Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur

Shri Sidhant Svadhyaymala

Hansraj, Pandit Heeralal · 2011/07

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Printed by Bulchand Hiralal at the J un Bhaskaroda, a Printing Press, Ashapura Road-JAVINAGAR

॥ स्वाध्यायमाला-पियानुक्रम ।
पाना
उत्तराध्ययनसूत्रम्
दर्शवकालिकमलम्
न दीसूत्रम्
उपाइसून गाथा-२२
मुखविपारसूत्रम्
सूसकताग-६-११ अध्ययन
प्रास्ताविक गाथाओ शुद्धिपत्रम
१ थी ७०
७५ यी १००
१०१ थी ११९
१२० थी १०
१२१ यी १५
१२० पी १२८
१२९ थी १३२

निवेदन
1
वाचकगण!
-
आ स्वाध्यायमाला नामना पुस्तकमा निस्तर म्या याय थता,
भगवद सुधर्मस्वामी गुफित विषयानुक्रममा जणावरा सूनोना
स्ठान करवा लाया मूळ पाठो आपवाना आव्या 7 अने
छापली प्रतोना आधार छापेर ३ जुदी जुदी सम्थाओ
तरफ्थी उपायला सूत्रोमा पाठ' तर फेर आरतो जथी अमोए ग्राम
जागमोदय समितिमाळा प्रथोनो विशेष आधार रासी छापल 7
अन प्रेमदोष अथवा मुफ् दोपथी रहल भूलो माट अतमा शुद्धिपत्रक
आपवामा आव्यू के छना का विपरीत छपायु होय तो वाचकगण
भतव्य करी सुपारीन वाचशे इति ॥
प्र
लि०
प्रकाशक

॥ णमोऽत्यु ण तस्स समणस्स भगरओ महावीरस्स ॥
श्री जैन
॥ सिद्धान्त-स्वाध्यायमाला ॥
॥ सिरि-उत्तरज्झयण-सुत्त ॥
विणयसुय पढम अज्झयण
सजोगा विप्पमुक्स्स, अणगारस्स मिक्खुणो। विणय पाउकरिस्सामि, आणुपुब्धि सुणेह मे ॥१॥
आणानिदेसकरे, गुरूणमुनगायकारए। इगियागारसपन्ने, से विणीए ति बुच्चई ॥ २ ॥
आणाऽनिद्देमकरे, गुरूणमणुवनायकारए । पडिणीए असबुद्धे, अविणीए ति वुच्चई ।। ३ ।।
जहा सुणी पूडकण्णी, निकसिन्जई मव्यमो । एव दुरस्सीलपडिणीए, मुहरी निक्कसिन्जई ॥ ४ ॥
कणकुण्डग चइत्ताण, विट्ठ भुना सूयरे । एन सील चडत्ताण, दुस्सीले रमइ मिए ॥ ५ ॥
सुणिया भान माणस्म, सूयरम्म नरस्म य । विणा ठपेज अप्पाणमिन्छन्तो हियमप्पणी ॥ ६ ॥
तम्हा विणयमेसिन्जा, सील पडिलमेज्जए। युद्धपुत्त नियागट्ठी, न निकसिन्जइ कण्हुई ।। ७ ॥
निसन्ते सियाऽमुहरी, बुद्धाण अन्तिय सया। जट्ठजुत्ताणि सिक्सिज्जा, निरट्ठाणि उ वजए॥ ८ ॥
अणुसासिओ न कुप्पिजा, पति सेविज पण्टिए। सुडेहि सह ससग्गि, हास कीड च वजए ॥ ९ ॥
मा य चण्डालिय कासी, बहुय मा य आलवे। कालेण य अहिन्जित्ता, तओ झाइज एगगो ॥१०॥
आहच्च चण्डालिय स्टु, न निण्हविज क्याड वि। क्डक्टेत्ति भासेन्जा, अस्ड नो कडे ति य ॥११॥
मा गलियम्सेव क्स, वयणमिन्छे पुणो पुणो । कस न दठुमाइण्णे, पाग परिसज्जए ॥१२॥
अणासपा पुलपया कुसीला मिउपि चण्ड पफरिति सीसा ।
चित्ताणुया रहु सोरया, पमायए त हु दुगमयपि ।। ॥ १३ ॥
नापुट्ठो नागर किचि, पुट्ठो गानालिय पए । कोह असच्च कुजा, धारजा पियमप्पिय ॥ १४ ॥
अप्पा चेन दमेय गो, अप्पा हु सद्दमो | अप्पाद तो सुही होड, अस्मि लोए परत्य य ॥ १० ॥
वर मे अप्पा दतो, सजमेण तवण य । माह परहि दम्मतो, धणेहि नहेहि य ॥ १६॥
पडिणीय च युद्धाण, वाया अदुर सम्मुणा । आपी वा जड वा रहस्से, नेर कुन्जा क्या वि ॥ १७ ॥
न पक्सओ न पुरओ, नेव कियाण पिट्ठओ। न जुने उरणा ऊरु, सयणे नो पडिस्सुणे ॥ १८ ॥
नेव पल्हत्थिय कुन्ना, पक्खपिण्ड च सनए । पाए पसारिए पावि, न चिट्ट गुरुणन्तिए ॥ १९॥
आयरिणहि चाहित्तो, तुसिणीओ न क्यावि। पसायपेही नियागट्ठी, उचिट्टे गुरु सया ॥ २० ॥

श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला आलवन्ते लवन्ते या, न निसीएज कयाइ वि । चहऊणमासणधीरो, जओजच पडिस्मुणे ॥२१॥ आसणगओन पुच्छेजा,नेव सेजागओकया।आगम्मुक्कुडओसतो, पुच्छिन्ना पजलीउडो॥ २२ ॥ एव विणयजुत्तस्स, मुत्त अस्थ च तदुभय । पुच्छमाणस्स सीसस्स, वागरिज जहासुय ॥ २३ ॥ मुस परिहरे मिक्खू न य ओहारिणिं वए । भासादोस परिहर, माय च वजए सया ॥ २४ ॥ न लवेज पुट्ठो सावज, न निरहन मम्मय । अप्पणट्ठा परहा वा, उभयस्स तरेण ना ।। २५ ।। समरेसु अगारेसु, सन्धीसु य महापहे । एगो एगत्थिए मद्धि, नेर चिट्टे न सलवे ॥ २६ ।। ज मे बुद्धाऽणुसासति, सीण्ण फरुसेण वा । मम लाहो ति पेहाए, पयओ त पडिस्सुणे ॥ २७॥ अणुमासणमोगय, दुकडस्स य चोयण । हिय त मण्णई पण्णो, वेस होड अमाहुणो ॥ २८ ॥ हिय विगयभया बुद्धा, फरुसपि अणुमामण । वेस त होइ मूढाण, सतिसोहिकर पय ॥ २९ ॥ आमणे उवचिडेजा, अणुन्चे अकुए थिरे । अट्ठाई निस्हाई, निसीपलप्पकुक्कुए ॥ २० ॥ कालेण निरसमे भिक्खू, कालेण य पडिक्कमे। अकाल च विवजित्ता, काले काल समायरे ॥ ३१ ।। परिसाडीए न चिडेजा, मिक्वू दत्तेसण चरे । पडिस्वेण एसित्ता, मिय का ठेण भक्सए ॥ ३२ ।। नाइदूमणासन्ने, नाऽन्नेसि चक्खुफासओ । एगो चिटेज भत्तट्टा, लघित्ता त नाऽडक्कमे ॥ ३३ ॥ नाइउच्चे न नीए वा, नामन्ने नाइदूरओ। फामुय परफड पिण्ड, पडिगाहेज सजए ।। ३४ ॥ अप्पपाणेऽपवीयम्मि, पडिछन्नम्मि सवुड । समय सजए भुजे, जय अपरिसाडिय ।। ३५ ॥ सुकडित्ति सुपरिचि, सुच्छिन्न सुहडे मडे । सुणिहिए मुलद्धिति, सावज वजए मुणी ।। ३६ ।। रमए पण्डिए सास, हय भद्द व वाहए। बाल सम्मइ सासतो, गलियस्स व वाहए ॥ ३७ ।। सहया मे चवेडा मे, अकोसा य यहा य मे । कल्लाणमणुसाम तो, पावदिहित्ति मन्नई ॥ ३८॥ पुत्तो मे भाय नाइ त्ति, साहू कल्लाण मन्नई। पावदिहि उ अप्पाण, साम दासु ति मन्नई ॥ ३९ ॥ न कोवए जायरिय, अप्पाणपि न कोवए । बुद्धोवघाई न सिया, न सिया तोत्तगरेसए ॥ ४० ॥ आयरिय कुविय नचा, पत्तिएण पसायए। विज्झरज पजलीउडो, बएन्ज न पुणोत्ति य ॥ ४१ ॥ धम्मजिय च ववहार, बुद्धेहायरिय सया। तमायग्न्तो ववहार, गरह नाभिगच्छई ॥ ४२ ॥ मणोगय वक्गय, जाणित्तायरियस्म उ । त परिगिज्झ वायाए, कम्मुणा उपवायए ॥ ४३ ॥ वित्ते अचोडए निच, सिप्प हाइ सुचोडए । जहोवडट्ठ मुक्य, पिञ्चाइ बुबई सया ॥ ४४ ॥ नचा नमइ मेहावी, लोए पित्ती से जायए । हगई किच्चाण सरण, भूयाण जगई जहा ।। ४५ ।। पुजा जस्म ण्मीयन्ति, ससुद्धा पुव्यसधुया। पमना लाभहस्सति, विउल अट्ठिय मुय ॥ ४६॥ स पुजमत्ये सुविणीयससए, मणोई चिड कम्मसपया । तयोममायारिममाहिसवुड, महर्जुई पच वयाइ पालिया ।। ॥४७॥ स देवगधव्यमणुस्सपूइए, चइत्तु दह मलपकपुन्वय । सिद्धे ना हाइ सामए दवे वा अप्परए महिड्डीए ।। ॥४८॥ त्ति वेमि ॥ इअ विणयसुय नाम पढम अज्नयण ममत्त । - , , श्रीउत्तरा ययनसून-प्रथमाध्ययनम् (३) -~ ॥ अह दुइअ परिसहज्झयण ॥ - सुय मे आउस-तेण भगया एवमकावाय । इह सलु बागीस परीसहा समणेण भगया महा- वीरेण कामवेण पोइया । जे भिक्खू मोचा नच्चा जिचा अभिभूय भिक्सायरियाए परिचयन्तो 'पुट्ठो नो निण्हवेजा ।। कयर ते बल्लु बागीस परीमहा समणेण भगरया महागीरेण कासवेण पवे- इया जे भिक्सू मोचा नचा जिचा अभिभूय भिस्सायरियाए परि यतो पुट्टो नो निण्हवेला ॥ इमे ते सलु भावीस परीसहा ममणेण भगाया महावीरेण कासवण पडया, जे भिक्सू सोचा नचा जिचा अभिभूय भिक्सायरियाए परिव्ययतो पुट्ठो नो निण्हरेजा, तनहा-दिगिछापरीसहे १ पिया सापरीमह २ सीयपरीमह 3 उसिणपरीमह ४ दमममयपरोमह अचेलपरीमह ६ अरइपरीसहे ७ इत्यीपरीमहे ८ चरियापरीमह ९ निमीहियापरीमह १० सेजापरामहे ११ जक्कोसपरीसहे १२ वह- परीमहे १३ जायणापरीसह १४ अलाभपरीसहे १५ रोगपरीमह १६ तणफामपरीसहे १७ जल्लप- रीसहे १८ सकारपुरकारपरीसह १९ पन्नापरीमहे २० अन्नाणपरीसह २१ दमणपरीमह २२ ।। परीमहाण पविभत्ती, मासण पन्या । त में उदाहरिस्मामि, आणुपुब्धि सुणेह मे ॥ १ ॥ दिगिछापरिगए देहे, तपस्सी भिस्यू थामन | न छिंद न डिदारए, न पए न पयाप ॥२॥ कालीपनगममासे फिसे यमणिसतए । मायने असणपाणस्म, अदीणमणसो चरे ॥३॥ तओ पुट्टो पिनामाए, दोगुन्छी लन्नसजाए । सीओदग न सेविजा, वियटस्सेमण चरे ॥ ४ ॥ छिन्नावाएसु पयेमु, लाउरे सुपिपामिए । परिसुव मुहाऽदीणे, त तितिक्से परीमह ॥ ५॥ चरत विरय र, मीय फुमइ एगया । नाइबेल मुणी गन्छे, सोचाण जिणसामण ॥ ६॥ न मे निवारण अस्थि, उवित्ताण न निजई। जह तु अग्गि समामि, इड भिक्सू न चितए ॥ ७ ॥ उसिण परियाण, परिदाहण तजिए । घिसु वा परियाण, माय नो परिदेवए ॥८॥ उण्हाहितत्ते मेहावी, सिणाण नो वि पथए। गाय नो परिमिचेजा न पीएज्जा य अप्पय ॥ ९॥ पुट्टो य दसमसाहिं, ममरे व महामुणी। नागो सगाममीसे वा, सूरो अभिहणे पर ॥ १०॥ न सतसे न वारेज्जा, मण पि न पओमए । उनहे न हणे पाणे, मुजते मससोणिय ॥११॥ परिजुण्णेहि वत्थेहि, होक्सामि त्ति अचेलाग । जदुना सचेले होक्सामि हर भिक्यून चिंत" ॥ १२॥ एगयाऽचेलए होड, मचेले आवि एगया। एय धम्म हिय नन्चा, नाणी नो परिटेरए ॥ १३॥ गामाणुगाम रीयत, अणगार अकिंचण । अरई अणुप्पमेसेज्ना, त तितिक्से परीसह ।। १४ ॥ अरइ पिट्ठओ पिचा, विरए आयरस्सिए । धम्मारामे निरारम्मे, उपस ते मुणी चरे ॥ १५॥ सङ्गो एम मणूसाण, जाओलोगम्मि इथिओ। जस्म एया परिन्नाया, सुकड तस्म सामग्ण ॥ १६ ॥ एयमादाय मेहावी, पङ्कभूया उ इत्यिओ । नो ताहिं विणिहम्मेजा, चरेवत्तगसए ॥ १७ ॥ एग व चरे लाढे, अभिभूय परीमहे । गामे वा नगरे वावि, निगमे वा रायहाणिए ॥ १८ ॥ असमाणे चरें भिक्खू , नेव कुज्जा परिग्गह । अससत्ते गिहत्येहि, अणिएओ परिव्बए ॥ १९ ॥ मुमाणे सुन्नगारे या, रुक्समूले घ एगओ। अकुक्कुओ निसीएज्जा, न य वित्तासए पर ॥ २० ॥ - । .

.
श्रीजैनसिद्धान्त-स्वा यायमाला
तत्थ से चिट्टपाणस्स, उवसग्गाभिधारए | सकाभीओ न गच्छेजा, उहित्ता अश्मासण ॥ २१ ॥
उच्चावयाहिं सेनाहि, तबस्सी भिक्खू थामव । नाइवेल पिहम्मेजा, पावदिट्ठी विहम्मई ।। २२ ॥
पइरिक्कुरस्सय लधु, कल्लाणमदुवा पारय । किमेगराइ करिस्सइ, एव तत्थडहियासए ॥ २३ ॥
अकोसेजा परे भिक्खु, नतेसिं पडिसजले । सरिसो होइ बालाण, तम्हा मिक्खू न सजले ॥ २४ ॥
सोचाण फरसा भासा, दारणा गामकण्टगा । तुसिणीओ उवेहेना, न ताओ मणसीकरे ॥२५॥
इओ न सजले भिक्खू, मणपि न पओसए। तितिक्स परम नचा, भिक्खू धम्म समायरे ॥ २६ ।।
समण सजय दत, हणिना कोइ कत्थई । नत्थि जीवस्स नासुत्ति, एव पेहेन सजए ।। २७ ॥
दुकर खलु भो निच, अणगारस्स भिक्खुणो। सव्य से जाइय होइ, नत्थि किंचि अजाइय ॥२८॥
गोयरग्गपनिहस्स, पाणी नो मुप्पसारए । मुओ अगारवासुत्ति, इइ भिक्खू न चिंतए ॥ २९ ॥
परेसु घासमेसज्जा, भोयणे परिणिहिए। लद्धे पिण्डे अलद्धे वा, नाणुतप्पेज पडिए ॥ ३० ॥
अजेवाह न ल मामि, अनिलाभो मुए सिया। जो एव पडिसचिक्खे, अलाभो तन तजए ॥ ३१ ।।
नचा उप्पइय दुक्स, वेयणाए दुइट्टिए। अदीणो थारए पन्न, पुट्ठो तत्थ हियासए ॥ ३२ ॥
तेड 3 नाभिनदेज्जा सचिक्सत्तगवेसए । एव खु तस्स सामण्ण, ज न कुजा न कारवे ॥ ३३॥
अचेलगस्स लहस्स, सतयस्म तपस्सियो। तणेसु सयमाणस्स, हुजा गायविराहणा ॥ ३४ ॥
आयास्स निनाएण, अउला हवइ वेयणा । एव नचा न सेवति, ततुज तणतजिया ॥ ३५ ॥
किलिन्नगाए मेहावी, पकेण व रएण वा । प्रिंसु वा परियावेण, साय नो परिदेवए ॥ ३६ ।।
वेज निजरापेही, आरिय धम्मणुत्तर । जार सरीरमेउत्ति, जल्ल काण्ण धारण || ३७ ॥
अभिनायणमभुट्ठाण, सामी कुजा निमतण । जे ताइ पडिसवन्ति, न तेसिं पीहए मुणी ॥ ३८ ॥
अणुकसा अप्पिच्छे, अनाणसी अलोलुप । रसेसु नाणुगिज्झेजा, नाणुतप्पेज पन्ना ॥ ३९ ॥
से भूण मए पुष, सम्माऽणाणफला कडा । जेणाह नाभिनाणामि, पुट्ठो केण- कण्हुई ॥४०॥
अह पन्छा उइजन्ति, कम्माऽणाणफला कडा। एवमस्सासि अप्पाण, नवा कम्मविवागय ॥४॥
निरङ्कगम्मि निरओ, मेहुणाओ मुसवुडो। जो सक्स नाभिजाणामि, धम्म कहाणपावग ॥ ४२ ॥
तयोवहाणमादाय, पडिम पडिमजओ। एव पि विहरओ मे, छउम न नियहई ॥ ४३ ॥
नत्थि नूण परे लोए, इड्ढी वापि तवस्सिणो। अटवा वचिओमित्ति, इड भिक्खू न चिंतए ॥४४॥
अभू जिणा अस्थि जिणा, अदुवावि भविस्सई । मुस ते एमाहसु, इइ भिक्खू न चिंत ॥ ४० ॥
ए' परीसहा सव्व कासवेण निवइया । जे भिक्यू न विहम्मेज्जा, पुट्ठो केणड कण्डुई ॥४६॥
त्ति वैमि॥ इअ दुइअ परिसहज्झयण समत्त ॥ २॥

श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-तृतीयाध्ययनम्
५)
॥ अह तइअ चाउरगिज्ज अज्झयण ।।
992ce
चत्तारि परमगाणि दुलहाणीह जतुणो। माणुसत्त सुइ सद्धा, सजमम्मि य वीरिय ॥ १ ॥
समावन्नाण ससारे, नाणागोतासु जाइसु । कम्मा नाणानिहा कटु, पुढो विस्सभिया पया ॥२॥
एगया देवलोएस, नरएसु वि एगया। एगया आसुर काय, अहाकम्मेहिं गच्छई ॥३॥
एगया सत्तिओ होइ, तओ चण्डालनोक्सा । तओकीडपयगो य, तओ कुन्युपिनालिया ॥ ४ ॥
एवमानजोणीम, पाणिणो कम्मकिब्धिसा! न निरिजन्ति ससारे, सबढेसु र ग्वत्तिया ॥५॥
कम्मसगेहि सम्मूढा, दुक्सिया बहुवेयणा। अमाणुमासु जोणीसु, पिणिहम्मन्ति पाणिणो ॥ ६ ॥
कम्माण तु पहाणाए, आणुपुत्री कयाः उ । जीमा सोहिमणुप्पत्ता, आययति मणुस्सय ॥ ७ ॥
माणुस्स दिग्गह लधु, सुई वम्मस्स दल्लहा। ज सोचा पडिव ति, तर सतिमहिंसय ॥ ८॥
आहछ सरण लधु, सद्धा परमदुल्लहा । सोचा नेआउय मग्ग, बहवे परिभस्साई ॥९॥
सुइ च लधु सद च, वीरिय पुण दुल्लह । रहवे रोयमाणापि, नो य ण पडिरज्जग ॥ १० ॥
माणुसत्तमि आयाओ, जो धम्म सुच्च मद्दहे । तपस्सी पीरिय लन्धु, सवुढे निधुणे रय ॥ १॥
सोही उज्जूय भूयस्स, धम्मो सुद्धस्म चिहई। निव्याण परम जाइ, घयसित्तिव्य पापए ॥ १२ ॥
विगिच कम्मुणो हेउ, जस सचिणु सतिए । मरीर पाढव हिचा, उट्ट पक्मए दिस ॥ १३ ।।
विसालमेहि सीलेहि, जक्सा उत्तरउत्तरा । महामुक्का र दिप्पता, मन्नता जपुणञ्चय ॥ १२ ॥
अप्पिया देवकामाण, कामरूनविउविणो । उट्ट कप्पेसु चिट्ठति, पुव्यावाममया बहु ॥ १० ॥
तत्थ ठिच्चा जहाठाण, जक्सा आउक्पये चुया। उति माणुस जोणिं, से दसगेभिनायए ॥ १६ ॥
सित्त वत्यु हिरण्ण च, पमयो दासपोरस । चत्तारि कामसधाणि । तत्य से उववनइ ॥ १७ ।।
मित्तर नाहर होइ, उच्चागोए य पण्णन । जप्पायके मापन्ने, अभिनाए जमो नले ॥ १८ ॥
भुच्चा माणुस्सए भोए, अप्पटिरूवै अहाउय । पुष्य विसुद्धसद्धम्मे, केरल पोन्हिपुझिया ॥ १९॥
चउरग दुल्लह नचा, सनम पडिजिया । तरमा धुयरम्म से, सिद्धे हाड सामए ॥ २० ॥
त्ति वेमि ॥ अ तृतीय परिज्झयण ममत्त ।
॥ अह चतुर्थं अससय अज्झयण ॥
जससय जीविय मा पमायए, जरोमणीयस्म हु नत्ति ताण ।
एस वियाणाहि जणे पमत्ते मनु विहिंया अनिया गिहिति ॥ ॥
जे पापकम्महिं यण मणूमा, ममाययती अमर गाय ।
पहाय त पामपयट्ठिए नर, वराणुनद्धा नग्य उनिति ॥२॥
तेणे जहा सधि गहीए, मरम्मुणा कि पारमारी।
एर पया पेच इह च लोण, क्डाण कम्माण न मुक्सु अत्यि ॥३॥

श्रीजैन सिद्धान्त खाध्यायमाला " ससारमावन्न परस्स अट्ठा, साहारण ज च करेइ कम्म । कम्मरस ते तस्म उवेयकाले, न चधवा वधवय उचिंति ॥ ४ ॥ वित्तेण ताण न लमे पमत्ते, इममि लीए अदुवा परस्थ । दीवप्पणठेव अणतमोहे, नेयाउय दछुमदछमेव ॥ ५॥ सुत्तेसुआवी पडिबुद्धजीनी, न वीससे पडिय आसुपण्णे । घोरा महुत्ता अचल सरीर, भारडपक्सीन चरप्पमत्तो ॥६॥ चरे पयाइ परिसकमाणो, ज किंचि पास इह मन्नमाणो । लाभतरे जीवियवहइत्ता, पन्छा परिन्नाय मलावधसी ॥ ७ ॥ छदनिरोहेण उवेइ मोक्स, आसे जहा सिक्सियवम्मधारी । पुवाइ वासाइ चरप्पमत्तो, तम्हा मुणी सिप्पमुवेइ मुक्स ॥ ८॥ स पुनमेव न लभेज पच्छा, एमोवमा सासरवाइयाण । विमीदई सिढिले आउयम्मि, कालोवणीए सरीरस्म भेए ॥९॥ सिप्प न सकेइ विवगमेउ, तम्हा समुट्ठाय पहाय कामे । समिच लोय समया महेसी, आयाणुरक्पी चरमप्पमत्ते ॥ १० ॥ मुहु मुहु मोहगुणे जय त, अणेगरूना समण चरन्त । फामा फुस ती अममजस च, न तेसि भिक्खू मणसा पउस्से ॥ ११ ॥ मन्दा य फासाबहुलोहणिज्जा, तहप्पगारेसु मण न कुज्जा। रक्विज कोह विणएज्ज माण, माय न सेवेज पयहेज लोह ॥ १२॥ जेऽससया तुच्छपरप्पनाइ ते पिजदोमाणुगया परभा । एए अहम्मे ति दुगुछमाणो, कखे गुणे जार सरीरभेउ ॥ १३ ॥ त्ति बेमि ॥ अ असखय चउत्व अज्झयण समत्त । ॥ अह अकाममरणिज्ज पञ्चम अज्झयण ॥ अण्णवसि महोहसि एगे तिण्णे तरुत्तर । तत्थ एगे महापन्ने, इम पण्हमुदाहरे ॥ १ ॥ सन्तिम य दुवै ठाणा, अक्साया मरणन्तिया । अझाममरण चेन, सकाममरण तहा ॥ २॥ चालाण तु अझाम तु, मरण असइ भवे । पण्डियाण समाम तु, उक्कोसेण सड भवे ॥३॥ तथिम पढम ठाण, महावीस्ण दसिय । कामगिद्धे जहा बाले, मिस कराइ बुवई ॥ ४ ॥ जे गिद्धे कामभोगेमु, एगे कूडाय गच्छद । न मे दिट्टे परे लोए, चक्सुदिट्ठा इमा रइ ।। ७॥ हत्थागया इमे कामा, कालिया ने अणागया। को जाण परेलोए, जस्थि वा नत्थि ना पुणो ॥ ६ ॥ जण सद्धि होक्सामि इड वाले पगभइ । कामभोगाणुराएण, कस सपडिनजइ ॥ ७ ॥ तओ से दण्ड समारभद, तसेमु यापरेसु य । अट्ठाए य अणट्ठाए, भृयगाम विहिंमई ॥ ८॥ हिंसे चाले मुमाराइ, माइले पिसुणे मढे । भुनमाणे मुर मम, सेयमेय ति मनई ॥ ।।

श्रीउत्तराययनसूत्र-पचमाध्ययनम्
,
कायसा चयमा मत्ते, वित्ते गिद्धे य इस्थिमा दुइओ मल सचिणड, सिमुणागु व मट्टिय ॥ १०॥
तओ पुट्टो आयकेण, गिलाणो परितप्पई । पमीओ पर ठोगस्म, कम्माणुप्पेहि अप्पणो ॥ ११ ॥
मुया मे नरए ठाणा, अमीलाण च जा गई । पालाण कुरफम्माण, पगाढा जत्य वेयणा ।। १२ ।।
तत्थोनाडय ठाण, जहा मेयमणुस्सुय । जाहाफम्मेहिं गछन्तो, सो पन्छा परितप्पड़ ॥१३॥
जहा मागडिओ जाण, मम हिच्चा महापह । विमम मग्गजोदण्णो अक्खे भग्गम्मि सोयड ॥ १४ ॥
एव धम्म विउकम्म, जहम्म पडिजिया । पाले मन्चुगृह पत्ते, अक्से भग्ग न सोयई ॥ १० ॥
तओ म मरण तम्मि, वाले सतमई भया । जफाममरण मरई, युत्ते र कलिणा निए ॥ १६ ॥
एय अकाममरण, बालाण तु पवेडय । एत्तो सकाममरण, पण्डियाण सुणेह मे ॥ १७ ॥
मरण पि सपुण्णाण, जहा मेयमणुम्सुय । विप्पमण्णमणाघाय, सजयाण वुसीमो । १८ ॥
नइम मन्वेसु भिक्सृसु,न इम सव्वेसु गाविसु। नाणासीला जगारत्था,विममसीला य मिक्ग्वणो।। १९ ॥
सन्ति एगेहि भिवग्यहि, गारत्था सजमुत्तरा । गारत्येहि य सव्वेहिं, सानो सजमुत्तरा ।। २० ॥
चीराजिण नगिणिण, जडी सघाटिमुण्टिण। एयाणि वि न तायन्ति, दुस्सील परियागय ।। २१॥
पिडोल एव्य दुस्सीले, नरगाजो न मुचई। मिस्साए नागिहन्ये पा, सुपए कम्मई दिव ॥ २२ ॥
अगारिमामाइयगाणि, मट्टी काण्ण फामए । पोसह दुहओ पस, एगराय न हारए ॥ २३ ॥
एर सिक्साममापन्ने, गिहिवासे वि मुपए । मुच्चई उविपन्याओ, गच्छे जम्समलोगय ॥ २४ ॥
अह जे सयुड भिक्यू, दोण्ह जन्नयरे सिया। मन दुक्सपहीणे पा, देदे वावि महिड्ढीण ॥ २५ ॥
उत्तराइ विमोहाइ, जुईमन्ताणुपुष्पमो। ममाडण्णाड जक्सेहिं, आपसाइ अससिणो ॥ २६ ॥
दीहाउया इड्ढीमन्ता, समिद्धा कामरूविणो। अनुणोमन्नसकामा, भुजो अचिमलिप्पभा ।। २७ ।।
ताणि ठाणाणि गच्छन्ति, सिक्सित्ता सनम तर ।
भिसागे ना गिहित्ये वा, जे सन्ति पडिनियुडा ।
॥ २८॥
तेसिं मोचा मपुजाण, मनयाण युमीमओ। न सतसति मरणत, सीलपन्ता बहुस्सुया ॥ २९॥
तुलिया विसेममादाय, दयाधम्मम्म सन्तिए । विप्पसीएज मेहानी, तहाभूएण जप्पणा ॥ ३० ॥
तओ काले अभिप्पए, सडढी तालिममन्तिए। विणएन लोमहरिम, भेय देहस्म कग्वए ॥ ३१ ।।
जह कारम्मि सपत्ते, जापायाय समुम्मय । ममाममरण मई तिहमन्नयर मुणी ॥ ३२ ॥
त्ति बेमि ।। इअ अफाममरणिज पचम अज्झयण समत्त ॥५॥
॥ अह सुड्डागनियहिज छह अज्झयण ॥
जारन्तविजापुरिमा मवे ते दुक्समभवा । लुप्पन्ति नबुसो मूढा, समाम्मि अण तए ॥ १॥
समिक्स पण्डए तम्हा, पामनाई पहे बहू । अप्पणा मच्चमेसेन्ना, मेत्ति भण्मु रपए ॥ २ ॥
माया पियान्टमा भाया, भजा पुत्ता य जोरसा । नाल ते मम ताणाग, लप्पतस्म सम्म्मुणा ॥ ३ ॥
एयमह महाप, पामे समियटमणे । छिन्द गेद्धि सिणेह च, न से पुचमय ॥ ४ ॥
गगास मणिकुण्डल, पमनो दासपोरुम । सचमेय चइत्ताण कामम्मी भविम्मसि ॥ ५ ॥

॥
श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाभ्यायमाला
अज्झत्थ सव्वओ सव्व, दिस्म पाणे पियाय । न हणे पाणिणो पाणे, भयवेराओ उत्ररए ॥ ६ ॥
आदाण नरय दिस्स, नायएज तणामवि । दोगुभ्छी अप्पणो पाए, दिन भुजेज भोयण ।।
इहमेगे उ मन्नन्ति, अपचक्साय पावग । आयरिय विदित्ताण, सबदुक्खाण मुचए ॥ ८॥
भणता अकरेन्ता य, बन्धमोक्सपइण्णिणो। यायाविरियमेत्तेण, समासासेन्ति अप्पय ॥ ९ ॥
न चित्तातायए भासा, कुओ विजाणुसासण। विसन्ना पारसम्मेहिं, बाला पडियमाणिणो ॥ १० ॥
जे केइ सरीरे सत्ता, चपणे रुवे य सव्वसो। मणसा काययक्केण, सव्वे ते दुक्खसम्भा ॥ ११ ॥
आवना दीहमद्धाण, ससारम्मि अण तए । तम्हा सम्बदिस पस्स, अप्पमत्तो परिव्बए ॥ १२॥
पहिया उड्ढमादाय, नावकखे क्याइ वि । पुनकम्मक्सयहाए, इम देह समुद्धर ॥ १३ ॥
विविच मम्मुणो हेउ कालकसी परिव्यए। माय पिंडस्स पाणस्स, कड लभ्रूण भक्मए । १४ ।।
सन्निहिं च न कुवेना, लेवमायए सजए। पसीपत्त समादाय, निसेक्सो परिचए ।। १५ ।।
एसणासमिओ लज्ज, गामे अणियओ चरे। अप्पमत्तो पमत्तेहि, पिण्डवाय गवेसए ॥ १६
एव से उदाहु अणुत्तरनाणीअणुत्तरदसी अणुत्तरनाणदसणधरे अरहा नायपुत्ते भगर वैमालिए वियालिए
इअ खुड्डागनियठिन्ज छट्ट अज्झयण समत्त ।। ६ ॥
NICAT-
॥ अह एलय सत्तम अज्झयण ॥
जहाएस समुद्दिस्स, कोइ पोसेज एलय । ओयण जनस देजा, पोसेजावि सयङ्गणे ॥१॥
तओ से पुढे परिवूढे, जायमेए महोदरे। पीणिए विउले देहे, आएस परिक्सए ॥ २ ॥
जाव न एइ आएसे, तार जीवइ सो दुही। अह पतम्मि जाएसे, सीस छेत्तूण भुजई ॥ ३ ॥
जहा से खलु उरन्मे, आएसाए समीहिए। एन वाले अहम्मिट्टे, ईहई नरयाउय ॥ ४ ॥
हिंसे पाले मुसावाई, अद्धाणसि विलोकए । अन्नदत्तहरे तेणे, माई क नु हरे सढे ॥ ७ ॥
इत्थीसियगिद्धे य, महारभपरिग्गहे । भुजमाणे सुर मस, परिमुढे परदमे ।। ६ ।।
अयकक्करभोई य, तुडिल्ले चियलोहिए। आउय नरए कसे, जहाए न एलए ॥ ७ ॥
आसण सयण जाण, वित्त कामे य भुजिया। दुस्साहट धण हिच्चा, बहु सचिणिया रय ॥ ८ ॥
तओ कम्मगुरू जतू, पच्चुप्पनपरायणे। अए व्य आगयाएसे मरणतम्मि सोयई ॥ ९ ॥
तओ आउपरिक्सीणे, चुया दहा विहिंसगा। आसुरीय दिस पाला, गछन्ति जरसा तम ॥ १०॥
जा कागिणिए हउ, सहस्म हारए नरो । अपच्छ अम्बग भोचा, राया रज तु हारए ॥११॥
एव माणुस्सगा कामा, देवमाण अन्तिए । सहस्मगुणिया भुज्जो, आउ कामाय दिब्धिया ॥ १२ ॥
अणेगनासानउया, जा सा पन्नाओ ठिई । जाणि जीयन्ति दुम्महा, ऊणासमयाउए ॥ १३ ॥
जहा य तिनि वाणिया, मूल घेत्तूण निग्गया। एगोऽत्थ लाई लाभ एगो मूलेण आगओ ॥ १४ ॥
एगो मूल पि हारित्ता, आगओतत्य वाणिओ। ववहारे उनमा एमा, एव धम्मे वियाणह ॥ १५ ॥
माणुसत्त भवे मूल, लामो दवगई भव । मूलच्छेएण जीनाण नरगतिरिक्सचण धुन ॥ १६ ॥
दुहओ गई पालस्स, आई वहमूलिया। देवत्त माणुसत्त च, जनिए लोलयासढे ॥ १७ ॥

श्रीउत्तराध्ययनसम-सप्तमाध्ययनम्
तो जिए सइ होड, दुविह दोग्गड गए। दुल्लहा तस्स उम्मग्गा, अदाए मुहरादवि ॥ १८॥
एवं जिय सपेहाए, तुल्लिया नाल च पण्डिय । मूलिय ते पवेमन्ति, माणुसिं जोणिमेन्ति जे ॥ १९ ॥
वेमायाहि सिक्साहि, जे नरा गिहिसुपया। उवेन्ति माणुम जोणि, कम्मसच्चा हु पाणिणो ॥ २० ॥
जेमिं तु निउला सिक्सा, मलिय ते अन्छिया। सीलयन्ता समीसेमा, अदीणा जन्ति देवय ॥ २१ ॥
एपमद्दीणव मिक्यु, आगारिंच रियाणिया। कहण्णु निच्चमेलिक्स, जिच्चमाणे न सपिढे ॥२०॥
जहा कुसग्गे उदग, समुहेण मम मिणे । एन माणुस्मगा कामा, देनफामाण अतिए ।॥ २३ ॥
कुसग्गमेत्ता इमे कामा, सन्निन्द्धम्मि आउए । कम्म हउ पुराफाउ, जोगक्रोम न सविढे ॥ २४ ॥
इह कामाणियद्वस्म, अत्तट्टे अपरज्झट । सोचा नेयाउय मग्ग, ज भुनो परिभस्सई ॥ २८ ॥
इह कामणियहस्स, अनट्टे नापग्झई । पूढेहनिरोहण, भवे देवि त्ति मे सुय ।। २६ ॥
इड्ढी जुई जस्मो वण्णो, आउ सुहमणुत्तर । भुज्जो जत्थ मणुस्सेसु, तत्थ से उपरजई ॥ २७ ॥
पालस्स पस्स वालत, जम्म पडिजिया। चिच्चा धम्म अहम्मिटे, नरए उपवजई ॥ २८ ॥
धीरस्म पस्स धीरत्त मन्त्रयमाणुरत्तिणो । चिचा जसम्म पम्मिटे, टेमेसु उपवनई ॥२९॥
तुलियाण बालभार, अमाल चेर पटिए | चइऊण बालभान, अपाल सेवई मुणि ॥ ३०॥
त्ति वेमि ॥ टअपलय-इझयण ममत्त ॥ ७॥
॥ अह काविलिय अहम अज्झयण ॥
अगुवे जमामयम्मि, समारम्मि दुक्मपउराए ।
कि नाम होज त कम्मय जेणा- दोग्गड न गन्ना ॥१॥
विजहित्तु पुन्चमजोय, न सिणेह पहिचि जुवेना ।
जसिणेहसिणेहरेहि, दोमपओमहि मुच्चए भिक्यू ॥ २॥
तो नाणदमणममग्गो, हियनिम्सेसाय मध्यजीवाण ।
तेमि रिमोरपणटाए, भामई मुणिरो विगयमोहो ॥ ३ ॥
सर गय रलह च, विप्पजह तहाविह मिरग्यू ।
मसु कामनाएगु, पाममाणो न लिप्पई ताई ॥४॥
भोगामिमढीमरिमन्न, यिनिम्सेयसद्धिमोचत्य ।
वाले य मन्एि मूढे, वझट माया र मेलम्मि ॥ ५॥
दुप्परिचया इमे सामा, नो मुनहा अधीरपुरीमेहिं ।
अह मन्ति मुघया माद जे तरन्ति अतर पणिया पा॥६॥
समणामु एगे वयमाणा, पाणवह मिया अयाणन्ता ।
मन्म निरप गच्छन्ति, पाला पापियानि ट्ठिीहिं ॥ ७॥
नहु पाणयह अणुनाणे, मुचेञ्ज क्याद मध्यदुक्याण ।
एवारिपहिं अस्पाय, जेहिं मो सायुधम्मो पनत्तो ॥ ८॥

(10) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला पाणे य नाइवाएला, से समीइ ति बुच्चई ताई । तओ से पाक्य कम्म, निजाइ उदग व थलाओ ॥९॥ जगनिस्सिएहिं भूएहि, तसनामेहिं यावरेहिं च । नो तसिमारमे दड, मणसा वायसा कायसा चेव ।। १०॥ मुद्धसणाओ नचाण, तत्थ ठवेज भिक्खू अप्पाण । जायाए घासमेसेना, रसगिद्धे न सिया भिक्साए ॥ ११ ॥ पताणि चेव सेवेजा, सीयपिंड पुराणकुम्मास । अदु वकस पुलाग वा, जरणद्वाए निवेसए म ।। १२ ।। जे लक्सण च सुविण, अनविज च जे पउजन्ति । न हु ते समणा वूचन्ति, एव आयरिएहिं अक्साय ।। १३ ॥ इहजीविय अणियमेत्ता, पभट्ठा समाहिजोएहिं । ते कामभोगरसगिद्धा, उववजन्ति आसुरे काए ॥ १४ ॥ तत्तो वि य उयट्टित्ता, ससार बहु अणुपरियडन्ति । बहुकम्मलेवलित्ताण, बोही होइ सुदुल्लहा तेसिं ॥ १५ ॥ कसिणपि जो इम लोय, पडिपुण्ण दलेज इफस्स । तेणावि से न सतुस्से, इइ दुप्पूरए इमे आया ॥ १६ ॥ जहा लाहो तहा लोहो, लाहा लोहो पवढइ । दोमासक्य कन्ज, कोडीए वि न निद्विय ॥ १७ ॥ नो रक्ससीम गिन्झेजा, गडवच्छासु ऽणेगचित्तासु । जाओ पुरिस पलोमित्ता, खेल्लन्ति जहा व दासेहिं ।। १९ ।। नारीसु नोवगिज्झेजा, इत्थी विप्पजहे गारे। च पेमल नद्या, तत्थ ठवेज भिक्खू अप्पाण ॥ १९ ॥ इअ एस धम्मे अक्साए कविलेण च विमुद्धपन्नेण । तरिहिन्ति जे उ काहिन्ति, तेहिं आराहिया दुवे लोग ॥ २० ॥ त्ति बेमि ॥ इअ काविलीय अहम अज्झयण समत्त ॥८॥ धम्म meas- ॥ अह नवम नमिपवजा जज्झयण ॥ चइऊण देवलोगाओ,उचानो माणुमम्मिलोगम्मि।उवमन्तमोहणिजो, सरइ पोराणिय जाइ ॥ १ ॥ जाइ सरितु भयन, महसयुद्धो अणुत्तरे धम्मे। पुत्त ठवेत्तु रन, अभिणिक्समई नमी राया ॥२॥ से देवलोगसरिस, अन्तेउरवरगओ वरे भोए । भुजित्तु नमी राया, बुद्धो भोगे परिचयई ॥ ३ ॥ मिहिलसपुरजणाय,बलमारोह च परियण सयाचिच्चाअभिनिसन्तो एग तमहिड्ढीओ भयव ॥ ४ ॥ कोलाहलगसभ्य आसी मिहिलाए पन्धयन्तम्मिा तइयारायरिसिम्मि,नमिम्मि अभिणिक्समतम्मिा।

श्रीउत्तरा ययनसूत्र-नवमाध्ययनम्
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अन्भुट्टिय रायरिसिं, पबनाठाणमुत्तम । सको माहणस्वेण, इम क्यणमन्बी ॥६॥
किण्णु भो अन्न मिहिला, कोलाहलगसकुला। सुन्वन्ति दारुणा सद्दा, पासाराम गिहेमु य ॥७॥
एयमह निसामित्ता, हेऊकारणचोइओ। तओ नमी रायरिसी, देविन्दो इणमनी ॥ ८ ॥
मिहिलाए चेडए बन्छे, सीयच्छाप मणोरमे। पत्तपुप्फफलोवेए, बहूण बहुगुणे सया ।। ९ ।।
वाएण हीरमाणम्मि, चेडयम्मि मणोरमे। दुहिया जसरणा अत्ता, एए क्न्दन्ति भो खगा ॥ १० ॥
एयम निमामित्ता, हेऊमारणचोडओ। तओ नमि रायरिसिं, देविन्दो इणमब्बनी ॥११॥
एस अग्गी य नाऊ य, एव डझड मन्दिर। भयव अन्नउर तेण, कीम ण नारपैक्सह ।। १२ ।।
एयम निप्सामित्ता हऊकारणचोडओ। तओ नमी रायरिसी, देविन्दो इणमब्बनी ॥१३॥
सुहवसामोजीमामो, जेसि मोनत्थि किचण । मिहिलाए डझडमाणीए, न मे डझड फिचण ॥ १४ ॥
चत्तपुत्तक्लत्तम्म, नि वागारस्म मिरपूणो। पिय न विजद किचि, जप्पिय पि न विजई ॥ १५ ॥
बहु सु मुणिणो भद्द, अणगारम्स भिखूणो । सयओ चिप्पमुक्स्स, एगन्तमणुपमओ ॥ १६ ॥
एयमट्ट निमामित्ता, हेमारणचोटओ। तओ नमी रायरिसी, देविन्दो डणम सी ॥ १७ ॥
पागार काग्इत्ताण, गोपुरट्टालगाणि च । उस्मूलगमयग्घीओ तओ गाउसि यत्तिया ॥१८॥
एयमह निमामित्ता, हमारणचोडओ। तओ नमी रायरिमी, देविदो इणम नी ॥ १९ ॥
मद्ध नगर विचा, तवसपरमग्गल । खन्ति निउणपागार, तीगुत्त टुप्पधमय ।। २० ॥
धणु परकम पिचा, जीन च इरिय मया। घिड च केयण मिचा, मच्चेण पलिम थए ॥ २१ ॥
तमनारायजुत्तेण, मित्तॄण कम्मरचुय । मुणी विजयसगामो, भागासो परिमुच्चए । २२ ।।
ण्यम निमामित्ता हेजकारणचोओ। तओ नमि रायरिमि, देविदो दणभनी ।। ३ ।।
पामाए कारइत्ताण, बद्धमाणगिहाणि य । बालग्गपोइयालो य तओ गन्छसि सत्तिया ॥ २४ ॥
एयमट्ट निमामित्ता, हमारणचोडओ। तओ नमी रायरिमी, दविन्दो इणम नवी ।। २० ।।
समय सलु सो कुणइ, जो मग्गे कुणई घर। जत्थेव गन्तुमिच्छेना, तत्थ कुव्वेज सामय ॥ २६ ॥
एयमट्ट निसामित्ता, हेऊयारणचोदो। तओ नमि रायरिसिं, दविन्दो इणम वी ॥ २७ ॥
आमोमे लोमहारे य, गटिमेए य तकर । नगरस्म खेम काउण, तओ गन्छसि सत्तिया ॥ २८ ॥
ण्यमह निमामित्ता, हउ कारणचोडमो। तओ नमी रायरिसी, देविन्दो इणमननी ॥ २९॥
अमइ तु मणुस्सेहि, मिन्छा दडो पजुञ्जई। अकारिणोऽत्य वज्झन्ति, मुच्चई कारणो जणो ॥ ३० ॥
एयम निमामित्ता, हेउकारणचोइओ। तओ नमि रायरिमि, दविन्दो हणमव्यवी ॥ ३१ ॥
जे केइ पत्थिवा तुज्झ, नानमन्ति नराहिवा। वसे ते ठानइत्ताण, तओ ग छसि खतिया ॥ ३२ ॥
एयमट्ट निमामित्ता, हेजकारणचोडओ । तओ नमी रायरिसी, दविंदो इणमन्यबी ॥ ३३ ।।
जो महस्स सहम्माण, सगामे रज्जए जिणे । एग जिणेज अप्पाण, एस से परमो जओ ।। ३४ ॥
अप्पणामव जुज्झाहि, कि ते जुज्रेण बन्झओ। अप्पणामेरमप्पाण, जहत्ता मुहमेहए ॥ ३० ॥
पचिन्दियाणि कोह, माण माय तहेव लोह चादुनय र अप्पाण,मच्च अप्पे निए निप ।। ३६ ॥
एयम निसामित्ता, हेजकारणचोइओ। तो नमि रायरिमि, देपिन्तो इणमच्चवी ॥ ३७॥
जडचा विउले जन्ने,भोत्ता समणमाहणे। दवा भोचाय निहाय, तो गच्छसि बत्तिया ॥३८॥

. श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला एयमट्ट निमामित्ता, हऊकारणचोइओ। तओ नमी रायरिसी, देवि दो इणमब्बवी ।। ३९ ॥ जो सहस्स सहस्साण, मासे मासे गव दए । तस्स वि सजमो सेओ, अदि तस्म वि किंचण ॥ ४० ॥ एयमह निसामित्ता, हेजकारणचोइओ। तओ नमि रायरिसिं, दविन्दो इणमब्बवी ।। ४१ ।। घोरासम चइत्ताण, अन्न पत्थेसि आमम । इहेव पोसहरओ, भवाहिवा मणुयाहिना ॥ ४२ ॥ एयमट्ट निसामित्ना हेऊकारणचोइओ। तओ नमी रायरिसिं, देविदो इणमब्बनी ॥ ४३ ।। मासे मासे तु जो बालो, कुमग्गेण तु भुजए । न सो सम्सायधम्मस्म, कल अग्घइ सोलसि ॥ ४५ ॥ एयमह निसामित्ता, इज्कारणचोडओ, तो नमि गयरिसिं, दवि दो इणमनी ॥ ४५ ॥ हिरण्ण सुनण्ण मणिमुत्त, कस दूस च पाहण। कोस वड्डाचहत्ताण, तओ गच्छसि खत्तिया ॥ ४६ ॥ एयमट्ट निमामित्ता, हेजकारणचोओ । तओ नमी रायरिमि, दलिंदो इणमब्बवी ॥४७॥ सुवण्णस्पस्स उ पव्यया भवे, सिया हु केलामममा जससया । नरस्म लुद्धस्स न तहि किचि, इच्छा उ आगाससमा अणन्तिया ॥ ॥४८॥ पुढवी माली जवा चेप, हिरण्ण पसुमिस्सह । पडिपुण्ण नालमेगस्म, इह विजा तर चरे ॥ ४९ ॥ एयमह निसामित्ता, हेजकारणचोइओ। तओ नर्मि रायरिसिं, दविदो इणमन्बवी ॥ ५० ॥ अच्छेरयमन्भुए भोए चयसि पत्थिना । असन्ते कामे पत्थेसि, सफप्पेण विहम्मसि ॥१॥ एयमट्ठ निसामित्ता, हेऊकारणचोडओ। तओ नमी रायरिसी, देविदो इणमब्लवी ॥५२॥ सल्ल कामा विस कामा, कामा आसोविसोवमा । कामे पत्थेमाणा, अकामा जन्ति दोग्गड ।। ५३ ॥ अहे वयन्ति कोहण, माणेण अहमा गई । माया गई पडिग्याओ, लोभाओ दुहओ भय ।। ५४ ।। अउज्झिऊण माहणरुच, निउब्विऊण इन्दत्ता बदइ अभित्थुण तो, इमाहि महुराहिं धग्गूहि ॥ ५५ ॥ अहो ते निजिजो कोहो, अहो माणो पराजिओ। अहो निरकिया माया, अहो लोभो वसीकओ ॥ ५६ ॥ अहो ते अन्जव साहु, अहो ते साहु महव। अहो ते उत्तमा सन्ती, अहो ते मुत्ति उत्तमा ॥ ५७ ।। इह सि उत्तमो भते, पच्छा होहिसि उत्तमो। लोगुत्तमुत्तम ठाण, सिद्धिं गन्छसि नीरओ ॥ ५८ ॥ एव अमिथुण तो, रायरिसिं उत्तमाए सद्धाए। पयाहिण करे तो, पुणो पुणो बन्दई सक्को ॥ ५९॥ तो पदिऊण पाए, चफकुसलक्सणे मुणिपरस्म । आगासेणुप्पइओ, रलियचलकुडलतिरीडी ।। ६० ॥ नमी नमेइ अप्पाण, सक्ख सकेण चोडओ। चइऊण गैह च वेदही, सामण्णे पज्जुट्टिओ ॥ ६१ ।। एव करेन्ति ससुद्धा, पडिया परियक्खणा। विणियन्ति भोगेसु, जहा से नमी रायरिसि ॥ २ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ नमिपञ्चजा समत्ता॥

श्रीउत्तराध्ययनसून-दसमाध्ययनम् wwwwwww wwwwww ॥ अह दुमपत्तय ढसम अज्झयण ॥ 3 मा य सत्रमे। दुमपत्तए पडुयए जहा, निगडड गडगणाण अच्चए । एर मणुयाण जीविय, ममय गोयम मा पमायए ॥१॥ कुसग्गे जह जोमचिन्टुए, योर चिट्ठइ लम्बमाण । एर मणुयाण जीविय, मम गोयम मा पमाय ॥२॥ दृढ उत्तग्यिम्मि जाउए, जीवियर गहुपचनायए। निगाहि ग्य पुरे स्ट, ममय गोयम मा पमायण || ३ ॥ टरन सट माणुसे भन, चिमाले नि मनपाणिण । गाढा य विधाग सम्मुणो, समय गोयम मा पमाया ॥१॥ पुढविकायमडगमो, उकोम जीनो सबमे। काल सपाटय, समय गोयम पमाया ॥ ५॥ आरसायमगजो, उकोम जीवो सरस। काल ससाईप, समय गोयम मा पमायए ॥६॥ तउकायमगनो, छोस जीयो मार सपाहय समय गोयम मा पमायण ॥ ७॥ पाउकाटयमदगमो, उकोम जीयो य मनसे । माल मगाईय, ममय गोयम मा पमाया ॥८॥ वणम्मकायमगनो, उक्कोम जीरो उ मनमे । कारमणन्तरन्तय ममय गोयम मा पमाया ।।० नहन्दियायमगमो, उकोम जीनो उ कार ममिन्जसन्निय, ममय गोयम मा पमायग ॥ १०॥ तान्ति कायमदगजो, छोम जीयो काल मसिन्नमनिय, समय गोयम मा पमाया ॥ ११॥ चउरिनियमायमडगओ, उपोम जीयो उ गरम । सार ममिजमनिय, ममय गोयम मा पमायण ॥ १० ॥ पचिन्यिकायमगमो, कोम जीवो उ सपमा मत्तट्ठभागहणे, समय गोयम पमायए ॥१३॥ दर नेग्टग यमगओ कोम जीयो मरसे | कमभनगाणे ममय गोयम मा पमाया ॥११॥ एक भरममार, समट महामृनहि सम्म। जीयो पमायबागे, ममय गोयम मा पमायए ॥ १० ॥ मासे । उ मरमे।

(१४) , 4 श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला लखूण वि माणुमत्तण, आरिअत्त पुणरावि दुल्लह । विगलिन्दियया हु दीसई, ममय गोयम मा पमायए ॥१६॥ लभ्रूण पि आयरित्तण, अहीणपचेन्दियया हु दुल्लहा । विगलिन्दियया हु दीसई, समय गोयम मा ण्मायए ॥ १७ ॥ अहीणपचेन्दियत्त पि से लहे, उत्तमधम्मसुई हु दुल्लहा । कुतित्थिनिवेसए जणे, समय गोयम मा पमायए ॥ १८ ॥ लळूण वि उत्तम सुइ, सहणा पुणरावि दुल्लहा । मिच्छत्तनिवेसए जणे, समय गोयम मा पमायए ॥ १९ ।। धम्म पि हु सद्दहन्तया, दुल्लहया काएण फासया । इह कामगुणेहि मुच्छिया, समय गोयम मा पमायए ॥ २० ॥ परिजूरइ ते सरीरय, केमा पण्डुरया हवन्ति ते । से सोयवले य हायर्ड, ममय गोयम मा पमायए ॥२१॥ परिज़रइ ते सरीरय, केसा पण्डुरया हाति ते । से चरसुवले य हायई, ममय गोयम मा पमायए । २२ ।। परिज़रइ ते सरीरय, केसा पण्डुरया हवन्ति ते । से घाणवले य हायई, समय गोयम मा पमायए ॥ २३ ॥ परिज़रइ ते सरीरय, केसा पण्डुरया हवति ते । से जिब्भवले य हायई, समय गोयम मा पमायए ॥ २४ ॥ परिज़र- ते सरीरया केमा पण्डुरया हवति ते । से फासबले य हायई, ममय गोयम मा पमायए ॥ २५॥ परिजूरइ त सरीरय, क्सा पण्डुरया हवन्ति ते। से मव्यवले य हायई, समय गोयम मा पमायए ॥ २६ ॥ अरई गण्ड विमूहया आयका विविहा फुमन्ति ते । विहडइ विद्धसइ ते सरीरय, ममय गोयम मा पमायए ॥ २७ ॥ वोच्छिन्द सिणेहमप्पयो, कुमुष सारहय व पाणिय । से मवसिणेहवजिए, समय गोयम मा पमायए ॥ २८ ॥ चिचाण धण च भारिय, पपइओ हि सि अणगारिय । मा वन्त पुणो वि आइए समय गोयम मा पमायए ।। २९ ।। अवउझिप मित्तवन्धय, विउल चेव धणोहसचय । मा त विउय गवेसए, समय गोयम मा पमायए ॥३०॥ नहु जिणे अन्न दिस्मई बहुमए दिस्सइ मग्गदसिए । सपइ नेयाउए पहे, समय गोयम मा पमायए ॥ ३१ ॥ अवमोहिय क्ण्टगा पह, ओइण्णो सि पह महालय । . H ।

श्रीउत्तरा ययनसूत्र-दसमाध्ययनम् (१५) गच्छसि मम्ग विसोहिया, समय गोयम मा पमायए ॥ ३२ ॥ अपले जह भारवाहए, मा मग्गे विसमे वगाहिया । पन्छा पच्छाणुतारण, समय गोयम मा पमायए ॥ ३३ ॥ तिण्णो हु सि अण्णव मह, कि पुण चिट्ठसि तीरमागओ । अभितुर पार गमित्तए, समय गोयम मा पमायए ।। ३४ ॥ अफलेवरसेणि उस्सिया, सिद्धिं गोयम लोय गन्छसि । खेम च सिर अणुत्तर, समय गोयम मा पमायए ।। ३५ ।। बुद्धे परिनि वुडे चरे, गामगए नगरे व सजए । मन्तीमग्ग च वृहए, ममय गोयम मा पमायए ॥ ३६ ।। बुद्धस्म निमम्म भासिय, सुकहियमपओसोहिय । राग दोस च छिन्दिया, सिद्धिगई गए गोयमे ॥ ३७ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ दुमपत्तय समत्त ॥ १० ॥ . ॥ अह बहुस्सुयपुज्ज एगारस अज्मयण ॥ सजोगा विप्पमुक्कस्म, अणगारस्स भिक्सुणो। जायार पाउकरिस्सामि, आणुपुन्धि मुह मे ॥ १ ।। जे यावि होइ निचिन्ने, थद्धे लुद्धे अणिग्गहे अभिक्सण उल्लयड, अविणीए अपहुस्सुए ॥ २॥ अह पचर्हि ठाणेहिं, जेहिं सिक्सा न भइ । थम्भा कोहा पमारण, रोगेणालम्मण्ण य ॥३॥ अह अहहिं ठाणेहिं, सिक्सासीलि ति वुच्चइ । अहस्सिरे सया दन्ते, न य मम्ममुदाहरे ॥ ४ ॥ नासीले न विसीले न सिया अइलोलए । अकोहणे मच्चरण, सिक्खासीलि त्ति चुबई ॥6॥ अह चोडसहि ठाणेहि, वट्टमरणे उ सजए। अविणी चुचई सो उ, निव्वाण च न गन्छ। ॥ ६॥ अभिक्खण कोही हरड, परध च पकुवइ । मेत्तिनमाणो मइ, सुय लघृणमजई ॥ ७ ॥ अवि पापपरिक्खेगी, अवि मिनेमु कुप्पद । सुप्पियम्सावि मित्तस्स, रहे भामा पारय ॥ ८॥ पहष्णगाइ दुहिले, थद्ध लुद्ध अणिग्गहे । असविभागी अवियत्ते, अविणीए ति बुच्चइ ॥९॥ अह पन्नरसहि ठाणेहि, सुविणीए ति युवइ । नीयापत्ती अचरले, अमाई अकु ऊहले ॥ १० ॥ अप्प च अहिक्खिबई, पर ध च न कुबई । मेत्तिजमाणो भयई, सुय लधु न मञ्जई ॥ ११ ॥ न य पायपरिक्वेवी, न य मित्तसु कुप्पई । अप्पियस्सावि मित्तस्स, रह कल्लाण भासई ।। १२ ।। कलहडमरवन्जिए युद्धे अभिजाइए । हिरिम पडिसीणे, सुविणीए ति बुचई ॥ १३ ॥ वसे गुस्कुले निच, जोगव उपहाणय | पियकरे पियवाई, से सिक्ख लधुमरिहई ।। १४ ।। जहा सखम्मि पय, निहिय दुहओ वि विरायड एव बहुस्सुए भिक्खू, धम्मो कित्ती तहासुय ।। १५ ।। जहा से कम्योयाण, आइण्णे क्न्थए सिया । आसे जवेण' पवरे, एव हाइ बहुस्मुए ॥ १६॥ जहाइण्णममारूढे, मरे दृढपरकमे । उभओ नन्दिघोसेण, एव हवः पहुस्सुए ॥ १७॥ जहा करेणुपरिकिण्णे, कुजरे मट्टिहायणे । बलवन्ते अप्पडिहए, एव हवा बहुस्मृए ॥ १८ (१६) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला जहा से तिरससिगे, जायसधै विरायई । बमहे जहाहिवई, एव हनइ बहुस्सए ॥ १९ ॥ जहा से तिस्सदाढे, उदग्गे दुप्पहसर | सीहे मियाण पपरे, एच हवह बहुस्सुए ॥२०॥ जहा से वासुदवे, ससचक्गयावरे । अप्पडिहयबले जोहे, एव हार बहुस्सए ॥ २१ ॥ जहा से चाउरन्त, चक्काट्टीमहिड्डिए । चोदमरयणाहिई, एर हाड बहुस्सुए ॥ २२ ॥ जहा से सहास्सक्खे, वनपाणी पुरन्दरे । सके दाहिनई, एर हाइ बहुस्सए ।॥ २३ ॥ जहा से तिमिरविद्धसे, उचिट्ठ ते दिवायरे । जलन्त इस तएण, एव हरड बहुस्सुए ॥ २४ ॥ जहा से उड्डाई च दे नक्ग्वत्तपरिवारिए । पडिपुण्णे पुण्णमासीए, एव हमइ बहुस्सुए ॥ २० ॥ जहा से ममाइयाण कोटागार सुरक्सिए । नाणा पन्नपटिपुण्णे एव हम बहुस्सुए ॥ २६ ॥ जहा सा दुमाण पनरा, जम्बू नाम सुदसणा । जणाढियस्स देवस्स, एन हवड बहुस्सुए ॥ २७ ॥ जहा सा नईण पवरा, सलिला सागरगमा । सीया नीलगन्तपनहा, एव हरड पहुस्सुए ॥ २८ ॥ जहा से नगाण पार, सुमह मन्र गिरी । नाणोमहिपनलिए, एव हगड बहुम्सुण् ॥ २९ ॥ जहा स सयभुग्मणे, उदही जमओदए । नाणारयणपडिपुणे एर हाड पहुस्सुए ॥ ३० ॥ समुहगम्भीरसमा दुगसया, अचकिया केणद टुप्पहमया । मुयस्म पुण्णा विग्लस्म ताइणो, सवित्तु कम्म गरमुत्तम गया ॥३१॥ तम्हा सुयमहिडिजा, उत्तमट्ठगवेमए। जेणप्पाण पर चेव, सिद्धि सपाउणेनामि ॥ ३२ ॥ त्ति येमि ।। इअ यहुस्सुयपुन ममत्त ॥ ११ ॥ . ॥ अह हरिएसिज्ज बारह अज्झयण ॥ सोनागकुलसभूओ, गुणुत्तरधरो मुणी, हरिएमपलो नाम, आसि भिक्यू जिइन्दिओ ॥ १ ॥ इरिएसणमासाए, उचारसमिईसु य । जो आयाणनिम्खेवे, सजओ मुसमाहिओ ॥ २ ॥ मणगुत्तो वयगुत्तो, कापगुत्तो जिइन्दिओ। भिक्खट्टा यम्भइन्जम्मि, जन्नवाडे उपट्टिओ ॥३॥ त पामिऊण एजन्त तवेण परिमोसिय । पतोरहिउमगरण, उवहसन्ति अणारिया ॥ ४ ॥ जाईमयपडिथद्धा, हिंसगा अजि-न्दिया । अबम्भचारिणो वाला, इम वयणम बवी ॥ ५ ॥ कयर आगछड दित्तरूवे, काले विगराले फोकनासे । ओमचेलए पमुपिमायभूए सफरदूम परिवरिय क्ण्ठे || ६ ॥ को रे तुम य अदसणिन्ने, काए । आमाइहमागओमि । ओमचेलया पसुपिमायभूया, ग उक्सलाहि किमिहिं ठिओ सि । ७॥ जक्सेतहिं ति दुयरुक्सवासी, अणुकम्पओ तस्स महामुणिस्म । पच्छायइत्ता नियग सरीर, इमाइ वयणाइमुदाहरित्था ॥ ८॥ समणो अह मनमो, बम्भयारी, निरओ धणपयणपरिग्गहाओ। परप्पवित्तस्म उ भिसफाले, अनस्म जहा इहमागओमि ॥ ९॥ नियरिज' सज्जइ भुजइ, अन्न पभूय भयाणमेय । - - .

