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Sanskrita Shiksha 1

Dr.kapildev Devedi Acharya

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संस्कृत-शिक्षा
भाग-१
लेखक
"पद्मश्री डॉ० कपिलदेव द्विवेदी आचार्य,
एम० ए०, डी० फिल्०, पी० ई० एस० (अ० प्रा०)
पूर्व कुलपति, गुरुकुल महाविद्यालय, ज्वालापुर, हरिद्वार
उत
विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी

सप्तम संस्करण १६६४ ई०
....
नाम, Name
.....
.....
कक्षा,
Class
विभाग, Section
विद्यालय, School
प्रकाशक
विश्वविद्यालय प्रकाशन, विशालाक्षी भवन, चौक, वाराणसी-१
मुद्रक
वाराणसी एलेक्ट्रानिक कलर प्रिण्टर्स प्रा० लि०, चौक, वाराणसी-१

विषय-सूची प्रत्ययादि पृष्ठ १ ६ २ ३ १० ४ १२ ५ प्रथमा द्वितीया w ७ १८ ८ तृतीया २० ६ २२ गृह रमा हरि गुरु नदी युष्मद् अस्मद् तत् इदम् धातु लट् प्र० पु० लट् म० पु० लट् उ० पु० कृ, अस्, लट् भू-लट् भू-लोट भू-लङ् भू-विधिलिङ् भू-लुट् हस् पठ् लिख गम् दृश् पा क्रीड् खाद् वद् कृ अस् चतुर्थी । । । । । । । २४ ११ " पंचमी १२ १३ १४ २६ २८ ३० ३२ M षष्ठी ३ " ३४ ३६ सप्तमी १७ तुम् तव्य शतृ ३८ . १८ ४० १६ दीर्घ सन्धि ४२ २० गुण सन्धि क्त्वा परिशिष्ट ४६ (क) शब्दरूप-संग्रह (ख) धातुरूप-संग्रह 'संस्कृत-शिक्षा' की विशेषताएँ १. इसमें भाषा-शिक्षण की नवीनतम वैज्ञानिक पद्धति अपनायी गयी है तथा अत्यन्त सरल और रोचक ढंग से संस्कृत की शिक्षा दी गयी है । 'संस्कृत-शिक्षा' ५ भागों में पूर्ण हुई है । यह कक्षा ६ से १० तक के छात्रों के लिए विशेष उपयोगी है । प्रत्येक कक्षा के लिए एक-एक भाग है । ३. प्रत्येक भाग में प्रयत्न किया गया है कि उस स्तर से संबद्ध व्याकरण का अंश उस भाग में विशेष रूप से सिखाया जाय । ४. अभ्यासों के द्वारा व्याकरण की शिक्षा दी गयी है । ५. प्रारम्भिक छात्रों के लिए उपयोगी सभी बातें इसमें दी गयी हैं । ६. प्रत्येक अभ्यास के लिए केवल दो पृष्ठ दिये गये हैं । ७. प्रत्येक अभ्यास में व्याकरण के एक या दो नियमों का अभ्यास कराया गया है । साथ ही आवश्यक शब्दावली भी दी गयी है । ८. उदाहरण वाक्यों के द्वारा व्याकरण के नियमों को स्पष्ट किया गया है । उनसे मिलते-जुलते हुए ही वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कराया गया है । ६. प्रत्येक अभ्यास में कुछ विशेष शब्दों, धातुओं या प्रत्ययों आदि का अभ्यास कराया गया है। १०. परिशिष्ट में आवश्यक शब्दों और धातुओं के रूप दिये गये हैं । कपिलदेव द्विवेदी आचार्य आवश्यक निर्देश १. संस्कृत में ३ लिंग (Genders) होते हैं । उनके नाम और संक्षिप्त रूप ये हैं: १. पुंलिंग (पुं०) (Masculine Gender), २. स्त्रीलिंग (स्त्री०) (Feminine Gender), ३. नपुंसकलिंग (नपुं०) (Neuter Gender) । २. संस्कृत में ३ वचन (Numbers) होते हैं । उनके नाम और संक्षिप्त रूप ये हैं: १. एकवचन (एक०) (Singular), २. द्विवचन (द्वि० या द्वि० १०) (Dual), ३. बहुवचन (बहु०) (Plural) | ३. संस्कृत में ३ पुरुष (Persons) होते हैं । उनके नाम और संक्षिप्त रूप ये हैं: १. प्रथम पुरुष या अन्य पुरुष (प्र० पु० या प्र०) (Third Person), २. मध्यम पुरुष (म० पु० या म०) (Second Person), ३. उत्तम पुरुष (उ० पु० या उ०) (First Person)। ४. संस्कृत में अधिक प्रयुक्त लकार (Tenses & Moods) ५ हैं । उनके नाम तथा अर्थ ये हैं:-१. लट् (वर्तमान काल) (Present Tense), २. लोट् (आज्ञा अर्थ) (Imperative Mood), ३. लङ् (भूतकाल) (Imperfect Tense), ४. विधिलिङ् (आज्ञा या चाहिए अर्थ) (Potential Mood), ५. लृट् (भविष्यत् काल) (Future Tense) | ५. संस्कृत में ८ विभक्तियाँ (कारक) होती हैं । उनके नाम, संक्षिप्त रूप और चिह्न ये हैं विभक्ति सं० रूप कारक Case . १. प्रथमा २. द्वितीया ३. तृतीया ४. चतुर्थी ५. पंचमी ६. षष्ठी ७. सप्तमी ८. संबोधन (प्र०) (द्वि०) (तृ०) (च०) (पं०) (ष०) (स०) (सं०) कर्ता कर्म करण संप्रदान अपादान संबन्ध अधिकरण संबोधन चिह्न ने को ने, से, द्वारा के लिए से Nominative Accusative Instrumental Dative Ablative Genitive Locative Vocative का, के, की में, पर हे, अये, भोः अभ्यास १ , - शब्दावली--- --दह, ne, तो---वे दोनों, those two, ते-वे सब, they, भू-होना, tc 52, ---ढ़ना, to read, लिख्—लिखना, to write, हस्-हँसना, to laugh, गम् गच्छ,-जाना, :0, अत्र-यहाँ, there, तत्र-वहाँ, there, यत्र-जहाँ, where, कुत्र–कहाँ, 15 ... किन--क्या, shat. नियम १-कर्ता के अनुसार क्रिया का वचन और पुरुष होता है । जैसे—सः पठति । का प्रथम पुरुष एक० है, अतः क्रिया भी प्र० पु० एक० है । नियम २–दर्तमान काल (लट्) प्रथम पुरुष में धातु के अन्त में ये संक्षिप्त रूप लगते है.---एकवचन में अति, द्विवचन मे अतः, बहुवचन में अन्ति । जैसे—पठ् के पठति, पठतः, पठन्ति । भू के भवति, भवत., भवन्ति । गम् >गच्छ् गच्छति, गच्छतः, गच्छन्ति । इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो :-- सः पठति । तौ पठतः। ते पठन्ति | सः लिखति । तौ लिखतः । ते लिखन्ति । सः गच्छति ! तौ कुत्र गच्छतः ? ते तत्र गच्छन्ति । सः अत्र हसति । तत्र किं भवति ? हिन्दी में अर्थ लिखो: सः लिखति | तौ लिखतः ते लिखन्ति । सः पठति ते पठन्तिः | सः किं पठति ? सः गच्छति | ते तत्र गच्छन्ति तत्र किं भवति? । सः हसतिः | ते हसन्तिः .... A..." maa.... तौ हसतः ..... (क) संस्कृत बनाओ :- वह क्या पढ़ता है ? वे दोनों कहाँ पढ़ते हैं ? वे सब यहाँ पढ़ते हैं। वह हँसता है वे सब हँसते हैं वह क्या लिखता है ? वे दोनों लिखते हैं वे सब लिखते हैं। वह कहाँ जाता है ? वे सब कहाँ जाते हैं ? वहाँ क्या हो रहा है ? Pa.... ते. लिखति । गच्छन्ति । 'हसन्ति । (ख) रिक्त स्थानों को भरो:- पठति । सः गच्छति । किं पठन्ति ? (ग) रिक्त स्थानों में दी हुई धातु का लट् का रूप भरो:- ते. (पठ्) । तौ ते. (लिख्) ते (हस्) । ते..... (गम्) । (हस्) । (भू) । दिनाङ्कः हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य

