Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur
The Dvadasharanayachakram Part-4
Front matter
प्रकाश प्रासिमामा
पन्दुखाख जमनापास शाह
संचासक, भीसम्मिपरीपर मैन अन्यमाम
पाणी (पी. पमेषण)
लक्ष्मीबाई मारायण चौपरी
निर्णयसागर प्रेस
२६-२८ कोटमाट बीर,
मुंबई म २
Eagliah Forward Printed by Shend Krahnaji Sopalo
at tho Ramkrins Printing Pree, Ratmıni Niwe,
Alorboor Rond, Dadar Bombay 14
Shri Labdhlearishwar Jain Granthamala No 44
THE
DVADASHARANAYACHAKRAM
OF
SRI MALLAVADI KSHAMASRAMANA
WITH
THE NYAYACAMANUSARINI COMMENTARY
SRI SIMHASURIDANI YADI KSHAMASRAMANA
PART IV
Edited with
Oritical Introduction, Index & Vihamapidarinechap
ACHARYA VJAYA LADDIII SURI
PUBLISHED BY
CHIANDUL IL JAMANAD IS SIIVH
Imrant FR I LUDO itu u Juak I YALA
CUIASI (DIST BAJIOD !)
Fire EDITIO w corirs
AD10)
PRICE O RUPS
धन्यवाद भने आभार बन वर्कशाजना अतिमहत्वना मा प्रत्यरन भीश शारमयचकमा अण भागो विशन् अकर्मन करकममा साइर समर्पित कर्या पठी तेना मा चतुर्य विभागने, प्रकाशित पर विधपी पुस्मीत पर ए सभातिक हे. प्रस्तुत नमागना प्रशाधन सापे, मा प्रधना प्रशासन, भगौरव कर्म परिपूर्ण पाप वा प्रन्परत्नमा रहेलो मितिा अने पूर्वताओनो परिपूर्ण परिक्य पाचन सम्ने सम्म पाय के मुदणकार्यमा अपराध कागलो बादि सापन सामग्री बने मणना निम पता मानो यो पप अमे माना सरगनु पोरण सपनी धपा और से पण गौरव सेवा मेरी हकीकत मा संपूर्ण प्रपना मुत्रण मारे उधर इम्प सहाय करनार भुतमत्त मैम भी बना बने बामारी लीए 4 मागमा मुद्रण वरमिपान प्राप्त पेली साहाय्य घरे उदारवित्त मुतप्रेमी साप्पोनी नामावली का मीचे मापना सा, वो सानो कम्पबाद वर्षण करवा पूर्वर वामार मानीए छीए समाप्य माठे प्रेरणा बापनर गुस्मक सुप्रमी ८ उपाध्यायनी श्रीवफाविषमनी गणिमनो पण मे भने उपकार मानीपे छोए उदापित्त धर्ममा माश्वर्य भेट थी रमणमळ दसमुखमा भॉफ, अतमहिना बमारा समापन, बौदामपूर्ण सामाप्य बनेकश करी रया ऐ बम्ये बोधीनी मूरि पूरै भनुम्मेदना कीर पीए साहायक समनोमो शुमनामो ५०१ म भीसंभ पाणी [नामपनी उपयमापी हरमा मातीकामोमा उपाभयमी उपजमापी [ तपसी साप्पीजी भीममतालीमीनी प्रेरणापी ] भी शान्तिमाप जैन पेवी जमालपोर [अनप्पनी उपसम्पपी] ३.१ म मीसंप पर्मन [सम्पनी उपसम्पपी] ३०१ जैन मीसंप शाहपुर [शानाम्पनी उपयमापी] ५१ शा पायुमाई उत्तमचंद वमणबाला [समीती किमीनी पाचसो बामनी या निमिते.] -प्रकाशक
जनग्न, म्याग्म्यान वाघम्पति, कविरलकिरीट, सरिमाभाम
जैनाचार्य श्रीमद्विजयलब्धिसूरीश्वरजी महाराज
Am
Jainacharya Shrimad \rjera Labdhısurishwaraji Maharaj
Editor of Dvadashara lavachakra
No text on this page.
॥धीम् ॥ प्राक् कथन साहादनी विशिष्टवा-मदर्शन एटले सर्वसापेक्ष इसिमोन केन्द्र स्थान | नगरानी वारम्वादम माननारी समध्ये विचार पवियोनो वास्ततिक समन्वय एमा पसेको छ । सछपी बम्यमन करवापी एन भनम्त ठगण स्पर बने छ । नगतना प्रमेक दर्शननी तठस विवेचना एम्यं समाएकी छे । एक पापाधीशनी नेम नदशन ममन्त बोकसाई एक मस पणे प्रतेक दर्शनने म्पाय यापे छ । एकान्त भाहना कारणे अन्य दरेक वर्शनम प्रतिपक्षिदर्शनोने न्याय वापबाम वाम्यो मपी । बैन दर्शन एकम्तमा न भठमाला मप्पस्सपणे मे मपेक्षाए पनी बात सापी होप से अपेक्षाए नी बात सीकरी प्रक्षेक दर्शनने परतो म्याप बापे छे। पी सपा न माटे मारपपरवा एकान्त-एकम्त एटले वस्म बना मर्भसमनी समतरीके भ्रममा वेमम प्ररूपणा, पी पधादी शकनार माटे चारोग्यप्रद छे बने वेने म पचावी शकतार माटे ते भारोम्यप्रद मपी एन बनेकान्त-अनेकान्त एटले म्पा म्यां ने सस रोप मा मा सेनो सीकर भने समर्थन, पचावी शकनार माटे पी वाम्यप्रद ए मात केली साधी वेटली न साथी मात पचापी न शकतार माटे भी भारोग्यप्रद नयी ते छ। बाबमे अपेक्षाको यथार्थपणे समधी न सकनार श्रीनो यमायग्रेम्प उपयोग नही करी शके तेमन करावी पम नहीं शके बने सम्पर ने हानी करी पेससे । मीन उदाहरण स्यूड भूमिकापर छे पण नापी सिम पवी हकीकत सूक्ष्म भूमिकापर पण एखी व साथी छे, एक भपेक्षा सरकारी पीमी अपेक्षा प्रमे सिरस्कार सेवनारनी गणत्री वापसीमा पाय छे बने मामही समशोषक बनी सक्यो नपी । सामनी घोष भनेकान्तद्वारा व साय बने छ । बनेकान्तबार बैनरनिमी मशिता छ । चैनदर्शन एकाते को पण दर्शन संरम का वगर, ने पे अपेक्षाए मे मे दर्शननी बात सम होम ते वे अपेशार वे वर्णननी मात सीकरी सर्वने न्याय बने वावकार पापे छे, बा एभी अप्रतिम विशाल शिक्ने उदारतान प्रतीक । एमी वा सूपाने वम्य को पण दर्शन स्पर्धा पण शम्प नभी। पगतने विनाशना पंपे दो रहेका पानिपो एकान्तना बास होगापी मन्यवादोने सम्पमा बसमर्थ डे पारे चैनदर्शननी बनेकात मि सम्पने शान्तिपूर्वक समानका समर्थ । बनेमस्तपार मपनावी वामे पण पगव म्पाय, शान्ति पने पुस माम मामाम्प सापी छ । नपनी म्याल्या अनेकप्रदमो एक माग मप ये, मय 'नी' धातुपी बनेको एक शद थे। नीयवे प्राप्यते पल बनेन इति मपा, मासे एनी पुत्पपि । इसे बापमे एनो रुवार्य बोइए । प्रत्येक पानान्तप के, इहरी परिए मा पो हुदा हुदा । वामानो इएपम समनमा माटेनी शि. RT भय । प्रत्येक मय प्रकारे , नप भने दुर्नय । एक पदार्पना बोकस धर्मर्ने प्रतिपादन वेना पभोंनी उपेक्षा का मगर करे सारे वे नय कोनाप से बने विपनपने करे मारे ते भय कमाय । म पो को के 'वस्तु सबूप नशे ते पाद हुर्नप सो बादमा वापतामो निपेन करने मान सपताने से क्यवसाय बाने छ । बने 'मस्त सत् ' एम कोलाम माने ते बाद नप ये कारण म्। । मसम्पवानो निषेध करावो नपी।
। नप मने प्रमाणमा अर्थ मेर- बनवधर्मस्मक । वे वस्तु एक धर्मराए पण पाणी शरपणे, पने भने धर्मर पण नाणी साय ऐ । भनेक धर्मद्वारा मस्तन शान काय ते प्रमाण करेगाय । एक धर्म ए पल शान काप ते मय फोगाय । से कमेपी पस्तुन पान पाप । प्रम्पगनरनिगमः (तपायं १- ) प्रासपी पस्तूर्नु परिर्ण जान पाय , मयपी एक मंशम शान पाप को पतनपान उपपोगी वस्तुनु परिपूर्ण सरूप रविनार प्रमाम छे, अधिक लरूपने परमार नपानयो एकातपादरूप रोगपी जगतने माठे बनुपयोगी छ । घगतने उपयोगी सारे व बने के प्प क्षेत्र क भने मारपी हेनी नाना मास्वामोनो विचार करवा भावे व विचार अनेकान्तराद पता सार कडेवाय थे। मगतनो पक होगपी पावाद मोरनार पर कोशाय । पाप सारा नयनो मिप्राप , एम स्पाने स्पामे कने बत्तम सपा स्पपी निरूपण करी पैन समनी समता सास्ति की। पानी उपमा भने नयपनी उतरवा:-मा प्रभाव नपचर' नाम भव। योपरि पकाती बम पोम मेम समस्त मारतमा रामवीभोने राना गीती मेटे करण के चरम पेनी पासे होप नो पराग्य कोई की घर मपी-ते सदा निमयी बरेच प्रवरहन पण एएमबेम समपुरी रह से ठेम शासपुरम का मपमान श्रेष्ठ छ। कमान गना महारामानोमा पासा बयप म वा मयचको पाविमोन का पाप। सामर्थनी मा समानता सिम फरमा प्रस्तुत परानमे नयचर माम मापषामा माम्पु से एम बमुम्पन की शाप ! नपचकार पण पवना सम्म एपर को के 'बेम बानिमोने पकार्तिपणु प्रास कारया सारपसननी भारस्यकता परे तेम पादि पसरपिप्पाने मनपा माटे वा नयमानी बार पकता है। सास मोपपार बात तो परे सामनी अपेधार एनी बने परत्ननी को देवी साम्पका ठे ठेवी च साम्यता रचनानी बफेशप एमी बने पैन दामी काम्मी गणती माटे स्वीकाराएम कसायासी परे । नपपा मगरणे, कापचा पप्प बार बर । प्रेम मपथमा ट्रम्पार्पिक बने पर्याप्पर्षिक एम वे निम्पग से तेम कम्पका पन उत्सर्पिणी भने बरसपिणी एम रेलिमाग । कमवता वा बसे निमाग वरने पराये । प्रमतर एक पर्म एक मतिरामपणेबाम्पान करे । ठेयी नयनरमे सामर्ण्यमी वपेचार करणनी बने एपनानी बपे पाए काठपानी उपमा पपार्थ पणे छ । परनमा पारक म्हासमपं परमी पर संसारम कोई पण बिजप पामी घरी म पेग मा पारमा एने छनम भरवी बाप तेवी चमरन करता काय पाती मा सिम बाप रे पण [पमा 1 मपचरन सरोवर पछ सर्वप्रारना बादोनो ममप मपी बार पण माममणम्पपी परम्पमे मुछ करी कापचनी बसरपी मापणने पर बना पर पणनिय प्राट कपचे। मा प्रवरान जैन म्याप भयोमा धनन्य। वावनिर्नय मारया माटे मयोनी पति सूस्म नचारणा करतो गए मुगम रचमानो मान् प्रयो एस पम नमो। मा प्रकारला मामे पदेव करणार दर्शनर' ए मत सास प्रमित मापात कम प्रचन्ति पाए प्रम पवनी प्रस्तुत प्रथम के समाननो 114111५५" निर्देश बावतो होगा तो तेभोधी मा मत्ताने स्पा पण मपी । सेमगे नपा को कप सिरसेनदिवाकरसूरि महारानना मान सम्मन के नपी कर्य निनभद्रगनिसमाश्रमणमा मतनु संउन केवरहान बने फेवपदर्शन किये मालपारित्रिमहापबनो मत पुगे परे छे ए स्परता टीकाकारे पण करी मपी । हरिमन रिमी महाराबमा समयम् मा मतान्तर प्रचलिग होना एतां मचादि सूरिजी महारावना मामे एनी प्रसिदि म हती, बता भा विपप विरानो माटे घोषहोनो मनी रहेछ । प्रन्पकारना नामे चालता प्रवादो-महादिम्रिम्हारान पोते हेलामास माने से ते पातको उठेम पम टेमगे वा प्रपी को नपी । मा प्रत्यमा तेजोमीए वस्तु तरीके मपार भने स्पादने सीकारी मुरूपावे लेनी च विचारणा करी छ । वा प्रत्यमा बैनदर्शन केला पार्प माने थे, केटछा प्रमारना खिो माने थे, केटा हेत्वामास म्पने छे, इस्मादि कशीन पर्चा विशेषकरने वाली मपी बने म्पा ज्या प्रमाणो के मोनी चर्चा करवानी बावी त्या स्पा फळ अमुक नपपादने आश्रयीने ब करमा पापी छे । ए उपरान्त महानिरिमहाराबना मामे अमुक नयो द्रम्पार्पिक छ भने अमुक नयो पर्यायार्षिक से ए मेद पारयामा बाम्या छ । मा बपा गुपगडा म्छादिमिहागननो को स्वतंत्र मय होप एम अनुमान करवा रे छे । अपना सम्मतितर्कती वेमणे पोते रपेटी म्पास्यामा पम कदाप दोप! सो न आ पपा भभिप्रायो संगत बमे ! था मयपकमा तो दम्पार्पिक छ भरोनो म्पहार, सामने नगमा पर्यायार्षिक छ अरोनो हजुम्न, शम्म, समभिए वने एवम्मूता समविश कों है। नामनी पपार्यता तथा अन्यनी रचनापद्धति:-नपपादनो सेरो भावी शस्तो नपी, एनी न आदि म मन्त । एक पानी न ते सश फरतो ही सगन बने मापन कान करतो होवापी प्रकार मातिए एनी रचना चक्राकारेकरी एने नपपक एए पपार्य माम अर्पण करांगे। मा नपपत्ररत्नमा गार भर छ । प्रस्मा से भर गये एक अन्तर एग भार भरतर है। प्रत्येक चार बर पर एक मेमि [ मार्ग ] एम प्रण मेरि छ । मने रेशे समय बरोने पोतानामा समावना-सरेसर सो सफा बरोन बने भाग पामे कहिए तो समम पानु पापार सान एक तुम्ब से । प्रयेक र एक सवा मपवाद छे । मा पानी पर दम्पारिरिपिओपना ऐ बने गोमा छ पर पर्यापार्पियरिविओपना । प्रपम एक मपनो वापर सोने सामम्प, मिशेष बने सामान्परिशेपोमपबारिमोना बादो सेगमा भाम्या । पछी ते सगन के मे दीपा मस्तानी रचना करवाम आवी की अन्य मपमा परू करवामा परे । ए भम्पनयमत प्रयम बांग पारिओना मतमतांतरोन नम्तरमा सण्डन पही पनी पोताना मतपशेष निरुपम करे । भरमा मते प्रकारे ते ते मप (घर)नो सनहारि सात नमोमा कपा मपमा समावेश पाय , ते बनाने के अपने सम्मन शर, पम्प तपा तदने बानी वे ते मपनो मूळ भापर मैन मगम एम निरूपगई । एटसे बषा मयो वागमना एक एक पास्पना विपपने मई पोताना मभिप मुग्य एकान्त पर्गन बरेऐ एम दीप पार्षिक छ मयोमा दम्पराम्द भने पर्यापशम्दमो गुरोपदार्पणम् भाग्ने, - . - 1'मरिमेम मगर । मगुमसायरान 11 गोमतीप। मरदर पर परमर ५६ मेघम • मगर बनिहाय 11-11एसम्मतनमना ।
एम पर्यायार्षिक छ मयोर्म पण । माम बारमो वा पूर्ण पा पारी वेनं बन्तर (मन) गमे ते नय कर सके । नगर्नु पम पाल ना पीनो मप, एवी से मणन ममम पासा करे। नो पन्त बासो नपा माठेल ने पक कोमाम वास है। समावस्पी सुम्मा-अमरा मयोनी तपम पुलिओने बसवि पाथ्वी एकनार स्यास्मी तुम्पनी एबग फरसा बारी है वे बारे पर मयोनो (बरोनो) भाधार ।ए तप सिपाप मयो स्की सस्ता मपी एम पर बनेको खबोहरा निरूपण करपाम वा मशरूप स्वाद हिना बमें मप तिवपी पनी यस्तो नपी । एन्दोमायस्याये परस्पर विरोषपी महत पई पाय बालियेपने हदानीले लार मा नपर्नु रहम करे हे एरसे बसावाद से सामान कमानामां समय बम नपायोलो परमेऔर म के परस्पर मयोनो एकस्वरूप विरोष दूर करने एकरण करे । बा एपमान स्माभर की शो । साइने अनुसने नयो बस्तुन रुपण करे तोपते प्रमाणमा सात पामी सके । लपमे निरूपण करे मारे एकात पकापपी निकल जापाबाम प्रकारे भयो निस्सम करत साने स्पने दर्शम् । प्रस्तुत प्रन मामा-मूहमारे परा रीकारे धम अम नया मामनो पप सपयोग फयों इमारनपचनामको ठोस पित नेमे पोयम वाले सम्मा के परमपक' नाम नमकारने पमित पे बने उचारमनी मुमता सार अपना नाम पखवा ऐप ! सप्त- पारनपणाप्पपनापी उपना मकाने तेनापी गई पारना महारशारनयना बाई नामकरण कारणामबारे ए ससम्मनित । मामारी ईमानदाराचे पग बनुपोगानी टीकामा पानीमपि पशा अपवक्रमस्जि' मा प्रमाणे हदधारनपान नाम है। बा समप एप ये वा मन नपमान एरिनपासामनो सम्पमा ! र पम पण हा बने परमपम को। पत्रकार पन मन्पाले पधारमयर सिप्रतिष्ठित बाबमाम गुणरानीए पानसमापनी तिम तथा मिनप्रमहरए मिनागमधाम्म नपसाब माम, पम कपरमा प्रमो पोताते बपर डाग नपी । बा मपनशासनिबरमनी म्यास्मानी एक्ल पक्ष प्रतिलिपि परमार, ने मरिशिप (मकर) मे प्रात पती वगग सर्प प्रतियोनो बाधार से, एका महान् उपाय किमि परम्प मागाय श्रीपशोपियपनी पाराय पण हापधारनपपक मामलो पटक करे है। मपोनी सत्याससता-मोमा नपचनो प्रमानसिपप लागऐ 'पिपिनिपममाापिम्प निरिकताइनर्पफायो । मैनाइन्पष्ठासनमनू मरतीति भैपर्म्यम् । बा सूत्ररूप परिकार मालुमावधर्म मारी । विपने पिता बापारे बारे मा पप । बर मा पार नप मरहमापारपानावसम्याग्दीमापातामराग्याम प्रभारमा दमलामाईखेमरेबरालय। शपीक घुस विविरमा ५ बम मिति. सग्रेस समनि निस्य समिममिया । (बर छे) वे मचा परस्परनिरपेच पईने मनशासनी पेठे विचार करे तो असमान प्रकाश परसापी मसम्म छ। नेपघा परस्पर मध्यने बमिरोषपणे विचार करे तो ते पैनशासन होताची सम्म छमके पस्तु सामान्यविपापनन्तपमा छे । देज हपे मघा म्योर मळीने सापेक्षपणे विचार करो जोरए सापेश निरपेक्ष विचार न परे वा प्रपम्य दर्शान्यो छ । बाप को पण सळे नप बने दुर्नयना मेदनी निवारणा करी नयी, फळ नपोनी निधारमा करी है। दो क संमनितर्फ सियसेन रिसासरि म. नन मन्यमा वा मेद गोगा मा छे । मत मारि स् म. वा मेोने केम सान मपी वाप्य वा एक महायनो प्रम। वा मार पर विधि बन नियमना मा छे । प्रथम चार बर विधि माछ। वा एक मार्ग (मेमि) छे । भागना पार भर उमप मा छ बा द्वितीय मार्ग छे । शेष पार पर नियम मा वा तृतीयमार्गमा मार्ग बालकव-लशासकल-कवासरूप खयो रानिमलमिमानिसाव-अनिमलनी स्थापना करे छे । वा बार नप म्पारे एक्मत पनि परस्सर-अपेशा पतीने पतन करे 2-'स्मानिया, स्यामिमानिसः, सादनिस्स' शब्द, एवी प्रविता करे , सारे परिपूर्ण वर्षना प्रशश करामनार होगाथी समखरूपने मतानार पाय छे एम मममता तुम्ममा विवेचन करवामो जाम्मे छ । वार मपचरशासन मुख्य प्रतिपाप । अन्यकर्ता बने वेमनी महचा:-अपना रथपिता पारिपूरामण मजगदिसम्यममणी । पैन म्यापशाखमा वा पाचार्य भी रूपातनामा छे । मयचक टीकाकर उसे छे के "वपति नयनिर्जितनिा क्षेपविषयपक्रविकान्ता । श्रीमावाविसरिजिनदमननमस्तलविवस्वान् । वर्षात् मयोना पाप मदर्शनधारे मगे सपयए स्यावादना निरोपियोने परावप वाप्यो छे, वे निमचनरूमी भाराराम सूर्य पेश म्हारिसूरि म• अपाता है। बा मोकापी भीमछादिरि म० मपचकना चाहे, पारि मोने जीतनार के बने निनवपनना प्रकाशक, मर्याद ते समयमा वर्तमान निमागमोना इसना सम्पर पेय बने प्रकाशपिटा हत्त । मा वाचार्य पोतानी सम्म मुद्रिधार जैन जगता वति मस्पात । पोताना मनी सिदिमाटे युधियोता एक बतिमुन्दर दुर्भप म्यूानी उपस्थिति की प्रसरवादिदोने वाहपुरमा बीती मेछ। मामात एमना समेष्ठ महसपूर्म मा म्पपी सारी रीते जागी धराप ऐ । एमनी शिक्षा येन परपसन निराकरण करमा पुण्ठ हती, तेन एफ्नी सेगुनी पण सपमा मनमा लगनिपी पारे । रपनानो मापारा-जा वाचार्यमीना मरमसान वादिनं विच प्रमानरुपरित वादि बनेक स्पोमा उचित होगपी माधकोन स्यांधी न जाणो सेगा निति की पीए । सेबोधीए प्रधान मनी रचना मोना वापारे क्यो ममे स्पारे की ते पिपी सामग्रीनो नमार शेरापी मानसी समता मपी । उ एनो म्ह बाधार 'सनपश्तार बादिमपो हो एम मगे । ते मयो मुळारमा समपमा एप एम गागी शपथे पल म्यारे एनो वापर भार के एम पम्पगे सूपयं नमी से पिपपी ते न मापार हे पम देवी ने बाप! वा नपचक 'पूर्वमहोरपिसमरियतनपत्रामृवरनागम प्रमसिशायमिनमा एम पीने प्रम्पग बने भागमारपए मुकना नपपा एटईप मुहारे कर्मु ।
हेमना सासमो-या सासमप्रमावालकिपापोगी महापुरपना नामनो दोस सर्वप्रथम हारमा म. मी बनेकावयपपताकामा ता पोगविगुनासोपाटीकाम वापसे । शान्तिरिमाराने तो म्पाया- पसारयालिस्ती एपिम म्यादिरिम्बारानी एक काम्पम पण अधुतस्तुति की है । बने पादिवाळ शान्तिकित उत्तराप्पपनसूत्रनी प्रान टीकाम तो ममचना मामनो योस बने नमधनी पेठिपण म मरेपरम्, म. ये प्राल कपास्कीम नमचक्र बने महानिनो पोम्य परिचय बाप्यो । मामारी हेमामालि रिसेपाययक्रमाप्पनी टीम नपचनो निर्देश छ। पछिमाम्सकी दो अनुम्सादिम साकिरा कीने सिसौम्पारणमा एमनी ताकितानी सोमाता गाई से। पछी सबालवामी मुनि पुम्दी बगेरे बनेकानेक आचार्य मगवंतोए मयचा तपा मारि मारेने अभ्यामना न्यायाचा भ्यायविशारद पोलियफ्ठपा पायरीए बाठ प्रम्पयनी समापम म्यादिसरिन बारिप्रभावक तरीके सम्पा ने रम्पगुगपापना पसन मयचान्ना एक बरमा बारे बर उतारी काप), नाम मन मने प्रत्यारने बनेकानेक बैना बायोए सम्पा। बापाविप्रमावकसूरीभरनी बादराहि-तर्फचलि बरेसर हेमना कालमा परसारिरूपी तारपायो माटे मप्पा सामना तपता सूर्य मेरी हता, एम्नी रचना पग एटी मत के देना कामना बने से पूर्वमा पारेग मन्पो बने समारोना भने एम्ना म बचनोनो बापार नि मना पायोने के सिवन्तो ने बानिए बने कोई पण कठोर बननो प्रयोग की बगर बाखविमलानी बोटिए पहरोंचार मानो प्रयास कर्यो । एमग वेग रेटहार मयो एमाले के ये हाल उपसम्म पता मपी बने वर्तमानमा उपसम्म पता पम्पोम बोगन एरा नागा बाबा पूर्वपलो भने हामी बाली बीमो के मे मलिक ना एका मस ने समीतिए का दुर्भव पुलियोपो नराकरण करामो मेमो सिवास्त मे एमना प्रकला बंधनात बने ममनारने तरतच माप कई प्रकार बारी बनानी के, एको माया भने गम्भीर भएन नि बगतमा वपूर्ण है। कारण के मा भाचार्ममा पूर्ववत मापार्पोए बनेसिशसनी सापना स्पारुपे की ये पण नपामा पूर्वपक्षियोना पादनु मात्र निराकरण करे पी स्पापमे पूर्णपक्षणाविमोनो मत समयी शकातो नपी। कानाचार्य मगनाने पूर्वपक्षिमोना भवनी पापणे साफ्ना करीने नरम कर्स मटे वा नब पूर्व । भाचार्य सिरसेनदिवार महाराब। मा नपणामकारे पु. मिसेनदिवाकर सार मनी रेटीक कारिकालो तमाकेता मायो उहत काबा बिगाकरमियममारा विश्वपरवयेय साचार्य सविसरिजीना पिम्प परमादिसरिना प्रिपरन से एकदमूरिगी पी.. १७५-११५ (विकम ९१-५१ म युगप्रचानावा । १ बलमा मितवाय मा हार, कलानिमिपार का माया मिसे बसबरियारपण मी मम्पपम्पलाममा नाम १.पही बना पात्र लाप समाद, कार कोमा वा रेप पलाल माप मना मामा स्मारमा समसारसम् (मताबा हमे) स्फन्दिलाचार्य में पपाछे एक आप जीतपर स्कन्दिाचार्य ने बौमा मनुयोगपर स्कन्दिनाचार्य देमो निर्देश नन्दिनी एव्वीस ने क्षेत्रीसमी गापामं करायो छे। 'सामने न्दे फोसिपगोच सरिस पवमीपघरं ॥ २६ ॥ त पम्दे दिगपरिए ॥ २३ ॥ एक बात तो दोन नेवी स्पर के मन्दिसून- मा महात्माजोनो नाम निर्देश करायो छ माटे जोभी नन्दिसूचना रचनाकालना पूरी निर्गम्प शिरोमणि छ। मात एक ए रही बाप के के 'सम्'ि मो मर्प स्कदिल केवी रीते। भगवान हरमनमरिम, भगवान झपपगिरि कोरे टीमनायेए समि नो वर्ष पाणिस्प को है, पनी सामे एक बात करेनामी से के पर उलिखित नन्दिप्राळा स्किन्दिसायरिए' नो कम्पमत्रना पीसना सूत्रम्य संहिछ शम्दयी मामोहरा क्यों छे। 'पेररस गे बमसीहस्स कासरगुवस्स बनपम्मे परे मविवासी कासरगुचे परस्स म बनधम्मस्स कासगुवस्स पछि परे मवेवासा' कल्पस्म (२०) वापी मापगे समझी शी के सति शम्दनो स्कदिलना वर्षी पण उपयोग पर शके छ ! बही ए सरित शद मेदिम उठिसित लिमाटे जपण्यो छे कारण के मेदिनी टीमयमा भगवान हरि मनरिम राखिन सिंहलापकना शिष्य तरीके निर्देश करे हे एर नि उपरना कल्पसूत्रमा बीसमा सूजर्म परायो, वाम एम सग्छि [परित ने आपसिंइना प्रसिप्प सरके नया छे पर था परिपन सर्पपा नगण्य ले करण के एक म्पहिने भनुम्मीने टीका शिम भने एम प्रशिप तरीकेनो टए जोग मळेछ। वार्प जीतपर स्पन्दिताधार्पनो समय बीरनिर्मण संव ३७६-१२१ इतिहासकारोए मझी क्यों उसका समर्म विपापशिना मा मापस पुगप्रधान के प्रमु शाममनी पुरा पहन करवा इता मगपात दिन म म. बाब महापुरुषना प्रशिम्प इता भने श्रीमादिसरिना शिम्प हता। भापी मम्मम्त सएसपे निमित की शाप के भगवान शिवारमारिनो समप वीरनिर्वाणनी पंचमी सानो जोगी मोइये ! ग्यारे सर प्रतक निममारिसर्नु मनुशासन पासdd , मान सम्मानय मामा यो मरिच प्रभुमार मार दीयसनम्मे इसने हाणाडे सार हर सामना करा पा र माता मिलने पति रोपापा यो माग गत सोयाँ गत माम्मर पति पर पगुना मोर और महामार्ग प्रथमपितार में पला प्रमुग पाया या पराम्पा मार सिमरिनी पयरे मुखिया राममरिमरम्परमपि पारप और मजे मगर पारा से सना महापारिक माम माप (यमविपपhtml बतरराचार) रापपा संगानुसार एवम दशमान परम्प ARTHATARममामा एनपी पार Autशि मेग विसर पर स्वरयर कार नानिमीatta ५) ८ भगवान पार निपावरतमीप स्कन्दिनवार्यमा प्रशिम्प एना माटे प्रमावक परिसर परवा रिना प्रमपम १७९ की १०८ रोकना क्षेस करे हे के पाविसरि विवापरगना हता । बापी एक बस्तु सिख पई नाप के के वार्य पीतपर स्कन्दिाचार्य के पेवो भीमरखाविस्मिा गुरु विपापर ग (40) मा एउठे भगवान बिनाफरमार विषावरगना स्फन्दिनाचार्यना प प्रशिप ले महीना मन्दिमवाना । बाली सामे एक प्रम भी एसय के के भीतरराविसौना गुरु सरीके मार्प जीतपर स्कन्दिगवार्पने प मानय मते कोर प्रध्यम से। एना उत्चरम एक प्रक्स मसा ए के मन्दिमूलना पाटकममार्य पौनयम स्कन्दिाचार्यना उडेख पठी मग पाच्छापापेना केस परी मानसपगगोत्रीप स्फन्दिाचार्मनो उमेर को ऐसे विकरना सममित सम्पनो भविस्म करी जाप के पापी पन मार्प पातपर सन्दिवापाने र विषापर गष्ठीय मानवा ए वषिक म्याप्प है। बोगी पर एक बात ए के कास्पपग्मेवीप स्कन्दिमार्य भयोगमर के एमने बागमनी चोपी माधना पापीठे ए निर्विवाद का बाचमा दशपर भगवान मामाची पाती बने भगवान सामी मगधम पारमिना चरवती से एमबमारी जाण प्रमाणे विवाद के पमहि । पापी सिद्ध के मगगन बनामीना उत्तरपती बमुपोगपर स्पन्दिनवार्य भीरपावितरिना गुरु समी पके प नहीं पटो एमना गुरु तन पे स्कन्दिाचार्यमो रोचकों के ए कौधिम्गोत्रीप वा- पावर सन्दिमाचार्य ब।बा विचारणा बसंदिग्णपणे वापणने पनाती बाप के भगवान दिनार सूरिम संरत् प्रालिमारिमना समझामन हता। 'भीनागनकुळे मीसिरसेनदिवाकरगछे भस्मासाम्या कसरता संवत् १०९५ सम्मेरमा 'पप्रम मगवानना जिममविरम भातमी पश्चतापविमाना बा मेसपी सिरसेनदिवाकरसूरिना मामपी गय पातो तो बने भा गठ नागेन (मा) पुसा भयो बाटई गाना मोठे। का प्रतिमा गम् पापरवश के प्रिपाम कुर क रिपार गठ बारा मोनोप ए माम्पनिको कारण कर स. म. मा मानो एक गम व प्रर्वमान बई गयो लो, मत प्रसिद्ध सिद्धसेनदिवाकर ५. मनागेन्द्र राम पपा केप टेम सम्म मपी मोबा. मुसित सम. वीकोप (फोटी) गण मीपम्पो चेभामती परम्पराम बासामीना निष्प बासेममा पिम्प वार्य मानिकपी नमासा मपी। प्रभारम्परिवार मागेगा नागेन्द्रप्रिप्यपी नीरथ्यो है एम पमा ऐ भन्दिसपिराम्पमा कार्य सम्मिने प्रमाणिपाना महापापना शिष्य कसा ठे वा शाना बार्यसभितमारती पर । पमनो समर यी से ५८० मो सामना मानुष माप है, प्रभारमरित्राम पापमपाक्मा गमि आर३३ गान सबेमा जाप है।
या क्षु जोता असीपिका शाखा पपेला अनुयोगधर स्फन्दिताचार्य केवी री दिवाकरसूरिना प्रगुरु होई शके ! सिद्धसेन दिवाकर रिने के एवोधीना गुरु एवबादिरि म ने कोई पण प्रम्पकारे प्रायोपिशासाना भोससाम्पा मपी प० श्रीकन्यामविपयनी पादखिसहि म० ने बरसेनना शिष्य विधापरपी प्रसिद पयेठा विधाघर कुम्ना नणावे के, पण मार्य मुहसिना शिप्ययुगल मुखित बने एप्रतिबद्धना शिम्प विषाधर गोपामयी प्रगर पपेल विधाघरशासान नागहस्तिस्सविर गणमा-माना पुतियुक्त छ, प्राचीनशासाओ कामान्तरे पुग्ना मामपी, कुशे गप्छना मामयी, प्रसिर पया छ । का न पात मागहसिधाचार्यना विपापर-गष्टना सम्बन्धमा पण मना पामी छे । भावी पा लिरि म० ने विपामर फुसना बना येशना कहेवामा बाले तो कोई हरकत देसाती नयी । मागी विस्मात् १५० नी गिरनारनी प्रशसिमा बणाववाम् अम्मु छे के वियाघरसंशना पादस्मिाचार्यनी वामाप (42)खादिस्मि० पया, थामा कशी घरा करवा घेवं देवं नपी, प्रमावकचरिबकाए एज प्रशस्तिनुं प्रमाण माप्य के सारे एमा शराबवी ए न्याप्य नबी। पीली पान नागार्जुन के बे पालिसरि म० ना गृहसशिप्य योगसियतरीके प्रसिब छे ते मन्दिनी सविरामीमा आवता मागाईनपी मिम छ, गृहस्स स्पविरामध्ये वेषी रोते भार! नो के पम्य पादम्मिरि म ना गुरु वार्य नागहस्ति नगी पण बार्य सपुगधार्य म कल्प पूर्णिम् पादलिममूरि म० ने मारक कहेनामा भाम्या छे बने नन्दिमा नागहस्ति ने पाचनशना पणा छ। वेषी नागहस्तिना शिम्प पादसिसरि होषा चोइये बाम नन्दिनु प्रमाण मापीने पादपिससरि म० ने मगहसिना शिप्प ठराका प्रपस पयो २ ते पर मपी फेम के मन्दिा आवता 'पठ माचकवंशो सशो मागहरपीण' मा बास्पनो वर्ष फक्त एटलो न पायक नागहस्तिनाचार्य बापक शना पण पमनानी पापीश शरू पयो एकत्री से कडेवाय । पादपिसमूरि म० विश्मना प्रथम शवफा पया के एम करमाक माने , ते पण विचारप्रिय छ। भनुपोगद्वारा पा लिप्तसूरि म० नी तजवतीनो नामोझेस मावेले वनुपोगर्नु निर्माण पी० से १५३ मी पोला के पण पठी तो नी बा प्रमाणे प्रमारक परिपना प्रबन्धपर्याचनमा ६० सत्यागविनपनी नणारे थे, एटके पादसिरि म० पी मि० १५५ पी पूर्वना आचार्य ए बात स्पर पई चाप रे बापी प्रसमस्कन्दिाचार्य म रसादिमरि म० ना गुरु छ भने सिइमेनरिमाकर परि म० मा प्रगुरु छ । भनुपोगपर स्कन्दितावामी पापना समपे मयादि पण इसा एम चैनपरम्पपना इतिहास म्। जगागाई , मा पात यो पावर रोम तो नितीपस्कदिगपर्पना प्रशिप्प Pाफरमूरिम० होशम्म ममी, पापिनमूरिम नो मुरणनी सापे सम्पप बनानाम माम्पो २ मां नाबार्पोए 'मुरण' मोगमा तरीके सख्त करेलो योग म, मानो इदिशाम हनी सी भपकारम् । 11. प्रथम भनुमोमशर सिमेनारिंग (प्रवासीमामानो पोशात) | १० एम्पबारी नागाहम बने सिरसेनरिमारनी विजओन साम्प देसाहीने दिवाकरमरिनो पांचम्म पपरा बोपा नामो समय निर्गप केटलाफ इतिहासकार करे हे ते विचारणीय छ । शून्पादमा मामधारणमात्रणी रिमाकरजी महाराज मगातुन्ना पपात् पर्चा हे एम की काप मी, शू-पारनो उदय नागार्जुनधी व पपोसी, शम्पद नितान्त प्राचीन छ न्यायन प्रतिपादन 'प्रज्ञापारमितामत्र मावाने से, सिरसेन बनीसमा मम्पममानना भने भूपादना निवर्णम मात्रची मागार्जुन पसीना रिमाकरम् के वापी कल्पमा पाप नाग । हो ! अरूप मागाईमती युक्षियो के मचना पो होत तो एकापना सापी कोगते । शिवाकरम्० म ना भयो म मात्र नाम मळे ।बापी मारो नम वमिप्राप के पुरी प्रपस प्रमामो म म मा एपी कल्पनामार्गधी कानो निर्णय करवानी उतारठ करनी गोरए मी। ५ परमदमारे दिवास्वसरिने मुतकाधिन मानम विस बापे । बापी पण प्राचीन-अतिप्राचीन सेवा गए । सी नागार्डने मप्पमारिकानी सतल परीक्षा प १५.५४ मा उत्पति सिति बने म्पयन के पेनु निरूपम दिनाकरमूरि म कर ले हेनु सणाम की । मापी पण सिदनपरि म नागार्डन बीमाटीम सिर पाप । बा आचार्यभीए दिगम्बर मतनी कमी मालोचना करी होय रोम समातु ममी, एटले दी से ६०६पने दिगमरापोडेय प्रमाणे वी सं १०९ मचे मत नौसम्पो रे मामाषी बता दिया करम् मोगा मोदए । पी बने सम्प्रराप मना मधमा प्रमाणापे ठरणो टाके । पी सं १९२ १९५ म्य पर्मसरि या एम मानयामा भावे । वा भाचार्य मगमनमा समपर्मा वा पुगवा पसारिसूति पया इस समनिपार मेणा वा सिरसेनदिमाकरसरिने वा वाचा- मा शिप्प हीमो पम उमेय करेमे । सिबसेनसरिमा गुरु तरीकेमा । माम प्राप्त माप । एप पारिसूरि क्ने बीमा का पर्मगरि महारार । ये सिरमनसारिए पोताना गुस्तके यममाषी एकतो पण टोटकों रोप तेम जोग बागा मयु मपी । यो मा बस्यनो समय मापये रोप तो परसारिरि म ने धर्मसमिना समानपत मानरा परे। जो बाबात सार्ग ठरे तो पसारि मरिमा गुरु प्रथम परिणचार्य व माता को गालो मापतो नी । सिकमना समसामयिरपणाम पप कलोप पाभो व्यो रहेको मरी । एक पात्र पम प्रभान मी उद्त कार और सिइसेमग्विाकरे को म्पारणनी एपमा करी दोही रोए । ए म्यारगर्नु नाम 'शपमा प्याण 1 निम्ना सम्पये में शिलो तामा मिटमेनदिवाकर पण पर ला । प्रेमनो र अन्य प्रमाणेर पगक' मा मामी को ठे गरिमामविरचित 'पोलिमिरग' में 'पमान्तरित आपणधेमहि मायभास्करपालिसा 1 नाव प्रातमी मिलनानिमामिप्यालामुरबार में मम्पमम् । पेर मानिक पध्मयम्यादी नाल तमुगा अपामार पुनः । ।
न्यातो वराहमिहिरो नपते समा रत्नानि वररुचिर्नय विममस्म । २०-१०॥ चैम प्रन्यो किमनी साये दिवाकरसूरिनो सम्पन्न सारी राते प्रसिद्ध छ । सिरसेनदिमाकरत्रिए झपक म्याकरणनी सोपति की होप रोम पम 'मैत्रेयरक्षिततंत्रप्रीप' मा बामा उसपी चणाप छ, 'पत एवं नाबमारमाने मन्यते इति लिग्रापरत्वादनेन हमलं बाधित्वा धमागमे सति ना मन्ये इति क्षपणकम्याकरणे' इति । तपा उम्मदचतिरपिक-ठमादिन्तिम तो स्पर शम्दोमा चणामुछे 'क्षपणकाचौ का इति सद भाचर्य म्पाच्यात ' इति, । चैनेन्द्रम्पारणमा पण वे सिवसेनस्प' मा प्रमाणे म्याकरणना विपस मा तेमनो मत टांकसाम बाम्पो छ । प्रस्तता नयचक्रा पण 'मस्ति मति लिपति पचति वर्चतय समि पातषष्ठाः सवा तपा 'तपा चाचार्यसिद्धसेन बार पत्र हि वर्षों बार्च म्पमिचरति नामिषानं सत्' । था बघा म्पाफरण सम्बधी पास्योपी दिवाकरसरिए म्याकरणमी रचना की इ एम माल्म परेछे बने ते म्याकरण नाम क्षपणक म्पाकरण हो ! क्षपणकनी स्ती होवापी बा माकरणनी सपणकम्पारणरूपे प्रसिदि पप वो विमना नक्रनोनं झपणकमामपी सिरसेनदिवाकररिज भाव पुपी समनाप छ एटसे विक्रमना समसामयिकपणा को पतराय बावतो नयी । म्पायावतार प्रन्पना कर्ता तरीके सियसेन दिवाकर सू० म० मी प्रसिदि । आ प्रसिद्धि न्यायाफ्तार बने भयाक्तारने एक मानीने पई पो ! नयघकनी म्यान्माम सम्मतिनी साये 'नयाक्तार' प्रवर्नु नाम जावे छे, पण न्यापारतारन माम भारत मपी । अयमा वा प्रतिदिन मळ कारण म्यायामतारमी एक कारिकाने हरिमदरिमहारासे 'महामविना उई' एम कहीने छीपी छे । पदमी टीका विनेयरमूरिमहाराने अतिशयप्रा सबसेन प्रि महाजमा नामनो फरेमो उल्लेस हो । परन्तु मा सियसेमझिमहारास सिरसेन दिवाकरपूरिमाराम के के भीमा कोई सिरसेनसू० म० छ केनो सायमानीपूर्वक विचार करमो मोरए । मा नपचनशाबना भत्ता नपावतारनो नमशास्वरूपे उठेस करवामा माम्पो छे, नहि के न्यायाफ्तारनो। म्पायाक्तारमा तो नयोनी सूचनामात्र जोगमा वा छे, नो कयो न विचार देसातो मपी । वेमा मभिकपणे प्रपणन व निरूपण करवाम्मे पाप है। एटस वा पायावसार दिवाकरमहाराने रवेश भयशाब नमी । जाना कर्च योगा कोई सिरसेन महामति शे! प्रख्यात दिवाकर शम्दमो प्रयोग होने महामति शम्दनो सहेस बीमा सिरसेन स्, म नी समावना तरफ सेंची गाय छे । उमास्वाति महाराघ मा भाचार्पमीनो बनाकेलो तरपर्यम्त्र' नामनो प्रश्य मेतांबर बने दिगम्बर को मैन ममापोने माघ । नपपारे 'तत्यामत्र' तमा ना सोपा माप्य' ना बामो प्रमाणस्से उदत का । वाम्म प्रेम पावमा विदामा बमिप्राय मेर प्रा। बाबाधामा मामी मार रामप्रेमी भरे परम्पारवना विपक्मा भावना मनो छोप मारेबापरखुमोदनम्बरम मासदार श्रम 'एसमतिमारपाचाना मठमा बनेका पी एमये प्रथमा लिन मात्र प्रेगाव शरिर म मा मानिसायमा बम पम एममा पाश्रम विकास मनानी मोषणा प्रेममा मारेकरमा प्पासपमा भाचार्य भी सिरसेनाभस् म. ए च पपनसपर्नु भयो। सम्पतिमी सार मरामवाट नाम भापी पम्मत भने बगावतार । -विपनि मारिमा बाबा सिमेन र म ऐष। । - १२ शैमिकमम उपचारमायो विस्तमा म्पहार'वामचम उपसम्पान माया नपम्प बाप । मेवांबरो ना माप्पना कर्ता उमाहातिम ने माने छ । महादिस्तिमहारानना समप पुचीमा पत्यार्पसूत्र पर मा एफ माम्प पर ! बा माय सिमामी तत्तामनी प्राप्त पती टीमोमा सामी प्राचीन टीस दिगम्बर देवनन्दिनी के मेवो एम्यपादना नामपी स्मात ऐ ने भो लिगमनी पांचवी पा श्री शवामिना मनाप ४ तेममी है। मा टौमा एक पण माक्प मारिसूरिए सीधु मथी। मा बाचार्यश्रीए सत्तामा गुणपायाम्पम् । वर्षात् गुण बने पर्याय बाळु द्रम्प कहेवाय गुग बने पर्पय ममेय पस्तुत' गुणा बसेना मेद नषी केमके भाप्पकारे 'मागत्तर स्वान्तरण पर्याप' एम का माटे व टोकापरे क्रममावी बने सहमाची मेदोने गुण कमा छे बने माप्पकानो पण बाम समिप्राय होगापी वागळ इम्पामया निर्गुणा गुणा'मा प्रमाणे केल गुगनु न पण पसे । गुमपी पर्याप मिम विपक्षित हो तो पायर्नु पण मण बस पस होत । बाब पर्नु विवाहिए एफटी- फरण स है। वी उत्पादम्पपम्पयुकं सत्' उमासति म ना मा सूवर्नु न पोषण सम्मतिमा पुगे। माटे तमासानि म० दिवाकरसूरिपी पूर्वी एटले उमासातिम मो समय विक्रमपी पूर्वनो के तमा बाधक मुस्यबीए व वने बापुने व माके, बर्षात वायु बने तेजनो मात्र इस शम्दनीय म्यपहार क्यों है। सने का विशेषण लगा नयी । पू० शिकाम सूरि म पाणे ए स्वर्नु मिररण करता म रेय हेम बापु बने हैन्ने पम प्रस न करता तेने सिमान्तनो निरोप न भाये माटे सूरमास कया , माटे उमाखाति म एमनापी पण पूना है। बा नपचम्नी टीमम्म शिवमर्मनिमी कर्मप्रकृतिनु प्रमाण मारे। बेमो छमाहातिम मे चोषी सपना बने शिवधर्मसूरिने पापमा सपना को मे, ओए पोतानी मान्यतानु संप्रेषन करपनी जरूर । बाबाचार्यश्रीए ५ प्रकारमोनी (बना की। मैन पहिरममा उपसम्म तीन संसत नयोनी चमाचोम स्पी बम बाटा संस प्रपनी रचना वामनी देशाप है। वा सूरपारमी म मा तत्वाने पू यानिमीमहचान हरिम्बसमधी दो बागम को। मैन परम्परामा पतष-पूर्वपर के दशपूर्ववर ये प्रमोनी रफ्ना करे २ ते वागम कडेनाप।बापी उमासातिम. दहाभर हा पचपूर्वपरोम अपश्चिममुनम यासामी म पपा के फेयो रेखा दसलकर पा एम्मी सचा निकासी की सीमा मनाप । मानाची उमामाविम ना होग मोदए । १५३ में उचर मपुरम्म अमम सपने मळली पोताना गुरु माई मा मधुमित्रना शिष्य का गमावीर वार्ष पर सामान्य रम्पु । पूर्वसमिरोचसोमाचतिविरक्तिनपायोंपरि बतिसक- माम महामाप रचितम् पाच तदपिप्रचाराणविवरणास्ते पपा परस्स ममित्तस्स से विपुमनाग शुन । मुनिगमभिविहिबगफ्यगाईयोसेर ॥१॥ मनियसामठरोह गैपपिपि। दोगुना माये समाया पुचप्रमाव पांगारीमा एक मेल प्रम प्रारतिपा प्रमेव चा पाया मोसमी (11)। १. मेनानिगारमय प्रस्त जपा ना मै अपनवसामचारवाधि मोल्माई इमामो निस्स। १ २०१५ विवरणमे रहवं दोसपासेस निकमत्रो ॥ २॥ वाप्रमाणे हिमतसलिरावटीम बणाम्मे छ । वामपी मा एक बात तो नही पाय छे के उमासाविम० ना तत्वार्य ऊपर गम्पहती वाचार्य महान् माप्प रम छे बने ए गम्भहस्तीम० वि सं २०० मा विपमान हता। एटले तत्वार्यस्त्रना सूत्रपिता वि सं २०० भी पूर्वमा छ। केटाको उमामाति म० ने पापनीयसपना कोमा हावापछे पण यापनीयसंघ वि सं. २०५ मा मीफल्यो छ । एम दिगंबर वाचार्य देवसेन कहेछ।ग्यारे उमाखाति म० मो सत्तासमप विक्रमपी नो सिद पाय छ । निर्पति अने भागमो नियुक्किना कर्ण चतुर्दशापूर्वपर बा० मद्रमाहुस्सामी म० छ। प्राचीन आचार्य भगवंतो नियुधिनी रचना वी० से १७० म पई के एम माने । म्यायावतपनी प्रस्तावना पृ० १०३ में नियुक्तियाँ अपने मौनदारूपमें सिरसेन के बादकी तियों है। बत एक सिरसेनपूर्वर/साहिममें साम नहीं। माध्य और पूर्णिया तो सिद्धमेन के बादकी । सियसेनविषाकरप्रिने मानना इतिहासकारो पोपी या पांचमी सीना माने छे बन वे धारा निर्मुशिनी रचना चोपी-पांचमी सदीया पानी सिद परवानो प्रपस की रमा छ । लत्पमा छट्ठामागनी प्रस्नानाम्म निर्गकिमोनी रचना विक्रमना वोगा सा नी ।' बाप्रमाणे गणामु छ। एटस से इतिहासविमो नियुजिमी रचना मीना सेकासी पूर्वनी छेा सुपी तो बाप्या छ। माम निर्पसिना निर्माणसमया मवमेव प्रथा छ । प्रस्तुत मयचक नियुकिनी गापामो गीत पपेटी । एरसे विक्रम्मी पांचमी समयी पूक्मी नियुकियोनी रपना छे एम शंकाने स्थान मपी। नियुजिनी बेम मा वाचार्यमीए नदिस्तनो पण पाठ यमो छ। मने ते नदिमा मुटमा निहिती पणी गापात्रो मुम्कार देवपापकगणीम स्टीपेली के. एटले मन्दिमी रचनापी पण पूर्वनी नियुकिलो छ । केटणक इतिहासको देववाचकगणिने देवगिमिनमाममण मानीने नन्दिमो रखनाफाल 0 # ९८० नो नकी करे के, पण से ठीक ममी । देवर्किगणिना गुरु देशगणी छे, ग्यारे देशवाचगणना गुरुप्पगणी छे । पेटमास प्राचीनप्रन्योमा देवपापकगणाने देवलिंगनियमाप्रमण सल्पा डे पण ते तो करप्रमी सालिरावयमा देवघापकने देवगिणी कपाते नामान्तर छ । वाममामी भागमोने पुत्रकारा करारनार देवरिंगणीशमा ममम पुरा छ बा बात करपम्पनी सविरामी बोतो माम पग्थे । ए सतिरावासीमा पेटिंगणिनाममणर्नु माम मे क्सन बाप रे । एटले देवरावराणीनु मी नाम का पण ऐई जोए ! फरसस्त्रनी एक स्पविण्यमा मिम मिम गोत्रीप दबगिणितमाममम अने दारिशमा प्रमण नाम के नाम बाये है। एटप्ले दरवायझगणिन मोर्ड नाम दवलिंगणि समायमग होई गोदए ! मापीम केरखाक चापोर देपावलीने देवरिंगणी मस्या है। पण वागम मारनार दकिंगणिक्षमाप्रमणगीने मनी 1 पू० मस्पगिरिम्हाराने मन्दिनी टीमामा देवरावालानो स्पष्ट उल्लेख करेगे छ । १ मामाचारको प्रत्यरना गमाविमो निसन म पो पायोनियो सपना समापनी समय प्रमाध्मिमी पायी मची पूर्पना र म देना हयाको मिरबारसमपिरपित तमसम्मतमारपुनावणीवमानमर्न मागुन मर्मचामि हिम्मादम अमन विभवामि ॥४॥ ।
। मन्दिनी रचना झारिरिपी पण पगी प्रापौन हो म मयचक्रम नन्दिने मापेर विशेषण उपरवी मनुमानाए औए । 'मगर शापि तपोपभूपते (नप.. ७१९) वर्षाव मन्दिने भगवान बारितनी बाबा को वापी नपिनी रचना पणी प्राचीन छ ए माटे हो पा विचारवाने को मपी मने वे परसा कोई पण महवाइ या नबी बीमा मइयानी कस्पना करमामा वाये रे मने विक्रमती ही साना कोमामा मारे । एते पी. स. १५० मा पपेग मायामामामाराम नियुजिना की है। जैनसिहाम्तोमो मूस वापार बार पाछे। वेना रपपिता पाचमा गमवर मुभर्मासामी मते बड़ो उपर टपानी सपना सतरमगतोए करी। वे मनो उपयोग सावित्रि म० एपी कों है। मानाचाय, समानाज मने मगरतीमी बाधम बासूत्रो छ । जीवामिगम पमागा बादि उपायो। उपम सूत्र तरीके प्रसिद्ध नदी बने अनुमोगाला पम मपघरे प्रमाण बाप्पा बाबा मोबने तेना सम्रो अतिप्राचीन मळना के कात्यापन मपचारे पामिनिना स्त्री, पार्विक भने केना उपरना पातममाप्यनो मे ये शपी उपपोग को । पौमिनिना समय यि विसनोम मतमेर प्रबर्वे । मन् चर्मन पणित मेक्समूसर ई.पू १५. प्रो. बर। पू.१. गोस्टमर--रों, मसरफर बने गम्मर.५ ७.० मि० रामबारे ६० ५.८ • मारतापाई पू. ९. पगितमालसामाभनी . २१ ० मीसुविष्ठिरमीमांसक ई.३२८. पोग्ला ग । बामदेव शरण मान पाणिनिना प्रम भयम्पापीपी पुरानामो रम् करी पाणिनिने युधिष्ठिर बने परधनमा समकालीन करे। पुधिष्ठिा मने पत्रिवनो काल पम मितिकोतेपनी गमी मुकर मामी गग १५१९ पूर्व हो । पमिनिना म्याकरण स्पर बने पार्विको क्या . । तेमा ममापनपार्मिक र प्रमिर । मा० मक्षामाप्पा मुसपणे कामायनपतिस्तु र म्यास्पान करवामा कार्य है। बारिकतारना बनेक मामोमापी पापि' भाम पण प्रमिले। पारगोमो मा प्राधिकार प्रामाणिक पर । पाइलिए 'प्रोगष भगस्त कम्म' एम कामायन माटे मगमा भानो प्रयोग क्यों है । पन दारनामिए मौमसायन (१ -८-१) मा सारित्वात् पाणिनेचन प्रमाणम्, ममरारि गम कालापनस' मा बायशपए कम्मापनना पचनने भएमाग टाम्मनपीन समयप सत्यमार प्रसापनने प्रामाणिक माझ्या समापन पतकालिपी पूर्ववर्षि भने पाणिनिया उत्तरपी १९५ किम । सायम् मापा मार मापारम्पारभार रेगामा मचानो।। प्रा रेमितिमे 'दीवर मनापमम् पा समयका पुरनगरमा परिचान सबा पदोन बोपानीमापारमा नारसमामार्मा समुरारपर मानर र पानोपा प्रमान मामा मात्र याममा मनमा बालरलो, दो बार माने शिर एम एएमसपना बीमपान मानg मरहे।
छे बामना समपरिपे विधनोमा मतमेद । चैनमन्पकारो नार्यस्युग्मना दिवा भने नंदरामाना महामामशक्टाम्मा समान कालीन माने एटसे वी० १७०नी मगमग बया हशे। पतबनिासमहामपम्पना समय बायतम पम विहानोर्नु ऐकमस्म पोवामा बार नयी योगदानना का ए प पतनि छ के बीमा ! ए हा सधौ पणउफेत्यो एक प्रम छे पर्वमानमा भापणी समक्ष ये मुद्रित महामयाम्प छ एना अने नपवा अपामेला महामाप्पना पाठोमा घणा स्वले मैद जायेबार्नु कारण ए के सम्पे समये महाभाष्य एप्स पर्युठे बने समये समये एनो उमर पण पयो । रारतरङ्गिणीमा करणे उल्लेस कोंछे के लिश्मनी बाठमी सताम्दीमा महामाम्पनो डोप भयो । पीनी पण भावा नसो मळे । भाषा गेप बने उमारपस्ते प्रपा मारे परिवर्चमोनी सम्भावना कारी नासमा मेवी नमी, उपर्युछ पाठ मेदोर्नु मूळ वाया परिसनो छे एम निःशहपणे कही धाय । नपचकमा मुटमा 'यस्तु प्रमुढे पुणे विक्षेप' इमादि रोकने महामाप्पफारे भाजसडक लोक कमो छ । वा सोक्ता कधी कैसर बादि टीकाकारोना मते कामायन हो! एई भनुमाम पाप छ । पधिप ध्ये छ के 'स्मृतेश्च कर्चा कानो भावनामात्र कारक' अर्थात् भागमोकरमपिता म को स्पति ना कर्ण छ। था कामापन शरद गोत्रप्रममान्त छ । कामायनकौशिकना पुत्र वरपि पण कामायनना मामयी कहेवाय छे, एमे कोई स्पतिमय पण रम्यो हशे ! मा कामायने पाणिनिम्घोषी फेटाक शम्दोनी सिदि नही पपापी सूत्रो पर बाकिनी रचना करी । फेमके "उकानुष्टुरकाना चिन्ता पत्र प्रबर्चते । प्राय मार्षिक प्रार्तिकमा म्यार्षिणः ॥ एम मात्रिकर्नु सक्षण छ । वा कामायनरसचिनो सम्म पाणिनिना सम्पने मनुसरे के परन्तु मामाप्पकार पसासिमी ३००-२०० शतक पूर्ववची छे केमके कामायनने पतंजलि सम्मान कि स्मरे छे । केटणार ऐतिहासिक कामापननो समय २० पू० चोपी सपको छ। महरि. महरिए को पण पोतामा प्रपा पोतालो कालो प परिपप भाप्पो नपी । तेम पोनामा गुरुर्नु माम पण साक्षात् माप्यु नयी । नयचरमन्यम् मझगरिसरिए मतरिना गुम्तरीके भुगतनो उल्लेख क्यों है। बाम्पपीना टीकाकर पुष्पराने पण महरिना गुरु तरीके ससुरातर्नु नाम मधु । मुरानो मन मपचक्र सिवाप बम्पर कोई पण प्रपमा बोरा माणया मदो नपी। बाबमे गुशिष्यमा मतनी मयचक कारे सारी एमी समाणेचना की है। मवारि पम पोताना गुरुना मार्नुभा मारा गुम्मो मत , एम कमा मना निरूपण करीने समान की समान निरूपण करे । महरिना समपविष पीनी पात्री सो पणी गरसमज फैलावी गधी । जेपी केटसार महानो मारिनो समप विशानी सातमी सीन उचार्ष माने छ । पुरिमि माम्पसक मेरम में० १५ पी पूर्वनो माने है। भारतीय जनमुतिप्रमागे महरि मिरमारिमना मोटा माई छ । , सम्प्रे सपनाचारवित प्राणि । नपचक्रमा भारती मरिना मतनी समाधना निछळतो मदान ए सादेना है। वेनी प्रधिमा सोट र एकमात्र परम तब से वा पगर तेमा म विवर्त रूप से एम स्पा मारम परे । एटले 'सिंग भारतवर्षपात्रा' (1• २७0) में महार मोहममानुपापी हलो सातबार प्राज्याने ग्राण की रती, नाम मे पलाया मा सेमेळ मामा म्यामोदयी बर्मुस भगा भीमा को मर होप । केमके महरि पण ये मम बई गया । मरिसम्प, मागधि, मीम्प्रेसामान्य शतकाय घम्वभावसमीक्षा प्रबोना फर्ता तरीके मरीन नाम योगय छ। बास्पपये, तेनी म्पाम्या, महाभाप्पीपिका बने मेन्यत्राचिना स्वपित्ता एक न पादासगाई महरि ।। परम्तमा तिप्प वा महरिना विष सिग कई मागतो न हतो एम कबीए तो पधारे पर मपी। माटे ठेला माघारे मारनी पत्नी सदी मानवी मूल मरेकै छ, केमके मित पाशमकता भारम्भ समपर्म कारनारम्य विधमान वामन सपा पयाविम महापापीना ऊपर सम्मिलिवरूपपी र सुन्दर विशाल म्पामा बेनु नाम फाधिकात्तिा १-३-८८ सूत्रना उदाहरणमा मर्तृहरिकत पापपरीने उरण है। बा काशिकापी पण प्राचीन दुर्गसिंहात करपाकरण- चिम्म 'पापविशवमसिरमा भा वाक्पपपपारिफानो उहेस । एवं शतपणापणना टीकार हरिनामी, में स्कन्दसामाना शिष्य हा, मेयोनो सवा समप एमगा उसपी वि . १९६ नो भो कुमारिममा सपा प्रमाफरने पोताना मावा इति मामाकरा' मा शम्बपी मरण करे है। "अन्ये तुष्ट प्रवेदम् लिपीतेऽर्षमान प्रक्रिया' सत बा" मा ते शम्यापमाही मतहरिने पण कारिकामा उसनो सामे पार करे । व्य कुमारकमा पण पापपानी १-११ मी कारिकार्नु उसरण करे हेपाहेपरम्परापी मारिनो समप अमारिममापी पण पूर्वनो सिर पाप है। कामाना समापबत्ती पुनारगतमा विमर्म महरिनी एक गुमा। ए गुफा निम्मादिमे बनावी एवी मा मसिधि है। एमी ने सनम रे ग्पा मकानी प्रजपानी स्वीमा पण महारनी गुफा प्रसि।वापी पति पाप महरि बने विनमाविस्फ्नो जहर समय होगे गोदए । मच्यासापर्ण बाट बने बा नयमाना पर्च पण महारो नपरे । प्रमपिता- मणिमा मरिनो महाराजा साम्मा माई तो उसके। मदारमाश्यिय समुत्रगुस रिफित 'मचारत' मा अनुसारे एइक राजा को सम्ममा प्ररर हता। मारा अनुसीम्म प्रमाणे हक नमुभित्रमा परी भाग कोबर होनो योर (बोद्रक मदर-यूसक एम मेसनमा परिवर्मन पपु बसे1) पायुपुराणमा एपी सोकर बारी यना बसभित्र पसे गोदक सम्म पामो सममिना मेमे परामी बने परदेसी प्रमा साये पुरमा उपरो । बाबोर १८ गभग सम्पमा लो। बा पगार परमोन्य सापेरावी ।बा गाए ' एक मामना नारफनी रचना की नन्दपरमैन मामना दाम्मत मान बसपारवर मा सहक रामाना पहिासकारो का एक राजा तो एम करीने मम पारण परे । पापा ! १५। वामे पम्पने पितरमजान छापला ११४-१५ धर्मकीचिना समसामयिक गोविन्द चम्ना पिता सिमसमनसाये मालत्रदेशीय राजशर्मा पयेग कोई मारिमी भगिनीनु मा युएनो केटाफ संशोपकोनो मत हे पण वा मवहरि वाक्यपाना कापी भिम है। शम्दामसिदान्तना प्रतिष्ठापफ मर्तृहरिने तो दिडाग पण यार करे छ । माटे ईसिंगनो मापार हाने महरि, धर्मकीति, बने कुमारिल वादिनो समयनिर्णय करपो ए ऐतिहासिकोनी मूल छ । न्दी नयपक्रकार नपचक्र शेपिकावना निरूपण धने मिराकरणना प्रसो कटन्दी' नामक पम्पनो उठेस करे। बाप कणादसूत्रना ऊपर भाप्प पा टीकारूप हो! ए अपना कर्णन नाम मा प्रन्पपी चाणवार्म मा नपी केमके प्रयकर केवळ 'फटन्दोकार' मानो सामान्य उछेस करे छ। बा कटन्दाकार पैशेपिक पणित सो! हाम्म उपळम्यमान पैसेविक-स्पोम वा माप के टीकानी साड़ी के एना उपर टीका-टिप्पमो के खरगों का शेप म देसात नथी । पण 'चनर्धरामवनाटक' ना पाचमा गहम्म कटन्दानो पिक-पमित रीये रापणना मामनो उठेस ले-“रावण-मो मो छक्मण| वैशेपिफस्टी- पणितो चगरिनयमान पर्यटामि कसौ राम : तेन सह निमाविमे का पंफिपी एवण कटन्दीनो कर्ण एम स्पट पाप । पचिपति उपाप्पाये कटनो रागणमाप्यतरीके उसको छे बने मान ठेकाणे 'पापकदीनो पुरानो पण टोम्पो । बा शवमने न पेदमाप्पमसनार 'सायणाचार्य' पोताना माम्पमा स्मरण क्यों दशे । वैदिकसाहिल' १३७) बढदेव उपाप्याय से है के रावणे शो कपर माप्प पण एवं भने सापे सापे पोतानो पदपाट पम प्रस्तुत कर्यो । । वाक्पपदोपटीकाम टीकाकार पुष्पराने पर्वत्पदागम मग्या' मा कारिकानी म्यास्यामा पर्वतात् प्रिक्वेश्ववर्तित्रिनिकोशादिति, तमुपमतले रावगविरक्तिो मूलमूतो म्याकरण्यगमस्तिष्ठति' वा उल्लेखमा बालो पन रावण कटनीकार हो! तपा वेदान्त पररमाप्पनी एनप्रमामाम्नी टीकार्मा के 'रापण्णीते माप्ये लपवे इवि चिरन्तनशेषिक- पार्द मा पम्' माम पैशेषिक माम् रापप्पप्रणीतमाम्प नी सचा सिख पाप । वाधा रावण एक व होप तो बामो सम्प पतवासिना पहीनो बने बमुरातपी पूर्वनो सिट पाय । १९६९.नि.से. मो प्राके इस्युपाद गंगापरमामा पुत्र मादेन धर्मए सेशोषित पिकदर्शननी प्रस्तावनामा बन्य के पदार्पसहराभिष-प्रशस्तदेवप्रणनिशेषिक सूत्रमाप्यस्प साक्षात परम्परपा वाम्माम्मा सपैकर, रितीपा तु राणप्रगीतमाप्प मायापीया तिरिति प्राचीनतरे रावणमाष्यस्य सशर फिरणा- बममात्करहतनाममानिदेशादवगम्प' भापी अनुमान पाप ठे के पा मारापा पिप बाम्पस रो बने माप्पाम्प राबगात कटदो। था मे उपर प्रशस्तमतिमी टीटीकानु नाम हए भावाचा प्रशसमवि नपचकार-कपादित्रिचीमा पूर्वरी छ। मा बात तो मिथित बरे। परम्त केटला प्राचीन एनिमित ठे। पदार्यवसाना का प्रशस्वदेव एममा बेटा प्राचीन मपी एने ग प्रसवपाद पण कहेबामा भावे ।भा मारामात्तिनो प शाहरमिम पोताना शेषिकसूत्रोपकारी वाम 1ो-रामलाल चौखम्बा काहीरय मुपित मागविन प्रचालना।
१८ करे उपसभ्यम्पम शेषिकसना टीमकारो प्रशस्तमतिना मानो भक्ति नहस करे। भोषिक रानिक वा प्रशस्वमति गदिसूरीबारना पूर्ण के बातो सिर बारे। बांना पनेक प्राचीन क्षेषिकस्वना पारपाना बोहोरा छता नपचनमा कटमार्नु मन शा माटे करे । जगत्वम् ए मनमा बैन न तरफपी पक्ष करीने तेन सणाम करवाम्य वाम्मु ऐ म देना प्रतिरामनायें प्रचारे ते गण पस के एम कागे । नयपता भम्पासपी मा हेतु साव गाणी शरम्प से। कटन्दीम वाला समयमा रापनपी एक म्मुमान पाप के समयमा पण त्याने भ्यायनी सीए वर्षामा पासो थे। बाजे वा कम्दीमच सखाप पई गयो होगाची बापगने याप्प गयो । बम्पर वो मानई से के जैन शासनम भनुक विमाने म्पायरीमए प्रथम बस्तनिरूपण ते पोम सामान्यतया निरूपन भावी कल्पना करवी निर्मळ । प्रयासमति भा एक पैशेविर सूचना प्पास्मामार बानो मलेस म गौरमाध्यममा गणो मोगा मळे से। मनापी निर्मित पसो मन्त्र के पापमा वाम्मु नपी तो पो केनी प्राप्तिमा पे कोई । फल ते ते मधोमा एमना मामपी सरेण वास्मोग योग मळे । वामपथम् टीकम कटम्बो टीस्या' (१९२ ) एम पशयपी करानी एक टीकार्नु बाम करने में । मागळ 'टीमा प्रशसमतों (१९२१) भाम मसाने ते टीना का प्राचमति से एम वापणने मास कारपरे । भायी रोपिकाबनी कटौटीमा राममहत देना उपर प्रशिक्षादिनी टीका दम तात्पर्य भीक छ । गेम पूर्ण बरोम बबन्नु भने दिमाग वा कमेमा मत साधे साधे निराकरण कसे वी राते बरी पण पटी भने तेनी टीका साधेपणन से। 'मुलिपिकर नाम्लो सम्पकारका रुपरनो टीकाम। म प्रासमविन माम तमा दिस्नाग साना बोलपमितोना मतर्नु समन । पण तेने धर्मचिनो सोस नयी पी बाप विनाग बने वधिमा मध्यानमा रको पम अनुमान राम के वापि सेपिकरमना पकनारसन पणु प्राचीन में मिला प्रम्पोम विरोष मामना पवाय- पर पणो मार म्कनामा पाम्पो तेना कपरपी ए दर्शननु रोपिक खु नाम पर।बा दर्शनना (चमार माटे कगाद' कममुर कपमा भने 'मौसप' एवी संशा पम वापरणाम बाये। मामा मुख्य प्रविपाच पदार्प इम्प गुण, कर्म सामान्य, निशेप, समवाय मने अमाव । बेने बनेक दर्शनकारो एफ या पौगारूपपी सीमारे पिक सूमो अतिप्राचीन होगपी पाठमेद होगानो गए समय माठे मयपरम भारता पागे सारे मुद्रित बसेषिकसूबनो पाठमेद देसाप ए सामानिफ। १ मा पर पर ममताकीपन (महा-परमातम्मन) सामोक्षस एप लोनयनो १९ - बा सूत्रोनो सारांशाने प्रशखपादाचा एक माप्प, निर्माण कार्य पेने प्रशस्तपादमाप्य' कहेवार्म पाये छे । वस्तुतः या माषा माम्पसमण न होमाथी एने माप्प न कहे गोइए । प्रशस्तपादाचार्य पण मा निमन्मने माप्प न कहेता पदार्थमर्मसार कई छ । 'प्रमेयमसम्मण' (पृ ५३२) मां पण ‘पदार्थ- प्रदेशकाप तरीके एनो उठेस क्यों छे । प्रशस्तपादाचार्यनो समय ई० स० पांचमी सवी मनाय छे। उपनिषत् म्हामारत तपा वैदिक प्रन्योना पा उमरणो नपचनमा बावे भने सनिरूपणने मटा निरूपण बहावमा 'अनाह' वा प्रमाणे वााय म्फीने उपनिषदोनों प्रमाण टाक्या छ। भानपानो रपनाकाळ बामणपण्डितो पणो प्राचीन माने । मा उपनिपत् वाम्यास्मिक मानना सरोस । वा सरोवरपी माननी मिम मिल मदीयो तिमीने मारता म्याफेठी छे। संस्थलोदाम्त भादि दर्शनोनी वापारशिला है। मा उपनिपत् वेदना वन्तिममागमा शान निरूपण छे उपनिषदोनी सच्या पणी होता छतो दश उपनिषदने वेदान्तियो प्रधान माने । पैवेपिक मवन म्पारे सणन चासं मारे मनुवादिसरिए निष्ठासम्बन्धयोरेफकारत्वात्' (ससमारे) था वमनमो उस क्यों है । पोतकरे पम म्यायपातिकमा वा बचन ली है। पण वा वाक्य बोत- करन मयी । बीमा कोई वैशेषिकसूत्र छपरमा प्राचीन प्रमर्नु मा प्रापीन प्रत्य वास्यमय हो! तेपी न टीकाकारे मागळ पता इति त मायकारामिप्रामोऽनुसतो माष्पकार' मा वाम्प म्कीने बाल्पकारमी सूचमा करी एम छागे । नाम्पाप म्पर कोई माम्पत्य हो ! एम पण वा बचनपी ज जाणवा मटे छे। आ भाप्प ऊपर प्रशस्वमविनी टीप द ए सम्मनित 21 ने टीमानी प्रयकारे खळे स्ले समालोचना करी । यो के मादिदेवरि म० 'स्यावाद रत्नाकर' मा शेषिकसूत्र ऊपर भाष्यकार तरीके बारेमनो उमेत कों । मा माप्प वेमन के गोगा कोन ते नकी फरमार्नु बाकी ये छ । 'संत्रासादिभ्योऽवगन्तम्यम्' का रीते टीवरकार कोई प्रन्यनी मगमण करे । वे वासार भगवा 'तर बा ते शोपीने अपंसद्रा' नामनो प्रव बाबा त्रार्य' बाम छोपीने सहाहारिम्योऽग सम्पबा सारम्पारिमामना वाचार्यात म्यामरणतिपयनोप माप के पीगो कोई मंस छ वा पाण। कठिन। १ प्रथम ऐमीपर मुनि कसामन्यता । परार्ममाए नसते माया पिरम्तमा माप्प भूमिधमा एक फिर से परामात पारंपमा प्रसठे मामातवा विझपरन्ति परमवम्, प्रमनपरम्म पास प्रायवे परन्तु समय मापारससम्माच तपास्मातीमामा शावमिनाम पर । स्पिान मा पपोतरमा प्रे. सुपीए पोलमा बामवरणमाना 'म्यासितिमिओपोवारम्बस्पाम्' नाम म बासरचना भारम्भमा गरिए 'या रसपा पिता ना सिन्ति परति मोकापरसीरप्रति मतपी मुविम्मानमाम निम्ममा हिरे विज्ञापनों'सा' श्य बात भी बनामार होषापीमा पनि निम्ममा एमभिपता मानिमिपीमनवमय पमेना म पयायपाठ पनमा रोगको एपे विम्पप बन पराब पर उपोवारमा पम्नुपी पूर्वकालमा तर नापना मन निराकर भाषी रत्नाप पोतारपीमात् किमी पूजन है. (मरिन पुपर्नेमाचार्ममी पारस्वतमनमानामा)बाम मान पापी निरमसमप्रमेन परिमाप मजामा भिनाबाना रवि पपिरन् या श्रेणीसमर्नु वचन परेप पी विमारिपनी सचामा विहामाहोमा पिसार एसोप का मन्वप्प मात्रौ प्य महि।
। 'प्रोत्रादिति प्रलसम्” गोपहियाणानां मनसाऽविष्ठिता सिन्दस्पर्शरूपामगा पपोकम मरणे पम्पना प्रमाण प्रससम्' या सौम्यसम्मत प्रमझने लान बने म्पास्मा भानु सप्पन मा प्रपमरे से छे । उपोताना पापपार्मिक' में गिरनागना 'प्रमानसमुचय' म सिद्धसेन दिवाकर नी वियव प्रिंशिका मादि प्रमोमा बा मधमनो सस योग मागे. पण मा सक्षम क्या RE- मर्नु बनाईते उपोतकर बादि कोई प्रत्यकारे जगा मपी 1 t *यामकिशात्पर्पटीका' मा वासस्पतिमिन पागण्यसापि ममममयुपनिमा-बोत्राविचिरिति' नाम की तो पण प्रत्य तो माम की मपी । 'सम्यसमति' मी म्मास्यारुप 'मुक्तिदपिका' माम्नी टीकामा 'मोनाशिचिरितिमा' वाप्रमाणे गोगा महे। बाम पण कापा मन्बर्नु पक्षण ए स्पर पर्व मपी । परितम् परत मागम्पनो कनाको प्रतिप्रायन पतिक नामनो को पुक प्रय झयम्प रन्तु पशि तन्य प्रणेता 'पाधिसाचार्य पार्षगण्य ठे बने पशिवाचार्य भने पगम्प एक सम्पटिर्नु माम मिम मिम म्पति एनिमय ऐतिहासिकोमो मवमेव प्रस्ते ।। 'योगमाप' मा पोषापादना १३ मा सूत्रम 'तमा सामानुसासने 'गुणानां परम कर्पन अर्पिपपपति । पुलिपपमा सम्मान समाम्" मा भोक पानी म्पासारूम सलधारम भारस्पतिमिले पतिस्प पावसमा प्रमाणे कसे । बाम कारकाने 'न' मा पीडा बम्पापना मा पनी 'मामती मामनी टीकाम बारस्पतिमि त एष योगशा म्मुत्पापिता माग स्म मापान मागण्य एटसे बाचस्पतिमिम परिश्मा कर्ता नामाण्य के एम माने । बा नयपक्रम स्वीय परम्प लिमाशिष्यते वागणे तने सम्पषितामिमवम्' अर्थात् म्छमारिसर पण पत्रिना कता बागप्पने माने ।वा पार्षगप सपण' मा पनी सिखना प्रथम शवममा मध्यमा पर्चमान सम्सयोगाचा वयमणे मार ऐसिसिको माने थे । पीनप्रसी ऐतिहासिको परितका वा पञ्चभिसामा मेर इण पण परिवाना की पशिवाचार्य के एसी माम्पताने धारण करना। "त्पवित्रमा मुनिरासर शकम्पपा प्रदी। बारिरपि पचमिसाय तेम थापा त्रम् ॥ शिथपरम्परागतमारहाणेन तयामि । संविष्ठममितिमा सम्पम्बिाप सिम्यम् || Rat sो बस्य परिवत्रस्य । भास्मापिकालरक्षिता' परवावरिपश्विाचापि" बा कारिकाबोनो सारी ने विचार मामा मारे तो बिरुण तिने पशिणाचार्यनी विप्रने वा पात पवाय मगये। १ मत पाने नितिन खमरित्र' 'पारिमा सुमित्रा भाषा परितरा पनि बीमामायबरबारमा बाबारे सोपविर मनायसे पीक मामाकपा माल मातीमावा, पासप्प एम समयावी लामा गोमाजी पास पर मेलामा बाम पर्याय नवदीपमा मतदान पनि बम मीठा- मा पोषामा बामबाबततिर मामतीमा 'रोनबाईपापा बारममावा पार्षपच मानस ममा बोपोसफ्ना परवा नमामा पानी परिवत्र गयो म एम मारने पारस नी । मा वामाचा गोममा पानिपत (पार बम्पपमितरना) ! म मारे योगा परमया नाम पतासात परमो प्रयोगा।
'अयमाग' में 'पत्राशिसेन मुनिना बाषा हल संत्रं पतिताम्म पनि लमिति तत्रय परिरपा म्पान्यावा' बापमागे 'शराचार्य' पम को । 'सुवर्णसप्तति' मा पण 'वर्य पाधिस परिसासगापारमक निपुर्व तत्र प्रोल्यान्' ए च प्रमाणे चौका मळे छ । वा पएितंत्र वाचस्पतिमिभना पोवामा वायु नपी एम बमाहे मान के कारण के रूपतिनया स्पितिशयाम परस्परेण विसम्पन्ठे सामान्यानि त्वतिश्पै सह प्रवर्ग' मा मायने तत्तशारदामा पशिस्यचार्य- मनाचे छे पण विक्रमनी छठी प्रतामिम् पनेसी पुक्तिदापिकामा 'तमा च मगवान् मार्पगप्प पठति' वा प्रमाणे नाम्मेझेसम्मक 'सपाविशया' वा पायने टा' ठे। वेमा व 'तपाच पार्पगणा पठन्ति तदेतभैमोमै म्योरपैति इमात्र प्रतिषेपात् वपेतमप्पति निनाशप्रतिषेपात संसर्गाव सौरम्पं सौरम्यादानुपरन्धिरवि' वा बचन मावे के पेनो 'भ्यासमाप्य मां पण उसबाये लेनी म्पापल्या वाचस्पतिमि म्यासमर्पिन से एम बमामु । बा पात्मने फेटछाक इति- हासप्रेमियो म्पायसूत्रना 'बारसायममाप्प' मा गोईन म्पास बने पारसायनमा समयमा पौर्षापर्पनी कस्सना करे । वाम परितंत्रना कनिषयमा बोगस निर्णय करी हास्यो मपी । येमा 'परम्पर्थ' नामना बौदामि मने ऐतिहासिकोने अणबामपणे ज करण । बम्ने वो धागे के के पार्पगप ए पक्ति विपर्नु माम नपी पण नेम माल गोत्रनिप्पमाम हे पक्षिक- सामीन वारस्याफ्न बने उपोतकर भाखान के तेम पंचशिसनो न वपर पर्याप नार्पगम्य हशेबपगण गोप्रपी बने थे। पाणिनि सूत्र गर्गारिम्पो पम्' या सूपना गर्गादिगण (पगण शाम्द 'अपगणस्प गोत्रापी वागण्प' बाप्रमागे पन् प्रत्ययान्त मा अम्द । 'नगदिम्प फर' का सूत्रम बाग नगदि- गण में 'मिशर्मन् पगणे का पाठ माने छे पगण गोत्रम धमिशर्मन् शम्मपी फरुममप बाये था गोत्र पारिमाधिक। पार्पगम्प पर कृष्णाना गुरु अपम काा बा प्रमाणे परमार्थ करे, पण ते साबर नपी केमके समाधीम बर्षदागम भनुमोगार, मन्दिसत्र कम्पपत्र मा मगरवीगीमा पण पतिंत्रनु नाम भाये । मत् परितंत्र पूर्ण च प्राचीन हे कोई टेकाणे पवित्रना कचा वरीके परशियामार्प माम बारे तो कोई ठेकाणे पार्षगण्य नाम बाले ते परस्पर निम्म नपी पण एक गोत्रम माम पारे बोम्पदिनु नाम बमे एक के एम मगे है। ईपररुप्म नपचकारे इमरहण पिरकित सांभप समनि' मी एक पण कारिका लगे मपी । पण प्रभानपणे पवित्रा निस्मेन म पदार्पो पा । वापी व भेमणे दिमाशिम्पवे मार्पगमे तो माम का। ईरहण निकमनी प्रपमहाना मनायामा प्रकारे म्प म्पो सडनीय निपय यो छे वे सदर्शनो मा मूठमूठ मन्पोनो न मापार भने । वापी साम्पसमतिनो बाधर महि पापो होस ! पालिपपमा नियनो विचार करो। मा सम्पसमतिनो सणनात्मक पप यमुम्पुए म परमार्पस्मति से एम बौर ऐधिसिने माने है। वेबो को के एक समये मिवासी नाम्ना संख्यामा बमुबापुनी अनुपसिसिमा सेना गुरु २२ दुमित्रने बाद राम्यो, केटमाफ समय पछी गुरुना पराजमने समिळीने यमुबपुर स्प्यिासीने शालार्य माटे नामवम बाप्प । परन्तु मारे ते पिपासी पर पाम्पा हता । यी पोताना मनने संतोष पावर सम्मसमतिना समनमा सम्पर्पसहीनी रचना करी । परम्तु वा हिप्पयासी ईचरहण मपी पम अमने लगे (मो माफ ऐतिहासिस्ने एम पम कहे के सरगनो नमुक्पुना शिप्प रिनागमी सापे उप- कशाचार्य पयो हलो । म ईसरहये हारी गया होग मत मारपर्मने सीमार्यो नहीं । वारी मिपण्ण पां बिस्ना छोपवेध बन्च की गयो । पी मार्यमभीनी प्रेरमागी शान्त पाने प्रमानसमुचपनी रचना करी एम परस्पर विस्य पातोषी संशय पाप के मारे कपनो कर्ष साई छ गमे वेम ऐप सांस्य- सन्तिना कर्ण विन्यासी थारुण नपी। केमो मेनो सिमान्त निमिष, सदिक मामला एक सम्माचार्य हता। तेनी सामे सुरमियनो पार भयो बसे। 'पदेव दपि धीरे पल्ली तरपति च । बदता रहिमेनेष म्पापिता पिम्पबासिता ।। बा प्रानन कारकाम पियसौ दिनो उमेस छ। भनुयोगदारम कनकमतिनो उहेश था कनकमति (सुवर्णसहति) सस्यस्मति मानवाम्य पारे तो ईरहण विक्रमाम्प कानो भरमा नापी पूर्ववत्ता साक्ति पाय छे । मा बात तो मकी के बसम्पु अपना विग्नाग नी सापे मायनो को पण सम्बन्ध न हो। सहरसामी, हारम्बार, बने पटराचार्य मा बगे द्विान, मुम्पुना शिम्पो इता ।माठापा सन्म- सछीनी पाया रची मेनो चीनीमाषाम अनुराद परमार्थ महाशये (५ -५६ ईस) को हो एम और ऐािसिको को छ । बा बातने इतिहासकार विकसमहाराप सौम्मता भनी । बमे पण एम च मातीपे छीए । केमो मायराति भने परम्पर्पना अनुपादन पोई पम साम्प पेसात नपी । मठरपिम्म बिरहमने मामानपूर्वक पाव करे । माग्न नाम पण भनुपोगारम मिप्याभुत्ला उदाहरणमा माने । भीमगनीम फेस परितो म उसले माठे सरकण बने बनुयोगा पडित माटर प माराचा ऐप तो माठराचार्यनो सम्प भीमगवनीमीना पछी बने बमुपोगहरपी पोमनो एम सिम पायो । अनुपोगहारकर्ता वार्परक्षितसूरजीनो समप विक्रम्मत ५२ बम बने धा ५१ युगप्रपानपर १११ सर्गवास १२. म। सामन्ना शिष्प परिमासरे पण देनमसिर बनेकान्तम्पपताकादि महान् प्रयोना स्वपिता दरम्बसूरीवरपी हुदा है। बैनाचार्य हरिम्हरिए तो पोताना प्रमोम वर्मकीर्ति बाधि प्राचीन बर्गधीन बौदोना सिान्तनु निराकरणकाई। नपचक्र महानी सरिम प्रथम वरम्म सुर्विज्ञानसमझी नीय निजातान्ति मो त नौकम्' बाम 'दुरचम 'ममिवर्मगम' वाली म्पाम्पारुप पमित्र विरचित 'प्रकरणपाद' नो पण निदेश १ मत पनि पम्त पन्तमायाम्परयात नियमापी, प्रामबार परमात्मापागात स्वंय इत्रिगत निम्नतिजा परिकामावमिकासरे बपितरबमेवारीमा निस्पती साविक प्रापरे, सम्मानमानापमहापानामनामपरेशम, रुस पिपानि बाला मान्य मनाम वियपाटिमा इस्मन्य पाचौदि नियमापी, बचीति विजारमा ।
। २५ कों छे । तपा 'धर्मो नामोभ्यते मामकाय' पदकम्पो म्पझनाप' इति वमिधर्मपिटकसारिणम्पोना वचनो सेवा माम्यो । पुरनो निर्वाण समय ऐतिहासिको नमी करी शस्या नपी । भारतीयरूपरेसामा जयचन्द्र मिया- सहार ६० ५० ५११ चणावे छे, बौददर्शना पं० पठदेव उपाध्याय लि० ५० १२६ ६० पू० १८२ बतष्ठाने छ, पुनसाङ्गना समय पुश्देननो निर्वाण समय कोर १२०० वर्प कहेता हता तो वाचायो १५०० वर्ष कहेता एवा फेटछाको ९०० वर्ष बोता हता, फाहिमामने कोई एम के पुरनिर्माण ६० ५० ११०० मा पर्यु फेमके मतिनी सापना पुरना परिनिर्माण पछी ३०० वर्षे पई हती । ते पसते हान देशमा चामशी महाराजा पिझ्नु राम्य तं पिङ्गनो शासन काल ई० पू० ७५०-७१९ रखो। भगवाच महाप मुझदेवनु निर्वाण मारत मुदनी पछी १३५० वर्षे वर्मात् वि० ५० १७३० मा पएशे एम बणावे । पम्पास भी कम्पाण बचपनी 'परिनिर्वाण संवत् वौर चैनकार गणना'मा महापौर निर्माणपी ११ पर्ष ५ मास पूर्व मुख्नु परिनिर्वाण बयु छे एम वगाने के बाम मुरनो निर्माण समय बमोबस । पुर निर्वाणना पी अल्प वर्पोमा म प्रपम परिषद् (सीति ) मळी । पीजी परिषद् विक्रम पू० ३२६ मा बने श्रीयी पशोक रागाना राम्पकाळ पईस्ती । आ मे समानोर्य सूत्र, विनय, बने पमिधर्मनो क्रमश माह पयो । से पछी पाटलिपुत्रना राना फुशामरशीप कनिफवारा काश्मीरना समीपमा मेगा पयेठी पोपी समिति विवीय समुमित्र बने अपमोचपुरसात स्पतिरपावियोए त्रिपिटक ऊपर माम्य बनाम्या मेने 'महातिमापा' को । कानिफना सम्पविपे ऐतिहासिकोमा मतमेद पाछे । केटाक ऐतिहासिको ई० पू० १०० मा कनिनो शासन काळ कई छ । बानी रामसभामा पमित नागार्डन बने अघोप बता । अपोष महापान सियतना प्रपत्रक के एम मनाप छ । नागार्डन बममोपना पछी मागार्जुन पपा । एमणे 'मप्यमकारिका लिइम्पापरिनी' वादि प्रन्योनी रचना की के। गौतमीपुत्र पहनीना समसामयिक मनाय । यी ६० प्रपम शतानो प्रारम्भमास भावे । मा नागाईने पोताना 'सोस' प्रपमा यात्री सातवाहमने परमार्थ बने म्पहारनी शिक्षा मापी छ । प्रहापारमितामा विस्तृत मवेचन करायेडा माध्यमिक माने सर्फ सतपी विस्तारपूर्वक विवेचन करनार नागाईने माध्यमिक फरिकामा शून्पानी प्रतिष्ठापना की है। मे मुखना प्रतीम समुत्पादने विकसित करमार है। मा कारिकामा नागार्जुन पोवानी वार्षिकशफि बने वर्गफिक प्रविमानो परिचय कराने के। मा जगत उत्पत्ति मात्र एक प्रसिमर बमोनिमा समयमा सानिमयेने पोवामी सभामा मागलाद भार्मक मा। मातृ भाषामा बमम हता। देवी मनिकन पर सो। ते पर 'महामनमोना नामवी विगी माषामा पासपन विपमान है।मा निगमपी ४ पर्व पर्म बसा हता। (भारत का इतिहास 11) म्न पत्र पनिकार । पर्वमा हा स्मथे। - सिति बने ध्यपहपपी बनावनात सहप के।भा दार्शनिकोनी मान्यता छ । मागार्डन तो मा माम्पतार्नु निराकरम करे । कार्यमणामी करपना र टकी प्रस्ती मी एटले स्पति पगेरे केम बई शके बने त्रा करनालो 'न तो मापि परतो न भम्पा नाप्याजवः। सत्पमा पातु विचन्ते माना कपन बम (कोटिविनिर्मुक तत्व माप्पमिका लिदु ॥ तचरा पायवर) वा माम्पमिक कारिका (११७) पी निएकाप करेहे। बाप कारिकाने ईने नपत्रसकारे नियमनियमार (१२) मा विस्तारपूर्वक विचार को है। मानी सिदिम, पसिमि, मुक्ति, बतुपाद, सामग्रीदर्शन क्न परमनहप हेतुखों के रेनु निरुपम प्रमाण- मासिकमा पम निवारणी करे न वो गाने या प्रकारे पग न्यगर्नु निरपण ये है। बम् बाम बाद मरना स्तरमा प्रीत लियोनी निराकरण करेंगे। बामना शिप्प बामदेवे पातक रखामप्रकरण' वादि योनी रचना करी रसपाक- प्रकरणनी ज्या सर्प इति शान' का फरकाने मपरारे मेथी । मा पर्नु बोर्ड नाम 'मुभिप्रकरण पम । माना उपर दिनागे एक पापा की हती। बामार्म परषु पौडम्तमा प्रकाण दार्शनिक हता । रामा कनिकमा समपम नमान' सपर एक महान् मा पमु निर्माण पर्यु तु मे निमाषा कोषाप। ना व्यर 'महामिभापास्याब' मामी एक टीका ।ए माष्पनो भाषार मने बसस्नुए सोपा मिधर्मकोशनी रचना की ती । पूर्वमा पानिएन मापिक हता। पीची एमना ब श्रेष्ठ माता बसंगना संसर्गमा बाबमापी योगाचारमत बाप्पाहता। बामने माटे मोडविरानो से के पाळपी पोताना पूर्वमोना करे महापातमी निवाना स्मरणगी भारे मगनि पाहती थी पोवानी भीमने कापी मारमा पार ए गया । पम्वे पण तेमना मार संगे बचानी मेषा ता बने मणे महापान संपदापनी सेवानो मार उसम्यो हतो । एममे मामानसंप्रदाय संधी बमा यो बनाम्पा हता। वाचार्य महारारिसरए बमिपर्मपिटकला प्रमशक्पिक मायर्नु सबधिक निराकरण करखी पाए बमिरवताना मापनो निसाफ विचार करीने निराकरण कर्म । प्रसमा ममम मिय विरक्ति प्रकरणपाद'र्नु पण प्रस्थानमान करें। बापमुस्मा सम्पत्रिने मतमेद प्रपापापागना निशन तकछमए एका सम्पई स.५ कमो पण या सुबन्धुना पेष्ट माता वसमा पो पर पीनी भाषा गमग स.. म नियमन पर मनुवार को रे माठे धरमपी पती बापाचार्य । काम्पागामधिकर्ण मामन पबिते पोतानी सिमा 'सोऽम सम्प्रति पन्गुत्तनमपात्रप्रकरणे पुना बात्प्रे म्पमिरामयः क्पिा Rel स्लामम बाम सम्मुम्मा इतिहासमारो 'इतषिष्य पदपी सामान्युने प्रतिकार पाद पोएम माने है। बर्षात् गुरुपोप प्रथम सतना मत्री ती सुम्पने को। गुप्सीम पमा वोरा काना पूर्भिमा पो हो । परमानोबा म समप मानयो ठीक।
२५ गुप्तवंशना प्रारम्मसमपविपे इसियसकारोनी मान्यता बनेकविध छ। केटगक विशनो बांधाभ्य काममा व गुमश रु पई गयो तो वाम माने छ । बा गुप्तवंशने म भाप्रमश करवाना वा 'एवे अनससामवा ग्रीमनुसफुलोरा । श्रीपानंतीयाघ्रमुस्म-नामान बानि ॥ बापी रीते कलिमुगराजाचान्ता सहेस । वा पश रुष्णाननी दक्षिणविशामा श्रीशेठनामना पनप्रदेशमा शुरुवातमा राम्प करसो हो। वे मेसम्म तीप राजा प्रममचंगत केनो पुत्र स्मगुप्त हतो ने संगतविशारद होवापी गन्धर्वसेन पण फेटयाको कोता हता। सेना पुत्ररत्नने केटगा ऐतिहासिको पराक्रममा सूर्प यो होलाथी मिश्मारिस्म द्वितीयचम्मगुप्त शकारि साइसाइ माने छ । एम मनाप सो वा निमम्परिमभी पूर्वतर्ण गमुक्न्धु पर्छ । परफसंहिता वा नयचक्र परफमपुतना केटाक पचनो बोरामा मावे के पकने भगवा प्राचीनतम प्रमाणभूत पारळना मैपक पोना मूळभूत परफर्महिता बने समुतसंहिता का ये मत्प।बामे प्रगमा पूर्व काळा पण मापुर्वेद निपफ्ना केटालाक स्त्रो मने शारो मिपमान हवा । पुनर्वसु भात्रेये '' शिप्पो ने बायुर्वेद ममाम्पो । पोला पमिसे रचेण त्रिनो प्रतिसंस्कार करने के बा सहितानी रपना की है। केमके वा संहितामा दरेक मप्यायनी घरमात 'मात्रेम उपाच' तपा सळे सटे भनिवेश प्रम करे पने पुनर्वस मात्रेय उर वापे छ । बा ते मा संहिता होवाची पाना मूळ उपदेशक पुनसानप छ । जामा ममिवेशना बमनोने पुदी करी शेष बचन बर्षाय पुनर्वच मायनों की शाप एम ममी केमके मप्यायोना अन्तमा 'वनिवेशहते देने परकप्रतिसंतते' आनो उष्ठेस बोवाम्बावे छे । एटमे पुनवम्- भारे उपदेश बाप्यो । मिसेजे तंत्र र सेनो घरके प्रतिसंस्कार करने परफसहित करी । प्रविसंस्कार एटने संसिताफ्नो विचार के गतिविस्तृवनो संक्षेपकरणो, ते परी पण सबके पोवाना ११ भम्पायनो उमेरो कों । मा प्रकारे कुन चरकसंहिताना १२० मप्पापो पाप छ । प्राचीनकालमा म मात्रफ्ना नाम मळे छ (१) पुनर्वसु बारेय (२) रुष्णा मात्रेय बने (३) मिस भाप । 'गाय मारयो दहणायचिकित्सितम् (महाभारत,०, २१.) वामपनपी बापदमा मूळ भाचार्य कृष्णात्रेय होगा नोईए । मीठ टीमकर यात्रेयः पुनर्षमा बारुणायने व पुनर्वस करे। 'अप्रियाय गुरुणा रणायेण मापिन' (परक चि० ० २८ ० १५५) वा 'हम्णानपेण गुरुणा मापित पनितम्' बाबा बायोगी पुनर्वसु मापने च प्णात्रेय को वापी मकी पाप के पुनर्गममात्रेप भने प्रणाम मा बमे एक य म्पचिनो माम छे । , एसो को परामी रामानेनु नाम मारिन मरेप बीय परामी रामामो पेवाने पराम्मी पापा निमारमो मारोप की नमुरामा निमामि बाई नामचरन करे ना मानना है। कब वनराममिर्मत्रम्माचः परकम वा विरतिवापरला पारिवाः नाराणसपी सम्ति धम्' उस विवानि समामि प्रचरन्ति मे भारी . पुनम अरेसे पानमामिगामपी पर रवानामा माये हे (पर. १ मेलममता ९ मा) बसपी का भाष बाप मापन समारोपी र एमाले० प म, ४ मिनु मात्रय-बिगतममा म मे मुना समपे मला मोगा समपनो तवशिमा औषक हिचाना मुम्म बस्यापक मि बाप वा । पुराना प्रपोतना मने विम्बसारना फिरसक बीयफ मुम्परसम पा मारेक्ती पासे व देयक सीमा हता । मामात्रप प परममंदिताना मूळ प्रपका पुनर्वसु मारेप के भानो हर महाश्यमो मत है। मा मत युक्त होप को पू० ६ ० मी वासपास वात्रय क्या इसे ! केणक इतिवासनेचामो पुनस मात्रय वाविप्राधीन छे ने भिा वापपी जन्य से एम माने छे । परम्त पुनमम बाप वने मिस धात्रेय समझामन गो पारुपीय बप्पापमा पुनम बापमी सापे वी करमारामोर्मा मिनु माय पण नाम है। परम पामिनि सूत्रमा कम्यरकामारपी निर्देश फरामेण परक यहउँदनी यासाना प्रपत्रक अपिछे, पण अमिततरमा प्रविमा परक नपी। पातबमामाप्परकमतिसकते। मनोगाम- दोषाणा अधिपत्ये मम " मा गोकपी पस्कना टीकाकार पक्रयामिदर टीचना बारम्मम परफना प्रतिसरकार का पतबलने ममस्कार करे हे तपा पवधि बने घरकने एक मामे । वपा मोगसूत्राधिकार मोर योगप्रतिकार यामि तपा पाकरण नागेशमा पण घरफ बने पतन्नेि वमिम माने हे केमके पर मोमन साभन योग माने ता वोमी गणनाम सास-सम्मत तत्वोने म बनुसरण करे । यो के भमर, केपट वारि महामान्यमा म्पास्पायरोए पटवछिनो पोगसूत्र के परकसहिवामा की तके पाय पण उस को नपी। केराको योगम्म्म् एम्पकार बने विशालपाद निराकरम बाप रोगामी देना की पवमसि नपी माम बदे के पण मापनमा प्रष्ठ प्रमाण की शाम मी केमके पपपार बने विधानपाव इनो न छे एम बोयो पण मी शके म नयी माटे पतंजछिने पोगरका मानवाम प्रबल नरोप पानो नपी । फेमके एक पगलि सामवेदमी पाथाना प्रमा। योगसूप्रमाम्पमा पाचस्पतिमिश पम कई पर्वनलिनु पचन अकेले । पुजिसियन पण पतमणिमा साम्पनिपपक मारपो पोवान बारे । रिस पतंमकिनो उस मालपुराणम् । पाणिनि २-२-१९ सपरिगणम् पनि स्मरण करे । परकम्प सामसोना बोबा तपोन वर्णन केले पाशिते मरमे मूकीने पोवीस तार्नु वर्णन कसे । परकम तन्मानानो ठोस नपी। एट्र वा परक्ने पतबल मालवा पापो मी । वा पाइलि म्यापमहामापा पतंबपिणी बाप है। पातबशाय, पोगसूत्र बने निदानसूत्रना कर्ता एक पतन । महामाप्पकार पनगडि कप पर पिकाम करेग पदार्शनो ग्लेख है म्पटे परकप्रतिसकरम कमार पिना पाम बने म्यामाप्पकार पतंपठिषी पनि रोई बोहए 1 प्रमाव एवापियर कनिकना दरबारम एक परक यो । शक इमिासकारोबा हमेवर १५ मापुस्यौर नपाय। सारस्तोमहरमाय पोन्माप रोपमा पंचम्मच सूतानपुर एस १५ मा समातियो मत।। प्रमोमस्त ने मामममा हलमा परम्मा ४ जागेप। पाममाणे एस्मानापेमेत निमोनम बलियो बनामिना समारने एमवाचित।बामे समपरी दयापार गुफापर - । परफने व ममियशवंचना प्रतिसंस्कळ माने थे परन्तु माम्नी सशताने मूकीने कोई चोक्ये पुराधे मळतो नपी । वा पनिफमो समय वि० ३०५० मी भासपास्नो छ । 'चिकिस्सितं यच धकार मात्रिः पयाचदानेय अपिनगाद' वा रखे गुदपरिता भरघोप पण वायना उपदेशने संहिता को छ । परक केवळ प्रति. सेकी छे का मयी, एम माने छे । मारे अनमोपथी पण प्राधीन होवाणी सेना का निष्फलीम 'परक ई शक्ता नथी। वा घरस्संहितामा ११षम्पायने उमेरनार रसमल काश्मीर प्रान्तना पधनदपुरमा जग्मेमा छ। एम्मे उमेरेग पाठोना उरणा पक्रपाणि, दच पने विचपरक्षितभादि शिनो से पाठने कामरिपाठ को छ । बबसे उमेरेला पार्नु उद्धरम पारमटे पर्स में । बामटनो एक पाठ बराहमिहिरे पोताना कान्दर्षिक प्रकरणमा टोक्यो छे। एटमे वराहमिहिरपी पूर्ववर्ती वाग्मर । नापी पूर्णकालीन खरल छ । वाग्मटने १० पाचवी सदीनो मानरामा बावे छे । मनो समय ई० स० ३०० पी १०० नी बचे मानवामा हरकत मपी। साल कपिबम्नो पुत्र छ । बा कपिलबम्नो बागमनमो बारमटे उठेल को छ। समुत दिवोदासषक्न्तरिए शत्पत्र लिपे बाफेला उपदेशनो सदर की सुभुते वा संघ रमे । परन्त पर्चमाम मसहितामा मायुर्वेदमा बाठे मंगोन वर्णन है । प्रथम पांच सानमा १२० मप्पाय छ । बाने सौ सर्वत्र को है । बाने समुधुत पण को छे। ते पीपी ६६ अप्पायन उचरतंत्र उमेराय । वा उपरतंत्र ममिवेश, मेख, विदेश, पार्वतक, बीवक पगेरेमा तत्रोपी भनेक विषयो अषेमा छ । उत्तरतंत्रकारे उधरतत्रने उमेरो ना पाप सानो घारे बधारो को छे के नर्स ए कोई मुझेस । वा उत्तरतने कोणे ठम् । से पोग समुततंत्रनो प्रविसंस्कार कोइए फर्यो हतो के नहि एना सदरम्म हाछनी प्रतिसतत प्रभुत- सरिता मौन छ केमके अनेक टीकाकारोए ठदत करेला परसुश्रुतना पाटो वा सुमुतमा मळता नथी । समुतनो प्रतिसरकार बनेक पार भयो छ। प्रतिकारक तरीके पराग्भट, नेता, चन्द्रट बने नागार्जुनना नामो योगप छ। 'विषामित्रमुतः श्रीमान् मभुतः परिपश्यति' 'शथिोरपिश्रेष्ठ मुभुतः परिपपी' वा पचनपी समुत विश्वामित्रना पुत्र तरीके वाणवाम माने छ । पहेस बपन सभासहितामा म है। अपनेपना पे शामित्रपिने छे है एटमे वा भुस मार्पियोना समसामयिक मानपा माले छ । वा मुमुतसदिसा मुराभूत उमृत बागई । प्रवित पएस प्रभुत परफ्ना प्रतिपस्कार परीना समपनु । बर्मात् ६० स० पाचमा शतकमा उपबम्प परफ बने सुश्रुतमरिता सैयार पई गई इती । मामाने पाना मेगा विपना बामनो मपों पपी बने निपना मिाथे समाप सापा मपुरा गरे स्वमेषी मायावेमा सौतम गोतामा भारे मास मे निमन्ने मामलामा भाग खेमापन नमो समसामरि मि तो ममी। तेम - मामा ममा समसामयिक मनाना इमारत में मोनातिक मतमा प्रवाल वाचार्य मबार प्रेए पेन्सना प्रममा पनि मन भम्ना निम्मै बसे। परप्रतिमा स्थान 4 २८ बा समुना प्रविसंसाररुची तरीके मान मागाईनने कई छ । नागार्जुनो बनेकपा छ। पौर एन्पपली एक नागान छे, योग एफ मोशाख, पोगशवा बादि प्रमोना का रसप्तायता मागीन से, श्रीमो नागार्जुन सातपाइन रामाना मित्रतरीके हरितम बाम पिए फोर छ । प्रम्प- चिन्तामणिमा जैन मुतपरम्पराम शानाहाना समकाधन नागानने रसशाधना विधान भाम्पा । समवनो प्रतिसंस्कार ६० स०ौचाभी चोपा एक मचे क्यो केम सम्पकारिकामापी समुतम स्पा उठारो परेन । माटे कानिफना समसामयिक धूम्पवाद प्रतियपफ नागवन केली ते प्रतिसरका साथ सम्पनी परकर पण हता एमटरको माने थे। बने शावमामरामा पानीसातकमा कोणाय । बने बागपी २० ० वर्ष पूना मागाईनना 'उपायहरप' नामना न प्रपना तरेशप्रकरण परी भागमतर्मनना प्रसका · मैपम्पमा मनधिचेन सिसक मत' वा प्रमाणे अनुतनो उसेस करणाम माम्यो । पा० महामाष्पकारे १-१-२ सूत्रमा मापमा 'सीता' एम उदाहरण मा १२-१-१०० सूचना 'माकपापियापनामुपस्यानम्' वा पार्षिकमा उदयरन 'कुतपसौमुत' प्रमाने । पामिनिए पप ५-२-१७ सूझना गमपाठमा सश्वपाविशद को। एट्र प्रमुख पापा बाचार्पोपी पूर्ववती । मने पल बाबा पोताना भन्दा पूर्वचारसे 'समधि- गौतम' नो उहेस कों छे। बा एति बुदना शिष्प प्रति ममी, मौलपपोम्म बप्पामालपपम पमूपिनो दोस।बा समूति गौतम पाचार्य बन्द छ । मा समुतनो समम हर्मक महाशय वि० ५ ६ . वया पासबर महासप एष भी गिरावनाम मुझोपाम्पाय .. १००० वर्ष माने । मीमांसा मानासाना में भेद-मानसा बने सचरमीम्सा । मानपाना सरकार गिनि अपि । सचरमसान्य प्रकार केप्यासमापि ।। बाने मारिया वेदना कर्मकाण बने हलकाना प्रसर विवेचक । वाक्ये पिणो समानकायन म मिनिसूत्रोमा बादरापप्प (म्पास) में बने मसूत्रम् वमिनिलो व्हेस पापापने देवमो प्यास वर्ष प्रपङ्करण स पटो एने पेदम्पास फोगामा बारेमा प्यासने व मामाख-पुराण वादिना रपिता मानवान भावे । बालिपपमा ऐतिहासिको एक मत नपी । म्पासना निप्प चैमिनि एम केटसाक पम्तिो माने छ । मितिना मार बम्पायना एक पग सरमा पीसोना में पग तत-रिवारको खोप नयी वा धाम पर विगेरे कर्मकाणर्नु मस्मक बा एखमा मामा निधार मिले निक्षेप मान मापवाय माय नवी । केळ पगारि रिसायोनी चर्चा करगम भापीठे माटे व मगरिसरम० मा बेदमादिमीसमने मानाय करो है। मखतरविचारम वानगद पनगाम माने तो प्रिपालो उपदेशा बने भात पण बम्पपसित ई वाम माटे अप्रियोगदिवपापक व म्पर्य छे एम कीने खारकचन करना al परमपम दमाहापराप्रपा प्रमाणे विपरिश्तो मासाप मरेलाय मौरी वाम् (trks) १ माप पाताल के पारनामे पैमी पर पाम मारे +येना मे प्रवाशमाना। - २९ - जैमिनिमत्र बगेरे मी साना एक पण म्प के तेना पचन बगेरेनो उस पयों नपी येमाई फारण हो से नाणदु मुश्शेस छ। मात्र होना पचम छाने मीमांसफमम्मत शैलीमी र निराकरण कसे है। Aधि अनुबाद, इतिकर्तस्पता, मावना दिनो विचार का छे । मीमासम्ममा केटलार आचार्य र बगेरे किराने ज धर्म करे । फेला वाचार्य विपापी पता बने धर्म करे।ा बम मतोने लईने मडादि सरिए विचार को छ । यो के बा भम्पिाप मूळपी स्पर पतो नमी पण टीकाकारनी म्पाप्पापी स्पए पाय है। एम वेदमी बपौरपेक्तानु पम साने माने निराकरण कर ले । एवीव रीने पुरुषवादी पण कोई पर्नु उदरण वायु नपी । वा बार पण विचार्य छ । मिनिमगोना पार्तिकार तरीके उपपपर्नु माम स्वस भाने छ । पछी माप्यार शबर सामी । बाबमे वाचार्यो म्यादि धरि म० ना पई गया केमके भावाचार्य मीना नसत्पाळ परीना कुमारितमोयोकवारिवादिनपोन शबर मामीना विधाने दर्शाम्मा छापने घबर स्वामीनो सम्प० स० १५० नी मासपासमा मनाम हे परम्त वर्षपी शासमाप्पनी सामे अमुक स्थानमा न नपधरम्पासामा साप गोतामा भावे छे बेम के 'उपदेशादेव म() तयानयोगका मूमनी टीमम्मे पप्पापा दौहित्र मरणवत्' बने बैरिक सर्गारिपिपप निशानकारणामार बगेरे । प्रायः टोकापरे मरमाप्प जोयु हो! महवादिसरि समय मीमांसा- भापार्य श्रीमगरिमरिकी पोताना बा प्रपम अनुपोगहर बने मन्दिसत्रना पमनोनी साक्षी पे छे मारे बा ममे सूत्रमारपी पमहान छ । मनुयोगदारना कर्ण पू० वारभितसूर के एम सरना सपळाये विशनो कम्ले है, या रि यो बासानि म० ना मपाशिप्प ग ऐप तो पी०नि० सं० ५९७ पसीना छे । नदीमत्रना कता देवावकगणो के पेमो दूप्यगगिना अन्वेगासी छे । वागणी वागमोने पुस्तकात करनारा देवबिंगगिक्षमाश्रमणपी मिन । अप्पगण्य मापार्य नागाशुनना शिष्य मूतर म्ना शिष्प छोडिसमूरिनी शिप्प छ । भाम नम्बीनी सविडीना श्रमपी पणाप । वाम पानेग मागार्डन, मागेन्दशना बने भनुपोगपर भी स्कदिनाचार्पना समसामयिक छ । वा वाचार्पनो सम्प पं० श्री सागरिरपती प्रमारक पर्यापनमा बी०म० सं० ८२. पी ८५० (वि सं० १५७-३००) सानो जगाये। वापी मन्दिमना कर्ता देउवाचक गमि मी. न. स. ८२० मा वो हत्यब पग मा संपत् पराम मंगत रोप वेम मागत ममी । ३० महागिरि म० मन्दिमुग्ने भगार्गदवापि भूमते अर्यात् मगमा परिहतनी मला पण ममयप छ पम गौरवपूर्वक एप प्रेमा एक मेरायपन समागम्यताम् रोल भागमभीमिरी मापन। पवयन पर सपा परबासमा न जमदिन पर्मनीमत मत मेरे पि हेनसमामा, माधर्मात रमादामर' परीरामसाप्पम पम्पोमो (परमप 1.11.11.) पग पनि म माम पर्मपापपने मामासमा मामार मागास पराविमा पाप्ययन-विहादी बना रिमाबिमा रम (तमा 2 1 १९-६) १ मा सगरो म परामद गरी एम ना मार और निमशानातुन भीमपर्यनारे ।
मन्दिसूत्रन उद्धरम पापे छे। बापी बामपफर्तापी नन्दिसूचना कर्ण धना प्राणीम । वा देवपाषा- गणना समसामयिक स्फन्दिणमार्यनो समय बी० न० सं०८२७ पी ८१० ए एम ठीक बंध मेस्तो मगी। बा आचार्य म० मो समय बमे पासळ सिवसेनदिषाकरसूरि म. मी समपरिपारगाम विचारी गय छीए। मा नयचरम ० स० ६०० पी लवची मोहाचार्य धर्मकीर्तिन वाक्य के बकम्प पपमा मत्तम्प पोगाम्मे बार नपी। नापी धर्मविधी पूर्ववर्ती वा मयपककार के एम शपण शहाने मकान मषी। मधमाप्पकार बिनम्दगमिक्षमाममगनीए महावादिना नामपी मिपात सुगपद्वैपयोगवादन सपान कई से वापी २१५-६.७ वी पूर्वमा म्यादि । विस्नागनु समन करनार उपोक्कर के ने धर्मकीर्तिपी पर्चा मेनो सत्तासमप छडी सो पम्ना प्रपनो को बापार प्रसाबमा सेवायो होप म भगत नयी । बापी बाबाचार्य म उपोतकरपी पण पूलती है। बम्ने मोठे के दिनागपी पाउमा का भाचार्य सुनीक पारछना एम एमना प्रकला स्पोकमपी गगे । मापात बराबर होय तो मयचक्रकार उप्रेतकरणी नियक पूर्ववची है । रिनागनो समय ई० ३४५-१२५ केटपक म्मने छ । हिसाये। ०५ बासपास नपचकारनो समय सिर पाय । शतपय प्रायणना माप्पकार हरिपोमी के भो स्कन्दसामीना निप्य । स्कन्दसामी इवेदमा माम्पकार बने निरकमाप्पटीकाकार पण । होरन माप्प स्कापसामाए नि . ९८० मार। बास्सरसामोए पोताना निरठ माध्यापि ८-२ मा गम्किनो एक मोक बने काम प्रकरणम् वपकिलो एक भोक १-१० तमा १०-१६ मा मामहना धोकन गरम कर्स है। इसमी पग पोताना माप्प सी प्रमाफरा' बाम गने अमारपमा क्ने प्रमाकरना मतन स्मरण करे। प्रभाकर कुमारिकामा भिम्प । बा अमारित धर्मकीर्तिमा समसामयिक । परस्परना प्रयोग परस्पर नाम बने मनन एणन करवाम माम्पु है। मा हिसाये कुमारिक म्ने पर्मीर्ति स्फदिमामापी (वाम्नो सपासम्प t०५८ पी नो) पटले ५०० बी पूर्वना छे ग्यारे मारिरिमाराने कीरि तपा कुमा- रिम्नी को पुद्धि के विचारनो मेमा कयों नपी तेगी पण मा क्र बाचार्यपी पूना के एम योगे पन संशपने वरकाश मबी। डम्मरमापन प्रमागवार्षिक्ती मूमिकामा मिनाग बने पर्मपालमा ६० १२५ (१) बने ५५ वर्षत् १५ पर्पन बन्दर बखते है, एटले विदनाामो समप विकमनी पोपी पांचमी सोना चम्म दो बारेमा बाम महानि म् म मोजे सभप बमे निमित को सम्पमा कयो फरक हरे पराम। मा मुमतुम्योपथर मामासादरमरानो र मानिसमर एम मामी बाब पिकनि मेन माहा सम्मानिमा मापनाम पमियाय पपगामेरमा मन्मे पर पाया बात मम्मामामुः सरिफलानि पलारिन् स्मायाम्पाचा मापारम् ॥ (पी)बाम बापका कमाने का समापपर) पुनले बिमा मेर- बनातानमा ५५५को मारनामा एम्मिानिम्मा पापा श्रीमान्तमापस Ar मापने । पर्ममा लामो मायान् गावातम् भाम गर।।
. वारतो मपी । एटले विक्रमनी पोचपी सीमो महानिरिकी पया छे ए प प्रमागपी व सिद पर वाय बने नपचकर्मा मारता प्रन्यो भने प्रारोनो समय पण या बापार्यना उस समय निर्णपर्मा याधक मधी। बाम्न स्ल 'विमान्त विपापर' मामना म्यारण प्रप उपर मनपाए म्पास का छ बापो उठेग 'शुगरनमहोमि' मा पर्दमानमरिए फों छ । हेमशदानुशासन' नी 'वृहत्ति' मा पण 'विधास्त म्यामा असमर्थतारणपगिरिस्मा मन्यते, 'निमान्सन्यासस्तु किरात एर रातो म्लेट इमार' मा प्रमागे विपन्त ग्पासन माम छ । परम्त मा म्पासना कचा मयपककार मठादिसूरिगी मपी। मछादि मामनी म्पटिशे प्रण पई गई। ए कोई मयादि ना कर्ण शे। बा मयचक्र व छ एम को प्रमाण नषी। केमके था मपम म्पारण सम्बन्धी विषार पाणिनि बने माष्यकारने म प्रमाण रूपे मूहकारे मरण पा बने रूपसिदिम! पण शकार बने टीकार पानिनिना सूत्रोनो ज उस करे । मामनना कोई पन अपननो कोई पण सले ठोस पर्यो मपी। पी नपरकारे 'प्रमामसमुपय' नामना योद प्रमाग मन्पनी भनेक कारिकामोर्नु म्याफ्यान करीन प्रमल युटियोप मनरे वभर निराकरण क्यु छ, आ प्रमामसमुबपना कर्चा नमुबघुना पाशिम्यो पैकी एक महान वार्षिक बने मतमोनो स्नाग । मा विशनमो समय मिस्तीप वतीय पावन उवा । प्रमाणसमुपया छ परिष्ट ऐ हारमा निम्मतीय मापा न से मापामांची संस्तम केस प्रत्यक्ष परिप्ठेर ज महासम् एपेठो प्राप्त एपो से । भापणा आ प्रथरारना सम्पमा सम्पूम मप संस्तवमा कारिकारपे हतो। वा आचापभीए प्रस्सन, अनुमान, मपोई अने जातिपरिष्येनी कारिकामोन निम्पग परीने वेन साग ने निराकरण को ठे। (आ ज विस्नागनी बाउमनपरीक्षा भने टेनी चीना पर सपनोने ने मण्डन पर्य है.) दिनागे गौतम सपा पासामनना पक्षणोनु सक्तिक प्रणम्यान करीने प्रण भरपोनी सापना करी ।भा युक्तियोर्नु मिराकारण उपातकरे म्यापातिकम पिम्सारपी करें है। सोम्यार्षिम्मा उम्परिकमा पण स्निागमी युक्तियोन पगम र छ आरिम्नागे मार्यपना इमराठ प्ररणनी म्याम्पा पण करी छ। बारिनाग पोतामा गुरु पमुम्पुना सिद्धान्त फेटा सा निराकरण कर 1 कपमा घगा टेफाग दर्णमामा पाप छ। पिसकोशार मा रिनागनो समय ६० रितीप भपग लीप सतीरामद लिफामपण महाशपती पंचम पातलो नत माग माने । मुहमारे तमोऽयमातरिशानं प्रमसम्' मा सण उपर विचार या है। मा समग बमुबापुरत परिपिनु माग्न बारम्पु ग्यारे रेमासि ता परे रप्यो दलो। मन्ना, टपोतर भने बापत मम पण मा मण मुमधुन मन छ । रिनाग तो मा एमगर्नु निराकरण करने भाग दो मदिर पारिपिना रपिता पमुपपुरी ने ईपके एम परिणाम परे । मपवारे दिसनागमिति बारम्मनपरीधानी पो पण बरिरा सीपी मपी पग तेनो भार तो भारे मुक्ति पारगना अनसनी पनि पियरियन् मादि भाषा उसपी मरम् Trm Tiशत । अनुवादस्मे पाटीपीन्य म्प्रपामा बने क्य मापापी सेससम भिम मिम सममे मात्र मापापियो परा अनुचित पपेश देनी कारिका भने चिम फेरफार भयो होय ए सम्मनित । माटे नवा मयमा बने टीकामा भारती कारेका धने तिमी मित्रता हे ए सामाविका मेम-टीकाकारे "विक्यो नि भाम यस्म इमादि में गाय पर्स हे वेम बने विनमानी उपभप संसल वारम्न-परीक्षा-चिम फरक देशाप से ना उदरणम् अमोए प अपेपार मते मापने भासम्ममपरीवाचित HD । एवी मी 'प्रमावसमुप' मी कामकामोम पण फेरफार बोगम बावे । पारपति संततम्पोन्ना पाठने वापारे नया ने केनी म्माम्पा शिमरण एकात प्राम्यमिक मनाम महि। परकसमापना का संक्दासममि मावर एकत्पनी एक गापाने का प्रथम ५ महावि सू. म. मग करी है। या गापाने निर्मुचिनी कोसी के मायनी कोपी ए मुके। जो निजिनी मा गापा होप तो कप विचारमा रो मी । पण मुद्रित पाकस्पर्म ए गापाने माप्यगनपाना मेरमा मुवामा पानी पो के हकपमा पनी गापामो बने निकिती गापामोने पवारवषी एपमानमा कठिन काम से मम्पगिरि का प्रम टीकाकारे पण माप्पगाषा बने निर्यविणाषाने हुरी बतागवानी हाम भीग मनी । उता य ए गापने बमोए मुखित सम्पना भाषारे उरणम् भामगापा तरीके मूकी है। का माम्पना गर्ग संसगनिमाचर बधदेव रिडीमा ती काय मिम वाम कडा विरामो माने ते उपरात रसुदेवरियाना प्रणेतापी हकस्पना माप्यकारने धर्माधीन मानेलस्पषु माप्पना की संपदासगणि महम क्यारे पपा वा विपयनो निर्णपारमा सोट छ सय क्यो मपी । जो मारित्रिए मैफेम गापा मापनी पहरोप तो वो कोई व परे के पांचवी सदीपी सना पण पसीना बीमा केटा मानो दासान्त नाम बोईने व पोपी होना वा वाचार्य केमके वे परेग वामन्च माम पवार्म वाम एम माने ते मागत नवी। भगवान महावीरमा समपनी बास्ती कामोमा पम मिनदास मावि पासव माम बोराम माये।बार्य पुखिना सम्पमा परी मर्मसम्बरमी कम्पमा पर पासत माम मारे । मन परीपर्पवर म्यवासामिना चार शिम्पोमा एक माम गोरस बने मना नामली गोहास गण मीकम्पो । बा नाम कल्पसूमी सहिरावलिन माने। माटे कान पासाम्त माम भोग्ने गोषी छठी, बने सममी सपनी कस्पना सपनामात्र पपा मपी। सपा नानापोम पप्पकार पनेर बसा मे मा सापी प्राचीन मापकार संपदासगामि मार हो । पहलसमाप्पा कर्ज संपाणि म पनि निशीष भाष्पना व शेष तो पनुपोगारनी रखना गपा परीनाज संपदासगण्य सिर पापमो अनुपोगारमा निोपामो सार्म बने स्तृित वर्णन शेगममनिम्ममिक्यम्पासना 'मूनोदये २ दमे (ल० मा०) गुण भाममा फ्यपाति!" प्रमाचमुचा पूर्ण जय नयेसोना बनुयामधारयेपर मोरे गे मेहकी परवा भदौ । बा प्रयासमार ने ममरे अनुमानमा मरेला बने तपासागर से परनु मामा भारत ने रिचायेगी मनोनीरसमामा। । पण १ 14 - निम्वचितो कटुनितम्सादि, उत्तरगुणनिम्पतितो मृतासशरीरे' (म० पू०) वा प्रमागे निशीपमाप्यम् उमपम्पतिरेक दम्मानना मूमोचरगुणनितितरूपपी मेद-वशेष देखारवा वाम्यो छे । मारे अनुपोगद्वारा धना मेद पारखामा बाठा ममी, बापी वा एक प्रकारनो विस्तार व कवाय, ना व कारणे अनुयोगधरनी रचना निशीपमाप्ययी बनी छ भने निशीपमाष्य तपा हकसमाप्पना का पमिम म्पति होय तो हल्कम्पमाप्पनी रचना बनुयोगना पछीनी व सिर पाय । अनुपोगहर नन्दिपी पण तिन छे केमके अनुपोगने नाम नन्दिा भावे बने नन्दिमा कर्चा पणा प्राधीन छ । आयी एटस तो चोकस पाप के के माप्पकार वि० प्रपम अवता मीजी सीपी पाना छे पण पूर्वमा मही । घोपी शदीपी पारळमा मी एटले २ पी १ सदीनी बन्दरना समयमा भाम्पारनी सचा सिद्ध पाय छ । नयचक्रती टीकामा टीकाकारे करेन्ग उसपी नन्दिसूमने कोई मान्य हो ! मेवी कल्पना पाय छ । प्रथम पृ० २१९ म नन्दिनु सूत्र मूकीने ते पट्टी 'तापाल्पाननिर्मना' एम कही ' चदि भावरिजना' था गापानो उपन्यास कर्पो छ । वे पछी पृ० १५२ म मा म पाठ ठीघो छ । मा सूत्र सपा माप्प के म्पास्यानु मामोचारण करणाम माम्मु नपी । सत् पश्चात् पृ. ७१९ मा 'तमा माप्पेऽपि' का प्रमाणे एक वास्पमी रचना कपने पि गदि वापरिमा' ना गापा मुफलाम भावी है। मापी मनी ऊपर हेर्नु म्पारपारूम कोई भाष्य हो। बार्नु बनुमान पाय है। माम होवा छt अहीमा माम्पहपे उदत करेली गामा नहिल फरकमाठी बहसमाप्यमा जोगा मले के । ते नेम मन्दिसूत्रकारे नछिनी गाभाको मेपेकी छे, तेम कदाच वृहस्कापमा पनी म गापा मेम होप ! भयमा मन्दिमाप्पनी म मा गावाने पहलन्समाम्यकारे मध्य होप ! गमे तेम होय पण मपचक टीकाकार तो नन्दिन माप्य र समने छ । एमना समपर्मा नन्दीन माप्प लिपान होप बने एमगे वा उस को होप ! तो मम्दन माम्प केडी गावरमक छ। एमा रचयिता कोण । क्यारे बया! था बमो लिपप उपम्पित पाप छे। मुहकारे था माम्पगापानी साक्षी कोई पण सम बापी नगी । टकाकारे म मा माम्पगापानी साक्षी मापीछे । शुम्मा उपसम्म पता नदिम मा गापास्नपी भिम माप्प तरीकेनो रास देसातो मी फळ भाप्य गावालपेसा प्रपम उठेस करमार होप तो नयाटीकाकार मा० सिहरिगणि धम्पप्रमगली न । भाषी मन्धमाम्यनी रचना महावारिसूरि पछीनी शे! बने नया टीकाकारपी मीठे बाटाई म हाम नही करी साप । मटकारे पृ. १५३ मा 'उR' कहीने को प्रसारना पनपे अपगमुगादादरम्प वा प्रमागे पुनरुज्नो अपराः बतायो । माने मरतो अपवाद गौतमसूत्रमा मन्यप्रानुपादा' मारमोप पोगमा माने।बा अपवादोनो सपहसारनारी कारकत्रो उपसम्म पाय हे पण वे पर करता पमा पाटमा परोपी उदव । १० कटी पृ० १०१ मा, पदनसमुचय पृ० १५-११, मा० समान २ ठरेगा ३ मी टीशरामा अनुवादरवीमायणायननियोगहेतस्पाम । सत् संभमविस्मय गणनास्मरणेगपुनरकम् ॥ यो के मारनी सामे बापी कारिका के को स्त्र हो । बाग प्रो एटी एगा नोंभ हो ! जने वेनो बल मुझकारे 'मनुमाइरादिम्प' पी मगमम करी होय । - । । टीप्रकारे का मगमगने प्रस्तुत करी मापी बने एबी री प्यागा करी के पामे को कारिकानी म्पासा बही रमा रेप ! सरेसर टीकाकारे उपर बतारेण रोकनी प्रतिको गने म्यामा करी या रोप को मास पाप ने भाप्ती कारिका तेमापी वैपार पगाप ने कारिकान रूप 'मनुवादारपीप्सा' ना प्रमाणे पार पई पाप छ। जा सिचायना बीमा वर्णोम पण पुनाफनो जमाव दर्शम्मार एक गामा मन्दिनी हारिम० टीका १३ नोपाई - समायमाणतरोमहेष्ठ उबरसपुपयागे । सतगुनकितणेस य न होति पुणरतदोसाओं। पुमा दोपनी पर्चा पणी प्राचीन है। की प्रकारे पुनानी पा सास अनुपाद मूरती की। मपसारे लिपिविष्यर नाम्ना बतीय परम्म 'या लिष्टसकाशे तपेदममवे सिर माये कारिकाको मेयर प्रमाणहमे प्राण बरेम । अवे मोको बोके पणा प्रकारोए मा छे सा पण वेना मठ के कानो निर्देश को मपी । पहारपसभ्य० (३-५-१२-११) में बोवा म पण का पार्तिकता का चराचार्मना थिम्प पुरेबराचार्य के मनो समप. स० मामी मानो पूर्वमाग मनाय से पण ते को रिकामो हनी रकम नपी पिण-उड़त पछे। केके मानापी योग काल पूना भाचार्य हरिमा स् म शाखागारमुकपा (५१५-६ कारिका ) उड़न करे योगाय । ममी मिरसिमाम्मपदीप लोपटीमामा पन मा ये कारेकामो तपा 'तस्पैकमपि बने प्रतिवमना बाकारि कालो पण वृत कोम बोगरा म । वापी वा कारिकामो की प्राचीन । मारे बापणा मेवारपी पग प्राचीन होगयी एम्ना समय पम्प कमी प रमत वास्ता नपी । केटाक मानो नेवरसरि बने म्हरामिरिने एफर म्पति पनाने प्रेरप। पग मां कोई पुर प्रमाण पेश करबामा बाबमपी । नयपरटीसम्म मंगळसोम तथा प८१ में 'मछारिरि मायो नामोठेप करे। केटमा बापुनिर महानोबा नाम कस्पि-विक्षेपणरूप बाई पार करे पम ए मारे कोई प्रमाण बापता मपी । पारे तुर प्रकार प्राप्त मागना महमा श्रीमत्-पेनपटमहराविधमानमगेन' (पृ. ११.२) मा प्रमाणे 'महाविसरि' मा नाम्नो स्पा तडेम परे । एमर्नु 'मा' एमाम ऐक्षित पमा मादक पण ए मामानी परी परि हाम्दनु जोमण एमने पारमा पप मेहम्पा पती सुरोप सोते सममित से बने से पीछादि मामर प्रसिर पर्षद ! पीस पार पण पोवार्नु माम ममारिस' बा प्रमान मराका साया । मरे 'म्हार मा मामी विपश रूप मदी। पठी भा र तपा बीमा तमाम प्रपा नपचना कतार्नु माम मसाम्मिरिमदापण गणारे छ। बाम वा प्रेषनु माम, प्रपकारनु माम बने Aषरना सम्पनो निर्नय पई गयो। से टीस तप टीमसारनानि विचारपालि धीर । -टीचर- भाचार्य म्हरिगरिए पसारेस गम्भीर अपराये दामिक मिसापी परिपूर्ण मपशामको प्रमाण प्रमार बन रहस्यन समभाग माटे शागतम्यम्प तारि गमगि गदर्शन विषण वाचार्य श्री स्व भूरिगिसमाप्रमगार म्पापगमानुमारिण' नामनी म्मास्मा की । ।
। - भो के कासना प्रमाषपी मळ 'नयरकशाम' एस पई गर्यु छ। पणी सपास करपा छता समाप्प म राम छ । यो मा म्यायामानुसारिणी टीका रची न होत भने बा टीका इसनिसितरूपे मण्डोम सपनाई खी म होत तो नयपक्र मूळ से तेपार ई शाप छे ते तैयार पई शफ्त महीं । नपत्रकन नाम मात्र न सामनवा मा सरेसर सिंहरिगनियमाप्रमजीए टीका मुहाने बनेकन्सबादना वम्यासीबोनो व नदि परंतु सागपे विज्ञान समामनो मान उपकार को छे । जो के वा टीका होगा छता मुळनयम तो बनु परम्प नछे। परतु ना टीममा माघारे मुछ्नो प्याप सामान्परीने भावी शके छ । बो टीकाकारे मना सम्पूर्ण पाक्यो, या प्रतीको मनि म्पामा करी होत तो मन शोषवार्म चरा पण श्रम परत नहीं ! मने मा पे तैयार करमाा गावेग माय करतय समय परिपूर्ण ममाप उपलम्प गयो होत ! पण मा टीकाकारे पोतानी टीकामा मुटनो पोमा मागयों काक बधिक समावेश को छे । मेने बान टीमा मामा प्रतीको घरा, पर्यापम्पान्याहारा, वसतिषी, वनुमानयी बने विवेचनोपी मूळ वैयार करमामा वाम्मे छ। मापी कोइए एम मामी म सेनु के महादिरिए मा तपार बएला मूक प्रमाणे व प्रत्पमी रपना की इसे पण तेयार पएका मूळपी पण मणिमुम्दा अने गम्भीर रचना करी छे था तो दिग्दर्शनमात्र च । ज्यो टीकामा प्रतीझमात्र ने बाकीनो प्रेप गतार्थ कों मा का महपापम् ते पान माया मपी । यी मुकारे छीपेश परदर्शन सम्बन्धी विषयोना प्रबो पण उपम्प पता नपी । चे प्रन्यो ठपठम्म पाय - ओम प्रमाणसमुबप भादि ते बप माषामा वेपी मल तैयार करवामा मणी कठिमता परे ए सामाविम ।तेला ठेकाणे केवळ बा टीकाना आधारे ग मन तैयार करमामा माम् । बा मसपाती टीकाने बोनापी टीकाकरनी वगाव लश्चानो प्रतिमास पया लिना रहेशे महीं । पर दर्शनोगा प्रपो मने पाणिनिम्याकरण तथा पातजा महामाप्प बाम्यपर्षय बादि लिपुरम्पोमा गम्भीर अनुशी नयी ठे ते दर्शनोन सणम बने मण्यन करवा पूर्ण सिदास मा टीकाकर । वाम किचित् पण भविशपोखिमपी। वे पादर्शन सरूप नयोन बौधिक प्रतिमावरा प्रथम निरूपण करीने पाव प्रमाणपूर्वक निराकरण करी तेने स्पाहादमी साये मान करे । बदागम भने पाहतदर्शनमा पण मनिपुण- मुदि। वापी वा टीकाकारत अमेमिक मैहुप्प सारी राते समशी शकाय । बाम सपरसमयमा निष्णात होगा सता वा धामणमीमा वामगीन बने या कामना, बीम पण देखवामा मावत मपी । माटे ज पोतानी टीम को पण ठेकाणे पोनानी मम्ममूमि, पुस शास्सा बने गुरु तवा सतत्सम्म पहिद बनाम्नार कोई पण सूधन बावि कसे नपी। वाम एता भापणे एटर बनुमान करी धीरमा टीकार भाचार्य मिनमनगमिक्षमाममणपी पात्कालीन बने कोणाचार्पमातरमी संकरी है। कारनके मिनम्बगणिशमामममगाना बिशेपासमकमाप्पनो पाठ वा टीका बावे हे बने धमाश्रमणजीनी अपूरी सोपवासिने पूर्ण करनार कोआचार्यमाचरे विशेपारस्यामाप्पनी टीमयमा प्रिनिगणिना नाममो उछेम्स को है। निमप्रगमिमा समप (मि सं १९९) पीना बा टीकार । फेमस मिशनो कोपाचागने जिनमनगणिजीना सिम्म पने मना मते मा टीकार १२ मपरम्परामाता बिनवगनियाना समानकालीन दिशा में एम सिर पाय छे । माटीमामा परिशोममपी माझी मायकेवा टीकारनो समप सातमी सदी परीनोई शके व मही। गोके वृतीय भरमा टीकाकारे सामर्शममु मे विवेपन कसते साम्पसमाशिनी प्राधीनटीन युक्तिपिकानी सापे साम्प परावे । परन्तु तेमा मापारेप टोरकारे वर्षा करी एम की शकाप हेम मपी। केम के मां ऐस्टमार्षगम्पतरनो विचार पई गयो एम मणाम्मुसे।बापी टीकाकारे मसमपम्प हिपमान परिखम्नामना Pपना बाधारे व म्याल्या की एम म्पनी समस्य । 'पुष्मिमिका दिनागना पानी से क्ने धर्मकीर्ति, कुमारग वादिमिशनोपी पूतनी से गोमग बरा पग समयदेकरमाप्लेयसिवितुमानम्' मा साश्यमतप्रसिय भनुमामगाण उदरण बसे । तेवनुमानमा 'मानानिमिचसपोगिनिरोधिसहचारिमसामियप्पमावारि' मा सात प्रमरो प्राय परितम्ना सारे का बसे। नपवाटीकारारे बासी टीका कोई पण स्पले धर्मकीर्ति पेय प्रखर बोर वाचार्पना पुफा पो राम ते भाचार्यना विचाणे, निधनो बने वेना प्रमोना पाक्योम ग्राम कई नपी । भा बात टौम्मकारने सादमी सदीमा मानयम बापणने पटकाने निक्षेपाम्पकमाप्प, प्रमाण टोयकारे मेनु के बापी सदमी सदी माम्पा सिवाय एको मषी । जो लिसेपारस्पफमाप्पकारनो सम्प बारे पित करणामा बाम्पो ते बघु शोष पाय को जमने आगे से के बा टीकारनो पम साप बदतमो परे बने समाममणीने भी सपना पनमा परे । माम जो बामाप्पकार धमाझमममी ही सपना सिर पाप तो बने फोव्याचामाचरनी पमाममणीना , शिप्प हेमा ने मुरा विचारवं मपटीशरकार भी सना सिम पास। सौनाग वने मागर टीकारारे पाकरणना विषयमा वारे वाचार्मोना नाम अषो । 'मनागस्पा- चार्यस्य शिन्याः सौनगा' मा मुना पाचार्य कम्मापनपी बर्षाधीन है। समापनामिप्रायमेर मार्शयित सौनांगरतिमिरेम पठिननिमः बा प्रमागे ममामाप्पप्रथपकार कैपटे । सौनागे' पाणिनीयाए- प्पापीना अपर पतिक रह। तबहिरे पाहि सोनागा। पठन्ति हुममाम् लप्रसा' तमा 'भोमागेर बास्त्र पर पतकिए पकार' प्रसास्यान करीने सो के 'एन, सोनागाः पठन्ति पोनकोऽपिकायदेशः बगेरे, बामपा प्रमाणोपी सौनाग पतसडिपी पूरी के बने कम्मा- फ्नपी पीना पम साबित पाप। मगरि बाचा म्याकरण-पपक कोई रचना कर रोय म 'मति मागरिकोपमताप्योपसर्गपो बापाप छपरमी मगे । मा टकाचरे द्वितीय बनी टीकाम कामना वर्णनम 'मुबम्सपप्पा पुषमाया सचमुापमा- पाबाब चतुरटुमारितणार बा प्रमाणे मुषमसुषमारिकाम्नु वर्णन कर चार मगुप्त प्रमाण पास ऐप ।वा वर्णन बा प्रसिपापना समामवेताम्बरमन्पोम्य गोपा म नबी एण दिगम्बर- चार्य विषमस्त विमेपपण्णधि' मनी पम्गुरु परिमागा चि चारवि शिंपडा । २२२ ॥ समापन मापनाच मा बाम पर, यस एम पाव प्रमिय। कमबरीमा 1.111 - 1 । बा गापामा जोगा मछे छे । बा पतितपमाचार्यनो सम्म ध सं० ३८० ( स ५१५) बतासाभ बापने तिलोयपणचिनो रचना समय शक से०१.५ ष्णमग यताबार्म वा छ। अगल किशोर मुस्तार तितोप पश्मपि देवर्षि गणि के येताम्मरीय वागमनमो और बावश्यक मिति वारिसे पहले राम रणावे हे, पण धाम्मे सेमनो पक्षपात ज देखाप छ । घेताम्मबागमत्यो देवर्दिगणिए बनाया नपी, पण पुस्तकाहड का छे । एमनो समय हम पीर०नि० ९८० (१० से ५१०) मनाय हे म्पारे पतिपमभाचार्फनो समप है० सं० ५१५ मनाप छ। नियुक्तिमोनी रचना तो एपी प पणी प्राचीन ए मात नपचकमकारना समपनिर्णपा पाळमचारी भाम्या टीए । बाम होगा टीकारे क्लिोपपण्गतिना आधारे च पार बहुरूना पासमी बात मसी छे ए विचारया बेई । पर्सम्यममा मता एका घणा स्पध्ये छे के मे उपम्प बागमोमा मरता नपी। हेम बाम पण बम्प होय तोची खातरी। दाचार्यरत 'समपप्रास्त' मा कर्दकम्पधिकारमा 'भीवपरिणामहेट कम्म पुमाला परिणमेति । पुमाल कम्ममिमिवं तहेब गीगो व परिणम् ॥१२ मा गापामा समामार्थक बने नी म फरक पाटी गागा टीकारे १००११ मांगाप्रमाणे टाफीछे 'जीवपरिणामहेठ करमचा पगमा परिणति । पोरगतसम्मणि- मित्त मीयोनि तोर परिणम् ।।' मठयगिरि सूरिमी प्रजापनीतिमा पण आ री मा गाया छ । अन्य प्रभोमा पण वा गाबा गोगा मळे छ। कर्मप्रकासनी पाइपटीकार्णिमी पण माने छ । का पूर्णिमा का कोग क्पारे पया से निपया बमे शोज एपी सुचवम्यास कर्मों मपी । गमे तेम होय पण मा गापाना मूलपर्ण कुन्दकुन्दाचार्य हशेबा बाचार्य निकामी प्रपम शताबीमा या छे एम मनाप छ । वो इसकुन्दाचार्य प्रयमे सहाना न होप सो भेनामपर बने बिगमार मेद पप्पा ते पूर्वना छ एम वपस्य सीकाई परे, कस्पसूत्रk पण प्रमाण टीकाकारे 'अप्पगो नियममका मामोपचा भाचा रम' का प्रमाणे मम्यु । वा कल्पसूत्रना कर्ता चतुणपूर्वपर भद्रबाहुसामी महाराज छे सप्रसिर छ। मानापी कल्पमम्मी प्राचीनता पण प्रबार पाय है। केमाको शंका उठाये घेए के था मद्रबाहुस्सामी पी० से १७० मा परल मपी, पन निकमनी छवी सदीमा पया के मा मिची ठीक वे विरामो मिपारी मेशे । मिसागणिजाए योनिप्रारत' ने पण प्रमाण यामु छ । योनिप्रारत ए गारमा मंगरूप मनमानो एक दिमाग छ । पूर्वनो म्युच्छे- पी०म० १००० मा पो । यी बानी प्राप्ति हुशाप न मी पण वसम्ममा छ । यो टीकाकारे योनिप्रारत बोईने प्रमाण टोम्प होप तो कहेज परे के सेमो पर वाचार्य इता । क्षमाभमण मिशेपण पण डानना हाता सबित करे । निनमरगणिशमा मममीर मधेपासर माम्पमा ( १७७५ मी गावामी ) 'मोणिरिहरण' घदपी योनिप्रापत प्रकीर्णक समयमानी सूचना परी। म्पहारसूत्र माप्य (गापा ५८) पहलसमाप्प (गामा १३०३) मोगिनो मर्प योनिप्राप्त करें । एक सूत्र जोणि राष्ट्रनो बर्ष ज्योनिपने अणारनार पण कसोंगे। पोनिप्रास्त मानी एक प्रतिशतमा पनि पाहेरनी छापामा मरे । बने मौरी पूना म मरे मेमनपा ममादिस्य र मिनार मग, ५0 11 बनेमन स. ५०.५ प्रापन वा सम्म १५मी प्रतापमाना.परम्म । - ए र एक ठेके मियो एनो अमोए बसे पुखको मोया न होगमी निधार परी शक्ता मपी, पण पूनागी प्रच माटेमो भनेक विनोए पिपार को से। टीमकार योनिप्रास्त प्रमाण मापता विविपा पोनि. योनिप्रसेऽमिहिता सरिता विचार तत्र सपिचापोनिर्दम्याणि संपोम्म भूमी निखाते रन्तरहितमनुम्पसा- रियापुत्पति, परिचा योनिईम्पपोगे च यथाविपिएरियतमुष्पामापुरपसिरिति ा प्रमाणे विषय मूल्यो । वा विषय नागटी योनिप्राप्तमी प्रतम नबी एम तो वम वादि नो लिपप ऐय तेम पो छे एटसे बॉ टीकाकरे मापेक पोनिप्रासत ए तो पूर्वान्तर्गत एक हिमाग प। पायुर्वेद पग टीकाकारे प्रमाण टाप छ। वामापुर्वेद मने प्राप्त भयो म होगापी एना विषयमा एमो मामोशेस कीने ग सतोप मानीए औए । स्ता शापिरपरतिम शाद अपरा उपम्न दिनो मामर्नु २५५ शेक प्रमपम एक प्रकरण समपाई पेल प्रपरमानो मायुर्वेद माम्नो गायो पण मन्च म एम दुर्गाशहर केकळ रामशाखियो मसे। पोगमा पनो पप एक स्पा टीममरे भावर वाप्यो । योगसूचना रपपिता महर्षि पता। पोगना प्रवर्तक बाम भाचार्य के एम मामग्रनी भूम करमी बदए मी फेमके पाइयस्यस्पतिमा निरप- गर्मों योगस्प पळा माझ्या पुरातन ' ए करनामुसार पोगना प्रवक हिरम्पगर्म । पठनति तो योगमा अनुशासक । या योगानुशासनम्' वा योगसूत्र पर तत्वशारदीयं वाचस्पतिमिस शिपस शासनमन- शासनम्' (१।१) वा प्रमाणे ऊपर को बर्थन र सूचन करे । मारतीय परम्परानुसारे पोगसूचना कर्त तमा म्पारणमहामाप्पना कर्ता पतचलि एक बमि म्पति। योगसूचना पवर्षपाद विमाना गणनसूमो (११०१५) मत ऐनामा पण निशानेबाद मैत्रेय बने असामी पधिक प्राचीन है। वा पतमिनो समय पाचना महाराणा पुर्पमित्रना समकामन । मा पुपमित्र रामानी सम्पई पू० २२५ च्यामग। वा योगसूत्रना ऊपर म्पासमाष्य नामनी माम्पनी रचना गई। बा म्यासपि पुराणोना का म्पासमर्पिषी मिम । पापी मा मापना प्रणेता मा म्पास। एर्नु प्रतिपादन कठिम। ऐतिहासिक महानो से विमना तीस कली वा पास प्राचीन नगरी। बा पोगमाप्पमा (११२) संसानमादिमाममा समापना तिनास्पविनाशिनाम्, एवं तिमिहर्ममात्र सलाय गुणान्य मिनास्पतिनाशिनाम् तस्मिन् सिकारसंग मा पाठ। तेष नपचनी टीमाम पम बारे (वृतीपारे) का पाठ योगमयप्पनो कोपा बाबा के प्रबनो बानो निर्णय मुशकिस।पोगमाप्पना मा मापने सरण परीके मेबाई माटे मन व मानपामा मापनने कोई बामो देखतो मपी । टीकाकारे 'वष्णमेपामप' मु प्रमाम बाबा मबन मगवम्म 'पपमाना' माथी प्रसिर । बापी वा प्रप सिहरिगगी धम्ममममपी पूर्वनो । ५ कोक प्रमाण हा प्रपन बानी गर्मसमभाग माने जन्म क्या पीनी रस दशा, वमन, संस्थानमेव, ना तमाम, मामे सम्पावगेरे साम्योत्पादक नमस्तान मे५क। जाम, पता, मरमन पोम्पारणे at मुला पती प्रमाणमा 1 मारत र पुन पासाम (१११११)ला 'पुर- मित्रो पले पारणापमान्त' () .
- । मुधार वर्णन करमा वाम् । जीवनी गर्मावला बगेरेर्नु शारीरिक वर्णन समुन्नी साये तुहना पामे हेर्नु छ। वा प्रपना का कोण हे ते मनात हे पण वा प्रपनी प्राचीनताम्य शहा नपी । निनदासगणि महचरनी दशकापिक पूर्णिमा पण क्युपमेयालीयन नाम जाने है। मा महचरबीनो समय नगीन ऐतिहासिको वि० सं०७९९ माने के। प्राचीनो शक सं० ५०० पी पम पूर्व माने के । मंदी पण बार्नु नाम भावे । उम्पनयार प्र० ५०९ मा 'मुवम इति परिणामय फेनिदाए' मा प्रमामे भवति माप कमिण प्रस्मय करे छे । पाणिनिना मोकळम् व प्रसय पाये । माम्पकारना मवे प्यन्तकरीने पछी बचप्रमय मुगाडीने मागसम्दमी सिद्धि पाप छे। पाणिनिना सूत्रो उपर काशिका नापनी टीका सेमी 'मावेच बाबपनपीकमग प्रसय गाने मावशम्पनी सिद्धि करवामां बापीछे। मने विधिसिम्परम (पृ २०७)ग प्रकरणे मुवयोपसेन्याने वा वास्प मूकने कम ग प्रमय कर्मों छे । परन्तु मा बार्षिक कपा म्याकरणर्नु छ ए मामामा भारतु मपी, पण को प्राचीन म्पाझरणन न होई मोहए। नी माहिती मापणने प्राप्ठ पती नथी । काशिका तो 'भक्तेम' भाम कडेलामा भाम् । बा टीकारे 'मामनुस्पा समेस्मार्पान्' इस्मादि पाणिनीपशिक्षा उमरण की छे । मा शिक्षा ६० मोकोनी है । बोना स्पारण सम्बन्धी निपयोनी शिसामण वापे छे । वा शिक्षा कोनी पति ते वयात |वा शिवाना पन्तमागा पाणिनीने नमस्कार करमा वाम्यो ठे। ठेगी मा शिक्षा पाणिनिमी रचना नपी एम मास पाय छ । जो एम ऐप तो एना का पण मा टीफरकारपी पूर्वनो रोग जोए; मपवा शिक्षाना बन्सनी ३१ करिकाने प्रसिप्त मानवाम माने तो शेषकारिकाओ पाणिमिनी कति की काय मानो निर्णय विरानो पोवे करी है। विकम्पयोनप पदा' वा कारिका पण टीकाकारे वैषी हे ए कारिका मोसमनी छे । मदन्तदिन (हिनाग ) नी । हरिमझिमहायमे पण भनेकान्तमयपताधमा मा कारिका औधी है। स्निाग दिम, मदम्तरिम, दत्तकमिस मा बर्षा एकम्पपिना नाम है। बार्य शिवशर्मसू० मा भाषार्पभीए कम्मपयर्ग' नाम्ना ऋषमी मनोहर रचना करी । मा फपने पू० हरिमा स् 'कम्मपयही पण को ले बा नपर्नु स्मरण बिनमद्रगणिक्षमाममणजीए विधेपणती में एं। धमाभमगमीए सं० ६६६ मा 'निषेपापम्पकसूत्र'मी रषमा करी हे एम संशोषको करे। माप्रपणीनामना बीमा मापी १५ मा बस्तुनामझविमाग पैकी पाचम्म नमागना पीस पारपैकी पोमा पार्नु माम 'कम्मपपने सीने कर्मप्राति सम्पनी रचना वा सरिपरे करी । भार्य विमसूरीश्वरम्हाराब वित् हता ए स्पर देशाम छे । शाननो म्युच्छेद वी० सं० १००० रिक० स. ५३० मा भयो । एटछे कर्मप्रतिकार ५२. पी ये परेगना । सार्ववित् सममियचार्य। मक बालीमको प्रा महापरसामाना मितवाएमा समाना पर्चा ताबा [1]। बेनानर समाधापत्रिपम्म मरेमात्मा से पानिमदे ममा ५...मौता गिरापुमा हिमपामा । समाशाम मि व पानिमये मामा. २६ अपस्मी पपीम कोदरस्य बने। पुरे परिधि सम्पररी पचम्मI1" सोदिसनामोप: समागम् Ir ४० विसरसिको बा बासियामग्नेि पांचमी सीमा पने ऐपण तेमनी पासे यो में पुरानो मपी । म्यारे पू. तमासावि म ए पास बने मामिने बस मया के लारे शिवधर्ममूरि एने सूस्मनस एम विशेषण अगारी ने प्रेछ । मापी ऊपर करेला विचार मुगब उमासावि म० मी पपातकालीन वा नाचार्य के एम और रवी नधी । था कर्मप्रतिनी एकगारा वा पैककारे उरत का एट टीमबार वि० # ५३ पछीना मसिद्ध बाप रे । मोषमारपफभाप्पनी ये गापामो (१११११२) कम्पमाप्पनी साये मस्ती से । मम- कारे विशेषमानश्पकमाष्यनु एक पण उद्धरण अंधु नपी पण कम्पभाम्पनु तो छ । वायी पण निजामपकमाम्य करतो वृहल्कापमाप्प प्राचीन | छतो टोकाकारे पापम्पमाप्पापी ए गावाबो की मपी पण विशेषारस्पफमाध्यमपी म मपी । पाकल्पम पहेली वे गावाले मारे निप्पा- पपफमाध्यम्य एक गापाजो साये च म छ। भावी मारो ए नियप के टोकापरे प्रोपावश्यक माम्पमापी भए गापामोपी। 'पपुरोगोमपं तस्य विपात् गोममम्' मा सदरण वराहामपपी वा परकपी अोई । यादयना कर्य स० पचिपी सपना मनाय ने एटर टीका परमो समय बिमानी पांची सही पळीनो कि बाप । मपपस्टीकाकारे पपी ने समिरूपगा संपादकसके सम्पाप उबरणो वाप्यो । वेम्पमा कमक उरणो एमनापी पाना प्रबकाए पग उरत करना नोबा मळे । बने केटगफ उबरको कमा प्रबना एनो पचो पण मगो नपी। एवी व ते मूम भने टीकामा भारत केटकामवतरणोनो मा माधार पपरतो मपी। वेपार बमे एना सान सा मपी बोस्टकामा प्रकरोति' वगेरे । प्रेम्पकमसमार्तण पाकस्स माविम प्राप्त पाप से पण एबमा सव अमने मम उमरणो बोता मूमकरपी टोराकारने पाटना सिह करनार सापी प्रथम प्रमाण मिशेषावश्यकमाप्य पाठे बने प्रथममरमा टीकाकारे ' पिमन्यायतम बौदपरिकि सामान्यम्' वा नाक्य मावे । बागकामना बौद्योए वर्णन्तरापोरम्माण सामान्य कारस्य । मापी बायोपोगन पाप के टीकाकारना समये काय, एम ए पाप कारनी सामे रहेम गौ माटे । मने वो धागे से के पतन मद नबीन वर्मा मानिस ले । गमे रोम होप पण मावास्यपी विनागमे यतमान कोमोए पसुराली केटाक विधारोमरा परेरे माते नवीन । बरतमबरपरपी बर्मनििन स्मगीन काप केमो टीकाकार पण धर्मकीर्तिधी नाके पम पछीना के समसामपिक मपी । बाबपोरल्युति बायो जसमा तो। 'एप्पान्तरापोह विमा कुस्ती निमिपचे मा प्रमाणे सम्दाय बने मातापोहरूप सामा पर्नु दिस्नागे म वर्णन से माटे तेज वपतमबार कलाप। एटोपिम भने टीकाकार पण समसामयिक होय एम पण सम्भारमा पाप । कार पणना पण ने (पृ.१७) ने विचार करे । भाषी मूगकर बने टीकाकार समसामयिक होगा बोहए एम मास पाप के परत मानसम्माष्पk उबरण टीकाकारे से होगापी मुम्कारणी पारसना गरे। भने फल (n) रमेव मा कममुश्तिोमा पारे . ११ महकरनी भविषमानतामन टीकाकारे टीका रपीछे भने दिमागगरे रचित मालम्मनपरवानी ही कारिका पण टीकाकारे (पृ० ११५२) ठीची छे। सांस्फ्योगपैशेषिकोदभिभापतिषु प्रातिपुम्परम्पगुणाविमिस्मानिमा तद्वैतत्रतादिपदार्थप्रक्रियामदै' का प्रमाणे टीकारे फेदशिर पदपी प्राय उपनिषद् (वेदान्तदान ) मा पदार्थ भदैत-ौत, बने बैत बगेरे पदार्पनी प्रक्मिान सूपम करें। वौतपदापन माननारा पुरुषवादी या समानवादी वेदान्त- दर्शननो एक मेद । तपदार्य एटले प्रम भने सकेतनने नपका प्रम बने पीनने या प्रति भने पुरुपने एटो प्रम भने सचेतनने मालनाये बापण एक वेदान्तदर्शनमो भेद । वपदा अपार अस, जीप बने बपेतन पदार्पने माननारो मेदान्तदर्शननो एक मेद छ । एकदमी, दिदी, बने विदण्डी संन्यासियो क्रमपी और बारि पदार्पोनि माननारा मे।बा बा मवो प्राचीन छ। साधात् या परंपरया उपनिषदोमा दीपनामा जावेण । एष टीकाकारने पाठशतकना मानवामा को पण लापचि ममी। भपका प्रस्य मूममत्वमा अनुसारे पुरुपातनाद, प्रान्तपस्पदैतवाद बने दम्पादि, बमा बने पररूप वेतपदार्थवाद पणा शकाय। पैशेषिकदर्शनना पदापर्मसंप्रहमा प्रशस्त्रदेवाय हेवामासप्रकरणमा एकस्मिथ इयोस्रोपोछ- यापोस्वियो समिपावे सति संशयदर्शनार भयमप' संदिग्म इति केचित्' वा प्रमाणे कोईनो मन्त्र टोक्यो । मयचक्रटीककारे पम (पृ० १००) मा वा म्यणने मळे देना पक्षणमो उस सों । इति केनिट' वा बापने होश छ । भाषी टीकाकारे या पापने पदार्थधर्मपापी प्रभु नमी पण तेनापी पूर्वपी कोई बाचार्यन टाम हो । एरले म प्रशस्वदेव वाचा इति केचित्' एम रहेस कों । प्रशसदेव मा टीकाकरणी पूर्पना मपी ए पाह बमे प्रधखमतिनी Aधारणामा सिर की पुस्पा और। बा पदार्थधर्मसंह पर म्योमपती टीका मसमार म्पोमशिवाचार्पनो समम विद्वानो ई० स० १७० मोगडी कर्मों के एटमे प्रशवदेवाचार्यनो सम्प ११० पठीनो तो ममीन। पुरुषवादमा टीकाकारे 'शरस- समतीपत्त दम्तनिपारितो रसः । दम्पनि पारित श्रेष्ठो मामिकस्त विद्यारत् ॥ मा लोकनु उसरम टम । बानु मा मात्र मटातापिमा पूर्णपणे मळे । 'मतदाही फररो वातपिचनिवारण । महा- दमो एप्पो दम्तनिपारितो रस ॥ (म० १५० १९०११) या प्रमाणे महापुरविकार मणे छे।मो 'कमावाविदास चरतपित्तनिगरासमवीर्यस्तु दन्तनिपीरितो रस-" (गुरु निदाशिमिरम्मी पानिक्तु प्रकार्तित) वाम नणारे । बमने छोछे के मटे वा नाम बीना करें प्रपपी की से! वाटीकाकारे पोजनापी मापीन प्रत्पमापी "पासममा पार्य प्रामात का पपत्" मा बाप नेम भी टेम सपर# पाय पण को प्रपसी सी शेप सीने नेमटे पण gोप! बेमा स्कीने ई.स २७५-११२ मा पारे । जेमा परमहना धिम्प ठेवा पात 'बमममु० कपी पणाप । बाब गुरुशिष्य परकम्पाप्पाला महार हरिपननो उल्लेख करे । मामा मनो उमेश करता मपी माटे यामाना समानकालीन रोग व महार हरिचन्तरण एथे। बा हरिचन्द्र० स० ३७५११३ मा दिपमान गुममा समान पाठीनएके प - १२ मेमड पण तेच समयमा पा । वर्षगायना फर्ता बने मागसमाना कर्व पारमा एक एपो पगालो मत। वाम सिमरिगणिधाश्रमणधी बमोने मळेगा वाधारपालो बने समां बापती चर्चाभो उपरपी ही सपना पछीना सिम पा शमता मपी। म्यारे बनेकरताना उपासक वार शिरोमणि टीकाकर म्हायर मी सदीना सिम पाप परे मटकारना समपन बमोए मे निघाम क्स वे पम धारी ते सिर पा पाप। भीशिपरिगणितमामम्गबीए मा मपचक्र उपर एफ म्पासा (पी। पेमा वाधारे अनुप सम्यमाम मूळ पर्ण पण घोषी कापसे। टीकाकारे म्पास्माननी छावातमा । 'मनुम्पापास्याम नाम म्याने टीकाकारे पोतानी टोकाने म्यास्पा मात्र म कही। बा टीकाकार नाम सिनिगणिवारिसमाप्रमण के बने टीका, माम म्यापागमानुसारिणी वा बसे हकीकत नगमा वरना प्रान्तमागम म्सेकी एक पस्तिपीन वाणा मले। माना बापारे । भा संस्करणमा म्यापपार्नु नाम 'म्यापागमानुसारिणी' समामा भाम् । पप विचार करता म परे के नबमा परमी मा पक्ति टीकाकारनी मविशेष पामयी कोई सके प्रसिदिने मनुसीने लसी हो ! मो मा माप टीकाकम होत तो भान ठेकाणे फेम । सत्र मोमा क्वम् कम नहिरा चोगा भरना पम्ते 'वर्ष मेतत् पुस्कम् एम मन्य पण म्पास्पानु नाम मा कम मनु! मन्तमा तो बस छम बोमd मा पप नम्। मा एकलपी एम एम्भावना पाप के टीकारे पोतागी म्पापान कोई नाम वा र नही मार्य होप तोम्सखान योग्य लाम्पु मही होप ! पाक्ने कोविपी र ई ए पप निरव साध पुरुपो, एक साप । माटे व पोवानी प्रशस्ति पण नवी मपी । सरेम को एमप होप तोमा पाममार्नु नाम ए एम उमो ये । प्राचीन कालमा म्पामा-निति माम्प बने पूर्णि राम माली , हेर्नु भरपमेर नाम रोई मोदए एपो रिसाम हतो मी । ये पर ऊपर म्पाम्मारि सापु पोप वे माना नाम साये मारपारि पद पोरीने पण बोग्यानो रिवाज इतो, बा बाबत प्राचीन म्यास्पायो बोनारने सोने समाय एवी । बाप्पाम्पा माटे एग एप सन्म हसे! बो म्पासाकारे, पोते न नाम वापत एव तो प्रमेक करना ते नो ठोस होगो बोहतो इतो, बन्तमा ये पल होत, पण म्पासाकारे प्यासा पूरी करवा छता सम्पसियोतक कोई शपमो प्रयोग की मबी एटो मझारपी बागल बने काम नही मानो पममो समार हो! बरमा मादिना मामचरण स्मे 'बफ्ती मावि फेस एक जकारिकर म्याने म्पामा शरू की है। मध्य प्रतियोमा त्रीया भरनी मारिम्प मागरणहमे कमदनीपुरमयमा'• कारिका बोली बोराम माये है कई सेसके पाळपी सेम में पम म्पाल्याकार के मम्म्कारी ते कारिका ममी। पोकेमा कारिका पणी प्राचीन पण सेनेमासाने सना भामाची पाम्ना सैकसी प्रसि हसे एम मनाप । । .
- - " ये टीकाकारे पोवान नाम मात्रामो विचार को री जम्मापार्नु नाम पण जापवानु पार्यमही शेप मेपी जा टकरा कोई पण पप्पाए म्पापान नाम सर के पाप पणे पण गोवा मा मपी । माटे च मा टीकाने कोई म्यायगमानुसारिणी को छे कोई कोई नया पागद कहे। परन्तु मा म्याप्त्या न्यायने मने भागमने मनुसरीने रवेणी होवापी श्यापागमानुसारिणीम्यास्पा मा नामनो अधिक समर छे । साधु नाम तो पारनपरकम्पास्पा, अपरा नपचम्पारसा बाई होई गोए। मा म्पामा बम्बयमुखपी न करवा भावी है। एटसे मूमना शम्दोनी म्पुत्पचि मने पर्याप भारि प्रदर्शनाय ना मावाने स्पट फरे । मना समन्मने मूकीने कोई पण वर्ष परसी नयी बने मूबने बनपेक्षित मौना पग कडेवाम मावी नपी, मारपस बातोने मूकी दोषी पण नमी, एएमे मातिलिस्तृत पर्याप्त म्पास्या । वेपी प मर्नु बनुपन करामाण्य महेनत परती नदी । भाम होय छनो वा म्याएपान दार्शनिक विषय एटसो गानपणे मोटो ठेके जे सामान्यपानिफने हेनो अभिप्राय हस्तगत पर शके नहीं । पातजामाम्यवादि म्यामरणसम्बन्धी विषयो पण धणी सारी रात स्फुटीरग करना वाम्या । नापी टीकाकारनी सनदर्शननी प्रठिमा सूर्यकान्तमणिला प्रसाशमी प्रेम करके छ । मूल भने प्पास्पान स्पएपणे तुलनात्मक सम्पपन करिये तो पर धामास पाय है के फारनी सेम टीपकार पण अनुपम पादिर्य छ। भ्यारण बने दर्शनशास्त्रमा पाजत छ। बैनदर्शनमा तो कोई मा सो वाचार्प पहना, रिम्पहानी हता, स्पाशदना नगैफिक समर्पक दवा, सरस र्शनोने सासदमा उतारखा मिस्पात निष्णात सा। मा प्रम्पी साधे विषमपनिषेपन' मामक टिप्पण पण भपापेठ । बाप सामान्य सम्पासिगो माटेगो र गाम । एमां समायेरा पस्यो समगरा पनि कटिन । वा माटे का प्रपना पोतानी पसाबस्सा होगा Bol सारी पहेमा उटावीने संपाम करनार ममारा परमगुरुपभीर टिप्पण पण मूबने टोपनो सेमने लागेर्ग कठिन बने गहन सोना लिपपोनो विवाद स्कोर को छ। जमारा प्रत स्मरणोप पदर्शनयेचा पुग्यपाद परमगुरु बने मपोना निर्माता भने पाप्पकार होग उपरत बनेक दिपपोना तमपना बम्पासी है। माये पण मा मझन् सही मदापुरुषमी मात सम्पासाचि बने मपाम्यामा युगनोने पग एनित करे एयो । रारम्पा पण निस नरनी बने म्पपमपी स्पना परा वेषोधी स्व-परला उपकार मापे सुनशननी माजी उपासना पती रपारे। बने भनेर शिप्पोने (धाननी बारापना कराणी (या है। दो सेमोभीर मा पर्नु संगन फर्म हाय प म होठ को मारा गने मा सम्पर्नु ने पकिपित् ज्ञानमगन पयु से पषु महोत बामपना रमपिता परिपंचाननम्हारिमूरि मागा मरमा पना रीसरार तया पगपर प्रो एपोर सारा नर समान उपर उपर कों है। जापादार श्रीमडारिशमानमा भने रामपषमापे सबैप परापता बनेनेर-मुरार्नु मने राजपासण्य प्रात सामसीना पारे जन ARYA ।
४१
मा तेस मिवारपालो परो वा प्राम प्रपा । बाम ऐसी बर्णतामोनो मने पास है।
इमिासना एक मम बम्पास्म तरीके में रेष्टी सामग्री विद्वानोने परिभाषित् पम पम निर्णय मते
उपयोगी को बेमाप प्रयाने फोनही मानीए। वटसापिए निचारपानी तमोने माय मिनती है।
बाम पेये सामोर्ने प्रमान की मागे म प प्रकाश पारपानी माम मामम ।
मम पापको नशाखमा बा महान्मन्दाना बन्यास पर बनेकातासिनो पूर्ण निकाय साम
संपादक परमपिनो परिम्म सफर को एसी ममिछाया सापे का प्रसापनाने की गर्म कर।
बादर
बारम-कमा सम्मिसूरीमती
बैनाममंदिर
ता. १३५-६.
