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Pakistan Se Taza Gazalen

Narendra Nath · 2011/03

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पाकिस्तान से ताजा राजलें

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पाकिस्तान से ताज़ा ग़ज़लें
नरेन्द्र नाथ
राधाकृष्ण

1980
नरेन्द्र नाथ
दिल्ली
प्रथम संस्करण : 1980
मूल्य
18 रुपये
प्रकाशक
राधाकृष्ण प्रकाशन
2, असारी रोड, दरियागज,
नई दिल्ली-110002
भारती प्रिंट
दिल्ली-110032

भूमिका पुरानी दिल्ली मे मस्ल मशहूर है कि एक पड़ोसिन जवान हो तो मुहल्ले मे दस गजलें कही जाती है। गजल के मिसरों पर किसी एक मात्रा-मीटर की रोक तो नहीं, पर तुक की वदिश जरूर है । गजल पर तुक मिलाने की यह शर्त, गजल की कमजोरी भी है और ताकत भी । नौसिखिये शायरी शुरू करते वक्त गजल का दामन पकडते है क्योकि जमे-मॅजे अलफाज (शराव-शवाव, पानी-जवानी, निशानी- कहानी, वफा-जफा) का सहारा लेकर तुकबंदियों का मजमुआ खड़ा करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं होता। लेकिन गजल की सल्तनत सिर्फ रंगीन लिफ़ाफ़ों और खुशबूदार रूमालों के धुएँ से भरे कमरो की तग चौहद्दी ही नहीं, खिडकियो से बाहर फैले आसमान की तरह एक मुसव्विर का खुला कैनवस भी है। अपने हमअस्त्र शायरो के मुकाबिले 'गालिव' और 'हाली' ने सावित किया था कि गजल नये तसव्वुरात का इजहार करने की कोशिश मे टूटती नही, बल्कि नये तजुर्गों को समोने के वाद खनकती है, हुमसती है, चमकती है । गजल का दायरा अँगूठी की गोलाई नही जो सिर्फ एक दौर, सदी, शायर तक महदूद होकर रह जाये । गज़ल के इमकानात में एक उडान का फैलाव है। गजल इस सदी की नौवी दहाई तक वरकरार है क्योकि गज़ल कहने वाले शायरों की बैखुदी की बुनियाद है अपने मौजून से मुकम्मल हम-आहंगी, क्योकि आम जिंदगी के मसाइल की चुभन समो लेने के वाद, गजल की मौजूदा तवानाई मे उस तरक्की-पसंद तहरीक का भी अमल-दस्ल है जिसने सन् 1930 के बाद से नयी अदवी मजिलों की निशानदही की। इस तहरीक के दो दौर हैं . एक आजादी से पहले का और दूसरा आजादी के वाद का । आजादी से पहले अदव की तरक्कोपसंद तहरीक के अलमबरदार शायरो ने उस जमाने में एक वागी रविश अस्नियार की जब मुशायरों और रिसाइल मे 'जिगर' और 'सीमाव' की तूती बोल रही थी। सन् 1947 के बाद की दूसरी तहरीक मै पाकिस्तानी शायरी को सियासी - 6 हालात से अलग रखकर नहीं समझा जा सकता। पाकिस्तान का क़याम सिर्फ एक जमीन के टुकड़े की तकसीम भर नहीं, एक तहजीबी इकाई और समाजी कवीले की तकसीम भी थी। आजादी की सुवह जिस अरजानी के साथ दो करोड़ इसानो पर तुलू हुई उसमे दिमागो का सुलगना ऐन फितरत था। शायर समाज का हस्सासतरीन फ़र्द होता है। (यह वात अदवी बहसो मे मुतवातिर दोहराई जाकर घिस-पिट चुकने के बाद भी सच है ।) हिंदुस्तानी फनकारों के मुकाविले मे पाकिस्तानी फनकार के जहनी और तहजीवी अहसास थोडे-से अलग रहे है। पाकिस्तान की बुनियाद एक इस्लामी रियासत कायम करने के लिए रखी गयी थी। पाकिस्तान के हुक्मरान धर्मश्रुत पहले थे, कविता-प्रेमी वाद मे। फिर जो सियासी और इक्तसादी निजाम पाकिस्तान में पनपा, उसमे मुल्क की माली और दिफाई मजबूरियो के सबब रद्दो-बदल की गुजाइश न थी। उन पाकि- स्तानी फ़नकारी के लिए नये मुल्क मे मआशरत की असास की बेशकरी का दर्द और भी ज्यादा कर्बनाक सावित हुआ, जो हिंदोस्तान से अलग पाकिस्तान की जुदागाना हैसियत के मुतलाशी होने के अलावा एक ऐसे मआशरे की तामीर का भी ख्वाब देख रहे थे जहाँ अमीरी-गरीबी का कडवा इम्तियाज न हो। लेकिन पाकिस्तान में ऐसे लोगों की हिम्मत अफजाई तो दूर, ये तरक्कीपसद अदीब पहले सेंसर की कलम के तले स्याह किये गये, फिर जेल की कोठरियों मे तवाह! सन् 1960 के आसपास लिखी गयी गजलो मे इसी जुल्म के ख़िलाफ़ बगावत का पंगाम उभरता है । "हम परवरिशे-लौहो-कलम करते रहेगे", "मैं कब से गोश-बर-आवाज हूँ, पुकारो भी” जैसी गजलें रिवायती मफहूम के अलफाज को ताजा अलामतों के तौर पर पेश करते हुए औजानो-अमूल और काफ़ियावंदी के नये पंकर बुनती है। ताजा खयालो से तराशी हुई इस दौर की गजलों मे एक खासियत यह भी है कि अलफाज और अलामतों को असर-अंगेज बनाने के तजुर्बो मे भी इन शायरी ने कैदो-बद की सऊवतो और गज़ल की रिवायती जामा जेबी पर कोई हर्फ़ नहीं आने दिया, न ही इन गज़लो की असर-आफ़रीनी किसी एक तबके या गिरोह का खिलोना रही। वैसे तो उर्दू शायरी के पुराने और नये दोनों बस्तो के शायरो ने अलफ़ाज़ का इस्तेमाल एक मुसच्चिर के कलम की मानिंद मस्सूस सूरते-हाल मे रगकारी और नक्काशी के लिए किया है। लेकिन इन गजलो मे सिर्फ रवायात कायम रखने के नाम पर गैर-मानूस अलफाज का वोझ दोने की मजबूरी नही, आम बोलचाल की जुबान मे अछूते मिसरे कहने को कोशिश है। इन गजलो के ज्यादातर शायर मिडिल-क्लासी शहरी तबके से है। तनहाई इस दौर की ग़ज़ल का अहम मौजूअ है। यह तनहाई किसी जागीरदारी ऐयाशी 7 का कबूतरवाज अकेलापन नहीं, भीड में घुटते हुए, खुदकुशी की तरफ धकेले जाते एक कैदी की चीख है जो न अपना जुर्म जानता है, न सजा। लेकिन ये गजलें पढते वक्त ऐसा भी लगता है कि ये शायर गाजिये-गुफ्तार होने के बावजूद उन कमजोर और डरपोक लोगों से ज्यादा अलग नहीं जो चीथडे पहने, दिन-भर की कमाई का चौथा हिस्सा खर्च करके, लवी लाइन मे रिश्वत- खोर पुलिस के डंडे खाने के बाद खरीदे गये टिकट मे स्मगलरो की कामयाव- खुशहाल-भरपूर जिंदगी पर बनी फ़िल्मे देखकर तालियां बजाने के बाद लौटकर टूटी चारपाइयों और मैले विस्तरों पर सो जाते है, लेकिन स्मगलराना निजाम की वेईमानी के खिलाफ मर मिटने की बात नही सोचते । इन गजलो मे कुन- मुनाता हुआ इकलाव का बुलावा किसी म्यान से खिवती हुई तलवार की सरस- राहट जैसा तेज, किसी कोडे की चोट जैसा तुर्श या किसी नगी पीठ पर खिंचती हुई वेत जैसा तल्ख बुलावा नहीं है। इन गजलो की नवा एक गडरिये की बाँसुरी है जो भेडों को इकट्ठा भले कर ले, पर चरागाहो की मिल्कियत बदल देने वाला लावा नही खोलाती। शायद इसीलिए ये गजलें दिल तो बहलाती है, रास्ता नहीं दिखाती। वहरहाल, मैंने इस संकलन मे ज्यादातर वही गजलें शामिल करने की कोशिश की है जो अभी तक हिंदी में निकले दूसरे संग्रहो मे नही छपी। पता नही अपनी इस कोशिश मे कहाँ तक कामयाब रहा हूँ यहाँ मैं देवनागरी लिपि मे उर्दू साहित्य छापने की परपरा मजबूत करने वाले दो नामो----अयोध्या प्रसाद गोयलीय और प्रकाश पडित के प्रति आभार प्रकट करना चाहूँगा । मैं इन दोनों सज्जनों से कभी मिला नहीं, लेकिन इन लोगो ने पहल न की होती तो शायद सन् 1947 के बाद सिर्फ हिंदी-इग्लिश-भापी स्कूलों मे पढे मेरी पीढ़ी के लाखो लोग उर्दू कविता की विरासत से वचित रह जाते। लिपि की परपरा तोड़कर ये लोग जिस तरह हिंदी और उर्दू को करीव लाये, यह सकलन उसी सिलसिले की एक कड़ी है और इन लोगो के तई शुक्राना भी। कडकडाती ठंड के दिनों मे मियाँ मुग्नी ने किताबी शोध की । अकीला इस्लाम ने इस्लाह दी। अमन, अमन की मां, प्रदीप, सदीप, विक्रान्त ने मेरा मत लगाये रखा । मैं इन्ही सबसे आश्वस्त हुआ हूँ। सितम्बर, 1980 - नरेन्द्र नाथ

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अनुक्रम 1. अस्तर अंसारी अकयरायादी दिखाते हैं पुराने स्वाब कुछ धुंधली-मी तस्वीरें... 17 18 2. अतहर मफोस कभी साया है, कभी धूप मुकद्दर मेरा... रौनक-चेशो-कम, किराके होने से है... इतने दिन के बाद तू आया है आज... सौ रंग है किम रग मे तस्वीर बनाऊँ... न शाम है न सवेरा, अजब दयार मे हूँ... वह इधक जो हमसे रूठ गया, अब उसका हाल बतायें क्या... 18 19 20 21 21 3. अदा जाफरी आपिरी टीस आजमाने को... तीफीक से कय कोई सरोकार चले है... शायद अभी है राख में कोई शरार भी... 23 24 25 4. अनवर अदीय शहर के सोगवारों के हम दरमियाँ... 26 5. अमजद इस्लाम अमजद' हर कदम गुरेजी था, हर नजर मे वहशत थी... चुपके-चुपके ही असर करता है... दिल मे लावा उबल रहा है क्या... 27 27 28 10 6. अहमद कमाल कोई चेहरा हुआ रोशन न उजागर आँखें... अजनवी खौफ़ फ़ज़ाओं में वसा हो जसे... 30 30 7. अहमद नदीम क़ासमी वरहना-पा मैं सूए-दश्ते-दर्द चलता हूँ... यूं तो मैं दश्त पे भी परतवे-गुलशन देखू... हाथ मे तेशा है या नुस्खा कोई अकसीर का... न शिकस्ता हर्फ है अजनवी, न फिगार लफ्ज पराये है... 31 31 32 33 8. अहमद फ़राज नामुरादी का यह आलम भी तो ऐ दिल न रहे... हुई है शाम तो आँखो मे वस गया फिर तू... नज़र बुझी ती करिश्मे भी रोजी-शव के गये... कुर्वतो मे भी जुदाई के ज़माने मांगे... खामोश हो क्यो, दादे-जफ़ा क्यों नहीं देते... 34 34 35 35 36 9. अहमद मुश्ताक कही उम्मीद-सी है दिल के निहाँखाने मे... 37 10, अहमद हमदानी न जाने आज यह किसका खयाल आया है... 38 11. आरिफ़ अब्दुल मतीन गुलाब रुत मे चमन से गुजर रहा हूँ मैं... तू अपनी आँख का आंसू कभी बना मुझको... मैं भरी दुनिया में रहता था, मगर तनहाँ भी था... 39 39 40 12. इकबाल साजिद दह र के अंधे कुएँ में कसके आवाजा लगा... 13. इफ्तिखार नसीम इस तरह सोयी हैं आंखें जागते सपनों के साथ.., 42 43 14. इन्ने इंशा गानेहा हम पे यह पहला है मेरी जो कोई... गोरी अब तू आप समझ ले हम साजन या दुश्मन है... 15. इरफान असोज दिल पर गहरा नाम है गायी लाय तेरी दागाई का... चिरागे-फिक्र जलाया है रात-भर हमने... नील गगन पर मुखं परिदो फी डारों के राग... 16. एहसान निश इतना कहाँ है जर्फ ममेटू ये किश्ते-दर्द... आईना है तो अपनी मफाई न दे मुझे... 45 45 46 47 47 49 49 50 17. किश्वर नाहीद आगे मरक रहे है कि सस्ता भी है अजव... हम कि भगलूबे-गुमा थे पहले.. तलब की प्यास को फूलों में बांट सकता था... 18. खातिर राजनधी गो जरा-सी बात पर वरमो के याराने गये... उलझे-उलझे धागे-धागे से रायालो की तरह... राजे-दिल जो तेरी महफिल में भी इपशा न हुआ... 19. खालिद अहमद लहू की धार ने तन रोशनी मे ढाल दिये... मू-कलम हल्कए-जंजीर कहाँ होते है... मैं कल का आदमी हूँ, मुझे कल पे टाल दे... 20. गुलाम जीलानी 'असरार' तू अंग-अंग में खुशबू-सी बन गया होगा... मौजे-सरसर की तरह दिल से गुजर जाओगे... 52 52 53 54 54 55 56 56 21. जमील मलिक महफ़िलें ख्वाब हुई, रह गये तनहा चेहरे... 58 12 59 59 मैं तो तनहा था मगर तुझको भी तनहा देखा... सुखिए-शाम ने यूं फूल बिखेरे दिल में... 22. जफर इकबाल 61 61 62 63 थकी हुई सी हवा मे तरंग आने दे... है यही उसकी रज़ा, जैसा भी था, जैसा भी है... फ़िक्र कर तामीरे-दिल की वह यही आ जायेगा... उदासियों का कुछ ऐसा तिलिस्म घर पे रहा... 23. जावेद शाही दिले-गिरिपता के सव पेचो-ताव खोल के देख... जो वर्फजार चीर दे, ऐसी किरन भी ला... अव यहां लोगों के दुख-सुख का पता क्या आये... यह बर्फ़ज़ार वदन से, न जाँ से निकलेगा... शोके-तामीर है मकां से परे... 64 65 65 66 67 68 24. जिया शबनमी खुशबू के रंग दस्ते-सवा से उतर गये.. 25. जॉन ईलिया खामुशी कह रही है कान मे क्या... 69 70 26. ताज सईद पुकारती रही कुछ देर तक हवा मुझको... 27. नजीर केंसर सब्ज है पेड अभी, चांद है पानी में अभी... 71 28. नासिर काजमी गये दिनो का मुराग लेकर किधर से आया, किधर गया वह... दिल मे इक लहर-सी उठी है अभी... रंग सुव्हो के, राग शामों के... 72 73 74 13 29. नन० मीम राशिद उह रे-गम की निगहे-दोस्त भी तिरयाक नही... फालवा मे गिर के भी टूटा न शीशए-चीनी... 75 76 77 30. परवीन फ़ना सैयद दन तेरी ही दुहाई देगा... ग. परवीन शाकिर बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गये... अब कंगी पर्दादारी, गवर आम हो चुकी... दस्ते-शव पर दिखायी क्या देंगी... चेहरा मेरा था, निगाहे उसको... यह ग़नीमत है कि उन आयों ने पहचाना हमें... ये हाथ चूमे गये फिर भी ये-गुलाब रहे... 78 78 79 80 80 81 2. फरीद जायद गुवार दिल पे यहुत आ गया है, धो लें आज... 82 83 83 33. "फारिस' बुखारी देखकर उस हसीन पंकर को... कितने शिकवे गिले है पहले ही... 34. फैज अहमद कंच हसरते-दीद में गुजरा हैं ज़माने कब से... न अब रकीब, न नासेह, न गमगुसार कोई... सितम सिखलायेगा रस्मे-यफ़ा ऐसे नहीं होता... 85 85 86 35. महबूब खिजी देख दरिया है, किनारे को संभाल... यह जो हम कभी-कभी सोचते है रात को... हम आप कयामत से गुजर क्यों नहीं जाते... हर बात यहाँ बात बढ़ाने के लिए है... 87 87 88 89 14 90 90 91 36. माजिद-उल-बाफरी मुझो से पूछ रहा था मेरा पता कोई... चेहरे छुपे हुए है वयानों को धूल में... वे-हिस हूँ आईने की तरह खुद निगाह हूँ... 37. मनोर नियाजी कैसी-कैसी वे-समर यादों के हालों में रहे... बेचैन बहुत फिरना, घबराये हुए रहना... गम की बारिश ने भी तेरे नक्श को धोया नही... अश्के-रवाँ की नहर है और हम हैं दोस्तो... दश्त बारां की हवा से फिर हरा-सा हो गया... 192 92 93 93 94 38. यूसुफ हसन रोशनी के इस्म की तकफ़ीर कर दी जायेगी... अपनी नुमू की ताबो-तवानाई लेके आ... आगही, वहम के साये में लिपटकर आयी... आँख चेहरो की सदाकत से मुकरती जाये... 95 95 96 96 98 39 रजी अख्तर शौक ये पेड है कुछ दिन वह शजर है कोई दिन और... सलामत आये है फिर उसके कूचओ-दर से... यह कौन डूब गया और उभर गया मुझमे... 98 99 40. डॉक्टर वजीर आगा धूप के साथ गया साथ निभाने वाला... सितम हवा का अगर तेरे तन को रास नहीं... लाजिम कहां कि सारा जहाँ खुश-लिवास हो... 100 100 101 41. शव जलाली जाती है धूप उजले परों को समेट के... आके पत्थर तो मेरे सहन में दो-चार गिरे... वही झुकी हुई वेलें वही दरीचा था... आता है हर चढाई के बाद इक उतार भी... लौ दे उठे, वह हर्फे तलब सोच रहे हैं... 102 102 103 104 105 15 उतरी अजीब रोशनियाँ रात ख्वाब में... 105 42. शहजाद अहमद यह सोचकर कि तेरी जवी पर न बल पड़े... लोट आयी तेरे लम्स से महकी हुई शामे... जब आफताव न निकला तो रोशनी के लिए... आज तक उसकी मोहब्बत का नशा तारी है... सितारा अपनी भी ताविंदगी न देख सका... 107 107 108 108 109 111 111 43. शायर लखनवी कुछ अजब जिंदगी के मंज़र है... अपना दर्द समझनेवाले शहर के अंदर कितने है... 44. सरशार सिद्दीकी इसी काविश में उम्र हो गयी सर्फ़... झलक दिखा, कि तेरे वस्ल की नवीद मिले... मिलने को तो मिल रहा हूँ सबसे... 45. सरमद सहवाई गूंगे बदन मे झाँककर फिर दे सदा मुझे... 46. सलाहुद्दीन 'नदीम जो मेरे देखे हुए ख्वाबों मे ढल जायेगी... 113 113 114 115 116 47. सलीम अहमद इश्क जत्रे-हाल का पावंद है... नया मजमू कितावे-जीस्त का हूँ... तेरी जानिब से दिल में सबसे हैं... जाके फिर लौट जो आये वह जमाना कैसा... 117 118 118 119 48. सलीम शाहिद खाक पर नक्शो-निगारे-रफ़्तगाँ रह जायेंगे...

