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Sarat-sahitya Vijaya (natak) 39

Rupnarayan Pande · 2010/12

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सुसम-साहित्य-माता उन्तालीसवर्षों पुष्प झरत्-साहित्य विजया (नाटक) ३ बनुवादक- प० रूपनारायण पाण्डेय हिन्दी-अन्य रलाकर (प्राइवेट ) लिमिटेड, बम्बई

माधाम प्रेमी, मेनेचिम गरेम्स,
हिन्दी-पाप सनार (मा.) डि.,
हीराबा, बम्बई-४
पामे पर
दिसम्बर १९५०
मृन्य १७)
मुरका
रपुमाप दिपानी रसा
मारत मिरियम
पोवादी, निगर, पर्मान

निवेदन
रचा ( मा. १८) नामक उपन्यासका पानापरूपी-
दिया। इसे रस्य परचमूने रूपान्तरिव दिया या मोरमलते
मम पिपेरम पर पड़ी तफवाके साथ स्म गया था।
एक पहस हम बाके रमा ( प्रामीच समाय) मौर
पोरणी (देना पाना) नामा रोनारको प्रकाशित कर चुके
हैं। पिज पहला नारसस्प मी पाठकोंके मा पम्ही ही
उपस्थित रियाबाबगा।
-प्रकाश

नाटक-पात्र
रामबिहारी मा समाप मिष भोर विषयाचे थामिम्पपर
पिणामपिहारी
परिताराके पुत्र
मरेन्द्र (मरेम)-पनमा और रामसिारा मित्र मा मगरी पुन
रियाके मन्दिरमापाय
नरेनो मामा
काठीपद
निसान मौर
परेश
-
एप गांगुली
पारनौर
"
मामाती, नियमित मद्रयन, कमबारी मादि
-
पोशीमा विवारीली
पिनया मनमासीकम्पा
मरिनी एमसी मानी
पाणी मी, परिसर और प्राममन्त्रिी, मारि

विजया
प्रथम अक
प्रथम श्य
म्यान-निगम पेठनपाना
जिना-गीय मुगा पा सपमुन ज परसे गिरकर मरे !
पिन -इनमें मीसामी रा नामे उन पर ।
विरा-मे पी है।
रिमा-गामी क्यों है। भासतम उनी मोत न होगी तो भोर
जिसीहायी बपदीश ग फरम भार: शिा सर्गीय नमामी बादी
सराठी सन प, म मरे पीछे भी पसनर नार्या भौर मित्र ।
सेमिन बापूची उनपर भी नरी रेम्पन । मरे सिा पारा
पर पर उपार मगन भाप 4-पिशारीन टने नौहरामे पार दिपार
पार निगम रिसा पा। आपूजी मिया पान न भमनारिष
रोको प्राय या माग दनस मप मममप मगमनम् निर भरापी
विमा-पार वो भी।
रियन -मित्रो, पारपाई रो मार गिरा मना बाम
भादको पूरित करना पित नाबादी सारी सामति मा म्पान्स
मी मारी। उन सिपर पुरा हर वो मना है
भगर न सोच में बनी पीना छ माने पाप र ऐना

- २ पिजपा [मपम पारिए। वास्वामे र रेमन में मविप्रा मी नहीं है। कारण, इन पपोसे एम पुष-से मछे काम र सने है। माग बिखोनहार सरो वियतकमेव सम्मे पर्म प्रचारमें कर सकते हैन बाने विनासा कर सकते हैं मनाया न करें, भाप की पाइप मापी सम्मति पासे ही बाबूमो न मरो। (मिसपा पर उपर करने सगती है।) रिप-मा ना, मैं मारतो हिलो र यस मोप न करने मा। इरिया दुवा पाप है- पाप क्यो, माप है। मैने मन ही मन संसार मिा, मापसे नामसे-बोपी नही कमी नहीं हुमा-पारम्प। इस गाईगरके पाप असममिरकी रपाम्ना परके देखो न भमागे पुलो धर्मी पिगा। भाप एक पर बरा राम लिए, इसमेगांधी मला भत्याचारसे सर परकर भापरे पितरेको भफ्ना मैर-माना पर होना पाचनही उनकी माहोलमाफोमा या पित नही उस बदसमीन पर नोडुन (मनोनित ) दस्म में, मर्षात् सनम या परम उपार (रिचपाडा पती)रा सोचिए वो, रेप, मानसिना पा नाम रोमा-स्विनी बनी जोहरत होगी। सपवापारपत्रे सोलार माना मा-भौर पा सीमर बरानेन मार दार- विमारे स्मारमें मनुष्य प, सायसाग। मनि बिसे सबा, मानतिजा पहुँमाई, मोर माना परौर परमेरे लिए पापा उर्व मामाती मोपी पम्पाने पर मनीः समरे सिप या इनाबमा सार्मसाग या सारे मारतपर हसरा विना मारक पफेम (नेति प्रभार) पोगा, बराबरकर यो रेलिए! सिपा-पावो है, हमि म धन परमपूर्वक बैक पी रामरी पीपदीय बापूसरमश मन ही मन बार पर है। बिमान.-ऐसा हो ही नहीं माया सदुरमा एपीपा पार परख पाम में नहीं करता शिपा -ल परेमें मैंने भी बापूपसे बात की पी। बाद मैने सुना। पा, मारो शिमोर बगदीप बालचनों पर्ने कान पाम ही [प] प्रथममक ३ । नहीं, एक दूसरे पनि मित्र मी या बगदीच बार दो सा मगावी पे किनु से दुम पे, पैसे ही दखिम बरे होनेपर मापरे पिता और मरे किसान मासपम स्वीकार कर लिया, मगर बगरीश वा नहीं कर सके मोर गारमें इस पम-परिक्रमा निर्यातन पुरोगा। भारपिता मत्यपात साठे हुए. गौर दी एम्पे, एम्नि मरे पापूस नही 80 गया। वे मानी सारी कमीन वापदारप्रदेपरेमा मार मार पिताको सोह, मापो सेबर, साचे पस भावे भोर बगीय बार पानी मौको टेबर पार करके लिए पापी भोर पठ गईं। सिम्पन.~यास में मी बानता है। सपा-भानना ही पारिए । पाबा कोसीम होमपे। उनमें पास कोई और नहीं था। कभी मरने के बाद ही उन गति सो गई। स्थिर -परामचम्प अपराध है। पिबपा—पर अफ है। अमन लो बहुत दिन पर मरी मनी मा मग्ने पर मेरे पासून एक दिन एकाएक बातों ही बातों में दरापा- जगदीशने यो पार पीना एसर पापा, पर मैं मर समार सा हरिया। रिमाल करती या रो। उनरु मुगम पर पीने jutification! विग-भार भी क्या करते है दिसाम बा। पर परिपना समपन न था। मम ठोंने भरने परम्पुसी म्पपारे परिमायकी भार समेत रामा। प्रतिम गरमाई गई, मानर पर देने मोर भाये। स्पिन-बहीबीचि कमाई। पिरा- rपा, सचिन बान पा १, मरे सिार मनम मिश्रा स्नेह महरा गया । नीम बबकमी पाय पाने से मांग, 'ना' नसीपारा रियम-ऐसा होता तो मन सरदान भी कर माते । पिया-पाये में नहीं बानी सिम बासना, उगाने दान पर निरपेर भानसम्मान-पनमा म पाना मारा।