अभ्यास २
शब्दावली—त्वम्-टू, thou, युवान्—तुम दोनो, you, you two, यूयम्-तुम सब, you,
you all, वद्--बोलना, to speak, क्रीड़-खेलना, to play, खाद्-खाना, to eat, अद्य-आज,
today, इदानीम्—अब, now, यदा-जब, when, तदा-तब, then, कदा—कब, when,
अपि भी, also, न-नहीं, no, स्व-ही, alone.
नियम ३–कता में प्रथना होती है और कर्म में द्वितीया । जैसे—राम पुरतक पढ़ता
रानः पुस्तकं पठति । त्वं गृहं गच्छसि ।
नियम ४-वर्तमानकाल (लट्) मध्यम पुरुष में धातु के अन्त मे ये संक्षिप्त रूप लगते
हैं:--एकवचन मे असि, द्विवचन ने अथ , बहुवचन ने अथ , जैस-पठ् के पठसि, पठथः,
पटथ । मू के भवति, भवथ., भवथ । गम् गच्छसि, गच्छथः, गच्छथ ।
इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो :-
त्वं वदसि । यूयं वदथ । त्वं क्रीडसि । यूयम् अपि क्रीडथ । त्वम् इदानीं
भोजनं खादसि | यूयम् इदानीं भोजनं किं न खादथ ? यदा रामः पठति, तदा
त्वम् अपि पठसि ।
हिन्दी में अर्थ लियो :-
त्वं किं वदसि ?
यूयम् इदानीं न क्रीडथ
त्वं कदा भोजनं खादसि?
त्वं पुस्तकं पठसि
यूयं गृहं गच्छथ
युवाम् इदानीं लिखथः
.......
...AAU
.....
...
......

क) संस्कृत बनाओ:- तू पुस्तक पढ़ता है तुम दोनों लिखते हो तुम सब घर जाते हो तू क्या कहता है ? तुम सब अब खेलते हो। तुम दोनों क्यों नहीं खेलते हो ? तू भी घर जाता है तुम सब भोजन खाते हो तुम दोनों कब खेलते हो ? तुम सब क्या पढ़ते हो ? तू क्यों नहीं बोलता है ? mom (ख) रिक्त स्थानों को भरो: त्वं पुस्तकं युवाम् 'न क्रीडथः ? यदा ..'आगच्छति, यूयं गृहं यूयं भोजनं. .... तदा त्वम् .... ..... यूयं कुत्र (ग) रिक्त स्थानों में दी हुई धातु का लट् का रूप भरो:- त्वं किं (पठ्) । (लिख्) । यूयं गृहं त्वं किं. (वद्) । यूयं किं न युवाम् इदानीं (क्रीड्) । (गम्) । (हस्) । दिनाङ्कः हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य अभ्यास ३ शब्दावली-अहम्-., I, आवान्, हम दोनों, we, we two, वयम्हम सब, we, we all. आगन् आगच्छ)-आना, to come, दृश्—देखना, to see. स्था—रुकना, to stay, पा-पीना, to drink, घ्रा—सूंघना, to smell, इतः—यहाँ से, from here, ततः—वहाँ से, from there, यत:-जहाँ से, from where, कुत:-कहाँ से, from where, इत्थम्- thus, तथा— वैसे, so. यथा--जैसे, as, कथम् –कैसे, how', च—और, and. -ऐसे, नियम ५-हिन्दी में जहां 'और' लगता है, संस्कृत में 'च' उससे एक शब्द के बाद में लगेगा । जैसे—फल और फूल-फलं पुष्पं च । राम और कृष्ण-रामः कृष्णः च । में नियम ६–वर्तमान काल (लट्) उत्तम पुरुष धातु के अन्त में ये संक्षिप्त रूप लगते हैं:-एक० में आमि, द्वि० मे आवः, बहु० में आमः ! जैसे—पट् के पठामि, पठावः, पठामः । इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो: अहं पुस्तकं पठामि । वयं लेखं लिखामः ! वयं ततः आगच्छामः । अहं फलं पश्यामि । अहम् अत्र तिष्ठामि । वयं जलं पिबामः । अहं पुष्पं जिघ्रामि । त्वं कुतः आगच्छसि ? अहं ततः आगच्छामि । त्वं कथं पठसि ? अहं इत्थं पठामि । सूचना-लट्, लोट्, लङ्, विधिलिङ् में इन धातुओं के ये रूप हो जाते हैं:-गन् का गच्छ, गच्छति । आगम्-आगच्छ्, आगच्छति । दृश्—पश्य्, पश्यति । स्था—तिष्ठ, तिष्ठति । पा—पिब्, पिबति । घ्रा—जिघ्र, जिघ्रति ।

हूँ (क) संस्कृत बनाओ :- मैं अब पुस्तक पढ़ता हूँ हम दोनों पुस्तक पढ़ते हैं हम सब पुस्तकें पढ़ते हैं मैं लेख लिखता हूँ मैं विद्यालय से आता हम दोनों वहाँ से आते हैं हम फूल को देखते हैं मैं वहाँ रुकता हूँ मैं जल पीता हूँ हम फूल सूंघते हैं वह वहाँ से आता है तुम सब कहाँ से आते हो? मैं फल और फूल देखता हूँ तुम सब कैसे पढ़ते हो? मैं जैसे पढ़ता हूँ, वैसे लिखता हूँ (ख) रिक्त स्थानों को भरो:- त्वं पठसि ? अहं पुस्तकं ? वयं (ग) रिक्त स्थानों में दी हुई धातु का लट् का रूप भरो:- युवां कुत्र (गस्) ? आवां गृहं (खाद्) ? वयं भोजनं दिनाङ्क: हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य - यूयं किं लिखामः ! - (गम्) । (खाद्) । ..... यूयं किं अभ्यास ४ two, शब्दावली—कृ—करना, to do. अत्—होना, to be, रक.-एक, one, द्वौ-दो, त्रय-तीन, three, चत्वार:-चार, four, पञ्च-पाँच, five, षट्-छ:,six, सप्त—सात, seven. अष्ट-आठ, eigh. नव-नी, nine, दस-दस, ren. प्र० पु० म० पु० उ० पुल स्वः - कृ (करना) लट् अस् (होना) लट् करोति कुरुत. कुर्वन्ति अस्ति सन्ति करोषि कुरुथ कुरुथ असि स्थः स्थ करोमि कुर्वः कुन. अस्मि नियम ७--तीनो लिङ्गों में धातु का रूप वही रहता है । जैसे—बालकः पठति ! बालिका पठति । बालकः पतति । बालिका पतति । पत्रं पतति । इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो :- सः कार्यं करोति । ते कार्यं कुर्वन्ति | त्वं किं करोषि ? अहं कार्यं करोमि । ते अत्र सन्ति । त्वं कुत्र असि ? अहम् अत्र अस्मि । वयं स्मः । अत्र द्वौ बालकौ स्तः । तत्र चत्वारः जनाः सन्ति । हिन्दी में अर्थ लिखो: त्वं किं करोषि ? अहम् अत्र कार्यं करोमि तत्र चत्वारः बालका: पठन्ति अत्र अष्ट छात्राः लेखं लिखन्ति अत्र नव बालिकाः क्रीडन्ति ......। 4.. 4....... .....

e.codeoa... 16000 ........... ... (क) संस्कृत बनाओ:- वह क्या करता है ? वह काम नहीं करता है वे क्या करते हैं ? वे पुस्तकें पढ़ते हैं तुम सब क्या करते हो ? मैं लेख लिख रहा हूँ वहाँ पर कौन है ? मैं यहाँ पर ही हूँ वहाँ पर एक बालक है यहाँ दो बालक हँस रहे हैं वहाँ तीन मनुष्य हैं यहाँ पर दस बालक हैं तुम सब कहाँ हो ? हम सब यहाँ पर ही हैं (ख) रिक्त स्थानों में दी हुई धातु के लट् के रूप भरो:- तौ कि त्वं किं (कृ)? अहं पुस्तकं तत्र कः (अस्) ? तन्त्र बालकः (अस्) ! यूयं तत्र बालकाः पुस्तकानि (पठ्) । मनुष्याः गृह दिनाङ्कः हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य ....... ..... सः किं (कृ) ? A. (कृ) । (प) । (अस) । (अस्) । (गम्) । अत्र अहम् .. . ...