16
49. साकी फारकी
ये लोग स्वाव मे भी वरहना नहीं हुए...
दामन में आंसुओं का जखीरा न कर अभी...
एक दिन जहन में आसेब फिरेगा ऐसा...
रेत की सूरत जाँ प्यासी थी, आँख हमारी नम न हुई...
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121
122
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50. सैयद हामिद यजदानी
वादबा, पतवार, हर इक आसरा टूटा हुआ...
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51. हबीब जालिय
यह और वात तेरी गली मे न आयें हम...
भुला भी दे उसे जो वात हो गयी प्यारे...
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अख्तर अंसारी अकबराबादी
-
दिखाते हैं पुराने ख्वाव कुछ धुंधली-सी तस्वीरें
किसे मालूम क्या होंगी नये ख्वावों को तावीरें।
नजर आती है जिंदाँ में जो जग-आलूद जंजीरें
जिला देकर बना लो उनसे जौहरदार शमशीरे
जमीं पर क्या नहीं है आस्माँ की सिम्त क्यों देखे
अगर जरों से फुरसत हो, सितारों के जिगर चीरें
समझकर अहले-दिल अपने जमाने का असर लेना
ज़माने की हवा में मुख्तलिफ़ होती हैं तासीरें
वगैरे - हौसला रंजे - असीरी कम नहीं होता
जो हो गँबिश रगो-पै में तो शर्माती है जजीरें
यह मैंने बेखुदी में क्या कहा, दुनिया ने क्या समझा
ग़लत राहें न दुनिया को दिखा दें मेरी तक़सीरे"
जहाने-शे'र" की सूरतगरी2 'अख्तर' जरा देखो
यह वहमहफ़िल है जिसमें मुंह से वोल उठती हैं तस्वीरें
1. परिणति, साकार प 2. जंग लगी हुई 3. चमक 4. तलवारें . वण
6. विभिन्न 7. प्रभाव 8. कंद का दुख 9. हरकत 10. दोष 1. छंदा की
दुनिया 12. चित्रकारी।
पाकिस्तान से ताजा गजलें
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अतहर नफ़ीस
एक
कभी साया है, कभी धूप मुक़द्दर मेरा
होता रहता है यूं ही कर्ज बराबर मेरा
टूट जाते है कभी मेरे किनारे मुझमें
डूब जाता है कभी मुझमें समंदर मेरा
किसी सहरा में बिछड़ जायेंगे सब यार मेरे
किसी जंगल में भटक जायेगा लश्कर मेरा
वावफ़ा था, तो मुझे पूछनेवाले भी न थे
वेवफ़ा हूँ तो हुआ नाम भी घर-घर मेरा
कितने हँसते हुए मौसम अभी आते लेकिन
एक ही धूप ने कुम्हला दिया मंजर मेरा
आखिरी जुर्भए-पुर-कैफ़ हो शायद वाकी'
अव जो छलका तो छलक जायेगा सागर मेरा
-
दो
रौनके - वेशो- कम, किसके होने से है
मौसमे - खुश्को - नम' किसके होने से है
किसका चेहरा बनाती है ये साअतें:
वक्त का जीरो-वम' किसके होने से है
कौन गुजरा कि बनते गये रास्ते
राह का पेचो-खमा किसके होने से है
1. दृश्य 2. शायद नशे से भरा आखिरी चूंट बचा हो 3. थोड़ी-बहुन
4. मूखा-गीला मौसम 5. क्षण 6. ऊंच-नीच 7. घुमाव-फिराव ।
पाकिस्तान से ताजा ग़ज़लें
18

आज भी किसकी खातिर दरीचों से आयी हवा यह फ़जा' यूं बहम किसके होने से है शाख-दर-शाख पत्तों को यह जिंदगी मुहतरम' किसके होने से है मौत वर-हक है किसके न होने से आज जिंदगी दम-ब-दम किसके होने से है किसकी जुल्फों का एजाज़ है बूए-गुल' यह हवाओं में नम किसके होने से है सुव्हे-शादाविए-जाँ का क्यों है मलाल' इशरते - शामे - गम किसके होने से है वहशते - दिल को किसने सँभाला दिया यह जुनूं कम से कम किसके होने से है किससे मंसूब' है हर जफ़ा हर वफ़ा यह सितम यह करम किसके होने से है तीन इतने दिन के बाद तू आया है आज सोचता हूँ किस तरह तुझमे मिलूं मेरे अंदर जाग उठी इक चांदनी मैं ज़मी से आस्माँ तक अंग हूँ और उजला हो गया कुर्वता का चाँद और गहरा हो गया तेरा फुसू" ऐ सरापा रंगो-नकहत', तू बता किस धनक से तेरा पैराहन" बुनूं सारे गुल-बूटे तरो-ताजा हुए दूर तक पहुंची है मेरी मौजे-तु" 1. वातावरण 2. परस्पर जुड़ा हुआ, एक माथ 4. अनिवार्य 5. चमत्कार 6. फूल की महा 7, he दुख क्यों है 8. गम की शाम का आनन्द 9. राष्ट्रिय 12. ऐ सर से पाँव तक रग और सुगव 13, for

कर रहे हैं लम्हे-लम्हे का हिसाव
मिलके फिर बैठे हैं याराने - जुनूं
दश्ते-ग़म' की धूप में मुझ पर खुला
मैं खुद अपना सायए - दीवार हूँ
नाज़ कर खुद पर कि तू है वेशुमार
कद्र कर मेरी कि मैं बस एक हूँ
चार
सौ रग है किस रंग से तस्वीर बनाऊँ
मेरे तो कई रूप है, किस रूप में आऊँ
क्यों आके हर इक शख्स मेरे जख्म कुरेदे
क्यों मैं भी हर इक शख्स को हाल अपना सुनाऊँ
क्यों लोग मुसिर है कि सुनें मेरी कहानी
यह हक मुझे हासिल है, सुनाऊँ कि छुपाऊँ
इस वक्म में अपना तो शनासा नहीं कोई
क्या कर्व है तनहाई का, मैं किसको वताऊँ
कुछ और तो हासिल न हुआ स्वावों से मुझको
बस यह है कि यादों के दरो-वाम' सजाऊँ
बेकीमतो - वेमायः इसी खाक में यारो
वह खाक भी होगी जिसे आँखों से लगाऊँ
किरनों की रफाकत कभी आये जो मयस्सर'
हमराह मैं उनके तेरी दहलीज पे आऊँ
ख्वावों के उफ़क पर तेरा चेहरा हो हमेशा
और मैं इसी चेहरे से नये ख्वाब सजाऊँ
रह जायें किसी तौर मेरे ख्वाव सलामत
इस एक दुआ के लिए अब हाथ उठाऊँ
J. दुख का जगल 2. परिचित 3. पीडा 4. दरवाजा और अटारी
5. मुल्यहीन और महत्वहीन 6. संगत 7. उपलब्ध 8. क्षितिजा
20
पाकिस्तान से ताजा गजलें

पांच न शाम है न सवेरा, अजब दयार' में हूँ मैं एक अरसए - बेरंग के हिसार में हूँ सिपाहे-ौर ने कब मुझको जरूम-जरूम किया मैं आप अपनी ही सांसों के कारज़ार में हूँ कशाँ-कशाँ जिसे ले जायेंगे सरे-मक्तल" मुझे खवर है कि मैं भी उसी कतार में हूँ शरफ़' मिला है कहाँ तेरी हमरही का मुझे तू शहसवार है और मैं तेरे गुवार में हूँ अता-पता किसी खुशबू से पूछ लो मेरा यहीं कहीं किसी मंजर, किसी बहार में हूँ मैं खुश्क पेड़ नही हूँ कि टूटकर गिर जाऊँ नुमू-पजीर" हूँ और सर्वो - शाखसार में हूँ न जाने कौन से मौसम में फूल महकेगे न जाने कब से तेरी चश्मे-इंतजार" में हूँ हुआ हूँ कर्यए-जाँ में कुछ इस तरह पामाल कि सर-बलंद तेरे शह रे-जर-निगार में हूँ।" " वह इश्क जो हमसे रूठ गया, अब उसका हाल वतायें क्या कोई मेह,र" नहीं, कोई कहर नही, फिर सच्चा शेर सुनायें क्या इक हिव" जो हमको लाहिक" है, ता-देर उसे दोहर वह जह र जो दिल में उतार लिया, फिर उसके नाज उठायें क्या क्या की जगह 1. स्थान 2. घेरा 3. विरोधी सेना 4. युद्ध 5. खीचते हुए 6. कत्ल करने 7. सम्मान 8. रास्ते में साथ चलना 9. बहुत अच्छा घुड़सवार 10. धूल 11. विकसित होता हुआ 12. वह जगह जहां बहुत-से सीधे और सुदर पेड हों 13. आंख की प्रतीक्षा 14.प्राण का गाँव 15. पांव तले रौदा हुआ 16. कि अपना सर ऊंचा किये तेरे स्वर्ग चित्रित शहर में हूँ 17. कृपा 18. प्रकोप 19. विरह 20, मिलने वाला पाकिस्तान से ताजा गजलें 21

फिर आँखें लहू से खाली है, ये शमएँ बुझने वाली हैं,
हम खुद भी किसी के सवाली है, इस बात पे हम शरमायें क्या
इक आग ग़मे-तनहाई की जो सारे वदन में फैल गयी
जब जिस्म ही सारा जलता हो, फिर दामने-दिल को बचायें क्या
हम नग्मा-सरा' कुछ ग़ज़लों के, हम सूरतगर कुछ ख्वाबों के
वे-जज्वए-शौक़ सुनायें क्या, कोई ख्वाव न हो तो वतायें क्या
1. अच्छी आवाज़ से गानेवाला 2.चित्रकार
22
पाकिस्तान से ताजा गजलें

अदा जाफ़री
का
एक
आखिरी टीस आजमाने
जी तो चाहा था मुस्कुराने को
याद इतनी भी सस्त-जां तो नहीं
इक घरीदा रहा है ढाने को
संगरेजों में ढल गये आँसू
लोग हँसते रहे दिखाने को
जस्मे - नरमाः भी लो तो देता है
इक दिया रह गया जलाने को
जलनेवाले तो जल-बुझे आखिर
कौन देता खबर ज़माने को
कितने मजबूर हो गये होगे
अनकही बात मुंह पे लाने को
खुलके हँसना तो सवको आता है
लोग तरसे है इक बहाने को
रेजा-रेज़ बिखर गया इंसा
दिल की वीरानियाँ जताने को
हसरतों की पनाहगाहों में,
क्या ठिकाने है सर छुपाने को
1. पत्थर के छोटे टुकड़े 2. गीत का घाव 3. कण 4. वह स्थान जहाँ
सुरक्षित रहा जा सके
पाकिस्तान से ताज़ा ग़ज़लें 23

हाथ काँटों से कर लिये जरूमी फूल वालों में इक सजाने को आस की बात हो कि साँस 'अदा' ये खिलौने थे टूट जाने को दो तौफीक से कब कोई सरोकार चले है दुनिया में फ़क़त तालिए - वेदार' चले है ठहरूँ तो चट्टानों - सी कलेजे पे खड़ी है जाऊँ तो मेरे साथ ही दीवार चले है हर गुंचा बड़े चाव से खिलता है चमन में हर दौर का मंसूर सरे - दार' चले है रंगों की न खुशबू की कमी है दिलो-जाँ को तोशा' जो चले साथ वह इक खार चले है दिल के लिए बस आँख का मेयार बहुत है जो सिक्कए-जाँ है, सरे-बाजार चले है हैरत से शिगूफ़ों की झपकती नहीं आँखें, किस आन से काँटों का खरीदार चले है खुरशीद' वहाँ हमने सुलगते हुए देखे किरनों का जिस आशोब में ब्योपार चले है इक जुबिशे-मिजगाँ' की इजाजत भी नहीं है दिल साथ चला है कि सितमगार चले है थे खिच भी लाखों यहाँ, ईसा भी बहुत थे आजार जो दिल का है सो आजार चले है 1. सामर्थ्य 2. केवल 3. सौभाग्य 4. कली 5. एक वली जिन्होंने "अनल- हक" (मैं खुदा हूँ) कहा था और इस अपराध में उनकी गरदन काटी गयी थी 6. फांसी का फदा गले में डाले 1. सफर में खाने-पीने का सामान 8. परख 9. सूरज 10. हलचल |J. पलको की हरकत 12. बीमारी 24 पाकिस्तान से ताजा गज़लें

तीन
शायद अभी है राख में कोई शरार' भी
क्यों वरना इंतजार भी है इस्तिरार भी
ध्यान आ गया है मर्ग-दिले-नामुराद का
मिलने को मिल गया है मुकू भी, करार भी
अब ढूंढने चले हो मुसाफ़िर को, दोस्तो
हद्दे-निगाह तक न रहा जब गुवार भी
हर आस्तो पे नासिया-फर्मा है आज वह
जो कल न कर सके थे तेरा इंतजार भी
इक राह रुक गयी तो ठिठक क्यों गयी 'अदा',
आबाद बस्तियाँ हैं पहाड़ों के पार भी
1. चिगारी
2. आतुरता 3. नाकाम दिल की मौत 4. दृष्टि की मीमा
2. चौखट ३. माथा रगड़नेवाला
पाकिस्तान से ताजा गजलें 25

अनवर अदीव
शहर के सोगवारों के हम दरमियाँ
और हमारे दिलों के है ग़म दरमियाँ
साँय - सांय सिसकती हुई दोपहर
दर्द गाड़ा हुआ इक अलम दरमियाँ
दूर तक देखने को खला' ही खला.
आधा उठा हुआ इक क़दम दरमियाँ
पार करने को दरिया वहुत वेपनाह
टूट जाने को कच्चा भरम दरमियाँ
जब भी होने लगा आमना - सामना
रख लिया एक काग़ज़-क़लम दरमियाँ
चाल सुथरी चलो चाहे मद्धम चलो
टूट जाता है वरना तो दम दरमियां
1. शोकग्रस्त 2. झडा 3. शन्य
26 पाकिस्तान से ताजा गजलें
-

अमजद इस्लाम 'अमजद'
हर कदम गुरेजाँ' था, हर नज़र में वहशत थी
मस्लहत - परस्तों की रबरी कयामत थी'
मंजिले - तमन्ना
तक कौन साथ देता है
गर्दै-सइए-लाहासिल' हर सफ़र की किस्मत थी
आप ही बिगड़ता था आप मान जाता था
उस गुरेज - पहलू की यह अजीव आदत थी
उसने हाल पूछा तो याद ही न आता था
किसको किससे शिकवा था, किससे क्या शिकायत थी
दफ्त में हवाओं की वेरुखी ने मारा है
शहर में जमाने की पूछ-गछ से वहशत थी
यूं तो दिन - दहाड़े भी लोग लूट लेते हैं
लेकिन उन निगाहों की और ही सियासत थी
हिज्र का जमाना भी क्या गजब ज़माना था
आँख में समंदर था ध्यान में वह सूरत थी
दो
चुपके चुपके ही असर करता है
इश्क कैसर की तरह बढ़ता है
रात के पिछले पहर तारों में
एक हंगामा मचा रहता
1. भागता हुआ 2. भय 3. सिर्फ अपने भले-बुरे का ध्यान रखकर काम
करने वालो का नेतृत्व भी कयामत था 4. निष्फल प्रयत्न की धूल 5. वच
निकलने का ढब 6. जगल
है
पाकिस्तान से ताजा गजलें 27

जो कोई जी न सके मर जाये आपका नाम अवस' लेता है घर से भागे हुए बच्चे की तरह दिल सरे - शह रे - वफा, तनहा है ख्वाव में जिससे परेशान थे हम, आँख खोली तो वही नक्शा है कौन सुनता है किसी की विपदा सबके माथों पे यही किस्सा है कोई डरता है भरी महफ़िल में कोई तनहाई में हंस पड़ता है यही जन्नत है यही है दोजख और देखो तो यही दुनिया है सबकी किस्मत में फ़ना है जब तक आस्मानों पे कोई जिंदा है वह खुदा है तो जमीं पर आये हा का दिन तो यहाँ वरपा है सांस रोके हुए बैठो 'अमजद' वक्त दुश्मन की तरह चलता है तीन दिल में लावा उवल रहा है क्या कोई कोहसार जल रहा है क्या ख्वावे-फ़र्दा', ज़मीं पे जाहिर हो मेरी आँखों में पल रहा है क्या चश्मे - शवनम', सफ़ोरे - गुंचा वन यूं हवा बनके चल रहा है क्या आ, शरीके - ग़मे - खुदाई हो अपनी वहदत' में गल रहा है क्या 1. व्यर्थ 2. पर्वतमाला 3. आनेवाले कल का सपना 4. ओस की आंख 5. कली का पंगाम पहुँचानेवाला 6. संमार के दुखों का साझीदार 7. एकत्व 28 पाकिस्तान से ताजा गजलें

इतने आसूदा क्यों हैं अह ले-सफ़र
सर से तूफ़ान टल रहा है क्या
किसलिए
बदहवास है तारे
कोई सूरज निकल रहा है क्या
क्यों हवा इस कदर रुकी-सी है
कोई तूफ़ान पल रहा है क्या
काटकर फेक दे इन्हें 'अमजद'
ऐसे हाथों को मल रहा है क्या
1. सतुष्ट 2. बौखलाये हुए
पाकिस्तान से ताजा गजलें 29

अहमद कमाल
कोई चेहरा हुआ रोशन न उजागर आँखें
आईना देख रही थीं मेरी पत्थर आँखें
फूट निकली तो कई शह रे-तमन्ना डूवे
एक कतरे को तरसती हुई बंजर आँखें
ले उड़ी वक्त की आँधी जिन्हें अपने हमराह
आज फिर ढूंढ रही हैं वही मंज़र आँखें
उसको देखा है तो अव शोक का वह आलम है
अपने हल्कों से निकल आयी हैं वाहर आँखें
तू निगाहों को जवाँ खूब समझता होगा
तेरी जानिब तो उठा करती है अक्सर आँखें
लोग मरते न दरो-वाम से टकराके कभी
देख लेते जो 'कमाल' उसकी समंदर आँखे
.
दो
अजनवी खौफ़ फ़जाओं में वसा हो जैसे
शह र का शहर ही आसेब-जदा हो जैसे
रात के पिछले पहर आती है आवाजे-सी
दूर सहरा में कोई चीख रहा हो जैसे
दरो- दीवार पे छायी है उदासी ऐसी
आज हर घर से जनाजा-सा उठा हो जैसे
मुस्कुराता हूँ पए - खातिरे - अहबाव मगर
दुख तो चेहरे की लकीरों पे सजा हो जैसे
अव अगर डूब गया भी तो मरूँगा न 'कमाल'
बहते पानी पे मेरा नाम लिखा हो जैसे
1. दृश्य 2. दरवाजा और अटारी 3. जिस पर जिन्न या भूत का साया हो
4. मित्रो का दिल खुश करने के लिए
30
पाकिस्तान से ताजा गज़लें

अहमद नदीम क़ासमी
एक
वरना-पा' मैं सूए-दश्ते-दर्द चलता हूँ
मैं अपनी आग में अपनी रजा से जलता हूँ
मेरे सुपुर्द हैं तख्लीके - हुस्न के मेयार
मैं रोज़ो-शब' की तरह दम-व-दम बदलता हूँ
मेरे मिजाज की चारागरी करेगा कौन
चमन की राह से सहरा' में जा निकलता हूँ
अगर जला न सका मुझको आफ़ताब कोई
मैं रंगो-बू की तमाजत में क्यों पिघलता हूँ
मुझे तो पैकरे - महसूस" से मोहब्बत है
मैं सिर्फ एक तसव्वुर" से कब बहलता हूँ
समेट लेता है वांहों में मेरा इश्क मुझे
मैं जब भी फ़िक्र की ढलवान से फिसलता हूँ
रुतों के जब से आजाद हो चुका हूँ 'नदीम'
खिजाँ में फलता हूँ, आँधियों में फलता हूँ
दो
यूं तो मैं दश्त" पे भी परतवे-गुलशन देखू
सायए-गुल" में मगर साँप का मस्कन" देखू
1. नंगे पांव 2. दुप के जगल की ओर 3. सौन्दर्य की रचना की कसौटी
4.दिन-रात 5. क्षण-प्रतिक्षण 6. स्वभाव 7. रेगिस्तान 8. सूरज 9. फूलों
का रंग और उनकी सुगध 10. गर्मी 11. वह शरीर जिसे महसूस किया जा
सके 12.कल्पना 13. अत्याचार 14. जगल 15. बाग का साया 16. फूल
की छांव 17.घर
पाकिस्तान से ताजा गजलें 31

फैले हुए अव तो ये दस्ते-तिही काटना जाइज़' ठहरा मुद्दतों से कई दामन देखू मर गये तश्ना-दहन', जल गये खेतों के वदन अब तो बरसात के इमकान' को रोशन देखू कभी कोहसार में करता था मैं मादिन की तलाश अब जमीनों में भी, सोनों में भी आहन देखू मुझ पे है शेख की तकरीमा तो लाज़िम लेकिन उसे नजदीक से देखू तो बरहमन देखू इतना चस्का मुझे इफ्शाए - हकीकत का पड़ा आस्मानों में भी रोजन - पसे - रोजन' देखू 13 तीन हाथ में तेशा है या नुस्खा कोई अकसीर का कम नही होता खंडर में भी जुनूं तामीर का चंद झंकारें थी जिनकी गूंज थी आफ़ाक़-गीर और क्या सरमाया होता खानए - जंजीर का" दिल से लव तक हर्फ का सारा सफ़र बरजख में है शौक हकगोई का, लेकिन खौफ़ है तकफ़ीर का भेद यह मुझ पर खुला इस शह, रे - इज्जतमंद में बेगुनाही भी है इक पहलू मेरी तक़सीर का दर-हकीकत दिल में घर करना है परबत काटना तुमने अफ़साना बना डाला है जूए - शीर का ख्वाब देखा था कि हम अफ़सू की जद में आये थे उम्र-भर फिर ख्वाब देखा ख्वाब की ताबीर का 1. खाली हाथ 2. उचित 3. प्यासे 4. सभावना 5. खनिज 6. लोहा 7. आदर 8. यथार्थ को खोलना 9. छेद के पीछे छेद 10. कुदाल 11. अचूक 12. निर्माण 13. ससार में फैली हुई 14. जजीर के घर की और क्या पूंजी होती 15. मरने से कयामत तक का समय 16. सच्ची वात कहना 17. डर 18. मुसलमान पर कुफ का फतवा लगाना 19. प्रतिष्ठित लोगों का शहर 20. दोष 21. दूध की नहर 22. जादू 23. निशाना 32 पाकिस्तान से ताजा गजलें शवः तसव्वुर' ने तेरी यादों की जब तजसीम की एक झोंके पर भी धोखा-सा हुआ तस्वीर का हिज से मौसूम कर लो अपनी कोताही 'नदीम' और भला-सा नाम उसको दे दिया तक़दीर का घार जरा न शिकस्ता हर्फ हैं अजनबी, न फिगार लफ़्ज' पराये हैं वही ग़म हैं मेरी मताए-फ़न', मेरे तज्रिये में जो आये है गो सफ़र तो धूप नगर का है, यह तिलिम्म हुस्ने-नजर' का है कहीं छांव कुर्वे-जमाल" की, कही फेजे-इश्क" के साये है तेरी एक जुबिशे - चश्म': से हुई नामा - नरमा' बसारते।। हुई गुंचा - गुंचा समाअतें, लय जो तूने हिलाये हैं तू गया तो वपमे - सयाल से तेरे खद्दो - खाल" कहाँ गये, मेरे फूल किसने जलाये हैं, मेरे चांद किसने बुझाये हैं तेरा इंतज़ार नहीं रहा, तेरा एतवार नहीं रहा मेरे एतिमाद की शास से ये तयूर'' किसने उड़ाये हैं मेरे शौक़ पर यह गिरिप्त क्यों, ऐ खुदा, यह नफ़िए-सिरिश्त' क्यों यह वह नश्शा: है जिसे आदमी तेरे आस्माँ से लाये है जो खला के जब में कैद था, वह खला के पार निकल गया जो गिरा था वामे - बिहिश्त से, ये हिसार उसी ने गिराये है 1. रात 2. कल्पना 3. शरीर का रूप देना 4. नाम रखा हुआ 5. टूटे हुए अक्षर 6. घायल शब्द 7. कला की पूंजी 8. जानकारी 9. दृष्टि की अच्छे- दुरे की परख 10. रूप की निकटता 11. प्यार का उपकार 12. आँख की हरकत 13. सुरीली आवाज़ 14. दृष्टि 15. सुनने की शक्तियाँ 16. कल्पना की महफ़िल 17. गाल और तिल 18. विश्वास 19. पक्षी 20. पकड़ 21. प्रकृति के प्रतिकूल वात, प्रकृति का खंडन 22. नशा 23. अंतरिक्ष 24. अत्याचार 25. स्वर्ग की छत 26. घेरा पाकिस्तान से ताजा गजले 33

