण बमीन दान रात मना किया पर नहाना। मानवालाप मारल गया, परमा , इस पर पोरने ने मन पोगा ! एन साका, पनवे । म प्रार, 0 इम फोरेन नहीं लेगा मौलिए, दुनिए इनकीबा" नवीन रम गर । एकावर पान गया ।मा उसने एक बार भी न मैं वितथि ने दिनीते मम पड़ा हुभाना मनस्य कि पूच्या यो मा पासा, पर मन ही मन मिन्धमा । उसने दी मौर एकधार ( मककालिदास पारेमामा भूमणमते हो या। सवाta जा मुझे माना। नपानी पाप मन ही मन विचार प्रने पर माला । - ९० भीमात एक शि उठ ला इमा, नये किसमिस बम बना पाता है। कही उस मोये महीनो मम भारमी रसे ये महाँ, ये कम्ठी बहार पाये पतितका दाग मरता है! और या गौहर ! मेरे यहाँ पने समय ही पावर इसीलिए पपीने उस खि तक काप गुवाई में भगर में पमर रखे तो थे नाराब नहीं होंगे । नायब होनेवाले बारम नदी है। पर मन पर क्यों महा मावा! उल्ने भपने मन ही मन पने मा सोष म्पिा। संचारमें मोरको माफ नहीं मना पामेको मी कोई नहै। सपना पैसा, पन-पोस्त तो उस किए ऐसे मानों में मम स्नेपर ही उसे पैन मिले। प्रेम भार उसने किमा मी पोवो मरते पासोर पर बसी रन पोया भी नहीं किया पीछे किसी मपापा स्पर्व न हो पर। वैपनी मानती है। उस नटिनम मापासे विनम्र प्रपमा विच-से इस पत भौर साको मूमे हुए मनुमको बचानक लिए ही प्रयर पा वाति माम बना पाती है। स्थान पच गया और मैं गरी मापे बैठकर उसी मेवी सम मम सोच रहा है। वहीं खोकर रखें। बपि पाँच पती ट्रेन फमग्र यो भामेर देर नहीं की सटी। पर रोक न बगना इस व्य मावतमे वाकिसेगमा मन्दीसे उठकर पाने मिए मानमीमन पानेका चारे यो मी , पद परमात मय पर भान प्रान करने पारा दिया था मोर मागे हुए पौरको खोव मना मैप परमारने रिक पनागस्पक मनुरोप पाठ माने । पर मार कर समापरण मपम्पनी सम्पन्न करनेमे कोई नहीं। देखा पपा मा दीप मार मोमे, "तुम एक मार दो मुमपी, गुवा।" शिमेर भाप । भोयनमें लोकर वैप्मयीने पा, "साचे परन्में तुम राव रोपापणी, नये गुबई । ठाकुरबीन पोड़ा-ज प्रमरस्य रता, कमोमै भाभो ।" वरीय जापानी मानी गई पी 12 मया। पाने Rए मन्नने और बोर राम्नेकी प्रपा महामारम्पकानेपर मोम मेना सेवाबासी मही पाया।

पतुर्य पर्व
बने बकवीने कहा, "नसे गुणाई,त्रि भामोगे म!"
"तुम रहोगीन"
"म बवामो, मुझे गिने दिनतक पना होगा।"
"तुम ही पतामो सिकिसने दिनों बार मुझे यह माना क्षेमा "
"नहीं, नाम में नहीं बजरंगी
"न बवामो, पर एक दूसरी बाताबर रोगी, बोडगे।"
इस बार पीने पर मा, मी, या मी मैं म नै । इस सम्प
तुमायबो पणा हो सोच मे गुरई, एक दिन अपने भाप ही उसका बार
बार इन पदोंने बानपर भाचा बाण, लिभर तो पहनी
जमाता, कर बागा, पर मो पराकानहाँ पापा । पीपरा कि
पमा पर मार ली हो गई। मसकी रेतारेती उसने मी पप
बेरम नमस्कार या । नतीने उससे माराज होकर हा, "हाय बोरकर
नमस्कार सा करती है ही, पैरोकी पूनगर प्रनाम कर।"
इस मासे मानों में पाक पा । उता की मोर नम करते ही रेखा
उसने दूसरी मोर मुंह फेर स्मिा है। समोर मन कार में उनका
मामय पर बाहर दिया।
९
भाव-वस साडचे पपने लिए निकल पड़ा। उस पार से भी
माग गुम्तमप है वर्माडा निर्यटन | पासि पैरपर मानेका शापर समय मी
नग्न और प्रपोग्न मी म होगा। छापर या अमाही मन्तिम बाना हो।
गिनकर रेता, रस नि स । दस दिन वन मिासे फिरने से।
यपि, मनमै दो महीपाल रस दिन पामे को यहाँ मापा पोरगाव
मे विरा करा, दोनों एक नहीं।
दुबैको ऐसे सम करते हुए उना है कि यह पिच्ने सोग मा समुह
मधि ऐज से बापा,-भपात्, ममुका बीवन मानों सूर्यप्राण और
पाप प ठको मनुमान पायम ठौर-चौफ गिनार लिखा है,

x भीग्रस्त सम्ध टकन मिसना र्मि मचिन्त्य ही नहीं, मबुद्ध मौ-मानों सनी मसाब-किताब बाहर निवाम और पुरा हो महाँ। महा अन्वे संगर सिमिम मनुमोनार, परवा पन्ज गणना में कठिन है कि एक मनुम्प मी कितने पिमित्र ममुमो ममें स्मारित के पता-पॉपर एस एम म तीस्मता और स्वामें समस्त पनको मटिकममा x सौपा यस्य पर कायम इम-उस पळे पर व्यायामा स्टेशन चापागु-कुछ उसी व्यक्ति स्परफनम पाठसामने पा परवा पा रेनका पक नहीं पता, उसकी दी मीन-स बाबानता कि यहाँ पहुँचने पर कोई-न-कोई रेम, मिले, मिनी बापगी। पते-करते एकाएक ऐष कम पखे पापानेर, मानी सिने नातक कितनी बार ल से भामा-गमा पानी बमान बने सौ सेडी और मेरे हो गये है। मोबर सा, मानो वो कोगोमवाय माग।। मरे, पी।और माघे सपने दो पनि मुरम् किनारेते बासा!! उमने न बने ही पपा मारे इस इमर पा सको गर्म रस्सी पोपकार भास्मात्या कर श्री पीपीपीबा नहाँ, माँ बनता, पर मामा और न गाँवालय पर मी पर मनमुति । पेपो किनारे है, वफान (जर मगर पाने की भरमै काटे उठ मावे , मांस बम्द एक ही हमें इस पानको पार करना पण बा। रतन दी। उस पर ऐता सग यस सहस्पारे पेश पर मानी पपरयो मोर माप मानते राय या। परम्नु मानदेय तिचारेम गर्न करने पर शक नहीं, और मे भय इमा हवेता नहीन प्रामक एक और एकादी नमवा। पेपमें भी पायरया, भारत वर्षों बार प्रथम अधात्में तीने मा मयुभी क्य मौत मिपाकर मार लिया, सो मेरे गम२४ दो, परठी महापय! मैने पास थर परम स्नेक पप टयरपर पप प्रेय। मम दमन - । चतुर्य पर्व ११ मम्मो माई रो मोगा, तुम तो मी परत पड़ोसी हो,- गरमीप । एप्पाका प्रहाध पुस्ता पपा मा । मैंने मिरा मेते हुए कहा, भाम्प गप्प भयानक मुभकात हो गई, पर बाप! भेजीमय बहुम्से मौके बाद बरा वर्गमगा। मम्पमनस होता तो भी पार कर पता, किम्त सहसा भनेक दिनकी भूमै दुई-सी परन्तु परिचिव बहुत ही सुन्दर मीय गवसे पाक पढ़ा-इपर उपर निघरते हो नम गई बार पर पोस्मारी उसी गणेदा मेष्यपी भासत मंत्री गम्म पकानम इनकम पणेलको कितनी भार- मित नर की पी। इस का फेस पर नहीं होता, स्पा माइम गौसे कर उसने इसको अपने Rो एक कोने में मापा पा । रेड़ा-मेड़ी मोर गाँठगामे, परे भारमी । उसको बारपी। उस दिनकी तय भाव मी उसकी वही एकमात्र सबब और समर कुछ थोरे से परे पोंकबीच से ही पोरसे या सफेद नीचे पणेश स्वामीको सम्पति पी। पर मकुरको हमने रेता था, हमारे मोपामे वे स्वर्गपाम सिपार युर। उनकी ठोये मनिायेकी दूकान म उनकी विषया दीपमठी पी। पूजान तो नही थी, एक रखिम्माम पछोरा प्रेय-बोरी भारसियों, पिया, नारे, महावर, हेम से, काय लिने, मेनकी बशी इतारि भरार पर-पर धमकर बेच कप्ती निसिप उसके पास मध्ये पानेका समान मी सवय भषिक 1. एक-एक दोनो पसेकी गरियाँ भौर फरि। में स्पदने पर इम उस पाते, वो बहुत पूम मपाते। इस भासा पाती एक सूली गडपर बनाये र मिका मामेपर बदा सरम्पा समय पानी पी भोर मे दिए सब परनेपर गादी समापि र स्वी, " नषा, पे मेरे साई ठोपनेपर मारामे।" भैपषी मब मही, पण मी किपाका मर गई, -वर बहुत दिम । पहरे एकनारे भौर एकमेरे पातरेपर नम पी, घरद यह पोदाको समापि होगी। शुत सम्म पुरी प्रीशारे पर उसने में पास दी अपने दिए पोड़ा-ग राम पर लिया ऐ। स्पको दुई सारा उवर रोपने पारप रिएर रो मरे और पेड़ो पम- ।

भीकान्त
गीदाने दिसा-समाम्नेपाल कोई नहीं है।
राणा र ऐशया ठत परिचित हो सके पास पाकर तमो गया।
रेख किमको नेवाग या दीपक नीचे पड़ा। मौर उसके उपरकीय
सूसी ग मात्र मी पर ही असे समोपी है।
पयोगका होय-सा पर ममीवर पूर्व सपा नहीगसनिमय
और बीता का म्पर दरगाबेको सार भीमा पड़ा हुमा मात्र मी
प्रामपचठे रधर पारे।
बीस-पच्चीस वर्ष पारेको मापने पिनी बाते पार मा यां,-सौर
पसे पिय दुमा भिमा-मुख्य पयोग मांगन, और पारी मेग-छा कमय।
उसको भागमा पद्य ! पर इसे मी एव माप एक परम पस्त मामी
रेननेको पाकी पी। भास्मात् कि उसी परे पर नौसे एक
सामोपच्च बार निम्म। मेरे फैकी अपाबसे चकित रोकर वापर
उसने मेरे मनधिकार प्रदेशका प्रतिवाद करना । पर उसकी भावाब
इना सीप पीकि उन्हम ही गई।
, "पा दमने माप तो नहीं किया !"
उन्ने मेरे मरन मोर रेतार न भने धेगा और रि छरिचना
पुरु पर रिया । मैंने का, “मर भीत् यहाँ"
उसने मरपुचरने विदोनों मान भी सोडार मपन्त निराप व्य
मेरे मुंहकी तरफ देना।
इसमे एक ना किरपणेदाका चाहै। शब्दार रंगीन मिनारका
मा-पहा भव मी ठ गम है। मैं समझ होम सका कि उस नि:सन्तान
रमपी पन्त लोका पनपा च भाव मो इस परिस्पक यम सा
सापर बीमित है। मुरामि बार अन-मरर पर जाने बार ये उत्तम है
नी, भारत ममी, मौर स्पति साप मेछ रखने पिता मी उठे मही
मिमा भिाग मा मोर अपमूसा गम नहीं पाा-पा गाय पायर
सतीची पाल पाबो उसको एक रिम प्यार करती थी। सोमवा पेमा
कहानी मई, एकम एक रिन गैरकर भागी। मन ही मन
करा, मी का ऐसा पाणको दी गना सारमै क्या
तमा मासान है।

चतुर्य पर्व
बापाप्परकी सप एक बार मीटरका और समी। अन्य
फारम और तो कुछ मी रिसाईन पस, बारपर पिपनी छ समीर
नममा यई। पाग-पनी र नाना पाति वा पतामोतकी सीर
पारे नये थानमन्त निकालनकायम यघोदा ने मद करती थी और
इस व्या माना वसपारी और मिटाती थी। पार माया किपरफनमें
इनको भनेक बार मुग्ध से ईमा। पारिश मीगर, दोबारकी मिसे
विगा, ये भार मी फिदी तय रिकी हुई।
और पमे हुई। पास है सर पेख ही दुरणाम या रंगीन रंडिया
जिसे देखते ही मुझे यह बाठ मास मा गई जिसमें उसकमास गते
थे। और मीर उपर पा-सा पड़ा था, मम्मभर पा नहीं पाया। सा
पा मिार पपपपते मुझे न माने विस पातका गित करने पी, पर उस
मापसे में पनयन था | इस ऐम्मा कि ममनो एक कोने मानौ रिटी
मृत शिकालिना-परहै। पर-यात्रीको नान्ग ड्री-फूटी पीयेसे पन्नपूर्वक
सम्पये हुए इस भुद्र खरको बा छोड़ गया है। भाग उन बीत मारर
नही, प्रपोग्न मी नहीं, मौवक्ते पारनार पड़ने पौनेधी पारख मी नहीं-
पमा सिमाज, सबिए कि प्तिीने उसे मुक्त नहीं किराए।
पाचा देखक साप-ताप मामा भोर ठार गा 1 बार दिवाई
पापठक मेराय इस मोर सरकी ब्यारे सा रेखा या। उप पापा
पा परिचम प्रथम मी है, और अन्तिम भी । त्रि मीमा १० पगे यार मिरा
ले भाग। मचगा। किसी बीन, सहीन प्रवास मिस, भौर पर
और भापमा मम्ने मनपरपूर्ण निरामे से हुए मानमें । ऐनकी सी
ऐष को माया रेखते हुए प्रतीधरहा !
बगो पारो पनेस पर होते गोमतो गमा, परन्तु प्रेरी
मिनरल ममाये पर सिर व मीतर ही मौतर रो स्य, ऐसी रण
मईको भान सका।
पावे पर तोप पा पाकिस्स मों होता है। और डिसी रन पर
नरेला यो पर छरिशेष समासन माता, परमाब मेय हवा
मे मारते मर हो पा को उन गोर असतारे
आप परत पाना पाते हैं।

भीकान्त सेन पहुँच गया । भाप मम्म था, उसे बह गाड़ी मिल गई, निवासल्पनपर पस्नेक पारा गव न ऐगी। रिप स्पद र बैठ गया भौर उसने मेरेर पान गुरु कर दी। सानो प्रति उसे मोर नम मौससि बार-बार पूमकर रेलनेको से परत नही। सिपही पार माई-मनुमोवनमे दस दिन दिनेसिर भी कितने बो। पर मुह ममता मोटी तो तोड़ने बानगी और उत्तरबार उसकी सारे दिन पम्नेगी रे-सेवा शुरू हो पपगी! ला मावम, बस दिन साजी मये गुखाईको भूम्नेमै उसे किसने दिन बगे। उस दिन उसने कहा था, 'मुबसेकी गुखई । मिल पार- पस भन्ने भापको निवेदन कर रिपाखाको परिपनाम नही रंगे।', पी। ऐखारी। परफ्नसे ही मेरे सनम कोई मस महासपूर्वक रिसी मी बीबी कामना करना में नौ बानता, सुसमुत-समन्या मे पारवा मी अमग है। पारि दल्नी उमर गई मिया मनुस्मरण करने, मानविपर भौर दूसरा म वामीटकरनेमें । इसलिए कोई भी काम मेरे बाप मी पादित न होय । रिप दुर्षक मेरे सारे सपा मोर गारे उपोम यो हो दूर पाते है और हर बार यस्म हो घर-घर दा पवे । समापने व्यते हैं, 'माती, ति समका नहाँ ।' परवभिप न किम्मे रेशमिया मशाद ही मेरा मन्तरवास्प माबत पाप मारमा कसम मुझेन रेमपा, मैंने बार बार नापम पर फिर किया मोर उपने बार-बार स्मितहास्वाप रियरिमारनपने पाय किया। मौर समस्या ! साबीपन मानी प्राचीन परमपि रिक भानुभा गीत है। ममि मेल ना, माघरममै भूत, माधम मी भनेक दुरिना पर उसका बिगर वो उस मोरसे नही किया जाय । मानी रस्मैप RT मा पीना सुर-बिसरे मर्मम परवा है, उसे । सप पवा पता। यामानों मानिस मात्र रंगारंगी तौर है। उमरा माम मीसंग नही-साधना मनुवर उभा परिमा देना मी विरामना। .

चतुर्य वर्ष मुमसे कहा था, 'मेन गुगई, पहाते पह, गीत गाते गाते पपही पप्पर दोनोक दिनरबायेंगे।' उसे पानेमें ये महम्पा, पर यह मुझे सरका। मेरा नाम रमसा। उसने 'नये गुमाई। कहा, 'मस नाम वो मैं मर मिला न साथी गुणगई। उसका विस्वास है कि मैं उसके पित-चीवनका मन्पु । मुमसे उसे रनर्स, मेरे पास यवे हुए उनकी सपनामै विप्न नहीं आ सकता । वैरागी परिकारासकी या धिप्या है, मान्म नहीं उन्होंने उसे किस साधनासे विदि मम करनेका मा दिपा है। एकाएक रामम्मीको पाद मा गई और उसकी उस प्ठोर पिटमका समाना गया बो स्नेह और स्वायी मिममसे भरी हुई थी। वो मौपानव हकि इसीवन के पूर्व पिरामपर यह मेरे लिए ऐप ऐ गई है। थायर पर पाही हुमा है। किन्तु उस एपक्षाको मरनेके लिए स्पा कर भी कोई लिपीक बार ममपरको तापवा दुमा उपचाप मेम या। एक-एक करन बाने सनी पावे मोर कितनी पटनायें पाद भा गई । शिकार भागोल किपड़ा किया एप कुमार साहसका बा तम्बू, पारमा और भनेकवाव बातमें उस प्रथम साथ दिनकी बीस काग भौमि उसकी पावरमा-विमुगलि बिसेबानता था कि मर गई, जिसे पार पान नहीं सका,-उत ति मानक पपपर उसीने चिनी म्पप्रमा दिन की थी और मन्दमें कुछ निराशाका पाता तो भमिमान ! यस्ता ऐडर माय, चना चाहते हो इसीमिया मैं में बनेगी ! नावे हो। इस विदेशमैं यदि कोई विपधि मा पदी, वो कौन रेहमान करेग्य । वाम इस एप उसे पहचाना । पर ही उसका हमेशा सा परिपर। जनमे पर उससे फिर को न भूम, से उसके निष्प कमी किसीको भनाइदिनहरी मिर्च पस्ने एक किनारे मरनेको पका पाक नाद टूरनेपर मॉल तोपर ऐन कपासियाने बैठी है। तब नारी रिवाएँ उसे फार मोल बन्द रखे गया । पर मार उसका, मेरा नहीं। गोपी मकान माकर बीमार पड़ गया। बाँ .