श्रीउत्तगध्ययनसूा-द्वारामाध्ययनम् VW जाणेह मे जायणजीविणु नि, सेमारसस लभउ एवस्सी ।। १० ।। उपक्सड मोयण माहणाण, अत्तट्ठिय सिद्धमिहगपक्स । न ऊ य एरिसमन्नपाण, दाहामु तुज्झ किमिह ठिओ सि ॥ ११ ॥ थलेसु वीया वतिमासगा, तहव निन्ने सु य आमसाए । एयाए मद्धाए दलाह मज्झ, आराहण पुण्णमिण सु सित्त ॥ १० ॥ खेत्ताणि जम्ह विडयाणि लोग,जहिं परिण्णा विरुहन्ति पुण्णा । जे माहणा जाइविज्जोरवया, ताड तु खेत्ताइ सुपेमलाइ ॥ १ ॥ कोहो य माणो य वहो य जेसिं, मोस जदत्त च परिग्गह च । ते माहणा जाडविजाविहणा, साद तु खेतार मुपानयाड ॥ १४ ॥ तु भेत्थ भो मारबरा गिराण, जट्ट न जाणेह अहिल वेए । उच्चापयाड मुणिणो चरन्ति, ताट तु सेत्ताड सुपेमलाइ ॥ १० ॥ अल्झापयाण पटिकूलमासी, पभामसे कि तु मगासि अम्ह । अवि एय विणम्मर अन्नपाण, न यण दाहामु तुम नियण्ठा ॥ १६ ॥ समितिमझ मुममाहियम्स, गुत्तीहि गुत्ताम जिदियम्म । जब म न दाहित्य अहमणिन, रिमन्न जनाण लहि य राह !| ७॥ के एत्य सत्ता उपजोटया गा, जज्झारया या मह सण्टिहि । एय ?ण्डेण फ्लपण हन्ता, कण्ठम्मि घेत्तण ग्वलेज जोण ॥१८॥ अज्झारयाण वयण मुणेना, उद्वाडया तत्थ र माग । दण्डहि वित्तेहि सेहि चैत्र ममागया त इसि ताल्यन्ति ॥ १९ ॥ रनो तहि कोमल्यिस्स धूया, भद्दत्ति नामेण अणिन्दियगी । त पासिया सजय हम्ममाण, बद्ध कुमार परिनियवेट ॥ २० ॥ पाभिओगेण निओटण, दिन्ना मु रन्ना मणमा न भाया । नरिन्दर वि दभिवन्दिपण, जेगम्हि यता इसिणा म एमो ॥ २१ ॥ पमो हु सो उग्गतयो महप्पा, नितिन्दिको सजओगम्भयारी । जो मे तयानन् र दिन्जमाणि, पिउणा सय योमरि पण रन्ना ॥ २० ॥ महाजमो एम महाणुभागो, घोग्यओ घोग्पर मो य । मा एय हीलह अहीरणिज्ज, मा मन्त्र तएण भे निदहना ।। २३ ।। ण्याड तीसे अयणाड सोचा, पत्तीह भहाट गुहासियाट । इसिम्म वयाडियट्ठयाए, जस्सा कुमार विणिनाग्यन्ति ॥ २४ ॥ ते घोररूना ठिय अतल्क्रोिऽसुग तहिं त जण तालयन्ति । ते मिनदह रहिर वमन्त, पासित्तु भा इणमाइ भुन्नो ॥२०॥ गिरि नहेहि सणह, महिं ग्वायह। जायतेय पाएहि हणह, जे भिक्खु अपमन्नह ॥ २६ ॥ अय श्रीजेनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला - आसीविसो उग्गतको महेसी, घोरपओ परकमो य । अगणिव पक्ख द पयगसेणा, जे भिक्खुप भत्ताले वदेह ॥ २७ ॥ सीसेण एय सरण उबेह, समागया सव्यजणेण तुम्मे । जइ इच्छह जीविय वाधणा, लोगपि एसोकुविओ डहेना ॥ २८ ॥ अबहेडिय पिट्टिसउत्तमगे, पसारिया बाहु अकमचेट्टे । निझेरियच्छे रुहिर वमन्ते, उद्धमुहे निग्गयजीहनेत्ते ।। २९ ।। ते पासियाखण्डियकभूए, विमणो विसण्णो अह माहणो सो । इसिं पमाएइ सभारियाओ, हील च निन्द च समाह भ ते ॥ ३०॥ बालेहि मूढेहि अयाणएहि, ज हीलिया तस्स खमाह भन्ते । महप्पमाया इसिणो हान्ति, न हु मुणी कोरपरा हनन्ति ॥ ३१ ॥ पुविच इण्डिं च अणागय च, मणप्पदोसोन मे अस्थि कोइ । जक्या हु वेयारडिय करन्ति, तम्हा हु एए निहया कुमारा ।। ३२ ।। अत्य च धम्म च वियाणमाणा, तुब्भन वि कुप्पह भूइपन्ना । तुब्भ तु पाए सरण उवमो, समागया सन्यजणेण अम्हे ॥ ३३ ॥ अञ्चेमु ते महाभाग, न ते किचि न अचिमो। भुजाहि सालिम नाणानजणसजुय ।। ३४ ।। इम च मे जत्थि पभूयमन्न, त भुजस्, जम्ह अणुग्गहट्ठा । वाढ ति पडिच्छइ भत्तपाण, मासस्स ऊ पारणए महप्पा ॥ ३५॥ तहिय गन्धोदयपुष्फलास, दिव्या तर्हि वसुहारा य बुट्ठा । पहयाओ दुन्दहीओ सुरहिं, जागासे जहो दाण च घुट्ठ ॥ ३६ ।। सक्स खु दीसइ तवोविसेसो न दीसद जाडविसेम कोई । सोनागपुत्त, हरिएमसाहु, जस्सेरिसा इड्डि महाणुभागा ॥ ३७॥ कि माहणा जोइसमारभन्ता, उदएण सोहिं वहिया विमग्गह । ज मग्गहा बाहिरिय विसोहिं न त सुइट्ट कुसला वयन्ति ॥ ३८ ॥ उस च जूव तणकट्ठमग्गि, साय च पाय उदग फुस ता। पाणाइ भूयाइ विहेडयता, भुजो वि मदा पगरेह पाच ॥ ३९ ॥ कह च र भिक्खु वय जयामो, पावाइ कम्माइ पुणोलयामो । अक्खाहि णे सजय जक्सपृडया, वह मुजट्ट कुसला यन्ति ॥ ४० ॥ छज्जीकाए अममारभन्ता, मोस अदत्त च असवमाणा । परिग्गह इथिओ माणमाय, एय परिनाय चरन्ति दन्ता ।। ४१ ।। सुसघुडा पचहि सपर्हि इह जीविय अणवफवमाणा। वोसट्टकाइ सुइचत्तदहा, महानय जयड जन्नसिट्ट ॥ ४२ ॥ क ते जोइ क र त जोरठाणे, राते सुया किं व त गरिसग ।

श्रीउत्तरा ययनसूत्र-द्वादशमाध्ययनम् , एहा य ते कयरा सन्ति भिक्खू, क्यरेण होमेण हुणासि जोइ ।। ४३॥ तवो जोइ जीयो जोइठाण, जोगा सुया सरीर कारिसग । कम्मेहा सजमजोगसन्ती, होम हुणामि इसिण पसत्थ ॥ ४४ ।। के ते हरए के य त सन्तितित्ये, रहिं सिणाओ व रय जहासि । आइक्ख णे सजय जक्सपृडया, इच्छामो नाउ भरओ सगासे ॥ ४५ ॥ यम्मे हरए यम्भे सन्तितित्य, अणाविले अत्तपसन्नले से । जहिं सिणाओ विमलो विसुद्धो, सुसीडभूओ पजहामि दोस ॥ ४६ ॥ एय सिणाण कुमठेहि दिट्ठ, महासिणाण इसिण पसत्थ जहि सिणाया विमला विसुद्धा, महारिसी उत्तम ठाण पत्त ॥ ४७ ।। त्ति बेमि ॥ इअ हरिसिज्ज समत्त ॥१०॥ ॥ अह चित्तसम्भूइज्ज तेरहम अज्झयण ॥ नाइपराजाओसलु, कामिनियाण तु हथिणपुरम्मिा चुलणीए बम्भदत्तो, उपपन्नो पउग्गुमाओ ।। १ ।। कम्पिल्लेसम्भूगो, चित्तो पुण जाओ पुरमतालम्मि। सेटिकुलम्मि विसाले, धम्म मोऊण पव्वइओ ॥२॥ कम्पिल्लम्मि य नयर, समागया दो विचित्तसम्भूया। मुहदुक्सफलविवाग,कहेन्ति ते एकमेक्स्स ॥३॥ चकवट्टी महिडढीओ, यम्भदत्तो महायसो । मायर बहुमाणेण, इम वयणमय ची ॥४॥ आसीम भायरो दोवि, जन्नमन्नवसाणुगा। जनमन्नमणूरत्ता, अन्नमन्नहिएसिणो ॥ ५ ॥ दासा दसण्णे आसीम, मिया काल्जिर नगे। हमा मयगतीर, मोवागा कासिभूमिए ॥ ६॥ देवा य देवलोगम्मि, आसि अम्ह महिड्ढीया। इमा नो छट्ठिया जाट, अन्नमन्नण जा विणा ॥७॥ फम्मा नियाणपयटा, तुमे राय विचिन्तिया । तेसिं फलविवागेण, निप्पओगमुनगया ॥८॥ सच्चसोयप्पगहा, क्म्मा मए पुरा कटा । ते अञ्ज परिभुजामो, कि तु चित्रवि से तहा ॥९॥ सय सुचिण्ण सफल नराण, कडाण कम्माण न मोम्म अस्थि । अत्थेहि कामेहि य उत्तमेहि, आया मम पुण्णफलोवए ॥१०॥ जाणाहि सभ्य महाणुभाग, महिडढीय पुण्णफ्लोरवेय । चित्त पि जाणाहि तहब राय, इड्ढी जुड़ तम्म वियप्भूया ॥ ११ ।। वयणप्पभूया, गाहाणुगीया नरमघमज्झे । ज भिक्सुणो सीलगुणोववेया, इह जय ते सुमणो मि जाओ ॥ १० ॥ उच्चोयए महु क्ये य धम्मे, पवेइया आरमहा य रम्मा । रम गिह चित्त धणभूय, पसाहि पचारगुणोरवय ॥ १३ ॥ न हि गीएहि य वा एहि, नारीनणाहि परियारयन्तो। भुजाहि भोगाइ इमाइ भिक्म्बू, मम रोयइ प रज हु दुम ॥ १४ ॥ महत्थरूपा - (२०) mewa सव्व सव्य आजैनसिद्धान्त स्वाध्यायमाला त पुग्नेहण क्याणुराग, नगहिर कामगुणेसु गिद्ध । धम्मस्सिओ तस्स हियाणुपही, चित्तो इम ग्यणमुदाहरित्या ॥ १५॥ विलविय गीय, नट्ट विडम्बिय। सवे आभरणा भारा, सन्च कामा दुहावहा ॥ १६ ॥ पालाभिरामेमु दुहारहेसु, न त सुह कामगुणेसु राय | विरत्तकामाण तोहणाण, ज मिक्सुण सीलगुणे रयाण ॥ १७ ॥ नरिंद जाद अहमा नराण, सोनागनाट दुहओ गयाण | जहिं वय समजणम्स, वस्सा, वसी य मोनागनिवसणेमु ॥ १८ ॥ तीसे य जाइड उ पावियाए, चुछ सोनागनिवेसणेसु । सन्यम्प लोगम्म टुगणिज्जा, इह तु क्म्माद पुरे कडाइ || १९ ।। सो दाणि सिं राय महाणुभागो, महिड्ढी पुण्णफ्लोपवेओ । च.तु भोगाइ असासयाइ, आटाणहेउ अभिणिक्समाहि ॥ २० ॥ इह जीविए राय अमासयम्मि धणिय तु पुण्णा- अव्यमाणो । से मोयइ मच्चुमुहोचणीए, वम्म अमाऊण परसि लोए ॥ २१ ॥ जहेह सीहो व मिय गहाय, मन्चू नर नइ हु अन्तकाले । न तस्म माया न पियार भाया, कालम्मि तम्मसहरा भवन्ति ।। २२ ।। न तस्स टुक्स विभयति, नाइओ, न मित्तनग्गा न सुया न बवा । एको सय पचणुहो- दुक्स, कत्तारमेन अणुजाइ क्म्म ॥ २३ ।। चेचा दुपय च चप्पय च, सेत्त गिह धणधन च सत्र । सफम्मबीओ असो पयाइ, पर भर सुदर पारग वा ॥ २४ ॥ त एक तुच्छसरीरंग से, चिदगय दहिय उ पावगेण | भज्जा य पुत्तावि य नायओ य, दायरमन्न अणुसकमन्ति ॥ २५ ॥ उपणिजइ जीवियमप्पमाय चण्ण जग हरइ नरस्म राय । पचालराया रयण सुणाहि मा कामि क्म्मार महालयाइ ॥ २६ ॥ अह पि जाणामि जहह साहू ज मे तुम साहप्ति रकमेय । भोगा इमे सगरा गन्ति, जे दुनया अनो अम्हारिसेहिं ।। २७ ॥ हत्थिणपुरम्मि चित्ता दट्टण नरसइ महिड्ढीय । कामभोगेसु गिद्धेण, नियाणमसुह कड ।। २८॥ म जपडियन्तस्स, एयारिस जाणमाणो वि ज धम्म, कामभोगेसु मुडिओ ॥ २९ ॥ नागो जहा परजलापसनो, दट्ठ थल नाभिसमइ तीर । एव वय कामगुणेसु गिद्धा, न भिक्खुणो मग्गमणु पयामो ॥ ३० ॥ अचेड कालो तरन्ति राइओ, न यावि भोगा पुरिमाण निचा । तस्स --

श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-निंदशमध्ययनम्
(२१)
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उपिञ्च भोगापुरिस चयन्ति, दुम जहा सीणफल व पक्सी ॥ ३१ ॥
जड त मि भोगे चडउ जसत्तो, जजाड कम्माद करहि राय ।
वम्मे ठिओ मवपयाणुपम्पी, तो होहिसि देवो इजो विउच्ची ॥ ३२ ॥
न तुझ भोगे चइऊण बुद्धी, गिद्धो सि जारभ्भपरिग्गहसु ।
मोह कओ एत्तिउ पिप्पलाउ, ग छामि राय आनन्तिओ मि ॥ ३३ ॥
पचालराया कि य बम्भदृत्तो, साहुस्म तस्म वयण अफाउ ।
अणुत्तर भुजिय कामभोमे, अणुत्तर सो नरए पविट्ठो ॥ ३४ ॥
चित्तो रिकामेहि रित्तकामो, अढग्गचारित्तनो महसी ।
अणुत्तर सजम पालइत्ता, अणुत्तर सिद्धिगड गओ ॥ ३५ ।।
त्ति बेमि ॥ इअ चित्तसम्भूहन्न समत्त ।।
॥ अह उसुयारिज चोदहम अज्झयण ॥
दया भवित्ताण पुर भवम्मी, केइ चूया एगविमाणवासी ।
पुरे पुराणे उसुयारनामे, साए समिद्धे सुरलोगरम्मे ॥१॥
सकम्मसेसेण पुराकएण, कुलेसुदग्गेसु य ते पस्या ।
निधिण्णससारभया जहाय, जिणिदमग्ग सरण पचना ॥२॥
पुमत्तमागम्म कुमार दो वी, पुरोहिओ तस्म जसा य पत्ती ।
विसालकित्ती य तहोसुयारो, रायत्थ देवी कमलापइ य ॥ ३ ॥
जाइजरामन्चुभयाभिभूया, नहिविहाराभिनिविद्वचित्ता ।
समारचकरस विमोक्सणट्टा, दट्टण ते कामगुणे विरत्ता ॥ ४ ॥
पियपुत्तगा दोन्नि वि माहणस्म, मकम्मसीलस्स पुरोहियस्म ।
सरित्तु पोराणिय तत्थ जाइ, तहा भुचिण्ण तयसजम च ॥ ५ ॥
ते कामभोगेसु असज्नमाणा, जाणुस्सएम जे यावि दिव्वा ।
मोरखाभिकसी अभिजायसड्ढा, ताय उवागम्म इम उदाहु ॥ ६॥
अमामय दछ इस विहार, बहुअन्तराय न य हीयमाउ ।
तम्हा गिहिसि न रह लहामो, आमन्तयामो चरिम्मामु मोण ॥ ७ ॥
अह तायगो तत्य मुणीण तसि, तपस्स वाघायकर वयासी ।
इम वय वेयविओ वयन्ति, जहा न होद अनुयाण लोगो ॥ ८॥
अहिज्ज वेए परिविस्म विप्प, पुत्ते परिठ्ठप्प गिहसि जाया ।
भोचाण भोए सह इत्थियाहि, आरण्णगा होह मुणो पसत्या ॥२॥
सोयरिंगणा आयगुणि धणेण, मोहाणिला पन्जलणाहिएण |
सवचभार परितप्पमाण, लालप्पमाण बहहा बहु च ॥ १० ॥

(२२) श्रीजैनसिद्धात-स्वाध्यायमाला पुरोहिय त कमसोऽणुणिन्त, निमतयन्त च सुए धणेण । जहक्म कामगुणेहि चेर, कुमारगा ते पसमिक्स चक्क ॥ २१ ॥ या अहीयान भान्ति ताण, भुत्ता दिया निन्ति तम तमेण । जाया य पुत्तान हवन्ति ताण, को णाम ते अणुमन्नन एय ॥ १० ॥ खणमेत्तसोक्खा बहुकालदुक्सा,पगामदुक्या अणिगाममोवा। ससारमोक्खस्स विपक्सभूया,साणी अणस्थाण उ कामभोगा ॥ १३ ॥ परिव्यय ते अणियत्तमामे, अहो य राओ परितप्पमाणे । अन्नप्पमत्ते धणमेसमाणे, पप्पोति मन्चु पुरिसे जर च ॥ १४ ॥ इम च मे अस्थि इम चनत्थि, इम च मे फिच इम अकिच । त एवमेय लालप्पमाण, हरा हरति ति कह पमाए ॥ १५ ॥ धण पभूय सह इस्थियाहि, सयणा तहा कायगुणा पगामा । तव कए तप्पइ जस्म लोगो, त सब साहीणमिमे तुम्भ ।। १६ ॥ धणेण किं धम्मधुराहिगारे, सयणेण वा कामगुणेहि चेर । समणा भविस्सामुगुणोहवारी,महिमवहारा मभिगम्मभिक्स ॥ १७ ॥ जहा य अग्गी अरणी असतो, सीरे घय तल्लमहा तिलेसु । एमेव ताया सरीरसि सत्ता, समुन्छइ नासह नारचिट्ठ ॥ १८ ॥ नो इन्दियग्गेज्झत्तमुत्तभाना अमुत्तभावापि य होइ निचो। अज्झत्थहेउ निययस्स अन्धो, समारहेउ च वयन्ति ब ध ॥ १९ ॥ जहा वय धम्म अजाणमाणा, पाव पुरा कम्ममकासि मोहा । ओलभमाणा परिरक्खयन्ता, त नेर भुजो नि समायरामो ॥ २० ॥ अन्भायम्मि लोगम्मि, सचओ परिवारिए। अमोहाहिं पडन्तीहि, गिहसि न रड लभे ।। २१ ।। केण अब्भाहओ लोगो कण वा परिमारिओ। का वा अमोहा वुत्ता, जाया चि तारो हुमे ॥ २२॥ मच्चुणाभाहओ लोगो, परिवारिओ। अमोहा रयणी कुत्ता, एप ताय विजाणह ।। २३ ॥ जा वचइ रयणी, न सा पडिनियत्तई। अहम्म कुणमाणस्स, अफला जन्ति सइओ ॥ २४ ॥ जा वच्चइ न सा पडिनियतई। धम्म च कुणमाणस्प, मफला जन्ति राइओ ॥२॥ एगओ समसित्ताण, दुइओ सम्मत्तसजुया । पच्छा जाया गमिम्मामो, भिक्समाणा कुले कुले ॥ २६ ॥ जस्तस्थि म चुगा सक्स, जस्त चस्थि पलायण । जरा जा रयणी, श्रीउत्तराभ्ययनसूत्र-चौद्दमाध्ययनम् (२३) णो जाणे न मरिस्मामि, सो हु कसे सुप सिया ॥ २७ ॥ अजेय धम्म पडिवनयामो, जहिं परना न पुणब्भवामो । अणागय ने य अस्थि किची, सद्धासम णे विणइत्तु राग ॥ २८ ॥ पहीणपुत्तस्म हुनस्थि वामो,नासिटिभिक्सायरियाड कालो। माहाहि रुक्सो हई समाहि, छिन्नाहि माहाहि तमेव ठाणु ॥ २९ ॥ पसाविहूणो धजत पक्सी, भिचविहूणो व्य रणे नरि दो। विवन्नमारो वणिओ व्य पोए, पहीणपुत्तो मि तही अहपि ॥ ३० ॥ सुसमिया कामगुणे मे ते, सपिण्डिया अग्गरमप्पभूया । भुजाम ता कामगुणे पगाम, पच्छा गमिस्मामु पहाणमग्ग ॥ ३१ ।। भुत्ता रसाभोड जहाड णे वओ न जीवियट्ठा पजहामि भोए । लाभ अलाभ चसुह च दुक्स,सचिस्समाणो चरिस्सामि मोण ॥३२॥ माहू नम मौयरियाण सम्भरे, जुणो व हमो पडिसोत्तगामी । भुजाहि भोगाट मए समाण, दुक्स खुभिकमायरियाविहारो ॥ ३३ ॥ जहा य भोद तणुय भुयगो, निम्मोयणि हिच्च पलेइ मुत्तो। एमेए जाया पयहन्ति भोए, ते ह कह नाणुगमिम्ममेको ।। ३४ ॥ छिन्दित्तु जाल मल र रोहिया, मच्छा जहा कामगुणे पहाय । योरेयसीला तरसा उदारा, पीरा हु भिक्साचरिय चरन्ति ॥ ३५ ॥ नदेव कुचा सयइक्कमन्ता तयाणि जालाणि दलित्त हसा । पलेति पुत्ता य पइ य मज्झ, ते ह कह नाणुगमिस्ममेक्का ॥ ३६ ॥ पुरोहिय त समय मदार, सोचाऽभिनिरसम्म पहाय भोए । कुइम्बमार विउठत्तम च, राय, अभिम समुदाय वी ॥ ७ ॥ वन्तासी पुरिमो राय, सो हो- पममिजो। माहणेण आटाउमिच्छसि ॥ ३८॥ सब जग जइ तुह, भव। सध पिते अपनत्त, नेर ताणाय त तर ॥ ३९ ॥ मरिहिसि राय जया तया वा, मणोरमे कामगुणे विहाय । पक्को धम्मो नरदर ताण न विल्लई अनमिहेह किंचि ॥४०॥ नाह ग्मे पक्पिणि पनरे पा, सताणछिन्ना चरिस्मामि मोण । अकि नगा उज्नुफ्डा निगमिमा, परिगहारम्भनियत्तदोमा ॥ ११ ॥ दररिंगणा जहा रण्यो, दयमाणेमु जन्तुम् । अन्ने मत्ता पमोयन्ति, गगद्दोमवस गया ॥ ४ ॥ एपमेन पय मूढा, फापभोगेसु मुच्छिया । टज्यमाण न युल्झामो, रागद्दोमग्गिणा जग ॥ ४ ॥ भोगे मोचा यमिता य, रद्दुभूयविहारिणो। आमोयमाणा गच्छति, दिया समकमा इव ॥ ४॥ इमे य बद्धा फन्दन्नि, मम हथनमागया। वय च मत्ता कामेसु, भविम्मामो जहा इमे ॥ ४५ ॥ परिचत्त, धण सब वावि पण (२१) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला सामिस कुलल दिस्स, बज्झमाण निरामिस । आमिस सव्यमुज्झिता, विहरिस्सामि निरामिसा ॥ ६ ॥ गिद्धोपमा उ नचाण, कामे ससारवड्डणे । उरगो सुअण्णपासे व्य, सरमाणो तणु चरे ॥ ४७ ॥ नागो व्य व धण छित्ता, अप्पणो वमहिं गए । एय पछ महागय, उस्सुयारि त्ति मे सुय ।। ४८ ॥ चइत्ता विउल रज्ज, कामभोगे य दुच्चए । निधिमय निरामिमा, निन्ने निप्परिग्गहा ॥ १९ ॥ धम्म धम्म वियाणित्ता, चेचा कामगुणे बरे । तव पगिज्झहक्साय, घोर घोरपरवमा ॥ ५० ॥ एव ते कमसो बुद्धा, सव्व धम्मपरायणा । जम्ममन्चुभउधिग्गा, दुक्सस्म तमवेसिणो ॥ ५१ ॥ सासणे विगयमोहाण, पुनि भावणभारिया । अचिरणेन कालेण, दुक्पस्सन्तमुवागया ॥ ५२ ॥ राया सह दवीए, माहणो य पुरोहिओ। माहणी दारगा चेव मन्च ते परिनिव्वुड ॥ ५३ ।। त्ति बेमि ।। इअ उसुयारिज समत्त ॥ १४ ॥ ॥ अह सभिक्खू पचदह अज्झयण ॥ मोण चरिस्सामि समिच धम्म, सहिए उज्जुकडे नियाणछिन्ने । सथर अहिज अझामकामे, अन्नायएसी परिपए स भिक्खू ॥१॥ राओवरय चरेज लाढे, विरए वेयरियायरक्खिए । पन्ने अभिभूय सम्बदसी जे, कम्हिचि न मुच्छिए स भिक्खू ॥२॥ अकोसरह मिइत्तु धीरे, मुणी चरे लाढे निच्चमायभुत्ते । अवग्गमणे असपहिढे, जे कसिण अहियासए स भिक्खु ॥ ३ ॥ पत सयगासण भइत्ता, सीउण्ह विविह च दसमसग । अवग्गमणे असपहिढे, जे कसिण अहियासए स भिक्सू ॥ ४॥ नो सकइमिन्छई न पूय, नो नि य व दणग कुओ पसस । से सजए सुपए तरस्सी, सहिए आयगवेसए स भिक्ग्यू ॥ ५ ॥ जेण पुण जहाइ जीविय, मोह वा कसिण नियच्छई। नरनारिं पजहे सया तबस्सी, न य कोऊहल उवेइ स भिक्ख ॥ ६ ॥ छिन्न सर भोमन्तलिक्ख, सुमिण लक्सणदण्डवत्युविज । अगवियार सरस्स विजय, जे विजाहि न जीवइ स भिक्खू ॥७॥ मन्त मूल विविह वेञ्जचित, वमणविरेयण धूमणेत्तसिणाण । आउरे सरण तिगिच्छिय च, त परिन्नाय परिवए स भिक्खू ॥८॥ सत्तियगणउग्गरायपुचा, माहणभोइय विविहा य सिप्पिणो । नो तेसिं चयइ सिलोगपूय, त परिनाय परि वए स भिक्खू ॥९॥ गिहिणो जे पडएण दिट्ठा, अप्परहएण व सयुया हविजा । तेसिं इयलोइयफलट्ठा, जो सथव न करेइ स भिक्खू ॥१०॥ सयणासणपाणभोयण, विविह साइमसाइम परेसिं।

(२५) wwwve ArAAN श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-पचदशमध्ययनम् अदए पडिसेहिए नियण्ठे, जे तत्य न पउस्सई स भिक्खू ॥ ११ ॥ ज किंचि आहारपाणजाय, विविह साडममाइम परेसिं लध्धु । जो त तिविहेण नाणुकम्पे, मणत्रयकायसुसवुडे स मिक्खु ॥ १२ ॥ आयामग चेव जबोदण च, सीय सोवीरजयोदग च। न हीलए पिण्ड नीरस तु, पन्तकुलाइ परिव्यए स मिक्ख् ॥ १३ ॥ सद्दा विविहा भवन्ति लोए, दिधा माणुस्मगा तिरिच्छा । भीमा भयमेरवा उराला, सोचा न विहिजई स मिक्खू ॥ १४॥ वाद विविह ममिचलोए, सहिए खेयाणुसए य कोवियप्पा । पन्ने अभिभूय सहदसी, उवसन्ते अविहेडि स भिक्ख् ॥ १५ ॥ अविसप्पजीवी अगिहे अमित्ते, जिइन्दिए मवओ विप्पमुक्के । अणुक्कसाई लहुअप्पभक्खी, चेच्चा गिह एगचरे स भिक्खू ॥ १६ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ सभिक्खुय समत्त ॥ १५ ॥ . ॥ अह बम्भचेरसमाहिठाणाणाम सोलसम अज्झयण ॥ मुय मे आउस-तेण भगया एवमक्खाय । इह खलु थेरहिं भगवन्नेहिं दम बम्भचेरसमाहिठाणा पन्नत्ता, जे भिक्खू सोचा निसम्म सजमबहुले समरबहुले ममाहिबहुले गुत्ते गुत्तिन्दिए गुतवम्भ- यारी मया अप्पमत्ते निहरजा । कयरे खलु ते थेरहिं भगव तेहिं दस पम्भचेरसमाहिठाणा पन्नाचा, जे भिक्खू सोचा निसम्म सजमवहूले समाहिबहूले गुत्ते गुत्तिन्दिए गुत्तवम्भयारी मया अप्पमचे विहरखा ॥ इमे खलु ते येरहिं भगव तेहिं दम वम्भचेरठाणा पन्नता, जे भिक्खू सोचा निसम्म सजमबहुले सवरचहुले समाहिबहुले गुत्त गुत्तिन्दिए गुत्तबम्भयारी सया अप्पमत्त विहरेजा नजहा विविचाइ सयणासणाइ सेरित्ता हवइ से निग्ग थे। नो इत्वीपसुपण्डगसमत्ताइ सयणामणाइ सेवित्ता हबह से निग्गन्थे । त सहमिति चे । आयरियाह । निग्गन्थस्स खलु इत्थिपसुपण्डगससत्ताइ सय- पासणाइ सेवमाणस्म बम्भयारिस्स उम्भचेरे सका गा कसा वा पिडगिच्छा पा समुप्पजिजा, भेद वा लभेजा, उम्माय वा पाउणिञ्जा, दीलकालिय वा रोगायक हवेजा, केलिपन्नचाओ धम्माओ भसेज । तम्हा नो इत्थिपमुषण्डगममत्ताइ सयणापणाइ सेनित्ता हवइ से निग्गन्थे ॥ १॥नो इथिण कह कहित्ता हर से निग्गन्थे । त कहमिति चे आयरियाह । निम्मथस्म सलु इत्तीण कह कहेमाणस्म कम्भयारिस्म बम्भचेर मका वा कमा वा विडग छाना ममुप्पजिजा, मेद वा लभेजा, उम्माय वा पाउणिजा, दीहकालिया रोगायक हवेना केरलिपनत्ताओ धम्माओ भ- सज्जा । तम्हा नो इत्थीण कह कहना ॥ २ ॥ नो इत्थीग सद्धि मन्निसेजागए विहरित्ता हवा से निग्गन्थे । त कहमिति चे । आयरियाह। निग्ग यस्म सलु इत्थी सद्धि मन्निसेन्नागयम्म पम्मपारिस्स चम्मचेरे ममा वा कखा वा निइगिन्छा ना ममुप्पजिला, भेद वा लमेला उम्माय वा पाउणिज्जा, दीहकारिय वा रोगायक हवेना, कालिपन्नत्ताओ धम्माओ मसला । तम्हा सल श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला नो निग्गथे इत्थीहिं सद्धिं सबिसेन्जागए विहरेजा ।।३॥ नो इत्थीण इन्दियाइ मणोहराइ मणो- रमाइ आलोइत्ता निज्झाइत्ता हचह से निग्ग थे। त कहमिति चे आयरियाह । निग्गन्थस्स बलु इत्थीण इन्दियाइ मणोहराइ मणोरमाइ आलोएमाणस्स निज्झायमाणस्स यम्भयारिस्म बम्भचेरे सका वा कखा वा विइगिच्छा वा समुप्पजिजा, भेद ना लभेजा, उम्माय वा पाउणिजा, दीह- कालिय वा रोगायक हवेजा, केवलिपन्नताओ धम्माओ भसेजा । तम्हा खलु नो निग्गन्थे इत्थीण इन्दियाइ मणोराइ मगोरमाइ आलोएन्ज निज्झाएजा ॥ ४ ॥ नो इत्थीण वुड्डु तरसि वा दूस न्तरसि वा भित्तन्तरसि वा कूइयसद्द वा रइयसद्द वा गीयसद्द वा इसियसद्द वा थणियसद्द वा कन्दियमद्द वा रिलवियमद्द वा सुणेत्ता हवड से निग्गन्थे । त कहमिति चे । आयरियाह । निग्ग- न्थस्म सल इत्थीण कुडन्तरसि व दूसन्तरसि वा मित्तन्तरसि या कू'यसद्द वा रुझ्यसद्द वा गीयसद्द वा हसियसद्द वा थणियसद्द ना कन्दियमद्दवा विलवियसद्द वा सुणेमाणस्स बम्भयारिस्स बम्भचेरे सका वा कखा या विइगि छा वा समुप्पजिजा, भेद वा लभेजा, उम्माय वा पाउणिजा, दीहका लिय वा रोगायक हवेजा केवलिपन्नताओ धम्माओ भसेजा । तम्हा सलु नो निग्गथे इत्थीण कुडुतरसि वा दूसन्तरसि वा भित्तन्तरसि मा कूइयसद्द वा रइयसद्द वा गीयसद्द ना हसियमद्द वा थणियसद्द वा कन्दियसद्द वा विलवियसद्द वा सुलेमाणे विहरेजा ॥ ५॥ नो निग्गन्थे पुष्वरय पुवकीलिय अणुसरित्ता हवइ से निग्गन्ये त कहमिति चे । आयरियाह । निग्ग थस्स खलु पुवरय पुवकीलिय अणुमरमाणस्म यम्भयारिस्त बम्भचेरे सका वा कसा वा विइगिच्छा वा समुप्पजिजा, भेद वा लभेजा, उम्माय वा पाउणिजा, दीडकालिय वा रोगायक हवेजा, केलिपन्नत्ताओ यम्मा' ओ भसेजा । तम्हा सतु नो निग्गण्थे पुवरय पुत्वकीलिय अणुसरेजा ॥ ६॥ नो पणीय जाहार आहरित्ता हवइ से निग्गन्थे । त रहमिति चे । आयरियाह । निग्गन्थम्स खलु पणीय आहार आहारेमाणस्स यम्भयारिस्म यम्भचेरे ममा ना कसा वा विइगिच्छा वा समुप्पजिजा, भेद वा लभेजा उम्माय ना पाउणिजा, दीहकालिय मा रोगायक हवेजा, केवलिपन्नत्ताओ यम्माओ भसेज्जा । तम्हा सलु नो निग्गन्ये पणीय आहार आहारेजा ॥ ७ । नो अइमायाए पाणभोयण आहारत्ता हाई से निग्गन्थे । त कहमिति चे । आयरियाह । निग्गन्थस्स खलु अ मायाए पाण भोयण आहारेमाणस्स बम्भयारिस्म यम्भचेरे सका ना करवा वा विइगिच्छा वा ममुपजिजा, भेद वा लभेजा, उम्माय वा पाउणिज्जा, दीलकालिय पा रोगायक हवेजा, केलिपन्नत्ताओ धम्माओ भसेजा । तम्हा सत्र नो निग्गथे अइमायाए पाणभोयण आहारेज्जा ।। ८ । नो विभू साणुवादी हवइ से निग्गन्थे । त कहमिति चे आयरियाह । विभूसावत्तिए विभूसियसरीरे इस्थि" जणस्स अमिलसणिजे हवइ तओ ण इत्थिजणेण अमिलसिनमाणस्स बम्भचेर सफा वा क्खा वा विइगिच्छा वा ममुप्पजिजा, भेद वा लभेजा, उम्माय वा पाउणिज्जा, दीहकालिय वा रोगायक हवेजा, केवलिपन्नत्ताओ धम्माओ भसेज्जा । तम्हा सलु नो निग्गथे विभूसाणुवादी हविजा ॥ ६ ॥ नो सहरूपरसगन्धफामाणुवादी हाइ से निग्गन्थ | त कहामिति चे । आयरियाह । निग न्थस्स खलु सहरूवगन्धफासाणुवादिस्स बम्भयारिस्म यम्भचेरे सा या कसा वा विइगिच्छा का समुप्पजिन्ना, भेद वा लभेना, उम्माय वा पाउणिज्जा, दीहकालिय वा रोगायक हवेजा, केव -- श्रीउत्तराययनसूत्र-सोलमाध्ययनम् (२७) लिपन्नत्ताओ धम्माओ भसेजा। तम्हा खलु नो मद्दरूपरमगन्धकामाणुनादी भनेजा मे निग्गन्थे । दसमे बम्भचेरममाहिठाणे हाइ ।। १० । भान्ति इत्थ सिलोगा तजहा- ज विवित्तमणाइण, रहिय इथि जणेण य यम्भचेरम रक्सट्ठा, आलय तु निसए ॥ १ ॥ मणपल्हायजणणी, कामरागविनवणी । कामरागविवड्डणी। बम्भचेररओ भिक्खू, थोकह तु विवजए ॥ २॥ सम च सथव गीहि, सरह च अभिक्सण । नम्भचेररओ भिक्खू, निचसो परिवजए ॥ ३ ॥ अगपञ्चगमठाण, चारल्लवियपेहिय । उम्भचेररओ थीण, चक्खुगिज्झ विवजए ॥ ४॥ कुडय म्इय गीय, हसिय यणियफन्दिय । सम्भचेररओ थीण, सोयगेज्झ विरजए ॥५॥ हास किड रइ दप्प, सहमावित्तासियाणि य । बम्भचेररओ थीण नाणुचिन्ते कयाइ वि ॥ ६ ॥ पणीय भत्तपाण तु, सिप्प मयवित्रड्डण । बम्भचेररओ भिक्खू, निचसो परिवज ॥७॥ धम्मलद्ध मिय काले, जत्तत्थ पणिहाणय । नाइमत्त तु भुनेजा, सम्भचेररओ मया ॥ ८॥ विभूस परिनन्जेजा, मरीरपरिमण्डण । वम्भचेररओ भिक्खू, सिंगारत्थ न धारए । सद्दे रूवे य गधे य, रसे फासे तहवय । पचविहे कामगुणे, निश्चमो परिवजए ॥१०॥ आलओ थीजणा ण्णो, थीम्हा य मणोरमा । मथयो चेत्र नारीण, तासि इन्दियदरिमण ॥ ११ ॥ कूइय स्इय गीय, हासभुत्तामियाणि य । पणीय भत्तपाण च, अडमाय पाणभोयण ॥ १२ ॥ गत्तभूसणमिट्ठ च, कामभोगा य दुनया | नरस्सत्तगवेसिस्स, विस तालउड जहा ॥ ३ ॥ दुजए कामभोगे य, निश्चमो परिवज्जए । सकाथाणाणि सवाणि, वजेजा पणिहाणच ॥ १४ ॥ धम्मारामरते चरे भिक्खू, धिइम यम्मसारही । धम्मारामरते द ते, चम्मचेरममाहिए ॥ १५ ॥ देवटाणवगन्धवा, जक्सरक्ससकिन्नरा । घम्भयारिं नमसन्ति, दुक्र जे रन्ति त ॥ १६ ॥ पास धम्मे धुवे निचे, मामए जिणदसिए । सिद्धा सिज्झन्ति चाणेण, सिज्झिस्सन्ति तहापरे ॥ १७ ॥ त्ति बेमि ।। दअ उम्भचेरममाहिठाणा ममत्ता ॥ १६ ॥ ॥ ॥ अह पावसमणिज्ज सत्तदह अज्झयण ॥ जे के उ पञ्चहए नियण्ठ, धम्म सुणिचा विणओनरन्ने । सुदुल्लह लहिउ चोहिलाभ, विहरेज पच्छा य जहासुह तु ॥१॥ मेञ्जा दढा पारणम्मि अत्थि, उप्पज्जइ भोत्तु तहव पाउ । जाणामि ज वइ आउसु त्ति, कि नाम कहामि मृएण भन्ते ॥२॥ जे केई पदइए, निहामीले पगाममो । भोचा पेचा मुह सुबड पारसमणि त्ति युचई ॥३॥ आयरियउवज्झहि मुय विणय च गाहिए । ते चेन सिंमई गाले, पावसमणि त्ति बुचई ॥ ४ ॥ आयरियउवज्झायाण, सम्म न पडितप्पइ । अप्पडिपूगए थद्धे पापममणि ति बुचई ॥५॥ सम्महमाणो पाणाणि, वीयाणि हरियाणि य । असजए मनयमनमाणी, पारसमणि चि बुच्चई ।। सथार फलग पीढ, निसन्न पायकम्पल । अप्पमञ्जियमारहइ, पारसमणि ति युश्चई ॥७॥ दवटवस्स चरई, पमत्ते य अमिक्वण । उल्लपणे य चण्डे य, पावममणि ति चुचई ॥८॥ .

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(२८)
श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला
पडिलहेड पमत्ते, पउज्झइ पायकम्बल । पडिरेहा अणाउत्ते, पावममणि ति बुचई ॥ ९ ॥
पडिलेहेइ पमत्ते, से किंचि हु निसामिया । गुरुपारिभावए निच्च, पावममणि त्ति वुचई ॥१०॥
बहुमाई पमुहरे, थद्धे लुद्ध अणिग्गहे। असविभागी अपियत्ते, पावममणि ति बुचई ॥ ११ ॥
विवाद च डदीरेइ, अहम्मे अत्तपन्नहा । चुग्गहे कलहे रत्ते, पावममणि त्ति कुचई ॥ १२ ॥
अथिरासणे कुकुइए, जत्थ त थ निसीयई । आसणम्मि अणाउत्ते, पावसमणि त्ति वुचई ॥ १३ ॥
तसक्सपाए सुबई, सेज न पडिलेहइ । सथारए अणाउत्ते, पावममणि ति वुचई ॥ १४ ।।
दुद्धदहीविगईओ, आहारेइ अमिक्खण । अरए य तोक्म्मे, पावसमणि ति दुचई ॥ १५ ॥
अत्यन्तम्मि य सूरम्मि आहारेइ अमिक्खण। चोइओ गडिचोएइ, पावसमणि त्ति वुच्चई ॥ १६ ॥
आयरियपरिचाई, परपासण्डसमए । गाणगणिए दृम्भूए, पावसमणि ति बुचई ॥ १७ ॥
सप गेह परिचन्ज, परगेहसि वावरे । निमित्तेण य चवहरइ, पावममणि त्ति वुचई ॥ १८ ॥
समाइ पिण्ड जेमेड, नेच्छई सामुदाणिय । गिहिनिसेज च वाहेइ, पावसमणि त्ति वुचई ।। १९ ।।
एयारिमे पचकुसीलसुवुडे, रूपधरे मुणिपरराण हेडिमे ।
अयसि लोए विसमेव गरहिए, न से इह नेव परत्थ लो ॥ २० ॥
जे वजए एए सया उ दोसे, से सुबए होइ मुणीण मज्झे ।
अयसि लोए अमय व पूहए, आराहए लोमिण तहा पर ॥२१॥
॥ ति बेमि ॥ इअ पावसमणिज समत्त ॥ १७ ॥
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॥ अह सजइज्ज अढारहम अज्झयण ॥
कम्पिल्ले नपरे राया, उदिण्णबलगाहणे । नामेण मजए नाम, मिगत उचणिग्गए ॥१॥
याणीए गयाणीए, रयाणीए तहेव य। पायताणीए महया, सबओ परिवारिए ॥२॥
मिए छुहित्वा हयगओ, कम्पिल्लुजाण केसरे । भीए सन्ते मिए तत्थ, वहेइ रसमुच्छिए ॥३॥
बह केसरम्मि उजाणे, अणगारे तवोधणे । सहायज्झाणसजुत्ते, धम्मज्झाण झियापइ ॥ ४ ॥
अफोवमण्डवम्मि, भायइ क्खवियामवे। तस्मागए मिग पास बहेइ से नराहिवे ॥५॥
अह आसगो राया, खिप्पमागम्म सो तहि। हए मिए उ पासित्ता अणगार तत्थ पासई ॥६॥
अह राया तत्थ मम्भन्तो, अणगारो मगा हओ । मए उ म दपुण्गेण, रमगिद्धण धानुगा ॥ ७ ॥
आस विसज्जइत्ताण, अणगारस्स सो नियो । विगएण व दए पाए भगव एत्य मे खमे । ८॥
अह मोणेण सो भग्गन, अणगारे झाणमस्सिए । रायाण न पडिम तेइ, तओ राया भवदुओ॥९॥
सनओ आहमम्मीति, भगा वाहराहि मे । कुद्धे तेएण अणगारे, डहेज नरकोडिओ ॥ १० ॥
अभओपत्थिवा तुम्भ, अभयदाया मवाहि या अणिचेजीनलोगम्मि, किं हिमाए पमजसी ॥ ११ ॥
जया सब परिचन्न, गन्तवमवसस्म ते । अणिच्चेजीवलोगम्मि, कि रजम्मि पसज्जसी ॥ १२ ॥
जीविय चेव रूप च, विज्जुसपाय चचल । जत्य त मुज्झसी राय पेचत्य नावुवुझसे ॥ १३ ॥
दाराणि य सुया चेव, मित्ता य तह बन्धवा । जीपन्तमणुजीवन्ति, मय नाणुदयन्ति य ॥ १४ ॥

. . श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-अट्ठदशमाध्ययनम् नीहरन्ति मय पुत्ता, पितर परमदुक्खिया । पितरो वि तहा पुत्ते, बन्धू राय तव चरे ।। १५॥ तओ तेणजिए दवे, दारे य परिरक्खिए। कीलन्तिज्ने नरा राय, हहतुट्ठमलकिया ॥ १६ ॥ तेणावि ज कय कम्म, सुह वा जइ वा दुह । कम्मुणा तेण सजुत्तो, गच्छई उ पर भव ॥ १७॥ सोजण तस्स सो धम्म, अणगारस्म अन्तिए । महया सवेगनिवेद, समावन्नो नराहिनो ॥ १८॥ सजओ चइउ रज, निक्ख तो जिणसासणे । गद्दभालिस्स भगवओ, अणगारस्म अन्तिए ॥ १९ ॥ चिच्चा रट्ट पवइए, खत्तिए परिभासइ । जहा ते दीसई रूव, पसन्न ते महा मणो । २० ॥ किं नामे कि गोत्त, कस्सट्ठाए व माहणे। कह पडियरसी युद्धे, कह विणीए ति बुचसी ॥ २१ ॥ सजओ नाम नामेण, तहा गोचेण गोयमो । गद्दभाली ममायरिया विजाचरणपारगा ।। २२ ॥ किरिय अकिरिय विणय, णन्नाण च महामुणी। एएहिं चउहि ठाणेहिं, मेयन्ने कि पभामई ॥ २३ ॥ इइ पाउकर उद्धे, नायए परिणियुए। विजाचरणसपन्ने, सच्चे मञ्चपरक्कमे ॥ २४ ॥ पडन्ति नरए घोरे, जे नरा पानकारिणो । दिव च गइ गच्छन्ति, चरित्ता धम्ममारिय ॥ २५ ॥ मायावुइयभेय तु, मुसाभासा निरस्थिया । सजममाणो वि अह, वमामि इरियामि य ।। २६ ।। सवेए विइय मज्झ, मिच्छादिट्ठी अणारिया। विजमाणे परे रोग, मम्म जाणामि अप्पग ॥ २७ ॥ अहसासि महापाणे, जुइम परिससओवमे । जा सा पालिमहापाली, दिवा वरिमसओनमा ॥ २८ ॥ से घुए वम्भलोगाओ, माणुस्स भरमागए । अप्पणो य परेसिं च, आउ जाणे जहा तहा ॥ २९ ॥ नाणारड च छन्द च, परिवजेज सजए । अणट्ठा जे य सहत्या, इयविजामणुसचरे ॥ ३० ॥ पडिक्मामि पसिणाण परमतहिं पा पुणो। अहो वहिए अहोराय, इइ विजा तव चरे ॥ ३१ ॥ ज च मे पुच्छसी काले, सम सुद्धेण चेयसा । ताइ पाउकरे बुद्धे त नाण जिणसासणे ॥ ३२ ॥ किरिय च रोयई धीर, अकिरिय परिवजए। दिट्ठीए दिट्ठीसम्पन्ने, धम्म चरसु दश्चर ॥ ३३ ॥ पय पुण्णपय सोचा, अत्थधम्मोवमोहिय । भरहो वि भारह वास, चेचा कामाइ पवए ।॥ ३४ ॥ सगरो वि सागरन्त, भरहवास नराहिनो । इस्मरिय काल हिचा, दयाह परिनिगुडे ॥ ३५ ॥ चहत्ता भारह वास, चवपट्टी महिड्डिओ। पवनमब्भुनगओ, मघर नाम महाउसो ॥३६ ।। सणकुमारो मणुस्मिन्दो चक्कपट्टी महिड्डिओ। पुत्त रज्जे ठवेऊण, सो वि राया तव चरे ॥ ३७ ।। चइत्ता भारह वास, चक्वरी महिडिओ। सन्ती सन्तिकर लोए, पत्तो गइमणुत्तर ॥ ३८ ॥ इक्सागरायवसभो, कुथ नाम नरिसरो। विक्सायक्त्तिी भगर पत्तो गइमणुत्तर ॥ ३९ ॥ मागरन्त चइनाण, भरह नरवरीसरो। अरो य अरय पत्तो, पत्तो गइमणुत्तर ॥ ४० ॥ चइत्ता भारह पास, चइत्ता बलपाहण | चइत्ता उत्तमे भोग महापग्मे तर चरे ॥४१॥ एगच्छत्त पमाहिता, महिं माणनिमूग्णो । हरिसेणो ममुस्मिदो, पत्तो गइमणुत्तर ॥ ४२ ॥ अनिओ रायमहस्सेहिं सुपरिचाई, दम चर। जयनामो जिणक्साय, पत्तो गइमणुत्तर ॥ ४३ ।। दमण्णरज्न मुदिय चहत्ताण मुणी चर । दसण्णभद्दो निक्ग्य तो, सम्स मक्कण चोग्ओ॥४४॥ नमी नमेइ अप्पाण, मक्स मक्केण चोइओ। चइऊण गेह पडदेही, मामण्णे पज्जुपट्टिओ ।। ४५ ॥ करकण्ड कलिंगेसु, पचालेस य दुम्मुहो। नमी राया वीदहसु, गन्धारेसु य नगई ।। ४६ ॥ एए नरिन्दवसभा, निक्स ता तिणमामणे । पुत्ते रज ठवेण, मामण्णे पज्जुट्टिया ॥ ४॥ . .

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श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला
सोवीररायवसभो, चइत्ताण मुणी चर। उदायणो पवइओ, पत्तो गइमणुत्तर ॥ १८ ॥
तहेव कासीराया, सेभोसचपरकमे। मामभोगे परिचज, पहणे कम्ममहावण ॥ ४९ ।।
तहेर विजओ राया, अणढाकित्ति पवए । रज्ज तु गुणसमिद्ध, पयहित्तु महाजसो ॥ ५० ॥
वहेवुग्ग तव किचा, अवक्खित्तेण चेयसा । महब्बलो रायरिसी, आदाय सिरसा सिरिं ॥ ५१ ॥
कह धीरो अहेऊहिं, उम्मत्तो व महिं चरे । एए विसेममादाय, सूरा दढपरकमा ॥५२॥
अञ्चन्तनियाणसमा, मचा मे भासिया नई । अतरिमु तरन्तेगे, तरिस्मन्ति अणागया ।। ५३॥'
कहिं धीरे अहेऊहिं अत्त ण परियावसे । मबसगविनिम्मुक्के, सिद्धे भवड नीरए ॥ ५४ ।।
त्ति बेमि ।। इअ सजइन समत्त ॥ १८ ॥
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॥ मियापुत्तीय एगूणवीसडम अज्झयण ॥'
मुग्गीवे नयरे रम्मे, आणणुज्जाणसोहिए । राया चलभद्दि ति, मिया तस्सग्गमाहिसी ॥ १ ॥
तेसिं पुत्ते बलसिरी, मियापुत्ते त्ति विस्सुए । अम्मापिऊण दइए, जुवराया दमीमरे ॥ २ ॥
नन्दणे मो उ पासाए, कीलए सह इत्थिहिं । देवोदोगुन्दगे चेव, निच मुइयमाणसो ॥ ३ ॥
मणिरयणकोहिमतले पामायालोयणढिओ । आलोएड नगरम्स, चउक्क तियचचर ॥ ४ ॥
अह तत्थ अइच्छन्त, पासई ममणसजय । तानियमसजमधर, सीलड्ड गुणआगर ।। ।।
तं हेहइ मियापुत्ते, दिट्टीए अणिमिमाए उ । कहिं मन्ने रिस रूव, दिट्ठपुब मए पुरा ।। ६ ॥
साहुस्स दरिमणे तस्स, अज्झवसाणम्मि सोहणे। मोह गयस्म स तस्स, जाइसरण समुप्पन्न ॥ ७ ॥
जासरणे समुप्पन्न, मियापुत्ते महिड्डिए । सई पोराणिय जाई, सामण्ण च पुरा कय ॥ ८ ॥
विमएहि अग्ज्जन्ती, रज्जन्तो सजमम्मि य । अम्मापियरमुगागम्म, इम वयणमब्बवी ॥९॥
मुयाणि मे पच महव्ययाणि नरएस दुक्ख च तिरिक्सजोणिसु ।
निविण्णकामो मि महण्णवाउ, अणुनाणह पवइम्मामि अम्मो ॥ १० ॥
अम्म ताय मए भोगा, भुत्ता विसफलोरमा । पच्छा कड्डयविवागा, अणुषन्धदुहारहा ॥ ११ ॥
इम सरीर अणिच अमुइ असुइसभव । अमासयापासमिण दुक्खकेमाण भायण ॥ १२ ।।
असासए मरीरम्मि, रइ नोबलभामह । पच्छा पुरा चइयव्वे फेणबुबुयमन्निभे ॥ १३ ॥
माणुमते असारम्मि, पाहीरोगाण आलए। जरामरणपत्थम्मि, गणपि न ग्मामह ॥ १४ ॥
जम्म दुक्स जरा दुक्ख, रोगाणि मरणाणि य । अहो दुक्मो हुसमारो, जत्थ कीसन्ति जन्तवो ॥ १५ ॥
खेत पत्थ हिरण्ण च पुत्तदार च बघमा । चइत्ताण हम देह, ग तहमनसस्म मे ॥ १६ ॥
जह किम्पागफलाण, परिणामो न सुन्दरो । एव भुत्ताण भोगाण, परिणामो न सुन्दरो ॥ १७ ॥
अद्धाण जो महत तु, अप्पाहेओ पवजई । ग छन्तो मो दुही होइ, छुहातण्हाप पीडिओ ॥ १८ ।।
एव धम्म अकाऊण, जो गच्छइ पर भव । गच्छ तो सो सुही हो', वाहीगेगेहि पीडिओ ॥१९॥
अद्धाण जो महत तु, सपाहेओ पवई । गन्छन्तो सो मुही होड, हातहाविवलिओ ॥ २० ॥

श्रीउत्तरा ययनसूत्र-सोलमाध्ययनम् एव धम्म पि काऊण, जो गच्छइ पर भर । गन्छन्तो सो सुही होड, अप्पकम्मे अवेयणे ॥ २१ ॥ जहा गेहे पलित्तम्मि, तस्म गेहस्स जो षट् । सारभण्डाणि नीणेड, असार अपउम्झइ ॥ २२ ॥ एव लोए पलित्तम्मि, जराए मरणेण य । अपाण तारहस्सामि, तुम्भेहिं अणुमनिओ ॥ २३ ॥ त विन्तम्मापियरो, सामण्ण पुत्त दुचर । गुणाण तु सहस्माइ, धारेयवाइ भिक्गुणा ॥ २४ ॥ समया मवभूएसु, मत्तुमित्तेसु वा जगे । पाणाडायविरई, जानज्जीवाए दुकर ।। २५ ।। निचकालप्पमत्तेण, मुमागायविवजण । भासियय हिय सच्च, निचाउत्तेण दुक्र ॥२६॥ ढन्तसोहणमाइस्म, अदत्तस्म विवजण । अणवजेमणिजस्स, गिहण्णा अवि दुवर ।। २७ ॥ विरई असम्भचरम्स, कामभोगरन्नुणा । उग्ग महत्वय बम्भ, धारेयव सुदुक्कर ॥ २८ ॥ पणधन्नपेमत्रग्गसु परिग्गहविरजण । मवारम्भपरिच्चाओ, निम्ममत्त मुदुक्र ।। २९॥ चउन्विहे वि आहारे, राडभोयणमञ्जणा । मनिहोमचओ चेन, यज्जेयन्यो सुदुक्र ।। ३० ।। छुहा तहा य सीउण्ह दसमसगवेयणा । अक्कोमा टुक्ससेज्जा य, तणफामा जलमेर य ॥ ३१ ॥ तालणा तजणा चेव, वडव धपरीसहा । दुक्स मिक्सायरिया, जायणा य अलाभया ॥ ३२ ॥ कागोया जा इमा वित्ती, केसलोओ य दारणो। दुक्स अम्भवय घोर, धारेउ य महप्पणो ॥ ३३ ॥ सुहोइओ तुम पुत्ता, सुकुमालो सुमजिओ। नहु सी पभू तुम पुत्ता, मामण्णमणुपालिया ॥ ३४ ॥ जावजीनमविस्सामो गुणाण तु महन्भरो। गुरु उ लोहभास्व, जो पुत्ता होइ दुबहो ।। ३५ ।। आगासे गगमोउ छ, पडिपोउ व दत्तरो। वाहाहि सागरो चेव, तरिया गुणोदही ॥ ३६ ॥ वालुया करलो चेव, निरस्माए उ मजमे । असिधारागमण चेव, टुकर चरिउ तवो ॥ ३७ ।। अही वेगन्तदिट्ठीए, चरित्ते पुत्त दुक्कर । जवा लोहमया चेव, चावयवा सुदुक्कर ॥ ३८ ॥ जहा अग्गिसिहा दित्ता, पाउ होइ सुदुबरा । एहा दुकर करेउ जे, तारण्णे ममणत्तण ।। ३९ ।। जहा दुक्स भरेउ जे, होड पायम्म सोत्थलो । तहा दुवस करउ जे, कीवेण समणत्तण ॥ ४० ॥ जहा तुलाए तोलेउ, दक्कगे मन्दरो गिरी। तहा निहुयनीसक, दुकर ममणतण ।। ४१ ॥ जहा भुयाहिं तरिउ, दुकर ग्यणायरो। नहा अणुनसन्तेण, दुवर दमसागरो ॥४॥ भुज माणुस्मए भोगे, पचलक्सणए तुम। भुत्तभोगी तओजाया, पच्छा धम्म चरिस्समि ।। ४३ ॥ सोइ अम्मापियरो, एपमेय जहा फुड । इह लोए निप्पिवासस्स, नत्यि किचिवि दुकर ॥४४॥ मारीरमाणमा चेक, वेयणाओ द्धन तसो। मए सोढाओ भीमाओ, जमइ दुक्पभयाणी य ॥ ४५ ।। जरामग्णरन्तार, चाउरन्ते भयागरे । मए सोढाणि भीमाणि, जम्माणि मरणाणि य ॥४६॥ जहा इह अगणी उण्हो, एत्तोऽणन्तगुणे तहिं । नरएभु वेयणा उण्हा, अस्माया वेडया मए ॥ ४७ ।। इम इह सीय, एतोऽणन्तगुणे नहिं । नरणसु वेपणा सीया, अस्सया वेइगा भए । ४८॥ कन्दन्तो मदुकुम्मीसु, उड्डपाओ अहोसिरे । हुयामणे जगन्तम्मि पक्कयुवो अण तसो ॥ ४९ ॥ महादपग्गिसकासे, मरम्मि बहरवालुए। कदम्बवालुयाए य, रडपुचो अणन्तमो ॥५०॥ रसन्तो कन्दुकुम्भीसु, उड्ड बद्धो अपथयो । करवत्तकरयाईहि छिनपुब्यो अण ॥५१॥ अइतिक्सकण्टगाइण्णे, तुग सिम्बलिपायवे । खेविय पासपद्धण, कट्टोकदाहिं दुकर ॥ ५२।। महाजन्तेसु उच्छू वा, आरमन्तो सुमेरव । पीडिओ मि मरम्मेहि, पारस्म्मोअणम्तमो ॥ ५३ ।। . , . .

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श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला
कृवन्तो कोलसुणहिं, सामेहि सरलेहि य । फाडिओ फालिओ छिन्नो, विफुरन्तो अणेगसो ॥५४॥
असीहि अवसिवण्णाहि, भल्लेहिं पट्टिसेहि य। छिन्नी मिनो विमिन्नो य, ओइण्णो पावकम्मुणा ॥ ५५ ॥
अनसे लोहरह जुत्तो, जलन्ते समिलाजुए। चोइओ तोचजुत्तहि, रोझो वा जह पाडिओ ॥ ५६ ॥
हुयासणे जल तम्मि, चियासु महिसो विन। दड्डो पक्को य अवसो, पारकम्मेहि पाविओ ॥ ७ ॥
वला सडामतुण्डेहि, लोहतुण्डेहिं पक्विहिं । विलुत्तो पिलपत्तो ह, ढकगिद्धेहिऽणन्तसो ॥ ५ ॥
तहाकिलन्तोधाव तो, पत्नो वेयराणि नदि । जल पाहिं ति चिन्त तो, खुरधाराहि विवाइओ ॥ ५९ ॥
उण्हामितत्तो सपत्तो, असिपत्त महापण । असिपत्तेहिं पडन्तेहि, छिन्नपुन्यो अणेगसो ॥ ६ ॥
मुग्गरेहि मुसढीहि, सूलेहिं मुमलेहिं य । गया सभग्गगत्तेहिं, पत्त दुक्ख अणन्तसो ।। ६१ ॥
खुरेहि तिक्सधारेहि, छुरियाहि कप्पणीहि योरप्पिओफालिओ छिन्नो, उकित्तोय अणेगसो ॥ ६२ ।।
पासेहिं कृडजालेहिं मिओ वा अवसो अह । वाहिओ पद्धद्धो वा, बहू चेव विवाइओ ।। ६३ ॥
गलेहिं मगरजालेहि, मन्छो वा अवसो अह । उल्लिओ फालिओ गहिओ, मारिणोय अणन्तसो ॥ ६४ ॥
वीदसएहि जालेहिं लेप्पाहि सउणो विव । गहिओ लग्गो बद्धो य, मारिओ य अणन्तसो ।। ६५ ।।
कुहाडफरसुमाईहिं, बड्डईहिं दुमो विव । कुट्टिओ फालिओ छिन्नो, तच्छिओ य अणन्तसो ॥ ६६ ।।
चवेडमुट्ठिमाईहिं कुमार्हि अय पिव । ताडिओ कुडिओ मि नो, चुणिओ य अणन्तसो ॥ ६७ ॥
सत्ताइ तम्बलोहाइ, तउयाइ सीसयाणि य । पाइओ कलकलन्ताइ, आरमन्तो सुभेरव ॥ ६८॥
तुह पियाइ मसाइ, सएडाइ सोलगाणि य । साविओ मिमममाइ, अग्गिनण्णाइऽणेगसो ॥ ६९ ॥
तुह पिया सुरा सीहू, मेरओ य महूणि य। पाइओ मि जलन्तीओ, वमाओ रहिराणि य ॥ ७० ॥
निच भीएण तत्थेण, दुहिएण पहिएण य । परमा दुहमबद्धा वेपणा वेदिता मए ॥ ७१ ।।
तिवचण्डप्पगाढाओ, घोराओ अइदुस्सहा । महब्भयाओ भीमाओ, नगएसु वेदिता मए । ७२ ।।
जारिसा माणुसे लोए, ताया दीसन्ति वेयणा । एचो अणन्तगुणिया, नरएसु दुक्खवेयणा ॥ ७३ ।।
सबभवेसु अम्साया, चेयणा वेदिता मए । निमेसतरमित्त पि, ज साता नस्थि चेयणा ॥ ७४ ।।
त विन्तम्मापियरो, छन्देण पुत्त पदया। नगर पुण सामण्णे, दुक्ख निप्पडिकम्मया ॥ ५ ॥
सो बेइ अम्मापियरो, एवमेय जहा फुड । पडिकम्म को कुणई, अरण्णे मियपक्खिण ॥ ७ ॥
एगभूए अरण्यो व, जहा उ चरई मिगे । एर धम्म चरिस्मामि, सजमेण तवेण य ॥ ७७ ॥
जया मिगस्म आयको, महारणम्मि जायई । अञ्च त रुक्यमूलम्मि, को ण ताहे तिगिच्छई ॥ ७८ ॥
को वा से ओपह देइ, को वा से पुच्छई सुह । को से भत्त च पाण वा, आहरित्तु पणामए ॥ ७९ ॥
जया से सुही होइ, तया गच्छद गोयर । भत्तपाणस्स अट्टाए वल्लगखि मराणि य ।। ८०॥
खाइचा दाणिय पाउ, बल्लरेहिं मरेहि य । मिगचारिय चरित्ताण गछई मिगचारिय ।। ८१॥
एव समुढिओ मिक्खू, एवमेव अणेगए । मिगचारिय चरित्ताण, उड्ड पक्कमई दिम ॥ ८ ॥
जहा मिगे एगे अणेगचारी, अणेगनासे धुरगोयरे य ।
एव मुणी गोयरिय पविटे, नो हीलए नोवि य सिमराजा ।। ।। ८३ ॥
मिगचारिय चरिस्मामि, एव पुत्ता जहासुह ! अम्मापिईहिऽणुन्नाआ, जहाइ उवर्हि तहा ।। ८४ ।।
मियचारिय चरिस्सामि, सबक्सनिमोक्सणिं । तुम्भेहि अभणुनाओ, गच्छ पुत्त जहासह ॥ ८५॥

श्रीउत्तराध्ययनसून-एगूनविशमाध्ययनम्
एव सो अम्मापियरो, अणुमाणित्ताण बहुनिह । ममत्व छिन्दई ताहे, महानागो व कचुय ॥ ८६ ।।
इड्ढी पि च मित्ते य, पुत्तटार च नायओ । रेणुय य पडे लग्ग, निध्धुत्ताण निग्गओ ।। ८७ ॥
पचमहत्वयजुत्तो, पचहि ममिओ तिगुत्तिगुत्तोय। सन्भिन्तरवाहिरओ, तपोकम्मसि उज्जुओ ॥८८ ॥
निम्ममो निरहकारो, निस्सगो चत्तगारयो । समो य सहभूएस, तसेसु थावरेसु य ॥ ८९ ॥
लाभालामे सुहे दुक्वे, जीपिए मरणे तहा। समो निन्द्रापससासु, तहा माणापमाणओ ॥ ९ ॥
गारवेसु कमाएसु, दण्डसल्लमएसु य । नियत्तो हामसोगाओ, अनियाणो अबन्धणो ॥ ९१ ॥
अणिस्मिओ इह लोए, परलोए अणिस्सियो । वासीचन्दणकप्पो य, असणे अणसणे तहा ॥ १२ ॥
जापसत्यहि दारेहि, सबओ पिहियामवे । अज्झप्पज्झाणजोगेहिं, पसत्थदमसासणे ॥ ९३ ।।
गन नापोण चरणेण, दसणेण तवेण य । भाषणाहि य सुद्धाहिं, सम्म भावेत्तु अप्पय ॥ ९४ ।।
बहुयाणि उ वासाणि, सामण्णमणुपालिया । मासिएण उ भत्तेण, सिद्धिं पत्तो अणुत्तर ॥ १५ ॥
एर करन्ति मयुद्धा, पण्डिया परियक्पणा । निणिअन्ति भोगेसु, मियापुत्ते जहारिसी ॥ ९६ ॥
महापभावस्म महाजसस्म, मियापुत्तस्स निसम्म मासिय ।
तरप्पहाण चरिय च उत्तम, गहप्पहाण च तिलोगविस्सुत ।। ॥ ९७॥
रियाणिया दुक्सविवद्धण धण, ममत्तवन्ध च मयाभयावह ।
मुहावह धम्मधुर अणुत्तर, धारेज निवाणगुणावह मह ।। ॥ ९८॥
त्ति बेमि ॥ इअ मियापुत्तीय समत्त ॥ १९ ॥
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॥ अह महोनियण्ठिज्ज वीसइम अज्झयणं ।
सिद्वाण नमो रिचा, सजयाण च भावओ। अत्यधम्मगई तच अणुसहि मुह मे ॥१॥
पभूयरायणो राया, सेणिओ मगहाहियो । विहारजत्त निआओ, मण्डिकुछिसि चेहए ॥२॥
नाणादुमलयाइण्ण, नाणापक्सिनिस विय । नाणासुमसछन्न, उजाण नन्दणोवम ॥ ३ ॥
तत्य सो पासई साहु, सजय सुममाहिय । निसन्न रस्खमूलम्मि, सुकुमाल सुहोइय ॥ ४ ॥
तस्स रुप तु पासित्ता, राहणो तम्मि सजए । अचन्तदरमो आसी, अउलो स्वविम्हओ ॥५॥
जहोवण्णो अहो रूव, अहो अञ्जम्स मोमया। अहो सन्ती अहो मुत्ती, अहो भोगे असजया ।। ६ ॥
तम्म पाए उ वन्दित्ता, काण य पयाहिण । नाइदमणासने, पजली पडिपुछई ॥ ७ ॥
तस्णो सि अजो पहइओ, भोगकालम्मि सजया। उवडिओ सि सामपणे, एयमट्ट सुणेमि वा ॥८॥
अणाहोमि महाराय, नाहो मज्झ न विनई । अणुकम्पग मुहि वावि, कचि नामिममेमह ॥९॥
वओ मो पहसिभो राया, सेणि ओ मगहाहिवो। एव ते इडिमन्तस्स, कह नाहो न विनई ॥ १० ॥
होमि नाहो भयताण, भोगे भुजाहि सनया । मिचनाईपरिखुडो, माणुस्स ख सुदुष्छह ॥ ११ ॥
अप्पणा विगाहो सि, सेणिया मगहाहिया । अप्पणा अणाहो मन्तो, कस्स नाहो भविस्मसि ॥ १२ ॥
एव पुचो नरिन्दो सो, सुमभन्तो सुविम्हिओ। वयण अस्सुयपुर, साहुणा विम्हयन्निओ ॥ १३ ॥
अस्सा इत्थी मशस्सा मे, पुर अन्तरं च मे। मुनामिमाणुस्से भोगे, आणा इस्सरिय च मे ॥१४॥

श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला . . . एरिसे मम्पयग्गम्मि, सबकामसमप्पिए । कह अणाहो भवइ, मा हु भन्तें मुस वए ॥ १५ ॥ न तुम जाणे अगाहस्स, अत्थ पोत्थ च पत्थिना। जहा अणाहो भाई, सणाहो वा नराहिवा ॥ १६ ॥ सुह मे महाराय, अक्सित्तेण चेयसा। जहा अणाहो भाई, जहा मेय पवत्तिय ॥ १७ ॥ कोसम्बी नाम नयरी, पुराण पुरभेयणी । तत्य आसी पिया मज्झ, पभूयधणसचओ ॥ १८ ॥ पढमे वए महाराय, अउला मे अच्छिवयणा । अहोत्या विउलो डाहो, सवगत्तेसुपस्थिता ।। १९ ॥ सत्थ जहा परमतिक्स, सरीरविवरन्तर । आगीलिज अरी कुद्धो, एव मे अच्छिवेयणा ॥२०॥ तिय मे अतरिच्छ च, उत्तमग च पीडड ! इन्दासणिसमा घोरा, वेयणा परमदारुणा ॥ २१ ॥ उपट्टिया मे आयरिया, विजाम ततिगिच्छया । अधीया सत्थकुमला, मन्तमूलविमारया ॥ २२ ॥ ते मे तिगिच्छ कुवन्ति, चाउप्पाय जहाहिय । न य दुक्सा विमोयन्ति, एसा मज्झ अणाहया ॥ २३ ॥ पिया मे सबसारपि, दिजाहि ममकारणा न य दुक्सा विमोएड, एसा मज्झ अणाहया ॥ २४ ॥ माया य मे महाराय, पुत्तसोगदुहटिया । न य दुक्खा विमोएइ, एसा मज्झ अणाहया ॥ २५ ॥ भायरो मे महाराय, सगा जेट्टकणिढगा। न य दुक्सा विमोयन्ति, एमा मज्झ जणाहया ।। २६ ।। भइणीओ मे महाराय, सगा जेट्टकणिढगा। न य ढक्खा विमोयन्ति, एमा मज्झ अणाहया । २७ ।। भारिया मे महाराय, अणुरत्ता अणुव्या । असुपुण्णेहिं नयणेहि, उर मे परिमिचई ।। २८ ॥ अन्न च पाण पहाण च, गघमल्लविलेवण । मए नायमणाय वा, सा वाला नेव भुजई ॥ २९ ॥ सण पि में महाराय, पासाओ मे न फिट्टई । न य दुक्सा विमोएइ, एसा मज्झ अणाहया ।। ३० ।। तओ ह एमाहसु, दुक्समा हु पुणो पुणो । वेयणा अणुभविउ जे, ससारम्मि अणन्तए ॥ ३१ ॥ सइ च जइ मुचेन्जा, वेयणा चिउला इओ। सन्तो दन्तो निरारम्भो, पवए अणगारिय ॥ ३२ ॥ एव च चिन्त ताण, पसुत्तो मि नराहिवा । परियत्तन्तीए राईए, वेयणा मे खय गया ॥ ३३ ॥ तओ कल्ले पमायम्मि, आपुच्छित्ताण पन्धव । स तो दन्तो निरारम्भो, पवइओऽणगारिय ॥ ३४ ॥ तो ह नाहो जाओ, अप्पणो य परस्स य । सो सिं चेव भूयाण, तसाण थावराण य ॥ ३५ ॥ अप्पा नई वेयरणी, अप्पा मे कूडमामली । अप्पा कामदुहा घेणू, अप्पा मे न दण वण ॥ ३६ ॥ अप्पा कत्ता विकता य, दुक्साण य सुहाण य । अप्पा मित्तममित्त च, दुप्पट्टियसुपडिओ ॥ ३७॥ इमा हु अना दि अणाहया निवा, तमेगचित्तो निहुओ सुणेहि । नियण्ठधम्म लहीयाण वी जहा, सीयन्ति एगे बहुकायरा नरा ॥ ३८ ॥ जो.. पवइत्ताण महत्वयाइ, सम्म च नो फामयई पमाया । अनिग्गहप्पा य रसेसु गिद्धे, न मूलओ छिन्नइ बन्धण से ॥ ३९ ॥ आउत्तया जस्स न अस्थि काइ, इरियाए भासाए तहेसणाए । आयाणनिक्खेनदुगछणाए, न धीरजाय अणुजाइ मग्ग ॥ ४० ॥ चिर पि से मुण्डरई भवित्ता, अथिरहए तानियमेहि भट्टे । चिर पि अप्पाण किसइत्ता, न पारए होइ हु सपराए । ४१॥ पोले व मुट्ठी जह से असारे, अयन्तिए कूडकहारणे वा । राढामणी वेरुलियप्पगासे, अमहग्धए होइ हु जाणएम् ॥ ४२ ॥ - ।

(३) , , श्रीउनगययनसूत्र-विममाध्ययनम् कुसीललिंग इह यारउत्ता, इसिज्झय जीविय गृहहत्ता । जसजए सनयलप्पमाणे, विणिग्यायमागच्छह से चिरपि ॥४३॥ विस तु पीय जह कालकूड, हणाइ सत्थ जह कुग्गहीय । मो वि धम्मो विसमोनपन्नो, हणाइ वेयाल उवाविपन्नो । टा जे लक्सण सुविण परजमाणे, निमित्तकोउहलसपगाढे । पुहेडविजासवदारलीपी, न गच्छइ मग्ण तम्मि काठ ॥ ४५ ॥ तम तमेणेन उ से असीले, सया दही विपरियामुवेड । सघापड नरगतिरिक्सजोणि, मोण विराहत अमाहुरूवे ॥ ४६ ॥ उद्देसिय कीयगड नियाग, न मुच्चइ कि च जणेमणिज । अग्गी विना सवभकमी भपित्ता, इत्तोचुए गन्छ कह पार ।। ४७ ॥ न त अरी कठछत्ता करड, ज से कर अप्पणिया दरप्पया । से नाहह मच्चुमुह त पत्ते, पच्छामितावेण दयाविरुणो ॥२८॥ निरहिया नग्गस्ट उ तम्प, जे उत्तम पिज्जासमेड । इमे वि से नत्यि पर विरोण, दुहओवि से मिजइ तत्थ लोग ॥ ४० ॥ एमेव हा छन्दकुसीलरवे, मग्ग विराहेत्तु निणुत्तमाण | कुररी विवा भोगरसाणुगिद्धा, निरहसोया परियाममेड ।। ७० ॥ सोचाण मेनापि सुभासिय टम, जणुमायण नाणगणोरवय । मग कुसीलाण जहाय मह, महानियण्ठाण पए पण ॥ ५२ ॥ चरित्तमायारगुणन्निए तओ, अणुत्तर मनम पालियाण । निरासवे सखपियाण कम्म, उवेह ठाण विउठत्तम धुन ॥५॥ एबुग्गटन्त । महातगोधणे, महामुणी मापडन्ने महायस । महानियण्ठिन्न मिण महासुय, से कहा महया पिथग्ण ।। ५३ ॥ तट्ठो य सणिओ गया, इणमुदाह सजली । अणाहत्त जहाभूय मुटु मे उपदसिय ॥५॥ तुज्झसुलद्ध सुमणुस्म जम्म, लामा मुन्द्रा य तुमे मासी । तुभेमणाहा य मवन्धयाय, ज भेरिया मग्गे निणुत्तमाण ॥ ५ ॥ सि नाहो अणाहाण, मवभूयाण मजया । खामेमि ते महाभाग, इछामि अणुमासिउ ॥ ५ ॥ पुन्छिऊण मग तुभ, आणविग्घाओ जो को। निमन्तिया य भोहि मच मरिमहि मे। .॥ एव थुणिचाण म रायमीहो, अणगारसीह परमाइ भत्तीए । सोरोहोमपरियणोमवन्धयो,धम्माणरत्तो विमरण चेसा ।।५८ ॥ ऊमसियरोमो, पयाहिण । त क काउण य

(३३)
श्रीजैनसिद्धात-स्वाध्यायमाला
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अभिवन्दिऊण सिरसा, जइयाओ नराहिवो ॥ ५९ ॥
ग्यरो वि गुणसमिद्धो, तिगुत्तिगुत्तो तिदण्डविरओ य ।
निहग इन विप्पमुक्को, विहरइ वमुह निगयमोहो ॥ ६० ।।
त्ति बेमि ॥ इअ महानियण्ठिज समत्त ।।
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॥ अह समुदपालीय एगवीसइमं अज्झयण ॥
चम्पाए पालिए नाम, सारए आसि चाणि । महावीरस्म भगपओ, सीसे सो उ महप्पणो ॥ १॥
निग्गन्धे पारयणे, मावए स नि कोचिए । पोएण चवहरन्ते, पिहुण्ड नगरमानए ॥ २ ॥
पिहुण्डे रवहन्तस्स, वाणिओ दइ धूयर । त ससत्त पडगिज्झ, सदेसमह पथिओ ॥३॥
अह पालियस्स घरिणी, समुद्दम्मि पसवई । अह बालए तहि जाए, समुद्दपालि त्ति नामए ॥ ४ ॥
खेमेण आगए चम्प, सावए वाणिए घर । सबड्डइ तस्स घरे, दारए से सुहोइए ॥ ५ ॥
पावत्तरी कलाओ य, सिक्वई नीइकोविए । जोवणेण य सपन्ने, सुरूवे पियदमणे ॥६॥
तस्स रुवनड भन्ज, पिया आणेड रविणि । पासाए कीलए रम्मे, देवो दोगुन्दओ जहा ॥७॥
अह अन्नया कयाई, पासायालोयणे ठिओ। वज्झमण्डणसोभाग, वन्झ पासइ बज्झग ॥ ८ ॥
त पासिऊण सवेग, समुद्दपालो इणमब्बी । अहोऽसुमाण कम्माण, निजाण पावग इम ॥ ९॥
सयुद्धो सो तहिं भगव, परमसवैमागओ। आपुच्छमापियरो, पबए अणगारिय ॥१०॥
जहित्तु ऽमग थमहाकिलेस, महन्तमोह कसिण भयावह ।
परियायधम्म चमिरोयएजा, क्याणि सीलाणि परीसहे य ॥ ११ ॥
अहिंससच्च च अतेणग च, तत्तो य बम्भ जपरिग्गह च ।
पटिवजिया पच महत्वयाणि, चरिज धम्म जिणदेसिय विदुः ॥ १२ ॥
सोहिं भूएहि दयानुकम्पी, खन्तिक्खमे सजमवम्भयारी।
सावजजोग परिवजयन्तो, चरिज भिक्खू सुसमाहिइन्दिए ॥ १३ ॥
कालेण काल विहरेज रहे, बलावलं जाणिय अप्पणो य ।
सीहो व सद्देण न स तसेजा, वयजोग सुच्चा न असचमाहु ॥ १४ ॥
उवेहमाणो उ परिबएजा, पियमप्पिय मब तितिखएज्जा ।
न सब सवत्थ ऽभिरोयएजा, न यावि पूय गरह च सजए ॥ १५ ॥
अणेगच्छन्दामिह माणवेहि, जे भारओ सपगरेइ भिक्खू ।
भयभेरया तन्थ उइन्ति भीमा दिवामणुस्सा अदुवा तिरिच्छा ॥ १६ ॥
परीसहा दुन्चिसहा अणेगे, सीयन्ति जत्था बहुकायरानरा ।
से तत्थ पत्ते न पहिज मिक्खू, सगामसीसे इव नागराया ॥ १७ ॥
सीओसिणादसमसाय फासा, आयका विविहा फुसन्ति देह ।
अकुक्कुओ तत्यहियासहेजा, रयाइ खेवेज पुरे कयाइ ॥१८॥