अहमद फ़राज़
एक
नामुरादी का यह आलम भी तो ऐ दिल न रहे
हम तो अब तर्के-तथल्लुक्क' के भी काबिल न रहे
बज्मे-मक्तल' जो सजे कल तो यह इमकान भी है
हम-से विस्मिल' तो रहें आप-सा कातिल न रहे
यूं तो हर शख्स है अंदेशए- रहजन' का असीर
कारवाँ नीयते-रहवर' से भी ग़ाफ़िल न रहे
आज उसने शरफ़े-हमसफ़री'
इस तरह से कि मुझे ख्वाहिशे-मंजिल न रहे
सामने तू हो तो सौ स्वाहिशें जाग उठती हैं
काश अवके मेरी आँखों में मेरा दिल न रहे
जो भी हो साहिबे-महफ़िल वही कहता है 'फराज'
कि वह उठ जाये जो महफ़िल से तो महफ़िल न रहे
वरशा
था
हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू
कहाँ गया है मेरे शहर के मुसाफ़िर तू
बहुत उदास है इक शख्स तेरे जाने से
जो हो सके तो चला आ उसी की खातिर तू
मेरी मिसाल कि इक नख्ले-खुश्के-सहरा हूँ
तेरा खयाल कि शाखे-चमन का ताइर तू
1. संबंध तोड़ना 2. कत्ल करने की महफ़िल 3. संभावना 4. जस्मी
5. लुटेरे का भय 6. वदी 7. पथ-प्रदर्शक का आशय 8. असावधान 9. यावा
में साथ देने का सम्मान 10. मभापति 11. जंगल का मूखा पेड 12. पक्षी
34
पाकिस्तान से ताजा गजलें

मैं जानता हूँ कि दुनिया तुझे बदल देगी
मैं मानता हूँ कि ऐसा नहीं बजाहिर' तू
हँसी-खुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है
यह हर मक़ाम पे क्या सोचता है आखिर तू
'फ़राज़' तूने उसे मुश्किलों में डाल दिया
जमाना साहिबे-ज़र और सिर्फ शाइर तू
तीन
नजर बुझी तो करिश्मे भी रोज़ो-शव के गये,
कि अब तलक नहीं आये हैं लोग जबके गये
करेगा कौन तेरी बेवफ़ाइयों का गिला
यही है रस्मे-जमाना' तो हम अवके गये
मगर किसी ने हमें हमसफ़र नहीं जाना
यह और वात कि हम साथ-साथ सबके गये
अब आये हो तो यहाँ क्या है देखने के लिए
यह शह, र कब से है वीरा, वे लोग कबके गये
गिरिपत:-दिल' थे मगर हौसला न हारा था
गिरिपत:-दिल है मगर हौसले भी अबके गये
तुम अपनी शम्अ-ए-तमन्ना को रो रहे हो 'फराज'
उन आँधियों में तो, प्यारे, चिरारा सबके गये
चार
कुर्वतों में भी जुदाई के ज़माने मांगे
दिल वह बेमेह,२० कि रोने के बहाने मांगे
हम न होते तो किसी और के चर्चे होते
खिल्कते-शहर। तो कहने को फ़साने मांगे
यही दिल था कि तरसता था मरासिम के लिए
अब यही तर्क-तअल्लुका के बहाने मांगे
1. देखने मे 2. जगह 3. धनवान 4. अनोखापन 5. दिन-रात 6. समय
की परंपरा 7. उदास 8. कामना का दीप 9.मिलन की पड़ियां 10.निर्दय
11. शहर के लोग 12. संवध 13. संबंध तोडना
पाकिस्तान से ताजा गजलें 35

में वह महरूम' कि जैसे कोई वीराना हो
तू वह सुशफहम, खरावों से सजाने मांगे
अपना यह हाल कि जी हार चुके, सुट भी चुके
और मोहब्बत वही अंदाज पुराने मांगे
जिंदगी, हम तेरे दागों से रहे शमिदा
और तू है कि सदा आईनाखाने' मांगे
दिल किसी हाल पे काने' ही नहीं जाने-'फ़राज़"
मिल गये तुम भी तो क्या और न जाने मांगे
पांच
खामोश हो क्यों, दादे-जफ़ा क्यों नहीं देते
विस्मिल' हो तो कातिल को दुआ क्यों नहीं देते
वहशत का सवय रोजने-जिंदा तो नहीं है।
मिह, रो-महो-अंजुम' को बुझा क्यों नहीं देते
इक यह भी तो अंदाजे-इलाजे-गमे-जाँ० है
ऐ चारागरोग, दर्द बढ़ा क्यों नहीं देते
मुंसिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे
मुजरिम है अगर हम तो सजा क्यों नहीं देते
रहजन हो तो हाज़िर है मताए-दिलो-जाँ भी
रहवर हो तो मंजिल का पता क्यों नहीं देते
साये हैं अगर हम तो हो क्यों हम से गुरेजा।
दीवार अगर है तो गिरा क्यों नहीं देते
क्या बीत गयी अबके 'फ़राज़' अहले-चमन पर
याराने-कफ़स मुझको सदा क्यों नहीं देते
1. निराश 2. किसी की ओर से अच्छा विचार रखने वाला 3. खंडहर
4 शीशाघर 5.फराज के प्राण 6. अत्याचार की प्रशसा 7. जख्मी 8. भय का
कारण कंदखाने का छेद तो नही है 9. सूरज-चांद-सितारे 10. प्राण के दुख की
चिकित्सा का तरीका 11.ऐ चिकित्सको 12. न्यायकर्ता 13. दोषी 14. लुटेरा
15. दिल और जान की पूंजी 16. पथ-प्रदर्शक 17. बचकर निकल जाने वाला
18. बाग में रहने वाले 19. खाने के साथी
36 पाकिस्तान से ताजा गजले

अहमद मुश्ताक
कहीं उम्मीद-सी है दिल के निहाँखाने में
अभी कुछ वक्त लगेगा इसे समझाने में
मोसमे-गुल हो कि पतझड़ हो, बला से अपनी
हम कि शामिल हैं न खिलने में न मुरझाने में
हम से मल्फी' नहीं कुछ रहगुजरे-शौक़' का हाल
हमने इक उम्र गुज़ारी है हवा खाने में
है यूं ही घूमते रहने का मजा ही कुछ और
ऐसी लज्जत न पहुंचने में न रह जाने में
नये दीवानों को देखें तो खुशी होती है
हम भी ऐसे ही थे जब आये थे वीराने में
मौसमों का कोई महरम' हो तो उससे पूछू
कितने पतझड़ अभी वाक़ी है बहार आने में
1.छुपा हुआ 2. अभिलापा का रास्ता 3. राजदार
पाकिस्तान से ताजा गजलें 37

अहमद हमदानी
न जाने आज यह किसका खयाल आया है
खुशी का रंग लिये हर मलाल आया है
वह एक शख्स कि हासिल नथा जो खुद को भी
मिटा किसी पे तो कैसा वहाल आया है
जवाँ पे हर्फ़-तलव भी नहीं कोई, फिर भी
निगाहे - दोस्त में रंगे-जलाल' आया है
किया न ज़िक्र भी जिसका तमाम उम्र कभी
हमारे काम बहुत वह मलाल आया है
नहीं है तुमसे कोई दोस्ती भी अव तो मगर,
कदम-क़दम पे यह कैसा ववाल आया है
1. इच्छा को वात 2. क्रोध का रंग 3. झंझट
38 पाकिस्तान से ताजा गजलें

आरिफ़ अब्दुल मतीन
एक
गुलाव रुत में चमन से गुजर रहा हूँ मैं
मेरे जिलो' में हैं रंग और बू, सवा हूँ मैं
हुए है मुझसे नुमायाँ' तेरे बदन के खुतूत'
जो चुस्त है तेरे पंकर पे, वह क़वा हूँ मैं
मेरे खयाल में उड़ती हैं तितलियां हरसू,
हर आन उनके तअक्कुबई में भागता हूँ मैं
यह आरजू है कि. सहराओं पर वरस जाऊँ
समंदरों से जो उठी है, वह घटा हूँ मैं
खिराम से मुझे पहचान, मेरे रूप न देख,
कहीं सवा", कहीं सरसर", कहीं हवा हूँ मैं
मेरे हुनर का यह एजाज" है कि हर ग़म को
तेरे जमाल" के साँचे में ढालता हूँ मैं
मेरे वुजूद का आशोव जांगुसिल है बहुत
खुद अपने होने की 'आरिफ़' कड़ी सजा हूँ मैं
-
दो
तू अपनी आँख का आँसू कभी बना मुझको
मिलू न खाक में, पलकों पे यूं सजा मुझको
1. हमराही 2. हवा 3. स्पष्ट 4. रेखाएँ 5. शरीर 6. चोगा, लबी
पोशाक 7. चारों ओर 8.पीछे 9. रेगिस्तान 10. गति 11.ठडी,
मधुर हवा 12. आँधी 13, चमत्कार 14. रूप 15. मेरे अस्तित्व की
हलचल
वहुत हृदय-विदारक है
मृदुल और
पाकिस्तान से ताजा गजलें
39

तरस रहा हूँ मैं अपनी ही हमनशीनी' को
तू आईना है मेरे अक्स से मिला मुझको
मेरे चुजूद के चंदन से दो-जहाँ महके
तू अपने प्यार के शोले मे यूं जला मुझको
सहर के नर्म उजाले में ढलके मुझ पे वरस
अँधेरो शब में जो सो जाऊँ, ५ जगा मुझको
अजल से ता-य-अयद खुद को फैलता देयूं
मेरी निगाह में तू इस कदर बढ़ा मुझको
तेरे जमाल' को रानाइयों' का गीत हूँ मैं
जो हो सके तो मधुर लय में गुनगुना मुझको
तीन
मैं भरी दुनिया में रहता था, मगर तनहा भी था,
मुझको निस्यत यी हकाइका से, मैं सुद सपना भी था
पौ फटे पहलू में तेरे आँख मेरी लग गयी,
नीद का प्यासा भी था, मैं रात का जागा भी था
मुझ पे कब यूं ही खुले असरार तेरी जात के,
मैंने देखा ही न था, तुझको बहुत सोचा भी था
मुतमइन' कव था तू अपने खालो-खद" को देखकर
अक्स तेरा आईने से वेतरह उलझा भी था
मुद्दतों दिल के सुकूँ की आस पर ढूंढा तुझे
देखकर तुझको मुकाबिल दिल मगर धड़का भी था
यह अलग इक वात है दुनिया से ओझल ही रहा
वरना जो दिल में निहाँ था, आँख से झलका भी था
1.साथ उठना-बैठना 2.अनादिकाल 3. अनंतकाल तक 4.रूप 5. छटा
6. अकेला 7. हकीकत का बहु०-यथार्थता 8. भेद 9. व्यक्तित्व 10. सतुष्ट
11. गाल और तिल 12. छुपा हुआ
40
पाकिस्तान से ताजा गज़लें

इक़बाल साजिद
दह,र' के अंधे कुएँ में कसके आवाजा लगा
कोई पत्थर फेंककर पानी का अंदाजा लगा
जहन में सोचों का सूरज बर्फ की सूरत न रख
कुहर के दीवारो-दर पर धूप का ग़ाजा लगा
रात भी अवजा रही है अपनी मंजिल की तरफ़
किसकी धुन में जागता है,घर का दरवाजा लगा
काँच के वरतन में जैसे सुर्ख काग़ज़ का गुलाय
वह मुझे उतना ही अच्छा और तरो-ताजा लगा
प्यार करने भी न पाया था कि रुस्वाई मिली
जुर्म से पहले ही मुझको सगे-खम्याजा' लगा
शहर की सड़कों पे अंधी रात के पिछले पहर,
मेरा ही साया मुझे रंगों का शीराजा' लगा
जाने रहता है कहाँ इकबाल साजिद' आजकल,
रात-दिनदेखा है उसके घर का दरवाजा लगा
1. काल 2. बुद्धि 3. करनी के फल का पत्थर 4. म
पाकिस्तान से ताजा गजलें
41

इफ्तिखार नसीम
इस तरह सोयी हैं आँखें जागते सपनों के साथ
ख्वाहिशें लिपटी हों जैसे बंद दरवाजों के साथ
रात भर होता रहा है उसके आने का गुमा'
ऐसे टकराती रही ठंडी हवा परदों के साथ
एक लम्हे का तअल्लुक उम्र-भर का रोग है
दौड़ते फिरते रहोगे भागते लम्हों के साथ
मैं उसे आवाज देकर भी बुला सकता न था
इस तरह टूटे जुवाँ के राब्ते' लफ्जों के साथ
एक सन्नाटा है, फिर भी हर तरफ़ इक शोर है
कितने चेहरे आँख में फैले हैं आवाजों के साथ
जानी - पहचानी है वातें, जाने - बूझे
फिर भी मिलता है वह सबसे मुख्तलिफ़ चेहरों के साथ
दिल धड़कता ही नहीं है उसको पाकर भी 'नसीम'
किस क़दर मानूस है यह, नित नये सदमों के साथ
नवश हैं
-
1. भ्रम 2. क्षण 3. सपर्क 4. विभिन्न 5. परिचित
42 पाकिस्तान से ताजा गजलें

इब्ने इंशा
एक
सानेहा' हम पे यह पहला है मेरी जाँ कोई
ऐसे दामन से मिलाता है गिरेवाँ कोई
कैस साहब का तो इस ग़म में अजव हाल हुआ
अपने रस्ते में न पड़ता हो बयावां कोई
हम ने अपने को बहुत देर सँभाला होता,
आज ही निकले अगर आँसू सरे-मिजगाँ-कोई
यारो, इस दर्दे-मोहब्बत की दवा बतलाओ
ढूंढ लेंगे ग़मे-दौरों का तो दरमाँ कोई
यक नजर देखना, रम करना, हवा हो जाना
उनसे छूटी है भला खूए-ग़जाला' कोई
हम किसी सम्त भी निकले हों, वहीं जा निकले
हमसे भूली है रहे - कूचए - जाना कोई
अब तेरी याद में रोयेंगे, न हैराँ होंगे
उनसे पैमा' है कोई, दिल से है पैमां कोई
सूनी रातों में सरे-बिस्तरे-ख्वावे-राहत
बैठा रहता है किसी वात पे गिरयाँ कोई
भीगी शामों में, खुले सहन में तनहा-तनहा
बेकराराना" ही देखा है स्वरामां कोई
दोस्तो, दोस्तो, उस शख्स को जाकर समझाओ
अपने इंशा के संभलने का भी सामाँ कोई
1. दुर्घटना 2. पलको के किनारे 3.चिकित्सा, इलाज
5. सुदरियो का स्वभाव 6. प्रेमिका को गली का रास्ता 7. वचन ४. मीठी नीद
के बिस्तर के सिरहाने 9. रोता हुआ 10. व्याकुल 1.टहलते हुए
8
4. लुभाना
.
पाकिस्तान से ताशा गजलें
43

यह भी हम लोगों को वहशत पे हँसा करता था
आया इस सान-ए-बोरी' में भी मेहमाँ कोई
दो
गोरी अब तू आप समझ ले हम साजन या दुश्मन है,
गोरी, तू है जिस्म हमारा, हम तेरा पैराहन हैं
नगरी-नगरी घूम रहे हैं, सखियो अच्छा मौका है
रूप-सरूप की भिक्षा दे दो, हम इक फैला दामन है
तेरे चाकर होकर पाया दर्द बहुत, रुस्वाई बहुत,
तुझसे थे जो टके कमाये आज तुझी को अरपन है
लोगो, मैले तन-मन-धन की हमको सख्त मनाही है
लोगो, हम इस छूत से भागें, हम तो खरे बिरहमन हैं
पूछो खेल बनानेवाले, पूछो खेलनेवाले से,
हम क्या जानें किसकी बाजी, हम जो पत्ते बावन हैं
1. उजाड घर 2 दानी लोगो
44 पाकिस्तान से ताजा गजलें

इरफ़ाना अज़ीज़
एक
दिल पर गहरा नक्श है साथी लाख तेरी दानाई का
सात समंदर भी तो न पायें राज मेरी गहराई का
चश्मए - खू. में डूब गयी बारात सुहाने तारों की
बोझल पलकों पर गहनाया चाँद मेरी तनहाई का
झूम रहे है काले बादल दरस की प्यासी आँखों में
काजल बनकर फैल गया है दाग मेरी रुस्वाई का
कितना है आनंद तेरे इस धीमे - धीमे लहजे में
तेरे धीरज से निखरा है रंग मेरी रानाई का
मेरे दिल से पूछे कोई क़द्र उभरते सूरज की
मेरी आँख से देखे कोई रूप मेरे सौदाई का
संदल जैसी रंगत पर कुरवान सुनहरी धूप करूँ
रोशन माथे पर मैं वारूँ सारा हुस्न खुदाई का
मेरा विखरा-बिखरा तन-मन सिमट गया किस चाहत से
जान गयी हूँ भेद मैं तेरी बाँहों की गोराई का
चिरागे - फ़िक जलाया है रात - भर हमने
और उसके बाद निखारा रुखे -सहर हमने
हमें शऊर ने धोखे दिये है
रह-रहकर
फ़रेव
खाये है दानिस्ता' वेशतर हमने
5. सोच का दीप
1. चतुरता 2. खून की नहर 3. सुदरता 4. पकड़
6. सुबह का मुंह 7. जान-बूझकर 8. ज्यादातर
पाकिस्तान से ताजा गजलें 45

सिला खिरद' का ज़माने में जामे-जह र सही
निखार दी है मगर अपमते - बशर हमने
नज़र हो दौलते -हर -दो - जहाँ पे क्या माइल'
समेट ली है बहुत दौलते - नज़र हमने
सदाए - पा की सुनी बाज़गश्ता ही हर गाम,
तलाश की है जहाँ तेरी रहगुज़र हमने
निगारे - गुल' ने लिया नाम जेरे - लव तेरा
उदास, चाँद को देखा पसे - शजर हमने
तीन
नील गगन पर सुर्ख परिंदों की डारों के संग,
बदली बनकर उड़ती जाये मेरी शोख उमंग
कोमल कलियों जैसा मेरा पाक पवित्न शरीर
पवन के छूने से उड़ जाता है चेहरे का रंग
सपनों की डाली पर चमका एक सुनहरा पात
चढ़ता सूरज देखके जिसका रूप हुआ है दंग
जलते • बुझते फूलों से उतरी खुशबू की राख
धोकर आग जो ओस ने देखा अंगारों का रंग
ताने देकर लोग लगाते हैं क्यों आग में
बस्तीवाले क्यों करते है बैरागन को तंग
आग
1. बुद्धि 2. जहर का जाम 3. मनुष्य की बड़ाई 4. दोनों लोको की
दौलत 5. आकर्षित 6. पद-चाप 7. प्रतिध्वनि 8. फूल की प्रतिमा 9. दवे
स्वर मे 10. पेड़ के पीछे
46 पाकिस्तान से ताज़ा ग़ज़लें

रहसान दानिश
इतना कहाँ है जर्फ समेहूं ये किश्ते - दर्द:
अपना सा एहतिमामे - सुदाई न दे मुझे
मैं किरचियां समेट कर जोगा कब तलक
तोड़ा है मुझसे लेके जो आईना दे मुझे
इस आप्ताये - दानिशे - नौ से मुझे बचा
जिस रोशनी में राह सुझायी न दे मुझे
मैं हूँ अर्क - अर्क,
मेरे तलवे लहू • लहू
इतनी सजाए - आवलापाई न दे मुझे
गुस्ताख मैं नहीं हूँ जो आवाज़ हो वलंद
उस दर पे इत्तहामे - गदाई' न दे मुझे
आयें नज़र जहां से जमीनें धुआं - धुओं
ऐसी बलंदियों पे रसाई न दे मुझे
सुनता हूँ ढक लिया है समंदर को वर्फ ने,
यारव अभी गहन से रिहाई न दे मुझे
मेरी नज़र का नुक्स है या आईना खराब
'दानिश' वह दिल में रहके दिखायी न दे मुझे
दो
आईना है तो अपनी सफाई न दे मुझे
मुमकिन नहीं कि अक्स दिखायी न दे मुझे
1. सहनशीलता 2. दुख के खेत 3. ससार की देख-रेख 4. नयी अक्ल का
रज 5. पैरों में छालों की सजा 6. भीख मांगने का आरोप
पाकिस्तान से ताजा गजलें
47