भीकात भ, "मोबापूध।" "हाँ बतौरा, ममम ममोहे" प्रस्युचरम पित्र वस्ने वैसा ही नमस्कार किया। गुम्सी मुंगेर (सेमा, मला मी, प्रामण होने नावे या बराबर मंगगी ऐति से मेरे पैर चूर प्रमाम करता। हमारी मावचीतकी पर शायर और मी एक दिलवानी नौकरकी मार सुछ या, रखनी बोरसे बमभने कारण या पारा मायका रोगमा । बिना कारण स्पैको रा-गमका कर दी खान इस मकान मफ्नी मारा कापम रम। बोम, "बाते भाये दो, लामै सोते हो और पेय लाते हो, तमासा मिमे पर नहीं रख सकते ! पभो गया भारम् नगारे, रवे चिन्म सन्यने और गना । सफर धीमी सामनाम बरामदा पार करनेपर एक बहुत बड़ा समय मिळा, गैस उन्म प्रमण्ये भामेषित । पाप मोर मा म हुभा है, उसके कमर पर पबम भीर रोबार किये परे। पास मेरा बहुम्मत अस्पन्त प्रिम हुका और सम्से बोकी हो पर मेरे की सम्पाने मलमयी स्टीपर सारपानावे रते हुए। ये मम्मीने अपने मापसे पुन ये और पयिाधम मेरे एक मदिन बमपर उपहार रिये थे । पावका कमरा मी गुम हुमा । पर उसमै कोना। परवासे एक भार कार रेला कि एक मोर ना जोर लापर विना विण मामेर दूसरी मोर देसी ही मां पर सिर्फ मेरे दो पो रैगे। गंगामामेबाने पा से खपर हुए थे। पार मी न ये, मोर काममै मी नही भा हनने पुकारा, "माँ " "म्पती ,"मार पसासी जमने भाकर पौधे मां और पैरी पूर प्रपाम बसेबाम्नी, "न, सिम वो मरम, उसे मारकर नीतेगड़ी जानी" "तपाक पुल भी मरी हुई मौं । पी-बुध हने पर स्पैम हामा, सरी मेरे ए बहुत है। कार रानीपे पला गया । पनामीकोनामोसोम रेमा । परीरमै प नहाँ माता| उस दिनकी पिारी पार मा गाइन बातोर मायनम नराकर मानी

पतुर्थ पर्ष
उसने नया रूप धारण कर लिया है। इन पार रिनोइस नये मकानकी
मस्थासे पाकत नौ दुमा, स्मोकि उसकी सुम्मस्वासे पेसमेका बाम पान
मी मुन्दर उठता है। रामादमीने मानौ भने-भाफ्को भी इनका
विनाम मियार फिरसे बनाया है। पापा बहुत गहने पानती थी, बीयम न
लोसमय-मानी सम्पासिनी हो । मेकिन भाव फिर पाने ,कुछ पोरे से
पर देखनेपर ऐसा मा मानो भविश्य कौम्ती । किर मी पोती
म्मारा कीमती नहीं-मिडकी सारी-माटो पार परम पाननेको । मायमें
मामाकी किनारी नाघेसे निकार मेठे-भेटे पास गाभेरगिर्द हाये
है। मेटे होने के कारण ही पारद से उसकी भाशा नहीं मानते। देखकर
मबाहोपा।
राबलामीने कहा, "विना क्या देखरे"
'तुमको रेस या है।"
"ऐसा ही वोमा पारे।"
"और मुझे माग पनते "
"महोपी खनके सिम्म पार कर गनेसे पासे ही सपने ऐनों
पास मारे ग म गलागा रेनेपर परा भरोगे रखमो।" कार र
पड़ी। मोमे, "ठाकर बार तो नहो।"
मैं भी हसी न रोगसमा भा, "बार देख ही मेन ! पर इसनी
श-की मॉम दो नहीं ला मीहै।"
सौरियोंपर पैरोकी भामाच सुनाई। उदिमान् रख्न बरा बारसे पैर
परफता हुमा पर रहा था। पायमीने सी दबाकर परिसा, "पाते
रनको पसे बने हो, पिर तुम बताऊँगी कि माँग लाईमा मौर मुलाया
है।" पर प्रवे-बाते मचानक उसका गहा मारी हो गया I , व मन
पान मगाम चारच दिनको मुझे मरम छोरर तुम पट्की पापी पपने
गये । म्यम है, ये पह-दिन मेरे बिस व्यको"
"मुझे सा माथम कि तुम मपानामा बामोगी।"
"मी भगना तो होगे ही। तुम एम बनते।
-

१०२
मीकान्त
पर ही पसे गये थे।"
खनने मार पुसा दिया, मोम, "गाव तब माँ, बापूका प्रसार
पार्टगा । रसोइसेसे साना मने लिए म राव मारा बन गये हैं।"
बाप नकर यमयामी मत हो गई, "रसारसते नही होगा, मैं पर
ठी ।। तुम मेरे सोनेके कमरेम पोडी-सी बगाकर दो।"
साने पिठवे बक मुझे गंगामाटी मन्तिम दिनोंकी बात बार मा
गई। प पही रसोइयाँ और वही रकन मेरे सानेकी रेसनेम करते थे।
एमसी मेरी सरर नेको पनी मिता पा । पर भाव इन मेगौते
मही होमा, रसोईसमें कुरबाना होना । पर मा उसकी मति, पापी
पिछति। समझ गया कि कारण मी से, किन्तु उसने अपनेको रिपा
मिमा।
साना सरम होनेपर रामम्मीने पूज, "को पायी हुई।"
"मासस महीं ली पर पानीठे मुनी , मम्मी पप"
"भौशासनहारेसी पन्ने दिनों फिर को"
विवारी स्वरी पटना लोकर मनाई। उनकर यमर लिए. माम्पर
राप रमले हुए उसने कहा, "तुम्ने दो मवार रिला! माने पाते ट्रको
उपहार देकर नही माये"
"मेरी सरस्ते या तुम देना।'
पम्मान पए, "तमारी तरफ्ते स्पो, मपनी तरफ्ते ही मत्रीको
मेव पी। पर मेकर्स, माटो पखापा ही नहीं।"
पा, "मुरारीपुर बारामा माममती पार"
यमामी , यों नही । पैयपियों पासि वो मुरते मुखाम मौल
माँगने मावी या परफ्नी मा मुस समार।'
गुनहर से रामामी परम परि रट प्रये, "मला गावियों
मन्बा में १ म मेरी माँ ! क्या करते हो बी! उन निमम यो मम गम्दी
बाते मनी" काफर या जसा उप पसे रेत की। मन्तम महमें मौत
सावर बोडी, "यो मारे लिए भाप काम कोई नहीं है। माराम मो
नारी मूर्ति देती है, माय बरा, सारे परम साक्षी मग, राम

बाप पर्व १०॥ पीतव -परमभुत- बात सत्म न कर सकी, मस्ते कोर-पोट हो गई। नारास होकर उसे पैठा रिया । मन्तम हिचकी सेकर हमें कपड़ा उसनेपर पाबड़ी मुरिकससे (सी की तो बोली, "प्परियोंने तुमसेसा कहा। पपी नाकामाय मोर गोरनौगाडी गौ मात-सी यतीन-" रिबी सीका पाय दूरनेवाम पा, पर स्वर्ष पर दिया, "इस पार स्नेपर ऐसा कहा रणगा कि का नौकको मन रिसा सकोगी।" पस्यमी मरठे दूर हट गई, और मेरसे बाही, "या तुम सरोसे वार पुग्यो का काम नहीं है। पुदीप मारे बाहर नहीं निकाल सकोगे । संसारमै तुमसे मारा मीर पुरष मौर कोई है।" पा, "तुम कुछ मी नहीं परवी मामी । तुमने मीच कार मवश की, पर पहें एसपी मुझसे कही थी भाग-दम्मी ।। "भयो, उसका किराया। " मी नहीं। उसने मेरा नाम रखा था 'नो गुणगई।वी थी, 'गुस्साई, उमारे उगायन यगी मनकी मपेशा भकिम्मा मन पृथ्वीमें भौर दूसरा नहीं। यम्ममीको रोग गई, "माका उम्ने " "कि इस म्पराण, गगी-मनः मनुष्मकी मपेश भषिक मम्मी म्मकि दुनियम सोबनेपर म्म नहीं मिझेगा । मर्मात् में पूर्ण बीर, मी कई ना।" पापीमा बारा मम्मोर हो गया। परिासको भार उसने पानहीन रिला । बोरी, "हमारे उदभवन मनकी तार उस राममदाने से पा" "मविपाके प्रति ऐसी मणि माषा त भापचिकना।" पटामीने पा, "पा बानती हैं। पर उल्ने तुमारा नाम वो रखा 'नरे गुणई, और उसका भग्ना नाम सा है" "wer Iोई-कोई प्रेमसे कमनीख मी करता है।ग करते! बिमाबार पानी है, उसका पनि मनाए मनुष्य पागल हो पता भीर पर बोचरीपही देता है।" "तुमने सुना है" -

भीकान्त
"सुना ।पमालार"
"उसकी उम्र सा
"धन पाना मारे दी बराबर रोपे। कुछ माया मी हो सकती है।"
"दलने में कैसी है।
"मकी। कमसे कम रूपप तो नहीं माया सस्ती । न पपये नाफों
मोर गोदनावासियों को दमने देखा है उनमी पा महा। पर मत फरकी
परमाने कमा, म उसकी बात सुनकर से समा गई। बता दम
ये तुमारी सेवा करती थी न !"
"। मेरी कोई शिकायत नहीं है।"
रामटरमीने एकारक निम्यार मेपर कसा, "धो करने रो। ति
सापना तुमको पाना चावा है उसे तो भगवान् मी मिलते हैं। माना
पैरागिन काम नहीं है। मैं परने पगी म बाने काफी पर कमब्यासे।
"पार पाने और बाहर पी गई।
म मरेसे मी एक दोर्प निपाठन गई। पर मेमन हो गया
प, इस मापासे होगम भागा । मोरे तरिमेको चरित रकर हुका
पौनेमा।
रूम एकोय- मामा मजूम कर माबुन या गैस उम्मक
मकामै उसकी भरा गातो बीमारत की क्या मकानकी कोर पर
पी पौ। मानोको मापनसे मया भी कई गुनी झापाको निम पर
भी।
पसमम्मी चैरकर मेरे ही दियो एक कोनेमै फोमनयों पर पेठ
पई । समाफर रेला उसके कपाबास मोमे हुए है। थापर ममी
अमी मौतमबोकर भाई।
मन किमा, "मी एकाएक इस व्यकाचे मों पसी भाई।'
पम्मीने कहा, 'एकाएक नएँ। उस दिन बार पनि
पपीत पे मन नपने रणने भगा विविध मी वयपान मया, र
बगारी पाई-पेड नो चप,- सम्म नि म मातासि नर्स
रेत "कार उल्ने हुयी नयी मेरे मस्से निकालकर दूर की।

चतुर्य पर्य
पा, "ए ठहये । पुएं मारे मुदवा रिसाई नहीं रेवा, ऐसा मपार कर
हुमाकी नम तो गई पर पयोमै मुटीम उसका सम मा गया।
पूम, "ब माम मा काण"
रामम्मीने पण म्भन सी सकर कहा, "बहु क भनेर ममो
होपाते,बरी
"उससे म्पाय नहीं।"
"कुछ न तो नहीं करती, पर पर मुझे इस पपा देगा। एल तो सिर्फ
द्वमा सकते हो। तुम गौ मा मोनोको सममुपका दुम्स और कोई
भी नहीं दे सकता ।"
"पर मैने मा कमी कोई त दिमामी ?"
रासमोने मनावश्यकही मेरे पामें आप गाया भोर उसे पकार
कहा, "कभी नही । पस्कि, मैने ही भाग्यक तुमको म पने किन्ने पुस दिसे
। मपने मुम्बन दिए ढोगोंकी मम्म नई देस बनाया, प्राचिषा मारा
मसम्मान होने रिसा, उसका ही रगोकमा पेनों किनारे से माये
रेलवो येोन"
सार, "को, नो"
रामसमीने "तो किसीने मम्र पदकर तुमारी दोनों मांगेपर पर्दा
भर दिया है। फिर कुछ पुप सार का, “उने पाप पर भी प्रसारम
मेरे सा माग्प किसी कमी देता। R मे माछा उठसे मी न मिय।
नपाने गाँसे मा दुम पर्मन पागञ्पन भौर शय मादमी अपने देते
फरारी। गंगामायसे भाकर भी पैन्प नहाँ हुमा, काप्रसे में मनादर
साप विरार रखा।
उसमीरोनी मौलो रफ-टप माँ गिरने भो, मेरे उन पसे देने
पर मोही, "अपने ही आपठे विषका पौन भगापा था, मा उसमें सग
गये हैं। सानो की, सो नी सधी, मलकी नींव राम ऐ मई, म
बने से-ते सम्म र होन मोनिका न सिर म । गुरष कप
मप्रनमें थे, उन्होंने कोई सब बेग रायमें बाब दिरा, का, बेरी, इस पर
दोभास्नपर हर मुमको दस बर बार नामसार करना ।

भीकाम्व परमो सकी। मनमें वो माय लगी थी, पूमाफर बैठते ही दानो मालावे मोमुडी पार बापती, उसी समय भाई तुमारी चिट्ठो भौर तब इतने दिनों बाद रोग पम्म गया।" "किसने फा-गुमेपने। इस बार छापद होने रि एक कप सिरिया" "श्री, सिरिया और उसे तुमारे ग में पॉपनेए स!" "ऐसही करना पॉप देना, अगर माय रोग भष्म हो बार। यमरम्मीने फसा, "उस चिट्ठीको सेयर मेरे दो दिन करे। सेठे पर नहीअन्ती । खनको मुणकर उपहा द्विीका बाग मेवरिया । मंगा मानकर मन्नपूर्मा मानवर, सो होकर कहा, 'मो, ऐश करो सम्प पते उनी मिट्टी पहुँच ष, मुझे भात्मपा न करनी पो" मेरे मुंडकी भोर देसारमा, "मुझे इस व्ययों बोला या मोमे" यासाका उचर नरेनन। इसमारमा, "तुम मौरतीक रारामा सम्मय है। हम पर गेर मी नहीं सस्ते, समझ मी नापते" "स्पीचर रो" पनमम्मीने रि एक बार मर थिए मेरी मोर ऐनकर कहा, "वाकई विचास करते हो कि पाहम भेग बिए ही सम्म, पुरप पचम ऐग महीरसते इस देखक पोनों सबसे। परमाने का, “मन्दिरसे बाहर निकर करा कि इमाप पानेका मन मानहा। मेरे हाथ पर पनारसी पोरेगा रखा था। मुझे पात पाहता था भौर मुझे मेरी पार पुष- रखा था। भापन्निव से दोम, परी, भाप यहाँ। मुझे माक्ष्म पारि पामे सतकी दूधन है। का, 'सारच, में फसाचे पया, मेरे लिए एक मनन कर समवेसे" म्सने का, "पर सता है। बंगामे मुह में मेरा माना एक महान है, हमें सराभापाो हो भने सोम या मान रे साथ। वह मर्म मार मार, उसपर मेरा विणत या, गयी गई। परम युगपर उपपेरिसे मैर उनने रवंद पिकर दी। उठीमामाने पर पतुर्य पर्व -पीसदी मसात दिन बाद ही खनको साप कर माँ पी भाई। मन ही मन का, 'मों मन्नपूर्णा, मने मुझपर साकी, नहीं सो पा मोम कमी न मिस्ता । मुझे उन वन गेही' मीर भासिर दफन हो गये।" कहा, "पर मुझे बेबसी ही बर्मा बाना होगामी ।। "मामीने करा, Matrt, वो धमेन । वाँ ममपा , सारे देशमै पुसबापरेको मन्दिर,-उन स्वदेस भाऊँगी।" "पर का फन्दा देशमी, चि-वायुप्रस्व मे मापार विचार पहों नहीं पच्छे । उस एम एम देतेपभोगी ।" रामम्मीने मेरे कानपर मर रसकर परि-परिन पने पापा, मी तरासे सम्मामे नही माग | काम बोरसे कहो तो सुनाई है।" रामदमीने करा, "नीं।" इसके बाद परमपर माक्से उसी तय होगी। सिर्फ उस उम्मका निश्वास मेरे गजेपर और मेरे पपर भाकर पाने भो। "मी, उठो। कपो परमार हापमा पोमे। न पान से मेय उत्तर न प्रनेपर राजामाने मि मण, "मिसनो देर हो गई है- भारतकोमोगे" परपरकर मैन माप कठने कहा, "तुमने सोने ही रिसा! अमी-अभी यो सोगा।" एस्ने मनोम चापकीयेरीकी वापर पहुँपी रखे ख्न मेबार बार शायदा मारे माग गया था। पम्ममीने , "ण, म पिस्ने बेला हो| भावमाको छमूठी मप्रतिमा पर मचे रो। तुद रातभर मानती व्य सोरे, पसि में से बाग- कर पन्चकनी यी हि गति की सम्सरी नाबम फुट पर मौर मुमसे ही भत्र ऐसा करने से दो उदो, नहा ये उपर पानी बगी।" उठ बेन । यधपि र नहीं हुई पी दो मी सरेराशे गाप, सिपियों सुरी हुई थी। माताको उच्च लिग्प प्रप्रामे रामलीला मर्भव १०८ भीकान्त रिसाई । उसका स्नान मोर पूछ-पाठ एमाप्त हो जुन, गंगन-पास उडिया परेका गाया हुमा समेव पर मा परनका का उसके मसकार है परपर नई मा बनारसी साड़ी है, पूर्णकी सिलीसे माई हुई योगी सौ गुना पूम तिरमै होकर उस मुक एक बफ पर यह है, उसके होठो कोनेम छाया कौतुकको सी सी है, फिर मी त्रिम गोपसे मिकी दुई मरिक नीचे पर भागती जि मानों उसने हुए मारेगटे जगमया पोसार मात्र मी माझ्चको सीमा न थी। एकाएक उसने मुक सिकर सरा,"मना पतामो वो किससे इक्ने मौरसे स्सा देखये।" "वमी मधमो न बिमा रेसा पमममीने फिर किस, "शयर पारेत ये सेटि मुमसे भाषक सुन्दर है या नस, मा कमसम्या येण्ने माप म- पीक नी-योमबही बात" "नही । पाबाट प्राचनीसे कही सकती किस्सा मामले वो कोई मारे पास नही था र पिपराने गौरसे कनेकी मापसा नहीं।" गमरम्मीने या "जन्म, मत्री बात बाने रो। पर गुणमें ?" "गुलम । हों, या मानना ही होगा कि इस विषपमै मपमेरकी सम्मानना है।" "गुगाक बारेमे यो मुना किया कीर्वन र उपची।" " पाप बदिपा "पर तुमने से समय कि परिवा।" "चार-पार मी नहीं समतलव सिम बम, प, पुर- एकस्मीने पापा रेकर पूल, "हो, किसे" "वास से बाबो परफ्नमें हमारी पौउपर पपी पार ना।" रामरमाने मा, "सापा, बाद नहीं ! मारफत पवार मोर पाकर गुममा निन्य पर गम मानवाने हिम्परे ठराव मन काही पा पारा, पापद समाप मारवासी पानी नहाँ मुनी।" "नही, गरिमामला मुर महा करनी चाहिए । बाम सुना देना । " चतुर्य पर्व १०१ पर उसका गम मय इसमें मोन।" "मुझे मी सो महा।" का सच हो एकाएक प्रणाम कौतुमसे उषी मलि पमक उपायोची "सेबी, यह माना मार! ही स्तेि पाठशालाकी पुटी होनेपर तुम पाते थे और मन मुग्ध होकर मुनवे - बही, कों पसे प्राग माम रेर्षोपन स्-ए-ए-ए-ए-" खि खाने के लिए मने मापसे को मिा बिमा, में भी इस पर। रामस्मीने मा, "पर गाना बहुत मावन है। मारे मासे पुनकर मनुमोकी वो कौन करे, गाय-हासासी भाखम पानी भा गवा पा" खन की मार सुनाई दी। प्रथिमी दरवायेके पाप सो होकर उसने कहा, "पापका पानी फिर पड़ा दिया है माँ, मार होने में देर नर्स जमेगी।" गाकर कमरे अन्दर गहिरो उसने पायकीच्येरी उठा की। रामयामीने मुझसे कहा, "अब देरी मत कणे, उठो, इस बार फिर पास बनेपर रतन निदबावग्न या मराजय भान नहीं कर सकया, स्पो ठीक न रखन। रहन भी मार देना बान है। बोम, "मो, भापका बयस्त नहीं र पता । पर पाए सम-जन र समय है।" कार या पापकी गेरी मेहर बम गा । व बाराव्यमीको 'भाप' या पा, मनपा 'तुम'पारसी पुकारता था। रामम्मीने , "रजन उपमुष तुमको पात पार रहा है।" "भप भी पहीमा" "तुम पापीते बसे भाये तो उसने मगम र मेप काम गेर रिया । मैन नायबोकरा, खन मैने लेखप ये सामिा, उसका मा यी प्रविफ। उसने कहा, 'मां, खन नमनपम न। मैं भी शर्मा अपा, बापूजी सेवा कर तुमारा अप धुत दूंगा। सब उनका धम पमहपा मोर पाना मण्यम स्वीकार कर उसे बात किसा।" पुल मरकर , "इसके बाद तुम्हरे स्विका निमाण-पत्र मापा ।" पापा कर 40, "इन गोमे। हमारी राप पानए-" इस बार उखने मी पापा देकर का, “ी, मारम है। नायब होकर यदि रिवार पानेको किस देवी घेरतेन" -

भीकान्त
"नहीं पा | तुम मोग सकुपरकते हो।"
परमम्मी करने गी“जन न आने सा समझा, वड या रेला
कि मेरे मुहकी भोर देखकर सकी भोले BABा मारे । उनले पार
पर उसे पिटीका बाप गकर्म गरे गए दिवा, वो बोय, 'मैं, इस
चिलीको गफम न ग साँगा, ते मैं गुद अकर उनके प गा।'
मैने करा, मम समे सर्च करनेसे क्या प्रमरा पोगा मासा ।
छनने ट्यत् मौत प्रेकर कहा, 'माँ, मैं ना आम्म कि मा हुमाई,
पर तम रेखार ऐठा मादम पाता है कि म्पनों पपा नारा काममेर ।
गानिका कोई ठीक नही कि पेड़-पौ भोर मकानो पर बार
पानीमें बनाय । मारसा मेरे मन कोई कमी नहीं है -पा स्पये तम
होगी वो भी मैं न सड़गा। भयर विमनाय पाचने नि उसपर रेल लिपा
तोर गाँपको पदीम मनी पानीको थोड़ा-ग प्रसार मेव देना, परमवारी
हो ब्यगी।"
"नाव चिना म्याना"
मुनकर यग्यमीने ऐठ खापर व दिया भोर कमा, "भष्म, भर
देरी मायेचमो।
पोपारको बम । मोग्न पपने बैठी तो मैंने फस, तो मामूही
गी पाने पाँ, पर भाग सरेकी या बनारसी पा ठाठ क्य,
पठामो मन्च
"मदी पामो म!"
"मैं महीन्य।"
"मार पानते रोस सादीको पाान ते हो।'
"श, पदचान सकता है। मैंने बतिस्परर मेग।"
एबमामानेगा, "ठी रिन मैंने चाररमरा भपने जीवन
पाठे माम् रिनपर इसे पायी, मोर कभी नहीं।
"पए माम पानी है।"
", खनिए भार पानी।"
वारपरा, "किनुपरणे गरा। पटवार" या शहरो

पतुप पर्व यी। का, “सुनाम भर्म-ममी पायपार पामोगी।" "रामामीने मामी साम कहा, "ममो! या कैसे हो सकता है। तुम सिम पिमकर अनेक बार ही दो पुष्टी मिगी।" "नहीं, मी नहीं मिमी । न का पापा तिम्हाय खाना-पाना मामा पद-सा हो गया है। सिर्फ कहा-सा साया या मौर भासे फिर उप पास एरु हो गया है। मादम है, मैंने क्या सिर मगा। भासे में को पासपम लूँगा । तुमारी बो एणी होगी, म परमोगी।" मामीने प्रसन्न मुलसे कहा, "ऐस हो वो बी पाऊँ महापची, म मूब पढगी पोऊँगी, किसी सम्म न पाना होगा।" "इसीबिय मान तुम कामेट मी नबसकोगी।" रामरमाने साप बोगर का, “तुम्हारे पैरों पड़ती है, सिर्फ माग मारे दिए माफ कर रो, मान्दा पुराने बमाने नवाब-वारणी तरीरी टीवी स्परांगी, न मषिक तुमसे भौर कुछ भी मचाएंगी।" "मपा, पर वो वामो इना बिनय पों?" "विना नहीं, यह रूप है। मनी भौमव उमसर नापी, भौर न वर्ग मानकर ही पी, इसलिए अपयर बार माप करते-करते नहस पद गपा। तुमारे उपर मा यस परमामामीका अधिकार ना-माने ही पोषसे लोग। देला कि उसकी मालाम भासू मा गये हैं। कहा, "वह मार-मार ए अनेकी भाशा दो मेरे रामा, मैं माँत्री मारती देख मा" "ऐसा होतो कल बपना। तुमने तो पा, सारी पत पगार मेरी सेवा रती सी। मान तुम बात पहुई हो।" "वहाँ, मुझे कई काबर है। यह भाव ही नहीं, सिनी ही पार बीमारी मौॉपर रेप है कि गागर पवार रात पगनेपर मी तुम्हारी माम मुझे कोई पर प्रतीच मही दुमा । म मम मेरी समत पकावरको कौन मिग देव है। कितने रिनते देवी- देवम मल गई पी, विधीमे मी मन न हना की।-मो राग, भाव मुझे न ऐको, बानेही माम दे दो।" पोपमे दोनों एक साप पर।" पम्टरमोडी पेनों मौत भामरते पमा उठा। योग, "परमे, पर

