Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Gayi Bhom Ro Baharoo
Front matter
No text on this page.
गई भोम रो बाहडू
बदनीकालीगी
भीमपॉडिया
गई भोमरो वाहडू (इतिहासूप्रबन्धकाव्य) भीमपॉडिया अनन्तराजूभीमपॉडिया बीकानेर अन्नपूर्णा अणतराजू पॉडिया सुगुणी प्रकाशन बीकानेर (राज )334005 अधिकृत वितरक विक्रेता श्री भीमपॉडिया सुगुणी प्रकाशन विश्वाम्बिका भवन आशापुरा नयाशहर बीकानेर 334005 प्रकाशक सुगुणी प्रकाशन बीकानेर आशापुरानयाशहर बीकानेर 334005 पैलो सस्करण 1100 (एक हजार एक सा) प्रकाशन वर्ष 1997 मोल एक सौ साठ रुपिया आवरण सज्जा अडिग (चितराम राठोड़ बीका श्री भीवराजजी गई भाम रो बाहडू) चितराम श्री गौरीशकर प्रजापत एव श्री रतनरगा तथा श्री नरेन्द्र कुमार प्रदीप कुमार कमल स्टूडियो जस्सूसर गेट के अन्दर बीकानेर - मुद्रक साखला प्रिण्टर्स सुगन निवास चन्दनसागर बीकानेर श्री सूरजमाल सिह राठोइ (भीमराजोत वीका) द्वारा पांडुलिपि पर घोपित प्रदत पुरस्कार गई भोम से वाहडू राशि रु 51000 से अथ प्रकाशित किया गया है। Gayi Bhom Ro Baharoo (Rajasthan Poetry}Historical Prnbandi Kavya By Bheem Pandii Bikaner
गई भोम रो बाहडू
(इतिहासू प्रवन्धकाव्य)
सुगुणी प्रकाशन बीकानेर
विश्वाम्बिका भवन
आशापुरा नया शहर बीकानेर 334005
अनुक्रम 1 म्हारी भाव भूमिका 2 प्राकल्प 5 11 3 भीमपॉडिया परिचय की परिधि मे 4 गीत 5 चितराम 13 19 20 21 23 43 69 77 6 मगळाचरण 7 पैलो सरग 8 दूजो सरग 9 तीजो सरग 10 चौथो सरग 11 पॉचवोसरग 12 भीव रो तुनतुनियो बाजै 13 मायड़ भासा मोवणी 14 वीर विरुदावली दो शब्द 15 राठौड़ो की भाव भूमिका 16 श्री सूर्यवश 17 बदायूँ के राठौड़ो का वशक्रम 18 राठौड़ो की राष्ट्रीय भावना 97 123 124 127 132 135 140 143 म्हारी भाव भूमिका हाथ बसूख्यात बात इतिहास रा पानों मे ओळी-ओळी आखर-आखर बाँचता कोई ऊँडी बात हाथों लाग जावै। बाँ बातों में कोई बात इसो असर करै कि कलम कोरणी चलॉवणी ही पड़े। म्हारी इण रचणा री भाव भूमिका पेटै बीकानेर री राती घाटी री माटी री महक ही मन मोवै। आपरी सस्कृति अर अस्मिता-ओळखॉण पर कोई सकट आयो जाणे या जबरिया गुलाम बणावण री बात बणै जद कुण सहण करै? जीवतै जी गुलामी री झळ कुण झेलै? बीकानेर राज व्यवस्था नै डॉवाडोळ करण वास्तै इण तरै रा घणॉ-मोकळा छिण आया पण अठै रा राठोड़ सूरमा बाँ छणाँ मे प्राण प्रण तूं आपरो बळिदान करण हूँ नही चूक्या। इण तरै रा केई प्रसग म्हारै इण प्रबध-काव्य गई भोम रो बाहडू मे उकेरीज्या है। इण रचणाँ मे वेद पुराणाँ री अवधारणौँ अर लारलै पनरै सौ बरसॉ री सूर्यवंशी राठोडाँ री ख्यात-बात इतिहास रा पानों री की झळक उजागर करणे री कोसिस करीजी है। पॉच सरगाँ मे इतिहासू प्रवध काव्य उकेरीज्योड़ो है। इण रै अलावा भळे केई कथावॉ और भी है पण म्हारी दीठ मे बॉरो कोई खास असर नही लागै। घणों ही पाना मे घणो विसतार दियो है पण बॉनें उकेरण री दरकार मन्हे कोनी लखाई। अतपत गई भोम रो बाहडू रो विड़द दिये जाणै तॉई कथावॉ रो मोकळो विसतार मिले। पण म्हारी दीठ अर कलम जिती नाप सकी है बिती नापणै री चेस्टा करी है—बा अपरोखी नही लागणी चाहीजै। किता महाराज्य बण्या-विलाईज्या अर बण्या-विलाईज्या? खास बखॉण ताँई पूगणै मे गूंगपणो काम कोनी लागै–की कळपणों रो सारो भी तो घणो जरूरी है। कारण कळपणॉ बिनॉ कथा सूत्रॉ रो पूरो जुड़ाव नही हुवै। आ रचणा अनेक ख्यात बात इतिहास मे उकेरीज्योडी घटणावॉ-वचनिकावाँ ने म्हारी चालणी तूं छाण अर सोना तोलणी तूं तोल-परख नै म्हारी दीठ अर अनुभूति रै आधार माथै माँडणै री चेसटा करी है। आप भी आपरी परख तूं परखोला। आप रो साच म्हारै साच V मेळ खायो तो म्हारी कलम सफळ मानसू। म्हारी इण इतिहासू प्रवध काव्य रचणा मे इण भोम मे राठोडौं रो ख्यातवासो अर राज व्यवस्था थापित करणै रो बखाँण है। राठोडॉ रे बारे मे केई विवाद पानॉ मे बोले पण बॉ विवादाँ नै छाण्याँ निसतार नीसरै कि गाहड़वाळ अर राठोड़ न्यारा-न्यारा है अक कोनी। घणाँ राठोड़ उत्तरजीवी लोग जयचद नै राठोड़ कोनी मानै । जयचद गाहड़वाळ हो। परिसिस्ट मे तीन लेख दिया है। सूरजमालसिह राठोड़ म्हारी भाव भूमिका 5 श्री रामसिह रोड़ा भर श्री प्रतापसिह घटेत रा। सागै ही चारी पूरी वसावळी री झळक भी छापी है जिण तूं म्हारी भाव भूमिका मेळ खावै। म्हारी इण रवणा में बीकानेर राव जैतसी रै कुँवर भीवराज राठोड़ ने गई भोम रो बाहडू रो बिड़द दिरीज्यो जकै रो बखॉण है। इण बात मे धणी सचाई लागै कि भीवराज राठोड़ बड़ो सूरवीर राजनीति राजाणकार परभावसाळी सरूप रोधणी हो। आप पानॉ बॉच नै जाणो-समझो तो हूँम्हारी कलम सफळ मानहूँ। पूर्व ससद सदस्य स्व डॉ श्री करणीसिह जी रै शोध प्रबन्ध ग्रथ बीकानेर के राजघराने का केन्द्रीय सत्ता से सम्बन्ध प्रकाशित प्रथम सस्करण 1968 मे पानै 46 पर मॉडयोड़ो है। बीकानेर लौटने पर राव कल्याणमल ने एक दरवार किया और अपने भाई भीमराज द्वारा दी गई सहायता की सार्वजनिक प्रशसा करते हुए उसे गई भूमि का वाहडू विरुद दिया। नामी ख्यातकार श्री दयालदास री ख्यात पानै 76 पर वनिका (गयी भूमिका बाहडू) म मॉड्योड़ो हे राव जैतसीजी रे पाट राव कलियाण दानेसरु काई स्वर वस का भाण भीवराज दिलस्वर सर कू अपणी मदत लाया राव मालदेव कूँ भगाय गयी भूमि के बाहडू वद पाया पीछै राव कल्याण सिहजी सीख मॉग विक्रमपुर आया नै वीरमदे दूदावत मेड़ता पाया। पाने 77 मे मॅडयोडो है भीवराजजी वीरमदेवजी पातसाहजी सागै गया। पीछे पातसाहजी दोवों ही सिरदारा नू सीख दीनी। तद वीरमदेवजी भीवराजजी नू मेड़त ले आया नै बडो जाबतो कियो। अरु कयौ बाबा तू तो दोऊ गयी भूम रो बाहडू हुवौ नै आ धरती थारै पगा सू आई। दयालदासरी ख्यात पानै 78 मे मॅड्योड़ो है पीछै भीवराजजी नू वीरमदेवजी किता अक दिन मेड़तै राखिया पीछे हाथी एक घोडा च्यार कपडो आछो देय नै विद्या किया। मैं बीकानेर आय राव कल्याणसिहजी रे पावॉ लागा। तद रावजी श्री कल्याणसिघजी फुरमायो जो भीवराज औ बीकानेर थारी भुजावॉ सू आयो नै थॉ जिसा भाई हुवै तद गयी थकी धरती धेरै अर तू गयी भौम रो बाहडू हुवौ। पीछै रावजी भीवराजजी रो ठिकाणो भीवसर बाँधियो किता अक गाँव हूँ। जिण दिन सूं भीवराजोतॉ रै गई भोम रै बाहडू रो व्रद है। राजपूतानै मे भी गुलामी रा पग पसरण लागग्या हा। बीकानेर भोमरी राती घाटी अर धोरॉ पर भी लोगों री ऑख्याँ लागगी ही। गुलामी रा कीडॉ री ऑख बॅधगी ही। बीकानेर री राठोडी फौजॉ नै कई जुधॉरी झळा झालणी पड़ी। बीकानेर री थरपणा हुँचता ही आजादी राखण वासतै स्वतत्रता सग्राम चालू करदेणो पझ्यो। बीका नेरा 6 गई भोम रो बाहडू लूणकरण अर जैतसिह तथा बॉरी सतानॉ उतराधिकारियों ने गुलामी सूं बचण सारू जुधॉ री झळ झेलणी पडी बॉने भी गुलामी री जकड सहण कोनी हुई। बीकानेर री अगली पीढियों ने भी स्वतत्रता सग्राम लडणा पड्या जिकै रा सबूत ख्यात बात इतिहासॉ मे मॅडयो है। बीकानेर रा राठोडॉ नै आजादी खातर केई वार तळवारॉ भाजणी पड़ी। जनता री आजादी अर बॉरी सुख सॉयती वासतै राठोड़ॉ नै आपरै भुजबळ पर भरोसो हो। सत्याग्रह आदोळण री रीत नीत कोनी ही। हळदी घाटी ज्यूही राती घाटी रो विडद बखाणीज्यो है। जनता री सुख सॉयत बासतै राठोडॉ समरथ सारू कोई कोर कसर नही राखी। बीकानेर भारत मे ही नही ससार भर मे नामी सूरमो रैयो है। आपरी साख अर धाक जमाई राखी। अमिट लेख लिख्या है म्हारै बीकानेर। ख्यात बात इतिहास मुंह बोलता बखाण करै। उणी आधारॉ माथै रची म्हारी इण रचणा गई भोम रो बाहडू ऐतिहासिक प्रबध-काव्य रो रचाव है। म्हारो ओ प्रबंध काव्य आपणी मायड भासा राजस्थानी रै परिनिष्ठित टकसाली सरूपरी धिर ओळखॉण बणै अर आखै राजस्थान ही नही आखै भारत मे राजस्थानी भासा रा लाडला समरथकों ने दाय आवै तो म्हारी कलम सफळ मानें। देववाणी सस्कृत-प्राकृत-अपश-डिगल-पिगल-मरुवाणी-मारवाडी री ओळखाँण कायम राखता ही राजस्थानी भासा रो सरूप सदा तूं ही सगळी राजस्थानी रियासतॉ मे सरब ओपमान लायक मान राजभासा रो अक रूप ही समझ मे आयो। राजस्थान निवास्याँ राजस्थानी रै विगसाव सारू पत्र-परवाणा मॉड्या जकी भासा ही आज आखै राजस्थान में समझ मे आवै। मामूली बोलचाल समझण मे कोई फरक लखावै तो बिसो फरक विश्व री सगळी ही भासावॉ मे मिळसी। इण मे मीन-मेख कोनी। निसचै ही राजस्थानी भासा विश्व री अनेकूँ भासावॉ मे आपरी ठसक न्यारी निरवाळी ही राखै है। राजस्थानी भासा रो सबद भडार विश्व री सगळी ही भासावॉ रै सबद भडार घणो लूठो समरथसार है। मोकळा लोकोकती मुहावरा-लोकगीतॉ मे बॅध्या-बंधाया टकसाली अकरू मे ही जोयाँ लाधै जे कोई भाभी भाँत जोवै। पण आजादी पछै आपणी राजस्थानी भासा ने आपणे सविधान V बारे ही फेक नाँखी। इण फेक मे की लूँठा राजनेतावॉ रा कोझा हाथ मुंडाई पर उतरव्या हा। बाँनै ख्यात-बात इतिहास काळपात्र कद माफ करसी ? बै कोझा नॉव नामी-गरामी भेंडा राजनेतावॉ रा सगळी नै चवई दीसै है। अबै तॉई अडचनॉ नॉखणवाळा मुंडा लोग भी ऑख्याँ सामा है। प्राणप्रण सूं राजस्थानी भासा री सवैधानिक मानता आपॉ चावॉ! म्हारी परधा रा मोकळा ही नामी गरामी धणों हेताळू राजस्थानी प्रेमी लोग राजस्थानी भासा री सवैधानिक-मालता री मॉग मे गहरै-ऊँडै मन तूं म्हारै सुर मे सुर मिलावै है। बॉने सुमरण भे लाऊँ तो मोटी पानड़ी वणे पण केई नॉव जीभ चढ्या बोलै बॉनै सुमरण पेटै गिणींवतो हूँ तो नी भूल सकूँ। बॉरी चावा है कि म्हारो ओ ऐतिहासिक प्रबध ग्रथ बैगो छपै-बैगो लोकार्पित हुवै। बॉनै सुमरण मॉड-बखॉणण रो म्हारो फरज पूरयाँ सरै। म्हारी भाव भूमिका 7 ज्यूँ-ज्यूँ याद आवै त्यूँ माँडतो-वखाँणतो ही मारी भाव भूमिका सिरै चढाऊँ तो चौँ नौयाँ नै ओळखू-जाणूं। राजस्थानी भासा-मायड़ भासा री गौरव गरिमा नै बधावण म घणे होस-जोस तूं पग मॉडे कलम चलावै जैकारा लगाव है। राजस्थानी भासा री सवैधानिक मानता मे घणी दूर ताँई री अड़चळ-बाधा लगावणी पार कोनी पड़े। बैगी ही मानता देणी पड़सी। जितो मोड़ो करै वितो ही काळो टीको गहरीजतो ही लखावै। ख्यात बात इतिहास बॉनें माफ कोनी करै। आँपणी सगळी री आवाज गूंजी ता मानता मिलणे मे धणी छेती-पछेती नी रैली। औ नोव तो गिणती रा है भलै घणों ही लोग म्हारे सुर में सुर मिलावणिया है। म्हारी इण रचणा रै रचाव रा प्रेरणा दायक साथी स्वर्गीय श्री डॉ प्रेमसा आचार्य डॉ छगनमोहता श्री उमेश आचार्य अर श्री बालचद साँड हा। बाँनै सुमरण मे लावणो हूँ कियाँ भूल सकूँ हूँ। म्हारो पालो फरज अर धरम बणै। डॉ बाबूलाल शर्मा, काश पारख द्वारका प्रसाद व्यास श्री बद्रीप्रसाद गहलोत, शिवकुमार सिह चौधरी कीरचन्द व्यास रामेश्वरजी पॉडिया वासुदेव विजयवर्गीय भवानी शकर शर्मा श्री हरिबाबू (बीकानेर) सूर्य प्रकाश विस्सा श्री मालचन्दजी तिवाड़ी श्री मूलदान देपावत (बीकानेर) श्री शिखरचन्दजी बछावत डॉ दिवाकर श्री उपध्यानजी कोचर। श्री चन्द्रदान चारण अभय भटनागर हरीश भादाणी विद्यासागर आचार्य डॉ राजानन्द भटनागर ता श्री इन्द्रसिंहजी (राजपुरा) श्री बुलाकीदासजी जोशी श्री लक्ष्मीनारायण रगा श्री नदलाल व्यास विधायक श्री भीमसेन चौधरी विधायक श्री वी डी फल्ला पूर्व शिक्षामत्री श्री देवीसिह भाटी पूर्व सिचाई मत्री। का श्रीहीरालाल आचार्य श्री यादवन्द्र शर्मा चन्द्र श्री धनजय वर्मा श्री अन्नाराम सुदामा श्री गौरीशकर अरुण श्री वासु आचार्य श्री भगवानजी व्यास श्री जानकीनारायण श्रीमाली, श्री नीरज दइया श्री गिरधारीसिह रतनूँ, श्री हरीश बी शर्मा डॉ सत्यनारायण स्वामी डॉ शकरलाल स्वामी श्री शकरसिह श्री भेवर भ्रमर श्री बुलाकी शर्मा श्री के राज शिवपाण्डे श्री पृथ्वीराज रतने, श्री सत्यप्रकाश आचार्य, श्री रामनरेश सोनी श्री विपिन गोयल श्री नटवर व्यास कजलसा श्री कजळीदास हर्ष श्री वीरेन्द्र सक्सेना श्री शेखर सक्सना डॉ कालीचरण जी माथुर रामनिवास शर्मा झमणजी व्यास भाया व्यास देवदास स्वामी राजेश व्यास कमल रगा, मदनमोहन रगा मदन व्यास, महबूब मुश्ताक भाटी बुलाकी खॉ शतारजी मोइनुदीन मुमताज शमीम तोलारामजी पॉडिया तिलक जोशी राजेन्द्र जोशी गिरवर विस्सा चचल हर्ष निर्मोहीव्यास, श्री पन्नालालजी सांखला श्री दीपचन्द जी सांखला डॉ दीपक पडित हर्षा मधु आचार्य युगल नारायणजी पुरोहित, मास्टर सुन्दर व्यास भवरजी आचार्य भैरूरतन रगा शाति प्रसाद बिस्सा महेशजी अग्रवाल मनू काका ललित व्यास डॉ अशोक आचार्य जनार्दनजी व्यास सरल विशारद दाऊजी व्यास दाऊजी आचार्य ओमजी आचार्य शिवकुमार सोनी जयनारायणजी व्यास कृष्ण शकर पारीक श्रीहीरालाल देरासरी डॉ शिवजी श्री भगवान सोनी श्री शिव भगवान जी बोहरा गाजी साद रफीक अमीन माहिर मुनीर अब्दुल रहीम पेशकार डॉ अजीज 8 गई भोम रो बाहडू सुलेमानी डॉ साविर मथुरेश पुरोहित पूर्णानद व्यास श्री मगत गुप्ता श्री हनुमानजी व्यास श्री मानमल आचार्य श्री सुन्दरलाल व्यास श्री गोपालजी व्यास श्री अरविद आचार्य श्री रामा तैलग श्री किसन चौधरी डॉ शिवचरण काश्यप डॉ अमरनाथ काश्यप श्री प दिवाकर किराडू, श्री शकरलाल हर्ष श्री शिवराज छगाणी श्री प्रेम सा जोशी श्री नदू जोशी श्री सन्नू जोशी, श्री सन्नू हर्ष श्री गोकुलजी पुरोहित श्री सुखजी पुरोहित श्री चतुरभुज मिस्त्री श्री सुखदेवजी मिस्त्री, श्री केदारजी रगा, श्री के के व्यास श्री शिवकुमार व्यास श्री कुशालचन्द रगा श्री नारायणदास रगा श्री शिवकृष्ण जोशी, श्री मनोहर चावला श्री कृष्ण जनसेवी श्री सोमदत श्रीमाली लाधूजी व्यास श्री गिरधरजी आचार्य, श्री रामरतन हर्ष श्री भवानी शकर शर्मा, श्री लूणजी छाजेड श्री गिराज जोशी, श्री लिछमण सुथार श्री नारायणजी एडवोकेट ईमानमल बोथरा एडवोकेट। म्हारी इण रचणॉ नै बैगी तूं बैगी सपूरण कर लोकारपण करणै वासतै घणों साथ्यों हेतालुऑ घणी ताकीद करी है। श्री जेसराजजी-कन्हैयालालजी राठी रायपुर कळकता प्रवासी श्री मनूलालजी पारख श्री शकर बाबू, जीवन बाबू नत्थूजी पहलवान सॉवर सेठ श्री भंवरलाल डागा हीराचन्द डागा गोपाल बोथरा रामचन्दजी बैद भंवरलाल बोथरा धनराज जी डागा पुखराज जी बेगानी श्री नारायण बाबू बजाज श्री दाऊलाल कोठारी श्री आत्माराम अग्रवाल श्री सोहनलाल गोलछा श्री सत्यनारायण पुरोहित श्री जयकिसनदास सादाणी श्रीमती सरला बसत कुमारजी बिड़ला श्री दुगदित्त शर्मा श्री बृजलालजी मिश्रा श्री ओमप्रकाशजी मिश्रा श्री सोहनलाल शेखसरिया (सूरतगढ) श्री चॉदमलजी अमाणी श्री राजेन्द्र कुमार सॉड श्री रामलालजी जैन सरदारसैर वासी श्री नारायण दास मुंधडा श्री भंवरलालजी रिखबचदजी बैद श्री माणकचदजी रामपुरिया श्री रखबदासजी भसाळी, श्री कन्हैयालालजी सेठिया श्री अक्षयचदजी शर्मा तथा मुबई प्रवासी श्री शिखरचदजी प्रदीपजी सुराणा श्री कैलाशजी परसरामपुरिया आदि आदि। घणों हेताळू राजस्थान मे जयपुर वासी श्री चम्पालालजी रॉका ठा ओंकारसिह आई ए एस (सेवा निवृत्त) श्री कल्याणमलजी शर्मा जयपुर श्री एम एन धवन बीकानेर। डॉ शक्तिदान कविया श्री मरुधर मृदुल की कल्याणसिह शेखावत श्री हणूतसिह देवड़ा श्री नेमीचन्द जैन भावुक गोविन्द श्रीमाली मीठेश निर्मोही जाधपुर श्री श्रीमतकुमारजी व्यास जालार श्री सोहनलाल जी डागा श्री मूळचन्दजी मालू, सरदारशहर। श्री कातजी शर्मा अजमेर। डॉ देवी प्रसाद गुप्त डॉ किरण नाहढा डॉ पुरुषोत्तम आसोपा । श्री गोपाळजी जोशी, श्री दाऊदयाल शर्मा श्री हरप्रसाद बगरहा श्री गिरधारीलालजी व्यास श्री सूर्यशकरजी पारीक श्री देवकिशन राजपुरोहित डॉ विनोद विहाणी श्री दमजी श्री सत्यनारायणजी पारीक श्री मूलचदजी पारीक वैद्य श्री ठाकुर प्रसादजी शर्मा कवि गीतकार मोहम्मद सदीक श्री भवानी शकर व्यास विनोद म्हारी भाव भूमिका 9 श्री गौरीशकर मधुकर अब्दुल वहीद कमल श्री रामजीवण सारस्वत श्री काति कोचर श्री शिवजी पुरोहित श्री ज्ञानजी राजपुरोहित श्री चौदजी मादी श्री जेतूजी गोपीजी सोलकी (पान भडार) श्री लालजी जोशी यी मक्खन जोशी श्री डी पी जाशी श्री नानक जोशी श्री रामनारायण शर्मा तथा नरसगजी आचार्य श्री दाऊ भादाणी डॉ ब्रह्माराम चौधरी श्री प्रेगजी ओझा श्री कृष्ण विसनोई इण ग्रथ रै जल्दी V जल्दी परकासण वासतै ताकीद करी है श्री पृथ्वीसिह जी घटेल श्री प्रतापसिह जी घटेल काधलोत राठोड़ श्री सूरजमाल सिह राठोड़ (भीवराजोत बीका) श्री भीवसिहजी राठोड़ (लाखणसर) श्री आनदसिह जी, (रामपुर) श्री जीवराजसिह राठोइ (कुसुमदेसर) श्री मुकुनसिह राठोड़ श्री मोतीलाल जी पुरोहित श्री करणीदान सिह भाटी श्री लाजपत भान श्री गिरधारी लालजी भोचिया श्री रामसिह रोड़ा (आई पी एस सेवा निवृत्त) श्री अजीज आजाद डॉ नन्दकिशोर आचार्य डॉ गिरिजा शकर शर्मा डॉ श्रीलाल मोहता श्री रामकृष्णदास गुप्ता श्री अशोकजी व्यास एडवोकेट नोटेरी पब्लिक बीकानेर श्री भंवरलालजी स्वर्णकार सरदार मोहकमसिह श्री गोपीकिसन जोशी श्री बद्रीजी चौधरी श्री चॉदजी आचार्य, श्री चाँदमलजी गहलोत श्री जबार अली श्री लालचन्द भावुक श्री बुलाकी बावरा श्री करुणा शकर श्रीमाली। श्रीजसकरण गोस्वामी मोतीलाल चॉडक। इण ग्रथ रै परकासण वासतै डॉ श्री करणी सिह जी घणी प्रेरणा दीनी ही तथा परकासित देखणो चॉवता हा पण समै री साख कोनी लागी। वॉ सब लोगॉरी उडीक नै धिन-धिन बाँनै सुजस देवताँ थकाँ हूँ घणो राजी। म्हारी रचणाँ आपनै आछी फूटरी लागी तो म्हारी कलम सफळ जाण। रवों आय रै कर कमलों मे सूपता घणे मान सू हरख बधाई है। हूँसूर्यवश रा कुलगुरु महर्षि वसिष्ठजी रो ही वशज हूँ- सूर्यवश कुळगुरु वसिष्ठ रिसि उण गुरुकुछ रो ही हूँ वशज शक्ति-परासर पसार साच भणू निज धरम विचार समसार री साख सिवरता बात इतिहासाँ छाया वेदव्यास धरियो अवतार छाण चालणी कलम कसार कुरु जॉगळ मरुजॉगळ भेळा सामपॉडिया री धरती पर धिन धरती सुभ सुजस सँवार भीमपॉडिया भण्यो घण लूँठा पण नामी जूझ्या कर लोकारपित करूं समरपित सूरवीर नरनार लुळ-लुळ निव-निव भाव भरार भीमपॉडिया बीकानेर विश्वाम्बिकाभवन 11 अक्टूबर 1997 आशापुरा नयाशहर बीकानेर 334005 विजयादसमी वि स 2054 वश ख्यात भणार पग-पग 10 गई भोम रो बाहडू प्राकल्प गई भोम रो बाहडू एक ऐतिहासिक प्रबन्धकाव्य है। इसकी मूल प्रेरणा कवि की जन्म-भूमि बीकानेर के इतिहास से सम्बद्ध है। इसकी सरचनात्मक पृष्ठभूमि के रूप में रचनाकार ने सर्वप्रथम बीकानेर के ऐतिहासिक सन्दर्भो की गवेषणा वैदिक वाइमय से लेकर पुरा इतिहास पुराण तथा मध्यकालीन इतिहास के साक्ष्यो से प्रामाणिक रूप में की है। पॉच सर्गो मे सृजित प्रस्तुत काव्य के कथ्य का ताना बाना बीकानेर के सस्थापक नरेश राव बीका से लेकर राव नैरा राव लूणकरण राव जैतसी तथा राव कल्याण की महिमा मडित शौर्य गाथाओं से बुना गया किन्तु काव्य नायक राव कल्याण के छोटे भाई राठौड भीमराज बीका के शौर्य पराक्रम एव विक्रम से ऊर्जास्वत अल्पज्ञात चरित्र का उद्घाटन सृजनचेतना का प्रस्थान बिन्दु है। बीकानेर के नरेशो (राव एव राजाओं) का राजस्थान के इतिहास (विशेषत ख्यातो मे) प्रमुखत बखान हुआ है। किन्तु राठौड़ भीमराज जैसे अतुलित पराक्रमी एव कूटनीतिक सूझबूझ वाले व्यक्तित्व का मात्र उल्लेख ही हुआ है। राजस्थान के रचनाकारो की दृष्टि से भी यह महान् चरित्र अलक्षित रहा। राठौड़ भीमराज ने ही वस्तुत बीकानेर के लगभग उस आधे भाग को जिसे मालदेव ने राव जैतसी पर आक्रमण करके अपने अधिकार मे ले लिया था तथा मेडता के राव वीरम को भी पराजित करके उसके भूभाग पर ही अधिकार कर लिया था राठौड भीमराज ने अपनी कूटनीतिक सूझबूझ से राव वीरम को साथ लेकर शहशाह शेरशाह से सैनिक सहायता प्राप्त की तथा मालदेव पर आक्रमण कर पराजित किया। राठौड भीमराज ने बीकानेर के हडपे हुए भूभाग (गई भोम) को पुन प्राप्त करवाया। राठौड भीमराज के अतुल पराक्रमी महाप्रयास से ही बीकानेर का समग्र रूप सरक्षित हुआ जो तब से आज तक विद्यमान है। वस्तुत बीकानेर राज्य के खडित स्वरूप को अखण्डता प्रदान कर उसके खोये गौरव की पुन प्रतिष्ठा करने वाले राठौड भीमराज का परिपूर्ण चरित्र एक महान् काव्यनायक की गरिमा से युक्त होते हुए भी अल्पज्ञात बना रहा है। कविवर भीमपॉडियाजी ने इसी महान् चरित्र की कीर्तिकथा को समीक्ष्य प्रबन्धकाव्य मे महिमामडित किया है। पॉच सर्गो के समीक्ष्य प्रबन्धकाव्य की सरचना के काव्य मे इतिहास और कल्पना का मणिकाचन कवित्व सगम है। मायड भाषा के जुझारू रचनाकार एव समर्थ काव्यकार भीमपॉडियाजी की इस कृति में महती सृजन प्रेरणा के साथ सस्कारित काव्यशिल्प की आभा और जलमभोम के प्रति समर्पण निष्ठा प्राकल्प 11 सर्वथा श्लाघनीय है। राठौड़ भीमराज के व्यक्तित्व एव कृतित्व का महत्वाकन करने वाले कवि के अनेकछन्दो मे निम्नाकित उद्धरणीय है। राठौडॉ रो चालियो चाईस पीढ़ी राज । जे नॉ हुवतो भीव तो हुवतो घणो अकाज ।। समष्टि रूप में प्रस्तुत प्रवधकाव्य इतिहास और राजस्थानी साहित्य दोनो ही क्षेत्रो मे श्रीपाँडिया की अनुपमकृति के रूप मे अविस्मरणीय एव सग्रहणीय ग्रथ सिद्ध होगा ऐसी मै मगलाकाक्षा करता हूँ। डॉ देवीप्रसाद गुप्त सरला सदन जेलवेल बीकानेर सेवानिवृत्त निसीपल राजकीय डूगर कालेज बीकानेर गई भोम रा बाहडू गई भोम रो वाहडू मे कवि भीमपाडिया ने बीकानेर राज्य का प्राचीन व अर्वाचीन इतिहास पद्या मे प्रस्तुत कर राजस्थान के इतिहास जगत मे अपनी एक अलग पहचान बनाई है। ग्रथ मे ऐतिहासिक घटनाओं को अधिक पुष्ट करने के लिये जहा उन्होने राजस्थान इतिहास के नवीनतम ग्रथो लेखो का उपयोग किया है वही राजस्थान राज्य अभिलेखागार की पुरा सम्पदा का अध्ययन कर उसको यथा स्थान अपनी बात का आधार बनाया है। राज्य के सस्थापक राव बीका से राव जैतसी और उसके पुत्र भीवराज की शौर्य-गाथा को तत्कालीन साहित्यिक और सामाजिक परिवेश के साथ प्रस्तुत कर ग्रन्थ के सास्कृतिक महत्व को भी बढ़ा दिया है। दिनाक 14 1297 (डॉ गिरिजा शकर शर्मा) सेवा निवृत्त उपनिदेशक राज राज्य अभिलेखागार बीकानेर 12 गई भोम रो बाहडू भीमपॉडिया परिचय की परिधि मे श्री भीमपॉडिया गत पाँच दशको से काव्य-क्षेत्र में अलख जगाये हुए है। रचनाधर्मिता उनके लिए सुविधा तथा अवसरवादिता नही अपितु स्वास एव रक्त प्रवाह की तरह स्वाभाविक एव आवश्यक है। वे अपनी सृजनशीलता के प्रति पूर्णतया समर्पित रहे है। श्री पॉडिया एक ऐसे कवि है जिनके जीवन एव कविता के बीच हासिय नही खीचे जा सकते। सघर्ष उनका मुख्य स्वर है। कविता का भी और जीवन का भी। उनका जीवन जितने उतार-चढावो धूप-छाहो असुविधाओं एव विपत्तियो मे से निकला कविता भी उतने ही पडावो पर चढी-उतरी। सघर्ष का यह स्वर उनका जीवन साथी है। घटनाओं के बदलाव के साथ उनकी आस्थाए नही बदलती और न ही राजनीति के मोड़ ही बनते है। क्राँति का स्वर उनकी धमनियो के रक्त प्रवाह की तरह स्वाभाविक एव हृदय के स्पदन की तरह स्पष्ट है। वे सघर्षों के माध्यम से सत्य के अन्वेषी रहे है। सहानुभूतियो के सहारे जीना उन्हे अभीष्ट नही और यही कारण है कि समाज के कथित प्रभावशाली क्षेत्रो की कृपा-कोरो या भूकुटि तनावो की विना परवाह किये वे निरन्तर सघर्षशील बने रहे। उनकी कविता उनके सघर्षो की उपज भी है तो साक्षी और सहयात्री भी। जहाँ-जहाँ अन्याय-उत्पीड़न है पाँडियाजी की कविता वही-वही चोट करती है-निर्णायक चोट। वह अपनी दिशा भी स्वय चुनती है। निश्चित दायरे बधे-बधाये राजमार्ग और सरकारी-मुद्राए उनके लिए अपरिचित रहे है। इस दृष्टि से देखे तो पाँडियाजी युगकवि है-उनका स्वर ही जैसे युग का स्वर बन गया है। बीकानेर के इन पेतालीस वर्षों के साहित्य को पॉडिया-युगीन साहित्य की सज्ञा दी जा सकती है। श्री भीमपॉडिया का जन्म 19 जुलाई 1929 आषाढ शुक्ला त्रयोदशी वि स 1986 को बीकानेर मे हुआ। 1948 मे वे कविता की ओर उन्मुख हुए और लगभग उन्ही दिनो अध्यापक बने। कविता और अध्यापन आज भी चालू है-सभवत ये दोनो उनके अभीष्ट है। उनकी कविताएँ प्रभावशाली स्वर ओजस्वी एव गति मार्मिक रही कि 1953 से 1960 तक उनकी कविता मै दिवलै री जोत अबै तू ओक सरीसी जगती रईजे आठवी कक्षा के पाठयक्रम में सम्मिलित की गई। उनकी रचनाएँ राजस्थान एव भारत के प्राय सभी पत्रो मे प्रकाशित हुई है जिनमे वातायन मधुमती जागती जोत राजस्थान भारती नवजीवन सदेश पाक्षिक चेतना ललकार लोकजीवन जनता की आवाज नया ससार राजस्थानी वीर माहेश्वरी सेवक अग्रदूत क्रातिदूत प्रजा सेवक गण-राज्य वर्तमान लोकमत राजस्थान विकास जय चित्तौड़ शिकायत सीमा-सदेश पार्थसारथी नवयुग आदि कुछेक पत्र है। इनमे वे पत्र भी सम्मिलित हैं भीमपोंडिया परिचय की परिधि में 13 जो पूना-हिंगनघाट दिल्ली कलकत्ता जयपुर, जोधपुर उदयपुर आदि से प्रकाशित होते रहे है। आकाशवाणी से भी प्रसारित होते रहे है। स्वातत्र्योत्तर हिन्दी कविता और विशेपत हिन्दी गीत जितने आयामा में से निकला पॉडियाजी ने उन सबको स्पर्शित ही नही आत्मसात भी किया। उनके हिन्दी राजस्थानी गीतो के इतने अधिक विषय-विन्दु है कि कवि-व्यक्तित्व को निश्चित दायरो में बाँधे रखना कठिन हो जाता है। प्रकृति प्रणय शृगार, वियोग क्राति विस्फाट विद्रोह राजनीतिक चेतना सामाजिक उत्थान पारिवारिक परिवेश बचत विकास, आध्यात्मिक चितन आदि सभी विषय-बिन्दुओं पर उन्होने अपनी कलम उठाई है। पॉडियाजी के अब तक प्रकाशित तीन ग्रथ उनकी तीन भगिमाए प्रकट करते है। पुरुष के क्रूर चगुल म पिसती नारी की पीड़ा के विरुद्ध जन कवि ने सघर्ष-धोषणा की और उस टकराहट मे हित-अनहित को बिना देखे जब वह जूझने लगा तो सन् 1958 में हाथ सू कतर लीनो बोरलो कविता सग्रह प्रकाशित हुआ। राजनीति के क्रूर कुकर्मियो ने जब राजस्थान मे प्रजातत्र का गला घाटना चाहा तथा मानव-रक्त के मूल्य पर सिहासन प्राप्ति की कुचेष्टाएँ की तो कवि ने 1967 म लोकतन्त्र रा पाळी रोया कविता सग्रह से अद्भुत जन-चेतना मे सहारा दिया। भारत ने जब आत्म विश्वास से एक युद्ध जीता और शास्त्रीजी क नेतृत्व में बहुमुखी प्रगति की तो 1968 में गरीब करोड़पति कविता-संग्रह सामने आया। यो उनकी कविताए कई सकलनो मे है जिनमे अलगाजो बागा रा फूल आज रा कवि एव विजय हमारी है' सम्मिलित है। कवि ने जीवन की व्यापकता एव अनुभवो की विविधता को अपनी कविताओं मे मूर्त रूप दिया है। उनका प्रकृति प्रेम इतना स्पष्ट एव उससे जुड़ी पारिवारिक मानसिकता इतनी प्रभावपूर्ण है कि रवनाएँ स्वय ही एक परिवेश बन जाती है। राजस्थानी भारी धीष्म के ताप एव वियोग की पीड़ा से जरित होती है तो गीत उछलता है मेघा आव रे म्हॉरोडै गॉव र जब बादल उमड़-घुमड कर वर्षा के लिए आ जात है तो गीत बरसता है आ चरसाळी बादळी आर जब ऐसी सुहानी ऋतु में एक पत्नी अपने पति को गॉव लोटने का आग्रह करती है तो गीत जन्मता है म्हारी नणदल बाईसा रा वीर चाकरी छोड हजूरी चोड़ अधै थे घरों पधारो राज। खेत मे क्यों हलकारो राज आपणी धरती में बरसी बिरखा मोकळी फसलो के लहलाने एव पति के आगमन का सुख ये दो गीत भी भोगते है आव रमण री रात रमा धण रेत में और जद ठडी मधरी पून चल हूँ हिवडै म हुळसाऊँ और अतत जब पति को कमाई के लिए जाना पड़ता है और तीज-त्यौहारो मौको-टोको पर नहीं आ पाता है तो वियोगिनी के आसुओं की तरह गीत प्रवाहित होता है आस मिटै पळकॉ मे गळ गळ हिवड़ो आज पसीजे राजा गीत मात्र केवल दाम्पत्य जीवन तक ही सीमित नहीं रहते वरन् पुत्री की विदाई की पीडा भी उसमे प्रकट होती है। विदाई के क्षणो मे जैसे गीत की आँखे भी नम होजाती है चिड़कली उड़जा पाँख पसार। 