अभ्यास ५ शब्दावली-रामः-राम, Ram, बालक..—बालक, Boy, मनुष्यः-आदमी, man, नृपः- राजा, king, विद्यालयः-विद्यालय, school, ग्रामः-गाँव, village, जनक:-पिता, father, पुत्रः-पुत्र, son, उपाध्यायः-अध्यापक, teacher, शिष्यः-शिष्य, pupil, पच्—पकाना, to cook, नम्-नमस्कार करना, to salute, रक्ष-रक्षा करना, to protect. भू (होना, to be) लट् संक्षिप्त रूप भवति भवतः भवन्ति प्र० पु० अति अतः अन्ति भवसि भवथः भवथ म० पु० असि अथः अथ भवामि भवाव: भवामः उ० पु० आमि आवः आमः सूचना—ये संक्षिप्त रूप पठ् आदि धातुओं के अन्त में लट् में लगेंगे । जैसे--पट्—पठति, पठतः, पठन्ति आदि । लिख-लिखति, लिखतः, लिखन्ति आदि । नियम ८–(प्रथमा) कर्ता (व्यक्तिनाम, वस्तुनाम आदि) में प्रथमा होती है जैसे—रानः पठति । बालक: गच्छति । नियम ६-(संबोधन) किसी को संबोधन करने (पुकारने) में संबोधन विभक्ति होती है ! जैसे—हे राम !, हे कृष्ण !, हे देवदत्त ! इन वाक्यों के ध्यान से पढ़ो:- रामः पुस्तकं पठति । बालकाः डन्ति । नृपः राज्यं रक्षति ! मनुष्यः भोजनं पचति । शिष्याः उपाध्यायं नमन्ति । जनक: ग्रामं गच्छति । पुत्राः हसन्ति । शिष्याः विद्यालयं गच्छन्ति । वयं लेखं लिखामः । अहं सत्यं वदामि ।

(क) संस्कृत बनाओ :- बालक पुस्तक पढ़ता है बालक पुस्तकें पढ़ते हैं मैं पुस्तक पढ़ता हूँ हम लेख लिखते हैं बालक खेलता है राम राज्य की रक्षा करता है वह आदमी भोजन पकाता है शिष्य गुरु को नमस्कार करता है पिता पुत्र की रक्षा करता है मैं विद्यालय को जाता हूँ वे कहाँ जा रहे हैं ? वे गाँव को जा रहे हैं अध्यापक शिष्य से कहता है हम सत्य बोलते हैं वे बालक हँस रहे हैं (ख) निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करो:- अहं पठति | ते गच्छति वयं वदामि | सः क्रीडन्ति यूयं गच्छथः । आवां गच्छामः त्वं कुर्वन्ति | वयं सन्तिः दिनाङ्कः हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य ... ... ।

अभ्यास ६ शब्दावली-हम्-घर, house, फलम्-फल, fruit, पत्रम्-पत्ता या पत्र, leaf, letter, नगरम्-नगर, city, कार्यम्-काम, work, अभितः-दोनों ओर, on both sides, उभयतः- दोनों ओर, on both sides, सर्वत..चारों ओर, around, प्रति. ओर, towards, धिक्—धिक्कार, fie, विना-बिना without. भू-लोट संक्षिप्त रूप भवतु भवताम् भवन्तु प्र० पु० अतु अताम् अन्तु भव भवतम् भवत म० पु० अ अतम् अत भवानि भवाव भवाम उ० पुग आनि आव आम सूचना ये संक्षिप्त रूप पट् आदि धातुओं के अन्त में लोट् में लगेंगे । जैसे-पट्-पठतु, पठताम्, पठन्तु आदि । लिख-लिखतु, लिखताम्, लिखन्तु आदि । नियम १०—(द्वितीया) कर्म कारक में द्वितीया होती है । जैसे—रामः विद्यालयं गच्छति । स पुस्तकं पठति । स प्रश्नं पृच्छति ! नियम ११-अभितः, उभयतः, सर्वत:, प्रति, धिक्, विना के साथ द्वितीया होती है । जैसे—ग्रामम् अभितः (गाँव के दोनों ओर), ग्रामं प्रति (गाँव की ओर), दुर्जनं धिक्, रामं विना । इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो :- रामः गृहं गच्छतु । नगरम् उभयतः वनम् अस्ति । विद्यालयं परितः फलानि पुष्पाणि च सन्ति । विद्यालयं प्रति गच्छ । दुर्जनं धिक् | रामं विना | शिष्याः पत्राणि लिखन्तु | छात्राः कार्यं कुर्वन्ति । amuaa ass है... (क) संस्कृत बनाओ :- तू घर को जा मैं विद्यालय को जाऊँ वे पुस्तकें पढ़ें तुम सब लेख लिखो मैं पत्र लिखू वे नगर को जायें तू फल को खा वह क्या काम करता है ? वह पढ़ता है और लिखता है गाँव के दोनों ओर जल है विद्यालय के चारों ओर पेड़ हैं वह विद्यालय की ओर जाता है कुशिष्य को धिक्कार है धर्म के बिना सुख नहीं है गुरु प्रश्न पूछता है (ख) रिक्त स्थानों में लोट् के रूप भरो:- (गम्) । यूयं लेख (लिख्) । यूयं (क्रीड्) । अहं भोजनं (खाद्) । ... ।... ते गृह वयं पुस्तकानि .... बालकाः (प) । (हस्) । (प्रच्छ) । (आगम्) । .. त्वं प्रश्नं. यूयम् अत्र" दिनाङ्क: हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य अभ्यास ७ शब्दावली-रमा-रमा, Rama, बालिका—लड़की, girl, पाठशाला विद्यालय, school, लता—लता, creeper, विद्या विद्या, knowledge, आज्ञा—आज्ञा, order, प्रजा--प्रजा, subjects, दिनम् दिन, day, वर्षम् वर्ष, year, क्रोशः—कोस, a distance of about 2 miles. भू-लङ् संक्षिप्त रूप अभवत् अभवताम् अभवन् प्र० पु० अत् अताम् अन् अभवः अभवतम् अभवत म० पु० अः अतम् अत अभवाव अभवाम उ० पु. आव अभवम् अन् सूचना-धातु से पहले 'अ' लगेगा । ये संक्षिप्त रूप पठ् आदि धातुओं के अन्त में लङ् में लगेंगे । जैसे—अपठत्, अपठताम्, अपठन् आदि । लि–अलिखत्, अलिखताम्,अलिखन् । नियम १२-- -(द्वितीया) गमन (चलना, जाना) अर्थ की धातुओं के साथ द्वितीया होती है । ग्रामं गच्छति । गृहं गच्छति । नियम १३-(द्वितीया) समय और मार्ग की दूरी वाचक शब्दों में द्वितीया होती है । दश दिनानि लिखति-दस दिन तक लिखता है । क्रोशं गच्छति—कोस भर जाता इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो: रमा पत्रम् अलिखत् । बालिकाः पाठशालाम् अगच्छन् । नृपः प्रजाः अरक्षत् । अहं लताम् अपश्यम् । वयं विद्याम् अपठाम । रामः दश दिनानि पठति । कृष्णः क्रोशं गच्छति । अहं जनकस्य आज्ञाम् अपालयम् । कृष्णः पञ्च वर्षाणि अपठत् । -- MOHANIA ।

... (क) संस्कृत बनाओ :--- रमा ने पुस्तक पढ़ी बालिका ने लेख लिखा सुशीला पाठशाला गयी तूने बालिका देखी उन्होंने लता देखी बालिकाओं ने विद्या पढ़ी राम ने पाँच साल पढ़ा मैंने गुरु की आज्ञा का पालन किया देवदत्त कोस भर गया वे गाँव को गये उसने दस दिन लेख लिखा कृष्ण ने प्रजा की रक्षा की बालिका ने भोजन खाया बालिकाएँ खेलीं रमा ने प्रश्न पूछा (ख) कोष्ठ में दिये शब्दों में से उचित शब्द को चुनकर भरो:- छात्राः विद्यालयम् | (अगच्छन्, अपठन्, अलिखन्) बालिकाः भोजनम्। । (अखादत्, अखादन्, अखादम्) अहं बालिकाम् । । (अपश्यत्, अपश्यम्, अपश्यः) वयं पुस्तकानि | (अपठन्, अपठाम, अपठम्) ..... म.... - दिनाङ्क: हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य