श्रीमत
"महारीमानमें"
प्रशासन सेवा, प्रमाण रो।"
"ममाष मूंगी तुमे । मुझे मा गरब है।"
"किनुकीत दारिमा ऐठग बात मी या बरो।"
परलो, कोष म रिगमो । स य पार-बारीत रासा' कार पुका
पेगे, तो अपम म होगा।"
"मफा बामो, मे मुकर खिा मासे तुम वापान ।"
यममरमी परी बोम, "मैं कितनी स्वाधीन , तपस
महमें मनुमब कर दी है। सपा रखेपरखे बस तुम मे प, रबपने
गमेमरते रामाय राम हसार में सटौ। राप म्यापा, नमारा माषा
पसीनेसे वर हो या चिम्से क्सामा पोपर पर गई। मन्द
प्रासी र रिसा। उस मप उमारे निशामिभूत पोर पोर देकर
मोताय ही न सकी। इसके पाले की नमन। भापा कि यारना मुन्दर
है! म मा कवी पीरिचा परि या पाप है तो फिर पुपकी
ससे व्यापापाता नर और पदि का मर्म है जो पूर्व भर मे0 पपा,
चनमें गदि पर मिया रोशन होने पूर्व ही किया कामे मैने नेप
किया पा!-बरे या पा, पीते क्यों नही । सारा पता ही पाहै।"
"भमत पिया गया।"
" से मा
"महापामी महा।"
"रिनु सिवने दुपये हो गये हो"
"पर दुल्ला हो मी गमा , बे बरा दिनोंधी भयोगा। एक दिनम
समुपारना होगा मर्द माग बगा।'
देवमाते उता पायपीय पागमा पा भर गन्दी न रोगी की
मम उसेमा नही भूगी। यी मेय धबसे पदा मम।" सिर
पुण्र मौन पर बीरे-भरे बनेगी 'मावासोनेपर उठ गई।
माम्पसे उम्मीनिहाबी महाँ ए, परना सोमण बेगम
पालिसानको बोकर गंगा माने गा, म्पतम पड़ा, मामो माताने
समस्त बपोगगरापरम पूय परने मैक्स बनाकर

। चातुर्य पर्व तम महीना मेर भाये , ताप ही या गपा मेरी पूनान मन, भा गमे । मेरे हवा और गुम्देव, भोर मा गये। मेरे भाषण मेप। भाष मी मेरी मातीसबाने स्मा, कि ये प्रभुदयको मसोमर निचोरेर नहीं थे, पतिपादोभानम्दसे ठमो दुर करनेकी पाय पी मिसने मुझे सब मोरसे विमोर र रिया ।-पाठ, कुछ फारेमा! पास पेठकर अपने राम्से पर वर्ग फर लिमये बहुत दिन गये । पॐ क्यों " अफापमो।" "यममा सी होत गतिसे पनी गई । मैंने एक बार फिर साँव कोरकर "कोबा और मोफमत्या न बने किसने कम एमप रपयें नार्मोमेंसे चुनकर इसका प्रस्मी माम रस्सा पा। दानों क्ति सम्म कायासे और उस समय पत नौ बज गये थे । गह- मी स्नान कर भोर रूपा पवार पर माक्ते पास मा बैठी। मैंने का, "रासी पोषाक उवर मई । पच्चे, बन रपी।" रामम्मीने बिगर करा, "भों, पामरे र राती पोरी मीकि पनाने को दो मापही मुझे पाने एि करना।" "ऐसी होगा। पर तुम क्या भाव माय दिन स्वप्न देखनेम रिता रोगी । म यो।" "पती" "मैं रखनसे पता कि माय बना रसोइयायपही मिला।" पीसी इमारी रपमा दिन मैं तुमारे जमने बैठार से मागी! कमी लाते देखा है।" "रोन र रेसनेमें बुई सारे" "मम ऐख मी कहाँ होग!! सिल पम्मी नाना तुम अर्गोप्रेस देखने होमो रंगी 'देशोभमी, तुमारी पापाळ व वही पलेगी। इसकारण दी उपवास नहीं करने देगा। सामोग्य नहीं वो मैं तुमसे नहा मोरया ।" "नमोरना। में भी महासापा भीत यामी व पड़ी, रोग, "क्त पारीत गरे, मोंकि यह में न वा गी।" रमोरया मोबन रेगमा । पर, फूल मिराम । नाम मात्र मोबन र पर योगी, "नने विकास कोकि मैं मावी नहीं है, परन्तु ममतामा, में पी सोकर परे हुए मुफरमेकी मपीक करने मचे माई यौ। सन निस तुम्हरे यहाँसे वापिस माच पा पर माई मारे इस पूछनेका गहरी मेप न होता था, सोषि, माना गान कारे कि मुभाव हुई थी पर बारमारे नर्मकार किया। कारण मेरे पास तो करने लिए कुotन" पालेकी भावभपता मी नस है। सब सम्म स्वयं परमार, जित मसार बोका-विम्बाको पाम से पता,म भी बी।" "विस्पतन,म "बही तो समझता है ऐसा निरीव संघरमै और कौन है' एकप प यकर राममो मोऔ, "किन वो मी, मन ही मन में मिना प्रमोरवी रखना मेर मिलीछे नहीं।" 'पर परिणत पर एका कारण पूछ सकता" रामध्यमो कर कुछ सपा मेरी भोर रेलती रही, गोची, "कारप मा। मैं में मन्यमति पापना। मैं बानी - सिमो प्रत मारी सपमुमकी माहिरा मौ महीमो पर रिसाने विचार घरमें प्रति मी मोहमा है। पपर्ष प्रमोम्न मौनमें उसका नमारे कानेपर पिता मोयम्मी" "म्मी, इलम पोड़ी-सी हो गई है। पुप्पीकी एक क्समै मात्र मी मेय मार, मोरगा गुम । बस पर 'नाना स बता । नमन का तीनही बात मानी कि एप दुनियाभी न पखो स्वाग समय।" “हापौभा,"बार यसरी यादी उठकर पची मा। दूसरे दिन बि और रिनाम्तमाम विषयार पसामी मरे पर माटी। मानेगी प्रमाण कहानी नगी मुनामो।' कुछ •प्रका

चतुर्य पर्य
अनता मा, सम मुना दिया, बस अपने समय कुछ छोकरिया, पों
कि उससे गम्यमी होने की सम्मापना भी।
मन ध्गार माधोपन्त गरी पावें मुनकर उसने पीरेसे पा, "यतीनको
मृत्यु हो उसे सबसे अधिक युमी, उसी दोरसे या मारा गया।"
"ठका या दोष"
"दोपसे नहीं माना पाक पुपानी मिए ठसीसे भारमात्मा करनेमें
समारता माँगी थी। उस दिन दो पतीन स्वीकार नहीं कर सका, किन्तु एक
दिन मना सायाने लिए उसे भी बड़ी मार्ग सबसे पासे नम्र भाया ।
ऐसा ही होता है, इसलिए पापमें पापवा पिए किसी मित्रको नहीं मना
चाहिए । इससे एका प्रामभित दूसर गडे पर भावा-बास्सप तो पर
गई, किन्तु उसस्नो पन मर गया।"
'यदि कुछ समस्मै नहीं माई, मी।"
"तुम से समझोगे ! समसा कमताने मोर मारी राममाने।"
":-ऐसा"
"नही वो पा । मम कहो तो म्पय मोक्न ठिना-है, उसका मा
मूम्प है, बस हम देवी मारी रप-"
किन्तु तुमने दी तो काया कि मेरे मनकी सब काबिल न हो
गई भार मा फोर प्लानि नयाँ-तो या स्पा छ पा"
"छ ही था । प्रसित तो मरनेपर पुछेगी, उससे पाये नहीं। मरना
मी चाए पा, पल तुमारे ही कारण न मर खी।"
"सत्र मासूम है पर गुम यदि इसे मेकर पारम्पार दुख दोगी तो मैं इस
तर माय माऊँगा पिर ईवनाम मी न पामोगी।"
राममोने मपमीत होकर मेरा राप पर रिमा और विपुल गाठी'
पास सिक भाइ।बाटी, "भा ऐसे पाव कमी मपर भी नहीं बना। तुम
सरसम्ते से, महाप निदवा कदा मी पापा नहीं मानती।"
" कहो कि भा ऐसी बात न कहोगी!"
“नहोगी।"
“बोडो, सोनंगी मी म।।
"तुम मी कहो कि भर मुझे हर मी नही भोगे ।।

भीकान्त "मठो भी गम नहीं ममी, भौर का भी गया है ना ही लिए कि तुमने मुझे नहीं चाहा ।" "वर तुम्हारी यमी नहीं, कोई मोर शेगी।" "प किसी भीरते ही तो भावमय माता है।" "नहीं, मब उसते मत ज्ये, बारामती मर दुधी है।" परपफर उसने मेरे उसी धमको पोरसे पम मिा और उपचाप बैठी थी। पौर-मर मिनरतक इसी प्रकार पेठे पने पक्षात् उसने मूल्य पर्चा मे रो, भा, "तुम पा चमुप पापमोगे।" "हो, सचमुपही बाप । "चाकर मा फोग, नौकरी पर हम भोग वो सिर्फ रोमानी,- हम मेगाको मागममताएँगी मिनी tr" "किन्तु उन कितनी भी तो प्राय करना होगा।' "पा मगवान् रे दंगे। पर तुम नौकरी नहीं करने पाभोगे, पातमारे समाप भनुम नहीं है।" "नहीं कर पा दो वापिस पथ पाउँगा।" 'बानी, वापिस तो माना ही पडेगा, पर मुझको कर देने व्य हठपूर्वक इवनी रचना पाहते हो।" "चोथेका मही भी करो।" समापने एक हुन यस रस, "सो, पामकी मत करो।" मने करा, "चाणको महापर, पम्नेसे में पाराव पर होगा। पर्वन माँगना, पर-बार अफ करना, सिमेने माना-" एमरमाने मा “च राई-मौर स्पा करेंगे।" "रा-नौकरा! उनए रपये हों।" पास्मीने का, “मपण, नजी। तुम मुझे पार विनाती मा रिलाम्मे, मेशिन में बगी ही।" "सोस में और तुम, काम मारेन मिसेगा शगदा करने मबनर और न मिलेगी पूग्य तपा उपयत परनेही असत " "न मिने दो। मैं मा कामते रती" "बरती मही हो, परम कर मोमी। रोरिन पर दीपित मोम्न पचना, ।

चतुर्य पर्व
भाने लिए भारत मपान गुरु कर दोगी।"
"इसमें भी क्या कोई नाम लेकर आऊँगी तपा सापडी वापिस हे
भाउँगी । कमसे कम तुर्म डोरकर तो न भाना रोगा।" पाकर पर एक
गई किम कुछ सोचने म्मी, रिबोसी, “रों पर ठीक रोग्य । एक छोटे से
परम पाहम और तुम येगे, न कोई पास होगा न दासी बोकानेको
दूंगी वही लाभोगे गो पालनको गी यही पानोगे ।-नही ! तुम रेतना,
मेरी माने शायद इम्मदी न होगी।"
बता पा मेरी गोरीमें माना तिर रसार सेट मौर पर देखक
भोत बन्द कर नितम्ब पड़ी थी।
"सा सोप यी हो।"
एमामी नेर स्पेखर किचित् मुस्ता भौर योग, “हम गोमा
पलंगे।"
"इस मकानकी कुछ परस्पा पररो, फिर मित दिन पाहो प्रस्पन
करो।"
उतने तिर बिमार सीति बनाई और नि नेत्र मुंद लिये।
"फिर क्या सोष पीस"
रामम्मीने वापते हुए 0, "सोप यी कि एक बार मुरारीपुर नहर
बमोगे।"
"ह, विरेण गानेसे पूर्व एकगार मि मानेन पन व विमा "
"यो परमे, सही दोनों ब।"
"तुम मी भोगी
"क्यों, इसमे सर क्या है। वर्षे पाटी कमवा और उसे पाने ।
दम्परे गौर रारा वा दुव लम।"
"पर समसे सिनेमा
"तुम्हाने।"
"न, मैने नसमा
"हो, तुमाने का मनु बाप्पा महा। किसका है।"
मुमार कोरसे म्पाकुछ उम। प्रा, "मेरो म, प
उमारा यहाँ पा उचित नहीं है।"

भीकान्त
"उस देगारीका मथकर तुम ठसे बैंग पर सम्मेगी।"
रामसरमौकी भकुरी बन गई, उसने रेपित स्वरमकहा, "मतकतम
मेरा यही परिषर मिन्महै। मैं क्या उसे इसीलिए रात करंगीला तुमसे
मेम करती है। तुमसे प्रेम करना मा मफ्यम है। मैं भी ठो मी हूँ। र मी
सा हो सकता किमानेपर में मी उसे पाने ज्या बा"
"तुमारे ए शमी मरम्मत नहीं है टमी । मे, तुम मी पचे।"
", पो, कह समेकी गाड़ीसे ही हम दोनों पातम को चिन्ता
नरो, इस बीवनम में तुम कमो दुखी न करूँगी।"
इना करकर पा एक वय विमना-सी हो गई। भोले बम से गई, जैस
पकने ग्य, सहसा न माने पर किसनी दूर पली गई।
मरम्मत होकर से हिमकर पूम, '
बामा "
रामवामी मौत जोवर विवित् मुस्कराई और दोग, "भों, कुछ मी
तो नहीं।"
भाग उसकी रसी मी न पने मुझे देसी नगी ।
पूरे दिन मेरी बनिमारण भना ना किन्तु सर मगरिन
किसी मकार मी न भरका रुका भौर मुरारीपुरक भतारे लिए रवाना होना
पड़ा । कि बिना एक एम मा पम्ना मुसिता रामममीका बाइन
रतन तो पप पाम ही, पर रसोरंमाको राई टाकी मी साप परी। कुछ
पो पनि कर रतन परेकी गाड़ीस रवाना हो गया है। माँ पहुँचार पर
स्टेशनपर पामोसे दो पोड़ा-गादियों और कर रखेपा । हम योगों साप बो
सामान पौंपा गया मामी यो कम नहीं है।
मने न या " सा परबार बसाने पाणी!
परमीने कहा, 'यह पारो
एक दिन मी न येंगे। सपन-बदम,
मरानामे, पार-मैरान माम मामे ही देख भाभोमे । मैं पा उस देशकी
माजी नपा देवरको इच्म नही होती ?
"मानता कि होटी पर रहनी चीन, इतने कमाका लाने-पीनेका
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घसुर्य पर्ष ૨૧ । भायोमन-" 'वो तुम क्या पहाटे दो कि देवस्थान साही दायाम! मोर तुम यो कुरा सब होना नहीं है, पिर इतनी चिन्ता पौ।" चिन्ता तो गुरु यो, पर परवा पिससे । समस मषिक मम इसी पावडा या किशप्पथी-पैयगिमौका गुम्म हुमा देवयका प्रख्या मापेपर वो ममेटे पदा देगी किस्नु मरम न गमगी। भौर कौन बान किपाँचकर किस बहाने उपवास मारम्म कर देगी या मोन पाने पैठ बायगी। यह एक मरोसा । यामीका मन चमुच बहै। मामे गमे पार पा विसीको पोर महीं पहुंचा सकती। मार उसे कुछ ऐम करना भी हुमा तो प्रथम मुतहास-परिहामाय इस प्रकार रगी कि मुझे और खनको मे कोई समत भी नहीं पामगा। यसमा पार गठनमै बास्स-मार कमी नहीं हुमा भौर फिर संयम तथा उपचाख्ने ठसे मानो मुवाकी एक दीप्ति धनरी। विशेषकर भाब उसकी साब-राब का विचित्र दी। मोर होने पाने ही मामान पर भाई, गंगापाट उडिया पणेश पवपूर्वक पारा मा तिक उतक मस्तकपर है, परसई रंगकी - तथा मेल-सूर्यसे चिमित दामनी वारी पान रस्सी, मारपर ही कुछ परि-स गाने , मुसपर मिग्न प्रसपा, और भपने काममै सीन है। हम माईने गी दो भासमायों मर्यद सपी, बार बानेस पूर्व उनमें बसी-आम्दी न बने मारलही है। काम करते-करते उसकायोत्री धामीकी माने बीच-बीपम पम उठवी १, गोमै पो हुए दीरे-पो बढ़ास हारकी विमिम पर्पजरा बिनामा पानसे सर उठती। उसपनों पारसे मी पक नीली षामा निकम पी। मेजर पाप पीने पर में एकरस उसी मोर देस सामा। उसमें एकोप था, परमबापरप्पन नही पानती थी, मतएव बरा भसापमान रोनपर उस गपन तथा बाधा बहुत-सा अंश अनात हो पाया था। पदि शलिए कर योगासर पाटी, भाषा, मुझमे पर सब नरी समता । मैं मरी गोवती भौरत, मुझे दिन-रात दीपिराना अठनमाल। मात् , हम अवि-प्रमुख र पा पाच पाना साम। मानमारोप पाहा बन्द करते हुए एकाएक मानि - ૧૨૧ मौकान्त मुझपर पर गई। धीश्वासे बड़ी समाचार या मेरी भोर धूमकर नदी गई भौर नाराज होकर बोले, "फिर में तार ! माकी बार-बार मुझे इतना सो वारो हो, प्रोवो !" और काकर ही याति पी। में मी सा, बोग, सोच पा पा कि पिघाताको परमाश्य देकर न बने किसने नमें गडपाया था।" रामममीने कहा, "तुमने । महा दो पुनियासे ऐसी नियमे पसदमी और किती हो सकती है। मेरे माने पाच-म बप पूर्ष तुम भारे, मोर भावे समय नपानारेमाये थे। बार नहीपा" "नहीं, कि तुमने से बामा !" "चमन करते समय विपणाने बीकानमें कर दिया । पर तुम पाव पी पुकार करोगे तो भाव मी जाना नहीं शेया।" "नी" "पर क्यभो, मो "वों मीदम पर तुम म पार्कमा ।" रामामा ने कहा, "मुझे तुम पाओगे, पर मैं तुमसोबार पाबा वो गनीमत है।" मैंने कहा, "पह मो सो ठीक नहीं है।" उसने कर कहा, "माँ, ऐग नहीं होमा । धर्मना ही परेमा । गुना किनमे गुसाईका गाँ एक ममा कमप, मैंगवेरी उसका कुपोदार रम गौ। कोई मत्र महा ना ना होगा, आधी तर या रीमिअपगी।" "बगे।" जिस समय हम डोग मठमें पहुंचे उत समय देवकी ममारपीन उमास ही हुई थी। पिना मुमये, बिना उपचार अकस्मात् इसने प्राची राम से गये पिर मी, उन लोगोंको इनी तुर्ण हुई कर ना सकता। परे गुगई भाभममै नाँ १, गुमरेप मिल्ने पिर नमीप गये ३, चिन्तु इस बीवीपैयगियाने पपर मेरे परम भगा मा पा है। कमवा, पया, मामी, सरस्मी तप मोर भीमाने भाषाम मेोकी तार मम्पर्पना की। कमायने मो गोठे पण, "नपे गुणाई, म बनी , पसुर्य पर्व उखने का, ૧ી पन्दी फिर हम बगेमोंभे रिसाई दोगे, ऐदी माण नहीं की थी।" रामास्मीने इस प्रकार बातचीत की, मानो नबाने काका परिचय है। पा "कमाता कीसी, इन कर दिसे इनकी बानपर बस तुमारीही पपा थी। इससे पारेही माना पाहते थे, पर मेरे कारण ही ऐसा न हो। इसमें मेरा ही पेय है।" मावाका मुख कुछ परिए मा हो गया, पपास पड़ी मोर उसने मौसपिप में। पमम्मीकी देश-भूषा पाचहरेसे उमीने उसे मद्र परिवारका समठा, करत मी साप उतम स्पा समन्बी, या निस्सन्दा कोई न मान का। परिचयपि तमी मसुक हो ये । रामसम्मकी मोसे कुछ भी नहीं पिय। "कमया दौसी, मुझे पहिसान ना सकी।" कमताने सिर रिगारमा, "नही ।" "निरापन कमी महाँ देखा कमानता मी निक नहीं है, उसने पयिास समह म्पिा मोर कर परा, "बार वो नहीं पा राम पहन ।" रामम्मीने करा, "पार न पानामा परी में इसी रेकी मकी पावन कमी नहीं गई," एकर या सिपी । मिमी, सरवठी व्या मप सप पने पर मुझे दिवार पा, "हम भेग एकरी गौवमै एक ही गुरौ पाठणला पावे ये,ऐन में ऐसा प्रेम पा से माई-पान । मैं मासे रिप्ते 'गाकार पुपानी पी और ये मुझे पानी दया पार करखे। मीरफर पो हापक नीमापा । रिमेय मोर रेकार हा, "पोली, ये फायी सपन" पण खुपवर पोमे, "वसे तुम दोनों रेसनेमै एम्बगवे नों ही पे और पाये, तुम मोरी हो भौर नये गुपई माब।" रामम्मीने गम्मर होकर मा, “हम भेग र एकटे हुए पिना पाम से पडसा पण "परी मैपालो मेरा नाम मी माइम है। नये गुनानि बना दिया पद !"