श्रीउत्तराध्ययनसून-एगविसमाध्ययनम् पहाय राग च तहेन दोम, मोह च भिक्खू सतत वियक्षणो। मेरु व्य वारण अपम्पमाणो, परीसहे आयगुत्ते सहेजा ।। १९ ।। अणुन्नए नारणए महेसी, न यावि पुय गरह च सजए । स उज्जभाव पडिल, सजए, नियाणमग्ग विरए उवेइ ॥२०॥ अरइरइसहे पहीणमय, निरए आयहिए पहाणव । परमट्ठपरहिं चिट्ठई, छिन्नसोए अममे अकिचणे ॥ २१ ॥ निमित्तलयणाड भएज ताई, निरोग्लेवाइ अमथडाइ । इसीहि चिण्णाड महायसेहिं, कारण फासेज परीसहाड ॥ २२॥ सन्नाणनाणोजगए महेमी अणुत्तर चरिउ धम्मसचय | अणुत्तरे नाणधरे जससी, ओभासई सुरिए वन्तलिक्खे ॥ २३ ॥ दुविह खवेऊण य पुण्णपाव, निरगणे सपओ विप्पमुक्के । तरित्ता समुद्द व महाभगोध, ममुद्दपाले अपुणागम गए ॥ २४ ॥ त्ति बेमि ।। इअ ममुद्दपालीय समत्त ।। ॥ अह रइनेमिज वावीसइम अज्झयण ॥ सोरियपुरम्मि नपरे, आसि राया महिड्डिए । वमुदेषु ति नामेण, रायलसणसजुए ॥ १॥ तस्म भन्जा दु आसी, रोहिणी देई तहा । तासि दोण्ह दुवे पुत्ता, इटा रामकेमया ॥ २ ॥ सोरियपुरम्मि नयरे, आसि राया महिड्डिए । समुद्दविजए नाम, रायरक्सणसजुए ॥ ३ ॥ तस्स भन्जा सिवा नाम, तीस पुत्तो महायसो। भगर अरिष्टनेमि ति लोगनाहे दमीसर ॥ ४ ॥ सो ऽरिहनेमिनागे उ, लक्खणस्मरसजुओ । अट्ठमहस्सरक्सणधरो, गोयमो कालगन्छवी ॥ ५॥ बजरिसहसघयणो, समचउरसो असोयरो। तस्म रायमईकन्न, भज जायइ क्समो ॥६॥ यह सा रायपरकन्ना, मुसीला चास्पेहणी । सवलक्सणसपन्ना, विज्जुमोयामणिप्पभा ॥७॥ अहाह जणओ तीसे, वासुदेव महिड्डिय । उहागच्छउकुमारो, जा से क्न्न ददामि ह ॥ ८॥ सबोसहीहिं पहविओ, कयमोउयमगलो। दिवजुयलपरिहिओ, आभरणेहिं विभूसिओ ॥ ९ ॥ मत्त च गधहत्थि, वासुदेवस्म जेट्टग । आरूटो सोहए अहिय, सिरे चूडामणि जहा ॥१०॥ अह ऊसिएण छत्तेण चामराहि य सोहिए। दसारचक्केण य मो मवओ परिमारिओ ॥११॥ चउरगिणोए सेणाए, रइयाए जहवम । तुरियाण मनिनाएण, दिवेण गगण फुसे ॥१२॥ ग्यारिमाए इवीए, जुत्तीए उत्तमाइ य ! नियगाओ भवणाओ, निजाओ चण्डिपुगो॥ १३ ॥ अह सो तत्य निजतो, दिरस पाणे भयदुए । पाडेहिं पजरहिं च, मनिरुद्ध सुदुपिखए ॥ १४ ॥ जीवियन्त तु सम्पचे, मसट्टा भक्वियवए । पासेचा से महापने, मारहिं इणम पवी ॥१५॥ कस्स अट्ठा इमे पाणा, एए सर्वे मुहेसिणो । बाडेहिं पजरहिं च, मन्निरद्धा य अच्छहि ॥ १६ ॥ अह सारही तओ भणइ, एए भद्दा उ पाणिणो। तुज्झ विगाह जम्मि, भोयावउ बहु जण ।। १७ ।। .

ww www " , (२) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला सोऊण तस्स बयण, यहुपाणिविणासण । चिन्तेड से महापन्नो, साणुकोसे जिए हिऊ ।। १८ ॥ जइ मज्झ कारणा एए, हम्मन्ति सुबहू जिया । न मे प्य तु निस्सेस, परलोगे भविस्सई ॥ १९ ॥ सो कुण्डलाण जुयल, सुत्तग च महायसो। आभरणाणि य सहाणि, सारहिस्स पणामए ।॥ २० ॥ मणपरिणामे य कए, देवा यजहोइय समोइण्णा । सबड्डीइ सपरिमा, निक्समण तस्स काउ जे ॥ २१ ॥ देवमणुस्सपरिखुडो सीयारयण तओसमारूढो, निक्सिमय वारगाओ, रेवयम्मिटिओ भगव ॥ २२ ॥ उजाण सपत्तो, ओइण्णो उत्तमाउसीयाओ। साम्सी परिखुडो, मह निक्समइ उ शित्ताहि ॥ २३ ॥ अह से सुगन्धग धीए, तुरिय मउकुचिए । सयमेव भुचई केसे, पचमुट्ठीहिं समाहिओ ॥ २४ ॥ वासुदेवो य ण भणइ लुत्तम जिान्दिय । इच्छिरियमणोरह तुरिय, पावसू त दमीसरा ॥ २० ॥ नाणेण दसणेण च, चरित्रेण तहेन य । खत्तीए मुत्तीए, बड्डमाणो भवाहि य ॥ २६ ॥ एव ते रामकेमा, दमारा य बहू जणा। अरिहणेमि पन्दित्ता, अभिगया दारगापुरि ।। २७ ।। सोऊण रायकन्ना, पवन सा जिणस्स उ । नीहासा य निराणन्दा, सोगेण उ सम्मुत्थिया ॥ २८ ॥ राईमई विनि तेइ, धिरत्थु मम जीविय । जा ह वेण परिचत्ता, सेय पव्यइउ मम ॥ २९ ।। अह सा भमरसन्निभे, कुच्चफणगमाहिए | सयमेन लुचई केसें, धिडम ता ववस्सिया ॥ ३० ॥ चासुन्यो य ण भणः, लुत्तकेम जिइन्दिय । समारमागर घोर, तर कन्न लहु लहु ॥ ३१ ॥ सा पव्वइया मन्ती, पयावेसी तहिं बहु मयण परियण चेन, मीलता बहुस्सुया ॥ ३२॥ गिरि रेवतय जन्ती, नासेणु झा उ अ तरा । वास-ते अ धयारम्मि, अन्तो लयणस्स सा ठिया ॥ ३३ ।। चीनराइ विसारन्ती, जहाजाय ति पासिया। रहनेमी भग्गचित्तो, पन्छा दिट्ठो य तीइ वि ॥ ३४ ॥ मीया य सा तहिं दद्छु, एगन्ते सजय तय । याहाहिं कार सगोप्फ, वेवमाणी निसीयई ॥३॥ अह मो वि रायपुत्तो, समुद्दविजयगओ। भीय पवेविय छ, इम पक उदाहरे ॥ ३६ ॥ रहनेमी अह भदे, सुकवे चारुभासिणी । मम भयाहि मुयणु, न ते पीला भविस्सई ॥ ३७॥ एहि ता भुजिमो भोए,माणुस्स सुसुदुल्लह । भुत्तभोगी पुणो पच्छा, जिणमग्ग चरिस्समो ॥ ३८ ॥ दगुण रहनेमि त, भग्गुजोयपराजिय । राईमइ असम्भन्ता, अप्पाण सवरे तर्हि ॥ ३९ ॥ अह मा रायपरकन्ना, सुट्टिया नियमबए । जाई कुल च सील च, रक्खमाणी तय वए ॥ ४० ॥ ज- सि रूवेण वेसमणो, ललिएण नलकुदरो। तहा वि ते न इच्छामि, जइ सि मक्स पुरदरी ।। ४१ ॥ धिरत्थु तेऽजसोकामी, जो त जीवियकारणा। वन्न इच्छसि आराउ, सेय त मरण भवे ॥ ४२ ॥ अह च भोगरायस्स, त च सिन्धगण्हिणो। माकुठे गन्धणा होमो, सजम निहुमो चर ॥ ४३ ॥ जइ त माहिसि भार, जा जा दच्छसि नारिओ। वायाद्धो व हढो, अद्विअप्पा भविस्ससि ॥ ४४ ॥ गोरालो भण्डवालो वा, जहा तत्वणिम्सरो। एर अणिस्सरी त पि, सामणस्स भविम्ससि ॥ ४५ ॥ तीसे सो वयण सोचा, सययाए सुभासिय । अकुसेण जहा नागो, वम्मे सपडिवाइओ ।। ८६ ।। मणगुत्तो वायगुत्तो, कायगुत्तो जिडन्दिए । सामण्ण निश्चल फासे, जानजीर दढवओ ॥ ४७ ॥ उम्ग तर चरित्ताण, नाया दोणि वि काली। सब क्म्म सवित्ताण, सिद्धि पत्ता अणुत्तर ॥ ४८ ॥ एप करति मयुद्धा, पण्डिया पवियक्सणा। विणियद्दन्ति भोगेमु, जहा मो पुरिमोत्तमो ॥ ४ ॥ त्ति बेमि ॥ रहनेमिन समत्त । - (३९) श्रीउ नराध्ययनस्त्र-तविममाध्ययनम् ॥ अह केसिगोयमिज तेवीसइम अज्झयण ॥ - जिणे पासि ति नामेण, अरहा रोगपूटओ। सयुद्धप्पा य समन्न्, वम्मतित्थयरे जिणे ॥१॥ तस्म लोगपदीपस्म, आसि मीसे महायसे । केमी कुमारममणे, विजाचरणपारगे। ॥ ओहिनाणसुए युद्धे, भीमसममाउले । गामाणुगाम रीयन्त, मारथि पुग्मागण् ॥ ३॥ ति दुय नाम उज्जाण, तस्मि नगरमण्डले । फासुए सिज्नसथारे, तत्थ पासमुपागा ॥ ४ ॥ अह तेणे कालेण यम्मतित्थयर जिणे । भगर नद्धमाणि ति, सच्चलोगम्मि विस्सुए ॥५॥ तस्म लोगपदीपस्स आसि मीसे महायमे । भगर गोयमे नाम, विनाचरणपारए ॥ ६ ॥ यारसगविऊ उद्धे, सीमसघममाउले । गामाणुगाम रीयन्ते, से नि मात्थिमागए ॥ ७ ॥ कोट्ठग नाम उजाण, तम्मी नगरमण्डले । 'कासुए सिजसथारे, नथ नासमुनागए ॥ ८॥ केसी कुमारसमणे, गोयमे य महायसे । उभगो नि तत्थ निहरिसु, अल्लीणा मुममाहिया ।। ९ ।। उमओ मीमसघाण, सजयाण तवम्मिण, । तत्थ चिन्ता समुप्पन्ना, गुणवन्ताण ताण ॥१०॥ कैरिमोगा इमो वम्मो, इमो धम्मोव केग्मिो । आयारधम्म पणिही, 'मा गा मा व केरिमी ॥ ११ ॥ चाउन्जामो य जो धम्मो, जो इमोपचसिविमो। टेसिओवादमाणेण, पामेण य ममामुणी ।। १२ ।। अचेलओ य जो धम्मो, जो मो स तस्त्तरो। एगमनपरन्नाण, रिमेमे कि नु कारण ॥ १३ ॥ अह ते तय सीसाण, विन्नाय पवितक्किय । ममागमे क्यमर्ट, उभओ केसिगोयमा ॥ १४ ॥ गोयमे पडिरून नू, मीससघममाउले । जेह कुलमवेक्सन्तो, तिन्दुय पणमागओ ॥ १५ ॥ केमी कुमारसमणे, गोयम दिस्ममागय । पडिरूप पडित्तिं मम्म सपडिरञ्जई ॥ १६ ॥ पलाल फासुय तत्य, पचम कुसतणाणि य । गोयमस्म निमेनाए, सिप्प समणामए ।। १७॥ केमी कुमारसमणे, गोयमे य महायसे । उभओ निमण्णा मोहन्ति, चन्सूरममप्पभा ॥ १८ ॥ ममागया बहू तत्थ, पासण्डाकोउगा मिया। गिहरयाण चणेगाओ, साहस्मीनो समागया ॥ १९ ॥ देवदाणवगन्धबा, जस्सरसमफिन्नरा । जदिस्माण च भूयाण, जामी तत्थ समागमो ॥ २०॥ पुच्छामि ते महाभाग, केमी गोयमम यी । तओ केसि उवण्न तु, गोयमो इणवी ॥ २१॥ पुच्छ भन्ते अहिच्छ ते, केसि गोयमम नवी । तओ रेमी अणुनाए, गोयम इणमन्बी ॥ २० ॥ चाउजामोय जो घम्मो, जो इमोपचसिक्सिओ। टसिओ बद्धमाणेण, पासेण य महामुणी ॥ २३ ॥ एगरजपपन्नाण, विसेसे किं नु रागण । पम्मे दुविहे मेहासी, यह विष्पच्चओ न ते ॥ २४ ॥ तओ रेमि चुनत तु, गोयमोइ म रवी । पना ममिस्सए धम्मतत्त तत्तरिणिन्छि ॥२०॥ पुरिमा उज्जुजडा उ, सनडाय पछिमा। पज्झिमा उज्नुपना उ, तण धम्मे दुहा कए ॥ २६ ॥ पुरिमाण दुहिमोग्झोउ, चरिमाण दुग्णुपालओ। कप्पो मज्यिमगाण नु, सविमोझोमुपालओ ॥ २०॥ साहु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे ससओ दमो। अनो रि समो माय, न मे रहम गोयमा ॥२८॥ अचेल्गो य जो धम्मो जो इमो मतस्तरो । देमिनो बदमाणेण, पासण य महानमा ॥ २९ ॥ एगाजपपन्नाण, विससे कि नु कारण । लिंगे दुविहे मेहासी, रह विप्पचओ न ते ॥ ३० ॥ . .

- . (४०) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला केसिमेव युवाण तु, गोयमो इणमब्बवी। विनाणेण समागम्म, धम्मसाहणमिच्छिय ॥ ३१ ॥ पचयत्य च लोगस्स, नाणाविहविगप्पण | जत्तत्थ गणहत्य च, लोगे लिंगपओयण ॥ ३२ ॥ अह भवे पइन्ना उ, मोक्खसन्भूयसाहणा । नाण च दसण चेर, चरित्त चेव निच्छए ॥ ३३ ॥ साहु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे समओ इमो। अन्नो वि समओ मज्झ, त मे कहसु गोयमा ।। ३४ ।। अणेगाण सहस्साण, मज्झे चिट्ठसि गोयमा। ते य ते अहिगच्छन्ति, कह ते निजिया तुमे ॥ ३५ ॥ एगे जिए जिया पच, पच जिए जिया दम । इसहा उ जिणिताण, सबसत्तु जिणामह ।। ३६ ॥ सत्तू य इइ के वुत्ते, केसी गोयम मत्र्यवी । तओ केसिं घुवत तु गोयमो इणमब्बत्री ।। ३७ ॥ एगप्पा अजिए सत्तु, कमाया इन्दियाणि य । ते जिणितु जहानाय, विहरामि अह मुणी ॥ ३८ ॥ साहु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे ससओइमो, अन्नो वि मसओ मज्झ, त मे कहसु गोयमा ॥ ३९ ॥ दीसन्ति यहवे लोए, पासबद्धा सरीरिणो । मुक्पासो लहुन्भुओ, कह विहरिसी मुणी ॥ ४० ॥ ते पासे सवसो चित्ता, निहन्तूण उवायओ । मुकपासो लहु-सुओ, कह विहगमि अह मुणी ॥ ४१ ॥ पासा य इइ के वुत्ता, कसी गोयममब्बी। केसिमेन वुरत तु, गोयमो इणम बबी ॥ ४२ ॥ रागद्दोमादओ तिचा, नेहपामा भयकग । ते छिन्दित्ता जहानाय, हिगमि जहम ॥ ४३ ।। साहु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे ससओ इमो। अन्नोवि ससओ मज्झ, त मे कहसु गोयमा ।। ४४ ॥ अतोहिययसभूया, लया चिट्ठइ गोयमा । फलेड विमभक्खीणि, सा उ उद्धरिया कह ॥ ४५ ॥ त लय मवसो छित्ता, उद्धरिता समूलिय ! विहरामि जहानाय मुको मि विसभक्खण ॥ ४६॥ लया य इइ का वुत्ता, केसी गोयममधवी । केसिमेव युवत तु, गोयमो इणमब्बची ।। ४७ ।। भवतण्हा लया वृत्ता, भीमा भीमफलोदया। तमुद्धिच्चा जहानाय, विहरामि जहासुह ।। ४८॥ साहु गोयम पन्ना ते, छिनो, मे सपओ इमो। जनो वि ससओ मज्झ, त मे क्सु गोयमा ॥ ४९ ॥ सपजलिया घोरा, अग्गी चिट्ठह गोयमा । जे डहन्ति सरीरत्थे, कह विज्झाविया तुमे ॥ ५० ॥ महामेहप्पस्याओ, गिज्झ वारि जलुत्तम । सिंचामि समय देह सित्ता नो व डहन्ति मे ॥५१॥ अग्गी य इइ के वुत्ता, केसी गोयममबवी । केसिमेर बुवत तु गोयमो इणम-बनी ॥ ५२ ॥ कसाया अग्गिणो बुत्ता, सुयसीलतमा जल । मुयधारामिहया सन्ता, मिन्ना हु न डहन्ति मे ।। ५३ ॥ साहु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे समओ। अन्नो वि ससमो मज्झ, त मे कहसु गोयमा ॥ ५४॥ अय साहसिओ भीमो, दुट्ठस्सो परिघावई । जसि गोयममारूढो, वह तेण न हीरसि ॥ ५५ ॥ पधारन्त निगिण्हामि सुयरस्सीसमाहिय । न मे गच्छड उम्मग्ग, मग्ग च पडिवजई ॥ ५६ ॥ आसे य इइ के वुत्ते, केसी गोयमम बची । केसिमेव बुरत तु, गोयमो इणम बची ॥ ५७ ।। मणो साहसिओ भीमो, दुहस्सोपरिधाइ। त सम्म तु निगिहामि, धम्मसिक्खाइ कन्थग ।। ५८ ॥ साहु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे समओ इमो। अन्नो वि ससओ मन्झ, त मे कहसु गोयमा ॥ ५९॥ पुष्पहा बहवो लोए, जेहिं नासन्ति जतुणो। अद्धाणे कह पट्टन्ते, त न नाससि गोयमा ॥६॥ जे य मग्गेण गच्छन्ति, जे य उम्मग्गपट्टिया।तेसवे वेड्या मज्ज, वो न नस्सामह मुणी ।। ६१ ॥ मग्गे य इइ के वुत्ने, केसी गोयमम ववी। कैसिमव युवत तु, गोयमो इणमन्नवी ॥ ६२ ॥ कुप्पायणपासण्डी, मचे उम्मग्गपट्ठिया । सम्मग्ग तु जिणक्खाय, एस मग्गे हि उत्तमे ।। ६३ ।।

- श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-तेनिसमाध्ययनम् साहु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे ससओ इमो। अन्नो वि ससओ मज्झ, त मे कहसु गोयमा ॥ ६४ ॥ महाउदगवेगेण, बुज्झमाणाण पाणिण । सरण गई पट्ठा य, दीन क मन्नसी मुणी ।। ६५ ॥ अस्थि एगो महादीगो, वारिमज्झे महालओ । मनाउदगवेगस्स, गई तत्थ न विजई ॥६६॥ दीवे य इड के वुत्ते, केसी गोयममन्नगी। केसिमेर पुनत तु, गोयमो इणमव्यवी ॥ ६७ ।। जरामरणवेगेण, उज्झमाणाण पाणिण । धम्मो दीगो पइट्ठा य, गइ सरणमुत्तम ॥ ६८ ॥ साहु गोयम पना ते, छिन्नो मे ससमो इमो। अन्नो वि मसओ मज्झ, त मे कहसुगोयमा ॥ ६९ ॥ जण्णासि महोहसि, नाना विपरिधापइ । जसि गोयममारूढो, कह पार गमिस्मसि ।। ७० ॥ जाउ सस्माविणी नाया,नमा पाररस गामिणी। जानिरस्माविणी नापा,माउ पारस्स गामिणी ।। ७१ ॥ नाना य इड का उत्ता, केसी गोयमम वी । केसिमय उरत तु, गोयमो डणम यवी ॥ ७२ ॥ मरीरमाहु नान त्ति, जीवे वुच्चड नाविओ। ससारो अण्णो वुत्तो, ज तरति महसिणो । ७३ ॥ साह गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे ममो इमो। अन्नो वि मसनो मज्झ, त मे कहमु गोयमा ।। ७४ ॥ अन्वयार तमे घोर, चिट्ठन्ति पाणिणो बह । को करिस्मह उज्जोय, सबलोयम्मि पाणिण ।। ७५ ।। उग्गओ विमलो भाण , सबलोयपभकरो। मो करिस्मा उन्नोय, मवलोयम्मि पाणिण ।। ७६ ॥ भाण य इन के उत्ते, केसी गोयमम चवी। रेसिमेव चुनत तु, गोयमो इणम नवी ॥ ७७ ॥ उग्गजो सीणससारो, सबन्नू निणभक्सरो । सो परिस्म- उज्जोय, महलोयम्मि पाणिण ॥ ८ ॥ माहु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे ससओ इमो। अन्नो वि मसओ मज्झ, त मे कहसु गोयमा ॥ ७९ ॥ मारीरमाणसे टुक्खे, उज्झमाणाण पाणिण । सेम सिरमणानाह, ठाण कि मन्नसी मुणी ।। ८० ।। अस्थि पग धुर ठाण, लोगग्गम्मि दुरारुह । जत्थ नस्थि जरा मन्च, वाहिणो वेयणा तहा ॥ ८१ ।। ठाणे य इड क वुत्ते, रेसी गोयमम नवी । केसिमेन सुवन तु, गोयमो इणमञ्चवी ।। ८२ ।। नियाण ति अवाह ति, सिद्धी लोगग्गमे य । खेम सिर अणावाह, ज चरति महसिणो ।। ८३ ।। त ठाण मामय वास, लोयग्गम्मि दुरास्ह । ज सपत्ता न सोयन्ति, भवोहन्तकग मुणी ॥ ८४ ॥ साहु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे ससओ इमो । नमो ते समगतीत, सचमुत्तमहोयही ।। ८५ ॥ एव तु ससए छिने, क्सी घोरपरक्कमे । अभिनन्दित्ता सिग्मा, गोमय तु महायस ।। ८६ ॥ पचमह वयधम्म, पडिवजड भारओ । पुरिमस्म पच्छिमम्मि, मग्गे तत्य सुहावह ॥ ८७ ॥ केसीगोयमओ निच, तम्मि आसि समागम । मुयमीलममुकमो, महत्थत्यविणिन्छनो। ८८ ।। तोमिया परिसा मबा, मम्मग्ग समुट्ठिया । मथुया त पसीयत्तु भयव कमिगोयमे ॥ ८९ ।। त्ति वेमि ॥ केसिगोयमिन्न ममत्त ।। ०६॥ ----- (४२) श्रीजैनसिद्धात -स्वाध्यायमाला 4 ॥ अह समिओ चउवीसइम अज्झयण ॥ , अह परयणमायाओ, समिई गुत्ती तहव य । पचेन य समिइओ, तओ गुत्तीउ आहीया ॥१॥ इरियाभासेसणादाणे, उच्चारे ममिई इय । मणगुत्ती वयगुत्ती, कायगुत्ती य अट्ठमा ॥ २ ॥ एयाओ अह सगिइओ, ममासेण वियाहिया । दुबारसग जिणग्वाय, माय जत्थ उ पवयण ३॥ आलम्बणेण कालेण, मग्गण जयणाय य । चउकारणपरिसुद्ध, सजए इरिय रिए ॥ ४ ॥ तत्थ आलम्बण नण दसण चरण तहा। काले य दिवसे वुत्ते, मग्गे उप्पहबजिए ॥ ५ ॥ दवओ सेत्तओ चेर, कालओ भावओ तहा । जायणा चउबिहा वुत्ता, त मे कित्तयओ सुण ॥ ६॥ दरओ चक्खुसा पेहे, जुगमित्त च सेत्तओ । कालओ जार रीइज्जा, उवउत्ते य भापओ ॥ ७ ॥ इन्दियत्थे विवजित्ता, सज्झाय चेव पञ्चहा । तम्मुत्ती तप्पुरकारे, उनउत्ते रिय रिए ॥ ८ ॥ कोह माणे य मायाए, लोभे य उनउत्तया। हासे भए मोहरिए, विकहासु तहेव य ॥९॥ एयाइ अझ ठाणाह, परिजितु सजए । अमावज मिय काले, भास भासिज पनव ॥ १० ॥ गवेसणाए गहणे य, परिभोगेमणाय य । आहारोवहिसेजाए, एरा तिन्नि विसोहए ॥ ११ ॥ गग्गमुप्पायण पढम, वीए सोहेज एसण । परिभोयम्मि चउक, विसोहज जय नइ ॥१२॥ ओहोरहोगग्गहिय, भण्डग दुविह मुणी । गिण्हन्तो निक्खिव तो चा, पउजेज इम विहिं ॥ १३ ॥ चक्खुमा पडिले हित्त, पमजज जय जइ । अडए निक्सिवेजा गा, दुहओ वि समिए सया ॥ १४ ॥ उच्चार पासवण, सेल सिंघाणजल्लिय | आहार उहि दह , अन्न वावि तहाविह ॥ १० ॥ अणावायमसलोए, अणोवाप चेव होद सलोए । आनायमसलोए, आवाए चेव सलोए ॥ १६ ॥ अणावायमसलोए, परस्सणुवघाइए। ममे अज्झुसिरे यावि, अचिरकालक्यम्मि य ।। १७ ।। विस्थिण्णे दूरमोगाढे, नासने विलवजिए। तसपाणवीयरहिए, उच्चाराइणि चोसिरे ॥ १८ ॥ एयाओ पञ्च समिइओ, ममासेण वियाहिया। एत्तोय तओ गुत्तीओ, वोच्छामि अणुपुत्वमो ॥ १९ ॥ मरम्भसमारम्भे, आरम्भे य तहेर य । चउत्थी अमञ्चमोसा य, मणगुत्तीओ चउबिहा ॥ २० ॥ सरम्भसमारम्भे, आरम्भे य तहर य । मण पत्तमाण तु, नियत्तेज जय जई ॥ २१ ॥ सचा सहा मोसा य, सचमोमा सहा य । चउरथी अमञ्चमोसा य, वइगुती उदिहा ॥ २२॥ सरम्भममारम्भे आरम्मे य तहेन य । वय पत्तमाण तु, नियतेन्ज जय जई ।। ३ ।। ठाणे निसीयणे चेव, तहेव य तुयट्टणे । उल्लघणपल्लघया, इन्दियाण य जुजणे ॥ २४ ॥ सरम्भसमारम्भे, आरम्भम्मि तहेच य। काय पचत्तमाण तु नियत्तेज जय जइ ॥ २५ ॥ एगाओ पञ्च समिईओ, चरणस्स य पवत्तणे । गुत्ती नियत्तणे उत्ता, असुभत्यसु सबमा ॥ २६ ॥ एमा पक्यणमाया, जे सम्म आयरे मुणी। सिप्प मबमसारा, विप्पमुच्च- पण्डिए । २७ त्ति बेमि ॥ इममिडओ समत्ताओ श्रीउत्तरायपनमून-पञ्चनिममाध्ययनम् (४३) ॥ अह जन्नदज्ज पञ्चवीसडम अज्झयण ॥ माहणकुलमभूमो, आसि विप्पो महायसो । जापाई जमजन्नम्मि, जयघोसि ति नाममो ॥१॥ इन्दियग्गामनिग्गाही, मग्गगाभी महामुणी । गामाणुग्गाम रीयते, पत्ते पाणारमिं पुरि ।।२।। वाणारसीए चहिया, उजाणम्मि मणोरमे। फामुए सेजसथाने, तत्थ वाममुनागए ॥३॥ अह तेणेर कालेण, पुरीए तत्थ माहणे । विजयघोसि ति नामेण, जन्न जयह पेयवी ॥ ५॥ अह से तस्य अणगार, मासकसमणपारणे । विजयपोसस्म जन्नम्मि, भिक्खमहा उपट्टिए॥॥ समुट्ठिय वहिं स त, जायगो पडिशेहिए।नहु दाहामि ते मिक्स, भिक्य जायानि अन्नओ॥६॥ जे य वेयविऊ विप्पा, जन्नट्ठा य जे दिया। जो मगविऊ जे य, जे य धम्माण पारगा जे समस्या समुद्धत्तु, परमप्पाणमेन य । तेसिं अन्नमणिदेय, भो भिक्खू मवकामिय ॥ ८ ॥ सो त थ एव पडिसिद्धो, जायगेण महामुणी । न नि स्टो न नि तुट्ठो, उत्तिमट्टगवेमओ ॥ ९ ॥ नन्नह पाणहेउ वा, नवि निवाहणाय पा। तेसिं विमोसणट्ठाए, इण यणमयची ।। १० ॥ ननि जाणसि वेयमुह, नवि जन्माण ज मुह। नरखत्ताण मुह ज २, जच यम्माण चा मुह ॥ ११ ॥ जे समस्या समुद्धत्त, परमप्पाणमेव य । न ते तुम वियाणासि, अह जाणासि तो भण ॥ १२ ॥ तस्मक्खैरपमोस तु, अअयन्तो तहिं दिओ। मपरिसो पजली होउ, पुच्छड त महामुणिं ॥ १३ ॥ क्याण च मुह हि, सहि जन्माण ज मुह । नक्सत्ताण मुह उहि, हि धम्माण समुह ।। १४ ॥ जे समस्या मम हत्त, परमप्पाणमेव य! एय मे ससय मध, माहू महसु अच्छिओ ।। १५ ।। अग्गिहत्तमुहा या अन्नट्ठी वेयसा मुह । नकवत्ताण मुह चन्दो, वम्माण कामगो मुह ॥ १६ ॥ जहा च द गहाया, चिट्ठती पजलीउडा । वन्दमाणा नममन्ता, उत्तम मनहारिणो ॥ १७ ॥ अनाणगा जन्ना, विजामाहणसपया । गूढा सज्झायतममा, भामच्छन्ना इग्गिणो ॥ १८ ॥ नो लोए यम्भणो उत्तो, अगीव महिओ जहा । सया कुमलमदिट्ट, न य म मारण 1) १९।। जो न सजड आगतु, पक्ष्य तो न मोयह । ग्मट अन्जायणम्मि, त वय वम माहण ।। २० ।। आयरूव जहामट्ट, निद्ध तमलपाग। रागदोमभयाय, त चय वम माहण ।। २१ ॥ ताम्पिय किम दन्त अवचियमससोणिय । सुव्वय पत्तनिवाण, त य म माहण ॥ २२ ॥ तमपाणे वियाणेत्ता, सगहण य थापरे । जो न हिंमड तिविहेण, त य म मादण ॥ २३ ॥ बोहा या जइ या हासा, लोहा ना जइ वा भया। मुम न ई जो उ, त य म माहण || २४ ।। चित्तमन्तमचित्त वा, अप्प या जड वा बहु । न गिण्हाड अत्त जे, त य म माहण ॥ २४ दिवमाणुमनेरिन्छ, जो न सेवा मेहुण | मगमा गायवक्केण, त य म माहण ।। २६ ॥ जहा पोम जले जाय, नोनलिप्पड वारिणा । एव अलित्त समेहि, त य म माहण ॥ २७॥ अलोठय मुहानीविं, अणगार अकिरण । असमत्त गिह यमु त य चूम मा ण ॥ २८॥ नहिना पुछसजोग नाइसगे य बन्धवे । जो न मन्नड भोगेमु, त यय उम माइण ॥ २९॥ पमुत्र या मवेया य, जट्टच पारम्भुणा । न त नायन्ति दम्मील, कम्माणि पल्पन्ति हि ॥ ३०॥ .

. , अाजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला न वि मुण्डिएण समणो, न आकारेण वम्भणो 1 7 मुणी रणनासेण, कुमचीरेण वावसो ॥ ३१ ॥ समगए समणो होइ यम्भचेरेण बम्भणो । नाणेण उ मुणी हो, तवेण होड तावसो ॥ ३२ ॥ फम्मुणा यम्मणो होइ, कम्भुणा होइ सत्तिओ । इमो कम्मुगा होड, मुद्दो हवा कम्मुणा ।। ३३ ॥ एए पाउकरे बुद्धे जेहिं होड सिणायओ । सबकम्मविणिम्मुख, त वय चूम माहण ॥ ३४ ॥ एव गुणममाउत्ता जे भरन्ति दिउत्तमा । ते समत्था उ उद्धत्तु, परमप्पाणमेव य ॥ ३० ।। एव तु ससए छिन्न, पिजयघोसे य माहणे । समुगाय त त तु, जयघोस महामुणिं ॥ ३६ ॥ तुट्टे य विजयघोमे, इणमुदाहु कयनली । माहणत्त जहाभूय, मुठ्ठ मे उवदसिय । -७ ।। सुन्भे जग्या जन्माण, तुब्भे वेयनिऊ विऊ । जो सगपिऊ तु-भे, तुम्भे धम्माण पारगा ।। ३८ ॥ तु भे ममत्था उद्वत्तु, परमप्पाणमेव य । तमणुग्गह करहम्ह मिक्खेण मिक्खु उत्तमा ॥ ३९ ॥ न कन्ज' मज्झ भिक्खेण, सिप्प निक्समसू दिया। मा भमिहिसि भयापट्ट धोर ससारसागरे ॥ ४० ॥ उबलेको होइ भोगसु अभोगी मोरलिप्पई । भोगी भमड समारे, अभोगी पिप्पमुच ।। ११ ॥ उल्लो सुक्सोय दो छढा गोलया महियामया। दो गिआवडिया उडे, जो उल्लो सोऽत्थ लग्गइ ।। ४२ ॥ एर लग्गन्ति टुम्मेहा, जे नरा रामलालसा | रित्ता उ न लग्गन्ति, जहा से सुक्सगोलग ॥ ३ ॥ एव से विजयघोम, जयघोसस्स अन्ति । अणगारस्स निक्स तो, वम्म सोचा अणुत्तर ॥ ४४ ।। सवित्ता पुष्परम्माइ, सजमेण तवेण य । जयोसविजयघोमा, सिद्ध पत्ता अणुत्तर ॥ ४५ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ जन्नइज्ज ममत्त ॥ २५ ॥ ॥ अह सामायारी छठीसइम अज्झयण ॥ सामायारि परक्सामि, सधदुरसरिमोरसणि । ज चरित्ताण निग्गन्था, तिण्णा ससारसागर ॥ १ ॥ पढमा आनस्मिया नाम, बिइया य निमीहिया । आपुच्छणा य तइया, चउत्थी पडिपुच्छणा ॥ २ ॥ पचमी छ दणा नाम इच्छाकारो य छट्टओ। सत्तमो मिच्छकारो य, तहकारो य अट्ठमो ॥ ३ ॥ अब्भुट्ठाण च नरम, दममी उपसपदा। एसा दसगा माहूण, सामायारी पवेइया ॥ ४ ॥ गमणे आरस्मिय कून्ना, ठाणे बुञ्ज निसीहिय । आपुच्छ सयररणे, परकरणे पडिपु छण ॥ ५॥ छन्दणा दबजाएण, इच्छाकारो य सारणे । मिच्छाकारो य निन्दाए, तहकारो पडिस्सुए ॥६॥ अब्भुट्टाण गुरूपूया, जच्छणे उपसपदा । एव दुपचसजुत्ता, सामायारी पवेइया ॥ ७ ॥ पुबिल्लम्मि चउभाए, आइञ्चम्मि समुट्ठिए । भण्डय पडिलेहिता, वन्दित्ता य तओ गुरु ॥ ८॥ पुच्छिज पजलीउडो, कि कायव मए इह । इच्छ निओइउ भत, वेयाचे व मज्झाए ॥ ९ ॥ वेयानचे निउत्तेण, काय अगिलायओ। सज्झाए वा निउत्तेण, मदुक्खविमोक्खणे ॥ १० ॥ दिवसस्स चउरो भागे, भिक्खू कुजा विपक्षणो। तओउत्तरगुणे कुजा, दिणभागेमु चउमुवि ।। ११ ॥ पढमपोरिसि सज्झाय,बीय झाण झियायई । तइयाए मिक्खायरिय, पुणो चउत्थीह सज्झाय ॥ १२ ॥ आसाढे मासे दुपया, पोसे मासे चउप्पया । चित्तासोपसु मासेस, तिप्पया हाइ पोरिसी ॥१३ ।। अगुल सत्तरण, परखेण च दुरगल । बड्डए हायए वावि, मासेण चउरगुल ।।

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श्रीउत्तरा ययनसूत्र-छपिसमाध्ययनम्
(४५)
आमादबहुलपक्खे, भद्दपए कत्तिए य पोसे य । फग्गुणगाइसाहेसु य, बोद्धवा ओमरत्ताओ ॥ १७ ॥
जेहाम्ले आमाढमावणे, उहि अगुलेहिं पटिलेहा। अर्हि वीयतम्मि तइए दम अट्ठहि चउत्ये ॥ १६ ॥
रति पि चउरो भागे, भिक्खू कुजा वियरसणो। तओ उत्तरगुणे कुञ्जा, गइभाएसु चउसु वि ॥ ७ ॥
पढम पोरिसि सज्झाय, वीय झाण झियाय। तस्याए निद्दमोक्सतु चउत्थी भुजो वि मज्झाय ॥ १८ ॥
ज नेह जयारत्ति, नक्सत्त तम्मि नहचउभाए । सपत्ते विरमेजा, मज्झाय पओसकालम्मि ॥ १९ ॥
तम्मा य नसत्ते, गयणचउभागमापसेमम्मि । रत्तियपि काल, पटिरेहिता मुणी कुजा ॥ २० ॥
पुल्लिम्मि चब्माए, पटिलेहिताण भण्डय । गुरु पन्दिन मज्झा याजा दुक्सविमोक्रवण ॥ २१ ॥
पोरिसीए चउभाए, वन्दित्ताण तओ गुरु । अपडिवमित्ता कालस्म, भायण पडिलेहए ॥ २२ ॥
मुहपोति पडिलेहित्ता, पडिलेज गोच्छग । गोच्छगल्टयगुलिओ, वत्थाइ पडिलेहए ॥ २३ ॥
जह थिर अतुरिय, पुव ता सत्यमेव पडिलेह । तो विन्य पप्फोडे, तइय च पुणो पमजिज ॥४॥
अणञ्चाविय जालिय, अणाणुगन्विममोमलिं चेन। उप्पुरिमा नन सोडा, पाणीपाणिविसोहण ॥ २५ ॥
जारभडा सम्म ग, पजेयवा यमोसलोतन्या। पप्फोडणा चउत्थी, विक्सिता वेडया छट्ठी ॥ २६ ॥
पसिढिलपलम्पलोला,एगा मोमाअणेगरूपगुणा। कुणड पमाणिपमाय,सक्यिगणणोग कुजा ॥ २७ ॥
जणूणाइरित्तपडिलेहा, अविच्चामा तदर य । पढम पय पमत्य, सेसाणि य अप्पमत्थाइ ॥ २८॥
पडिलेहण कुणन्तो, मिटोरह कुणड जणयह वा । टेड र पच्च स्याण, पाण्इ सय पडिन्छड ना ॥ २० ॥
पुढवा आउकाए, तेऊ वर पणस्मड-तमाण । पडिलेहणापमत्तो, छह पि विगहलो होड ॥ ३० ॥
पुढवी आउखाए, तेऊ पार वणम्मड तमाण ! पडिलहणानारत्तो, छह सग्क्सओ होड ॥ ३१ ॥
तडया पोरिसीए, भत्त पण गवस । छह जन्नयराए, कारणम्मि समुट्ठिए ॥ ३० ॥
वेयण क्यानचे, इरियट्ठाण य सनमट्ठए । तह पाणपत्तियाए, उट्ठ पुण पम्मचि ताए ॥ ३३ ॥
निग्ग थोधिइमन्तो निग्गन्थी विन करज हि चेव । याणेहि उ र मेहिं, अण वमणा से होइ ॥ ३४ ॥
आयक उपसग्गे, तितिकावया यम्भचेरगुत्तीसु । पाणिदया तबहउ, मरीरयो? यणट्ठाए ॥ ३५ ॥
अवसेस भण्डग गिज्झ, चक्सुमा पडिलेहए । परमद्धजोयणाओ, विहार विहरए मुणो ।। ३६ ।।
चउत्थीप पोरिसीए, निक्सिविताण भायण । मझा। नमो कुना, मद्यभापविभाषण ॥ ३७ ।।
पोरिसीए चउम्भार, वन्दित्ताण तओ गुरु । पटिकमित्ता कालस्म, सेज तु पडिऐहए ॥ ३८ ॥
पामरणुचारभूमि च, पडिलेहिज जय जइ । गाउम्मग तो उन्ना, सबदुक्सपिमोक्सण ।। ३९ ।।
दयसिय च जइयार, चिन्तिजा अणुपुत्वसो | नाणे ग दसणे चेर, चरितम्मि तहन य ॥ ४० ॥
पारियकाउस्मग्गो, वन्दित्ताण तओ गुरु । दसिय तु अश्यार, आलोएज अहकाम ।। ४१ ॥
पडिमिनु निम्सल्लो, वन्दिताण तओ गुरु । काउस्मग्ग तओ कुजा, महदुस्सविमोक्यण ॥ ४२ ॥
पारियकाउस्मग्गो, पन्दित्ताण तो गुरु । यडमगल च पाऊण काल सपटिलेहए ॥ ४३ ॥
पढम पोरिसि मज्झाय, वितिय झाण झियायद। तइयाए निदमोक्य तु, मज्झाय तु चउत्यिए ॥ ४५ ॥
पोरिसीए चारथीए, काल तु पडिलेहिया । मज्झाय तु तओ कुन्ना, जमोहन्नो असजए ॥ ४५ ॥
पोरिसीए चरभाए, वन्ति उण तमो गुरु । पडिकमित्तु कालास, कार त पडिहा ॥ ४६ ॥
आगए काययोम्मग्गे, मवदुक्यविमोक्सणे । गाउम्मग्ग तो उन्ना मवदुक्मविमोग्यण ॥ २७ ॥

www (४६) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला राइय च अईयर, चिन्तिज अणुपुचसो । नाणमि दसणमि य, चरित्तमि तवमि य ॥४८॥ पारियकाउस्सग्गो, वन्दित्ताण तओ गुरु । राइय तु अईयार, आलोएन जहक्कम्म ॥ ४९ ।। पडिकमित्तु निस्सल्लो, वन्दित्ताण तओ गुरु । काउस्मग्ग तओ बुजा, सबदुक्खण ॥ ५० ॥ किं तव पडिवजामि, एव तत्थ विचिन्तए । काउस्सग्ग तु पारित्ता, वन्दई य वओ गुरु ॥ ५ ॥ पारियकाउस्सग्गो, वन्दित्ताण तओ गुरु । तव तु पडिवजेजा, कुन्ना सिद्धाण सथव ॥ ५२ ।। एसा सामायारी, ममासेण वियाहिया । ज चरित्ता यह जीवा, तिण्णा ससारसागर ।। ५३ ॥ ति बेमि ॥ इअ सामायारी ममत्ता ॥२६॥ " ॥ ॥ अह खलुकिज सत्तवीसइम अज्झयण ॥ थेरे गणहरे गग्गे, मुणी आसि विसारए । आइण्णे गणिभावम्मि, समाहि पडिसधए ॥१॥ वहणे वहमाणस्स कन्तर अइयत्तई । जोगे वहमाणस्स, ससारो अइवत्तई ॥२॥ पलके जो उ जोएइ, विहम्माणो किलिस्सई । असमाहि ज वेएइ, तोत्तओ से य भन्नई ॥ ३॥ एग डसड पुच्छम्मि, एग विन्धइ ऽभिक्खण । एगो भजइ ममिल, एगो उप्पहदहिओ॥ एगो पडइ पासेण, निवसह निवञ्जई । उक्नुहइ उप्फिडइ, सढे बालगवी वए ॥ ५॥ माइ मुद्धेण पडइ, कुद्धे गच्छे पडिप्पह । मयलस्खेण चिट्ठई, वेगेण य पहामई ॥६॥ छिन्नाले छि दई सेलिं, दुद्द तो भजए जुग । सेवि य सुस्सुयाइत्ता, उज्जहित्ता पलायए ।। ७॥ खलुका जारिसा जोना, दुस्सीसा विहु तारिसा जोइया धम्मनाणम्मि, भजन्ती धिहदुबला ॥८॥ इड्डीगारविए एगे, पगेऽत्य रसगारवे । सायागारविए एगे, एगे सुचिरकोहणे ॥९॥ मिक्खालसिए एगे, एगे ओमाणभीरुए । थद्धे पगे आणुसामम्मी, हेऊहिं कारणेहि य ॥१०॥ सो वि अन्तरभासिल्लो, दोसमेव पकुबई । आयरियण तु वयण, पडिकूलेइऽमिक्खण ॥ ११ ॥ न मा मम वियाणाइ, न य सा मज्झ दाहिई । निग्गया होहिई मन्ने, सह अन्नोत्थ वच्च ॥ १२॥ पेसिया पलिउचन्ति, ते परियन्ति, ममतओ। रायवेष्टिं च मन ता, करेन्ति मिउर्डि मुद्दे ॥ १३ ।। वाइया सगहिया चेन, भत्तपाणेण पोसिया । जायपक्खा जहा हमा, पक्कमन्ति दिसो दिसि ॥ १४॥ अह सारही विचिन्तेइ, खटकेहि ममागओ। किं मज्झ दुट्ठसीसेहि, अप्पा मे अवसीयई ॥ १५ ॥ जारिसा मम सीमाओ, तारिसा गलिगद्दहा । गलिगद्दहे जहित्ताण, दढ पगिण्हई तर ॥१६॥ मिउमदवसपनो, गम्भीरो सुममाहिओ। विहरड महिं महप्पा, सीलभूएण अप्पण ॥ १७ ॥ त्ति बेमि ॥ बलुकिज ममत्त ॥ २७॥ .

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श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-जहारिसमाध्ययनम्
(४७)
॥ अह मोक्वग्गगई अहावीसइम अज्झयण ॥
मोक्खमग्गगइ तच,
सुणेह जिणभासिय । चउकारणसजुत्त, नाणदसणलक्षण ॥१॥
नाण च टसण चेव, चरित्त च तयो तहा । एस मग्गु त्ति पन्नत्तो, जिणेहिं वरदसिहि ॥ २॥
नाण च दमण चैव, चरित्त च तवो नहा । एयमग्गमणुप्पत्ता, जीवा गच्छन्ति सोग्गड ॥३॥
तत्थ पचविह नाण, सुय आमिनियोहिय । ओहिनाण तु तइय, मणनाण च केवल ॥ ४ ॥
एय पचविह नाण, दवाण य गुणाण य । पज पाण य सबैसि, नाण नाणीहि दसिय ॥ ५॥
गुणाणमासओ दन्छ, एगदवस्मिया गुणा । लक्खण पन्जयाण तु अभओ अस्मिया भवे ॥६॥
धम्मो अहम्मो आगास, कालो पुग्गल ज तवो । एम लोगो ति पन्नत्तो, जिणेहिं वरदसिहि ॥७॥
धम्मो अहम्मो आगाम, दव इविकमाहिय । अणन्ताणि य दवाणि, कालो, पुग्गलजन्तोवो ॥ ८॥
गइलक्सणो उ धम्मो, जहम्मो ठाणलक्खणो । भायण सबद वाण, नह ओगाहलक्खण ॥९॥
वत्तणालक्सणो कालो, जीवो उपओगलक्खणो । नाणेण दसणेण च, मुहेण य दुहेण य ॥१०॥
नाण च दमण चेन, चरित्त च नवो तहा । वीरिय अपओगो य, ण्य जीसम्म लक्खण ॥ ११ ॥
महन्धयार उजोओ, पहा छाया तवे इ वा । पण्णरसगन्धफासा, पुग्गलाण तु लक्षण ॥ १२॥
एगत्त च पुहत्त च, सखा सठाणमेव य । मजोगा य विभागा य, पज्जयाण तु लक्षण ॥ १३ ॥
जीवाजीवा य व धो य, पुण्ण पावासमा तहा । मवरो निन्जरा मोक्पो, सतेए नहिया नव ।। १४ ।।
तहियाण तु भावाण, सब्भावे उपएमण । भावेण सद्दहन्तस्म, मम्मत्त त वियाहिय ॥ १५ ॥
निसग्गुवासरई, आणई मुत्त बीयरइमेव । अभिगम विस्थाररुइ, किरिया संसंच वम्मरुद ॥ १६ ॥
भूयत्येणाहिगया, जीनाजीवा य पुण्णपार च । महसम्मुइयासवसवगे य रोण्इ उ निस्सग्गो ॥ १७ ॥
जो जिणदि? भावे, चउबिहे सद्दहार सयमेव । एमेव नन्नह त्ति य, स निमग्गरुइ ति नायधो ॥१८॥
एए चेर उ भावे, उपइटे जो परेण सदइ । छउमस्येण जिणेण , उवएसरुइ ति नायहो ॥ १९ ॥
गगो दोसो मोहो, अन्नाण जस्स अवगय होइ । आणाए रोएतो, मो ग्वलु आणारुइ नाम ॥२०॥
जो सुत्तमहिजन्तो, सुपण ओगाहई उ सम्मत्त ! अगेण बहिरेण , सो सुत्तरुइ त्ति नायबो ॥ २१ ॥
एगेण अणेगाइ, पयाइ जो पसरइ उ मम्मत्त । उदए व तेल्हरिदू, सोपीयरइत्ति नायवो ॥२०॥
सो होइ अभिगमरुद, सुयनाण जेण अत्थओ दिदा एकारस जगइ, पडण्णग दिहिवाओ य ॥ २३ ॥
दवाण सवभावा, सवपमाणेहि जस्म उपलद्धा । सवाहि नयविहीहि, वित्थारर ति नायहो ॥ २४ ॥
दमणनाणचरिते, तवपिणा मद्यसमिइगुत्तीसु।जो किरियामावरुई, मोबलु पिरियाई नाम ॥ २० ॥
अणमिग्गहियकुदिट्ठी सखेपरइत्ति होइ नायबोअविसारओपरयणे,अणभिंगहिओय सेसेमु ॥ २६ ॥
जो अस्थिकायधम्म,सुधम्म खलु चरित्तधम्म चा सद्दहड जिणाभिहिय,मोधम्मरुडत्तिनायो ।। २७॥
परमत्यमथवो , सुटिट्ठपरमथसेवण वा वि । बावनकुदमणाजणा, य सम्मत्तमद्दहणा ॥ २८ ॥
नस्थि चरित्त सम्मत्तविहूण, दमणे उ भइयच । सम्मत्तचरित्ताइ, जुगर पुव व ममत्त ॥ २९ ॥
नादमणिस्स नाण, नाणेण विणा न हुन्ति चरणगणा ।
अगणिम्प नत्थि मोक्खो, नथि अमोस्वस्स निवाण ॥३०॥

(४८) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला निस्सकिय निकसिय निधितिच्छा अमूढदिट्ठीय । उपवूह थिरीमरणे, वच्छल पभारणे अट्ठ ॥ ३१ ॥ सामाइत्थ पढम, ओवट्ठापण भये बीय । परिहारविसुद्धीय, सृहुम तह मपराय च ।। ३ ।। अकमायमहक्साय, छउमथस्म जिणस्म वा । एप चयरित्तार, चारित्त हो आहिय ॥ ३ ॥ तवो य दुविहो वुत्तो, बाहिरब्भन्तरो तना। बाहिरो छब्धिहो वुत्तो, एमेव भण्तरो तयो ॥ १ ॥ नाणेण जाणई भाव, दमणेण य सद्दहे। चरित्तण निगिण्हार, तवेण परिसुज्झइ ।। ३५ ॥ खवेत्ता युवरमाड, सजमेण तवेण य । मबदुक्सपहीणट्ठा पक्मति महसिणो ॥ ३६ ।। त्ति घेमि ॥ * मोस्यमग्गगई ममता ॥ २८ ॥ , । ॥ अह सम्मत्तपरकम एगूणतीसदम अज्झयण ॥ मुय मे आउम-तण भगाया एवमग्याप । इह बलु मम्मत्तपरध मे नाम अज्झयणे समणेण भगम्या महागीरण कासवेण पवेडए, ज सम्म सद्दहित्ता पतियाइत्ता रोयदत्त फासित्ता पालइत्ता ती- रित्ता वित्तता सोहत्ता जाराहिता आणाए अणुपालइत्त बहवे जीना सिग्झन्ति युज्झन्ति मुचन्ति परिनिवायन्ति सवदुक्साणमत करन्ति । तस्म ण अयमट्ठ एवमाहिञ्जड, तनहा-सवगे १ निवेए २ धम्मसद्धा ३ गुरुमाहम्मियसुरसूमणया ४ जालोयणया ५ नि दणया ६ गरि णया ७ सामाडग ८ चउचीसत्थव ९ व दणे १० पडिक्मणे ११ काउम्मग्गे १२ पञ्चक्साणे १३ था युईमगले १४ कालपडि ठेहणया १५ पायच्छित्तकरणे १२ समाश्यपया १७ सज्झाए १८ घायणया १९ पडिपु- च्छणया २० पडियदृणया २१ अणुप्पेहा २२ धमकहा २३ सुयस्म आराहणया २४ एगग्गमण- सनिवेमणया २५ सजमे २६ तवे २७ वोदाणे २८ सुहसाए २९ जपडिवद्धया ३०'विवित्तमयणा सणसेरणया ३१ विणियट्टणया *२ सभोगपञ्चक्साणे ५३ उमहिपचक्साणे ३४ आहारपच्चक्साणे ३. कमायपञ्चक्स्वाणे ३- जोगपञ्चक्साणे ३७ सरीरपञ्चक्साणे ३८ महा आणे ३९ भत्तप चक्साणे ४० स भावपञ्चक्साणे ४१ पडिख्वणया ४० वेयानच्चे ४३ मवगुणसपुण्णया ४४ पीय- रागया ४५ सती ४६ मुत्ती ४७ मध्ये ४८ अन्जवे ४० भारसचे ५० रणसच्चे ५१ जोगमञ्चे मणगुत्तया ५३ वयगुत्तया ५४ कायगुत्तया ५५ मणसमाधारणया ५६ वयसमाधारणया ५७ का । यसमाधारणया ५८ नाणसपनया ५९ दसणसपन्नया ६० चरित्तसपन्नया ६१ सोइन्दियनिग्गह ६० चक्सिन्दियनिग्गहे ६३ घाणिन्दियनिग्गहे ६४ जिभिन्दियनिग्गहें ६५ फासिन्दियनिग्गहे ६६ योहविजए ६७ माणविजए ६८ मायाविजए ६९ लोहविजए ७० पेजदोसमिन्छादसणविजए ७१ सेलेसी ७२ अकम्मया ।। ७३ ।। सगेण भते जीवे कि जणयइ। समेगण अणुत्तर धम्मसद्ध जणयड । अणुत्तराए धम्मसद्धाए सवेग हदमागच्छइ अणन्ताणुबधिकोहमाणमायालोमे सवेइ । क्म्म न बन्ध- । तप्पचय च ण मिच्छत्तविसोहिं पाऊण दसणाराहए भवइ । दमणविसोहीए य ण विमुद्धाए अत्जेगइए तेणेव भाग्गहणेण सिन्झई । सोहीए य ण विसुद्धाए तच्च पुणो भवग्गहण नाइक्कमइ ॥ ॥ निव्वेटण -- श्रीउत्तरा ययनसूत्र-एगूणतीममाध्ययनम् (४९) भन्ते जीवे कि जणय । निवेदण दिवमाणुमतेरिन्छण्सु कामभोगेसु निवेय हवमागन्छेड सबचिसएसु विरजन । सबमिएसु विरज्जमाणे आरम्भपरिचाय काइ! आरम्भपरिचाय करेमाणे ससारमग्ग वोन्छि दड, सिद्धिमग पडिनन्ने य भरड ३२|| धम्मसद्धाप ण भन्ने जीवे कि जणयइ । वम्मसद्धाए णमायामोखेसु रजमाणे विरजड। आगारधम्म च ण चय। अणगारिए ण जीवे मारीरमाणमाण टुक्माण छयणभेयणमजोगाटण पोन्रेय करे- अव्यागाह च सुह निरत्ते ॥ ॥ गरमाहम्मिय- सुस्मूसणाए ण विणयपडियचि जणयड । विणयपदिनन्न य ण नीचे अणाचामायणमीले नेहयतिरि कमजोणियमणुम्मदेवदुग्ग मो निरम्म । अण्णमजरणभत्तिबहुमाणयाए मणुस्सदरगईमो निनबट, सिद्धि मोगगह च विमोह। पम याड च ण विणयामूलाइ मजाड साहह अने य हवे जीव विणिरत्ता भर ।। आलोयणाए ण भन्ते जी कि जणयड । आलोयणाए ण मायानियाणमिच्छा दमणमल्लाण मोरममग्गविग्याण अणतममारयन्वणाण उद्धरण रड। उजुभान च जणयइ । उजु भावपटिाने य ण जीवे जमाट उत्पीयनपुपगमय च न ब-या। पुवनद्ध च ण निजरेड ॥ ५ ॥ निदणयाए ण भन्ते जीर कि जणयट । निन्दणया ण पन्छाणुतार जणयट । पाणुतावण पिर जमाणे रणगुणसटिं पटिरज । रणगुणसेढीपडिपन्ने य ण अणगार मोहणिज कम्म उग्पाए।६।। गरहणयाग ण भत जीवे कि जणयह। गरहणयाप अपुरकार जणयइ । अपुरकारगए ण जीवे जप्प सत्येनितो जोगेहिंतोनियत्तेत पसत्य य पडिजद । पमत्थनागपटियन्ने यण अणगार अण तघा पनवे सो ७मामाण भन्ते नीव नि जणगड ! मामाइपण मानलजोगविरत जणयट॥८॥उनीम यण्ण भन्त जीव किंजणयह ! च० टमणरिमोहिं जणयड।।९। वन्दणष्ण भन्त नीरे कि जणय। १०नीयागीय क्म्म सह। उच्चागोय कम्म निरपड सोहग्ग च ण जपडियि जाणाफल निचत्तट। दाहिणभान च ण जणयः ॥१०॥ पडिकमणेण भन्ते जीवे कि जणयट । प० पयछिदाणि पिटेट । पिहियायरिदे पुण जीव निरद्वामर जमनल्चग्तेि अहम परयणमायामु उपन्ते जपुहत्ते मुप्पणि हिहनिए पिहरट ।। १॥ काउमग्गेण मन्ते जी कि जणयड । का तायपरापन पायन्उित्त निसोट । निसुपायन्छित्ते य जीर नि यन्यिए ओहरिभर भारवर पम झाणोनगए मुह सुरण विदरड ॥ १२ ॥ पचक्साणेण भन्त जीने कि जणय । प० जामनगइ निम्म्भर | पञ्च- क्साणेण इन्छानिरोह जणयट । द निगेह गए य ण जीरे ममरव्यमुगिणीयतण्ह मी भूए गि हाट ॥ १३ ॥ ययुगमगरेण भन्त जीये कि जणयट । य० नाणत्यणचरित्तचोहिलाभ जणयड । नाणमणचरित्तगोहिलाममपने य ण जीवे अ तगिरिय परिमाणोसतिग जागहण आगहन । १० ॥ कालपटिटहणयाए ण भते जीवे कि जणयह । का० नाणानगणिन्न सम्म सवर ॥ १५ ॥ पायउत्तमरणेण भन्त जीर किं जणयन।पा पागनिमोहि जणय निरहयार पावि भरह । मम्म चण पायच्छित्त पडिरजमाणे मग्ग च मग्गफर च पिमोह मायार च आयारपल च जागण्ट ॥ १६ ॥ गमावणया ण भन्त जीरे किं जणयह । म० पल्हायणभाव जगयट । पल्लायणभावमु वगए य मव्यपाणभ्यनीपमत्तसु-मैत्ताभावमुप्पाण्ट । मत्तीभारमुपगए यानि भापविमोनि माउण नि भए भवट ॥१७॥ मन्याएण भने जीरे कि जणयट । म० नाणावरणिल सम्म गोट ॥ १८॥ चायणाए ण भन्ते जीरे पिं जणयड । ना० निजर जणयइ मुयस्म य अणामायणाए

(५२)
श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला
जहा सूई ससुत्ता न पिणस्मतहा जीने ससुत्ते ससारे न पिणम्सन, नाणरिणयतवचरितजोगे सपा
उणद, मसमयपरसमयपिमारए य असघायणिज भव ॥ ५९ ॥ दसणमपन्नयाए ण भत जीने किं
जणयइ । द० भामि छत्तयण करेइ न विज्झायइ । पर अविज्झाएमाणे अणुत्तरण नागमणेण
अप्पाण सजोएमाणे सम्म भागेमाणे विहरइ ।। ६०॥ चरित्तमपन्नयाए ण भते जीवे कि जणयह ।
च० सेलेसीभार जणय । मलेसि पडिनने य अणगार बत्तारि फेलिसम्मम सवर | तओ पच्छा
सिज्झइ युज्झइ मुचड परिनिवायइ सवदुक्साणम त काड ॥ ६ ॥ मोइन्दियनिग्गहण भ ते जीवे
कि जणयइ । सो० मणुनमणुन्नसु सद्देसु गगदोमनिग्गह जणयइ, तप्पच्चइय कम्म न यन्वइ, पुट
बद्ध च निजरइ ।। ६२ ॥ चक्सि िदयनिग्गहेण भ त जी कि जणयइ । च० मणु नामणुनेसु
रूपेर रागदोमनिगगह जणयइ, तप्पञ्चइय कम्म न रन्धड, पुवनद्ध च निजरइ ॥ २३ ।। पाणि
दियनिग्गण भ ते जीव किं जणयइ । घा० मणुनामणुनसु गन्धेसु रागटोमनिग्गह जणयइ,
तप्मचन्य क्म्म न बन्वड, पुवबद्ध च निजरड ॥ ६४ ॥ जिठिमन्दियनिगहेण भन्त जीरे किं
जणयड । जि० मणुनामणुन्नम रसेसु गगटोपनिग्गह जणुयड, तप्पच्चडय क्म्म न व वर, पुवनद्ध
च निजरेद ।। ६५ ॥ फासिन्दियनिग्गण भन्ते जीवे कि जणयह ! फा० यणुन्नामणुन्नेसु फासेसु
रागदोपनिग्गह जणय, तप्पञ्चय क्म्म न व पट, पुवनद्ध च निजरेद॥६६॥ कोहविजाण भ ते
जीव किं जणयद । को सति जणय कोदवेयणिज्ज क्म्म न चन्ध' पुबबद्ध च निजर । ६७॥
माणविजएण भन्त जीने कि जणयड । मा० मद्दन जणयइ, मायापयणिज सम्म न यन्वद, पुवनद्ध
च निन्नरड ॥ ६८ ॥ मायाविनएण भते जीरे कि जणयद । मा० अजन जणयड, मायावेयणिज
कम्म न ब धद, पुवबद्ध च निजरद ॥ ९॥ लोभपिजषण भन्ते जीने किं जणया । लो० सतोम
जणयड, लोभयणिज क्म्म न बन्धर, पुबलद्ध च निजरे |७० ॥ पिज्जदोसमिच्छादसणविएण
भन्ते जीरे कि जणयद । पि० नाणदसणचरित्ताराहणयाए अन्मुढे । अट्ठविहम्स कम्मस्स कम्म
गण्ठिविमोयणयाए तप्पढमयाए जाणुपुवीए अट्ठवीसदविह मोहणिज क्म्म उग्याए, पञ्चविह
नाणावरणिन, नाविह दमणावरणिन, पचविह अन्तराश्य, ए" तिन्नि वि सम्मसे सनेह । तओ
पच्छा जणुत्तर कसिग पडिपुत्ण निरावरण दितिमर पिसुद्ध लोगालोगप्पभार कालवरनाणदसण
समुप्पाडइ । जग्व मजोगी भवड, तान ईरियावहिय कम्म निबन्ध सुहफरिस दुममयठिश्य । त
पढमसमए पद्ध, विग्यसमए वेश्य, त यसमए निजिष्ण, त बद्ध पुट्ठ उदीरिय वेदय निजिण्ण
सेयाल य अगम्भयाच भवइ ॥७१॥ अह आउय पालइताअतोमुहुत्तद्धानसेमाए जोगनिरोह कॉमाणे
मुहुमकिरिय अप्पडिवाइसुवज्झाण झायमाणे तप्पढमयाए मणनोग निरुभर वयजोग निरुभर,कापजोग
निरुभइ, आणपाणुनिरोह करेइ, इसि पचरहस्मक्खरचारगट्ठाए य ण अणगारे समुच्छिन्नकिरिय अ
नियट्टिसुक्झाण झियायमाणे वेयणिज आउय नाम गोत्त च एए चत्तारि कम्मसे जुगव सवे॥७॥
तओ ओरालियतेयकम्माइ सचाहिं पिप्पजणाहि निप्पजहित्ता उज्जुसेढिपत्ते अपुममाणगइ उड्ड एग
समएण अपिग्गहण त थ गन्ता सागारोपउत्ते सिन्झइ पुज्झइ जार अत करेद ॥ ७३ ॥ एस पलु
सम्मत्तपरकम्मस्स अज्झयणस्म अट्टे समणेण भगवया वहावीरेण आपपिए पनविए पाविप दसिए
उपदसिए । ७४ ॥ त्ति वेमि ॥ इअ सम्मत्तपरक्कमे समत्त ॥ २९ ॥

श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-तीसमाध्ययनम् ॥ अह तवमग्ग तीसइम अज्झयण ॥ - , " जहा उ पावग कम्म, गगदोसर मजिय । स तवसा भिक्ख, तमेगागमणो सुण ॥१॥ पाणिवहमुमावायाजदत्त मेहुणपरिम्गहा विरलो। राइभोयणविरो, जीवो भवर अणासयो ॥२॥ पचसमिनो तिगुनो, अरमानो जि दियो । जगानो य निस्सल्लो, जीयो होद अणासवो ॥ ३ ॥ एएमि तु विश्चास, रागदोससमन्जिय | स उ जहा मिक्खू, तमेगग्गमणो सुण ॥ ४ ॥ जहा महातलायस्म, सन्निर द्वे जलागमे । उस्सिचणाए तरणाए, कमेण सोसणा भने ॥५॥ एव तु सजयस्मानि, पारकम्मनिगम । भरकोडीसचिय कम्म, तसा निजरिजइ ॥ ६ ॥ मो तमो दविहो जुत्तो, बाहिरम्भतरो तहा । वाहिरो छबिहो चुत्तो, एवमन्भन्तगे तो ॥ ७ ॥ अणमणमृणोयरिया,मिस्सायरिया य रसपरिचाओ। कायक्लेिसोसलीणयाय वज्झो तवो होड ॥८॥ इत्तरिय मरणकाला य, अणमणा दुविता भवे । त्तरिय मानक्सा, निरवकसा उ विडजिया ॥९॥ जो सोन्तरियतनो, सो समासण उबिहो । सेढितवो पयरतनो, घणो य तह होड वग्गो य ॥ १० ॥ तत्तो य जग्गाग्गो, पचमो उडओ प णतयो। मणयिचित्तत्यो, नायबो होइ इतरिओ ॥ ११ ॥ जा मा अणमणा मग्णे दुविहा मा वि रियाहिया। सवियारमपियारा, कायचिट्ठ पई भने ।। १२ ।। जहमा सपरिकम्मा, जपरिक्म्मा य आहिया । नीहारिमनीहारी, आहारन्छेओ दोसु नि ॥ १३ ॥ ओमोयरण पचहा, ममासेण पियायि । वो खेतमालेण, भावेण पजनेहि य ॥ १४ ॥ जो जम्म उ जाहारो, तत्तो जोम तु जो कर । जहन्नेणेगसित्याई, एन दवेण ऊ भवे ॥ १० ॥ गाम नगर तह रायहाणिनिगमे य जागरे पल्ली । सेडे बडदोणमुह पट्टणमडम्यसवाहे ॥ १६ ॥ जाममपए पिहारे, सचिनेसे समाययोसे य । यरिसेणाप पारे, सत्ये सवट्टकोट्टे य ॥ १७ ।। पाडेसु र रच्छा , घरसु ना एनमित्तिय पेत्त । कप्प- उ एवमाइ, एन खत्तेण ऊ भवे ॥ १८ ॥ पडा य जद्वपडा, गोमुत्तिपयगवीहिया चेन। सम्मुक्कापट्टाय यगन्तुपञ्चागया छट्ठा ॥ १९ ॥ दिनसम्म पोस्सीण, चउप, पिउ जतिजो भने कालो।एर चरमाणोसलु कालरोमाण मुणेयच ॥ २० ॥ अहवात याए पोरिसीए उणार पासमस तो। चउभारणाए चा, एक कारण ऊ भने ।। २१॥ इत्यी वा पूरिसोगा, जलक्लिो पानविओवादि । अन्नयरयत्यो वा, अन्नयरण व च घेण ॥ २० ॥ अनेण विरोसेण, अण्णेण भावमणुमुयन्त उ। एच चरमाणो सलु भागोमाण मुणेयच ॥ २३ ॥ दवे मेत्त काल, भारम्मि य आहिया उ ज भारा। एएहि ओमचरओ, पत्नपचरओ भने भिक्यू ॥ २४ ॥ जहरिहगोयरग्ग तु, तहा सत्तेत्र एमणा । अभिग्गहा य जे अन्ने, मिक्पायरियमाहिया । २५ ॥ सीरदहिसप्पिमाद, पणीय पाणभोयण। परिवजण रमाण तु, भणिय रसविरजण ॥ २६ ॥ ठाणा वीगमणाइया, जीनस्स उ मुहानहा। उग्गा जहा धरिजन्ति, कायरेिस तमाहिय ॥ २७ ॥ एगन्तमणानाए, इत्यीपमुविवजिए। सयणासणसेनणया, निवित्तसयणासण ॥ २८ ॥ एसो वाहिगतमो, समासेण वियाहिकी। अभि तर तव एत्तो, चुच्छामि अणुपुलमो ॥ २९ ।। पायच्छित पिणओ, बेयावच तहेव सज्झाओ। झाण च पिउसग्गो, एसो अभितरो वयो ।। ३० ॥ . -- श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला आलोयणारिहाईय, पायच्छित्स तु दसविह । ज भिस्सू वहई मम्म, पायच्छित्त तमाहिय ॥ ३१ ॥ अन्भुट्ठाण अजलिकरण, तहेवासणदायण । गुरुभत्तिभावसुम्ममा, विणओ एम वियाहिओ ॥ ३२ ।। आयरियमाईए, वेयावञ्चम्मि दसविह। आसेवण जहागाम, चयापच तमाहिय ॥ ३३ ॥ वायणा पुच्छणा चेव, तहर परियणा । अणुप्पेहा धम्मरहा, अज्झाओ पनहा भवे ॥ ४ ॥ अदृरुदाणि वजित्ता, झागजा सुसमाहिए। धम्मसुझाड झाणाइ, झाण त तु उहागण ।। ३५ ॥ सयणासणठाणे वा, जे उ भिक्स न वापरे। कायस्म विउस्मगो, उठो सो परिकित्तिो ।। १६ ॥ पच तव तु दुविह, जे सम्म जायरे मुणी। सो विप्प सबमसाग, विपमुच्चड पण्डिओ ॥ ३७॥ त्ति बेमि ॥ इअ तपमग्ग समत्त ॥ ३० ॥ ॥अह चरणनिही एगतीसडम अज्झयण ॥ चरणविहि पवक्सामि, जीनस्म उ सुहारह । ज चरित्ता बहू जीगा, तिण्णा ससारसागर ॥ १॥ एगओ विरइ कुजा, गओ य पवत्तण । असजमे नियत्ति च, सजमे य पत्तण ॥ २ ॥ गगदोसे य दो पाव, पावकम्मपवत्तपो । ज मिक्सू भई निच, से न पन्छा मण्डले ॥ ३ ॥ दण्डण गारवाण च, सल्लाण च तिग तिय । जे भिक्खू चयई निच, से न अन्ड मण्डले ॥ ४ ॥ दिवे य जे उपसग्गे, तहा तेरिच्छमाणुसे । जे भिक्खू सहई जयई, मे न अच्छड़ मण्डले ॥ ५॥ विगहाकमायसन्नाण, झाणाण च दुय तहा। ज बजइ निन, से न अन्छड मण्डठे ॥ ६ ॥ वएसु इ िदयत्थेसु समिईसु किरियासु य । जे भिक्रए जयद निच्च, से न अच्छह मण्डले ॥ ७ ॥ लेसामु छसु काएसु, छक्के आहारकारणे । जे भिक्खू जयई निच्च, से न अन्छद मण्डले ॥ ८ ॥ पिण्डोग्गहपडिमासु, भयट्ठाणेमु मत्तम् । जे भिक्खू जयइ निच, से न अच्छइ मण्डले ॥ ॥ मदेसु यम्भगुत्तीसु, भिक्षुधम्मम्मि दमविह। जे भिक्ग्यू जयइ निच, से न जच्छइ मण्डले ॥ १० ॥ उसगाण पडिमासु, भिक्खूण पडिमासु या जे भिक्पू जयइ निच, से न अच्छइ मण्डले ॥ ११ ॥ किरियासु भूयगामेस, परमाहम्मिण्मु य । ज भिक्खू जयई निच्च, स न जन्छड मण्डले ॥ १२ ॥ गाहासोल्मएहि, तहा असजम्मि य । जे भिक्खू जयई निच, से न अच्छइ मण्डले ॥ १३ ॥ चम्भम्मि नायझणेम, ठाणेसु य समाहिए।जे भिक्ग्य जयइ निच्च, म न अच्छड मण्डले ॥ १४ ॥ एगीमा सबले, याचीसाए परीमहे । जे भिक्खू जयई निच, स न अच्छइ मण्डले ॥ १ ॥ तपीसाइ सूयगड, रूचाहिएमु सुरेसु अ ! ज भिक्खू जयई निच, से न अच्छइ मण्डः ॥१६॥ पणुवीमभावणासु, उद्देसेसु दमाइण ! जे भिक्खू जयन निच, से न अछइ मण्डले ॥ १७ ॥ मणगारगुणेहि च, पगप्पम्मि तहेव य । जे भिक्खु जयई निच, से न अच्छइ मण्डले ॥ १८ ॥ पायमुयपसगेसु, मोहठाणेसु चेव य । जे भिख जयइ निच, म न अच्छइ मण्डले ॥१०॥ सिद्धा गुणजोगेसु, तेत्तीमासायणामु य । जे भिक्खू जयई निच्च से न अ इ मण्डले ॥ २० ॥ इय एस ठाणेसु, जे भिक्खू जयई मया । खिप्प सो सबसमारा, विष्पमुचड पण्डियो ॥ २ ॥ त्ति वेमि ।। इअ चरणविही समत्ता ॥ ३१ ॥ --