२ विजया [प्रथम पारिए । पासा र देने में मषिभर मी नहीं है। प्राण, इन पोस एम से भले काम प्रसर है। समाररे मिती होनहार मरेको समय का मेगनाते है-धर्म प्रमारमें हर र सम्ते-न पाने जिनामा राम मा यों न करे, माप ताप १ मापकी सम्मान पाते दी बादी का मरर मेंगे। (विषय पर उपर रमे पाती है।) पिम्पन-माना, में आरोलिमीमा यस मयत न मने दूंगा। इरिया शुभपया पार-केक्स पार सो, माप है। मैंने मन ही मन संसार सिपा, माप: नाममेकोसी नहीं है, की नहीं हुभा-गी। रस गरि वीर ब्रममन्दिरणी स्पाम्ना पर ऐसके इन भाग लोगो पमा विभय दूंगा। मार एक बार बरा पार देखिए, न लोगों मम्ताके मत्पागारस एम पर भापरे फितरेपको भपना मार-मफ्ना पर ग्ना पहा पालिनी! सनीपमा होर भारोमा या समित नहीं किस बदसलूकी पर नोएम (मद्रबोक्सि) है, भर उन पर परम उपाार (दिवया पुरती) सोरिए वो, रेपमें भाप कितना मा नाम दीमा-विनी दी मात होगी! नावारण सीपार करना पग-भौर परस्पर पपा मार मुधर-बिमारे समाजमें मनुष्य प, रगताम है। उगोंने बिसे स्था, मानसिक पापबाई, भोर मना पर गौर नो सिम माप सिा, उमी महम्माली मापसी पन्यान एम रिपमरे लिए गाना पका सार्पस्याग लिया। मारे मारतपर सामिना मरिम एफर (नैविक प्रमार) परेगा, बारा सोसा वौसिए। शिवरा-पाव, पनि मुझे पान परागी मेरी रजमही पीबारीपासोममा मन ही मन प्यार करते है। रिपन -पेमा दोही नही सलपुरमा पापांप्रेशर पार करते बारिशमनार सम्य। रिपाल रेमे मैने भी मानीसे माल की पी। उससे मैने मुना। मगो नि भोर मीण पडू-तीनो बने रेल सापारीको मयम मंक रस] नीं, एक पूतरे पनिर मित्र भी बगदीरा बान् ही सबमे मपात्री प्रापे रितु से दुपये, जैसे ही दखि भी। बरे होनेपर मापके पिता और मरे फिनाने प्रामपर्म सीकार कर लिया, मगर बगरीय पार नहीं कर सके भोर गारमें इस पम-परिक्तमोकार निर्यातन परहोमपा । आरके पिता पत्यापार साठे इप गारमें दीपपे, मेम्नि मरे पास नहीं सहा मसा। वे मानी सारी भीन पायदारी देखरेपन मार मारणे पिताको पार, माघे सेबर फसाये पर भाम भोर पगदीश पाए अपनी भीको टेबर पास करने लिए पाकी भोर पले गये। पियन.-मास में भी पाना। रिस्पा-बानना ही पाहिए । पर्णहम यह एकपात हो गये । उनमें पहर कोई दोष नहीं पास मोके मरने बाद ही उनकी गति एक हो गई। रिया-पर पहभधम भपराप है। सिपा-या बैंक है। शनि इसो गुन दिन बाद मरी भग्नी माम मरने पर मरे मायने एक दिन एकाएक बातो ही बोंमें पापा- मगरीपने स्पो परार पीना शुरु कर दिया था, पर में भव समम मा विश्पा। साम.-करनी सा! मफ मुपमे एयब पीनेntiflation ! रिया-भार भी क्या पावे १ मियत बा। यह परयटिम्पन पा मपन म पा। इनमे सोने भन्ने पाप-गुसरी म्पपा परिमाकी मार दीपाया। प्रतिय गई, माई गई, नब नर र देशको मोरभाप। Forम.-हीकारिसमाई। रिसा-मब गपा, मन बान पाना, मरे मिारे मनम मिान स्नेह नही गया । म परम्मी पाय पाने सय मांगे, दापे 'ना' नीबा से। रिगना - ऐना होने पर नगर पान मीर सरने पे । रिमापा स्बे में नहीं मानती दिन गाडू से सना रनोने पान परम पे पुर मानसम्मनसेपोमा नाना पायो।

विजया
[पपम
मि.-रमिएका सर भारी भविस्तीपाते नहीं हो ये शाम
जोर देनेका उपदेश भारदे पा सरते थे। माक्स माने मित्रम फण
मारररनेो सिमा सो नही कर गये।
विश्या -सा में महाँ बनती। मुझ कोई मी आदेश देर पनमें
नर्माण गरि मात्र पसने पर अली बरमते तरी, तुम
मफ्नो पम पुस्मेि ही मम्ने परम्प बानो । मैं भपनी पारे शासनम
तुमेन पार पाऊँगा। मिनु मुबान पालिकिनाके पापकी मदागाम
पुपये पा-दीन करनेका उना एम्दा नरी था। मना है, पदीय गरे
महोप नाम नरेन्द्र है।भार मानन पायो।
रिचम --जाना है। पत्री आपली ती परेर भने परमें दी है।
शिम बोभा नहीं पाता पर पुत्र है। उतर सा करना
मम्पप है।
शिवपा 1-पान परमाद, भापम उनी बान-परिचान है।
रिणाम बाल-परिपान ! -भाप मुशा ममानी कारपो!
मैंता परमोगी नरी समाति बपदीय मुकि हर साप मरी
बान-परमानना बालपीत होनी है।हो, दिन गनमें भचानक
पालम मपे भारीपदमार मुसे भाम भाप दुभा पा। मुना,
नरेन्द्र मुपा।
विना-पागम म । सन्निनादातोस!
पिन - सार में दो सिम मा भरता। सी मामी से
प्राति कनिम्मा
मिण पित्या बा, मार जगदीप पारे परपर हमलोग
मममुपासापा,वो रम सा परमरा गाममापन उपहा!
yि -पितुम नमार र पारमा गौमि भादमी मी
ऐमा म पग, रिन न रागदार रामर भानुमति दी।
नोति 'र',ऐमा गई मारमा हल हए नही है।
(मोर भार पापा समर पर पैर मारोप-)
T-(भोर) मम भारमी में समा पाइन ।

य] प्रपमर्मक - विवा-उनेही र भाभा । (नौहरका रपान) विश्पा-मुसमे मा पा नहीं सहा बा । गफ माने बानेशता माही राव है। इनसे तो सच ही मप्पी पी। (नरेन्द्रका प्रवेण) नरेन्द्र-मेरे मामा पूषन्द्र गोगुणी महान मापके पड़ोसी है।मा बगा। पर उन्हीं है। मैं का मुनार माना गया कि उनके दादोके बमानसे चर्स मा रही दुर्गापूजाको माप गापद मात्री पद कर देना चाहती हैं। या स्थानम ! (खना पर एक कुनी लीवर मार बैठ जाता है।) वियन.सीस भार भरने मामारी तरफमे झगा परमे भायमा! सम्नि भारमिग परते, बान भूमिपगा। नरेद्र-चीनी, पर मैं नही भूम्म। भोर बागडा परन मी नहीं भापा । सिरस बातफर रिनाम नहीं भा, इमसिए सरल पाने सिए भापा। रियम-नियम न होमेराप्रपा नरेन्द्र-म रिगामा निरपाभपन पहामी पम रियामको पोर पनाइएगा, परिपालन होना दी तो स्वमासि। बिमामा-भारमेम्पर्प मासूम होमेमे ही भोर रिमीधी रिमें उमा कोई भर्प भी रहेगा भपरा भार पम पानस पी मर उम चिरापाप कर संग, हला कोलनी है। मूर्तिा हमारी रिम पम नहीं है और उम सनम भी हम मन्पाय नहीं मानते। नरन्द्र-(शिवपाम) भार भी क्या पीपाती है। विपा-में। मुराम सा भार इसरे सिम्स मनप्प भुननी माया परके माप! रि-(पिपा साप पर) किन पावा विदेशी भादमी है। र ममा, हमारे बारमें कुछ भी नही मानते । नगर-(पराग ) में रिवी न रोमरर मी गोरका मादमी नहीं, पर पाना यैकदा मी मन मरनुर ही माम पर माया नहीं की। मूर्वि- पूरी का भारत मुहम न निगमनेर भी में साधर निराRI पुराना नही उठाव । भर मॉम एस दुतरे ममारी, पापाना। हरिन पर पा नही । मरमें यही पणती मर

६
पिनया
[प्रपम
बनमा ती दिनी मनीषा रामापी प्रग मापसम्बोधी ताद
"मासे माने साप साप पोरमें मानन-उता गुनाह बानेशी भाण
होतो मागेम परवे। पितु ऐना न रोडर इतना, नामा
निगनर मार भाप भरना प्रबाके शिरपर मार देगी- मिरा परना क्या
साम तोकिमी वर विश्वास नहीं कर एम।
विमान.--आपने भनेर दावे ही हमारे पास इतना प्रम् समय
नहाँम भाफ्मे सामर-निराकारी परे। सो पा सेमे पार ।
भाररे मामा एकपों, एक पुतमे नार परम पेठकर पूरा पर रमे
१ उममें में कोई मापति नहीं है। पर पग-से दोम यो भोर पथ
पीपार दिनमा पानी प्रम पार पने भमुरण भया परेशान
परमेमे में भापति।
नरेन.--दिन-राम हे पेपरे पवे नही। परो मार भरस पावे
नम्मे उम्तयोंमें पुन- मामा होना है। भमुरिया
दौसीमार पेग मातारी बाति है। इन सौ भानबरे झपाचार
भार नही तो कौन देगा!
Fo-मापने तो प्रमानिने मा भऔर पामापोंकी उपमा
री, भोर या मुवन मा मातीमगी। न्ति में FREE मापो
मामा सानो पाल महरमरे सारे वीना पुरा बाप, क्या
उनाभनमा पारी पार पान लिए हमारे
पासनानने म दिसा मोगा।
मोगा---गामा भौर ने मना करनेम मा भपिनर ।
मामा मानत लिन मामे बारे मरमभामा उपमारे
मता पर रोपनपोमर भवर
मायरोता तो भारत, बनारस
को भोजन।
-- बामन दाम कमाने
ntitan और