१२४
मीकान्त
पभोगे । मुहे मी साप हेपटो। तुमसे दो फोहर नही, पक साप रेसर
कोई कमी न गारेगा और यदि घागा भी तो दर्य स्पा, रिप
नीबागमती राबायगा पेरमै नही खरेया।"
मैं मर चुप न सका । भौरवोंडा यह किस प्रकारका मगर, पाये
सम्पन । पित पर का, भविष साप मोझा मगर
मामीने म मानुसकी स्परा, "सपा मकान हो तुम्ही बता दो।
बानबी, मनसे कापी, इसे तुम नायन पो होवे हो।"
सका गाम्भीर्य लकर गुस्से होकर मी में स पा, ", यमनसे पर
स!-कमय, सारमे इतनी बड़ी पैवान और वाचाल तुम
करनेपर मी पूमी नहीं मिमी। (का कुम्न-कुछ पता है, इसकी सस
वापर साबी पास मरम्ना।"
रामरमाने करा "नम्रा मा करते हो गई ! वो मेरे साथ
मारे मन ही मनमो।"
"वो
"पर मेरे मन मला है। मैं निम्पप निकाल"
"रों, पुषिरि"
कमरम्य मोती, पितु उसकेमोग्नेकी भंगिमापर | महार और
कपुछ समान न सी, सिर्फ उम्मन पर गई। कारण, उस दिन मी तो
पिती रमणीस अपने सम्मका ने कोई प्रमास नही पाया और देख मी
पिसवा देने लिए उत रिन पा ही क्या "
"मेरा नाम पम्मी है और ये परमेका पार पाड
भएमा ।म एसी) 'भोये,' 'मुनो,'पार पुकारती भी। किन्तु भान
'नसे गुसाई' पाकर पुकारने लिए पाते हैं इससे तृप्ति होगी।"
पाने का मामी बगार, "समझ गई।"
कमताने से धमकाकर परा, "तक भारी इसिीन। क्या ये,
प्पा उसी
"निभप समझ गई।"
"पाना महारोग्य, भापकर उसने स्नेह पप रामास्मीन पप

चतुर्थ पर्व १२५ पार करा, "पार्वो-ही- मामे देर हो सीमान, भूपमें मर सूत गया है। बनती हूँ, कुम्भकर मी ही मारे । हो, हाप मैंह मोगर रेखाको प्रणाम करो, फिर भी मिलर प्रसार पारें । तुम मी पळो गुसाई-" या उसका आप पसार मन्दिरको मोर पसेमा। भवकी बार मन ही मन मुझे विचि दिखाई दी, मोकि भा भावगा प्रसारमण पनेका माहान | खाने पीने और प्रभाकका विचार पबलामी बीना अप इस प्रकार प्रपित है कि इस विफ्नमें सत्यालका प्रश्न मगहै। याचा विचार महीं, उसका स्वमापा । इसे छोड़कर पा की नहीं सकती। पर कोई नहीं बन सकता दिनोपनके इस एकान्त प्रयोगनकी माप और सकिय स्क्याने कितनी बार लवने से उसकी खाकी-मपने भाप पा बताएमी नहीं भौर पननेसे कोई मम नहीं। मह में ही बाया कि एक दिन रायमीको मिना पारे दी देवात् पारा मोर मान पा समी प्राप्त बसमोसे बदर है। किन्तु इस समय उस बावको पाने । उत्तकी बोध करता है वापस भपने लिए, उसमे दूसरेपर कोई मात्माचार नहीं है। पासकर करती है, पापा, मस्त माना का करनेकी भावको समपमै रूना परकर पम्नेसे प्राण नगर सन् ।' पहचानवी है कि मैं नहा मानता । यासीम बुधक उम्की मॉऔर स्थमने कुछ कर पाना न हो । मेरी पोषनाचारकी धनीसे मी दो बार अपने रोनीपनको पद पर मपनी रावी, या कमी गाम्पर बाप देकर मनोकर पाती है, मेरे दुमाग्यसे तुम ऐसे मौए । तुमारे कारण मेरा सर-कुछ या किन्तु भानन मामण ठीक वैसा नहीं है। इस निर्मन मठमें कोई प्रापी पन्तिसे परदेस दीभित रेपपारम्पा है। योग बाति- मेव ना म्यनते और पूर्वाभमी बाते भी मनमें भी नहीं भवे। इससे चिो भविषिक मानेपर वेग निकोब भापूर्वक प्रसार वितरण करते और भातक किसीने मी प्रचारको मसौधार र इनमेन अपमाम नहीं सिमा । किन्तु पामप्रतिकर कार परिमाध, रिना गुपये भा, मारे ही ण्य पारख हो तो इसकी सम्म न पेगी,--और विशेषकर में माम पनवा पाकिमन्ना मरते कुछ म पोमी, चिो , १२१ भौमत न देया,-मौर पर मह एक पार मेये मोर रेतकर ही फिर सिर नीषा कर मन्त्र सिक बापगी। तब उस मूग व्यमयोगका सा उत्तर होमा,- सहा-सहा मैं यही सोच रसपा । इसी समप पाने माकर कहा, "पमे नये गुगई,री में एमपी।प-मरो रिया है।" "नहीं। " मामो, मैं पानी देती हैं। प्रबर दिया गया।" "मागममा बना" "भाब रेषताको भा भोग है" मैंने मन ही मन का कितनो और मी पुर्णकी समीपूज, "प्रपर किस महरिपाचपा" पाने सा, बारबराममें । तुम पागामी बोया साथठोगे और हम मौर। पादम लागो । भाब हम यौको सय परमी वीरी पोसमी।" "२ बागी नहा।" "नही, मावोहम मोगकी पर येणक महा १, प्रापकी पीएम मेगोवा पुमा खानेते उन्हें पापा है।" "हमारी मातारी प्रणब नहीं " "माणको रोगी, परन् चिने भो । स्पीते दोन कसा, "भगसे सम्मम हम रोनों पान एक ही मौके परखे म गौ। पहले 4 पैन डगी और तुम पार। दोनों पाने माई रापसे एक ही पचपर तापसी । उस ज्मद परिचव नर होने की बात कहोगी तो माँ कान मा देयो ।" मुनकर होकर सोमा, भाषाभा | रामामा पास करने में भी पर कोई प्रतिवन्दी महा मिला था। पूज, "पा र रिसा" पपाने करा, "यमारमा गरी मी मुनकर नेगी। पाने ज्या, में पोंगी, हम तो पोवान रोगी ही, सपं पान मामा । मैत्री इतनी रिमात पिली व्यपरांश न करना।" प्रपुचर पुनम कुप हो पपा । मन ही मन मना कर पाकिमा- व्वा कमीतरी भो म हमले। पर ला कि मेरी प्रार्थना मगर हो गई। कमाने उस पासपर कोई ।

धतुर्य पर्व १२० पान नरिसा, बलिस भमेलको न मान रही इस पीचरोनों में सूब मेह हो गया है। यामकी गादसे को गुसाई परिकादास गये और उनके पाप और मी कई बागधी भाये। समग अका परिमाण भौर पैविम्म रेसर सोड नगा कि ये मी मोगर पात्र नः। पड़े गुसाई मुझे रेतकर व बुध हुए रिना उनके छापियोंने मेरी कोई परवा न की! परवा परनी मी न पारिए, पोषिक मुना गमा, उनमेसे एक तो पातिप्राप्त गर्वनाचा और पूमे मदद अपनेमे उस्वाद। प्रसाद पाना समाप्त होनेपर में बाहर निकल पड़ा । भी सूखी नो भोर बही बन-बंगह। पायें मोर येणु और तर कुम,-रीर चार पम्ना मुसि।भारुम्न सूपास्त समय निारेपर बैठकर प्रातिश्री मिळा निरीक्षण करनेका संस किया, किन्तु दोष हुभा कि पासपीभी भरवी पक्कि भर माणिक (s) हैं। उनकी व हुए मास मेसी बीमस पुर्गमने बैठने ना दिया । मन ही मन सोचा कि बियोको या फूल बहुत पसन्द है। कोई एन फूको बार छ, उपहार क्यों नहीं देवा ! छम्मा होने पूर्व ही पैर माग । पाकर रेप कियाँ समारोती म है। पर-पर सगया पगा। और भारतापारीमती बैठकरोगी। पपाने का, "नये गुमाई, बीवन सुनना धर्मे भय भगवा, भाष मनोहरदास बारानीका माना मुननेफर तुम क्याहो व्यभोगे | कैसा परिमा माये" पथाव- मेरे ए पप्पय कवियाँकी पदापी सी मम्प कोई ममुर पख नही। पा, "प, मुझे पाव मात्र मा पा । परफ्नमें दो बार कोसमीतर ही मी प्रेम होनेकी सार मुक्ता या दो काठ दबाब पा, किसी भी तर परमें नहीं सकता था। समग्राम मासे परेन भाये, मेकिन मत मैठा रहता था। मरवा, मार तुम नामामोगी।" कमाने का "नाही गुमाइ, मान नहीं। मेरी तो सीरिया नहीं। इसीथिए उन बमने गाते हुए धर्म माटी है। इसके ममगा उत गौमारीसे महा इतना खराब हो गया कि ममातक ठीक नहीं हुमा ।" "पर मामी यो तुमारा गाना सुनने ही माई है। उनका माने

१२८
भीकान्त
तमारे विफलमे पसा-यापार कहा है।"
कमवाने पसे कहा, "बदा-बदार तो बस कहा होगा गुमा ।"
सपाद मित शाखा सप पमम्मोसे परा, "तुम पास न करना
मान, बो बोरानात भाता है, परमिटी भौर दिन मुनाऊँगी।'
राबमीने मसप होकर U, "मपम दीदी, तुमारी किस दिन हम हो
पुस्म मेकना, मैं खुद भापर तुम्हाग माना सुन बसपी ।" मुतसे कहा, "तुमें
कौन सुनना ना भय मावापा दो तमने कमी नहीं कहा।"
उधर दिया "तुमसे मोमवा । र्गयामाटीमें बीमार पार मा एमापर
पम पा, बरसे भौर ने मैदानोंकी मोर देखते रेलवे रोपारा पक करता
भा, भोर तुमर पा किसी तय मोसे करना ही न पाती पी-"
परमीने पर मेरे मुंशको मपने हापते का दिया। कहा "मगर भोर
कुम्पाप का, फ्युम सिर पर मर बगी।" फिर बदली बतिम
से समायर बोमे, “कमाता दोसी, मफ्ने पो गुसाईबीसे कामामो
मान, भावमापारी महाएर कोसपाद ही मैं रेस्ताको गाना सुनाउँगी।"
कमाने संदिग्ध कठसे करा, "किन पहन, बावामी सयका
रिपनीरनेवा।"
एप्माने कहा, “म हो, मापानका नाम तो होगा।" मा
मसियोको समवे रिपते हुए सा, "यर सुध हो। भौर सापानीका
ये मैं उतना पपास नहीं करती बहन, पर मेरे पे गागरेक्वा प्रसप हो बामें
येपन बान भाए !"
"प्रखम्न होनेपर मेशिन बलधरा मिलेगी।"
यसमाने समय परा "रपा पये गुणाई, वहीं सक थमने बसप
देने मत मापना। मारे टिए मसम्पब कुछ भी नहीं।"
मुनकर पवियों ने मम्मी, पणा पुष्प हानेर में पपने बगी।
कमाने उपकी तरफ सरनेश मार स्तेि हुए का, "दूर हर बा-
30-अप या" एक मीठे बोले, "बामो पहन, क्या म्पम भना
मकवाका बैठे।
देवताकी छप्पा-मारती बार कौवनी बैठा जम्मै । माग बहुम्ते

पतुर्य पर्व दीपकबह । रेणक-समाबमें मुपरीपुरका माझम मिवान्त मासिब नहीं R, नाना स्पानोंसे कीर्तन करनेवाले देशगिक समानेपर इस तयन भायो- बन मसर दुमा पखा। मटमें न आप पावत्र मौयद पते देखा किशविर र दिये गये।। एक मोर बैप्पषियों बैठी 1, म परिचित है, दूसप ओर पाठ-धीस भनेक वेयगी-मुनियों है, नाना उम भोर तय सापासी। बीच पिकाव मनोहरदास मौर उनके मृगदादा मामीन हैं। कमरेपर में ही सब करनेवाले नषमुषा बापाप हारमोनियममें मुर २।। या प्रगर होगमा कासे एक मान्त सी मरियमाई 1,-2ी गाना मार्यगी। ये पुश्ती और पनपती, उन साप माये रास- राम, मापे मनेक प्रकारके लापसमा मौर कोई एक नया गुस्पाई मी मामा -पीनहाँप एक पुमका। मनोहरपाकी कोर्टनकी भूमिका और गौर-पत्रिका बीच यममी कमवावा पार भाकर बैठ गा। प्ठार, पापाग्य मोरया या कुछ कॉपर समगा, मृदंगपर पपड़ी मही परी। मा एक नितान्त रैरकीती होम पो । सिर्फ शरियत दोबारा सहारे मेसे भात पर किये येते ठे। स्पा माधम, अपरदे बन ही न पाये कि कौन मापा और कौन हो। 'मारी एक नीम्ममय यही पानकर माई, और उडी माीन बने किनारे बनी रंगका सबमिबार एकरोगपाहै। पासाग ,सिक भुरा ठारवा परोपी बगाये हुए तापे इतपक बात इ० मिट पये,-बो पे बाकी बचे। मान, माचिन मिमिल मेप बोन बनेर नौकमाका किम पर्यगे। बामति छिर पन्त, उसने मेरी मोर मयते मी न वाफा, मान पहचानवी ही मही पो मी सा उसने मानी मा-सौ सी एच दी, परगीपने । भया मेरी मी होती -मसम्मको महा। भामरावानी महापान पनामा नहीं, पर यह उनमने दोपसे न बोगोंडी भोणार कारण । शनिप्रदाने भोसे सोग पम्पमोश माधान पर सा, "दी, हमारे देलाडो मा म दुख निरन पर मुनामो, बाहेमरमवा।

भीमात
मुनार इस मी भन्म हो।"
पस्वामी उसी भोर मरर बैठ गा। परकाराने मृदंगकी मोर
मगुमसे बारा र पूछा, "ससे कोई पदो पैदा न होगी!"
रामास्मीने कहा, "नहीं"
पर मुनकर सिदो मही, बस्ति मनोहररात में मन ही मन कुल मित
पाकिएकापारण मोठे शायद उन्होंने रची भाणा नहाँको पी।
गाना एरु मा । झोपडी गमता, ममताकी दुनिया का मी नरी
1,-निस्शन पर मार बासोतकी तय प्रसारित होने मा। बान
इसमयमा मुधिसिता-या उसकी बीविका यी, पर साहनही
बिमामाने संगीतकी शरापर भी उसने इल्ने योगय पिकार
कर रखा है। विते मासूम था कि प्राचीन और भाधुनिक मर कविकी
पवनी मिल पदावहिपोको उसने कप्ठम्प पर रना होगा। सिर्फ वर-खास मौर
ममें नमक वामपकी सिमता, उपारमकी सम्वा भौर प्राम-मंगाकी
मपुरवाते उसने इस प्रमको मिस विसपकी सपि की मा पल्पनातीत की।
पपरवठा उसके सामने हैं और दुर्वासा देवता पीछे, काना मुश्कि:
उसकी या मारापना रिसको पारा सपने हर थी। क्या जाने, पर
पतमाम उसई मन पीपा नहीं गंगामायमपणा योग साध्न
मीबाय।
परगा दी थी-
पके पद-पंकज के विभूपित, कमरबर मेक,
तुया परसन पामे पण नागिनछ रिदुम भार गेछ ।
जोहारि मुरसी सा प्रपये मवेशन, छोड्नु गृहमुखास,
पंचदुख वाई फरि म गमनु कहार गाविदास ।।
परे गुसारको भौतासे मभुपाय पायी थी, भाग और पानम्दी
मेरपासे उठ तो हुए। मूर्तिक से मरिमको मध वारकर म्यान
रायी गमें पाना भीर प्रा, “प्रापना कर मारेलमारमाप
पूरोप
एबमीने फार ममस्भर दिसा, रिटटार मेरे पास माई,म्मा
खम्ने पैकी पूर मापर प्यार और भास्सेि सा, “परम्पम रम्सी है,

पतुर्य पर्व १३३ बसीका रन रिपसा होता तो यही मारे गरेमें पनाता पार वरत ही वापी गई। गानेकी मैठक सम्म हुई। ऐसा गा मानों भाग बीपन गर्षक हो गया । प्रमशः प्रसाद-विवरणका मापोग्न शुरू हुमा । भन्मकारमें से बरा मोरमै समर का, “पर माम रल । यहाँ नही, पर पैटकर उमारे सास पार्नेगा।" रास्मीने कहा, "यहाँ मकर-परमें पान मेगे वो रि उदार नाँ लोगे,-शायद इसी बावका " "सी, मन र महा है, गपूर हो गया है। मगर परी दुनिया मे होती धेत भावमा मी पान र देवा।" "मोद से रानी । पपरो मारी ही पती।" "तुम मारमामय पन्यबाद ।" “ी, स्वामी तो यी" "माचलपासोपाम तुमारे पोम्प नही ।। रूप, गुण, रस, विद्या, स्नो भौर सौम्पसे परिपूर्ण बो न मुझ बिना पाचना wat, उसकी संसारमें तुम्ना नहा है। अपनी मपोमवार मारे धर्म मातीमी,-मारे निकर मैं सचमुच बहुत स्वा!" पम्पमीने कहा, "इस बार में प्रमुख नाराज हो पढ़गी।" "वो दोपलो । सोबना किस ऐधर्मो में कहा गया ?" *यो, पोपपनेपर" "नहीं, पेसा भादमी वो कोई नम महाँ मा एमी । चोरी पर रस ओपने चपा बनी बगरमा चाप हो पायेगा।" पमस्मीने उत्तर नही सिा, मेरा नाम सोचकर पोमे देता समीप रस मेगा । रिसा, "झपकारमै ऐसे मामने-सामने सरे नेणे पेग सिगे महा। पर मेरीकि रातको क िमुभगौ-माह दो ही नहीं।" "गने दो पी मो सोर व पारगा।" "ता होकार रोये, पर बोयत हो तुमारी मम्मी है मी, मार पर सन्ते हो।"

"मे फिरनेको मरत नहीं, ये मेग मनरंगे"
एमालमीने मिन्तातरम छ, "सब का देतोयी, पता न
मा पस्या करेंगे। पर मैं मन और बेरें!-मे, पोदा-स्य सार
सोमाना।'
गोभी मौकारण सोनेको सचमुपही बगान पी।सपको किसी
वय एक सुमे परामरेमें मतारी गावर सोने की प्रवरप्य की गई। रिपों
कारण पम्मी भणन्ति पोषकरने भी ध्याद एको बीपीपम
भार देस मी गई पर मेरी नीदमें कोई काम नही पड़ी।
दूसरे दिन बिछौने ठने देखा कि ऐनी बात परे फूल योगप बैट
मामाने व मेरे ससे यमरमीभेदी साधी बना ।
मानी वा पाकिमहा मोम उनमें सासा वा हुई पर भाव न
प्रेश पारा देबार मुझे गत सन्तोष हुमा। मानो रोनी पहुव पुरानी
सतिणे, माने किसने समयमै भारमीप । कमरोनों एक बघ एकही
पयापर मोदी
अतिविचारने को विसी रास रोग माहीं भरावा ।
इस बारेमा पापा नहीं स्पती कमावाने मुजसे सिरसा,
"तुम पुण् पास न करना गुसाई इनका प्राव हमारा हो गया। भमन्म
पार में बड़ी गान ऐर पैरा गया और इस दोनों काम भी व्य
पलाने का "इक पर मैंने मी एक योगा
मार मैं मर पर वो इसे देखापनते तीघरमा नाम निमुळ
रोन्म पोगा। में मपणी तय गमतीमारे स्निा मुझे मटि नही मिपी
और लत बनार us पिर पदी संगी, उणे सिनवार पर
पेस रेसकीय,कोपर बैठे-बैठे इस पर काम करा मी,
वरभेगी।"
माने साम्रा में मरने की बात महामान, पेपर
मेम र मत मी एम ईगी।"
पासपोरगीर सम्बाधर्म भार मिळा। मने भार
पा रा रन परना गुबई मोर टन मी साय ने माना रिपर
देषवारा मोग मार करने लिए एप सामण गरा

चतुर्थ पर्व
मेयरी भासी । उसे पहायता रेने एम्मी गपमै गई हैं।"
"पा मम्मना किया । बरस्मीका साना तो हो बापया, पर मारे
देच्या उपाठे येंगे।
कमताने परते नीम काटते हुए 8, “ऐसी नाव नो गुखारे, उसके
काम मन परवानगी तो फिर यहाँ बस मी प्राण नहीं करेगी।
तसरा, "चौबात पर भी नहीं बोठे कमवता पर तमने उसका
पचान दिया । उसने मी रिमा, "हाँ गुसाई, पहिचान मिा।
रोम सोनेपर मी तुम ऐम एक मी मनुम नहीं मिगा माई । म माम्म
बान् रो"
मोदरसे मुमभव नहीं हुई मह परफर नहीं था। उसकी एक विस्या ग्रीन
सुनाम प्राममै राती है। सीनने बयाको नबाने कौन- एक मा
रोग फैमा गत मारमी मर ये है। पखि बहिन ममनोंडो कर
भापम पर गई। इसीलिए पा-दारू ने पा गया है। मान बस-पारा
दिनोंस कोई तार नहीं है, नपीन र मरे मग पाया है, पर कोई भी पता
उसे नही समय । एकाएको बोरसे पोल मारकर पान मा । योग,
"पर मेरे पावू मा मिन्य नहीं है। मैं एक मूरन किसान , कमी मॉक्छ
पार नहीं गया, महीपस्य किक या रेस है और मसि माना होगा।
नहीं तो जरी पर-पात्यी सबवी ये भी नहीन मातक पर न मैन पवा ।
पापीलीन-पत पुणमद कर कि ममायक, रसाय, समान बार
तुम सोमपे देवा , एक बार मुझे से रमे, पर पर पूर्व प्राप्प मी
नीरिया । पर या मागोवा किमगर मेरे माशा मर गये वो
पापा ममनको भाग गाडर महागा मौर पिर उठी आममें मामाया
परमर गऊँगा । इसने यो नमसरामको में मिदा नहीं रहने मूंगा।"
उसको सान्सना र पूण, "सका नाम धनो होस्पीन !"
भीनने पा, सपा नापा गौष मरिया जिले कोने
। सेपनसे गाड़ी पर बना होता।" पिर योग, "पता
बम्परमपम यामी महीपसमना पास्य।"
मशीन पुरानो पिडिपो परीय संगा कर न्यमा, पर उनसे कोई पता नहीं
पय । सियापा र हिरो महीने पहले विपणा कीमणारी