भाराभ्यपाद परमगुरुदेष
मापार्यदेव भीमहिण्यसम्भिरीपरजी
मारामान्वेवासी पन्यासरिकम निमप गपी
FOREWORD The orichalarilla in Gombal by Roy Papa Shri Viruma Vilayali (LITERAL TRANSLATION] B, Prof Hiralal R. Kapadia, 4 A Speciality of the doctripe of non-absolutisk- Jondan moms tho central locabo of all catro vow ponds L arbadian the real barrocoy of all the wcbook of thought of the world which babors n to custence of cool b pinto depth becomes madufest by to tharoogh study kt ndudes empertul exportion of overy system of philosophy daraana of the world. Like a pdge Jeon from a very carefud and imperial pagement to rey derma where on the roman ders'ou barvo faled to do so o the care of mil des and org to ther abeokuta nutnom Jarom door full rustico to overy other (dermone) by accepting a vow by remorting to the net and post ood by rofnunng from abroaluto aboolute That danfod better ord of pod boulth for one od alla (abooluto) abeolot The ort of mbooluto ro mo kod artruth or belf truth u completo truth and moreprochen. Thut danfod butter i otroo of good health to ano bom don t where not mom homo of one who comot dogout, ( niston of) Don aboo tatu (mebantel Anakond meme comptance of truth wherever * muy bond x corrobortbon. The statement that changed buttori Booroo of good boekh for coo who can digant to true - thy watamant that dorsed butter y bermful to one who cannot do to One who fale to codarstod radily both the now ponto, anot make the regulat mo of danfood butter nor como other to do so od mi ruha bom humeelf mod other The complo of clanfod proue buu but what follom from u qully truco sabtlo plana Ono who coopt on w pont ad dar perde motherboated poo u och follow annot fod out truth to realization an bo wctroved by morta bo con bao only Aubelecend Poolty of Junam butter on Jarum prou radgoment to other darunt rod webhoroes them withook antrely reftang ary ano of them ad nocere correct now of each of them from the night stand pout That - spoon of the upenildiod breed modedoon and catholicay of Juomen No other derasa bu dwored to boroty pod wporfically kena keding the world to the path of rum, ao cable to ontortin obor motos so absolutely took won mo pory well able to do o voto of os policy of non debe Tb world on boll up a Pau amparo of Joo, pocos ad bappone by admetre aceaeda DefJtion of vow polot (myu )- Noya derred from the root to A part of orchatons to o mokytoder *नीको मापी यमनेति 3 V powded with coontoboral (traditional peront Erory obetico modoned blade totes and they in tafferert from offerta stud poch The pool not post the belo ho understanding the contre ambon, aw Erory my of two londe (1) wye od (I donose Proventaban da perboler sorglow of subotecce without pro odber tortato chied noget where the sorento called DAY If co mat to my the bestaan only cut the net duman fort pood out only and by daryng poo-OC. A tanet tet my for #dou not detty pancato Difference in gallication bolwen ur and Pranean Anbetuoco vocad with free strute, mit a borealed by more of the boy Dorboto orang bowderlaget about wobetavos derived by part of my lewe mean (wald prood) wbtrous that Edg ty đào tinh A babanoa a realued by both those maana Tattrendymouth (ch 1) - So wys the following 6th an of "प्रमाननािम: Cartplate koomlade about mbetenco attened by come of promene and to portal mbetoon by moon of wry. Both of the man would fa roboczy abetanoa Phone romaale coroplets nature of batuco and more only pet Nasos to come to the world as they necuely dogta amaton Thoyon bowever bocoran tofu tot wood Dan no lo nto nocount to our photos of mobiect yaits and location, to od natura Thon art of rollcotra a aalled achotad a Szabala, Salvad salo culled lokacka at protector of the wedd The then the space of the couro Novecotoru depicted ovimoun plecon bomutally other cod, od thereby nability of Junotablebod, Blend of wheel and excellence of Nayacabra Tbo move of the mud towel Nrytolome doctor preto boo booomne a opoor conquers rokone of the catre Barth (locha) as bo postal whool tond whech mokre ts walder lavorable cookers hom always votomu moetely the aun with twock-follo wbool Home collant to Nombre med en merptorow, Sororogeny tapod olongnt lng by motos of who ad Libre pracy poppt dorque strand by more of the Noycobre may be formed that the work to Nayacakre for proving unlenty of potency The author to obearms the and that got na wtored owled to amparon todo orngoty otho Nogucubra bo po poncyloog al depot Too fact pecully worth motoy that this from the end poet of scoponton oth Pode sort of molety between the Nogecatre and the wheel of beoo profounded a furam for relevleting tano un the chon with the Nayacakes and whool-yard from the and part of Policy Thero totodro poboos in Nemantre and trade in the wheel of the Jomt u there to two domus in substantno aspect (draryarthaka) and madfactory aspoot (pengerthuka) in 8 Napsufr ob tho con with the wheel of time, for os tiro diripods are to Locanding od der condog ponad. Each of thew poroda com o of uspoka, od they nees madly follow ano Other Coorogoontly the ondo of a wboot towe gran to Nayacakra from the new pont of poteocy od that of the wheel of the tuto foto 1 from the now-poort of os compondon 20 property applicable Though a very powerful emporer who salds a whool-ome moonquer abbon the wedd, yot be doare by te wood of bomo Da momont So u proses the u promacy of the wheel of me over a whoolowe But Nayoobra-xewd accredo (111 wheela for not caly does it mata o vetono o lots of droutes but door to oven roudag to nfluence of the wboal of tome by multiple o potency by liberting us from woodeng of Modano enco, Ths work tome que o Jude world on laps. Though a very muutely trou tho lopke of vow-pood for boeterment of truth yet thund and to there do other work which on no with it The following doctrmo o pocially well-toroms # being abuted to the author (of the Nayecakra) यदेव मस्सन नम् But to a question bow et boc no current, for oven though there raportion of ano @coco n the work the author has not een touched the doctrine, Ho bus patbor refuted the vow of Sunna Drvakor. Son par tout of Jurble Gani Krang ramane Entotho canmoottor (Sobe Sun) bes not posted out that Mallavedin Sani diffor n this connection from thono tra Thood the different vw w current on the time of Horrbandro Sari, i wou not the stor buted to Mallavader. Honce that becomes a roncarch problem for scholar Lageads about the Author Mellanedo ho do ora pentapod bus now about fillecyn de work, Horen bobo menly doulth with only povode' od spaded by scooping them the topic (7) In the work there hardly my oposibon bout the following:- (1) What the number of substmo scompted by Janar? (2) How many kind of room for opfarroco (the model terb) to donated by RIA? (3) How many fallecos tro ocopted by Jason! Furthor wrote the radiacion about and proof od reasons, only particular nega reda resorted to Boudes the diram of certen erys as droogarthike sod the rest as pergeserth k attributed b Malandu Son Al the problems and become constady motred pronced may nifer that there Drut bato been como dependent work of 81 llateur Sor on the topic. (1) The portion quare brackets forces a part of the Gujrat forepond (Sou PP 21 116), & 1201 ७) भसिक सिपमस विषो मतदिन: (4) Vide the motor own commentery (P 73 ou Dress-GarPranthera) May ban bora te bytom ob comments on Sander A Sonora) Lothom Nayucan a spoke of Innertkik rendered to Vyeonbepectat, Safrohe (colloctero) mod Natams (am denguezbed) where the ar pakes di persagentlike a Ryatra (Strugte forward ) Sabda (Vabel) Soocbluralbe (abito) and Evorbita tudi bol Appropriate wol the bad. of the work and its style There and to wyr the bus patho beprong or mond The robot wont be notty Seven to those work the nine of Norwubre by camponog x n the form of a wood for the reenco that daya roda goos ao refuting (com ww) od obtabang (moother) by whitys serono Hone wheel Thom Nauczbora word consists of twalo pokon and there are twdro atarak, ane betran may two spoken Tbers otherco fel (mury) com for mors mot of four spoke Lamy thoro a włuch a nearted at the pako and which a indood support of the potes Red that of the atre whed, f further said Exay spako is no ndepeodent agrada Sa police of the bool, parton to drasserthike now pace and the roooong us to mozeforthike how pont. Fire of all ur of parens who lay tadoo amphaan ao gooeraldy particularity or both to treated by meeting o are now post Then an deral composed to pont oot bore nofotation and for mother new pont commcoond Thom pom W padt propoonde as now by refur operoone of other depanto a the storral. At the end of the spoko woocomed the matbor ben fraly posted out the place of the corresponding with podt (polo) non my och Santreke to that oftorweb troco od mocno Receptable that w podt rod the od be bus was that the Jaco non te ontpoed be of thet arbader more kreuna that the author han pontod out that all the new pont propound thar abooleto dogma by reportag to the popuo eun.bocked oma the other coopco OCCUOTE oth croon Mattor of droosa od toa of Maryst me pro Dodroyarthike now poob pod obaly aux persgarthika raw posts too. The whoo the trokh opako cree baternal ſefutation) boom the obect matter of my opony od una tem a profoted by mooth od to refutation and co puno postly Tb powodu, od for that round nom, Snadrada dara- A Robo focus of Syed on oppoud tho tro promover of all the agmats based on do the nm ponts, and the on the support of me end di the tworowya apakolo bo bora popted out by many doar unny that wypot stood that hasan to not able to become throne wobout (the hotp of) Szarade, the name and thougeba dostroyed owne blootud on wccording to do onde Syedade protects de ma by rumor those parm. Carpetty 1 Spoles I wanted with Vyroben I. Sopabere V & VI Nagy VI - Rurt VII & X n Subda Xe Sugh d XXL B Bưuri 2 Torn dood a tho main support they no pedd o butego (?) Ere todas food bel bring to tasba od uch may betro been the men theo alth or athen the mothor brock bmw piece to baada 3 do Nayaan (P 94.)
8 syadorada a the lord of all the nayarades toch are capable in sablong the world for 2 (Sradrada) removeh ndoa antagon in the form of a book of rou, od rather then. The rathesis can be cured by Sydada alone, Exportion of mobiect (top) may be emped ploco na nld proof provided ayns bare dore to by following syadrada to dopo ndependently ofte owne to its biolotham To be what is posted out to mou places by the thor while a pounding orgus Name of the work – The nthor and to commentetor (Sambutan) brro specficult mendorod bo name of this work as mother to but Waycin o po ocenom Tomat Dredanroyacakan rather rely notod Naverthelone u probabilo tat no other one but Dractatutory calore deabed by the thor od the pa Nayacalon ay burro boon mentioned for the fralty of pronuncut. Levery likely that the permet Drade maranayacakra, a dao to the desire of dengubers this Noyabr from Saptas xort-tycak diyyenn from which to extracted. Alladharn Hauchendra Sun. to be mentioned mother dumo but Dreda malam her compentary Oa Anayopadre (Pr Androydhara) n the following mentonce - इदानीमपिदारणार नसचामस्ति an The work mu bo atended at leuk up to the perod od som be the convenon of ..ng that works Dedemanaracakra The author baconet to name this works , Dnedauertrycker andy Even the contenentator door pn the end - "रणानरससिष्पप्रतिशितम् ॥" Tho pane Nayalora * pened by Guntrato Sari bu commentary Sodda mucon And by Joprabhaun into lorprasm but this name does not teem to be correcto now of the aboromettoned thorten Eren Upadhyaya Yasoman who has coped the super commentary of the Nayacakra o only ano fortrught who he much obliged us who sa crest-und of logood and who a heghly octubha, he mentioned po other mano bot Dredo tomtynakn n the tracrption which to bana of Imont I tho manuncpo mbiloto dry Talvity ud pob nability of view polots : Thus the min mbyest of the Nayakna Thos Tory tong sported out in the following complete and aplunan "लिपिनियममप्रतिस्पासिरितारनपंसपोरन । नादम्पपास्मात मम्मति सर्मम् and runa prone to tudre Bhang (comboiboral There bhangat ko the twelve nagu lakesAll of the bocomo entry or wrong des Acthy Lu a pon Juru par propondom by remont pokpendent of each oder Bued they meet (1) Tboy wie (1) Por, (11) March (11) HTC (II) Per (1) उमम् ( उप (VII) रमपम, 10 उमानिमा (T) Art, ad Amster (x) :
6 Dotely od propound now free from antequam ter o ponto hostma ne bo jamo, For u rubator bry mind attributo chu gporal com portal b that way I the Day should make relatre capontore by coaching ane niher The bor her deak with the topic pertung to relative and bedlats (nows) Nombero in this not to bas dealt with the danction Dotwem ory od dunong bobus opty trend w pool. The follows an important question How the Wallando be Dot dealt with the chanction rron wbro totoond by Sedih Dirk bawak Samonte Serpental Thuto treadro spokes are the Bheages of noh and nyang The first foor polomon bburgu of noha od they make up are Alap felly) the next for me thrros of both cod chry famood folly od the romance for or bhangra of sys and they for the third folly Thom felly cabbates storty tedy potratomy rd neo-etorty by toots of reum m. Doncreta, co won cration and crombon Gaspectory The following fact pounded the site of Nagroke-wton thomo talo muyas becom o od bobaro a ompetent of a mother odbo boos, they tuyul post out the real natin as they are onbettmon of the completo object such :- त्पमिलापभिल्पनिला त्यानित्याशम lete. The very hotbo man abect metter for apporton of Nepal Tvey toog » the Desobect for aporton of Nayzalon Th. Aut bor and bl Grulne. The Author of to work of Indo Scom crest tood of deputante, The Sun (procuptor ) a renomed in the Jana wako on loge. The comotator of Nagatom oberta - पति मगरमिनिम्तिानि पपिपपपरमिान्त। भीमापारिसमापनमस्परिकतान् । Thos mom, He who has defeated l tho maternt of moneda by Don of Soders on whool so de form of wood of sayin u notanoua. Mallarda Sun the ann the sky of the Jun ondo From the boro-morpored to wo luccm - ( Malanda San the mother of Nayacakra. (1) He the comperor of dipumba (T) Hooldus o lornet (Wand of the Tibeta) .torybos duty ont woh the coco of the June toon otet n tou dey and bo Tb Sonray collate the len wild we of bor bpel carrer. He mothes bort of metaly depo ndoto me by construction collect modeforbto my of Tokong for atatlakog baner Thurasvrylmaled by the colat od oportunt wak of blum wa bongo ( pouch ) H o matutos vom of oppomto obar deo (composto ) 03, meg fotowobb bom how very wala Basis of Composition Ao tocart portano to bothplace etc of the Son o may a work ocho Prabhamaikann Heoco for o regret reden to refer to thon Wanny nothing about the source of this work hayran #well u the dute ind place of tcmpontos, owing tot of metenal dating with the topic All tho Am # appen that the man bites of the work o morta de Saptamattoacabo Vo an low that these worlu vero extract n the time of the uthor But soco the uuthor has not clourly mentioned that the bean of this work is thean rery mocks, how can w my that there arut be defortely the bea? After myrs that to Nayector - 'पूर्व मझेदपि रामपिठनपपात मामम tadurATT ATT the ruthor han omply so that the source of that Aryal orld proof and the tradition regarding the canon Admirero (of the author)- The pine of the great per omago who bero prabhummal of the door reproo and when a dovoteo of browladys to ascertoo font noticed m Handhu Sun Anekana hayopetala (Vol. lpp. 58 & 116) and has commentary on his own work Yogabodu She San ba marvellously pred bomm (Allaha) by me of a Teron ba commentary on the Vatla af Nyttar. Moreener n Vedretak Stunt Sun Prakrt commentary (68) Utandhya Suria (P. Vrathanol) the mention of Nayacakora sod ita remonng boo. Bhador Som bas eren n los probert Kathavada (Kaheraba) roundable mfortton about Nayucalore and Al lavador Nagakort mentored on bladbarn Hemachandra Son. Cocuy Venturabbaya (P Voermonyabbel halkaloverveja (Hemedando Sun) bes extolled coalesce o boa logical caroton Saddhabe gre s under मनुमानापिन शामिना" Later am Sahrnundharan Aborundara Son and prett Merty other voorblo Suns buvo procomzod Noyucakra And Vlinden Sun Fly Aynaury Marta Upadhyaya Yaorgara han prened in her Atha praiberikan Saphaya Malradan San bero tomonga depune, od o ho Dirtygen Parrymoria ho bared that all the telo spolu can bo pcluded (7) pano spoke of Arrakera lo dos wry the work and author are nolled by preuk mary Jou Surat The argomentotre pone lopal names of Ho Son 1 to us pri wo ndeed like that of the moordan (heit of the son of the med day the axe of met n the form of drepturto of other cools nos dara Ho comporton bom * to try merellows that by adopting an extra ordrary wyle and without ung any bush word he he made an attempt to reduce to the map of urrealny disputations and dromen of af en bry reporting to Tambodied in contemporaneous or carlxt work of ther om schoolu afar groping the essence of there are Some of the works aled by balath Woln ) are poch om not milde torley Furtean (had tycakra ) there are try kogtry porn pakens (ww of opponents) and documns which are not to be won a works so far anlik and tuch thouch knatty are presented a beatful and luad way and utach are umedately coerchtalk and whad when tapod make profand dispuente, the realm and students of the work of be who nearen in TITY. TA Progetti T 7777 TUTT Parfyrirtant for an STATERT HETTA ATU ary 1777 PT IT Tram FITT A TUWVAD (nd P 57 of Nysalon) 8 repottoo by mobile game (Par them on the volumnow and doop and wodowe both Jordd F# Surf' tbat procoded that Sol bere do dooba costy tableted the doctor, of com betoonon bat they bermorady refutod rata of other school bered to NAYAS who too Taid that the new of the oppoperto choot bo daly puped Thaw mon booty chaty cropounded vom o partoon of other boobs od to refund them Here the work wagon Ditun Set: The pool har hon structed on the Nortonkirt por completo od too too from the words) of world Saddhantera Darlan Son Th Darbon Sunpopulared of Vaddenin Sorn papel of Sundla on of Vdonds VAOM Betool) Sundla on wu xp predane (bowery personale of bas on Va Sout 376-14 fyon 94-56 before the VID) Then to two Sorn by mama Sandha (1) Arne Jaendben arpoot laponat of Jo gambar andfonton) Sandle Son and (1) Anuradhan expert in esponton) Standla Sun wo monod o od Sutra (Pt. Nunc tan V 26 od under "what it tapte uth Ardret JJ 3 M htu At least the fact that the Mebama (nt cancer wbo tre best of carbon bere Bourbod prorb the compouton of Nedetne the patte rompenboood then derw dry bett The fact that top bow on SALDA Slodele 7 Completo much an errand Harboach San, Malmer Sun of attens beraphened "Sandila Skandilya Apnat the only one thing is to be and that Stach layanya mentored a Nunduatre arofondon Sodotto follow the trof Kampanon P Pasoppal. तन मनाइल अन्गुरूत मममम्म मचा भाताचे मान मनवम्मत प्रत्यक्त्व मातरमवारी From that wo an understand that the word Seadh can be used in the mass of Shodila How that work Sodil send for no other word u Khoodida matoned a Nandi for wobte Habbat Son dabo Mbeatle u pool of Sob Vacun bon concry, Not Thay mooton ooontuh Suth of Kebun Of corta, thon Sander ( Kodused to be pod popel of Ann Sobe But the difforpco alle slable for our mod de a adindy.moboord Puod Domy wburtos mind popu the correspondent The date of Angela Salle Sorted by to.Vn Sam 576-04 At that time thon Maheperea great personality of Vidyadhar Vam wa bury to yole of yoga prachana Rorad Denton Sun we mood docple of the roy Mastupanua bod popod of Vidda roda Jun 30 t may be try try deaty decided that the date of Rer Dirkan Sunnah bod fit color of to Vn a-te ponad when Vibo medira Sant preventats (founder of an art) was the rda 9 Row Donlotna pred popul of nooo olke bot Steadil Son of Vidyadhar Ver. In Ho cropoction (Prabbeoun Son ) the autho of Prblanborta Vidchenderbetre (V 176-178) thet Vodeberada Suri bebop to the Vaidynthin poche (schooll Frome pots proved that Arguedar Sodila Son who , the teacher freemptor) of Vedderado Sur belongs to the Vidyadhari gucche (Vormsu Consequady Rev Dardan Son mad-popul of more too but Standte Sun of Vidyadha padha od not that of toother of the moderDo) Arnet the question may be rund be there ary proof to beben the the tractors of Viodensdn Son mono ceo bot Arys Jander Slamduli Sun) A trang wanent by way of droply that Sumohla Sun of the Kuryepe Imongo motored n the como bat prea o Noodtr od to trtongeon the probablo dato of Direkte efter the mention of sbor five to Surs that follomrod An lunchen Sandala Sor For the one, too toro jumtifiablo bo bobore that con dao bat Arne Jacom Sundile Som belong to the Vydyochan gacha Amther post that Sandila Son of the Kayap loops murogam Thot be has fro the fourth room of the conceputable So far we know thero po duroord rogurding the followig- The ce postenor to (too lfo-bubo) of Vanumento deporndar (care of ten parvus, od Vaprumunn floonsbed after Dinke Sur Tbo pronou that Bouyguhan Sundle Son who postonar to varusmier conot bo gore of Vidhanta Sur Hoodo Stuckate Sun mertod a la noon combat Arya madhart Skochta Sur of Koona locul Tbo TORQ mdoubtedly pfarrom U that Dirakam Suna i contemporary of Virumadity Semcrrat premtaka ( Sortion properlaku bluch u the latlme of the 8th to Lo Casted onth this foot da) Lo mnt day the chammed Malo mi occoring 1 sopro plece In tho third Continy boloro chrut, then clear the help of Kodraba clar, opporod bubandara (Alexander) Botandeltroml na could not ho had it doautod Thou very Hulan tnbe ame to Rajputma, on the beoog romed by constant attact of the Greek tod to crtabdabod it premacy Man m tbe for second contury beloro brint. It ropobucan state, od Vinmedity nuita lander Vino med ibo tath of Salman by multiplyox attacha of the Sabu (Scythummel Further be medo Walena clan fimone For that romon thuy en tot mod umaban pane shita Antory of merit Litorture (p. 144) Ry Baldar Upadhyen Danone to coton of powerful mod bbenu ruder dermed Vitrdity wbo procentod laon to be a yoto of h nictory on nor the following rene of Cette coposed by bong Hair- "बामशरस्तोनिमन रेन्टन प्रारम् । पध्ये किमारच चरम म्युटिसिम वित्ता ॥" Jan Worlu fully corropora thu feet tide 14 10 There the folloma necroton e para terba metalka pro the teample of Lord Cuod rubbe play • नमनाइने भौतिरमनापामस्मायुमा भरिव १९५ From the mlaum (1) Gacche bemed after Siddhar Dinken dan we prevalent und (D) to pacche boere from Nyanda (Nola) Kulton that the pago Dorino may be looking a Dios bach o Vatyder Varme Vidyadhan Kuka Vydan con Por poste perned for Sullivan Dirkan Son bed be perveket Eton then t . not probable the well lorowa Solbero Direton may be floor bed a the Nagendra hate, mon Kodya choon bed werted from Arg withta Sun und n hi riccoma Nuke breach (tha) angeetod from Arga Nagle papel of Varnos pod of Vanwen The mother of Prabbenkaartal infanos a that Nagendra recoba bed started from pupd of Nagendra h the chamaral, (Pr torerate, but of therren) of Nand Arya Skandha n mod to bo pupil of Sheer of Bremedipala Setha Tha linch torted from Arms San who flournbed a Vm Samrat 584 and who wo natore anche of Vapor bo cornocturn the other of Pubborrta romana wloat after that to Secoba Suri balcopod botho Vidmohamanya Looking to all thos quosboo to bow on yodban Sandaler Son of Archermende producing brand bo graad teacher of Deraten San? No mthar bag and that Soddhasa Derakan Sun or te gru Viddharadha Sun belong to to the Brobenadruke branch, Peorun Kalyariya bond that Pallota Sori boloop to the Volyedben bola pod after Vidden pupd of gras Battrouble to believe that Suban Nagabertan behooen to Vidyadhan branch wtoch ongrated from Vitradher Gopala popod of Sastheke mod Supretibeddba couple of pupile of Arga Sahmo Ancuat Sakhan have been nested a roone of too m kole and kalna Gaccher The way tong has occurred, eren in the care of Vatyadbara gccha a Nagahan Sun Canarqarody there seems to be no hem in aria Padal pa Son a road to belong to ndyadhare hole or Varom Hooon there a no ground for doubting the following statement ocaunog n colopban a Gre dated a Vienna Samrat 150 Vido mucha Son flanted a tho deny (ope of Pedalota Sort The author of Prubberbora bestod bar wory colaboom matbord So not xotifable to doubt t Another pont a that Norstone who brymen pop of Padulpte Sun and we well own Yopa dittorat from Neporn mentioned the Swarnal of Neodi How the meno af) booscholder bo matapod Sabril 7 The Curb of venerabile Plakpa Son pox Negubotn bt be more che bet Art papote San Pedubpa Sunrared Vaba A the Coma (Corun of Kube Further a hand and that Napstut belongs to Vacata Toma So Patalpe Sun mot be papel of Nagahanin Ao ackerapt n loo daube) made to pron that Padelpa San n pupl of Naast by cating Rund unwtherty But the tempo unated for the pro of the lana porunn Nandi (V Opply to the Neptun Sen belong to Vecaka mandout that the anged fromalam 11 पाण्ट मामाको सपणे भवनापरवीन Soos belebt Padalipua Sun flourbod in the first actory of the Vienam on Thus beleef too toquoe rondton Termob (P- Tarbgmna) of Pedalota Sun bon montoad o Aarrogadtara Comporta of buyon (crponto) pnot to Vott 153 mad oot postoor tot Thon about Payo Kalymorp brud o ho prabodhpurselor of Prabharte So become closer that Padalipua Sonorya who flourished dort Vo Start 453 Corona quently a form that the front Skabla Sun and none clotho touchar of Vrabendo Son pd pead teacher of Swdhine Dion Sur blurperan percobite *.md that Mellanda bo wts aliro at the bomo moupopchen Stoodila Sun datorared bow nicio La correct. Dinken Sun qurmat bo Pod-dowciple of bewoond Stuxodile Sun Lone Sun wbilo bowing the cornoction of Padalipua Sun with Murunda, bu referred to the latter o Koy Homomo footho dot about bors, Somo ba tontos doodle the date of Divakara Sure the fifth or the fourth contrary by showing resemblance between works of Negrou a protegast of Dubben od thomo of Siddhima Darular but they (wow) requiera orphan From the more ponton of catalana i repot be sad that Dari Sende posterior to Negana Nebben has dot arguated from Naganuna h a caterdy order pandul on Preparantunutra. From the pero fact that Madhyama Dern (Abdwny Path) ind Neben trots Dretrimata of Science, ano anot gone that Divulorum postopor to Newana Surely the coppucture modd baro bon maid to boa ngłt p also at waa polated out that, op and wymy of Negerin word omboded (by Saddle Dintre. Word of Dirakara San am a prosat ndable a text anly As n ay bumble opinion we should not besten bo doorda bo dun by copper al we com eco pud nad proof Vaenble Hanbhadra Sonhar prento Daralun Sun a banorfio ado of Stankevala Hero too, the period of the Sun mot bo moat ray Regent morcover Nagerhin bus refided Sankariter per (pp. 45–57) of Madhyakstu the doctor of ongruo pem and destruction peoporoded by Darake Sur Tha too. proroo that Salomon Sanon tonor to Napans Et me that to [Siddhescon] Sun bed not attained the Domba mbol of thoudt Sex falow the Dark Sun at her floomhed poor to this bool which ongoited - Vogt 605 (According to the Sretanhbars stadion) and a Varaoru 806 according to Dremban wala. That wby both the cocts (of the Juda) ca atract from hom work us outhority Dortoi-antant of 1 The t belong to the first century AD Vnde p 176 of (ntroducton Prutopal 2 co Boldbakur 2. 1951 31 "मीत नियम्पो-विधिस्निामिम्मापली नितपिचमात्यमामुरबान मप्पाम् ॥ १९॥ इसमेवरममावत परमपी मान् समारविनियोध्यामलान ॥११॥"
13 La bound the Dons founded . VAADITH 92-495 Str Dorben Sun Dodbo popeltos a man whole not the Khepa Son Videredo Senec floorbod dong tho ho too of the erable Sul (Danma) For the pure of Siddharama Son tuo smo ko mentioned w Vodebrada Seni od to) Darm Sor, though for we bow Suttasa Sunb metropod perthor of the u bo pan If no bare to roconale the dates of these two Sans who may bar to accept that vidderada Sur contemporery of Dharma Son tan como broo, thoropo mo boloring that the go maduroda Scotile Sur (1) od nono las od (w) Sadelbana Dorotan. contemporery of Vientem W port out mother and proof oth connection to the Sadron Dardan most bene corporod pore gummer lo demo s Keperula any of the scholar wbo floonsbed the top of Virem od be reffenrod to Kepon by aber authon la lourdubtart composed by Kaldaa tuod "प-परि. अपनी धमसिंह: । ताम्मा- पापालिता।" *स्पोम्पमिहिपता सभाष सानि सक्रि वितरण || २.-1 The corner between Vikrame and Darko Sommary well deferred to plum worka, That Saddharma Drraton Sun bes nitro oren commentary cab Omo OT Kepala barns out by the following logs OTC D Mostraguardentreprade- मा पर माममात्मान सम्पते इति विमानारन हरमन बपिस्पषमागमे पति ना मन्द इति एपमारने Mormorer t. datinctly todo loud composed by Umkedetto o inder- आपकाची भव इति सम मान्ममा इति" La Joneodh pemer too Speldbank opon wth gromo » popoteados - Hotel Ero a thes Narrakre in come in the following meteoces - पति मतिरिदिपपतिनापिपास्यमकामा पमा पाचन मा हिमयों चम्पमिति नामिभान ठत् । From two meteocar pertung DC follows that Dari Sun mont le Composed tommend that probe beca proda Kipenak A. the guar come from the poi of kepala bpomey have been 1 Honor not to who the Lor PL Harbor Prom u reluctant to beremo that thou en how cospored prumu Be a opevon om kort pertume to a manpaticallops i crted caly wten heb coorpored me odepoodet og et punkto porabile citong the open of Aubindi He boto validity of the form a bon pumper and bence W Opuodated Er other opim.co I Daraban dan pertung to our ant voted bi ork so ther kom to be no promed to Loabt to fact that the bottor of Kapropar M Bedchema Dinakar son The man of Nenealood good with Samant to the bor of both of the the pero The Sudan Son Roty boot wattooed Xothcord (Nobom att 18 brown as Kepala Iko, konce Schoona Dorian Sun alono D op till now dentfred with Kapanala, ano of the nuo grwok of Vikrama, thero bo to bach mog a beberang caten portraty of Sdhe ene wth Vina Sodalesco Diako Santoral, beboved to be the mother of Myryttar This tredtro mot bere onerated by bentufyng Ngoymsten woh Nayara The pode Nonton mebooed along with Samant pto amentary on Noman, but poc tho namo Nyumban or toy bo that this tradition may bereat be the fact that a couplot of Ngentan qoated by Herbedaan Suri by profion & with " HEHKATRIA," hos com motary Jnern Su may bave morbood the name of Siddhues Sor, retorna whole. But I would bo arefully restautod as to whether thor Sudden Sun omo o Saldocon Dimbar or como other La to and of the Serpturo Nayak, Neytyttan od nor Nyyratin : mentoood a Kontifo mack danlong with now porta la Nyytván nayn are only referred to, but not therolo thers tary caponton of them. to the rat (Nysyaratan) ady rold proofs are extenerely trotted So the Noynton Dot De Neymar composed by Draken (Sort). los other mount bo other Sidhurco Mabama Themenbon of Mahamat Datand of the current word Darabon, londa co to bobove that probably the must be some other Siddhese Sur (Vaal) Umuvati. Taavuthat composed by the Sun Eccepted by both the sect of the hovo Srotambeni od Deprobar. The author of Ntyakn bos extracted (estod abortlar martorico from (thom) Tattvartoti mdo bbm fcommentary) composed by to other bameelf. The follower ontmo Ocum n the mulable thry (118) “मैक्सिम उपचारमापो निस्वार्थो महारा 1 According to the retumbera bo sothor of those that Umum It menu that there rouwt bere boen ooty to commentary Tattractburn up to the tror of Malleredo Sur, Ament the mlable commentare cutuda thu bhury, to warmet me sto me composed by Dapubaru Daretodo wboos own by the up of Puppepada pod now dan bolerod to bo the fifth or tho odh century of the Virtona on Not . modo noturco from the commary cated by Mird. Sur गुल पम्प The Son (Uma) hos Moda Tastertha (outh ch-V) u " IR IL mom ubomoo w endoved with attributo ipam) and toodeticnon (peryml Both ona mod paryaya to rely punts (properties That defferepom betyron bers, for the author of the Bury bead up da to 427) For the wory reason the commentator S dico Genu) hu mooboned the cocotre ad adultdeco bledus (matos) o fra And the bang the opraon at the author of the bhaars, ) ho has given ahead the daracteristic of only the preu mud NI" (d V.40LF prywu to be looked upon Jutartu gm barould bare certerly defined person This very fuct a cadated by Delon Sun, barcome the follomy ophone of Urras fortured a Sena - KUI SR" K VS 29) a bo to commentary (435) sad- पुन मग पोपा एम्पो र मम, माइए प्रतिमरितमेव गुमा एप रवि मनि 14 Hero i follows that Uranase to Denar Sun and be hance flour bed achier tan Vitto Morsorer Vocals (Una) bas metod fro bodo od o bodied bago Tu Ho ha dempered them w mordy Time Heb ddod o qubfyn word to Tio Verde Strum Son betwerpounded the phone Wholo da robe bes macropod tre bodol od bodo bo notomody Trombot a Tren to mod ory collect with the option, So Uroentend to be too lathe commony of to Noyonkry, Ken predlot (Kemenpiyadi) of Southern Soriatod athordy Thoko who on the forth crotury to Use and the faith b Sma Sen bould recordo the theme Thoman ( Ud) has composed 500 Anonton It won the tofur to com beratore concerned opong the malble Jan Sekot walo o merry lot wortos sofort comporod by the Sun) and me Tutvertba () of the Son deputed on by womblo Harbhadh Son uport ton of Yatoa Mabatter According to the farm tradton every work composed by a Caturdaspunder woo convernot wat 14 Purrus or by dumperndant 1.D Corred with 10 Pumaullo Agam So Umart ww desupunde Accet dospordi Vermout follower of the bond Ho is the last dawpornden How to have founded in the wooood atory of the Varmeon. (Henoa) Uront must bo lo babu n Voor By cong the Cound of the conception of de obos n porth Machon Secme 153 Gidhen Son pupel of Mount Sun, co pope of Uonen bere con powod Dabubbar on Tatrum Horresten tod: पूर्वस्ववियोमासाठिमिचिस्तरबोपरि मधलियाम्पसमाच मामाप रचितम् बार वापिस पाचाराविमा पारस ममिक्त सहिति विपु-बार दुई। अपिलविविध काममा पnि मीविवाहामगीमयिनि । विषमेव व दोपते सिम ॥२॥ From that heat ane fact boooom carton that Gandhahran Sun buon composod a volan pot bburi on Tattband be wus te Vlor Set 200 So to rather of Tarttooler the Venue Sam 200, Some o warnpood to be that count bolnod to the Yeperty Seat (oroko Bat the Suche opted a Vlorup Scott 205 wad by Damir Deri Son bord Umupoortdub Vlore Nisyoktis (Nilfall) & Coponical Treaties The uthor of Niger Niget. bebumen oturdumpurnden Aca voorbe Sun bel the Nigam corpored daten Vn Surat 170. Oro ty . उम्म् र मनपरिमाविमोसमा इलामोनियम Apmistiko (72) 1 16 bathe atrodacton ( 10) Nayanter pred Norgotta u medable to-day ro wodus posterior to Sddatens For this very rouxcn they bm no place in the hormone composed bator Sdn Bharyas (bben) dams (amelo cortoly pontorar to, Saddhuese Modem bobora belum that Saddharon Dirtan un flaunabod a the fourth or the lofth century od danby they are bryog to proro that payudhtos to composed bacogeant to the fourth fifth cortury bo to atroduction to part VI of Babadtula Reppu) to so that Nuryakto wiro corpored pror to the second century of the vibran ere, Haco persona conrear with history baro now e last scocpted that arjakta se compoood prior to the wond century Then there a difference of procurogedeng the date of composton of Nordby, bo chon Nayrak vervon from Nerobte to quoted Hanco ter s po doubt that ibo compostop of Noyak orlar than the fifth contury of the Varuna ar T. Son Malendada) by quoted from Nandat na dane n the che of Noyuttle And Dorinak Gombo author of Nand, bes morporstod many one of Nurrukun bon tocs Node Consequently Noyoktor ber than on the compoutron of Nandl Sauno botons determ. po the date of the companion of Nmdis Virunt Swart 980 by bantfyne Dortmoula Gaon wib Dormdebo Care Krimere, but that a not for Tho gru of Dovada Garu Dan Gra wheroes that of Dora Vuoalu Corr, Dasya Gambo mame of the cant worth Dawala Gubca o Derend Go Kursurton but * p mother nepod barod upon the fact that in the Stbevorst of Kelpunt. Dovevala waulo Deruddhi Gem Thant Dorndeta Ger Kurut the redactor of the announcul tret different from thom wd boronted on going through the Streenit of Kalpesta ba to Steve at the Demo do of Donde Go Kempo ocown twoo Soo follow that thuo mot be another peqDO of Dortmonta Go home of b Schevinds of Kaloun thero » mopoon of ent of diffcrcot horepoo but benog Domino Dordon Gan kereta Contogoontly * follows that Doverdd Go Kumummoa mother sumo of Dortymaala Go For the very Take Hang Encant Garn bar called Donracaia Gan Dorarddin Gane, but not to to Deverddha Gen Kontberedactor of me Voerblo Maloyagn Sorbu dostoctly mentor Dorobamba mamotry on Nond Prove the quality words wwod for Neoduo Nonator, wo ofor that Nand met bare beca composed bofors tho ton of Mallorca Sant too, Tbo portant In - “मपरावपि तोपते CP 749 ) Hero Naadam modo bo to commandment of the dype Tirthanen, Heno pot now Door to philpon the wrongabon that the compoucos of Morruko - vory at Durmi that period no Bhadrabata who no oror bes flanned Another Bhadribaha whoso constanca na (1) 11 airyoktin tro cocapo alter than Suddhista Soni u kontod a the Introduction to Najtraten, o prored by bow ono sntmg that Dinlannerler than the second contury of the Vorm Kccording to the atrodaction of Port VL of Bubetale ab TUTOR देवगिरि समातम मार गुर्च नमामि ॥११॥ सहि माउमने प्रतवगुपे पभिवामि |IMP 16 con luctured mud to belong b the oth cottury of the postma on Hand follow that Bebaum.cn who floorbode Vn Sam 170, the mother of Nigrutto The whole of the le doctrnos o tretto a Tor woodbor Suhr. the fifth pouth Stern (voterto) bb bere composed opergu by blog to go Alllando Sun basmade fromo of both of them in a special Theresa Ackog Un) Stan (Thood Bogometa (Virbapendant quatrn what Jivabhagom Paotete, wo photo Boude the nther Malerweden Sue bus quated from Nands od Acryogedren loma Soon All the warto od thor ruthon belong to rey marco porod Katyayam. I thous pluon the tothor of Noyabr' has mudo free oto of photos of Pon, Vatla od Putemel Wahabharye oo then the boffwroco of operon rading the dus af Para Max Vols foot Gametoa mappa to bom the data 950 B, C Prof Wober 400 B, C Gokhatunkor Dr Bodart od Dr Botraker 700 B C Proapa Ratondo 800 BC Brutacury 900 B C Pad Setyembam 1400 BC. and Yucbetin D dato obarth 2800 B. G. Shna Agud loow opon Pon controporary of Yodhochot rod Paton, by pred androco from Amedhen a work of Pront Hobforced the date of Yodhrt and that of Parkt. Acoordog to be aleaton thow dates about 1509 ut from today A pod maoy Votte barro been compared on the moder of Pout Therem anty the Vartia composed by Katyryice a well known by the Mahabhara anity to Vatta' a marly apaunded of the mou nertos of the mother of the Vaula won the A Varaw koom Amongt mot borobopou outhor Patropub housed the word begon for Katynyma followay as - ANY RETRTSI But Sboberman heade the follow motion of ba Maxmudoman (10-S-1) the wyne of ketyrytor and शारिता पनि सम्मम् परमादित्य न अत्याल On the best of our coluna Katyryto myop wood to be fruld All the modern don bom hom va conded Kuyayor duble, Ksynyon mor b Patents but potenor b Pan There differta of open wong scholars repeda bo katytos ) de Tb June nde Tutunjana (Terry 19571 () Katya (Bbursdag (u) Son (1) Kromtr n) Vauctorit (mm) Spydenpudo Harta Cocarded. اند!(۲) pioru 17 Tho lun wethora bok upon bm u contemporadau wth Sukata father of Ary Sidebhadra od tho proo manter of King Node! So be my bero florahad about Ver. Smrt 170 footion soft There was of operon retrdo the date of Pampb. Mabubbery, too, whether to very other of Yogedorn to Peterpal or como coobs upored. b mury place thero » difference in readings between thoro n tho ported Mababbury w baforo od promet od thoso given to the Nayacak Thorouon for the that the Mahabharat lax meten times mod t mi restored many 1 ton, Keben n hos Robe bu mod that Mahabharga bad perwhed in the shath ototury of the Vermont V como rosa och other rolerences too. we should not diecard the probability of menu dengan to work that broko at the time of th ech destructor od restoran W co undoubtedly say that you are due to cha dengan The followig rare occurring a tho best of Normale a booked upon a brunnmula by the author of Mebabbery पतु अपूरे काम विशेषा Wakro lad oxfor that tcondong to the communentaton Raynta od others, the author of thos vere may be Kartye The pupd of Sulorum "स्पतमा काना मारनाम्ना पारक: The moth the athor of Burma verton outhor of some Sort Tlos word Katyayan bu o the cod tormabra for loonga, Varer on of Katy you too, thonod - Kutyayum Ho may bave written me kete Than Katyayma has componed Vertidas on Panaphone correction of some words could not be proved by theme phone. For the diforbon of ratiba उत्पानुपामताना चिन्ता या प्रकति । त प्रवे पार्तिक माविमा महर्षिण ॥ The date of Katyayon alus Varren postonor to that of Perm bot ito por by 300 to 200 gan from Patagpall the wthor of Mababawy for Katyayma suportfully ref-red to by Patronat Some botones proth Katyayma flournted in the fourth century boforo then 1 Theyyun which the 28th one of 16th pago connected with the footnote. Somo brator on compare the sentenco सीमास्तर पचनम्" Betro that to wdbor of the la portero bo Vabime son of Udayana But thert not Propor Volan n mentioned n prathyay of Bodhemoranon Eren Patarlal malo pounder the Vatla bu sud u onder - पुरसारकपर-“मेर मन, मिनर एप-शिबानो मरा नाममोगाम्याम् हिमस्पपप भागरि" htbetme of Kortom den the dog walang Takne #bo bo ncord bo us that the correct word met bo Viber Sorrmproper bo belona the ketyapma » pour o Vibon son of Udayale 7 See Portapen of Hemendur 18 Bbratrbert Bertion home peather pros no aba of sformation about beelf n my of hos morto ne bombe drooly montered them of bas teacber Malloredo Son bu (however) tomed Vunt - the (Dame of the touch of Blatten a Nayacakra Eran Punytn Octor of Vokyopedy bu meuboned the pate of Vuurta u that of the teacher of barth The gem of Vents us not reorded pay aber work but Nay online Voow of both them tontero pupel re very well corned by the mostbor of Narodom batrlar, too, apeads the most of to toucbe without pocitoally mentionng that. tho vow of bes tacher and catable bee box on new by refuting that of the teacher Long. Choose tavole has created a great deal of onderstanding about the date of Beatrben Th has lod omo colors to betere that Best Blogsted in latter half of the oponth century of the Vinton, Yoch tanamma boberce that he floorbod por to Vinum. Surret 45 According to the babes tradition Bhartton the older Iroth of Virundt On pang trong town of the now of Bheather gren in Nayomkr. * fod the be protopnost (orporat) of webde balon (pound monica) od wccording to bon pbola abonem on short antally and the unrror » Viverta imodifporton Carmequently the street nog Betterwayant (20 to the effort that better was follower of Budim ond be bud brou Drtunted swen tomon, may bay been made ang toks pole faubon of bombom or be munt bo on other thetter For the tre forshed to to the porc by me Bbeth Tho motorbop of Bhutabaryu begroit Media bbergi Selatan md Subdedback - attributed to Bhattan The author of Vaiyapadya, to commentary Mahebberyadpler and Vedeta atrevitamo od the winn Bhatten, protagonist of webda bab knot to much of we were to way that has totaly part about the better puped of Vuranta Sot ako to bolo by taking bt mort no account that bo Bharuban florahad the oven contury For the question from Bharth Vakyepeda - Kukenth benctful ood volo connectory on Astyy comporod potly by Vama od Jagdte bron Kwbrow a tho become of the south contory of the Vitre, bile gong merople for the phone +5 89 b Dorpcbo commentary on Karrotna poner the commentary whach. older than on the Korth the following bro from couplot of Valpedyr t atod - बाबरिसमस Harson Coomotor of Setapother Brabant who pol of Stabadams and bowe do according to ham. Virum Seat 696, rolon to Kumrla Bhath tod Prabban - Prabokom n ho bheen Purther bo mootoms o Bhutan nepopent of Subda bom od poco the follow by entong bu cooplat मौसमयम्, विमान प्रक्रिया इलामः Morror Kunal Boutta too quotn the 15th vase from the Ix Kimda (nector) on of Vaypody Thomas of nog proror that Berubatanar bo Kumer Bhatt an of Bertben the ends of Conapedh D K Thn ton that the cat was got contractod by Vardaadaya Sunded, ar Upon which was (1) Sert Van ( 163 ) Thor 19 the captal of Varme, a koom as that of Bhartrben So s follows that werely toro ou baro boen fotre comparton betaceo Batteri od Vikramadin Veabhats the wthor of Antropologia and the author of the Nancakt too mentions Sherber la Praberdh contacte Bhartrbar in ud to be brother of kong Sakala Accordgg to Korba componed by the emperor Sarmatagupt log Sutrata was the founder of some ore Accorday bo my sady thom Sudrab must be poco doo but Orlos, como of Vasunutra of ubo Sarp dyotty (A chungelboe in sout bato boken plea) Lo Vayapuro and that (1) Odrala welcomed Varmte bog bod (a) be wl bo u naburou Vaamtr and (w) he will nego a war mith the forego whech The Adrola wao abre a about 180 B C Ho band fought aghat Ytrine. Ho bars cormoed druna demed, Abaculub which arenon of the drama Gulatha compared by the poort Bhans contemporary of Nade Hitonen obrers donos about log Satula after (merly) ayng that he was king Some motrdi stolen opano that extra of someo Blurther bort pe royal family of the Malm country ww memed to Vomlandre father of Gorndacadre, contemporary of Dhantom Kort But thin Bharthan a different from the other of Valyopudry Exon Donge mention Bbastan, a pocoot of the doctrme of maboda brabime So ito blunder of bauturns to deado denten of Bhesten Dhunonakti Kuomale ud other by royng pon lang Kata di The methor of 'Nayacalora mer work med kunden hos Nayucakn wtulo pondok od refutny the Vxorona mutem of philosopby The work may be abbarya or . la oo Kradantri The name of the author of the work not know from oos work, for who tuthor (Lallandol roer to burnumery Kamdan Ha mont be morem scholar W. do not food in the Vazanda worla smetable at preste any reference to the bhasya a kike comment or pote otor may extract from it. But n Adarstundam (na V.). drarna there Meat of Romana Vuwala scholar of Ketuado From the following loc locorng this drama o becomes clear that Roro wthor of Kand -परम: मो मो कमर बेषिमनी प्रगिरी महारबमान, पर्पयामि माटो यमः नासिरिया Rorpat Upadhyay be mood Kendi Rerana bharya, and has n this very placo stod as ondeo Nrayna kadah Theo very Roma muy borre boon metodo bhay by Suyuna Actry the endor of bharya on Voda Bulder Upadhyen water n hos Vadila boya 6 57) that Remuoa bu composed orna Bbury trade and bus pren cyto ho orm pedepeche Parayı n bos coronary on Vabypadiya had under whale chuc datoy the couplet begin with FUTTA PUOI पवित् मिस देशवावि विडिवणादिति तव पुपको मिमियो भूपतो याप्रमाणमस्ति। Ritha mrtno oro beren my bao udos bar the ushx of Kodu Voreover o Reanuprabha . ammatory of Vodaco Santan bertud AUTA ru trat si पिरन्टनपिपरप्रमाप्यम्"। 1 Hoo booked upon un cortomportery of Candragupta II by bestoran-Lobodaeton (11 14 15) Autobian 2 Set the introduction of hobund pablushed in Chanthamba Sangkrit Sure Beains 3 Berdarta Inbaran ( R1 4 "It mane prtbod of T'I for regley teth 4 Youth wo mola wpraids and to its ongreal boo-HRE From that follow the thoroborare composed by Rent n the bent of the Vrwa trate of ptalopty If the Room no detaly be dato po prorod u porturor to that of Petroplend or to that of Verma In the nitroduction of Vuonnon dated n Vro Semt 1969 by Mabado Sorma man of Goodber Bhad berny Balo) otvoreno od "पापसमामिप्रास्त्रेकालात सक्सिममाप्यस्य पाचात् मेममा राम्पम्प पैसा दिवस तु पयप्रपातमा muutuneita tra +115 H माफिलारी मारकपनाममात्रीमारताम्बर From the to dated that the very by rotta may be my pobe and the bber matha Rann Red Both of them i fartenbod with commentary try Pract The time of the cornery not know. At let the fact certain the bora Primestron w kurorto Allrado Sun the mother of Noynalo Bat i rerneo to bo detronown to bow ou Prem D Pirmunder the whor of Pudothedamargrabe. not soldo Priet and boomed as Prenbestapade too The wory Bherdryett mentioned by Sarkomen in to Visotroparlan Commentator of the rulablo Vuwath haunty muoton the now of Pornstamme. That the protestam Varmelo plomopher to makemor to Alle Sunsettled fret Why does the author of Nayacakra refute hestand even when there in pod many occt commento al Vowodant 7 A wpły (to the goestion) that more that Janna . thereo read by proting to the purvipaksa the wthor Allevado Son) bas elected to work for counter roupon. The study of Nuratrynob the meson From the rouation of brands occurring n Kondomend that oren a thomo darya gadynda may bero been expounded na bocal way As this work of Ketand has now almont perphod *» not adable ba belen bat berelem to connectors but there wm an ordinary expowtion for andrade) pror to a local treatment by only A de la repro carti choly Prwatapat Ile mano d the correntino Vabat Homboned tytmon the kerature of the fun and the Buddhas ku not known at toch work was corpored by hare Then we bo wy about squirmoon? Only quartoon po by mourney to pero no found in de luns and Bull warts The commentator Sushoon) in the Nagator awal to word a Tedad (R 620) od bereby te hur mbettend that Jiwan adesh wifeon "मरमिरेमात्र मागापासवान (भावारमा पनि) समेमोरिम 91 thero commentary on Ketende By with abood 'a' (621) bo giros Dos pleng that the commentator # Pressmati From that it follow that the commotery Ketuoda co the Vamouberth n composed by Rena od Prusuma bus commented upon it Just an provou pokoryton of botte Vorobandhand Danega to u tome refuted to here, ton, both Kennede od to carmentory pro arcolinoconly refuted On Sokhylunda thero bo 1 commentary nurod - Yuttachado There the namo of Prostat a mortoped, and I contos refutab nom of Buddhist scholen up to Drags but there to mention of Dhemalt Hande tu mferred that this work (Yutu dipekn) componed the story cong perod between Dooremad Dhania korte Kanada Then the ongnator of the Voronka darin Thom der er i vory copt pernod a Viwanda oxbo lad moch omphesus on ou (Derbiconty) out of the portant cob. The ongemtor of the denone Yimouala med much w Kanada Kanubiy Korbbalm und Auslandse Themen atto propoandad on the darme me mbetence quality stan, wal pocensky pbculanty mbaronco ondno-estone and three or scrutted by muy philosopher, no way or the other Since the Vowomba aphoruma belong to a very condo porod, to a front poredity for vinents. So natural thout the roading of propted Voemkant tory buffer from thonc ocaring Nayacakt By tulong into wooout the nubtance of the aphonero fot Vanoulcurutra) Preabastpada Acharya bao campood a bharya It a callod Prahattpadabburyn Soco o roully lacks m tho daractorate of bhary at hould not be donated as bharya Prachastopada Achary too doo not name to comportion of how bbarya but names t u Puderthechne ognbai Evenn Praneyelmelanda (532) tallad Pederbeperromanoba The date of Prusbusta pada Acry boloved to be the fifth century of the Christen on to Nayaca wo fod Dy qoohoos from Upccundo Mahabharta od (othor) Vodac worto Fortbar qutaboon from Uptrends are given us withonty by profiong to thom ve to show that low condoo (of Jan) pode with that of Upande According to Brema Pradta thorouro very cat wochs Thore Vacade are likes of our mallorowolp Vrou mom of bowledge barro on metod from the lako od they are proud ohoda They o the corner stopou of dra ooh a Suuhy Vodına oto The Upensado mergomioon of knowledge by way of the fral part of Vode Tanagh the number of Uprando o be the Vedeato look upon ton Upendo u tho meno Whilo refer to Voka ww Mellanda Sur how quoted the following moutono (a tho 7th pola निमसम्मकसरिमारवाद 1 One xbolar tam mtroduction to the boarsa E н प्रणम्म खमीम मुनि मारमा परामर्मत र महोबा मस्तपाराचासम्परापमतमा प्रवतो, मा पन्य विद्मारन्ति, सहसगवम् ममम्मेपरम पर्व बमसमर प्रयाको पात मानधात् मापदरसोमबार एसपीरावात ग्वामिलाममा।"
22 Usdrottare, toa ben pren the screenoo ahor Nyere rath but at bo pot ha om k may be from other but work perture to Votolimot The poet work pey be rukyu mtb For that rery rockon the compactor (Sahar) Arme bo barre were Valya kom by lower on quatre the following co- इति समयभिप्रायशुमवेभसारे। The Viky prache run hare boon furcsbod mahame lam saotha That too, x Pfarred from gott Es poble de Pruttaman mury btn compound commentary on the Bhara the camortary which bee bean artered a mwy place by the thar (Mallorado' Vnde Do Son bon bowery sectoard (ebe u of) Attynes the sther of the boom on Vamor, a Syudadero Whether the terma bos or Dot Doto bo posled Tho commettor has mootined some work by way of the followner Anong putreds Pitemps That work. Terentbrengrabe ar tekne the reading tetra for poore & Arthamograla or bry correctory the above potabin e out the people Sangrabe lo dedicades to know wbother the Serbato mock compound by Vade Acer D cometnom with per a gre other work. The delinten of pret, stom perception) accepted by the Stokhym and a ponton rompechey wodor - औचारिप : सपथम् " जमानामानाना ममताभपिपिता भूपि एमासकरपुमोरकम प्राने बसमाना समाच प्रस्फमम् 15 1. O bobu bu ard aboat Uddiyotabir The poet Bubanden bu od bus "Vendetta kan det परिवदिमियोपायमसम्पम् I tbe bang of Vandet the port bay montou uoder in connoton .th Value पा रच पिस्त रस रिमन्ति परी नौ पः। नीपौषि पति मवि किमारिते॥ As the word m bor udota the experienced object, prorou that the post u contemporno nth Vilers ox thue roy bamentation about Viboson, How that th post foon bed rory Docthy Uter Vinum If he bed floorbod eft i lor partod, thoro w no potability for toch loup aboa, Ho Udyobben trở tm thu sang Diddyotan na thon (Dico Ho Dong antener to Odd yota od broatian (latention of the date of Vairysy to by Pratt Sturmount of the Pajb) By beboring thus thorofarmace that Kubdan coctempontry of Vircadith be od the bal Domn the folloring rano of uw Nogtudata co to to joined बनाम्पम पर पपिसन् Horus ditfer regarding the date of Viltre to the Loro rationed nay carot be acopo final 23 The hus bera related by to other Wo como COTO this datortom n mo wala od u Uddalen. Nugavertido Damga. Premacy od Saddba soda Dinkor Dram draml.. But do or bor out of Udyotlar od other, bus poeted out the stroo of the work o wboob #occon or the modo of d kotor Bot only Vacapatunon hade los Nguytnuta berria o under land thereby decated the name of the mother) मागणापि सत्रमपुतमित्यार' भोगारितिरिव । 1 combater on Bot oven then bo bu bot mootood the work lo Yukudoku Seolhyu pat o Como ROOT the following loo भोनारिपिरिति मार्पमना !" 1 From the boo, bo name of the work where the demton occun » not know Suatttantra But it board that there is way ochont ad malumoos work mormod Stunt md composed by Vamperya But there is differma of oppoo monget boton rogarding the following (I) . Pocedcery the athor of Sustentra o Vougega? (11) Aro Pmonkey mod Varsupaya Duomos of one mod u HTDO PETHOO or thod of different pernco? Lo the Bhassa on the 15th apbord of the fourth pede (foot) of Yopabbury there occur the followme los १ मवलियरन 'मार्फाने बरे न पाणावर FMEURE QUITE पन्नामिन मुनिना पाषा पपितास्प मप पत्यापित परिणावामा रिपुतन On the beam of thom yang Tetristen to moc Son And no Prochure Adeny bolong to the Vrupo ng bo poned Varmo od Vrugtey words have oth od tho toon for logo Tbos Sem a dangtod - Yoquetrt too The word Yop fyonyos, too, of Solihin It send (Bagind) Gta 4 - "सम्पपेगो परम् भाम प्रारम्ति न पनि ।" For the very reuna Vacupation too be made the following utement n Beatz बोगसमुत्परम्य मार स्म मपवान मामला oly burder that Voruptory uy whole profondage Yopuestr, tben more b beboru work of Yogamate Than Sarkhra Acarya mag bere expanded antites of joge, 'नियममा ममुकामस्मिासूमना For thos Taty rots bo me here and the peace bernt the trico HAY meant for the proud toon मुतारका H वबावानुमानम् गुलान परम समनपरपति। खरिपथमाप्तम्मावामम् ॥ law commentary Tattrenmadi Vocompatto ane bar and बपिताल स्राइल While proting the rory couple n Bharti ammontary on the Bhura Brulmuth (ob LB) Vape en bou od मएप गणात मुत्पासिा माहस्म मपलान् मागिन Hecat idem that conna Vicmpetion the other of Sustatn - Vormgury. hthothard pole of Nayan Muran Sunhoud भिवधिको सपने तने हुमायखमिम So the Sun too botones that the other of Santandre Vartagany According a Homo betonoma toy Voy Sankhya Yopogry one bo bornakroon and aliwon the dle of the funt omtury of the common Comero bora belim that the number of Setion to Pronto Ashes ad do hombra too If the following couplets to wod comandared, the fact the bonimene betares thet Santana work of Pachecoy w फporard- एस्त परिश्रमम मुनिएमरजेनुसार प्रायो। भामुरिरापि पचापपान देनावनम् ॥ सिम्पमपरमासमोस्पेन म्यामि । सविसमाप्रमठिम विहार सिमान्तम् n सखना सिरिनम परिवारल। भास्पासिमिया परवानियिमापि ॥ Ero Scoccoynbeylem "पनि मुनिना मुषारत र पस्तिमान परिलमिति तय पनि बाबा to Sutrama.mptat, too, we find the follomos भव पचपिन पस्तिस्पास्मीपुत्र बमोज्यान् सपातिक लकिण्वाम परस्मेष सिप्पी पामाम्पपरिवति प्रहरी W bolumns that the Sexton we non poto by Veaupten. For be about the thong of following common to Procube by Tan But babes quando Yapdos composed the soch tury of the Valores L. by prefing to the following तापमान मा पठति bahy work we come to the fadas पाचपापना मत मेप तैयप पेपरति हवा प्रविषेषात् परामप्रति निाप्रपिपेपर तोष सौम्माप्नुवरिति The occun ena n the Aberra of Vyum has cramentary Vampire hus attributed how to Vyped On Indice che portona n Vitrynon Pharon Network forno per pred n butory collecton the moon of Prarad Pastomor ropter The daton of 25 Vrum ad Verygios Thas The authonbep of Santtinn has not been defolaty dooded. Theren gortco Llano of Buddat mook med u Panatha and that of history Worcher feel that ingan not the one of a partade omul but it most be Typowym of Pancolla ostbocmo mth Mathan interno derived from the La Vatry yot of the Pareon od Bbendrop thet of Vidyombor Tbo medo Varguga may baro been derived from the Virgen logo The word Vrugor ochino the popada of tho following photo of Peace गमाविमो मन् The word Versagtoy has a to od to como Yo under- VINH 177 r95 The pathadi 1987 ocano Neduct grow occurred at the apbare at प Lobo Vrugo loogo there the phek terneration from the word wannen TE bome techocad According to Paderb, Viragay n the teacher of Lowerkn, od bo belong to the for century Bu do not correct, for the Demo Sasottra oceno the rory KOCH June annoncul breadores y Anuyog drn, Nordbotn med Kelpemotr od Bhagant too To Settin Yury incent It is not contradictory that o como pluco Pocunkbe Acharya o mod to be the author of 'Shtatra od n some other pleca Varnegara o rafforod to For moon the name derved from the Inergo to the other the name of andendua! Both sppoer to be donbaal Invarakripe The author of Nayaka ba not gooted oven ogla couplot from Swakhyapti conopowod by brano But he has manly dealt with only atute treetod Sestitaon. For dyrton bo bend माधिको पापपमेरे La beloved that on koon belong to tho fint century of th. Vinduern, Ibn rathor (Mallorado Son) while relating topics of otber um of plokomophy has done so by rokorting to theropol words anty Thuto wby Sonidoptat may Dot bero bero blood onoborty Schoolos may brostegato the matter Tbo Buddet bostort bebor that Vubadba bus composed Parmarthaveptate by way of arocong to Sobhy upto They way that coco Smokbryn Acarya by na Vodhyttan dafectado deposto Buddhantr po of Veobandu ne bos abertos. Os comng to know about Ho defeat after sometimo, Vubuod. mited Vodounen for Kryptoni debeba But at the mo Vodstvu w doud. So for her utofacto be compound Porrorthoped by way of rofoton of Subyeptat. But we think that the Vodhist oot tos lobo, for on botonta onun uy that dobuto an anth has taken place betwood laboro od Dong Poul of Vmobeodba Therto loro sot defeated but even then be did not abrico Buddbraun Camoqdartly Doner pt carestod rod stopped pro sportual advice to the popola Wbebom paafid et optar of uga Alcyon, bo cu pored Pomecan As thoro o contradictory be, a doo Go to wtor of the correct Whatever traty be. Vndhymn the thor of Secrystapt not looking for doctrine of both of the differ (१)मात पारिपार सन्मदे पथमावाप्यपरमेति विभगती मादेमहार स्वीकारस्वरमार गत्रम पीएफ पतीसहप्पा, सन्द्रमाणि पिनाति बिम्पराठी परिस्जिपरिमापमित्पर । मपिपरवमेपारपनि माति पिनाती पोरएरिणमिमापारी, मसामिमानसम्पासायनामम्पसमपाम् पय विमगफिना मा प्रति पॉप मि, मति विनातिन पुस्मणार नास्तीति विषयण पन्तीनि रमापारका।"
16 Soral thoro mti Sally Acun paped Rock Adobes dey bero blop plear between bo od Boden In the follomos et complet toro morton of Vpbyna Radler नौष पनि द पार पत्र गौर बरपतिय । सवा सीन माफ्तिा विममागित || Kokemptat Dende Angyen I thom Kamptat (Sevimauptab) belwered b be o Sebumpet, po proved that Lokata floorwe domy too rapme of Vircon or boterer to hon. At least thus certum that there was no compact of Loll with sbor Vodbudiuar Dame Swaltung, Hanblada Suri od Naharcoy all the proo scholars word pop of Vmaboda. Mathan Acarya han composed commentary on Sooklypod ww triculad mo Chimpo lipo by Poubertha Meben ( Street personnel (500 A D 560 AD) So my Buddha h storm. But the not accepted by Tolak Babesty, and wo, too, hold tho LTO For to bet of morty pot con botween Mother and to traboo by Peomar ha. b Mather brotna booonbly mpenbord. Er the Demo Mathem oon on Luton of Mabryunta (folur rrptun) Anurodant h. Bhen the mention of only Sentor Carosequunty of labor od Mathe nobod Amuyor (dr) o Marinary it pets promed ibat the date of Mecbentary pomenor to that of Bhand tomor ter of Aotropeder Ary Relax Sundb muthor of Arcopten wo bomo D Vitrine Sur 32 got need n 74, como Yurdu 114 od dod o 127 Ero Harboncta Son pood of Vacadhe differcot from Herbhadh Sors, too matbor of fremd works roches Anokromatabe oto wall bow Jom Habba Son. Jana Acauza, bu refuted a he works thous of ancient and modern Baddat uch - Dharam bort mod athen b the fint poto of Neynecke Mulleredo Son bon nderred to Buddha Abbuchurupu od treh Prdukogede a commentary b Vin, by way of the following mata uyunca te ftoho dostal Farber bo bespoed onder from word och Abmela otor बमाप्रमोमटे यमनाम पदकामनाया Huonane ben not setled the date of the terrena of Bodha oroandr Vitrolatnih bu Bharti ruperekcha mtoto 544 BC Pada Bebeder Upadhyaya pbes Boodle der 452 BC a 426 yen par to the Viru In the low of Hue Try (Yono- Charting) the seven of Boddhadon wes med by some to bare taken placa 1200 your ago and by rano others, a 1500 sung Sorme send that mm 900 years ago. According to aben, Budete doda 1100 B C for the pulloon of the map took place 500 after the porta of Buddha Atshet toothandtor of the Haan wountry wlog Port of bom . Plog ruled for 750 B C 719 B C 1 Hb co to lada 60 AD.HR, E. 2 H Yrded Ipda La 400 AD-HRK Catrangareddetta Mohanty oforms us that the permite of Boddhe aty bere taken place 1350 run after the Bharte wri a 1750 your before the Viboruna ar Parayum Kalye wyobo wid Ab Vrut Santan Juru Keleporeon ( 160) that the parkuna of Buddha took place fourteen years ood fr and half wrath Aboud of the date of Mahara malabon Then the data of the Norica of Booktha s catala Tbo fret coupe (go) wa bold post for year doer to buvor of Budd... tho roond 326 your before the Viinud ant od the thed during the ropese of Koy Adole la all those trdo council. Sutra Voera od Abbadhane word collected to tako, Thoreaftur the fourth coomal beld nour Kasum by Kaike of the Kosana dynasty King of Patalputra, bbwys were composed on Tropetala by Vencontre II md Suhkrudo beaded by Amphome. Tbom bburu koalled mehebbe Theo » difference of apmoon amongt bostonos regendong tho duto of Kerala Soun hostorno ury to be dato of the repure of Kecaka 100 BC In bon royal court thero vero Panda Naguiona od Ambon It bebered that Astutom a tho on ottor of the Mabayaan dan Narwa Neptun lounabod after Ariston Ho be composed worto odu Madhyakkan Viormentethem ac Hebalcad opon or contemporary of Gotarpun Yana Sod the begroot of the fret cooary AD. This Nega bus trupla trascendental od worldly doctrines n bow work Sutrleke to Yman Sutralam Negopora wbo has appounded in datele na lanca! way the Madhyumba doctopo treated antenerely v Pronpertanda bus entablabod n hos Madhya arka plalom which dovelopes pretty wetpade of Buddha, Thun Kardon roveab the lopoal power tod atmordinary penses of Negwne Philosophers open that the world bu neither begroung porma arku obect to oro ebonpermanence and destruction But Neguan bu refuted the view Wben megnaton (kaldea about the rolboo berwoco effect and can doon not send to rosca) bow om boro be ongoton ota? Refutation of the Kalpon commencon from the followog couplot of Medhankutenda "न स्पोमापि परतो नाम्प नाजोखत उत्पन्हा बानु विषम्ते मागायन पेपन 1||171|| 4 The not for the latter bem such चतुरिमिनिट तय मापमिति" The methor of Nayacaka after taking the very couplet into account has axterarely dont with in the poka ayyun (121 For proning & the author after resorting to the following no web tro capounded attoo n mean Pretoria bus treated abiem - Audio, Arun outpuda, wmoderna cod caribe Ho be refused the doctrine the (correspond sternal lof the poba) by of sound moment I Narrativell knora Boddhis wr bor old to tune of Kamila Kokila mted him to come to hi embly But w troetan blot do so, he whole kto to wa The letter IDN'Hiburan Korba Koha Cinta TA por la tbc Tibetan bopuutt. Torshmhla flourubed 400 ya after Buddies Bharat Virtala Itha R331) Hoca Tor too systbus Kemamahrbthet00.b seruter that ofthedrine of Buddle He in Argador pupil of Nagurune has composed works such as achatske Hustrdsprotaras The dor of Negrator bes arted the following coople from Hatalaprdoren f 1)- रम्पा विशन 4 Another prono for the work hout od furished wb commentary by Dune Varrbandhu Lorna Vuobundu w veteria philosopher of Buddham Abu barna ww compound on loopt them the top of Kanak It called nbhus The u furashed with commary pomod Mabarbat By rowerty to the bberg Vaxboca composed Abdarmakom od command port in bo le porad (of ble Lo ) How color Vabbendam bot Latorre bo accepted Yogecon doctores by coorme o contact with boddet brother Amana Asrperd towe (Voobrodta) Buldhant wcholen my that he pt to moc dorected obo derlian besar mended of hos blasphemy of mabeyman lowoute that he become rudy to at off betonpr At that time to be brother Astron word boo Vanbantu then lepo to be the banden of wavy too Wabayar roct. He coopored memory warlos perting to the act. While lopcely routing the toocorogarding protein occur Abbuchamparados Melinda Sun bo artenerely relocted upon Allodhora.om and its bberye od then refutod & but wtudo dong wo, bo bes roftled Pakraupade composed by Vaunin Tberos dfference of opron rogarding the date of Vrobadba Take.com Jepuneto wcholt bo ospod to be the dedo 500 A D Bot Dham who wulo o about 400 A D botted onto Chic laqu pwoda of Aong the oder brother of the Vaubandu So thos Acry weatern to Dbertanke. Pandt Vope bas odundan baray on Kurylenir सोगावप्रति नतम्ना बप्रमाणे पुरवातो भूपतिराय पिया विधामम' । Thornby Lomorena beben tbet by katedry the commentator (Viro) refer to V oboch Dey try marion Verbando Dator of Ceodregop (I) of the Gupta dyunty Thakog of the Capte dynaty flortbed the former half of the third contury kn retablo to blame thus rorydd that of bedre Hatunga bold different person sopordog the date of the comecebent of the Gopts dynaty som bolos bolson that the Gapur dynasty bed om ocod dorm the Andhern rouge ponod od tot lite The rury Gupta dysety and Andere Bertya dgedy Theo the foBowo stot Kaliyeprotvrto एते प्रणवामन्ता श्रीमररामरोजमा प्राप्तीग्रामस-नामान पार्विन ॥ be the beging the dyerty was not the mountain roan cumed San Footton drop of too mrer Koo to that dramy there wa Samudraguptu a od Candra pripta (linst Sokep waport Am.O bed dou ubed bomu Geodhore.com Hm-lond to therd bing (on that doety) and the Sun aloe So omo bustoria bel bobo Vietty Cantagapa (1) Saba Sabola Hur babet , coroct Vobedbe will bo uteror to the Vam Then I broup whore me krundt 8o the behef that mtbor abourdon Lro bg sdopting the title of trangditz to box thar Toy that aucto Log Vibrad, bet & Canakanambita to the Nagram wo como com fome goteboos from Carla (Kumkata ) od Sorota (wrontal Thoro trombito tre the most ancient works of medical conce, oro Euthortarro med ro the bus for the rubeoquant works of the science Pror to (the compowtoo of these two worlus thoro conto como Sotros(aphonom ) od kuptor pertan ng to Arroda Puntvuu Atroya bad tught Ayurveda to be pupub Conka han compared to (Cardo) ambta by maloog pritokan (adoptaboo) of the totan (contific work) composed by Apronssa Forn Hos mbeta crory chapter begons with 971 JU odny places of this embra tu ad Agnier ab preston od Porno Atron replies Sache berg the naturo of the Sarabta Punemo Attya - tongoral frencher It not pooble bay that after kepenting ketements of Aprvem a there Tom Nateconda mo those of Puryou for at the end of chapter the follow lone can — माहिरमावे तने परमप्रतिसहते" Thus Pure Atray to a krmon Carla mado probemlor of tho tantra corpored by Aurou ud composed Carbonara Pretomar mer amplificato of conceach ar abortion of appetation Eren Lister a Drdrubale added 41 chapter of low on Than there are 120 ceptera a Carlmantata La incent times wro come to three panoo, etch modes Atroy They are (1) Punto Abroya (1) Ka Asterya od (M) Bhd Asroya From the following line ocorny m Alahubha ou Porn Ch. 210 upport that the ongal Acme ( wuthor) of Ararreda oust be Krm Arrey मान्धर नारो पर समानेममिमितन् The coormantator Sobantha my md the boarnet us forme coo ebbar Knuor The followme rootenco ndicate that Punto Atroy and con el na alled Kapatron (arba can then c. XXTU, 153) भमिरेशाय गुम्मा पारेच माफ्विम् | मायेज गुपत्रा मारित मितम् ।। From all there wentesch & follows that Punto Arrogn and come lo # alad Heat gets ruled bat Pure Atrey od krom Arena kononm of ano and the me ndondial Kipa Abruya Bhiks Atreya In the Buddha Jok* ad tut n the time of Buddha of some me earlier than that the procipal teacher of redal kore a Takmale was Bhaken Arroya Iraka Kamraborty, a plyncam of Buddha, Predrota and Barbuan, bad kant medical crence from "कामसमरानमिमनयमात Conta com sa "Palatoria T 790441T AY7174 " Canl Sarlra Sibens (VIII) 4 "TA I OSTA" Carte Vom whaca cha L The Potarra Alregenmad LDOTA CTED by the one Candrabbage (Curta XI, Bbele . 39) Tou made morts that this Atrere my burro heca rendent u opbox moed Coodrabba LO then Abrera According to Hantal (1) this very Arun n Pinarams Atrore, the ongoal apander of Central thus opren correct (the) Atrey may haso fourrbed n about 600 BC Sare bostoran beleve that Puntmau Avera u roy soat (older than Btakou Atreya) and Bibo Atroy afferent from born But Punta Abrey and Broke Abrey Cookpad for Yhpuruya adhyrra (daptr) the same af tren Blok Aureza a mabaoed copi permone who cured with Peru Abeye Cardo - Camila reford to be following ponton of Puro gume s . pabo founded branch of Ygorrede, but bo is not Cance the adopter of Apures tantra :- # Corepaden commentator of Caraba (mbata) bom to Priangoli dotar of certa the beping of bom correctory od dotle Carla th Putantal u can be seen from bo followme were पातमहामापरयातहते । मनेगमपरोपवीतप्रति ममः। 4 Furthe Bbome commentator of Yaput Voorabbadeo be mother of Yarreta mod von Negombbatte FUM o. bok upon Conta md Patenpuli non satinct for Canada be yop bolo me of Lordon od whebo motorra taina (obtai bonument rutrumcorpted by the Sabby. But commentator of allation och u Bharthar Kayta and others have nowhero morboned Patentli as the mothor of Yorontra or Cankambte Kom on fndbog doond voorda roludo Yopestr wy that a thoroot Pabergull But do ocoot bo bokod apoo Hoog male moment to prove the statement. Foran the Burler opot ry that bilan od proinde onorated from Buddha od popecbac So to pop sound coordhetono believed Penal as the wtbor of Yogest. For comodinkul Dame Pom mb the ongoittor of brand of Semua red Eve Vampen goots ac from Home Permoph warkoba bharya Yorut Further con Younded we come acro Motopom of Pagal patime to the Sockheedera Thero in fonco to Apam Pongal Memputa. Po moto Parcul o opladno 2-4-69 L Caraka therm apontin of the 24 otros of the seoklyn kupon with ano prea by Pancenkhe, extulog bor (God) in Corbe tarono ond of otru (bola) od prmtry coment. So toro do butcho dentify the Conto wtb Pob Thos Panulin different from com, the atbor of Kebabharu on promo The thor of Pubtha Yoguit mod Nimetr ood the no Paul where Padomb, to author of Mohebben dortct from hom b. Canl then Potre of predicted to proponded Vuotout So (the 1 मार्मपन सोप्रारतस्मात्परम पोण ममापि पोरणामसम्म पम पनि ।। Then but dong mth Parchmentbe s bare the of Sanktyneptat. b Pool Yaput od Hububbed the bestod of 26 tund Carstee that of 24 2 समपानामा ममीना गुना 1 निपार्मिन सत्र नियो गुपः ॥ नामित कर्मगुगा तरल सम्पापिन् । तामहमवानमा काम गुना। Colla in, the CI 9. 1 Vido aak otra G YV YsJodporous whyan 61 (date of) adaptate of Carta a posterior to the date of) kende sago and mtoor to that of Petopete the mother of Aletubberye There was a photo sed Carba b the court of reconed Karab, along of boxes Some bastorama beleso that there very coola tho adeptor of Apirmini Bet thero ano dete proof to destify them czcept that both barotho some Photo Thos Kula' florted about 50 ye betero the notion Eren Ariston refers to Abeyi BITDOOS - Senha n Buddhanta by my of the followme vorm चिकित्सित ववकार नावि पयाचाप पिगार" Ho belones that corla only to adopter mod not madhor Cabecquently woce xs nubor (Atreya ) poor to Ametom bo cronot bo Corake controporary of Korla Dudhubala who has added 41 cepten Caraka ambits, un born Poco dopo n Hoe Kaboo prornco Scholan such as Cakrpe Datte Votykta md others mbo hayo dructed pahin added by bom refor to thoro patbas u Kuhura petha Vogthata bes tracted patha added by Drdhubala and ore pattern of Valuta nated by Varmbandern obra Kandarpta Praksa Henco Vostheta teror to Verboomtare, od Dradhabals Antenor to Vestbate, Veeblata o loborred to be floorhed o the fifth century AD. Theron to hoch a beboving the date of Drdhubal - 500 AD 400 AD Duchebala ron of Kepababa Thus Kepulabalas mentioned by Vestheta ... Astangrogabe Serrutan dibila Sumrita bo composed the tantra by collecting Krop datirered by Dirodna Dhuovuton Sulyatarth Boto Summume mdable to dry throom comum of all the adt am (looba of Ayurveda Tho fret fra bu cant of 120 cbrpters They are collectively Smututmt od Viddharta #suel To thow dded Uitentni brong 66 captorm bo the Uttertotra ano ncorporated topics trented by Agro Bbelt Viden. Portaka Jitka and other interpective trade It difficult to my whether the mother of Ut wtulo addry Urantutru be modo arptodations mod odooos n tbo preroun has a not Adopted Sorrutambua us immobilo to day smoot reading the followne question (1) Who dided to Urtariat (I Had Inyo lopted Sortiment pros to me who odded For prob atricted from Vadhurita by Darty commentator se pot to be found in der Suorota 1 garam bradot bort ftet mentioned the mome of K L (any one ol) bn work We flod that Sant 3 to 41 a writer on corn i Kio la obtured from Surmth, Suncha Mithuna ac Il the Saturati looled opon tbrt of Kala ujana not be tale to be * couteoperer) of Romila Further Kumti bo is belesed to be contem-ponary of Neto, od s predoctorat Acary of the Simon la cbool ha detailed Knala p Abone of Ancient time he rot 2 Cantı ahtopthina X 200 32 Sorun ber boon dopted meory a torre o person who did mo aumer of V Vaste Jerta, Candat od Nagarura From the folowngu learn the Sunda ton of Vorm विवामित्रानुन श्रीमान् गुट परिरमप्रति दिौरपपिनका विमान Of the two the font rooms Serritomba thel Sunt este sabotn sago negerberg femo Hence the Sunda believed to be contempory of great , By tham Surotta ment the angne Surte. Adopted Suruta pontoner to adap terson of Canka. This name that Carle a sredible today and Suntementets had been compiled the fifth century AD Accordo Dallas, adeptor of the Suruba Na Thero bere bom many Nagkara One of them is Buddust natale Another Nagwan in the author of Lohamstru, Yopombala otc od bon amont wb Ruuth (the onda of Alchemy) Therd Nape Daboned u frwd of King Sabonba by Bonp bu Harmant According Hoo Joon tudtoo n Prabandhantom Neptune « anteroporvry of Setariana ed to be A wollen Adaptabion of Surn bus akto place in the kience of wlcherry Sorocton between the wood century AD and the fourth for the deuty perceived attract from Sently benta n Surub So how ato Naperon wbo contemportery of Kingbo odco oponert of Nihal bo the doporr? Some behen but oon Carba pbyncin wala at the very Kne Stavana Ballad Yonani Setslarm Moreon n Nacronu philosophical work Up abrdayu componad 2000 youn op from b-dry Surut o rofared to wako apodadore the topic of trane chapter followo Udka prekornon TAY. A fra: Tbo mother of Mahebben o pore he metapod Smrd on Thurston ob barn on 1 1 3 bathroom शारर्षिगदानामुपदनानम् 2 1 170 Kutepartemebond solon. Eron Pa her wed the word Svoriteteve n the prapedba of 6-2-57 Hero Sotteror to al dicto Acry Surrata Acarya bas neatrod Subhat Gectin an Acarya who flortbed poor to be Thom Subleta pot Subtut pupel of Buddha Subboti montunod n Bucket warto wbk donline both only The Sutton Comptymczas dload from bom, Acondato Dr Hour to Somerota florabod 60. ron before the true on wovu koordag mo la od Grade Mapedhyay o 1000 BC पामेका मानमानो माम म विहम्मामिटर पाइलाव लाव होताम् (Hubert) Sede Saturation (1) red with the belo of frog har 100 cm Hooco bob dronty wald Saradina GB Mimams. There kroto reebox of mum Pum menn td() Utanium. The photos of Purvcima ir composed by lampa werde thero of Uttarmomamno by to post my Vederyth Thore trio groet ngon tro a pounder of rode Kumakande (the dopertiert of vode wtech relates to ceremonia ed od zacal ntos ) od sodec Jonna banda l the esterc parbon of the roda wtech trawb of the knowledge of the supremo pet ) ropoctively Both thoro woon sro contempor nou, for thoro mouton of Bedortyma (Via) ntbo Jumamutru and that of Jamo o Brubmetre Komos Dmpayant performed the Vyor of Voda la docto. So bo naalled Vodavyo Thor my w behoved to be the mother of Mahabharata. Purton etc. About the (belof) thoro o coconus of operoon mange batera Soora Pandos bebovo that Jam * popul of Vym lo mono of the hero of the twelve copters of Jammu (otre) and pbulowopłocul teret of the Buddhimba dealt with The copturo tread Kurmanda-cacto Hertos mocha uttan bon p not pod to the exponoma of vastu tativa (reality of a substanco) only marfa ntos te erporndod, For Pory routon Millmdm an dongautod thing rodande mambo mando (pounder of ghoroico). If parende p coeptod on the tot mount of watu-battre proceed of moral od even a (orresponding) motor becomo alle regen lated. Henco dhad to know the roman why there Do Foton of commun or may other work of (Purn) moon op oy quotation therefrons, or when thero datulad postal after wayng steet the cripturo dealng with nobleton to freets, taclou. There rafutabon beron the stylo scoopted by Moneles by rocortiog rentepoon of only the rodas Vadim (anchico) poreda (the whoch ports too mucho green before od strate it by way of comment on to wdha ) tartarytu (duty, bberoa da me trouted. Some Ackry way that anty rol ah urucifico sco otho Mannah atom of philowpply wach oben opeo that pom ( mert od mos the home of futuro heppinou a mory) ang fom a romlu dhana Bath those name hero boen dalt with by Mallardo Sin There (pow.) do not benoudo con from the trut bot they become so by the coponton of the commentator (Sunbury an Eros pturiloyata (to tab of not borg of bumap) of the red refutod on plaan Sunulaty o Purusunda toon work atracted. The fact too donares to be comadrod, Tho neome of Up the kther of the Vatha pooly metred Hon followed by Saberarraron the boibor of the beary Bath thooo Ácaryan hero florated before mellorada Sun for Kananlabbatte who flounsbed ray shortly after the १ व एष मेपर पर पर्मशमेमोप्पो, मममममम्मता' यो बाममनुतिरति पार्मिक इति समाप। मम पस्पोकन परिस्पते वा पारको सरकइति हैन पुरा निन्मेरतेन पुनधि कर्म मेमो प्पो नसामोरी बहेन फम्मरमन्त रेषार, सानि नमानि ममाम्बासम् विवातिगमगाम्पमेय Hout - Suben Bhuby on 1-1-2 R 17 मापारमनिवार्य मार्ग नाम पर्ममामले परमामाला मा हाम्रान किसप समर्मतमा वैशिमामानेर मामाको ममिहोत्रमिति में मिामिलाप da Commentary IP p. 165-6) on Draden maken 2 Nou Kalsnar y m Vina ma Sannt un Jan Kelantan that the order of Shamvarati con le Nodi u pot by my Of A raccoon het Acarys, ben neobmed nom of Sabermann in de works ach as Mrname) Shokamaitila The date of Sabertan beberrod o be about 10 AD But to commentary co Noyclone oloty of thout the Saber Horn on in the places (Statened. For the oct “उपोदेर न (0 वम्मनप्रेम “पप्पा मिस्मरवत् n the combinatory of the lat od porn norbermabhan (non-contece of prenou the ammo of YORDS) etc while doing Vodila herroo to. Most probably the commentator Scher) mont bon ou Subaru-bbery Larotination of the Dato of Mallardia Sur Hallando Son on the work of burnos from Anurag od Nadzor by way of nordonco Sobe postenor to both the thon of the form ( porno trental All the moden scholars adopt that the wthor of Arayonda bo venenbla Arytroke Sun If the Sun A ono sto bot talent of Vopnun ba be fouthed after wbre Surrout 597 The mothor of Nobeto Dorivhob a who pepel of Durry Gal and who diffon et from Dorida Geo KDXUDI the rodector of the (lon aka Tha Dora Gan Aony pupel of Lotarse son propd of Bhadro popel of Nepame Son The what is boow from the dette of Nank Negatone mandoned hervocon portry of Anuryoptan Sandalen of the Ny Varm The date of the (Malembo) Sun marcord m Skor 871 to 840 (Vio Surovinat 357 o 70 by Pony Kutyaourage o bo probandha porruloon of Prabbevat Haofalowe Dota Ger the weather of Nandat, wo cortenly alivo nmu Sective 840, bot the date dom pot mean to be romcoobla. Varmble Mulleredo Sun rospectudy quotes from Nodd by reform of the under ममतारामप्रप भूगो Tb moro mo the comment of the dinne Tithon bord Coonegantly * follow be the outhor of Noodt for both othar (Malando) Tbo date of Sedl Sur contreporting of Dancala Gare maakond - m Sorrent 877 840 » Dot poto pront. The date of thos Sooty treated by on whilo decomeng the date of Socco Dom Son In the Nepali w do not como crow Roy quotation from my work of Badebat Maty Dbroek oy vow of boas of roy the of box who fourted certo then Vino Slot 600. So sboru w do pluon wettore for doubtng the fact that the mother of Nayakn ntnor to Duterte Jabban Ga Kumon, the obor of Mbby ( Vonyabben) hered the doctrine of otpor uproges (wtentions ) trboled to Malmo So Minder the bron Set 645 677 type that the work (Noyabr) cothing badoon work of Wotaben, wbobo refutad (vow of) Doma, wboor to Dhankuta od who floured wotury Coordpootty tho (Mido) Sonotonor to run Usiyon Lou too b. Barth (1) Seo Bebod tih (That the doctrine production of Matendo fotod that once des annot bo beloved, for a Bampettura compound Buddhascos Dirim. O all the thrt doctor TL outraty of tu toga, oon of two peoposud poodin ochon ofturo operoh 15 that the Sun who poster or to Dman pot fer from hom Thas what ppeen from the storty of has work. If this proper to nthor of Nayantaubtedly mtortor to Widdyoları Samo beboro tut the date of Dunia 45A Dt 425 AD Co to boos the date of the author of the Nayucle proved to bo about 450 A D Haruvam bus comporodbharya Saputha Baborou Hopupel of Skodarstone the outhor of the best co Roroda and a commenter of the bbomoa Nord The bhong on Rguda wa compowed by Sundaram n nma Servet 680, Thos Slendemuno bu ated. no armo from Slokantban bom commcotory oo boo bhausga of Nokta VIII, 2 md oth very chirpter IIL. 10.00 urte from Tontrerutila od ono vorte fruen Blaub work wtulo corament py on X, 16, Erta Hortum ref to the doctrilas of Komertebbetta md Prabbelaar by mentance "इति मामाक्या' hos barya Prabbular bo popel of Kumanlabbatta. To Kumanlı (bhatta) a contemporary of Dharmakot Both of them here mentioned wach other LII ad refotod en of auch aber n theo ro poctrro wala Oathbu Kumode od Doordatorta o teror to Skendommen who floorbod now to boforo viruma Scuya 680). Hence they am bered date outcr then 600. On the other hand Malleredo Surbes not noted by renome or view of atbar Dbamatorta of Kumrk, For the rouca too, thao ndo koopo for oren abe of doubt o believe that the Sun tenor to both of them Rabela Sanlatyayaoa nho ntroduction to Promovarea ponts out that Doonga floon hodin 425 (421) AD od Dharmepak p 575 AD od thus thero o differenon of 130 ywany betwoca tau datan. Heron the date of Drepobo ocitoly womewburo between the fourth nod to fifth coolures of the Venue an, The doou not affect the least the date of Malevado Sur, - decoded by om. So the stem at the Mallando Sorbes flourished on the fifth century of the drama om atutested by the royal proof. Frother om datos of worla ad bon mootoned e Noyacaboy, do not auto toy botcha thon documen talon about the date of the Sun Vodder Sonnthe Greconbodech bes mod that Malleredo los corpored ayman Vorwortyndben, mar composed by Veoman Eros a tho Betandortbe of Harne Subdodoma tore o pecton of Vanta-ayon the following loon 'विमाप्त पान न ममता एपिरित्या मनो" "किमान्यात किरात एष पयो परस्पा' But the mother of the Noun Dot Mulleredo Sun. the other of Nugroalan, Thon to thopo ndondiale Allaradon by One, Somos con ong of doom may be the other of the Nya Thero no proof to by the bossono con but the other of the Negick For berth, while 1 Ho has adut the code of br bhar- परमानामा मर्षि वानिश परिव समामा पास्ता मापामिर रम् ॥" Thos the date of the best place 5780 md & equal Vibrada Sant 696 Eren n the coppe plata of Lobom of Pubbom IL Sala Sacerat 552 montoned. The the Hordo Jodge of Cash popus non.com.dty a be song from the following Tone भीमतोमम्हिणावत सिमास मूमे।बर्मामो हरिम्पमा म्यपात् पासपी भुठिम् ।।
dan puncal topos bombalan (the tothor of the toc) le catod a morte aty Pound Bheyker (Putra) Further con prorng rahdity of formes the modern od b commotat (Samboan)ben antod iphone f Pig only Nowhero malon of my Morcover the other of Nayaka bus expounded a good many couple of Prome Boddhet wat an logo and has refutod then letter by better by means of obd oproerd The udhor of Princem. Donega, mbo none of the proapal popule of Vwbods who cont bapan od who comment with metru (autta) e tomu (mepoul od ocal formelor) The code (Dong) bu founded a tho Lotor half of the tad century of the Chronom Theron restoran Producaya At protect they tro svalable only on the Tibetm Langa Only the Pratyaka seoton restored a Sanskrt from that ke deblos protod n Mactro bo to day of the mother of our throtoo work autod n Subot coopha The Sun botorvoghly routed percopten (oodler proof portano radnom a pobom (optio or relatro etong of wordel mod de algoe) after a pounding couploto porton (Alomboontoe of the wory Demonge and to commentary on round by romantong to strenants ambached theren) Drags bes refuted by adranog prats, deframe of reyer (ber of myllapm) soupied by Costume and Votryon od b cabbabod throo my Thompanab in duted hogth by Udhyotko in bow Nyytilo mod oren by Kanebbetta n bo Slakontrola Thos Diep by corpored open commentary on Hatlapraken of Arydon, Tbos Droga rodutos no placan the doctrine of how to ctr Vadodh rod to ponted out o many place in the work (Nayacabe). The author of ra rakom wys that Druage flourabad n the wood or the band omatury AD, Dr Seconda Vidyabhuhe Mahanty bebrou that the period the and of the fifth century The colombes obretod the follwe (datatoa of Prayek (porcepton) WARTA RETE The do borren by Vaubandhu ob Vacancy Thus wat ww composed by bu at the bow bow Voon (by fach) The ulakan, Watotelon od on Vom born that the definition maly Vostedbu Donca refut them dofoton od cod polanda How an "Vanband be the author of nandh ntach a round by nut blanh? Tesothor of Naya ben not cated any coupkt fra Alechoupure compoved by Darms but be bus continly word #contents Alumbrom od commentaty pronted to day to enkrat verone of them worka mraten o kngrega ach - Tibetan ete k powble that come her takes places to couplet (of Alnabordarbu odd COMVryweled by brogants cal e different time from Senat poto another brand move for that ruy * mitent that there rory be differson A the coupled wd Vide R. 104 214 of Drsbigyan and Abbantptum (1) Vice A 101 718 of Draenorth cotay p 3 & 9 a Alambonapenda 87 the commentary ambobed in Noyaalne (on the one hand) and to commentary on the other hand) For ruttoon there. Ifmooco between the contesco “frente ATH THE quoted by the com mentator (Sumber) and the Sevent commentary of Alabamapanla of Domega aralıblo today Nesuthelem, from the very own pont sobre more the dracted sentence in bolonge to the commentary on Alenberapanku. Somkerty wo fnd startboos n complets of Pramor way. (Hauce) Corroctro modo o Nagain od tamnentury by reporting to this forored Sobrt works ctonot bo scompted o abeokutely rolable Tho author of the base on Brhatbale, Seoghadan Gem Alahattin Opo ero of (tho commentary of ) Bahau w quoted a thin work by Melendon San It la difficult to ay a betber tbla rare betong to the Nuryukta (of Brahatlahpe or bot Boy I tho vento (roully) beloop to the Noyutta thero rame nothing to coordor But a tho printed (odation of ) Bihulalom do rumband o ano of the vorres of Bery, oven though to a difficult tok a prezent to distinguosh verres of the bharyn of Betulation from those of its Noryadh Eron Alaba yagn a competent commentator ho pot darod to pont out that there in vena of the bbwyn od thor of the boyuk Ered then this reason trapped place by B. Torto of the blanty n tho but of quotaton, on the base of the prmbad odtoo, Sordo mbolen belovo that the Sengbedene Gare Mahattan of the bbarn different from the subor of Vadonbindu Father they belore that the other of the bharya on Baudela poor to the author of murdonbod. Up tl Dow I'm not boon desboctly decaded to when (Sacchaden Gro Mahattara, ) the author of the leghubharya flourlabod I tho vorno quoted by Malevado Sun belong to the barya, w met ny that bo (Sangbadan) has flourbod pror to the fifth cobry of the who on and by Do meto later k does not seem far that some scholen behoro that this Acarya (Sangtraden Gare) beloop to the fourth century of the rikram en as his name and with dem and that nooo bad bo pone endng e dan before the century Eroop Dentros belooppy to the peod of Lord Maharm wo omo actos sanos ending a dos ag duoden Erm n the story of Nameda unden who founded tho tome of Arn Subunto a morte ondoren dan ooan Motor tb nemo of cor of the four populls of citur durepundhra Bhecbaburten, w** Godou od W ned after boss Godem The Duo ocen the Street of kalpu un of the fourth coth and socoth contro cong matuly po odog n to coły coorocira od oot reablo fucts Sended pa Mabatter my bo the carbon bhurylobe mmoopt my out of the Jona Surs Honopormas If Seadra Gor Mabattant to thor of the boun on Brabotkalpes (now) the wthor of tbobbery on Nube (Arabe not follow Hat hy dite certaphy posiero to that of the compation of Aarodvin Fa n apto of tharo bang coroplate od ante aporton of mapecto a Anurad * les in the folloma vanebo connected with pory od scoondary forms of the dry hua (porttito spact of bood) other than lan San Thn Prumanamcocoasa s pot completely ammbble u Bacchus chart pat boca abla to obtain ts mettrom dealing with maroce poba etc. The molalar to be commcolator ) baro Locorporated in this work to betoogog to sections ou mlecoce etc.mod har etpontoos bat we bare opplemented ceret, eta by lling to tocount worrons and relectroma nhàh thì anh 38 ( body of the lower) od bun Son body bowds attributed coodhon of cono litora critone after douh to was noted as under the bben a Notte मूमेको परखे मागुननिमाछिटो grunt (Nede) deeft remont So this may be looked upon u bort of dilation, for those wory rewon the duto of the componbon of Actyopatror voter then but of the compouson of ile bum on Natbu Farther the natbor of the ban an the poor data from that the bharya on Brutto * pots proved that the bowy w Belles composed * a deto powtorce to that of the coupo worn of Aouyopten Aaronder ceber o eroa Node for the pumo of Acryogedreres montand o Nadi and the other of Neodem pary now. So to moch booomos cartun that the date of the author of the bharya later then the fnt or the moond century of the FDA , Od not beer Thom delp boot later than the fnt or the word cactory to win an od ootaule Te debe s pot later to the fourth coury to my be flom bed ontm betwoon the focond and the fourth coton From the refer took made by the ammentator (Sambun Gea) o bos oromootory on Neyour muy bo confotoond that there minst have boon abbmay on Neodoutor Ho hem int of a quoted in pharm of Nandi on A 219 md thero ofter nyn TV be bes ntrodoond the worm of Later os ma 462 bo humorbood hory tatement (Pabtu ) Thoro be boot med mine of the tn, te bbery or o apondon cbaquatly ap 749 be bes quoted to forte या मामेपि for tutne तापिपरिभाषामा Hoocotoforced that there must be boyu Nandi by wy of opombon kapte of the the more hore good as belonging to the blum a found in the bbars on Berharap with pory that differono Jast as the soother of Notre ba ncorpordo venon of the Norgoku o porheca to commentator may borna dane o other one of the form of the bhutery o Bebedelo art may be that the very form of the bharyn an Noods muy burro baton corporated by the mother of the buy on Bredala n hos bber Whatora tory bo, the com montator of Naya akan tak to boron bolonong to the bhern It too bbery on Noodaw extent nba dry and he may be made to recog, to following quos ma- 1 How many von were there a tho bhas, a Nudy 2 Who composed the bary? 3 Womandad be flourb? The lakan (lereden bos mo wtore poted the monmondo but only the Cortinentator han dono no bo Nob o ardeblo protot tos are pot foco mentioned belong bobbarna od not the peut Nend) Name otro but the commentator of Natalin pared as Acam Sonheur Geo Kane TacTone, the fox to way that this the belong to the Caryn oa Nand, Sou may be that the date of the couponton of the barn on the there an Nande bry bo pomemor that of Millardn Sun, od tomor to the date of the commentator of Noyabr Only ta ruch can be defrsely mod at present Cap. 153 te Holm prefoong twth“ rift AUTO The reception rooting the ononty PYHITT Gotar, 1 scron aleam of complics emboding ten exceptions but they main by mothers who 0 89 flourished Later than the soorber The following completa met thn the cometry (p. 401) on Belastalo, n Sedda motocctn (pp. 15-) od o the commentary on Sthapa (Stben , odos. ) | -- “मनुबारादरपीठास्वामिनिसादेवस्याम् । इपद संभ्रमविस्मयातनास्मरप्रेषपुनरुतम् ॥ Tho madakat Daybere como tocOW och couplat or como porno o may bo that o some other role may bevo loco occonally metod rod the mulain may bere nommended t - पारादिम्प The commentate bus datod upon i rod huso apounded that it may wom to bo mo carponton of some couplot I need appears that the ammontabor chndatom the couplet by Dong parte, Thoroby the completo complet pes rody onder "मनुवाररपीप्ता Ooo tro odcetrg naratico of option that matig (7) Thm that noted us under o Harbhadn Sun. commentary (Pyon Neod - उनकायमाणपोन्मु उपासपुरपपाणे । संवगुलरिपोरन वि पुनमच्योतामो ॥ The dicono about the food repeto a very moont. Here the cobor hun docurod repetition so focły munda concerned The author of Norical ben mantoped the following two coupled by way of corrobo muro ordenco polo Il presed. Vabandhu -माविणदमाकारा तमेर-मस्व सिद्ध To two Ferro A Do doubt cated by merry abors but none of them hos menned the potomce or tbon of the mother These at met with a tho bhasya a Brabederanyaka (II. 543,41 Thus metto composed by Suretu Aarya whop pap of Sankocary mod who od to barw fouwbed n the cather part of the opeth century AD but thoro caplot so pot composed by hom thoy to morady treated by lom. For Hobbcha Sun who fotebod llebat pear to bom, bes poorpotted ( 7 ) than o lo S ohtravetmiya um 545_6 Ered Bhand has aumenttry on boas on rock rukyopediya holota cated that two verton along with the followog "तस्पैमपि" “प्रावित्वमन Haco the couplets to ay Oceat. Anda boy bolong to perpd order to that of or thor no botch to n doudog the date of or author Samocholen er optad to baboy the Demon Sun md Malienado Sun tre ane sodi mimo nindul. But they are not druncad my pod proof for at Tbo commentator of Nagcar has tetonad Mallando Som the Out of the motor) nhputra TP 81 Some modern wholm doclaro be those not to chectereBut thoy do not do any proof for it. On the contry the other hot n the abere porten of bon rok (v 1102) dubnalymcoboosa TRT THIWA mod thereby pop oot lo tono Melanden Sun MAIL n from tho ruy to be got Dutod od probable that the word Veden og have been added to be come after he had taped victory a depota Therefter the very pro Mallando x bero booomo o very well loow that the tothor bomba bao low has porno o Melladon So the And not mord fochino Morrone to other o venou other thort motoo the one of the other of Nanak. Moon Tio frate the decoro bout the name of the work tothor DDD and b dute, Consequently to non dal with the cometary and the commentna Hub 40 The Commentator I order to aptau th great pe od ccoon of the renpture Nayacak bich Nol of detp moonmg and philosopho thongbts od bach o pored by Walkedin San Acun Sobavura Ga Kontaa ramana o reporod by the (Jum) regina who the arex joud of logiciana md who s proficient in all Systems of pinlorophy has composode commentrymmod 4 Nyrygimantan Tho onom! knipture Nonacalm has pershed omg to the prowth of time, and a hu remaipod untracepto o many werch. If tbr Nytymimann commentary u not componed and if its manuscript were not presered bhandaru (hibrunow it would bare been impotblot retort the original Njan crea in ton form and we would har lernt only to to Naraama Sunbaren Gam Kambarimam he dood mroch obligod not only moholen of the doctrine of non-haotab but on the entire orcio of lounod perront by compound thn commentary In spita f there being the commentry the ongmal 'Nayacaben mootbox bet nuhol. But en form fomo dan bout it by mom of thu commentary If the com.exentator had cxpounded th text by ro-producing its sentence in toto or by potmg to perto t would not hare required ay labour to restore it, od the core tact would have been completely rostprod mis onom farm and not a restored now. The cou Dontator I botter boorposted a little lat more than throc fourtbe of the original rock. Thu partiron a ertored by means of parto noted in this commentury synonym tied for at panton Constancy of morning frenco nod ospotton Coonoquocthy moc monld baby that Mallanden u may hato composed bra work out routmbling thu rostoration Hbborouor con porod worl for better and mort dooprensed than the retoa ton, Tb rotorobos u Dorely but yo now of It has not been porable to fill in pipe in the ormal rock ben the making of veut ported out by noting only to purt Morvorot vorto of other stor of plulosophy tuired by the 'Volakan • pot to be had. Some of the anlahlo rota mob. Protamsoon etc. mitten a wother Langa (other than anat) Duch difficulty u crpercocod in restoring the corroepood DR or cal portion, in och uron tooted properod nth tho belp of this commentary only On yomg through the commontary of Noakowd wholetup of the comcotator dots not runun trorated Tboro Dot the bebout contro in Kytor that the commentator - tboroughly appert m pounding and rating sa Juma dars 100 bo los deeply waded recaro xocos cb worth of the sur Date of philosophy Puro Army Paws Nababbu md 'Vanipadiyy N Helposoda nature of beterodo tan of philosophy by tarta mto mccount ce poubt by Dean of our ordinary got then be relates the doctnde by metr ol mahd prool uod lathe ad make them comesteat with Sysca Hory pro croat tho Jana choon tod lama puloopbs Htoo room rory ven rulo atraordmary scholendap of the comentator pitad och proberety in bus or der And thou of other, there wot but of lmportou od dom for pory in the Kum For that ay Ten, DO 41 whore to be comenontory he bas made CTED bon etc about the pero of hor Dato place nd thow of tos Rede (fumaly) brodo odber and low dos etc. Even the moto moest kater that to commentator potenor to Actory Jobbadregni Kamus rem mod anterior to Katyruary Mabattan Fab this commentary vo como crom a station from bhary of Jobbecne Gta Komunia od Kotyocera Mabatter wbo completed kuume muth coupleto cometry co hos own work Vulabhurn me mentored the ome of Sorben Gool n his commoby co Vosylabbaya Then commentator - poster or to Joabbade Ged(666 of Viktima anl) Sorbo wcholo bobovo that Kotycary popel of Snabbadre Gari od banco they opeo that Koyucan be popull of Jombbendra Gua od bona they oporo but it gets proved that the commentator Kotructure) to . contemporary webolo of loabbetore Ge From the study of the commcobry peto enabtrabed Hat the date of this commentator not be later than the south cotury thoogh the powdon of the Seakby wystem of philosophy ocetimet n bos comentary the third poter room with Yurttapa, mas como entory of Sookhymuptet Bestit amat bond that this portion has the very commentary to to bain for at the cod bo be romarked that the finishes lavoration of Varrepetytor Hence to be trotood that the commentator be bored bo afontoo oo po other work but Sutton tot n bon time Yuktedlube belong to period later than that of Decora od arher than those of wholar ach Dhurmusturtu, od kole Even the following datenctorate of pforence well board n the Seakhya is stem of philosophy is tracted to the wound spoke सम्पारेकरमाम्यतिरिखमानम् The cron vectos of the poresco VIL मानानिमियतामिक्ट्रिपिमधारितसामियप्पाते etc. may bavo beo amtared mostly on the beam of no other work bot Suttanto The commentator of Nayscalco hapo when nho eat contentory mentoned w, or aponton of Dharmakate or gran quotations from bar works eroo when thero bo pod menty worto of the voterto Burdicht Acura Thos fact prevent from belot that the commentator Lorated tho momench coolers But there other p n wo bebring Since he has atod Visceraryalabharya as an authorts If the question of the door of the uthor of Vroumaybe bhary a ducadod pretento further mexparted, we feel that the dite of the commotor el here to be charged and Keonarmna may be booked upon a banng flourished in the math century Tfx den gets proved that Kamuramana the uthor of Mehuttera belongs to the with ud of in andered that Kothecary Alabama pertany popul of Kontramine, the date of the commentator of Nagzala pa bo ostablated as the soch century SAUVAGA AVD DHACURI Nemo of bone two come here bem meotoned by the ammattor tile dealing with grammateal top PHRYSH from the Sce Juna Paramparno Ithana (Pase 450 2 VW Pasdan ( Part 2 Peso 761 1 3. Latina o Brandtraj hrorte Sydina dirbtret, Vmachty are when Cogumentstort, This Semag Acary a postane to Katyrycz Kaysta, te bihar of mahabharya pa bo ud कास्थानामिप्रायमेर मरादि जैनाणेविपित्तरेन पाठसमिती' Super he composed taka o Aodhyry of Paris Patau wntor पारसौन्द्रमाः पठन्ति पुमधाम्ममा Furthews repond the barro Pwel wat dengan a hossud- एपरिौनाप पटन्ति पोनापिकावर etc., There ondernoon prors that Santa s motor to People and postenor to Katyjum. From to follow otoco impen that Acery Bapa bo composed como portal work परिमारियोमगायोस्पस्यो। The commentator (Saben) wbile decabang did of time on nou under hos odobre como try on the second spoke to four inpo men मुम्मनुरमाग मुषमाय मुम्मा पम्पनी चार माहितगा। Des denrptan s pot b bo noen ny malable Setubber works coept this como aby Ba is found as under a Tkossparats composed by Yatrruable, Drgemben ham - TRATTOR FRITT In The data of the Yetibda Ardo bo S Sony XO (515 V S. wd that of the compoon of Thay yet anbout Sula Semanat 405. Hopkubor Mukbor ways that the date of Typened or to that of Sretroben works of Douddh Gan and that of Amke porukt etc. But the dearty bom nothing aso bot be purtualty Srebben om o not compared by Dorende Gere, but they be bom redacted by hom He des promenat beloved to be la Seurat 90 (510 V S.) wburons that of Yotrebbe Actory 515 VS Norsk me corpored for medio theo Than what a stated by a while deconce the date of the other of Nayacare la ste of them, to my that the bare for mentione prone to be for frem a manna, in nothing de but Tiboyperetde erro Arroton Good Day Topic won mobile today or not to be found to go proof others that much my not bon occurd nths ? bo Samayr problete of Kondstonda Acara, the follower roro ocan who dealing with bo po of Kotry पिपरिनाम ठसम्म पुम्बारा परमति । पुप्पलम्मापमियरपोषि परिषमा १२ 1 Vida ANERANT (V 12Z) Sale OR PRU*P 5 2 doo Pio 455 Vide Anabanta (VOL L P 521) 4 Lo the controduction of Proncopenbos pabubel from Bombay al D. 1939 ed to be the best of the Caretta 18 Aero bing the rumo monog mod diffaring from very besty a quoted under by the cocomentator on Pure 461 - औरपरिषामो कम्मच पुपाम परिवमति । पोमानमत्रमिच गग्रेवि पर परिममेर॥ Eron to continentury of Melontor Sunco Prampon the very reo ocar. The Fornon met wth other works, too. & dcm a Com Pasy (Print) coromectitori on Kant-prakett We have not o fo t all stated the goontons us to who washor und when he flown bod. Whatorer may be thos vento mont beso been compowed by Kundalanda Achyu It believed that thos Aceryr flowrobed n the fort century of the Vibrum eru LF Kandlandı Acery roelly belongs to the first century # may bere to be cortly nocepted that be flounted poor to the date of the deco of the lui Card u Srtamban and Dembere The commentator hos cited a shorty on Kalpestra inders- “भपयो निमममयभामौएच पाचार, I well known that the author of the Kiloman" Blandrababuwana, catures purred Thas proves the mosquity of over Kalpatra Sompo me dardot that the Bhadrabuhorum Dot mo who four bed n Vm Soy 170 but hoano belongng to the wch centary of the Vam ore Scholan mry vertrate the property of thwa tatement Sumbaton Grauber caled orta Yampodtrta v obuthonty (The Yarupnablerta » * portion of Purnam(a part of the twoth arep Purva bramo orton Vn Surat 1000. Hepco the chance of soment a not only for remoro but oporable. If the commentator bu given qooboo on soeng Yanprabtrta i met bed that to Acury must havo beon concernant wah Pun Tho achectivo Kannante, sua prores das fact. Inabhadra Gao kamaramin bus toppened in V 1775 of bo Vetykubber that by Jangwarede perrt Yorapraborte, Prakmake lotto born (V 581 Vorbertion and in the boary (1503) of Behatkatpa, the meaning of Jane a stated to be Yangorbbrta bi ong of the true to monog of Jonu meotoned us pdicatog Jyoto (astrologi One meccscnpt of Yarapnblata ca promoot na Library u Brto md author Poom Wannot deada wiether the two Manants are of the same work or not, woco e hare not seen those manscripts. But the manu scripte of Pana has been described by may scholars. The commentator bas while ating Yonprubtota hus treated the topics unders “हिरिपोनि पोनिमामृतेऽमिहिला परिचारिचाच तर पिच योनिम्मानि प भूमौ निगाने रम्पनि मनुपारिपत्यधिा मरिच निम्मोगैप पपारिधि मुरम्मानास्पतिति The topic not to bo found n the conoscope of Yaprabhta a Poona Tbeten. I sorts that in treded topres perting to medical soccot, wo Yonprabtrta scared to by the com portion of Pure and nothing cus The commentator bas mentioned Vihutyunneda too, um withonty Asthos Vouyor rol could not be bad I rem contented by merdy mentong di mo madre a nipat In Semedaripada dapter conting of 236 rentan od nadu Tours rodu ar Uparma Vooder permetted Dugulackar derelrem Shawn ways that another work Vikurruered and composed by Rachanabbat nanilabled Liimid to be the bermior of the chinttu m. 2. Todo lodupan" (May 1997 A 5) The common bumoto 000 place ovo Yogurt by way of corpore endence. The mather of Yogaun Pataryali, a gott megs, Ooo should not comme a matko di beboving that the very Aarry to the angoste of Yoga For according to the follomog observation of Yaparky Sort Hornyabbe the onprator of Yope OR DIT TE : Petrol bowena na pounder of Yogue Vicap Mo create thom very thank Tatramand ( commentator ca Yasuta) while cheadating भव ऐमानुपास्यम् the form bormon of Yogastro by be for rent According to the Indian tradibon, the uthor of Yopeth and Paraph, the author a suhabbers, a greinabeal work, are aoo and te weedindul Ero Hoopla thero won the fourth padle of Yoput ophorwm. 1 144 13 which reputo tynnuradh ya ramanade ba angosted poor to murroya and Alerga A rade the death Penh contemporary of king Paperstra of Sump dyresty Kog Paper flormed about 8C25 ott Youndre corpored Waryn ood Vybery Thon mago Vytay different from the great my Vyrom the mother of Purnu So tn difficult to my as to mtach Vyun acopoead the baan Historike ky that thon Vyam ben pot flourbo pror to the tard crotury of the Vintme con The followay abcrratom made in the bhara Yoplotne (11, 13. u met wit or the commentary on Neycukor साम्मारिमार्ममात्र प्रमादाना किनास्यक्विामिनाम् एव मिारिमग्राममान प्यारीना गुमाना पियस्थापनापिनाम् वामम् सिारख" (hen diffroat to docude a to whether then angrel surco of the statement made in the bord polo x Yagablana ar kone other (work). Serco the observation of Yogabban a pade by way of a grotthon, a name that then no obrocton n bedurog to be so ballooning to Yoghboura) and no other wat The commentar has atod Toddlerorly an authority Thus work well knoma a Payun n the line world, Hawth work a totonor to Sumbaan Geca Kumasa n date. The work compreng 500 vormen, damals with a botubfd donorpion of the following topics the doorption which artos rungty (bence of wordy document and uppetto) embroma codoo of mundo bong and too coordinon following the bath, n, trotur vitnation of the Lp of the body wt.se of to the ember of sth The doorpton of the body nenau conditoon of modern beschub ambryonno coton can be compared with that pro n sunt, Tbo author of the wick (Trodlevopoliya) Tetpot komo bort thero w no doubt medget moguty Tom "Tedulerayal oocom lond Gimbatter Come on Dornokulda According to modern brotho mabatt flaumbed Vhon Serrat 799 breme obording to be add new come poor to Suba Seamy 500 TL mo ooo obo 1ोन वक्त परेन वाचा, सपना बोम्मान व प्रम मना सिमाम्ननियन्तोमरम 7 Vido Blant den PN 849 पुमित्र सम्ममा (512) od seat at a TRE 15 b Ubayron (P 509) beid YA 4 be the way in "APA ATEthe touch me tod a thone of the Agent According to Peard the tarmogbog ned the core. According to Blankan the word bn bs formed by termatco after ryze Thero a commentary Dated huda a Pamo nutra. Then the word Bbm Datablahod by editing the terminato on the con of the foot on the basis of trag" Furthern tho spoko notendha (R 207) *ond - 97 457 7944, * After you to the termoco o dued for thout Button dot known as to which groter the verbalong But Amunt be some meant premier about which wo are bo the dark, h Kiska ta obectvo "qaw Thos comentator bmi pre the follomne quotation from Penergie- भारम पुरमा समेस्पान " ete- Thom Bike coont of 60 vore k plorms us about topics pertanng to pronounciation of letteta The author of the Shannot knom. At the end of this Siku there at matuton to Paa So * appen this in pot composed by Prof. Rothor too, pont be antenor to thes comotar Orof the corre to four Tous prennt the end of the Sale in looked upon Eterpolate, the author of the memang couplets ch bo med to bo paurant Scholar may theo verschredo che question Then commentator bas quoted a couplet bepong with पिम्पोनपदार The couple o cornectod with Budler mod wo wuthor Bhadeta Dima (Dunya) Hambacho Sun too, bas quoted chers couploto Anckutavyopatalca Dorog Dara Bubadenta Dapu nd Dattabalhlcnu tre arma of one and the umo nduduk Ara Sranan Sun bus composed a fascinating work named as hammapayad Theo work namned by runerbio Harbhadra Son on Korupardi Sanpa toa Jnabhadra Gron Karunan har pabaned the work o Vacantat. According to remerch column ha bas compound Vocuri babbary n Virama Samrat 666 The second Pm med Aprym two 14 wedbons ac modo Veste section contate of 20 patartu. Of them to faunts pelude to named as hammsparnd The Son bas compone lompakt voorna from Hacker that an Swim Sun 1 In the commentary on Tudelaneyaly on the author of the Payam mand o be a polowed by Lord Vlahme t. It fest nutrition foto TATAH मपालमाप्रपाभिम मोपण सम्म भोट मैसीनो ममः . मामि । मनमर्म तरेर ॥१८॥ vrtas UFO RY W Connect with Pum! Koowledge of Purys booem dat n Vn Sect 1000.0, Venum Swarya 5% Hence the mother of Romerbufan body tha V S 50 The best per conot wol Pum.An Setyaretra Scholars n'arted obstory bo boben the targ Smart Son four to the fifth contury But they benso groot fort Varble looma hu mandromad o bodiedad in bochod bevaram harte Stem Son compte them 'Submetr by goaltyag Sok Hace thero - po dodat n wry that Son b pomenor to Uom already watod, Odow of the Kropsku badructed by to commutetor prorod bit bo floonbod after VLOS 550 md not cler Corporatly I got Two w 141 od 142 of Volleybabbury w with those of the bar Dubadkaba The Walton bas not good do one from Vomu Lubbenbat hob door to from the theory on Bebedoel For thou too, the burn an Bobtaip elor den som abbey All the methos Cromatutor bo pod poked how to ton from L. but he be don from Viceryogakathaya modno other work The first two perses ocar a (the blant and Bettolpa where all the threat just me after the other in Vmaavarnakabharya So wo duode that the commotor bmw apted from no other work but Vecsaveryskubbern Tbo follow my Loon gootod from other Antrag beder or cada "गुस्टेरोमन वस विशेष मेमनी मपन् E u bubored that the box of Antarpabila farshad n the fifth century A D Haram * pot proved that too cuentator foorstod after the fifth octtury of the Viens ort, The commentator of Nayaculoa bes om other way pomeroom grootstroom by way of corroborito nbow opondon. Some of them are now bad by postenor other bo Sourou o mome gootstou o tromba Itb roy way the ongoed morcon of contro occum o the act on century ten trond. The why wobr pot mentoond the for "Fif" They were treat with a Primodtagoda Tbo Skont commoturya Baba etc but all of the roadtrict. Oooking mo scoot weron trood by a fa quatroon way that the strongest proof for belerng that the comeninor pastant to the Malian a no ather work bat Voweverydabbert The commentator barn to follow potato otheint spola हिम्मपनर पति (!) तनमाम्पम् lourou १ "सिमोना PP949 " पत्रा पोरसम्मा मेय They are found the way quinoa n ported works.
The Bullets of todry tale me to be wrthatotpobe (11 Hond totonot be nterpreted that this b done in the top of the combatdor and act cater The statemeat of bu has applied to Balita mngh the time of the Mac I think that the word Adyum b dancerady uned in the core of Norma (com) Wartor & my be to do So be alone can be Adyatane Bruddha menu that Donants Adretana Baaddha. For be differs from Vuobadon some points and o bebs pava Adyutan Beddha apot be interpreted as refonng to Dharmikarti for even the commentator baterior bh od pether poster or not contemporaneo Formerly (7) bo potom WIL मम्मायभुवि Donegu ond rone bob free the Sahdarba * onder and he has expanded Story Arthempoh म्दान्तयारसा गती श्रुतिमिपये" So ho alone can be Adratana Buddha Henco thero ha pocabuity to bebeto that Doma kod the Commentator tog, may be coat comport The Wablar too. cxpounds by ballng thus delton ( 737) mto account Consequently it appears that the Holahan 200 the commentator moet bo contemporanes but doce the commentator has quoted from Vaenlabbriya beh delocły podaror to Lbc balcan The commentator bms composed his coumentary at on other time but ben ibe Noblari w not akre and the commotator bas gooted oo R 1152, the nth couplet from Alambapaparin The commentator has preded the treatment of categories portant to montu daah. und the doctone of a tred the categoria of Opamod (lodsot dinama)odicated by the word Vedlahun mentioned as under - parts on card ATHONY LETITA Arofactantotant and the Portatadine (adrocter of one kool) or braboonttrandos (Adroda of only brutto) wbo behemu cognac categories are ono rinety of the followers of Vedanta dari Perrons beleting dalis categories L Brabman (logos) and don soul or brahman mautbe ou or prakrti pottet ind parata (mand) no riety of Varota dom Feman who bebet in categories pertimog to a triad le brahman tbo rodindo 100l, and ou la mother nety of data dartina ELADA DI : Stan anda di farzand tundand-renoyurt baient to adrata Larut pudarth repetints Atbare real u TEJ UCHCOL uod tbey are autotoord in one Iron or other to Upang For that rory rawa there to go harm to belieto that the comprotator forbed to be surtb cratory Occording to the tattbexe an be Lotermosted 17) u forondranada (oor fality of our smiltsporsu dradards, (doulty of matter ad qd) ind trapadorth toda (the doctor of the categoro rathalantoined) tbe ltom odru (mutter lete olead Code Prane. Acara hated moder Theo of some one to the betrabhon (attacy) charter of the Paturthdhodimba lumbo dun Trollati eiratet tary Tar det " Eren the commentator of Naririn bu mutlood co P 100 m (dotton) or rennblog them. He bu hovorty dropped the word इभिचिव on This bon that the commentator has not atracted the sentence from farthadhe menaghe It must be now of tomo eutlier Act). That tsby Prestack Acura b gotowed W. hare kledy prored bile decorate the date of Print that Prom da bo sot soterror to the commentato. Schrohre barre decided that the of Vzor Acury wbo Composed Vyominti, CODOC.cary Padarthudburutanama * 670 A D 80 cetunty Prestadors bo pot llwrtabed barber than 610 A. D. Tho commentator has cated the following to pound etoondta परिपारितरतः रवानपरिता मेरो मानावसिा" Doly its first bemech a fully soon Jopata comrs.cetery Tbo tothor of Brtarticho pengan “मपिता पहरो ग्रचिनिगारपा । समापनो मुप्पी त्वनिप्परिक र - Sonda ch XIV v 140-141 Janta bowery समपिराही वरपिकनिकका तमनु पचनहितो रतः (पुननिमा सिम्मी परिमल W think that Joppata may baro me thus gootation from some other rort, la the connectator be gooted to following from some certher mort no boy bar quoted to abors mantropod me from me rot “रियममयस्वर मानव पर्य" Jeueta, too, may ban door The data of Jozpata to mootty 375 A, D. to 411 AD Jawatan popal of Verbhatta Tow shet to learnt from "Both of them the teacher od tho pepul mentioa Bhattan Hectonda, A com.catator of Cenka Varbhattar dou pot monta hu meme, Hece it lotion that Phattan Headra thogurta cuckcmporiy yooth. Tou Harcode . contempormy of Capdragopte, bom temo from 375 A D to 413 A. D So Joraty, too, mox bent flordsbed dog that period. Most of the porkoon opose that sothor of Astro gleder mod thout or Astanaraba HO 000 od the moodridal The roa kourcontrond by an md doctors embodhod in thirt naki choot bo proud that Siphan Geo Koma loonbed batter than the lath o atory Whoo Lt tota proved that the corcotetor whor deroine of the doctrine of bon-bolat od bo ** bend jou oponent scholen belong to the oth coatwy our matemat about the date of Valub tota Yay wall prord formaron Gem Kamera be coopond commentary on the 'N make the commutery whicha bu baped A restoring the potrebabto tort, though incompletely Tho com cotator bu mod borbootary M only thin by band "Wh bugtonbod bu comarcatery o ocott thood of the moth pole o loca: (0 the peo of the COMM Sumbwe Condi Kumu od (ti) the num. ot the country pe On this cybe the one of the nitty - pro Naampton Orta a thry boo Boca roletaroahna tha thu hpo u the ad of the math polos pot witon by the constatator 1000 py a later ontwoording to 1 in the 19 tadution 16 tho tothor of the mostanco m the commentator the lollowing poetloos سلطه بر n (1) Why to this (rentence) bere only md by tot at the ad of 10 the spoke 7 (11) Why did bo pot mention the name of the Vratha o the cod of that fourth spoko where 'ममेव पुत्रम् surkter! (III) Why did bo oot wito at the end, throgh sectory? From this t may be conjectored that the commentator mury pot hate mmed He Valhya add oed, he did not think it proper to mention it. To be abore glory and famo banho a caracteristic of a dospendonte ore. For that very reason he bas not composed her colophon If ready , tbo questioa un to what the same of the rakhna terenim omotu ered In meent days 1 commentary noch miyakti Bhaye iod Corni' composed Bat it was not tbo cortom that it would have certany a lapocall me. There CTC the custom that tho 'Vakbya or tho liko composed 001 tork sboald be dealgmated by addmg the word Vyakbyn or o at the end of the tone of the rork concerned. This is what cmn be enly reuoed by one bo Rog through cost commentene The methoog may laro happened in tho che of the commentary too. If the commentator had mmed boa commentary the name ought to have been mentooed at the cod of crery spoke and atleast m tho ead. Bat cten though the courteotator bus completed his commentary bo bes not need any word to ondacato its completion. Hence It follows that bom maturo may bare been to write pothing more than what u ard by the He bai commenced his commentary by atomg only 000 Tero जबति Apacho mtrodoction in the beganng of the first spoke. In all the matcripts we food that a tho begion g of the thed pola the verre ममणिपुरानपना enttea w do impcions mtrodoctor. This may ba o been abeo pently witten by come Ops Let it does not come from the pen of tho krt bor or that of tho Comentator Torren no dont cxcort be act to tntion here, it n looked down 71 laterpolated by me robeequent soter Jest the commentator dd pot think of mentioning hu oru mame, mo he myy not ha e loucht (I dennable) to mambos campeotary That is why po where m the commentary e COOH KTOR to mno mentioned er her detecthy are crea blated for that very rera mo name the 001: bary * Nomagamond nod Romer Nyamala (da? But upce ihn commentary composed according to Daya (lor ) rod (cool tho mimo Nyama noper To probable The real moto should be either Dead orangecakaryakhya Of Aulnarolina The commentary follow oely tho ATT (ordeel ooit eluexlater the meaning of I word by portting out the etymology of HTDOD OTO The commentator regnet hoor! 10 bus mitten in the lat Hehu pot dert sith my topke bich hmot persary from tbe rad prout the test Forber be but not dropped my errenbul imta. Tooth commentary na pot iets entoure it to (tor) oct. For that sery resoon oor la poti aet ob talar ile tett levertbeker te mbulosophical mbject op metes tested to the COTROKptar, that mordet) stacleot of philosophy canoot & Deanne Erro Crateur Pamat bom the tores Conected with gomat rolu rocha Truth chickdatel Cooktocolh the gem or the contator pertanto to wl the dar penhle 30 Saryabanta pore Il nuero to thoutoophily make a comprato sody of the totod commenty odwtecth reabed that on the commentator fi amparabled dorpatutant the wth the anthor Tbo comecetator opet ma fram od pbilosophy Thor what to at about (ha mosladpol) Jum? Thent i bun preceptor codowed with domo kaowlodpratmordinary spodent of moneda del mon od prolet Inocooling all with todde Erotho glow one Vampatan nagree ja thos eldon The vorh (Nsyrola) »ortrem dy difficult for ordinary sodat It tory burd to understand to enco per bamse contalped in it. For this repon cuoctient touter bo to edited this tot by mm.Boosty sporting and rail of bu old son bu tlocketed by me of his glow och poprao nepoured to bum to be difficult od wtrato the topa tretto the torted to commentary Our bughly respected reporable md croaleat tauber ubo a curent udh tho we rydom of (Landma) palosophy as not only in urbor of many works pd a poet but ben thorough scoober of Dery robjecte Ered today the diseat nomtercopted tocluttor, godly kod devotoo to home of this great and stooor perfonae pot crun yok med to hanno 1 pto of the old you bluster ball mod ober by carpong Dee works na noon buntungan Factbet be treat youry of scriptun knoastede od min ton papel Indent doratoon of the une bo had pot nedkertries to edit the work, I would pot bero good to be kittle kon ledro I could fet from it. Th three pored portone by Wathnada son, who the author of the part od who Loon poort dupdunt, the commentator od the glorstar baro obiegod the entir mankid. I have dealt with many LOPNO Tocated with Wareho kuone, to rellent preceptor and Dronacaba on the bow of materab I LAVO Come acros doing my study Then we only ftrat attempt tot and think in thu ) I M. CODECKT. my fimportact.com that in crept in the modertaking of the Inhall comedor my baboor u Gractured prosscheid the mater presented by member ble Radeot albatory become moral to mobolent Como to the nebt decimos com a mellette I reopent scholars to pada important And I be in bumble recommeoit.co to rectify my erron mod to bigbly cohghton ! conchado tan atrodoctior by pro my detero thet brood rw.dora by wudyok this Best other perbunter to philosophy on accomplish complete developrodat of the doctrine of non abrolda od thoroby fractily tbe labour of the front, tbe oditor Aum Krah-Labdbi Somn Penjor Vikr tourlyft Gun depth of Ira Gane od 6-A LOP Church S V113 Labathi Sorinel dorable Dattr Bombty 22 cucellent teacher and autod proceptor 13-3-00 HR Kepada NB I crime od obce of the Karned router la By Oword or common that ty k cropt a thin Foraard (the Immal timebon of Peni-Kathena) prepared the fortmght #tbe mtupan of Bions Businviarll in aparte olay old po nad ne trouble well u rmt of li creat time and coppet Suid Sheri Coppa Sunt HR padia 17 3-00 Vive Hunbindn Vegas has gone throat the en proof of the Englnb Troub.co a the Formerd.
मवापपपण पर्मभशा सुभाष भीपुत पन्दुसास जमनादास मार, छाणी
पाणी (
जिपवय) भी संपे निर्माण परेप
श्री जैन श्वेतांपर भानमंदिर
(मार्नु गामाटन महोदना ना मरापमा मौर्मत सयाजीराव गापकमारना
गुम रस्ते पर्मुलु)
साघुपरित श्रुत भक्त श्री चंदुभाई - - पम्म बोवन बने मृत्यु ९बा संसारमा प्राणीयोमाटे नियत पपेये काम । बगतमा गोकर्मा अनेक बीपी पम्मे थे, बीये थे, बने विराप से। बम्मई बने बाप मर्नु म सार्यक छ के, मो पोताना सहिधार नमे सदाचारनी सास चीरका पुची ममममती रोपी रीते मी है। वही बापमे बेशराब एक साघुपरित शत मतनी पौठान करवानी छ । गरपी गुमसतना बोदरा शहरपी त्रणेक माईल पर मावेसे नानका छामी गाम कामपी पर्नु मोहूँ । मदर मिनापो दिशाम काप उपाभयो वने श्री मिनागमादि सारिमा सुरक्षणाचे निर्मित येत मम्प श्रीबन तार शाममंदिर मादिपी सुशोमित बनौनी गमग सो परमी यस्ता परामता मा गाममा नायको धर्म भवा बने धर्म रक्षा माटे पंकपेग छ। बा प्रणामापी १७ पुरुषो बने पास दुपात भाबोर संपम मरण करी, मग मार्गमी कठिन बारापना करी छ । श्री चंदुमाई मा छाणी गाममा बनी है। गाणीनी मिना लामाविक संस्कारो सपरोस मनामा बीमी पण बनेक शेषतायो । प्रकृतिर सम्म पर्मारापनपरायण बने धर्मसवाना हर कोई कार्यमा यपाशक्ति पाठो बाफ्यामा परी दुभाई एम म प्रमाणिक बने गुम्मच । वोर्मा पितार्नु मामले भी बमनादास हार 1 श्री बमनादासमाई पण मग पमभवास हवा, प्रतिष्ठान राग बादि कार्यों के भी विममलिपी करमामा मोर पोताना बीबममो मो समय गळयो हो। बाबनमा बतिम पोमा पप संपम प्राण की, तेको गीरम कल्याण की गया है। मी हुमाइ दिनमा, प्रतिक्रमण बने पौपापदि द्वारा कम्पाण मार्ग साधी रया छ । चतुर्पत राण पण सं. १९९१ मा कार्य G, बानपपी पी पाराषक क्रियामिाथी । भी सपना सापटी कार्यमा पण तेमणे पयो भोग बाप्पो छे, पोवामा म्पबसायने गौण करी श्री संपनी प्राविमा यो बोया मागणे श्रीन तास काम मंदिरनो कारमार एगी एपी संमायरमा । एपपाद भाचार्यदेव श्रीमद् विम्प प्पि सूरीमरथी महाराबना गुणानुगगी तेगोत्री 'सम्भि स्मीपर मैन प्रयमा' सारू संचाटन करे बापमान बाब धीमा बैन साहिमना १५ प्रयानो प्रकाशन की चुकी पापमान उपरत श्री सुभाई श्री कमन्सूरीश्वरवी शास संपा' तपा उपाप्पापमो भी मारवामपनी शास संग्रह पाहि प्रेप मारोनी पण पैदर देपरेश राणी रमा मी तुमाई टूर पण धर्म परायण ऐ. सेमना BY पुत्र भी महिला १८मी पुनम संपम प्रहा, मुनीनी बिनम्र निवपमी कि रिकी रमा मना पुत्री श्री पपाबोन (प्रियंकर मी दी) तपादोरित्रो (मी पुपमा श्रीनी) परमीश्रीबी (श्री कमठ प्रमामाया) पण संपमी बीवन बीपीरपाले पारिरीक बरपास बने पदयपे पण ते पर्मसपा पोको पीपरी बाबा पापम मोबम बीबता चिरापु बनो तेवी मंगल कामना. पन्द्रमा मौरनसाठशार श्रीमास्वादिसूरिस्तुति पावरंगे मह इस महयारी सुषिमुतः। शासनोपोसकर्ता या सेवेत महपाविनम् ॥१॥ मयपक रुतं येन दुर्मानं पणितैरपि । सद् अएं उम्पसौमाग्या सेवे त मलबादिनम् ॥ २॥ पिपिनियममेदाम्यां शादधारमरुमका । स्यावादतुम्बका च सेवे तं माहवादिनम् ॥ ६॥ स्तुता श्रीहरिमद्रेण हेमचन्द्रण यो भृशम् । मन्पर्वाचकवध सेवेत मझवादिनम् ॥ ४ ॥ नियमातुरुवेतारे पोराचार्य सुयुक्तिमिः । वादेऽजयत् भगोः पुा सेवेत मप्यादिनम् ॥ ५ ॥ नपप्रमाणपायोपिःद्वादशारेस्तरहितः । पन प्रीगुम्बेन सेवे से मन्तवादिनम् ॥५॥ नयचक्र वादनार मवचकनिषारकम् । येन प्रपंचितं सम्पर सेवेत मझवाविनम् ॥७॥ मायादीति पर प्रातः स्मरणीयः जिनेन्द्रवत् । विवुर्पा सर्वसूरीमा सेवेत मलयाविनम् ॥ ८॥ मीमद्विवपप्तस्पिीचर म्यापागमानुसारिणीसमसहसम्प द्वादशारनयपक्रस्य विस्तरतो विषयक्रम [चतुर्थविभाग ] पनिक २ " H . " H M J " 1 M . . . . " निपममयः मनापारम्भसम्मतिप्रदसनम् मेराम्याबपतितेपारम्मा सपनीमूनाबसमयमनिशरणम् पन्चमीदज्ञापमम् बम्बामावापादनम् मेलापमापादनम् मेमपालो भाव इस नियमपम् स्मारमानप्रस्पषम् प्रारमिोचतिरोपामजान पूपिणी पये मरतीमारिवारवार्षविरा मवगविमरम् मममम्मनिषा गरपरिमाणम् सामापस मपावनापारम् सामावधिपोममममनपीमा रोपणानर मेरम पुनमारत्वाम्मुपपमे रोपामिबातम् पलानमारमेवमायाति लत्त पुरोषाभिषापर मैरवारमामबापचारिसमान भाग्नेन मेनोपचारिकचासिरिलि पस्सवर वामियर बयुगपदापिपरमिवामिनारपोरोरमा पुगपारिवामित्रपरिचरोनारमा क्यामेरामामपन्यामा पम्पमा नामिनि . 1 . H ३ १ पसेपछि सम्बग्पामाधमडावप भरपरपामारवाति २ प्र पूर्वप्रथानियम विशेष प्राममान वापसमापुनि मिनि मामास प्रनिसमापानम् १२ प्रमहम्पमिवारप्रनम् निम्प वम्तिा पम्पमानम् विदीचे रिसेपसी सामा पापादनम् . विशेषायबापस्मर मिशियल सिरपारगम् ५ मगवृमिकापाशीपरिमेट्नामपन एस इम . १६ माषामापरिनुपरम् विलापमानामगर . मिपालमपोतुमिम्पमम् सामावनिरपेशव निवासी नम् पररव पिवीमा मारमारिन इन पप्पणम् अनादिकल्लामा पापामावलम् पम्पुपगमेऽपमुपति मामावलियो प्रभामगुषमार्गमन होमम्ममा महावितमेगनुमा हवामामर म्यानमारमा पातरमपरसानिम्माधि तारमीयमे यानम् माधम पसमेगावावारिधिमा रोपा मम् जानीबमोरिमारनारमा - . H 1 11 २ - . H 1 1 . H . " पारगे नमानुपानिप्राम ३ ६ H . । - A H 1 . २ परिमेनसावन मेदारमानानुराग रोपामर भारमिनार यात्रा मारावानिमाला चिरनियापर १ मरिमार ल्य मागोमागमा . . .
२ मनुकमपित्र 1 ९ . 18 . ५ . . . - १ A . . " . " " " R १ M . . M 12 सिनेमा प्रबमाबापारकर बमयमिततक्मनाम् उपसहारे साम्प्राप ॥पसिनाबादसावामिनि निम्पन्न एकताममिधारणापर "अनिरुपलासिविपरम् बप्रेमाडेति धनम् पवामानम् रियलमामि सो ममिवार पति बाहामा की सेवामानामयम् जब मामेव मारणानम् सपरिवारवालमिति निममम् कात्ममामेव कारबोकि बामनिम्बार दोपोलीवर प्रापिबने स्मारवामिरचीतिहातोपा जर्षमाधव नारकोपचारतोतिः पोरमेमने वा परोष मेबुषित पचारमम्मवासम्मममम् पहिला सबसपारमा बामपरिममावेशापफचम्मर परीमानम् सममिलनाडीजवापर मेरेयत्वे प्रवातिदेचमम् जमिनिमस्तिकत्यसमा बन्दले रोपामधापर परमादेन सविरारन पहिलोप्पाच्या अपिलान्चोषणापतमात्र पप्रम जानिपारम् सपैमानम् प्रयोगप्रक्स मयमरममानिराकार किमीको परायलावासोति महिमाको परसाम्मापारयेवानिवप्रवास पसमायसिमपुत्पचिवम् बास्तावित विरोमानम् ममकिपचाररवायफ्पष्मिावर मालमत्वमिवायुपपचिति कसम मानिससम्मुपकालागि रोजाना परमामधमापनसनम । कोपविरोधपाएनन् परोपनित्यनियमन हिम्मदापनीलामोरे पापा स्मारावपित्राचार मामिलाम्बा अनियमिम्मामाला नसीम दातर विदेशवर -बाबालोपाबासबमेनसम्म नमोलोरबारमारियम् .] रकबामामुपधिर परमावनम् मेरमा मेहसरायकवा दिनमा व मवेतीमाला "मामलापमानवासिनाम् च सीमा भावासतिमिपम् पम्माम्बामप्रीमो मायर" मनमावि पनि पारि पशाम् बनवतामा चलमिनिपानिमात्मानम् बरामबीबतमववि पाबालापम् मिपम्प पायमेन निमामिवावर " 7 २ R 11 - ५ . " 1 M . M । 4 . - - . 1 H ।
1 1 1 " H . । " २ " - । " " - १ 1 " : पावशालयचामम् पो पनि समपनसम्पापन नियम् एपगमुपगमेनापि बापालापणम् एकतनापि प्रतिरेषा पूर्वसम्मानिधनम् प्पो प्रचालोपनमानसशाम् ५ भावधिोपपोरमलपपमानम् ३ साप्पधिप्रतिपादन "तविरमपनम् महामोपनपत्वपला एवं सम्भविनी निरनेर भाजप विशेषाम्पत्व परोपप्रदानम् मानिमाम्मानम् असतम्ब साधनहारा कामम् पामास्ववियापारम्पोचविचारा ५वमिरिपुरमन परिकम्पपविभा "यतबादिमा प्रश मांबलामपणापादनम् १५/प्रपनामदनम् और प्रयोगबानम् पुष्पवरमालासस्पबोशानम् सूरमपामा पापियाम् परदितम मानचे रोपोदीरणम् । पतिराम मिापन भावापबपमममम प्यन्माधिोपपत्तिनिरासकर पप्पप्यानम् व्यापारास कारमा सरकारलमिन्दुक्ति . मागविधिोपप्रवनम् पामराममेव सम्पयसिपो मनति निम्पनर मारपिपर पुष मेडोपचार इनि समाधित नियुपधारा पसतोमणम् 12 उत्पारभिापोपचारप्रसाशनम् . पामानक सम्मानमाम्यमिप्रतिपय मात्र उपचममाणन्प मेलापरले होपारपारम् पनिमावस्य ३ सामान्य पूपामते गनुपने इन प्रवर्धनम् पप्रधनम् स्मारपसमा भावलानुपपचिरिमि प्रति पवारदेव मेहमिहिरवालालम् गौच मुम्बभूगचाईमणम् बमान चापापम्पम्मानिति देनाकासन अभिडमा मेदोपचारका मातालामारामपामेऽनिरामयम् विपनापरि मागरमपवेति पर परिवार मावानबनि निस्सन प्मारामाचापारम् परिपारि मावातच इति प्ररूपणम् चिोरत मानपानम् गावर्षणम् १ पनिझरमदर्शनम् 11 लिपिमानाम् १५ मिसन मारामाति फोकि: 14 पाविसामान्यस्यमापनोकि 11 प सामयिोपवावर साम्माधिमनिरामपम् जपत्रमानुपमम्मपि पर महरमाणम्मान समापन नितमन्नामापापम् शिल सामन्यामेरे सामावतारातर विपाविषयमापदपायानम् उपतीप्रणम् बमबालमनामवासीरवामिनि प्रमाणित लेबमानम् परियारल्यावर 1-मितामाधारमपमानम् पित पुरवाधिनम् उबीपमवलपमम् विपरिमाचारप्रणानुपतिपत्ता उपमुपपलापिन परमम् ५। गामसम्म मानिमोमिनुपतारा मम्मम् M - " M १५ H . . . ५ " " 16 . . H ५ ३ . 1 1 - H . ११ १५ H " . ५ 1 भनुभमनिध। पोप प्रमालामालापतितमम् जबाबमान निवास्तिमिनालाप पायोम्मामकाएर नियामप्रसार पकत्वाम्यापाप्पावत्समवासनत्या- उत्सालयम् बिनिम्मेमोऽप्यस्यम्बत्वमिति समम् ३मधमप्रतिम लमबत्वमेव समबत्ती- नपा पतिवार बारपत्रम् पुति न्यायकोवपन्नम्मन् सातमापर + स्पसझोप म्ममाप्यामा प्रतिषित पापस्त्वमिवापर इस पर 14 परमम् चिमनारोगा १५ समाविषयमाप्रपल निविरिकमाए परमम् गरेसमामाकर बाबा बरमरित्रावर उपलबार जतिरोधार्मवर कम्पलोमिति नम् १. मारिष महाबलको प्रतिपारिति . . F . H . D " H . 1 " २ J परसपावसबाग्मति प्रमाणसम्माननियकवायन पचमन मुक्ति पान्तरोतोपानरामवर बिसमाजालपमेति मगर 7 N . " १ M 1 पगामि मनुति मापतिपयुमोम परिवानपसे निरसन बाबियापहे दोषोपणम् बिोक्सोमबारनामावाप्रतिष इसिमका बबललामतिरातिपति प्रसासनम् बमबमाचासियमकार बाबामतिरेमम्बामा भिगमवोशिश " . १ दुपगारिया चम्ममिति . 14 पमा . . 4 2 "कायम 1 . बचावाच्यतिमोघोषित बालमपि सिमतीमालावर . ' M पापमोनियमाप्रमाणम् पपरिम्सनामामा -नियमविधिमपार- पातिकतर विपिनाक्तिमान परियो पानी बगुम्बनम्मचम् एमोनियमामाचीनि कवर विवनिर्मितपसमामिदिमानम् पर alexपनर रमन तिरिनाम स्थाखिमिनार . 1 M परमपम मिचिमिपसमा पामिनारम्बापपरिया . प १ . कातिर प्रचाराम सपतष प्रयास . 1 १५ १२ . . स . . H " H ९ . H - १ द्वापारमपक्षम् हे पछि पो पनि पापमपनम् विपझेसिझवम् 11 मागतासानम् 10 इणपचिलिरसमस पदारे नियतमत्वायनम् विपापम प्रहमापवमम्मुपपम्प प्रनिपिमत सातिपथावतप्पलपात्रम् इकि परमपिपतीमत्वम् वानीमप्मवान्ममाप्यमामामत्वानित बसमीति सामनाया जासापानम् रममता बापम्पुतेरेति मिरपणम् ११ पत्नी अपनीवनमापतितमित्पुति हिमोगप्रतिपादन मरम्पक विपश्यतिरिचयपसध्यानम् पम्पबसिरिकन शामाषामजनम् मरचा माल्यवहारमा मिरमवम् मात्र पसे विनासकामम् पदो पासप्रतिपाति महाररपोधि बातम्यषगुनोम्मतुत्वापादनम् समाविनर नारीममियानम् ३ बमबलपबोपादाम । मापसापामा पाइनर ") पविक्षपोमेरेमस्तुम्बापाइनन् तिसमपरसुराबाबप्पावनम् . का प्रयोगोपचासा पाचवसमाविदितत्वापानम् विपसे पोपपदनम् मियामाप्रमाणपकापनम् ५/पितापमम् समसामोपनि बम्परम्पविदोपानतिसम्मनिरेपाहे रोपोनि. 14 बालपत्यम्मुकामेवारिपामियापम् पपाप्यामप्रसमस पवनार मामा वरिपोर्मेंदामेरामा | दिपप्रमानापम्पोपपमप्रसार प्रमोवातासम्मपन तस्पतियोकि फ्यामिरानम् प्रवासमनवाता पिसम्पल सिम्पोषित एमालवभिनेतिरेमाचबापी दिसतापमानम् सारितिगमम् ११ प्रतिमेचविषण्म्साभपमानाप्रमण्यमा परचमनमषिवापसमा माप दोषामियागर वापेमाम कवायनमोनिको परमवारपरसबर पाबवलगिरप्यतिरिक्तदोषामिधाम् , बमाधवनपक्षे पोषामियानम् मापयधिरचनापमिपावर गरायावर लिलामतिविपत वीरपालापानम् बचप्पलसम्मानमामो प्रयानम् पाठिपादन आमालपारमोन्यासमतमोप्रोधिः मापनुपपरमिदमिति मानम् बमानुसीमोनिदोषामियानम् और परम् पतिरेकोसीरमम् "पियारामिषामुपपतिपदनम् पान्तमान १ एवारिणितिगामापा मापारमाथिोषपरत्योति नमत एपोपमामाधम निप्रसवर बामविशेषत्वेमनीवतामा बुधि ०५ 1) प्रतिकारमानावर पारस्परम | निम्योपपतिप्रभार सिवायलमापमाणले रोपाल .प्रतिपारनपानीयवासजनए प्रमामिम्मन पिपरामापाचीवारावर " १५ . . M . . 14 M 1 . M M . N P । . H 1 H M . । M ९ ८ मनुस्मपिष मेमपुरस्मिार मेर विवि मनिपातम् M समिसमयम् कामममापि प्रासनम् भताठमावासबारादनम् पावायतिवम् बक्सर सहीरामम् भावमसावीवायुमावेष सावनम् समातिवादिषयमत्वमावनम् विकोपामिनल 1. सपनिमर्मयम् पन्चामन स्मोपाइपिवायमचे पस्नुषा मम् . ५ H " M . प्रबोमेशावकम् मन्तालापवमशनर "मियापीपरेमिका "पनिम्मोपवारा 1" | महोत्सवाम्बा स्मोपारम्पोमे- १५ 14 M 1 . १ तहारेल पत्सवमर प्रममावातावामा माननीति निम्पन्न बपुननिसरीतधात्वावर सन्न रस भरमा सम्मानुषित ममावासमा बदबा समसमानुपपिति प्रसार जमानापमानाहिसमापक समारनामो माग एपेविनिम्मलम् भासमतोमामाबोगसम्मम्युतिः भावामानवाल्चापम् मारनामामचोपरिमा # ११ . . . पासमारती जयबुमानम् बपि विलोकि ॥ मनात नियमोमवारमा १५ | बागमत चौकापल्यानम् , पारनवमेएकसार ३ग्पोगबम्मामोदामबार सापर सवानितिक एका समाचार मिमोसमा मात्र . . . M H 11 पापमापद - बापमान परिवारसले बचावपळ ५ पसिनसमर . 1 १५ . R . पासतिशबमाबमा साक्षिा सम्पत्रिपयोग पाएमा सन्पाइवियामेरामावर महोत्मारवमोत्पावनो सम्मान बाबासातसम्मोकिा सूरनियारसपार सम्म . मिममनिपममया- मावोवानुभमनोबलमा ॥ बन्ने सर्व विवादिसमिति 1. मिपावसरगम् सितापावे स्वामवासन बस्तुनो नाममाताम् पहिल्यावर बारम्बारसापाम बसम्मातीमोल जमिनमानम् मागोमेवारपानाममा . M - 4 गर 14 विधाजपबमम् H . H 1 । पो पनि कपिम्पमाविचारेगमपामजयम् 1) बान्तरमोफिममासपासमा अफिसम्मभुषतिपरकम् १८ माविषमेम्पपदम विमिवानम् मानिसम्पयाममा लिमो माय सपाय माग्न भाति मिस मरमपर्मिसनमानम् जमुममे काममा तब ममममरम्पमिवानर पपिल्सिएप परमात्मानों पर, उपप्य विमम् पपपत्रम् "पालिका सिविन पनि ममामा ५) पापुलममिमिक्त नमामो सम्ममरणयोरिति रपतियाविनापति इस्पास्यमय १० महापानिनावम् समापि सविस्वापरेलासम्म हलिएका वाम्मम्मालोपन्नासनम् स्वपमारे इमलमासमामि बमतिमाएपनि . 11 . 4 . . M H Note पाचवोपनातर १ " . . . " . बमिपुकारपणा पापमपम प्रामानामपर " सा पहावारिदिपाया बिनानोपाहम निमोमिनर बाबावपेक्वसमर्थन सवमूलबसमक्स और समानुपतिमान अस्वमीमा सम्पमा असहमारेपिरमेशन १ मानोपारपोलीगारमाथि मोरपि जनमोर यो सित मासासम्मा- मियत्वम् निमनपरेशानुपपरेकारमा रमार निवासमा समस्या " . . . . . . बम्बाचिरेर मिसा परिवानिप्रमोक . " उत्पावापुरतम् . चिमाभिसमिति समाचार "सविास लिया प्रबार्यमालो पोषामिया समाचार प्रोपावीपमरामिधानम् बात एष भावाभिमानम् M . . . M . " . M ११ योधन बाहिति विपावर पपरियारोपाम्मानम् पारित IN सिराविति पीपा परेर मत समय पोपोल्न रोपर मानवम् माविमर्मपत्तिामा "बामा माग सम्म - पनावामानाति मामएये बापमानापानिमामा . . " १ . 4 २ समारोपन परिसर सपना नये पारारिका . . मशाली समुपाचमितिमा अधिन । F पूमदार पायमोहरदिशानिया " ममुहमयिका . " H . H H सवालम्पसम्बामपमित्राममा हामावार सापि ममतमा रोिमा बरनावावगीना वादा परिषदम्पसबावणीवन बोरोबोषित " . H ३ प ' M बारम्बुवावरमा भबस्नेवि साम्यम् समाचाम्पत्योदतावास पय परिरोमालियरोगाणम् परम् . - "म्मादौ ममिवारमार समापिसापयाधि बानिसमम् पारिम्पविरमा बस्त्विति प्रपनर तसा एषारिषचनमामानिमम् संसारामुपपा परमाप्रमयर "पुरपालिकामासम्म 1. सार्वनिरामय मसभापतित्वमानिराप्रपा - वरपैमावा बम्पविरमाबुपोग उपयोगिशिपामावर १)प्रथमदिनपविचारा "याचिोकबरेवालय परोपामिनात .वरपदरीका पौम्मरमर 10|रपारि मतले दोषणम् 14/बमारिन सारिसक्य -मल्लविकासापापमोपसहता सव एव नावावम्युमोनापारम् ५ सीरियजम्म "राविमामायामा फिल्मायामामाबाद स्माईखद निस्सा H . . १ . मारवारिनिरामय पुरस्मन पावर समानवी समुपविनोपयोग " १ १ . " . " 7 प्रमियावनिरामर पोवामामामानोपीय मारवमय मानिसमरामगावात पावमिधालार रममाल्सावा मारामानिरिकारे पो . H 14 " M H . ५ मानामाकरण . सांई मतमितिमा "काय समितिपत्र 11 का परिपश्मेदिसम्बर "मेव पति मोबास व दोषासस .बिसीवस्यामपनर प्रतिपरामसंचार प्यान्विनियमन पानामावतार मुपवमणिमालाविम् अमरजितेकामवदेशावर . . . . H । 1 . . वीनियाका पपरसाबलोग । ॥सवलाम्पुल्ये मोगतिम् । पदेव ममितिकोषमानम् .
माइशारजयबकम् U . २ U " . M - प १५ . H " ३ H M M 11 " . हे पनि वर्षमावणम् ५ पाषसम्मवमनुफेरासनम् पंचत्तबमारे बारमेमामामात्रमिति - बादामने पवन मनाची समर्पणम् पसमापनर रापिसाबक्षिणावपवम् -नियमोमयमये- बाध्मनो कपापम्पवानुमालसामम् स्पतिविस्तबम् सचम्पावादनम्पवयनम् पत्तान्तरसप्रतिनिवपसपम् सेलिभियान मामा समिति सम् पदममवापारमियानम् विचारियन बास्मा सम्मानपत्मसमर्पनम् बस्तुमापि स्पेय मचिवम्पमिति म्पमम् पुला दिमागेपपाचमामाल मिाहरणम् मालमेनमदमप्रतिवेऽभाषकलेजमवप्रसङ्गमम् । भावशम्पावनम् विपनापि प्रनिने रोपापातमम् पारम्पादेवालाववादनम् रत्पानिासम्मेव भव सवापि समिति मन्विारगम् नाममामाचिभरमप्रमोचाइलम् मनुत्पादकत्वेन भरने निधपातमम् पारा सममिम्म्मलालम् .निम्मणम् मीनसुना समापेसकातिम्भवम् "मर पालप्रसवोत्पादनम् बल्लारप्रती दोषणाम् "बस्वा महामासनम् समिसाल्पाल -माधावा निम्नानगर "चम्पा एज्यममिमतामयम् बसले कमिवन्यपाल गुमामहमेदाम्यानम् २५ वस्तुमा प्रतिपनियनिवारसम्म उत्पन्नामामसम्मानमर वातारयावर रत्पाबानिएवरगन्दी बोपामिबालर किसते पत्र संकारपतुबप्रसार बाबावामिषालय शिवेमक्यामरामा समन्तिरिति मन, 10 उत्पतिविन्यजसमावलनिस्सन्स् मारनामन्तिीमापार पनिचारमानिमिवालम् मदिरेवर दिनाले शिान्तिनम् मायिक मात्रामवालिम्पण .बिपोखमानिमममम् समाचम्पारेगमममममममिवानर ५ विवाहयो साम्बवामिवानर बलम मिलमपिल्लापणम् बाबारासिवमापापन नियमपिपिचमममम् शिवदानापार "बाबवापि सम्मानसम्मति नियमविपिन 10मापतितोगवि बाहर बस पचारिकरूपम् परेप स्मिासनमानवम् पारिव सवारपर वादालानम् पानोपानबारसम्मपर सर्व विनसम्बयोपा त दम्पपिपलायनर प्रहापरिप्रोभिवाम्यदिरेबल 1१ सानिमामासमिनि काम " - . १ ११ " H " १ . . . 1 H . . “ M 1 H । H १ ' - " " H M ८ से कि ११ " १ 1 मनुक्रमणिका यो पनि मेषुपतिवापर ११ अम्मच मिति मदिवासपा पविता प्रमामाम्ममिति स्पषम् प्रयाएपनिरपर सन्तामर सूक्ष्मोवाइरिनामप्ये पस्नुमा प्रायम् बक्सासमयकम् प्रबोगेष सम्माचा सम्वनिप्पसमयम् ॥ अनिमातीमोमनिरप्रसार बसम्पपारा 1" महोत्पादमदा सम्मोन्मादम्योपुमे सविनामबमम् वाममचारि पर जस्तावासलाकर पावरान्तिकाम सब स्पीन्य बाबमामाचीवाडमान साधनम् भमानाबाविसमासमयावयम् पिरोपामिनावर " २ . - १५ h 1 “ उपयोग व्यवनम् सिमसामानाबाद पमा मनोविनिम्मर बापुमविपरीचवायापमम् १ " 1 ९ M H १२ 12 " जमानास्वाम्ममम् बाबमा बाम्पनापति प्रसार बमाप्रपाल गनीदिसमाजपमा अमावसानो बाब पेशिबिमबम् मालमतोमामाको माला १५ . .पीवरम् ठे समानारतो सपनुमानम् मेरपि पक्लियोकि मा निबमक्कामावर माफमत औषम्यानम् .पर्यापनवमेश्याम ३) पोपैम्पूतोदाहरनन् भारतमानिति का परवेजपामार दुरिमोम्समा इमान्यवर . . . . मालामालमतपरिमाबत्यो बनाएपापा सम् H "बायसवर ११ अनिमारमामायनानुपति परपर १८८ वापति समावमा भय इलुधि सम्वनियमोबाइपावर M १ . अपवावमार्यम् . -विपमनियमनपा- -सपाटोवाष्पोमानामा ॥ बन्ते पाय मकविधषमिति निम्पत्यम् 1-मितत्परम् सतहमा मायग्रासबर बमोनिप्रवामुपगमापाएका . महामारमोलातको स्मणम् बाम्यानमारसम्मोलि एम्मोत्सानिमाकोरमवार बोनस्पनर - 14 . 1 सम्मासिदिकपमम् सामाणिसावर बारम्माषी रमितापमानम् १ सालोवोरमानमामिलामन् . ת पाधिसमेत्यानम् मावशारजपवम् . . १५ - . " है १३ . - M . . M . M . " प 4 ९ शो पाला शनिमाविचारेषगरमागरमापर "बमनपामेषिममामानम् पक्लिाममुपखिमम् 16 माविषमणापोचमिधानम् सामामिसम्मायाममा पमित्रानो मा सपान हलेच मापवर पातिति निस्पकम् मरमपर्मिसमापन वायुप्ममे सहानुममितिर . स्मित चमत्थमिपानम् पपिपिएपरिसमापोंभवमानम् , पप निस्मत्रम् पापम् "पान्तिनगर विसतिनीधि समापन ग्राममनिमित्तानमारमनो अम्ममनचोरिति स्ववियरपिनाम्य पवित मार १४ मा परिवार पपिपिसापरेपन हति बनाममापन रामारमा पालमवामि- प्रति किमायुपपलियाम् नामिनुष्यन्फपसमम् सम्मेनिसमय ममितिमा पानिपपाश्म मस्सिवसीयस मापनमायणम् वाजलाल प्रविधि पापपरोपी-पप्पसम्मोधित मिलानोत्पादन अपिलोपिनिामम पोरपियो बोस्थिकले मापासम्म बाबामवत्वसमवम् मियालय मललावामन शनिबापरेणापुप्पमस्वरम् और पब इमल्पपुपपरियार रत्ताने विमम्मुख समस्या मरीमनीमा सपोनित अपामार पधानम् पम्मतिरेप मा सम्बन्धिपारिमा समाम्सामिग्र सम्पपावणातिलमिल मापार पारपामार तिमिरमर परम विन्यतिपात्र पतमानसम्पपज प्रमाणे निवार बारमोगरामर प्रमालालारमामालियानर आपल्याकमायन प्रतिपादन भवव एष मामिला परम्वोपामानम् प्पसमयमा मापसमायणम् लिदिराची बात ५बानमारामानिमिफार जोपरम् पापभाषामिद परेर मनोनिसमा माताले मारवायलाबानितासम्म मिस योगोपन पोषलेर मानेर मानव मारिधर्मनामनिरामय 14 मारलतापविमापन प्पमालाविचार ले गरिनर मानधर्मिता मनाममोक मोतीनमुरामिति मा दिप विहार वसीम मामोल पाNिAL M R . . १५ D 1 . 11 4 . . . “ “ 4 A १२ ५ २ " १ M " - " मनुम्मानिन पो पंकि यो पनि बारिममिओमानस्पतिमानावयम् M " पादिमतेसम्पनातानम् प्रतिमिल्काईम्पबाबामा मक्मापानम् और मबने मोषापारम् रसोनियावासम्मको # सरकाराबंकोच मारम्बार सामवलिमालाइनामियानम् .बबपोपकोषापुरचय सम्मेवामिसाल १५ . . H M ." . . ६) पाविम्मारावारिमापरिमा १ . पापप्पचोतिबामप्रशासन तिष में मालावामिति दिवस M . " " शिव पोपपतति सम्म व्यस्वर पिसार मायबापापति काय, मागम्यायोगेपछि 12 . “ " - बासमति विस्मणम् बकासमा बच्चो या पुरसम्पयो मिलेमा जमिनमा सक्तरूपमा विकस्मियम् प " अपामारिबारपिनतिर बसममये क्यावर बझालावावर बाबा बरकरमवारममावलम् . " " गानिसलेनियमसमय बताइमिनाहासम्मबारबर लिवमानबापाच्या मायामकाचे पापपरम्म -विमोती मार H 11 H बाराचा वापर इति विकसकम् १५ 1 " ५ . " बाम्मनिपजाबर "शिरोममिरिमेशमिवावर "सबसवत्तवामियम् "चलमा पुरसमस सिामना मात्मागांसी पर मादीलामी अपिल्पमपियार रविवामिहोवामान इति निमावर "परमपात "बाम्बाबदामबारमातार मामबागमैतिग्रम् 11 सोलापविमानमार मायामसपाबायाचमपितामरिकी H 10 M H . बिमासमान्पपिपदिम्माम् 1 " विपक्षमालालम् महिनुमवणामावनिमानम् पहलवादेपनिषद H . 111 H . मणि दैनिकमा रिनुमानम् सौरम्मतभिारम् निपरेनुसार नियामो समयसम्मर जमानामा प्याएकवावी निर्धनमा "ल्पग्रामियानर १३ | बस्तो समोर संगतिमम् जमिनम् १६मोबवामप्पा ११ . . " १ . H " * h 1 R " ५ P H . N " . " . ५ H M द्वारथारनपषम् परे पछि शे मसिसाविशेदपावा सदीपा बसिरेमिस्मनाम्मा .पयमोमबतिष परावमिवाय मनिपर मनमानीपषत परापरणार ५पाएमा बच एवासिरलोषित पूजापानिमा मप्पमाविमा रियरले रोषमानम् पपरोपरतापसिंखडालनम् खराबर पोखरेपलाममतिमिमा बनामिया बापापम् १६/पथमनगारवा मिरिविम्यापमम् श्यपत्ती मम्पमातीवापारगम् फामाबादामप्यसम्पापसानिदेशा पीतामा सवामापपर्नवम् २)बबुधिोगुना तामिरिकममम् पापमय ३पया नवा मिरिमानम् नेतले विरोषोकि सतमत्वालामेक्वान्पत्वपयोगाचवम् सामानम् ॥ (पामेछापम्मरम्मः सवमर्षवामानो "बनान्तरलोवतीरमम् उपापि दीवानापापादनम् ५ परतवत्वपाता रखवायनोसरस्पत्तोप्पयापारस समाची पायमलवर माविमोदमा रोगोलिक एवषयपादनम् रवाना तिरेपनम् का म्पासिमापन पासप्रतिगिरणयर "पदोफावविवार रमाची परिपकमर - सापनामावानर मनमणिकात्मिक १५) सामामनिरलोपरा बाबदरवापर शिवरासदत्तवापानम् दिवोपरिनिराशनम् अमिप्रावमाप्रप्सनम् पायाममा बयो पेड समयमा हवरेवमोगपरे गोपानिजात कामाविरोमोनापार इसे वापसम्मुफ्पमे रोमणिोपरमाणाम् 1. (मारपेटवायेषु ले समाधामपपारम् मेहकर अप्पगुणादावपि वरापानम् अनिशापाससामावर .| समयमालामपामे प्यादरमाम्मपास, अमरोमायमिणम् एमाणम् साम्पत्य होपामार प्रिनियापारगम् सत्तारामास्वाऽसत्तापावर भागात मलपित्तामा शिरोपरीनामनिपासिनिमन् १५ मे प्रधानाचिरति दिनुपरम् पणापमापन भया पधतिविपरीषसम्मानम् पापानिपाचे दोषामित्रम् र नमम्माशी परोपानम् परेरोग्यमानापारापानम् रम्यषारापमापमानम् मगरवियतीरामिरिमर जनपदो परमिनि बगोपालमानम् पम् वनीपरम भविम् .] पाने पारासगावागावर H ५ " " . . ३ " . ' H . M " . - - 14 . J । N 4 " " . H . H पो पनि १५ H " " पर साम्प्रोगहरणम् परमवरणमे मतपत्र कोपरात्मासम्पपमे माहिमामय रोपान्तरम्मत क्यानिकी जिपर प्रमुखमाविम परे पनि .लादेम्बार प्यार एति समाधि ममममममुकामसम्मन १२ माम्मे साफ्सपोमानम् बारम्बामसामिवानाम् मापवायचारमर ५ माममा मासिनियर .. . . 1 H - . विवाशिमोगातरम बरिषमालियनोमानियानम् पारि मामामक मनमायामाला बनियानी मिासक निशिसायम् . H "मापापहमति सानो मिसनम् विपिनामपाल चामिलामा चिाममावलि परापमानामानिति परम -प्रमाणामबापरेमिपमा ममा F " U 11.2 . " M . " उपसाप्रमालादेविममामिल निमसामिपात ९ . H - H - 1 . बगुलमोरणाएकोशि समाविषयमा बाफियापारम् प्रमावरेबावरमेनसावताम् सातवियर मिचारियर बाकाम मिलना मारपीट चमत्वगुम्बम्परिपेयरिसा बामभमानावावमित्रत्वसार विमानमियर भावप्पा बाल भैरे होतातावर बोरेपनि दोषणापर मारनपुरम विकास भसामवामितीयोगम्यम् माविकाविस जीवाल तिनुनानिमिोषमा रणर परमानमिवानर रासाभिमाक्पा अपुताना निसार सामान्य • मोती "बिरोबोबालार पनि निमोना रोनोति प्रमाणपत्र ܨ ܕ ܨ ܨ 14 111 111 . . M . , . १ मनमोबसच्या ॥ १५भमन्याधिक नकात्मिपर . परमात्मान हासिमाराम M " . . - - ११ पापपरियार सानिमारोमालोमेसनम् बाभिरामग्रमाणित 11 पामीरमणास्पबारमा . मापन समजेमाहिर .बपरिस्वाममयामेन स्मिा हामीपरित सक्ने मातरविनिमय . J . ।
१३ १ दारापासप् सामाधम्पमापन " . १ " ९ ममेममतोमोरयान्तिमतिरामा . प W सिलामत साप्मतमामा विश्वासिरिया बारपचापजानिरामयम् शशारजयपध्म् हे पनि • पर्यको भाष पुरेनिमिणम् मायोति शामिविस्म पोम पति परम् , प पम्पेषु रमपमाडमम् प्रमाणपति - पनामारदिवारमाधनम् .मावनम् १५७ एडवाव निकमनिमममममस् -पतपस्यान्तरम्- "मपालेका मानिामम् सामानम् . सामपिरिप्रसाबुपतिदेहमान पतमल्याबुस्तिषम् १५ जिनामोनिसामाछि १५९ • समारोपपणम् रिव पयरेपि सत्तापाइम्य ५ बमित्यानिमामा बमिरतापुरसमस M " " H बास्पषमलनिम्मम्म् स्मारपिसिसमम् परिप्पविरेनेज परममावनिस्सपा रेलम्ममामापराममालसमापवान . " 1 ५ . १ १ 1 " . " . . इतरेजामपदोपणपरम् मामबारतिवमाननिम्मणम् पस्थानमा संसासम्मति पामणमामाविकारापालापानम् परमप्यमापासुमोम सेर निससम् बासनालापि मापवायरमम् निर्षिमापारस्पनर पापामायणपतमाम मोमाने समस्याममोका " . . १ A १५ " 4 - पारसम्मगाराभावप्रमियनित पपीमावापित पुर मगर बुनि १ " H " तीनो एषाचे प्रमादिमिषम्ममय मामाम्मत चोपोपसवाए एमथरे पक्षधमालम्पसर पलाम् 10 चिपसम्पपमानम् पायपुसबारमार || शिमयम्पमोमेशामायणा इनिपा समोसापादिस्यमारनामपनत्यमिरिस्पनर पानमा समसमायोपियामि निमय १५ प्रशिरापमपणामोपारसमिनि मनम् १५१ मनोरमारापोषित मानतातो पुराने समझियाना पुषिमुनि 11]पर्नयर १९ पियपुरमात्मनामा युधि मरमानिया रिजाबानियालाराममश शिलानम् विषम्तिमापमानम् "माविबारिरिसरयषम्मानम् 4 १५ 111 का पालनपरिप्रेडागर मे व्यापारमालसरमम् पाणिमातम्या चिलमेच तुपनारम्य वित समापन . . " 1 " प्रापरयोपचार म्मानसमायमासाभिारतमावरम् सम्ममुम्यो पापा एसीपाविसमपर पानिए १ . H . क .