एप]
मयममक
७
नरेन्द्र-(पिवयी उपेठा रके रियासे)-मेरे मामा परे भादमी
नहीं है। उन पूना मागोमन साधारण होतो मी मापी गरीष
प्रमान पैमरमें वही एक मानन्दोस्त ही सवालम्से भार
७ मरिषा हो, किन्तु उनम समास पर क्या इवना भी
न मा संगी?
निम्मत.-(टेक्पिपर एक पर पूमा मारपर) ना, नहीं तर मी--
एक मो बार नहीं तहसी 10 मूल मोगों पागलग्न पति करने के
सिपकोई मीरारी नहीं करता । तुम्हेंभौर कुछ कामेको महो तो पामो-
ममर हम मोगौन समर परमार न परो।
विमा-(विष्यासस) भापके पापू मुझे माफी परा प्यार प्रत,
इससे गोने इन सोमेकी पूा मना है। दिन में तीन
पार रिन पुछ गुम्मा-गुम्मा होग्न हो यो मा हुमा-
रिसामा-भो-परमम्मरम होगा। भाप पानी नहा रसस
विजया-बानी से नहीं होने दो एमा, बीन दिनमदी वो मामला
है। भोर मेरी भमुविपानी मात्र माप मोरता भगर बसाया होता तो
मापार के बाद दोनों तो भगा कर माठो पार पानों पर
तोरे दागता पवा, दो मी उम पुामाप माना पड़ना । (नरेनम) भाप मम्मे
मामाम पर दीपिए, राम मि तरा पूना पर उमी वराह भामे
भरे, मुझे तनिक भी मापति नहीं है। मम तो बम, नमस्कार ।
नामू-फ्यवाद-नमार, ममतार।
(रोनोको नमस्पर परके प्रस्पान)
पिरा-हमारी पापीको समाप्त ही महाराने पाई । ठो क्या नामुग
से समितीमार बापू गरे।
मिरा-हीन हममें रिली तर कुछ गोमाम तो ना।
पिन -ना।
सपा-भारपा पर उन बेस पर भावेंगे!
रिमान.-पानी माना।

विजया [प्रपम सापमर रीदिनी प्रतीधाम एतेमाप प्रमा भापके पासपो तरह है। आरके माने ताप साप गोवमें मानन्द-समय गनाप बानेपी भाशा हीमोगपते। िऐमा न रोजर इनापास, इतना गए मिन्द माय माप अपनी पसारे सिरपर स्पद देणे-मा विमान करना पस हारमोहिमा र विश्वास नहीं करता। पिता-मापने मनेर बातें कही।मारे पास इतना का स्मर माम भापमे सामा-निरापरी परत परे । माया ममें गाय । भापरे मामा एरो, एक सो पुरा नगर परमै बैठकर पूरा कर सकते मम में सभापति नहीं है। पाबत-से दोसता भौर पण्य- परित दिन-रात भोंके पाम पासर री ममुरण अपग परेशान करने में ही हमें भारचि है। नरेन्द्र -रिक्पा पे परे गाते नहीं । एष-रोगार भरम परते सभी उम्मयाम कुन-कुछ हुमागता ता दी । इण् परिया दोही भार सोम मातारी बी। इन मोगोंके भारदरे मसातारको भाप नही तगामीन मोगा। Pि-मापने दोश्रमनपने का मा भोर पालनपोसी उम्मा २०, भौर पर मुननम मो माग समय । चिन में माहिर मापके मामा पानो पाम मोहरम पार पीना एकर दिया बाना, गो परमार, परिवा हो, पर बना लिए मार गमप नागमे पोस्म पानी होगा। नन्द्रा-भार मा मौन । भोर में मना पानेन या अधिकार है पर मग गाना वीनि माम्न पायो मारम भरमा उपमारे गमा दुखममममें मत भाई वाला यह पचनमौसी न र मगर माम मुमन पोरवा मार मारत, बमुनेमा पेपर गरम-ग्री र मसाबारे निशा भौर पुष नही है। रिमा- ममपम नम नापान पार पाए, पामेको दान को भी मान आपमे हमने पायान और मना नेपमा भरिभर है।

एस] प्रयममक ७ - नरेश टाश को रिसपाने)-भरे मना मदनी नी। उनका पूरा मामोन सापरत दो मी मानी ग्राम प्रपत्र परर्ने यही मानन्दोन है। होम्सालसने मारो दुए मरिश से नुि न साठ प्रा सा इनामी न माग विपना-(यरिए प्रचामा मारकर ) ना, नी मा की- पर मौत नही मानी | कुछ मर्म समोर पसन्न प्रदाष्ट करने हिरको दारी नहरी तारें मोर कुन कानेग्रेन से टो पामो- पार मधोध ममर पर नरो। पिका-(सामने) मरो बार मुझे माफी दर प्यार करता है, हमने उनति इन 8 पूना मना पर है। सपिन में कार्य तीन- चार दिन पुरावा करी वा पा मा- रिम -मो-परमम्मम्मामा मार बानी नगरस- विमानती क्यों नहीं होने राप्रपा, टीन दिनभरीय मानस है।मत म मनिषा मार मारतोभमर मचा रोटा सा मार मार दे पाए वो हाँसो मत र माटो पार पानों पर तो दारता, वो भी टम पुस्सार मना पाा। (नरन्द्रन)मार पन्ने मातान पारीरिक, मार सम दिन हर पूरा पटटी वा मासी म करें, मुझ टाना भी मार नहीं है। जाटो बम, ननाएर । नग्न्द्र-वार-नाममात्र । (नो नमस्तर पर प्रापान) पिपरा-मारी पस्चीत टोम ही नहीं होन पाये या तालुका हरेनेशीहीमा गरौ! रिमा- बिग-टेनिसने पिसी हरमण गोमास ये नहीं। रिसम -ना। मिरम्पदा म मय पर मांग! पिपट.-पानीमा विनया [प्रथम सिपा-मापन हो गयेसा! दिमाता-सघन होने पर मी, फिनाले ममानस पुरे मन भोम होना शायद मनेगा नहीं है। विश्पा-किन इसमें उनका भमान हुभा, पर गन सपास मापो मनमें पैस पैदा हुभा । मोमे रमेहरा र क्याम दिया कि मुझे कमर होगा। सचिन मस पर नहीं होगा, यही मैमे न मफे मारमीको बाय- या। इनमें मान-अपमानही तमा पल नही रिष्मा पा! रियाना- पानी है। मपणी बार माप भरो रसी निम्मे ना मान्य मीथिए । सम्नि मा मुझे मी पारम्पारपान कर देना मरीठी मरे पुसम्पमें पुरि रोग सिरा-मेने या मोचा भी नही पाकिम सापार पो मापत रूपमें सेबर रखना महरा रंग। मम्टी बात है, मेरी समममेली भूमम भयर यो भन्नारोगा हो, होम मपरा ससार परवीभाइरा पेमा हिर न। पिम -तोरि पूष गांगु को पागनिवार दिए कि गमरितारी पाने को हुम्म दिया है उस मार उमा नही मानी। बिपा-पापा बामपि भन्दाय न होगा भम्प्रभ भाप सिसी सिरमापर पिशायी भनुमति मांग की। सिान -भाभनुपी सना-नम्ना रोनी दगार है। भार अपर बाध मार पर उपास पात्र ना मना पारती है तो मुझे म भन्ने भाग भनिरचाना मरना होगा। रिप-(भरने कम मगम राई)पर भरि सम्म मा, राम । म परिमाबमरी-गन्नो वरपर भाप न रा। गिरा-भाप मापा मममहिमा मापने मना करने मनेगा सिपना-ममम दोपरा मुशवानी रोगी। सिपा-(परमर मौन गा)मपी मारे। मारगे सोमोमा गत जिन मरो पम-म में वापानी र म। Hि ---मारोता मनपरामरामाननपता स] प्रथम भक मिया-(जसले स्वरमें) अपने क्विारे पारेमें मैं आपली मपेक्षा बहुत मसि भोर अच्छी तरह जानती है किस्मत पाए। लेकिन इस बायको खर पस करना बेकार है मेरे नानका समय हुआ, मैं बाती हैं। (बाने के लिए उठ सही होती है।) बिमस.-गौरवोकी पाति ऐच ही नमकाराम होती है। [विवपाने पामेर सिए पैर छापा ही या विक्री वापके वेपसे मार सड़ी हो गई । पम्मर विमसके प्रति हरिपान करके जुबाप पासे पस। इसी समप पर रासबिहारी धीरे धीरे प्रवेश करते हैं मोर उन देम ही पुष उच्य पाना है--] विस्मस - बापू, तुम्म मना ममी यो कुरामा । पूर्ण गांगुम अपी भी दोम-धाश पम्य परिगाह पर दुर्मापूजा करेगा, उसे मना नहीं मिलाया एगा। भभी उमन को भानबा प्रतिसाद परमे भागा पा मिसयाने दे दिया कि पूना हो। रस. वो इससे कम एक्ने भाग-मस्म सो हो उठे । विस्मत.-भाग-ममम न हो। विमानमारे दुस्मके लिम्फ हम है, और मेरे रामने पर मी! राम.-खेपा तमने इसी बासपर उससे मिगार सिया। सि.-होमिन उपाय हौसाबारमात्मसम्मान बनाए रखनेए- रास -देलो मेवा, अफ्ना पर मरमसम्मानकोप कुछ दिनके लिए पोहा काम कर हो, नहीं तो भव मुमसे सैंमाम न भायगा । मारोपाने , फिर भी मरकर मामगम्मान प्रेमदा ऐना में मना नहीगा। (विश्याम मवे) रान.- पिता बेटी मा यो। विवा-आप माने रेसर में मै भाई मनमा । मुनकर शायद भाष नागब होंगे, लेकिन केस दीन दीन पर होने दीजिए गा-गुतर-मैं मनापास उसे सह मी गोगम मापी प्रगतो रोने पर नहीं है। मैंने भनुमति दे दी है। मन-ही बात रियम मुझे समझा रहा था। रामादमीठारा, [मयम उनपर एमएष परत हो उठा पाक मरिप्पमें फिर ऐना होनेसे वो काम नहीं पलया। समापनम्मानधरणारे लिए मुझे अपने मारी बापदार मोर मीरारीसे भाम करना ही होगा । ति विसामयी मासे मरे मनरी मांस बाती रही देरी । उमा मिरा रे भगनी करें पूणा । पति पराये के सिम रात ताना ही महत्त है। इस सिसकी मावि मा मदन है।लो पन और आमती पन देसारोई मामी मा पाA ताप ना फोमर, इसे पाने पर बमदीयमान पर मन समय (माम समा)ोरान पता है, तो मर देर न करके, इन पुी दिनोंम जब पारी पूर्ण र गम्नी होगी। पहा पा राप। सिपा-भार को भल समग, पही होम । रपए भदा परमी उनी मिपार नतम हो गई है। -पाहुन दिन हुए। माठ श्री पौपर बहनों वाम सिपा-मुनती को पुत्र पहरी ।उने गुम्मर भोर भी थोड़ो मुरव देनाकमा रनोग्न १ पार उराप कर। ग -(मर हिलते हुए) नहरी र सगा-हार चरेगा-पर मा- रिस -भगर पा पोध पुगतनाम पर मी है, वो हम को गेप सेत ममा उन पदोशन पा किपाशीस रेमभरानमा [विराने शिविर मोर एक बार रिया को गमिरे मुम भार रेला र सद, पिठोरा-] पिरा-पावार मित्र । नरे नामपमें गम्मान मापा पाराम मुरोरेगा। मि -(पगार)बार माता देने भी सर पर- गा --II, Tसोनपि | पार प्रति मा भागरिकमा पार: उसनमा परे, लापान मी वा तमाम पमपमाम भपाप्रपन भेगा मयमभक एन] विचस -नही बापू, ये सब फिस सेप्टिम (Sentimentuमनोमात्र) में किसी ठरा बर्दाश्त नहीं कर समया, सो इसके लिए चाहे कोई क्रोप करे या कुछ मी करे। मैं सब बात करनेमें नहीं रखा, सस प्रम करनेसे पीछे नही इवा। -खो को ठीक है। तुमको ही मप्ता मैं मा पर अपने पत्र मेरा पह समावड़े होने पर मी ममी का नहीं यया ! अमाप अपम देखते ही बसे हमें भाग मग पाती है। समी न बर्य विजया, मैं भोर तुमारे पिता, दोनों इसी घरब सारे गोषक निम्ह सब पम प्रहल करनेमें नही दियो,-नहीं रे । पदीकर, नाही स्प हो। (बा पर दोनों हाथ बोसकर मापसे सगाकर पतीसरो प्रगाम किया। ) चिन्त देसो घी, मैं छ मी रो, फिर मी सूत्रीय मति ।। तुम दोनों भवभेदके बीच मेरा रोना उचित नहीं है। परम, किससे बम प्रेगोका मस्प होगा, यह भाव नही तो तुम्म मेग ठीक कर सकोगे। इसमतामा मावस्यमा न होगी। सेकिन मगर पार पानी परे तो प्रना ही होगा कि मामस्टेमें तुम ही भूम कर रही हो । बीदारी पाने काममें मुझे भी विकसके भागे हर माननी होती , सर में बहुत रफ देस पुग्ध । अप्स, तुम्ही पाओ मा, विसको मारा गरम है। हम मेगोको पा अगदीश सारो उपनेता बता ही मगर होता तो एक बार भाप मातर स्पा यह कोधिप करके नरेलना ! उसे वो मालूम किम यहाँ मार हो। मा इम ही अगर उपवास र उमे मुल्प ममें तो पानिमा ही बहुत स्मी मुरव चारा । उन्ध फस के महोगा कि देना मी न जुम्वा होगा और इमोमोच यही प्रामामी ग्याफ्ना संरस मी सदाफ लिए समाप्त हो जायगा | भतरह स्प्रेषकर देखा वो बेटी, यही क्या या नही है। फिर उससे छिपाकर वो कुछ हो नहीं सामानामुद मार कुछ समय मांग, वो न हो टारर रिपो रेखा बास ! सोय, तुम सा करती! विका-(भप्रथम मुम्पसे) मा । नगद, मुझे पड़ी देर हो गई। मासा मे पासती है। एम.-बामा गये पभो में भी दावा है।