14 गई भोम रो वाहडू कवि का दूसरा पक्ष सघर्ष विद्रोह एव राजनीतिक चेतना के साथ विकास परिक्रमा के स्वागत का है। प्रजातन्त्र के रथ की अगवानी एव विकास की आश इस गीत मे उदित होती है उजासो दीसै आभल कोर तो भावीपीढी के सुख की परिकल्पना जीवता रेवै रे थारा भूरिया लटूरिया मे उमडती है। सघर्ष के स्वर लीडरिया एव अफसरिया कविताओं में है तो युद्ध-रत सैनिको का आह्वान मोरचो तकडो राखीजो' एव 'सीव रो रुखाळो म्हारो सायबो मे दृष्टिगत होता है। मानवीय पीडा 'ज्यूँ रुकै ठीकरी मिनख रुळे कण म्हारो नॉव धरयो सिणगारी पॉव मे पगी नही अग मे झगी नही हाय मिनख रोओ-समाज आदि गीतो मे है। इस परिप्रेक्ष्य में देखा जाये तो नैराष्य, अधकार भटकाव आदि जीवन के स्वर हो सकते है पर मुख्य स्वर नहीं। जीवन नियन्ता शक्ति कोई और ही है और वह आशा विश्वास सहनशीलता एव सघर्ष के माध्यम से जीवन का ताना-बाना बुनती है। कवि का यह आध्यात्मिक पक्ष है पर भक्ति ज्ञान एव कर्म के इस सम्मिश्रण मे भी वह आडम्बरो को नहीं पचा सकता) आध्यात्मिक पड़ाव की कुछ रचनाओं मे ये सभी स्वर सामने आते है लेख लिख्यो दाणे-पाणी रोचुगणो पडसी रे/बीज नै उगणो पडसी रे' मन मे मूरत जमी नही तो हिवडो है श्मशान रे जी म्हारा जिवड़ा जी आदि रचनाएँ भक्ति के सत्य आडबरो पर प्रहार नियति की शक्ति एव भानवीय आशा के सच्चय की पीठिकाएँ है। बालगीत लोरियाँ प्रयाणगीत आदि अनेक क्षेत्र इन पीठिकाओंकी ओर अधिक दृढता प्रदान करते है। कविता और जीवन के बीच की दूरी देखनी हो तो भीमपॉडिया को नहीं किसी और कवि को ढूँढना होगा। हाथ सूं क्तर लीनो बोरलो के रचनाकाल मे कवि को तथाकथित सामाजिक शक्तियो से टकरा जाना पड़ा व कई विपत्तियो का वरण करना पड़ा पर वह न झुका न रुका और न ही टूटा लोकतत्र रा पाळी रोया के रचनाकाल मे राजस्थान के क्रूर कुकर्मी शासन के अत होने तक बीकानेर में प्रवेश नही करने जूते धारण नही करके केवल एक वस्त्र मे रहने की प्रताप-प्रतिज्ञाएँ की और उन्हे अन्त तक निभाया। बेटी के मेहदी रचे हाथो की जीत हुई और कुकर्मी- -शासन के अन्त की घोषणा के साथ कवि ने कन्यादान के लिए बीकानेर में प्रवेश किया। आपात-काल क 19 महीनो के अधकारमय युग म जब अभिव्यक्ति का सकट था कवि ने खुली बेबाक व प्रत्यक्ष रचनाओं मे भूतपूर्व शासन का विरोध किया व यातनाएँ सही। नागार्जुन व रेणु को जेल जाना पड़ा, भीमपॉडिया जेल के फाटक तक पहुँचते-पहुँचते रह गये। पाछी बणजा ऊँदरी इण्डै नै महादेव बतावै-जोरामरद पुजावै रे आदि रचनाएँ इसी काल की है। कवि की इस सृजनशीलता को भारत मे ही नहीं एशिया में मान्यता मिली है। Reference Asia (1975) एव Lesders of India (Vhos Who) आदि ग्रथा में भीमपोडिया परिचय की परिधि में 15 कवि के व्यक्तित्व एव कृतित्व के बारे मे सन्दर्भ दिये गये हैं। कवि होने के साथ-साथ वे पत्रकार सम्पादक समीक्षक एव राजनेता भी रहे है। जय जवान जय किसान के सम्पादक इस कवि ने नौकरी छोड़कर चुनाव लड़ा तथा राजस्थान के सर्वमान्य समाजवादी नेता लोकनायक मुरलीधर व्यास के साथ राजनेतिक सहधर्मिता का निर्वाह किया। स्वर्गीय व्यासजी के साथ वे पूना, गोआ बम्बई कलकत्ता एव राजस्थान के प्राय सभी नगरो में गये व समाजवाद का प्रचार-प्रसार किया। उनकी 'झाला दवै झंपड़ी की रचना जन-जन की भावनाओं का केन्द्र बन गयी थी। मेघदूत एव गीता का अनुवाद उसके जीवततम अनुभवो के निचोड की तरह सामने आता है। राजस्थान के निवासी एव प्रवासी असख्य नर-नारियो की आध्यात्मिक प्यास इस अनुवाद से तृप्त हो सकेगी। अधिसख्यक निरक्षर नर-नारी गीता की ज्ञान गगा म नहाने का आनद सस्कृत के माध्यम से नहीं उठा सकते। यदि टीकाओं मे भठक ता उन्हे पध की गेयता एव गत्यात्मकता नही मिल सकता और गीता ज्ञान रूखे उपदेशो की तरह केवल नीरस रूप में ही मिल पाता है। आवश्यकता इसबात की है कि गीता का वह गुह्य-ज्ञान अपनी बोलचाल की भाषा मे उसी मिठास और उसी सुपरिचित शैली में जन-जन तक पहुचाया जाये। हर भाषा के अपने तेवर होते है और हर भाषा की अपनी ही लाच, अपना ही लावण्य और अपना ही स्वाद होता है। ये लोच लावण्य और स्वाद भी बने तथा गीता की शब्द-व्यजना के साथ न्याय भी हो सके इन दो कठिनाइयो को पार करने का साहसिक प्रयास भीमपोडिया ने किया है। उनकी यह गीता राजस्थान के निवासी प्रवासी भाई-बहिनो के लिये लोकगीता या जन-गीता बन जायगी-एसी आशा तो की ही जानी चाहिये। भीमानन्दी भगवद्गीता के कुछ अश केवल बानकी के रूप मे प्रस्तुत कर रहा हू अर्जुन का सताप और भगवान कृष्ण का दिशा निर्देश इन श्लोका में प्रकट होता है . सजय चतायो- रण भोमी में सोक गळमळो अरजुन इणतर वचन उचार धनुस-बाण नै नॉख धनजे रथ मे जाय बैसिया लार।।१-४७।। आकळ-बाकळ साकाकुळ लख अरजुन ऑख भरायो ज्यूँ मधुसूदन भगवान दया कर अरजुन ने समझायो यूँ 112-11 भगवान बखाण्या--- अधरम जोग कुजोग अरजुना वेभोकै क्यूँ मोह करे सरग टाळ अपजस करवावै इसी ऑख क्यूँ आज झरै ।।२-२१॥ थारै जोग कायरी कोनी मत वण हूँ कायर लाचार हियो दूबो मत कर अरजुन जुद्ध करणनै हुयजा त्यार । १२.३।। सोक करै पिंडत ज्यूँ बोले जका सोक करणे नहि जाग मस्या-जियाँ रो साक न लावै पण मनडे मे पिडत लोग 12-991 16 गई भोम रो बाहडू बोदा बसतर त्याग पुरुष ज्यूँ मुंआ-निकोरा बसतर धारै त्यूँ बोदो तन तजै आतमा जुई निकोरी काया धारै ।।२-२२।। अमरी इसी आतमा इणनै काटण सकै न ससतर पाय गाळ न बाळ सकै जळ-अगनी सकै न इणनै पून सुखाय । १२-२३।। अणछेदी-अणबळी आतमा अणभीजी अणसोख बराण अकरूप है सदा सनातन सरबाळे व्यापक थिर जाण ।।२-२४।। जद-जद धरम घटै धरती पर अधरम बढे धरम घेराय प्रगट हूँवू पारथ हूँ ही तो उणी काळ निज रूप रचाय । १४-७।। साधू पुरुष उबारण जग मे पापीडॉ रो करण विनास धरम धजा थापण नै प्रग₹ जुग-जुग मे हूँ जुग री आस ।।४-८।। अरजुन सकळ भूत उतपत रो बीज जको हूँ ही हूँ जाण म्हाँ बिन भूत चराचर कोनी कोई भी तो समझ सुजाण | 190-३१।। जलै कृष्ण योगेसर है अर जकै धनुरधर अरजुन जाण बढ़ विजयश्री और विभूती अचळ नीति म्हॉरो मत माण ।।१८-७८।। भीमानन्दी भगवद्गीता निश्चित रूप से जन-जन तक पहुंचेगी यह मेरी दृढ धारणा है। इस गीता के नामकरण के पीछे भी एक विशेष पवित्रता और पूर्ण समर्पण की आस्थावान भावना रही है। बैलूर मठ कलकत्ता के ध्यान कक्ष में स्वामी रामकृष्ण परमहस और विवेकानन्द की प्रतिमाओं के सामने कवि ने अपने आपको भीमानन्द घोषित किया तथा भीमानन्दी भगवद्गीता का अन्तिम स्पर्श वही पर देनेकी बात कही। कवि के शब्दो और क्रियाओं मे आज तक अन्तर नहीं रहा है और उनकी यह घोषणा भी सफल हुई। कवि श्री भीमपॉडिया की साहित्य सर्जना को समाज ने भली प्रकार सराहा है। आपका अभिनदन आद्या आर्यसमाज ज्ञानोदय भारतीय विद्या मंदिर शोध प्रतिष्ठान बीकानेर आदि विभिन्न साहित्यिक सामाजिक सस्थानो द्वारा किया गया तथा आपको पीथळ पुरस्कार 1995 राव बीका पुरस्कार 1995 स्व श्री बालचद सॉड स्मृति पुरस्कार 1997 स्व श्री भीकमचद अभाणी स्मृति पुरस्कार 1997 तथा गई भोम रो बाहडू पुरस्कार 1997 देकर सम्मानित किया जा चुका है। वैसे आप कभी भी पुरस्कार पाने की लालसा मे नही रहे है। उनकी स्पष्ट घोषणा है कि मै रचना धर्मिता के अनुसार कर्तव्य पूरा करता हूँ-रचता-गाता हूँ, किसी से भी सिफारिश-अभिशषा करवाकर पुरस्कार प्राप्त करना मेरा अभीष्ट नही। निश्चय ही आपकी उक्त भाव भूमि अनुकरणीय है। साहित्यकार समर्पित भाव से समाज कल्याण एव राष्ट्र सेवा मे सनातन सत्य का चितेरा तथा शब्दब्रहम का साधक बना रहे थी पॉडियाजी का अभीष्ट कालजयी सुकृत है। मॉगकर पुरस्कार लिया क्या लिया? भीमपाँडिया परिवय की परिधि में 17 कवि श्री भीमपॉडियाजी का नया कविता सग्रह आखर गगा आखर गीत जन जन की भावनाओं को साक्षरता से जोड़ने तथा घर-घर मे साक्षर बनने-बनाने की प्रेरणा देने शिक्षा का प्रसार करने के उद्देश्य से रचा व प्रकाशित किया गया है। नव साक्षरो तथा प्रौढो के मन मे शिक्षा-प्रसार हेतु जागरूकता पैदा करने के लिए भावोत्पादक सकल्पनाएँ सरल-सुगम और सरस राजस्थानी भाषा-गीतो के माध्यम से अभिव्यक्त की गयी है। भाषा सरल-सुबोध प्रभावकारी ओज-माधुर्य से युक्त छद-अलकार लय गति की लावण्यता लिये हुए है। सपूर्ण राजस्थान के साक्षरता ऑदोलन को इन गेय गीतो से क्रातिकारी गति और उद्देश्यपूर्ति में भारी सफलता मिलेगी ऐसी आशा की जानी पर्याप्त विश्वसनीय है। निश्चय ही यह कविता सगह जन-जन के हाथा ढाणी-ढाणी गाँव-गाँव कसबो-नगरी में धूम मचायेगा। आखर गगा आखर गीत अथ साक्षरता अभियान यज्ञ की महक सुदूर राजस्थान ही नही अपितु सम्पूर्ण भारत मे फैलायेगा। आज तो सारा विश्व ही साक्षरता के यज्ञ मे रचा-पचा है। श्री भीमपॉडिया जी का प्रस्तुत ताजा राजस्थानी प्रबधकाव्य ख्यात-बात-इतिहास के आधारो पर आधारित गई भोम रो बाहडू आपके हाथों में है। इस प्रबध काव्य मे आदि वैदिक अवधारणाओं व पौराणिक सदर्भो तथा ख्यात-बात-इतिहास में वर्णित सूर्यवंशीय क्षत्रियो के वशजो राष्ट्रकूटो-राठोड़ा के राजकाज और स्वतन्त्रता हेतु लडे सग्रामो का भव्य वर्णन किया गया है जो कि राजस्थान की सस्कृति और समाज व्यवस्था की अनुगूंज है। पॉच सर्गो मे सृजित प्रबध की जीवतता मनमोहक शैली भाव भाषा छद-अलकार रस निष्पत्ति के गरिमापूर्ण निर्वहन-सप्रेषण से सराबोर है। बीकानेर के सस्थापक राती घाटी के प्रणवीर राव वीका उसके वशज नरा-लूणा और परम विजेता राव जैतसी तथा राव कल्याण व उनके भाई वीर भीवराजजी गई भोम रो बाहडू के जीवन से सबधित ऐतिहासिक चीरोचित प्रसगों को प्रवाहपूर्ण प्रबध काव्य की मनमोहक शेली मे उकेरा है। काव्य की छटा आप स्वय परखेगे तो वाह-वाह । कहे विनॉ नही रहेगे ऐसा भरोसा है। निश्चय ही आप इसे पढकर पूर्णत गौरवान्वित होगे। कवि को साधुवाद दिये बिना नहीं रहेग यह मगल कामना मेरी है आपकी भी होगी। -भवानी शकर व्यास विनोद पवनपुरी बीकानेर 18 गई भोम रो दाहडू समरपण रा सुर भीतडा ढह जासी गीतडा रह जासी भीवराजोत बीका राठौड श्री नवलसिहजी पुत्र श्री जेसराज सिहजी राठौड पौत्र श्री खुमाणसिहजी राठौड़ गाँव चलकोई (जन्म सन् 1898 मार्च 30 स्वर्गवास 20 नवम्बर 1989 ख्यात बात इतिहास रा पानॉ मॅडिया पुरखों रै पुण्य रा पवाड़ा अर रणखेतॉ मे सूरमाई रै सुजस रा अखी आखर-अमर गीत गूंज्या-बखाण्या जुग जुगांतरॉ सुजस बधावै। गई भोम रो बाहडू रो बिडद धारणिया श्री भीवराजजी राठौड जैतावत बीका कुळ रा सिरमोड़ सूरमा कुसळ राजनेता अर समाजू सेवादार हा। तरवार री धार अर कलम री कार वॉरै सुजस रा अखी आखर-अमरगीत जुग जुगॉतरॉ तॉई गूंजता रैसी। वाँरै सुजस मे सँपाडा करता रैसी। म्हारी कलम सू कोरीजियोड़ो ओ इतिहासू प्रबधकाव्य गई भोम रो बाहडू भीवराजोत बीका राठौड़ स्वर्गीय ठाकुर श्री नवलसिहजी चलकोई रै सईकै बरस जनम दिन पर सुमरणसार-सरूप घणे मान सनमान समरपित है। 'भीतॉ मॅडिया मॉडणा गळे समै री धार कागद मॅडिया गीत पण गळे न आखर ध्यार भीमपॉडिया बीकानेर
श्री करणी साळ (करणीजी रो डेरो)
राव श्री बीकाजी री लोक सभा
निर्मित (वि स 1545 वैसाख सुदी 2 शनिवार
r
,
किनियाणी करणी पग माँडया गढ़ गणेसरी थापी नीव
लोकसभा बीवै थरपाई सुजस सँमायो सिसटी भीव
जन जन पर फिरपारी कोरौं परम धार करियो सुभ न्याय
दएँ दिसा सपै सुख साँयत जग मे विरुद बखाण्यो जाय
धिन धिन रे बीकापो बको राठोडौं रो नामी धाम
दिन दिन घरा विगसती फूनै पग पग मुळक रमावै राम
बीकानेर सस्थापक राव श्री बीकाजी जोधावत राठोड
सस्थापन वि स 1545 वैसाख सुदी 2शनिवार
Arya
उन्मदिर 1495615(रट 1438TT5)
Priदिर 15015
(11-05217)
काको काँधल श्री बीकै रो जोधैजी रो भुजबँध वीर
घोडे चढ रणरग जीत तो दुसमण रा काळजिया चीर
बीकै अर बीका नगरी रो सरक्षक हो तेज तरार
जियो जितै जुध पर जुध जीत्या सदा निभाया कवल करार
काँधलोत सूरा घण मुळकै ठोड़ ठोड़ जस रा गुण गाय
धिन धिन म्हाँरो वीर बडेरो म्हाँले दिया सुजस छाय
वीर श्री कॉधलजी राठौड़
जोधैजी रो कँवर लाडलो नोरेंगदे रै हिद रो हीर
बीकै रो भुजबँध भाई हो बीदो राव महादळपीर
बीदाहद राठौड़ राजवी जोधावन कुळ रो अवतस
बीका में बीदावाटी सिरै सूर बीदावत घस
वीर श्री बीदोजी राठौड़
करणी हाय जीव धर ॐी दिए ।
बरस सईको राम र लो
राती घाटी गढ गणेस मई आए
राठौड़ा रो सुजस समायो भारी पर
सवन पनरैसौ पैताकै सुभ बैशाख म
थावर बीज भरपदी बीपीवा नगा -
राव श्री वीकाजी जोधावत राठोड
सस्थापक दीपानेर(वि स 1945)
राव जैत रोडको बाज्यो आखी सिसटी हुई पिछाण
राठोडा सधारणपका सुवरण आँकों मेंड्या यखाण
राती घाटी गढ गोस V
द कानरा साह माज्यो
लारामलाल लोही लयमय
गड लाहोर जाय लाज्यो
राव श्री जैतसी राठौड़
ORर 16 mins
स्पर।
राव श्री वीकाजी जोधावत राठोड़ रे रैवत घोड़ेरी प्रतिमा
बीकानेर रातीघाटी गढ़ गणेस मे वापित
र
N
नाचीही थी चामुगनी
गरम (मान)
-ru मुदी
धीक रो रैवत घोड़ो जद दुसमणियाँ पर वझतो गाज
बडाँ बौँ रा पाँव उखड़ता रणभूमी जाँता भाज
लोकाचार अर्ने जग पूजै घोक विजे रा तिलक लगार
म्हाँ मे भी नित भरै रेवती राठोडै बीकै री कार
गद गणेस में धान धरपियो लोक भाव भर गायै गीत
पग पग पर म्होंने नित सपी ज्यूँ रूपी बी मैं जीर
रातीघाटी मे राव श्री बीकाजी गढ गणेश सस्थापित वि स 1545 बैसाख शुक्ला बीज शनिवार Moli संद - जाजीवा- श्रीनगर 4 TEAM --- mare-memenewwear- गढ पाल्यो बीकै जोधावत रणबकै कमज राठोड़ माँ करणी सिर छत्र घरायो जित बाज्या घोड़ों रा पोड राव जैत अघराताँ भाँग्यो साह कामरो काळो चोर भीता फूद भाजियो खोड़ा नीठ पूगियो गढ़ लाहोर साह कामरो भले न आयो भेकर मे ही विगइयो डोळ ख्यात बात इतिहास बखाणे गढ गणेस दीकाँ री प्रोळ राव श्री वीकोजी जोधावत सस्थापक गढ गणेस बीकानेर री सूरज दरसण छतरी (वि स 1545) गढ गणेस मे सूरज छतरी सूरजवसी दरस कराय नित सूरज नै अरघ अरपतो लुळ लुळ बीको धोक लगाय राव जैतसी अरघ अरमतो पछै अरोगण करतो थाळ रणबको राठोड़ो बीको राव जैतसी मुळक्यो पाळ कल्याणे भीदै जस अरज्यो राव मालदे पर घढ गाज ख्यात बात इतिहास बखाणे गई भोम रो वाहडू बाज
गई भोम रो बाहडू (ऐतिहासिक प्रवध काव्य रो सर्जक भीमपोडिया पुत्र
श्री रामरखजी पोडिया आपरी पोती दिव्या पॉडिया पुत्री श्री अणत् राजू पॉडिया साथ
(विश्वाम्बिका भवन बीकानेर में आपरे अध्ययन कक्ष मे डॉ शक्तिदान कविया
जोधपुर भेळे) प्रसन्न मुद्रा मे दिनाक 11 अक्टूबर 1997 विजयादसमी विस
2054शनिवार
राजन
na
am
(AL
।
गई भोम रो बाहडू (ऐतिहासिक प्रबंध काव्य रो सर्जक भीमपाँडिया पुत्र श्री
रामरखजी पाँडिया कविता पाठ मुद्रा में जन्म वि स 1986 साढ सुदी
13ई सन् 1929 जुलाई 19
राजस्थानी प्रबध 'गई भोम रो बाहडू' सूरजमालसिह राठौड़ जनकवि श्री भीमपाँडिया द्वारा सरज्यो राजस्थानी प्रबध 'गई भोम रो बाहडू देख सुण घणोजी सोरो हुयग्यो, घणो चोखो लाग्यो। राती घाटी रो विरुद राजस्थानी भाषा मे घणो फूठरो लिख्यो है। मायड़ भाषा राजस्थानी आर्य भाषावा मे नामी भाषा है। पण सिरै भाषा हुँचता थका भी भारत रै सविधान मे आठवी अनुसूचिका मे राजस्थानी भाषा नै आदरजोग मान्यता नही दिरीजी जकै रो घणो दुख राजस्थानी भाषा रा बोलण वाळा अर राजस्थानी प्रेमी नौ किरोड़ लोगों ने है। राजस्थानी भाषा सीधी सस्कृत सू निकळी आछी सम्पन्न टकसाळी स्वरूप म घणी मीठी भाषा है। राजस्थानी भाषा रोप्राचीण रूप मरुवाणी-मरुभाषा-डिगळ मे हो। हिन्दी साहित्य रै आदिकाळ-वीरगाथा काळ- चारणीकाळ मे राजस्थानी डिगळ भाषा ही नामी भापा ही। हिन्दी खड़ी बोली गुजराती आदि अनेक भाषावाँ डिगळ पछै री भाषावाँ है। बीकानेर री कुळदेवी माँ करणीजी मायड़ भाषा राजस्थानी मे ही बोलता-बखाणता हा। राजस्थानी डिगळ भाषा मे पुराणै काळ मे अने] लूंठा चारण कवि आपरी कवितावाँ लिखी। बीकानेर रा राजावाँ अने] लूँठा चारण कवियाँ नै धणा लाख पसाव-करोड़ पसाव भेट कर आदर दियो। महाराज पृथ्वीराज पीथळ री वेलिक्रिसन रुकमणी तो आखै ससार मे नामी हुई है। अनेकूँ नामी चारण कवि हुया है बीकानेर री धरती पर। मधुलाल चारण चारण खिड़िया बीतू सूजा, बीतू भीम, दयालदास सिढायच आदि घणजोगा चारण कवियाँ नै पुरस्कार-लाख पसाव करोड़ पसाव भेंट कर आदरीज्या। कविता ख्यात बात, इतिहास रा प्रमाण घणों ओपता ओळखीजै। राव बीकोजी काँधलजी राजस्थानी मे ही बतळ करता हा। महाराजा गगासिहजी, राजस्थानी भाषा और साहित्य रा बाळा सरक्षक हा। खुद राजस्थानी मे बोल-बतळ करता। घणा सावाँ लागता धाँरो रुड़ो रूप मेकर जिण देख्यो निजर हा। अनूप सस्कृत पुस्तकालय नै घणो रूड़ो सो किभ भूलै भूप वो राठोड़ी तेज तप रूप देय सँवारियो। अनेक ग्रथ प्रकाशित श्री चन्द्रसिह दिरकाळी लिखियो करवाया राजस्थानी गीत मजरी वीर गीत दयालदास री ख्यात जसवत उद्योत आदि नामी ग्रथ प्रकाशित हुया। मरुगगा लावणिया भागीरथ ही नही विद्या रा भडार अर विद्वाना रा पारखी तथा सरक्षकभी हा। डॉ टैसीटोरी ठा रामसिहजीप सूर्यकरणजी पारीक स्वामी नरोत्तमदासजी आदि घणकरा विद्वान राजस्थानी भाषा रा हिमायती त्यार करिया। राज रा आदेश प्रचार भी राजस्थानी भकिया।
महाराजा सार्दुलसिहजी आपरै राज्यकाल में सादुल राजस्थानी रिसर्च इस्टीटयूट री जनवरी सन् 1945 मे थापणा कर राजस्थानी भाषा रै विगसाव अर मानता सारू मोकळी चेसटा करी। ठा रामसिह डॉ दशरथ शर्मा अगरचन्द नाहटा श्री लालबन्द कोठारी जिसा चावा-ठावा विद्वान निदेशक हा। श्री नरोत्तमदास जी स्वामी श्री नाथामजी खड़गावत श्री अक्षयचन्द्रजी शर्मा परिषद सदस्य एव सचिव हा। श्री मुरलीधर व्यास राजस्थानी, बद्रीप्रसाद साकरिया मूलचन्द प्राणेश, चन्द्रदान चारण ओर श्री नृप सादुल जन हित कियो सिरै देस हित काज भीमपोडिया जिसा प्रतिष्ठित व्यक्ति सहयोगी राजस्थान बगाइयो हा। श्री सुनीति कुमार चाटुा जिसा लूँठा हाथों (प्यो राजस्थानी प्रेमी सादुल राजस्थानी रिसर्च इस्टीटयूट रैमचपर पधारिया। राज सादुल राजस्थानी रिसर्च इस्टीटयूट बीकानेर की प्रथम वार्षिक रिपोर्ट से साभार (जन्म कथा) बीकानेर का प्रतापी राठौड़ वश आरम्भ से ही सरस्वती का समाराधक और साहित्य एव कला का सरक्षक तथा आश्रयदाता रहा है। बीकानेर के नरेशो ने अनेको सु-कवियो सु-लेखको विद्वानो और कलाकारो को आश्रय देकर भगवती भारती के भडार की श्री वृद्धि की। उनकी साहित्य सबधी दानवीरता इतिहास मे कहावत बन चुकी है। महाराजा रायसिहजी ने अपने राज्य काल मे तीन करोड़ पसाव (करोड़ के पुरस्कार) सौ लाख पसाव (लाख के पुरस्कार) सवा तीन करोड़ नकद दो हजार हाथी पचास हजार घोड़े और 25 गाँव कविजनों को दान मे दिये। आखै भारत मे राजस्थानी भाषा रै विगसाव सारू लूठा सत जैन साधु अर चावा-ठावा विद्वान बराबर साहित्य सरजणों मे लाग्या है। आधुनिक स्वर्गीय अर जीवित साहित्यकारों मे घणाँ लूँठा सिरै नाँव साहित्यकार कवि है। श्रीविद्याधर जी शास्त्री श्री अक्षयचन्द्रजी शर्मा डॉ नन्दकिशोर आचार्य श्री मनोहर शर्मा, चन्द्रदेव कन्हैयालाल सेठिया, श्रीलाल नथमल जोशी भरत व्यास मेघराज मुकुल चन्द्रसिह विरकाळी रावत सारस्वत गिरधारीसिह पड़िहार मुकनसिह राठौड़ भीमपाँडिया गजानन वर्मा मोहम्मद सदीक धनजय वर्मा साँवर दइया यादवेन्द्र शर्मा चन्द्र श्री माणकचन्द रामपुरिया श्री मत कुमार व्यास श्री गौरीशकर आचार्य गौरीशकर मधुकर रानी लक्ष्मीकुमारी चूंडावत लक्ष्मीकात शर्मा, श्री रामदेव आचार्य गगाराम पथिक श्री चम्पालाल राका गिरधारी लाल व्यास, विद्यासागर, श्री गोविन्द श्रीमाली श्रीलालचन्द भावुक श्री बुलाकी बावरा वासु आचार्य, देवदास श्री हरदत्त सहगल डॉ बाबूलाल शर्मा, ए वी कमल डॉ शकरलाल स्वमी देवकिसन राजपुरोहित मोहनलालजी पुरोहित, दीनदयाल ओझा, चन्द्रदान चारण मनुज देपावत अन्नाराम सुदामा, हरीश भादाणी, भवानीशकर व्यास नानूराम सस्कर्ता ओंकार पारीक शिवराज छगाणी सूर्यशकर पारीक श्याम महर्षि डॉ श्रीलाल मोहता डॉ गिरजाशकर शर्मा डॉ देवी प्रसाद गुप्ता मदन केवलिया पुरुषोतम आसोपा किरण नाहटा मूलदान देपावत मस्तान, शमीम श्री बल्लभश दिवाकर श्रीलाल जोशी भवरलाल भ्रमर काह्न महर्षि,किशोर कल्पनाकात सीताराम महर्षि चचल हर्ष श्री दाऊदयाल व्यास अजीज आजाद अब्दुल रहमान पेशकार भालचन्द तिवाड़ी रामजीवण सारस्वत, झमणलाल व्यास बुलाकी शर्मा शिव पाण्डे, नीरज दइया श्री लक्ष्मीनारायण रगा सत्यप्रकाश आचार्य रामनिवास शर्मा पृथ्वीराज रतनू, कमल रगा, मदन रगा श्री कृष्ण बिश्नोई आदि-आदि घणाँ ही लोग राजस्थानी भाषा रै विगसाव अर सविधान मानता सारू जूझता जुड्या रैया है। ससद मे भोज़े सुर [जै महाराजा डॉ करणीसिहजी साँसद तो राजस्थानी भाषा री सविधान मानता सारू घणी खूठी पैरवी आवाज ससद मे उठाई अर राजस्थानी भाषा रै विगसाव सारू मोकळो ही काम कियो। राजस्थानी भाषा रा अनेक गथा नै उजास मे लावण सारू घणो मोकळो जतन कियो। राजस्थानी भाषा रा लेखका ने घणो ही आदरजोग सहयोग दियो। राजस्थानी भाषा मे काम करणियाँ विद्वाना नै आदरजोग सहयोग 17 देवण सारू अनेकूँ ट्रस्टा री थापणा करी अर अकर बीकानेर मे कळादीर्धा सजवाई। ओजूं करण खड़ग ले हाथ मे महाराजा सासद डॉ करणीसिहजी रै रो सुखड़ो मायड भाषा राजस्थानी नै सविधान री आठवी निरप हियै भर साथ सूचिका मे आदरजोग थान-मुकाम थापित करणे रो ठूठो सकळप पूरो करणो अबै आपाँ राजस्थानी रा नव किरोड़ हेताळू लोगों रे हाथों मे है। राजनैतिक निर्णय लेय हाथ उठावाँ-वधावॉ तो सकळप पूरो हुवण में ताळ कितीक लागै? हाथ साधी तोखरी । आव जन लाव राजमाता सुशीला कुगारीजी तो राजस्थानी भाषा साहित्य-सस्कृति रै विगसाव प्रचार प्रकाशन सारूघणो मोकळो सहयोग देवै है। आप तो राजस्थानी लोक कला लोक गीत लोक साहित्य रै भडार भरण सारू हरदम त्यार रैवै है। अर सगरथ सारू मोकळो सहयोग करें। डॉ करणीसिहजी द्वारा स्थापित नागरी भडार बीकानर म राजमाता सुदर्शना कुमारी कला दीर्घा रै विगसाव मे भी घणो मोकळो सहयोग दियो है। आगे भी समरथ सारू मोकळो सहयोग रो हाथ बधासी। आपाँ मायड़ भाषा राजस्थानी री करणी करणीसिह ताँई सविधान मानता अर विगसाव सारू भेळी भेक उठी है Dझ चेसटा कराँ। जुझारू कवि श्री भीमपाँडिया जी जे सुख चावै साध जीव नै तो भरपूर चसटा अर सघर्ष कर ही रैया है। मायड़ भापा पूज आपॉ सगळा ही भरपूर चेसटा मे लाग जावाँ तो सविधान मानता मायड़ भाषा राजस्थानी नै घणी बैंगी मिल सकेली। इण में फरक रत्ती भर ही कोनी। निसचे ही राजस्थानी भाषा व्याकरण सम्मत घणी लूँठी-सम्पन्न भाषा है। इण भाषा रो सबदकोस विश्व री घणी नामी भाषावाँ अर हिन्दी भाषा रै सबद कोसाँ भी घणो लूठो है इण भाषा रा लोकगीताँ रो मिठास ससार री कोई भाषा मे कोनी मिले। राष्ट्र प्रेम अर वीर भावना सराबोर राजस्थानी भाषा रो मुकाबलो दूजी किसी भाषा कर सकै है ? बताओ तो खरी। अक परचै मे श्री भीमपॉडिया जी जोरदार पक्को सबूत देय बतायो है कि राजस्थानी भाषा स्वतन्त्र सशक्त सम्पन्न अकरूप टकसाली भाषा है। -श्री भीमपॉडिया उवाच देखिये (स्वतन्त्र गणतन्त्रात्मक भारतीय सविधान लागू होने से पूर्व ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस बम्बई कलकत्ता-मद्रास द्वारा एन हिस्टोरिकल एटलस ऑफ दी इण्डियन पैनिलसुला का प्रथम एडीशन 1949 मे प्रकाशित हुआ था। उसी म क्रम सख्या 40 41 पृष्ठ 82 से 85 तक मे पृष्ठ 82 83 पर विवरण सहित भारत की आर्यन लेग्वेजेज (आर्य भाषाओं) और पृष्ठ 84 85 पर नॉन-आर्यन लेग्वेजेज (द्रविड़ भाषाओं) के भाषागत ऐतिहासिक नक्शे प्रकाशित हुए थे। भारत की आर्य भाषाओं का यह आलोक्य नक्शा है आप लोग प्रस्तुत नक्शे मे झाँकिये तो सही।
गौर से झाँकिये तो इस नक्शे मे राजपूताने (राजस्थान) की प्रमुख आर्य भाषा राजस्थानी का भू-प्रदेश सम्पूर्ण क्षेत्र स्पष्टत दर्शाया हुआ है जो कि अपनी ऑचलिक बोलियो से सयुक्त-सम्पन्न समृद्ध अधिकाधिक समरस एक रूप टकसाली स्वरूप में स्वतन्त्र परिनिष्ठित प्रादेशिक भाषा एक मात्र राजस्थानी से परिलक्षित है। निश्चय ही राजस्थान की समग्र एक प्रादेशिक भाषा राजस्थानी है जिसे भारत ही नहीं विश्व भर के अनेक ख्याति प्राप्त लब्ध प्रतिष्ठित भाषा शास्त्री एवं विद्वानो ने समृद्ध-सम्पन्न स्वतन्त्र परिनिष्ठित आर्य भाषाओं मे गिनाया है। परन्तु हमारी उक्त प्रादेशिक मायड़ भाषा राजस्थानी भाषा को भारत के सविधान मे आठवी अनुसूचिका मे सम्मानपूर्वक मान नहीं दर्शाकर उपक्षा भाव प्रकट किया गया है। जबकि हमारी प्रादेशिक मायड़ भाषा 'राजस्थानी भाषा से अनेक अत्यधिक छोटी-छोटी भाषाओं को सविधान में सम्मानपूर्ण मानता से महिमा मण्डित किया जा चुका है। इसी कारण वर्षो से लम्बे अर्से से राजस्थानी भाषा को सविधान की आठवी अनुसूचिका मे सम्मानपूर्वक न्यायोचित मान्यता की माग पूरी करने हेतु राजस्थान के करोड़ो लोग आप हम आग्रहपूर्ण ज्ञापन-आदोलन करते आ रहे है जिसे चरम लक्ष्य प्राप्ति तक चलाये रखना हमारा जन्म-जात मौलिक अधिकार एव दायित्व है। विश्वास रखिये हमारी राजस्थानी भाषा भारत ही नही विश्व की अधिकाश भाषाओं की एकरूपता-परिनिष्ठता से कुछ अधिक ही एक रूप परिनिष्ठित स्वतन्त्र-समृद्ध- टकसाली स्वरूप की भाषा है। सशक्त दावे एव सम्पूर्ण सामर्थ्य के साथ हम आदोलनरत रहे तो हमारा पुनीत मौलिक अधिकार प्राप्ति का सकल्प अवश्य ही सफलीभूत होगा। निश्चय ही हमारी प्रादेशिक मायड़ भाषा राजस्थानी भाषा को सविधान की आठवी अनुसूचिका मे निकटतम भविष्य में ही सम्मानपूर्ण मान्यता देनी होगी। सकल्प सजोये रखे-उपेक्षापूर्ण अन्याय के बादल छटके रहगे। राजस्थानी भाषा की सवैधानिक मान्यता के विराधी असल मे राजस्थानी सपूत नहीं है। दरअसल मे सच्चे राजस्थानी सपूत वे है जो यह मानते है कि सम्पूर्ण राजस्थान प्रदेश एक राजनैतिक प्रादेशिक इकाई है और उसकी एक ही समृद्ध सम्पन्न अधिकाधिक एक रस एक रूप टकसाली स्वरूप मे स्वतन्त्र-परिनिष्ठित भाषा है-'राजस्थानीभाषा ।' जनकवि श्री भीमपॉडिया जी द्वारा ऐतिहासिक एटलस मे सू छाप्यो आर्य भाषावाँ रो ऐतिहासिक मानचित्र साफ बतावै है कि राजस्थानी भाषा निपट निरवाळी स्वतन्त्र आर्य -1 भाषा है।
SHALCHA JA AIN- MinutOWARD PAKKTU PASHTU PANJAB SAVENI SIRAIKI LANGUAGES AVAA TWAAILI "SINOHL KANE LANI A1 RAJASTHANI HINDI MAA BENGALI GUJARATI MANA DANANDISA ORIYA MARATHI ARYAN LANGUAGES आपा राजस्थान प्रदेश रा वीर सपूता मायड भाषा राजस्थानी री सवैधानिक मानता रो दिढ सकळप लेय अक सुर आवाज उठावाँ अर राजनैतिक निरणे लेवाँ तो राजस्थानी भाषा नै सविधान वारे कुण राख सळो ? जागो तो खरी सूरजमाल सिह राठौड़ उपशिक्षा निदेशक(सेवानिवृत्त) चलकोई हाउस बीकानेर राजमाता बीकानेर गई भोम रो बाहडू राजस्थानी भाषा मे काव्य परम्परा बड़ी समृद्ध रही है। कवि भीमपाँडिया की कृति गई भोम रो बाहहू' हमारे पूर्वजो की गौरव-गाथा पर लिखा गया प्रबन्ध काव्य है जिसमे बीकानेर राज्य इतिहास की अनेक महान् विभूतियो के वीरतापूर्ण क्रियाकलामा पर बड़े रोचक ढग से प्रकाश डाला है। मै श्री पाँडिया को ऐसी सुन्दर काव्यकृति रचने पर बधाई देती हूँ तथा कामना करती हूँ कि वे निरन्तर साहित्य सृजन करते हुए मायड़ भाषा राजस्थानी की सेवा करते रहे। सुशीलाकुमारी
Dr GOPAL JOSHI
Ex MLA (Bikaner)
Vice President
Rajasthan Prdesh Congress Committee (1)
'गई भोम रो बाहडू'
जन कवि श्री भीमपाँडिया रो मायड़ भासा राजस्थानी में
रचित ऐतिहासिक प्रबध काव्य रा पाचू सरगा रा केई अश सुण्या
अर सुण र जी सोरो हुयग्यो। राती घाटी री माटी री महक मन
मोवे। भाव भासा अलकार, प्रकृति चित्रण में राजस्थान री
सस्कृति सामाजिक चेतना अर सूरापण री सौरभ नै घणमोली
अभिव्यक्ति दी है। म्हारी बधाई अर मगल कामना है।
-~डा गोपाल जोशी
गीत
प्रेरणा सुजस
सुत जीतियो
जैतराव
भीवराज
भूपाळ
गई भोम रो बाहडू
बज्यो वीर लकाळ
कलम कोर कीरत कथ्यो
वीरॉ सुजस उजास
भीव भणै सागर री पाळा
मॅड्यो ख्यात इतिहास
उणी भीवराजोत रो
धीका वश विसाल
नवलसिह रै ऑगणे
पळकै सूरजमाल
चलकोई
रो चानणो
पग पग कर परकास
राठोडॉ रणबकडॉ
भरसी मुंओ हुळास
गीत 19
चितराम काँधल रणमलोत रणवको जोधाणे आयो साथ मुँवो राज थरप्यो चीकॉणो चीकै मार्थ राख्यो हाथ श्री कॉधल वीके रो काको श्री जोधै रो भुजबँध वीर राठोड़ॉ रो सुजस वधायो मात भोम म राख्यो सीर आण माण मरजादा पाळी अमर हुयो भुजबळ रे जोर घीकैजी रै मेरो लूणो लूणकरण सुत जैतोराव जैतै रै कल्याण प्रगटियो सुत दूजो श्री भीवाराव धिन राणी कसमीरदे सोढी जाया वीर राव कल्याणसी भीवराज मुख ख्यात बात इतिहास मॅडायो भीव बखाणे साच करणी कलम सवाई राखै जग जाणे जस बाँच श्री कॉधल हो सुजस सुमेरू वेजोड़ो राठोडो वीर जन जीवण री सुख सॉयत हित धीर वीर मिनखापण हीर श्री काँधल जद रणभोमी में घाई चढ्यो उछळतो वीर दुमची पुसतग तग उछळता अरिदळ विखर भाजतो भीर ख्यात बात इतिहास बखाणे गढ़ गणेस री पळकी पाळ गई भोम रो बाहडू बाज्यो बीकाणे री कर रिछपाळ भीवराज जग मे धुर थरपी समैसार राठोडी आण प्राण जाय पर वचन न जावे वचन निभाया ही मुख पाण श्री कॉधल भायाँ रो भाई वैरयॉ रो वैरी हो जाण सदा सजग रण रातो मातो राती घाटी सरब सुजाण श्री कॉधल छतरी छतरप ही धण जोधो हो अमर सुजाण मिनखापणी माण मरजादा राठोड़ों री राखी आण श्री कॉधल धिन धिन राठोडो धिन धिन धिन जननी जायो बीके रो सागी काको हो बीकाणे रो पायो सपूत जोधा रे जाधा ही प्रगट सवळा सायर सिह तेज मे रग सवायो जुलम्या रै भारया नित जूत बिना जूत जुलमी कद मानै बै तो मिनखपणे रा काळ राज समाजू काण न राखै मरजादा री तोई पाळ हो श्री बीकै रो वस घणो ही बीकाणे बसियो चहुँ ओर 20 गई भोम रोबाहडू मगळाचरण कुळदेवी म्हॉरी मॉ जगदम्बा आ म्हारै सागै आ दुसमणियाँ तूं करी रुखाळी सकट सभी दळा घणी ओपमॉ लायक भासा वाणी मधुर गुजा सातूं सुर मे गाऊँ सुरीलो इमरत रस बरसा पूजा और पुजापो ओही धूपू ध्यान धरा छप्पन भोग दाळ घी दळियो रुच रुच भोग लगा दिव्य दीठ दे दिव्य तेज दे हिवडै जोत जगा आखो विश्व अक घर करदूँ घर घर मगळ गा राम छान झूपड़ा घर आसरिया कुटैया छा मुळकतड़ा टाबर ऑगणियै अन धन सभी पुरा कण कण मे सुख सोरम भरदै मारग सुगम बणा पग-पग विजै दान दे मैया लाल धजा फरुका मगळाचरण 21
समरपण रासुर
भीतडा ढह जासी गीतडा रह जासी
ख्यात बात इतिहास रा पानॉ मॅडिया पुरखों रे पुण्य रा
पवाड़ा अर रणखेतों में सूरमाई रे सुजस रा अखी आखर-अमर
गीत गूंज्या-बखाण्या जुग जुगॉतरॉ सुजस बधावै।
गई भाम रा बाहडू रो बिड़द धारणिया श्री भीवराजजी
राठौड़ जैतावत बीका कुळ रा सिरमोड़ सूरमा कुसळ राजनेता अर
समाजू सेवादार हा। तरवार री धार अर कलम री कार बॉरे
सुजस रा अखी आखर-अमरगीत जुग जुगांतराँ ताँई गूंजता
रैसी। बॉरै सुजस मे सँपाड़ा करता रैसी।
म्हारी कलम V कोरीजियोड़ो आ इतिहासू प्रबधकाव्य बाई
भोम रो बाहडू भीवराजोत बीका राठोड़ स्वर्गीय ठाकुर
श्री नवलसिहजी चलकोई रै सईक बरस जनम दिन पर
सुमरणसार-सरूप घणे मान सनमान सूं समरपित है।
भीतों मॅडिया मॉडणा
गले समे री
कागद मडिया गीत पण
गलै न आखर च्यार
धार
भीमपॉडिया, बीकानेर
22 गई भोमराबाहडू
पैलो सरग
No text on this page.