१५ . " 1 - H . . . H प M मनुश्मपिका पो पनि पिपरिमायिगरिमादिकमेव सागर इतरेतरयोगदोपानमध्यावासमा मुगुमानम् "गुम्बामपरोमबमावालाचम् 111 जिम यिा भरतीमादी परमश समरामसपम् रिनास्पिोजरातम बनिगपादन पापामा मिशिगमापारपसोडामा "स्पेश्यबामेडतादेवामिदिमागमयम् कम्मापरतवमानतामिरिमरम् बनियादित मानिसच्यामिरवम् मिचिमिचिमारमान्यापुमसम्मानम् तनाप्यानम् सामोरगारम् सर्वमायाको काबरेचस्वाचनम पनि ममममममश्वम् स्पषम् प्रणमाम्सागर ॥ | पानामनि सबसमानामसागर प्पाचा सरोकि मगिरेसमेवरप्पमित्वे मिरवापस सम्पापाचरेत मान्यतामा प्रादेयमेरे मिलनसार सपनर भिवादनम् पतास्याम् सपा प्रमाविरोमानम् बलपपाजामामा "प्रीरोपमम् पाने मरमपिसिसिपम् वर्षमागम् बनियादीलामायने मेरोषनामोशिश मागनिनादमय वजारमा मनामानुगनिमन्तरलतामागचपरमेर सममिये पोषणापर . पानी परिम्पोसम्म मि सचम् मनपरेशापमुम्प समसमामानिरि परेमातनिरामय मर -सरपोलमा माता मकारामानुराम मक दिवसीय एम्बना पति महार मानवमास्समबर बोपरम्पते पधाममुकाम इमपदिमा गिरिमा 11(५ मामचनम् वापर मामाकपनमाला बमाभिमापन समितिमाममोरोक मपामा -बयामा महामास मानहान मम्मानमतिमारसमनिरसर प्रमयर मापुग्णातिर 1 सिमस्पोसिदिनाकर मिसो मालिका गामि ॥ बमोमिनमायाम सपनामापतिमान .मम्नतिनगरम् TIMIT मेनोवोमितानिन मला मिोपामारपणम् मरंपरिमापन ht गावामगार मान पारिभिाषमागर -गरमा लामाला साविपरमिशनगरापनिसमाधि मानिकाला मागणी सामानम् मरमर ११ १ M M ५ - . M . . - . . 12 ५ H , - . . १ " " 1 . H . D " " 11 १ H H ... ८ H " A वापशाजपचम् परे पनि शोधि उत्पादविलापामावनिपारपम् सम्यत्रापि सकपनम् . बममाप्यमबोकि "सारममापि सर्वमानस्सयम् तासारपानम् • समावसंगमिधानम् एस मामिलानम् बाप परमार्या सत्यमेममिपानम् ५ मात्रबाटमोऽमितिलपानम् ५पर्ममापि मासपेरेसमिधावम् अम्मगुमलार्मषम्मरम्मप्रवर बमा सामोपपासा विमा दावामिपानम् १५ पूरप्पमपातिदेपवम् बनिसलापानम् "समामिम्पवेरिति देता प्रबाहीबामपि विधि 11.4 २ पापमानमाविषदिति प्यार वापसमिबाब निविषसाधनम् अन्तरसमापषम् सर्व पुस्तविपरीमानमिति प्रायम् तुम्बनिरूपणम्- विस्वयम् समममस्तुमा सस्पत्यासमाचारिसनम् 14 सिमाविष्पाता अप्पास्वमिरामना विप पावन ३ सरपरसम्म सत्तचे मसात्वमासक्य विरारम् ३ | मालामुचरोचरेकाम्यपुष्चामुमारगर गयीसम्मानित ममपसिलामा पवादालापनमासमम् बारेनिमानिमनपानम् बच्नमापबामप्रनम् मिमप मनस्तुनिस्पनापादनम् | अपरममप्रसन पियामिनोरमानापानम् "एपबारम सामानसम्कयो विधिविधिपेन प्रसहमबिबानि परिबाताबम मामणमार्पमिति निस्मणम् प्रापहाणमापावापानम् ॥ एपलापि मनविसम्बन इबुकि अमिलाप रोपामिपानम् १८ पपाइवर बारसमसामीप्रमाप मामासमिति निम्मम, अत्रापि मेहामायणमानम् पासाल्पामम् 11 विमलप बागावाविषमुपोमा मिप्यापरिमामा म्पबमाबापमीना दिपये रोपाहीर 10 बपरमासमिनि मतपशुपयोषषषम् १६ मयाम्पमिरम्मपम मानीमायानम् बामहे पियानम् मनवाना प्रियसपमारमिति प्राममय सामाग्रगापि सोसियसमर्थनम् सरमाचमम् 4 पराला बम बासिरसेगामाप पाता सामग्रीसमामिवाल बापाषामायमरमनस् पामग्रीमानम् 14मामिविमानम् प्पयामानामेव मारा विनिमय मागुम्बामप्रसपानम् .म्पप्रियामा रोषामनोनि ममिसारसम्पम प्रथमपानम् सामाया बगाने निम्नम्मारामाणम् म्याना रिमापरचम परस्पना "नामबोलोमाजिान्नर सिम्मपरिवानामापतिपक्षमा व सबमिनियम छामर । १ १ " H . " H " 1 " H 11 . M " . " . H . " १५ 1 . " 1 " 11 M १५ M . 1144 1 १८1 मनुस्मदिन पोप १९. - स्पोमवादिनामानि . १८९ M पभियावधीचस्पोकिन सामिप्रपरले रोगसमय " " ' १५८ . पाय ििमताबालाविवापर परमानना पम्मनायतरर विनाममा विधिविधिसमानामिवायम् पिपिपिविनियमनमानम् पम्पान्तरामिक विनियमबाबमध्यवर असामवामिवावर विविनियमविविषयमतोफमम्मम् रमबोरवरपर स्वमिनमश्चमवामिपावर निलमयमा समविभिनयमापनिवार । h " निलामाले प्रधिादिगमरमर यापरम मिरमानमुपदविधमिना : १८ " . . १९१ - १९९ . बनाने का समयोकि -नवासिमस्तित . . " . . " . काममा समापि साल पशुपमा। " . मियमस्वमयप्रकासन सर्वपमेण प्रधिावमिया M " 12 1 मेरनिरामयमय बालचिावादितावासाराम नेमारामानिति विज्ञापन जयमम " . " " ९ . काम जापानम्मे विससिविणकर जान्नयोगोटि " ३ . १९" १५ मा विरल्याक्यावर काका ' ५ 4 . . " . . A - - हामारसमापन पनवविधात व्यापार बाईकसमपरा सपकासा प्रस्तुगपरिसमापीगुम्बाला निवारण पारिदिपावामिच "बामनियम पवमर 11१५ पसिनाबा मीरा मानिसमुभर एमनपालामालपोषित लापमयो सताबापमानवारणम् इति पिपयामुष्मनिय समाचा १॥ . - " . ज नवमो नियमभङ्गार विधिनियमसर्वमहास्यास्मकैकताधिकारे पर्वमाने उमयनियममगारवर्शनेऽप्यपरितुष्यत पचरनपस्म नियममहस्मोत्यानम् , तस्मिंस्तु पूपिते स्वमवमवर्शन युमिति कापणार्थमाह- यदि मेदप्रपानो भावः कममसौ भाषो मषितुर्मेदस्य किमामेदाविरेफेण स्वरूपमपि मासु समपी अस्पतत्रत्वादमवितृस्वादसन् खपुष्पषत् , सतश्च मेचम्पस्यामाषामेवा भपि न भवितुमर्हन्ति लपुप्पपदिति धर्मपर्मिस्वस्पविरोपः, घटादिमेवाभाया, मेचम्यामायानगनो चुम्बरकुममयत् , पधा गगनकुममावुयुम्परषसममुदुम्बरकुसुमाता गगनकुसुम मेतृ मेचम्यं षा म सयोपसर्जनमधानयोः, सतपात्यन्तनिरूपास्पस्थाप्न्यस्यापत्ती स्पयचनाविविरोधा मपि। यदि मेवप्रधानो भाष इत्यादि, पापद्धर्मपर्मिस्वरूपविरोपः, यो भपति प्राभान्येना भबमोऽमोपसर्जनमित्सुकवत्र वमेवविध माबममपारयामः, कममसाविति, सत्येष्टोऽध्वयो मायो भवितुः] 10 मेरा नियामेदातिरेकेण--मविवार कारमन्तरेण स्वरूपमपि प्राप्तुमसमर्मो मिमयः कस्मात् ? मस्त्रवत्र स्वात्-मनलाइमविधा, अमविस्वादसम् पपुप्पबत्, वस्मान्ययस्म-मारमामागे मेवा एप विप्रकीर्ण भेषवस्तरहिवाः स्मर, स्वर मेचम्पस्मान्वपस्यामाषापा भपि न मवितुमईन्ति,[बविपमानो हि मेवा तो मिपते । मसौ निर्मेपत्तात् खपुष्पादिति भेरामापासर्मपर्मिणोः वरूपामाऽवयोपसर्मनो मेद प्लोरियस मपस मेश्मानमानाम्पासम्ममामामा उपसर्यनलान् एषदमा मेोऽपि म म्यात् पममोहममत 15 सामावलियोरम्पतरोममवापधम्मपनि पानामसम्तामाषामिमुगना मापारीम्बनमालावतोमरमवापसम्पा भेत लिममन पर्ममितुम्, अषमा मपिनियमप्रेमापारमादिनसम्मलाविमरे वर्तमाने पूरियेममनियम म्यापि किमलापरितोगविरमतिपत्थतएममेवान्तर्गतनियममामठप्रवर्गपर पूनम परिनुपामावल- पिपिनिममेति । मवम्योपानमेवप्रबालवा म्पयापिता वाफ्पति-पदि मवमपान इति । भेदः प्रधानमान मति बम बोपनमन्बय मर मरता स्पानिये भाष-मन्ना सम्मपी की विचारणाम 30 मार-पनेवो भवतीति । मान् प्रपार्न भने मात्र स्पर्मानम्, माति ६ मेिर यमी मति मान- मापपर्व मनमकियामनुमति नरपतिम्मे पुनमत मात्र प्रतिपयमाप्रेमों नियति टाप्यो रिपोलिस पारपारिमय परमान परमानों मति प का तन पर्ग मचा बट स पर माठीति मग्रीमान ओ मूबते न मन प्ये माति, उमा, म मन ले मन एडी तपासमिति माय । तात- फमार-स त्वयेप इति मानसपो मागे मी मनवा नमान् त मजलपमेव समेत बसणे, मानस्सो मारे र भनिन नानुमची इमपापोती मदाम्, तपान पोरगा लपे िनवाचामा , मपी जमनातु पुपापसाचनमा सारित माष । समनपस्मय मातम्यामाने पार्क मेशा परसराममा मत मास सम्मेपमएसवारिया-तम्याम्पयस्यति । संगति मेहा बपि म ममुभामामागर, ममामी मेनपामा मेरोऽपि चम्मन् सम्पासम्म मेक्यम्प नामाषपमै वा मतिममिधा सम्पम्मेवाभाय उपलब मेर म बारिष पमा इस वनमालामेर निराशर्मिन्यतारिचार-समय मचन्यस्यति। सपा 30 मिसपेरेनो। U, (११) पापागमानुसारिणीप्याल्पासमैप्तम् [नियममहारे मवाना मामा इनेवाय निरासमर्मबमिसरूपा चम्, तदुपसहन्य सापनमाइ-पयतिमेवामानो भेत्तम्यामाबात्, गानोहम्पकसमबनिति, पमयोत्तमेचम्पयोरमारे म समालम्पसमा दुम्पपसुमाग गान मर्म भेत्तु मेचम्म देवि च्यम्ता, बोपसर्वमप्रपानयो-सामान्यमेश्योरिति रातिकोऽयो वायन्छेमावि, इत्व लिमारमत्वायत्तापचौ सपचनाम्युमामामामालाविरोपा .पि प्राप्ता, ते पानिश इति । , . पृपिषी पटो मवतीस्पत्र मिपार्य किं पृथिवी मवति । पख पटो भवति । रमयं पा मवति । न भपति ति, तत्र यदि विशेष एव, नास्स्पेवेतीवानीमेवोकस्यात् कुवा सामाम्परत प्रधानोपकारिता, अप पृपिम्पादेरन्ययिस्वं मासेर्भवति सत्त्वात् सत्योपसर्जनवं सामाम्पस्म 10 नासि, स्वतत्वम्पापिस्वास् माषत्वात् , मवर्चमानत्वाच मेषत्, उभयसिस्स्वससि माये भवितरि व पचभाव एष मेदोऽप्यनुभूपते, तेनैष मेवेन न भूमेत, ममावस्यात् पुप्पवत्, म प्रभावो भाषो भवति । (एपिवीति) पभियी घटो भवतीमा पनि प्रविधी भववि न पटा पत पटो माति म प्रविधी पम् वा मति । म भवति मावि, वत्र पनि निक्षेप पपेसावि सामाम्पस्मोपसर्जनमामागे 10 'विशेप पति नाम्मेवेतीलामीमेमोक्यात्, वसति र पटे रिपे असा मामाम्पस्मारवोऽसत्यपानोपरि तेति, पपेनाति बप मा मत परिम्परिस्माम्योपसर्जनस्वे पोपि सामान्पविशेषगोरमापोप इति पसनमार पगदिमेवेति, पाना मावासमात्र साप मे पाभावाति मानवम्पपनम् । सात महि-समयोरिति मेरस मेमन भाषामला पतामात् सम्परा मेतुन मी मला मोहम्म पसमापन भेषम न म तपोमवश्यानो भएमतमाम जी भार । एपोमनिरपसालात परमवापये समामामानामनुस्मारिमिरोबा अपवित्रा मसुप्रियानस्पमिति । मधु सामान्यकोमोनको प्रयास्वाम सपना मतमतामन्वप्रमानवाया पासम्मवान पासबोपगोषप्रवासा तगम्भूपणम्पवे उनको मात भासनानोक्सन प्रपनाया नमारसमपानला चलिये मी विमान म मेरस मारनुपते तर दिवानव-पूपिणी पर ति । पाने-पिवीति माननिमापि, . मगम्, स्तोम ब म बिस्पेषु में निवासमते बारममय । यदि एर ममीम बाम-सब परीति परसपान सामान्न म पम्बते तब मामलार सामान्य म मा दरबार मेस्मा मेदोऽपिन बीपुरमेश मग. । ममापि सम्पवाalim सामान्य प्रपाखामान न रपमा मनमा मसति व पट इति। न पियारे सामान भविमनुमती निमाजमा सामानोरा प्रसयत बारपात पिसारितामा सात ते रस्त भागरते-अप मा मदिति । बा पति पर विशेष बातम पर्म ममिवा भूमवेत मरटोति ममी, कवि-नाशिवाम्मपि तमामाधाममय पर मामी व्यापारमा निमावि वानमा गोलभम् मिसनम्नयो मातमालमिती - समापमानमपि मापमान सन्, मान् मेरा पायाम्पमपि भार नवा मारा वापिमान भाग ब प्रमाणात माल सामापनि गाह- 4... मामल। 12.1ो।
1 - । मेवस्वीपचारिकत्यापापमम् ] दावशारजयचम्म् १००१ प्रपिम्पादेरन्वयिस्य प्रचर्मपति, मत्स्सात्, तमोपमनव सामान्यस नाति, म्पवस्वम्पापिरसात् माष स्यात्, प्रपर्वमानतलास् मेदबत्, इस्थमप्पुपसमन मिचि , उमयस्मिस्थिति, सामाम्पे-प्रविष्यों मेदेव पटे येऽप्यसति मारेऽन्वये मपितरि प विक्षेपे स ययमाप पण मेवोऽप्यनुभूयते-मेरेन स भेद इचीप्यते सनेव मेरेन न भूमेत, ममायांगत्, अमावस्यममबनकियारममत्वात् , सपुप्पबत्, न एमालो मागो भवतीतिरप्लान्तार्पपदनात् । अय भाष एयासी भेद इप्यते सतो भाषाम्यतिरेका सस्वादुभयपापि न पुनर्भयेस, भूतपटाविषत् आकाशाविषत् , पैपात्, न हि भूत एव भवति, सयासत्यसत्यापश्चा, पवि भूतमेव भवेत्ततस्तदसत् स्यात् , उत्तपमानस्यादजावपटयविस्पनिष्टा च सा मेदेपु प्रयक् सरस भपनाऽन्यय औपचारिक इस्पत्रोच्यते ननु स्वयैय स्वदम्ये पृथिम्यादौ पटाविमेव मुवता वस्यावस्पामात्र घटादिमेदा इत्युकं भवति, ययाऽनुलिबक्रीमयतीरयुके औपचारिकस्य 10 यझताया नाहुले, न हि यकस्यमङ्गुलिमयति, मनुत्पनस्यात् खपुप्पपविसि । (अपेति) भय भाम एष-मा मुझेप रोप इति भाग्यसमाम एवासी भेदो भाप एवेप्यते ततो मावाम्मतिरेकात् -भावारमकवात् परमारममतात् भूव पादुमयमापि-अपानोपसर्मनत्पापा प्रविपरीपट साा न पुनर्मूमेत, मूतत्वावपटाविबस् बामशविवम् पैपप्पात् वर्गपति-न हि मूत पस भवतीति, कस्मात् ? तपा[मत्य] सत्त्यापत्तो पनि भूवमेव मवेत् उत्पममेवोत्पधेस सवस्ववसत् पादुपप- 15 - पतति चिनी मालति मातीसम्युमामा उपायम पार वापस माति मरिम्पोपधप सामान्ममुफ्- भी साफामम् परात मेगापि मदत दत प्रभारमेर र ममियान मेसरजमीन साल माया । रे रिसर मरमनिारये सामाम्पम्पमावानुमानसम्, सामाम्पम्पापि मरनास प्रामवासुपरवमि पुमरवापनुप- सना मारिया-त्यमपीति परिमार्मारपीसा एवं सामाने मावबम्प मेरे च मविश्वम्याधरले पपमार एर मेरा बाबमान मेदन न मन-मभावो मेरे माताति म स्मास्मिार-उमपमिस्स्थितीति सामान्ये मेरी ममनि-मारे 20 मपित बाटीया यमाप पति, बमारवभाव एव गरि मेहोणवत नैवेति प्रमानेर मेनन भूत- सामान्य मरो म मातीचा । दमार-ममावत्यादिति मार धमाकार-मानम्मिरममतामानामि । म दमन-म हीति । एतरपारपाय मेरम्प मापबमम्मुम्पम्पत माप-अप माष पवेति । मार-मा भूरेप इति । पर मेरो मापे मानरममा माटो मनिता तु भूत एकना-मामा परिवार अम्पपस्समाष पति मेरोऽन्यानमार एवं व एस भाषो मानरियामा इप्पत इसका मानन मलिनु भूतप मेोऽपि भून एष परियार-सतो मापा पसिरेकादिति मापानिमसात् मानपान् म स भव एल मूतपी माप । उमपपापीति मेदो अपमार एष भनयम मात्र एषामो मेदो मार सोमबपि पिचर मरेताम् प्रपाममाफ्सममाना सामान परमात्, दुरवस्य पुनस्पपिरमरम्बाला बागानुपातेति भाग 1 ग्लोन मन पुनर्भयत एपवार-पादिति, मारपामार सचिरपला रानाप मोहमा पुनतिरासियर मावि मूलम्प पुनम व मात्र । मोपुग्नमवार-सपासस्पसरपचेरिति । ता प्रम-परि० मूतमेरेति रममा प्ये मार मणपत्तिधनाचारकोप बदायम्, मना पर मतमकुरपमानता- मि.म.भालपोर !
" 10 २००२ म्याबागमातुसारिणीम्याम्मासमेतम् [मियममझारे मानतवाद, भावपटपरित्ससत्यापचिा, मनिष्टा च सेति न भाषो मपति नामामो मालुम प्रवियों पर ति, भेदेप्निसाहि माग्मव मेर-पटारिमेव परमास परमार्षदो पोमो मपति मस्तीति मबनाऽयया स पौपचारिक मत्रोच्यते ननु पवेमादि, म त्वयैव स्वम्ये प्रनिम्मादाविति सारमम्बे, वम वस प्रविष्मानितम्पसारस्सामात्र पटारिमेका इति पटाविमेका एचौपचारिधः प्रविष्यारिसामाम्पमेव वत : मिमुक मरतीवि, सिमित्यत माह-प्रबाहुन्निलिमाल, सावित्रीभवीलुरोऽहलेषस्या बाया, बहुसे। सामान्मस्य मेरोऽपैसामात्रमिसौपचारिम्न परवाग नासो, मम्मान गम्यमासिमपति मस्त स्यारस्पारयापहमपुलिस कीमति न पौवाहीमपति परमात् पुनर्न मालमीमपति रमते- मनुत्पभवात्, सपुप्पपत्, एवं वाणयुगतराषिपठमिनामिभवपर्यायेषु ममात्रमुपम् । मुगपतविरेशमिमामिमवपर्यायेणपि- भेवस्याध रूपवत् यथा पट एव चामुरारिमाणापदेशविशिष्टस्वादूपं रसो गम्भ इत्यादि मेनोप्यते विज्ञानमात्रस्प त भेदस्वावस्सुनोऽभिन्नत्वादेयं पृपिम्पादिसामाम्यमेवाः । (मेदस्वावति) भेरवाच आपबत् वदवनामात्रमिति पर्वत बमा भट एक नमुरारिमाया- परेमविक्षिपस्यात् स्पं रसो गन्य मावि मोनोच्यते भानियां विज्ञाममात्रम र मेवस्थावस्तुनो पर स्लामिनस्यात् एवं परिम्पाविसामाम्ममेराः पटादयोऽश्मसिकवार[मविधानमानेगेति । किशाम्पत्- मत रकम्पायात् दम्पस्य पर्यायानामितत्वाध पोपमा सर्वमानुपपचिा, एवं पायर, बापति माम मारो एमा मात्र मी मामा मी, पिलपि न ममी कोपि कभपती माय । मनु मे एष परसरामा परमाबोलियम्से पर भी मामपि म सोय पोपचार पदमूत. पापद्वार उमा भाष एस परवे-माग्मतमिति, भारिप 10 बाताव विमानेषु माम मममममि बानुरष्मपितापेशल समापन परमासानि मात्र । समाचते- रपयेषति माविापरायो मेध कारण स. सदेव मति इममेव इपिसी भात समानामनाम् मेरमा सम्मापिपरामरताच साम्ये प्रस्मिादी लात्मम्मेष मेरा मुम्मायन मेगावा एप विसावर सतत निम्पानायव भारपस्यमावत्या माची मान । मनमा- पपाशतिरिति भरेषम्बा माता या पापस्वाऽशम्पपारिवारिता न तत्पभूना सामाग्रमास तत्व मेल बारपार नमामेभी पारेखपवतार पपुनमा मात्र । पम्मयुमपानिपु पाम्मेरेन मिय पति मन त पागात मागम्य बोपचारा स-पप तापदिति । बन पुमपदामिन- बाबायोपवलमार-मेहत्यापेति । मेश पुनपानिया पर्याय मैत्वाल पारामास्वामा पनि बम्पसामानासना पने पातीमारियवे रमण्य मत गुमममेष राशुपते प्रामसम्ये पर्व अमावसपने मंच प्रपते समान मारमात्रमैन रमुखो हायाधम्म वर पारसबाप सा- मार-पपा पर पति । पापियामासमेा पत पारबरा पिापमानमेन्युधपोरा इत्य एवं पूपिम्याति । शिनमापति परामराम विकास विबा मार । परिवार निमुनमा एक- बारपारपमाटमारम्भिनर भेदार सामग्री प्रमाणिमिमा भत रसम्यापादिति। म मरमाणेन । म.kut A. परमि... मेरा IA.५ पुषम् । U -मनु मबमारते पट्यपनुपपचिळयमम् ] दावशारनपथरम् १००३ विशेपस्वरूपपस्यपेक्षायां पूर्व मवनमस्वतन्त्र पृपा का टि स्पाचतो निर्मूलत्यादसन् पटः खपुष्पयत् । मत उक्तन्यापादित्यादि, भतीवविष्यापितम्यार्मिकनयेप्रेकमर्पगतनित्यमरप्पयस्तुमाप्रवि म्मित सिमितमरखवाविवत् त्रिमुषन मिनामिमवमप्पमित्रमेव, द्रव्यामिवरया देवानाम्, अवस्याति संशाना पुस्पाविपारेषु प्रतिपादिवत्वात्, व्यस पर्यायानाभिवत्वाच, पयामप्रवचरित्यावि, इसि सर्वव । भवनविम्पनुपपचिा, एष पूर्वातीताम्पनयमवर्भनेन, विशेपम्पहपेत्यादि, तस्यापि प विशेपम्प स्वरूप प्रन्य पेपमाण मापसामारते न सम्पते, वपया [म्ब] रूपयति पाछपति, कार्यस्मास्मनोऽस्वारो म्परूपमिति कारण मानमन्बया सेनेप महिमा प्रपम्वर्तते भेदारतेऽपि पयोपवर्णितमनेकपाध्वीवनयेपु, तपनि पूर्व मपनमस्सावत्र सम्या प्रति यथा लयबेष्ठ म्पात् दतः हि तवो निमूटयाइसन् पटा पपुप्पवत् । स्मा मत है परस मूछेन मानेन ! किन सयमेष मपति । इत्येवर- नापि स पटः स्वयमेष मागा, विशेषप्रधानपमहाने, नाप्यस्य भावः मसस्वाधि- क्षेपात् वपुष्पवदेषति पूर्वोकाविर्मावादिमेदानुपपतिविरोधात् । (नापीति) मापि स घटः स्वयमेव मावा, कस्मात् । विक्षेपप्रधानपपाने पनि विशेप एन मायक्लो पट एक विशेपः स एष मागो मबन न भूयतेऽयपेन भागनेसता तपामास्वाइटस्मापि 10 प्पा-भतीतपिप्पावरीति प स हि शारम यास न्माननिम्मित मिश्राममपि त्रिमुखमम्, वरेर 18 पसु माघारनामामोडीयमानबस्समे मयि तसतित्विम्यान्ममामाबाद, पोमिटमेन सपराधिपविनिम्तम्पपार प्रतिपापा यस्तो मेहा पतम सुना प्रशा एष बोप्रवरा की मेदा इम्माभिता इम्माभिधा इदि भाषः । सब पपारामित किन्नु पर्षागा एस पाकिता एवमपि पर्याय न मान्ति गाव मन्ति oft मनामया पर्वमा मात, मानव इम्म Geet पर्यापाdि मवत् सम्मत् सर्वथा पायात्रा मनविरमुपपतिमा प्यस्य पर्यापानाभितत्वाति । पिम्प बसम्म् ममप एरेगाह-सस्यापि निगपस्येति समसामर्या 0 देख विम्य हम सम्पते ममयो व ततोऽम्परम् तु तम्मम्बन्धित प्रदौम्मानविशेसम्पपश्यम् मा पर निम परवर जनसामप्याररमराभान् एतर निमेषम्य सभापम्पसारमामा या परिपासनापनर एव सिम्म सरपम् वर पा मगम इममि युनत, सभामय नत्र तत्मात् समरिमेन मेरमन्तोपापि पुपर एमेत परिवन्धिी इम्पापित भवाम्पामिति मार । मेरा मारमा परमा पह मन्द वत्र मानापर भोपमारक पर मेरामिन ए मनमा प्रपा सविसरमुरगन गरि स्वाती मेश नमसा मसु नो मिस्वान् यपुप्पारिक पान्तो मेवा सुरिम्पर-सपीति सम भरनमा मेगमा पूनमेवितममिति माप । मनु स्टार मान मिा # लपमेत म मातम्यार-मापि स इति । भीममा र पारि ति प्रमान , सपा । सामान्योपविलेपानपद पपमा सादिसा-मापि म पर इति विसपा नी सयमा मपी पर पर मागे मरमसुपर पोवामन भास मुरत पर पर एर मा म मारण मामान्यमाप्रपाममा पम्मा भाषामना प्राति सामामोम्मनविपासवानगि त् मा किसानमालाम्प्रपामाप्राप्त एर प.20 सपमे माप इसनुपात्र म मातम भूपन इति पर मानो मार्ग पर्फ पपा मारा-पम्प माम मामान भयारिषमतम्प मापमानामान्यमय मा, मारपत्र प्राधान्यान् कि ? मारमनुमति न मार: म.
म्मापागमानुसारिणीम्पान्यासमेतम् [नियममहारे भावमात्र सामान्यमपी, पटातिविशेषगापमपि व्यापारमाद्विपम्म मावानुरोपात सामान्योपसनविक्षेप- प्रपामप्रतिमाशामिा, एक वाटो माप इस्पेवपयुष्म्, साम्मत पास मापो विपरम सम्बन्धिमा सम्पपाध्या, पया पटम विनष्टना पामनि नमावस्य भारोतुत्वात् निरुपम माम्मनिह पति- रोमोवानि म्पयन्वे, पदुफ्भरित्वात् किमिव बाहरण बीज निपमानमुपमपति, पता- । भ्यप्सम्म माषा मात्! वतमासत्ताविशेषात् अपुष्पवयपाविशेषा, इति पूर्वोचपानिमाविमेवाडा- पतिविरोपारिसनेनावी मन्नमतिविति-पोषसत्त्वं नाम वासिमन्मठे क्तोऽन्यत् कार्यम् , तहसमर्प- विसरया, पटपटप, विकासासामम्मे पासकायोरिटमावि पापस्मारकमाविविरोपोपसघरेण विशेष विरोधोपमोगप्रसवार सस्पपिरोप इति । 10 ननु विशेपा प्रस्पषस एपोपठम्यत इस्पत्रो रस्पमानस्वेऽपि पपा रस्य तमा तस्यामयनादस्त ए पया मृगणिकासमिछगम्पनगरापि, भूगणिकगम्पनगर योहि भवनरस पृथग्भावेनाभवनात् सठिनगरपोरसत्त्वं ए तथा सामाम्योपसर्मनतायो विशेपस्म, मयोध्येत त्वमा शीवादिनीवादिविशेपामावासयोः स्यादसत्वम् , नावश्प विक्षेपे पटादौ पपिपीविशेपैर्माम्पम् , यदि स्पुषिशेपे विशेषा अविशेष एष साविशेफा सामान्यमेव ॥ विशेषवस्वात् , परम्पत्वपिम्पादिसामाम्यबविति । भनु विशेष इत्यादि, सामाम्पोपसीना विसपा प्रत्ययव सोपसम्पवे वस्मार याबिस्ने कस्सनेमत्रोमो रममावेसीमावि, प्रनसम्ममिवारप्रसनसापनम् पचा एक्वे या तमामबन्य सत्तं एम् पभा पगप्पिसमाति प्यावा, कसाबा-भूगणिमात्पर्षमारपोसार, मबनम म सम्पनीमार । माग माग्रि करा माप वि सम्ममा मेयमार, पर रमे मागे ममी पपा निमे समान मान्ति दियेषरोडभाने मालसख परिवात - गरनार, को मानसोपरिम. सब माना एप विमानमारमोपला माद, एस को न मात्र स्यगावे स्माम्मवमिति बलवं मान तु मा माष पवा अस म्पमति, समानानेचर पार उत्तपत्र त तिम्रो प्रपत्र का निवर्षमान पौम्मरण या भये पये दरात मात्रा । नामाको मापति सभापमाप्पमेति प्रभावशासम्बन्धी मात्र मन । ब मार-मासात्वाविशेषाविति सामोरम पपुप्पात् स मा मात्, नत माविकमाइप. प्राधमानेषु एप म तपोमापि मम तदेवा-ति पुर्कोलादिति । संगी-परबसस्प बामेति, पूर्व पिप्पलिगामाया, मम् । एतस्मतापोल भीमा-सपनारीतन्नु सातम्ये पमम्मी कप स्मात साम्पते मरतालिासिम प्रमिला-जु विक्षपति। माश-सामान्योपसन इति, स्वम् । प्रत्ये परत सगरसवे मा एम भरम- 30 बकति गरी प्रत्योति प्रोमा एमवे तानिनामाणात समपविति मात्र । पावसार- मुपदमिति माविमानमरामा मयसीमनपरोरम पर मत कोष पर्सना पाने मापी मानि मन परायपेरसत्तम समाबेगनाले सम्मान सत्तावतापमानामामाद समवर भविरोपाम्पपापारमम् ] मापधारनपचभम् २००५ प्रबग्मापेनामपनात् [ब परमार्मसस्मात् सलिम्नारपोरसव पर पया क्या मामान्योपसजनवायां विक्षेपस प्रत्यमत्सेऽप्यमस्वमिति, बयोन्येत खमा सीतापीत्सादि, सम्वप्निकाससिले शीतमूद्रयवादि विक्षेपामाषात् सपनगरे [नगरे] श्यमानीपानीवविशेषपर्मामायात् सारसत्वम्, नावश्य विधपे पटफ्नो प्रविधी विभपाश्मसिकवादिमे म्पम् , पचो विक्षेपासस्पारमत्त्व कम्प्येत, परि मुर्ति क्षेपे निक्षेपा भनिक्षेप एप स्मात्सामाम्पमेर-अन्यय एम साद्विक्षेपा, विशेषष स्मात् साम्पत्माविम्मारि । सामाम्मवत् । भवापारी मार- अपि प पयमप्येतदेय मूमोऽविशेप एय स्यादिति यदि तया भयनेन विशेपेण विना भवेदम्पयो विशेप एष निसामान्या स प नास्ति ग्यपुप्पपत् , नापि सामान्ममेव निर्षिशेपम् तपा सया यस्तुनोऽभवनात्, मृगतृष्णिकान्याकृतजलविशेपापि किं शीतादिमेदा न 10 मषति ! न भाषामाषादेष, यया याऽसौ विशेषमायामायात् नास्ति, तया पटाविः विकोपोs- म्भयमाषामाषाभास्ति, पवि विशेप एवं प्रभानं स्यात् सलिसमाधानम्प्रितमिष पटापि मृगत प्णिकाकस्पमसत् स्यात् निरुपास्पस्यात्, पास्या हि भयनप्राणिका, इदं वविप्ति सोपारस्पेयेति, ततो न किमित् स्यात् , पूपिम्पादिसामान्येनानुपष्टम्पस्यात् , सपुप्पयत् । (भपि पेति) मपि च बसमप्येवरेन मूमा अन्वय एमाविशेष: सामान्यमेप म्यातिति, पति तथा 18 मानेन विहेपेण-आज्याप्येन बिमा मवेदम्पयो बिशेप एन नि:सामान्यः स प नाम्नि, सपुप्पपत्, मापि मोरिग शियम प्रहालसमत पारिमार-मषनस्पति सामान्यस्थानापचम्म मासम्म समानुमिपरे पमनामनार सवासति मत परिणमगरको विषय पत प्रजयोरपि तथा सामान्यमपि मबनात्मम्म्प मारन मामामाषामला प्रलसमापि निक्षेपणास्त्वभित भाष । समिपमनगरममतृप्पिकामधिसमन्वनपरपोरवालाना साबसातमिरा पाय-मयोप्पेवेति । फ्मोपन उस्लामावारिधर्मा पफ्तृभिरासरी मायाति प्राप्त गबमपर नमाम्य 20 सपा प्रमवा मीनाबापिपरपा पर्मा म सन्चति समति-गमपनगर इति । परसत भ नामे- म। परन्त मिले न दिपा नरमाई सना मार-नाबापमिति मानिविभो प्रविधिपा मे मनि कारमेर या मदिनु बोधि परिपत्रले सम्मी भति रिस्पेसिन् विपामापारपी पर पुम्मेवेति भाग Iो रिमेनस्म निभा न सम्मम्तीमार-पदि स्युर्विशेष इति, पम् विपार सब विसरत न स्मन् पितापस सामान्यतम्ले सामान्य मात् मत् दर्प पिम्मारि वा पिता खमा बाल भाषः । पाचार्य रममार-मपि पेति । यसमामे मो गरि मानन बिना रिपो भोणी HAसियान समारवारी माप-अपि च पपमपीति । एकदेर तमा-पदि तपसि । मिक्षप एष निसामाम्य इति । मनमाविमो पिया देन दिला पाय मार, सोना विप एर म सामापा मा, मातिर बानियो पि प्युपारित मायः । एवं निम्सामाीिमेपामाषमुक्ता विषमामाग्यमाषमार- मापीधि तमा मापन व विमा मोभ र समान्या रिमपर्वलम्, पानिपग्लुनोमाना ARE-30 सानिमा बतु मदिनुपईनान म्या । काम बिना मिगे मानौप दिन लामा मानन सम्पनिाम सि धनानिमित्तान। ...यश्यो। 44. 'माम । .मि... साम्त । - - 10 म्पापापमानुसारिणीम्पारपासमेवम् [मिपमममरे भावमा सामान्यमयी बटाविविक्षेपणावमपि कामाम्माधिोपस्म मावानुयेगात् सामान्योपसर्मनविशेष- प्रधानमतिमाशानिः, एवं वाणो माव ईत्वेतपुच्म् माम्मत पाम मामो विक्षेपमा सम्बन्धिना सम्पावपळमा, पथा घटस विनष्टम कपास्मनि, अमावस्म मानहेतुत्वात् मिस्डस, पाम्पनिह पटमि रोपाखानि सपन्ते पदुपरित्वात् किमिव ! पगारस मी निबर्षमानमुपकारीति एवर- . भाप्परम भाषा मात् । अवमासत्ताविक्षेपार नपुप्पबगाविशेपा, इति पूर्योपाधि वारिमेषामु- पतिविरोमातिमनेनावी मन्नमतिविति-परेवासत्त नाम स्वामिम्मम्पते दोश्यत् कार्मम , वरसमर्ष विरफ्लात् पटपम्पत्, विपासाम पाऽसतायोरियाति पावसाचनाविक्रोिक्सिपरेण विशेष मिरापोपप्रसवात् सस्मविरोप ति । भार- मनु विशेषा प्रस्पक्षत एपोपउम्पत इस्पत्रोपते स्पमानत्वेऽपि पया रस्पते सया तस्पाभवनावस पपा मृगवृष्णिकासलियगन्धर्षनगरावि, मृगणिकनगन्धर्मनगर पोर्हि मषनस्य प्रपग्मावेनाभवनात् सलिसनगरपोरसव र सपा सामाम्योपसर्जनवार्य विक्षेपस्प मपोम्मेत त्वया शीताविनीयाविविशेपामापातयोः स्यादसत्त्वम् , नाषमै विशेपे पटावी पृपिषीविकोपाम्पम् , यदि स्सुर्विक्षेपे विझेपा अविशेप एन स्पादिशेपा सामान्यमेव 1 विक्षेपपत्वात् , सम्पत्यपपिम्पादिसामाम्पवविति । ननु विशेष इष्यापि, सामाम्योपसचनो विशेषा ममपत एपोपसम्बते उस्माद् विस्मे पसमेनरोते-रपमानोऽपीनाति ममधम्ममिवामरीनसापमम् पया एक्ते तवा वसाभवमा- एस एम् पपा मगरमिनादि पवा, प.साम्मा-पगतप्पिागममारोमावि भवनम्म म सम्पत पनि माग । भोन माम रितु राखि मा मन इति सम्ममा मेरम्पाद, पप 20 मे भायेगपी मदा को निमे पानी मन्ति बिरोधम्प्रेडमागे मागस र पनिरोपान कम- मानाद, मो माक्सोकपरम वन मान या मिमानमहरमोपली मावि, एसप को कमान समापन समान्ममिति Rel माल नु सम माप मा मम स्पानि, बानाप्रेम माप मत्पपा की मिमोपा पार्षमान पाममहराला माने ये दरित माया । माया भारत व्यापाप्यमेति गमावाससम्बन्धी भाष मनपाइ-तमासलाविपापानिति मागो पुपात म मा मात, त मालागारमिलाएपपत्ते पोनमारमा पर तसा एक मनोवापि माम तपातति योजयदिति । म परेवरसत्वं बामेति पूर्व विपरमप्पासमेठत, पन हामम् । एम विस्फवाट मलीह-सामारीति। मनु सामान्य पानी र प्रमर एणमते माशालास्पिासिमन समिममिनाये-पड विरोप इति । मारपी-सामाम्पोपसम इति सम् । राप्रपो समिपनि सासवे म बा दस माम 50 मोमिनुपरी प्रत्योति सो परा सो समिपारेषाम्मुफ्पमत एमविति मात्र । पातमा मृगप्पिति विकासम्बनबाना मसालारवरगावात प्रमोस पाना मात्रौ पः सो पमान या शस्त समाबेसी माला अपमानामग्लाद निपा सामान्यविशेषघम्सपसनिरासा] दावशाजपपरम् ममन्दमन्यस्य प्रविनीदम्यम्प बेसमपान सर्पस्य उम्मगगस व्यतिरेफेम निरम्पयो मिरुपास्मा कमिरेवा पायोऽवपस्मोऽर्थः पम्माम स्पास् अन्यपरहिवस्तास् , मत एम पेत्यादि, यस्मारम्पयरहिवम्म निरूपास्त सामावा वरमान्निध्यादर्शनाविपत्यकबीपकर्मसम्पन्धसम्मत्यास्पाग्ययामाषाभरकारिगतिविशेपमुसा रस- फारमसेसारविशेषाप्रपधयो पुण्यपापकर्मणोरनुपपधिः तदनुपपचे संसापनुपपचिा, वत्प्रतिपमसम्प मर्शनारिपरिणामविक्षेपानुपपत्तिः, वतस्तत्प्राप्यमोक्षानुपपत्तिरपि, ततः शाशाम्यासादिपुरुषकारानुपपचिा, . बनियतवयामवृत्त। षय मा मूवमते दोपा इसि सपामियप्राचिरिप्यते सव- सत्याच तथानियतमवृतो बीवो नारफः संसारी मुक इत्यादियस् पृमिवी पट इत्पन्थय मापान्यमेवैपितग्यम् , विशेपस्तु पटः पृथिवीमनुवर्तते, लोके प्रपान अनुयय॑ते, गुणस्त्यनु- पर्वते नीलोत्पलमत् , सदापि विशेपानुरुपति चेम, विशेषाभाषाविति पूर्वनयेपु 10 पाषा भाषितत्वान्न विशेपैकान्तपक्षा सामाम्प शनोस्पत्यम्त निवर्तयितुम् , नापि सामान्यै कान्तपक्षो विशेषपक्षमतसौ न क्षमौ! (मस्या ति) समान वानियतापूची जीवकर्मसम्मम्मसंसारमोधादियों जीयो नारका संसारी मुक्त इत्याविषत् पृमियी पत सम्बयप्राधान्यमेपैक्सिम्यम्, विक्षेपम् पटः प्रयिषीमनुबवे, जीपल नारकस्थापित, मात् १ पस्मातोरे प्रमानं प्रमुब_ते न गुमः, गुमपनुवर्तते, म पपानम्, 10 प्रयच मान ! बेग मिरपालपारस सारित मार-अस्पन्समम्पस्येति लिवासातमित्रसम्म लिमार- मम्पपेति । भवगरहितत्वाविरपारम्बारमारे पाम्तरमा-परमादिति पुम्पपापम्मेवारबपतिरोप पुमपापमानो माचिपिरसराम, एममारप परकारचतिविमरेषु मुस्लमान पुनपापमपी पात्मनि गौरम्मसम्म बस्न्तगरपावसातारातः जीवाममाम्बस मिमीमारियन की मिस पर यदि मामाम्पदिसमुपदे ता बारम्भमन्यसम्मानरूपयाममन्यसामागत् र पुप्पापमयी उपपपैठे पति मा । एस समारोऽपि म स्पानिपार-10 तनुपपवेरिति पुम्भपापमानुपपरिया । पुसमापमानुपपरेषाप्रमनप्रीपक्षमाम्मारिपरषामो र स्वरि- मार तामतिपक्षेति पुमपापमपम । समापिपरगामनिषाभाये तत्वाप्पो मोशोपि भारिप-तस्त त्यायेति । एवं मोकप्राप्त मात्राम्मामानिमपि न मासाह-वाति । बापु नियमारपसम्मासि रे- मा-भनियतति । सम्म तोपराधिपूननाय न प्रपरेन पितात्पभुग अपि सामाम्पातपयमा प्राय प्ररेक मिपार-सस्थाधेति । म्यामो सत्यापानियताएपपिति और सम्बम्पममुभा समरवि पनि मुरमा वामानामभ्पपीति निमारमुपगमे मारपत्रसमलिमुबारविमरनुपचनपीलाप सामाम्पम्प जस्स प्राधान्यम्, कम्पमा पर मारपारि स्मात् तथा बापान पर सामान प्रपालमियम्मुरेवमिन मा । विम्या प्रमान पति- एपिी पटातीति । ममयमा पिनेर प्रमान भतपुरभूतो निर पिम पमनाम् सं मारा गारमनुसरतो पण- शिरस्थिति। र मार-पक्षासारु इति गुष सनमनुपरसत म प्रमाला गुनाते सातपयन मुसम्मनात, मनु प्रभातम् पर मोरो परम्परा प्रधानमुलक पनार मेला 2 to पनामपरमम्मा, नौगे गुम मेरमा को मीसम्माजम्नेव बोकम समये यो म या धीमी समसमयानुप्सम्मसात् प्राममा मात्रामा दाबता माप मारलपि पार्भमा पेप्पर पो पत्तात् माम्पमतमारपमरमरपाय RTR पम्मपसार मा सामान्यतयामार म्यायाममा सारिबीम्पाप्पासमेवम् [नियममहारे सामान्यमेव निर्षितपम्, पढाबपनापक्रिनमाणविशेपक्रम वा या पस्तुनोऽमबनान्, तोपर्म मुगल- मिसयामिस्त पार-सरस्वमिस नम्बातमीनेपानी परिवातिमेदा म भवतीति भरमनिवार्य प्रमा, मारम बास्स मावामाबारेष पमा वाऽसाविति, रवा मावणियात मावामानामाचि षा भटारिरिपोऽयपमानामाषामासि, परस्म तु रोपा, पति विक्षेप एष प्रपान स्मात् ससिमभानपति । सम्सिमपनेनानन्वित घटापरि माविमसमसत् मात्, निमाम्मवार, पापा हिमवनप्रापिका विमित्युपास्येमत मार-प वरिति सोपाम्मेपेति, परिवीति इम्यं सर बट इति पा, हामि विजित स्मात्, कस्मात् । पूपिम्मारिसामाम्नानुपासम्मलात , सपुप्पयत् । किसाम्पत्- तपा करमावटपठाविविशिष्टहत्त्येष उदकम्पलनानिडानाशाविना प्रपिम्पापि न 10 पम्पसे । भस्पन्तमम्पस्प पपिवीद्रव्यस्य पैठधण्यादा सर्वम्यगणप्पतिरेकेण निरन्ययो निस्मारूपा कधिदेभापः कमान स्यात् ! अत एव च मिष्यादर्शनाविमस्ययनीयकर्मसम्पप उन्तस्पास्पाम्बयाभावात् पुण्यपापकर्मानुपपणे संसापनुपपत्तिा मोक्षानुपपत्तिः, वस्पतिपक्ष- परिणामविशेषानुपपा, पुरुषकारानुपपक्षिय, ममियवसपामयते।। तपा करमादित्यादि, परि विशेषा सामानिरपेक्षा स्मात् सतो पया स्टा पर इस बा 15 विभिटमा त्या प्रषिम्यादि म्यम्मठे बोरफनम्नानिमायपिना स्मात मम्पते प्रविधीविमिनेय, बमम-सोपर्पमिति । बामयिोपा मानिस नखना पोतारमा न मनोति पति-ममप्पिति पिया प्रतिमाम्मान चिपस स्वभिप्रयां निता मतभिकारे सिपालामाषा परमिक वे पापरणमिति प्रमाविमा, मामाभावापि मातम-विसापास पामाप पतरेल सिपी मपा पाऽऽसावितीति । गतिमाह-सया पठाविरिति सामामापा मामाभ्वादिसपोऽपि पावधि विशेषमा मायो पेष इति मात्र । पुनर्मामारि-पवि विझेप एपेति सरिरमानामितम पारिवारिक प्रग मामिसेस का सारत मात । मतत्व एमाह-निपाम्पत्वादिति मासास्वामाबएमालमत्वाभिमाले मित मिसना-उपाप्या हीति, मनबमेनोपानामा निममी मात्र । समानुपास्पैम मनावतार वदितीति गरि सिम पाया भादिमायामा लोपासाहम्णवादिसामा परि पनि हारस्पमस्त मालति मा निसायसना- मपित्यादिति भारि तिमपि न माविमा एमा- सपिम्पादीति भिमारिसमान्यनाममात् क्वा यानि पक्मिसिमानामाला ति पापि भी मान । पिस पायाम्मविरफेसताना रोपावरमार-सपा प्रमादिति । सामान निप्पल्मम्मम्मम्, मम सिमिक्षम्म किमानसामान्य पम्मते माम्पसमापि पफ्यानाने पिम्मादेरफेमनार - मिलेन मामाबादला किया बमिमपि बसमा बिपरमाल मिरपेशवाद, एपो को सामान जामिन मारियादमा पियारेमिमममहानापि मम्वे विमान, स्पमापनिरक्यामराम लार, धिरतामाकानाको मारो:-पपि विप इति। परिम्नाट मिस विमा यो मलात सामान घर परिवार-सम्मवार निरमोट सामानमामोत सामान करिव .लि. भाव । सि... 'पाल्पाबत मार ...मोपायो ।
मलेम्पिनेत्यानुपपवि.] मावशारनपणाम् पमाषविशेपेसाविसमामदण्टको गवार्यः, सतपर्यायविरसगुगलले एतस्यार्पस्स मापनापमुसहरणम्- पर हिमानममीयनपविति, तत्र तापदमीन्मनयोरेक्रय नानात्वा उमयत भमुमयस्य अग्पतरमपानोपममनवा सम्मानिवि पिकप सवाऽप्यपातम्यवेरवि मसभाणो रशम्दा:, सदिकम्पानुपपरे । तौल मागम पत्य इति म , प्यम् ? पया नफस्वमग्नेरिन्पनेन सह घटते, यदि स्यादेकस्यम् , दग्न्धनमदग्निर्न प्रयत,० मनि धनपवृपेचामावतेषाने, अस्विमतिविपतिपद्यतिवर्चतयः सन्निपातपाः सन्चार्धाः इति थपनावप्रवृत्त्यमत्त्वात्यात् , न प्रवर्धते, एकत्याग्मे धनषत् । यया नैफत्यमित्यादि, तपस्यममेरिस्पने[न]सई, इम्पनम्यामिना या मा म्यात्, 'सर युकप्रपान (पा० २-३-१९) तृतीया, इम्पनमेयामिरेप पा स्यात्, तम वापरमार पनन सोस परते, पेन सपिलात् सत्यापाम्पात् यस्पते दोपोऽसत्त्व पनि स्यादेस्त्पममरिन्पनेन, रेग्मेम्पन- 10 परमिरिस्पनरहितरयाम प्रवरेत, पथा ग्यम्मनोऽमिन प्रमते, स्वाऽम्माप्रचिरनि पनप्रतिमामापतेमा। स्पात, 'असिमातिविपतिपचतिपातया ममिपातपमाः सचायाः' इति पवनारमसिमसार्पस्वात, मप्रारमत्त्वपयापनात् वदुपसंहत्य सापनमा-न प्रपते, पातापग्मेन्धनपत-पपा एम्भे पनोऽनिरि पनन मरेपरवानिपतावरणाप्रपर्तमानपारकलादप्रपचेरमम् पमाऽपिरिति । मत्रार- पपेपनमग्निना सकस्येऽप्यनुपजाताग्निकं प्रवर्धमान (एम् सपेम्पनेन सदकस्ये प्रयस्तुिमईस्यग्निः सूरमायस्य इति चेत् को या प्रवीत्यग्निरहितायस्पापामिन्धनस्वम् , एत जिला परिन् पस्तुनि म मरन्ति बानिय स्वायम्मन भावी पर । भापसिम्पियाम्पवर पसिन मारमा स्पन्न पति-पपं भवनमिति यस पर्व का मार । भीमोरक- तादिमारमाय छिपार भएपहि-तर वायरिति । समान्वनयोश्वादिविण्यानुपपराकम्पनी सरसबनि-10 सविसरगनुपपत्तेरिति । वारेमाचम्मम्मास्यया-पपा नैसमिति । गरमन्बनयोरेएसमुप्पो र ममार बनेन एथनम्यामिला मासा सार, मिः प्राममिपम्मानम् मोहन प्रपानमामिप्रमालम्, माप योगेनपाने दृष्यसाया प्रेमपान पनि प्रेष निता गम्भवम्मेर म्यान रोयतनामिरेर का स्वाद पर पहयो सौपम्पतरम्मापारि माचो वपश्यमिति । एमन महामेरे पति-राम तापदिति। रफान सारेगमे प्रापाम्पापपा एफेबमोमिन प्रगट तपाऽममपामिन मान मापागार उम्प स्मीयर-29 पदि म्पारेरपमिति । नादितान प्रापिदमावामिरमार एष पदमार मनिम्पनति । प्रात सत्तम पानिमा गसिप पर्यापमा प्रावमा मत्वमपि नाची राह मतिमय ति। जिममनुमानम्मागेम दमगी- मरचंदाति माम मी-पतिमान प्रान एएगापमारियोममतिक मिपण-पयेग्पनामिति ।ममा मोलमाल रिफनमनत्रानुगतरपि गये निर्गमा मामलामपान मप्रेदपारसमण्यपि प्रतिमा बाममयमामा प्रारिम एष मामलमा ब्यापनापनयर 30 हात पछाममन्निमियामी-पपम्पनमतिमति। मिना मनमानसम्मानमा मातम गित मिपा.. मसापयामिनासा नायनमेरापि RTGT बने। ...मेलगानि । मिस मगपनि । 18 म्यापागमानुसारिपीच्याप्पासमेतम् [नियममारे मीठोपमपरिसि, मगपि विशेषानुरचर च्याति पद-पान्मा नन्त-पर्यशपबिशेषम वापरापा- वेप्यते । तम्प पूर्वमध्यस्यात् मामा पादुपमर्मनात् ॥ (प्र स ) इत्यातिप्रपन विझेप त सामान्येनानुवर्यवे, म विभत्र सामान्पमिति, एतम, विमपाभाषा, स एष व विसपो मैगस्तीति पूर्वनयेपु पापा भाषितम, तस्मान विसपकान्तपमः सामान्य शोमत्पन्न निरचयितुम् , नापि , सामा पैमान्तरमा विशेषपममसी न ममा-मामाम्पविशेषकान्तपमा । पक्ष्यमाणमवचनीय यस्तु प्रतिपक्षम्पम् , नाप्यमाषनिरन्बयं न माप एय नाविक्षेपम् , न विशेषापमर्सनम् , न विशेष एष, नामयोपसर्जनं मोमयप्रधानम् , सर्पविकम्पप्वणुभावा- पचिदापदर्शनात् मपचनीमभाषविशेपकारणकार्पकानेरुमपानोपसर्जनादिविकसं मवक प्पतस्य वस्तु माति, एपं हि मवनमानी पनषत् परिकस्पानुपपये। (पश्पमाणमिति) पत्यमाणमनन्तरं बम्सु प्रतिपचम्पमपचनीयम् मानविक्षेपामा भरणार्य- साम्पमेकानानाम्यं प्रपानोपसर्जनस्याम्पनिमादिमिनिमविरसपमामबकम्पतसं बस्तु भवति माध्यमारनिरपय न तदुपसर्गनम् मागोपमर्थन बिनपप्रधानम् पस्त्वित्समिसम्बप्पो, म मार एष लिए- उपरिक्षप., या मारिएप-विमपरम्प न विपापसन सामान्य प्रपानमिति मनिशेप एवात्स्न्तरिक सामान्या मामयोरमान बस्तु, बपन्तनिणरतम्मापसामाम्पविणेपम्, नोभमप्रमान, भमन्वसांरतुस्प- ॥समामा पविशपम् मविस्पप्वणुमायपचिनोपनात्, पीरइहि बस मम्तीमव पार-अपनी- 10 भापमा मारिएकान्तरपूर्वतये न्यान् पापि विषावापि सामाम्पपीतामा निमारो- सापीति मा मनापराभराना फिनिपिनानाफि मामाम्मीि मारापी पारधनु पर सामापन मिका पानात मी तापी-म्पाग्मतमिति । भति व एपबायो मानिसम्प, पापण भाराव पापपारी दबा र मिरम्प मरापि पामासनम्पानोपन त प्राय सामान मतले रि पचनसम्म भार लोहम्मापिये मानी मागास प्रामा पाप पोप पुगपी गिरामागादिति । एरेन्तरिमा पन्तप्रमानो या सामर्म नि: मधन मार-समावि । मामाला वस्तु प्रविरदीपिसार-पस्पमाणमिति । पम्मा- सतया मरनपिसम्पामिति । पति-पाप्यमारति, मागे सिपाहणीत समा मापस पानि पर गर्व मायाम्पोपसनमा पतु म मा पनाम भाव परति माप- नमा लरका पस्नु र म मा पो पानोमानभायमानीत मेहावा माविकार मिति Aut मामामा नमविमान भोप.पि एवेति भरचरित्वमामाम्ये पिएस मार्ग प्रापि न मानोलामा । मोमपापमममिति सामान पायोपुर नग्मा बिएप मामपनपानमिति सामान मम्मपि परसात पीपासमान तमामु, मास पाचमार-सपरिपेप्पिति समरिनाम- समुपासमान मारमा राममनिमम I सा परमोनियम मानापमापति परमा-परिसरमामा भारतभरणभावनामा मम् पदर, 11..साप ' ममी।
मलेरियमेष्टमानुपपति] द्वारधारनपवयम् यमावविक्षेपेमादि समामरण्टको नापी, पतपर्यापपिरस्पयुग के एवम्पार्थस्स भावनामुदादरप्पम्- एवं हि भवनममीन्धनपविति, पत्र सावइमीग्धनयोरपत्र नानात्व[ उमयय अनुमयस्य भम्पसरप्रपानोपमनता चम्पातिति विकस्य सर्वपाऽप्यस्तरपति पत्पमाणो रशन्वाय:, वकिस्पानुपपचेः । वोकल तामन परत इति मा, कथम् । यथा नकस्यमलेरि धनेन सह घटते, यदि स्पादकत्वम् , दरम्भनषदमिन प्रवचेत, अनि मनप्रवृत्यामायतेवानेः, अखिमयतिविघतिपद्यतिपर्वतयः सन्निपातपष्ठाः सचार्या इति वचनादप्रवृत्पसत्यार्पत्यात्, न प्रपते, एकस्वाइग्मे पनषत् । पपा नेफस्थमिस्यादि, तपस्यमग्नेरिन्भने न]सरे, इम्पनम्पामिना या मा म्यास्, 'सर पुळेऽपाने (पा० २-१-१९) तृतीया, मनमेवामिरेम पा स्मात्, तम तापवरि पनेन मईकर्त पटते, वेन सहकलात् वपामान्यान् पस्पते पोपोऽसत्त, परि म्पारेकस्यमारिन्भनेन, दम्पन्धन- 10 बामिरिन्धनरनिवरयाम प्रपर्यत, पा रग्वेम्पनोऽमिन प्रबर्गते, वयाऽम्यामधिरमिभनप्रामामाबवेगाने म्मात् , 'अखिमबतिविपतिपयतिवपतयः ममिपावपठाः सचायाः' इति वचनावमति[क] सत्यार्यत्वात्, भप्रवृत्रसवपपायरसात सदुपसत्य मापनमार-न प्रबर्गते पायादग्पे पनवन-पमा इम्पेन्पनोऽपिरि म्पनेन महेष्वादिग्धनेम्पति रेफेप्णप्रपर्चमानवारेकलादप्रपरमम् समाऽनिरिति । बनार- पपेपनमग्निना सबैकस्पेऽप्यनुपजातामिकं प्रपर्तमानं टम् सपेम्पनेन सहकले प्रयसिंतुमईत्यग्निः सम्माषस्य इति चेत् को या प्रयीत्यग्निरहिवायस्थायामिन्धनत्यम्, एत विमा यमि पसनि । प्रमरन्ति बानिय बल्लारम्पबाए माटी का । मागेपछिपेपरम्पवल परिकी माषना पान संबधि-पम दिमबनमिति ममामाकोर पारपाय बम मा । भीमनगरेक- समापनाय पिम् भवति-उब तापदिति । पापमोरेवारविप्रानुपरवेरपति पति-20 तदिकम्पानुपपत्तेरिति । तबारेमासम्मम्मानि-पया भैम्पमिति । सपनगरेपपमुमते हा ममेर- गरेन ख, कपनमामिला रा सम्मान मिः प्रबामनियममम मनम् मे प्रवालमपिरप्रधानम्, पर पोवान कृतीनामा मयुरेऽप्रपा, इन स्टेच दितिया मतेनेपनमेर सार, सोमन्वनामिप रा स्वी न पायो पियरम्यापति म्याचो-तपस्पमिति । म्यनेन महामेरेर पप-सम वायदिति । एन महामरेज प्राचाम्पापा एकबधी प्रयतव उपाध्यमपमिल पतेत बनेपामत सम्प स्परिसर-20 पदि सारेचस्वमिति। इसमासान् प्रातिदिनाचाभिरमार एष परिगर भमिग्पति - पत्तम्प परिमायरममा पापा प्रत्यमा मरम्मपि मातीमार मस्लिमरताति। निममनुमानापेर बनि- ममपन इति ममि परेनुसाप्प समयी-पयति । ममाभि प्रारत एएगावारिसम प्रतिक मिरास-पमम्फामिति । भामा मनमनमानुकोपि गन्ने प्रातिका मामरानम्मक ममेनुमानमपि प्रापना ईम्पमा ममापि एस मामता बाप्पम्पिन 30 पकापास एएमनिमगव-पयापनमनिमति । मिना समाधान मानी तर TAGE. महावाप्रिया । मि... मारोगामि बिमा ....समामि । किमयमापनि । 16 म्यापागमानुसारिणीम्याच्यासमेतम् [नियममारे पदपेक्षस्वादिग्धनलस्य, वपते दीप्यत इती घनमप्रिस्यपरिणवावेष मिपी दीप्साधिति स्मृो वामानमिम्पन भवति नानिध्यमान, घरकाणामेष कारकस्यात् । यपे पनमिस्मादि पावर समावस इति चे मवेपनमप्मिना सकतेऽप्यनुपमावामि प्रवर्ग- मान ठ समाऽमिरेपीन्पनेन सोको प्रवर्वितमांसि सूक्ष्मावखा कार्यामुमेयोऽपत्यक्ष सपा, परमारने प्रति (पारसकरयमिति मन्यसे-अत्र गुमा-कोपा प्रबीचीत्याति अनिरहिवापस्यागामिन्पनत्वममाभागात विधामा प्रतिवाभासदा वालाचप्टे-तवपेपस्वाविम्पनलस-दीपमोऽमि इम्पनीपनदान मस्मीकरणापरयात् तत्परिणवान्भनमिप्यते पपवे पीप्यत इसीधनमविपरिणवायेग, एकस्यपारिनो विझेपेमातपरिणवानपिस्वेचनस्मयोरभाषात् मिस्त्री बीसौ इति स्मृतेः निराधिस्थापनिष्पमानस्सानि- न्मनत्वमत पाइ-पमानमिन्धन माति नानिम्पमानम् 8 भरणम् १ भरमप्यमेव भरपवाद । 10 कर्माविसमावेशापमानामेव कमाविकारमय भरकाप्यमसीस्मिनाभ स्मात्, नाम्यपा, सर्वमबटा- शिवप्रसङ्गात् । बपुर समावमाप्पिरिपनीत इति, वरपि मोपपपत इलेवत् परम्नार्यमार- सम्मानस्यत्वेन पाने दीप्तिविशेपावस्थामाधिः सामाम्यविक्षेपाचवस्पयोरम्पत्वे सिरे याद तदपि तु चिम्स्यमय, सिरदर कपमनीन्धनयोरेकस्वमुच्यते अपोध्येत नाई वीम्योरिधनेन सहकत्वम् किम्स्विम्पनस्याप्निना सह, पपप्पामरिम्पनेन सईकरपेअरचे रसस्वं सम्माम्पते तथापि मदोपत्वेऽस्ति म्याया सपा-माविषधदिन्पनायकत्वात् रस त्वात् रा ही पनेऽनुपजाताप्रिके मागम्पकस्याने पचासकि, ग्चरापरयोररण्योनिम- पनेन, साभाषप दिष्ठ इति प्रागम्पुत्पतेः सत पवा तिववपापपीम्पनस्य सत्त्वमेवेति । सूक्ष्मावम्पस्पेन चेत्यादि, शमनाम्पविरेकेण दीतिमामाम्यावस्पमा सम्मातीनियेम्बानी- SO लामाल सोरेकसत्पनेबान्तवापामस्ता नारा हो वा प्रबीतीति। नाम्पफेवत्वासिलवतानने स्वस्तात वाचति संकी-सबपेसत्वादिति । नवी सी पी सौ व मसौरान सामाननमसौरमा- मला तामरिमालमत्तामुपयामिरमेन्वारने नासि पारी माचो-दीपनोऽग्निरिति । पलपापामामाने एसपासवे स्थानकावरमिया मला परत्वमारिन इतिपमानमास्चिनले बिपीठानित स्पति रोषात् सपने में स्पतिवापानी तमेवमासम्ममा माइ-रममानमिम्धन मप सवीति । मानिपवानमिवन माहि, म्यिोपरितसर पारफ्तार मित्रास, तमसारमा पनि मात् पौरपर साममियाम्पेिन दमात कापसम न सिभिलप, तमारपसारमे कपन व नायसार-पारराणामेवेति बनीति भारम्, पलियापिएम पारकी मार । चार- पदमाहीति । ये ऐपमा समरिति पभापस भापति प्रमालोमलाम्मी मम । पन्निवरेस देवारमोनियम बमामय उत्तरमा प्राधिनायुमेन ही परिण-सरमावस्थान रेतिामाबो-पमान्यतिरेमति बनाविका सिनामामारबमानभिषिोपायबापा बाजता पम्मेवा- 1Aबम बमेव मम । नितमेष। 1A.रेस उमारा ।.R. माल 4.बाबानिय नि.का.रे मामिप्य । सिमसामममि ।
मेदप्रस्पनुपपति] वाशारनपपमम् अमिन मिविशेषावस्माप्राप्तियां लयोच्यते, एव गुण्यवस्थम्य गुम्पमम्पाप्राप्तिः प्रयापस्थाय कारणवस्था प्राप्तिम सामान्यविक्षेपायघरगुणप्रमानानामन्पत्वे सिझे म्यात्-तया पर मुम्येत, सदपि तु पिन्त्यमेव पतेपामन्ये चम्, मामान्यविशेषाचवस्मयोमशासि सिसमा कथमप्रीधनपारेपत्यमुपवे, भयोध्येते साति, म्याम्मत तर नाह अवीमि-अपरिपनन सहकपम् , विन्त्यिमनस्यामिना मोफस्यम, व पाया-परा प्समरिस्पानि, मयं ययाऽमेरि भनेन मोपदेन वारेकस्पाइप्रवृत्तिग्नम्धनवनिन्धनम्य, अमत्तेम[]मन सम्भाम्पते रोप तया-एकन्येऽभरपरोपसम्मापनायां सत्यामप्यदोपत्वेऽस्ति भ्याया, वधमा मानि[मदिग्ध माध्येम्वात्, इन्धनस्सामिना सन्ताम मविप्यति थोपा, कस्मात् । प्रत्यात, घटा दिइन्भनेऽनुपजातामिक भगम्मचम्मामा पसासचिरुत्तरापरसोररण्योनिर्मभनेन, फिल यस्मात् सामागम डिप्ठ पति, इतिगम्यम्य देवर्यस्वात्, यथाऽपिना सम्मन भरस्मेवमनिरपीम्पनेन भपतीन्यवः प्रागम्युस्पची सत पामेतिपर भाषपीननम्प सत्वमेव, पम्पया महम्पवानुपपचरिति । 10 भत्रमा- एतदेय स्य पृष्ठपसे-अप मेदप्रवृत्तिा कयम् । कस्मा ग्धनमम्यकत्येन्धनामिस्याभ्या मरण्यपस्थायामिय ज्याठायस्थायामग्निः। सत्रेपनमग्निरेय स्यात्, दहनकत्वात् , अम्मपद, मम्मे याऽमिरिन्धनमेय स्यात्, इन्धनकस्यात्, प्राग्यदिति, विकन्यापकस्यम्यापासा, एकस्ये कुसोऽयं विशेषः, इद न सहेदं महेति, मस्तषाविनामिर, एकत्ये मयनक्रियापारकरणायन 15 पपचेम, रटयोपकारकम्पापारमेदम्यवहारः । जान्दियनी अभिमा मदिरा तमद सा सामग्रम्पविभागाभेद सती मात्, म स्योरमेरे मा रिया सम्प्रति पानि पर प्रापती पसत ए अपभरपयोः पुनप्रपामभर ममेष कार्यालय परपाया- मामि गुमसम्म गुभारम्बातिय र पुम्पी मारा । मामामविसर माया पर्व भारत मिर्मिपार-सदापि तुचिस्पमेडति पम्प र मस्यय । परपमार-मामाम्पेति। पर सामाप्पविकपयात पार 10 पसरायोनिन पुग्यत न मिनारपेशित मानोपा सिसपेदिति । मनिपानिपते पोमु अमिमापिणापसाप्पन पान-गाग्मत तति । सामाग्मेर एनी मागे- सत्पमिति मगर परे पर, भरिभ ने एप्पा मारा मरेपरेपनिरिक्षा माने पानिपगारमिता मात्र मागपति-परामस्पदापति । यो माय पत्र म्पा गपी पति एपरममिमा एपबामना मनिगपितमा परी मm। तर गमती- एम्पारिति भिमरा रम्पनिलेवाभानिरा बने मागर्गनमय पम्प पवामिम्पचितम माग्रिी भाग । सा िमिना प्रमत्त परमात्मानमारमा र पदमापए मिष्ठति गरमपम बिरहा मात्र । तर तिमति मा एमास भाग्यम मार प्रापण गुणमा प्रमि पार गरमागरमरो भान सभामा परम गामा नाA REPRARTH पिन नापी | RAHAT सभी मारे-पतरपनि । माना A... समता मापनम् Ih.ram - बापागमानुसारिणीन्याम्मासमेतम् [विपममगारे (पतदेवेति) एवरेर से प्रापसे भय मेप्रति मम्-अमीपनयोरेको विपणन सामानस हिम्यादित्युच्यते यया, मतामियपावनसापनमपि तपपा-करमामम्पनमित्साति वरेतक- रूपापस्मभ्युपगमात्, बम्पचन्पमानियाम्बामरम्पपमायामिव भागवमापामत्र कपनमम्पिामि रपीमन्मेष पात् पर वावरिन्दनममिरेव स्मात्, पानतादम्वन-सम्मप्रलपत्-नगमिचमात्, बारापरस्मापरिमपी, पन्ते बेठि वरिपर्ययेणेपन्स्यापचिरमर्मालापपसलेपनम्सात् मामा- भायम्लामा भनिन, किसाम्पत्-चिम्पारणम्माका, मनेन शामिरेकोऽमिना सोन्मनमिति निम्साम्मुपगमारेलप्रतिमाहानिः मेरे मस्येवो विम्सो युम्मेवे, दरेकरखे विसामुपपा, बवर संयना-एर सोऽम विक्षेपा- न सो सदेति विकस्पानुपपत्तिप्रदर्शन गवा पुरुषापेकभरममावा- विनातिनामित्र, विधाम्पत्-पम्तो मपनभियापारमानुपपत्तेध, एकपम्बापाव इति मते, अपरा- 10 रनिरामारो मचनक्रिपा प्रणमुचराचिरमिर कर्मेत्येपमातिपरकम्मापाराविमेरा सतोमसिनो नोप- पपवे, भमीग्पनबारेफरयात भाराममनप्रधभारमत् परोपगारफम्पापारमेवमहारा, तमार पुष्मेश्यम् । मयापि क्यचिदम्युफाम्पाप्पानीम्पनैकार्य यरेकस्मेनाभिमतं सदेकमिति न वकम्म मेकरयात् एकदेवदत्वहस्सायनेकस्यबत् , इस्त्रोऽप्येक एवेति न पम्पोऽस्मापने करवाय, 10 मसिमपि परिपहुस्यात् पर्वापि स्यगादिपर्यावययस्कन्पास्वाद स्कन्पोऽपि परमाणुणा पामि गहमारवायोरमेर रेनला मिया मतिम समासस एस प्रिपेविति माचो मप मेरेति कम बनोभेमधिस परामि सदा, मत समिप्राय । समानामिनावाप्रमाणा- कमाप्रेग्पनमिपारीति लागलामा मात्र मागी नियनम्, सनमनिमम्मोमतामाता, परमवावामियनेमपामिन पानमसायामिती, एमियमममिरमिरपीक मारिति माया । प्रोमत्राने गर्मी-वर तारदिति परमनिष मान्, नत रामन मसात् जामायणम्पातिरसन्नमसामित भामगि माग । मामालगन सलारपस्वाभिमापारयनि-मन्ते ति पासवाना सिम्मी भवामिनिकियारनामपरमरे म मा स्थायी तो एममा सार विपापेति । बरेशन इत्यसमामिला मिरयम मु! अपेम्वाल परियारपा-पोयोऽपमिति। पुरणारेषत्र पारन्ताम्मेोतपला भरपस्थापना friHRI ममामला मन्ये या नामापी ग्रह-पुरुषादीति । बामगोरेत काम परर सारा सम्म, पापापारमामिपकने मरियमारिनोकपिरम्पापा पान पार-एर प्रपनपिपेति ममाप्रपाका मिकिकरणम्, पायर शिरारा तमाम मत पापामरिमा पारमियमचाच मि faltamanा भामेर समारणारयते परमधेरा हमारेसमाप्त इति भार । भरकर मन-अपरागपिरिति परमाननाममा मोग बिमासमागमे मा बिममी A- मार मायाति । बसमा पापारावपाको मन पराएपेतियाम्पुरपम्मानमरक FR.पानि रामेरमा । B.. ...मामा पनि मत . एकमेरित्यारप्पता] हाशारनपमम् ૨૦૧૫ स्थात्, अणो रूपापनेकस्यात् , रूपादेः प्रतिक्षणमम्यत्वात् प्रतिक्षणकस्याप्यनन्तानेकस्वात् , सोऽप्यनेका परस्परासीर्णरूपा केनचित् कदाधिदसम्बध्यमानत्वात् , असमानत्यादयफम्य पष, सम्पदो पर्व सामान्पेनोप्पत इति, एयमग्नीन्धनयोरपि । अपापि कनिदित्यादि, त्यग्मतानुत्पाऽभ्युपगम्यायनीन्भनर फयमित नपिन्या पान्तरेणम्पारिकरित्यभिनायः, क्यापि यदकमिन्यमिमत रममिनि] न पत्तम्प स्यात्, एम्मेषति, । न पत्तम्पमित्यर्थः, पम्मान ! एफस्यात्, पत्रान्य वर्षम्मवेत्स रकम एटम, स्थपनम्मम्-पभा एक इत्यमिमनो देसदचो रसपानापरसवपत्मारक परति न बकम्प एवममीपन योरपि पायन्तिको पस्पत, सोऽप्येक एपेनि न पत्तयोऽत्यापनम्त्वान्-भलिप्रकोष्ठवहिरन्तरतादि पत्ता, अतिरपि पारिबहुस्वात् पापि स्यग्यरिपालयपरमात्मात् सम्मोऽपि परमाणुगत्यात्, एम्मेवति न बक्तम्पमिति वक्ते यापोरिति, मूद्रव्यमेव पर्यम्वारमितान् फिमणुरफ इति वचम्मो 10 म्युम्पने-अप्ने स्पायनम्त्यात्-रूपरमगन्पस्पशबहुस्पात् रूपापास्मस्वास्, [B] परमो गापः स्पर्शो पैक इति बचम्पा नत्युध्यते-रूपादे प्रतिमानमम्पत्ता-रूपमपि भणे मणेयर पदुसघवे बिन पति पेन्यन्य वादनम्मनस्यापमिर]मिति म मत्तम्पमेन रमो गन्मः स्पर्मन पापः म्याग्मन देशभिमप्पाठिपर्यत्वम् पादीनामनेम्बारकमित्यपष्टम्म म्यात् काउमिनस्तु मनिक एक एप रूपाद्यम्पतमोऽमाधारणोऽय! रिमि- साइवि नोच्यत इन्पत्रोपते-प्रतिभकम्पाप्यनम्वानारयात्मणे मणे या प्रतिममेर , मम मम प्रति- 15 मनाया मार-मपापीसि । विदामाद-मचिध्यायाम्तरेमति मम्माननु मानापमपारेन पाणिनिप्र पवायुमणामि तपापि यो एमियभिमत ताम्मी र परम्पम्, पप्प्यात पारिवानगई फत गायम्म निपारम्पमिपार-तयापीति। मार पपपादिति एक सभिमन्य NR म एक पतन मई कम पायापरिनारमेरमा न्यानमा मात्र योजना मापारमा सारपनियता माया ममेव मारमण-परवरतिापी-पयति 20 तरल एक ही बाप स्पार-तापति । जापानामन परति भागति। नुपने पर सामानसम्मारिपार मानिरपीति । सामामपि सागसमसमर-पपीति । सरणापरपर नाममा सम्पाउपातिपिपीपरम्प बाम मोर सरपमित्रम्, भारपणा दम्पभूगरेर पम्मारपिपर-पपमति ।मापिएम मम मामम्पयन- मनपरिति । मामिलामा पि मगारेल मारपेवरायानर-पारमपपारिति 25 पारम्पम्न मे निमगारगम्मत जम्मामेटमगिमापपुरमा मनगरमा समचारमामा माम्मरण मामाम भापपासामना सामान hen या सापारिरितिFिAIrrita TV नारद पमपातिानाATTA मोपलवारासतमामा-माग्मतमिनि मन नियति पापसागरमागरमती नोक प्रत कामावरण सभणमिति पनप रा ...राम ... मार।
10 न्यापागमानुसारिपीभ्याम्पासमेतम् [मिपममाद्वारे पर्यत इति पीप्मार्मप्रपनीयत्वात् प्रते:, सोऽप्यनेस परस्परासीमापः केनापित् मानिसमाप- मानरमात्, मसमानोऽसापारणा भसमान माने, ममानवे पेपर सात, वस्मारसम्पपासमानता पनेरऽप्परचम्प पब, सम्बयो पप सामाग्पेनोच्येक-अब स इति स्यमयमिति पा, सतु मासि सामा- बमिनपच्म्मा एष वावरेक्त्वेनीम्पनयोरपाभ्यस्वमुत्तम् । मथ मा भुषमेते वोपा इस्यनीग्भनयोरम्यस्वमम्युपगम्यते चेत् तेन तानेरि पनात् पृपग्मत रुपमास्पेयम् , निर्दिष्ट हि प्रपरमूवे स्पेऽन्य सिरसेत्, शक्यच प्रतिपत्तुमयममा दन्य इति, यमाऽन्पपामन्येम्या, त्वया न शक्यतेऽमेरि मनास् पपग्भूत तत्त्वं दर्शयितुम् , न सम्पदम्यसाधारणं रूपं भवति, तमामयते च सतः प्रपग्मूतेन तस्वेन निम्, न तपेपिनास् पुपरमूतमसापारणमन्ने म्पं शक्यं यतुम् । अप मा भूपमिस्यादि, एतत्सयामागेन पावरपरिमरे पारगमाचभाषा पमान्तर मारगति, मामीन्यनयोरन्नत्वपमो 'निरोप इति मम्यमानेन्यम्मुपाम्यते पेत्त्वया 'सोऽपि निर्वोप इति मा ममा वेन नामानि वेम-नामी मनपोरम्पत्वाऽम्मुपगमेन पारणेनेबमातिवं मारमरि पनात् प्रपरभूत रूपमा- मेयम् पटादेरिमाराशन सौपिर्पम् निरिए दे बरमूवे रपेऽन्यत्व सिक्षेत् शक्या मतिपतमेयम- स्मारम्प इति विमिव । भमाऽपेपामिन्मादि बापेपो पढापीनामानीवनाविम्या, अन्वेम्बा पटाविम्म- साम्मेपाम् वतु स्पानिपतेऽरिबन्यत् प्रषग्मूत तत्त्वं रमितुम् , फ्माम हि मम्मदवसापारपम् । बिम्पो परमावर्षे नमानसात पटाप-पसाभारणरूप न भवति तन्लादीनावमापन वा बग्भूम वस्नेन निएम् न तफेन्पात् प्रषग्मूतमसाधारणमा म पटम्मेर बगरपानिपटाविवियप समय मतम् । पम्पमाननार, सम्मपमालाया कि तत् साधारणमे मा भावारबतिम, मतपसाबरमत एकानेरम्, अमेप्रचारित मरम्ममिति मात्र । तदेवात-असमानोऽसापारमातिपादित चित सम्मषमान सामान्य 20 मेचर-सम्बो इति। एसोनावापत्रमुपदरी-पप वापदिति। मोम्योपचाराममान्बयोरेपला पर समाम्मचमोऽम्पुमाया दमा-भपमा पचिति।पाको एतत्पसमागेमेति पालामा ममी हमपारिति रिम्बन ममता बनर ताई नापि प म की भाव । रोक्नासयनि-तप तदात्या पीति, बपौत्वपरमम्बर राई याममात् पुच्चलम बिबिट मका, पचा परेराकासमम्मत, तर समपिरति लिमितम् वा मेरमवाक्या सम्म बाममिति भाव । पम्पसकार मापस पतिमेरिबाना मा सिसी, सतवापिरिम्बनाइमपी प्रीपशु सात स्मानिर्षियतीति । मनमाह-मन्पामिति काया बनानम्मा कम पारिमा काम्बमानामन्यात प्रीपतु मानवापि मा। ममेत पनि नाशि न मिनास-तच लपायपत इति । मिवाना साधारन भन्दिामा परसापहीति कटारे मात्र पलास लाना मनिमम मित्रलाल परमाता सिपा इति मार । बगैस पानात् नमसाभारप पलना सम् पवे पापिया क्यदेमगारमारियल मनियर- सपेपमादिति । मनुभप्रकरणात नामान हामिमी व सामान्यामेरल पा लगा म. रहे मिति इति । । सिपम मन्थमनोमनु मि.मरे सोनि दोष । .शि.म. भीमामे । ५तिम मार ।(R.. मलादीमाम । मि... म. वामनमा गुलमात्र ।बामगातार ।
5 ममेरसत्वापादनम्] शशारनामम् १०१५ सामाम्पविदोपफरवनानास्थाम्या स्वत्पदर्शितपयिषीघटपटादिनिर्देशवदत्रापि स्यादिति घेदुप्यते न मम फिन्धित समाम्यविशेपैकरबनानास्याम्या म्यवस्थितमस्ति, स्वन्मवानुस्या प्रतिपादनार्य संवृत्या पृथिवीपटपटवदिस्युदाहियते, मन्मवेन तु सामान्यविपकस्याम्पत्या नवस्थिततसपटपटसंवृचितुस्यससिषमानी भने निर्दिश्यते, तस्मादनिहप्पोऽसभापये सामिा, अनि पनवे सस्यरूपत्वात् सपुष्पवत् , पटपटादिप्यप्यतस्साधन योग्यमिति । (सामान्येति) म्याम्मत कप तयाऽमुना पटात् पोऽन्य इति विपेण नानास्लेन एथिली पर इति प सामान्यस्पेन मरिष्ट रुपम् । सभाऽनीम्पनयोरपि शम्मत एव पस्यमाम नामकारकत्वादी- सोप्यते न मम किमिरसपतम्यवादिनः सामाम्पविशेपैकत्वनानालाभ्याम्पमस्तिवमसि मनु हिनिस्, कि ताई ? स्वम्मवावास्या प्रतिपावनापं सारमा सामाम्पविशेषम्भानात्माभ्यां मिलीपटफ्टपरिस्नुपाहिपते नमन्मवेन, मन्मतेन व मापनपस्थितवरमामति, वस्मयमुपाहरवि सामान्पविशेपत्मावि सामान्यविशेप 10 योरेफत्वाम्पत्याभ्यामनरस्थित तत्त्व ययोसाविमौ पटपटो-सामान्यविशेपेरतानानात्वानरलिववत्तपरपटो वयोः संचि:-उपचार [] मभ्युपेस परफस्पनेनोवारणम्, दया तुस्पसचिरत् । पपा सरस्मा पर पथविष्टायप्पसापारणम्पो निश्यिते, न माऽमीन्मन इत्यर्थः तस्मादनिरप्योऽनिरूप्यस्त्वसमापपेवामिा, स्मात् ? अनित्पनले सत्यल्पत्पाद, सपुप्परम् उपादानस्वरूपात् प्रमगनिरपिवस्मरूपत्वारित्यर्थ , पट्पटाविषयवसापन-अमेव सत्यरूपत्वात् परोऽसन् सपुष्पवत, अवनुले सत्समपत्लान् पटोऽसन् 16 अपुप्मपरिमारियोम्पमिति । मयोप्यते यदेवत् न्याठा देशेऽने रूपमिति, तया कुतोऽमिम्पनम् । अग्निस्थपरिण तस्वन पुष्ठानामाकायदेशेऽयस्थानाध्याठापृतेः, पैयुतस्याप्युदफेन्धनस्वानानान्तिकस्वम् , माना मिनि पानीपतरपि सामाशिषामन्यवान-सामाम्पविद्यापति । मात्र प्रभापति माम्मतमिति । मामयम्पदा नमम ममापि क्सकनधिपेर सामान सय मान्यम बामविप्रनरेने. 10 मी या मावि मा मासिनि तम्मनमामान सत्या प्रपनाम्पमा सामान्यमानामाम्मा मियोपामार निरिम र तमाम्पम्मोऽसमिनि समावो न मम निशिदिति । तरि मा पार मामनेम पिति पयै मन्मतमामास्मिततत्वाति । एतत पनि सामाम्परिशेपयारिति सम्मापनिापित पिवनिरपिटनामालाभ्यां नयेषरावरपम्नपिन तमोपचारसम्पुम परमपानुपरेवानियत तपारिपष्ट माया , समावभीन्दम्य परियं । अपमानतामार-पमा संवृस्येति पो सारा नापि 10 मेरलापरणनस्पो यो मनोपनमम यो बाम मानिन पदी भाषः । तम्मानाबाद तामेनिस्परिनुमापातमापत सर-तमादिति । पत्ते हमार-अनिम्पनर सर्वाति मालक दादा पसभापनिम्बाराम मरासि बम्मनायनानुपागता पहरायाममतार, पर मसामालाइनिगपितामस्पेऽमि. सः मन मामापार अपमातिपितमम्पनर उपारमा । अनुमानमरपात पयनिपिनामसोनुमन्ययापि पसारारिति-पटपराटिप्यपाति। मेरमा मी ममच मर्याति पत्रमा पनि नामम्फात पुपारयमिति, माप शनामस्पर जमार पोस पेसमिट मा परिमाणात भयाप्पत इति नाम्पमनपार नितिन 1.अपवन स ... पाप। 04 (110) । 10 भ्यापागमानुसारिणीभ्याम्पासमेतम् [निमममगारे पर्वत इन्धि पी'मार्पर्मप्रवचमीयत्वात् मते, सोऽप्यने परस्परामशीर्णरूपा रेनस्थित् समापिएममय- मानत्वात् असमानोऽसाभारा, मसमानमानेका, ममानस्से ऐक्य स्मात, तस्मारसम्ममासमानता- नेपत्तेऽप्यपटमा एक सम्बयो पर्व: सामाग्येनोध्येत-भर्य सवि, रवमयमिति पा व नाति सामा- पमिसरचम्मा, एवं वावरेस्तेऽमीम्भनमोरवापरयमुच्म् । अप मा भूखमेते दोइस्पप्नीग्धनयोरम्यस्थमम्युपगम्पते पेत् तेन तर्थप्रेरिस्पनाद पृमग्भूत रूपमारपेयम् , मिदिए हि पुपरमू रूपेऽन्यत्र सिम्सेत् , शक्पच प्रतिपसुमयमस्मा- पन्य इति, यथाऽपेपामन्येम्पा, स्वया न शक्यतेऽप्रेरि भनात् पृपग्मूत तत्व दर्शयितुम् , न प्रम्यदन्यसाधारण रूपं भवति, तस्माक्यते च ततः परमूवेन तत्वेन निम्, न ठपेन्धनात् पृपग्भूतमसाधारणमने म्पं शक्यं पातुम् । भप मा म्वप्निस्यादि, पत्त्यपत्यागेन पचान्दरपरिपरे प्ररणमाषमाणः पावरं प्राइपति, मामीपनबोरम्पत्वपभो 'निरोप इति मम्यमानेन्नम्मुपगम्यते पेत्ता 'सोऽपि निषोप इति मा मना, वेन सनिापि तेन-अमीग्मनबोरम्बाऽभ्युपगमेन पारणेनेइमापतित मारमेरिधनात् प्रबग्मूर्व रूपमा- म्मेवम् परादेरिवाराशम्म मौपिर्यम् निवि व पुषग्मूते स्पेऽपत्वं सिकोत्, एप प्रविपतमेपम- मारम्प भति, विमिन ' भवाऽनेपामिन्मानि पारीनाममापनारिम्पा, अम्म्या पटारिम्स- साम्मेपाम् दत्तु स्वयानिशम्यतेऽपरम्पन्धत् प्रपग्मू वारय पर्शयितुम् पस्माम पम्पयन्यसाधारणम्, हिमग्यो वामाप पभावनावि पटापसापारणहर्ष म मनति वत्वाधीनो तस्मापास्यतेच]वा प्रषग्मूतेन तत्त्वन विएम् न तन्मात् प्रषग्मूतमसापारणमने रूम पटक्षेप समारम्परिपटाविपिम्मण समाजम् । मनमानस्वार समयमामधया है ठत् साभारो म्यत् साधारयमितिमा सम्, मतपेमसाभारवमय एसानेगम, कोलाम मरम्ममिति माल । ददेवार भसमामोऽसापारण इति। माचित् पचित पमपमानस सामामा 20 मेगा-सम्मयो इति। एसपनामामात्मुफ्मरति एवं वावरिति । ठोपापारावीश्वकोषपर्व पर सम्मामलोभ्फ्लामत -अप मा भूषभिति।माचरे एतत्पसत्यागेमेति मरेपलपलमा ममी पनपोरिति परन्तरस्पा किदुर मला मायबी पापि ऐप कम ही सार । रोपवाडमयी-सन त्या रीति सामान्यररोल दरमुपेतुलनाममापना दिवरप निमित मरे वायदेमाम्मए, मच पम्प पिरति मयिम् त्वा ममेरम्बावेलरा बाप मामी मात्र 1 मामलोचनम् सरपल सतिमिला- पन्यासी, जवामित्वमावस की प्रतिम नमत इमार-निर्दिऐ सति । निम्नमार-मन्येपामिति-भाना सोमवारमोन कम मचालय बिमानामक प्रतिमा विस्तात मालपोत भिमानापिनु म समिमार-पाच वयामधपत इति । मिवानाम प्रचार सस्प न मनिवा- पमापति शारे परेव कला से सम्माना भविमति मिनापकाविसमा त सो मा । मोमल इनार पम्मूतममापारन व नमई जयम् ल , प्राविमिमा पाचारायल महार-जवपनादिति । मनु प्रायोरिसेप्तत मालागि सामापामेल र ला र मको मिति इति । मि.मरे मनमोभनु पनि हो। .स.म. पनि ।.R.. 'मरमार म.प्र.बलीदवातीपान । म. वामनेवा गुममात्र ।म अमोना। - . ममेवीसिसमावत्योति] माइशारमययाम् पद्विपयेऽम्पपरिणतेजप दारुणम्पनतमुपचारापति, वरन्पत्वे-अप्रीपनान्परये स उपपारो नैए म्यात्, मुम्पे पनामाषात् भरविपामतीमकुष्टाविसापम्पामापे तदुपधारामाणपत्, अव एष स्वित्यादि ममिपरि मतदारमुरत्येपनत्वारेष तपरिणवासपी पन पम्प सिस्सस्सुपचार, कस्मात् । मेणम्प मुख्यमूलत्वात् सिरे हि मुरये सिो शैमानिसस्सापात् माणा सिंह उच्यते नासछि मुप्से सिंद, चित्रकारिता चित्रलेसनातिक्रियापरिणसमसामपित्रारतम्यपदेगो नासति परिक्रयापरिणमे । वस्मामिवपरिणवादेवेम्पनत्यसवापिनी स्पति सापिसमाह- मिसपी दीप्तायिति ननु स्मरन्त्यमियुक्ता पैयाकरणा दीपन इत्यमिमि पा, पूर्षोकाय सदस्तिस्यारस्वारमयनान्यस्पम् , भदधमान हीम्पनमेय न मनति, कारकाणामेय कारकस्था वित्याविम्यास्पातस्यात् । (प्रीति) पि एपी दीप्तापिति ननु स्मरम्पमियुध पेयाफरण्यः क्षमार्यमम्बम्पमा दीपन 10 इस्पग्नि-दीप्तिलमाया, ममिरेमेग्पन पत्रवासिन्पा, किमाम्पत्-सूर्योछाव पचिरगरम्यात्मवमाम्पत्तम पमा मागेरले पपमिरिन्पनेम सोका साचतो दम्पेम्पनरपेकम्माप्रवृचेरमायवेप म्यानित्यानिमम्मोक्न पापेनकस्म निपिरम्, पापत् सामासम्म टिपारिवि तवाम्यत्व दवेन्धनमान्मम्मामाचेरमानदेष म्यादि यातितस्पासागमविशेपेण मम्मो योम्पा मम्पस्पेऽप्यमाषापचिसाम्यात् म्यास्मरमान्यरसमिति, मपिम्पास्मा . माम्मारामादिरमिनापरम परमापनसावादिमाहार भोपारिक म र मुप्सापेकः सपना पामिर 18 स्वपरिमारिटि राबाद, एनरपेक्षगमिसबामरदिने दावारासिवनतरामवासनहार भोरचार परम पनि माग । इन्पनेप्रमपितामुपगम्यमाने तु मैप उपचार उपपपते मुम्मम्पेम्पलस्यामाकान्, गपा परस्मिानादो वीरनाम्यतारेनों पचार सामग्याम्प्रदारितार-तवन्यस्य इति । परमेर पुनः सोमोति मप्तिपरिणतेति लापरिमतापि-आमग्नक- तारबपी पमतमोपचार मिनर्वा सुमार गीप्यम्पेति उपसारो परनिररपा साथ प्रशिक्षामि पमिगलो गुमर पा मावरा मारिना सिंह पाते थे परन प्रसिसिहमतमप्रमिरमानसपमिगठय मिरे पाएमा प्रतिरोपमा मुप्स तप्पा मावसे नितिन ममतोऽनिमिति तपरिष चौर्यस्प गुममारावानि.. पपरिवानाय मापनाम सिस्मोपर्यत हम्मानुपचारस सारस्मसात् गासस प्रमिताप्रतिस्पर्मियावान् शिर पर्मिमतत्वामा यतान मीर पाटन बोपचार । दम्पाडोनम्य मुप्पमस्वमिन माषः । निनान्तरमाह- चित्रकपदिषदेति गर्न र वि सम्प्रमिमपि पुरणे म्पाहार मिडिया परमा पान वरपरबानी सारस्मपरोसपोज एवंदारीमपि नए रय्यत पानिपरि रितपरिणीरिगुरल्य नि मामा परिसम्पराएपनल स्पस्य शायत पर मिएपीदीमापितीति । मागापपरिवारमा मिपी सागितिमाम्ति ऐपन इनामिम् , समामीपननमाता पम्पद बनस्परिपार नमभाषामिरम्पम- रसियार-मिएपीति । पपादितम्म्मम्मपन्यायामिपममियरपोकाऐति । - मन्परपति-पपा मागिति। दोपमनपा पति-तपाऽम्पत्य इति । टरेसमिपमम्पायरफेशनसागर मारमायो म्पन RARI लेवरी-मम्परऽपाति। पान प्रक-मनिम्पारमति मात्र सो. मामा तत्याना .:..रेप नि !
. पापाममानुसारिणीम्पाप्यासमवम् [नियममारे पदि स्पावनिम्पनोऽमिनिरपशेपदम्पेम्पनोऽपि मवेदप्नित्वाम्बालावत् , अपोमेत सायचाई नवीम्पनेरिम्भनेन सहाम्पत्वम् फिस्विम्पनस्यामिना सहाम्पस्वम् , पचप्पप्रेरिम्भनेन साम्प स्वेऽनिम्मनस्वे सस्परूपत्वादप्रपञ्चरसत्त्व सम्माम्यते सपाप्यदोफ्वेऽस्ति न्याया मनाम्यम्पस्यात् इसबापत् रस्त्यात् राहि छोफे इन्धनमाहरति काठमाहरतीति, • ममोप्यते तद्रिपय एयैप उपचारोपित्यपरिणतिनलसिययापेम्पनरव मुस्पमपेस्य, सदम्पत्वे पस नैव स्यात् , मुस्पेन्पनामाषात् , अस एष तु वदपरिणवाषपीग्पनस्वस्योपचार सिझति, गौणस्प मुस्पमूलस्वात् सिंहमाणवकवत् , चिप्रमाविषदा । (भपोच्यत इति) भयोचते मदेवण्यासा देशे-अबाचीवात्तसपना प्रषगमेरशि रूपम् वयपा पाग्म पानरेगे तस्माम्मपाऽऽरगाव ते प्रमगिन्यनारमिरूपम् , माररूपत्तासिनासममिन्मय 10 मावश लोऽनिग्यमम् । पत्र ग्याम्मरूपमर्गगनवेशे वरपीन्पनसशिवमेव मामिस्वपरिश्वत्वेन पुराण- मामारामशेऽस्मानान्माणाटो, न पागनिबना महिलालारपमिनस् गुतस्याप्पुरम्मनस्या- मानमन्तिकरयमतोऽपिरिचनात् प्रमग्मूतो नाति बापबन्धनं वापरेवामिनिष्तित्व नो बिचाव इस्लुमते, तस्मामेम्पन्यत् प्रमगमितु उमा, परमनिच्छवो दोप उपते, यदि म्यारनियमोऽमिः स्तवमेव निरक- पन्धनोऽपि-मुर्मुरायवोचरप्रमापि मरमिरवात् , पाठावदनियतत् एवं वापत् पूर्वोलेकरा- "परिन्यनेन सरापेरम्परय म बसम्पम् अयोच्वेवेसानि विस्ताम् पूर्वपरिन्पनस्माम्यत्व सपावत् एत्वात गोरे हि एमिन्धनमाइरेति प्रममाइऐति, मवि पारित प्रमाणमधि, प्रम्बम पपप्वमेरिमारि बाहर तीन गवा पूर्वपमा भगोर परिपप पवैप सपचारा, भमिस्बपरिमविकासिमपारम्भनव मुममपेप पचमनिम्, भाग पसलमानाय स्वाहापाइलमा बागा मितरफ्तार, महिवाम गोमा मामा-भपापसीपास्त्पमिति । नियमममिरेप : भारी क्यामरस देन सेबीन मापसमातियोग 10 सनि-या पुतोऽनियनमिति बारेमेस्प नरेश गुपये वापि मास केवमेव मामिलना जात भाजपानन परमवापुरा की मात्रा । ठत्र साप प्रयोगमार- बाणानिनिति बोकोऽमि वजन सभापमित्भाप तानि मात्र । परमपिन पनि मामबाण दम्पनिमालार मार-चपुतपमापीति । उम्परिचनातम्यारसत्तम बाबस्विन मासमेत मत एतापमान पर मान्त सम्मान इमार-पापम्पममिति।प्रस्वमस बर्ष मामिति ममिवारणालिमा-पदि माप निम्पन इति भनिनाम्यनुपरम एवं निरस्य से सति मास्तरसारमपि रामदा पनि मापि स्वामित्ान् प्याभव : कामवानियमोजी भोर भागवार, सवा मम्मतपरियत्रिपिताम्बयो माप । बाममितिमलिनियर-अयोध्येतत्यादीति सं-पनमामिविपिनवरिपरमवी पपपपत्यालिफ्तिापातावारणमनोरम्पलामा सो बनमापनेबाबत पे समाम्मत एवं रोपसम्माननामपि म्पायोसार एबमामबालासम्पनसमिना सामग्री ऐप ही ना लमह इतबार एत्वादिति भित्रमा इम्बनमा पापा रखनमा समिर पारा प्रवासात् चित् प्रम मालमनोति मारः। पूरा मारपति प्रम्पति स पापमय पिपरी पारम्बा पौष । मनोरमार-दिपप पप त, दबमारत 18... मिरवपदापि । मि.......बालति । मदीप्तिसमारत्वोकि] शारशारमयवम् पद्विपयेऽप्यपरिणतेऽपि पारणीम्पनत्वमुपपारावति, वन्यत्वे अमीभनान्पले स पारो नैव स्मात्, मुस्त्येन्धनामारास परविपाणतीरमण्टाविसापामाचे वदुपनारामावषत्, मत एव स्वित्यादि अग्निपरि महामन्येम्पनत्वादेड वदपरिणवाषपीन्पनरसम्म सिमास्युपपारा, कस्मात् ? गणम्प मुस्पमूसत्तात् सिटे हि मुरये सिरे विवस्तापात् मामका सिंह उच्यते मासति मुस्ये सिहे पिकाविवन चित्रसेसनायिक्रियापरिणयवस्मासम्पचित्रकारसम्पपदेशो नासति वस्त्रियापरिणामे । वमामित्वपरिमवायेमेग्मन्तवसंवादिनी स्मृति पापिमामा- मिरपी दीप्तायिति ननु स्मरन्त्यभिमुचा पैयाफरणा दीपन इत्यग्निमिधा, पूर्षोकाध सचिस्वारस्वारमयन्नाभ्यस्यम् , अदभमान हीन्धनमेव न भवति, कारफाणामेय कारकत्या पित्यादिप्यास्यावस्यात् । (पीति) मि इन्पी दीप्ताविति ननु स्मरम्पमियुष वैयाकरगा शप्पार्यसम्बन्धमा पीपन 10 इत्पमि-रीतिसमापः, पमिरेवेन्धन पीत्मपरयाविन्या, किनान्यत् सूर्गे काय वचिस्यात्स्वास्मपभाम्पत्वम पपा प्रागेरस्ते पपपिरिपनेन सोका साचतो दग्धेम्पनगरेकम्माप्रपेरमावष सावित्यादिमन्योन म्पायनेक्ता निपिठम, यावत् सामानम्म विवानिति माऽन्यता दग्वेम्पनबदम्यस्सापहरमागम स्मार स्पावितस्पार्यागमविक्षेपेण सम्भो योम्मा बन्योऽप्यमामापधिसाम्पात् सारमषमाम्पस्पमिति, पमिस्वास्मा- . प्रामारमरमिरनापरिमते सम्भावनालयावापिम्पहार भोपचारेक पर मुम्मायः सप्मेवानाम समिक-18 ध्यानपापविधि पानि, एतदपेपमामिपारगमरते दादारिम्बनतकामवारियर भौफ्मारक साइत मार। एनेमिनिमपितामेभ्युपगम्यमाने तुमेर उपचार पपपवे मुसम्मेबनस्सामावात् पवा परियापादो टीमलापतालों पचार सम्पामावारिसाह-तरम्यस्यति । परमेव पुमा पोति मनिपरिपतेति वापरतावपि-मापारमा पदारम्पपीम्पनत्वकोपारा लिया । हेतुमार-गीपस्येति उपवारो है सापमनिरपन पासव प्रसिदापनि पमिगतले गुमरिमेव मा मापन पौगारिमा सिदत्युपर्यत पौर्य दास प्रसिसिरमवमीसमापसपमिवर मिद पार्य मदा पनि पा सम्म रम्पत माया प्रेमविश्न म्पूनमतोऽप्रतिनिधि, परिष व परिप गुममारामान - फ्पपिपरनान मानाप सिहोरपर्यते तमागुपचारस सारश्यमूल्सात् पार पम्प प्रतिभारिपर्मिमतमान प्रशिर पर्मिमतमामा र तासान मोरया सेन बोपचार । समागम सम्पमूलतमिल भाया । मनान्तरमार- चित्रारादियदेति न कर ति सम्प्राविपि पुरसे पार डिमाया पूर्व परिग्ना स पार, वत्सम्बायोपरत्वम्पपरेमापोज पायीमपि समाप्त पानिपिरतीमति सरन्य तमामामा तम्पेर राणालमा स्पस्य भारत पर-मिहरपीरासावितीति । ममानामपर गरमा मिएपी वापिति मान्तिरित स्वाभिम् टेनमे पननमाला गम्पते पनप पिचार सम्मानिरेपक मी गामि स्पीति । प्रॉरिशरोममतालेवागपामिरेमवननिसपी-कापेति। मरी-पया मागिति 1 ऐपमम्पनहेरी पाऽम्पत्य इति पनि परम्पपरफे-पनवरा सम्ममप्रनाम सामरा राउतरपी-सम्परमेऽपीति । स पारीमाप्तिस्वारमति माम- मी ...रे मारन्। .R... बम:। मणमपिरारभारासा तापनि।
म्यापागमानुसारिणीन्यापासमेठम् [निपममहरन ओवाश्मो न भवति तपेन्पनमपि वचित्वात्-वस्म प्रति पत्तिः, सैन मा पिरतिः पचिर चिरस्म पति ममिलीमिरेगे मनरमाचिदीतिरूपक्विारमिरन्पनमायाभवत्, भरपमानं दीपन मेव न मपति, परमप्रमेव परमवादिसानिम्माप्यायलात्, एष वापविन्धनोहारणेऽप्रपन्यतम्पापा । , काठोपाहरणेऽपि वपणा- कापशम्दम्पमहाऽप्यपिकाष्ठयोरन्यम माहम्पते, पदाऽयमग्निः ततोऽम्पो नाति सेन्धनात्, ननु पदेव काठमनपिए तदा तेन बिना एत्पादम्पस्वसिगिरिति, मत्र मा- भयामेदचिरम्पत्ते न पामोति, मदीप्यमानाचशेम्पनत्वामाप्तिषद कस्माम काष्ठमग्रिम दीप्पमानावस्थायामिवाम्पत्तापित्यावस्थायाम् ! मणिः काठमेष, काष्ठमनिरेष वा स्वात्, 10 माम्बत् पथावाऽनम्पस्वात् । काठशम्देख्यादि, पाठसमम्मवारेऽप्यनिराम्पोरम्पर्य मान्यते तपमा याऽमनिमावि पाठबनोऽग्निततोऽन्यो मासि सेन्धनात् , पुतोऽप्पुरकेन्धनमग्मूतो नास्ति अवाऽमानतु भौष पारा मनमि एस वा पेन बिन्ध स्याम्पत्तसिद्धिरिति, मत्र बम म्मा-भपाभेराधिश दीपमाणि, दीप्यमान पाठमिग्मन मिति सा पामेरापिरम्पले न मानोति, पीप्यमानामपनवापानिपत, मादिमाद परस्परस्मापादनेनानियपादन पपासम्स प्राग्मत् पमाणोऽन्यत्वरिति गवार्य सापक यम्। लम्मा क्वाऽमे मलमयपापित् पतिवार, मौ वापिनीत पाच-तसपिरितिको किन पति बसविशेष अथितिरेप स्वयम्, बाममिरेत वन पार्कोमिक पासो बरेिष रिसमाप्रतिलिपीतावको सममिवारमवामिरेफवारमियर । एक मान का मबात परपसाब करने की पापियामेन पारात्, न या मोमिनपराम, सामानामपि कारतापते नापि ग्रामियो परम्, मालामा म मा पानि पि मानवमास-मापमानमिति वर्तमानपान पलनिसनमुमतमिम । परमसामरम्मको रोग एकमातोव इमार-एवं तापनिति । पापापा-मायनेति । एमाहोमापि बारको मादसे मपी, उपवास मुपसमूतानबानपरिबीयब हर मुप्त सम्प्पेस पारपास काममा सगोतयार मामिलानापरी तु पापको मन नपराशयमोरे, कोलोनस समाचार, पुष्पानिया सेन एन सोनं पनामविस मा पठानम्पपाष्पीति । बसलमेवा तपति। मननुपयतका की मनापामिना सपनाममोरमलमि पाण-पउ पोरारमिति । दोस्लम सर्व समापिमा प्रसाद प्यमानापान पामिनी नममेरापीकाममा रकमानमात्रामवर मभिनुमति समापोरनम्पमम्मुव तलामेरापित बला-पयामेपचिरिति । मासम्मोरवाजावामि पम पमानामानामामिलापस्मापा से परसरायलाय मते मारिलादीति बरामबाग पर पकायामपि भाममन सार, कापौरदाता मतदान प्राबोवन एपी परममिरेर सामान्य श-प्राग्यवितिापमानामानि स-पदिशामिति । पाए संपत्पिी भागो मनाया मी 1ALबमिरसि.न.पा 1AL. साम , । महारजमित्वम्पुवासः] दावधाजयपरम् मित्रान्पत्- पदि काष्ठ कयमनमिः काशनादीपनादानात् , काठमनप्ति तविति स्थपचनविरोधा, इम्पनमननिरिस्पपि, काश दीप्ताविति फषाधिनि यन्प्रत्यये अप्ठमिति रूपसिबेरोपविरोपा, फिदारम्पपि शक्यमित्य भाषयितुम् को हि नाम पाय न शापानम् , दर भस्मीकरण इस्पेकार्पस्यात् तपापि दानरक्षणार्पदारुशम्बस्पाविवक्षितत्वाददोपो गगनाविवक्षावत् । (यदीति) परि अष्ठ कपमान]ग्निः कामनास् अप्ठममित्वमेप, काशनारीपनारा नामाम्मया, वस्मात काम्मनमि मिति साचनविरोपा, सभेन्धनमान]मिरित्यपि स्वाचनविरोमा, परमात् काठ नियमावमिः, अमिरपि नियमात् पाम्, एवमिन्धनममिति सवः समचनविरोपा, पापना वर्ष संवादिनी स्पति सापकमार-भर मी अमरीमादिके पत्पाचिनि बम्प्रत्यये काष्ठमिति स्पसिरित्य- मालेसोरक्षेपविरोमा-वयारस्त्यात प्रत्यभविरोषः, गेन रतस्वामिविरोपा, एवमनुमिवत्वानुमान 10 विरोपा, पयाऽम्युपगमारभ्युपगमविरोप इति पाण्यपि प्रक्यमिव भावयितुम् । पाम् पाने, रेर रमणे, पोऽअसणने, शोपने इत्तेपा पतुर्णामम्यतमम्म स्प्रत्ययाम्वम्म पावि अपसियो, कोहि नाम सर्प न पाहुपारम्, गोपनारसण्टनार्यखापत् सिद्धमेष, रामम्मीरणे एकार्यत्वात्, पयापि रानरममार्पयोरसम्मवाचदारुत्पमुदाहरम वमोदाहरणस्पेन विस्यसे, कस्मात् । मनिम्पनस्पानाम- मत्, पीस्पसम्भवाराम्भणमाविवधिवत्तारपोपोऽत्र गानाविरभाषत् । 18 सहासहमयनन्यमपि मिष्ठमतो पर्यफमय नाना सर्पपाऽप्येकमन्पदिति या न प्रक्पते पकम् , अयापि कयधिदम्युपगम्यापि काठाम्योरम्यस्य स्वम्मस्या पदम्पत् तदम्यदेवेति न थकम्यमम्पत्वात् , हसायन्यानन्यदेवदचयत् , चक्षुरादिभ्यपदेशविशिष्टरूपाचारमकपटपत्, वबाप पाम सिमानाम्दी पर्याया पारमारिवामिरी अम्मनपीपवर्म परसरविम्यम्, सम्पपासमिति बार पुनरनमात्मा हरिमापचनमिष सार-प्रशनामिति । एवमियमममममी परनमपि सम्म परमो तिम्मानुनिया- मनालापान पचमिचामिया नामविसमस्याह-उपेम्पनमित्ति । साचनविमेनार-पसान् कासमिति बमिकाओन्पना सर्वपापभिचारादेपर प्रपनर पस्न पमिनिरे साम्पिकीन निगमा पानि मारः। प पांगरे पारस्पनि वाम-काशदीप्तापिति पय साशि पायगातारीचारिक हनिपिनी मिमपिम' कमर पर प्रस्पेन प्रामिति मावि स ममपी प्रमामिपा मान्छी मार । शिशपामार-22 वपाररत्वादितिपमानकारनाममा प्रयतविरोष पनि समोर निरोष इस्ला-पोरेनति । अनुमामामुम्ममरिणी पर्मयनि-एपमिति सामिग्नमितोम्यर्थ । एक पारसम्मानोऽप्यमियी एसपी-कारुण्यपीति नरममावानमा चिमि राम्रो मानुमिः सम्मान समाप निहिती सार-राण दानाति । तत्रा मम्मीवरम रमन समानापन् प्रोपनापागामार्गमानुषिमादाममप मापना रामगार मनात बालरवमा गनिमारामापत्यकामानिनुराहरनम्, पर्मानम्ममममग्रमागर-2 गोपनति । मनोमामायबोभवति पर पागम्मतपेयान परिपान गहामानाय सशसागर माप्रेम परत पुरपादेशचारपमानलगारिनामित्र बरमानाका परि एम्स नये रेशमम्पबाईन प्रम्पत हरामप्रोन महामिरम्प हमार-सहामभवनति । प्यावाति-सदमानमिति मोरगति 'पापागमानुपारिमीयायागमेतम् [विपसमा सम्पम्य तरापसायिशिरपितृस्पादिप्पावशारमकदेयदराम:, भन्यपा राजदाभाग भदाम्न ण्यान्य इति पपुमाया, दपदमारमारगरा पाणरमरगय म्पानिएगा उगम्पान पपरमाणुरदिति । महामहम्पादि, गमरन [भमदभमन मिपी मिना पपा ग भनिना मित्रा . पाठन, अप माना गया पनपारमाध्यापिनामाग्निाभला नाशिमा नमो पापम् नम्मानपत् प्रापिपरियार शायुपेन सम्मन्नाम्पा भम्परपेशीम पापमय- गत् नाम्पानगरपानपण, नापिग्माणु रमापि पोशीपाएर परनपापमों गमो पशुपदेशपिविष्ट गणामापर, मनीता रिपोशामसमानाप गोषः, भम्पपासासाम्रो भाषा भान पाप भी पनुम 10 या परतारमरपा पगपरमार नदीनागना मम्पो पापा मगरिमगनराम्या मम्पपरमामुपरित मापनावरारम माग्लिामरमापारि परा मारपिकम्पमिल। अभार- . मभायसहि, मापननिरयप्पागधा, पपुणपत् , यपा पपुष्पं नामिनानप्निा, सदकस्या मेकरचम्पापसेरमए सपाऽनीपन स्यातामिति, मनु मिन्नम्पपस्पानठधणयानासीस्यप्यर 18 पनीयमर पदि दागदाहस्पग्यणनियमो न परस्थितः सताऽपिरपि दोत कारपद, पभ्यत, मोदनपत्, मुग्यत पादनपदय, सपम्पनमपि स्पगेर पात् पपेपानिरदिस्यनुभय- साऽप्परफायन। भभावस्सीस्पादि, ते समीपन ननावर, परमात् ! भाम्यनमि पम्यापन: प्पाच- मिनिमात मा मारि मार । मनानाNAUTARA परिपामार सुमन पापि यी भपा 10 पीति मारियनिका नरमापराम्पम् भार मात्रामा माननम्मा पम् बाल पापापातमा निमतीची नवनारस पत्र पनि प्रापरलोप्पा एकी पवम अन्य मात् पापियामम्बानि गुप्रियसीमा समान लगासम्बासम्परामरायम मनमनमा, समानम्मानपत्रमा परम्पोममतमात्राममा प्परिौंपा। जब पीपरपरमातरमा वसुगदिम्पपरगति बारा मनमानामा WAमरसते एपमानियतामाप्प लाल प्रापमानामुपेय कर तिनुपेरी, एगिरी परमपिरतापवान नोऽमा एमशीन मामलमार-सम्पाम्पम्तरेति पाएमा पाला पिकी प्रान्तावमा प्रातिपदिशाएरा मानुस मे प्रेपितरनमापवर मानापोपमम्मी मार । पापामा तस मामापात नेशनल तुमामा पानबाबा भार पारेरमामयाबरया-तकापामाप इति । परापरणीयरमोगर मार तिर पो माप समार-ताप्रतिपादनोपायेति बालवानियमोगल सम्रपा मनपरि मुस्मत मात पर-भमावतीति । मार-मापनमित्वमारतेरिति पानिपप्पापनि समयमानित स्पाति भार । रन-प्पाचेति बनामोरेत मनमनितम्बर, परमवारपारम्पत्तिामिल Aपासाबाई।सिका पादुनु ।
. उमपस्वावलम्पवा वा] प्राचारनपचभ्म् नमित्पादिमव एकत्वेऽमिरेवेन्धनमम्पलेऽनमिः, पमेम्पन[निधनस्वम्याचरित्यपि मपति हेम:, वत्पर्याया- पत्वात, सपुष्पवत्-पमा खपुष्प नाप्नि नमिा, सदेकरयानेकत्वम्पावचेरसब समाऽमीम्पने स्थावाम्-उमय मपि नेत्सर्वः, मन व मूमा, ननु मिर्मत्यादि पदष्पनुमय न पपनीमम्, कस्मात् ! मिमध्ययस्यानल सपनात्, मिन-विविच्मसात्रीण म्पपस्पान-काठमेव दामसत्याविसमणमप्पिरेवाममोप्म्पवादकाविसक्षम इति सदेष म्पपमान किसमणमस्सोमयस्स वापानिमाम्यवस्वानवमणवात्, संधिसम् पटपटपमानु । मयसम्, वस्मामणसभावामास्त्रीत्यप्यपत्रमीयमेव स्माम्मत वापदानसझणस्मासिविखनस्पपसिरि अवष न, यस्मात् सिद्धं सस धर्मपर्मिप्पोरिति, वत्प्र[सा भनार्यमाह-पवि[या मनाइफस्पेत्यावि, परि काप्टे पार पाममेव पाएकोऽमिरेवेति क्षणनियमो म स्मात्योर्व्यवस्थितः पदोऽभिरपि दोष काटना, पच्चा- पनवत् पापकसममाम्बवानात् पास्यत्वात्, ववो मुम्पत पौवनपदे प्रषगनिष्टवत्, वस्मात्पपस्थित पाचगारफत्वाविरुपणम, पमेन्मनमपि वापपात्याविष्यवस्भिवभिभष्मण परि न स्यात् एपगेम गोत् 10 विनाप्यमिन्द्र प्रतापसिंहव परेपोदनाविकममिवामित्वादिसवो रानमन्वरेणैन पाका स्मात्, न मपति, पदुफ्सहरति-इत्पनुमयवाप्पवच्व्यति । अनुमयशेमावि उभयमस्ति सहि सचोभयं मिमम्पयस्थानत्तमपि, एष नाभ्युपगम्पवे ततो सर्वात्मकनित्यकालायम्यसममावतस्यमसभिरुपाम्प पेस्येतदुभय स्यात् , सध न भवति मिठितस्यादा पयाणाम् , भनुभयस्पप्रतिपेपादुमयत्वमिति पेश, मम्पत्याषकम्पस्यात् मासम्, सम्पती इबानमनमिरेप मात् भवत्वानिमामिम्याचमामि तपारसरणमापारसल प्रामिधि माया । एवं पान्नानि पनवामिमपि सो परम्, समाग्यनको पर्यायत्ताद रेसोरपि पर्यायापारिमार-तपेन्धनति, मानमाविलमत्तापित एक मनमेवामिरम्परये निधनामित माष । पाठमार-सपुप्पपविति। एगी-पति, पपपुकमायो नामि नानम्मत बालमिरेपणास्त् त्वाम्मी पमपोरेस्त्वम्पायाभलिम्मापिरनवापारपानामिक प्पारमियरमाइमम्मपि मी माप । ममीम्बनोरनुमबलमपावायमेव पमपत्वमवस्वासयामतकापारिला नाह-20 पनु मित्यारीति । हे म्माचरे-मिप विविकमिति । पाण्ममुप्पसमाष पाए मगलाति प्रमयनम् दाहक सम्म समायेमिरामियत बापमानाम्मान समिति मिमिवायलाच कामप्ति देस्युमन भिडीमपना मनापमापवरपरपोरिक्सा-काष्ठमेवामिति पय मापस प्पषसापास समापनोमोरगिरी पर्व मानीति समर्म सापित माः । समितिमार्णम्पारम्प हमपेतनायम् सोविन पर्मविना माझपायो पारम- मायापार धमकी नई पायवे बालनामालमारला स्कुन एकामावर पम्पेरा सापिसामरत-स्पास्मत मिति। धर्मपर्मिको सत्तमयिम् । हालको वयोवस्थितलावरमेत पावन परम्, राफेल परामराम मिनलम्पपस्थिति का सामना पसलमानमेन म पलम्, गरि पर्माक्लो पिपनि मना रामममिपि सात् पारमित पापयाम रमे, पावसानोरणास्थितवान् मोदनार भुपेनक- बजे रामनारकर्मा मास्किमितिवारमवमिंग सत्व मिमिमार-पति पाठमिति । बपमित पापा र पर एम पास्यमेव राममेनि मम्मितराम स्यतर निमामिमारमारिसममिरिक परे, रानैन नापि पाने मन रमत पासादियामस्थितमियाह-तरम्परमपीति। एकब मनपसमाचारमननयोलमा पपमपुप्पारख-त्पनुमपतापीति। रमपसमावे-मनुभपश्शेविति । बमपरी दरा- 1 सि ... मेरी म .... पाला ... । 10 20 ma- - १०२२ म्पापागमानुसारिणीम्पास्यासमेतम् [नियममाहारे मम्पस्वप्रतिपेप एकत्वमिति पेत् न, सस्पाप्यवकम्यत्वात् , एकरवान्पत्योमयत्वानुभमत्व प्रतिपेभेन च प्रपानोपसर्सनमायोऽपि प्रतिपिर पवति सर्वयाप्ययकम्यतेव । (भमुमोदिप्ति) अनुमोमास्युमरमस्ति परियोमब मिमम्पषखानाचमपि, एवं नाम पगम्पवे पदो-मिन्नम्मरमानाचोभयत्वा[नम्मुपगमे तु प्राप्त गुमयम् । तपमा सस्मिोनापि, • एक सस्मिक निमें सर्वगतमनुत्पादमय अनियतिसमावप्रपानपुरपादीनामन्यतमराववस्यमसपोर लिस्पारयमबस्वमन्वासत् अपुप्पावि मेवजुमन स्मात् एकस्याम्पत्वामुमबत्तामा गमन्वयमापात, पब म मपति निस्तिस्यादेपा पमाण्यम् , प्रमुमयपतिपेपाषुममत्वमिति चेत् स्याम्मतमनुभयमुमगामापोऽस- स्वम् , भसत्त्वम्म प्रतिपिरत्वादुमय वनविपमा स्ती एव परतुनी मचितुमईत इति म, सम्पत्पाग जव्यत्वात् पराभवत्वमम्पत्यमेव परस्परमिनग्यमे अग्नीम्पने पम्पोऽम्मस्मापम्मे इति, पब अम्ल 10 विचारिवमसरेति सम्मावामाप्यवसम्पत्तम् पसत्वालय्यत्वामानुमपत्वप्रतिपेपाहुमपत्वम्, अस्पत प्रतिपय एकत्वमिति चेत् साम्मतमम्पत्वप्रतिपेये त्वमेव सिझतीतष म, उस्माप्याचम्पत्वात् पकरणम्माप्रसस्वस्पोत्पक्लेव ममोळवारपत्तप्यत्वेष, इत्वमेकत्वाम्यत्वोमपत्वानुभयस्यानि प्रविपिशानि, मायामशासामाम्पविक्षेपयोरमीन्यनयोकलापमावेऽयम्पवरमपानोपसनवपा मारत बक्तमतेपेसे वायुच्म् एकरयापधिपतयुरिति वातिविशमा एस्याम्पत्वोमपत्वानुमबत्वप्रतिपेपेन प्रपानो- 15 पसर्जनमायोऽपि प्रतिफिट एवेति, परमादेवपोः सामाम्पविक्षेपबोनापेरणीपनयोमासस्वमेव एकला- मलय प्रम मोबमोममा भिलप्पनस्वारमानमामिला तपोमयमिति । यदि तमय परसरापानी नितम्मान न च तत् पय मरिमामा-एवं माम्पुफाम्पत इति मोमबत्लानम्नुपम्य स्वाबलमाला पम्ममोपायप्ति भार । बोरेको भाष मालमत्तानमवसालापरम्पत्परिवारमा प्रामे पामिविया समाको का प्रचार का पुस्मामा सात, बारबामपोकामा निपम मालमतामत् प्पुमा मुभव स्वपिन 10 स्माषते-एक सपरिमकमिति स पत्यारिसमा प्रमाणित भीतगोमा पस्त माविमन रेनुमा एकरति एकम्पपलमानुपावस वाचायो मायामुपामायतमेपति नाम मवरमावा- मम । मास्वारगी नववानिवसामरिमानानां मार प्रविपिनालामा-बम भवतीति । नवलमा मनुफाममात्र ते प्रमादिना प्रतिषिम् तक भानुमनामामात पनि बामसम्मेप्रेस मनमा पाते-मनुमति । पापा-माम्मतमिति । मम मम्मे परममित्सुम्पिकलाप बामपन्यताप 28 पलना परतारोम्पे ही पा र कामगरपरि प्रद सम्मभ्युपगम्मापमान मरम्ममिलपि और Reमेर मा चासत्ताकलापपपाचमुमस्सग्रीव रममा प्रमोशनपिन रमित मापते-भम्पत्वापक प्पराविति । मभिपन हरग्री-मठामपत्वमिति नमीभगतमि मितिमापत्मविपत एल विनापरत-भापत्वेति । सापतापमत्त प्रचारमा प्रमुफ्पातलामा स्यापीति । परेपला ऐना प्रतिवेयरनरपमिति । मम मान्नमामीमा, स्वामबापमाकमि मापानमा प्राणिमातवामान एप मारवागावे पाहाशति । स्वाना तोरणम्मान प्रधान प्रभावीपवर्मन मानीपि म गम्भवतीतो विरामी पपस्याम्परपति मार-पमादेतयोरिति पत्योः सामान मिरे लाभासपा सामाचो माया ARE ...पानीपनि । -म.प्र मानत्य । मि.मर रमवायच ।
अप्रीम्पमापनुपपत्तिा] अवशारमपवरम् રબી म्पत्वपपयोरिति प्रतिपादियम्, वस्माइनबोरस्तो का प्रपानोपसनवा पपुष्याम्पामुवयोरिव ! साल स्तोरेव सामिमृत्यपोटति, किसाम्यत्तपम एषैषा प्रभानोपसर्मनता सुम्यते, स क लिपि, अमीम्पन पोम प्रवृत्तेरेसापटी गतिः स्मात्, यदुतेकत्व नानास्वमुमयस्वमनुमक्रयमामुपसर्जनमिन्धनमपानलमिम्पनोप- सर्शनमभिप्रपानलमिति, सर्वमा न परते, वस्मात् सर्पपाप्पपकम्पवैवि प्यास्तवर्णनमिव कवम् । एपे सामान्पषिशेपयोस्खायपोकल विशेषस्य भाषेन नाम्यत्वं, तोऽनारमनो। भाषस्यामपधेरभाषतेय स्यात् , म प्रवृत्तिर्मावस्य, एकस्यात् , दग्धेम्पनयत्, ननु यमा विशेष पकैकोऽपि प्रवर्धमानो एस्तथा सूस्माषस्प एकको मामा प्रघमंतीति चेत् को या प्रपीति निसामान्यस्य विशेषस्य प्रवृत्तिम् । अत एष विक्षेपत्वात् समेव विशेपीमषति, सद पेपरवाच विशेपस्य, स्मं हि रसाद्विशिप्यमाण सम्पदरसमपेस्य विशेपो भपति तथा रसोऽपि नासत् खपुष्पाथपेस्त्य, विशिष्यते स वस्मान या स इत्यादिकारकाणामेप कारकस्यात्, 10 मबिशिष्यमाणो हि विशेपः पिशेप इति निर्देशमेव नाईत , विशिंपमन्यमन्येन व विशिष्य माणः विशेपो भवति, तमात् स्थितमिदं सामाम्पमेव विशेपा इति, तया पता पृपक प्रवृत्तिविशेपस्य! को पाऽऽयासो विडोप एक एष प्रवर्चत इति । एवमित्यादि, प्रस्तुतमामाम्पविक्षेपाविधान्तिकपर्णनायोक्रो प्रन्या, सामान्पविक्षेपयोलावत् तपमा-पपेकस विपरम-मटादेविन-मम्वपेन प्रविम्पाविना, निमुखमरति ? सामाम्यमेन निरिक्षेप मासे- 10 कमिति, वर्णनापमार-नाम्पत्वमिति, वतावोऽनात्मनो भावस्म-अश्मसिस्वामोरपनानि पटारिविक्षेपास्मसामरहिवामानात्मस्व एपिम्या सामान्यस्म भनारमात्ताप वरविपापप्रवृश्चिा, पमा पिपरान्धस्योरेन्सले चामरसल प्रतिपारितमेवेविसरमालादेन प्रमालोपमनमायो निर्षिय एक पुमापा पुनो प्रदानोपानमा मेननियमानोरेर लामियमको प्रधानोपनमाग्रेस इस्मा-सा दीति प्रमानोपमनता ही मामीचमगोरेपो प्रधानोपानता न मादेव, बपि लक्षपसे सम्म, सान सम्ममयुष्माइ-बिया 20 म्पत्वपस इति । एमामान्यनयो गत माफि मातीलामतोमालानुममतामुपसाखानपानले बमोपच नामि- प्रनामस्तानतमस्पैच गति सम्मन, सान सवा न भवति सर्वपापाप्मतेवर पलवल मपात श्रीपार पाय सामाणिक्षेपपोरेसनामनिवारे यान्यवयोनिमाबिनोशहरमा पनामिनुपवरी-मामीपनयोमेति । परवान्तर भार्गववि-एवं सामापविशपयोरिति । पप पिकातणे प्रत्य मम मातेति, एकान चार्गदम्य सामान्नपिसेपयोपविचारे पर पिलिफिी सामाग्मति सामापपरियामापति-पपे 25 समिति मत पेसिस परिना मावस्यमयम निम्मा पठ समीचीन इस मारी रसपाटेन खारोपणानतृवीयावस भाषमाप्रावाम्म विपन्न प्रपन स्याचा सर्व मावि सामाम्ममेव पि मासेमवाति मीन सामान्यप्रामायापलेम निरोप पीमि । भारनितिन पिनारसामाम्मम्ममा सबमुख मनोमगार-सामान्यमेवेति भावानस मिसनम प्रचाये सामान्य वार्षिविरामीमामला सामान मेरेर मावि वान-समपर्वमनटीत भागः । बारपारी पेमाप-ततोऽमारमन ति, की सामान म्यायागमानुसारिणीप्पाप्पासमेतम् [मियममारे सेरमायसेन स्मात् परविपाप्मचष, वात् सामनेन पर्शयति-न प्रचिरिति गतार्यम् मनु पवेम्पनमित्यादि सपण न्म पमा विझेप परेकोऽपीमावि पूर्वपमा किन्तु समावियुगपनाविपर्यायविक्षेपमारिन प्रसिपिग्मुरास भाषाविसम्मते वत्प्रवृत्तिवरमग्मवे सूक्ष्माषस एकमो भानः प्रबर्मतीतिमात्, अत्रामपसम्मवादी धम्मवे- नोवो ने वा प्रवीतीलादि सामान्पविशेपप्रास्समायोपपाइनेन सम्पासिलिं वर्षपति-अत एक विशेफ्लात् समय विक्षेपीमबति-सामाम्यमेष नासत् पपुष्पापीमी, सरपेमलायेति-रूप रमारितिष्यमाप सम्मरसमपेल्प विक्षेपो भवति तथा रसोऽपि रप रसो पटो पाभ्योऽयम्, नासत् पपुप्पमपेस्पति, सदगति कारफम्पारवा विक्षिप्यते स तस्मान पास स्मारिन्य पारकाये रसिये सम्मथीम्सम्याम्पपि कारमपूटानम्माविमाम , अविक्षिप्मेमाण इत्यादि परि मायेन हितो विपखवो रिसेप इति - मेष नारेत् विशिषसम्ममम्मेन च विहिप्नमामो विझेपो भवति, म्यपारामदेव परमार्थ कर्मापीन्ने 10 परसवात्, विशेपनियामक्षामा पानिक्षेप पब स्मादिति तस्मात् मिवामा सामान्यमेव विक्षेपा-सामा- म्यापेक्ष पवि दमा पदप्रातिसिपम सामान्याविनामाषात् कोमाऽध्यसाम मनोरणोऽपि करणीको रूप रसो मा पदपयदि विशेप ए एस प्रबर्गत इति सम्ममोरबानास्पा संपतिसत्तेना- मुपगतमोमेंटफ्टमोरिवान्यायाविपचेनिमित्त मूक्योरिति सोऽप्येर मा मसा इत्ममिप्रापा । से मी क्मिारिणमाम्पमानास्वा प्ररम्मते मसिनतानिपस्पेमात्मामामावाद, बलात्मनमा 15 विमानमरातेरमाक्ष स्थापित मात्र । मानमेवामानाह- प्रवृचिरिति प्रच सामान्यम्, एलान, दमनात मानम् । पूर्वोत्तम प्रतिनि-नचिति । ताहाको नमु पयेति चला रपि प्रतिमा पापि सम्मवे सामाम्बामाकपि विप एला प्रवे या मम्मतेऽपि ममाया मात्र प्रगत दोगे निक Pान सामाम्पम प्रापयनत्वात सामान्स एनुपस्थित भार । परिवारमा बराबो-वादीतीति मिरेलरमवापारे प्रमापिरमम् पासवास प्राधिक मात्पामिरमरम्मते मेन मम म. सामा- मपिता पारमारिवारिस सलिमकी पारम्पुमा मात्र । पारियो मनमनाइन् पात्वाति परपेकताकि सपनिमेयो मा हायवे नाव पुपात कमावाला पीवास रखाम्मोनिमा तपेश्या रिमेमे ममति सरेश रमेपास्परिभ्रममायोको भापति समेत पक्षात् समानमेव मोमबति मिपामावसापिति माप । पारमामापन चामपि-शिप्यताति पिवेत तम्मत्त मिस्सिवे देव समितभी पर्यापानसरपतिमानि आपकारसम्म पिनियत " मास । मविभिप्पमाप हमारीति मोहस्पिरेलामा यो मापी सविणे, पिपमा मातो मति माथेरोष मम नितिन पार पास्कामानिविषादिको की तमपिफमामालसा रोष ममता विपिन पापियामा पिकिनाभाये सहपसमा पपुलाम माग ।यो मापिपलिपि मातापिमा कारनामा निर्मापानाम् कति चिो न सा-यापारामा वति । सामान्य सामानापेको सिनेमाकुमारी-समादिति । एवम समामानम्तीमत्व 30ोस सालमामलानिय स ग ते स्पानिमा बपि निमामिला-पाचपुताति। पता लगा सातापमानापोलिमित पानिमारसामुग्यो समानेमवेद मलमल- समामिा सामान्यनुपम्पस एन लोप मा मला मि मलयालो समामि-सामनोरपावास्येति। ननुपाय- सि...मिमा म वाम ।।सिक.LD Aविचम्ममिति।
। सूएमाषस्पसामाध्यमः] द्वादशात्मपथमम् सुस्मामस्थामाप्तिदिगप्ययययावयविविशेषसामान्यकारणकार्याणी मेवे सिझे स्यान्ना न्पया, प्रधानावस्था हि सूक्ष्मा मादादिविपयस्थूलापेक्षैव ते चाज्यस्ये परस्परापेथे परस्पर मन्तरेण न भवता, पतष सूरमावस्योस्त्यैष त्वयाऽभ्युपगठ भयति, सम्पतिरेकेणाम्यय स्थानात् , तथा च तदनुपपचिरमावस्यापत्त्पम्युपगमात्, मागमायमध्यसाभाषात्मकत्वादय स्थयोः सतय तेऽभ्युपगमहानिः । सूक्ष्मावस्येस्यादि, पापि माप्तिरिक पापित् सयानीपते केनषिमयान्तरेण सूक्ष्मामस्तो मानो विशेपरमिवसिस्वीति साप्पवयपानामवयविनो विशेपाने सामाम्यात् कारमात् प्रयाप्य भेदे सिने स्मादिति संमाम्मेव, नान्यबा, प्रमानावस्या हि सूस्मा-सत्त्वरजखमां समता सा महादिविपपस्यूमावस्यापेभेव, व एक गुणाः सूरमा' स्मूसास, ते पोऽवस परस्पपपेसे सर्परफाटोपटिळगतिस्पितिकण्टठकीमरनादिवत् सर्पमम्वरेण म विक्षेपा भाव न सामन्तरेण स इति, एतब सूस्मापस्योरमेट तयाऽभ्युपगत मरति, 10 सब सूरमवाभावो पाळपुत्रमन्यमस्सविरापनस्थानिक्षेप एप ममति, सविरे फेप्पम्पबस्पानास् वा तदनुपपत्तिा-पत्र मति भाषम्मान्यमापवस्म भारस्वामुपपतिः अमाष नापत्त्यम्मुपगमाम् कस्मात् ? प्रागमा- पप्रधसामागरमझत्पादयस्पयो।-सूस्मरपूसयोः पपा पटा प्रागमूत्वा मवति भूतला च म मतीममापा स्मकत्यारसमय प्राइ पसाब पनमसुस्मा सूरमो मति पुनम न मवति दमाऽरथमेऽपीत्पमारपारित्य मापम माषपादिनसऽम्मुपगमहानिम। निवासापासबिन सामान्य सम्मान सामान्ममुम्मत विमतिम इप्यापिपरियोज तमा बीमिते तरनुपित मिमा समावस्पाप्राप्तिविगपीति । माको-पापीति प्रो-सामानाबापाारस सामाम्प र सूचनमुरते पामावस्यो मानो विपरदिन पि एसयन ता साफा सामाविपरपस्यमयरिने कार्यगरमगोभक मि नाम्प पेखि समाव-साप्पपपपामामिति भावनि मामान्याम् पारपारपसाना विशेषामा का मात्र मेरे प्रमाक- विषयीमून सामास्वामसि सम्माम्मत भम्पबा तवसमातीनामबमाविमाभावातहसम्मा कुमारी माम्। प्रपामायस्था 20 हीति तमा प्रधानावस्था कारपणा दामाषायमुरगम्यत सा पारमा सवारियरयम्यम्परा तमा परमत्ताप मानिनिमामिदस्मसानिपिनेर मलावरच पुचाना पम्मम् एसय पुगेर रस स्मात्याने तबरला मामले परस्परापेझेनो मेमन्तरेगापरस सम्भाः यथा सपमन्तरेण दरसा सरोपारया तामामा बिना वा सो मनिनुमा मतालिस पिना मम्मान्नस तामाम्य बिमा बानियत्रस्यमसम्मा इमानुपमाविलाम्बासामा समानुपातिरिति मात्र। परसरारिमामापरवयाप्पमुपगत एरेगा ससूरमतामाष इति स्वारिकप एप मारम्बम् नामानिरपति में और भारतापवान न समान मात्र । पारमात्माम्यापारामामे हार मानवमा पारम्पत मार- तपा पेति । भारतामुपमा हेमा ममावस्याएपम्युएगमानिति रममावस्याम्पुम्समेनगा। भाभार एपेसमापनामुम्पमा की भा । नापियवाद-मागमापति प्रगमन सामता प्रपमामा पनि मी मामा मामधे मावो विप्रायमरा मति, सब प्रगणरस समय रामनारा मिनाय एक रहा नो या ना मापापभाषारमा पपाशमदापनातस्प एपेरमामय भाषाम् अमावासाचन 30 सापित मामेरामा प्रयममुरम इति नाम सामनारिमामय पर पामो मगति विमदिन म बमानम् भाटार पुनबममी पुनबमो, मी-रो मात ममतामय माता मयास रप्लामामाभग्रान्तयाऽस्मोऽपाति भरपूर रो भाति पुगबन मा गुमपाप्पमा मम्मरमा तमभार म. माम... परमवारमापा र ना। 16 म्यापायमानुसारिणीम्पास्यासमेतम् [विसममहारे भयामावस्वमेव मावस्याम्पुपगच्छसि तम पाराविलक्षणस्यास्माकाशादि विशेपाणा निशानामुत्पचिरसतीति सर्वशास्त्रलोकगतम्पमारामावग्रसर । (मपेति) पर मा मुरमुपेतहानिरित्नमानस्वमेव मानम्मामुपगपासि बम पमुगवि सममित्यादि, पपसच सामामस्पेष्ट वस्मापासता सामाम्यात् परिरमादीनामाप्रसादीनामाणसा उपान्य विमेपा नमानामुसपिरसती, सपम्य मुभिणम्, आरिमाणात् बोरवानिशामामानि ममतभरमगन्यानो सहपनि सपा सपापया सम्मापारमामि गाऽऽामानिमुवानीसारिमशास- खोरापारामारामदासबलामार रमपि नाम्मुफ्तग्गमिति । अपारपेस मागप्नीम्पनकरवे दोपादि पनाम्पकायाम्पुपगमपयदि भावो विशेपान प्यामाठि न तु विशेपा माषम् , एकदाचिस्यात् तस्मादिशेपेण सह सामान्यस्पकर 1 नास्ति अति तु विदापस्य स्पमान्येन मा मापोपमहान्त वितविक्षेपत्यादिति, एतदेव वं पृष्ठपसे मप मैदसिा पम् । रया हि मेहेन इसिर्जफेऽनयो, एकस्मेऽनयोग विझेपावि शपारयोः कोपपतिः । अपोष्पतस्यादि, मागमी पनेर-भप्रेरिन्पनेन संदेकर योगदिम्पनस्पामिना मरेको दोषा. माष मम्पमानेन पया रिसाए परपोरठे बर मावस विशपण मोरखे दोपातिक्षेपम्प मापन सोप्ते रोपामा मापमाना परिवारमार-उपमा पनि माग सामान्य पिलीयारि पम्पटारीन् पश्मसिमचारीम विशेषान प्यानानि, म रिपोऽश्मपरासिमा एमिनीयम्पामोति, एकोतियात्, पस्मादिक्षपेम सा परेन पदनमा [मामाम्पम्म] एपिम्मा एवं नास्ति, परम्प तति निमपस सामान्येन प्रमिम्पारिमा भावन पार माल तम्मो मदानि प्राणी मात्र मन मार मारसामानवाम् सपा ममम पते पा- मपामापत्वमोति । मनमुत्पमे यमुम्मानि मा पम्तमारमभुमा मार मप मा मूरिति । Onापो-तपति अपारणमातापिनास गागामापापियानामुमति मार, प्रसार मात मान लो ना राममो मामी पोको पापनिवानि पंचमपत्रानि मानेम्वासमा परमान गये मालमते ममतामय माण तामित सानिया पोमाराम मानि पर पम्यारी मात्र । मात्र ही परामचमिति । बारादीति स एर मरम्मतम् । सम्प्रम-मापम्येति स्याहारमामामुम्पनुमनामी अम् । HAITANIमा रमापामा मापामगारापा-मपोपति मुरसार- मापनापति बपेषानिमियामा मागापागालायर प्रिनीत Aai ममापि मारमनपाम ti ना पनि मिस गितमाम मामा । भापति गगी माम तपकिरे बिनामा भनी पदि माप । माता-पिशर इति। रा Minutnार एतिपाहिति मागो रमागरन ल मा मात्र airnimawfohtoi ममनन तिनमा माTARA सम्मानिगरेपनिमा मापापमहानि, मारेन R नाम माना नाममा मत मामkriti मार 10 पकत्वम्यामाता]] मावशारनयमम्म सार, कस्मात् । मानोपप्रहाम्तर्माविवषिशेषत्वात् भावम्म सामान्यमोपमहेन तेनोपगृहीत्वाम् वस्मिमन्त माविता चिनमस्तित्व विशेपस मावास्मस्माफ्मस्वात् पारात् विशेषस पिपत्त नान्या, मोपमहान्तावितपिशेपत्माद्विपस्स सामाम्पेन सोपवमस्त मात्राम्पतिरिष्यस्मस्वात् को दोप पति, एखाद]र प्रभपवे सामाम्पविशेषैकसमादी सामान्पोपछम्मानिते, भप भेदधिः कपमिति पूर्णपरेक, रय मेरेन चिनियो, वपया-प्रविमीत्मविसपेम पटपटादिप्पमिमा भावस्म पटा पो न मरतीति । पटपगरेमिमा विफपस्म, तेन ची परसरविमिमे तयोः कोपपचिरेको। परस्परस्पतापची नानात्वकता कस्मान समानमूतः समषिशेपरूप एव संवृतः। माषो षा विशिष्टस्यादिशेपम्मा 1, तवेकस्यात्, इप्टा चेयं सामान्यविशेषयोरनुचिम्पाप चिम्पा मेदधिः, विकस्साफस्यम्मापातः, एफस्खे कुत्तोर्य विशेषनव न सह, इव सह इति, विशेषणक्रियाधारकरणाचनुपपत्तेम। परस्परस्पतापत्ती नामास्वमसायामिति, परस्त्यनिष्टयपावनगरेण परमाम समानमूतः समविक्षेपल्प एव संवचा । योऽम पटो सपावि विपः पाविम्यो रसाविम्यो वा म्याचोऽपि सम्म- अत्यम्पावत्या समानभूतः सम् सन् सम् मति मपति प्रषियी प्रपिवमेष मा निर्विशेपा कस्माम भाव पपति ! प्रविषपायस्माविशेपानिष्टयपादनात, रट पिझेप समर्थपति-भामो पा विशिष्टत्वाविपरूपा, करमाम संहाच इति पचते वदेकलारिशेपवत्, मापनप्रमियीलत्यकरपो रूपरसाविषिोप पर कस्माम 15 मति, समपत्र दरेफलादिति हेतुः इतरेवरस्वरूपे स्टाम्दी, प्य रे सामाम्पविक्षेपयोनाचिम्पाचिम्मा मेरातिः, ममिणापादनसामन-माको विझेप एव स्वास् ददेसात् वस्सामनत् विक्षेपो वा भाव पर मापस सामाम्पोति भारम्पत्वमा सामान्समिसेपरेसमारिन प्रणात सामान्यभारसम्मविशेषानिये-पसरे पति सस्मिता-भप मेवातिप्पमितीति विशेषम्य मात्रामविकने रेतरस्परमा मावस मूवन माना- सम्मपाधिषपस समयमरन मन रम्, सामानिमेसोमदन बने मेरे सपा पारिभाष पपिपति- पगामिया मते सम प्रसवितांचा परारिपिसेपामान्नु मिई मर्दनम् पापये न मन्चति पर मिड- लात, तमान् समान्पपिसेरैले रपे परस्परिमिता कमिटी माप । सामानविषयोतिरेवरसपापती पानिधमर- परस्परकपतापचारिति । सामान सा पियवास परस्मरपापिया परस्परेतिपः सामाग्रस्त पमानव बस एस सामान्य मानिसप एष सहाक पप्यारो सेस मम मिया बपि सामाम्पमसार रिसेपम्पेष पपात पिली प्रमितिमा सम् समिति समानता मापन तो मनिपान मानि माया सम्मा- भारिपस्प ए नाममोपारा पोषाफामनिति सूरगतीपनार-प्रतिपेपरपस्पेति। नमिलापता प्रेक्स एमिरोमात, यो निषि स्मगार-ए विशेषमिति गारपिस पते पर मारम्प विपास्मस्या- विभिमूना पोला माम्बस नियोसा माल । मारामार-मुनपनाति परमाया- पारन से पतमानापियोपनिमिार मपयारासेयाः प्रसाद पायः दरेमसाफिी मात्रा सामान मिति पर्व सामान्यस तवादित पर रिमा समयोति । पम्प साम्पत्तापारी मालप मापस पिला पारने व विलाप पात इसा-रेवति। नापति सम्माम्पसियलपिमातिम्पा मोन संभार मा-रायमिति। सानियापतिमन प्रमोगल पांधी-मायो पिशेष एवेति । संसामा पनपान र्स पर- मापासायची। - 10 म्पापायमानुसारपीप्याम्पासमेवम् [निपममहारे मात्, हरेकरवात, मास्मपत् परस्मारट एप पोकस्मात् पटसारमवत् पटो पा सरेप स्मात् मरेकस्मात् सास्मय, कियाम्पत्-विसम्मेवव्यापाद -एपे झोऽय विक्षेपः न सा ससा इति, मागो विशेपेण सौ न निक्षेपो मापन, विझेपो मावेन सौ न मायो विशेपेणेत्येवो कसो नैकाले पदेते, विशेपोखमापात् पम्पल एप पोवे शिव सहासामारस्पति, वय मोरपडमेकप मानेन सा । विशेपस- विपपरिमापार करण्यापनुपपवेम-विशेषणमिया करि विधिपति समवेता निधेष्ये पा कर्मणि प्रमियीपटापो पा, पवमा पयाविषक्षमापारौ पेन पटाविन्य विषमभूतेम विभिपते पत्रणम् मावस्येव वा विशेपः, पतो मिशिम्य पटोऽर्य पटानिने ममतीवि सोोऽपापानम्, यस्मै विपिनते प्रतिपाक्वेस सम्प्रमानं मोवा मे परममा शिपायाम पिपूर्वशिपिपापाच्यापा मिमार्थनिपपनपारेको सम- मुपपत्तिा एमा कारममाहारो मेपनिपन्धना, उस्मारवाहमुक्मेश्रयम् । पम्युपेमाप्येव म युक्तमेवेति मा- ममापि कपशिविस्पादि पूर्वषयावत् परमाणुवविति, मप मा भूवमेते दोषा इति भावविशेपयोरम्यत्वपयोऽभ्युपगम्यते चेत् तापदि भावस्प विशेषेण सहाम्पत्वं सेन धनि भाषस्य विशेषात् प्रयग्मूतं म्पमास्मेयम् , निर्दिष्ट हि प्रमावे रूपेऽन्यत्वं सिरसेव, शक्मा प्रतिपयुमयमस्मादन्य इति, पयाम्येपामम्येभ्यः पटादिभ्यस्तम्तुस्वम् , न शक्यते व भायल 16 विशेपार पृपामूर्त तत्प दयितुम् , न प्रम्पदन्यसाधारणपं भवति, तमापते पततः पुपरमूवेन तस्वेन निर्देएम् , न सपा विझपार प्रयग्भूतमसाधारणं भावस्म कम सम मतम् । सामाम्मविशेपैकत्वनानालाम्पा स्वमरशिवपिनीपटपटाविनिर्देसवदनापि स्यादिति दुप्यते न मम विचित् सामान्यविशेपेकस्वनानात्वाम्पो म्पपस्थितमस्ति लम्म- तानुस्पा संहतिपटपरवदिस्पैपर्म कमवादियते, मलिमप्यमाणस्वसभापयते, अविशेपरले ० सस्पस्मस्वात्, सपुष्पवत् । उमेर पुनर्मिमत-मत्यावर पवेति ।यमितिक्त्व पापा न मावनिरपिपिप बार मानिरापरे रविनाविवभिक्ति भापति सी पदयातो मल माहपते पर परिये नमपि सावन माम माम्नाह विषम्पाति तीनपारम्भमा एएसप जो मिर-मामा मष बितेर पमा हेति मात्र सिपिचाबल सम्मो बारिमार भन्याच बरेति । भागमावि मत मारपीमापारकारमारना प्रसमानामापनुपात मामाला पिता रविमा सापित मायापिनमपचविषामाद अनुसुमागायल्यानरमी बाबारी मस्त भार मारना निश्चित तमाम् पापम्, परिधिमा समारपालमपे विविष पपवे या समापन कारणला सिपमकिगागाव पा परेको मामिलामावामुपदि भग्नावाराला मित्राविमिनप्रसाद पारमाहारामा मिचनिमिपास Waवासियमार निवारपिाधाति । स शिपममिति । मानिएकममोमापि मनमानसमाजमरम्मवारपारासिमामानिमाणी-भयापिकधिदि .मि... येमा ।
पष प्रयभूपाम्यानाशपठा] पशाजयवम् अथापि कभनिदिस्यादि, पूर्ववदकस्यप्रतिपमाषछम्यप्रसाधन वमेव प्रथमतिविभति पूर्ववत् पारस्परमामुपविति सावधिक सहेलप्पानापापापम्पयनिष्ठ तुरुमगमत्लात् म्याख्याताम्मेवेति, सामान्यविशेफ्वोरेकसे पोपा का, एतरोपमयात् पयाम्परे निर्णोप मन्ममानपत् परो पहीपात् भम मा भूमते रोपा इति, सित् पहाम्वरम् । बन्यत्व मावविक्षेपयो), सत्राप्येक्तावत् यी गति, मावस्म पिझेपेण साम्पस्व विशेपस्म पा मावेनेति तत्र सावधरि भाषस्स विक्षेपेण सहाम्पत्यमभ्युपगम्पो वन इमापसिन दोपहात तेन तहत्यिादि यावत् संमृतिपटपटवदेश्य समित्यादि, उपसंहारसापन-अनिरूप्यमाण स्वसभापपते, अपिशेपत्ते सत्यरूपत्वात् अपुष्पपस्, [व]विशेषत मावस्स विशेषापत्यवमम्पत्वात्, प्रपिम्मा अश्मसिकवायमाविशेपमन्तरेणास्मानात् तदात्मत्वमनिमय एकाम्तेनाविशेपस्से सत्परूपत्त मापस वदतिरेणानिरूप्यरूपस्यात्, तस्मादसवमापत पस्तुनोऽम्पतो प्रमभूपावश्यमापात् । पदास्पान्याशयले पा सत्तमित्युत्पत्ववादिना- मयोध्येत रूप पपग्भावस्यवि शेपादनुप्राची, सपा कुतो विशेष विना! पटपटापन प्रवृचिम्पस्वेऽपि पृथपारस्पानाशस्यत्वात् पदि स्पामायो विशेपरहिवस्ततो निरषशेष विशेपामावेऽपि खपुष्पादाषनुमतिम स्यामापत्वावटादाक्वि । (अपोम्पेतेति) बमोध्येत स्म एवम्माषम पिपान्यापूधिरूपानमुप्रती, समिति माम्प- 10 10 त्यादीति । मलमासापन पूर्वप्रन्पेन तमामात्वालाममाताभार-पूर्वपदिति एषमिति र कसमिसेमाचप्रति नारसम्मलसाक्न पम् । उपसात एवमिति । एसे मागविरेफ्सोस्योपासामन योरन्सलपत्रमुत्लापपति- पतदोपमयाविति। मम्पलपोप्रेकरमसत् , मापस लिन मामलम्, Kा रिसेपम मान समेत विमान सम्मति अधिरेप समावस्यन्यावे सेफ्मार-सत्रापेकपपदिति। संभवतानाप्पनिय-रोग सही त्पादीति मापतिमोरम्बालाभ्युपगमेन रिसेपनि रपे मावस पापम्, उदेषायममान रपेयाम्प इति प्रतियR 30 तब लबान बवे समिर स्पेप मसाबारक मानम्, बार स्पं मविवाति सेवाबत्नाधिी एसय मिसेयर मम्मूतमसाधारण सरनाम् सप्पटा पगपिलाममा समाम्मसात् पिम्या मनाम्य पति प्रमाणिनामालाना मलारस्तिमिवायफ्टारिसिनियम परम्पानो मम पम्मापि वाम्मा पास्यमामामा तन्मम्मावापि तनया मम्मामम्युपगम्म योरसाधारसवाते दाम परवे मिमित पीपारनामेव पवा सम्, तम्मानिसम्मो मात्र ही माव । तत्तचोपदारमत साधनमाह-मानिकप्य-10 माषसिपति पतो मानोऽनिप्पमाकोस एष मागेऽसन् मरिसेपत्ये सापलात् पुपति मावेनासालमापपत हात भाष । पिपाहिति निरपेठ-मविशेषत्वमिति निमिह त्वम मावे मिसेपारममताम्मालसामुत्पमात् तपासाविलेपम्पतिरेप कम्पपि पतनोगामायेऽपि वालमनिपाण भाषाम्तमानसेनमम्, वा वारिसेपचे सरल मापसमाधिसमिति मारः। साक्नामारमाह-सवतिरेमेति मावस माप शेिषातिरेषानिमितमेोs+ सपनारमापत्रम्, पिसाम्पत्ती मावस फ्मावलम् नासिवमारसत्वमिति मामः। मापसम-10 ममताच मागोमधिति सपिज्यातमा संव-भयोध्येतेति। माचो भयोध्येत म्पमिति मापति हरपाधि प्रहातमानाचे पूर्व परम । इस फिलम इपिक ममामानिधि सा निम्तरेष सि.कामदोषाः। सि..ममा । सि.भ.परवीति ।
10 म्यापागमानुसारिपीप्पास्यासमेतम् [नियममहारे स्पात, बरेमात्, सास्मक पत्त्यावर एक पापात् घटस्सारमपात्, पटो वा मोष स्मात् दरेकवान् सास्मवत्, बाम्पत्-बिम्स्पायरयम्मापात:-एफसे मोऽयं विक्षेपः स न सम, स! इति, मारो विशेषेण सोमेन विशेपो मान विमेपो मापे सोने न मानो वितपणेत्यती पिम्सो नैकसे पटेते विक्षेपहेलमानात्, भापाय पर च पटेते निस्सात् सहासहमालम्पेति, स्वम नोरपामेल पपेन सर - विक्षेपम्प-विक्षेपमम्मिापारफरमपमुपपत्तेम-विक्षेपपम्पिा करि विभिपति समवेता विशेष्ये या धर्मणि एपितीपटाने पा, एतस्मा स्थाविषयमापारी, पेन पटाविना विपभमूवेन मिशिप्पते उत्करणम् मावस्व वा विझेपा बतो विभिनवे पोऽयं पटाविन मरतीति सोऽर्मोऽपापानम्, पम्मै विशिवते प्रविपाचवे स सम्परानं मोवा इसेपी कारनमा भिागाम विशिपिपातुवाचाया मिनानिपपनत्वादेशले सप- गुपपचिः, एमार्य परम्ममारो मेपनिकपमा, वमार त्वायुषमेकरयम् । बम्भुपेलाप्येय न मुत्मेपेटि मः- अपापि कपतिविस्यादि पूर्ववपावत् परमाणुषविति, भप मा भूयते दोण इति भाषविशफ्पोरम्पत्वपक्षोऽभ्युपगम्यते पेत् तम तायपरि भाषस्य विशेपेण महान्पत्वं सन सहि मावस्य विशेपास् पयरमूर्त रूपमास्पेयम् , निर्दिष्ट हि पृथग्मते रूपेऽन्पस्वं सिरसेव , सक्पन्न प्रतिपत्तुमयमस्मादम्य इति, यमाऽन्येपामम्पेम्या पटादिम्पस्तम्तुत्वम् , न शपसे च भावस्प 1 विशेपार पपग्मतं सर्व दर्शयितुम् , म प्रम्पदम्पसापारणरूप भवति, तस्मापते पता पृपग्मूतेन सस्पेन निएम् , न सपा विशेपात् प्रपम्भूतमसापारणं भावस्प रूम शक्य वाम् । सामाम्पपिझेपैकरवनानास्वाम्या स्वप्रदर्शितपपिपीपटपटाविनिर्देशवदापि स्मादिसि चेदुच्यते न मम किचित् सामान्यविशेपैकस्पनानास्वाम्मो म्पपस्थितमस्ति, प्लम्म सानुवृत्त्या संवृतिपटपटवविस्वैप कर्तुमुदाहियते, मनिम्प्यमाणस्वसभापयते, अविशेफत्वे सस्पम्पत्वात् सपुष्पवत् । हुन पुरसपी मरम्पायर एवेति । पिपिरत माक्सन: मरनिरनिरामय बना भनिदिन पवन शिनियमित मावि दिगो सिसी मायनस मारपवे एरोरी- स्परिन्नमपि जन साम इमानार विषम्पायेति लिएपमाने का एक लिपिक-मामा नबिरेनसायिक दामाम्बेन मी मात्र । सिनिवार को सापिसार- भम्पाप पप पेति। मारमपितसं लिपस बारेमाचरियथरिमानामातरमामा मामामामारन दिन यिपियामा वि पिरामिया मालवा विपन्न परिप्रेम, पिका- मनुमा निमावानमा यी भाचारी मना र साना पिव सम्मात् प्रणम्, समविवियनमा राम साप, मेरिपी औपटेरा सम्मामि पारमा चारपाच पार मिमीप मारमा मिसाएपनि परिमापारामा मिलाप मलबार प्रसाराचा निमिास नगर पिचरपरिमापारति । तर पनी पिपरियति । अब मार्षिीपरम पापि परसामाभिननतमीपरम्पपेम्प्रेषताना मामासामी-अयापिकपधिदि 9. मेरा । - उपचारमिपति मारधारमयचक्रम् कपाठावमाविक्षेपा, सम्माबिनपरावारिसमावविमावविषयपरिणामत्वात्पनो विनर इत्यापुफ्- पारो मारमेष, नामावस्प सपुष्मा सम्मवति । यदि मम्पेमाः मापे मेदोपचार इति स भाषादम्पत्वे वपुप्पषमेव स्यात् , न मिम इति सस्पन इति षोपर्यंत, ममावस्थात् खपुष्पषत्, मत एष च सत्सिमिस,मिभसमानाधिकरणस्प मुस्पमूळस्वात् , मिलो पट इति पटेन समानाधिकरणो मेदोपचारो गौणो मुस्प मेवमनुम । प्रतिसाचरितमवस्याविशेष मावस्यापेत्य विनटेऽपि कियते, अभिम एष वा भाभे कपालाप वस्यायों मेद उपधर्यंत स्तिमिससरासलिण्यदनुस्पादम्पयत्वानापस्म, विशिष्यते विशेष इति सतो विशेषत्वात् वदपेक्षत्याच, पूर्वोताच वचिस्यान । (यदीति) यति मन्येषा भाषे भेदोपचार इति स मापापम्मषे पपुष्पवमेव स्मात्, न मिम उत्सम इति चोपचर्येत पटा, पमानत्वात् [माविक्षेपलात् पुप्पपत्, कियाम्बत् मत एष पस्तिमित, 10 अपश्यतरेप भावविपय एप मेरोपभारः, मेदोपचारादेष मेसिशि भामादेव मा मेवोपचारसिकि, भरण! मिमसमान्प्रधिकरणाम मुस्यम्ममाडौषस्म, मिमो पट इति पटेन समामाधिकरणो मेरो पचारो गणो मुम्स मेवमनुप्राचिसापरित अवमाविशेष मतदपमप्यनीतिक सम्मेष स्फाटोपटि मातिमासमीपलास्सिापासाबिझेप मामस्मापेस्म दिन अपि मिन इत्युपनारा कियते, गौणस्म मुत्पम्पमात्, अमिम एष मा भाने कपासापरमापो मेर उपचर्येव, स्विमिवसरससिपमुसाइम्पपला ॥ पारम्न पुरषभविमरणमात्रस्म, लिविशिष्यते विप इति सतो विपत्वाचवपेमत्वाच-विधिप्यते . पापा समधि उत्पति। मम्मपीति मेदो मीसा । उत्पाविनासोपचारमा समाभिमबरेति मनिपराबा- मनारीना ने पापापा उमापविश्पपरनामे उत्पन हपि विसपातलिपपरिमामे विनर अपुरबार परिमामय मार उपचारस कसानाचामाये पपुभारिप इति मापः । ननु मारेलवारि र पवते तेन रनर माममिती मागविन्धमूरिोपनितिमाठे-पदि मापेथा इति । उत्तरमधि-स मावादिति, मनोरठे धमार भावास मादा मात् वपुरला प्रोमध मिति गव भी ना को मोपतति पनि म मिति । मधमाश्रम मिखाना मविशेषत्वाविति पिरतिलापि मनसत पवारो न मम्मी मेरोपचारण मि व एस मेदो मारमा लाम-मव पबति । मेोपचारो माननियम एष नमानसोपचारासमवात, मेरो पारण यो मेसिमिरमा भषस्पमिति । मेहसिला मेरोवार मेोपचाराण मेसितिमिन्नोमानारमा पार-मापादेव पति, मेरे दी भाषा मुस सादेव तत सपो मेदास स्मात् प्रमिसोपवारिफ्लावित भाग 125 मेष पारममाव-मिति मिर्ष भानु न समानाधिकरणोष पौसमुप्स मुप्तमपोरैव मावि सप्याक मेरो- सुनाशिधापरतोऽस्थापि रन अस्लाम नबत्त्तरबसयमातीसावमा सिमसामु काम्बामपनात, नमुपसिदिता मापसमास्य पाति वदा मम तालमा पासण माता भस मियोपस्युपवर्मत पुप्पामामै सपनाएसम्मधारित माष । वरी माचराम मेशेपचारमुक्त धरममा सपथ संचल-प्रमिप एप पैतिसापाला पतष मानिनुपपपचार सम्प्रति सम्मापछि मात्रसस्पेनुत्पमस्या परमेस्पचार तय मिमितेश या सानिमुखापासो माग ध ध उम्पर सिप टेन पापिपवेतमै परिपत मे मागापेक्षताव न भाषादयो लिप सार-तिविधिप्पत इति । माता- सिभ पारमेनो ।
. पापापमामुसारिणीयाप्यासमैवम् [नियममारे क्षेपः, मा म मा सो विशेष परेप मारिपु प्रविधीलामचितम रूप निक्षेपण विना नैया नीति वापस पम्पाप्यनाशक्यस्थम अभ्युपत्यानुात्मा निसिप मानमसन्ताम्यत्वानि को म पनि स्पारायो विशपरहितततो निरमपरिपामावेऽपि सपुष्पापरामुपापिरुप साप, भारस्यात् पटादाविन, मनिरवत् । अयोध्येतदिशेपप्रधानमम्पस्म मा भूमाम, तपापि विशेपस्प सामान्येन सहा न्पत्वमस्ति रस्त्यात् , रटो हि विशेपा भावविनाभूयोऽपि, पपा मिना पट इति, मनोमवे मायविपय एपंप मेदोपचारः, भिदिक्रियाविशेपणविशिष्टयवस्था तु भावस्पैष भूमिणशिषकावि भयनानुविद्रस्य, नामाषस्प सपुप्पादो। अयोध्येसेत्यादि, रणोपमयात सामाम्पम्य विक्षेपेम मदाम्पत्वमित्येतरिसेपप्रधानमन्पत्त 10 मा भूमाम, तपापि विरोपम्प सामाम्मेन सहायतमति परमात् स्टोर विशेषो भावविनामूयोऽपि रिहोप पर मावति स इति वदर्शयनि-यमा मिझो पठावि भेदो त पटल प्रपसामायो विनाम- पापा मार विभपा मागासन्नक्तिमयो एमातोऽप विक्षेपम्म मागरिति, भगोप्यते-भावनि पप एप मेाचारा मिनिक्रियाविशेषणविशिधरण तु भाषस्मैन पटाप्यस्म, भविधिाममसिसिर परिमरमानुषिसम्पोसममयमप्पमपुयमविशरणारस्पामेापपरर्सपावामेष शनिवामममस कपमपि . IHIRK सम्मिा मते माविमा पूम्मारयष्टसारमेयार-सपा पुतो विशेषमितिमा गमता विपरविनामानितरफ्लारपानामुत्तम नामा परि स्पारिवि पासव मिसिनोम्मको मानरमा निज पियामिमुगनिक भी रासायनिक पपुपादायपि पि पिके परगनिया मुसमा मात्र सामामविपिम्प प्रभास रोप निफिता- बारे मामाम्बप स्पिानु पाले-माप्पतति । मनुज मिना पाहता मी मिामा प्रसा- 10 माप वाणिो मापारमियर दिनाणमा सम्मानमावि पितम्प र समान महामगिपरीण-दोषमयादिति रामनाममा पार करे- गर-सपापि विशपम्पति । मारनाम'मानमुपाएंगी-रोहीति । मिसनमा पपा मिमो पर इति । मन-मावि र माप अपमामा मामायापदम्तमान पायो मानमानसमा समापन मैरममावत मतभार एमात्र समारले भावपिपपति भार -लोर सिमरियावाममारे मान परिवाियाना- मार मालपम्पुरापारमेर ममा बमपर भी पुराने मी पाते ही माभागामासासगरमामुमारामम् एएम असर सम्मासिस मेर पुरेपानमा मनपरा सोपान गर मला chrirandi नाना पसनाने मितीमार माझा wantu aanitar मामी-मपिपिति-CETRIPT । म यमनात - ... नमागवान् । ...मामन INReautakशासानुगामिन बारमेर ।
मषपनीयतास्पापनम्] मावशारजपचम्म् ૨ बन्य इति सिमित्वष न, मनिक्षेपात-उक प्राग्नेमा मिरास्वसबि पम्म मापस्सारमगमामाषा भारता, अविशेषताप सपप्पयड्सता शोऽन्यत्वम्, किन-पदपि प मामो विशेपेण सह मपति, न विसपा, 'निक्षेपो मायेन सर न भाव इति च परस्पर सहासचिमेद उच्यते स पासिया, क्योरम्पत्यम्मा सिद्धस्मात्, सिदे पम्पले सहासामवन विम्यात्मात्, मन्नु न सिद्धम् , परमारयुष सहासदमयनम्सना, मन्मला मोरम्मुपगम्मापि भूमा, वापि यनिवित्यादि पावत् परमाणुपविति, स एव तुम्म्पगमो प्रन्पोऽ-5 म्पत्वनिपेपार्थोऽम्पदम्परेति न पचम्पमिति प्रतिक्षाय भन्यत्वात्, अनावम्यानन्यरेषयाचबर, याप्रपात भणान्वसम्मान पपरमाणुषरिति स म्पापयानोपायसवर्णनेन गवार्यः । एवमेकत्याम्पत्ययोर्निपिरयोगह परा-- मत्यन्तामापस तौ, विशेपाविशेषस्वाभायात् खपुप्पपदिति, ननु मिनप्यवस्थानल- पणत्पावनुमपत्वमप्पमधनीयम् , यदि मनुवृत्तिम्पादची तयोभिभम्यवस्थाने न स्मातां ततो 10 म्पाविरपि पपगेष मामात् प्रपर्चत म्यापतिस्परहितस्यात् , मावषत, मायोऽपि च रूपादे पप गेय म्यावर्चत, अनुमचिम्मरहितस्वात् , लपुप्पषविस्पनुभयवाप्यपकम्यैष, मनुभयश्वेमारस्यु मपमस्तुवर्षि मिलम्पयस्मानपत्तमपि तदेयं नाम्युपगम्यते सता सस्मिकैकनित्यकाणपन्यतम मावतस्वमसनिरुपास्पयेत्येतदुमय स्यात् , तब न भवति मिष्टिवस्थादेपा पमाणाम् , मनुभय स्पप्रतिपादुमयत्वमिति पेन, अन्यस्वायकम्पत्वात् , मम्मत्यमतिपेप एकस्यमिति प्रेम तस्मा 15 प्यषकम्पस्वाद , एकत्याम्पत्वोमपस्यानुभयत्वप्रतिपेपेन प प्रपानोपसर्जनभायोऽपि प्रतिपिर एघेति सर्वधैयापकम्यता, दम्यगुणकारणकापादिप्यप्पपमपति स्पिवमषचनीय परिस्पति । (अष्यन्तेति) मसम्तामाषाई पो बिशेपाविशेफ्रयामापात, यपुप्पबत्-मागविक्षेपयोरपिसेप। एम्बम् , विशेपोऽन्यत्व यो मतिपित्याीिमेपानिक्षेपत्तामावा, यम विक्षेपाविपत्मामाषसमासातम् पमा सपुप्पस्येति, मनोमते नमु भिमेमाति, अनुमपरयमसत्त वरप्यपत्रमीयम्, कस्मात् मिसम्मवस्या 20 नियमनासत्तम्प प्रागनेमा निरपितवारिपुचरपति विशेषादिति बरमनिरामयतिदिशेपास्मम्ममाविम्म सामाम्पमा पिम्पहानात्मसात् परिपाचाविरमारामारीचेति ने दिपाश्मत्वमिति मायः । समम्मत्तम्मानित मापसेपो मायाधिमे परमवे सोपशिएशी मस्पथी-पदपि च भाव इति, सासमाकम्प किस्मत मान किमोरपती शिस सम्म मान्नी माला म तन्मया तोरमसुम्ममाप्यवस्मरेति र परमम्, कामवान् बाबामन का व्यापकसम्म एम्, एमाणतामानापान एवं रसायप्पामा- यामम्मतान्यापीन चप्पमिस गावत् समन्वोऽप्यम्ब एपेखि नरमा बमवार, पारिवान्तरान्बानम्पपर माउरिन् भामनिया मम्पस्पश तपोरिति । ददे मायझिपयोरेपालले प्रविधिमन्तामार एप सापिसा- पाते मस्यम्बामावताहीदि । सामाम्पस्क्यिोरे मिग्रेमसमरिमेय एसमेसमा प्रनिसियो पानिमामो रमालापोरसवमालक सानिकमपिरोपमा मानि भ्यामत्तम्, गाणप्पा तम्माचोरमार प्रसपा-भावविशपपोरिति सामान्नपिनवेलमत्रालाकोमम् एमपि माति बन्वयमपि मानापमा 30 पपरवार । भापपि पोप पस्सुम्पत्रणामसम्म सत्वात् गति सप्रापि तमाम्पम्, माचिगि में तोमि स्वामी काममाफ सायामपनोतरमावि-मनु मिप्रेस्यादति । नुम्य मत सपि तपासमेत .मिम.सामान मम मातापाताममोनहारा । .