बिजया [प्रपम सुनकर एभए पंपस होळा माकि मरिम्पमें फिर ऐसा होनेसे दो काम नही पसेमा सम्मानसम्माननीरवाके लिए मुझे अपने मारी बाराद भौर जमादारीसे मारना होगा । मिस पास मेरे मन सोच बाती पी बेमे । म सिमा, यमनी परे पूछ। पशि परायेके सिए ससाना ही मात ।इस विकसकी प्राति भी ममत है। इसके स्पन और ममली पब देसाई या नहीं समझ पाता कि समस ना मोमासर, इसे बाने रो। यह बगवीस महान पर मने समान (ग्राम समाव) ही दान कर दिया है, वो अब देर न करणे, इन पुरे दिनों ही सपन ठेवारी पुरी कर गमनी होगी। उमारी सा राप। शिपा-आरममा समग, यही होगा । रपए मदा रनेकी उनी मिपार गरम हो गई। एल -याच दिन हुए । ए आठ साली पी, पर मा पह नया सास पाता। विषमा-सुनी , मो पुन पही। पुखर मोर मी पोरी मुरव देना स्पा मेनरोण सारो पावरत। ए-(सिर रितेपुर) नही र सगा नहीं कर सकेमाका सम्यो- किस -मपर या सपान करवाम र मेरे, तो हम मो बैंगेसपए से मत उस एपोहोप न मा बिमा । इसे से मामा। [मिसाने पिससविदायी भोर एक पर पिपात करके रामपिारी मुनी मोर रेलते हुए पाय, मिल पठसे पा-] दिवसा- बापू मित्र थे । सो सम्भब वे सम्मानके पम या करनेकी माय मुझेरे गये है। नियत -(परबार)बार माशा देनेपर मी मा एक- पा -माहा, अप रहो न दिलप्स ! आपके प्रति सम्हारी मातरिक पृष्य पापी पर न पा पो, इसप्रससास राइली पाथेमागसपमा सम्म मपि मोबन मैपा।

मपम भक एस] विस्मस - नहीं प्रपू, ये फिल्म सेटिग (Sambhment मनोभार) में किसी तरा पति नहीं कर सकता, सो इसके लिए पारे कोई झोपरेमा कुछ मी करे। मैं सब प्रानमें नहीं रखा, सत्म काम करनेसे पीछे नही इदा। राम-सो तो यह है । सोही मम्म में सा दोष हूँ। अपने पास मेरा पर समान देने पर मी ममी नहीं गया ! अनाम अपर्म देखते ही से देहमें आग लग पाती है। समभी नये क्विया, मैं भौर तुम्हारे पिदा, दोनों इसी कारण सारे गाँवरे विस्ट अप भम प्राय करने में नहीं दिख नहीं गरे । पगलीर, गुम्ही साप हो। (गा पाकर दोनों हाय बोम्मर मापसे सम्पर मदीरो ममाम किया।) किन्तु देसो पेये, मैं कुछ भी हो, फिर मी मृतीम पचिदम दोनों मवमैदरे प्रेम मय बोम्ना पित नहीं है। कारण, सिमस म मेयोका मन होगा, यह भाव नही तो कमी स्प्रेग ठीकर सकोगे। इसके मतामनकी मात्रसम्वा न ऐसी । सपिन मपर बात करनी पोवो करना ही होगा कि इस मामले में तुम ही भूस कर सीबीदारी पाने काममें मुझे भी मिल्ममा मागे हार माननी होती है, पर मैं बहुव रफ रेल पुल। अमा, प्री क्वामो मा, किन्ने मादा गरम गरम गोंडो वा बगदीगके बाको वर्ष पुराना पूरा ही भगर होता तो एक बार माप भार स्पा पर कोशिश करके न देखना। उस वो मादम मियहाँ मार । भर हम ही अगर उपपाचा होर उम बुम मेरे तो कर निमर ही बहुत ची मुदत चाहेगा । उसका फरक नही होगा कि देना मी न युवा शेगा और दम गोंध पहा जमतमानही रसाफ्ना समर मी सदार सिए समाप्त हो बारा । मपणीमा सांबार देखो दो बेरी, सहीसा वैक नहीं है। फिर उससे हिसार यो रोनी सम्मा 1 टन मह खुद मार पुण् मय मांगे, वो न रो टमर पिचार के देम्बा बापगा 1 क्यों बेयममा कहती हो। रिश्मा- (अप्रतम मुममे ) मम । प्रका, मुझे बहो मेरो गई। भर पा में पाए । मन.-बामा वटी बामो में भी का।