.
सैय्याद अव वहार, न बरखा, न फूल वन
ऐसे में इग्ने - नरमा सराई। न दे मुझे
वरपा है खल्वतों में भी नीलामघर का शोर
ये लोग हैं बड़े तो बड़ाई न दे मुझे
तेरा सुबूत है तेरी खुशबू मगर यह क्या
तू सामने हो और दिखायी न दे मुझे
जो वेवसर है उनको वसीरत' कहां से दूं
इस काफिले में राहनुमाई न दे मुझे
यह भी गलत नही कि अगर तू हो स्वरू
हो शोरे - हथ' भी तो सुनायो न दे मुझे
दिल की जो बात है वह जवाँ तक तो आ चुके
रुख्सत न हो, यह जख्मे - जुदाई न दे मुझे
अफ़कारे-नौ की क्यों न करूँ मंडियाँ तलाश,
जव कोई काश्तकार वटाई न दे मुझे
मर क्यों न जाऊँ जब यह समाअत का हाल हो
दस्तक हो तेरी और सुनायी न दे मुझे
यह फ़िक्र है कि जिसके लिए तज दिये रफ़ीक़
इक-दिन वह दुश्मनों में दिखायी न दे मुझे
1. गाने का बुलावा 2. एकात 3. दिल की नजर 4. महाप्रलय का शोर
5. नयी चिंताएं 6. सुनने की शक्ति
48 पाकिस्तान से ताजा गजलें

किश्वर नाह
आगे सरक रहे है कि सक्ता भी है अजब,
दीवारो- दर को शौक-तमाशा भी है अजव
शायद उदास शाखों पे लेटा हुआ मिले
अपनी गली में उसका ठिकाना भी है अजव
गुंजान गहरे सज दरख्तों ने बांट ली
वह तीरगी कि जिसका उजाला भी है अजव
दीवारो- दर के रंग है आँखों पे जम गये
दहशत से मर न जायें कि रस्ता भी है अजव
बिखरे हरूफ़ जोड़के लिख दो कोई तो नाम
इस दिल के दुख अजब है मसीहा भी है अजब
मर्दो को सव रवा' है पै औरत को ना-रवा',
शर्मो - हया का शहर में चर्चा भी है अजब
हः - विसाल हर्फ़ - गुमाँ तक न बन सका
तहजीबे-जा में गम का मुदावा भी है अजव
भेजी है उसने फूलों में मुंह - बंद सीपियाँ
इंकार भी अजब है, बुलावा भी है अजब
दो
हम कि मग़लूबे - गुमाँ थे पहले
फिर वहीं है कि जहाँ थे पहले
1. सन्नाटा 2. अंधकार 3. भय 4. उचित 5. अनुचित 6. मिलन की
बात 7. भ्रम (कल्पना) की बात 8. जीवन को संस्कृति 9. इलाज 10. भ्रम से
पराजित
पाकिस्तान से ताजा गजलें 49

ख्वाहिशें झुरियां बनकर उभरी
जराम सोने में निहीं थे पहले
अब तो हर बात पे रो देते है
वाकिफ़ - सूदो - जियाः थे पहले
दिल में जैसे कोई कोटा निकला
अश्क आँगों से रचा थे पहले
अब फान अंजुमन - आराई है
पनवारे - दिलो - जां थे पहले
दोश पे सर है कि है बर्फ जमी
हम कि शोलों की जुयाँ थे पहले
अवतोहर ताजा सितम है तस्लीम,
हादसे दिल पे गरी थे पहले
मेरी हमजाद है तनहाई मेरी,
ऐसे रिश्ते भी कहाँ थे पहले
तीन
तलव' की प्यास को फूलों में बांट सकता था
वह रुवाव में भी मेरे लब पे ओस रखता था
उसे खबर थी मेरे मुत्तरिय वहानों की
वह हर्फ़गर' मेरे कानों में फूल बुनता था
उसे पलट के बुलाने का शौक़ भी था अजव
वह दायरों की तरह साहिलों पे चलता था
मैं कैसे खुद को तराशुं कि तुझको पा तो सकू
तेरी गली में तो सूरज भी छनके आता था
नमी से आँख की था दिल में ग़म तमन्ना का
तुम्हारा गम मेरी पलकों को तरतो रखता था
1.छुपे हुए 2. लाभ और हानि के जानकार 3. सभा की सजावट 4. कंधा
5. दुर्घटना 6. साथ पंदा हुई 7. इच्छा 8. अधीर 9. वात बनाने वाला
50 पाकिस्तान से ताजा गज़लें

कहाँ से ढूंढूं मैं उन सद-चिराग आँखों को
वह शख्स तो मेरा हर मूए-तन समझता था
विखर गया हर इक अंदेशए - फ़ना 'नाहीद'
कि मेरा जामे - तमन्ना' छलकके भरता था
1.सैकडों दीप 2. शरीर का वाल, रोम-रोम 3. मौत का भय 4. इच्छा
का प्याला
पाकिस्तान से ताजा गजलें
51

खातिर ग़ज़नवी
एक
गो जरा-सी बात पर बरसों याराने गये
लेकिन इतना तो हुआ, कुछ लोग पहचाने गये
गमिए-महफ़िल फ़क़त इक नारए-मस्ताना है।
और वह खुश है कि इस महफ़िल से दीवाने गये
मैं इसे शोहरत कहूँ या अपनी रुस्वाई' कहूँ
मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गये
यूं तो वह मेरी रगे-जाँ से भी थे नज़दीक-तर',
आँसुओं की धुंद लेकिन न पहचाने गये
वहशतें. कुछ इस तरह अपना मुक़द्दर हो गयी
हम जहाँ पहुंचे, हमारे साथ वीराने गये
अब भी उन यादों की खुशबू जेहन में महफूज हैं
वारहा हम जिनसे गुलजारों को महकाने गये
क्या क़यामत है कि 'खातिर' कुश्तए-शव भी थे हम
सुव्ह भी आयी तो मुजरिम। हम ही गरदामें गये:
दो
उलझे-उलझे धागे-धागे से खयालों की तरह
हो गया हूँ इन दिनों तेरे सवालों की तरह
1. सभा की चहल-पहल केवल एक मस्ती-भरा नारा है 2. प्रसिद्धि
3. वदनामी 4. सबसे बड़ी खून की रग जो दिल में जाती है 5. ज्यादा करीब
6. त्रास 7. सुरक्षित 8. प्रायः 9. वागों 10. रात का मारा हुआ 11. दोपी
12. माने गये
52 पाकिस्तान से ताजा गजले

अपने दिल की वुसमतों में हर तरफ़भटका फिरा
बेकरी', मुव्हम' सरावों में गज़ालों की तरह
यह मेरा अहसास है या जत्रे - मौसम का असर
अबको रुत महके नहीं गुल पिछले सालों की तरह
अस्र- हाज़िर को जबीं पर तल्खियां' कंदा हुई
तन गये हालात अपने गिर्द जालों की तरह
दश्ते-गम में औधियों के वार सहने के लिए
खुश्क पत्ते उठ रहे है आज ढालों की तरह
जुल्मते-मग़रिब को 'खातिर' कोई यह पैग़ाम दे
हम भी अब उभरेंगे मशरिक' से उजालों को तरह
तीन
राजे-दिल" जो तेरी महफ़िल में भी इफ्शा न हुआ,
या सरे - दार' हुआ या सरे - मैखाना हुआ
एक हम हैं कि तसव्वुर की तरह साथ रहे
एक तू है कि जो खल्वत में भी तनहा न हुआ
क्या भरोसा है तेरे लुत्फ़ो-करम का ऐ दोस्त
जिस तरह सायए-दीवार" हुआ या न हुआ
शवनमिस्ता में उतर आयी थी सूरज की किरन
आईनाखानए-गुल' था कि सनमखाना हुआ
इस कदर रंज सहे दिल ने वफ़ा में 'खातिर'
आज वह हमसे जो बिछड़े भी तो सदमा न हुआ
1. विस्तार 2. असीम 3. अस्पष्ट 4. मृगतृष्णा 5. हिरन 6. वर्तमान
काल 7. कटुताएँ 8. अकित 9. पश्चिम के अंधकार 10. पूरब 11. मन का
भेद 12. न खुला 13. फाँसी के तख्ते पर 14. एकांत
15. अकेला
16.करुणा और दया 17. दीवार की शंव 18. ओस का घर 19. फूल का
शीशाधर 20. प्रेमिका का घर
पाकिस्तान से ताजा गज़लें 53

खालिद अहमद
एक
लहू की धार ने तन रोशनी में ढाल दिये,
सरों के साथ हवा में दिये उछाल दिये
तुलूए - दर्द का लम्हा कहाँ गुरूव हुआ,
वनामे-जीस्त हमें जुल्मतों के साल दिये
शऊर देके हमें बेशऊर कहने को,
दिलों से खोलके ताले लबों पे डाल दिये
हर एक सत्र' पयामे-सकूत' थी हमको
हर इम्तहान में तूने अजब सवाल दिये
दरे-तजाद पे कुफ़्लै-जवाज़' क्या लगता
बरंगे - सुव्ह अंधेरों ने घर उजाल दिये
तेरी रुतों ने हमें चांदनी समेटने को,
हवा से हाथ दिये, वादलों से जाल दिये
नवश एक मोहब्बत के अक्स थे 'खालिद'
वे रंग अब तेरी तस्वीर निकाल दिये
मू-कलम' हल्कए-जंजीर' कहाँ होते हैं
नवश तुझसे सरे-तसवीर कही होते हैं
शह र को धूल सिमट आती है क्यों आंखों
कुछ तो कह, अब तेरे दिलगीर कहाँ होते हैं
1. दर्द के उदय होने पा क्षण वहाँ ड्रा 2.जिंदगी के नाम से हमें अधर में
माल दिपै 3. विवेक 4. पक्ति 5. मौन सदंग 6. प्रतिपूलना या दरवा
7. औचित्य का ताला 8. निवार को मूलिया 9. जंगीर वीवही
54 पापिस्नान मे ताजा गजलें

सर को घुटनों पे धरे कौन कभी बैठा था
हमसे वहशी यूं ही जंजीर कहाँ होते हैं
वे नगर जिनको जगह दे न खयालों की जमी
वे हक़ीक़त में भी तामीर कहाँ होते है
लफ़्ज मफ़हूम' की तनहाई के उरियाँ कैदी
लफ्ज मिन्नतकशे-तफ़सीर कहाँ होते है।
ख्वाब तो देखने वालों के हुनर है 'खालिद'
ख्वाब तो दर-पए-तावीर कहाँ होते है
तीन
मैं कल का आदमी हूँ, मुझे कल पे टाल दे
ऐ दिन, मुझे ज़वाल की हद से निकाल दे
वह टीस जाग-जागके पहलू में सो गयी
वह टीस जो कि लाख दिलों को उजाल दे
अंग - अंग चूम-चूम के ढूंदूं जवाव मैं
हर शव मेरे लवों को वह ऐसे सवाल दे
ऐ अस्र, मेरे अस्र से आगे निकलके देख
ऐ रब्बे-जुलजलाल', दुखों को जमाल दे
ऐ गदिशे - नुजूम', पसे-गदिशे-नुजूम
हर सुब्हे - इंतज़ार को शामे-विसाल दे
1. अर्थ 2. शब्द व्याख्या के आभारी कहाँ होते है 3. स्वप्नफल के इच्छुक
4. पतन 5. काल 6. हे परमात्मा 7.ऐ सितारो(भाग्य)के चक्कर 8. सितारों
के चक्कर के वाद 9.मिलन की सांझ
पाकिस्तान से ताजा गजलें
55

गुलाम जीलानी 'असगर'
एक
तू अंग-अंग में खुशबू-सी बन गया होगा
मैं सोचता हूँ कि तुझसे गुरेज़ा क्या होगा
तमाम रात मेरे दिल से आँच आती रही
कहीं करीब कोई शह र जल रहा होगा
तू मेरे साथ भी रहकर मेरे करीव न था
अव इससे और फुजू फ़ासला भी क्या होगा
मुझे खुद अपनी वफ़ा पर भी एतमाद नही
कभी तो तू भी मेरी तरह सोचता होगा
कभी तो सगे-मलामत कही से आयेगा,
कोई तो शहर में अपना भी आशना होगा
ज़रा-सी वात पे क्या दोस्तों के मुंह आयें
गरीव दिल था, मुरव्वत में जल-बुझा होगा
दो
मोजे-सरसर की तरह दिल से गुज़र जाओगे
किसको मालूम था तुम दिल में उतर जाओगे
चार सू वक्त की गर्दिश की फसीले-शव' है
वचके इस गदिशे-दोरी मे किधर जाओगे
आईनासाने से दामन को बचाकर गुज़रो
आईना टूटा तो रेज़ों में बिखर जाओगे
1. उपेक्षा 2. अधिक 3.विश्याम 4.निदा कापायर 5. आंधीवी ने जी
6. चारी और 7. रात पा घेरा
56 पारिस्तान से ताजा गजल

इक जरा और करीबे-रगे-जाँ आओ तो
मेरे खूनाव में तुम ढलके संवर जाओगे
देखो वह चाँद सिसकता है उफ़क की हद पर
तुम भी उस चाँद की मानिंद गुजर जाओगे
इस भरी वम से हंस-बोलके रुख्सत हो लो
कल जो उठोगे तो वा-दीदा-ए-तर जाओगे
I. खून को उस रग के करीव जो दिल में जाती है
3. क्षितिज 4. सभा 5. आंसू-भरी आँखें लेकर
2. खून के आंसू
पाकिस्तान से ताजा गजलें 57

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दास्ताँ खत्म न होगी कभी चेहरों की 'जमील' हुस्ने-यूसुफ़ तो कभी इश्क-जुलेखा चेहरे दो मैं तो तनहा था मगर तुझ को भी तनहा देखा अपनी तसवीर के पीछे तेरा चेहरा देखा जिस की खुशबू से महक जाये शबिस्ताने विसाल' दोस्तो, तुमने कभी वह गुले-सहरा' देखा अजनवी बनके मिले, दिल में उतरता जाये, शहर में कोई भी तुझ-सा न शनासा' देखा अब तो बस एक ही स्वाहिश है कि तुझको देखें सारी दुनिया में फिरे और न क्या-क्या देखा कोई सूरत भी शनासा नज़र आयी न हमें घर से निकले तो अजव शहर का नक्शा देखा इस कदर धूप थी संवला गये रख्शा चेहरे जलते सूरज का मगर रंग भी पीला देखा पेड़ का दुख तो कोई पूछने वाला ही न था अपनी ही आग में जलता हुआ साया देखा थे अंधेरों के तअक्व में उजाले क्या-क्या खुद तमाशा थे 'जमोल' और तमाशा देखा तीन सुसिए-शाम ने यूं फूल बियेरे दिल में जरी चुपके से उतर आयें सवेरे दिल में हम तो सदियों से यूं ही गोश-वर-आवाज रहे जाने तू कौन है यया राज है तेरे दिल में पास शव भर कोई सुरशीद-सिफता रहता है दिन को तारे से उत्तर आते हैं मेरे दिल में 1.अओला 2. गधि को मिलने की जगह 3. जगनी पून ३. परिचित 5. चमाते हुए 6. आवाज पर धान लगाये 7. मूरज जंगा पारिम्नान गेनामा गरमें 59

जमील मलिक
एस.
महफिलें रूपाय हुई, रह गये तनहा चेहरे
ययन ने छीन लिये कितने शनासाः चेहरे
मारी दुनिया के लिए एक तमाशा चेहरे
दिल तो परदे में रहे, हो गये रस्वा चेहरे
तुम यह वेददं कि मुड़कर भी न देया उनको
वरना करते रहे क्या-पया न तकाजा चेहरे
कितने हाथों तराशे ये हसी ताजमहल,
झांकते है दरो-दीवार से क्या-क्या चेहरे
सोये पत्तों की तरह, जागती कलियों की तरह
साक में गुम तो कभी साफ से पैदा चेहरे
खुद ही वीरानी-ए-दिल, सुद ही चिरागे-महफ़िल
कभी महरूमे-तमन्ना, कभी शैदा' चेहरे
साक उड़ती भी रही, अब घरसता भी रहा
हमने देखे कभी सहरा, कभी दरिया चेहरे
ऐशे-इमरोज' भी, हंगामए-फ़दा' भी यही,
पेश करते रहे, हर दौर का नक्शा चेहरे
दीप जलते रहे हर ताक पे अरमानों के
कितनी सदियों से है हर घर का उजाला चेहरे
खत्म हो जाये जिन्हें देखके बीमारिए-दिल,
ढूंढकर लायें कहां से वह मसीहा चेहरे
1. परिचित 2. कामना से वचित 3. किसी चीज़ को बहुत अधिक कामना
4. आज का विलास 5. आने वाले कल का हंगामा
58 पाकिस्तान से ताजा गज़लें

दास्ताँ खत्म न होगी कभी चेहरों की 'जमील' हुस्ने-यूसुफ़ तो कभी इश्क-जुलखा चेहरे दो मैं तो तनहा था मगर तुझ को भी तनहा देखा अपनी तसवीर के पीछे तेरा चेहरा देखा जिस की खुशबू से महक जाये शविस्ताने विसाल' दोस्तो, तुमने कभी वह गुले-सहरा देखा अजनवी बनके मिले, दिल में उतरता जाये, शहर में कोई भी तुझ-सा न शनासा' देखा अब तो बस एक ही ख्वाहिश है कि तुझको देखें सारी दुनिया में फिरे और न क्या-क्या देखा कोई सूरत भी शनासा नज़र आयी न हमें घर से निकले तो अजव शहर का नक्शा देखा इस कदर धूप थी सँवला गये रख्शा चेहरे जलते सूरज का मगर रंग भी पीला देखा पेड़ का दुख तो कोई पूछने वाला ही न था अपनी ही आग में जलता हुआ साया देखा थे अँधेरों के तअक्कुब मैं उजाले क्या-क्या खुद तमाशा थे 'जमील' और तमाशा देखा तीन सुखिए-शाम ने यूं फूल बिखेरे दिल में जैसे चुपके से उतर आयें सवेरे दिल में हम तो सदियों से यूं ही गोश-घर-आवाज रहे जाने तू कौन है क्या राज है तेरे दिल में पास शव भर कोई खुरशीद-सिफ़त रहता है दिन को तारे से उतर आते हैं मेरे दिल में 1. अकेला 2. रात्रि को मिलने की जगह 3. जंगली फूल 4. परिचित्र 5. चमकते हुए 6. आवाज पर कान लगाये 7. सूरज जैगा पाकिस्तान मे नाजा गजलें 59

प्यार की लो मे मुनव्वर है सविस्ताने-विसाला
आज तो आन मिल शाम-गयेरे दिल में
हम मुसाफिर है मोहब्बत को कठिन राहों के
घक भी जाते है तो करते है बगेरे दिल में
क्यों भटकता है, इघर आये ज़रा मुस्ता ले
इंग तरफ़ धूप है, बादल है घनेरे दिल में
अपना सरमायाए-फ़ान फिर भी गलामत ही रहा
कितनी ही बार 'जमील' आये लुटेरे दिल में
1. मिलन का कक्ष प्यार की लौ से प्रकाशमान है 2. अपनी कला की पूंजी
फिर भी बची ही रही
60 पाकिस्तान से ताजा गजलें

जफ़र इक़बाल
एक
थकी हुई सी हवा में तरंग आने दे,
चमन से जा कहीं फूलों के रंग आने दे
जो बात करनी है मुश्किल तो आँख उठाके गुजर
खला' में स्वाव, लहू में उमंग आने दे
इस आवशार' का रस्ता न रोक बहरे-खुदा,
झुलस रहा है मेरा अंग-अंग आने दे
दिलों से बेखवरी इस क़दर नहीं अच्छी
महाजे-शौक़' से रूदादे-जंग आने दे
पनाह मांगती फिरती है तुझसे खल्के-खुदा,
कोई मुझे भी अगर तुझ से तंग आने दे
तू अपने सिन' को चादर बदन पे खेंचके रख
मेरी नज़र में तमन्ना का नंग आने दे
मैं खुद भी जीने से बेज़ार हूँ बहुत लेकिन
जरा ठहर मुझे मरने का ढंग आने दे
मताए-जुमला से यह एक शै बची है 'ज़फ़र'
हज़ार हैफ़ अगर दिल पे जंग आने दे
दो
है यही उसकी रजा, जैसा भी था, जैसा भी है
सह ल या दुश्वार है यह भरहला, जैसा भी है
देखना चाहो तो है, सुनना भी चाहो तो बहुत,
नक्श है, और साथ-साथ उसके सदा जैसा भी है
1. अतरिक्ष 2.झरना 3. अभिलापा का युद्ध-क्षेत्र 4. युद्ध का हाल
5. पर्दा 6. कुल पूंजी 7. मनोकामना 8. कठिन काम 9. चित्र 10. आवाज़
पाकिस्तान से ताजा गजले
61