। ११९ पापाममानुसारिणीम्पाप्यासभेप्तम् [नियममारे स स्मायेन वा म इत्यादिनामिपिनविशिष्पमागो पाम निक्षेप एब, करकाप्यमेव परसता रिमारिपचेन पूर्णेत्तापेमतिरिति लिन तदपिरवार पूर्वोत्तावेति पर्वते, विपरित्याभारत विशेषरुपमपम विभेपेभ्योऽम्पत्वम् या मासिवात मान[शाम द्विपस्स मागभापत्र वाक्तियमामबोरतीयम्पायेन समाविवम्, पटपटारिभाषानुरतिस्पोऽपि प्रषगनिर्देसर पत्ताल । स्पाम्मवमन्मविशेपस्तु परमामुष्पन्पप्रत्ययाखवात् म्पारतिरूप एपेखि म पर- मावावन्स्यविशेषस्तु नैप पृपग्मूता, विशेपरयात् घटपस्, यदा चाप माषाम्पतिरिका न कयाचिदप्पमावो भवति सपुष्पयत् , मनु परेव सामाम्ममविशेपं तदैयाम्पषम् , म, भविशेषात् भापस्यास्मामाभावादमावत्यापचेरकस्यास् , पदपि प मायो विशेपेण सह भवति न विशेषः विशेपो मावेन सह, न भाव इति सहासचिमेद रम्पते, स चासिया, सिद्धे 10 अन्यत्वे सहासाहमपनं द्विसत्तात् तपापि पबिपन्यस्वमभ्युपगम्पापि स्वमस्या यदम्पत तदम्परिति न बकम्पम् , मन्यस्वात् हस्तादम्यानम्पदेयदत्तपत् यावपाविषणान्तरा- म्यानम्पपरमाणुअदिति । (भावाविति) मागइन्त्रवि पम्नु नैव प्रगभूषा विशेपरगाबूटयत् पया इटा विलेपो भावात्मका वदस्यिात् तारमवत् मापारगमूतः पाश्मविक्षेपोऽपि पावरे बरा पायमित्या] म 18 याचिरप्पमानो भवति सपुप्परनिति परतावा भाषाम्मतिरिचमिशेपोपसम्मेर्मामाद्विक्षेपमान्यता म्गाज्मवोऽसिद्धमन्यस्वमिरमुपनयः अत्राए-नम पर सामान्यमविसेप तमामयम्नस्तु मागोमापि- म्सपोऽनिकालसर्पपटपठातिविशेपो म पवित् मयभित म्पावते, बो विशेषात् परस्परम्मातिम्मण- सपो रकम पिपरियापारपरमानुपति पारअवाम कारवाला समप्पा माम्ममिसार-परवाना मेवेति । परिवतिलमप्पा मामला-विचित्वाति पि पि मा पि बार- For पित समुचम्, मानो मम्मोऽन्य सिमराला, पिबामग्री मावर्मिक प्रोम विशेष बमिरन मापादन मामिला माहारी मारनपमा मिसरपी सिपालि मायन, ोिष मारम बरपत्रिी मानति नियमाप्रामश्विापि मारोपलाद, प्रवानिव मिक्स सिस्मितमाम पिया । मातम्यमेव सूचना परित्योति । बर्ष मास्तिपिपासूची-परपमपीति, प फ्यापारिवी निवापिस प मानम नाम सम्मासि स्पं सी 2 मान । नियमात सयरमेवानुमानो मारमा लिपे मेमस एल्युमते सप्पानिमानसालानामा पम्प मामार मावासम्मनिरोपस्विति। पूपिमा नियमाचा मानसमा सोऽप्यो नि सिमसार क मा मन रामप्पा मार मावादिति । पति-पषा परति सम्मान माझ्मावतिराम मग सारमा माम्म ति सरपं मालामामा भाव वर्मी-पापापमिलादीति मालकिन न मानमरिचमानो नी पपुपार, एकच हिसकोपभापतीपापा ममममम- 30 मिमी मात । नु स्मन्नमेवार मणिम सत्मा पनि सति मत लामो समायमग पर निमय परिपालनातन वनपतमी नाममामिलामने-मनु पोषेति । माग पीलू मावति नापिकापे माष विमानत नामसारमारियो नमिलते सपा मरासिनते पास मा नापिन् विज्ञान की परसरमारपिताजपाएको मेयो मार विमान सिमबापाला । .सि... मावासन्तति ।
10 पतमपसम्पप्रदर्शनम्] दावशाजपाकम् स एव प्यम्बो प्रम्पो पापत् सर्वदाप्यवच्थ्यौरेषि, वस्योपरि स्पेकस गुपस्म प्रम्मेण सह नान्मवेत्यादि प्रम्मगुपयोः परस्परेण सोन्तान्त्रत्वानुमयस्वोमयत्वप्रधानोपसनलप्रतिपेभेन सचिषाबकम्पतेस्मुपसंहाणे पाषचशेपो प्रम्यो योम्पराका कारण अर्ययोरपि पुनः सैव प्रम्पमोडना, वाविप्रामात् सर्वगवासर्पगत नित्यानित्यावसाबस्थापनोम्पभोक्शाविविफस्पेषु समानः प्रवर्ष इति लिवमवचनीय बस्तु इति । अतोऽपयोको प्रस्तुविस्थादः, मन्यस्यानम्पबनानन्यस्य घान्यत्वेनावपारणात् , , मदफ्टधिपर्यपरिषदिति । (भत इति) अतोऽयमोजो पस्तवि] संचार प्रति प्रविधा, मन्यम्मानम्मत्वेनमानि पाषापार पापिति, पटपपिपयामिनिति धाम्तः पभा पढे पट इसपार्यमाणे पटे पट इत्यषपार्यमामे क्सिंपाद एवमम्मस्मि मनम्मत्वेनेत्यादि योम्पम् , पकत्वाम्पत्योमयत्नानुमफ्स्वाम्मतरप्रभानोपसमस्रपमार्य- माण मस्त रिसेपर परस्पत] इसि पर ध्याम्पावम् । सपा नयो नियम एवं धस्वितीपति, सामान्पषिशेपैकस्याम्पत्यैकान्तायतस्पधेरेष निमितनियसापिक्ययमनात्, पकविपिना सामाम्यपिझपयोरेकस्येऽम्यस्वे रित्वेऽनुमयस्वेऽम्प तरमपानोपसर्जनत्वे च मिचिनियतापिकमावेनापतस्वचिस्यात् , अषकम्यत्वे निधितमिय- ताभिकभावेन पत्तस्यत्तित्वात् । (मपसि) स्पस्वरूपमुच्यते-अयत्र लिममा-पिपिनियमसर्वमङ्गसमूहसम्पनत्वप्रतिपावनाधिकारे 15 प्रत्येकासाहपनिवासायामेप यो नियम पर पस्थितीप्रति पनापति निममसपाय पस्तुना पोम यत्पतीवविकम्पपस्तुसम्मन प्रवर्षयम् वधपा-सामान्यविशेषत्वान्यलेमन्तास्तसपुरेष लिमिसनिय- मसात बाप्पास्मती प्रवर्मन्टो पान्तिम रक्त पुसमा समाप्रपवेमतो भाया । अभिमनमानाह-मारिमापाविति । मामालनिरपमुपाति-पाति स्थिवमिति सम्ममेत पर भी एविपनाममुफ्पमे तु वस्तूला परत्सख सेनार सनीति निममोन परतुपरस्या हो प्रयोगवा में 10 प्रसापवर पसम्पामामुपाणी-मतोऽपपोचाविति। मनास्लुलरपमुफ्पारित लोध्यारेन मखबरपे प्रेमानेन पला परस्पर वार जिन किसान समाति प्रमापीठे भव इति। धानमा-मम्पस्मेति मन्वयात्मनोगमा माम्बवात्मनोपरामोऽनुममा नुमकलात्मक समवेनाप्रधानोपसमावस्या मानधनमारेन भाजपा रपापिल देवन । प्रान्तमार-मरपटेति मावि-पपेन्सि, पाक परनारपाच पट वामदेवापामाचे विदार पमानिमामिलापसम्माय एसमम्मभिन्नामापरिक्षयानरपे सपनाको बारपामामायमिन् पापविनातामापे 45 क्व परस्पर विसरले मात्र । एसपश्चातमिरपधार पर वस्तुनिसलादोपुरि एमार पपरवान्पत्यति। पब मासास निमस सस्पमुखवे-मयोति।चिनियमाणादसयामा एक सम्मान परिपूर्णमिति प्रतिपापOR श्रेष्मानरपायानपरिष तारकामपा प्रमेयसामिाता समुप्तिामा प्रस्तुने भयो सिमरूपमेनपतु वास्तीत सी-विधिनियमेति । प्रिपे प्रीपरिवाना सलामभर वर्ग निम्मसपा मुजरेप पल पम्पा- पपातर्षितमिति । पितो कमोरिलो विनियम की पतिमिलन सम्पेषु सामाग्यविषयप्रतापमम्म-30 मुमयसम्सममन्दारप्रवानीपसमा परिणम् नु क्षेत्र स्तुमा मिचिनियवाभिमान कालामालारस- चाविचारलारेषपसनोम पोलिमिदनिस्ताविभाति पी नियमामासम्मुफ्पमास्मिा तपमति नियम- सिमरे विपरवाना प्रभावमालपxx मम. रस्तुसम ..सि... ।
म्यागमानुसारिणीम्पाप्पासमेतम् [लपममगारे नम्मपस्यात् पवाऽमीपनयोनहापानिम्बलानमिन म्यगे द इत्पनुमपत नासीतुन तो माग विपयोरप्पनुचिमारपिम्पबन्लानमिन समणे त झनुमयसमपाचनीय पूष गमनीयमिति वलसापनामार-रि पनुरचीत्यादि, भमिष्ट्यपानोपारणे तु विक्षेपः-पतो स्पातिरपीमारि, स्म बिशेपो रमोऽपि प्रेरर्चेत प्रपगेर मापात्र सेनेक स्पेण, पाइरिस्परमवस्यात्, मापबत् मागोऽपि ० पानाचिरूपा सम् रूपाः पूषगेर म्पावत, प्रमुपचिरपरीवस्यात्, पपुप्पमत, यहनुमाधिम्माची सामान्पविमेपयो मिन्नम्परस्पाने म स्वार्वा स्मारेप प्रसङ्गः प्रखते पस्मानयो रूपरसादिप्नुपर्चमान्ने एएफ्वे विपन स्परसारिया परस्परं म्पावर्चमाना, तम्मामानुमपत्पमप्पति, पितु मिझम्बरमाम- समयमुमपरयमन्सु-सम्पमित्वपः, पाइनभ्युपगमे दोप उम्पते-मिसम्पपस्पानेमाति पादुमसत्व मात्, समिटमार पपोमवतं स्मारसम्वामा पपुप्प पत्र पा, गमतरामापात् वसानिष्ठ सस्मिर 10 मागोमयस्वमत्सम्तामागोमयत वा अनुम्मरमपविपेपापित्यादि पूर्वपतुस्पगमो प्रयो यावत् सवषा- पचम्मतति घातामीपनोपसंहारमार्गम्तिम्मावनिक्षेपोपसंहारेप गतापा, एमापापातम्पको सामाम्पविभपयोतिविशति-म्पगुणमरणमर्गविषप्येवमेवेति पब मानि भामममीग्धनरवित्पुपम्म पभयो पासमतावास बापान मोमिनाबामसत हनुमक्लारपोल पम्, ममत नको पानि लगामापमिचम्मममापनुमान पत्रस्थापित समषिमाजिकसमिसाप्यापक- माको सहाययोरनुमपालमपापको निस्पति-भमुमयत्वमसत्तमिति । पर योनिमस्कापमा मस्सार समवे याविनापामारेन प्रम मनुमनामवीरत समयहि-परि मनासीत्पादीति । महापमारजिपमिचम्मपालामाल र यो अभिमानामापोवार पालो भरम पाचनोपारमारिसे पर्सी-सतो पादिरपात्यादीति पनि स्पम् बारिता एमानरपि का स्मारिकार पावित मात् समानापि ममा मान प्रविधिमा मोषम् । एवं मावापि मनुचिठीक- मा सामन्तीमापि सस्पेन म्पात पुम्पपात बरति-भावोऽपि चेति । सामाग्योमोरपि सारे सबसे परमपम सात दिपमारोप मा परन्तु मा समरिम्परसारिपु मायोजनमान एक एसव रिपथक पारम्प रणरम्य परापर पानमा एक वो मिलापतामयापि माचीर-पपनुमचीति । समस्त विपासनामारते रिस्थिति। योमर्म मिस्तस्क- मधमपि प्रेयस्पैचीमा सामानि माम्मुखम्मत सम्परत दर सवारमानिकामनामविसलमान प्रमालपुरणारिसमा सामसलुबमम्वासन परिप्रेमापोभमा परवान्तरामा बापिणार-पदमम्पुपमम इति मिलम्बामम्मानमुपम सामेमासानमुफ्पराकलापुमय- भासम्मरम्ला । सिमुमनामध्याह-सात्मकपमाति सापके एगि माने एस प्रणास्से जमुनावमा मुमतम् पात्यामानेमिष्यारिष्येमालमित मात्र । वन ऐपमा-समाधि पमिति ननिस्मानामामा सामोरमा भाषा । समागमको परमापारमितपणी+ मानसमारनुभमनपी पमतमा प्रलापरव-अनुमयत्वप्रतिपादित्यादीति मालमत्तान म्पर भयानम्न प्राविपिरत न ममादिचे एक प्रारम्मम् , समापि REMI परमेस्सा म्पत्तोमानायुमपानी परिवार समाबविणारयात्म मानसम्ममावरोधपतयोमुत्परिक प्रपातोपतानमारपसम्मपालसम्ममेशनाल । देव मानापमोरपानाम्गुबक माम्मरक पोरपारम्पनिय मामिणमिणी-एबमापातिकमानमय एमति- एमपतीति बनामी म.प्रति समर्पित।
. भस्य पर्यपाकिस्ता] बादशारजपवक्रम् मेयामि, स शपापा-स एप पदार्थः, पास्या कामाक्ये साठे पास्पार्यो मापाठ एपेसा पा] संपावो पास्यम्, पर्णसंपातः पदम्, एकापरस्मापि खरम्पधनसंपावस्थात, पबसपातो पाप कस्माविति दुम्पते देवाच । गमम्मार छहामिति प्रत्येकमाचिसामान्यविशेपरवान्यतानेकार्पसत्वात- परमादेपर चापीति पा[म्य सामाम्ये प्रत्यक वर्तमानानि विशिष्टसंसर्गे अर्भे वर्चन्ते स वास्मा, पगोक 'सामान्पार्सिनो पानां विझेपेऽपसान मारमाय:, ) योग सामाम्पविझेपोरेस्वान्मनोमय-. स्थापनेममकार्यत्वमापनीयत्वेन परिमारनेगा सिता साप पक्रूपेणापारयितुमशस्पत्यावषकम्पा सार्प इति, एष एता परप्युक्त 'सामान्पातिरोभूयो निक्षेपो नोपजायते । पाचस्स असल्यागो निधि अपविताम् ।। (पापका० २ ० १५) इति पदपि प्रत्युतमेव पपाविचारितनिधितमवलम्स सर्पमा पस्थिति, रिपवर्जनमात्रेण शमोऽर्यप्रसासस्या विद्यानापानमात्रेय पीतीत्युच्यते, परमेवेति, पदपि मममस्मरेम सम्पनयममणमुफ नामम्मापनाप्रम्पयाध्ययनमापयुष्याची सम्पा' ( )10 इति माला पर्यायो नियमो गुमो पा नपुछमाची-पुलमय भूवे एप इति शयनयमत पप्पा सुम्पते यापत्तम्पमिति पर्पणमात्रमार, सामान्पविरुपैम्वाम्पत्याने कारमकस्म बस्तुनो मा पामशस्यत्वात् । शम्दनयवेशनात् पर्यवासिक एपः, किं कारण भाषयुक्तवाधित्वे पर्यायमहणम् , न सामाम्पप्रणिमिति तुम्पते भुषो मिन्नपात्वर्पयाथिस्यात् , न सवैष मा, पर्यषति भवतीति म्पमित्व मातीति मात्र । नामिरेप युधिमिरममत्वासानुमबत्वम्म प्रधानोपममनतामाभावोरमार-पखाम्पामेति 10 एमपतलिस्मबुद्धिम्मानित पासायतिरामा पानी प्रथमोपपति हसनापानमामिलामामेबार- पाम्पेशात इति।सामरमापि वर्गसम्तमा पालमतीमार-पवासरस्यापति गारपीय पासण्वस पावर स्मकी-पदमभाव इति प्राममानामा पपनामनामविविएससस्पे बिमान. परसबात एक मिस । सार प्रत्येकाचीति प्रमेयो सामनेस्लप स्वित्वारिका कच! गाममायामिनाये भावरिपनि माप्रपन नमाणु परम्ते आममारिवानानि विधिसमऽरे । पन्चे इया-परमादेषापारी नीति रिपिया मों पाया बिधिरमपर्मों पापामा सबमेर साम्योजामिप्रेत पर सामान्य प्रतापपाना मामानी माग रसियापा, एपर सामथायी दिप पाटममान्यमियी मार। सिपो मायामा परसमादे पति-पपोतमिति परिममेरा मा एमालयपि पर विसरात्पेषु समामस्पतः पर पाच सामापरप प एक पायेषु समिसिदाम्पावरिषवाकाराविधिसएरापमा परगत ही भाषा । वापस पासमापन निमपात पचास्पतरक्स सामानवियफमोरेशान्तावनीक्रयाऽनमा वर्तमानोऽपि ०५७ पारपेबापारमितपत्ताकरमपीमा योमेति मा पर पा पायपासामधाम एपी माप। मा पापन्तरोमोनिकारागार-पवश वेति, समविचार्म साममिति भितबारदेव बर पापपीय क. १ ४ परिकच मत सामान्चरोमोन रिटिश्व । पापम्प स्वस्मामा (नाम ) निगत. (माओ) पिस्ताम् ।तपमाप्रोम्नमा रिमार्शममाणेति पर सदाय मारमेर एवम्, न पियरेन साप च न बोलाविप एमालामभरपी अनिरुपमत मारयासरवा पुदिन 20 एम नपोल सपा विम्य पयोमब' साप मारमात्मतादर्माचरतमम्प प्रसम्म मन मान, नायव पोय तुप्यते नसभावाम मोति माव. पिपरोलमयममणमार-मामस्थाप- मेति । एमपि न मारमनालम्पसम्म पनि बा लेप मुमत इति पनि-सप्पेयमिति। नोज : मा पापा ममपटनाह-सवमपरेशावादिति । मारत वस्सर मनु मागण्या सामाग्मपर । . म्यापागमानुसारिपीम्पाप्पासमेवम् [निपममारे गपिस्सयमनात्, पमेर्निपूर्णम पनि प्राविसमासे निमियो पमो निपमोऽभिको पा नियमा कस्मात् ! पतविधिना सामान्पपिपयोरेकवेऽयतो हिरवेऽनुमत्वेन्यवरप्रपानोपसनस्ये पायठसचिवामिमि पनियवापिकमादेन, बसम्पते निमिवलियवापिकमान मतसमित्यापमापनिमसमोऽयं ममः। एवं पशुतोऽमरातम निपमसल्पमुक्त्वा पपार्षमाइ- अब चामिजस्सा शम्दापः प्रागेवोका, माइ हि-"शम्दो वाध्यमिजम्पत्यमागतो पाति पाच्यताम् । सोध्यमिस्पमिसम्बम्पादूपमेघावं यदा । शम्पस्पार्थेन तं शप्पममिजस्म प्रच पते ॥ तयोरपूमगारमस्थे मेरम्पमिचारिणि । किमिदेष चियं मापाम्पेनापतिष्ठते ।" (माक्पा. २ श्लो० १३० १५१॥) इति सोऽयमित्येकीस्वत्वाणपस्मस्मार्भनाम्पस्वम- वचम्पमित्युकम्मवति विष्ठत्वादेकीकरणस्पैकस्वमवकम्पमिरयुक्तम्भवतीति, शेपमम्पूपम्, 10 स शादापा, पवसंपातो पाक्पम् , दवदच ! गगमम्पाम शामिति मस्पेकात्तिसामाम्यविकोप- फस्याम्पत्यानेकार्पस्पत्पादपकप्पा सदर्प इति विक, पर्ष च कृषा पवायुक्त 'सामान्मार्य- सिरोभूतो विशेपो नोपजायते । उपचस्प तस्मागो मितिः कापतिष्यतामिति (पास्पप. कां• २०१५) तदपि प्रत्युक्तमेव यपाविधारितनिमितमयतम परिवति, पपमेय 'नाम- स्थापनावम्यवाध्येयकरणाभापमुकवाची शब्द इति सम्पनयमत पुग्पते यदमकम्पमिति 16 पर्यषणमाममाह सामान्यविशेपेकस्वाम्पत्यानेचस्मकस्य वस्तुनो पापा मममस्पस्वात् । (भन ति) भत्र विपभावनाबामभिनस्पः पापा प्रागेवोऽमिजस्सा शापार्य: मासहितको पत्यारिवखप्रत्यास्मानप्रसङ्गेनोउ इति न पुमारवायते, वसूचनार्थम्स्यार-बार पानि वाममारिमा सूर्यरमेन प्रश्न समर्पयदि सपो माप्पमिवस्मतमागता' सानि पर्ममरिकन्य क्षेपमम्पमित्यादि प पुनवेन सम्मेनापत्तपतोतति देतानार्पमार-सोऽयमिस्मेयम्सलात 10 सवपस्माम-सोऽपमित्यमेरसम्बम्पपनि मस्त पदेखि बचनादम्पत्वमपसम्पमित्यु भपति बने- स्वेपर-सपमिहनामकरण सिनारेमकरणसानेग्मे रिपते पपस्ममनेति पचनाये प्रथमपत्तम्पमिस्त मति पाम्पामेष पुतिम्मामुमक्त्तममुमपर प्रभानोपर्वते वापतम्मामीति परमपनिार-पमर्मिर्षयेति। परिम्ने मानुमसमायोका बोत्तरको किन मानिमा विवक्त की सय मागास पनि माचो मागकपिपिनेति एतारोमस्तिनाप सामामिलापमपम क्सन बाक्विाधिसमाक्न देव पहम् भारतमानिधिनिपतविरमा पसुपत मसनम प्रश्नमासमार बपरमपम पियनि-मप्रतिसपरप्परवनिम्पमातमान प्राप्ताभिमारप समानामामिमतार-पपरिपमाषमायामिति। स्मामाचितिगतिमासासाचा पायाची निराकामामो मानिमा प्रन्यायों माप तोल पुनरम सार-पचपातिक ART परमका सम्मान-मारीपादीति।हानोति बनिम्मामुपक्त पार प्रापातिर। पनवायम्फरामिनवरया-मोऽपमितीति मिरी माये पेमलिमेमम्बा पाममम मा पानाबालासमय एनयिमावल्यम्पारणोखातामय मी स्पारनाम्नप्प पाल, पायप्रसार रामसम्म, तारक म... माइति ।.R... किमन मि. प.है. समन।
संपायो बास्यम्, अस्य पयपाखिस्ता] द्वादशारमयपरम् पानि, म ममार्य:-स एप परार्पः, मास्यार्पता का याक्ये माते बाप्पार्भो साफ्त परेसाह-पर धर्मसंपावः पदम्, एकाक्षरम्पापि मरम्मखनर्सपावत्यात्, पदसंभातो पाम्प कस्मादिति पदुरपते देपरच ग्गमम्मा छठामिति प्रस्पेचिमामान्यविशेपैमयान्यस्वानेकार्पसत्वास्- परमारेवरचादीनि पदान्य मामान्ये प्रत्येऊ पर्तमानानि विभिष्टममर्गे मर्षे बचन्त स पाक्यार्प., पमोक 'सामान्परविना पदानां विपऽरम्यान मामार्यः, ( ) वयोम मामाम्पविदोपमारेस्स्वान्पत्पोमय । स्थापनेमत्ममर्यस्वम्यापचनीयस्वेन परिमाइनम स्थिता मा एकरूपाप्रपपारयितुमगत्पत्यायनकम्पः वार्य इति, परम स्स्या ययुक्त 'मामाभ्यालिरोमूनो विशेपो मोपमापसे । पाचम्प सम्पागो निरसि. भविष्यवाम् ॥ (माझ्या.. शे० १५) इति वदपि प्रस्तुतमेव पपारिपारितनिमिवमवसम्म सर्वथा बलिपति, विस्मानमात्र शपोयमत्यासत्या विमानापाममारम प्रवीतीस्पुयो, वमति, पापि पाणकारम गयनमसमणमुक्त नामसापनादम्पबाम्येष्ठाकारणारयुच्याची शप'( 10 रति मायः पयायो नियमो गुमो बाबाच्याची वपुषमय पूर्व मम इति गम्पनयमत वरप्पर पुम्पते परबत्तम्पमिति पपगणमानमार, मामाम्पविष्पैमसान्यत्वानेमरमाम्य परतुनो वा बहमशस्वस्मात् । शम्दनयदेशत्वात् पर्यवास्तिक एषा, किं कारण भाययुफयाधिस्से पर्यायग्रहणम् , न सामान्यमहणमिति चेदुप्यते मुयो मिन्नधात्मवापिस्वास् न सय भूरा, पर्यषति भयतीति ममि माथी मारा । भाभिरेर पुतिभिम्मानम्मानुमपगम्य प्रमानोपमनापापारम्पामा-पताम्यामोति । एमाणसापपुषिमामला बास्मानियानाप दास प्रथमा पनि समापानमाविमाशापाम्पेसार- पाप मावति। एपपरमापि सामगनमा पालमापार-पासरम्यापीति गारपीपमतम्प मापन एमति-पर्समाव इति प्राम वर्गमानाको पानामरामम् मिशिसार्यम्पे मामा पदमपात पर पाम- मिर । तर मस्येकाचीसि यो वाम्मम्मम्प बता सन! याममा घामप्यारी सानि नयापु पन्त आमचारिणामानि पिपिरामले तपा-परमादेपरचारी10 मीसित मनमो नामा पिरमर्पयो वा पासा भपत पापयामाभिपत पर मामा- प्रवीपमाला- मामला सामन शिरवानाT एपमा सिप परापमान्यमिति भार मानार्थ पा परगमा रम्पति-पपोचमिति पसरपमपम्पर मन एरपाय नाप विष परमपम्पेगमामस्मत सपासामन्या. म एक पातु परिमीयाम्पातमिगीनराधिपायाने पाली मार। बास्मस परमपम परसाबरोव सामानविरेण्यम्पसापपपपानमामामागपत्र एकाधिपारमा लप्पा पापति महा पापामाचलपी मा। मनपापम्तरोनाभिगभषागार पधति, सम्पगिमार्य बन्नाचमति पिनास र रापरय को... oo सन 'समवानाitouri। गाय माग(ग) Pira (HI)नाम् " पदाम्ममा-पिताशममात्रमति र प्रमाय मारमा विनम्, म मरेप पर हम पोषिः दामाशायीपत मागमाराम धम नापनेमा एमापिस पानगर पारियापुताराप्रामपम प्रसपा- मार एनम गुपत मतमा परेममा परोन समनयमनर-मामम्पार भनि । म मरयमेमपम पर बारामा मिरापहलाप्यामिनि मrt it पामार वानरपवार-मनपरत्वारिति । Rof 'वसमत मनु ममममार . १०८ म्यापागमानुसारिणीम्याप्यासमतम् [नियममगारे भाषा, पर्यवणच प्रवेशनम्, परिसदः समन्तादपी, मयशम्दा प्रवेशापा, समन्तात् प्रषि- पाध्यकतामम्यतामुमयतामनुमयताच योग्यास पर्यया, सत्रास्त्रीस्पेयं मतिरस्पेति मूहसंज्ञाऽत्प नयस्य, पपमिम पनमस्य 'पदुमपस्स भावि (मग श• १२ २०१० ) इत्यादि। (शम्देति) सपनयोस्चात् पर्वमासिक एपः 'तस्स र साविकप्पा साइपसाप मामभेगा।' । पति पचनामपनपेऽन्तर्भूता, कारण भावयुच्याक्तिले पर्यापमइयं न सामाम्याणम् मापश्यसा सामान्पाचित प्रति दुमते-सुमो मिमपाववादित्वात्, भूपादयः सर्पमावषो म्या, भूधारण एवियरीप्रति सम्प्रत्यये पापया सम्पावया, सम्मान सदैव मा मूकमोः सर्वमात्वर्यपाकिलात्, पर्ववति भवतीति भाषा, पर्यषणा प्रवेपनम् प रमपम्तिमीवियस्पषगमनप्रवेशमवयस्पम्पपंपाचन- किचादीपवात्मासिदिसापानम्पबाचिपिति पठितत्वात् भाषा फर्मका प्रवेश्य समम्वापणः पर्यन प्रति 10 परिणमा समम्वादोऽयसपा प्रदेशाः तद्वस्तुतोदयति-समम्वात् प्रविमोक्तामम्पवासमपवाममुमबा च पोऽक सपा प्रतीमेष मतिराधिका, पर्यो भास्तिका पर्यपास्तिक इति मूएसंहास नपस्म सम्मण किमेवाः स्वमनीपिकते वाममोपनिकम्मममार्पमपीति । अस्तीत्युच्यते पनिकायममम 'डुममस्म मानिटे' स्मारि 'इमा मते रवपममा पुरषी बावा ना भाग' इति से भावाचन गोरमा' पप्पणो पारिश बापा परस्स भाविद मो भागा वहुममस्स भाषिटे नवाचार भावा सिप प्रे 15 भाव सिप' इति एमबसम्पत्तमामानामपर्षमाम्यामारे पा माफक निबन्धनमुपये। पति नियममको बमोऽरा भीमवादिमनीतनपचास पायो पापागमानुपारिया सिरसरिणविवाविषमामममरम्पापा समाता। जसमा भावपुज्जानिया पर्यायम्प्रतम मामिमानाते- रिसारणमिति मानिसको मातम्या मूबमाधम पाप मत मताफे का सामाम्पबत्यो माथिमायनोत्तरको मुषो मिपावबाधित्वावितिमनाममाष 20ोकामेसने लिपतिमा भियन पारन रिविर प्रदिपारलार पीचिमतिरबानानिमावनाशर बाब परम्पते पामामात्मा त एव हि मानिसम्बो प्यामिम्बपि सामान्यामा पानी बसपाट माते पित पाव की बात सामतेम तुसाद सामान बिवाल मामिलाममुपपवते गामा- मानामुचाना ला महानामनिरोमालाइजरमा मोसौ लियो रयिम् । नच सामान्यतियोगपधिपमा सम्माति, चिनियागो नि माविमेन तामाम्यापको पिात समातम पामाग्यस मापसा सरनेमासम्मलेन मजब निरपेनमार्गमाचारमा सम्पयापि पास सामाम्पसियार पिपरिव निम Im हिमाम् । सम्पपिति एवार्थ वायास पालि मुख मसागार मूगावयति मुमति मुमापन पदरील मासे मारा हिमालमा बाम वा बालक्लबम कसे या माविवार समाहाप पर्माना नानिबानमा मात्र मत मात्र पनि मुत्पत्यापि पीपाल समार- पर्पक्तीति । तमाम प्रमावस्यामा मान-मबारसमेति । तय माणसा-माया पर्पन तिस पति-पमन्वाद प्रमिला प्रपितति कर्मापेवामा समरि-समन्वादिति । स्वामकास सात महिना-मस्तीपेवमिति पतसम्ममयमरपला समन्वा प्रोम मनिधिसत पकनर पवादित की मन्ना भारी मह । मिस लिमबमोतिका दिन मात्मा तमो नामी प्रशासन मना करम मन मा समश्मा परमात भोपामा समयमा मागबम्, निमारमा पनि कामे समागममावासारिपन माम माष । इस्माचार्यविनपम्पिरिकले झापामपचास दिसमपदविषयमे नमो निपममहारा। 4 दशमो नियमविधिनयार पिम्पादिमरलमारमासम्पपनापिमरे पर्वमाने पिकाम्नपसरूपमानम्म्यात् सम्पपशनस्प विम्युमपविष्स्पपतुष्टयात्मगे मागे घ्याम्पाय नियमविकासमतुष्टया मर पतीपे मार्गे पर्चमाने वत्र नियममा प्रथममुस्वाऽमिमस्मशम्पार्यमामिमुरयन मिसमासस्या, म साक्षात्, पलुवा सामान्य- विशेपयो अस्मितमोरेक्त्वाम्मत्लापनेकदुरपपागनस्पत्वावलम्पवेत्पनन्तरनियमनमोऽभ्यपान, अप्राप्य । परिठवम् नियमविधिमधारस्तार- नैर्वविधो नियमो युग्यते, स्ववचनविरोपादिदोपात्, भनेकायस्थापचापनियतस्थाय, इद हि स्वदीयं वचन डोकामाणक एष संवृतम् , तद्यथा-व तत् तदेवोपते सदेवापोपते स्यया सत्यासत् , स्वय विहिसनियर्णित्वात् , सर्पोक्तानृतपक्षपत् । (नेविष इति) मेषविषा नियमो युम्पते स्वरचनविरोमारियोपान् बनारस्यापचार 10 निपतत्वाप सहि त्वदीम पचन छोगमाणक एव सोचम् वपमा- तत् वयोएते बरापोफ्ते तदेव परम्मपरसि ऐया, दवा कि तासचत्-अमोमन नास्ति सपा, मात् । स्यम विदितनिवस्तिवात्-भास्मन्य विहितमेप निपयितुं शीपमम्मेति स्वय निहितनिधिसाधनम् , तापात् सर्प विदितनिवर्सित्वात् रिमिर? सोपानवपमवत्-पमा मर्षमुसमन्वमिति परवो मरेगोरिव सामुखमनून मिति विपिना परेशान्तरमेन म्पाप्तस्वात् प्रतिपिप्पमानमपोपते उमेरमपि तदीय सर्वमरसम्पमिति । स्वयान 18 भर नियमविधिमामारि पुरस्मरमानिसमानिसमभाममुपतिमान पिपिपिनियत पार परिवार एक रसी-पिम्पादीति । समातिएक्सम्याम प्रयाम्पेन लिम्पनीष पायमान मनरेन न ममुराबारमासमसाममिति प्रत्येघर निम्पी विपिनपा पिरिम्मामपरिम्पपशुपवर मापारगरपसे मिकमविष्यमा नये मा प्रारम्यादा पिसमय पापाभिमप्पस पयामेरमपि रमा- प्रोपराग्निम् रसुत मावारमारपोरेखाम्पसास्पिटोसपारमिदमसमनामध्यमाशी समाचप्पगमे रहम 20 सम्पमित पियन समनपिनमगध परतावामातम्मन राजमार-भपनिषति । सामामरिपोरबम्पर पिनयनाभिरामार बतनास्पिपिपीको दिपमो, पुम्मत सरमविरोधारिणम्सद्वान् बाबामा रसुनो- मागमा गनिहार में मासम्पणिसमलायम पदनिकालकर मन भनियननगरे समापा रापुमा मारपेर म्यागेनिमविषा नियम इद्रियावावरीपमुमारपति र रीति र तर-पसास्पिनी समयभिपाय पुमनराजमनात पे । ममीमा-पतपेसि मम्मम्म मरागापममता मी मार । नार-म्पपमिति, वन दिवमय हो गया गाममे सम्ममार-मौकेति मानिवितापाताममप मारमानाप ममाम प्रमाणे तमाम Aगिमारमा परवाना तशासायमितमतमालती निमित नवासमादी समापि गिपातमा पर मारेपनि पारस्याप्यानमारमा 10..प्र.मियरोमिवार । धापासला पारे म.. म.मिरेगी।
म्यापागमानुसारिणीम्पाल्यासमेवम् [नियमविपिनपारे एतम्य प्रतिपादनार्थमेकस्यादि प्रसिपिम्प म्यवस्थाप्य पापोचते, वपया प्रागेप तावत् सामाम्पषिदोफ्पोरेकरचे प्रतिपिरम्यत्वमुपस्थिसं विधाय राम्सेऽप्रेरि धनपुमग्भूतं समा स्पेयमित्यादिना पुनः प्रतिपिद्धा, सोऽपि चामस्यया यपोचमप्रेरिम्भनमित्यादि पावदसदापये सेस्यावि, सदेव पुनस्वयोः स्वयमेवापोदितम् , ननु वाला देश इति निरूपणादन्यत्व स्फुटी • भूसमपि तमा कुरोनिम्नमिस्पनि पनप्रस्यास्पानेन पाठाल्पमिम्पनसहितमेवेति बता । (पतस्पेति) एतम्म प्रतिपादनायमेकत्वादि प्रतिपिपपाखाप्य र परस्परता पुनमापोपने, तपबा-मागेव सावत् सामाम्पविक्षेपयोरेसले प्रविपित्रेऽम्पत्तमुपखितम चर्सेन प्रसिपेमात्, पम्प विमाय पुनः प्रतिपियम् कप मतिपितमिति गुप्ते तयया स्यन्ते यदुत्तमप्रेरिम्मनप्पग्भूत रूपमा मिमारिना न प्रविपिनम् सोऽपि च मविपेपोऽप्रमयः तं प्रतिपेपमा पाति म] प्रत्मकत्वेन बोक- 10 मरिचनमिन्यात पावसापपेठेमावि पारिमाणात् समुचिक सर्वप्रच सन्निमति तरेवत् पुनस्तयोः कायमेवापोनिक-नियम समिति पते-मनु बाग देसे-पचनियन बग्भूत रूपमा प्राप सन्यायाऽऽमरेले पहाणेति निरूपणम्मत एटीभूवमपि पुनय मोऽनिन्ननमिननिधनप्रत्साम्पा- मेन भामरूपमिन्मनसहितमेवेति हुनता तबादमुक्त मपस्पदीप्यमानं प्रागनियनम प्राप्त सरोरु- प्रसारि पथारीप्तिसम्पबमिवन का मातीत पैसा संस्पर्शपिम्प पीण पालकादि तमामे 15स्ममिति । मी मात्र । पात सी-पथा समिति नातिमाघमारनम्बाप्पल प्रवीरत समाचपापुरिया परन्समापि पचनसोक्तान सियाति पलानेन मिरजलमपेफ्ट पासमामास्वत्वाति भार । विविकिन लीयोपनिनसी पलाम-पतम प्रतिपावनामिति, समास मास्वपनामा । पारोति-पतमेति माण- श्रीपायनितमेश्याम्पत्तोमवतावमला परमानोसनए परस्परमेमोरे बागायम पालापनसम्पपचार तो मार समान पातरो मस्तानप्रतिमा समात-उपवेति, एक लामावगे पसरजतिष्पापलालप्रतिसत्तमसमुपरिवत मस्त माल । नपा पामपसम्म प्रतिमा एमालस मगर मार समेति भयका परसम निरमायाराममायाम्पल सिबार पुनलेवा मतमोजमाप रपमाम्मेलनमा मन प्रतिविषय मार-बापत विपापेति। प्रतियोऽपि न प्रा. जमानता पम्पमाला दिपा समरि-सोऽपि पेति । पुनबारबनात परत समागणे सामसमबति मिश्मनेताम्म सुरमपि पि बिन पता सिमसार-सतत् पुनरिति भोपनम्बर र समन्य स्मगति-मनु माया ऐश इति बातो मान्म प्रमाणपत्र इपभिसय एवेबमासम्मथमने सवामित मात्र याचनात प्रत्येक कहिार पुममा ठि भाकामहे मातरपनि समायान्वनमे स्पानिपुरगत पर्शको-तपापमुक मक्तीति पसार परसमर्थन प्रापमानमनि मनमनामपर फ्यात् ऐपमानांकन पास मावि र समा- मि.म. पापाप । सि. विमानालापमए ।।मरेम नापति मग । हिमपमति । ५ मि.म. से 1मिमा।
प्रतिपानाममस्ययता] मावशारमयपश्म् १०४२ एसधान्यस्यमेष समर्पयस्यतो प्रत्ययम् । (पतपेति) एतष-अपस्पप्रदिपेपापनमम्पत्यमेय समर्पपत्यतोऽप्रत्सयम् , पपन्यस्य समर्भितमेश परिगृग्रेस म्य[सप्रत्ययम्, न तु दत् परिगृहीतम्, वस्मादम्यत्वप्रतिपेपोऽप्रत्यया, वत्समर्थनारेव प्यास्त पर्णने पत्रपतिपेमोऽप्रत्सव । . उपसंहारेऽपि पदुक विशेपस्य माषपुपरमूर्त रूपमास्येयमिस्यावि, एतदपि स्ययैयापो दिवम्, ननु भयदिशेपा एय समुदिता एफमित्युष्यन्ते भ्रान्तः, एकैक एप विशेष प्रणिपा नयभिरषगम्पते, रूपरसाविपटकस्यषिशेपयत् । पृथगेकत्यविलक्षण प्रतिपादयितुं विशेपस्य माषप्रधग्मूर्त रुपमास्पेयमित्याविना पृयगेकस्वमन्यस्य विशेपाणां स्वरूपणायधारपितम्प मिति पचनादेयान्यस्वं समर्पितमतोऽन्यत्वप्रसिपेघोप्रतिस्फुट एष स्वयपनविरोपो दार्शन्ति 10 कोपसंहारेऽपीति । उपसंहारेऽपीस्यादि, भावविशेषयोरेकस्य प्रविपिप्याम्पत्र म्परस्याप्य ततिपेचे पाष्टान्तिको पसंहारे पदुत विशेपस्य माषपपग्मूत रूपमाग्येपमित्यादि-समेव प्रम्भ वदुत रमपति, एतदपि स्मबागे- मित-मम्पलप्रतिपेपवादनम् समिति सदसपति ननु महिशेषा इत्यादि, ननु विझेपा पर माम्लिन सामाम्प माम रिनिति, र पिछेपा पर मषम्त समुरिया एपमिस्सुम्पम्, ने रिधिरनारमा पस्तु 15 fa! और पप-एको विरापोऽन्योऽयो मम्वीति परमार्थी प्रणिधानपमिरमानैरपगम्पवे, भावास्तु विशेपा पर मरम्ता समुविधा मित्सुपामते रिमिर ! रूपरसारिपरप्रसविदोपरत्, पमा रुपरसगम्भ पसरमा इन्यापीवरेवर ५ विक्षेपगुग्ण बन्योन्पो मातीति समुदायम्वारेस्त्यात् भानिनुपाम् [1] गरि घमा पनिशुम्भावधि मार। इस सबनमममममोगा-पतयेति । ममिसमाप्मगसिमियत एप्पो सम्परमेश्यूमिसम्पामिरेमा पनममिरारीनामन्य मेव रामरति गावलि नेप- पिममारम्, पारम्प-10 म्सामा सम्माधियभारमय गावमिति रपामिशॉरम्मसदन मानि-पचम्पस्पमिति तनमना -अम्मरममनागान्ति सम्म माचरपरेमापनापा मापयामम्ममान्य पिम्प बाणमिन या सानि गरिसमिरासी रपसंहारेऽपीति । भादरियारण्य मन्तिम प्राप्त सम्परा बिगपरेमरम्प नरपार एसम्पन बार पुनरपि प्रतिस्पिट पानिधेसदरमापरिपारिति । मापनुपान पातमिति । मरम्म्म numtी प्रतिमा मनु भपनियाग त्यानीति ाि रा बासिनोमा तपमम्मे पास समुशिा भोपि एमपुप्यन्तामामा मामे मिति व मलकोपरमानाम् भोम्पो ममी पामसारमामाकी मरमागममा पनि एनमा कारमा रीति समपरम्पारप पर पर मुरारभ्या एपित मा। लातरति लोतरमा ममता, बो रिसोरो मार गिराममुधर ht #.n'मोपाई। माम । मान राममायोसा मान ममुरागलामो मार सरनेमामा । १०४२ म्यापागमानुसारिणीम्याम्गसमेतम् [नियमविपिनपारे प्रबगेर त्वविकपण-विविध विक्षेपविपर्य प्रतिपाइपितु-विक्षेपम मावएपग्मूत रूपमाम्पेपमियारिमा बगे- समन्पर विक्षेपानं सरपणावपारविवम्पमिति पत्रमारनाम्पा समर्षितम, भतोऽम्पत्वप्रतिपेपेऽति- फुट एक सपचनपिरोपो परान्ति मेसहारेणीति । पास्यम्- ननूभयतोऽपि प्रसिपेपावदोप, इति, अप्रेदमसि त्वं प्रटम्या-किषिपया तवकम्मवा! वत्र न तापमावस्य विशेपस्पोमयस्य पा मावस्यैकस्पान्यत्वोमपत्यानुमयस्यानि प्रविमागेना. प्रविभागेन वा स्था, मप्रधिमागतस्वावदेकस्य नास्ति, द्वितीपरहिवस्योपाख्यानासपस्पेन स्वयैव प्रतिपिद्धस्मात् , मषिमागतोऽपि नास्ति सहासहमवनस्प दिएस्पाविस्मादिना निपिर स्वादेप, क्या विशेफ्स्पोभयस्य च सिमे पैकरदेवदछेनाम्पस्व प्यापर्येत, तु नास्ति । (नन्पिति) नन्मयतोऽपि प्रविषेपारपोया-एक मविपिम्म पुनरम्पत्वमपि प्रविपिगमेग, वयोमयत्वमनुभयपत्र प्रतिपिप्पापलम्पतेव समर्षितति, भनेरमसि र प्रप्टम्पा-विपना सम्पदा पगुमयप्रतिपेष एव फळमास्तु परमम्मम् , विमापो विक्षेप समपं देवि निर्मार्यम् , पस्तुले सति किस्म अपावित पत्र न वापस न विक्षेपम नोमपम पा मारामुपर्जनात, मावस्मैवत्वाम्पत्वो- मकवानुममत्वानि मविमागेनापविमागेन पा सा, बप्रविमानेकत पषा पुस्प एरं सर्वमिमारि, ॥मविमागेन सति रितीने तेन सहासम्पर्धी मात्, पमा-'न सिंगन मुवि भूतपूर्णमासीविपाप्यमपि मासिपम् । एकाफिनवे विचरन्ति पीपवेबसिनो नास्ति सापानम् ॥ ( 10 ) इमेष कलाद को पति परमात म्न प्रतिमा । मन परस्साप तिमिमिति मुरणनि-पपरोक्त हिसणमिति मिर्च बरेल-पामाम्म से किया मावाहिक्मान सम्माम्बार मिल सस प्रतिपादितमी मान । निरोपस माषपातमिति एतापमानाला reprt-बत एकचन मारेपणा- 0पनामी सम्, भारोबार सरफ्त सपमा बनाएका स्मर्षिती मा । मतोऽत्यत्वेति मा- प्रबास माविया एममारपत्वप्रतिष पी नामनिरोपोगान्त पुरस पम्तिोमी माप । एम- पास गरेपातमोक्कलमानुमबत्तस तिरपालमत्र समर्षिसमतो सावविरोष साद-परमम वोऽपीति। पाप-पत्वं प्रतिपिप्पेति । एमवाया प्रतिमा की प्रामामा-मोरासीति । प्रभ माचो-पमुमपेति । एमालमा प्रतिमामाता दी । त्वमाने मानिस पोम मा परम छमापरिवरफ्तवा मिल्योग सम्भसारित मापति। सपापम्पल सिमा मार-धन वापदिन्ति । नारत्न मनिमाम मच रोमान वमन्त्रात् प्रारम्पपि च समानार- मारेति। मनोविमर्म निरपेक्षपणापतानि ममते सापेमामा-भारमेष तोतिमानि और रापुरम एकातिर मात्र पार्वती एवमया न्याय पहा साहित्यमापनवेस्लारे परिणाम प्रशि तेन सामन्यात जुर्म की ० माविमागेनेति । सात बार सामन नियमान-मसिसम्पमितिम रिमामेका पारी! A.केमा।
मिपासंभषसमर्पनम्] मारवारजयमम्म् समसामाापार्यत्वात् , षप्रविमानवापीकत मावस विक्षेपस्पोमयस्स पा नास्ति रितीपरहितस्योपा स्मानाशासन तयेष प्रतिपिठत्वात्, प्रविमाग्वोऽपि नास्ति, सहासाममनस निमत्वावित्याविना मिपिन स्वादेव, वमा विशेपसोभयस्म पैमस्य नास्तीत्युच्म्, सिटे कस्बे हाछेनाम्पत्य म्यावस-सम्भाम्पवे बकत्व परिगृय पारेण-सुदुपायेनान्यस्वस्स म्यापर्चनम् तु नास्त्येकस ववमापापम्पस्वप्रविषेपामापः । सान्मवमम्पल सिबनेकपोमयत्वारि प्रतिपिम्यत इति सर- न पाम्पस्वं सिद्धम् , स्वयैव तस्यापि निपिनत्वात्, पदलेनोमयस्स म्पावर्सेतैकस्य षा त्यानुमयत्यमपि नास्ति, एकस्याम्पत्वयोक्षणमेदमियमादिस्युक्तम् , यबनेकत्वाम्यत्योमम- त्पानि प्यावरन् , यस्य पाध्यतामषाप्यता वा गृहीत्वाध्याय पाध्य मा म्यापर्यंत, म्यय स्मापूर्वस्वादिवरम्पावर्तनस्य । (न पेति) माम्पत सिर-क्षेप[] प्रविभागलो पान्यत नाखि पटपटयोरिग जीपशरीरपोरिग 10 मा समापमान वयैव समापि निपिनस्यात् यसेन-बम्पत्वद्वारेण्यमपस्वं म्यानत्वकत्व पा, तपानुभक्त्वमपि नाति एकरपाम्पररयोसपणभेदमियमाविस्कुल पसेनेम्वाम्पत्योमपत्वानि मावस्परम् , पम पाप्मना गृहीरवेति, इद वाच्यमेकत्वमम्पत्वमुमयत्व पा यम्, पम्तु मवति, भवाच्यम्, तयेपनि पाप्यमनुमय वाचानि न पायानीत्यवाथ्यपण बास मा म्यापर्यंठ, म्पवरमापूर्णत्वाति वरध्यापनस्म । मन्वयम्पतिरेकाम्यामर्यापिगमाघ, कथम् । एकशम्दो सम्पमिरपेक्षसंस्थापा, वरमा नाम नामीविप एसम्मतिपतमाटेपासबरप बपति पिणम् ब्योर-पोरा बतो संभलनपम्ति टेमलिना रखापन मलमपि प्रमोसनमन्वति परर्फ पर रस सकारपि पेन व संपमापोऽमदानपरेकायन पिता मात्र । तर प्रतिमाभापविमाटो र प्रात्यनिमागेत मावादरेएम्पुपर बापामातोपाप्तानुसार लस ला प्रार प्रविपिसनासत्तापक्कि मारमा ममविमागतसपदिति । मदिमागतोऽपाति मापन 20 विय सोयाप प्रविमापत एक्लब पियमले पर सहेवि रिमेयाम्मपाशी मागा । परमेन च मम्मपस प्रतिमा यि सार-सपा विशपस्येति परमेश्लासिवाय मामिल पाय पिसाबम्पमापकममपत, पति रेस लालप्रतिमेषोऽपि , मरमते माषः । परम्पर मिस गरेपोमबार पिपत्र समार-म पाम्पत्यमिति । समाप प्रमालो गरीरमाणा- प्रतिमा का माम्म अमेदिनानुसमा परम सम्पनर फिर , भयो कि सम्पप्रति सम्मानमापरिनाम्पसम्म तर पियवा धारेवोमवारिम्पापिसम्भव इस्पात पाय-नाम्यात मिसमिति। एषमनुस्मनमप्पडिम्, एपसम्पासातमपलान, अमावस व समराकामाशि निमिबनवान व्यक्तिवारिपार-सपाऽमुमपत्वमपोति । एका बऐन माात मोम्मानित मात समान पर एसमयमुमचा पाच पम्, समपर गाय मातीपाप्पत्यम्माारमा कसा एपमनुभमतममा एप, इसनेमस्यममुमका ग भागममिवामताप्पाचा बापाले सरा-30 पन्य पाप्यतामितितरमार-सम्पति । बाराकोरममा मम मात्र म एपेस्मात्र 1मि..."दिनमा । A... पवार संवादात्परमपारिता । LO - - म्वापागमानुमारिणी-मास्यासमेतम् [नियमविपिनपारे देक इत्युके नान्योऽस्सीयुकं भवति, स चार्यों न पटवे, न स निरपेक्षा, एकस्याम्पस्वोमपत्या नुमपत्वविकरसानामम्योन्यायित्वात् , भयासहायषपन एकसप्दा, तपा सति सागते. पिनाम्पतिरेकादेकायं नासि किम्वन्पस्वमेव सिम्सेदिति पुनरम्पत्वमेवाफ । (भन्ययेति) अम्बमम्मतिरेपम्बाम पिगमाष, समिति, कर्म भाग्यम इति प्रपति, सम्प–एकसमो पम्पनिरपेम संस्मार्थोऽप्रविमागेम्समार्यस्पात्, रियो परमारपी परमादेशः संस्थावावियेऽन्यनिरपेमो संम्मा सम्मान प्रामाम्बेनार सम्मान्तरम्पापनार्यम्, एकोऽमें न विमानमोऽर्मा इति छोरे सम्मादक इलु नाम्योऽन्तीत्युक्तं मपति, सवाणे म परम स निरपेप। बमारेकचाम्पत्तोमयरगनुमसरयविरस्पनामम्योपापेमत्वात् प्रागुरुविमिना पासायवन एर सम-अप मा भूप पोपोऽम्बनिरपेमसंप्यार्पवस्व इससशापमापी विषमप्यतेमामा सम्मानस्वेकता 10 वशित्वापयत्वापणातीसचम्पविपपसारसिरिरिति भत्र मा भा[स]तीत्यादि सौतीति सागर समापन सावित पोहून पा भक्तीति सारो पर्दैन [नतिरेकोप नातीति नामस्ममाफ- पाविषयस्यम् नितम्पत्वमेव व सिझेविति पुनरम्पलमेमाः, एवमेकमायोपित्वाऽपत्तमाची पुषम् , बयाम्प एका सोऽपि ततोऽय एक इवेश्योऽपापापी । ततोऽम्पार्थे तु साक्षादम्पत्वमेव विशेपविपर्य ततोऽन्यत्वनिषेऽतिस्फुट पर स्वपन 1: विरोप इत्पुकम् , व्या पानन्यस्वमपि सिसति प्रतिपशापाद, पपा मास्यासमेकत्वाम्प- त्वयोः परस्परमस्पपेवत्वं तपोभयानुभपस्वयोम, एवं पामदेकस्यसिनमतिपक्षपणास् सिर स्या परकारतरपारक भी नाकामावरकाम्यामा परस्य इस्पन समिती पमितीति सोमनिरपेलापान नबनिरपेबसमाया मातमारवार, पवा एमे सहा सल्लावासदो न पहातापसिपैयामरत्वमापा समां मापापप्राधान्यमिव मानानेवारी patोषल सर्व विषय मातरम्मत सामयापिरपि तो पपी, स एवार क्येक बजाति, सह मरत एपर प्रमुख एक एप, पारस्तमुक मत पायो निम्मलिनानायोमबारी नमते तरिमपानी परसरापेकत्वाति मात्र । एमने मारीती-पक शमोरीति । स पुसमा ललिापरवमानसोपाल बार पता-स चार्य इति । स रवि, पस्त्वाम्बानिमाविषय एकदम निरपेकम । उहिम्पाला परसरमाकावादितात-पमापति र तरकारचन समा पेस्पसम्माननाम्मावि तमोवापरले मापसचमत्त निपासिनिमार-भपासापाचन पनि। पारोति-अप मा भूदिति । एमफेल पाति स्माषणे- सपा सतीमादीति जाने बाम छापनम्, पब होना ना पानी साति, ते फार्म एतापनिया पन्जानम्वतलान, जापानिपरप्रयागात्मनान वाचति बारम्पतिस्मातर एक्लामाला- साम्पसमेत न्,ि बाबर एक रमते सोम पोमयरमेनापति सम्पन्न सी मार। बर्मा पाम फेम एस पोध्योति गोकर भाति पचने मातालमाप+ नामावरम एवारिम्सालबी-मपाम्प इति। मायामोमा कोरोन हम-ततोऽन्या विति। रोमसिन प्रीति मा रपमानवनिमदिना प्रकोषमापन पानी मम्पमप्यतामिमूलता] द्वादगारमपपत्रम् सत् म्यापर्त्यते नान्यस्यवसम्पनिषिपयसा, पयमन्यत्वोभयस्पादायपीस्वकस्वादिमतिपघाः किं कयमयतम्यम् । ते तु निपेप्यानामतयात्वे निर्मूला अवकम्यत्वमेव म्यापर्चयन्तीति । (सत इति) ततोऽपार्षे साभावम्यस्वमेप विक्षेपविषय ततोऽत्पत्वनिपेपेऽतिस्फुट एप स्वपचन वियप इसुतम्, हिमाम्पत्-वमा पानम्पत्तमपि-पया पैशयाऽम्मनुस्यायेमान्यस्से ममते तेन प्रमा- रेण माऽनम्पत्वमपि सिध्यति, मनम्पत्वेन बिनाऽन्यरसम्पामावान्, पद माह-प्रविपमाझेपानिति गता । र्यम्, पमा पाल्यावमेकस्याम्परययोः परस्परप्रत्य[प]शत योमयानुमयत्वयोप्रेषि, एम वापरफासिर प्रतिपमसात् सिख सम्पारम्ते नान्यमन्यबसम्पनिम्पियता नान्यसेत्युतम् , कनन शेपमुक ममतीत्यतिर मधि-पषमम्पत्तोमस्तारापपीति, माविमाप्पानुमयते चाय म्पायोऽपताया, न वापरापम्य विशेफ- म्योमपम्य पा भनिदपि प्रविमागतोऽप्रविमागतो पाध्यत्पमस्त्युमपत्यमत्रीत्युपश्म्यान्मत्लासिगावेपत्ता माषमुमपत्वामा मुमसत्तासिटी रेस्पान्पतामात्र पाऽभावपित्ता भापयितम्मिमिति तदुपरारति-10 अन्यत्पादिप्रतिपमा समित्याति यावत् म्यारत्तयन्तीति, एवमुत्तविधिनकस्पारिप्रतिपमा f- प्रविषमाः न मगन्तीत्यर्पः, वाविपघामावात् कपमबत्तम्पमिति मिम्पपचिक निम्पियनत्पर्यः -एकवा निप्रतिपपा निपम्पानामवयास्त्र मिपम्पत्तामा निमूसत्यापयतम्य मिष म्पापचयतीति । - न पराभिप्रायगतकस्यापेकाम्तम्यावर्चनार्थस्वामिर्मूलाः प्रतिपेपाः, न प निर्भिपयम 13 नापेयापारमितम्पमिति परमात् प्रागन्दर पिपा समर्थितम् , भर लेपन माहारमान समनिवाब समारो नामगिपरत प्रसारि-साक्षारम्पत्यमप्रति । यथा बातामामाचार पधारमा भागारमा मा मेरामधारपामेलम्मानपत्रमपि सवानि पसापे तोऽसमिति जनम्मापासाम्पबमध्यमरम्पममम्मा म मिा तमाराप्तिपति सम्मानम्मानमपि शिपम्पयरिति हरिये पारननिष एवं ग्याम्पना-सपा पाम्पस्वमपीति सामेकमान्ममो परत्रापेवनार मनोमयमिशितवामनमान-20 मागमपि मत्सरापेलमिपार-पथा प्पाल्पातमिति । एक्सप्रतिसापालारामा प्रतिसपमिला तामा पत्पनिमारमा सम्परम्प निम पात मिमम म्याक्ति सम्ममण-पर्व हापरकरवेति । एपमेनागपिचरमामय सिविरमनुमतिप्रतिपचरमर मिसमान स्पारम्पनिम्पिमापुरम्म मगर मननति। नमेशनुमय रोपि निवारण पर मनुमयरब पति मागरमागमाराकी मसावट पम्यति भावार रिनागरिमामोपामासात सालाममाम्म निरपानापम रिसा" प्रतिमामामारा बारिमागनाउपम्पसप्प सापेततमारोपाप्पावरमारनामावमापतिमो पम्प पारिएर मातयितुं पापम् वतु मारमन्यवमिस मारिदिप एमपोभम पानिमा एम्पयनसे पोरामाष रमणाम्पमा समापन सम्पमारण्यापलिहायलाएर सामादिनि मारोपपदेया। मारा मार्ग म म । मेला प्रोपामासतमा ARKगह- पित्यारिमनिपेपा इति। एषा प्रतीपीयोमाला प्रतिस्परिपामाTME0 तमा मागपनि मारतामसायपरमयाा परिणति स्पिनि। मर्मसारका नाम मान्ति र एभरेतापमुसम्मनु गलबार ती मा पर पापड पर भी प्रतिरामामधण्णादिम्पावनया समाराशिव-म परामिमापति । भाषा- म. मिग्रमारपितमिलामा हाना ।
[नियविभिलारे न्यायागमानुसारिणीम्यास्यासमेतम् पकम्पलम् , एकरसाविमतिपेपतयास्यास् मय त एकत्पादयो विधमाना भविषमाना व काय परेण प्रसिपन्नाः यदि वापदिपमाना। सन्ता प्रतिपिम्पम्ते सवसापकम्पवनिर्मित तोका, महाविद्यमानाः, मत्यन्समभूतस्यात् कर्य प्रतिपतुं शम्पन्ते ! अप्रतिपलवादेव प्रतिपेपानुपपतिः। (मेति) न परामिप्रागपत्तापराम्तमापर्चनापरामिर्ममा प्रतिषपाः मैं र निर्विरकम पतम्मस्वम , एम्सालिप्रतिपमतमास्वात्, तेऽपि पथमिमापातानामेयादीमा प्रतिपेभ्यानामेनवान्ने म्भावनााः तस्माताप इत्यत्राम-बम त एमवाय इत्मा२] यावत् स परण प्रतिमा ! इति, परि वापरेकवारप परेप पया विपते पैर प्रतिपमा सन्या मविपिम्पन्चे ततखातम्मानिपिस्तोस भवाविपमानाः मन्चममूतत्वात् प्रपुप्पासतम प्रतिपत्तुं शक्यतेजोऽप्रतिभतारेच म प्रति 10 पेमा इति प्रतिपेषामुपपचिः । ननु पादपरमेश्वरयादबत् प्रतिपप उपपपत इस्येतचायुक्तम् तदैपात्, न पी भवता एकान्तमपनं म्पाषाऽनेनन्तमयन प्रतिपापते, पत्र भनेकान्तरूपेण पकम्या पर सन्त एकान्तरूपेणावतम्या इत्युप्यन्त सपतिपत्पामावानाम् , तया माह ‘मप्रति धाम्पेतानि यतस्तस्मान्न तानि याच्यानि । एकाम्तेन हि पदयो मिप्पावाया मसम्मेव ।' 18( ) इति। (नन्विति) मा मत माशोऽपि सामाम्पविशेफ्यो किनेका नान्यस्यमुममत्वमगुममत्वमपर्ण मत्वमिति प्रष्ट प्रतिपेमाः भिन्ते म नामात नोमपत्र मानुमवत्त मापसम्पर्व * at: मारेकर मारपस्व माहुमजले भानुभक्त स्मादयधम्पत्वमिमाति पवायुत्तम्, पारिति-वरती पति म पो मनमानि मामो मारामामी सिमानुप्रासमर्मत्वात् वास्तिकताइयो मपात 20 एलेगावमानिपोन विगमते बनुमन्ते वा भनेपाचप्रतिपादनात् मसापचमत्वाविन्य भवता वेऽपीति । एमाले-मपत इति परेप एवार ला विपन्न वाला येषां तया विषयावरण्यात निविपमेन मोर माया साचाषा प्रतिरेषायामात शिवायोमारत माप । पम्मिाच पम्ला पर्व समापि वनिपा-ममत्वात् न समयमा मपि प्राप्त पति सोपामापापा अपत मनिष नार-मपाविषमामा इति। मारे लालारिणीय मिताप्राप्तप मानेका पाद पाते-बन्विति । पासा-माम्ममिति । प्रविमान मानवमिति एमकारका प्रतिपय म मान । स्थानमा स्वा-यारेसमिति पनि । एलवासामिरेमा प्रचार परत्वापत मत LOKa or पानातीप रिति । कम्येवानिमा पामिति मायापालिका मावि प्रकारेनाशमन वाले पोत एसपपाराका परम मसला बापमा पारमि- मम्मतिरलापान मालामाबाद मायामिरेललानाकान्तममममुल . पचम्पतापादमम्] मारशारनपथमम् एकत्यादीनामेकाम्वमवर्न भ्यावाने प्रम्समबन प्रविपापटे, वरमावसत्प्रतिपेमारसमसमोऽय एनम्तो पादपरमेश्वरमादपिति, वत्र मनेनन्वरूपेण स्मादिक्प म्यामानास्वमिन्याविषसम्मा एष पन्त एवम्बरपेणा- पसम्पा इत्युच्यन्ते साविपमत्ताशपानाम् , यमा पाइ-सप्रतिपमाप्यतानि पतसस्माम बानि पाम्पानि । एषाम्न नपरो मिथ्यावादा प्रसम्मेव' ॥ ( ) इदि। वा माभनमा नियमविपिनया-- भवकम्यशम्पस्प तु प्रतिपदा सम्माम्यते नम्युकत्वात् , अबामणमत्, मपि प स्पयाप्पमिजस्सयम्दार्पयाविना विकमस्यासस्पाध्यकम्योऽर्य इत्यम्युपगतम् , स्वरमस्या स चावलम्म एबायकम्प इसि ना मतिपिभ्यते, सच प्रतिपेपप्रतिपेपत्वात् प्रकृतिं गमयेत् , मनप्रामणषदिति। (भवकम्पशम्बस्पति) बसम्पमपम न प्रविपया सम्माम्यते नम्पुजवात् , HIOP-10 बत, सम्माम्ममानप्रतिपक्ष एपावतम्पसमा तार्यो मेति पभ[:] नमुरुत्वादिति समे चहेतुर्गेम्मा, माम्यन्योऽप्रमाणपरिति प्राममो न भवन्ति, मम्मो पा प्रापयानित्यनाराणा, स्त्येष प्रामणे प्रविपसे भत्रिपारिभवति, दमा प्रतिपक्षे पनि मजम्मे सत्मसम्मानमोर्चा वा भवितुमईवीति, अपि वलया- पीमारि, न फेवर्ड सम्भावनपाऽस्मदीपया[सम्पत्तम रसम्पत्ता पना, किन्तबिमाप्यमियम -- परिस्भपातास्मोनिमामामामपन्तममममम्पपमानामुमते नमाना लगा तमाम मीगतेसो 15 कम्म् लग्रहमपा बलिपचे एसारपसानिधानामे मतिमेपारमप्रतिषण, तमा नगरपातोन पुम्मत रवि मा । माहाने सविसम्मत्वमेष प्रतिपावननिमार-म पोकाम्तरूपेणेति, नवलपमतम्, भाषामा सपपिपलमुस्तारिवि माया । पार्षे मा संसारमाह-सपा धाहेति समापनि सामानि मादेशान्तेन पानि नामानि, गर तान्नम्तमम् GR सपा) मिमा पुष स्वाति मारः। भाषामा मधिमत पमैगुप्तापापमोपि समतिमा पनि मता पर निपमान नियममिनियो मानतो माम्बामपति-20 मालम्पशनल बिति । म्याचा-भरकम्पेति । दमान-नन्यतत्पादिठि नमसममिमावतपस्यासिर । प्यन्म-ममम्मपरिति । स्म प्रतियताचाबमान समजल मार-सम्माम्पमानेति रस सनम पर प्रति सम्मापमानरपानमोऽम्मामालन नरिवल्मसनम मम परिवरसमाचप्कामाम्प एका मास मालमेश बमल पायी मान पाम्त मावि-प्रामणा म ममतीति सपनाम प्रिपान मसात किमानामावविरेनस प्रसारण्याचरपरापाए त मम्मेना-2 परिक परिधरपफमत प्राममायामामन इमामलाः प्रधानम्, अधिमान कम्मासिान्तिभरणार पनि प्राप्रमाला प्रमुम्पते समिपमानायः पुषणोनहपान सम्मनियरिगति, मा मात्र मियाममाया माध्यमोऽर्य हसिपी यो पारते नमितपुष्पमापापिन वा प्रति मागाव, वाममनिम्मपन्याप एका शिशारिणम माति वातरम्परबारमारपरकम्प परम्मम्ममप मम स बहिन सम्पपी मापः। परम्पले बायोपिए मन लामा मासुमामात् सत्ता पायोमिमय पीत मनामिग्या मना पारसको परियाह- मपरामिति, परमारपी मममममाया तिपापम्युमपापमोवि माता।
10 - - प्लानि ૧૮ म्यायाममानुसारिणीम्पास्यासमेतम [नियमविपिनपारे सम्पावादिना विसमासस्याऽयमोऽर्थ इसम्युपगम् , बेत्र वापयोमक्सिवाद, स पावचम्प पर सम्मत्या पोऽमिवस्पेनोनवेऽभी सोऽयसम्म इति पचम्म एव ममा प्रविपिप्यते, तम्मापराफमो हिम- प्रयोगोऽयमवय मरम्पः, स च विनम्नयोग्य प्रतिपेपप्रतिपेपलात् प्रान गमयति मनमापक पदिति पपमा श्रमिक भूगावपतम्यो न भपायपनो न मपतीति प्रपोवत् सोऽमचष्यो दिनम् • प्रयोगात् प्रतिपेपप्रतिपेपत्वात् महर्वि गमपेरिति, एतेन पचनाममुपगमपिरोपाबुराप्प मात्र परम्पये स्पपनमाहेति पिम्मी। संस्थव वाग्म्यवहार इति पेद, मपरमार्पसवकम्पा, संतिसस्यपदसमुदायार्पवाद, मयूजटाभारतकेशामारकम्प्यापुत्रलपुप्पदामातमुणमाठास्थानषत् , धर्मपर्मिविभा गम्यवस्थाभावात् प्रतिपादनममाणामावेनाविदितं भवत्यवधम्प पस्तु। (संवृस्यैवेति) सरसैव वाम्म्यबहार इति चेत्-माम्म म शमा कधिर मूने, मो- ' विपयोमा समाविमा समयोमा । हेपामसन्तमम्बयो नाम समा पन्तपि ॥ येन येम विफपेन पपात सिरयते । परिकास्थित एषाम से मायो म हरियते ॥ ( पा का समाधापा पिता ! मयोउ सय म लयोधमिति, वस्मात् संपतिमन्नं म्वारगेवर पारो सर्वमिति, बामः, अपरमानपतम्मा, स्यात् १ अविसापासमुरापालात्, बस्स्थया 16 उपसिन प्रमममा मनिसलाई पनि स्वपापीति । परम्मतमपस्नुपातमिलि मिनुमन-ए पापम्प पति बाममोपायपरवाममोचते योनीमारि सेपि त्यामागमाचनिनवासम्मका सम्मो भारि भरम्यानमगम सभागरम साद तथा मनोवोऽस्म्पका भुचेमा मातमनगमकी प्रतवाटपाचार, मानमावि र समग्रीमेवारमा एस पम्प क मम्मपरिवाष्पवा प्राणी मात्र देकमक्तो पम्प सामानामनोकामानियम व दि. स्मानमरातबम्पटमा प्रतिक मामि-अपवाभीमविति जाम भाटी प्रयोग प्रतिकार शिवमीपेषत्वात ग्रामवातियोगात सापला, एकमेचार भीमामलामा भाषामस्थमनिये मक्ता सिप निममनिधिमा सम्पर्व माधन प्राप्ति पारेनेति विपिनो सिमो पुस्मत मकवायरम्मतर्पतम्। ननु मायाप्रसोनप पनि खे त एपोनापिठानियो विमान प्रदरत साहनिर्माता पक्षमपी बस्न एमेन्सन पातामा एक सानियामिकाबारस्मितात, परमहरपलाव कार्याबामासायिनमा मायारो पारगानामानापरवरियशिपये- सहति । मारपहि-माम्मतमिति । पना प्रवेशिकरपति शासरिभासामानमा- पैम यैनेवि।समिसिपमाने उपाय परिसितमेव, सामपराप्यम्म्यानमारमा पेसम्ममारमा सम्मवात, पिनसमा माष । स्याहारमा मन बनात् सन्माद पापिठानियामासात 10 माबी एम्बन्बामाबाद व मा सार बाोष एस कमाये एव सोम मानिन्ताला पावर सभालन-पाति । उपमणी-वमादिति । स स सस सस पवमपि titan एक मात्र परमात्र सार, पम्मुरण्याचा तिसके पनि तनाबालिगुरपी- अपमारतहीति। नार-संपतिसमेति स स स्पारण सातापाया मि... प्रमोमबाड़ा । 'वाये। ।
पश्चादी पृच्छा] मावशारनपचकम् परसंपावोऽभ्यपामि यास्ममिति शम्मचर्य स संरखिमात्रात्वाइपरमार्यः, स्थठो मणफयटेसापि, मणफाटामारेम सा मामधरो मफेसमारको यम्म-मयूजटामारक्तदेशाकारकम्मापुत्रः दस्म प्रपुष्पदामा मुडमाग ता, सभ्या पास्पान सुरमिः पत्रपणेः सापगगनकसममपीत्यानिमर्मन साति- समपाममुपागा राम परमार्यस्तपर सर्वमपीति नास्पषसम्पवा, सियाम्पत्-धर्मपीआति, अविविक- मित्व मनत्यपकम्प पत, प्रतिपादनप्रमाषामापात्, प्रतिपादनप्रमाणामापो पर्मपर्मिविमागापरस्सामावात् । वापोऽवलम्पत्माद, धर्मपर्मिणो . विमागेन म्पयस्मिदो पुनः समुनियो पमा स्यात्, पमा साभ्यधर्म विक्षिपो भर्मी पमा, अनिमायाम प्रति, वस्म पर्मिणः सतकरयातिरम्यो भर्मो म्पपस्थित एष खाम्यात, वोच[समय सामनपी सरिती मर्मान्तरे प्रापर्यते यत्र-पता वरनिन्म एम्, पमा पट इति स याद इसीद पर्मपर्मिविमागम्परस्मान्धमा मापन भोपपयोनिरलयर्मधमिदिमागम्यवसमत्वात, पर्मपर्मिनिरसनभावतम्मत्वात्, मावविशपमसान्यत्वाविनिरमनपरेम बस्तुनस्वस्म निर्विपमत्वमानन्द 10 ऐसात् वमाभिरखपर्मपर्मिसात्मस्वात् पक्षापसापनम्, पर अरविपाप स्फटितपम्वागत स्पोपनिति पानिपत, वस्मात् पक्षापसापनत्वात् [न]सम्मापनीयमवलम्[व]म, लत्परिस्मितस्म बहनो नाम्पसुदरकोऽयम् । अम्पत्याप्पपचम्पा पोप भूमा- श्वमसि त्वं प्रष्टग्या, भय यस्य य पते देशातेपो यो विशेषोऽययवसमावस् किम 15 म्पतिरिकाम्यसिरिक वा! अपकम्यस्य विशेषावयषस्वनियमाए प्रमोत्यानम् , सामान्यवि शेकस्वापापासम्भववत्, यदि सामाम्पमेष विशेष एषोमपमेपारम्परा पस्तु, तत्र पनि मस्सरेस्यादरीति मदाय सामारोऽमस एस वा वानरो यस स पच्यापुरतम परसाम तेन हरमाकर मुबमाममा परम्मारियाना में परमाणपत्र मिलापसमायामा परमाणात पासवर्षपमिति समय परामरी माप पापभुपमास मर्मियाममाला REATRO सम्मगति परमम्मी पापात्रसम्मम्नापि न मारेला-धर्मपमास्वादीति कर्मपर्मिको पात मारस्वामहास मुजियमसवानात् परशुपान्यनुपपरवा साबमामाल पमपम माम वि भान । असुमेर मामा- नियरोति अपिवितमिति तमामण्यतमप्रमेव मपनि प्रमान व प्रमेनसिसि मामलप्रतिपतियामापामाबादेष पस्त प्रमेन न भावति मात्र । तपरिणमात्रामार कमिमार-पर्मपर्माति सा मते बमपर्मबोरिमागेत सन् मक्समा नाचि तमादम । सोऽपि पनि मापाऽवलम्पत्पादिति का समयमत पर न क परिवंतापापम्ममेकी मार। बत एस पसापमा बलस्पधारेन प्रसासति-पर्मपर्मिणी हीति विनिमती रिणामस विमिरास्वा प्रामपर्व सापवर्मोन बाति मामारमौर्य सापकर्मविधिशे बर्माधि पापरिमान सामिल, मलनियम पमस बाराी स्वब अमिमिह पनि मिरविमा कमरियम परिधान सात, पापमयामानामिरन साधनवस कर्मन्त प्रदान मात् गर पसल वामिल रामार, एम पावे मेषर्मियोरिमान मलित वा सम्पपवेवि तस्सापानमे प्रकाशित साल मदेन सम्मानमरतीमिति लगा । समान्यताबलादिमायारेनापम्पमा स्पेशात मा दस पियरन मापनाविरयमवर्मितिमापसम्मान पाच पामतो गमा परनिपाल ब, सुरिकताबार बारामसराम पनालिसापनमसावन वा लाम्पाचमापोराममानमानसपी माचि सम्मान मिता। पापमपमम्मुफ्सम्यापि रायते-रामसि त्पमिति । सामान . म्पायागम्पनुसारिणीम्पाप्यासमेतम् [नियमविभिनपारे सामान्पकसमेकत्व विशेपीस्तमाकम्प विशेषसम्म वस्तु म्यापयत् तत् सामान्यहकित्य- विशेष म्यापर्सयेत् न सामान्यमेवेति, यदि वोमपातमन्यस्व म सामाम्यं न विशेषण वेति सदेस्स्वाम्पस्वपोरपि विशेपेणाप्यतिरिकवायां सस्पामयकम्पाः संपदेपाम्यमा, पो स्वातम्सेवकम्यत्पनिये। इपमसि स्व प्रष्ठम्या, मप यस्पेत्यादि, भपकम्पात्मकस्य ऐझिनो प पते देना-सामा- मविक्षेपैकत्वान्पत्वारयो पैरवचम्पमिप्यते तेपो पो विपापप स्मात् सम्पतिरिवामिनाति, पर्व नियमविधिनयो विपनापी वमेव स्वाभिप्रेत विझेप गृहीत्वा पोवपति माम्मत सामाम्पविर- लामिनिराम्फेनपावलम्प बामन्तर बस्न नियमित निमितनियवाधिकमावेन, पत्र सम्पतिरिकत्वारिम मोवानम्मित्रोन्यते-अचम्ममा निक्षेपा भैरवाचमानियमारे सपनोम्परानात् परम- 10 निरिचम्पतिरिक अत्पानिप्रमोत्यानम् , परपरस्ताव वम सामान्पविक्षेपैम्स्वापामासमवारिति बहुपपति महश्य पत्रपरमतमानावे-तपादि सामाम्येमादि समाम्पमेव सम्मिादीनामेक बन विक्षेप एवं पौरम्म समय पिकसमा परमतेऽम्पत्, पत्रावपम्पमा परि वसामान्यरुतमेकस बिपीसूक्माकम्म विक्षेपसरप म्यापयत् सामाम्मरत्वविग्रेप म्यापम सामाम्पमेयेसविशेषापारमेन, पति मोमब- स्तमम्बत् म माम्बा रिसपर मेति पयरेक्याम्पवयोरपि विशेपेणाम्पतिरिच्यार्य सम्पमपा- 16म्यापी संपरेमाम्पपा पामेकत्वादिवि पाणां मातम्मे समयसम्मानित। मत्वाम्पत्यारिपिपरमपमपाल लगेय वारस निकसमता एकत्वारस्येपामा समान किया बनय एपात सिमधिनियम सालात स्वारसम्म वित्सिवमापारी मी- मरम्पारमकस्मेति । बमम्मपरिमान पिसासरोकाममा अपरीति । बम बलु पावरमेकी प्रानुभमेव मामाचलगोरेमले उमदेनुमबत्कारमयानोपसमयमिक्ताविसमानारतका रविवार अपप्पल एव पियनिस्तापिपमा मनासिवानी मा समाग्यविशेषाम्मामलम्पटनो म्याधिरिक- लायक काम म नाचमाहाने-माग्मतमिति । समानो-मवलम्पयेति पारपस साना वास स पर मिमितानवाधिषमानायला पालामा एश्वानिमिपमान सामान्य पाने पामा साप्प सम्म मनावमा सामानावरग्रेवि मावा । एपसामावारिसिपल सामान्य विपदमपाणी बामपन्त रवि-समवयवत्वाति मामाच्या सरी ममतमे व्याया-पपपेति । RE- पानामपि तु नि सामान्यमेवेति मला पुमासमाचास्मिारपीदा 1 एपिसार किसान मामाम्मामा मामाच गलात् बाप्पेल पत्र पर सामापात पापाय, वसमा रपमाचारमन भारतमबति पामापामेल माठमति चामेको एसे मिलो सामाम्बमेत भर, माघ सम्मामी की सामानगोमातम चौमूठमासम्म मिलाप मावकाममात्र भारत न पाना बनाते एकाम्पमा पनि बारमा समेत एकनासौ मम्मी, पालेमा मातिारले पनि मारतय लिप बरसम्बबादामा मिरमादिमावर देव परम समीम सेपी-तमा बचम्पचार इति। एम्बाम्पनामिनाची तयारी सविनवापिसमा मिसम्ममानाममा मते, मिसावरचा विमारह.भारमच्चाविषमो लाmxxपा- .सि मोममायनाए।
. एत्मादपाय दोपा] सादगारनपषम् विक्षेपाना हरस्तुपरखमते सत्सवसम्माों नियम्यमाना संपत्तीमय बार- मवफम्पत्यस्प मियमस्यादस्य च नियमस्म तया तथाऽऽरमाम्मरनियाधास्मान्तरस्था- पवेर्षिशेषमाणस्प विशेफ्स्वमेव, पदि पुनर्विशेपम्यसिरिक स्यात् ततो म्पतिरेकादम्य स्वापा। (भवकण्यस्वस्येति) [बवलम्मतल नियमस्वात्, तस्म व नियमस्म दमा वयान केन । अमरेण सामाम्मविझेपैकखान्यत्वोमक्त्वादीनामात्मान्तरमितचापारमान्तरतापविझप्पमाणस निममत्ता- पपतम्यवस्म विक्षेपत्वम्, स्मारम्पतिरित विशेपारपणम्पवस्तु, यति पुनर्विशेपम्पतिरिक्त म्याग्दो म्पविरेपारपत्वं विशेषाने पस्तुनः परस्परसम्वादीनो सात्, वयाम्पर न विपये पस्त, पधन्वाप रवतम्मत्वसोपात् इष्ट पारतम्य लवेयत भार-सतो म्पतिरेमाइन्यत्वासाम्तेरिशि, स्व निक्षेपाम्प- तिरेकोपपचिरवकल्पबतुनेति । वमा मापोपमतविक्षेपकसोमपस्वाम्पत्वमाषाम्यतिरिवायामबक- 10 पासवाबारपाकम्पत्वस्म नियमत्तात्तवावयानि पारम्पतिरिकम् , तो म्पतिरेकाइन्पवामान्वेरिति पठिस्या भाषणाविपमेऽप्युपपचिरम्पतिरेक्स्प तव पोम्पा वा सामाम्पविष्ठेपाम्मामासते। मापविशेप कलकत्वायत्तमावनिक्षेपाम्पतिरिक्ततावामिमाघेवप्रन्यो पावरेत्वाम्पत्वासाम्तेरिस्पुममवारिपमेऽप्युपपति- रम्पविरेकरस तप बोम्मेति । पषमपतम्मवारिमसंगारारिपाम्पतिरिक्त पस्त, दवा पिम् !- पर्व विशेषाम्पतिरिकं ततस्तत्तु विशेषमाप्रमेष, पया मिनोऽप्येको विशेपो रूपा- दिस्वरूपादम्पतिरिकस्पादिशेप एपेस्यम्मुपगम्यते स्वयापि, यस्य मावेन सहेकरयाम्पत्यादि 15 बातम्य, समेसन बस्तुभेम्पलापरम्प-अपदस्पस्वस्येति । लिम्मत निमामत मापसमिति मागर, म मारतस्वामिग्री के नामान्तरनिरचावात्मान्तरलापोर रिशेपमालालाम्मलमपि वा एकमाम्पेन मारोति- मयकम्पत्यस्य निममत्वादिति । सामान्यापोरेसानत्वास नस्पायरिलो स्पु तोपपतिमिरेक- लापरमामरामा तापमानापमान्तरलमापयते बम्बोम्यापिनाला मान्यता प्रे पिवमानताविसमस्पप उस मिसेस, पाम्पम्पिकर्म पस मातीसार-सामान्पपिशपेति । बरिल लगि सान विपा माम्मपक्षनो मिला मसु तथा परस्पर साम्प्रनाम् वर मठन पाम्म बसम मत मापन परवेशलामागारेसम्म पटक परसरतबाम्पत्तापरम्पयनसि र पति पुनरिति । रिपो विपारम्पपिरिचमाचम पहिला प्रतिपादितनिसार त्यमिति । सामापापहेपि परिसर मिलमे सामाम्पोमामासम्म सामान पाचपन् पियानमारम् , जि एक सामान्यप निराग्यमान, बोमपानमन्बममामानोपनको बासरेबापबेरपि ममाम्चमाया सपामाया सारे, सम्पारम्पनिमोपचपन समाचवा परमरिचम् तमतिरेकाएमापातहरमुभव परिपोऽयमातरम्पतिमाम्पबाद-तथा भावापान्तति । रमपरियापार-पपा मामम्पविभागम्या मितिलाभानियालारपसमिचिमि पाममा विरामणापार-पपेपमिति। 10. पावसापाले १०५२ म्पापागानुपारिबीपास्यासमेतम् [नियमविभिनयारे विचार्यते, पस्माच तैर्मायोऽवकम्य इत्युप्पसे, एप विशेषोऽप्येक एय, मम्मतिरेको कलक्षणम्, पया पुस्प पवेदं सर्वमित्यादि, सच विशेपो मायो यस्तु, भवकम्पस्व निको पाम्पतिरिकत्वात् , सरस्वारमपत्, पथा विशेषाम्यतिरिकं विशेषस्वारमवस्तु विशेष एस, मवतीति भाव इति स्वार्पस्वारस्य, ततध विशेपमात्रमेय, स्विमिवमेक एव विशेफ्तदयक- प्पस्यमाम्यमिति। (पपेपमिति) पपेवं विक्षेपाम्पतिरित क्व पायात वतु विक्षेपमानमेव एवं नियमविभिनय- मनोरथपूरणम् परामपति-पया मिनोभीमारि पचा परस्परविपिसापारण सत्याहिपापं मिहो ज्यको विशेपो रूपादिस्वरूपात-रूपाचास्मनोऽम्पपिरिचत्वारिशेप एवेति ष्ठाम्ववर्ममम्, पस्यमामस्वार मुपगम्पद इति, सपाऽपीमिमनुमानयति, साम्मत वत् कम मयऽभ्युपगवमिति प्रदर्शनार्दमाराम 10 मानेमादि, पोऽसौ त्वया माभेन सह विशेपसरवमम्मत्वमिन्यविभिचारेऽम्मुफ्गता, पम्माष विषेपा- पाप एकलाम्यस्यादिमिरमत्तम्प सुप्यते पंप विमेपोऽप्येयका, कस्मात् । बम्पतिरेको कलपणम्, परि न मिश्यतिरिच्यते पोमिसुनते सवा 'पुरुप पोरं समिमावि, स च विमेपो मार परत परकम्पम विशेपाम्मतिरिकत्वात् सतविपिमा सियोरेता, करमात्मवरिति विपाम्मतिरित विझेप परमबस्त विझेपः क इति पवा पपानमाम्पमिति सम्बन्ध मा भूत प्रागुपसामाम्प- 10 पर्यापमाषष्ठम्पबुभिरिम[स]मोशन भागो स्थिति बस्नुपर्यापत पयनार-मवतीवि भाव वि सचा- लात् तम उतम निझपमानमेवेति सामान्याहानिरासो पतुपर्णकमेपुपनयापी मात्रप्राप्मत् सिरे स्टीकरणार्पमिचोप्रपारपाकोपभरमाणम् , नियमिदमेक एव विशेपलपलम्पसामाम्ममिति । गपतिर बातमम सिम्मानमे निमसालाप इति दिन बिमाधिनयम मनोरमान परिपत प्रतिपादपति-तत पवदायातमिति । तमिलन-पया मिमोऽपात्यादीति विया परस्पर मिचा वापर से बिपो चा स्पाविसपारामिकवादिष एरेडपान्त तापमानमेव मियाम्मतिरसात कमाए मरिच फोपी अमित मात्र । ननु सम्पपाम्पत इति सब उन मामुपगतमिलना- पोऽसाविति । स भारत चैपचापलारविचारो शिवाय मात्र एकमाइमिरम्म सम्माम्मद लया कामपि दिन एच परिसम्वासन पमा पुम्पयनसभागात पुस्मावि मत् पति र पुन एमपुणे मत पर एफ एममममपि विडेवारिवानिएर सपालमा लो भागो पख भरतपय परिप्रेकवाशित मात्र । प्रोने पम्मा तत्स्वात्मवदिति माया गरिने शिव र समरम्ममपीस मात्र । चिसो मानो परिकलन मममम मामायन पलपांग ed पतिमा पर्याय स्मनार मा भूमिति मकरस परवाहावर निमारमेन पर एल पाना- सराप पशुपायच भावन सामाम्पसम्मतेनालयालम मात्र । माति सामान्यजानिरामया पति पर स्पा पोवारमाय लावायची पद्धक एस बिपी विवि माना। ० सम्म बच लमाम्मुफ्णम्पते र एस एस सी प्रेमानेन मिस एक्लाइमिरगम' मोर, ...सोम जिपमाबोलि....दिन पला ।
. परमीयत्वापादनम्] मावशारमपषकम् २०५३ ससिंग स्थिते तदेकस्यात् कुतोऽवचनीयता तस्य न हि विशेपोज्यधनीयो विशेषा म्पतिरिकस्मात् स्वारमवत्, एव निर्धारिसो विशेपो धाच्य एष क्या च निर्धारितार्थायकम्य पचनादुप्णत्वेन निर्धारिसमा शीतोऽग्निरिति षषनम्पबहारवयुनिपूर्वकयारपिछकवचन प्पपहारप्रस, अतथा वेदिष्ठस्येवं वाई विशेषा वयनीयः, विशेपाम्पतिरिकस्यात् , अब फम्पसामान्यषत् । (तमिति) वमिप स्थिते परेमसात् स्तोऽवपनीमवा । वितीयामामात् केन सोमत्या म्पत्लापमतम्पवा वस्म-विक्षेपमात्रस्म मारस्पति, वनवना-न हि विक्षेप इत्यादिनाऽवषमीयो विशेपो विशे- पाम्पतिरिचयात् सामाग्परवियुक्तोपसराय मापन गवार्यम्, पय निर्धारितो विशेपो निपारिपत्वाच्य पब स्मात , मनिपरिवो प्रायः स्यात्, बया पेमावि, एष निर्धारितमपि विशेष स्वपश्यगावयाप्पमेन मम्पसे तयार निधारितेत्यादि पावत् प्रसा, अपम्पुटिपूर्णको यरपण्या किमते म्पहारस्पया, निर्धारि 10 वाषितम्यवचनात् , उप्रवन मिभारिवस्थामा भीवोऽपिरितिषचनम्पबहारयत्, वमाशिप एनेवि निपा- रिवोत्तम्पसामाम्याग विक्षेप वेति बसम्पा, बिपाम्पतिरिक्षयात् परवा मबत् अवमेत्यादि, स्वपक्षणगणैव निक्षेपाम्पचिरिचरनेऽप्यपत्रमीयमेव या परमीयसामाम्पमियास्पद विशेपो बिशेप इत्यवचनीमो विशेपाम्पतिरिक्सारबत्तम्पसामाम्पबत् । म्याम्मत सिखमेव विझेपावाग्मत्वमित्तब न- स्वया विशेपस्यैकस्यादि पाप्यस्वेनाभ्युपगम्य प्रतिपेपेनाषकम्यप्रतिपादनस्म कृतस्यात्, सस्याप्ययाम्यस्थे वस्तुनमायाप्यस्वे सयोः परस्परमपचनीयस्वादुमयतोऽप्यपधनीययोईयोरपि वपनीयत्वं स्यात् । सदैवत्वादिमिरवण्य पर साम्पामाषा एकमेर व झिपात्र सु. बापत् विलोमपेनार तमिम स्पित रवि। म्याचो-दितीयामापाविति । रमेनानुमान सारगति-नीति विशेषा मारपीस शिपम्प 10 AROVE सामान् पारियामा सिाम्मतिविपता मावराय पिनाम्ममवे तपसोऽपि । एसमाचपराममामान्पस पि एक निर्धारित समय एष स्मात्, पनिरल प्य मत नरम मार-पूर्व निर्धारित इति। एवं निर्धारितमपीति, इक्मुफ्पत्तिमिनार मेवामिष बरपाया निलमपि सम्म पापी पम्पम्पसे का सपथराम एष पर नाम्पा समपि प्रमारप, तवपापमायामप्रकारागिरंधे पाधिश पर पपेजम नियामे पीना मसार इति मन । तरेगा मपमइसिप्पक इति । हेमार- निपारितति निपातस्पर्पस मपपरामागरम परिमानिनिमार-उप्प्यत्वमेति मिना निगम वमादिगार पतीति। विशम्पतिजारापनीयतायाम्पम्प मिती परिपि पावमामा- समापनोस्मोपी वसनीम्मामासानापि रि पापोरन मापन एगमार-सपसरागेपति। माय गोय, ममाभिगिनीस्ताम्मुरम मारनपणा कि पम्येतिपातयतामा सम्मापिसाममोरवालासोपा मिसाल-30 10 14. मम्मे ।
म्पायागमानुसारिणीम्पास्यासमेतम् [नियमविपिनारे विधार्यठे, पस्माध तैर्मापोऽयकम्य इत्युच्यते, एप विशेषोऽप्येक एव, मम्पतिरेको प्रेकलपणम्, यया पुरुष पवेद सर्वमित्यादि, स च विशेपो भायो षस्तु, अवक्षप्यस्य विझे पाम्पतिरिकत्वात् , तत्स्वारमपत्, यया विशेषाम्पसिरिक विशेपस्वात्मवस्तु विशेष एब, भवतीति भाम इति ससार्पस्याचस्प ततय विक्षेपमाप्रमेय स्थितमिदमेक एष विशेषसषक म्यसामाम्पमिति। (पपेपमिति) पपेष विशेपाम्मतिरिक्त तत एलवायात वतु विशेषमात्रमेव एप नियमविविनय- मनोरमपूरणम् , पावपति-बा मिनोऽपीनापि, पया परस्परविविष्यसापारमापत्वारिशेपार्ण मिमो- ध्येको निक्षेपो स्पादिसलपात-स्पापामनोऽम्पतिरिचलाधिशेप एपेति शन्तवर्णनम् पाबमाणत्वार मुपगम्पय इति, स्ययाऽभीमिमनुमानपति, माम्मत वत् कर्म मयाऽम्मुपगतमिति तत्पर्शनार्पमाइ-स्म 10 मानेमावि पोऽसौ त्वया : मायेन सा दिसेपसमत्वमम्यसमित्यादिविचारेऽम्पुगता, परमाच विक्षेपा- माप एकत्या वत्वादिमिरपरम्प इस्युक्ते, पंप विक्षेपोऽप्येका स्मात् । सम्पतिरेको ऐक्म्मम्, बद्धि न तमिलतिरिच्यते वो मिस्तुच्यते पचा 'पुरुप पपेर सर्पमितादि स च विपो' मा[1] बस्तु भाकम्पमा विक्षेपाम्पतिरिक्त्तात्, विधिना सियो रेतः, सामवरिति विशेपाम्मतिरि विपनामबस्त निक्षेपः ऐक इति पमा उबातम्पाम्पमिति मम्मन्बा, मा भूत प्रागुवसामान्य ॥ पर्यापमानशविरम[समहार्य भाषो मस्त्विति बस्नुपवित्व गमार-भवतीति भाष इति सचार्य त्वात् तम्म ततम विक्षेपमात्रमेवेति सामान्याहानियसो वस्तुपयमेत्युपमगर्यो, मात्राप्यत् सिमे स्टीमरणार्पमितोऽअपारणापौरपरमाणम्, मिवमित्रमेक एष विशेपटदसतम्पसामाम्पमिति । गमम्मतिरका मर्म विपमात्र सिमसावपसम्म पनि निलाम समापिनकस मनोरफान परिपूर्णता प्रीपादो-तत पदापातमिति । नवनिगाह पपा मिमोऽपीमातीति रिया पर मिना जनाधारक, 04 मिले पा स्पारिमरपामावाविप पी पाठ परपमानमे मतिमत्वात् मार म तो पि को साकामिति मार । मु तवापसम्मामग दल मयाप्रमुफ्तमिलना- पोऽसाविति । स भाक्त मामयविचारो हिराब माल एनामिपम सम्पनमते या मायपि व संपतिमालावेतमा या इसमालाबार पुराविपित् म्पतिक र पर्व पुस एपेपुवे मा एस पर एलममममपि पिपरिवारिसेच सैर सपालमा बिसेये मानो पसर पम्पस विपरियोजनाति मात्र । भोगे पातमाह वत्सारमवदिति सिलामा पितो बिसेक पापमपात मात्र यो मानो परिपात मावन सामानाय पर्याय विविध मस्तिता बसप्पाच इमनार मा भूपिति माबरदास महतास्तुपवापस मारमेष, स्त्र एक सामान पामि पसुपरिव मातम्म भवाम्मम्मतनातनुवाति मार । मादनावेच लामामानिरामय सुमति औरभर समय सोमवार को पापकर्म क्तु एक एप पिनि भाषः । पारस लगामुरामम्पद एस पि रविवान मोस एवषम र मोर, पर म.म. विविनियो । २.म.सोलिन। तिचापलु.म.मरेमापनपा।
प . - - मेदामेवपक्षनियमा] विशारमयचक्रम् भावसे भक्तपौर, अमावस्वेऽप्यसमिति बतष्यवेत्यवतम्पत्तमिति, एबमम्मात्यायेन पोषा, हिमा- न्या-तमा संयुक्तरप्यवस्तुना तेन प्रकारेण तपा-विशेपम्पतिरिक्तत्यम्पायेन यदुनेर हदयसम्पान्त स्वस्तु स्मात् ! अमूतावत्तम्परवान् भावता[वि] विदोपारण पदकम्पत्यमुक्तम्, वापतिरिकसे पस्मामूवावचम्पत्वम्, अमूवावतम्मरराव सपुष्पवयस्थिति, मावपहेपि भवत्सेव भवतीति भामस्म परम्परतापवापतम्पत्यम् एमात्त्वम्मतेने मापपसऽप्यमूतापक्तम्परयात् प्रभानाविषयवस्विति, . कियाम्पत्-पपा पेयादि पपा पवरवचम्पास्य वस्तु बिशेपम्पटिरिचमिप्यते पमा विशेषोऽप्यपचम्पारपा- मनो भ्यविरित्तो मतिरेकम्म दिस्त्यात्, एपन सवि वरपामस्वमनगो वस्तुविज्ञपयोः प्राप्तम् , स्वरिट बरयसत्, भविश्पत्वात-विक्षेपम्पतिरिक्तस्वात् सपुष्पबत्, विशेषोऽप्यमात्, पम्पविरितस्वात, सपुष्पवर नो पेत् पपुष्प मात्, विक्षेपम्पनिरिक्तात् पस्तुषत् सपुप्प सत् पस्तुम्यतिरिक्ताध विशेष बात, वारेमादि एर उस्म बस्तुनोमस्वे सामाम्पविदोपयोः किमेन्तमम्पसमयसम्पमित्यारिपिम्स 10 प्रपचनमाकाशरामन्यनवत् परिश्मात्रफलम् , अयपार्यतारिमाकामुममोरमामौरमानिविपारामपार्ष त्यानिमायपार्यत्वमम्म विषारम्पोच्विपिना सिममिलेर म्यतिररूपोऽमरचम्पस्मामायः । भयायकम्पविक्षेपम्पतिरेकाम्पतिरेक पस्त्विस्यप मे पक्षा, समापि विर्षिशेपांशवृचः विक्षपमपानायकम्योपसर्जनपक्षता, विशेष एषापहम्मत्वेन विशेष्यत्वाशीरदस्तुरस्वत्पषिक्षेपण- बिशेप्यरेषदत्तपत् प्रधाना, मवफम्पस्य पोपसर्मनता स्पारिति प्रपानोपसर्जनपभवामत- 10 स्तिोपस्पिताऽनिष्टा प सेसि । (अधेति) पावसम्पविक्षेपम्पतिरेकाम्यतिरेक-स्मान्मत सामान्यविसर्पकत्वान्यत्वापरकम मतपेपि पस भावस्पेपास्यूपैन का परममेव मानपुरगति-मायस्व राति । पचप्पलमममतेनामदेव एस्तुमोजावयार-तपा रपदुमपापीति बस्सुमोअप सामामि मिचिमिमामला परिसलामते लगा तवा च स भवति माय । रेसुमार ममतापक्तप्पत्यादिति, बस मेि 20 मलान मानन मामाम्पमिपाल मगमनास्पी तमारभूतापचय हुन् पापपरमूनागरमपारमा MB भाषः । नापि त परत मापबार तमाचे मटीति पम्पलापले सम्पादारपि प्रपामारपरम्, भमूनारसमसारमार-मापपोपोति । बसनो पयतिखो - मतिरेपनि सिपि पस म्मतिरपा पर समातिर सम्मानिसमा सम्मानितम् तापनि मेरस म्पतिमामिपमान पसम्मपितामा पचा स्वाति । (एमा प्रयापनो संगति स्पदिए पस्म्पिति रमाय परिणाम 2 समार-विसापेति । पतियोविन्यप्परिचापि गरि पारमियत र पम्मपि मन् पाईराना परिमारिया-मोपदिति । मातिमीस्य बोरसत्तमिप्यत तरा माम्पमायोरमा समयसम्म स्वमुमतामयारिरिम्पप्रपर मायाममात्रयेर नमामि रिकारसम्मवावान् माचनमामान उभारम्भौरममा रस्वामियर एवं तम्य यम्मुन रति। एपर प्राप्पपिपि या माध्यमिपुम्मरकी-पर्व प्पपिपीति मनु सामान्मारामाभिमानमामि Rm एन पारसी समागीप्रति गमल-मयापकम्पति। मार-म्याग्मतमिति। म भरे बागानु मारमान् मनमानियामती (१५) म्पापागमानुसारिणीम्पाप्यासमेतम् [नियमविधिनपारे (स्वति) ला विपस्सैकालारिवारपवेनाभ्युपगम्प प्रतिपेरेनापरम्परयमतिपादनम पस स्यात् वमापि विक्षेपम्पावाम्पले बस्तुनावचम्पसामा पस्पावाच्यतेलम्पसामान्पेन विपो न पायो निक्षेपेण सामाम्पमवाच्यम् उपोमागचनीपयोः परस्परमपचनीयत्वम्, वा वयोमपतोऽप्य- पनीरमपचनीय सरसनीय सामाम्पमिति निविपेपस प्रत्यारोपनीयं प्रसच्म्, प्या विपोऽपीति अपनीचरस्मेव मात्, मोरपीति, पब वापत् विक्षेपाम्पतिरिकत्वावमपम्प पचम्पमेपमिसुषम् । अप विशेपम्पतिरिक पस्विप्पशेयकम्पत्वादेव, मन्येयं तप भावत्वे षकम्पतिव, ममामस्वेऽभ्यसदिति बकम्पतैम, तपा स्वदुक्कमदप्यषस्तुवा, अमूवानकम्पत्वाव, लपुप्पा, मावफोऽप्पभूवाषकम्पस्मात् मपानादिषचदमस्तु यथा सरिसेपम्पतिरिकमिप्यते तया विशेपोऽपि वस्तुनो म्पतिरिका, पषव तदेपासवमनयो, त्वदिष्टं पस्त्वसत्, मविशेस्वात् 10 लपुप्पबत् , विशेपोऽप्यसत्, षस्तुम्पतिरिकत्वात् , सपुष्पयत्, क्या च सामान्यविशेफ्पोरे कस्पान्पस्वादिविकस्पप्रपञ्चनमाकायरोमम्यनवत् परिशमात्रफलम् , मपपार्पस्वात् । भप निशेपश्यतिरिकमिस्मादि, अब मा मूलमी योपा इति बनुनो विभेपा म्पति- रितमिप्यत इति बनापि पूर प्रमोत्याने पोपोपमे बिझेपम्पतिरिचारपमार-नवता पत्ताविधि- परमात् सामान्पषिोपेरादिविक्षेपैलम्पैरवसम्मोऽओं मिलम्ममतम्मावलम्पत्लारेन सम्मानित 1० प्रविरित विशपास्तिस्युपपचिा उपमेय माम्लोमपावत्वयो। पूर्वपापविराने पोमोपपचिः, पस्मिनापि पझे मन्पैर वस विशेपम्पतिरिकत्वात् इपी गति [ मानो पा] बलवामानो वा नाबाति, . - मएसपी मान्मममम्पत मग्री, बन्नय प्रणाममा रो-स्वति। ननु बदामीमपि न सारनीयवमेनाम्पुरपम्पत की बार-समापि विशेषस्पेति मापानमा नापी पिणे पापणपनि स्पषामनामान्यममापित सामान्नम्मरपामा सायाम हरचार- 10 पासपनीम, भाषामो बिग्रेप तापसाताप्पालानापभिमानमरोरपानीमा पेपया प्रतिम सम्पमात्रा प्रनमा को भा । पररममामामा-मपरम्पसामाम्येनति । गमकोपारको को पोसा मामाम्बामोनोपमार-मापनीयं सदिति । वामवापार-तथा विशेषोऽपीति सामानो निसरी विवरण सामान्य परिवारम्परिकलापमा समति रिस मरम्मत RTRमत्रमुत्ताग्री-भप मिशपेति । भाको मप मा भूषमिति ।मनु सामान्य पापभिरापास ate मिलिमिप्रभावाने स्वार-मसापीति सामामिोनालिसिरिमारिसरमासासक्नुनपालमा निर्ममिनिममिति मात्र । एकमा मनोमानामायोरपि पातासमुपति माइनसमेति । एतापमान मार-मसिपि पसरवि । दानमिसानमा पल पिरमातो पासपनाये या जो मानापार समिपमा सापट, नामसारमा मरिनाम्नीमा-पी गतिरिति । A. 'हिसार। 14. पापिसम नाचतिनामियोनिमाही । मि.ममापि ।
, - - मेदामेवपमनिरामा डादशारजयचप्रम् मारले बकम्यनेब, अमावस्वेऽप्यमदिति बदम्पनेसवलम्पस्वनिति, एषमस्मात्यापेन पोपा, रिमा- म्या-क्या स्वदुलजाप्यवस्तुता-वेन प्रकारण तया-विपश्यतिरिक्तरसम्पायेन यदुक्तनेव तारकामारूप स्वस्त कस्मात् । भवावक्त परयास् मासावि विशेषधारेण परक्तम्पत्यमुत्तम्, सम्पतिरिसे वस्सामूवावलम्पत्यम्, अमूवातम्याप सपुप्पबदपस्विसि, मावपसेऽपि मपसेप मरठीति मापस्म पचम्पादमूवायत्तम्परयम् , वस्मात्पन्मसेनेर मावपमेऽप्यमूवातम्परयात् प्रपानाविपचरपस्थिति, । कियाम्पत्-पया त्यावि, पवा पसरपक्तम्पाय पस्तु विशेपम्पतिरिमिप्यते तथा विशेषाऽपातम्मास्या स्तुनो म्पतिरितो म्मतिरेकम्प द्विपमात्, एपन सनि तरपामस्समनयोः बस्तुविशेपमो प्राप्तम् , स्वादिष्ट पस्वसत्, परिपताम्-विशेषम्मतिरिवस्थात् ग्यपुस्मत, विशेपोऽप्यसन्, पम्सुम्पनिरिकत्यान, एमपुप्पमत्, नो पेन् पपुष्म म्यान, पिझपम्पतिरिकत्वाम् वस्तुवत् सपुष्प मत् पम्तम्पतिरिक्तवादा निक्षेप पत, वमा पेत्सानि एष वम बस्तुनोऽमस्त्र सामाम्पविक्षेपमोः किमेस्समम्पत्यमपञ्चम्पमित्यारिपिरस्प-10 पपप्रनमात्रभरोमन्यनबत् परिशमात्रफमम्, भयमार्यत्पावित्याकामामुमसौरमामौरमारिविचारापनार्ष- वाविषयममार्पत्वमम्प विचारस्पोचविपिना सिमिसन म्पटिरेकपक्षऽप्यसम्परामा । अपायकम्पविक्षेपम्पतिरेकाम्पतिरेक पस्त्यित्पप मे पक्षा, समापि दिविशेपासचा थिोपमपानावकम्पोपसर्जनपषता, विशेप एयायकम्पस्थेन विशेप्यस्वदीरदन्तुरत्यदयविक्षेपण- विक्षेप्यदेवदचषत् प्रधाना, मयफम्पस्य घोपसर्जनसा स्पाविति प्रपानोपसर्मनपमसामन-10 थिोपस्थिताऽनिटा च सेति । (भषेति) भापकम्पविदापम्यतिरेकाम्पतिरक-याम्मन सामान्यविसर्पकत्याम्पस्पापरकम्प- पीपि पर मारपेवामा पेच पा चप्पमेन स्पारिपुत्तरगति-मावत्यति । पम्पसममन्मतनो लपवेन पसोजसम्ममेकमार-सपा पदुकपरपीति मोजरप्पा सम्मारिलायमितता पिपिलानुष्यत तसा तवा तस मी मात्र । दिसा-ममूतापकप्पस्पारिति तास भि: पचिपात्र भवनमा सामान्यकिती दमननस् सावतारम त सपा परम्परम्परा पी माप । मापि सी बस मापनस तवाये माना पचमलामो साहापि मपामादिसपल, समूतारममावारिपार-मापसेऽपीति । यस हिसायतिरस र पतिपय पनिमा लिपि बाद प्पकमप पम्पसर पास्पापि मग पप्पीपवम् याच सुनियोग्मत पारिसाद, पचमतिरक्सामा पपा पत्यादीति । एत गापना की-सदिए पस्थिति मामास पास्नin एप्पा-पितपेति । एमपिएसपि पनि मापन रिसपुरमपि मा पाईएम म्यतिम मारिचारमा पविति । सन्नीया तगारमत्तमियत रे सहा ममाम्मरमा सम्ममा समुभनाम्यापिर बायानमारमा समिािरनियबामन गणमानाम मोरमामोरम- रस्परमाणमिोसा एवं तम्य परतुन रति। एर माता-पि पसु मारम्पमि पुरसरत-एवं म्पतिरेपपपीति मनु मामानमरममायाभिरमा पासमानापि म्पनीम 20 एमापनमा समसामतिरपीक मल-मयापनम्पति। पापा-माम्ममिति । 18. बानु परमार Atanाहानी। 4 (111) म्यायागमानुसारिणीप्यास्यासमेवम् [लिपमविधिपारे एक्सतिरेकाम्पतिरेरै पस्मितास्यवसम्पविक्षेपम्पतिरेमम्मतिरेपमित्सेप मे पम इसरोग्यते- शिपिसपासचेषिप्रपामावलम्पोपसर्जनपभवा-विक्षेपस्म-मापविजेपैकरमादापविपेपरवाम्पत्याप पसम्ममाशाविणमापनिरिचमम्मतिरिकत्यविक्षेपारम्पलममाचिसामाठिशेप पगावचम्मलेन कि सम्पत्यागौरपान्तस्यापविक्षपणविक्षेप्यरेवरचवत् प्रपानोऽपचम्पम चोपसर्मनवा प मात्, चम विक्षेपमपानारतम्पोपसानपम भाप्रवर्षियोपमितानिन र सेति । - घस्सा मपि च सं निरूप्यम् , किमेकत्वमम्यत्वमुमयरवमनुमयस्थ वेति प्रतिपेप्पपिफ्स- म्पस्पामपितम्पस्वास् , तप तस्य किं निर्विशेषांशवृचिराभीयते । अथ नाभीयते । ममा भीयते मिपिभ्यमानमतिपयम्सता ततः पर्यायेण सांस्यादिवादगतानम्पत्वाविदोपप्रसङ्गा, 10 स्पबोकदोपाषाऽऽपतन्ति । (तस्या इति) तसा भपि र स्म निरूप्यम् र निरूप्वमिति चेतुमाते- किमेकामिनाति या पापाम्पामन्यवरेजवश्वम्माम्पत्वाभिलप्मम् वपया-पकले लिपेमेऽवत. मापति अम्यस्वे नियम्पे वैश्यम् , योनिपेमेऽमुमपत्वम् , अनुमयत्वनिषेचे चोममत्वम् तस्मात् प्रविणे विपक्षरुपमा अयिवम्बम्, पब तम विसपप्रधानापमम्मोपसमेनस्म रिशिष[]चिराभीयवे लगा, ॥भप नाबीयते किमिति प्रभामो गतिहगानतिनचेरिति, लिमिति पत्र निरूपपितम्, बिपाऽपि सोपा का गावामी लिपिम्पमानप्रतिपपहफ्ता क्या परिष सांसारिपारगवानम्मचारियोकोपापानम्- मारक वा दिवस पर मन ही मनप्रबनारसम्पत्तोफ्सपा प्रमुग्यत इति समावसे शिविरोपांशारिति, दिखा नियमाप्रो परम्पपरमेसर्व । जलपरिमाह-निरोपोति मावि लाग्यपदारसेक्स पति अतिरिकालविरमा बारम्माचोमा मिस प्रामममममुपागम्, मानसिकतामाकम्मलस्मे पर्ने मरिचमतिरस्परियारम्पलस्म बम बामपैन परमा विपत पाय मावि मा। विशप एपेति । एकजम्मन विशेषनागपपतस प्राचारपत सिप्पमापतात, लोपन्म समयमा रिप एस प्रचार का पोरनारापिके निशेषमायो का प्रभान पाम्पत्य पत्ताधर्म मोपी मार। एनम पावसम्मतोलनताको निधनवारय मार-स्मेति । मनु परस्परामामामबाण मा सामोधर्मवाना नपनापने सम्मानिमालय एस्सारसमपि मातिा-सया भपि पति। सपनविपामार-फिमेलमिस्वादरीति। पसरावारिसाना-पये मिपेम्प इति । पर मेमन कमजपने मातम्, गो लाम्पतये नममत्वम्, महिमामुमकल वामन बम्परागसम्बानियमान् प्रपत इति मात्र । एलबमैड पिथमावस व प्रतिसात्वमवस्मयामीतिर समाविधि, समरेमापसम्मामातारिमार्थ । तति मरिमपिता प्रतिपरिवार पियालतिर परियोरेर एमाप उसे एपछिपरेकामानावयालोपनलमा मानवत तामीरापमा परम्माह-तिदमेति पर या मारमा पा पाया पविरची भाक । प्रोपि तस्पिरिनुमचार-किमिति तिरावर पेपरसपी-भपानीपत इति। श्रमिपमानो व एमसायोग्य पाणिपिरा.विताबाद। .लि.का.रे मेवाहा। 1. मोरा .मि.हा विचिोवा भावना।
म्यापागमानुसारिबीम्माम्पासमेतम् [नियमविधिपारे ऽसीवि न विभिचम्मा संव, क्यापि पापपरमेश्वरमारामन वेऽमनुफामविरोपान्मनसिनो मिमिमीपुष्य निकादि वेनापि सा पिस्यत्वात् पूर्वमिति । मकान्स्वावगतदोपविदूरीकरणार्यमसदेष सास्थिति वदेतदपि न शोभन विक मारा लिपेपानुपपा, ततोऽप्ययुक्तमयकम्पत्यम्, विक्षेपपर्मासत्त्वे विशेष्यस्वाभावाद , ३ सपुष्पपत् । अधैकान्तस्यादि, भय मत निपेभ्यप्रतिपक्षेषाम्माम्युपगमे व एष मदुका पोपा सामराम परमेऽभ्युपग्मविरोपा वगारेमन्तवादगवदोपविदूरीकरणार्य पर्यायेप प्रविपिरप्रविपक्षसामना पाम्प [ष सरेप वास्थिति बदत्-उध्येत रपया एतरप्पशोभनम् विपापानिपपानुपपो स्वोs. बुमिनानि पपसन्दासप वासियम अपुमपालम्वासत्तारावनिक्षेपैकत्वाम्पस्यममउम्पमिना म्-विक्षेपपर्मासस्पे विशेष्यत्वामाषात् सपुष्पबत्, एक प्रोम्मेपरवान्यसाम्य भागविक्षेपयोरमणम मयुतम्, बससे ग्मयस्वेनाप्यपुच्म सदामपत्यायोमयरमणम एकताम्पत्योः सत्त्वाचारेण चानु मपवमानवासात्वस्माप्यर[म्मा सिलवीलमिप्रापस्म स्वयैव वलात् । अपाच्येत प्रतिपादनापं विपकत्वान्यत्वापसदेव फस्पते प्रामाविपयोपवेशे विगा विप्रवर्मनषत् , मम प्रिख्मणोपपसेसत्र सयोध स्वरूपेणापकप्पतयेति, पप तर्हि ननु प्रतिपा परनमिस्पप्यषचनीयमेष मस्यन्तासस्वात् सपुष्पषत् प्रतिपादनमिति चोपवे स्क्या छोकार प्रतिपादनमैपण, विशेफ्वधनस्य च विष्ठपाविक्षेपापेकत्याचषकम्पस्मात् , मतिपापप्रतिपाद क्योरपि कस्याम्पत्वापयकम्पस्चात् तदयपनीयत्वे प सस्सस्वमषश्यम्भावि, बफम्पयत् । अमिलना-नापि सोति म्यारेनापि बेस प्रतिवेषप्रविषवरपासचे मालमपमे बसभित्र नामतममा समरिति प्रकोप स्पमुसम्मवे एकानामुम्ममातापिपारा मानिसमार- मधेमन्तवारवि। भय मवमिति रपमानप्रतिपय पोमवायमे पर्गत सामाविकानगारपोपला लामातुम सम्मपन्ति वर्षसम्मम्ममा मायरामुम्पमप्रमाणपहिरोषा उम्रेपलापमा भास्पतिशासमोष पति सी मात । मनि नपरो-विशपहारेति समाम्पपिस्मरेतात्पर विधानपच्नतितो परत मोप्रान्तासत्ताव पपुप्पात बनाधिपमा यस सामाम्बनिसलाम स्परेवापत मात् पवायलासियामसत्तम पर्यामापाश नाबा यो मन मारेरक पका पानामपिफोरम्पररमरी मात्र 1 वदेगा-पपस्यम्वासति । सम्मेललाम्मतम भारोम्याम्सापासलमपाका रोनापि पपरम्म्ममममुपनिमार महत्व दि परम्पलतरण इम । एम्माम्पत्तो मापारेषानुमसहामाया मापापभिरमुत्रम् समापि सामाणिोरखाधिमाधिम्या म्पबामा मास्क्विापारम्मतवरमका नाममायाको परम्मुमतमामारपसार- कम्पमपाम्पत्पपारिति । पपसाव , TRA सामामिलापतारिफर्मपाममात पनि भूतापस्तुपीपारमा त एमपीमा प्रापिप स्मात भपोपेतति । एवमा पराम्पसदासापर प्रीपतिनाव सम्बाम्पसम्मलायौफनापी चाभिमान हो वापसमय समपायपाति महापापासप्रामापिम मिम्पिानाच सा पा समापन नमामो सि.म.पाय। ...मामुरमा।
पोम्पबोपम्मेवासस्वोलि] पाराशाजपमम्म् (अपोम्पेतेति) बमोध्येत प्रतिपादनार्यम्, 'उपाय सिस्यमापानां वात्मनामुपाना । मत- से पर्मनि सिस्वा स्वस्व समीयते । ) इति लिपैकत्वान्यत्वापसरेम प्रतिपाना करप्यते, गविरिप प्रतिपादनस्म, प्रामाविषयोपरेसे विगविमानपत्, पित्रमजिविन्यसनपरिति, क्षेत्र त्री- सममोपपता-प्रविपेभ्यप्रविपासले पकवान्यत्वयोः सस्पमितरेवरनिषेपार्शपतिविहितमुमक्सप परत. मापपेर, पनिरवत्, स्माचा-मवाध्यवस्तुमि क्योम-एकसाम्पत्तमोः सहपेमापतम्मेवेति, पत्र मा-एवं पाईननु प्रतिपादननिमप्यरचनीयमेप-पञ्चरेकलाविप्रतिपादनमसकस्सितमुपायत्वाभिमव वस्पति- पारनमित्यवचनीमममन्वासस्थात् सपुष्पबत् प्रतिपारनमिसि पोयते स्पया प्रतिपादन दिगो विशेष पवन पो गोरा स पाच इति वढपण, चासत्ताविक्षेपाचन प्रतिपानिमुखम् , विशाम्पस- विपनपनस विशेपाविझपायमस्वापरकम्पवात-वचनमपि * निष्ठेपोऽविक्षप पकोऽन्य पमपमनुमयम- बसम्पमित्येवमाविधिकस्पेप्परकम्पमतो विक्षेपाचनमाप्यपत्रमीयताम् प्रतिपादन प्रतिपावनमित्सरपतीयम्, 10 कियाम्पत्-प्रसिपापो पश्मा पर प्रतिपारम्खयोरप्रेन्याम्पत्तोमयसापरकम्पम्, भावपि प्रति- पाइनमिनवमनीमम् वदपचनीको प दत्सवमवश्यम्मापि, पम्पबनिति । मपोपेत न प्रतिपापात् प्रतिपादफमेयोऽसित, किन्तु सर्पस्प थिोपणसविकोप्यस्पास्स पाक्पसंपातस्मैकस्मोकप्रकारेणापतम्या प्रतिपादनपचनावदोष इत्यत्र मा, ननु यचषपनी- मतिपाबमामिति । बगा प्रमानमा परिकाम्नति पाप इति । सान्यतोमपलाना प्रयाला पानोपपाय 15 सर्व मर रिपेयप्रतिपबास्फवागा बामपये मेला प्रतिपरपरसापरस्म प्रतिमेचे पैम सारततरनिपनापरयो- नम्र हरममावतमा-भाबीति । कि त तपस्टोमाये रस्तुपेन्योः बस्पोऽसत्यमेन, प्रतिपादनामेच अप्रमते मार-मवितदिति । लताविपटिपारसमुपायभूतमप्पमत तरपनीयमेव अपुर- पारमन्तात्तालिपुत्तरपनि एवं वति । मनामनुपरिनाम्योपामभूत्यशालाभिमानमानसमा पुक- रस्सम्यसत्तालिपात्यत्तरेकरवाडीस्ति । यदि पीपात स्पिामियाब रस पोमा पीपराम- चिसापा पे और परेशान मौतयाविनायनेन साचनम ते तयादेपर प्रतिपादनमुप्पते 30 मन पसारिणीपारनमसरियाम पमम्मत साह-प्रतिपादनमिटीति बपक-कोमारपीपारनरेगाव प्रविप्राण- सुपर स्पीओम्नीयम्, तब-धर्म । मनु लिसपसबनमपि निमपर सामान्यसपना एण्यम्मममममम मेजारि- निपोषन कम कमाए प्रतिपास प्रीपानमसाला-बिशेपपणमस्मेति ।माचो-ममममपीति। प्रारान्तरेणाप्मनीरत्यार प्रतिपाप रवि लिमेपरवल प्रविपरन सामान्य प्रतिपकम् , तसा तपार रिपापमो. मेखमम्मत मारिविसम्मरणपनीयतापि श्रीपारमम्मिमिति भाव । म प्रतिपाई नियापनम-25 बाम्पम् प्रतिपारोऽपामा व्योम प्रपाणपतिपारमा परसामवरपचारसमीरमधीमत्वेन ीि श्रीराम मापने परिपाचे पौरन माद व मीपारपि धमत् प्रतिपाएस विषपस सलमारले मात् सामने पस्य प्राप्पेलाइ-हामनीपस्वति प्रतिपादनसावायले प्रतिपादन भस्मम्मी, प्रेचोरिति भार । म प्रतिपापसारपसामान्य प्रशासमिस पनाति मेष पेनबागायतर हानुपाया मा मिनु निरपम प्रसय पचातास्मफम्यानम्मावावग्रामिया-भयोप्यतेति। मायेति-20 सि... पनिारमात्रमुपाप । म .1.किमाए । म तिरपाप । सिम..'मामपा ५सि भाबपुनम् ।
पापागमामुसारिणीम्मापासमेठम् [मिपमविपियपारे पमित्येतदप्पषपनीयमेष, यस्तुत्वाचदर्पषदिति, मदानी परमनिरपे त्वदीये तत्वावत् मस्या- मुम्पमान किं कधिषपनीयं ! सर्वपापा! रमपया प प्रत्यपाविविरोपा, एकस्पेनान्य त्वेनोमपस्नानुभपस्येनाम्पतरमपानोपसर्वनठया तपावपाषषनीपस्वास् । भयोग्यतेयादि, ने प्रतिपारकमेदोऽसि बदच्म्मम, नापि विडिझेपाः प्रतियारमा, प्रवि- पापात् सामाम्बारिपते, किन्तु सर्पस्म विपपसविशेम्पसास दाम्पसपावकम्योचमभरेपर- म्पार्थठिपापनपत्रमारोप इमबमा, ननु पथवचनीयमित्यादि, गडप्रत्सागोन निरोपापारनं ग्वार्थम्, भयोमेट घामचनीयमिमेक्डपि पचनममचनीयमेव महो पुनरामवचनीयवादी पतिमि पचनीय मपि प्रतिपपम! किन्तु समान प्रसिपापप्रतिपारम्भेषव्हव समगधिषचनमेवापि मोच्पत एक बह- स्वाचार्यपत् इत्मदानी परमनियचे वदीये वापत् मत्सपमुख्यमान- न-भूपमाप पचमी वापरनीयले 10 रूपी पति-तत् तिमधिपषमीम ! सर्वपा येति । पर्यनगुम्प यूपण-सर्पना येसापि समयमा र सर्वबा, परि फेनचितपरेप परि सर्वपेमा, वन पनि नविसभरप्पपचनीयं स्था सामान्पविसपैकत्वाम्पत्यादि विरसानामम्पतमेन स्वयैवोक्सोक्ता उमावसम्पत्तप्रतिपापनस्म कलात्, एकत्वेनाम्पस्नोमपले नाव- मकव] नमस्पतरोपसर्मनप्रपामतया वया तवा पचनीयत्वात् , प्रममभूपयामत्वात् प्रनपविरोधः पापमुळे सपनविरोषः सपमम्युपामाषम्युपगमविरोरा मिन्नम्मबमानम्म्मणाविनाऽनुमानेन तपा का बोक- ॥प्रकारेणानुमानावमुमानविरोमा, गोके माथेषु च वाम्मवाचकमेषमसिदे मगमपिरोपो ए वापत् किमपिठापरेणावसम्मतले पते समवन्ततिनिरोपा, समाप्मबत्तम्मे क्यैष प्रसपातिक्रोिपाः । इस्पेविपमवस्तु सर्वपाऽप्यम्पत्वात् सपुष्पषत् , सर्वेण षा पिरोपात , सपुप्पपदेव, प्रत्ययम्पाविषत् ज्ञानसुखापिम्पाविपत् , उस्मानापकम्यं वस्तु । म प्रतिपाति काम्पम पीपापस पीपा पान व वम म्पिकारसरिपरमेरोति मम्मा मायर, 20 वापि । प्रतिपारका निविसेवा परस्पाये वारपार पासाम्पर मिपन्ठे तु मिनि विनिफरपतमापारमा पापसापपास भामा समारोनु पचावनीपमित्यादीति पती- मामव्यापकमारमा पीसिपेमेष मताना पाचा प्रसामला सामभिरोषा सुफिी मात्रा। स्पा मपोम्पेत येति मनोनय मिपि परमात बद स्मामति मामुपमि, कर प्रदिपायलमा प्रतिपसमता प्रतिपातिपयरमेरीत विसर्गनिम्, मोपानसरेलाम्पत्यमकलापके भस्मसमारचमीयत्वेन पामारला dि सनमेस्पेबालबारमियवासीयमुमते पस्तुत्वम्प बात ममममा निमय की धारा र परमनियम प्रापमा पाल्न हम्पपलियर पम्। पलामा ति मम्मिी पप्णी-स्पबदामीमिति । म्नवा दोपमापति-मपथा चेति प्रम रेप मायमर पम्मम स एल एवं प्रकार सम्पमार-पीति निमरेगारी प्रमाणा- उस परियचिरिति । तर प्रहला-पया सामान्येति न ऐकमार परमति एमलामीमा सरमा प्रमामिषा भूपठी प्रसन्ये मानसिपमा पाम्, मा प्रारम पर फरमा परिवादी भाष । मस्तव मलमा मेति समरियम इयर-सपमुरिति सामसम्म नेपाल अभियानमा सम्मान माइ-सपमिति। सपापम्पवे एकमेव प्रमादिमिरोगाम्या सपापाति। 1.पापानिपातक प्रिमिा लिप.म.मोरवी रेपो तम् ।
चिचिारावतप्पत्यम] द्वादशारखयम् स्त्येविषमषक्ष, इजियो हेतूपसंहारापा, पतस्मात् परमपरकम्पास्म यदेवविध पिकल्पित सपा बस्विति तरवस्तु, कस्मात् ? सर्वपाऽप्यरूपत्वात-सौः प्रचो सर्पया, पर सामान्यविक्षेप कत्वाम्पत्तारिषिकसैप्पमपाध्यम्, मम रम्पविरेकम्पविरेनविविौगाच्यमषाध्यमत्यन्तम् , सदेव या सामान्यविशेषष्ठमप्रतिपापप्रतिपावनसिविकल्पै; यच्चम्पमपम्पोत्सापुतविधिना सकया विपार्य- मापस्म रूप नापतिष्ठते वस्मात् सर्वपाऽप्यरूप अपुप्पपरवस्त वस्, किनाम्पत्-सी वा विरोपात, भस्त्विति पते, प्रविधिनय सण सवपनाविना प्रमामेनानेन विसम्मत एव भवोऽप्यबस्तु सपुष्पक- देनेति सापपंरप्टान्वा, इव। प्रामसपारिषनिसि वैपस्यन्त सः परम रूपमति वस्सर्वेप न केनषिविरम्पते, यया प्रत्सम स्वसग सर्वगादिन प्रति, मानसुखारिस्पारिमविति विमानमात्रशुन्यमारिन मुक्ताभ्याम् पति, वस्मात् नावचम्म पस्मित्युपसंहारा । नापि निर्षिधारवकम्पमेकान्सपावप्रसङ्गात् तष घोकदोपस्यात् , विशेषोऽपि रपा 10 विवम भवसि पस्तु, समुदायस्यात् , न भावोऽपि, स्वयैष प्रतिपियस्थात् कुतस्तदेकत्वाथ पकम्पवा।। (नापीति) नापि मिर्पिचारपतम्यम् एकान्तभावप्रमाव, वन पोच्योपस्थात्, न इम्प न भरम न सामान्पमिति पूर्वोद्रावितविकस्पप्रतिपेक्नीनेम्स वेपामेन पमा त्वमेव[अवतम्पबामिना निफि- सम्, मान्मत निक्षेपथदि पगरिरस्तु बस्तु, वैरपि स्वादिपविवि न मपति पशु, सत्यपि विशेपत्ते सम-10 प्रमिाईमाह-विशम्पतिमाह-सपेति। प्रभार स्पनिमया-पदीति । सामान्परिपताम्बवादिपिम्प पतिरिचयापचवारिकियो सामाम्पनिसमाप्रविसबसिपारकादिविपैसाचन स्थमिम ताम्ममिति प्रेक- विपिना सिपमितमधासत्वात् सर्वपाविम्य वन, साप्पसारिरममावापामाराव पुप्पबत्तसारपस्त नाति मात्र । हेलम्तरमाह-सप मा निरोपाविति एवमलस, सच निरोग, साधर्मपात पपुपात वर्माता प्रमापासिव मानमुशास्मिासोधि प्रयोप एस्लामिप्रतिमेषमान्यतापम्पमास्निामाविस्केन पुमयपतिवार सामा-20 मनिपोरेकलाम वामनामुष्पम्म पिसावकारामुफ्पमानिमिष मामा पासिमानानापरमात सम्मामासुम्प्रेरितवारवमितिमाफम्पपस्वाभाषा प्रयाप्पापमापनलार सर्वच सरकारमा रोपाचा सम्म सन्तरेदेखि माष । बर्माम्ठमार-प्रस्मसम्पादिवविति। भागमवादीति विज्ञानमात्रयादि. मते मानस पापि स्यस्पिपमावासमवे समाप्पमात् तार मुवामान प्रति सन्ममिति भाषा । असायला विकासचनीब परिवनि म अमो पेन स्वापाप का ऐषो वा मोर, मु चिारमपम 10 पतिपति मम ससाणे-नापीति । वध मा पान्न चारपमत पर प्रसानिकान्तवारमा स्युचरपति- पपति बपानियस पसुषो मावास्मसे बिपाश्मने वाला रोपसोपवारिस्मार-तारेति । भरिमाम्या भरममताम्बामेसान्यताम्मा प्रचापस प्रवाभामिमानिलिम्पम्पिमानमममम बस्तु भगवंसारमा स्तुम एम समाया प्रतिमेरमार, व मलम परम सम्माम्मलिए प्रार प्रविपिलानर्स प्राप्त की बायः । मनु सियो परिमिलाप्पा पिम सम्मपतीय माम्मतमिति। विम्यपि स ममुरत-20 पारमितापपीति । मापस पानिपये कातिमाम माल मरिमनर-न भाष इति । बप्प 1. पापिरो IA - पोपकार भितरी।
- 10 पापागमानुसारेणीम्पाम्पासमैतम् [नियमविपिम्हारे रायपापारिवत् न भाषा सामागो विषप्रविपक्षोऽपि-तस्मविपेपारपत्र प्रसपोजी सय प्रविपिरयात् का एतरेयापरकम्पता-माववि पगोरेपासिौना पुनवद्रकलान्पत्पारि पर्मनमुरम्परचम्पत्वमिति । तिरं परिवति पेदुप्पो-रूपादय पप समुदायिना, न समुदायो नाम फमिद, त •एम हि भवन्ति, यचर्भूयते स भाषो भवन भूतिः, ते हितस्मा भवनक्रियामा कार, योपैः परिकस्प्पत समुदाय कारण दम्पमित्यादि स न भावः कचिदति, भरूमाविस्वाद, खपुरषद, को हि सः पपिम्पादिमिनाभूता, एवं का पपिम्याधादिरण्यादिविनाभूता, फेज्मयो स्पादिम्पो बिना, ममिवाचनमात्रमते मास्मा च न नामान्यः कधिदसि, मस्य- दिस्वात् सपुप्पषत् । (फिमिति) पर पस्थिति पेमते-झपारप एष समुपापिना समुरापोऽसनपि परमातो वेषां संशतिसमजीवि समुामिना, व पर हि मान्ति, न समुपायो माम अधिरित्मभारपति, परभू स मायो मम्न मूतिः मापसापन्ये पम्मा हितमा मनमरिमामा कर्णय, शमार्यसम्पबारेम पोय परिकल्प्य समुराम[]मरप इम्पनिमावि स न माव-सामान्याम्पः भिति, सम्मान ! बस्पारिरात् समस्या रूपारयो खस्नोमन्वे सपापम्पसमान्मस्मरणारिसमः, मिमिव ! सपुप्पमत, 16 सापनन भाषम्य सामाम्ममा प्रहरी रस्तुनो र पति-सा एपिम्यानिक्नेिलप्रति कि मुरमनिपानामध्यममतिपनि समुदायमानरूपविभाधा-कोसो भाषा, सावरकम नास्तीमा पर्ष पुषिम्यामशारिरिमारिनिमावि पारत् जो सपरिम्पो चिनति ग्वाः भभिपपनमात्रम- तरापरमा पनि सामा प्रति स्वापि तमापिलम पिसम सामान्य पिम्पद प्रामा पयरेबासिनतामातानिमिरममता धर्माधमपभापति माय । समय पनि मि भिवति । सपियरसमुराणमाता ममुपनि साइब एस प्रमात बसमय -गाय पति, यो पप समुण्य ममापि पनिमामि समुस्लिो कास समितिमा। एषम्ममामलेगा सपपरीति भइल एर मार्गमा परमान र ममुराये पर परमानन्गी भम् । मायने अरमाने भाडिया -पचपत इति विवो मार भरिया भीमामा पारत बिमापसेनामापापहार पानामबासनारसमाम व पासमुप पर साम्पर परमायस्पो भाव भी पायममतामा प्रमाविमा मारपद-प्रम्पारिता रिति रिस ममसरपपमा सपिला रामनवमी वापसम, सामरिक पाया-यपुप्पवरिति Ale ममुगालमा सामानम्र, मर्म मा मामलि पम्मानपानाबापमानपाए समुपये Ekd मारवगस्मिालम्कीमा , Ratम मुरुम मा गरिमारिकरुष समानारनोkसविास मिल पाना पसाममनि माननगरमाय पा) अपेपि ममता पपास न तो स्तनपाना-प एपिप्पामशादिमिति विपरम पिपुराना कमी JAMMA मा Rv.पामाथि 'रामार से मामग्राम ।
- 10 पादितमुपापमानता] वापशारजपचम्म् भाभिमुस्यार्प वचन रूपपपिगमार्ममित्यमा, रूपरसात्यसझेशमा सपाइपा, रुपयेनानिमानसमासस्य मा वससिरिचमम्पत् प्रपिम्पादि ववमिवपनमात्रम्, भव मार-धात्मा पन नामाम्मा कमिखि, भरूपवित्पात्, सपुषवत् । रूपाविममुदायमावप्रतिपावनाय प्यन्तमाह- यथा पपाण्यक्षाविहस्त्यायासम्हे रथसेनासंज्ञा समुदायो विभम्यमानोऽन्यु। धान्यपि स्वाशेपु, प्रत्येफमेष परमाणुपर्यन्त पिभम्य मुह निमाक्ष्यमानोऽपि न रयाविरम्प तिरिको दृश्यत किन्तु समुदाय एषाऽऽभासवे तथा, यदि सोऽजेयु स्माचारमम्यतिरिके नास्मना स्थाचत उपसम्विधर्मा तस्मतिपिनामभाष रूपावियपषम्मेत, वस्तुत्वाम तूप- उम्पते, समादसन् , स्पादिम्पतिरिकोऽस्ति पेरसमुदायोजारमको नासो ततः पुष्पवमवेद, मरूपत्वात् अल्पापात्मकत्यापादिम्य इष वा खपुष्पादेरपि भवेत् । यथा चक्रेपाण्यसेत्यादि, पपास रपसमा स्मापङ्गसमूहे सेनासंमा पा समुदायो विमम्पमानोगेष तिष्ठति वाम्पप्पङ्गानि विमम्ममामामि बान्माक्षेपु परतो वा परत गति यावत्परमाणु, सो लिमम्म रूपानिप्पर तिष्ठति प्रत्येक एकत्रमा परमाणुपर्यन्त विमम्म मुष्ठ विमास्पमानोऽपि रयो न य दवा सेना पन पुरुषोज्योपाऽसौ न रयतेऽम्मतिरिच किन्तु वत्समुदाप भामासठे-रुपादय एक प्रमणमासते समरिवाति पदि सोऽधिमानि स पास्मा नास्मक मान्मा माऽनास्मा मा स्यात्, पति एपोम्योपा 10 रूपापारमम्मतिरिकेनात्मना ततः स पठपिपर्मा सममाणनिमिचान्यमतिरसमिकर्षाभिभवायुपम्मि प्रतिबन्पिनाममाये स्पारिबहुफ्सम्येव बस्तुलाम सूपणम्पते पस्माईसन् रमादिः समुपाया, क्योऽम्पस्ने पोवाचम्ममरिगारमानो मा स्पादिरेष बक्षस पर ना मिली में शासन काल माविसम्ममिति बारपशिफ्नामक पविनुसावन नाति व पिमानि अभिमाचे स्पारिक्निामात मासपनार-भमिषषममाष मेषेत इव । परिमादिमवामिभयेमाइ-पदन्ति । एसमेनास्मापि पारिमतिरको सौम्य मारमा चेति 30 शिामल प्लात्पेलि मावः स्परपदेन स्परमाने विसरिता की सूपमधि मारमा प्रति मन । पिम्मारिकामा स्मारमुपपश्चिमा स्मातसादापनिटर एस पृमिमा सभापतिमा निर्मनमा-पथा पकेति। रपो माम- परिणामापसगासमुजाविना मसिर सत नवासेपास्मपरमपातम्मुरायाफेमा मातिर बपि में हिमालधापत्यारिस्मुराबापेम्पा म्पतिम्, पम्मरम्मामा पनि सेनति बनमिति पा बिते तप पवारवाद' मुराविया न पा किम्मापायकापोशापविणव नाति प्रमाणात दम पास्पोऽपि पसपम्पबादिममममम भासवरारिपाणि परावपि समोर, कपि मगर, एपे वापरमाल निमम्भमाल मस, सागवतासाते नवा प्रपा मिति रमायोपि स्मासानसमुपायमानमेन म पिमानमपि प्रामाटिरिस रणसु समुफ्ते खाना पसराय पर रवानामासम्त समान मारोत- पकापति । एवं aftसत इस फिनिवति । माचि स्मशायो मानिनास्पानामसतिका मास्मत मा वरपर्मम्ममयममा सम्मम्मम्बनिक मानवजुमानत, पामत तसवासाम्मेनाइ-पति: सोपियारीति तपमानम-मापारमावास्मा महरप्रेकरम दा मात, सबम्पले पम्पा रफा- बर्मता मापसम्मानपप्पालाणी भाया। पतिवमरोपि ममातिनामस्मनोममानसौम्पमिमी ग्रामवाविषयमा समरसमसमवेमवह-ममहानिमिचानामिति । मा स्मारम्पविरो मावनास्मा- शिवोमारामसाई। मि.म.पामासम्मकायापलापास.. म I.B..म.एस्समातिए। 0 (11) . - - 10 स्वम्, म्पापागमामुसारिणीप्पाम्यासमेठम् [मिवविभिपपारे स्वनिमापापनम् सपापिम्पतिरिकोऽसि समुदायोऽवदामकोऽनुपमम्ममानोऽपि 1] भपुष्पवरपरस तात्।[ववो न] [स्मापात्मकत्वात् रूपाविम्प इस न पवदात्ममम समुदायसोपचौसपाइयो रेखभाष प्रतिपपम्ते मोमममम तत्र पटाविसमुदायस स्पारयो यो भवन्ति लपुपारगे मति सपाव व पटाविसमुदायम देवरो न म्मोममुमादीमत्र को विज्ञपोखः । अपानान्तरतायां रूपादिवाएं भारषानाविकार्य रयादी फयम् ! मा प्रयोग स्वतो म्पतिरिकसमाधरिसम्बन्पिनो म्पादयः, स्वासम्भधिकार्यदर्शनाचाराविवविति, . वर्हि वाट! तप्मेष, नन्यविषादसिर शिपिफावारफेम्पबतुर्यो म्पतिरिकार सहापार वेऽपि शिविरवहन रस कार्यम् , मताऽनैमान्तिक सत्, तथा प्रत्येकवस्तुचिमनतिका मन्त पय स्यो धिमपतिष्ठम्ते रूपावया वेपामेष पस्तुस्वास्, अम्पपाऽर्पस्प परिकल्पनामाण भनयस्थिते कस्वतंत्रत्वात् भडासपफयत् । भधानन्तरतापामियादि, पावत् सम् १ माम्मत पपनान्तर स्मारिनो स्वादिसम पाया रूपादिष्पर्ष मारवानाविकार्य तत्रासम्भवबावा ए के क्लयम् । प्रतिनियतपरमसार लात् प्रर्यापम् वन्तुस्टावियत् भत्र प्रयोः सतो म्मतिरिक्सापरिसम्पम्पिनो स्परपा, पासम्म विपदर्शनात् परारिषत् यया रुप्यताराविपशुचिरिच मिन्द्रियमुपम्पिपरप साभरि पमुष्प 10 सम्बदमनमीयते पाप्यसम्भपापवान भर्य या तपा रूपायसम्मविपरवानाविषयममामान समुरापापत्रसम्नुमेपमिमगामवे 1-0 of सत्यं वारपानारिचर्म रोमक-सारिपु रपम्, बा पारसमुरारनामस्तारपसम्मको पासमार-पादिम्पतिरिक्त इति सनात्मप्रसारमुफम्ममातोपि मोर परिमुष्मपि मन भावात् विस्तार सपनाममा मत मारिसमुराप एमपात, मत पर ध्वस्य स्मरम्ने माति, बपनाएमा प्रचारमामुम्योडर एस म स्पादिम्पो माधि एवं नामबम्पवे मारापब स्पारणे हेलपेन पनामा लिपो म मार, असायमागिर माना भरपापारमयादिति मसापामारम्भुराम सपरिम्पो मक्सद पुष्पारेरपिस भनिसका। नरपत्र पमी महीति पानात्ममुराबस पाएको तर भाय। समुपसम्पास्माले सपिरेप सीन माविम्मा का पयदिसमुदायमेति । ना पारो प्री सापालामा Reat पारच मारामारिका रामो मा, मी वाम-भपानी सम्परतापामिति । मारे-याम्मतमिति, भारप्रमाला स्पराग यासम्ममा मान्यता मत भार । म प्रकोपल मिना अर्पा सम्भा भारपाय पसरवणपादक सद, प्रतिनियर मामला म्यानाम्, बवा ता र प्रतिमन पर बयान मोक्मारकमाइ-प्रतिनिपठति। समेना मगेल साथी-भत्र प्रपोग इति समिामामा नल सो भिमसमपरिवार लामाम्म प्सत भमण प्राप्पिसम्मानसम्ममापति वा पापसम्भार पर्व परमात पपीचरपरिनमुसामा पनि मुसया मम्मामादरमेटी मामा मातान्तिममात्र -पपा रुप्यतापरीति । बासम्पप्रमानापमानारिमा रिएमिति मारना मिर पवन रामकुमत व द्वापारपर्व मापम्मान- पान [1] मार रममितिबापु मधमा पातको भरपर।
तवेतपरीक्षणम् ] माशाजयपफम् २.१. खासम्मपिरयविक्षेपमासिदिः, सिदत्वमम्मुपेत्याप्पनैमानिक प्रयवर्मन नाशयति नम्परिणादत्यारि, भाष मोरविराइन शिमिश्नपारफेम्पमतमों म्यतिरिचात् सागरपि शिविकापान ए कार्यममोऽनचन्तिक पत, या प्रत्सम्यस्तित्सावि याबरावरकरविवि भारवानक्रियाया समुदायिन सम्मम समुराय [A] सम्भव पर्भपितु समुदायप्रतिपपा न्यायमाह-वेन प्रकारण तमा स्पादिपस्तुन' प्रसक पति, मन- विनमन्त एष स्पं पश्चिमषतिष्ठन्ते रूपाया, सस्पत्यागम्पवस्त्रपैर मारषइनारिरियामारमन्ते, वेपामेव । पस्तुलात् पम्पपा-पस्तुनो विपर्यप, निर्पिपरे रेशमेरेन सिवाना रूपादीनामेय वस्तुत्वास वतोऽयपा- समुशायाम्पस्मार्धम परिकल्पनामानत्यापनमस्सिवैक्संतस्तत्मात् भगवपश्यत्, यथाऽसासस्स भाम्पता पावामान भान्वपरिफम्पनामात्र निपिरत्वात् वपा रूपादीनां निबिरामी परमायादिवराभान भान्द परिपस्सनामात्रम् हिमा! पुना मचियरसनियरमरमविपरतमा पारिनगरारिपूपिम्यादी[नाम्, सस- मुवामानाम् न पा समुदायानामक खवयमवस्सिवम् स्माधियत् परस्परपिविष्मस्पतोऽळावरकर 10 प्राम्स रूपाति परवारसम्पपरेशमाफ्त्यात्, परमारसत: समुदापस्म[न] भा[र][]नाविका क्रियेवि । ननु पटाकावनय स्थिकिस्मतत्त्यत्वस्य सत्त्वमिति चेन्न समुदायस्यात् घटस्य शफटादिषष साध्यस्थात् , म्पल्याविस्मितेफ्रूपस्वेऽपि सत्वमिति बेम, रूपसामान्पसमुदायसाप्यस्थात् । स्रोपगायिकाको सन्तति मात्र । तो सिगासमभुपेसापि ऐतारनेगम्तियमार सियत्वमम्मुफ्स्पापीति, IB प्रो पापनात भिवायमिति भाव । बौन्तिकर्स परगति-नम्बाभिमादेस्पारीति बत्रा विनिमय पाम्ति पिपिगम्, रन्नु विधिमथाइ मानमपमपि तो मचिस्स सापि महापमापेपमाबार एस बमारोगन्धि तम्मात् बामम्मनिराम तत्राधिमानि माबो मनिरामपरिसम्पमितभिनेम्तिम्मति मारा । ना मारणामपिमा पि पिरिप्रसारममुराये एक भी प्रमाणिविमानमा मम्मपतिस्पर-सपा मस्तक परिस्पस्पादीति । मम मृग्या भाषमार-मारवहनति। स्पाय नवरारपपरिस्मा र पमनाया20 अन्य परिषदेच पसूत्वात् परि समुदाय एस सिस्य मोपु पारग माचिसान्त निगामारमन्त स्पिातय समसाबमा साविपरियप्पा माराव शिम्मुरापति मार । एम्स निरिमन ममता स्पाइस एप पसमूना पारिस्मा मम दोनप्रमर ममुशर पस्मित एपा अम्पयति ।म्पिय उमा मनस्थित सतस्पत्पादिमि प्रोपना बरम यानास्तितसानिमारमा तपासबासम्बामास पासपोड:- मास भी पाया पय माम्मत निरितास्थान परमामन भाति दर परम्पमामा बरs स्पर विरमिपरतारतम्यान् परमाणपरिसफ्यापिमानिमियरसमुदायासेबामसन्त परमुरामा प्रति पियवतम पाखिवा. स्पारित भु परस्पपिमिततावाद हा भाना एष - ako मामपसभापत्, नमावि पिन् प्रमुण्य पसभापमाहिग्गिा म मिनु समुपामिभिरिमापनपत्र मिकी-पपासातस्यति । दार्शन्तिक परमात प्रपनामावर पुसम्म मिनाभिमानमा सम्प मासम्म रिमन पुनरिति । एषा ममुरापालामाराम रसुवामा प्रमुरायम्म भारसमापिम सिर २० उमादिति। मुसमानासपापमानवालालम्पनिरमाणात ननु पटारापिति । सरएम प्यारी 1. स्मरबारबरपरसबाराषित .R.म.मरम्मम्मी । १.बई। मि... सपा " -- पापागमामुसारिणीम्पास्यासमेवम् [नियमविधिबारे ननु घटावापिति, पायत् संरचमिन्मनेमविकोपरनम्, भन] सिकस्वरूपपटारिसस- पारिमोच्यते न समुपायरयात्-नानप्रमियमस्म तो समुदाम्याटम्प सपनारियरब साभायात् पटसपस्मानकाम्तिममासतेसमः, स्पस्पारिसिवैम्पायपि सम्वमिति पा-मम्मीठमरिस्पेषु रूम सामाम्पसलमनममिवापन तम्मारने ननियमिति चत्, न अपसामाम्पसमुदायसामागत् प्रमानिविषिचहपम्पतिरिक्सामाम्परूपस्स समुरायाम्पस सवासियरपस्तुलाधिपक्षासिन नेमविश्वा । भभुना बस्तुवर निरूपयति- प्रत्येक पचामाविम्पफिर्मेदम्पैक, स्प पानपस्थितिकरूपेत्यत मात्रसत्यमेव पस्तु, दत्त त्वमिषचनमात्र पट इति परिकल्पनामात्रात्वायम्यस्य, संसारानुषपषत्, परमावस्तु पथात् पूर्वध भाषापथा रपस्पास्मा नास्ति तया संयुक्ताषस्पापामपि, यपोस किबित 10 कार्य मुखिपूर्वकं पुरुपेण क्रियते, स्वत पय च कारणात् प्रर्यमुखपत इस्पेठम्मूपा तेर्ययोप्पधे-सत् कार्य यथा स्मादिभिरामशादीनां भूतानामुस्पतिरिति पाचोयुकिमाण मक्रियाषक्षामिमत्वादिति । (प्रत्येकमिति) प्रत्माचा स्पारिम्पति गस्पैव, न सामाम्पम्, पापभिवेकरमा- परस्परविक्किापनेतम्मानसममेव पर, वम तु वस्तुनोऽमिवचनमात्र मामिमुम्बेन प्रतिपचिनिमित्वं 10 समापन पर प्रति पटो व माविमा रम्यमान एप स रपा शमविकस्सितो बसविपरीता सकि- को सत्पावमिवार -मनेगन्ति सेनाबममिति । माफ मुनाममा एसिपापि पसान्तमा मामिमानिफ्लनिकरणमामा मन्तिमसोमानमाभ्यसरफोवाइ-समदापत्वादिति । ननु मामा मसित - समापस पतन पपमुवामता बनपरिक प्रवासानेप्रतिमा-परपानीति म धनी पीकर ममध्यानमा सलिमुश्मयते सामरिकामवासना सिमावोमेकान्तिममिति ममा । म्ममा ० मुस्मामा पाप्यम् , बस्पारम प्रस्ताविसमुराचे माचि स्पोपसमुदायस्पताधम पर सलमान प्परिमापामाम्मकारपसाराममहावामुरासलात तरम्मुरायमापशावारिवानिनिम्ति तमिपुपरी- अपसामान्पति । नाच-गादीप्ति । मुषमस्वरले बतुल पोमवा-मामिति । प्रकारममा माता स्मारिपरिपाचन समाम्बात्मिा परिमठापमपेममा पारिबापाविम्ममि सामरम्म विसम्मामामरिसतेच पाचवे स्पतिवापारमाधिपक्षिापयामेन म प्र म पियालयम्मुराया मनापन मते मतभा परमात रेल सन्ति मेन निमामिमा सविसन्त परसियावे मन पागल सामान माचे प्रकरण ति समिमि सचा. मलवा वर्तमाय स्पारपछि मिस एस सामायमर रमालारनामात्यभागो भाषा परस्परेति। एसप पनपावरफमाथि मिना भएसम्ममा बरिष परमात समपारमा मानना समरामात्मना सीसपमा पापा-माचिति सममिक्स क्णमास मिस: 0 वित्, परमानचिन्नु बापता पित पसिन, ते ममम माध्यमाब एग्रेति । स्मस पासामागायन स्पर- 18..सब शि.xx। चि... पालिले ।
पर्यासत्त्वसाफ्नम् ] वावशारमपचक्रम् सन् शमार्षमात्रमेव, परिकसमात्रात्वात् शम्पस, किमिव ! संसारानुबन्धवत्-या संसारस्मानुबयोग मावा मे पिता मे भावा मार्या पुत्र प्याविरमुपवारिपप्युपारिसुखा म्मबहारोऽवत्ता प्रेमपासनामध्यापति सपा समुदायोऽतस्वम्पबहारषासनया त्वसम् क्रियते, नात्र मित् परमार्थः, कसाई परमार्पः परमावस्त पमात् पूजा पवादोपु प्राइ पनपाविसंयोगास् यया रपस्मात्मा नाखि, पश्मविविसयोगीकवेषु पमामाचि मा संयुधपमायामप्योपु स्वास्मरविवस्मामाथि र इति, बोम्मे थे पावि, बनेनैप । म्पायेन विजितपय पटपटावि बुद्धिपूर्वक पुरुपण निस्ते, स्वत पर परमात् पर्यमसियत असम्पपे सेवदुत भगति, धवा पुनः प्रर्यमुखपत्रे भरणपविति पयाध्ये मन्यन्ते वयाऽनुसुम्पत इति प्रदर्शनापमार- योपवे सत् पर्यम्, सपया-पाविमिरिमावि, शमारिवमानाम्पत्र रूपाविमहणेन गृहीयानि, पाचोमुचिमात्रेण प्रश्मिाषनानिमत्वारिसि] पाऽऽकानपीना भूवानो शमापेकोपरोकग समिके- प्रक्रिया प्रागयन्तरे म्माममातस्याम पुनरिमायसे । " मात्, 10 सामनम्- यदेवत् सन्माम ततोऽपवेष तु कार्यम् , तदतुल्यविफम्पत्पात्, पाविसपुप्पयत् , कपमतुस्यविकस्पा! शशदादीनो कारणानामाकासादीनां कार्याणामुमयेपो सत्त्वं कार्या णामाकाशादीनामेष सत्त्वमिति हौ भावुपयोग्यौ, इतरयोरम्युपगतप्रतिपक्षस्यावादामाषात्, संसारानुपायवदिति । भरी-पपेति सस्पत भारमना म पर न पध्माता सम्बन्योति बप 18 परस्परममुफ्मक विनाविप्रेमास्वातपादन में पिता प्राव मार्या मावेसारिस्पोपमलिएमा सारममनाना स्वत्वभानो ममाए प्रपतवे सा मामूला समुदामोनामिनापहारपियो माठि मार म्पबहारे मन परमाों निबपी मा । तर परमाभूत क्स प्राषित पाने-कसहमति । यति म्सहारपियोमतो पासनापीपक लापस जाममा वस्तु मी भाषा । बलुवस एव वि म पबिपरि + पयाचाोषमावात मदरस अभिगममा बापापातम्योपस्मातामति सावारिसोपात् प्राव बावारिनिवेगाव पवाद मान रकमा बनारमा 99 यसते सम पचाच नासि समायणायामपि नापि स्पादि पूर्व फ्यापि विपते तमवर्तमामाप्रमामपि तर पाधि कम्पपादन एस परमार्थ स्पाविसमापसे समरपान सम्पनि प्रस्तुमान माम्पनार-परमातस्विति। भनेर मान भावे समावि मित कार्य पुस्पेष पुनिसामे म्पिते बत एष तु परमात कामुत्त्व समेवा परी पति-पपोच्यतेस्मादीसि । धर्म सतत कारवायत की सम्पत मत पर्मनी-पिंपोच्यत इति । कार्य सम्पाते सोष पर्व मामत् पय मानिमिरारामारीना भानामुत्पत्ति निस्पति-सत् अर्यमिति । मारिफरमितिमाह-शमादीठि छमसन्मान स्पर्षतम्मान स्पान्मा रसतम्मान मन्यतम्मासमेतम्या पासामुस्क- ते, पा-ममममममावागारमेवपुर्ण समसमान सन्मानार गुपे बामु ममतपणपार रफ- पम्मानात् नि स परस्परमारस्वात् रस्टन्मानात पय माप मसम्मरसम्पबार पक्मा- मात् परमपा प्रविमलोपेतच भूतपिशाबामपति तम्प्यापाधादिम्मामा सनिमिषा एपेठि सांसम्मिी भाः । तपसम्म मिमी-पायोपुझिमामेति ममि प्राणायमादेव प्रतिमानानेमामाशिवम्, मनिष मिति अररियस कायम मुस्लामस पारपारगममान्टिजम्मा मिलापारेष यता मुरासस चावलि मा सोमव प्रश्मि प्रारिवान्विरे मामासानसम्पामायत सह-प्रक्रियेति। माध्यिारेज .लि.xx.