मिजपा [दिवीर (विखवान प्रस्थान ।) दिवस-(परे साथ) या अगर इस पर्यध मुरत माँगे, ये भी उस- पर दिपार करना होगा क्या। um -(प, द ई आपबमें ) परना न होगा तो क्या मारने देना रोगा राम मन्दिरकी प्रतिया ! देख पिास, इस समीकी मस्स्पा मयिक नहीं मपिन अपी का पानी नही माने अपनी सारी सम्पपिकी स्वामिनी रे मोरो नहीं। मन्दिरकी स्थापना न पनेपर मीको पनि न होमी, लेकिन मेरी भूमनेसे काम नहीं रहेगा। (मरमान) (प्रीपत्र प्रदेश) कार्यपद-मावाने पूण कि भापरे मिय क्या चाप मेरे। मिासना। कासीपरबाघरा- मियत -ना, भारत नहीं है। प्रीपर--पसमा मिठाई। विखपत -Rो दिया, कुछ न पारिए । उनस का देना, दम पर पारे। (मरमान) पी.पाना म होगा, ये चासे हो बान बागी। (प्रस्थान ) द्वितीय श्य स्थान---गाँव पखा (पूर्ण माराम मोर दो-तीन प्रामवासियों का प्रया) मामात्र हा पूर्व पाता, मुना है, पूरा करनेका पुनम मिल गया। पूष- मा, पम्पने रसारिसे देस बिपा। मीदारफे परसे पुस्म मि गपा है पूजा करने परेमै सने मापति नहीं है। १ मामत्र-पम तुना कि पूषा रोक दी गई, ससे इस्मिता सेमा २ पीपारानमी सोर रेप किवहारे यहाँका पने दिनों पुपनी गा पापर मनी रोपापपी।पुरम रिमा ने पाया !

एम] प्रथम,भक १३ पूर्व-मीदारी पाने स्वयं । यह सब मामम उर्ने कुरा म माम न थारमारे नरेन्द्रने पार पहा तो सुनकर आपके साप खाने मा- पासी है। आप अपने मामासे पाकर का दाबिए किया बराकी तर विधिपूल मैलाली पूण परें । मुझे वनिक मी भापति नहीं है।-भरे याब उमीनों पदयात बाप-बेटी कारसायो । मुझसे वे मत है। -यो परमो कि छाी बहुत मसीहै। २ मा -., मी है। सपा विपर्मी | मैं पूछता है, तो कुछ पता है। पूर्ण लोप मे। सकिन मैपा, मी एस-सी गो-हरि रापी पोसी । मना, इस विस्मस छोकरेने पूना बन्द करनेकीसी पेश की थी, सि मोने उसकी कोई बात नहीं सुनी। स्पा कर दिया किनार अमुविधा होनेपर भी मैं पराये धर्म कम इतक्षेप नहीं र मंगी। पापा साब बात है। १प्रा.-रते पसा पाया। पहले विस रन बनामेगा पानकर फिटनपर बहकर गाँवमें आई, दो ग्रेग देसार मपसे मममरे हो गये । अपनार कम गर्ने कि इसी के साथ मिसाट मासूम माह होनेग्रम है, स्पस गाव आहै। सभीने मनमें सोचा कि भोले रामसे दी गान नहीं करती, पर तापमें पा सुप्रीम मी ! मा को नहीं पेगा, यह पदिपस (रासबिहारी) साम्य समाने पर फार सौपर पड़ा देगा । किन्तु तम्हारा पर मामसम रेशान करने मरोसा होता है सोनपापा । पूर्व-हो मेपा, पता है। मैं दावा है आगे पर म स्प्रेग रेस सेना-सम्मके मनमें दसरा-पर्म है। यह किसीधे गप स नहीं देगी। २प्रा.-फिम-किर- फिस गाव है। मरे पर विपी है। पामे शिसे मोम मा है, उसके रमा ! उसके धर्म ! काँसे माया ! १.-से तो करे। धामन पाप सहरमें मिया नहीं होगा किन्न पानाश्री पून तो मा समीने मम्मे पोरसे पम्मी । बाप-वेय दोनों बार घेशको भी उसे मद नहीं कर पामे । २ प्रा.-(मिरिमार) मरिन तुम प्रेग पारको रेसना, पहा मोगा पाननेवाचे म्ममा सामे सरे गरको बाहर लाफर छोडेगी। में मा रपर देख पा रहा है। - विनया [विधीम ---सा पाने मैपा, हमारे नरेनने तो सात दरमा कोईर नहीं है पर विसीको प्रनहीं देगी। महामापाने माम्पमें भी मिसाह ो रोग दी।-सेर, म सब छोम मा पूपाका प्रम देखो मैपा। मैं यही चारताकिम सब मिलन मप यह श्रम बना दो। २मा-रेधे पाना हम समी मिर तुम्हारे इस काम सम पागे- मेकिती मोर देखना न होगा। १. ~ मातापी पूषा इय-प्रेमसे निपट चार । इसके पार पाया, समता भी हम मेमोकी पोड़ी- माता पना शेगी । न मोर मरेन। ताप हेकर, मौला रेकार, एक दिन एम योग पर पहुँच पायेगे बीदारफे माँगे 8 मा, प्राम-देवता सिदेसरीका पोलर माप मेर बिए । ई सामे सरापमान पर बर्दस्ती उसपर ना कर रिमा है। मन साम्भरसक मो उमसे निभानेग्री मासियों सौ रुपये पिवी उन स्पोमसे कितने समय रपरी तापसमें पमा होते हैं, इसमय पता भगाइए । मुझे एसय हार। पाचा, इन 6. सात मस्यौमें एक पेसा मी महीबमा रिमा यमा । या, पहा इसम सा पसाब देता है। २त्रा -बदा कर देगा यह बात की। मनी नही पाती। १ मामब- पह को को बरा । परीके कोड़ो मारने में बानता हूँ। उसले पुरोहिवसे मेरी पी मिश्या है। उसकी गवाहीसे में प्रमानित गा कि हमारा प्रना मुठ नही है। पा सोहो मपुमा । के पाप हो रपए पर एमालमते मनी मेक्ता है। - मगर मुझे इस मामठमें न पसाये मेवा । पररे पास ही पर। मैं ग भावी ठाण-मुफ्तमें मारा गाउँगा। ११.-कि माय मानय नरेन्द्र कमी नहीं गया, गरम मसख ।। रसे मैशा, साप स्म मेय मुंगे। म सा या सोमवे होकिरिके ख्ने प्रोगों के इल्मे काम पार देता है, मौर म पोम पन्ना उपार न करेगा। निमरत करेगा। २ मा -पो इसके साथ ही मेरे को मारे सूना- मेवानी सार मी से मुना देना माई-मबमीन नरी, तीन बाचे।बमाई हानी

ब]
प्रथम भक
देखने सुननेपाम को है नहीं। सी मेरे पास चस्प मा। सीन-बार सारका
मान पाती हो गया। इसके बार मसीको मार नहीं हुई किकामा मेरान
हो गया और पानीममपर चर गया। बस माम मा हा फार मैंने
किननी सुग्रामद की, राय-पैर थे, मगर इना पा रगत पाहा।
किरिसी तग उसे नहीं का।
पूर्ण-मके परके उचर पर पाबो नया परमी मामला पाग मगाया
गया है, सीन!
२०- पाचा, वही मप डेके पोरकी मामी बरिला है।
पूर्ण-चिन पावो नीमममें सरोदरी दुई बमीन है। इसे वो कोई छोड़
नहीं सपा मैया।
२ मा.-न छोड़ सके। इसकी भाषा मी में नहीं करता। लेकिन बड़ा
वाम रो दिन पर ससुर होगा कि नहीं। इससे प्रकि समन यते
ससुरके गु-दोष योगात मा-समी सुन रहा ।
१मा.-बगीच मुसमीप मकान मी तो सुना है, वा हषिमा
केना चाहता है।
पूर्ण-मनामी में नही तो सुन रहा मैपा ।
२मा.-ऐता हो वो इस परच की दादीतो एक सफेमें उबाल
से, तो मरे दमी बन मिटे ।
पूर्ण-ने रो मैया, हने दो। गरके पार पो होकर ये सब बातें
करनेणी मरत नहीं । को कहीं मुन रूगा और पार कर देयतो मेरी
चान नहीं क्पेगी।
२बा-ना पाचा, मुनेमा मोर प्रैन ! यहाँ तो मी तीन भादमी है।
र पाने रो पेसाबावे, रेर दुई। पम्मे, मग पर पम पाव ।
पूर्व- पमे मया । सुमार, रूपारे बाद मेरे माँ बरा आ
भषिक समय नहीं है-म योसेक समारनी पड़ी।
१.-रूमाके बाद ही आऊँगा पारा।ये, अब पर पमबार ।
(सान थान)