भीकान्त
लिए पनि मौदरसे सौ सये पसूक येथे!
मूळ गौहरक पास बात मया , तः मधम्म परि ठसे ठगेंगे ही-
इसके ए पोम करना मा है, फिर मी इतनी बड़ी तानी पहुत कम बम
भाग।
नपीनने कहा, "सलिए तो वामूका मरना ही अच्छा है, प्रतिपय
बाप न ! उपारण एक पैसा मी नही दुकाना पागा।" नाममन नहीं है।
रोनी भादमी पावापर गये। इसना पिवयी, ऐख मीठी बात करने
पाप मौर ऐसा पर उत्तम मापांक संधरम दुर्मम ! पर रहो बाने
कारण स्मृतिचिन्न सीप से गई। उसे रिली मी तर पार न
माया, पाक किमिका नाम भी माड न भागा। प कोनिगार बार
एक यामटेस भार उचर मौर पूर्व बंगाम र रोमनों सोम
नाम पर गया फिर भी यह स्मरण न कर नाम प्रकर रखे हुए योग,
समापन किसनी और मया-पैख उपार से बातेवापा, बार नरी
नीरावा और फिर कोई मेयने में नहीं माय । मन ही मन प्रवाफ
सिएपर भगवान ने इसका पियार करेंगे।"
मदीन भर भौर पम्त म कर सका, गरज उग्र, ", म्हारा
विचार रेंगे। मगर मरेंगे तो पिर मैं गा!"
परवाने स्नेहाई मपुर कमसे कहा, "नबीन, मूठ ए रों
मापोले दो मैपा, तीन पन पीत गरे, एक पन बाकी था। मरिबानता
यो स्पाइना मी न र ? गोदर सा मरेप परागा माटो मरे पर
कीम्य"
नवीनने का "रान मैं मही बनता । उमस भन्तिम बार काब
शिवार पास मे पाना दो से चामे, नहीं तो किस दिन ठन कोई वरी
बार मिलेगी, उस न येम मोर या
पाने प्रत्युतरमै कपामर हाव मारकर लिई विना , "कौर
नान, दादर ! नहीं हो तुम मुहते ऐसी पकाते।"
मतएव, पिरनों परमी और मापे । महामोग्रार सा होकर मैने
माणमनुनम पाठा पर बर मी पुना से। पर कोई नहीं
मिम, रमानेकी मारसे कार रोला कि पानी की किम्मकार

चतुर्थ पर्ष से तोपर बप का मार कर पाई। गौरिका संचार पानेका उपाय सोचते सोचते गा में असायम पहुँच, का बरीच तीन बजे पे । रेवारे कमरे परामदेम मौरतों की भोर मी दी। बाबाम्बभौम कोई नहीं है, सम्मका सुपपुर प्रसार सेवा परिमासे निगव हो पाराम पर रो-कि रात बक फिर एक पर मसारसे मना होगा, भएप उसए मी बा-चब परना बस्न । पोकर रेखा कि मारपीच एक बार सिनेवाल पनि म हुभाई- पयोग, पोपी सरिता, रोग, पेंटिकवादि गबनाके विविध सफारम उसक पाए। से पासे पाकी नम्र ही मुमार पड़ी, वा निम ये, “नये गुबई मा गपे" कमतमताने कहा, "न सी पन गई थी कि गोहर गुपई म मा हो नहीं देगे, उनाने क्या मिया!-" रामम्मीने उठका मस्सा विषा, "राने रो रोकी, पर मत पूजे ।" कमव्याने उगन राप इयते हुए मा, "मैं सूम गपा, पस्ते की धूल-मिठ विरपर बम गई है-नाना-माना हो गया सा!" एबलश्माने कहा, "वो टूते नहीं, "इसलिए नामो सेनेपर मी पठा नापसेपीरी।" "इसमें एक मही किनबीनने र प्रचारकी कोशिश की, पर मैन स्वीपर नहीं किया, पिना नाय साये दी मापच मेर मारा है।" रामरमाने पो मानद सापकहा, "म्पोसिपाने मेरा पप देतारका यम्पनी रोगी "रा दिया पमाने कर दिया, पाँच पपा । परमी दीदी माँ बरये।" मैंने र का, "मुझे रेवी थे मैं सो मी सम्म बवा सम्वा " मोतिग उहिया मामन था, बादुर मग्न बंगा बोगवा पाग्य का ग समय है। उसने मी (सकर "नदा यहाण्य, पपे लिए नहीं, सये घे में बहुत कमाता है। सब का कि ऐसा मा पप मेले मग नही रेखा । देसिएगा, मेरा शप रसना कमी छनोवा ।" पा, "गातिय, विना शाप से कुछ पता सन्तो।"

भीनम्त "बा या । एका माम मजिए।" "हमरका पूर" मोतिपीने वासिमरन ही नही। मैं दूंगालाप क्या पाठेर उपने पीपाठे दो मिनस्तक हिसाब लगाकर का, "माप एकसारमानना पाते।" "कौन-सी वस" यह मेरी भोर देसका काने ग्य, "नहीं, माममे-पुरमेकी ना, माप पिसी भारोबारमानना हवे। सो सरपब सकते हैं।" "चता परमही है, एकनमें ही मिल पागो। कर मन ही मन मिमित मा, मैप पेय देतार ने दीपा अनुमान किया। परमाने सुध रोटर का, “बला न ! मैं पापी मापी गमना करने पर तुम प्रेग यो किती वापर पिपासना करना पाते,- किर समस्ते हो।" कमायने 1, "अविना नपे गुणाई, पमपना आप भी चा एकबार पोधिपीसीको रिसानी।" मेरे पाप फेन्मठेपी मोहिमायने माने राबर्मे मेय बाबमा, रोवीन मिनार पर्यवेक्षण किया, पिसार व्यापा, शिकए, "मराम, रेखा मापके लिए पर बहुत बर्ष विपश्चित " Amm "पत बदरी । मरने-चीन बात है।" पमामाकी भोर कर देय कि उसपरेपर खून नगर सन्दरा गया। मोतिपीने मेए साप छोएर राममोठे , “ों, मारा प पर बार मौर- "नाही, मेप गप या नहीं देखना होमा, देख पुरे उमा पर मामान्य मत्पन्त सापा। पतुर पावित प्रेरन समतपमा जना सरनेमें उमने गलती नहीं दी।मोच, "में दो मा एक-या। बारा पगी होगा, पर समरको भी गाय माप, पतुर्य पर्य इसकी विधि-सिर्फ दलीत मपे जबरने की बात है।" "तुम हमारे सारे मकानपर मा सकते हो।" "कयों न अन्गा माँ, बनेपर पम पाईगा।" "भन्छा। रेना कि प्रारे कोपरे मति तो उसको पूरा विश्वास हैपर उसे प्रताप ने बारेमे का सन्दर। "पत्मे गुपई, तम्हारी चाम पार पर, पक कमताने का गया है।" रामम्मीने का "मैं पना मती बीदी हम बरा इन पैठनेकी जगा टीक कर दो और रतनसे हु वार करने लिए कारो।से तो उस भया मी नजर नहीं पाई।" मोहिणीको बर सब करण करने गाइम पसे भाये। एपिबयममै मेरी रस्सीकोलार पड़ी, खनने मारापी कुछ रिया, मनाप पोनेको पानी का दिया | मेरेते ही पारेको काम फर्मत नहीं मिमे है, फिर भी मासिपिन परवी कि उसकी छापावक मई की 1 मेप पिचि-पोग भाता है, पर खनके पूज्नेपर पर भवास परवा की नहीं, विचि-योग मापका नहीं-मेरा। कममता नीचे परामरेमें बैठकर गौहरका पार पडयो पी। ग्राम चाप भाई, बहरा पाव मारी हो या, सामने स्टम्पर प्यारी रमान बोली, "गे, तुमसे एगर दम्र का जीवन-माम मत पूमा करो,- पापत भावे किसनी देर रगती । गम आँच गड भोर पोहा तुमठे प्रार्थना करती है मेरी बात मानो।" मातक पास पनापना राबवामीने पायद पही चार स्पिर किस पा। बहुत बदो' का नय या मर्प हो सकता है। पमतमताने माप सापकहा, "न-बंगामें गुमाई र गमे ये " रामरमाने पाहा, "का गये, क्या या में ऐसा परती री ! मुझे पा दुनिया और कोई काम नहीं है" मैंने कहा, "रेखा कमी न सिर्फ मादामहै। मोतिषी मेरा मम मापदम गड गया।

२६८ भीकात मुनार रतन दूसरी भोर मर फेर मम्मीसे बम गा। यमहामाने मा, मोतिपौड़ा पा रोपा देरीया बीवी पाएगा । संसारमै विपरियोग नामकी सा कोई पौन ही मही है। भारतम क्या कमी कोई नही पान " इन सर पस्नीका उचर देना किया। यमनमाको समस्याने मी पा बाम सियापा मी चुप यी । पायकी प्पानी मपने हामि से ही रामाश्मीने १७, "रोबार का और पोरीन मिया माऊँ।" पहा, 'न" "नही माँ! ' वडार पाना सा मयाम्ने में सामा मही र मे माकी भोर देखर खा भपितर दिन से प्रश्न किसा, "तुमारी रोनी मास इतनी अब क्यों दिखाई पी। नराणे पानीमै महाकर ठो यहाँ मारे हो" "नहीं भाव स्नान नहीं किया।" "और पो खाया मा" " मी नहीं खायाम भी नहीं हुई।" बनेपा योचार नन्दीरमार उसने मेरे सिरपर राम रस्ता, मिही पप र मोवर मेरी मीनबदौक मार कर"ये सोषागक महो।कमकी, ऐलो तो इनका घरीर गरम मालूम नहीं पर सा" मसम्म मत होकर उटी मझे। मोम "म्प व गरम हो गया तो मा दुमा एपर th पा नामकरण करने में भारत पटुहै। मानपा माम मेरे कानों में मी पड़ा। रामहरमीने कस, "इस मानी पार ये" स्मन्यताने करा, "मपर मर होतो तुम लोग पानीम नही पापड़ी रोमरे पास माई हो, हम हो इसकी मपरपा र गे मान,- कि करने की कोई जरख नहीं।" मम्मी इस मत मापुस्तम दूसरे भविषति वन गमामी को मरतिस्पर रिपा । शरमिधा सेर उसने कहा, "ममी पावरी, पर एक पहाँ यसरवैय नहीं है. रि इमेण देशाभिरि में दो चतुर्य पर्प अब तो बस्दी भाराम नहीं होता, बहुत भोगना पड़ा। सिस म्पोनिधी न जाने कहसि भाकरर दिय गवा- "रा पाने रो।" "नहीं दी, मैंने रेप किनकी म बावे पो न फती, पर माम या कनिटबती।" कमळावाने स्मत हास्पसेका "रनेकी बात नहीं गम्त क्षेत्रमै उनकी बात क न होगी। बेरेसे ही गुणाई धूपमें पूम्वे ये, ठीपकपर स्नान-माहार नहीं हुम्न, सापर इसी कारण छीर कुछ गर्म हो गया है- मुबारक नही रोगा।" ब्बती माने भाकर पा, “मों, रसोईपरम द्वामान रखोला तुर्मण रा।" "ती"मार माध्यताको परफास परिपात करमापी गई। मेरे रोग सम्बन्म कमाटाकी बात ही फमै । पर ठोक मुरीमे नहीं गया, पर एक-रोरिनमें ही मैं स्वस्त हो गा । फितु इस पनामा- बदामो मारी मीवरकी बात पता गपा, पायद एक भौर म्पतिको मो पता चम्म-सपो गुपयको। पने दिन कमावाने इम मेयोंको भाइमें शुमार पूम, “गुसाई, तुम्हें मानी दीघ सा पार निकर ही देना कि एक पारी में रखवाका प्रणय, चरन मोर मंत्री माता रखी। अम्नका बयान रिया एमम्मीने, कहा, "इमा माफ मायम रोगा, मुझे पार" माम्याने रस्ते हुए 1, "यह सी पाव किएसको वो पार से भौर मेडो नः ।। पच्यमाने पा, "बहुत मेरी उन यी म, इसलिए । तर मी टीक गान न था।" "पर उसमें दोपही पो, पर।" "मो मत बोहैं। कुछ पॉप -1 मेरी उमा माठ-नौ जही पी। एक दिन पहेम मग पानाकर मैंने मन ही मन कहा, "मासे वूमा हुए ! पूमा ! दूमा " पर मुझे इशारेसे दिखाए का, बम मेरे त .

धीकास्त
रेषता उसी पद मे मामको पो-सोमा गये।"
मम्मने मामस पूम, "मेकी माम किस तय गये।"
मैने कहा, "मेकी याब नहीं, पर हुए मोरोकी भाब पी। रोमी
नहीबापया ।"
कमलता ने भी । पमम्मीने १७, "पर पहांसे मेरी दुर्गत एक
हो गई । लली। इसके बारकी बावे मत आनना पाही की,-पर
बोगसना पर वो बात मी नहीं है, जो नपने क्या-पापले
है। इस पार बात दिनोंतक रोती-पीरती मरमती फिी और तय करती
यी । भाखिर मगवान्की रमा दुई, मोर जैसे एक दिन पर ही रेफर एमएस
मैन स्त्रिाचा से से भारमात् एक दिन पहषय मी रिसा"
उसने मगधन्द उदेससे प्रभाम कर लिया।
कमान्याने कहा, "नहीं भगवान्को माम बो गुसाईन मेची भाव
बाने दिन तुम दोनों एक-दूरमेको पाना रो"
पास्मीने बाप कोरफर कम, इनकी इस ये गर्ने, पर काय
समादेश म करो। बचपनकी या मेरी यह रंगी माम भाव मी मास
परफरनेपर इनके सी किसोर गम्ते रम्ती दुई रमाई देती है। भगवानकी
हुई मेयै गा माम हमेशा बनी पेगी।"
मैने कहा, 'पर परमाणामी दी।
गमामीने कहा, "बी देवता, इस बार मुझे भी खा गये।" प्रकर
रस्ते दुए उच्ने चन्दनकी सोरी, भंगुलियों हपोकर मेरे मस्तपर छाप
।
हम सब मिम्मारिकाराकमरेमें गमे । ३ न पाने किस मना
पठ परनेम बगे हुए थे, मादरसे बोडे, "मामो माई टो।"
रामारीने बौनपर बैठकर प्रा, "पैठनेका पच नहाँ है गुवाई मत
उपद्रप किया है इसलिए बने पासे ममस्मर कर भापठे समाफी मिया
माँगने माई"
गुवा बोके, “म पगी मारमी १ मिधा मे हो सकते २ मी
किन त्रिपा उपाय करने मामोगी पवभो दी। भाभममेको
भावपारोबाप

पतुर्य पर्व १४१ कमताने पहा, "न है गुताई सचमुच मी मासूम होया कि भाव हमीची नहीं की है, सब बगर मबार हो रहा है।" पो गुस्पाने का, “पान, भानन भौर घस परियासारण इनकई रिसे ऐसभा र था कि मानो हमारे पायें भोर विषा दीपक माये 1-पा और कभी नहीं देखा। मैने सुना, कमताने माय नाम 'नये गुताई' रखा है, और मैने हमें नाम दिया है मान्ममपी-" इस बार उन सभाम्मे मुझे पाया रेनी पड़ी। मा, को गुस्पाई, विका रीप ही भाप गोंकी मोमीने ऐला है, पर गिन करीम उसकी मम पनि दिन-राव पपती गठी है, उनसे दो नए थिए ! मानन्दमपी समयमै कममे कम स्वनकी गय-" रन पीछे गया था,माग गपा । राज्यस्मीने कहा, "इनकी बायें दम न मुनगे गुबई, मुतते से दिन-पत भरते।" फिर मे मोर रेतकर कहा, "स पार बर मारगी यो रस ऐगी भोर भरतिक मादमीको कमरेम ठाम बगाकर बन्द र भाऊँगी, इसक मार मुझे कहीं चैन नहीं मिली।" दो गुपौने पा, "नही मानन्दमयी, न बनेगा, गोरकर माँ मा सफोगी।" एमास्मीने पा, "भाल भा सईगी। बीच बीच में मेरी ऐसी इज होती है गुमाई मेरी मर पर्व।" वो गुसाई बोले, "पा इस दो पदारनमें एक रन उनी मुदसे मी निये मी बान, पर देख रो नही सकारों, भानम्इमरी, मेलापाव पाप महा।- मस्त्री, दे गा में किसको प्रयाससकी सेवा। जानें क्या बदामोतो-" का-पाठे मान सम्पमनसो गये। मोमे, "सच्चे प्रेम बारेम दम देग स्तिना-माना नाम अपने मुस्मये रखते हैं। पर तुम चन की हो गरिन इसलिए परवा कम मित खिर मेम मौहानको मस कर रोगी, भानम्दमरी-" मुनपर एमामी मानो दिर, दहीपर रोष्ट एम श्रीकान्त "ऐसा माछाद मत करो गुमाई, मरे भाम्पमें ऐसा न पटे । बरिसमा पापबाद दोकसी व्याँस्से सेब्रे इन एमशी एक दिन मर प।" माम्यने पाठ सम्म "पो गुवाई मारे प्रेमकी बात ही काये, और कुछ नहीं।" मैने मी समझ च्यिा किमन्य भागों माफ रिकाराकी मिचार-पाग सरस पर भौर परपर पी गई थी, बस । रामामीने एक मुंहसे का, “एक वो पापीर और फिर एकन-एक ऐग बाण माही पण-एकांगी मादी, फिीकी बात सुनना नहीं पार,--मै रातदिन ति राम्रो खमी यस्ती दोरी, से बाऊँ।" पर वो मैं मन ही मन सहिम दो उठा । पते पक पाणे ही पाळमें काम पानी का पहुँच गया, इसका ठिकाना ही नहीं। मैं ना कि मुझे अपना बप गिरा करनेडी मर्माम्वक मारमानि कर ही इस पार एमास्मी पायसे भाई और प्रचारक हात-परिवारमयरमें म पने र मनन कठिन की मात्र ठसा मन पनी पती बोकसी वरद मिरना ही नहीं पाती। इसीको पात करतो अमिप्रापसे में सकर मोम “ोगों मागे मी दुबसे पतले शरीरको तुम पारे विजनी निम्ब पो म करा गा, पर इस परका विनाय नहीं है। तुम्हारे पाले मरे बिना में मरने नही यह निमित।" उमने बात सम भी न करने पी, बरसे मेप साप पकार करा, "पष इन के सामने मुझे सूपर तीन पार कसम खामो। मोकि सात कमी उन दोयी" कहते-पाते सात व्यत् रकी पोनों मौते पापो। सो सामनारहो रे। मई मारे उल्ने मेय हाय मदोसे छोड़ दिया भौर भारदस्ती सिरहा, "इस पर मोतियाने परमूछ । मुमे खना ग्य दिया कि- पर बात भी पर साम मकर रुकी भौर परेको पा सम्पमा होते दुए भी उसी भनिन (मुभाँकी दोनों माराम पड़ा। एक बार रिसरते एकएक मिरा दी गई। यो गुलाने परन Rसा विसपारचे पनेपर रे हमारे यो मी पपारमे और पचाने कमी पर माया, इसरि बर मी गपर्म भापौ।

चातुर्य पर्य
स्टेफनपर पहुंचते ही सबसे पहले पीक योविषी नम भासा ।
प्लेटफार्म पर कमल पिसकर बड़ी शान यो भोर उभापास कापीयेग
बमा हो गये।
पूज, “पा मी साप पम्प स्मात
पमामीने ममी मोर देसकर मपनी समसौ हिय में। पर सिर
दिव्यपर पाया कि बापगा।"
कहा, "नर्स नहीचपगा।"
"मान पनेसेना मच नगा वो पुरा मीथेन होगा। साप पकने
दोन"
"नहीं । मन्म-पुराछ भी से यह पाप न बरेगा। उतेको पुराना
हो, -रिमार महीसे पिदा कर रोमान्त करनेकी सम्वा भौर सापुता
भगर उसमें दो मी, तो तुम्सरी गौतोंडी पर ही मारे।"
"तो पहीपा देवी,"पर रखनको उसे मुपने लिए भेज दिया ।
नही पानब कि उसे क्या दिया, परपा पार मापा रियर और भनेक
भागरिदेकर रस्ते दुए से उसने बिरा।
घोड़ी देर बाद ही ट्रेन भार हाबिर पुर और हम साचेको परिये ।
१२
रामसमी एक प्रश्न उत्तरमें उपयोगी प्राप्तिका किस्सा पटाना पड़ा।
"हमारे पर्मा आफिससे एक ऊँचे सपने मुरीद वस्व गैया र मेरे
पडे किये हुए सपने उपर से किये थे और पुद ही नोंने पर नदी भी
द ही नहीं, बलि भगर मछे दिन भाये सो मुनाफे मी माप
हिस्सा रंगे । इस बार परसचे औरकर फ्पे मोगनेर टोने पर्दा पोगुना
पापा मेज दिया । बस यही मेरी पूची है।"
"बा किनी"
"मेरे टिपणे गुव पर तुम्हारे निर मविशप तुम्छ।"
"तुन हो पिकनी।"
"त गर ।"
"या मुझे देनी होगी।"

श्रीमान्त
सरसे का, “यह ती बातमी यो पान होकरीप म
फैमास्सा
रामाने सास करा, "मी भपामय सान नई करी मोर मयोग
स्मशार पाय-फका विमानकरी ममो रूपये।"
'स्पा करोगी"
"अपने शान-सोपी नवस्य काँगी। मासे यही होगा मरे क्ति
एनेका मूड-पन।"
"पर स्ने मन-मनसे काम कैसे चलेगा ! तुमारे ई ए मौकर
नौकानयोकी फन्द्रा दिनकी नमार मीठो इससे पूर्व मही होगी। इन
पाप गुम्-पुरोहित, तेतीस कम देता है, बाक्-सी विमा व मरण
पोरण ठनका सा उपाय होगा"
"नापि फिक्र मत करो, उनका मरबन्द न होमा । मैं अपने दी मरण
पापनकी बातचयो। समझे।"
कहा, "तमझ गरा । मक्से मम्नेको एक मात्राम भुगपे रमना गावी
हो,-पही न
पम्ब्रमीने का, “महां, सो न । पान म्पमा पूसरे कामो लिए
है। मेरे भविपकी पूंजी ही होगा जो मरते नमारे अम्ने राप पयरनेपर
सिप । उनीसे मापेर साळगी, नहीं तो उपयात कलगी।"
'तुमारे माम्पमै यही बिहा"
"पाति-उपवावबार पर मुख्ने (दुए कप, "म
चोर पोलिसापरप-सी पंगे। पपा विधा में बनती ( बारपो
रित दर पावा व्यता है । एक दिन मांगे कि मेरे पापाम तुमको
समेहकर होगा नहाँ।"
"यापाठ तुमने इल्ने रिठे सो नाही"
इसीपि नही की कि रिसात नहीं करोगे। मेरा सपना दम मा
मारे पूठेवक ना, परमाणे पाले मेरो अती पर बाती।"
म्पपितरका "मचानक भासदेलवासेपी कासीहोमी"
रामश्मी प-मरता मेरे पारेको भोर रेस्टो ही रिपोमे "पा
गाव नमान एमएकवरी पर मेरी तो प-दिन यही भावना यौ।