अभ्यास ८
शब्दावली—हरि:-विष्णु, Vishnu, नुनिः-मुनि, sage, कवि:-कवि, poet, रविः-सूर्य,
sun, अग्निः—आग, fire, गिरिः–पहाड़, mountain, भूपति:-राजा, king, कन्दुकम्—गेंद,
ball, दण्डः-डंडा, stick, सैनिक:-सिपाही, soldier, सह—साथ, with, प्रच्छ—पूछना, to
ask.
म० पु०
ए:
एत
उ० पु०
भू-विधिलिङ्
संक्षिप्त रूप
भवेत् भवेताम् भवेयुः प्र० पु० एत् एताम् एयुः
भवे: भवेतम् भवेत
एतम्
भवेयम् भवेव भवेम
एयम्
एम
सूचना—ये संक्षिप्त रूप पठ् आदि धातुओं के बाद विधिलिङ् में लगेंगे । जैसे—पट्—पठेत्,
पठेताम्, पठेयुः आदि । लिख्—लिखेत्, लिखेताम्, लिखेयुः आदि ।
नियम १४--(तृतीया) करण कारक में तृतीया होती है और कर्मवाच्य में कर्ता में ।
जैसे—कन्दुकेन क्रीडति । दण्डेन गच्छति । रामेण पुस्तकं पठितम् ।
नियम १५.-(तृतीया) सह के साथ तृतीया होती है । जैसे—जनकेन सह गृहं गच्छति-पिता
के साथ घर जाता है ।
इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो:-
रामः कन्दुकेन क्रीडेत् । मुनिः दण्डेन गच्छेत् । कविः श्लोकं गायेत् (गावे) ।
हरिः पठेत् । रविः आकाशे तपेत् (तपे) ! अग्निः ज्वलेत् (जले) । भूपतिः
दण्डेन दुर्जनं ताडयेत् (मारे) । सः गिरिं गच्छेत् । जनकेन सह पुत्रः आगच्छेत् ।
शिष्यः प्रश्नं पृच्छेत् ।
MERO

16.
...
......
....
(क) संस्कृत बनाओ :--
हरि गेंद से खेले
मुनि डंडे से चले
कवि श्लोक लिखे
हरि विद्या पढ़े
सूर्य अब आकाश में तपे
आग पहाड़ पर जले
बालक डंडे से गेंद मारे
सैनिक डंडे से दुष्ट को मारे
हरि पिता के साथ घर जावे.
कृष्ण पहाड़ पर जावे
राम प्रश्न पूछे
राजा प्रजा की रक्षा करे।
बालक सत्य बोलें
तुम असत्य न बोलो.
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के संस्कृत में उत्तर दो :-
त्वं किं करोषि ?
त्वं किं पठसि ?
ते कुत्र अगच्छन् ?
?....
यूयं किं कुरुथ ?
हरि: केन अक्रीडत् ?
...
.....
दिनाङ्कः
हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य

अभ्यास शब्दाश्ली-गुरु:, teacher, साधुः सञ्जन, a gentleman, शिशुः –बच्चा, infant, भानुः-सूर्य, sun, पशु-पशु, animal, वायु:- हवा, wind, तरु:-वृक्ष, tree, किं कार्यम्, कोऽर्थः, किं प्रयोजनम् –तीनों का अर्थ है—क्या लाभ, hat is the use of, प्रकृति:-स्वभाव, n&iure. संक्षिप्त रूप भविष्यति भविष्यतः भविष्यन्ति प्र० पु० इष्यति इष्यतः इष्यन्ति भविष्यसि भविष्यथः भविष्यथ म० पु० इष्यसि इष्यथः इष्यथ उ० पु० भविष्यामि भविष्याव: भविष्यानः इष्यामि इष्याव: इष्यामः सूचना-कुछ धातुओं के अन्त में स्यति, स्यतः, स्यन्ति आदि बिना इ वाले संक्षिप्त रूप लगते हैं ! पठ् आदि धातुओं के अन्त में लृट् में ये सं० रूप लगते हैं । जैसे—पठिष्यति, पठिष्यतः, पठिष्यन्ति आदि । दृश—द्रक्ष्यति, द्रक्ष्यतः, द्रक्ष्यन्ति आदि । नियम १६-(तृतीया) किं कार्यम्, कोऽर्थः, किं प्रयोजनम् के साथ तृतीया होती है । मूर्खेण पुत्रेण किं कार्यम्, कोऽर्थः, किं प्रयोजनम् मूर्ख पुत्र से क्या लाभ ? नियम १७-(तृतीया) प्रकृति आदि क्रियाविशेषण शब्दों में तृतीया होती है । प्रकृत्या साधुः ! सुखेन जीवति । दुःखेन जीवति । इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो :- गुरुः विद्यालयम् आगमिष्यति । शिशुः क्रीडिष्यति हसिष्यति च । सः प्रकृत्या साधुः अस्ति । दुर्जनेन शिष्येण किं कार्यम् ? शिशुः भानुं तरं च द्रक्ष्यति (देखेगा) । पशुः धाविष्यति (दौड़ेगा) | वायुः चलिष्यति (चलेगी) ।

Sea " की 12.... (क) संस्कृत बनाओ :- बालक घर जायेगा गुरु विद्यालय में आयेंगे छात्र विद्या पढ़ेंगे बालिकाएँ लेख लिखेंगी शिशु गेंद से खेलेगा शिशु सूर्य को देखेगा सज्जन हँसेगा हवा चलेगी मूर्ख शिष्य से क्या लाभ ? देवदत्त स्वभाव से सज्जन है राम सुख से जीता है दुर्जन दुःख से जीता है छात्र वृक्ष को देखेंगे। मैं घर जाऊँगा, तू भी चल बालक दौड़ेंगे (ख) निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करो:- सः पठिष्यन्ति त्वं गमिष्यामि यूयं धाविष्यसि शिशुः क्रीडिष्यन्ति .23 ! ते लेखिष्यति अहं द्रक्ष्यति ते हसिष्यति त्वं धाविष्यति ..... .... दिनाङ्क: हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य अभ्यास १० शब्दावली नदी-नदी, river, रजनी—रात्रि, night, सखी-सहेली, friend, भवती- आप (स्त्रीलिंग), you, राज्ञी रानी, queen, बुद्धिमती—बुद्धिमान् स्त्री, an intelligent woman, दा-देना, to give, यच्छ—देना, to give, नमः नमस्कार, salutation, स्वस्ति—आशीर्वाद, blessing. नियम १८-(चतुर्थी) संप्रदान कारक (दान देना आदि) में चतुर्थी होती है । ब्राह्मणाय धनं ददाति यच्छति वा-ब्राह्मण को धन देता है । बालकाय पुस्तकं ददाति-बालक को पुस्तक देता है। नियम १६—(चतुर्थी) नमः और स्वस्ति के साथ चतुर्थी होती है । गुरवे नमः-गुरु को नमस्कार । शिष्याय स्वस्ति-शिष्य का कल्याण हो । इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो :- नदी पश्य | नद्याः जलम् आनय । रजन्यां चन्द्रः भाति (चमकता है) । राज्ञी भवत्यै फलानि यच्छति । बुद्धिमत्यै नमः । सखीं पृच्छ । पुत्राय स्वस्ति । अहं भवतीं पृच्छामि । बालकेभ्यः फलानि यच्छ । बालकाः हसन्ति । बालिकाः अहसन् । ते हसिष्यन्ति । हिन्दी में अर्थ लिखो :- नृपः ब्राह्मणाय धनं यच्छति गुरवे नमः, शिष्याय स्वस्ति रजन्यां चन्द्रः भातिः नद्याः जलम् आनय राज्ञी बुद्धिमत्यै फलानि ददाति ...... ..... ....॥ ... 2.

.
(क) संस्कृत बनाओ :-
वह नदी को देखता है
वह नदी से जल लाया
नदी में जल है
रात्रि में चन्द्रमा आकाश में चमकता है
सखी आपको पुस्तकें देती है
राम हरि को धन देता है
रानी से पूछो
गुरु को नमस्कार
शिष्य को आशीर्वाद
बालक हँसा.
शिशु हँसेंगे
तू हँस
मैं नहीं हँसूंगा।
बुद्धमती को फल दो
(ख) रिक्त स्थानों में हस् धातु के लट्, लोट्, लङ् के रूप लिखो :-
बालकाः
......
त्वं
यूयं
अहं
....
वयं
दिनाङ्कः
हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य

अभ्यास ११
शब्दावली अध्यापक:-अध्यापक, teacher, अङ्काः-अंक, marks, अवकाशः–छुट्टी,
holiday, brich-377, passed, pidis, failed, BURZA:-BYRPTO, present,
अनुपस्थितः अनुपस्थित, absent, परीक्षा परीक्षा, examination, श्रेणी—कक्षा, class,
युष्मद्-तू, you, रुच्—अच्छा लगना, to like, क्रुध्—क्रोध करना, to be angry, द्रुह-द्रोह
करना, to bear malice.
नियम २०—(चतुर्थी) रुच् (अच्छा लगना) अर्थ की धातुओं के साथ चतुर्थी होती है ।
जैसे—बालकाय मोदकं रोचते.—बालक को लड्डू अच्छा लगता है । पुत्राय दुग्धं रोचते !
नियम २१–(चतुर्थी) क्रुध् और द्रुह् अर्थ की धातुओं के साथ जिसपर क्रोध किया जाय,
उसमें चतुर्थी होती , जैसे—रामः दुर्जनाय क्रुध्यति, दुह्यति वा—राम दुर्जन पर क्रोध करता
है।
इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो :
अयं विद्यालयः अस्ति । अत्र अध्यापकाः छात्रान् पाठयन्ति (पढ़ाते हैं) ।
अद्य विद्यालये शतं छात्राः उपस्थिताः सन्ति, दश च अनुपस्थिताः । परीक्षायां
सप्ततिः (७०) छात्राः उत्तीर्णाः, अन्ये च अनुत्तीर्णाः । शिष्याय मोदकं रोचते ।
युष्मद् शब्द के इन विभक्तियों के रूप लिखो
द्वि०
'प्र०
"तृ
च०
'ष०
स०