पैलो सरग आदू सिसटी सुरसत मात सारदा सिवरूँ सिरै गजानद ध्यान धरूँ कलम सवाई राखै म्हॉरी लुळ लुळ विनती अरज करूँ यूँ ही चालै जन रखवाळी राखै आस राज वीरॉ नै सूपै मिनखापण मे कर विसवास तेज मिनखा धरम अक जग व्यापै सदा सनातन सुजस सुजाण धरती पूत सध्योड़ो छतरी धार सकै धरती रो माण अगन पवन जळ थळ नभ सिवरूँ कण कण जीव जगत आधार मिनख जमारो पग पग फूलै जियाāण सुख फळ ससार भुजबळ कलम सारदा सारै सबद साधना साच सँवार वीर भोम वीरा ही थापै न्याय धरम री कालै कार सूरज देव ओक जग तूलै करै आपरी कळा विसेस सूरजवसी जणै सूरमो निरमळ धरै मिनख रो वेस मात सारदा कोठे व्यापै ऊंडे हिवड़े सोच विचार ख्यात बात इतिहास बखाणे घण निरमळ जीवण री धार कोट किरो. किरणों विकसै कण कण व्याप किरण प्रकास वीर भोम वीरा नर प्रगटै जीव जगत री पूरै आस नव रस छळकै सबद राग छतीसू रळकै सबद रो सार ओपै उपमावै लय गत ससार अलकार छद ताळ अमरा हुवै राष्ट्रकुळ नायक अमर भारती रा सिरमोड रणभोमी रज रकै रेत मे जलम भोम हित काया जोड़ समैसार ही साख सॅवारै धीरज धरम धरा पर धार अपराध्या नै आप नावडे पाप मिटा घण मेटै भार अमर गीत वीरों रा गाऊँ कण कण व्यापै कलम करार धरती री धुन धरम फळावै सपै समरस ससार वीरों तणी साँभळी धरती वीराँ रो नित सुजस उजास वीरॉ विना जगत अंधियारो वीराँ रा नित निरमळ सॉस दसू दिसा दसला जद नाचै सुख सॉयत सब करदै खार जन जन रो जीवण जद बिलखै नेजा ढाल सजै तलवार पैलो सरग 25 राष्ट्रकूट राठोड़ राजवी ठोड ठोड़ जा थरप्या राज सूरवीर बळ विकरम धारी जाण प्रजा ओढाया ताज जननी जलम भोम रा जाया जद जागै जद भलो विचार जुलमी जद हद पार जुळबुळे जद कोई लेवै अवतार अणु परमाणू बणै आदमी अलख निरजन लै अवतार समैसार रो ऊदो आयाँ कण कण रो करदै उद्धार राष्ट्रकूट रो अरथ कथीजें राष्ट्र वस-राष्ट्र सिरमोड़ ख्यात बात इतिहास बखाणे राष्ट्रकूट ही है राठोड़ राष्ट्रकूट हा घणा सूरमा सूर्यवस कुस री सतान राज थरप दिखणादै भारत घण पायो आदर सनमान जाग जगत मे जद कद जागे गीत जागरण रा नित गाऊँ कलम करारी चालै चवई जलम भोम हित सीस चढाऊँ सूर्यवस सिसटी में व्याप्यो वीर पुरुष प्रगटै ससार समैसार सपाडे सप्या मिनखा धरम सनातन धार सूर्यवस सूरज सू चाल्यो अखी जगत पायो विस्तार सरब प्रथम जगती जग माने आद ब्रह्म प्रगट्यो अवतार राष्ट्रकूट रा थमा विकस्या घणा मोकळो बध परिवार आखै भारत मे धण ठोडॉ राज थरपियो धारमधार आद ब्रह्म रो पुत्र मरीची कस्यप उणरो पुत्र सुजाण कस्यप पुत्र प्रगटियो सूरज सूर्यवस रो जनक सुजाण सूरज सुत महाराज मनू हूँ तसठवी दसरथ सुत राम राम g लवकुस प्रगटाया लव कुस सुत प्रगट्या सब धाम कुस वसज दिखणादै भारत जाय बस्या पसरचा धण ठोड़ चेही राष्ट्रकूट जग जाण्या ही राठोड़ 26 गई भोम रो वाह राष्ट्रकूट राठोड राजवी बळ विकरम धारी घण जाण राज चलावण धणों निपुण हा धरम करम दिढ नीति सुजाण दिखणादै भारत मे नामी राष्ट्रकूट हो वस महाण राष्ट्रकूट ही राठोड़ा हा घण वळसाळी ख्यात बखाण विकरम सवत साढ पाँच सौ पैलॉ हो इदर सिर ताज ख्यात बात इतिहास बखाणे राष्ट्रकूट राठोड़ो राज सूरवीर इदर राजा हो पळकै हो मुख? पर नूर राठोडाँ रो राजथान हो घण मामी जनपठ यबूर राजा इदर पूत कृष्ण रो नामी राष्ट्रकूट राठोड़ जुध जीत्यो जयसिह सोळकी राठोड़ा पण छूटी ठोड़ समैसार री लीकालोळी की राठोड़ हुया बळहीण सोळक्यों रो वार बैयग्यो लख राठोड़ी सगती खीण पण की ठोड जमा बैठ्यो पग राज दतिवरमा राठोड़ सासण तत्र हाथ मे काबू घणाँ बरस तॉई बी ठोड़ वीर दतिवरमा रो पोतो गोविदराज बडो राठोड़ राठोड़ाँ रो सुजस रुखाळयो घणो तापियो हो उण ठोड़ पुळकेसी सोळकी माथै राजा गोविद करी चढाई पण आखिर मे मेळ मिलापॉ दोनों लीनी सधि कराई गोविद राजा रो पड़पोतो दतीदुरण हुयो सुरजीत समत आठसौ इग्यारै मे लाट देस लीनो हो जीत सोळकी राजा बल्लभ नै हरा दियो कर घण भेभोत बिड़द लियो राजाधिराज रो अर परमेसर रो जुधजोत कोसळ कलिग टक अर माळव जीत लिया श्रीसैल सुजाण श्री वल्लभ रो नॉव धारियो बधा घणो राठोड़ा माण काची केरळ चोळ पाड्य दव सोळक्याँ नै दिया हराय बजरट अर कनौज जीत नै दी राठोडी धाक जमाय दतिदुरग रे पछै सभाळयो काकै कृष्ण राठोड़ी राज घण राठोड़ो सुजस बधायो सिर पर धारयो जस रो ताज जग नामी अलोरा माँही सुभ मिदर कैलास चिणायो सिल्प कळा मे अजब अणूंठो राठोड़ाँ रो सुजस सवायो कृष्णराज रै पछै हुयो भळ दूजो गोविदराज सुजाण पण भाई ध्रुव राज खोसियो खुद वणग्यो राजा ले माण ध्रुव राजा हो घण बळसाळी उतराखंड घण लीनो जीत बड़ा वडॉ नै मार पछाड्या राजा सब हुयग्या भैभीत रामेसर लगा अजोध्या सगळे छायो उण रो राज राठोड़ों री बधा कीरती सिर पर धारचो जस रो ताज ध्रुव राजा रै पछै हुयो भळ तीजो गाविदराज सुजाण जीत लियो गुजरात माळवो इतिहासॉ मे मड्यो बखाण तुंगभदरा बेगी गगबाड़ी केरळ पाँड्य चोळ पर छाय सिधळ रो राजा अधीण कर काँची नृप नै दियो हराय पैलो सरग 27 इदरायुध कनौज राज नै तीजै गोविद लीनो जीत मिहिर भोज प्रतिहार पछाड्या पाल राज भी लियो सुजीत सोरासटर भडळ चढ लीनो अरवॉ ने भी दिया हराय चकरायुध कन्नोजी ने भी लीनो तुरता फुरत दबाय राष्ट्रकूट तीजी सगती हा भारत मे बळवीर महाण सदी आठवी ऊदो लायो दतिदुरग राठोड़ सुजाण उतराधै भारत मे बधियो बेगी कलिग मालवो जीत राष्ट्रकूट राठोड राज नै घण लूँठो नित कियो सुजीत राठोडॉ रा पग घण मॉड्या सुजस बधायो पग पग छाय दुसमणियाँ नै मार भगाया ख्यात बात इतिहास बताय उण तीजै गोविद री सगती दीनी लॅठी धाक जमाय राठोड़ॉ रो तेज बधायो दर् दिसा जैकार लगाय पछै हरा प्रतिहार नागभट मारवाड मे दियो भजाय राठोड़ा रो माण बधायो दएँ दिसावों गूंज सवाय गोविदराज मरयाँ रे पीछे सुत अमोघ राजा हो जाण उण राठोड़े महाराज्य रो माळक हुया वीर चळवाण 28 गई भोम रो दाहडू माणखेट उणरी रजधाणी घण राठोडो राज बधायो दुनिया भर मे चार बादसा बॉ मे हो बो ओक सवायो उण अमोघ री पीढि सातवी कृष्णराज तीजो सुभ आयो भुजबळ पाण राज सुख भोग्यो घण राठोडो सुजस सवायो सवत मेक हजार कै मे अल मसरूदी कियो बखाण मुरु जल जहब ग्रथम लिखियो मॉड्यो बोलै सुजस सुजाण हिंदुसथानी सब राजॉ मे राज बड़ो वळहरा सुजाण माणखेट उरी रजधाणी ऊँच पहाडॉ पळकै भाण अणगिण हाथी घोडा लसकर पैदल सेना घण बळवाण माणखेट रो राज राठोडो राष्ट्रकूट रो घणो बखाण समैसार पण कदैन चूकै टकैन उणरी कोई काट तीजै कृष्णराज रो भाई खोटिठा निवड्यो सफा निपाठ माळव रा पड़िहार कोपिया माळखेट रो डोल्यो ताज महाराज्य रो पतन आयग्यो राठोडाँ रो रुळग्यो राज सवत अक हजार गुणतीसै खोटिग ऊपर पड़गी गाज माळव रै पड़िहारै राजा चढ श्री हरस लूँटियो राज लूठी सेना करी चढाई घण बाज्या घोडॉ रा पोड़ लॅटगी माणखेट रजधाणी रुलग्या राष्ट्रकूट राठोड़ खोटिग रो उतराधिकारी दूजो करक राज हो जाण बळ हटियो दुरबळ घण राजा खुसा दियो राठोडो माण सोळकी राजा तैळप चढ घणो कियो उतपात बधाय करक राज वें राज खोसियो छाती माथै फौज चढाय गग बस रै गोलबॉतक मारसिघ की क्यिो उपाय राठोडॉ सिरदारों सागै राज बचॉवण करी सहाय राठोडॉ री साख घणैरी दिखणाधै भारत में जाण बॉरी घण जागीरॉ पसरी काठ-लाट-सौदती सुजाण सवत नौसौ पैताळीसै राज राठोडो हो गुजरात राष्ट्रकूट बसज सासक हा घण नामी इतिहासॉ ख्यात पण पीछे गुजरात राज नै आप राज मे लियो मिलाय माणखेट रै कृष्ण दूसरै समैसार री नीत समाय सवत बारैसौ पिचियासी सोळक्याँ घण तेज तरार माणखेट ने जीत लियो जद राठोडो छूट्यो अधिकार समैसार रै उण सकट मे घणी कठिण वेळा ही जाण तो भी कायम हो सौदति मे राठोडॉ रो राज सुजाण मध्य जपुताणे और बदायूँ मे लै जाण उण सक्ट री धड़ियाँ मे भी हो राठोडो राज सुजाण मध्यप्रात रै भानपुरै अर मध्यप्रदेश रै बेतुळ मॉय विक्रम सदी सातवी तॉई राठोड़ी अधिकार बताय सवत नौसौ सतरै मॉही ख्यात बात इतिहास कथाय पथारी भोपाळ राज राठोडॉ रो राज बताय कृष्णराज रै तीजै बेटै चौथै इदर नै दे राज गादी वॅप कियो निजराणो राठोडॉ रो सारण काज पण लॉ पार पडी कोसीसों ढबियो नी राठोडो राज मारसिघ अर इदर राजा अनसन कर मर कियो अकाज प्रॉत अर पण राठोड़ मुलक घण पसरया ठौड़ ठौड हो उण रो राज समैसार पण उथळ पुथळ मे गया राज घण हुया अकाज नन्न कीरती राज तुग रा सिळालेख राठोडा जाण बुद्ध गया मे मिल्या बखाणे साँ परमॉण सुजाण पैलो सरग 29 राजपुताणे मे भी बोले घण लूँता राठोड़ा राज थान हाडी अर धनोप मे पळकै हा राठोडा ताज सवत अक हजार तेसठ तक राजपुताणै म घण छाय ख्यात बात इतिहास बखाणे राठोड़ॉ रा राज सवाय विकरम सदी ग्यारवी तॉई थान बदायूँ म हो राज राठोडा पण तेज तापिया पळका करता हा सिर ताज प्रतिहारा कमजोर पड्या जद लियो राज कन्नोज दबाय पण थिर राख सक्या नॉ सावळ राठोडा जुध गया हराय चद्रदेव गाहड़वालो आ हमलो कर चढियो घण गाज लॅट पाट कर राठोडॉ सूं खोस लियो कन्नौजी राज तदएँ चै गाहइवाळा रा बणग्या हा लूठा सामत पण राठोड़ आपरी खिमता नामी हा राजा श्रीमत उण जयचंद घण कुजस कमायो जियो जितै कर कोझा काज मिनखा धरम कदै नाँ पाल्यो पनपायो नित जनखा राज राष्ट्रकूट राठोड़ी साखाँ दिखणादै भारत तूं चाली मुंआ मुंभा रजवाडा थरप्या मुख मडळ पळकती लाली राठोडॉ रै हियाँ जोस हो भुजवळ पाण दिखाळयो जोर होस होसळो कदैन त्याग्यो रणराती नैणा री कोर समेसार हारवा जीत्या पण जुध मे लड्या सूरमॉ साथ धाक जमाई आखै भारत राठोडॉ रा लाम्बा हाथ रणखेताँ तूं मुख नॉ मोड्या कदैन भाज्या बण रणछोड़ भाणखेट तूं साखा पसरी उण साखा रा ही राठोड़ ओक चद्र राठोड बदायूँ जद थरप्यो राठोडी राज जन जन आदर दियो मोकळो घणैमान ओढायो ताज दूजो राजगिदी पर बैठो चद्रपाळ सुत विग्रहपाळ तीजो राजगिदी पर बैठो विग्रहपाळ सुत भूवनपाळ चौथो राजगिदी पर बैठो भुवनपाळ रो सुत गोपाळ पचम राजगिदी पर बैठो गोपालै रो तिमुनमाळ सवत बारैसौ पचास मे साबदीन गोरी ले फौज गहड़वाळ राजा जयचद नै हरा खोस लीनो कन्नौज जयचंद गाहड़वाळ हारियो इद मरयो जा गगा माय कावियाँ रो भोजण बणग्यो हिम्मत हार हबोळा खाय 30 गई भोम रोवाहडू छठवो राजगिदी पर बैठो छोटो भाई मदनपाळ सतवो राजगिदी पर बैठो मदनपाळ सुत जयचद राव अठवो राजगिदी पर बैठो जयचद पूत हरिसचद राव हरिसचद सुत सेतरामजी सेतराम सुत सीहा राव सीहाजी रै आसथानजी प्रगट हुयो राठोड़ो राव धिन राणी उछरेंगदे जायो आसथान रै धूहड़ राव धूहड़जी रै रायपाळजी रायपाळ रै कान्हो राव धिन किल्याण देवड़ी जायो कान्है रै जालणसी राव जालणसी रै छाडो जलम्यो छाडैजी तीडो राव बड़ भागण तारादे जायो तीडेजी रे सलखो राव जोधो बैर बाप रो लेवण जा पूग्या सीधो मेवाड राठोडॉ री आण निभाई राणैजी री फौज पछाड घोड़ा पाय पिछोळॉ घिरिया जोधोजी आया मडोर जैजैकार राठोडी सुभ ऊगी सोनळिया भोर जोधाराव गजब हो जोधो वैरचॉ ऊपर चढतो धाय राठोडॉ रो सुजस बधायो ख्यात बात इतिहासों छाय वीर विकरमी रिणमलजी रो सुत नामी हो जोधो राव बैरयाँ री छाती पर चढतो मार उछाळो करतो घाव सवत चवदैसौ बोतरियै माह बैसाख वदी री चौथ सुभ बुधवारै वीर जलमियो जोध राव श्री रिड़मीलोत सुभ सवत पनरैसौ दस मे जा जीत्यो मडोवर धाय मारवाड री परघा मॉही राठोड़ा री धुरी थपाय चिड़िया नाय महर कर दीनी गढ घातण री ठौड़ बताय अखी राज जोधे रो थपसी जुगाँ जुगों तॉई जस छाय सवत पनरैसौ पनरै री जेठ सुदी ग्यारस सुभ आय राठोड़ॉ री महमा मोठी दियो जोधपुर नगर बसाय सलखै रै मलिनाथ प्रगटियो भळे प्रगटियो वीरम राव वीरम रै डोजी प्रगट्यो ईजी रे रिणमल राव रिणमल री राणी भटियाणी भलो प्रगटियो जोधो राव नानाणे मे जलम्यो जोधो नानाणे पळ वणियो राव मेवाइयाँ नै कूट भजाया जिण कबजै मडोर कियो रावळ परसळ री मदताँ पद पाछो मडोर लियो पैनो सरग 31 चिड़िया नाथ रिसी धण ठूलो चिड़िया ट्रॅक मेक तपतो प्रभु सुमरण करतो मन भरतो हरी नॉच हिवई धरतो चिडिया ट्रॅक दुरण गढ थाप्यो गद मेहराणो बजै सवाय जगचावो गढ भलो चिणायो करणी हाथों जीव लगाय सक्ट टाळ घणा जुध जीत्यो जीत नगारा दिया धुराय रावोड़ों रा पॉव जमाया दुसमणियॉ नै पगॉ लगाय अमर नॉव जोधै जस लीनो घणा ऊजळा करिया काम सवत पनरैसौ सैताळे जोधै राव लियो बिसराम सन ग्यारैसौ चौराणू मे मचियो घण घमसाण महमद गौरी SIT अठै मसळ्यो भारत माण ख्यात बात इतिहास मॅडायो जनगण मुखॉ बखाण्यो जाय महमद गौरी दिल्ली दाबी पछै लियो कन्नौज दबाय सवत बारैसौ पचास मे साबुदीन गौरी री फौज जयचद गाहड़वाळे ही खोस लियो सासण कोज साही सेना ने जद हारयो गहड़वाळ जैचद कन्नौज पकड़ जेळ मे जडण मारणे छाती चढ़गी गौरी फौज उण घेळा जैचद पछतायो लख्यो न कोई और उपाय जैचद गहड़वाल झट भाज्यो डूब मरयो जा गगा मॉय डूच्यो राज गहड़वाळा रो हाथों V खुसग्यो कन्नौज करी बदायूँ पर नित धाता राठोडौँ पर कोप्या रोज सवत बारैसौ तेपन कुतबदीन अवक घण छाय राज बदायूँ राठोडॉ रो फूट फरेबी लियो खुसाय इणतर राठोडॉ दुख छायो महडवाळियाँ काढी रीस रजपूती पर कलंक लगायो ऑतड़ फडा दॉतडा पीस सेतराम सुत हरिसचद्र रो बदायूँ मे राठोड राठोडी जस लोक बसायाँ थापै हो रजपूती जोड़ गहड़वाळियाँ री घण घातों मन माथो हुयग्यो बेहाल सेतराम री काया डीजी राठोडॉ री छीजी पाल सेतराम धण सॉसॉ चिरियो चामेर घिरायो काळ राज वदायूँ रो बीखरियो मिनख धरम री टूटी पाळ सकट घिरियाँ लोक बिगड़ियो सेतराम लीनो सन्यास राठोड़ी रो लोही खिडियो सह न सक्यो टूटी घण आस थभ 32 गई भोम रो वाहडू सेतराम सुत सीहो सळग्यो खाखो विळखो हुयो सुजाण गहड़वालियाँ री करतूताँ राठोडॉ री उतरी पाण छोड बदायूँ री धरती मैं राष्ट्रकूट राठोड़ी भाण मारवाड़ मरुभोमी आयो सेतराम सुत सिहो सुजाण सवत तेरैसौ आसरियै पाली आया सीहा राव भुजवळ से आ धान थरपिया राठोड़ॉ रा जमिया पाँव बस पाली रे आस-पासै राज खेड़ मे लीनो थाप राठोड़ी विकसावण लड़ियो पग पग पर रण रळियो आप बीतू गॉव धाम पाली रो सीहाराव समायो राम मारवाड़ मे सिरैमौड़ है राठोडॉ रो तीरथ धाम सीहै रो सुत आसथान हो रणरेंगियो राठोड़ो भाण राठोड़ॉ री पत राखण नै ठोड़ा-ठोड़ा किया ठिकाण आसथान गादी सभाळी पण पाली नाँ सँभळी हाथ साही फौज चढी छाती पर समरथ बिनाँ बिखरग्यो साथ आस-पासै ईडर दाबी लइ भिड़ दुसमणिया पछड़ाय पण छोटे भाई सोनग नै ईडर दीनी भाव थपाय साही फौजाँ सँ टकरायो आसथान जूझ्यो रण मॉय आखर फौज चढी छाती पर प्राण त्यागग्यो सरग सिधाय सन बारैसौ इकराणै मे रण भोमी मे आयो काम दुसमणियाँ तूं घिर्यो घिरायो आसथान लीनो विसराम मारवाड में पाली नगरी घण नामी बिणजारोंधीण पाली री धरती आ दाबी खिलजी साह जलालूदीन आसथान रो सुत धूहड़ हो रणबको राठोड सुजाण सूरवीर सेना नायक हो रजपूताँ री राखी आण पैलो सरग 33 पाली मे पग घणा मॅडाया थाप सक्यो नॉ पाली राज साही फौजॉ सू किचरीज्यो तखत मिल्यो नाँ मिलियो ताज ख्यात बात इतिहास बखाणे सीहो हो राठोड़ी पायो छतरी धरम पाळ रण रळियो जग आखै मे जसो छायो सवत तेरैसौ तीसै मे काती बद वारस दिनवार सीहा राव रणाँ रण लड़ता अमर हुया हा धाम पधार सन् बारैसौ तेवोतर मे रण भोमी में आयो काम दुसमणियाँ रै धेरै मॉही सीहा राव लियो विसराम धूहड़ राव बैठ गादी पर दियो राज नै की विसतार आसै-पासै गॉव डेढसौ दाब लिया तलवारों धार प्रतिहारॉ नै घणों खदेड्या अकर तो दाब्यो मडोर पण आखिर प्रतिहारों भिड़तों गयो सरग प्राणा नै खोर सवत तेरैसौ छॉसठ मे पॅचभदरा रै तिगड़ी गॉव दुसमणियाँ सू लडतो भिड़तो रण भूमी मे गयो समाय रायपाल गादी पर आयो पाछो दाब लियो मण्डोर काबू नहीं हुई पण धरती रण लड़ियो-भिडियो घणघोर मालाणी री धरा दबाई लीनी सगती घणी बधाय भाट्या भिडियो रणबको रण भोगी मे दिया हराय राव कान्ह गादी पर बैठो लियो बाप रो राज सॅभाय आछा करम किया भावी बण सुख सायत V राज चलाय राजगिदी जालणसी बैठो शूरवीर बलवीर सुजाण उमरकोट रा सोढॉ भिड रण जीत्यो राठोड़ॉ पाण भीनमाळ रा सोळकिया नै जीत विजै डको बजवायो रण भोमी मे हरा सीख दे विरथा करियो गरब गळायो जालणसी रा सुत छाडोजी पछै राव गादी पर आया वीर घणा बळवाण घणा हा राज धरम सुभ करम कराया उमरकोट रा सोढॉ तूं भिड़ रणभोमी मे हाथ दिखाया दड दियो सोढा नै भारी दड भेट मे घोड़ा लाया जैसलमेर राव पर चढिया राज खोस गादी उतराया उण री बेटी नै परणीज्या गादी पर पाछा बैसाया पाली सोजत भीनमाळ अर गढ जालोरॉ करी चढाई ऑकस मे ला कर घण चुक्यो रण मे जीत सदा ही पाई सोनगरों चौहाण देवड़ा पण हुय भेळॉ घात लगाई छाडोजी आखर मे घिरग्या त्याग्या प्राण वीर गति पाई सन् तेरैसौ चमाळीस मे रण भोमी मे आया काम दुसमण री फौजॉ से भिडता छाडै राव लियो विसराम छाडैजी रो सुत तीडोजी राठोड़ी रॉघड़ हो जाण महावीर बळवीरो जोधो सूरवीर हो घणो सुजाण राव राजगादी पर आयो छाईजी रो तीडोराव लियो बाप रो बदळो साचो सोनगरा चौहाण 34 गई भोम रो दाहडू भीनमाळ पर कबजो करियो राठोडॉ रा रग सवाया बाळेचा अर भाटी-देवड़ा रणभोमी मे मार नसाया पग-पग पर माया घण जोड़ी जस जीत्या सनमान बधाया दुसमणियों रो करण खातमो सोळक्याँ नै घणा छकाया आखर दुसमण मिळ चढ आया जद सक्ट रा बादळ छाया सीवाणे री रखवाळी मे रण मे जूझ्या प्राण गॅवाया तीडैजी रो सुत सलखोजी पछै राव गादी पर आयो भली भाँत धरती रखवाळी राठोड़ा रो माण बघायो जनता नै सुख सायत सपी पग-पग लीनो सुजस सवायो राठोडॉ रो इण धरती पर इणतर राज बघतो आयो सलखै रो सुत मलीनाथ हो दूजो वीरम बीर सुजाण राठोड़ो सनमान बधायो रजपूतों री राखी आण मलीनाथ हो घणो साहसी घणो विकरमी घण बळधारी जीत महेवा री धरती ने राठोड़ॉ री धाक पसारी सिध माळवै री सीवाँ हूँ जोड़ सीव सू सीव बॅधाई वैभव सगती बधा मोकळा सुभ रावळ री पदवी पाई चूंडोजी वीरम रो सुत हो बाळकपण गादी पर आयो छव वरसॉ री छोटी ऊमर खतरॉ मे जीवण विगसायो चूडैजी नै मिल्यो सासरो सासरला ईदा पड़िहार दियो दायजै मे मडोवर घस्यो बठै ही घर परिवार बडो हुयो जद राज जमायो राठोडाँ रो माण सवायो घण लूंठा रणखेतों मॉही बळ विकरम परताप दिखायो सन् चवदैसौ तेईसै मे आयो रणखेतॉ मे काम राठोडॉ री धाक पसारी चूँडैजी लीनो विसराम यूँडैजी रो सुत रिणमल हो वीर विकरमी घणो सुजाण पण कान्है नै गादी तूंपी महर घणी किरपा री ताण जुध जीत्यो मडोवर रिणमल राठोड़ों रो राज बधायो रिणमल रो नित्त घूसो बाजे मारवाड़ मेवाड़ सवायो बहन आपरी हसा बाई राणे लाखै नै परणाई मोकळ हो भाणेज राव रो उण री प्रभुता घणी बधाई सन् चददैसौ अड़तीसै मे मार दियो पडयतर छाय मेवाड़े में हत्या करदी रिणमल धरती गयो समाय पैलो सरग 35 सीसोदॉ मडोवर दाब्यो कबजै लियो कराय जोधो कॉधल जा बस्या कॉवनी जाय गॉव जोधा कॉधल साँवठ्या गॉव कॉवनी मॉय घण लूठी सेना सजी दळबळ लियो बधाय सवत पनरै सौ दस बरसै सीसोदा नै मार भजाय मडोवर पाछो लेलीनो जोधै काँधल दोनॉ छाय सनीवार सुद जेठ इग्यारस पनरसौ पनरै री साल भलो जोधपुर थरप्यौ जोधै चिडिया ट्रॅक दुरण गढ घाल घण मोटी महमा विगसाई गढ़ लूँठो छायो मेहराण करणी हाथॉ नीव दिवी ही सरब गुणॉ री खाण सुजॉण धिन किनियॉणी चारणी धिन चारण धोरॉ रजथाण हाथों मॉडी जबर झूपडी बिना तगारी घण सनमॉण देसाणो दस फूटवो खुलिया है दस द्वार राठोडॉ री कुळ देवी करणी कीरत कार जोधै रो घण वस बधायो घणो फळाप्यो धुर रजथॉण पूत हुया पड़पोता प्रगट्या लड़पोतों धण पायो माँण धिन राणी नौरगदे जायो जोधैजी रै बीको राव उणी फूख वड भागण जलम्यो भुजवेध घजध वीदो राव सवत् चवदैसौ पिचाणमै सावण सुद पूनम परभात धिन राणी नौरग सॉखली चीको जायो पूत सुजात पूत दूसरो बीदो जायो बीके रो भुजबॅध हो भाई मुँवो राज थरपण . निसरथा कुरु जॉगळ में धूम मचाई दोनॆ भाई घणा सूरमा जोधैजी रै कुळ मे आया जाय जॉगळू राज थरपियो घण राठोडी रग सवाया बोही राज जॉगळू बजियो आगै जायर बीकानेर मॉ करणी सिर छत्र धरायो बीकै माथै करदी मेर कुरु जॉगळ री धरती माथै बीकै रो घण वस बधायो मरु भोमी री माया मोटी जगळ मे मगल सरसायो नागफणी पर कलम भीवरी तीखी कलम सवाई जीत भीव भणू सागर री पाळॉ खुलॉ कतडॉ गाऊँ गीत वेद पुराणों जाणियो जग जाँगळ परदेस धरती सोनो नीपजै आखी अखी हमेस 36 गई भौम रो बाहरू महाभारत रै काळ मे महतब हो घण खास जबरा कोरू-पॉडवा घोड़ा चरता घास रग बिरगा फुलड़ा महकै तितळ्या फुदक भरै फुदकार काळा किसन भेंवरियाँ भू-y भेवरॉ री गूंजै भणकार भाँत भाँत रा पॉख पखेरू आळॉ डाळॉ करै किलोळ कोयलडी री कुहुक सुरीली कानॉ म दै इमरत घोळ धोरा धुरपट ऊजळा रूपळ निरमळ रेत पूनम चॉद उजास मे पळकै सोनल खेत ऊपर आभो मुळकतो नीचे बाळू रेत सरद पुनम री चॉदणी हरखै हरियळ खेत धिन धरती मन मोवणी ऊडो निरमळ नीर स्याम धरम घण मानखो ऊँडी सुंडी पीर हेताळू घण आदमी जितरों ऊँडो नीर हेत निभावै ऊजळो धरम पाळ नित धीर मिनखा धरम सदा सू मोटो धरम सनातन सीर इमरत बिरखा हुवै मोकळी नूंत जिमावै खीर ओ जॉगळ परदेस जाँगळू अठै घणी कुदरत री मेर बारै मास बदळती चालै छव रितुओं घण घेर घुमेर फागण चैत मधुर रस झरती रुत बसत री चलै बहार रूँख सँख मे पूँई फॅपळाँ मिमझर भरै फूल फुलवार होळी री धमाळा गूंजै चगॉ पर चिमटी झणकार थाई थपकी थाप थपै जद गूंजै गढ गूंजै गिगनार ठडी मीठी रात चानणी चदो चढे अकास धोरॉ पर रूपाळी चाँदी सोने रै आभास घुड़ला घूम गीत गरणावै गवरा रा मेळॉ मनवार फागणिया फरफर लहरावै पवन वेग पल्ला पळकार फुलड़ा बीण गवरजा पूजै ईसरजी री पाघ सँवार रग बिरगी उडै गुलालॉ रुत बसत री कर मनवार मॅहदी मॉड मॉडणा मुळकै मूमल तुमकॉ चालै घेर घुमाळा घुमा घाघरा धमचक घूमर घालै करै गवरजा री आरतड़ी वर कन्या वपरावै आसा पाळ आसका पूरै पूजा रो फळ पावै पैलो सरग 37 सुहावै आसोजों मे सरद साँपड़े सरद पुनम सरसावै झीणो झीणो तपै तावड़ो चढती धूप काती दीप जगा पूजावै लिछमीरी कर घण मनवार मिगसर खेत खळी नै लाटै अन धन से भरसी भडार फळी टीडसी लोइया काचर मटकाचर बपरावै भात भंतीला तीवण रोटा ओट भोभरिया खावै मास चढै बैसाख जेठ जद गरमी री रुत आवै आम आमली अमलाणी मे घोळ खीचड़ो खावै लूआँ रा लपकारा लागे गरमी गैरी चेते भूत भतूळा ढूंड उठावै भरै ऑखड्या रेतै काळी पीळी ऑध्या उमटै घिर घिर घणी घिरावै धू. रा धपरोळ धरावे घर कोठा भरजावै जीव जिनावर सगळा तड़फै रूँखों मे लुकजावै ठडी छैयाँ मानखो जोवै रुंखॉ तळे भुळावै ठडी मटकी छाण नाळ री नापासर री लाचे कोई छाणै भोळासर री पी पाणी मुळकावै लागे माह आसाद सावणो मुंआ बादळा छावै मेह बरसै जद घणो मोकळो भर्यो भादवो जावै ताळ तळायाँ डैर भरावै तेजो घण गरणावै करसा खेत खड़े हरियाकै हरखै कोड करावै डेरों बैठा सिठ्ठा सेकै मोरण मोर चबावै झाड़ झाइखा झोळी लावै सुरख बोरिया खाचे काकड़ियाँ री फाँक फॉक मे खाटा मीठा रस सरसावै लालम लाल सिदूरा सुरेंगा मीठा गुटक मतीरा खावै पोस माघ सी पड़े मोकळो ओढ भाखला कामळ सोवै ठडा ठार करै सगळॉ नै डॉफर घण कॉपै थररावै ताव तेजरों टाबर टोळी बूढळिया दुख पावै दावा पडै दाझता जावै पान फूल झुळसावै पतझड़ री रुत इसीज आवै सालो साल फुरावै कुदरत आपो आप फळती थिर वासती लावै घावै धान पान सरसायाँ मुळकै खेत खळॉ पा समैसार नेपै मे हरखै फूल्या नहीं समावै 38 गई भोम रो बाहडू धरती री धुन इसीज चालै सै रितुओं सरसावै आसमान रो वरण फोरती चकरी चलती जावै धीरे-धीरै मुलक मे आय बस्या की लोग भुजबॅध धजबँध भोगणें आग सुभागों भोग जाट जोइया साँखला भट भाटी चौहाण चोयल मोहिल खीचिया बिरम पूत बिरमाण कयामखानी डीडुआ रजवट चारण भाट भुटा बलूचा बाघड़ा गूजर छीपा राठ की दसला जनखा अठै धन माया रै रोग जॅगळी भाव पळाँवता लतुवा भूडा लोग होकलिया हुड़कॉवता बैठ तिबारी मॉय चिलमा भरता हाथ सू सोता खीचड़ खाय चौकी राज चलॉवता हरता पर घर नार आपस मे भिडिया इसा भिड़ भिड़ मुवा टॉवार राज थरपियो साँखलॉ समसार परवॉण माड़ो मुड़दो ही चल्यो चढ़ा सक्या ना पाण राज थपायो सॉखलॉ पाळी खूठी आस विगत सॉखलॉरी मिलै ख्यात बात इतिहास धुर जगदेव पॅवार डाभ रिसी अवतार उण रा पोता पोतडाँ त्यागी जात पंवार डाभ रिसी रै धोम रिसी हो उण रो बेटो धरमदेव सुत दूजो धरणी वराह हो उणरो बेटो बाहड़ सुत सोढो अर बाघो बाधा पूत वैरसी जाण वैरसीह हुय गयो साँखलो आ बसियो बो सँण सुजाण पैलो सरग 39 रे जाट घणा जाडा बस्या खाँपो खॉप खिचॉण चौकी राज चलॉवता लतुवाई तॉण केइक गाव फसादाँ दाब्या लाठी सोटौँ लोग दबाय जनखाँ जनता नै डरपाया दसला लूँट लोकचन खाय ढाणी ढाणी गाँवड़ा छोटा घणा मुकाम खेती पाती पेट नराई काम अठै न कोई राज हो नाँ कोई हो ताज धरा सुततर साँवठी सारै सबरा काज धन-पसू बाहड़ देव राजपाळ उण वैरसीह रो उणरो बेटो हो महिपाळ महिपाळे रो रायसिह हो लॅण त्याग दीनी ततकाळ कॅचरसीह रै पूत राजसी उणरै पूत करमसी जाण करमसीह हर भगत होयग्यो भाई मूजो राण सुजाण सुगना रुण त्याग बो गयो जॉगळू लीनो मुखडोमोड़ प्रथीराज री नार अजॉदे दहियाणी बस थरपी ठोड़ जै रो सुत ऊदो राणो ऊदै रो बेटो पुनपाळ पुनपाळो घण हुयो सूरमो बॉधी घणी राज री पाळ रो गुपत गुढो घर मोंड रायसी वस्यो जॉगळू जाय सुजाण कोट जाँगळू कनै बस्यो है रूँण उजाइण री मन ठाण पीछे हुयो जॉगळू राणो पुनपाळे माणकराव पीछै राणो नापो सॉखलो धिरयो दुसमणों दोखी दाव बसै अठं दहियाँ रा डेरा दुचर कोई माँ मानै काण नार सौखलारी जळ भरता धुचर गिलोलाँ मारै ताण दुसमण सगळा हुया अकळा नापो ढाव सक्यो नों राज ताज तखत सब खुसव्या जाणे लुटती जावै पग-पग लाज धीरज धरम रायसी पाळे औसर रो घण राखै ध्यान आखर दहिया किया पाघरा फिरा जाँगळू गनिज आण नापो भाज जोधपुर पूग्यो मदद करण री करी पुकार सगती विना राज नौ ढबसी आखर मन म मानी हार जीत रायसी वीर साँखळे जबजे कियो जाँगळू फोट पहिया सगळा यूर मारिया धन दौलत पप घाँधी पोट पहन साँखली नौरगदे ही जोधै री राणी घर नार डाव सके तो राज लावले सावल करलै सोच विचार सहयो रायसी लैंठो पा भल्यसो हुयो सुजाण जे दीकै ने मेजे जगद तो मजे में हुयसी राज तोग सपायो आदर देसी सिर पर परसी सा ताज हुदा सीदती 3. परती उ 40 rtyrs नौरेंगदे बीका-बीदा दो। सूरवीर हा पूत धीर वीर गभीर घणा हा राज काज मे हा मजबूत काको कॉधल साथ भेजसा भळे घणाँ ही दुरसी साथ मॉ करणी री मेर हुई तो राज जॉगळू आसी हाथ राज जॉगळू री सब बातों जोधैजी रै पूगी कान हाथों आयो राज ढाबसॉ बीको-बीदो पासी मान राठोडॉ री ख्यात गूंजसी जोधा री हुयसी जैकार आखी धरती धिन धिन कैसी बीकै री करसी मनवार गढ गणेस सिर नाऊँ कणकण खणखणहरपळ अरपण भाव बोध दुलराऊँ धिन धरती रै धुर आधीटै चरण चॉकतो जाऊँ राती घाटी री टोकी पर गढ गणेस सिर नाऊँ ख्यात बात इतिहास मॅडाया गीत जीत रा गाऊँ आसै पासै बोझ बॉठका फोग भटूरा भावै धुर लाहोरी कोट कॅगूरॉ गूंज वीर गरणावै समैसार री बात अनोखी कुण भूलै बिसरावै साचै मन सू कान लगायाँ ओजू गूंज सुणावै झोला खाँती पड़ी किलगी भाज कामरा जैतो आवै बीस हथी तलवारों पळकै मॉ करणी छिब छावै भीव रो तुनतुनियो बाजै इण धरती रा गीत अमर सुण वीक बीद कॉघल मुळकावै आजादी रो गीर गीरवो रातो लालम लाल लखावै पैलो सरग 41
No text on this page.
दूजो सरग
No text on this page.
दूजो सरग श्री काँधल बीकै रो काको श्री जोधै रो भुजबॅध वीर लूँठो वीर लड़ाको जोधो खीच मारतो तीखो तीर काका भतीजा करै जोजणा Tओ राज थरपण री काई आपॉ क्यूँ कोइ करॉ वरजणॉ सिरै चढायाँ जाणॉ भाई राज जॉगळू री सुण बातों सगा सॉखलॉ री सुण पीड़ मुंओ राज पाछो थरपासॉ वेग मिटासॉ दुख री भीड़ जोधै राव मुळक मन मॉही बात करी उथळी बिसतारी सिरदारॉ रो ध्यान खिचायो इचरज भर देखै दरबारी सुण हामळ काँधल बीकै री नौरेंगदे मुळकी मन मॉय धीर बँधा नापै नै बोली राज आपणो जासी नॉय लोकसभा मे तानो मार्यो जोधा राव भरथै दरबार कॉधल बीको काको भतीजो कानाँ बाती करै विचार जोधैजी दरबार तेड़ियो हळकारा भेज्या ततकाळ भाई बॅध सरदार सॉवठा सब आया मरजादा पाळ लूंठो कोई राज थरपसी Dओ कोई भुजा पसार ऊँडो सोच दूंगरॉ चढसी देखॉ कदैक मन मे धार कॉधल सिर मसकै चिता मे वीके बिन फीको दरबार बीको बीदो अजूं न आया समैसार चालै ससार देखो लोगों काको-भतीजो मुळकै पुळकै मूंछ पलार जाणै धजाबँध धारी बण चढजासी घोडा सिणगार बीको बीदो मोड़ा आया कॉधल मुळक्यो कर खखार भर्यो-तर्यो दरबार उडीकै आ बैठ्या कॉधल रै लार घडी भेक पग थमैन धरती जाणै जबरो कियो करार दुरण जोग घडियाँ दुरजासी नेजा धार ढाल तलवार कानाँ बाती लख कॉधल जोधैजी री निजर तणाई भर दरबार मारियो तानो खामोसी सिरदारों छाई देखो लोगों भुजा फरूकै लालम लाल नैण रतनार झाँक झरोखों देखो भाळो दळबळ सेना कितीक त्यार दूजो सरग 45 सगती बिनॉ राज नॉ सभळ्यो बिखर गयो म्हॉरो दरबार म्हॉदेस जॉगळू छूट्यो काट चढ्यो म्हॉरी तरवार कॉधल उठ ललकार बोलियो उठ बीका झट हुयजा त्यार जकी रावजी मन मे चीती वाही राम पाडसी पार आपॉ राज मुंओ ही थापा जगदम्बा री काढॉ कार घडी अक नॉ थमाँ अठै अब नेजो सॉभ ढाल तलवार दळ-बादळ घोड़ा सिणगारों राठोडा चढसाँ असवार सजन सनेही साथे सजसी चढो चढो घुड़ला सिणगार उठो उठो रणबकॉ जाधों हाथो हाथ खाँच तलवार दुरणै री सुभ घड़ी आयगी चढो चढो घोड़ा सिणगार रणबकों राठोडॉ चालो मुंआ राज थरपण मन धार उठो उठो सब पाणीदारॉ राम करैलो बेड़ा पार कॉधल बीको बीदो उठिया उठ्या टाळवॉ पाणीदार भाई बधू उठ्या मोकळा सगा सनेही अर सिरदार उठ्या केई सेना रा नायक सँभ्या घणों घोड़ा असवार तीरदाज धनुरघर उठिया नेजा धार ढाल तलवार उठ बीका बीदा चालो तो बाँध लेवॉ खिडियो दरबार काँधलजी साथै चालै तो हूँ लेऊँ घोड़ो सिणगार थारो राज बॅध्या मुळकाढू हूँ चाकर बण चौकीदार धीर धरम विसवास बँधाऊँ वचन निभा पाणीदार वो सुभ मगळ दिन घिर आसी तखत चढे घीको भाणेज राज जॉगळू बॅधियाँ राजी बधसी म्हारो गरब गुमेज मॉ करणी सिर छत्र धरासी किरप चारणी करसी आप राज तेज पापों मे खोयो मिटसी म्हॉरो करियो पाप कॉधल अर पीके सूं बोल्या जोधाजी सुभ सबद उचार नापैजी रै साथै जाओ करो जागळू रो उद्धार मॉ करणी री किरप घणी है आखै लोक करै कल्याण लोक मँगळ री लगन लगाओ सुख सॉयत री लेवो आण सत री जोत जगा हिवड़े मे जा बाँधो बीकै रो राज काको भतीजो रमिल चालो करणी मो सारैली काज उठ बोल्यो नापोजी मामो राव सॉखलो सबद उचार हुयो जॉगळू अब बीराणी म्हारो तो उठग्यो दरबार 46 गई भोम रो वाहडू सब सिरदारों सामै बोल्या जोधोजी निज मन मुळकार मुंओ राज थापण जो चावै वेग हुवो घोड़ों असवार बीको-बीदो काँधल सेभिया कमर कसी घोडौं असवार सागै फौज सजी उभी है सिघ कर चालो मन मुळकार म्हारो सुभ आसीस आपने आप सिधावो भलो विचार विजै तिलक लिलवट पर काढो नेजा साझ ढाल तलवार माँ करणी मगळ घण करसी भरसी थॉरा भोग भखार दूध दही घी नदी बवासी गऊ माता री सेवादार बीको बीदो काँधल मुळकै मुजरो कर दुरणे नै त्यार चढो चढो आगै बध मुळको वेग चढो टळवाँ सिरदार काँधल रूपो मॉडण मँडळो नाथूजी काका है साथ भाई बीदो अर जोगायत मामोजी नापोजी साथ कामदार लालो लाखणसी चौथमल कोठारी साथ बछावत वरसिह साथै है सगळा वीर विकरमी साथ भकै घणों ही वीर चढ्या है बेलोजी साहणी पड़िहार विक्रमसी प्रोहित साथै है सालोजी राठी सऊकार सुभ आसोज सुदी दसमी दिन पनरैसौ सताइसै साल सिधकर विदा हुया वीकोजी तज मेहराण गदॉ री पाळ चिड़िया ट्रॅक दुरग तज चाल्या सज दळ बळ राठोड़ सुजॉण काँधल बीको काको भतीजो Tओ राज थरपण मन ठाँण श्री बीकै रो रेवत घोड़ो घणै गुमर सैं घालै चाल मुख मडळ पळकै राठोड़ो हाथ पळकतो धजबॅध भाल गाजाँ बाजों ढोल ढमाकॉ धुरै नगारॉ रा धमसॉण Jटवाँ सूरवीर घण राँधड़ साँगळिया मूछा दे ताँण घर फूंचा घर मॅजळी चाली राठोड़ाँ री फौज बधाय सॉझ पड़ी मडोवर पूगी नापै दीनो सख बजाय गौरैजी रा दरसण करिया सिझ्या रा मडोवर आय द। दिसा सुख सॉयत दीसै सॉझइली मगळ बरसाय चाउँमेर पखेरू बोलै चक चक चिड़ियाँ री चहकार मोर कबूतर फुर फुर बैसै आप आपरै डेरॉ जार गायाँ ढीकै बछड़ा कूदै साँझ ढळी बाखळियाँ माँय झिरमिर दूध दुहारयॉ दुवै आसै पासै सँ धुण आय दूजो सरग 47 चूरमो थान देवरॉ मिदर बाजे गूंज नगारों री गरणाय झालर सख टिकोरा बाजै दा दिसा झणकारॉ छाय रातीबासै सेना ढाबी गौरेजी रै थान मुकाम धीर वीर सगळा विसरामै आप आप रा साधै काम ससतर पाती री पूजा कर नेजा पूज ढाल तलवार काका भतीजा सगळा मुळकै कूदै नाचै भुजा पसार राम रसोई बणी लापसी ऊपर घी री पुरसै धार जीमजूठ सगळा मुळकावै आपस मे मुळकै मनवार सोपै वेळा ढळी जाजमा विसरामै सब थान मुकाम आखै लोक नीद ली मीठी गौरेजी धाम रातावासो लियो मुळकता दूजै दिन उठिया परभात आखो लोक उठ्यो सॉळियो गौरेजी री पूरी जात न्हाय धोय पूजा मे बैठ्या बीकोजी मुळक्या परभात भैरुजी री मूरत लाधी पूजा रै बेले मे हाथ देख साँखलो नापो बोल्यो गौरोजी चालैला साथ सुभ मगळ आपाँरै छासी लूँठो राज थमासी हाथ 48 गई भोम रो वाहडू परभातै परसाद भोग भरायो सगळे लोक सेना सब हथियार सॅभाया गौरैजी नै मन मे गोख ले परसाद चूरमो चढिया टुरो दुरो री गुंजी टेर नेजॉ नेजाँ घजा फरूकै बजै नगारा घेर घुमेर घोडा हिण हिणार हुकारै जैकारा गुँजै चहुँ ओर हळवॉ हळवॉ सेना चाली घण बोल्या मीठोड़ा मोर सूरज लालम लाल पळकियो चढतो धण मुळकै गिगनार पॉख पँखेरू उडै गिगन मे मीठी चिड़ियाँ री चहकार चाउँमेर सँखड़ा फुरकै पवन वेग लहरॉ लहराय पान फूल डाळ्या हरखावै हरखै हरियाळो वनराय खीप फोग मुळकै खेजड़ियाँ झड बैरयाँ लुळकै मनवार लालम लाल बोरिया लुळकै झीणी न चलै झणकार फुदक फुदक तितळयाँ घणना भेवरों री भीणी भणकार डाळी डाळी हिलके हरखै D-D री गूंजै गुजार खेत खेत सीवों पर निरखै करसॉ रा कुळकै परिवार बीकैजी री जय जय बोलै राठोड़ा री जैजैकार मीठा बोले मोर टहूकै ढाणी बसती सँखाँ डाळ कठैक ढाणी गॉच गॉवडा ऊजळिया धोरॉ री पाळ गाँव गोरवाँ गहक मची है गायाँ री गूंजै ढिकार टोघड़िया बाछडिया नाचै टोकरियाँ मीठी दणकार पग-पग मारग मिलै लोगडा दळ बळ आगै बधतो जाय बीकैजी री जय जय बोलै कण कण मुळकै मुळक सवाय सुहणा साचा सुगन सॉतरा आसॉ पासॉ मन मनवार उछले कुदै मार फदाका घण नाचै हिरणों रा डार भैरूँजी री मूरत सागै सौ घोड़ा लूँठा असवार पैदल सेना चलै पाँचसौ बधती जावै मन मुळकार बीका फौज सतोमत चाली देसणोक मे पूगी आय श्री करणी रा दरसण करिया आखी फौज आसीसा छाय श्री करणी श्रीमुख फरमायो सुण बीका तूं ध्यान लगाय अठै थारो परताप बधासी जोधैजी सू सुजस सवाय अठै ग्रासिया घणा मोकळा लुळ धारा पायनॉमी हुयसी दसू दिसावाँ सुजस पसरसी थारों राज सवायो बधसी श्री करणी माँ थॉरी जय हो बीको बोल्यो सबद उचार आखी सेना जय जय बोली माता आगै भुजा पसार श्री करणीजी श्रीमुख बोल्या सुण बीका तूं ध्यान लगार श्री भैरूँ सागै आयो है मडोवर तूं किरप करार इणरी सेवा आछी करजे चित मन पूजा लगन लगार तूं अबार चॉडासर जा बस हुयसी थारी जैजैकार थारी सेना राज थपासी मुँझे राज री जैजैकार घण तपसी राठोड़ मुलक मे राठोडौँ री जैजैकार श्री करणी मॉ री आज्ञा झें बस्यो गॉव चाण्डासर जाय तीन बरस चाण्डासर बसियो छव बरसाँ देसाणे आय तीन बरस कोडमदेसर रह मॉ करणी रो हुकम बजायो भाव भगत गौरोजी पूज्या श्री भैरूँ रो थान थपायो पछै बरस दस रया जॉगळू फिर फिर सगळा गाँव बसाया सालोसाल जमानो आछो धान-पान भडार भराया घोड़ा बध्या चार सौ हुयग्या नौकर चाकर सग बधायो हुयो जाँगळू आखो कबजे श्री बीकै रो राज थपायो दूजो सरग 49 समै सार चूकै नहि बीको देसणोक पखवाडै जावै मॉ करणी तूं मिलै बरोबर दरसण कर नित हुकम हलावै श्री बीकै री भाव भगत V मॉ करणी राजी घण छावै हुकम पाळ घरमी जस जीते राठोडॉ रो राज बॅधावै अेक दिवस करणी माँ बोली जोवॉ आसा पासों म्हे आछो देख ठिकाणो बीका अबै तन्हे परणासॉ म्हे आछा करम करै तूं बीका मिनख धरम नै पाकै है आछो राज करै धरती पर पाप-जुलम नित गाकै है पूगळ राज राव सेखै नै ন ध्यान सुमरायो हो मै करणी सोयाप गॉव मे भाई कह बतळायो हो वर दीनो कर सफळ कामना बो म्हारा गुण गावै है हर चवदस देसाणे आवै दरसण लाभ कमावै है श्री करणी दूजी चवदस नै सेखै नै फरमायो है सगपण भेक सौतरो लाई जोग सुजोगा आयो है बीकै रो परताप घणैरो बध्यो-बधै मै जाणी है सेखा धारी रगफंवर नै बीक नै परणाणी सेखो बोल्यो करणी ब ओ सगपण अनुकूल नह और हुकम सघ माथै मार पण ओ हुकम कबूल नई सेखा थारी अकल चराई सगपण चूक कुनामी हुयसी थारै जिसड़ा लोग हजारूँ बीकै रा पायनॉमी हुयसी नाट गयो पूगळगढ सेखो करणी तूं ले सीख सिधायो हुक्म टळायों फॅस्यो जाळ मे पड़यो जेळ मे घण पछतायो सेखो राव धाडवी बणग्यो लूट धाड धरती धन खावै मालोमाल हुयो नॉ ओजूं नित धावै नित धाड धड़ावै धाडो मारण गयो ओक दिन फॅस्यो नगर मुळतान घिरायो थाणेदार पकड़ सेखै नै सेवादारों झलायो सेवादार बाँध सेखै नै सामै जा मुळतान पुगायो कायम जुलम कियो धाड़ेती सेखैजी नै जेळ जड़ायो जेल सड़तो सेखो सुमरै हुकम अदूळी हूँ कर आयो पूगळ गढ मे खबर हुई जद आखो लोक अणेसाँ छायो साथ हरै नै ले देसाणे सेखै री तुकराणी आई अरज करी करणी रे आगे विपदा मेट करो सँकळाई 50 ईभोम रोपाहरू
No text on this page.