मौज में आये तो दिखलाता है अपनी क़ुदरतें
खल्क से बाहर नहीं, लेकिन, खुदा जैसा भी है
वोलता है झूठ भी, रहता है सच से भी करीब
वातिलो-हक़ से वज़ाहिर मावरा जैसा भी है।
कुछ मोहब्बत में सियासत को भी रखता है रवा',
वह अगर ऐसा समझता है तो क्या, जैसा भी है
रुख बदलता जा रहा है उसकी सोचों का अगर
सोचना उसका भी हक है, सोचता जैसा भी है
वेवफ़ाई जब करेगा वह भी देखेंगे, 'ज़फ़र'
देख लो दो-चार दिन रंगे-वफ़ा जैसा भी है
तीन
फ़िक्र कर तामीरे-दिल' की वह यही आ जायेगा
बन गया जिस दिन मका उस दिन मकी आ जायेगा
कौन-सा हम रोज-रोज उसको बुलाते हैं यहाँ
वे-मुरव्वत है मगर इतना नहीं, आ जायेगा
हमसे मिल लेने का मतलब यह नहीं होगा कि अव
हर कोई उसको बुला ले, हर कहीं आ जायेगा
खुद भी वह चालाक है लेकिन अगर हिम्मत करो
पहला-पहला झूठ है उसको यक़ी आ जायेगा
सरखुशी' का सिलसिला चलता रहेगा और फिर
दरमियां में फिर कोई हर्फ़-हज़ी आ जायेगा
जख्मे-दिल तो सात परदों में छुपा होगा कही
और सबके सामने दागे-जवी' आ जायेगा
हम तो समझे थे कि इस लश्कर-कशी से हुस्न का
कुछ इलाका और भी जेरे-नगी" आ जायेगा
1. मनुष्य 2. ऐसा जान पड़ता है कि वह सत्य और असत्य से परे भी है
3. प्रचलित, उचित 4. दिल का निर्माण 5. रहने वाला 6. निष्ठुर 7. हलका
नशा 8. दुखदायक बात
9. माथे का दाग 10. आत्रमण 11. शासनाधीन।
62 पाविस्तान से ताजा गजलें

अव तो जैसे खुद भी आना चाहता है वह 'जफ़र'
घर, गली, होटल, जहाँ चाहो वहीं आ जायेगा।
न
उदासियों का कुछ ऐसा तिलिस्मा घर पे रहा
धुआँ - सा शौके - मुलाक़ात वामो - दर पे रहा
बराते - हिज थी या खस्ता ख्वाहिशों का जलूस
दवा - दवा - सा कोई शोर, रहगुजर' पे रहा
कवीदा चश्मा हुए, आहे - बे - महार पे हम
एतराज हमें आस्तीने - तर' पे रहा
सिवाये - दिल कई तुगयानियों से बच निकले
न इख्तियार। हमारा इसी भंवर पे रहा
यह मेरे पाँव में जंजीरे - आरजू' क्या थी
कि मैं कियाम में खुश था न मैं सफ़र पे रहा
यह किसकी सुव्ह मेरी रात से जुदा न हुई
यह किसका अक्स" मेरे हालए - हुनर" पे रहा
न खुलके देख सके हम न जान पाये उसे
कि इनहिसारे - तमाशा फ़क़त नजर पे रहा
वला की धूप थी और शफ़क़तें। मोहब्बत की
कि तेरी याद का बादल हमारे सर पे रहा
तेरा खयाल सलाखों से फोड़ता था जवी
वह वक्त भी, मेरे प्यार तेरे 'ज़फ़र' पे रहा
1. जादू 2. विरह की बारात 3. घायल इच्छाओं 4. रास्ता 5. मलिन
आँख 6. वह आह जिस पर हमारा बस न था 7. गीली आस्तीन 8. दिल के
अलावा 9. सैलाबों 10. अधिकार 11. मनोकामना की जजीर 12. अस्थायी
निवास 13. प्रतिबिंब 14. कला मडल 15. देखने की निर्भरता 16. कृपा
17. माथा
पाकिस्तान से ताजा गजलें 63

जावेद शाही
एक
दिले-गिरिपता के सव पेचो-ताव खोलके देख
हवा का जोर, मुहीते - हवाब खोलके देख
मेरे लहू को नुमाइशगहे - वफ़ा से उठा,
है जमा-ओ-खर्च बहुत, यह हिसाब खोलके देख
यह किस तिलिस्म से हर शै है मिस्ले-संग खमोश
ऐ नक्शगर, दरे - शह रे - खराब खोलके देख
कहीं तो दश्त में ठहरेगी मौजे - आबे-गुरेज'
रवाँ हुआ है तो राजे - सराव खोलके देख
धड़कते दिल से न मौजों की रज्म-गह में उतर
खते - सफर को कफे- दस्ते-आव" खोलके देख
है कब से तश्नए - मानी मेरे हरूफे - बदन
फराशा हो तो कभी यह किताब खोलके देख
जरा सुराग़ लगा मेरे रंगे - खस्ता का
ग़मों की धूप में बंदे - नकाब खोलके देख
गुलों को किसलिए डसती है चाँदनी रातें
कहाँ है जह,र, रगे - माहताब खोलके देख
मजा तो जब है कि गुलशन में जश्ने-शोला हो,
भरी बहार में दागे - गुलाव खोलके देख
1. दुखी मन 2. क्रोध 3. बुलबुले का फैलाव 4. पत्थर की तरह 5. नक्काश
6. वीरान शहर का दरवाजा 7. तेज पानी की लहर 8. मृगतृष्णा का रहस्य
9. लहरों 10. युद्धक्षेत्र 1!. यात्रा की रेखा 12. पानी के हाथ के झाग
13. अर्थ के प्यासे 14, शरीर के असर 15. फुर्सत 16. खोज 17. दुर्दशा
ग्रस्त 18. नकाव की गिरह 19, चांद की नस 20. शोलों का उत्सब
64
पाकिस्तान से ताजा गजले

कनारे - दश्ते - बला कौन है मकों 'शाही' समोश, सूनी हवेली का वाव खोलके देख ला दो जो बर्फ़ज़ारः चीर दे, ऐसी किरन भी ला पत्थर दिलों में आज कोई कोहकन' भी ला इस तरह सरसरी मेरा वावे-वफ़ा न लिख वक्ते-शुमारे-जस्म, मेरा खस्ता-तना भी ला मुंसिफ़ अगर बना है तो सबको गवाह रख इंसाफ़ है तो मेरा फटा पैरहन' भी ला जलने लगे हैं प्यास से फूलों के खुश्क होंट अद्रे - वहार को जरा सूए - चमन" चुपचाप खल्वतों में पिघलने से फायदा कोई चिराग़ है तो सरे - अंजुमन" भी ला इतना वह शादमा मुझे अच्छा नहीं लगा उस गुल के दिल में दाग़ की थोड़ी जलन भी ला जस्मे-सफ़र के दर्दे-मुसलसल का सह,रतोड़ निकला हुआ वतन से गरीब-उल-वतन भी ला यह चश्मे-इल्तिफ़ात ही काफ़ी नहीं मुझे मेरे लिए तू नरमी-ए-कामो-दहन भी ला 'शाही' उसे अजीज है अपना लहू तो क्या नाशे-शहीद के लिए खूनी कफ़न भी ला 1. ऐ शाही ! मुसीवतों के जंगल के किनारे कौन रहता है 2. द्वार 3. वर्फ़ का वन 4. पहाड़ काटने वाला 5. प्यार का परिच्छेद 6. जख्म गिनते समय 7. घायल शरीर 8.न्याय करने वाला 9.लिवास 10. वसंत की घटा 11. वाग की ओर 12. एकांत 13. सभा मे 14. प्रसन्नचित्त 15. यात्रा के घाव 16. निरतर पीडा 17. परदेसी 18. दया की दृष्टि 19. कोमल बात 20. प्यारा 21. शहीद की लाश पाकिस्तान से ताजा गजलें 65 ना.

अब यहां लोगों के दुध - सुख का पता क्या आये
बंद हो घर तो मकानों को सदा क्या आये
डूबते दिन को जिलो में न सुकू है न फ़राग़'
शफ़ - शाम से चेहरों पे जिया क्या आये
सद सीनों में पनपते ही नही दर्द के वीज
इन सरावों पे बरसने को घटा क्या आये
दूर हो कैसे तेरे जिस्म, तेरी जां को घुटन
तंग, वे - रोजनो- दर' घर में हवा क्या आये
खो चुके लुत्फ़ - सहरवेजी गरी - स्वाय मकोन'
सुव्ह • दम बंद दरीचों में सवा क्या आये
खुश्क पत्ते हैं कि झड़ते ही नहीं पेड़ों से
कैसे तब्दील हो रत, रंग नया क्या आये
गर्म हंगामा करे कौन रगों में 'शाही'
खुश्क नदियों में कोई मौजे - बला क्या आये
चार
यह बर्फज़ार' बदन से, न जां से निकलेगा
लहू हो सदं तो शोला कहां से निकलेगा
हजार घेरे रहे जन्न का हिसारे - सियहा
कि बावे -राहे - अमां दरमियां से निकलेगा
जो तल्ख हर्फ पसे-लब है, आम भी होगा
चढा है तीर तो आखिर कमां से निकलेगा
जो पेड़ फल नहीं देते वह काटते जाओ,
खिजाँ का जहर यूं ही गुलिस्तां से निकलेगा
1. रहनेवाले 2. लगाम, काबू 3. शांति 4. सुख 5. शाम की लालिमा
6. प्रकाश 7. बिना झरोखे और दरवाजे के 8. देर तक सोने वाले सुवह जल्दी
उठने का आनंद खो चुके 9. जहाँ बर्फ ही बर्फ हो 10. अन्याय का काला घेरा
चाहे जितना धेरे रहे 11. सुरक्षा के रास्ते का दरवाजा 12. जो कडवा अक्षर
होंठो के पीछे है
66 पाकिस्तान से ताजा गजलें

जरा चले तो सही पानियों पे तेज हवा
खड़ा सफ़ीना खुले वादवां से निकलेगा
कोई तो काम लो ग़म से, रगें ही चमकाओ
जलेंगी शम्एँ, अँधेरा मकाँ से निकलेगा
खुले हैं रास्तों के भेद तो समझ 'शाही'
यह कारवाँ सफ़रे - रायगाँ से निकलेगा
पाँच
शोके - तामीर' है मकों से परे,
फूल खिलते है गुलिस्ताँ से परे
जम रही है रगों में तारीकी
सूरते - दूद शमए - जाँ से परे
यूं न आ तश्नगी के धोखे में,
आव है चश्मए - रवाँ से परे
अव तो हटता नज़र नहीं आता
तीसरा शख्स दरमियाँ से परे
मुंह कसैला है उनसे क्यों 'शाही'
लफ्ज रहते है जो जुवाँ से परे
1. निष्फल यामा 2. निर्माण की यभिलापा 3.धुएँ की तरह 4. प्याम
5. बहती हुई नदी
पारिम्नान में ताजा गजने
67

जिया शवनमी
खुशबू के रंग दस्ते - सवा' से उतर गये
पल-भर में तेरी चाह के मौसम गुजर गये
वे ख्वाब जिनकी याद से आवाद था नगर
दिन के उदास फूल की सूरत विखर गये
जिनको जवी- ये गर्दै - मुसाफ़त के जख्म थे
वे लोग क्या हुए ? वे मुसाफ़िर किधर गये ?
दुनिया हमारे नवशे - क़दम ढूंढती रही
और हम खुद अपने शौके-तअक्कुव में मर गये
शीशों को पत्थरों के मुकाविल सजायेंगे
अवके वरस पहाड़ पे हम भी अगर गये
उस पुसिशे-निगाह की शवनम से ऐ 'जिया'
तनहाइयों के दाग़ मिटे, जखम भर गये
1. हवा के हाथ 2. माथा 3. यात्रा को धूल 4. पीछा करने की अभिलापा
5. दृष्टि की पूछ-ताछ 6. अकेनेपन
68
पाकिस्तान से ताजा गजलें

जॉन ईलिया
क्या
खामुशी कह रही है कान में क्या
आ रहा है मेरे गुमान में
मेरी हर बात वे - असर ही रही
नुक्स है कुछ मेरे बयान में क्या
मेरे सीने में और दुखन, क्या वात
पड़ गया घाव इस चटान में क्या
वह मिले तो यह पूछना है मुझे
अव भी हूँ मैं तेरी अमाना में क्या
यूं जो तकता है आस्मान को तू
कोई रहता है आस्मान में क्या
है नसीमे - वहार गर्द - आलूद'
खाक उड़ती है उस मकान में क्या
यह मुझे चैन क्यों नहीं पड़ता
एक ही शख्स था जहान में क्या
धूल ही बस लिखी हवाओं ने,
'जॉन' इस मेरे घर की शान में क्या
1. सुरक्षा 2. वसत की ठंडी और धीमी हवा 3. धूल में अटी हुई
पाकिस्तान से ताजा गजलें 69

ताज सईद
पुकारती रही कुछ देर तक हवा मुझको
समझ सका न जरा भी कि क्या कहा मुझको
वहार हो कि सिजाँ मेरे दिल के गुलशन में
सुनाया करती है इक दुप-भरी सदा मुझको
निगाह में वही मंजर है मौसमे-गुल' का
रुला रहा है अभी एक हादसा' मुझको
विगड़-विगड़ गयी है जेहन में वे तस्वीरें
फ़क़त जो याद रही तेरी इक अदा मुझको
मैं मुंतजिर हूँ, कोई मुझको भी मनायेगा,
नदी किसी ने अभी तक कोई सदा मुझको
1. दृश्य 2. वसत ऋतु 3. दुर्घटना 4. बुद्धि 5. केवल 6. प्रतीक्षा में
70
पाकिस्तान से ताजा गजलें

नजीर कैसर
सब्ज़ है पेड़ अभी, चाँद है पानी में अभी
और कुछ देर ठहर इस शबे-फ़ानी में अभी
कोई कहता नहीं, क्या देख रही है आँखें
सब गिरफ्तार है ख्वाबों की गरानी' में अभी
कोई चलता नहीं कदमों के निशाँ से हटकर
पाँव है हल्क़ए-जंजीरे-जमानी में अभी'
मेरे चेहरे से वह पहचान रहा है मुझको
जुस्तजू मेरी उसे है मेरे सानी' में अभी
टूटे आईनों में हैरान हैं शक्लें क्या-क्या
रब्त मिलता नहीं अल्फ़ाजो-मआनी' में अभी
आहटे चुनता हूँ यादों की गुजरगाहों में
ढूंढता हूँ उसे गुमगश्ता' निशानी में अभी
सरे-अफ़लाको-तहे-खाक बिखर आया हूँ
शौक रखता हूँ मगर नवले-मकानीu में अभी
प्यास वनकर कभी चमकूँगा तेरी आँखों में
वह रहा हूँ तेरे दरियाओं के पानी में अभी
1. नश्वर रात 2. गहरी नीद 3. अभी पांव समय की जंजीर के घेरे में हैं
4. तलाश 5. दूसरा 6. संबंध 7. शब्दों और अर्थों 8. रास्तो 9. खोयी हुई
10. आकाशसमूह में और धरती की थाह में 11.एक स्थान से दूसरे स्थान को
जाना
पाकिस्तान में ताजा गजलें 71

नासिर काज़मी गये दिनों का सुराग लेकर किधर मे आया, किधर गया वह अजीव मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वह बस एक मोती-सी छब दिखाकर, बस एक मीठी-सी धुन सुनाकर सितारए - शाम बनके आया, व - रंगे - ख्वावे - सहर गया वह खुशी की रुत हो कि ग़म का मौसम, नजर उसे ढूंढती है हरदम वह वए-गुल' था कि नरमए-जॉ, मेरे तो दिल में उतर गया वह न अव वह यादों का चढता दरिया, न फुरसतों की उदास बरखा यूँ ही जरा-सी कसक है दिल में, जो जख्म गहरा था भर गया वह कुछ अव सँभलने लगी है जॉ भी, बदल चला रंगे-आस्मां भी जो रात भारी थी टल गयी है, जो दिन कड़ा था गुजर गया वह शिकस्ता - पा' राह में खड़ा हूँ, गये दिनो को बुला रहा हूँ जो काफ़िला मेरा हमसफ़र था, मिसाले-गर्दै-सफ़र गया वह हवस की बुनियाद पर न ठहरा किसी भी उम्मीद का घरौदा चली जरा-सी हवा मुखालिफ़, गुवार वनकर बिखर गया वह बस एक मंजिल है बुलबस 2 की, हजार रस्ते है अह ले-दिल के यही तो है फ़र्क मुझमें उसमें, गुजर गया मैं, ठहर गया वह वह मैकदे को जगानेवाला, वह रात की नींद उड़ाने वाला यह आज क्या उसके जी में आयी कि शाम होते ही धर गया वह वह जिसके शाने पे हाथ रखकर सफ़र किया तूने मजिलों का तेरी गली से न जाने क्यों आज सर झुकाये गुजर गया वह 1. पता 2. परिचित 3. सुबह के सपने की तरह 4. फूल की गध 5. आत्मा का गीत 6. आकाश का रंग 7. अपाहिज 8. यात्रा की धूल की तरह 9. लालसा 10. आधार 11.विरोधी 12, लालची 13. दिल का मालिक 14. कधे 72 पाकिस्तान से ताजा गजलें

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नून० मीम० राशिद एक जह रे-ग़म की निगहे - दोस्त भी तिरयाक नहीं जा, तेरे दर्द का दरमाँ दिले-सद - चाक' नहीं उफ़ कयामत ! है उन्हें भी हवसे - राहगुज़ार जिनका अपना कोई सानी तहे - अफ़लाक' नहीं वहरे-सहवा के शिनावर तो बहुत मिलते है अश्के-खू" का मगर, ऐ दिल, कोई पैराक नहीं सागरे - मैं न सही दुर्दे - तहे - जाम कबूल, खाका जो हम - नफ़से - बादा है वह खाक नहीं यह नसीवा है कि हम जिंदा है ऐ तुर्रए - यार अव गिरह" में तेरी शायद कोई पेचाका नहीं वाए गर काफिलए-शौक़ा यही रुक • जाये मंजिले - रह - रवाँ सरहदे - इदराक नही आफ़ताब आज हो किस रिद के दाम से तुलू जव सितारा कोई मौजूद सरे - ताक नहीं मुझको बख्शा गया वह शोला अज़ल में राशिद', वादो - बाराने - हवादिस से जो नमनाक नही 1. दुख का विप 2. प्रेमिका की दृष्टि 3. विप का नाशक 4. इलाज 5. वह दिल जिसके संकड़ों टुकड़े हो गये हो 6. रास्ते की लालसा 7. आकाश 8.मदिरा का समुद्र 9.तैराक 10 खून के आंसू 11. तैराक 12. शराब का प्याला 13. प्याले की तलछट 14. मिट्टी 15. शराब के साथी 16.प्रेमिका के वालों की लट 17. गांठ 18. वल 19. अभिलापा का समूह 20. यात्रियों का पड़ाव 21. ज्ञान की सीमा 22. सूरज आज किस शराबी के दामन से निकलेगा 23. आँख में 24. अनादिकाल 25. दुर्घटनाओं की तेज वारिश से जो गीला नहीं हुआ पाकिस्तान से ताजा गजलें के नीचे 75

दो
फलक से गिरके भी टूटा न शीशए-चीनी
कि रास आ ही गया एहतिमामे-खुदवानी'
रहे-फरार' से उस तक कोई पहुँच न सका
कि वे दिली से था बरतर मकामे वे-दीनी
अभी तो तेशा' भी है और कोहकन भी है
अवस है हुस्न का पिदारे-कोहे-तमकीनी'
वह एक जुरआ जो तेरी निगाह ने बख्शा
तमाम जहरे-हलाहल", तमाम शीरीनी
रहे-तलाश में गुजरी तमाम उम्र मगर
मिलान कुछ भी हवस को व-जुज खजफ़त्रीनी'
वह आये ख्वाब में यूं, वे-सदा चले जैसे
किनारे-कौसरो-तसनीमा', रूहे-गुल-चीनी
है सब फ़सुर्दा दिलों की नजर की नक्शगरी।"
रुखे-निगार को यह आवो-तावो-रगीनी
मैं शेरे-नो का खुदा ही सही मगर राशिद'
मेरी ग़जल भी है उनके हुजूर लातीनी"
1. आकाश 2. कांच की बोतल 3. अभिमान का प्रयोजन 4. पलायन का
रास्ता 5. उदासी 6. नास्तिकता का स्थान 7. कुदाल 8. पहाड काटने वाला
9. सौदर्य की स्थिरता के पहाड़ का अभिमान व्यर्थ है 10. चूंट 11. बहुत ही तीन
और प्रचंड विष 12. मिठास 13. लोभ को ठीकरो के अलावा कुछ भी न मिला
14. स्वर्ग की नहरों (कौसर और तसनीम) के किनारे 15. फूल बीननेवाले की
रूह 16. उदास 17. चित्रकारी 18.वित्र की आकृति की यह चमक-दमक
और सौदर्य 19. समकालीन शायरी 20. रूमियों की प्राचीन भापा
76 पाकिस्तान से ताज्ञा गजलें

परवीन फ़ना सैयद
दश्त' मेरी ही दुहाई देगा
फिर मुझे आवला-पाई देगा
रोशनी रूह तलक आ पहुंची
अब अंधेरे में दिखायी देगा
जर्द पत्तों का धड़कता हुआ दिल
खामुशी में भी सुनायी देगा
कश्फ़ो-आगाहो' के आईने में
अपना वहरूप दिखायी देगा
तोड़कर देख तू आईनए-दिल,
शहर-का-शहर दुहाई देगा
1. जगल 2. पांव मे छाले 3. जो प्रकट हुआ और जिसका ज्ञान हुआ
पाकिस्तान से ताशा गजलें
77