..
(क) संस्कृत बनाओ :-
यह एक विद्यालय है
विद्यालय में सौ छात्र पढ़ते हैं..
अध्यापक कक्षा में शिष्यों को पढ़ाते हैं
मैं उपस्थित हूँ
आज श्याम अनुपस्थित है
आज तुम्हारी परीक्षा है
वार्षिक परीक्षा में ७० छात्र उत्तीर्ण हैं
अन्य छात्र अनुत्तीर्ण हैं
कृष्ण को लड्डू अच्छा लगता है
शिशु को दूध अच्छा लगता है
तुम्हें क्या अच्छा लगता है ?
राम रावण पर क्रोध करता है
आज विद्यालय में छुट्टी है
तुम्हारी श्रेणी में कितने (कति) छात्र हैं ?
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के संस्कृत में उत्तर लिखो
तुभ्यं किं रोचते ? मां
रामः कस्मै क्रुध्यति ?
तव पुस्तकं कुत्र अस्ति ? मम
शिशवे किं रोचते ?
त्वं किं पठिष्यसि ?
दिनाङ्क:
हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य

अभ्यास १२
शब्दावली–अत्नद्-, . अश्व-घोड़ा, horse, चोर..-चोर, thief, पत्-गिरता :
Fall बिभतिदुरत है, tears. त्रायते-बचाता है, protects, संचिका–कापी, exercise-book,
नसं-स्वहो, ink. नतीपात्रम्-दावाद, inkpot, लेखन-कलम, pen, तूलिका--पेन्सिल,
pencil. हु.-बीता हुआ कल, vesterday, श्वः-आनेवाला कल, tommorow.
नियम २२–(पंचमी) अपादान कारक मे पंचमी होती है । वृक्षात् पत्रं पतति-पेड़ से पत्ता
गिरता है । अश्वात् बालः पतति—बालक घोड़े से गिरता है ।
नियम २३–(पंचनी) भय और रक्षा अर्थ की धातुओं के साथ भय के कारण में पंचनी
होती है । चोरात् बिभेति—चोर से डरता है । चोरात् त्रायते-चोर से बचाता है ।
इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो :-
नरः अश्वात् पततिः । बालः चोरात् बिभेति ! नृपः बालं चोरात् त्रायते ।
श्वः मम परीक्षा अस्ति । मम समीपे संचिका मसी मसीपात्रं लेखनी तूलिका च
सन्ति । अहं परीक्षायां सफलः भविष्यामि | अहं ह्यः ग्रामम् अगच्छम् ।
अस्मद् शब्द के इन विभक्तियों के रूप लिखो :-
'द्वि०
...
'प्र०
......।
'तृ०
च०
....
......
'ष०
स०

24.....
...
(क) संस्कृत बनाओ:-
मैं लेख लिखता हूँ
तुम लेख लिखो.
राम ने लेख लिखा
बालिकाएँ लेख लिखेंगी
मेरे साथ एक छात्र है
मुझे लड्डू अच्छा लगता है
मेरा नाम रामदत्त है
बालक घोड़े से गिरा
पेड़ से पत्ता गिरा
शिशु चोर से डरता है
सज्जन शिशु को चोर से बचाता है
मेरे पास कापी पेन्सिल और कलम
मेरी दावात में स्याही है
कल मेरी मौखिक (मौखिकी) परीक्षा होगी
राम कल घर गया था
(ख) नीचे लिख् धातु के लट्, लङ, विधिलिङ् के रूप लिखो :-
बालकाः लेखं
त्वं लेख
यूयं लेखं
अहं लेख
.....
दिनाङ्कः
हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य.

अभ्यास
शब्दावली क्षेत्रपालक:-खेत का रक्षक, one who guards a field, यवः-जी, barley,
भवनम् —घर, mansion, द्वारम्-दरवाजा, gate, कपाट.-किवाड़, door, शय्या-बिस्तर,
bed, पाकशाला—रसोई, kitchen, अधोते-पढ़ता है, leams, वारयति हटाता है.
presents.
निवारयति हटाता है, prevents.
नियम २४--(पंचनी) जिससे विद्या पढ़ो जाय, उसमें पंचमी होती है । जैसे—गुरोः पर्वते ।
उपाध्यायात् अधीते ।
नियम २५–(पंचमी) जिस वस्तु से किसी को हटाया जाय, उसमें पंचमी होती है ।
क्षेत्रपालक: यवेभ्यः पशुं वारयति-क्षेत्रपाल जी से पशु को हटाता है !
m
इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो
रामः गुरोः विद्याम् अधीते । पिता पुत्रं पापात् निवारयति । गुरुः शिष्यं
दुर्गुणात् वारयति । तत् रामस्य भवनम् अस्ति । तस्मिन् भवने एकं द्वारं द्वौ
कपाटौ च सन्ति । अहं शय्यायां शयनं करोमि । मम माता पाकशालायां भोजनं
पचति (पकाती है)।
तत् शब्द पुं० के इन विभक्तियों के रूप लिखो :
'द्वि०
'तृ०
''पं०
.....
32...
"च०
ब०
स०

३१ (क) संस्कृत बनाओ:- वे घर गये मैं कल घर जाऊँगा तुम कल कहाँ गये थे ? मैं कल प्रयाग गया था उसको फल दो वे बालिकाएँ हँस रही हैं कृष्ण गुरु से विद्या पढ़ता है गुरु से विद्या पढ़ो राम जौ से पशु को हटाता है: शिष्य को पाप से हटाता है मेरे घर में रसोई है दरवाजे में दो किवाड़ हैं हम बिस्तर पर सोते हैं पिता पुत्र को दुर्गुण से हटाता है (ख) इन वाक्यों का अर्थ लिखकर अन्तर समझाओ :- सः पठति | सा पठति । ते पठतः ते पठन्ति | ताः पठन्ति ते लिखन्ति | ताः लिखन्ति ते पतन्ति | ताः पतन्ति दिनाङ्क: हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य ..... तौ पठतः ....।

अभ्यास १४
नियम २७-
शब्दावली—शरीरम्-शरीर, body. शिरः-सिर, head, केशा:-बाल, hair, नेत्रे दो
आँख, eyes, मुखम्-मुँह, mouth, उदरम्-पेट,. stomach, जिह्वा--जीभ, tongue,
कर्णी—दो कान, ears, दन्ताः—दाँत teeth, भुजौ-दो भुजाएँ, arms, हस्तौ-दो हाथ, hands,
अगुलयः-अँगुलियाँ, fingers, पादौ-दो पैर, feet, स्मृ—स्मरण करना, to remember, to
learn.
नियम २६—(षष्ठी) सम्बन्धकारक के अर्थ में षष्ठी विभक्ति होती है । जैसे—रामस्य
पुस्तकम् राम की पुस्तक | देवदत्तस्य गृहम् । गङ्गायाः जलम् । वृक्षस्य पत्रम् ।
—(षष्ठी) स्मरण अर्थ की धातुओं के साथ (खेदपूर्वक स्मरण में) कर्म में षष्ठी
होती है । शिशुः मातुः स्मरति—बच्चा खेदपूर्वक माता को स्मरण करता है ।
इन वाक्यों का ध्यान से पढ़ो :-
इदं मम शरीरम् अस्ति । मम शिरसि (सिर पर) केशाः सन्ति । मम द्वे
नेत्रे स्तः । अहं नेत्राभ्यां पश्यामि । अहं मुखेन वदामि, भोजनं च करोमि ।
मम मुखे जिह्वा दन्ताः च सन्ति । मम द्वौ की स्तः । अहं कर्णाभ्यां शृणोमि
(सुनता हूँ) । मम द्वौ भुजौ द्वौ हस्तौ च सन्ति । हस्तेषु अड्गुलयः सन्ति ।
मम द्वौ पादौ स्तः ।
इदम् शब्द पुं० के इन विभक्तियों में रूप लिखो :-
'प्र०
"द्वि०
-
"तृ०
'चo
..
'ष०.
"स०