विजपा [स्पीय सृतीय श्य स्थान-सरस्वती नाम मिनारा [पए ऋारे मन्ती शी सेष मसती नदी है। उसो पूसरे किनारपर मा-बोका मैदान है। परके नारेपर व्यामों भौर हरिनासे मरा हुभा पना अंग है। गली मार दिया गावानरी उपर छोटा-सा सोमपना पदोनों किनारोको बौना है। नबीसे एक पारदीगो भीवर होर रिपका गाँव कपी गई।इन सब पीराम माय नरेनके यो पो मकान हिला मर विकाई देता है। मदीये किनारे बैठा हुमा नरेन्द्र पसे मी पम्मने मावि भौर मनाई सिंहमा प्रवेण] रिया-इसी नाके किनारे ही विपका हैन मावि ना---गौ मात्रा विम्मा-ख गांवमें बगीय वन पर है। मार्ग हा मारी, पाल की इमारत है। विमा पुम्पर कर शायद नम रोग बरा रोवा: [विमा पुग्ने पात बाती है। नरेल नगर उत्पर पर पाती है। नरेन-मारए माइए, नमत्पर । तीसरे पार पसामने फिरनेके लिए या नरीम मिना पुरी मगह नहीं है। लेकिन भाव-पके दिमोमें मरिमाला मी कम नहीं है। इस बारे में असर किसीने मापको समपान नही दिया। रिक्सा-नहीं। लेकिन मलेरिया भारमी पापानकर मामन नही परवा में प्रसि पिना बामे यहाँ भाई किन माप हो पानसार भनी किनारे ।दे, कौन सी मम मापने की। नरेन-(पुक यूसरे रसे) से और ग मी दो परेमें सिर्फ से मिली । मी नही पोवार । सेपिन समन टो पिसी पर भाटना है। विना-लेकिन मपने मामा पूगाके मरम्मपर सहाय न करेप पान पाते रिमाप! इन दो से महमियसि दो उनकी प्यासा नी।

एस]
प्रथम मक
मरेन्द्र -(सम) ना। लेकिन एक तो मैं मामाके पर नहीं माना,
दूपरे उनकी सहायता करने के लिए भौर बहुम् से खेगा-मेरी पस्त नहीं है।
विण्या-मामाकपा नहीं भाये। वो शिर पहों का रावे
नरेन्द्र पर मेरा दिमका गावमें है। इसी बाँसके पुरसे परों पाना होगा।
बिचमा रिपका । यो माप नरेन्द्र बावने बानते होगे ! ता सकते ।
किया से मादमी।
नरेम-भोर-नरेन्द्र ! उन पर तो मापने भफ्ना हम अपने भि
लरीर स्मिानमा उसके बारेमें सौरसार सेनेसे क्या मम! मिस
यससे मापने पर मिया , सो मी इस वरफके सामोंने सुन
मिा।
विक्या-पायद इस तरप पही बात फेम गई है कि मान एपदम है
दिया गया है।
नरेद्र-कैम्नी ही चाहिए । बगीप बाला सर्वस्व मापके पानी
पास मिलारी क्रिो साजेपर बंपक था । रुखने रुपए पुकाना उनके गाने
पूते प्रत नहीं है। मौर फिर मिपाव मी बीच गई है। पर प्ठ सा और
पानवे ।
विमा-माप सन बब उसी गवके आदमी है, तब सब नबर भाप
रोनी चाहिए। मया, मनानरेन्द्र बाबू विमफ्तसे नामवरीके सार
गम पास करके माय है। किसी भी जगह मैपिटस अफ करके, मौ
कुछ समय मापार, कला या प्रपत्र नहीं बुभ सम्वे!
नरेन-मा मन नहीं । सना है, प्रेरिस भने का विचार
नहा है।
विना-दो फिर क्या करनेका विचार है। इन सब करके पिरामर
गये मोर पर उठाकर गौ सौखी। अधमर पर ही भय स्वारे
सम्ता एकदम मारा है।
नरेन्द्र-मपदा (मि) मेक समता मापने| पान पाय है, यही
उसन मन्स रोग है। मार मुनाई पापामा सर्प पिरिण करने
मपेपा ऐसा कुछ भाविकार र बाना चाहता है, पिस्त पात मेयोन उफार

विजया [ीय । पोगा। मुझे सर मित्र है इसके लिए यह मेहनत भी ना करता है। विमा-भयर का सबब बन पड़ी पत है। किन्तु पस्तार पले पाने पर पा पास से करेंगे। सब वो भी ई रोजगार मनाही पाहिए। मण, भाप पा निश्चय ही या समितिमा करनेो मारव पहाके मेगने उनको समाबके बारर देवानी। मरेलवे निश्पनी गोंने उता बाप्पर र रखा है। मेरे मामा पूर्ण व उसके भी एक तरसे मातमीब है, तो मी पूरे रिनाम या उसे अपने पाँगुस्मनेका साहस नस पर सकेमि इससे उसमको पनि ना हुई। वामपने मम-काव, इना पता । उससे एमप स्वता ta विना मौर परसे बहुत कम बाहर निकम है। मा. माची, जमा होने को है पर मैटव राख हो वामगी। नरेम-ना, गावो की बातों में समा दो भाई। विषया-पो या महिए कि पर पण पनेपर किसी भामरस ना नातेदार परमें मी उनके माभव पानकी माण नस। नरेम- विही नहीं। पिथपा-(धरमर पुप राम) या तो किसीके पास ना हो मर्म पार-नोवो इसी महीने मन्मे वो उसे मान र देनेश नमेरित दिला माहै। भोर मोरे होय तो प्रमसे कम मुझसे ही एक पर मिमनेकी मारता नरेन्द्र- होता है कि टसे परत न हो, मया रोष हो इस मम क्या है माप को यमुझे उस परम गने नहीं देता। शिवा-हमेशा के लिए न सही, भौर कुछ दिन तो यने रिमा पा सकता पनि बान पाता, मापसे नये विशेप वान परवान है। मो, पोमा नरन-किन रेसिप, पर शाम होतीमा रही। रिया-माये। नरेन-भाये ! माया कि पारने प्रतिभापमस्बा भाव है। रिया-इसके माने।

प्रपम मंक नरेन्-माने पाकिस्पा-ममें यहाँ सरेराम गौरक मलेरिया तो मफ्नामे दिना मारन मन नहीं मानव । विषणा (सिर)मोह, मापात है। लेकिन पर हो आपका मोहै। बान पाता है, मटेरियाको माप भपना मुके। लेकिन मुंह देकर को ऐसा नहीं पान पस्ता। नरेख-राम्ररोगो परासर पर सेना होता है। पिक्पा भाप गाय क्या! नरेन-गोगटर पर दिन भर काय गत्य ।। विषया-टो आप बस पड़ोसो ही नहीं उनके मरसायन मी है। उनके सामने दो बाते में महात्मे सब आप उनसे बार करेंगे- क्यों न! नरेन-सिकर) या पगा। यही वो कहूँगा कि मापने का किया । एक भपदार्प मौर अभामा मादमी है। आप का चिन्य नरें-नातो पाव पुपनी बातमी मेग उसे ऐसा मते है। नये सिरेसे पाने की बात नी-रो ना पत नरी है। मयर , पनेसे सासर किती दिन आपसे मिम्ने सिर पा सकी। रिखमा--मुमसे मिकर सनेमा अमोगा!-लेकिन उनके समपमें तो मैंने जैक ऐसीपत मापसे नहीं कही। नरेम-न कानेपर मी, काना चाहिए था। विवा-बाना पीए पााो। नरेन-कानेमें मिसन रहने परता, विवा सर्पल वा निक पाय, उसे हमी ममागा पाते हैं। मग मी करते हैं। सामने न का कोपर म पीठ- पौने पापा क्या है? विषया-(सर) भाप तो उनके बो मरछे मित्र है। नरेन्द्र-(पनि रिस्पर), ममिय मीमा बा साया है। यों तक कि उसी मोरस में मुर ही मापसे सिरिय करता अमर पर न गाता हिमाप एकमो मापसे ही उसके परोसे रही हैं। रिश्या-मा सा भाप भन्ने मित्र एक बार विहारी पूरे प्रत बाने यि नहीं कर सकते। --