ऊँचा कोट कॅगूरा मुळक तोरण बँध्यो विसाल राव सेखै री गढ़पोळा मे जासी धूमर घाल बनै री घोड़ी केसर नाचै झूम गढ़पतिया सिरदार जनेती जॉनण करणी आप राठोड़ा री जैजैकारों जस जीतण री छाप बनै री घोड़ी केसर नाचै झूम मोरत साध बानसी तोरण गढपतियाँ री साख हरख बधावॉ लाडॉ कोडॉ घणा पिदासी खाख बनै री घोड़ी केसर नाचै झूम जोधैजी रो कुंवर लाडलो तोरण बनसी जाय आखो लोक आसीसॉ देसी मगळ वेळा मॉय बनै री घोडी केसर नाचै झूम कॉधल रो भतीजो बीको गढपतियों सिर मोड़ भाई बीदो चॅवर हुळावै चालै कॉधो जोड़ बनै री घोडी केसर नाचै झूम पूगळगढ़ सेखै री बेटी रगकॅचर सँग ब्यॉव रचासी राठोडॉ री फिरी दुहाई मॉ करणी री कीरत छासी ऊँची प्रोल यानियो तोरण गढ़ म घुटै बधाई है लोग करे इचरज घण लूँठो करणी जानण आई है। वीन बीनणी चॅवरी चढिया फे री सुभ वेळा आई करणीजी मुळतान जेल सैं सेखै नै साथै ही लाई श्री बीकै सँग ब्यॉव रचायो रगकॅचर बेटी परणाई घण मिजमानी दियो दायजो छप्पन भोगा जान जिमाई च्याँव हुयॉ सगळा जन हरख्या पूगळ गढ मे चॅटै बधाई कर मिजमानी ट्रॅप दायजो पछै जान नै सीख दिराई सीख लुगायाँ ओछ्रे गाई मगळ गीत कोयलड़ी गायो अकर घुड़ला पाछा घेरो गढ पूगळ ग्रॅज्यो गरणायो रगकॅवर बैली मे बैठी रुणझुण बैल जुताया है ओछ्रे रा सुर धीमा पड़ग्या नैणों नीर ढळाया है रठाकॅचर अब हुई पराई सेखै री ऑख्या भर आई झरतों मैंण गळगळॉ दीनी बेटी नै आसीस सवाई दुरगी जान ढळी पूगल से घरॉ जॉगळू नै जावै देखै सो ही लोग-लुगाई वर वधु नै आसीस बधावै हळवाँ हलवॉ जान चढती जा पूगी पूगळ गढ मॉय भरपूरी मिजमानी सागै बीको तोरण बानण जाय 52 गई भोम रो बाहडू मन. मे थुथकारा नॉखै मगळ गीत बधावा गावै ढाणी-ढाणी गॉव नगरियाँ परणी जान निरख सुख छावै कपिल सरोवर रै घाटॉ पर धिरती जान लियो विसराम आसॉ - पासाँ ईरॉ - तीराँ घोड़ा ऊँट ढाबिया धाम जीरो चारो घणो नीरियो हरियळियाँ सँखॉ री छाँव जान ढबी सँखा रे नीचे जाणै कोई बसग्यो गॉव कपिल सरोवर भरयो लबालब तिरियाँ मिरियों खाय हबोळ न्हावै धोवै सकळ जनेती काया ली इमरत मे घोळ कपिल मुनी रा दरसण करिया साँझ पड़ी आरतड़ी गाय जीमा जूठो कियो जनेत्याँ सुखी घणा परसादो पाय अगली मजळ चढ्या जनेती हळवाँ हळवों बधता जाय सोनळ भोर जाँगळू पूठया चीन बीनणी लिया बधाय घोड़ा हिण हिणार हुकारै वीकैजी री फिरी दुहाई राठोडौं री जैजैकारों माँ करणी री घण सकळाई घर घर मगलाचार [जावै सरव जगल् चैटै यघाई पूगळ गढ़ सेबै री बेटी रगचर पुजवधू सवाई मन थुथकार आसीसॉ छावै दरसण कर कर लोग लुगाई धन्य भाग करणी री किरपा राठोडॉ री फिरी दुहाई रगकॅचर बीकै री सोभा राठोडॉ री है प्रभुताई मॉ करणी सिर छत्र धरायो किरप करै सपै सॅकळाई चढती रात ढोल गरणावै आज जॉगळू री छिब न्यारी रात चानणी इमरत वरसै सुख री घड़ी घणी बिसतारी रगवर सुख सैजॉ पोढी बीक कुँवर री मैड़ी माँय बरसॉ बरस जियै रेंग माणे सातूं सुख रसभरियॉ छाय बीकै नै परणायाँ पीछे करणी मॉ देसाणे जाय राजलोक सब भेळो हुयग्यो बीन-बीनणी धोक लगाय गाजाँ बाजॉ करणी माँ नै देसणोक नै विदा कराई काका काँधल धीदो भाई सब राठोडौं घोक लगाई नौकर चाकर गया पुगाँवण देसणोक जा ठेठ पुगाई करणी रो परताप घरो लुल लुळ दिन लोग लुगाई पग-पग ऊभा दरसण पावै आसीसौं दे करणी माई मद मे जाय इंपड़ी बैठी घरों गया सब लोग लुगाई दूसरग 53 श्री करणी पूजा मे लागी ध्यान मगन मनई मुळकावै नौकर चाकर भटात मोकळा मढ मे हरदम आवै जावै आप आप रा करम ऊजळा देसाणे मे करता जावै गउऑ चरै ओरणॉ मॉही धरम करम सनमान बधावै सभैसार बीको सिध जावै देसणोक करणी दरबार राज तेज महिमाँ घण सपै ज्यूँ-ज्यूँ बधै राज रो भार तन मन समसार सैठीजे मॉ करणी सू भेट कराय मारग दरसण लेवै मोकळो देसणोक जा दरसण पाय राजकाज री नीती समझै सासण रा गुरुमत्र जपावै भेद मुलक रो राख ऑगळ्या जुलम मेटणा जतन उपावै नौकर चाकर चरवादारा सूबाँ सेवादार बधाया गुणी गुपतवर बधा अहेरी पागी थाणेदार लगाया दिन दिन दूंणो रात चौगुणो घण ऑकस चहुंओर धपावै अपराध्या रा मिटै हूँसळा छोड़ कुमारग मारग आवै जगळ राज अवै ना चालै राज जागळू रो समझावै श्री बीकै री फिरी दुहाई माँ करणी सिर छत्र धरावै चौकी राज अबै ना चलसी चौबाटों पर न्याय चुकावै गॉव पच परमेसर व्याप्यो सकट मिठता लोग लखावै घण आतकी अबै न कोई दसला जनखा कूट नसावै श्री बीकै री जैजै बोलै राठोडॉ रो राज बधावै मरजादा री पाळॉ थरपी जोगा जोगी करम करावो न्याय धरम तूं भरी कवेड़ी लोगों थे सुख साँयत पावो जाट हुया पानामी सारा बीकै रै सरणै आया राठोड़ॉ री फिरी दुहाई करणी री छतरी छाया भट भाटी चौहान सॉखला जाट जोइया काबू करिया चोयल मोहिल खीची खाती घण अपराध करता इरिया कयामखानी डीडू रजवट चारण भाट बाघ इरपाया भुटा बलूचा गूजर छीपा औकस री परधा मे छाया कुण अपराध लोक धन लूँटै कुण लठुवा अपराध कराय कुण पाजी जनलोक पिड़ावै के अभाव है पतो लगाय अरथ तन पर काबू कर कर राजकोप सैठो सपादै तन मन धन रखवाळे सेना समैसार नित सग बघावे 54 गई भोम सेवाह घण अपराधी हुया पाधरा छोड़ कुमारग मारग आया श्री बीके री फिरी दुहाई राठोड़ॉ रा रग सवाया दूध दही घी ढाणी ढाणी गाँव नगर कसबॉ उरळोई खीचड़ खाय राबड़ी रोटी राम खीचडी राम रसोई समैसार रितुआँ फळ फळती तीज तिवाराँ धूम मचावै भागोभाग जमाना नेपै खेती पाती खड़ मुळकावै दिन दिन बधै मुलक चौफेराँ पग-पग करसा मगळ गावै गाजॉ-बाजों मेळॉ-मगरियाँ नर नारी टाबर सुख छावै दस फॅटो देसाणो मुळकै राज जॉगळू री पुण्याई सुभ सुराज राठोड़ी सपै मॉ करणी नित करै बड़ाई आप सदेही करणी मुळकै सगळॉ नै आसीस सवाई बीका राज जाँगळू विकसै राठोडौँ री फिरी दुहाई न्याय मिलै चव. चौगानों जात पाँत रो भेद न कोई लतुवा तत्र अबै ना चालै सुभ राठोड़ी नीति सँजोई मॉ करणी सिर छत्र धरावै राज करै देसाणी माई जनता राज सतोमत सपै लेखो राखे पाई-पाई सवत पनरै सौ पैतीसै कोडमदेसर गया सिधाय गौरेजी रा दरसण करिया बीकैजी लुळ धोक लगाय सगी साथी साथ घणैरो काको कॉधल बीदो भाई गढ घालण रो मतो उपायो आछी ठोड़ अक थरपाई घण मजूर कारीगर लगिया ऊँडी खोदी नीव भराई सेखैजी नै खबर हुई जद हाथोहाथ वरजणों आई सेखै राव सनेसो भेज्यो आप अढ़ गढ़ मत थरपावो जाय जॉगळू री परघा मे मन चावा गढ कोट चिणावो मानी नही वरजणॉ बीकै कॉधल बीदो मतो न ढाय सुण सेखो धण हुयो बिराजी पण बॉने की कहियो नॉय भाटी भेळा हुया मोकळा सेखै नै दी खुली सुणाय छाती माथै पण गढ़ धतियाँ जमी आपणी रैसी नॉय धीरज धरम धार समरसता श्री बीकोजी राज चलावै करै लोक कल्याण पगोपग घण राठोड़ी मान बधावै सेखो बोल्यो भायाँ बेल्याँ तो चवई आऊँ नॉय गढ घतणे री नीती पळटै इसड़ो कोई करो उपाय दूजो सरग 55 कलकरणे केहरोत कने जा भाट्या सगळा करी पुकार कोडमदेसर मे गढ़ घातण बीको आयो है मन धार कलकरणे रो आयो सँदेसो अठै आप गदड़ो मत घालो गद घाल्याँ टू राड़ हुवैली परै जॉगळूरी हद चालो पण बीके अर सगळा साथ्याँ कलकरण री बात न मानी राठोडॉ री रीत न जाणे कलकरणो है घण अज्ञानी कलकरणो सज सेना आयो जोड़ आदमी दोय हजार राटोडॉ सू लियो मोरचो जुध करणे री घार विचार सेखै नै सदेस करायो थे भेळे आ रळो अवार काची वेदन काट देवों तो सुख सॉयत री बॅधसी कार सेखै भेज्यो दियो पडूतर म्हारो माथो फाटै आज जद म्हॉरै आराम आयसी हूँ आV थोरै ही काज कलकरणै सदेस पुगायो थे मत आज्यो आज अबार माथो तो घण दिनाँ दूखसी औ राठोडा आया द्वार बीकै काँधल बीदै नापै बेलै करियो साथ बिचार आपॉ नै के करणो चहियै निरणे करलो आज अबार नापो बोल्यो सुगन सॉतरा आ है ठोड़ घणी सुभ जाण राज आपणो थिर थित रैसी घणी पीढियाँ बधै सुजाण कॉधल कहियो भली बात है धर आछी म्हारै मन भाय इयै ठोड़ ही सुभ गढ माँडॉ राठोड़ी जस बधै सवाय कलकरणो सेना सज आयो राठोडॉ पर करी चढाई बीकै कियो सामनो सज धज घण ललकारॉ फौज बधाई नेजा ढाल लियाँ तलवार राठोडॉ रणरग चढायो भाटी मारया झपट तीन सौ रणचडी रो खपर भरायो कलकरणो केहरोत बडेरो ऊमर ही घण अस्सी साल काया मे बळवाण घणो पण भाज मुवो हुय लालम लाल भाटी भाज छूटिया रण हूँ मद छकिया हुयग्या रणछोड़ बिजै हुई बीकै री रण मे घण घमक्या घोड़ॉ रा पोड़ पण भाटी दगो नित राखै घण अणमणिया दुखी विचार राठोड़ी गढ़ भलो न लागै ऑख्याँ राती खारभखार बीको बोल्यो धीरज धाराँ ऊँतावळ मे उळझॉ नॉय पैलै कवै गिटा क्यूँ माखी गढ़ घालाँ क्यूँ राइ बधाय 56 गई भोम रो बाहडू नापै अर नेरै नै भेज्या दूजी जोवो ठोड़ सवाय बढ़ चाल लँठो गढ घालॉ सुख सॉयत लॉ राज थपाय बै आया राती घाटी मे टोकी माथै चढिया आय नागोरॉ मुळताना सामा दीसै दो मारगिया जाय बचिया दोय लिया ऊभी है गाडर कैर झॉस रै मॉय ल्याळी चार लागिया लारै पण गाडर सध सीग भुंवाय नापै दाकळ मार ल्याळियाँ करी ताडना दूर भगाया इण सुभ जागा गढ़ घालाँला थिर थित रैसों नेरा भाया तेड़ो भेज दियो नापैजी कॉधल बीको बीदो आया आ धरती तो घणी सॉतरी अढ घालण रा सुगन सवाया राठोडॉ थुथकारो धाल्यो भलो घलावो गढ इण ठोड़ राठोडॉ रो माण बधैलो बाजणदो घोड़ाँ रा पोड़ नापो नेरो सुगन जॉचणे हा केई ठोड़ मेक ठोड़ इसड़ी भी देखी अजब अजूबी सूनै खोड़ सूतॉ अक लॅख रै हेढ़ भुरट सिराणै देख्यो आप मुख मे घाल्याँ पूँछ आपरी मार कुडाळो बैठ्यो सॉप नापो नरो उठ्या पग लीना चल्या सॉप री लीकालोळ लीक पूगगी जठै घरपदी राती घाटी मे गढपोळ नापो बोल्यो जिण ठोड़ॉ पर बैठ्यो सॉप कुडाळो मार समसार लूँठो गढ घलसी राठोड़ा री जैजैकार सवत पनरैसो बैयाळे बीकै कुँवर सुजस घण छाय राती घाटी री टोकी पर गढ गणेस सुभ लियो घलाय सवत पनरैसौ पैताळे बीकै घण तप तेज बधाय बीकानेर नगर सुभ थरप्यो घर घर मगळ गीत गवाय श्री बीकैजी राज थपियो करामात करणी री देख ख्यात बात इतिहास बखाणे किणी कवी रो कथियो लेख (सवत) पनरैसौ पैताळवै सुद बैसाख सुमेर धावर बीज थरप्पियो बीकै बीकानेर जलम भोम है भीव री कलम कथै सतसेर ख्यात बात इतिहास मे धिन धिन बीकानेर भळे गया राजस्थानी रग मे चालै कलम कमाल टीपाटीप करूंबलो रॅग रूड़ो रँग लाल दूजो सरग 57 बीकाणे रै थभ सू प्रगटै सूर विसाळ मात भोम रा चानणा अमर भीव भुरजाळ बीकै रो परताप घणो हो ठोडॉ-ठोड़ॉ गाँव बसाया कुआ बावड़ी ताल तळायाँ पग-पग हरियळ सँख लगाया धन धरती धाडेत लॅटता देस जॉगळू धुर देसाण राठोड़ॉ नै ठोड़ भुलाई करणी सरणॉ आप सुजाण गाय चारणी घुमा कामड़ी पवन वेग मारी फटकार जुलम्याँ रा टोटा ही उडव्या मिनखापण री खिचगी कार अणपूण्यो मोरत थरपायो भोग लग्यो अमलाणी खीच दसू दिसावॉ गीत गुंजाया जुलम्याँ रा पसवाड़ा पीच मिनखापण रो पाणी ऊँडो काढ लियो कमधजिया सार जन जन रो हिवड़ो धीजायो न्याय धरम डडो फटकार सुख रा सूरज चाँद उगाया जैजैकार करी गिगनार करणळ री किरपा घण पूँजी धरती पर पण धीरज धार जोधैजी नै खबर हुई जद मरजादा री बॅधगी कार पूत हुवै तो बीके जैड़ो हुवै वीरता रो अवतार धिन मायड़ धणियाप जचावै नोरंगदे गोदी सिणगार गढ मेहाण नगारा गडक्या डकॉ री बकी गुंजार मुँवो राज राठोड़ो धरप्यो भुजबलियाँ री साख पसार मिनखापण रो माण बधायो पग पग हुई जुलम री हार गाँव गुवाड़ा ढाणी-ढाणी पणघट-पणघट पाणी-पाणी पग-पग पर इमरत रळकायो मिनखपणो ही राजा-राणी इण धरती पर राज न कोई ढाणी ढाणी बसता लोग कोरु पाँडू अठ विचरता सेवण घास ऊगता फोग कॉधल रा कॉधा मचकीज्या बीके री चाली तलवार नेजॉ पर धज लाल फरूक्या राठोड़ो गाज्यो परिवार बीदै री घोड़ी जद कूदै जद बाजै रण मे तलवार दुसमणिया ऊँडा जा दुबकै झाल सके नौँ उणरो वार भाई बधू सैण साईंणा चक डौंडी माँडी चौफेर चारण चरण कतड़ा गूंज्या धीकै थरप्यो बीकानेर विकरम पनरैसौ पैताळे सुद बैसाखी आखा बीज गढ गणेसरी करी धरपणा ऊगतड़ी सुभ आखातीज 58 गई भौम रोयाहरू साह जैन ओसवाळ महेसरी आय बस्या घण अगरवाळ बिणजारॉ घण बिणज टोरियो साच धरम मरजादा पाळ घोड़ा चरता घास मोकळो ताल तळावॉ पीता नीर गाय भैस ओठारू पळता मिलतो घणो दूध अर खीर दसला केई चोरटा बसता करता अठै सूगला काज हरण करता नार पराई चलता अठै तिबारी राज पहलो राज सॉखलॉ थरप्यो पण बॉV नॉ ढवियो राज जाट जोइया भाठी भिड़ता बध बध करता घणा अकाज खबरदार बीको जद गूंज्यो बद हुई दसलाँ री घूस ऑगण बाखळ लॅट मची तो सिर पर पइसी अणगिण खूस लूट पाठ चोरी नॉ चलसी मत करजो अपराध अजाण चौबाटाँ पर चूक डॅडीजै राठोड़ा री फिरगी आण करणी रा किरपाळ कसीज्या जन जीवण रा पोरैदार कण-कण मे सुख सॉयत व्यापी दसलॉ रा उठग्या दरबार लिखमी नाथ टेकरी छायो नागणेचजी री बळिहार सुख सॉयत मे बसी नगरिया बीकाणे री जैजैकार जात जात रा आवै जातरी गाँव नगर कसबा बसवावै सुख साँयत लख सरण सुरक्षा नर नारी फूल्या न समावै गद मे बीको सैर मे कीको राज तेज सुख सॉयत लावै दसलो जनखो अक न पनपै न्याय धरम राज चलावै हाकम अफसर नौकर चाकर जुलम कोई करणे नाँ पावै जॉच परख पड़ताळॉ परखै ओक जुलम जीवण रुळजावै सिद्ध दोस हुँवताँ ही पळ मे आछी भली नौकरी जावै जेळ ज. सौ गुणो दड दे इज्जत आब सभी उतरावै समैसार बिरखा सुभ बरसै खेत जमी घण धान निपावै धास पात नीरै चारै तूं पसुवाँ पाण घणी पळकावै राठोडॉ रो डको बाजै दिन दिन राज सवायो छावै जाट जोइया धणाँ निवाया बीकै री जैकार गुंजावै पण की लतुवा जाट चौधरी चौधर मे भूल्या भरमादै मिनख पणैरी काण न मानै पर बेटी पर नार हरावै भाट्या नै काबू कर बीकै हॉसळ करली लूँठी जीत चारूँ मेर चौखळे हुयग्या छोटा मोटा घण भैभीत दूजो सरग 59 गाजॉ बाजॉ राज धरपियो राती घाटी जद गढ घाल गढ गणेस मे उपब मनायो जद पूज्या धण नेजा ढाल राठोड़ी तलवारॉ पळकी जद जनता घण खुसी मनाई लतुवाँ रो आतक मिटैलो लेखो लेसी पाई पाई पण केई जनखा घण सालै चौक्या बैठा फोडा घालै छानै छुपकै दसला नाचे बैठ तिबारचा दारू मालै भुजबळ मे भरमाया भटकै खोटी निजर ऑगणों ताकै जुडळी बणा फिरै गळिया मे करड़ी मीट डरॉवण झाकै लठुवा घण आतक मचावै चौकी बैठा हुकम चलाय करणी रे दरबार पुकारी जनता मॉगी बेग सहाय करणी हुकम दियो बीकै नै वेग मुलक है काबू करणो गॉव सेखसर रै गोदारै पॉडू जाट लियो है सरणो जाटों रो लतुवो नेता जद आ लाग्यो बीकै रै पॉव राठोडौं री फिरी दुहाई जैजैकारों गूंज्या गॉव गाँव गाँव मे हुयो पसारो ढाणी-ढाणी पसरी बात लतुवा रा पग धूजण लाग्या घण छाती धड़कै दिन रात 60 गई भोम रो बाहडू ख्यात बात इतिहास बखाणे नामी प्रेम कथा बतळावै धणी फूठरी मळकी जाटण सकळ ढाणियाँ गाँव गुंजावै गाँव सेखसर रो धण लतुयी पॉडू हो गोदारो जाट अर दूजो लतुवो पूलो हो गाँव भाइँग रो सारण जाट नार जबर पूलै सारण री मळकी ही घण तेज तरार पॉडू माथै घणी रिझाळू पॉडू हो जबरो दातार ओक रात मळकी यूँ बोली पूलै सेती होठ फुलार जे दातार हुवै कोई तो पॉडू सो होवै दातार दातारी रै ताने माथै पूलै लीना भँवर तणाय मळकी नै घण कोझी कूटी दारू री खूमारी मॉय पूलो बोल्यो मार ह्सडाँ काढी गाळ सूगली नार पॉडू पर इतरी रीझी तो बीरे ही घर जा रडार मळकी बोली घर बूडा रे धारै मॉचै नाँ आऊँ जे थारै माँचै आऊँ तो भाई रै मॉचै आऊँ मळकी कियो रूसणो भारी पूलै तूं मुखई नाँ बोले जे पूलो बतळावै तो बा डावै पग री जूती खोले पॉडू नै सदेस भेजियो रमग्यो है मन थारै मॉय थारै साथ करूँ घरवासो बैगो आ म्हॉनै ले जाय पॉडू पूत नकोदर सागै भेज दिया गोदारा सात सातूं ही गोदारा लवा गाँव गया भाग चढ रात पाय सनेसो मळकी निसरी मन मे होय घणी राजी सवा पोर चढती रातडली सग नकोदर चढ भाजी आ मीठी मॉ कह बतळाई पूत नकोदर लेग्यो साथ घण लठुवा गोदारा सागै जा पूगी पीळे परभात मळकी आय सेखसर बडगी पाँडू री घरवाळी बणगी पण पांडूरी नार पैलडी देख सौत मळकी नै तणगी गोठ जीम मळकी तेड़ाई समझाइस री उण वेळा पण मळकी री छयाँ न दीसै हुया बात रा दस डेळा पूलो बोल्यो मळकी नै तो ले भाज्यो पॉडू गोदारो कह्यो सारणों बात खूटगी रह्यो देखतो ही बेचारो आपॉ अबै नावड़ॉ कोनी सारण बोल्या पडै न पार पॉडू रै लारै बीको है सोच करण मे कोई न सार नरसँग जादू कनै चालियाँ जे बो झगड़ो लेवै झाल तो की पार-पई जाणीजै सब चालो तो पूगाँ हाल आखर सगळॉ मतो उपायो बॅचणे रो है ओक उपाय टुळक्या जाट सिवॉणी कानी नरसँग जाटू तेइण जाय कॅचर पाळ कसवो सिधमुख मळकी रो नानो हो जाण बैणीवाळ रायसळ दुरियो मळकी रो हो बाप सुजाण गॉव भाडॅग रो पूलो सारण मळकी रो खुद खसम सुजाण धाणसियै रो अमरो सोहुवो भुआ बेटो भाई जाण सूई रो चोखो सियाग हो मासी बेटो भाई लूंदी गॉव से कानो पूनियो हो पूलै रो भाई सुजाण दूजो सरग 61 मळकी गॉव सेखसर बसगी पण दिन घणों पड़ी नॉ पार पॉडू री पैली घरवाळी मळकी ऊपर खावै खार रॉडाराड मिटावण मळकी जोय लिवी फिर पूँई थॉव गाँव गोपलाण रै नेई बसा लियो मळकीसर गॉव मळकी जद भाग सू भाजी सारण जाट हुयो भेळो मळकी री रूसॉवण मेटण भाग मे मॉड्यो मेळो जाण इतरा जाट गया हुय भेळा पूग्या गाँव सियाणे जाय घणे माण अरदास करी घण नरसग जाटू लाया मनाय नरसग जादू सग साथ ले चढ आयो ले फौज सजाय पाँडू माथै करण चढाई जाटॉ री घण मदत कराय जाटाँ घण जैकार गुंजाया नरसग जादू री जय बोल पॉडू गोदारै नै मारॉ बजा दिया घण गैरा ढोल कर देवण रा वचन दिया घण राजाई रो बिड़द दियो नरसग रै सरणै नित रैसॉ सगळा जाटों कौल कियो गॉव गॉव री चौधर चलती आपस मे भिड़िया घण जाट रॉडा राड़ मच्योडी रैती लठुवा करता माराकाट सीयाणे रो नरसग जाटू आय चढ्यो लाघड़ियै गॉव लूट पाट कर गॉव बालियो आप बाप रो काढण नॉव नकोदर दो। दुखी गळगळा भाज्या जाय सिधमुख मे डेरा बीकै रा जाय बढ़ लाग्या झट पॉव बोल्या थॉरी परघा मरग्या नरसग जाटू साचत जाय पूलो जाट रळयो है सागै अब तो म्हॉरी करो सहाय लाड़ियै घण लूँट पाट कर नरसग लॉपो दियो लगा भाई वधू पूलै भेळ अको कर से लाया बुलाय जद बीकै काँधल सज सेना सीवाणे पर दिवी चढाय सिधमुख सूं दो कोस आँतरै ढीकै गाँव पूगिया जाय आधी रात मारियो नरसग बीकै री तलवार पछाड़ दो टुकड़ा नरसग रा करिया मिटा दिवी सब रॉडी राड़ इसड़ी जबर जाटणी मळकी घण जाटाँ ने दिया मराय राठोड़े बीकै रै चरणाँ सब जाटों ने दिया झुकाय जुलमी जाट भागिया सगळा गॉव गॉव दापळिया जाय समझ गया बीकै काँधल री खिमता आगै सीस निवाय पॉडू और जाट सकळ आ सरणो मॉग्यो राठोडॉ री फेर दुहाई म्हे नॉ कदै कुमारग चालॉ मॉ करणी री खैर मनाई गाँव गाँव जा सुध बुध लीनी खुसी हुया सै लोग लुगाई राठोड़ॉ रा रग सवाया बीकैजी री फिरी दुहाई करणी रो तप तेज ऊजळो बीकाणे पर घण सॅकळाई रोग-सोग-पीड़ा नॉ पनपै कण-कण मे छाई सुखदाई 62 गई भोम रो बाहडू नरबद बरसळ और मोयलॉ सारंगखाँ उतपात मचायो बीकै काँधल फौज सजाई राठौडॉ रो सग चढायो आमो सामो रणरॅग चढियो मार काट तलवार बजाई सारंगखॉ पर कॉधल धायो बीक मोयलॉ फौज-चढाई नरबद बरसल मर्या जग में बाकी भाज्या पूँछ दबाई राठोडॉ री जीत हुई जद बीकैजी री फिरी दुहाई काबू करियो जाय द्रोणपुर हँसी खुसी दिन सात बिताया बीदैजी नै दियो द्रोणपुर बीकोजी बीकाणे आया इसड़ो सूरवीर जोधो हो राठौड़ो रॉधड़ हो भाई बध बध वार खपाखप करतो दुसमणियाँ री हुवै सफाई कॉधल री तलवार पळकती ज्यूँ आभै मे बीज चमकती लपलपाट करती ही चलती दुसमणियाँ री भीड़ लपकती मारकाट बा इसडी करती रणखेतॉ मे माथा धरती जो चढतो उणरी चकरी मे साबत गयो न रण टू फिरती धिन कॉधल री माँ जनमायो इसो सूरमो दूधो पायो रणभोमी रो हीर कॉधलो गोदी मे हीरो पळकायो श्री कॉधल रणमलोत रणबको जोधाणे सैं आयो साथ मुंवो राज थरप्यो बीकॉणो बीकै माथे राख्यो हाथ श्री कॉधल बीकै रो काको श्री जोधैं रो भुजबॅध बीर राठौडॉ रो सुजस बधायो मात भोम मे राख्यो सीर श्री कॉधल हो सुजस सुमेरू बेजोड़ो राठोड़ो वीर जन जीवण री सुख सॉयत हित धीर वीर मिनखापण हीर श्री कॉघल जद रणभोमी मे घोड़े चढ्यो उछळतो वीर दुमची पुसतग तग उछळता अरिदळ बिखर भाजतो भीर सारंगखों हसार बिराजै फोजदार है मौज मनावै बीकाणै री परघा मॉही बध बध घण उतपात करावै मोहिलवाटी री धरती जो बीदै रै हाथों सूंपाई पण सॅभ वैरीसाळ सिधायो दिल्ली जाय पुकार मचाई लोदीसा बहलोल हुकम दे सारगखों सँग फौज चढाई बीदै री धरती हित ऊभी काँघलजी री फौज सवाई कॉधलजी री बात अजब है जद बै उछळ घोड़ियै चढता अकै भजकै रै सागै ही दुमची तग लगाम टूटता दूजो सरग 63 श्रा कॉधल भायाँ रो भाई वैर्यों रो वैरी हो जाण सदा सजग रण रातो मातो राती घाटी सरव सुजाण श्री कॉधल छतरी छतरप हो घण जोधो हो अमर सुजाण मिनखापणो माण मरजादा राठोड़ा री राखी आण श्री काँधल धिन धिन राठोड़ो घिन घिन घिन जननी जायो बीकै रो सागी काको हो बीकाणे रो हो पायो श्री कॉधल रो वस घणो ही बीकाणै बसियो चहुँ ओर आण माण मरजादा पाळी अमर हुयो भुजवळ रे जोर गॉव साहबै जा कॉधलजी लगा मोरचा थाण धपायो देख फौज सारंगखों कॉप्यो झटपट दळबळ घणो बधायो काँधलजी राजासर आया लूँठो दळबळ साज सघायो जा मारयो हिसार रो काँठो धन असबाब घणो हथ आयो वार चढ्यो सारंगखॉ धायो कॉधलजी रै ऊपर आयो टूटगया दुमची तंग पुस्तग जद कॉधल घोड़ो कूदायो सारंगखाँ कॉधल पर आयो हमलो बोल हस्यो मुळकायो तलवारॉ री पड़ी चौकडी कॉधल चारुमेर घिरायो काँधल संभ तलवार उठाई सारंगखाँ रे सिर पर वाही पण सारंगखौँ दुवक टलायो फौज चढी काँधल पर आई काँधलजी अकलड़ा पड़ाया तलवारों रा घाव लगाया मार काट दुसमण घण मार्गा लड़ता भिड़ता सरग सिधाया खबर हुई घीकाणे गढ़ में पीकेजी प्रण कियो सघाय कॉधलजी रो वैर लियाँ ही भोजन करसू थाळ सजाय खाली दूध टक दो पीवै बीकोजी व्रत पाळ निभावै सारंगखाँ पर जा चढणे री त्यारी मे दिन रात बितावै जोधैजी नै खबर कराई संभ आयो श्री जोधो राव चढ हिसार रै काँठे झाँसै सब राठोड़ा बधिया धाय सारेंगखॉ री फौज भाजगी मऱ्या घणा दुसमण दुख पाय सारंगखॉ ने मार गिरायो कुँवर नरै बीकावत जाय राठोडॉ री जीत हुई जद ढोलॉ रा गइक्या ढमकार बीकॉ जोधा री जैकारों राठोडॉ री जै जैकार धणै गुमर री बात अकपण बीकाणे इतिहास मॅडाय काँधलजी रो बदळो साश्यो ससारै इतिहास सवाय 4 गई भोम रो वाहडू कलम कयूँ मन हूँस बधावै बासों उछकै ऊँचो नाड कुंवर नरो बीकावत धिन धिन सारंगखॉ नै दियो पछाड ओ छतरी रो हो छतरापो हियै गोखलो बारबार नॉ गोखो तो किसडा छतरी बोझॉ मे फेको तलवार सवत् पनरैसौ सैतालै आसाठी वद छठ दिलवार सारंगखॉ लै मार पछाड्यो राठोड़ा री जै जैकार बीका जोधा सँग राठोड़ा विदा हुवै जद पूर्यो काम गाजॉ बाजों ढोल धुराँतों पूज्या अपणे थान मुकाम पण जोधैजी वाचा मॉग्या बीकेजी तूं बचन बॅधार अक लाडणूं मॉग्यो देदै थारै हाथों जको अबार दृजो वचन जोधपुर मॉही जितरी माया जुड़ी अबार तूं मायाँ सँ बेट मत लीजे दावो करै न कर तकरार दोD वचन दिया पण मॉD तखत छत्र थारी तलवार हूँ सूजै हूँ मोटो बेटो भन्हे मिलेला अरज सिकार कहो राव जोधै सब सामै भेजूं बेग जोधपुर जाय पूजनीक चीजों सब थारी जाय भेजनू वचन निभाय सकळ मानसी बेटा पोता हूँ मानू थारो अधिकार ख्यात बात इतिहास भणेला हूँ जाऊँ सत वचन बँधार राठोडॉ री भरी सभा में निसचै निरणो हुयो बजार जोधोजी जोधाणै हुरिया कर बीकै यूँ कौल करार पीकै सुगन सॉतरा साझ्या जोधोजी जोधाण सिधाया पगाँ धोक आसीसॉ छाया बीकोजी बीकाण सिधाया सवत पनरेसा सैताकै श्री जोधोजी धाम पधाऱ्या जद सातळजी गादी बैठा पूजनीक सब साज सँवाया थोड़ोसो ही राज कियो पण जद सातळजी धाम सिधाया सूजोजी गादी पर बैठा पूजनीक सब साज सजाया समचार मिलिया बीकै नै कोल करार किया सुमराया पूजनीक जिनसॉ लावण नै बेलोजी पड़िहार सिधाया बेलोजी जोधाणे पूग्या सूजैजी नै अरज कराई पूजनीक जिनसाँ सै माँगी बीकै नै दैणी फरमाई सूजोजी बोल्या बेलै नै म्होंने भी जिनसाँ चाहीजे खुलो खुलासो दियो पइतर औ जिनसाँ क्यूकर देईजै दूजो सरग 65 बेलोजी पूठा घिर आया समचार सारा बतळाया सला करी बीकैजी गढ मे अमरावॉ मुसयों सँग भायाँ सला करी सब राय विचारी ओक बात सगळा ही धारी फौज सजा जोधाणे घावो सिध करणे री करली त्यारी कोस अक उरियाँ जोधाणै फौजॉ री मुठभेड़ हुई सूजै री घण सेना भाजी बीकै जैकार हुई पैठ सहर में सेना गाजी सारो सहर भिळायो है बीच बजारॉ भगदड माची बीकै रो दल छायो है गढ मेहराण उपरळी तोपॉ आग उगळती गोळा बरसै बीका फौज बधी गढ घेर्यो पाणी बिना गढेरी तरसै आखर राव सूजै री माजी जसमादे हाडी कहवायो गढ मे बैठ करो समझौतो बात करॉ सदेस पुगायो गयो वैद लाखणसी गढ़ में बछावत वर सिघ सिधायो साथै गयो सॉखलो नापो बेलोजी पडिहार सवायो खेडॉ सारू आया लडाकू तीन हजारी सेन सजाई द्रोणपुरै बीदो सँग सँभियो अरडकमल भी फौज रळाई राजासर V आयो राजसी रावत सेना लाय मिलायो श्री वणीर बाधावत पूग्यो ले सेना धण साथै आयो काकोजी मॅडळोजी आया फौज आपरी साथै लाया पूगळ हरोजी आया तीस हजारी सूर सजाया बीकैजी री फौज सवाई पूगी देसणोक घण छाई मायड़ खुद आसीसॉ दीनी राठोड़ॉ री साख बधाई श्री करणी माँ खुद फुरमायो बीका भलो हुदै सिघ करलै वधी फौज राठोड़ी आगे धरकूचा घरमँजळाँ भरलै श्री बीकोजी गया जोधपुर श्री सूजै लीनो गढ साझ की साथी भेज्या सॉमेले बीकै माथै उछळ्या गाज सूजैजी रा घों हजूरी हाकम मुसदी गढ मे आया आमा-सामा बैठ विचारै समझौतॉ रा सूत सुणाया बीकाणै रा मुसदी चोल्या साचो धरम थॉरो जे जागे जोधैजी रै धाम पधार्यों बीकै रो हक पहलाँ लागै धीरज धरम धारियों सुख है सुख साँयत रो करो विचार जोधैजी रो कचल निभावो मिनखापण मरजादा धार 66 गई भोम रो बाहडू सूजैजी रा मुसदी बोल्या आ थाँरी है साची बात द्रोणपुरै री सधी बोलै अब क्यूँ करै कोई भी घात काँधलजी रो वैर चूकिया पछै द्रोणपुर पाछा आया बीकोजी जोधोजी भेळा बैस परसपर वचन बॅधाया बीकैजी रा मुसदी बोल्या बीकोजी वचनॉ नै पाळे पण जोधै रा गादीधारी खीचतॉण वचनाँ नै गाळे सूजैजी रा मुसदी बोल्या पैठ कोट रुधिया है जिणरा लेय फौज पाछा मुड़ जावो धन धरती कबजै है उणरा नाँ मानो तो थॉरी मरजी म्हे भी हो रजपूत सवाया बॅटवारो म्हे देसाँ मरियाँ खुला खुलासा वचन सुणाया बीकानेरी मुसदी मुडिया बीकैजी रै पासै आया बै जोधै रा वचन न पाळे रण राता उनमादाँ छाया सूजैजी रो राम निकळग्यो गढ मे बोल्या लोग लुगाई जोधैजी रै धाम पूगियाँ बीकैजी री सब प्रभुताई बीकोजी है अबै बडेरा बीकाणे रो है पग मोटो सूजोजी छोटा बीकै नै जोधाणे रो है पग छोटो बीकै री आज्ञा सिर माथै सूजो है धारण रै जोग आज्ञामान वेदना टाळे सुख सॉयत पावै सै लोग सूजो जा माजी V बोल्यो थे जावो मॉ उणरै पास था जायाँ ही बात सळटसी मानो थे म्हारी अरदास सूजैजी री माजी हार्ट जसमादेजी हुया व श्री बीकैजी खने कट सूजै री बदळण - बीको बोल्यो उठो सूरमों खोस लेवो गढ करो चढाई जोधैजी रै धाम पधार्यों बीकै री है सब प्रभुताई लूँठो हमलो गढ पर घोल्यो मार काट कर फौज सिधाई बीकै स जैकारा ज्या सूजै री पण फौज कॅपाई खडेकै निरवाण रिड़मले बीकाणे घण कियो विगाइ चीकोजी ले फौज सिधाया रिड़मल भाज्यो नीची नाड़ रिगल गिल हिदाल चढाया रेवाड़ी ३ काँठे आया धीकोजी उठ करण सामनो ले राठोड़ी फौज सिधाया जोधैजी री ढाल Vपदी चीकै रै घाँधी तलवार सगळी चीजाँ इतरी तूंपी पूजनीक ही भली विचार तखत छत्र अर चैंवर सूपिया वॅपी ढाल और तलवार लिछमीजी री मूरत लॅपी नागणेचजी भुजा अठार भेवर ढोल वैरीसाळ-नगारो करेंइ भुजाई दिवी कटार पूजनीक सगळा नग तेहरै घोड़ो दीनो दळ सिणगार पीछे सीख लिवी माजी पाछी फौजाँ लीनी घेर देसणोक करणी कर दरसण गढ़ दाखळिया बीकानेर दूदैजी री मदद करी नर मॉ करणी रो हुकम हलायो बीकंजी कर जतन जावतो मेड़तियो वरसिध छुडायो मार काट तकड़ी घण माची घण तकड़ो राठोड़ी राम रिड़मल अर हिदाल दोऊँ ही के साथै आया काम सवत पनरैसौ इकसठ म आसोजी बद तीज सुनाम राठोड़ा श्री राव बीकोजी सरग सिधास्या पूगा धाम आखी नगरी सोक सॅतापी ऑख्या हुयगी गीलीगार राठौडॉ री पलकॉ सूजी झुर झुर घण रोया नरनार 68 गई भोम रो बाहडू तीजो सरग
No text on this page.