mm ..... ...... .... (क) संस्कृत बनाओ:- यह कौन है ? यह एक बालक है यह एक बालिका है यह एक फल है यह राम की पुस्तक है यह कृष्ण का घर है यह गंगा का जल है यह पेड़ का पत्ता है बच्चा माता को स्मरण करता है यह मेरा हाथ है रमा के सिर पर बाल हैं इस बालक की दो आंखें हैं वह दो आखों से देखता है तेरे दो कान हैं.. मैं कानों से शब्द सुनता हूँ ख) इन वाक्यों को शुद्ध करो: ते पश्यति त्वं पश्यतु अहम् अपश्यत् ते पश्येत् .. ........ .... | अहं पश्यामः यूयं पश्य | वयं अपश्यम् । अहं पश्येम दिनाङ्कः हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य अभ्यास १५ शब्दावली-कञ्चुक:- कुर्ता, sair, अधोवस्त्र धोती. choti, शाटिका--साड़ो, saree, अरे क्षगन्–अंगोछ :05. मुख्यक -उनाल, nandkerchief. पादयाम.-पायजाना, trousers. उपानह, उमानत-जूता, snce, उपरि-ऊपर, 01, नीचे:-नीचे, below, अग्रे-सामने, intrort of, श्रेष्ठ:---श्रेष्ठ, best, पटुत्नः-सबसे चतुर, most intelligent. धारय-हनना, to wear, नार्जय-पोंछना, to wash off. नियम २८-(पष्टी) बहुतों में से एक को छांटने में, जिसमें से छाँटा जाय, उसमें षष्टी और सप्तमी दोनों होती हैं । जैसे—छात्राणां छात्रेषु वा रामः श्रेष्ठ:-छात्रों में राम श्रेष्ठ छात्रासु उमा पटुतमा-छात्राओं में उमा सबसे चतुर है । नियम २६—(षष्ठी) उपरि, नीचैः और अग्रे के साथ षष्ठी होती है । जैसे—वृक्षस्य उपरि, नीचैः, अग्रे वा खगाः सन्ति—पेड़ के ऊपर, नीचे या सामने पक्षी हैं । इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो :- रामः जलं पिबति । श्यामः दुग्धम् अपिबत् । त्वं दुग्धं पिब ! अहं कञ्चुकम् अधोवस्त्रम् उपानत् च प्रतिदिनं धारयामि । सः अङ्गप्रोक्षणेन शरीरं, मुखप्रोक्षणेन च मुखं मार्जयति । त्वं पादयामं धारयसि । सा स्त्री शाटिकां धारयति । गृहस्य उपरि नीचैः च जनाः सन्ति । कालिदासः कवीनां कविषु वा श्रेष्ठः अस्ति । कृष्णः छात्राणां पटुतमः अस्ति ।

(क) संस्कृत बनाओ :- कृष्ण दूध पीता है राम ने जल पिया मैं जल पीऊँगा तुम जल पीओ 2. ...... वह कुर्ता और धोती पहनता है। तू रूमाल से मुँह पोंछता है मैं अंगोछे से शरीर पोंछता हूँ क्या वह लड़की साड़ी पहनती है ? तुम जूता क्यों नहीं पहनते हो ? पेड़ के नीचे बालक खेल रहे हैं छात्राओं में रमा सबसे चतुर है सारे कवियों में कालिदास श्रेष्ठ हैं. (ख) रिक्त स्थानों को भरो:--- त्वं पादयामा .. अहं .... उपरि मार्जयामि । 'सन्ति । पास्यामि । श्यामः पटुतमः। कवीनां श्रेष्ठः। अहं (ग) पा (पीना) धातु के लोट् और लङ् के रूप लिखो :-- पिबतु 'प्र० अपिबत् ... 'म० *उ० दिनाङ्कः हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य अभ्यास १६ शब्दावली क्रीडाक्षेत्रम्-खेल का मैदान, play-ground, क्रीडक:-खिलाड़ी, player, पादकन्दुक:—फुटबॉल, foot-ball, आसन्दिका—कुर्सी, chair, फलकम्-मेज, table, लेखनपीठम् डेस्क, desk, काष्ठासनम्-बेंच, bench, स्नेहः-प्रेम, affection, आदर:—आदर, respect, निवस्—रहना, to dwell, इच्छ—चाहना, to like, to desire. नियम ३०—(सप्तमी) अधिकरण कारक में सप्तमी होती है । जैसे—स: विद्यालये पठति—वह विद्यालय में पढ़ता है | सः गृहे निवसति । पाठशालायां शतं छात्राः पठन्ति । नियम ३१- (सप्तमी) प्रेम और आदर-सूचक शब्दों और धातुओं के साथ सप्तमी होती है । तस्य रामे स्नेहः अस्ति-उसका राम पर प्रेम है । मम गुरौ आदरः श्रद्धा वा अस्ति । तुमुन्) को, के लिए अर्थ में धातु से तुम् प्रत्यय होता है । इसके रूप नहीं चलते हैं। कृ>कर्तुम्—करने को । पठ् पठितुम् –पढ़ने को । लिख>लेखितुम् लिखने को । गमगन्तुम्—जाने को । पा>पातुम्—पीने को । खाद्-खादितुम् खाने को । दा>दातुम्—देने को । दृश्>द्रष्टुम् देखने को । 4:३२ इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो : इदं क्रीडाक्षेत्रम् अस्ति । क्रीडाक्षेत्रे क्रीडकाः पादकन्दुकेन क्रीडन्ति । गुरुः आसन्दिकायाम् उपविशति, छात्राः च काष्ठासने उपविशन्ति । फलके गुरोः पुस्तकानि सन्ति । लेखनपीठे छात्राणां पुस्तकानि सन्ति । अहं छात्रालये निवसामि । गुरोः शिष्ये स्नेहः अस्ति । सः पठितुम् इच्छति । अहं गन्तुम् इच्छामि । स जलं पातुम् इच्छति । अहं भोजनं खादितुं गच्छामि ।

३७ .... । ७ (क) संस्कृत बनाओ :- विद्यालय में. एक खेल का मैदान है यहाँ पर बालक फुटबाल खेल रहे हैं खिलाड़ी गेंद से खेल रहा है। राम कुर्सी पर बैठा है मेज पर दस पुस्तकें हैं डेस्क पर कृष्ण की दावात है बेंच पर बालक बैठे हैं पिता का पुत्र पर स्नेह है शिष्य की गुरु पर श्रद्धा है राम पढ़ने को विद्यालय जाता है वह जाना चाहता है मैं जल पीना चाहता हूँ मैं भोजन खाने को घर जाता हूँ (ख) कोष्ठ में दिये शब्दों में से उचित शब्द चुनकर भरो:- अहं कार्य 'इच्छामि । (दातुम्, कर्तुम्, पातुम् ) त्वं बालिकां इच्छसि । (द्रष्टुम्, गन्तुम्, कर्तुम् ) बालक: क्रीडाक्षेत्रे (अक्रीडत्, अगच्छन्, अक्रीडः) ते क्रीडाक्षेत्रे (पठेयुः, क्रीडेयुः, गच्छेत्) बालिका: (क्रीडिष्यन्ति, क्रीडति, क्रीडेत्) वयं कन्दुकेन ( क्रीडन्ति, क्रीडामः, अक्रीडन्) दिनाङ्कः हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य

अभ्यास १७
शब्दावली रोटिका-रोटी, bread, पाचक:-रसोइया, cook, मोदक:-लड्डू, a kind
of sweet, सूपः-दाल, soup, शाक:- साग, vegetable, सिता—चीनी, sugar, भक्तम्-भात,
boiled rice, मिष्टान्नम्—मिठाई, sweets, नवनीतम्-मक्खन, butter, घृतम्-घी, ghee,
लवणम् नमक, salt, संलग्नः-लगा हुआ, engaged, चतुर:-चतुर, skilful.
नियम ३३—(सप्तमी) संलग्न और चतुर अर्थ वाले शब्दों के साथ सप्तमी होती है । स
पठने संलग्नः लग्नः युक्तः तत्परः वा अस्ति-वह पढ़ाई में लगा हुआ है । स पठने कुशल:
निपुणः दक्षः चतुरः वा अस्ति—वह पढ़ाई में चतुर है ।
नियम ३४—(तव्य) 'चाहिए' अर्थ में धातु के साथ तव्य प्रत्यय लगता है । जैसे—कृ +
तव्य = कर्तव्यम् । दाणे प्रकार पठितव्यम्, लेखितव्यम्, गन्तव्यम्, खादितव्यम्, पातव्यम् ।
इन वाक्यों के ध्यान से पढो
पाचकः रोटिकां सूपं शाकं च पचति । अहं मोदकं मिष्टान्नं नवनीतं च प्रतिदिनं
खादामि । त्वं भक्तं घृतं सितां च खादसि | सूपे लवणं न्यूनम् अस्ति.। मया
कार्यं कर्तव्यम् । त्वया पुस्तकं पठितव्यम्, लेख: च लेखितव्यः । मया जलं
पातव्यम् ।
खाद् धातु के लोट् और लङ् के रूप लिखो:
खादतु
'प्र० अखादत्
--
....।
...
म०
.....
....
उ०