[स्टीम
नरेन-किन मनके पास क्यों।
ाि-पही गावाला पदावन प्रम मोर देता है।
नरेल-सो में माता पिन अनके पास पानेसे दो मम नहीं।
समाहो यो। म मा पता । नमस्पर।
[ नरेन्द्र पुल पार रोममा मीम मास हो गया। दिक्पा उसी मेर
कार -पान मात्र
विमा-(पौर मनमे भा)-कौन है, सो वो नहीं मानती
बिनके यहाँ पूना ही की, मी मानने हैं।
(रासनिमारका मण)
पता-माको बोध हावा ये । मासूम हुआ मम नाकी
परा यम्मे भाई मसी पार-उसे हमने नोटिस दिया, मोर फिर
मी उसे चारिस परने भो, तो पाश्रम मारी और प्रमाकी नगरमें कैसा
चया, परपोबरा पोरकर लो।
विवमाएर बिडी मिरर उनके पास मेय वानिए न । मुझे निश्वर ही
बन पान मपमानके रिसेप माने हार
महरते।
पर ~ (मेनके सहरमें ) रेक्ता मामानी भावमी है। इससे
मम्मान मिल पर बरकर हममेमोरी उपसार उसे कि जितनी
महरबानी परेपा भी परन ।
सिना (मर भारसे) में पोप नहीं है पम्।
मपादित दवा परमेमे मनो अमही।
ज-(सर) ये, मनी पर म पानी को हमे
शि में मो रामा । मैने दो ही रिस्पना पाहापारिने
यो का पारा पा, पान पारे क पा मोर न किसम कोपर
भाग-धम्म समहरदोकाना चाहा था। एक दिन मेरी बामसार
मोरमारे विवादार सबमिनार मा ऐनी बनाव में भारी।
स दिन हरि मेरे लिए इस मुद्देम दिन प्रपोली ये।

स] प्रथम मंक (पिपिहारीन प्रदेश) [विस्मसमिधारी विमपती पोसाकम है। हायमें प्रेय-सा पंग है। मस्वन्त मस्त मात्र है। मियम.म सोय यहाँहो!-, अभी तक पर पानेका भरमय नहीं मिस्म । मासे मोरने ही मुना कि तुम लोग नदी किनारे एम्ने आये हो। मपर यम्ना । श्वना का काप-मार सिरपर लेकर मादमी सस्पमें समय ा सस्ता है, मैं मही सोय है। , मैं एक रासे सभी काम प्राका समास पर भावा। फिन गोगोंको हुन्चना होगा, किनकी उस शिनके कामा मार खैफ्ना रोया, सा क्या करना होम्य-सत्र । रास - का क्या हो। इसी बीच में यह सब से कर गम तुमने । शिवस.- स । मुझ सा नहाने लानेा हो या शिवबा, तुम निमप ही सोबती रोगी मैं इतम दिन नाराज होकर नही भागा। पचपि मैंने कोर नहरी रिमा नि भयर करता मी तो या सामन्पाप न शेता। रान-माईसिंह, घस्ये भैपा, परा माग छ र क म आऊँ । बहुब रिनोंस नदी तरफ ही नहीं सका है। नाई-पतिए हुए। (रासबिहारी भोर मासिका प्रत्पान !) -ग्रम मयेसे पुप रह सकती हो; फिन्तु मुझसे नहीं पा पाता । मुझे मफ्नी रिमेशरीधप। एक रिए अपघ्र मार मिरपर देर में किसी तरा पुर नहरी र सम्मा। हमारे मन्दिरको प्रतिग इसी पो दिनकी पुहिमोंमें होमी । सब तप हो मरा है। यहाँ वक विनिमयम करना का मैने नही पापी रखा। भोर-स सबसे कैसी पो र मुझ परनी पड़ी है। खेर, सब तरफ कामस तो एक तपसे निमित हो गया। कौन कौन भाग, पामी नोट पर अपा पदम देना, बोको हम पापान की। [मालेलार उनले मीवरसे या पर निकाष्टकर विवपाने देता है। विमा उसे सदी भास है, किन्तु उमड़ा नुन देगार पान पा किया बहुव सिम हो गर] विसामा-मामय स्माममा स्थापम्पों शे।

ર विरया [लीप विमा-मैं पापेच रही कि मपये उन मेयों निमम रे मापे, तो उनमो भाषामा बामगा। मिमम.-इसके माने। मिसा-मन्दिर स्थापना के सम्बप में अमील कुछ रिपर नहीं कर सीम मित्र मोर उससे म्प भक्ति मेषसे विमो मुला मात्र मानक हो रहा, किन्तु कठके स्मरणोप समाप्ति समय पर योग- वियत.-सके माने याममे मा सोनामन पुस्सिोंमें पर काम न बिना बासमतो पिर कमी किया पाया। वे छोगो दमारे- पामा प्रवे-पा नहीं मा सुविधा होगी मी मार वर्ष होंगे ! मनरिफ नही हुआ इसका मकसब या है, का मुने । विता-(बाम सर ) गाँजामन्दिर रपापित करने की प्रेर वर्षता नहीं है। उसी रवाफ्ना नहीं होगी। शिल्पस-(छ देर चमित हार) में जानना चाहवाम पवार्म ब्रास मरिमोहनी। विमा-(विपतके मुसी भोर मुफ्पाप वास्ते पर)पर बारप, बासि भारत होकर मोटे स्निा भापके ताप इस बारेमें 1 महीरो सकेगी। समय इसे रामेनिया पिस -महोग तुम्हारा संसार सागरे, यह पानी हो। पिका-रन परेमें में मात्र से बात पसी, मापके साप नही। मित.--म ग तुमाय बरंगे तो मा रोपा, बानदी । शिमा-नहीं। किन्तु भापर अपर विम्मेदारोकामास इस्ना पति २, तर मेरी पस न पन पर मी नि निमंत्रित करणेमपहरण करने बिम्मदारी मापने 4 टनका भार भाप ही उठाइए । मुतसे उपमे दिव्य नयमनुरोपनीधिएगा। पिता-मैं कामता मनमी । काम ही मुझे प्यारा, हिमा मुझे पानी-पापार पो विमा! मिना--(पठसरम) मध, मे नहीं भूसंगी।

मयमभक
२॥
मित.-(माया चीपर पर) -विसमें दम न मुझे, पही में देगा।
[सिवा कुछ न कसर बानेन उपक्रम परवी है।]
पिता-मया फिर एक्ना पमान किस काममे भागा, मु पो
सही। उसे तो सी पड़ा रहने नही रिमा वा सवा!
विना-(रि उठन दमासे) मेकिन यह तो ममी का तन नहीं
हुमा किया पर लेना ही होगा ।
मिस.--(प्रेषके मारे पोरसे बमीनपर पैर पकर) हो गया है, गे
परम हो गया है। मैं समाचके मान्य मक्तिमोग्ने मुझन उनका मपमान
नहीं कर सगा । वा पर हम मेयोको चाहिए पर मरिरकी स्थापना
करके ही मैं माया । पामो ममी बलाये देखा है।
(रासबिहारी और भाते है।)
रिस -मुना पानी, वियपा प्रतीक या ममी नहीं होगा। यह
मम्मान---
पस.-नरी होपा पा नहीं होगा। कौन पता नहीं होगा।
पिएस.-(गमसे दिखार) परावी कि मन्दिरकी प्रतियार
समप नहीं हो सकी।
स.-बिया कावी. किन होगी। कावे सा हो। ममा चर
होभो मैपा, स्पिर होमी। किसी भी भारयामै मस्विर मा उमाना न रोना
पाहिए । पाठे सब मन । भा, निम्न में दिया गया है। दिना
मामात यावेमा भैयमा नहीं पाया-मसमा।
पर रिन मी मधिक नहीं है। करना है तो इसी बीचमै देमारी पूरी करनी
पाहिए । इसमें दो सदेह नहीं हैपये।
विम्या-किन्तु यह मगर भरनी इसे पर छोरम न पसे गये, वो
किसी मामा मरिरकी स्पाफ्ना नही हो सस्ती का पा।
रान.-खेपासे पर उसनेी बात बिमधीकारहीदोबेट पदीय
बोध! उसमे वो पर छोड़ दिया है-उमने मुना नहीं।
[विना विपकी मेर पेठ पुमाकर की होती है। उसके होठ पने
मारे परमपनो स्पट करके समाकर प्रवी-]

२२
विजया
[वीप
विण्या-मेगा कि मपो म सगोंगे निमवसरे माये,
सो उनको मासा का बासया !
स्मिता-लेमाने।
शिमा-मन्दिरकी रमापनाले समय में भी इक पर नकर
[वीस किमय भी उससे मी माविकोपसे मिलाने मुला मा मनाना
हो उठा, किन्तु कठो खस्ने परमवाप्रति संवत करके गोया-]
पिस-रे माने सामने क्या सोचा कि इन सिमें
पा कम न पिया बानो फिर कमी दिसावा सरेया श्रेग तो मारे-
पापा पते-पानमा सविधा होगी पमी से मार
कदार्प होंगे। मनस्पिर नही हुमा इसका मसम्म क्या है, बाम ।
किया-(धीमे स्वाम) महाप्रपमन्दिर स्थापित करनेडी मोर सापेक्षता
नी है। सौरपामना नहीं होगी।
बिमस(१० देर तमित एकर ) में बानना पाकिम पपार्य
पास महिम हो कि नहीं।
विवा-(जिसके मुतम भोर अपचाप वालो पर) पर पाए, बरसे
सन्न होकर गोटे बिना मारणे साप रस प्ररेमे पास नहीं रो सके। इस
समय से हमे दीदिए।
बिम्पत.हम छीप तमारा संसासरे सते, पर पानी हो।
विना-ल परेमें में मात्र असे की, भापके नाप नही।
विस.म सोग तुम्हारा स्वर रंगे तो सा कमा, पानवारो।
सिपा-नीति भाप मगर विम्मेवारीका बासरना बर्दस
१, का मेरी न रहने पर मी किन निमंत्रित करने मपहरण करने
शिम्मदारी मापने की उना मार माप ही उठाए । मुझसे उसमें हिरण
यमन मनुरोधन धिएगा।
मित.-- मममी भादमी प्रमही मुझे पारा, शिल्पा
मुझे फार नही-पापार रस्चरा
सिम्पा-(तस्पर) मम, मैं नहीं पूरी।