बतुर्ष पर्व पस्या या समझते कि मी कमसि ही मैं रेपी-रेपवर्मकी बा परती | उस परका एक मणु मी भार उमा पिरिममें में सनी घेरावी। मपास ही मेरे फारसे मयदान में सीन देवे। इस याको सय मानकर मुसहा विश्वास ने दो दि में मारी थी।" "विमान कोपरख ।" "नही, नोकर उसी प्रतिसादका वास महामन्या काने मी, कमसे मारा रोना परिपाको मी तुमने उसकी गणेशानी मन पर मनी, उन बापाप मिट गर,-पा पुट हो गई। पर हमने मुतते कमी कोई बात ना पूछो, कमी तो नही कहा कि समी, माने बोपन खरी पाना नाबार बवामी। शों नही जो मुम मिलाप नही करवे मेन और न बिस्वास रहो मम्ने CRP" का 'उससे मी नहीं पूना, बनना मो नी बाधा रखने पुरोबार सोला। राममने पा"हो मी मुबी है। पापाई सकिए उसकी पानी नदिनना चाहते थे, सादि पता नहीं। पर मुमसे मी सा पहीबागे" "महाँ, पानी ग्गिएमा म मापी यो उखने बोuिt में भी वही करना इन बाटोम में भूटनेवाय नी । मेरो सारी बाते में सुननी ही पायी।" "मायो बड़ी मुरिस। मैं दुनन्य महाभारत को मी एक्ली भी।" ", मननी पगि । गा ताकि तुरनेपर पर मुझे पार मई परागे ना मुसपियनी पायी।" ' तामा विपकनारे मनुपरमासा तु मात" रामाश्मीर पी, बोली, "नही पा नहीं होगा, धर्म सुनना पोषण। तुम पुलमा मनमें या स्नी मी गति नहीं है अपित मादम होने पर मुन्न र रमो व मरमताको बाट सम्खा कपूर पर ए कप, 'म (न परिणाम पुर्येश उमेरो मुझे मम्मानित र सीहोमी, मार

२४६
मीकान्त
पुस्य, नमस्कार करने योग्य है। उनकी पद-यूनिकी बोम्मता मी मुसमें नीं।
बम विधा पर मैं एक दिन मी नहीं य गा, पायद उसी पल मेग बने
किए औड़ पाया और तुम्ने गवि 'ना' का दिया जो मेरी दुगतिकी पैम्प
नहीं येगी । भतरव, ममपावर विपर्योको भावना बन्द करो।"
पमामांने कहा, "तुम भावमपचपनमें मॉन समे एक मैपिडा
मारहाणे देवरिया ।"
"हा मौर एक पगमारकीरी बनानी या तार बहुत दिनों बार मनी
पीपा मेप मित्रम"
परमाने करा, ", पर पारे मित्रका मित्र था। एक दिन नाराज
होकर मैंने मौको विद्या कर रिपा और उनीने पर भैरफर मेरी मृत्यु माया
फैडा पायावर भुनी पी!"
"सुनकर तुमने म्पा सोपा मा"
"येगा , माचारीमा मर गई।
"पी और कुछ नहीं "
"और पा मी सोचा कि कापीम मरने के कारण और मन मी हो
वि दोरीमा
परमाने नाराज होकर पा, "यो, मुठी मार-मार रस
प्रकार रनेको त मही | मैं सम पकर का सतीश गुम्ने एक बार
मी 'मा' की यो। मे, मुझे पूर को दो।"
भा, 'रतने दिनों पाणी गावे स्पा यक-और पाद पती की पी,
पही दो बार पाता"
राबमामीने कसा, "सैरानी पुरानी बातें पर पार करने
बरखना, मैं जानती है।"रि पोड़ी देर टारगर उच्ने गरा, "मौर में।
रोब मुखर विनापासे पर पाती थी, मगवान् , मेरे माग्पम एपने या
या दिवा तुर्ग साध्य बनाएर बितर गमे पम्प गीपी साइल
जीवन में तो फिर कमी मिाना नही होया रिपकम्पा ऐपत्रणा
मी रिनाने परमे। उन रिलीधी बाते पार पाते ये भाव मी मारम
इस्पा पर बनेकी पोती है।"

चातुर्य पथ
उसके पारेकी भोर रेसन मोसमोर शुमा, पर या सोपकर उपहारस
सिमय निषेप नही मानेगी।
सदा उने विटने दिनी मन ही मन चिनी ध्यसे उन्ह-पाटकर
वोपानविचारा, उठ मार-मायलम्त मनने नगरपदी किनी मर्माम्बक
पदमा मनमो इस पर किसक कुछ रोग, अण
यदिर पप्नेश बार न किया, इतने दिनों बार भर भापा पछि
REETसे पनपा। अपनी प्रम्य कारणे मनायो
पीने मुक्ति पती, यवर मी मात्र मा औरझमदारी मेरोको
सोसकर उसकी वह सब पर सो रोना पारी, रिस माम्पमें
उछ मी मों न हो। साविया ने महमाने है। चार इस एक
म्मरि मागे इस पिया नारीने मिर अपने इलाके समापनकी मिया
मोग्गी , पाना तो संयम मेनेफर मुझे बहुत ज्याप मित्र।
बुधरेर रोनारी पहे। सास राज्यमी बोय, "एमयुन एकाएक
मरसा, मौने मुहे पर बनेका परमय रा--"
-
"एक दूसरे राजकुमार-मारे उनी मिग- सायमन ताप
जर कार ने सि पवे ए-क्या दुमा, पारना"
'भापर नरामात पुण्नी पाप हैन । पर उसके पार
परमाने मा, "या पपयनीं । मैं बासी, 'माँ दम पर बमो।'
मनिका रयर पमे मो मे पुरी , पापा र म देश
पभो । माया पपा पोहोमा में भागौ। मात्र या
पादसे ही तुम पिरान रोगी माँ, तोरी में मरने रेसर यया
मावा पानौ हुए गौ। मुझे दो एम बानणे माँ, हा र नही दिखा
रही । म पिरा ग । उसकी इगनी मे मीवको सबर मुनार हमने
एच मत हुए । था, 'मा! पारी मर गई।" वापर
पुर ही कुछ हसी और बोली, "तब होती तो तुमारे मुंह नियतीपा
'भार मेरे लिए एक पी, सभा विकदिन सबमुप माया, इस दिन
मंसू बार राना साना कि संचारय मने पर-पुभोने अनेक
माम रसी६, उनके प्रेम संसार पपिएपरिपूर्व रोगास

भीम्त पुण्य पच्यमाने भनी मौ वर्षकी उम्र उस रिमोर बरको एक मनसे बिना म्गरा पार किया था, इस संसरमै उखना नारा पार कमी कितीने पिसको नहीं दिया। कहो कि मेरे काम उस पठ पापा कांगे ! मैं मरकर मी मन हंगी।" "यह क्या तुम तो ऐपी हो?" सपने मोनो मौत मौका पौगारमा, "तुम क्या सोचते हो विश्व निरपान पम्नीपर उस भामाग सम्ोंने बिना मसाचार किया, उसे अन्तर्यामी भगवान् स नही !-सा माय रे ना रंगे!-- मलये गंगे।" रा, 'सोषवा तोल मोत बर लिने यना पित ना पर स्नी बात मग ही मापी पपस्ती हो, मेरे से पापपासा पराम कमी नही मेते।" एम्यमाने का, “मवा!" पर पूरे हो पप गम्मीर होकर करा, "पर होगका कमी और पुम्पका धर्म एकम होनसे काम नहीं पाया, पर धर्म कर्मम तो मेरा भौर दम्परा सम्मई सौप मौर मेपले बसा है। पिर मोम बोगीकासन्य" "प- नेत्री त्यही परवा। सबमानमें यमसे मार गम्म बड़ी मार सहिप एक मधि पून्मेका पर नहीं करवा निर्मम होकर माकर ब-बबाहिना मात्रा होती कि उसकी धर्म-पापनाम विण पासा" "उसाद पा होता है।" सारा "उससाद पापुर रोवे गोठे बापत यावा, पाँवों में दिन बाहर कावा है मुझे पत सग मिस युधस बीपन भय इनी बड़ी माना ग । गपा मैप स-सर गुरु पुरादित,-मुझे इमा रामाश्या मोदी बोटी "पर खमा मिडवोबादी" से मिलती है। पर हुमाय पानीका पाहुमा । पसममीने का प्रती है। म-मर मेरी भोर निष्पा नेठे रेल परा, 'माण पम्मै गई । टन दिन्ने मुझे एकमा उस्ताद गामा-पगमा पतुएं पर्य मसाला पाया था। सिख समाने पाली था, पर इसपर पिर मरी गगा था। सभी मुसम्मान मी श्री ना मुझे नाव दिलाने भाती पी। मैं उसे वापसी और मुहे बमुर पगाव पार रखा पा । रोकर कार पाप, म मेरी शपये, पहना मुमसेर होमा।' पावभावमा पाएकाएक बालन कर सभी मैनेमा पास गाव म्परा। उससे पदक समवमा । सिर माम मरा होग, होगा। पर मापये भाग पहे। इनार उसमे अपनी बम पूमी माघ मसान, विस्की नामरा, बापुर, मय,समें इस परनामें मार मास किया । आप पपा एक महामनकी गदीमै सम्म भय दिपा मोर माघे ससे एक मनिहारी देर पोका पान सोड। मन सरपरको समयमा, उसे घर हम मी पपा और लिएको कम्ती पो परोठमने सुरमानी रोवे दम्पहै। सीकानी सुनार खरेतर सम्बया, सिरोध "तुम प्रती होए भारमार नहीं होता और कोई वा दो सावा AR नगद पानी मन या है।" पथमाने पा, "मैं शायर नसतो" पहा "धायद पोज सरती पर मेरा पिसाट मुमते मामा महीपाय "बाबासमा "मेरी मा भरण पेठे कहाँ देखा वोचरं और तुर्मे दा ने कहा मेरा भास्माष न है।" "मनकी बात तुमने ठानी।" " मनकी बात भी काम न की हो" "मे बन सकती है कि पा मेरी रात-दिली मारना है। पर सारे दोस।" "भगरोज दुपदरोमोमी १० पामीने मिसार का, "बई होमी । मैं मारी बाम राजाने इससे पाए म साना, मैं यही भावी।" ठार या, “तुम उस पुस्की मनुम हो, बाग

मीकान्त
संसार"
एमम्मीने पप्स, "मैं ऐसी हो गई और इमेण ऐसी होएँ।" मा
पार पर मेरी मोर ऐन्य रिना "तुम सोचते हो कि इस पुमकी और
स्ने नई रेली।। बहुवली पसिनुमाने नहीं रेसी । भोर रेसी मी
वो पापरते। इनमसे किसी साप मुझे बरत हो, तो दे कि म यसका
रो।मी मुझमे मारते हुए कहा था कि हम मिना पाकर मा
थी, न तुम दस राय ने दौसीम सिमम खाये भाओगे।"
परमा इसी मीमांसा काही नहीं सच्ची पर हमड़ा करने का घमरा
सिर्फ यही का सम्वा कि उनके बारेमें तुमने बाद मविपार किया।"
पक्रमाने का 'भवितर भगर पिारो तो मी का सीन
मसान्त भरिचार नहीं किया । भो गुमाई, मैं मी पाहत भूमी , गुव रेख।
तुम म बों को यहाँ भी हमारी रस बोड़ी भास पहुई"
बोन पम्मेवे देना दिए । गत का
रखी म्म्म
एमम्मीने (ते हुए करा, "साई, मेरे हाम-पैर पर,
ऐसे पाये मेवी सिमर म मूख्ते । पर जाने दो, मैं ठन गई
क्या हमारी सी रोगी, मनमारी यादो मे किए सारे
रहा काम है। पर म मम्ने बारेम बप मो न सोरने इंग। परम जमा
सि पाव काम है, मबसे बेरी करने होंगे। इस मम्ममिनी' पौछे मारा
प्रपतन भोर भी बहुत कुछ नए दो पपा , भर में मोर नाना
करने गौ।"
छ, "साटिए तो में मिनी बायो त उही पुरानी नौकर
पार साबिर हो बाना पाया है।"
राजामीने का, 'नोडणे में तुम ना करने गी।"
"पर मनिहारीकी कार में नहीं पप सम्प।"
"मो नहीं बन सकोगे।
'पाग पारप तो पाकिबीन प्रम मुझे पार न पता, दूसरे,
राम सेना और प्रेरन दो दिसाप कर पा पैसा मेम ना दो और मी
मतम्मर है । पूधान सीपपगी, मगर र माटी न पर

बार वो गनीमत चतुर्प पर्व "तो पोपी एक न करो।" "इससे मम्मोकि बंगी और मालभोकी एक दूजनम्यारो, मेर उसे अपना नारा आधन होगा" पवयमी स पड़ी। योग, "मन मार इनी भारमना करने पार मी भन्तम भगवान्ने मुहे एक ऐस बर्मन मनुप दिशा निसा स्मारका श्वनाथ मोकाम यहाँहोमवा" मा, 'भाराफ्नामे पुरिबी। उसे सुपरनेका बफ है, मात्र मी तुमे गर्मठ भरी हिला-बाना, सस्प, सम्मा-चीफ बवान बिन कोई प्रय समा और न रंग ही या सिर कामका मार देकर निमिन्द, हममें रूपमा-सा सोपहर निमा एमा यसविसकी सरपरी नहीं करनी होगी, मदम खो देनेत्री माता ना बिसे समार वृप्ति, मान कराकर भानन्द-मममा को 'ना' बोना ही नहीं पय- रामचमी गुपचाप मेरे की तरफ देव यी मी, बारमात् सतारे परम गरि उठ भाये। मैंने कमा "भरे मामा' "नहीं, कुछ नहीं।" "कॉपबोरठी पसायमीने कहा, "हमपानी ही तुमने थे वीर यी है, उसका अपर भाष मो परमो सयर मैं मारे रकम पठंगी।" "पर मेरे से गार्मम पापमोकोर तुम स्मामी।" परमीन रवी पार पण, "मी मोर मा । ममान्को कोसँगी। और मेधा मन्ती नदी पर मम्मी । सबममें और वो कुछ मासे दिखाई न देवा। "बकि मम्मद नही है तुम मुझे मुपरीपुरके बताने मेरो।" "हम कोन-सा उपकार करोय !" "मोरयाणा भीर क्या प्राद पाकर भन्दा पाएंगा। इस बार उसी पर मेरी स्मारिन प्रमको दीपाला अपमी,-दिस दिन १५२ भीकाम्द दिन पाप नबसेगा । मुह फूल शोपन उपासे कमावासनिकछेगी खेप्मी एक मही मतिका फूल पिसेर देयी भोर कमी अन्दर फूल। पदि मी कोई परिरित पखा मूबर मा ययगा वो उसे समाधि मारोगी, प हमारे नये गुसाई राते हैं,-पहा ये बय पी बया, पाँ मलिका सूखे मोर पुरवाये गय मिपर हुए बमपूर मरे हुए रायमाझी ममम मौत मर माये, भूस, "और मा परिचित म्पति तर स्या परेगा मैंने मा, "या मैं मसी बानय । हो समय है कि बार-ण पया सब कर मन्दिर बनवाये- पमम्मीने मा, "वीं ऐसा म होगा | पाठयपुर को हर करनाम वाग्म । पेही र गम्पर पधी व करेगे, गामा गायेगे गंगे को सूले पचे सूई गमियगे-ठन को साफ करनेका म्पर उसपर रोग्य । मुगा चुनकर और साफार फूमेकी माम पिप, गतको सोनेपर उन नगरिया गीत सुनायेगा पिर पक भामेपर कमाता दीपीको मारमा हमें एकत्र कर समाधि देमा, कहाँ भन्वर म पने पापे, मग-मग न पाराने पर्य। भौर पाको रपये, इनसे मन्दिर बनवा देना, पपासपी मति प्रतिषित पना, पर कोई नाम मत ग्लिया, कोई विम्व रखना,सीको मादम न होने पासे किन है और मांस भा" पा, "हामी, तुमारी तबीर तो हो गई भीर मी मपुर, भोर मी मुन्दर ।" राजपम्पने कहा "मोरि पर सवीर सिंचासे महा गदी गई। गुसाई, मा सम्मको भौर नहर में गई। मेरसईया, समठे नरी ऐगा । तुमारे दाग भरित मार्टीकी तस्वीर लिप बाते होकर ही रायगी।" 4 चना " "यनी । स्पर्प दुम्से मी म्यादा बानती । पर वो मे पूग, मेरा प्पान है। पुष्प प पर किसके पेपर बह पाती है। पिता पर पत्र देवी मारेरी।" मापसे रसोइसकी पुकार मार, "मा, न नापासम्र पानी यार

चतुर्थ वर्ष
२५३
रोया ।"
"माती भास पॉटवर पा उसी पल पी गई।
अपरेर बार बायको पासीमाई और रछे मेरे सामने रहर पोमे,
“म निगरे पापागा, वो भरते पीसो नही खे"
"वक्ते पयेवो भाग नहीं "
"पोका मा रोय १ स्परा तो मोगों के पास है।
इस सपरा, "उपरपान मा परिलका कम्य तुम्हारे पदनेष कमा
होगा। मान देस पिवर्ष तरीरकर म्पयेंगे और मैं अपने मन मुतारित
सपार रगी। उसके एक गरम मेयोनेका मग रोग, और पूरी मोर
मरीका कप | क्स, इस सम्मम मेप पी त्रिमुपर-इसके बार मे
तीमी बानी।"
पूछा, "और माय रोरसा मानन संन्यासी मारमी है, उपर नमन
रखोपी उसे एक दिन में न रखप सोमा-पर उमा पा से
मला भानगा।"
पसारमीने कहा, "यारीगने पवा दिला है, पर मानन्द रहुत
दो मापगे। पारस मिसार गंगामारी आगे मोर यी कुछ दिन
था, "मझो किपाँपनी की गई। किन उनके निकट बने हुए
समार में धर्म नहीं भाग्य
रामसामीने इंठित हास्पस सिनियर, " उनसे ये कोई
मी मानी अनवापि वान वगैरा ध्यार मैंने स्वांग नापा पा।
पाक मा एव पर गये !, पता मा पा साठा कमी करे थे, और
र मेरे सारे माप और बारी मोर मार पर बिएम भी वो मेरे
जयो
समरकर पोधे, “सार मिय कियसमामिनी माची रिभैर
माईसमोर साम मई मने पतिको । उको दिए एक हार गरमा यौ।"
पा, ', गदा देश पिन ब मार रि मगर सुनन्दार पने
पजामी बारी यो स्टी, "नाबी माँ, मरमामना।

भीकान्त मोबापूर हो गया है। बाप रे बाप, पेसी घम-दिही गरिन न खे मौलीक मोर ही रोक सकी, मचाना दी ला सकी और म ये पावहाँ कि पगड नई ।" पिर उसने सिरहा, "तुम्सरी मी पारे सहो, मेलिन मस्थिर मनी नर्म है। उसने एक बार जिसे साप समय लिया, र ठसे उम्से कोई दिया नहीं सकता। कुछ भप नौरव पार फिर बोली, 'मेरा धारा मन मामो इस वक्त मानन्दमै गा हुम्न है। र पक ऐसा बगा TA इस पनका स- मिझ गरा, मर मुझे कुछ नहीं चाहिए। यदि मा भगवान्का निर्देश नहीं तो और क्या है, बताभो । प्रतिदिन पूग कर सवार परणाम सपने लिए कुछ कामना नहीं करती ह यही प्रार्थना करती कि ऐसा मानन्द संसारमै सबको मिले। इसी तो भानन देवरो मुम भगा कि उसकामम भबसे पोड़ी-बहुत बहायता करेगी।" "भी बातम्रो। यमी भने मनमें न आने का दोषने पी रिपबरो,- "नो इस एनन्दा मेवा भी नियम और सस्पबारी मोर कोई दी औरत मने नहा रेली, पर बातक उसकी पियकी गरमी म पापगी वापर विया सी काम नहीमोगी। "पर मुनना बियान पर नहीं।" रामम्मीने करा, "नहीं, पूम्की तयना-और या पाप मने दी मी नही पाकितने सोक चिनी पम-पार्व, फिटने उपायमान बानगी है। उस मासे सुन मुबार दी ये मेरी या पारनाई थी कि मैं मारी मोरे ना इमाय सम्पप इन-मीर विनात मी तो पही ना पाय पा, पर मचान्ने मेरी गरन फम र समस्प दिया कि इससे पहर मिप्पा मोर करना। इसीसे समझो कि उसकी विशमैं ही परदस्त भूगर सीमिए रेलटी मा बिसीको मुन्नी नहीं पर हमठी, Gि: रीदे सकती है। उसकी बेअनी उससे पहुव बड़ी है। पंधी-सादी , पदना बिपना नहीं पनी, पर दिम दया-माया मगई। फिटने इसी भोर परित परिवार पर इस्पार प्रतिपामती-किसी पन मी नही पष्टा । यो परिवारकाप घे एक मुम्पत्य हो गई, बामा कमी मुनन्दारिए रोहती पीतुम सा पा सोक्ते दिपायरिखमकर