म्यापागमानुसारिणीम्माम्मासमेतम् [विपमविपिनबारे ननु पटापामिति, यावत् संसमिसनमस्तिको दाउनम् भनि मिलेकसारूपपटारिसा- पारिसबोम्मते, म, समुदायत्वात् नानमन्तिमसमम हतो समुदावाइटस समानियन साम्पत्वात् पटपमानमन्तिममाम्तेपी, सपम्पारिस्सिवेवरफ्तेऽपि सस्पमिति पत्-छम्नीमविस्पेषु रूप सामाम्पसत्तमनरसिम्हपन एवरमारनेमनियमिति बत्, न समसामान्पसमुरायसाम्यतात, गतिविविधमपम्मतिरितसामान्मरूपस्य समुपायाम्सम्य सत्यासिरसतुत्साहिपमासिन नास्तिकता । भभुना बस्तत्व निरूपपति- प्रस्पेसचा स्पादिम्पतिर्मवरूपैय, सा पानपस्सिकम्मेत्येतन्माप्रसस्पमेष पस्तु, तल त्पभियपनमाम पट इति परिकल्पनामामार्पवासाम्यस्य, संसारानुबन्पषत्, परमार्थतस्तु पथात् पूर्वच भावापपा रभस्यात्मा नास्ति तथा संयुक्ताषस्थायामपि, ययोप्पेत हिथित 10 कार्य पुरिपूर्वकं पुरुषेण क्रियते, स्वत एष प प्ररणात् अर्यमुस्पपट इस्पेसम्ममा सैर्यपोप्यते-सत् कार्य पथा म्मादिमिराकामादीनां भूतानामुपधिरिति पाचोयुकिमाण मकियाषशामिलस्वादिति। (प्रत्येफमिति) प्रनकाचा स्पारिम्पति:वरूपैष न सामाम्पम् सामागभिवेत्रापा- परस्परविविकरूपमेम्मासम्मेष वस्तु वसा तुपस्तुनाऽमिषवनमा-माभिमुम्पेन प्रतिपचिनिमिर्च समुहापाचनं घट रवि फोरम इत्यादि मा मध्यमान एव स रा समविकस्सियो पसुविपरीवा साति- के. पवारसनियर र मममन्तिमेशापममिति । भादो मुपाकरता एकासिमसाप पलान्तर ममिवासिमविरकतामायापनमन्तिमयोगानमामासाना-समुदापत्वादिति । बहसपीमाराम पमाम्मम स मम्मपाक्वात् मनवरि करवाचानवास्तिकोमा अपरूपातीति स्पं . उम्मीद सम्मापास्मा व समिभुपमम्म समारसम्मलादेवालास्किीम्सासम्मोन्टिक मन । सामान 30 समुपमम्मत पम्, दब पामो छानामगर माथि समीपसमवायरममासम्, म काका मनिममपसामानसम्पराम मरेसमुकमावात् बामसमुदायमाहवाधिमाभिमानकातिलमिपुरकी- पसामान्पेति । साप-कादरीति । मुहावटले सर्व कसेना प्रत्येकमिति मेगास्मन्म नमामा पारम्पपिपिपलायन सामाग्रमिरा पापमपादिमतपेक्ष्या प्रारिम्पारम्पमित्रता सापा- हिमपतपयस्मिक प्रेम बानियापारमधिमायापमानवा फ्ये मम पिसानिम्मुरामा समाज मिसाप्पारक परमात रक्त समित सम्पनि छाजिमम्ता पर मिठाये मन सामान्य माम्मा पाको प्रत्येपच इति एमिनमाण सामना पर्वमा स्पानिमा वि समपामासमेत स्वभावान्तामाप्रपामारवि भाव । परस्पोति । एतमा स्पपल स्मपरिमारिस निवासम्भहा मदिर परक समून पराव पानानिमम समुदामामा पीपलमत मार तम स्थिति समरिमा पनुभूतम nिामुराक पिम् परबाभूताम्पिका मत मानिसमा सर-उपमान पाठि। पमस परमपनामामा मामार- हि...बम xिx.सि. म. ज्याभिने ।
- . अपादिमम्पादेपैग्सम्यम्] भावशारनपयाम् पपत्यसहमपात अप पम्परहितपिवितस्वम्परूपाविमादुर्भाषघा भूम्यादिमादुर्भाषः, तप्प कार्य सद ति निमितं ततः कायमेव सदस्तु, म्यापसत् स्यात् सहिरुक्षणस्यात् सपुप्पषत् , स्वर- पतत्त्वेन भूतत्वापादा परस्मतस्याधिर्माधिना ससा कार्याद्विवक्षणस्वाद, मपेदमपि सत् स्वतत्त्वप्रादुर्मापास्मकष्यते धवस्त_लक्षण्यास् कार्यमसत् प्रामाति, अस्वतत्त्याविर्भावात्म फस्यात् , अस्पतवमवत् , अय मा भूपोप इति सदेष कार्यमिष्यते ततः स्वत एव प्रादुर्भमेत् , । सत्त्वाद् रूपादिनविति तुल्याविर्भाष प्राप्तः । (अपेति) भय न मूम्पादीत एकमेचरसपाविपरस्पोकर्पापकर्परपम्परीत विविक्तवरूपहपादि पातुर्मावषम्पानिप्रादुर्भावो पैठपण्यादतुल्पविकसदेतीप्यते सब कार्य सोनेति लिपि वा अमेम सवस्तु, न रूपावि स्वपररूपैमातुर्मासपेठमण्यारनयोरसता सहिमाम्याम्पाचमत् स्मास सनिक- मणत्वात् अपुप्पपत् सहिम्मपल देवोईपति-सरपसरलेन मूवस्तात् रूपाको पररूपवत्साधि विना 10 सवा कार्याधिसम्मत्वादिति भमेहमपीमारि-रूपाविसावत्वप्रादुर्भावसम्मेऽपि रूपारि सत् सावरक- प्रादुर्माणात्मकमप्यते तवस्त्रेमप्यात् गर्यममप्राप्नोति, भवत्याविर्मापारमकस्यात्-रकोचररूपाविपर रूपवत्लोस्पतिरम्यवस्थापिका, र ससमय, स्पेत्यत माह-अप्रतापकाविति पयोमुफ भाम्प- माण फसमावसतस्मल्यगेन पानभासमुत्पपमान[म मदेव अर्यमपीति पब मा मूर पोप इति सदेम भर्यमिप्यते वा सस्से मत एष प्रादुर्मरेत् कार्यम् पपापं सदसरूपमनाराय प्रादुर्मगवि 10 अपाविमइमाने पते पर्यमपि च सच ममितमिति ममत्प्रभापमवायुप्पत समाते भपति । पप पम्पेति स्मारे प्रापुको वाम तय मुम्भविभाइर्माका स्पति एतररपानरम्परित परस्पेकपाप रस्तिष विकासमापि मम्पादयतु एतस्मारिवपम्पान्ठ पुत्री पा सुग मापा निशुम वेग चिगुप्मे वायु म पुन मामय स्मभ्युफ्पमार , दम्मादेषु परेणु मे सस्तापाया पास्ता भूम्यारम परिम पीन - स पावरपे या माय बापी सर्व समाज स्म मधुरो रस तेम्स रप्पा स्पर्क सभासर पम्, 10 पायेबापत सर्प. भमसालमापनि सादापों स्टोचतवमानप्रवेमारपत मालम्पसमा स्पादिमन्ने स्मारणा का एक स्पाये न भूमालिका मम्मातिप्राइमा मतप्रादुर्भापरिणाम तम्पर समाधिस्मता - मम्मा समपि पुमाइसतर्मस बामएफ्पाम- पलमेकी विधिसमिति मात्र । यसविपरन स्पार सब म्पत्, सहिमपात, पुसा मी-वता कार्यमेवेति ययममयोगमा कर्म सरिपतवार समेत सत् भाष तु कारपनि भाग । सम्पयवसायमानद सपरेति, मातिप्रायुर्माता तापाप का मूम्मातिप्रापर्माना पास्पाइमांग की गति मात्र । एतं मचे सलमानामपि काम सार, मेव सरप्पा मार सत्त रिसमस स्पाना सवार-भसत इति । योपनलमिसमा सरूपवतोनाति । कर मनप- बामामिलालम्पसमे एमपि स्पानि पर मतपप्रादुर्भावास्योपवे पति निम्मानपत्र सत् मारमा - भयदमपीमाठि। दमार-भस्मस्पेति परम्मतरक प्रस भूमारेरापिाप-पम्पलानिर्माण तमसात तेपो भमराव परिणाम भाला निदर्शनमार-मगावसम्मदितीति। पति-पपोस्मुकमिति । पर्म-30 सि.....मामा म एम.बपाय । - म्यापाममानुसारिणीप्यास्यासमेठम् [नियमविभिपारे तपदि तापमयसत्त्वं सत्त्याविशेषात् कार्यकारणयोरपिशेपा, सति चाधिशेपे यया सम्म सत्ता एय शम्दादय उत्पपन्तेऽभिम्यम्यन्ते या वयाशमशादयोऽप्पुत्सपेरन् सत्या- विक्षेपात्, स्मादिषत्, सम्दस्पर्शायकोचरपरतत्त्वोस्पतिर्मा भूत् , इप्यत चासा, तस्माचद तुस्यविकस्पता सिमा ततखसोऽम्पस्वभाव कापम् । (यदेतदिति) गोवत् सभाम सवोऽयोग । प्रर्यम् , सम्पतिरिवनमा साम् समात्र न मपीतापी, वास्तविकस्पस्वात् ] प्रिमिय' रूपापियपुमबत्-पमा रूपाएपः सन्ता अपुप्पमसत्, वस्तुस्परिकसं न भवति तथा कारः ससिपारिमिः भयानमावि तुस्पविम्म न मपति वनात् अपुष्मवत् सतरवोऽभ्यसमावमिति, एवस्म साधनस्मासिस्पपपर्ममनिराकरम्पर्य म्पमापपिर्तुगमा सत्यमेव पति परोक्या म्यास्यापयितुम् समतुम्पविप इति वर्ष महेषु को बापुपयोम्पाविति वरेजोपम्पसति- समादीमामिपि इह पयावा घरपनि विसदादयः प्रालि वेपामुमपामपि सत्समिसको विकासा, तिीया पर्याप्पागमादीम्मेब सान्तीति न भरपसत्यमर्यासारनिकस्यो माभपा सत्तपिकासो रा स्मात् । अभ्यामिवरयोरभ्युगसम्म सरमर्यारम्म प्रतिमघरवाईसपमत्वमेगयो पापामापाती मेनोपयोम्पो चापि वपरि वामपसत्व प्रबमविस इस सत्ताविक्षेपात् परमान समापनो भर्याणामामारीमामविपः सन्ति पाविझेपे पथा सस्पतला एक-सम्मस्पर्शहपरसगाव 1. वत्स्वा एष समापय प्रपपन्वेऽमिम्मम्पन्ते या बाऽऽप्रशारयोऽपि तस्साम्प्रपा पोत्पपरन नापिका- मापाः परमात् १ सत्त्वाविशेषात् सादिवत् शमस्पर्धयेकोचरपरबत्तासचिर्मा भूत, इप्पवे पासौ, वमापदनुस्मविपासना सिमा, यस्तोऽम्पसम्म अमानवापसपिन। प्रमिासानिकल पावणी-परेतदिति । असमासत्व समाति परेवत् सचामेति, पठानमुभव कामावर पादिमियभाष मी सलमान न माप स्मारवा पा त्यामापा मारा पा ससम्ममा तमा म्यो स्मरबमारालामा साप. पारकार्यमानचालन म्पमत- बपुमान सत्तोसामिति मात्र । सम्पविरामात पाम पाटामिपिसाबकिनारम्ति पोरमसत्यापरिपाटीमा-पतम साधन मेति । तुलसिपलपावन । भरपका सत्व परमेल कार्यमेन लभरपोभरपतम्या भक्ति मो। अमिमनमिमतबिम्पनिम्मानमति-पतुर्विति । अनिमाया-मेति पर न ममत, परम्म पार्षपति मा वापिस पारममाह-पाभ्यामिति पालारमबोसल पार्यमा उत्पमितुपाम्बा कम्पोर्णिमापदरमुफ्पतसम्मपथपिकाबारम्पमतमो न कर मार रम्पराग मिलायात् वायोपपुवापिति भागा! मागोम्मरम्मामाविमचार-परिवादिति । ज पारपोममो समति सत्यागी बाबामासानाश कियोसा, पते कारवाषनार्य प्रमाण माविमा पापागोमामला पवाय ना मानाचार एमीभ्याला मान, पिपरमे मागपत्ता एसोत्पफ्ते मम्मम्मते पा मम्मामयोऽपि वपसमावा एसोसेस मिनपरन् मा बताणामुषणमा प्रत्याय बिते पर सम्मानित मानधरतुस्परिक मिति भावा । परियामपुरतमै दोषमा सति चामिशेष इति । एमपरका गरे नसावागरेपलावलम्मालास भितिसत इति । नमामि पि पावणार्भात .सि... पल्लामामुमम । .. मप हिकमत पत्या पोम्बोरखे ।
सपसत्पभोपा] पावशारजपचाम् tut पीति सपाविसमुदायस्सापसुवेत्पमुक्वा, पापेन लियावि, पस्तिप्रिविति सामान्यवरनात् विभिप्य पासीनिस्ते-नपमेव प्राय सत एषाविर्मवितृत्वास, स्वरयविति सामाम्पसपनाइसमविति विक्षिप्य रयन्वा, एषम पाणामपि रसादीनां विशिय प्रसास्वमिवरदृष्ट्याम्पसारवादतिरुपम् प्रलमपूर्वकचारनुमान स्थापविरोपा, नरमात् मत्समस्यापपिरोपानदेव मवति-रूपापेर बस्पिति सिनम् । अषदोपववियुमयसस्थपर्ष स्पक्या कार्यासस्वाभ्युपगमपरिहारेण कार्यसत्त्वपक्षमे । पामयो, तसा कार्यमेष सदित्यवपार्यमाणः पक्षः स्यात् , सत्र कार्यमेष सविति कार्यसमीपे एक्कारः क्रियते 'यस एपकारसतोऽम्पप्रापपारणात्' कार्यस्य प्त्येन निपमास् कार्य एष सत्त्वं नियतं नान्यत् सविति मियम्यते ततध रूमादि न सविति ते प्रसकम् , तस्पासत्त्वे कार्यस्मासमा सचे विपरीता संज्ञा क्रियते सतोऽसविस्मसतय सदित्यप्रिम नामबत्, कार्यसस्वमिति प नाममात्रमेय । (भषेपमिति) भोपपरित्युभयसत्त्वपसमुनोपममात्यक्त्यापतर सत् कारण रूपापि, प्रय बाऽऽकाशदीतीपमाणे धर्मसमरिनो मे प्रातिरस्येम प्रर्यासस्वाम्मुपगमे वादापसान मा भूमिति प्रर्यासस्वाम्मुपगमपरिहारण परपसत्तपम सफ्त्या प्रयसस्पएकमेकमेवाऽऽनयेस्त्र वन पर्वमेव सदित्य पभार्यमाणा पक्षः मात् वम्मत, प. पुनदी प्रमेय सम भरणमिति प्रतिपपने, यस्म सिखाम्ये रूपाइयो म स्मरामस्याग एष स्मुरिति अत्रोपवे, पस्नोमयसादिनः साम्पस परमे प्रर्यसत्त्पसियत 11 अपेदन पया, परप्पविनामादित्वात् पर्यस कार्यम्मुपगमेऽभ्युमासमेष भरणम्, रिमु न मियम्पते कारणमसरेप सदेम बेति, यदि मावस्तु को पारयति मर्यन्तु सलेम निपम्पवे तत्रापि प द्वयी गति:- 10 - यता प्यार-पाय चिति । म्मान त गरि पनि प्रम् , सत एनिममितत्वावितरपति मून बलिय पिनाति सम्मानो विधिमा संगति-परिधिदितीति र परम्पससम्म प्रापाग्यम् प्रतिबन्ध बोपण्यावामापात पातु परिषद प्रममिति पाम्मम् , मा गतिवित् परन म्म बियमित उमेरमनिकनेन रसारित रिसर,मराव रस्मे नियमित मासिरिति रिम मन्बारामपि मामम् तुम लत एनिमचितृत्वात् मत पिया ल परस्पाप्पेपमाऽनिर्ममिहारिधि माया सब रुपमा प्रयतमिरोष सिसोत सानुमानापविरोभोऽपि निहाति प्रम पसाबमामाखमपाल माति मस्त म बिमारि, प्रमावारिपालारिति मिमिया पयति । एवं कार्यकारक गरमको स्लपोप्रेतोपप्रसामवापस परिसम कार्यमेव पति पयो पर परिमते घरोपोरिणाम हमेष परामुल्लाप मार-ममिति । उमसलमेरोपति अपने परियममरसताप्रामेति परम सत् कार्यमे या परिस, पर्यावतका कारणमेव समितमा परमाणु पास, वा मरिन लवापि नसिव परणार मारा- माता, दारासान मा मूति स्पर्म समापवम् पर्वमेव सरति मा परक्सासम्मको मत परिते यपि ए 4 मासी-भदोपपदितीति । मनिमफ्धप्रदान सामावाम-पता धर्ममेष सवितीति । स पापोमा पिसार-तस्पेति भये या सामसर पर सत्तामागुम सीमा। परिकार्यप सपनिमम अनिमगार-कारणाविनामाविस्थाविति परमेला म माति, मेन र प्रसनुपपामत वेव पास परममममममममीको तमान पार नसत् प्र मानिसमापि सम्मम्। किमु भरण मी मम्मकर्ममेव व विनिमय पर पाऊसय मामले गरिमा परम्मत नाम इति भावा। पर पो बिमा सिमपति-पवापि विनिम्नव इति पोका बर्मा समान प (1) 10 १.30 पापागमानुसारिणीम्यास्यासमेतम् [नियमविपिनगारे रसोऽपि स्परूप बना सळशनगमा परस्पररूपम् , किन्तु सनेव रूपेणाविर्भनम्ति तपाऽमध्यविधमपि सस्पमेवाविर्मोस् परस्पप लेगणुचरमसम्पाविमपन्तीत्यनित्तुस्पाविर्भावस्ते प्राप्ता, सत्यापारिए दिलब प्रादुमाग्रीष्ठमपासुस्पवित्पत्लमापतित सनो स्पारिभ्या पर्यस्य । सदमिकता पातुर्माणाषिक्षेपमसात्पर्पयसानं चक्रफ तत्रैव प्रसङ्गे स्पिन सत्वादूपाविष । विस्पुत्याप्प सत्त्यापादिवविस्पेष विपर्ययेण गमनीयम् तस्मात् सतोऽन्यस्वभाषमेव कार्यम् , पषम्तु म्पादिप्रतिनियतारापषिपपत्यात् पपिम्यादयो न प्रस्पक्षाा, मनाविर्भाम्पस्मात् सपुप्पषत् , म्यापप तु यत्किषित् प्रत्यक्ष स्वत एषाधिषितृत्वाद, श्वरवदिति प्रस्मवस्या पषिरोपानदेय भवति । (तपनियत इति) बनिया प्रादुभाषाविष्पप्रसापर्यवसान पहा वोग प्रसा सिर्व 10 सत्यापारियरित्युत्माप सत्यापारिवरिप-पुनरिधानी भूम्मारिमाहुमावसुस्परूपाविमाहुर्मानमर्गासवं पावत् सिवं वर मूम्पावित्रायत्तं सोमसम्पावसरूपोस्पचेसमाप्य वत्पर्मवसाम्मेष पा वरिपर्ययेष पापम्पतिवनिति गमनीयम् उस्मारस्पपिम्पलात् सतोऽम्पसामावमेव पर्यमिति प्रदायी, निमाम्पत्-एवस्तिमात रूपारिपु विपयेपु परापीना प्रतिनियत प्राप्पम् पा रूपमेव निया रसमेन्मारिमाम म्पतिनिर्माणः स न मात् पमुण्पतिपयत्तात्, सपारस पपी ममर्म निपवाय- ॥रापीन विपपा पूपिम्पारपस्त न प्रतिविषिष्पानिलवस्था मन्यवि म्याः, पस्मारनाविर्माम्पत्वात् न प्रमसम्पचमा प्रविम्पाएमा, प्रतिनियसबापपरिपपत्वात् पपुप्पमत् बारिमाणामुमाम्यपविषमता- भवसत्तोपपपाराम सत्यमेव अपम्मालम्पते भी खत एव म प्रायो भन न तु परस्पाकमा प्रसार समापन-भप मा भूविति । पन्त भागा-पय पमिति म रपास्विस्फममाया रथारपि मतम मनाम और स्पेमातमी स्वाम्मावारिसर्मपि मम ममापिरफरमाय व स्पैच मरम्, मेष सरस्मेपनिर्माण भाष' । रन पर काम स्मारियोशापविमल प्रार्मागोमपातपस्विनमान- सत्तापादिववितीति । एक प्रमुर्मचारिपामा मारित मास माहुर्मापनमुम्पमे सूखमममेर पुन पुन मानिस पनि इतिसरमा निर्मचाव मानमिति म पति-पुमरिषानीमिति, एका पार्मस स्पोम्पपिपवात पोपलमेल मिति सारा+ । बस्तरमार-पपरियामाहीति पिम्माना मालामाले प्रतिपानिपत्याएमासमेव मामले प्रीमियायाम सम्पपेन प्रावि, स्थिा रपमेन प्राय फबत ला सा मी पानिपतम्याभिष, मारनामे व कान मार प्रविमानानपारखानामा ममियो माद, कायनानिय पत्ताब प्रया पिम्मारक मानापमा पि, प्रामाविम्बासम्मबिलात भर परमे मचा-पादि मिति सजायपे पारस पीनमठमेत पान्ति बानिर्मातान्ति म्पस प्रतिमिनमा निभाएर बीमिकामारिसका बाहिना न प्रमा पानर्माम्य पार्माम्मत्वाचनमारमा प्रयापी BORATOपरपस्ताद पुप्प भार । एस प्रमाणियोसमापनियतात् प्रमानापिया मानिसमुपपारस रियादेसलर माविमामादिदि, विनितारास्तिमिमापि । पिनासम्मले 12. रमपुरमवानिकीमा ।
. समुरायस्पताऽऽस्मयः।] हारशारनपषम् विरोप इति, किसाम्पत् परमधर्ममश्यम्पाय तु स पनोमयसत्त्वमापोऽवश्यम्भागी, पत्र बोलोपा:- धनुत्पविकसत्तात् सवोऽन्यदेव चमियायुपगम्य पाये व एक चामस्थिता इति, ख माकार्य मेष समिपमारणे दोपः। मप सदेष कार्यमित्येपकारात् सदनपते पूर्वदोप एषेति । (अपेति) भय मा भूवममी वोपा इति सरप कार्यमित्यपपायवे, पद एयभरखतोम्यवानमा- . रणमिति, सस्पेन प्रर्य नियत सम्पन्न नियवम् , प्ररणम्यापि सत्त्वाभ्युपगमात् , सवनम पूरोप एम-समयसत्सवालोप पनति । यया प पूपिम्पाषेषमात्मापि संपत्या वस्समुदाये प्रज्ञाप्यते तस्सन्ताने या, 'राशिवत् सार्पषत् , नन शुरूपदप्रयोगादेव नासधास्मेति रूपाविषदेवाऽम्प इति चेस, शम्बाम्तरषाध्य स्वादेवानन्यस्यात् , यथाजन्या नररया पद्वीपवती शम्दान्तरमाच्या सेनेति, नरादिपपमा 10 वेखा स्थापस स्वम्, मात्मनस्तु नाभ्सपायम्माषाचदारमत्याध साप्पो, भनम्पन प्रारपि समुदायस्पानाम्सरस्पान, यया पशिलराधिम्या शिखरिणो नार्यान्तरस्पम् । (पपा ति) पभा प निम्मायेबमारमापि-पमा पविगीपटामिन स्माविम्योन्यानि न सन्ति दया रूपानाविधानसभानसंस्परम्मा सम्मम्मोऽम्म भास्मा नाचि सास्मा वस्समुराये प्राप्ते वसंगन बा, पमा गतिवत् सार्पपदिन्परिधान्या' समुरारासयविपापना रूपारिमात्र 10 वस्तुस्वप्रतिपादनाः, रसन्न पास चेतसि भाषनोलाइना रीममार्य नाम, पत्राद-ननु एरपर स्मात् वरपरस्पदो पर स्पात, दापि प्रपम्माम पधारपि प्रपन स्मन् पायापाराभावमा प्रमपि पापाणे न सपमानसीबवाम पार्यमिति बानी सम्म सत्ताम्मुपगमे वेनाडुमारन पिरो भाषः । भागे धर्म म मत पपा परस्त पनि प्रमनिरोग पत्ताभ्युपपम मा व्या शमादिति । उकया सरपे अपरम्मामा पमे व परक प्रामपसलपा भापतिता पच पास्ट पा सा-परणे कार्यससि । तर कार्यमा सीति पो 20 पेसा ग्यपवरी एवं तापविति। सम्मेव सात पझे समन मुरिति सरकेत कामाविष सरपट भाटिल कारममापि पत्तालिममुपगमे त एभमभरपनरोपा मास्मिता सा-भय सबति। पाचरे- मप मा भूपमिति परे सस सत्तपो मारन विचारत रागामी प्रमाण मासत्तमा जति मान । पावसापर्वाम्मरमगबनस्पाला एक प्रवि-भावमा महानायक प्रविमा भाप र मेर बारममा प्रम पति मुरामलमनिमनमानमेहमारमाऽमीमार-पपा पेति । ननु पनि समावेम्म उपमम्मट पप से भामारमा वागावात रसम्मठे मारापास्मसात् २ मानसंग शिकायत निवार प्रभावामा सरप्रमाणावमा पास्मानिमच मापाप्रति मिनु पूषिमाविधारमा सररमा प्मुराये सन्ताने पा मेमप्यत इति पापो-पपा पूपिबीपगदीवीति । पमपावार-रूपचंदनति । कास्मे चार-संखेति म्यस्सिमुरापे स्मारिवाने वा पाय पिम्पारमादि प्राप्पत सामानाना-पपा पशिष रवि, मणिमुरले दिए प्रमिति माका । मावमार-समुदापासस्पेति। परप्रान्तममममार-20 रशाम्तेति। ममामी परमार नामा गरमा नु स्पा बन्य एस, मरमत नामासमारसम्म एम्मान पातमिशापात-मर गुरपति । समान्तरमाणमनम्बरमा पापसार-सम्माम्वरवि, प.. सि.म. याकामलामोजत। सि.का. 'माकारि।
१०७२ पापागमानुसारिणीम्याम्मासमेतम् नियमविभिगारे कार्यमेव सत् सरेप पर्यमिति वा पत्र प्रमेव सविति कार्यसमीप एषभरा पिते, मत परभरणतोऽ- म्पबाबपारणमिति कार्य सरक्सरपार्यमाणे कार्वन सत्तेन नियमा-सत्सम पर्येप[म नियमात् कर गऽपि सत्वमिति पूर्वपिचारिशोमपसात्तपम एषाऽऽपवधीत्सवपारपरेफान खात्, तथामिएम् उमारेरकार प्रपासापास्मात् कार्यशपापम्पन्न सफमा न वावियोगिनि नियमः पर्ष सदेवेति, तरपति- सस एष नियत नामसविधि, वविध स्पानि न सरिति ते प्रसच्म्, प्रेसनमुपसम्मानसासस्पे पर्यस्मासतः प्रसपापमुपनम्बमानस सरव विपरीवा सामनीपिकना संका निते सतोऽसविलसवा समिति, सामानिमाम्माममत, पमिमापभिमत्ववत् । पापि प पर्यसत्त सारपियापरीन सहिति मामेधि नाममाममारमेव मार्य प्रति । 10 कामासत्त्वमित्येवम्वत्यागाध स्पषपनाविषिरोपा, कारणे कार्यसत्वम्पाये तुम एषोमयसस्थवादा तन चोका दोपा। (कार्येति) सत्त्ववित्तमम्तमागा-भमुपगतस्तैकान्ठेन सत्पर्य मिनस्य च त्यागा, न कि कार्यममापि फेनभिप्रकारेपेप्यते लपेसम्मुफ्गमविरोपपत् सवचनादिविरोपा, पति प्रर्य [भरत का समिते इविवि [सममय सत् प प्रमिति समपनविरोपा, गोरे कार्यासत्त्वं मरवा वस्सिा 1॥ [पंपगमार्मनात् सोर्गेपिरोपा ममप्रापिचवन[5]ानामुमानविरोपा दबा दर्शनात् ममय- मधिन मात्र पनि माय । पाग सपित पनि निरामोत-तापामेति व सगर र पतोमाला- रममिति मादन प्रापि भूगमात्र एपार पवन मिति कार्यम्, समाप कार्यमित मत नलवाय समिती सत्तम संवत न निलम भिरत व्या व सत्ता मारमान प्रारबारबार परमपि प्रत्यापियमित मर्मसरनेमक्यालय पर पुन प्रापत वमेव प्रसपास मिग्य मापावेत मार। पतारम्यान 20 पनि प्रकारान्तरेव नियम दम्पति-समारेषभरेति नदेन ममिन्यात एषगरा प्रावन्नर-पप्रमोपी पारणे पाना सम्पपति-पारिति । तदापाया-सर्व प्रप एष मिपतमिति तत कर्म म पनि उन व पारम्पमात् पर्व मास्ति मपति नाम्पत् सो सामान पर स्मादि प्रति मामी भाषा । पर रोमाह-सन्ति वासति परमस स्मारत प्रपम्पते प्रममावस तसा मारेर मत प्रापापम्पम्पमत पास पतसम्मतिर समय सालि पल मामामामा निवे परिसम्पपश्विमणापत माला। पदपि चेति पार्यसमिति नाम भक्पिारे समिति नामपदेश मा सानो की मात्रा मा चामत प्रसामि राममेकाम्न छ वा भुपमा समानार मिरोज सुमार-मसित्त्वति। मामा-मम्मुफ्गत मेति ला पिपि प्रकारे यमपी मापते तमा परमाणमा रोष व समालरोगामी मा । समक्लादिमिरोषाला-पदि कामिति, पार पायममद, तर पर प्यूमेव मित माता मताप्रवासम्ममा त प्रक्रिया मात् समन् कम निमम्, अब पनीर्मम् सपोरोिवार बर्मन प्रगमनमाम माम्पमार, सव मिसान्तपालमा सदा ससनिषाद सावमिषा प. प्रश्न कार्यमा म तलिम जबर ममीयर मार-पाति । हुम्मापदीति इम्मकारप्रणीतरामार-मामा पापाम म्भात् मारपरसम्मान प्रतिविमिसापर्व समाप्रदिप बत् माप मापनि पर्व अधि...वि.म 1मिमस्मादि।
- . भस्म सममिना] घदशारवपचक्रम् १०७५ मसिद्धिर्यमा वपतिवर्गमाषेऽपि वयार्मसम्पन्मादिसम्पबहारप्रपोजनसिसि पास रूमानिपु लम्भे मेष, अवसहरियष्मपरिकल्पनापर्ममिति नः पुनरात्मप्राहा प्रबर्गत लवोन्मवे-औदासीन्याचसापेप्पि माति-वस्ताविपार प्रमोदासीम्पात् पसाफम्पवतविपरीवास्मपरिपस्सन[]पा विपर्ययमानीभूतत्मात् पित्तस्म मानातिमानारिसप्तमानान्वर्गवाहमानाकामसंस्कारानुशयापमानास्पाइसमपर्मनिधिसपासनापरिपाया- त्माऽवीसारा प्रपते, दतः पस्कन्दम्पतिरिका पुरुप वि, पत्र पसुवोऽस नमस्म दर्शन प्रदर्भिवम् । । अमुना फसमन्यपिसोऽअमिमवभिपयार्यमार- पषध म्पादितत्त्वस्म घस्स्वन्तरसाम्रयथार्पस्वाइन्सुम्यषस्थागतिविनिर्मुक्केस्भया- पस्तुत्यमापादयेत् सेति प्रतिपत्तेः समभिरुवा, एकीमावेनाभिमुस्पेनैक एष म्माविरपसा सो संज्ञा सममिमा, यस्य सतसंख्यस्पापीदमेष लक्षणम् 'परमो सक्रमण होति भवत्यू णये सममिस्ने' (माष० मि०७५७) इसि, समार्य नियमविपिविक्षघा भिमस्य शतभेदसममि-10 कदेवस्म गुणसमभिमस्य नाममेवः । प्रपत्र स्पादितस्वस्पेष्यादि, एप नमो रूपाविमात्रमेव बस्तु, सब पलन्दर समुपापाम्प म सहामवीन्मयो पटाविसमुदापनस्स्यस्तरसहाम्रपवार्यस्वरोपावस्तुम्पबस्पाया पा गवितो बिमोरयो वस्तु समसागतिविनिर्मुक्षेपटाविसमुदायमस्त्पन्वरसहान्तिः मात्, सोमपामस्तुस्वापावना मात्-रूमा गगा समुदायमापस्तुनी स्माताम्, रूपाइया समुदामरूपापचे सरूपेऽनयमितत्वावपस्तु, रूपादि-11 समुपायो रूपाविषत सस्पेण तस्मानवस्लिवस्वारगसिपस्युम्यावस्तुत्वमापारपेस् सा-मबम्तरसहान्तिरिति- इस्पं प्रतिपचे समभिस्स:-एक मत्कीमावेनामिमुमेनेक एम स्पाविर एवेति पा या संदा तो वो सममि- सा, पम्म सम्पमापीपमेव माण-एको म सवधिो० इति ससम्म सप्रमेयमेवम्मूतम्मामोतीत्येवम्मण वस्सामीमूर्व वसंपादिमिर्युजियमममाह-पलूमो संक्रमण होति अपत्यू फ्ये सममिसी' (भा.नि ७५५) पति, पायमिन्मानि पौवाम बस्यो संक्रमण रोति अपत्यू पये सममिरे' इति सम्म स्वमेरम, n सप्तमपन्मतारनपको सममिस्त्रे तपा मिमे समा सममिसनोऽपमिति मम्ममामे गुणसममिस्तो नामाप पर्यापसमभिसारम्या, वनरेभाव पापमाण्[7] भप लिममविभिरमैन गुमसममिस्सस्स पुनरिमे समापारसम्म पति-पपप इति । स्पारेपल मिति पाइस इति पत्तरस्कान्टरम्मम्मे माल मराफाममापयत र सस्मेयपस्थिमिस मोर, समासोऽपि स्पतिदेव सम्पन्नमस्तिष्ठ भोप- पारसा सन्तरान्तिरापास्तीत प्रहपपवे एममिरम्मत की मात्रा ममिसपा मार-ए मोति समिरमाणे, बीमाभिमुस्मे, सीमानामिमुस्कनेसपालि एस नाही मरिमामपियवति सममिती माया। मेवा प्रमभिमय पर मनमनुत्पमिसार-पस शतसम्पमेति । पतसमसमभिमसे माममार- परेकोपवि। स्पमिसम्ममाप्यो म पूमो इति मनमा पतमेरस समझिमम । यानयवार मामा मरममा वभिरमा मिले सममिस्म मामराज्यपी स्मयाचे पारसमभिमरम्मा मुरम्ममि सयस दिपायापटप्रयेम समयावा तो दिसमपिविरसमिनाह-सप्तमपटवारेति। पुनसरामप्रदेणनार-30 गुपयमभिसमेति । भाषामामण्पेखि, सममिमा रम्पर्माकोमने पोसाविक व सह पीर- सिमामासासी। लिभरे बापूर्व।।ा. पवमाना। .. विविविध मितिषमा इति ।
पापागमानुपारिबीम्पारपासमेतम् [नियमतिको प्रयोगावेष मासमामेति पुरपान-सम्मान्तरेपोजमानस्यापारिपरेर मोम इत्येतच म, स्मार पायगरेपानन्ययात्, वपा[ऽन म्या[नरमायद्विपरवीन्मादि, पम्पान्तरसामनानचन्तिगणना वोपापापनार्पमार पुनरपि मरादिषमात्र सारसर्च-मत्रास्मनि नरामदीननं प्रबह सम्पद प्राधिपर्शनात् परसमशरन्यवादर्शन्यत् सेनाया। मापसत्तम्, पारमनस्तु नामाम, रूपारसम्मा- पाचास्मत्वाच रोच्यते एवपि बोचरम्, अनन्यत्र [प्रवचरपि समुरायिभ्या समुपास्मानन्दिर सात् वपया-पया 7 सिमराविम्म श्यादि। तत्रापि शिलादिविभागादेष न स्यादिति म पुद्धिविभागेऽप्यनम्पत्वात् पानात तथपा मरिमोद पानकम् , पर्ष ससम्मसु विज्ञानाविधर्मम्पतिरिक मारमा नास्ति, वपया सुमितो दासिनो रको शिरोऽवामीति 10 संम्पपहारसिबिपिज्ञानादेव तयैव पुस्पकर्मफछसम्बन्पादिसम्भवहारसिमित पास स्मन्मेप्येष पुनः पुनरारममाहा प्रवर्ग । मनोग्यते 'मौवासीम्पाच तत्तोपु' ( पंचकम्मत विपरीतारमकल्पनाया विपर्यपज्ञानीभूतस्वास् चिचस्प सप्तमानाम्तर्गसामानाकुसाहसंस्कार पनुशयात् बारमाऽवीस्पारः प्रपते पता पम्पम्यतिरिका पुरुप इति । (तषापीति) पत्रापि शिमगतिविमागगरेर न माविति चेत्-माम्मव पुता विमम्ममाया 15 मिसरा प्रषगुफ्सम्पन्ते पर मियी, म वापाविम भामेति वदपि न पुसिविमागेऽयम्म वात् पानफयत् वपवा-मरिचमोरेस्पादि पावत्यानमिति प्यम्तवर्णमम्, गर्यन्तिकमर्पनम्तु सम्म- पुरुविमानादिपर्मम्पतिरिभरमामाषसाधात् तपमा मुरिस्तो दावित स्मारि, माधु-सपिपाना- उम्मगुणविचारोऽन्तरसापनाच नामिति प्यान्तः पार्यन्तिकतर पुरुपेलापि, तप्पानाविप्रयोग रूपोगन्न बारमा समान्तरपाम्यवाद समितिमा समपरवपदानिम्मेजय ना मान्मपामा पल्या एमालम्पपीतम दे मोघ्न मान । मुगासात समुरादिता पन प्रापिनार सोम पदाम्वरमा ममिवारणा, मुरारम्मत मेनागा प्रारमनारमारमणम् , बारमा उपचास एष सापामाषामाबाम पापी कार्यापारमिलायमेन पो-रामास्तरपाम्पत्वेति। पपवीति सेनाका पकानरपानीम बामनि प्राविगत् मेनागाश्च महामनावनात नामा मात्र मानखम समुतामिभो मेरे पाप समर रिमाधम मवमला माय । पम्पन-मनम्पति पण प्राममानि मगमम्मुराविनोन मेर समिनिमोनिमापासम्म परमारपमा लियो माम्बी भाषा सामिन पापुरमा मा बिमानसम्मोस मिसरा मिलमय परपसम्भो वाव या समारम्प बाम्मामय पति परते-उमापीति! पामोीि-माम्ममिति का विमम्मपालिकामानिमा बममा सम्मले स्परेपप्रमेश नापत्यति मात । दिमागेपि भिमराव मागासम्बनाना पोखर्ण परिसरात-रिविमागेऽपति । यपिनमा स्पस्मारमेर परमामा मस्त सरा न्तोष मारपेन म पम सब परिमारियो को पतन सच्च मामिलाम्वरकप मार पाय ० सम्ममवा व माम् तम्मानसमुपासावरमान्विरभवा जब ना सन्तरसभात मारेक्रममगार .R ... समन। सि.....भन्नेमा यरियारलपन।
पाधयम्माम्या] साधारणपकम् तिर्न नस्त्वन्तरसफान्तिरिति कम, कस्मात् । प्रतिषस्तु पमामवनस्म भूवत्लास्-स्पस्स रसापास्मना रसस्स रूपापात्मना गम्पसमापि पात्मना-परस्परम्पावचास्मना सर्वस पस्तुना प्रतिनियतत्वात् , न च भवनेनापि म्यासिरस्पेममिवि मपन-माया संमममभावं माषाभाष इति मावी संसम्चिा, वमा एम रेवोऽवस्तुवा, समात् लिस्पुत्पतिविगविनिरपेपा रूपावपा, पन्मात्रस्म-पमावतत्तद सापख मात्ररूपवा, परमात्र सिस्स्पतिविरतिनिरपेठल्पावितम्मानस्पतायो सर्वसिदि:-सर्व सिमसि नात्र कथिोपा, मम्मम्म सव । मेदसममितमम्पपविवस मासममिस्टम पर्भनेन तूपावष्यमयोग एय रूपादीनामिति सोऽम्पति कमि बामहः नि ! इसय समेमामूतत्वात् तस्म, एष पार्य गुणसममिस्वनियमपिपिरुळा, अवाप्यपक- म्पम्ममाप्यनम्वरस्म नियमन वियः। पावनार्यमाह- एवं हि नियमो भवति मपि वस्तु, एप नयोऽनन्तरातीवनयप्रतिथेपेण पूर्वतरातीसषिचार 10 प्रसिदोस्सर्गविपिपचास्मीमानाबापषादेन नियमः क्रियते विपीयस इत्यतयेति, पर्यष इति परिगमर्न तयानकता गुणः परितो गमनात् स एषास्तीति मतिरस्येति पर्यपालिका । एष दि नियमो भवतीत्यादि, कर! पति परत घेन प्रचारप्पविधमानत्वात् सामाम्पापा समुपायम माग्पाः किन्तु विशेपा एष स्मारयो दशमिमाः प्रत्समाधिप्रमाप्मोपरत्वाम् परिपामा इस्यु पतोऽपिकवरमसत्, दमासको विझेपेण विधिसम्मते परि षस्तु वयोऽस्मेष नियमो पुम्पत इति एप मिममस्म 15 विपिरनन्तरातीवनपप्रसिझपेप पूर्वम्यवीवविपारप्रसिम्पुरुपाविवादोस्वर्गविधिाचानो वदनन्तयामानान विभुममापिशचानामानीपानामपपारेन लयमा भिपवे विपीपत पक्षपा का विचारप्रसिलोमविधि- इचात्मीयापमापनियमबिमामेति म्पास्मा तनयः, समार्पस्तु पण इति परिगमनं तपानेकता गुमा, परमूख मिलतापमाणगावे-मप मम्पस इति । परपरस्पति प्रलेस पल पात्परम्मावतलस्पेव मूतमिति म पसरस्पेन सक्नेन पामिरीमान मामले प्रतिपस्विति । वा मानमेव संगति स्पति, मानस पाममे मामा 20 महामति भाषामातम बस्न मात्र सम् सत् महान्टिमीणा समेत् नमाने मारम भरममावस्पला जिपी बस्युत्पपिक्निापरपि न पापत सि मामः । सम्पतिमा विरपुत्पपिविनापरपास्मिारकापम्, बने पारसिमिति संपति-उमादिति । रतिनिनाम्पापियपि समेतु सममि पथित समनिस्पति सयरामामा मतिविना सबाम एउवा, न अपत पुषसमरिसरणपोर्म नमाति गुमसममियर नियमविपिन सिफ्फी-भम्पति। मनु सामान्यविक्षेपबारेपलाग्मतावानुफ्पत्याचा परियति पूर्वस्मोनियम या पानाधिम्मतिविरवं नम इति मारयति-पर्वतीति। न प्रगोग मिस मगर तमाम्येति-पमिति, तु सामाम्मानिरपेष समुण्यापेच मा नाचि यतोता समान्याससमामा किन्तु किन एस पायो प्रसधारिप्रमावधिक का प्रमाप्रप पेपमेन मिया प्या-परिवसिति । तई न प्रयोग सुबिधमाननिमा फितु विपापा पति, परामर स्पति पय म त नाफरमस्वम् तम्मानमा पनि निशम् भो सम्पर- पत्मीर पवाये देसमेल मिवाम्मानिमिषा प्रयास पितरेप सफ्यानम्मरम्म पामाम्पसमुपयाधिपा 20 सहम्मेम्पसमावि पनि पक्ष पालत यी मसु सापक म्याप य-- मुम्मत विनियम भाषा । निममपिविषारीमा एप नियमस विधिरिणि, विनय मारतियवाव मिमो मुम्मत इस्पारना प्रसि- पतला की विविभिनयानुभवारिसमातिमोत्सर्यापपरभवस्यमा १- प्र वापपात सब से पता स्पारस सरभिषा वा सम्मापारसम्पादन समाप वा समुराग्रेबापमा मियो सिमीयत निय 8. मलमलत्वा मममममापि समिनिस्पमितिमाममिमम । - ।
म्यापागमालुसारिणीम्पास्यासमेतम् [नियमविभिचारे मेदाः-विपिा १, बिपिविनिः २ पिप्पुमयम् ३ विपिनियमा १ उमयम् ५ उमपविधिः । रमयोमम् ७ उमपनियमा ८ नियमः ९ नियमविपिः १ मिमोमयम् ११ नियमनियमा १२ इति परसपा मिझम मतभेरसममिस्नैपरेशमाम नियमपिपिर्नामभेर इति । किमाम्पत्-पबा चार्य बस्वम्बरसवान्दि नेपात रूपादीनो दमा- मस्प नपस्स घोस्पतिविगतिस्पितिमिरपि नैष सम्पप्यते रूपादि, नस्पचिविगस्पोखाक्त प्रागभावमप्यसाभावात्मकस्यादुमयममूतं पावि च भूतम् , तयोर्षस्वन्तरसद्वान्वेर्ननूभर्य म्यान्पत भूतयेत् कथममूतम्। भभूतमत् कप भूत माविवस्तु । इति । (अस्य पेति) भस्म चोपचि[विविसितिमिपि नैव सम्मम्पवे-नयसोत्पापावित्रसान्दरक- भाषात् पुसत्यादि पस्यम्तरसंअन्तिः सात् सोऽम सममित्लवा स्यादिति मिति पर्शपति- 10 उत्पत्तिविगत्योसायत् प्रागभाषप्रधसा[भाषा मरगत्-पराधि प्रागमापो विनाशः प्रभसामाका, पहु भगमभूर्त बपानि प मृतम्, प्रमोर्भूतामूवयोर्वस्वन्तरसेमन्तेस्तूमप म्पाहम्मत भूताचेत् सममूवम् । अमूक्तम मूव रूपारिवस्तु । इति । उत्पतिविनाशानाभिवा मितिभूतलाम म्पारम्प रूपापिने [व] म्यते सत्यम्- भूता स्पितिरपि च भवनारिमका सर्वत्र साशमति परस्पम्तरमिति न वस्तुतेप, भप तपा 1 तपा भाव एष भपतीति तस्यैकस्माभिम्पाप्तिर्न परस्पन्तरस शम्तिरिति सन, प्रतिषस्तु तथा भवनस्य भूतत्यात् परस्परम्पावतारमना सर्वस्य पस्तुनः प्रतिनियतस्यात् न प भषनेनापि म्याप्तिरस्स्पयमिति स्पिस्युस्पचिविातिनिरपक्षम्पादिमाषम्मतायो पेसिरिरिति । (भूतति) भूप खितिरपि प मानामिका भक्सव भवतीत्तो भवनम्मुस्पले सर्वप्रमरी सर्व भवति पटोऽपि रूपमपि रसोऽपीमावि, मानं सर्वत्र सहमति बसम्परमिति न बस्तुव सिमतेरपीति, सप वपा वन्मानि अप मम्पसे वेन वेन प्रकारेण पटस्मरसारिम्प पर मनवीति वफसामिम्मा- समास उपत पर्याचा विमा समभाविन मारिन सी सहमाविमो मुख्य मा म्ममानर्मागममनिस्सहयो पुनमानिए म विपतिपय समया मिन र मितिभिरममता एस म । ममम्मम्मामिमवारमार पपा चापमिति। परम्वरसम्तममममयदेमपपिरियतिविपि न सम्पन्न पण मम मपम चेति । मामी-मस्य पति बम बम पत पावसु मपरिसिमाभि ममप में प्रेमातरी पाप अप्रान्ति सम्पन्न गत व्यसाविधिभि पम्तिमपि पति मम । यो समस्या को रोप रूपार पपुत्पापारीति पापम मिनिसिम्तर महाविमति मम समभिर मा माद, परमम्म पामा बम्पापे पादेवम्बितकापागापये रम्य पोय एपमानामिमुरफेन व सामयिपि मा। मायारिमानुसार सपना परमि-पत्पतिविगस्पोमापदिति मति प्रापमानामAar मागरम भरमणमासमोर भामग्रमानामा परि मामात्मश्लामिस तामामाणे पारम पातर नुम्पमे मतामत्स्य पाएमेत सम्पमतमान में मी दम्पत्यादरम्याम्तिमा समाप । मनु म्पनि स्मिरमा मा मसतरपि भूतस्कर मारना महाविरोधारिसमार-मता स्थितिरपि चेति । स्तनमति, मिनर्भानामता म बसमा गो प्रयासमा मिति पिन पधमन्य परिरी एमोरि मी यानि भाव में नाममा पत्र मस्तान्तरे पापा ममतामयामपदम्प मालालिम FACHAR प्रणीभूतति । मनु मप पर सम्मानितुने समय समत तमा एकादशो नियमोमयनयः . भगासम्पम्पर्माधिकारे प्रत्येप्नयसापपरिधानपूर्वकलामयसम्मानस्मानन्तग्नपरने बाप- रिवोपादुउरोलानमिति स एष सम्झपा, पूर्वस्म दूषण समवप्रक्रिया र सोपवे नियमोमपेड़- स्मिभिमव भाइ- इदमशक्य यपचपाविमवनमेव भाव इसि स्वमत म्पपस्याप्य वस्तुसंग्रन्तिप्रतिपेधे । नोत्पत्पभाष इति पचने मोतुमपि, अवश्यं हि तैः केनापि प्रकारेण भवितम्प, अव एव, वत्र च तयोरस्यन्तभवनस्य म्पावर्तितस्थामाषरुपेण मषनामाषात् परिशेपादुत्पादविनाशेनधी भवनमप्याचम्, तपावन प्रमापता तेषां स्यात् , स्वपुप्पयत् , उत्पादविनाशर्प भवन स्वयापि ननु वैर्यधानुसूयते स एव भाव इत्युक्तम् । श्वमशफ्पमित्यादि, इस मोतुमप्यमाम तो बतुम् । सामन्यतिनिरोपात् चमकाय ? 10 यपचरित्यारि मत्-यस्माविमर्मः, पचतिति पचनममिसम्मम्मते, रूपाविमपनमेव माव इति समत म्पबमाम बस्तुसकान्तिप्रतिपेपेनोत्पत्पमाव इति म पुनरेवशयमव बाइ-अवश्य हीत्यापि, वैषम रूपाविमिा केनापि प्रपरेण मविवम्प मापस्पेणाभाररूपेण पा भव एष-वाचना भिसमस बबनदेव स्वात् परपपारपितुमाह-पत्र मावि योग माषामाषयोरत्मन्दमपनन यापन कलारित प्रम्पार्षिकमक्मेपु पर्यवासिनया, भवो भवनम्पापन्यत् भावरूपेण भवनामापात् परिप्पा 10 - बचिनिनवामिन् पाले सम्मानम् तबसमानामित प्रमेनसानमन्परेन लामावार प्रमेयपरमनस्या- मसार परिम्न सममाति प्रमात पूत्रम्सस्पे ठोपामान मनमो भवति जनपि वपक- मन्तरेषाम्पेवानासम्मोन वापस लेन एसजगप्रकिय व पोमचनिप्प खर प्रसंग इति च परिमार्म पति-नपति समपि ममतमामा, मानमारको प्रतिमा मेष मेहमानो माम समुपापिकविसमुसि पानिनाम्परिकामामारामारलापते पये भावमिवस्तापयापारमारिपायापलबस्कन दिपावते निपम्पते पी पिपोममममम् । बनु लोपवे स्पानिधिमक्षा रसारिपरस्परम्पाताचाममा प्रीमियरात् उत्पमितिभिरिमि प्रापमापरिस्मसम्रे पास इति वचौपितमिमा पमयम्पमिति । मान मोनुमेन- सम्म विषाच्या काममिया-दमिति बन र्समान मनिसाबपनाममगा-पपचविस्था पीति । स्पानिमारमा पर मालमपरिसमुरापारमा पन महामार गरि पामेत् तर माना समुण्यापापत्मा ससम्मेऽनपरिवरपदासा सात समुरामोऽपि सारिस ससस्मेनास्थितना सर 60-9 सारस्कार प्रापमाषप्रमालपमोस्पमिलापौरभूतत्वात स्वस्तरपन्च मूलासमतममूटो 4 भूमी मानिर्मचम्पापयामाममा तिमोऽमित्रानो मितिमा म्पाविमपनमति। बसम्म केपपि प्रपरेष भमिटम्पसम्मका सपुमतमान समयमा मान्मारपेप मानस माध्मित मेहनत पगमाविम पाविलाल पेक मायभाये रसाइकिपमस्मे मतमेव निपारम् पारिमानमात्रालयिक समाव-परस्पीति मपि प्रयरेष मारनामालमेन बाबासम्मानमतमा प्रतियोमेति। मामे मानपतवासियमावामावलपेपर मर्म सम्म, बमाधोत्पणिय बन ममा भौम माप- मिमार-मव इति । तयोष सोनु तामासिवाद-पमारिति मापस्ममममम्माधिपरमागमेन "(111) - 5 १०७८ म्यापागमानुसारिधीम्माम्यासमेठम् [विषमविधिमारे गप गुप संसाने, पारपा परसरविष्ठिय गुणाः, सम्पयू म्यानात्, स प गुणा पर्याया परिदो गमनार पर्यवो पा पूर्ववत् स एवास्नीमादिम्माम्मा गवाया। पृधन स्पेन स्पेनान युतानि पदानि वाक्यम् , पामेया? पाक्यापी, उपनिवन्य- नमस 'गोयमा पनि पण्णच त जह-पण्णषते रसर्षते गपर्षते फासवते (म०४. २००५) पर्णवन्त इस्पादिनिशे मध्यत्ययः संसर्गे परस्परसंसा एष वर्णावय इति । (पपगिति) पद पदानि पायापी खेन सेनान युवनि रेपच गमम्माज धममिला इबरचारिपाम्पेब वाक्यम् वेपामेवों पापा , सात् समुरापासत्रात श्रम नफ्लोपनिकन्न नमार्पमुम्पते पदोऽस्म निर्गमा, वयमा कामिरे में मत भाषपरमाण पप्प' इति प्रभे म्पारणं गोथम पामिरे (पम्मच) व मापनाते रसबसे गपपते घसते (म प्र २०४ ५) इति वक्त मावि, माये 10 पावरार परे [] बोन्पोर्मा म्याध्या इति बुम्पवे न ऐपित् मिस व एष वारसा परत्र पन्ना रसमान्पस्पशा पणतः वर्ण, तमन् रसवा रसपम्तो गन्पपना गमरम्वा, सास- पन्त इति मतुपा निर्षिया पस्मान्मदि संसर्गे, परसरसमण पर क्यारम इति, 'भूमनिवासामु मिलपोगोऽतिनपिने। संसर्गेऽसि विधायो भवम्ति मतुगारवः।। तपमा-भूमि सममान् गोमान् निनार्थ झापी म्मारापहासी प्रशंसायं-रूपयाम् पीठमान् मिमयोग-धीरिषो पा टकिनो पा अविशायिने मेषी मामी (महाभा ज ५ पा २ ९४) संसर्गे-मण्डी रुत्री भविष्यमारे-परमवामिा मेमतीति यस वर्णमन्त प्रसादिनिष्ठ मासपः संसों धम्मिनपने स्माहाराने तु इम्पपरमान पेक्षो मा पमा पर पावित दम्पतिवाय पबग पनि । उम्पायठिामा पनि परिम्स एवं ।' (सम्मति ग्वा०१२) इति परमारों गिनमते तुमसम्नसम्भारमानात् माबमान स्पनेन गृहीतमिति । पशम्न मदो नियमविपिनया समाप्तः। 20 मम्म विपित भार लिम पका माविममा मार-मापस्पिति पत्नुभम मवार भागारमें फोन-मन्तामन क स सानोति बस म मरिसी पास समन्वयमापनेसम्मे पुष तर समसामनता पमा प्रमात, एम्स मुबान समम्बा माता मेरेव मेएर सम्मे मएम पमम्वाइमनाउम्भात्र ठसान्स एप परममिश्रिा गुमा समर प्राग्रमा पारवा यमच पानमा वि भाषामा वामपर्व संगति-गपगिति। समुदायमासत्तात् सवामन्ति मान्मा म मरुपता रूम परत! मभार एमिमा मारिपरा यान्ति बसचव प्रसार-पक परम्मीवि । दार्थ एव पाया एमा-तपामपति परमामय पदम परमपाताद बास्त्रामा एमा- उम्पादिति, पर प्रकारे मारपमामात्मन् मुराबानामात्य भाव । म यसबारमासम्ममा मम मपस्पेति । भार। बारमावा पीपरा असा पनि प्रभामेर मफ्लामा मौतम । चनुषा प्रमाता-गन्ती सम्मो कपाल कल इम्माफ्राम प्रावी भाष.। मनु मावाय ममाला प्रमिति बमोमवाय पान प्रमाण-पर्पपात इयारीति । समायो-नचिदिति न विद्यतनी मात मरमममा परिव एष नरिमन्ता व रसपवर पसीत् बत उपान्त यत् माता रमन रिसतया मार्गात कपाट परनमा मर्मत सम्मत न मनुपाम्माम्तमान a भाषा। मनुष्यवाण-परमादिति, भय मदुरपस्निानन्यायानाम्, टेक पर्गपम्पवासमा रतdard मा मझिा माभापाय सम्मरणा भूमविरति । ति पिपम्पिपिरिचित विषमपरिषचन मपचरशानस बशमा नियमविभिनवारा समगा। मरम्मतिविम्याचा समिया बस्तुनः] पाशाजपषमम् विनामवारपर्यापम् , अफ्पायमामिदम, निमुवान स्माविति अमेय खरेणुमायेन गतापम्, प्रत्येक ते देखणा, परमानुत्पापविनाशाश्मना पस्तुना भवितव्यमेवेनेति । मपि च नानिस्पसामाम्पमात्रेण पस्तुमतिपक्षनिस्पसंस्पर्शसम्पम्मिना सन्तुप्पामा, कि सहि । प्रतिपक्षविनिर्मुफमेयानित्यत्वं यस्तुनः, वानि स्मादीनि क्षणिनीत्वधार्यताम् , पो हि भाव उत्पना स 'नष्ठा चेन्नाशविता ! ( ) यदि हि उत्पतिविनाश , स्वभावो भाया तर्हि तस्य विनाशपर्मणः सता को विनाशमतिय पी विघ्नः येनावसिष्ठेत तद्विशिष्टमपि काळम् , स तत्पनमात्र एय विनाशमनुभवेत् , अनन्तरासस्पे सति वत्स्वभाष स्वात् , विनाशक्षणयर, 'न पेमेव विनश्यति', एवमनिता स नैव नात्येत् पूर्ववत् । अपि स्पादि, नानिमसामान्पमात्रेप सन्सुम्पामा अगम्तममापिना एपिम्पुएररूप पीनामुत्पारबिनाप्रयमनामुमितेनानिमसामाम्पमात्रम मनुप्मामोऽनित्समस्तुप्रतिपयनित्म्सस्पझसम्माधिना, 10 अगम्वरापमानस्याप्पमित्यप्रतिपसत्तास्, पkिी प्रतिपधविनिर्मुज्मेगानित्रस्न पस्तुना, [इति] वानि रूपारामि पलिमनीव्यवपार्यवाम् पयोऽस्माखीति पमिका परमनिरूया कालाम्पः स एवास्मालि, न द्वितीयालिसमयान्वरावमापीनीति निमीपसाम् म्पायोऽप्यत्र-मो विमाष उत्पमा स नरा माविमा, [-] वापारमा पनि हीपनि स्पतिविनाश्नाबमम्मरमाविती, स सपनसमावो बिनाप्ठसमापसे चरम विनाम- धर्मणा वा बिनाशपतिकन्धी विमो येनापतित परिशिष्मपि पाठ स म्पप्रमात्र एम बिनासममु.10 र स्वाति भार । मा मत विपरित वा बानुत्पादविनापित संसार-मणति । प्रवास देतेपास्महत्ते रेलमिलाप्रति । एका मरम्मावि क्सवी सनपाइक्विात्मना मवम्ममिरपुम्मा-मा विति। मपानिपामना फ्लुमा भनितम्पमिति मध्मनिम पिपरियमवर्तिमानमापार प्रापन निरमामा भिन्न पक्मारस्वाप्पनिमा पस्न की माम इलाम्मेवार अपि पति । मनु पयत्यानमारस सामीमुपमा भपि माखरपा पार स्मिता पवादिनमाम्योपा समस्त परिमपरिमापारसमनिरस पानानिमिमा यनिम- 20 बनिसपनिम्नम्मम्मि भणमारस्वामनि सिपास्पिनालस्वादि बफ विभावस्थामा प्रमन्वयक स्थरमेन नि प्रतिया एसम्पनिमतसमीपवनिमसफ्ननियनमामा पमान मामा पाप स्मार-मानिस्प- सामाम्पेति । ससम्मावनिमत्माह-प्रतिपसति प्रबन्तमस्थानानिमानिरस्त पसूना सम्मति भए। इस नयी-वानि पारीनीति । किमो यस यो बस्तु ससे निगममम्परा पर निभा सम्मा प्रया पर यसपएमोनियनिक रपट HAपि बना भास निमामियोप्रति, माघमा Rम्पद सापोऽस्सास्तीतीति। भारतमातरानासान मायग्पर पोदिमाप सि पर भापमान पेशतिपनि विवो ममाम्पते। सपपमानायला मिसमापनमस्कापियाम्नलिामेसम्भार, मदतीनाम्पटियापन पिपट मरोतियाविनमा स्पाममन्वरमानिपिनापनमामात तमाम सापप्पभाममनिममारियषवा पदम बिमात्र एनिम्ममावि निपारिवणारखी भिमान- परमार, बप मिनायो पस भावावे व लिापनमा निवासम्मनुभम मिनामनमा मदिवा 20 अनुभमन परारमादिम लिया, स्पसमा पसातारा-मपत्तिविनाशारिति। मभिचार पासनविनामनामनुमानगपासमप्रापि नाम्पसम्मान 10 पापागम्मनुसारिणीम्पास्यासमेवम् [लिममोमबार दुसारमिनाक्षेनैण समादीनां भवनमम्मचम्, कारण। समाचसापने भाषण वर्ग-सपारीक मुत्साकिनारपेप्पपि मक्ने म्यापति अपुष्मपमाषवा मात् तरि नचिचपेपणमपन्यत् पसन्धान या मा भूमित्सुतापविनाशरूप मवन स्क्यापीति वहाते-न्नु वैर्यवानुभूयते स एष माप इति भक्तबोध बममममनाभ्युपगमात् । श्वर बार- ननु तैमसेनुत्पादावित्वेनैवेति, न तर्हि तैर्भूपते, अकालत्वेस्वात् , त्वदुफिय पुत्पदापनम्युपगमादकालस्वम् चस्पादविनाशाषेप हि पस्तूनां भफ्नपीमम् , स्पादय इस तन्याविभषनवीनम् , सवभावे तदमावात् तमापे तमापात् , इसरमा अनुत्पादविनास- स्वावपर्यापत्वान्निर्मूलत्वाम स्मात्, पम्मापुत्रवत् । (नन्पिति) न्नु वैद्यतेऽनुत्पा[] वित्वेनैपेसि मगोत्यात्पुष्मिनवोपते न वर व पते, पथमोऽकामवात् प्रम मोऽवीसमठा, भयम्से समकामवात्, सम्मानमत्तात् प्रयत् सरवाशश मात् मा भूमिममम मनकामवादिति विहिणते, चिपसारापनम्मुपगम्परमम् त्वम् भारिमापानिपानमुपगमात् स्मात् ! उत्पादेमारि, पमानुत्पानिमामादेष वस्तूना कापावीन मजनम मीयम् हिम्मो देव पापविनाशमर्म बस्तु भवन दीवयात, विमिन ! सपाय इस वारिभवममी वरभाषे वदभावात् वगरे नावात् मानिसमुरामो हि सानुफ्तारपा दरम्मने न सन्ति बीयत्वात् समाप एव च भवन्ति एवं सत्चपि म्पापविनाश्मीयत्वात् वाममबनकमिति, पषमनम्मुपगमे पोप-पवरमा होत्पति पावत् वाम्मापुत्रपतिति, मागे न सापम्पमर्मयान्ती, अनुसार भासमापि माने यपुमोल पानामभान माइपिपि स्पेसक्नात् तम्मा भूपित पाम पारितो भागम भुपैयविमान-पामिति। म्नुभमेन परमारता सापि मनु सम्म तल भाव मस्तानी यापासव 20 पानिारपेच मान्तरमा रत्पावलिमासपमिति स्पाराव स्पानामनुमम्माच्यपेव मानवमायामुपेष मेलि मात्र पा-मुरितिसत मत स मापा मालपरवनापि स्पेन के मया मतेमपारसे न ममाविप्रीमय-मनुपाति।म्पतिविमिमान वेषापमपातस्पेन मम्मको मा मरिचमानरपानामुत्पागनाममा सम्बन्बामानवाम ग प समापन दि रिति । भारतले समग्रमवादिन्ति पाकिमले पनि पाम्बरमलामातापिपासामयिदि ममिवारपारच्या Wमजनुभम् सपा-पोति। म्पनी मा गरिबतिवादिति बसाये मामय सिमो मुश्ता पालनादरममस्ममान सम्माधिसमिति मकामानामभसाप्रबलमपाश्वासिलमबमात्मस्त प्रमाणे व समापिना पल्प मानेवीम् , रबमानसम्मरमासाभरमसारपसो वीयम् स्पापमानमामिलामात्र परिमार एस तत्त्वानि भवनि पमपासपोयम्, एमेर पाश्मिपसोभादस्लिायो पीरम्, पमपाका समसाममिपावबाप-पमाविति । पाषर्मवान्दण-पापानि । धर्मपामा वरपा बीमा रीति मारेस्परिनामस्नमुपसे उस फर्मामालाविलापि सीमापुन मन्दा मथिता पस्तुनः] वारशामययम् विन्यसत्यापपर्यायम्, अपर्यायवामिभ्यम्, निसान मारिधि क्रमेण हेमन गम्वार्थम्, प्रत्यय देवया, वमादुत्पादविनाशात्मना पस्तुन्य भवितम्यमेहेनति । भपि च नानिस्यसामान्यमानेण यस्तुपतिपक्षनिस्यसंस्पर्शसम्पम्धिना सन्तुप्यामा, कि वर्ष प्रतिपक्षविनिर्मुकमेवानित्यत्वं वस्तुनः, तानि स्मादीनि धणियनीस्पमधार्यसाम्, यो हि भाव रत्सना स 'नष्टा चेन्नाचविता फा!( ) यदि हि उत्पधिषिनाश । स्वभाषो माया तस्स्य विनाशधर्मणा सतः को पिनाशप्रतिवन्धी विना येनापतित तद्विशिष्टमपि कावम् , म नस्पतमाम पय विनाशमनुभवेत् , अनन्तरासत्व सति तस्स्पभाष स्वात् , विनाशक्षणवत्, 'न पेय पिनस्पति', पयमनिम्तः स नैव नश्येत् पूर्वपत् । अपि त्यादि, न्यबिमसामान्यमात्रेण सन्तुप्पामा भगन्तापमायिना प्रमिम्मुररूप पीनामसारविमाप्रार्थनानुमिवेनानिमसामाम्पमात्रेण सन्तुप्पामोऽनिमवस्तुमविपक्षनित्यसपक्षमम्मम्धिना, 10 प्रताचरापमानाप्पमित्यप्रतिपक्षतात्, संव। प्रविषमविनिर्मुखमेधानिमल पस्तुना, [व] वानि स्पार्शनि भलिशानीत्यवभारताम्-प्रमोऽसासीति पनि परमनिरुदा काठामा स पनापति, न द्वितीयारिसमपावराबसायीनीति विपीयवाम् म्योऽप्यत्र-पोति माय स्पमा स मारा पेमाविमा [] पापाम्पा-परिवीमति स्पधिविनाश्चममम्मरमारियो सम्पसमायो विनासमाषमेचस विनास- धर्मपा सवा बिनाभाविकधी विमो येनारविवि शितिहमपि काठ, स रूपममात्र एष बिनाश्मनु-15 गत पचति माग । मसले मल मिनर्मायत वन पाल्पविनापिस लाया ममपन्ति । साबार नेपालमत्ते कमिसार- प्रोति । एता परि मावि सनपारमिासात्मना ममतमाम उम्मपरी-वरमा विति। मनूपाननाम्मरममा बनुमा भनितम्पमिति मम्मनित मिश्रणयस्मिाफ्सपार पापम मरमामा मिन्नु गमारस्वामनिया रस पीलिएसम्म इमारपेया मपि पेति । पनु पपम्पषिपाल समापसावी पावर पात Anा पवापिनसम्बोखा वमा निमविषमापानमनिमरम्मानिमिममिक्ष्म 20 पनिसपीपयसिसम्मम्मि भबमानस्वाप्पति विपाधिस्वाति सि बभावस्थामा समन्वय स्पनर पीपक, पावितस्तुमीपवनिमसर्वसम्मानिनसामाम्पसारेप माम्मा पाप साप-नानिस्प- सामाम्पेति । सम्मपनिमारप्रसिपमति, प्रतापपानानियमेनालिस्त पस्ता सम्पादमिन भाया । एस्मा लिपति-पनि स्पारीनीति । पतितो बस निमामो र साठे निमापसम्म र निभाता समूला अस्पा समयमा वसोधिरपिकामते विपि पक्षमा प्रचबिमारगपोप्रति मामामात RA सपाऽस्पातीवीति । कमरम्मयान्तरामसम्मापरम्मत यादमाप इति भन नशाम पपिनियन माम्पेता पमानानाममात्नम्परिणामस्वरमापसम्भाये महदिमामतिपत्रपट मरेपणिय समिपमा उपरानन्तरभाजिनामाला ताप पियामासमरिस्पारिप मिन्दरममा सलाममुमकी पिम्पारमा सामना- रम, समास सवयीलापनमातार मारी, पर बिलासन मन बासुभरेर पराममापि सपण स्पचारमा। सभा-सपत्तिस्मिागपिति मनिसार मानिरामरामपबति नियममपि नाभवनुमने त्यसमावि माणगुस्सापान म्पापागमानुसारिणीप्याम्पासमेतम् [मिपमोम्पमा मषेत्, भनन्मरासले सति वत्समापवास् विनाशपणात, न सौर विनंत्यवि, मम माम्मे वापत् पूर्वपरिति, मनिष्ट्यपावनसापनमेषमनिपान इति गवायम् । भगन्दरापनापभिनवापार- मस्ति विघ्नः कोऽसौ ! विनामहेत्वसाभिम्पम् , का कम पिनासहेतु! पत्सभिमाना- सनिपानाम्यां विनाशाविनाशी पपा पटस्य मुशलापभिपातोनिसंयोगः पार्षिान्मं म्मादीना मप्पच विनायहेतुरिस्पषोभ्यते 'साम्यं विनाप्सहेतुत्व' ( ) भन्मसरासिय लिपिठे हेतुरेवेति विदोपहेतु इति मति विशेपहेतु, तस्मिन् सति 'पधारमार्ण बत' इति मनोच्यते-पमझापाम् 'स्वयं विनामे तुस्पत्वात् तपानुसचिसोऽप्रह' स एवा! पपारस्पमिसा व पार्षिषपटम्पादया म्पादय एष पटापरेणोत्पयमाना पट इस्पास्मो 10 समन्वे, समुदापविशेषात्, वे पुनः स्क्पमेप विनया, स्पधेरेव विनाधारणत्वाद, सत्रामिपावमस्पयपधादम्ये म्पवयो न पुनलपोत्पमा, तस्यत् तदानीं पटरवेन म्पाप- माणम् वेन न पटो किनाभिता, सया पापिया मपि स्मादया मापा । (मस्तीति) मचि विशा, कोऽसौ ? रिमामस्वसामिम्मम् नैव म्मापापरितुपमा पुमति-काम विनामतः । यत्समिभानासभिपान्यम्मा बिनानाविन्यप्राविति स मूगात् मा सार- 10 स्मारि पत्र मुम्मपमिपावो विनामोदरचि,[भमि संयोगः पाविधानो स्पापीनामपाल विमाशा, हिप्पे चिन्नोऽसमिन्नेप्रमानमिति, बमोच्यते-सायं विनामोतुत्वम् साममिति सपा साबले मम्मदापमिपावेन परम्म विम्पमोऽमिसयोग्यात् पाकिस्मादीनामपावेति, मपा सम्मेवेतीति, वाचो कवरम परमप्यम् । तम्मारक्तासिरलापता प निवार्यते रेपेशि, विपोवईमा, प्रवर भार-पति विशेषतः तस्मिन् सति पमापश्चात् वसाजिम्ये माणात् क्सविषावाप्पायी मी-भसमाप्पमितिसम्म किनाममारवं पान मसतराममानिस मास्सयामनियमोनाति मामनिधि सिम सारव एक दिनासमा पनि सन्मामलाप पिलाने संपविभापि सोपसिनु ममोपविस्मयप मराजयपविनामले बिना भी मिला। अभियानमेव व्यावना प्रविबा समान प्रमन्तरात्यमिता प्रसा-अस्ति चिमति । पोसियारवाने विविध मनात समाविमा मावि मसाविति । मम मते निलामेनाम्लालेय प्रविबरनामापनि लामो पच्ची-का सेति सम्मानको पर गर्मशारामामास वावगापि सम्बकम्परिप्रभा मानना वस पारमिला- पत्तपिपानेति।मिनालार पम्पी-पप्ण परमेलादीवि भनि मागसोफाम पाविपाना- प्रिमिस एमापापपमनवानाम्पास सिमिति मार । मामिलादेवल सम्पपभिवापानी म समिनिम्म्पललिपपमामिलामो मत एमभुमम्मा की ॐ समायो-साम्पमिति। पर पताल पचपन कदर । अनि बार कापिया की प्राय हमाम्मते लगा ताप तेनामी महसत स्त, सानिमाय मोर्षमा मा रिम मा मातः । सम्पनिका प्रयो सारे मस्ति विशपतुरिति । उम्मपनिकले पर्ग'मध ।
सो विनाशस्थापनम्] दारशारमपमम्म् बिनाझे स स हेतुरिति निमीक्वे, बत्रोम-समझापम् परमात् सय पिनाशेऽयमसमे तुममेव सविन]पाल देपाम्, कस्मात् । यस्माचवानुसचिवोऽप्रहः, अमिपावारिसामिप्यात् प्रा क्योपचे- ग्रहणम्, पारमाण वत्स्यभिप्ये मानुस्पता, कला !- मामना- भव भाइ-पमासम्पनिया दि पाकिस्मारया-विम्यां पत्रपर्णपइसनिगन्यायस्पर्शः झेपेपूर क्योबायुषु दीनवरा इति पा या संसायपासम्म चपासम्भवमित्यपी, सपादय एष पटापरेणोपपमाना पर इत्याम्पा समन्वे समुदायविशे- पात, वे पुना सपमेम विनयः स्परेप विनाकारणत्वात्, सन्त्रास्मापमिपावेन सन्तविपतिवानाम म्पे स्मादीनामुत्पादो निसम्मते स्मारभिपातप्रत्ययपाएम्ये रूपारयो न पुनसयोत्पमा, परमात् सन्ततिनिरोपात् वदानीममिपातकासे पटतेन स्पायमइण वेनामिपावेन न पटो बिनाटिका, वया पार्पिमा अपीमावि, देवपि रूपाविषु सैव भाषना, पत्राग्निसम्क्न्यसामर्थ्यमन्येप क्सन्चविरूपानामुसचिस्वा विरोपम्म्, न पूर्वेपो विनासम्म, बाऽसामपि, अमिसपा तस्सवपतमोत्सत्चिनियेपे ऐता, समाना 10 बिनाठा सम्मेव भवति, बन्मानो स्वयामिमदत्वात्, सम्पत्सुत्पादनासामात् सर्वविनाशा, एवमन्मा सामपायनुसभत्ता, पर्ष सयमेव विनाशो भावाना, नान्येन केन निशिनाशिवताविति । कपमिदमवगन्तम्प एस्पमानेऽमिपातादौ पिनासोती स्क्पमेम विनाश इति, पतप पति कपकपात' सविमाने मारपसिनास खति भावः । म्युम मिलावामुफ्णमेपि मुम्हाए- 10 मिते भापानमुफ्पपठे मुम्पपमिभावन व समानामुलगणनम्, न त सोमिया कनियन समयबासो परिक्ष म्मम-बमवायमिति, हमाम्द्रले प्रमिकाबारेवियापरबत्तापके स । सर्व मिलापपपि तको सम्ममा पम्पदिति । ममामाने परम्यार-पसाचयेति बमिपावसविल सम्सेना- मुत्पपेरसम्मा बाधिपाने तु वयोपदेचा मान । माय एष पुत्पादमीच भावति । पयासम्म निशा इति, पिसाबमा सारतसामानि स्पीति पर बाकिम तापपपाममा पुषिमासपी मया 10 पत्रपति मोमपीतप्परचमसमा मरिमेरेन परियोरस पीतोमुम्मभिपरपठिनमेनापरिब स्पर्म नसते प्रकिना समयसम्म बिपासिरसम्मन्याय विभाः । एपस मियाममा रियाः समुत्तिा सदर एस मारस्मेनोपवा मारिम्पकमाये भान्ति मिलाप देख सम्मे परेल मात्र त्यापरवाताव पप निपान सपा-पापप एपेति। मिवतामा माह-सति विनामक तमिमता मुण्मनिवागनामसविषाने पारस्पेन समानामुत्पावनधारा प्रमाथी पातु मारम्पपदेसराय स्माना मुममिवावा विकास यति तदा परिस्मेष स्मरेमपार विभारिसमेन तेषामुपानातम्यामो निामवे- पवमान स्पानामाम् न मुस्मपमिधाम भाविनापरवमिति माया । एवं प्रषिमारिस्पेकोत्सव समायोपी लिनाकारलतामिमतसामियाद रविवार संसन्धानस मोमपी मापदमागमा-रापा पार्पिचा इति । एवं मारपेचोपचानायपि मामिला-सपाऽपामपीति मा सामेल भण्ठीमान + मारसम्मत संगी-मम्मानामिति, का ममयत पपिधना धम्पमा लोपरनिसियुपताना मवालामन्तिमा 0 पमा समेत लिपीबोरविधिमेशुभम पापमायाप्पा परिनिरा पिभिस्मारक सममेव निमसामिा पत्नायिस्ताव पाविपिरोक्ल पनि भागात निम्मी-एवमिति । मरम्परेचम्बा मातालममि- भताना प्रकोषम् , मिमिवावमा भन्नुपी मोक्ष एवं निनाम्नु सम्मेलीमापद-पमिर मिति नमिक्ता भिनाश मामपि बिना परमेस क्यामचन्य पिपित मावन मानाभाषा- स्थि अणपु म्पापागमानुसारिणीम्पाश्याप्तमेवम् [निपनोभपमा धुनाऽनुमानेन प्रस्थाग्यो-स्वयं विनाशि घटादि, जाम्यात् , प्रदीपशिखावत्, आगमोऽपि 'मातिरेय हि भावाना पिनास हेतुरिप्यते । पचात् विनाशनमायान पिनस्यत् करायन ।' ) तपा-'मुरिफाई मिमि उप्पाद भरिध कारणं । पाणे कारणं ) इति, तस्मात् प्रतिक्षणमुत्पचरेप विनामित • सिद्ध म्पादीनाम् वयं म्पादीनामभूतनधास्वादेशामेवमपनामापसमुदाययत् अलाभेद भयनामापादसत्यम्, यषा हि समुदापस्य दशाभेदस्य संपतिसता परमार्पताऽसले तमा म्मादेरपि रूपादिपरमार्यतया भवतोऽप्येकसिन् धणे न क्षणान्तरमतीधण पळतो भेराव रसविरुपकाणमेदादिस्मपा, स्योचरफाडामतीधिसत्याचदयदमित्यशक्यं पाम्, ततो त्यम्वमन्यस्वादसावियस् । (फपमिति) पमिदमवगम्यम्प समानऽभिपवारो पिनासम्म सयमय विनया पराये न देन हेतुना विन्मपिता इति, कोसपानेन मन्मारमा म्वर्ग बिना पुति, पतरपुनाऽनुमानेन प्रत्य- सम्म बिन्धशि पारि गावत्पात् परीमियपत्, पवानुमानमाभीभूतोऽप्रमागमसरपसे गरी उपया 'गतिरेण हे प्रत्यारि, बा-'सुरपिसाच मिमि उपारे परिवार । पदण भरपं नमि भपके परपात ( ) इति सम्मात् प्रविषणमुसत्तेरेप बिनाशि सिम रुपान्मम् , दवा ॥ तत्रै प्रतिमानवायां समा रूपादीनाममूतववायम्, भभूपतपास्वात् समुदापपरपाससमर्पस्म स्मा तेन प्रभरेषभयमेरमबनरममाऽभ्यषा-वाभूतमर्पवस्वं मविधानभरणारा गमला, वध पानातवालावसत्तम्, मिम । समुपाय, नापाम्मापमा हि समुदायमेम्यारि, रूपारिलेन मतो रूपारयो ऐनमेरेन भपरिसरागारमना च सम्मि, तपाभूतभेरभान्प्रभावात् समुदायम संपरिसता परमार्पतोऽसस्थात् पमा रूपारेरपि स्परिपरमार्पया भक्तोऽस्येमिम् न स्मारिपामार्थो:- 10 Oपमिति । पाय मिनाया प्रतिमा बिना समान सबमा परिमोपति पापेक्षिता वारिपस्यात् लयमेव निधीस्वनुमान का स्वाद-परपुनति । जात पारेरणा मिति मारतीमभिचारसमा परसराचार्य श्यामकी-माविरेणीवि स्पपिरोसा नामपि मारमा सानिहन्ति । एस प्रजनमुत्पपिनावित स्पामा मेस्पेय भनाभावात् समुराणान्मापा सत्त्व पाणा-पतवमिति बाप-ब मेरमानापापों स्पामा भाग तमिलना मतिसमेति परमानाविलार पासवासात या पुराने सोसा- समाचार तथा पारिपी यामात्ममुबम्पबदिति । भाषामा-पावित्वेनेति स्परम समापन मारपोपि यसमेहास्मथा नमान्त रेखमेर गरियमुण्यम परिम्मपताल मन मेन र मस्त स्पस्य एमासत एष सकिन तेरा मान मिलमास सत्तामफेलम्ते मोनालियर मिसिनेषु वान एस पर एस प्रमोम्मदन मर्म बानामि रोखामेरेर मालामासम्मुरामात समेन मारनामापत्र पन्ति स्पास इति मात्र । सा स्पा सम्मोपि पासोपालमानाममात. काबमेर भाकरमाया पाएमा पन दिनानावतरसपेशनात् तदेव समिति बहुमानमालामा-या 12मयपोरयनिसमा बरते।
मम्पत्वसमपनम्] भावशारनपथरुम् प्येप, स तु पणान्तरे न प्रवीमने, काम्टो मेदात् पूर्वमणपादुचरमपरूपमम्परेव, एस रसापयोऽपि, बता काममेरमपनामामात् देशामेरमपनामावसमुदायबम सम्नि, सम्म फुटीकरणामार-साविरुपमा भेदादित्य इति, परमोधरामप्रतीधिवत्वाचरेपमित्यमाय बकु रूपम् , तोऽत्यन्तमम्पस्वास् , रसादिषस् । वस्मान्पत्तमपीवेन समर्पयितुमार- कृस्या कस्पनया इस्थ स्यापदि स्यात् सघयाम्प तयारूप तदूपं स्यात् मितीय . पणाविपु न कदाचित् , इदन्तु तदभावपरम्परापतिसमसदेव समुदायषत् , यपा समुदाया स्वम्पमासमेव म्मादीनामेव ममपि, पृथक्त्यानवस्थितार्यस्वात् , मतो स्प, स्पस्वरूपासत् एवं नियमो नियमितोऽसत्त्वेन विशेपो स्मादिः । कृस्था फरूपनपा इस्प स्पायदि स्यादिति, वपमा परि वर पयारूप-रूप-रूप-सात म्पतिरिक्त स्पास्मफमेम स वस्पेनि विनवात्मना रुपेप वपारस साप परि स्माद् विसीयपरिप[न] 10 माचिस्-न मामिपि भवतीत्वमी, परि स्माचवतरिति कला रूपमुच्यते, न तु मगति प्रतियफ्नपरत्वात्, सिरि सन्तु सपमाषपरम्परापतित-पाप भवति तत्तस्मिप्रेम मगे न भवति पुनरपि ममन्चरे मपरेव न भमति पुनरपि न ममतीस्पेक्ममापपरम्परयाऽऽप्रावत्वाइसरेप, समुपास्मत, बदुच्युटीमण्यमुफ- संहल प्यमनमार-पपा समुपाया सहपेगासमेव स्पापीनामिति यान्ता, एवं रूपमपति साप्पनिमा, भसमेति पचनात् प्रपछयानवमिवार्यत्वानिति रेसा, प्रविषमाचिस्वात् प्रवक्त्यानमभिवापत्वम् , अवो 15 रूपम्, पक्षसासरेव नियमो नियमिठोऽसत्रवेन विशेषो स्पादिः । परिविक्षेपमासखेन नियमा ? एप किममाष एव ? नाम- मभावार्यस्तु नियमः यवत् प्रतिषणमपनं तस्य तत्तुषणे मणे पत्तमस्पम्ताभाषषिपरीत- वृश्चि स्त् क्यमनर्यतायो स्पात् । किन्तु नास्ति तत् , भस्मम्ताभाषत्वात् , सपुप्पपदिति स्थावता प्रतिषण न भवति न मषतीति विशेपाम्पुपगमात् सोऽभावः समर्पय । रूपारेरपीति । ततोऽत्पन्तमिति प्राममोरपी पर विवारियोपम्पादेव म रमासिलि मा ममत्वमेव वातानुमानेन एमसी-एस्बा पमयेति । प्रजियनमामि स्पास्मत Bा वनस्पता- ROK मा फोर-प्रसारमानिसमेत स्वत्तोष मार-मोहमति गई सम्मान, समाविता मात वसा मर पाति रतलामाद-पदि सपा स्पमिति । वाम गर पर्ष स्पल सी-परि यादिन्ति । दिवीपमानिय प्रमपमानिस गरि सापम्मम्बार वो तपमे रवि मत्या स्पनियुक्त समय व मसी प्रजिनपिनाभिरिनि प्रायः । प्रतिनियमितावर मधमतामाक्यमो भी प्रथमपो मत लामामात एपीमारियायपि एपरम्पर परम्पाररमामामादमत्त मुक्त पाना मुण्ग्रेसस्पेवामोरया- सारपीगर-रमित्पति । स्पादिरप्पस पपरसाससिताम् सामयिनुमानमाह पया समुराब-ति । सपरिमाप सरनाम्मास्मिनोय पादौ प्रतियकममा पच्मार - मतिम मपी प्रविमिरवाह- मतिसमविपाविति । एमप सतस्पधीत पमो-प- मिरमित हार-भत इति। 1-30 समाजमार मिमा परिमात खेपा भमाबाईसिषति ! स्पति पुप्पाताभावी सि.... मममेहाति। मिण सम्मिमारने । 10 पापाममानुसारिणीप्याम्पासमेवम् [नियमोमा (अभाषास्स्विति) ममावास्तु-अमावमासामर्पम, मापसेमी, जयचत् प्रतिशत ममरन तम पारिपस्तुना दतु मजनमपि मे धणे पर सपुष्पेषपसन्तामावविपरीतापि सत्य मनर्यवापा-अवसवायो मात् । पुना म्पत् । त्वं मात नातिन सत्मने अपेन मवेत् पला- मावत्वात् , पपुप्पबत्, भनिएतत्मविषय न भवधि न भवतीति विभेषामुपामानिमता सोऽभाषा सभर्फ-स्त रेसी, पपुष्पपरमन्सामावविपरीवचित्लात् । ननु स भषनम्यपदेशा सत्त्वे पटते, अन्यथा कुतोऽस्यात्यन्तमेदस्य भवतीति मवनेनोपाल्पा! ममायो पार्थोऽस्पेत्पस्पशम्पनिर्देस्योऽन्यो समस्ता सम्बध्यते, ममा- पस्याभयभूतस्यात्, भाष एष मामयो मषितुमईति, एकक्षणविज्ञानगपाविसदसद्विचारस्थ, श्वरधा निरामयी मागभाषमध्यस्प्रभावी न स्माताम् , श्री च तीन भाषमनामित 10 मवितुमरसदेते, मसदिशेपत्पाद, स पामयोऽमी पूर्वमसपा पराध स्ववियुपमानत्वात तदुपपदनम्त्वात् , मर्प इति नामावमम्तरेणोत्सहते, ममाय इति पापम् । ननु स इस्पादि, गम भानामावत पयति, प्रविषमसन्तविला रूपमेव रूपरेक मति तथापि वपमेष रुपमेरेसान भवतीति मानम्पपरशा सस्पे परते, माया जोऽस्मासम्वमेरम पमन्ताग्यपरविम मावीवि भरनेन माणेनामयसोपाम्प! पूरव एष न पुन 13 माप इत्युपाम्पा, ममायो वाऽपोऽमेखि पापीदिसमासो मा, ममायोऽयोऽप्रसस्ससमतिरेश्योऽमोम पा तमामयममापि भासतम मार मानि पनि सभा की भाऽपि गरि सात् समान्दामानिजि मार, पसिनसन भात, पता, तमामा पापम्स म्पो ममामासाविति । म मा-पदिति श्री माछापने पासतमान एण-पपुष्पपरिति । एतापामासम्म किं पुना स्थापित ular बनेकी सात पताभासा एपुन्माण स्मरामि भला । मीन मालिपिमुममा सबमर-पतिसममिति र भीमा प्रतिपरमभाषत मनि वामगारा 42 पापारि पनि मान मरतनुप्पो सम्मान समानाप्रिमाय ARREE भियत । इमनाभि मा ननु साति। साम्पससी भात मंचमा मेम सारा पाना भात भानम्परम समपरब सम्भया समोर त्या मतिसममिति। भस्मस्य at BARA मानमिवानामान भी मारनपत्र भम्ममा स्मन् एमपरवसा मी मी फको पस (साभार भम्पपा पति, प्रधाममा सत्तामरे 6 मा मात्र Muftly ar । भमाला पा शेतीति बीमामा-मा-पार की Macrमार गुरमियममा प्रम भाषामा रस नाम मापन समयममा भले भाम भार । एसेवा भस्य शमनिरप इति । बनारागर गोलिया 11. भावपत्पमा ।
भावसदियमापार्यवा] मापशारजयवम् २००७ समसवा सम्बप्पवे, बहिरपवासावी, सम्पत् ? अमावस्सामयभूतत्वात्, माव एक है भाभयो भवितुमईति, एकमविज्ञानमा पारिससहिचारम, स्वरमा निरामयो प्रागम्पपमपघामामो न मावाम्, यौ च गै, न हि माक्मनाभिन्न प्रागमाषम नसामागो मवितमसोते, असतिक्षेपत्यापत्यन्तामाप बेमण्यात् स नामयोऽर्थ एतयोः, पूर्वमसापमुत्पत्सवमाया सस्, पावधि] सरित्सुम्पमानवात्, पदुपपदनम्तात्, मर्य इति नामावमम्तरेप्पोत्सात, अभाव इति माषोपानम्मसोम, प्रतिपेपरापि । त्वात् सिवाय एव वासिनाविपमः । ननु माविमाषोऽपा क्षणिकतायां सत्यामपि नाभाषमन्तरेण नोस्सहते भवितुम्! न भाभावा नभुपपदस्यात्, मनाझणवत् भाषादपादेरन्पस्वाभाव इति निर्देशो युक्तः। नन्धेष क्षणि- फत्पादसत्त्वे कयमुत्पने पुत्रादौ पटादी पार्थे भूतमिस्याश्वासः, दग्पमतमध्यसेषु चानाभ्यासा! मविषयस्यात्, नन्दविषय एषाय म्यवहार, क्षणिकऽस्यासम्भवात् , उकयत्। एषमेव 10 पराग्यभावना पटत, वदर्यधापमारम्म इति गुणोपपया। (नन्विति) ननु पारिम्पोमा भमिकतापो समामपि पादिरो मायो नामाधमन्वरेण नोसा-सात एष भषितुम् न पामाषो[ मावमम्वरेप ] मचिमत्सहते, नमुपपववादमाएपवत्- पमा प्रयप्परम्पम्मामाम्म इति निता वमा रूपारेर्मावापन्यस्मामाष इति निको मुत सत्मामेन मणिश्वापो न भवतीलमागानिदो माव एव भवतीति मापापदेरिमसत एषामंत्वमाइनोमित्यानि, क्षपिकताइसवे समुत्पो पुत्रारो पटारो पाउ मूवमिन्यासः-अनेन ममा प्रर्म पर्यम् ! बम्पमत- - बदित्वादिति स्मारप्रयामानिमाविश्वामित्र समायों माग पनि मानिमा ममा बमेति । पपा स्पारिसमस विचारम्म पनि मति मा विनमामय प्रसाइ-एक्सणेति । रपामो माने म साई पालामार एव न मारमा वरपेति । माक्सापामयी प्रावमाप्रार्यसामानामुत्तधिविनासम्मो में साताम्, पप माय। मनाप्रमाणे तो न सावामित्ववाह-मसदिशपत्पाविति भामेरमा-20 सम्वामानात विचार नियमपि । पमेवाइ सति । एतबोराममोडपे एम. । सामान पस्व मानस मारामा सकसि मसात्माराममुफ्पमात पाच क्सपियुपमानत्वात् मारिति बम पटो रिसेपचत्तर मापनपदीलण पूर्वमसम्पमिति। म्स' एमा प्राम्सपेम पथात् सपेण मासपेवाणे माठीति मा । भोपि मामारयन्तरेन मीमा म इवीति । सामालम्पो मायोमेति समय इस मार । उपमाये मावपतियोपिम्मावातुमिचमात्योषा तिथियासपर एक पाभिावीपर 19 सम्मा-ममाष वीति । म मामा मापी मदम भिमेदार्थ पोषगति र मापात मामापुसम्म समाविमल मापार मत्वडिया मोम मापा । जब मामालमतरेष भषिमुसार मभारतम मारमन्तोष भरिमुत्सत माननुपादिमाव इति । पाषरे-पादिरपति रसायमान पयापास- समानवाणिस्तान मोऽमाम्मतरेष याम नरेनवे ! मत सी मात्रः । मासुम भाषमम्तरेष मसिमरमर मापेपपबम्पोमा प्रमिसाभवानिपालामार-न पामाप इति निमारममाझणपदिति 30 प्रामममिक पियानोपमोपपरमपदोपते तपामारी भावापासम्म मोसमय दोष मारमाननानिये .पि.एम मातरितो । 4. १२(१७) पापागमानुसारिणीम्याम्पासमेवम् [मियमोमबार प्रप्पा नामाचसा गवं कार्यमिसेप म्पारो नापपेत, विपत्तात्, सविपयस्वे पाऽस म्पप्रारम पुधारेरमणिकत्वे पुछ मामा कामन्तरविनम्त्वेऽनापासमेजयोपवे नावविषण एवार्य म्पपहारो पनि पणिोऽसासम्मवाच्या पमा दबाभूत सामेइमपनामाषात् सपरिसमुपायाभाषा तथा वा- मूतप्रध्ममेगमपनाभावाचदमावपापपरम्परापस्तिमेष सपापपीति मायेन रूपापससे मोऽस्तार नापासानाभासम्ममारम। एवमेव च एग्यमाषा-सरिसबनम्मानिनमस्मात् निप्पनापासात् संसाररोगग्मविप्रानिइस्तेन पटरे, वर्षमाम्मारम्म इति गुपोपचा निम्माये । पच म्पबहाराविपक्तमुक वम भपति, परमात्- स हि गुम्पते संवस्पा सन्तानविषयस्यात् उसादो पिनाप्सम किं सूक्ष्मा मझन् वा! महोत्पादा सूक्ष्मोत्पाद इस्पेवम् महत्ता सम्पाने उत्पादविनाशयो, सूक्ष्मता क्या मुद्या- 10 तप्णपोरिष न सईि सस्म्यै त पप, महारणत्पात् सपुप्पषत् , सम्सालगावव खः सकारण- स्वात् पाल्पपटस्मेव न परस्पेव विनाश इति मत्रोप्यते परस्परमारणत्वात् , जातिबिना हास्य कारणं जासेर्षिनापः उपोयुगपभाषात् , 'नानोत्पादी समं यमामोमामी तुलाम्तयो । (सेति) स पुम्मते संपलाम्ममहारत सन्तानविपत्मात्, पहिप्पनिर्मारपार सारबिनाये विसम्मपति सूमोसमेवा मावोसादेन विन्यसेनानोत्पादिनान इति नो प्रमेक विष्याचा- 10 विप्यम् परम्पतिमहोत्पार सूमोत्पर पति, महोऽप्यमितिदेशेम प, पहिरोकमपर्शनम्-माचा सन्तान प्रपदविन्यानो सूक्ष्मणा माधो-ग्रेगोलापमापोः प्रवृतिदर्शनात् अमुपातष्पमोरिव वत्र सन्धमम पुत्रपटारेमशसुस्पारे ममयसा, विन्यसेनाश्यसा स्वरयो सूक्ष्मोत्परमापो- मात्र एष मस्तीति मात्र । अलिकमा मालसाप्रपात त मायामानापापी, सपिने ये पुज्ने प्रयपाते- समिकत्वारितिपिपासानापासौ पनिस्म एषभूतत्ववर्माचारमा पुवायो सबवर्मापायाम साताम् । 20पिल सममेरापरवा मारपे-सम्बपिपप इति पति पनि सोबारे विचार, पनि देखमेमप्रमाणात मुरायमेव काममेरमणमामात्यकोवर माती पनिरम सरबरयासरम्पराचारवाये माण्णवतार मा मात्र । फ्लुनदेव मनिपाला प्पिमिमामामामात् एकत्र रममाणपत्र प्रसREE- एरामोपारिपारिमेन प्रवर्दव एकासिम्पाला सिबारम्ममासमिधि अनिपारेसका इम्य- परमेवति। समपारस मिला पोपि माची प्रपितभर, स्वामक्रिोम्सौ पन्तामय गाविसधि- म सुस्पताम्त मालम सिवा समापसमोसारमय सारिएपनिमारपामिति । एम्समेनोस्पानिको मेरी तन महतोत्पादन एम सर यस्ता विलास पोलियमेश मोत्पाद सोपो मानिनाम सामनिवास बाप्पमिपुत्पादनासे सामामातामा किनम् । सामग्री-महो त्पाद इति । रपालिकामगार-मातेति । पासवान्याने उत्पारमिास्मालम्, पासवाना सोपालामाहौष ममानिनाम्मोरापाया छमोल्पामाम्मुम सा अम्बारको प्रापि- सरबार सामनवम्तमानिति मात्र । तावे यासातासमी-सोति । पुनारेमानपानमामि चालान पसप्तरे पिपरमारिमाणमेन मया सर्व गाविपरिम्पार उपपचते ति मन । रामन पासा भास्तनियादी समारते तब महोसाइक्लिासमा सम्मोपविमानसमाते इसा तिरपोरिति । ना १८ प.सि.मसे मनोन्मए।
- --- युगपत्पादमिनाशी] मारशामयचम्म् हव्यासमिः यासानुमितभान्तिषिमाम्योरिषानुमेयता, इतर बार-न तर्हि सूक्ष्मी व एमाभरणस्पास् पपुप्पभनुसारविन्यप्रविधि, सन्तानगवानेष पो ली नानोस्पानी सा समरणयात् पम्पपटस्पेषोत्पादः भारतमटमेव विनाश मोम्पवे सरमोत्पारमहयोरारमपमसियम्, परस्परमरणत्पात्, पटियामोशि- जानिर्विनामस्म प्ररममावेर्थिनामा, मयोयुगपशवात् , मिमिनेसव पार-पतः 'नानोत्पारी सम यभामो- मामी सुठान्दमोः।( ) रमा तुसाया एकोऽभ्यो नमत्युममत्सपर एकस्मिमेष पणे साप्रपोसति- समाम्तरविनाध्यविति। एवमेष च सन्तानसिरिस, युगपदुस्पापविनाशः म्पनरम्तर्यात् , अन्यथाऽनघस्पानेन झियाक रभाषात् का क्रिया ? रव-पणिना ससस्त्रराः अस्थिवाना कुता किया। भूति]ो किया सैष कारकं सैव पोम्यते, ॥' ( ) इति, अप षा नायमर्यो युफिसाध्या प्रस्पक्षत्वात् , मन्यदेव हि रूपादि उत्पधमान एस्पते, यहसीयोदक, मन्दबुद्धेय सम्वाने 10 स्रोतसि वदेसि मिप्याप्रत्यय उपजायते । (पवमेव ति) एवमेम च सम्मानसिद्धियुगपदुस्पापविनाशः रूपनेरम्वर्या-सन्तवमनपरवं भागात, भम्पया-न्मापारम्पबा न भरण सपा पिनाशोत्पारगोरवस्मानेन कियाजा-मचितुरमावात् , एतरर्सवारियापनमार-भमिना सर्वसंस्मया' इति कोष एत्पतेः सहारपत्वात् प्रत्यपरन्माना सेवा भण्मानमापिनो द्वितीयपणमसिमाना ना मिमा वेपाम् ! पवई प्रिया मोके परिगृहीता पिते पट ! पति ? किपर ब्रोति मम मावि, भत्रोपते-भूविर्यप-बम्मेन स्मिा सेप प कारक बास्मानमात्मनैव निर्मपतीवि जम्मैप पिनासमरममित्युकम्, अब मा नायमों युक्तिसाम्मः प्रत्सम मोलाइनिासमोर ममतासम्मपि सम्मोत्साकिनाम्यो वन्ययमानो तुमसारमा एमाले-मावति । सामोपारविनामोरधरपसम्मम्, सत्पाई प्रतिदिनापस दिला प्रतिसारस परमातोपपमातिमा-एमास्पारेति। वायपि सामोपारविनामो आन्तपनयमोहमनपपदेव मरत. मोरमान पापि मानो पारल ममग-20 मम्मोरियाविरसमिति भाषः । तदेव रपयनि-नाशोत्पादापिति । मनु बमलोकमाने का मन् मिजोरदो सपापनामा लप्स, avi पुष्परिमा-पोत्पत्तीति । उपा र स सुमपापारमिनाप्रपति विनापरून पारस पार से मना । अपचरनमानमा विनाऽपरस्पात प्रीय मापति सन्ताननिfo सपनिमामधये परम्पपवासरत वापसदिमाम बारामेरम्तमा पपमप पति । मानो-ए- मिति । मिनामारपरोपरकी बाबानापानामम्मिान-स्पोरनुभमिरमा मारि-पम्पमसि 20 परत्सरपरकताबमप्रथममाया रसापरिनाम्पारिवारमा । भत्र मात्रा भीममार-सम्मिच इति । तिमिमा सपर तमा ने सपा परमम्मावान नमारतामिन नपि पिनाविश्व पनिमा प्रामम मिामा सम्भव परिमपूर्णपमा सह-उत्पचेरिति । म मिाया नमार परेका सिनिमा विभपात मिनिस्ति पारपसारमा प्रसानिमान परमिन- प्रेमग ममाधिमा पति भूतिपामिति, मेष फ्याचा भविभान व ग्गिा दस पम्पिान मर30 भीमामालान निमार समिाणात भाषः।मनुमिननाबुमानप्रवामन पमपम वरपपरपी 'माम चम इमरिनुपापाय मिय।
म्यापागमानुसारिणीम्याम्यासमवम् [नियमोमपापा स्यात् गम्पो बसपाफुपचमान श्पते प्रसपत पर, -पहलीपोरके, पवा मोतसि नपापीना परमपरन्परेनागाति, गरन्तु गहमेव, जय मम्मुसा आन्तम स्वाने-अनमरवे खोतति तदेवि मिम्मामलम स्पायवे पा सहपातिए । . ) 10 , मय सन्तानयत् सूक्ष्मोत्पावधिनायोरप्यम्सरे घस्तु रस्पेत, सन्तानमपि वा न येत सम्मोत्पादपिनाक्षवत् , अनोच्यते न दिरअपपल नाम, पकं हि मुरिमाम्पादकमोधो- पदपस्पानदर्शनमस्तः सन्सानस्प, प्रस्म श्यमानस्यादष वा न पोपम्, प्रत्ययस्य प्रमाणाम्तरेणापाम्पत्पात् , तया हिपचकस्मिन् धणे आतं ॥ इति, वस्मात् स्पिसमेतत्वणि म्मादि मान परिस्थति। भप सम्तानपदिस्यादि,-पमा सम्तानोऽपलिदो श्यते सोत्पापविनाश्योरम्वरे दवा सूस्मो- स्परविन्प्रायोरप्यन्तरे पस्तु-पाति रयेत सूक्ष्मोत्पारपिना साम्वरेऽप्युपतम्पमानखम्पपदेपोतमे मावाम् प्लारविनाभस्वात् , सम्पानोपारविनाश्वत्, सम्वानम्तो पोल्पापविना सान्तरानुफ्यम्पस म्पपरेमोनुमे स्मातामुत्पावविद्ययात् सूस्मोत्पादविनामयत्, बोमटे, नवोऽनुपपने नाम पनि बुद्धिमान्पाडुरम्स्रोतोपमम्पनरर्मनमस्ता सम्वानम ममम चमानवारे या न पोपम्, ॥न प्रमाणमे प्रलपमतिकम्योपपममिति प्रसपनिम्न प्रविप पोम्पम् प्रसपा प्रमाणाम्ठरेम- पामत्वात् मा स्मेिवमाम संगागुपपस्पन्दरपारिकापम्पह-'पपेकस्मिम् मणे जात ( मिति सोका कासचिरेण विनामारप न मात् विवीयमप्यपयमानयत् सदाप्रमानमेव मात् मिनापरेसमाविमुच्म् न पंचदेव भाति, तमासम्मैव विनाशोखरामना वशिनास एष पोच चिभरणमिति शिवमेवत्यापि रूपाति पार्य पसिषति। प्रस एप मार-मप येति । प्रारमि दमानि-पातीयोति सामान्यपि सम्वाने मातम पुस्मत कमिसन रपवारत के स्परावपि मिली मार । म मामिलाम्येरवरी सामासिव मठ सामोपदमाम्मरम्पपि यह मत, मध वा सम्मोपियोमासावे- भयेति । माबो-पपा सम्माम पति । एतदेव प्रबोमन संपल-सूरमोत्पाविनाधाविति । समास्तर पति प्रसानिममोमो सम्मानमुत्पादानास्माका चल पापानिापी वान्ताम्म मानसम्पपोतु म्पादमिनाची तातापुमानमानसमोस सपम उत्पादनापपात सम्प्पत सोपान-पसी पन्त ।पनियमनमान-सम्मानमती ति।सताना- पमानम् नमाम भारतमा, स्पानिमाम्याम्पसमा पनार, नगे पनि भारत सुपरमलावरमापा पर मिलन समारो- बीए इति । प्रमाबान्तावापत प्रसार-विवि। मिलाकर पेसव-तपाति । पसिधिति मोमिन कर बात ननिकारकत् । बाम समापिटीमा समा। मेरी न सम्माम्पत । माप्रमाण-पयुत्पत्तिरपति । परिमेस्वमापदि सालासम्म गर्न पैव विमाप्र पार्म - सनाप उपरोपका निम्न मनुमा म्पमा सेणी मानव-म पैतरेपमिति, मालिकावासम्म म मामा-पसाबम्मैवेति । एमाला- , एषम्मूतपेशवाऽस्स] मारणाजयममम् पताम्यामेघ महोत्पादभनाम्यां सन्तानजाभ्यां वणिको सूक्ष्मोत्पादमलामनुमेयौ, तपपा-अन्ते क्षयदर्शनावादी क्षयोऽनुमीपते, प्रदीपशिखापत् , ज्या पटाविरपि, तपा मुखिरपि धमिति मया नयः प्रतिक्षणमन्यो भवशेष न भयतीत्यभ्युपगपति, अतो नियमोमयं षाम्यति, भावनिक्षेपविकस्पमनागमठो मायमुपयोगसमूत पाम उपादि प्रतिपयते, उपयोगैप भूतस्प नपस्पैकदेशस्यात्, पर्यापमूसनयमेदपा, परि समन्तादयते इति पर्यायाक्षरार्थ । स्यात् , स एषार्पोऽस्यास्त्रीति पर्यायार्थिफा, इन्द्रोऽनि प्रमेन्द्रा, पुरन्दराविस्वस्स स्वनषफाश एष पमिकस्मात , समावस्यैव तमनत्याविति । (पताभ्यामेवेति) एताम्यामेम महोस्पाइमकामा सम्वानाभ्यो पक्किो सूस्मोत्पावमङ्गा पमुमेयो, सपना-अम्ठे इपार्शनासादो भयोऽनुमीप परीपशिखाग, पथा प्रीपशिलोत्पत्तिका रम्म भीपमाणान्ते मिवावेऽपि सर्वमा झीपसे, सा प समान्वरापसाने सपि न मीवेव काविमित्युच्म्, 10 मत्स्ते तु सर्ग, वस्मादाविव भारम्योपरतेन्मनुमीयते, प्रत्यक्षेप बा, दरा पटाविरपि जन्मनः प्रति सौपतेऽसे मयदर्शनपविति, या बुद्धिपि मणिमुरु बस्तु नपमवेन, माना नप उम्पवे-अपने स्पानि, अप नपा प्रतिक्षणमन्यो मवमव[न] भवतीत्मभ्युपगपति, बतो नियम विदधाति नियमपति रेवि नियमोमप वाम्मति, निक्षेपमनुस्मे च भाषनिपविम्स्पमनागमवो माममुपयोग पायोपममिकमाषमोर मिक पारिणमिक पा मावमुपयोगमस्व विधानपमित पय रूपापि प्रतिपफ्टे, उपयोगेकम्मूवस्म नपस्मेक-18 देशत्वात् , बागमस एफ्योलम्भूधार्षिशिष्यते पंप बत् ददुमय पबम्मूतो बिसेसे' (मु० १३९) इति सामान्परमप्पत्, पर्यायमूमनपभेरौपा-परि]समम्तावपचे पर्पयत इति पर्मायापर्यत्पात्, स पनि पारमिधाम्ना समोसाइक्लिामवानुमेवाविवाह-पताम्पामेति । मामाघरमार-सपयेति, पयन्तेि बने पसव स प्रतिष समपरेन , सम्मटविला बोक्ने मापपिदियो यषा प्रसिमित भारम्ब नियन्ठी पते पायापमारपि वा बिग्री वारिति माय । पन्त पति-पपेति 120 पारिक प्रमादिसुपपरपासपनाह-प्रव्यसैषति। स में पाया ममाविष समार-सपा पराविरपीति दर पापम्पम् । तपा दुधिरपोति । मान्ता सपि समिमति माया कोसी ब्य रम्पत इमार-भर्ष नय वि।मा नो मर्म-निय माविमानन विपशेमाक्वेन रनियमनकारी निममोमन रमठ इति माया । सध निमम ममम्तवासनद-निसेपपतुपये चेति । बामस्वाफ्नाममाम्मपनिरचनाये रेय माविमा स बापमो नोमपातपरिक पनाचे प्रेमपमठो भाषम मुरति माया-नफ्यो मे मोमासमतो मानव काम सब पायेमित निक पारिवानिये पा सेम ममम रिसा रामसातवासस्नपामार, बल फिर पनि विस्यमा वस्तु अधिकमति, विशाक्ताभिस्ला परिवार, मावेनासमत निगरानमवे मावारिरिस्मा मागमत सफ्पोगति। 'पंचमति सकिराविधिक सतोमठे पर मिश्मिास्तम्मत मुमते, पयोम्यसकारासम्मका मल पा -वमिपेमसम्म मालगाव पानापानो युमम मनायाभयम्, तसिपी मैक्सेन सापति स मय एपम्मत पपमना पपेश पियति । वर्षों पर 30 पारम्पपपास्मेयमारल्याला पामरा सम्मोपिय पद पर वार नाम्पोनप्पापी मायः । ममत गम्योपगम्भूनलकेज मिनिमनेर मार-पर्यापेति पर सामनेनार पनि म मिनाम्यादात पम त सारायसव इन गिरिज, सोपरिपक्वामिपिरोनाहि माप । एसिपा, मनमा- २०१२ पापाममामुसारिणीम्पास्यासमेवम् [नियमोमपया एपाखि पपयोगसम्योऽऽओंऽस्मेति पर्यपालिका, दुपाहरणमिम् मान मोनिद्रमेन्द्रा, इति परमैपर्ने, पारमैवानुमगनपर पपेन्द्रोऽम्पदानिमा लोपयोगमा पप गोपगोगना समानन्दरमनियम बहुपरमात् पुरम्परावितम लनबमन एव पणिसातुपयोगास ववर्मन च, पणा पूरिमन झुप- बोहो पा पुरवरा, अपुर परोपमा मात्वावग परबचात् स एव भाग उपयोगीमूता । पुरनपपम्पमपापा साप एक नामोति माषिताम् । समापः को अयोग्यवे- मम प प्रतिषणास्तिमित्वावस्तुनो बुरिस्पो पोऽमी स सम्बाः 'पो वार्डो मुनि विफ्या कैसिदिप्यते ॥ ) पति, सन्तानचिम मो वाम्पापा, धार्म पर्णपदाविद्यमानामानुपूर्पोचारणम् , उपनिबन्धनमस्स उपमा-इमार्म 10 भंते । (पीवामि ११७८) इत्यादि। (भव चेति) भत्र प्रविषपातिमित्वात् पस्नो मुरिलो गोऽभी स झपापा पमे ममेड- मरेप प पस्त पपोत्पपाधिममपि पुरी निति, रतु मयो पुदिना सोयः श्मस्म, रूस रस्मे गम्प प्रमादि पतसंपाधापमान काफमाह, नबावरान्मे अनागमप्रमकत्वात् 'यो पार्को अतिपिपमा' नारिम्पारपावार्मानुसारिलान पाम्पाते, मिविष्णव इति, बसानागमोपयोगैसम्मघम मतमिल, 10 बास्मा प्यते-सम्वानाचिन मो पाक्यापा-विधानसन्चाने सपरिणामत्ताने पप प्रत्पतिविनासम्मः स बागापा, पाय वर्मपपाविसमानामावपूर्णाधारणम्, मतिमा मम्मविरोधानुमहा कमा मा मसार सममापियोपव वि नागमोऽप्येष मिनट माइ-पनिकामन तोऽम निर्गमा वपना-माग मत !' स्मारिणम्पो गवार्यः असायलेन पागणं निसात् । इति वचनीयायो एमाशोऽसमिपमोमपमहर सम्पूर्ण। तदुरादरपमिति र परमपमें सनातन परमेपनि मार्य परमपदमाति तापमा मनरा सचिन समापिन् सम्मासिपीना मार मा, एमिनमोस्यो मास एलोमते सोममिति सानिया एमसोपना निवास स्पोयम सि पर मोम्मान पुरविला पम्मर मुफ्रेम- मेलामा एमालतभिवादन पाना तमेपेपपेपस पुरम्परमारतम् विषम परियाभूतनम मा-पुरमरादित्वस्मेति । एवं परिवार सालो पुरस्बरो नाम्पा और सपूरिमोगे सत्तार, सदा रिमनिकन समितो मास, वाम भाका । मान-समापति, परिवार लोपयोग. पुरमरा रि- मित स. पुरमये मकी नालोरी म । मम मम्मान समाप्मावति। पुमिपरिमापार मावों पर प्रविमनिपराबाद-मन प्रतिसपति पास म यस्ताविपारम्पान्नः तपा शिपि मापा पिानपारामा मामुपमानिसलादसामा का पासायप्रविनिम्मे पति सरप बुदित बाण म+मति रमही नियम उत्पतिविभिन्मापाकार परकीयः । सम्भार 50 सामपि-पो पार्थ इति । रामामम-सम्बनधिमेति । गरमा-बाम्पमिति । बम मानिने म्मान वाम र मापं भी गवाभिगमन मेकप रिपवाय रसवप्रमापिकिमानाय पारायशालतामिपी पिम् । सम्माधिमारतीति । वि विजपसपिरिविरचित विपमहाविसबने नपपास पायो विपमोमपमा समाधा।
द्वादशो नियमनियमनयः पूनममवापरितोपमरममुचरनयोत्पानम्, उत्तरोत्तरसूक्ष्मेसिम्या प पूस पोपासनात् समतसोसिसाभिमानाबारम्भ इयत बाह-- अन्ते क्ष्यापर्य ततो वस्तुषत् मसिम्पपगमः कृतो भवति, इतरया विनाशोस्पादयो रप्पमावा, प्रसिसन्धानामाषाद , सितस्यैव हि भवनमिस्यभ्युपगमले, वस्तुम्यषस्थासिस- पहिवनियमानतिकमात् निष्ठित पत्,ि मन्तवत्वात्, पटाविषस्तुषद, निष्ठितस्यात् । कृतकं ततभारम्पमपि, एष ते पूर्वनियस्तुनिवम्धना, क्रियापत्त्यादन्तयत्, यथान्से झिपा-मयन सा पूर्वनिर्वचषस्तुमिवपना तपा मारम्मादिभिमाः । (अन्त इति) बन्ने पपापपेष-परि तपाने अपाशनात् सरसेनेव भय पनाराषप्मनुमीप्ते, dark ? वो वस्तुमत् प्रसिअपगमः कतो मयति-पस्तुनीच पस्तवम् पया मस्तुनः प्रसिद्धस्म-छोके लियम पदारे पयो भवतीति प्रसिद्धिा, हमा समाऽभ्युपगवमिति प्राप्तम्, बिनाप्स्पोसारम र मसिए 10 वस्तुनिएमाला, इतरण परविपापमय लिममाये बिनापोत्सादयोरप्पमाव: प्रतिसन्पानामापात्, भिवम्म-मयद पर भरनमिति-समभ्युपगमस्से, वस्माइसम्पपसासिनुपहिवनियमानतिम्मास्- प्रसस्मारतोभषस एपोत्पादविनाशप्रविसम्पानात् म्पबलिव मस्तु सिय मिक्समुत्पादविन्यसम्पपरेसमाग्म- पती-पेवनियम माविममति, प्रपुप्पादिपसमापनोपहितमको प्रस्तुम्पपस्मासिस्नुपरिवनियमानविकमात् निमयेन मिव निष्ठिसम्मपसिसमिति गृहाण तापनारेमव मार-निहित कई वत्, मम्वरस्पाम्, पटाविक्रमपविनि प्यादा पवा पत्पिण्यायमस्मानामन्ते पटोऽस्पेम, पस्सिव पपाम्वपत् वमा महाप 18 ममापि मतस्यामापुता परस्पति पतित पमपुत्ती म्नमसपीया पामानिमारामुपपना भनिनपीपवारममाषपरमानुत्पत्पिरिभ्यः एस्मत्त्व बसुन से निपनियमय प्पाप्तान नमक- परित रात्रि-पूर्पमपमतति मपटोप एचरमोत्पाने भरपम् भपतोपथ बामसिम्स रिपरे सिमान संयमते पर्सनारिल्यमाचलमत यापानिमामानापारम्भ व भाषा । पूर्वनवे ऐपमुडामणी-भन्ते 20 सपादिवि मत पगरनारा मत स धोनीपत प्रोपनियतम मतम् मय सरत पपरनम्, वर दमे मभितम वराय विपणम् सिम प्रमसिप्रिमिति नविपरम्मामुपपम पनि बिरपफ्स ओभरती पानाप सत्परम प्रसिधावियर पहन बहामार तालिपायस्पोत्पादनापपोरपा मारमा- परिस्पति । सिममा पसेपोत्पादसमेष बिना ही श्रीमपान म मामिण पाश्मिमा मार-प्रति सम्पानामावारिति । मासम्पर त ा प्रतश्पप स्पप्रामवनेसम्पासतानादिया भावाति मा+25 सामान्यतिलपारि सितम मान मरमम्ममियर-स्पिवस्मेति बन पर प्रतिस्ने सी भामा एसपना साम्पमया तामिला म्पहिलो माये में मिसन-प्पुमारिसमवय बितरमामाभामा की नियमावरमनिम्मापसमा मिति स्वयापभुमतमा सास्पिति । पद मिनपारात पाणि, माम्नति पाप परिसमापसातामास्थित सेयरपपि अधिनियम परम्पमपि पसी पए मम्मकिपानिय दोनुमान भावनि-निटिवेतदिति। मारम्भसिन्धिानाममा प्रas 10 म्यापागमानुसारिणीम्मापासमेवम् [नियमनियममा पसासपि विस्तित्वात् [क] नद् पस्त, पटाविसस्नुपरेष, वव-मसम्यास् बारम्ममपि भटाविषय- परवि खतमगामेनारम्भम्मिानिया सामिधा उपसंहस्पैकत्वेनाह-एम व सरि-बारम्मशियानिनः पूर्वनिचियनिवपन्यः, किपापस्वारस्तपमन्व साधवत्, सान्टे निचित्रो श्मिामान सम्म आम्मम्ममा, सा पूर्वनिचिवस्तुनिन्याना पवा पारम्मारिकिया। . कुता मिा वणिकवाद ! रख हि-णिका सर्वसंसारा मस्सिताना कुसः क्रिमा ।। भूतिया भिमा सैम पर सैय चोप्यते ॥ इति, भमोच्यते तिपतु सावत् पर म्पत् , पणिकशम्दापतत्त्वान्वीक्षणादेष धणभनयादमा शक्पते काम पणिकासम्पल मस्पतिमसम्म पवाचिठम्मस्पपान्तस्य सितार्पामाऽभिपेपाभावप्रसाद, न हिणिक 10 सम्या क्षणेन स्पेन समता पार्थेन स्वामिना किनाऽर्पवान् या क्षेत्रेण स्वामिना वन स्वेन - विना दणिक इति शम्बो नार्पवान् इति सत्समषस्पास्दम्माममार्यों भवितुर्माति, इसरपा षणामासीति षणिक इति न शम्दापों पटते। (कुत इति) ता किया क्षणिक स्वार-अम्तेऽपि च विचार नाम्मुपगम्यते मा पनि कलापम्पमत्वात् मागुठविभिना किमा। पुनरारम्मरपापसासु अभिववस्वनम्नुपगमात् च 10 हीमाविमापक अमिमा ससस्त्रया सानिमोक: प्राम्माम्यवाय इति न पुनाम्पाते, पोय- विस्त वापरिमादि परम्प[-]म्मानमर्शनस्पोष्पोत्पादानिमियमुमामाविषप्तम्पमासिनिमन पा सबमहामावविपनसमषम् वचावासाम् off : पणिसपार्यवत्तालीमपरेष सपा पापम्म भापत कम्, स्मात् । पश्मिल मलामिम्पयनखिमसम्बन्धबाफिटम्ममगावमा शिवा मानेऽमिमामाषपात वापनि नियमिकसम्म स्मादि पपोऽमास्तीति पमित्र, पवा विमानसनिक घाति एवं वामाचीविति प्रा लि बस्तु बाबारा बारेममाथि रिमा मामात, मात् मिति सामिल किया सनिलिवन्ध वेवाम्ममा पिनासी मानुपि पवन पनि उपनिषकाममेश्मरमामायावसम्पमारत्वाचाधि म्मिा कमायो परिमाणे- कुया पेति । मारि-मन्तेऽपि बेति, निधिमपि नाचि मिया बालकलार गमावरम्परा पस्नासत्ताव स्मात् परम्भब मिमातारपण रिसावा सीमापासरियस एस गुमाका भारसाई-साविपति समानानियन मिापारमिामा का वाचनिय का मनमो निवस तासाचाम् पनि मानवापि सम्मायो बाया-विपतुवापदिम्यादीति। बसचीत की त्पति भवपिम्नी ममम मम तसेवामा बमबारमासम्पन्न प्रमचे मापात बानी विमानमामि रिपोय प्रय सिमा सम्पमिस मसार भरियामावि।सारमा मा सनिशपमेति माविमति प्राममिलन मसामिभावाप समपामोप्रमार लामीमोविकास समिम मियामकुमत को मात्र । मोमोति मिरम्परम मिया खामी, क्याम्पवरेजलागि मची तपा पनि समपि सपन नामी समान मोबिना बासानिमा समोऽमासीवीति । तम साल मयार- 18 बगावमानिमिप्रकि।सिमबदि।
समियाम्पयस्पा] पापचारनयमाम् पणोऽमाचीति दणिका यथा श्रेय दणसम्बम्धिना सामिना पणेन खेन प विना परिक इति शमो नार्याम् भवस्येम भक्तिमोऽपि क्षमन खन महता पान स्पमिना विना नार्पमान, मा भूत्सोऽनर्षक रवि उस्म सपस्म सस वणस्येप पत्रः, ठन्प्रत्ययातः सामी, तेन सह समयमातु शीठ मस्स स इम्साघम्सपोऽों जैनेम्म्म्मुत्पाविवोत्पावमिनाभपयार्यापारिसितम्यार्यपावितुमाति, स्वरमा भणोऽ- माचीति सपिक इति न स्मार्यो पटते, असावपसाधम्मामिपापिस्पे पटते । . . न, पर्यायविपय वरस्वामित्योपपतेः शिविपो हि क्षणा उत्पत्तिक्षणो विनाशक्षण सदनन्तरम् , एवं निरन्तरयो क्षणयोलस्पशिक्षणानम्वरो विनाशपण एष तस्मास्निपर्यायस्य पर्यायः तस्मात् क्षणिकशाम्दा क्षणस्य क्षणान्तरापेक्षस्वादर्पयामिति न दोपा, एषमपि न युकोऽपदेशा, इतराभाषे इसरस्यापि तथाभावात् यथा दाभाषे चैत्रो दण्टिक इति 10 नोप्पते, एष यदा दो विघठे क्षेत्रोऽपि तदाऽस्य सेन तवचाऽपदेश्यवा स्यात् , इह तु यदोस्पचिक्षणः न तदा विनाशपणा यदा विनाशक्षणो न तदोस्पविक्षण इतीतरफाछे इवरस्यास्यन्तमसस्यात् प्राध्यापदेशो न पुका। (मेति) न पर्यायविषम एष तत्त्पमित्योपपत्तेः पर्यायान्तरस सपर्यायावर खामीत्यस्पति- मत्सम्बन्ध पपपवे वरर्पयाची वट्यमयः, मसावट-पिपोरिमण स्मावि, पिप-म्पचिपा बिनाए-15 सपम सरनम्टरमिति तस्स फुटीकरणम् अनन्तरवपनमन्वपठापमानम्मुरासार्थम्, नाम्तराने विधि एसीस, अस्मार्पम पर्शनाव म सापक मागुरु 'नायोत्पारी सम प[मामो मामौ मुगम्बयो रिति एष निरन्तरपोः क्षणपोर्पोऽसमुत्पत्तिमपानम्वरो विनाममणा, स पापण्यापयतमोरेन मुस्खा बिमम्ममानो यो विमाग न मयपति स एष पम्पचिफ्यापस्म पपायः, वस्मात् मणिम्भमा भणम माभूदिति।गम सा खामी क्षेत्राहि तब सा पैदा गमवावबमामतमसो ममापि उम्मयान्ता सावितम 10 खासमाम इम्पेब साता भरतम्यम् , पानि ममासननिस्विमुत्पम्मिाममापसालसम्म वास्लम एस धमिमा पुम्पत मानवेत माराम सम्म पर्यायमा परापास्वामा लामी, मनुसम्पस, परमार मुम्मा माद, ताबासमयिमसम्मानमोपपचिपाति।क्षम पार्माकम्प निासाम्रगम्बरपायरि सम्म मनमोपर पप्रविमर्मर पकिसमिमार-म पर्यायविपप एबाविसमा माति- परिपोीति धिमे विमान पौधापन सम्म निप्पम पिपर्मममम मम 25 म्याम्पस सम्भा ताम्राकानि म तर साप मातरमी-नागात्पादाविति उम्मरममा- म्तयो नमनोधमार गमनमुत्ताविना यावाभिमा-पपं निरस्तरमारितिपादन गयो पचे नमुत्पविधनान्तर माया र अध्यापारमध्ये पुरख मिममातम पसभा सम समापो व भगिता वसर खिमान पाम बसावस तपास वभसमय पपरपर मायान्हमाम म बम जमा पचान्तरामनार पमिमामानित नाम्सायम सिमामो भारत 30 ॥ (110) - म्यापागमामुसारिणीप्पामासमेतम् [विमनियम पणम्वपपेसत्ताधर्मवान्, षवो न परोपो न दम्मार्पपरिमोऽअभिवार्मोऽमेय इति, प्रोग्य-सामी न दुखोपोशा समोऽस्त्राप्तीति पत्रिक इति पर्यपाम्बयपेपवापि, स्मात् । इवरामाये इसरस्थापि कमा- मप्रपात्, रमा रणामाने रमिलेन चैवमाध्यमावात् त्रो रशिति मोयते, परमुत्पमिक्स विनापथमस या परस्परमिवरमानेश्वरमानन्दमसत्वात् विनाश्यप पधिपचान ममति, परिपको । ऽपि विनासमवान मपति सारिपामयतेन नामाववत् पहारमोनियवे पेत्रोऽपि विषवे answ- वैवम वेन मम्झेन वाच-रणमय मिलापपरेश्मतामानिति बेपमेन निदर्शनम् को सतिसम स्मारिनोत्पत्तिविनाशवपोरसापर्म वमति पापत् माध्यापरे न पुजवि गमार्यम् । पदपि प नानोत्पादापित्यादिमिदर्शनमुक्त तदप्यर्यान्तरपोर्युगपत् स्तोस्तुगान्तको मुंम्मते न तु विधमानाविधमानयो षणयो यौग्पपम् , परसपुप्पपोरिष, मय साता कमि 1० पोरपि क्षमपो पचरा पूर्षो मा, तिष्ठतु नाम सपापि यकसिन् पणे माव इत्मवि स्पयोको दोप पव, एवं तापाइयो भणयो। सम्मम्भाभावात् पणिकशास्यार्पोऽसम् पपन्तरा- लाषस्थानम्मुवासापत्वेनम्तरधम्मस्य । (यपपि चेति) पदपि - ' नापारी सम पाभामोलायो तमन्वयोरिति परेनुमत्त नियममुक्त वार्मान्तरमूवयोर्मुगम्योपणाचयोमुम्से, न निपमामाविषमाम्यो सफ्नोगत 1B परापुप्पपोरिष वामनमोस सत्वापोगपर्य मात्, बपोऽसमससवा पावान्तिकमोर मामठ मायोपयोगौंगप सति सामवस्माररोप स्पेक्वायुष्म, नश्ता सस्से सामानमुत्स्थमानेम, भससे नरममममसलम् स्मारयुत स्परेप प्राममापरेषा समोऽसाखीति पनि इनि, -- - परविणमासत्तारित समावत परमपीति विन्स्यकापियवा सम्म पुपमा मारण्यात भाव इति एम्सामावरम पार पोपमात्रामा। मामा-पोति बस्यामा परी मस्ते करपमानमा सम्पन्नाभागापति मायः । सन्धिामा पबमुत्पचितपस्मेति स्पणि पिणे मन बोलाएपसिनापमानाप्पुरममावलिाग पनिमाविनिमयमरम्वर कामावरमामामार या प्रमाला पानात इति मात्र । परमादेस मासनम-पमा पप इति तपमानास मामिप्यार पारेप- रमस्य गोरेप पोरन मनमो बसम्णम्ये मारमानापळयापी पार । पयम पालना स्थिति मधिनाम्योरप्तररामरमामयाब पिच गत्पक्षियमास मत मम । मनोममनिमपि न मया-पापि रेवि पनामामाम्ये परसपर पोपमो मममम मातो, ते भपि सम्बमा बुमपी मानेर पाइरिया महिमामी जिनमुत्ताविनामम-पापि मासो स्पाराविति, तमसम्मोहमशिन तोगविन मारत माता । स्पानामोरपि एक RAM मा साम्ममिति । ममामामाभ, पतसर मप्रल AUR मा म त पापमापतिसम्मम्मी सम्पपनस्पति पामेला एक प्रोपरम मिाणमा पनि परमे परिमामय तमायुधाति समाचार सालान 1avR. मायामा ।
10 वार्षिक समिकामा मापशारजपचयम् माविस्माना वयोः पूर्वोचरपप्पोरन्यवरखिम्तो म्यपरेशसिरिरिति प्रस्तुचरण भय स्सावा कमियो- रपि अयोरिति, यपुरो पनि पूर्णे पोसि वयात, तिस्तु नाम, दवाऽभ्युपगतेऽपि दोपचयो 'पपकस्मिम् क्षमे गाव' माविमोकाः समोचो बिनाम भरपाभावारनम्तामापसानमिति दोप एम, पर दाब पोः पयो सम्बन्पाभापार मणिकामार्पोऽसन् , पपन्तराठाबमानम्मुरासार्परेऽनन्तर कपा म्पपदेश[सिसिरिति पते । मपाऽप्रमाभोऽनन्तरविनाशपर्मसम्बम्पी, मनन्तरवासी विनाशति समासत्वात् उस्पैच विनाशपर्मसम्बग्पिना सम्पन्ध्यस्तीति क्षणिकशम्योऽधान् , न हि म्पाविपिनाशक्षण प्पतिरिका उत्पावधणा, वेनैव स पणिका, मध्यतिरेकेपि सम्बग्पषाषिप्रत्ययदर्शनात् ययोत्पादवाना, स पोस्पावादनम्तरमहरा, चस्पादातिरिकालरासम्भवात् । अपाऽश्मलाम इत्यादि, भप मा भूप गोप स्युत्पत्यनापरविनाशक्षण इत्मनम्वरम्प्य पचिपप्पमेषाद, स एषोसपिक्षपोऽनन्तरबिनाशी समानाधिकरणसमासत्यात् तदईयति-धनम्वरमासौ] मिनप्रमादिना, स्पेषात्मममम बिनाझमर्मसम्पम्पिना सम्मपत्रीति भमिकामोऽर्यवान्, समाम्मा-महिपारिविमामानि पापत् मिस श्रम सम्बन्मिपानिप्रममता शेति पम् दरमठे प्योपाइपानार इत्युच्यते नगरम्पत्तिरित प्रसादो न बोत्पापम्पतिरितो मनुषोऽयमुस्पाबमानहर इत्युक्ते, समान म्पपरेगोनेव वस्म, [वदेश] वर्मयमार-स बोत्साराषनर्मान्तरमहरा परमात् १ ।। उत्पादासिरिभरासम्भवारिति । क्योसमीपन प्राममोपारम प्राध्येम गरम मिरर पपणे म पुची मारा । पाणिने दिलासम्म विनामले बोपारसलस्विमिति र म माति सा-माधिपमासि ।ऊ सामान निारयरमा मापति पपेमिनको योग बिनोलारम्पद । मायाम मा वस मामिसम्म वा । मेरमरिना लो यो मुम्बर ही समाप-तपाऽभ्युपगतेऽपीति मेरन्यमानाभापमेऽपीमती । एसोत्पत्तिसपो 20 नाबामियान्तरणमसान्यासास्सिवेरासायविरोरपि मम्मे हम्मालामावात बमोऽमातीत पिक भी पम्पस साव, तापम देन समेत मापदेस मास्वामि-पर्व वाचदिति। मनन्तरम्म्मे प्या- मामा मामाभाग साधम्मपनिवेपरबषयमकिनार्य पोसारसपमानिनि निलम्पसात मिनावावपाये मनिम्पराकानिमामा-भाऽऽस्मणाम इति । मसराम वरनामवन इम्यानम्तरण पनि अममेर मममात्स्यपपिपि पवार, मपविषमन्वबियामापार भनि, एपिसोडता सनाम इतिहमा समावाविरफ्तारमन्तरबासो बिमारी समाविमर्मधरमसमास पल्पत साम भामोति-अप म्पमूरिति । मनमो निमारारम्भीकत स उसास बिना सर्वपीभूतः पमा नियमित स्पारम्प माह-समवेति। मपासपमानिसहमनिषाद परिविनामसम्परिपालनपोरेता तथापि पनेप्रतिकिल सेनेव लस मपरमो मार गिरपि सम्पनिको मतपरिमाणमा पमा प्रेम सिरपति-समपाम्येति । मरम्पतिक समावनिममुष्प्रभागार मारणे पामेति। उत्पावणाराति मारोत्सार सत्यप समा महिलामो सितमपि सम्मानमामिलाते पोत्पादन पर सवे पावापीस मा नम्रता पर पिसमा मिनापित इमामलोघरपशि- सि.चा. मग म्पापागमामुसारिणीम्याम्पासमेवम् [नियमनियममा पत्र मा- एवम्ते य रत्पादः स एवार्पः, स्नैव स एव पमिका उत्पादातिरिकासम्मषादिति भनिए पमिकामार्पसमीकरणम्यास्पामधेन स्पया सस्पैव विमाशितवाद न प स यस पणा न प योऽसौ क्षणा मेन सम्बन्पात् पणोऽस्सास्तीति क्षणिक रमते ततोऽपामतः । सापनपर्मविफल इस्पेतच न तुम्पपरिमभार्पस्वात्, परमेन प्रर्यमारमसात पर्येण कारणमिति पतरस्म पचसा विशेपनिर्मयोऽस्त्यावयो। एव ते प उस्पाप इत्यादि, वन्मवप्रमुबारपं, अबदुस्पासिरिय[]सम्मपारिति, चालिए वर पनिकम्मापसमीरपासापाचेन प्लया वन विनामितत्वात् समिति पदयविन प समम पण इति न च सोऽों परोन स्पेन ताम् अस्मिक उच्यते, सामी पणेनेच रमिक, 10 लषोत्पापमपातिरियासम्मवामित्सुकत्वात् न पोऽसौ पप इति, सोऽप पो मालि, गौत्र- पमित्वम्पपरेससरसानीयापमाछ, बेन सम्बन्धात् पोऽस्मारवीति पनिक रयते तोऽमा भता सामनधर्मविष्मा नेवबन, गुस्सपरिममावा, बर्ष ममा कारमन प्रर्पमात्मसात वम्लादिना पापीति, समा भर्येण पढारिनाऽमसाक्वारम्वापप गति परम पचसा निक्षेपनिर्णयोऽस्त्वापपो। विक्षेपमपि पात्र मा- 10 नमूळवस्तुपावपत् भपाच कारणं अम्पमेव मारमसास्कोति, वस्मानपता ब्रम्पेम एवं जाति एवं मम । पापारिदिलिपा एमट ागा सप्तम कथित विपरा एक पारम्परिको मागतोय सवार मी नमोऽस्पति पत्रिक सामुफ्पमनी नेर कनिम्मान समीरमान निलमा निति समान पाच-सपानिए वर्षतिम दिनान्ति मना-पस ही सेचि ममसौ बर मानिस सामगिरधर्षामान पामोतिन यायोति स्तन म्यामिति वा पनि स्तेमाने पा-मपसोबत बोपणियमिनासपालि परम- परात्पमतमाससम् देव रामसापीरमा बिक रमज्जा विकसनोवरपादादिपाधि कपि, बलिो पोत् लरत्सागोमागादिसुस्तारित मामलोपाराभीमसम्पत्प्रेमसम्पमापार परिणामो नामाथिली मात्र । मोऽपि नाचि रमवार सहमपन्या समनिममा मामि पोऽसी सपीति प्रत्सावादिमियभाग, क्लिानोसामासाकरसारिनाम सम्पत्यापित सापामार बार मन पापिलोमा ब्रम्पसायोति न समेति भक्तानाम्न सामा-भवति । एवं ल्या बारम्समा म विपतिवाप्पतब सम्म परिप्रभा मामला त्या पानामा पार सामान ना मारपसायन तुमd मग बापाला र एरा एकसार समपोसाद बास्मानित पशुपवे ताप पारसमस स्मामलारप्रभावात वाचन शानि मामति समरिमेमेति । एत्मा एलान मममम निमपसावन म पुती भाप । हस्तामाकोलियम इति इम्मामालिनी पोन पर्वमारमपालमते मामग्रवादी महाविमा ति पर्याप्सारीत का नाबादिना पारममुत्पपि पपरवा पाच पारम्प यमपरिनवे सात् पाय पर्याय प्रशामिमा वामपन्या मिनिय कार्य समिनिमय सीमाया मा मरम्मामाला समिचिस्मिथाना प्रसार नूष्वस्ववादपदिति । पदमार-मामातम्, प्रम-नामापारे अमिरे समिकणवायोगा] दावशारमयपष्म् कारणेनासाघेते चस्पावविनाशाविति, यचेच नेम्यते सपुष्पम्ममप्पासात, तस्पोपादावर्षा न्तरत्वेनाभूतस्यात् ययवुत्पादावर्यास्तरस्वेनाभूता तनासाधमान रटम् , पपार उत्पादेन, मरं षोत्पादो नासादयेत्, अर्पान्तरत्वेनामूलस्थात् खपुष्पयन्भ्यामुतादिवत् । नमूतवस्तुवावपदिस्यादि । पापवासापेते इति ननु पूर्वमुपवरूप मयोकमाईवपारपसार विनाश्वता पस्तुना मितिमवापि मषितम्प भूवत्वामित्मावि, पर मबरेच मपति, नामपत्, भवन कारण इम्पमेयोत्पाद विप्रथं पर्यशास्मसाकरोनि-मासापयति, स्माचेनैव मरवा दम्पेण बारमेन्यसापेते भोपारविनामाविति नामपकार्यमासादयितुर्मावि शिरमसत्त्वात् अपुप्पषत्, यग नेप्यते- भावस्मन्पमा अपुप्मरूपमप्यासापेवैक-मिर्मीवमपि दैत्पादकोष भवेत्, इत्पादो हि ममवा निर्भीयोऽम्मुफ गबा, म बोलायो निर्षा कारणान्यास्मसाकरोतीवीया, स्माचेनेवोत्पादेनारमसारिकमेत लपुप्पयामुता पपि परण ! सम्म नपुप्पारेरूत्पारावर्याम्वरत्वेनामूसत्पात्, पपदुलारापान्तरलेनाभूत वचमा 10 सापमान-प्रास्मसारिकपमाप घटम्, पपापुर सादेनेन्माफ्ममनिष्ठवित्, भहर पोत्पादो नासादयेत्, मम्वरस्बेनामूलत्वात् पुष्पकम्प्यामुखादिवत् । पत्चरेण विनाशेन प्राप्पस्मासता तस्करले तेन घा सम्प्रति भसवा न युको म्पपदेश इस्पस्योकर यदुप्यते खया न माविधर्मम्पपदेशादिसि भाविनं धर्ण सपायोप्यते क्षणोऽस्या स्वीति षणिक इति मरणपनिषत् , तस्यैष चासी भाषस्य म्पपः प्रामस्पेति म्यास्य फ्षापदेश: 15 यदि माषकालान्तरमाविना मरणर्मेणापि म्पयात्मकेन तस्यैव धर्म इति म्पपविष्यते भाषा लिमिति पुनरास्मठामानम्तरभाषिना विनाशेमास्मीपेन प्रपमधण एवं षणिक इति नोच्यते माविषणस पानबानम्तरसम्मको कथा उत्पायवे पणिक इति । मसिमसामन्तिमसम्ममापिसतम क्वामिायामिमामालमसा पीस लोगों मेनपारोल्पाय- मिलापमानास्वामानिति प्रतिपादितव्यरिस । सार-ननु पूर्वमिति । ल मतिमात 30 मारेन तेन देव स्पेव मपति नामक्त् मगर पार धर्ममनमुत्र लिमयमा मोदमान-तब भवति । माय परस्परमसाप्रपात् नामवत् परिपर्व परपरपमासादमिति सम्मपत्र पुपादि-सम्मा- चेति मात एस मासादिमा समापि मनमायावे साप-मवस्त्वम्ययेति पुष्पमपि मनमाया- देवि माल सिममाति-पत्पादोीति, भाम्पते म्पारो नाम समालम्पलात, परवान्यात्मसार- कति मन सोपाय मालमत् पुष्यपि पास्मारिकती माया । तत्र फारममार-तस्पेति। सुप्पापपि मान- मामात पावरकामतत्वात् सम्भारपारान्तिर पहलापरेवार नावात इसमान मात- पपविलिपुभारेस्पान्तरात्मामपि वाष्पपमानासानफ्रजरमपुत्परो नाम्सादयर, मास्तरमा मनात पुमान्यापुपारिवति मिनिममार-मार ति बार सपथ खपुष्पाणि मोपलोमा मा पर मानिसमा सत्परम परिम्पपसोसापाव सम्मपनी एपस पापाराम्समापन .सि... मयतौरमबोध । म मरे, सोमालित।
पापागमानुसारिणीप्पापासमेतम् [लियमनियमक्या यन्तरेणेण्यापि, परस्माभिपणात्तरेण विनाम्न माध्यमासम्वत्का न वा चिना[न] सम्ममता म मुझे पपरेससमोर परिवारान्न यनुमते पण-न, मविपर्मम्पपरेशनिति कामासान भाषिन पप सम्पायोपवे अप्पेऽनासीति पविक इति, बसामाबिनाऽपि माविना वाचा मपति मिल? मरणपर्मिपत्नवा भाषिना मरणपर्मेण ताम् मनुपातिक प्राणी म्पपविश्यते, या प्रबमपणे रितीक- सनामामाविनापि माविमा पफिनपरेशो मपरेशा वस्नैष चासौ भाषम म्पपा मासस्पेति माग्न पत्र म्पपरेसा गरि भाभगवरमापिमा मरणपर्मेणापि म्पचारमफेन वस्पैव पर्म इति म्पपविश्यते मावः चिमिति पुनरामगमानम्मरमापिनाझेनात्मीयेम प्रबमयम एस पणित इति नोपवे, माविषण सम्माननाति मे मंमाः प्रतिवध्यमानेनेवानी देवम्बरमुपाचमिति पभाविक्षमसन्मान प्रबममेवोपाच मपाऽप्रमेणामोऽमन्वरेसि विवेपोजवात्, पोऽन्वरम्मो कपा-बनवमम्मेऽमा 10 चीति विजानाम्पोप वा ठम्ममप सत्यपठे पफिक इति पथा रेगरचो देनिक इति, 'अबाबाई नितीवार' (पा ५-३-८३) इति । किम पुनरेग्मुमते मा- तस्पोत्समम पापारस्पितिरिक्साशाफ्नामेवमुप्यते यत् पणिक मास्ते, अमि निकेतनमिति, पतवपि परिकसितमेष यन्मरमपर्मिणो द्रव्यापस्मावणिकस्मास्मास्मसाभाष- 16 पत्त्तरेनेति । मावो-चरेणेति उत्तरेम भिमारपेव बन्न मामात्यायन -निमाबिमानम्म बानियन मपरमपुर पप देन-विनामोल्पा सम्मयता-उतारकासम्म पनि मरेगे। उपन्त रकममामिर पापाय सपासप निम्मापि तलमले बिनाले पनि योनिमा पनिा किसानोपा बनिन मालव इति श्री पंपासम्म म मा । देव पवाएता पति-- मावि धमेति । यानि बिना मुखा विक्रम पारम्म बनमाविका पनि मासिव सपा-माग्निमिति । तथा प्रविपि तस्या-मरपमिवविति । पात पम्ति समारोति-पपा मारिनेति। 10 प्राविमरमममी पपास भाविकच मरकर भो गोममानिस र समयोपि मनियममैव मान पम्तिो माह-यदि मायामाचरभापिनति भावमा प्राविया प्रमावरे माल मरन म । पषा परपम प्रनित एस माय बर्मशीला प्रत्यी मरमवर्मा मरेषा पापि मापी मानति मन टोली परिस्पेठेसार किमिवीति । ममा परिपमान प्रान भिाग प्रमी सम्र सौम्पाती मा पैस्था भारिसमा उपग प्रोपाच मामबानम्वरमा भनेर मै मस्या इति । क्या पसारनपुपपिरमारतोमाटोति किसानला किया। मालमुनिसावतेमाम्मेवार माविसपसम्पानशेवि मलि म बेलमिलासिं- मनन्तरसय इति । यामार-पयेति साम्पिो रेकरपा रेल परिसर मसाने एमाले परिणाममा रमपम 'ममापिगारी क्षेत्र को प्रेम म्मठिी वेपन मिरमानम्तरालमा समास्मेिपे बनियति मी बनवन्त- पापणमिति माया मम्मनम्वरम् परम पापा मार लम्ममाह-तरोत्पप्रमेति । समान पति बाये समांसय किसिपिकानेन च पानि का पता किया सि.म.पामामयाममिनिसिमसिएगात परामा विचार इति ।
. मायुप्के जनममरणे] मावशारममममम् विलमणस्प भाषाम्तरविलक्षणस्य विपर्ययसाधनादिस्यो हेतुः, स्थितमेव आयते बात मियत इत्येवं लोके रष्टत्वात् , यथा कतारखानिस्यत्वधर्मा स्पित एष पटादित शम्दामिस्वस्थ प्रविज्ञायां स्यम्त सभ्यते नास्सितो नात्यम्ताभायो नापि वसोर्यान्तरमूवो पा तकस्या नित्यस्वपर्मासम्पन्ध्याकाशादि तपाऽवस्थितपुरुषमरणव्यपदेशो अम्मना तदविनाभावात् पटा पनिस्पर्मिव्यपदेशकम्मरणपर्मिग्यपदेशः । (तस्पेति) वस्मोत्समम म्यापारमितिरिकशाजापार्य-उत्पम क्रियाविरहित मितिविरहिवति भापपित, यदुपारणे बवासस्प-पत् समिक बास्ने नि:कर्मेसी क्षणिक निकेसन-लितपुस्पानिपत शामिनः, भत्रोम्पते एवपि परिकस्सिवमेव-वयुम्, पन्मरप्पपर्मिपीमाति, ठ्यार्यमा] मणिक- मारमाम्पस्माभावविष्यमम भाषाम्तरविष्यफ्स्येति शवम वेपर्म बर्षपति, विपर्ययसापनादिरूदो तरिति एष मिवमेव रायते, बातम मियते सित्यविनाभाविनी वन्ममरणे, मरणाविनामावि 410 सम्मेस्येव ठोके वात्, पाशवम वनवामिमस्तेमावि, समनपर्माऽनिमत्परा चा[व]सित एष पटादित समानिसत्वप्रसिकायो यन्त एम्पते पकवक सदनिस घट यया पदागिरिति नामितो नात्यम्तामायो नापि दवोऽन्दिरमूवो पा पापवर्मासम्बन्म्यानविरिति, वारस्सिवपटापनित्यस्वरम कस्बेन म्पपदेषात् भवभित्पुरुपमरणम्पपरेशो बम्मना वदपिनामावाविति यन्तस्म सापक्षसाप स्वामापाप पायनिकलोपसार मोति-पटापनिमपर्मिम्पपदेशवम्मरणपर्मिम्पपरेशा। मायुफाननमरणयोईयोरपि मायुष्कर्मणि स्पिवे भास्मा ज्ययते स एष मियते मुकायुकर्मत्वात् , मसति प क्रियानुपपञ्चे। मला प्रम मोत्यास पस्तुमा दिलासवस्तिमायो समापं तय किया बदलाम्पेन मामोति- रत्पमिति । मुत्तम स्मिारदिवस्पितिरदिवसान ला मलिका विपसावपमेश शिरो-पतवपि परिस्मितमेति । मरममि या दलिल मद सामवे वाम्माम विश्वसामने स्ति स्मार-अपार्मस्पेति । इमरमोशन परिभागिताका लागि प्रयमेरमामाप्रारमाषमी मरमप्रिथिनो माता- विवर्मा पनि माविमरेसारित शर्मिनसवन मी तेन मामाववि और पलसाने नियो रात पनि-विपर्ययसापनादिति । सीमपि प्रमापति एवं स्थितमेवेति, सदमे गायवे लिस्दीको सम्पमर सिमिनाभारिनो सम्पापि ममवामिनामाने मे पी भान । म स र समोऽतिमा सानिमनमान्त रमते मानिसलपोप्रमस्तितौर एम्मपात्, म मनस्थिमेवाभाववाभामर्यान्म भोपा पार से सम्बन्धी मळमार-उपरणम्तमेति । मायाम प्रत पभीमरोति-सादिसि पलिते मानमामिल स्थापनाते तवावम्मित्पुम्सब मरनमार म्म्मना वस्पनिमावारी भाग। माम मनो भरममच पान भार प्रपन विधमानव स्वाध्यनिर्मिम्मम्ममा समिति पुष्पर मरमपनि मरिस पतति रशम्तयति। मनु मक्नु परपमा प्राथी मिक्सर मरमम् वापि लामो मम मरमनिमाह-मायुमेति बनमा मात्र भामरपे पाने मी सपुष्प मनमरसे 20 मन्मने मानिमित्त नाके पर भापुर ममता बापते व मायामुप से पर्माने सि.म.परिमापुस्। 15 प्वापायमानुसारिबीम्यापासमेतम् [मियमनिपापा भायुष्कजननेमादि, पायाधर्मपा मयभिवेन जीवन बननमरप्प नासता अपुष्पाविना, नार्यान्वरेपास्मापरिगृहीवपरमाण्यामश्चविन्य वा पपो-बाबुगलसेन जीयो वाफ्ते जीवति य आस- से । ममायुगोदर या मरति सम्पायुप्पसे वा॥' ( ) समाचयोः वाममरमयोईगोरपि, तनामुकर्मनि मिते-विद्यमाने विद्यमान एपारमा ससमुदीबुपर्मपरिपतो वास्ते स पर मिस्ते, मुख्य धर्मसात् अपति किमानुफ्पो, माजवासति प्रपुष्पे चम्ममरणप्रतिक्रिया उपपयने, गप्पांम्वरे पपरिणामाने माना। सपा पाभियुधा पठम्ति भूर प्राणत्यागे इति (पातुपा १४२८) म्पपस्थितो बीयो प्राणानुपाचान स्पजति, ग्पादचे पचानेप तत्र सनस्पात् किं सम्मानेन । तपापाभियुकाः पठन्तीति, शापमार, के पुनरमिमुख्यामिप्राचित त्वनिम्पनयम 10 स्वरूपपरियाममाणे म्पारणेऽभिगुर याममा, पपाह-अस्वित्वा शप्पा सनिबन्धनम् । बत्तामोपा अमानो चिम्पारपारते॥' (पास्यप का १ सो १३) पम्मापर्यतत्तम म्पबम्मा- नार्पमा पर्पवत्त म्पमसापयितुं प्राचरवागारमा पठन्ति-परमाणत्यागे इति परिमतो जीयो मियते मापानुपाचन-नियुयोमासम्मपान मन्ति, स्पारचे पाने चापछ इति, वा पमूल- स्यत-गोमनरेसिवप्रायोपादानानागात्ममममसम्ममरणारमप्रार्मसास्वाममस्मत्वात् सम्पानेम प्रयोबन कस्सिवेन सम्पानेन नास्तीसा। त की न खायाने मरणामिति मार । पसिनैमा मंबा मममरम मार मापुर फर्मवेति । वाम मलितमा रिकारचेन मारमानम्तरमूरन व बान्तरमा परमामुपाल्परिणम वामप्रमाणात मायः । तस्मितत्वमेव मनिरसन पी-मासटेठि । भाइयो पोर कम्ममरणे सापम प्रमापति 'भायुम पसेन' रवि मामन तो मक्ते पैगरि बामणमोदरे। नामोसमा भियतेत सामा। पति। 10 मा मामाता । एर बनिरिक्त एषामा गनुपमा बामन्दिरमो बालd पसभा मोपळसे मिपवे - लम्पिमालेमावाभावस्फेनान्तरमारते भारमान समार-समाच्योरिति । मापनम्मे म्ममरमारिमियानुक्सपिमाह-मसति चेति । माग बम बम्पसर पर ममामिपुष्प पकममपि प्राय एससी-सपा चेति । मणिमा लामा-हे पुनरिति । भति । मनिनिसिपमार सम्पारण्यमयोगमामलापसम्मातानि-माता अमिमुख स्यमय तरल सारिका पास या मातीति । पारमना मापो-समारे मारपरिमानामानिमारममा प्रपत्तानि मिमियानि मानिमिया' नामपरावाभावे मना भवापामगार, वेषभमा त भिवान-पप सम्मानाराम पममता, मोगरम्मतरेष माईमपासतात, जपमामा मामा रोकात साताको रियो मारमन्तरेव सती तर विमारतस्यति माया नालापाता याममा अभिम त ति पर प्रताप सिमित मात्र पाना प्रभाना मागे मत एक मागम म्पपस्थित मावि । सो सामिवान् प्राचार परासीमा मितवा नोपारो कप रक्त की मामा पनि भात । भरमा सब समूतत्याविति एस प्रारे मा पनि बारममावस्मलाकर मामा मास्थित प्रपोषरामायम्से म्ममरणाम अनुपातासास गरते पिस्तीमा मालस्मिानियायमापनार-सम्माननति । मुथापा भारस ममा समन मात्र तयेति पाठपनुपपति] माशामपंचाध्म् " पदप्युकं सौष मावस्य म्पपत्वात् विनाशेनोस्पादस्य धणोऽस्यासीति धमिक इति व्यपदेशो न्यायादनपेत इति तदपि न फिधित्, सस्पग्रमानविनश्यतोरपि तापत् भाषयो स्स्वम्मतेऽमूतस्पात् सम्बम्पामाषः, किमापुनस्तस्प्रमावरम्ययोस्पादपिनाशपोः सम्पम्प कपा! अयोरसस्वमूतस्वादषस्सुस्वाथ, असम्भाम्पत्यो, अपि पात्रापि तस्यैव माषस्य । ध्यप इति पम्पानुपपचिरपि, असम्बन्धात्, सम्यम्पामाषधासहभावात् । पदप्युकमित्यादि, पस्यैव मावस्म म्पयत्वात् विनाशेनोसाइम्म समोऽसाखीति मणिकति म्पदेशो म्यपारनपेव इति स्मया पदुध वापि न विशित् नार्थो न नायुस्त्यात् बार्शपति- सपमानविनश्यतोरपि वापरिमावि, यावेवासवृषि यसै भाषौ पावेवावपि सम्मवे न जा, उत्सव पवार इति अपनात्, क्योमामूत्वाइमाक्त नपुप्पयोरिष सम्बन्धामाषा, समानुत्पति विनष्ठेन्मपुज 10 पम्, किमल! पुनरियार, दूरव पपोत्पधमानविनश्यामाचे वयमावलम्पयोरसाइक्निाभ्यो सम्बन्ध माया पोरसत्त्वमूवत्तात्, मसत्तमूकाम भबस्तुलाच,-न पस्तुनी सा पयोखानुत्पावचिन्मयै भगत यावारपस्तत्वात्, वो पासम्भाम्पाची अपुप्पबत् षसम्माम्पमात्योरेष सम्मामान इति पते, जिसम्पत्-मपि पावापीत्मावि, पपैयामखिमसम्मपामाषावसामाबिनोस्पाइबियमो मणिकाव म्पमपामावादमा यस्मैप भाषसम्पति पम्प नुपपतिरपि, सम्बन्धात्, सम्बम्पमा रिभरकवि-" मण्या, परमविवझायां षसम्पये प्रतिपरिचर्यम्पविरे मशीविधानात्, सम्ममाभाषमासामागादिति। पपाणी पिणकरणापार-पप्पुकमिति । नियमेव मामलोपारस स स सोपारस पनि प्यपदेसो म्याच एकर संपविलोमीपति-सम्मैव भावति। मुस्तमेवार-सत्पपमानेवि, परमासस निनावापासप मारलतम पदेनासपमेन पाश्मात्राममुफ्तृत्पद, स्पर पसार इति लपोपलार, सम्पयानिक मरण पुप्पामासात् ममुहारेपलिम समासपो परस्पर पम्पसमावि मार । क्या कोपरमपभाषा-20 सरासमपर्म वरप्रमारनपसामिापो सम्मने म किम्लेति। माह-पोरिति साना- स्पोमाराम्बरसलपायनापास लामममम्पोमप्रमालय-भवभूतत्वमिति । एषय क्यो भाषसम्ममा पासपोर्व सम्ममीमा-चौति। मपदविलापानिमाय । बस्पानिम्न सामावायापर धिमासम्मनाममा नाय तर मातम मय सापि माक्सय प न पापिन मावस्मरणमाहित सम्मासम्मवादिय-अपि चेति । मामात्र पीने मी प्राभिपिलादप्रमा परम या मेमोनम सार, मिर्मिये मानो खाताव पात र सम्बन्धमतरेषा लो परतिमन्ना सम्मम्बरमा एप, पारस्पता सम्बक पारिमित मम्बत्म स्पेन सम्मम्बा मामि माता सविनयनेम्मा परमोध्याप्रयतम्, पव स पारमालिका सम्पुमते किया भरमसा परसमसमारना सम्पन्पक्षपा हीति, मचा राग पुप्पाच पनी मा रापुर : अजामियामोकिने र किनारसमन्या भरमा सम्पन्न प्रम मामरसम्मको पेजमा लोरमतेम पूर्व सम्मान पम्पुरवण, पम्पबोनसम्म स्पनर सामान्यप्राप्तीस एकरी परेप किया प्रपमा पाम्पिरिकभरममा प्रतिनियमारे सीना परम् । भिमानाबारविषमापामिति । भोप्रमावस्या-समपामावति। ॥ न १४ (१७) बासागमानुसारिणीप्यापासमेतम् [विमनियममा नम्वसहमपनेऽपि पठी विचरविफ्या, मकस्यपमर्दय विकारा, तथपा-मानां सतया, तणुप्रनामोदन इति, न मन प्रतिकित्यवस्थायामस्ति, मप प प्रकृती गठी भूयते पानानां तYष्पनामिति एतदपि न, ब्रम्पपर्यायसवृतो, पानातYणविप्रकवरेष सास्वोदनस्वादिविनरपरिणामाच्यातपायस्पानात् , फिनाशो पटस्य इय, तस्मात् स्वाम- परित्यागपराधिर्मापतिरोमाची सर्वमाषानामतः साभाविनोरेय सम्बम्पायुपपद्यतेऽत्रापि पष्ठी भाषस्प म्पय इति भावो विपीपसे भवशेष पते पोदति वस्पुकं भवति, भवोऽम्पमा भद्रम्पयोरुत्पादमिनायोस्पषकम्पमिति भाव एष स नेति तोऽस्योत्पादो विनाशो पा! (नन्विति,) मन्बसामवनेऽपि विअरविषया-विनरामपा, मध्यपमर्पम मिश्रा, पपवा- to भानानां समा तमुगनामोबन इति, म पर प्रतिषितमनापामसि, अब र प्रचौ पछी भूक्ते बानानो वामन्यमिति, भत्र भूमा एतदपि न, स्मात् एम्पपर्यायसाचोम्म प्रतिनावममता पप्रेम विशेष विमरेप सा पते पानावणमविप्रहतेरेन सत्त्वोवनाहिविभरपरिप्पमात् पापा भवमानात्, किमिर ! पटम बिनाष्ठ इति, बबा माम्बस्मैव पिपस्विकारिकमाविधर्ममा रूपात सामाविधर्ममान पर पाम्लेन सामना परमाणादिसंभावपरिणम्पक्सपसंमानान्तरेप पर्य ॥विन्यसो फटस्पेक्तुष्पवे तस्मात्सबानपरिक्षागाच्यविर्मावविरोमाने सर्वमावानामता सामाक्निोरेप समाहुपपपवेत्रापि पठी भाषस्स म्पय इति माबो मक्ते भरोग पो का पति बेस्पुकम्मपति उम्पागोपरिमागनेवोत्पादम्पनो मतोऽनया पाम्पमोल्पापविनाशयोनिविपोषः भवसम्ममिति पनगरियापि सम्बन्को सवे गवा बानानो सन पमनामोर मान मिल मासुल मम्, मिलन दिनापात प्रवेम्पो व पायर्ममार, ममाति प्रमहरमुफ्मोपातपिति प्रवेषिधम्, सास मन मारो सिस्वर्ग भतेरमाकाणापि - रस्त की रोष दिमावे-पम्पसहमबमेऽपीति ।माणे- निचरमसति, पासपमा मनतनिजित्वा किलोमोर बोरन देषाममावा मानपि यती कीमत पचासा पानापय सम्मेष बल की माब । बाप्पयातिसमनिम्, इम्पमा प्पणावगवना बनपगासमोरनास्मिपि मास्थमानियन समारो-मम्पपायेति म पानामा, पर्याय सम्पमावि को अमनमसि साभावामा विनिमयासर्व मिस पिपरेक मी मम्ममापि बारे सप्रिस्तिाप स्मामालिग मा दीपमती सामाजिक माना । मिपमाह-परम दिनाण इति पिसमिनारमझानावसरममानिसमापन करेग म्पमम्मन परमाधुसनापरवामापास्यास्पानावरम पम पार पते मसाला समसामान पाम्रा पविरोमावाबाबखापितति मग । दमा समाहित सम्पने पास मावत मयस्सानि मालम्पो प्रमाणिवार साधि भायो मोर मा मेरमापासारमिता सांपापिलर-बता सामाविमाणेति । इमारवागेन्नारपायोनिबारनाम्पा पोप मारपीपुमागोम्पोमा पसा-मोऽम्पयनीतिमा होमिली। 1.भवारिष्ट । होलिन।
प्रकायेऽप्यमायो भाषस्य] मावशारजपबकम् २१०५ मधुमेपास्यमेवत्, भाप एवासी मस्तखामिमतो माथि, वोऽसोत्पायो विनाभो वा पर्मो ब्रम्पार्पसार माये सपुप्मस्पेव । चौपम्प इम्पार्यपारिन एषोसावविनाशोपपचिपळनार्यमाह- भषन्ती हि मृत् भवति उत्पयते सपा शिषकस्य स्तूपकीभाषा सैव च मृत् भवन्सी म्मेति, स्तूपकत्वेनोत्पपमाना शिवकवाति, भषनानि भाषा, भाषस्म म्यय इस्यत्र भाष- . शम्दोऽप्पेय पटते नान्पया, एषन्तु स्वयोको भाषा स भाष एष न, पूर्षमभाषात् पचाव भाषात् पूर्व पभावाभायात् षयापुत्रवत् । (मषन्तीति) मवम्ती हि मृत्-पान मबन्येप मपन्ती-सरूपममयन्ती भवत्सुसयते वपया-शिवम्स स्तूपीमावः सत्पादे स्तूपक इति मिदर्शनम् , सैप प मृत् मपम्ती म्पति, दमिदन- सपम्त्येनोत्पपमान्त शिवकत्वात् म्मेवीति, मपन्यति मापा मापम म्पय मित्र पोऽस भाषसम्मा 10 सोऽप्येवमस्मदुम्यार्पविषय एष पटते यदर्षम्म म्पय उम्पते, नाम्यबा यत्त्वमषात् सपुमापदम्प वमोलपते न म्पेति पा, एवम्विन्यावि, इत्पमुक्तमायेन लयोच्ये भाषा स मात्र एष न मपति, कस्मात् । पूर्वममावात्-मपनामाषारित्सी, माप पप स नवि पते एकमेपो प्रत्येक हेतु, समुदितावपि-पपवा- पूर्व पभाषामापाविधि, प्रयाणामपि देवना पम्म्यापुत्रपरिमेक एव प्यम्दः, सम्मतेनेच पा ए देवया सिठा, मत्सारपणौम सत्ताम्मुफ्ममात्, भयो भाव एक न स इवि सापूलम् । स्पात् प्रत्याशा पर्वमानक्षणे भाषो भविसुमतीति सापि न कार्या, स्पताह एप, माझ पचात् मध्ये भामाषात् , स्वदमनादेव भावस्पेति पठी यदि कर्तृष्क्षणा, स एष भाषा- पत्पादा म्पेति-विनश्यति न भवति इत्युक मषति, यदि कर्मवणा, पिनाशोऽफर्सका केनोत्पादो निषवेस्पयुक्त एष माषा, तस्मात्स एप न मपतीति मप्येऽप्पभापः । (स्पादिति) स्मात् प्रमाश वर्षमानमणे मानो मनितुईवीति, साऽपि न पर्या-प्रत्याश्य, 2 मामप्यवसापामसत्तात्, मार-बावजुमा एवं प्राइपमान्मम्मे पाभाषात, माव पर नम 14 मम्मामपत्यारनामफ्रोते की प्ररम्य -मवन्ती दीति। र ससस्पसमती मिनिस्मा तूफ स्पेोत्पपवे व स्परोपणमान्य स्तू मिल की न तन मनरेष भतारेवल पानिर्माण सम्मत सामन मापति-प्रम्यान मपन्मेवेति । मापस मा मनापि वा तपा माओष मापापन एस नावामा पता-मावस म्पय इस्पति । मनले मरेपरम्पयौ वा सुम्साह-माम्पयेति । त्वमवस्तु मानेक सलामावाव सम सभी न भाव स्तापभिमतः मयि पनि पूर्व पति पा सम्पापुरमरिमार- इत्पमुखम्पायनेति। तुमार-पूपममावादिति उपाययभागारिया का न मी पपात्र मावि पचम मपति स मालसममीम्पापुमरियाताम्पमधिी मालि-स्यम्मटेमवति। पूर्व पबम सामने समसमावे-स्यात् प्रमाशति । वर्तमानको मो मायायी मान वानमपि माRAM नाम-परमात्मपीति प्रापसार्य पश्यामस्थानां मध्यान्यस्यायपास सम्मति-पया त्रास ११०४ बापागमानुपारिधीम्याम्यासमेतम् [निपमनियमनपा वाई- नन्यसाहमनेऽपि पष्ठी विकारविषया, प्रकल्पुपमर्दय विकार, तपा-पानानी सकया, पण्डानामोदन इति, न पत्र प्रतिकित्यपस्थापामसि, मय प प्रकटौ पछी थ्यठे पानानां वण्डलानामिति एतदपि न, द्रम्पपर्यायसहाणे, पानावणुमदिमकवेरेव सक्स्पोदनस्वादिविधरपरिणामासयातयाअस्पानात् , पिनाशो पटस्य इव, तस्मात् स्वजास्स- परित्यागपत्तेयधिर्मायतिरोभावी सर्वभावानामा सहमापिनोरेय सम्पन्धावुपपद्यतेऽत्रापि पठी भावस्स म्पय इति भाषो यिपीपसे भवमेव पसे पोदति पेस्युकं भवति, मतोऽन्पपा पद्रम्पयोरुत्पादविनाशयोर्वस्पयकम्पमिति भाष एष स नेति कुतोश्स्योत्पादो विनाशो वा! (नन्पिति,) मन्त्रसहमपनपि विपरविषया-विकारणम्पमा पम्पमईम विनय, पपगा- 10 मानानो साना वणनामोदन इति, न पत्र प्रातिलिसागमति, भय च प्रवी पाठी मुफ्ते पान्यनो सपडमन्ममिति, भर मूमः, पदपि न, स्मात् । ट्रम्पपर्यायाम प्रतिभावानुमतिः फ्पायन विपन विमरेप सा पर्यवे पानवमुमविपकरेप सफ्लोपनारिरिमरपरिणामात् पवावया मरमानात्, किमिर । पदम बिनाप्ठ इति, यमा यमस्यैव पिण्डभिवनिम्ममाविमर्मपा रूपान- सामाविपर्ममय फटने कपाम्तेन पतास्ममा परमाण्यारिसपातपरिप्पम्पबयपसंमानान्तरेण पर्व ॥ विनामो पटस्पेक्तुम्ते, दमात्समालपरिनगरनिर्मापविरोम्यपी सर्वसामान्यमा साम्पपिनोरेप सम्पानुपपपतेनापि पी भाषम म्पब इति भयो म्पकवे मरनेष परवे पो ति सुष्म्मपति उम्पा परित्यागनेोत्पारम्पपा, अबोसपा परम्पयस्तित्परविनमयोर्निर्पयो पम्पमिति भम्रणमावियापि सम्मको सापटमका पानानो मा काममामारम नादि निम प्रमाणनेस सम्भूतम्, मिला बिना कुवर या कामर्भिमा, ममारिर्व प्रारिम्मुमबापममित प्रमविपर्यम्, एता पास भम एसरी सिम्पयो परमापरममा स्तरोपी पाव-पम्पसहमपमेऽपीति । मागे- पिपपसपति पाममा मर्ममपेनधित्वामिम्मोमा सम्पोन वपामापात् ममामाचेऽपि प्राप्ती परस्त एष चारमा पानीको समेग ग्राम की माय । पापनामिडियम, मामला पानावणमा समपर्यपतपत्रवारिमपि नापमानस मार-प्रम्पपर्यायेति, पानामा, पपर परमादि व्यबभागतोवामायामाचे प्रमाण प्रिपेयी मपरम मी सम्मपि पर सवारिता सम्माननीय उपापचमठ दिनमागेको भार । ममार-परस्प बिना लि, पिपनि परम्ममनिर्माणम्मरबारितामानिर्माधिपामा मास पामर परमानीयमापनपनान्तरेण न मम मिाप पते दम्पानी समामा माम्सीमानाकी सामामि। फासापनिष पम्पासो पारस पर सत्रापि मम्मम्मे परमापिसात् पनि भाग्रे मार मार रजबारेमरसपिना- ०पेनापी-पता सामाश्निापेति। मारपणे मारपरमिवासनास पयोकी रामेश फारम, पापायरोप्पो पO-मोऽम्पपीतिबापमान व्यhिa 1मि...पारिसि.दि.मा ।