तीजो सरग सवत पनरैसौ इकसठ मे आसोजॉ सुद तीज सँवार श्री बीकोजी धाम पधारया दस कॅवर सँग तज परवार सवत पनरैसौ पच्चीसै काती सुदी चौथ दिनवार कुंवर नरैजी जलम लियो हो रॅगवर रै पेट सॅवार मॉ करणी सिर छत्र धरायो लिखमी नाथ सहाय करी राठोडॉ री फुलवारी ही बीका नगरी हरी भरी सवत पनरैसौ इकसठ मे सुद आसोज पुनम दिनमान नरो राव गादी पर बैठो गढ गणेस मे घण सनमान जन जन गहरो सोग प्रगटियो बीको राव पधारयाँ धाम पग पग धरा ऊजळी धरती अमर नाम घण अमरा काम पण कुदरत री है गत न्यारी नरो उमर थोड़ी ही लायो सवत उणी माघ सुद आठम राव नरोजी धाम सिघायो राव नरो गादी पर आयो बीको राव पधारचा धाम कुंवर नरो बीकावत नामी कुँवर पदों जग पळक्यो नाम सवत पनरैसौ इकसठ मे फागण बदी चौथ सुभवार लूणकरण जी गादी बैठा बीकानेर सज्यो दरबार सवत पनरैसौ छाईसै माघ सुदी दसमी सुभवार लूणकरणजी जलम लियो हो रँगकॅवर रो पेट सॅवार जद हिसार रे कॉठे झॉसै सज राठोड़ी फौज चढाई सारेंगखॉ सू लियो मोरचो मेटण नै अँडी जुलमाई कुंवर नरो बीकावत नामी घुड़ सवार हो इसड़ो भाई नेजै रै पळकार उछलै दुसमणियाँ पर करै चढाई बीकैजी रै ऑगण जायो राव नरै रो भाई है नरै राव रै धाम पधारचा गादी मिली सवाई है उण जुध भिझ्यो नरो बीकावत राठोड़ॉ रो झण्डो गाड्यो कॉधलजी रो बदळो घेरचो सारंगखॉ नै मार पछाड्यो सवत पनरैसौ बासठ मे चैत सुदी चवदस सुभवार देसणोक री करी जातरा लूणकरणजी जा दरबार 71 तीजो सरग बीकाणै री राजगिदी पर मॉ करणी री है घण मर लूणकरणजी ले आसीसॉ आया है गढ बीकानेर नीवत चदळी घणों भोमियाँ भाई बटण घाय अकल सगती राज पाट री टुकड़ा हुँचती जाय आप आपरा पेट सॅभाळे अप सुवारथ सपाय पग-पग राड़ मचावै रॉघड लोक सकटा छाय गढ बीकाणै घुरै नगारा मीठी बॅटै बधाई है मुंआ रावजी गादी बैठा घर घर खुसियाँ छाई है मॉ करणी री किरप घणैरी घण सुध बुध वपरावैली राठोडॉ रा जैजैकारा धर आखी गूंजावैली बीकै री ही माया ठूठी पण अब लूठी नॉय समेसार फटकारो लागै भाग मुँवाळी खाय बीके धरती घणी बधाई राज धरम मन चाय लूणकरणजी रे आता ही सगळी खिडती जाय गाळ जातीवाद पनपग्यो पाछो ढाणी ढाणी गाँव जनखा न→ नयूँ कर नाचै लतुवा सीस उँचाय राज धरम टूटतड़ो लागै राठोड़ा री पाळ ठालॉ भूलॉ तसिया गारों दियो मिनखपण धीकसिघ पूंछडसिघ उठिया जाठा सोट भुंवाय जॅगाळी राज लावणो चावै गॉव उजडता जाय चारण ओक अरज अरपाई करणी दरवार लूणकरण सूतो खूखावै समझ नीद मे सार खूटी ऊपर टॉग दिया है नेज ढाल तलवार जुलम्या जाग हुई घण जाग्या कर जुलमा वधवार सीस सॅभायो घणाँ भोमियाँ सीवॉ मे ह्साय राज तेज बिन हुयो भूथरो जनता घण दुख छाय भोम माफिया बदळत दीसै लूटपाट कर खाय चामेर असॉयत पसरी जमी दाबता जाय जनता रै तळतळियो तसियो दिन दिन बधतो जाय लोग लुगाई घण अणभणिया टाबरिया दुख पाय के करणी सू चूक हुई है के कुदरत री काण के रावळ रुळियारों रूळगी रजपूतों री आण 72 गई भोम रो बाहडू करणी हेलो दियो लूँणसी सूतै लूणकरण नै आय बीके रो परताप मिटावै गढ मे क्यूँ सूतो खूखाय बीको राज चलोतो इसको चालै ज्यूँ सुराज गणराज तन मन धन जन हिताँ निरमळो सबळो सदा सुरण्या काज माँ करणी खुद हुकम सुणायो लूणकरण उठ फौज सँवार जनहित मे कल्याण वासतै नेजो उठा ढाल तलवार लूणकरण झट उठ्यो सौंभळयो सिध्यो बध्यो ले फौज सँवार घण दसलों में काबू करिया पेलै ही भचकै कर वार सवत पनरैसौ छासठ मे ददरेवै चढ दमन करायो दबा दियो विदरोह साँवठो मानसिघ चौहान हरायो सात मास लड़कियो सामनो मानसिध चौहाण डरायो छुट भाई घड़सी रे हाथों मानसिघ रणभोम मरायो नगर फतैपुर मे दौलतखों और रगखाँ नितरा भिड़ता सदा जमी रो झगड़ो झोयाँ रोज क्यामखानी ऊळझता बीकाणे री परधा मॉही समैसार उतपात करॉता घण दोसी दसला उमरावाँ लूँट माल ले सरण दिरॉता सुण लोगां री पीड़ मिटावण लूणकरणजी फौज चढाई घेर फतेपुर नगर मिळायो राठोड़ा री फिरी दुहाई सवत पनरैसौ गुणतरै जीत फतेपुर सघी कीनी गाँव एक सौ चीस भेट ले पाछी भोम फतैपुर दीनी चायल राजपूत विदरोही सीवों पर उतपात मचाँता घण दसला नै पाळ चायला भारी लूँट पाट करवाँता लूणकरण ले फौज सिधायो चायलवाटी पर चढ धायो चढ हिसार सरसै ३ कोठे गाँव चारसौ चाळिस लायो राव लूणसी जीत जुधाँ मे जितरा गॉव फॅटाया है हाथो हाथ मिला रजवाई घण परवध बँधाया है सवत पनरैसौ सितर मे काँई कुमतड़ी केठा आई महमदखौँ नागोरी सासक गढ बीकाणै करी चढाई लूणकरण जी करण सामनो घण रण रूड़ी फौज सजाई आधी रात कियो चढ हमलो पण नागोरी फौज भगाई महमदखॉ घण घायल हुयग्यो घायल हुय नागोर भजायो लालम लाल लोही सूं लथपथ सिर धुण धुण मन पछतायो तीजो सरग 73 समसार गागो चढ आयो अवसर लख जोधाणो राव गह नागोर घेर कबजै मे लूँठो राव मारियो दाव महमद अरज करी बीकाणे लूणकरण से मॉगी साय सेना सज चढ गया रावजी पाछा आया मेळ कराय सवत पनरैसौ सितर मे लूणकरणजी रचियो ब्यॉव महाराणा चित्तौड़ रायमल अपणी बेटी दी परणाय सुणों भेक लालो चारण हो जैसळमेरॉ कियो प्रवास रावळ जैतै हँसी उडाई राठोडॉ री लैण तपास रावळ जैतसिघजी बोल्या तानो मार कियो अभिमान जितरी भोम फेरदै घोड़ो राठोड़ॉ ने करवू दान लालो पाछो धिर बीकाणे लूणकरण सू मिलियो आय करी बात जेसाणे रावळ ज्यूँ री त्यूँ कह दिवी सुणाय राठोडॉ झट मूंछ मरोड़ी रावळ री है काँई मजाल राठोड़ी रण री झळ झेळे भाजण मे नॉ लगसी ताळ घण लूँठी राठोड़ी सेना साध सिघायो लूणो राव चढ जैसाणे करी चढाई झटपट मारयो लूँठो दाव 74 गई भोम रो बाहडू जैसाणे रै रावळ जैते सेना आधी रात सजाई घणे गुमर हमलो वोल्यो राठोड़ी सेना पर धाई पण राठोड़ी सेना आगै रावळ नॉ टिकियो छळ छाय जीवतड़ो रावळ अपड़ीज्यो छूट्यो धीवड़ियाँ परणाय लूणकरण रा बेटॉ सागै धीवड़ियाँ परणाई ही घणो मोकळो दियो दायजो आछी सीख दिराई ही लूणकरणजी सीख लेय फिर पाछा आया बीकानेर राव सीव विसतारण लाग्यो ठौड़ ठौड़ चढ घेरा घेर कॉठळियो बागड़ियो नरवद डीडवाणियो लियो सिवाण नारनौल पर करॉ चढाई सेना आगै करों प्रयाण पण थकिया केई रणबका लैण चाय गढ मे बिसराम घण लेता सिरदार विमुखिया छुट्टी दुरग्या थान मुकाम सवत पनरैसौ तैयासी राव लूणसी फौज सजाई नारनौळ पर चढती वेळा करणी खुद बीकाणे आई लूणकरणजी दरसण करणे श्री करणी रै डेरै आया जद करणी फरमायो लूणा नारनौळ पर चढ मत भाया पीछै फौज बधाई आगे डेरा दिया द्रोणपुर जाय द्रोणपुरै सँ फौज चढाई ढोसी में पग लिया जमाय नारनौळ झें तीन कोसौं उरियाँ डेरा लिया लगाय समचार सुण सेना आई नारनौळी कॅपाय नवाब नारनौळ पर जा चढणे रो समै ठीक ही नहीं अवार पण मानी नौँ राय रावजी करण चढाई हुयग्यो त्यार नारनौळ चढणे रा दिनडौँ जैतसिंह पर घर्गों विराजी लूणकरणजी चढती वेळा की नौ बोल्या हुया न राजी करणी बोली लूणकरण हूँ नारनौल पर चढणे धीजै म्हारी बात मान चढतों ही जैतसिघ मैं की तो दीजै राव चोलियो जैतसिघ नै हूँ काँई देॐ औ भाठा करणी बोली बस अब लूणा मिलै जैत ने ही मै भाठा घणी जाणती खुली खुलासा करणी सब भविष्य री बातों गिरह नखत काळ री भापा अर जीवण पर हुँचती धाता हूँणहार नाँ टळे रावजी इणी बात मैं नाँ जाणी दरसण कर गढ मे आया है बैठ पियो मीठो पाणी श्री करणी बैली जुतवाई देसणोक मढ गई सिधार नारनौळ चढ लड़सी भिड़सी लूणकरण ली काठी धार नारनौळ पर करण चढाई लिवी लूणसी निसवै धार बीकाणे सू चढ्या रावजी पूण्या देसणोक दरबार कछावा अर तँवर कोपिया डर छायो मनड़ा रै माँय लूणकरण री सेना ठूठी रण रैगियों झळ झलसी नाय समझौते री बाताँ चाली नारनौळ रै मीर नवाब पण मानी नौ अक रावजी हमलै री घण मारी दाब कल्याणो बीदावत भाटी हरो जोइयो तिहुण पाळ चौथो राय मलो सेखावत च्याराँ रळ मिळ गूंथ्यो जाळ कर नवाब + गुपत बारता दियो हूँसळो घणो बधाय नेम धरम V वाचा दीना लूणकरण री फौज मिळाय भगी घातसॉ रण मे लड़तों सेना री तोड़ॉला धार फौजॉ मे भगदड़ मचजासी लूणकरण नै लेसाँ मार उदैकरण भिळ आयो फौज मे तिहुण पाळ तूं राय मिलाय और हरै भाटी नै अपणे सागै कर लीनो समझाय तीजो सरग 75 पीछे से तीनूं ही मिलिया मिल नबाब सूं बात कराय ऊंडी घात विचारी सगळाँ भेद कठे भी खोल्यो नाँय दूजै दिन नवाब सॅभ आयो लूणकरण रै डेरै मॉय और रावजी साथ सारै उठ मिलिया की सामा जाय अचाचूक ही मची लड़ाई दोनॅ फौजॉ भिड़गी आय आमा सामा घोड़ा उछळ्या सूरवीर तलवार बजाय लूणकरण री फौजॉ भागी अचाचूक भगदड़ मचवाय दगो करणियाँ दगो करायो छळ बळ करता चूक्या नॉय लूणकरण रो लसकर टूटो छळगारा भाज्या छल छाय राठोडा लडभिड घण खपिया जुध जीतण पण नही उपाय तलवारों री पड़ी चौकड़ी राव लूणसी गया घिराय घोड़ा कटग्या तीन राव रा फिर पाळा ही लड्या भिड़ाय घणो लोक मरियो इण जुध मे दोनों पासी नास मिलाय राव लूणसी घायल हुयग्या अण गिणती रा घाव लगाय सवत पनरैसौ तैयासी सावण बदी चौथ दिनवार ढोसी गॉव रया रणखेतॉ लूणकरणसी सरग सिधार रगांवर रो दूधो त्रुग्यो रग रग रे रग सवाय बीकैजी रो वस बंधायो राठोड़ा जैकारों छाय बीकानेर सवाया रगाँ धिन धिन लूणकरणसी राव जलम भोम री रखवाळी में धाम पधारयो घावोघाव लूणकरणसी धाम पधारयाँ लूणकरण सुत जैतो राव बीकाणे री राजगिदी पर आयो वीर राव पद पाय लूणकरणसी दानी मानी वीर साहसी बाप समान बीकै रो परताप वधायो राठोड़ॉ रो विकस्यो थान घण उदार गुणियाँ रो गाहक राव प्रजापालक हो जाण दानसीळ दातार सूरमो कळजुग रो हो करण सुजाण बारै पुत्र सूरमा जलम्या जलम भोम रो सुजस सवाय राव लूणसी धाम पधारचो सुरग सिधायो रण रॅग छाय करणी धिन धिन कह आसीस्यो जियो जितै सिर छत्र धराय जनता री सेवा घण साधी सुख सॉयत री साख बधाय लूणकरणसी सागै जुध मे वीर अनेः आया काम कुँवर प्रताप नेतसी जूझ्या वीर वैरसी सिधग्या धाम पोहित देवीदास सिधायो रणभोमी मे आयो काम नारनौळ रै रण मे जूझ्या गया लूणसी सागै धाम 76 गई भोम रो बाहडू चौथो सरग
No text on this page.
चौथो सरग तुरता फुरत द्रोणपुर भाज्यो कल्याणो गढ बैठ्यो जाय धरक जमारो काची ताकी बीकाणो लैवणग्यो धाय सवत पनरै सौ छैयाळे काती सुद आठम दिनमाण लूणकरण बीकाण राव रै ऑगण जलम्यो जैत सुजाण धिन राणी लिखमॉदे सोढी जैतसिह जायो रणवीर दानवीर दातार सूरमो मिनख धरम पाळक हो धीर जैतसिह रै मन रो कॉटो हूँ क्यूँ बणियो घण पछताय म्हारी के कूबत बीकाणो राज ढाबलू सेन सजाय सवत पनरैसौ तैयासी सावण वदी अमावस वार लूणकरण सुत वीर जैतसी बीकाणे ली गादी धार सवत पनरै सौ तैयासी वद बैसाख चौथ दिन छाय लूणकरण रणखेत रळायो लड़ ढोसी मे घाव लगाय लूणकरण जी धाम पधारयाँ जद मिलियो गढ समचार तुरत नगर री करण सुरक्षा सभ्यो जैतसी ले तलवार लूणकरणजी धाम पधारचाँ राव जैतसी पाट बिराज्या गढ मे राज तिलक री वेळा मगळ साज नगारा बाज्या जैतसिह गढ कडो घिरायो सँग सेना चौकस हुसियार कल्याणो बीदावत आयो चढ गढ पर करणे अधिकार निजरॉ निरख जैतसी देख्यो द्रोणपुरी कल्याणो आयो नस नीची कर घणो लजाळू हाथ जोड़ियाँ घण सरमायो पण जैतै री त्यारी नै लख सॉयत धार लिवी मन मॉय सोग करण बतळावण मानै बीदावत दी बात फुराय कल्याणै रो अपजस छायो गढ मॉही जाणै सै लोग मुंह काळो कर आ ऊभो है बिना बुलायाँ कर घण सोग राज तिलक री रीत पूरियाँ राव गया करणे विसराम कल्याणै । मुख नाँ बोल्या जद वो गयो आपरै धाम गोडा बोळावण हित आयो सो तो बात लिवी मै जाण सावधान अब जैतो आएँ घणों दिनों मै राखी काण चौथो सरग 79 गाजाँ बाजाँ ढोल ढमाकाँ गढ गे गूंज नगारा छाय मिडत विरम पुजारी सगळा चिरजीवी आसीसाँ पाय भाई चधू सगा सबधी सॉवत सरव सभासद आय राव जैत मैं देवै बधाई मगळ भाव सकळ प्रगटाय पीछ राव गया देसॉणे मॉ करणी रै धाम सिधाय दरसण मेळा किया भलैरा ली आसीस सवाई छाय सुभ सुगना । सीख लैवता गढ बीकाणे दुरया सिधाय भल परवेस्या गढ गणेस मे राती घाटी पीछा आय सवत पनरैसौ पिचतरै माघ सुदी छठ सुभ दिनमाण राव जैतसी रै ऑगण मे लीनो जलम कॅवर कल्याण धिन सोढी राणी कसमीरॉ ऊजळ फूख जण्यो कल्याण थाळ्याँ भर भर बॅट घूघरचा बोस्यों भर भर सुभ नारळ गढ़ मे नार धेनडिया गावै खुसियाँ री है रेळमपेळ गढ रखवाळा भाई भतीजा खाय मिठाई कर कर केळ लोग लुगाई दैण बधाई गढ गणेस मे धूम मचावै धेनड गीत बधावा गावै गुड री भेल्याँ घणी बॅटावै कोड करै आखो बीकाणो आखी धरती मे सुख छावै पग पग जतन गॉव ढाणी मे डागलियों चढ थाळ बजावै राव जैतसी मन मुळकावै साई बधाई घणी बॅटाय लोग लुगाई टाबर मुळकै हरख हरख सगळा हरखाय माँ करणी री मेर घणी है मन मुळकै सिर छत्र घराय राज तेज रो तिलक करती राखी मोळी हाथ बँधाय समझी राज काज री नीती सब मुसक्या तूं राय मिलाय धीरे धीरे राज काज नै घण आँकस मे लियो कसाय अरथ तत्र रो रूप परखियो आमद खरच बही सब देख लेखो लियो सभा मे बैठ्या आज तॉई रो सगळो लेख गॉव गॉव री करी जातरा ढाणी हाणी निरख सवाय कुण लतुआ चौक्यों पर बैठ्या मद छक चौकी राज चलाय दसला दोखी जनखा जोखी कुण जनता नै दुखी कराय राज सभा मे लेखो देवै हाकम मुसी सब बतळाय सवत पनरैसौ चौरासी राव जैतसी सेन सजाय कल्याण बीदावत माथै हमलो कियो द्रोणपुर जाय 80 गई भोम रो वाहडू कल्याणो बीदावत भाज्यो लुकतो छिपतो जान बचाय जाय लुक्यो नागोर खान रै लियो आसरो घण डरपाय कर कबजो अधिकार द्रोणपुर वीर जैतसी लियो सँभाय बीदै रै पोते सॉगै नै दियो द्रोणपुर थान सुपाय राव जैतसी सेना साजी सॉगै नै दळपती बणाय भेज दिवी सिधाणकोट पर तिहुणपाळ पर दिवी चढाय राव जोइयो तिहुणपाळ हो लुक छिप भाज्यो रातो रात गढ भाँग्यो सिघाणकोट रो सॉगोजी जीत्या परभात फिरी दुहाई जैतसिघ री बीकाणै री जै जैकारी मॉ करणी री जै जै बोली राठोडॉ री जै जैकारी भाई बधू सगा पिछाण्या सीसकटी रा सॉवत जाण जनता री रक्षा मे जूझ्या सेना नायक सकळ सुजाण सीवॉ री रखवाळी निरखी परख्या सब हाकम सिरदार जन जन सू भेटा कर जैतै गाँव गाँव तूं ली मनवार करणीजी सदेस भिजायो धिन जैता तूं भलॉ विचार धिन धरती सूं नेह जतावै लोक राज री आही कार कुआ बावड़ी ताळ तळायाँ पग पग पणघट प्रगटै प्यार ढाणी ढाणी गॉव नगरियाँ मिनख घरम री जै जैकार दसला जनखा पळे न कोई उठतॉ सीस कुवळ दै जाय वो राजा ही सदा सनातन म्हारी इण परघा रै मॉय बिजै कियो सिघाणकोट नै राव सिधाया बीकानेर गढ परवेस्या खुसी मनाई सेस जातरा करस्याँ फेर देसणोक जा मॉ करणी रा दरसण करिया जैतैराव की थोडॉ दिन कर विसरामो आसीसॉ ले चढिया राव किरसाणा से करै किलोळा ऊभा खेत खळा रै मॉय धन धरती सगळी ही नापी राज सीव मे जिकी समाय पछै राव गढ कोटा आया आय कियो की दिन विसराम राती घाटी मे गणेसगढ सुख मे फूलै सदा सिलाम गढ बीकाणै आ परवेस्या मन मे घण परमॉणद छाय सेस जातरा पछै करॉला मा करणी रै धोक लगाय लोक सभा मे बैठ जैतसी जन सुख दुख री पूछै बात पूण करै जनखापण माडो करै कबाड़ॉ हूँ जनघात चौथो सरग 81 गाँव गाँव तूं आवै जातरी गह गणेस देखण नै आय राती घाटी री माटी पर मॉड मॉडणा गॉव सिधाय गॉव पचोटा केई आवै राज सभा रा दरस कराय आप आपरी अरज करावे मॉग बतावै गढ मे आय श्री सूरज नै अरघ चढ़ावै राव जैतसी जळ री धार सुभ कासी रो थाळ बाजियो झणक उठ्यो झण झण झणकार बालो पॉखों बारै आयो धन्य धन्य सुभ घडी सुजाण धिन सोढी राणी कसमिरदे मुळकी सरब गुणों री खाण सवत पनरैसौ सिततरै सुद आसोज दस्यू सुभ छाय राव जैतसी रे ऑगणिय भीवराज प्रगट्यो सुत आय आण माण मरजादा पाकै गीत हरख गावै गढ नार दसू दिसावाँ हुयो चॉनणो सूरज जी री साख सॅवार दोलण ढोल बजावै गढ मे मीठो मगळ गीत उमेर हरख कोड हरखावै सगळा गढ मे गूंजै मीठी भेर भीवराज जलम्यो कुळ तारू सूरज जिसड़ो लिया सरूप भळकै भाल अधर मुळकावै रंग रूप मे सुघड़ अनूप 82 गई भोम रो दाहडू राती घाटी आज महकमी गढ गणेस हरखै धीकाण घर घर मीठी बेटै बधाई ज्यूँ राठोड़ कुठौं री काण जोसी खोल टीपणो बाँच्यो गिरह नखत सुभ भाव सेंजोग ख्यात बात इतिहास मॅडासी सौ बरसॉ जीवै सुख भोग दळपतियो दळबळ दरपासी छतरी घरम निभासी आण दीन दयाळ दरप दुख दळसी दस दिस सरव सवायो माण सुगन सॉतरा सरब सॉवठा सुजस सपसी सुभ सिरमोड़ स्याम धरम कुळ वस उजळसी माया बधसी लाख किरोड तपसी सूरवीर अवतरियो सदा बधासी कुळ री साख टिकै न सामा हार भाजसी दुसमण दोखी लाखोलाख पग पग विजै पताका फहरै होदै पासी माण कदै न त्यागै साच सतोमत सकळपी राठोड़ी आण बडॉ बडॉ री मदत करैलो सूर घणै सकट मे जाय जुध भोमी मे लडै सूरमो इसो तेज प्रगटियो आय घोड़ॉ रो घण हुवै पारखी रण जीते घोड़ॉ असवार राठोड़ॉ रो माँण बधासी नेजा ढाल सजै तलवार सवत पनरैसौ चौरा" चैत वदी दूजॉ दिनमान करणी हाथ गुंभारो चिणियो बिना तगारी चिणियो थान जाळॉ री लकड़ी छत छायो अजब देवरो लियो चिणाय आप श्री करणी सॅभ दुरगी जैसळमेरॉ गई सिधाय गॉव जॉगळू रो विसनोई सारॅगियो हो सागै अक गाडै रो खाईती लूँठो मिनखॉ मॉय मिनख हो नेक सवत पनरै सौ पिचियासी मिगसर बद सात्यूँ सुभवार राव जैतसी गयो जोधपुर राव गॉगै री मदत पधार सेखै गॉगै वैर वधायो सेखो आयो सेन सजाय सरखेळो दौलतखाँ सागै मिल गॉगै पर चढिया धाय राव जैतसी अर गॉगोजी रलमिळ चढिया सेन सजाय सेखै री सेना रौँ भिडिया सेखो पड़ियो घावोघाव मरतॉ सॉस उपरला लेता सेखो बोल्यो वचन उचार जैत राव थारो के खोस्यो क्यूँ करियो थे म्हॉ पर वार जमी कारणे काको भतीजो म्हे लडता हा म्हारे वार मो गत हुई थॉरी गत हुयज्यो अखी नही कोई ससार इतरी कह सेखोजी पौढ्या दोऊँ नेतरा लिया तिरेड़ सेखो धाम पधारयो लडतों रण भोमी मे रळग्यो खेड़ सेखै रा कर ससकार सब डेरै जा जीमण मनवार भोजन भेळा बैस करायो घणो दिखायो सिसटाचार गॉगोजी सेखै सँ बोल्या भेवर घोड थॉनै दूँ भेट थॉरी मदत जोधपुर रहियो अरज सॉभळी ठेठमठेठ जैसलमेर जैत रावत री घण गळगी काया री चाम सकळप लियो जातरा करतूं देसणोक करणी रै धाम पण करणी लख भाव भगत रा जा पूगी खुद जैसलमेर रावळ अक मॅजळ दुर सामो दरसॉ आय भाव भर खैर करणी फेरचो हाथ किरप रो कचन हुयग्यो जैत सरीर रावळ कयो मात हूँ आसू देसणोक दुर जात बहीर करणी बोली जात सफळ है हूँ खुद आई होय बहीर थारै भाव भगत घण राजी कचन काया कियो सरीर जय करणी माँ थारी जै जै घणे भाव तूं कर जैकार रावळ साथ दुरया करणी रै पाळा ही करता जैकार चौथो सरग 83 पीछै रावळ ले करणी नै जैसळमेर गढॉ मे आया दिन पनरै राख्या करणी नै भाव भगत सुभ दरस सवाया चले अक ऑधो खाती हो असी बरस ऊमर परवाँण करणी बोली मूरत घड्दै तू म्हारी काया मुजवॉण माता हूँ ऑधो कारीगर बूढो हूँ पण भेक सुथार हूँ फूंकर घड़दूं मूरतड़ी थॉरी ही काया री कार करणी कयो जोय म्हॉ सामो सुण सुथार तूं निजर पसार जद सुथार जोयो हुय सामो ऑख्या पळकी जोत भरार आघो हुयो जाळ ऑख्या रो निजर हुई बाळक री कार श्री करणी री खैर मनाई लुळ लुळ दीनी धोक सुथार पछै घडी मूरत करणी री उण काया रै ही परवॉण करणी जा खारो. देवळ पॉच दिनॉरी बण महमाण पीछे गई बैघढी करनळ हरबूजी रै पूगी गाँव घण मनवार करी हरबूजी हरबू जिसो बिसो ही नॉव करणी बोली सुण भाई हरबू कर सतोस घणो धन सार हूँ राजी घण आज हुई हूँ ले थारी भीठी पछै गाँव गड़ियाळे पूगी सूर उगाळी रै ही साथ गड़ियाळे मे खुदी खराइयाँ ढवी तळायाँ माथै मात गाडै तूं उतरी करणीजी जद पूछी सारेगियै बात अठै सून जाग्याँ म मायड़ के कारण क्यूँ उतरी मात पीछे मार झबोळो धैठी ध्यान मगन करणी माँ आप आपो आप अगन झल निसरी गई जोत सूरज मे थाप सवत पनरैसौ पिचाणमै चैत सुदी नोमी गुरुवार देवी करणी देह सागी परम धाम मे गई सिधार जैसाणै रै रावत देसणोक पूजा भिजवाई अरु रूपै रो तोरण भेज्यो आछी भाव भगत अरपाई बो बूढो सुथार खुद आयो देसाणे मूरत घड़ लायो भाव भगति आछी दरसाई मॉ करणी रो हुकम हलायो सवत पनरैसौ पिचाणमै चैत सुदी चवदस सनिवार देसणोक गूंभारै मॉही देवळ थरपी भलॉ विचार देसणोक दस फॅटो जग में नामी है करनळ रो धाम मढ मॉही थापी किनियाणी सकळ लोक रा सारै काम जैतै मनवार 84 गई भोम रो बाडू राठोड़ॉ री कुळ देवी है बीकै पर राखी घण मेर दएँ पूँट आवै जातरी धिन देसाणे बीकानेर नागफणी पर कलम भीवरी तीखी चालै कलम कटार भीव भ» सागर री पाळा धिन करणी री किरप अपार म्हों पर भी करणी री किरपा उपरी मेर मनावा खैर जीवण री हर घड़ी ऊजलै मन मुळकै आणद री लैर सुरसुत मात सारदा सिवरूँ खुलॉ कठडॉ गाऊँ गीत छोळमछोळ गुंजावै धरती पग पग मॅडसी म्हारी जीत गीत श्री सूरज जी री साख रौ सवत पनरैसौ चुराणमै चैत बदी दूजळ सुभवार देसणोक मढ बिना तगारी करणी हाथों चिण्यो गुंभार जाळॉ रा लकड़ा धर माथै मढ री छात मॅढी गिगनार ध्यान जोग घण करी तपस्या ॐडी झंडी ओम उचार चारण भगत बजै भारी पण सेवादार कोई नाँ लीनो के कारण की समझ न आवै मायड़ कोई न परचो दीनो रावळ जैसळमेर जैतसी घण पीडीज्यो पीड़ चिराय बिना बुलायाँ जा परचायो हाथ फेर दी पीड़ मिटाय गड़ियालै री खरड तळाई मार झबोळ समाध लगाई ध्यान जोग अगनी लपटाई श्री सूरज री जोत समाई सवत पनरैसौ पिचाणमै चैत सुकल नवमी गुरुवार मिली जोत मे जोत परम प्रभु श्री करणी जी धाम सिधार समसार साध्यो श्री करणी बरस भेक सुभ सारमसार ऊँडै मन मे मतो उपायो जैसळमेर सिधावण धार गाडै रो खाईती सारंग भोम जाँगळू रो बिसनोई गाडो जुपा टोरियो सागै भाव भगत दुरियो सँग सो ही सारॅगियै विसनोई सागै करणी जैसळमेर सिधाई चारण कोई न सागै लीनो मन समझ कोई अवखाई आखर दरसण लाभ कमायो अतस सारॅगियै बिसलोई श्री सूरज री साख खड़ी है विधि नै टाळ सकै ना कोई चौथो सरग 85 धरम धार धणियाप न अकळ सरबजात सनमाण समरपै दसू दिसावॉ दस दरवाजा भीव भगत ध्यादै सो सपै चढा फौज लाहोर नगर V चढ्यो कामरो गढ भटनेर तगड़ी फौज चढा छाती पर घेर लियो गढ चामेर ऑधी ऑख्या दे परचायो हियै चानणो कर सरचार हाथों मूरत घड़ी अनोखी असी बरस रै बिरध सुथार खेतसिघ काँधल रो पोतो रखवाळो हो गढ भटनेर ले तलवार खेतसी लड़ियो राठोड़ी सेना नै लेर तीर तोप गोळॉ री बिरखा करी कामरै गढ भटनेर मुगली फौज घणी भा ही घण बिछग्या लासॉ रा ढेर सवत पनरैसौ पिचाणमै चैत सुदी चवदस सनिवार उतरा फाळगुणी सुभ नखतर मूरत धर थरपी गुभार देसणोक मे सज्यो देवरो श्री करणी रो धाम सजाय अणगिणती नरनार जातरू दरसण लाभ लेवै हरखाय नाग फणी पर कलम भीवरी खुलॉ कठडॉ गावै गीत भीव भणै सागर री पाळॉ छोळमछोळ गुंजावै गीत तुनतुनियो बाजै रे भीव रो तुनतुनियो बाजै कर केसरिया बागा कूदया खोल दियो गढरो मुख द्वार घण राठोड़ा लड्या सूरमा लपक लपक चालै तलवार मुट्ठी भर राठोड़ी सेना जलम भोम हित दे बलिदान आन बान राठोड़ी राखण गजब लड़ी रण रै मैदान कचरघाण लोही सू लथपथ मरया घणों ही मुगल पठान खेतसिघ तलवार भिळायो धाम सिधायो रणरॅग धान साह बाबर रो पूत कामरो सासण करतो हो लाहोर पग सीवॉ पसरावण चाल्या जग मे आप जतावण जोर आखर गढ लेलियो कामरै मुगल फौज री हुयगी जीत गढ मे बड़ घण गोठ रचाई पण मन मे हा घण भभीत बधा हुँसळो चढ्यो कामरो गढ घेरायो बीकानेर राती घाटी गढ़ गणेस पर बजा बजा भारी रणभेर सवत पनरैसौ पिचाणमै चढ्यो कामरो गढ भटनेर इणी बरस मे धावो बोल्यो गढ गणेस चढ बीकानेर 86 गई भोम रो वाहडू जैतसिघ नै भेज्यो सनेसो हुयजा तू म्हारै आधीन गढ मे फेर दुहाई म्हॉरी मॉड मान म्हॉरी आईन क्यो जैतसी दियो पडूतर बीकै रै वसज अनुसार जाय कामरा नै कहदीजो जो करणो कर धार विचार अठै नही काकड़िया कॅवळा खाय गादड़ा जीभ पलार राव जैतसी लड़णो जाणै राठोड़ॉ री फौज सजार मलीनाथ सातळ राठोड़ा रणमल जोधा वीर सुजाण लूणकरण दूदा गाँगा ज्यूँ बीका भान्या मुगळ पठाण बाही काण कणूक म्हॉ मे वाही है राठोड़ी आण राव जैतसी भी उण भॉती गरव गाळसी थारो जाण दूत लेय सदेसो मुड़ियो कयो कामरै नै झट आय दियो फौज नै हुकम कामरै करो वार नाँ खाली जाय राव जैतसी जिदो पकड़ो इण मे जाणो जीत सवाय देखाँ पूँकर गरब गळासी घण राठोड़ी सेन सजाय जुध रा बाजा घणाँ बाजिया दियो कामरै हुकम सुणाय हलचल मची फौज मे भारी पण मुगलॉ रा पाँव कँपाय सामै दीसै आग उगळती लादाँ लती गढ रै मॉय राठोडॉ रे जैकारॉ मे राव जैतसी री जै छाय जैतसिघ चेत्यो झटपट ही सिरदाराँ सँग कियो विचार अकर आपा लेवाँ पछेती गढ तूं बारै करों किनार राती घाटी छोड़ सिधाचा गढ नै करदाँ खुलो खुलाय आस पास मैदान सॅभाळा फोगाँ मे लॉ फौज बिछाय मुगळॉ नै गढ मे आवणदाँ जसन मनासी गोठ करासी दारू पी-पी मौज करैला गढ जीत्या री खुसी मनासी आधी रात ढळयॉ आ घेरॉ मुगलाँ नै गढ मे दॉ मार मॉ करणी रो हुकम ओही है मुगल भाजसी जासी हार राठोड़ॉ री फतै हुवैली मुगल मरैला घण गस खाय भलेन आवै कदै कामरो राती घाटी मे चढ धाय भोज राज रूपावत रैसी की राठोड़ी सेना साज मुगल फौज V लड़सी भिड़सी भगी घालसी रण रँग गाज सवत पनरैसौ पिचाणमै सुद आसोजी छठ दिनमाण साह कामरै हमलो करियो बीकाणे घेरो ताण गढ चौथो सरग 87 लूठी फौज सजा घण आयो ससतर पाती तोप सवाय आग उगळता गोळा फैकै तीखा तीर बरसता जाय मिली सूचना जैत राव नै राव गया देसाणे धाम करणी जी रै Dभारै मे हाजर लुळ लुळ अरज कराय राती वासो दियो राव जी करणी ऊभी चक्र चलावै करणी ही बीकाण रुखालै करणी दुसमण मार भगावै मॉ करणी दिसटॉग दियो है राव सामनो करी पछेत दुसमण नै गढ मे रोडीजे पछै रात नै राखी खेत गढ पर विजे कामरो समझे मुगल फौज गढ मे चड़ छासी बजा जीत रो भेर नगारो मन मुळकाय मगन हुय जासी मुगली फौज जीत मे पागल जसन मनासी गोठ करासी दारू पी-पी हुसी बावळा गढ जीतण री खुसी मनासी आधी रात ढळ्या आ घेराँ दारू रा मतवाळॉ छावॉ अचाचूक हमलो कर आपा मुगलॉ री छाती चढजावा हर हर महादेव कर आपॉ राठोड़ॉ री सेना साज आधी रात पछै गढ माथै टूट पड़ॉ आपाँ सब गाज आपॉ हुया सगवित आसाँ राठोडॉ री फौज जमात पकड़ कामरै नै रण राखा मारॉ ऊगत. परभात मतो उपायो पूरो करियो छोड दियो गढ जैतै राव आस पास जगल मे डेरा घण राठोडा फौज सॅभाय मुगली फौज किलै मे बड़सी जसन मनासी फिरसी गैळ घण मतवाळो हुवै कामरो दारू पी-पी रेळमळ करणी री किरणों नाचैली करणी लडसी हाथ हजार मुगली फौज हुवै चमगूंगी इसी पई करणी री मार पझ्या पड्या सूता रैजासी साह कामरो जासी हार भळे कामरो कदैन आवै गढ़ बीकाणे रै दरबार राठोडॉ री जीत हुवैली म्हारी है आसीस सवाय थारी सेना करै रुखाळी माँ करणी सिर छतर छवाय औसर जाण कामरो चढियो गढ गणेस पर धूम मचाय मुगली सेना बड़ी कोट में हुई जीत रो ढोल बजाय गढ गणेस पर धावै चढियो गयो कामरो गढ रै मॉय सूनो गढ देख्यो जद जाण्यो राठोड़ा डर गया भजाय 88 गई भोम रो बाहडू चामेर खून मुगल घणैरा काट नॉखिया रा खाळ लाय पळीता लगा किलै मे केई जीवता दीना बाळ मार काट सू डर राठोड़ा कोसॉ कोस भाजग्या दूर गढ छोड्यो बनवास करण नै जैतसिघ हुयग्यो मजबूर सूनै गढ मे बढ्यो कामरो मुगल पठाणी सेना छाय मार काट डरग्या राठोड़ा जाण्यो दीनो राज भिळाय गढ मे लियो रात वासो कर मुगली फौजाँ गोठ जिमाय दारूड़ी पी हुया छकाछक गहरा गैळीज्या गढ मॉय केई मुगल उघाड़ा भाज्या खाली कछियाँ भाज्या जाय फोग बॉठकॉ मे फॅस मरिया मरचा खोड में भटक तिसाय लुकतो छिपतो निकळ कामरो भीतॉ कूद गयो गढ बार मुठियाँ भीची दिया ततैया साथै हा सैनिक नग च्यार खुद बेचैतै ससतर पाती पझ्या कठे ही आप कठे ही पझ्या सँसाय हुयो कामरो घोड़ा ऊभा पूँछ हिलाय गढ मे जाणे सोपो पड़ग्यो गैरा गैळ्या मुगल पठाण दारू री भभकार उठी है सोयो कामरो ठूटी ताण आधी रात ढळी घाटी जद राठोड़ा आया गढ धाय मार अचाचक हमलो बोल्यो मुगलॉ री सेना पर छाय मार धाड मे मुगल घिराया तलवाराँ री भारी मार नेजावॉ री बॅधी चौकड़ी निकळण रो नॉ दीसै द्वार चेताचूक हुया की मुगला उछळ कूदग्या आधी रात ससतर पाती हाथ न लाग्या धूजण लाग्या सब रा गात मारग भटक्या खोड रळाया मुगल भाजिया नाठा जाय सीस कामरै रै साज्योडी पड़ी किलगी झोला खाय सोधी पण सोधी नॉ लाधी रळी धूड मे दबकस खाय प्राण बचावण री लागी ही छोड़ किलगी नाग्यो जाय लाधी कदै अक चारण नै दियो छोटड़ियो गाँव बसाय ख्यात बात इतिहास बखाणे लोग लुगाई सै बतळाय जा लाहोर कामरो थमियो जीती बाजी पूग्यो हार प्राण बच्या पण खैर खुदारी कदैन खाई इसड़ी मार लातों खाई बचण तलवारॉ री धार गढ पिछवाड़े री मोरी हूँ पड्यो कूदणो मरण विचार चौथो सरग 88 थापा मुक्का बारी बारी पॉच कूदिया प्राण बच्या भज आया हॉ तिसॉ मरतॉ खोड़ॉ भटक्या घण भूखा घण धायाँ हाँ लुकता छिपता घणा दिनॉ फिर गढ लाहोरॉ आया हाँ इसड़ी मार पड़ी बीकाणे गपतागोळी खाया हाँ धावो घाव हुया घण मुगला गढ घाटी में बिखरया है घण लोही रा खाळ खिडाया पग-पग माथै छितरया है राती घाटी लाल तळाई इसा घणा सैनाण पड्या फोगा-बोझॉ सई लासड्यॉ राठोड़ा इण भाँत लड्या मार पछेती लड़या सूरमा बरसॉ घणों गूंजसी गीत साह कामरो इसो भाजियो राठोडौं री नामी जीत तीर तोप तलवारॉ गोळा गढ़ गणेस मे रहग्या लार जीण कसाया पूँछ हिलाता घोड़ छोड आया गढ़ बार फौज कटी घण मुगल पठाणी धन माया सब रैगी लार लूट पाट रा हीरा मोती पमा लाल सभी बेकार राठोड़ॉ से भिडणो खोटो तौबा खुदा बचावै टाळ इसडी मार न भूलू बिसरूँ जे भूलूँ तो काळोकाळ गढ गणेस मे दिनड़ो ऊग्यो सै जोवै चानण परभात गढ नै सार सॅवारै निरखै राव जैतसी सब रै साथ जैतराव राठोड़ाँ निरख्यो पड्यो कचरियो बॉयोबॉथ गढ में कादा कीच इसो है अगिण लासॉ कटिया माथ कचरो साफ हुवै नाँ दस दिन इसड़ो कचरो पसस्यो आज खून माँस रा खिड्या लोथड़ा लाधो अंक दूटियो ताज 90 गई भोम रो दाहडू गढ गणेस राती घाटी रो बीकाणे री नाक है देसाणै री करणी माँ री जमी जमाई धाक मारवाड़ नव।टो छायो अठै रच्यो महमाँ मडाण घणा उजळा आखर बोले ख्यात बात इतिहास पुराण सवत पनरैसौ इठियासी मारवाड मे हुयो अजोग राज भोग री धणी लालसा कोझो काळो भरियो भोग पटक बाप गॉगै नै गढ हूँ राव मालदे लीनो राज दुस्ट भाव हळका घण माडा आई नही बरतता लाज सवत पनरैसौ इठियासी जेठ बदी दूजाँ दिनवार राव मालदे राज सँभाळ्यो बाप राव गाँग नै मार जोघाणै रै राव मालदे घण पाळी मनई में खोट बीकाणे रो करण विधूसण छळ बळ करी चोट पर चोट गढ बीकाणे तपै जैतसी रणबको राठोड़ सुजाण दसैं दिसावौँ जस पसरायो सूर्यवस रो भळकै भाल पण मन घार जग माँडण री मालदेव चढियो रणरग अचाचूक बड़ग्यो काकड़ में आ धमक्यो सेना ले सग सेना बीस हजारी साझी घेर लियो सोवो रण खेत बीकाणे पर चढ्यो मालदे भाईपै राळी रेत सुण हमलै री बात जैतसी गाज उठ्यो मारी ललकार भालो भळक उठ्यो हाथों मे जोरावर पळकी तलवार घोड़ा देख जैतसी धीज्यो करलीनो सौदो मन धार दोय लाख रुपियाँ मे लीना सगळा ही घोड़ा विणजार घोड़ा लख मन घणो मुळकियो घण थुथकार कॅवर कल्याण भीवराज मन. हरखायो लख घोड़ा घण पाणीवॉण काबळिया कधारी घोड़ा राव जैतसी लीना मोल मालदेव हमलो कर चढियो बाज उठ्या रण जगी ढोल हुकम कामदारॉ ने दीनो दोय लाख करदो भुगताण कावळिया कधारी घोड़ा सज जासी सोवै मैदान पर हेलो दियो फौज ने चालो मालदेव माडी है जग राती घाटी गूंज उठी जद सूरवीर चढिया रणरग भाई भतीजा सगा सनेही दळपतिया सजिया असवार टळवाँ टळवाँ सज्या सूरमा ससतर पाती सब सिणगार हाल समै चढती वेळा ही अचाचूक सौदागर आया काबळिया कधारी घोड़ा बिणजाराँ सौदागर लाया राव जैतसी रण सज चढियो भाई बधू कुटुम समेत झटपट जाय मोरचो लीनो दळबळ ले सोवै रणखेत राठोडाँ रॉघड़ रणरेंगियाँ रणभोमी मारी ललकार घण भाला तलवारॉ भळकी सूरवीर जूझण नै त्यार फौजॉ देख काळजो काँप्यो राव मालदे डरप्यो जाण पग चिपग्या धरती पर जाणे धेसग्या पेट उतरगी पाण हमलो कर चढिया पण आगै बधणे मे दीसै नाँ सार धड़ धड़ धूजै राव मालदे दापळिया जोधा मन मार - चौथो सरग 91 दरबारी नै सावचेत कर घोडॉ माथे जीण कसाया साथ लियो रामै नै चढिया छानै गढ़ बीकाण सिधाया हिम्मत हारया जाय मालदे कर कर ऊँडो सोच विचार पिरतक हार सामनै दीसै आगै बधियाँ पडै न पार चिपग्या दॉत रूँआळी कॉपै चुप हुयग्या लूँठा सिरदार ऊभो काळ सामनै दीसै राव जैत गूंजै ललकार बेटा पोता भाई भतीजा सगा सबधी घण मर जासी पग-पग खून खिडैलो रातो रजपूतण रॉडॉ वध जासी घर खाली हुयसी ऑगणिया राजपाट सगळा रुळजासी मार काट मचजासी भारी मिनखाँ पर धोरा फिर जासी पण लारै गढ बीकाणे मे के गूजरचो कॉई फैताळ आई बात घणी अणहूँणी केठा कॉई रचियो साथ लियॉ सौदागर पूग्या रात पौर बीत्या बीकाण रुपिया गिणा दिया गढ मॉही राव जैतसी आप सुजाण धीज गया सौदागर बोल्या रणखेतॉ म्हॉ करदी चूक अदाता थे रण मे जुपिया सूर उजाळो थॉरी कूख जीत हुयाँ म्हे रुपिया लेसॉ अठै पधारण रो नहि जोग जाणों म्हॉरी अकल निकळगी भटक गया म्हे छोटा लोग जाळ कामदारियाँ इसडी करदी किया नही रुपिया भुगताण हुकम अदूळी करी हराम्याँ केठा कॉई मन मे जाण घोड़ॉ रो नॉ मोल चुकायो सौदागर हुयव्या नाराज सेना रै लारै लारै ही रण खेतॉ मे पूग्या भाज हुयो तकादो रणभूमी मे सौदागर आया है लार राव जैतसी सुण घण कोप्यो गढ जावण रो कियो विचार राव जैतसी हठ पर उतरचा पण बॉ रुपिया लिया न जाण रणखेतॉ पूगो जुध जीतो फतै हुवै पावो घण माण इणतर देर हुई पूगण मे दुरया सईदॉ नै गढ ढाब राव जेतसी सोवै चाल्या जलम भोम री राखण आब भोजराज रूपावत भेज्या साथ किया पच्चीस सवार राव जैत रणखेतॉ जावै सूरवीर मनड़ो मुळकार पण डेरॉ म हाको फूट्यो राव नीसरचा है रणछोड़ सब सिरदार पूगिया भेळा कठे गया म्हारों सिरमोड़ 92 गई भोम रो बाहडू वैरसी पूगळ दरबारी पण झूठ बोलियो पौढया है डेरै दरबार घण तकरार करी सिरदारों मिलणे री म्होरै दरकार जद माधव दरबारी घोल्यो आवण मे अब लमैन देर ऑ घोड़ाँ रो मोल चुकावण राव गया गढ़ बीकानेर सुण सिरदारॉ मनी विचारी गळत धारणा लीनी धार राव गया बीकाणे गढ मे छाड आपण पर जुध भार छार्ने राव गया बीकाणै पाछा नहीं पधारे राव आपाँ पझ्या अकला रण मे झाल सकॉ नहि रण रा धाव वै सगळा भेळा ही बोल्या राव जैत रै तबू मॉय आपॉ चालो थान मुकामा रण री झळ अब झलसी नॉय अरजनसिघ महाजन रो मालक द्रोणपुरै रो बोल्यो राव राव किसनसिघ राजासर रो सॉईदास साहबाराव श्री वणीरजी चाचवाद रो चदसेण सारुंडा राव सिकराळी रो मॉडळोत हो वीर भारमल चढग्यो ताव वीर रूपसी बाणीदै रो घडसीसर रो देवीदास सूरसिघ बीदावत बोल्यो जा परतापसिघ रै पास गारव रो डूंगरसिघ बोल्यो राव राव जैगलसर रो करणो भाटी बीठणोक रो धनो राव भाटी किसन खारबारै रो सगळा सागै कियो विचार सौ चाकर तबू पर छोड्या मुइ चढिया लूँठा सिरदार खाली छोड़ मोरचा सगळा बिखर गई बीकाणी फौज राव बिनॉ रण राग न गूंजै दूजै किण पर करै धरोज वीकानेरी फौज खिडी जद दुरग्या जाण मुड़ता खोज खाली साझ मोरचा बधगी राव मालदे री सब फौज समझ्यो सगळा डरता भाज्या लड़नै री आसग खूटी मालदेव रो बध्यो हूँसळो अमर आसा टूटी घड़ी दोय झाँझरकै पूग्या राव जैतसी रण री धार आ ऊभा डेरॉ रै सामा सागै सताईस सवार दुसमण री फोजॉ चोकस ही राव मालदे दी ललकार राव जैतसी डेरै ऊभो हमलो बोल अबै लो मार राव जैतसी काठो घिरग्यो गिणती रा सागै असवार राव मालदे सामो दीसै रणचडी बाजी तलवार चौथो सरग 93 घोडो चढा दियो खुद जैतै मालदेव पर साध्यो वार लपलपाट करती पळकती गळबदी झटकी तलवार बाळ बाळ कटणे तूं बचग्यो मालदेव आडी दी ढाल पण दुकडा कर दिया जैतसी हाथों थमी ऊछली ढाल घोडै री करणोती काटी वाह रे जैता वाह थारै सा दस बीस हुवै तो सब लामै दाह सोनगरो सारेंगदे जूझ्यो बाय गॉव रो खुद सिरदार बेळासर रो राम साहणी सागै सरगा गयो सिधार दरबारी माधव रेंग रळियो प्रोहित लिखमीदास सुजाण राव जैतसी सागै जूझ्या तज तज गॉव सोवै मे प्राण अमर लेख अमरॉ रा आखर जलम भोम हित मॉड्या जाय सुजस सूरमा रो जग व्यापै ओळयाँ आखै लोकॉ छाय रै खपक खपक चालै तलवारों घण नेजा रळकायॉ जाय तलवारों री बँधी चौकड़ी घायल हुयो जैतसी राव पण अकल असवार जैतसी रण बको जूझ्यो राठोड़ सूरवीर अणगिण रण मारया गूंज उठ्या घोडै रा पोड़ सवत पनरैसौ अठाणमै चैत बदी ग्यारस री भोर दुसमण री फौजॉ रै धेरै राव जैतसी-लड़ियो घोर आखर पड्यो जैतसी धरती लड़ भिड़ अमर हुयो रणखेत सोवै री धरती पर सोयो सरग सोवणी रळियो रेत जुध रा हाल जाण रूपावत भोज राजजी कियो विचार मालदेव मन रो घण मैलो गढ भेळण नॉ चूकै धार कर भेळा कुंवरॉ नै भेज्या सरसै मे रखवाळी मॉय कुटुम कबीलो सगळो सागै हुयो सुरक्षित सरसै जाय पीछै राव मालदे उचक्यो गढ बीकाणो लियो घिराय राती घाटी री माटी पर फौजॉ लीना पॉव जमाय इतरा राजपूत रण रॅगिया जैतसिघ साथै रणखेत जलम भोम री रखवाळी मे जूझ जूझ रळग्या रण रेत 94 गई भोम रो दाहडू गढ रा रखवाळा ललकारया तलवारी रा चालै दॉव मालदेव री सेना रोकी रोक दिया जुलम्याँ रा पाँव मालदेव मन. घबरायो गढ बारै ही इतरा सूर गढ रै भीतर किताक बीका रण रँग राग अमर रस चूर किण री माँ घण सँठ अरोगी आपा थकाँ गढ़ों मे आवै मालदेव री के खिमता है सामी छाती गढ घुस जावै भोजराज रूपावत खोली गढ गणेस री सूरज पोळ अक साथ नीसरिया सगळा केसरिया रण रो रंग घोळ वीरां री तलवारों पळकी मालदेव रा उडग्या होस चला खपाखप नेजा मिळतों पटक लिवी तलवारों खोस मालदेव रा माणस मरव्या गढ बारे ही अक हजार गढ रै भीतर नहीं घुसणदै केठा फॅफर पइसी पार तो भी राव घणा सायो फौजा नै मारै ललकार बढी सूरमाँ गढ मे कूदो आखर जीत लैवण मे सार राठोड़ा घायल घण हुयग्या लोही रा खिडग्या घण खाळ लासाँ पर लासाँ घण विछगी अर्थे टूटती दीसै पाळ गढ मे भोजराज रूपावत साथ साँखलो वीर महेस घण बीका राठोड़ सूरमा रॅग लीना केसरिया भेस धन्ना सालू दोय सईदा लड़ण मरण नै ऊभा त्यार केसरिया बागा करलीना हार्थों में साँभी तलवार भोजराज रूपावत हाथाँ गढ मे अमल घणो गळवायो प्याला भर भर देवै महेसो सगळाँ ही वीराँ नै पायो चालो गढ वारै अब भिड़साँ हालो हालो रो हलकारो दुसमण फौज चढी गढ पाळी आगै बधो अपड़ला मारो डेढ हजार सेना सँभ निकळी भोजराज रूपावत धावै वीर साँखलो बधै महेसो सेना नै घण जोस दिरावै मालदेव रा माणस मरिया चार पाँच सौ अकॉ चोट सेना मे भगदड़ सी मचगी देख राप रा चिपग्या होट चाल्यो कोई इसो चकरियो माणस मरिया अक हजार गढ दरवाजै आगै लाग्यो लासाँ रो ठूठो अबार आखर लड़ताँ भिड़तॉ जूझ्या बीका भी घण ओक हजार भोजराज रूपावत घिरग्यो वीर महेसो चढग्यो धार धना सालू दोय सईदा मार खपाखप मिनख मराय मालदेव रा माणस अपड्या मार नॉखिया कठ पिचाय बीका फौज मरी सगळी जद मालदेव गढ दाखल जाय सिघासण पर जाय बिराज्यो हाकम मुसदी लिया बुलाय चौथो सरग 95 आप जीत री खुसी मनाई फौजॉ ने दी गोठ जिमाय बदोबस्त करण में लाग्यो सेवादारों हुकम चलाय पाँच सात दिन गढ मे रहियो थाणो अक दियो घरपाय फॅपै अर पचायण भोळ्यो सासण भार दियो सँभळाय कूँपो मेहराजोत बीकाणे गढ मे सब परवध करावै करमसोत पचायण रमिल ठोड ठोड़ थाणा थरपावै सेना रा घण वीर सिपाही मालदेव री जीत सॅभाळे आधै मुलक दुहाई फिरगी आधै मे कल्याणो माळे मालदेव ले फौज आपरी झटपट दुस्यो जोधपुर जाय बसै घणो खतरो लागै है लारोलार सनेसा आय मालदेव मन. भरमायो समै सार नै जाणे नाँय बीकाणो कितरा दिन रैसी भाग मुँवाळी कोझी खाय राव जैतसी रा जायोड़ा घण बीका राठोड़ मालदेव नै रात्यूँ दीसै गरजै ठोडाँठोड़ भीवराज री खिमता अखरै मालदेव दुख पाय दिन मे चैन न नीद रात मे छाती धड़का खाय सरसै बैठ्या कुंवर रावश्री जैतसिघ जी री सतान फॅकर अपड़ कठडा मोरे अकज चिता खावै जान ओ बीका राठोड़ उठला लेसी बदळो आय मालदेव दिन रात ओझकै लीलो पडतो जाय मालदेव जोधाणे पूग्यो गढ म करियो जा परवेस बीकाणा काबू कर आयो हुयो अबै बो अपणो देस 96 गई भोम रो बाहडू पाँचवों सरग
No text on this page.