चतुर्य पर्व
मभन पर पड़ेगाने पाण हुई। कभी ना या उसकी पड़ी
खरानीने भन्ने पनि पर्षे पा और रो-रोकर लगा है। सुननराने सारी दुनिया
सामने अपने पाठको दोर कार प्रेस पर खिा,वही मा -
PART है। उसमें पोथीकी विधा माता मनुषो मुलाल, मई
पुपई, पाप-पुम पम्प गप धमाल नहीं कर पाती anas पुस्तकों
सेए पर्सम्म गाना फ ममुनीको बिना कारण देगा, भवारार रेग्न
और बाये देती है किस्सारमे किती मी स्पाप नही करेगा।"
मा भुनकर रिस्त इमा, पूम, 'यह सब तुमने सीप पिसे ।"
यसकामांने कहा, "क्या मासूम से, पर तुम । तुम कुछ
रखे नहीं, इस मागवे ना, रितीपर बोर नही राम्रो । सीलिप गुमसे
सौलाना समोसना मही है, पायो ससम्मम पाना है। हम एक रन
भारपणाप सोचना पड़ता है कि यह सब पनि भाया । पर इसे अपने दो,
इस पार पारी मुमार-पीके मित्र कमी और उस दूध उनकी
ममोना को गधी की, भाकपार उसे सुपारंगी। मेगेन
गंगामाय"
"तुपर्ण नारी
MERA नौकरी मी तो मा कि मैं तुर्म नौनी मा करने गो।"
"हामी, दमारा समय सूब है। तुम पानी नहीं, पाहीन,
विवार और मी न करता,-विवार पहनताका ममूना तुम्परे
ही सिरमिता
"रबिर या तिकी बोल रोगी, उनका अनुमोदन करना पड़ेगा।
चरम स्पा मोर दिया एक मुल नारी है। साम"
"ठीक हो कि ममपा । उसने फेगा भए ना किया। पर
उस दिन भाभप रेम पर न पायो तो थामद भार तुम मुझे पता
नहीं। भाव उसका क्या हुमा, यह पा बिस्कुल ही म हो ।"
कमी अममरमें हो पा मोर हे विमात शेतमोती,-
"हो तुम यो, भानमबरको औपर मैं ही बर्मा बाटो पभार उन मेगोको
है भागो । मरों उनके लिए मेरे प्रकार होही पापग्म ।"
माहोकतापितु मा पहुव ममियाननी है। मैं नगा दो पायद

भीकान्त देसावन दरवार साहै। नबरा भीम दबाकर करा, "जन दुप न मानना माई, मैंने समझा था कि तुम उपर ले यो से, पुपरनेपर उपर न मिम बन" रामम्मी सिने बगी, मुतसे मी बिना सि न प्य गा । नत्र मनि महा पी, उसने गम्भीर भामा मा, "मैं वापरब पाँ, किसनने चापका पानी पड़ा दिया है।" भौर पर पम पमा । परमाने का "ठापर नकी भानन महीं बनती।" भानन्दने मा , पर मैं उसे रोग नही रे सच्चा दीरी। पर भापका लियर-ए- नौको महा भुसने देना चाहय । परभाव उस्ते मेडकर म्ना होना, मम तो चना मस नहीं मिम्पा । पात दिर्नाका मूला।" परमीने पम्दीसे पराममै पर या, "ख्न, रमा परेका मई, माल एक बड़ोस ई म मनी सेगी।" मगर कहा "मलाप पो से माई, में पाप वार कर मी" पर या नीचे रमे गई। मानपने का, "परा, एकाएक तमी क्यों " "इस फिपत क्या मैं गा भानम" भामन्दने एए कप, लवकराराम भर मी नही मानी- नायगी र मी दुई। रिहा गाना दो बनेपर तो ना। सघ गंगामायम स संसारमै सहरिया पर खरे रे मेरीका निमाप मोर उपर मकानका मालाच! पीचर्म में, नया भारी- एर पो , उपरो, पैर मार ऐने बैठ गई, खनने को मणानेका योग किया-सा विच पी! पाराण, भाप लूप मे मीस पदाबोम, "भाकी पार नाराजगी दूर हो गई है। ये मत ।" मानन्दने पा, "पर मल नहीं होगा। माप नि:संग, एकात्री जोसे में रखा और माम जेषक मापने मानेको संसारमै माँ सपने रखा। मना-मन का तार ! और महसे मा, "रसा मुझे मूमे नहीं, बीच-बीच पार करते थे।" मानन्दने करा, "वह शरा, मापको मन्ना भी मुश्किामोर समममा मगठन है, मोरर पर ये मोर मी कठिन है। भयर पास न तो -

चतुर्य पर्व
कदिए, बोरीको गफर बादी है। आप सिर्फ दो-तीन दिनकासी ही
परिचम, पर उस रिनोदी साप सुरमै सुर मिथकर मैं मी दो रोने नहीं
बैठ गपा पो सिर्फ इसरिए किया सेन्पाले पीमिष्य लिया है।"
बोम, "पा सासर परीकी खातिर । उनले मनुरोक्से ही तो हनी दूर
आहो"
मानपने पा, "Reछ नहीं है। उनका मनुरोपको सिक
मनुष नही पावो मायें मांकी पुकार , पैर मपने भाप बन्ना गुरुपर
सनाने पिने पाम भाभपखा, रौब को नहीं
देखता । पुनाकि माप मी दो महुत धर्म , मापने मी श्री कोई न देसी
, "बहुत ।"
गण्यस्मीने प्रदेश किया। कमरेम भुसते ही उसने मेरी बाव मन में पी,
पापकी प्यासी भानन्द मकर रखार मुझसे पूज, “दुर या भी
माम प्रगदा विपदमस्त से गया। मैने का, "तुमारे गुपोकी
पटेलीने रिपरि लया ण, एसपिए मैने बोरसे उसका विवाद
किपा"
मानव पापकी पागे मोठे का पाप, सीकी पम घोड़ी पी पार
अमीनपर गिर पड़ो। ममी मी त पड़ी।
मानेरने का, “राण, मापकी उपरिप-बार मय है। यह ठीक
उम्टी बात पप-मरमें मापरिमागर्म से मा गरे।
पम्यमीने था, "इसमें भार्गमा भार! अपने मन बाव
पाते-से मोर कहानिर्पो गरर मुनाते सुनाते इस विधाम ये पूरी समझ
महोपाप्मान गये है।"
कहा, "तुम मेयधात नहीं की।"
" मी माय
मानेने सहर का, “गार कानेकी विषम पाप मी कम
दोरोनीवाप रे दिपा "बरामी महा"
यमरमी भी पड़ी। बोडी, "-मुनकर सना पड़ा मार
बरसमरेर मत करो.राप प्रेम महा। पर भी उस

भीकात
का ट्रेनमें तमाय भोग्न महाभा । इनके मासे मेरी उम्पाति मुन दिए
वो तमाय परा दिन में कम होगा।" यह कार या पी गई।
भानंदने का, “माप दोनों से रो माफि स्पिरम पिरक है। मपचारले
माम रमियर भाप ग्रेगोको दुनिया मेम।
"उसका नमूना चबान "
"नमूना वो उस पर दिन बैईपियों मेगन परत देस पापा।
इसकमार मोर कोई कमी नम महीं भाया।"
"माहा । ये बाते परि तुम उनके सामने दीपवे भामर"
भानर धमका मारमी है, प्रम परनेम उपम और पति उसमें निपुण
है। उसको निकर पाकर एलमा भानंदकी सीमा नहीं। पत-रिन खानेकी
वारियों को प्राय माको सीमानक पहुंच गई । दोनों में बगावार किन्ने पप
होने से उनको में नहीं माना। कानमें सिर्फ पर मना पड़ी कि
गामायम एक गए और एक करो लिए सोम
पायगा । पोकापी मरीन और मीच मत होगेका बासी भोर शायर
दी उपप । मुना विविका भी मान्य विपा व्यबमा । बनन
विपकी मुमम तनिक भी पटा नहीं। परोपकारप्राप्मी पर गतिमा।
पासोपटही किकहाण वग करना या बनाना पड़गा, मेप मान्य मन
'मा नहीं, 40 का मार ग्नि गम्ना पारवहै। पपने मरे उपोयम
भौच-नीमम भानर मुझे पतीने मावा, म राम्समी ted हुए पापा और
प ने मठ मत पेग मानन, मारे नसकस पंगु हो चयगे।"
तुनने प्रतिबार रना री पावा वाय, "ममी-ममी उस दिन तो करा
हिमप गुत काम और मर मुझे बहुत-न करना होगा।"
रामसीन पप गोदारा, "मेरी गच्ची पुरं गुसाई, पर ऐसी बार
कभीमानाम मागी।
"बक्पा किसी दिन पुण् मीनी कगा"
"पों नहीं करोगे। परि पर पाम के मारे मुझे मरम्प नर
पचे, तो बनते ही मैं मारे निकर पितामी।"
भानम्दने पण, "00, इस तय हो भाप सचमुच समर्मन बना

मनु पर्ष बारमीने मा, "मुझे नहीं बनाना पोगा माई, कि विषावाने इनकी सो उसने इसी मबस्पा करा भी मुरि नायने . मानने भा । मम्मीने पा, "मर रिया बहा म्पोस ऐखर दिया गया किली मकानसे बाहर पैर रखते ही मेये जती पर परने माती है-माता से नहीं मावा किसी भी काममें मन नहीं मासमटी "इस बीचम्मोतिपाका मिया सा का उसने " इसका उचर ने रिसा, पा, "मेरा साप सार बायोम कि बहुत या रिप-योग-कीचन मापकी समस्या |" 'गरो, हम समाापर भाप पिचास बरती।" भने हा, ", खीरे, मरती है।मारी दी कासीमा पिपभोग नामकी कोई बात से दुनियाम नहीं है। मा कमी किसीर माफ्त नहीभाती" भानन्दने तर "मा सन्चा, पराप देतार कोई सेवा सवारी" परमाने कहा, "पाणे नहाँ चमध्ये माई, पर मुझे पा मोठा पो किरसी माग्परती है, उसे भगवान् इसने राम महा पायेगे।" भप-मरक हमारे प ठक की भोर ऐसार मानवने रुप पाती। इसी बीच मननकी जिला-पी, बन्दोबस्व मौर म्पपत्याच काम ने रो, काल, पूना, पुरकी, दरवाये लिकियाँ बय मा पर। पुराने पर पामीने नया मनानेघ मापोन किया। उतरिम शमसे भानमने , “पटिया, पम भा।" भागार में चार बने प्रस्तावार पमम्मी पनि बाहिररिया करती है। बोधी, "भूमकर मैसे-जैसे गधि हो पयेगी मानम्र, ठप नाँगी भानन्दने का, "गरमीसे वो बोग से पटरोंm भाव मेरी तबीरव मी बहुत मी न पी। , "इसमें नाक भीकान्त मानेनर नही, पर मार उठनेडी मी पैसी इसम नहीं होगा। भान" भानम्दने पा, "पा बायो। शामक कमरेम हे पनेस पनिषा मेर म बरबागी-पम्पि, सहिए।" एमामीने इम उम्पयन करने के लिए पा, "इसे पच एक स्प प्रम परें न बानम्म। पर पिठीय मुझे एक बच्न हारमोनियम परर गा, भातक उसे देखनेका पक से नहीं मिम । में भगवान नाम देती, म बैठकर मनो–णम र परमी ।" माप उल्ने रखनको पुपरकर मस्त मयिका रिता। मानने सपने पूज, "भगवान्ता माम मानेमा गीत रीरी पमम्मीने मि मिकर की। “पारीको पा लिय मी माता क्या "बहुत साधारण-सी ।" रि मुझे रिसा, "वपन बनाने की पम्पास कापा पा मानन्दने पण होकर का, “या हो कि हुए रसम है, पारसे पापम्ने कोई उपाय ही नहीं।" उसका मदम सुन मी मनेगी, पर मैं सलमान खाप मा। मोकि मामर कुछ मी मी समझेमा और मोइनभरको उतारिनप पाप नमत और मी म्पादा रंग पेप, और मन्तम पर नायब मोरया । पुष-बोकावर पूण-वियपा पुर्णपनवाम गाना भन्या । पर यमीक सार इस पैठा पावगा नहीं। परमाने परम्पेनियम मानपर पहले एक मगवान्ऐसे गीत गाये गोरबमा मच्चि और रचा-पदारम भारम्म रामनार ऐसा लगा कि BORन मुरारीपुरक मारे में मी पर इना पण न सुन्न पा। भान विस्मय अमित हो गया, मेयै भोर पर गुम्ब वियते पोप, “पर सब सा लठि सारी "जपा एसोभारमी पासोई मौतबमान" बानी।" इसके पार उख्ने मेरी तरफ देसार प्रा, “आप भब मापसा करनी होगी। रीछ पा गई।"

चतुर्य पर्व
"नही माई, मेरी सनीपत मी नहीं।"
“ीप सिए मैं बिम्मेदारमा प्रतिषित मनुरोप नहीं मानेंगे।"
"मानने का उपाय जो नहीं है, बीपत बहुत सराब है।"
रामामी मम्मीर होने पर पौध र सानो सीसी
मारे होट-पोर हो गई। मानम्दने मन मामय सममा, योग, "धरी, वो सच
पतामो कि अपने रिसते ना सौला ।"
मैंने "मो पोर परिर्जनमें रिश-रान करते हैं उनसे, मुस्खे नहीं
मैपा। राधा इस विपासे मी कमी नहीं फटका।"
पनमा मौन एकर बानपने कहा, "मैं मी कुछ योग-ब बानगर
रीची, पर पाप कने बत नहीं मिम । परि इस बार मुोग यिम ये
पापन मिल सीमर र मनी विको सम्पूर्ण र ईंगा । पर भाव क्या
यही सवयी, और कुछ मी मनाया।"
परमाने , "भव पर नहीं मार्ग, दम होगा पाना बेगर
-
मानन्दने निवास मेवार कहा, "पक्वा ( संसारमें मिनपर
मार सो पात बळ कम है। पर उनमे में मेय , मापका मेय माई।
मुझे सिध्यना ही होग्य । मरिपित रानमै पर मोम पळ परना ना
चाहेगा, वर आपको इस पान स्मरण ।"
पकारमाने स्लोसे निगमित कर का, “तुम यस्टर, विदेश जाने
इस स्वासमीन पर प्रति घी रसना माई, मैं मिना मी पनवी खना
तुर्मप्पारसे सताउंयो।"
"पर इसमयमा स्पा मापको और कोई निरी
रामस्पी पुरी। मानम्रने मुझे ऐसारमा, "राए ख माप
सपा नगर महामावा"
मैंने इस पर रिमा, "मोर ऐग मर्मप मदिरी बाबा नगर
माता है अानन्द । ऐखेको मा पाए भगवान् मगपूत मारमो मीरे
नोवेमीप समुद्र में हो सब-किसी सम पावा पहुंचही
नपा । इसी तर संवा बर्मम्सको रणवी! भैरा, मेरी मा मिनार
देमना, प्रमाण मिमग्न ।"

२१८
मौकाम्स
रागामी मी मुहूर्व-मर मियाद देलती पो, पिर सठ गई। उसे बहुत
काम है।
इन कुछ दिनों मदर ही माना काम एक हो गरा, बीमपराये एक
कमोमें बन्दर रामममी पाय थिए मारी करने म्पी । मकानका मार करे
सौम्परपा।
बानेरिन रामम्मीने मेरे हाफमै एक पोस्टकार्ड रेकरमा, "मी
पार पम्नेको चियामार भागा-पहार व थे।" और पर
दो-चीन भाम कमव्याने नि-
"तुमसे ही पान, मित्र नाम मानेको निरन कर सिा मुझे
मा रमनका मार मी सनापर। बम प्रार्थना करतीम भेग 5
पो। यो गुवाईगी भरनी भानम्मममी या प्रकर करते हैं।
-विभी-श्रीराणानबरपाभिवा, कमलया।"
सन्ने मेरे नामका उम्स भी नहीं किया है। इसका मकर
मादमें उसकी म भने किन्नी बाते पुपी पगई। लोग्ने खगा किमि
एकर मोदला ग मीसा नही परे। पर कोई भी सिह नर नाँ
माया।
दिसे सम्म मेर पुप बैठा था। लिाकार पार भूपसे सपा हुम्प
नीलम भाषाप, पड़ोसी पर रो मारिपन पोन ससका
पण रित्या रेखा है।पाँ भस्मात् ही ऐरे पास दो पात माना
भाये, एक मेरी गमममीना-सामी प्रतिमा, दूसप मारवाय,
मपरिकर, मनपन से कोई सनम रेप पर।
नने भार पान मंग बरपा । पाम, "स्नानका यको मारे
पा, माने गए।
स्नानासमप भी नहीं बताना चाहिए।
फिर एक दिन राम गंगामायैप पहुंचे। उस पर भामर मात
मसिपिप पर इस बार मामपित पाल। मकान मोर मा सम्पये परत
मामी और मनारमीप म बाने सिने सोग हमे नेमाये ।समीपारी-
पर प्रनम्न सी और पुश-मन है। रामरमाने कुणारी पनी प्रणाम

- चतुर्य पर्व हिरा । मुनम्रा राममें भी पी, पार निभा और हम दोनों मनाम रोकी, "शरा, मापा कम हो स्व पणा दिखाई नहीं देगा।" "मपा और सर रिलाय पान । मुझसे तो नहीं इम्स, पापर तुम मेग ममा कर सको, दी मागते योभाई।।" मेरे विगत रिनोको मायकी बात ग्रापर सोमाको यार मा गई, माने स्लेशा से रिगा देते हुए मा,-"की को पात महामेरी, इस सिरसा पानी से निम ये टोक हो पायेंगे।" मे समसमें मही मनाक मुझ सा मा है और विसरिए इतनी दरिषद्य ।। इस बार माना प्रभारी कार्मका आपोग्न पूरे उपमय एकरो गया । पोदाममयको खरीदनेको वावगीतसे एक करणि-पिवळपकी प्रतिमा ए स्मानी सोता किसी भी काम किसी भी माम्स नहीं। लिल में मम ही मनमें कोई टवार भनुमय न करण । पा तो पा मेय समाव हो, या फिर और ही गुमो भगोबर मेरी समत माथ प्रचार-बारे मूमेन परमा। एक मुमीता पर से पाक मी उपसीनतासे कोई स्मित नयी होता मानो तो मोर रिसी बाकी पापा करना मत है। मैं दुर्ग में कमो र भोर कमी नहीं पर मी को बीमारी नहीं है, ताना-पीता भोर गव।मानी शारीविण परा मौसमी भान हिम्मने नभनेकी छिरण तोरी पमयामी मनो उपने ममें पाप देते हुए काटी, “मेरिफ करनेका काम नहीं माई, नपर्ने पाठेयरोभय । ल हमें दी मोगना पडेगा ।" पानन्द काय, "मापको सामान किये देवापत्य की उससे मोमानी मामा रहेगी कम नहीं होगी गरी।" पम्मी दादी सीकर रोती, "ब्बे में व्यक्ती मानन्द, हिमाम्ने मेरे ममाम्मै मालपा सा दिया है।" इसपर मौर तकनी किमामा समया। कमी मिना पदवे दुप दिन ममता कमी मस्नी विगत मानको सिनेमे और कमो ने मदानाम भने एम्ते-पम्वे । एक से निमित लिपी प्रेरणा मुत्सम माँ। पसगार सहरमवार संघरमै रत पारमिला सिरपर या बैठकी पति भी नहीं और संकल्प मी नहीं हो भीषम्त बो मिस बात से ही सणे मानमेवा ।। मकान-पर, पया पैसा, समान पपरा, मान-सम्मान, पेन मेरे ए प्रयामप है। बाकी देखा-देखी मनी माताको मरिचमी पर्तम्मादिको पानावे समेत करना चावायो रेला कि पोड़ी ही देरमै पर फिर माँ बन्द किये ॐ दीकमें पोनेपर मी नाहना नहीं पाती। देखता कि सिर्फ एक विपपमें तम्दातुर मन कसे तरंगित हो उठता है और पापपुर रस पिनकी स्मृतिका मामेड़न । मानों कानोंमें मुनाई पर पा, पचनी कमताभ स्नेहभागेप-'नये गुणाई यार रो न मा।-मरे सो, न नार रिसा! मी गम्तो ईचे तुम्से घाम करने दिए मा, मत्र ग्लो। ममी पपा को मार बरा पानी बड़ा देवी, मारा पान पीने सम्प हो मा है गुसाई। उन दिनों बादुर पाय पाच बोकर सती पी इस परमार न वा उनका प्रपोक्न सम्म हो गया, वापि स्पा माष्म पिर मी प्राममे भानेकी प्रणासे उसने मन मी में पानपूर्वक रस मेगा मा ना, जानता किया मागे मागू कर दी है। हेतु नहीं बाना, तो मी मनमें सन्दा नहीं है कि मुण्यपुर ममममें उस दिन र रोग सथिम होते जाये है। एक दिन मकस्मात् पर, यह खबर मिलेगी । पारस्पना को से गोताम भरमा गते परनिरामय, मिल पम्पप्पर मिसा माँगता हुईम रही। मम-भर मन खम्बनाको अपाम राबरीम मोर देला है स स एमपिता भविमाम धर्म नियुकी-मानी उसक रोधी रखें अंगुरिमोट स्पाप मास पायसे वाया। सम्म मुत्पर अन्ति और दोपकी लिप जपा पा पोम्पा मोर माणसे परपकी पमुना किनारे पूर्ण है-निरयन प्रेम माप महिमा सापया मेरे एबमें मिस माखनपर प्रविम्ति है, माना कि उसकी तुम्ना बिटकीपर। सिगरी मुनमा दुर्निबार प्रभाग्ने कुछ पलके (ए उसे रिमाद कर परिखापते उख्ने बानी पुरानी सा मते पा है। एकपठ मास मी या मेरे पनों प्रमै पाठी "म मी कम नही ऐसे कम नहीं हो! मना कौर पत्ता पाकिम्मरे पडे गाने परपर रिया था,

मतुपै पर्व
प्रमेय सर्वस्व पम माने तो रोज पहेगा। पाठी मयंकर पात ।
बोक्नेपर मीर मामे दिनो मे पान बम्द होकर
भर नाँगई, वही भाम" में उतर नहाँ पाय , कि पाप देखता
यवा ।
अपने पारेममा उसकी ममी पपनेडी गुबारस नस। सौभाम
बार मी बस पपाप भाकर देवची। कभी एकाएक भार नदी
बाटी और हापकी न्तिाव प्यते हुए पाटी है, "भासद परोप
बोपो म, में लिपरापता। इतना पनेपर मालामै पर मोहोने
होगा
मानदार पारसे दो करता, "एक भाव पूना या सवा"
रामपमा पाटी"भा सम्वेदातुर्मानेकी मिनारमानंद !"
बानेर कम कर मामले प्रया, "इस भवमपमें सा मापने
मुबाही रीरी
यममी तर बाप रेती है, "माप क्या गुरुवार एमा! नहाँ
सोनेरी वो मे तुमारी पाव्याम बापपने नये"
परवाहीमही कर देगी।"
" वो पुरयो मिरी व्यवी, छिपसे प्रेई प्रम-बार नही
पर पाच
"अपनी ही समय पागल हो बारेंगे," पार भावर पार पहा
यता।
सा बनमाने भ्रममै मारतो पेस नेत्री मी फक्त ना और
संपांच तरीरने माममै रामममी मी पूर्ण तयासी दुरी तपन
सामग्रमा हुई, बहुत-से पो माफियमको मर्यको पाठपर हमे
पुए, बहुत देर , नवीनको गति दी मा पहुंची,-पैरर मुसुशप्पापर
है।समे पासता मा भी की पा है। मातार मुझे एक
ती दुमी । या नही बना किदिनो महान मास वैय। राना
म्पारा पादित, या मी नहीं सुना-मुननेकी विष पेघ मीनरीकी और
मान दम पेष रंगद मा मपा । प्रापा पनि पायो, सलिए
मनपामा नहाँ-हो कौन बनता है। पर एयर प्रनेकी