३६ (क) संस्कृत बनाओ :- मैं रोटी खाता हूँ राम मिठाई खायेगा तुम क्या खाओगे ? मैं लड्डू खाऊँगा वह क्या खायेगा ? वह भात, दाल और रोटी खायेगा. दूध में चीनी है दाल में नमक और घी है रसोइया क्या पका रहा है ? वह दाल और साग पका रहा है। मैं मक्खन से रोटी खाता हूँ मैं पढ़ाई में लगा हुआ हूँ: चतुर हो तुम्हें काम करना चाहिए मुझे दूध पीना चाहिए मुझे पुस्तक पढ़नी चाहिए (ख) इन वाक्यों को शुद्ध करके लिखो :-- अहं कार्यं कर्तव्यम् त्वया पुस्तकः पठितव्यः अहं जलं पातव्यम् सूपे लवणं न सन्ति दिनाङ्कः हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य तुम पढ़ाई में अभ्यास १८ शब्दावली-प्रथन-पहला, first, द्वितीयः-दूसरा, second, तृतीयः- तीसरा, third, चतुर्थः-चौथा, fourth, पञ्चमः—पाँचवाँ, fifth, षष्ठः-छटा, sixth, सप्तमः—सातवाँ, seventh, अष्टमः-आठवाँ, eighth, नवमः-नवाँ, ninth, दशनः--दसवाँ, tenth, बाणः—बाण, arrow, क्षिप्—फेंकना, to throw, मुञ्च्-छोड़ना, to throw, विश्वसिति—विश्वास करता है, believes. नियम ३५-(सप्तमी) फेंकना और विश्वास अर्थवाली धातुओं और शब्दों के साथ सप्तमी होती है । जैसे—मृगे बाणं क्षिपति मुञ्चति वा—मृग पर बाण फेंकता है । स धर्मे विश्वसिति—वह धर्म में विश्वास करता है | विश्वस् के साथ द्वितीया भी होती नियम ३६-(शत) 'रहा है', "रहा था' आदि अर्थ को बताने के लिए शतृ प्रत्यय होता है । इसका अत् शेष रहता है । जैसे प>पठत्-पढ़ता हुआ । लिख्>लिखत्—लिखता हुआ । गम्>गच्छत्-जाता हुआ । कृ>कुर्वत्—करता हुआ । इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो :- अहं कक्षायां प्रथमः अस्मि, त्वं द्वितीयः असि, स च तृतीयः अस्ति । कक्षायां रामः चतुर्थः, कृष्णः पञ्चमः, देवदत्तः षष्ठः, यज्ञदत्तः सप्तमः, श्यामः अष्टमः, हरिः नवमः, विष्णुः दशमः च सन्ति । गच्छन्तं (जाते हुए) सिंहं पश्य । त्वं किं वदसि ? अहं सत्यं वदामि | त्वं सदा सत्यं वद ।

- . ... (क) संस्कृत बनाओ :- राम मृग पर बाण फेंकता है कृष्ण सिंह पर बाण फेंकता है वह राम पर विश्वास करता है आते हुए शेर को देखो जाते हुए बालक को देखो वह सत्य बोलता है। तू सदा सत्य बोल.. कृष्ण क्या कहता है ? हम सच बोलते हैं राम कक्षा में प्रथम है कृष्ण कक्षा में द्वितीय है देवदत्त कक्षा में तृतीय है तुम्हारी कक्षा में सातवाँ छात्र कौन है ? हमारी कक्षा में सातवाँ छात्र हरि है (ख) रिक्त स्थानों को भरो: गच्छन्तं 'पश्य । आगच्छन्तं कक्षायां द्वितीयः कः मम कक्षायां तृतीयः त्वं किं. (वद्) ? अहं कदापि असत्यं न सदा सत्य . a... ... 'पश्य । ? अस्ति । "वदामि । -- दिनाङ्कः हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य अभ्यास १६ शब्दावली–किम्-क्या, what, करिनन्—किसमें, in which, पितु:-पिता का, father's राजकीयः-सरकारी, Government. करोतु कुरु करवाणि कृ धातु-लोट कुरुताम् कर्वन्तु कुरुतम् कुरुत करवाव करवाम प्र० पु० म० पु० उ० पु० अकरोत् अकरोः लङ् अकुरुताम् अकुर्वन् अकुरुतम् अकुरुत अकुर्व अकुर्म अकरवम् उ० पु० विधिलिङ् लुट् कुर्यात् कुर्याताम् कुर्यु. प्र० पु० करिष्यति करिष्यतः करिष्यन्ति कुर्याः कुर्यातम् कुर्यात म० पु० करिष्यसि करिष्यथ: करिष्यथ कुर्याम् कर्याव कुर्याम करिष्यामि करिष्याव: करिष्यामः नियम ३७—(क्त प्रत्यय) भूतकाल अर्थ में धातुओं से क्त प्रत्यय होता है । इसका त शेष रहता है ! इससे पहले कुछ धातुओं में इ और लगता है, कुछ में नहीं । जैसे--कृ-कृतः (किया), पठ्-पठितः (पढ़ा), लिलिखितः (लिखा), गम्-गतः (गया) । नियम ३८-(दीर्घ संधि) अ इ उ ऋ के बाद वैसा ही अक्षर बाद में होगा. तो दोनों अक्षरों के स्थान पर उसी वर्ण का दीर्ध अक्षर हो जायगा । विद्या+आलयः विद्यालयः । गिरि+ईशः= गिरीशः । गुरु+उपदेश:-गुरूपदेशः । इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो : तव किं नाम अस्ति ? मम नाम रामः अस्ति । तव पितुः किं नाम अस्ति ? मम पितुः नाम कृष्णचन्द्रः अस्ति । त्वं कस्मिन् विद्यालये पठसि ? अहं राजकीये विद्यालये पठामि | त्वं कस्मिन् नगरे वससि ? अहं प्रयाग-नगरे वसामि ।

४३ .... कति भातरः .... (क) संस्कृत बनाओ: -(रिक्त स्थानों की उचित पूर्ति करो) तुम्हारा क्या नाम है ? मेरा नाम है तुम्हारे. पिता का क्या नाम है ? मेरे पिता का नाम: तुम किस विद्यालय में पढ़ते हो ? मैं. विद्यालय में पढ़ता तुम किस नगर में रहते हो ? मैं... 'नगर में रहता हूँ तुम्हारे कितने भाई हैं ?.... मेरे "भाई हैं तुम्हारे पिता क्या काम करते हैं ? मेरे पिता 'का काम करते है तुम क्या कर रहे हो ? मैं अध्ययन कर रहा हूँ तुम कहां जा रहे हो ? मैं घर जा रहा हूँ तुम कब आओगे? मैं कल प्रातःकाल आऊँगा तुम कहाँ से आ रहे हो ? मैं विद्यालय से आ रहा हूँ दिनाङ्कः हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य .... ....