श्रीउत्तरा ययनसूत्र-प्रतीममाप्ययनम्
॥ अह पमायठाणं बत्तीसहम अज्झयण ॥
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अचन्तकालम्म सम्लगस्स मवस्म दक्यस्म उजो पमोक्यो।
त भामओ मे पडिपुण्णचित्ता, सुणेह एगतहिय हियरथ ॥ १॥
नाणस्म म म पगामणाप, जन्नाणमोहम्म विवन्नणाए ।
गगम्म दोमम्म य सखण्ण, एगन्तमोक्स समुवेन मोक्स ||२||
तम्सेम मग्गो गुगनिद्धसेना, विरजणा पालजणस्स दूरा ।
मझायएगन्तनिसेपणा य, सुनत्थसचि तणया पिद य ॥३॥
जाहामि-7 मियमेमणिन, महायमिन्छे निउणत्यबुद्धि ।
निकेयमिन्छेज रिवेगजोग्ग, ममाहिकामे समणे तबम्सी ॥४॥
न य लमेला निजण महय, गुगान्यि पा गुणओ मम वा ।
पको वि पना- पिसजय ततो, विहरज कामेमु अमज्जमाणो ॥५॥
जहा यजएडप्पभगा लागा, जग्ड वालागप्पमत्र जहा य ।
मेर मोहाययण खु तण्हा, पोह व तण्हाययण जयन्ति ॥ ६ ॥
गगो य दोमो विय कम्मनीय, सम्म च मोहप्पभव यन्ति ।
कम्म च जाइमरणम्म मल, दुक्स च जाईमग्ण वयन्ति ॥ ७ ॥
दुक्स हय जस्स न होट मोहो, मोहो हो जस्म न होट तण्हा ।
नहा हया जम्म न होइ रोहो, रोहो हओ जस्म न किचणाड ॥ ८॥
गग च स च तहर मोह, उद्धत्तु कामेण ममूलजार |
जे जे पाया पडिजियवा, ते फिनइम्मामि जहाणुपुति ॥ ० ॥
ग्मा पगाम न निसेवियवा, पाय म्मा दित्तिकग नराण ।
टिस च कामा समभिन्पन्ति, दम जहा माउफ्ल र पक्खो ॥१०॥
जहा टपग्गी पगरि पणे चणे, ममाम्लो नोवमम उवेइ ।
एविन्दियग्गा वि पगामभो णो,न सम्भयारिस्म हियायि कम्पः ॥११॥
विवित्तमेलामणतियाण, ओमामणाण दमिदियाण ।
न गगमत्त परिमेह चित्त, पग नो पाहिरिवोमहहि ॥ १०॥
जहा निरालावमहम्म मूले, न ममगाण वमही पसत्या ।
एमेव स्थीनिल्यम्म मज्झे, न सम्भयारिम्म म्यमो निगमो ॥ १३ ॥
न स्वरावण्णविलामहास, न जपियइगियपहिय वा।
इत्थीण चित्तसि निवमत्ता, न्? उवम्से समणे नाम्सी ॥ ११ ॥
अरमण र अपत्थण च, अचिन्तण चेर अस्तिण च ।
वीनणम्मारियज्माणजुम्ग, हिय मया यम्भवा रयाण ॥ १५॥

(b Aw www श्रीजैनसिद्वात-स्वाध्यायमाला काम तु देवीहि विभूसियाहि, न चाइया सोभइउ तिगुत्ता । तहा वि एग तहिय ति नचा, विपित्तचासो मुणिण पमत्यो ।॥ १६ ॥ मोक्साभिकखिस्स उमाणवस्स,ससारभीरुस्स ठियरस पम्मे । नेयारिस दुत्तरमस्थि लोग, जहित्यिो बाल्मणोहगजो ॥ १७ ॥ एए य सगे समइक्कमित्ता, सुदुत्तरा चेव भवा त ससा । जहा महासागरमुत्तरित्ता, नई भवे अवि गङ्गासमाणा ॥१८॥ कामाणुगिद्धिप्पभव खु दुक्स, सबस्स लोगस्स सदेवगस्म । जे काइय माणसिय च किचि, तस्मन्तग गच्छड वीयरागो ॥ १९ ॥ जहा य किम्पागफला मणोरमा, रसेण वण्णेण य भुज्जमाणा । ते खुड्डए जीविय पञ्चमाणा, एओरमा कामगुणा विनागे ।। २० ॥ जे इन्दियाण विसया मणुन्ना, न तसु भान निसिरे क्या । न यामणुन्नेसु मण पि कुजा, समाहिकामे समणे तस्सी ॥ २१॥ चक्खुस्स चक्खु गहण वयन्ति, त रागहउ तु मणुन्नमाहु । त दोसहेउ अमणुन्नमाहु, समो य जो तेसु स वीयरागो ॥ २२ ॥ रूचस्स चक्र गहण वयन्ति, चक्खुरम रूप गहण वयति । रागस्स हेउ ममणुन्नमाहु, दोमस्म हउ अमणुन्नमाहु ॥ २३ ॥ रूवेसु जो गेहिमुवेइ तिव, अकालिय पावइ से विणास । रागाउर से जह वा पयगे, आलोयलोले समुवेइ मच्चु ॥ २४ ॥ जे यानि दोस समुवेई तिव, तसिक्सणे से उ उवेइ दुवस । दुद्द तदोसेण सएण ज तू, न किञ्चि रूव जवरज्झई से ॥२५॥ एगन्तरते स्हरसि रूवे, अतालिसे से कुणई पओस । दुक्खस्स सम्पीलमुवेइ बाले, न लिप्पई तेण मुणी निरागा ॥ २६ ॥ रूवाणुगासाणुगए य जीवे, चराचरे हिंसइ तेणरूवे । चित्तेहि ते परितावेइ पाले, पीलेन जत्तद्वगुरू फिल्टेि ॥ २७ ॥ रूवाणुवाएण परिग्गहेण, उपायणे रक्सणसन्निओगे। पए विओगे य कह सुह से, वए सम्भोगकाले य अतित्ततामे ॥ २८ ॥ रूवे अतित य परिगहम्मि, सत्तोसत्तो न उवेइ तुहि । अतुहिदोसेण दुही परस्म, लोभाविले जाययई अदत्त ॥ २९ ॥ तण्हाभिभूयस्स अढत्तहारिणो, रूवे अतितस्स परिग्गहे य । मायामुस बड्डइ लोभदोसा, तस्यापि दुक्खा चिमुच्चई से ॥ ३० ।। मोसस्म पच्छा य पुरस्यको य, पयोगकाले य दुही दुरते । एव अदचागि समायय तो रूवे अतितो दुहिओ अणिस्सो ॥ ३१ ॥ रूपाशुरत्तम्म नरस्म एव, कत्तो सुह होज कयाइ फिश्चि । ,

(५७)
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श्रीउत्तरा'ययनसूत्र-घतीसमाध्ययनम्
तत्योपभोगे वि फिलेसदुक्ख, निवत्तई जस्स करण दुक्स ॥ ३२ ॥
एमेव स्वम्मि गओ पओस, उपेइ दुक्खोहपरपराओ!
पदुद्दचित्तो य चिणाइ क्म्म, ज से पुणो होड दुह विवागे ॥ ३३ ॥
ने विरत्तो-मणुओ विसोगो, एएण दुक्सोइपरपरेण !
न लिप्पए भरमज्ञ वि मन्तो, जलेण वा पोक्सरिणीपलास ॥ ३४ ॥
सोयरस सद्द गहण वयन्ति, त रागहेउ तु मणुन्नमाहु ।
त दोसहेउ जमणुन्नमाहु, समो य जो तेसु स वीयरागो ।। ३ ।।
सद्दस्स सोय गहण वयन्ति, सोयरस सद्द-गहण वयन्ति ।
रागस्स हेउ समणुन्नमाहु, दोसस्स हउ अमणुन्नमाहु ॥ ३६ ॥
सदेसु जो गेहिमुवेइ तिव, अकालिय पावइ से विणास ।
रागाउरे हरिणमिगे व मुद्धे सद्दे अतिचे समुवेड मच्चु ॥ ३७॥
ज यानि दोस समुवेइ तिब, तसि क्खणे से उ उवेइ दुक्ख ।
दुद्दन्तदोसेण सएण जतू, न किञ्चि सद्द अमरुज्झई से ॥ ३८ ॥
एगन्तरत्ते रुनरसि सद्दे, अतालिसे से कुणइ पओस ।
दुक्सस्स सम्पीलमुवेइ बाले, न लिप्पई तेण मुणी निरागो ।। ३९ ।।
सदाणुगासाणुगए य जीवे, चराचर हिंसइऽणेगरूवे ।
चित्तेहि ते परितावेड बाले, पीलेड अतद्वगुरू किलिडे ॥ ४० ॥
सद्दाणुवारण परिग्गहेण, उपायणे रक्सगसन्निओगे।
वए विओगे य कह सुह से, सभोगकाले य अतित्तलामे ॥४१॥
सद्दे अतित्ते य परिग्गहम्मि, सत्तोसत्तो न उवेंइ तुहि ।
अतुट्टिदोसेण दुही परस्म लोभाविले आययई अदत्त ॥ ४ ॥
तहामिभूयस्स अदचहारिणो, सद्दे अतित्तस्म परिग्गहे य ।
मायामुस वडा लोभदोसा, तत्थावि दुक्सा न विमुच्चई से ॥ ४३ ।।
मोसस्म पच्छा य पुरत्थओ य, पओगकाले य दुही दुरन्ते ।
एव अदत्ताणि समाययन्तो, सद्दे अतितो दुहिओ अणिस्सो ॥ ४४ ।।
सदाणुरत्तस्स नरस्म एव, कत्तो सुह होन कयाइ किचि ।
तत्थोपभोगे वि मिलेसदुक्स, निवत्तई जस्म कएण दुक्स ॥ ४५ ॥
एमेव सद्दम्मि गओ पओस, उवेड दुक्खोहपरपराओ।
पदुद्धचित्तो य चिणाड यम्म, ज से पुणो होइ दुह विवागे ।। ४६ ।।
सद्दे विरत्तो मणुमो विसोगो, एएण दुक्योहपरपरण ।
न लिप्पए भवमझे वि स तो, जलेण वा पोक्सरिणीपलाम ॥४७॥
पाणस्म गन्ध गहण वयति, त रामहेउ तु मणुभमाहु ।
स दोसहेउ अमममाह, समो य जो तेमु स वीपरागो ॥ ४८ ॥

+ श्रीजैनसिद्धात-खाध्यायमाला गन्धस्स घाण गहण पयन्ति, घाणस्स गन्ध गहण वयन्ति । रागस्स हेउ समणुनमाहु, दोमरस हेउ अमणुन्नमाहु ॥ ४९ ॥ गन्धेसु जो गेहिमुवेइ तिव, अकालिय पान से विणास । रागाउरे ओसहगन्धगिद्धे, सप्पे विलाओ विन निक्समते ॥ ५० ॥ जे यावि दोस समुवेइ तिच, तसिक्सणे से उ उवेइ दुक्स । दुदन्तदोसेण सण्ण जन्तू, न किचि गन्ध अवरुज्झई से ।। ५१ ॥ एगन्तरत्ते रुहरसि गन्ये, अनालिसे से कुणई पओस । दुक्सस्स सपीलमुवेइ बाले, न लिप्पई तेण मुणी विरागो ॥ ५२ ॥ गन्धाणुगासाणुग य जीवे, चराचरे हिंसइऽणेगरूवे । चित्तेहि ते परितावेइ पाले, पीलेइ अत्तगुरू किलिट्टे ॥ ५३ ।। गन्धाणुवाएण परिग्गहेण, उपायणे रक्सणसन्निओगे। वए विओगे य कह सुह से, सभोगका य अतित्तलामे ।। ५४ ॥ गधे अतित्ते य परिग्गहम्मि, सत्तोवसत्तो न उवेइ तुद्धि । अतुट्टिोसेण दुही परस्स, लोभाविले आययई अदत्त ।। ५५ ॥ तण्डाभिभूयस्म अदत्तहारिणो, गन्धे अतित्तस्स परिग्गहे य । मायामुप्स वड्डइ लोभदोमा, तथावि दुक्सा न विमुचई से ।। ५६ ।। मोसस्म पच्छाय पुरत्थओ य, पओगकाले य दुही दुर ते । एव अदत्ताणि ममायय तो, ग अतितो दुहिओअणिस्सो ॥ ५७ ।। गधाणुरत्तस्म नरस्स एव, कत्तो सुह होज कयाइ किचि । तत्थोकभोगे वि क्लेिसदुक्स्व, निवतई जस्स कण्ण दुक्ख ॥ ५८ ॥ एमेव गन्धम्मि गओ पओस, उवेइ दुक्सोहपरपराओ । पदुद्दचित्तो य चिणाइ कम्म, ज से पुणो होइ टुह विवागे ॥ ५० ॥ गन्ये विरत्तो मणुओ निसोगो, एएण दुक्सोहपरपरेण । न लिप्पड भवमझ वि सन्तो जलेण ना पोक्सरिणीपलास ॥ ६० ॥ जिब्भाए रस गहण वयन्ति, त रागहेउ तु मणुन्नमाहु । त दोसहेउ अमथुन्नमाहु, समो य जो तेमु स वीयरागो।। ६१ ॥ ग्सस्म किम्भ गहण चयति, जिभाए रस गहण वयति । गगस्स हड ममणुन्नमाहु, दोमस्स हेउ अमणुन्नमाहु ॥ ६२ ।। रसेसु जो गहिमुवेइ तिव, अकालिय पाव से विणास । रागाउरे बडिमपिभिन्नकाण, मच्छ जहा आमिमभोगसिद्धे ॥ ६३ ।। जे यानि दोस समुवे तिच, तसिकपणे से उ उवेड दुक्स । दुद्द वदोसेण सएण जतू, न किचि रस अवरज्झइ से ॥ ६४ ।। एगतरत्ते रुइरसि रसे अतालिसे से। कुणइ पोस ।

(५९) श्रीउत्तराध्ययनसत-बतीसमाध्ययनम् दुक्सस्म सपीलमुवैड घाले, न लिप्पद तेण मुणी विरागो ॥६५॥ रसाणुगामाणुगए य जीव, चराचरेहिसइऽणेगरूवे । चिंत्तेहि ते परितापेट वाले, पीलेड अत्तगुरू किलहे ॥ ६६ ॥ रसाणुनाएण परिग्गहेण, उप्पायणे रम्पणसन्निओगे। पए, विओगे य कह मुह से, सभोगकाले य अतितलामे ॥ ६७ ॥ रसे अतित्त य परिग्गहम्मि, सत्तोसत्तो न उबेइ तुहि । अतुट्ठिदोमेण दुही परस्स, लोभाविले आययई अदत्त ॥ ६८ ॥ तण्हाभिभूयस्म अदत्तहारिणो, रसे अदत्तस्स परिग्गहे य । मायामुस वड्डा लोभदोमा, तत्थावि दुक्सा न विमुच्चई से ॥ ६९ ।। मोमस्स पच्छा य पुरत्थनो य, पओगकाले य दुही दुरन्ते । एव अदत्ताणि ममाययन्तो, रसे अतितो दुहिओ अणिस्सो ॥ ७० ॥ रसाणुरत्तम्म नरस्म एन, क्त्तो सुह होज कयाइ किंचि । तत्योपभोगे वि किलेसदुक्स, निवर्तई जस्स एण दुक्स ॥ ७१ ॥ एमेर रमम्मि गओ पओस, उवेड दुक्खोहपरपराओ। पदट्ठचित्तोय चिणार कम्म, ज से पुणो होइ दुह विवागे ।। ७२ ॥ रसे पिरतो मणुओ विमोगो, एएण दुक्सोहपरपरेण । न लिप्पई भवमझे वि सन्तो, जलेण वा पोक्खरिणीपलास ।। ७ ॥ कायस्म फाम गहण वयन्ति, त रागहेउ तु मणुन्नमाहु । त दोमहेउ अमणुन्नमाहु, ममो य जो तेमु स वीयरागो ॥ ७४ ॥ फासस्म काय गहण वयन्ति, कायस्म फास गहण वयति । गगस्स हेउ ममणुन्नमाहु दोसस्म हेउ अमणु नमाहु ॥ ७५ ।। फासेसु जो गेहिमुवेइ तिव, अकालिय पार से विणास । रागाउरे सीयजलापमन्ने, गाहग्गहीए महिसे पिचन्ने ॥ ७६ ॥ जे यानि दोस समुवइ तिव, तसि क्सणे से उ उवेड दुक्स । दुद्दन्तदोसेण माण जन्तू, न किचि फास अरुज्झइ से ।। ७ ॥ एगतरत्त रुहरसि फासे, आतालिसे से कुणइ पओस । दुक्सस्म सपील मुवेड पाले, न लिप्पद तेण मुणी विगगो ।। ७८ ॥ फासाणुगासाणुगए य जीवे, चराचरे हिंसडऽणेगरूवे । चित्तेहि ते परितावेड पाले, पीलेइ अचट्ठगुरुकिलिट्ठ ।। ७९ ।। फासाणुवाएण परिग्गहण, उप्पायणे रक्वणसन्निओगे। गए विओगे य कह मुह से, सभोगकाले य जतिचलामे ॥ ८०॥ फासे अतिते य, परिग्गहम्मि, मत्तोवमत्तो न उवे तुहि । अतुट्टिदोसेण दुही परस्म, लोभाविले आययह अदच ॥ ८१ ।।

श्रीजनसिद्धान्त-खाध्यायमाला वण्हाभिभूयस्स अदत्तहारिणो,फासे अतित्तस्स परिगहे य । मायामुस वइ लोभदोसा, तत्यावि दुक्सा न विमुचई से ॥ ८२ ।। मौसस्स पच्छा य पुरस्थओय, पोगकाले य दुही दुरस्ते । एव अदत्ताणि समायय तो,फासे अतित्तोदुहिओ अणिस्सो ॥ ८३ ।। 'फासाणुरत्तस्स' नरस्स एव, कत्तो मुह होज कयाइ किंचि । तत्योवभोर्गे वि किलेसदुक्य निवतई जस्स कएण दुक्स ॥ ८४ ॥ 'एमेव 'फासम्मि गओ पोस, उवेइ दुक्खोहपरपराओ। पदुद्दचित्तो य चिणाइ कम्म,ज से पुणो होइ दुह विवागे ।। ८ ।। "फासे विरत्तो मणुओ पिसोगो, एएण दुक्खोहपरपरेण । नलिप्पई भर्वमझे वि सन्तो, जलेण चा पोक्खरिणीपलास ॥ 'मणस्स भाव गहण वयन्ति, त रागहउ तु मणुन्नमाहु । त दोसहेउ अमणुन्नमाहु, समोय जो तेसु स वीयरागो ।। ८७ ।। भावस्स मण गहण वयन्ति, मणस्स भाव गहण वयन्ति । रागस्स हेउ समणुनमाहु, दोसस्स हेउ अमणुनमाहु ॥ ८८॥ भावेसु जो गेहिमुवेइ तिघ, अमालिय पाप से विणास । रागाउरे' कामगुणेसु गिद्धे, करेणुमरगावहिए गजे चा ॥ ८९ ।। जे यावि दोस समुवेइ तिब, तसिक्सणे से उ उवेइ दुक्ख । दुइन्तदोसेणं सएण जतू, न किचि भाव अवरुज्झई से ॥ ९ ॥ 'एगन्तरने रुहरसि "भावे, अतालिसे से कुणई पओस । दुक्खस्स संपीलमुवेइ बाले, न लिप्पई तेण मुणी विरागो॥९१ ॥ भावाणुगासाणुगए य जीवे, चराचरे हिसइऽणेगरूवे । चित्तेहि ते परितावेइ वाले, 'पोलेइ अत्तायुरू किलिट्टे ॥ ९२ ।। भावाणुनाएण' परिग्गहेण, उप्पायणे रक्खणसन्निओगे। वए विओगे य कह सुह से, सभोगकाले य अतित्तलामे ॥ १३ ॥ भावे अतिते य परिग्गहम्मि, सत्तोवसत्तो न उवेह तुहि । अतुविदोसेण दुही परस्स, लोभाविले आययई अदत्त ॥ ९४ ॥ तहामिभूयस्स अदत्तहारिणो, भावे अतित्तस्स परिग्गहे य । मायामुस बड्डा लोभदोसा, तत्थाविदुिक्खा न विमुच्चई से ।। ९५ ॥ मोसस्स पच्छाये पुरस्थओय, पोगकाले य दुही दुरते । एवअदत्ताणि समाययन्तो, भावे अतिचोदुहिओ अणिस्सो ॥ ९६ ।। भावाणुरत्तस्स नरस्म एव, क्त्तो मुह होज कयाइ किंचि । वस्थोवभोगे विकिसदुपस, निवृतई जिन्स करण दुक्खः।। ९७ ।। एमेव भावम्मि' गी 'पओस, वेद दुस्खोहपरपराओ। +

(६१)
श्रीउत्चराध्ययनसून-वतीसमाध्ययनम्
पदुद्दचित्तोय चिणाड कम्म, ज से पुणो होड दुह विनागे ॥ ९८ ॥
भावे विरत्तो मणुओ विसोगो, एएण दुक्सोहपरपरेण ।
नलिप्पइ भवमझे वि स तो, जलेण वा पोक्सरिणी पलास ॥ ९९ ॥
एविन्दियत्था य मणस्स अस्या दुक्यस्म हउ मणुयस्म रागिणो ।
ते चेत्र थोर पि कयाइ दुक्स, न वीयरागस्स करेन्ति किचि ।। १०० ॥
न कामभोगा ससय उवन्ति, न यावि भोगा गिइ उवेन्ति ।
जे तप्पओसी य परिग्गही य, सो तेसु मोहा विगइ उपेइ ॥ १०१ ।।
कोह च माण च तव माय लोह दुगुच्छ अरइ रइ च।
हास भय सोगपुमित्यिवेय, नपुसवेय विविहे य भाव ॥ १०२ ।।
आवजा एवमणेगरूवे, एपविह कामगुणेसु सत्तो ।
अन्न य एयप्पथवे विसेसे, कारुण्णदीणे हिरिमे वइस्से ॥ १०३ ।।
कप न इच्छिन्न सहायलिन्छ, पच्छाणुताव न तवप्पभाव ।
एव वियार अमियप्पयारे, आरजइ इन्दियचोरयस्से ॥ १०४ ।।
तओ से जायति पओयणाइ, निमिजिउ मोहमहण्णाम्मि ।
सुहेसिणो दुक्सविणोयणट्ठा, तप्पचय उजमए य रागी ॥ १०५ ॥
विरजमाणस्म य इन्दियत्था, सद्दाइया तानइयप्पगारा ।
न तस्स सबै वि मणुन्नय वा, निवत्तयन्ती अमणुनय चा ॥१०६॥
एव ससकप्पविकापणासु, सजायई समयमुट्ठियस्स ।
अत्थे असकप्पयओ तओ से, पहीयए कामगुणेसु तण्हा ॥ १०७ ।।
स वीयरागी कयसबस्चिो, सवेइ नाणावरण सणेण ।
तहेच ज दसणमानरेइ, ज च तराय परेड क्म्म ॥ १०८ ॥
सच तओ जाणइ पामए य, अमोहणे होड निरतगए ।
अणासवे झाणसमाहिजुत्ते, आउक्सए मोक्समुवेइ सुद्धे ॥ १०९ ॥
सो तस्म सबस्स दुहस्स मुक्को, ज वाहद सयय जतुमेय ।
दोहामय पिप्पमुक्को पसत्थो, तो हो अचन्तसुही कयस्थो ।। ११० ॥
अणाइकालप्पभवस्म एसो, सवस्स दुक्सस्म पमोक्समग्गो ।
वियाहिओ ज समुविच सचा, कमेण अञ्चन्तसुही भान्ति ॥ १११ ॥
त्ति वैमि ॥ इअ पमायहाण समत्त ॥ ३२ ॥

(६२) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला ruww ॥ अह कम्मप्पयडी तेत्तीसइम अज्झयण ॥ अट्ठ कम्माइ योन्छामि आणुपुर्वि जहाक्म । जेहि बद्धो अय जीयो, ससारे परिवई ॥१॥ नाणस्मावरणिन्ज, दसणावरण तहा। वेयणिज ता मोह, आउकम्म तहेर य ॥ २ ॥ नामझम्म च गोय च, अन्तराय तहेव य । एवमेयाइ क्म्माइ, अट्ठन उ समासओ ॥ ३ ॥ नाणावरण पञ्चविह, सुय आभिणियोहि ।। ओहिनाण च तइय, मणनाण च केवल ।। ४ ।। निदा तहेव पयला, निहानिदा पयलपयला य । तत्तो यमीणगिद्धी उ, पचमा होड नायबा ॥५॥ चक्खुमचक्खूओहिस्म, दसणे केवले य आवरणे । एव तु नपविगप्प, नायव दसणारण ॥ ६ ॥ वेयणीयपि य दुविह, सायममाहिय च अहिय । सायस्स उ बहू भेया, एमेर अमायस्स वि ।। ७ ।। मोहणिजपि च दुविह, दसणे चरणे त।। दसणे तिविह वुत्त, चरणे दुविह भवे ॥ ८॥ सम्मत्त चेर मिच्छत्त, सम्मामिन्छत्तमेव य। एयाओ तिनि पयडीओ, मोहणिजस्स दसणे ॥९॥ चरितमोहण कम्म, दुविह त वियाहिय कमायमोहणिज्ज तु, नोकसाग तहेव य ॥ १० ॥ सोलसविहभेएण, कम्म तु सायज । सत्तविह नवविह वा, कम्म च नोक्मायज ॥ ११ ॥ नेरइयतिरिक्खाउ, मणुस्साउ तहर य । देउय चउत्थ तु, आउ कम्म चउन्बिह ॥१० ।। नाम कम्म तु दुविह, सुहममुह च आहिय । सुभस्प उ बहू भेया, एमेव असुहस्त वि ॥ १३ ॥ गोय कम्म दुविह, उच्च नीय च आहिय । उच्च अट्ठविह होड, एव नीय पि आहिय ॥ १४ ॥ दाणे लामे य भोगे य, उवभोगे वीरिए तहा । पञ्चविहमन्तराय, समासेण वियाहिय ॥ १५ ॥ एयाओ मूलपयडीओ, उत्तराओ य आहिया । पएसग्ग खेत्तकाले य, भाव च उत्तर सुण ॥ १६ ॥ गवेसिं चेत्र कम्माण, पएसग्गमण तग | गणिठयसत्ताइय, अन्तो सिद्धाण आहिय ॥ १७ ॥ सबजीवाण कम्म तु, सगहे छद्दिसागय । समु वि पएसेसु, सच्च सव्वेण बद्धग ॥१८॥ उदहीमरिसनामाण, तीमई कोडिकोडिओ । उक्कोसिय टिई होइ, अन्तोमुहुत्त जहनिया ॥ १९ ।। आवरणिज्जाण दुण्हपि, वेयाणिज्जे तहन य । अन्तराए य कम्मम्मि, ठिइ एसा वियाहिया ॥ २० ॥ उदहोमरिमनामाण, सत्तरि कोडिकोडीओ ! मोहणिजस्स उकोसा, अ तोमुत्त जहनिया ॥ २१ ।। तत्तीम सागरोचमा, उक्वोसेण वियाहिया । ठिइ उ आउकम्मस्स, अन्तोमुहृत्त जहनिया ॥ २२ ॥ उदहीमरिमनामाण, वीमई कोडिकोडीओ । नामगोताण उकोसा, अट्ठ मुहत्ता जहनिया ॥ २३ ॥ सिद्धाणण तपागो य, अणुभागा हति - । मन्वेसु वि पएसग्ग, सबजीवे अइच्छिय ॥ २४ ॥ वम्हा एएसि कम्माण, अणुभागा वियाणिया । एएमि सवरे चेर, खवणे य ज यहो ॥ २५ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ कम्मप्पयडी समत्ता ॥ ३३ ।।

श्रीउत्तरा ययनसूत्र-चोलीममाध्ययनम् ॥ अह लेसज्झयण चोत्तीसइम अज्झयण ॥ vvvMy लेसज्जयणं परक्सामि, आणुपुवि जहकम । उण्हपि कम्म लेमाण, जणुभावे सुहण मे ॥१॥ नामाड वणरसग धफासपरिणामल क्सण | ठाण ठिइ गइ चाउ, लेमाण तु सुह मे 101 किण्हा नीला य काऊ य, तेऊ पम्हा तहेर य । सुक्लेसा य छटा य, नामाड तु जहम ॥ ३ ॥ जीमूपनिद्रसफामा, गवलरिडगमनिभा । सजणनयणनिभा, किण्हलेमा उ पण्ण भो ॥४॥ नीलासोगमकामा, चामपिच्छममप्पभा । वेरुलियनिद्वसमामा, नीललेमा उ चण्णओ ॥५॥ अयमोपुष्फममामा, कोइलच्छदमन्निभा । सुयतुण्डपदानिमा, काउलेमा उ मण्णओ ॥ ६ ॥ हिंगुलपाउसकामा, तरुणाईच्चसन्निभा । सुयतुण्डपदवनिभा, तेऊलेमा उ रण्णओ ॥ ७ ॥ हरियालमेयसफासा, हलिदामेयममप्पभा सणासणकुसुमनिभा पम्हलेसा उ रण्णओ ।। ८ ।। ससकन्दमङ्कामा, सीरपूरसमप्पभा। रयणहारसकामा, सुकलेसा + पण्णी ॥९॥ जह क्डयतुम्बगरसो, निम्बरसो षडयरोहिणिग्यो वा । पत्तो नि अणन्तगुणो, रसो य किण्हाए नायवो ॥१०॥ जह तिगडुयस्स य रसो, तिक्सो जह हरिथपिप्पलीए वा । एत्तो वि अण तगुणो, रसो उ नी गए नायव्यो ॥ ११ ॥ जह परिणअम्बगरसो, तुवरकविट्ठस्स वारि जारिसओ। एतो वि अणन्तगुणो, रसो उ काऊण नायव्यो ।। १२ ॥ जह परिणयम्बगरसो, पक्ककविट्ठस्म नावि जारिसओ। एतो नि अणन्तगुणो, रसो उ तेजण नाय गो ॥ १३ ॥ वरवारुणीप वारसो, विविहाण व आमवाण जारिसओ । महुमेरयस्म व रसो, पत्तो पम्हाए परएण ॥१४ । सज्जमुद्दियरसो, खीररसो खडसकरसो मा । एत्तो वि अणतगुणो,रमो उ मुक्काए नायवो ॥ १५ ॥ जह गोमडस्म गधो मुणगमडस्म र जहा अहिमडरमाएत्तो वि अणतगुणो,लेमाण जप्पमत्थाण ॥ १६ ॥ नह सुरहिक्सुमगधो गधवामाण पिस्ममाणाण। एत्तो वि अणतगुणो, पयत्यलेमाण तिण्ह पि ॥ १७ ॥ जह करगयस्म फासो, गोनि भाए य मागपत्ताण। एत्तो वि जणतगुणो लेमाण अप्पह पाण ॥ १८ ॥ जह पूरस्म र फासो,नरणीयस्म व सिरीमकुसुमाणा एत्तोचि अणतगुणो,पमत्यलेसाण तिण्हपि ॥ १९ ॥ तिविहो व नापिहोवा, सत्तावीसइपिहरूसीओ वा । दुमओ तेयालो पा लमाण होर परिणामो ॥ २० ॥ पचामवप्पबत्तो, तीहिं अगुचो छसु अविरओ या तिहारमपरिणओ, खुट्टो साहसिमोनरो ॥२१॥ निद्धन्धमपरिणामो, निस्ममो अनिइन्दिओ। एयनोगममाउत्तो किण्हलेम तु परिणम || २२ ॥ इम्मा अमरिस चतयो, अपिज्जमाया अहीरिय । गेही पोसे य सट, पमत्त रसलोटए ॥ ३ ॥ मायगवेसए य आरम्भामो अविरओ,सुट्ठो साहस्मिओ नरोएयनोगममाउनो,नीरस तु परिणमे । क चकममायारे, नियडिठे अणुज्जु । पलिउचगोरहिए, मिडटिट्ठी अणारिए ॥ २० ॥ उफामगदुट्टयाई य, तेणे यानि य म उरी। एयनोगमाउत्तो, गाजम तु परिणमे ॥ २६ ॥ - . (६४) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला नीयावत्ती अचवले, अमाई अकुहले। पिणीयरिणए दन्ते, जोगव उपहाणा ॥ २७ ॥ पियधम्मे दढधम्मेऽवज भीरू हिएसए । एयजोगसमाउत्तो, तेउलेस तु परिणमे ।। २८ ।। पयणुकोहमाणे य, मायालोमे य पयणुए । पसन्तचित्ते द तप्पा, जोगव उवहाणर ॥ ९॥ तहा पयणुवाई य, उपस ते जिइदिए । ण्यजोगसमाउत्तो, पम्हलेस तु परिणमे ॥ ३० ॥ अट्ठरुद्दाणि वजित्ता, धम्मसुकाणि झायए। पसन्तचिचे द तप्पा, समिए गुत्ते य गुत्तिसु ॥ ३१ ॥ सरागे वीयरागे वा, उवसन्ते जिइन्दिए। एयजोगसमाउत्तो, सुकलेस तु परिणमे ॥ ३२ ।। असखिजाणोसप्पिणीण, उस्मप्पिणीण जे समया। ससाइया लोगा, लेसाण हान्ति ठाणाइ ॥ ३३ ॥ मुहुचद्ध तु जहन्ना, तेत्तीसा सागरा मुहुत्तहिया। उक्कोसा होइ ठिई, नायचा किण्हलेसाए ॥ ३४ ॥ मुहुत्तद्ध तु जहन्ना,दस उदही पलियमसग्वभागभहिया। उक्कोसा होइ ठिई,नायचा नीललेसाए ॥ ३५ ॥ मुहुत्तद्ध तु जहन्ना,तिण्णुदही पलियमससभागमभहिया|उक्कोसा होड ठिई,नायवा काउलेमाए॥३६ ॥ मुहुत्तद्ध तु जहन्ना,दोण्णुदही पलियमससभागमभहिया।उक्कोसा होइ ठिई,नायव्वा वेउलेसाए ॥ ३७ ।। मुहुत्तद्ध तु जहन्ना, दस हो ित य सागरा मुहुत्तहिय । उक्कोसा होइ ठिई, नायचा पम्हलेसाए ॥ ३८ ॥ मुहुत्तद्ध तु जहन्ना तेत्तीस सागरा मुहुत्तहिया । उक्कोसा होइ ठिई, नायवा सुकलेसाए ॥ ३९ ॥ एसासल लेसाण, ओहण ठिई वणिया होइ । चउसु वि गईसु पत्तो, लेसाण ठिई तु वोच्छामि ॥ ४० ॥ दस वाससहस्साइ, काऊए ठिइ जहन्निया होइ। तिण्णुदही पलिओवम, असखभागच नकोसा ॥ ४१ ।। तिण्णुदही पलिओवमससभागोजह नेण नीलठिई।दसउदहीपलिओवमअससभागच उकोमा ॥ ४२ ॥ दसउदही पलिओवमअससभग जहनिया होइ । तेत्तीससागराइ उक्कोसा, होइ किण्हाए लेसए ॥ ४३ ॥ एसा नेरइयाण, लेसाण ठिद उ वण्णिा होइ । तेण पर वोच्छामि, तिरियमणुस्साण दवाण ॥ ४४ ॥ अन्तीमुहुत्तमद्ध, लेलाण जहिं जहि जाउ । तिरियाण नराण वा, जित्ता केरल लेस ॥ ४५ ॥ मुहुत्तद्ध तु जहन्ना उकोसा होइ पुचकोडीओ । नयहि परिसेहि उणा, नायचा कसुलेसाए ॥ ४६ ॥ एसा तिरियनराण, लेसाण ठिई उपणिया होइ । तेण पर वोच्छामि, लेसाण ठिइउ दवाण | ४४॥ दस वाससहस्सइ, विहाए ठिई जहनिया होइ । पलियमससिज्ज इमो, उकोसो होइ किण्हाए ॥४८॥ जा किण्हाए ठिइ खलु, उकोसा सा उ समयमभहिया । जहन्नेण नीलाए, पलियमसस च उकोसो ॥ ४९ ॥ जा नीसाए ठिइ खलु, उकोसा सा उ समयमभहिया। जह नेण काऊए, पलियमसस च उक्कोसा ।। ५० ॥ तेण पर वोच्छामि, तेऊलेसा जहा सुरगाण | भरणवइवाणमन्तरजोइसवेमाणियाण च ।। ५१ ।। पलिओषम जहन्न, उक्कोसा सागरा उ दुन्नहिआ । पलियमसखेल्नेण, होड़ भागेण तेऊए ।। ५२ ॥ दस वाससहस्साइ, तजए ठिई जहनिया होइ। दुनुदही पलिओवमअसखमाग च उकोसा ॥ ५३ ॥ जा तेजण ठिई सलु, उकोसा सा प समयमभहिया। जान्नेण पम्हाए, दस उ मुहचाहियाइ उकोसा ।। ५४ ।।

wraan . श्रीउत्तरा ययनसूत्र-चोचीसमाध्ययनम् जा पम्हाए ठिई सलु,कोसासा उ ममयमभहिया। जहन्नेण सुकाए, तेत्तीम मुहुत्तमब्भहिया ॥ ५५ ॥ विण्हा नीला काऊ, तिन्नि वि एयाओ अहमलेमाओ। एयाहि तिहिवि जीवो, दुग्गड उपवजः ।। ५६ ॥ तेऊ पम्हा मुक्का, तिन्निवि एयाओ धम्मलेमाओ। एयाहि तिहिवि जीवो, सुग्गड उवरज्जई ।। ५७ ।। लेसाहिं सवाहि, पढमे समयमि परिणया हिं तु नि हुकरमड उपनाओ, परेभव अस्थि जीनस्म ।। ५८ ॥ साहिं सवाहि, चरिमे समयमि परिणयाहिं तु । न हुस्सइ उपनाओ पर भवे होड जीपस्म ॥ ५९ ॥ अन्तमुहुत्तम्मि गए अ तमुहुत्तम्मि सेमए चेन । लेसाहि परिणयादि, जीना गन्छन्ति परलोय ।। ६०॥ तम्हा एयासि लेमाण,आणुभावे वियाणिया ।अप्पस याओ जित्ता, पमत्थाओऽहिट्ठिप मुणि ॥ ६१ ॥ त्ति बेमि ॥ इअलेसज्झयण समत्त ॥ ३४ ॥ ॥ अह अणगारज्झयण णाम पचतीसइम अज्झयण ॥ मुहेण मे एगग्गमणा, मग्ग बद्धेहि दसिय । जमायरन्तो भिक्सू, दुक्खाणन्त करे भवे ॥ १॥ गिहमास परिचज, परजामस्सिए मुणी | इमे सगे वियाणिज्न, जेहिं सन्जन्ति माणरा || ॥ तहव हिंस अलिय, चोन असम्भसेवण । इच्छाराम च लोभ च, मजओ परिवजए ॥ २ ॥ मणोहर चित्तधर, मल्लधूवेण वासिय । सक्वाड पण्डुरलोच, मणमावि न पत्थए ॥ ४ ॥ इन्दियाणि उ भिक्सुस्स, वारिसम्मि उपस्मए । दुक्कराड निवारेउ, कामरागविवडणे ॥५॥ सुसाणे सुनगार वा, रक्समूले र हक्कओ। पडरिक परकडे वा, वाम तत्थाभिरोयए ॥६॥ फासुयम्मि अणायाह, इत्थीहिं अणभिदुए । तत्थ सम्प्पए वाम, भिक्खू परमसजए ॥ ७ ॥ न सय गिहाइ कुछि जा र अन्नेहिं कारए । गिहकम्मममारम्भे भूयाण दिस्म हो ॥ ८॥ तसाण थाराण च, सुहुमाण चागण य । तम्हा गिहममारम्भ, मजओ परिननए ॥ ९॥ तहब भत्तपाणेसु, पयो पयारणेसु य । पाणभूयदयट्ठाए, न प न पयारए ॥ १० ॥ जलधन्ननिस्सिया जीना पुढवीकट्ठनिम्मिया। हमन्ति भत्तपाणेसु तम्हा भिक्खू न पयाग ॥ ११ ॥ विमप्पे सबओ घारे, यहुपाणिविणामणे । नत्थि जोइसम सत्य, तम्हा जोर न दीवए ॥ १२ ॥ हिरण जायस्व च, मणमा वि न पत्यए । समलेठरवणे मिक्खू, विगए कयविवए ॥ १३ ॥ किणतोक'ओ होड,विकिष्णन्तो य वाणिणो। क्यविकस्मि नहतो, मिक्सून भवड नास्सिी ।। १४ ॥ मिक्खियवन केयर, भिक्षुणा भिकावरत्तिणा। स्यविक्कओ महादोसो मिक्सपत्ती सुहारहा ॥ १५ ॥ समुयाण उ मेसिना, जहामुत्तमणिन्दिय । लामालाभम्मि सतुट्टे पिण्डयाय चर मुणी ॥ १६ ॥ अलोले न रसे गिद्धे, जि मारन्त अमुन्छिए। न रमट्ठाए भुनिज्जा, जाणट्ठाए महामुणी ॥ १७ ॥ अचण रयण घेव, वदण पूयण तहा । ड्डीमकारसम्माण, मणमा वि न पथए ॥ १८ ॥ सुबमाण झियाण्जा, अणियाणे अकिंचणे । योपटकाए विहरज्जा, जाप कालम्म पञ्जओ ॥ १९ ॥ निजहिऊण आहार, कालधम्म उवहिए । जहिजण माणुस बोन्दि, पटू दुक्वे विमुच्चइ ॥ २० ॥ निम्ममे निरहकारे, पीयरागो अणामयो। सपत्तो केवल नाण, मामय परिणिन्यु ॥ २१ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ अणगारज्नयण समत्त ।। ३५ ।।

(६६)
श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला
॥ अह जीवाजीवविभत्ती णाम छत्तीसइम अज्झयण ॥
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जीवाजीपविभत्ति, सुणेर मे एगमणा इओ । ज जाणिण भिक्खू , सम्म जयइ सनमे ॥१॥
जीवा चेव अजीवा य, एस लोए वियाहिप । अजीवदममागासे, अलोगे से रियाहिए ॥२॥
दलओ खेतओ चेव, कालओ भानओ तहा । परूषणा तेमि भवे, जीनाणमजीगण य ॥३॥
रूविणो चेवरूवी य अजीवा दुविहा भवे । अरूनी दसहा जुत्ता, रूविणो य चउबिहा ।। ४ ॥
धम्मत्थिकाए तसे, तप्पएसे य आहिए । अहम्मे तस्म ढसे य तप्पएसे य आहिए ॥ ५ ॥
आगासे तस्स देसे य, तप्पएसे य आहिए । अद्धासमए चेन, अरूबी दमहा भवे ॥६॥
धम्माधम्मे य दो चेत्र, लोगमित्ता वियाहिया। लोगालोगे य आगासे, समए समयखेत्तिए ।॥ ७॥
धम्माधम्मागासा, तिनिरि एए अणाइया । अपजरसिया चेत्र, सम्बद्ध तु वियाहिया ॥८॥
समएगि सतइ पप्प, एवमेव वियाहिए । आएस पप्प माईए, सप्पननसिएवि य ॥९॥
खन्धा य सन्धदेसा य, तप्पएसा तहव य । परमाणुणो य बोधवा रूविणो य चउविहा ॥ १० ॥
एगत्तेण पुरतेण, खधा य परमाणुणो । लोएगदेसे लोए य, भइयत्वा ते उ वेत्तओ ॥ ११ ॥
इत्तो कालविभाग तु, तेसि बुच्छ चउविह ॥ १२ ॥
सतह पप्प तरुणाई, अपजवमियावि य । ठिइ पडुच्च साईया, सपजवसिया वि य ॥ १३ ॥
अससकालमुकोस,एको समओ जहन्नय । अजीवाण य रूवीण, ठिइ एमा वियाहिया ॥१४॥
अण तकालमुकोसमेको, समओ जहन्नय । अजीवाण य रूवीण, अतरय वियाहिय ॥१५॥
घण्णओ गन्धओ चेव,रसओ फासओ तहा। सठाणओ य विनओ, परिणामो तैमि पचहा ॥ १६ ॥
चण्णओ परिणया जे उ,पञ्चहा वे पकिचिया। किण्हा नीलाय लोहिया, लिद्दा सुक्लिा तहा ॥ १७ ॥
गन्धओ परिणया जे उ,दुविहा ते वियाहिया। सुब्भिग धपरिणामा,दुभिगन्धा तहेव य ॥ १८ ॥
रसओ परिणया जे उ, पञ्चहा ते पफित्तिया । वित्तकडुयकमाया, अम्बिला महुरा तहा ।। १९ ।।
फासओ परिणया जे उ, अट्टहा ते पकितिया। कक्सडा मउआ चेर, गस्या लहुवा तहा ॥२०॥
सोया उण्हा य निद्धा य,तहा लुक्सा य आहिया। इय फासपरिणया पए,पुग्गला समुदाहिया ॥ २१ ॥
सठाणओ परिणयाजे उ पञ्चगते पफित्तिया। परिमएडला य वट्टा य, तसा चटरसमायया ॥ २२ ॥
वण्णओ जे भवे किण्हे, भइए से उ गन्धओ । रसओ फासओ चेब, भइए सठाणओवि य ।। २३ ।।
चण्णओ जे भने नीले भइए से उगन्यो । रसओ फासओ चेर, भहए सठाणओपि य ॥ २४ ॥
वण्णओ लोहिए जे उ, भइए से उ गन्धओ । रसओ फासओ चेन भइए सठाणओवि य ॥ २५ ।।
वण्णवो पीयए जे उ, भइए से गन्धओ। रसओ फासओ चेत्र, भइए सठाणोवि य ॥ २६ ॥
वण्णओ सुक्लेि जे उ, भइए से उ अघओ । रसओ पासओ चेव, भइए सठाणओवि य ॥ २७ ॥
गन्धो जे भवे सुब्मी, भइए से उ वण्णओ। रसओ फासओ चेव, भइए सठाणओवि य ।। २८ ।।
गधओ जे भवे दुन्मी, भइए से उ पण्णओ। रसओ फासओ चेत्र, भडए सठाणओवि य ॥ २९ ॥
रसओ तित्तए ने उ, भइए से उ यण्णओ। गधओ रसओ चेव, भइए मठाणओवि य !॥ ३०॥

- - , श्रीउत्तराध्ययनमत्र-छतीसमाध्ययनम् रमओ वटा जे उ, भटए से उ वण्णो | गन्यो फासओ चेन, भडए मठाणओवि य ॥ ३१ ॥ रसओ कसा जे उ, भटए से उ पण्णओ । गधो फामओ चेन, भट्टए मठाणओवि य ॥३०॥ रसओ अनिले जे उ भगए से उ वण्णओ। गन्धओ फासओ चेन, भहए मठाणोवि य ॥ ३३ ॥ रसओ महुरए जे उ, भ-ए से उ पण्णओ । गन्यओ फासो चेन, भए मठाणओवि य ॥ ३४ ॥ पासओ क्सडे जे उ, भडए से उ मण्णओ। ग प रमओ चेन भहण मठाणावि य ॥ ३५ ॥ फामओ भइए जे उ, भइए से उ पण्णओ । गन्धो रसओ चर, भडए मठाणमोवि य ।। ३६ ॥ पाम गुस्ए जे उ, भटए से उ पण्णओ। गन्धो रसओ चेव, भहए सठाणओवि य ॥ ३७ ॥ 'फामओ राहुए जे उ, भटए से उ वण्णओ । गन्धओ ग्सजो चेन, भए मठाणमोवि य ॥२८॥ फास सीयए जे उ, भइए से उ पण्णओ । गन्धओ रसओ चेत्र, भइए मठाणोवि य ॥ ३९ ॥ फामओ उण्हए जे उ, भडए से उ वण्णओ । गन्धओ रसी चेव, भह सठाणओपि य ॥४०॥ फामओ निद्वए जे उ, भइए से उ चण्णओ । गन्धओ रमओ चैत्र, भइण सटाणोनि य ॥४१॥ फामओ लुक्सए जे उ, भडए से उ यण्णओ। गन्धओरमओ चेन, भइए सटाणओपि य ।। ४२ ।। परिमण्डलमठाणे, भडए से उ पण्णओ । गन्यमो रसओ चैव, भडग से फामओपि य ॥ १३ ॥ सठाणओ भवे पट्टे, भइए स उ घण्णओ । ग वओ रसओ चेन, भडए से फामओवि य ॥ ४४ ॥ सठाणओ भवे तसे, भडए से उ वण्णो । ग घओ रसओ चेन, भहए से फापओवि य ॥ ४० ॥ सठाणओ जे चउरसे, भडए मे उ वण्णओ । गन्धओ रमओ चेन, भगए से फासोवि य ।। ४६ ॥ जे आययमठाणे, भडए से अण्णओ। गन्धसो रसओ चेन, भहए से फासमोरि य ॥४७॥ एसा अजीननिभत्ती, समासेण वियाहिया । इत्तो जीवविभत्ति, कुन्छामि अणुपुवमो। ४८॥ समारत्था य सिद्धा य, दुविहा जीवा वियाहिया। सिद्धाणेगविहा वुत्ता, त मे कियतओ सुण ॥ ४९ ॥ इत्थो पुरिसमद्धा य, तहेच य नपुसगा। सलिंगे अन्नलिंगे य, गिहिलिंगे तहेव य ।। ५० ॥ उक्कोसोगाहणाए य, जहन्नमज्झिमा- य । उड्ढ अहे तिरिय च, समुम्मि जलम्मि य ॥ ९ ॥ रस य नपुसण्सु वीस त्थियासु य । पुरिसेसु य अट्ठसय, ममएणेगेण सिज्झइ ।। ५२ ।। चत्तारि य गिहलिंगे, अनलिंगे दसैव य । सल्गिण अट्ठमय समएगेण सिन्झई ।। ५३ ॥ उकोसोगाहणाए य सिज्झन्ते जुगव दुवे । चत्तारि जहन्नाए, मझे अटुत्तर मय ॥५४ ।। चउमट्टलोए य दुवे ममुद्दे, तो जठे वीसमह तहेर य । मय च अन्ठुत्तर तिरियलोए, समणेगेण सिज्झइ धुर ।। ॥५.॥ कहिं पडिहया सिद्धा, यहि सिद्धा पइट्ठिया । कहिं मोन्दि, चडत्ताण, स्त्य गन्तूण सिज्झई ।। ८६ ॥ आरोए पडिहया सिद्धा, रोयग्गे यपइडिया । इह योन्दि चहत्ताण, तत्य गतूण सिग्झइ ।। ५७ ।। बारसहि जोयणेहिं, सबढस्मृवरिं भवे । इसिपमारनामा, पुढवी छत्तसठिया ॥ ८ ॥ पणयालमयमहस्सा, जोयणाण तु आयया। तायडय चैव वित्यिण्णा,तिग्गुणोतस्से परिमणो ॥ ५९॥ अट्ठजोयणबाहुला, मा मन्मम्मि वियाहिया परिहायन्ती चरिम ते, मन्टिपत्ताउ तणुयरी ।। ६० ॥ अग्गुणमुचप्णगमई, सा पुढची निम्मा सहावेण । उत्ताणगउत्तगसर्टिया य, भणिया निणरहिं ॥ ६१ ॥ .

meroine (६८) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला सखककुदसकासा, पण्डरा निम्मला सुहा। सीयाणे जोयण तत्तो, लोय तो उ वियाहिओ ।। ६२ ।। जोयणस्स उ जोतत्थ, कोसो परिमो भवे। तस्स कोसस्स सन्माए, सिद्धाणोगाहणा भवे ॥ ६३ ॥ तत्थ सिद्धा महाभागा, लोगग्गम्मि पइट्ठिया । भरपपचओ मुक्का, सिद्धिं वरगर गया ॥६४ ॥ उस्सेहोजेसिं जो होइ, भाम्मि चरिमम्मि उ । तिभागहीणो तत्तो य, सिद्धाणोगाहणाभवे ॥ ६५ ॥ एगण साइया, अपज्जयसियावि य । पुहत्तेण अणाडया, अपजसियावि य ॥६६॥ अरूविणो जीवघणा, नाणदसणमन्निया । अउल सुह सपना, उवमा जस्स नस्थि उ ॥ ६७ ॥ लोगेगदेसे ते सर्वे, नाणदसणमन्निया । ससारपारनित्थिण्णा, सिद्धिं वरगइ गया ॥ ६८॥ ससारत्था उ जे जीना, दुविहा ते वियाहिया । तमा य थापरा चेन, थायरा तिविहा तहिं ।। ६९ ।। पुढवी आउजीना य, तहेन य वणस्मई । इच्चेए थारा तिविहा, तसिं भेए सुह मे ॥ ७० ॥ दुविह पुढवीजीना य, सुहुमा बायरा तथा । पज्जत्तमपज्जत्ता, एवमेए दुहा पुणो ।। ७१।। बायरा जे उ पन्नचा, दुविहा ते वियाहिया। सहा सरा य बोधवा मण्हा सत्तविहा तहिं ।। ७२ ॥ विण्हा नीला य रुहिरा य, हलिदा सुकिला तहा। पण्णुपणगमहिया, खरा छत्तीमइविहा ॥ ७३ ॥ पुढवी य सकरा बालुया य, उपले सिला य लोणूसे । अय-तम्ब तउय-सीसग-रुप्प-सुरणे य वहरे य ।। ॥ ७४॥ हरियाले हिंगुलुए, मणोसिला सासगजण-पवाले । अब्भपडरब्भनालय, बायरकाए मणिविहाले ॥ ॥ ७५ ॥ गोमेजए य रुयगे, अके फलिहे य लोहियक्खे य । मरगय मसारगल्ले,भुयमोयग इन्दनीले य ॥ ७६ ।। चन्दण गेरुय हसगन्मे, पुलए सोगन्धिए य बोधवे। चन्दप्प-वेरुलिए, जलकन्ते सूरकन्ते य ।। ७७ ॥ एए सरपुढवीए, भेया छत्तीसमाहीया । एगविहमणाणत्ता, सुहुमा तत्थ वियाहिया ॥ ७८ ॥ सुहुमा सबलोगम्मि, लोगदेसे य बायरा । इत्तो कालविभाग तु, बुच्छ तेमि चउबिह ।। ७९ ॥ सतइ पप्णाईया, अपजासियावि य । ठिइ पडुच्च साईया, सपजनसियावि य ॥ ८ ॥ बावीससहस्साइ, वासाणुकोसिया भवे । आउठिई पुढवीण, अन्तोमुहुत्त जहन्नय ।। ८१ ॥ असखकालेमुक्कोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय ! कायठिई पुरवीण, त काय तु अमुचओ ॥ ८२ ।। अणन्तकालमुकोस, अन्तोमहुत्त जहन्नय ! विजढम्मि सए काए पुढविजीवाण अतर ॥ ८३ ।। एएसिं यण्णओ चेन, गन्धओ रसफसओ। सठाणदेसओ वावि, विहाणाइ सहस्मसो।। ८४ ।। दुविहा आऊजीना उ, सुहुमा बायरा तहा। पजत्तमपज्जत्ता, एसमेए दुहा पुणो ।। ८५ ॥ बायरा जे उ पजत्ता, पचहा ते पकित्तिया । सुद्धोदए य उस्से, हरवणू महिया हिमे ॥ ८६ ॥ एगविहमणाणत्ता, सुहुमा तत्थ वियाहिया । मुहुमा सबलोगम्मि, लोगदेसे य बायरा ।। ८७ ।। सन्तइ पप्पणाइया, अपज्जवसियागि। ठिइ पडुच्च माईया, सपजवसियावि य ॥ ८८ ॥ सत्तेव सहस्साइ, वासाणुकोसिया भवे । आइठिई आऊण, अतोमुहुत्त जहनिया ।। ८९ ॥ अससकालमुक्कोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । कायठिई आऊण त काय तु अमुचओ ॥ १० ॥ अणन्तकालमुकोस, अतोमुहुत्त जहन्नय । विजढम्मि सए काए, आऊजीवाण णन्वर ॥ ९१ ।। एएसिं वण्णओ चेर, गन्धओ रसफासओ। सठाणदेसओ चावि, विहाणाइ सहस्ससो ॥ ९२ ।। - - श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-छतीसमाध्ययनम् (६९) दुनिहा वणस्मईजीवा, सुहृमा बायरा तहा। पल्लत्तमपज्रचा, एवमेव दुहा पुणो ॥ ९३ ॥ बायरा जे उ पजत्ता, दुविहा ते वियाहिया। साहारणसरीरा य, पचेगा य तहेव य ॥ ९४॥ पत्तेगमरीराओऽणेगहा ते पवित्तिया। रुक्पा गुच्छा य गुम्मा य, लया वल्ली तणा तहा ॥ ९५ ।। चलया पहगा कुहुणा, जलरुहा ओसही तहा । हरियकाया योषहा, पत्तेगाड वियाहिया ॥ ९६॥ साहारणसरीराओऽणेगहा ते पकित्तिया। आलुए मूलए चेव, सिगवरे तहेर य ।। ९७ ।। हरिली सिरिली सस्सिरिली, जावई केयकन्दली । पलण्डुलमणकन्दे य, कन्दली य कुडुपए ॥ ९८ ॥ लोहिणीहू य थीहू य, कुहगा य तहर य । कन्दे य वजफन्दे य, कन्दे सूरणए तहा ॥ ९९ ।। सस्मकणी य योधवा, सीहकण्णी तदेव य । मुसुण्डी य हलिहा, य गहा एवमायओ ॥ १० ॥ एगतिहमणाणत्ता, मुहुमा तत्थ नियाहिया सुहुमा सबलोगम्मि, लोगदेसे य वायरा ।। १०१ ।। सतइ पप्पणाईया, अपज्जवसियावि य । ठिट पडुच्च साईया, सपजयसियावि य ।' १०२ ।। दस चेव सहस्माइ, वासाणुकोसिया पणगाण । रणप्फर्डण आउ, अन्तोमुहृत्त जहन्निया ॥ १०३ ।। अणन्तकालमुक्कोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय | कायठिई पणगाण, त काय तु अमुचओ ॥ १०४ ॥ असखकालमुक्कोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । विजढम्मि सए काए, पणगनीवाण अन्तर ॥ १०५॥ एएसि वण्णओ चेन, गन्धओ रसफासओ। सठाणदसओ बावि, विहाणाइ सहस्ससो ॥ १०६ ॥ हुचेए थारा तिनिहा, समामेण वियाहिया । इत्तो उ तसे तिनिहे, बुच्छामि अणुपुषसो ॥ १०७ ॥ तेऊ वाऊ य वोधबा, उराला य तमा तहा । इच्चेए तसा तिविहा, तेर्सि मेए सुणेह मे ॥ १०८ ॥ दुविहा तेऊजीपा उ, सुहमा वायरा तहा । पजत्तमपज्जत्ता एपमेष दुहा पुणो ॥ १०९ ॥ बापरा जे उ पजत्ताणेगहा ते वियाहिया। इगाले मुम्मुरे अगणी अच्चिजाला तहेब य॥११०॥ उक्का विज्ज य बोधवा गहा एवमायओ। एगविहमणाणता, मुहुमा ते वियाहिया ॥ १११॥ मुहमा सबलोगम्मि, लोगदेसे य घायरा । इत्तो कालविभाग तु तेमि पुच्छ चउबिह ॥ ११२ ॥ सतइ पप्पणाईया, अपज्जवसियानि य । ठिई पडच्च माइया, मपञ्जवसियापि य ॥ ११३ ।। तिण्णेर अहोरत्ता, उकोसेण वियाहिया । आर्टिई तेऊण, अन्तोमुहुत्त जहन्निया ॥ ११४ ।। अससकालमुक्कोस, अतोमुहुत्त जहन्नय । काठिर्ड तेऊण, त काय तु अमुचओ ॥ ११० ॥ अणन्तकालमुक्कोस, अतोमुहुत्त जहन्नय । निजढम्मि मए काए, तऊजीपाण अन्तर ॥ ११६॥ एएसि चण्णओ चेन, गन्धओ रसफासओ। सठाणटेसओ यावि, रिहाणाड महस्ससो ॥ १७ ॥ दुनिहा पाउजीना उ, सुहुमा वायरा तहा । पजत्तमपञ्जत्ता, एवमेए दुहा पुणो ॥ ११८ ॥ थायरा जे उ पन्जना, पञ्चहा ते पवित्तिया। उकलिया मण्डलिया, घणगुजासुदवाया य ।। ११९ ॥ सवगवाया यणेगहा एवमायओ। एगविडमणाणत्ता, सुहमा तत्थ वियाहिया ॥ १२० ॥ मुहमा सबलोगम्मि, एगदसे य पायरा । इचो कालविभाग तु, तेमि पुच्छ चरविह ॥ ११ ॥ सन्तइ पप्पणाईया, अपन्जवसियापि य । टिड पडुच्च साईया, सपजासियापि य ॥ १२ ॥ तिण्णेव महस्साइ, वामाणुकोसिया भवे । आउठि काऊण, अन्तोमुहुत जहनिया ॥ १०३ ॥ अससकालमुक्कोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । कार्डिर्ड वाऊण, त काय तु अमुचओ ॥ १२४ ॥ अणन्तकारमुक्कोस, अन्तोमुत्त जहनय । पिनदम्मि मए काए, काऊनीवाण अन्तर ।। १२५ ।।

(७०)
श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला
एएसिं बण्णओ चेव, गन्धओ रसफासओ । सठाणदेसा वावि, विहाणाइ महस्ससो ।। १२६ !!
उराला तसा जे उ, चउहा ते पकिचिया । वेइन्दिय-तेइन्दिय-चरो पचिन्दिया येव ॥ १२७ ।।
बेइन्दिया उजे जीवा, दुविहा ते पक्रित्तिया । पजत्तमपनत्ता, वेसि मेए सुणेह मे ॥ १२८॥
किमिणो सोमगला चेव, अलसा माइवाहया। वासीमहा य सिप्पिया, सस सखणगा तहा ॥ १२९ ॥
घटोयाणुल्लया चेक, तहेब य वराडगा । जलुगा जालगा चेब, चन्दणा य तहब य ॥ १३० ।।
इइ बेइन्दिया एएऽणेगहा एयमायओ। लोगेगदेसे ते सके, न सवत्थ वियाहिया ॥ १३१ ॥
सतइ पप्पणाईया, अपज्जवसियावि य । ठिड़ पडुच साइया, सपजवसियावि य ॥ १३२ ॥
वासाइ बारसा चेर, उक्कोसेण वियाहिया । घेइन्दियआउटिई अन्दोमुहुत्त जहनिया ।। १३३ ।।
सखिज्जकालमुक्कोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । वान्दियकायठिई, व काय तु अमुचओ ॥ १३४ ॥
अणन्तकालमुक्कोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । बेइन्दियजीवाण, अन्तर च वियाहिय ।। १३५ ॥
एएसि वण्णओ चेव, गन्धओ रसफासओ । सठाणदेसओ वापि, विहाणाइ सहस्मसो ।। १३६ ।।
तेइन्दिया उ जे जीवा, दुविहा ते पकित्तिया । पजतमपन्जत्ता, तेर्सि मेए सुणेह मे ॥ १३७ ॥
कु थुपिवीलिउड्डसा, उक्कले देहिया तहा । तणहारक्हहारा य, मालरा पत्तहारगा ।। १३८ ।।
कप्पासहिम्मि जायन्ति, दुगा तसमिंजगा1 मदावरी य गुम्भी य, बोधवा इन्दगाइया ॥ १३९ ॥
गन्दगोवगमाईयाणेगहा एवमायओ। लोगेगदसे ते सके, न सम्बत्थ वियाहिया ॥ १४० ॥
सतइ पप्पणाइया, अपजयसियावि य । ठिइ पच्च साइया, सपज्जयसियावि य ।। १४१ ॥
एगूणपण्णहोरत्ता, उक्कोसेण वियाहिया । तेइन्दियआउठिई, अतोमुहुत्त जहनिया ॥ १४२ ।।
ससिजकालमुक्कोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । तेइन्दियकायठिई, त काय तु अमुचओ ॥ १४३ ॥
अणतकालमुक्कोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । तेइदियजीवाण, अन्तोमुहुत्त जहनिया ॥ १४४ ।।
एएसि घण्णओ चेव, गन्धओ रसफासओ । सठाणदेसओ वावि, विहाणाइ सहस्सजो ॥ १४५ ॥
चउरिन्दिया उ जे जीवा, दुविहा ते पकित्तिया। पजत्तमपज्जत्ता, तेसिं भेए सुणेह मे ॥ १४६ ॥
अन्धिया पोत्तिया चेव, मच्छिया मसगा तहा। भमरे कीडपयगे य, टिंकुणे ककणे तहा ॥ १४७ ॥
कुक्कुडे भिरीडी य, नन्दावते य विन्छुए । टोले भिंगारी य, वियडी अच्छिवेयए ॥ १४८ ॥
अच्छिले माहए अच्छिरोडए, विचित्ते चित्तपत्तए ।
उहिंजलिया जलकारी य, नीया तन्तवयान्या । ॥ १४९ ।।
इय चउरिन्दिया, एएऽणेगहा एवमायओ। लोगेगदेसे त सके, न सवत्य वियाहिया ॥ १५ ॥
सतइ पप्पणाइया, अपजवसिया वि य । ठिइ पटुच साईया, भपज्जवसिया वि य ॥१५१ ।।
छचेच मासाऊ, उक्कोसेण पियाहिया । चउरिन्दिदयनाउठिई, अ तोमुहुत्त जहनिया ॥ १५ ॥
सरिजकालमुकोम, अन्तोमुहुत्त जहानय । चउरिन्दियकायठिई, त काय तु अमुचओ ॥१५३ ॥
अण तसालमुकोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । चउरिन्दियजीवाण, अतर च वियाहिय ॥ १५ ॥
एएसि वष्णओ चेन, गन्धओ रसफामओ । मठाणदेसओ पापि, विहाणाइ सहस्मसो ।। ५. ।।
पचिन्दिया उजे जीवा,चउबिहा तेरियाहिया नेरइयतिरिक्वाय, मणुया देवा य आहिया ॥ १५६ ।।
नेग्डया सत्तरिहा, पुटवीसु सतम् भवे । रयणाममकराभा, वालुयामा य आहिया ॥ १५७ ॥

, " श्रीउचरा ययनसूत्र-छत्तीसमाध्ययनम् पकामा धूमामा, तमा तमतमा तहा । इइ नेरइया एए, सत्तहा परिकित्तिया ।। १५८ ॥ लोगस्म एगदेमम्मि, ते मवे उ वियाहिया। एत्तो कालविभाग तु, वोच्छ तेमि चउहि ॥ १५९ ॥ सतह पप्पणाईया, अपज्जवसियावि य । ठिइ पडुच्च माइया, मपन्जवसियापि य ॥ १६० ॥ सागरोनममेग तु, उक्कोसेण वियाहिया। पढमाए जहन्नेण, दसमाससहस्सिया ॥ १६१ ।। तिणेर सागरा ऊ, उक्कोसेण वियाहिया। दोचाण जहन्नेण, एग तु मागरोवम ॥ १६२ ।। मत्तेन सागरा ऊ, उनोसेण विगाहिया । चउत्थीए जहन्नेण, तिण्णेच मागरोवमा ।। १६३ ॥ दम सागरोनमा ऊ, उकोसेण वियाहिया। चउत्थीए जहन्नेण, सत्तेव मागरोपमा ॥ १६४ ॥ सत्तरस मागरा ऊ, उक्वोसेण वियाहिया । चउत्थीए जहन्नेण, मत्तेन नागरोनमा ॥ १६ ॥ वावीम मागरा ऊ, उक्छोसेण पियाहिया। उट्ठीए जहन्नेण, सत्तरम सागरोवमा ॥ १६६ ॥ तेत्तीस सागरा ऊ, उक्कोसेण पियाहिया। सत्तमाए जहन्त्रेण, वापीस मागरोपमा ॥ १६७ ॥ जा चेव य आयठिर्ड, नेरडयाण वियाहिया । सा तेमि कायठिई, जहन्नुकोसिया भवे ॥ १८ ॥ अणन्तकालमुक्कोम, अतोमुहुत्त जहन्नय । विजढम्मि सए काए, नेरहयाण अन्तर ॥ १६९ ।। एएसि वण्णओ चेव, गन्धो रसफासओ। सठाणदेमओ वावि, विहाणाड सहस्मसो ।। १७० ॥ पचिन्दियतिरिक्वाओ, दविण ते वियाहिया । ममुच्छिमतिरिक्वाओ, गन्भवन्तिया तहा॥ ॥ १७१॥ दुविहा ते भवे तिविहा, जलयराथलयरातहा। नहयरा य योपवा, तेसिं भेए सुणेह मे ॥ १७२ ॥ मच्छा य कच्छभा य, गाहा य मगरा तहा । सुसुमारा य बोधवा, पचहा जलहराहिया ॥ १७३ ॥ लोएगदेसे ते सवे, न मवण्य वियाहिया। एत्तो कालविभाग तु, वोच्छ तेसिं चउबिह ॥ १७४ ॥ सतइ पप्पणाइया, अपजयसिया वि य । ठिड पडुच्च साइया, सपज्जवसिया विय ॥ १७५ ।। एगा य पुत्वकोडी, उक्कोसेण वियाहिया । आउठिई जलयराण, अन्तोमुहुत्त जहनिया ।। १७६ ॥ पुवकोडिपुहत्त तु, उक्कोसेण वियाहिया । कायट्टिई जलयराण, अतोमुत्त जहन्नय ॥ १७७ ॥ अण वकालमुक्कोम, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । विनढम्मि सए काए, जमयराण अन्तर ॥ १७८ ।। चउप्पया य परिमप्पा, दुविहा यलयरा भवे। चउप्पया चउविहा, ते मे क्यिनओ सुण ॥ १७९ ।। गखुरा दुखुरा चेव, गण्डीपयसणहप्पया। हयमाइगोणमाडगयमाइसीहमाइणो ।। १८० ॥ भुओरगपरिसप्पा य, परिसप्पा दुरिहा मवे । गोहाइ गहिमाई य, एकेकाणेगहा भवे ॥ १८१ ।। लोएगदसे ते सव्वे, न मवत्थ वियाहिया। एत्तो कालविभाग तु, पोम्छ तमि चउनिह ॥ १८ ॥ सतइ पप्पणाइया, अपजवसियावि य । ठिई पटच माईया, सपन्नपसियानि य ॥ १८३ ।। पलिओपमाइ तिणि उ, उकोसेण वियाहिया। आउठि थलपराण, अतोमुहुत्त जहनिया ॥ १८४ ॥ पुवकोडिपुहत्तेण, जन्तोमुहुत्त जहनिया | कायर्टि थल्यराण, अतर तसिम भरे ॥ १८५ ।। कालमणन्तमुकोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । विजढम्मि सए काण, यस्यगण तु अतर ॥ १८६ ।। चम्मे उ लोमपरवी य, तइया ममुग्गपस्सिया । विययपक्सी य गोधवा, परिसणो य चउचिहा ॥ ॥ १८ ॥ लोगेगदेसे ने सबे, न मवस्थ पियाहिया। इत्तो कालविभाग तु पोछ नगि उनिह ॥ १८८ ।।

(७२)
श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला
सतइ पप्पणाईया, अपञ्जवसियावि य । ठिई पहुच्च माईया, सपञ्जवसियावि य ॥ १८९ ॥
पलिओयमस्स भागो, असखेजइमो भवे । आउठिई सहयराण, अतोमुहुत्त जहनिया ॥ १९॥
असराभाग पलियस्स, उक्कोसेण उ साहिया। पुवकोडीपुहत्तेण, अन्तोमुहुत्त जहनिया ॥ १९ ॥
ठिई सहयराण, अन्तरे तेसिमे भवे । काल अण तकोस, मुक्कोस, अन्तोमुहृत्त, जहन्नय ॥ १९२ ॥
एएसि वण्णओ चेव गन्धो रसफासओ। सठाणदेसओ वावि, विहाणाइ सहरसमो ॥ १९ ॥
मणुया दुविहमेया उ, ते मे कित्तयओ सुण । समुन्छिमा य मणुया, गम्भवन्तिया तहा ।। १९४ ।।
गम्भवकन्तिया जे उ, तिविहा ते वियाहिया। कम्मअकम्मभूमा य, अन्तरद्दीवया तहा ॥ १९५ ॥
पन्नरम तीसविहा, मेया अहवीमड । ससा उ कम्मसो तेर्सि, इइ एसा वियहिया ॥ १९६ ॥
समुच्छिमाण एसेव, भेओ होइ वियाहिओ। लोगस्स पगदेसम्मि, ते सव्वे वि वियाहिया ॥ १९७ ।।
सतइ पप्पणाईया, अपज्जवसियावि य । ठिइ पडुच्च साईया, सपज्जवसियापि य ॥ १९८ ॥
पलिओवमाउ तिण्णवि, अससेजइमो भवे । आउट्टिई मणुयण, अतोमुहुत्त जहन्निया ॥ १९९ ।।
पलिओवमाइ तिण्णि उ, उक्कोसेण उ साहिया । पुवकोडिपुहत्तेण, अन्तोमुद्दत्त जहन्निया ॥ २०० ।
कायठिई मणुयाण, अन्तर तेसिम भवे । अणन्तकालमुक्कोस, अतोमुहुत्त जहन्नय ।। २०१॥
एएसिं, वण्णओ चेर, ग वओ रसफासो । सठाणदेमओ वावि, विहाणाइ सहस्मसो । २०२॥
देवा चउबिहा वुत्ता, ते मे फित्तयओ सुण । भोमिजवाणमन्तरजोइसवेमाणिया तहा ॥ २०३ ।।
दसहा उ भवणमासी, अट्ठहा वणचारिणो । पचविहा जोइसिया, दुविहा वैमाणिया तहा ॥२०४॥
असुरा नागसुमण्णा, विज्जू अग्गी वियाहिया ।
दीवोदहिदिसा वाया, धणिया भरणनासिणो ।
॥२०५॥
पिसायभूया जक्खा य, रवरूसा किन्नरा किंपुरिसा ।
महोरगा य गन्धवा, अट्टविहा वाणमन्तरा ॥ ॥ २०६॥
चन्दा सूरा य नक्खत्ता, गहा तारांगणा तहा ।
ठिया विचारिणो चेव, पचहा जोइसालया । ॥ २०७॥
वेमाणिया उ जे देवा, दुविहा ते नियाहिया। कप्पोरगा य बोधब्वा, कप्पाईया तहेव य ।। २०८ ।।
कप्पोरग्गा पारसहा, सोहम्मीसाणगा तहा। सणकुमारमाहिन्दवम्भलोगा य सन्तगा ॥ २०९ ।।
महासुक्का सहस्सारा, आणया पाणया तहा । आरणा अच्चुया चेव, इइ कप्पोरगा सुरा ।। २१० ॥
कप्पाईया उजे देवा, दुविहा ते वियाहिया। गेविजाणुतरा चेर, गेविजा नरविहा तहिं ।। २११ ॥
हेट्ठिमा हेद्विमा चेक, हेट्ठिमा मज्झिमा तहा। हेट्ठिमा उबरिमा चेत्र, मज्झिमा हेडिमा तहा ।। २१२ ।।
मज्झिमा मज्झिमा चेच, मज्झिमा उवरिमा तहा ।
उवरिमा हेट्ठिमा चेव, उपरिमा मज्झिमा वहा ।। ।। २१३ ॥
उवरिमा उवरिमा चेव, इय गेविजगा मुरा। विजया वेजयन्ता य, जय ता अपराजिया ॥ २१४ ।।
सवत्थसिद्धगा चेव, पचहाणुतरा सुरा । इय माणिया एएऽणेगहा एवमायओ ॥ २१५ ॥
लोगस्स एगदेसम्मि, ते सद्देवि वियाहिया । इचो कालविभाग तु, बुच्छ देसि चउबिह ॥ २१६ ॥
सतइ पप्पणाईया, अपज्जवसियावि य । ठिद्र पडुच्च साइया, सपञ्जवसियादि य ॥ २१७ ॥

घावीम सागरा, श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-छतीसमाध्ययनम् साहीय मागर एक्क, उक्कोसेण ठिई भवे । भोमेलाण जहन्नेण, दमवाससहस्मिया ॥ २१८ ।। पलिओरममेग तु, उक्कोसेण टिई भवे । पन्तराण जहन्नेण, दमनामसहस्मिया ॥२.९ ।। पलिओवममेग तु, वासलक्खेण साहिय । पलिओवमट्ठभागो, जोडसेसु जहन्निया ।। २२० ।। दो चेर सागराइ, उक्कोसेण नियाहिया । सोहम्मम्मि जहन्नेण, एग च पलिओवम || २१॥ सागरा साहिया दुन्नि, उक्कोसेण रियाहिया । ईसाणम्मि जहन्नण, साहिय पलिओनम || २०२ ॥ सागराणि य सत्तेव उक्कोसेण ठिई भव । सणकुमार जहन्नेण, दुन्नि उ मागरोवमा ॥ २०॥ साहिया मागरा मत्त, उक्कोसेण ठिर्ट भवे। माहिन्दम्मि जहन्नेण, साहिया दुन्नि सागरा || २२४ ॥ टस चेन मागराइ, उक्कोसेण ठिई भवे । सम्भलोग जहन्नण, गत्त ऊ सागरोग्मा ॥ २५॥ चउदम सागराइ, उकोसेण ठिई भवे । लन्तगम्मि जहन्नेण, दम उ मागरोनमा ॥ २२६ ॥ सत्तरस सागराड, उकोमेण ठिई भवे । महामुक्के जह नेण, चोदस सागरोनमा ॥ २२७ ॥ अट्ठारम सागराद, उक्कोसेण ठिई भवे । सहस्मारम्मि जह नेण, सत्तरस सागरोपमा ।। २२८ ।। सागरा अउणवीस तु, उक्कोसेण ठिई भवे । आणयम्मि जह नेण, अट्ठारम सागरोपमा ॥ २२९ ॥ वीम तु मागराद, उक्कोसेण ठिर्ड भवे । पाणयम्मि जहन्नेण, मागरा अणवीमई ।। २३० ।। सागरा इक्कीस त, उक्कोसेण ठिई भवे । आरणम्मि जहन्नेण, वीसई सागरोनमा ।। २३१ ॥ उक्कोसेण ठिई भवे । अच्चुयम्मि जह्ननेण, मागरा इक्वीसह ॥ २३२ ॥ तेवीम सागराइ, उक्कोसेण ठि भवे । पढमम्मि जहन्नेण, बावीस सागरोनमा ।। २३३ ।। चवीम मागराड, उक्कोसेण ाठई भवे । विइयम्मि जहन्नेण, तेवीस सागरोनमा ॥ २३ ॥ पणवीम सागराह, उक्कोसेण ठिई भवे । तइय जहन्नेण, चउवीस सागरोनमा ॥ २३५ ।। छवीस सागराड, उक्कोसेण ठिई भवे । चउत्थम्मि जहन्नेण, सागरा पणुवीमई ।। २३६ ।। सागरा सत्तवीस तु, उक्कोसेण ठिई मवे । पञ्चमम्मि जहन्नेण, सागरा उ उवीमई ।। २३७ ॥ सागरा अट्ठवीस तु, उक्कोसेण टिई, भवे । उट्ठम्मि जहन्नेण, सागरा सत्तवीमई ॥ २३८ ॥ सागरा अरणतीस तु उक्कोसेण ठिई भवे । मनमम्मि जहन्नेण, सागग अट्ठवीमह ॥ २३९ ।। तीस तु सागराइ, उक्कोसेण ठिई भवे । अट्टमम्मि जहन्नेण, सागरा अउणतीमई ॥ ४० ॥ सागरा इक्क्तीम तु, उक्कोसेण लिई भवे । नरमम्मि जहन्नेण, तीमई सागरोवमा ॥ २४१ ॥ तेत्तीसा सागराइ उक्कोसेण ठिई भवे । चउसुपि विजयाइसु, जहन्नेणेकतीमई ॥ २४ ॥ अनहन्नमणुकोमा, तेत्तीम मागरोरमा । महाविमाणे सबढे, टिई एमा रियाहिया ॥ २४३ ॥ जा चर उ आउठिई, दवाण तु वियाहिया । सा तेसिं कायठिई, जहनमुक्कोसिया मवे ॥ १४ ॥ अण वकालमुक्कोस, अतोमुहुत्त रहन्नय । विजदम्मि मए काए, देवाण हुन्ज अन्तर ।। २४५ ॥ एएमि यण्णओ चेर, गन्धो रसफामओ। सठाणदमओ वावि, विहाणाइ सहम्मसो ।। २८६ ।। ममारत्थाय सिद्धा य, इय जीवा रियाहिया। सपिणो चेवभ्वी य, अजीवा दुहिहारि य ।। ०४७ ॥ इय जीरमजीवे य, मोचा सद्दहिऊण य । मवनयाणमणुमए रमेज सनमे मुणी ॥१८॥ तओ पहूणि वामाणि, सामण्णमणुपालिय । इमेण कम्मनोगेण, अप्पाण मल्हि मुणी ॥ २४९ ।। पारसेर उ यासाइ, सलेहुकोसिया भवे । मवरन्टरमझिमिया, छम्मामा य जहनिया ॥ २५० ॥ . .