पॉचवो सरग सवत पनरैसौ अठाणगे चैत सुदी ग्यारस दिनवार मालदेव · रण मे लड़ता गया जैतसिघ सरग सिधार कुंवर दोऊँ कल्याण भीवजी धपता थाणां तूं टकरावै नित हमेस रो झगड़ो झोयो मालदेव सगळे रड़कावै वीकाणे री राती घाटी गढ गणेस रो की बखाण समैंसार हमलो कर जीत्यो मालदेव आ थरप्या धाण फॉटोफॉट गॉवड़ॉ रड़भड़ मालदेव ने कोई न चावै खैर मना कल्याण राव री करणी री आसीस फळावै समेसार सकट री घड़ियाँ कोप विखै रा दिन दो च्यार सरसै मे सकट तूं पनपै जैतसिघ रो घर परिवार भीवराज री गाँव गाँव मे दिन दिन सोभा घणी बधावै धीर वीर राठोड़ लड़ाको लोकसभा धर करतो जावै टीकाई कल्याण राव परस तेईसाँ रै परवॉण दूजो भाई भीवराज है बरस इकीसो सुधड़ सुजॉण राजनीत मे दिव्यदीठ है लोकनीति मे घण परवीण गुपतचरी मे भीव गोप है मिनख धरम मे है लवलीण भळे कुँवर इग्यारै सागै ऊमर में है छोटा जाण कुल तेरै सुत कुळ तारणिया सरसै सैठा हुवै सुजॉण भीव ऊँठ घोडा पारखियो छॉट ऊँठ घोड़ा मोलावै राठोड़ॉ री जै जैकारी सॉठी ठूठी सेन सजावै फिरै घिरै कल्याण रावजी भीवराज सागै माळे आधो मुलक मालदे दाब्यो आधो दोनॅ वीर सँभाले भीवराज री महमा मोटी दूर दूर मुलकॉ जस छायो साह सेरसा सुण मन मोयो सादर गढ दिल्ली बुलवायो मालदेव सुण सुण मन डरपै कॉपै हियो हबोळा खाय खोटो करम कियो रण मॉड्यो मनई चैन न निदरा आय पाँचवो सरग कूपो अर पचायण बैठा गढ मे सब परबध करावै मालदेव री फिरा दुहाई ठोड़ ठोड़ थाणा धरपावै 99 ले घोड़ा पच्चास सिधायो सागै ले सैठा असवार साह सरसा मिल्यो प्रेम ढूँ बॉह पसारचॉ भर दरवार ऑतो जॉतो रैवै मुलक मे बीकाणे री लेवै सँभाळ लोगा री पीड़ा घण मेटै गाँव गाँव मे जाजम ढाळ भीवराज दिल्ली जद जावै साह सेरसा गळे लगावै राज काज सेवा मे सादर राय मसविरॉ सभा सजावै घण ऊँडा सवध राव सू गुपतचरी मे गुपत सुजाण गुपत सनेसॉ धीज सेरसा साह घणो ही करतो माण रिणधिरात श्री अखैराज जी सोनगरै भेज्यो नारळ घेटी भकतोंदे परणाई श्री कल्याण कुचर सेंग मेळ सवत पनरैसौ अठाणमै सावण वद चारस सुभवार गढ गणेस मे थाळ चाजियो घण गरणायो गढ गिगनार श्री कल्याणा वस बधायो भकताँदे राणी रूपाळ कॅवर रायसिघ बेटो जायो घण गुणवती कूख उजाळ आगै वस घणो ही बधियो राठोडॉ रो रेलमपेळ बीकाणै री राजगिदी पर लूठी घणी बधाई अळ राज काज सुख सॉयत छाई लूंठो बिड़द लियो घणमाण बीकाणै रो रुतबो ऊँचो नामी रजवाडॉ रजथाण वस बिरख है हरियो भरियो घण छाया बीका रैठोड मॉ करणी सिर छत्र धरायो गढ बीकाण सिरै सिरमोड़ नगर घणो गुळजार बसायो लिखमीनाथ करै रिछपाळ नागणेच री किरप घणैरी मिनख धरम री करै सभाळ राणै सूरजमाल सिसोदै उदियापुर सू भेज नारेळ बेटी रामकुँवर परणाई भीवराज बीकै सँग मेळ भीवराज रो रुतबो ऊँचो दिन दिन बघतो ही जावै के दिल्ली रजथाण बिकाणे घणो लोक माने चावै दिल्ली मे साही निवास मे भीवराज री महमा मोटी नामी उण री जबर हवेली चौबारै री छिब नव कोटी दुखिया रै हित सरणगाह है न्यान दिरावै कर दुख दूर सकट घिरचा घिराया आवै घण कोई निरधण मजबूर रोतो आवै हंसतो जावै न्याय धरम सू करै सहाय दिल्ली मे जस हुयो सवायो दिन दिन दूणो बधतो जाय 100 गई भोम रो बाहडू राणी सरसै मे कल्याण राव हूँ मिलियो वीरमदेव सिधाय हाल हवाला कह बतळाया लेवण आयो साथ सहाय नीवराज रो वस बधायो रामवर रूपाळ पूत जण्यो नवरेंग नारायण घण गुणवती कूख उजाळ आगै बस घणो ही बधिया राठोडौँ रो रेळमळ ठौइम ठोइ ठिकाणौँ धारी लूठी घणी बधाई अळ वस विरख घण हरियो भरियो घण छाया बीका राठोड़ रणबका रणरग रचाया नित वाज्या घोड़ॉ रा पोड़ घण कॉघल बीदावत छाया राठोड़ा घण रेळगमेळ ठोडॉठोड़ ठिकाणा धारी Dठी घणी बधाई अळ मालदेव ठाकुरसी कान्हा करमसेन सुरजन भृग जाण पूरणमल अर अचळदास जी भोजराज तिरलोक सुजाण ऑरा वसज घणॉ मोकळा आखै राजसथाणे मॉय राठोड़ाँ रो माण वधावै वस बिरछ री गैरी छाँव झगड़ो झोयो जद सेखै से गाँगेजी जोधाणै राव सेखैजी री मदत चढायो नागोरी खॉ सेन सजाय उण झगड़े गॉगोजी जीत्या सेखोजी ग्या सरग सिधाय राव जैत री घणी मदत ही जोधाणे री फौजॉ मॉय बी झगड़े मे हाथी भाज्यो हाथी थम्यो मेड़ते आय पकड़ लियो म्हे उण हाथी नै वीरम गढ मे लियो बॅधाय पीछै गागै मालदेव ने खबर पड़ी हाथी री जाय हाथी गयो मेड़तै सीधो वीरम गढ मे लियो बँधाय राव जैत रा पूत बधाया आगै घणो बध्यो परिवार ऊपर बॉची टीप घणी है घणॉ जलमिया पाणीदार वीरमदे दूदावत मोटो धणी मेड़ते रो धण नॉव मालदेव सैं घणो सँतायो भोगै नित जहरीळा दाँव मालदेव सदेस करायो वीरम हाथी देय पुगाय जुध मे म्हॉरी जीत हुयॉ सूं हाथी म्हारो समझ सवाय पण मेडतियाँ मतो करायो हाथी म्हे अब देवॉ नॉय म्हे हाथी नै जद देवॉला गागोजी आ गोठ जिमाय मै सगळा नै अरज कराई हाथी देवो खैर मनाय पण भाईड़ा कोई न मानै गोठ जिमण री सरत लगाय पाँचवो सरग 101 मैं गॉगैजी ने कहवायो जोधाणे सदेस पुगायो राव आपजी अठै पधारो गोठ जीम हाथी लेजावो सौ घाड़ा असवार मालदे चढ्यो मेडतै पर चढ आयो गोठ करी दूदावत भायाँ गोठ जीम हाथी लेजावो सुण आ बात मालदे बोल्यो उठ बैगा जोधाणै आवो पकै जीमसॉ गोठ आपरी जोधाणे हाथी पुगवावो रायमलो दूदावत बोल्यो थे इसड़ा क्यूँ अडियल राज इसा अड़ीला घणों डीकरा म्हारे भी है समझो राज पाछा जावो थे जोधाणे म्हे हाथी अब देवॉ नॉय जद पाछो मुड चल्यो मालदे सुण हाथी अब देवॉ नॉय जॉतॉ जॉतों यूँ उठ बोल्यो मालदेव ऑख्या कर लाल गिण्या दिनों मे खिच जावैली हाथी बदलै थारी खाल हाथी तो थे नॉ देवो पण मालदेव है म्हारो नॉद थे जिण ठोड़ मेड़तै बैठा मूळा हूँ चैवाटू आय पछै मालदे गयो जोधपुर गॉगै वीरम नै कैवायो भल भेज्यो सदेस रावजी समझायस कर यूँ समझायो 1027ई भौम रो वाह जितै जिऊँ थे म्हारा हो पण पछै मालदे घणो सॅतासी मिनख पणो बो कदै न राखै घण जनखापण सदा जतासी पीछै हूँ खुद गयो जोधपुर गॉगैजी नै कहियो जाय हाथी म्हॉरै घरै बॅध्यो है उण हाथी नै अब कुण खाय हूँ बोल्यो जे आप कैवो तो हाथी हाजर है लो जाण जाय मेडते वचन निभाऊँ हाथी भेजूं जॉतॉ पाण हूँ पूग्यो झट जाय मेड़तै गढ से हाथी नै कढवायो दो घोडा रजपूतॉ सागै हाथी जोधाणै टुरवायो पण पीपाड़ पूगता साथे हाथी मुवो मारगॉ मॉय दो घोडा असवार सिधाया भोर जोधपुर पूगा जाय गॉगैजी सूजा गढ मिलिया घोडा दोय सूपिया जाय हाथी कठे पूछियो गॉगै हाथी मुवो पिपाई आय हाथी आयो हूँ मानूं हूँ सुण बोल्या डॉगोजी राव हाथी मुवो म्हारी हद माही वीरम ने कह दीजो जाय कनै ऊभियो माला बोल्यो वचन कैचतों आई न लाज हाथी आयो थे मानो पण हूँ आयो नौँ मानें आज आप हाथ से कागद लिखदो दिल्ली जाणो चाऊँ हूँ भीवराज री खिमता लूँठी सकट जाय टळाऊँ हूँ साह जोग घण चलै मानता म्हाँनै दिरा सरण सुख छासी भीवराज री पैठा सैठी घिरिया सब सकट टळजासी पछै राव मागे नै मारयो मालदेव खुद वणग्यो राव मेड़तियाँ पर करी चढ़ाई वीरम म्होरो हाथी लाव पछे मालदे लारै लाग्यो मेइतियाँ नै घणा सेताय नित फैताळ करावै ऊभो छैई रोज टिकण दै नॉय मालदेव धण गोधम घाली चढ्यो मेइतै नित आयो मार धाइ कर नित दुख दीनो म्ही सगळी नै घणा सँतायो आखर हार मेड़तो छोड्यो ठौड़ ठौड़ घण हूँ भटकायो मालदेव लारो ना छोड्यो हूँ सकट ग घणो घिरायो अब हूँ आयो थोरै सरसै हुयसी म्हारी घणी सहाय मिनखापण रै निरमळ जळ मे हूँ आँसूड़ा देऊँ खोळाय राव खातरी करी मोकळी धीरज घणो बँधायो है सुख सॉयत री आस बँधाई मिनखा धरम सवायो है जद कल्याण रावजी बोल्या थारी बात घणी है आछी सकट सगळा टाळ घिरैली थोरै सुख री घड़ियाँ पाछी थारी खातर सारू लिख दूँ कागद लेय सिधावो थे भीवराज भाई सँग रहजो सकट सभी टळावो थे लिख दीनी कल्याण रावजी भीवराज नै पाती खास वीरमजी री घणी खातरी करिया थे दिन रातीवास वीरम देव सीख ले चाल्या आगे दिल्ली गया सिधाय भीवराज जी तूं जा मिलिया हाथों दिवी लिखावट जाय भीवराज कर घणी खातरी डेरै वास दिरायो है घणे मान सनमान सवायो घण परवध करायो है उठ कल्याण राव वीरम रो घण परवध करायो है सकट री घड़ियाँ कर हळकी मिनखापण दरसायो है कयो राव नै मै सुण जाणी सगळे जस पसरायो है भीवराज दिल्ली मे तापै साह रौँ हेत सवायो है भीवराज रो साह-वजीर हूँ गाढो हेत घणो हो जाण खुद सागै वीरम नै लेग्या साह सू साधी भेट सुजाण पाँचवो सरग 103 साह पूछियो भीवराज नै ॐ कुण आया है सरकार कह बतळायो मे वीरम है श्री मेड़तिया है सिरदार छोड़ मेड़तो उतन खुसाया दिल्ली आया है सिरदार सरण आपरी साही चावै मदत आपरी घण दरकार पछै सेरसा पातसाहजी वीरमदे नै पास बिठार घणे मान सू करी खातरी आसण दे साही दरबार इणतर भेटा किया साह सूं घण हरखाया डेरै आय भीवराज वीरमदे साथे घणे मान सू रया बसाय दोनें ही राठोडा रॉघड दिन दिन लीनो सुजस सवायो सुख सॉयत से घड़ी बितावै मालदेव सुण सुण घबरायो सेरसाह री बातॉ चालै भीवराज जी करै बखॉण श्री वीरमजी सुणै प्रेम तूं मन. आणद लेवै सुजाण सेरसाह हो घण साधारण छोटो सो हो वीर पठाण बालपणे रो नॉव फरीदो पछै हुयो हो सेरेखॉण आपॉ ज्यूँ ही पझ्यो विखै मे दुरदिन धणॉ बिताया है अब दिल्ली रो पातसाह है आछा दिनडा आया है सैसाराम गाँव रो वासी सेरखान हो जात पठाण भायाँ रै झगड़ॉ रै कारण पझ्यो विखै मे हुय हैराण सन पनरैसौ सताइस में वावर रो सासण चलतो हो सेरखान उण री सेना में लग्यो नौकरी ही करतो हो अक बरस ही करी नौकरी पीछै गयो छोड़ छिटकाय लैण-दैण री बात सटैही आपस मे घण झो. छाय फिर लोदी जलाल टू मिलियो नायब सूबेदार बणायो अवसर आयो सैठो हुयग्यो घण विकरम बळ तेज बधायो सासण री सगती घण बधगी गढ चुनार जा घेरायो हो ताजखान री विधवा साथै खुद रो ब्यॉव रचायो हो ब्यॉव रचाता पाण सेरखा गढ चुनार कचजायो हो धन माया घण हाथों लागी घूसो घणो बजायो हो मालुम पड़ी हुमायूँ नै जद गढ चुनार पर धायो हो पण मजबूरी सेरखान वें समझौतो करवायो हो इणतर सेरखान सैठायो सूरजगढ बगाल घिरायो घण धन माया हाथा लागी मन. माही घण हरखायो 104 गई भोम रो बाहडू ओ जुध जीत्यौँ भारत भर मे सेरसाह रो नाँव गुजायो सैंभ विहार रो सासक हुयग्यो तेज घणो पगपग दिखळायो चढ्यो सेरसा सूर जोरकर जद दिल्ली गड गाज्यो हो दिल्लीपत पतसाह हुमायूँ छोड तखत झट भाज्यो हो समैंसार चळोण घणो पण जो गरभ्यो सो लाज्यो है गयो हुमायूँ आयो सेरसा राज मुगट सिर छाज्यो है भीवराज अर सेरसाह री घण ऊँडी ही जाण पिछाण भीवराज ने वेग बुलायो साह सेरसा भेज दिवाण भीवराज कर फुरती आयो ले वीरम नै साथै जाण सरणे आयो जाण सेरसा साह मिलायो हाथ सुजाण भीवराज जी कह बतळायो साह सेरसा नै समझाय राव मालदे खोस मेड़तो वीरमजी ने दिया भगाय जोधाणै रै राव मालदे लूँठी फौज सजाई है वीरमजी रो उतन खुसायो दिल्ली आय सुणाई है वीरम बोल्यो सेरसाह विपदा भारी आई भाज आपरै सरणै आयो आसा घणी लगाई है मै पैलड़ियों अरज करी है निसचै म्हारी करो सहाय भीवराज म्हाँरो पोतो है थाँ सू इण दी भेट कराय साह सेरसा आसण दीना करी खातरी भर दरवार वीरमजी ने धीर बँधायो मन सैं घणा जतायो प्यार समसार आपाँ मिल करसॉ वीरमजी री घणी सहाय चीकाणो पीछै लेवॉला पैली लेवॉ मेड़तो जाय भीवराज वीरमजी दोन सीख लेय डेरै आया घणे मान सू साह सेरसा राठोड़ॉ नै विदा कराया भीवराज वीरम दोउँ डेरे बात करै मन मे छावै सकट अक जिसा था म्हॉ पर ॐडाँ हिवड़ाँ पीड़ जगावै पग पग सॉप सळेटा उछले पग पग मिनख रुळे भटकावे चूला चाकी गलै पळीढा ऑगण बाखळ सै धुड़जावै दसू दिसावॉ पून ऊचकै जन मन गण मगळ गुदळावै सुख सॉयत रा सपना बिखरै जीवण जीवत मौत मरावै छूटै उतन ऊजई घर दर मिनख धरम तज नाग पुंफावै जनखा ही जनखा जद नाचै देस धरम घण माण डिगावै पाँचवो सरग 105 सैसाराम गाँव रो वासी सेरखान हो जात पठाण भायाँ रे झगौं रै कारण पड्यो बियै मे हुय हैराण सन पनरैसौ सताइस म बावर रो सासण चलतो हो सेरखान उण री सेना मे लग्यो नौकरी ही करतो हो साह पूछियो भीवराज ने मैं कुण आया है सरकार कह बतळायो अ चीरम है श्री मेड़तिया है सिरदार छोड़ मेड़तो उतन खुसाया दिल्ली आया है सिरदार सरण आपरी साही चावै मदत आपरी घण दरकार पछै सेरसा पातसाहजी वीरमदे नै पास विठार घणे मान सू करी खातरी आसण दे साही दरवार इणतर भेटा किया साह से घण हरखाया डेरै आय भीवराज वीरमदे साथै घणे मान सू रया बसाय दोनूँ ही राठोड़ा राँघड़ दिन दिन लीनो सुजस सवायो सुख सॉयत वें घड़ी बितावै मालदेव सुण सुण घबरायो सेरसाह री बातों चालै भीवराज जी करै बखॉण श्री वीरमजी सुणै प्रेम हूँ मनडै आणद लेवै सुजाण सेरसाह हो घण साधारण छोटो सो हो वीर पठाण बालपणे रो नॉव फरीदो पछै हुयो हो सेरेखॉण आपा ज्यूं ही पड्यो बिखै मे दुरदिन घणों बिताया है अब दिल्ली रो पातसाह है आछा दिनड़ा आया है 104 गई भोम रो बाहडू अक बरस ही करी नौकरी पीछै गयो छोड़ छिटकाय लैण-दैण री बात सटेही आपस मे घण झोई छाय फिर लोदी जलाल V मिलियो नायब सूबेदार वणायो अवसर आयो सैठो हुयग्यो घण विकरम बळ तेज बधायो सासण री सगती घण बधगी गढ चुनार जा घेरायो हो ताजखान री विधवा साथै खुद रो ब्याँव रचायो हो च्यॉव रचाता पाण सेरखाँ गढ चुनार कबजायो हो धन माया घण हाथों लागी घूसो घणो बजायो हो मालुम पड़ी हुमायूँ नै जद गढ चुनार पर धायो हो पण मजबूरी सेरखान हूँ समझौतो करवायो हो इणतर सेरखान सैठायो सूरजगढ़ बगाल घिरायो घण धन माया हाथों लागी मन. माही घण हरखायो ओ जुध जीत्या भारत भर में सेरसाह रो नॉव गुजायो संभ विहार रो सासक हुयग्यो तेज घणो पगपग दिखळायो चढ्यो सेरसा सूर जोरकर जद दिल्ली गढ गाज्यो हो दिल्लीपत पतसाह हुमायूँ छोड तखत झट भाज्यो हो समैसार बळवॉण घणो पण जो गरभ्यो सो लाज्यो है गयो हुमायूँ आयो सेरसा राज मुगट सिर छाज्यो है भीवराज अर सेरसाह री घण ऊँडी ही जाण पिछाण भीवराज नै धेग बुलायो साह सेरसा भेज दिवाण भीवराज कर फुरती आयो ले वीरम ने साथै जाण सरणै आयो जाण सेरसा साह मिलायो हाथ सुजाण भीवराज जी कह बतळायो साह सेरसा ने समझाय राव मालदे खोस मेड़तो वीरमजी ने दिया भगाय जोधाणे रे राव मालद ठूठी फौज सजाई है वीरमजी रो उतन खुसायो दिल्ली मैं पैलड़ियाँ अरज करी है निसचै म्हारी करो सहाय भीवराज म्हॉरो पोतो है था । इण दी भेट कराय साह सेरसा आसण दीना करी खातरी भर दरबार वीरमजी ने धीर बॅधायो मन घणो जतायो प्यार समैसार आपों मिल करसाँ वीरमजी री घणी सहाय बीकाणो पीछ लेवॉला पैली लेवाँ मेड़तो जाय भीवराज वीरमजी दो। सीख लेय डेरै आया घणे मान सू साह सेरसा राठोड़ॉ नै विदा कराया भीवराज वीरम दोउँ डेरै बात करै मनरें में छावै सकट अक जिसा था म्हाँ पर ऊँडाँ हिवडॉ पीड जगावै पग पग सॉप सळेटा उछळे पग पग मिनख रुले भटकावै चूला चाकी गलै पळीदा ऑगण बाखळ सै धुड़जावै दसू दिसावॉ पून ऊचकै जन मन गण मगळ गुदळावै सुख सॉयत रा सपना बिखरै जीवण जीवत मौत मरावै छूटै उतन ऊजडै घर दर मिनख धरम तज नाग (फावै जनखा ही जनखा जद नाचे देस धरम घण माण डिगावै आय वीरम बोल्यो सेरसाह सू विपदा भारी आई है भाज आपरै सरणै आयो आसा घणी लगाई है पाँचवों सरग 105 समेसार जद राजा बदलै आसा पासा सै बदलावै ताज तखत फुरतॉ ही बदले आसण सासण सै फुरजावै सॉमॅत सूबेदार हजूरा हाकम मुसी सै बदळावै नौकर चाकर पेट मजूरा जीतोडॉ रा ही गुण गावै वीरम देख्यो भर दरबार निजराणा हुँचता निजरावै दिल्लीपत पतसाह मुळकता निजराणा लै हाथ मिलावै निजर करण री बॅधी कतारों कर कर निजर भेट करवावै राज सभा में बिछी जाजमॉ जोगाजोगी ठौड बैसावै पिडत जोसी आज तेड़िया घरै ऑगणे हवन करावाँ विरम भोज री वेळा आवै पितर पूजियाँ करज चुकावा आप सिधा जावो दादोसा आज साह दरवारों जावो लोकाचार धरम भी मोटो लोक करै ज्यूँ निजर करावो समेसार दिन आवै जावै सुणे साह तो अरज करावी सुख दुख छयाँ-तावडा छावै साय करै तो पीड़ हरावो वीरम साह दरबार सिधाया लोकाचार निजर करवाई भेट सॉतरा सुगन मनाया साह किरप निजरॉ पसराई साह बोलिया आप विरमजी अजूं अठै ही हो आ जाणी थॉरी अरज सिरै चढ जासी साह बोलिया मीठी वाणी आप विरमजी म्हारी मानो म्हॉरो दीन धरम अपणावो कलमा पढो सरब सुख सपो पाछो बो सागी दिन लावो घण तकड़ी सेना सज धजसॉ दुसमणियों रो गरब गळावो साह सेरसा सूर साथ है पाछो उतन आपरो पावो राजसभा विसराम समाई विरमदेवजी डेरै आया मुख मडळ घण आमण दूबळ धूजै भौह अधर अळसाया निजरॉ करो भेट अरपावो छोटो भोटो होदो पावो जिसडी किरपा हुवै साह री लूटो खोसो पेट भरावो वीरम बोल्यो भीवराजजी आपा भी दरबार सिधावाँ सेरसाह दिल्ली पति हाथों लोक करै ज्यूँ निजर करावा ऊँडा सकट पळे हिया मे मदत लेवता चरण बधावाँ हालो आपॉ निजर करण नै सकट सगळा सदा नसावाँ भीवराज बोल्यो दादोसा म्हे तो आज न चाल सकावॉ आज राव रो म्हारै सराधो पूजा अॅजळी सरसावाँ 106 गई भोम रो बाडू भीवराज पूण्यो दादोसा जा दरबार निजर कर आया हाल हकीकत सभी वखाणो क्यूँ आमण-दामण दुख छाया भीवराज सुण वीरम वोल्या राज सभा जा निजर कराई साह सेरसा हुकम दियो हो जे पाळीं तो धण दुखदाई साह सेरसा सूर बोलियो दीन धरम म्हारो अपणावो कलमा पढो सेन सज चढसाँ थाँरो उतन पाय सुख छावा भीवराज वोल्यो दादासा आप चूकिया घड़ी गॅदाई खैर कोई नौं देखी जासी पाछी फुरण फुरैली काई काल चाल आपाँ दोनूं ही भेळा रळ दरबार सिधासाँ साह सेरसा सूर भेटसाँ मिनख धरम रो मरम खुलासाँ भीवराज दीरमजी सागै उठ सज धज दरवार सिधाया साह सेरसा सूर विराज्या तखत भरयाँ दरबार बजाया निरख सेरसा सूर बोलिया आओ भीवराजजी भाई वीरम थे कई सोरप सोची काल खुलासा कह समझाई भीवराज झटपट उठ बोल्या दीरम थारी सरण सवाई पण के दोय माणसौँ ओटयाँ धोरो दीन चदै ऊँचाई इणतर दीन हुवे जे मोटा म्ह दाउँ थॉरो दीन बधावॉ मिनख धरम पण सदसैं मोटो म्हाँ समझ्यो सो साच बतावाँ साह सेरसा सूर बोलियो सुणा भीवराजजी भाई मैं तो परख करण ने मारी कालै परखी ओक सवाई आपाँ सज धज सन सजावाँ सरणागत री कराँ सहाई हुकम खुदा रो उतन दिरासाँ आगे चावै कोई खुदाई राज सभा धिन धिन सब गूंजी साह सेरसा सूर बधाई मिनख धरम री माया मोटी उण म सगळी कळा समाई परम खुदा है अक जगत रो न्याय ताकडी तोलो भाई सरणागत प्रतपाळ करो नित सवसे मोटी अक भलाई साह सेरसा सूर बोलियो ओ कुराण आ गीता गावे न्याय निरख ही अक निरख है मिनख धरम सद धरम समावै सगती रो सामत घडो है परम खुदा ही परम खुदाई राज सभा विसराम लेवै अव मिनख घरम सुन जीवा भाई राजसभा विसराम लिया उद सगळा ठौड़ ठिकण सिधाया भीवराज दीरम दोनें भी मुळक आपरै डेरे गया पापोंसर 107 धीरज धरम धरोज सवायो समसार कण कण मे छावै मिनख भरोसे पर ही जीवे बिनॉ भरोसै सभी नसावै समसार री बात सॉतरी दिन कदास पाछा घिर आवै आप सेन सज वेग पधारो जतन आपणा पार पड़ावै पछै दूसरे दिन तड़के ही साह भेजियो झट हलकारो भीवराज भाई नै लावो वीरम भी म्हारो घण प्यारो चीकाणे रो किया जाचतो सरसै रो परवध कराया दळबळ सवळ चाँध थे आजो साह सेरसा सूर बुलाया अठै सेरसा फौज सजै है फॅच करण री त्यारी मॉही आप जतन कर बैगा आया साह ढील अब करसी नॉही सरसै राव कल्याण विराज्या जैतसिगजी सरग सिधाया सरसै मे मोहकाण करण नै रावत किसनसिघ जी आया अॅवळी घणी छोकरयॉ बोली आय रावजी मना कराई रावळ म्हॉरो साथ निभाता तो घण आता काम सदा ही हलकारो झटपट उठ धायो भीवराज वीरम सँग लायो सज धज गया साह सू भेट्या साह घणो मन हरखायो साह सेरसा सूर बोलियो परखी लगा परखिया थाने थे दिढ दीन धरम पर कायम हुयो भरोसो पक्को म्हॉनै भीवराज मै अबै विचारया अब हूँ खुद अजमेर सिधातूं घणी महर ख्वाजै री म्हाँ पर ख्वाजैजी रा दरसण पाएँ लिखो वीर कल्याण राव नै फौज लेय जल्दी ही आवे आळस चूक करै नॉ कोई देरी बिलकुल नही लगावै तद दोऊँ सिरदार सिधाया हरख कोड कर डेरै आया लिख पाती सरसै नै भेजी राव आप नै साह बुलाया साह सेरसा सूर सिकारचो निसचै मदत आपणी करसी आप साथ सारो कर आओ साह आपणा कारज सरसी हमै ठिकाणा बेग घेरसी घणी तीख मे कही सुणाई सुण रावत जै बोल राव रा वैगी मॉगी सीख सुवाई कयो रावजी जीम चढो थे पीछे देसॉ सीख सुवाई रावल बोल्या म्हारै रावळे थॉर ही परताप रावळाई पीछै कमर बॉधिया रावत हुया बीर राजासर आया रडकै मालदेव रा थाणा सगळॉ रा चैरा मुरझाया 108 गई भोम रो बाहडू जैतसिघ री जुध री वेळा घण सिरदारॉ चूक कराई कर ऊँतावळ मुझ्या ठिकाणा सोवै रण मे पीठ दिखाई जैतसिघ अकलडा पडव्या मालदेव री फौज घिराया पण सोवै रै रण मे जूझ्या राव जैतसी सरग सिधाया उण घटणा नै याद करै तो किसनसिघ जी धण पछतावै राव गया अर गयो राजड़ो राठोडॉ री नाक लजावै किसनसिघ जी करी लिखावट आ सिरदारों राज बचावो मालदेव थाणा घण थरप्या चै थाणा सब परॉ हटायो बाँच लिखावट किसनसिघ री घण सिरदार बैग सॅभ आया छव हजार री सेना सजगी पाछा वीर भाव रॅग छाया मारवाड़ रा मरया तीन सौ घण काँधल भी रणॉ रमाया मालदेव रा घण माणसिया भाज नीसरया प्राण बचाया आखर थाणो नास मिलायो जीत राव री फिरी दुहाई हुया राव रा जय जयकारा राठोडॉ री आण जताई ऊँठ अकसौ घोड दोयसौ लूँट-पाट मे हाथों आया घोड़ा टाळ पचास टाळवॉ श्री कल्याण रै निजर कराया बच्या घोड़िया ऊँठ बॉटिया रजपूताँ नै भेट कराया लूणकरणसर रै तालाँ मे राठोड़ॉ रा रग सवाया किसनसिघ कॉधल रा वसज सूरवीर बघता ही धाया चढ चढ लगा मोरचो तकड़ो मालदेव रा थाण उठाया मालदेव रो दूजो सबळी गारबदेसर में थाणो हो जाय रातवासै मे भेळ्यो उगती भोर बिराणो हो माणस मस्या चारसौ पूरा माल लूँट मे आयो हाय पनरै बीस दिनों में विडियो मालदेव रो सारो साथ पी? किसनसिघ जी चढिया भीनासर मे पाँव जमाया सारो साय अठै ही जमियो गह चीकापै नैण गडाया पछै कोट सिधाण तेइनै चावै जोइयै नै बुलवायो चावो जोइयो तुरत सिघायो फौज हजार च्यार V आयो इणतर फौज सॉवठी हुयगी दस हजार री फौज सजाई जोधाणे रे मालदेव रा सब थाणों पर करी चढाई मोटो थाणो लूणकरणसर सिर ऊँचो कर सानै आयो रौठो झगड़ो हुयो अठै ही रण भोमी रो रूप लखायो पाँचदों सरग 109 गढ बीकाणो दाच्या बैठो फ़ेपो मेहराजोत सॅभायो दो हजार री फौज सँभी ही मालदेव रो थाण थपायो किसनसिघ झूपै बारठ नै फॅपै खने भेज कैवायो धे भाई गढ घणाँ बिराज्या थारो राख्यो मान सवायो अब थे थॉरी ठौड सिधावो तो थॉरी है घण इधकाई जे थे राजपूत घण तकड़ा आ गढ बारै करी लड़ाई सुण झूपै री बात सॉवठी फॅपै रीस घणी ही छाई काळो-पीळो हुयो घणो ही पण झगडै री आसँग नॉही फॅपै मॉड बात सब भेजी मालदेव नै गढों बुलायो आप पधारो तो पग थामा म्हॉ ऊपर है घेर घिरायो म्हे धारयो मन काम आयसॉ रजपूतॉ री आण दिखावॉ कबजो कदैन छोडॉ रण मे जोधाणे रो माण बधावाँ गढ दिल्ली टू कागद आयो भाई भीव रै हाथ लिखायो बाँच राव कल्याण सॅभळियो बाँच बाँच मनड़ो हरखायो समचार सगळा सवळा है आस बँधावै जोस जगावै हूँस-हँसळो करै चौगुणो गज छाती फूली न समावै वीरमजी आसीस लिखाई वॉच बाँच निव सीस धरावै भीवराज सागै दिल्ली में रजपूती रो माण बधावै भीवराज री पाती बॉची श्री कल्याण राव हरखाया तुरता फुरत मॉड मडाणा सगळा ही परवध कराया सजी फौज राठोडी सज धज ससतर पाती सभी बँधाया आगै सू आगै रळ बधता गढ दिल्ली री दिसा सिधाया फौज साह री सामै मिलसी समचार आया भरपाया धर फूंचा धर मॅजलॉ चाल्या रण बाजा सगळा गूंजाया ठोड ठाड पर हुई खातरी धिन राठोडी फौज सिधावै बीकाणे रो राज लोक है रलै फौज मे फौज बधावै घोड़ा-ऊँठ रळ्या घण पैदळ रण रचिया असवार दुराया नेजा ढाल सज्या घण ससतर मॉ करणी री छतरी छाया जाण बात सगळी जद झूपो पाछो भीनासर मुड आयो बोल्यो फेंपो बात न मानै जोधाणै सदेस पठायो किसनसिघ जमियो बैठो है भीनासर मे पॉव रुपायो आसॉ पासाँ घणो सॉवठो घेरो घण मजबूत करायो 110 गई भोम रो बाहडू राठोडी जस लोक जागियो जैतसिघ रो पूत सिधावै दळ बळ सबळ सॉवठो बधियो हळवा हळवॉ मन मुळकावै दिल्ली दूर नहीं मोट्यारों दिल्ली आ सामी दीसै है चढ़ जाय रण रग रगासाँ केमर घण घोटै पीसै है साह सेरसा सूर गुंजियो साही सेना कूच करावै अजमेरॉ री करण जातरा ढोलॉ रै ढमकार सिधावै डोढ लाख रणबका सागै सेरसाह सूरी खुद जावै भीवराज वीरम दो मुखिया गाजॉ वाजॉ फौज सिधावै मजळ अक चाल दिल्ली हूँ फौज आपरी चाल बधाई साह निरख चतुरगण सेना छाती ववडी करी फुलाई वधा हूँसळो साह सेर रो भीवराज वीरम आ बोल्या निसचै याँरी जीत हुदैली चारुमेर मोरचा खोल्या साज सजी चतुरगी सेना गाजॉ बाजॉ चढती आवे साह सूर रो बध्यो काळजो भीवराज वीरम घण छावै आय मिली राठोडी सेना बध्यो राव कल्याण सवायो साह सरसा सूर गले मिल घणै मान सनमान बधायो श्री वीरम रै चरणों मे झुक लुळ लुळ ऊँडी धोक लगाई भाव सनातन पुण्य बधायो घण मॉगी आसीस सवाई पीछे भीवराज भाई हूँ गळे मिल्यो निजरॉ पळकाई श्री चरणों मे धोक दिरा दी मन मुळका आसीस सवाई निरमळ नीर नदी रो झीणो पाट किनारै फौज थमाई मीठो प्रेम भाव परसादो घुटा फौज नै गोठ जिमाई की थोडो विसराम कियो अर पछै फौज नै कूच कराई अजमेरों रै मारग चढतों ख्वाजै जी री जै बुलवाई दर मजळ अजमेर पूगिया पातसाह रा डेरा दीना राव राज भेळा ही मुळके ख्वाजी रा दरसण कीना दरगा में आ सीस झुकायो लुळ लुळ सगळी धोक लगाई जुध जीतम री करी कामना नवरेंग चादर ताण चाई इतणे में छिपती दिस मारग रणभेरी गूंजी गरणाई बधै राव कल्याण गूंजतो भीवराज भाई रो भाई लाल धजा नेजा फुरकाता ॐठौँ घोडौँ चडिया आवै विजळी ज्यूँ तलवारों पळकै राठोड़ों री जय गूजावै दयों सरम 111 लिखी राव कल्याण हाथ से लिखत गाँव भीनासर भेजी चढ ओठी बीकाणे पूग्यो मन म राख सॉवठी तेजी किसनसिघ जी लिखत वॉच नै घणों गरजिया हुय घण राजी अवै हुँसळो घण कर वोल्या जासी कठे मालदे पाजी अजमेरों मे फौज पूगगी श्री कल्याण राव घण राजी साह सेर साथै वीरम है भीवराज रै हाथों बाजी नही लुळेलो नहीं झुकैलो भीवराज सेना रो मुखियो वीरम देव सतोमत साथै मालदेव तूं है घण दुखियो साह सेरसा सूर साथ है अबै मालदे लुक कित जासी वीरम घाव करैलो भारी भीवराज छाती चढजासी किसनसिघ घण दाब लगायो फॅपै री छाती धण धड़की पग पग सूरवीर ललकारै राठोडी तलवारों खड़की अजमेरॉ री खबर पड़ी जद मालदेव नै मुरछा आई चेहरै रो रेंग फीको पडग्यो पगों हेट धरती खिसकाई ओठी हाथ मेल परवानो मालदेव फॅपै ने भेज्यो गढ खाली कर बैगा आवो खतरो अबै घणो मत लीज्यो साह सेरसा सूर पातसा गढ जोधाणे पर चढ़ आयो भीवराज वीरम सागे है अणगिण फौज सजा घण लायो साथ राव कल्याण सुणीजै जोधाणे पर चढिया आवै वीरम भीवराज सेनापत अजमेरों सू कूच करावै फॅपै मेराजोत सनेसो किसनसिघ जी ने करवायो थे म्हारो लारो न लेवो तो जाँवॉ जोधपुर वादो ठायो वैगा जावो उखड़ जोधपुर रावत किसनसिघ कहवायो दो हजार माणस ले भाज्यो फॅपोजी गढ़ छोड़ सिघायो सवत सोहँसौ छव विकरम पोह सुदी पूनम शुभवार रावत किसनसिघ गढ बीको साँभ लियो खाली करवार गढ गणेस राती घाटी मे फिरी राव कल्याण दुहाई रावत किसनसिघ बीकाणे आखै मे घण दिती बधाई सज चाळीस हजारी सेना राव मालदे फौज बधाई अजमेरों रै मारग माथे कडो बाँध करली घेराई जोधाणे सू कूच कियो जद कोचरड़ी डावै करळाई मालदेव थारी नीवतड़ी घोर पापसू नित लपटाई 112 गई भोम रो बाहडू बीकाणे पर हमलो करता राई भर भी लाज न आई राइ भेडतै सू नित मॉडी वीरम पर नित घात कराई अबै भोग फळ बाप मारियो कळंक लगा तै खोस्यो राज थॉरी भूख मिटी नॉ ओजूं अबै न फळसी थारा काज मालदेव रो रूँ रूँ कॉपै पण ललकारै सेना सागे राज जॉवतो सामो दीसै थोथो चिणो घणो ही बाजै अजमेरॉ रै मारग-मारग मालदेव री फौज दुराय हळवा हळवॉ धर मॅजलॉ धर धर कूचों धर फौज बधाय साह सेरसा सूर सेन सज मालदेव पर करी चढाई समैसार सब बात