परवीन शाकिर
।
एक
वारिश हुई तो फूलों के तन चाका होगये
मौसम के हाथ भीग के सफ्फ़ाक होगये
बादल को क्या खबर है कि बारिश की चाह में
कितने वलंदो-वाला शजर' खाक होगये
जुगनू को दिन के वक्त परखने की जिद करें
बच्चे हमारे अहद' के चालाक होगये
लहरा रही है बर्फ की चादर हटाके घास
सूरज की शह पे तिनके भी वेवाक होगये
बस्ती में जितने आव-गजीदा थे सबके सव,
दरिया के रुख बदलते ही तैराक होगये
सूरज-दिमाग लोग भी इवलागे-फ़िक्र में
जुल्फे - शवे - फिराक़ के पेचाक' होगये
जब भी गरीबे-शहर से कुछ गुफ्तगू हुई,
लहजे हवाए - शाम के नमनाक होगये
दो
अब कैसी पर्दादारी, खबर आम हो चुकी,
माँ की रिदा तो दिन हुए नीलाम हो चुकी
अब आस्मां से चादरे-शब आये भी तो क्या
बे - चादरी जमीन पे इल्जाम हो चुकी
1. फट गये 2. निष्ठुर 3.ऊंचे-लवे पेड़ 4. काल 5. पानी से डरे हुए
6. सोच की पहुँच 7. बल 8. चादर
78
पाकिस्तान से ताजा गजलें

उजड़े हुए दयार पे फिर क्यों निगाह है
इस किश्त पर तो बारिशे-इकराम' हो चुकी
सूरज भी उसको ढूंढ़के वापस चला गया
अव हम भी घर को लौट चलें, शाम हो चुकी
शमले सँभालते ही रहे मसलहत-पसंद
होना था जिसको प्यार में बदनाम हो चुकी
आँखें हैं और सुव्ह तलक तेरा इंतजार
मश्अल-ब-दस्त' रात तेरे नाम हो चुकी
अब यह कहें कि कीमते-फ़न क्या लगायी है
इतनी सुखननवाजी तो इनआम हो चुकी
कोहे-निदा से भी सुखन उतरे अगर तो क्या
ना-सामेओ में हुरमते-इलहाम° हो चुकी
तीन
दस्ते-शबपर दिखायी क्या देगी
सिलवटें रोशनी में उभरेंगी
घर की दीवारें मेरे जाने पर
अपनी तनहाइयों को सोचेंगी
उँगलियों को तराश दूं फिर भी
आदतन उसका नाम लिखेंगी
रंगो-बू से कहीं पनाह नही
ख्वाहिशें भी कहाँ अमाँ देंगी
एक खुशबू से वच भी जाऊँ अगर
दूसरी नकहतें जकड़ लेंगी
खिड़कियों पर दबीज परदे हों
बारिशें फिर भी दस्तके देंगी
1. सम्मान की वर्षा 2. पगड़ी 3. अच्छा-बुरा समझकर काम करने वाला
4. हाथ में मश्अल उठाये 5. कला का मूल्य 6. कविता की कद्र 7. आवाजों
का पहाड़ 8.जिनमे कला की परस न हो 9. देववाणी का सम्मान 10. फूलो
का रंग और उनकी सुगंध 11. रक्षा 12. सुरक्षा 13. खुशबूएं 14. मोटे
पाकिस्तान से ताजा गजलें 19

चार
चेहरा मेरा था, निगाहें उसकी
खामुशी में भी ये बातें उसकी
मेरे चेहरे पे ग़ज़ल लिखती गयों
शे'र कहती हुई आँखें उसकी
शोख लम्हों का पता देने लगीं
तेज होती हुई साँसें उसकी
ऐसे मौसम भी गुजारे हमने,
सुव्हें जब अपनी थी, शामें उसकी
ध्यान में उसके यह आलम था कभी
आँख महताब की, यादें उसकी
रंगे-जोइंदा' वह आये तो सही
फूल तो फूल हैं, शाखें उसको
फैसला मौजे-हवा ने लिखा !
आँधियाँ मेरी, बहारें उसकी
खुद पे भी खुलती न हो जिसकी नजर
जानता कौन जवानें उसकी
नींद इस सोच से टूटी अक्सर
किस तरह कटती है रातें उसकी
दूर रहकर भी सदा रहती है
मुझको थामे हुए वाँहें उसकी
पाँच
यह ग़नीमत है कि उन आँखों ने पहचाना हमें
कोई तो समझा दयारे-ौर में अपना हमें
वे कि जिनके हाथ में तक़दीरे-फस्ले-गुल रही
दे गये सूखे हुए पत्तों का नज़ाना हमें
1. रग का जिज्ञासु 2. हवा का झोका 3. परदेस 4. वसंत ऋतु का भाग्य
80
पाकिस्तान से ताजा गजले

वस्ला में तेरे खरावे भी लगे घर की तरह और तेरे हिन' में वस्ती भी वीराना हमें सच तुम्हारे सारे कड़वे थे मगर अच्छे लगे फांस बनकर रह गया बस एक अफ़साना हमें अजनवी लोगों में हो तुम और इतनी दूर हो एक उलझन-सी रहा करती है रोजाना हमें सुनते हैं कीमत तुम्हारी लग रही है आजकल सबसे अच्छे दाम किसके है ये बतलाना हमे ताकि उस खुशवस्त ताजिर को मुबारकबाद दे और उसके बाद दिल को भी है समझाना हमें - - ये हाथ चूमे गये फिर भी वे-गुलाव रहे जो रुत भी आयी खिजा के सफ़ोर' ऐसी थी शहादतें मेरे हक में तमाम जाती थी मगर खमोश थे मुंसिफ़', नजीर ऐसी थी कुतरके जाल भी, सैयादा की रजा के वगैर तमाम उम्र न उडती, असीर ऐसी थी वह मेरे पाँव को छूने झुका था जिस लम्हे" जो माँगता उसे देती, अमीर ऐसी थी फिर उसके वाद न देखे विसाला के मौसम जुदाइयों की घड़ी चश्मगीर" ऐसी थी वस इक निगाह मुझे देखता चला जाता उस आदमी की मोहब्बत फ़क़ीर ऐसी थी न सर को फोड़के तू मर सका तो क्या शिकवा' जुनूं-शआर कहाँ मैं भी हीर ऐसी थी 1. मिलन 2. निर्जन स्थान 3. विरह 4. सौभाग्यशाली 5. व्यापारी 6. गुलाब जैसा रंग नहीं आया 7. दूत 8. गवाहियां 9. न्यायकर्ता 10. उदा- हरण 11.शिकारी 12. इच्छा 13.कैदी 14.क्षण 15. धनवान 16. मिलन 17. दृष्टि छीनने वाली 18. शिकायत 19. पागलपन की आदत पाकिस्तान से ताजा गजलें 81

फ़रीद जावेद
गुवार दिल पे बहुत आ गया है, धो लें आज
पुली फजा में कहीं दूर जा के रो ले आज
दयारे-गर। में अब दूर तक है तनहाई
ये अजनवी दरो-दीवार कुछ तो वोलें आज
तमाम उम्र की बेदारियां भी सह लेंगे
मिली है छांव तो बस एक नींद सो लें आज
तरव' का रंग मोहत की लो नहीं देता
तरव' के रंग में कुछ दर्द भी समो लें आज
किसे खबर है कि कल जिंदगी कहाँ ले जाये,
निगाहे - यार, तेरे साथ ही न हो लें आज
1. परदेस 2. जागरण 3. आनद 4. खुशी
82
पाकिस्तान से ताजा गजल

'फ़ारिग़' बुखारी
देखकर उस हसीन पैकर को
नशा-सा आ गया समंदर को
डोलती डगमगाती-सी नाव
पी गयी आके सारे सागर को
खुश्क पेड़ों में जान पड़ने लगी
देखकर रूप के समंदर को
वहर- प्यासे की जुस्तुजू में है
है सिद्फ़' की तलाश गौहर को
कोई तो नीम-वा दरीचों से
देखे इस रतजगे के मंजर को
एक देवी है मुंतजिर 'फारिस',
वा' किये पट, सजाये मदर को
कुछ तलाफ़ी
कितने शिकवे गिले है पहले ही
राह में फ़ासले है पहले ही
निगारे-फ़स्ले-खाँ
हम लुटे काफ़िले है पहले ही
‘और ले जायेगा कहाँ गुलची,
सरे-मक्तल' खुले है पहले ही
I. आकृति 2. समुद्र 3. सीपी 4. मोती 5. अधखुले 6. प्रतीक्षक
7. खोले हुए 8. ऐ बरसते मौसम जैसी प्रेमिका, कुछ हानि की पूर्ति हो
9. कत्ल करने की जगह पर
पाकिस्तान से ताजा गजल
83

अव जयां काटने की रस्म न डाल
कि यहाँ लय सिले हैं पहले ही
इतनी ये-रहम हो न तेज हवा
फूल कम-कम मिले है पहले ही
और किन शे की है तलव 'फारिग'
दर्द के सिलसिले हैं पहले ही
84
पाकिस्तान से ताज़ा गज।

फैज़ अहमद 'फेज'
हसरते-दीद में गुजरी हैं जमाने कब से।
दश्ते-उम्मीद में गर्दा हैं: जमाने कर से
देर मे आँख पे उतरा नहीं अश्कों का अजाव'
अपने जिम्मे है तेरा फर्ज न जाने कब से
किस तरह पाक हो बे-आरजू लम्हों का हिसाब
दर्द आया नहीं दरवार सजाने कब से
सर करो साज कि छेड़ें कोई दिल-सोज गजल
"ढूंढता है दिले-शोरीदा वहाने कब से"
पुर करो जाम कि शायद हो इस लहजा रवाँ
रोक रखा है जो इक तीर कजा' ने कब से
'फैज़' फिर कब किसी मक्तल' में करेंगे आबाद
लव पे वीरां है शहीदों के फ़साने कव से
दो
न अब रकीब, न नासेह', न गमगुसार कोई
तुम आशना थे तो थी आशनाइयां क्या-क्या
जुदा थे हम तो मयस्सर थी कुर्वत कितनी
वहम' हुए -सों पड़ी है जुदाइयाँ क्या-क्या
पहुँचके दर पे तेरे कितने मोतबर ठहरे
अगरचे रह में हुई जग-हँसाइयाँ क्या-क्या
1. देखने की अभिलाषा में समय कव से गुजर रहा है 2. आशा के जगल
धूम रहे हैं 3. पीडा 4. मृत्यु 5. कत्ल करने की
जगह 6. प्रतिद्वद्वी
7. उपदेश देनेवाला 8. सामीप्य 9, मिलन 10. विश्वस्त
पाकिस्तान से ताजा गजले 85

हम ऐसे सादा-दिलों की नियाजमंदी से
बुतों ने की है जहाँ में खुदाइयां क्या-क्या
सितम पे खुश, कभी लुत्फ़ो-करम से रंजीदा',
सिखायी तुमने हमें कज-अदाइयाँ' क्या-क्या
-
तीन
सितम सिंगलायेगा रस्मे-वफ़ा ऐसे नहीं होता
सनम दिखलायेगे राहे-खुदा ऐरो नहीं होता
गिनो सब हमरते जो यूं हुई है तन के मक्तल में
मेरे कातिल, हिसावे-स्रबहा' ऐसे नहीं होता
जहाने-दिल में काम आती हैं तदवीरें न ताजीरें।
यहाँ पैमाने-नस्लीमो-रजा ऐमे नही होता
हर इक शव हर घड़ी गुजरे क़यामत, यूं तो होता है
मगर हर सुव्ह हो रोजे-जजा ऐसे नहीं होता
रवां है नब्जे-दोरा, गदिशों में आस्मां सारे
जो तुम कहते हो सव-कुछ हो चुका, ऐसे नहीं होता
1. आज्ञाकारिता 2. अत्याचार 3. अनुकंपा और कृपा, 4. दुखी 5.2
अदाएँ 6. कत्ल करने की जगह 7. खून की कीमत का हिसाब 8. दिल
दुनिया 9. उपचार 10. दड 1. यहां स्वीकृति और सहमति की प्रतिज्ञा
नहीं होती 12. कयामत के बाद हिसाब का दिन 13. समय की नाड़ी चल र
है, सारे आकाश चक्कर लगा रहे है
86
पाकिस्तान से ताजा गजलें

महबूब खिजां देख दरिया है, किनारे कोर यह मोहब्बत, यह मोहब्बत काम इस जमाने को तरस गरे र आह, यह तश्नगी-ए- हिमा मीठी बातों से बना मग नम आँखों में नंद आर ज़रूम विगड़े तो उन वरना काँटा भी मन न आपकी याद इतनी महरूम न खत जो करना हाँ ज़रा का उद्दल हाय नियन्त्र कभी न यह सुकूने-वे-जिहता, यह कशिश अजीब है तुझमें बंद कर दिया किसने शश-जिहात' को साहिले-खयाल' पर कहकशां की छूट थी एक मौज ले गयी उन तजल्लियात को आँख जब उठे, भर आये, शे'र अब कहा न जाये कैसे भूल जाइये भूलने की देख ऐ मेरी निगाह, तू भी है जहाँ भी है किसने वा-खवर कहा दूसरे की जात को क्या हुई रिवायते', अव है क्यों शिकायतें, इश्क-नामुराद' से हुस्ने-वेसवात को ऐ बहारे-सर-गराँ तू खिजाँ-नसीब है, और हम तरस गये तेरे इल्तिफ़ात को। बात को तीन हम आप क़यामत से गुजर क्यों नही जाते जीने की शिकायत है तो मर क्यों नहीं जाते कतराते हैं, बल खाते है, धवराते है क्यों लोग सर्दी है तो पानी में उतर क्यों नही जाते आँखों में चमक है तो नजर क्यों नहीं आता पलकों पे गुहर है तो बिखर क्यों नहीं जाते अखवार में रोजाना वही शोर है, यानी अपने से ये हालात सँवर क्यों नही जाते यह बात अभी मुझको भी मालूम नहीं है पत्थर इधर आते है, उधर क्यों नही जाते 1. अकारण शाति 2. छ. दिशाएँ 3. कल्पना का तट 4. आकाश-गगा 5. रोशनियां 6. किसी के मुंह से सुनी हुई बातें ज्यो की त्यो किसी से कहना 7. अभागा प्रेम 8. नश्वर रूप १.रष्ट वसंत ऋतु 10.जिस के भाग्य में पतझड़ हो 11. कृपा 88 पाकिस्तान से ताजा गजलें

तेरी ही तरह अब ये तेरे हिज़ के दिन भी
जाते नजर आते है, मगर क्यों नहीं जाते
अव याद कभी आये तो आईने पूछो
'महबूब खिजाँ' शाम को घर क्यों नहीं जाते
हर बात यहाँ वात बढ़ाने के लिए है
यह उम्र जो धोखा है तो खाने के लिए है
यह दामने-हसरत' है वही स्वावे-गुरेजा
जो अपने लिए है न जमाने के लिए है
उतरे हुए चेहरे में शिकायत है किसी की
रूठी हुई रंगत है मनाने के लिए है
ग़ाफ़िल तेरी आँखों का मुक़द्दर है अँधेरा,
यह फ़र्श तो राहों में बिछाने के लिए है
घवरा न सितम से, न करम से, न अदा से
हर मोड़ यहाँ राह दिखाने के लिए है
1. अभिलापा का आंचल 2. भागकर जाने वाला स्वप्न
पाकिस्तान से तावा गजलें 89

यह सुपून- तुझमें बंद नाहिने गया एक मौज आँप जय उठे देग ऐ मेरी किगने बाम. गया हुई रिवा इश्के-गामुराद ऐ बहारे-गर: और हम गरम हम आ TTI जोको शिशाम पनगरे, मगर गर्दी को पानी आगों में गमर पोरगी अगवार में सेना.

दिल के मुतालवाता लकीरों में बँट गये
जैसे कि कोई फर्क नहीं अरजो - तूलः मैं
जो कुछ या उम्र भर का उसे भी लुटा दिया
अब एक उम्र और तगेगी हुसूल' में
तीन
वे-हिस' हूँ आईने की तरह खुद निगाह हूँ
आवाद बस्तियों ही का हाले - तवाह
अंधा नहीं हूँ, लोग जो कहते है ठीक है
मैं एक कत्ले - आम का ऐनी गवाह हूँ
पहले भी सादगी से गुजरता था मेरा वक्त
माजूल' हो गया हूँ तो क्या, बादशाह हूँ
रखो अजायबात' में ये मिट्टियों के ढेर
शह रे - सुसन की आखिरी आरामगाह हूँ
सहरा की दोपहर में हूँ बरगद का एक पेड़
ठहरा हुआ सफ़र हूँ मुसाफिर की राह हूँ
सब कुछ लुटा दिया है तभी मैं हूँ बे-निशाँ
दिल के मुआमलात में आलमपनाह हूँ
1. मांगे 2. चौडाई और लंबाई 3. प्राप्ति 4. चेतनाशून्य 5. ऐसा गवाह
जिसने आनी आँख से देखा हो 6.जिसे पद से हटा दिया गया हो 7. विचित्रताएँ
पाकिस्तान से ताजा गज़ले
91

माजिद-उल-बाक़री
एक
मुझी से पूछ रहा था मेरा पता कोई
बुतों के शहर में मौजूद था खुदा कोई
ख मोशियों को चटानों को तोड़ने के लिए
किसी के पास नहीं तीशए-सदा कोई
समझ सका न मगर कोई पत्थरों की जवाँ,
हर एक लम्हा लगा वोलता हुआ कोई
इक आँसुओं का समंदर था जलपरी का लिबास
मिला तो ऐसे मिला पैकरे - वफ़ा कोई
हर एक जेहन में अपने ही, बंद है 'माजिद',
खुद अपने खोल से बाहर है रास्ता कोई
दो
चेहरे छुपे हुए है वयानों की धूल में,
कांटे नहीं हैं फूल लगे हैं बवूल में
मौजे - हवा में आग न पानी का डर हमें
तब्दीलियाँ अवस हैं हमारे उसूल में
शाखों से हमने बांधे है वे-फसल मोजिजे',
सूंघो तो नकहते भी हैं कागज के फूल में
लफ़्जों की इक पतंग थी बढ़कर निकल गयी,
किस बेवफ़ा को दिल से लगाया था भूल में
4
1. आवाज की कुदाल 2. भक्ति की आकृति 3. हमने डालियों में वे मौसम
चमत्वार बाँधे हैं 4. पुशवएँ
90 पाकिस्तान से ताजा गजलें

दिल के मुतालबाता लकीरों में बँट गये
जैसे कि कोई फर्क नहीं अरजो - तूल में
जो कुछ था उम्र भर का उसे भी लुटा दिया
अब एक उम्र और लगेगी हुसूल' में
तीन
वे-हिस हूँ आईने की तरह खुद निगाह
आवाद बस्तियों ही का हाले - तवाह हूँ
अंधा नहीं हूँ, लोग जो कहते हैं ठीक है
मैं एक करले - आम का ऐनी गवाह हूँ
पहले भी सादगी से गुज़रता था मेरा वक्त
माजूल* हो गया हूँ तो क्या, वादशाह हूँ
रखो अजायवात' में ये मिट्टियों के ढेर
शह रे - सुखन की आखिरी आरामगाह हूँ
सहरा की दोपहर में हूँ वरगद का एक पेड़
ठहरा हुआ सफ़र हूँ मुसाफ़िर की राह हूँ
सब कुछ लुटा दिया है तभी मैं हूँ बे-निशाँ
दिल के मुआमलात में आलमपनाह हूँ
1. मांगें 2. चौडाई और लंबाई 3. प्राप्ति 4. चेतनाशून्य 5. ऐसा गवाह
नसने आनी आँख से देखा हो 6.जिसे पद से हटा दिया गया हो 7.विचित्रताएं
पाकिस्तान से ताजा गजलें
91

मुनीर नियाजी
एक
कैसी - कैसी चे - समर यादों के हालों में रहे
हम भी इतनी जिंदगी कैसे बवालों में रहे
इक नजरवंदी का आलम थी नगर की जिंदगी
कैद में रहते थे जब तक शहरवालों में रहे
हम अगर होते तो मिलते तुझसे भी जाने-जहाँ,
ख्वाब थे नापैद' दुनिया के मलालों में रहे
वह चमकना वर्क का दश्तो-दरो-दीवार पर,
सारे मंज़र एक पल उसके उजालों में रहे
क्या थी वे बातें जो कहना चाहते थे वक्ते-मर्ग,
आखिरी दम यार अपने किन खयालों में रहे
दूर तक मस्कन थे वन उनकी सदाओं के 'मुनीर'
देर तक उन देवियों के ग़म शिवालों में रहे
दो
वेचैन बहुत फिरना, घबराये हुए रहना
इक आग-सी जजवोs की दहकाये हुए रहना
छलकाये हुए फिरना खुशबू लवे - लाली की
इक बाग़-सा साथ अपने महकाये हुए रहना
उस हुस्न का शेवा' है जब इश्क नज़र आये
परदे में चले जाना, शरमाये हुए रहना
1. लुप्त 2. विजली 3. मरते समय 4. घर 5. भावनाओं 6. लाल हों
7.ढग
92
पाकिस्तान से ताजा गजलें