(७४) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला पढमे पासचउम्मि, निगई-निज्जूहण कर । बिईए पामचउकम्मि, निवित्त तु तव चरे ॥ ५१ ॥ एगन्तरमायाम, कटु मवच्छरे दुवे । तओ सवन्छरद्ध तु, ना विगट्ठ तव चरे ॥२.२॥ तओ सब छरद्ध तु, निगिट्ट तु ता चरे । परिमिय चे आयाम, तम्मि मवन्छरे करे ।। २०३ ॥ कोडी सहियमायाम, कटु, समच्छरे मुणी । मासद्धमासिएण तु, आहारेण तर चरे ॥ २५४ ॥ पदप्पमामिओग च, फिनिसिय मोहमासुरुत्त च । ग्याउ दुग्गईओ, मरणम्मि विराहिया होन्ति ॥ ॥ २५५।। मिडादमणरत्ता, मनियाणा उ हिंसगा । इय जे मरन्ति जीना, तेसि पुण दुलहा बोही ॥ ५६ ॥ सम्मदसणरत्ता, अनियाणा सुक्लेसमोगाढा। इयजे मरन्ति जीना, तेसिं सुलहा भव बोही ।। २५७ ॥ मिच्छादसणरत्ता, मनियाणारह समोगाढा। इय जे मरन्ति जीना, तेसिं पुण दुल्लहा चोही । ॥ २५८॥ जिणायणे अणुरत्ता,जिणवयण करेन्ति भावेण। अमला अमङ्किलिट्ठा,ते होन्ति परित्तससारी ॥ १९ ॥ चालमरणाणि बहुमो, अकाममरणाणि चेर य नहणि । मरिहन्ति ते पराया जिणवयण ने न जाणन्ति । ॥ २६॥ पहुआगमविनाणा, समाहिउप्पायगा य गुणगाही। एएणकारणेण, अरिग आलोयण सोउ ।। २६१ ॥ कन्दप्पकुकुयाइ, तह सीलसहारहमणविगहाइ । विम्हावेन्तोवि पर, नन्दप्प भावण कुणड ।। २६२ ॥ मताजोग काउ, भूईकम्म च जे पउनति । माय-रम-उड्डिहउ अभिओग भाषण कुणइ ॥ २६३ ॥ नाणस्म केवलीण, पम्मायरियस्स सङ्घसाहूण । माइ अअण्णवाई, विविसिय भाषण कुणइ ।। २६४ ॥ अणुपद्धरोमपसरो, तह य निमित्तम्मि होइ पडिसेवी।एएहि कारणेहि, आसुरिय भाषण कुणइ ॥ २६५ ॥ मत्थगहण विसभरवण च जलण च जलपवेसो य । अणायारभण्डसेना, जम्मणमरणाणि पधन्ति ।। ॥ २६६॥ इय पाउकरे बुद्ध, नायए परिनि चुए। छत्तीम उत्तरज्झाए, भवसिद्धीयसबुडे ॥ २६७ ।। त्ति वेमि ॥ जीवाजीविभत्ती ममत्ता ॥ ३६॥ ॥अ उत्तरायण सुत्त समत्त ॥

॥ णमो समणस्म भगओ महावीरस्स ।। ॥ सिरि-दसवेआलियं-सुत्तं ॥ ॥ दुमपुफ्फिया पढम अज्झयण ॥ धम्मो मगर मुक्ट्ठि, अहिंसा सजमो तो। देवा वि त नमसति, जरम वम्मे सया मणो ॥१॥ जहा दुमस्स पुप्फेस, भमरो आवियइ रस । ण य पुप्फ क्लिामेड, सो अ पीणेइ अप्पय ॥२॥ एमेण ममणा मुत्ता, जे लोए सति साढणो। विहगमा व पुप्फेसु, दाणभत्तेसणे रया ॥ ३ ॥ वय च वित्तिं लन्मामो, ण य कोड उपहम्मड । अहागडसु रीयते, पुप्फेमु भमरा जहा ॥ ४ ॥ महगा (का) रममा बुद्धा, जे भनति अणिस्सिया । नाणपिटरया दता, नेण उच्चति माहुणो ॥ ५ ॥ त्ति बेमि ॥ दुमपुफिया पढममज्झयण ममत्त ॥ . ॥जह मामण्णपुव्वय दुइअ अन्झयण ॥ कह नु बुआ सामण्ण, जो कामे न निवारए । पए पण विसीअतो, सरप्पस्स यस गओ ॥१॥ वस्यगधमलकार, इत्थीओ मयणाणि य । अन्ढा जे न भुजति, न से चाइ ति उच्चड ॥ २॥ जे य क्ते पिए भोए, लद्धे वि पिट्टि कुबइ । माहीणे चयड भोए, मे हु चाड ति चुच्चड ॥३॥ ममाड पेहाइ परिचयतो, सिया मणो निम्मरद बहिद्धा । न सा मह नोवि अह वि तीसे, इच्चेर ताजो विणटन्न राग ।। ॥४॥ आयापयाही चय मोगमल्ल, कामे माहि कमिय खु दुक्व । उिंदाहिं दोस विणएज्ज राग, एव सुही होहिसि सपराण ॥ ॥५॥ पक्खद जलिय जोड, धूमकेउ दुरासय । नेन्उति तय भोत्त, कुले जाया अधगणे ॥ ६ ॥ धिरत्धु तेऽनमोकामी, जो त जीवियकारणा। बत इच्छसि आवेउ, सेय ते मरण भवे ।। ७॥ अह च भोगरायस्म त चमि अधगविण्हिणो । मा कुले गधणा होमो, सनम निहुमो चर ।। ८॥ जड त साहिसि भाव, जाजा दिन्छसि नारिओ।यायाविद्धो छ हडो,अद्विअप्पा भविस्ससि ।।९।। ती मो वयण सोचा, सजयाइ मुभासिय । अकुसेण जहा नागो, घम्मे सपडिवाइमो ॥ १० ॥ एव परति सबुद्धा, पडिया पवियक्वणा । विणियति भोगेम, जहा से परिमृत्तमो ॥ ११ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ सामपणपु ग्य नाम अज्मयण ममत्त ॥ २ ॥ .

(७६) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला - ॥ अह खुड्डयायारकहा तइम अज्झयण ॥ सजमे सुद्विअप्पाण, विष्पमुक्काण ताइण । तेसिमेयमणाण्ण, निग्गथाण महसिण ॥१॥ उद्देसिय कीयगड, नियागममिहडाणि य । राइभत्ते सिणाणे य, गधमल्ले य वीयणे ॥२॥ सनिही गिहिमत्ते य, रायपिंडे किमिछए। सचाहणा दतपहोयणाय, सपुच्छणा देहपलोयणाय ॥ ३ ॥ अट्ठावए य नालीए, छत्तस्म य धारणहाए । तेगिच्छ पाहणापाए, समारभ च जोडणो ॥४॥ सिज्जायरपिंड च, आसदीपलियकए। गिहतरनिसिना य, गायस्सुबट्टणाणि य ॥ ५॥ गिहिणो वेआनडिय, जा य आजीचरत्तिया। तत्तानिव्वुडभोत्त, आउरस्सरणाणि य ॥ ६॥ मूल सिंगबेरे य, उच्छुख. अनिम्बुडे । कदे मूले य सचित्त, फले बीए य आमए ॥७॥ सोपच्चले सिंघवे लोणे, रोमालोणे य आमए । समुद्दे पमुसारे य, कालालोणे य आम ॥ ८॥ धुवणे ति रमणे य, पत्थीकम्भविरेयणे । अजणे दतपणे य, गायब्भगविभूसणे ॥९॥ सबमेयमणाइन्न, निग्गथाण महेसिण । सजमम्मि अ जुत्ताण, लहुभूयविहारिण ॥ १० ॥ पचामवपरिणाया, तिगुत्ता छम सजया । पचनिग्गहणा धीरा, निग्गथा उज्जुदसिणो ॥ ११ ॥ आयावयति गिम्हेसु, हेमतेसु अवाउडा । वासासु पडिसलीणा, सञ्जया सुममाहिया ॥ १२ ॥ परीसहरिऊदता, धूअमोहा जिइदिया। सबदुक्खपहीणट्ठा, पक्कमन्ति महेसिणो ॥ १३ ॥ दुकराइ करित्ताण, दुस्महाइ सहित्तु य । केइत्थ दवलोएसु, केइ सिज्झन्ति नीरया ॥ १४ ॥ खवित्ता पुवकम्माइ, सन्जमेण तवेण य । सिद्धिभग्गमणुप्पत्ता, ताइणो परिणि वुडे ॥ ॥ १५ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ खुड्डयायारकहा नाम तइयमज्गयण ॥ ॥ अह छज्जीवणियानाम चउत्थ अज्झयण ॥ सुअ मे आउसतेण भगवया एवमक्खाय, इह खलु छन्जीरणिया नामज्झयण समणेण भग वया महावीरेण कामवेण पवेइया मुअक्खाया सुपनत्ता सेअ मे अहिजिउ अज्झयण धम्मपण्णत्ती ॥१॥ कयरा खलु साछज्जीपणिया नामज्झयण समणेण भगवया महावीरेण कासवेण पवेडया मुअक्खाया मुपनत्ता सेअ मे अहिन्जिड अज्झयण धम्मपण्णती ॥ २॥ इमा खलु सा छजीवणिया नामज्झयण समणेण भगाया महानीरेण कामवेण पवेइया सुअक्खाया सुपन्नता सेअ मे अहिजिउ अज्झयण धम्मपन्नत्ती ॥ तजहा-पुढविकाइया १, आउकाइया २ तेउकाइया ३, वाउकाइया ४, वणस्सइकाइया , तसकाइया ६ । पुढत्री चित्तमतमक्खाया अणेगजीग पुगेसत्ता अन्नत्य सत्थप रिणएण । आऊ चित्तमतमक्खाया अणेगजीवा पुढोसत्ता अन्नत्य सत्थपरिणएण । वाम चित्तमत मक्खाया अणेगजीवा पुढोसत्ता अन्नत्थ सत्थपरिणएण । वाऊ चित्तमतमक्खाया अणेगजीवा पुढो सत्ता अन्नत्यपरिणएण । वणस्मई वित्तमतमक्खाया अणेगजीरा पुढोसमा अमत्थ सस्थपरिगएण तजहा-अग्गवीया, मूलवीया, पोरखीया, खघवीया, बीयरुहा, समुच्छिमा, तणलया, वणस्मइका इया, सवीया चिचमतमक्खाया अणेगजीवा पुढोसत्ता अन्नत्य सत्यपरिणएण । से जे पुण इमे , . श्रीदसवैकालिकसूत्र-चतुर्थाध्ययनम् (७७) अणेगे बहवे तसा पाणा, तजहा-अडया, पोयया, जराउया, रसया, ससेडमा, समुच्छिमा उभिया उपनाइया, जेमि केसिंचि पाणाण, अभिक्त, पडिकत, सकुचिय, पसारिय, रुप, भत, तसिय, पलाइय आगइगडविनाया, जे अ कीडपयगा, जा य कुथुपिपीलिया, सवे वेइढिया, सवे तेइदिया, सवे चउरिदिया सवे पचिंदिया, मवे तिरिक्सजोणिया, मवे नेरडया, सद्दे मणुआ, सबे देना, सबै पाणा, परमाहम्मिआ, एसो सलु उट्ठो जीवनिकाओ तमझाओ ति पवुच्च । इच्चेसि छण्ह जीपनि मायाण चेर सय दड समारभिज्जा, नेग्नेहिं दट ममारभाविजा, दड समारभन्ते वि अन्ने न समणुजाणामि, जापजीना तिविह तिविहण मणेण वायाए कारण न करमि न सरवेमि परतपि अन्न न ममणुजाणामि । तस्म भते पडिकमामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण नोमरामि ।। पढमे भते । महबए पाणाइनायाओ वेरमण | सब भन्ते ! पाणाडनाय पञ्चक्सामि । से सुहुम वा, वायर वा, तस ना, यावर वा, नेन सय पाणे अइवाजा, नेपऽन्नेहिं पाणे अइसायाविना, पाणे अइवायन्तेऽवि अन्ने न ममणुजाणामि, जावजी तिविह तिविहण मणेण गायाए कारण न करेमि न कारवेमि करतपि अन्न न समणुजाणामि तस्स भते ! पडिक्कमामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण योमरामि । पढमे भन्ने ! महबए उपढिओ मि मवाओ पाणाइवाया वेरमण ॥ २ ॥ अहावर टुच्चे भन्ने ! महत्वए मुसावायाओ वेरमण । सब भन्ते ! मुसावाय पचक्खामि । से कोहा वा, लोहा या, भया गा, हासा गा, नेव सय मुस वइला, नेवन्नेहिं मुम वायाविजा, मुस वपन्ते वि अन्ने न समणुजाणामि जारजीनाए तिविह तिविहेण मणेण नायाए कारण न करेमि न कारवेमि करतपि अन्न न समणुजाणामि तस्म भन्ते । पडिकमामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण बोमरामि । दुचे भते ! महबए उवडिओ मि सदाओ मुसावायाओ वेरमण ॥ २ ॥ अहावरे तच्चे भन्ते ! महबए अदिन्नादाणाओ वेरमण । मह भन्ते ! अदिन्नादाण पञ्चक्सामि । से गामे चा, नगरे ना, रणे वा, अप्प था, बहु ना, अणु वा, यूल ना, चित्तमत बा, अचित्तमत चा, नेर सय अदिन्न गिहिना, नेवन्नेहिं अदिन्न गिण्डाविना, अदिन गिण्हन्ते वि अने न सम- गुजाणामि जारज्जीगए तिविह तिविहण मणेण गयाए काएण न करेमि न कारवेमि करवपि अन्न न समणुजाणामि । तस्स भन्ते ! पडिकमामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण चोमरामि । तच्चे भन्ते ! महबए उपट्टिओ मि सबाओ अदिन्नादाणाओ वेरमण ॥३॥ अहावर चउत्य भन्ते ! महबए मेहुणाओ वेरमण | सब भते' पचक्सामि । से दिव ना, माणुस वा, तिरिक्सजोणिय वा, नेत्र सय मेहुण सेविजा, नेव नेहिं मेहुण सेगविजा, मेहुण सेवन्ते वि अन्ने न समणुजाणामि जावजीवरए तिविह तिविहेण मणेण वायाए कारण न करेमि न कार धेमि फरतपि अन्न न समणुनाणामि । तस्म मन्ते ! पडिकमामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण वोमरामि । चउत्थे भन्ते ! महहए व्यट्टिओ मि सबाओ मेहुणामओ वेरमण ॥ ४ ॥ अहावरे पश्चमे भन्ते ! महन्वए परिग्गहाओ वेरमण | सब मते ! परिग्गह पचक्खामि । मे अप्प या, बहु वा अणु वा, धूल वा, चित्तमत वा, अचित्तमत या। नेव सयपरिग्गह परिगिहिना, (७८) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला नेवन्नेहिं परिगह परिगिण्ह ते वि अनेन समणुज्जाणिना जामजीवाए तिविह तिविहेण मण वायाए कारण न करेमि न कारवेमि करतपि अन्न समणुजाणामि, तस्स भन्ते ! पडिकमामि निदामि गरिहामि अध्याण बोसरामि। पञ्चमे भन्ते ! मह गए उमहिओ मि सबाओ परिग्गहाओ वेरमण ॥८॥ अहावरे छटे भन्ते ! वए राडभोअगाओ वेरमण । मय भन्ते । राइभोयण पञ्चक्खामि । से असण वा, पाण वा, साइम वा, साइम वा । नेन सय राइ भुजिज्जा, नेव राइ भुजिजा, नेवन्नहिं राइ भुजाविना, राइ भुजतेऽवि अन्ने न समणुजाणामि जारजीनाए तिविह तिनिहेण मणेण वायाए कारण न करेमि न मारवमि करतपि अन्न न समजाणादि । तस्स भन्ते ! पडिक्मामि निंदामि गरिहामि अप्पाण वोसिरामि । छट्टे भते ! वए उपट्टिो मि सबाओ राइभोअणाओ वेरमण ॥६॥ इच्चेयाइ पचमहत्वयाइ राइमोअणवेरमणछट्ठाइ अत्तिहियट्टियाए उवसपजित्ता ण विहरामि ।। से भिक्खू वा, भिक्खुणी वा, सजयनिरयपडिहयपचक्सायपारकम्मे, दिआ वा, राओवा, एगओ वा, परिमागओ वा, सुत्ते वा, जागरमाणे वा, से पुढपिं वा, मिति वा, सिल वा, लल वा, ससरक्स चा काय, ससरक्स चा पत्थ, हत्थेण वा, पाएण चा, कढण किलिंचेण वा, अगलियाए वा, सिलागाए वा, सिलागहत्थेण या न आलिहिज्जा, न विलिहिज्जा, न घटिजा, न मिंदिजा, अन्न न आलिहाविजा न विलिहाविना, न घटाविजा, न मिंदाविजा, अन्न आलिहत वा, विलि हत वा, घद्दत वा, भिंढत वा नसमणुजाणिजाजावजीवाए तिविह तिविहेण मणेण वायाए कारण न करेमि न कारवेमि करत पि अन्न न समणुजाणामि तस्स । भते ! पडिकमामि उिंदामि गरिहामि अप्पाण होमरामि । १॥ से भिक्खू वा, भिक्खुणी ना सजयविरयपडिहयपञ्चक्सायपानकम्मे, दिआ वा, राओ वा, एगओ बा, परिसागओ वा, सुत्ते वा, जागरमाणे वा, से उदग वा, ओस वा, हिम वा, महिय वा, करग वा, हरिगणुग वा, सुद्धोदग वा, उदउल्ल वा वत्थ, ससिणिद्ध वा काय, ससिणिद्ध वा वत्थ न आमुसिजा, न मफुसिजा, न आवीलिजा, न पीलिज्जा, न अक्खोडिला, न पक्सोडिजा, न आयाविजा, न पयाविजा, अन्ने न आमुसाविजा, न सफुसाविजा, न आवीलाविजा, न पीला विजा, न अक्सोविजा, न पक्सोडाविजा, न आयाविजा, न पयापिज्जा, अन्न आमुसत वा, सफुमत वा, आवीलत था, पपीलत वा, अक्खोडत वा, पक्सोडत वा, आयावत वा, पयावत वा न समणुजाणिजा, जावजीनाए, तिविह तिविहेण मणेण वायाए कारण न करेमि न कारवेमि करत पि अन्न न समणुनाणामि । तस्म भन्ते ! पडिकमामि निदामि गरिहामि अप्पाण वोसरामि ॥२॥ से भिक्खू गा, भिक्खुणी चा, सनयविरयपडिहयपच्चक्खायपावकम्मे, दिआ था, राओ वा, एगओ वा, पस्मिागओवा, सुत्ते या, जागरमाणे पा, से अगणि वा, इगाल वा, मुम्मुर वा, अचिं चा, जाल वा, अलीय वा, सुद्धागणि वा, उक्त वा, न विज्ञान घट्टिजा, न भिदिला, न उजा- लिजा, न पन्नालिजा, न निवाविजा, अन्न न उन्नाविना, न धराविजा, न भिंदाविना,

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श्रीदमकालिमसूत्र-चतुर्धाध्ययनम्
(७९)
उन्नालाविजा, न पञ्जालाविजा, न निचाविजा, अन्न उञ्ज त बा, घट्टत वा, भिदत वा, उज्जालत
वा, पज्जालत रा, नि वापत चा, न ममणुजाणिज्जा जावज्जीवाए तिविह तिविहेण मणेण वायाए
कारण न फरमि न कारवमि करत पि अन्न न ममणुजाणामि । तस्म मन्ते ! पडिकमामि निन्दामि
गरिहामि अप्पाण घोसरामि ॥ ३ ॥
से भिक्खू वा, भिक्सुणी ना, सञ्जयपिरयपडिहयपच्चक्सायपात्रकम्मे, दिआ वा, राओ ना,
एगओ वा, परिसागओ वा, सुत्ते वा, जागरमाणे वा, ने सिएण वा, विहुयणेण वा, तालियटेण
वा, पत्तेण वा, पत्तभगेण या, साहाए या, माहाभगेण पा, पिहुणेण वा, पिहुणलत्थेण वा, चेलेण
वा, चेलमन्नण वा, हत्येण पा, मुहेण या, अप्पणो वा काप, बाहिर ना नि पुग्गल न फुमिज्जा, न
बीएज्जा, अन्न न फूमानिन्ना, न वीआपिज्जा, अन्न फमत पा, बीअत वा न समगुजाणिज्जा जा-
व-जीवाए तिविह तिरिहण मणेण वायाए काएण न करमि न कारवेमि करतपि अन्न न समणुजा
णामि । नस्स भ ते । पडिकमामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण वोमरामि ॥ ४॥
से भिक्ग्यू वा, मिक्सुणी चा, सजयविरयपडिहयपचक्सायपानकम्मे, दिआ वा, राओ वा,
एगओ वा, परिसागओ गा, सुत्ते ना, जागरमाणे ना, मे वीण्सु वा, वीयपइटेसु वा, रूढेसु वा,
स्ढपडद्वेसु वा, जाएसु वा, जायपइवेसु वा, हरिएसु हरियपइ8सु चा, छि नेसु वा, छि नेसु वा,
छिन्नपइडेसु वा, सचित्तेसु वा, सचित्तकोलपडिनिस्सिपसु चा न गरेना, न चिढ़ेना, न निसी
इना, न तुअहिज्जा, जन्न न गन्छाविना, नचिट्ठापिज्जा, न निसीआविजा, न तु अट्टानिज्ना,
अन्न गच्छत चा, चिट्ठत वा, निसीअत ना, तुयट्टत वा न समणुजामि जारजीनाए तिविह निनि-
हेण मणेण वायाए कारण न करमि न कारवेमि करत पि अन्न न समणुजाणामि । तस्म भन्ते !
पडिकमामि निदामि गरिहामि अप्पाण वोसरामि ॥ ॥
से भिक्खू चा, भिक्खुणी वा, मजयविरयपडिहयपच्चक्सायपानसम्म, दिआ ना, राओ वा,
एगओ वा, परिसागओ वा, सुत्ते वा, जागरमाणे वा, से कीट ना, पयग ना, कुशु चा, पिपीलिय
गा, हत्थसि वा, पायसि वा, पाहुसि वा, उरसि वा, उदरसि वा, सीससि वा, वत्यसि वा, पडि
ग्गहसि बा, क्वलसि या, पायपुन्छणसि वा, रपहरणसि पा, गुन्छगसि वा, उडगसि मा दडगसि
या पीढगसि वा, फल्गसि वा, सथारगसि ना, अन्नयरसि वा तहप्पगार अवगरण नाए तओ सनया-
मेव पडिलेहिय पटिलेहिय पमनि एगतमाणिज्जा, नो ण सघायमारजिना ॥६॥
अजय चरमाणो अ, पाणभूयाइ हिंगड । रन्धह पावय कम्म, तसे होड कडअ फल ॥२॥
अजय चिट्टमाणो अ, पाणभूयाइ हिंसइ । चघड पापय कम्म, त से होड पल ॥ २ ॥
अनय आसमाणो अ, पाणभ्याड हिलइ । यधड पारय पम्म, त से होइ कटुअ फ्ल ॥ ३ ॥
अनय मयमाणो अ, पाणभूयाइ हिंमइ । घइ पारय कम्म, त से हो कडअ फल ॥ ४ ॥
अजय भुनमाणो अ, पाणभ्याइ हिंमइ । उघड पापय कम्म, त मे होट रडा पर ॥ ५॥
अनय भाममाणो अ, पाणभूयाइ हिंमः । र पाग्य कम्म, तसे होट का फल ॥६॥

श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला
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कह चरे कह चिढ़े, कमाए कह सए। कह भुजन्तो भासतो, पावकम्म न बघड ॥७॥
जय चरे जय चिट्टे, जयमासे जय सए । जय भुजन्तो भासतो, पावकम्म न बघह ॥ ८ ॥
सबभूयप्पभूयस्स, सम्म भूयाइ पासओ। पिहिआप्तवस्स दतस्स, पावकम्म न बघइ ॥९॥
पढम नाण तओ दया, एव चिट्ठइ सबसजए । अन्नाणी किं काही, किंवा नाही सेयपावग ॥१०॥
सोचा जाणइ कल्लाण, सोचा जाणइ पावग। उभय पि जाणइ सोचा, ज सेयत समायरे ॥ ११ ॥
जो जीवे वि न याणइ, अजीवे वि न याणड ! जीवाजीवे अयाणतो, कह सोनाहीड सजम ।। १२ ।।
जो जीवे वियाणेइ, अजीवे वि रियाणइ । जीनाजीवे वियाणतो, सो हु नाहीइ सनम ॥ १३ ॥
जय जीनमजीवे य, दोषि एप पियाण । तया गइ बहुपिह, सब जीवाण जाण ॥ १४ ॥
जया गइ बहुविह, सघजीनाण जाणइ । तथा पुण्ण च पार च, बध मुक्ख च जाणइ ॥ १५॥
जया पुण्ण च पाव च, बध मुक्सच जाणइ। तया निषिदए भोए, जे दिव्ये जे यमाणुसे ॥ १६ ॥
जया निविदए भोए, जे दिव्वे जे य माणुसे । तया चयइ सजोग, सन्भिन्तर वाहिर ॥ १७ ॥
जया चयइ सजोग, सभितर शहिर । तया मुड भवित्ताण, पदइए अणगारिय ॥ १८ ॥
जया मुडे भविचाण, पवइए अणगारिय । तया मरमुकिट, धम्म फासे अणुत्तर ॥ १९ ॥
नया समरमुक्किट, धम्म फासे अणुत्तर । तया धुगइ कम्मरय, अमोहिल्लुस कड ॥ २० ॥
जया धुणइ कम्मरय, अयोहिकलुस क्ड । तया स वत्तग नाण, दमण चाभिगच्छइ ॥ २१ ॥
जया सव्वत्तग नाण, दसण चाभिगच्छइ । तया लोगमलोग च, जिणो जाणइ केवली ।। २२ ॥
जया लोगमलोग च, जिणो जाणइ केली । तया जोगे निरुभित्ता, सेलेसि पडिवजइ ॥ २३ ॥
जया जोगे निरुभित्ता, सेलेमि पडिवाइ । तया कम्म खवित्ताण, सिद्धिं गच्छइ नीरओ ॥ २४ ॥
जया कम्म खवित्ताण, सिद्धिं गच्छड गरिओ। तया लोगमत्यथत्थो, सिद्धो हवइ सामओ ॥ २५ ॥
सुह सायगस्त समणस्स, सायाउलगस्स निगामसाइस्स ।
उच्छोलणापहोअस्स, दुल्लहा सुगई तारिसगस्स ॥ २६ ।।
तवोगुणपहाणस्स, उज्जुमइ खन्विसजमरयस्स ।
परीसहे जिणतस्स, सुलहा सुगई तारिसगस्स ॥ २७ ॥
पछा वि ते पयाया, खिप्प गच्छति अमरभवणाइ ।
जेसि पिओ तो सजमो अ, खती अ वभचर च ॥ २८ ॥
इच्चेय छन्नीवणिज, सम्मदिट्ठी सया जए ।
दुलह लहित्तु सामण्ण, कम्मुणा न विराहिजासि ॥ २९ ॥
त्ति बेमि ॥ इअ छज्जीवणिआ णाम चउत्थ अज्झयण समत्त ॥४॥

(८१)
श्रीदसवैकालिकसूत्र-पञ्चमाध्ययनम्
॥ अह पिंडेसणा णाम पचमज्झयण ॥
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सपत्ते मिक्सालम्मि, असमतो अमुन्छिओ। इमेण क्मजोगेण, भत्तपाण गवेसए ॥१॥
से गामे वा नगरे वा, गोअरग्गगो मुणी । चरे मदमणुविग्गो, अबक्सित्तेण चेअसा ॥ २ ॥
पुरओ जुगमायाए, पेहमाणो महि चरे। रजतो वीअहरियाइ, पाणे अदगमहिअ ॥ ३ ॥
ओवाय विसम साणु, विजल परिवजए । सम्मेण न गच्छिजा, विजमाणे परक्कमे ॥४॥
पवडते व से तत्थ, पक्खलते सजए। हिंसेज पाणभूयाइ, वसे अदुर थापरे ।। ५ ।।
तम्हा तेण न गच्छिन्ना, सजए सुममाहिए। सइ अण्णेण मग्गेण, जयमेव परक्मे ॥६॥
इगाले छारिय रामि तुमरासिं च गोमय । समरक्खेहिं पाएहिं, सजओ त नइक्कमे ॥७॥
न चरज घासे चासते, महियाए पडनिए । महापाए व वायते, तिरीच्छसपाइमेसु वा ।। ८ ॥
न चरेज वेससामते, यभरवसाणुए। वभयारिस्स दतस्स, होजा तत्थ विमोहिआ ॥ ॥
अणाययणे चरतस्म, ससग्गीए अभिक्सए । होज पयाण पीला, सामणम्मि अ समओ ॥१०॥
तम्हा एअ विआणित्ता, दोस दुग्गइरड्डण । वजए वेससामन्त, मुणी एगतमस्मि ॥ ११ ॥
साण सूइअ गार्षि, दिन गोण हय गय । सडिभ कवेह जुद्ध, दूरओ परिपत्रए ।॥ १२ ॥
अणुनए नावणए, अप्पहिढे अणाउले । इदिआइ जहाभाग दमहत्ता मुणी चरे ॥१३॥
दनदवस्स न गच्छेजा, भासमाणो अगोचरे। हसन्तो नाभिगच्छेजा, कुल उच्चारय मया ॥ १४ ॥
आलोअ विग्गल दार, सघि दगभवणाणि । चरन्तो न विणिज्झाए, सम्हाण विवजए ।॥ १५ ॥
रनो गिहाइण च, रहम्मारविक्सयाण य । सस्लेिमकर ठाण, दूरओ परिवजए ॥ १६ ॥
पडिकुट कुल न पविसे, मामग परिवजए। अचियत्त कुल न पविसे, चियत्त पविसे कुल । १७ ॥
साणीपाचारपिहिअ, अप्पणा नारपार | क्वाड नो पणुल्लिन्ना, उग्गहसि अणाइआ॥ १८ ॥
गोअरग्गपविट्ठो ज, पञ्चमुत्त न धारए | ओगास फासुअ नचा, अणुनविय चोसिर ॥ १९ ।।
णीय दुगार तमस युट्टग परिवजए। अचक्खुविसओ जत्थ, पाणा दुप्पडिलेहगा ॥ २० ॥
जत्थ पुप्फार वीआइ, पिप्पइन्नाइ वोट्टए । अहुणोलित्त उल्ल, दठ्ठण परिवजए ॥ २१ ॥
एलग दारंग साण, व छग ना नि कुट्टए । उल्लघिा न पविसे, विउहिताण व सनए ॥ २२ ।।
अससत्त फ्लोजा, नाराबरोअए । उप्फुल्छ न पिणिज्झाए, नियट्टिज अयपिरो ।। २३ ।।
अइभूमिं न गन्द्रा, गोअरग्गगओ मुणी। कुलस्स भूमि जाणिता, मित्र भूमि परकमे ।। २८॥
तत्थर पडिहिज्ना, भूमिभागविअक्सणो । सिणाणस्म य वचस्म, सलोग परिवजए ॥ २५ ॥
दगमरिअआयाणे, वीआणि हरिशआणि अ । परिवन्नतो चिहिला, सविंदिअसमाहिए ॥२॥
तत्थ से चिट्ठमाणस्म, आहारे पाणभोअण | अपिअन इच्छिन्ना, पडिगाहिन्न कपि ।। २७ ।।
आहाग्न्ती सिआ तत्थ, परिसाडिज भोषण । तिअ पडिआ क्से, न मे कप्पइ तारिस ॥ २८ ॥
समद्दमाणी पाणाणि, वीआणि हरिआणि अ । असजमसरि नचा, तारिमि परिवजए ॥ २९ ॥
साह निक्सिविचा ण, मचित्त घहियाणि य । तहत ममणुट्टाए, उदग सपणुल्लिया ॥ ३० ॥

wrrrr- (८२) श्रीजेनसिद्धान्त-खाध्यायमाला ओगाहइत्ता चलइत्ता, आहारे पाणभोअण । दितिय पडियाइसके, न मे कप्पड़ तारिस ॥ ३१ ॥ पुरेकम्मेण हत्थेण, दवीए भायणेण वा । दितिअ पडिआइक्से, न मे कप्पद तारिस ।। ३२ ।। एव उदउल्ले मसिणिद्धे, ससरसे मट्टिआओसे । हरिआले हिंगुलए, मणोसिला अजणे लोणे ॥ ३३ ॥ गेरुनिअसेढिअ, सोरडिअपिट्ठकुक्कुसकए अ । उकिट्ठमससट्टे, ससढे चेव बोद्ध वे ॥ ३४ ॥ अससटेण हत्येण, दवीए भायणेण वा । दिजमाण न इच्छिजा, पन्छाम्म जहिं भवे ।। ३ ।। ससटेण य हत्थेण, दीए भायणेण वा । दिजमाण पडिच्छिा, ज तत्थेसणिय भवे ॥ ३६ ।। दुण्ह तु भुजमाणाण, एगो तत्थ निमतए । दिज्जमाण न इन्छिजा, छद से पडिलेहए ॥ ३७ ॥ दुण्ह भुजमाणाण, दो वि तत्थ निमतए । दिज्जमाण पडिच्छिन्ना, ज तत्येसणिय भवे ॥ ३८ ॥ गुन्धिणीए उवण्णस्थ, विविह पाणभोअण । भुजमाण विवज्जिज्ना, मुत्सेस पडिच्छए ॥ ३९ ॥ सिआ य समणट्ठाए, गुव्विणी कालमासिणी । उद्विआ वा निसी जा, निसन्ना वा पुणुट्ठए ॥ ४० ॥ त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिा । दितिअ पडिआडक्से, न मे कप्पइ तारिस ॥ ४१ ।। थणग पिज्जमाणी, दारग वा कुमारिअ । त निक्खिवित्तु रोअत, आहारे पाणभोयण ।। ४२ ।। त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिय । दितिअ पडिआडक्से, न मे कप्पइ तारिस ॥ ४३ ॥ ज भवे भत्तपाण तु, कप्परप्पम्मि मकिय । दितिअ पडिआइक्खे, न मे कप्पइ तारिस ॥४४॥ दगवारेण पिहिअ, नीमाए पीढएण वा । लोढेण वा विलेवेण, सिलेसेण वा केणइ ॥ ४ ॥ त च उभिदिआ दिज्जा, समणट्ठा एव दावए । दितिअ पडिआइक्खे, न मे कम्पइ तारिस ।। ४६ ।। असण पाणग वाचि, साइम साइम तहा । ज जाणिज्जा सुणिज्न वा, दाणट्ठा पगड इम ॥ ४७ ।। त भवे भत्तपाण तु, मजयाण अप्पिा । दितिअ पडिआइक्खे, न मे कप्पइ तारिस ॥ ४८ ॥ असण पागग वावि, साइम माइम तहा । ज जाणिज्जा सुणिज्जा ना, पुण्णट्ठा पगड म॥३९ त भवे भत्तपाण तु, मजयाण अकप्पिा । दितिअ पडिआइक्खे, न मे कप्पड तारिस ॥ ५० ॥ असण पाणग वावि, खाइम साइम तहा । ज जाणिज्जा सुणिजापा, वणिमट्ठा पगड इम ॥ ५१ ॥ त भवे भत्तपाण तु मनयाण अप्पिय । दितिअ पडिआइक्से न मे कप्पड तारिस ।। ५२ ॥ असण पाणग वानि, साइम मायम तहा । ज जाणिज सुणिज्जा वा, समणट्टा पगड इम ॥ ५३ ॥ त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अप्पिा । दितिअ पडिआइक्खे, न मे कप्पइ तारिस ॥ ०४ ।। उद्देसिय कीयगड, पूइक्म्म च आहड | अज्झोअरपामिञ्च, मीमजाय निवज्जा ।। ५५ ॥ उगम से अ पुन्छिन्जा, कस्महाकण वा कड्र। सुच्चा निस्सस्यि सुद्ध, पडिगाहिज सनए ॥ ५६ असण पाणग पानि, माइम साइम तहा । पुप्पेसु हुज उम्मीम, पीएमु हरिएसु वा ।। ५७ त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अप्पिा । दितिम पडिआग्क्वे, न मे कप्प- तारिस ॥ ५८ ॥ असण पाणग वावि, साइम साइम तहा । उदगम्मि हुन्ज निक्खित्त, उत्तिंगपणगेस ना ॥ ५० ॥ त भवे भत्तपाण तु, मजयाण अप्पिा! दितिय पडिआइक्म्बे, नमे कप्पइ तारिम ॥ ६॥ यावि, साइमा साइम उम्मि (अगणिग्मि) होज निक्सित्त, त च मट्टिा दा ॥ . अमण पाणग तहा।

श्रीदमवैकालिकसूत्र-पञ्चमाध्ययनम्
त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिय । दितिअ पडिआउक्खे, न मे कप्पड तारिम ।। ६२ ।।
एव उस्सिकिया ओमकिया. उन्नालिआ पज्जालिआ निवारिया ।
उस्सिचिया निस्मिचिया, उवतिया (उचत्तिया)ओनारिया दए । ॥६३ ॥
त भवे भत्तपाण तु, मजयाण अप्पिय । दितिअ पडि डक्खे, न मे कम्पइ तारिस ॥ ६४ ॥
हुन्ज क्ट्ठ सिल वावि, इट्टाल पानि एगया । ठविअ मकमट्टाए, त च हुन्न चलाचल ॥६५॥
न तेण भिक्खू गच्छिन्ना, दिवो तत्थ असजमो। गभीर मुसिर चेव, सबिदिअ समाहिय ।। ६६ ॥
निस्सेणि फलग पीढ, उम्सपित्ता ण मारहे। मच कील च पासाय, समणट्ठा एव दावए ॥ ६७ ॥
दुरूहमाणी पाडज्जा, (पडिवला) हत्थ पाय व लूमाए ।
पुढवीजीवे पि हिंसेचा, जे अ तन्निस्सिआ जगे ।। ॥ ६८ ॥
एआरिसे महादोसे, जाणिऊण महेसिणो। तम्हा मालोहड भिक्स,न पडिगिण्हसि सजया ॥ ६९ ॥
की मूल परब वा, आम छिन्न च सन्निर । तुपाग सिंगवेर च, आमग परिवज्जए । ७० ।।
तहेव मत्तुचुन्नाड, कोलतुन्नाइ आपणे। मक्कुलिं फालिअ पृअ, अन्न ना नि तहाविह ॥ ७१।।
निकायमाण पमढ, रएण परिफासिअ । दितिअ पडिआइक्खे, न मे पड तारिस ॥ ७२ ।।
बहुअट्टिअ पुगल, अणिमिम वा बहुक्टय । अत्थिय तिंदुय विल्ल उच्छुसट र मिलिं ।। ७३ ।।
अप्पे सिआ भोअणजाए, नहुउज्झिय चम्मिए (य)।
दितिम पडियाइक्खे, न मे कप्पइ तारिस ॥ ॥ ७४ ॥
तहेपुच्चावय पाण, अदुवा वारधोअण । ससे म चाउलोदग, अहुणापो विजए ॥ ७५ ॥
जाजाणेजा चिरावाआ, मइए दमणण वा, पडिपुच्छिण मुच्चा वा, ज च निस्सकिय भवे ।। ७६ ॥
अजीव पडिणय नच्चा, पडिगाहिज सजए । अह मक्यि भमिजा, आसाइत्ताण रोअए ।। ७७ ॥
थोषमासायणद्वाए, हत्थगम्मि दलाहि में । मामे अच्चविल पूज, नाण तिण्ह विणित्तए । ७८ ॥
त च अचविल पूअ, नाण तिण्हगिणित्तए । दितिअ पडिआइक्मे, न मे क्प्पड़ तारिस ।। ७९ ।।
त च हुजा अकामेण, विमणेण पडिच्छि। त अप्पणा न पिद ! नो नि मन्नम्म दावए ।। ८० ॥
एगतमवकमित्ता, अचित्त पडिलेहिआ। जय पडिट्ठपिजा, परिदृप्प पडिकमे ॥ ८१॥
सिया अ गोअग्ग्गओ इच्छिन्ना परिभुत्नुअ । बुट्टग मित्तिमूल या पडिठेहिताण पासुअ ॥ ८२ ॥
अणुनविनु मेहावी, पडिच्छिन्नम्मि सडे । हत्थग सपमजित्ता, तत्थ भुनिज मजए ।। ८३ ॥
तत्थ से भुजमाणस्स, अहिअ क्टओ सिआ। तणकट्ठमार गावि, अन्न चानि तहामिह ।। ८४ ॥
त उक्सिवितु न निक्सि, आसएण न छट्टए । हत्थेण त गहेऊण, एगतमपकमे ॥ ८॥
एगतमरकमित्ता अचित्त पडिलेहिआ । जय परिहरिना, परिठ्ठप्प पडिक्मे ॥ ८६ ॥
सिभा आभिक्खूइनिउजा, सिजमागम्म भुत्तुअ । मपिंडपायमागम्म, उड्डुअ पडिलेहिआ ।। ८७ ॥
विणण्ण परिमिचा, सगासे गुरूणो मुणी। हरियारहियमाययाय, आगओ अ परिकमे ॥ ८८॥
आमोइत्ताण नीसेस, अइआर च जहक्म । गमणागमणे चेन, भत्ते पाणे च मनए ॥ ८९ ।।
उज्जुप्पनो अणुविग्गो, अक्सिण चेअमा । आलोग गुम्मगासे, ज जहा गहिय भवे ॥ २० ॥
न सम्ममारोप हुना, पुधि पछा र ज रडा पुणो पटिकम नम्म, गोमट्ठो चिंतण्डम ॥ ९ ॥

www M श्रीजेनसिद्धान्त-खाध्यायमाला अहो जिणेहिं असावजा, वित्ती साहूण देसिआ । मुक्ससाहणहेउस्स, साहुदेहस्स धारणा ।। ९० णमुक्कारेण पारित्ता, करित्ता जिणसथय । सज्झाय पट्टवित्ताण, वीसमेन खण मुणी ।। ९३ ॥ वीससतो इम चिंते हियम लाभमहिओ। मे अणुगह कुजा, साहू हुजामि तारिओ ।। ९४ ॥ साहवो तो चिअत्रण, निमतिज्न जहकम | जड तत्थ केइ इज्छिन्ना, तेहिं सद्धिं तु भुजए ॥ ९ ॥ अह कोड न इच्छिन्जा, तओ भुजिज एकओ।आलोए भायणे साहू जय अपरिसाडिअ ॥ ९६ ॥ तित्तग च कड्डअ च, कसाय अपिल च महुर लग्ण वा । एयलद्धमन्नत्यपउत्त महु घय च भुजिज मजए । ॥ ९७॥ अरस विरस यावि, सइअ चा असूडअ । उल्ल वा जड वा सुक, मथुकुम्मासमोअण ॥ ९८ ॥ उप्पण्ण नाइहीलिजा, अप्प वा बहु फासुअ । मुहालद्ध मुहाजीवी, भुजिजा दोसवजिअ ।। ९९ ॥ दुल्लहाओ मुहादाई, मुहाजीबी, वि दुल्लहा । मुहादाई मुहाजीवी, दो वि गछति सुग्गइ ।। १०० ॥ ॥ इअ पिंडेसणाए पढमो उद्देमो समत्तो ॥ पडिग्गह सलिहिताण, लेवमायाइ सजए। दुगध वा, सब भुजे न छड्डए ॥१॥ सेज्जा निसीहियाए, अमावन्नो अगोचरे । अयावयट्ठा भुच्चाण, जइ तेण न सथर ॥२॥ तओ कारणमुप्पण्णे, भत्तपाण गवेसए । विहिणा पुवउत्तेण, इमेण उत्तरेण य ।। ३ ।। कालेण निक्समे भिक्खू , कालेण य पडिक्मे । अकाल च विवजित्ता (जा), काले काल समायर ॥ ॥४॥ अकाले चरिसि मिक्खू, काल न पडिलेहिसि । अप्पाण च क्लिामेसि, सन्निवेस च गरिहासि ।। सइ काले चरे मिक्खू कुजा पुरिसकारिअ। अलाभोत्ति न सोइजा पो त्ति अहियासए ॥ ६ ॥ वहेवुचावया पाणा, भत्तट्ठाए समागया। त उज्जुअ न गच्छिजा, जयमेव परक्कमे ॥ ७ ॥ गोअरग्गपविट्ठो अ, न निसीज पत्थई । कह च न पयधिजा, चिट्टित्ताण व सजए ।। ८ ॥ अग्गल फलिह दार, कवाड या वि सजए । अबलविआ न चिट्ठिजा, गोअरग्गओ मुणो ॥ ९ ॥ समण माहण मावि, फिविण वा वणीमग । उवसम्मत भत्तट्ठा, पाणहाए व सजए ॥१०॥ तमइक्कमित्तु न पविसे, न चिट्टे चक्खुगोअरे । एगतमपक्कमित्ता, तत्थ चिहिज सजए ।। ११ ।। वणीमगस्म वा तस्स, दायगस्सुभयस्म वा। अप्पत्ति सिआ हुन्जा, लहुत्त पश्यणस्स वा । १२ ।। पडिसेहिए व दिने वा, तओतम्मि नियत्तिए । उपसमिज भत्तट्ठा, पाणट्ठाए व सजए ॥ १३ ॥ उप्पल पउम चावि, कुमुअ ना मगदति । अन्न वा पुप्फमचित्त, त च सल्लुचिआ दए ॥ १४॥ त भवे भत्तपाण तु सजयाण अकप्पिा । दितिअ पडि आइक्खे, न मे क्प्पइ तारिस ॥१५॥ "उप्पल पउम वावि, कुमुअ पा मगदति । अन्न वा पुष्फमचित्त, त च सम्मद्दिा दए ॥ १६ ॥ त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिा । दितिअ पडिआइक्ख, न मे कप्पड़ तारिस ।। ७ ॥ सालअ पा विरालि, कुमुअ उप्पलनालिय। मुणालिअसासवनालिअ उन्छुखड अनिव्वुड ॥१८॥ तरुणग वा पयाल, रक्सस्म तणगस्स या । अन्नरस वा वि हरिअस्स, आमग परिवजए ॥ १९ ॥ , 1 www श्रीदमवैकालिकसूत्र-पञ्चमाध्ययनम् (८५) तरणिअ वा छिवार्डि, आमिअ भजिय सय । दितिअ पडिआइक्से, न मे कप्पइ तारिस २०॥ तहा कोलमणुस्सिन्न वेलुअ कामरनालिअ । तिलपप्पडग नीम, आमग परिनज्जए ॥ २१ ॥ तहव चाउल पिट्ठ, विअड तत्तनिव्वुड । तिलपिट्टपूइपिन्नाग, आमग परिवजए ॥ २२ ॥ कविट्ठ माउलिंग च, मूलग मूलगतिभ, आम अमत्थपरिणय मणसा नि न पत्थए ॥ २३ ॥ तहेर फलमभूणि बीचमथूणि जाणिआ । विहलग पियाल च, आमग परिवजए ॥ २४ ॥ समुआण चरे मिक्खू कुलमुच्चारय सया । नीय कुलमडक्कम्म, उसढ नाभिवारए ॥ २५ ॥ अदीणो वित्तिमे सिजा, न विसीएज पडिए । अमुणम्मि भोअणम्मि, मायण्णे एमणार ॥ २६ ॥ बहु परघरे अस्थि विविह सा मसाइम । न तव्य पडिओ कुप्पे इच्छा दिज परो नना ॥ २७ ।। सयणासणवथ पा, भत्त पाण च सजए । अदितस्म न कुप्पिज्जा, पञ्चक्से वि अ दीमओ ॥ २८ ॥ इस्थिअ पुरिस गावि, डहर वा महल्लग । वदमाण न जाइजा, नो अण फरुस गए ॥ २९ ॥ जे न वद न से कुप्पे, वदिओ न समुक्से । एवमन्नेसमाणम्म, मामण्णमणुचिट्ठः ॥ ३० ॥ सिआ एगओ लधु लोभेण विणिगृहह । मामेय दाइय सत, दट्टण मयमायण ॥ ३१ ॥ अत्तट्ठा गुरुओ लुद्धो, बहु पार पकुवइ । टुत्तोमओ अ से (मो) होन,निवाण च न ग छड ॥ २ ॥ सिआ एगडो लधु, रिविह पाणभोनण | भद्दग भग भुच्चा, विपन्न विरसमाहर ॥ ३३ ॥ जाणतु ता इमे समणा, आययट्ठी अय मुणी। सट्ठो मे पत, लहवित्ती सुतोसओ ॥ ३४॥ पूयणहा जमोसमी, माणसमाणकामए । बहु पमबई पार, मायासर च कुबड । ३५ ॥ सुर चा मरग पावि, अन्न वा मजग रम | समक्स न पिवे मिक्सू जस मारक्समप्पणो ॥ ३६ ।। पिया एगओ तेणो, न मे कोइ विआण' । तस्म पस्मह दोमा', नियटि च सुणेह मे ॥ ३७ ।। बड्डई सुडिआ तम्म, मायामोस च मिक्खूणो। अयसो जनिवाण, मयय च अमाहुआ ॥ ३८ ॥ निचुबिग्गो जहा तणो, अत्तम्म्मेहिं तम्मइ। तारिमो मरणते वि न आराइड समर ॥ ३९ ।। आयरिण नाराहइ, ममणे आवी तारिसो। गिहत्था वि ण गरिहति, जेण जाणति तारिम ॥ ४० ॥ एव तु अभुप्पही गुणाण च विवजए । तारिमो मरणते वि, ण आराड सबर ॥ ४१ ॥ तव कुबइ मेहावी, पणी वजए रस 1 मन्त्रप्पमायविरओ, ताम्सी अडउक्सो ॥ ४ ॥ तस्म पस्मह कलाण अणेगमाहुपू । विल अस्थसजुत्त, कित्तडम्म मुह मे ॥ ४३ ।। एर तु गुणप्पेही, अगुणाण च विवजए (ओ)। तारिमो मरणते वि आराहइ सरर ॥ ४४ ।। आयरिण आराहइ समणे आवि ताग्मिो । गिहत्था पि ण पूयति, जेम जाणति तारिम ॥ ४५ ॥ तरतणे पयतणे, रुरतेणे अ जे नर। आयारभारतेणे अ, बुबड टवरिधिम ।। ४६ ॥ धूम वि देवत्त, उपमन्नो दरमिबिम। तत्थापि से न याणार कि मे फिच्चा इम फल ॥ २७ ॥ तत्तो रि से चत्ताण, लभ लम्गग । नरग तिरिक्सनोणि वा, गोही जत्थ मुदुल्लहा । ८८ ॥ एअ च दोस रट्टण, नायपुत्तेण भासिभ । अणुमाय पि मेहापी, मायामोम विजए ॥ ४० ॥ सिक्पिऊण मिक्रोमणमोहि, मनयाण युद्धाण मगासे । त य मिस्स् मुप्पणिहिरिए, लनगुणर विहरिनासि ॥१०॥त्ति वैमि॥अपिंडेमणा पीओ उद्देमो॥ पचमाझयण ममत्त । .

श्रीजैन सिद्धान्त-खाध्यायमाला
॥ अहं छठ धम्मत्थकामज्झयण ॥
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नाणदसणसपन्न, मजमे अ तवे रय । गणिमागमसपन्न, उजाणम्मि समोसढ ॥१॥
रायाओ रायमचा य, माहणा अदुव सत्तिआ। पुन्छति निहु अप्पाणो, कह मे आयारगोयरो ॥ २ ॥
तेसिं सो निहुओ दतो, मवभूअसुहारहो, सिक्साएमु समाउत्तो, आयक्सड रिअक्वणो ॥ ३॥
हदि धम्मत्थकामाण निग्गथाण सुणेह मे । आयारगोअर भीम, सयल दुरहिडिअ ॥ ४ ॥
ननत्य एरिम वुत्त, ज लोए परमदुचर । विउलट्ठाणभाइस्म, न भूअ न भविस्सइ ॥ ५ ॥
ससुड्डगपिअत्ताण, वाहिआण च जे गुणा । अक्सडफुडिआ कायचा, त सुणेह जहा तहा ॥ ६॥
दस अट्ठ य ठाणाइ, जाइ बालोअपरज्झइ । तत्य अन्नयरे ठाणे, निग्गताओ भस्मड ॥७॥
वयछक्क कायछक्क, अकप्पो गिहिभायण । पलियकनिम [सि] सजा य, सिणाण सोहवजण ॥ ८ ॥
तस्थिम पढम ठाण, महावीरेण देसिअ। अहिंसा निउणा दिट्ठा, सबभूएसु सजमो ॥ ९॥
जापति लोए पाणा, तसा अदुव थावरा । ते जाणमजाण या, न हणे णो विधायण ॥ १० ॥
मधे जीना वि इच्छति, जीविउ न मरिज्जिउ । तम्हा पाणिवह घोर, निग्गथा वज्जयति ण ॥११॥
अप्पणट्ठा परट्ठा वा, कोहा वा जइ ना भया। हिंसग न मुम बूआ, नोरि अन्न बयानए ॥ १० ॥
मुसाओ य लोगम्मि, सबसाहूहिंगरिहिओ। भविस्साओ य भूआण, तम्हा मोस निरज्जए ॥ १३ ॥
चित्तमतमचित्त चा, अप्प वा जइ वा बहु । दतसोहणमित्त पि, उग्गहसि अजाइया ॥ १४ ॥
त अप्पणा न गिण्हति, नो वि गिण्हापए पर। अन्न ना गिण्हमाण पि, नाणुजाणी सजया ॥ १५ ॥
अपभचरिअ घोर, पमाय दुरहिटिअ । नायरति मुणी -लोए भेआयणजिणो ॥ १६ ॥
मूलमेयमहम्मस्म, महादोमसमुस्मय । तम्हा मेहुणसगग्ग, निग्गथा वजयति ॥ ॥ १७ ॥
विडमु भेइम लोण, तिल्ल मपि फाणि । न ते मनिहिमिच्छति, नायपुत्तवओरया ॥ १८ ॥
लो-स्सेसणुफास, मन्ने अन्नयरामवि ! जे सिया सन्निहिं काम, गिही पदइए न से ॥ १९ ।।
ज पि रत्थ च पाय गा, क्बल पायपुछग । त पि सजमलजट्ठा, धारति परिहरति अ॥ २० ॥
न सो परिग्गहो जुत्तो, नायपुत्तण ताइणा । मुच्छा परिग्गहो वुत्तो इड वुत्त महसिणा ॥ २१ ॥
सवत्थुनहिणा युद्धा, सरक्षणपरिग्गहे अवि अप्पणोऽवि दहम्मि, नायरति ममाग्य ।। २२ ॥
अहो निच तो म्म, सह पद्धहि वन्निा । जा य रज्जासमा विनी, एगभत्त च भोअण ॥ २३ ॥
सति मे सुहुमा पाणा तमा नव थारा । जाइ राओ उपासतो, कहमेसणि चरे ॥ २४ ॥
उदउल्ल वीअससत्त, पाणा निगडिया महिं । दिआ ताइ विरजिजा, राजो एत्थ कह चर । २५ ॥
एअ च टोस द?ण, नायपुत्वेण भासिय । सबा गर न भुजति, निग्गथा राइभोअण || २६ ॥
पुढविकाय न हिंसति, मगसा वयसा कायसा। तिविहेण करणजोएण, सजया सुसमाहिआ ।। २७ ॥
पुढविमाय विहिसतो, हिंसई उ तयस्मिए । तसे अ विनिह पाणे, चक्खुसे अ अचक्खसे ॥ २८ ॥
तम्हा एअ विआणित्ता, दोस दुग्गइसट्टण | पुढनिकायममारभ, जावजीवाए बजए ।। २९ ।।
आउकाय न हिंमति मणमा वयमा कायमा तिरिहण करणजोएण, मनया सुममाहिआ ॥ ३० ॥

H . श्रीदमवैकालिकसूत्र-पटमाध्ययनम् आउकाय विहिंमतो, हिंसई तयस्मिए | तसे अ विविहे पाणे, चक्खुसे अ अचक्खुसे ॥ ३१ ॥ तम्हा एअ विभाणित्ता, दोम दुग्गडबड्डण । आउसायममारभ, जारजीनाए वजए ।। ३२ ॥ जायतेज न इन्छति पाग जलहत्तप । तिक्समन्नयर मत्थ, मवओ वि दुरासयं ॥ ३३ ॥ पाइण पडिण नापि, उड्ड अणदिमामनि । अहे दाहिणिओ ना नि दहे उत्तरओ वि अ ॥ ३४ ॥ भूआणमेममाघाओ हमाहो न मसओ। त पइपयापट्ठा, सजग किचि नारमे ॥ ३५ ॥ तम्हा एयवियाणित्ता, दोम टुग्ग पट्टण । तेउमायममारभ, जारजीनाप वजए । ३६ ॥ अणिलरस ममाग्भ, उद्धा मन्नति तारिस । सारजबहुल चेअ, नेअ तादहिं सेविज ॥ ३७ ।। तालिजटण पत्तेण, माहाविनुअणण पा। न ते वी- उमिच्छति, वीआयेऊण ना पर ॥ ३८ ॥ ज पि वत्थ व (च) पाय पा, कमल पायपुछण न त गायमुदरति, जय परिहरति अ॥ ३९ ॥ तम्हा एअ पिआणित्ता, दोम दुग्गड्डण । नाउ कायसमारभ, जापज्जीपाए बजए ॥ ४० ॥ वणसह न हिंसति, मणमा वयसा कायसा । तिविहेण करणजोएण, मनया सुमम्माहिआ ॥ ४१ ।। चणस्मड रिहिसतो, हिंसइ उ तयस्मिए । तसे अनिनिह पाणे, चक्खुसे अ अचम्सुसे ।। ४२ ।। तम्हा एय वियाणित्ता, दोस दुगइवड्डण । वणस्मड समारभ, जानजीगए नज्जए ॥ ४३ ॥ तसकाय न हिंसति, मणमा पयसा कायसा । तिनिह्ण रणजोएण, मजया मुममाहिआ ॥ ४४ ॥ तसमाय विहिंसतो, हिमइ उ तयस्मिए । तसे जरिरिहे पाणे, चक्खुसे अ अचक्युसे ॥ ४५ ॥ तम्हा एज पिआणित्ता, दोस दुग्गडबड्डण । तमकायममारभ, जाजीनाए [६] पज्जए ॥ ४६ ॥ जाइ चत्तारि भुज्नाइ, इसिणा हारमा णि । ताइ तु विनतो, मनम अणुपालए ॥ ४७ ।। पिंड सिज्ज च वत्थ च, चउत्थ पायमेव य । अप्पिसन इन्छिज्ना, पडिगाहिन प्पिा ।। ८८ ।। जे नियाग ममायति, कीअमुद्दोसिआहड । वह ते ममणुजाणति, इअ उ (बु)त्त महसिणा ॥ ४० ॥ नम्हा अमणपाणाइ, कीयमुद्देसियाहड । उज्नयति ठिअप्पाणो, निग्गथा बम्मनीषिणो ॥ ०० ॥ क्सेस मिपाएमु कुडभोएसु वा पुणो । भुजतो असणपाणाट, जायग परिभस्मड ।। ५१ ।। सीओग समारभे, मत्तयोअणउड्डण जाइ छनति भूआइ, दिट्ठो तत्य असजमो ।। २ ॥ पन्छासम्म पुरकम्म, सिआ तथ न कप्पड । एअमट्ट न भुजति, निग्गधा गिहिभायणे ।। ५३ ॥ आसदीपलिअक्सु, मचमामालएसु वा। अणायरिअमाण जामडत्तु मातु ना ॥ ५२ ।। नासदीपलि अक्सु, न निसिजा न पीढए । निग्गया पटिलेहाए, युद्धउत्तमहिट्ठगा ।। ५५ ॥ गमीरविनया एए, पाणा दुप्पटिलेहगा। आसदी पलिअको अ, एपमह विजिआ ॥ ५६ ॥ गोअरगगपविट्ठस्म, निसिजा जम्म कप्पइ । इमणिममणायार, आपन्जड अबोहिम ॥ ५ ॥ विपत्ती वभचेरस्म, पाणाण च वह वही । वणीमगपडिग्याओ, पटिकोहो अणगारिण ॥ ५८ ॥ अगुत्ती पभचेरम्स, इ योओ वा वि मरण । सीसड्डण, गण, दृग्गो परिसजए ॥ ५० ॥ तिण्हमन्नयरागस्म, निसिन्ना जस्म कप्प । जराए अभिभूअम्म, चाहिनस्म नास्मिणो ॥ ३० ॥ नाहिओ ना अरोगी वा, मिणाण जो उ पथए । पुस्तो हो आयारो, अटो हर मनमो ॥ ६ ॥ सतिमै सुटुमा पाणा, घमा मिल्गासु अाजे अभिकम्यू सिणायतो, विमटणुप्पिलाइए ॥ ३० ॥ तम्हा त न मिणायति, सीपण उसिणेण ना । जापन्नीर य घोर, अमिणाणमटिगा ॥ ६३ ॥ -

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(८८)
श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला
सिणाण अदुवा पक्क, युद्ध पउमगाणि अ। गायस्मृबट्टणट्ठाए, नायरति कयाइ वि ।। ६४ ॥
नगिणस्स वावि मुडस्स, दीहरोमनहसिणो। मेहुणाओ उपसतस्म, किं विभूसाय कारिअ ।। ६५ ॥
विभूसावत्तिा भिक्खू, कम्म बधइ चिक्ण | ससारमायरे घोरे, जेण पडइ दुरुत्तरे ॥ ६६ ॥
विभूसावतिअ चेअ, बुद्धा मन्नति तारिस । सापज बहुल चेअ, नेय ताईहि सेवित्र ।। ६७ ॥
खपति अप्पाणममोहदसिणो, तवे रया सजम अजवे गुणे ।
धुणति पााइ पुरेकडाइ नवाइ पावाइ न ते करति ॥ ॥ ६८॥
सओवसताअममा अकिचणा, मविजविजाणुगया जससिणो ।
उउप्पसन्ने विमले व चदिमा । सिद्धि विमाणाड उवेंति (वयनि) ताइणो ॥ ६९ ।।
त्ति बेमि ॥ इअ उट्ट धम्मत्धकामज्झयण समत्त ॥६॥
॥ अह सुबकसुद्धी णाम सनम जज्झयण ॥
चउण्ह खलु भासाण, परिससाय पन्नव । दुण्ह तु विणय सिम्से, दा न भासिज्न मदमो ॥१॥
जा अ सच्चा अपत्तवा, सच्चामोसा अजा मुसा । जा अ बुद्धेहिं नाइन्ना, न त भामिज पन्नव ॥ २ ॥
असच्चमोस सच च, अणज्जमक्कस । समुप्पेहमरादिदू गिर भासिज्ज पन्नव ॥ ३ ॥
एय च अट्ठमन्नवा, जतु नामेइ सासय । स भास सच्चमोस च पि त (पि) धीरो विरज्जए ॥ ४ ॥
वितह पि तहामुत्ति, ज गिर भासओ नरो। वम्हा मो पुट्ठो पावण, कि पुण जो मुस वए ॥ ५॥
तम्हा गच्छामो रस्सामो, अमुग वा णे भपिस्सड ।
अह या ण करिस्सामि, एसो वा ण करिस्मइ ।।
एवमाइ उ जा भासा, एसकालम्मि सकिआ । सपयाइअमढे वा, त पि धीरो विवज्जए ॥ ७ ॥
अइअम्मि अ कालम्मि, पच्चुप्पण्णमणागए। जमट्ट तु न जाणिज्जा, एरमेअ ति नो वए ॥ ८॥
अइअम्मि अ कालम्मि, पच्चुप्पण्णमणागए । जत्थ सका भवे त तु, एवमेअ तु नो वए ॥९॥
अईअम्मि य कालम्मि, पच्चुप्पणमणागए । निस्सकिअ भवे ज तु, एवमेअ तु निदिसे ॥ १० ॥
तहेव फ्रुमा भासा, गुरुभूओवघाइणी । सच्चा नि सा न वत्तवा, जओ पापस्स आगमो ।' ११ ॥
तदेव काण काणत्ति, पडग पडग त्ति वा वाहिअगावि रोगि ति, तेण चोरे त्ति नोवए ॥१०॥
एएणन्नेण अद्वेण, परो जेणुवहम्मड | आयारभाषदोसन्नू न त भासिज्ज पण्णव ॥ ३॥
तहेव होले गोलि ति, माणे वा वसुलि त्ति । दमए दुहए वा वि नेव भासिज्ज पण्णव ॥ १४ ॥
अज्जिए पज्जिए का बि अम्मो माउस्सिा ति अ ।
पिउस्सिए भायणिज्ज ति, धूए णत्तुणि त्ति अ ॥
॥ १० ॥
हले हलित्ति अनि ति, भट्टे मामिणि गोमिणि ।
होले गोठे वसुलि ति, इत्थिा नेवमालवे ।।
गामधिज्जेण ण वृआ, इत्थीगुत्तेण वा पुणो।जहारिहमभिगिज्झ, जालविन लविज्न वा ॥ १७ ॥
॥ १६ ॥