अभ्यास २० असान स्याः शब्दावली-पित्ता-पित्ता, father, भ्राता-भाई, brother, माता—माता, mother, भगिनी बाहेन, sister. पितृव्य.-चाचा, uncle, मातुलः- मामा, maternal uncle, पितामह.-बाबा, grand-father, नातामहः-नाना, maternal grand-father. अस् धातु- लोट् लङ् अस्तु स्तम् प्र० पु० आसीत् आस्ताम् आसन् एधि स्तम् न० पु० आसी: आस्तम् आस्त असानि असाव उ० पु० आसम् आरव आरम विधिलिङ् लुट् स्यात् स्याताम् स्युः भविष्यति भविष्यतः भविष्यन्ति स्यातम् स्यात भविष्यसि भविष्यथ. भविष्यथ स्थान् स्याव स्याम भविष्यामि भविष्याव: भविष्यामः नियम ३६—(क्त्वा) कर या करके अर्थ में त्वा प्रत्यय होता है । इसके रूप नहीं चलते हैं। जैसे—पठ् पठित्वा-पढ़कर, लिख>लिखित्वा-लिखकर, गम्>गत्वा-जाकर, खाद्> खादित्वा-खाकर, कृ>कृत्वा—करके, दृश्>दृष्ट्वा- -देखकर । नियम ४०—(गुण-संधि) अ या आ के बाद इ या ई होंगे तो दोनों को ए हो जायगा, या ऊ को ओ और ऋ को अर् हो जायगा । रमा+ईश:-रमेशः । हित+उपदेशः हितोपदेशः । महा+ऋषि: महर्षिः । इन वाक्यों को ध्यान से पढ़ो :- मम पिता माता च अत्रैव निवसतः । मम एका भगिनी, एकः पितृव्यः, एकः मातुलः च सन्ति । अहं पाठं पठित्वा, लेखं लिखित्वा, भोजनं च खादित्वा विद्यालयं गच्छामि । प्र० पु० म० पु० उ० पु० उ .. (क) संस्कृत बनाओ :- मेरे पिता यहाँ रहते हैं मेरी माता घर में है मेरी बहिन पढ़ने जाती है मेरे चाचा व्यापार करते हैं मेरे मामा कृषि करते हैं मेरे बाबा और नाना वृद्ध वह पुस्तक पढ़कर विद्यालय जाता है वह खाना खाकर यहाँ आया वह फूल को देखकर हँसा राम काम करके घर गया वह लेख लिखकर सोया (सुप्तः) राम यहाँ पर था। तुम कहाँ थे ? मैं यहाँ पर ही था राम अब कहाँ होगा ? (ख) कोष्ठ में दिये शब्दों में से उचित शब्द चुनकर भरो:- अहम् इदं कार्य (करिष्यामि, करिष्यति) अहम् अत्र एव (आसम्, आसीत्) त्वम् इदं कार्य (कुर्याः, कुर्याम्) (भविष्यामि, भविष्यामः) दिनाङ्कः हस्ताक्षरम् उपाध्यायस्य ... 2. वयं तत्र परिशिष्ट हरिभ्याम् रामाभ्याम् हरिभ्याम् हे रानाः (क) शब्दरूप-संग्रह (१) राम (राम) अकारान्त पुं० (२) हरि (विष्णु) इकारान्त पुं० रामो हरिः हरी हरयः रानम् रानौ रामान् हरिम् हरी हरीन् रामेण रामाभ्याम् रामैः हरिणा हरिभिः रामाय रामाभ्याम् रामेभ्य. च० हरये हरिभ्याम् हरिभ्यः रानात् रामेभ्यः पं० हरेः हरिभ्यः रामत्य रामयोः रामाणाम् ष० हरे: हो: रामे हरीणाम् रामयोः रामेषु स० हरौ हर्यो: हरिषु हे रामौ सं० हे हरे हे हरयः (३) गुरु (गुरु) उकारान्त पुं० (४) रमा (लक्ष्मी) आकारान्त श्री० गुरु: गुरदः रमा रमे रमाः गुरुम् गुरुन् द्वि० रमाम् रमे रमाः गुरुणा गुरुभ्याम् गुरुभिः तृ० रमया रमाभ्याम् रमाभिः गुरवे गुरुभ्याम् गुरुभ्यः च० रमायै रमाभ्याम् रमाभ्यः गुरोः गुरुभ्याम् गुरुभ्यः पं० रमायाः रमाभ्याम् रमाभ्यः गुरोः गुर्योः गुरुगान् ष० रमायाः रमयोः गुरौ रमाणाम् गुर्वोः स० रमायाम् रमयोः सं० हे रमे हे रमे (५१ नदी (नदी) ईकारान्त श्री० (६) गृह (घर) अकारान्त नपुं० नदी नद्यौ नद्यः प्र० गृहम् गृहे नदीम् गृहाणि नद्यौ नदी: द्वि० गृहम् गृहे नद्या नदीभ्याम् गृहाणि नदीभिः तृ० गृहेण नद्यै गृहाभ्याम् गृहै. नदीभ्याम् नदीभ्यः च० गृहाय गृहाभ्याम् गृहेभ्यः नद्याः नदीन्याम् नदीभ्यः पं० गृहात् गृहाभ्याम् नद्याः नद्यो: गृहेभ्यः ष० गृहस्य गृहयोः नधाम नद्योः गृहाणाम् नदीषु गृहे हे नदि गृहयोः हे नद्यौ सं० हे गृहे हे गृहाणि हे गुरो हे गुरू हे गुरवः रमासु हे रमाः . नदीनाम् हे नद्यः गृहेषु हे गृह (७) युष्मद् (तू) (८) अस्मद् (मैं) अहम् वयम् प्र० द्वि० तृ० मया यूयम् युष्मान् युष्माभिः युष्मन्यम् युष्मत् युष्माकम् युष्मासु ਰ अवाम अवाभ्याम् आवाभ्यान् आवा बन् अदयो आवयोः अत्मन्यम् अस्मत् पं० मत् स० त्वम् युवाम् त्वाम् युवाम् त्वया युवाभ्याम् तुभ्यम् युवाभ्याम् त्वत् युवाभ्यान् युवयोः त्वयि युवयोः (६) तत् (वह) पुंलिंग त्तः तौ तम् तौ तेन ताभ्याम् तस्मै ताभ्याम् तस्मात् ताभ्याम् तस्य तयोः तस्मिन् तयोः तत्-नपुं० द्वि० ते तान् तैः तेभ्यः तेभ्यः तेषाम् तेषु (१०) इदम् (यह) पुंलिंग अयन् इम इमन अनेन आभ्याम अस्मै आभ्याम् अन्यान् अनयोः अस्मिन् अनयोः इदम्-नपुं० एभि. एभ्यः पं० एवम् ते प्र० इदम् तत् तत् तानि तानि इमे इमे शेष पुंलिंग के तुल्य इमानि शेष पुंलिंग के तुल्य तत्-त्रीलिंग इदम्-श्रीलिंग प्र० द्वि० ताम् तया तस्यै इयम् इमाम अनया अस्यै इमाः इनाः अभिः ते ते ताभ्याम् ताभ्याम् ताभ्याम् तयोः तयो. ताभिः ताभ्यः आभ्यः च० पं० इमे आन्याम् आभ्याम् आभ्याम् अनयोः अनयोः अत्या ताभ्यः तासाम् तस्याः ष० अत्या. आभ्यः आसाम् आतु तस्याम् अस्यान ४८ (ख) धातुरूप-संग्रह पठ् (पढ़ना) लट् प्र० पु० पठति पठति पठामि पन्तः पन्थः पठामः पठन्ति पठथ पठामः म० ० पठतु पठ पठानि पठन्तु पठत पठाम उ० पु० लोट पठताम् पठतम् पठाव विधिलिङ् पठेताम् पठेतम् पठेव लङ् अपठताम् अपठतम् अपठाव अपठत् अपठः अपठम् अपठन् अपठत अपठाम प्र० पु० म० पु० उ० पु० पठेत् पठे: पठेयम् पठेयुः पठेत पठेम पठिष्यति पठिष्यति पठिष्यामि लुट् पठिष्यत: पठिष्यथ: पठिष्यावः पठिष्यन्ति पठिष्यथ पठिष्यामः प्र० पु० म० पु० उ० पु० गच्छतु सूचना-निम्नलिखित धातुओं के रूप भू या पट् के तुल्य चलावे । यहाँ पर पांचों लकारों के केवल प्रारम्भिक रूप (प्र०.पु० एक०) दिये गये हैं। धातु लट् लोट लङ् विधिलिङ् लुट् १. लिख लिखति लिखतु अलिखत् लिखेत् लेखिष्यति २. गम् गच्छति अगच्छत गच्छेत् गमिष्यति ३. दृश पश्यति पश्यतु अपश्यत पश्येत् द्रक्ष्यति. पिबति अपिबत् पास्यति ५. क्रीड् क्रीडति अक्रीडत् क्रीडिष्यति ६. खाद् खादति खादतु अखादत् खादिष्यति ७. वद् वदति वदेत् वदिष्यति ८. पत् पतति पततु अपतत् पतेत् पतिष्यति ६. प्रच्छ पृच्छति पृच्छतु अपृच्छत् पृच्छेत् प्रक्ष्यति १०. स्था तिष्ठति तिष्ठतु तिष्ठेत स्थास्यति ११. हस् हसति हसतु हसेत् हसिष्यति १२. चल चलति चलतु अचलत् चलिष्यति पिबतु क्रीडतु पिबेत् क्रीडेत खादेत् वदतु अवदत् अतिष्ठत् अहसत् चलेत्

Sanskrita Shiksha 1

Author
Dr.kapildev Devedi Acharya
Other authors
Ccl
Title
Sanskrita Shiksha 1
File name
Sanskrita Shiksha 1
Text
OCR done
Citation
1903
Publisher
Vishavidyalay Publications
Language
Sanskrit
Pages
48
Library
Scl
DLI number
369445
Barcode
2020010013323.00
Scanning centre
City Central Library, Hyderabad
Digital publisher
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VMLT id
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