इक शाम-सी कर रखना काजल के करिश्मे से
इक चांद - सा आँखों में चमकाये हुए रहना
आदत ही बना ली है तुमने तो 'मुनीर' अपनी
जिम शहर में भी रहना उकताये हुए रहना
तीन
ग़म की बारिश ने भी तेरे नक्श को धोया नहीं
तूने मुझको खो दिया, मैंने तुझे खोया नहीं
नीद का हल्का गुलाबी-सा खुमार आँखों में था
यूं लगा जैसे वह शव को देर तक सोया नही
हर तरफ़ दीवारो-दर और उनमें आँखों के हुजूम
कह सके जो दिल की हालत वो लये - गोया नहीं
जुर्म आदम ने किया और नस्ले - आदम को सजा
काटता हूँ जिंदगी भर, मैंने जो बोया नहीं
जानता हूँ एक ऐसे शख्स को मैं भी 'मुनीर'
ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं
अश्के-रवाँ की नहर है और हम है दोस्तो
उस वे-वफ़ा का शहर है और हम है दोस्तो
ये अजनवी - सी मज़िलें और रफ़्तगां की याद
तनहाइयों का जहर है और हम है दोस्तो
लायी है अब उड़ाके गये मौसमों की बास
वरखा की रुत का कहर है और हम है दोस्तो
फिरते हैं मिस्ले - मौजे - हवा शहर - शहर में
आवारगी की लहर है और हम है दोस्तो
शामे - अलम ढली तो चली दर्द की हवा
रातों का पिछला पहर है और हम है दोस्तो
1. बोलनेवाला होंट
पाकिस्तान से ताजा गजलें 93

पांच
दश्त बाराँ। की हवा से फिर हरा-सा हो गया
मैं फ़क़त स्खुशबू से उसकी ताज़ादम-सा हो गया
उसके होने से हुआ पैदा खयाले - जा - फ़िजा',
जैसे इक मुर्दा जमी में वाग़ पैदा हो गया
फिर हवाए-इश्क़ से आशुफ़्तगी' खूबा में है
इन दिनों में हुस्न भी आजार जैसा हो गया
है कहीं महसूर' शायद वह हकीक़त अहद की
जिसका रस्ता देखते इतना ज़माना हो गया
गमरुवा है हाल कहना दिल का उस बुत से 'मुनीर',
जिसके गम में अपने दिल का हाल ऐसा हो गया
1. वर्षा 2. केवल 3. प्राणवर्द्धक विचार 4. व्यग्रता 5. सुंदरियो 6. रोग,
विपदा 7. घिरी हुई 8. यथार्थता १. समय, काल, युग
94 पाकिस्तान से ताजा गजलें

कहान
रोगनी मम्मा की तरफोर' कर भी जायेगी
तीरगी' म शहर को तादीर फर से जायेगी
प्रतिकाम नाम पर तं होगा रगत सफर,
गुमरही एजाज से तापीर कर दी जाएगी।
एक कमरे की घुटन महफूज रगने के लिए
सारी गलियों को या जंगीर पर दी जायेगी
जागती थांगों में भी हम स्वाव देशमे मगर
स्वाहिले - ताबीर - तापीर बर दी जागी
अपने सालो-यदा की असलियत न मानेका पाँ
आईने के जुर्म की ताहीर करो संगी
शे
अपनी नुम' को ताया-नवाना है. मा
तू साफ है तो साफ की गन्ना रे प्रा
मूरज के साथ तू भी बंधेरी में गुम नही
शब के सफर में पानी मनानामा
साहिल पे सीप, मौत में मोहर' नाम कर
चेहरे पे माग, आग में शंताई आ

ए GI7.
तारीक जंगलों से मेरे भाई लेके आ
'यूसुफ' हुनर न खो किसी को अजीज़ में
अपने उजाड़ घर में भी रानाई लेके आ
तीन
आगही, वहम के साये में लिपटकर आयी
धूप को लहर कहां शहर के अंदर आयी
दर-व-दर झांक रही है कोई दस्तक लेकिन
आशना चाप किसी घर से न बाहर आयो
कोई एजाज़ नहीं जीस्त का हासिल, न सही
इक तेरी चाह की तोहमत तो मयस्सर आयो
तेरी तख लीक़' में खुद को भी तराशा मैंने
मेरी सूरत भी खदो-खाल बदलकर आयी
राह निकली तो तेरे घर की तरफ़ ही निकली
बात आयी तो तेरी बात ही लव पर आयी
दावरे-हश को अपनी ही पड़ी है 'यूसुफ़'
खल्का भी संग-व - दामा सरे - महशर आयी
चार
आँख चेहरों की सदाक़त से मुकरती जाये,
उम्र सायों के तअक्वा में गुजरती जाये
जर्दा आँगन के सुलगते हुए सन्नाटे में
वे-नवा दर्द की लै और उभरती जाये
फिर मुंडेरों पे शफ़क़ा फूल रही है शायद
फिर सरे -करियए - जाँ राख विखरती जाये
1.अंधेरे 2.मिस्र के प्राचीन वादशाह अजीज का महल 3. सुंदरता 4.
5. सम्मान 6. जीवन 7. मृजन 8. गाल और तिल 9. ईश्वर 10. कर
के दिन जनता भी अपनी गोदो में पत्थर भरकर लायी 11. सच्चाई 12.
करना 13. पीला 14. वेआवाज 15. ऊपा 16.जीवन के गांव के दिन
96 पाकिस्तान से ताजा गजलें

या मेरे मनमा से भी गुरं मगर,
जारी गग मेरी मांगों में जगरती जागे
किमानाशा नोद का नामगुफ'
IFE- गोप में मरणोना
1. दृष्टि घे. पाग 2. यसकार निमग जानेवाला 3. स्वज की याद
पाकिस्तान से ताजा गजलें
97

रजी अस्तर शौक
एक
ये पेड़ हैं कुछ दिन वह शजर है कोई दिन और
अव छांव सरे-राहगुजर है कोई दिन और
जिनको मेरे अनफ़ास' ने ली दी है वे शम्एँ
जलती रहें, अब मेरा सफ़र है कोई दिन और
ता-देर नही उसकी रफ़ाक़त' का नशा भी
यह ख्याव भी ऐ दीदा-ए-तर है कोई दिन और
बिछड़ा है तो अब उसका सफर है वह जिधर जाये
है भी तो हमें उसकी खबर है कोई दिन और
वह आग लगेगी
कि भरा शहर जलेगा
लोगो, जो यही रक्से-शरर है कोई दिन और
तुम देखना यह पेड़ भी कट जायेगा एक दिन
हम है तो अभी नख्ले-हुनर है कोई दिन और
दो
सलामत आये है फिर उसके कूचओ-दर से
न कोई संग ही आया न फूल ही वरसे
मैं आगही के अजव मंसवों पे फाइज'
कि आप अपना ही मुनकिर हूँ अपने अंदर से
न जाने किसको यह एजाजे-फ़न मिला होगा
तमाम शहर में विखरे हुए है पत्थर से
हूँ
1. पेड 2. सांसों 3. साथ, दोस्ती 4. भीगी आंख 5.चिंगारी का नाच
6. कला का पेड़ 7. पहुंच गया हूँ 8. इंकार करनेवाला 9. कला का सम्मान
98
पाकिस्तान से ताजा गजलें

अब इसके मोजो-तलातुमा में डूबने से न डर
गुहर भी तुझको मिले थे इसी समंदर से
यह एहतेमामे-चिराग़ां भी किस कमाल का है
दिये जले हैं तो में बुझ गया हूँ अंदर से
अजब समोथा कि अवतक हैं जरूम-जस्म आंखें
मैं कोर-नश्म भला, आगही के मंजर से'
तीन
यह कौन डूब गया और उभर गया मुझमें
यह कौन साये की सूरत गुज़र गया मुझमें
यह किसके सोग में शोरोदा-हाल: फिरता हूँ
वह कौन शरस था ऐसा कि मर गया मुझमें
अजव हवाए-बहारी ने चारासाजी की
वह जस्म जिसको न भरना था, भर गया मुझमें
वह आदमी कि जो पत्थर था, जी रहा है अभी
जो आईना था वह कब का बिखर गया मुझमें
विसाल क्या कि वह जब भी करीव से गुजरा
तो यूं लगा कि कोई रक्स' कर गया मुझमें
वह साथ था तो अजब धूप-छांय रहती थी
वस अब तो एक ही मौसम ठहर गया मुझमें
1. लहर और बाढ 2. मोती
3.दीप जलाने का प्रवध
4.मैं अंधा ही
अच्छा था कि ज्ञान के ये दृश्य तो न देख पाता 5. दुर्दशाग्रस्त 6. मिलन 7. नाच
पाकिस्तान से ताजा गजलें 99

डॉक्टर वजीर आगा
एक
धूप के साथ गया साथ निभानेवाला
अब कहाँ आयेगा वह लौटके आनेवाला
रेत पर छोड गया नक्श हजारों अपने
किसी पागल की तरह नक्श मिटानेवाला
सब्ज शाखे कभी ऐसे तो नही चीखती है
कौन आया है ? परिंदों को डरानेवाला
आरिजे-शाम की सुर्जी ने किया फ़ाश उसे
परदए-अव में था आग लगानेवाला
सफरे-शब का तकाजा है मेरे साथ रहो
दश्त पुर-हौल है', तूफ़ान है आनेवाला
मुझको दर-परदा सुनाता रहा किस्सा अपना
अगले वक्तों की हिकायात' सुनानेवाला
शबनमी घास, घने फूल, लरजती किरने
कौन आया है खजानों को लुटानेवाला
अब तो आराम करें सोचती आँखें मेरी,
रात का आखिरी तारा भी है जानेवाला
दो
सितम हवा का अगर तेरे तन को रास नही
कहाँ से लाऊँ वह झोंका जो मेरे पास नहीं
1. डालियाँ 2. सध्या के गाल २. लाली 4. प्रकट
5.घटा की ओट
6. रात की यात्रा 7. जगल भयकर है 8. छुपकर 9. कथाएँ
100
पाकिस्तान से ताजा गजलें

पिघल चुका हूँ तभाजत में आफताब की मैं
मेरा वजूद भी अब मेरे आस-पास नहीं
मेरे नसीव में कब थी बरहनगी अपनी
मिली वह मुझको तमन्ना कि वेलिबास नहीं
किधर से उतरे कहाँ आके तुझसे मिल जाये
अभी नदी के चलन से तू रूशनास नही
खुला पड़ा है समंदर किताव की सूरत
वही पढे इसे आकर जो ना-शनास नहीं
लहू के साथ गयी तन-बदन की सब चहकार
चुभन सबा में नहीं है कली में वास नहीं
तीन
लाजिम कहाँ कि सारा जहाँ खुश-लिवास हो
मेला बदन पहनके न इतना उदास हो
इतना न पास आ कि तुझे ढूंढते फिरें
इतना न दूर जा कि हमा-वक्त' पास हो
इक जूए-वे-करार हो क्यों दिलकशी तेरी
क्यों इतनी तश्ना-लब मेरी आँखों की प्यास हो
पहना दे चाँदनी को कथा10 अपने जिस्म की
उसका बदन भी तेरी तरह वे-लिवास" हो
रंगों की कत्लगह में कभी तू भी आके देख
शायद कि रंगे-जख्म कोई तुझको रास हो
मैं भी हवाए-सुव्ह की सूरत फिरूँ सदा
शामिल गुलों की वास में गर तेरी वास हो
आये वह दिन कि किश्ते-फ़लक हो हरी-भरी,
बंजर जमी पे मीलों तलक सब्ज घास हो
1. गर्मी 2. परिचित 3. अपरिचित 4. चवहाहट 5. आवश्यक 6. अच्छे
वस्त्र पहने हो 7. हर समय 8. तेरी सुदरता इक व्याकुल नदी जैसो क्यों हो
9. जिसके होठ प्यास के मारे भूप गये हों 10. वोमा 11. निर्वस्त्र
पाकिस्तान से ताजा गजलें
101

शव जलाली
एक
जाती है धूप उजले परों को समेटके
जख्मों को अब गिनूंगा मैं बिस्तर पे लेटके
मैं हाथ की लकीरें मिटाने पे हूँ वजिद
गो जानता हूँ नक्श नहीं ये सलेट के
दुनिया को कुछ खवर नहीं, क्या हादसा हुआ
फेंका था उसने संग: गुलों में लपेटके
फव्वारे की तरह न उगल दे हर एक बात
कम-कम वह वोलते है जो गहरे है पेट के
इक नुक़रई खनक के सिवा क्या मिला 'शकेव'
टुकड़े यह मुझसे कहते हैं टूटी पलेट के
दो
आके पत्थर तो मेरे सहन में दो-चार गिरे
जितने उस पेड़ के फल थे, पसे-दीवार गिरे
ऐसी दहशत थी फजाओं में खुले पानी की
आँख झपकी भी नही, हाथ से पतवार गिरे
मुझे गिरना है तो मैं अपने ही क़दमों में गिरूँ
जिस तरह सायए-दीवार पे दीवार गिरे
तीरगी छोड़ गये दिल में उजाले के खतूत
ये सितारे मेरे घर टूटके वेकार गिरे
क्या हवा हाथ में तलवार लिये फिरती थी
क्यों मुझे ढाल बनाने को ये छतनार गिरे
1. पत्थर 2. चांदी की
102 पाकिस्तान से ताजा गजलें

देखकर अपने दरो-वाम लरज उठता हूँ
मेरे हमसाये में जब भी कोई दीवार गिरे
वक्त की डोर खुदा जाने कहाँ से टूटे
किस घड़ी सर पे यह लटकी हुई तलवार गिरे
हमसे टकरा गयी खुद बढ़के अंधेरे की चटान
हम संभलकर जो बहुत चलते थे नाचार गिरे
क्या कहूँ दीदए-तर, यह तो मेरा चेहरा है,
संग कट जाते हैं, वारिश की जहाँ धार गिरे
हाथ आया नहीं कुछ रात की दलदल के सिवा
हाय किस मोड़ पे रुवावों के परस्तार गिरे
वह तजल्लीकी शुआएँ-थों कि जलते हुए तीर
माईने टूट गये आईना वरदार गिरे
देखते क्यों हो 'शकेव' इतनी बुलंदी की तरफ़,
न उठाया करो सर को कि यह दस्तार गिरे
तीन
वही झुकी हुई बेलें वही दरीचा था
मगर वह फूल-सा चेहरा नज़र न आता था
मैं लौट आया हूँ खामोशियों के सहरा से
वहाँ भी तेरी सदा का गुवार फैला था
करीव तर रहा था वतों का एक जोड़ा
मैं आवजू के किनारे उदास बैठा था
शवे-सफ़र थी कवा तीरगी की पहने हुए
कहीं-कहीं पे कोई रोशनी का धब्बा था
वनी नहीं जो कहीं पर कली की तुरवत थी
सुना नहीं जो किसी ने हवा का नौहा था
ये आड़ी-तिरछी लकीरें वना गया है कौन
मैं क्या कहूँ मेरे दिल का वरक़ तो सादा था
1. रोशनी 2. किरने ३. नदी 4. यात्रा की रात 5. कव 6. मरनेवाले
के लिए रोना-पीटना
पाकिस्तान से ताज़ा ग़ज़लें 103

मैं स्वाकदां से निकलकर भी क्या हुआ आजाद हर इक तरफ़ से मुझे आस्माँ ने घेरा था उतर गया तेरे दिल में तो शे'र कहलाया, मैं अपनी गूंज था और गुंबदों में रहता था उधर से बारहा गुजरा मगर खबर न हुई कि जेरे-संग खुनक पानियों का चश्मा था वह उसका अक्से-बदनः था कि चांदनी का कवल वह नीली झील थी या आस्मां का टुकड़ा था मैं साहिलों पे उतरकर 'शकेव' क्या लेता अज़ल से नाम मेरा पानियों पे लिखा था चार आता है हर चढाई के बाद इक उतार भी पस्ती' से हमकनार मिले कोहसार' भी आखिर को थकके बैठ गयी इक मकाम पर, कुछ दूर मेरे साथ चली रहगुजार भी दिल क्यों धड़कने लगता है उभरे जो कोई चाप अव तो नही किसी का मुझे इंतजार भी जब भी सुकूते-शाम में आया तेरा खयाल कुछ देर को ठहर-सा गया आवशार भी कुछ हो गया है धूप से खाकिस्तरी' वदन कुछ जम गया है राह का मुझ पर गुबार भी इस फासलो के दश्त में रहवर वही बने जिसकी निगाह देख ले सदियों के पार भी ऐ दोस्त, पहले ० का नशा अजीव था मैं सुन सका न अपने बदन की पुकार भी 1. पत्थर के नीचे 2. शरीर का प्रतिबिंध 3. नीचाई 4. पर्वतमाला 5. शाम का सन्नाटा 6. झरना 7. मटमैला 8.जगल 9. पथ-प्रदर्शक 10.निकटता 104 पाकिस्तान से ताजा गजलें

रस्ता भी वापसी का कहीं बन में खो गया
ओझल हुई निगाह से हिरनों की डार भी
क्यों रो रहे हो राह के अंधे चिराग को
क्या बुझ गयो हवा से लहू का शरार भी
कुछ अक्ल भी है वाइसे-तौकीर, ऐ 'शकेव'
कुछ आ गये है बालों में चाँदी के तार भी
पांच
लौ दे उठे, वह हर्फ़-तलव सोच रहे है
क्या लिखिये, सरे-दामने-शव' सोच रहे है
क्या जानिये मंजिल है कहाँ, जाते हैं किम सम्त'
भटकी हुई इस भीड में सब सोच रहे है
भीगी हुई एक शाम की दहलीज पे बैठे
हम दिल के सुलगने का सवव सोच रहे हैं
टूटे हुए पत्तों से दरख्तों का तअल्लुक
हम दूर खडे कुजे-तरव सोच रहे है
इस लहर के पीछे भी रवाँ हैं नयी लहरे
पहले नहीं सोचा था, जो अब सोच रहे है
हम उभरे भी, डूवे भी स्याही के भँवर में,
हम सोये नहीं, शव-हमा-शव' सोच रहे है
उतरों अजीव रोशनियाँ रात ख्वाब में,
क्या-क्या न अक्स तैर रहे थे सराब में
कब से है एक हर्फ पे नजरे जमी हुई
वह पढ़ रहा हूँ जो नही लिया किताब में
1. प्रतिष्ठा का कारण 2. याचना की बात 3. गन के अतिम भाग में
5. संबंध 6. आनद का एपात 7. रात-रात भर 8 मृगतृष्णा
4. दिशा
पानिम्नान में ताजा गजले
105

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शहजाद अहमद
एक
यह सोचकर कि तेरी जवी पर न बल पड़े
वस दूर ही से देख लिया और चल पड़े
दिल में फिर इक कसक-सी उठी मुद्दतों के बाद
इक उम्र के रुके हुए आंसू निकल पड़े
सीने में वे-करार' हैं मुर्दा मोहब्बतें
मुमकिन है यह चिराग़ कभी खुद ही जल पड़े
ऐ दिल, तुझे बदलती हुई रुत से क्या मिला
पौदों में फूल और दरख्तों में फल पड़े
अब किस के इंतजार में जागें तमाम शव'
वह साथ हो तो नींद में कैसे खलल पड़े
सूरज-सी उसकी तवा है शोला-सा उसका रंग
छू जाये उस वदन को तो पानी उबल पड़े
'शहज़ाद' दिल को जब्त' का यारा नहीं रहा
निकला जो माहताब समंदर उछल पड़े
-
लौट आयीं तेरे लम्स से महकी हुई शामें
फिर आग लगा दी तेरी साँसों ने हवा में
रक्सा हैं इस लय पे सितारे हों कि शबनम,
क्या सहर है इस दिल के धड़कने की सदा में
इक नूर" का सैलाव" है बंद आँखों के अंदर,
लिपटे हुए चेहरे है अंधेरे की रिदा में
1. माथा 2. बहुत समय 3.ध्याकुल 4. रात 5. बाधा 6,स्वभाव
7. सहन 8. चांद 9.स्पर्श 10. नाच रहे है 11. प्रकाश 12. बाढ़ 13. चादर
पाकिस्तान से ताजा गजलें 107

(6
पानी नहीं कि अपने ही चेहरे को देख लू
मंज़र ज़मीं के ढूंढता हूँ माहताव में
फिर तीरगी के ख्वाव से चौका है रास्ता
फिर रोशनी-सी दौड़ गयी है सहाव' में
कब तक रहेगा रूह पे पराहने-बदन
कब तक हवा असीर' रहेगी हवाब में
यूं आईना-व-दस्त मिली परवतों की वर्फ
शरमाके धूप लौट गयी आफ़ताब में
जीने के साथ मौत का डर है लगा हुआ
खुश्की दिखायी दी है समंदर को ख्वाब में
गुजरी है बार-वार मेरे सर से मौजे-खुश्क'
उभरा हूँ डूब-डूबके तस्वीरे - आव में
एक याद है कि छीन रही है लबों से जाम
एक अक्स है कि कांप रहा है शराव में
चूमा है मेरा नाम लबे-सुर्ख' ने 'शकेव'
या फूल रख दिया है किसी ने किताव में
1. दृश्य 2. चांद 3. अंधेरा 4. घटा 5. आत्मा 6. शरीर का वस्त्र
8. बुलबुला 9. हाय में दर्पण लिये 10. मूरज 11.मूखी लहर
12. पानी का चित्र 13. लाल होंट
7.वंदी
106 पाकिस्तान से ताजा गजलें