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श्रीदसवैकालिमसूत्र-सप्तमाध्ययनम्
(८९)
अजए पन्जए वा वि, चप्पो चुम्लपिउत्ति । माउलो भाइणिज्ज चि, पुत्ते णन्तुणि तिअ ।। १८ ॥
हे भो! हलित्ति अनित्ति, मट्टा सामि अगोमिया होला गोल मुलित्ति, पुरिम नेवमालवे ॥ १९॥
नामधिज्जेण ण चूआ, परिगुत्तेण वा पुणो। जहारिहममिगिज्झ, आलविज लगिज या ॥ २० ॥
पचिंदिआण पाणाण, एस इत्थी अय पुम !जार ण नो विजाणिजा, तार जाइ ति आलवे ॥ २१ ।।
तहेर मणुम एसु, पक्सि वा वि मरीसिन । घूले पमेइले रज्झे, पाडमि त्ति अ नो व ॥ २२ ॥
परिवुड्डे ति प यूआ, या उपपिए ति जर मनाए पीणिए वावि महाराय त्ति आलवे ॥ २३ ॥
तहेव गाओ दुझाओ, दम्मा गोरहगति । वाहिमा रहजोगि त्ति, नेर मासिन्न पण्णर ॥ २४ ॥
जुन गवि चि ण आ, घेणु रसदय तिरहस्से महल्लए गा वि व सवहाणि ति अ॥ २० ॥
तहेर गतमुजाण, पचयाणि वणाणि अ! रक्सा महल पेहाए, नेव भासिज पण्णन ।। २६ ।।
अल पामायसमाण, तोरणाणि गिहाणि अ। फलिहग्गलनाचाण, अल उदगदोणिण ॥ २७ ॥
पीढए चगोरे अ, नगले महय सिआ। जतलट्ठी व नामी वा, गडिआ व अल मिआ ॥ २८ ॥
आमण मयण जाण, हुजा ग फिचुवस्म । भूओवाणिं माम, नेत्र भासिज पण्णर ॥ २९ ॥
तहेन गनुमुजाण, पचयाणि रणाणि अ। स्क्सा महल्ल पेहाए, एर भासिन्न पण्णन ॥ ३०॥
जामता इमे रस्सा, दीहवट्टा महालया। पयायसाला विडिमा, पए दरिमणि त्ति अ ॥ ३१ ॥
तहा फलाइ पक्काइ, पायमझा- नो गए। वेलो यार्ड टालाइ, वेहिमाइ ति नो वए ॥ ३०॥
अमथडा इमे अवा, पहुनिवटिमा फला। पन्ज बहुमभूआ, भअरूप ति वा पुणो । ३३ ।।
तहवोमहीओ पक्काओ, नीलिआओ छपी। लाहमा भजिमाउत्ति, पिदुमज ति नो वए ॥ ३४ ॥
रूढा बहुसभूआ, थिरा ओमढा वि अ । गमिआओ पमूआओ, समाराउ त्ति आलवे ।। ३५ ।।
तहर ससडि नचा, विच जति नो ए।
सेणग वावि वज्झि चि, मुतिथि त्ति अ आगगा ।
ससडि सबडि चूआ, पणिअट्ट ति तणग।
बहुममानि तित्थाणि, आगाण विआगर ॥
॥ ३७॥
तहा नइओ पुण्णाओ, पायतिज ति नो रए ।
नारहिं तारिमाउ ति, पाणिपिज ति नो गए।
॥ ३८ ॥
बहुवाहडा अगाहा, बहुमलिटप्पिलोगा। बहुवित्थडोगा आवि एव भासिन्न पण्णा ॥ ३९ ।।
तहय सारन जोग, परम्मटा अनिहिया कीरमाण ति वा नचा, मावन्न न लवे मुणी ॥ ४०॥
सुरुटि ति मुपति त्ति, सुच्छिन्ने सुहटे मट । मुनिट्टिए सुरहित्ति, मावन वजए मुणी । ४१ ॥
पयत्चपछि ति व पक्मारव, पयत्तडिन तिर छिनमारव ।
पयनरहित्ति व कम्महउअ, पहाग्गाढि ति व गाढमालव ।।
सन्युक्स परग्ध ना, अउर नत्यि परिम । अनिविअमरता अचित्त चैव नो वए । टा
महम वइस्मामि, मवमति नो नए । अणुवी- मन मव थ, प भासिज पण्णर ॥४४॥
मुकीम या सुविकीम, अपि न रिञ्जमेय या। इम गिण्ह म मुम, पणिण नो विभागर ॥ ५॥
॥ ४२ ॥

AAN - (९०) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला अप्पग्धे वा गहन्धे वा, कए वा विक्कए वि वा । पडिअट्टे समुप्पन्ने, अणवज विआगरे ॥ ४६॥ तहेवासजय धीरो, आस एहि करेहि वा। सयचिट्ठ वयाहित्ति, नेव मासिज पण्णव ॥ ४७ ॥ बहने इमे असाहू, लोए युवति साहुणो। न लवे असाहु साहुत्ति, साहु साहुति आलवे ॥ १८ ॥ नाणदसणसपन्न, सजमे अ तवे रय | एव गुणसमाउत्त, सजय साहुमालवे ॥ ४९ ॥ देवाण मणुआण च, विरिभाण च बुग्गह। अमुगाण जओ होउ, मा वा होउत्ति नो बए ॥ ५० ॥ वाओ बुट्ट व सीउण्ह, खेम धाय सिन ति वा। कया णु हुज एयाणि, मा वा होउ ति नो वए ॥५१॥ तहेव मेह व नहर मणव, न देवदेव ति गिर बइना। समुच्छिए उन्नए या पओए, वहज वा बुट्ट बलाहय चि ॥ ५२ ॥ अलिक्ख ति ण चूआ, गुज्झाणुचरिअ ति अ। रिद्धिमत नर दिस्स, रिद्धिमत ति आलवे ॥ ५३॥ तहे सारजणुमोअणी गिरा, य परोवघायणी। से कोह लोह भय हाम माणयो, न हासमाणो विगिर वइला ॥ ०४ ॥ सुवक्सुर्द्धि समुपेहिआ मुणी, गिर च दुट्ठ परिवजए सया । मिअ अदुढे अणुवीइ भासए, सयाण मज्झे लहइ पससण ॥ ५५ ॥ भासाइ दोसे अगुणे अजाणिआ,तीसेअदुढे परिवजए सया। छसु सजए सामणिए सया जए, बइज्ज बुद्धे हिअमाणुलोअ ॥ ५६ ॥ परिक्खभासी सुसमाहिइदिए, चउकसायावगए अणिस्सिए । स निधुणे धुत्तमल पुरेक्ड, आराहए लोगमणि तहा पर ॥ ५७ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ सुवक्कसुद्वीनाम सत्तम अज्झयण ममत्त ॥ ७ ॥ जा

श्रीदमवैकालिकसूत्र-अट्ठमाध्ययनम्
॥ अह आयारयणिही अहममज्झयण ॥
आयारपणिहिं ला, जहा काय मिरखुणा। त मे उदाहरिस्सामि, आणुपुर्वि सुणेह मे ॥१॥
पुढविदगअगणिमारुअ, तणरुक्खस्स वीयगा। तमा अपाणा जीर ति, इड वुत्त महेसिणा ॥२॥
तेसिं अच्छणजोएण, निच्च होअपय सिआ। मणसा कायवकेण, एव हवड सजए ॥ ३॥
पुढषि मिति सिल लेल, नेर भिंदे न सलिहे। तिविहेण करणजोएण, सजए सुममाहिए ॥ ४॥
सुद्धपुढवीं न निसीए, ससरकवम्मि अ आसणे। पमजित्तु निसीइजा, जाडत्ता जस्म उग्गह ॥५॥
सीओदग न सेविजा, सिलावुट्ट हिमाणि अ। उसिणोदध तत्तफासुअ, पडिगाहिज सजए ॥ ६ ॥
उदउल्ल अप्पणो काय, नेव पुढे न सलिहे। समुप्पेह तहाभूअ, नो ण सघट्टए मुणी ॥ ७ ॥
इगाल अगणिं अचिं, अलाय वा सजोड। न उजिजा न पट्टिज्जा, नो ण निवारए मुणी ॥८॥
वालिअटेण पत्तेण, साहाए विहुयणेण ना। न वीइज्ज अप्पणो काय, वाहिर वा वि पुग्गल ॥९॥
वणरक्ख न छिदिज्जा, फल मूल च कस्सइ । आमग विविह नीअ, मणमा वि ण पत्थए ॥ १० ॥
गहणेसु न चिहिज्जा, वीएसु हरिएसु वा । उदगम्मि तहा निच, उत्तिंगपणगेसु वा ।। ११ ।।
तसे पाणे न हिंसिज्जा, वाया अदुव कम्मुणा । उवरओ सबभूएसु, पासेज्न रिविह जग ॥ १२ ॥
अट्ट सहुमाड पेहाए, जाइ जाणितु मजए । दयाहिगारी भूएस, आस चिट्ठ सएहि वा ॥ १३ ॥
कयराड अट्ट सुहुमाइ, जाइ पुच्छिज्ज सजए। इमाइ ताइ मेहावी, आइक्सिन पिअक्खणो ॥ २४ ॥
सिणेह पुप्फ हुम च, पाणुत्तिंग एहेव य । पणग वीअ हरिअ च, अडसुहुम च अट्ठम ॥ १० ॥
एवमेआणि जाणित्ता, सवभावेण सजए। अप्पमत्तो जए निच, मबिंदिअसमाहिए ॥ १६॥
धुव च पडिले हिज्जा, जोगसा पायक्वल । सिजमुच्चारभूमि च, मथार अदुवामण ॥ १७ ॥
उच्चार पामरण, खेल सिंघाणजल्लिअ । फासुब पडिलेहित्ता, परिद्वारिज्न मजए ॥ १८ ।'
पविमित्तु परागार, पाणट्ठा भोअणस्स या । जय चिट्टे मिअ भासे, न य स्वेसु मण करे ॥ १९ ॥
बहु सुणेड क्ण्णेहिं, बहु अच्छीहि पिन्छइ । न य दिट्ट सुज सव्य भिकम्बू अक्वाउमरिहह ।। २० ।।
सुअ ना जइ या दिट्ठ, न लविजोरघाड | न य रेण उवाएण, गिहिजोग ममायर ।। २१ ।।
निट्ठाण रसनाज्जढ, मदग पावग ति वा । पुट्ठो वापि अपुट्ठो वा, रामालाभ न निदिसे ॥२२॥
न य भोअणम्मि गिद्धो, चरे उछ अपपिरो । अपासुन मुजीना, की अमु मिश्राइड ॥ २३ ॥
मनिहीं च न कुन्धिज्जा, अणुमाय पि सन 1 मुहानीची अमपद्धे, हपिन जगनिस्मिए ॥ २४ ॥
लहवित्ति मुसतुट्टे, अपिछे सुहर मिआ । आमुरत्त न गच्छिन्ना, सुचा ण निणमामण || २५॥
कण्णमुक्खेहि सद्देहि, प्रेम नामिनि वेमए । दारण रकम पास, कारण अहिआमए ॥ २६ ॥
गुह पिपास दुस्मिन्न, सीउण्ह अरइ भय । आहिआसे अयहिओ देहदु य महारथ ॥ २॥
अस्थ गयम्मि आइ चे, पुरस्था अ अणुग्गए । आहारभाइअ मव्य, मणसा पिण पथए ॥ २८॥
अतितिणे अचरले, अप्पभामी, मिआमणे । हरिज उअर दत, योर ल्धु न मिम ॥ २० ॥
न बाहिर परिभवे अत्ताण न ममुदसे । मुअलामे न मानना, नया तम्मि शुद्धिप ॥ ३० ॥

श्रीजैनसिद्धात-स्वाध्यायमाला
से जाणमजाण वा, कटु आहम्मिभ पय । सवरे सिप्पमप्पाण, बीअ त न समायरे ॥ ३१ ॥
अणायार परकम्म, नेव गृहे न निण्हवे । सुई सया नियडमावे, असमत्ते जिइदिए ॥ ३२ ॥
अमोह वयण कुज्जा, आयरीअस्स महप्पणो । त परिगिज्झ वायाए, कम्मुणा उववायए ॥ ३३ ।।
अधुव जीविअ नचा, सिद्धिमग्ग विआणिआ। विणिअद्विज्ज मोगेस, आउ परिमिअमप्पणो॥ ३४ ॥
पल थाम च पेहाए, सद्धामारुग्ममप्पणो। सित्त काल च विनाय, तहप्पाण निजुजए ॥ ३५ ।।
जरा जाव न पीडेइ, चाही जाव न बड्डइ । जाविदिआ न हायति, तार धम्म समायरे ।। ३६ ॥
कोह माण च माय च, लोभ च पारमट्ठण । चमे चत्तारि दोसे उ, इन्छतो हिअमप्पणो ।। ३७ ।।
कोहो पीइ पणासेड, माणो विणयनासणो । माया मित्ताणि नासेड, लोभो सबविणामणो ॥ ३८ ॥
उपसमेण हणे कोह, माण मद्दवया जिणे । मायमन्जनभावण, लोभ सतोसओ जिणे ॥ ३९ ॥
कोहो अ माणो अ अणिग्गहीआ, माया अ लोभो अ पवड्डमाणा ।
चत्तारि एए कसिणा कमाया, सिंचति मूलाइ पुणन्भरस्म ॥
॥४०॥
रायणिएसु विणय पउजे, धुरसीलय रायप न हावइजा ।
कुम्मुस
अल्लीणपलीणगुत्तो, परक्कमिन्ना तपसजम्मि ।।
॥४१॥
निद च न बहु मनिज्जा, सप्पहास विवज्जए। मिहो कहाहि न रमे, सज्झायम्मि रओसया ॥ १२ ॥
जोग च समणधम्मम्मि, जुजे अनलसोधुन । जुत्तो अ समणधम्मम्मि, अट्ठ लहइ णणुत्तर ।। ४३ ।।
इहलोगपारत्तहिअ, जेण गच्छइ सुग्गइ । बहुस्सुअ पज्जुवासिज्जा, पुच्छिज्जत्थविणिच्छअ ।। ४४ ॥
हत्थ पाय च काय च, पणिगय निइदिए । अल्लीणगुत्तो निसिए, मगासे गुस्णो मुणी ॥ ४५ ॥
न पक्खओ न पुरो, नेव किच्चाण पिट्ठओ। न य ऊरु समासिज्ज, चिट्ठिज्जा गुरुणतिए ॥ ४६ ।।
अपुच्छिओ न भासिज्जा, भासमाणस्स अबरा। पिट्टिमस न साइज्जा, मायामोस विवज्जए ।। ४७ ।।
अप्पत्तिअ जेण सिआ, आसु कुप्पिज्ज वा परो ।
सव्वसो त न भासिज्जा, भास अहिअगामिणि ॥
दिट्ठ मिअ असदिद्ध, पडिपुन विअ जिअ । अयपिरमणुधिग्ग, भास निसिर अत्तर ॥ ४९ ॥
आयारपन्नत्तिधर, दिट्ठिवायमहिज्जग। वायनिक्सलिअ नच्चा, न त उवहसे मुणी ॥ ५० ॥
नक्खत्त सुमिण जोग, निमित्त मतमेसज । मिहिको त न आइक्खे, भूहिगरण प्य ॥५१॥
अन्नह पगड लयण, भइज्जा सयणासण । उच्चारभूमिसपन्न, इत्थीपसुविवज्जिअ ॥ ५२ ॥
विनित्ता अभवे सिज्जा, नारीण न लव कह । गिहिसथव न कुज्ना, कुज्जा माहूहि सथव ।। ३ ।।
जहा कुक्कुडपोअस्स, निच कुललओ भय । एव खु बभयारिस्स, इत्थीविग्गहओ नय ॥ ५४ ।।
चित्तमिचि न निज्झाए, नारिं वा सअलकिन। भक्खर पिर दट्टण, दिहि पडिमसमाहरे ।। ५५ ॥
हत्थपायपडिच्छिन्न, कननासविगप्पिस । अवि वासमय नारिं, बमयारि विवज्जए ॥ ५६ ॥
निभूसा इस्थिसमग्गी, पणी रसभोअण! नरस्मत्तगवेसिम्स, विस तालउड जहा ॥ ५७ ।।
अगपञ्चगसठाण, चारल्लविअप्पेहि । इत्थीण त न गिज्झाए, कामरागविवड्डण ।। ५८ ॥
विसएमु मणुण्णेसु, पेम नाभिनिवेमए । अणिच तेसि विण्णाय, परिणाम पुग्गलाण उ ।। ५९ ॥
॥४८॥

श्रीदसर्वकालिकसूत्र-अट्ठमाध्ययनम् पोग्गलाण परिणाम, तेसिं नच्चा जहा तहा। विणीअतिण्हो विहरे, सीईभूएण अप्पणा ।। ६० ॥ जाइ सद्धाइ निक्खतो, परिआयट्ठाणमुत्तम । तमेव अणुपालिज्जा, गुणे आयरियसमए ॥ ६१ ॥ तव चिम सजमजोगय च, सज्झायजोग च सया अहिट्ट ए। सूरे व सेणा' सम्मत्तमाउहे, अलमप्पणो होड अल परेसिं ॥ ६२ ।। सज्झायसुझाणरयस्म ताइणो, अपानभावस्म तवे रयस्स । विसुज्झट ज सि मल पुरेक्ड, समीरिज स्प्पमल व जोइणा ।। ६३ ॥ से तारिसे दुक्खमहे निइदिए, सुएण जुत्ते अममे अकिंचणे । विरायई कम्मघणम्मि अवगए, कसिण भपुडानगमै व चदिम ॥ ६४ ॥ त्ति बेमि ।। इअ आयारपणिही णाम अट्टममज्झयण ममत्त ॥८॥ ॥ अह विणयसमाही णाम नवममज्झयण ॥ थभा व कोहा व मयप्पमाया, गुरुस्सगासे विणय न सिम्खे । सो चेव उ तस्स अभूइभावो, फल न कीअस्म नहाय होइ ॥१॥ जे आवि मदि ति गुरु विदत्ता, डहरे इमे अप्पसुए ति नच्चा । हीलति मिन्छ पडिबजमाणा, करति आसायण ते गुरूण ॥ २ ॥ पगईए मदा वि भवति एगे, डहरा वि अ जे सुअशुद्धोववेआ। आयारमता गुणसुट्टिअप्पा, हीलिआ सिहिरिव भाम कुजा ।। ३ ॥ जे आवि नाग डहर ति नचा, आसायए से अहिआय हो । एवारियपि हु हीलयती, निअन्छइ आइपह खु मो (द)॥ ४ ॥ आसीविसो वावि पर सुरहो, कि जीरनामाउ पर न कुजा । आयरिआया पुण अप्पसना, अपोहिआमायण नत्थि मुक्सो ॥ ५॥ जो पारग जलिअमनकमिजा, आसीविम पा विहु मोडना। जो या विस खायः जीविअट्ठी एमोरमामायणगा गुरूण ॥ ६ ॥ सिमा हुसे पारय नो डहिला,आसीविसो वा दुवियोन भक्खे । सिआ विम हालहल न मारे, न आवि मुक्यो गुस्हीलणाए ॥ ७ ॥ जो पचय सिरमा भित्तुमिच्ने, सुत्त व सीह पडियोहहना। जो या दए सत्तिअग्गे पहार, एमोरमामायणया गुरुण ॥ ८ ॥ सिआ हु सीसण गिरि पिमिद,सिमा हुसीहो कुविओ न भरखे । सिमा नभिदिज व सत्तिअग्ग, न आवि मुक्यो गुम्हील्माए ॥ ९ ॥ आयरिअपाया पुण अप्पमना,अमोहिआसायण नत्यि मुक्यो । तम्हा अणाचाहमुहामिमी, गुरप्पसायाभिमुहो रमिन्ना ॥ १० ॥ जहाहिअग्गी जल्ण नमसे, नाणाहुइमतपयामिसित्त ।

(९४)
श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला
एवायरिअ उपचिट्ठइज्जा, अणतनाणोयगओ वि सतो ॥११॥
जस्सतिए धम्मपयाइ सिक्खे, तस्सतिए वेणइय पउजे ।
मकारए सिरसा पजलीओ, कायगिरा भो मणसा अनिच ॥ १२ ॥
लना दया सजमवभरेर, कल्लाणमागिस्स विसोहिठाण ।
जे मे गुरू सययमणुसासयति, तेहिं गुरू सयय पूजयामि ॥ १३ ॥
जहा निसते तवणचिमाली, पभासई केवलमारह तु ।
एवायरिओ सुअसीलवृद्धिए, चिरायई सुरमज्ञ व इदो ॥ १४ ॥
जहा ससी कोमुडजोगजुत्तो, नक्सत्ततारागणपरिवुडप्पा ।
खे सोहई विमले अब्भमुक्के, एव गणी सोहइ भिक्खुमुज्झे ॥ १५ ॥
महागरा आयरिआ महेसी, ममाहिजोगे सुअसीलबुद्धिए ।
सपापिउकामे अणुत्तराड, आराहए तोमइ चम्मकामी ॥ १६ ॥
सच्चा ण मेहावी सुभासिआइ, मुस्लमए आयरिअप्पमत्तो।
आराहत्ताण गुणे अणेगे, से पावई मिद्धिमणुत्तर त्ति वेमि ॥ १७ ॥
।। इअ विणयसमाहिज्झयणे पढमो उद्दसो ममत्तो ॥
मलाउ संघप्पमतो दुमस्म, सधाउ पच्छा समुर्विति साहा ।
साहप्पसाहा विरहति पत्ता, तओ सि (से)पुष्फ च फल रसोअ ॥
॥१॥
एव धम्मस्स विणओ, मूल परमो अ से मुक्खो, जेण कित्ति सुअ सिद्ध, नीसेस चाभिगच्छड ।। २ ।।
जे अ चडे मिए यद्धे, दुबाई नियडी मढे । बुज्झइ से अपिणीअप्पा, पट्ट सोअगय जहा ॥३॥
विणयम्मि जो उपाएण, चोइसो कुप्पइ नरो । दिव्य सो सिरिमिजति, दडेण पडिसेहिए ॥ ४ ॥
तहेव अविणीअप्पा, उवयज्झा हया गया। दीसति दुहमेहता, आमिओगमुवडिआ ॥५॥
तहेव सुविणीअप्पा, उपवज्झा हया गया। दीसति सुहमेहता, इढेि पत्ता महायसा ॥ ६ ॥
तहेव अविणीअप्पा, लोगम्मि नरनारिओ । दीसति दुहमेहता, छाया त बिगलिंदिआ ॥ ७ ॥
दडसत्थपरिज्जुन्ना असम्भवयणेहि अ । क्लुणा विपनछदा, खुप्पिवामपरिग्गया ॥ ८॥
तहेच सुविणीअप्पा, लोगसि नरनारिओ । दामति सुहमेहता, इढिं पत्ता महायसा ॥ ९ ॥
तहेव अविणीअप्पा, देना जक्सा अ गुज्झगा । दीसति दुहमेहता, आभिओगमुवटिआ १०॥
तहेव मुविणीअप्पा, देवा जक्सा अ गुज्झगा । दीमति मुहमेहता, इड्डेि पत्ता महायसा ॥ ११ ॥
जे आयरिअर झायाण, मुस्सूसारयण कर। तेसिं सिक्खा पवड्ढति, जलसित्ता इव पायवा ॥ १०॥
अप्पणट्ठा परट्ठा वा, सिप्पा पोउणिआणि अ । गिहिणो उपभोगट्ठा, इहलोगस्स कारणा ॥ १३ ॥
जेण बघ वह घोर, परिआर च दारुण | सिक्खमाणा निअच्छति जुत्ता ते ललिइदिशा ॥ १४ ॥
ते वि त गुरु पूअति तस्स सिप्पस्स कारणा । सकारति नमसति, तुट्ठा निर्देसरतिणो ॥ १५ ॥
कि पुण जे सुअग्गाही, अणतहिअकामए । आयरिआ नपए मिक्खू तम्हा त नाइवत्तए ॥ १६॥

wwwww श्रीदमवैकालिकसूत्र-नरमाध्ययनम् (९५) नीअसिज्ज गइ ठाण, नीअ च आसणाणिआनीमच पाए वदिजा, नीमज्जा अ अजलिं ॥१७॥ सघटइत्ता कारण, तहा उपहिणामवि । खमेह अवराह मे, वइन न पुणु ति अ॥१८॥ दुग्गओ वा पओएण, चोइओ वहइ रह । एव दुबुद्धि फिचाण, वुत्तो वुत्तो पकुवह ॥ १९ ॥ आलवते लवते वा, न निसिजाए पडिस्सुणे । मुत्तूण आसण वीरो, सुस्सुमाए पडिस्सणे ॥ २० ॥ काल छदोश्यार च, पडिलेहिताण हेउहिं । तेण तेण उवाएण, त त सपडिवायए ॥ २१ ॥ विवति अविणीअम्स, सपत्ती विणिअस्म य । जस्सय दुहओ नाय, सिक्स से अमिगच्छइ ॥ २२॥ जे आनि चडे महइडिगारवे, पिणे नरे साहसडीणपेसणे । अदिधम्मे विणए अकोरिए,असपिभागी न हु तम्स मुक्सो ॥ ॥ २३॥ निदेसरित्ती पुण जे गुरूण, सुअत्यधम्मा विणयम्मि कोविआ। तरिच त ओषमिण दुरुत्तर, सवित्त क्म्म गड्मुत्तम गया ।। ॥२४॥ त्ति बेमि इअ विणयसमाहिणामज्झयणे बीओ उन्मो समत्तो॥ आयरिअ(अ) जग्गिमिनाहिअग्गी, सुरससमाणो पडिजागरिजा । जालोइअ इगिअमेव नचा, जो छदमाराहयई स पुज्जो ॥१॥ आयारमट्ठा विणय पउजे, सुस्सूममाणो परिगिज्झ यक । जहोवइट्ट अभिकसगणो, गुरु च नामायइ जे म पुज्जो ॥२॥ रायणिएसु विणय पउजे डहरा वि अ जे परिआयजिट्ठा । नीअत्तणे यट्टइ सच्चवइ, ओगायव उकार म पुञ्जो ॥ ३ ॥ अन्नायउछ चरइ विसुद्ध, जनणट्टया ममुआण च निच । अलधु नो परिदेव इना, रधु न विकथिइ स पुज्जो ॥ ४ ॥ सथारसिजायणभत्तपाणे, अपिच्छया अइलामे नि सते । जो एवमप्पाणभितीसडना, सतोसपाहन्नरए स पुनो ॥५॥ मक्का सहउ आसाइ क्टया, अओमया उच्छहया नरेण । अणासए जो उ सहिज्ज क्टष, वडमए कन्नसरे म पुज्जो । ६॥ मुहत्तदुवा उ हमति क्टया, अओमया ते नि तओ मुउद्धरा । यायादुरत्ताणि दुरद्धराणि, वेराणुनधीणि मयुभयाणि ॥ ७ ॥ ममावयता वयणाभिघाया, स्नगया दुम्मणिअ जाणति । धम्मु ति विचा परमग्गसूरे, जिदिए जो महइ म पुलो ।। ८॥ अपण्णवाय च परम्मुहस्स, पञ्चक्सओ पडिणीअ च भाम । ओहारणि अप्पिअशरणिं च, भाम न भासिन्न मया म पुनो ॥ ९ ॥ अलोलए अक्कु हए अमाइ, अपिमुणे आवि अदाणविती । नो भावण्नो वि अ मारिअप्पा, अमोउहल्ले अ मया म प्रलो ॥ १० ॥ . - श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला गुणेहि साहू अगुणेहिऽसाहू, गिहाहि साहू गुण मुचऽसाहू । विआणिआ अप्पगमप्पएण, जो रागदोसेहि समो स पुज्जो ।। ११ ॥ तहेव डहर च महल्लग वा, इत्थी पुम पवइस गिहिं वा । नो हीलए नो वि अखिसइजा थम च कोह च चए पुज्जो ।। १२ ।। जे माणिआ सययय माणयति जचेण कन्न व निवेसयति । ते माणए माणरिहे तपस्सी, जिइदिए सच्चरए स पुज्नो ॥ १३ ॥ तेसिं गुरुण गुणमायराण, सुचाण मेहावि सुभासिआइ । चरे मुणी पचरए तिगुत्तो, चउकसायावगए स पुज्नो ॥ १४ ॥ गुरुमिह सयय पडिगरिअ मुणी,जिणमयनिउणे अभिगमकुसले । धुणिअ रयमल पुरेकड, भामुरमउल गइ वइ (गय ) ॥१५॥ त्ति वेमि ॥ इअ विणयसमाहीत तडओ उद्देसो समत्तो ।। , सुअ मे आउस-तेण भगवया एवमक्साय । इह सलु थेरेहिं भगवतेहिं चत्वारि विणयसमा हिठाणा पन्नता । कयरे सलु ते थेरेहिं भगवतेहिं चत्तारि विणयसमाहिट्ठाणा पन्नत्ता । इमे खलु ते थेरेहिं भगरतेहिं चत्तारि विणयसमाहिट्ठाणा पन्नत्ता । तनहा-विणयसमाही, सुअसमाही, तवस माही, आयारसमाही । “विणऐ सुए अ तवे, आयारे निच पडिआ। अभिरामयति अप्पाण, जे भवति जिइदिआ" चउबिहा सलु विणयसमाही भनइ । तजहा-अणुमासिज्जतो, मुस्यूसइ । सम्म पडिरज्जड । वयमाराहइ । न य भवइ अत्तसपग्गहिए। चउत्थ पय भनइ । भाइ अ इत्थ सिलोगो।। "पहेइ हिसाणुसासण, मुम्सूसइ त च पुणो अहिडिए । न य माणमएण मजइ, विणयसमाहिआ ययट्ठिए" ॥२॥ चउदिहा खल सुअसगाही भवइ । तजहा-सुअ मे मविस्सइ त्ति अज्झाइअब भवइ । एगग्गचित्तो भविस्सामि त्ति अज्झाइअवय भवइ । अप्पाण ठानइस्साभि ति अज्साहअवय भवइ । ठिओ पर ठावइस्सामि त्ति अज्झाइअवय भवइ । चउत्थ पय भनइ । भर अ इत्थ सिलोगो।। "नाणमेगग्गचित्तो अ, ठिओ अ टावर पर । सुआणि अ अहिन्जित्ता, रओ सुअसाहिए" ॥३॥ चउबिहा सलु तवसमाही भवइ । तजहा-नो इहलोगट्ठयाए तवमहिहिला, नो परलोगढपाए तर महिडिजा, नो कित्तिपन्नमद्दसिलोगहआए तनमहिद्विजा, ननत्य निजट्टयाए तवमहिद्विज्जा । चउत्थ पय भवइ । भनइ अ इत्थ सिलोगो ॥ "निरिहगुणतनोरए, निन भवइ थिरासए निजर ट्ठिए । तवसा धुणइ पुराणपारग, जुत्तो सया तरसमाहिए"।। ४ ।। चउबिहा खलु आयारसमाही भनइ । तजहा-नो इहलोगट्टयाए आयारमहिद्विज्जा, नो नो परलोगट्टयाए आयारमहिहिल, नो कित्तिवन्नसहसिलोगट्ठयाए आयारमहिद्विजा, ननस्थ आरहतेहिं हेअर्हि आयारमहिद्विजा । चउत्थ पय भनइ । भवइ अ इत्थ सिलोगो । “जिणवयणरए अतिवणे, पडिपुनाययमाययट्टिए । आयार समाहिसचुडे, भाइ अ दते भानसघए ॥ ४ ॥ अभिगम चउरो समाहिओ, सुविसुद्धो सुसमाहिम प्पणो । निउलहिअ सुद्दावह पुणो, कुछह अ सो पपखेममप्पणो ॥ ६॥ जाइमरणाओ मुबह इत्थत्थ , - श्रीदसवैकालिकसूत्र-दममाध्ययनम् (९७) च चएइ सबसो । सिद्धे वा हरइ सासए, देवे वा अप्परए महिटिए ॥ ७ ॥ त्ति वेमि ॥ इअ विणयममाही नाम चउत्यो उहेमो नरममायण समत्त ॥९॥ ॥ अह भिखू नाम दसममज्झयण ॥ तिक्खम्ममाणाइ अ बुद्धपयणे, निच चित्तसमाहिओ हविज्जा । इत्थीण बस न आपि गन्छे, वत नो पटिआरइ जे म भिक्खू ॥१॥ पुनि न सणे न सणावए, सीओदग न पिए न पिआरए । अगणि मत्थ जहा मुनिसिअ, त न जले न जलागए जेम मिक्सू ॥ २ ॥ अनिलेण न वीए न वीयारए, हरियाणि न देि न छिटाए । पीआणि सया विवज्जयतो, सचित्त नाहारण जे स भिक्खू ॥ ३॥ वहण तसयापराण होइ, पुढवितणक्ट्ठनिस्मिआण । तम्हा उसिअ न भुजे नो पि, पए न पयाव जे स भिक्ख् ॥ ४ ॥ रोडअ नायपुत्तपयणे, अत्तममे मनिन्ज छप्पि काए । पच य फासे महायाइ, पचामरसवरे जे स भिक्ग्व् ॥ ५ ॥ चत्तारि बमे मया कसाए, धुनजोगी हरिज बुद्धरयणे। अहणे निजायरूपरयण, गिहिजोग परिवञ्जए जे स मिमग्छ ।॥ ६ ॥ सम्मदिट्ठी सया जमूढे, अस्थि हु नाणे तवे सजमे अ । सरसा धुणइ पुराणपारग, मणरयकायमसयुड जे म सिक्यू ॥ ७ ॥ तहेर असण पाणग वा, विविह सामसाइम लभित्ता । होही अट्ठो सुए परे वा, त न निहे न निहारए जे म भिक्म्बू ॥ ८॥ तहेन अमण पाणग वा, विविह रमाइममा'म लमित्ता। छदिअ साहम्मिआण भुज, भुच्चा मज्झायरए ज म भिक्सू ॥९॥ न य गुग्गहिअ कह कहिजा, न य कुप्पे निदुइदिए पसत । सनमधुनोगजुत्ते, उपसते उपहडए जे म मिक्स् ॥ १० ॥ जो महड हु गामक्टए, अकोमपहारतजणाओ । भयमेरयमहसप्पहाम, ममसुहदुक्ससहे अजे स भिक्म् ॥ ११ ॥ पडिम पडियाजिमा समाणे, नो माया भयमेरमान दिस्म । विविहगुणतोरए अनिच, न मरीर चाभिमपए जे मभिक्ख् ।। १२ ॥ अमइ गोसिट्टचनदहे, अकुठे व हए लूसिए ना। पुढविममे मुणी हविजा अनिआणे अकोउहल्ले जे म मिकम् ॥ १३ ॥ अमिभूअ कारण परीमहाइ, समृद्धर जाइपहाउ अप्पय । विउत्तु जाइमरण महन्मय, तव रण मामणि जे म मिरम्म् ।। १४ ।। .

श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला गुणेहि साहू अगुणेहिऽसाहू, गिण्हाहि साहू गुण मुचऽसाहू । विआणिआ अप्पगमप्पएण, जो रागदोसेहिं समो स पुज्जो ॥११॥ तहेव डहर च महल्लग वा, इत्थी पुम पाहअ गिर्हि वा। नो हीलए नो वि अखिसइजा थम च कोह च चए पुज्जो ॥ १२॥ जे माणिआ सययय माणयति जत्तेण कन्न व निवेसयति । ते माणए माणरिहे तबस्सी, जिइदिए सच्चरए स पुज्जो ॥ १३ ॥ तेसिं गुरूण गुणसायराण, सुच्चाण मेहावि सुभासिआइ । चरे मुणी पचरए तिगुत्तो, चउकसायानगए स पुज्जो ॥ १४ ।। गुरुमिह सयय पडिगरिअमुणी,जिणमयनिउणे अभिगमकुसले । धुणि रयमल पुरेकड, भासुरमउल गइ वह ( गय) ॥ १५ ॥ त्ति वेमि ॥ इअ विणयसमाहीए तइओ उद्देसो समत्तो ॥ सुअ मे आउस-तेण भगवया एवमक्साय । इह खलु थेरेहिं भगरतेहिं चत्तारि विणयसमा हिठाणा पन्नता । कयरे खलु ते थेरेहिं भगवतेहिं चत्तारि विणयसमाहिट्ठाणा पन्नता। इमे खलु ते थेरेहिं भगरतेहिं चत्तारि विणयसमाहिट्ठाणा पनत्ता । तनहा-विणयसमाही, सुअसमाही, तवस माही, आयारसमाही । "विणऐ सुए अ तवे, आयारे निच पडिआ। अमिरामयति अप्पाण, जे भगति जिइदिआ" चउबिहा खल विणयसमाही भवइ । तजहा-अणुमासिजतो, मुस्सइ । सम्म पडिवज्जइ । वयमाराहइ। न य भवइ अत्तसपग्गहिए। चउत्थ पय भवइ । भरड अ इत्थ सिलोगो॥ "पेहेइ हिसाणुसासण, सुस्सूमइ त च पुणो अहिटिए । न य माणमएण माइ, विणयसमाहिआ ययदिए" ॥ २ ॥ चउबिहा सल सुअसगाही भवइ । तजहा-सुअ मे मरिस्सइ ति अज्झाइअव्व भाइ । एगग्गचित्तो भरिस्मामि त्ति अज्झाइअवय भवइ । अप्पाण ठापडस्साभि ति अज्झाइअवय भवइ। ठिओ पर ठावइस्मामि त्ति अज्झाइअवय भवइ । चउत्थ पय भाइ । भवर अ इत्थ सिलोगो।। "नाणमेगग्गचित्तो अ, ठिओ अ ठावह पर । सुआणि अ अहिजित्ता, रओ सुअसाहिए" ॥३॥ चारविहा सलु तमसमाही मनइ । तजहा-नो इहलोगहपाए तवमहिडिन्ना, नो परलोगहपाए तब महिहिज्जा, नो कित्तिनन्नमद्दसिलोगट्ठआए तवमहिडिजा, ननत्थ निजट्टयाए तवमहिडिज्जा । चउत्थ पय भवइ । भरइ अ इत्थ सिलोगो । “गिरिहगुणतमोरए, निम भवइ थिरासए निजर हिए | तवसा धुगइ पुराणपावग, जुत्तो सया तरसमाहिए"॥ ४ ॥ चउबिहा खल आयारसमाही भरह । तजहा-नो इहलोगट्टयाए आयारमहिद्विज्जा, नो नो परलोगट्टयाए आयारमहिहिब, नो कित्तिवनमसिलोगट्ठयाए आयारमहिडिजा, ननत्थ आरहतेहिं हेऊहिं आयारमहिद्विजा । चउत्थ पय भवइ । भवइ अ इत्थ सिलोगो । “जिणवयणरए अवितणे, पडिपुत्राययमाययहिए । आयार समाहिसवुडे, भवन अ दते भावसघए ॥ ४ ॥ अभिगम चउरो समाहिओ, सुविमुद्धो सुममाहिम प्पणो । निउलहिअ सुझावह पुणो, कुबइ अ सो पयखेममप्पणो ॥६॥ जाइमरणाओ मुबइ इत्थत्थ श्रीदमबैकालिकसूत्र-दसमाध्ययनम् www . , जया अ माणिमो होइ, पच्छाहोइ अमाणिमो । सिटिव कब्बडे छूढो, स पन्छा परितप्पइ ॥५॥ जया अ थेरओ होइ, समस्कतजुषणो। मच्छुच्च गलिं गलित्ता, स पच्छा परितप्पइ ॥ ६ ॥ जया अ कुकुडुवस्स, कुतत्तीहिं विहम्मड । हत्थी व बधणे बद्धो, स पच्छा परितप्पइ ॥ ७ ॥ पुतदारपरिकिन्नो, मोहसताणसतओ। पकोसनो जहा नागो, स पच्छा परितप्पइ ॥८॥ अज आह गणी हुतो, भाविअप्पा बहुस्सुओ । जड हरमतो परिआए, सामन्ने जिणदेसिए ॥९॥ देवलोगसमाणो अ, परिआओ महसिण । स्याण, अरयाण च, महानरयसारिसो॥१०॥ अमरोवम जाणिअ सुक्खमुत्तम, रयाण परिआए तहारयाण । निरओवम जाणिअ दुक्खमुत्तम, रमिज तम्हा परिआयपडिए ।। ११ ॥ धम्माउ भट्ट सिरिओववेय, जन्नगि विज्झायमिनप्पते । हीलति ण दुविहिअ कुसीला, दाढद्धिअ घोरविस व नाग ॥ १२ ॥ इहेब यम्मो अयसो अकित्ती, दुनामधिज्ज च पिहुज्जणम्मि । चुअस्स धम्माउ अहम्मसेविणो, सभिन्नवित्तस्मय हिडओ गई ॥ १३ ॥ भुजितु भोगाइ पमज्झ चेअसा, तहाविह कट्टु असजम बहु । गडच गच्छे अणहिन्झिअदुह बोही असे नो सुलहा पुणो पुणो ॥ १४ ॥ इमस्म ता नेरइअस्स जतुणो, दुहोवणीअस्स किलेसपत्तिणो । पलिओवम झिज्जइ सागरोगम, किमग पुण मज्झ इम मणोदुह ॥ १० ॥ न मे चिर दुक्ग्वमिण भविस्मद, असामया भोगपिवास जतुणो । न चे सरीरेण इमेण विस्मह, अविस्सई जीविअपञ्जवेण मे ।। १६ ॥ जस्सेवमप्पा उ हविज निच्छिओ, चइज दह न हु धम्मसामण । त तारिम नो पइलिंति इदिआ, उविति वाया र मुदसण गिरिं ॥ १७ ॥ इच्चैव मपस्सिम बुद्धिम नरो आय उवाय विविह विआणिआ । कारण वाया अदु माणसेण तिगुत्तिगुत्तो जिणश्यणमहिद्विजासि ॥ १८ ॥ त्ति बेमि ।। इअ रइवका पदमा चूला समत्ता ॥ १॥ ॥ अह विवित्तचरिया वीआ चुलिआ ॥ चूलिअ तु पयसामि, सुअ मिलिभासिज । ज सुणित्तु सुपुण्णाण, यम्मे उप्पजए मइ ॥१॥ अणुसोअपट्टिए बहुजणम्मि परिसोअलद्धलक्खेण । पडिसोअमेर अप्पा, दायही होउमामेण ॥ २॥ अणुसोभसुहोरोओ,पडिसोओ आमचो सुविहिआणाअणुसोओमसारो,पडिमोनो तस्म उत्तारो ॥ ३ ॥ तम्हा आयारपरफ्मेण मवरसमाहिपहुलेण । चरिआ गुणा ज नियमा अ, इति साहूण दट्टवा ॥४॥ अणि अवासो ममुआणचरिआ, अनायउछ पयरिक्या अ। अप्पोपही क्लहविरजणा अ, विहारचरिआ सिण पमत्था ॥ ॥ आइन्नओ माणविननणा , जोमा नदिहाइडभत्तपाणे ।

वायसज श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला हत्थसजए पायसनए, सजइदिए। अज्झप्परए सुसमाहिअप्पा, सुत्तत्थ च विआणड जे स भिक्खू ।। १८ ॥ उपहिम्मि अमुच्छिए अगिद्धे, अन्नायउछ पुलनिप्पुलाए । कयविक्कयसनिहिओ विरए, सबसगावगए अ जे स भिक्खू ।। १६ ॥ अलोल(ल)भिक्खू न रसेसु गिज्झे,उछ चरजीविअनाभिकखी । इढेि च सकारण पूअण च, चए ठिअप्पा अणिहे जे स भिक्खू ॥ १७ ॥ न पर वइजाासि अय कुसीले, जेण च कुप्पिज न त वइजा। जाणिअ पत्ते पुनपाव' अत्ताण न समुक्कसे जे स भिक्खू । १८ ॥ न जादमत्ते न य रूपमत्ते, न लाभमत्ते न सुरण मत्ते । मयाणि सहाणि विवजइत्ता, धम्मज्झाणरए जे स भिक्खू ॥ १९ ॥ पवेअए अञ्जपय महामुणी, धम्मे ठिओ ठावयइ पर पि । निक्सम्म वजिज बुसीललिंग,न आवि हास कुहए जेस भिक्खू ॥ २० ॥ त देहवास असुइ अमासय, सया चए निचहिअद्विअप्पा । छिदित्तु जाइमरणम्म बधण, उवेइ भिक्खू अपुणागम गइ ॥ २१ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ भिरसु नाम दसमज्झयण ममत्त ।। ॥ अह रइवका पढमा चूलिआ । इह खलु भो पदइएण उप्पण्णदुक्खेण सजमे अरइममाग्नचित्तेण ओहाणुप्पेहिणा अणोहाइएण चेव हयरस्सिगयकुसपोयपडागाभूआइ इमाइ अट्ठारस ठाणाइ सम्म सपडिलेहिअबाइ भवति । तजहा ह भो! दुस्समाइ दुप्पजीवी ॥१॥ लहुसगा इत्तरिआ गिहीण कामभोगा ॥ २॥ भुजो अ साय बहुला मणुस्सा ॥ ३ ॥ इमे अ मे दुक्खे न चिरकालोपट्ठाइ मविस्सइ ॥ ४ ॥ ओमजणपुरकारे ॥५॥ वतस्स य पडिआयण ॥ ६ ॥ अहरगइवासोवसपया ॥ ७॥ दुल्लहे खलु भो ! गिहीण धम्मे गिहिवासमझे वसताण ॥८॥ आयके से वहाय होह ॥९॥ सकप्पे से वहाय होई ॥१०॥ सोवकेसे गिहवासे, निरुनकेसे परिआए ॥ ११ ॥ यधे गिल्वासे, मुक्खे परिआए ॥१२|| सावजे गिहवासे, अणवज्जे परिआए ॥ १३ ॥ बहुसाहारणा गिहोण कामभोगा ॥ १२ ॥ पत्तेअ पुनभाव ॥ १५ ॥ अणिचे सलु भो! मणुआण जीविए कुसग्गनलपिंदुचचले ॥१६॥बहु च खलु भो! पार कम्म पगड ॥ १७ ॥ पाशण च सलु भो ! कडाण रम्माण पुत्विं दुचिन्नाण दुप्पडिफ्ताण वेइत्ता मुक्खो नत्थि अवेइत्ता तवसा चा झोसइत्ता ॥ १८ ॥ अट्ठारसम पय भवइ, भाइ अ इत्थ सिलोगो- जया य चयइ धम्म, जणजो भोगमारणा । से तत्य मुच्छिए चाले, आयड नावयुज्झई ॥१॥ जया ओहाविओ होइ, इदो वा पडिओ छम | सधम्मपरि भट्ठो, स पच्छा परितप्पइ ॥२॥ जया अ यदिमो होइ, पच्छा हो अवदिमो। दया व चुआ ठाणा, म पच्छा परितप्पड ॥ ३ ॥ जया अ पूइमो होइ, पडा हो' अपूरमो, राया व रन्नप भट्ठो, स पच्छा परितप्पा ॥४॥ - . नी ॥ श्रीमद्देवऋद्धिगणितमात्रमणप्रणीत ॥ श्री नन्दीसूत्र मूलपाठः। जयह जग जीव जोणी रियाणो । जगगुरू जगाणटो ॥ जगणाहो जगार, जयड जगप्पि यामहोमयः ॥ १ ॥ जयह मुआण पभयो । तित्थयराण अपछिमो जयह ॥ जयह गुरुरोगाण । जयह महप्पा महावीरो॥०॥ भद सब जगनोयगस्म । मद्द जिणम्म वीरम्म ।। म६ मृगमुरनम- सियम्स । म६ धुपरयस्म ॥ ३॥ गुणभवणगहण । मुयरयण भग्यिासणनिमुद्धरत्यागा सघ नगर भ६ ते । अखड चारित्तपागाग ॥ ४ ॥ सनम तर तुमाग्यस्म । नमो मम्मत्त पाग्यिहम्म ॥ अप्पडि चकस्स जओ होउ मया मपचकम्म ॥ ५॥ मद सील पटागूसियम्म । तर नियम तुग्य जुचस्म ।। मारहम्म मगरओ । मज्याय मुनदियोसम्म ॥ ६॥ कम्मरय जलोह विणिग्गयम्म । मुगरयण दीहनासम्म ।। पच महावय थिरमनियम्म । गुणकेमगरम्म ।। ७ ।। मारग जण महुअरि परिढम्म । निण सूर तेय युद्धम्म ।। मघपग्मस्स मद्द । ममण गण सहम्म पत्तम्म ॥ ८॥ तर मनम मयलण । असिरिय राहमुह दुरिमनिच । जय मर चद । निम्म मम्मत्त विमुद्ध जो- आहागा ॥९॥ पर तित्थिय गह पह नामगस्म । तवतेय दिस रेमस्म ।। नाणु खोयम्म जप मर दम मय मूरम्म ॥ १०॥ मदशिश घेरा परिगयम्म । ममाय जोग मगरस्म ।। अक्खोहम्म मग- वयो । मघ समुहस्म स्दम्म ।। ११ ।। मम्म दमण वर पहर दहम्द गाटारगाट पेटस्म ॥ पम्म वग्रयण मडिय त्रामीयर मेहलागम्म |॥ १२ ॥ निय मृमिय क्णय मिलायटुञ्जल जलत चित्तक- डम्म ॥ नदण वण मणहर मुगमि सील गधुदमायम्म ॥ १३ ॥ जीपच्या मुर र रिय मुणियर मइद इनस्म । इउ सप धार पगरत रयणरिचोमहि गुम्म ॥ ४॥ मार पर जर पग रिप उझर परिराय माणहास्म । माग जण पर मन मोर नगत हम्म्म ॥ १५॥ रिणय नय पर मुणियर पुरत विज्नुसरत मिहम्म्म । निरिह गुण पप्प ग्क्सग फलमर कुमुमाउर चगस्म ।। १६ ॥ नाण पर रयण टिप्पत स्तरिय विमा चरम्म ॥ सामि विणय पणमो मर महामा गिरिम्म ॥ १७ ॥ गुण रयणुझन क्रय मीर मुगवि तर मदिउन्म ॥ मुयनाग्म गमिहर मघ महामदर वद ॥ १८॥ नगर म्ह चक पउमै चट मूर ममुद्र मेझम्मि । जो अमि अ मपय त मयगुणायरं पर ||१९॥ पर उमम अनिय ममर ममिनटण मुम' मुपम सुपास।।

श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला www ससहकप्पेण चरिज भिक्खू तजायससह जई जइजा ॥ ६ ॥ अमजमसासि अमच्छरीआ, अभिक्खण निविगइ गया अ । अमिक्सण काउस्सग्गकारी, सज्झायजोग पयओ हविना ॥ ७ ॥ न पडिन्नविजा सयणासणाइ, सिन्ज निसिज्ज तह भत्तपाण । गामे कुले बा नगरे व देसे, ममत्तभाव न कहिं पि कुजा ॥ ८॥ गिहिणो वेआरडिअ न कुजा, अभिरायण चदणपूअण वा । असकिलिटेहिं सम पसिना, मुणी चरित्तस्स जओ न हाणी ॥९॥ न या लभेजा निउण सहाय, गुणाहिअ या गुणओ सम वा । इक्को वि पावाइ मिनयतो, विहरिज कामेसु असन्जमाणो ॥१०॥ सरन्छर वा वि पर पमाण, पीअ च पास न तहिं वसिज्जा । सुत्तस्स मग्गेण चरिज्जभिक्सू, सुतस्म अत्थो जह आणवेड ॥ ११ ।। जो पुवरत्तावररत्तकाले, सपिक्स अप्पगमप्पएण। कि मे फड किं च मे किच्चसेम, कि सकणिज न समायरामि ॥१२॥ कि म परा पामइ किंच अप्पा, कि वाह सलिअन विचज्जयामि । इच्चेव सम्म अणुपाममाणो, अणागय नो पडियध कुज्जा ॥ १३ ॥ जत्थेर पासे कइ दुप्पउत्त, कारण वाया अदु माणसेण । तत्थेर धीरो पडिमाह रिज्जा, आनन्नओ सिप्पमिव खलीण || १४ ॥ जस्सेरिसा जोग जिइदिअस्स, धिइमओ सप्पुरिसस्म निच्च । तमाह लोए पडियुद्धजीवी, सो जीअइ सनमजीपिएण ॥ १० ॥ अप्पा सल सयय रक्खि अन्यो, मधिदिएहिं सुसमाहिएहिं । अरक्सिओ जाइपह उवेइ, सुरक्सिओ मव्वदूहाण मुच्चड ॥ १६ ॥ त्ति वेमि || इअ विवित्तचरिआ बीआ चूला समत्ता ॥ ॥ इअ दसवेआलिअ सुत्त समत्त ॥

॥ श्री नन्दीसूत्र मूलपाठे. ॥ इति । २ ३ ४ ६ ७ ८ ९ , - सेल-घण, कुडग, चालणि, परिपूर्णग, हम महिम, मेसे य, ममग, जलूग, विराली जाहग, गो, मेरी आमीरी ॥ ५१ ॥ "सा समासओ तिविहा पन्नत्ता तजहा जाणिया, अनाणिया, दुबिगड्डा" जाणिया जहा खीर- मिव, जहा हसा जे घुट्टन्ति इह गुरगुण समिद्धा दोसे य विवजति त जाणम् जाणिय परिम ॥५२।। अजाणिया जहा-जा होड पगडमहुरा मियछावय सीह कुक्कुडय भूआ । रयणमिव असठविया । अजाणिया साभवे परिसा ॥ ५३ ।। दुढ़ियड्डा जह-नय क्त्थइ निम्माओ न य पुच्छड़ परिभवम्म दोसेण । वस्थिववायपुण्णो फुट्टइ गामिल्लयवियड्डो दुवियड्ढो ।। ५४ ॥ (सूत्र) नाण पञ्चविह पन्नत, वजहा-आभिणि वोहियनाण सुयनाण, ओहिनाण, मणपजवनाण, केवलनाण ॥ १ ॥ त समासओ दुविह पण्णत, तजहा-पञ्चक्ख च परोक्ख च ॥ सू० २॥ से कि त पञ्चक्स २ पञ्चक्ख दुविहप पत्त, तजहा इदियपञ्चक्स । नोइदियपञ्चक्स च ॥ सू० ३ ॥ से कि त इदिय पच्चक्ख ? इदिय- पञ्चक्स पञ्चविह पण्णन, तजहा-सो इदियपञ्चक्ख । चरिंसदिय पञ्चक्स । पाणिदिय पञ्चक्स । जिभिदिय पञ्चक्स । फार्मिदिय पञ्चक्स । सेत इदियपचक्ख ॥ सू० ४ ॥ से कि त नोडदियप सक्ख ? नोडदियपञ्चक्स तिविह पण्णत्त तजहा-ओहिनाण पचक्ख । मणपज्जवनाण पञ्चक्स । केवलनाण पञ्चक्स ॥५॥ से कि त ओहिनाण पञ्चक्स? ओहिनाण पचक्स दुरिह पण्णत्त, तजहा-मनपञ्चदयच सा ओयममिय च ॥ ६॥ से कि त भरपञ्चाय ? भवपचय दुण्ह, तनहा- देवाणय नेरइयाणय ॥ ७ ॥ से किं त खा ओरसमिय ? स्वा ओरसमय दुण्ह, तजहा-मणूमाण य पदिय तिरिक्स जोणियाण य । को हेऊ साओरमिय १ साओपममिय तयाररणि जाण कम्माण उदिण्णाण ग्बएण अणुदिण्णाण उपसमेण ओहिनाण गमुप्पजड ॥ सू० ८॥ अहा गुण- पडियनस्म अणगारम्म ओहिनाण समुप्पञ्जड त समासओ छविह पण्णत्त, तजहा- -आणुगामिय, अणाणुगामिय, बड्डमाणय, हीयमाणय, पडिवाइग, अपडिवाइस ॥६॥ से कि त आणुगामिय आणुगामिग ओहिनाण दुविह पण्णत्त, तजहा-अतगग च मझगग च । मे कि त अतगा? अतगय तिविह पण्णत्त तनहा पुरओ अतगय? मग्गओ अतगय। पासओ अतगय से कि त पुग्ओ अतगय? पुरओ अतगय-से नहा नामए केइ पुरिसे उपना चइलिय वा अराय या मणि या पइन वा जोइ वा पुरओ काउ पणुल्लमाणे २ ग डेना, म त पुरओ अतगय । मे कित मग्गो अतगय ' मग्गओ अतगय से जहानामए के पुरिसे उक्त पा चदलिय वा अलाय वा मणि या पदन वा जोइ वा मग्गओ काउ अणुलड्डेमाणे २ गच्छिजा, मे त अतगय । मे रित पामओ अतगय ? पामओ अतगय सेजहानामए कड पुरिम उच्च वा चइलिय वा अलाय चामणि या पईन वा जोइ वा पासओ माउ परिसड्ढे माणे २ गाउना, म त पामओ अतगय से त जत- गप । म किंत मझगय? मझगय से जहा नामए कह पुरमे उस वा चट्टलिय वा अलाय वा . २ ३ ६ (१०२) श्रीजेनसिद्धान्त-खाध्यायमाला ससि पुप्फदत सीयल सिजस वासुपूज च ॥ २०॥ विमल मणत य धम्म मन्ति कुथु अर च मल्लिं च ॥ मुनिसुवय नमिनेमि पास तह बद्धमाण च ॥ २१ ॥ पढमस्थि इदभूड बीए पुणहोइ अग्गिभू इति ॥ तईए य पाउभूइ तओ वियत्ते सुहम्मेय ॥ २२ ॥ मडिअ मोरिय पुत्ते अकपिऐ चेव अयल भायाय॥ मे यज्जेय पहासेय गणहरा हुति वीरस्स ।। २३ ।। नियुह पह सासणय जयइ सया सह भाव देसणय॥ कु समय मय नासणय जिणिदवर वीर सासणय ||२|| सुहम्म अग्गिवेमाण जब नाम च कासव पभव ।। कचायण वदे वच्छ सिजभर तहा ॥ २५ ॥ जसमद तुगिय वदे सभ्य चेव माढर ॥ भद्दबाहु च पाइन्न थूलभ६ च गोयम ॥ २६ ॥ ऐलावचसगोत्त वदामि महागिरि मुहत्थि च ॥ तत्तो कोसियगोत्त बहुलस्स सरिवय वन्दे ॥ २७ ॥ हारिय गुत्त साइ च वदिमो हारिय च सामञ्ज ।। वन्दे कोसिय गोत सडिल्ल अन्न जीयधर ।। २८ ॥ तिममुद्दखायकित्तिं दीव समुद्देसु गहिय पेयाल ।। वदे अञ्ज ममुद्द अक्खुभिय समुद्दगमीर ।। २९ ।। भणग करग झरग पभावग पाणदमण गुणाण ॥ वदामि अज मगु सुय सागर पारग धीर ॥३०॥ वदामि अज धम्म तत्तो वदे य भद्द गुत्त च ॥ तत्तोय अञ्ज वर तर नियम गुणेहिं वइर सम । ३१ ॥ वदामि अन्न रक्सिय खमणे रक्खिय चारित्त सबस्से । रयण करडगभूओ अणुओगो जेहिं ॥ ३२ ॥ नाणम्मि दसण म्मिय तव विगए णिच काल मुज्जुत्त ॥ अन्ज नदिलसमण सिरमा वद पसन्नमण ॥ ३३ ॥ बड्डउ पायगासो नलचसो अज नागहत्याण ।। नागरण करण भगिय कम्मपयटी पहाणाण ॥३०॥ जचजण वाउ समप्यहाण मुद्दिय कुनलय निहाण ॥ बड्डउ वायगरसो रउदनक्खत्त नामाण ॥३॥ अयलपुरा णिक्सते कालियसुय आणुओगिए वीर ।। बभद्दीगसीहे वायगपय मुत्तम पत्ते । ३६।। जेमि इमो अणु ओगो पयरइ अन्नाविअड्डढभरहम्मि ॥ बहु नयर निग्गय जसे ते वद सदिलाय रिए ॥ ३७॥ तत्तो हिमवन्त महत विक्कमे धिड परक्कम मणते ।। सम्झाय मणतधरे हिमवत वदि मो सिरसा ॥ ३८ ॥ कालिय सुय अणु ओगम धारए धारए य पुष्माण ॥ हिमवत खमा समणे वदे णागज्जुणायरिये ॥ ३९ ॥ मिउमद्दर सपन्ने आणुपुधि वायगत्तण पत्ते । ओहसुय समायारे नाजुण वायए वद ॥ ४० ॥ गोविंदाण पि नमो अणुओगे विउल धारिणि दाण ।। णिच्च खति दयाण पस्यणे दुल्लभि दाण ॥ ४६ ॥ तत्तो य भूयदिन्न निच्च तर सजमे अनिविण्ण ।। पडिय जण मामण्ण बदामो सजम विहिष्णु ॥ ४२ ॥ रकणगतविय चपग विमउलवर कमल गाभ मरिवन्ने । भविय जणहिययदइए दयागुण निसारए धीरे॥४३॥ अड्ड भरहप्पहाणे बहुविह सज्झाय सुमुणिय पहायो । अणुओगिय पर वम नाइल कुल बसनदिकरे ॥४४॥ भूगहियअपगम्भे वदह भूयदिन्न मायरिए || भवभय गुच्छेय कर सीस नागज्जुण रिसीण ॥४५॥ सुमुणिय निचा निच सुमुणिय सुत्तस्य धारय पदे ।। मन्मायुम्भारणया तत्य लोहिचणामाण ॥ ४६ ॥ अथ महत्थ क्साणिं सुममण नक्साण कहण निवाणि । पयदए महुरवाणि पर्यओ पणमामि दूसगर्णि ॥ ४० ॥ तव नियम सच सनम निगपन्ना सति मद्दवरयाण ॥ सील गुणगद्दियाण अणुओग जुगप्पहाणाण ।। ४८॥ मुकुमाल कोमल तले तेसिं पणमामि लक्षण पसत्य पाए पात्रयणीण पडिच्छ सय एहि पणि वइए ॥ ४९ । जे अन भगवते कालिय मुय जाणु ओगिए धीरे ।। ते पणमिण सिरमा नाणस्स परूरण वोच्छा ।। ५०॥

॥ श्री नन्दीसूत्र मूलपाठे ॥ -- mr- इति । २ ३ ४ ६ ८ ९ 1 7 ? सेल-घण, कुडग, चालणि, परिपूर्णग, हम महिम, मेसे य, ममग, जलूग, विराली-जाहग, गो, मेरी आमीरी ॥ ५१ ॥ "सा समासओ तिविहा पन्नत्ता तजहा जाणिया, अनाणिया, दुधियड्डा" जाणिया जहा खीर- मिव, जहा हसा जे घुद्दन्ति इह गुरुगुण समिद्धा दोसे य विरजति त जाणस जाणिय परिस ॥५२॥ अजाणिया जहा-जा होड पगडमहुरा मियछावय सीह कुक्कुडय भूआ । स्यणमिव असठविया । अजाणिया साभवे परिसा ॥ ५३ ॥ दुवियड्डा जह-नय कथइ निम्माओ न य पुच्छइ परिभवम्स दोसेण । वत्यिवायपुण्णो फुट्टइ गामिल्लयवियड्डो दुधियड्डो । ५४ ॥ (सूत्र) नाण पश्चविह पन्नत, तजहा-आभिणि बोहियनाण सुयनाण, ओहिनाण, मणपजानाण, केवलनाण ॥१॥ त समासओ दुविह पण्णत, तजहा-पचक्ख च परोक्ख च ।। सू०२॥ से कि त पञ्चक्ख पञ्चक्स दुविहप- पणच, तजहा इदियपञ्चक्स । नोइदियपच्चक्ख च ॥ सू० ३ ॥ से कि त इदिय पचक्स' इदिय- पञ्चक्स पश्चविह पण्णत्त, तजहा-सो इदियपञ्चक्ख । चरिसदिय पञ्चक्स । पाणिदिय पचक्ख । जिभिदिय पञ्चक्स ! फार्मिदिय पञ्चक्ख । सेत इदियपचक्ख ॥ सू० ४ ॥ से कि त नोडदियप धक्स नोडदियपञ्चक्स तिविह पण्णत्त तजहा-ओहिनाण पञ्चक्स । मणपज्जवनाण पचक्स । केवलनाण पञ्चक्ख ॥५॥ से कि त ओहिनाण पञ्चक्स ? ओहिनाण पञ्चक्ख दुनिह पण्णच, तजहा-भापचयच सा ओवसमिय च ॥ ६॥ से कि त भरपचइय ? भरपञ्चइय दुण्ड, तजहा- देवाणय नेरइयाणय ॥७॥ से कि त सा ओवममिय ? स्वा ओपसमय दुण्ह, तजहा-मणूमाण य पचेदिय तिरिक्स जोणियाण य । को हऊ साओनर्मामय ? खाओनसमिय तयाररणि जाण सम्माण उदिण्णाण सएण अणुदिण्णाण उपसमेण ओहिनाण गमुप्पञ्जड ।। सू०८॥ अहवा गुण- पडियनस्म अणगारम्स ओहिनाण समुप्पजइ त समासओ छविह पण्णत्त, तजहा-आणुगामिय, अणाणुगामिय, बड्डमाणय, हीयमाणय, पडिवाइय, अपडिवाइग ॥ ६॥ से कि त आणुगामिग आणुगामिग ओहिनाण दुविह पण्णत्त, तजहा-अतगा च मज्झगरा च । से कि त अतगा? अतगय तिविह पण्णत्त तजहा पुरओ अतगय? मग्गो अतगय। पासओ अतगय से रित पुग्ओ अतगय? पुरओ अतगय-से जहा नामए केड पुरिसे उश्या चड्डलिय ना अाय वा मणि या पइस पा जोइ वा पुरओ काउ पणुल्लेमाणे २ गरेन्ना, म त पुरओ अतगय । मे कि त मग्गो अतगय? मग्गओ अतगय से नहानामए के पुरिसे उक्क चा चलिय वा अलाय वा मणिं या पइव या जोइ वा मग्गओ काउ अणुलड्डेमाणे २ गडिजा, मे त अतगय । मे मित पामओ अतगय ? पामओ अतगय से नहानामए का पुरिम उक्त वा चलिय वा अलाय वा मणि चा पइन वा जोइ वा पामओ राउ परिसड्ढे माणे २ गउिन्ना, मे त पापओ अतगय से त अत- गय । से क्ति मज्झगय? मझगय से जहा नामए कह पुरमे उक्र या चदरिय या अलाय वा , २ ३ ४ ५ ६ (१०४) श्रीजेनसिदान्त-खाण्यायमाला मणि वा पईव वा जोइ वा मत्थए काउ समुबह माणे २ गच्छिन्ना सेत मजयगय । अतगपस्स मझगयस्स य को पइविसेसो । पुरओ अतगएण ओहि नाणेण पुरओ चेत्र सखिजाणि वा असखे आणि वा जोयणाइ जाणइ पासइ मग्गो अतगएणं ओहिनाणेण मग्गओ चेव सखिआणि वा अस- खिजाणि या जोयणाइ जाणइ पासइ । पासओ अतगएण ओहिनाणेण पासओ चेव सखिजाणि वा असखिजाणि वा जोयणाइ जाणइ पासद | मझगएण ओहिनाणेणं सबओ समता सखिजआणि वा असखिन्नाणि या जोयणाइ जाणइ पासइ । से त आणुगामिय ओहिनाण ॥ १०॥ से किंत अणा- णुगामिय ओहिनाण अणाणु गामिय ओहिनाण से जहानामए के पुरिसे एग महत जोइटाण काउ तस्सेन जोइट्ठाणस्स परिपर तेहिं परिपरतेहि, परिघोले माणे परिघोलेमाणे तमेव जोइट्ठाण पासइ, अन्नत्यगए न जाणइ न पासइ एवामेव अणाणुगामिय ओहिनाण जत्थेत्र समुष्पन्नइ तत्थेव सखे बाणि वा असखेज़ाणि वा सयद्धाणि वा असपद्धाणि वा जोयणाइ जाणइ पासइ, 'अन्नत्थगएण पासइ, से त अणाणुगामिय ओहिनाण ॥ ११ ॥ से कि त वड्डमाणय ओहिनाण ? बढमाणय ओहिनाण पमस्थेसु अज्झवसायट्ठाणेसु वड्डमाणस्स वड्डमाण चरित्तस्स । विसुज्झमाणस्स विमुज्झ- माण चरित्तस्स । सबओ समता ओहि वड्डइ-- जायइआ तिसमयाहारगस्म सहुमस्स पणगजीवस्स ॥ ओगाहणा जहन्ना ओहीखित्त जहन्न तु ॥ ५५ ॥ सब बहु अगणि जीपा निरतर अत्तिय भरिजंसु ॥ खित्त सबदिसाग परमोही खेत्तनि दिवो । ५६ ।' अगुलमावलियाण भाग मसविन दोसु सखिजा । अगुलमावलियतो आवलिया अगुल पुहुत्त ।। ५७ ॥ हत्थम्मि मुहुत्ततो, दिवसतो गाउयम्मि बोद्धव्यो । जोयण दिवमपुहुत्त, पक्खतो पन्नवीसाओ ॥ ५८ ॥ भरहम्मि अद्धमासो, जम्बुद्दीनम्मि साहिआ मासा ॥ वास च मणुय लोए, वासपुहुत्त च रुयगम्मि ॥५९॥ सखिजम्मि उ काले, दीपममुद्दावि हुति सखिजा।। कालम्मि असखिज्जे, दीपसमुद्दा उ भइयन्या ।। ६० ॥ काले चउण्हवुड्डी, कालो भइयव्वु खित बुड्डीए । वुड्डीए परपजव, भइयत्वा सित्तकाला उ ॥ ६१ ॥ सुहुमो य होइ कालो, तत्तो मुहुम- यर हयइ खित्त अगुल सेढी मित्ते, ओसप्पिणिओ असखिज्जा ।। ६२ ॥ से त्त वड्डमाणय ओहिनाण सू ॥ १२॥ से किंत हीयमाणय ओहिनाण ? हीयमाणय ओहिनाण अप्पमत्थेहिं अज्झवसायट्ठा पोहिं वड्डमाणस्स वड्डमाणचरित्तस्स सकिलिस्स माणस्म सकिलिस्समाणचरित्तस्स सबओ समता ओही परिहायइ से त्त हीयमाणय ओहिनाण ॥ १३ ॥ से कि त पडियार ओहिनाण ? पडिवाइ ओहिनाण जहण्णेण अगुलम्स अससिजय भाग या सखिजय भाग वा बालग्ग वा वालग्ग पुहत्त या लिंक्स या लिक्खपुहुत्त वा, जूय वा जूयपुहुत्त वा, जर वा जव पुहृत्त वा । अगुल वा अगुल पुहुत्त वा । पाय वा पायपहुत्त वा । विहत्थि वा विहत्थि पुहुत्त वा । रयणि वा रयणि पुहुत्त वा। कुच्छि कुच्छिपुहुत्त या, धणु चा धणुपहुत वा । गाउअ वा गाउयपुहुत्त वा । जोयण वा जोयण पुहुत्त वा । जोअणसय वा जोयणसय पुडुत्त वा जोयण महस्स वा जो यणसहस्म पुहुत्त चा । जो यणलक्स का जोपणलक्प पुद्दुत्त वा ! जोयणकोडिं वा जोयणकोडाकोडि हुत्त वा। जोयणकोडा- कोडिं या जोयणकोडाकोडि पुद्दुत्व वा । [जो अणसखिन्न या जो अणसखिन पुहुत्त वा जो अण , ॥ श्री नन्दीसूत्र मूलपाठ ॥ अमखेजरा जो अणअसखेजपुहुत्या । ] उक्कोसेण लोग वा पासि ताण पडिवहजा । स त पडिवाड ओहिनाण ॥ १४ ॥ से किं त अपडिवाइ ओहिनाण ! अपडिगाड ओहिनाणजेण अलोगस्म एग- मवि आगामपण्स जाणइ पासइ तेण पर अपडिनाइ ओहिनाण । से त्त अपडिवाइ ओहिनाण ॥१५॥ त समासओ चउन्विह पण्णत्त, तजहा दवओ, वित्तओ, कालओ, भाषओ। तस्थ दन्च ओ ण ओहि- नाणी जहन्नेण अणताइ रूविदयाइ जाणइ पामइ उक्वोसेण सहाइ रूविदयाइ जाणड पासइ सित्त ओण ओहिनाणी जहन्नेण अगुलम्म अससिन्जय भाग जाण पासड, उक्कोसेण अमखि माइ अलोगे लोगप्पमाण मित्ताइ खडाइ जाण- पामइ, कालओ ण ओहिनाणी जहन्नेण आवलियाए अससिजय भाग जाणइ पासड, उक्कोसेण अससिज्जाओ उस्मप्पिणीओ अवसप्पिणीओ अईय मणागय च काल जाणड, पासड भारओ ण ओहिनाणी जहन्नण अणते भावे जाणड पास', उक्केसेणवि अणत भावे जाण पासह । सत्र भाषाण मणत भाग भावे जाणइ पासइ ।। १६ ॥ ओही भरपञ्चडओ गुणपच्च इओ य गणिओ दुविहो । तस्स य बहू विगप्पा द वे खित्ते य कालेय । नेडियदेवतित्थकग य ओहिस्सऽचाहिरा हुति । पासति सव्यओ सलु सेमा देसेण पासति । से त्त ओहिनाणपञ्चक्ष से कि त मणपज्जननाण ? मणपज्नानाणे ण भते ! कि मणुम्साण उप्पज्जड अमणुस्माण ? गोयमा! मणुस्साण नो अमणुस्साण० १ जग्मणुस्माण कि समुच्छिममणुस्माण गम्भवतिय मणुस्साण ? गोयमा ? नोसमुन्छिममणुस्साण उपाइ गम्भववतियमणुम्माण । जइग भवक्वतियमणुस्साण किं कम्मभूमिय गन्भवतिय मणुस्साण, अम्मभूमिय गन्मनकतिय मणुस्साण, अन्तरदीनगगम्भव- कतिय मगुस्साण, गोयमा ' सम्मभूमिय ग भकतियमणुस्साण नो अम्मभूमिय गन्भरकतिय- मणुस्याण, नो अन्तरदाग गम्भ ववतियमणुस्साण जड कम्मभूमियगम्भवकतियमणुस्साण, कि ससिञ्जयासाउयकम्मभूमिय गम्भवक्कतियमणुस्साण असखिजवासाउयम्मभूमिय गम्भवकतिय मणु स्माण ' गोयमा ? ससज्जनामाउय कम्मभूमिय गन्भपक्वतिय मणुस्साण, नो अमखेज्न गासाउय कम्मभूमिय मणुस्साण। जइ सखेज वामाउय कम्मभूमिय गम्भवतिय मणुस्साण, कि पजत्तग ससे जयासाउययम्मभूमिय गम्भवतिय मणुम्माण,अपञ्जनग सखेन वासाउय कम्मभूमिय गम्भकतिय मणुस्माण ? गोयमा! पजत्तम मखेज नामाउय कम्मभूमिय गम्भवतिय मणुम्माण,नो अपजत्तग सखेज वामाउय क्म्मभूमिय गन्भरकतिय मणुम्माण । जइ पन्जत्तग ससेज पासाउय सम्मभू मिय गम्भवतिय मणुस्माण किं सम्मदिहि पज्नत्तग मखेज्ज पासाउय कम्मभूमिय गम्भनक तिय मणुस्साण, मिन्छदिट्टि पज्जत्तग मसेज्नासाउय कम्मभूमिय ग भरतिय मणुस्माण, स म्मामिच्छदिट्ठि पज्जत्तग मखेन वामाग्य कम्मभूमिय गम्भयकतिय मणुस्माण ? गोयमा! मम्म दिहि पन्नत्तग ससेज्नानामाउय फम्मभूमिय गभरतिय मणुस्माण नो मिच्छद्दिट्टि पज्जत्ता सरोज्न पामाउय सम्मभूमिय गन्भनकतिय मणुस्माण, नो मम्मामि उद्दिष्टि पनत्तग मपेन चामाउय सम्मभूमिय ग भवतिय मणुम्माण ज' मम्मदिद्विपनत्तग मगेन नामाउय सम्मभृ मिय गम्भवतिय मणुस्माण किं मनय मम्मदिहि पज्नत्तम मसेज्न यामाग्य क्म्मभूमिय ग म ववतिय मणुस्माण, असनय मम्मदिट्टि पज्जत्तग मसज्न नामाउय कम्मभूमिय गन्मयकतिय मगुस्साण । मनया सनय मम्मदिट्टि पज्जत्तग ममेन नामाउय कम्मभूमिय गभवपतिय मणु श्रीजेनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला www vum स्साण ? गोयमा ' सनय सम्मद्दिष्टि पज्जत्तग ससेज्न वामाउय कम्मभूमिय ग भवकतिय मणु स्साण, नो असजय सम्मदिट्टि पज्नत्तग सखेज्ज नामाउय कम्मभूमिय गम्भवकतिय मणुस्माण । नो सजयास नय सम्मदिहि पज्जत्तग सखेज्जनासाउय कम्मभूमिय गम्भवक्कतिय मणुम्माण । जइ सजय सम्मद्दिष्टि पज्नत्तग सखेज्ज नामाउय कम्मभूरिय गम्भववतिय मणुस्माण कि पमत्त सनय सम्मदिट्टि पज्जत्तग सखेज मासाउय कम्मभूमिय गब्भवतिय मणुस्साण, अपमत्त सनय सम्मद्दिष्टि पज्जत्तग मसेज्ज पामाउय कम्मभूमिय गब्भवतिय मणुस्साण ? गोयमा । अपमत्तमनय सम्मद्दिट्ठि पज्जत्तग ससेज्ज वामाउय कम्मभूमिय गम्भवतिय मणुस्माण, नो पमत्त सञ्जय मम्मदिति पज्जत्तग सखेज्न वासाउय कम्मभूमिय गम्भवतिय मणुस्माण । ज- अपमत्त मनय मम्मद्दिष्टि पज्नत्तग मखेज वामाउय कम्मभूमिय गम्भवतिय मणुस्साण,कि इड्डीपत्त अपमत्त मनय मम्मदिद्वि पज्नत्तम ससेज्न बासाउय सम्मभमिय गभरतिय मणुम्साण अणिड्डीपत्त अपमत्त सनय सम्म- द्दिष्टि पज्जत्तग सखेज्न वासाउय कम्मभूमिय गम्भवक्कतिय मणुस्साण ? गोयमा ! इड्डीपत्तअपमत्त सजय मम्मद्दिहि पज्नत्तग ससेज्न वासाउय कम्मभूमिय गम्भवकतिय मणुस्माण, नो अणिड्डीपत्त अपमत्तमजयसम्मद्दिट्टि पज्जत्तग ससेज्ज यासाउय क्म्मभूमिय मणुस्साण । मणपज्जपनाण सम् प्पज्नड ।। सू० ॥ १०॥ त च दुचिह उप्पज्नइ तजहा उज्जुमड य विउमइ य त समामओ चउबिह पन्नत्त तना-दवओ, सित्तो, कालओ, भारओ। तत्थ दवओण उज्जुमइ अणते अणत पएसिए सध जाण' पामइ, त चेर विउलमइ जन्महियतराए पिउलताप निमुद्धतराण नितिमिर तराए जाण- पासइ । सित्तओण उज्जुमइ यजहन्नेण अगुलस्स अससेज्जय भाग उकोसण अहे जार इमीसे रयणप्पभाग पुढवीए उपरिमहडिल्ले खुड्डग पयर उड्ड जान जोइसस्म उवरिमतले, तिरिय जान अन्तोमणुस्णुम्मसित्ते अड्डाइज्नेसु दीपसमुद्देसु पन्नरस्ससु कम्मभूमिसु तीसाए अम्म भूमिसु छपन्नाए अन्तरदीपगेसु सन्निपचदियाण पजत्तयाण मणोगए भाव जाण- पाम त चैव विउलमई अड्डाईज्जेहिमगुलेहिं ज-भहियत्तर विउलतर विसुद्धतर वितिमिरतराग सेत्त जाणइ पासइ । कालओ ण उज्जुमइ जहन्नेण पलिओवमस्म अससिज्जयभाग उक्कोसेण वि पलिओवमस्स असखि ज्जयभाग अतीयमणागय वा काल जाणड पास । त चेत्र विउरमइ अन्महियतराग विउलतराग विसुद्धतराग वितिमिरतराग जाणइ पामइ । भारओ ण उज्जुमइ अणत भाव जाणइ पास, सब भाराण अणतभाग जाणइ पाम । त चेर विउरमद अब्भहियतगग विउलतराग विसुद्धतगग वि तिमिरतराग जाणइ पासइ । मणपज्नानाण पुण जणमणपरिचितियत्यपागडण। माणुमखितनिबद्ध गुणपञ्चन्य चरित्तरओ ॥ ६ ॥ से त मणपउनानाण सू० ॥ १८ ॥ से कि त कपलनाण केवलनाण दुविह पन्नत्त, तजहा-भवत्थकवलनाण च सिद्धकालनाण च । से कि त भत्कनर नाण ? भरत्यकपलनाण टुविह पण्णत, तनहा-सजोगिभनत्थकालनाण च अनोगिमवत्थकालनाण च । से कि त मनोगिभरत्यकेलनाण' सनोगिभवत्थकालनाण दुविह पण्णत्त, तनहा-पढम समयसनोगिभरत्थ, केरलनाण च अपढम समय सजोगिमपत्थरलनाण च, अहवा, चरमसमयस- जोगिभनत्योलनाण च अचरमसमयसजोगिभरत्यकेलनाण च, से त्त सनोगिभनत्थकेवलनाण । से कि त अनोगिमात्यल नाण? अजोगिमगत्यलिनाण दुविह पनन, तजहा-पढमसयअजोगि- 7