. . प्रयेऽप्यमामो भाषण] माशाजपषम् १९०५ पपुवायमेतत्, माष एमासौ पस्तुस्लामिमतो नाशि, मोऽस्मोत्सापो विनाश धर्मो मार्यमा मागेमपुप्यस्पेन। वापर्येण ब्रम्पार्यवादिन एपोलारपिनायोपपचिपापमाह- भवम्ची हि मूत् मयति उपयत तण्या शिषकस्य स्तूपकीभाषा मेष चमत् भवन्सी म्येति, स्तूपकलेनोत्पपमाना शिवकस्वापति, मषनाधि भाषा, भाषस्य प्पय इस्पत्र माय प्रयोऽप्येवं परते नान्यथा, एषन्तु स्वयोको भाषा स भाव एव न, पूर्वमभावात् पवाद भाषात् पूर्ष पानामावात् ययापुत्रवत् । (मवन्तीति) मबन्ती हि मृत्-म्पार्थेन मबन्लेग मषम्ती-सहपमययन्ती मबस्मुत्पपवे, पपया-विषम सूपकीमावः सारे स्सूपक इति निदर्शनम् , सैव १ मत् भक्ती ति, पहिरन सुपरनोत्पपमाना शिवकस्वात् म्मेवीति, भवन्नति मापः, मावस म्पय स्लत्र पोऽम मावशमा 10 सोऽप्येवमस्मदुच्यम्पाविपम एम पटते, याम म्यय सम्पते, नाम्पबा-यत्वमपर सपुष्पापाप चमोत्सपो न म्मेति षा, एपन्त्यिम्पनि, स्थमुपायेन स्वयोको माषा सम्पब एप न भवति, कस्मात् । पूर्वमभावात्-मपनामावारिसपी, भाग एक स नर्स पर्पो, एपमेवो प्रस्मेक हेतू, समुविसापपि-उपमा- पूर्व पाषाभाषाविति, प्रमाणामपि देतूनो गन्मापुत्रपरिनेक पष प्यन्वा, स्पम्मवेमैप वा प्रदेवमा सिया, पारमणमेप सत्ताभ्युपगमात्, यवो भाष पर न स पठि साम् । स्यात् प्रत्याशा पर्वमानक्षणे भावो मषितुमईतीति सापि न कार्या, स्वना पप, पाक पचात् मध्ये धामावात् , स्वल्पनादेष भाषस्पेति पष्ठी मदि कर्तृक्षणा, स एव भाषा- पत्पादा मेति-विनस्पति न भवति इत्युक्तं मपति, पदि कर्मष्यणा, विनाशोऽमर्नुका केनोत्पादो निवस्पतेस्पयुक पर भाषा, तस्मास्स एप न भवतीवि मम्मेऽप्यमावा। (साविति) मात् प्रमाण पर्तमानपणे माषो मचितुमईतीति, साऽपि न प्रर्या सन्मान, ५ मामप्यषमापामसत्तात्, पप मार-पवारवाद एकप्राइपमाम्मम्मे पामापत, मात्र एक न स 10 पाल्मामलोपामिनामनुफ्ते की प्रान की माती पीति। पत समयमा निरस्य स्कूफ सोल्पमते स्परकोपपमान्य मिलन पो तेन वन प्रपरेक मानास परमाबरमत सारेप माकोरि-ध्यान भपम्मेवेवि ! मावस मन मनापि तथा तमा पाबेग मारे प्रमाविषय एत भारपा पर पामा-मामय प्पय इस्पति सक्यो मोसपम्पको चासमोर-माम्पवेति । लसम्भवस्तु माये 23 मामा की महिमा मसाराधिमा समधि पप से पाचाचि मानलमा- त्पमुकन्यायेति । खमार-पूर्वममाषाविति, स्पायसमागम का पूर्व न भाति से नयम मार लममी पालनमा स्खलामधिरि मुस्मत-सम्मनिवेति । पूर्व सामने WATRA-भार प्रमाशेति । वर्षमागबाने माने ममापि मामामपि समास म्यायामपति, प्रायो पास्यामा वर्षमानावस्मयामपसाताभिमान । सम-पमा म्पापपमानुसारिधीप्यापासमेतम् [नियमनियमनया इति पदे, माइ पभाषायापलमहम्मालारसम्मवेनोम्, मधुना सम्मवे वर्षमानपणेऽप्यसले साम्पते मात्र पभाषाभाषल सिटमेष मस्तीति वत्सवितुमाइ तारनारेप-सपथा-पपा पुष्पवे वनेर चासो माधम मब इति, मपरेसप्रसिरिस्पनार्वेम पचनेन, मम पापमों भारस्पति गंम्पमा परी म्पत् धर्मम्पप्प पा बरि नम्पमा स एष माष म्सायोमेति विनश्यति न मपति ने रिपीस्ते म । भूक्ते विनश्पतीस्थत मपति, प्रेऽसौ म मपति, पाद पर, बहिर्मम्मण वो विषयका मोसारो निवपटनयुत्त एष मापा, स्मात् स पप न मपति-प्रसार प्रति मम्मेऽप्पमाषा, समान माइ पमाम्म पापात् मागम म्पय इति पत्रमात् पनियमो मापवान् मात् । मपि । सानामोदन इस्पत्रोदनस्य सनसमवस्थापिद्रम्माविषप्रयन्तरगत सम्भवेदिप गतिः, स्वन्मठे तु सदैपासवासावसमिहित पप भाषा मे प्रतीत्युच्यते । 10 पवि परा समिहितसदेष ध्येति नैव वर्मुत्परते, मपोस्पयते म सम्मेिति, स्त्पापम्ममयो- विप्रतिपात् स एष तत् । (भपि पेति) अपि च मम्मनामोदन स्लमोबनम विभरणामणमफाठे प्रम्माता वमान् समवसापित्यारोपनेन सा मनुवारिसपतरमोपनवं वत्र उम्मे पर्व गोमुरापपेरन पम्हमा, सम्भवेरियं गतिरसी स्वम्मठे सम्म पनि सवारसमसाविडम्मारिकाम्वरगडेर "सम्ममात् पोपात् वासावसनिहित एप मायामपारा स्ववियोऽसनेव म्मेवीस्मुथमवे,-सपुम परसमिदिवा केन म्पायेम म्मेवीवि पते पाम्, स्माम्म यहा समितिवमा म्मेवीसम्मत इति, - पति लामिमत प मागे मावस मी अा बन्यषेपामाबाद मार पचाचमा प्रायम्पसमाव, मावि इम्पयाकया क्स तम मारवायपरवापी मयासपपिठम्, मलेपिमपाती भास परपी लपक मि मास । प्रद पवाबामामुमदेव हरमेलाको मायरमेश मापनि मस्त सया-प्रार पमायेति । मेष पाचौ मावस सी लग्रमिकसम्मपसमिस मुम्, वा मानत पर मते बाप म्यान्मयस्पोट बना मोका मानि बसायी-म्म चापमति । परम्पयमे भाषा पर्चा भाव मार मापेम-निरी- मवति भाराने दिन मात्रामा प्रकार स्मिारसे मातम भूमते मागे निमसात मानपालापामपि सावनमारमेव मोडी भाक। की मानमरममा पोपवे नाई भाये ममि प्रदकर्ष सयममलाममुरम्माद मत सर्तत नामुमते 'गरेर पानी से एमप' इति सोपवाद, पपना परिवाया- पम्सार पमा मापस मिति र सात प्रमाणायाम्पर-परिमयति । तस्माद मापिति, अगम पर भोपाल समाचासानं मम्मी मम् । इमाम सामवासोरम माथीभरपाविपरमसमिरातरफममम्मपादनमपिचेति। म्याचो-मपि पाण्यामिति मानिधरमपानमम वर्षमासार जनिमरत ने सम्म बोरमलयपत माफ । न म म बाहिरिपाठरस्मनब सम्मणी विभागले निमारपणात लवासमा एमा-मामते रिवति । म मात्र पनि सम्मत स्माते सम्मतमिति। पर क्या मिस्तु । 18... 'यमले सचेत । १t... माण । स्पिवद्रम्मासिस्थापादनम् ] शादधारनपचकम् स्नूळमधोमवे सम्मपारा स एव पर्यते तदैवायुसमिति, पति परा समिहितव म्पति नैप वर्मुलपते न समितिः न मपति-नाखीममी, पपोत्सपते मपति समिहितो न मम्मेति, कस्मात् ? उस्पारम्पपयो- विप्रतिपेमाविका प्रतिपेपो विप्रतिपेपा, प्रसारो म्पयेन विसम्पते म्पयमोसावेन, भतो विरुवस्यात् परस्परनिमारिवत्पाविप्रतिपेपात् अत एव वत्तापन वस्वैप भावस्म पम इति, दूरव पर न पटवेऽमापारिति, एष वावदुत्पादाम एम विनामपण इति पकुमयुतम्, विप्रतिपेमात् । न बसमयमेव न पटवेशवाई - एषबोचरोऽप्यस्य विनाशक्षणो नैव भवति, यतः तदपेक्षा पणोऽस्पास्त्रीति क्षणिक पच्यते, मनुस्पनत्वात् नपुप्पवत्, आफ्षना, दयाभावे तु यदि सदेष पेशस्थिप्यो तत माईतमवामिमतस्पिवद्रम्पार्पसमावेषणे प्रणे पर्यायनपसमावे चोत्पादपिनाशाभ्युपगमात् पणिकसदार्पषचोपपपते नाम्पपेति, परमेव च 'बातिरेष हीति' लोक इत्यं पठितम्या, 10 तपा-'यातिरेव हि भाषानामनाशे हेतुरिप्प' इति, यस्पत् स्थित एषा उत्पपसे नास्थितः तस्मावुत्पतिरेवापस्पाने कारणं जातमपस्थितस्यतो न भ्यस्तमिति । (एक्वेति) एमबोरोऽयम मिनाक्षप्पो नैम भवति, यसरपेचा मोऽस्मातीति समिक मवे-तस्पमावारेच म पटव स्मः कस्मात् । मनुसभत्वात् पुप्मविवि गवार्पम् , सौशास्तिक म[मा मयविति पा एष तापवुत्पापविनाशौ म मुख्याने पपान्वरे पा झमिक्समाभिषेपो फ्वा 18 मात्, पमा प मामाने -प्रपारपिनासमप्रमावेऽपि परि सरेर सिपप्प वव समापममाईक- मयभिमपसिवनम्मासराये ममे हमे पर्याफ्नपसमा बोत्परविनाभ्याम्पुफामात् पणिया सर्वमापा मिस एस पते व दिनापामा-मनमिति। स एव पर्यत इति बाप्पावे देवापुष्पमा प्रमाप्टेम्मा- पदि परेति स्पारम्पोरेशाने उत्पार सन मी निसप्रविमानापारमासपिरिकलापित मा।। मारपोल्पा माविमनास मालापप्रतिमामा चिमिचलायमार-भपोत्पयत इति । प्रविरोध निमाह-उत्पाद 90 प्पपयोरिति यो परस्पर विरोषाकरमाकर प्रतिम्पत मास । हिरो सम्माति-उत्पाद इति। स्पाये मानापेमामारिबानि भावीपतमेरेमासम्म पुमपपरस्परम्पपिपिकप्रसरालमिति मारा। मजे मानस सानिमामालन संयपीटति पवार- एक पदिति । उपखल-ए वावरिति । पेनातर मप्या-पपति प्रसारण एसबिनाणा मयसम्भन । पारस्पेपरानो ममापि सम्पति मरणोपारामन - सादिया पपोतपेऽपीति । मनुत्पमत्वादिति नहि परसमे नाम समापन चापसम्भवात सत्तारोत्तरमोनियम मपी मापालाद, कोपमम्मापुरको ममिनमावि मारकर, सौमास्तिक में प्रभासतर, मते मातरमेव मामिलाए, भाप्रपरेरसमानामामा- सात मपि पाराबारे पिताबापाले भाये अपि च मामिमा प्रपयन्ति पुरिलोप प्रसादम्पत् मक नति वापिस प्रतिमापतिस्पायरोपमासमा समपि पारसस्तु बमम्मा वामम मम्पन्- की। मामा ने पवान्दो पोत्पमिमा म पु म पार परिणमामि मामिाह-पर्व तापदिति समुपपरेकोपारमिनापामामि क्ल परेलमपुरधाम्पत वालिमापनमालप्रपा स्यमामा पर मनोरम्पमास्मिा-पाति माविम्यान एल पोवा मनमुत्तापिताम्मम एस- म्पायममानुसारिणीम्पापासमेवम् [निपमनियममा इति प्रचंद, मार पमावास्यक्रसमद्रम्मत्वावसम्मतेनोच्म् , मपन्य सम्मवे पमानमोऽस्मसत साम्पते माइ भाषाभाषप सिरमेव मातीति तस्सापयितुमा वामनादेव-उपपा सग पुश्पते स्मैप पासो भाषस म्पय इति, परेशप्रसिदिसामनाउँन सक्नेन, तम चायमर्षो मापति नरमण पारी मात् फर्मम्मण पा, परिसंपणा स एप माष पसारो म्येवि पिनश्पति व सपति ने विपीयवे न भूमते विनश्स्तीमुठ मरति, फोऽसौ म मपति, पार एण, पवि धर्मममम क्वो विनाश मनोरमको विवरटेन्मयुक्त पर मावा, तमात् स एष न मपनि पाप इति मनमाया, तस्मात् मात्र पमाम्मथे पामावात् मापस म्पय इति परमात् पनिमामो मापेवार मात् । अपि पण्डानामोदन इस्पत्रोदनस्य स्खकासमवस्थापिम्याचविकायम्तरगत सम्मवेदिय गतिा, स्वन्मते तु तपापदासाषसमिहित एप मावा म्प प्येतीत्युपत 10 परि पदा समिहितस्वदेव म्मेति नैव व स्पपसे, मपोल्पयते न तरिम्पेसि, उत्पादम्परा पिपठिपेपात् अत एव वत् । (भपि चेति) मपि र वसुमनामोदन मित्रोदना सिमरम्पऽप्रमममाले वडष्पन्न समस्माफ्तिारोनेन सह मामुत्वाविषयम्वरमोषमत्वं का इमे च वणमा, सम्मवेदिय गतिरीरी, सम्म वमा बपि समम्समपरप्रापिद्रमार 18 सम्मपात् वोपात् वहास्यवसानिदित पर भाषा-सपाद तोऽसोर कर्म म्य परसानिदिवा केन न्यायेन मेतीति पापते पम्, साम्मा पा समिहितम पति, समिठा स मामे भाग एस म मा मात्र मान्मधे वामावाद प्राप पश्चिममाय एक ह भावलापम्पसारित मापतिम्, ममेविस लोकवि मात्र प्राइ पायभामुम्ममर्दन भिमेश्ये मम्मामा पमाघेति । रवासी समापनलमा निम्मपदेसणीसावमा पासपपरम्परागत पई प्रोवा मी, व प्रमिअयमी नामो बाा पर्वा माद, पालभायेमे-निपी- मनात म पोलबम सवे भागे सिमावरपुष मात, तमाममायामपि मारसम्पादनमा जुमले का मनोमा भरमामुपमठे पालतमा मिनाये ऐप विस सम्म भक्त माम माविषम पद, मिनिममाथिसम्मेना' प्रागिति भरसम्म विपरमविप्रसारवासानगरम स्मान सम्भवति माविमाप्रमाणेपिरान्दार पुणमामिति,मोसामिपरपसम्मानम बाम कीबार र मदम्पसमाविषविप्रान्तरमा सभ स्मारनपम्मत रिपति । पण माया विविध 18... 'प्यार का सिप चोरमावः प्राप्त प्यापारिकता] भावशारापहम् मालिवमेव, असंवत्रयमत् यथा प्रतिसस्पाविरोपा, अप्रतिसम्मानिरोपा, पानप्रमिसेवप्रय पोय- वाइपापियत् सम्प्रत्ययेनामनिवसारसंका प्रपमिलि संसात्रयपाध्यत्वाप सप नास्थिवड या पटोऽसीसि सन्मन पोत्पादविनाशमात्राममायान्तु निर्मागाय-सितार्पशून्यायां तयोः साविना याप्युल वसेव बासी मात्र इति, एक्वपि न पिमित् इस्सुपम्प सम्पवोऽयंत पापतिप्रतिपेपाविसि मामिवेन मुस्म मानिनवरिमतिविनति लिवमेवोपपवे विनश्यति सावि, पोऽपि । का-मिका सर्वसंस्काणः' इत्यादिः सोऽप्येष पठिसम्पः एतस्मात् परपत्, इसिम्पस स्वत्वात्, पपया-'सऽप्यमणि भावाः पपिकानां वा निमा' पमाप त्यस्पाठपत् स्पसमापिनाशविपापनाः मोका, वासाम्मा-प्रथा वस्तूनीति पर्यापाः वे सर्वेऽप्यमणिका, सिमा फिल्ममा पोल्पचिपिनाशास्मिकया स्तवमबनपिन्मात्मन इस्सुम पण, मना सिविक्रियाम्पमपमिका इत्युपसंहवार्पम्पास्य । त्वम्मठषयदि पणिकाः स्युखत एपामुत्पादविनाशो नैव स्याताम् , म्यापारस्थिति- 10 रिकत्वात् खपुप्पयत् , ययक्षणिकाः तव उत्पादविनाशासम्भषात्तदतिरिकस्ष, उत्पादविनाशा तिरिकत्वाचे न स्पिता एष, सपुष्पषदस्थिताना कुता क्रियेत्युक्तम् , सावि गुम्पते संमत्त्यै- देति चेन्न भूतिर्येषां क्रिया सेव भवतीत्मभ्युपगतैष प्रा म्यापारारिकता द्रम्पार्पपस्तुना, मूतेरेव । (स्वन्मतबदिति) तन्मवपपरि पनिया सुप्त एपामुत्पापविनायो नेप स्सावाम् , 18 म्पापरमितिरिक्त्वात् सपुष्पवनिमनिग्रपानसापननिय गवार्यम्, दस्मात् मितपेपोत्पारविनाम- सिटेपमिका भाषाा, बार-पपमनिमा इमावि पनि भितोऽयमिकप भागः मोत्पादविनाशी म पेपत्ता पारिपत् सब नाभिवाः एम योऽपीधिमा । पोप प्रभावि-पमितीति । सन्मते न सिर भावार स्पापविनामोरमाप एष सात निस्तास्मिास्त्वम्मतेम चेति तोपतानासत्तावाति मात्र । प्रमियमका प्राय सिटमेनोपपवे मार लिटौति मिपमाघरे तमेव वासी मयसम्म इमानि गाधिप्रतिमा भन्योन्या-पवप्युमिति । प्रायम्म्मान, सस्परा. माया मित्र पारस्थपिनो दिवमास्मिानस्वामिन रमेवररायलमा मेज पनि सर्वसत्परा परिवाना किया। निर्मषा दिना से पाक समवेत सापि प्यमिता माषाः पनिमा बिना भविषेषा किया ग पर सेव कोपवे । पति परमा- पोऽपि मोकाति स्पस लिनाले न माता के माह-उत्पपस्मेति । मापो-पा- स्पेति । भास्मारक विधिसम्म सितमेव फियक्षिकासप्रेषणमामानिमाणामसार, यस मानमोसादस्पताइफ्रोजनमानस बापमतात, तमार स्थितिमायामामबतिमा Ad रात मरसत मा। तब मते तु माया विक स्थितियापारवा देवामुल्मीनापौ मातामिया-त्यामवपविति ता- निप्रतिमा पुदिपायरेष विमा परे नोस्पते म दिनापी व एमाले माष मिशः मतग मोलपरर पर विनापारमितिलार, प्रसार स्विप मापरसम्म पनि माग मा-परि समिमा स्युरिति सम परिमन व हिमास्तावम् । ननु बाद मार स्तिो अपिल का मिसम्म उम्मेल्पनिमन म सम्म मरियन मनित किया तो मानपरिस्क्येि मापेमामा, एमवेत्यादिनापरलाससानिमाला पास स्थित एस सत्पात्मक नियमबम माति बस्तिमेन सिमाव भासम्म पनिवेपताल पिता सुमारस्मिान किया भारत एनामिलित कियेयुक्त की परिस्थित ति, म म्पापाममानुसारिणीमास्यासमेतम् [निधमनियमाला इति पमिसमापंपचोपपपवे मारपेखि, एपमेष र-पथा म्याम्प वमा नातिरेव दीति मोकण पठिसम्मा वीमा-पाविरेव वि मापानाममा खरिष्यते,' पश्चार्य वरेव, सपा भाषानामनाक्ष मात्र संहिवापाठदो ममरो विमरसदिवपाठाहिनाशिमा, नपिरवानवा दुर्भिसिवत्वाम पन्नेन दुरुपदेशाप, सम्मानिमि मिव पवावं असा नामिव इति प्रतिक्षित समानुपचिरेमाणसाने परम् बसिवनेपोत्सवो पापमपनियोलतो म परम्, पमोत्पत्तिकाए पपामएम सतोप्रसानारमकम पमात् को बिनामावरिवि र माधिपति बिनासः । मा ममा साइसमिदं हि वापते बात न पसत इति, वर्ष प्रवियते-- सितम अयते मस्से पटा ब्रम्पार्यात्मा, न तावदस्थिता, अनुत्पादविनामा स्मकत्वात्, पवुत्सादात्मकं विनाशात्मक म भवप्ति तयास्पितमेष, भसंस्कृतमयपत्, 10 दि मोध्यत्वापापिषत् सत् , सब नास्पितय, उत्पावविनाशमात्रास्मकतापास्तु निर्यापी सपोरभाषा तस्यैव पासी भाव इस्पेसदपि न किधिस्, सितमेपोत्पपते पिनस्पति स्थानि भावितवदिसि, पोऽपि सोकर 'पणिमा सर्वसंस्कारा' इस्पादिः सोऽप्येवं पठितम्प तथा -सर्वेऽप्पयाणि भाषा पणिनां सा किया । पास्या-भाषा वस्तूनि इति पर्यापार से सर्वेऽप्याणि पिस्पा क्रियया पोत्पतिविनाचास्मिच्या सतमपनक्रियात्मक 15 पप, मयस्त्रभ्यामक्षणिय इति । (सितमेति) भिवा बाते प न प पंसते पटा इम्म्मेति, पम पुगपत् मविपार गितुमसम्मस्वात् मेप प्रतिप्राप्ते भिवर्ष बाबरन व्यवसिव सि पविाय-अस्तित्वमारियों सिक्त सिलवीचि, मात् । भमुत्पापविनाश्चत्मसात् पापारात्मकं विनाशामका न भवति माया लिमितिमा पठे पसात बसती मात्र । माय 'यातिणमा निवरिपते । परिवारमा मिलेर मानपी पारिका त्याविषमापणाममा लोपवे । चाहिनापमापलिस्त पावन पर्व परमार-पषमेवति। परमात्मपरपोमा पाल्या भावा- मामला हवाइमारपिाल मकारस्थाने बिरयोगपिता स पाने मिनास्ति' या नियम व पास जिवित बाद, पसमापिलाच मला नापि यो पारसपा स्विति । प्ररि बाबर-पमाविति । RE- प्पा मारक्योतिबोट तपासण-उपधिरेषको-पापा मम्, आमवानोपचापित बातमपरिणतया कमेव मामलामा । पचार सिते माप मालाव, विपि पसलमानामा र परषाभाषचममानिपिनासकम मात्रा । मक्त बारवे तसत इति प्रमति-स्मितायेति । पार्कमा बित एस म पिपसिनासम्ममाम्मपमिमाम्मेष बाबते सम्मा गरमायाम या समनिरन्मदिनाथ पवास्तिकमा एष बापते , प्रापा स्पोकमा निमम्मो निमावीमाप । मा स्विस एस चारवे वासिये वापत सर्व उपपम् प्रोपाइसिसलात् कमेप प्रतिपाप नासिदो बार Wखलित पर बाबत यस च प्रवासे- बदलित इति इम्बोस्या भोपाल स।ऐसार-मनुत्पाऐति एपमालामलामायनी मात मास्यमभो मिलविनासव स्तोम मातारी माया । मामि प्रागति-पत्पापेति । मकवेति मिलानोमवे मत खसरनिया कि समामेप्रमोद परत उपते साल मलबा समान बाप एनम जम्मा मीणामस्वयममग्रीसमारोवापिसावरील पतेपनिमा सानासममा . 10 विपसे दोप] मावशारजपचरम् दुःख, एवं सिवाविौषतिरोपमात्रोत्साइविनाशवे बस् पश्यते-'नष्य पेत्' इत्यापिसोका सोऽप्यस्मात् खेदः। स्थितस्यैयोन्मईनमुत्पादो विशेपेणादर्शनं विनाशा, को नष्टाअत्यम्तारस्पारमना! को नाक्षा प्रप्यसामाषास्मको यस्य वितथिम्त्यते? को विनस्पति। पिनाश पव नास्त्रि उसोऽस्य हेतुर्यव सभ्यते 'साध्य विनाशोतुस्वमिति ? अपि प षयमित्यं पत्रमा, तपघा- 'मवितुर्मापविघ्नः फो न चेन्नैप तया भवेत्' इति प्रतिपक्षसंस्पर्शविनिर्मुको भाष एष भाष इति निर्यः, यया हि भाष उत्पन्न स भविता, भूतोऽस्ति पेत् पुनरस्य वयाभवने को विना ! यदि हि भाषो मूतः कोऽस्योचरकाठमपि मयन विमा ? सदा हि तेन भयता भाषेन भवितम्यम् न न भवितम्प कदाचित् , 'न पेमेव तपा भवेत् अप पुनरेय नेप्यते मतोऽसायभवनपर्मा तवथानापि नैव भवेत् । (स्थितस्यैवेति) भितस्मैवार्थस्सोम्मईनमुसायो विक्षेपेप्पदर्शन विनामोऽम्पमापन प्राम्बर गर्दनम् को नयादारश्यामना सम्मवा १ को नाश प्रममावारमवो यमेव उपक्रम विममिन्यते । से बिनस्पति ? न मिरपि मावो विनस्पतीत्यर्थ, मात्, पिनाशाभावावेप एमसर्ममुन्मचकमलपित- मानीयमविचारपमम् पर पार-विनाश पम नासितोऽस्मोकी पत उच्यते-'साम्प मिनाशोनुत्पमिति', मपि र अपमिम पठामो प्रयामामस्त पदीयः पाठ मीसभा भूयसाम्-अपमा 'भवितुः' प्रमादि 15 रोग यस्म म्यामा मन्तिपधसस्पर्शविमिर्मुक इत्सानि ब्रम्पानिमत्यात माप एव भाव इति निर्यः, र प्रविमा समिका त प्रागमाषप्रमसाम्पपामा सपश्य प्रतिपम भरसेव भवतीति निर्मायः र निर्यिवे? पाहि भाव उत्पमः समविता भूतोऽस्ति पत् पुनरस्म तथा मपने को बिना नास्मवेअमि- प्रायः परियोति-पधि हि भागो मूतोऽस्मोचरसम्मपि भक्ने विमा ? सदा दि-पूर्व पाचदानी विपि अपु वेन मनसा मानेन भविष्म न न मविवम्म कमाचित् न पेमेष दया भमेत् वाम्मा-20 नोस्परिश्रेषपाठनमपीस । उत्पादनासो समाने वर्षमान प्राविधिक सम्म निम्पार मानिमात्र पूर्वोचर नाना लिखिरोबारम्, समय तरेमात एक वर्तमानस्पेव दर्पतम्या पर पूर्वांचर स्माम्बामपनविषय नव निरसन करापार सम्माठि शिरोभागात सापुत्पति मात्र प्रताम्सारमने नियमोऽसि न पावतापमरममा पाटि गार्य विनिम्ता मरिष्याम्पेगा-स्थितीवेति । माचा-स्थितम असाहो मानसिक परमम् बरेमाराममन्पदा मन प्रसासन वापिस नतमन्यन दवा पारम्यास्याममा मन नोऽपि मा प्रबेसामावस्मने बिनाएसपरसम्मोचि न विनामे दिसापिम्प मात् मिायभागदेश निशपिन मिति तस्मात् नंग देखापरिक सानिमामो पेटी मात्र । विासमापन मेलमिलाप लगाऽपुनवे 'साय बिग्रनुत्तमिसाल-विवाश एपेति । एता नपा परिपारिममेमप्रमे मराया परियमय पानीपे पार-अपि रेति । मरिनुमान कनपत्र उषा मन् विमान परिप्रयम्। वर्ग मात्र प्रतिपक्षन्ति इम्पापपलुनो निसारे मात्र एस मा भगी, न मानस प्रपित् प्रतिमा पर प्रममा+0 प्रमेयमापे विमान स समाज निर्मुस सा माहेष माठि साविपि न म माति, पेमा मरिमावस पुने प्रविधिोऽचति माया। एसमेत माचो-परिरमाव इति एमविपि भालेर संभालगति माफ । लिप पेपमाह-न पेप तथा मविति । कम मामा-मप पुनरिस्पा प, ५(४) वापसेसि सामसभापता, म्यायापमानुसारिणीयाध्यासमेठम् [विपमविकास का उत्पादक्निासम्मतिरिकम म्यम्पा मिसापर, सम्माति, वरसम्भवाचतिरिक्त्व-सापविधायनि- रिजस्वम्, सारबिनाचिरिच्वात् मनुसमविनष्टलापि वे न सिवा एप, गुप्मपुतविपिना नपुप्मार मिवान् का किमेपुरा पुनर्माप्पररिम निर्मपाणमिवैव, [सा है गुम्पते ] संवत्यैोमोमते एपपि नैव कुछ मूविपा जिला सैव मातीन्समुपगतमस्मामिः प्रागेव-सिवम बाबवे न बंसने पेलि म्यापारारिता-मापारउलेर र प्रमावस्तुका स्माप्त ! मूरेम एव हि मवात मोत् यहि मक्त्येव भवति । वत्पुनर्मवन लविर मिमममपमित न मपति सम्मेति पर्वपति- मभ्युपगतमपि वैतत् भूतिपैपी भाषानो स एव पापार इति, उत्पादकिनाशापाकि- पतिरोभाषाक्वस्पितस्यैवेति, मत एव कारकं स्य भूतिः, भम्पमषनद्रम्पार्थस्वाद , एका 10 वप्पकस्मात् पुम्न पत् फमते 'मध्य धापविना का ॥ ) इति । मभ्युपगतमपि चैतविस्मापि, मवाऽम्युमगतमेष प्रागुल मूतिन भावान्य स एष व्यापार इति, प्रमूविरम्बा प्रागसत्पायो नाप्पुत्पनलाजन्यविनाशः प्रचसाम्पमा परि पापविनाये। मानिर्मापतिरोमावावलिवमेति निचरमा परिवार्षम् तस्माविषवियामुज्यामिपण पवित्र म भवन्ति मानाः नाप्पमितपणिमा भव एवं पार से भूमि परक पाविर्मापति- 18 रोमागारमकभिवम्मैव, स्मात् ! मम्मभवमरम्मावान-भक्तीति मम्मं भरि, भूपते परेन मापन मरे, पावसामनाम्याम्मनोऽभिपहुंचपदारमनवाश्ममा साम्पसावनत्वात्, एषा बप्पकमात् परममितामाकममीशी माना। बीमितभा मतेमोहिमपरीकमबाट गोमते गरम प्रसार समाय-पतमपि च युकमिति जिस मायकल पायात वर्ष मेयो भनि-मा बिना पाठवि दिवस बारवे वेन तेन अमरेन मयत व प्रमेन भिासपातपात, तमामात समापरणको मत स महोतच या मनाति मात्रा । पारमार-भूतरेति प्रबास मसान्देश मोन मी-की लिसमेत बाक्त पनि । त्यसम्म भवन स्वामितीय मुत्परम मया-भम्पुफ्गमपीति । यो मयेति भूमिग विमा पनि मापनपरिवाना मा अपाय मार्ग का प्रापतापुतारापुटाव मापस लिन पचममा मत भाया । अपारमियमो. प्राममायामापात प्रपो ये भक्त सना-भानिर्मापतिरोभावाविधि, अपमानमेन प्रपात मानव निर्माणलोमानापानावामितपते प्रतितापक्ष प्रतिर म तथा निर्मातारावामुरामा समिम म मन्ति पाणिन्त सन परिपेति, मानिसमा मेर्यापारमावस्यामानावरम पुष बालम मालाम्मतीमा पार पोपते st पापे-म्त पोति भक्तो मावस मलमा पोखी पर मधिर्मसमानामरोभा या पानि मिरोमातरमनि पारामापनि दिपा मम्मेति ममम मम मममस्म मात्र से भी समय पारेषा को मानव मल प्रपात पापयतिमाएस राकि सारिकार प्रति माह समारमेर मेरार एप पीठि बिमामाभागात म भाष्य ।नि... 'मिसित ।।... 'मयम।
. 10 विपसे दोपा] माशाजपमम् दुस, एक विवाविर्मापतिरोभायमानोसाइपिनाप्रवे यत् पठपके–'नय पन्' त्यापिका सोऽप्यस्मात् खेरा। स्पितस्पोन्मईनमुस्पादो विशेपेणादर्शनं पिनाशः, को नराअत्यन्तारश्यारमना! को नाशः प्रध्यसाभाषास्मको यस्य विमधिन्त्यते! को विनस्पति विनाश एष नास्ति वोऽसतुर्यत उच्यते 'साध्य विनाशहेतुत्वमिति ! अपि च पयमित्यं पठामा, तद्यया- 'भवितुर्भावषिन को न चेय तया भवेत्' इति प्रतिपक्षसंस्पर्शविनिर्मुको भाष एव भाष प्रति मिर्यः यथा हि भाष उत्पन्नः स भविता, भूतोऽसि पेत् पुनरस्य सयामषने को विमा! यदि हि भावो भूतः कोऽस्योत्तरकालमपि मषन विमा! सदा हि वेन ममता मावेन मषितम्यम्, न न भवितम्प कदापित् , 'न पेमेव तथा भवत्' मय पुनरेवं नेप्यवे मतोऽसावमफ्नभर्मा ततयापुनापि नष भवेत् । (स्सितस्यैवेति) स्पितम्बैमार्यमोम्मवानमुपायो विशेपेणापर्भन विनासोन्यमापन प्राम्बर र्शनम् को नयऽमन्वाश्यामना लामाको नाशा प्रभसामाषात्मको पस्मय पणा विममिन्स ? बिनस्पति ? न कमिपि मामो बिनस्पतीमा मात्, विनयश्चमावारप, पास्सर्वमुन्मचम्पपिक- मानीयमविचारपमम् भवभाइ-बिनाप एप नासियोऽस्मशः पत तप्यते 'साप्प विनश्चरेत्ममिति', अपि प पयमित्व पामो प्रध्यमामस्तु पदीयः पाठः, मीना भूषवाम्-तपमा 'भवितु' मानि 15 सोम, मस म्पाल्पा-प्रतिपमसंस्पर्शविनिर्मुल प्रसालि, म्यानिमत्यान् माप पर माव इति निघायर, न प्रतिमा झमिका, व भागमापनसामावास्मा संसदम प्रतिपम मवमप भवतीति लिपापः को निर्यिते । यथा माप प्रलमा म मविता मूतोऽस्ति चेत् पुनरस्म सभा मपने को विमा! नास्पनेसमि- पापा वरिपोति पनि हि भागो मूला प्रेऽसोत्तरसम्ममि अपने विमा ? सवा-पूर्व पक्षाचवानीम विपपिपासेपु पेन भगवा मावेन भक्तिम्प न न भवितम माचित्, म पेमेर तथा भोस् वदनाममा-0 मारिलोकपनमपीमा । रत्मनिनावी मनाने पर्दमानानिमिसन इम्पम्प सनमे पाप मानिभाया पूोपर योगाम्ममेव नासिरोपामम् यत एम म य एष बनमानस्पेन समलियन एल पीचर माम्पामरानपिन मिमि साप्पुपार पम्मी निभाना सादि तम्मान प्रसामारमय पिचि - सामना नमामि पिता भानाम्नार-स्थितस्पति । मात्रा-स्पिती- यामेति उत्पाशे वर्षमानयिक समम् सिमेनारमनवा मा प्रामाराम पानि म स्वस्तार वा बामदारस्पारमा मा न पेपि मग प्रसाभावाम मालमत्रोप्रति ना पिर मार निाममा नापि न विदसि समान् मरा सम्मकि क पानिमामो पिक भार । बिनापमान समिया यापुमो 'पाप मनापानमसाला पिवाश एमति । स रामादमप्रपामे मालामा-मपि पेति । मरिनुमानित नबर या मरमा रमपार वा मायो-प्रतिपति, म्याग सुनो वि भाव एक भाषी माति १ मा प्रथा प्रीमि प्रभाग पसभापासे परमात्म सीमावरम पनिमुक सहा भार भामि मारिपि मामास पुने कविनोति भाग । एकमा म्पनी-पदि६ माप इति स विधि मन नरम, मनावमावतार, पूर्वमनपरी माम पिरोपमान वय वा मदिति । दम्प मापबाद मप पुनरिया ० म १५(४) 10 म्पायाममानुसारिणीम्पाम्पासमेतम् [मिपमनियमनमा अब पुनरियाति अवेष नेप्यते-अपना भवितत्वात् रिमपि प्रपु भवसेनेसवोऽसावमवनपमा, पवमा मनपर्मस्वारघुनाऽपि नैव मोत्-पानी मरिसस्पेन स स नैप पराजिपि भवेत् पवाधुनालेन सपुप्मररिताचाफममनिवत् । स्वरापातु- मति भपने मिना स्वप बिनाको पा कम विनाश हेतुपैति निवस्या पैशेषिको पात् पादीनामश्मापमिघातो विनाशहेतुः अग्निसंपोगः पापिषाना म्पादीनामपाय तस्मानिये पिनायोऽस्पनिम्मेवस्थानमिति, पोशोऽपि 'जुहुक्सित्तं मिनम्मि' इति तम स्पध्ये विनाशसत्त्वे सा मम्पतरासिद्ध कर्म निर्यमर्य हेतुरेषेति, मस्ति विशेपहेतुखमिन् सति पभावमामादिति। (मस्तीति) पनि मबने चिता, मोरक्षेपिपासमा साप बिना विनाशासाभिम्पमिति र पाममात्, परमेव पृथ्णमा यबास्स विनाशोतुति निपश्यामिति अशक्यमिजाभिमाया, सेपिने यत् पमा पटारीनाममापमिपाव इत्यादि पूर्णनपबत् निनो गवाया, पेयोऽपि सम्मिच मिम्मि' इत्यादि जम्मर र विनाश इति पात् मोमुगपगुचर 'साप्पे विन्मशतस्पेस इत्यानि अनिचापीयस्त्र जातरम सब मिनाशा मागभावप्रबंसामाषम्मम इति, परंतु ममः प्रविम सुचम्पायेन, बैशेपित 15 असा नाश्माभिमायामिसंगोपनिम्म पटपारिवालोरमा विनाश पति वर्ष मा कायमेव प्रतिम इति वा समिरमम्पवरसिवाभिमायते भम्परासिसिमरामार्षमाशा-मस्मिन् सति पारमाणनिति पूनमम्माम्यनुगम्यम्पम् ।। रीति मामा परिमापि तु मम्मी परिपत परम भाफेमामा म्र, पामामवमवारणापि रममा पपुप्पाम मात्र माग मानहानीमिति, सारी मरियम एसपि न मानिनि का मो. 20 तपा-बता पायरतात माया) ब सामवरामलालम्पसाय पिर बलिपरवाए गौरब मम पीस मस्ति मपन विन इति । बोरमा क्याम्म ब मिना निम्मरम्पविष पनि मने मामिला- पोसेति परमपापमपति मात्र गुणा मालामे रिति रिनामे नियमित प्रमाला प्रणी- पयमपमिति वासनमा स्पभिप्राय । बामाचमिपा पाना प्रस्नोपा पसिनासम्म मपाबामस्मतिरेप्रम्य हेतु निति रिमेकि रति-पत्रपिः इति । पीनामापछि-पीरोड पीठि म्र भावाना नसोधि गर । मनु विमाने भारताला मे भपि तु व सासर-योयुम पगुचरमिति परिम्नगरेपलमुरवत इति मार 'अमे विनावात परम मा मपिनुपातमा पर ग्राम स्मन् । बर मापस पपत पायात समिम्बादीति गगन माम मामाभाष प्रफ कम म मा रम्य मारम्पमा भी एक 410 पीएम न एचम्पार मानिमामी भर पडसम साप्पाला सरपति-बापित इति । मातरम्परित भयोधपठ भिनु मम्मे प्रतिमन भरनमामी, तमादमा श्यामसम्म मतपरिधरमप्रमिया-पर्य मम इति । नाम मात्रा पनि एमासम्पपचार माविप प्रभार पार्टिमा भरपरम सम्ममार-मम्पतपसिनीति, पबमबहोमको मिदिमाग 1...मर । - प्रतिश्पवर्षनम्] मावशारमयचक्रम् वोचर मोरपि इदमसंभापर्क स्क्प विनाशेऽपि हि भावेऽतके कमनियमप्राधवची माग्दृष्टो पटभाषा कपालत्वेनाविषनिरोमर्षय पटत्वेन न गृह्यते फपान्त्वेन गृपते, मतः सिसत्येयासम्मसेन पटपार्थिवरूपायुदकानां तिरोमती न स्पेणानुपछम्पिा, कय हत्या ! यमासस्यनिर्देशा हि मपादया, उभयेऽपि शिषकाल्या समन्ते, स्पेन रूपेणाविनष्टाः सरस्वभाषभूतेरेय पिणस्पेन : छीना,कर्तप्रत्ययवशायोस्पन्नाः स्तूपकस्पेन स्तूपक इस्पुश्यन्ते, अभिपाताविप्रत्ययवशायाकमा छानीति, सोहि वपा तया पस्पति, अवसस्य शिषभदेरप्रहण न स्वयममायाछिनाशामा । स्वमिति । समसापक यस्मात् सय बिनाझेऽपि मापे-स्त्रय बिनाशो कि मापस्माधिर्मपविरो- मावात्मका प्रतियो मात्र सका, स चोच्यापत्तादेबायका तसिंमायके मारे मनियमप्राप्तायो कमेप नियमा मनियमा, मनियमेन प्राप्त चिम्म साममिममप्राप्तातिर्मापोऽसको समिणप्तिकला 10 सत्रविक्रमेण लियता प वृत्तिा प्राप्यवे पिणाधिषक, शिपयत् सूपक इत्यादि सममेव, काति भरपन्वयम्पपि नियतमपिणापासूत्रोपगमरिस्पाणि अमेप मषन्सेम मपन्ति, वमिंध मनियम- प्राप्ताणे मागे प्राग ठो पटभाष पाळलेनाविर्भवतिरोमरस परतेनपश्मामिभावारिनिमिचमपनप्रपरेण न गृपते पठत्वेन मामस्मेन गृपते पततेपी सिगात्सेवामन्मवेन विरोमूतापमाण घटमाविरूपापुर मनाम् वेद स्पेानुपमम्मिबिनाको विशेषेण्यदर्शनमन्ययोपाम्पिरेशानुपम्मिरिति सम मायनाममा 18 मदि,म्पाकरण अवार्सम्पनिर्देशा हीमारि समिति ब्रम्पार्पमपनैक्यारेसम्पपोच्यते स्मारय इत्पा निर्माचविरोमावपर्यायमचनमेशात् पत्तसंम्पयो पसे,मयेऽपि शिषधम्पो ममन्ते सान रूपेण पापिनाया, मारविना पारमनेति इति चेत्, वचस्मानमूरेग-वेन मिचिश्मामिपावारिसपरापेक्षेप स्त्रमानेन - मेखिएकी भाषामेरपुत्र प्रतियोगमा कामवात् पवारममा प्रतिमाह-रामसापकमिति। माविमतिमा निम्म एमबिमायामाम् , मावि तिरोभायरममावासा बास मरारिमामा 20 मचनियमेनच पर्वत मापन पाप-परमात् सपरिवाशेऽपीतिमा मात्रः कमेन मिनिम्ममा विवि प्राति समेत पिशानिमा पर तक ससक कति मत-मनियमति। परन्तरापि पपराम्पसमिमरिमानि मानदेव व मपन्ति माविमेन सपरापेकमानसमातार पिसिरिमाम भरपन्वरमसमापवान्, एवं मेर पिमणिपरिम्पेष समापेवमानस्मेव गिनी प्रमाणे माने रसपर्यापस स्पायनाभिर्माने बामामिममिनिममवनापेन समाकम विभागात तासन तम म्यान मोदीवि कमालपानिमिवामानसमाववातिरोमागम माने वामन्मनाम्य पार्षिसम्मारिवारीनानिमाह-भवरोगामिति मानमानिर्मागविरोमायो सयपेपमतबसमानता अपालिम्पीना प्रत्यादिनानुपात्मिा नियने निकष पनमन्त्रोपावलवे संसात्वा न तु प्रामाणीवेनोपडामाता वम निवासावादित भाषाारसमे मायनि- पंति स्तुला सिमामा मत इन। मातमी-पपासंम्येति मामिविदा परेश सिमपामा मते समम्मममाती स्वासमता पसोप्पीप्रीमममममतारेमबनान्तरिम माइस इम्ममिमांगविमापाया. 30 ममममममम गवनासनिक पदमारमा स एष न प्रभामा भिन्तम मिरिमा मन्वे मापि वे कम मि समवस्मसम्म ने देतो बनम्मेवानिया तेन देन समक्ष रूपएपेशेवमा . 10 भ्यायाममानुसारमीम्पास्यासमेतम् [नियमनियमनका भव पुनरिनि भौर नेप्यते-अपुन्य मविपत्मात् विपपि अाप भरलेसवोऽसावमवनपर्मा, जसमा मरनमर्मतारपुनापि नैर भवत्-पानी मविलेन हास नेप पापिापि भवेत् बाबुनास्लेव मपुप्परतिमापापममनिरवत् । स्वाषा- अस्ति ममने पिता स्वयं विनाशो वा का कस्य विनायहेतुर्वेति निदश्यों, वैशेषिको स्यात् पटादीनामश्मायमिपाता विनापहेतु, मनिसंयोगा पार्थिवानो स्मादीनामपाव सत्साग्निम्मे विनामोऽसामिप्यवस्थानमिति, बौद्धोऽपि मुहुफ्ति मिरम्मि' इति तम 'साध्य विनाशतत्त्वे स्वः' मन्यतरासिने कप निर्धार्यमय हेतुरेवेति, अति विमेपोतुसस्मिन् सति पथावप्राणादिति। (अस्तीति) भरि मम्ने विना पोरोपियोपमासम्म साप बिन्यो विनामखसानिम्पमिति च पारमात्, बम्मे पूछामो पथा कम विनाति लिपश्याविति भशापमिममिमापा सेमिनो यत् यपा परादीनामश्मापमिपाव इत्पनि पूर्वन्यात् निदर्सनो स्वार्थ पेयोऽपि 'एस्पिच मिम्मि' इत्यादि मम्मर प विनाश इति ज्यास् वयोयुगपदुचरे 'साम्मे विनाम्वरलेट परि, समिकगरी गास्त्र जावस्म का विनामा मागमाचप्रभसाभाषम्पप इन्स, बस तु मा प्रतिम्स इस्युचम्मान, पिम्स पाः तेनापमामिपातानिस्पोपरिना परपापियोरप बिना इति पय मा सयमेव प्रतिम्म पति पता समितमम्पतरासिामिपायठे मम्मतरासिनिमुरासार्यमाछ-वस्मिन् सति पभारमहम्पतिति पूर्णनबम्पारम्पावरमुगन्यम्पम् । परीसि भामा भाग बिपि मा नेपालबीच भागमामपात, भाभारतारपुर समंग पप्पा मार बाप माप-रानीमिति इस भविषम पोऽपि ममापिरपि वा भयो 50 RO-मास पारामा । समयन्तरारम्पासा मेरि भरिला गरम मम म पाल भस्ति भपन विम इति । बौररि क्याम्म म मा नामसाधि पनि मने मामला- पीयति सम्मानित भात । मुमार सहिमा सिमिरमान दमामा पापी- पयमवमिति वाममसामणिसममाय मसामिप्रतेमापिनापस नमानसमा पनि प्रमा मयसमातरममा हेतु ग्रीमति मानि शपिकति दिनापारगति-पायो पीति म्मा नागय मिास मर । मात्र मानुसर - सिम मपि तु मार-पयोयुम पासमिति, परमपरेशतरपुरमा पनि का 'समग्रमवारे समय तक कर HC काम मामी लाम्म फन वाकी भविष्यगरीष्ठि पनमा भाममापन प्रमाnिtd मनु + RUAम बाक्सामा सम्म सब बारामा वालवाणी भाप । अपि प्री पालन मापस सपा-पिक इति । मासारिमण्यता पानाम मिनामा काम भावमापीरम् उमारमा भरतभारम्प-पर्य मम इति । RAM नाती पानी मध्यमापनाम मामय पारम्पम उग्रा निपा-मम्पत्तपसिमीति परपस्पेमा परिमार मन्मेर । - । मणामवरणम्तान्तरापि] बावशारनयपकम् मा अपीः । विहि ! विम्माविमङ्गान्तापासिनः सर्वेन्येऽपि पस्तुषापुद्राराम्पमाहेम पुल्या आविता मेवानुफ्वन्ति, वस्तुद्राइस्मानेभन्दलाप र वेपो पूर्वाभ्युपगमे पिरोधा[म्पसन प्रेमात्मन भाषा- सकरमिति वाससनदर्शनापास्मापासमिति वाससनरर्शनावास्मा घासन पुनर्वि भाषम । धनम्तरावीवनपदर्शन पावापयामा सपबा- येप्याहु राशिवदिति, पप श्लोका स्याहाद एष नैकान्तार्थत्वात् 'शक्त्यन्तरत्वतादाम्पा- म्पानन्पत्यमकस्पना। ॥ इति सक्स्पन्तरं नरादिपु प्रत्येकमसत् सेनायां समुक्तिनराविचतुरझापा रटं तदात्मना सेना तु प्रस्पेकमिति तयोः समुदायिसमुदाययो रेकल्पनानास्त्रे षादिनामीकते ब्रम्पार्चपर्यायार्थानुपात: कतो भवति, नराविस्यमाम्यतावा स्म्पेऽपि प सेनाऽम्यापि, तस्समुदायमात्रस्थात् पदारमत्वात् भषनसामान्यस्य परसार्यान्तर त्यत् , तस्मादेव मागेप म्यापखपया 'नृरयाप ॥ इति । 10 पेप्यातुः शिवपित्यानि एप श्लोकः स्माद एप, नैनवार्यत्वात्, सम्पाम्यामोमाइ- 'समन्वरत्ववादास्पे'मानि सेनामा भाक्तेि सर्पस्याम्पु राशिमामिप्यपि मौक्तिमेव मविप्पवीति गापमा, शासम्रै नरारिपु प्रत्येकमसत् सेना समुरिसनाविपणा टट प्रपरिपुनिजमनम् , वाम्मना सेना तु प्रमेक, वाम्पेयहि नरापङ्गानि सेनेति नैव वयोगरिसेनाम्यपस्तुनोः समुरापिसमुपाययो- पाणिनोरेकस्वनानावे पाविनोदारवाशी, ववजीमपात् उम्पार्थपर्यावानुपात:-मवनयात्म-10 पा रियास्मिान्वापतितानामपि स्तुपादानामात्माफ्तसेमार-विम्यारीवि । मार-पस्वारस्मेति की पसम्ममम्मत नापि तप सारमानेमन्तरमापक्त एपी मापः । एपबानेकान्तापमारमन मापास पर, माराम पेडियाझसनस्पा च विचार्य शो मा पर्तिमा-सपेति मालिसमनु सिप्पारिमप्रान्त पासिलपाराम्रा माईतलमापपर तरसममिति प्रतिपारणीयम्, पसलमानवालानाप बाम्पन्नमतिनापारमा तारकम्त- सरपरसरात रममावर्सनमेव वारसबममाईस्पेन मारबम समापलाह-मेऽप्यारिति । पक्षम्यापमनपर 10 भोमार-रातिपदित्पादरीति नाम मोऽस्मार्थिको सम्मानिसममा मासिस्ये पापा सम्मान एस र प्रापट वरसम्ताने भी सामनार प्यान्सत्येनोपम्पचा रास्मादमा प्रमुखापासणीपास्ना स्माश्मिानस्वातिपारम्प वाम रमणार याबास्सै परमेम प्रतितिमिति बोध्यम् । एतोषिपारितोऽपी मापार एग भनेमान्यावारिति विचार-पप सोकाति। साहार इम्म मेकर काम सम्प-याम्पासोकमिति । शम्स्पतर खेति गगमपि मेमे न पूर्व उपाय । सम्परालादरम्याापामामारपना । मेलाम्वायरफलात् मारम- सपी की अरका मम्माम्पते । म राता. संपत्रिोल सत्र सेनाणम्त मारे भारत पाता एपिसारिपु म मानिये भवतामा सेमापो मापित इति नाया साहाय माविवे मम । 'एमपरस्पा माई माम्यम् न प्रमेहमारी मियपछि समुदिवासी सेनामान्तु प्रामगि ठर प्रसारिपनरूपम् ॥ प्रो रो माधि से सम्ममदप प्रो मानव सेनुपात माह-शपत्यम्तरमिति मा पवित मान्तरम् । तत पमिमगार-मवेति, मम पाविमेन समाया यो नरासिनो समस्यालापामा तपस्म-30 तल पारिवामिति मात्र । म वापि ममपातलीपरपारिति ग्यामिरेलमार- लाममायामासांतानुपात हो मति एतापराम्पा नात्याभराच पायावानुता बमो. 'सि-प... समसनमाधम । सिम मामिषु ।
पायागमानुसारिणीम्पाप्पासमेतम् [नियमनियममा मपन्चो ठीनासिरोमूना पिण्टोन प्रमपमाबोसमाः सूपम्नेन स्तूपक इसुम्पम्हे सापारमा, अमिपामा विमलयपप्रम मागनीति, सर्वसो विबजे से मापे परिपमति, पपोलीससा पम् । वगापति जिपो अपनो माया परिव।' (मार न २५६७) इति पपनात् दबा वा पत्पति बहुपतरति-मतवम शिवभरिमाणम्, न सबमभावाहिनावारेस्पुभयोरप्युचरोहित। पार्षिमा भपि म्मावमा स्वपरापेक्षस्वभाषन ममन्तोऽपिसम्पम्पसामन पूर्णम्पतिरो भाषे पुनरम्पयोस्पमा, तपायामप्पान्तराफेवानपेक्षस्थितामयनभ्याप्ठरम्मतराविभूतिरमि- सम्बम्पसामप॑त् भम्पानामपामसिसम्मत्वाध स्फुट प्रहीसु शक्यतेऽनुमीयते सु तिरोमूल्य इत्पाहतद्रयार्पवाद पर्यापार्यावणिकवादः समर्पपति । पार्थिवा भपीमावि, वन्यमवायपि प्रत्या विपस्तु पूर्णरूपतिरोमा पुनरन्मबोपना 10 इति बारपावामुसारेप, विशेपयामिम्म्मम्पसामर्मम् पामपानिमानि विपरमेष, भपामस्सवानिमूने रविरापेमानपेयनिताभवनम्माप्तरेषापामस्वरागिविरप्पिसम्पन्पसामारतोऽमानामपामक्स्स्मि- पारमिम्मममसामने न सूट पहीतु सस्ते प्रममतोमीयते तु नियमूवा इति, भनेन प्रपरेप [बाप न वेनामिसंयोगेन विन्यसनादिति, वस्मात् सापयोचमा तम्मावारमेव पर्यावधि पपि[] रस्तुपा समरवीति । मा चापूर्ति कापीः ममेवाईसस्यमापतितममियतोऽसीति, किं सहि! विष्पादिमाता- पातिनः सर्वेऽम्पेऽपि पस्तुवायमाहा स्पसाहतुस्मा, तब वलसनदर्शनावारमावासकरमिति पति भाषण । मा चापति फापीरित्यापि, ममैव पनिकालवादिन माईत्वमापतितमनिपातोऽभीतरनुवाई 18 मापसमामिकाविषयमा पूर्वतमाम विरोधता स्तरसमाग्रनिर्मदा परिसपान पाए सिस्थानापामा ममिवातावमा सम्मारिकाममाम्मत ही भाव मिलिया प्रमाबमासमोरीवित 'मरिमा गम्मिन् माये परवमति प्रमोवकिपाम्बाइमम् । वयसमावि मिमोसातवा मानिसमा या नाणम्मेव सर्वसम्मको यात्रामाम् ममिवावाविप्रसार सम्मेव सम्ताऽपि मिलादिना बिनविरोमानाने परमपम् मनु सिमसापादिमाया-प्रदरम्मति पारितम्यता विवामामेवानिर्मापनिर्मा- पेच भसमिति पति-पार्थिवा यपीति विमम्बन्मिनोऽपी गुपचामवानिमिया-पम्पबरेवेति । स्पेनामवय समियोपारिसरापेबलमा निराम्ता पर्वमापचा निरोम्नापेपन साम्ते पावितस्पेन एम्त मान मिति-निसामिपति समसारस्पा परि मात्र मामिलासा- मर्च पासपनिम्मति याकाममापि नपराफेमसमान मानसम्पबमामात् स्वामिग्रेमामाnिt पार पपमपामिमाीति।मन्तिरेति विमानमान्दाभिरोसा दफेवयमपेजसो मागपतिवार । बस अभिमानापन स्थानिय साप माचिकाएर प्रमाना निमीमत भिन्न समितीमा- भन्लानामपामिति। म पम्पतरावादिना सीमसायनमे निमा मामिम्मोगादिमा लिाम्मामा मनोति। एन पांवा मामाप्रमदमम्मतमेव विमापार पसार नमसम्मान-समापिति। मनु मिला- नि मानिनेपालमाकी या चा-मा पापविमिति। मापा-ममैवेति। बसियालय सावरगताम्तपपि] बावशारमययकम् मा भी लिवाई? पिप्पाविमङ्गाम्तापाखिनः सर्वेऽध्येऽपि वस्तुवागुवाहास्वाहेम तुस्मा माईसंतान मेवानुपतन्ति, बस्नद्रामानेकाम्तत्वापत्तो, व पो पूर्वाभ्युपगमे विरोपा[दाम्पसन प्रेस्पास्मन भाषा सममिति परससनदर्शनावात्मापास्करमिति वससनदर्शनारामापासन कुरु वि मावय । बनम्बराठीवनपदर्शन तावमापयामः तपमा- पेप्याहुः राशिवदिति, एपश्लोक स्यावाद एष नैनम्तायस्वात् 'सक्त्यन्सरत्वतावारम्या- म्पानन्यस्वप्रकसना। ॥ इति शक्त्यन्तर नरादिपु प्रत्येकमसत् सेनायां समुक्तिनरादिपतुरायां रट तदारमना सेना तु प्रत्येकामिति सयोः समुदायिसमुदाययो रेकत्वनानास्पे पाविनाशीक द्रम्पार्पपर्यायानुपात: कतो भवति, नरादिसामान्यतादा एम्पेऽपि च सेनाऽन्यापि, तस्समुदायमाप्रस्थात् तदात्मस्वात् भषनसामान्यस्य रूपरसार्यान्तर ल्यत् , तस्मादेष मागेप न्यायस्तपपा 'नृरयाप ॥ इति । 10 पेप्पाहुः राप्तिपदित्यावि, एप सोकः मानव एष, नैकान्तार्यत्वाम् मासालासोकमार- 'असन्तरत्ववादास्रम्पमानि सेनायो माक्तेि सर्वणन्टेषु राभिसाविप्पपि मापिठमेष भविष्यतीति अपना, शासम्रै नपरिपु प्रत्येम्मसत् सेनामा समुदितमरावतुपायां प्रपरिपुषिजयनम् , वात्मना सेना तुमसेफ, वान्येन हि नरापहानि सेनेति, वेनैव वयोगविसेन्नम्पबस्तुनो समापिसमुदाययो- पाशिनोरेपनानाले पाविनोद्वारपवाजी, पडीकरामत म्यार्थपर्याानुपावा-उमपनपारम-10 मोगा निप्पादिमतान्दापतिवानामपि वस्तुपारामामाईतत्वमापसेम्या-विम्यारीति । एमाह-पस्वहसेति. समि मनम्मुफ्यम्पते कनापि तप बारममेकाम्तवमापप्त की भाषा । एमावासमारमन मानसप्रति पवाराब प्पमित्याससमस्पा पनि प्रचार्य सोई मा इर्विमा-सऐति बाईपमा मनु नपरमात पारिनस्सुमारास माईक्तमाफ्यठे लपी प्रतिपारनीयम् बनमानाममालाप्रपके व्याम्मपरिसरमावस्यायनस प्रसारक गरपसारव सम्मानमेव पचममईन माराम सामनार-येऽप्याहुरिति । पूर्वसम्मान 20 भेकमा-राशिपरिस्पारीति वा प्रेऽम्मम्मिम्मो पसवानिरिस्परमयो बाधित सारमा समान एलप प्रापत सन्ताये की सामान पावत्येनोपपता गायक समुरामासत्तापाला मारमावस्तुलवारमा मसत्यममा प्रान्तमा तस्येन प्रतिपापितमिति मोम्पम् । एतरकारिवानितोऽकी मदार एस मन्तवाति पापार-पप सोपाति। सादा स्मयोमा उत्रमा गरम-तपाप्पामोमिति । उपत्यावर खेतिपयमपि म पूर्ण उपाय । सासदरापारम्बामापलाएपना । मेमन्वारपसात् मास- सुपरी ॥ व पारिश्र सम्भाम्पते। मेरे पाता पिधिनाय का सेनाहान्त भयार भारित पम्पु पिपरपु स मारिता भावसार-सेवा भावित इति, मनाया स्पाये मासिक । 'स्मभर सारा सेना माम् पर स्मारी मित्र मणि समुहलाना मनावन्नु भयन्तामसि तब प्रररिपुरिम्पमम्मम् त मम ममाटि सेन्य सस्पमा प्रो नरापेपनि पुष्पत मार-शपत्यम्वरमिति माता ममत्वरम् । मम्पार-तनयेति भास मातिमनेन सम्पन्या यो रामो पसन्मान GREAm लापता परमाणीतमि मा । मस तनापि ममाह-मरीमरणाविति राशिमरेलमा वामुम्मामा पाईनुपाल को मसी एसाभराइम्मानुयल मामा प्रिय मापानुभो 1. मि म समाधान । म.प.म... भाविता ।
म्यापागमानुसारिणीम्पाप्याप्समयम् [नियमनियम तेपामेव भेवपार स्मादीति, पपातीवनये स्मारिसमुत्पमात्र तत्त्वमिति समुपायो स्मादीनो विहेपाय सामाम्पममुपगवम्, व्यो न निक्षेपमापस्यापिति मिणता, उमेणापि पमान पान समुदाय सामान्यमेवेति निरामयों वायवे सैदायिः वदुमयमिछनियममाशेऽस्तिति । 11 मौदासीन्याच सत्वेपु मिथ्याभिनिवेशावयुमारपापिवे ज्ञानमुखाचन्यात्मकमात्माने पपसि तस्मद सादाम्यशफ्स्मन्तरोनापुरस्कृतस्यमाम्पपिशेपास्मकल्पानतिकात् सैद्धार्थीप- स्थापचिः वस्तुवादित्वात्, एवं शेपपादेप्यपि स्मामाद पपापयते पठात् सत्र वत्र तर योचितमित्यर्ड प्रसङ्गिन्याः संकपाया। औदासीन्यायेत्यादि वत्तपरीधानापयत् मिप्यामिनिममत्-मामस्मि वत्वात्मिाय्यामिमा- 10 नाब मा स्यामाप्रापिते शानमुपापम्पारम सापतिपिवमा मुती उसी रजो रियो पाऽस्मी- मारमाने पररसि, तस्माचराम्यश्कलन्दरोगापुरतवसामान्यविशेपारमध्यानविस्मात् सपरिसमुदाय मात्रवादिनोऽपि सैवाचिलापपिा बस्नुपाविरवानिति साम् एव क्षेपबारेप्पीत्पतिरेय, एव सेपेषु पुस्पारेपपिम्मधार एवाफ्यते बम्मत् पत्र का वम पोत्रिवमिला प्रसजिम्पाः संम्बामा, पिपते रियो पारात् पान्तनिपरपुरतवाया वस्तुपापामुमामा, सम्पपामामात् । विkि:- एषन्तु यमता निःसभापमिदं सर्वम् मुघोम्मत्तादिवत , सुधमत्तस्थानीया पर दि रफ विरमूडा पापणिना सदसदाकारप्रफरफ्नानुपासिविधानस्यात् तदारस्वामाम्पन विज्ञानकम्सि- ताफारसुसमचापिविधानवियपर, किमपि किमपीत्यामासात् परमार्मतो नास्ति भिवाकार मूम तैः स्वैराचारैरिद रममाणमपि मुसा प्राहकाकारपरिठवावासाकारमान्ये शूम्पगृहमत प्रवेस्पानिर्गतम्मोत्यवाविरहित कम्पपितु पापम् । (पबमिति) एसम्त गस्तो लिाममाषमिव सर्व सुमोन्मत्वाविवत्, पमा मुनम सापमपि मित सीपी-पपाधीवपय दलिएमसमा म लाप्रापित परम्पसमय एस HARसम्म मी पापमोति सामान पामत वामनामनाया नमामिलाममपिमानाम्या मौवाती पायेति । माप-तत्त्वपरीमति । यति व पदनामी त एक सेवा वाय- प्रलापनपतस्मसम्मारिवारमा भीममात् रामपानमुपासम्पन पत्ती मानस परिपालन HALA अति पारित भालापादन मापूजा-पामावादाम्पेति । परोक्ताबारेषा समिति जिला पिठन का मनो कापति र प्रधानताया एमन्सनियमामलामा नाम्, परमम् रिमोऽस्त पात, पम्मवानापरिना-प सेपेपिबति । मन मुसामलापरितोन समयमा पनि कमाने की माय सा प्राा पनिवति । मागे मेति । को की गाय बागाने पवास्मिनमोचा नर मी सम्म 18... मितवादोरियादि। ।
निम्समाषाम्यापमम्] मारणारजयमम्म् पर सियूमानिरर्शन समारविपय तरवसमावभूम्यं या भाप्रसोऽपि, पवा पा मचम्म महापाम, मममचमानीया एष वि रहिम्मूगा पापणिनः दवाप्रपासनानुपातिविधानलात्, सरवस्थामाम्पेन मिानकस्पिवानरसुसमचादिविधानविपयपत् किमपि किमपीमामासात् परमामेवो मालि पमिदाकार, शूम्प राषौरिस गृपमानमपि मुखा, प्राइमरपरिप्रमाद्रामापरप्रान्तो, वमाम प्रारम्पमेवेति कम्पपितु यम्पम् लिमित्र ! शुम्परागत् प्रमेहभावमिर्ग कसोलापारिवम्- पथा शुम्पगरे न प्रमेन च भाषा [न] मिर्गवा [नैवम वापि म्पत्तिमिविपिनासम्बम्पायो- पासिविमानवमिदं मानविशेषामिमतमित्युऐप्सः । सप स्वभावधिम्पमानो न स्वता नापि परतो न माम्याम्, नाप्यतुवा, अप कपं स्वपरोमपामापा! ममः, मसिझयुत्पनुपावसामग्रीवर्धनावर्धनेम्मा, मसिदेखावत् दीर्म- इस्योर्मभ्यमानामिकास्योः दीर्घाया दीर्पस्वभाषो न तापही स्वास्मम्मति परायचत्या-10 चस्पासस्प वद्धि मनामिब्रहस्पत्यायचं यत् स्वारमम्पसि तत् कप परसा सिसेत् ।। (स पेति) स च समापमिन्यमानो हेतुनो ओडवो] पा स्मात् पनि खवा ससा परत गमफ्नो पा स्मात् स प समायो 'न सदो नापि परदो न मम्मा, माम्मतवा' भोपपतिमा पप बरपपत्यका महगा व पासति तलमातमन्नलम्प का स सस्थायी पमनाना ग्रामोऽपि मारिया पनि माय । समापुसमन्यामविपीना समाषपपि स्पति सभापतिमाह-पया बेति । पालम्पका 10 पारिनोऽपि रजीपमा अमन्यत्स्वामीमा एकी उशिवम बत्वपसमावेऽपि तराचरामनाराब कप्पनाम- भुमी माथिाकानिमार-सुप्तमवेति । स्वशामचारिपुम्सीविधानविपयाचा व्यासपासमारमा पपाना परिस्पिटमारत का गामणस्पामपि पिम्मपी हिमपीवमिति प्रतिमासवे मा. परमाबजल माति मिरापोली किन्तु एवमेव परम्मतो मायामावपिन मिति समापन समिति पनि मुमार-पतस्सामा म्पेनेति । एसको निहाय तर, परमाबत मामः परा माधि परिमाण माषप्रमेवारिसमाना महमानों 20 प्रो मालसम्पन्बात व्यापारम्बासम्मवत् सम्मम्मम्माषाहम्मताच पनि पिनाकि न माय मिानम पिन दिसाम्मारिवगठिविमानशुम्पम्, माम्म मान सम्मयोऽपि न मीमीवारिधिामपिम्पन्नवाजुफाम्य पापों निमित्वधर्भपति बिारे वीमरे साधमत्वात, मन्यापरमानवाचासम्ममार, कमला खास मरापरताप समाचाधि या प्रारम, मानापरमेषिमान परिणाममाम्मानित समानियासिमियोपावर पसरलासात म्मान मिासमेत पापनारियाबीमीताबापरमपभासवे नपसे यदि परमा सम्मान मात्र मानिमामला सानिमा साम्पसमा परिवसमास पास्मानियस्तो भ्म एपी पिगम्, मत एक पुजा सगरमा परिमिक मालमपी प्रत्यमेव पासना सिमादेश प्राह यिामापरम पवितात् परतो मममात् प्रामारोपाप्रम एक साथ पल मिशनम्किी विमानमनिरपनामित सर्व एमोसा-वेदोपरिति । प्रस्तुनिन्तरदिवास- परसव उत्पपिम्पितिनामसमन्वरी मनामनाभिमान र राधाविनवाश्मितसम्मममिला- घरपणादिति। पल्ला दिनमायलसिस पल समापनेनापिमत सभा गिमार-स प समावति । 50 एपारस्थितिमा एक वस्तूमो समाज विषमाषमा मुसार विमानम्म पुम्पयामनार मुत्र एप समयमा भगिनुमति एवं भितिरपि निसिपमानयन लिम्पो मनिम्मानिन मिसपत इति मिषो म समार समान-थ माया यस पापा का सार तदा स्यने या मा म्णतःशी मामिला मन। पर को समान रहे मी, मी हेतुत सम्पते पीपा पणे प्रेम पास चतिक सन पम्पटीमाइ-स पसमावस्ति । भ मोनापि पावो मामा पाप्पा । मपमा मनु रिमते मापाः u, १५(४१) - . म्यामागमानुसारिणीम्यापमापमवम् [मिपमनियम क्षेपामेर भेदबार इत्यादि, पमाऽविनय रूपातिसमुदायमात्र वत्समिति समुदायो स्थापन विषय मामाम्पम मुस्तम्, दतो न विषयावसानिति RTER, उपालि पमान सपा समुपरा सामाम्पमति निरामरों नामते मेराति ठदुमपनिमियरममाहोऽस्थिति। किमाम्मत- मोदासीन्याय तस्वेषु मिम्याभिनिवेशापामापिस पानसुलापन्यात्मकमारमान पश्यसि तस्माद तादात्म्पशायन्सरोजापुरस्कृतसामाम्यविक्षेपात्मकल्पानतिक्रमात् सैदाधीच स्मापतिः पस्तुयादिस्वात् , एवं शेपयादप्यपि स्पाशाद पचापपते बसात् तत्र तत्र तब योजितमिस्पर्क प्रसहिम्पाः संझपामा । औदासीन्पाषेत्यादि उसपीपाययत् मिष्यामिनिशा-मामनिवत्तासमाथिमा- 10 नाच भक्ता लानमापिते शानमुपपग्रस्मा मागनिपिवमा मुसी छाती रो रियो वाऽमी. मारमान परयसि तस्माचाम्पसम्वरोदारपुरहनसामान्पविसपात्मयानविम्मात् सपरिसमुरार- मायबाप्तनाऽपि मैगींवलापचि बाविस्वामिति साभूतम् एव शेपपादेवी मतिरेमा, एव सेप पुरूपारेपपिस्मार पापपवे परमात्, वा वा वर याशिवमित्या प्रसविन्याः सम्मामा, मिदुरुपये रिमोऽस्सु पापात् एमन्वनिमयपुरकया बस्तुगाराम्मुमामायाः सम्पपामापात् । हित- एपन्तु रमतां निस्यभाषमिव सर्वम् , सुमोन्मचादियत् , समवस्थानीया एप हि रक- हिटमा पापटिना वदवदाकारसमपनानुपतिविज्ञानस्वात् तदवरस्थामाम्यन विज्ञानकस्सि- साबरमतमचारिमिवानपिपपपत्, झिमपि फिमपीत्यामास्यत् परमार्पतो नास्ति कभिदाचारः शुन्य से स्वैराकाररिद गृपमाणमपि पुरमा प्राहलघरपरिष्ठपानामाघरघान्दो शुम्परहमत् प्रस्थावनिर्गन्तुस्सात्यदादिरहिस पस्पपितु म्याप्यम् । (पपमिति) पन्तु गुमा मलमारमिा सा मुमोम्मत्तानियन्, यमा मुसम्म संरचमपि सिम-पपीतनय रति एमसर तारपापित पसम्पनमुन एस मरम्म भीमबाग वत्तपण्यायाममा प्यास्मिरणाभिमानामा भारमम्पापति। मापपरीमति । एमपि स ममा न त सेसी अमावस्याम समामामामासम्मम्मा, समारम्भुरामा त मानिस परिमसम्म मुशमामा मा- प्रप्ता भावामान तारास्तारम्पति । इसरोरपारेषपसी पपमिति । पपि सा का माग सामान की प्रापरा- एपनिमारमा मममापाम् भम् मिरमा नागा बमाबापरया-एप सपप्पिति । मित्र जम्माuest माय स्पा मार्ग प्रार परमिपति राम्री अयप्प सुसम्पति बाप्रपा पम्मरमानसिपमानात मर भी Ame 1R...प्रवासी निम्तमाषताम्यापनम् । दादाजपवम् पवा] इसियूवारिसर्मन लासमावविषय वक्त्समापम्प क्या दाम्वोऽपि पपा वा मत्तम महापाहरूम, ससमक्सानीमा एप हि रतशिम्भूगा पापभिना तपशाचप्रकासनानुपातिविधानत्वात्, वरवमयमाम्पेन शिानकस्सिवापरसुसमचारिधिानविपरबत् किमपि किमपीत्मामासात् परमार्यतो नाति परिवापरा, अन्य देतेराभरैरिए ग्रयमाणमपि पुक्षा, माअमरपरिणवाद्वापाकारान्त, सम्माम पा(फ शून्यमेवेति परमपितु न्याप्यम् , मिमिव ! शून्मगृहमत् प्रवेमावनिर्गस्वासोत्सावादिमिवम्- पया शूनगरे न प्रवेश न मावा [न] भिन्ता [नैक्म वापि सपत्तिस्मितिविनामसम्ममा तपो- पारमितिमादिमिर्ष शानविपानिमवमिमुरेशः । सद स्वमावधिनस्यमानो न स्वता नापि परतो न माम्याम्, नाप्योता, अप कप स्परोमयाभावःमः, मसिनयुक्त्यनुत्पादसामग्रीवर्धनावर्शनेम्या, मसिद्धेस्वायत् दीर्घ- हस्क्योर्मभ्यमानामिकाम्पो दीर्घाया दीर्पस्वभाषो न तावही स्वारमन्मस्ति परायचत्या 10 वस्पास्म पनि मनामिकाहस्वत्वायत्त यत् स्वारमम्यसिद्ध तत् कप परतः सिम्सेत्।। (सति) स प समावधिम्ममानो तो प्रोतो] वा स्मात् पवि ऐसा सवा परत म्भवो पा स्मात् स प समालो 'न सवो नापि परवो न शभ्यो, अप्पमता बत्रोपपचिपमा अब पहिया व परमात उत्तरममा-मम्पसमय का एवं जापरसत्ता सम्मान प्यागोपि बानिया की भागः । समयसम्मानवियपमर्पना सिमाक्वापि अपवि-समारपसा-यपाति । मालपरूपया: 10 पासिमोऽपि रविसमा समवेयच्चयाबीना पकी तपिशाम बस्ला सिमावकिपि तदायरामतदाधारण प्रपनाम मुसरति प्रारिमाणमाह-सुप्तमरोति । ममा कामचारिपुस्मामपिाकिस्साषा वरसभारतमातरममावत्या रविानी परस्मिताकारले तर वावस्थामपि ममपीमपीएमति प्रतिभासवे स. परमातस्तु माचि कपिरामरो पस्तूला मित्यमेव तक्मतो प्रवामाबादामपि न मिति माश्यमेन समिति पनि उपसम-स्वतस्सामा प्पेमेति । एक विशालमेर तल परमाभूत बम पदार्पो नामि दुरिमायेने प्रमावासावितिमामा महिमामयों प्रो भानसम्बन्धान बारम्बासम्भात् मममम्मावासम्मवाचनीयानामोत्पपि पाग मिानस, लिन हिमाम्माहिवासपति विकासम्मम् , नाम्या पचन सोधिनीम्मीवारिधिापिम्पन्मयानुफ्फमा पारें दिमिरवर्मपति शिामे बीमारे सामरामाफमत्तात्, अन्याभरमान्यापामगार कला सम्म निराम्रतापते. समाचासि पाय प्राम, मनागरपिमा पूरिकन बाम्पोनापितलासमाधिनिपान, सिरममावाद ठमाव विमानमेत बाम्मानिसबीपीवापारयामास मापासे बीमार परमा मात्र बोस स्मानिनामधिमान समयिा साम्मा गरिसमारस्तु बासमापिमान प्रम एलिपिम्, म एष पूजा रामरैना मरिमिय- मानसपी समेत पासमाविमादेष प्रारपिामापस परिसात् परतो पमपात प्रामारोपाप्रम एम समाब पक्षम्य ममिति स्पिायरियनामित सर्व स्पोमा सेपरेरिति । प्रमसातविर्षन्तरमियरम- प्रापद सत्पपिपिपिनाम्समावरित मानागनाभिमा म निरापरमिजामिक्लुम्मामा- धूम्पपविति। ता -समासमिस पक्ष समायलेनामिमव समान निरामा सब समाष इति । पारस्थितिमा एस सत्ता समास पर नियमामा मुसार भरिपमानस पुम्भापमानताव मुसार एम समसमानतुति परिलविरपि मि Rसप्पयानपते निममपि म सप्प इति योन समान मा-मामा स्पस पवन पाक्योमाया तमा स्थान या मा मातापि मापन का। वर पसूना नभाता खोपको भी, यो त गप्पो व हे सेवा पये मम पास पेति । एता सन सम्मामा- समावति । 'म सोनापि पर मामा पापोतः । मलारण ते मना u, (111) 10 - बापागमानुसारिणीम्पान्पासमेतम् [नियमनियममा पर सपरोमयाभागामा-पम्मो हेतुभ्य:-मसिहायुषमनुत्पादसाममीपीमावर्षनेम्यः असिखाप पुर्व प : समाः पारे सति सा परो वा माया मात्, अनुत्पारे अतः सा ? ममता बसनेऽपि न सोमाषा, परने पुनर्मेसमा युपसंगरो भविपति, मेने देवकः प्रविपापा इमस भार- मसिदेखापरित्यानि मछिमप्पमा पर्मा अनामिनासा, वयोग-मम्पमाया दीवि या स्वमाला- पीपल कम वापत् वीर्ष सामन्यति मात् । परायचयात् वसा मम्पमागासम्म पीपस्वला सद्धि मा पीतमनामिकाहत्याचम्, वो पनामि हसामपेव मम्ममा दीर्घस्लुम्मते, यरस्तात्मम्पसिक परविपाप्मविषचत् कर परवः सिमेत् । मामत सामचमेवेति वह अनामिनहत्थामावप्रसाद पवि हि स्वविफ्यमेषेवत् स्यात् , मनामियाहस्मत्वं न स्मात् , अपरापेक्षत्वात् पऽपि 10 दीप स्पात् मध्यमावत् न तु भवति स्पा हस्पतयेतो, अपाहस्वैवेप्यते ततम मप्पमा दीर्पयामाया सामेयापेस्प दीति म्यपदेशात् , तस्माच दीर्पस्वप्रतिपयस्पानामिकाहस्कार स्थामावा, तयोः परस्परापत्तत्वात् , कदा मम्पमा दीर्घा सेरस्पति! पदानामिकाहस्वा भवेद, मनामिन इस्वा च मम्पमावीपस्वसिरी सेरस्पति इति इतरेतरामपत्यादसिदिः। ( यदि हीति) परि मविपयमेतत् स्मात्माऽप्रमारत्मेप मम्भमापा पीपवं तपा 16 अनामिभालल न मात् बपरापेमत्वात् सापि पीपर स्मात्-पमा हि मन्पमाऽन्यमिमनिरपेया पप्क्ते तमाऽनामिकापि मम्पमानिरपेमा सय एवरीप्यताम् , मपमावत् नहु मति मा सगे, अमाइसरेप क्स-मासस्ने मभ्पमापीतामामा-वस्मा ममामिममा स्पस्मनि इसालामापे मनमागा मरेपनी मानमिनाका तोममारबमावा नफ्रोमो व मान्ति, मनिस स्पारे मिनी नो वा परो रोमानतो की मार स एवासियोऽनुष्य कुमठे इसपिाधि या उणि साफ्न यसविसम्मत, 10 एस मापारिक समाप मा ममा मसिशापपुती चेति । सपतिनायो पतामपनोऽपाशE- BF समारला भनुत्पाद भाषा प्रयन्तेन प्रसस्पेनमा सम्मेवर वाशिम समय समापनि खोलि सारति बोभाव पसार सामध्पा वि पल्लो भावामन रम्मार परम+ मपोरनार एम्मापि पसुमो मेरमात्र मामा-भान इति । अब प्रोग्य रेला विचार तुमार समपतति । म मोमबारापेमिम्माभिमेवार ममिरिति मम्मामुलीपुरमा मामिा पहनापन Bाम मधमाधम नमारमचापि कम्पायन, भावाला निकाभिा मतमोर मी, नामभि प प लिक परिkिi मार। तुमय पर मत मासमेत राम-पदि पति। ममाचा तिरियत मायमेव महापर्व मनामिमग्राममपि राब मार पसबारामत्त नाव मप मपमा सानामिपि साा मामा मामा-यपति। मनिममा पनि प्रीपारी-पप्प दीति । शान्ति पुरवनि-म मु मपतीति । मपमापेमवतन परता भार । पिपिरिम हिनामिनाया गनमा बामनि हस्त माति संसपमान ht म्यान भयममाबातमपेत वस्म पारिया जामिय aft मत मपया मार BHIRA II म स्पादियार भवाम्मरेप्पत हति । सपनातायो मपयाम्पमा मध्यमाया - - पीत्वामाषापादनम्] मावशारनपचम्म् २१२१ दीपल न मास्, पामेमापेस्म-स्थनामिनं दीधि प्रपदेशात् सायनामिनासा न भवति प्रमम्पा मपेस दी साम्मम्पमा इति तस्मा दीर्घत्वामाषा, समाव-मम्पमादीपस्थामावान् दीर्घत्वप्रतिपक्षमाना मिनास्वत्वसामाषा, वयोः परसम्यक्त्वात्, पापपति-पदा मप्यमेलपति यावत् सेत्स्स्तीवि गवार्य मिवरेवराश्रयत्वमायनम् इवीवरेतरामपत्याइसिशि:-इत्वमुसरेतराभवाम सिद्धिा परस्परमतिबद्ध वावाददनोडस्ववितीर्यते इस्वीपस्यम्सना, एर नापत् वीर्षे दीर्पयाचिमिच्छवः प्रसङ्गातुमयोरभाव । धापारिवा। साम्मत से पाई दीर्पता भविष्यति त्यविभिना, स्पपेपत्यारीत्यस, भनामिनासता पस्वाभिमतमप्पमापीर्पता भवितुर्मात्मा सिमति दीर्घत्व सपा सिलमिवयपेयस्वापिसत्रोपते- न हस्खेऽपि वीर्पल उत्प्रतिम्हित्वाचमोस्तमःमकाशवत् जीषितमरणयकत्र कुसो भाषा! तस्य पानीपस्वेऽमाघारमकस्यात् कुतो दीर्घत्वमागतमन्यत् ? हस्स्यामानाथ नास्ति 10 दीर्मत्यम् , दीर्घत्वस्य हस्ते पोवववएम्पेहस्वस्थस्यानवकाशात् , उमापि पुनः हस्थमतियोगिनो दीमत्वस्यामावाच सिमति दीर्घत्यम् , स्वारमनि परत्र या इत्त्यसम्मयात् । (नेति) न हम्मेऽपि पीपल तत्प्रसिन्द्रिस्वात् , दीर्यस्लेन हस्तेन पिरोमात् सत्वदीपरवयो। परसरविरोधात् समाप्रमजीस्विमरपवरकर तो भावा? वस बाजीपलेऽभावात्मकत्वात-वस रस- सम्म पीपलामावारमन्तात् परि खोके दीप न मपति सम्पते इसमिति वमात् सस्स दीपवाभाषामन्तात् ।। कुतो पर्पसमागतमम्मत् स्वामागाव नाशि दीपक-दीपसमा से पचे पीपरावणम्भेऽनवण्यात माधानामियतालाभाष मितीसमोर परस्परावळचारमाह-समापति । एसपिवरेतराभासतममिति। परस्पराभणानि भाग प्रपेर परस्परविणाताहवनीयमुमणमपि किनभनेतति माक्पीमा मध्यमेस्मादीसि। इतरेतराभरले व हामिमा-वीवरेवयभपस्वादिति । एवं रीसमभावाम्प मापारित माप खापरिति । भए तापात एक मपामावपेया पितानामिनया पराभवा मपमायामपि माविमानाला #l 20 मात्र, एक रियासतो सिलिपपेशवादिस्यपावेनासेऽपविलाल पर प्रतिमिलारेपा- समातेर सम्मपटीत बाप-मतिमासम्पन्पारयोग्रेन नभयपदा रेप सा प्रमपम्म मरण या समसामायिक एकतरेप सभव प्रमा-मामयशपदिति । म समिभिन्य हमलस्म OM-माणामलतद मप्पमा भारतलतापेरल, मसरामाने पर। मा बरस पसाभावाम ईमभाव ते इमर्पितमामम् । साम्पेमार-वय मेति । विनिमो. सातपय । प्रमाणम्पमिम म्ममाहार पति-यदि सोक इति मौर्य न मागत सिमित समागरम मसमिति मारा । प्रप्रवरेण स म सत्पामायापति से सपास एपका मोहन एर मालिसपातिनिमित्तसार वरपक्षाप्यो मनिमात पो पराप्राधिमनियस परवस पर अपराम्पोममी, तमा नाभिमत सस ससस भम् यस्मितम्परामा हम्प्रमाण पत्र पति भास । एपमपि सरपये ऐपने मनपि 10 Rोगाम्पस्मार ।
J ११२२ पायापमानुसारिधीम्याम्पासमेतम् [नियमविपमयमा इसवमा इलामा दीपवं पर्चेत बोऽपि दीपखामापः क्यापि पुनरिमारि-पुनपि प पील- इससयोर्भावामुपसामेऽपि इसत्वप्रतियोगिनो पीत्वस्मामापाम सिमति पीर सास्मनि परा य स्पसम्मवात् । स्माम्मवमुभमत्र पतेऽम्पापेमत्वादुमयोलमपेन [पी दीपमपम इस सिमातीस्वर- न इसे उकम्पापात् , मसिान्नित्यामा, रमपन वीर्घत्ववृतिरेपा च हिवे वर्चमान्ने दीर्घत्वे वीर्ष भवति । स दीपें एक वर्षमाने, यदि हस्खे कमानं दीमत्वमुमपण भावं लभते सटो इस्पे पर्वमानं सर्फत्वं दीपस्म पीर्पता वीर्ष इति मुनि कप फुर्यात् । ततोऽन्वय एक- स्वात्, इस्वादीमत्वमस्पपवत् । (नेति) [न] कस्मात् ? मागत् पयारी रीपर न परागस्लाविलुपम्प नापति 10 विवरेतरामस्वापसिरिरिषुल्न्यानाम सिहति दीपंता क्या हस्तेऽपि म पर्यव मनोजमापाय सिजवि रम्पतरस्यपि मसिवम मात्र सिमिशनपरपोः प्रतिनिस्वास-पथा पीपलं पि रसे पर तमा सत्वमपि दी से बचते, क्तमपोम्मपत्र मापो बिरोधी क्यो सााचिर पुष्प निरोपिलाष परस] प्रपुच्म् , तस्मात मदो न परवो नोममतमीप सिजाति बलव वा पण इसनेऽपीमविश्यमानत्वात् लिलाम्बत्नामपत्र पवाचिरेपा-सा : परेवरयोगम, सोडी 16किमान मामवारीपापम्पर पर्चमाने दीपले भवति सत सामने गरी एक वर्षमाने भी मपति । इति नियम् निबाव-पति से इसरि-दिसे पर्चमान पीपस्वमुमपा भापमितरेवरयोग ममत इसीप्यते प्रबमविकास तित: Aणेने पर्वमान दीर्घत्व वरीषम पीवो गर्भ पनि पुति त् । मर्मात् नापम्मानित पदोऽपत्र रचत्वात् स्पोऽपत्र परवे वचम तत्तो सिताकम वस मा का मामलामा माम्मन मार विमा-पुमरपीठि । ना मिम् परमि सम्मपि पासवारिदिने र रमान मामामामा-पति। माता-येति । स सपेवाम मारमनास्टिा मसात् सात्मन्ममित सम्मान समय पापरामचलापलतापपरार शिवित मत वाममापि र म तला मामले मम्ममालय रमिलमपिन माद, स्ने पात्परायोतीषणता पितामात समित परस्मिस राभिमस रसदमा मुमार एमरस्यायवाणापि मामला । परस्परप्रति निकाय मोमन मिय-सफ्रपोरिति । मरिमा न परस्मि इस पोम्पर स्नातक नमसरामनिवास बारवेरसम्म म । मल-पमाठि । सालमावि पोच परमार- एवमिति । भवन पिसमिभितरा बाप प्रम गरमा-समपति। नोकिया। पपोऽपति रमायोमी ने इति, सामापत्र नमन व ofat of पति युनियन सामने एक वर्षमा प्रभावमा विरामो-पदि इस इतिपर्वमान आरिद, ERIAL त मन प्रोति की मोहतक परमार- सव, मम्ममारपे मम ममता प्राय विषय पनि नव नियो, पोम्मत हत्तनपारी मा। समेत दमा-कोऽपमानवारिति । बद सोमम am a वरियम करोति बस साम्पस सिम मन्य। सोलापद ।
- दीप दीपाची दोपा] मारशारमपचपम् २१२॥ न मोवि न दुनिमारमाति सारीपस्वप्रन्ययषा-पमा इस पीपल न करोति मारमावि स्वामी सगा पित्त वीर्य प्रत्यपत्र न मामाइम्पाविति । अय दीर्प एष दीर्घत्यधिरिप्यते ततो दी एय वर्तमान दीर्घष परोति तपस्य- पञ्चापत्ते इति हवेन दीसरेणेतरेतरयोगार्य फस्सिवेन नार्यः न च तस्मत्ययेन, स्वाधारक- छादष तस्सिखे, अथ तथापि तत्र दीर्षे दीर्पवा न करोति न वध्यत्ययश्चादधातीति मन्यसे ततो हस्पे कम दीपत्य सचिन कुर्यात् , सतोऽन्यत्र स्वार , हस्वादीर्घत्वप्रत्यययत् , अयोप्पेस हस्खे दीर्घतो नैय करोति वीर्घप्रत्ययमपि नादपातीति, एतदपि नोपपपते इस्वदीर्पयो परस्परापेक्षसि कि ररस्थात् , तपया-सिमापफेत्यादि मेरुपर्यम्तानामितरेतरापेपहस्य- दीर्माणो रटाना हस्पे पृचस्प दीर्घत्वस्य दीफिरणदीप्रत्ययानापानाम्युपगमेऽस्यम्सदीर्पामाष एप प्रसका, नैष दीर्घ भवेत् दीर्पाकरणात्, हस्पत्यषत् , तपस्मयोऽपि न भवेत् , दी। प्रस्पयानापानाद, हस्वमत्यपदिति, पर्ष हस्कषेपि । (अपेति) अम मा भूपदोप इति दीप एक दीपसचिरिम्ने, भत्र मा दीप एक पर्चमान- मित्यति, बव मापमरीप एव पत्तमान दीपस्वीपा करोति वयसपनाभचे वत्रेति इप्पत एखात्, किन्तु इसेनीवरेणेठरेवरकोपकस्सिन माया, न पक्प्रत्ययेन, स्वापारपमदेव परिसर, स्वरेवरयोगामसुते भापमपि वोपः मय दमेत्यादिनसम्पपपप्पोपपयिारामिवरेसरसोगे सत्पपि तत्र दीर्घतो 1 न करोति न दीपप्रत्यय पारपाटीति मम्पसे पद समम्पदोपसाव प्राप्त-सेऽपि पर्स न करोति न र पीपमत्सयमापास्मतीति प्राप्तम् , स्वरप्रदर्शन-खे कममित्यादि गवार्य पूर्णसापर्न परसादीफ्ल्पप्रत्यक- परिधि, अमोम्यतेतरोपपरिणाम स्पया इसे पिता नेव मोतीति दीपप्रत्ययमपि नारपाटीति, पतदपि मोपपपवे-सीपयोः परस्परापेपसिरे पलाम्, तत्प्रत्ययस्म र तौर पैम्स पस्तुनोऽभान्दरापेसम्म सस्यीस्पदमनात्, वपमा-सिवामित्याविषणमेनो सिकायमपारम्प मेस्सयन्दानामिटरेतरापेक्ष : परम तत्व नापन हमसफल पनि प्रभवसन पोति वा हसम्म तत्तभूत मारम्पमिम् पर्व पर्वत प्रसपा मरिति सम्पति-यपत इति बप विटीय मामीप एक पक्षमा मालपारिपाय- मिति पो पेपमा-भप दीप पवेतिरीमति मप मा मदिति । एस्लिप वायरस सर्व प्राम्पत सरेरोमानापेपरीपत्रमयसको बम्पर दो प्रपो परा पुन मापारे एस पद म परापे वा नापारपसारत को निमा-वत समापप्रमिति । सतरमाणपत्रगानमपि ग्रामति पापी इवरे : तरस नसतारोमा भोसर्पमिति रमप्र समापि पेपरब पंसारम्पपाषामन भरी मनत स्मा इति । यी बीमेपलियम्यारापापमा पतनबनामिग्रमा प्रिपेको यो र भरतरमितिरस्म योग सर्व माहिस्साऽपीतिनात पुलिस मसात् साम्पस बस उत्तमसात् हमारपत्र पलायसखि अपमिति म्परत-दस पमि त्पादीति। मनु बमा एक सफल मोड प्रेशप इस्पपल अपोम्पेतति । प्राविभासतम्प प्र ऐप अपन एएसमानत्प्रपेवा कि एसपैमानिसप्पमापेपासीमारी उमाणे- दसदीर्पयोरिति मापार-उपपतिग्रपेक्षय कपने पै समम्पपया मा प्रपासम्म समीराए- । पापागमानुसारिणीप्पाम्मासमेतम् [नियमभिवमयका सादीनां रीपम घ्यानो सास सर्पलम दीपाश्मदीपप्रलगनापानाम्युपगमेऽत्यम्तीपामाब एष प्रसत्य, भवानिशपारनसामन-नर दीर्पमित्मावि गवार्य यापद्रसस्पतिवि वमा उत्पत्स्वोऽपि नेति पला पापमपमयपदिति, एवं समावेऽपि, पविदेश-पति हस हस्पमिस्मुपकम्प पीपशमसाने तस हा स एव प्रायो पापो याबापमबपिरिति । उभयोमयफ्धोऽपि प्रत्येकमभिहितैपिन विमुच्यते, प्रत्येकमसिद्धयोरपक्षायामप्पसिया, विमतिपेपाथ, पर्ष तावध स्वतो न परतो नोमयक्य हस्पदीर्घ सिसता, ययोता, लपुप्पमपि स्यादिति। (उभपेति)मयोममममम समपि दीप हसार पीपमपि वर्ष सम्रमपमपि उम्मो- मपपमा प्रस्पेन्ममिहिपर्न चिमुच्यते प्रत्येकमसिस्कोरपक्षागमसि पृषसिद्धिमूमवारपेसापा, 10 लिखावत्-विप्रतिपमान रनवीतयोपिरोपाप्राचिरित्युवस्थाम, एवं पारम सतो नापि परतो नोभक- वम इसी सिमत इति, माम्मवमोतुवा सिव पति पत्राप्रपाका यपुप्पमपि मात्, भक्कम न सिग्मति दीपवममतात्, सपुष्पपत् पनि सिस्पेत् पपुष्पमपि सिखपत, मोग- पचापलबत् । माम्मवमापेक्षिके सादीपरिपु मापर्व म्वो न तु पटारिणपि नैव मन्चम्म मरमार- एवं पटादीनामपि स्वम्पसिदिरेव नास्ति, न पटे पटकम् , परायचस्वाद पटस्पस्पस्मावि पीमस्वप्रसिपेपन्याय पात्रापि पदि हि स्वविषयमेवैतत् स्यात् पटोन पटोऽपि स्यात् भवति तरेतरा तस्प बापटवे एपमम्मेऽपि पटा इति तस्मामाया, स्पामामेऽमटामाया पटापेपत्यद पसमा सना बम्पीपरम्, ए मान्ने समचरेवापेका सवेरी या समीच गई ने वर्षमान पोति माया बारवादिता समोरमात निदरा माता मावि मामा ! पासव परमात्र तिमपिएभप्रभावमपि समन्तायामप्रसमोरचा मानपिनासपीमा माघमा ही प्रो पर्सी-मेष दीपमिल्दीति तदेव बानिरा । समसामपि न वपस्ताले सामनगि फामा - मसाब सलमसम मपमाचार र बामम्पायजम परत दिमतीसविम्मीद पर मचाया चन मात् बराफेकलात् सापि ममत् अयमेवात, म म मा पिते जवाफ शनिम्न्सत्यमान पामेरामाशिमवार, मातापिसा मम्ममामामा पो पालमस्तान मामामिमामामा पप पप्पा बम भो, मपमा ऐनामिता इसत्ताम्य सेवाभार A इसे पकायो मा FIVE सोम को माया- पपीति।सोमाय पल पनि राम-उमपोमयेति । समापन समभुमम तापि प्रोडबोलदोन पर मामयोमपपसमेति। कोलिमेरपैमाध्याति प्रसत मिरेपपैयासम्मवासिया प्रत्येक मिन्ति। माये पर विरोवात् मालसम्ममा विमतिपेपावेति। परसोइसोरमितिमा-पर्व वापपिति। मोदीले यसव एवम रिपुम्मरमपि मधिमात्माम्मतमिचि । मानो-महेतु मेति। मनोभारमपि पचणीनाम्पायरकी पर्व मादीनामपतियानामनिमित 15 यदिसम्पासि]ि पावशारनयममम् घटत्वस्म, सोऽप्पेषमपटो न भवति, एतरटायचस्वादपरत्वस्य, तयो परस्परायत्तवृचिस्यात् फदा पटा सेत्स्यति प्रत्येकम्यरूपामा ! यदाऽसावपटो भवेत् , अपटय पटसिसौ सेत्स्पती तीतरेतरामयस्थादसिद्धिः। (पषमिति) एव पटानामपि स्वरूपसिविरेस नास्ति, मसाभर--न पते पटत्त्वम्, परामच स्थात् पटम्पेमादि यो दीपस्पप्रतिपेपेन्यामः स एषात्रापि दीपस्त्राने परुत्वा खसाने पटापपट पटान्तरे । पस्ता, पट एकापटो दृश्य, श्वरस्म घटस्पेवरपररयामावात् रेशकाठाप्रतिमेराब परस्परता, तस्मात परायचय-पटान्तरे पटाही वाऽऽयत्त यदि वि सविपयमेवैवत् स्मात् पटो न पटोऽपि म्यात्, कम पुनरपटोऽपि भवतीमत आर-मपतिरेवरा वस्स बापटत्व एवम्-मस्स पटमेवापटले पभाऽसारपटा क्याम्पेऽपि पटा अपटा एपेति पटाभाव: पटापयस्वपटा पब सिखा, वस्म-पटस्मामारेऽपटा भाषा, परमात ? पापेभस्वारपटस्वम्स, सोऽप्येवमफ्टो न मवतीमपटा, वस्मारन्यो पठा पटो पा. 10 एकवरत्पापचवारपरसम्म परस्सयपाचिस्यात् पटलापटतयोः वह पति-या परा सेत्स्पति प्रस्पेक- म्पत्यास्मा पगन्धरम्पाचविविच्खरपा १ महामारपट इत्यादि पूर्वयम्यो नेयो दीपसायोरिव पटा परयोगावटिवरेवराभयत्पावसिखि, पर वायत् पट नास्ति परत्वम् । स्पन्मनमेर ई पर्मितविशाऽपट इत्पापपुना म्पामावविस्थऽपट एव पटव पचते सपा दृष्टवानिवि मन्यसे चेस्-अत्रापि मम'- 15 वाद-न परइति। म त तितिरेग्मन्न ठापारे सामान मास पर्सत पायलयात् परत प्रपरम्पारतिपमनोर पेयता परतम् कामममम्मतिमि फरक त पापा में प्रपिपलम्बान वा फरार पराम्तर ग्र स्पेम्प मममौरमिति मात्र । मनु मम्रो पावरमिसबाह-पर पपारो रए इति म परमपेपर एर पनगतिविपित्तम नामापार, समास्तरसेम मिवाचिता, भाप्रपाभिलार मित्राप्रमाण परस्पर मेरा भार । पम्माद परावतस्पमिसार-समादिति । ममारमायतमेव च पातं न पराम, नैवम् , मप 10 माय स्परागता सापि प एष म्म् पयदि पोऽमनिरपेठो परोऽपि पानिरपेयामत एप पा मार मान् भन, वसाफा अवापि सरपत पसभा क मा एमास मारिमा मार-यदि दीति । भम्पपलपिमा भपत्पिति पणे पायम उपरता मेमे भरत मास।। ar: मिसपार-समय पति एवं सति पावामभार म्प एपरस्पफ्रस्तीसरेपमपि पयामप्यारी मारः। अपय व परनिरपि पोपि, पपादोधाभार यि ए मन सम्यामा सान् पो मन्मपेपर उप्पत स. पापयाम भक्ती सम्पमपात पप पर सारित मामा एक सय पालामावान् मापेधासम्पप्पान मसा- तस्पति प्यस्याः पये पने अंगह-तस्मादम्पति। परफ्यन्तरसारपसरापे/ पसारत परत बत्तापितानिया-पवस्टरगति। पापा मम्पनि सहगीतमसम्पायरायरम्ये मा बस्यपदस्पर फारस पया ममी भरमामा पसरवणायातनापरवा-पदा पर सिप मावि पो मामिम्मी-एवं वारदिति । ममायविनात् सम्पपरिपसारमापि पसरपेक्षा पर पारितु-30 मगर भाप बत्तत भमयपर्व समापि पाप मलिनुमति नच आप पारामार मारत मिस...बापममम... भापय । मि.भ.प. विमगम ।
, . 10 म्पापागमानुसारिणीम्पाम्पासमवम् [मिपमनिममाया मपापटेऽपि न पटत्वम्, प्रत्यषत एवाफ्टे पटवस्थामावात् प्रतिम्रिस्ताबापटे झप पटाप स्थात, हस्वदीर्घत्वयत् , मपटस्य प परत्वे पट एव सा प्राप्त वस्मात् को पटो नामामयदम्य इति पयमाषा, पटवामाषास्मकस्वादपटत्यस्प, मपद्यमावा नासि पटत्वम्, परस्पास्यापटे वृत्ते पटस्वामएम्सटरमानवाचार, अपटाभावे क पटव पत! तपापि पुनर्न सिसति पटत्वं स्वास्मनि परत्र या प्रस्पसम्ममात् । (अपेति) वापअप न परवम् मनपा एमामटे पटाही पटत्वासामावात् प्रतिन्तित्पर निरोपिम्पपटे पटर विरोधि कम मात् ! विरोधिनोः सामावे एशवानीपतमत् बटम र पटो-अपटे भाई पटतं पर एक सोऽमटा साचा, वस्मात् को पटो मापयरम्म इति भयमा, स्मात् । पटसाम्पमात्मवारपटलमेन्सानि पूर्वोच्चसदस्वररियपि नेपम् । स्माम्ममुमबति सह- न पे एकन्यापात् पोरम्मतरत्राप्यसिरस्म कुत समपत्र सिसि स्वपरपोर, प्रसि- मनिलामा तयोः सहाचिरमुक्का भयमपि पम्पापभिन्स्पा किमपटे पटव वर्चमानमुमपत्र भावं उमते ! नत पट एष पर्चमानमिति, पचपटे विद्यमानमुभपन भावं उमते ततोऽमते वचमाने पटत्य पटल पटत्मे की अपार नहुरिबाध्यात् । ततोऽम्पत्र तत्ताव हस्पदीर्म- 10 मत्पयम, मप पट पर पटवाचिरिप्यते तो पट एवं वर्षमान पटव पटा रोति तस्म- स्पपचापचे वरेतीप्यते किन्तु मपटेन पटेतरेणेसरेसरयोग्य कस्सिवेन नान ब तात्मकेन, स्वापारवठादेय सस्सिा मयतमापि बत्र पटसा न करोति न एतस्पत्यमादपाठीति मम्मसे ताभ स्वपोमवे मम्पते ५ पट इति ततोऽम्पम पचत्पात् हस्पदीर्घतमस्यपवत् ममा पोवाफ्टे पटतो नैव परोवि समस्पपमपि नादपावति तदपि न पटापटपोः परस्परपेक्ष सिक ररस्थात् वपया-सिखार्यकल्पाविमेम्पर्यम्तानामितरेतरापेक्षपटापटानो रानामपटे पल पटवा पयकरणपटप्रत्यपानापानाम्युपगमेश्स्पन्तपटामाप एष मसका, नैय पटो मवेत् पट्यकरमाद, इस्वत्वपत् तत्पस्मयोऽपि न मवेत्, पटपस्पयानापानात्, इस्म प्रत्मयपदिति पर्ष न पटस्वेऽपि, नापटेऽपटवमिस्पादि यापरवदनुसम्मम् । (न य इति)मापे यमा पर मातिालापीपबोरिए परामो प्रत्येकमसिक्तिरेष -माम्मतमिति । यो पात मि-मयापरेपोति । बर मातम प्रकारे चाल पम्मानमा प्रत्मसत एवेति । भापतो. विपिन परमपारविनिमवार को पालनाप.चा समाधि पिठा र प्रतिबिवावेति। पापि फ्लिावरे तापमान सलामो पिप समात, या भामरा रहामाप प्रमोमवयबापा मापामसारमनपरस्य पति। भानु मामोमी कालानिमामा-ब म इति । प्राधियारमुख मारपी-पप्प परमारीवि। बाबोल पमलामा धाविािरमा मोब प्रोममिनिमाविना समपररपि भारमा नेमसिम्त समय निवारप्रमादि मार । परोपमोमबन पिसमापमान । मयुकिनिरूपणम् पारधारनयपरम् मिहापि स एम म्मायो मापत् परमोरपीति, भयमपि घेत्यादि, एपोऽपि स एप न्यायः 'हिमपटे फटसमिति पूर्पोपमा, मपटे पटामणप्रत्ययानापानप्रदर्शनस्म मुम्तवात् शेप पूर्ववत्, सापनपिरोपोडापनाम- कम लयोम्पो मम्पते प पट इति, क्षेपं वयेय नेय पटापटापविलेपा पावत् पटप्रमयपविति स एप गमः, एबमपटलेऽभीमविदेशोऽपि पूवरेब, दम दिश एस्पति-नापटेऽपटस्पमिल्झारिना स्वयमेव पम्प पारो यासारेण पाटस्वपरानुसम्पमिति, गालाम्पायस्स । उभयोभयपक्षस्तु प्रत्येफममिहिर्वोपर्न विमुच्यते, प्रत्येकमसिद्धयोरपेधायामप्यसिद्धे, विप्रसिपेपाथ, एव तापन्न स्वतो न परतो नोभपतय घटापटी सिसता, सिद्धस्यहेसुतधत् सपुप्पायपि स्मात्, एव प्विपीत्यसिरिरेवेति । (उभयेति) उमयोमपपमस्तूमपदोपापवेरिति समानपूर्वोपरपसम्पास्मा पूजातीवप्रन्यन गम्वापा, विप्रतिपेपारत्मपि वप, स्माम्मत खररोमश्रितुमार्गप्पसिनापप्पोखवा सिद्धिरिति पर 10 नारदाना, सपुप्पसिये वापि सिमससुतमेस्, यपुप्मायपि स्माविति पूर्वपरनियापारन मेयम् , एस सविपीति, पासिहा पटरमम्यातिनिरपेयसिद्धामिमवसपापासिसिरिस्पतिशा, इससिविरेनेति पापविक्रमसिसिखा सिद्ध इस्युपसंहारा। अनन्वरोधमुष्मितसिविरपुनोच्यते तत्सम्बन्धप्ररर्मनाभ वापरा-- अयाम्तरेणापीतरेतरयोगं स्वत एव सिसति पट इति पेष मा, यपति पटस्त । वनस्य सत्त्वकत्वपरस्पानामेफस्यान्यस्वयोः का युकिरिति विपारे पामेफत्वचदिप्यते तो यौफस्य वनास्तिस्यमपि निष्फलं स्वनेय तत्त्वेन भवितुमईति, मनान्तरस्वात् , यत्र यस्पान भयने मुमो पो भाति उतनाभ प स पध्मान रम्ने ये भावसमपि चाय इस्पररिसति-पपोऽपीति । अपरफ्यान सम्म पता पति मुसि माम् मोऽपत्र तिरिति अपमनिम्मे पर एप मिपमासम्म पासस समारपि पयाम्पेनमारतायोबाईं अमितनम स्प्रेग्न स्वास्न मापारपसारेर व्याय-20 मनिीत पोपि परप्रयवानापने मेपि भासताफ्यमाबानम्म्य वरना प्यासा परमारोप- मिले प्रस्तारित प्राविध भाप्पनि रिमपर इति । मम पालामारामपुरपये मानाभिमा यामात् प्रत्यय मम्पत अपते रस बरसकिएप स्याह-सपयनति । पूर्वमन्पो म्यारस नस्पता- पनि-पापमिति । एक्मे परममिवापि यतास फेडोपाम्पासप्रेमपा गम्प मी मूलपर एरिपसार परममावेऽपति । मेले पापयतमोऽपि प्रपेक्षम्ममापील एयर-" पमयोमपपसरिस्पति ! समसमविपिसल-उमपेति । भमफ्यानरेष मिरोपावरतिरपि र भाम्पस विप्रतिपापति । प्ापरतोपरा निरिश्वमपि मराम्रो माग्ममिति । यि मपि at प्पुमान्, र पिपिवई पपमपि समितिमार-समापीति र मनमो मी परोप-यो माप्पडेसो पमपमिति निरपेपर सिमानामप्यारी-पपमिति । व सममा पमपतिया सम्माधिनापि हम परिमार-भणम्वरेणापति । साम्पम्पा-30 सिमसारे। 1.() पापागमानुपारिणीम्याम्पासमेतम् [नियमानिसमस्या सरस्व तब तस्स निफलमेघ स्क्वर्ष भषति, घट इष पटस्वसत्त्यस्य, स्वचारित्वस्वतत्व पर्वमावा इति पर्वमायाना पटत्यप्रसा। (अति) भवाम्वरेनापीवरेवरयोग–विनापि वस्तूनामम्मोन्यापेक्षया पटसिमीरमति, al मत एष सिग्मति सत्यमेव पर इति ममसे पत्र रामः-पपति पर इन्माति, भतीमुस्यात् सम् । पट! स पै इम्यम् , एयवनोक्वात्, कसम्म परम सम्वफ्टस्वानां युधिरिति विचारे वरबिन्ममाषो पुत्तिा, सातु ते प्रमापामेऽम्पले मान सम्मपति, वरूपमितिनास्पको पर इवि जयाप्पमन्त्रिमण्येकपटझममायानामेक्सविप्मते तो बकवमिन्नति पदोपप्ररम् यौमत्वमसि वासिवमपि लि-निरपक्षेप लेना तत्त्वेन मचितुईतीति प्रतिमानीमहे वापत्, स्या! बनान्तरमात्, पत्र पसेमापनयन देतो साध्मेन, 4 सलेमापुपमयो निष्कसमेर सवत 10 भवतीति सापा पारपं-पर इस घटनावस्वस्मेति, पटसातसं या पठे निरपोपमसि तदर्मा- परत्वात् वमोऽसिवनवस्वं निरपक्षेपमिति, वतमास्तिसतसंच सर्पभाषा ति कला सई प्रवामां पटनप्रसा, पालि बाटाम्मतिरेकात् सर्वमेव पट इत्युपसंहारो परतते । पत्रास्तित्वमिति पूर्ववत्सापनं हत्वा पकवस्वतत्वम सर्वकास्मिन् , सर्वस प्रत्येक 15 मस्सेकस्यादिति साफ्नामेऽप्यसित्पैकत्वाम्यामनम्ये सबभावार पटादय इस्पनम्मत्वापावन तुस्मम् , पूर्वज पटा सर्व तदेकत्व स्तः पयतिरिकम्, परमिंस्तु पट एव सर्व वदेकरम सर्वभाप इति विहोपोऽस्माचस्म । पेपमा दिनापि स एव मिसमासे-मिनापाति बमोहम्पपिवमा अभिनयाच मासोमा गोम्पपैम मिमापि विवि माग्नाम्याचा दिनानिमत एष भनिधिमन्यतेति भावः । सत पर पोस्वामका- 20 पपतीति । पारिमिम्मधिसभर एसी दवा यात्रामा मतामा समापि पसल मसावि रणमिमार-मचीपुत्पाविति । मासुस्वार को सर्व प्रावते मनमान्यतोवार एकल प्रयवे पुलायमपि, एम प्रमान्सिपलानि समासात प्रतम्, वेपा प्रयामा समानानामेलाम्बर विवार का पिता नामाव एष पुष्मिति मात्र । ख मुभिविन्यभावमापा पैरोकाया वेषां सम्मत पर पोसम्म समरि-परस्पेकाति। प्रतिद्धमा-पर्यनमस्तीति समाविमा सेमैच मनास्तिम्पपि पोल- मपियर मावि नामत याटिसमेत सौम्मेर परत पम्, समयासम्मपुरस्कारबाचित ती माषा । मामलामा प्रमुख इमार-मसान्तबादिति एमचामिलमेरनन्तरनार परोक्तं मम की भाष । एकचिलमासोलर पी-पत्र यमेनादीति मा पो मम पलसामान लमचिचप्राणायमपि परिपूनाचि एवे चाटियानन्तरामचि मापासपमपि रिपोपमासमा भार । मासु पालिमलमचिमासनापानां सम्ण स्मार-पठति । बयवसादापता हम मासु फारचपत्ति माननामचित्तास् एपमानिरपे वापिस मितपस्या कर लासमाधाना पाला संप माष । मत एप पसी, मशिनाबारेकारबम कामा नपपिमापित तपापले वकोपरयकलापोलार-परतीति । समसासिलबतर्ण प्रतिपायावनितमस्वरजवासार- पमासिबमिति । पसिनाप्पमित्यतिर एरवमपि मौसमापुरतारे चमचम-पूर्वपदिति । स...रे मापसावोतर ।निक्लुिधिोति ।
परत्वकस्वामित्वमवस्ता] मादधारनपपम् पत्रास्तिस्पमित्यादि, पूर्वमत् साधन प्रस्मेत्यतिदेशात्-पत्रास्तित्व कोम्तमापि निकनेर सवत्तेन भविवम्पम् , मनमान्त सात्] मत्र पस्मानर्माम्परत वा वस्स निष्कसमेव सवम माति पट इस पटस्ववस्वस्मेति वरेस्मेनोपनम् इति पिपः-सपमा-एकपलवस्त्र सविरमकस्मिन्- सम्म मत्येकमेकमस्त्येफस्पाविति, सामनायेऽप्पस्थितम्ताभ्यामनम्ये समावाः पटाइप इत्मनन्य लापादन तुस्यम्, पूर्ववष्य पटा वानपदसिसमिति, शिवीये संम पटसनम्परेपसमिति, पूर्वस्मिम् । सापने पटा समं वरेस सब कमविवि प्रभे म्पारण स्सस्तः पटादम्पतिरिमिति, पट एप सर्व सिसिरिसि' परमिस पप स्तमपिति प्रभे सर्पभाषा ति म्याकरपमिति रिपोऽस्माचमा, पटे सर्वमापा एकत्साम्पतिरिका सिसन्तीमपी, एम पापरविरकन्याम्पाभनम्पलापावनन पटस सर्पस्व पटे सर्व मावसिद्धिरिति दोपाः । किमान्यत- सपा या पटत्वं वत्रासिस्पैकत्ययोरपि लिप्कनेष स्वतत्त्वेन मषिसम्यम् , अनर्थान्तर स्वास् यम यस्पानान्तरस्वं सत्र सस्य निफरमेष स्वतस्य भवति, यथा पट इय पटस्पतत्त्व स्पेत्यत पक्षको पटादिरयादिः सर्वो मेदेन सर्यास्मका, नपा व प्रत्यक्षादिविरोपाः प्यकाम्यका- स्मकभाषानां ब्रम्यगुणकर्मणामुसावस्पितिभन्नानां साधनदूपणतमेदानाचापापा । सपा यत्र घटस्पमित्यादि, सानी पटवेऽसिस्कस्पयो म्पवस्वापारन रेप सापन समा । उपसंहार-वो पठाइनन्यत्वेऽखिकस्वयोरेने पठान-पटो रसः पट इत्यानित, अपारिरिति- 10 - बनम्, भरमपसिामारोऽसिनेप्सपरनन्तरप्रमुखालमा भमर्याम्तरत्यादिति। विवे एखानम्तरतारेखम दत्तवानीति रामपाल-पर यति माये एम्मरममावारिसन्नत सभामा स्पुषपर सिनामार- एस्पस्वतस्पति, प्रोड मातु एतसतसमयि एलान में मना रपयनति भावः । ग्यापन- परेस मेवारिस स्पेन सर्वमाननाममम्मवाम्पस सीनामा-सापनापति । परम्मनिरपार-20 पूपति प्रथमे एस्लामिप्र म पायौपानमाविमसमयि पिटर वित्तविक प्रविमानम्मरक- तलवमति भाष। म एप सा तब सम्मेलम्मम् हरप्पेम्समभेदनानिसावधिसमातिापनि प्रमे साने, पिने सपने तत्पिविर मे एमपनि पिताम्पतिरेप्राणिनामसपर पूरस्पधिमणस्पासिता विरसाध्यिमात्परवासियविमनिपिनसमिरेसामसामिागास निरपरी-मिन सापनाति । एप्साभिमानिमित्तमामरेन सम्पत्ति सत्ताविसमत्तारतामन्तवान् परफ्यपन्न प्रलेस नियति मात्र । परमापवमारामार-पर सपमापाठियपादिवाभिमफाभिमसम्पमाल पारो मरवान् चरमपम्पिबवरणम्प ससारो समाग्रीति पनि मा म पिपल ममग्रवारमन स्थिति मसारमा ममा थापाला। समापी-पपंतापदितिमप पाटिलमेलपरम्मतत्तयामेन सापपरि-सपा पप्रति । साधिमार बानीमिति बामरमरिमुष्माप्रामप्रसप्तपर्क । नाम्ननाम समापने पारमानिय प्रमापति भनो परादिति, मापनापारिवामितमोपनिपिगम्मतारन मार्मिपित छ पयामी 30 सिभ म.नम्या । .मि...रे 'सिस्न।
११३० भ्यापागमानुसारिणीम्यास्यासमेतम् [निपमपिफमयमा ब[]मिषापुमुम्पानि स सम्मिकमेरेम्म्, अव बाह-सयों मेरेन पटा प्रत्येकमिमी, मषत सा सौरमम्म्, मोरोप इति बम्पन्वे पोया-सगार प्रसपारिविरोधा:-पटादीनो प्रलपमसर्मामलाए प्रत्यमविरोमा, प्रसमपूर्णम्पारनुमानपदीन्धमनुमान्यनिविरोमा योमा, [म्मममममारि ग प्रत्यपातिपिपा मचरिमारेषु परमपिम्मावि गमाति पगति वा, पौसमस्येममान्य प्राण- • मेयमापन वा मारियातिप्रमत्वम्पावेन्प्रति रलवरस्मेम्न [वस] पलवलं मापाव मावरससबास्मसम्, प्रषिम्मारीन्यमपि प्रस्प गादीनं नेम्, पदमफामे प्रलपारिरिरोपा, सम्म ससरबलमसान्न प्रमेकमध्येसम्पचनो प्रपातमिमानि बस्लेससानामिन्मादि । [बस्पेक- रजस्पमित्यादि] अस्मेप[व]मसामित्मावि, पवा इम्गुपर्ममामिति बोत्पपमितिमझानाम्, वा स्पपनस पसरानो प्रतिवादीनो दूपमा परेवानाम सपनविरोपापसिद्धपरिसाम्पममममारीन्यमी 10 मोचम्पायेन प्रत्पमारिविरोपा भापाचा, म्यपिवारस म्पापमेति । एते घेभेप्यन्ते पटो नास्तीति प्रतिपचम्मम् , उपा प सर्ये मावा, मा पटस्थापित सर्वभावानामवृत्तिरेय, मस्तिस्यैकत्वयोः पद्यनान्तरस्यात्, भयाप्पान्तरं ततो पटस्म सामान्यपिशेषी न स इति नि:सामान्यत्वानिर्मिोपस्याचासत्यमेष स्यात् । (एते दिति) पठे पेमप्पन्ठे परो नपचीति प्रविपचम्मम्-भवान् प्रत्समपिरोशनिदोगन 18 नैरेसि ठरा पटो नाचीत्यवत् प्रतिपयति समवलम्पसाऽऽपारनम्, क्या पसरे मामा नतिरेको अपचोरेन स्मि भी भाषामापापमेवार-सों मामेति । भरपरेम स्मिसामयिमसम्ममार- तपा पति, प्रतिनियमपुरतारे पाणी प्रमाणितानमा मिनामुममा प्रमतो विमी भाम । पर्व- मिसमायोग माणसानामसमाप्पामगइमानेन प्रतिनिपिww मेगम बोलनामुम्मो समान माम मा प्रत्यसपश्यादिति पारोमा पारसमसारमा 10 feel । सो सोरमकने ममा प्रमाचा सपा सरमामयसिमामा गरि प्रसेपरपरेम जम्मान समतामय प्रयधारा पाप स्मा म्पयाम्पसमटेस्मारीदि। मादिभाषा प्रपापसम्ममानलासप प्रभाग सत्तरचम समामलाममा पग्यमानमसम्मम्, मनिमारकावर पसायपालि समेगमाय स्मितामापार प्रयाविरोधारापतितति । ममा मानिमाबममारमा बमारी सरस्वैपसत्र मामलाते समय पिमलेम्पमा हरेसरमामनामेसाम्पत्तो प्रतिकिलो ताम्मे अपन को और वहिलमीमा अपना भरिमा गरम पापमतम पम संग्राम सागरपारेष समलखाने म ठराव मागे मई सम्माप परेमा पनि माय मामिलाप इत्म-प्रचमिति । स इम्बाभिने बढेर साल से नए गापा प्रापरम्पसमाजमो माया ग्मामासागर सपा प्रम्पेति । परोपनमा एलोर मर पते पप्पस वि 0 पीपल मर। मा भवानिति। प्रAAषमता सप्तमम् नायर बारामनायी र वाम माली माभुरेश एक पर वाममारठरा मान समार-सरा पर इति । पचपस मादा मापनाम राप्रपा स्वरूपपपरीस्पमसघनम्] वापधारनपचभम् स्था परस्मामुल्या नासित प्रतिपादिवमस्पेनसायमनन्पते क्या पटरपातिसर्षमावानो प्रविपापमोऽ- वीकन्यायेन पोजयितुमुपायं प्रपमपमाह-पत्र परस्सापतित सत्र सर्पमापानामचिरेस, कस्मात् ! पटा- नपान्तरस्यात्, पटादनमाम्वरतं सर्पमानानां भाक्तिमेष, वितिस्पेक्त्वयोरनपाम्वरस्पे पटम पटा दीनामप्यस्तित्मानमाम्वरस्पत् पटानपान्तरलमनाम पटानान्तरस्मात् सर्पमापान पटापचारपधि- रेत्यत्येकपटानामनन्तरले रोपा, अमाप्पान्तरमिति-भस्वस्वाभ्यां पटसापाचरवायां रा सामान्म- मसित विक्षेप एम पटस, सखी सामाम्पविशेपो न सा, निसामाम्पत्सामिपित्याचासत्त्वमेष पटम सपुष्पबत् स्माविति । भय भायाः परस्परविपरीतस्वभावा एव सत्यप्यतिस्वफत्यामेदे, मेदा प्रधानादि पवृचो, उस्मान्न सस्मिदोपा, अत्र पूमा घटः पटादस्त्यात्मकादेकारमफादनम्यात्माप 10 विपरीता सता तवम पटो पटात्मस्वरूपादपि विपरीता प्रामोति, मस्तिस्यैकत्वाम्यां विपरी- सत्वात् , पटविपरीसपटास्मपविति पुनरपि नास्ति पटा, पर्व सर्वभाया भपि, सर्वगतस्वासाः। अपेत्यादि, पटपटाइयो माषा परसरपिपरीवस्खमावा पर सत्यप्पतिस्मैपस्यामेरे, झिम कि भरमा १ सय मेार्य प्रभानाविप्रपती, प्रधान र प्रतिबहुमानप्रतिपयार्य पुरुरोपमोगेश्यागुपठप्पि-15 रूपमाप गुमपुरुपाम्बरोपसम्मिरुपमान्यमुरिएप पुरुष प्रपषमान पारिपपिम्पारिगतानिपटारिभेर- मन्दरेण न प्रोति पुरुषार्थ म्, मतो मेवाचं प्रमान्यविमाचे पटपटारया परसरविमिमखमाया मनिरपति-तपाप सबै मापा सि पौराति स्वामित्वमपि नियम सेमेव न भवितुर्मात मनपाम्वरलाली विधि तत्र सर्वसरमम्पपरमावासित निषा र तीन मरिनुविनम्मुम्पने पास मानिस प्रविdि मी लामामाने पर पाामन्येताखिला पात् परमानामा परणापि सारित भावः। तर प्रेग्न्याय 20 सपासिमपापमार-पत्र परस्येति । परिसरोपराजिता समानामप्पादितम्, सपैमाना मानान्तर- सम मापिसार पर मास्तिमित्यवाह-मस्तिस्परपयोरिति पारनपान्तरे पति बसामनम्तराति सोमारा पियानम्तरतं सर्वभाषामा फ्ययाम् हाभियभिम समिशनम्मानिस माम्विमिस भार । का मिनिमार-सर्वमायानामिति । मचिरामा समाम्पिल स्मात्यधिपत्यारास राहणारभार एस पारिमा-भस्पेमस्याम्पामिवि सम्पबाभारत मा । मम सन्तोऽयम पि मासाः मतवा पामाम्पनिमग्रम्ममापि मापामा समाना परसरो मामेर स्ससाठ-मय माया ति। पराममधिक भस्ममेरपति परमानेरापिपलमान परमत्तभवनपामा एमसर्पसमधीपापो- परपराइप इति । भाना सामने प्रतिविपनामाप्रापि साद, तपरिपानाम्लावारपार रियममा पराप्य nिt सी वर्गरमप्र वर्ष प्रपातगामि मा प्रपामरामपि नामसार, प्राणनम् हमारे तमिपसमा मर्मस्ममा प्रतिनिफातमारा समस्यामापी-किमयfto पर पेप्ति मे प्रपामाष मे दमा , पास्मविमानवम । समाप-मरापमिति। म्पपे- मपान रीति, योधि र प्रपोमवमिति स प्रर्मक पर्व गुरमेापा मापसम्म, रस पपास्टर पुस्मामा स्ववियतन सपनापतिपः पमानिसकारागानरास भिापपपपरपाको पुरमा प्रवारिमामय मापनसमापिम्पमारने म्पापागमानुसारिणीम्पास्पासमेवम् [विपमनियमनपा एष तमाम सामोपोऽस्येकपटानामिसम्मा] वदो पर पटारस्त्यात्मभारिपरीवो वाऽमु गता परमम्बुफरते पुनरोप भापपवे पपा पटः पटारस्मारमनरेभस्ममदनम्मात्मभाव विस्पता संचा, परिपरीस, नाम्यया, वक्षम बना पटो पठामखरूपापि विपरीता पटाखिल नम्पा मापात् मानाति, भलिलेश्याम्या विपरीतस्वात्, परविपरीतपटास्मपरिवि भटास्मनेपाभागा पुनरपि 5 नाशि पर एव सर्वमापा मपीसविरशारेको भाषा परमाविरमाता मात्, स्मात् पठारनम्पलेकला- विपविपरीतवा सिलति । सर्वगळवारपासा । नम्पतिस्पैकपोर्षिपरीतता कस्मात् सवंगतस्परसा, दो म्यापतिः कस्यतेपटादया परस्परविपरीता इति, अप मा, एर्ष तावदेकत्ये कुत इदं! यचे सर्वगते न पटल्यम् , पटक- मेपासर्वगर्व न इति, नम्घर्ष सर्वेपामप्येकम्पेण भषितप्पम् , मनम्पस्यात् , प्रतिवस्तुतस्व- 10 वविति मावि सवंगतस्यास्वंगतस्पषिोपा प्रतक्षेप्यत पटवास्प नहिं मातम्, परमावस्स्सपि पो मेवेन, एकोऽपि, पोऽसीति त्रयो पटाः स्या, मप पट पोको पट इप्यते न त्वस्ति- वैको सिखा नारिख पट इति मस्तिस्यार्यान्सरस्थात् सपुप्पषत्, नेक इति च, एकस्पा- खिस्वत्मागाध स्पादिपु पटकदेशेप्यपि न पट इति प्राप्तम्, एकत्पत्यागात्, परास्वाम म्भावीनां स्मादिप्पभावे भटस्य म्मादयो पटा संरतिसमिति निपते, पणिक इति न 1 अमिकमानम्, अतिस्पस्यागात् वतमानस्खिस्यो पट इति प्राप्ठम् , तब विज्ञानमात्रमिदं सर्प इति पम्पमाणपयोऽभ्युपासो भपति । (नन्विति) नरसिलेक्तयोबिपरीतता, स्मात् सर्वगतलासा ? इति, परित्तेक्वाने प्रमेरम्मेव की तमा मेरम्मेवा परस्पर मिटमात्रा की माया । तमाच स्पस प्रम- तमायेति । मान्मत एपसाव प्रीमिपी-सतो पर पाविति को भामसापापित बताया समितिमात्मा, मोडरमाणामपिपीताप्रसस्पपिपिपीयो क्सा पास्मधरेमात परिपन बा कासम्पपीत दबा मोऽप्यस्मात्मनतरसिमानापमपास्मात् पचिपीपसम्पपि सामान्य विपकरामुपमास्यस्पयत् प्रेमपतवापुमा मानविन मार देखे तिनुमानमा-एबमम्मुपगत वि । मन्निावस्मरमियरपिनेपाल लगापि काम मला to पम्मपति । भानु - पिपा-सपा मइति । यथा परमाधिवेस्तामा श्रम WAORAT या पानपारमात् मास्मसम्मापि निको पा मार-पयतिवेति, पयमितोमा निपतित्वमति मात्र ! मनु सम्म परायसायसिमा-परमनति सम्मापणी प्रालि को समति मार समाजाला परवानाममात्र मामार पपमिति।समय मान स्वाद पेनापि ग्रेन भी चमी-कमाविति । मबु पेपरमा प्रतिमेन पिल मसिम मा सवार महिलामा पस्न पाम पते पाविति महिनामा पारनेर सिमा ।
-- विसपानुपपत्तिा] मारधारनपपणम् म्याप्ता पगरम पम्मान, स्वखापरीत्यम् ? ठठो म्याचा परम्पते पटावयतु परस्परविपरीताः स्मा म्पारचारमतातो न नि:समायापचिरस्थितीपम्पाप्तरिति, पत्र ममः प] बाबरेत स सं पचे इसार, गम्मामस्तित्वैकत्याभ्यां पटत्वैपसेऽम्मुपगम्पमाने नोऽय निक्षेप आपावः तयोरेषासि म्तयोः सर्मगल म पट[सम्म, पट[स] पासवगतमा नासित्तास्वयोरिति ? मत्र सापन मोमित्यादि सपामसिलेकतवपट[सन्धमप्येररूपेण मषितम्ममिति पमः, बनम्यत्वारिवि रेखा, प्रतिपस्नुनयपविति सम्वा-यमा पस्तु बस्तु प्रति पपात्मनहर पटारी तवदनम्पत्ादकसपमेय दरम्, स्परूपत्यममापारण न वासापाप्मम्मपीन्यरिशिष्ठ सयाऽत्येकपटानामप्रीति नासि सबगवत्मा सग्नताविप इति वरपस्मा नि:समाषमा, मौतमप्यते निवभारतमनम्पावनापानस्लमेमारपे कपरानामिप्यते पेत् यता पटवाव दि प्राप्तमिति मः, पस्मारस्पपि पटो भेरेन, एप्रेऽपि, पटा भेदेनेति पचते, वा पटोऽपि पट इति प्रयो पनाः स्युरनिएतत् घर मा मुरेप राप इति पट 10 परेसे पट इम्मते न स्वसिपकसे पट इति पता सिद्ध माथि पट इति, परमाप्त ! अस्तिस्वार पाम्वरस्थात् सपुरमत्, नेक इति प सिदसि पर्यवे, किमाम्मत्-एम्पाविपत्मारपण रूपारिपु पटेवासेप्नपि न पर इति प्राप्तमेम्पत्यग्यात्, पम्त्याय रुपारीन्ने स्पादिप्यमारे घटस्य 'रूपारि- परतापः परसरेपरी पासपसारिण्याधिपम्पारहिमपात, बस्तिम्भ्यामनुतस्परेचर मयाममा पनि पाम् । एस हिमशिस्मा फ्यादरमम्मानिलम्बे सर्वगत फरसारिम सर्वयामिति मे 15 कम्पासम्माप-पर्पसापदिति।पपनि एमामनन्तरत परस्मस पत्र मसानपावरसम्मिापासुम्पम्पत बरसमरिमेम्स बनातुपया पर एति सिनपा पर मसभारे, पशिसमयसमारंपति म्याग्थे- ताम्पामिति भार परमाने पयलाई पार भामत । उमनुमान प्रसम्पनि-मा सापनामिति प्रिोसरता विभिमान भनम्परम, प्रनिरगुतला रस्सूला पत्ताले पसुतारमारमम्पसारपिपिनि पनि मन परामसे मनम्पयामिपि वा सम्म पापत-तरमा सपि मायापारपम्, स्मरसारिसमुरा-20 स्मगादरम्पामगारमिोरनामम्मामिप्रसामिारमारे सामन्यसाम्पस रमापरमम्मपनि यस नेम्मी मगरम् वापि रसायरममारिनिरमी माता निवारणा मिर-स्परपस्पमिति,म्म समि एस एम्पधिग्याबानामप्यसम्ममा शितात् ममतारामपठसमिमग्रमारप्रयाइकिसोरम्प पर रिस्पामभरममातरमपरमप्रभाविपरीवाराम्समाप्रमियरममावतार-सपाऽस्त्य पतिNARA मारनाममन्यनरावतसरतामा नप्पत वामपन्तरतमरपट पास मार-भतप्रेप्पत इति।रापमार वता परपस्पमिति मनिपान पामम्प प्रस्तामिराहिये पयम एसमापिका गोरो मामाफि मास पर पप गुपनमा जस्लेग्रसरगति भार। मनुवा रोग मसाजयमेर पानामपियेण्यापि मममम्मत भप मा भूदिति । परमप्रिपामाजिार सप्पा पापा पसरमित माता, मामिमममता मम माता-सिरसीति । सम्मरम-प्य पाप- एम्पासिम्यस्यामासि समय प्रेग महमुराण मटा मानिसमुशम्म स्तरिममिनिम्बर,पेटमायभ्युम्मासमा मिति सम्मानसपसममा 1R... प्रपा..म...मम्मागर्म मारसा समुपपा ।
म्पापागमामुसारिणीम्मास्यासमेतम् [नियमविपमबार समुपायो पापिसहिनस्वेवभिवते, वमा समिक इलेप्राप्पपम्बिनोऽसित परिवारोऽनुमत भूमिप भिमा सैति, मूठेरखिलत्यागात् न भूवमात्रमिति प प्राप्तम् , अनिमोदाममापीति, वालि स्वभानचित्को पट इति मातम्-मावि मलिल परम सोऽनमिलो पो पर इलुनते सोऽनसिता, व विकानमामि व पामापंम्पमिति पत्रमा पयोऽभ्युपग्यो मक्तीति । अयोध्येत पयासि प्रत्येकाचेरखिस्वस्थ, पहेव मारिख परस्परम्पापचसम्मत्वाद, तर कविवर्षे न सर्वघ, पटाविशेषणार्पमसि पट इत्युच्यते, एकमपि माविपिशेपणामुध्यते तपापेको पर इति, सबैकस्वमसलो पटमहत्वपसमय इस मायावी ! इति, पतम स+ समयामति, मस्तितत्व न करमपित् समपसिई वहिति, मखित्वस साम्तराभापात् । अपोम्पेतेयादि, कत्र पनि पदिाय परेपोसते, तपपा-पोवाति पटैपटावि प्रकारे 10 लिम्म, दवा व पति पापटापेष परस्परम्याचलरूपत्वात्, वा चिोकस्मिाउँ, म सर्व- अफ्लिमेष मारिखमेव वा स्मात् पस्न पटाद्विपणामसि बट इति पठसवारियमुमने, वकमपि पोष पटपगति, रेष न सित्रिचतुपरिसम्ममपि, सम्परेमिति परेविषपामुमवे वोष विपिषतानि मन्मेको पर इति, मोकपटान्न प्रपाणामनम्पत्वात् समेत प्रसका, मम्पले वात- मेोऽपि परोऽपि म इति पटमालप्रसाम मायावावी प्रमहापिति परियारा, पन मा, पठान 1B मामलाबाबात तपासमुपये भाव समापन मानो dot मात्र । एस धमाका भारमुफ्प तप्प मिया सा-या पलिकति । कमिला तोम्पुतमिलना-भूतिपामिति मानव अमिमा स्मेि एस भानपचित दयावावयो न मुझमानमिति मार । एक पार पमित्त प्राप्त स्वार-सतमेति । बनविसमामुत्पधिमा-नास्तीति मति हमि परम्, मिसपर तलाममाम्रो मन्धि मामला, पारि मिल गस गरे सोऽखिल क्लनिक मा 30TVम भयभित्री भागमा नाति मानिाइ-तति व मारताविकानमारमा समिति बापसमा । मानसिलिनलसमाधिपतिसम्, बापानमा मासमा तोकवस्तारवादालामामयित्वानिमित्तानो प्रयास मदत निबर तमसारमार गलामम-प्रोमेतन्ति । पा-पोवामीति पाल्परिकारमावि, गुलपति Ran. सपनो प्रविधि समापि मानव सभामा सम मालम्पन भाया । सावित विस्या प्रतिमा पसिना नापि समापमानामा-सति । एम्पीयुमोतियामास मात पास्मिारवायोमते रविन मारा प्रामारावार व सण-समादिति । एसमेत मग मतप, मन प्रीमिमममेलम्, का माता समेत पानि पिलपमध्य रिता पम्परमा समय प्राप्यो सतार, प्रोपावे. समुण्पासिनिमार, एसबसे रापमपम्मे सारेरनिवि नाम्पा मारत प्रेमप्रसा-मपीविरसमस पालो प्रोमो मेमामाभासतपः पतसोम सम्पन्न मततितम्मा पूजारी पामोति-पतति । वाम्पमितामुमोन पर सि...।
. नानास्तित्वप्रतिमेपा] परशारजपचमम् परिवारपणनम्, मास् १ सर्वसमगनसिसीपम सामोऽचित्म वम मचित्-सांस्पा- रीचा समपसिन बद्विति, स्मात् । बचिवस समान्वयमापात् । यदि स्पानुपान्तरं सतो नानारूपमेव स्यात् फिधिदति किषितास्ति किधिवस्ति नास्ति घेति, मनिएतत् , तस्मात्मेद एवास्तित्वस्प, तसिंघ तदमे सु सर्षेपामेक्यम्, मेदे षा पटबहुत्वमिति तदवस्पी प्रसङ्गी, क्यापि च नास्तिस्वमेष, अखिनैकत्वशून्यत्वात् लपुष्पषत् । । इवरेतरासात्वाम्मुपगमाघ फुतोऽखिलं पामिति । (पदि स्यादिति) पनि सामूपान्तर-पटऽन्यात् पटेऽत्पाखिल मानपुर क्षेपप्पम्परम्पत स्मात् क्यो नानारूपमष स्मात् किनिसिनिमावि विधिदसि नाति पेति, अमिरप्रेतत्, वस्मारयुच्छ सन्य पटान्तरपटाम्रापतिस्पम्पो विशेपणामखि पट इति संगे पट स्लपि अयम् , दमारमेए पपाखितम, वमिस वदमेरे तु पहारीनामनिमारनन्मस्वपमे सर्षेपानेक्यम्, बम्पत्वपळ था पर 10 पत्नमिति उपवनो प्रसङ्गी, मियान्यात्-तमापि प नासित्वमेर-समसिमसामान्य पत्तारेका विपरस्पत्ताच नासित्तमर्यान्वरतार्या पपुप्पवत्, शरवपसमाम्मुपगमारसतो तो मोऽस्मि[] पो पटापीनामिति, भनन्यत्मऽपि प्रसपातिनिरोपसस्पेक्पयोपापावन रेणासस्यमुपरिति । भयोमेत मिनास्तित्व पक्ष पटा, मारमठामे मित्रपकारस्वात् , पटपटधीवत्, कटो हि नास्ति पटा पटम नासि फट इति कटपटपियो भिन्मानित्ये रटे तया पटोऽपि भिम 15 प्रचारारमठामत्पाद पटादिम्पो मिशासिस्वा एतदपि न, उकसत्वतुल्यस्वाद, अस्प या देवोरमिभप्रकारस्यादिति प्रयोगेऽपि, येन मझारेणकस्यास्मयाभसेन प्रकारेण सर्पमावानाम- प्पास्मामा, मस्तिस्वेन भवनाषिक्षेपात् , नानाम्प्येऽस्तित्वं नास्तित्वमस्तिनास्तित्वं या स्पावि युतम् , तस्मादमिचालित्योऽसौ नसहित एय हेतु, पटमदिति ररान्ता, सर्थकत्वमपि। भयोध्येत भिमास्तिस्य पपस्पादि, मिमममारित परस्म पापवित्वात् , प्रत्पमसापा 20 बासमते व युज्म् मिमपि ने नानाखिलाम मुस्पमापिरमपमेव म स्पान्तरमासिक मा ( मसीस्य- स्पेति। मोगा तभाषा TREAN पनि मायेति वा पिसाब गति सिरमिति मात्रः । मार- मस्तित्पमेति चिन्मेरम्मत माससम स्मन्परम् परि माना मा दिबस्मारिल पम्, एकप्रचितसम्मपूर्ण लिसा पनि स्तर मामिल भाषा । परि सापावर अनुपपपिरिवार पदि स्मादिति। परफ्यदि प्रतियाभिहितम्य नीद ममा मन्तिास मिवास्तिार पुप्पानि प्रिफ्यातन्नि-15 लाम मामाम्म म्यपतन हसिम्पम्, पण पनामार मामा-परम्पदितिमा तिर इति परन्मियातिप्रमन म्पया पाठिसामाभागसमय मम मात्, भन्द्रिले सामान स्वदेशमले पर इमीति पाप्मुसाह-उमापुन यति । एतपाधिस माधि मेए तपापालिका नामनेर यमप्रतिसत मरेपलम प्राममयमा सदमेडमिति, मरिनामेव मामिवालि- मिरफ्याना मतमात् प्रालिम्पी भागः । गरिमोध्यपान्तरताबामनियमाम्बरोध भारिपाचम्म म सम्मापामाणि-तथापि पवि।स पाय निवाहित ममिति मतमान- समपि प्रमुफ्तका कारनामा मारिमारतति । परवानाममा सामानामगार प्रमवारोिप रजरमाद-मनम्परबपीति । पुपापि पाएं अपमानामन्तिी पर विभाति प्रमाणपोष परि-भयोम्पवति। माबो मिप्रमरति मातिावना नियमसिल रिम्पम, प्रामामात्म- ॥ १८(10) म्यापगमानुसारिणीम्पाभ्यासमेवम् [नियमनियमन रम्पत्मलाभारिरेकामानिमिचारिमेदेन सलिए प्रसिधायवे भिममपना-मिनासिव एष पट पनि, अतः १ भात्मम्ममे मिनाभरत्यात-पामठामे पन्मनि सत्पची घटम्म पगन्तात् पटारिम्मम रेश- घामाचरनिमिचारिप्रमरो मिम एष म्ाात्यात्मरूपत्वात् , मिमिप । पटकटपीवत्, तपामा- यो बिनानि पट स्वादि, यथा कर इति पुतिः पटयुरोमिभेन प्रवरेणात्मानं म्मवे, पटरियर पुशे तेरपापियो परस्पर मिमाचिस्मे एसे उमा पटोऽपि भिमप्रमयस्मगमत्तात् फटारिमो मिमारिय इति एवपि न, उसमतुस्पत्वात्नामप्यनम्तरोल्पटारिम्पतिरिममिमवक्टालिन सुस्म पटमिमाखित्तम् वस्मानुसत्यतस्पस्वारसरस्मेकेलः मिमाघरलादिनल मा देवोरमिम- प्रभारवानिति प्रयोगोऽपरित्वम्माप्तिसापनस्से तुस्पत्पति विपाप्युक्तसस्वतस्पस्यात्, न परमिमक- मिमासिस्त्वो पट इति सम्बया, उस्म म्मास्थान समानमपायेऽप्यत भाह-पेन प्रपरेरमात्मममान 10 प्रकारेम सर्वमामानामप्यात्मममोऽस्वेिन भवनाविक्षेपात् नानारूप्ये[ऽसिस्म] नासिवमविपनावित्र मा माबिस्सुम्, वस्मापारममममामिभन्मपत्वादमिमाखितो पा, निम्तो म्पमिपारी पात्रम् अमिमाखितोऽसौ नमसहित एक रिति-भभिमप्रभरारमधामयातिति प्रमोसम्म स्मभिप्राया, पर घटपपिति शम्सा यर हि पट वात्ममममणेऽनन्तमभिमाखिला तथा पटान्वरानि फटारपति, वयकवमपि नेगम एक्मेकस्वामित्वाम्माममिलो पटः । बममासाधारमावासपि मित्र एनाममम सम्मानिमित्तानमेव भावनेम, परम तक पति समेष मेष समारामदेव समेस्सविनमान मे पायदारोमा मावामश्विावापामार पर इमाघरमेर समयमामो मम मित्त वर्गमनम्न मी मित्तमात्र प्रभारवमममम मामे मित्रप्रसारताचप्रमाना भित्रमिवालिम्पिति मापारमेवानुमानपापी-दिवमिति भि भागमतिमात्र भम सापापनामिभिवापस समय मिषमान की प्रतिमाएमाप-भारमगामति मिरारोमास 20 मारमा, पारमाध्मपमेम्मान समतिमो गवस समानियेम्पयनगरविभिाविकमरो मित्र समारमममे मित्रपरिवारमानेच मितामार-म्पापचारमरूपत्वादिति समावसतियानमार दस मिनमा मष्टपीपदिति । अपुरे मास्पित्यमरे परिपारपणामे परस्मापारवस्मर- पता परमम्ममे मित्रप्रभागात् ज्योमिधचिताराप्रसम्म नियमासान-मोदीतिप्रम परस्पताबापत मन मालामावान् सम्परयो मिलियती भिवसारेगारमसमलान वाक्यपि मिवासिता "पादिभ्या भिकप्रकार मनामनात मात्र । मासान माय-पपापातीति । सीमानामसालिम त समयानरमापि बनियामा पावरसमुन्म नो पायवम्मति र सोमामि गुम व ममि मागी- रसस्वेधि। माप-बमपति।कमिवानिपतमा पर मास्मममाभित्रमा नवयम् मापनस गुम्पत्वात् परमितमधारयामानामुम्मरम्पनिमार-मिप्रामस्पादिस्पति मामला नाम मामा, ममममेप्रमानमसापी दरवसत्वं सचिये गुस-येन प्रमरगति मस्वपमरेरा बापहायपोग्रामिति मन । मारमात्मने शिप्रागसि तोमरममता दी मानासप्प इतिचापयामारमध्यायायामपारेरसिमर मधुप्पशासित भम्पनिलागिश्वरी ममानिावपति मायाप मनास्तितिको मोडमा पानिदेषा प्रमी मात्र । एमगरमधमे भित्र गएपनिमामिल एप सलो तिम् विनवतापम भिवामितम भिभिवामिनाम्यभिचारिबाविसामभिचारी हो गा-समादिति । समानुपानमा स्पी-ममिति। म्ह पबति-पक्ष्यतीति। एमभिएपरिमापापम् . परीस्मात्यास] कारशारजयचक्रम् यदि तु वाम्यामप्यम्पसतो पटस्य शम्यत्वम् , अस्तित्वकस्वशून्यत्वात् सपुष्पपदिति प्रागुको वोपा, मनम्पस्थे तु सर्वमेष घटा, असित्पफत्पानपारस्तषात् घटस्थतास्यानम्तर पटपपिति, मधेय नेप्यतेऽनन्तरत्वा न त्यम्यते ततो पटोऽपि पटो मा भूमपनविशेष हेत्वभावात् , एयमनम्युफ्गमे या तुस्पयोरखित्वकस्वयोः सतोपंटो पट एप नियवरूपो न सु पटो भट इण, अखिवैकत्याविशेपात् , एषमपट एष घटा स्यात् , तस्मादेष हेतोः, नन्षयमय विपर्यय:-रूपं गोफे रूपमेष न रस इति सियमपि रूप न स्पाइसोऽपि रसो मा । भूपं स्यात् , पहुत्मप्रसङ्गो पोफयत्, वस्मान सन्ति पटादयः । पदि स्विस्पादि, पवि पु ताम्मामपि पटोऽसिलेकसाभ्यामन्यछतो फटस्म शूम्मत्वम् , मस्ति- लेकसम्म्पत्वात्-सामान्पविक्षेपयत्यासत्वात् भसत्त्वमेव सपुष्यविति प्रागुत इसन्दिरकोपोपसंहारा, पनपते स्वित्पानिन्ऽनम्तिरपमयोपोपसंहारो गवार्यो पार्टपरिति, यस्मात् स्मिसमेवापुतं पटपत् पटायपि पट इति बवमित्यादि अम म्यायापारिवमपि पयविसर्गमापपटस्प नेप्यवे प्रसिलपारिबन 10 केनचित् बनान्तरस्य च न सम्पते तो पटोऽपि भटो मा भूपनविक्षेपोलमामात् अखिलेकरमा- नाम्वरस्पे पटमानात् फाविमानानां न मिनिक्षेपोऽस्ति, न परप्पम् तस्मासनविक्षेपोत्व मापात् फटप्पटोऽपि पटो मा मूरिति पटेमाप्पभाषः एषमनम्युपगमे का तुस्पयोरचितम्लयो सो सर्वत्रपिनो भटो पट एर नियवरूपा ने तु पटो पट सा स्मात् । भत्मिाविशेपात, एप [म] पर एस पटः म्पात् उस्मारेप देवोपटपरफ्ट पर समपि नन्पयमेवेत्यादि ठरेगानुशापयन् 15 एपस्चितकरयामा टोमिव शिपाटीला-सपकस्यमपीति । भविष्यभ्यास मागेपमाह-परितुवाम्पा मिति गम्लिामानु मिलर मासमास्तिरतामा सामान्यपिारपत्रमा म्पतिरिकाले समाम्पास्म सानिमपत्ताच सुमारसत्वमेव मारला यदि त्पिति । पान्तर सो पास सामान्यांसप्प नख मेर प्राइसमेत ऐपमुमारा-मागुरु इति । एमस्तिसाम्माममयान्तरातोपि सन्तानन्तरताये पर स समयभिचशिलकानन्ति मानना फापरणपपि भलसा सामना-ममम्पस्व स्पिति १० खम्मा परमामन्यये विमा । एसप प्रर्भ सौ मिलमपीमार परमानना मनापा मारी- तमात् स्पितमेवदिति । दम्मापनि मापाना माल प्रवेश रोपमा-मपैयमित्यादीति निपमा निमित्काक्-िप्रमिष्यादिननेति समेष मानेन प्रसिरियो म पार विमिवास्मिादगाररपरादे नारमिमियामेराय मायामा परार्थना पत पवशी भाया । तमा समानामविलम्साम्मम्ममेव इप्पत्त समार-मनन्तरत्वोति। एती भागमा पानी वा सामार तमा परमपि पाताभाषपत परिया-2 सवाति । खपा मनविशपेति मानशिपामासात् सिमापारि । मामरिसेपामारमा-भस्तित्पमपति सह सपायापलारित मा । ऐनमारमा-मच तस्मरणमिति गतिमान्तरले नपा प्रभास वाम स्वरवाद नये मने समायणमान भासापि पर ममारित भाषा । भवाचित सामन्यव सर्वमानपत्यम्मुपपमे परम्प प्रत्यामाप्रस प्रमपि सी पाम्मुक्पम्प का समयेमुफ्लम्पटे off प्रारम एसमा म्पात् सपा मपि बस्तिकमामियापार-एपमपम्पुपगमे बेति। बमुमा म्पा स्पति सच नम्बपमवेत्यादीति परमालानाम्वराने मारमाधोपो प्रतिमाविम एष प्रापि बळ प्रमा दि.म.भागामा।सिमलपमे।
पापाममापुसारिणीम्यापासमेतम् [लियमनियममा समाधिपनि मापारपति-उवाप्रतिको स्लेब पटाबीना विपर्यया पटारितेन प्रापिता, दमा रूम मोरे रूपमेष न रस इवि सिद्धमपि स्म म मात् रसोऽपि रसो मा मूत् रूप माविधि, गरिम्पनिाना- मिपानविपर्ययो पोन इति, पास्वपमझो वा परिवैसपटलपपोपा पवे मा भूपमिनिम्म, लपक्षामुपम्मे पटत्तप्रसङ्ग स्मात् मात्, वस्मात् न सम्ति पदारय इति । नन्वेषमसस्ये प्रत्यवासिनं तृप्तिमुसावि विरु मते, ननु तपसिरान्तसिबमिलायुके पटादीनां शुम्पवा। (नन्मेवमिति)नोक्मसले प्रलमसिन पमिमुसारि विरपते-प्रमाउसहमपाविमेनारिवाना क्षतिभराचदुपसमे मुखम् , मुमुक्षापिपासार्दिवानाच इप्तिः प्रसवो एक्ते, वस्मात् प्रामवियेमार 10 युध पस्सनेमवोसते ननु वससिवान्नमति वमुसमाविष्ठामपनप्रभाविभान्विधियानाप्रमाणी- परणेनैव स्पारिविषयमम्मातिसमरिमनापासाद्वितयत्ताप गम्मिलतोयानावासमा मोषाग पतितम्ममिति प्रापमोपाधादेव सिद्धत्वाविनि-भत्वमयुठेपटातीनां शुम्पवा । पाऽनुत्पादावपि मापम्तयो साम्पतयोरनुत्पादावसत्, तप है तो विधेया नपा पवि नाम न ततोऽसत्वे तपोः सर्वमामानामनायम्तस्वामित्यस्वितिरेष स्मात् सप 13 प्रस्मसाविषिम्दा पत्पत्तिविना प्रदर्शनात् स्थित्यस्तुविपरीतत्वाववस्तु मामोति, मनुस्पलमेन सर्प परिस्वत्पम्फामे सर्वसिशास्तम्यापातम। बस पर पथपि मम्मोपच एरमेश बोरमारमिदं स्मन प्रप्रिमपि प म मास रसादिमा रोपि रखो व सम्प, रप मानी पौरपतिविपिन मिहानि माम मारिति मायापितलावापास- रोनिमामास्वानपवाभ्युत्पमे समान मास कमल मात, मात्र सम्मासिमिया रोमा 20 एमसिसरोक पातरियो लोप पर सामान मार-पावासोति ।मानो-मस्तित्वति पब्लेिषणयबाबाकसमा एमा। तरेमेलोपा मारमा रम्मामाद नपरोमगामापत् । सो पानि परतो मामा पा समालशिविरमपम मिशागोपचारत-समादिति। मन्म पस्तूपासमारी प्रामपानी मिलबार निमपत्र मापाबमिति। न प्रसभामा पिपासव पारितमानपानासेर म अमेवारत माता पीरिवान्य करपतीसरेच वरामुफ्लने सचम्, उभयदिवसमाव प्रति मेगा पामिनी मममममम्, प्रायपि समारना भए मात्र, पसलमापद वमानदवाव समारो-प्रमातोति। समान-मनु दिति मpिan दि. मात्र । तर प्रमावि मम्मुत्पति वा तपासमारीता परिमा-परम्पान्तबानपारमता- मिमि नमाम्मारक पर प्रसारिशान्तिका प्रमाणामामा मामाले प्रकार मन्त एस मापनमा तेनिया एस मारिमिसिरसा सेवा परमार, मामलामपि अररित्या तत्तापाच, दमनबारक्तामापाटया व पति म मापार निवामानानाने मजवाया समस्यामापुरताल मापसमाव एवं ममता परमास पर A पसारमाभिम पामा पार पामा पालामा पम्, मनिवासिस्चिामास एक पाप न समाग स सात् शामिपा पतषिप्रा समामि साप्रामसवासाविषय परिणामी मुनिया-त्पमिति। पारिवालसपी मनमा-पप्प मुत्पागलपति ।
मनुत्पापनाऽसत्वम् ] शारशारजपचम्म् तपाउनुस्पावादिष्यादि, अमुळे शूम्पत्वयवनुसादारपि वस्तुनः शुम्पत्य प्राप्नोति षस्तुपाविना, प्रस्पतिविनाश्योरसत्तेऽनुस्पनाविनष्टत्वाम् सपुष्पवविलुपसंहरिम्पमापन्यत्वात्, पापम्तयो वाजाक्पोर नुत्पावादसविति, पत्राविरूपचिः मन्तः पया, वापापम्तो विषयाताम् , न पेति में विफस्पोप, यो कारमिष्यसि पनि नाम नेवीसि ततोऽसत्वे यो सर्वमावानामनायम्सत्वाइटादीनो मित्मता सात् मितिरेप, सा प प्रत्समातिविरुवा मितिः, प्रस्पतिविनाशदर्शनात्, प्रत्यमपूर्णत्वानुमानादीनाममु-: मानानिमिरपि विरुभ्येव किनाम्यत्-स्मितर्वस्तुविपरीवत्सारपस्त, उत्पममपसु प्रामोति, स्विमस्तुविपरीव- खात्, सपुमबत्, किमान्यात-मनुत्पममेष सर्प पस्तित्सम्युपगमे सर्वसिसान्तम्यापातम, पैसेफिक सितावे वापस्पचिममुपेमोक 'एम्पाणि दम्पान्तरमारमन्ने गुणाम गुणन्तरम् ।' 'मियागुप्पम्पपदेश मागारसत्' (२० ष १ स् १ ) इत्यादि प्रागसतार्योत्पचिम्पारपानात् । पवार यो ससिद्धान्तम्यापासोऽनुत्पादाम्पुपगमेनेमि तमुहम्-विस्त तावत् पुरुपपरि ta गादा, सोम्पानामेव वाबस् सतकार्यपारित्यायम्मापाव इत्यत्र मा यससम्मत वावत् प्रमुषारयामः । १बा वपघा- अयोध्येत सांस्यानामेष सावत् सस्कार्यषादिस्मावण्यापात इसि, नाम्पापाता, फयम सस्कार्यानभ्युपगमात् ! प्रपानादीनां निस्यनिधितत्वाभ्युपगमात्, अतचाम्पारम्पान्येष, निष्ठितत्वात्, पटषद, भारग्धत्वात् कसकानि कृतकस्यात् पर्यमसानपन्त्यपि, यत्वेष न 10 भवति तत् खपुप्पक्दसत् स्यात् , मय त्वेवमपि नैषाम्युपगम्यत आरम्भावि तर्मनिचमनि- छितमसत् स्यात्, आकाशवत् । भयोच्येत सांस्पानामेपेक्ष्यादि, वमोचर-नाम्पायत स्मावि, नाष्माभावो मापाव एम, पाचो-मयुकेरिति बज्या था सपनातिना प्रण मिपिता वा सानादपि पलपारिना सापाने प्रभावानामान्तमायामाचे सपुपारपत सामने उपयामिप्यत तमा पत्पल प्रतीति मा सविस्मना 20 प्रतियमात-पापम्तपोरिति । भारतम्बामुफ्त दवारा हिमपमुमणपति-पराविरिति म्पारमिासो सत्तरसती किस्सा सत्पानिमाम्मे किस प्रकर्म तस्सवय विचारपति-पवि मामेति। गरि समाधानामुत्पार भिनास पचरानापम्तमाधिमा सहायानस्मा मामा पार सा सहिनिमाविमाममा शिप्पत मार- ततोऽसव इति । समानामिया-प्रत्योति। स्पानिासपासमा रमापसानी सपा वितरण हिपत उपल पम्, वा पपुपानि, सिपमुस्लिीवल्पचिनिनाम्यातिप्रायोजत मामिति रोपन्तरमा-1 स्मितपपिपरीतस्वापिति मिलन म । उत्पामिनासबारसम्पमे संतु मुत्पमिति मात्, तपा शिान्तम्मापात. माविमा भनुत्पप्रमेवेति । पिसिया पप्पाने हत्तरियास्तूला मप4 'नमामि मान्दरमारम' सारस प्रतिपक्षात सर-पेपपिसिबाम्त इति । किमयमारी मार- लोकप्रियतमाको नामाई पर लायनम्मुफ्पमा उन्नत सी-प्रबाहेति । तदापि समात म्याचो प्रचार-विमन्त्यिति । च महापामेन मण्मुपविरी-मणेच्पतति । मिरा-2 नाम्पापाव इति सुमाई मयिान्तरमापत निम्म्मपत एक्सासममा मापात मरम्मसाधर्म- 18. म... पनाविमीम । सि.एन।
- - 10 म्यासापमानुपारिपीम्याप्त्यासमेतम् [नियमनियमाया रितिपेमस प्रामापो, समसत्प्रमानम्मुमामादिति, सम्पते, प्रधानारीन निमनिधिसत्वाम्बु पगमात्-मितं निष्ठिवमेव प्रपाममारामाविमच्यम्मच्याम्म सर्वमित्यधुपामापारम्मोऽस्मुपान्हो भवनारम्भमम्वरेण किमामापात् स्थिमन्वरेप प निखनाभावात् , दुफ्सहन्म सामनमा-भवानी मारि पानि प्रमानावीपारम्पाम्येष, निमितमात्, पठयत्, पटनिमनम्भिारम्भा मेम्पस्मिता हुराएरपसिक प्रपानादी पदुपनमसिदित, एबमारम्भस्पात समसिवि, सबा समात् पसर- मामबम्मपि तम्मारापम्सन्ता प्रमानामा पत्र न भवतीति अपयन्वा, सामनान्तर या गार्य- माफ्यवस्थामाये यपुष्पवरसत्यापापन प्रपानादीनाम् भारिमामस् पुस्पारिपपि प्रसा। समान- पी, मनेनेन सामनेन गवालेऽमुपपत्यम्वरनिराकरापमाातरयम्वेनानियपावनसाधन सब मेव- मपि नैवाम्मुफाम्पत बारम्भावीमान पाररावरिति । बाद- नम्पामा शापवायत्वामिनि निष्ठित देष प्रमाणशानपविस्यत्रोपवे कुचोऽस शुरुपदा। मामषदर्य उपसर्गः, काश दीप्साविति पातुः, माफासत इत्याकानम् अतिपावया' (पा २-२-१८) इति समासस्वात् मृगवप्णिवदामास्त इस्पाकासमिति विज्ञानस्वैष तपादपोत्पादाः । पवि व साविपरपदार्पप्रतिपतिं कुर्मखतो विज्ञानमायमेवं समिति नाम्पुपगच्छेम मरम्पर्क हि विपनमनलाम्परम्पोममापाशुम्पपटपटाविधवानामपि विधानमानार्मति अनेन सबै शम्या विज्ञानापाननिमित्तमात्रत्वादसवर्षा पष । परम पेमा पतिपय पाटोमाबालमुफ्पमे सारिकापाठे-कपमिति । प्रधानानामारय मामी- मपानातीनामिति प्रम्पकम्प मापना गादास्यापिकनितिलाव, प्रमानस माविलागि समिति चम्, सम पुस्तम्त विमुताम्पियामिलिभिवाचमिरी भार । एका मम्ममा तिमुस्यममाने नियम ० नियामन्तोष मियागाबारम्मकमान्तरेषासम्मवार मरम्माम्मुफ्पत एक मक्सद-विस्प निमितमवेति । इमेव प्रोपा साप-मतकामीलादीति बह सकस आसपरम्मोप परमारे पदार कम्कर जतनपानि नपस लिम्, निलिमम्माषी माने भिषाणरणम्, समाविनयभामसिहरी रेला रोपा मचानानुनय मिति माय । तस्मादिमा एपमारप्पत्वादिति। एस प्रणामापापा मारा निमित्वमादिति दिनभिमारम्भकर्मचाबियामिम । साथमम्मापनसाविन मावि परम्प, बापुष्प वर्मविनपिला-पावमिति । बन्दामा समारम्मास्सिायनं सापामा समायमसन पत्र भि पन्त च्यपामा पिलर जिमेवामित कर्मणामिना-सामनासर अति महासंगण यापुमारित मापसत्य प्रचारपैनानिपत लगी मियासदेप्रमिक भाषा एवं पुस्पस्सप्पापन्तएका मिनि क्षणी-माविमापाविति, प्रधानानापिनाविलासिनोमा परमते ममरम्मादि मपी मापस्मरम्बार भएकपात वारम्भाषमायपि साक्ष एवं प्रधानार सामुपारपर मामात-बमेनवेति पस्तत्वाम्गल प्रचामान पुम्पादसलसा मेरेर शिवप्रसार पीमापारामार अपस्चमपति भिलारम्भाप्रमानावे हिमायपि यदि पर मंगलमय मनितमस्त हामि माम्मावास पालो समय माको पात न मा । मनाम सनममिसभा मालाकामिति । ममामा पनि मादी गाय, मापताम्मापन, प्रमापानमा U शप्पा विमानोत्पचिसपा]] सपशारनयवफम् नन्याकाशमित्यादि, आगग्रसस्पासिद्धिप्रपथनार्यमनुमानम् , गुरपदबाष्पमामिगच निम्ति मरेप यत्, प्रमाणसानपरित्यत्रोम्यते-तोऽस्स गुरापरवेति देवसिशापादनम्, वस समासपरवां पति-आभेपवर्ष उपमा प्राप्तिाविति पातुः, बामश्व इत्याकाम् । 'शातिपादपा' (पा०२- २-१८) इति समासत्पात्, फोऽस्मार्प इति वदन्पर्यमार-मगतृप्यिमवरामास्व इत्याकानमिति- पमा ममायिन अमर्थत्वेनासठी रामासते वाऽऽयमप्यनियमानं विपमानरनिमानेन गुण्ये, विमानस्न वा पोस्यात्, स्मान्मन सपिलसोमारिएपदमाम्मरपामासिसिरिति, एवायुच्म्, परिप स्परिधरपरात्यापि, यदि पप भुपरपाध्यमपि शमा प्रतिपपेमदि वो विनामात्रमेयेर समिति नाभ्युपगमोम-न पाम, भस्मास हि विपद्गनरांवरम्पोममायाम्पपटपटाविसमानामपि निम्पति- रियो नेपार्योऽसीति मिद्धम् वदतिरावनार्यः पविप्मामरे, भननत्यारि, एतेन पारिशुद्धपापापठापेन म शमा किरामरफसम्पन्यार्थगपिन परवि नैरुषभिमवनने म्मुत्पचिपसे पारशिमान 10 पाऽभ्युत्पचिपसे डिस्मादीनां नमाविप्रतिपेपसहितानो पयानो पा न मिरियतेऽमस्वस्मात् विज्ञान्य पाननिमित्तमाप्रपाइसरो पर सर्वश्मा इति । घसरायणमानमगागमा स्पा प्रमाणभूत या सापलागिति मा एम्मासम्मपीमाच-गुरपश्याम्य स्पादिति । मामास परवरिशम्पमपरम्पापि समन्तवारिस्पा कुतोऽस्मेति । पानपत पित मालीपत्तम पबिमागभावमावलपित पुस्तहिमाघसपास रमति- भारप इति । मनिसरा सूना-19 पानमारमेन पतिगमन प्रारिम्माम पवार-गीति पुरापो भनिसमा प्रादुर समीर समस्त aan । मार-मृगप्मिरति । तर पति-पधति । स्पषिप्र समपेवानदीनापामा पन वपनामा जापनिजामयान्तरमा तपासवान समानिरागमाप्रपाको मीसपीयरितण्यभरपेपता प्राति रिमन माराम गायतलपराम्पन्नरा पर नीपीतारने पाईसमास पान्या मरिया वालपमानमेगा- प्रसार सम्मानिपिनानपत मानेन समापपाविषापामारणात्तिािनस्वारगामिति भान । मनाप्रम-20 परम प्रसारस्थापि परिसम्ममारिपामा सश्यामारेमा समिति पत स्पान्मरामिति । समायो- परि पति पसारा सुपरिपब मासुम्पप्रम पेन ससिपमतयारसमिया साल, पामगरा बाधिरामानमात्र मामिन यहा पाम् पापियाममा मतपरि विरापिप्प पाये "मभन्मेर पार्प, मिरपा रिना पापिने सपासपने में मेरी anot गारिणम् गम्मे पार मस्त मिसन भाग । समानामपि fult मा भमातिापपरा पपासमान 25 मा मुगदा भरम अनुराध मरीत, म्पुरवापर म्मिापरम्मम्मम्पराविरमणमुरारम्, पपा परस्परमार गुपपनातिन रमपम्याना रम्पत्रे गरनारम्पपरम्पररयम्, स्सा पम्ने पो घसा सामुमग मासमा नसम्परा पुरामा । पारि पास भगुत्तमम परमपुजनानाप्रपा पनामा पनि मनगमा नमारपिम्मान समयापारमा एमाले र मामायणमपि बार बाराम परम्ममामयम्ममपरविमलाना-मार पनसामान एरापारम्बलामन्पुरम का पापमपमत्तमा ममा पसा- प्रतापपमा- सारा मारे पग-4 पारम्परिभासदम्परताना 18... भरिमामाया ।
पापायमानुसारिणीम्पाम्पासमेवम् [नियममिपमा मप मा भूविज्ञानमाषवाप्रसा इस्सम्यपादिः प्रधानाविरिप्यते पूर्वप्रत्युपसहरसमा हिवत्वाविति स सोपसंहार किनिस्यः । तानित्या! मयाविनिस्पतायो दोपभिस्वनिति मिप्यते तवा पूर्वोक एष दोपो भाषमिज्ञानमाप्रार्पता, अम्तनिस्पवायामस्वसत्तमेष । अपमा भूदित्यादि, माम्म निष्टिवार्षिमानमात्रामस, स मा मूभिमन्यमाऽपिरिप्मने, • प्रमानानिः प्रमानपुरूपसभापति दोष न प्ररप तम्मार पटपपरिपर्यम्, स्मात् ! पूर्वप्रमुपसंहारसमाहिकत्वात्-प्रर्माम् प्रागपि पस्मिमेव मपानापन्यवमभरणमात्रे समाधिवा एष विप्रा पचरसम्मपि पौवाम्तमन्तः वो भूतानो विषमान्यनामेव पनदीना निकायमाविर, नारम्मानिनच एका से-स सोपसंहार इत्यादि, स भाषा प्रपानाविधारणाममा सहोसपरेप विनिमा बाहोसिर निमा इति निर्मिः ता पनि भिमस्त भाविरेप न मपछि, कस्वात्-अनारम्मत्वाव., वतन 10 सतमानिष्ठिना पनिम्वित्वाइसन् यपुम्मपत् पवारिमिमवायामिमाति, परोपमयामिननिम्ति पूर्वोचर तुस्पागाचीप्यतेऽतः पूर्वोचएर योपोनिमाचत्वायनरम्मत्वारहवपापनिहित नपुप्पपरा प्रमत्मा पीति तरेगान्तिविमति पारिवानमात्राता पूर्ववरेष सत्तानुपपपपिरिति एषमुपचिकिमत्वे मितिविमो चासत्रमुच्म् बनिसत्वं बिनानिमवा पस्मान्त्वन्तनिसवायामसत्तमेव सम्वापारनिसत्वे रोपा। मपानिस्पत्ये स किं जाता! किममातो पा! यदि जातोऽनुत्पावत, चास्वाद 1 मिचिपटषदनुत्पमत्वावसन्, पपजामस्तोऽप्यनुत्पादा, भजावलात्, भनिचपटवर जाताजात द्विरोपादुमयपपदोपसम्पपाध, निणयामपि फिनिमितोऽनिष्ठितो षायदि कि- ठिता मनुत्पादनानिष्ठितस्यात् , निष्ठिवपटषत् ययनिष्ठितसपाप्यनुसाव पवानिष्ठितवाद, तारमा सम्पप्रमर भारिपते वपि रोपापारमाप सावे-प्रय मा मूदिति। यो स्यान्मातमिति सभा मारमाप प्रधान पुम्भ असममात्रा मा म समानानु मारिस प्रयामास्मिारपेमार-प्रसानारिरिति । Wबानारिमानमा समाविमा एमा-पर्पमत्पुपसंहारेति । पूर्व पार्मादार कुमार उपहाररममा परिणाम प्रापा समरामा मापनमा तय भरमाचे प्रमादिकतात-अन्तमनत्यनियमानानापेर मारामामानिमा प्रधानाम में पस्तु नाविभाति बलस्त बारम्सबानि मा त माय-कार्यादिति । उपहार प्रानाAAR सानिमावि प्रश्न मागाधरामिवियामामी भरमपमेनपद मारापर म्भीलम पारमा मात् दरम्मत विभिनवानादेविलापमानमारम्मरसम्म - मारेनमारमणमपि न मासे तमारारिमाणवाद, पाभूतमारा विपिनातिले सnि परामरम्म मात्र बालारम्भ तयापि, निमितानगरमा-वर परीति। मनम्बरमा यी सलमा भूत् मिति पोतास-मासा प्रभावागाममुपम मापा समापयोग- पापमपादिति मिनिमाभाविनामारामाजिविषामुपयमै परष्मानिसवाभुम्म्मे मिलापस्वाभिम तारवत्तले पराममोश सामुष्मेशी नाव । अम्मियानादिमि विमरेपपिनिय प्रामा समिनिसवस्तुनमाम्यमिता प्रामामामताप रमति एपमिति। प्रम ले प्राम- नाममा स-मस्तविस्फत्पमिति। गोमाता प्रचालिसा भयनिम्मपति wwth- 1मि.भा.मोजिम ।