बणे रे बोल्यो भीवराजजी भाई वीरम नै ले साथ गाजियो अजमेराँ बारै आय भीवराज घोड़ो कूदायो कई बीच तलवार चलाय वीरम भी घोड़ो कूदायो भीवराज सागै ललकार अबकी वार न चूर्को कोई मालदेव ने लेसाँ मार साह सेरसा सूर गाजियो ले घोड़ो उएल्यो मैदान सागै ही कल्याण सूरमो उछळवो ले राठोड़ी आण बाग उठी घोडॉ री बकी घण बाज्या घोडॉ रा पौड़ मालदेव रा थरणा धूज्या भाज नीस ऊँडी ठौड़ पूँपो मेहराजोत पचायण करम सोत भिड आया काम मालदेव रो साथ मरायो कड़ो टूटग्यो पूग्या धाम भीवराज वीरम दोउँ लपक्या मालदेवै नै अब लो मार घोड़ा उछळ कनौती खीची लपलपाट खीची तलवार मालदेव री निजरों कॉपी भीवराज वीरम दोउँ आय मार काट करता ही उछलै अवै न कोई करै सहाय लख थोड़ा सा सूर लड़ता मालदेव रा रुपग्या पॉव हाथ काळ रा बधता दीसै अब भाजण रो करो उपाव मौको देख पूठड़ी फोरी घोड़े रै मारी फटकार मालदेव झट दिया ततैया रण भोमी ने पीठ दिखार आखर भाज दौड़तो बड़ग्यो चूँघरोट रा पाडौँ माँय साथ सात सौ लिया रुखाळा लुकतो फिरै भाखरौं माय मालदेव में देख भाजलो चच्या सुच्या भी नाठा जाय रण भोमी खाली कर दीनी आँख्यों में तिरवाला आय पाँचसासरग 113 पग भीवराज अर वीरम दोनूँ पातसाह रै साथ गया घण कीरत चिसतारी दोनों उतन दिराया करी दया पछै पातसा सीख दिराई घणे कोड मनई हरखाया वीरम देव मेइते आया भीवराज नै साथै लाया घणी खातरी कर वीरमजी भीवराज रो माण वधायो दोनूँ गयी भोम से बाहडू विरद दियो जै भीव सवायो साह सेरसा हुकम दियो झट संभ्या वीर सेना रा छाय हळचाँ हळवाँ सेना पूगी थाम्या जोधाणे जाय साह सेरसा सूर कूचकर बझ्यो नगर जोधाणे मॉय चिड़िया ट्रॅक दुरग जा घेरचो फौज चढी मेहराण गढाय किलेदार बरजॅग तिलोकसी की दिन लड़ियो गढ रै मॉय पाणी बिना तिसाया मरग्या सूरवीर केई गस खाय आखर मरचॉ तीनसौ माणस जद तिलोकसी बारै आयो मार काट मचगी घण भारी गढ रै आगै सरग सिधायो साह सेरसा सूर जीतियो जोधाणे रो गढ मेहराण च्यार मास गढ में विगजियो सेरसाह री फिरगी आण पछै फौज ले चढ्या मेइते झटपट खाली लियो कराय वीरमजी ने गादी बैठा राज मेड़तो दियो सुपाय पछै राव कल्याण सीख ले गढ बीकाणे पूग्या जाय गढ गणेस राती घाटी मे कर परवेस मुळकिया आय साह सेरसा सूर सिधायो जोधाणै थाणो थरपाय गढ दिल्ली में जा परवेस्यो ख्वाजै जी री जै बुलवाय 114 गई भोम रो बाहडू थारै पगाँ गयोड़ी धरती म्हाँरै हाथों पाछी आई गयी भोम रो बाहडू धिनधिन मॉ कसमिरदे कूख सराई पछै सीख दी भीवराज ने भीवराज बीकाणे आयो हाथी अक च्यार घोड़ॉ री सीख भेट सुभ सागै लायो कर गढ मे परवेस मुळकियो पगा राव कल्याण लगायो श्री मुख सूं आसीस दिवी घण मों करणी सिर छत्र धरायो श्री मुख सूं श्री राव बोलिया भाई तो भाई है भीव राव जैतसी बस उजाळ्यो पाळी घणी राज री सीव बीका कुळ राठोड बधायो थारै ताण रहयो बीकाण तूं है गयी भोम रो बाहडू विरद देऊँ हूँ घण सनमाण थारा नॉव अमर जग रैसी जितै चाँद सूरज जस माण ख्यात बात इतिहास मॅडासी कलम कथासी सुजस सुजाण सवत सोळसौ दो बरसाँ काळिजर जुध गयो जुपाय चढता ही रणभोम रलायो साह सेरसा मुवो चढाय मालदेव सुण समचार झट जोधाणे पर गयो वढाय कियो राज काबू करने में हरख कोड मुळक्यो मन मॉय जैमल राव मेइतै तपतो कॉट ज्यूँ रहकै दिन रात मालदेव नित राड़ मचावै रइभिड़ करै पात पर घात जैमल दीनी भोम ईडवै अरजण नै सूंपी जागीर मालदेव पण राजी हो सहण हुवै नो टूट्यो धीर ताबड़तोड़ मचाई इसड़ी लग्यो काळजै ऊँडो तीर मालदेव दसरावै पीछे सेन सजा झट हुयग्यो वीर धावो चोलण गयो मेड़तै गाँव गाँगरड़ थाप्यो थान घूम घूम परजा सताई लूट मार कर पण सैतान उण सक्ट री वेळा जैमळ धीकाणे सू करी पुकार भीवराज सँग पैठ राय ली मदत देवणी की सीकार माँ करणी री सुभ आसीसॉ छॉट छोट टळवॉ सिरदार भेजी मदत राव कल्याणे सज बीकाणी सेन सजार बीकाणे री फौज पूगगी जैमळ री छाती तणगी रळमिळ पूरी फौज टोरदी मालदेव तूं जा भिड़गी जैतमाल सेना रो मुखियो अखैराज भादावत साथ जैतराम जाधावत सागै रणजूझण रणगिया हाथ मालदेव ने घण चेतायो जैमल नै तूं मत ना छेड़ राख मेइतो जैमल हाथों राइ राख मत जुध मैं तड़ मालदेव पण सीख न माने झटपट कोरो दियो नकार ओ सदेस गयो जद पालो जैमल हुयग्यो जुध नै त्यार भारी मार काट जद मचगी दोD फौज भिळी तरवार मालदेव री सेना भगदड़ पड़ी खपाखप पड़तों वार पग पाछा पड़ता ही दीस्था लोही रा बहग्या पण खाळ मालदेव री सेना भाजी झात नही पाई रण झाळ अबैराज सुरताण लपकिया घेर लियो जा पिरचीराज रणखेतों रपरेतों रखियो काट नौद्धियो पाड़ी गाज पौवयो सरग 115 पिरथीराज गुवो सुण भाजी ऊखड़ग्या सेना रा पाँव मालदेव ने दावण तॉई झट फोरया सिरदारों दाँव लख जैमल पोल्यो सिरदारों उचित कोयनी माड़ी बात मालदेव नै थे मत मारो आपै ही मरसी कर घात पण धीकाणै रा सिरदारों मालदेव रो लीनो लार चढ पूग्या बीकाणा बका मार खपाखप ले तरवार नगो भारमलोत आ सामो रण मे भिडियो ले तरवार सीधो हाथ पड्यो श्री रेंग रो लपक नगै नै लीनो मार जैमल बोल्यो मालदेव रै भाजण री मत देवो बधाई रहयो मेड़तो थोरै हाथों इणरी लूँठी देवो बधाई पैलों भी थारे ही हाथों रह्यो मेइतो म्हारै हाथ अबकै भी थिर रैयो भेड़तो मिल्यों आपरो लूँठो साथ इण जुध मे बी मालदेव रो नॉमी नगारो लाग्यो हाथ पण जैमल भाँभी रै हाथों भेज्यो जोधपुर हाथो हाथ मारग मे होली रे मन में रळी आयगी गैरी छाय बजा लेऊँ अकर नगारियो उठा नगारो दियो बजाय नगारो बजता ही गूंज्यो मालदेव जद सुणी अवाज फौज मेड़तै री आवै है समझ जोधपुर बड़ग्यो भाज भाभी लेय नगारो पूग्यो बेगोबेग जोधपुर जाय मालदेव नै सूप नगारो ढोली बोल्यो सीस निवाय ओ नगारो रयो भाजता रण भूमी मे दीनो छोड अबै सँभाळो आम आपरो घणैमान धिन धिन रणछोड ढोली जद पाछो मुड आयो समचार सब दिया सुणाय सुण ढोली री बात सॉतरी जैमलजी मनडे मुळकाय मालदेव सेना ले भाज्यो कोस अक पण लीनो घेर चढ पूग्या बीकाणा बका कियो सामनो चॉदै फेर चढ वणीरजी वार कियो झट चाँदै नै भी लीनो मार इती ताळ मे मालदेव जी खासा अळगा हुयग्या पार आखर लारो छोड मुड़ी जद घडी अक लीनो विसराम बीकाणी रण बकी सेना करणी सिवर कियो आराम थान मुकाम आय सिरदारों रणछोड़ॉ री खबर सुणाई कोसॉकोस भाजग्यो मालो जैमलजी नै दिवी बधाई 116 गई भोम रो बाहडू सिरो पाव ढोली नै दीनो नेग नगारे रो चूकाय गढ री चौकी चढो मेडतै सै सिरदार गया मुळकाय हळवॉ हळवा सेना चाली गाजॉ बाजॉ ढोल घुराय मन मे भारी मोद भरायो नगर मेड़तै पूगी आय की दिन सेना रैई मेडतै राठोडा रणबका छाय गाजाँ बाजॉ ढोल ढमाकॉ गढ चौकाँ विसराम कराय सीख लेवण री वेळा आई जैमलजी से अरज कराय अबै सीख देवो थे म्हॉनै म्हे बीकाणे जावॉ सिधाय छोड़ मेड़तो सीख सिधाया बीकाणै रा जद सिरदार जैमल कयो राव ने कहज्यो म्हारा मुजरो नमसकार कहज्यो थोरै तॉण मेड़तो ढवग्यो हाथों रहग्यो राज धिन धिन आप जिसा सहजोगी थे भल सारयो वहाँरो काज छोड मेड़तो फौज सिधाई हळवाँ हळवाँ चलती आय देसणोक मे फौज डबाई मौं करणी री जय गूंजाय देसणोक फौज सिधाई गढ बीकाणे पूगी आय राठोड़ॉ रै जैकारों हूँ राती पाटी गयी गुंजाय गढ गणेस राती घाटी मे बीका फौज कियो परवेस राठोड़ॉ रै जैकारै से गूंज उठ्यो गढ श्री गणेस घण बाज्या छतीसू बाजा जगी ढोल बज्यो गरणाय कर आरतड़ी फौज बधारी ऊँचै सुर सू सख बजाय मालदेव रो गरब गळायो राठोड़ॉ री राखी आण जैमल रो सदेस सुणायो सुण मुळक्या घण राव कल्याण पछै फौज नै गोठ जिमाई गढ गणेस मे कर परसाद धिन धिन धिन राठोड़ी सेना राठोड़ी पाळी मरजाद गई भोम रो बाहडू मुळक्यो भीवराजजी दिवी बधाई घर घर खुसी वधाई बॉटे सै नगरी रा लोग लुगाई आखी जनता खुसी हुई घण राठोड़ा है म्हारा प्राण आजादी रा सदा रुखाळा छतरी धरम निभावै आण मिनखा धरम सनातन राख्यो राख ऊजळी क्ख सवाय राठोड़ा छतरापो पाळया पग पग जनता राज थपाय राठोड़ी फौजाँ रा गुहियों धिन धिन धिन रे थारो नाँव सीका चीदा कैघलोत पण ठादा यसिया गावागाँव पाँचोंस 117 पिरथीराज मुवो सुण भाजी ऊखडग्या सेना रा पॉव मालदेव ने दावण ताई झट फोरया सिरदारॉ दॉव लख जैमल बोल्यो सिरदारों उचित कोयनी माड़ी बात मालदेव नै थे मत मारो आपै ही मरसी कर घात पण घीकाणे रा सिरदार मालदेव रो लीनो लार चढ़ पूठया बीकाणा बका मार खपाखप ले तरवार जैमल बोल्यो मालदेव रे भाजण री मत देवो बधाई रहयो मेड़तो थोरै हाथों इणरी ठूठी देवो बधाई पैलॉ भी थारे ही हाथों रहयो मेड़तो म्हारै हाथ अबकै भी थिर रैयो मेड़तो मिल्याँ आपरो लूँठो साथ इण जुध मे बी मालदेव रो नॉमी नगारो लाग्या हाथ पण जैमल भाभी रे हाथों भेज्यो जोधपुर हाथो हाथ मारग म ढोली रै मन में रळी आयगी गैरी छाय बजा लेऊँ अकर नगारियो उठा नगारो दियो बजाय नगारो बजता ही गूंज्यो मालदेव जद सुणी अवाज फौज मेड़तै री आवै है समझ जोधपुर बड़ग्यो भाज भाभी लेय नगारो पूज्यो बेगोवेग जोधपुर जाय मालदेव नै सूप नगारो ढोली बोल्यो सीस निवाय नगो भारमलोत आ सामो रण मे भिडियो ले तरवार सीधो हाथ पड्यो श्री रेंग रो लपक नौ नै लीनो मार मालदेव सेना ले भाज्यो कोस अक पण लीनो घेर चढ पूग्या बीकाणा बका कियो सामनो चाँदै फेर चढ वणीरजी वार कियो झट चाँदै नै भी लीनो मार इती ताळ मे मालदेव जी खासा अळगा हुयग्या पार आखर लारो छोड मुडी जद घडी अक लीनो बिसराम बीकाणी रण बकी सेना करणी सिवर कियो आराम थान मुकाम आय सिरदारों रणछोड़ॉ री खबर सुणाई कोसॉकोस भाजग्यो मालो जैमलजी नै दिदी बधाई ओ नगारो रयो भाजतॉ रण भूमी मे दीनो छोड अबै सॅभाळो आप आपरो घणैमान धिन धिन रणछोड़ ढोली जद पाछो मुड आयो समचार सब दिया सुणाय सुण ढोली री बात सॉतरी जैमलजी मन. मुळकाय 116 गई भोम रो बाहडू सिरो पाव ढोली नै दीनो नेग नगारै रो चूकाय गढ री चौकी चढो मेडतै सै सिरदार गया मुळकाय हळवॉ हळवॉ सेना चाली गाजाँ बाजॉ ढोल घुराय मन मे भारी मोद भरायो नगर मेडतै पूगी आय की दिन सेना रैई मेडतै राठोडा रणबका छाय गाजॉ बाजॉ ढोल ढमाकॉ गढ़ चौकॉ विसराम कराय सीख लेवण री वेळा आई जैमलजी तूं अरज कराय अवै सीख देवो थे म्हॉनै म्हे बीकाणे जावॉ सिधाय छोड़ मेड़तो सीख सिधाया बीकाणे रा जद सिरदार जैमल कयो राव ने कहज्यो म्हॉरो मुजरो नमसकार कहज्यो थॉरै तॉण मेड़तो ढबग्यो हाथों रहग्यो राज धिन धिन आप जिसा सहजोगी थे भल सारयो म्हॉरो काज छाड मेड़तो फौज सिधाई हळवाँ हळवाँ चलती आय देसणोक मे फौज ढबाई मॉ करणी री जय गूंजाय देसणोक यूँ फौज सिधाई गढ बीकाणे पूगी आय राठोड़ा रे जैकारों सैं राती घाटी गयी गुंजाय गढ गणेस राती घाटी मे बीका फौज कियो परवेस राठोडॉ रै जैकारै सू गूंज उठ्यो गढ श्री गणेस घण बाज्या छतीसू बाजा जगी ढोल बज्यो गरणाय कर आरतडी फौज बधारी ऊँचै सुर ा सख बजाय मालदेव रो गरब गळायो राठोड़ॉ री राखी आण जैमल रो सदेस सुणायो सुण मुळक्या घण राव कल्याण पछै फौज नै गोठ जिमाई गढ गणेस में कर परसाद धिन धिन धिन राठोड़ी सेना राठोड़ी पाळी मरजाद गई भोम रो बाहडू मुळक्यो भीवराजजी दिवी बधाई घर घर खुसी बधाई बाँदै सै नगरी रा लोग लुगाई आखी जनता खुसी हुई घण राठोड़ा है म्हारा प्राण आजादी रा सदा रुखाळा छतरी धरम निभावै आण मिनखा धरम सनातन राख्यो राख ऊजळी कूख सवाय राठोड़ा छतरापो पाळयो पग पग जनता राज थपाय राठोड़ी फौजाँ रा मुँहियों धिन धिन धिन रे धाँरो नौव बीका बीदा काँघलोत पण ठावा बसिया गाँवोगोंद पाँचौ सरग 117 आछा ठोड ठिकाणा धारी सीस कटी मे बसिया जाय जनता रा साचा रखवाळा राठोड़ों रा रग सवाय गढ भटनेर चायलै अहमद बैठे घण उतपात कराई पग पग पर आतक मचायो जनता ही घण भरी भराई राजसीह अर मेघसीह नर केलण देवसीह घण माण विजैसीह अर अमरसीह नर बीसाजी बीका सुत जाण वीर प्रतापसी बेरसीह नर रतनसीह अर तेजसी जाण वीर नेतसी और करमसी किसनसीह रामसीह सुजाण सूरजमल अर कुसळसीह नर रूपसीह धिन वीर सुजाण मैं सगळा ही वीर लडाका लूणकरण सुत नीतीवाण मालदेव अर कान्ह श्रृगजी सुरजन करमसेन घण माण पूरणमल अर अचळदासजी मान भोज तिरलोक सुजाण राठोडॉ री जैजैकारी दुसमणियों पर चढिया गाज राव जैतसी रा सुत सूरॉ जलम भोम हित कियो सुकाज बड़ो राव कल्याण सूरमो गादीघर टीकाई है ठाकुरसी भी घणो सूरमो भीवराज सो भाई है बीकाणे रो राज बावइयाँ राठोड़ाँ खून बधायो मालदेव री चोट बिखरियो चारूँ मेरॉ राज सँधायो 118 गई भोम रो दाहडू जैतपुरै ठाकुरसी तपतो अहमद मॉडी राड़ घणी दिन धौळे रा धाड धराँतो गढ बैठो भटनेर धणी ठाकुरसी भटनेर लैवण रो आखर मन मे चायो हो जोरदार हमलो कर खोसाँ काठो मतो उपायो हो ओक हजार री फौज चढाई जा घेरयो चढ गढ भटनेर मॉ करणी री जैजै बोल्यो गढ मे जाय जियो सेर अहमद रहग्यो दूर कठे ही गयो फिरोजो रण मे मर राठोडॉ री फिरी दुहाई धिन कल्याणो गादी धर भीवराज ठाकुरसी भाई गढ मे करी जीतरी गोठ धरम धार नगरी रा लोगों नौसौ मणों उछाळ्या मोठ बीस बरस ठाकुरसी तपियो घणो बध्यो राठोड़ो राज घणो इलाको कबजै करियो घणा कराया जनहित काज महाजन रा मालक अरजनसी चाचावाद रा वीर वणीर जैतपुरै रा किसनसीह नर पूगळ राव वैरसी धीर कॉधल दीकै काकै भतीजै गढ गणेस री पाळ देय लोक सेवा सरक्षण दुरदिन दीना टाळ काका हुवै तो कॉधल जिसड़ो रे काँधल वाह लोकराज बीकै रो थरप्यो लख लोकॉ री चाह वाह रायसीह अर रामसीहजी पीथळ पिरथीराज सुजाण अमरसीह अर भाणसीह नर सारंगदे सूरा सुरताण राठोडों रो सुजस बधायो धिन धिन धिन दीरा बीकाण ॐ सगळा कल्याण राव सुत राठोडॉ रा सुजस सुजाण भळे घणों ही सूरवीर नर राठोड़ी फौजॉ रा वीर धरम धीर चौकस हुय बधिया दुसमणियाँ री छात्याँ चीर गढ गणेस राती घाठी री माटी में ही बा तासीर जलम्या सो ही सूर जलमिया दुसमणियों पर चढिया धीर राठोडौं री जैजैकारी मॉ करणी सिर छत्र धरायो गाजाँ बाजाँ राज कियो घण जन सेवा रो फरज निभायो लोकलाज मरजादा राखी घड़ी घड़ी रा विधन टळाया सदा लोक कल्याण साधियो मों करणी रा हुकम हलाया आजादी रा रखवाळा हा घण सैठा राठोड़ा राव आखै भारत सुजस कमायो कर दुसभण काळजियाँ घाव लोकराज दीकै जोघावत थरप्यो बीकानेर जनलोको री पीई मिटाई ही करणी री भैर बीकाणे री करी थरपणा राती घाटी माह लोकसभा री साळ खड़ी है गढ गणेस री छाँह राव जैत जस जीतियों राती घाटी माँह साह कामरो भाजियो निरख अँधारी छौंह सवत पनरैसौ पचाणमै सुद आसोजी ਰ भाजत नॉख्यो किरणियो नास मिलायो ਵਣੇ ख्यात बात इतिहास में विजै दिवस जस लेख करणी चकर चलाइयो कॅप्यो कामरो देख भाज्यो लुक छिप रात रो छाई काळी भोर डिगतो पड़तो मारगाँ भाज बझ्यो लाहौर नीवराज जैतावत बीके करियो करम ਸੰet गई भोम रो बाह लीनो विरुद सुजाण 119 भीवराज चितम चदयो साह सेरसा सार गढ दिल्ली में तेड़ियो पणे मान मनवार सुजस भीवराजोत रा बीका करै सभाळ चलकोई रो चानणा पळकै सूरजगाल राती घाटी थरपियो वाको गढ घीकाण राखण मिनखापण सदा आजादी रो माण भीवराज चित मे चढ्यो घण कामू मुख नूर घण विसवासी नित गिण्यो साह सेरसा श्री करणी री कीरती अखी अमर महिगाँण भीव भणे सागर री पाळी तीखी कलम बखॉण सगती री भगती इसी घण लूठी जस झाळ टिके न दुसमण सामने लपटाँ देवै चाळ राजकाज रणनीतियो घण लाँची तलवार दुसमण धूजै नाँव सुण लड़ियों पई न पार ऊँठ घोडौं रो पारखी घण तकड़ो असवार सेन सजावै साँवठी मुंहिया मुखाँ मॅझार सुजस घणा जग सपियो साह सेरसा भीवराज नै जीवणे भल गढ देसाणे देहुरो दस फॅटो देसाण किनियाणी री कीरती पळकै जितरै भाण राख्यो भरपूर चारण काबा चौमुखा चव. ढोल बजाय जो धोकै बिनवै अलै करणी रै जस छाय राती घाटी सोवणी गढ गणेस घण भाण बीकै जोधावत थप्यो बॉको गढ बीकाण विकरम सवत सोळसौ जा मालव परदेस रायसेन गढ जीतियो सेरसाह सँगतेस सॅवत सोळसौ अंक मे लियो जोधपुर दाब मालदेव भाखर भिळ्यो मिली न रोटी राब मालदेव नवसहसा भाज्यो पदमादे देवड़ियो पूत पिछम धरा रो पातसाह हो जोधाणै रो हो रजप्त कुंवर भाण राव जैतसी रो भीवराज कुळ गई भोम रो पायो बिड़द 120 गई भोम रो बाहडू बाहडू बखाण फतै जोधपुर नै किन्यो भीवराज रै तॉण साह सेरसा सूर रो सुजस बध्यो सनमाण मालदेव खोसियो पाछो गढ़ बीकाण गयो राज पाछो लियो भीवराज रै ताण राठोडॉ रो चालियो बाईस पीढी राज जे नॉ हुँवतो भीव तो हुँचतो घणो अकाज गढपतिया नामी हुया ख्यात बात इतिहास घण जीत्या गढ साँवठा कर दुसमण रो नास जैतसिह रे आँगणे घणा जलमिया सूर राठोड़ा रॉघड हुया मुख मडळ घण नूर राती घाटी रण मॅड्या राँघड़ लड्या संपूर जस जीत्या तलवार सू दुसमणिया कर घूर राठोडॉ रणवकडा गढ बाणेस बीकाण राज तिलक सनमाणियो जैतसुतो कल्याण वीरम दीनो मेडतो बीकाणो कल्याण गई भोम रो बाहड़ भीवराज विड़दाण राजसभा सनमाणियो गढ गणेस बीकाण राती घाटी रो विड़द भीवराज कल्याण घण पग माड्या ऊजळा गाँव गॉव घमरोळ राठोड़ा रणरग चढ पूरा करिया कोळ घण सकट घिरताँ थकॉ कदैन खोयो होस धीर वीर राख्यो सदा हिवडॉ जस रो जोस गई भोम रो बाहडू मोटो बिड़द बखाण गाँव भीवसर बोधियो गॉवौँ सेत सुजाण आखै राज वसाइया आछी आछी ठोड़ बीका भीवराजोत रा रण चका राठोड़ रणराता रण सुजसिया नीव भीव राजोत सुघड़ सपियो सॉवतो सुभ राठोड़ो गोत रण मेरळक्या कमर कस रण राती झळ झाल सकट मेट्या साँवठा कर जनता प्रतिपाळ कसमिरदे रे पेट रा घण पळक्या दो लाल घण नामी कल्यापसी भीवराज भूपाळ दबदोसर 121 जे नॉ हुँवतो भीव तो वणतो कर गोत नॉव कमायो भीव जद बज्या भीवराजोत जे नॉ हुँवतो भीवजी हुँवतो इसो अकाज चौथी पीढी विणसतो बीकावसी जे नॉ हॅवतो भीवजी हुँवतो इसो अकाज बीकॉ रो नॉ चालतो बाइस पीढी राज जे नॉ हुँचतो भीवजी जैतावत राठोड़ मालदेव रै वस रा गढॉ करता कोड जे नॉ हुँवतो भीवजी जैतसिघ रो पूत बीका बीदा कॉधला रुळता घण रजपूत जे नॉ हुँवतो भीवजी जैतावत राठोड बीका बीदा कॉधला गढ बॅधता किण ठोड उणी भीवराजोत रो बीको वस विसाळ नवलसिघ रै ऑगणै पळकै सूरजमाल चलकोई रे च्यानणे पग पग कर परकास राठोड़ों रणवकहाँ भरसी नॅओ हुळास सवत दो हजार चौपनवे भादू जलमाठम सोमवार गई भोम से बाहडू लिखियो अथ लिखार सन उगणीसौ सताँणमै पचिस अगस्त सोमवार गई भोम रो वाहडू लिखियो यथ लिखार समैसार परवॉण लख सुभ सुगुणी सुत सार गढ बीकाणे नगर म भीव भण्यो भणकार नाग फणी पर कलम भीवरी नित चालै तीखी तरवार मॉ करणी सिर छत्र धरावै सार सारदा बिडद सॅवार समैसार री बात बणैली मुँवो बणैलो म्हारो गोत म्हॉरा वसज बीकाणै रा बजै पॉडिया भीवपॉडोत 122 गई भोम रो बाडू भीव रो तुनतुनियो बाजै श्री जोधै सुत बीकै मॉड्या पग रण रातै रजवट रग आ जॉगळ परदेस जॉगळू कमधज काकै कॉधल सग जोरावर गज राजसिघ सा भल परगटिया बीका भाण सुभ प्रगट्या प्रताप सूरतसी रतनसिघ सरदार सुजाण हूँग गग सादूळ सवाया करणी राज बडैरॉ माण राठोड़ाँ रजपूती राखी राजस्थानी आण भीव रो तुनतुनियो बाजे जय श्री करणी देसणोक री माथै ऊपर छत्र धरायो लिखमीनाथ नागणेचीजी घणो दियो आसीस सवायो गढ गणेस राती घाटी मे राठोड़ॉ भल गढ चिणवायो न्यारी न्यारी जात पाँत रो चलतो चौकी राज मिटायो राठोडॉ रजपूती राखी राजस्थानी आण भीव रो तुनतुनियो बाजै नैरो लूणो राव जैतसी राती घाटी तपिया छाया धिन कल्याण रायसी दळपत सूरा करणा सुजस सँपाया जय जगळ धर बादसाह रा गैरा घुरिया ढोल निसाण 'गई भोम रो बाहडू नामी भीवराज राठोड़ सुजाण राठोडौं रजपूती राखी राजस्थानी आण नीव रो तुनतुलियो दाजै रणधका राठोड़ तापिया निरप अनूप सरूप सुजाण रायसिघ जूनो गढ घाल्यो सुभ बीकाणे भलो चिणायो गग निरप खाखी बाबै आ लालमलाल लालगढ छायो गढ मे बीको सैर मे कीको न्याय धरम चूसो बजवायो जनखा जुलमी दसला पजो देय मठोठी तोड़ बणायो राठोड़ाँ रजपूती राखी राजस्थानी आण भीव रो तुनतुनियो बाजे सिरै नाँव बीकाणो जग मे राठोड़ घण माण वधायो मॉ करणी री परघा माँही रैया विजेता सुजस सवायो लतुआ सोटी भाँग नाँखदी किरचो किरचो तोड़ बगायो पण लख औज्या खोल सरूपो तोडमोड़ हे किलो दादो दरो द्वन्तुनिष्पाजे 123 राठोडॉ रजपूती राखी राजस्थानी आण भीव रो तुनतुनियो बाजै जात पात रो झोड़ नहीं हो कारू री नीती सुखदाई सगळा करता काम आपरा भद नही हो राती पाई राती घाटी री माटी री महक सदा जनता सरसाई सुख सॉयत भाईचारै री प्रेम भावना नित पसराई राठोड़ाँ रजपूती राखी राजस्थानी आण भीव रो तुनतुनियो बाजै गीत मायड भासा मोवणी बीकाणै विश्वाम्बिका ऑगण पड्यो निढाळ डावो पग धचकॉवतों चालू घण बेहाळ मुरगढहाळो गेडियो लियो हाथ मे धार मॉचै पडियाँ मॉडियो लिखियो ग्रथ लिखार अथ इकीसो ओपतो प्रबंधकाव्य परवाँण ख्यात बात इतिहास में पळकै घण परमाण छपणे री बेळा हुई समेसार सनमॉण सुणै गीतड़ा नर कोई सरब गुणॉ री खॉण कलम कोरणी कोरियो सत री स्याही सार चरित ऊजळो मॉडियो झॉक्यो आरपार सवत दो हजार चौपनवें सुद आसोज दरों सनिवार विजया दसमी नै सुभ घड़ियाँ भण गुण सावळ सोच विचार मायड़ भासा मोवणी मन मरजादा पाळ गई भोम रो बाहडू भण्यो भीव भुरजाळ राती घाटी रो सुजस जैतसिघ रो पूत गढ गणेस बीकाण रो राठोड़ो रजपूत 124 गई भोम रो वाहडू सत साहित रो सुजस पारखी मायड़ भासा राखै जॉण घर आ सुणिया भीव गीतड़ा कविया सगती दान सुजॉण भीमपाँडिया बीकानेर 111097 परिशिष्ट
No text on this page.
भीवराजोत बीका राठौड़ श्री नवलसिंहजी
पुत्र श्रीजेसराजसिंहजी राठौड़पौत्र
श्री खुमाणसिहजी राठौड़ गाँव धलकोई
जन्म सन् 1898 मार्च 30
स्व 20 नवम्बर 1989
ठा श्रीहरीसिहजी धीका राठौड़ भीवराजोत
पुत्र ठा श्री नवळसिहजीवीका राठौड़ भीवराजो
(घलकोई)(जन्म 18 जनवरी 1925)
Romar
ठा श्रीसूरजमानसिंहजी यी ठाइभवराजपुत्र टान्दसिटी
का राठौडदाउन्न 7फ दरी 1930
एम ए पी एड उपटेकनिभा रास्थान (रेवानिवृत)
No text on this page.
भीवराजोत बीका राठौड़ श्री नवलसिहजी
पुत्र श्री जेसराजसिंहजी राठौड़पौत्र
श्री सुमाणसिहजी राठौड़गाँव घलफोई
जम सन् 1898 मार्च 30
स्व20 नवम्बर 1989
ठा श्रीहरीसिहजी दीपा राठीइभीट पर
पुत्र वा श्रीनवदसिंहजीवीय राठीइमोदराजो-
(पलबोई)(जम 18 जनवरी 1925)
...
trysreerfort
उम
-1010
-hern
श्रीमती शुभकँवर पड़िहार (राणी मडोर)
पत्नी श्री सूरजमाल सिंहजी राठौड़
(पुत्रीले कर्नल ठाकुर किशनसिहजीपड़िहार
बेळासर मास्टर ऑफ दी हाउस होल्ड महाराजा बीकानेर)
ले कर्नल ठाकुर श्री किशनसिहजी पड़िहार (वेळासर
मास्टर ऑफदीहाउस होल्ड महाराजा बीकानेर
कु पल्लवी निरवाण पुत्री श्री सुरेन्द्रसिहजी निरवाण
NAVAR- । . ले कर्नल महेन्द्रसिह राठौड़ पुत्र श्री सूरजमाल सिह राठौड़ एम एस सी जुलौजी एम एस सी डिफेस (वलिंगटन) जम2 मार्च 1956 श्रीमती मजू सावरा पत्नीपल भी महेन्द्रसिंह राठौड़ (पुत्रवधूठा श्रीसूरजमानसिह राइ) जम21 दिसम्बर 1959 Frts (1225TRI,
भंवर श्री विक्रमसिह राठौड़ (पौत्र ठा सूरजमालसिंह राठौड़)
जम 10दिसम्बर 1983
कु वदना राठोड(पौत्री ठा सूरजमाल सिंह राठौड़)
जन्म 29पितम्बर 1985
श्री कुचेर सिह राठोड
(चित्रकार) बीकानेर
कु भुवनेश्वरी राठौड़ (पौत्रीठा सूरजमाल सिह राठौड़)
जन्म 24 दिसम्बर 1992
मैं रुद्ध सिह राठौड़ (पौत्र ठा सूरजमानसिंह राठौड़)
जन्म 6 अप्रैल 1994
Fair
३
-----
--
श्रीमती निशि राठौड़ पत्नी श्री सुरेन्द्रसिंहजी निरबाण
(अलसीसर)(ठा सूरजमालसिंह राठौड़ की पुत्री)
श्रीसुरेन्द्रसिह पुत्र श्रीनारायणसिहजी जिरवाण(अळसीसर)
(ठा सूरजमालसिह राठौड़ की पुत्री निशि राठौड़ के पार
श्रीमती निवाराठइपत्नी श्री सुरेन्द्रसिहरी नि (पुत्रीदपुर
श्रीसूरजम मरिहती)अपरमपदोनि
पुत्रनेन्द्रस्ति निरव
A
कु भोपालसिह राठौड़ (पुत्र ठा हरीसिहजी राठौड़)अपने बहनोई
श्री कुमेरसिहजी शेखावत (गाँगियासर)वे साथ
श्रीमती शिवकँवर पत्नी श्रीजीतेन्द्रसिह राठौड़
पुत्रवधूठा श्रीहरीसिंहजी राठौड़
TE
पुत्र जन्मोत्सव पर ले कर्नल महेन्द्रसिंह राठौड (पुत्र ठा सूरजमालसिहजी राठौड़)
यूनिस डान व अन्य परिजनो के साथ।
शिक्षाविद् डॉ वी वी जान (निदेशक महाविद्यालय शिक्षा) एव अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के पुरस्कार प्राप्त करते ठा श्री सूरजमाल सिह राठौड़ राजस्थान के राज्यपाल श्री रघुफुल तिलक ठा सूरजमाल सिह राठौड़ राज्य पुरस्कार (शिक्षक दिवस पर) प्रदान करते हुए।
राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षाविद श्री रामप्रसाद जी सहल ठा श्री सूरजमालसिह
राठौड़ को आशीर्वाद सम्मान दे रहे है।
आकाशवाणी रिकोर्डिंग दिनाक 26 जनवरी 1988 61 श्री सूरजमालसिह राठौड़
आकाशवाणी बीकानेर उद्घोषक श्री घचल हर्ष के साथ
शिक्षा मत्री राजस्थान सरकार श्री ललित किशोर चतुर्वेदी ठा सूरजमा न सिह राठौड़ का शिक्षक दिवस समारोह मे सम्मान कर रहे है। पूर्व बीकानेर नगर विधायक श्री गोपाल जोशी जिला शिक्षा अधिकारी श्री भीखमचन्दजी जैन के साथ ठा सूरजमालसिह राठौड प्रसन्न मुद्रा मे।
PN
man
रगमहल खुदाई अभियान मे भी हमारीड के साथ ठा सूरजमालसिह राठौड़ तथा
अन्य श्री वीरेन्द्र सक्सेना (दैनिक युगपक्ष बीकानेर) ठाकुर इन्द्रसिहजी (राजपुरा)
डॉ लक्ष्मणसिह मेजर रघुनाथ सिह आदि-आदि।
elete
LUN
म
010
Minik
ठा सूरजमालसिह राठौड़ फोर्ट स्कूल बीकानेर वार्षिक समारोह मे पूर्व बीकानेर
महाराजा सॉसद डॉ करणीसिहजी व महाराज कुमार नरेन्द्रसिहजी तथा अन्य
सरदार मदनसिहजी श्री दाऊदयाल शर्मा सपिकेश शर्मा आदि आदि के साथ।
राजस्थानमाल मन्दिर
स्वागत-समारोह
TA
राजस्थान बाल मदिर स्वागत समारोह में राज्य मत्री दामोदर आचार्य सार्वजनिक
निर्माण मत्री श्री बी डी कल्ला आदि आदि के साथ ठा श्री सूरजमाल सिह राठोड
(जि शि अ बीकानेर)
ज
DADAROO
ठा श्री सूरजमालसिह राठौड़ उपशिक्षा निदेशक सादुल स्पोर्टस स्कूल बीकानेर
चीका हाउस उद्घाटन समारोह में ब्रिगेडियर बाघसिह कु लक्ष्मणसिह एव ठाकुर
अजीतसिह (बेलासर) साथ म है।
aneer
रगमहल खुदाई अभियान मे श्री हन्नारीड के साथ का सूरजमालसिह राठौड़ तथा
अन्य श्री वीरेन्द्र सक्सेना (दैनिक युगपक्ष बीकानेर) ठाकुर इन्द्रसिहजी (राजपुरा)
डॉ लक्ष्मणसिह मेजर रघुनाथ सिह आदि आदि।
ellhere
2
910
ठा सूरजमालसिह राठौड फोर्ट स्कूल बीकानेर वार्षिक समारोह में पूर्व बीकानेर
महाराजा सॉसद डॉ करणीसिहजीव महाराज कुमार नरेन्द्रसिहजी तथा अन्य
सरदार मक्खनसिहजी श्री दाऊदयाल शर्मा ऋषिकेश शर्मा आदि आदि के साथ।
राजस्थानवालसन्दिर
स्वागत समारोह
राजस्थान बाल मदिर स्वागत समारोह मे राज्य मत्री दामोदर आचार्य सार्वजनिक
निर्माण मत्री श्री धी डी कल्ला आदि-आदि के साथ ठा श्री सूरजमाल सिह राठोद
(जि शि अ बीकानेर)
MARRI
E
ठा श्री सूरजमालसिट राठौड उपशिक्षा निदेशक सादुल स्पोर्टस स्कूल बीकानेर
चीका हाउस उद्घाटन समारोह मे ब्रिगेडियर बाघसिह कु लक्ष्मणसिह एव ठाकुर
अजीतसिह (बेलासर)साथ म है।
--
INE
वा सूरजमालसिह राठौड़ राव बीकाजी के गढगणेश (राती घाटी लक्ष्मीनाथ
मदिर) की प्रोल के आगे ले कर्नल गाढसिह श्री लाजपतभाग धाभाई श्री मातीलाल
पुरोहित आदि साथ म है।
पूर्व बीकानेर महाराजा सासद डॉ करणीसिह जी के साथ नागरी भडार बीकानेर के
समारोह मेला सूरजमालसिह राठौड़।
1 ता सूरजमालसिह राठौड़ बीकानेर स्थापना दिवस समारोह म जिल श्री सुबोधजी अग्रवाल को पुष्पाजली मच की ओर ले जा रहे है। सा । श्री राजेन्द्रसिहजीशेखावत पर्यटन अधिकारी बीकानेर। ठा सूरजमालसिह राठौड़ श्री मोतीलाल पुरोहित आदि के साथ में बीकानेर स्थापना दिवस समारोह में जिला कलेक्टर श्री सुबोध अग्रवाल की अगवानी स्वागत करते हुए।
T.
सूरजमालसिह राठौड़ सपरिवार गगोत्री मे (यात्रा पर)
ठा सूरजमालसिह राठौड़ परिवार सहित जमुनोत्री पर
irul.