,
"
|| श्री नन्दावन मूलपाठ ॥
(१०७)
भनत्यग्लनाण च अपढमममयअजोगिमात्थकेरलनाण च अहना चरमसमयअजोगिभरत्यकेरल
नाण च जचरमममयअनोगिभवत्थकेवलनाण च, से च अजोगिभवत्यफेसनाण, से त भत्थके-
वलनाण ।। सू० ॥ १९ ॥ से कि त सिद्धकालनाण? सिद्धकेलनाण दुविह पण्णत्त, तजहा- अण
सरमिद्ध केवल नाण च परपरसिद्धकेलनाण च ।। सू० ।। २० ॥ से कि त अणतरसिद्धरेलनाण ?
अणतरसिद्धस्वलनाण पन्नरमविह पण्णा, तजहा-तित्यसिद्धा १, अतित्थसिद्धा २, तित्ययरसिद्धा
३, अतित्ययरसिद्धा४ , मयनद्धसिद्धा ५, पचेयबुद्धसिद्वा ६, उद्धयोहियसिद्धा, ७ इत्यिलिंगसिद्धा
८, पुरिमलिंगसिद्धा ५, नपुमगलिंगसिद्धा १०, सलिंगसिद्धा १५, अन्नलिंगसिद्धा १२, गिहिलिंग
सिद्धा १३, एगसिद्धा १९ अणेगसिद्धा १५, से च अणतरसिद्धकेलनाण ॥ सू० ॥ २१ ।। म किं
त परपरमिद्धकेलनाण' परपरसिद्ध केलनाण अणेगविह पण्णन, तजहा-अपढमममयमिद्धा, दुम
मयसिद्धा, तिममयसिद्धा, चउममयसिद्धा, जार दमसमयसिद्धा, ससिजममयसिद्धा, अससिनम
मयसिद्धा, जणतसमयसिद्धा, से परपरसिद्ध केवलनाण, से सिद्धकेलनाण ॥ त ममामजो
चउबिह पण्णा, तजहा -दवओ, सित्तओ, कालओ, भानओ । त थ दवो ण केलनाणी सबद-
वाइ जाण- पासड | सित्तओ ण केवलनाणी सब पिच जाणड पासइ। कालोण केलनाणी मन्च
काल जाणड पासइ । भाषजो ण केलनाणी मच्चे भावे जाणड पासद । जह सचदव्यपरिणाम,
भावरिष्णत्तिारणमणत । सासय मप्पडिवाइ, प्रगविह केवल नाण ॥६६॥ सू०॥ २२ ॥ केव-
लनाणेणऽत्ये नाउ ज तत्य पण्णपणजोगे । त भाम- ति ययरो, पढजोगसुय हबर सेस ॥ ६७ ॥
सेम केलनाण, म / नोडटियपचक्स म च पञ्चसनाण || म०॥ २३ ॥ से सिंत परोस्स
नाण ? परोक्पनाण दुविह पन्नन, तना--त्राभिणियोहियनाणपरोक्स च सुयनाण परोक्स च,
जत्य आभिपिघोहियनाण तत्थ सुयनाण, जय सुयनाण तत्यामिणिनोहियनाण, टोऽवि प्रयाइ
अण्णमण्णमणगयाइ तहवि पण इत्य आयारया नाणच पण्णश्यति-अभिनिनुज्झइति आभिणिनोहि-
यनाण, सुणेत्ति सुय,मइपुन्च जण सुय, न मइ सुयपुधिया ॥ सू० ॥ 07 || अपिसेंसिया मई,
मइनाण च मडअन्नाण च । विरोसिया सम्म िहिस्स मई मन्नाण मिन्छहिद्विस्म म माणनाण ।
अपिसेसिय सुय सुयनाण च मृयअन्नाण च । निमेमिय सुय सम्मदिविस्म सुय सुयनाण, मिछ-
दिट्टिम्म सुय सुयअनाण ॥ सू० २५॥ से कि त नाभिणियोहियनाण' आभिणियोहियनाण
दुविह पण्णन, तनहा-सुयनिस्मिय च, अस्सुयनिस्मिय च। सेमित जस्मयनिस्मिय १ जम्मुपनि
स्सिय चउचिह पण्णत, तनहा-उत्पत्तिया १ वणडया २, कम्मया ३, परिणामिया ४ । गुद्धि
चउबिहा उत्ता पचमा नोपरम्भः ॥ ६८ ॥ ५० ॥ २६ ॥ पुवादिट्ठमस्यमबइय, तक्राणवि
सुद्धगहियस्था । अव्याहयफलनोगा बुद्धि पत्तिया नाम ॥ ६० ॥ भरहमिल • पणिय • स्कम
३ सुष्टग ४ पड सरड - काय ७ उचार ८ । गय ९ घयण १० गोर १० गमे (२, मुहग
१. मगि १४ त्यि १५ पइ १६ पुते ७ ॥ ७० ॥ भरह १ मिल • मिंद ३ उस ४, तिल
५ चालुप ६ हत्यि ७ अगड ८ वणसड ९। पायम .. अडया ११ पत्ते १२, माहिला १३
पच पिअरो य १४ ॥ ७१ ॥ महमित्य १८ मुद्दि १० अफ २०, य नाणए २१ भिम्बु २०
चेडगनिहाणे २३ सिक्खा २४ य अस्थमत्य २५, इत्थी य मह २६ मयमहम्मे २७ ॥ ७२ ॥

. . श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला भरनित्थरणसमत्था, तिग्गसुत्तत्थंगहियपेयाला । उभओलोगफलवई, विणयसमुत्था हबर बुद्धी ।।७३ ॥ निमित्त १ अत्थसत्थे ये २ लेहे ३ गणिए य कूब ५ असे ६५ । गद्दम ७ लक्षण ८ गठी ९, अगए १० रहिए ११ ये गणिया १२ य ।। ७४ ॥ सीया साडी दीह, च तण अवस अय च कुचस्म १२ निव्बोदए १४ य गोणे, घोडगपडण च रुक्खाओ १५॥ ७५ ॥ उबओग- दिवसारा, कम्मपसगपरिघोलणविसाला । साहुकारफलवर्ड, कम्मसमुत्था हबइ बुद्धी ॥ ७६ ॥ हेर णिए १ करिसए २, कोलिय 3 डोवे ४ य मुत्ति ५ घय ६ पपए • तुनाए ८ पड्डइय ९ पूयह १० घड ११ चित्तकारे १२ य ।। ७७ ॥ अणुमाणहेउदितमाहिया वयविवागपरिणामा । हिय- निस्सेयसफलवई, बुद्धी परिणामिया नाम ॥ ७८ ॥ अभए १ सिटि कुमारे ३, देवी ४ उदिओदए हाइ राया ५ साहू य नदिसेणे ६, धणदत्ते ७ सावग / अमचे ९ ॥ ७९ ॥ समए १० अमञ्च पुत्ते ११, चाणक्के १० चेन थूलभद्दे १३ या नासिकसुदेरिनद १४ वदर परिणामिया बुद्धी ८०॥ चलणाहण १६ आभडे १७, मणी १८ य सप्पे १९ य सम्गि २० थूभिंद २१ । परिणामियबु द्धीए, एवमाई उदाहरणा ।। ८१ ॥ सेत्त अस्सुयनिस्सिय । से कि त सुयनिस्सिय ? सुयनिस्सिय चउनिह पण्णत्त, तनहा-उग्गहै १ ईहा २ अवाओ ३ धारणा ४॥ सू० ॥ २६ ॥ से किं त उग्गहे ? दुविहे पण्णरो, तजहा-अ युग्गह य वनणुग्गह य, ॥ सू० ॥ २७ ॥ मे मित वजणुग्गहे ? वनणुग्गह चरब्धिहे पण्णत्ते सजहा-सोइदियवजणुग्गह, पाणिदियरजणग्गहे जिभिदियवजणुग्गह फासिंदिरयजणुग्गहे, से च वजणग्गह ॥ ७० ॥ ॥ २८ ॥ से किं त अत्युग्गहे १ अत्थुग्गहे छबिहे पण्णत्ते, तजहा-सोइदियअत्थुग्गहे, चक्सिदियअत्युग्गहे, थाणिदियअत्थुग्गहे, जिभिदियअत्युग्गहे, फासिंदियअत्थुग्गहे, नोडदियअत्थुग्गह ।। सू० ॥ ॥ २९ ॥ तस्स ण इमे एगडिया नाणाघोसा नाणापजणा पच नामधिज्जा भपति, तजहा- ओगेण्हया, उवधारणया, सवणया, अवलवणया, मेहा, से त उग्गह ॥ सू० ॥ ३० ॥ से कित ईहा? छधिहा पण्णत्ता, तजहा-सोइदियईहा, चम्पिदियईहा, पाणिदियईहा, जिभिदियईहा, फा- सिंदियईहा, नोइदियईहा, तीसेण इमे एगडिया नाणायोसा नाणा वजणा पच नामधिज्जा भवति, तजहा-आभोगणया, मग्गणया, गवेसणया, चिंता, वीमसा, से त ईहा ॥ सू० ॥ ३१ ॥ से कि त अवाए ? अवाए छविह पण्णते, तजहा-सोदियअवाए, चक्सिदियअवाए, पाणिदियमवाए जिभिदियअगाए, फासिंदियअवाए, नोइदियअगाए, तम्म ण इसे एगद्विया नाणाधोसा नाणारजपा पच नामधिन्ना भवन्ति, तजहा-आउट्टणया, पचाउट्टणया अगए, युद्धी, विण्णाणे, सेत अगाए ॥ सू० ३२ ॥ से कि त धारणा' धारणा छबिहा पण्णत्ता, तनहा-मोइदियधारणा, च किंसदियधारणा, घाणिदियधारणा, जिभिदियधारणा, फार्मिदियधारणा, नोइदियधारणा, तीसे ण इमे एगडिया नाणाघोसा नाणारजणा पच नामधिना भवति, तनहा धरणा, वारणा, ठरणा, पट्टा, को?, से त्त धारणा | सू० ॥ ३३ ॥ उग्गहे इक्कसमइए, अतोमुहुत्तिया इहा, अतोमुहुत्तिए अना ए, धारणा सखेज चा काल अससेज वा काल || सू० ॥ ३४ ॥ पव अट्ठावीमइविहस्म आमि णियोहियनाणस्स वनणुग्गहस्स पररण करिस्सामि पडिबोहगदिद्वतेण मल्लगदिद्वतण । से कित पडियोहगदिगुण' पडियोहगदिट्टतेणसे जहानामए कडू पुरिसे चि पुरिस सुत्त पडिकोहिला, , " णत . ॥ श्री नन्दीसूत्र मूलपाठ ॥ (१० अमुगा अमुगत्ति तत्य चोयगे पन्नवय एव पयासी-फि एगसमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति ? दुममयपविट्ठा पुग्गला गहणमागन्छति? जाब दससमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति ? सखिज्न- समयपविठ्ठा पुग्गला गहणमागच्छति', अससिऊ ममयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति ?, एव वयत चोयग पण्णपए एव क्यासी-नो एगसमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति, नो दुसमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति, जार नो दसममयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति, नो ससिनसमयप- विट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति, असखिज्नसमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति, से । पडिवोहग- दिट्ठतेण । से कि त मल्लगदिट्टतेण १ मल्लगदिट्टनेण मे जहानामए केइ पुरिसे आवागसीसाओ मल्लग गहाय तत्येग उदगनिंदु पक्से विज्ना, से नहे, अण्णेऽवि पक्सिचे सेऽपि नहे, एव पक्सि- प्पमाणेसु पक्विप्पमाणेसु होही से उदगविंदू जे ण त मल्लग रावेहि शि, होही मे उदगबिंदू, जे ण वसि मल्लगसि ठाहिति, होही से उदगविंद जै ण त मल्लग् भरिहित, होही से उद्गनिंदु, जे मल्लग पाहेहिति, एकामे पक्सिप्पमाणेहि पक्सिप्पमाणेहिं अणतेहिं पुग्गलेहि जाहे त वजण पूरिय होर, ताहहुति करेड नो चेन ण जाणड क वेम सद्दाइ ? तओ इह पनिमई, तओजाणई अ मुगे एम सद्दइ, तओ माय पविमइ तभी से उगय हाइ, तओ धारण परिसड, तओण धारह ससिजन या काल, असग्निज्न वा काल, से जहानामए के पुरसे अवच मद्द मणि ना, तेण सदोति उग्गहिए, नो चेर ण जाणड के वेस मदार, तओ ईह परिमइ तओ जाणड अमुगे एम मद्द, तओ अपाय पनिमइ, तओ से उनगय हवड, तओ धारण पविसह, तओ ण धारेड ससेज्ज वा काल अ ससेज ना काल । से जहानामए केड पुरिम अवच रून पासिज्जा तण रूपति उग्गहिए, नो चेव ण जाणइ के वेम म्पत्ति, तो इहपपिमह तो माण- अमुगे एम रूने, तो अपाय परिमड, तओ से उपगय हवा, तओ धारण परिमह, तओ ण धारेइ सखेज वा काल, अससेज ना कार । से जहानामए केहपुरिस अव्यत्त गघ अग्घाइजा तण गत्ति उग्गहिए, नो चेन ण आणइ के वेम गति, तओ ईह पविमह, तओ जाण- अमुगे एम गधे, तओ अगाय परिमा, तओ से उनगय हवड, तओ धारण पनिमड, तओ ण धारेह मसेन वा काल अमसेन वा साल । से जहानामए- केइ पुरिमे अन्यत्त रस आमाइला तण रमोत्ति उग्गहिए, नो र ण जाणइ के वेम रमत्ति, तओ ईह परिसड, तो जाणन अमुगे एस रसे, तो अबाय परिमा, तओ से उरमय हरड, तो धारण परिसर, तओ ण धारेद मसिज वा माल अमपिन वा काल । से जहानामए के पुरिने अध्यत्त पाम पडिमवेइत्रा तेण फासेत्ति उग्गहिए, नो चेपण जाण र वम कामओत्ति, तो ईह परिमइ, तओ जाण' अमुगे एम फामे, तो अाय परिमद, तओ से उहगय हार, तओ धारण पविसइ, तओ ण धारेड मखेन या पार अमसेन पा काल | से जहानामए के पुरिम अत्त मृमिण पामिजा तेण सुमिगेत्ति उग्गहिए नो चेत्र ण जाणटरे वम सुमिणेत्ति, तमोर परिमा, तओ जाणइ अमुगे एम मुमिणे, नगो अपाय परिमा, तओ मे गय हरत, नओ पारण परिमः तमो ण धान्ड मसेज्न वा कार अमन वा काल, मे त मल्हगरिदृरण म० ३८ ॥ त ममामओ चउब्बिद्द पण्णच तनहा रब्बी, सितो, शरओ, भारओ, तपओ ण आ भिणियोहियनाणी आएमेण मन्या दव्या जाण', न पाम । खेतोण आभिणियोहियनाणी -- , - , ११०० श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला मरनित्थरणसमस्था, तिवग्गसुत्तत्यंगहियपेयाला । उभओलोगफलवई, विणयसमुत्था हवइ बुद्धी ॥७३॥ निमित्त १ अस्थसत्थे ये २ लेहे ३ गणिए य कूल ५ अस्से ६ य । गद्दम ७ लक्षण ८ गठी ९, अगए १० रहिए ११ य गणिया १२ य ।। ७४ ॥ सीया साडी दीह, च तण अवस व्वय च कुचस्म १३ नियोदए १४ य गोणे, घोडगपडण च रक्खाओ १५ ॥ ७५ ।। उत्रओग- दिवसारा, कम्मपसगपरिघोलणनिसाला । साहुक्कारफेलबर्ड, कम्मसमुत्था हवइ बुद्धी ॥ ७६ ।। हर णिए १ करिसए २, कोलिय 3 डोवे ४ य मुत्ति ५ घय ६ पपए - तुनाए ८ वड्डइय ९ पूयड १० घड ११ चित्तकारे १२ य ॥ ७७ ॥ अणुमाणहेउदिद्वतमाहिया वयविवागपरिणामा । हिय- निस्सेयसफलपई, बुद्धी परिणामिया नाम ॥ ७८ ॥ अभए १ सिढि कुमारे ३, दवी ४ उदिओदए हवइ राया ५ साहू य नदिसेणे ६, धणदत्ते ७ सावग / अमचे ९॥ ७९ ॥ खमए १० अमञ्च- पुत्ते ११, चाणके १२ चेव थूलभद्दे १३ या नासिकेसुदरिनद १४ वइर परिणामिया बुद्धी 1८०॥ चलणाहण १६ आभडे १७, मणी १८ य सप्प १९ य खग्गि २० भिंद २१ । परिणामिययु द्धीए, एचमाई उदाहरणा ॥ ८१ ।। सेत्त अस्सुयनिस्मिय । से कि त सुयनिस्सिय ? सुयनिस्मिय 'चाबिह पण्णत्त, 'तनहा-उग्ग १ इहा - अवाओ ३ धारणा ४ ॥ सू० ॥ २६ ॥ से कित उग्गहे ? दुनिहे पण, तजहा-अ युग्गड य वजणुग्गह य, ॥ सू० ॥ २७ ॥ मे किं त वजणुग्गहे ? वजणुग्गह चरबिहे पण्णत्ते तजहा-सोडदियवजणुग्गह, घाणिदियनजणग्गह जिभिदियवजणग्गहे फासिंदिरमजणुग्गहे, से । वजणग्गह ॥ ३० ॥ ॥ २८ ॥ से किं त अत्थुग्गहे ? अत्थुग्गह छबिह पणते, तजहा-सोइदियअत्युग्गहे, चक्सिदियअत्युग्गह, घाणिदियअत्युग्गहे, जिभिदियअत्थुग्गहे, फासिंदियअत्थुग्गहे, नोहदियअत्युग्गहे ॥ सू० ।। ॥ २९ ॥ तस्स ण इमे एगढिया नाणाघोसा नाणानजणा पच नामधिजा भवति, तजहा- ओगेण्हया, उवधारणया, सवणया, अवलवणया, मेहा, से त उग्गहे ॥ मू० ॥ ३० ॥ से किं त ईहा? छबिहा पण्णत्ता, तजहा-सोडदियईहा, चक्सिदियइहा, घाणिदियईहा, जिभिदियइहा, फा सिंदियईहा, नोइदियईहा, तीसेण इमे एगट्ठिया नाणाघोसा नाणा बजणा पच नामधिजा भवति, तजहा-आभोगणया, मग्गणया, गवेसणया, चिंता, वीमसा, से त ईहा ।। सू० ॥ ३१ ॥ से कि त अवाए ? अवाए छविह पण्णत्ते, तजहा-सोइदियअवाए, चक्सिदियअवाए, धाणिनियमवाए जिभिदियअगाए, फासिदियअवाए, नोइदियअवाए, तस्म ण इमे एगट्टिया नाणाघोसा नाणावजणा पच नामधिज्ञा भवन्ति, तजहा-आउट्टणया, पचाउट्टणया, अमाण, बुद्धी, विण्णाणे, से त अाए ॥ सू० ३२ ।। से कि त धारणा ? धारणा छबिहा पण्णत्ता, तजहा-मोइदियधारणा, च सिदियधारणा, पाणिदियधारणा, जिभिदियधारणा, फापिदियधारणा, नोइदियधारणा, तीस ण इमे एगढिया नाणाघोमा नाणारजणा पच नामधिजा भवति, तजहा वरणा, धारणा, ठपणा, पइट्टा, कोटे, से च धारणा ।। सू० ।। ३३ ॥ उग्गह इक्कसमइए, अतोमुहुत्तिया इहा, अतोमुहुत्तिए अवा ए, धारणा सखेज वा काल असखेज वा काल ॥ सू० ॥ ३४ ॥ व अट्ठावीसइविहस्स आमि णियोहियनाणस्स वजणुग्गहस्म परूषण करिस्सामि पडियोहगदिढतेण मल्लगदिद्वतण । से कि त पडियोहगदिवण' पडियोहगदिट्टतेणसे जहानामए केइ पुरिसे कचि पुरिस सुत्त पडिमोहिला, . - . - . ॥ श्री नन्दीमत्र मूलपाठ ॥ (१११) ४ विवाहपण्णत्ती ५ नायाधम्मकहाओ ६ उवासगदसाओ ७ अतगडदसाओ अतगडढसाओ ८ अ गुत्तरोवाडयदमाओ ९ पण्डागरणाइ १० विवागमुयं ११ दिहिवाओ १२, इच्चेय दुवालसग गणिपिडग चोदसपुविस्म सम्मसुय, अभिण्णदसपुचिस्म सम्ममुय, तेण पर मिण्णेसु भयणा, से स मम्मसुय । सू० ॥ ४० ॥ मे किं त मिच्छासुग? मिच्छासुग ज इम अण्णाणिएहि मिच्छादि- ट्ठिएहिं मन्छटबुद्धिमडविगप्पिय, तजहा-मारह, रामायण, मीमासुरुक्ख, कोडिल्लग, सगड भदियाओ, सोड (घोडग) मुह, कप्पासिय, नागसुहुम, क्णगसचरी, वइसेसिंग, बुद्धवयण, तेरासिय, काविलिय, लोगायय, सद्वितत, माढर, पुराण, वागरण, भागनग, पागजली पुस्मदे- यय, लेह, गणिग, सउणरुय नाडयाइ, अहवा पाररिकलाओ, चत्वारि य या सगोवगा, एयाइ मिच्छदिद्विस्म मिन्उत्तपरिग्गहियाइ मिच्छासुय एयाइ चेव सम्मदिहिस्म सम्मत्त- परिग्गहियाड सम्मसुय, अहना मिच्छदिहिस्मवि ण्याइ चेव सम्मसुय, क्म्हा ? सम्मत्तहेउत्तणओ जम्हा ते मिन्छदिट्ठिया तेहिं चेन समरहिं चोइया समाणा केइ सपक्खदिहीओ चयति,से त्त मिच्छा मुय ।। सू० ॥ ४१ ।। से कि त माहय सपजनसिय, अणाहय अपज्जासिय च ? इच्चे य दुनालसग गणि पिडग वुच्छित्तिनयट्ठयाए सा प सपनासिय अच्छित्तिनयट्टयाए अणाइय अपनवसिय, त समामओ चउहि पण्णच, तनहा-दवओ, सित्तओ, पालओ, मारओ, तत्य दडओ ण सम्मसुय एग पुरिस पहुंच साइय सपज्जवसिय, बहव पुरिमे य पड़च अणाइय अपज्नासिय, सेत्तओ ण पच भरहाइ पचेरवयाइ पडुच्च साडय सपज्जनसिय, पच महाविदेहाइ पडच्च अणाइय अपज्नपसिय, पालओ ण उस्सप्पिणि ओमप्पिणि च पडुच्च माहय सपनासिय, नो उस्मप्पिणि नो ओसप्पिणि च पट्टच अणाइय अपज्जवसिय, भावओ ण जे जया जिणपन्नता मावा आघविज्नति, पण्णविज्नति, पाविज्नति, दसिज्नति, निदसिज्जति, उपदसिज्जति, ते तया भावे पडुच्च माहय मपज्नासिय सा ओरसमिय पुण भाव पट्टच्च अणाइय अपज्नासिय, अहमा भवमिद्धियस्स सुय माइय मपज्जासिय च, अभरसिद्धियस्म सुय अणाइय अपञ्जवसिय च, महागासपएमग्ग महागासपएमेहि अणतएणिय पज्नसक्यर निष्पन्नड, मवजीवाणपि य णअक्सरस्म अणतभागो,निन्चुग्धाडियो जड पुण सोऽपि आनरिआ तेण जीरो अनीवर पाविना,- "सुट्ठवि मेहममुगए, होइ पमा चदसूराण" से च साइय मपन्नवासिय, से त अणाइय अपजासिय ॥ सू० ॥ ४२ ॥ से कि त गमिय ? गमिग दिहिवाओ, से कि त अगमिय अगमिय गलिय सुय, से त गमिय, से च अगमिग । अमा त समामओ दुनिह पण्णच, तनहा-अगपचिट्ठ, अग याहिर च । से कि त अगाहिर ? अगनाहिर दुविद्य पण्णत्त, तजहा-आपस्मय च, आपम्मयररित्त च । से मि त आरस्मय ? आरम्मय छबिह पण्णा, तनहा-मामाइय, चम्चीम यओ, पदणय, पडिक्मण, काउस्मग्गो, पचल्याण, से च आवम्मय । से कि त आरस्सयपहरित ? आवस्मयपरित्त टुविह पण्णना, तनहा-कालिग च, उकालिय चासे किं त काल्यि २ अणेगरिह पण्णन, तनहा--मवेयालिग, सप्पियामप्पिग, चुहरप्पमुग, महारप्पसुग, उमान्य, रायपसेणिग, जीराभिगमो, पप्णपणा, महापण्णपणा, पमायप्पमाय, नदी, अणुओगटारा, दरिंदत्यो, नदल्येयारिय, चाचिन्मय, सूरपणाची, पोरि सिमण्डल, मण्ड-परमो, मिजाचरणनिणिन्छओ, गणिरिजा, झाणनिमत्ती, मरणरिमनी, आयनि .

. श्रीजेनसिद्धान्त-खान्यायमाला आएसेण सब खेत जाणइ न पासइ। कालोण आभिणिबोहियनाणी आपसेण सन्च काल आणा न पासइ । भावओ ण आभिणियोहियनाणी आएसेण सव्वे भावे जाणइ, न पासइ । उग्गह ईहाऽवाओ, य धारणा एव हुति चत्तारि । आमिणिबोहियनाणस्स भैयवस्थू समासेज ॥४२॥ * अत्याण उग्गहणम्मि उग्गहो वह वियालणे ईहा। ववसायम्मि अवाओ, घरण पुण-धारण चिति ॥ ८३ ॥ उग्गह इक्क समय, ईहावाया मुहुत्तमद्ध तु । कालमसख मख, च धारणा होई नायव्वा ॥ ८४॥ पुट्ट सुणेइ सद्द, रूव पुण पासइ अपुट्ट तु । गध रस च फास च बद्धपुट्ट विया गरे । ८५ ॥ भासासमसेढीओ, सद्द ज मुणइ मीसिय सुणइ । वीसेढी पुण सद, सुणेड नियमा पराधाए ॥ ८६ ॥ ईहा अपोह वीमसा, मग्गणा य गवसणा। सन्ना सई मई पन्ना, मन आमि णियोहिय ॥ ८७॥ से त्त आभिणियोहियनाणपरोक्ख, से त्त महनाण ॥ सू० ॥ ३६॥ से कि त मुयनाणपरो क्ख ? सुयनाणपरोक्स चोदसविह पण्णत्त तजहा-अक्खरसुय १ अणक्खरमुय २ सण्णिसुय ३ असण्णिसुय ४ सम्मसुय ५ मिच्छसुय ६ साइय ७ अणाइय ८ सपज्जवसिय ९ अपज्जवसिय १० गमिय ११ अगमिय १२ अगपविट्ठ १३ अणगपविट्ठ १४ ॥सू०३७॥ से किं त अक्खग्मयो अक्ख रसुय तिविह पण्णत्त तजहा-सन्नक्खर वजणक्सर, लद्धिअक्सर । से किं त सन्नक्खर ? सन्नक्खर अक्ग्वरस्स सठाणागिई, से त सनक्खर । से कि त वजणलक्खर ? वजणक्सरअक्सरस्स वजणा भिलावो, से त्त वजणक्सर । से किं त लद्धिअक्सर लद्धिअक्सर अक्खरलद्धियस्म लद्धिअक्खर ममुप्पजइ, तजहा-सोइदिय सद्धिअक्खर, चक्सिदिय लद्धिअक्सर, घाणिदिय लद्धिअक्खर, रस णिदिय लद्धिअक्खर, फार्सिदिय लद्धिअक्सर, नोइदिय लद्धिअक्सर, स त लद्धिअक्सर, से त्त अक्खरसुय ॥ से किं त अणक्खरसुय? अणक्ससुय अणेगविह पण्णत्त, तजहा-ऊससिय नीमसिय, निन्छूढ खासिय च छीय च । निस्सिघियमणुसार, अणक्सर छेलियाईय ॥ ८८ ।। से त अणक्सरसुय ।। सू० ३८ ॥ से कि त सण्णिसुय' सण्णिसुय तिविह पग्णन, तजहा-- कालिओवासेण, हेऊवएसेण, दिहिवाओवएसेण । से कि त कालिओवण्सेण? कालिओवएसेण जस्स ण अत्थि ईहा, अमोहो, मग्गणा गवेसणा, चिंता, वीमसा, से ण सण्णीति लब्भड । जस्सण नत्यि ईहा, अयोहो, मग्गणा, गवेसणा, चिंता, वीमता, से ण अमण्णीति लब्मइ, से च कालिओ चरसेण । से कि त हेऊनएसेण ? हेऊवएसेण जस्सण अस्थि अभिसधारणपुखिया करणसत्ती से ण सणीति लब्भइ । जस्स ण नत्थि अभिसधारणपुब्धिया करणसत्ती से ण असण्णीति लब्भइ, से न हेऊवएसेण । से कि त दिद्विवाओवएसेण? दिडिवाओवएसेण सणिमुयस्स सओवसमेण मण्णी लब्भइ, असण्णिसुयस्स सओवसमेण अमण्णी लन्भइ, से च दिविनाओवएसेण, से च सण्णिमय, से च असण्णिसुय ।। मृ० ॥ ३९ ॥ से कि त सम्मसुय' सम्मसुय ज इम अरहतेहिं भगवतहिं उप्पण्णनाणदसणधरेहिं तेलुकनिरिक्सयमहियप एहि तीयपडुप्पण्णमणागयजाणएहिं सध्यण्णूहि सव्वदरिसीहिं पणीय दुवालमग गणिपिडग, तनहा-~आयारो १ सूयगडो • ठाण ३ समवाओ * म थाण उगाण घ उम्गह तह वियालग इह । ववसाय च अवाय भाग पुण धारण विगत ॥१॥ इति पागनरगाथा ।

॥ श्री नन्दीसूत्र मूलपाठ ॥ (१११) ४ विवाहपण्णची ५ नायाधम्मकहाओ ६ उवासगदसाओ ७ अतगडदसाओ अतगडदसाओ ८ अ गुत्तरोववाडयदमाओ ९ पण्हावागरणाड १० विवागमुय ११ दिट्टिाओ १२, इच्चेय दुवालसग गणिपिडग चोद्दसपुब्बिस्स सम्मसुय, अभिण्णदसपुब्बिस्म सम्ममुय, तेण पर मिण्णेसु भयणा, से का मम्मसुय ॥ सू० ॥ ४० ॥ से किं त मिच्छासुग? मिच्छासुय ज इम अण्णाणिएहि मिच्छादि- हिएहिं मच्छदबुद्धिमडविगप्पिय, तजहा-भारह, रामायण, मीमासुरुक्ख, कोडिल्लग, सगड- भदियाओ, सोड (घोडग) मुह, कप्पासिय, नागसुहुम, क्णगसचरी, वइसेखिग, बुद्धवयण, तेरासिय, काविलिय, लोगायय, सद्वितत, माढर, पुराण, वागरण, भागवय, पागजली पुस्मदे- वय, लेह, गणिग, सउणरुय नाडयाइ, अहवा यापनरिकलाओ, चत्तारि य या सगोनगा, एयाइ मिच्छदिहिस्स मिन्उत्तपरिग्गहियाइ मिच्छासुय एयाइ चेव सम्मदिविस्म सम्मत्त- परिग्गा सम्मसुय, अहवा मिच्छदिद्विस्मवि एयाड चेव सम्मसुय, कम्हा ? सम्मचहउत्तणओ जम्हा ते मिन्छदिट्ठिया तेहिं चेर समहिं चोइया समाणा केड मपक्वदिडीओ चयति,से न मिच्छा मुय ।। सू० ।। ४१ ॥ से कि त माइय सपञ्जवसिय, अणाइय अपजासिय च ? इचे य दुनालसग गणि पिडग वुच्छित्तिनयट्टयाए साइय सपज्जवसिय अवुच्छित्तिनयट्टयाए अणाइय अपज्नवसिय, त समासओ चउबिह पण्णत्त, तजहा-दवओ, खित्तओ, कालओ, भारओ, तस्थ दवओ ण सम्मसुय एग पुरिस पड्डच साइय सपज्जवसिय, यहव पुरिसे य पड्डुच्च अणाइय अपज्जासिय, खेतओ ण पच मरहाइ पचेरवयाड पडुच्च साहय सपज्जासिय, पच महाविदेहाइ पडुच अणाइय अपज्नपसिय, कालो ण उम्सप्पिणि ओमप्पिणि च पडच्च साडय सपनवसिय, नो उस्मप्पिणि नो ओसप्पिणिं च पडच अगाइय अपन्नवसिय, भावओ ण जे जया जिणपन्नता भावा आपविज्नति, पणविज्नति, परविज्नति, दसिज्नति, निदसिज्जति, उपदसिज्जति, ते तया भावे पड्डुच्च साइय मपज्जनसिय सा- ओरसमिय पुण भाव पडुच्च अणाइय अपज्जवसिय, अहवा भवसिद्धियस्स सुय माइय मपज्जनसिय च, अभवमिद्धियस्स सुय अणाइय अपजासिय च, सहागासपएमग्ग सदागासपएसेहिं अणतरणिय पज्नसक्खर निप्फनड, सहजीगणपि य ण अक्सरस्म अणतमागो,निन्चुग्धाडियो जड पुण सोवि आगरिजा तेण जीरो अजीवच पाविना,- "सुटुवि मेहममुदए, होइ पमा चदसूराण" से च साइय मपज्जवसिय, से च अणाइय अपञ्जवसिय ॥ सू० ॥ ४२ ॥ से कि त गमिय ? गमिग दिहिवाओ, से कि त अगमिय अगमिय कालिय सुय, से त्त गमिय, से च अगमिग । अहा त ममासओ दुविह पप्णच, तजहा-अगपविट्ठ, अग बाहिर च । से कि त अगनाहिर ? अगमाहिर दुविह पण्णच, तनहा-आवस्मय च, आरम्सयपटरिच च । से ति आवस्मय' आरस्पय छविह पण्णा, तनहा-सामाइय, चवीमथओ, पदणय, पडिक्मण, काउस्मगो, पचक्याण, से च आरम्मय । से किं त आस्मयवडरिच ? आवस्मयवरित दुविह पण्णन, तनहा-कालिग च, उकालिय चासे किं त उकालिय २ जणेगविह पण्णच, तनहा- मवेयालिंग, सप्पियाकप्पिग, चुल्लरप्पसुग, महारप्पसुग, उपसाट्य, रायपसेणिग, जीनाभिगमो, पण्णवणा, महापण्णरणा, पमायप्पमाय, नी, अणुओगदाराट, दरिंदत्थो, नदलवेयालिय, चाविज्झय, सूरपग्णत्ती, पोरि- सिमण्डल, मण्टल परेमो, रिजाचरणनिणिच्छो, गणिविजा, झागविमची, मरणरिमती, आयोरे .

(११२) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला , सोही, वीयरागसुय, सरोहणासय, विहारकप्पो, चरणविही, आउरपञ्चक्खाण, महापच्चक्खाण, एवमाइ, से 7 उकालिया से किं त कालिय? कालिग अणेगविह पण्णत, तजहा-उत्तुरज्झयणाइ, दसाओ, कप्पो, ववहारो, निसीह, महानिसीह, इसिभासियाइ, जम्बूदीनपनची, दीपसा गरपन्नती, चदप पन्नत्ती, खुड्डिया विमाणपविभत्तोमहल्लिया विमाणपविभत्तो, अगचूलिया, वग्गचूलिया, विवाहचू लिया, अरुणोरवाए, वरुणोपवाए, गरुलोवनाएं, धरणोपवाए, वेममणोपगाए वेलघरोववाए, देवि दोरवाए, णट्ठाणसुए, समुट्ठाणसुए, नागपरियावलियाओ, निरयानलियाओ कप्पियाओ, कप्पवाड सियाओ, पुफियाओ, पुप्फचूलियाओ, वण्हीदसाओ, आसीनिसमावणाण, दिद्विविसमावणाण, सुमिण भावणण महासुमिणभाषणाण, तेयग्गिनिसग्गाण, एवमाइयाइ चउरासीइ पइन्नगमहस्साइ भगवओ अरहओ उसहसामिस्म आइतित्थयरस्स, तहा ससिज्जाइ पइन्नगमहस्साड मज्झिमगाण जिणवराण, चोदस पइन्नगसहस्साड भगवओ बद्धमाणसामिस्स अपहा जस्म जत्तिया सीसा उप्पत्तियाए, वेणइयाए कम्मयाए, पारिणामियाए, चाबिहाए बुद्धीए उपवेया तस्स तत्रियाइ पइण्णगसहस्साइ, पचेयबुद्धानि तत्तिया चेव, से । कालिय, से श आवस्मयनहरित, से च अण गपविट्ठ ।। सू० ॥ ४३ ॥ से किं त अगपविट्ठ ? अगपविट्ठ दुवालमनिं पण्णत्त, तजहा-आयारो १ सूयगडो २ ठाण ३ समवाओ ४ विवाहपन्नत्ती नायाधम्मकहाओ ६ उवासदमाओ ७ अवग डदसाओ ८ अणुत्तरोववाइयदमाओ९ पण्हापागरणाइ १० विवागसुय ११ दिद्विवाओ १२ ॥ सू० ४४ ॥ से कि त आयारे' आयारे ण समणाण निग्गथाण आयारगोयरविणयवेणायसिक्खाभासा अभामाचरणकरणजायामायावित्तीओ आघनिज्जति, से समा सओ पचविहे पण्णरो, तजहा-नाणा यारे दसणायारे, चरित्तायारे, तपायारे, वीरियायारे, आयारेण परित्ता बायणा, सखेजा, अणुभोग दारा, ससिज्जा वेढा, सखेजा सिलोगा, ससिजाओ निजुत्तीओ,सखिजाओ सगहणीओ, सखिजाओ पडिवत्तीओ, से ण अगट्टयाए पढमे अगे, दो सुयक्सधा, पणवीस अज्झयणा, पचासीइ उद्देमण काला, पचासीइ समुद्देसणकाला, अट्ठारस पयसहस्साइ पयग्गेण, ससिजा अक्सरा, अणता गमा, अणता पज्जा, परित्ता तसा, अणता थावरा, सामयकडनिवद्धनिमाइया जिणपण्णत्ता भाषा आघ विज्जति पन्नपिज्जति, परुपिज्जति, दसिज्जति, निदसिज्जति उपदसिज्जति से एव आया, एव नाया, एव विण्णाया एव चरणकरणपरूवणा आघविजइ, से च आयारे १ ॥ सू० ॥ ४५ ॥ से किं त सूपगडे ' सूपगडे ण लोए सूइज्जइ, अलोए सूइजइ, लोयालोए सूहजइ, जीना सूइज्जति, अजीवा सूइजति, जीवाजीना सूइज्जति, ससमए सूइज्जद, परसमए इजइ, ससमयपरममए सूइजइ, सूयगडे असीयस्म फिरियानाइसयस्स, चउरासीडए अकिरियानादण, सत्तट्टीए अण्णाणीयवा ईण, बत्तीमाए वेणइयवाईण, तिण्ह तेसट्ठाण पामडियसयाण चूह किया ससमए ठानिजइ, सूय गडे ण परित्ता घायणा, सखिज्जा, अगुओगदारा, सखेला वेढा सखेजा सिलोगा, ससिजाओ निज्जुत्तीओ, ससिजाओ सगहणीओ, ससिज्जाओ पडियत्तीओ, से ण अगट्ठयाए विए अगे, दो सुयक्सधा, तेवीम अज्झपणा, तित्तीस उद्दमणकाला, तित्तीस समुद्देमणकाला, छत्तीस पयमहस्साड पयग्गेण ससिजा, अक्सरा, अणता गमा अणता पन्नवा, परित्ता तसा, अणता थापरा, सामय पडनिबद्धनिकाइया जिणपण्णत्ता भावा आपपिज्जति, पणज्निति, परविज्नति, दसिज्जति, निद- " + , . ॥ श्री नन्दीसूत्र मूलपाठ ॥ (११३) सिन्नति, उपदसिन्नति, से एस आया, एच नाया, एर विण्णाया, एव चरणकरणपरूपणा आप विजय, से त्त सूयगडे ।। सू० ॥ ४६॥" से कि त ठाणे ? ठाणे ण जीवा ठाविन्नति, अजीवा ठाविज्जति, जीनाजीमा ठाविजति, मसमए ठाविजइ, परसमए ठाविजड, मसमयपरसमएठाविजड, लोएठाविजह, अलोए ठाविज्ञह, लोयालोण ठाविनइ । ठाणे ण टका, कूडा, मेला, सिहरिणो, पभारा, कुटाट, गुहाओ, आगरा दहा, नईओ, आधविन्जति । ठाणे ण एगाग्याए एगुत्तरियाए बुड्डीए दमट्ठाणगरिपड्डियाण भागाण पत्रणा आघनिज्जड । ठाणे ण परित्ता वायणा, सखेना अणु ओगदारा, सखेजा वेढा, सखेजा सिलोगा, सग्वेजाओ निज्जुत्तीओ, सखेजाओ सगहणीओ, सखेजाओ पडिपत्तीओ मे ण अगट्ठयाए तडए अगे, पगे सुयकवये, दमअझयणा एगीस उद्देस णमाला, एक्कपीस समुद्देमणकाला, बापत्तरि पयसहस्मा पयग्गेण, ससेवा अस्सरा, अणता गमा, अणता पजवा, परित्ता तमा, अणता यावग, सासयकडनिबद्धनिकाहया जिणपन्नत्ता भाना आघ निजति, पन्नानन्नति, पररिजति दसिन्नति, निदसिन्नति उवदसिन्जति । से एप आया, एर नाया, एव पिण्णाया एन चरणकरणपरूवणा आपविजड, सेत्त ठाणे ३ ॥ सू० ॥ ४७ ॥ मे नि त मम पार ? समनाए ण जीरा ममासिञ्जति, अनी ममासिजति, जीपाजीना ममासिञ्जति, सममए समासिञ्जर, परममए समासिज्जड, मसमयपरसमण समामिजद लोग समासिञ्जड, अलोए समासिन्नट रोयालो ममामिजइ। ममनाए ण एगायाण गुत्तरियाण ठाणमयविष्टियाण भागाण पस्वणा आघविजर, दुनालमनिहस्म य गणिपिढगस्म पल्लपगे ममामिजह, समनायस्स ण परित्ता गायणा, ससिज्जा अणुओगदारा, ससिज्जा वेढा, मसिजा मिलोगा, मसिनाओ, निज्जुत्तीमो, मसिजाओ मगहणीओ, मसिज्जाओ पडिवत्तीओ, से ण अगट्ठयाण्चउत्थ अगे, एगे मुयक्सथे, एगे अज्झ यणे, एगे उद्देमणकारे, एगे समद्देमणमाले, एगे चोयाले मयमहम्से पयग्गेण, ममेजा जयग, अणता गमा, अणता पन्जना, परित्ता तसा, अणता पारग, सामयपडनिबद्धनिकाइया जिणपण्णत्ता भाना आधविन्नति, पण्णविज्नति, पविनति, दसिन्नति, नि-सिग्नति, उपद सिन्नति आया,एक नाया, एर निण्णाया, एर चरणरणपरूवणा जापनिजह से त्त ममनाए ४ मू०॥४८॥ से कि त विवाहे? विवाह ण जीना पिाहिन्नति, अजीना पिआहिनति, जीवानीमा निआहिजति, ससमए पिआहिजति, परसमए पिाहिन्नति, सममएपरसमए पिआहिन्नति, लोग विाहिन्नति, अलोए पिआहिन्नति, रोयारोप पिआहिनति, विवाहस्मग परित्ता नायणा, मरिजा अणुओग- दाग ससिज्जा वेढा, मसिना सिरोगा, ससिजाओ निज्जुत्तीमो, ममिन्नाओ सगहणीगो, मसि- जाओ पडिबत्तीओ, से ण अगट्ठयाए परम अगे, एगे मुयस्पो, एगे साहग्गे अज्झयणसए, दम उद्देमगमहस्माइ ममुद्देमगसम्माट, छत्तीम वागरणमहम्माइ, दो लम्या अट्ठासी- पयमहस्मा' पयग्गेण, ममिजा अक्पग, अणता गमा, अणता पज्नवा, परित्ता तमा, अणता था मामय पटनिरनिकाया निणपण्णता भागा आरपिज्नति, पण्णविन्नति, पररिज्नति, दसिज्नति, निटमिन्जति, उपदमिन्नति, से पर आया, एप नाया, एप विणाया एप चरणरणपरत्रणा आघनिग्नड, से त विगाह ५ ॥ सू० ॥ १९ ॥ से मि त नायाधम्मकहाओ ? नायधम्मरहामु ण नायाण नगराइ, उज्नाणाइ, चेइयाइ, रणमडाइ, समोमरणा' गयाणो, अम्मापियरो, धम्मायरिया, . . - , (११२) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला सोही, वीयरागसुय, सोहणासुय, विहारकप्पो, चरणविही, आउरपञ्चक्खाण, महापच्चक्खाण, एवमाइ, से च उकालिया। से किं त कालिय? कालिग अणेगविह पण्णच, तजहा-उत्तुरज्झयणाइ, दसाओ, कप्पो, यहारो, निसीह, महानिसीह, इसिभासियाइ, जम्बूदीपपन्नत्ती, दीपसा गरपन्नत्ती, चदप पन्नत्ती, खुडिया विमाणपविभत्तोमहल्लिया विमाणपविभत्तो, अगचूलिया, वग्गचूलिया, विवाह लिया, अरणोक्वाए, वस्णोरवाए, गस्लोरवाए, धरणोववाए, वेममणोनाए वेलधरोववाए, दर्वि दोननाए, गट्ठाणसुए, समुट्ठाणसुए, नागपरियारलियाओ, निरयारलियाओ कप्पियाओ, कम्पवाड सियाओ, पुफियाओ, पुप्फचूलियाओ, चण्हीदसाओ, आसीनिमभावणाण दिद्विविसमावणाण, सुमिण भावणण महासुमिणभाषणाण, तेयग्गिनिसग्गाण, एवमाइयाइ चउरासीह पडन्नगमहस्साइ भगवओ अरहओ उसहसामिस्स आइतित्थयरस्म, तहा ससिज्जाइ पइन्नगसहस्माइ मज्झिमगाण जिणवराण, चोद्दस पडन्नगसहस्साड भगवओ पद्धमाणसामिस्स हा जस्म जत्तिया सीसा उप्पत्तियाए, वेणइयाए कम्मयाए, पारिणामियाए, चविहाए बुद्धीए उपवेया तस्म तचियाइ पइण्णगसहस्साइ, पोयबुद्धापि ततिया चेव, से श कालिय, से श आनस्मयाइरित, से च अण गपविट्ठ ।। सू० ॥ ४३ ॥ से कि त अगपविट्ठ ? अगपविट्ठ दुवालस िपण्णत्त, तजहा-आयारो १ सूयगडो २ ठाण ३ समवाओ ४ विवाहपन्नत्ती ५ नायाधम्मकहाओ ६ उपासदसाओ ७ अतग डदसाओ ८ अणुत्तरोववाइयदमाओ ९ पण्हापागरणाइ १० विनागसुय ११ दिद्विवाओ १२ ॥ सू० ४४ ॥ से कि त आयारे' आयारे ण समणाण निग्गथाण आयारगोयरविणयवेणइयसिक्खाभासा अभामाचरणकरणजायामायाविचीओ आधविज्जति, से समा सओ पचविहे पण्णचे, तजहा-नाणा यारे दसणायारे, चरित्तायारे, तायारे, बीरियायारे, आयारेण परिचा वायणा, सखेजा, अणुओग दारा, ससिज्जा वेढा, सखेजा सिलोगा, ससिआओ निज्जुत्तीओ,सखिजाओ सगहणीओ, सखिजाओ पडिवत्तीओ, से ण अगट्ठयाए पढमे अगे, दो सुयक्सघा, पणवीम अन्झयणा, पचासीइ उद्देमण काला, पचासीइ समुद्देसणकाला, अट्ठारस पयमहस्माइ पयग्गेण, सखिजा अक्खरा, अणता गमा, अणता पजना, परित्ता तसा, अणता थावरा, सामयकडनिवद्धनिकाइया जिणपण्णत्ता भाषा आघ विज्जति पन्नविज्जति, परुपिज्जति, दसिज्जति, निदसिज्जति उवदसिज्जति से एव आया, एव नाया, एव विण्णाया एव चरणकरणपरूवणा आघविजइ, से च आयारे १ ॥ सू० ॥ ४५ ॥ से किं त सूयगडे ? सूयगडे ण लोए सूइज्जइ, अलोए सूइजइ, लोयालोए सहजइ, जीग सहजति, अजीवा सूइजति, जीवाजीना सूइज्जति, ससमए सूइजद, परसमए सइजन, ससमयपरममए सूइज्जइ, सूयगडे ण असीयस्म फिरियावाइसयस्स, चउरासीइए अकिरियानाण, सत्तट्ठीए अण्णाणीयवा इण, बत्तीसाए वेणइयवाइण, तिण्ह तेसट्ठाण पासडियसयाण वूह किचा ससमए ठापिजइ, सूप गडे ण परित्ता वायणा, ससिज्जा, अगुओगटारा, सखेला वेढा सखेजा सिलोगा, सखिजाओ निन्जुत्तीओ, ससिजाओ सगहणीओ, ससिजाओ पडिपत्तीओ, से ण अगट्टयाए वि अगे, दो सुयक्सधा, तेवीम अज्झयणा, तित्तीस उद्देमणकाला, तित्तीस समुद्देमणकाला, छत्तीस पयसहस्सा पयग्गेण ससिजा, अक्सरा, अणता गमा, अणता पजया, परित्ता तमा, अगता थावरा सामय क्डनिबद्धनिकाइया जिणपण्णता भावा आघनिज्जति, पणविज्नति, परतिज्नति, दसिज्जति, निद- , - . ॥ श्री नन्दीसूत्र मूलपाठ ॥ (११५) अणुचरोववाइयदसामु ण अणुचरोववाइयाण नगराइ, उजाणाइ, चेडयाड, वणमडाड, ममोमरणाइ, रायाणो, अम्मापियरो, धम्मायरिया, धम्मकहाओ, इहलोडयपरलोइया इष्टिविसेमा, मोगपरिचागा, पबजाओ, परिआगा, सुयपरिग्गहा, तबोवहाणाइ, पटिमाओ, उवमग्गा, सलेहणाओ, भत्तपच्चवखा गाइ पाओगमणाड, अणुत्तरोववाडय चि न्यबत्ती, सुकुलपञ्चायाइओ, पुणवोहिलामा, अतरिरि- याओ, आपविञ्जति, अणुचरोवाइपदसामु ण परिचा चायणा, सखेचा अणुओगटारा, मसेज्ना वेढा, सखेजा सिलोगा, मखेजात्रो निज्जुत्तीओ, मखेन्नाओ सगहणीओ, सखेजाओ पडिनचीओ, से ण अगट्ठयाए नवमे अगे, एंगे सुयक्रवरे, तिन्नि वग्गा, तिन्नि उद्देसणकाला, तिनि ममुद्देमण काला, मखेजाइ पयमहस्माड पयग्गेण सखेजा अक्खरा, अणता गमा, अणता पज्नवा, परित्ता समा, अणता थावरा, मामयस्टनिवद्धनिराहया निणपण्णचा भावा आघविन्नति, पण्णविन्नति, परूविज्नति, दसिन्नति, निदसिजनि, उवदसिजति, से एस आया, एर नाया, एव विष्णाया, एर चरणरणपरूनणा आधरिना से अणुसरोवबाटयदमाओ ९ ॥ मू० ॥ ५ ॥ से किंव पण्हावागरणाड १ पाहावागरणेसु ण अद्वैत्तर पसिणय, अछुचर अपसिणमय अठुत्तर पसिणापसि णप्सय, तनहा-अगुट्ठपसिणाह पाहुपमिणाह, अहागपमिणाड, अन्नेविविचित्ता विनादमया, नाग- मुवण्णेहिं मद्धिं दिवा सनाया आपविन्नति, पण्हावागरणाण परित्ता गायणा, मवेजा अणुओगदारा, सखेप्ना वेढा, मखेज्ना मिलोगा, मखनाओ निजुत्तीओ, सखेनाओ मगहणीओ, मखेज्नाओ पडिवत्तीओ, से " अगट्ठयाए दममे अगे एगे सुयक्सधे, पणयालीम अध्ययणा, पणयालीम उद्दे- सणकाला, पणयालीम ममुद्देमणकाला, मखजाद पयमहस्माइ पयग्गेणेण, मखन्ना अक्खरा, णतागमा, अणता पज्नवा परित्ता तमा, अणता धारा, सामयाडनिनद्धनिकाल्या निणपण्णाचा भाना आधनिज्जति, पण्णविज्जति, परूविज्नति, दसि नति, निदमिज्नति, उवटमिनति, से एक आया, एव नाया, एव विरणाया, एव चरणकरणरूपणा आपत्रिनड, से 7 पदावागरणाइ १० ॥ सू० ।। ५४ ॥ से कि त निरागसुय ? विवागसुए ण मुक्तदुक्कडाण कम्माण फ्लविवागे आप- विनइ, तत्थ ण दम दुह विवागा दम सहनिवागा। से कि त दुहविवागा ? तुहविवागेसु ण दुह निरागाण नगराइ, उज्नाणाइ, रणमडाड, चेडयाह, ममोसरणाह, रायाणो, अम्मापियरी, धम्माय- रिया, धम्ममहायो, इहोदयपरलोच्या इडिरिमोमा, निरयमणाट, ममारमनपरचा दुहपरपराओ, दुकुल्पञ्चायाडओ दुल्लहबोहियत्त, आपविनर, से च दुहवियागा। से किं त सुहविवागा ? मुह- विवागेम ण सुहविनागाण नगराट, उनणाड, पणसटा चेहयाई, ममोमरणार, रायाणो, अम्मा- पियरो, धम्मायरिया, धम्मकहाओ, इहलोडयपरलोटया इड्डिरिसेमा, मोगपरिवागा, पवनाओ, परियागा, सुयपरिग्गहा, तमोरहाणाइ, सलेहणाओ, मत्वपञ्चक्माणार, पाओगमणा', टेवोग गमणाइ, मुहपरपराओ, सुलपञ्चायाईओ, पुणवोहिरामा, अतरिरियाओ, आपत्रिनति । विवा- गमुयस प परिचा नायगा, मसना अणुओगदारा, मसेना बढा मसेजना मिरोगा, नजाओ निज्जतीओ, मसिनाओ मगहणीमओ, मखिजाओ पटिनचीओ। सेण अगायाप काग्ममे अगे, दो सुपस्वधा, वीस अज्झयणा, वीम उद्देमणारा, वीम समुदमणाला, भगिनाइ पयमहम्माड पयगगा, ससेना अक्वरा, अणता गमा, अगता पन्ना, परिचा तमा, अणना यारग, मामपक- , , . .