शहजाद अहमद
एक
यह सोचकर कि तेरी जवी पर न बल पड़े
बस दूर ही से देख लिया और चल पड़े
दिल में फिर इक कसक-सी उठी मुद्दतों के बाद
इक उम्र के रुके हुए आँसू निकल पड़े
सीने में वे-करार हैं मुर्दा मोहब्बतें
मुमकिन है यह चिराग़ कभी खुद ही जल पड़े
ऐ दिल, तुझे वदलती हुई रुत से क्या मिला
पौदों में फूल और दरख्तों में फल पड़े
अब किस के इंतजार में जागें तमाम शब'
वह साथ हो तो नींद में कैसे खलल पड़े
सूरज-सी उसकी तवा है शोला-सा उसका रंग
छू जाये उस वदन को तो पानी उबल पड़े
'शहजाद' दिल को जब्त' का यारा नही रहा
निकला, जो माहताब समंदर उछल पड़े
दो
लौट आयी तेरे लम्स' से महकी हुई शामें
फिर आग लगा दी तेरी सांसों ने हवा में
रक्सा हैं। इस लय पे सितारे हों कि शबनम,
क्या सहर है इस दिल के धड़कने की सदा में
इक नूर" का सैलाव है बंद आँखों के अंदर,
लिपटे हुए चेहरे है अंधेरे की रिदा' में
1. माथा 2. बहुत समय 3. व्याकुल 4. रात 5.बाधा 6,स्वभाव
7. सहन 8. चांद 9.स्पर्श 10. नाच रहे हैं 11. प्रकाश 12.बाढ 13. चादर
पाकिस्तान से ताजा गजलें 107

निग आगागादिल मोजमी पर गुन-गेमा निमान- TIL में ग गोरा उसमें नीर न आयी, ग. गोर का बंटा है गाने की गुफा में गलियोनीमागिने-गुनिम्मा कोजाण, पार पल मरगना ? रिमी और मा में माग उठा दिन में पो. गांगामा बागी परम "माद' गिनी फजा में तीन जब आसमान निकषातो गंगनी मिा जलारे हमने पग्दि पात्रा में लोग गि नमाम उस रसी जैरे-गायगुनासाने न उगने वान बदायीन हमने होट मिये गवर नहीं कि गला किम जगह पे ही मौजूद जमीन पर भी कदम फंक-चपर रप्रिये सफ़र भी दूर का है और कहीं नहीं जाना अब निदा इसे नाहिये कि पलहा कहिये हया उठा न सको यो अत्रका 'शहजाद' जगी के अश्क' भी आसिर समंदरों ने पिये चार आज तक उसकी मोहब्बत का नशा तारी है फूल बाकी नही सुशबू का मफ़र जारी है सहर लगता है पसीने में नहाया हुआ जिस्म यह अजय ख्वाब में डूबी हुई वेदारी है 1. पदतल के चिह्न 2. याग पर उपकार करने वाला 3. सूरज 4. होठों में 5.क्षितिज 6. घटा, बादल 7. आंसू 108 पाकिस्तान से ताजा गजले आज का फूल तेरी कोय से जाहिर होगा शासे-दिल सुश्क न हो अबके तेरी बारी है ध्यान भी उगया है मिलते भी नहीं है उससे, जिस्म मे वर है, साये से वफादारी है दिल को तनहाई का अहसास भी वाकी न रहा वह भी धुंदला गयी जो शक्ल बहुत प्यारी है इस तगो-तारा' में टूटे है सितारे कितने आस्मां जीत मका है न जमी हारी है कोई आया है जरा आँख तो योलो 'शहजाद' अभी जागे थे अभी सोने की तैयारी है पांच सितारा अपनी भी ताबिंदगी न देख सका वो धुंद थी कि यह मंजर कोई न देख सका तलाश करते हुए उँगलियाँ जला डाली वह तीरगी थी कि मैं शम्अ भी न देख सका मिला था शाम मुझे इक बुझा हुआ सूरज मैं उसके बाद कभी रोशनी न देख सका जो रन्त बाक़ी थे सव कता कर लिये उसने वह मेहरवा' मेरी वेचारगी न देख सका निगाह वैसे तो वामे-फ़लक को छू आयी, मैं जिस जमीं पे खड़ा था वही न देख सका वही है आईनाखाना' वही है तस्वीरें मैं उम्र भर कोई सूरत नयी न देख सका में वह दीदावर हुआ मशहूर जो अपनी नाक से आगे कभी न देख सका तमाम शहर 1. दौड़-धूप 2. चमक 3. दृश्य 4. अँधेरा 5. संबंध 6. विच्छेद 7. दयालु 8. आकाश की छत 9. शीशाघर 10. पारखी पाकिस्तान से ताजा गजलें 109

बगर ने गारमें. परपर गांपा निये नकिन
रगों में बनी निगी न पा सका
ल्याएं रंग यामनी है किग सरह 'जाद',
दिन' दंग रे मामी ग ग गका
1. पेड़
110 पाकिस्तान से ताजा गजलें

शायर लखनवी
दूर तक
कुछ अजब जिंदगी के मंजर हैं
रेत के समंदर हैं
मेरी ही रोशनी का पैकर है
चंद शक्लें जो दिल के अंदर हैं
दिल जो ठहरे तो कुछ सुराग मिले
कर्ज किस-किस नज़र के हम पर है
है बड़ी चीज़ नाजुकी दिल की
किससे कहिये कि लोग पत्थर है
खुल गयी आँख तो खुला हम पर
ख्वाब बेदारियों से बेहतर हैं।
खामुशी खुद है एक गहराई
चुप है जो लोग वे समंदर है
जब से देखा है इक नजर उनको
खुद को भी हम कहाँ मयस्सर हैं
ज़रूम पर क्या गुजर गयी 'शायर'
रेजा-रेजा तमाम निश्तर है"
अपना दर्द समझने वाले शहर के अंदर कितने हैं
वीरानी खुद बोल रही है वस्ती में घर कितने हैं
1. आकृति 2. निशान 3. सपने जागने से ज्यादा अच्छे है 4. उपलब्ध,
प्राप्त 5. धीरफाड का आला भी सारा टूट कर बिखर गया है
पारिस्तान से ताजा गजलें 111

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सरशार सिद्दीक़ी
इसी काविश' में उम्र हो गयी सर्फ़
लिख सकूँ अपनी सोच हर्फ़-व-हर्फ़
लपज बनकर छलक पड़े जज्वे
मैंने देखा है अपने शौक का जर्फ
मैंने उसको वफा-शिआर' कहा
कितने वे-आवरू हुए ये हर्फ
चुपके-चुपके सुलग रहा है वुजूद
धीरे-धीरे पिघल रही है वर्फ
कितनी बाते है मावरा-ए-सुखन"
कितने ना-दीदा हर्फ़ है पसे-हर्फ
दो
झलक दिखा, कि तेरे वस्ल की नवीद मिले
गुनाहगार को कुछ तो सवावे-दीद मिले
किसी ने जान न बख्शी, फ़िराक़ हो कि विसाल
वफा की राह में सब मरहले शदीद मिले
वस इक झलक पे कनाअत नहीं मेरा ईमाँ
हरीसे-जल्वा को कुछ गैब से मजोद" मिले
1. जिज्ञासा 2. भावनाएँ 3. गभीरता 4. जिसका काम वफा करना है
5. अस्तित्व 6. बात से परे 7. अक्षर के पीछे कितने अनदेखे अक्षर है 8. शुभ
सूचना 9. देखने का पुण्य
10. कठिन 11. थोडी-सी चीज पर सतोप
12. दर्शन का लालची 13. परोक्ष 14. ज्यादा
पाकिस्तान से ताजा गजलें
1]

नज़र मिली भी जो उससे तो यह हुआ महसूस
तकल्लुफ़न कोई जैसे किसी से ईद मिले
नफ़ो-ए-जात की तल्कीन करने वाले बुजुर्गी
खुद अपने नफ़से-गुनहगार के मुरीद मिले
रजाइयत में तो 'सरशार' का जवाब नहीं
हुजूमे-यास' में भी हमको पुर-उम्मीद मिले
तीन
मिलने को तो मिल रहा हूँ सबसे,
पर मेरा मुआमला है रव से
मैं अर्श-नशी' का नामलेवा
हाँ, नाम भी लो मेरा अदव से
जी - जान से चाहते थे उसको
गुस्ताख हुए इसी सवव से
इस इश्क की सरकशी ने मुझको,
मुमताज़ भी कर दिया है सबसे
सूरज भी सफ़र में हो मेरे साथ,
इक ऐसा मुआहिदा' हो शव से
फिर रात न आये जिंदगी में
उस दिन का है इंतजार कबसे
1. स्वयं को नकारने का गुरमत्र देने वाले महात्मा 2. पापी स्वभाव
3. शिष्य 4. आशावाद 5. बहुत फ्यादा निराशा 6. आशावान 7. आकाश
पर रहने वाला खुदा 8. विशिष्ट 9. समझोता, करारनामा
114 पाकिस्तान से ताजा ग़ज़लें

सरमद सहबाई
गूंगे वदन में झाँककर फिर दे सदा मुझे
साकित' लवों पे हर्फ़ की सूरत जगा मुझे
लम्हा-व-लम्हा खुद पे मुझे मुनकशिफ़ न कर
मैं भेद हूँ तेरा, किसी ढव से छुपा मुझे
यह रेजए-बदन है पिघलता चला गया
दरिया की तरह साथ वहा ले गया मुझे
क्या जुस्तजू है, अपने तअक्व में आप हूँ
कब से सता रहा है यह इक दायरा मुझे
मैं आईने के साथ विखरता चला गया
खुद मेरा अपना जिस्म उगलता रहा मुझे
विखरी जो धूप जिस्म की रंगत बदल गयी
सूरज उतर गया है कहाँ ढूंढता मुझे
1. मौन 2. प्रकट 3. शरीर का कण 4. तलाश 5. पीछा करना
पाकिस्तान से ताजा गजलें
115

सलाहुद्दीन 'नदीम'
जो मेरे देखे हुए ख्वावों में ढल जायेगी
वही दुनिया तेरी जन्नत को भी शरमायेगी
खुल गयी आँख तो दरवाजा खुलेगा दिल का
घर के अदर भी तेरे ताज़ा हवा आयेगी
शव के सन्नाटे में तारों के धडकने की सदा
बर्फ में डूबे हुए जिस्मों को गरमायेगी
दर्द खुशबू है इसे दिल में मुकय्यद' कर लो
किसी नाफे' की तरह रूह को महकायेगी
आईना टूटके विखरा है तमन्नाओं का
किरचियाँ चुनते हुए उम्र गुजर जायेगी
हर नफ़स रंग वदलती हुई दुनिया में 'नदीम'
एक ही शक्ल कई चेहरों को दिखलायेगी
1. वंदी 2. मृगनाभि, कस्तुरी 3. भौति 4. सास, क्षण
116 पाकिस्तान से ताजा गज़लें

सलीम अहमद
एक
इश्क जय-हाल' का पाबंद है
घर में रहिये, राहे - सहराः बंद है
दामने - मिज़गा भी नम होता नहीं
आंख में आशोवे • दरिया' बंद है
इश्क क्या है, आँख है जिस आँख में
हुस्न का स्वावे - तमन्ना बंद है
इस पे क्या पिघलें कि दिल पत्थर हुआ
इस पे क्या रोये कि रोना बंद है
एक-इक पत्ती में गुलशन है असीर
एक-इक ज़रें में सहरा बंद है
एक कतरा खुश्क आँखों की सबील"
लेकिन इस कतरे में दरिया बंद है
शहरे-नापुरसाँ' है शहर इदराक का
कूए - आगाही का रस्ता बंद है
हुस्न का आईना है टूटा हुआ
इश्क की चश्मे - तमाशा बंद है
बंद रहने दो तसव्वुर में इन्हें
इन उजाड़ आँखों में दुनिया बंद है
1. दशा का अन्याय 2. जंगल का रास्ता 3. पलकों का किनारा 4. नदी
की
हलचल 5.कामना का सपना 6.पियाऊ 7.निश्चित लोगो का शहर
8. ज्ञान 9, ज्ञान की गली 10. देखनेवाली आँख
पाकिस्तान से ताजा ग़ज़लें 117

दो
नया मज़मूं। कितावे-जीस्त' का हूँ,
निहायत गौर से सोचा गया हूँ
सुनें मुझको तो मैं धड़कान हूँ दिल की
नहीं सुनते तो सहरा की सदा हूँ
मेरी जानिवः कोई आये तो पूर्वी
निशाने-राह' हूँ, मंजिल हूँ, क्या हूँ
किसी को क्या बताऊँ, कौन हूँ मैं
कि अपनी दास्तां भूला हुआ हूं
खुद अपनी दीद से अंधी है आँखें
खुद अपनी गूंज से बहरा हुआ हूँ
मेरी सेरावियों में तश्नगी है
कि मैं दरिया हूँ लेकिन रेत का हूँ
वह रन मुझमें पड़ा है खैरो-गर' का
कि अपनी ज़ात में इक करवला हूँ
मेरा सीना है छलनी ने की सूरत
इन्हीं जख्मों से मैं नरमा - सरा हूँ
मुझे शवनम का आईना मिला है
उसी में गुल की सूरत देखता हूँ
मेरी मौजूदगी से बंदगी है
कि जब से गुम हुआ हूँ मैं खुदा हूँ
तीन
तेरी जानिब से दिल में वसवसे हैं,
ये कुत्ते रात-भर भौका किये है
लिवासे - दर्द भी हमने उतारा
ये कपड़े अब पुराने हो चुके है
1. लेख 2. जीवन की किताब 3. ओर 4. रास्ते का निशान 5. प्यास न
होना 6. धमासान की लडाई 7, अच्छाई और बुराई 8. बांसुरी 9. गानेवाला
10. बुरी शंकाएँ
118 पाकिस्तान से ताज़ा ग़ज़लें

उतारें केंचुली अव तल्ख जज़वात'
कि वे अपने में घुटकर रह गये हैं
न हो मायूस खुश्क आँखों से, ऐ दिल
कि सहराओं में भी दरिया बहे हैं
'सलीम' अच्छी गजल है तेरी, माना,
मगर ये फूल पूरे पर खिले हैं
चार
जाके फिर लौट जो आये वह जमाना कैसा
तेरी आँखों ने यह छेड़ा है फसाना कैसा
आँख सरशारे तमन्ना है तो वादा कर ले
चाल कहती है कि अब लौट के आना कैसा
मुझसे कहता है कि साये की तरह साथ हैं हम
यूं न मिलने का निकाला है वहाना कैसा
इसका शिकवा तो नहीं है, न मिले तुम हमसे
रंज इसका है कि तुमने हमें जाना कैसा
खुद भी सोचा था बहुत, उसने भी पूछा था बहुत
हाल जब खुद ही न समझे तो सुनाना कैसा
तुझको पाने की हवस थी सो किसे था मालूम
अपने ही आप को खो बैठेंगे, पाना कैसा
.
1, कडवी भावनाएँ 2. रेगिस्तानी 3. कामना मे डूबी हुई
पाकिस्तान से ताजा गजलें 119

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साक़ी फ़ारूक़ी
एक
ये लोग ख्याय में भी वरहना' नहीं हुए
ये बदनसीब तो कभी तनहा नहीं हुए
यह क्या कि अपनी जात- से वे-पर्दगीन हो
यह क्या कि अपने आपपर इफशा नही हुए
हम वह सदाए-आव' कि मिट्टी में जज्ब है
खुश है कि आवशार' का नरमा नही हुए
वह संगदिल पहाड़कि पिघले न अपनी वर्फ,
यह रंज है कि रानिके-दरिया नहीं हुए
तेरे बदन की आग से आँखों में है धनक
अपने लहू से रंग ये पैदा नहीं हुए
दो
दामन में आँसुओं का जखीरा न कर अभी
यह सब का मुकाम है गिरिया न कर अभी
जिसकी सखावतों" की जमाने में धूम है
वह हाथ सो गया है तकाजा न कर अभी
नजरें जलाके देख मनाजिर की आग में
इसरारे-काइनात से परदा न कर अभी
ये खामुशी का जहर नसों में उतर न जाये
आवाज़ की शिकस्त गवारा न कर अभी
1.नग्न 2. अस्तित्व 3. पर्दे में न रहना 4. प्रकट 5. पानी की आवाज
9. दरिया का अन्नदाता
10. संचित
11. दानशीलता 12. ब्रह्माड के भेद
6.आत्मसात
7.झरना
8.गाना
पाकिस्तान में ताजा गजलें
121

दुनिया पे अपने इल्म की परछाइयाँ न डाल
ऐ रोशनी-फरोश' अंधेरा न कर अभी
तीन
एक दिन ज़हन में आसेव: फिरेगा ऐसा
यह समनजार' नजर आयेगा सहरा ऐसा
मैंने क्या रंज दिये अश्क न लौटाये मुझे
ऐ मेरे दिल, कोई बे-फैज न देखा ऐसा
एक मुद्दत से कोई लहर न उठी मुझमें
मेरी आँखों से छुपा चाँद का चेहरा ऐसा
रात कहती है मुलाक़ात न होगी अपनी
तू कोई ख्वाव न मैं नीद का माता ऐसा
जिस्म की सतह पे कागज़ की तरह जिंदा है
तू समंदर है न मैं डूबनेवाला ऐसा
तेरे चेहरे पे उजाले की सखावत' ऐसी
और मेरी रूह में नादार० अँधेरा ऐसा
हर नये दर्द की पोशाक पहन ली मैंने
जां मुहजब' न हुई, मैं था वरहना ऐसा
चार
रेत की सूरत जाँ प्यासी थी, आँख हमारी नम न हुई
तेरी दर्द-गुसारी से भी रूह की उलझन कम न हुई
शाख से टूटके वे-हुरमत'' हैं, वैसे भी वे-हुरमत थे
हम गिरते पत्तों पे मलामत" कब मौसम-मौसम न हुई
नागफनी - सा शोला है जो आँखों में लहराता है
रात कभी हमदम न बनी और नींद कभी मरहम न हुई
1.प्रकाश बेचनेवाला 2. भूत-प्रेत 3. चमेली का वन 4. विमी का भल
न करने वाला 5. दानशीलता 6. दरिद्र 7. सभ्य 8. नग्न १. सहानुभू
हमदर्दी 10. अपमानित 11. निंदा
122 पारिस्तान मे ताजा गजलें

अव यादों की धूप-छांव में परछाई-सा फिरता
मैंने विछड़कर देख लिया है, दुनिया नर्म कदम न हुई
मेरी सहरा-जाद' मोहब्बत, अन्न सियह को ढूंढती है
एक जनम की प्यासी थी, इक बूंद से ताजादम न हुई
1. जंगल में जन्मी 2. कालीघटा
पाकिस्तान से ताशा गजलें
123

सैयद हामिद यजदानी
वादयां', पतवार, हर इक आसरा टूटा हुआ
लेके निकला है सफीना नाखुदा टूटा हुआ
एक चेहरे के हैं कितने अक्स मेरे सामने
हाथ में बैठा हूँ लेकर आईना टूटा हुआ
शास से होकर जुदा जिस तरह मुरझाया हो फूल
फिर रहा है होके वह मुझसे जुदा टूटा हुआ
ये खिजाँका है करिश्मा, या बहारों का करम
नकहते-गुल' मुज़महिल', दस्ते-सवा टूटा हुआ
हर तरफ़ विखरी हुई थी मेरे दिल की किरचियाँ
जोड़ने पर भी यह आईना रहा टूटा हुआ
छोटी-छोटी रंजिशें दीवार वनकर रह गयी
क्या जुड़े अव दोस्ती का सिलसिला टूटा हुआ
जिंदगी की राह पर 'हामिद' चले जाते हैं लोग
दिल है महरूमे-यक़ी और हौसला टूटा हुआ
1. वादवान 2. पतझड 3. फूल की सुगध 4. शिथिल 5. है
6. छोटे-छोटे टुकडे 7. मनमुटाव 8. विश्वास न होना
124 पाकिस्तान से ताजा गजलें

हबीब जालिब
.
एक
यह और वात तेरी गली में न आयें हम
लेकिन यह क्या कि शहर तेरा छोड़ जायें हम
मुद्दत हुई है कूए-पुतां की तरफ़ गये
आवारगी से दिल को कहां तक बचाये हम
शायद व-कंदै-जीस्त यह साअत न आ सके.
तुम दास्ताने-शौक़ सुनो और सुनायें हम
वे-नूर' हो चुकी है बहुत शहर की फ़ज़ा
तारीका रास्तों में कहीं खो न जायें हम
उसके बगैर आज बहुत जी उदास है
'जालिव' चलो कही से उसे ढूंढ लायें हम
दो
भुला भी दे उसे जो बात हो गयी प्यारे
नये चिराग़ जला रात हो गयी प्यारे
तेरी निगाहे-पशेमा को कैसे देखूगा
कभी जो तुझसे मुलाकात हो गयी प्यारे
उदास-उदास हैं शम्एँ बुझे-बुझे सागर
यह कैसी शामे-खराबात' हो गयी प्यारे
कभी-कभी तेरी यादों की साँवली रुत में
वहे जो अश्क तो बरसात हो गयी प्यारे
1. सुदरियो की गली 2. शायद जीवन में यह घडी न आ सके 3. अंधेरी
4. वातावरण 5. अँधेरे 6. पछतावे की दृष्टि 7. मधुशाला की शाम
पाकिस्तान से ताजा गजलें
125

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Pakistan Se Taza Gazalen

Author
Narendra Nath
Title
Pakistan Se Taza Gazalen
File name
Pakistan Se Taza Gazalen
Text
OCR done
Citation
1980
Published
2011/03
Publisher
Radhakrishan Prakashan Ansari Road Dariyaganj New Dehli
Language
Sanskrit
Pages
136
Library
Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Classification
Poetry
DLI number
551673
Barcode
4990010032390.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
n6eapflU2mB
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