ठा सूरजमालसिह राठौड़ सपरिवार वद्रिका धाम मदिर केसिहद्वार पर।
*-
111
ठा सूरजमालसिह राठोड़ परिवार सहित ऊटी पर यात्रा मे।
छा सूरजमालसिह राठौड़ बीकानेर जूनागढ मे गणगौर मेले के अवसर पर साथ है
महाराजा प्रतापसिहजी म कालूसिहजी ठा हनुमतसिहजी और
ठा आनन्दसिहजी (रामपुर)
ठा सूरजमालसिह राठौड सपरिवार गगोत्री म (यात्रा पर) ठा सूरजमालसिह राठौड़ परिवार सहित जमुनोत्री पर
This
।
टा सूरजगलतिर राइ परिवार सहित उटी पर यामा
on
ठा सूरजमालसिह राठौड़ बीकानेर जूनागढ़ मे गणगौर मेले के अवसर पर साथ है
महाराजा प्रतापसिहजी ठा कालूसिहजी ठा हनुमतसिहजी और
ठा आन्दसिहजी (रामपुर)
--
बीकानेर जूनागढ मे गणगौर मेले पर महाराजा रायसिह बेड सलामी देते हुए।
रनर
राना दिवस समामल
पु. FriREITStane
मान न TRI
वीर विरुदावली दो शब्द सूरजमालसिह राठौड प्रात स्मरणीय वीर श्री भीवराजजी राठौड़ (गई भोम के बाहडू) बीकानेर के सुनामधन्य राठौड़ राव श्री जैतसी के सुपुत्र थे। वे राव श्री कल्याण के अनुज थे। उनका जन्म सोढी राणी कश्मीरदे की कोख से हुआ था बचपन से ही श्री भीवराजजी मे वीरता और शौर्य के गुण प्रकट होने लगे थे। वे शस्त्र चलाने में अत्यधिक निपुण थे। तेजस्विता तो उनमे कूट-कूट कर भरी हुई थी। श्री भीवराजजी अपने पिता श्री राव जैतसी के साथ रहकर शस्त्र चलाने की शिक्षा-दीक्षा लेकर निपुण हुए। घुड़ सवारी मे तो चे अद्वितीय पारगत थे। साथ ही वे घोड़ो के कुशल पारखी थे। उनका बल विक्रम साहस जुझारूपन शस्त्र चलाने की कला और युद्ध कौशल सदैव अनुपम और अनुकरणीय था। उनका शौर्य से दमकता स्वरूप भी चिताकर्षक था। उनके शरीर का गठन और दमकता हुआ स्वरूप अत्यधिक प्रभावशाली और प्रेरणादायक था। महान शूरवीर पिता श्री जैतसी की सगत से युद्ध मे शूरवीरता दिखाने के प्रति चाव अदम्य उत्साह और सुयश प्राप्ति की अनुकरणीय लगन-लालसा सदैव रही। परिणाम स्वरूप सुरक्षा पक्ति मे रहकर सदा ही युद्धो मे विजय श्री प्राप्त की। पिताश्री राव जैतसी ने कुशल कूटनीति-राजनीति और युद्ध कौशल से भारी भरकम मुगल सेना और मुगल सेना के क्रूर-नायक कामरों को परास्त कर बीकानेर रातीघाटी से भगाकर ऐतिहासिक विजय श्री प्राप्त की जिसका विजय दिवस पर्व आज भी मनाया जाना अत्यधिक प्रासगिक है। ई सन् 1534 से 26 अक्टूबर को अर्द्धरात्रि पर्यत आक्रामक मुगल सेना और उसके नायक शाह कामरॉ को रातीघाटी के गणेशगढ़ बीकानेर मे अचानक युद्ध कौशल से जोरदार आक्रमण कर जान बचाकर भागने को मजबूर किया वह ख्यात वात इतिहास मे आज भी विश्व विख्यात है। उन्ही वीरवर राब श्री जैतसी के सुपुत्र भीवराजजी के अदम्य वीरता साहस-शौर्य की गुण-गरिमा की चर्चाएं सुनकर दिल्ली का शाह शेरशाह प्रभावित हुआ और उन्हे दिल्ली आमत्रित कर अपने प्रमुख सहयोगी के रूप म स्थापित किया। एक बार मतिभ्रम होकर जोधुपर राव मालदव ने बीकानेर पर भारी भरकम सेना लेकर आक्रमण किया और राव जैतसी को मरवाकर बीकानेर रातीघाटी के किले वीर विरुदावली दो शब्द 127 बीकानेर जूनागढ मे गणगौर मेले पर महाराजा रायसिह बैड सलामी देते हुए। अभिनत्र ठा सूरजमालसिह राठौड़ बीकानेर स्थापना दिवस समारोह म श्री मोतीलाल पुरोहित श्री चन्द्रदानजी धारण तथा सम्मान प्राप्त श्री प्रतापसिह घटेल और यो मुसुलसिह राठौड़ के अभिनदन अवसर पर।
वीर विरुदावली दो शब्द सूरजमालसिह राठौड प्रात स्मरणीय वीर श्री भीवराजजी राठौड़ (गई भोम के बाहडू) बीकानेर के सुनामधन्य राठौड़ राव श्री जैतसी के सुपुत्र थे। वे राव श्री कल्याण के अनुज थे। उनका जन्म सोढी राणी कश्मीरदे की कोख से हुआ था बचपन से ही श्री भीवराजजी मे वीरता और शौर्य के गुण प्रकट होने लगे थे। वे शस्त्र चलाने मे अत्यधिक निपुण थे। तेजस्विता तो उनमे कूट-कूट कर भरी हुई थी। श्री भीवराजजी अपने पिता श्री राव जैतसी के साथ रहकर शस्त्र चलाने की शिक्षा-दीक्षा लेकर निपुण हुए। घुइ सवारी मे तो वे अद्वितीय पारगत थे। साथ ही वे घोड़ो के कुशल पारखी थे। उनका बल विक्रम साहस जुझारूपन शस्त्र चलाने की कला और युद्ध कौशल सदैव अनुपम और अनुकरणीय था। उनका शौर्य से दमकता स्वरूप भी चिताकर्षक था। उनके शरीर का गठन और दमकता हुआ स्वरूप अत्यधिक प्रभावशाली और प्रेरणादायक था। महान शूरवीर पिता श्री जैतसी की सगत से युद्ध मे शूरवीरता दिखाने के प्रति चाव अदम्य उत्साह और सुयश प्राप्ति की अनुकरणीय लगन-लालसा सदैव रही। परिणाम स्वरूप सुरक्षा पक्ति मे रहकर सदा ही युद्धो मे विजय श्री प्राप्त की। पिताश्री राव जैतसी ने कुशल कूटनीति-राजनीति और युद्ध कौशल से भारी भरकम मुगल सेना और मुगल सेना के क्रूर-नायक कामरॉ को परास्त कर बीकानेर रातीघाटी से भगाकर ऐतिहासिक विजय श्री प्राप्त की जिसका विजय दिवस पर्व आज भी मनाया जाना अत्यधिक प्रासगिक है। ई सन् 1534 में 26 अक्टूबर को अर्द्धरात्रि पर्यत आक्रामक मुगल सेना और उसके नायक शाह कामरों को रातीघाटी के गणेशगढ बीकानेर मे अचानक युद्ध कौशल से जोरदार आक्रमण कर जान बचाकर भागने को मजबूर किया वह ख्यात बात इतिहास में आज भी विश्व विख्यात है। उन्ही वीरवर राव श्री जैतसी के सुपुत्र भीवराजजी के अदम्य वीरता साहस-शौर्य की गुण-गरिमा की चर्चाएँ सुनकर दिल्ली का शाह शेरशाह प्रभावित हुआ और उन्हे दिल्ली आमत्रित कर अपने प्रमुख सहयोगी के रूप मे स्थापित किया। एक बार मतिभ्रम होकर जोधुपर राव मालदेव ने बीकानेर पर भारी भरकम सेना लेकर आक्रमण किया और राव जैतसी को मरवाकर बीकानेर रातीघाटी के किले वीर विरुदावली दो शब्द 127 गणेशगद पर करजा कर लिया तो श्री भीवराजजी के प्रभाव और सुप्रयला से दिल्ली शाह शेरशाह सूरी की सहायता से जोधपुर पर आक्रमण कर गालदेव का परास्त कर-~मान भगकर बीकानेर का खोया हुआ राज्य हीकानेर राज्य के उत्तराधिकारी बड़े भाई राव श्री कल्याणगल को वापिस दिलाया-परिणाम स्वरूप सी अदम्य उत्साह और शौर्य की प्रतिष्ठा म अनुज श्री भीवराज राठौड़ को गई भोग रो बाहडू विरुद से सम्मानित किया था। तथा उन्त भीवसर का बड़ा ठिकाना नट कर सम्मानित किया गया था। यही नहीं श्री भीवराजजी ने भइता के राव धीरग के जोधपुरी मालदेव द्वारा हड़पे राज को भी वापिस दिलाकर वीरग को मेड़ता को पुन सस्थापित करने में सहायता दी थी। परिणाम स्वरूप राव वीरम ने भीश्रीजीवराजजी को गई भोग रो बाहडू से ससम्मान सबोधित कर कृतज्ञता ज्ञापित की थी। उनके सम्मान म वीरम ने अनेक दोहे-कविता भेट कर सम्मानित किया तथा विरुद बदाया। किसी कवि ने राठौड़ो की प्रशसा मे लिखा है कि राठौड़ा ने मरुभूमि को अपने खून से सीचकर और वन सम्पदा को भी पानी के अभाव म रयत-पसीने से सीचकर हरा भरा रखकर पर्यावरण को स्वास्थ्यकर हरा भरा सरसन्न रखा। खून पर खून सीचकर-माथा देकर राठौड़ो ने सतत आजादी रखने का भरपूर प्रयत्न किया-यही उनका क्रमधजपनका विरुद था। जैसे मुट्ठी भर सूकी थर्को नीसर जावै दौड़। रगत सिचोई जद रही रेती धर राठौड़।। अर्थात सूखी चालू रेत को मुट्ठी में बद रखना चाहे तो वह मुट्ठी से तुरत ही बाहर निकल भागती है परन्तु उसे रुधिर से गीला कर रखा जाये तो वह मुट्ठी में ही वद रह जाती है। इसी प्रकार राव श्री जैतसी और उनके पुत्र श्री भीवराजजी जैसे राठौड़ो ने अपने खून से सीच कर मरुधरा बीकानेर को बनाये रखने को सदा प्रयत्नशील रहकर स्वतत्र बनाये रखा। कभी भी गुलामी की बेड़ियो मे जकड़ने नही दिया-हर हालत मे आक्राताओं को मारकर खदेड़ दिया। स्वस्थ पर्यावरण की रक्षा के लिये अनिवार्यत उपयोगी वन सम्पदा को वृक्ष लगाओ का नारा देकर ही नही अपितु विधि सम्मत जोरदार व्यवस्था के कदम उठाकर वन-सरक्षण की व्यवस्था करते थे। हरे-भरे वृक्ष काटकर पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वालो को कठोर दड देते थे। राव श्रीजैतसी और उनके पुत्रो तथा वशजो ने राठौडी आन मान मर्यादा का पालन कर अपने गाढे रक्त-पसीने से सोचकर जगला को कायम रखा 'ओरण स्थापित कर व चारागाह सरक्षित कर पर्यावरण की रक्षा की जिसके अनेक अभिलेखीय दस्तावेज सुरक्षित एव सरक्षित सकलित है। किसी कवि ने ठीक ही कहा है जड़ कद जमती रेत मे जळ ऊँडो धर भूख राठौडॉ राखिया रगतॉ हरिया रुख - कर 128 गई भोम रो बाहडू अर्थात बालू मिट्टी में बिना पानी के पेड़ कैसे लग-टिक सकते है जहाँ पार्न बहुत ही गहरा है और भू-भाग पर-धरा पर भूख-तिस है-गरीबी है ऐसी स्थिति में शूरवीर राठौड़ो ने ही अपने रक्त-पसीने से सीचकर वन सम्पदा को हरा-भरा रख जो कि सम्पूर्ण प्राणीवर्ग जीवमात्र के लिए प्राण रक्षक एव जीवन दायक है। परमवीर श्री भीवराजजी राठौड़ और उनके वशज समस्त भारत के नामी महानगरो कलकता मुबई मद्रास दिल्ली जयपुर जोधपुर कोटा बीकानेर मे कार्यरत है तथा पर्याप्त सख्या मे सेना पुलिस न्यायिकसेवा शिक्षा जगत चिकित्सा क्षेत्र राजस्व प्रशासन लेखा सेवा कृपि कार्य ही नही अपितु अनेक लब्ध प्रतिष्ठित व्यावसायिक-व्यापारिक प्रतिष्ठाना मे उच्चतम पदा पर स्थापित-कार्यरत रहे है और आज भी सेवा सलग्न कार्यरत है। उक्त श्री भीवराजजी राठौड़ भीवराजोत बीका राठौड के बीकानेर व बीकानेर के चूरू जिले के विभिन्न महत्वपूर्ण बडे धीगड ठिकानो-गाँवो मे बाहुल्यता से आवाद है। विशेष कर बारह गॉवो-(1) राजपुरा (2) अमरपुरा (3) चलकोई (4) मुवाड़ी (5) ढीगी (6) हड़ियाल (7) कॉजण (8) गिनडी (9) विलियाँ (10) नाथपुरा (11) मूंदीटीवा (12) मूंदी ताल। इनके अलावा कुछेक घर-गुवाडी गॉव बालेसर और आसल खेड़ी मे भी आबाद है। पूर्व मे राजपुरा ठिकाने के अतर्गत ताजीम के 25 गॉव थे जिसमे से उपर्युक्त 12 गॉव तो भीवराजोत बीका राठौड़ा के जागीर के रहे थे। नामी ख्यात लेखक श्रीदयालदास की ख्यात मे श्री भीवराजजी राठौड की वीरता और उनको दिये गये गई भोम रो बाहडू विरुद का बडा अनूठा-सजीव उल्लेख-बखॉण किया गया है। तथा उन्हे भीवसर का नामी ठिकाणा भेट स्वरूप दिया गया। बाद मे राजपुरा की 25 गाँवो सहित ताजीम दी गई। निश्चय ही श्री भीवराजजी राठौड के वशज शूरवीर भीवराजोत बीका राठौड़ो ने समय समय पर हर सक्ट की धडियो मे युद्धो मे माथो का मोल चुका कर सिरकटी-सहयोग दिया तथा बीकानेर राज्य को अक्षुण्य बनाये रखने मे हर प्रकार के बलिदान भेट कर सराहनीय सेवाये देते रहे जिसके यत्र तत्र उल्लेख अभिलेखो मे अकित है व ख्यात-बात-इतिहास में वर्णित है। नामी ख्यात लेखक श्री दयालदास कृत- दयालदास री ख्यात के पृष्ठ 76 से 78 की वचनका मे गई भोम रो बाहडू श्री भीवराजजी राठौड़ की स्पष्ट विगत-बखॉण का दस्तावेजी उल्लेख-वर्णन दृष्टव्य है तथा मेहत के श्री वीरम का कथ्य और उनकी वीरता की प्रशसा मे कहे दोहे प्रकाशित है। यथा- निश्चय ही नामी ख्यात लेखक श्री दयालदास की ख्यात मे राव श्री जैतसी के पुत्र श्री भीवराजजी की वीरता शौर्य बलिदान एव आकर्षक व्यक्तित्व के बारे में सही बखॉण हुआ है। -दयालदासरी ख्यात वीर विरुदावली दो शब्द 129 गई भूमिका वाहडू राव जैतसीजी पाट राव कलियाण दाने सरु काई स्वर वस का भाण। भीवराज दिलेस्वर सेरकू अपणी मदत लाया राव मालदेकू भगाय गई भोम के बाहडू व्रद पाया। पीछै राव कल्याणसिघजी सीख माग विक्रमपुर आया नै वीरमदे दूदावत मेडता पाया। पीछै राव कल्याणसिघजी गढ दाखल हुवा। श्री करनीजी री जात करण देसणोक पधारिया। पीछै पातसाहजी जोधपुर में थाणा राख दिल्ली पधारिया नै भीवराजजी वीरमदेजी पातसाहजीरै सागै आया। पीछै पातसाहजी दोवाई सिरदारा नू सीख दीवी। तद वीरमदेजी भीवराजजीनू मेड़तै ले आया नै बडौ जापतौ किन्यौ। अरु कयौ बाबा तू तौ दोऊ गई भोम रो बाहडू हुवौ नै आ धरती थारा पगासू आयी। दूहो वीरमदेजी कहै- दूहा (१) वाघा वसुधा खोय। जननी धिन' जे जन्मिया । वसुधा वाळी वीरमै ।। भीमाजण कुल भण।। माल भजाड़े मेड़तै । अण-भग फेरी आण।। जैत-सुतन खग झेल । भीम विखौ कीधौ भलौ।। (२) माल विखै दिस मेल । खाच सुलताण । भीम चाढ गेडी भली।। विखौ गमायौ वीरमा । मालै मळिया माण। वीरम धरती वाळता ।। माई हा पूत जिण'। जेहा भीव नरेस।। जद वीरमदे सूजा समहर साझिया। भीवराज कहियौ भला ।। दूजा समपे देस।। इण तरै वीरमदेजीरा कहिया दूहा घणा है। पीछै भीवराजजीनू वीरमदेजी किता-अक दिन मेड़तै राखिया। पीछै हाथी एक घोड़ा च्यार कपड़ो आछौ देय ने विक्या किया। सू से बीकानेर आय राव कल्याणसिघजीरै पावा लागा। तद रावजी श्रीकल्याणसिघजी फुरमायौ जो भीवराज 1 धन्य। 2 सूर्य। 3 भगाकर। 4 आन दुहाई। 5 लौटाते हुए पुन प्राप्त करते हुए। 6 पकड़कर। 7 विपत्ति। 1 उत्पन्न कर। 2विरुद यश। जोय । 130 गई भोम रो बाहडू
औ बीकानेर थारी भुजावासू आयौ नै था जिसा भाई हुवै तद गयी थकी धरती धेरै।
अरु तू गई भोम रो बाहडू हुवौ। पीछै रावजी भीवराजजीरौ ठिकाणी भीवसर बाघियौ
किता भेक गावासू। जिण दिनसूभीवराजोतारै गई भोमरै बाहडू रौ व्रद है।
इस प्रकार लब्ध प्रतिष्ठित ऐतिहासिक परम वीर प्रतापी सुनामधन्य वीरवर
बीकानेर राव श्री जैतसी के सुपुत्र शूरवीर श्री भीवराजजी राठौड़ प्रवर गई भोम रो
बाहडू की वीरता के सबध मे विशेष विरुद बखॉण महान उपलब्धि है। उनका अनूठा
एव अद्वितीय शौर्य अनुकरणीय है। ऐसे राजपूती शौर्य के महाबली देशभक्त कुशल
प्रखर बुद्धि कौशल के धनी-मानी त्याग-बलिदान के प्रेरक व्यक्तित्व को शत्-शत्
नमन है।
बीकानेर
दि 15 अगस्त 1997
चलकोई हाउस
1206 गजनेर रोड़ बीकानेर (राजस्थान)
सूरजमालसिह राठौड़ (उपनिदेशक)
आर ई एस (सेवा निवृत)
(सूरजमालसिह राठौड़ आत्मज
ठा श्री नवलसिहजी चलकोई)
वीर विरुदावली दो शब्द
131
राठौडो की भाव भूमिका (ठा प्रतापसिह घटेल) का ख्यात बात इतिहास के उल्लेखा-वर्णनना से ज्ञात हुआ है- राठौड़ वश गोत्र-पश्यप वेद-सागवेद गुरु शुक्राचार्य कुलदेवी-विध्यवासिनी नागणेचदेवी करणीमात (ये सब दुर्गा के ही पर्यायवाची है) वृक्ष-नीग पक्षी-वाज व चीलक विरुद-रणवका व कगधज है। राठौड़ वास्तव मे रघुवशी भगवान श्री राम के द्वितीय पुत्र कुश के वशज हैं। इस वश का प्राचीन नाम राष्ट्रकूट है। राष्ट्रकूट का प्राकृत रूप रहऊ होता है जिससे राठऊड़ या राठौड़ शब्द बनता है। राष्ट्रयूट के स्थान पर यही कही राष्ट्रवर्य शब्द मिलता है जिससे राठवड़ शब्द बना है। राष्ट्रकूट और राष्ट्रवर्य दोनो शब्दो का एक ही अर्थ है। राष्ट्रकूट का अर्थ राष्ट्र जाति या वश का शिरोमणी है। राष्ट्रवर्य का अर्थ राष्ट्रजाति अथवा वश मे श्रेष्ठ है। भगवान श्री राम के पुत्र कुश के वशज राजा अमोघवर्ष ने दक्षिण में जाकर महाराज्य स्थापित किया। वहाँ उनकी राजधानी मान्यखेट थी। वहाँ से एक शाखा मध्य भारत मे आयी जिससे इनके राज्य को महाराष्ट्र कहा जाने लगा। यही से यह काठियावाड़ बदायूँ व कनौज मे फैल गये। बदाय से राव सीहाजी सन् 1243 मे पाली आये और पल्लीवाल ब्राह्मणो की सहायता से मारवाड़ राज्य की स्थापना की। राठोड़ा की वीरता विश्व विख्यात है। जैसे बळहट बका देवड़ा करतब बका गौड़। बका मे रणवका राठौड़।। अथवा वज देसॉ चन्दन बड़ा मेरु पहाडॉ मोड़। गरुड़ खगों लका गढॉ राजकुलॉ राठौड़ ।। राव सीहार्जी बदायूँ से मारवाड़ के पाली नगर में विक्रम स 1300 (ई सन् 1243) मे आये थे। यह फॅचर सेतराम राठौड के पुत्र थे। गाहड़वाल-राठौडो की शाखा नहीं है। उनके पूर्वजो के ताम्रपत्रो और शिलालेखो मे जयचन्द और उसके पूर्वजो 132 गई भोम रो बाहड़ -- हाडा गाढ को कही भी राठौड नही लिखा है किन्तु गाहड़वाल (गाहरवाल) ही लिखा है। इन ताम्रपत्रो एव शिलालेखो के आधार पर आधुनिक पुरातत्ववेत्ता भी जयचन्द को गाहड़वाल ही मानते है। राजा रायसिहजी (बीकानेर) की विक्रम संवत् 1650 की सस्कृत प्रशस्ति भाटो के कयानुसार है जो ठीक नहीं है। (देखिये बीकानेर राज्य इतिहास (पहला भाग) पृष्ठ स 79 80) राठौड़ो और गाहडवालो के आपस में विवाह शादी होते है। यदि जयचन्द राठौड़ होता और गाहड़वाल राठौड़ा की शाखा होती तो आपस मे राठौडो और गाहड़वालो के शादी विवाह कतई नहीं होते। अत गाहडवाल वश राठौडो की शाखा नही है। क्योंकि राठौड़ सूर्यवशी है और गाहड़वाल चन्द्रवशी है। इन दोना वशो मे वैवाहिक सबध होते है। जाति भास्कर क्षत्रिय वश प्रकाश तथा क्षत्रिय वश भास्कर आदि ग्रथो मे यही मत स्वीकार किया गया है। डा बी ए स्मिथ ने भी इसी मत को माला है और जगदीशसिह गहलोत ने भी सुलझाने का अवश्य ही प्रयास किया है। गाहड़वाल वश के सस्थापक चन्द्रदेव थे जिनकी राजधानी वाराणसी थी। लगभग 1085 ई मे उसने कन्नौज पर अधिकार किया। चन्द्रदेव के बाद गोविन्दचन्द्र और विजयचन्द्र भी इसी वश के शासक हुए। मध्यकाल मे गाहड़वाल वश का प्रसिद्ध राजा जयचन्द हुआ। पृथ्वीराज रासो के आधार पर जयचन्द गाहडवाल को देशद्रोही ठहराया गया किन्तु आधुनिक विद्वानो ने जयचन्द गाहडवाल को निष्कलक सिद्ध कर एक महान दानी नरेश सिद्ध किया है। इनके समय के आज तक 14 दानपत्र मिल चुके है जिनसे उसकी दानप्रियता का अच्छा प्रमाण मिलता है। रम्भा मजरी नाटक जिसका नायक जयचन्द है से भी उसके दानप्रिय होने के प्रमाण मिलते है। उसने चौहानो के विरुद्ध चन्देलो की सहायती की थी। सभवत इसी बात से चिढकर पृथ्वीराज रासो म जयचन्द पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया था। ई सन् 1193 मे जयचन्द गाहड़वाल पर शहाबुद्दीन गौरी ने विजय प्राप्त कर उसे मौत के घाट उतार दिया था और जयचन्द के साथ ही गाडवाल वंश का राज्य समाप्त हो गया। इस वश के राजा मानिकचन्द के पुत्र आल्हदेव ने मुगलकाल मे पुन कान्तिथ राज्य (वर्तमान मे विजयपुर जिला मिर्जापुर) स्थापित किया। बाद म यह राज्य तीन भागो मे विभक्त हो गया। उधर बदायूँ का शासक चन्द्र राठौड़ था जो चन्द्रदेव का समकालीन न होकर बहुत पहले हुआ था। चन्द्र राठौड़ के बाद उसके वशज क्रमश विग्रहपाल भुवनपाल और गोपाल राठौड़ हुए। गोपाल राठौड़ चन्द्र राठौड़ की चौथी पीढ़ी मे था जिससे ई सन् 1085 मे चन्द्रदेव गाहड़वाल ने कन्नौज छीन लिया और बदायूँ की जागीर देकर उसे अपना सामत बना लिया। गोपाल राठौड़ के तिमुनपाल तथा उसके बाद उसका छोटा भाई मदनपाल यहाँ का सामत रहा। मदनपाल की वि स 1176 (ई सन् १११६) का एक शिलालेख गोडा (उत्तरप्रदेश) के सहठ महठ स्थान से मिलता है जिससे राठौड़ों की भाव भूमिका 133 उस समय का सामत होना प्रमाणित होता है। इस तरह कन्नौज और बदायूँ की अलग-अलग शाखाये है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण चन्दरदेव (गाहड़वाल)का विस 1148 (ई सन् 1091) का दान पत्र है जो उसने अपनी इस विजय के उपलक्ष्य मे किया था। अत स्पष्ट है कि वि स 1148 (ई सन् 1091) मे कनौज पर गहरवालो (गाहड़वालो) का राज्य स्थापित हो चुका था और राठौड़ बदायूँ के सामत थे। बदायूँ के सामत मदनपाल के चशज क्रमश जयचन्द हरिश्चन्द कुँचर सेतराम और राव सीहा थे। कलौज का जयचन्द गाहड़वाल और मदनपाल का पुत्र जयचन्द राठौड़ जो बदायूँ का सामत था~यह दोनो एक ही नाम के दो भिन्न-भिन्न व्यक्ति और भिन-भिन्न जाति के दो अलग-अलग व्यक्ति थे। चन्द्र रागड़ के वशज कुँवर सेतराम के पुत्र राव सीहाजी ने ही ई सन् 1243 (वि स 1300) मे मारवाड़ राज्य की स्थापना की थी (देखिये पृष्ठ 238 240 राजपूत वशावली ठग ईश्वरसिह मडाढ चेतना प्रकाशन दिल्ली) तथा (ऐतिहासिक लेखमाला पृष्ठ 51-54) इसी मत से सहमत होकर ओझाजी ने भी कहा है अब तक में राठौड़ा और गहरवाला को एक ही वश मानता था और अब मैं निश्चयपूर्वक इन दोनो वशो को भिन्न मानता हूँ। घटेल हाउस (पुरानी गिनानी) बीकानेर दि 15 अगस्त 1997 (ठा प्रतापसिह घटेल) आर पी एस (सेवा निवृत) 134 गई भोम रोवाहा श्री सूर्यवश (सकलनकर्ता सूरजमालसिह राठौड़) श्री सूर्यवश की उत्पत्ति महापुरुष सूर्य विवस्वान से मानी जाती है। ब्रह्माजी के पुत्र अपि मरीचि हुए और मरीचि के पुत्र कश्यप हुए। कश्यप की पत्नी अदिति के पुत्र सूर्य हुए जिन्हे विवस्वान भी कहा जाता है। विवस्वान के पुत्र महाराज मनुजी थे और महाराज मनुजी के बड़े पुत्र इक्ष्वाकु थे। महाराज मनुजी ने ही अयोध्या नगरी स्थापित कर बसाई थी। पुराणो के अनुसार श्री सूर्यवश की वशावली इस प्रकार से प्राप्त होती है 1 मनु 24 सम्मूल 47 अम्बरिप 2 इक्ष्वाकु 25 अनरण्य 48 सिधुद्वीप 3 विकुक्षि 26 सदश्व 49 अयुतायु 4 परजय 27 हर्यश्व 50 अतुपर्ण 5 अनेना 28 वसुमान 29 त्रिधन्वा 51 सर्वकाम 6 पृथु 7 वृषदश्व 30 त्रयारूणी 52 सुदास 8 अन्ध्र 31 सत्यव्रत 53 सोदास 9 युवनाश्व 32 हरिश्चन्द्र 54 अश्मक 10 श्रावस्त 33 रोहिताश्व 55 मूलक 11 वृहदश्व 34 हरित 56 दशरथ 12 कुवलयाश्व 57 एडविड 36 विजय 14 प्रमोद 37 रूरूक 58 विश्वसह 15 हर्यश्व 16 निकुभ 60 रघु 17 सहताश्व 40 सगर 61 अज 18 कृशाश्व 41 असमजस 62 दशरथ 19 प्रसेनजित 63 श्रीरामचन्द्रजी 43 दिलीप 21 मान्धाता 44 भागीरथ 64 कुश 22 पुरुकुत्स 45 श्रुत 65 अतिथि 46 नाभाग 66 निषध 35 चवु 13 दृढाश्व 59 दिलीप 38 वृक 39 बाह 42 अशुमान 20 युवनाश्व 23 त्रसदस्यु श्री सूर्यवश 135 67 नल 68 नभ 69 पुण्डरीक 70 क्षेमधन्वा 71 देवानीक 72 अहीनगु 73 रूप 74 रूरू 75 पारियात्र 87 अग्निवर्ण 88 शीघ्रन 89 मरू 90 प्रसुत 91 सुगन्धि 92 अमर्ष 93 महस्वान् 94 विश्रुतवान 95 वृहद्बल 96 वृहक्षण 97 गुरुक्षेप 98 वत्स 99 वत्सव्यूह 100 प्रतिव्योम 101 दिवाकर 102 सहदेव 103 वृहदश्व 104 भानुरथ 105 सुप्रतीक 106 मरुदेव 107 सुनक्षत्र 108 किन्नर 109 अन्तरिक्ष 110 सुवर्ण 111 कृमित्रजित् 112 वृहदाज 113 धर्मी 114 कृतजय 115 रणजय 76 दल 116 सञ्जय 77 छल 78 उक्थ 79 वज्रनाभ 80 शवनाभ BI व्युथिताश्व 82 विश्वसह 83 हरिण्याक्ष 84 पुष्य 85 ध्रुवशक्ति 86 सुदर्शन 117 शाक्य 118 शुद्धोदन 119 रातुल 120 प्रसेनजित् 121 क्षुद्र 122 कुण्डक 123 सुरथ 124 सुमित्र श्री राम पुत्र कुश के वशज दक्षिण भारत मे फैल गये और अनेक स्थानो पर अपने राज्य स्थापित कर राज्य करने लगे। कुश का ही एक प्रतापी वशज राजा कृष्ण का पुत्र इन्द्र येबूर जनपद में राजा बन गया जिसने विक्रम सवत् 550 से पूर्व ही राष्ट्रकूट राठौड़ राज्य स्थापित किया। श्री गोविन्दराज के प्रपौत्र दतिदुर्ग ने बलशाली सोलकियो को पराजित कर राजाधिराज और परमेश्वर विरुद धारण किये। दति दुर्ग के बाद उसके चाचा कृष्णराज राष्ट्रकूट -राठौड़ महाराज्य के स्वामी बने। कृष्णराज के बाद गोविन्दराज द्वितीय राजा हुए जिसे परास्त कर उसी का भाई ध्रुवराज राज्य का स्वामी बना। ध्रुवराज का राज्य रामेश्वर से अयोध्या तक फैला हुआ था। गोविन्दराज की मृत्यु के बाद उसका पुत्र अमोघवर्ष पुन राजा बना जिसकी राजधानी मान्यख्नेट थी। अमोघवर्ष के सबंध मे सुलेमान सौदागर का उल्लेख है कि वह दुनिया के चार बड़े बादशाहो मे से एक था। अमोघवर्ष से लगातार राज्य सभालते आ रहे राजाओं मे सातवे वशधर कृष्णराज तृतीय तक दक्षिण भारत मे राष्ट्रकूट राठौड़ो के राज्य उन्नति प्राप्त करते रहे। अरब यात्री अल-मसऊदी ने विक्रम संवत 1001 मे रचित अपनी 196 गई भोम रो बाहडू पुस्तक मुरु जल-जहब मे उक्त राष्ट्रकूट राठौड़ो के वशज चलहरा को सबसे सशक्त पराक्रमी राजा माना था। मान्यखेट के राठौड़ो की एक शाखा मध्य भारत में आयी जिनका राज्य महाराष्ट्र कहलाया। कुछ राठौड़ राजपूताने मे हटूडी (जोधपुर) धनोप (शाहपुरा) में स्थापित होकर राज करने लगे। महाराष्ट्र से ही राठौड़ राजा काठियावाइ बदायूँ व कमौज ग स्थापित हुए। विक्रम सवत की ग्यारवी शताब्दी के आस पास बदायूँ मे राठौड़ो का राज्य स्थापित हो चुका था। उक्त राठौड़ो ने ही प्रतिहारो को परास्त कर कनौज का राज्य प्राप्त किया परन्तु वे वहाँ अधिक समय जम नही पाये। गाहड़वाल चन्द्रदेव ने राठौड़ो को परास्त कर कमौज का राज्य छीन लिया और बदायूँ के राठौड़ सामत बन गये। विक्रम सक्त 1250 मे शहाबुद्दीन गौरी ने जोरदार आक्रमण कर कनौज के अतिम राजा जयचन्द गाहड़वाल को परास्त कर नील राज्य स्थापित कर दिया। उसी के प्रतिनिधि कुतुबुद्दीन ऐबक ने ही वि स 1253 मे बदायूँ के राठौड़ो को परास्त कर अपना मुस्लिम राज्य स्थापित कर लिया विक्रम सबा 1283 मे बदायूँ के श्री सेतराम का पुत्र राव सीहा विक्रम संवत 1300 मे राजपूताने मे आया और पाली के आस पास पालीवाल ब्राह्मणो की सहायता से अपना राज्य स्थापित किया। श्री सूर्यवश 137 नवीं शताब्दी के अन्तिम समय का भारत कामीर शाही तियत करनाल रिपत्थर TATTO सिटी पापरानदी नेपाल घरब गुर्जर प्रतिहार असम पन्देल ज्यान न ना परभार पाल wrd मगर नर्मदा नदी mवीदी उत्फल NHAN राष्ट्रकूट कलिग गम्यते Hd यातुक्य (A) ग भारत (9ीं शताब्दीके अन्तिम चरण में) घोल अनुमानित लीवर an antra hala मुहम्मद गौरी के भारत पर आक्रमण कायुत मुहम्मद गौरी के आक्रमण (1175-1205 ई) देशावर पनी M धीन सा1st तिप्यत सरहिन्द 1911 मारतांग तिन्पुदी 'खो120 तराइना • 11757 .... यदायू दिल्ली-मेरठ 1100 अजमेर मधुरा राजपूताना कीज11941 - मिय आगरा ग्वालियर इटाद ना बिहार लेखनाती जालौर कालिजर 100 नदी १11991 महानदी गाँउवाना अन्हितगड़ा मार-ज्जन.. गुजरात 11781 mt रत्नपुर गाल इतिधपुर ra तेलगाना गोदावरी यगाल की खाड़ी हमारी अरब सागर होयसल चोल (221) Night नदीप सागर पाण्ड्य का हिन्द महासागर m one » an वदायूँ के राठौडो का वशक्रम बदायूँ का प्रथम राठौड़ राजा चन्द्र राठौड़ । विग्रहपाल अलमल भुवनपाल जयचन्द्र गोपाल राठौड़ हरिश्चन्द्र । J तिमुनपाल सेतराम मदनपाल (लघुभाता) सीहाराव इसी सीहा राव ने राजपूताने मे पाली के आसपास राठौड़ राज्य स्थापित किया और राज्यवृद्धि मे जीवनपर्यन्त लगा रहा। उनका स्वर्गवास रणक्षेत्र पाली से 14 मील दूर ग्राम बीतू मे विक्रम संवत 1330 कार्तिक बदी 12 ई सन् 1273 की दिनाक । अक्टूबर सोमवार को हुआ। यह बीतू गाँव राठौड़ राज्य के प्रथम सस्थापक राव सीहा का स्मारक धाम है। जिसे स्मारक स्वरूप विकसित किया जाना परमावश्यक है। समस्त राठौड़ो को इस पुण्य पवित्र भूमि पर राव सीहा राठौड़ का भव्य स्मारक बनाना चाहिये जो कि परम अपेक्षित है। राव सीहा के वशज आस्थान - तीडा आस्थान सलखा धहड़ राव माला मल्लिनाथ रायपाल भाई वीरम कान्हपाल । । चौडा जालणसी कान्हा छाडा भाईरणमल । राव जोधा 140 गई भोम रो बाहडू राव जोधा से आगे जोधपुर का वशक्रम है तथा इसी जोधा से आगे बीकानेर मे राव श्री बीका का वशक्रम है। श्री बीका ----- मेरा लूणकरण (नेरोजी के भाई) राव श्री जैतसी (राव श्री जैतसी के तेरह पुत्र थे।) बीकानेर राव श्री जैतसी राव कल्याणमल (आगे बीकानेर राजवश क्रम) (गई भोम रो बाहडू विरुद श्री भीवराजजी प्राप्त इन्ही श्री भीवराजजी राठौड़ के वशज भीवराजोत बीका है।) श्री नारायणदासजी (नोरगजी) रघुनाथ सिह राजसिह प्रतापसिह रूपसिह (अनूपसिह) जोरावर सिह हिम्मत सिह । मुकुन्द सिह श्री कल्याणसिह (राजपुरा) श्री खेतसिहजी बायसिह खुमाणसिह विशनसिह (साई) अमरसिह बदायूँ के राठौड़ो का वशक्रम 141
श्री कल्याणसिह (राजपुरा)
श्री खेतसिहजी
(चलकोई)
यापसिह-अमरसिह -विजयसिंह-अभयसिंह - दुर्जनसालसिंह - नारायणसिंह-पुशलसिह
(अमरपुरासे
गोद)
खुमाणसिंह विशनसिंह ज्ञानसिह यानसिंह मूपीसिह सूरजमालसिंह श्यामसिंह रामसिंह
वहादुरसिह इन्द्रसिह धीरसिंह देवीसिंह रणजीतसिह राजेन्द्रसिह यज्ञदेवसिंह
।
शिवेन्द्रसिंह (पुत्र इन्द्रसिंह गोद आये)
श्री भैरसिंह श्रीजेसराजसिह
हमीरसिह
नवलसिंह
गणपतसिह
रघुनाथसिह
चालूसिंह
प्रेमसिंह
अमरसिंह
श्री हरीसिंह (श्री हरीसिंह के आठ पुत्र हुए है)
सूरजमालसिंहराठौड़
महेन्द्रसिह
जितेन्द्रसिह
कुमेरसिंह भोपालसिह छगनसिह नरपतसिंह सोहनसिह मनोहरसिह जितेन्द्रसिह सुरेन्द्रसिह
142 गई भोम रो बाहडू
राठोडो की राष्ट्रीय भावना धीकोर मे राव जैतसी गद को भोजराज रूपावत को सुपुर्द करके हट गया। कामरा ने गढ़ जीत की दक्षिण भारत मे राष्ट्रकूटो का सुदृद व समृद्धिशाली साम्राज्य था। इस पुस्तक में उनकी महानता शौर्य व बुद्धिमत्ता का वर्णन किया गया है। उनकी एक शाखा ने उत्तर भारत में बदायू मे अपना राज्य स्थापित किया। कन्नौज के पतन के बाद बदायू के राठौड़ मारवाड़ की तरफ आ गए। उनकी शक्ति को देख कर पालीवालो के आग्रह पर सर्वप्रथम पाली मे राज्य स्थापित किया। वहाँ से खेड़ ईडर मडोर व बीकानेर किशनगढ़ अजमेर की तरफ फैल गए। राजस्थान में राजूपतो मे राठौड़ सबसे बाद में आए परन्तु उन्होने अपनी शक्ति वीरता व बुद्धिमत्ता से आधे राजस्थान पर आधिपत्य स्थापित कर लिया। करीब 12 पीढी तक राठौड़ राजा युद्ध के मैदान म वीर गति को प्राप्त हुए व रण का राठौड़ कहलाए। राव रिड़मल बहुत प्रतिभाशाली व उच्चकोटि का वीर था। उसके भाणजे राजामोकल मेवाड़ के वध की सूचना पाते ही वह बदला लेने के लिए मेवाड़ की तरफ तेज गति से दौड़ा। बिजली की तरह तेज गति से आक्रमण करके चाचा व मेरा को मारा। महपा पवार के भाग जाने से शरण देने वाले माडू के सुल्तान महमूद खिलजी व गुजरात के सुल्तान अहमद शाह को बुरी तरह से हराया। राव रिड़मल की जीत का स्मृति-चिह्न चित्तौड़ मे विजय स्तम्भ राणा कुम्भा ने निर्मित किया जो सिसौदियों की श्रेष्ठता का उद्घोप करता है। राव जोधा के भाई राव कान्धल के नेतृत्व में नए राज्य बीकानेर की स्थापना करके जोधा के पुत्र बीफा को गद्दी पर बैठाया। 73 वर्ष की आयु में युद्ध करते हुए हिसार क्षेत्र मे सारग खा लोदी वादशाह के सेनापति के हाथ वीर गति को प्राप्त हुए। इस पर प्रतिज्ञा करवे बदला लेने के लिए जोधा बीका बीदा सयुक्त राठौड़ सेना को लेकर सारग खा पर टूट पड़े व झासल के युद्ध इस बार करीब 150 वर्ष स्थापना के बाद राठौड़ दिल्ली के शक्तिशाली बादशाह शेर शाह सूरी के सामने युद्ध मैदान में थे। शेरशाह के साथ भीमराज वीरम मेड़तिया व राव कल्याणमल बीकानेर थे। गिरी सुमेल के मैदान में युद्ध हुआ। राठौड़ो की तरफ से दस हजार सेना का नेतृत्व करते हुए जैता कूया व पचायण अपनी इज्जत स्वामी भक्त व स्वतन्त्रता के लिए शेरशाह की फौज पर टूट पड़े। राव मालदेव शक करके मैदान से हट गया। युद्ध मे जैता कूपा व पचायण काम आए व शेरशाह ने आह मरते हुए कहा कि मुट्ठी भर वाजर के लिए सारा साम्राज्य हाथ से चला जाता । लेकिन भीमराज जी की बुद्धिमानी व सहयोग से गया हुआ राज्य मेड़ता व बीकानेर का वीरमव कल्याणमलजी ने वापिस प्राप्त किया। राणा सागा के नेतृत्व मे विदेशी आक्रमणकर्ता बाबर से टकर लेने को राजपूत राजाओं संयुक्त सेना इकट्ठी हुई। उसमे प्रमुख राठौड़ राव दिरम देव मेड़ता राव गागा जोधपुर का पोता रायमल कुवर कल्याणमल बीकानेर भारमल ईडर ने अपनी अपनी सेना के साथ खानवे की लड़ाई में भाग लिया। राष्ट्रीय हित में राठौड़ हमेशा आगे रहे व बड़े से बड़े त्याग करते हए हिव किवाए नही घाबर के छोटे पुत्र कामरा हिन्दुस्तान के उत्तरी भाग का वादशाह) ने बीकानेर पर हमला किया। रास्ते मे भटनेर दुर्ग पर खेतसी कांधल (राठौड़) ने जौहर मै वीर गति प्राप्त की। मे उसको मार गिराया। राठौड़ो की राष्ट्रीय भावना 143 उर लिया परन्तु राव जैतसी ने छापा मार पद्धति से रात को हमला करके दुश्मन को भगा दिया व गइ कब्जे कर लिया। कामरापुरी तरह से हार कर व जान बचाकर दौड़ गया। यह पुस्तक राठौड़ो पर भीमराजजी तक ही प्रकाश डालती है परन्तु बाद मे भी राबड़ो ने राष्ट्रीय हित मे सदैव त्याग व बलिदान करते हुए वीरता का प्रदर्शन किया। राव जयमल मेड़तिया ने अपना हित छोड़ कर राष्ट्रीय हित मे राणा उदयसिंह मेवाड़ का निमन्त्रण स्वीकार करके, अभयर के विरुद्ध चित्तौड़ आक्रमण के समय नेतृत्व करते हुए जौहर मे प्राणो की बली देश व इतके लिए दी। इंजत की रक्षा हेतु इस जौहर मे 30000 वीर व वीरागनाएँ काम आई। यह त्याग निरर्थक नहीं गया। थोड़े समय बाद ही राणा प्रताप ने चित्तौड़ की स्वतन्त्रता व आन मान के लिए लम्ये सघर्ष की बिगुल बजा दी। हमेशा की तरह इस राष्ट्रीय सघर्ष मे भी स्वतन्त्रता के लिए प्रमुख राठौड़ राव चन्द्रसेन मारवाइ राव नारायणदास ईडर जयमल का पुत्र रामदास बदनोर अपने पुत्र सहित राणा प्रताप की सहायता मे निरन्तर लड़ते रहे। पृथ्वीराज बीकानेर अकबर के दरबार मे नव रत्नो मे थे। उन्होने डिगल मे दोहे लिखकर राणा प्रताप को स्वतन्त्रता के लिए जूझते रहने को प्रोत्साहित करके अक्षुण यश प्राप्त किया। राजा राय सिद्ध बीकानेर अकबर के प्रमुख सेनापति होते हुए भी कभी चित्तौड़ के विरुद्ध किसी लड़ाई में उपस्थित नही हुए। श्री जसवन्त सिह के पुत्र अजीत सिंह को जोधपुर की गद्दी पर बैठाने के लिए व जोधपुर, को मुगलो से स्वतन्त्र कराने को 40 साल तक लम्बे युद्धो का नेतृत्व किया। उनकी स्वामी भक्ति' देश प्रेम व ईमानदारी व त्याग उत्कृष्ट कोटि का था। उन्होने अपना कर्तव्य निर्वाह करते हुए जोधपुर को मुगल वगुल से छुड़ा कर अक्षुणयश प्राप्त किया। राजा जसवन्त सिह जोधपुरने मुगल उत्तराधिकारी युद्ध मे दारा की सेना का नेतृत्व किया राजा कर्ण सिह बीकानेर ने औरगजेब द्वारा राजपूत राजाओं को अटक नदी में इस्लाम स्वीकार कराने की नीति का उसके द्वारा भेजी गई नावो को तोड़कर विरोध का नेतृत्व किया। इस परदेशी राजाओं ने उन्हें जय जगल पर बादशाह का खिताब दिया। राठौड़ का उत्कृष्ट नमूना दुर्गादास के रूप मे औरगजेब ने कट्टर अन्यायपूर्ण व निर्दयी हिन्दू विरोधी नीतियो का विरोध करने प्रकट हुआ। अग्रेजो के शासन काल मे भी बीकानेर के महाराजा गगा सिह ने राष्ट्रीय भावनाओं के प्रति सहानुभूति रखते हुए 1917 मे अपने रोम नोट मे self rule व केन्द्रीय राज्य असेम्बली स्थापित करने की वकालात की। गोल मेज सम्मेलन मे (Domimon state) के लिए जोर दिया। जयनारायण व्यास जैसे ईमानदार राजनेताओं को प्रोत्साहन देने को जोधपुर दिवान सर डोनाल्ड फील्ड को पत्र लिखा। मदन मोहन मालवीय को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय स्थापित करने मे पूर्ण समर्थन किया व खुले मन से धन दिया। बनारस विश्व-विद्यालय के लम्बे समय तक चासलर रहे। चैम्बर ऑफ प्रिंसेज के भी चासलर रहे। प्रथम महायुद्ध के बाद इम्पीरियल वार ट्रीटी मे हस्ताक्षर किए लीग ऑफ नेसन्स मे भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होने अग्रेजो से सबध रखते हुए राष्ट्रीय भावना का समर्थन किया। अग्रेजो के विरुद्ध स्वतन्त्रता आन्दोलन मे राव गोपालसिह राठौड़ खरवा (अजमेर जिला) ने राजस्थान मे क्रान्तिकारियो का नेतृत्व किया व बगाल क्रान्तिकारियो से सम्पर्क में थे। महाराजा गगासिह के अतिथि होकर बीकानेर मे ठहरे। उनको महाराजा गगा सिह का समर्थन प्राप्त था। -रामसिह रोड़ा आईपीएस (सेवानिवृत) सी 73 शार्दूलगज बीकानेर 144 गई भोम रो बाह
No text on this page.
No text on this page.
गई भोम रो बाहडू
श्री भीमपॉडिया राजस्थानी और हिन्दी केमान्य कवि है।
आपकी कई साहित्यिक एव सास्कृतिक कृतियाँ प्रकाशित
हो चुकी है।
यह नई कृति इतिहास की एक विलुप्त होती हुई परम्परा
को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक अति महत्वपूर्ण यज्ञ
वेदी की सरचना है।
गई हुई भोम को पुन प्राप्त करने के लिए राती घाटी के
वीर शिरोमणि राव जैतसी की वीर गाथा और उनके
सुपुत्र भीवराजजी की राजनयिक सूझ-बूझ एव
शूरवीरता को हृदयग्राही प्रवघात्मक आख्यान मे सँजोकर
लेखक ने एक कालजयी कृति का सृजन किया है।
इस प्रकार की सरचनाएँ जब मधुर राजस्थानी भाषा मे
पढने को मिलती है तो राजस्थानी की क्षमता स्वत सिद्ध
होजाती है।
सत्यनारायण पारीक
शिक्षाविद
बीकानेर
पूर्व अध्यक्ष
22 11-1997
भारतीय विद्या मदिर शोध प्रतिष्ठान बीकानेर