, मादिलिप इति पपम्] माचारजयपणम् अनिचपटपट , मनिष्ठितासन् , असस्वादका, मकस्मात्र सपुष्पषम नितिष्ठति, नोमय मुरूषत् , मम्तेऽपि फि विनष्टो विनश्यति, किं वाऽपिनटा! यदि विनष्टो विनश्यतीतीप्यते वतोऽनुत्पाद पर पिनष्टत्वात् विनष्टपटवत्, नापिनष्टोचतपटयदभूतविनश्यमावस्यादाकारा- पपिति या, अस्यानुगम कृत्वा प्रसर नोमयमुरूवदिति नोपचिस्थितिमनाः सिसन्ति सम्म पुस्पषदमाव एवं स्याबस्तु । अप[]नित्यस्प इत्यादि, भानियले दोष दमा वत्सरियाणपमाविरनित्य इवीप्यते तत्र त्रयी गतिः बावस्म बजावस्य, जागवावस्म सा, यिावा मिश: इति विसायमारप तर्मयोगम सूठीयम विन्सम्म सिका, पति जावइत्यादिना योगपविमस्सयोस्सावाभाषोऽनुलमसारसतिति ग्वार्थम् , पावागावमेरिति वीपविकसम्म विरोपाइसम्ममा, किशोमपदोपासकमा यो जावलोपो पमागवले नाम्या युक्तो जावाजातपसोऽवम्याम्मा, एषमुलारे रोपा, निष्ठायामपीलारि, 210 निमियोऽनिधितो निमिवानिमितो वेति व एष मिया, वेमपि त्रिपु पोपा उत्पादपदुम्मायेन मीचा एक गापमोमपमुताविति भनिटियोऽसमसत्तापपर्चा, भवपाश सपुष्पवन निनितीति विक्षेपणे सायो, बन्तेऽभीमान, विनासेऽपि बिनपणे बिनापति? पविनाश नितिनो रो पर विनष्ठो विनश्यतीवीप्मवे प्रयुपम्प त्रिपपि विम्स्पेषु सावनोमयमुच्यविति, नाविनोऽप्रवपटमरित्सम म्माम्मान-प्रभूषविनश्परागत्वात्-अमूतोऽमृत्पमो विनश्यामोऽस्त्रमूविनापा, उस्मारमूवपिन- 15 मामलात, भपतपटपमिति मानवनिति , पमूतविनश्यावतापित्यस्मैप रेपोष्यमान्वरम्, समानुगाम कसा प्रसा, कोऽय: स्परपम्पलारिस्पति यावद्विमानम्मचरित्पनि नामममुकारन भारेनित्यत्वाति भार प्रमानारप्रकाश्मिा उत्पटियापति को विना पण मार, मुत्पन्नभानुत्ता नमक सोलरममाव मत मल-मपीपतिरिति । वदेर कुरसी- लिव इति । इलामो विमो हेयमपि प्राम स्या-विमपायेति । यतसमास्यवसमापन परपसम्म तिमया मुला-20 लावासतिरपी पविजाव इत्यादिनेति । तापपनस परस्परिपार सम्मको सम्भो मा पारितो गम इमार-जावागावमेरितीति । रमाप्रेम्सम्म प्रभावि-पो ज्यताम इति । समुत्परे पमिधा नियम परोपमा-मिठापामपीस्पादीति । भरपि पावनापार प्राणरितम्यवासामागपमिनि री-मिश्वि पति नियमानदिवित न पीपपा प्राप्युपपरोपा नामापायचमत्तमेवर पलभा । विपिरो रोग विस्मार-मम्मिपित इति । भप किनारोपि और प्रिपामार-मम्तेऽपास्याति । म सम्मार-- माविमर इति । भवति यस समासम्म पनिसचा पहा मानिसानिमा लिप्स मा । परम- विवारपद्यममी प्रामात् वामसपासमाविमसि प्रमावामनमानुपम पापोऽस मारवार माशिमपात प्राममापि स ध्या-भानुगममिति । सनसपो मार- मोमपमिति मारे-मेति । मापसिनापम्प भामिप्पमात्रामोत्पनि पातापायते । निरपमान र भागो बोरपळ मनसिपमानस म भातम्पपट । गाविसम्पमातुन माये मारपट माप मानिस 30 At Aपत । एषा सपनामा परि विमान स्वम् । परस्पर ऐसा ०, (im) " , पापागमापुसारिणीम्पाम्पासमेठम् [विमति मिनग्यविनरो विनश्पससम्मवात्, ससम्मको विरोपावुममदोपाधि पूर्वानन्यायानुसोरल, इस नोपधि- मितिमा सिमन्दि, वदसिटेरनुत्पमासिवपिनष्टत्वात् पपुष्पपदमाम पर मारियति । अयोध्येत किं न पताभ्यामसम्माम्पामायन्ताम्मा प्रयोजनम्, पठी हि बस्तुन मात्मामात् पूर्वोचरस्मठी, स्योरभाषेऽपि तन्मध्ये षस्तु भपितुमईत्येष मत्र मा, मन्ने मध्य या किं जासमजात वा पस्तु स्यात् ! यदि आसम्, मनुत्पादनस्य जाकस्पार्मिक पटपवित्मावि स एव प्रम्पा, यावपि प तो काली सायपि न रूम, विनयनुत्पमत्वात् सरमाणे तदपेपत्याचम्मप्यषस्त्वमावा, दम्पेम्पनचालायत् , परि पूर्वोचरयो ज्योति सम्मम्मे कप सम्भाम्पेत ! मसचनपति, पूर्वोचरकासपोरसत्वात् , सपुप्पपविति । अपोच्येत किंन इस्मादि, मा मत किमेताम्मामापम्वाभ्यां पस्तुनोऽसरूपाम्पा विचारिखाम्या 10 प्रयोजनम् वस्तु विचार्यम्, पनौ पापम्दै बसन बारमम्मभात पूर्वोचरी अमे-यात्मगमात् पूरी काम माविसम्पते रोऽवा नोरमावेशी बस्तु मयितुमईलेव दम्मम्मे परमादति पस्सिम भूम वम्म मध हानि यो पूर्वोचर भग्नोर्मध्ये पचास्त भवितुमस्तीति मापसे, कोपा पूर्वोचरमम्मो मप्पापभिन्नये मम्मपि कि पावमजाव पास्त मात्, परि चक्मनुत्पापर्मम गावपात, नितिपटवरिमादि स पर दिपु योम्पो दोपापादनमा जन्मदोपस्यात् किमान्यत्-पावपि को 10 प्रमै पूर्वोचपै वायपि न पस्त्वम्मवादपि विनाशनुत्पमत्तात्, हदम्पो-योः पम्पोरभावे वरपेपरम चामप्पयस्त्वमाब, लिमिव । मेमनग्गामात, पपगपेक्षया पाठा मनापेक्षा मपन्तीवि सम्भाब भपि निम्मे समिभिम्पने न सन्ति ववपेक्षत्वाचनमारे क्या पूर्वोचरमग मम्पमिन्समिमा पत्र वरपेमलाचरमारे नाचीति प्रसन्मेव, बरि पूर्णेशपोः मम्मोनायि वस मम्मेऽखित का इल्प सम्माम्मेवन सम्भाम्पमिममिमायः असर ममतीमारि, वत्र मापनमसचात् पूर्वोत्तमम्मोरसवात्, पुप्पवरिति । स्वतम् इति । समुपदनितिभावाभिमापसालादस्मिाता पुमायदेशासायमिति । मान्ती पतुम से कमातदेचारे माना मिति पक्ष परमपको मपम म्पमापी क्स भागनुर्मासने सपा-भपात्म्मेवेति । मामा-मामतमिति मनमा भने नियम पास समोर नमते पन्त स्वरमापते ती रसदन कस्मे वरमारपि मपयोपोर मच नमा मत पापमोमपक्षपावरमपम पमेयवे नमतेपचापट मानिन- बीते पाकिमपिनो निमामिनो विमान मला दो प्रामव मनि-सम्मम्मे मम्प सादरीति । गौच पूर्णचरमोती मप मम नाला, ग्राम्स पापालाद, बरे समाये मपम्पक मासिस चरणमापस कमरे मम्मो मोर, नेमपयनरत कमाल एपला-पावपि चेति । परमा-गपेपनम्बामावदिति मम्मीभाने भन्ने अपेमा या जाम 20 मपति बाराको पाने-पवेम्पनासपति । मिना-सपा पूररेति। यह प्रोगरा माचि पम्मपति पब मम्मामा-परीतिर प्रगामेर र मसचदिति। मपनि म तुम लोजपमेरमा पर परस्मोनधि समापि माछिपसाबमान तामा ।
सामग्रीवर्णनहेतु] शादशाणपषम् मयोप्पेत मादौ मध्ये, न पोत्पश्नमात्रे, कार्य तस्योपनिछयनात् प्रागसदेष, तदर्थ महो, न हि तदर्थित्व सति तस्मिमुपपपप्ठे, तत्त्योपनिउयनायुचरकाठमखि, तदर्षमप्रपो, न प्रति ससिंखवयीं न प्रपते, एतदसत्यम् , तपसत्यानिधेरसदव स्यात् पुनरपि, सदादिमध्यान्तेप्यभूतत्वात् खपुष्पपदिति । अयोध्येतस्यादि, बारी-भारम्भे, मप्पे-कियााले, न पोसममात्रे-पिपरिसमाप्ती, धर्म-5 द्रम्मारि उम्मलापवयोपनिम्पनात् प्रागसरेप, स्मात् १ बाद मप्पे पर मरी, न हि वार्पित सति वस्मिमुपपद्यते, तत्तोपनिमयनाटुचरगम्मलि, कमात् । वामप्ररण, उपरवरियतास, म पसति पस्मिती न मरते, मात्र म एतरसत्य सत्तानिफेरसर स्मात् पुनरपि, सानिमम्या- म्वेवमूवत्वात्, वपुष्पपरिवि, एस वापदमुत्पापाइपि मुम्पा सषमामाः । इतब नास्ति पस्तु सामप्रीवर्धनादपि, सामन्या भावा रश्यन्ते न प्रत्येक स्वरूपेण, 10 यम स्वरूपण नाखि सस्प सामम्मामपि फुचोऽस्तित्वम् । श छोफे याषवी पट इति संज्ञा कपालसामय्यां पट इति संज्ञा सन्तुसामग्यो स्पमिति च सझा तरसन्तान वत्स्यमग्रीमाप्रमेष, सामग्री व भाषानां भायाम्तरं प्रति प्यापारा, यथा तन्तूनां पट प्रति म्यापारा, साप सामग्यामेकेकोऽयपषो नाषयी सम्भवति, तम्यक्त्यमावाद, न तावरेतुप्रत्ययसामग्री, पृथग्भावेप्यदर्शनात् , नापि तत्स्वरूपपृथक्त्वम् , अप्रत्यक्षता, अनुमीयतेऽपि प नासीति, 15 सस्सासिप्प एव तदप्रपा, यश येषु नास्ति तेषु तवीं तदर्थ न प्रयते पटपटपत्, न हि फुम्मा पटे नास्तीति मत्या पदपिना तदर्भ प्रषचन पट एम् , पटोऽपि वा कुम्मे नास्तीति मत्वा तदपिनो सदर्य प्रवर्धनं कुम्मेऽपि टम् । (इतति) वम नगधि बनु सामप्रीदर्शनारि, सामन्यो भामा एमन्ते पटफ्टायो म मस्पेक सरपेण, या सारूपेण नानि वम सामसामपि कुतोऽस्तिम् । सिम्वावेवारिस्युपनयमों 20 मायाप पूरमोस्मोसितममनिम्, दापनियकार पूर्णमासमासत्तावापापविमानाकुत्रा व सत्तार मापा-भपोप्पेशति । प्वो माराविति । पारसनीसाप्रारम्मो ममारिलप्रमाणे यो- म. पापेन्सनसम्मत् प्रयामती समय पापिना प्रतिपयाचिदमा दवानी को विपमारे प्यार मायापिरोसत उमादरचोपनिमा मय पयसमिति माह । स्पामाचे परम्मरमापरममा तुप सोनिमास पगारूपाचात्तरसमिस तानी पामा मापसारवान् देवापत पो मारी - भाव पनि युग्मवामानम्, दमाद पूरप्रम्पोरस्त्तमतिरमिसमार-तत्यापनिश्पनादिति । पर रखना गोरचमिपा मप्पनऽप्यमामामिप्पाम्पमतान् पपुष्परमात पापिन च समाप मनुषणा- निपालापा पम्पुम्सा पदसस्पमिति । भप फापुरनाम्यामिम्बा सामना फ्यानपि . मापा मार-तम मातिपस्विति । बसमयसपरिक सम्मा मा ममापिसासम्पामा सा परमार, प्रमणमामि समेत सम्ति वा समिर परतस्मेष माति समुरापि30 पारस्तमुरायमसार, दमा मामाससम्ममा मात्र पसार इसम्मा-साम ज्यामिति । प्यासपरक निरपरम पासवाम्मार-सिरोति । नामा माता प्रसस्त इफका नाम रिपो- - म्यायागमानुसारिणीम्मापासमेतम् [शिवमनियम भविमति, पनवना-मागे पावतीत्यदि, पट इति संवा परसामग्य फट इति पन्तुसम्मान रूपमिति वरसम्वाने-पनोपचिविनष्टहरसम्वाने, पसबारपा पविधिासावि मुक्त्यिात या रेसप्रणभिमाश्यवर्सपासमात्र सामग्रीमानमेवेति, प्रसाममी ? मते मागान्मे मागम्य प्रति म्यमय, क्सपर्सनम्-पवा वन्तुन पठ प्रति मापारा, बायविनोऽप्रयत्लेन म्पामियमा अपना एक दबावणा- पभिवाः साममीत्युमन्ते, अषयपरस्से वबमागत्, वन पेसारि, बभूवापत्र सामम्मा म्पयन क्यापपरमानामेमोऽभययो नापसी सम्मपति, तपस्पमावात् प्रत्येकमसत्से वासमुरितापप्पसम- मिनक्यविनः सर्वबाऽप्यमार पर स्मात्, वावपति-न वापवित्मावि, रेखममयसामग्री परम्पक रसनात्-नाति ऐy-तुप पटो नाधि, प्रमो-मिमिक्रणेपु तुरीयेमण्याप्रविपु नासि वमापारि सामग्री परमीमा, नापि वस्मारूपएमक्तम् मप्रसव पति, प्रसस मागेन क्न्तुमासपे तुर्यानि 10 सरपे या प्रषग्नुपम्मा साममी पटास्मा, भनुमीपतेऽपि च माचीति तरसाभिम प [] रातो- समिहिवेरेव रेखमनपु वन्नुर्यादिपु फ्टार्थी पटो म्पीति मत्वा वर परते, वो नाति निमिय। बहोति मग मी पति पापा इति वाम्मलित पति वा परिसीमा मपणा प्लान्ये वेज पायामम्मामेव मन्तिम व्यो पनि मन परावयपरते वा माम्सामा विभपदेश सामना फर इति नियमिताने मपिचार मक्विामियमुना मुशिल मनिवासुपूपिपिरामरम्मुपले पहिली 1. विधिसमम्मेदिन विविधायरसबातमिव स मास मान । सामयपदामेर वागमति- सामभीति, मायाम्वर पसारि प्रति बापस न्यारेषिविहावमेव पोय मापरो-माधिस्यावता सामोसमा पपेति । संघमीमारनामापालाममा प्रतिपारितोपिएसम्माता सायनसायमा सम्पन प्रीपापविद्ध पाममा भयो-मक्पविन पति बपरित्नामिमम पारेरमा एक लारने विधिमा मेन पथमा सामसुमन्त की भाषा सिवानेन वापमानावामानाने सामौतार माविरसमस से न मामा-भरपवेति मायनामाप्रस सायम्बा मायापतिमा पर मामादार पाय- र मात्यो मातीची निस्वाना मामामार-त्पम्मूतापावेति विशिवानस्परिकतामामा- पासवस्मयाममेयरसम्माविलापमये पमुबवेषपम्म बामविल सम्पत्तीति समयसपनिमा म्य सम्मा की सया। प्रोभारसासस्लिामा स-सम्ममावापिति समिकरणपरिणाम माता प्रस्मक समुणारत्वमिमार-प्रोत्रमिति । बसपमा मात्र मामा-वामविला रीति हेतुप्रमा पम्पायेषु न साप घाममधि मनायिका माय-मास्तिऐधिति पापनाकि पोऽभाष सामग्री माविमनानाधि प्राम-पिचारमेषु माविमपि नाम्य सामाप्रति मात्र । सम्मम्मतिमसम्मावि सायम्मा मानरमापति समयसमा पाय सापया असामय । परमार भप्रमात रति ममनापास पूषप्लुफम्भावित पा-प्रयमेव दीति। बटुमामादपि समयमा मार-मनुमीपतऽपि चेति क्षमा मारि सायम् उत्पाविम एष दरमा वन पापी प्रमः। माइ-स्साधिम्य इति श्रपबिमान स्वमव । ई माधो-सचिहियोति। खममाएकी नाम मार बरमदिरा सी मची तर मन, परम सत्पन्, माटेद समापु पये माय भावः । च कारबासमी नाचि देहु तयासी पपसे कारबाट सम्यमाय नफ्यी पावले प्रातल पम्, प्रेमा भरपाधिवेमामामारी गर्व प्रगतीपदी वर्म समी-पत्र 18.म.सादात्र।
मपयवारपम्पमाप.] मावशारनयचकम् पापटपत्-पमा पटे समिहितेऽपि पटानी पटो नासीति मत्ता उदय [नह] प्रपते, पटे वा समिहिते पटा( पटार्यम् पर येषु नासीस्पुपनयो गवार्यो पापात् उम्मेऽपि सम्, नहीति पति। धवा- ननु कुम्मस्य सिकताकणेपु प्रत्येकमरष्टस्य दर्शनादिति, न सामप्रीतुत्यस्वाद, सामग्री हि सामा सयैव तुस्पः कुम्मोऽपि, भस्माभियदि हटा स्थानत्येतत्साध्यते-मस्ति । नास्ति षा सामग्रीति, तस्योपन्यासाचदिपक्षाभिमस्या कान्तिफत्वचोदनं पाठमात्रमेतत् प्रत्येकमाएस्स सिकतासु कुम्भस्य दर्शनमिति । (नन्विति) न्नु सिवामणेषु प्रत्येकम जमा सामग्यो ए मनेकान्तिपोपोडापन पर अपात्-म्मम सिम्ताम्गेषु प्रस्पेरमाटस्प वशनादिन [५] मा-न, सामप्रीतस्पत्वात-नानकान्तिका प्रत्येकमसत्तात् समुदायेऽप्यसमिति यस्मात् सामग्री साम्पा म्पैम तुस्सा कुम्मोऽपि विपपत्तामिमता 10 साम्पत्मात् पप एष वस्मापि ममपरिणामस्म समुदायमात्, यस्मादिपमासिकरनेकान्तिपोइन्टमास बास्युचरमिरम्, वयाम्या-भस्माभिदि हा स्मामबमुम्पेठ सामम्मा पप्यमाप इति, वरेर मारपति प्रस्तुत-नस्लेवरसास्ते भप्ति नास्ति [ग] सामप्रीति, वसंगोपन्पासाचीपमाभिमत्माऽनप्रतिलिचोदन पाठमात्रमेवत् प्रत्येकमाएरम सिस्वासु कम्मरम पर्खनमिति, परं तावत् साममी मास्त्रीवि प्रतिपारिवम् । मवयषालाई सन्तीति चेम, मा रूपादिम्पोऽययविनयासस्वस्पोकस्वात् , रूमादयोऽपि । न स्वतो स्मादिस्वं छमम्ते पस्माद स्मादयसु रूपणाविनिरूपितविज्ञानसागा व रूमादीनां परस्परतः पृपक्व हेतुस्पाट पुसौ पचेरेप नाचे, तमाच पहिरतिस्वं जनयितु मावस्ने हेत्वापमापे सामध्यमायात् , सामन्यभाषे च का व्रग्यता ! इसरेतरदोपाचेति । (अपपमा इति) भरपाई सन्दीति चेत्-माम्मत पटस्म सम्मकोऽअपनाः सन्तीति, सम, पप्पिति । ननु माचि सामी प्रधमत्तान, सिमानका पुर्ण कर लोरपैयमिततमुनापी-मनु कुम्म-20 येति । मारो-नम्पिति। विम्यामोमो पर प्रतिष्ठापसवपीति प्रक्षेपसत्तातोरने प्रतिपसमिति मा । ममा सम्पप्रामवासवदेशातिय सामानुसता ममस सामानमारमापती मा सम्पदेला सममी. रिम मम सर्व मनानामै अन्तिमसमतामत बानेशतिरस्मेलनमामाम्मेर पाप्पसमापनुपरस्पमिति प्रमाभ-साममीतुल्यत्वादिति । नानम्तिकाति प्रमुगपतन, प्रसेम्ममपाल मा मानपत्तनमक। समयमुम्पदा पुरगति-पमादिति । समुने सत्तामिमन. सामप्रति ममता विपतमा धामीमात्रमात स्मन् म पलमाम निपमााविधिवि बौप्तिमार्गमामम्यतो गापुरमिमिति माषः । निसासिरिपेण समपरि-मसामिरिति मेम्मानिरपि समुपनियपि स यहि प म र ममुराये पाममा पतनपा पर्वत पनि सत्तामरम्परमारनपरास मिनेत तम्मापामार तिवावमिति तदा प्रीय निरपवन तोताम म. सम्पापि सम्ममुहापे ममप मममी तो परमात्रमेड मानेमम्तिम्तमममिति मा । गिनि-प तापरिति । मनु मास सामी तसगास्तु मत्यो सम्भारपस्पा सुपचापा-भरपवासहति । 30 म्यमावि-माम्मतमिति सामागमम्प पाम्पापायपि तासग्रनम्तो पिठ एपेशीम नामाईमात्रापति माया 18..ममाबला A म्यावसामानुसारिणीम्पास्यासमवम् [मिपमानियमाला कमात् । मा पानिम्मोऽप्रविनमासत्तमोफतार-वयमा तोप, पटिप फुटया परमा, पक्ष्मादि स्पषगरेपु म सन्तीमति यावत् परमामुमो विम्यगचापाषयम्मेव परमाणुरपिमानवाशिरमाया समिति चेत्, सोऽपि स्मरमात्मसर्पमेरेनाइसम्मेष, एक व िरूपादयोऽपयवा एष पवपरिन इति सेन हेऽपि न सवो रूपादिय म्मन्ये, परमापापमस्तु स्मारितिस्पतक्किानस्पता-सयत इति स्म रमद वि रस हमादिविधानेनेव मिसम्यम्वे स्पामा मसालपविधानेन प्रकाप्यन्ते, वत्र स्मादीनां परमरपा पूषक्त देखत्वा पुझे तो संपट, न तमामाने सात्मनेव, सम्माभिरसित [नोग्नमितमता वे खरपतो, अनिम्पतिरेकेर सहपामापात्, दबुक्समाह-देवाचम्प समाप्रमागत्-खम्लगमहा- प्रवक्तानाममा रूपापीमा सामग्री | सामम्ममारे परम्पतेति! दम्मामा समावप्रसिसि पमापुमुखमपप्पी सामग्री विपते भमयमा एप पा सतीति भिवान्यत्-इटरेवरामययोपार-बापरकि- 10 मारेऽपापमयक्त्वात् सिमन्ति लाई तेपु पाऽमरे मस्त वाक्पविस्थात् धर्मत्वासनी- सिरवीति परिरमिवरेवराप्रपलम् स्वरेतराममापि पन प्रकासन्ते तपपा-मौर्नाविपदा मेवरनामावति, एवं साममीरमेनापि न सन्ति सम्मापा । इस न सन्ति सपाध्यशनात्, सर्वपाप्पयुकयो वर्षनापगृहीतसभाका सन्तोर्मा पस्पपितमा, उपापि न सम्ति तत्प वनस्पासम्भवात्-तदपि च दनं नास्येप पधो पावन परमं सावकारान्मप्यपरमागम् तत्र पयाराभागो रस्पते इति प्रस्पयामिप्यत परमध्यभागयोर- दर्शनावमस्माता तस्स कि मेप्यते । समावदर्शनमेव वस्तुनः । (इतथेति) वम म सन्ति वपासना-अपनादपि नेप मनरेपन सन्धि, पत्र परमान- तोपि बारक्त मी परमोधी मारय मत भावसरमा सामान मोम at सारखा माया माय-मा सादिभ्य इति मर्गराज म त्वमिनये मरममावापिस परिसमा मामिलना भित्री भए ।दा जाप मागे-सपपेति । बवाना सरकारनामा पिपि निरमा पहने समरामापावे-परमाणुरिति । परमाप्रेरिसमसिम् स्मरत्नबसपमुज्यास्मतामया- सोऽपति परमासपीः मनिरपरस्पानिमा-परवदति। रूपारामपि मसाले For सम्पपामगार रसमामलामः प्ररयमलाएमा पासमान समारोप मिप्यो पावसारामबापमापरिकामप्रसाद साप-पाति मारपि बने स्मारवाय मन मिति मा-पमिति पनि पुर्ण पत्र की पुण्याचा प्रतिमासमानता भने तेरेत्तम् सिमपरिमिकमार हा पर मेरा दमो पुजामापसे असार मसाप बम का पासव मामा-परम्पपसिबति । वमादिति रमाएपरिपा पिसावे समस्या कुसमिनामानिरमाया दिनसम्परसती मात्राममा नर्म पुरम प्परिक सम्ममा रिम्पतिरस्मेति। परम पुनस तारस्तव रामानात् कामिरहमापी माभि स्य रमता र वि पवार वापस देत्यापमाप इति । सा-नुमत्पति । भामरमरवतरामाविधि मन, भारत बनाम ममा-खति। म्यो-मयपीटि । पानगरी-पपमिदिमागमावि परमप्रार-नरामेतिर लमरम्मान मालमतप्रवीसमापनमिरमाणेमार्गमा . पस्तुपर्णनामावसापनम्] मारवाजपचार सम्पाप्यमुख्य इत्यावि-म सन्ति पुल्यो पेपामर्यानामयुष्यचे, पपपि युलियो नोपनमन्वे प्रसव पठम्पन्वे रश्यन्ते रश्यमानाम निराफत्तुं न शकपम्टे, भवो दर्शनापगृहीवसापा सम्तोः सपिवम्पा इति, पति परसपेरम् वमापि न सन्ति, वस्म पर्सनस्मासम्ममात्, समास्या-नरपि प पशन नाम्पेन, कम पर्शन नाति सम्पते-पदो यावरित्यावि-पामर रश्य वापत् [बागम्मप्य] परमागम् , श्यामिमवस्त्र हि वस्तुन भाराशाग एव श्यते न परमम्पमाग्मै श्येते, मावश्यमान्मम्पपरमागर्मवितम्म बलना, 6 वत्र यपायगो श्यत इति प्रसामिप्यते परमप्यमागपोरवर्मनादप्रससवा दस्म नेप्यते । वरमार पर्जनमेय वस्तुना, न हि मायागमेव बस्विति । मय मतमारामागो नियमात् प्रत्यक्षदो महीप्यते परमभ्यमागावप्यनुमानात् माता- म्सरे व प्रत्यक्षतो नहीप्यते इति, न तापि त्रिमागत्वतुस्पत्यावदर्शनमेष सायपयस्यात् समयस्त्वदर्सनवत् अप मतं मागो उत्पत इति परमाणप्रतहि एप्रताम्, तेप्परश्यमानेषु 10 निर्मागेपु भागवत् रस्पत इति का कया? भागान्तराश्पस्यात्, सिकवाटल्या प्रत्येक वर्शनामावे तस्समुदायेऽपि दर्शनाभावात् , यदा प परमाणुन कस्यचिद् रस्पस्नपा कुतः परमाणुसंपातो भागवान् यत्पते ! मागपति या परमम्याग्रहणादरममाणे तर्दशा निर्षिभागमः परमाणवो प्रहीप्यन्ते ? इति । भय मतमिस्मादि, स्मानिय ते मतियणगवारशीप्पठे नियमात् प्रत्सवः तपा मम्पपर 15 भागानप्पनुमानात् अम्मन्तरे प्रत्समतो महीप्येवे, सम्मामावर्सनवि, पत्र मान वापि विभाग स्पत्वात्-मायाऽपि श्यामिमते प्रयो मागः सम्मबम्स्पेष मारामपपरमारगरपाः सापपपत्ता, विमम्पमान दि सापपत्र त्रिपा म्पपवि ववसबात्रापि परमप्यमाग्यरनम् त्रिमागाठल्पलात् समच- पनवनवापिति, पर्व वपत् स्पषम प्रिनगम दर्शनासम्भपा, भय मत मागो उत्पत इति-पमिर्षिमा- पपीति । रपि मारा बुधिमि लियाति प्रमाणमा उम्पमामाच प्रीन PAR समापन 20 सिसा माना जमुना पी एस्पता-सा पप्मतामयति । ए सरप्रपा र पाटन भाषामा मम्मे वा सम्माठमाद-पदिल्पपेरपिति। म पम्माटोमवार-रपि पेति । पासमा वित व्व सभापम्, बारामप्पपरमाणम्, पपरप्रमिमा वस्तुमा पूर्व प्रमणाम एष वम प्रवे म सम्परमाया तिसम्भार, न पाण्यापमानमेष पस भरिनुमणी पायाफ्याप्पत्यासन व समयमा भास या-पावद् एस्पमिति । सम्पययम्पाका पदम भार-मेति । बापमानपरेप सी प्लस सामिप्यते जनसमप्रमाणम्मप्पसमापोरनापलुनोकामतमेष को प्यते ! पणापमानम्बर- सानोमानमा पुममार-पर पहीति । माननाम्प्रणाम प्रमानेमले पप्परमाप्पोटमानया मदरे प्रम सयो एएम साथममि पडने-मय ममिति । पासावि-यारियमिति गमिक विपास पडामा । सायं नाम मप्पारणापो नु सानोमसमानता प्रमन्तरे प्रप्रमहतो र मेस- प्रमपति भारः। माणा पशाममापि नापत्रकापम्पपि मम स वे नाणाम एमपुनर-न समापीति पणामीसके । मानो मापलागेऽपाति भाप्पयानामपि वापसत्यापि विममाया दे मापापी माणब एप हमपरी दमन परपदामन पापी माछ। एवं माना गाना पसन्मो भाये पिरिमापा एकापाल मप ममिति । पापो-परिति ।
- पापागमानुसारिणीम्पान्पासमैतम् [निपनिया गमा माग मात्र गमत वि फेमम्प्से पतम वेऽनिलमित्र-परमाणवाद प्रसवाम् , नदि परमामोड दीमिया सन्ता कमविर श्या तीया, परश्यमानेषु निर्मागेपु भानावर दृश्यत इति भाग्यवरारपत्वात्, सिन्ध्यवैम्पा प्रत्येक रचनामारे समुदामेऽपि पर्मनाभावात्, भागति प परमाणुसंपावे परमप्यमायामागूपमाणे वक्षो निर्मागपरमाणुस्त इति भया इलवर्सन्ममाथि दर्शनम् अस्मार्पतपम म्यास्या परा व परमाणुरिमादि प्रदीप्यन्त इति गम्ताम्, इमनवमात् । पदर्शनम्पपहारस्वहिं कपमसति श्ये सम्भवतीति दुष्यते, मयन्तु म्यवहारो पिज्ञानोस्पापित एष, विज्ञानमासस्मपि पाये तपा तया विपरिवर्तमान बामापरवभावे, पस्तुत्वात् स्वमपत्, वापि आमाहीतोऽमा प्ररणमिति चत्र च सत्र विज्ञानमेव घरणम् स्वामध्यगरणकारमेन विमानेनयोत्पापितोयॊज्य इति प्रतिपतुं सम्मो नान्यपा, मवि 10 बाऽविज्ञानोऽयो कमिदति स वीचा स्वया मया पुना शक्पवेऽर्थेन बालेन विज्ञानमेवाचे इति वर्धयितुम् , सद्यपा-स्वमे वन विज्ञानमेवार्य इति । (दिपेति) पपरनिम्बारसरि समसति से सम्मपतीति हुण्यते भतुम्मणाविका मोरयापित एष रिणाम समपि पामे वेन पेन्यारेम विपरिवर्चमानमा परे पवामावर म्पमते वस्तुस्वात-रिमामला, विमिन ? सब-साम इस मामल, पमा मुमा 'सतेऽवमन- 15 सम्पविनं रखिचूपपर्षवापानी पापत्मसम्मेव एवियूमाविबारे पापवधिानपरिणामादे भामरसहपारिपिशानाम्सप्पन्तर्विमदिरामासानि, न मितासतिरिकोऽय इति, स्पोक पो भय विनिमामो मामा परमात्मते 4 मापमाया प्रयतेप्पते मा फरमावास्याचब ने मा- परमानव इति। एषय परमाचोरानावनाप्रमभरपर बसमुसम्म माविका प्रायवा न मारेप, एमामा पर समामाया-नहीति । मामा-मामाम्तरेति मग्रामम्भारमानापन्दर परमायपि पामापुरमामलामा निमार-सिरोति प्रति देगाने विपिन पगम भागामान्य पमानामा स्तमुपायाममाफ्तोमानी सप'। भागवति ति मालिका पमानपतमेन बामन बालापानी परमानामएमे मुरम्म मानिन सपपरमावामानाति । मापनामदन मामिनोरनम्, भानिनोजन माफमायामनिममम मामामाला-मम्मापासम्मेति। सनार संत बातम्, पप समाभाये यसमापि ममममाभापार पसारमा सो पम्पमान. मातिापर-स्पर्शमेति ।म्पचे रस्मेति । प्रमाणे पाण्याचापियो न वाम- पशवमल सुवरण-भपस्थिति, मासयानावापिटा स पाप बामनिशानमेवा भो बम्बालियो बारपामारपातराम सभामम् प्रेममामो परमातीत मा विमानोति मियाम्पसमा स्म पाय विमानमतभाति पापभिमुत्तपत परिरमा पामीरपतवाम्मेष पामि माम। raमार-सम्बदिति । प प्रभसाद-पया मुवि अन्तरिमामा पुरुषले लामो समयस्व निरपवे पपलास्कायमापि पसमित्व गरमग्रामपि स्यापियाम्पनि मनमाम्मे बोगिमारमा । रामजनम पा समारपेयमापनमागसमय समय परममा पारसमति एवेन्त मोर माया प्रतिमन पहिरति महिम्मत 1R.....मा ।... यमाप ।
मेऽपशमाया] पारारजपपम्म मामुराकाशं सागरः सरितो विशा । मन्दारमतत्त्वम्म माग्न पहिरिम सिवाः ॥ (बाय००३ सो. ४१) पति, पत्रापि गापहीतोऽयः परपमिति चेत् समे हरभुखानुभूतपरिस्सिवमुखारारिसफ- रसापाखरमेय विद्धानमुपपरे नासन्तानुपउम्पसपुप्यापारम् , तस्मादाणार्थमेव कारणमिति पेम्मम्पसे, पत्र पर मा, वरवर पिशानमेम भरणम्, खेमजागरणभरमेन विज्ञाननेवोस्पापिटोऽर्योऽ इति सम्पते प्रतिपातुम् , नान्यपा, विज्ञानेनाविन्यमाविसमापस्म धागरमेऽपि स्वरूपामापावनुपरम्मे या पुना। सपचरफ्त्वम् ? तव भार-पदि बाऽविमानोऽयः मिति स पर्यवां स्या-मानेन[7] प्रमपितो न समो दर्शयितुमर्प इत्यभिप्राया, मया पुनः सम्पर्धन प्रसेन [विन्य] विज्ञानमेमार्य पति, वपमा थम सन विज्ञानमेवा इति पर्यते, वमात् सपजाप्रवक्षयोरप्यम्ममिचारिविज्ञानमेवार्य इति पापस्सना। भत्र नये सम्मा: । म - मन च विज्ञान शम्दापा, विज्ञानमेष हि शम्दो विज्ञानोस्थापितो रूपरसादिपटपटादि- मामो पायो विज्ञानमेय, एवं वहिं प्रमाणप्रमाणामासापिझेप इति चेदिप्यत एतत्, तब विज्ञान फस्पना, मनियतदेशमाहाकारनिमिचनमित्तिकत्यात् मुससमिरिकादिविज्ञानवद , पुस्खनुरितिक्यिापी। (मन ति) भन्न र निशान मार्पः, विज्ञानमेन हि स्पो पापगमिमतो विझानोरपापित: 15 पदुपस्योऽपि रूपरसारिपटपटारिवायो माम्यो विद्वानमे समोठ 'विकृप्तिमायमेट भो मिन 10 मामती मालः । सम्मान (स्माना नाममा सापामाप्राणयां सोऽमों ग्रीवो मरम्पया वस्मयपमिसन- साखर परम्, सम्पदाप्रास्वाध्या वनरकपनाममन्यमय मिापप्पानामपि यो मायभामा रूप सपा-मापीति, सर्पयपिानापमापीमापाररे-स्समे दीति, सम्पपाया ! मुसा भनमा परिस्मिता पाषणवारसम्पप्रारमेन विजान सप रोति माग । म भापति मा सय प्ररपने पिसानोत्पापिस 20 प्रतिमासतमा पिने सपरपिानतिमा परममिया-नपा पेति, तो वापर सफा मनु सबरपि विहानामायिनामापनाभेदात् पस्मिनाभायमानुपमम्मी पारस मत इसा-विधाने- मेति । पिासम्पतिरियमममुपण्या या स्मास प्रस्ताव सिम्पनिमम दना । परात पानि खटि निमिानव निप्पोनीपों विधाममतिरिकमा मग विमाभूतापम्मतिरेणापि हामगार मिनि पाप मामिम्मे वापस, भतु विमानतमस्माधिसममेर नातिरित इमाम्पेनर-पदिति मावि पिान मस एपमा मरियानोमा । सिमित भारत तयेमबार-स्वम स्थिति। उम्परवि-वमारिति पानवामिप दिनसमेर पममा नाम प्रविनियाम्पेन पति-मा ति हिमात्रासुपस्वस गरा मोमानाम पर रामापी पिानमा समपान समयमार पास्मा पिामसम्म प्रतिविपन् सिमरिचस्वभावारेमा-पिमानमेव रीति । पानमात्र मिस पुसपने मलामारमा प्रमाणी शिप्तिमात्रममिति। परमतपेति पानिमाम्मने माथि प्रावधामो विपणामयों ना . मरिम्ने बामयिम्पेरिसम्पपिटो पठन एक महिनामत न मये या पति प्रभासत में म्याम्पतम्या गप्पत पिानमसाशिमरनमार,taमतिर मात, मस्या समापन 1छि मममममममार। ० (17) नि - . म्यापागमानुसारिपीपाप्पासमेतम् पुत्र ! गतिरं पातुम्' (मुखवचनम् ) त्यादि, 'पदन्यरूप [व] परिसभास्ते । सोऽओं लि- रूपस्यात् प्रत्ययवाऽपि प' (भारम्बन ६) त्यादि, वाई प्रमाप्रमाणामामाविशेष इति श्रीका एवम, यमाय विधान पसना-पसनामाम्मेव, मनियवरेशमधाममिमिचनैमिचिम्लात्, सम्मान परसाभिनवविधानसमापि मुतमिरिमविविज्ञान प्रामाण्यास् एप पवार, वास्या का रम्पवे-मुरूनुस पनि बाक्पा:-विधानमेर पौ पर्याभासविधानानुसबारेम सम्मपविज्ञान बार बाल्यार्पति। अया पिकस्म एषम्भूतेकवेशा, तस्य च परासिफमेवस्यात् , परि समन्तादपगम, नास्वाभायात् परियोध्यगमा, सोऽस्यास्तीति मविरस्य पर्यवासिकोय नयः, सप माप भावोऽपि माय एव साकारोऽनामरो पा प्रमाणप्रमाणामास्यविषिकसशून्या, ब्रम्पसमा 10 पदस्मपि जुर्गति, तस्मा विफारे यस्पत्यमे दम्पमिति, ब्रम्यमेवाफी प्रयापी, स पुननधातमा मागम्माम्पातो ययादर्शनं पर्यायार्य एष स पापिफम्पाऽपि, तपागवे। (मपति) भया विम्म एवम्भूवैकोश-मनपा मिनवम्मूतसमेोऽप मया स प- परम्भूवस पर्यग्रसिकमेहत्तात्, पर्यो गमपिवमा पनाविक इस वार-परि समन्वायर गम्मा, परिस्पना समन्वारे प्रतिवरषगमापा ममा भने रमणातिमीलिवतगमनमा 1. साम्पग्रपनकियारीलाम्यतिनिर्विसापानमावरिपु (मातुपाठ मारिगम ६१) बना गमस्म विभितत्वात् भैसामाम्मात् परितोऽनाम-परीस्यमाम मामाम विधानम्मतिरिकम स- पिरितसमागाभ्यपारगममात्र विज्ञानमारमेवेलपी, सोऽमातीति ममिति स पर्पयो सास्तीति मतिः १ पुरमग्री का निमपी याबासाहमिययन गरि मनपर प्रभावसमभापोलमेर विमानस्वालिपिमा यतिरावमापाप्माण-पर्य हातिमा यस्मारति मिनाया पिने भापरिमपम स्वापिय विस्त पापाय पतिसमय समय परिसती Mpter मारमा समाना ARI RAPानिAANAD सनाप्रमाको म तार, परमानामामा मामा मामा माल तयार पुणनुसंहविरिति, -समाधिमाकायाम्मेव पोसिमामा पो मान प्रमाणे पा समाच ग्भौचामानामा परिम्पसम्भाय ममममममा पापागामे की नाप । म गमन सामनाभ मार-अपरेति। वाभिमान मम शतपेति । मायामा पागारमाह-वसेति । प्राचारेण पानिमा बाम पति, परिम्मा मताने मारमामा मामामा भर सत्यति । जयममा सामाप्यादिति वामाने बिपिमानास समापन मारम्मत सम भाषमापाप्राममायाममाया ति सपनाम 0 मसिनाधिणि मी मोर मम्पति विमोनमारमा समस्यालसियमी - १ मानियोग प्रोमणि - पनिपनियन्मनोति] भाषचारजपषम् पनमा, पर्ययोजीता पट्मचारोऽपि, भखिनाशिविष्ठ मतिः' (पाणि० म० ४ पा० १ ० ६०) इविठसलमान्वरूपसिहो, पर्यर एषानीति मन्यमानः पर्यपालिकोऽम नयः, स प माप -अपः शमोबा, पाप बाममिमव विधानध्यपमेय पस्विसव पार-मापोऽपि माव एष-ममतीति मायो घटपटान इम्मगुणपति पा इस माहीविति माष एष उपयोगे माषो न दृष्यापीति, स प मापः भामिका सालोपामिक औपचमिका पारिमामिको बा, सपोपयोग एर साकारोऽनाभरोमा ममाप्यममाणमासा . मिविम्सशून्या, तस्मात् पवासिनरभेर एमम्मूधकोष्ठोऽयम्वकिारविकानपर्यायमात्रपाही नमोऽ- पमिति, पवा बिम्पाविविकापेवाप्पु क्ट्स इम्माखिनु पर्मयशमो प्रम्पप्रापान्यात वापरलेन म्याम्पावर पाप्माण्वीयेपूग्मयोमपफिक्स्पेषु अन्यतमः पर्यवप्राभाम्पाचार्यत्वेन गमपितम्मः अव बार- उम्पन्चम्पाप दापीत्यावि, वर्गविरिति, तु गवौ तुझयो गत्सर्पः वस्ना-पवेनिश्चरे पत्रसमे इते सम्पमिति रूप मपति, सम्पमेपार्यो व्याः, स पुनस्तावमा-वेन तेन प्रपरेपाठीवोमयोमयादिमित्सेपु 10 म्ये माग म्याप्सावा या दर्शन-पथावर्शन वेपो पप्पा मेन सेन बनेन पर्यायार्य एम स पति- प्रमोऽपि, पयागो दबावमा परिवो गमनात् । किमेवत् स्वभिप्रायविवरणमाघम् ? बारासिवन दर्शनस्मोपमिदापनमरममप्रवीत्सोमवे मनीषम् --- निम पनमस्य 'से कि तं भावसंपे! २ दुविहे पण्णते तं जम-आगमतो अ, नो भाग 1॥ मसो म, से किं तं मागमतो भापक्सपे! २ जाणये उपर सेच आगमतो भाषासंपे' (मनु० सू. ५५-५५) इति, आगममावस्कन्पादेरुपयोगलक्षणस्य विज्ञानस्वम्ममानत्वात् सर्वमुपयोग पष, मयं मियमस्सापि यामिकवावस्स निपमः, सदपि पणिक घस्तु विज्ञानमेवेति निमममियममा मावशी . पर्वमा स्मा-पर्यादि। सपयो मात्र एम सर्वानुफ्त मा-सपेति । एकस्यामिम माझ्माइ-मर्प इति मो0 मानों का माननमेर तदेव विमान पापम्मपि गरमपीव भाषा । मायोऽपीति पापमयापामिमोऽपि मानो मोति माप सिमुपस्या न ममाप्शुिपा लिमिटा मिल भाष एक-सफेगस प्रमा रमणमा- सभापति पोपयोग पोठि पिापा मम स माममा माघिसमयसमा कन्तु प्रमाप्रपामावप्रसपोवामप्रसारयो र पी माया । मनाहियप्रमपरिहामिमानामुम्ममारपर्म मा सिनयमम्मी पमत इसम-समाविति । कम पानपर्यन्तमागे पल्ला निपारिनयनापि पसिनमुक्त्वा परसमस मत पासात उप्रेमसोमपापिनवानामपि प्रमानिपल इपापस पाय- परामुफ्णव सम्पणिमा-पपेलि। मानस फर्मदाता पमिति-अम्पयापप इतिपर्यावार्षिक प्रक पार्षिसम्मरममासमा इम्पसमापार पतिपय प्रिय पर्वा स पमप्रेममारक्याच्या समसमानुमारेर भासाताब नवा मानल्या, तेन तेन प्रयोग समापिपि माषा । वाममारपसोफ्यान या सामियम्पावरमा म माति बम मूपमापपतनमपत्रमार-नियम्भनमभेति। अपने मामा म म्पापागम्मनुसारिधीम्याम्पासमवम् [विचमानिसमा (निपपनमिति) नियमनमन 'सेलि मारपसने इति प्रमोपामो प्रभो पावत् सेप बागमो मावस्सपे (मनु० सू ५१-५५) इति म्यारोपसहारा पागमम्पत्यमोपमोगम्पपल स्मिार- सरूपमास्त्वाचा विमाणावमावश्या सामायिकमधम्मा-नामाविनिझेपानुम्मेषाभिगमनीय बस्किथित पासमागमत उपयोग पग-पानमेपेमर्यः, षय नवममापि पनिमारम-मनिम्मेष पस्त सम्पपि दर्शनस नियमा-मापि पणिक वस्तु विज्ञानमेष-नस्पादि सरपतिरित पायमसि ! धिामन्त- विपरिणामविम्भिवमात्रमेयेति, नियमनियममङ्गो नामाऽऽविवो विधिमहारारम्प गण्यमानो सरोका। शरचारजपचास भीमम्मवाविसस रीमा भीमसिहसरि गतिविरचितार्मा समाप्त उपयोग उपवे मानताप एवं पर मायमभावसम्पयति । भाषरम्पादेयानमामामानामा 10विानररमा भविप्रहपादिति । समागम पोम की गोडी मिसोम शिव लिममसावि मनमा पापसापि भवधि भनिममदाराभिम बनि परपि विमानमेव तो म्तरिक मावि र गमि-मर्प नियममा पीति । पारति-नियमनियममाति। इसि विजपम्पिसपिविक्तेि विपमपदविवेपने नपचम्म मयो नियमनियममा समायः॥ १सि ॥ मम्वाAt अथ द्वादशमास्यान्तरम् . विमातिसमकारमकैमाचिसम्पग्दर्शनानिपरे प्रत्येमतिमिप्यावनित्यापावना प्रचत्वाराह- एतदपि पूर्ववदेषेकाम्तस्थावयुकम् , सम्भविधिकस्पानुपपा, पर्ष सर्व निस्वभावमित्येवं शुषतष विज्ञानषचसोरपि सन्ति:पातिस्वामिन्स्वमाक्त्मेप्रत्यायनमसात् परप्रस्थापन- मयुक्तम् , विज्ञानषषसोनिमितपधादिस्वेनाभूतस्थादुन्मत्तप्रतापयिज्ञानषत् , अप मा भूदेप दोष इति सस्वभावे विज्ञानषचसी अम्युपगगासि ज्ञानवमनस्वभाषस्याम्पुपगमेनाम्युपगमविरोधा, श्वानी समभाषत्वाम्युपगमाविति स्वयफविरोभए । (एतवपीति) पदपि पूर्वपत्रवत्तायुधम् यथा भगिकमेष रूपाविसमुदाय एस सामान- विशेषत्वा मतारीनीमेमन्तपावानामयुखरयमे अन्तरयात्, युक्त पा जैनेमत्वम्, पातपति- गणित्वात्पुम् , पसदपि लिसम्पपमिति मवम् , कस्मास्! सम्मविकिस्पानुपपने-अस्मिमपि 10 मवे के विकासाः सम्भषन्ति सपहेण विधानवरसोः नासामाम्म सामाम्प पेमनमोरेर मेरा पत्पमापचे सर्वमा नोपपपन्ते, सनुपपत्रमापि मवस्मामुक्तिरवो जिनकस्पिानेकाम्वरूपम पस्सना मग इत्युपसंहारो भविष्यति, वपमा एष सर्प निम्नमाममिति मुनवोऽतीवासियातिप्रमरेण पति मषारण प्रभमन्यात् द्वितीमेवशम्माशिानमपसोरपि स्वमोज्योः साम्वापानित्पादविक्षेप्य सर्व न विपतिविधिमासिनेप्रति सम्मान प्रमेम्मामि मियादनम् , माबियमनियममासापि निम्मा-10 पनामापापमो म्यानयाभय पारमितमपम्मते-पपपीछि एम ए सामावमिन समेतवमा मापनासपनिमानसात् मोम्मचामिति ममपीसा । भपिनमासमुचित दम्पति-पया सपिम्मेवेति, लिम्पोमा- को एमाले अपमान्तमिवम्माफ्यापारमानिनपरमाल रक्मे नियमविपापारिनिरपेक समसामन्यपिरिमे पामानिमाम्मान क्स, निममनो मामे सामान्य रिफ्लोरेसाम्पत्तोममतानुमकस्मन्नतोमवप्रपानोपसम्मपचाया पासपमा पल. मेनारा रवाऽमुभा पन्तलाचा मिानमात्रमे निमुन औषा नाममा मारिप पर्व-20 हिमालम्पटेमा प्रस्तारितोऽपि नियमनियमानगोमुक एप्रन्तस्यामिति माया । स्पेषां पारामा पुस्त- भावे वी पारानामेपा पलायसवामिनीपत मात् नेप्रन्प्रतिज्ञानानुस्मेहाला मार-युवरपे बेति बांसला बन जबसेषु स्विी मामा । पर न समापति सम सिमनिमममममप्यममार-पवार पोति । खमाह-सम्मवीति सम्पनिलम्पाः वेपाभमुफ्पीमा पनि समामिति मिान निसमा au पा समिसिमावमिति पचन विसभर समाज विकासापायेगमेनोरिमामयारेष निस्पोमा वाममाषा प्रिपाम बोपपपन्त इति मतमतमागमति मारा। मसापपुरले भूल बस ममामि-भवो शिवस्पितति । एमापुष्तिामामा-वपमेति । प्रथमेशप्पादिति सर्व मखमममितीमार पोतमाधिमारिकारेष सई कल रितमानमिति विमान प्रतिपापते सम्मान- समावित समरिसमसममिन्माइपमापिसाभरपनी पवार म समापनमा सि.प.मरखो । मसम्मापि।
म्पापागमानुसारिणीम्यास्यासमेतम् [शापशनयमसम् सो मिानम्मपतारिवि लाम्मुपति मसिसावितुमिबाणार्पनेसामाम्यमापाप पिानमात्रमेष सर्व समसिंघानियत् जामसिगनपुत्रजम्मानिमयदर्पमुपदापावि विधाममपीमतः सर्पस विमानम्म्मममेष सत्तात् वम प सर्पलात् समिव चेत् गिानमार्न सब पुरुप एषा सम्मयनरमवीवानागव्यमि- मतमपि वर्षमानमेष, स्विमिवसरासलिमयमुनापसावत् सप्तमपुप्त जागरिकारीमाप्सरममा • मात्रमेवममिममेवाचीत्यम्मुमारी भगति, गोफ विपिसिधिनयारमा प्राइ पुरुप एपेर सर्ममिलानि, पवत् पुरुपसूल म्यम्पाट पोति न पुनर्षित्रिय, पशाह-न्नु विज्ञानभमेनोप्रेमामात्रमुच्यते, पास रिशानम्म, मासिहरनमयाविवविनुराहम कस्पनामावलम्म प्रतिपारितस्वादाणभाषा, मायामापे प्रारपसाभाषा, समोठ 'पदमाव वदप्मसन् इति, प्रत्युभारममष वा स्यबस् सामुहर किरिति, मनोप्यो-एतदप्यमुख आरिसम्पतिरिक्तस्पोदारप्पर विज्ञानमावलम्पावनात् समविषा- 10 त्याच भागानो प्रमाणयमाप्यमासत्य[प] त साम्पसन्दभेदाम्पुपगमोऽपश्यम्मानी। पदि तम्मा कि स्वमस्म जागरणाविशेषम पटते ? उमयोरप्यभायतुस्यत्वात् सपुप्पस पम्पासुवाविष, प्रतिपाद्यमत्यपेक्षया इति श्रेग्न, रमयोरप्यमायतुस्मत्वात् । पदि तन्मान किमिस्मादि, पति विमानमे समोऽसप्तो न मबति वस्मिम् स्म सिहरनम- परिमपुज्याभिस्य पनि मामा, मारपस्थामा निमारठि पुत्रमारमा प्रदेव सिरस ॥ मारनपुरम्मामामुपारापानमसम्ममारवासय मिल सत् एषा या समानित सिमाप्पसार प्रयास पनि, मन्मया साधसम्मत एव साद, पपन पर मिासमेत कई मामा पुम सलमाने मिान मन मसोई गमान, तमामताभिमठमपि पामालमत्र मयमासारसम्म तयार परवारिकार र पुरुष मनमामिपावोसमा हम्प्रतमेभिरमनिमम सामान पुसम्वत्तमनुरपा अक्टीति मापा । पुरस एकस मिमेतत् विशिषिमो पुरसाद निफित नै पुरनिस्मत सार-पयोछमिति। बर्ष पुल एप समिमि.पि पुरमिपमयपगाराविम्मिनस प्रपनामालसावत् म मिनरलोटगत पचास मित्रमवारितिभास्केपसरपयाम्पपि प्रिनयनमामा, मागवि बानिया मापार विमलमे स्मात जमा पुस्तारमा व्यापारस्थाने अपारिमाया-पनु विपामशपेनति ! माशामाय इति सम्पतिमा विम्याधर्मनस्यभागेऽसिम्माविर सम्बनम्मापि प्रायस्पेवामा प्राप्पामा परपेसमम मिनावी समिति मारमधरता प्रमीपता मा पन सम्यानमारा मनमा सास-मममरसमसमा पानसम्मम्पनीति मर । व प्रमाण माप इति प्राममेष प्रमाणे पिपरपम्पविभागप्रपिम्पामभावना वा सम्मप्पामामा-पसपीति की काममेर बीमापारकापमानम्मापि पाroads पदस्पतम्मन फ्याभिवतार पर पस मानिसमेर पुमत जीपीराप्रपा र गरि पिानमामा मम्मी प्रसादिमा बापमा पाkिी भाग। बुममपि पिानमेवा-समतिपक्षापापति मारमा प्रतिभमापम् पया प्रयाय कीसमूल प्रमाप्रमानेर भागेमामासन माप पाम्दन समाप्रमान गोमम्मी पर मामा मानवावामिसिपी या। मोमिनमाडमेर मनगपरामिता मारिसर- मरि तम्माममितिमाच स्सम इति । परि रिसम्ममा दी गाणामारा सम्मान समेर बरपान सोम मातिम्, Ratan मगामी दम्पाथानमा पुस ममिदम्माल भासपी सा गमिसन माग गगनषि मत सरपमानमरेम - निम्समाक्तापतिमेपा] दावशारमयपध्म् सोम मपनिमिचम्, विरम मयापगमोऽससे समसिंहम बामसिंहाना साझाम्मत्युमिमिव सममेष प्रीतिहेतुमघाप्रत्पुत्रवर्मन स्वप्न सापेक्षाविमुझे प्रोसफामात् नैवामित्यवगम्य जाप्रविमानम्पतिरिक्त सप्पोदाहरण मुम्पवे, व वसझे सप्तम गागरम्पविक्षेपण न भटते, कस्मात् । उम्योरप्पमाममुस्पस्पात्, लपुप्पम पम्पामुदानिय, प्रविपापमत्सपेधयेति चेस-मान्मत सम्परयन्वयोः मागरणसमविज्ञानमोरमा मानुस्मत क्यापि लयसियामापान स्थानेष बागरीमापार्यत्वप्रतिपादन मुझ सम्मन्मनुस्ता किमत, पर दि प्रविपापस्म मवेरनुरोपः-उपाया प्रतिपादयितुममायतुल्पवऽपीसेवन न ग्मयोरप्यमारतुस्पलात् मवेरप्पमतेमोन विशेफ्म प्रदिपायम प्रतिपारपरेप्रतिपापाविशेषणमित्यपप्पमातुस्पत्यास प[टव] एव । मिमान्यत् साध्यन्तोऽपि लपुप्पम्पुदमनेन च स्वमसिंहपर्थनषदिति षनं पटते, स्वमदृष्टाम्तम्पास्पाने न प भाभयहर्षविविशेषणमपाभयहादिना विना ननु भवितुमईति, विज्ञानपिपया धारिखता 10. ननु स्थितिष, ततम सर्ष निःस्वभाषमित्येतन्मिभ्या, निर्भेदम नायित्व नास्त्यव, कुतभिस्सतो पस्तुनो पिशेप्य सदेव शक्यं या नासीति न शून्यत्वं सर्वस्प, सस्यमेप वचधा, स्वाविज्ञान सिंझवेरपि नासिस्वमम्पास्सित्वं सापयति । (सपुप्पेति) सपुष्पम्मुदसनेन च समसिमानानिति पचन परमपुम्म न भवति सिंह इति, समयान्तम्यमाने न यामापतिविक्षेपणमरमामपापविना विना[नन]मवितुमईति, 15 भविमनापपति, सिवान्यत्-विधानविपया पातिता ननु लिदैव-विज्ञानमात्रमिति हुमणा मिानाति- प्रसपमा नामापुरमानासले न ममप्रतिव मे मात्र मानिने बाहर पुमा भम्, भारमा वसो बगरको प्रचामारामावतस्पताप वपुष्पस पन्यासताहियाता न पते तपासास मारपोरोन मत कति मा । सिंहपर्शममिति से प्रतिमासाममतिबर्सन ममोकामासम्म तमिलना मार मनास्पमा बाप्रमाणात पोस सि मयुरेका पुनर्सय प्रति अपम्पत् मो का गीचे गात टरा 50 समलिपवानोरमास ममोरपनो मतिष -प्रतिपाति सारी प्रतिपायक इमारी पाव वापि प्रतिपारम्प मे मविरका मामलारभावत नापि प्रतिषसा सामान परिपन र नमीमसार म मा प्रतिसामावालाममिनामनुल बी मपामावान श्रीपट बातम्र मदम्पपि प्रतिपामठरेस प्रतिपादने उपायलानि मा एमे पापा-माम्मतमिति । प्रतिपाप्मक परका मार-अप होति । श्रीराममममी या वस्तुमा प्रतिशत प्रतिपक्षमामतेप मतदानपात्, प्रतिपासणी तमामताना सपनामात्रणामानुपासवर-मपोरपीति प्रविषमपीपारकोसमोरपीसकर पाय- मोकाट पाने सधि सुमन याप्पति । मात्र सपुष्प मेति शिवपुप्प न मालति बपुष्प प्रोन निसान को समास को रामवासवितामानिमित्त सिप मारित मा। पान्दम्म रपम्मान पिणार्थमनपरिना मना सामावरसम्मान समेत प्रीयो कुम्पत सार-सम- यन्तति। A.बमामिति मापद या वास मान गरिसतिता निमातिसमास atar या-विमामपिपपा ति, तामा पसमा APARम् तपनमा मारे वा गिरे। निम.. मामाला || ... समाजापन । 4. () R.बर्ष ।
पापायमानुसारिणीम्पास्यासमेवम् [शाशमययाम् निकमायमिनुसात्, विज्ञानवस्वाचाहियसमिानवचसी मोसमावेश्यनारमनिराणिनगरसोर मनायनप्रसात-परा दिपिानमसात् सदा निक्षमावमिद समिमनिमि सयमनिमिसास्मान् प्रतिकि पारपिपतवेपमाहिसापनपचनासत्ता, वस्मात् परप्रमायममनुच्म्, निशानरचसोर्निमिवपचारिस्चेनामूक- स्वागुम्मचरमपविधानपरिति निसमावनिम्तो मानापसो सर्ववस्तुनःसामार्म म्यापर्चस्वीवि वोपा, 'भप मा मूनिमावि, एतरोपभयात् सलमाने विधानाचसी सीये पामोम्मुपगपासि सर्व मा. सामावमितास्माम्मुसम्मम विरोप[] न । मानवचनसमारतापगमेनेसम्मुपामविरोमा प्रतिया पोषा, न केवळमम्मुफामकिोप एस, मानविपर्यषचसोऽपि पारिम्भमस वे[न] ससम्परसे यत् प्रागुत वम वर्हि सर्प म सम्पपम् , इवामी ससम्ममत्वामुपगमारिति, समपनविरोपम वोपा इति पमत रेतर्पत्वात् । इत्व स्पपनबूपप्पप्रविग्रणप्रतिपादनम्बारमार्गानुपातिना सवतेऽनुमानयो विरोमावितात 10 पपद पटायपि सत् पषारसूचस्वात् , साक्पषद, उभपविरोपाविधिकस्पता- पन्पत्वे तु प्रत्पमाविपिरोपाः छोकपिरोपस्तु सर्वोकमपमत्म माचस्पात् । (पवनति) पवन पटापपि समिति प्रतिवापते, स्वो मासिनत्वात् सतप्रतिमपि, 15 बार टोपियाको साउनम् समामिनिमम्मानमरियायोसारित माझा तो समन्छि- पतित्वरित यायपति मिनी साम्मा व्यबसामानवाल माथिमानिसमा म मार-विहाबवतादेति सम्पनियामतलायो पारिपवित्रसम्वादमा । सारनमे वाममार-पवादीति भनि समाश्याम्पियसिमाना समाचारसत्तमा समामिव न विम्, सम्माशिनाने भवान् नमान् पतिपिपानिपत चापि ममपीपारपर्व सविसमा पनि स्मात् पि न मर्मत 20 प्रतिक सबालमानामा परमाननमसम्म मम । मार-विमानसोरिति एमोनि- पमावान बिरसानिमित्मामलम् समवसरमामयी भाषा मामलोग सामा-निम्न मानविकसति सभापति समवसाबिसमान सेवा पहला मालिसपा सामना पापमय पनि माया । प्रेमप्पाराम रानाको पक्षमापलानुपपमेनोवामुम्पन स सभामा मुफ्फारम रोका, एस A समापसामाग्रत् न प्रादायी नियम प्रसा-पापमपादिति।भपुरसम्मम्म्यत्र म रोपित अपमायियोऽमीमा म समिति समाषधि पनि समानियानयारिम- बारसम्म सामानमा पलमा माया ममात तब मार, राय समारामुफ्यमान है- रमार साबि सी भाष । एष त समापनात परिवार पालामा प्परमपर्वमान तपमानारोवापि सम्मा-पपति मावासो प्रसन्मो समापनामुपगमे । मायामा पत्र भेजाय व् मिस मनायत सिमामाइनबो मतीति । एतम्मामि .लि... इमेवातियादि । मि.म. विरार...'मा .लि.के.विवाहम - 10 दोपतिर्शनम] न्यापागमानुसारिणीम्पाम्पासमेतम् भन्न्तरोतसमभाषते दिवानपपसोरिति स्मारयमेवमा, कमात् सवटादीत पेत् उप्पसे-मबार चित्वात् उपयत्-असिसयुम्पनुसारसामग्रीवर्शनादर्शनपक्षपरायचोमपपिरोपातिविम्मोतुसपुष्मा- विरमम्युरिषचा सखावत्ववटादीनो म्पपासताना सखम्यषस्य माविति, [mमय विरोमानि- निम्स, समन्यते तु प्रत्यक्षाविक्रोिषाः-उस्म वस्म पपनस भोत्रमियप्रत्ययस पचाफ- साविभागस्म पटाविमतिपापार्यसहिवरम सहिमानमरा मम पसरपस्म शूम्पत्ते प्रमयादि। विरोषा संस्त्रमाबमनिळवा, इनोऽभ्युपगमसाचनविरोपायर पानिमामाइनुमानागमविरोभी, मदुराप्रपामगावपाविमोगमा सा विरोपित्वात्, छोपिरोपस्त प्रसयोपाचरूपया पदाइयो पाणी मानरम र सम्वीति प्रपलं सर्वमेम्मषमत्य शून्याः सर्वभाषा इति प्राचयात्, एवं मानवपन एल्याम्पत्वपोरम्मुपगमनिरोपारिसर्पोपा: सामान्पत उनः । वोपरिप्रवर्मना तयैव विशा- सर्वशुन्ययादगतपक्षधर्मापमाषाच न साप्पा, विज्ञानाभ्युपगमा पुरुप एवेदं सर्प धतुरवस्थामायमेवममिन्नमस्तीस्यम्मुपगत भयति सतो विज्ञानण्षणस्यात् तस्य च सर्वत्वात् सर्वमेष पेविज्ञानमा सच पुस एष शर, तम्मपदमिति, ननु विज्ञानशम्पनोस्मक्षामान मुप्यते, नार्थषत्वं विज्ञानस्य, स्वममुदाहरमिः पस्सनामात्रस्वस्थ प्रतिपावितत्वादिति, पनवप्य गुफम् , आगरिसम्पतिरिक्तस्वमोदाहरणादेय विज्ञानमानस्थप्पायनात् । (सप्ति) सर्वशुम्पमापरवपक्षापमावार-न सामोऽसिम्माविपयासियो परायचत्मावि देवयो न सिमस्येवानयोछविक्षेति स्फुटलामावामिनिविधीमई, भपि र निशानाम्युपगमाविमावि भापत् मार-मनम्तऐति । भाना सत्वे पप्पे मार-म्पपहाररातत्वादिति माहारपरचमाविमा वापिस प्रान्तमसपरपरामा-भसिद्धीवि अभिमुखमनापासाममोसनामानि लिभावानि परायच्लाजुम्य- लोपानिमियात् पपुपारिरिति गुमानम्पिो च तवाविन पवन क्षममोगमा दमा मापायनाप मानामपि मखमाले पति मा पोन परमादानामुचाना समस्याम्पमम्ममाने व प्रकारोबार सातवमामा पापमपतियारमना ओनिमप्रसमामा-मपविरोधारीति । प्रतिषिमागी- तय हसति पारेमानस तमन्परिणामस्येमाम्या सोपस प्रत्पत्तीमुफ्गम्ममा बियेप मार मायो जसमावनिम-गुस्समबरमतानिरोपोप मनात इति । परमनुमानाम्मतिरोधपि र स्मार- माविमहणाविति प्रभावाभिमान बामविरोपमाया-भईदिति । नरोक्मप-योतिको सोमारवामपक्षधारीच प्रतिपयते समिम मेम्बमम त्या पर समापो मामोशीत समयमा रा प्रतिपाने प्रासादिक । व निस मनाम प्रयासमायचे सासुमा बामाम्मम्मानरोप पावले मनमायले पनि समानुपमणि पाचनभिपोशमा मयसम्म रोपण पेप पनि सामानत रया-पसार बचनेति। म फेया रिपोम्यन्ते-सम्पति।लाई फार्माविरमात्र मापारिभिर्न समति, महिरपुष्पनापार- पामनारसनानि समामिमतापडियानि सस्ताव परापताविमोऽपि म जियन्ति, एम्मेष पानामपि : मपिता परमार-सबैति।विन समिमा परमवाप्रपरिमाइ-मपि चेति वालालमोमा मामले । सि.... बिमारियायत । बि.पी.सि.. म.विवेका भिसाम। सि.प.म.प्रग्ने। 10 म्यामागमानुसारिणीम्यास्यासमेठम् [सवण्णाम् सतो स्थिानम्पमस्वादिवि स्वाम्मुपगत मसिम्मानिमिवामानःसाभाम्पमापाप यिानमाम्मे सबै सम्पसिारिवत् जामस्सिावनपुत्रसम्मानिमपार्पसुपासावि विधानमपीत्सतः सास विकानम्पकोष सत्तात् तस्स र सर्वत्वात् सर्वमेव पेस् विज्ञानमात्र स प पुरुप पर मा, वन्मयप्रेदमतीवानाम्वामि- मतमपि पर्वमानमेष, विमिसमासमिळवणापरमावत् सुप्तसपात गगरिततुरीयाम्पचारमा यात्रमेरममिममेवातीजम्युपात मपति, पमोड विपिनिधिनमारम्भ माइ पुरुप सेव सर्पमित्पति, पनत् पुस्पसूत म्याम्पत वनैमेति न पुनर्विप्रियते, पत्रार-ननु मिानसपेनोप्रेमामात्रमुपस्ते, नार्पयत्त विज्ञानस, सामसिदार्शनमयाविनविमुपास स्पनामाउत्तम प्रतिपातिक्त्वामानामाष, प्राणाम्य मारफलमाभावा, पयोग 'वामाने उपप्पसत् इति, प्रत्सुपरफमेव पप गायत् समसार मिरिति, पत्रोपवे-एप्पपुल पागरिवम्पतिरिक्सप्पोपपरपादप निशानमात्रसम्सामर्थनात् सप्रविष्य 10 बार मापा प्रमायामाणमामल[] र साम्पयन्दमेराम्मुपगमोऽसदसम्मानी । पदि तम्मानं किं स्वास्प बागरणाविशेपर्ण घटते रमयोरप्यभावतुस्यत्वात् सपुप्पस कम्प्पासुवाविष, मतिपायमस्पेक्षया इति चेम, उभयारप्यभावसुस्पत्वात् । पदि तन्मात्र किमित्यादि, पवि शिानमेव समोऽसयो न मपति सस्मिम् सो सिरानमः मम्मुिखमा मिसपा मम्मेद, सामान बिनमहविः पुनम्न्याषिो मासरेच पिस यो मिरपुरम्माधिमासिमाबामपनायासावर सिमेव पर, एक साक्षसायनित मिफापतात परम पवित, मन्यमा परम्पर एस मार, पप गरि निम्म पुन समसमासे पिय पर समयमईमान बयलपठानियतमपि ध्यानमेव विमापारमम्म पशुपवर सम्पर मन पुम्मम ममममममामामतमोमाया मानवविवामियन पिनास पुरासमुपन मातीत मात्र । पुस मनिठत् विपिरिपियो पुसवाई सिक्ति वा पुवनिम्मत मा-पपोचमिति । 20 पुल एष समिनिमपि न अपमिम्मियपरिभानस प्रपणामारोपप्रत - निममनोमयत त्यामस सिपमापरिसिमावरप्रसारमानाम्सापि सचिनम्पमाला, र सम्पमा परि विनर सामसुमायो माह पुस्पलादम्य सामावास्यवो सलाम-नु विज्ञानशदेनेति । माम । प्रविमानस्पमासिपारिभिरण पत्तासमापि प्रामस्पेवामान मारम्स पैरव नम बिगावामिति परम्भरता प्रमापा का समरपेच सातामारा मानस पालमपरस्पतम् म मिानसम्मासपी मानः । न माममा रमाप इति मनसेष माये व प्रामापि प्राप्रमणेऽपि प्रापरतणावा प्रामपसमापनाम-पापपीति गर विमल पर गारमनपाममापि मान्यता पान्तलासम्मवात् वाभिमार यार सम्देल बाम्नीयमेन प्रमठे बीमागरमा प्र गाविने मिासमार सेस्मा पारिरलाय मारमा प्राधिक मात्र । म सापेपि भिमेश्या-सप्रतिपमवावेति भाषा परिसमाप्पम्, मा सम्मान प्रदान प्रमाबामाम मागोमाग पण पन्तेषमाप्पमठो बाते पिसाब सम्म परी पापापभारत्तपोनिमार पर निशानमारमा पथपरोपियन समस्या- परियामानमिति । म्पो-पान इति । कम्पिकमाई मायामोमो - सार, सिमानार स्फेपो म माटोति प्रधिसम्, तोमर ने मोनुर्ममा जमायतम पुस्मस बात का मपनी जा पीतारमन सामेल समिमप मम सम्पुर्यनमपि सर प्रदिप पतपेपमा यो . मिन्समाक्वाप्रतिपा] माधाजपपरम् मेष मपनिमित्वम्, बिम मयापगमोऽसले समसिंहस्म बामसिंहपना सापाम्मत्सुनिमिच ससमेव प्रीतितम यामसुत्रदर्शन स्वप्ने वरपेधाविमुझे प्रीत्वपगमात् नैदावित्पपगम्य बामविमानम्पतिरिका खप्पोदाहरण पुम्पते, मातु स्वससे सम्म बागरपरिष्क्षेपम न पटते, फरमात् । समयोरप्यभाषतुस्पलात्, पपुप्पम पम्मामुवादिम, प्रविपापमत्सपेभयेति चेत् मान्मतं सौम्परयन्वयोः भागरणस्वपरिवानपोरयाँ भावनुत्त्ववं समापि त्पत्पसियामापान स्वानेव बागीमावास्वप्रतिपादन मुन्न सम्मत्रमात्मा जित, भगद प्रतिपापम्म मलेरनुरोपासाया प्रतिपारमितममावतस्पखेमीसेवब न उम्योरप्यमावतुस्यत्वात् मरप्पमतेमदन विशेफ्म प्रविपापस्म प्रतिपादकादेप्रतिपापाविशेषणमिमापप्पमामास्वत्पाभ पटव] एष । कियाम्पत् समयम्वोऽपि- सपुप्पम्मुवसनेन च स्वमसिंहदर्शनवदिति पचनं भटते, स्वमरयम्तम्मास्याने न प पाभयह विविशेपणमस्यामपादिना पिना ननु भषितुमईति, विज्ञानपिपया धास्तिसा 10 ननु पितय, सतब स निःस्वभावमिस्पेतन्मिप्पा, निर्भयच नासिव नास्त्येव, फुतस्बिरसतो पस्तुनो विशेप्य सदेष शक्यं पहुं नास्तीति न शूम्यत्वं सत्य, सस्वमेव तत्त्या, स्वमविज्ञान सिंपदेरपि नास्तिवमम्पासितस्वं सापयति । (पुष्पेति) सपुष्पम्भुवस्नेन - सासिंहपर्शमयनिति बपन पर अपुर्ण म भवति सिंह इति, समयम्तम्मामाने न च पामहरिविकोपममइमामपापविना बिना न भवितुमईति, 16 मम्बिसनुमापयति, विशाम्पत्-विधानविपया पारिता मनु सिवैप-विकाममानमिति हनवा विधानारिक- - सम्ममा सम्पुर्शनासते की, भगवतिरछी ने सिनेम सकिने स्प्रेगर पुमते म, नमानपोकायो समायरमो मारनामाणसाला कपुमा समाधिसका न मावे पा समस पावरकाम नती माता । सिरानमिति को प्रतिमासमाममहिम्न मरम्माणमा तस्मिासना- कामात् समास्या यसपास लेड मिसन मयुरेश पुत्र प्रति जापरमात् रूपये भाव दरा 20 मनमनमोरमान कोरपकमो मति लोपः । सरले प्रतिपाति मापा प्रतिपाव इसारी प्रतिपाय स्पपि प्रदिपारसम मे मनिवास रामानतापमान जी दापि प्रतिपापस मामन सहिमा यसशिपमा मकि तम्मति प्रमामायाफ्तारियमिमीमहसम्म भापति मयाम्मामा प्रीपपट बलतबगेर मा सम्पाचेपि प्रतिपामतेरेख प्रतिपाने उपायबारत माम। एकमेव पाचो-याम्मवमिति । प्रविषम पर मान-मरीति प्रतिपयममपेपपति लगाईम पसते प्रतिपमप्र श्रीपायसामवेष मवर्मेरामानात्, प्रतिप्रणपी-20 पारम्मम्ममा मानतमामाशयतारिपुचरपति- भयोरपीति प्रतिषणतिपारमोसमोरपीaur- गोमाताले मुरासे सी मुम्मा इसा-पुप्पेति । मार-सपुप्प मेति, निशा पुष्प र भगवश पपुक जरासेन सिम्य समाचल बागपते भन्यवाप्रमावासनिफ्स्पारमानिमित पनि मति मारा। मायान्तस पयामान व वापि सम्मपत्तिा मा सामादिरसम्ममा समेत प्रतिपय पुम्मत स्मा-सम प्यम्तवि। समालमिती सत्यतेलमा तरपन सिमपार गरिदिना निमाचिलममामा पाठ मार विधानविपपाति मिनायाभरपसार सबभा निम्नमित त्रिम् दबाव सामानसमापन 18 am मरेपलि एम. मात्र पनि प्रदेशमा भागव । .सि...सबर्ष । ॥ (11) पापापमाउसारिबीम्पास्यासमेतम् [सान्तम समभ्युपातमेव बम, बम समिसिमावमिसेवम्मिया, जिस-निर्मपत्र नारित माने, स्वामित स्तो पस्तनो विशेष सरेप शाप पछ नासीति संस्म पुर्ण नाखि, माशोपसेवि नाविध्य, वम्मान एकल सर्पम, समिति सत्तमेव पत् वा-वेन प्रपरेप, सप्रधिानसिंदारेरपि माचितमम्मखिल सापम्तीति। मपोच्येत विज्ञानातिस्पमपि र प्रतिपयते । कम्पनामाप्रस्वाद, विज्ञानाति विज्ञानम्, तप्रियाभावे कुता ! स्वमे सत्कारणविक्षेपमामाषामियुरोऽप्येवमेव । भयोध्येतस्यावि, विमानातित्वमपि का मतिपयते । पसनामाम्बात्-सिरतारिखम्प एस समावि मिानमपि, बिगनातीति वि विधान मात्, सा विमानविना पर्च पा निस मारि, विदयामायात्, मो वापसमाह-विजानाधिशाने परिश्रमामाये -तरिमानातीति 10 विधामम विज्ञामत्व म्यात् हिजो धर्मव्यसति वा नाति मित् परम्पत्, सो वत्मरपतिक- मामापारियुसेऽप्येवमेवेति-बामासानतापि लामिणावगामाचे विकामयाभावात् प्रशिान्य- जिवामी। बत्रोच एवमपि पिकानपि पाविज्ञानाधिशेयभानपचनविक्षेपणमेदाम्युपगमात् समाप एवाम्म ॥पमतोमलया, नो पेवभाषाविक्षेपातप्णीम्भापर समाप्रपणीया सात्, तपाऽविज्ञानामाव विपु ममात्र गति। किंमागारिबिशेपेण नातीति। ग्वाविशेपेणैवेति। तत्र यदि विझे- माद, एन्ति पानिमा मामामामानी मागे रात्रि मन स्थितिमा अभाव-विनिमाविमा मालाम्पर निर्भरशेति तो मेरे मम ANDRA पई प्रमिलमटमार-समिदिति सममित मनाना रागारियाना देस पुन ० प्रचलि बईमा पुर्व मलबम पुर्ण नाचति गम्मत पसापि पुमेव मान बल पुमममुभा पायति बपलपपिसी माम, एसबसपलम् । यिोनिलाम् प्रमापात्पमालावरून प्रमिलोपना परिचालिमा समातिनामिपि मामलमा पत पायी, सानिमा मना-सामेति । नुनमा नाकामा बसायावाद जापानमाविन माय मधिलामिपि मावि पनि समार-मयोप्यतेवि। प्यो- दिमानास्तित्वमपीति । नियबासनम्, विमानसम्पति ति मार, वे भरि पनि समेत समाविम्बर्मामा रमाप्रपामासम्म माता का नया भिमान र वमनस्मिानामारय मानवामान मात्र सम्पन्न प्रपी-शिनानिमय मिति निमनात मिलीम विस्माता समक्ष मार मानगवामापा र । पाव मिलन अभिपरपतिमा-मातीति । म पनि कारभरिमामासात् सामान पान हलमासानसापिसाबबाद शिलनमा मेय समे तत्परनेति । मम नातिनो लग सामुमत कर ह.भ.पुणा पूर्ण। शिम बिमाकिया , ननपावपि पस्तुससम्] मावाजपपत्रम् पेण नासीरपुष्पसे प्रासादिठरेठरासामप्पासंयोगेभ्यः ततो ननु निर्मचाभरातत्सम पहिसम्वन्पाविस्वमेव घटादेः सम्यते । एवमपीस्मावि, विमानपति विद्यानमित्यविमानात् सीजापरिभान निक्षेप्यते स्वपैच, बारि मानमिति प त्यो बामदिवानात्, या विश्वामित्मविश्यात् स्पषिपयारनामामात्रामद्विपयो म्माति, भी नामपियाष निगरपिशेयमिति साविपर्म बस्तु, दर मेरनामुपगम्पवे मानापनपिपस्तपा । सदर एसम्मुपगतोऽत्र सपा, नो मे दिवानपिपिमानापिग्मानपपनविनपणमेगामापारमामाबिने- पापणीम्मावत समाश्यप्ीया माम्, किनान्यत्-सवाविधानमारि, सिमानमपिन] विमान भवति, मामो मारो न मरवीत्पतिए नमान गतिःविचार्य सपा माध्यम्, किमत्र निधि सचमसर या विाना प्रागारिविक्षेपप नातीति । नाविन्सपरेनेति निपाय हि, पर यति विक्षेप[व] भाटीयुपवे वा प्रासमारिवरेतरासामप्यासंमोगेभ्यः पपा पटः पार नारि सहापरमाया, पयात 10 अप्परने, वरेवरखया पटले, भसामर्थे सिमते, भसंयोग गर नातीति तो पपार्सन ननु निच- मादि, प्रागम्परे नाचोऽसीति के विलेपपति, पमारमापऽसमस्याऽनीति, इवरतरामाने सोऽसि, सामप्याम्परे समर्याऽसि गेसपोयमाने बदि संयोगोऽसीति, यस्मादस्तिमेव पटम्म नम् विसपपति । भयोध्येत नषास्त्रीत्यविशेप्य पन्ध्यापुपाविषयुप्यते, मप कप पुनर्मम्म्यापुमनालिस्त- मपि ! यदि न विपपो, निर्वस्याविसमागभाषाविस्वभाषेषु न समवेत् सम्भयति तु स्वप 15 प्रमाणे-पप्रमपीति । सायामुपमे मी-विमानातीतीति, मिानस्मन् सामन् समनिशान नियमात पलवलानमुमते बामनिलाच समान माविमनाति प्राणिमामिछुम्मत ना समान, परस समय पित सकरानियवासपो वारिसोपोरीसारपसाधिवासार्वरोम्पानि इति सिपत एका स्मिानमनिमाफियोनीस मोनामुम्मा का पाप मायरियामा तमिपावनतिमा रमा एषामापासपी पारा । इत्ये मरेल लगा महिमाम्मुसम्मत उमाकामामामिपिप्पमापबामिानविकमाधिमाधिपानी मेघमासार 20 भारिपत्तन प्पोमात एस प्रमाणपोया मामा-मोदिति। म मिान नि मी मागे मागेममा परेमामालिएपते । सिम्मति पानिपते। एम्सुम्पत-पिवानमपीति।कान स्पिा व माटीपारी बालमिता मत विमा भरपरसमा त Aled भी ARYAN पानेमतत्व dि मनमायामी-फिमक लिमितमिति । बाम्रा पति-रिमागरीति, प्रा पार, सतना, समपति मनपानिया रेया हिरवास्तिमाइनिरोप कीसमिमानिस ससार पा- पीति, परवाना रसविताना प्रामाविर, सामाजिम बानिय पयरी पवितरितका वरमादितम्, पिनास प्रवत्तािमनाचित प्रारी शिवतिरोपवामि- समेनी मम्मो मारमा पर काम निवास स्थानावरपुरासन माल- खुनी जम्ममा पुगे ममाति, मुरेमाची प्रमुख वामपनप मम्मत fE मेरमपरित भाए । पादत-पपति । बटिस्वामार-सतो पपासंम्पमिति र nि मार सिनिमार-मपोम्पतति । शनापरिमारिपारमा मापन 1xx.मि. पपमाधाना प.म. समयानलमधीला IFT... नेण्यायवापिसे । हिम..नि ।
न्यायागमामुसारिणीम्पापासमेतम् [मापसमयमास्तम् मपितृस्वेन तत्र पेतनस्पानापनन्तकर्मपरिपचानुमाग्मनायनन्तभवेषु स्वयात्मपरित्यागनेवर- प्रम्पपदम्यपामरतो मनुष्यत्रीवन्म्यास्वाम्यां प्रत्यायस्य अन्मान्तरे मनुप्यनीस्योत्पथै पुश्यत्त्वे ब्रम्पार्यामेदाम्पा पुत्रवती आयते । अयोध्येत नैवेस्मादि, अब मा मुरेर नचाखिरयारिमसा इत्मविसम्म मानि व । भवती माविपर्यायैरसिझारिम्पो बम्मापुरतिवदपि पारि पन्त नासीरस्ते, एर व मापसे, भत्रापि मा-भय पुनरिस्पारि, पन्मापुरनाविस्वमप्यत्मम्दामामाभिमवमसिहमतो चिप स्वसामर्पसमम्पप्रमापारिविक्षेप[पापाना]प्रतिपेभवापिनेर नमा सामाम्यपिकरण्याबरलपति पर सम्माषयामा, पनि न विषय इम्पति-परि पम्पुरोऽमम्वामाना मात् मित्तिाविसमागमाषारिसमा म सम्मवेत्, सम्मपति तु सब मक्तृित्वेन, समाचामम्वामाषा, विहिं ! सम्भपतोगमा नित्तादि 10 मपितृसम्पापु, वपामाप ससम्माम्पते बम विनमवन शिविनम्, वा वनस्साति, रवि पेवनमास्म पमन्प्रपनवमरेषु मचितुमुत्साते, या ! कर्मरियापमायात्, भनाचनम्वकर्म बम्पसम्दानम विपरिवर्चा: निर्यानरपमरमरमवार पे पानापनम्वा मममीण एष समान- परित्यागनाम्पबामसम्व', श्वसम्परत्वपम्पबत्, पका पारम्प रूपरस्मन्मस्पर्शग्यपूर्ण वन्यापरिनागेन मूपुरपशिपवनवनस्पवित्रसभरिभरतीवोमरणावपोपोवारिपरिषयमा सम्मदिवसापामारमानणामाम्सामागारपरकमममाणाधिपरिमिरमेते तवा र सम्पापुरानामा पानावनात विहाराकोरमस मण भय मा मरेवेति । कम्प्मापुतानामप्यमा नापित मातोप कम मायामधिलागनामे मना भावनात् विलासिदिनुपरमति-मपपमिति पम्पापुरमा मन्तामानामित मानिसलमान, सिंचामादसवारपद श्रीवानिमा ममा समामाविम मसात पिाला- रो पास पातळ पार मावति माविपदेन चिसयसमातापिरम तर पेपटीति पम्पापुमेऽपि PO मोदी मै सम्मानमाम इति मा । कीमन्मापुरमाणित विषाविकीपरोन मात्र समापन पीनेवरिप एस मात् of चामव्यवतीपसमाप्त न सम्मत, सम्ममा बर्ग मरियम चारपततिरेकरियर एमर-पदि म विपप इस्पातीति ल्याउने माति प्रसर स्वरसत्वातिपय पर, मविपत् पाताभारत मा सम्मवस्येवेति पमपुत्रसाबित बिलामवासितापमान पर माप सम्मोस। बस मस्तिबमातामहारपति-उपपेति पुनादिल मी सम्पामठे मी सनातनमन शिरम, म्मममपि चापपनस्तपर्णमा को बन्धमम्मानकाबपरमाण परम्पगेनाम्पसम्ममा भावी मा । यसमामाननरनि, मिरामनामन्मनु मभिसत्यत की पर परममावार हेनुरम्म्, पप्पात पाच मर्च पगामा सामाग्मपाल पाना- मरेप मामम्, पररामम्पवात कमाल भिलामणरमा मंगा नामानिमा पीयामा बना माहरोशिमा मधाममटेड मानरामरपए लेभमादमारपम्पिापुमा सरमनपारि समेत कलापमानामा मन्तति मात्र । प्रान्मारनावणम्पपदिति कायमार पुम्मम्मी पान पी पवेति प्रत्यर्पण मान-सम्म पनि मिटमा व मया मरसम्पर्क पवम्, पब सत्यापलिम प्रोममायोतिरिकभरी भाष । पतिक दिसम्बरेल्वेण्मरणिसाव भविषय । दिसxx.hi कम्पापुत्रमपनम्] मावशारजयपकम् या पानुमति पपा पेवनात्म[ना] फर्मपरिवर्णनुमाविमनुप्यस्मीपमालामा प्रसार जम्माम्वरे मनुष्यस्वोत्पची मीयोसची या पुत्राने इमामेवात् सैम पश्मा पुत्ररती नायव इति । मत्र पन्मापुत्र स्त्येनमय वमन पर्शपति- अनन्तरभयपनमाभाषानतिरिकस्यात् सकर्मा चेतनोऽनम्म्यावेऽपि तदत् पाठपुमार पदा पक एव, अनापनन्तकर्मप्रवम्पास्मकस्यात् । भनन्तरमयवनपेलाबिना पावस् प्रपन्पास्मभ्याम् पायावेऽपि कस्मात् । वामानतिरि कत्वात्-सम्मात् पूर्वस्मानाबादनतिरितः सर्मा पेवना, वात्-पूर्वमम्प्यात्मत् पुत्रयस्थपर्यमसम्मूवापि, परमारपति राम्तान्तरे छोप्रसिद-यमा वाम मारो युवेदिपायेप्यपि स एष मपवि दया पम्पापुत्रयस्थामस्मयोरेफ एक जीव इति, पय वायवनस्मानापनन्तमपम्पयित्वात् भावानतिरितस्वार वत्ते पम्मापुत्राधिस्वमुत्तम् । बरेवनस्मापि घूमा वपमा- पम्याशरीरगताना पुनठानामुरहटानां मृत्त्वमीमाविस्यसम्मूती पन्ध्यया लिया पुंसा' बाऽप्रारितानां पुत्रत्वेनोत्पसावपि पप्पापुत्रासित्यमविरुखम् , तदन्योऽन्यानुगतिमन्तरेण तदभावात्तत्तस्यैव तदेष या, शरीरारम्भवत् , तस्मात् सर्पमिदं सर्वस्वभावमशूम्यमुत्पति- स्पितिविनाशसहितमेकमनेनरमर्फ स्वपरोमयतोऽस्त्येवेति प्रतिपञ्चम्पम् , उतन्यायात् । (षध्येति) बम्पाश्चरीरगवाना पुरानामुस्वानांनतन्वमूत्रमावरसरभिरमास्य परी सत्वनीपानरयसम्मूग परम्पया मिमा पुसा पाऽऽारितानो रच्नुयारिमायेन पोपाचा पुश्तोनोत्पचारपि पमापुत्रासियम् वावाननिरिकयात् मनापनन्तविपरिबताम्यवाणारिमागिना भगति-तपातनारमन इति एवं तमोऽपि मैना परलतामनुमस मनुपमहान पात्मनाम् पुपर मिसम्म समान्तरेममुपस सस रोपप का पुनका भी तय कम्पासपुनावपर्यायसुभानिनस इमामेदे.' बार कम्पमामापरबेतन एस पुरसार गत इति कम्प्यापुवादित सम्भाम्पत पनि माग । इम्पार्थमेशाम्पापुरती बापट मनपात प्रामवि-मनम्वरमति भम्पादिवसमकमायाबर-मबाप्पाऽपीति पुरसफपिपीम। भारम-पुकारकर्मायानुमतिमात् परमम् मरे को पाप-पावे ममातम तलावासनपूर्णपालन- म्मलित मटने वामप्रेमारायसम्मदिन पुसत्तासम्मवापि सोपस्थापियो पर तमो मापी मतान्यान्न सामग्रनम्वन्यामरसारित माष । एक एस फेनोमारियोजन्तपु मामी उपपेपरमा- पोपवायपि सिमामेम्पोमतिरिकत्वात् पुसतमापतौ मम्मर पुरस्त गति बापुनामित तिमि पुमान- एवं तापदिति। तदेव पेनसम्मान समाग्रसित प्रमाप्पामापाप्रम ठरचिव प्रसामगति-म्पाशरीरगताना- मिति । एभ्यासापारमारिन्प्रेषभुम्म मुगा पापमा पाला बन्नापमापुरीगरिकता पनिमन्ता महामार मायमापना मा पानिपोपमुषा सम्त पोषितभा प्राप्य पुरा समस्त सपना पुरषोपभुष. माझ्मासार पुत्रले प्रेसवे हा मार्गमेशात् पम्पापाय स पुरणामी ला पायापुनकि सम्मम्मम्मैन मारे-पप्पा 3 शरीरेति । इसे पाम एलानापमम्परमण महिनुमत्ताने मनाएनन्तपरवचम्पालाद, स्वपम्पाद, पुसाम एर बापरम भागानीका नाममारलार प्रयासमतिपिछी-वमावि, पान्पामा - 10 म्यापागमानुसारिणीम्पाम्पासमेतम् [मारावस्मान्वयम् म्यापेन्पविरूप बम्पापुत्रलम्, वरापयति-सम्योऽमानुगतिमन्तरेण वदमापात्, बपन्नोम्पामुगदिम- म्वरेण म मावि वचमैप, तरेस पा, शरीरारम्मवस्-पमा शरीर वेपम्, पुरगनापनम्वरमारि. परिपर्चम्पपावापन्योम्पानुगतिमन्तरेषमानाथ पाम्येष वानि जीवद्रमाम्पामि, पपा पम्प्यावा एप पला पुत्रपाम इत्मविरुवं पम्मापुत्रत्वम्, स्मापनि कम्पापुत्रा, तस्मात् सर्वमिसारि, सम्म • पारे सापनापम्पसम्मपात् प्रविपापप्रतिपारमाहारामावात् विमानमात्रपयसापि समापुरुषमात्रमा भमुपामापतेः स्वयमापुत्रारियम्वान र ससर्गरमावेऽसमसिटेरियं सर्वसमावमालम्पमिति प्रतिपचम्मम्, बहुपर्पविपर्ययेप्पम्यगावप्रवेमातनिर्मान्तकस्तारनिधिविनाक्षेः सविमेव सर्व मेकमनेमत्मामगिरम्यगुणवाविषत् विचित्रवर्णकम्पसबा खरेच प्रम्पचापरिस्स्तिववार मावा परत मयतमाम्सबै म नाचीति प्राममुखम्पापात् । मात्रा- मप फवं स्वपरोमयमाय इति भन मः संसिरिसंयुम्पनुत्पादसामग्रीवर्सनसवाद नेम्पो हेतुम्पा, ससिद्धिस्तदारममेदकोभावेन समापा, दीर्पत्वं दीर्म एष, अपरायचत्वात् , तरि स्थायचमेव, यदि स्वषिपपमेय सम्म स्थात् नानामिन्य मध्यमादीर्पतायामपि कनिष्ठिकातो वीर्पा स्यात्, स्वास्मन्पषियमानदीर्पस्यात् , सपुष्पवत् भवति तु पीपि स्वायचा निहि सापेषस्वगतदीपस्वपरिणामात्, तथा न च मध्यमा सभ्यरिदीपवायां मनामिका भवति तु, एवं इस्पस्पमपि। दम्मामा मात कह पास पानतिर जानी-मम्पोऽम्येति वा पाया पम्पावासमा पापुरम्मत कपालमापनबनासम्मोग्यावपतिमम्वरेण पुरमामाभागाला पाम्पमा परीपरम्मपदिति गमिमारम्मदेवेन्याम्म ब-परम्भपायापी-पा पर पामिति पारम्पसम्पाट पाए म्यतामायमर यानप पानुमति तम परतरामुपमममन्दरेष वामा पुग्मनामा प्रायमर पा, कोपतानविपरपर्व बसपी मरयलरामर, साम्पोम्पायुममममन्तरेषावापय सीपम्पमेश पाममा पासव पाउप्रावि दिएसपी मार पण पपासमन्तामा मात्रामा प्रामारिदिपपीमियादिवशियम खतमात्याग श्रीराममाषामबापनम्तमतपरिवारमवतापोभानुपातमन्तरेषाभाष सभापति माननम्मर मादिति । मामिल भाषामा सर्पशम्मपार इति में सम्मान प्रयासमा पमा पासपमधम्मवान् श्रीमतिमारमाहारानगर-समरिमोगर मात्रामुपये परपलायन परिपुमा पापातम माविमा नया प्रमत्तमापिनाकिर प्रय सामालियामसम्ममपन्तमा मापदुखाति पराममा ममता पसर प्राप्रमरट मामाभरभाम्ता एसपर लाएमग्रेममयम स्वाम यापि मरुस्सुस्मिानमा बतानमधरस्वाभिमाया मा. परिसमोरमसमगुबवरम् विपाहमा माप ममसामनितम्या परत रममावासा मनु मावि रम्यागमितपणेमस्तु समझिम्म वाममार-अपरूपमिति। .हिरेशममने । - . सिरसावितबा मारशारमपचकम् भप फर अपरोमयमान इति, मत्र भूमः संसिदिसंयुक्त्यनुत्पादसाममीदर्शनसाइन- म्यो तुभ्यः-ससिरिमापत् समितीमाष, सबै माग मेवामिमवार सामान्यान्वभूताः परस्परमकी- वा: सिमन्वीत्सव मार-संसिदिखवात्मभेदेकीमावेन सापा, संसिद्धि सामापा, सानिधिः, गसमुचिरितानम्वरम्, पासपति दीप बी एर, भपरामतत्वात स्पायचत्पादेवेत्सर्पः, परि हरीपर्व परवमेवानामिनया, बलि साविषयमेववत् अनिहिमालयापेक्षमनामिकादीपत्य स्वन्मवेन सात, नाना- मेश्रमम्पमापीभवापामपि कनिष्ठिकानोदी स्मात्, मध्यमा दीपा या खगोन हम्परवपरिम्पमेनासा सटी पा पुनन स्मारेपान्तिरापेक्षयापि, सारमम्पषियमानीपस्मात् पपुप्पयत्, मम्पमायाम्पत्वात् , ममति तु रापि, सायचकनिष्ठिमपेक्षसरावदीपस्तपरिणामात्, वस्मात् स्पपच दीर्मलमन्पमिमयाः, तमा न प सम्पमा सक्रमशिलतायो-मसम्पपेभमप्पमा सपरिप्यमाचस्मात् सगवात् खति, न लनामिप्रपेमात प्रदीपसपरिमामात्, पी स्मारिति वर्गवे, मपति त वस्माइनामिमय मप्पमायाम कनिष्ठिमपेक्षामिमव 10 पित स्पयचमेव, पीतयपेक्षे कसे संरतेऽपि सवो इसवयपेसया पीपत्पस्मापस्मिवत्पात् , एपं दस- बमपीति, मननेष न्पायेन पनिष्ठिम्रया सत्पमपि सायचमेवेसविनिति, पनि साविषयमेव वतनपस्न मितिमऽनामिनीवायामपि सावपपारिम्मो पी मास् न पानामिप्र मम्पमापीपवायामप्पीति । कम्पनिमार-समाति सपोमा समस्तिमिमम्-मा समानिमिमकामान्दिवेगापुपमा माग्रिता लिएक- प्रामक रेल मालितविसापनाम रम्पति-संसिसीति । विमापमा संसिबियपदिति निरिमन IS समपर्म एममा-कोम्मानम्मे पत्तत एनिमा विशि मरे मामा पापलास्मो नेशः सामान्मान्त- भंसा-भारत परत्मनिराधमान मिति मापापः । भमुमेवाएं म्मा-तपारमति प्रामाम्मरमानो रे मेपदेप्रमेप्रमाकन साफ सानिमम हममेरामा सरमाण पत्पपिपपरनिति समानार्वाही मारमक एसियो शिप एवा, पपरमानिसमा पनि वर वारममा गिाममामिलामचि बारम्परिमार- पमिति मनमिया सस फामारमनामिप्रयतपत्, परामपले सम्मपहिया ऐपतस 10 परमेऽपि गिरि जि । मामिप्रवास पर समिपमेष सम्मत नियामतपेजमनामनीपत ५ र मानामिम मारिरि पत्यमिति । बन्प्रमिम 04, भारम्तिरापेपमापि सम्पम्पनिम्मानपत, पुष्पात, सारमनिसस्पतपमानापम मप्पा ग पानामिप्रपा बसपारगत परत स्पदपरमो प्रतिनिस्ट श्रीमपेवसमाप्पमानादिस्या-नानामिति मप्पमापवायामपि-मप्यमान व प्रशारीमा प्रअभिप्रेमान मप्पा अपि न प्रश्नो महिमा अपि पायममुरमम्मी पिमा मते मान-सम्पमामिति गधि पसानिमा मपति स्थिति हिलामा समन मसरमेर पक्तियामि माति सापमा पेस वारम्मेवेति मापा मामिप्रसासारवासएमप, पाच मपितात, पम्पोरा पा इपेक्ससम सपा प्रपतवान् साम्मप्या मेमा-सयान पेति।मामपमा मामिप्रपेपरचमान एवं मार पपेपरवे मारसम्पतिपमानवामिजा-मस्पमामिति मसमप्पमा पसिन क्मात् पपेपठाभिमत दोसारमेव म परमामधार-मयतिस्पिति म सध्यार पारपारिपनराजमाता पिता प्रमाणितमोगर-रीपतयप विमा तारिखार माम्ममिकर-पर्व हसत्यमपीति। रिया एस सी मीसाब मामि xxH । .५रेम सेवा - म्पापागमानुसारिणीम्पाम्पायमेवम् [सणवपमानम् फस्परेवो:- स्वास्नानास्प्पानतिकमा एकपुरपपिम्पुत्रत्वाविवत् सया स्थानियमवई स्वस्वदीर्म- वाप्पापाता, मात्मगता एष हि वास्ताः सापेक्षनिरफेवा परिमामशका पुरानामन्येपास। (सगतेति) महावनागसप्मानविकमातु परमागमगता एक तासाः सापेमनिरपेमाः परिपाय- पसीपलूममुगुरुनिसानिममयमूर्व वन्य बतनत्वारपा पुतणनाम् , अन्येपान-पास भस्मफागन से से परिणामा, नेमार्शनात् सर्वसांस्मकम्मापनये या विध्यारिमान्वये, विमिन ! एखपुस्परित्पुरत्यारिवत्-नेका पुस्पा सपुत्रापेक्षया पितृत्वेन परिश्ता सपिरपथमा । पुरलेन वा मातम्मागिने अवशरपौत्रगौरिनभानीयमामोपीमामीपमितमूसामिषासारि पक्किमिा परिममन्त सान्बनिरपेयर पानदर्शनमुनासोमार्गमगरिमिरुत्पादम्परमौम्मम्ममा 10वस्थात्, न च वा पच्यवनाविपमानाः सम्मान गपुणावाविय, म प तास शीनों परस्पर विरोमो नाप्नवसा न च समा, सपुप्रापेमपा पितृत्वस्म निरवत्वात् , एवं पापामीसव बारमार्थ- वि-पमा वा निम्मरम्पतीमत्वाम्पापास लवद्विरोपामारोपनपनम् , वमा सम्पनरसादोषा- भावोपमयनमपि द्रसम्यम्, एक नेवरेवरामादेवरेसरानयासिदय इति । पा समतेष एमालपरियामेन बम्मेव पायता सम्मन रमाणिपि म मात्, समानानिमपि मनमा सपनामलपरप्रमेन सो परिकता नसायमार-पीति सत्यद सलमानकारित तमा तमा समिति माग मसिमानसम्बोनस सेवारि श्रीपेश हमाल खरा नपरामदत्लाद, परि साल मपमाया बायमेन गोसरियमेश्य-सम्मलाताच मपमालालम्मवेब साद, पमपमानामिन- सवापि सम्मानिसा बामपन्मिानाबालात सुमार, मनामिप्रपेशमिजात मी सापि, सामामिल निभायमा कम्पबामात या सम्र म मान्मपमान बवासाराम 30नरपेवाभिमत मले बारपमेव सरापेमे ने सापेपि सो रापेममा लालमायस्मितवाल सातवा सायरमेश मा मोरयते यत्नमाचतानिसगति सपा या मापारपत्र पतिको जगमुममे भात मात्र कपिल भाग 1 प्रफेशातलो लपलपरामप्रतिमा पसादारमपता एपेति एपमा पापण्या भारतिः पल परयाममा एमा पापेक्षा किरपेधाव व माजमारय पेसा परिवामपन मिनिसपूर्णम्मामलामो निरपेक्षाः परवामपन ताब अमरम्म पालामा तातोपामारमात्मालापमा परेबापायो फेमसमाविमा सस्मिसम्मानमाविणार मोति बाब । मन प्रतिवापायपिस्पेच समतेन परमपमान प्रान्छमार-एफपुरपेति । पार्व सपनामाभिमणी- पतिसाम्मनिरपेसामचिमिति-साम्येति । पीमित पार पत्ताऐति पटल गत्पारम्पयनमारममाया पापमा मात्र प्रविमति मा। तप पारिएको पामरिचमानः पावन मानि पम्मम्मम्ममा और सहानामायनो बिगोपा अनमस्सा पास प्रपितृपम्पसारे पुस्तपसापड प्रसार-पाति। सम्यग्रतामपियर पाम् पाव मत्सबापेमारामारी प्रीमिपावधिभिवनिला मिष नार तपातपति) पोषिमामिला मानम न पा सारमा पा सरेति। समेम्पसरपसाबार सम्मेलन सम्मान समantataराभर पेमपरपतिमपि मेम्ब एषमिति 1.म.समाbिar तपपेमयमावसंयुक्तिा] पारशारमयसम्म मनेनैव न्यायेन हस्यसमा दीपस्सामावो न भवति, तपेतरेतरामपत्वावसिदिरपि न, एकात् पक्ष एषामविश्न्द्रिस्थम्, विम्याभिमवसर्षपर्माविरोपहचत्वात् , एयमेष चेतरेतर योगविचारानयास इति । (अनेनेति) मनेनेप-भगवनानासप्यानविकमासेपुरुपपित्पुत्रसमपमानियमप्र सत्य पीपलाम्मापाव वि दोषपरिहारम्पायेन इससहारे दीपस्मामावो न भपतीवि सानमसानदोपपरिहार वो मरवीति, वस्मारेष देवोरुकाट्यम्तमत्, वपेवरेवराभपताइसिद्धिरित्येयोऽपि वोपो नास्त्युच्यत्, साश्रमस्वारेप, अत एवाप्रविमिलम् विरुवामिमवसर्वधर्माविरोपाचमात्, परिप सापन-सेपि पीस्लिमिति पसा, ीियो 'पीऽपि शससमिति, एक एष प्रतिनित्यानिति, स्यासपीपरमात्मवात् , टोलमात्मा नमस्त्रसारमना सत्वेनामविप्रस्तित्वात् स भवत्पर हखे दीपत मपति, कीऽपि हसत वीर्यसामवरिति विरोधोपोऽपि पयित: इस पोऽपि सदनम्बरमिवरवरयोगदोयोगपनाप विपा स्वा, 10 तस्मानपवार एव सपरोमयेम्पो भवन सम्मेवानो विरोपामाषप्रतिगरनारेच बदलोपपयिारमापि स्वत्या- इस बार-एकमेव पेवरेनरयोगविपायनरमश इति गवाः एव वाबत् सफरोभसमापसंसिविः सिया । संयुकेरपि च स्वपरोभपमाषा, हमाष एष भावा नाभाव इति, स प भाषा सदसद वीतानागतयमानेप्यविशिष्ट एष, समाये भावात् तदभावे धामावात् , पटपाशुकासकन्तु पटषत् सर्वसर्वक्पमिति स्पितेऽस्मिन् न्पाये ठत्रास्स्पेको पट इति प्रयाणामेकरपे यत्रैकर्ष 10 वासित्वस्यापि निप्कन स्वतत्त्वेन भवितम्पम्, मनम्वरत्वाद, मत्र यस्यानन्तरस्य वत्र वस्स निफसमष स्वतस्व, एकमिनेफरवस्वतस्ववत्, मस्तिस्वस्वतत्त्वान सर्वभाषा इति यदुक तत् सर्वस्पर्क परिस्पछतो ममेष्टमेय । परेर प्रतिपादयनि-मर्मवेति । मारे-सगतेति, परपामष्मिपि तुमने माना मिसन मानिस रूपरेर बससहाय बम्य साये बता सहाचे माचीत रिलिम्ब न पानसम्मोणे 20 माधि, एपम्पपिस्तारिख पानिममप्रारति मा । एसमेशामातापिरपि नामा-परेतरेधि- पपीना परापेमामपामार लव ताNIRO AR । मर्माय मर्मस्पूमजाना निमाभिम बवामप्पविरोक पवनार, प्रशिप्रिलमिलाइ मत पति पत्यागातु सत एाभा या रपीस मोरिस्म । महास्यमा प्रयोपत अमपति-वदिस्पमिति। इसेऽपि पति समिति सुनिर्म कानिमिता, एवं श्रमविपिन सुनिमा पसम्मतिनिक प्रयोग पावो यचम्म हसलाम, मास्मपितामात कापी-एतिपक रोगप्पारस्पेनमारमा सत्सरियस बर मा नेपाल विरो मत, पयादा मामा मनिराम बर्वद व मलमपविरार मानी मानले तपस्पि सरिस्पेटरम्म योग साभवाइम्या पक्ष्मा और मीस परमान et भी प्रिय लोप्रातार दम्पा मेषा मापाता समपत राय माने षिमागत पारितवान् प्रेषगरफ्तारय परिहाये नामोगा-दर याऽपीति । ठ तमोमयम् भाना मेममा समानामा परम्परा सहसासइनिधिमपिसा दिया-ए तापदिति। .नि.पि.तिसारा पाला नि.मामादिमि।
म्पापाममानुसारिणीम्यान्यासमैतम् [शापनसमापन (संयुकेरपि चेति) संयुकेपि न परोमपमाषा वारयति-स माप एप भायो नामाष पहि-सर्वमेवमणि भवन्मेष भाति पख न म मपतीयुक्तात्, समावि, सप भाषा बरवातीसम्मक पर्चमानेपु-दस्मिम् अवस्मियाचे माने परमति परेशप्रविनियमिमवेषु अविशि:-एक एस, पम्पत् । [ना मारात् ] तपमाऽभावात् पु षु समेरेषु भवस्लेव मवि ब[मासु नमबनवा वाये मामाचनमानेपामाबादविष्टिय एर तेम्पा एम, निमिष । पटपामुमपामारपत्-पमा पा कपामसम्पविक्रमेण पांमुमूवः पात पनि प्रसिपीमसम्बन्मात् प्रासीमवायो वा तुम्या पर वि कमेप पटपटैक्सपत् सर्वसम्ममिति, मितेऽस्मिम् म्पये वगध्येको पत इति प्रयाणामेकलम्, एवं सविले योस वारिसमापि निकलेन सवलेन भविदम्पम् , भस्मात् । मानविण्यात, बस तो। साम्पेनान्वित परश्यते-पत्र पसेपनि पावर स्वत्वं भवतीति गतापम् , निमिष । एमिने 10 करयसवत्तमत्-कस्मिन् वस्तुपेकरवसवस्व वदोऽनम्तिनात् निकम्मेष ममति, फतेऽधि- त्वमपि निकम्मेव मचितुमईपीवि, पसिबलवत्ता सर्वमाया इति परेप्पनिम्मापारमितमुखम् मम । सरचि एक परिवार समेशिन रोपः। किमाम्पत्- यतिस्पमिस्पावि पूर्ववत्, न मे थिोपा, मत्पपसापना एव ते देवपाः । 18 एसोनयमाव पिया-संयुकेपपि चेति। भारत-दापपतीति पर मारे मत पनि बिराये नामाथि बस अपेरिफेरिमामसभिलार वा तय भाष मीरा मामरी, एकमात्र एषापराये माति, समावसामान मापा । एस बाबामन पी सब भारत से भावोससे ब म पर्वमा भरपति बासि स ममी मंगा स मी नाम पर पाममाम मामत, समापसमाये परमाता न रेपमेन पा मेपला मेणे 10 मेरेग एससम्ममामिमतभ्याम्रो मानिस-एक पारेमामाले मादिति । समारो-पुतप्पिति । मारमाथिति पएस प्रेस को मरी क्या भावाने भाविका मन सम्म ब - प मा भूमि मा पर माल्यमसनबारहरिको मासे मठ समीपेऽपि पी नगी एम म मामाईमे मजे लिये पास MARAC पोल मारमासम्, माछमात्रमात पर सम्पत् नयाभावाच प्रमा अचम् और मिया पर की मार, । रस्मेर म भाति या पासोपे मला मेम्माला जपानला धमा, सास बोल दियापि सपाल भप्तिमम् मनातवार, म मास्टर सोमवाराम प्रसपानवलास बचितवदत्ताभागामापालाका न्य सम्मेसेज कसलिण्ो म नैव विविपाएगी स्मिताऽमि माप इतिपर-पकमिप्रिदि। पास इयरमम बना मन्ने प्राव भावाला काय 10 पारका सायरन मामाम्यपि इति परेपन्ति । एवंद मानसमापि मेर मगर सम, जयन्वयमावल सपनामा पनि पम्ममवत्त ममी पाठपरिमाया-पप्रातिपमिति। बसाना -- Rोगपतिममि.म.नि।
10 . देशपमेदेऽप्पमित्रता] सरशारनपचकम् पत्रास्तिस्वमित्यादि द्वितीयमनिशाइनस्थपन परेपोच पदपीष्टमेवेवि पूर्ववत्परिहार इति मन्यमानसौम सामन पूर्वपरित्सविविशति, परमा-पत्रास्वित्व कोमलमापि निफनेप सवलेन मकि. दोऽनम्विरस्यात्, पत्र पस्मानन्तिरसंवत्र म निकसमेव सवत्तमविस्वेऽखिलवत्तर, एकपलवस्वा सर्पमिकस्मिम् एकमात्येक्लमेलवोऽसिकलाभ्यामन्ये सर्पमावा, पते। पठारया-पटपटावा एप पटा पहनम्पदखितम्-एसपटाइम्पपवित्वं वम्पदेकपटाभ्यामनम्म । स्मादविवारनम्मे सर्पमापार, बवा एकमारम्पविरेनत्, सर्वमेव घटपटापि, सम पट इवि सत्तेने कत्वाम्पविरेकनारेण पठेपस्वास्त्विाम्यो सर्पमारपटार पया एवं पठे सर्वसिकि, भस्त्यिाम्पतिरेक- रेक्लाम्पविरेकादेवि पटे सर्वसिविरुख, व्या पटत्वमिमाविन्य पटेखिरकियाम्पविरेचन म्वरता- विनाऽखितकरयाम्पविरेचात् पटबस्सा, पठानिरपि पटा वमाजाधिरा-सदप्रतिरपि भट एष पावाम् मागा, न मे मिरोपो मत्सझसापना एस ठवः । तभिरर्सन पेशमेरमात्रे वापत्- अलम पपुभवेशमेदेऽप्यमिमः स एकोऽस्ति च पटा, मालकुमारादिमेदे स एपेको नरा, या सर्वभाषा, तया वर्षात्मकमेव पस्थिति प्रत्यक्षाविममाणरूपउभामहे, भसोड- न्यथा प्रत्यक्षाविपिरोपाः, पते पेनेप्यम्ते मदुई सौ पटोऽसस्पेक इति प्रतिपचप्पम् , पटा नम्वरस्यात् भटस्वास्मयदिति । (कति) मध्यभरेष्टमेऽम्पमिमा स एकोऽधि पठा, अमात्रमेरेऽपि-पक मारातिमेरे स एको नरम, पपा सर्वभावाः परसरतो रेस्पठाघ्रपतिमात्रमेरेऽप्येकमानारिशिष्टत्वार असममेलाल पनाति कमलमपि निकनेम-सिरसा मवान मनितम्यम् मिलन समापि निरपरेप मागेर पत्त स्त, रोजर्यास्तराबाद, परमपम्तय र मनिष सवलम्, सपा प्रति पसियल पेजवराचाधिकमेव मावि बाविस्पति से एमसमपि पामेर मरिनुमति एस्खलन-10 समितिमा सम्पमिलमेर चालि, स्मात् सर्वपापे पस्तूपामयिसत्तारसम्पमिति विवर सापन मोरिल सरल पदेनामिति माघर मार-दितीयमिति । बरमसिसिमानाबमाउपमेति । बरियतमलाम्या पनवे माता मम मामा-पाति एमवारमन्त का वचारणावरमपितम् एमावरमा पन्तएमभितम् पामिप्यमिवामिणमाका फरार या सत्वर मिरवक्सलवार माति, एपण पारेपसारन्ताम् समास मा मसालान्त पर दस्सम्परेपरम्, पछिमान्दिरमा वन्तरमेसर, मरिस्पानिजफ्यायोप्सम स्मरेमियमपला पत्तपत् बच मिरसितमपि महासंयमिति सामान कमलति दिन स्ममिति पनिकासा पस्तीस्मतधिनिया संपति। पर प्रम सम्वन्धमारमा पसनामपि तपासमानिया-सपा परत्पमित्यादि मेति, म पार पाविसमतगारपि मिपा सस्म भक्तिम्प, भात, म यस्मत्रपात पप तम सिमामेर सतत मपति मारी पादिरा घों मन सम्रमा सब समापन 20 मम्पनिमानुफि पनि यो पये भर-सरमा मस्त चामत सतत मा। तस्मिानाने पारवानि मनुस्ममेर, रस्त्यात सत्यम्समन मानाव में प्रधिरितिमा सबभागार सामरिमेक रसारित पर पामपि भन्मेपी से मिरम मेघापन कार्यमम्येति । पर 10 म्यापासमानुसारिणीम्पास्यासमेठम् [परानवमान्तरम् मिल एक एव माबो मिन्न सामासि सबा पेसाति, समुचम्पायन सलिम्मेष-मचि नित सर्वगत सड़मेरसमावड़पस्थिति मसमाविममाम्पसभामरे, भदोऽम्पमा प्रसपारिक्रोिशा-पटमा सलमान असिस्नुपरप्रीमुदाविपरिवरस्म प्रमभदर्शनात् प्रमशविरोपा, जनावमेव सर्वात्मकमविभता वार पिपानुमेपरगारमुमानविरोपा, होगमाभ्युममसमपनमिरोपा, सपरमेप्रसिद्धसापनापनसमा • भाराभ्युपगमात् भस्मेकयाम्पविरेबाव वेपाम्, पसे पेमेष्यते-मा भूममेवे रोषा इति मदुख भापति बित् तसा पटोऽस्मेक इति प्रतिपचम्पम् स्मात् । पटानम्वरमात्, भटमास्मगरिदि सापनमुप- संधरापम् , एक वागत् अयाणमेले नाति पोपा । पुनरमध्येकपटयनो अग्र मानाले विपरीतसमाषत्व पापात्लममाक्रया प्रामपरित पिक- सारसा विचापम्तरं य वन मा- विपरीवस्वभावालापासनषतार पपाम्पत्वानभ्युपगमात्, नन्नम्पमा वावर प्रस्वादिमिस्पसम्पते नास्तीति, उपया पटा पठस्वेन नास्ति पटोऽपि पटलेनेस्यादि, पटो हिमट प्वोपरम्पते न स्वसौ पटोऽपि, भय पुनस्स्वम्मसेन सर्वम्प उपउम्पेठ, न तूपठम्पवे समामाखि पवित्वेनेतिपरस्मेणामाषा, वपा स्वस्पेमाप्पभाषा परस्मासत्वात्सप्पदिति । कारण ममप्पीपारवेषो मेऽपि प प एक साल मेोऽयमेर नरम पत्रस्य वा 15 माररास्वादमा भेपि प मर एक एसायि संसभामा बपि ममममेरेपि एकल पर एक भाषामा प्रवामिनामानिमित्त स एष मया मित्र सवत मा मम्मामेति । वा मार-एषमुपायेमैति, कस्मिरमान पारितक्त् मावा पनि म सब समान पहा. भाग पर माचे भकी मममममाविसम्म सिधान्तमा सबब स्वावमाखमामलाच मेरसमस माता भग। एसमेन बलु प्रमावसम्मतीमत्वालापानिरोग सपएस माम्मे चारमा अचरिवीसम्मान कमेन प्रतिनो मी पापाप परखे पहिलोपतमापरकमेव पर स्पाती, आमा समस्यामा एक प्रामाषा मा पसादरीति । म सामानमणमाक्सवानियमानुपायरियम मामा-पहावमेवेति माया मारच्या मिषम्योपममेति मेोषावामुपमनिवारोगा री प्रस्ताव प्रभास बालोबलातत्सम सपो मिला एवे सुस्त मन । रम्मामम मापनात साल परस मेगाव मारा प्रसार सामारोश बमसानो पामरा पाताभामा सारिणत्व महारपिम मुफ्पम्पते वे गी तेष समानतात सोमवार रोका ममता मामलामीम, लोक एकात्मे या प्रतिज्ञाय मामिलाममारमा समस्यालयापारमा-सपऐति। ग्य प्रमाण मापते परतावनमूलादिमोमर प्रान्तरलात प्रभारी ने को भाषा ममसेना पालामा सायमेट्रो रेपि चार-पो पात इति । एसपनामावामयन्ती समस्यालारामसम्मानितनवा मार, एमपमा गल मार, बसपियो मेस एपेपि यो मेल मोऽपि मे मेरा पनि सम्माम्म त मरेपी, वगीते भारतात पर सामानाधिक्मिणावस्योपमा मात्र पुनमगाव मेरमावामान्य लाभुपमामा-विपतेति। तमाम पर. एससम्म प्रमिला रायमेरे मामामामामुम्पमान, कत्लेमपसम्मावळाया मार गुप 10 सांस्पोपरम्मोकि] वारशारजयपरम् (विपरीतेति) विपरीवस्त्रमाषबावापासशनमवार एष, पम्पत्वानम्मुपामात्, सशोक बस्त वाममेकीमान संसिदिसावाभ्युपगमावप्रतिभावसारोपप्प सससमविविष्सितमाघमेप से, वस्माचदिकस्मातदोपा नास्माम् पापम्त इति, अयोपवे-जन्यम्पया तापविमावि, र अपमानित पसमाविप्रमाप्पसिय पटापन्यम्पेन प्रधरप म्यायप्यन्ययम्पेन, फोऽपि पटात्, योऽपि गईमादम्पा सम्पबा प्रसपादिमिरुपलभ्यते नास्तीति, सपा-पटा पटत्वेन माति पटोऽपि फ्टस्पेनेपाल सापयति। पटो दीमावि, हिसयो पमा यस्माटो पर एमोपरभ्यते न स्वसी पटोऽपीस्मुपसम्पते, वस्मात् प्रमयत एव पर स पटत्ने(न)नास्ति, भय पुनस्त्पन्मवेन परि । सामाम्पे पटम्म मासिौकसे मावो स्वस्पदुकम्पपेन ससिप एपछम्पेत, पटा पटरमारिसपो न तूपसम्पते, उस्मामारि पारिस्मेनेति पररूपेण्यमापा दबासरूपेणाप्पमाला पररुपासत्तापिति प्राप्ता, पपुष्पपरिति । भत्र मा- को वा प्रमीति नोपसम्पत इति, ननु भो' व नाम सर्वात्मकमुपउम्पमानमप्पफ्ठप्प शूम्म कर्तुमिच्छसि, न पुनराहमुपलम्पमानमेष सर्परुप सन्त र्नु शक्रोमीत्यहो साहसम्, पटो हि मत् मुम्मयस्यात् मृदा पपिपीत्वं सदत्वात् प्रयिम्पा ट्रम्पत्वं दुविकारत्वात् , ब्रम्प स मम्मस्थात् मम्पस्म भवितस्वात् मविसुः सर्वस्यात् सदखि भाप इति पटपटविसर्प परस्पर स्वरून हसवविटि न किधिदेवत्, मन्यया सावन्नास्त्येष भट इति । फोगाप्रवीतीत्यादि, सर्पहप उपसभ्यत एम, नोपसम्मत इवि सम्मुखारेवम्यूयते, नानु भो इन्परि, तमाम सरिमामुपगम्यमानमप्पपराप्य शून्य कमियासि, न पुनरामुपलभ्पमानमेव सर्वहम मन्त कई सप्रेमीमहो' साहसम्-उपउम्मिा सोकाममा लगाऽप्यमाना पूर्वोचसर्वप्रमापविरोधियों वे परसा सम्पाएपति वापसुणे मस्सोऽभिप्राय इति प्रन्यो गवार्यमाम विप्रिफ्ते, वात पटाम्प मात् पपरियेपारोपप - मम्मतिविमम्मम्मेन प्रमति, बारमा प्रवन को पाषा मरीति मापो-सति। - समारोपमाणवे-मान्नम्पयेति गरयो दि प्रमानिमिरम्पप्रपरेषनाचीरपुपमम्मो सपन्यप्रसारक स्पार, गायपि तथप्रपरेषाम्पर, पा पारम्प, मे पश्नान्य एक प्रसारिमिमाम्मच ठेम वसपल समान मातीत भाव । ठमेलामात्सपयेति या पालेर बाति पयेपि भारत नाति । एव पम पम्मत- बोपणम्भात् मारिम्मतमा बानुपामा प्रसस्तोमा पर मान्ति मा फ्यात्मानमवाति सामान्यमस्तिो मास्टमार-झापपवीति, प्रारमिनोमनरेष मामिलोसम्म माया गरि सम पनि सम्म भवितरको पानाम्पमोपीसम्म मामासाह, ई ये म माम्पेट न तु फरमरपरिसस्तमा समो. फसम्मोऽधि समाचति पर परवानिति परस्पेव तस्यभाष बब परम्मेष माचिस तस्मेनापि माष पुष्प पति समेर बसिनलार-मप पुनरिति । पम्मेवामिम्मामा AUR प्रमाण-कोप प्रबीतीति। सर्गरमल पास साम्पस एष मोपासनाविरोऽपि पनि, भषापुचत तपा मा मत मार-सम्प इति । पन्नासमम्मान समस्त प्रमापामुपपतिभिर्म पोमील माना तमोपड दिन तो मा भिपते तहत सारतसारस मामेति । पाषा-उपसपिरिति गमिप्यार मेम्पोसमानस मिनिसलमानीरोपित प्रति नमुखी माता पम्म्मप्रमासान यदि पहा समता मारमा-सपस्थिति। रवि, मोर सन्मस्तार परियारलान्समायोमर एवेन मल 16 - म्यायाममानुसारिणीम्याच्यासमेतम् [सामान्यम् सास भवतीतापयितुमार-मटो मृत्, समस्यात्, मृसं पटना सिव मरा पवितीय वरमलात प्रषिम्या इमारवं हविगरवात्-सत्सपिमण्यात्, सम्यम्म मध्यत्वात् ममम मविवृतात् मक्तुिः सर्पस्यात् सर्व मसापति व सरखि भाव इस परमात सर्व परस्परसरूप तस्मात् सर्वस सस्मिात् समो पट परम्मते, निमिष ख्वत्-पवा बोलिपर्यसन्धिरेयपरिसहप उपरावे सोमहस्यपाल पात् वमा पटोऽपि सरेममकस्याविप पपम्पत एनेवि मचिमिदेवत् सम्पमा वारमामय पर एरि बम्पमा बापि पटम सत्यारम्पवासिरिति । मपोप्यते मिन्न एषासापों मिमप्रकारत्या, पाविमतिमाविमतियानदिलेट न तुस्पत्वात् , येन प्रकारेणकस्सात्मममसेन प्रपरेण सर्वभाषानामिति सर्षोऽप्यभिमोऽसपा, भारमसामेऽमिममपरत्वात्, एकवत्, न हि साम्यामस्तिस्वकस्वाभ्यां फ्टस्मान्यस्वमसि, 10 पयत् समेवभावसयोरम्पत्यम् वरनम्पले तेपामपि पटारमकत्वं तदनन्तरस्वात, पट स्वारमयविति। (भयोम्पत इति) भयो भम्पर्व वर्षि स्पपयामि-मिम एवासापों पर पटारिमो भिमप्रमाणात पारिप्रतिवारिमविवचनात्, वर्गसंबानप्रयोजनातिप्रभरमेनाच नासिमियो भोपने सिर वुफ्सम्मिपि भिमप्रपौनेवि न मात् रूपोपसमिरिति एवष नस्पता- 10 मेव पुस्मत्वाल देखोरम्मत्सयसपनवेन सामना-पेन भरेकामसमो परम केन प्रक- रेखाचिोकवादिना सौभाषामायपारममममे रेशमम्मेवामिमवो मम्मापोमानवयुगमम्मपुराणाविन्य, [मिलाना ] भवः प्रविशारते-सोऽम्ममिनोऽसाव इति, नम्सहितः स एम रेखा-भास्मनभे मिलमका मनिम्, तपस्व मिलताए पनि मनाहा विध तापि पनि भम्, छ महिनीमरावत् पाता पवित पतनार, अम्पस मताधिप्रमिग्रेम्पत्वात, पमा परिवार यानानिनिमियममा मस्थित सारा समिति पद स्त् माय मा मामला , समय से परमात साप-समितिमा-विति। मोहक गाने मुरि मानेपन्धि मोगरेचा समारो सापामेल प्रोम मिनास्मिारस्पम्पिकमाते ० न्यायोपि समात्मम्ममरवारिस रात एक बोपमायतीति रिश्रमिति मारा। प्रवासना ये गारमेष, पबचा महिनादेशसम्म पदामा भम्पति । मिस कला प्रोमध्यबारपम्ममा माय मिबाओ एस महिमामलामामायण, बाल सामा एममा बासियािमपप्रारसम्ममाए, म्यानमार सममित्रप्रभावात् पापम्पबमला मित्र सामा-मपोमवति। हमारतो ना मिल सप-मित्र एषाप्तावित दिवसभा- म्म पिवम्भरला पातपतिनामिविरकामानित साथम् । मिसाल पति-पति पा र परम पलाम फामापनि सम प्रयोग मारमा प्रसारमा बस्तुना म्ममातिषापरल 20मामि सिमेणाम्मचलतमा निल मितालमता मारमावस्मयापिकनिमयालय वापर मसाम, मग तपस मप साक्यमा परम्पत्वादिति। बलिप्रसारिप गामसम समपरा मेपिपि मानायव एव मान, मममिवारतासामा प्रभावि। पान - प्रपसपिरोपपबिहार] रशासपचम् रस्थापिति पस्त्वयोका, भामममेऽमिमप्रभरत्याविति स पलमा, एकमरिति प्यन्ता, पको पटा पटो पा मगरिनपाविरेश्कास्पनरेप मिम इत्ममिमतोऽप्यभिन्न एम, भस्तित्वैपसपटत्यामेवात, पर्व पटारिखमा सर्वमापा पमिमप्रकारात्मगमात् स्था, मा ममा बसियो तरिक्त भार-न वाभ्यामसिक्लाम्या घटस्साम्पत्यमति सत्तेक एष पो यस्मात् पटा[२] सर्वमेरमाजासमोरखित्वेकरवा योन्मता, न दीति पर्दवे -सर्वान् पटष्टरपापीन मेशन खगवानपिनपापीन् भजमाना[नावटादति । फसमोरन्पनास्तम्, पता कि १ [व] नम्पखे-पटाखिवैषस्थानबस्वेऽमिहिकम्पायेन सिखे सर्व मावा पटापयोऽपि ततोऽनम्मे, बखितकरयाम्पामनर्माम्वरमात्, पटपरिसुख्खात्, भव भार-पामपि पटात्मकाय फटादीनाम् ,मदनान्वरस्थात् पटसास्मपविति माविगर्योऽयमठीतार्योपसंहारा। भत्रा- नन्वेकरचे प्रत्यवसिर तृप्तिसुलावि विरुभ्यत इति ननु वत् सर्वसिद्धान्तप्यपि, प्रत्यक्ष-10 सिरमन्यपा मस्या मोक्षायाऽऽयस्पत इति न पा पुनरम्पा विमति कार्या । (नन्पिति) नमेको प्रमपसिवं पृप्तिमुस्यति बिरुम्पत इति-दल सर्वम सस्मिकमिति हुमत प्रापरए भेरेनानायिवमुम्पनन्वय समिमुसाविरोभिनी वरनन्तरभाषि पसु हाम- विरोधीपमानि विसम्मते, नदि प्रत्सविता प्रतिपातु योम्पमित्सर मा ननु तरससिन्वेषपि, प्रत्यासिनमन्वया मस्या भोपायाऽऽपत्यत इति ननु विपयमुनानामसवात्तात् कुलपतीपरमात्रत्वात् 18 मसम्मिमत्वात् दुम्समूपिम्त्वात् मायम्तियाब दुःसत्वमेव पोरपि समिम्मपजननाखवारवतिक- मेति मत्वा नियमापमफ्पपीनमासम्विम्मैकान्विक विपयमुखविपरीत का नाम मुणिमुर मिनि प्राप्नुपमेति ममामाम्पात् सर्वसिसम्मप्रसिद्धप्राषिरयात्, न पा पुनरम्पा विमति कार्येति संयुख्यपि सर्पमापाः सन्तीति प्राया। मागणी-पकाविमचाविमेवमिवामिम्वोस र पामो सोसियमलेरमियप्रकारमामि 0 एस या सर्व पफ्यरो भाषा नमिधा सरि मा । पापित परसमधिल पत वा वाविवेश्चमोनिकानेग सरल ममममनन्तरालाति तस्माद मातना सिम्मेवामिहानि प्रपराम्परिलेसफ्रलानाम्या-मा मस्या इति । नीति मसितम्या सम सबमेश्मा समातिरस्परन्तिरता मी पर्वत एव माता । लामा परम्प सर्वश्रादेम्स पि स्पोरसन्मल सिनेमामामातार वारमारिनेमा-पर म्यताति सारमलसानोमारोममि मालामाले सास्माधिक वृमिमामुपसमिति स्न प्रमाणे प्रमोन रिमपम माप-पमेगाति। मा त्यमिति एम्प परमप्लममिरमानस माटो मुबामियोभनपराभुत्यान्त या दृष्टि- ख मुकाविरोगिनी पासमा लागिपीठ पापन प्रपो स्मिते मी प्रसपनिमपतु विज्ञानु मनि । एमाबो ममिति मा प्रतिमान सरेपपि जिसम्पु एकता स प्रतिकार मोवमा प्रत्ययम मामा । प्रसपनिमामथमनमायनि-मनु विषय सुप्ममामिति । प्रतिमपि नियमुखम् मम्पर नया रिम्पामावप्रबार, मारप्रसार, 30 विपनामममे गा मावि पदी मरमारमेर मम्मातापिप्रममपि मत एक सममित सम्मानाधि- प्रगासमपालमानसननिम्मे अवापि ये मावमा सक्से वात, पिस्तमरित्रपामा म्यापाममामुधारिणीम्पास्यासमेतम् [शाबशनपश्यात वय मनुस्पदावपि सर्वमावाः सन्ति, यदि हि तवस्तृतपेत पिनश्पेशा तता पाइप भाषषम्मध्येऽप्यभावः स्वभावस्थामाम्यात्, न स्पादककर्म मेदयता स्यात्, या स्वया त सा सम्भाम्मेवात्पधिविनाशसभावे, न तु कस्यचिदस्तुन माविरन्तो या, वस्तुत्यास्थागत •हि यस्तु स्वरूप स्पति, शिषप्राविकपाअदिपटमवत् । (अनुस्पावावपीति) अनुसारादपि सर्पभाषाः सन्ति, पति हीनादि-बहिनिस्सा प्सनत्वाव बिन्दयेरेवेति-उत्पयत बिनश्पना वा #वा महामाया सचे, पमाणमायो चिन्तामा वामप्येऽप्यस्यवः समावस्यमाम्पात्, न मारेपमिति भेरवा मात्, परिमाया पास वासपात् प[लपा दाते तमोपपचिः सम्माम्मेवोपचितिनामसरामे, ! न तु कामानि 10 सुन पाति:-सचिा, अन्दो विनाशो पाऽति, मात्! पस्तुत्वात्मामत्, न हि वस्तु सहमस्ट ममति, सिमर सिवनविरुपामनिपट-पमा ६ पटा क्षिकस्तूपकमलपारस भेामिमामु पयामेरान्परेप कपाशरिभपूरि टिपरमाणुजपि मूर्चतापरेबापम्वविय, व पापि फिाति पस्तुत्वात्पगारिति न्प्रस्युत्तारसदमावाद्विनाशोऽभ्यया । मनापनन्तमर्धिमूचयघामूचमप्यनुत्पादविनाशाम्यामनापनम्तम्, मतोऽसी सपा 15 यस्थित एफस्वभाषा निर्भेदा मेदासम्भपात्, रस्सादविनाशाम्यां हि मेवा सम्भाम्मे स तु न भपति। (भनादीति) मित्र प्रमप्रमेपानापन्न्तरवान्पणियापागरिषिपरिपपपि स्मा वयस्मोस्पाइविनामामाघारनापनन्तर्विमुत्तमामूर्चमपि पस्तुत्वाम्ग्यरमुसावचिन्ताम्मामन्प्रपनन्धम की मम्मो रिस्पन एप्पयामीमीनसभामुख नियामा पन्तिक मास विभिनमिय 20निराधारता का विमान निगम पुगी भर । सं म्मुर सरैमाससमभिषावास्यापि यता स्ववि-मनुरपादासपीधि। मम्मामुत्पारिमाम्ममयोमपाण्व प्रापमान नियमम्ममा पर भादापरबासि समरिया अपरबको मापनमा लामामाशित भाष गैर-परि होति पस्लामुत्परामुम्समे मिाणामम्माधि मा । भरती पण समार-सत इति समा पित्तरियर मा पचव तत्पवान् मोसमाषा व सिमसामान्पादित भाषः । - मत्यमापनाच माता मात्र एका पत्ता सारिकाप-स्पादिति।पतिमा मा भूपि मसार प्सम्या मेस्मता हा प्रपत्र्यानातयपाएमा पत्तमा मा अधिक मारित समेत भात।। 40 पत्रिसुन ग्पामयी मार नबम्पसमा तामिमोसा सतरपालामा गसम्प्रणम्मम्मताभारिप इसममार-म दुसम्पपिरिति । पशुपाल्वर सम्पनीमार EिRITAमति या सम्माभिम प्रस्त्रया असमनवा मा wkute एम पास पर न ममम्पयन सस परमादेशमारिए मामा वाली परमामायारामन नारा ससिसामप्रपामोशी समर मूर्तम मसात- सापपरमानन एमामपालनमा मनापनम्नति पायो रिति मिनाम समापुरमा प्रवेसमापदम्मुतामिनापामा समेत पयरेमिम्पविकपमम् ] भावशारमयपरम् सस्मात् सक्तमासानमेष पस्सना, बदुपसंहरवि-मनोऽसो समाजस्थित एकसमापो निर्मद पति मेरासम्मपास मेरसम्मपनरप्पमापात्, पदर्शयति पैपण-उत्पापविनामाभ्यां है मेरा सम्माम्मेव, स तूविभिनानापनन्तस्पात मरवीति । भत्राप्र- नन्यनिष्ठित प्राक् पयादारम्भात् , मारम्भमधनात् , तत्र यदि निष्ठितं स्मात् निष्ठिक्त्वा । भारम्पेत निष्पमपटवदिसि, इव धिप्रतिपिर यचनिष्ठित मनिष्ठितस्मादसत् सपुप्पषत् , इतरो पटषत्, यया पटो मन्पावित्वेन निष्ठित एष साकारान्तरम्पतिरूपतो म्यज्यते, पदिन तयारम्व किं न सपुमावदम्पादेोऽब्रम्पते ।। नन्वनिष्ठितमिष्यावि, मनूल 'प्रम्मामि म्यान्वरमारमन्ते-परिम्पाविपरमात्म्यामि सवा सात्मनि । पति या परस्परसंगोपपेपागि आरमन्ते, धर्मरम्ममन्यत्, गुणाभारम्भकबर्षिपरम्पसम 10 मेवा रारम्ने पर्यनम्मे निम्मान] पर सवः परास्मनि गुप्मन्दरमारमन्से, म संभोगदिमागसमय नारमते परतः परात्मनि' ( ) प्रमाविनाऽऽप्रम्मवपनेनानिष्ठित पार पधापारम्भात् किया मिपावो निन्ममिमिवम् वप पनि निमित स्मात् लिप्टिसत्तामारम्पेव निष्पमपटपरिपत्र मः-इव शिप्रविपिछमियादि, विप्रतिपेम भावयधि-पचमिशिवमित्याविना भमिष्टिवत्तारसत् सपुप्पपत्, बसत्ता- पामारम्यते इतरो पटवरिति बेपर्पणवा पमा पटो मापारिलेन निम्ति एष समाकारान्वर 10 पनाममाता मकिपा मूर्तामा छरमूर्तमपमानम्तमेश लममापरिमावारिति मात्र । सब मूर्तामूतना तालिमेक- मेषयमापवमत एक कर मिझार-भवोऽसाविति । एमा-भेदासम्मवादिति मेरस धम्मो परम्मेव माखाधि भाग परब मेरस सम्म सात् गमावाविमरमेम सातिमाह-उत्पादेति बरि गल्पनिमायो चो मावस दवा को म पो मिबसमासात् भन्नु र मन पये मिचलमारवाणी मेर सम्माम्मे पातु ससम्मा- परि वारसायनम्बर मा मेश्म सम्मा इति मात्र । ना मान स्विमेमसामने भारम्पोपमुफ्पत एक 10 म्यानमारम्मरमशात् म पुसमते लारम्मे वन प्राइ पचाइनिधितव प्रोतले -नम्बनिष्ठिवमिति । रेषिमा इम्पमारम्भ प इति मावि मनुकमिति इमानि इमान्तरसारमावे इपिस्सने पाचो-पपिम्पादीति पारिवानिवरिपपामाप्रम्मावि सो मि ममम ममाविपरमसे बात्मनि परमसमेगसम्पासमपानिमरणमफे- स्थाप्रभो परमाम्मे मा पानि झगुममानि मामु गनि पुषम्मानि परम भाषा । पारिपारि परिचपरमामुकता कारसे गला परमानुमिरो परस्पति बसारणम्मानिसमा सम्पराम्पारभाव स्मार-गुणामेति। म मोर्य बिमाम 4 निम्यापम मे भारमत मार-कमधि प्रमं सत् मास्पमि अम्मान मारमते पुस खत परारमनि पुनाम्वरम्, पर मास्मनि सोयीनिति मार । मोनारम्भपतेयम्प्रभाव पूर्व पप्पर समशितम्या-त्पादिमेति । मनमामिला भारम्मादिति निम्म्मस प्रक्रिया प्रचार । समसौम्म समुराफम्पवे वर्मरम्म पर सात परिमाइ-तम परीति एपपरम्भात् प्राचार बमुनिशीन मफेोपविशिव साहिति सम्रपमियम । निहितमबारम्भ भाटि" शिवमायो विनिवारित मक्मे विहिरियो एमापदमिति। रसुमोऽनिमितले शुभारमा मापसा- परिमारा मारम्भमसोमारपाया-प्रतिषितस्यादिति । मभितमेवारमान शी वर्म पति-पति महारस्वविधिक एपमा, तमाख पाउप्रारम प्रभादेमपि मम प्रमो मावि, वन सेव फिमारिया परि- 04 (110) - " म्यायाममानुसारिणीम्यापासमेतम् [समपमानम् म्पमिफ्तो मम्मते प्रमोईनीपाविना [पनि म बारम्पति, सखि, किन सपुष्पाउमा- रेपोऽरम्पच इति, उम्मगुपमतिमेपास्तुविपरीवात् धिरवारम्माभिविस्तार मसनिमि- मपिरम्मा। पतकं ममति पोफ्तखाद्पशक्तिपिवमानन्त्वेतत्त्वम्, भावकस्मात्, मतो नानिष्ठितं निष्ठितमेप पस्तु, अनारम्भारम्भस्वात् , पचानारम्पारम्भ समिसितमेव, शिप- दिवत्, यवाऽजारम्पमपि शिम्पकस्पेन सूत्र शतवानिष्ठितमेवमन्यदपि पस्तु, मपैवमपि नेप्यते अनारम्पानि तामि, भमिपितत्वात् सपुष्पवत् । (एतदिति) पनडुळे मपति संझपता वापठतिविपर्चमान्तवत् सर्वमिति पर मात्रै कलात्-एम्मेष पुरुपवर्मावरम कारपमात्रस्म विम्मितवात् सत्तामामात्रभेदेन, वदुपसोडला- 14वो नालिस्विमिमाति, लिप्सितमेष वस्तु पनिष्ठिवम् स्मात् ! भनारम्भारम्मत्वात् धनारम भर्ममि- मणिमण, भारम्म फेवरमरणाममनपस्यवस्मस्पेन, पानपरम्पारम्प पमिश्विमेव प्रनिश्विम् चिमिची शिल्पचवियत्-पवाऽनारम्ममपि शिवपकतेन सूत्र सतवामिश्विमेषमम्पपपि पस्थिति, पमा सोफ्नीवसूमानियन्वैर्मापवितम्पम् , बरमपीमारि-रल मुम्मा प्रतिपनिवमप्यमान बनो मैग्गी माप । एवमेव शिवापारम्भो पापबा तु विनिया मारोतव्यपुमानमारा ये मारनवे U-पदि न तपेति तानि । उपजाति-मम्पगुमेति म मुक में प्रमेयात मामा पमितापमान विपरीत अवधिपरम्मो न मान सम्मान मितानि समारोत्पतिमिमालाम्प- पसापामा मात्र । पुस्पतिममा प्रविमा कम्, मा मूर्तमूनमम पि-पतु भवतीति । पुरोहियाम्मे भगा व विमानम्, समममममनुरोगसमतुरमरम मा वाधारमा पुस् बस ममेर मानोपारम्पस मचितुरमात् पुम्यो भाष पण मग व कार्यमनामस्वामेले सर्व मिम्मिमिकामा- 10 पनसमिति । एमार-मारवादिति, पुस एगवतो मा सफ्यारिपिताम्ममोम्यात्मपविमान पमितिमात् सावित्रावास्मेव प्रात्ममा निमपते पुस्पलाल वर्मयता मिला मत. स अपर मति मात्र इस वाम् । एवं पुरसारमा क्या बारबारम्पपी0 पुमर्म म्सेपनिमजे मावि पनारम्भ मान विसेच पारमात्मनाउने प्रया पामारबारम्बवामिति भर पस पानिमितमिला-मतो मानिपितमिमादीति रो पिभिमासमाविम्ममानलागे । समान ममारम्पति। पनारम्परियार भनारम्पमिति, परमनाप्रमिमपया स्मारका कामारम्पमित्रम मारम्पमिति अर्मचिम्पधिारत मवयमा सवारणमा। एसपसारम्पारकलारत मलम मत माला-पोति । पात पति-पपेति, मकर मारप लिया अम्मा पूर्व मिमा म निम्मितमगार समारपेवरा तविधिवमेन मी, या सपपि स्तुतिमेश यात्रा। परिमानि पातारा पनि मामानी-पपा यबोपनीति मोम्स्तर माद, रिमामोसम्म परामरमांमार पाता चरामसभातपित्ताच, मोपनमतसमेपासम्ममारमा नर्माचा तपास पाविचित यश या प्रमासगरमपि परमो Anurमयम पवार- इत्प युपयेवि मानिमारमारमन्त की माप मारम्पनिमामि इमामरामसारमाना सु - म्यादिनिस्मताम] मापद्याजयमम्म् मेष्यवे, मनिपाइनमिर-अनारम्पानि पानि म्याम्पराम्पारम्पामिमदाम्पपि, अनिष्टिवत्पात, सपुष्पवत्, पादासत्तानित्यमिप्राया। अयोग्मेत आणि प्रत्यक्षत एप पटादेश्यिते मेदहेतुा, अब पृष्यसे स किं नित्यः । रवानिस्सा पवि निस्पा सर्वपस्तुनिस्पता, बाविस्वरूपस्यात् तमिस्मत्वाच, क्रियमाणनिष्ठि स्पोधामावात् तपाजन्यमेदाभाषा, सतयात्मविष्टोऽयस्थानपक्ष एष जयति, आविप्रत्यक्ष । प्रमाणीकरणाच क्रियानिष्ठाप्रत्ययायपरिस्पागा सयोग रएम्यमिचारमितरप्रेकस्मिन् प्रत्यक्ष कम्प प्रमाणीकरिप्यत इति पुनरपि तसानिरिति सर्वया त्वयैष प्रत्यक्षमप्रमाणीकृतम् । भयोम्पेतेयावि, धानिस्सति प्रसमठ एव पठारेश्यते, सच मेहेतुः पटादेवस्तुना, परि मनुत्पमाविन स्मात् मारमिममिति, बत्र प्रभपसे स लिमित्यादि, समातिरारम्मा स प्रत्या मिमता विनिमोऽनिस इति निमार्य, निमावा! यदि निमः सवस्तुनित्यवा-सपा पदादीनान वस्तूना- 10 मविपेम नित्यं स्यात्, पाविसस्पत्पात् उभिमत्वाय, अमिमवत[अवता, किमान्मत्- नियमाणमिहिवयोमामावाचवावम्पमेदामाव:-मादेनिमत्मापारेरेम प रस्तुत्वापारम्म एप बालसंधोऽस्थि न मिनिटे चा, पयोम निमाणनिष्चिमोरमापात् दबाजनयितम्मम तेन प्रपरेप घटारिखेनोत्पाप समेवमामाषा, दमास्मविष्टोऽअपनपम पर अपति, किसाम्पत्-माविमासानि-मानिः प्रसव एस मेरहदश्यते इति निक्षेप्याविरेव प्रत्ययः प्रमाणीकवो न हिपाविछे, वयोः प्रममयोरपि परिम्गम । का समसमविरोपापयुजा, क्योप्रेमावि तमोम प्रमभयोः किमनिम्मोरप्रमाणीकरणे प्रत्यक्षमप्प- लाव. पुस्मात मम्मे इमान्तरापाराचा पापात्मनापासत्वेनानिकितपासातासरवारिति भाग। मनु भयो मामालिपति प्रत पर सवे, ए मेरसम्मपनरमलादेत्रमा निममद्यपाविनायम्सामनापमान मसिनी मिवापरके अपोतेति । पासाति-भादिम्पत्तिरिति उत्सत ससामनवम्मा पस्तुमेरा मनासा मनिरले मामि बरस प्रमान वेऽभिमव भारम्म निमोनिको सीरिय ऐपमा-अन पूष्पस इति 1 30 निमोनिश्मा-पदि निस्य इति समनिममममविविशिानामानिमत्तात् पायपि ममता सन् सिमिधे मिलवार, कला सपरिमिक मारिति माया । मानम्मालिस प्रशास्पद हुमतये पिक वालिया-अनिएतदिति । बारम्पनिले माविमेनाममावाविदमनापमान्त विपारस्थान बसवेर सोग पठ एमसत्यमेव पर पह-किपमानाति नानिटमोरमा बारेपरम्म निलाम्पफमाद, पप लियान्टिमिपमान अनौम्मुम्पपिति घर परमादा प्रभागा पररममधयाय प्रयोपासमा अपर्व पसारम्मः तसनामा पप्पा पारपुपमा प्रयते इस्पेसतिरमिम्माि किशुपते गाता मा म्पछि प्राममधिमि निबम्पवे के तय किया, बरमविपिपरम्मभिमानिनाम्, एमय किग्रन्टिनोरमारे सरितम्पस-पारिनोत्पापसा- मापद परचमारसमसावमेव प्राप्त मारियो पातबामसार सलग पत्र सिमिती मारामाणिमानिया- पपिरेम प्रवासमापि मेगापि प्रमद सरसत याटिपरमम प्रिमिप्यमाय बिगान्धमा प्रमा ते मग तु प्रमाणात मितिले प्रमोऽपि मधे ठोस्मापन प्रमणिपापपुर मार मादि प्रत्पमत 30 एवेति। पप गायो प्रसपरप्परमार छक्लवमप्रमा सगर्व वतबाम मा प्रत्रात्यावर प्रक दि.म.से.मिमिका.लि... म प्रमालक सिनियो।
१९०८ म्यापापमानुसारिधीम्याम्पासमवम् [पनमाम्वरम् प्रमाणमिति रो मभिवाण, वरनागरेपि प्रत्मसम्म वाऐगाप्रामाण्यात पुनरप्पारेः प्रमपम नामा इति सर्पमा तयेर प्रमसमप्रमाणीतम् , एस तापमानिसवार्या पोपः । मपादिनिस्मतायो दोपात् निचनिस्पत्यमभ्युपगणसि यमाम परेकवेति, नम्मेवमपि इतो मेवा! नित्मनिष्टिवस्वे नारम्मोऽस्ति न फिमेस्यम्पुपगतस्वात् कुतो मेदा, मवानि • स्वमम्मुपगम्पवे पेत् स किमाविआंतोज्जास इस्पादिस्वप्नुयोगपदेष योपार, पवि बाता तस्पेषानुस्पादो माक्त्वाधिईचपटषविस्मावि त्वयुख्यदेवेद न पुन्पो, मन्तेऽपि पत्यदुकोण- विमोक्षात् यावरभोध्येतान्तः प्रत्यगत एव मेदोश्यत इति पूर्णपणे स कि मिलोऽनित्म इत्यादि स एष पर्यनुयोगो षाच्यः । भवादिनिस्यातायामित्यादि, एवोपमयापारिनित्मत्वपक्ष सक्त्वा निचनिजलममुपायसि 10 रोपामा पमाम परैफतेति-एवं चिनिस्वाप सोच साम्म तब नाधि प्रग्विमिक मरूपत्वापिसत्र नमो नन्वेषमपीत्यारि, पनि निमनिस्विमेव पशु वो मरम्भोऽस्ति न कियेलम्मुमाल- स्यात् यो भेरा-भारम्मा क्रिया सम्पद इति भेषामाष पवाग्मविश प्रसा, पर्व वापराविनिम्ता गोपा, भन्मानि पनरोपमापारेरपिस्त्पमम्मुगम्यते चेत्त्या व त्वं पर्यमुगोम्मोऽप्ति स किमारिबांधोऽजात इमानिस्यत्पर्यमुयोगनरेष विष्वपि विकासेपुवामोपीगरोपण इति विर्ष दर्शयति-पनि बावरा मेवानुपायो बालात् मिचिमटपरिमारिति प्रबमविम्ल्पमुकना यं प्रबमतिविपति-बबुरा प युबा स्मगावगावातविकारयोपि दुध पोप समुत्पादामाषा पेन्तेऽपि मावि भन्तेऽप्युसाराममा विनयविनाविनाचिनपविकस्सेपु त्वयुयोपाक्मिोमात् बायोग्वेदान्ता प्रकानिएर भेषवश्वत सन किमानिध्योरम्मानप्रेममिवाभिया-तयोमेति । तछा मारा-पार्शमादिति ममियरवनामा एमगारपि प्रापमम्मानम्, प्रमाम्यवाद किमनिझम्मान कियाधिो प्रममा प्रमापि सापा WARA मा प्रपम्पप्रमावता पोति मानिस्तापदि माव । ममाविमले की प्रेमोक्तम्भ सम-विमरमा नियमित स्मपारे पपादीति । माओ-पदोपेति, स्तुमित मासिक मिले तु मारमारिमेना पन ला परेच सायम पम्मति मितिसम्म पम्, अनिर्माणा- रोमासम्म सम्पपवायरसाद गमेन्या मोर, पब माचो माल । म पायो-वीति । बीला विमम्पुपमठम् बम पम्मत दान प्रारम्भमरियासम्पद, भारम्मानयजत्लामा अपनता पापना के माम माम् स्माद परकमान निमित्तानुपरति पनि विस- निप्रितमेवति । परेनियमहापानिमल पामुकम्मते चापि मातमारगाव गद्यमान थी मामा-पापमपाविति मातम्याममा एवं प्रसारमोदाम मिलेगापि रुपमा PRERष रमिला तारिणी-स्यादति । नापोलारामाणे गाठतात निगम रोमापी निम्मम्मान परिपालिमा यदि बात इति । परिमपेप्मसार एक मामला GIF ० गरियोपुम्मायो पानोपन तापापीमारनामावति । बोगीतका रोगगावमेवानि वाम भिमनिरनि-मन्तपीति, सीनिये बिना मा मिनरी लिपायल्पाल मा स्वार यप ने नादियो विनासति, मनिपालारनामम् मम्मच व ग्मन लो उमेरमा गप्पर, समिति मार। अनुप विस्तामामामाभारियन्येषामेवार मि.मीच । १मि भम बारमबोका।
सामग्रीदर्शनहेमु] मावशारजयचक्रम् इसस्मिन् पूर्णपसे सल मित्योऽनिस इत्यादि परनुयोगा, विक्षेपस्त्रनाम्दप्रत्समप्रमाणीकरणबारम्मकिप- मागप्रममःपपरित्यागम, दोष सम्ममिपारमिवरप्रेऽस्मिन् प्रसझ कम प्रमापीरप्पत इति पुनरपि महानिरिति गम्य इत्पतिरसफलम् , एपमनुत्सारान् सर्वमेरेमपसिदिः। सामग्रीदर्शनावपि सर्वासिस्वसिमि, तया च तवषैर्फ सर्वात्मक स्व परमुभयच समर्थ सम्मादयति, सा च सामग्री रश्यते प्रत्यक्षता, सामग्री मशेपभाषानो भाषान्तर प्रति पधिः यया पृपिम्यादिसामग्री समर्थ प्रति, यस्तुनोजेकशस्यात्मफस्यैफस्य म्यकाम्यकशम्पपब स्थात् सर्पसारमकस्यात् , सामग्यामेवदर्शनमेष संयादेन रूपाविपपिम्याविपरस्परसामग्रीपट पटादीतिरस्यते सज्ञायते प्रपते चेतन अगदिति । (सामग्रीति) सामप्रीदर्शनाइफि-पुरुपनियतिमतमामायभाषापम्पवमारपस्मकतावमादि 10 भेवसामग्रीमेवरनावपि तो सर्गसितसिदिः, वपा प-सेन प्रपरेप्पोत्पतिविनाशापाविप्रोज- भरपतण दरेक सामक स परममयं तमय सम्पादयति सामग्री, सारयात्मकत्वाचस्माः, साप सामग्री श्यते प्रसपवा, किम्मम्य सामग्रीवि पेनुष्यते-सामध्यनेप[भाषान्न] माराम्रै प्रति चि:- एरेसमिममियभरमम्मस्तुभेडमा भ्ारे भेदाम्वरम चिरा सा सामग्रीसम्मते हार्भपति- पमा धिम्पारिसामान्पादि-गृधिम्पुरपडिपमनगगनाल्मानिससमूगमका प्रपासा बसावया वत्स-15 माया अणुसम्पमामि[वत् सम्मसन्तयः तत्समूह प इति व वमर्ष प्रति साममी प्रपिम्यु विशति-भपोप्पेठति । मेरमा पूरो समति-पियोपस्पति, भारिविमाप्रससममा मम्तमानम् मा. यो प्रभावोरप्रमाता टो पभिगारा प्रस्वासमा उमाबापामाम्मैन सारनापमपमपि म मा सार ठाम समापिरनि मारितिम्मित पापहमतिमिरपानपाप्परम्पत पम्मत ही माता । अनुपापो सिमरवि- पपमिटि । प मापदनात् सपिदिमाह-सामग्रीवर्तनावपीति । बानेपा या पामी तस एप माराम्स 20 एमालाभारम्भमेदावाधरम्पापुम्मापारमारमा समिसिसिसा-पुरपति भरम्यमे पुरषापरममा पुरारिमनमा निमितस्तारस्थानाम् सपनाः पण तप निपतितन्ठ पुरधारक्याला पामार- स्थानेरमामापा पर वायरतापमा पुस्पा मनग्गस मिमी पुरपारदमष्मिपपिस सम्सारमय से भार। स्वामिनासभरणे समस्पतामानुपातिभिरमसमरसमाप्रप्तार पुरमसमें चमध्यस्मयाठिमा सामग्री पुरम पमुभा देवर्ष व्यायपाइ-तथा पति सामावर मुग्राम में परसुमय हम मम्पररी मेसोमा सम्पादक अपिममपरेनुसार सारयति पत्रिपामसामी पुरापासम्म मधमपुरा मान सामा प्रकोप्सव पनि भाए। सामा म्यापति-साम प्रीति प्रसारिभाान्तर ० भागमामग्री परामसरप्पयनमा पर प्राप्त मामध्ये वापि पर्व प्रतारिभाष माबिचारविम्प प्रम ममाममात्र मा मामाहाम्तरपारस ममुरसारम- मप्रपरेपित एमप, पामम्या समुपदनाम्यम्सानिरगभार-रमिपिति, परम्पे निममम. स्थामा मानमरस मरवारस्य सम्पादयन्ते मा मामाभर ममममी मामा माममा - पी-पण पिम्यारीति पिपुरामापयाम्मस्य समय सम्पमापसभापम इपिमा स्मा TR...मामयसम...म.मुभरप्रेमाम्मः।
पापागमानुसारिणीम्यास्यासमेतम् [परमातरम् एपरिपारिफारिसमूत्मिप्र, बस्तुनोऽनेम्मरम्परमम्मैक्स म्पदाम्पसरपेक्षत्वात् ससा- स्मकस्मात्, सामग्रामे रसेनमेव संगारेनेसात एवेन सर्पसबारमकवस्तुमेहसामप्रीपर्मनसेन संपारि रूपारिपिम्मारिपरस्परसम्मपीपटपटापति रपवे संभाषते प्रबरट पेवन बगत्, सपा विपिविपिनक- माझे प्राग म्पासावम् वस्मात् सतिसालम्पोऽपि हेतुम्पनेवनारमपविम्भिवमात्रमित । सिसीति । पत्राप्र- यदि सामायक्षेपसा सर्वस सर्वत्र पो तिठेषु देवपत् सिकतास्वपि वैसे लाद, कम- माफ्पत्सिम्यप्पमाल एप स्मात् , ननु पपा तिप्यम्पर्क स्वामिम्यस्युपायानुपरम्पते तपा सिकतास्थप्पनमिम्पक तर्क नोफ्ठम्यते सिफ्नामवेशोप्ततिठनीयस्मासुरम्पर्णादिप्रभया 10 सिफसानामेष यातया पिपरियो, सम्दुदकादिदम्येषु । पदि सामग्यशेपतेस्मावि, पपक्षेप समेहसामपीमात्र सर्वम सर्वकार्यमा बिसेन ने सचवा सिम्वासी वैष मात्, वामाषपविध्यप्यमार पप स्मात् न तु मावि तमामाक्षेप सममी- मात्रमित्यवोच्यते-स्नु परेपनि नेपा नीति सियासु मासि ते विमेपवीति, किन्तु मा निष्पाप मामिम्पन्धुपायात् यंत्रपीडन्यो। पान पसरते, पपारिमिासु पीरवत् भाषा- 104 पास बसरायणमाननो मा बाममी उपमुफ्णमामयम्, पामानि साम्यो सम्पम्, मा तामी स्ममुरापास्मसम एसा किमामलाममा जनतारिप सतरमकाण्डमा प्रारमे प्री नाममात पसरणामबार मध्यसामर्ष सम्म कमायाममा पटनो मरममा पेस क्तु मरमा माति एमरमसानुमेपम्पा नाममा भाषः । त्वमेगाह-वसान पति का सामनायेगमालतले पिरमाना माता सन्द नप प्रमपरिमारियायामामयपरि ० इरिफरमानुपापियामामुत्तरोतरा भागम प्या परिपरमारिपामामामामामा फिरपाम्पा पर्सिसम्मम्मामुतोरा मान्य एवं सामसुमारासम्मपरमामामूर्तममम ममप - मुठा मा प्रतिमान्त एस बधिमाधम्ममूनाम्माम् परमासमान नामाप्रमेपरिमारित्तमम बाद तहत पुम्म स तमामत्त परममिता नामावाद, पर वेन निम्त्यात मामाचार, नेमारी मपि मर खामिपार सामाम्पामपनमेषति । पुम्ससमोर भिमाको ममामा-पयति । गवल-तमादिति। न मम पाप मी हामार ताकि मला मिठापि मा पा समाया सात-परीति । सामसोमसमेत परिमाणितमवारमारिणा र सामम ममी गरीब मुगवानपिन मार, रवान मन नम्पिपि म सत् मा मचि कम मममम समेएमईयाममा tam प्रमी-पपरोपमिति पचममा विरामनिमममा विपिन न मन ममेरसम्ममा तथापि तमिमामाक्रमामधाने सोसारक, मा bagar भिमानापानापासमबाट भीमनगमुणपानापमित्रापापा- मिपमा तम्मा पनि पूरी रात एमनमानीसम्म हिम्मत पारनेर सम्मममम ममता प्रभासाम्म मासु पयेत्यादीति SE 18. म. नालायला.म.पापचयाएमा सदावर्णमहेतु] दावशारनपपम् पमानमितिमूहाणपपरमास १ मा सिम्वासप्पनमिम्मत दैवं नोपलम्पते, सिम्वापरेको- तविम्बीवरमाङ्करमपणाविप्रमासिकतानामेव, सपा पया विपरितो, सिमान्यममाने विम्मअपम्पवास सिम्ताष देम्मलि, तदुराविद्रम्मेपु-समासदणकोयु प्रम्पेप्पत्ति छ पाषाम्पमम्पस्मात्मनीति, विस्पोम पनजीवनम्ममापि स्मात् म्याम्पसपेण सर्वस्म सर्वत्र भावात् समानमेवत् । । प्या- सदा दर्शनात् संसिझादिहेतुमिा सम्पावितसर्षात्मकम्यस्तुस्वाददर्शनावश्यमानमा गान्तरासस्पेन कस्पिता मपि न परमार्पतोऽसन्तो न पा न दृश्यन्ते, भावितवदेकभवना स्मकस्वात् तदप्पग्भागान्तराणामपि दर्शनमेय, निषिमागमेष हि सदस्तु विभागेनेषण मान्तिरिस्युक्तम् , समात् स एवासि स्वतः परस उभयतयति, ययोछ 'तदेजति वर्षजति बारे सनुपातिके ॥ तदन्तरस्प सर्वस्य तदु सर्वस्यास्प पामतः । (इशा० १-५) यया सुदीपात् 10 पापनाद्विस्फुखिनः सहशा प्रभषम्रो सम्मा) तथाषराद्विविधाः सौम्प! भाषा: प्रवापन्ते वर पैवापियन्ति ॥ (मुण. ११) इति, भाषितानकार्यद्रम्पार्पमेदवत्, यः पुनर्मेदः सोऽसत्येष मेदे मेदामिमाना, सस क्रमामिम्प, एकदम्यस्वसत्वम्पादिमदिति । (सदेति) सहारनात्-सर्वदा मापस मासान्दरानेऽपि दर्शनमेष कस्मात् । संसिरसाद हेभिः सम्पादिवसामानुत्लात् प्राम्पमादितरेवराप्रम्यफसामसंयोग्यमन्ताभावाना प्रविपम-15 भूषा माषा एकात्मतामूवामिमवयम्यापुत्रान्वा मुख्यात् असम्बसमा सन्तोऽर्याः, अपनात्-प्ति शनिम्म्यापमानमागास्तरा बसन्त इति स्परम् तत् [न] परमार्पतोऽसम्वः न काम पन्वे, सम्मपदे रिला सस निसीमम अमरम्झामग्रमप्रतिस्परमारसा मिनानास माता विनानामेन पाउमापरिणाम तन निनामापत् तमसाच मितेमचीति सगी-सिक्वति । एवं पारिप्रदेश परिमूमापना पिचर मरठिकाना वेब सपुष्पमोतिमना पामयणगावमहमूममाततिमीनाब 10 ममाप्रमा समसपारम्पमानामने गा तारपदीति, पिम्मयिरमनिम्मरमातिम्मम्मरानामुरमरि- सादुरपनियमपि तप गान्दो मानमपि तेम्मस्ती मा एक्यारमापि मेगनायबामसम्बस्मम्पपदि स्पतिमत्त प्रतिपपद वाशिमयमम्मपि दम्ममा विग्यानीति पर सो प्पापेमामरस्मेन परमपी मापा । एवं सामरवाद समिनिमुपणच समापि वपा-सदा दर्शनादिति । समिसिनुपाति- दिभि सपपेमबम्परमातुमि प्रतिपादिया मासान्तपिश भाषा मरमेश प्रसास्मतिषिमापेट- पहना परसप्पान्तमायादितम्म बर्मनारिया-सवा मावस्येति । पम्पहनापि माथि मत एष सुनो मेप र तुपाम्म मपी में प्रापमापति मुख्साच मधिसमोऽप्रमोसन झार प्रासमादिति पसमापि जसमपराम्पमापापविनाममोरमापात् सपा सम्म भाव परस्सरमस्या सर्वस्य समारने मात्र एस. भाव पनि भाषामा सराससमस्लेष प्य पदमसम्यािपवान् सम्माधिपण पचाइदिवस पवाधाविपरस प्रापलिस रामान सम्पकमेनामिासापरवासियम प्रमापासवामावताररप्रमापसासमप्र सामपस पे० स्वामी समस्त्तर प्रेमात पावनाप्रपामारमपितृसमापदपसमा तम्मानिसमुच्मी मासिकमापि प्रेमात पनि प्रतिमा माय । बमबासमानापान्तरम्मत प्रपतनुस परमासोसम्मपान मस्मरचारिति । न मान मन्त समारम्वामा समिति पशमामा पमानाविक 1मि.म.म.हे.वेकवार । सिम फासि...मरम्पर ।
पायापमानुसारिपीभ्याम्पायमेवम् [शापशनयमातरम् समाचापि नाम्नेगदर्शनम् , कस्मामाचि परमागवित सामग्रीवनदेवोरेममनारममिति, वास विवष्मयनात्मकत्वात्-पवीतम्पायमाविवसरममपनाममात्, निर्षिमागम त बस्तुना परमम्प भागात सम्मेिवात् स्पिध मपि पस्बमदात् परेव ते मागस रश्यत्वास नपस्यामावरान मपि रखनमे निर्षिमाग्मेव हि सास्तु, विमागेपणं भान्टिरिस्पुम् , तस्मात् स एप[स्वीति नाति गतापम् घमात् समा वर्णन नावनम् पयोमित्यतिना प्रागटीव म्पय मापावेनाऽप्र-पति गति ( ) इत्यादि अगसम् पौष मायावत्वाम विप्रियते, न्यास्त सम्मेष भारणार्पमतिविपति-मविवानेपर्यम्मार्यभरपरिति-म्यापमयेषु पदम विपतिमेरेवापपु पया मारिवं प्रार पमा गोपाइप पसिम्मारिपु स एवाक्षेपो प्रन्योऽवावधारपिवम्पा, या पुनर्भो पटा पर स्वाति सोऽसमेप मेरे भेरामिमानः स्मात् । दम-अभिमस पमुना मामिम्मको, मेपल कि- 10 मता पछिमामा मभित्रम्पमाना मेरा इसाम्पसन्वे पुस्यप्राणशसपेभय, न तु परमादो भेषोऽसि, लिमिव ! एकदम्पस्नवस्वरूपरिवत्-परकमेष पटाम्प वस्तु पराविमापापरेपनिसिया रूपारिम्पो- माग मन्ति-पपा पमुपा गृण्माण रूप गिरा रसो प्राणेन पर प्रोग्रेण धमाला स्पर्श इति तय सर्वस्माभिन्नौकमेव पटपराविभेदमाषनमभिमानमात्रमेवेति, पर्व सामान्यबारा पुस्पारिद्रम्प- पारेन निर्मित इति । द्वादशारान्वर समायम् मिति। विमुकम्मरमानमारमाप्रपामप्या पर प्रसारमारिवासिमसारमस्वम सामीपम्पोदना STAतिसालको मानमति माया एतरेर साधर्म मामा भवीपापति, नामपनम्मान पत्य मानात्ममातुन संयमत्वात् परमपारमाया तारमा पचिम्पा भपि मरममभिवा परिममा नाति तर यो भयो सवे पर सम्मामपि विसार यस्मा दमापीचि भाषामनाया 10 कामातम दुपरिंभाग प्राधिरेन ठमपरपस सर्व नरमम्मेममा परव ग्भस्तबामधि प्रतिम अनुमणमित मसति निर्षिमागमय दीति। विपास्मा पुएनियन समतपरिमाविषयक मेमभोगसेच रस्तुत भित्र से विभिनेक भामरेत तस्मात् पुरण मति मारामा मामासमेर माय मारय संगी-तरेजतीति । तसरम सुसमतेम मेरे तमिपि वा मौसम भावमा परेपमा मना-मेडी पमा पाहिदीमा नुरमा मुया पारतिमा पर भान्टे मापा । उपप्राविमिमा भीम। जगा- प्रपर र चापित। मामले मे समान भास्नम्मक मारी पसमिca मामिवामाति। प्यम्की द्रप्पार्धनयप्पिति -प्सरा। पर रखे मन पराभिसम्मान ग्रा-पा पुमरिति, पर मध्यपरमम्माप नाम त पुरी पायल तामेगापिकनिम्म् अभिशापुरम निवारमागवे गुरतु मे ARTH भार परषा-वसेति परम तब पुष मसिम पान हमारमा रमाप्रार मापदामन परपस भार । मार-एसम्पति एम्माममा समय प- राम रममा ममता तपासना प्रोपरममामा राम रम पम मानत नमानपाइने तय पुरस समामि पासम्म एमाससम-सादिति ARTA सति। 18 अय तुम्बनिरूपणम् । । अता पर तुम्यं नपपकम्प मापते तदपि कि दम्माम क्मत सत्स मिसत्य ? इति, भस्मिम् सम्मेऽमिपीयते- एतदपि नाम्से युक्तम् , ततध विपेरारम्प विधिविभ्यन्सरानुपमझमेणोचरोचरे कान्तायुक्तत्यप्रान्त्या तेषु वेवरान्तरेषु विषारितमेष याषष्म्यषावम् । (पतवपीति) एतदपि नैवैनन्धे युक्तमिति प्रसन्नमेष, भ्यमियत मार-विपत्यावि, वकम सर्वसद्धारमअद्विपरिभिनयारागारम्पोत्तरोत्तर कान्तायुतत्यप्रणम्या वेषु तेप्रान्तरेषु विपारिसमेव, . पुरुस एवावमा ? असा पर पुरुया स्माधिविम्सफ्पनुयोगोषम्मेमेति, वगनुस्मारपति विधिषिम्मत- पमम्मम्मेप-विधिविषेर्भरानो पुरुपनियतिकाम्समाषमावानां पूर्वपूर्णपणेनाचरोचरम्मवस्मान व पो विध्युमयारीनामनुकमा परिपाट्या मेम-विविना, यारमोऽयपिद्रम्मार्यदूपम् इति तुमठे याब 10 रम्पम्पिोमयनम उक्का वायाम्पार्यम्भावभूतो बता पर पयागर्मभेषा, पामपि पर्वमार्यमानामुचरो परेपन्नायुसमन्मा यापम्पबारम्, सम्यगावस्माप्येअन्यायुधमपुन्य विधिविधिनस्यमवे प्रश्नम्तम् । वदकान्तायुकत्वस्थापना त्वेकान्तवााना परस्परसंयुकत्यमापाच प्रस्पेकयो वियो याष मावशारशा सप्रमेवतेपामुपरि विपिनयो यपालोकमाई पस्स्यिति, समावर्तितसविक- ससामान्यविशेपोद्वारा विधिनियमविपिस्नभिषनार्यमुभयोमयनय इत्ययमपि क्रमो यावत् ।। पुनरय विपिषिधिा, यपा पानेन शुम्पयाधपूर्वपक्षस्य सम्घ धनधेककन म्यार्पभेदेन, यथा - तमस्सारमन्तरमाम्पायनामिवाना समal ति श्रीगाव-मता परमिति । मनुशासन प्रतिपाय पाईपमेन परिधिसम्, कामासानिमत रममा सुमनुवासमिति सम्म रस, मनमाड मि समेष पुषरभित्लामियम वापीति । रबरपति-पसरपति । इस्मपि इमाम म्यानपानिमम्ममन्तवमुक- मिति निपासिमान्तभिफिनिधि मारपतिनन्ति प्रयाम्तमेबति । एमन्तामविवातिमिर-ततपेति 2 समापिपिरिवारमान्त पूर्णिमापतिपन्नामाममुख्ता माठिमी भावा । स्वपरितमि पर प्रिमितिविनयमान्तरे, प्रतिपादित बयोरिदिए रिकारमारबरासम्म रियापक-पुष्प पति । मुबारपि निवारण म्मरपतीमार सानुसारपवीति । बिपिविपीसि अम्पर विक्स पुरविमतिमनमानभाषा- पाक प्रविगतमा सिमाभिरामपुरस्सरम् लिपिरिमये माना विनियमनमनमुमान है- नियमविपिनमा प्रमधिला अप्पा पम्पपिनियनिस समयमर से भारमियमविमरम्मा ७ पपापा भाभार- मुसविस्मयन भियनय मधीमय बिमाभरमपसमपि पारो नियमविपसना मरेर र स्पा एपमा माय बिपिविधिमयोप अमररेमार-स्वः पामिति । एपम्ठम साम्पा पुसस्थपना भिम प्रमरान्तरेय तम्बामा पति-तरेसम्तति। अा प्रतिा एअन्तमा परममेन मस पानी म.सर्न । 1.भ.पर। एम २४ (४९) xxम.