- (११४) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला धम्मकहाओ, इहलोइयपरलोइया इड्डिविसेसा, भोगपरिचाया, पबजाओ, परिआया, सुयपरिग्गहा, तवोनहाणाइ, सलेहणाओ, भत्तपञ्चक्साणाइ पाओगमणाइ, देवलोगगमणाइ, मुकुलपञ्चायाईओ, पुणवोहिलामा, अतकिरियाओ य आपविज्जति, दस धम्मकहाण वग्गा, तत्थ ण एगमेगाए धम्म कहाए पच पच अक्खाइयासयाइ, एगमेगाए अक्खाइयाए पच पच उवाक्खाइया सयाइ एगमेगाए उवक्खाइयाए पच पच अक्खाइयउवक्साइयासयाइ एवामेन सपुवारण अधुट्ठाओ कहाणगको डीओ हववित्ति समक्लाय । नायाधम्मकहाण परित्ता वायणा, सखिज्जा अणुओगदारा, ससिज्जा वेढा, ससिज्जा सिलोगा, ससिजाओ निज्जत्तीओ सगहणीओ, ससिज्जाओ पडिवत्तीओ । से ण अगट्ठयाए छट्टे अगे, दो सुयक्सधा, एगूणवीस अज्झयणा, एगूणवीस समुद्देसणाला, सखेज्जा पयसहस्सा पयग्गेण, सखेज्जा अक्ग्वरा अणता गमा, अणता पज्जना, परित्ता तमा, अणता थावरा, सासयकडनिबद्धनिकाइया जिणपण्णता भाना आघविज्जति पण्णविज्जति परूविज्जति दसिज्जति निदसिज्जति उवदसिज्जति, से एव आया, एव नाया, एव विण्णाया, एर चरणकरणपरूवणा आ- घविज्जइ, से त्त नायाधम्मकहाओ ६॥ सू० ॥ ५० ॥ से कि त उवालगदमाओ? उमासगदसा सुण समणोवामयाण नगराइ उजाणाइ, चेइयाइ वणसडाइ, समोसरणाइ, रायाणो, अम्मापिवरो, धम्मायरिया, धम्मकहाओ इहलोडयपरलोइया इड्डिविसेमा, भोगपरिचाया, पवनाओ, परि आगा, सुयपरिग्गहा तवोवहागाइ सीलवयगुणवेरमणपञ्चक्साणपोसहोरगासपडिपज्जणया, पडि माओ, उनसग्गा, सलेहणाओ, भत्तपचक्पाणाइ पाओवगमणाइ, देवलोगगमणाइ, सुक्लपञ्चाइओ, पुणवोहिलामा, अतकिरियाओ आघविज्जति, उसगदसाण परिचा वायणा, सखेज्जा अणुओग दारा, सखेज्जा वेढा, सखेज्जा सिलोगा, सखेज्जाओ निज्जुत्तीओ सखेजाओ सगहणीओ, सखे जाओ पडिवत्तीओ । से ण अगट्ठयाए सत्तमे अगे, गे, एगे सुयक्खने, दस अज्झनणा, दस उद्देसणकाला, दम ममुद्देसणकाला सखेज्जा पयमहम्सा पयग्गेण ससेजा अक्सरा, अणता गमा, अणता पन्जना, परित्ता तमा अणता थारा, सासयकडनिबद्धनिमाइया जिणपण्णत्ता भावा आघ विजति पन्नविजति परूविजति दसिजति, निदसिज्जति, उवदसिजति, से एव आया, एव नाया, एव विनाया, एव चरणकरणपरूपणा आपविजइ, से च स्वासगदमाओ ७ ॥ सू० ॥ ५१ ॥ स कि त अतगडदसाओ? अतगडदमासु ण अतगडाण नगराइ उजाणाइ, चेइयाइ, वणसडाइ, समो सरणाइ, रायाणो, अम्मापियरो, धम्मायरिया, पम्ममहाओ, इग्लोइयपरलोइया इड्डिनिसेमा, भोग परिचागा, पवजाओ परिआगा, सुयपरिग्गहा तोवहाणाइ, सटेणाओ, भत्तपञ्चक्साणाइ पाओ वगमणाइ, अतकिरियाजो, आधविचति, अवगडदसासु ण परित्ता वायणा, सखिजा अणुओगदारा, सखेजा वेढा, सखेजा सिलोगा, सखेजाओ निजुत्तीओ, सखेजाओ सगहणी, ससेजाओ पडिव त्तीओ से ण अगट्टयाए अहमे अगे, एगे सुयक्सध, अट्ठवग्गा अट्ठ उद्देसणकाला, अट्ट समुद्देसण काला सखेजा पयसहस्मा पयग्गेण, सखेजा अक्सरा, अणता गमा, अणता पजवा, परित्ता तमा, अणता थावरा, सासयकडनिबद्धनिमाइया जिणपण्णत्ता भाना आविज्जति, पन्नविनति परूविज्रति, डसिनति, निदसिज्जति, उवदसिज्नति, से एव आया, एव नाया, एव विनाया, एव चरणकरण परूनणा आपविजइ, से त्त अवगडदसाओ ८॥ सू०॥ ५२ ॥ से किं त अणुचरोववादयदमाओ? . , ॥ श्री नन्दीसूत्र मूलपाठ ॥ आजीवियसुत्तपरिवाडीए, उच्चइयाइ बावीस सुत्ताइ तिगणइयाणि तैरासिय सुत्तपरिवाडीए, इच्चेड याइ पानीस मुत्ताइ चउकनइयाणि ससमयसुत्तपरिवाडीए, एवामेव सपुच्चावरेण अट्टासीई सुचाइ भवतित्ति मक्खाय, स च मुत्ताइ । से कि त पुनगए? पुगए चउद्दसविहे पण्णचे, तजहा- उप्पायपुव्व १ अग्गाणीय २ चीरिय ३ अत्थिनत्यिप्पवाय ४ नाणप्पवाय ५ सच्चप्पावाय ६ आय- प्पवाय ७ कम्मप्पवाय ८ पञ्चक्खाणप्पवाय (पञ्चक्खाण) ९विजणुप्पवाय १० अवझ ११ पाणाऊ १२ किरियाविसाल १३ लोकविंदुसार १४ । उप्पायपुरस्स ण दस वत्यू, चत्तारि चूलि यावत्थू पण्णत्ता । अग्गाणीयपुबम्स ण चोइस वत्थू, दुवालस चूलियावत्यू पण्णता । वीरियपुवस्स प अट्ठ वत्प् अ चूलियावत्थ् पण्णता । अत्थिनत्थिप्पवायपुवस्स ण अट्ठारस वत्यू, दस चूलिया- वत्यू पण्णत्ता । नाणप्पनायपुवस्म ण बारम बत्थ् पण्णत्ता । सच्चप्पपायपुवस्स ण दोणिवत्यूपण्ण त्ता । आयप्पवायपुवस्स ण सोलम वत्थू पण्णचा । कम्मप्पवायपुवस ण वीस वत्थू पण्णता । पच्च- क्खाणपुवस्म ण वीस वत्यू पण्णत्ता । विजाणुप्परायपुवस्म ण पन्नरस वत्यू पण्णता अवझपुरस्म ण वारस वत्यू पण्णत्ता । पाणाउपुवस्स ण तेरस पत्थू पण्णचा । किरियाविसाल पुत्वस्म ण तीस वत्यू पण्णत्ता । लोकबिंदुसारपुवस्स ण पणुवीस यत्यू पण्णत्ता, गाहा- दस । चोदस २ अट्ट ३ इटारसेव ४ चारस ५ दुवे ६ य वणि । सोलस ७ तीम ८ वीमा ९, पन्नरम ० अणुप्पवायम्मि ॥ ८९ ॥ वारस इकारसमे, वारसमे तेरसेव वत्थूणि । तीसा पुण तेरसमे, चोदसमे पण्णवीसाओ ॥१०॥ चचारि १ दुवालस २ अट्ठ३ चेपदस ४ चेव चुल्लवत्थूणि। आइल्लण चरण्ह, चूलिया नत्थि ॥११॥ से त्त पुवगए। से किं त अणुओगे ? अणुओगे दविहे पण्णते, तजहा- मूलपढमाणुओगे, गडिया- णुओगे य । से कि त मूलपढमाणुओगे ? मूलपढमाणुओगे ण अरहताण भगवताण पुत्वभवा, देव गमणाइ, आउ, चषणाइ, जम्मणाणि अभिसेया रायपरसिरीओ, पवनाओ, तवा य उग्गा, कवलना णुप्पयाओ, तित्थपरत्तणाणि य, सीमा, गणरा, अञ्जपत्तिणीओ सघस्स चरविहम्म जच परिमाण, निणमणपन्जयओहिनाणी, मम्मच पनामिणो य पाई अशुत्तरगईय, उत्तरवेउ, चिणो य मुगियो, अत्तिया सिद्धा, सिद्धिपहो जह देसिओ, जच्चिर च काल, पोआगया जे जहिं जत्तियाइ भत्ताइ अणम णाए इत्ता अतगडे मुणिररुत्तमे, तिमिरओघ विप्पमुक्के मुक्समुहमणुत्तर च पत्ते, एनमन्ने य एवमाड भाना मूलपढमाणुओगे कहिया, से च मूलपढमाणुओगे से कि त गडियाणुओगे? गडियाणुओगे कुलगरगडियाओ, वित्थयरगडियाओ चकवद्विगडियाओ, दसारगडियाओ, बलदनगडियाओ, पामुदवगडियाओ, गणधरगडियाओ, भद्दयाहुगडियाओ, तवोफम्मगडियाओ, हरिवमगडियाओ उस्मप्पिणीगडियाओ, ओमप्पिणीगडियाओ, चित्ततरगडियाओ अमरनरतिरियनिरयगगमणवि विहपरिपट्टणेसु एकमाइपाओ गडिपाओ आपविज्जति, पण्णविन्नति मे च गडियाणुओगे, सच अणुओगे ४ । से कि त चूलियाओ? आइल्लाण चउण्ह पुवग्ण, चूटिया सेमाइ पुबाड अचूरियाइ, से च चूलियारो। दिहिवायस्म ण परिचा वायणा ससेजा अणुओगदारा, सखेन्ना घढा, सखेना - श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला डनिबद्धनिकाइया जिणपण्णत्ता भाषा आघविज्जति, पनविनति, परविनति, दसिञ्जति, निंदसि ज्जति, से एव आया, एव नाया, एव विनाया, एवं चरणकरणपरूनणा आधविजइ, से च वित्रा गसुय ११ ॥ सू० ॥ ५५ ॥ से कि त दिहिपाए ? दिहिवारण सबभावपल्वणा आपविना, से समासओ पचविहे पण्णत्ते, तजहा-परिकम्मे १ सुत्ताइ २ पुवगए ३ अणुओगे ४ चूलिया ५ । से कि त परिमम्मे ? परिक्म्मे सत्तविहे पण्णत्ते, तजहा-सिद्धसेणिया परिकम्मे १ मणुस्मसेणियापरि कम्मे • पुट्ठसणिण-परिकम्मे ३ ओगाढसेणियापरिकम्मे ४ उवमपञ्च सेणियापरिकम्मे ५ विप्प जहणसेणियापरिकम्मे ६ चुयाचुयसेणियापरिकम्मे ७ से मि त सिद्धसेणियापरिकम्मे सिद्धसेणि- यापरिकम्मे चउद्दमविह पण्णचे, तजहा-मउगापयाइ १ एगट्टियपयाइ २ अट्ठपयाइ ३ पाढोआगा सपयाइ ४ केउभूय ५ रासिबद्ध ६ एगगुण ७ दुगुण ८ तिगुण ९ केडभ्य १. पडिग्गहो ?' ससारपडिग्गहो १२ नदारत १३ सिद्धावत्त १४, से च सिद्धसेणियापरिमम्मे १ । से कि त मणु स्मसेणियापरिसम्मे? मणुम्मसेणियापरिकम्मे चउद्दमविह पण्णचे, तजहा-माउयापयाइ १ एगट्ठिय पवाइ २ अट्ठपयाइ ३ पाढोआगासपयाइ ४ केउभूय • रासिबद्ध ६ एगगुण ७ दुगुण ८ तिगुण ९ केउभूय १० पडिग्गहो ११ समारपडिग्गहो १२ वदायर १३ मणुस्सापत १४ से च मणुस्स- सेणियापरिकम्मे २। से कि त पुट्ठमेणियापरिकम्मे? पुट्ठमेणियापरिकम्मे डकारसविहे पण्णचे, तजहा पाढोआगामपयाइ ? केवभूय २ रासबद्ध ३ एगगुण ४ दुगुण ७ तिगुण ६ केउभूय ७ पडिग्गहो समारपडिग्गहो ९ नदारत १० पुट्ठावन ११, से च पुट्ठसेणियापरिकम्मे ३ । मे किं त ओगाढ- सेणियापरिकम्मे ? ओगाढमेणियापरिकम्मे इक्कारसविहे पण्णचे तजहा-पाढोआगासपयाड १ केउ- भूय रामबद्ध ३ एगगुण ४ दुगुण ५ तिगुण ६ कउभूय ७ पडिग्गहो ८ ससारपडिग्गहो ९ नदा वर १० ओगाढायच ११, से च ओगाढसेणियापरिकम्मे ४ । से कि त उपसपजणसेणियापरिक- म्मे ' उवसपजणसेणिया परिकम्मे इक्कारस विहे पण्णत्ते, तनहा-पाढोआगासपयाइ । केउभूय २ रासिबद्ध ३ पगगुण ४ दुगुण २ तिगुण ६ केहभूय ७ पडिग्गहो ८ समारपडिग्गहो ९ नदायत्त १० उपसपजणवत्त १ , से च उवसपज्जणमेणियापरिक्म्मे ५। से कि त विप्पजहणसेणियापरि- कम्मे ' विप्पजहणसेणियापरिकम्मे इक्कारसविहे पण्णत्ते, तजग-पाढोआगासपयाइ १ केउभूय २ रासिबद्ध ३ एगगुण ४ दुगुण ५ तिगुण ६ केइभूय ७ पडिग्गहो ८ ससारपडिग्गहो ९ नदारत्त १० विप्पजहणारत्त °१, से त निपजहणसेणियापरिकम्मे ६ । से किं त चुयाचुयसेणियापरिक- म्मे चुयाचुयसेणियापरिकम्मे इक्कारसविहे पन्नत्ते, तजहा--- -पाढोआगासपयाइ १ केभूय २ रासिबद्ध ३ एगगुण ४ दुगुण ५ तिगुण ६ केइभूय ७ पडिग्गहो ८ ससारपडिग्गहो ९ नदावत्त १० चुपाच्यवत्त ११ से त चयाचुयसेणियापरिक्म्मे ८ । छ चउक्कन याइ सन तरासियाइ, से च परिकम्मे १ से कि त सुत्ताइ बानीस पन्नत्ताइ, तजहा-उज्जुसुय १ परिणयापरिणय २ पहुभगिय ३ विजयचरिय ४ अणतर ५ परपर ६ मामाण ७ सजह ८ समिण्ण ९ आहचाय १० सोथियावर ११ नदारत १० बहुल १३ पुट्ठापुट्ठ १४ वियावत्त १० एवभूय १६ दुयावत्त १७ वत्तमाण पय १८ सममिरूढ १० सबओभद्द २० पस्मास २१ दुप्पडिग्गह २२, इनेइयाइ पानीस मुचाइ छिनच्यनइयाणि सममयमुत्तपरिवाडीप; इच्चेइयाइ बानीस मुत्ताइ अन्छिन व्यनइयाणि . ॥ श्री नन्दीसूत्र मूलपाठ.॥ आजीवियसुचपरिवाडीए, 'बेहयाइ नावीस सुचाइ तिगणइयाणि तैरासिय सुत्तपरिवाडीए, उचेह याई बावीस सूचाइ चउकनइयाणि ससमयमुप्तपरिचाडीए; एवामेत्र सपून्चावरेणा अवासीई सुचाई भवतित्ति मक्याप, से च मुत्ताइ । से कि त पुबगए? पुगए चउद्दसविहे पण्णते, तजहा- उपायपुन्च १ अगाणीय २ वीरिय ३ अत्थिनत्यिप्पसाय ४ नाणप्पवाय ५ सञ्चप्पावाय ६ आय प्पवाय ७ कम्मप्पपाय ८ पच्चक्वाणप्पवाय (पञ्चक्खाण ) ९विजणुप्पवाय १० अवझ ११ पाणा: १२ किरियात्रिसाल १३ लोकनिंदुसार १४ । उप्पायपुस्म ण दम वत्यू, चत्वारि चूलि याव यू पण्णता । अग्गाणीयपुवम्म ण चोदय पत्यु, दुवालस चूलियावत्यू पण्णता । बीरियपुवस्स प अट्ठ वत्यू अट्ट चूलियापत्र पण्णत्ता । अत्यनस्थिप्पवायपुवस्म ण अट्ठारम वत्यू, दम चूलिया- बत्यू पण्णता । नाणप्पायपुवस्म ण बारम बत्थ् पण्णता । सच्चप्पायपुवस्स ण दोणिवत्यूपण्ण ता। आयप्पनायपुनस्म ण मोलम रत्यू पण्णत्ता । कम्मप्पवायपुत्रस ण तीस वत्यू पण्णचा । पञ्च खाणपुवम्म ण वीस वस्य पण्णत्ता । विनाणुप्पपायपुवस्म ण पन्नरस वत्थू पण्णचा अवझपुवस्म ग बारम वत्यू पण्णत्वा । पाणाउपुवस्स ण तेरस वत्यू पण्णचा। किरियाविमाल पुवस्म ण तीस वर पण्णचा । रोकनिंदुसारपुवस्म ण पणुवीस पत्यू पण्णत्ता, गाहा-- दम । चोदस २ अट्ठ ३ ऽद्वारसेन ४ पारस ५ दुवे ६ य वत्यूणि । सोल्म ७ तीम ८ धीमा ९, पनरम °० अणुप्पवायम्मि ॥ ८९ ।। भारम हकारसमे, बारसमे तेरसेव वत्थूणि । तीसा पुण तेरसमे, चोइसमे पण्णवीसाओ ॥१०॥ चचारि १ दुवालस २ अट्ठ ३ चेवढम ४ चेत्र चुल्लयत्यूणि । आठण चण्ह, चूलिया नत्यि ॥९१॥ से पुदगए । से कि त अणुओगे ? अणुओगे दविहे पण्णते, तजहा-मूलपढमाणुओगे, गडिया- शुओगे य । मे कि त मूलपढमाणुओगे ? मूलपढमाणुओगे ण अरहताण भगवताण पुत्वभा, देव गमगाह, आउ, चवणाड, जम्मणाणि अमिमेया रायपरसिरीओ, पवनाओ, तवा य उग्गा, कालना शुप्पयाओ, तित्यपवरणाणि य, सीमा, गणहरा, अजपवत्तिणीओ सघस्म च उविहम्म जच परिमाण, निणमणपञ्चपओहिनाणी मम्मत्तसुयनाणिणो य गाई अणुत्तरगटय, उत्तरवेउ, चिणो य मुणिणो, जचिया सिद्धा, सिद्धिपहो जड देसिओ, जचिर च साल, पोआगया जे जहिं जनियाह भत्ताह अणम गाए इत्ता अतगड मुणिवरुत्तमे, तिमिरओघ विप्पमुक्के मुक्समूहमणुत्तर च पत्ते, एवमन्ने य एवमाड भागा मूलपढमाणुओगे कहिया, से त मूलपढमाणुओगे से किं त गडियाणुओगे ? गडियाणुओगे हलगरगडियाओ, तिथयरगडियाओ चक्कानिगडियाओ, दमारगडियाओ, बल्देवगडियाओ, पारदरगडिपाओ, गणधरगडियाओ, महबाइगटिपाओ, गोरम्मगटियाओ, हरिवमगडियाओ उस्मप्पिागडियाओ, ओमप्पिणीगडियाओ, चित्ततरगडियाओ अमरनरतिरियनिस्यग गमणवि विहपरियट्टणेसु एमाहयाओ गडियाओ आपविन्नति, पण्णविन्नति मे च गडियाणुओगे, सच अशओग ४ । से जित चुलियाओ ? आइल्लाण चउण्ह पुवाण, चूलिया सेसाइ पुवाइ अलियाइ, से च चूलिया। दिग्विायरमण परिचा बायणा, सपेन्ना अणुशोगदारा, ससैन्ना बेडा, सग्वेना ? - www (११६) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला डनिबद्धनिकाइया जिणपण्णचा भाग आघविज्जति, पन्नविनति, परुविनति, दसिञ्जति, निदसि ज्जति, से एव आया, एव नाया, एव विनाया, एव चग्णरणपरूनणा आपविजद, से श विवा गसुय ११ ।। सू० ॥ ५५ ॥ से कि त दिढिाए । दिटिनापण सच्चभावपरूवणा आधविजइ, से समासओ पचविहे पण्णत्ते, तजहा-परिकम्मे १ सुत्ताइ २ पुवगए ३ अणुओगे ४ चूलिया ५ । से कि त परिसम्मे ? परिकम्मे सत्तविहे पण्णत्ते, तजहा-सिद्धसेणिया परिसम्म । मणुस्मसेणियापरि कम्मे २ पुट्ठसणिया-परिकम्मे ३ ओगाढसेणियापरिक्म्मे ४ उयसपज्ज सेणियापरिकम्मे ५ विप्प जहणसेणियापरिक्म्मे ६ चुयाचुयसेणियापरिकम्मे ७1 से कि त सिद्ध सेणियापरिकम्मे सिद्धसेणि- यापरिकम्मे चउद्दमविह पण्णते, तजहा-मउगापयाड १ एगट्ठियपयाइ २ अट्ठपयाइ ३ पाढोआगा सपयाइ ४ केउभूय ८ रासिबद्ध ६ एगगुण ७ दुगुण, ८ तिगुण ९ केहभूय १० पडिग्गहो ११ ससारपडिग्गहो १२ नदायरा १३ सिद्धावत्त १४, से र सिद्धसेणियापरिकम्मे १ । से कि त मणु स्मसेणियापरिकम्मे? मणुस्मसेणियापरिकम्मे चउद्दमविह पण्णते, तजहा-माउयापयाइ १ एगट्टिय पचाइ २ अट्ठपयाइ ३ पाढोआगासपयाइ ४ कउभ्य • रासिबद्ध ६ एगगुण ७ दुगुण ८ तिगुण ९ केउभूय १० पडिग्गहो ११ समारपडिग्गहो १२ वदापच १३ मणुस्सापच १४ से च मणुस्म- सेणियापरिकम्मे २। से कि त पुट्ठसेणियापरिकम्मे पुट्ठमेणियापरिकम्मे डकारमविह पण्णने, तजहा पाढोआगासपयाइ ? केउभूय २ रासद्ध ३ एगगुण ४ दुगुण ७ तिगुण ६ केउभूय ७ पडिग्गहो ससारपडिग्गहो ९ नदावा १० पुट्ठावर ११, से च पुट्ठसेणियापरिकम्मे ३ । मे कि त ओगाढ- सेणियापरिकम्मे ? ओगाढसेणियापरिकम्मे इकारसविहे पण्णचे तजहा-पाढोआगासपयाइ १ केउ- भूय रामबद्ध ३ एगगुण ४ दुगुण ५ तिगुण ६ कउभूय ७ पडिग्गहो ८ समारपडिग्गहो ९ नदा वच १० ओगाढावत ११, से श ओगाढसेणियापरिस्म्मे ४ । से कि त उनसपजणसेणियापरिक- म्मे ' उवसपञ्जणसेणिया परिकम्मे डकारसविहे पण्णत्ते, तजहा-पाढोआगासपयाइ । केउभूय २ रासिबद्ध ३ पगगुण ४ दुगुण २ तिगुण ६ केइभूय ७ पडिग्गहो ८ ससारपडिग्गहो ९ नदावत्त १० उपसपन्नणवत्त १ , से च उवसपजणसेणियापरिकम्मे ५। से कि त विप्पजहणसेणियापरि- कम्मे ' विप्पजहणसेणियापरिकम्मे इक्कारसविहे पण्णत्ते, तजहा-पाढोआगासपयाइ १ केउभूय २ रासिबद्ध ३ एगगुण ४ दुगुण ५ तिगुण ६ फेइभूय ७ पडिग्गहो ८ ससारपटिग्गहो ९ नदारत्त १० विप्पजहणारत्त °१, से त निप्पजहणसेणियापरिकम्मे ६ । से किं त चुयाचुयसेणियापरिक- म्मे ! चुयाचुयसेणियापरिकम्मे इक्वारसविहे पन्नत्ते, तजहा—पाढोआगासपयाइ १ केभूय २ रासिबद्ध ३ एगगुण ४ दुगुण ५ तिगुण ६ केइभूय ७ पडिग्गहो ८ ससारपडिग्गही ९ नदावत्त १० चुयान्यवच ११ से त चुयाचयसेणियापरिकम्मे ८ । छ चउक्नइयाइ सन तेरासियाइ, से च परिक्म्मे १ से किं त सुत्ताइ बारीस पन्नत्ताइ, तजहा- उज्जुसुय, परिणयापरिणय २ पहुभगिय ३ जयचरिय ४ अणतर ५ परपर ६ मामाण ७ सजूह ८ सभिण्ण ९ आहचाय १० सोपस्थियावर ११ नदापच १२ बहुल १३ पुट्ठापुट्ट १४ वियावत्त १. एवभूय १६ दुयानत्त १७ चत्तमाण पय १८ सममिरूढ १९ सबओभद्द २० पस्सास २१ दुप्पडिग्गह २२, इच्चेदयाइ चावीस मुचाइ छिनच्डेयनइयाणि सममयमुत्तपरिवाडीप, इच्चेइयाह वापीस सुचाइ अन्छिनच्छेयनइयाणि श्री नन्दीमत्र मूलपाठ ॥ (११२) मूब हुकार वा, वाढक्कार पडिपुन्छ बीमसा । तत्तो पसगपारायण च परिणि सत्तमए ॥९६॥ सुत्तत्यो खलु पढमो, वीओ निज्जुतिमीसिओ भणिओ । तडओ य निरवसेसो, एस विही होइ अशुओगे ॥ ९७॥ से त्त अगपविठ्ठ, से ग सुयनाण से । परोक्खनाण, से च नदी ।। नदी समत्ता ।। इअ नंदीसुत्तं समत्तम्

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(११८)
श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला
सिलोगा सखेजाओ पडिवत्तीभो ससिजाओ निज्जुत्तीओ, सखेजाओ सगहणीओ से ण अगट्ठयाए
बारसमे अगे, एगे सुयक्खये, चोदम पुवाइ, सखेजा वत्यू, सखेजा चूलवत्यू, सखेजा पाहुडा,
सखेजापहुडपाहुडा, सखेजाओ पाहुडियाओ, सखेजाओ पाहुडपाहुडियाओ, सखेजाइ पयसद
स्साइ पयग्गण, सखेजा अक्सग, अणता गमा, अणता पजवा परित्ता तसा अणता थावरा, सा
सयकडनिबद्धनिकाइया जिणपन्नता भाना आधविनति, पण्णविनति, परुविजति, दसिन्नति,
निदसिजति, उवदसिज्नति । से एव आया, एव नाया एव विण्णाया, एव चरणकरणपरूषणा
आपविज्जति, से च दिट्टिवाए १२ ॥ सू० ५६ ।। इच्चेइयमि दुवालसगे गणिपिडगे अणता भावा
अणता अभाना, अणता हेऊ, अणता अहेऊ, अणता कारणा, अणता अकारणा, अणता जीवा
अणतता अजीवा अणता भरसिद्धिया अणता अभनसिद्धिया अणता सिद्धा, अणता असिद्धा पण्णत्ता-
भावमभावा हेऊमहेउ, कारणमकारणे चेव । जीवाजीया भवियमभविया सिद्धा असिद्धा
य॥ ९२।।
इच्चेइय दुवालसग कणिपिडग तीए काले अणता जीवा आणाए विराहित्ता चाउरत ससारक
तार अणुपरियदि इच्चे य दुपारसग गाणपिडग पडुप्पण्णकाले परित्ता जीवा आणाए विराहिता
चाउरत ससारकतार अणुपरियति । इच्चेइय दुनालसग गणिपिडग अणागए काले अणता जीवा
आणाए विराहित्ता चाउरत समारकतार अणुपरियहिस्सति । इच्चेइय दुवालसग गणिपिडग तीए
काले अणता जीना आणाए आराहित्ता चाउरत ससारकतार बीईवइस । इच्चेइय दुवालसग गणि
पिडग पडुप्पणकाले परिसा जीना आणाए आराहित्ता चउरत ससारकतार वीईवयति । इच्चेइव
दुवालसग गणिपिडग अणागए काले अणता जीवा आणाए आराहित्ता चाउरत ससारकतार वीईव
इस्मति । इच्चेडय दुवालसग गणिपिडिग न कयाइ नासी, न कयाड न भवइ, न कयाइ न भवि
स्सइ, भुनि च, भवई य, भविस्मइ य, धुवे नियए, सासए, अक्खए अबए, अपट्ठिए निच्चे । से
जहानार ए पचत्यिकाए न कयाइनासी व कयाइ नत्थि, न कयाइ न भविस्सह, भूविं च, भवह
य, भविस्सइ, य, धुवे, नियए, सामए, अक्सए, अपए, अहिए, निन्चे, एवामेव दुवालसग
गणिपिडग न क्याइ नासी, न कयाड नत्थि, न क्याइ न भविस्सइ, भुवि च, भवइ य, भविस्सइ
य, धुवे, नियए, सासए अक्सए, अन्यए, अमट्टिए निच्चे । से समासओ चउन्धिहे पण्णचे,
तजहा-दयओ, सिचओ, कालओ, भारओ । तत्थ दबओ ण सुयनाणी उपउने सबदन्वाइ जाणइ
पासइ, सिराओ ण सुयनाणी उपउत्ते सत्य खेत्त जाणइ पासइ, कालओ ण सुयनाणी उपउचे मह
खेत जाणइ पासइ, भावओ ण सुयनाणी उवउने सम्वे भावे जाणइ पासइ ॥ सू० ५७ ॥
अक्सर सन्नी सम्म, साइय खलु सपजवसिय च । गमिय अगाविठ्ठ, सत्तवि एए सपडिव
कला ॥९॥ जागमसत्थगहण, ज बुद्धिगुणेहिं अट्ठहिं दिट्ठ | विति सुयनाणलभ, त पुचविसा
रया धीरा ॥९४॥
मुस्ममइ १ पडिपुच्छ, २ मुणेड ३ गिण्हइ ४ य ईहएयावि । ततो अपोहए ६ वा,
धारे ७ करेइ या सम्म ८॥ ९५ ॥

श्रीमुख विपाक-मूत्रम् १२१ www ॥ श्री सुखविपाक-सूत्रम् ॥ . - तेण कालेण तेण समएण रायगिहे णयरे गुणसिलग चेइए सोहग्मे समोसढे जब जाव पन्जु वासमाणे एव वयासी-जइ ण भते । समणेण भगवया महावीरेण जाव सपत्तेण दुहविवागाण अयमढे पण्णत्ते सुहरिवागाण भते ! समणेण भगवया महावीरेण जाव सपत्तेण के अटे पण्णते ? तते ण से सुहम्मे अणगारे जवू अणगार एष वयासी-एव सलु जना समणेण भगवया महानीरेण जान सपत्तेण सुहविवागाण दस जज्झयणा पण्णता । तजहा-सुबाहू १ भद्दनदी य २, सुजाए य ३, सुवासवे ।। तहेव जिणदासे ५, धणपती य ६ महब्बले ७ ॥ १ ॥ महनदी ८ महचद ९ वरदत्ते १०॥ जहण भते ! समणेण जान सपत्तेण सुहविनागाण दस अज्झयणा पण्णत्ता पढमस्म ण भते ! अज्झयणस्स सुहरिनागाण जाव के अटे पण्णत्ते ? तते ण से सुहम्मे अणगारे जवू अणगार एव वयासी-एव खलु जर' तेण कालेण तण समएण हथिसीसे णाम णयर हो या रिद्धिस्थिमियसमिद्धे तस्स ण हथिसीसस्स णगरस्स बहिया उत्तरपुरस्थिम दिसीभाए एत्थ ण पुप्फकरडए णाम उजाणे होत्था सन्योउय० तत्थण कयवणमालपियस्स जक्सस्म जक्साययणे होत्था दिव्वे०, तत्थ ण हस्थिसीसे णयरे अदीणसत्तू णाम राया होत्था महया० अण्णओ, तस्स ण अदीणसत्तुस्स रणो धा- रिणीपामुस दवीसहस्म ओरोहे यावि होत्था । तते ण मा धारिणी देवी अण्णया कयाड तसि तारिसगसि वासघरसि जार सीह सुमिणे पामइ जहा मेहस्स जम्मण वहा भाणियव्य । सुवाहुकुमारे जाव अल भोगसमस्य यावि जाणति, जाणित्ता अम्मापियरो पच पामायाडिसगसयाइ करावेति, अन्मुग्गय० भवण एव जहा महाबलस्म रग्णो, णवर पुप्फचूलापामोक्साण पचण्ह रायवरकण्णय मयाण पगदिवसेण पाणिं गिव्हावति तहब पचमइओ दाओ जार उप्पि पासायवरगए फुद्रमाणेहि मुडगमत्थएहिं जाव विहरइ । तेण कालेण तण समएण ममणे भगव महागीर समोमदे, परिसा निग्गया, अदीणमत्तू जहा कृणिओ तहन निग्गओ सुबाहू विजहा जमाली तहा रहेण निग्गए जाव धम्मो कहिओ राया परिसा पडिगया। तण्ण से सुबाहुकुमार समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिए धम्म सोचा णिसम्म हह तु० उठाए उष्टेति जाव एव वयासी-मद्दहामि ण भते ! णिग्गथ पारयण जहाण दवाणुप्पियाण अतिए बहवे राइसर जान सत्थवाहप्पमिहओ मुडे भवित्ता अगा राओ अणगारिय पधइया नो सलु अगहण तहा सचाएमि मुडे भवित्ता अगाराओ अणगारिय पवर- चए अहण्ण दवाणुप्पियाण अतिए पचाणुबइय मतसिस्साडय दुनालमविह गिहिधम्म पडिवनि स्सामि, अहासुह देवाणुप्पिया! मा पडिवध करह । ततेण से मुयाहुकुमार ममणस्म भगवओ महा वीरस्स अतिए पचाणुन्धडय सप सिक्खाबडय दुनालमविह गिहिधम्म पडिनजति पडियन्त्रिता तमेव चाउग्घट आमरह दुरूहति जामेव दिम पारम्भूण तामरदिस पडिगए । तेण कालेण तण ममएण समणस्म भगरओ महागीरम्म जढे अतवामी इदभूइ नाम अणगार जाव एव वयासी-अहोण मते ! सुपाहुकुमार इढे इहरूव फत २ पिए २ मणुण्णे २ मणाम २ सोमे सुमगे पियदसणे मुस्से श्रीजेनसिद्धान्त-खाज्यायमाला उववाई सूत्तं - ( यावीस गाथा) कहिं पडिहया सिद्धा? कहिं सिद्धा पइट्टिया? । कहिं बोंदि चइत्ता ण, कत्थ गतूण सिज्मई ॥१॥ अलोगे पडिहया सिद्धा, लोयग्गे य पडिट्ठिया। इहबोंदि चइत्ता ण, तत्थ गतूण सिज्झई १ ॥२॥ ज सठाण तु इह भव चय तस्स चरिमसमयमि । आसी य पएसघण त सठाण तहिं तस्स ॥ ३ ॥ दीह वा हस्स वा ज चरिमभवे हवेज-सठाण । तत्तो तिमागहीण सिद्धाणोगाहणा मणिया ।। तिणि सया तेत्तीसाधणुत्तिभागोय होइ बोधवा । एसा,सल सिद्धाण उक्कोसोगाहणा मणिया ॥५॥ चत्तारि यरयणीओ रयणिति भागूणिया य बोधवा एसा खलु सिद्धाण मज्झिमओगाहणा भणिया ॥६॥ एका य होइ रयणी साहीवा अगुलाइ कट्ठ भवे। एसा सलु सिद्धाण जहण्णओगाहणा भणिया ॥७॥ ओगाहणाए सिद्धा भरतिभार्गेण होइ परिहीणा । सठाणमणित्थथ जरामरणविप्पमुक्काण !! ८ ॥ जत्थ य एगोसिद्धो तत्थ अणता भवक्खयविमुक्का । अण्णोण्णसमोगाढा पुट्ठा सव्वे य लोगते ॥९॥ फसइ अणते सिद्धे सव्वपएसेहि णियमसा सिद्धो । ते वि असखेज्जागुणा देसपएसेहिं जे पुट्टा ॥१०॥ असरीरा जीवघणा उवउत्ता दसणे य णाणे य । सागारमणागार लक्खणमेय तु सिद्धाण ॥ ११ ॥ केवलणाणुवउत्ता जाणहि सव्वभावगुणभावे । पासति सबओ खलु केवलदिट्टीअणताहि ॥ १२ ॥ णवि अस्थि माणुसाण त सोक्ख णविय सचदेवाण । ज सिद्धाण सोक्ख अव्वाबाह उवगयाण॥१३॥ ज देवाण सोक्ख सव्वद्धवापिडिय अणतगुण । ण य पावइ मुत्तिसुह णताहिं वग्गवम्गूहि ।। १४ ॥ सिद्धस्स सुहो रासो सन्नद्धापिंडिओ जइ हवेजा । सोणतवग्गभइओ सव्यागासे ण माएज्जा ॥१५॥ जह णाम कोइ मिच्छो णगरगुणे बहुविहे वियाणतो। ण चएइ परिकहेउ उवमाए तहिं असतीए॥१६॥ इय सिद्धाण सोक्स अणोवम णस्थि तस्स ओरम्म । किंचि विसेसेणेत्तो ओवम्ममिण सुणह वोच्छ॥१७॥ जह सव्वकामगुणिय पुरिसो भोत्तूण भोयण कोई । तण्हाछुहाविमुको अच्छेन्ज जहा अमियतित्तो॥१८॥ इय सव्यकालतिचा अतुल निव्वाणमुनगया सिद्धा । सासयमबाबाह चिट्ठति मुही सुह पत्ता॥१९॥ सिद्धत्ति य कुद्धत्ति य पारगयत्ति य परपरगयचि । उम्मुक्कम्मकाया अजरा अमरा असगा य॥२०॥ णिच्छिण्णसन्चदुक्सा जाइजरामरणवधणविमुक्का । अन्यावाह सुक्ख अणुहोती सामय सिद्धा॥२१॥ अतुलसुहसागरगया अव्वाबाह अणोवम पत्ता । सचमणागयमद्ध चिट्ठति सुह पत्ता ॥ २२ ॥ ॥ उववाइ उवग समत्त ॥ भ भवतु।

श्रीमुख विपाक-सूत्रम् विहार विहरति । तते ण से सुबाहुकुमारे समणोवासए जाते अभिगयजीवाजीवे जाव पडिलामेमाणे विहरेति । तते ण से सुपाहकुमारे अन्नया कयाइ चाउद्दमट्टमुद्दिवपुण्णमासिणीसु जेणेच पोसहसाला तेणेव पागच्छति २ ता पोसहसाल पमञ्जति २ ता उच्चारपासवणभूमि पडिलेहति २ ता दम्भ सथार सथरेड २ ता रकमसथार दुरूहइ २ ता अट्ठमभत्त पगिण्हइ. चा पोसहसालाए पोसहिए अट्ठमभत्तिए पोसह पडिजागरमाणे विहरति । तए ण तस्स सुबाहुरम कुमारस्स पुन्बरत्तावरत्तकाल- समयसि धम्मजागरिय जागरमाणरस इमे एयारूचे अज्झस्थिए ५ समुप्पन्ने धण्णा ण ते गामागरणगर जान सन्निसा ज य ण समणे भगव महावीर जार विहरति, धन्ना ण तेराइसरतलवर जे ण समणस्स भगरओ महावीरस्म अतिए मुडा जार पध्ययति, धन्ना ण त राइसरतरवर जे ण समणस्स भगरओ महावीरम्स अतिए पचाणुच्चय जान गिहिधम्म पडिवज्जति, धन्ना ण ते राईसर जान जे ण समणस्म भगाओ महापीरस्स अतिप धम्म सुणेति, त जति ण समण भगव महावीर पुवाणुपधि चरमाण गामाणुगाम दूइजमाणे इहमागच्छिना जाव विहरजा तते ण अह समणस्म भगाओ महावीरम्स अतिए मुडे भपित्ता जाव पवण्जा । तते ण समणे भगव महावीरे सुवाहुस्म कुमारस्म इम इयारून अज्झस्थिय जाव चियाणित्ता पुन्याणुपुचि जाव दूइज्जमाणे जेणर हथि सीसे नगरे जण पुप्फकरडे उजाणे जेणर कयवणमालपियस्स जक्सस्स जक्खाययणे तेणेव उपागच्छइ २ ता अहापडिरून उग्गह उगिगिहत्ता सजमेण तवसा अप्पाण भावेमाणे विहरति परिसा राया निग्गया। तत ण तस्स सुबाहस्म कुमारस्स त महया जहा पढम तहा निग्गओ धम्मो पहिओ परिमा रापा पडिगया । तत ण से मुबाहुकुमाममणरस भगवओ मावीरस्स अतिए धम्म मोचा निसम्म हट्ट तुट्ट जहा मह तहा अम्मापियरो आपुच्छति, णिक्खमणाभिसेंओ तहब जाव अणगार जाते टरियाममिए जाव चभयारी, ततेण स सुबाहु अणगारे समणस्स भगवओ महावीरस्स तहारूनाण थेगण अतिए मामाइयमाडयाड एकारस अणाइ अहिजति २ ता बहूर्हि चउत्थछट्टट्ठम० तगोविहाणेहिं अप्पाण भाविता बहूइ पासाइ मामनपरियाग पाउणित्ता मासियाए मलेहणाए अप्पाण असित्ता सहिं भत्ताइ असणाए उदित्ता आलोइयपडिकसे समाहिपत्ते कालमासे काल किचा सोहम्म कप्पे दपनाए उपवन्ने, से ण ततो देवलोगाओ आउक्सएण भवक्रपएण ठिड क्साण अणतर चय च ना माणुस्स विण्गह लभिहिति २ ता केवल बोहिं बुझिहिति २ ता तहारुवाण थराण अतिए मुडे जान पव्वइस्मति, से ण तत्थ बहूइ चासाड सामण्ण परियाग्ग पार णिहिति आलोइयपडिकते समाहिपत्ते काल कगिहिति सणामारे कप्पे देवत्ताए उपजिहिति, मे ण तओ दवलोगाओ माणुस्म पयजा यमलोए ततो माणुस्स महासुके ततो माणुस्स आणत दरे ततो माणुस्म ततो आरण दये तत्तो माणुस्स सचट्ठसिद्धे, से ण ततो अणतर उपद्वित्ता महाविदेह घास जाव अढाइ जहा दढपने सिज्झिहिति ५ आर एर सलु जबू! समणेण जाव सपरोण सुहविवागाण पढमस्म अज्झयणस्स अपमट्ठ पन्नते अज्झमयण समत्त ॥१॥ , वितियम्म ण उक्सेनो-एव सलु जम्बू ! तण कालेण तेण ममरण उसमपुर णगर धूभकरड १२२ श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला बहुजणस्सवि य ण भते! सुपाहुकुमारे इट्टे ५ सोमे ४ साहुजणस्सवि य ण भते ! मुबाहुकुमारे इढे ६ जाव सुरूवे । सुबाहुणा मत ! कुमारण इमा एयारूला उराला माणुम्सरिद्धी किण्णा लद्धा' किण्णा पत्ता ? किण्णा अभिसमन्नागया? के वा पम आसी पुयभो ? एव खलु गोयमा! तेण कालेण तेण समएण इहेव जयुद्दीवे दीवे भारहे वासे हत्थिणाउर णाम णगरे होत्था रिद्ध. तत्थ ण हत्थिणाउरे णगरे सुमुह नाम गाहारइ परिचसह अड्डे० तेण कालण तण समएण धम्मघोसा णाम थेरा जातिसपना जाव पचहिं ममणसएहिं साई सपरिवुडा पुयाणुपुत्विं चरमाणा गामाणुगाम दुइ जमाणा जेणेप हस्थिणाउरे णगरे जेणेव सहसपरणे उजाणे तणे उपागच्छड उपागन्छित्ता अहा पडिरूव उग्गह उग्गिहिता सजमेण तपसा अप्पाण भाषमाणा विहरति । तेण कालेण तेण ममएण धम्मघोसाण थेराण अतेवासी सुदत्ते णाम अणगारे उराले जान लेस्से मास मासेण खममाणे विह रति तए ण से सुदत्ते अणगारे मासक्समणपारणगसि पढमाए पोरिसीए मज्झाय करेति जहा गोयमसामी तहेव धम्मघोसे ('सुधम्म) यरे आपुच्छति जान अडमाणे सुमुहरस गाहापतिरस गहे अणुपविढे तए ण से सुमुहे गाहावती सुदत्त अणगार एजमाण पामति २ ता हट्टतआमणातो अन्मुट्ठति २ ता पायपीढाओ पचोरुहति २ त्ता पाग्याओ ओमुयति २ ता एगासाडिय उत्तरासग करेति • त्ता सुदत्त अणगार सत्तट्ठ पयाइ अणुगच्छति २ ता तिक्खुत्तो आयाहिणपयाहिण करेड २ त्ता वदति णमसति २ ता जेणेव भत्तघरे तेणेव उनागच्छति २ ता सयहत्येण विउठेण असण पाणखाइमसाइमेण पडिलाभेम्सामीति तुढे पडिलामेमाणपि तु पडिलाभिएनि तुट्टे । तते ण तस्म सुमुहस्म गाहावइस्स तेण दव्यसुद्धण टायगसुद्धेण पडिगाहगसुद्धण तिविहण तिमरणसुद्धेण सुदते अणगारे पडिलामिए समाणे ससार परित्तीकए मणुस्साउए निबद्ध गेहसि य से इमाइ पच दिवाइ पाउन्भूयाइ तजहा- वसुहारा बुट्टा १ दसद्धवन्ने कुसुमे निपातिते २ चेलुक्खेने कए आहयाओ देवदुदुहीओ ४ अतरावि य ण आगाससि अहो दाणमहो दाण घुट्ठ य ५ । हत्थिणाउरे नयरे सिंघाडग जान पइम बहुजणो अन्नमनस्स एवमाइक्खड ४-धण्णे ण दवाणुप्पिया! सुमुह गाहाई सुकयपुग्ने कयलक्षणे मुलद्धे ण मणुस्सजम्मे सुकयरिद्धी य जान त धन्ने ण दवाणुप्पिया! मुमुई गाहाई । तते ण स सुमुहे गाहावई बहूइ वाससयाइ आउय पारइत्ता कालमासे काल मिचा इहय हथिमीस एगरे अदीणमत्तस्स रनो धारिणीए देवीए कुच्छिसि पुत्तनाए उपचन्ने । तते ण सा धारिणा देवी सय णिजसि सुत्तनागरा ओहीरमाणी २ सीह पामति सेस न चे जान उप्पि पामाए विहरति त एय खलु गोयमा! सुबाहुणा इमा एयारूपा माणुस्सरिद्धी रद्धा पत्ता अभिममन्नागया पभू ण भत ! सुबाहुकुमार देवाणुप्पियाण अतिष मुडे भवित्ता अगागआ अणगारिय पव्यदत्तए ? हता पम् । तते ण से भगव गोयमे समण भगव महावीर पदति नममति २ ना सजमेण तरसा अप्पाण भावेमाणे विहरति । तते ण से समणे भगव महावीरे अन्नया क्याइ हथिसीसाओ णगराओ पुप्फकरडाओ उजाणाओ कयषणमालपियस्स जक्खस्स जक्पाययणाओ पडिणिक्खमवि २ ता बहिया जणाय श्रीसुखविपाक-सूत्रम् १२३ . विहार विहरति । तते ण से सुबाहुकुमारे समणोवामए जाते अभिगयजीवाजीवे जाव पडिलामेमाणे रिहरेति । तत ण से सुबाहुकुमारे अन्नया कयाइ चाउद्दमट्टमुद्दिद्वपुण्णमासिणीसु जेणेच पोमहसाला तेणे वागन्छति २ ता पोसहसाल पमजति २ ता उच्चारपासवणभूमि पडिलेहति • त्ता दम्भ सथार सथरेइ २ ता दब्भसथार दुरूहइ २ त्ता अट्ठमभत्त पगिण्हइचा पोसहसालाए पोसहिए अट्ठमभत्तिए पोसह पडिजागरमाणे विहरति । तए ण तस्स सुबाहुम्स कुमारस्स पुन्यरत्तावरत्तकाल- समयसि धम्मजागरिय जागरमाणरस इमे एयारूचे अज्झथिए . समुप्पन्ने धण्णा ण गामागरणगर जार सन्निसा जत्य ण समणे भगन महावीर जार विहरति, धना ण तेराइसरतलवर जे ण ममणस्म भगरमओ महावीरस्म अतिए मुडा जार पम्पयति, धन्ना ण ते राईसरतलघर० जे ण समणम्स भगवओ महावीरस्स अतिए पचाणुव्यडय जार गिहिधम्म पडिवज्जति, धन्ना ण त राईसर जान जे ण समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिप धम्म सुणेति, त जति ण समणे भगव महावीरे पुषाणुपनि चरमाण गामाणुगाम दृइजमाणे इहमागच्छिन्ना जाव विहरज्जा तते ण अह समणस्स भगाओ महावीरस्स अतिए मुड भक्त्तिा जाव पव्यएन्जा । तते ण समणे भगव महावीरे सुबाहुस्स कुमारस्म इम इयारून अज्झत्थिय जाब वियाणित्ता पुन्याणुपुचि जार दुइज्जमाण जेणेर इत्थि सीसे गगरे जण पुप्फकरडे उजाणे जेणे कयवणमालपियस्स जक्सस्स जक्खाययणे तेणेव उपाग उइ २ ता अहापडिरून उग्गह उगिगिहत्ता सजमेण तपसा अप्पाण भावेमाणे विहरति परिमा राया निग्गया । तत ण तस्स सुयाहस्म कुमारस्स त महया जहा पढम तहा निग्गओ धम्मो पहिओ परिमा राया पडिगया । तते ण से सुबाहुकुमारे समणस्स भगवओ म वीरस्स अतिए चम्म मोचा निसम्म हट्ट तुट्ट जहा मह तहा अम्मापियरो आपुच्छति, णिक्समणाभिसेंओ तहव जार अणगार जाते इग्यिासमिण जाव चभयारी, ततेण म सुबाहु अणगारे समणस भगनी महावीरस्स तहारूनाण थेराण अतिए मामाइयमाइयाड एकारस अणाइ अहिजति २ ता बहूहिं चउत्थछट्टट्ठम० तमोविहाणेहि अप्पाण भाविता बहूइ वासाइ मामनपरियाग पाउणित्ता मामियाए सलेहणाए अप्पाण झूसित्ता सहिँ भत्ताइ असणाए उदिता आलोइयपडिकते समाहिपत्ते कालमासे फाल किच्चा सोहम्मे कप्पे दबनाए उववन्ने, से ण ततो दवलोगाओ आउक्खएण भवरखएण ठिइ क्सएण अणतर चय चइना माणुस्स विगह लभिहिति । ता केवल घोहिं बुज्झिहिति २ ता तहारूपाण थेराण जतिए मुडे जार पव्यहस्सति, से ण तत्थ बहूइ वासाइ सामण्ण परियाग पाट गिहिति आलोइयपडिकते समाहिपत्ते काल करिहिति सणामारे कप्पे देवत्ताए उचवजिहिति, से ण तओ दवलोगाओ माणुस्स पयजा यमलोए ततो माणुस्स महासुके ततो माणुस्स आणते दो तनो माणुस्म ततो आरणे दो ततो माणुस्स मयसिद्ध, से ण ततो अणतर उपद्वित्ता महाविदेह चासे नाव अड्डाइ जहा दढपडन्ने सिज्झिहिति - जाप एव सल जब ! समणेण जाव मपत्तण महविवागाण पढमस्म अज्झयणस्स अयमट्ट पनचे अज्झमयण समत्त ॥ १॥ वितियम्म ण उक्खेनो-पच सलु जम्यू ! तण कालेण वेण ममरण उसमपुरे णगर धूभकरड १२२ श्रीजनसिद्धान्त-खाध्यायमाला namaAAme बहुजणस्सवि य ण मते ! सुपाहुकुमारे इढे ५ मोमे ४ साहुजणस्मवि य णं भते ! मुबाहुकुमारे इवे जाप सुरूवे । सुबाहुणा भते ! कुमारेण इमा एयारूना उराला माणुम्सरिद्धी किण्णा लद्धा' फिण्णा पत्ता ? किण्णा अभिसमन्नागया? क वा पम आसी पुषभ' एव ग्वल गोयमा! तेण कालेण तेण समएण इहेव जबुद्दीवे दीवे भारह वासे हत्यिणाउर णाम णगर होत्था रिद्ध० तत्थ ण हस्थिणारे णगर सुमुह नाम गाहावइ परिवसह अड्डे० तेण कालेण तेण समएण धम्मघोसा णाम थेरा जातिसपना जाव पचहिं ममणसएहिं सा सपरिघुडा पुत्राणुपुति चरमाणा गामाणुगाम दुइ जमाणा जेणेन हत्थिणाउरे णगरे जेणेव सहसवणे उजाणे तणेस उपागच्छइ उजागन्छित्ता अहा पडिरून उग्गह उग्गिहिता सजमेण तपसा अप्पाण भाषमाणा विहरति । तेण कालेण तण ममएण धम्मघोसाण थेराण अतेवासी सुदत्ते णाम अणगारे उराले जान लेस्से मास मासेण खममाणे विह रति तए ण से सुदत्ते अणगारे मासक्समणपारणगसि पढमाए पोरिसीए मज्झाय करति जहा गोयमसामी तहेव धम्मपोसे (सुधम्म) थेरे आपुन्छति जान अटमाणे सुमुहरस गाहापतिरस गेहे अणुपविढे तए ण से सुमुह गाहावती सुदत्त अणगार एजमाण पासति २ चा हट्टत? आमणातो अन्भुटेति २ त्ता पायपीढाओ पचोरुहति २ ता पाउयाओ ओमुयति २ त्ता एगासाडिय उत्तरासग करेति त्ता सुदत्त अणगार सत्तह पयाइ अणुगच्छति २ त्ता तिक्खुत्तो जायाग्णिपयाहिण करड २ ता वदति णमसति २ ता जेणेव भत्तघरे तेणेव उपागच्छति २ ता सयहत्येण पिउलेण अमण पाणखाइमसाइमेण पडिलाभेस्सामीति तुढे पडिलामेमाणपि तुढे पडिलाभिएनि तुट्ट । तते ण तस्स सुमुहस्म गाहावइस्स तेण दव्यसुद्धण दायगसुद्धेण पडिगाहगसुद्धण तिविहेण तिकरणसुद्धेण सुदत्ते अणगारे पडिलाभिए समाणे ससारे परित्तीकए मणुस्माउए निबद्ध गेहसि य से इमाइ पच बार पाउन्भूया तजहा- सहारा बुट्ठा १ दसद्धवन्ने कुसुमे निपातिते २ चेलुक्खेर कए · आहयाओ विदुदुहीओ ४ अतरावि य ण आगाससि अहो दाणमहो दाण धुट्ठ य ५ । हत्थिणाउरे नयर सिंघाडग जार पहम बहुजणो अन्नमस्स एवमाइक्खड ४-धण्णे ण दवाणुप्पिया ! सुमुह गाहावई सुझयपुन्ने कयलक्सणे सुलद्धे ण मणुस्सजम्मे सुकयरिद्धी य जाच त पन्ने ण दवाणुप्पिया। मुमुहे गाहाई । तत ण स सुमुहे गाहावई बहूइ वाससयाइ आउय पार"ता कालमासे काल रिचा इहेच हथिमीसे एगरे अदीणमत्तस्स रनो धारिणीए देवीए कुच्छिसि पुत्तत्ताए उसपने। तते ण सा धारिणी दवी सय णिजसि सुत्तजागरा ओहीरमाणी २ सीह पामनि सेस न चैव नार उप्पि पायाए विहरति त एय खलु गोयमा! सुबाहुणा इमा एयारूना माणुस्सरिद्धी रद्धा पत्ता अभिसमन्नागया पभू ण भत ! सुबाहुकुमार देवाणुप्पियाण अतिए मुड़े भपित्ता अगागओ अणगारिय पमहत्तए ? हता पभू । तत ण से भगव गोयमे समण भगव महावीर पदनि नममति २ ता सजमेण तवमा अप्पाण भावमाणे विहरति । तते ण से समणे भगव महावीरे अनया क्याइ हथिमीसाओ णगराओ पुष्फकरडाओ उजाणाओ कयषणमालपियस्स जक्खस्स जक्पाययणाओ पडिणिक्खमति २ चा बहिया जणवय

श्रीसम्पविषाक-मूत्रम्
raniurva~
जयसत्तू राया धम्मवीरिए अणगारे पाटराभिए जाव सिद्ध ।। नवम अज्झयण समत्त ॥ ९ ॥
जति ण दममस्स उक्खेवो-एव सलु जबू! तेण कालेण तेण समएण साएय नाम नयर होत्था
उत्तरकुरउजाणे पाममिओ जक्सो मित्तनदी राया सिरिकता देवी वरदत्ते कुमारे वरसेणापामोक्वा
ग पचदेवीमया तित्थयरागमण सावरगधम पुरभवो पुच्छा सत्तदुवारे नगरे विमलवाहणे राया
चम्मई अणगारे पडिलामिए ससार परित्तीका मणुस्साउए निबद्ध इह उप्पन्ने सेस जहा सुबाहुस्स
कुमारस्म चिंता जाव पयजा कप्पतरिओ जान सव्वट्ठसिद्धे ततो महाविदेहे जहा दढपइन्नो जाब
सिज्झिहिति बुज्झिहिति मुचिहिति परि नियाहिति सबटुखाणमत करेहिति । एन सलु जबू!
समणेण भगवया महावीरण जान सपत्तेण मुहविभागाण दसमस्स अझण्णस्म अयमढे पनत्ते,
सेव भते । सेव भत । मुहविवागा || दसम अज्झयण ममत्त ॥ २० ॥
नमो सुयदेवाप-विभागसुयस्स दो सुयवसधा दुहविधागो य सुहविवागो य, तत्थ दुहविवागे
अज्झयणा दस एकसरगा दससुचेर दिवसेसु उद्दिसिजति, एप सुहविधागो वि सेस जहा आयारस्स ॥
इति एकारमम अग समत्त ।।
॥ इअ सुखविपाकसुत्त समत्तम् ।।
॥ सूत्रकृलागसूत्रे वीरस्तुत्यारय पष्टमध्ययन ॥
पुच्छिस्सु ण समणा माहणा य, अगारिणो या परतित्थिआ य ।
से कह णेगतहिय धम्माहु, अणेलिम माहु समिक्पयाए ।। १ ।
कह च णाण कह दसण से, सील कह नायसुतस्स आसी!।
जाणासि ण भिक्षु जहातहण, अहासुत चूहि जहा णिसत ॥ २॥
खेयन्नप से कुमलापन्ने (ले मन्मी) अणतनाणीय अण तदसी।
जससिणो चक्खुपह ठियस्स, जाणाहि वम्म च धिइ च पेहि ॥ ३ ॥
उड्ड अहंय तिरिय दिसामु, तमा य जे थावर जे य पाणा ।
से णिचणिचेहि ममिरस पन, दीव व धम्म ममिय उदाहु ॥ ४ ॥
से सबदसी अभिभूयनाणी, णिरामगधे धिम ठितप्पा ।
अणुत्तरे सव्यजगसि विन, गथा अतीते अभए अणा ॥५॥
से भूइपण्णे अणिएअचारी, ओहतर धीर अणतचक्यू ।
अणुत्तर तप्पति मरिए वा, वइरोयणिंदे व तम पगासे ॥ ६ ॥
अणुत्तर धम्ममिण निणाण, णेया मुणी कामव आसुपन्ने ।
इदर दवाण महाणुभाव, सहस्मणता दिवि ण विसिढे ।। ७ ।।
से पन्नया अक्सयमागर वा, महोदही चापि अणतपारे ।
अणाइले पा अफसाइ मुके, मकेर दाहिवई जुईम ॥ ८॥

१२४ श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला उजाणे धन्नो जक्सो धणारहो राया सरस्सई देवी सुमिणदसण फहण जम्मण पालवण कालाओ य जुब्बणे पाणिग्गहण दाओ पासाद० भोगा य जहा सुबाहुस्स, नार भहनदी कूमारे सिरिदेवीपा मोक्खा ण पचसया सामी समोसरण सावगधम्म पुधभरपुच्छा महाविदेहे वासे पुडरीकिणी णगरी विजयत बुमारे जुगवाहू तित्थयरे पडिलाभिए माणुस्साउए निग? इह उप्पन्ने, मेस जहा सुबाहुस्स जाव महाविदह मासे सिज्झिहिति घुज्झिहिति मुचिहिति परिनिबाहिति सम्बदुक्खाणमत करहिति ॥ वितिय अज्झयण समच ॥ २ ॥ सच्चस्म उक्खेनो-वीरपुर णगर मणोरम उजाण वीरकण्ह जक्खे मिते राया सिरि दवी सुजाए कुमारे पर सिरिपामोक्सा पचसयकन्ना सामी समोसरण पुव्बभनपुच्छा उसुयार नयरे उसमदत्ते गाहाचई पुप्फदत्ते अणगारे पडिलाभिए मणुस्साउए निबद्ध इह उप्पाने जाव महाविदेहे वासे सिज्झिहिति ५॥ तइय अज्झयण समत्त ॥३॥ चोत्यस्स उक्रोमो-विजयपुर णगर णदणषण [मणोरम] उजाण असोगो जक्सो वासवदने राया कण्हा देवी सुवासवे कुमारे भद्दापामोक्सा ण पचमया जार पुव्वभवे कोसवी गगरी धणपाले राया वेसणभद्द अणगारे पडिलाभिए इह जाव सिद्धे । चोत्थ अज्झयण समत्त ॥ ४ ॥ पचमस्म उक्खेनओ-सोगधिया णगरी नीलासोए उजाणे सुकालो जक्खो अप्पडिहओ राया सुकन्ना देवी महचदे कुमारे तस्म अरहदत्ता मारिया जिणदासो पुत्तो तित्थयरागमण जिण दामपुब्वभवो मज्झमिया णगरी मेहरहो राया सुधम्मे अणगारे पडिलाभिए जाप सिद्ध ॥ ।। पचम अज्झयण समत्त ॥५॥ छट्ठस्म उक्खेरओ-गपुर णगर सेयासोय उजाण वीरभद्दो जक्खो पियचदो राया सुभदा देवी ममणे कुमारे जुवराया सिरिदेवी पामोक्खा पचसया कन्ना पाणिग्गहण तित्थयरागमण धनवती यवरायपुत्ते जाव पुष्यभवो मणिग्या नगरी मिनो राया सभूतिविजए अणगारे पडिलाभिते जान सिद्ध ॥ छट्ट अज्झयण समत्त ॥ ६ ॥ सत्तमस्स उक्खेवो-महापुर णगर रत्तासोग उजाण रत्तपाओ जक्खो बले राया मुभद्दा दवी महब्बले कुमार रत्तवईपामोक्खाओ पचसयाना पाणिग्गहण तित्थयरागमण जाव पुब्बभवो मणिपुर णगर णागदत्ते गाहावती इन्ददत्ते अणगार पडिलाभित जाव सिद्धे ॥ मत्तम अज्झयण समत्त ॥ ७॥ अट्ठमस उक्खेगो-सुघोस नगर दवरमण उजाण वीरसेणो जक्खो अज्जुण्णो राया तत्तपती दवी भद्दनदी कुमार सिरिदेवीपामोक्सा पचसया जाव पुषभने महाघोसे णगर धम्मघोसे गाहाती धम्मसीहे अणगारे पडिलाभिए जाव सिद्धे ॥ अट्ठम अज्झयण समत्त ॥ ८ ॥ णवमस्म उक्सेवो-चपा णगरी पुनभद्दे उन्नाण पुन्नभद्दो जक्सो दत्ते राया रत्तवई दवी महचदे कुमारे जुराया सिरिकतापामोक्खा ण पच सया कना जाब पुन्वभवो तिगि छी णगरी श्रीमविपाक-सूत्रम् १२७ निव्वाणसेट्टा जह मन्बधम्मा, ण णायपुत्ता परमत्यि नाणी ॥ २४ ॥ पुढोरमे धुणड विगयगेहि, न मणिहिं बुच्चति आसुपन्ने । तरिउ समुद्द व महामवोध, भपकरे वीर अणतचक्षु ॥ २० ॥ कोह च माण च तहेर माय, लोभ चउत्थ अज्झत्थदोसा । एजाणि यता अरहा महसी, ण कुव्बइ पावण पारड ॥ २६ ॥ किरियाफिरिय वणहयाणु वाय, अण्णाणियाण पडियच ठाण । से सव्वगाय इति वेयडत्ता, उपट्टि सजमदीहराय ।। २७ ।। स पारिया इत्थी सगडमन, उपहाणव दक्पखयट्टयाए । लोग विदिचा आर पर च, सच पभू पारिय सपवार ॥ २८ ॥ मोचा य धम्म अरहतभासिय, ममाहित अट्टपदोसमृद्ध । त सइहाणा य जणा अणाऊ, इदा व देवाहिर आगमिस्सति ।। २९ ।। ॥ इति श्रीवीरस्तुत्यारय पष्टमध्ययनम् ॥ , , ॥ मोक्षमार्गनामक एकादशाध्ययनम् ॥ त मग्ग गुत्तर मृद्ध, सचदुवसविमोक्सण । जाणामि ण जहा मिक्खु, त णो वृहि महामुणी ॥२॥ कपरे मग्गे अक्साप, पाहणेण मटमता! ज मग उज्जु पावित्ता ओह तरति दुत्तर ॥१॥ जह णो कह पुच्छिता, दवा अदुन माणुमा । तेसिं तु क्यर मग्ग, आइक्खेच? कहाहि णो ॥ ३ ॥ जह जो कह पुन्छिन्ना, देवा मदुव माणुमा । तेमिम पडिसाहिना, मग्गसार सुणेह मे ॥ ४ ॥ अणुपुष्येण महाघोर सामरेण पञ्चहय, । जमााय ओ पुन्य, ममुद्द पहारिणो ॥५॥ अतरिमु तरतेगे, तरिस्मति अणागया । तु मोचा पटियवसामि, जतनो त सुमेह मे ॥ ६ ॥ पुढनीजीया पुढो सना, आउजीना तहाऽगणी । वाउनीवा पुढो सचा, तणस्क्सा मनीयगा ॥७॥ अहावरा तमा पणा, एक छकाय आहिया । एतावश जीरगण, गावर को विजई ॥ ८ ॥ सबाहिं अणुजुचीहि, मतिम पडिलेहिया । मव्ये अक्तदुक्या य अतो सब्वे न हिंसया ॥ ॥ एय गुणाणिो मार, जन हिंमति क्चण | अर्हिमा ममय चेव, पतारत विजाणिया ।। १० ।' उट्ट अह य तिरिय, जे यह तमथायरा । सब य निति निना, सति निधाणमाहिय ॥११॥ पभू दोमे निराश्चिा, ण निरज्झज क्णः । मणमा ग्यमा चन, कायमा चैव अतमो ॥ १२ ॥ रायुड में महापन्न, धीर ददेमण चर। एमणाममिग णिय, उज्जयते अणेसण ॥ १३ ॥ भृयाइ च ममारभ, तमुद्दिमा य ज रड 1 तारिस तु ण गिहना, अनपाण सुमन ॥१४॥ पूढम्म न मरिना एस धम्म गुमीमओ। किंचि अमिरपन्ना, मनमो त न प्पिए ॥१५॥ हणत णाणुनाणेन्ना, आयगुत्ते जीडदिए । ठाणा: सति मट्टीण, गामेमु नगरेस पा ॥१६॥ तहा गिर समारम्भ, अग्यि पुण्णति एग पए । अहा यि पुष्णति, एर मेय महन्मय ।। १७ ॥

१२६ भीजैनसिदान्त-स्वाध्यायमाला से वीरिएण पडिपुनधीरिए, सुदसणे वा णगस वसे? । सुरालए चासिमुदागरे से, विरायए गगुणोववेए ॥ ॥ सय सहस्साण उ जोयणाण, तिकडगे पडगवेजयते । से जोयणे णवणवते सहस्से उध्धुस्सितो हह महस्समेग ॥ १० ॥ पुढे णमे चिट्ठइ भूमिवहिए, ज मरिया अणुपरिवट्टयति । से हेमवने बहुनदणे य, जसी रतिं वेदयती महिंदा ॥ ११ ।। से पव्वए सद्दमहप्पगासे, विरायती कचणमट्ठान्ने | अणुत्तरे गिरिसु य पव्वदुग्गे, गिरीपर से जलिएव भोमे ॥ १२ ॥ महीड मज्झमि ठिते णगिंदे, पन्नायते सूरिय सुद्धसे । एव सिरीए उ स भूरिवन्ने, मणोरमे जोयइ अचिमाली ॥ १३ ॥ सुदसणस्सेव जसो गिरिस्स, पवुच्चइ महतो पव्ययस्स । एतोवमे समणे नायपुत्ते, जातीजसोदसणनाणसीले ॥ १४ ॥ गिरीवर वा निसहाऽऽययाण, रुपए व सेढे वलयायताण । तओवमे से जगभूइपन्ने, मुणीण मझे तमुदाहु पन्ने ॥ १५ ॥ अणुत्तर धम्ममुईरइत्ता, अणुत्तर झाणवर झियाइ । सुसुकसुक्क अपगडसुक, सखिदुएगतपदातसुक्क अणुत्तररंग परम महेसी, असेमकम्म स विसोहहत्ता । सिद्धिं गते साइमणतपत्ते, नाणेण सीलेण य दसणेण ॥ १७ ।। रुक्खेसु णाते जह सामली वा, जसिं रतिं वययती सुवन्ना । चणेसु वा णदणमाहु सेट्ट, जाणेण सीलेण य भूतिपन्ने ॥ १८ ॥ थणिय व सदाण अणुत्तरे उ, चदो व ताराण महाणुभारे । गधेसु वा चदणमाहु सेट्ट, एर मुणीण अपडिन्नमाहु । जहा सयभू उदहीण सेट्ट, नागेसु वा धरणिंदमाहु सेतु। खोओदए वा रस वेजयते, तपोवहाणे मुणिवेजयते ॥ २०॥ हत्थीसु एरावणमाहु णाए सीहो मिगाण सलिलाण गगा। पक्खीसु वा गरुले वेणुदवो, निव्वाणवादीणिह णायपुत्ते ॥ २१ ॥ जोहेसु णाए जह वीससेणे, पुप्फेसु वा जह अरविंदमाहु । सचीण से? जह दतपके, इसीण सढे तह वद्धमाणे ॥ २२ ॥ दाणाण सेट्ट अभयप्पयाण, सचेसु वा अणपज पयति । तयेम वा उत्तम बमचेर, लोगुत्तमे समणे नायपुत्ते ॥ २३ ॥ ठिईण सेंटा लवसत्तमा वा, सभा सुहम्मा पा सभाण सेट्ठा । 20 ॥

प्रास्ताविक-गापाओ
"
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दवदाणवगवत, जक्सरक्सस्मकिनग । नभयारिं नमसति दुकर जे करतित ॥ ५ ॥
पम धम्मे धुवे निचे, मामए निणदेमिए । मिदा सिझति चाणेण, सिझिम्सति तहापरे ॥ ६ ॥
(उत्तगययन सूत्रे) पोडशसध्ययन
अरहत मिद्ध परयणगुरु या बहुस्सु ताम्मी पन्छयाय तेमि अमिक्सणाणणोवओगे य ॥ ७ ॥
दसण विणए आरम्मए य, मील्चए निरडयार । गणय तर चियाए, याच ममाही य ॥ ८॥
अपक्षणाणगहणे मुयभत्ती, पक्ष्यणे पभाषणया। एएहिं कारणेहिं तित्ययरत्त लहह जीयो । ५ ॥
(पाताधर्मस्थाने)
जिणवयणे नणुरत्ता निणवयण जे करति भावेण । अमलाअसरिलिटा, तेउतियपरित्तसमारि ॥ १० ॥
एयरखुनाणीणोमार, ज नहिं मह पिंचण । अहिंममय चेन, एतावत्त वियाणि य ।।११।।
जातिं च उष्टिं च "ह दूपास, भूतेहिं जाणेहिं पटिलेहमाय ।
तम्हातिविनझोपग्मतिणचा, मम्मत्तदसी न कोड पार ॥ १० ॥
उम्मुच्चपास "ह मचिएहिं, आरमजीपीऊज्यपयाणुपम्मी!
पामेसु गिद्धाणिचयपरति, ससिंचमाणापुणरतिगझ ॥ १३ ॥
सावणेनाणेवि नाणे, पञ्चमेकमाणेयसनमो । अणण्हएतनेचेन, गोदाणे अफिरियासिद्धि ॥ १ ॥
एगोह नस्थि मे कोड, नाह मन्नम्म सम्म । एप प्रदीणमणस्मा, अप्पाणमणु मामह ॥ १० ॥
एगोमे मामओ अप्पा, नाणदमणसनओ । सेमामे वाहिग भाना, मन्य सनोग लरखणा ॥ १६ ॥
जीवियो नामिगन्ना मरण नो विपत्थए । रहर विनहरेना, जीविओ मरण तहा ।। १७ ।।
सार दमण नाण, मार तर नियम मनमसाल । मारजिण पर धम्म, मारसलेहणापडियमग्ण ॥ १८ ॥
कहाणोटिसारिणी, दुग दुनिठवणी, ममारजस्तारणी, एगठहोडजीपटया ॥ १९ ॥
आरमे नत्यि दया, महिरपमगनामा यम । मकानामम्मम्मत्त, एन्वझायग्गहण च ॥ २० ॥
मन्त्रविमयकमाय, निंदापिरहायमचमामणिया | tv पचप्पमाया, जीपापडतिससार ॥ २१ ॥
लअति विमरामोए, राति सुग्मपया । अति पुत्तमित्त च । एगोधम्मो न लज्मह ॥ २२॥
नरिगृहीदवताटालोए,नविसुदीपुटपीपगाया। नपिसहीसठिसेणारहय, एगतमुद्दीसुणीवीयगगी॥२३॥
नगरी सोहति जलमूर नागे, नारीमोहतिपरपुम्पत्यागे ।
गजमोहत ममा पुराणी, माधुमोहता अमृतवाणी ॥ २४ ॥
चलविमेरचलतिमदिर, चरतितारारविचद्रमाल ।
कदापि काले पृथ्वी चरति, माहपुम्पाक्यो न चलति धर्म । २५ ॥
अशोकक्ष मुरपुष्पवृष्टि-भिव्य निश्यामरमामन च ।
भामटर प्रदभिरानपत्र, मत्प्रातिहार्याणिनिनवगणा ॥ २६ ॥
रुप अनोपम तुल्य न कोइ, नाणीसुणता नपणमहो।
दहमुगधी हर पुष्पवाम, चउमटडदरह प्रभु पाम || २७ ॥
चउटपुरवधारसहिय,नानाभाग्यपाणीय! निननहिं पण तिनमरिया, नीमुधर्मस्वामी जाणी॥ २० ॥
स्प अनोपम पखाणीण, त्यतान वल्लम लागा हवा श्रीनमामी जाणीने, मावीए मन मावथी॥ ९॥

१२८ श्रीजेनसिदान्त-खाण्यायमाला - दाणट्ठया य जे पाणा, हम्मति तसथावरा । तेसिं सारक्खणट्ठाए, तम्हा अथिति णो वए ॥ १८॥ जेसि त उनकप्पति, अन्नपाण, तहानिह । तमि लाभतरायति, तम्हा स्थिति णो वए ॥ १९॥ जो य दाण पससति, वहमिच्छति पाणिण । जे य ण पडिमहति, वित्तिय करति त ॥ २० ॥ दुइओवि ते ण भासति, अस्थि वा नाथ या पुणो। आय रयस्स हेचा ण निव्वाण पाउणति ते॥२॥ निबाण परम बुद्धा, णक्सत्ताण व चदिमा । तम्हा सदा जए दते, निन्याण सधण मृणी ॥ २२ ।। बुज्झमाणण पाणाण, किच्चताण मफम्मुणा । आघाति माहु न दीव पतिवसा पवुबई ॥ २३ ॥ आयगुत्ते सया दते, छिन्नमोए अणासरे । ज धम्म सुद्धमक्साति, डिपुग्नमणेलिम ॥ २४ ॥ तमेव अविजाणता, अबुद्धा बुद्धमाणिणो । बुद्धा मोत्ति य मन्नता, अत एन ममाहिए ॥ २५ ॥ ते य चीशोदग चेव तमुद्दिस्सा य ज कड । भोचा झाण झियायति, अखेयन्ना(अ)समाहिया , २६ ।। जहा ढका य कका य, कुलला मग्गुका सिही । मच्छेमण झियायति झाण त कलुनाधम ॥ ७ ॥ एव तु समणा एगे, मिच्छट्टिी अणारिया । विसण्स झियायति, कका वा कलुताहमा ।। २८ ।। मुद्ध मग्ग विराहित्ता, इहमेगे उ दुम्मती । उम्मग्गगता दुक्स, धायमसति त तहा ॥ २९ ॥ जहा आसाविणिं नाव जाइअधो दुरूहिया । इच्छद पारमागतु, अतरा य विसीयति ॥ ३० ॥ एव तु समणा एगे, मिच्छदिट्टी अणारिया । सोय कसिणमापन्ना, आगतरो महन्मय ॥ ३१ ॥ इम च धम्ममादाय, कामरेण पवेदित । तरे सोय महाघोर, अत्तनाए परिबए ॥ ३२ ॥ रिए गामधम्मेहि, जे केई जगई जगा । तेसिं अत्तुरमायाए, याम कुव्व परिषए । ३३ ।। अहमाण च माय च, त परिन्नाय पडिए । मध्यमेय पिराकिचा, णियाण सधए मुणी ॥ ३०॥ सधए साहुधम्म च, पारधम्म णिराकरे । उवहाणवीरिए भिक्खू, कोह माण ण पत्थए ॥२०॥ जे य बुद्धा अतिककता, जे य युद्धा अणागया । सति तेमि पइट्ठाण, भूयाणा जगती जहा ।। ३६ ।। अह ण वयमावन्न, फामा उच्चावयाफुमे । ण तेसु विणिहण्योजा, वारण व महागिरि ॥ १७ ॥ सवुडे से महापन्न, धीरे दत्तेसण चरे । निव्वुडे शालमाकसी, एव (य) क्वलिणोमय ॥ २८ ॥ ॥ इति मोक्षमार्गनामक एकादशमध्ययनम् ॥ सुभाषित केटलीक गाथानो सग्रह पचमहलयमुनमुल,समणामणाइलरमा दुसुच्चीन्न ।वेरविरामणपजमाण मध्यममुद्दमो दधी तित्था। तित्थकरहिंसु देसियमन्ग, नरगतिरि छरिमज्झियमग्ग । सव्यपवित्त सुनिम्मियसार, सिद्धिविमाण अवगुयदार ॥२॥ दवनरिंदनमसियपूय, सव्यजगुत्तममगलमग्ग। उधरिसगुणनायगमेग, मोक्खपहस्सवडिंसगभूय।।३।। (प्रश्नयाकरणसूत्रे सवरद्वारे) धम्मारामेचरेमिक्खू । पिहम धम्मसारही। धम्मा रामेश्यादत बभरसमाहिए । ४ ॥

भ्य पृष्ट गायक भर्युद्ध ३४ जप्पस्थाण मभायमण तहव ६३ ૧૬ ८ रेलाण नायवाक परिमा ८ ६४ ३६ अप्पमत्राण रेमाण नाय मुक्त परिमडला महुए दराचेसा निरयणज अध्य पृष्ट गाथाक गुद्ध ६ ममायण ५३ तहे अहेव २७ महाकम ८ अमप्पणो ८ ९२ सजम्मि ९५ ८ भायरिआया ९३ गुरहीलसा ९ ९६ गली सुअहिण ९ ३१ सुनाव भड मत्तेवना निणवयण ८ महारर गमप्पणो सनमामि मायरियपात्रा गुरही गाण सुहममाहिए मुटावह ७. १६५ ८ इयत्रकालिक शुद्धिपत्रम् ३ ८ नन्दीसूत्र शुद्धिपत्रकम् ४ सिंघव दादी बाऊ परिग्गह ४ ७८ सिने तेऊ परिगिहानिम्ता वा,उद्धलवाकाय समणुजाणिजा ४ २३, घा १०२ ३२ ७९ १९,, ममणुजामि ४ २५ चा वा, मजामिया ૧૧૧ लारी गुण उत्तमगुण जहि रवियओजेनि ना जुण नागजुण अनगन्दमाार भतगडदमाआ अगु ओगदारा अणु ओगटारा सम्विनाओसग से उवहममिजतिस खेत्तकार ४ ७९ २९, २९ ५ १२ सग हिंपद कोर चुनाइ अमुच्छिणो रायाणो कोल तुनाइ अपुणम्मि रायाओ ૧૧૪ ૧૧૬ ८५ ७ २ , २ ११८ ५७ गाथा ॥ शुद्विपत्रकम् ॥ उत्तरायनसून भर पृष्ट गाथारु अशुद्ध अध्य पृष्ट गायाक मशुद्ध १ ४ भिवाचरिय भिवायरिय १ १ ३ 40 धम्म व ३ १९ ४ . ४ सयंगासाण सनमबदल २५ ४ २ १ ३८ ३ ५ ४ २७ ४ सयणासण मजमबहूले सवरबहले निदाशीले उतीरह रोगभिण सोउण ३ १२ ६ निहाभार हतारह लोमिण सोजण ८ ५ ४ २८ २० १८ १८ ८ १९ ४८ ५ इम खून तमो ४५ ५ ७ १९ १९ १९ ५६ असं ७ ૨૨ सववव ७ २७ . ७ २८ २२ २३ असनया शिताहिं सत्तीप ६ ३ २६ दुरस्सील दुसील निरट्ठाइ लिस्टाइन चरे सुओ सेओ अभिमायण अभिवाय क्थुपीवाल या क्थुपिपारिया वीससे वीमसे दुरुतर दुग्त्तरे महावीरण मगवीरेण समारभइ समारभद्र पमीमो पम्पीओ गाविसु गारिसु अससिणो जससिणो अचिम अञ्चिमा भिवागे भिक्खाए पियान्डुसा पिपाण्णुता दवि यत्ति नरसु हाहा रोहो मिनिला मिहिलाओ भित्तण कामे कामेभोगे अहो अहो त सद्रा सहाण निवड निवदुइ धोइसहि चो-स्महिं भरतहिं द तेहिं नदह वहेह महिडटी मन्डिडीओ म्भाइ कम्मा चपाउ अफाउ भुधिषणा सुचिण हीयमाउ नीयमाउ सफ्ला सफ्ला सुममिया सुमभिया ९ २८ ૧૨ ३ २३ महाइम अन तसो अवसे स वदुक्रव अपगया चित्ताह सतिए महामुणी ससवो इमो गोयम सबदुक्ख बिमोवण बद्धामो जेभि आणुपाणा खधारे ८ १ ममुामुणा ससची गोमय स पदुक्षण ४ ४१ ९ ६ २ २२ मित्तण २६ ४६ ५० ९ ५३ ९ १२ २९ ५ ५ रहाओ १२ ६१ २९ ६ १ १३ १ ५१ R १५ आणपाणु पधारे जे १२ ५४ ६ जेभिक्खु पावाह १८ ३१ ૨૨ ३२ ૨૭ ५५ ५ २० ५५ ६ पवाह हमिद चक्खु रक्खग २१ १० ३२ ५५ ख्व १४ १ ५ २० रवण ६ ४ सायममाथि m ६२ ७ कारण सायमसाय कारण खग्र वसकरस्सो १४ २२ २५ सज्जू खासकरसो १५

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Shri Sidhant Svadhyaymala

Author
Hansraj, Pandit Heeralal
Title
Shri Sidhant Svadhyaymala
File name
Shri Sidhant Svadhyaymala
Text
OCR done
Citation
1938
Published
2011/07
Publisher
Jamnagar, Shri Jain Bhaskaroday Mudranalaya
Language
Sanskrit
Pages
144
Library
Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur
DLI number
313965
Barcode
99999990312126.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
Digital Library Of India
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