मीयम्त मला इस रेशमें नहा। मौर उठ रेशम मी नहीं। इखथ्य इका पिता प्रय है। पिट्टी परपर गारमने सिरफ सप रहर पूम, "धर्म मा जाना पोमा " "वो पडो, में भी पापपई।" "पापही सकता है। इस मामले समय दम करें मोमी" पा उच्ने पुरी उमामा कि प्रत्याय मन, मपरीपुरके मारेको पाव मोरि पामरान न म सकी । योगी, "नको पसे इधर, ममें प्रैन बाबा ! मानसे" "मही या मेरे तिर उसने भारमी नही' "वो फिर खपम विख्न बाम " "मार, रमापत ना" "भार रोग गिरोगे पोमे" "समस मिन्म होगा।" "मही, पानही मुगी । एक दिन चिन म मिल्नेस मैं नुए पपगी पारेखम कितने ही नाराब पीनदो।" मला पनी होना पड़ा और हर रोष मार देनेको प्रतिश र उसी दिन पर पहा । रेला कमिवाते रामवामीका मैं पीम पर गया है, उसने भाने कार मन्तिम पार जपमान करते हुए , "बाराको परकी मप्रेग्नामही करोगे।" "नही, महाँसंगा।" "पोरिग्नेमें एक दिनकी मी देरी नहीं करोगे। "नी,भी नहीं परंगा" मन्तम पैगामी रेसपे स्टेपनी सकी। मापन महीना पाटोतरे मार मोहरके मकान र परमप पश। मेये मावाब सुनकर मबीन पर भरा और पमा सादर कर पाच गिर पड़ा । बोरा पो हुमा । उस पर्पचाप बधि पुस्पो प्रक- पठो त प्रवीधानेका मनमै घोडीएक नई मूर्ति ली। पारिनी पम्मीर पी, उखनी ही पड़ी और उम्मीदो तस। यौहरको मों म, पान

पतुर्य पर्व
नहीं पम्पा ना, मी वहाँ । उस दिन इस गोदान मनुष्पको बाँकी
माम पदनार गिरा करनेवाग कोई नया पे भी ऐसा माम वकि
पसे सब्यहीन, भूपवान, या पेयम नहीं बना पा, उसकी डोकान्तर
पापा पर पिस पाप भो नवीनने हो रोनो हाप मरकर मेट
सिाहै।
पात देर बाद मा पा सर पे मकान पूज, "गोहर पर मा
स्वान"
"परसौषादी हमने उन पनाया है।"
"कोरफनाया।"
"नारे भाम्मे मायमै | भोर मा उनि परापा। ममेरी
पति मकानन कुमार मेकर घेरे भोर या पुस्पर सिर नहीं गया।"
"इमबहुभा या"
"हो हो सकता है सत्र हुमा, पर किसे मी मम पदुमा।
बारी सपन गये थे।"
"मस्या गुलाबी मावे पे"
मानने का, “कमी-कम। समापसे उनके गुर पाये। यदि
रोब मामला पक मही मिल पा ।" मोर एक म्पतिक पारेम पूछे गए
धर्म माने गी पो मी कोष दूर पर प्रन मिया, "iid मोर कोई नहीं
मावा नवीन "
नबीनने का, “, कमाता भाई यौ।"
" भाई
मान्ने मा, "इ-पेर । मन्तिम तीन दिनीम को न जाने गाया और
न ठोपा, पापविना होकर एक बार भी मसका।"
और कोई प्रश्न न विचा, पोगा । मपीनने पूछा, "मग पाँ
पयेंगे, भत्पड़े।"
""
"च्य ठहरिए पर या भीतर गया और एक सीनका पम्स पार
निकाल हापा । उठे मुसे रेले ए ग्रेय, "भापको देने एप्रो"
"पारेसम नयन"

भीयम्त "सोमर देखिए," पाकर उसने मेरे पायम पापी रेरी। सोकर रेखा किसकी पिचकापियों रस्सासे यी दुई। उपर मिला, "भाधान्त, सम्पपप सरप करनेका बनी रसायो गुहाईकोरे देना, इसे मटमै रखरेगे, जिससे ना न होने पाये।" दूम्सी होमे-सी पोरी मुवीय पोकी है।सोकर रेल कि नाना मून एक पक्ष नोट और ग्नफर मिल "मा भीकान्त, पापर में नहीं नग्ग । फ्वा महा कि तुमसे मुलाका रोग्ग या नहीं। मगर महाँ हुई ये नपानका पह रस रेवसेना। म्पो में रेप रहा, परिकमम्मकामम भार तोरे देना | मगर न तोला हो सो करमा । भारतमाय मग करे।--गौहर ।" पनका गर्व नहीं, मनुनय-विनय मी नहीं । मृत्युने मात्र पवार हिर्ष पोले पनि बाम्म-मधुकी प्रमकामना पर अपना ऐप मरन रख पा है। मप नहीं, पोम मई, उपाधि समापसे उख्ने मम्पुरा मचिार नही किमा पाकवि पा, मुनमान पसार-बमा रक उसी पियाम प- धान्त मनसे पाप रखना मफ्ने बाम-पपुर यस मना है। मत्व म मौलाकर बाहर न निकले थे, पर मा नौने निषेष माह माना, रेडी-गरी रोम भौसाँसे निकम्मर एक पड़े। भाषारका दिन उस बक सम्पप्तिी मोर पा । सारे पमिम नाकाम काले मैपका कर सर उठ पाया। उलिस एक साल पक्से मोम्मुल पूर्वी माँ बाहोकर भाप, प्राचीरते सम्म एकसप बामुना पार मिपर | चाला मारे मैहरको मापी और मादी स्वामी सपने थे। उस दिन सि को यौ । मुझे उनसे ही कुछ उपहार ने उसने इम। रेविन पीरियोंमसे नही रेभा पा। मात्र उनमें गु गुमी हे, निम्न कुरा हो मा सहगपे और उपर गिर्द पिलर गये।। नामसे पुछ उस ये,याम्पस सालीप मान समझकर । बीनने पा, "चलिए, भापको पहुँचा मा।" पा, “नपान, बप वारा समय तो रोये लगा।" नानने कमा सो रिसा | भाव मी चौकीपर एक भार ना पिय सुमारला, एक छोरी पान्सड और कुछ को कागबारो भी। कमरेमें गोररने मम्नी सरचित परिव परिनी चार वाखको कामी गाकर बाते पतर्प पर्य मनाइ पी । इस स्मरेम न पने किसनो बार भागाने दिनौकाया कीया और बोमा और तपसबकर गया है। उस दिन ईस हुए किलोंने सब पुछ सान यिा था, उनसे कोई प्रकिट नहीं है। अब मपना सारा भानामाना समाप्त करेवाहर निहपामा । रास्ते में नवीन मरसे मना गौहर ऐसी ही एक मोमेकी मेरी पोरम उज्यालो मी दे गया है। पानी बो उम्पचिपची, उसके ममेरे मारिनोको मिठेप, और उसके पिता पय निर्मित मकरसपापपर्क पियेगी। भामममें पगार ऐसा किमत मोह। गुमेपो वाय पाम् धिप्प मोर पिप्पाएँ बाईसी मास कमी है और हाव-मानसे उनम निराहोने पर मी रिस्पर नही रखे। अनुमान किया किणसेवा बाधि प्रतिमनुसार ही है। मुते साररिवाराख्ने सम्पर्धना । म आगमन से पन्त समोर एव परिर लिया, पर उनके मस्पर न पने कैवा विस, अप्रान्त भरप, को प्रारमीना बानाब किपा किराने दिनीसे वैप्पोको परिवार के समय भोर विपर्यस्त हो मये, निमित होकर पवचीवपरनेल पक उनके पास नही। सर मिलते ही पमा माई, उमरपर भी भाव नहीं, पेच चित- सौ, मानो माग गरे बचे। पूछा, "कमल दी इस पक बहुत मस्त पोपमा " "नीरीको पुम"पार पापी गई। यह मापना मस्पारित और मप्रामयिक ज्याक मन ही मन स्तिो ठा। कुछ र बार होकमान्याने मार नमसार पिया । प्रा, "भामो गुमाई, मेरे भन्ने पिने सादि सेसनरी ओदार सिफ मंग छाप पवाया और मोरासमत मे नौकर फिर पा । माया ममें मार, उसे भर पर्म देते हुए बोम, " पानी रसणे, बसमें गाव पये। कमावाने पा, "भादम है। इसके बाद उसे खारके नीचे रखकर

भीकान्त
एम, "जयद तुमने ममीवानहाँ पीहै"
भाये
"माटो पार पपई" पामगा मौकरको कर पाए
मोर पणा मी यम-ह बोने ए पानी देकर पर्म मई सही नहीं पी।
रिमामा किपाता।
पोपीर बार कमा पाप से भाई, आप कुम, मिया और
सचम रेताका प्रहाय । बहुच देर ममा पा, पौरन ही बैठ गया।
कुहम पभार ही देवाको बम-भारणीस और पटेली मापार
समाई पूज,"भो, हम नहीं गई।"
"मयं मना"
"मनातुर्मास मानी।"
मलवाने श्वन totaका, "मनाचे माने है मना, गुला।
भयंत ताकम मेगसमा निरि।"
भाराने मंचन दो पूम मे मनाया "
"पो गुवाको गुम्देवने । और माअपये मामे, उतने।"
"मापावे"
"
पाक मेमAN मे बाते पित होगे।"
"म मर्म रितु वे म"गोरधनाठे ही साम्प
सा"
"सए।"
FV मी नहीं आतावो मी नियमित प्रचार काय, पाद
पा मम्म"
"मतम्भव को गुरुगा ?"
पर नही रकम मामा, पर इसे पदार और कोई बात
मिपा मग ऐप मनुष-माम्मे भरने मस-पापात्री मी
एपम्त स्वाप ऐसा हो र पुरस्कार दिया था।"
रसीलीम भीमा यये । दो, “मा पहेलना देण्या

मतुर्ष पर्व यामी, उनके निकर तो एसीपा, रथा सिइम भाव में निर्मम होकर गई गुबरें । जम्ने भारपियोंकि वीर तुम सि मुभवे सपा! और मिसे नहीं। "न, और किसी न सिं तुमच।" इस पर दोनों स्तम्प थे। एक बार पूम, " गुखौरी या मलाने का, “म दो और कोई उपाय नरहैनरी बोरि कोई मी पेपर इस मठमें नर्स बारेमा र पार, "मायो राना नही हो । मह हो अनी मी किसी एक दिन मुहे पर रोगा, पर यही नहीं सोया चकिश्व सतना होगा गुणाई पर पधाई पारे चोप तिल।गी, सहमी मी ई मही है। पो गुवासको पाप पड़ी हुई मिडी पी। मनी दीदी छेपनेपर पर पाव रोमी सर हो सके तो उसका मारना । यौ न राना पारे तो मे ग्रमसे एकको दे देना मज तमोगी मास करेगी।" शिश ष सुरपाप कटे। एम, “रन सपोध का होमा ११ "न मितारिन बाबासापरपी-पवाये " 'यो मोगादि कमी या काममें माम- कमताने इतर करमा, "मेरे पास मी यो एक दिन पर पा पर पर लिए आम भागार भीभयर पमो मत पीसो तुम बिस बरोब तुमने माय यो । मेरे पे सोने !" रेपन Bास पावन सा बाप,लि उती मोर सम्ने चिहा, "वहीं गुबई, मो रस्ये नायिनि भावरमाम सरको उमर दरसा मुझे नी मेरेये। कहा मी मऊ, ये सार ममा पूर्वर मे । मे पिए मिनीकम करो।" पपाने पर मारपा, "पे गुवाद लिए स्प इच कमो प्रगद देरी"

धीकान्त
", पहीले मामो। नौकरको दिया।"
'तरेविया"
वो मी या नहीं गई, पपमरस पर उपर कबोटी, "तुम ना
सानोगौरीदी"
"सामोरीरो, बाल है, तब बिना सारे दोरीली
माई"
पमा चली गई।
समा उम्नेर ममता रिसाई नी पड़ी, पनाकी सानी माक्षम हुमा
कपासमको भाती है। दिनमा काँगती है, कोई नहीं बान्ता । तो मी
में निभिन्त नहीं रोका, एककी पावें पार करने का निहाया
पीन यई दो और मब मुभावी न हो।
परे गुमायकमरे गा । सम्ने उन प्रापिपीको रसपर शेम
"गौरकी पमानण है। उनकी म पौकिमा महमें ये
रिकाराने शय प्रभार समारष मे, बोने, “यही होगा नये
गुपई । मों मठा और सब प्रब यो 1, नहीं समीप रसे मी रस
कोईरो मिनस्ताप यार , " सम्मबम कमब्यापार स्याये
गये मपवादपर तुम पास करते हो गुस्सा "
परिकाम्ने मह उपर उठयार पा, "मैं!मय मीन।'
"तर मी उसे पच जाना पर गा"
'मुझे भी बना होया गुमाई । निपीको एरपरि पुर रवाएं,
तो फिर मियादी इस पपर भापा मोर मिथ्या हो उन माम ने दिनी
कलिया।"
हरि उतेकी पौ मना पगा! मटोपर्धा होम हो, तुम तो
उसे रस
परिका गुरु 1 गुरु ! गुरु कार र नीबा किये। उममा
इम्मपन गुरप मोर म्परेशन।
"माबमध या गुनई," मार मासे मार नपस्ने समय उनाने
मरमर उठाकर मेरो मोर नागा बकि उनकी माँसो मार गिर से

पतुर्य पर्य
। मोंने मुझे पूष उमाकर नमस्पर दिया और में प्रतिनमस्कार
राम स्वाम परिब पा, सपा वसीम ऐपर यत
माईमिया रमना माई। पौरभ मादमी मुझे खेमनस पाँ
समयमा पहुँच । सरपर बैग रखे चिकन दी मपाडर रया
भाबकनी पर मानहाम । पशम विभाउ कि मोड़ी देर
भारही मानेगी, पर मेरा सदरममा सास बन याविना
मी और पराईको ठोर पनि विमुक्त होनाका माह में ही माग
गई। ख्य रस मी सप नहीं पा है। उसने मिभुमी परिषी स्टार
बो भाम-परिपत सिाथ पीयराजमाण रक्षा
बानेरक पत्र नेमी से अपना पा हुए रा"राने
तुमने मुम विदो मिठे पने लिए रामारी मोरो पर मुझे
सिर भेना पमा
" में वो भन्म जयसिना नहीं बनती, यसमा ।"
"म पेम्बिोगों में बहो पर रंगा।"
"सेमिनारमोये "
MP मुलकात होगीपण, मरका में बवप्रम पार निकपड़ा।
मोर मिते धरे यस्ते मगधरम भी लोग सीन, उससे मुबाब दुई
रेलवे स्टेपसर । वामेको मनवे रसड़ी भी, मुझे देव नदी भार
मोये,"sमिबरबर देना पन्य गुआई
" सम्मुवाको भेडरकरा"
"हो भमरा और पो कोई उपाय है।"
"प्रनी होगका
"नासमो पूछते हो गुबई, सोमस्टे ।"
अमोमी
"वार पमी । पर रखनी एम यिरि नई भारिए । हुप
दौरि बमप्र सर दो।"

मीकान्त
मरामि मेरा पतिका मोम हो उसना मना पार
मोठे मिण मापना कर दोगी, मलपप शेप नही हो। हो यो ।
"मिया श पर परी पारी छोगी प्रसाई। मामी भोर
नहीं माँगी
पुप रा । उसने मेरी पोर मोटे पियकर 4U, " दानच टिकट
सरो।"
दो मे एसपदी."
"हाय मीसा यही रास्ता
पा, "16, बही तो नहातो मी मिदनी दूरस, सनी को खक
"
गाडी मानेपर दोनों उसमें बैठ गये। पासको चपर मने अपने रापोसी
उसम विनाम विमा।
कमाया पो उठी, “या स्पा पर पुष्पाई "
"चारणा कमी लिए यहाँ किया-मेश बाप रखने
'सपमुबह स्पा मार रहा बाहवे हो"
"सचमुष पार रसमा पार कमवा । तुमारे माया पाव
और कोई नहीबानेगा।
" मोठो दोपयोगा एबई ।"
"नहीं, कोई रोप नहीं मोगा-गुम मोठे बैठो
कमवा मे, म बोको साम। तिने गाँव, कितने नगर, और
किसने प्रस्तरको पार करती ट्रेन पायो यो। नम्मर रेठकर का परि
परिमपने पिरको भनेकपानियाँ मुनानेगी। बया-ममा मनेकी का
नियों, माप, मन, गावरान, प्रपाकर-निमाको पाते, भनेर वीर्य
प्रमोशी कपएँ भोर मत परिणामपम मुरारपुर माझम मानेको
पाव। मुझे उस पल उस महिला विरामी बागारमा गई । का,
"धन्य हो काम, मो गुसाई मारे ककपर विसास नही।
"भीरते"
"भवानी ! मेरे माने बह उनकी मां मोस मिरने मे, बोले-
-

चतुर्थ पर्व
निदोरीको पूरा परि मैं वहाँ पुरस्ना रण नवे गुमाई, तो उनका नाम
मेना मिमा मोर मिमा भप इस पपपर माना। महमें ये भी न रंग
पौरख ऐवा निमाप मपुर भाभम टार विनर होममा।"
"नहीं, नहीं नर होगा, मगवान् एक-एक एसा अपप दिसा मंगे।"
"मगर भी वारी पुकार हो, वो फिर यहाँ मेटकर ममोगी।"
नहीं"
"परिमाचाप समयमा पाई
"तो मी नहीं।
"पर सब समसे कहाँ मुभकात होगी।"
इस मनन उसने उपर नहीं दिया, पुप रही। पापक सामोधीम
रापा, पुकारा, कमतरता। उधर नहीं मिम, रेखा की एक
को मि रसकर उसने भोले बन्द कर थापा चोपकर कि घरे दिन
मासे सो गा, मानेकी इम्म नहीं हुई। उसके बाद फिर मैं सुदर
सो पमा, या पता नही हात् कानों में भापान माई, “नमे गुप्ता।" रखा
किया मेरे पपरको हिसार पुकार की है। पोी, "उठो, तुम्हारी छोईरिसाकी
देव सही है।
का उठ बैठा पारिमेम किसनसिह पा, पुकारना सपही उसने
माएर म उतार दिया। मोना योपवे बह देखा कि निऐ चादरसे
उसकी पप्पा पनाई थी, उध्ने उनको पा से ही बार मेरी पर एक भोर
रत रिसा रामा, "क्य- मी दमने येय दिपानामा "
"न ने पिठनी पार पदना मरना पोपा बोझा कौन साएगा।
"दूसरा बम मी साब नहीं गई, पर भी मा बोध होता। एक-दो
मानिकार
"एप मी खूब हो ! दगारे कसो मिलास्पिीड परपर रेमे ये"
"तेर, पो ममो नहाभाग, पर मिलापको मी खाना तो परणारे ।
पहुंचने में और मी दो-चीन रन योगे, ट्रेनमें सा बाभोगी। ये बनेकी
बीये मेरे पास है, उन मी मा र तुम नहीं भोगी !"
कमायने इस पार कर पा, "परे पर गुस्सा हो गये। ममी
समे पुढंगी। पने रोठ, मारे पोपने पद में फेरस सामी"

१८२
भीकान्त
बत सरम हो या या, में उतरने मठ बोली, " ठाये तो गुसाई,
पोहोनी-मार छिपकर तुम एक बार प्रमाम पर है।" या कार
उसने कार मेरे पैकी धमकी।
मतरकर फोरपामार का रो पया । सप्त बच गत समात नहीं हुई थी
नीचे और उमर भक्कार में पारा एक हो गया था। माका एक
प्रारमै कप पोरका सील धर्म पगि भौर पूरे मान्ठमें तपकी भागमनी ।
उस दिनकी बाद पार मा गई मिस रिन ऐसे ही बन रेववार थिए योने
बामे लिए उसका दामी हुमा मा । और मान।
सीय बयार और हरे रंगकी मन्टेन रिसकर गाई जाने गात्रामा
संकिया।कमताने सिगकोठे दाप बदामर प्रपम बार मेरा प पत्र
मिा । उपमै मिनोकामुर पा पा से समझा। पोजी 'तुमसे
कभी कुछ नही गैंगा, बाम एक बात रखागे"
"मग्प" करकर उसकी भोर देखने का।
पाने तसे एक पनकी देर, मोची, "नदी में मारे लिखने
भारएकी । भाग नियमपूर्वक उन पाद-पदमे मुझे सीपार बम निमित
रोमो, मन दोभो । मेरे पि सोच-सोचकर भर तुम अपना मन सागर मत
करना गुगार, तम्बरे मन मेरी यही मापना।"
ट्रेन पदी । उता पर हाप भपने हायमें लिपे कर माम दो-
होते पर, "मवा, तुम मैने उनीको सौंप ने दी समारा मार माप
पथ, दमारी साना निपपद हो-अपनी पार बस में तुमा मसम्मान
नहीगा।"
सम दिया, गाडी पूरते पूर निब्यो। गवारपते देखा, उस
उप मुत्पर सेनकी प्रकाश मामबार भाकर पड़ी और फिर भारम
मिझ गई। यही माम मा किशप उपकर मानो पा मुझे शेप ममतार
बरगी।
समाप्त

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Sarat -sahitya Shrekant(chturth Parv)

Author
Kamal Joshi
Title
Sarat -sahitya Shrekant(chturth Parv)
File name
Sarat -sahitya Shrekant(chturth Parv)
Text
OCR done
Citation
1961
Published
2010/12
Publisher
Bumbai,hindi Granth Ratnakar P.ltd.
Language
Sanskrit
Pages
166
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
Literature
DLI number
514732
Barcode
4990010022420.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
lZ7aMnxXzjv
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Sarat -sahitya Shrekant(chturth Parv)