पापागमानुसारिणीम्याम्यासमेवम् [तुमतिपथम् प से प्रत्येक विधिविधिना शुम्पवादे प्रतिपिढे यथापितममिसम्बपा, शुम्पवादलपि पेन फेनपिरेकादशानामम्यतमेनान्वरितस्प सम्म भोपपो। (तदिति) परकान्तायुक्त्मभापा वेधन्ववापरानो परस्परसमुच्चमापाप प्रोमो दिये पापद्वारमारक्षा सप्रमेरचपामुपरि विभिनया, प्रबमोजो वसम्पा, स्मारप बामेकपरिमाण । मस्त्वितीति सबुत्वानाविमम्बप्रापात् समस्यरसूचनम् सभापतिमादि-तेन विभिनयेन म्पतियोमे सविस्फ्पोः सामाम्पविक्षेपयोस्खाराम विपिनियमसिमिा, दवा तमिवनामुमसोमयनय समयमपि मो बापत् पुनरमं विधिलिपिरिति पना पाननेनापि ममा पानेन विपिविभिनयनेमन्तामुक्तपादिम्य छून्यपापपूर्वप्यास्त्र सम्बन्पा बोन तस्पिन इम्पाप मेरेन, क्वाप वैरिस्परि-पया व अम्ममेरे प्रतेक पिपिविधिनयेनैव योगा धूम्पपापम, सपा शून्वयारे प्रतिपिप बनम्तरमेव विम्यापीय परम 10 नामप्यराणा पवारविमभिसम्बन्पा शून्यगावमापि पेन केनफित्, एमपमानामम्पवमेन्अन्तरिम सम्म म्योपपचे। प्रत्येक जगस्वभावप्रतिपादनसमांना म्यापिनो येन रिमिति बपनात् पनि विपरनय- पीनो समनन्तरेपेचपपरिवेनोचरेपान पूण समनन्धरावीतेनैमपन्तरिवाती नेसविरुसमेग एकस- माम्य पा सम्बन्धोऽवी[मः । तस्माच मादधान्यतमायनन्तरोत्पानमसम्पन्न समापवाणो म्यवसायायेम- मारिधिभिर्यापोवारसमिर्मिमिता एम्वेन स्मना रमापुल स्पान्ति वा भिरमामा पमुप्रीति पर ममुसम्मवे निम पिच सिरप या मेहमेत पसु मावि मी कोणमिपाम्परिपते पानाचा सामाममियोपयो सपनिमाप्नुपरसता शामिप्रमादयोरिमन पोपुकामे माना-तरेकामयुत तेति, एकाचामुस । विपिन धिमे मारपति-पपा मोरेति । यानि पिपिचापम्मारिणाम, सामानात् सामाणिमापने पविया मातामिति प्रबमारम मिमियाबिनकर पति मामी 90 माना इति तदुत्पति पारम्बार पिसव समरनिपानिप्राविधिक सामावलियो प्रतिधियो' म्मुरपार प्रमालामसामाम्मविश्वात्मविमलप्रतिपारविनिममरिधिनमा समुत्त - प्रमाण याममा तमगाम्मल बाद एसामानिराको विविवि सम्मपि भाटीमा-तम विधिक पाति । एमवारमा सबार सम्मम्मो इमाम विकिपिनियन परिवयापासव्याक्षिा पण बामेनेति परममासमा खस एमतानुक्समातिा विविपिनसन सम्मायो स्वाति मामाचन्यात समय सापि सम्पयो सम्बन्जा-पपा चेतियामानामम्पसम्म सीन किपिमिति यो एपलास नाम एसम्मामेनिसिपिलिभिमस पर विराम पर नमाम्पिास्वामराव मधे का समविद् मत परिविरिधिमयोऽमिममप ममा नव मत वदव पिलिभियानमा सम्पन्न प्रमति किम कामपित्मविविपिना र समवामितममियम सुमी मार कमा म्पमा प्रतिपादिमा माफिमय परमपियरटेनमारसम्मको मापी-पक पसापाति । अब निस्किस भामेवाको-पपीति लक्लियोपामियाना निवारया पारस मन पम्पल एमपला रिविधिसमाना बामहिसाब निविभारिपके ठप्पन पारिन बार भिमान समये प्रतिमा । समग्रमालामामा समावेति । ..पामेलामेव पालखीत। .सि...म.पावत्यविधिमेति।
मयोपप्रारम्पर्पपपमम्] माशाजपमम्म् नार्य सर्वमिद नयकशास्त्र क्रमते, एषमेवास्य शासस्य नयानां पफ नयचर नयसम्ह इस्यन्वर्गसंज्ञा स्पात् , यया घामादेयं सर्वेम्पोऽपि सर्वनमानामुत्थानमविम्यम् । (तस्माषेति) माप -सपा]मावम्यावर्चनान्तरसम्ममा[त् ] मावानामन्यवमावरार नम्वरस्मोत्वान वचपरफ्णा मा, वेन क्रमेण सम्बन्धेन समतपमान-मिप्यारष्टिप्रणीवप्रमाणे म्पबस्मानार्म सर्वमिदं नयपत्रसम्म कमते समयमायापातिवमाशवानपेक्षसानपमिप्यारपि । वात्, कत्र वत्र पवरोपिहिवम प्रतिपादिक्त्यात् परस्परविहिवपमा मेच्छानुसारेण सर्षेपामम्पो- म्यपक्वात्, एपमेयेमावि-परमाताऽस शाम्रम मपापीना पक नरपा नयसमूह सम्पसमा मात्, नपाना अपरमतस्पधनबूपफ्समानो समूहत्वात् नपन्तेऽर्थाभ प्रापयम्ति नपम्ति गमयन्तीति बस्तुनोऽनेप्रत्मासाम्पतमैप्रस्मसम्मपरिप्रदात्मका नया इति वेपो पम्, एम वापरमारमा सम्पबावात् सर्वनगोस्वान म बिरुम्यते, यथा पामारेष सर्षेभ्योऽपि-पौवस्मामयाबुमान सर्पनमान्यम 10 म्यारमिरी वा सर्वेभ्योऽपि-सर्वस्मारेकैम्स्मावपि नयात् सर्पनपानामुभानमविरुटमेय, सर्पम सर्पण सा बिरोपिस्ने सति विवारसापात् । पपामशेषशासननपारामामुपमाह बिनषचन तपपा-माम मते । रपणप्पमा पुरषी कि सासता प्रसासता इति पऐ प्याकरणं सिया सास्ता सिया मसासता इति समप्रावेशात्, पुना, से कगाणं भंसे एतं एवं पुति सिया सासवा सिया मसासता, तस्य पिकलादेशा माकरणं, स्नप्रभाया स्वतत्वमुमयात्मकं विमागेन विदधाति वचपा पप्यावाए साससा षणपजवेहिं गंपफ्सपेहि रसपमोहिं फासफ्जवेहिं संठाणफसवेहि असासता इति वदनुपा नपा, IS बिपिविपिनस मर्मामा मावि तहकन्न न सम्भात् द्वारपानामराबामपठमारहान्तरसारपोसान पर प्रतिमेपाल माद, कानुनपानमपि तपरप्रसिपाल कम समेत विसरमामा सबै मवान् मिया रस्तिात् बनेट फ्यान मास्वामिमामा नबसम्मा प्रसव समारोह-माय सर्वाभाषेवि । मासमपदामा मिनायित-सस्येति स्मारोहपा सापामसमापाबकी मापानमपपरिवार पार्प+ सम्पत्सभनगुना जिनापूना परस्परविम्याना परियामात्, सहि मार मारमेहम्माषाप्पोमातापिता परस्परसाम्मा- स्पफमेन परिपामार नाता परिवसापेममा प्रचाः स मन सम्ममानवियरसामिप्याम्म मायावर होति पाहिलमिलापसरे ठेला मिपारा शिवले प्रतिपादितमा मायः । बिप्पानम्मान प्रतियापितास परेव पपरमारिवठालमिर-परस्परेति गोलमेल परस्परेच दिवपाषा मम्मोस पिलासि माता | as एस मया रोमाभ्पा परसरफाएबलमवम्पयस्वारमा त एस सपरमत्मामाएकामना मगामा मुकाम स्पतावमा मम्मम्मत स्मार- पवेति ।मम्मामाह-नयम्त इति। वस्तु मामामविसेनापमपम् परेसमा प्रतिपमुपारान्वेन तमेष पसरसमानामि प्रथम ममापीठ मम्माममापि ममापारम्बे रेशम्मुत्थान सम्मरमार-एवं वावदिति रवाये बामप्रभागार निषाबाताव बमात् प्मापपि मारवरेत- मुवान सम्मपीपा क्यान्स सहरोन हमारणापा मनोयनेय विसप्त श्मति सम इति माता । 30 एवं नया सत्रामा निर्मपानविपकममहासमुइस वयमा पर मामा बिनापनमा बिम्ब- नि.भ.प्र., सम्पबा। .सि कमरे 'बोध पापापमानुसारिणीम्मापासमेतम् [तुम्बनिष्पवम् तो ससापननामिक्रिया-तस्या धापताशाश्वतधर्मस्वतस्थायाः कारणाम्या द्रमा पर्यायाम्पिा परित, स्वसच विवपसो चिनवधनखानुगमात् । एपामित्यादि, पपामक्षेपनवानां नि निकपनमिति पेरुमते पपामशेषशासननपारामे-मक्षेप शासनाम्मेष मिनीमोपमिपदावि नवा:-भरखानीयानि मायाम्पसम नयबाम वेपामपेपशासन- , नमाया र भगवरवचनमुपनिकपनम् मिनवचनमहासमुद्रसैन सखा एते तमा पत्र वत्र मावि पम् पाऽऽवासियसनापार-'मह मिपारसमसमूहमायस्व प्रमपसाररस । निकायमस्स भायो सबिमामुशाहिगम्भस्म ।। (# का गा ५९) इति पाबापशासनमा गयो प्रमाफर्मायामयी गे ममासवो मम्मेदो वामेपाः सदादया विवरणयासाइक्सेिसपत्तारम्म्यागाप्पी । एनहिये य फलपपो प सेसा विप्पासि' (सं प्र १ गा ३) नारिम्भारमानात, तत्र द्रमास 10 विमाः पद् संपेपेम्पत्रोच्मा पागार्मस्म पद्, नेपामुपमाएक बिनपचन वपया-इमाणं मवे ! रपन प्पा पुरपी सासवा सास्था पति पर म्माचरण सिगा सासवा सिगा प्रसासवा' इति सममा देषात् पुना से मोपं भवे । एव एवं युवति सिता सासवा सिवा भसासवा' इति म्यानपावादी प्रमा तम विकमरेशासारण प्रभावाः सवस्वमुममात्मक विमागेन विषपाति, वपमा रमाए सासता पम्पपबहिं परफलादि रसबमेरि सफायरि सामाववि मसासवा' (जीग सू 10३-१-७८) पति वदनुपानाची ससामननाभिक्रिया मा राप्रमामा पापवासाचवमर्मसातत्साया परणाम्मा इम्मापागार्वाम्मा प्रमकपलिम्पा परित सवस्वमने अन्यात्मकं विपदो जिनपवन- मानुगमात् । मिला-पपामिति । माबो-भोपशासनाम्पेवेति सम्माम्येव मया पश्चिमबार बाविसानि मिनियच मामापानमुपनिषत्-पुस्माणि पिम्मारामापनि सम्मिलित वाम मासुम्मसार 90 मसावि पाचपामामो मामासमेत बिमान दया. मला भपकासव मण्म्ममरी भाक। बमा हरनावासमुफ्समाति-पया चेति म दिमादमामवसापासारस । नियम मपातः समि मुखामियम स्वास्लाम्येतानि प्रमावाजवा कोसेब लिममा सो मेरा नाममारनेपर्स एसम्मसममिम्मम्प्ला मालपाति । बाचा नायनमाइ-तित्पपर राति बमपनमामोपयर मुम्मातरम्पभिब परिनार मेपा शिकपा एपम् । मबारबनमानिस पानिपी सामाकि- सभिलम्हो यो प्रणामस्मदापर समय मास बालयमता वा अम्मासिफर्मरामि योग म्ममाएको विमा मेरा पीस मिर सपम विनिप्पास्वा पदमा पर्यावारिस पोमोसमयस फा समापनेति । वारसनामुनिन बिनववर्य यी-संपामुपमाइमिति पत्रमा विक्रमाधिन परपानाम् सपाट म्यणपती प्रभे रमापर्यायामिवाम्पसमयदेसाबारात माजी सरपति, परपेवा-इमा इति । प्रामाणिकपि वारसा मी EिAR नामिश्रण वापत पारवा परमवी-सेनाविणमाया तासरतापेमलाल सम्माभिम विमान मारवामपति-प्रमाताप इति । मनुपातरिति स सानानामिया की पाठी मि.म्यान्मामा।।पिलमपरवामिग मम्मामलामम ।। सर ।
, तुम्फरपम्] भावशारनपरकम् मादशानामराणामित्य सुम्बकिया, तत्प्रतिषसाराषस्पानात् मतोऽन्यया विश्वर णात्, तपमा विपि-विपिविधि-विध्युमय विधिनियम-उभय-नभयविधि-चभयोमय-समयनियम नियम-नियमविप्रि-नियमोमय-नियमनियमा ऐकमस्येनाम्योम्यापेषपक्षया सस्पाया, तपाय- वर्भनविकस्सैकषापारमकपात्, घटवत्, एतमममियतस्माद्वादरमणः शम्दा स्मानित्या, स्माभिस्थानिस्पा, स्यादमिस्पा, विभ्याविशदशविकस्सनियताकृतक-कताकता-कृतकस्वाने । काम्तविकासात्मकस्यात् , पटवविति । (सावधानामिति) शापभानाम्यामक्षेपश्चास्नसाहिणामित्व तुम्बकिया-माधवनामिकरणं धातिवद्धसराबखानाम्, अवोऽम्पया विशरणात् पपोत 'मि म बायधं पुरिर्स बापरेण रक्साह । पम्मम्मि किम्छे बरया सागरण हॉसि ।।' (भा० नि० गया ४५९) इति वचपा- विधिविपीत्यादिसामनपणा पावर पटवरिति एयन्ता, एवं तुम्फरप-सविकसपटनयपोकवाक्या 10 नयन्सापनम् वत्र रिधिमहासत्मार भापार, उभयमा मप्पमामलाण, नियममहामत्वारा मपार्सम्म निमाविमाः ४ निसानिमाविकाः ४ अनिमाविमाम विपिः विधि [विधि, विष निमिनियम, विधिनियम इति प्रपममहपापम् , मध्यम विधिनियम, विपिनियमगोर्षिभिः, विधि- नियमम्म विधिनियमम्, विधिनियमस्म नियम इति, पायाममपि नियमा, नियमम्म विधिः, नियमसम लिपिनियमौ लिनमम नियम इति, रखे धारशाप्यानया ऐमसेनाम्मोऽपापेमपतमा 15 पाम्पासा, पमा सवल यमासमा सप्रमान्य प्रम पानिपामा इमापर्वावापामा पारपाम्या वो भी लव तसा परी चरितमने पन्चामल लिपटो मिनाचनमानुपमानिमा । एक्मेर परसराम बामिबियाण-मापशानामिति । माणे-भावशानामपणामिति में मारा मिनिमानसमाप एमास्तारपाना तो गाउनुपन्त रम्पर्क पौगाभिमा दरा नमिझम बामिति निम्, रमेश महानामिमबम् साहारनामो सम्रा गरा प्रतिवरा मान्ति तरेर देशममस्थान मावि सम्पयत निपाते परस्म निरोक्न प्रमिलाद मायाम्ना सरमामा यान्ति का विरो-20 बामाकन स पुस्विरा माठि भाषा पनिसानामवस्थानमन्मपतिसरा पानोन प्रस्तावममुफ्समाति-पपो समिति गमिम् ममारत पुम्ममाररोग एन् । महम्मे हिमरे मरन सापारा मनु मपन्ति इति माया मापार पुम परियमेव मलिनो तस्मिन् डिग्रीमदम् विकरमा सापारा भवन्ति मिराबारा निम्ती मारा। एकदमादमी पारस पक्षा-पमित्र पुरस प्रषानो योन सो परिवार । तस्बिर निमोनिस्पकमामि मो परम RU स्सु व मामिर प्रयोबसंगति बिपिविधीस्पाइरीति नपारी हारारा ऐम्न फासरा-9 पेपार या AIो समयमा परिति शमममममम मानवामामानयनसायमनमाने तमारक म्ममिलाप प्रतिमा विधि-निविषितिपुमा-विविक्सिमममास्तारो निमिया रमन्ते रमा-मषि-मयोमा उममनिबमा रमपमा निम-मविपि-निम्मोमय-विमनियमनमा नियममा साह-बेति।पु मोपु समनिममा प्रतिमा प्रागति-पपासंम्पमिति सम्मोनिमा प्रतिसादात्म विविभोप. पमोमिनिमपितारसमभोप, सम्प्रे निमसीसापेमपमोचिर भनिन् एमालवाराणपराजिरिस्पेसवाय उपमपमापी मामायिते सोविएतला प्रपति र भावना सममोकिमते पोलिभानिस मामला मममम विधिनियमौ विधिनियमपोधिचिनियमप्रेरिधिनियमपोरियमनियमसिमका पमा। सि...म..विनिम्मी । वि. करप म पम्पवेष ।
म्पायगमानुसारिणीम्पापासमेठम् [तुम्पविकसवम् समाळ ति सपिम्सपेप प्रथिना-एवजमियवस्माधरम्मणा पण पति, सापिता मानिन्पनिमा स्मानिनः पम् इति संझपेप विविधा हेतुरपि बिमारियरमपिम्पनियतास-मस्य-वा- लानेप्रतिविम्सात्मकत्वादिवि प्रारम्मास्ना[वा]महार्यसमाधायस्मक एवार्य, प्रविणापत्, पचनमा विषयामास्मफरतात, पटवविवि ष्णम्वा, परस्पपेपाधिसमसनयमकमलानानिमित-कित्सावित- [निनवाने अन्तपिकासारमानुगवान-कासक-कवकत्वानेकाम्सविम्यामका सिद्ध प्रति पाग म्याम्पमत्वात् । म्पास्मानविषप्रवर्मनसापनन्तु म्यवहारिकल्प सधैकत्व सर्वसर्वत्यो भयप्राधाम्या पर प्रपानोपसमैनो-तरेतरामाय- मेदमपानवायवग्यस्वमेदसमुदायिमानत्य पणिकरव शम्मता- निस्मा सम्पा, म्यवहारिकत्वकत्वस्वस्वत्वोमयप्रापान्पान्यतरमपानोपसर्वनवेस्यमावम- 10 पप्रपानस्वापकम्मत्वमेवसमुदापिमात्रत्वमणिशम्पवातरवात् , म्यास्पार्पपटवत् । (प्यास्यानेति) म्याफ्यानविदर्शनसापनम्न-पतस्मानम्वरामिवियनामिकिमानेभन्दस्वप्रका- त समावोमवोकिनी कामाला पत्ता पत विभागामाममा नगान् समाति-विपिरितियापिमा परमपेक्षा साबेरमाई मत, पमा परिमार्गवि प्रदिपायसपो विविमिति मामा मेस्सान प्रजमेरपपिपास निविरिधि कसा माहवखन जास्पस्तनमानल्यावर मनिम्मास्पतिविधिनियमम्, प्रातिपुम्सयो पापानापने मम्मम्बामालाई सम्पति वियप्रससजिम्मपन बभिमायनमारविनिम्म पर प्रक्समाचलम् । तुमसमभवप्रपामा निधिविस्मी ममावरमारमग वयमित विधिनियमम् , मारयो। पत्मनिर फेवत्वे प्रवासी पापमानासत्यापोईनापानमनपाला विधिनियम्योपवित ममामो पलस पात असम्मपात् प्रतिस्ममिततरामसम्ममतापनि पस्तिति विधिनियम विविनिमयम् (समालोचतप्रधान मनवोपक समिति निमा लिपिभिसम्मोनिम्म व मपममायाम् । इममाम्मेयरमम्ममारपपरिक्मविया मम्मपानिमामा क्य. मातम मानसिपालि नियमन निकालाविषयविधि पामिकम्पमपाल पानिमारमा पसिना निमम निवासाविसमापन सिमरन विधिनियमम्, अस्मिाविमोम्भावपएमा परिवति प्रसाद विपनाविश्यम निम की पाबासमास्ययम् । परासनया मेमोन परस्परापेवाले मन्ति बेगन्मदिन पात्मरामिपमा मावि ला प्रसाईकी प्रामाह-पते राति । पूर्व परिसा प्रतिमा प्रमाण रवि मा मरेबाम्योपावरवल्या ता की-एमोति सम्मोमिमित व पाठ समयमेष व्यक्ति पनि पिसानिस पतिलाठवला पनि प्रनिविषा प्रतिम भाती भाष । उन खमाएपौति परिकीनिक्यो मेलालेमतमालसामेशवानमा पानेका निमसे प्रसार मात्र । मापपरी प्रति सम्मातिाहासमा महास्पेशल प्रचारप्रवामपरमसार-प्रामपाम्पाताति। सामान्य मात-उपदर्शनेति न सिविविधीमा पाइपमा प्रतिसाद मनु मामा सानाति मतिपरमम्मामन्ति प्रयोग 20ो मारवार भिसाप समस्यामा परिमाथि, नमाने प्रमाणपतु पापरापेपाधिमा मजयपत्रसमसमयमित मन्यसम्पमा नियमिनिसानिमानेपरिनपास्यम्मानिामाता मानेपानमा निम्ना-पासपपेसेति, सानिमाविमायामान माथिमिमा पामावा की माषः । समाना प्रो पिलियामानानपरियाणवी सिम-प्पाम्पावदिगितिमामाग-पतस्येति सानिधादिममममा रेमोनासोपान मक समा वसनलिमेमामात्मवाति मामिप्रमानेन्टलमानयन तामेवात मसान 4 मिथ्यादिनपपिपपा] शाश्शारनपषम् पनमापनम्प म्यास्पानविश पश्यत्यवस्सापनम् , अतीवान्ने रानामरा प्रत्येक यथासम्म प्रसान्तों पम्पासालान्, वपणा-म्पपारेकवेत्याविषणप्रवियोपम्पासो पापम् शम्पवानिया शन इति, खः म्पबारेमवेत्याविरणो यमस् पनिम्म्पयऽकामवालिनि, १ विधिनसम्म तापापासोकमाइमेव वस्तु, यथा ठोम्न परिगृहीवमेव मित्यानित्यचरममन्नानासायसम्मप्रात्यप्रयोजनवापिचारेण शक्यमामिपयो- जनपकर्मफलसम्ममानपरिक्षानमपोस्पेयानापनिपनागमगम्पमिति दर्शनम् , २ पिपिपिपिस्तु मिसावि- पापिराम्पपरिशानसाम्पत्यप्रात्यप्रयोगमताविकोपाविमोक्षास् सम्बनानिविरोपात् पस्तुवतपरिवाना मिनामावास्युतेः सबैकमरममावलम् वा पुरुषमामिपतिसमारभाराप-पतमात्मम्म् , पारमप्रभेर मात्रावस्माभेरमात्रम्पपारिति, तस्मापि बिपिपिपरपसापस्माबदोपारानावश्यम्मापात् परमशून्यम- निमपनभिप्रेवरामसहाय समिनिम्मापविमानातिना अपाम्, प्रमाप्रचिनियमात्ममोग्यसत्त रजखमोमयप्रतिम्मापारस्मोदासीनभोम्पुरुषोपभोगार्थप्रचरिति पिपिविधीयते नियम्पते पति रिपि 10 रिथिमिपमनयमवासनम्, न सर्वमेयरमा कि त । सर्प सपास्ममिति, ३ भसैम वा विकताम्वर रम्पतीमः । परममार-मतीवानामिति प्रोषना समयाराबा पवामन बनबारिम्पमानिसमा सम्माननिम्पपरितमरियमधीयानुसार प्रागसिगाभिकिनासाफ्नम्मासानस्से प्रसपति-प्पपहार स्वेस्पारिति- सपा निपानि वारपनराम्मानविय साविया पापिसानिमः माविकोपा, तपरिपसाप पापिसारा अरपत् तपारिपस्परमात प्रभाव । प्रमेकममत्रस्थानापान मसा सिपाति पिपिनयमति पत्र-10 मन परस्प्रट तर सुमपानरो पनाचिरतिविमिपाचरेष रमारमारिसमग पारसम्म घामाम्म पिगमपे मिलगानिमसमरवस्वमवतानानारिमाधि प्रहरपालप्पाराव पथ परममेर समा समाम्मे समिति प्रिपर र प्रमेाति मी व उमसोममाहारमातील प्रार्वमानानि पापनि पर मिसतीतिरे पुरपामाप्पम्मपनकम्पारावर समय मुकि गूप्रमाण पतरसम्म मनुमसम्मपत परम्मा कपात एर मरममममममम इम्म द प्रत्याप्त समयति सम्म तपापोरगनियममाम मी प्रतिग्राम प्रमो भात मासिपिपिपिस्थिति किसाविपापसाम्पस परिसनमपि म मम्मा 4-20 सरसरियमम्सापपराभ्या विमानासम्म पिरदेससभानजामानुनिक समितिमारोप भन्यतामपि भोपीयरमपागना पम्मनपानिमिी मग्रमारे बनम र प्रतिगर मापस म्पात् दिनादिनानियों पुराम नानादिलपहागनामाये पसमिसम्म सिमानम्, समानार पिकाममाभारिपारिताशिम्प मापसारनमारम्प र तामारे वभाग एर वसम्मेर बामाम्मे मारमित भरममा रस पुल समिति ममा भानस सपने बास्था मापनसमेनियम-23 नारामार मानेर म मात्रा प्रसमस इस मरिरिपिमपमम् । तस्यापति समापस्वासोरमदे पुरमारममावस्था अपि मनि बामसम्मानसमाये बात बाम्यारा पपुष्पा गमुरायमात्रय एम्पन् बा म्मारिणमुरार एष पो बलामी सम्पाचसापानमुरिभ्य समाजमा पारम्बनायासेमारसनामा शष्य मत परभारापपि पगार विमारमा पनुप्पियामु समासम्भमा सनसम्पारन परमारिणी समासममात्रम्, सम्माचपरगारम-20 मा सम्पत एरधरिमामय पुलामनियानमारम भारात् प्रणमाम्यापरपण . पालभाम्पा मारमाम्ममरा बराममा माययमन प्राधम्मापरम्प भाचपावरप प्रामाणिना सम्परम्पमतम् । रिपुम्पसमानरममग्रम्बरमा सम्प पति महो मानिन भागम् भन्ने चाय मरममा तम्मा पार्यका म्यायागमानुसारिणीम्पाम्पासमेठम् [तुम्मनिरपवम् विम्मुभमनमदर्शनम्म प्रकविपुस्पयो मरयम्मरमानुरपो सिमस्पुस्पतिविनाधानास्मारपारसत्यापन भागोन मामभक्तिमेात् प्रविरिशिष्टयुसिमापिन अपिण्यासात्रताविष्यात् ईपरेशिवम्पास्पक तमिमिति एनसमापि प्रतिपुस्पस परस्मात्मानापची कर्मसमभामा संसारमोमापनसते, विरमापि च प्रयत्पुरुपर्मनस्यात् र्मपो पुसमवस्यात् पारमनैषामना पचवारे सर्व सर्वसमिति निधिनियम्पस्यात् । विपिनियमनपानमिति एपो पतुष्प इमार्फत्वारहवपनिलाव अन्तः । भवितुमरनयोऽम्पनिषदोरम्पवरमपानोपसनमानुपपतिरमवापसरवो मिमिनियमौ प्रधानाष उम्मभावपरिमात्मप्रविधि ५ उमनपावर्सनम ममापि मपम परसरनिरपेमसावपे उम्पमा योस्तु पपमलिस्पुत्पतिविनाशतापमयोरमावस्य सपुम्मरतः परसा सवा तपस्यामाम्य गुणप्रमानमान बनाम सावधिभरमस पुस्यसामपाम् भाप्रविमानसापि प्रधानस भाग भाषामिटारयस्तरेपवार पुष 10 मालासम्म एस प्रारमा मर्म मपी मुसा प्रविधिमा समेऽपिता पराजित अभिजात भाषेवमात् बिगुमसमेकित पार । उमयमतमपि रामोति-पतस्मापीति । प्रमतपुर परस्मसम्ममनापी माम्नामिम्मामे मार, तम समाये मोसमानुपपोते भोपि समतसमक प्रातरात मेगाऽमेपरमम्वामा में माद, सामने प्रामपि मेषा वत्तार बम मवार मनरामोलार समात् बमै थनि परेष प्राव मेषनरम परसाती 1544 पत्थर सान् वापि प्रापरवा मन, मम लाममपि म मात्र पुसमरापिपरिवत् मेर पुल पर का, सपन पाबा नादिनस्यात्, वापि में बारिमम् भरनारी नाताम्मेरमीपणा उत्सम्मकाममा बारिता, बारमा होतात भारत परमम्मति मधिमाश्याम पाणार तेपि विम्यार मासिकारमान परक्यानाम्फेम्पपरिवामासानाप्रिस्लप, वेगामापापरिमारसिक प्रेम, पार्न प्राचम्पामा विपारिसमापरिष्मानकर, पमै नर्स मिति लिपिनिगमताधिमिनिममममम, एवं माणे काममात्राम्पमपरा सम्माएको किस एप बसमाप्रित सन-पामितिमान बार पति बपो म एम पुष्म् मा प्रम मानम्म प्रसार समापन - गुरबान र मायपि भाटीति मात्र रवि पाना भासमापि माः सम्मानितना मारेर तिमी मा किरा मानोऽपि नेच मार, मामातारस्त पमितात, तमाम धर्म मास मारवायो.. मता पम्पिारा सम्ममा वाममारना देशरतादेरमात् स्मिा इनपणापत्याप्रमभियोचामेवम् विपना था भएपन नम्बरमापो पचामभूतो मति मिलममिया-मन्तिममयोरिति । प समायो प्राकाम्मे रसरामधास्वामिलामपुर प्रमते सितुधिम्पिय प्राथा वस्मारेमममममममस्मत ता सिया राम तरच तस्मात्मा मिपमा सामेश्मागर, पर किसलिनुमबार रम्मनामा मचामल मामा विभारिपारममावत मानपारपारममनात निर्मा- पाच मयालि र भारमा गुपनो मननिम्स प्रोन समय मेरेभ्याम्पले भरपरक तोपो पानामनगरेभानपुरिया एस रमामायापेक मतभार भी मार मातामाम सपा भर भूठ बापी म मात्र मी मी मार्थप नको भार. (मार नामदार मापन माda RNAपरिमारिमिर्मिलम्ममगर मस्पापि अपस्यति नविनया बाय मनमानम् ता पप गरिनुमति चिनिमिण्यम् पागात माणगारा सम्मानिनाममा मन र रापसमापमामात भूपवान सपा सवासायरममा नपार ममापार, उममाजमा उपमम्मम् गुषमापुजा मारा माननामा बल उचामा र उप्र गम्भावना मातापि, वरी शारणयविपपा] शरशारजपचकम् इम्माति सस् परतः सचावि सास इत्यसदापि मातीति विधिनियम विधीयते इति ६ रिमिनिममपिभिनप एपनम् , बस्साप्पसदुसचिवामिनो नवमासमिहिमपितमत्वात् अपुमाविषत् सवोऽसवा सबसतो पा सवाऽसत्य सबसता पा समापामागत् सत्यलाभापाबासवुसत्यमुके प्रतिरूपमिवरेवरामापसमय- ममबसपति[स्मिति भयोमपनयवर्धनम्, भस्मापि रमनस पराभाषस विशेपम सरूपमिशेपासम्भवे अबसानाम् सपोरप्पमावसहरम पारितोपासुभवितप्रधान मपनोपसमनमिति ८ एमनियम नयमनम्] . एष पापमयीमय] पिप्पारिपु वनवम्लानिमानिसवापसम्विधतुरपयपा प्रविधातुम्याप्या किसा, अमापि नपरम भेदप्राधाम्मेऽनयामावा, उपसर्वन्यात्, भेषम्नापि वाविनामानिनोऽमायो गानोदुम्बरकसमपत् सामान्पविशेषमोरन्मवरोमपप्रधानोपसर्वनपसमिकरसानामत्सन्तामामाभिमुलानो त्याग्य सम्मपति सविसमा मतसमान सत्तासम्ममात् प्राइम्मार्षिचातात मचाया सोसता मा मात्र त्मसम्भावभरमसमवस लव पर सत्तासम्ममा सधसमन्यात भरणे स सातो पासत्वनास मात्र स्वम 10 सच्या प्रकार याब सम्मश्री सम्म सतायत ममाना मी पद्य सम्बामपभूतप्रतिसातत्य देवर मी पपस पासपोपि किमागुम्मपसाभावा तमान सम्मान निधारवे निम्नलिपि म सामान्न प्रतिनिधि प्रातिनिरयावालामाविन्यौ एका सामान्य सामान पिप मत पाऽपि कि समाम्बर मात इति तारामारपेप ले र मागस्पेप सदेशन पमिति बमरगुपनम्म बसिनस्पुमो- मानमवमिजय-मस्याप्यसमुत्पत्तीति । मालाम्यस्मासुको भाषमाया दिशेस परामाषपने लपतिपस्मा माये 10 मालपरस्परमपवितव मात्, संत समबति परमारपिपमान, परमपि न मपति सभापमित्वाति भामामात्य देसावरान म सा सपरयोरिटरेवरात्मापळे एसब मायामोरक्यम्, सोसल पटोपि सत्पमिती परोपि साव, मारामाराम्भयो प्रमाणाधिमा न सान् परामोपसनमाणे स्वायसम्मत पिस मागमा समान आयाम्पस भवनस्पेोपसम्म पुर्व स्पबाममा रम्सम्ममा मागमायो पदन्यन प्राभाम्पन मरिसम्पम्, परमाणे प्रारम्भापतित म्भमनिमममममति मारपति-अस्यापि पनपेति । एत पवारो मयाः इम्म भापति 10 समानेषु परिर प्रतिमा ममतानिपतलामासमरम्मका पो ममाविमा मानवारिस माम्पमि- सम-प्पु धनुर्विन्ति । रमपम म पुषम् , मी मेनपानो माया खत, कोत्रम मा मन्तिारमन्तरेण सम्म प्राप्तुं समस्या प्रत्यत् सम्पादम्तिा नमविलास पुष, २ उपयसामा मेरा का मेक- पसरा सु मेपास्मोम्मावाब मे मपि न मस्नुिमईन्ति पुपाल भरपर्मन्ये मेनपान इममत, एलग प्रारिमेवामा मेमामापर, बालोसमानत एवं मिरासामान लगे या पापसान समान पास निपातरिमेये भार एक पा लिपसरतामामा मापसम्वनियमनवमयामाम्पनिमेष पा ममतमयसम्मा- समसामामिसबा परतुन मी सतु रिकमेपानापविणेपर्समा स्मारमबनषि सामानविपणारे अस्कोमपाएपप्परम्भापोपममय समयमापनाद साम्पनी ममम ममापि अपोति।माम्म्ममा मतपपुस्मा बरयशवशाल, शनिपौरत मापत भावयतामठे मरम्मम्मोप्यमानतालापठे तोच्चमात्, पसरलासम्मलामीणे एवरेसम्मस्वानुमा0 तपेपि, प्रेमपलोपि प्रधिरेचे कायपट गरम भरेमा विष पम ना माषाहरेतापविन- प्रीया पुस्तरियत सवि शिकले मनासपएक सार, बिसनु मात्र उपप्समापन प्रापिसत्यत मो प्रतिमान वपिन पसामानम बिसारिपरि पिस्वाम् एषमन्यसाधविनाचम्पयम प्रीसा सम्मानवे नमुमाराम पारामपाम्पमा पाचम्पासापरमासापके पगर्मिपिमापमम्पमापद परिणाप्रमानवानापमत मान भनिापिमहानियाका प्रहमा तम्बार सस मराबिना पस मपी मुबाला म्पपमापन सपुप्पा, प्रमेयसास्मिरमर म नामासम्, प, १५ (vs) , . - पापात्पमापुतारपीम्यायातमेवम् [म्बनिस पीधिनषत् वस्याम्पत्वोमवस्वापसम्पदा मेयसीति ९ नियमनयमवमेतत् , पठपि मत[मयुमपचम्परिणी बचम्मरयानतितो सामाग्विरोपावनिरूपितवस्तुसावत्ववादिनमापायित्वासनात् स्परसापमन्वपिवित देवमिमविक्षेपसमापिमात्र पस्थिति १० नियमस विपिा, रामपि नयमवमझोभनम्, इम्पभवनम्माची प्रतिवावा प्रेज भेवमाको नाम समुदायसंरतिसमुराविनामुत्पापविनाशम्मतिरिचमरूपामावादमार • पापः पणे मणेऽमम्नमित स्पानि, बसापारम्पनिश्पपरमार्फत्वाास्तुन इति नियमो विधीयते निक- म्यते चेति ११ निम्मोमनियमवम् , भस्मापि नयमवस्मासापुता, पणोऽस्मातीति पनिक इति प्रम मुत्पचे ठनम्त्वपपठनोम्यो सामाविमागाभ्युमामात, पनिर्वहनीयस्थात्, अमावपरमार्पवस्तुत्वापसिना- निम्मा ट्रम्पत्वमेव पस्तुन इति [१२ मिम्मम्म नियमा], पोपु पर्प लियमवि-मारिषु सरस्थापित प्रति समविवाम्माम्माकिस्सा, सर्वत्र मारपर्यष्टमरिति प्यन्ता, पकसपिणनम्सापनप्रयोगमा 10 म्यस्यानविमानेन वा । एवं सर्वप्रमेदेपपि, सादेका स्यादेकानेका, स्पादनेका पिपिपिपिनियममियमस्व. मायस्वात् , विम्पाविशावतारमकस्यात्, पटवत् , भाषितमेप नयपक्रमानेणानेन, एषा जिनशासनमेनम्तसत्यमेष, सम्पक्सम्मसिसपनि धनसम्पतिष्ठितात्वात् सदसदर्पपदाम भिषारिममाणप्रवम्भससिरबहुमेवासियादेशनैमित्तिकवाक्यार्पयत् । 15 परसरपिवितेमाप सम्मानसममेव वस्तु, तम प्रतिपपिरिमेय समुगमन र पा रप मा पम्पमा मावासायी समिपमतवितिय विस्यसमुशमिमा परिवति मरिरिमममिया-पापीति । सार- मलमेर मात्र इति महमसामनम् मानिमिति मावस्पेनामावपेच या मरितम्मम्, मास्मितम पर्यापारि वियत् मासस्पेष मनामाचे स्पा दमापापविनासम्म मलयपारम्, वस्यपि माळवेपन्समा स्मानि सार, एपस पिनास विनामन्दिमाभागापासमेत लिनुमा बनिक पति सत्यमरममावलेन 30 प्रधानमन्त्र भरोस म निको पार न मा पमपि मममतमिति । मन्च मनापनो मन का तामनुस्मयोऽपि म मा म पनि स्विपारिस्त मरिभाषा भनेर, स्मारबिनाको पनि क्सपिपरत्वात् भात पर मामिलाममायवे तमामुपस्थगिपरिनियमामातम्यात् भारत परिमित बक्लिी महम् स्तम्यरम्माचे प्राताम्, स्मिात् विकलार भिमा पेट पाध्यम कार स्मार्धम्यामा पारभासम्भवाद, स्नोमायति वलि बिन बताया बनिसमारत मासि साकसिममातरमाण मानवामी, सपना पनि सम्पनिरोग र बार, प एोपाइ स एष पनि सावादिनचर्यभापतिमु भारप्रद पनि पपरिमाप एर मात, मावि भामेर यस सम्मपसोपसम्म मास्क्यिाम्पमन्तोष मानिधर्मेच सम्म मातम्भरार, पम्बन्पा सन्म लिने पनि म मातम, विभावार, Rok कोपारमिनार एस परमाननापछि मार समाधिनमा पिम्, बरसाना मायामा - मालिकमा म्प रिम्पीपमामात् परमाको मावि पपिएपर एसमेएम ममापि पाटो मामा माया सभापति तिमनुस्मानपारमामादर्शनाएपन की प्रसमा पनि मिनिममनमामिला- भस्यापि मपमवति । राभिमागायलमा विगा-पलेपिति, प्रतिपशु पाति पये पाव या सपति । समयसमये मामा - पसमाति, परमपावन मा पम्पोमामा जिमणासनसस्पतालापनम्]] मावशारखपपरम् एवं सर्षप्रमेदेष्पपीति, एमनेषनरमनपसगासर्पगवसामान्पविक्षेपपर्मिघमाविवस्तुप्रमेये प्पप्ये नवपमित्मविविपति, दमिनाएं शपचनो विकल्पानां त्रिपा सम्पिण्डनन चतुरमतुरो विस्ता नेकर म्पारुत्पा-सारकत्सावि, तयेबानुपा सत्र स्मारे दलानि पसारो बिम्सासपिप्प पछीना!, स्मारेचनेक इत्युमपविम्साः, स्मारना "ति नियमपिका, पर साकारण सात्परमचर्य स्सालार्य मेपति, क्या सास् सबगलं स्मात् सवगवासर्पगत म्गाइसगवमेवेति इस वर निलेकम्मरणमपगतोममा । नित्यानम्मासिबगतविक्षस्थान प्रयाप्पशापा निमान्य समय प्रतिज्ञापतुरपि समिप्योपवे वयेष- विधि-मिनिनियम-नियमस्वभावमात्-विवाणेन विभिषि साम्प्रत्यारो गृहीसा, विमिनिममप्रहमेनोमय- रिकस्साः, निरमप्रामेन नियमनिम्त्यासत्यारा विधिम विमिनियमन नियमम-विपिविधिनियमनियमा वि विप्रहात्, समपर्यमार-विभ्याविशारशामकरमारिति पटपविन्ति च्यन्ता भाविवमवि-स्यास्पा- वमेव अदनानसम्पारत्यानप्रपजामम्न मपमयोप्रन्नति भठीवारेशन तपमुकि, अतिरेको नाम 10 प्रसस्मातीन साभनमविवश इति म्पपत्, पो द बिप्याविनाविधमपनसमूहात्मक वेपामम्पदना मात्र व भपति, परस्परापमामामेस मपवीति विवरेण परिवाधवत् एबोत्साति, समाशमार नपचा- मानोनिमावियाचारपत्यम्वराभारनामीमूवम्मानवप्रवन्धवैयाक्यतार्या सामाचीपचायों व समामिल प्रतिरादिवासो पर्यापमा सामोत्याने प्रतिमात विम्यतित्परमकस्यात् धैननामनसत्पस्म प्राप्तिरिति दस्सिवम् , बोपसात्म सापनमिहम्-भिनन्नासनमकान्तसत्पमेदेखि प्रतिज्ञा, सम्बसम्प्रसि 15 एमास्मारिए माम मतिरपी-एवमिति। पाब-एनेति । शरमसान् मापपये प्रविभकानेश्लादि- प्रमेवनिपमा प्रणिय प्रतिमा सपिग्म पर्पपी-विशनापमिति । प्रमपेलानिय व एनावि तमा मी वामनरावी अपार-तर्पयानुपम्पति। तसर्मनी-सति । भरपतकाम्पसमामेबार- पर्व स्पारपरणमिति । सर्वसम्मेमोण वमति । भावार्थमाइनर पैवेति स्पणिया स्पमितानिन. स्पमिति प्रतिगमन, स्मारक स्मारने स्पना वि. साधारप म्यान् परप मात्वमिति सारमपन भाव समापट मारसपतमि भरकमेव प्रतिमा परपि तम्यवठि भाग । सापामार- विपीति पाप्यारी-विपर्माणमति । एमासमाह-विधिमेति । म मापामार-पिप्पादीति । मोनाषि- समायोमिनिम्मलमा निम्मानमारम निपाधिसम्मतान् ताप स्पधिमा साधिमामिलमा सानिमच सपेष सारोमीनपासपम पाण्या-परपतितिापमयेऽपरम्प सम्मान तिमेरे पाह-मापिठमोतीति । भने- समारकमानास पालममिति प्रमावे मनायब मार समस्त प्राप्य युधि मिचिमिा" प्रमावस्मविदेस सस्पेन पटना-मतीतेति। यन्त समी-परोति । एसर नसमातम्यमापनरषि- सनिमपरिग सम्पबाधित समाचार सयगुर पारम्ने पस्मिन माठीपा-सप्तशतारेति सक भारतसम्म पूर्वाधापनि पनवारपरप्रमान्तर गराधारमामीभूत म्यागपत्र उममाश्यतारा हमाया समा एमामाग्रमे सर्वानाचा प्राप्तिाब पदमापस पारिव मवि पातोपाने मिनिममा पिपरिवानामसनमा मातीतुर्थ सहपापला ममास्नगत विसाधापत्रमात्मसात प्रतिमा नि मानति माया । तर प्ररस समयपति-सपोपसरपेति । विम्माधर्म पन्तममा प्रमाणाममुम्- सि.धिनियमा।
म्पापागमामुसारिणीम्पापासमेतम् [तुम्बगिरावट सुपनिवन्धनसम्प्रविम्विा गरिति देता, समीरीना सम्प्रसिरिल सम्पम्सम्मसिसि, सामापरिमादि- साम्योऽम्याम्पत्य पस्तुतत्वनिम्मति, सम्पम्सम्प्रसिद्धः पमिकम्पन-प्रसपासमान्पमसोमसिर सम्पपविरोषन मेनोपनिषयनन सम्प्रविष्ठिमोओं पस हरि मिनभासन सम्पम्सप्रसिम्पनिकपन सम्प्रविधिवा वसपारेलम्बसतमेष वा, शिक्षा सामाग्रति संमासमार्थोऽभिषेको बस पर । मनमा) परस्म सहीवानम्मेरामिम्बारन]मन्तात्मका, वेन सहाम्पमिपारियां प्रसमानुमारि- प्रमाणान् प्रपन्नामाणिप्रमाप्पपमेनसम्बन्मामामिपानप्रमययाबाम्पेन ससिमा भाषामि- दिवा पाभेदाः-पटानियमपबामिया मस्त्यातिकिपापहामिरेगामापाः ससिखिनिदर्शनाः सिगारे- नैमितिमाक्पषत् समापनेसम्ताविपफ्लात् सत्य प्रमापराम्पमिवालि भारिवमेग, म्यमय- प्रकारसम्पक्सम्प्रसिम्पनिकपनसम्प्रतिमिवार्यस्यादिति, एष नपसंसिविसापनामिपानपर्लप 10 प्रामापिसदायस्मकं सम् । परपमपिसेपममसामन्यभिषामविसपनिमपि भामापसायमा मिते- एसदन्परिकान्तसाम्रममम्पस्तु विपटितापी प्रस्तुतवस्तुपिणेदपरमार्पस्वाद, एक पाहिमानीस्पादिवाक्यपत् । विनम्बमसम्मतिरिवारवाहिती प्रयोग रेलमार-समीपीति सामामयिनपानो परसरापास्पद ममम मन्वानुमानापामेमाम्मावि रमिर ने प्रयासमा प्रतिनिधि वना पाएन सम्मासम्पनिमानुपविम्बसम्प्रति वाम् प्रमातापिरोन समप्रमाणे पापारियो मरमान पाचे प्रतिपाटाने सुनाव सम्प्रीम पवे नामवाम्म मु सचिन पाय परिवार मोमो विच प्रमामाहारसयम प्रीपादनारसम्मतिश्विार्यः मानि आमातिम मपति तुमसमेत एकान पमी मा । प्रान्तमार-सदसदत्यादीति मा मारिएम सापानेमेलमेर Oौरवामिषेत्र प्रमानाम्पपि नारिपरेत वाम्ममितिकानि मिलने समामिलामा सम्मेलनमानसम्मानी त एष रणबी समाविषम्पावास मकसम्ममिरिता गुमेप वर्ष-- मारियमपाभिष' माना मियाफ्यामिाथ परिपपानवाससगरेनमिन पम्पमिषालम्पोरका मामावरमामरामिवामिनामचारिसमानानि मरणम्यापमान मिले मानिसमापनमतिमार लम्सालामविध वापसी माय । म सोतिर सामिपनिदेन महामनियारम्पायनि-मिरमास प्रमावो सिनिम्न पेष प्रयाचा प्रकाराम पापसम्पन्बाप्पा स्वामिवाम्ममिवारम्पमिवार लामिया यासि ना मोल एम मसालामविपारममावतन-मन गुदा म स स परिवारमा मपिस पास मार्य प्रमानमेवेवि माव । ते बाभवाने प्री-सदापनकान्तेति मासिक पान सपा प्रमियमत एक लामाश्या गावाला, समर सम्मानिससम्मानितात्परेर मिमी मात्र । तर मेममम ममममममपनमामोपदी पापमयबारोपनारस मरम्प मामलामी 20 परसम्मनाकामिना-पवमिति । सामानमानीपानसापि पवार यालामिवामी स्पिनिमाय-परपसेतिम्र्मानार्थकतान्यासमा प्रबोनिमार-पल्बम्पतरतिनिपात्या- 18.भ.पारयन् । - भम्पशासनानृतत्वोकि] द्वादशारनपत्रम् (एतदिति) एतवम्पसरे नम्बशामप्रवन्यस्तु विपटिवार्य ,-एक्षेपामुच्यना विम्याविनयानां परस्पर मिममस्मानाननं सर्वासमनानुसत्या सात्सोका सदस्समध्यवमा इम्पापपर्मयाप]द्वित्मानविवर्धिन समोरम्पवरम्मकान्तरस शामस प्रबन्धः-पुरुपपरम्परयाऽप्रामाम्पबच्छेदपरम्प[रय सदेमासदेव मित्समे- वामिलमेरेत्यादिः विपटिवार्य इति पधार्य ाषपचनं सांस्मादीनां दूप्याण्णमेर मैकिऊफ्टभपत्यादि- प्रमोगम्पो रम्यन्तमूठेम कय पक्षीमा मा मृदु शान्तदान्तिम्योरप्रविवेक इति, प्रसूतषस्तु । विच्छेदपरमार्थत्यादिति देता, प्रस्तुत पस्सु दासविमोचादेनसा मसापनसम्बन्मविपान प्रमाणमेष सिद्धि मिरुपमा परिछेरो म्यापावः विमोऽन्यमाभान वालियोहा, मासरापुण्ठीकमिपूमार्थप्रचाप्राप्तप इनिममपुख्य[प] स परमार्यों पस्मेवयोईम्पपर्यायार्पयोरन्पवरैनन्वनाममवम्भम्म[स]स्तुविजपरमापा- स्पमिमतविपर्ममहसुः, वडावात् प्रस्तुतवस्तुनिष्ठेवपरमार्थात् विपटिवा, विमिव ! पत्र पारिमामी व्यरिवारपास-यमेवमसम्पशवमार्यमापमावानापचर्षिपटिवाव प्रस्तुसमस्तुविशेदपरमात्मात् वयो- 10 उम्पार्थपर्यापार्यान्यवरविकास काम्तनामप्रपम्यो बिनटिवार्य इसेपोऽओं मावित एमातीवसमतनपत्र:- मेमेति । पवमनेन समस्नेन प्रम्धेनेतदभिहित विपिनियममाचिम्पसिरिकत्वादनकषचोषत बैनादन्यासनमनूतम् , बैनमेव प्रास्न सत्यम् , विभिमियममास्यास्मकस्यात्, भयति बत्, पटवा, एफमेष या साधनम् , तत्साधवैधाभ्यां सबैकाम्तषाविदूपणायानेकाम्तया 18 विपक्षस्थपनाप प प्रमपति, एपबत्या पिपिनियमभङ्गम्पतिरिकस्यादिति सिद्धे विषफ्नम शेपमधापतायामेव प्रतिभङ्गमपि चिरिति स्पापनार्पम् किमुकं भवति ! स्पानावसुम्म- मतिमवसर्वनयभङ्गास्मिकैफेव पति सस्मा, रसायठीवत्, अन्पया पत्त्यभाव एष, तयैव प सर्वकाम्तमममा। एम्मा परस्परप्रिमियमेम्पा निम्पिकमतानुसारेण पोष वा वित् सत्पई पिम्प प्रतिपारम्ति -20 एस ते प्रमापरवागविवर्षिय पपईमापाया मोरन्यवरम एकम्तभूतम प्रामस्स प्रबन्या-प्रतिपाक सप पुस्पसम्पररा स्पागात बागम्मपरम्परता आपमेन समासात सदा भरत मिलमेर कमिसमा मानिस बिपी ठा-साता पनि प्रविमापी-पतुपामुच्चामामिति । बा भानामप्रोममार-पासपचनमिति सामने विनीमा एप्पामा रकममेष पासा तब परमन र सभामारपोमा तस बान्तवारमा पन्त प्रदिप सारी मात्र रितिकार मार-प्रस्तुतति । प्रदन पछी-उन्नतिमामात मी 25 मोड पूरभाष सि. हरम हापसाबमसम्पन्दनियापम परिमादि प्रमाका शत पक्ष, धिमिनिस्प पालम विमो-पागतो डिम्यवामा मनिळोवा या मवि मरसि गपुरी सिनाम्मोसमामप्या प्रचा तप्रम पुनरी बाब मत परे मनम एकविरपुरमा प्रस्तासुर पर परमाऽर्को गत एरपेवाम्यासमार्यम्प- हरमनपान्दमा प्रसुतमिम पर परमार व एकरतिपारित भी माय म्हमारवश वाडिमानाति। पान भी पदमिति पराम्मिानि प्रामममिमियादि बानि बरपानाममम्परावापाय-30 वामयापानि पिवरिवाति समुदवसुषि-मेपरमायामानाब पनि प्रस्तपातपरमारत बसेसिक सम्माने वर वर निरपितमति माया बसवरप्रसारमार-एपममति । साम्पच्याम्नपिनि सि ...मापनी । .
7 - म्पापागमानुपारिधीम्पास्यासमेठम् [म्मनिरपवम् (पयमिति) एपमनेन समन प्रन्पेनवामिहित-पिभिनियममाचिम्पतिरिवारनक बपोरत् बैनावपासनमनूवम् , जैनमेप शासन सत्यम् , विधिनिम्ममाात्यात्मकरया, भवतिमार पति, पम्मेप मा सापनम् , वत्स्पधरपाभ्यो सबैकान्तमादिपप्पम अनमन्वयाविषधसामन्य र प्रमरवीति यथाप्रति मायावम् पतदुमयं मा सम्पमिति पेत् पचिबनात, वरनार्थमाह-एका किया विधिनियमममम्मतिरिच्या विवि सिर पूचिषचनमक्षेपमोम्याक्सवागमेव प्रतिमनमपि इचिरिति मापनार्पम् विमुक्त मपति ! स्माधरनुम्बप्रतिपखसर्पनयमनास्मिर पति पला खारीवरया प्रतिविशिष्ठभाविवर्णावासाराशिममनासंमानानिगुमागोपेवमनिगमसम्पमियम रखापतीत्सुकते पवाखानवियस् म प्रमेक पुबा विभ्याविनमाराप्यमपि तुम्नमविवाधिवत् पाशवप्रविषय- नपश्चिा, धम्पया इपमान एपेति पावसापर्मम् नयपत्रसम्ययान्मत्पादेष सम्वाम्बर 10 प्रतिपाइनेन ना! पा, प प सचम्चाकम इति-पपत्र या सर्वेपामेमन्दनपान्नमचिरस, असम स्मारिति प्रश्नम्तमेष पत्र वन । अनसासनसस्यत्वेवरशासनासस्पत्यसाधनपोरेकनरस्म सामनेन सापपपाम्यामर्म दयप्रतिपादन कृत भपति सम्योऽन्यायिनामापात् , विम्यादीनामेकस्मिटप्पुछे सफ्नया पका पय वर्षाभिपानमेपाम्युतियफ्नवत् , प्रतिज्ञावावितरमशार्पाम्पमिचारात्, ससा- धनधर्माणां सदन्धपम्भतिरेकमार्जनसाधर्म्यषेधम्मावानाचार्याम्पभिचारात् सावशानाम- मिपानं कृतमेष । स्मयारिम्पविश्यबाद, सानाला ममेर धान निविस्यमारकास्मरणात मावर भर मातरिशासनाना मामालान से मालासपी-विधिनियमति । मिमापित निवितरण माया महापविनर पि मरेगा बगाना सामदिन पर प्रविषय पर विखरा मार्ग असा सा तिरेर 10 न मदमसम्मा; पणी मात्र । ससमेन वा साबन पाचर्मवर्मामामुममामा मामा-एकमेव देखि, पासनस्त निविरिस्ममापीच्चारिसेपने पावं मत्थर्मसान्भारक्रमेन सम्पपारिएकार मोरपानी पम्बहान्नामेन्समापसापना व अपनों माठि मापा । पम्माकनामममी पोत प्रतिमा-त्तिपत्रमादिति लिमिनियममोभो महिमिच-समयसम्ममामी साता पिसामवेषा मामालाम्पर पर प्रमेर मामा लिमम्मवामित्वमेव रामदामममेव माणगुम्मनरी समापनाप र तवा कामतामापानमान वानम्, एमापतानापानामममा मन्नति पत्र । पारस्पषिमा-माद्वारेति सारनम्मे हम्मे प्रतिसास नगमा पारिमन पिर परमाक्पामापारयाद बमानिसमालगुनमबिमाबापा बवास्वामम्तिा रमारमै म प्रयो पानि रमत नोपावे व विचारनिविणारा माविमल स रक्त समेति मात्र । तुम्पप्रतिपदेखि बस हम्पनुषाबरा जय मिन्टेन्न्यप नि ते तपा मारा एमाया मपि मिलेमामविकासाचन पधर्ममत यी मान । नसमामेति नामावलमतोमणावायपरम्मनासाग्रेस-पति मामा परपावसायी भाष । महापौर में नया बचावात्तव विनिमपिता पयसिपमारता माह-यषतिमा-एकाति। समापनमारसायनेतरपासवमामन पा सामोरया भगममतिरामनारपराभामपरमसम्मल मनसा पापिठमेर माति सम्पतिरेय तरसम्मपाएकोमा 10 सापेसनपसस्पार्यता] वापशाजयपरम् (जैनेति) एषा सन्पिास्मकैमाधिजेना शासन सत्सवसापनप्रवृत्वैवापिस्सा क्षेपठासना सामुयमविपादन , तवसाघुस्पप्रतिपादनेन प बैन[शासन सत्यत्वप्रतिपादन हन भपति, अन्योन्या विनाभावात् जनशासनसमवेतरशासनासत्पररसाधनमोरेश्वर स्म सापनि]न साप पेपH ] गन्ना म्यामन्वयम्पतिरेकवर्शना मधम्मामर्थयमविपादनात्, विध्याविनयानामेकमाये सर्वमानात् परस्परापेक्ष स्वात् , एकामावे सांभाषानिति, किमियी पोमिधानमपाम्मुमतिपचनरत्-पमा वृष्टिममोममनमन्तरेण न . सम्मपतीत्यपिनामापावुभ्यवे समा पिम्यादीनामेकस्मिमप्युले क्षेपनमा अप्युला एष, भन्योन्यविनामायात्, प्रतिकाराविरम्बार्याम्पमिपारविधि यकमा निसप्रतिमामामनित्सोमयषसम्माविप्रतिमाऽयश्यम्माविवा तया तस्सापनधर्माण हेतुना वदन्धयम्पविरेमपनसापर्यवेपरप्यन्ताना प्रार्याम्पमिपाराव बादशा- नाममिपान रुपमेष मपत्यर्पता, वो निमरमेशस्मिमये विमम्मि क्षेपनयाविनामापात् माफम्याति विष्टेपिवानेान्तसापनप्ररिपैप सापीयसीति प्राप्तम् । 10 . पर वाद- तपा अयमेव प्रयोगार्थो विधि-विपिविधि-षिम्युभय-विपिनियमो भयोमपविध्युभयोभ मोमयनियम-नियम-नियमविधि-नियमोमय-नियमनियमाः ऐकमस्पेनान्योम्पापेक्षपचयः स- स्पार्याः, वयवर्धनविफस्पैकषाफ्यारमकस्यात् , पटषदित्येफ एवाय हेतुः प्रत्येकनयवियक्षया प्रयोगेऽपि, क्त्र यस्मिन् कसिमित् निस्यानिस्यादीनां साधने प्रयोगविघयो भवन्ति, रोपां 15 महानामेकैकयोगे वादश भना, द्वियोगे पट्पप्टिः प्रिकसयोगे में शते विशे, चतुष्कयोगे पत्यारि शतानि पयनपतियुतानि, पचयागे दिनपतियुतसप्तशतानि, पफमागे पतुर्विशत्यु अस्युचरनपशवानि, सधकयागे दिनमतियुतसप्तशगनि, मटफपोगे पस्वारि शतानि पस नपतियुतानि, नवकपोगे झते विशे दशकयोगे पट्पष्ठिरेकादायोगे सादा सावायोगे मिनामाषाविमा नपासनेति । मालरोति-पपप्ति । इत्यमेव वहिपाप्मामेमगामिमामे झेपनया भयभिधीन 20 पर विधायम्पतमभाने सनबमाबार, ममात्र मान् परस्पपेशत्वाशिमार-विम्पादिनयामामिति । ठन निवर्सनमाह-पया इपिरिति बना बाज्वारगुष्य मेकातिरपति विनमा भाति मात्र यन्त फुगवि-पया पिरिति । विमार-सपा पिम्यादीमामिति ला देनमासने पामिति विपद तत्पशमनस्सारतत्वमपि प्रतिमा माति विनय पुष्पपीतरैमापनयाना समाबलमुलभाति भयोम्पाविनामाविरक्तिरमा मभिवाराविति भाष । वर प्रान्तमार-पयरस्यामिति मा मानिस इति प्रतिशातापामभिमाभागान माइनित - माइमाम् स्पररममा साविषम्पः मानिसमा सामोअपय ले प्रति मार्य भान्स मारनामामपि तानिएकमेवमाह-वस्थापनसम्पामिति भनम्यानमसापचरत्नामित पापीयान्तानामनामविरेप्रनम्पापामप्यानिशाने परामिपान नमब भरतोपि माग । एसपमानाम- ममियने समयानाममियाममा परमात्म रमा माति एकनमेन प्रापरमवाप्रमपिनामावारिसमा-शाशा मामिति । एव महापक सर मधिल सामिल स्मारिकमेच मामापुचवतमापनप्ररिया पुण्या-30 स्थामादीति। एषय सबिम्पमापनयममाक्यानलमारन नपचम्पावधपिगम गुण प्रामाभिमका- पसरे तरपति-तपा अपमति । साम्प पिपिः सा तत्समबरिमामायाममा पनि म्पापाममानुसारिधीप्पाम्पासमेतम् [तुमतिपत्रम् (एपमिति) एषमनेन समतेन प्रम्पनैवभिनिव-विपिनियममात्तिम्पचिरिचयात्मक पभोगत् नादम्पमसनमन्वम् अनमेव शासन ससम् , विधिनियममगात्सारमयात्, भरविवार पाति एकमेव वा साचनम्, वरसाधर्मपाम्यो सगम्बराविपणाप भनसम्सबारिपप्रसाधनाय प प्रभावीति यथावित म्याम्पावम् एतदुभय सो सम्ममिति चेत् इचिवचनात् सगरनार्यमार-एक छिरा विधिनियममदम्पतिरिक्रयानिवि सिदे इतिवचनम पमनापवायामेर प्रविमपामपि इचिरिति प्यापन्प्रर्यम् मिमुठ मरति ? स्मासुम्पप्रतिरवसनगमहात्मिकर वृश्चिः सल्ला रमारतीय-पथा प्रतिनिशिष्ठमातिवर्णगापासारमुखिप्रमवार्यसंस्थानानिगुमायोपवमभिगमसम्मान पाठीतुपले बवामानविन्पामरमा म मोर या विभ्यापिनयाराणामपि सुम्पप्रतिवसाधिवत् स्माधवप्रतिवदेनम्य- पाचिा पम्पमा उत्पमाव पति पाप्मान्वसाधर्मम् , नापासपयार्यनामस्पारग रगम्तान्तर 10 प्रतिपावनेन नार्थो पा र सम्सप्रक्रम इवि-परम या सपामेकान्वनमान्नमात्तिरेप, मम्म- स्वातिति प्रशठमेव वन दर । जनशासनसत्यस्वेतरवासनासत्मस्पसाधनयोरेकतरस्म साधनेन सापम्यवपाम्पामर्प अपप्रतिपादनं कृतं भवति, सम्योऽन्याविनाभापात्, विम्यादीनामेकस्मिष्वप्युके शेफ्नया उका एष योभिपानमेपाम्पुप्तसिपचनपस् , प्रतिभावाविवरमझायाम्पमिपाराव , प्रत्सा 10 धनधर्माणां तदम्पसम्पतिरेकप्रदर्शनसाधर्म्यवैधम्परशन्तानाचार्याप्यभिधारात् शादपानाम- भिपानं कसमेव । सममातिमतिर, भरमसार स्थानमेव धाम्न सपिविमायामा मातिमा सी नकरणम्नानां समस्यमापनी मम्मी विधिनियमति । पिपिसममपाधि-विपापारमा मानो मागपटिरंच पति पण ममाग्ने मपास सह प्रविषय पनि पिया समाते बरपा मा मतित 01 मम्तीमाप्रथा एगी मार। एमा पा साप सापर्मपर्माम्मामुभगाया मजा-एसमय बिति, भारतमाम अपिरियमापरिस्मिम्मी पाप लापर्मणाम्बामा समतावाचार मादरम परम्मम्ममानेमन्तगासपमापनाव सम मानव भारत मारनामानि सम्मत पीसी चिरपनाविति मरिनोभो पीरममग्रममावार मेखि तारा AIR चिम्मनसेच भावामा प्रम भाना ति मनमामि एमास्वामबमा व सासराममा, ही पामार निवारामबापनापानाना पारवम् एमालाबाराममममा मिति मार । मारताय ना म्पासारति मास मुफे श्रीराम नवमा यास्मिन विना एखाम्पमतमा परम्परामगुवमानाय बास्थ मारिता रहा पर प्रसामि रामे नोप्याड तय {rakre HARY पर पति यम्मी भाषा। तुम्मतिम्रोति सम्म नायरा बमा पनि मन्नान व मासस एगम्ममा अपि समिति समवन पर्मन RAKE IN I मम्मी मामागWRITAIगरनाराया-नपपति मापारमतर । म सरोपा भागात एपिर परम्पपरम नयर पनि। मापो-पपा लगिनगमागमापासपोर्ममा मागमाम प्रामसम्म मना कर वाम तालमपप्पोम्पा परेपामात्योति] शापशाखययम् महासमुदस्सान्त्वनयसपमा पाणवारपारीणम संख्या तु अनुयात् , किन्त्यमा पशि प्रदर्शिवायां विपधिवा रशमुपपाविना शेर्प पयामुगन्दम्मम् , एपबानेकान्ते सम्पगपगोपि न स पभियो न रेखा, तृपतिरपि पम्मा मांसिप्पनिया भर इत्याविना प्रविमा एभपति-भनेमन्तपापिनोऽनन्दनः परमात् । सर्वस्म सर्गरमफ्लेन सर्वदम्पपर्यायाविपरिपृचः-एफको इम्माः सर्व एम्सट्रम्पार्पवया विपरिवर्विका सर्वपर्याार्यसया प, मा सपपयापार्यः सर्बो ब्रम्पपग्रयार्पतया बिपरिपचने, पु वेषु नप- नेपु सविपरम्परमापनविदरपु वितरण प्रक्षित सम्पपयारार्पविगत्यात्मम्मेफेरबस्तु, सम्मान सर्वमेकास्मन्मेकप्रसास्मक सर्वन सपात्मरुमिमारि, दव एक पोबेर ससप पेर, या सर्व पेस पैक पेर, यपोच- ए जाणवि स सम्म जापति, ने सत्र मापति, स एग बापति (माचा०४-१- ४४) इति, सभा-एको मापा सर्वमानसमा सबै भाषा एम्मायनमा । एको मापनस्लवो येन या सर्षे भावाचस्पवखेन प्यः ।।' ( ) इति, स्माद्यदिनाघ्र स्वभापसभाप-10 मार गारेमावस्त्रमावसमावस्वाब का पमित्तृपारिरप्पों सुभरत्येर यो कस्माभित् प्रतिमाया मिति सापूष्म । 15 पेन त्वेषविध घस्तु न ज्ञायते नासौ फस्यपिस्तुनोध्ययघमात्रस्यापि शाता, सदेकदेश मानस्यैष परिशीतस्यात्, अनषधार्यस्यावधारयितृत्वात् , स्वगहारफितमात्रनियतपास स्वतस्पमाहियत् । एपति, पमा ससापित निशारिणीम्या सर्व वस्तु भनिनुमति नवारण पस्तुगो हेतुन मातृपर पयार सभा मावाः । एमनेसम्बगारिस एम्यपि प्रकिनारा मनन्या इमा सम्मानिस घरीमभ्यम् , सबम परमम्म म प विनाम्पासम्ममारिमा-भनेत्रतपादिन इति । समार-सपम्पेति । सम्म एप्पत सक्सि मधपानमा पर्माना नामारिता म्यापो-ससि रमा समता-मसपा सरमाया व परिसर में पर्यावा मायामा मममम्मा बिपरिपर्वत 20 समापिम्पमा सन्नाम्पत यमायतमा मा एक सम्पनिमाम्पसमा सबम्पितमा ५ मरिस्त इति बपनिमचारसरे व भाषा । हमेवर-पुतप्पिसि सपनिम्पमधनपरिगे नये सो मासम्पास्मस पगारमन्न प्रकम्सुमा प्रतिपारिश्मास मा । एवरेर दिन सम्मति-उस्मादिसि मसोमम पसारमा एक याममा बामति बसुपरिनुपप्प म्यासलमेनि मारा पा समार- व पति । एम्स मधमा सरयम्मागरम्पारमतारा एक सामान मई रापमा मग पेमामा समाप ममत्रसारम्प समात्मसारेर राम्मै प्रयापति पपादमिति। पानावनान्वरमार-एमे भाप इति संभारमभामयम्भारप एम्माषमाम्स नाबारामिति पस्कि वयप पीना समापसमाये मारे पनेम में भाग पा एष तसा विभाएर दिनमा प्रति मिनवापिपिनाना माया मारेराम मौरमामा गनारस म्यानमारमा प्रपत्री रोगामारपरकर-स्यादिनाति । माननुपसतापप्तमभरोसाम्पसमसिम-30 भप्रायमसम्म-मसामिग्मानिस मरिमा परमसमरीमन्ने मापार मारोबार सपा सर-पनति समसफल समसामगि म्यान . पापागमानुसारिणीम्पाम्पाटमेवम् [तुम्बनिरपणम् एक एष, एवं सर्वसहरणताः प्रतिज्ञा, तासाकैकस्या हेतूनां पत्वारि सहमाणि पाचनपति- युवामि (१०९५) विकसयो भवन्ति, एषच प्रतिज्ञापनहेतुभसामान्योम्यगुणिय महा- नामेका-कोटी समपष्ठिर झवसासाणामेकोनससतिष सहसाणा पचविसति (१९७१९०२५), एवं तापमिस्याविप्रतिभास मनानां मेराः। (तपा हीति) वपा भयमेग प्रयोगाों पोऽमाभिपसंहम सामपिणिवायलेनोम विधि- विभीति पर एष पारखा प्रलम्नमविषमया विषवे अम्भवममयोगाऽपि सामध्यात्सर्वसम्मपात् वा सम्मिम् कस्मिमित साधने-मिलानिमापीनामन्यतमस्मिन् पर प्रयोगविषपो भवन्ति-रिम्सा महा इत्यर्थः वे गारमन्य मदानामेकायोगे शावन मा, विनोगे फ्ट्परिट, विभिम विधिविपिन सबिताको मार, एवं विपिनअपना मोम्मा सभा विपिविधिः, क्यारिनिविमिनिममा, विधिनिपम पमधनो 10 पाप्यमपि महानो विम्योो पद्पनिर्मपति, पवेनेम संमोगविपिना निम्सयोग हे विधे - विनाऽऽपाव महविभिन्न पार पापोो एक पति, एक सर्वसदरेवाः प्रविशा, बार- बसारि सामानि पचनपतिमुवाति वा का तूना पवार साखालि पमनपरिवार (४०९५) विकसो मवम्लि, देखो वो र प्रतिमा बपि वपन्न एष, सर्वस परस्पराविनामावेन नयमबानामुक्त्वात्, एपोत्पविन्म, प्रविाभना महाभाम्मोऽत्पापिठा भवानामेका कोटी सा- 18 पशि: शवसहस्त्राणामेकोनससन्तिम साता पनर्विक्षेति (१६४६९ २५) पर वापविनाति मदिवा परवानां मकानो मेवा ग्मा, एपं भरपसांगवेवारिप्रतिपसु बिप्पानिमपसारा ममा नेवम्याः। पपमिपम्नेमन्तवावरिगुपदर्शिता परमानेनन्ठे सम्यगवछोपि न स कमियो म देता, खणाविरपि पस्खो कस्पाबित् प्रतिज्ञायां हेतुर्भवति, सर्वस सोरमकत्वेन सपद्रप्पपर्या- ० पाविपरिरचे तस्मात् सर्वमेनस्मकमेकप सर्वात्मकं च सरिममित्यादि सत एक पो मेव सर्ववेद या पेद स पर। (एपमिति) एषभियमनमन्वपापविगुपपर्मिया, कोऽम भगवतो मइयो मानुभागस सार- प्रमोफा प्रवासास लिमिनिम्मानिप्रनगममा प्रयोगा पापा सरस्मेर पर सम्मामि सोमानिनामानि पक्रयासम्मलाशिमा एक पर वायमिति । मामिम्ममारनामा सामातिपाति गमिन् ममिथित् पकने म्मिमाने प्रमोपविषम्पार संपति-वर पमिमिति बनिनियन विविधिविनिम्मे विपिनियन एवं प्रोन विधापनाममा समेत पट्सम्योगे या मान्यता-उपा लिपिविधिरिति । एक माना गे माला- पतिविभिन्न विना सापाप वादिति। प्रोपलपेममा ताम एस प्रीम मात्र सपा ममा परममिया लाभापासम्मपरिपाती देती येति । एषय शिरेलफेवया पमिाभैरान-प्रतिक्षामा वि।समे मिनिमम स्पा पर mota निमेश सिा माह-ए तापदिति । एक्मरान्तबार पोपेन समयमानामामा मामा वालियब तु सामामास यम्मी मयाना ममा बहुमानमपितो Ram माधान ARARE एममियमिति। पोरबोऽस्म मपयत इति । याला मामा- भगवतस्सवा] मावशाजपपरम् र्भावान नापावेऽसीति मानम सर्वियम्पादनाचित्वावनमतविषमस्वात् वम पानोऽनम्व सात् भगवनम्माधिान एक पखवत्त पेचि नाम्मा, स पाईमवेत्सव मार- भगवास्वनि यदेवत् सर्व नाम तत्र मिरापरणज्ञाना, तस्य पथासूतसममेदस्य सम्पग मिपावस्यात्, यस पथाभूतप्रमेदपस्तुविषयसम्पगमिधातृत्वं स तत्र मिरापरणशानो ए, तपथा मैत्रक प वगारफितादिमेदपठासस्पतत्त्वं देशकागफारममाणादिमिशिष्टं शिशिर षसम्पनिदाफ्याधररोमम्तेपु ता तामवस्या विम्रत पार्श लायोनारफितः हिस्सयिता पत्रित इत्यादि षन्, नयान पपाभूर्व वस्तु निरमशेष प्नुवनिरापरणज्ञान इत्यनुमीयताम्। (भगषानिति) भगवासवान परेपसर्व नाम पत्र मियपरवाना-साद पस्तुनि निरावरण- मम्माहवमन शानमित्या, वम पयामूतसमभेरस्म सम्पगमिपावसात-तम-सर्वाश्यमतुनो पयामूर्व- स्पत यथामूव बीप्सात्वापारयम, पेन प्रसरेण भूव वा पशु सप्रमेव-सप्रतिपमानिसमारपट- 10 सर्पगवापिसाविक्षेपपणापत्मसनसमे प्रमेष र पस्तु वैरनन्वमदरपपरिक्षेपः मा स्मादरे बनेक- नवविकल्पपुलममा सोमवस्तुति बापावयबामेरकविपनसम्पगमिमापिस्लमस सिद्धम् समल नयत्मसात् स्माधरस्म, परम गबाभूतमिरवमयममेषस्तुतिपयसम्पामिभाव स पत्र लिपपरानो रण, वपपा-मैत्रक इव स्वग्वारविवारिमेपणसम्वत्तम देशकागभापमापरिनिसिएम पिक्षिर सम्वनियामपसरलेमन्टेषु वो नाममा विमा तपा विशेष्य समात्रोभारपिता किसायिवः पविष 18 मानिनुपन् मैत्रम पम निरखमपप्रमेव वा निरापरणयान इति प्रेसियो न रेखवीतीपपमम्पजावसंश निमिपनि निम्माविमचाउरलपेपर सवानियमाम मफ्यान पम्पस ममदास प्रमोमसिसाम्मी परिणपति मन्ति, तमाम मापर्यायविदयम्, पविमान इममानविपरमवपारपर्म सापति क्षत् पकड़ने अनिरुप्रतिशत माद, परन्तु क्मान पावित्रम्, अपितु माक्पमातापि मत पानवापिसम्, एसब समोणतामद, एकम्मलमत्ता ८ एस गालाति बस हार्म अपपदमाग ति मन, माया 10 स्मलानिमामालमतन्य इति माता । बम मावेन पर्सयति पय मगास्वमिति । सामाचार विनिरापराम इति प्रतिवामद-मगपानितिमा-ससेति । वं पायी-सम्पपस्तुम इति । गमा बम प्रस्ताविपर-पपतमिति । फे प्रमाण पत्र प्रकारावासमरियासमाभोगा-पेन प्रपरेमेति । सम्मेरम्लामाह-सप्रतिपक्षेति प्रमश प्रतिवानिमामनरासयदिना सहित नियाभरनेम मबार, गत सारपिचारात्मप्रनम्तमेप्रमेम सुमारे पैरसम्तमेप्रमेय सानेपाम्प बरते उमाल माराम भगति स्पिानिपलपेपासप्रमेपपरमवामियम अपिति माना। परमार- समति मागो सिमयसमहालकवि मापा । मामि सपा-पामेति । मोल प्रस्तुपियामेयर प्रमेमसमपमिमाया पवरिफ्परिणामान्ये पwt । पान्मन्समाबो-भवति । महल चम्मपपेपमा पनिपेतम्यामपसमातिम्मे माति, वा पम वयापेममा विमत्तका गोमात समविक परिन्ति र मरमसमे हुस् मैरम्परिने निरापरपममो मायति प्रतिमा वि 30 मासः। पर्मप्यमार परिरेश्मासविपुम्सापेमा-न ऐपतीवीपति मौर्यमार प्रपत् पसपुते पती- A. ममेष . 10 म्यायागमानुसारिणीप्पाम्पासमेतम् [तुतिपत्रम् पेन स्पेसविषमित्यादि, पापन मागसमस्यौपम्पमा मन परवापप्रयासपिजी- परपस्पपन वा प-एपविषमाधरापिगम्पाने प्रचारमकामानववा पुमान् नासौ पसभिलुनोऽ- बसयमात्रमापि जावा दरमपमानमेष परिगृहीतवाट निसानिमत्तापनवपास्मो वस्तुनि निलमेक- निममेलापमिभिषिम्युरियात्, परेषम्पावटे-मनपपामापारमितत्वात-रमेव इत्वमेसनरभार- : पोम्पमापारपा नात् लिमित्र वगङ्गारभितमात्रनियतपठामास्तमाहिया गारिको धित परिटिससापमस वमपमेय समिमित् भाविक्षेपे पात् सम्मेवानिमलपुष्पाजधान पति, क्षेत्रमासे पाहारविवमिव बनपगागमारापरीतमिव पामो मममसराम मुगाममवयनमम छोक्स गोस् हम्पबाइन एपायं सर्वप्रामिवि स तत्पम्मेवमात्रनिक्वपमशवतत्तपाहिलात सामानः प्रमाभिरामीरीभिरपि संरचं 'मत् चतुषणपदेश्यमान्यस्मानेकाताहरसिम्पपत्रकममध्मतिविचित्रावन मैवतं का रेति प्रामीयाममसर्पिविनान्दीनत्वात् , पम्पतमाक्मायात्रापम्पिसिना नवाद एकमेचम्बबादिमो वस्तुवस्वानमित्वमिति । बुगमनवम्पपपपरियतिविपयाम्पाइवनिएवरफ्लापरिनिनिमिचाविमापापलिममारिनिमित्य- व पिपरम्पानोन भावान् यत् पपये परिम्मति सिम्योम्याम्पो चरति दया मारपमेगावाटसमानुपतिपादनप्रवासाम्यवनप्रतिपादकम स्मार-माहादेति। तसिस्पिरिकामा 10 पुमान प्राविपि पलुमेप्रमानरियामानापि सी प्रगतीव-पपिपेति। पासून सुमार-परेको छमावति मानिसले मातरमन सिमेन बलू, मममेर सिक्नमितरमापापकर मेमनाया माग गरिति माष । प्रिपे माझरोधि-निमामिस्मत्वाति । स्वास्नी-मारवार्य- मोति । सिमोशायरपारपाकमा ग्लुमनाप्रपरमविवानापिया। पायो-समवेति प समान परमावास भोऽनिस एन सि लेगमापरमाणात मिनमानसमझारक्तिति पाने का लपारि पिचिवपनावि पाविससा ताणली पारसमरिपूर्ण तो सोने का समय सम्म एति प्रमाण मापारगति परिमापा कागति-पति परिसिमा पासा परिपाक- मम्मम्प्यप, अनिमा पुमानि ति भवन मा सोनिपपुपमा बसावस मामयावनिम्न भोममायामुपमधारात ले, लामामामधीमत्ताव पलपलमयमा एक पसमय पम्मेपार म एमसमिति से नवान् पसलमेनियामाही मामायाप्पाही मामिनिमलितमि समस्यपि वपनुमिपमान मानावारूपये प्रसार सामाग्रिाम पलसावित म निगाणी शुरप्रमापिपिानरमतार, पाप वर्षमान- भारतमालसामानसमा विमर्षि एम्प मचारिणीति मा। पाराधिन पामा माम्म नमाने परकम्प ससा मानायब मिलो अपनी भाषण मातरम पारगमार-युगपदिति गमंत मान पुनपएमयपविविसि पर मिल ak .सि.म.न.पा.म.पासपोपमय... स्वामयिा। ५. मासिम्पला । (सम... परममिति रिमा। 20 मगक्तस्साता] मावशारण्यमम्म् १२०१ पायान नापायेऽचीति पानस सर्मिपम्पारमारित्वाइनवपुतविपयस्वात् उस्म पानोऽनन्त लात् पुगपएनन्वार्षवृधिधान एप वस्तुस्वत्वं बेचि नाम्पा, स पाईमेवैमव बार- भगवास्त्वान् यदेठत् सर्ष नाम सघ मिरामरणशाना, तस्य पथाभूतसप्रमेदस्य सम्यग मिघातृत्वात् , पस्स यथासूतममेदषस्तुतिपयसम्पगमिधातृत्वं स तत्र निराधरणक्षानो रस, तथपा भैषक इष स्वगारकिठापिमेदपछाशक्तत्त्वं देयकालाकारममाणादिविशिष्टं शिशिर । पसम्पनिदापवर्षाशरमन्तेपु सो तामपस्यां विभ्रत पछार्श त्वमायोऽङ्गारफितः किसठयितः पत्रित इत्यादि हुपन्, वयान यपाभूसं वस्तु निरषशेपं मुषभिराषरणज्ञान इत्यनुमीयताम्। (भगवानिति) भगवान् पदेवत्सर्व नाम वा निरावरणवान सर्षि वस्तुनि मिराबरण- मम्पाइवमम पानमित्या, वस्म बाभूतसप्रमेयस सम्पगमिपाहवार-उस्म-साम्पबहनो पपामूर्व- सपल पपाभूव बीप्सात्तापयाममम येन प्रकारेण मूर्व वा पशु सप्रमेव-सप्रतिपमनियाभरण- 10 सर्मगवारिससविशेषप्रस्वायरमअनन्तमेरप्रमेरं तब पस्तु तैरनम्तैमरेरखपवैरनेपः सा मायदे अनेक नपविकासयुकमवा साम्पतनि पावपषप्रमेषिपयस मगमिपापिस्समम सिवम्, समज- नमारमकत्वात् मायाम, परस यपाभूवनिरषयषप्रमेस्वस्तुविषयसम्पगमिपातल स तत्र निरापरणखान्ये वपमा-मेकप लग्णारविवातिमेरपणमस्त्रवत्पम देशवागारममाणविविक्षिरस्म शिशिर पसम्वनितापवर्षाभरमन्तेषु तो वामवर्मा विप्रय वा विझेप्प लयात्रोधारविा किसरपितः पशिव 10 सारितुषन् मैत्रका पमर्श निरवश्वप्रभेद वा निरादरम्यान इति मेसियो न रेपवीडीपपमम्मयावसाय सनिमिष्यनिर्माब नबगारिनिमितान्तरामपेक्षा याविषयमान भयवान् पमस्तु ममास प्रमोपनिमसाम्पा परिमति पपीमापति, तमान पापर्यावविपरम्, रवि मा ममापिम्ममारमरप सात वर परिणाने कपिलवस्मपि मम मात, परन्तु क्यान म सवानिवम्, अपि तापमावापि गत एमनमानिमाम् एषय यस पसनोमवापार एम्म्मममममस गालाति बम हान परतापुति मरे, नाना 20 स्माचारिक सिमलव पति मात्रामा मारेन संपति माघर मपपासवधिति । ममासान पनिमारपणान इति प्रतिभामार-मगवानिति । समार-स्येति च मागी-सम्यिवस्तुन इति। पमा स्मस तामिया-पपवमिति । रेन अमरेन यी प्रभागासपनिमानसमेणा-पेम मबारेणेति। सम्मेस माह-समविपसेति प्रमेव प्रदिपोपनिमाविषयवादिना पति नपरस+ पर, वर्षत् परपिसेपप्रचारात्मप्रान्तमेरममेरमै यस मापारे निरनन्तमेप्रमे सामग्रीमापक ते 25 समास माहाराले मपति साखरसेपासेपासप्रमेयरमवाभिमानित मिमिति मारापरमार- समसेति मापा सिमसमामा माया । माति संपति-पमेति। ग्रेसिपिचवारमा प्रमेवप्रसरसम्ममिवावा तरिभिामरमानो प म । पान्मम्मममनो-मेषकति । पमाणावर रामपपेमा पचप्तको लप्पारामध्यपश्चिारिममे मी, यमाय पर तरसेवा पिप लगा भोपालसम्मनित. परितः पिता ने निरसरामे हुए मैत्रमणीय निरसरबहामो माठौति प्रथिति 30 भागः । चर्मणन्दमा परिमार्जिपुम्सापेकप-बऐपतीशीपेवि मौर्यमा प्रपित् परामदपुमुते रेपछी- सिभोमस्ति।
म्पापागमानुसारिणीम्पास्यासमेठम् [तुम्बनिसएम चशम्बरो मौर्यमारोश्नपा हुन्, पसरसामागामिपायी या मैत्रफमुम्पमारोन्पा, क्यान पराभूवमित्यति सर्यावरणप्रभे वस्तु निरपोर्ष पमनुमीया का निरापरम्यान सि, का विवरया नतेन मामलावो विवक्षिधर्मसाम्पत्पान निरुवाविरोपा, सामनमाम प्रसाधितत्वाव सर्वम सर्वत्र खस्वप्रमो, भासदेशमनम्माश्वसागविसमत्वमसनोऽपनि न भपति, अनुमानमपि सर्वमान । सभाषमत्तात् स्माद्यविनाः म्यसम्पपारस्पप्रसाः सपपरिपमारिम्पकसाठोपप्रसङ्गारिति रेम, प्रोक नवविवपाविपपागाः परमवापेपपिपिपमाविम्यवसायाा प्रमता परियताक्षेपयोपासलमेरेवस्सापनमिति । भमुना असमयोगन्सुम्मवे- सरस्वपि पूर्षाचार्यविरपिसेपु नयशापु तसिंघाऐं सप्तनपशवारचप्पयने । भावमारनपनकोसरणं दुष्पमाघम्योपयसप्रतिदिनप्रमीयमाणमेपायुर्वछोत्सास्मशासंग- 10 अपमपारणाविद्यकीनां संपामियामिना श्रेषकमनानामनुप्राय विहित भीमणेवर माझ्याविषमाममणेन स्वनीतिपराक्रमविविताशेपमपादिविजिगीपुषकपिपिना तदिदं नए- पकरण बामचिनामिम पारन बनाना याविषयविविधये सिरपतिष्ठितम् , प्रतिपित- सिपिजमापहमाम्मूर्पस्थसिद्धपविति ॥ - होपरि सस्त समर सरप्रायजा पा सर सर सम्पपरपुममा गति पार पसन लिवरपाल माषा सम्माने। स्वापर बनिनिमाइ-पम्पति पत्रमा पनि भारत 15 पी मानामस्मस पानिपतपुपमा पामिल पा सममितमेति परमेशपाई हुम्ब निसारमान ही माषा तल सार्ममेकर्मचाम्यम्बत्र विमरपालनामसिमामेरम्लनिसान बभिमानातो मत्लासिमितहास्थानमा नाम निमाविमा मातीमा निराकरणेति। एकको सम्वे सम्मान न परोसा जानिरपि ममा प्रमाचित प्रजानां धर्मग्रीसमास्या सर पर्यावारिपरि कमात् सप्रस्मसंवा वामपन 10स एक बयान मारमा पराभूतपरमेरस सम्पमिण्डल प्रस्थापितमे-साममामेति।माने भाविति। पामारी माता सन्स कम्मति सोऽपि मार, साम्तमप्रमेस पम पम्पमिकालाव, पार ममेरसमस सम्ममिवान विसरतवासिमपाना मानधर्ममिवार मारिति भाकामामामपि पति मनुमानमपीति ममा मामाखमापाला मात्र । मोऽपि समार-पापम्पमापति, मयत परम मेपः प्रसन्मते मोहिमपाटा मन पम- पगारपि स्वस प्रा मातापितामिवाने पोल पमोन नामोजमेर खरब सामामिलामा धमाल रोपि म्यापो मनापामाश्रिी माता निरामो:-प्रत्येणपति, समास प्रालिमिली परमवार प्रतिनिधिसभामामा- प मानाय सनापछि मात्र मात् समाजमा सामे - पविष की मात्र तो मसमास्यापापभिमान प्रविवाय सम्पति विसावपि पर्समा प्रयोगमा काममा निको पारपा सत्सापाति। म रमापस मसायाला समप्रमेयमा समय म. मार ।
छासपोजनम्] माचारजपचरम् ૨૦૦૨ (सत्सपीति) सस्थापि पूर्वाचार्यविरक्तेिषु सम्मचिनयाषवारादिपु नपञ्चपु भासणीस- कैगमालिप्रसम्मतसम्पप्रमेवामन्यमनसभवारनामप्परनानुसारिपु वमिंसा स्मनयमवारपासप्पयने - म्पपि सरकारनपत्र दरमं ापमानम्योपक्प्रतिदिनप्रमीयमाप्पमेषापुर्षोत्सारमसासरेग- भवपपारम्पनियतीन्मे मम्पसत्यानां भवमेव वाचम्मम् , भुवापि बत्तमोपा मुमा वस्लमन्यस्स म्पब परम परमत्यायन प्रत्याइरो दुर्गमा, ममप्यारे प्रत्यार्पसंमरण समारपमुग्रहिवाप्रतिपारन वामन्च मायेति ममा वत्स्वास लिमान बिखरपन्यमीसम् संपामिवामिना सजनान्नुपडीतु म मामासी- पसा प्रमेन नयमपीयेरमिमे सम्परप्य श्मनपाभुकम्पया संक्षिप्तप्राय पार्पमिर नपपरार्म श्रीमतपटममाविषमाममणेन विहिवम्, सनविपराम्मनिमिवापप्रमानिविभिगीपुपरविवपिना सम्म्मरदविपयवासिनूपतिविभिगीपुषणविरपिनेर मरवषयन्ति देवापरिणदीवामविस्वरमानेन सापुत्रपरम्पयनुपापिसापिरिपुरविमसमसा पञ्जमिए परिर नमकर-पर्धिनामिप पर 10 पुत्रपौत्राविनृपतीनां विहित-व, हिमर्पमिति दुष्प-वचिनामिव पचित्तविषये नाविन्य मैनाना- जिनशासनप्रमाबाम्मुपवानां पारिवानित्यविषये-गाविसम्मर्षि विरेयारिमेवमर्यमित्येवम्म नपपक असम विमाने प्रयोजनममिहिवम् , देवदेवं सारश्वरनपत्रा सिद्धप्रविधिर्व-अम्पाइस पार्थिवरना - पूचिारिक्विानि सम्मविमानस्परिणावामि सस्थापि तक सवारपसपने पर्षे सपनेऽपि प्रम- परेच मापसामना ममाया मुखापनोबारेमारपारमयसम्म सवारपापनमाम्मुशामिजय- 15 पर बगी-सरसपि पूर्वापायति । पुष्पमेति, अपमानामा प्रथम वर्षमानमक स एस रोकन रिस प्रोनमापार मेगा मेयरमासमेग्भापारमारिसको खां वेप मामीपाना वाचवाने प्रतिरेष मा चिन मारपि वपरगायबोयो म त समपि पि म्हारे परमविप्रेमनाय प्रापिमा समामपि प्राय परमर राम विवाविपादन वाममोहाय मातीत माता रम्य विकार मधुर बम्पमुपर मीहपन् पोपमिसपिमा सिमराकामिोऽनु भम्पसत्य इमेशातीय प्रग 20 परमाणथमपाकिस्मनुम्पन श्रमपेपरसानातिकमाभमफेर सम्मिसको बिस्कृतपर्व गगसम्मानिसुपनि मिति भागालोम पर्ममा पसिनीवीति, सम्म नीपिपरामामा परिवा ममेरपास्पेिन विकिपीपुपोषल्मपि पिमिमीपुमा पीन एवम । रपमा मार-समति समे मखने हिम्ये लातिना उपखना विकिमीपुराणापि विग मतपरि सरनेम । विमा-रपतापरिणीति मम मन- परिसबर रेल्वाचिलिमपति पनि गुमोनालिसम्मप्रमिभेम्मापिनिकम्मानि0 मागास पर मसान् भवक्षिपि पुत्रपौग्ररिप बमबम्, छ मनिपात-पाधिमामिति । मारपे-पकपर्चिनामिति इसमय मित्रमा पनि सम्पतिप्रिय टि ग्रेमा पापवाना साक्षित भिम इति दरका मा नियमनप्रभापमानिया प्रेषयामा परिसम्मतिभिसे मरवम् विदिमिति पति- पादिनामिति से या सामन्ये पारिपालि विरपापिसाम्पोति मात्र । इमेज प्रोसनिमार-बादीति। सम्पमाम रियनि-माववाति सि प्राधिी मि-मारवा प्रतिभा पर मम गवति 0 निम... 'गरे। १.म.मे। ।
-- म्यापासमानुसारिणीम्याम्पासमेवम् [सम्मतिपणम् पामापि माता, पपिसामिणमिमनप्रमुशमिमुख्य सिद्धम्, सिद्धनाममरमा मापन सिमझिम्मपरम्परया पवितुमईति, प्रतिस्विसिद्धिविनयापनगममसिसवत् प्रविष्टिय मामिति ॥ इति श्रीमठयाविक्षमाश्रमणपादकृसनयपक्रस्प तुम्ब समातम् प्रन्पानम् ॥ १८०.० मीफस्पापमस्तु मिति पनि प्रापित एष वषा नरपि प्रयते । मसते नितीन मामा काविमान प्रवरजपप्पर, परा मूल ग्रनोऽमित प्रवासाला निमित ममितिमध्य मामा, मामालामामा प्रधानुमान-सिबमा ममाति एकसपमा प्रतिपिवेति परिचालिममारिमसम्मान कर मोजमपि पावर वि का विलोपस्मासमा तम्बासस्सीमति भी ति। मीमत्वमस्मीशेर वा सारमिर्मम । परवा सफा गावा पीवोstोमोमध मटी भयानुसन्याने मला प्रपत्वम् । भसामा कपि संशोमा साबीपना।२॥ नियमावलमीण पाविपरिपाम् । भीमामामुरीमा, सिगुना मरियमरिमा ।।। विपमानात बास्पानो वरिष्पवर्षगा। बाणानुपारेण मन्तो मन्याम् ।। पुग्मम् पधारनियऽपं प्रचार सत्पपम । भाचारस मुवीन्द्रामा पारिता माम्पतो मया ॥५॥ एनेगुपिया कम प्रामाबिने । इण वायापामिण पूर्णकन मण।। विभीविनयपिरिनिषिते विषमपदनिने पपवरम तुम्पमिपर्व पमानम् समासमकारमपचरम विपमपविषयम् । मुमै पात् ।
No text on this page.
No text on this page.
न्यायागमानुसारिणीसमलबूते वावशारनयचके निर्वियन्पुटरणानि । (2) (2) (से) (2) (री) (2) (2) (1) [न.प.] [म. म..] [L 16] [म. स. १४] [.हा १ मे..] १५ १६ २ । J ७ ११ एपनिमम्मि बेबपासन एस एम परिपिटरी श्मा मते रक्सप्पमा पुश्री उत्पामिलिलोरिमना विवियतिपमपाव्या त्पूरमध्ये प्रया मिसागुबारसमधमिधाम सरिति मोहम्मुष मैसुगा सच्च प्रगुणासम्मोनियन सय परमपरा मम्मा बत्यिसभिलिवे बारामा बममता प्रायमरे ही दम्पपपनेचरमको सर्व पिम् पसमाविभिचारणत बापावित्रा प्रारमधमेन्ट बन्नपित्यनिरपे सम्पम् मेरमा [..भा.स. १५] १६. [भ १ मा १.८..] [वि. मा. १४१ १m.m] [प. प. २१५ गाजि] [सभा..] १. -- -- (0) (2) (20) (2) (2) (2) (म्) (2) (2) (म) [ [ [ [ १" १ १५ १ . ] ] ] [पा. HH] [पा. +1-४] [पा...] [पा.प. se se] [प्प. महामा, 11] [२.८.१५] [पा.बा ..] [...] [ Iो . 18 (2) (ये ) (म्) 10 १. मुषवाने पम् सिपषमणाविर मिािसमोर मरसबरीच पम्पसमरसपम्बारमा पिन मस्यामा याम्पीयो मासा पुनरिएमम् ] १. - - १ (2) (1) (1) (2) (*) (से) 14 [ [वा.] [ १४ १ मयपि मास्काम समर्मतमीभिाषा मना मेर समय निए परमप्र प्रथम इम्बरमा (4) (2) (2) [...] [मा. ममाथासपा] [...] [14] ૨ अम्मा मेम्बो थिोमा (2) मामध्यराविषमा [...] [H] इममेर दिवा स्वास्थ्याव । १३ बापिसारभर पापम् पनि पान प्रम् माविम्वरमातमम्ते एपिठोम्मुषमा (2) (4) (2) [पान्तर ] ] [11] (२.१.111 (4) २४ परमपीपयो स्वरमा (2 ) (2) (4) [१] [111111 ८.११ [पा महा.14] [प्पा मह11] [हिन [म.प्र. २०] [बासन [बावर ..] १ - २॥ - (2) (2) 1 " . अनावितोऽपा निमोहपरो यूमरिमालम्पिति अमममम्मेपनि प्रमाणात स्पारमामा पवमा ममम् (2) (2) [पा..] ] [au [ " १५ [ ] (4) [प +11] ] भिमकामा अभिनय [ोम 18] (2) (2) [ । 11 सामयिवान स्म[] पनि (2) ६४ [4.६, १-२१+11] [बा. म्याम् ] [पा...11] [प] अपि स्म (4) १ अनामनग्रास -- १ भेगमाछिसम् [ साम. ] [.HD [लान] (A) (2) (4) पम्प प्रसपर १. पानिधित्व मधिानम्मी [मि...] [बमिकामम] ४ (म्) (स) (2) -पाम [प्रम ११ १९ . १ अमिरमिरी पारी मयों मामो मते मायभव बो पोरण र पुषाना परम से प्रान्तिपत्रिका अभियानमा परिनत्रया खरपोममिव मम्पपागास्मन्पात् भकिम मिलेगपति रिमेन् सीसम्मपमिसरारे मावशाजपचष्म् [प] (ये ) [पा. पा. ४५,४] (म्) [ममिपमपि ] (2) ] (ये ) [भिवत] (2) [प्रमा...] (म) [ममिवपिना] (2) [...] (4) [पासप २-१५] (4) [ममिष ] (ये ) [पा...] (2) (2) पितु. भा.14] (2 [न्यायास.] (2) [पा] ११ 555 २ ] प्राप्रम्प याम गुनमा पम् पद्य एस पवार धपति परमप्रथा परति संपता संपता पोल बाप्रकारनिव [ ] (2) (2) (म) (1) (म्) ८९ १८ [पमियोप.] [भमिमोप] [समिधर्मप [ममिक ] [अमिपम्प] [मिर्मप्रेप] १ । . . ४ (म्) (म्) (म्) (म) १ (यै ) बनेममिवेपने पापमक्षम्प प्रोव प्रापिरोन हमेशा बीजम्मेवमापित प्रवास बापरामरूप नियमावनिम् पम्पमायामे मिर मर मिपाल इम्पसारेपश्यले मेरपपखम्पापा मत्सररिस्पाम्, मेमरम्मत्पर बा पनसोरम मम्म्ममान्य प्रमाने मरिन राम सम्प्रया क्रमेयपसम्पादक भोपपपपलार वापस [बमिम मा.1-1 ] [चनु . 110] [प्र ..] [...] १५ (2) ] ४ [प R] [ [ (2) (*) (2) १२ १ [प्रमावर से ४] [रे १२१] [म्पाय 1- [मैप्रा.] [म्मामा ४] (2) . ] ५ R बामप्रपरिष्मा [14] १४ (2) - [ “ जम्मम्मम्मम्म पीसे इम्पमा इम्पमेधाव्यमानार भूमिपायो बाधिप्रसारक समयम् मनिमम धर्मम् इम्मानिमाचरमारमन्ते सादिप्लुम्मा [संपावर ] - १५ - () (2) (म्) (2) १४ अन्तरंपरियो जरमाल परिव पति नियति भिमानिसमा (मे ) (4) (2) [11] 11141] [१२] 1910 [Mur [म. 10 [पा. महा. 1-141] [मा. मह 11] हमान [म.भा. १०] [सना ] [पास्यप, 11] ] ११ ३८ १ - (2) १५ १ سا मानवामिडपनी किनारमा फरको पावधिमकाममन्दिरी मेमनोमेपनि प्रमापानि बन्द स्वरसबापता पतम [पा, प ५] [ [ १५ १५ . (2) (2) (2) (2) (म् ) (4) [1] ] ] परमवारपाचवकि मामासाना ममियों (2) ] (2) [पोम 11५] ४ " प्रय[] समय (2) (2) [4. १२-१५-1] [पा ममामा ..] [पा. 11-10] [पा.H] ४ १ बालापा out [ -- १ (4) (4) [ साल ] [...] [मनाल] . (मे मिविया 14 १. [मि... Hr] [मितिम] () (२) r ९ [प्रकरवम] मावाणयबकम् २५ [पा ११ [प. वा. rm M] [बमिधर्मपि ] ९ . -- (ये ) (म) (2) (d ) (2) [ 1१ [परिवर] [प्रमा, स..] [बमिपर्मपिरो] [२८.१४] [पारस११५] [बमित्र ] [पा 111] ३ “ - (2) (2) (2) (1) (2) (1) (2) (2) (म) ] २ मम्मे मम्म् बपिपिपी पवार पायो मायोम मामात्रयः गों को रसास पुबानी परमस प्रान्टिविमान सचिवसम्ममा विभिनयवा: परपये निमित कम्पासम्मपात् गरिमन मिलेमपात प्रदिप भी मम्मोपभिसारेच नियमी मशिनम् प्रामापोरेगाम गुमनायो मम् पास संपवार धम्ति रिपरमामा परस्पर वाति पंण् स्वर पेन पाने परमिट रामपिसमा बरेपरमिक अापक्वम्प प्रमेत पपिरोन इम्पेष पात्र बरन इम्मेवमानित ४ [पतु 116] इमाप्रकर.] [प्रतम्य +11] 44 . 1 ] - ४ . [ (2) () (2) (म्) १ । ४ 1 [ममिक्स] [मिमग.] [बमिपमैप.] [अमियम ] मिमिक्स [अमिषप्रेस] [पुरान] [मिक्स भा] [1] [पा. 4] [4.15] (म) ५ (2) (मे) (2) (2) (मे) १५ ५ १२ क्याप प्रस्पेठे निसबारमियम् यामपामेशमित मा मिन्मारमन उममानमयले मेराम्या परसरविमाणाम् मेन्यस्मरबा गुजम समर्म प . - ४ . १२ (2) (2) [वा ] [ ] [प्रमाबा.४] [में 1+1] [माप 1.] [मा..] " ११ मम झुमा सर्पप्रमा कामेपरम्पलाई नेसम्पपत्ता वाले (म) (म्) -- ५ ] - लिम्पो दिमाम बस काम परिमन सिमपतिः दशीलम्, मिनीमपि ज्योति प्रमबम् मामा मनमुपपवे प्रदेव पमुटाव, व्यसम्ममा सा एपितसम्ममा कविमनग्रा पामनपरिकमा (2) [थापनमाया ] (म्) [बभिधर्म 1] (म्) [जाप [चनु-पार 110] (2) [प्रतिनि] [गिल [.मुक्ता] [प्रमाक्स मे ४] (2) [मरियमपि ] [प.पा. १५] () [ (2) [भारत m] . ११४ 11४ 1 - 16 . 1 [ ] २ १५ १२ १२५ 18 १ मुसिौर्ष मारम्मत समस्या प्रवेश्यि परकमा माधुरामा कोजाति प्रथम बरिसमलावार प्रतिपति भारनियममोपात् नियामासनविनसार [ TY १५ (म्) (2) (2) (*) २ बारपानाम् मानम् बरखापाल (म्) (*) (2) ११५ [...] [अनायबाचन] ११ [...] ११ [पा. बा. ९.१ ५.] [पा.मा ५.] १११ [गामा.-१९ [प] [८११.५ मी.] ॥ [पपप ..] [ला. मा. १८३५] १२१ [म्म.प्र.पा. ४] [प.प marn] ११४ [पा.११] ११४ [म.] ११ मेरसम रपचारपये बोल्नमपस्या (मे) १ एपी ४ हामा अण्यात मासेमारी (2) . मि मान सम्मा १४ (म्) (2) (मै ) () पर्वमा सम्पन्न प्रमापनि प्रायम् परत मासोबत [rst [ [मैस. १] १७ परक.] १५ १॥4 [वैपि प्र........] [पा. का 141] [मा. महामा ११.] 10 मो. (2) . मम्मी प्रमाण मेसीमामा ५ (2) ५ १४॥ १४५ १४५ १४१ १४६ पर १ १. . १४१ ] । [ दारशारमपम् सडिमारिक (* [म्मा. महामा. 111] कतरिचर्मते बनहानिशी (मे) [मा. महामा १११ अभावसिम किया और [पा. मामा 111] (4) [पा. 1-4.] (2) [पा ..] पूपिरीमद भाषमाम्मनायो (मे) [गारविर १४१५] यमौ विमोमब (2 ) [पास. ११७.11] (2) [मा या..] बरिस्माधिरिस मटिश (री) [पा. ४] समका पता [पा 1.1.1] पर मोमासे मिले (ये) [मा. महामा...] पतिरप्रपामम (4) [मा मया...] (2.) [म्या महा...] शिपिविहिवमहिमसामनुस चप्रमाणामपियरेष पुमरक- पवनानुसारराविना ] प्रपा प्रमापेमा (2) [भ्या महा ३५] पमामा पापाचो मिसान्त (म्) [पि. Pri.] स्तरोगास सम् () [मा. महा मा. १५५१..] पुस एम एवम् (4) [म. १ पुस्पस१] (म् ) पामण्मरम्म् [ ] बधिपम्पम् (2) [मा. महामा, ११२.] का एलपरन्टोन्मापरणम् (2) ] पोगमामयम्त काम (2) [पा.14] [प.११] गयेव प्रपतये (4) [मै 100 (2) [पौ 110 ] बर्मचामप्रम्मा (2) [...] प्रवासटप सूई [ परम्प प्रशारनेर [2160] होपासाये (2) [...] पिपेरदम्मे (2) [म...४१ (d ) [...] [मा ममा .५] बापामा लापावे (पापन्यास) (2) [ समायोपुलर (2) [.tv १५५ १५८ ११ १ ३ २२ [ ] [ १२ १३ ] . १ पम्म्म् १३ 141 १८५ 14 पपवम समपन मवामिमगारमेये परोप १८५ बमिहोत्रा मम्मे प्राप स्टेम सुवाद १०५ १ १५ " ] . - ५ [ [ ९५ ११० सामीप मेग मपुरी कमतिर किमीका यमपति क्व पक्षमतोमवातवारणम् पर एक मन्दिा पनि माम् प्रातिप्रममा प्रामा छ मुमोपरमानम् सम्प पिपलपाते. सम्पत्रिमयाम् aमार परमा। " १. 14 १ १४ [ नामध्यदिनमा (4) [ये ५.५] (4) [चरण 1.] [५] () [प्र. :-] (2) [मैना H-] (4) [भा १५] (2) [ति स .14] (2) (2) (4) ] (2) (2) (री [म्मा.मा] (2) (मे [५] (ग) [परकt.R.14] (2 [प बा. १९५४] (2) [...] () (ये [बा.८.५] (2) [पर 11] [14] (2) [भप, 11-14..] (2) [पला 41] [स] () [मा ११.] [म.] (2 ) [मन्त्री.] [प्र.१] () [bit.] ( [मिल [H] (2) [१] (2) [माण्मात] (मै [भवा -14] (1) [14] २१४ 16 -- ] . प्रभारपायमिथको चामुमी स्वा पपीते मुफ्पोपी मापनम्म् वे पण मियामानितम्यार पुति म ममै पकाए यम मरे। पोमेरस १ १२१ २१५ ४ 11 सस एक ४ प ५ मासण्यामागे पिटीमारिजिम प्रामा पर भी मिपी पपी पोकवानि एबवे पमा मारिसमा - पति महानि १ " ११ २११ . ४ मना प्रतिवम देवीपी [ प्राबधारनपचकम् (2) [प. प. ] [ [ ] ] (म) (1) -- प्रारमिटियाम मामानिमायकामानिमामा अति मपति रिपी पपति परिया पगिरानेष पथ्यम्ते पतितापिचर परक पवित समास निर्माण १४ [सिमेव [पा.५११] [स्त्रिास्त] २४ . (मे) ४ [ वा ] [ [ 1 ] एक्ट पर वाय पान रेपम्मिनीषभिवा अपरमिवर सुपपरिम् स्थामति २५ (A) (2) (2) (2) (2) (2) (2) (d ) (सी) (म्) असमविचा [ ] [वनमे भगा] [प्रास् १११] [म्य महामा...] [मात्र न. २५.] [सूता ] [मसमारत ] सिमिचारिया मति ५ J सलहि मावि में भाग लेम मात्र मति प्रमावरानुमा निम्मा (म् ) [पा महामा, 110] Y ] १ (म् ) [ [ केगाशिवादिनस्वाति 1 १ ५ (2) (म्) (री) (2) (2) { [ ] [ [बर १-२६] ] [खाया [सना [पाप ] [मा यसमा 11-12] با १ ] (4 ) (d ) [ ] -- لا मिरवे! परिवति पर मिनि मैतसमएपिपुल जनारमा बनिमुमम्माविर बतो मुमोऽयमपिसणानि सवाला छापिसकाय पम्मापामसमे परेममा भार पायाम्पसमाशिप्रयासमपात मामानेपोपरविणपणे पुष्पवादिलीबाबमा पपरिणामामा सम्पपि भवन (2) (2) (2) (4) [.. 11-10] [ 1] - [ ] १७ ३ पिथस सपमेन - १ परोपव बमित्र पगार मामलेर प्रापल्ले स्वमगाव मामअपदिकमा (2) [यो. ५२५] (मै ) [बर १९. [सय १५] प्रसार ..] (2 [मैत्रा --] (2) [ 114] (2) [ति] (0) का कम्मर मे - ५ ] ] ] ] १॥ (1) (2) (2) (मे ) (2) (4) (2) (2) (2) (2) “ प्रदिपामा बम्पति बच एकपरम्पोन्नातवारणम् पर एष प्रमपिता पयाम् प्रमिला प्रममावत मुक्पोपमासम् पसमर्मस्तु चिरम पाले सरपीमायाम् मार पाया। मारे प्रसारणमामि राय बमुनी म्मा रपयतिमाते गुपयोगी भारनियम् मोपेपित मम्यापमाप्रमार पुनि मते! पाए एमपर्व मते। पोमेरस्य [पा महा +4] ] [५] चरक म. ११] [प.पा. १५४] [पप. 1.4] [बस A ...] २१५ 414 ] । १ १४ (4) (2) (2) (2) (2) (1) (2) १ ४ r १५ [बचा...] [पर११५] [वच्चा 114] [म्प, 14-10] [वत्ता..] [म्प, 141] [म्प १.] [प्र..] [..] [प.ni] [पि. ] [म. ] [ सं-] [सर -1 [मधभात.] [वा ४H] ५ बासरस्समायो पिबामतिमा प्रामा पविभाविपी पपति योनामस्ते स्वा प्रणालीमा पर पर मनात 1 (4 ) (2) (7) (2) (*) (2) (4) (2) (2) () २११ १२ २३१ १ पम्पनरोतिम ऐति देवी .
[ ] -- मापसाचे मासम्मोनियमिम मामालियान मानिनाम बधि मतिलिपति पनि पाया परियोग फसते सचिवापिचर बरपति समारनिर्मापर हापशाजपथक (2) [प्र. पा. ] (म् ) (5) [मिसेन {पा.५११] (2) [विप्रार] (2) ] १ १४४ १४६ -- [ १९ ] ] [प.पा ११] ४ २४ १ (2) (d ) (2) () (टी) (से) (1) (1) (म्) १५ एक्त् परको सापर्व परमेन मेपम्मिपषिता पाभिवामपनिम् धाई मावि अप्पनिसमा समविलागि बेमा नीमिया मिया मति पति भापनि भएर हिमान म मायालेन मा मत मनन्तनुमा एनिम्मः १६} [मने वा] [प्रपथ, १५] [ मद्रामा +11] [बाल..] [सा ] [महामारत ' ११ J २६. v [भा महामा ५११५] ४ () (2) ] ] -- २.५ २४२ [ () (मे) ] [ [चरक्स १२] [ ] (मे ) १२ नाभिवानपनाति पासमानामा विद्याप पारे समाप प्रायम् मिर मेवेबस्विवियुकी मि मत । एमापति पनारिविक्ने प्रम मनिष्पन्नाप्रक्रिी रको मुममिरपी परंपरा साक्सियापाय, मालमसे सम्परारेमा प्रकार पामाम्यहम्मकार समायाममोप्पोमपियो पुम्सीमा वाम [स्वाया [स्थला. [पासप 1] [म्मा, महामा ३१] -- [ १ (मे) (मे) (4) (2) (2) (1) (2) ] १८ [ [ [वाकय] [ ५.११.] [पो. PRI] [d...] ] ] (2) ५ [ मपि भोपपवन मारमेन ममममममायरमेये १८५ २ १ अमित याबाद १८९ १८१ परम्प प्रयपतोष १८५ १९ ११ - । [ [ ५ १५ ] ९१ - १५ मेरमा प्रमे माथा प्रापेम्मदिन कि प्रतिवेषामा बमबति बत एकमप्यमानवारणम्, कत पर परमपिता नाम् सानिमा माई भुषोमानम् मख भित्रभर पाये. समापियवाम् मात्र परमा। । १ २ ११ ४ मामप्रपरिकमा (2) [पो. 81] [परक ११.] (4) [प्रापा ५] (२) [प्राम. (-] (री) [मैना --] (मे) [समर्म (14] [जि. प. 114] (2) (4) ] (4 (2) (ग ) (2) [मा. म] (2) ] (मे) [१५] ( [पर ] [प वा ] (य [मप, 14] (4) [...] (स) (4) [बचा ८.५] (4) [पर114] [वचा १] (री [मप. 11400] (2) [वला +1] (2 ) [स. 141] (2 ) [मप 10 (म) [2] (4) [ी. (2 ) [ी.] (री [bru. RIN] (2 ) [मेर ] (4) [H] (*) [मधभारत ] [प्रेणा *] (मै) [ ११४ २. २४ । मारवामिनको पचभमुमो प्रया स्वामीचे सम्पुस्मोकी मानम् मोपिय पान भिप्यापतिप्रमार पुरिल मते। मुमै पर भयो मोमेरस १४ ४ २१५ नापसमा २॥ ४ १ जापान MA मतिरपीपी बोमामि पस्ते बमा मुयारीमा - पति सूदानि १२ ४ कमानी प्रोविल्म तरीको ] १११ १५ . 1 14 भारशारजपथ (2) [म्मा. महा 11] [पा.पा.११] (2) (2) [मग १] (2) [उत्ता.५१] [ ] ] ] (म) परामपादोम मनी प्राधर्म माए प्राममे सम्पमि प भारिपचे बलिये परिचमति. मामः परियामा पुण्यापिकी प्रभाव पम् कामप्र प्रापिणीम् मोणे गुमप्रमाणा अधि प्रवाम मेानामन्नमनात समसमाभिधानाम्पामिय नियाममे मम् पापीघाटका मिसविस्तम मारा गुमनामम् स्वति मारपणे वापसमापयपि सरसमेत परमा عه [ [ [ 14 २ (2) (2) (म् ) (री) (री ) (2) (2) (2 ) (1) (2) (2 ) (म्) ] [भत् मा. १५] ] [मा महा +10] [प्पा. महा १५] [वला ५-२३] [वमा २५] 1 [फ से मा] [मिनमणि ] 6 [ 114 - जगाये गौरवम्, समानमाधिसममारम् बधि मतिरिपीपपति एकरमापति मोफतुरनीसोप्रम् एनेपथी मचियावी यामाम, प्रहाररावपानम् { ४. (2) [मामळ न 1-14] [धेत ..] [बपटनाप ] [पास 1] [पा. मा -11] १० (म् ) -- - च! मासम्पर कि पनामा पर बपति मुची -विनियमारे- सार समान सपना पुरुष चामारामी परिणति प्रया पापरमन्मयम् यो प्रतिमा समयमायेयम्पमा बारपाका मामासयता ] () (1) (7) 14 १४ ॥ ] . [ । ] ४॥ १४ १ -- [प्र. मे..] ममा प्रचारप्र देपेलाप (4) (2) (4) ] ८ [ ] 11 अपने मुक्ती सो प्रभिमान पबकि माया 11 बपीपिकापर संबायो भुगोसममिरपति बामनरादिकमा (1) [पास. १३५] (2 ) [भारR. ..] (2) [रनप] (म्) [-] (म्) (म्) [स. १८-१] (4) [पाप ..] (4) [बार..] (2) [संम...] [ ] ११ .. बामा सक्तो परमोि ३४ ४ निम्बारे समाद परमापरमविपिन पुम्ससमयमा १ () (मे ) ४ मिसान्त - [ ] (4) (2) १९ २ (2) (म्) (1) (2.) (2) (4) () सीवी भावनिक बयामेव विकासाना ५ 1 [ ] [८] [भि..] [वता] ११ [पा.पा.१५] [प] २२ [म पा १.] [मा. मा...] [पा पा.. ५] २११ [प पा...] [पेवा 14] १४१ [मुंड ] [पा...] १४१ [-1-1-1-11] m [ [मेरे ..] [को ११] [ २४ हर 11] 16 [पापा १] १५१ १४ [वं भ.] [भय ९म्मामा] १ [ An] ११ । पर्थ मुम हावा बम पठिपको (* J १५ ३४ मिानुपयफ्रेममा बानि माम्परमार मम्वे प्रमतिमारमाम माबमानम् (d ) (2) (*) (2) (2) १५ १ १ रममा प्रापिणमस्पम् [ ] १ मम इस्पियर ४ (4) १५ सररखमी मास्चायो त्यो १४ १५ पादचारमयचो ५१४ २ पान [म्या. मामा. १३.] [म्म मद्रामा 11] [प. ११.२१] [म्म माम्म ३५३९] [पा. १३४] . १५ [से १११] [ 1] [नामप. २०१] हम्मा. महामा...] [ ] ४ [...] ب - [ ७ ہ ५.७ ] प्रातिपरिचना सामान (गे) परमा प्राधिषिमा (2) (ये) माम पुसे पनि (2) प्रातिपरिमारिमाण मोगरिमापाच र्मयम् (2 पुरप्रसस्तोमाराम् (से) परिमागायत (2) अधिर्मबन्तीपरा (म्) मायावपक्षिपि परेप मापते (ये ) मिरान् (से) सिरिता सम परेसनाम् (1) सूदपेपर (2) प्रसि पिच (मू) बामिन (म्) प्राप्रपा प्राचितिम (म्) पोपडे I पति (20) मारपपयार (2) गरपोये (2) (2) मीरापेको (से सिमबति मावि (2) स्पदिय पिरिवत्प (2) मिारोबार (1) बबरम्मोपाप्रपसापमाने भगा सामाम्पमपि पण कि परिप बारवीचमति एस मठरियो (2) भासात साम्पपपरस्पर (2) एमतिर पास्यम् -ििपनियपरिधि मास्मिर वो भात- बामपठी कियाप्रमा दुधमपि पंप (2) बस्तिसम्वरमाचे (4) पूर्व माधस्ताम्तरम् (*.) पसर मनिबसमार्यम् (4) पेमभिरमारम्सासर्यम् पिवावं [पा 141] [मा. महामा [ममय 4-11 [प.पा. IN [पापा ५.] [पाप ne] [प.पा. १ [पार. १५ [भाग १] [मा या-111] ] [म्प. प. R४] [1111 [.. २११] [प. स .113 [1] ] १२ [ . -- 41 [11] به उसरवानि (4) ॥ (2) [ [ [ [ १५ (* ] 1 ] [स्ययाय ६ [सम्मा...] [ [पा पा..] [ ] . ॥ व्यापार देशममार सतिम्रो गोपीनामो एसीवापिस साल से पमानामुमो भामा निम्मा मसाम्पिायवीमनिट पपरा संसद परमयी एपमेपास मैदे क्स प्रयत्पुले पार ४ 14 ४ - (मे) (4) (2) (2 ) (2) [ [ ३ " ] ४ [.-1 । ." vv - - (2) - १ [ - (2) (2) १ ५ [ [स्प +11] १४ पुषिमतेपी म्सलेमपत्थर बर्मामधीठे बमाणसम्बन्बाद पापक (2) ४१ ४४ ४ १४ पियवा सम् [प्रपा +14] ] [भाष मा. १ ९९१] ] [प्प 1-1] [गए 10४] ४१५ ४. [ १५ एवमा गुणा . (म) ५ १६ भूसपनाम् पची (मे) " [पा.प.] [पा. बा ..] [...] ] [भा. मा Ar]] [मा, मा. H..] [ कपिपिसामवारी (0) (2) (म्) [ ] [मा.मा...] ग परम्परामामिमा मियागारमासाम् । [ (2) (2) . [म.पामार...] [पत 1ि५11] " . मिवामी कार्यालय (2) -- ७ ११ ५२१ २ [ ४ - 1 1 ५११ ५५ [ - ५५४ माणजपरके प्राषिया विमान [मा मामा ११५] परममा प्रापिनि (2) [मा. महामन 111 (2) [पा. ३-१५] पाप पुननि (2) [मा महामा ११] प्राधिपरिचारमाब (2) [पा...] प्रेमतिमापाबर्ममाम् [से 11] गुस्सपलस्बोमवाम् [ .१२९] सारणाभिमम् (2) [ 1] पभिमायामास (4) अधिर्मबम्तीपरा (म) [मा महामा...] अग्रीम्पतिपि पोषमावे (2) शिर [पा..] नितीन कमबरेन नाम् (2) सूक्षेवर (म्) (म) [प] कारपो प्राधिविरेस (म) [म्या माया. पोपमा () [समय ] भाप म्पयादि (2) [प्र. 4 (2) [पा. पा१५ ] पिठा (2) [पा.पा.un] परिपरमेसे (2) [पा.पा ११] बीमित मापी (2) [बार १५ पमहिम शिव (क) [भार ५१] चिमारोबार (म) [म्मा. म.] पोमामपाप्पमा मात्र (2) ] पम्पन्यमपि धरित्रा (म्) [मा. पहा. 1] परपवरिपये पपपी (म्) [म.] एरोव सप्तरियो () [.. २९1१] जास्त साम्पपत्रावाम्म्म (2) [पा. पा...] एपीर पासम् (1) [4. पा ...] -विलियमनिधि अपेस्मिर बनेगा (2) परिणामस्टी म्पिमा रामपि गाय (2) बस्विवस मसान्तनिायो (2) मन मोरक्ताम्वरम् [2] मान प्रापिम्ब समयम् () [पौ 1-1-] प्रमियमरम्मसमर्पम् (0) ५५५ ७ ] [ ५ ] ५० १५ 1 -- 11 इम्पन्न प्रमोपनियावाच मनाम् मनोभायम (4) (4) (2) (2) (ये) परमान [* +11] [१] [11 [1 111५] १४ १ मारेयगाम् (ये ) [1110] [पास १.५] [पि 114] १ यासमवे -पिविनियममारे- रमाणामापन्ति इम्बामप्यार سه [" 11101 १ सनिक समोसाद प्रभारपको जाम (2) (4) (2) (2) (2) (2) (2) (2) (2) [H] [ ] [पा 11-11] [[ ] [मा, मग +1111] ४ ५ ११ १२५ बस बस मार प्रमियमय अपम्पिाधिमकीनिया पाचार मम्मी बलिटबल हरिबाबा [भ [पी...] [म ] [प] १५ १ १ (म्) (यै ) (2) (2) ६२१ [13 . (4 मधेचे मनमगादीनामपि इन (4) (2) (2 ) [ 11 [H] [1 11-] 1 11 सन किमानपकामा बी भूमापन सा मामाया मोरपबनियमसपी नियोगका सम्पपयोरेममा पउँमायालये ] [५] (4) (मे) (2) () (म्) (म्) (4) ] ३ १५ [ 111] पीमधरो सपना [111] सम्पयाणयपके [म्प महा 11] [ ] साभाविक ५ ' (2) ] . [ ] "" ] सपश्याम्यम् मेसपारमे निपमा समामेोपाव फमम्मलित विप्रोन मुमा पापनापति ऐन स्पति बाव मेवे ! परमायुप्रेम. समयनियमारे () (म्) (2) ४ [भिमाय भाव , २२९४] मम.. ११४] १ १ (मे) ] w५ r C एमनम्वरानुमान वो ममापन एबापान दिया पिनीमावरमेया श्यामनाममनोगा प्रभास सोमपकसाविसबार (2) [पा ११११] [ [पाय 1-1] [भी प..] [सम्म ८..] [क्ला ] [प] [उत्त्ता (10] [पापा. १४ ४] [पा. भा. १९१] [स] ५ ६ . (मे) (ये (2) (2.) (2.) १ -- हि परमेसे भोपाठ नाममठो पाए रास बारमा प्रपा समेमान मूमलम् २ (2 ) [ २ ] [पाणिनिशिवा ] ७५ [ . (2) (म्) देम्पोरिक्सने एमन्दी रन नाही [पा. ४२१२२] . [ (म् ) (म्) (2) (2 ) बाबायप्रविभवम् मासेष मम्मोपपदे मागसम्बारे प्रचार [म्पा. मा ३.] [मामा [पा 14.] [प] [पा ४५] [प ११] [ 1] [पा ४५] [प्त्वा +१४ पापे] [म्य मा..] [म्या महा. (2) (2) (2) (मै ) (म.) (1) 3.-..--: मममो याम् पल प्रोम्मे 1 स्वरपानि . -- (म्) (म्) ४ ७ किमामरम्मेदेम मामिम्भूस्मि विधिप्पा स्थान्सिपोनसिपी स्वान्यारेजमार गुमास मास्तिरायम् पोनमिसमिसम्मन्यात म्योरपल्पायर मेस्सताम् (A) (4) - (2) “ १५ WI 1 1 - मुशिम भरके [पा वा ] [पा 1111] [मा ममा 1941] [मा महा 14] [स] [प्रास [पास 1] [गाय m] [11] [पए १m] [पास ] [म.] [प] [पा ..] [पा ११ [1 111५] [मा म +10] [प्रथा [पापा ११४] [श्रीशियमेष " (2) (4) () (म) (2) (म्) (2) (2) (2) (2) ८६ १४ .. दिरात महामहिते कमाया १४ 1 १ - ए - ममिस्तिो मानो परी भरपनामनिया बरममिची ममियम प्रकारे (2) () 4 ] ] १४ पेपरवाल्मले ४ प . १ पपपपचापाप बाम उमावि (2 ) (4) (म्) . नामस्मापापमित्र [पापा १ [प्रास 1] [पर ] [म्य महा 1-1] [म्म मद्रा 11-1] [प-1.] [ब 10 [.1] [ [पा ..] [पा १ [५] [पन का ११] [प] [पि 12.] [म म् ] 17 १४ (मै ) (2) ] 1 बारपासमिनियो बायपोगापरास्ते ११ बसकोपाधिकाम् " नवरंगापासवान (2) (यै (2) . 14 मादशामय (म्) --- ८" निगमा पुन भूति मफिसम्पे मेवानाम् समावरा पोलि । [प्रमा घ. घयावी.] [विनाम १९ ५ (म्) ] सम्बममनिसम् (2) (मे) (2) [प्रमा. स ५] [मिल्माय [प्रमा ] २३ -- पप्रमाणावर धामम् मेो मेवातरात सामान्तरमेश साप्पनिक प्रविधा ] (2) (2) (म्) [गौत ११] ] . [म्पक [म्मा मस ११२ (से) () [ [स] (म ) -- ४१ ॥ मामविशेषस ग्रन्स् भिमापन मदमस्या भयासी निकमाया प्रथा बोलतत्वात मेकमायो नपानेयम् अभिमुष्मन्सामाविर समातम्रो पेषु वर्तते पारन्ये मेमाम् अपठितो मेरानाम् बावेरपति साम्पामिक मुहर [मा महा ११] (2) (2) । [ [ ] ] 3 ] ] - । [ (म) ] ] [ [ ] मे मेरान्त [मा म [प्रमास - - । मरम्ममा (म ) (म्) ७२ [श्या [प्रमा स] [प्रया ] [प्रचार (म ) ४ 04 कोपर्मपि समापनाकीगत् सम्ममा माप्रयाान्तरण गानिमा ससाना - [ १४ [प्रमा ܢܝܙ ११ 1 1 ११ (2) [ ] ८९७ ८९५ सदस्पिोतोमा अप्परमा पनि सम्यानमनिरपम् पातु मिमी ३ (2) (2) [ौर ] [प्रमा. ] [पार में ५५४] रबरपनि १ (2) [ममा स पीपप्रपारेष बाप्रसाद ग्रम सम्पन्बो पनि [श्मा स با ] . (म्) (२) (म) (म्) (म) ममपिमापि प्रीपाप्रकारेष لا " ११ [प्रमा ६ - . ] (म.) [ 17 - [स - " विमानसमाधि पासमादेश लसाम्बादिमान सम्बबाद एम्मा प्रसार अधिकारितिरिक्त ध्यमात् प्रसार पारस रिम सम भी विपन् कपमा पर्मिनाक्षप सापलापेक्षया बार परमपिता पर (म) (1) (2) (2) [i १ - [मा मा 1-11] [पा १ ] ] [ (म्) (म) ९११ " ] ५ . - टा ["u m५] [पा पर्व ११५] [प्रय ७ , १५ १४ (म्) ] मारवानुमान म परमं पारणम् १५ 1 [ 1] ' (2) (2) (2) (म) 1 प्रम मितिमापि विमाप्रपरेष [प्रमा स ] [म्या . ] [ प्रम्य प] समानुपम १४९ “ . गमलामा [+ १w [ 1] 11 १५ " - कतिपक भण्डमामिणम् (4) (2) (42) [. ] ] ] - संसपोरिमोथ [ग्राम 11-110] १५ - बाकर मत्री ] ९."
बादशाजपपके १७ - १ (म) ४ 1 [प्रमा प [प्रमा स [ प्रयास ] ९८९ मोमबमिते. स्वादमारिएका पुस्तफसीरम्म सविधि स्वास पहाफे पपपरम्प म्पबनियस जविरेवामाप-प्रत विमधिमेरो नियमाव, अपोममेदार मित्राः () (म्) (2) ] ] ] ] ९८५ - [ १ (म) (म्) (2) १ [पास 4 पिच .] [प्रमा ७ ] [प्रमा स ] ४ पोमोहयात्रसमो २ (2) () (म) 11 [ मावा - ( - मापदरोमाम सवामुमोऽपर बरेगाव पर [पाय 4 ११४ (म्) (2) () (म) 1 3 -- १ - इसम्म पनि पित्यमेव परमपिस मरणाने बति मरिणी विपीय १ ] १ ११ - (2) (2) (म ) (म) (म् ) ] . - ११ [118 [बिनम [प पा. - [पा.पा १० [पच [प्र.पा. १५५ [प.पा. १८० [.बा.10 [पा.पा. ४ [पास ॥ [प्रम" ܝܝ (2) (2) 1 १९ ] सामने ए सेने पपमिसपर पोपरपस्या प्रमाणपत्र बामराम सामान्मदिन (म्) ܝܚ ] ] 1 - [ भय . - पससमरिष्म्य [ ४ (4) [मन . मचिम भी ज्यपियाम्पेशानि 14 मारपानि ] " -- (2) (2) (म) . [ [ [ - . । بي " पाधिक्यात मोरासमय प्रसूले सम्म पनि पोवो पप गुममा ] (म्) (4) (2) ] M - १ [ बा १ १ १ को भवे मावफरमान समविनाप्रपा बा-भूमि सम्पन १९ (2) (मे) (2) (2) (म) () [ +९९४ पनि [भा पा• RAY] [स्पति १ ११ -- ] ] ५ [ [ [ पालिाशनम् वापिसमाग्रताम् १ । (म) (म्) (५) मासाही एम मार अविमा यस्यम -- (4) [ १ बम बम बानिमियम r . ] स्मा मैले (4) [वा 214 गमासापूर्व दिवारका 11 - (2) ] ] ] " ११ १ [पाबा १४१ [पास को - (4) - अधिवाताना अमिण भामा सम्मारिन भाषा १ - [प्रवास ] १८ 111 - [ [ ] ५ भविविध (५) (म्) (म्) (म्) (म्) () (1) 119 11 ६ ] ] . [पावर 110 [ 111४ 11१५ ११४ मम्मद मामधारमपप १९ ] ११५ पर बुखि मिमिपु स्वामी لا -- - ] ११. (2) (ये (म्) (4) C [ [ [ به पीपसम्पाप उत्तर बसोवापि पा इम्मानिमाम्वरम् मिनारनपपेशामाता परिवारका [ मानिसमीप -- ११३९ १५ - ] ] मामी (म्) १४ [.." [पा ११० [प पा ११ [मार ७ [प्रसचमम् [बई [पा पा विपतिमानमेन मे मान्स १ (d ) (4) لا ب ११५१ ११५१ . पसिनाधिनमति १९५३ १ (2) (4) (म्) (4) (1) [पा पा ११९. ] [ब सू ५४५५ मायामो ] माये ११५३ ११५4 -- [ ] इम्मानणान्तरपारमठे बीपीगत जप पुरीमा पालन एमई मते खबप्पा मामि सब [न ११ [मुपए - [ ११ ११८५ (म्) () لا - पीएम एमापसमा [पा ४.0 (2) (2) [ ] ] १९९ ११९ इति मपर्म परिसिपम् ।
No text on this page.
द्वितीयं परिशिष्ठम् न्यायायमानुसारिणीम्यासमायते साधारनयपके निर्दिरानां प्रन्यानां अन्परिक्षेपनामाप्र सी। -111५1५।९-२४। 1.41 । २१९ 1५1५1५। ५९1५1१1-1 - +][v1 4 (k + 1 + 1 + 1) १५-९६९९"। मत-11011111111111111111। पारम्सेस-11-14.11९14111५111। पित ISI ९९६-९९६१1114-1 भापार 1111 माप यति । मस्त्री सत पारसमाम्य पत्थर -.-110-12 ७४ मापमा ५४-" ।... -५ एनीम ६६-21-01-11101111111111111111 111111-१२॥ ६५-१६-२। प्रपति HI"। अचान । १-१३11111HI181144-। मगोपी । अमिर्माम ।। IINITION 1" औया "41. पासुन ११ १९1111HI11-11- २५९२६-1 १९५१४॥
No text on this page.
द्वितीय परिशिष्ठम् न्यायागमानुसारिणीन्यास्पायुते सावधारनपचक्रे निर्दिष्टानां ग्रन्पानां प्रन्यकरिशेमनासाश एपी। -१५।५।२४14"। १२९१५।२१।१५11101 १६-11-1४1 (14.4 Iswww..१४.४.1 ४१४॥ 15HI11111111 बाई-m1.11.९.२६.111111111 पारपसार :-१४-५४६५८rti.४१।१५।। अपित ५। ९९६-१९८५११५-। प्रमुबा 411१५-01---11 परमि 41 पचपी जाणानि 0-11। प (१।११। मापपर पेशीय -३।५-11-11001111111111111111 1114141 (२-११-२। प्रायमति २।४।५-11। पापारियोनाः । ९-28HI1HI1144-4 मिमी । बमिप्य ९४ ।। परमपर ६९। मिधर्म । जाममपिक .111.11.1104 बमिष स्मतम १ ।-SHI ।।१५-७ । या 1111५1५। सापुर ५११1१111111९२६ ५।१०।
२२ प्रापक्तपीपोपमामाश सषी मारमामायण ॥५॥ पर 11-1011५६.१५-11५६१ ।१५-१६।१९५२।१1111 १९५१1१111 1111 मीमापक १५-१।११। योपरख ल 1411 प्रसारका २04100 v-111४1-11 १५-4114.३१५. 10111414१११ 1411141 कोक्ति 1-98111111111111111५। 1011-1010.-"111111012-1011-1५1५1५1५11 ५.३।११।१८१२६१RMIRHATATWA411 ११।९।१६७३।१५-11014111101-01-xi.। • +11.111.00 0.1111111111111 १९४।१५ " । १५-१५ ११११५। "I1111 14141५। ५३।१५९।१११११।।40114141 1114.1111011-101111011991-1३। 1414141"।७३ १२-11 111५।११। १३५१५४41 १४-191111। 18-18 01.2 14.१५ १७.५। ५५६--1111111 141014-11।१४।१५१५।।५-19. ५-५.५.११ १३."MSNI पाव पर 1-1-1 ११ ।१ १५ ११. कमिमामिलामा १५।। 11111111111111111111३३-1 पवित पायातकापा रममा १९५३. प्रमाणपता।
मैनपर्शनप्रसिदशम्या: पतीपं परिशिपम् प 4 प्र प ३ 4 इम्पावसिा मरा p ५ H " | परमानम् हिम्मदेश पादपरमेय मार | निवस्वानम् ९४ ४ १५ * प्रायोपिक प्रनाम् पः (धर्मविपा) म (पर्यानिया) अपोमा म्यम् पर पपारः (4) १६ " मेहर . १२५ १३ कियापार 4 9 पनदिया समयमा एप्पोसम्माबारे भामितियोपियानम् मुमानम् । . १७ भिमसार सयामरणम् " " १९ बनेप्रवाहमाल U १ शामावरणीयम २ मिपासनम् १४मापना बमवारमपेपर स्पेपमापबाहामारि ६ ४ 4 बिरामरवाम परंपरा पदम्पलपविनम् M M १५ H ३५ M १ प्रदेछ . मार्षिक पोर्षि इम्पति P N A वाज बार २१बात " ५ } परम् A H 1 ११ . पमानमरणम् (समाम्यम्) मया १५ म 4 - U ६ २४ जैनरमप्रसिदशमा ११९ 1 पन्न 1 M - - सम्पमापालि मनारमोनियम माम् पपेपण्या M . H . U M - " "सारणम् शिकि H " नियंग देवम् (परम्) प्र. मानियम् भवापानमन्त्रम् इम्पनिम्म् विनिया 33 पुरोविका बतरम् वर .:.:...: । . M १५ बपि प्रति ४ . VRD . . - येणाम् 1 उमममा - अमंगाए देम्वण्यम् मारपीम् मारिसर विकार बाप्पेरोन - " गरमा 1 पर दिएकमावस्या दिपमाला M " मि M एमबमामि पिशुबधागा एलनामा एकपलागि पाप मायायची १५ प्र 4 पू बम्पमापनि भोम्पपरमाए रोमा ४०१ He 4 १८ स्पा उत्पर्पिी समर्पिणी सम्ममा पुस्मा एम्पापमा |परमार्गमा भवम्यामा परम्पपमिया माम्म्रोपनिया १४ अन्तरम् 4 " . १८ माम उपपमपमा पमा उपमम्ममा " १ क्रमा १५/नियोग १० बर्मामा ४॥ . - भार पनि परमा पनि पापा ४प्रवानिया १४मस्थानम् पुरमाया rv५ ४८ . ४४ " U राप्रमा मी h प्राचापाय माणम्पम् मन्नम् ५ोगमा P H । H पए मराममया . " १ H वाम् मिश्राविम् पानमा . U H . फारम्मपरिया निरमायुः पेम् सीपम् हा . परिविक परमम् P U ११ . सिम्या U H मोपपरपामा . । . " पपर्णनमसियामा . विमानस . (- १ बाराबन्ददममा U - पि " . " मनुमा मंति " H {(4) H १ - यावामया 4 ...३ . रफता पोपावाली शामापरणम् मारणम् . १ १९ . - . H . - - ' १ मविपरोया . 4 . १८ . मारपिन परवर्शनप्रसिदशम्या चतुर्ष परिशिपम् . H . . ~ माय P प्रचारमा " य बारक समापी - प्राणम् ३४ M पर . . ५ हमा . . - मि सर 6 (नस) (समान) मारगारनयो 1 सिया . २ . निस्पन अपदेश 16 मम्मम् +मपेपः २५ ७ प गर H H समस ४५ ५० 4 M विमानम् पाना परस्परा ममत्यम् बान्तरम् मरम्मम्मर म - ५सपर्मम् बारिमा रोमास द्यमान्यम्यम् 1 "मा M प्रसारम् पमा " U . 4 H 4 तिम् १५ रनम् " ५ मा २ Filteri परमा प्रमा कम्मर ४ १४ प्यारी → मनरेश . भार 40 भास पर 1 चाम्पस "म 1-अप स्म परमया पदभार क पम् - ~ - H पमा . H T R८ पपर्णवमसियामा 4 " मनप्पासामः १३५ पर १४ पुम्पम् - मरपम् पारिधि सामाविमा . - १२५ ११ - . " v ६ M . 4 4 M प्रधानम् M म मंत्रम् रेक्ट माम १५/बासा पवम्तमम् . १४१ १३ - १ - ५१ H बारारा परमा पुमा सम्परम परिमा १५ पम् १४४ - M - " . "प्रपाम् ग्पपमम् w मा " म बार H " - H . - मत W पिटिरेका १५ ५ बमिरणम् ११मम्म मेहकर परम प्रपषम् बारम् २३ । २ - - M M मुफ्त 4 H १५४ ११॥ 1 - - ४ 18 राजपमयम - M " मागणपपके प्र द बम्परारा १६५ १.6 " . "पाप्रारम्पा १४मसारण मावस्य मतवा . नये २ बपिप समर्माता p " M २१ बनिमाम्पसमा " - H १६९ १२ २१ 1 गोपीयम् परमपर ७ माप ११ विम्योपत्र परथी -रामप्र -विपतिवार 14[यमधि 4 H + बबामिय उपम्स बसतम्या मार्मा २ १२ ५ ५मायेगा - - २४१ २० २४ २ २ देवमपात पारा प्रापयापक प्रणमा एवरेतरामा पक्षमा प्रामा शिरोभा |धि समारम् निमारम् " M २ बापापमयू ५ 2 रिग्रम् अममममा बाकि पानि सस मागम बाम्यम् ११ ४ मिममम् | निधि " - स्म् मामाविममम् परिमपम् ३ परेम मानम् स्पारम् गामम् मिाधि - 1 २८ परपर्धवमसियशपा 4 . मरप्पाम्का १२३ १२९ 4 प्रपाकर [परिणाम १४ पुषम् . . मोत्यम् फेवातादिन सामविन 1 . - १४ ११. १ मा ११ - १४1 इम्पम् मैत्रम् . पापम्प . H - »सवा U . . १४५ " 4 मजप पम 14 ORE प्रेममायम् रामे ११ 10 ११ " → A १५ प्रक १९ " H "प्रवायम् मसम्म् M 4 . U M - - H - " सपी " . पीक पामाराम ११५ १ . 1 4 परिणमम् भारणम् " " बघुमाया पौरा - १५४ १ - ४ . पास १५९ १ सामा " " शवयामयचो प 4 पू 4 मागविविविविकासमा ४१४ ११ विम् . - . " M . वारा BI - 4 J अम्बानम् . * 4 M . - प्राप ११५ एमा भौचमामाम इनिसा व्या मोर . " १/महामोहर ४ तामिया 9 पसीपम् ~ । . प्रतिमा अपवापिस समपरिचम् पिपरमाणम् " " H WW - H उपहार b साषणम् 4 W परमेषिम् 4 M एम्यम् W १६ H H पौरम्म् पारम् प्रारम् प्पा प्रमोम् W D - M १ . मेरमात्रम् ४११ बाधि बानिर्माण ४ " F . 4 A . . पप्पा A - मी सिसहित ४१५ " . A मायम् पाप्पापा . परपवधिशमा . - १४६ १९ है . म H " पमा - 9 पाषाम १ M . मारमा बारम्या है। . " 4 1 . न ॥ . म . तुषा - . पाल्परकिया २८ H प निम्बानिय . २म्पतिमा २ . ४ . x बापविमानम् परिवाया . ११ - 4 २२१ १९॥ बमबारका 4 " 4 M - परमानेमानता n - १५ परिणाम On - - स - M लिम् . H " बरम ११| 141 १॥ परमान H पिपिकि AL 4 1 . 4 भावशाजपची १ पू 4. 4 मावधि ४१४ . २०० १९| पनिम्म् J " 4 . ४१५ . Dia DIRE M - '२ २३ २ - सम्पदामम् अपारगम् अविनम् म " म 4 -मेगा समारीच भौचम्मति M J २९५ x मन्तिम r ४८ - 2 ४११ १४वामा " 4 प्रया M ५ M सम्परमाणम् प्रापिपरिमाणम् परमाणम् 2 4 D काता M U " उपवार १३ 2 . J साषणम् मास्यास्माति उपमोमा 1 " 4 4 . १८ H 1 ताम् ALA मौरपर r 1 . खाप ५ H पिम् " " ४ पापविर M ४." " २ - Raginia - - नियमसमपर मोठया M १५ न्यप्पा Mu - . 4 मापम् बापत्पम् . M R परपबामियशम्मा र 4 . ४२० श पीमियान्ता मातिा माम्स्मतम् चालुपए अन्योन्यास्मिन १४ "नम्म् . H 4 | बारिश नमः wa . अम्पपरियामा प्रसार ४३४ " बाप- प्रौपाय " प्राणायमा १२ 1 . - - ४ - त प्रमाथि . ४१ . 4 D H - प्रममन्वरप्रसन्न माफिया . ॥५ साकुलम् पुनसमा पायाम्बो मनुम्नम् 4 ४. । 1 स्वाम १ - इभिवम् - p 4 बमुरमा माकिम १ ए . . " नाण्यभरकर "प्रान - - रामपाल विधि 1 निर्मप्रति बाराम रामप . me M - , H m ४ अपुत्र मिसरा समय बमुपागम् मनापा साहारा स्वरमा - ११ मधाम ० पै. १ जम्पतिका 7 " ५मपर्मम् पर्मम् H H U पर्यम् . १५ M स्चा H . 4 W मान्तरसधिषित R बमाक्सचा सम्प्रति बसमसावि १४ १ U " M ७ U M १५ परिमलाम् मिसावन ममतम् पति। ठिबन्धा सम्पपछि मानप्रयः 9 1 . 11 सवा बोनम् बभिषा - म्यानम् बमबमम् जम्ममाया मसम्तामाषा मीनोपार १४ करामाषा "सामापा "सावीमा १ . बिलास भयोम्यामिमग्र मिमापित " उपयो ४ १४ १ U मममम्मा ५सुधि साबमाण "पर्मपाका पुसियसम्ममा १२विता १७मारम्मा प्राधि " १५ पीमायणम् 10 . निम्नम् .
पपर्धनमामिरप्रमा "प्रपाषा 11 4 स्वयममा एप ' पाधि M समिरलाश्म -मपुर १४ " काम स्थापना - . पारम्पमिम्म 9 १ मी प्रसमा - H पाशिरसानिरोप U १४ समसामय "पुरम् उपमणम् पापा १ ए . पाक बापसम समाविम् . M . १ 11 २ १ १९ प्रमाविमा । ११४ अमिक 1111 . . १५ प्रमा १५ोया H पाम परिधिम् एक्षिा- पापा. पारमिसप- १ तपय मार पति पम्पमामवामि चावरकर (मा)H - प्रोसमाप कम्-१९ बोनसम्ममारत. , पारधारमपरके १५ पष्ठ परिशिएम् म्पायागमानुसारिप्पीसमेतमपचयनिर्दिएप्रन्यायपरिवपा - पीपल पम्पेनी भासना बारापर समानदार पुल पम्नी पूरा समर, मोपारास होना पास समान पेशापवमा सम्पन्धी तरमेपर सपना भीगा हमाल पपेना गार प्रभुमन पारपरमार साधारमन्तवार सभा समाप्रपाक मुपादन कामा मारि अभुग = मा महर्षि मारमदानुसामी पेषित बामपिपिए मतना प्रापा एने रखा पप प्रेगा पाये। FAY = मा मर्षि न्यायसायमा प्राकन वम पर प्रेगमा माये पुराणों तथा महाभारत भने प्रमाना मना है पनि मेरमा पुनािएर इरावने बारमवनी स्थापना - मा पुरसममनमा सम्प्रासन मानऔर देश ७ मा परिवार से समताप मास असमान गरी मगर मा सीता एप्रिय परिचय गर भनेन मावि पति - पामिवियामपरशा कार मसभाप्प मामनी सम्रना र सामसूमा पन मा मनार . वापर - भाप बालमने अपुन पनवना पाममा पम पर भाप तादा या वापपाएमा यमपी. परन्दर = मा माष पाभा जो भेन बाम 1- भन्सामा मागविपयमुनम् । बयोममनपर सर्व पनि पाना ने मोपली बारनार परखने सूत्र पेशामा भार समापारीपर - पासपर एमेमो पर लिा पर्च प्पर - सूत्र बनतिमा विद्यारी म्पाप्या धनार. पमा सायाम्पर मूभीग्रप्या मार भारत मरुने मामगाराभो. पम्पाय युमा माने मानायो पेरिसको रममा रीम समानी गरेर यसरी भागारपिान, समानरसेन - न मनमा मुभिमम्मतिको ग्रेना विद्रवामानबागमन निगम महारा मनिपर्मायम भाभियपन मम गरेमा पनि समार से मिला भाव मिमय- नियमपिर पि, पिरमपिराभिषम एक बा बाग्मुरा पन प्रविप्न सनारबपन एत निफ्ना सामान पाया मेन पारमादिमारब रसाय पियरमा नम्मर मुममा मानना पयन दरबारमा भारी नगरी - पपया भसर एन मालवारा 4- maavat Reणामा पर पाjan प्रोपोस!
फ्णयमभिवाश्रम । . स्वपरामा kewala -सम्ममुजरिमाणम् १५ ११ मापन H H पुनस्पपिस्य पारम्मानमा मपमा ५ A 1 प्रतिस्माविरोध . M ww . १४ समसामग्री "सुम 110 पम्मम्मम्ममा . १ H समाविम् - M 11 पराक मएस बचम्पवा १ ११६२ 144 १ १५बादरम् H १५ १४ M . ४मामिति पाधि अमितुमा . . - मात्रम् M H M मा- फार्म परिधि माविभिनयाने मस्सो- १ मतपीलोपोनलिमारा पतिसम्मले पारेकीमावा. अनासक्त (माय -
No text on this page.
पर परिक्षिणम् मानिमार - मारव र मावि योग पिप्पम, पावरान र एसियस स. मी बार पर पास्मिीना पारने मान मार भषामा मारमा प्रम परमामा मानिसमा मराई स्थान ने पीया मरमा पर्नु मारतरामापच = पासरचित माखभने रामायण याम्मी अधिकारी = दिनमा भागारनिचार पम्न बम बमसे सारी रीव वाचार मियों पराभव सामान पत्वामी राफिनो पोषणामार मार पीमा मिनिनने यामनारामैनामनिट पोनिमायत = गांवोप्रेम्सपिना प्रभार गिरे नो सपनार पूर्वपरोपी मपूर्व महार faro - मामा मात्र मन मनोचे मुमप सिमानापार्य प्रणेते मामाने कि प्रो बारे पनि एम चामो मां गात रति सपना पेपर बातेदो प्रयम परक, प्रभुत बगेरे. पापायव - Rबस्थामा मत मितिमी बिना एक माम् सितभा पर्व मनाया गया पम्पून प्रपंच बेपर्व भाषास पवाल, मम, पिपरिमामा त वा समुभा मत मारि परिमो को पार कम रतुवी मानसकनी मरावाने बानी परपीम मारे प्रब परमो और मपरीवा पिपा पागमती प्रारमिय प्रबनी विनिया फरमाला प्रामि बार बम गीतमी बाट नेपालबारमा सप्त। त्य निर्माण म्भोग म मालाग्रामक बीमा पसलम मदिर रपी परमवाट प्रदर्शनमा महाप्रममा प्रामामामा मच पर पाब! पारे बायका अगाई बिदिव ऐष। मानि - बासमविलास रोष गरानिमोई मापनपन माप माणसे मना पानी नतमस्मानाबा है.एम यास पड़े। पपवन - पक्पति पतिदेव नायने सांसमोर सेतियारमहलमा यो मामारा. सपा उपपेमे मानवारा, अफिसमापि वित प्राणिमुसापामारी पत मोरमा गुरासनमा पोषसम्म सपर मामय गोला प्रवास करणार मारण बायबापा पसी - इम्पगुजविना गरेको मे मामाने पर धमाल मावि सम्मपती बालो माल मामारो को. वाम - पावितमप्रमनपरी पार - बाबरावर हात मी. पापी र प्रमाणी विहिवादेवी पनि बार एम माननारोबारीसे। भगिन - पापी ग्वा भने पोतमी परिन यम्मी बस्तुलना ममस्या प्रमाणे. मारपितानमारिरमा न और सांस पिक बात बाद, अवसई मोना मुरापचार प्रन बाट मिलायोपनियनि पूचिएसोनिबार मापस-सपरेनरोनार बाम पान. परपषगर - पर मोबसरमा प्रद मरिमाल - था पोरान पापित मामाघर मारव, -परिसपान सम्मान- .
No text on this page.