प्रयम मैक २५ रिपस.-(प्राया पीकार करके) हाकिसमें हम न भूसे, यही मैं देगा। [सिमा कुन पान पानेडा उपक्रम करती है। विकास -अशा फिर इतना पड़ा मकान पिस ममें मापेमा, मुनें वो सही। ससेहोसाठी पारने नहीं दिया था सकता। विवपा-(सिर उठानादमाक्से) मेशिन या वो भी एक ल्प नर्स हुभा दिपा पर सेना ही होगा। सिमस.-(पके मारे पोरसे पमीनपर पैर पटकार) हो गया है, गे बार सर हो गया है। मैं समायके माप म्पक्तिपोने शुमार उनच भपमान नहीं कर दंगा ।पा पर हम सोगों में चाहिए हो-पर मदिरको स्याफ्ना करके ही में मानूंगा । या तुमको ममी मनाये देता हूँ। (रासबिहारी और मावे है।) लिम.-मुना पानी, विरामी मह ममी नही होगा। मह भपमान- पस.-नहीं होगामा नहीं होगा।ौन करता है कि नहीं होगा। ति-(ॐगमसे रिखाकर) पाकाती है कि मन्दिरकी प्रविष्य इस स्मर नहीं हो सकी। Tw-बिया काही किन होगी। कावेरा हो। मम्स मर होमो मेवा, स्थिर होमो। किसी भी भारपा मस्बिरमा उतारस्म न होना चाहिए । पासे सा मुन | भज, निमबरे रिसा गया। दे दिया गाभरणी मातयह ते मा मेयमा मही बाबा-असमय है। पर दिन भी अधिक नही है। माना है वो इसी बीचमै देमारी पूरी करनी पाहिए । इसमें दो पर नहीं है बरी ! स्विमा-पिता भगर मानी इसे पर छोड़कर न बसे ममे, वो पिसवरह पर मरिरकी साम्ना नहीं हो सकती अन बा। एम -पप्रसे पर होममे बात फिरकी का सीहो मेये। पदीय समय उसने तो पर छोस हिसाब-गमन सुना नही। [विमा नियती मोर पीठ दुपार सड़ी होती है। होठ पने माक्रमाने सेक्स करने, समाचार करती है-] विजया [स्वर मिक्या-ना, मने नहीं सुना किन्तु उनके सब सामान पा एमा! पर सब से गये। सिमस.- (मी मुद्रामें)ना है, सामानके नामपर गनेकी दामनमें उसकी एक टूी चारपाई पी। बान पाता है, उसके ऊपर या सोमा कप्ता बा। मैं उस पारपाईच नियम र पेसो नीचे रामदेने माझा कर सकते गया था। आब स्टेशनपर खरते ही दरबानकी पानी मुना कि पाी साहेनेके मिया भाप स्वेरे फिर मापा । र, उसबो कुछ उस पर मे मुझे कोई मापचि नहै। प्स -पही तुममें योग विकास । मनुम्म चाहि सा अपराधी हो, मगवान् उसे पाहे कितना दम दे, हम ससकेसमें दुसित होना, समवेदना प्रार करना उरित है। मैं या नही रखा कि तुम पगमें उसके लिए प्रमा भनुभव नहीं करते किन्तु मेरा पना पही है कि पार मी उसे पक करना तुम्हारा कम। मने मुझसे उससे एक बार मिल्ने लिए क्यों नहीं मा रेल्ता-भार ३०- विमस – उससे मैट करके निमयान देने के सिवा क्या मुझे भौर कोई काम नही या बाबूरी माप मी न बाने कैसी भावे करते है। इसके सिवा मरे पहुँचने पर ही तो गाय धाव अपना सफ पियरा, मशीन पुर्षे मोरा जसमटकर बिक गरे । किमया सार है-भौर बा! परमपदार्प रंग (Humbus) मीना गत –ना मित, तुम्हारी इस तरी बातचीत में क्षमा नहीं कर सख्यभपने इस म्हरो पिए हुमको समि। होना सहिप-पमावाप बरना चाहिए। मिम्स -विमधिए-बरा मन तो पायलमें पुलित होनकी, पराना हेच निवारण करने की विष्ठा मैंने पई। किन्तु यो दाम्मिा परपर बरकर मपमान रबाब उसे में माफ नहीं करता। इनी मणदा पा बनाए मुसमें नहीं है-मैबरामावमी ।। रात -परपर पार मोम तुमारा अपमान कर गया। किसी पतम काए। बमीप बडे मपुत्र नरेम पानी दीपपगायी। -

प्रथम मंक
६५
यह एक दिन न विपाके परमें बैठकर मेग मपमान कर गये ।
तब में उने पाचानता नहीं था, इसीसे-(विवयाको रिमाकर ) यह
मादमी इन मी अपमान परमेसे बात नहीं आया। तुम बोग यह बात
पानते हो। (मिम्मासे ) पूर्ण बाबूषा मानमा पार सिने अपना परिचय
रिसा या मोर टम दिन तुमार क अपमान पर गना था, बानी हो, पर
कौन है । उस समय तो तुमने बहुत प्रभप दिया था। वही नरेन्द्र है। उस
एमप मगर यह मपना रपा परिचय दे देता-तमी में काता कि हो, पर
मव है। ठमबहीबार
निम्मा-गही नरेन्द्र का है। दरबान मेवर स्नीको मापने परसे निक
दिया है। मेरे ही नामसे ! मेरे कर्मको पुकामेके पिए ।
[प भोर पोभसे पैसे या योगर घर गई।]
पस.-(पिमुद्र माइसे) मा और स्पा दुमा !
विसमस.-सा में क्या पार्ने ।
रात.-अगर बानते नहीं हो इतना मपके पर कानेकी ही म्पा
वरूण थी। पुमसे ही मुनरो नया बगशेणके बेटेके उपर बोर
पार्दस्ती नहीं पाती, तो मी-
निस -इवनी पाम्पनी मुझे नहीं आती । मैं सभी राइसे पसना
पसंद करता हूँ।
एम. -पही पसंद करो। सीधी र वही एक दिन तुमने अच्छी तरह
रिस्प देगी।-सीधी या सीपी राह।
(कात प्रवेगार साप मरमान।)

द्वितीय भक प्रपम श्य स्थान-विषपाठने कमरा [रिक्या बाहर किती भोर पकारक वा रही है। फिर उठकर विरे पास बार उसे हापो रेसे पुस्तीका एक प्रवेश करता है। बाल मंगे क्दन है। मोतीक में नाt, शिसे साना भी लठम नरी एमा। परेप-मुझे गुल रम बीमा। विवा-गाकर हाया। परेप-समासादापा। रिम्पा-पोती तो हिने हे परेश न देख पा रही। परेश- नमाने दी। पिया-पाचोवी और रीमेकी-सी मही किनारे! (मपनी मामी मगर चौड़ी किनारी रिमाकर) एसोनिारी तसे पाहिए- बानी मनमानी। परे(गर्दन बिमार सहमति प्रर पवा भा) मा 50 में नरीमना नहीं बनती। मेमापोठी सिने गरीर दी। विमा-मैने भाप खरीदी है। परेश–भापबरीशराम मिलने पड़े। किसा-बसर मारे! हेपिन रेशम ऐसा ही एक पोरी से यूपी मगर- परेप-हे रोगी स] रितीय मंक २७ विषमा-हे पूरी, मान त् एक पर मेरो मुने। लेकिन तेरी मा पा मोर कोई न बानने पाये। परेश -मा पैसे पामग्री । तुम प्रो ना-मैं ममी मनेगा। विमला - दिपका पाता है। परेगही वो यहाँ। कोशेशी विसतियाँ लोग्ने बहुमा रिपमा माया करता हूँ। विषपा-पोससे पहा मान सिमी,बानता है। परेप-हौ, पगनोता है। यही वो उस साल वापी पीर से पाद पो प, उनका । ही वहाँ गोविन्दकी मा-या की दुकान है मोर सीके पास उनका पत्र मकान है। गोबिन्द क्या कहता है, बानवी मानी पता है-पीने माँगा हो गई, म माथे पैम (प) के ढाई मा पता नहीं मिलेगे, मम फिरो गण्डा मिलेंगे । हेकिन तुम भम समूचे एक पैसे मगायो तो में पार गगहा ल सकता है। बिपा- दो पैसे नशे मोड भयो। परग-रा, इस आपमें पाल एक पैसके पार गरा गिनन ग- फिर काँगा, दुमनदार इस सबमें मोर पाच गपा गिन रे। दे पुग्ने पर गा-माचीने दोजारो कानमें देनेोपरा-सोनउसे दोनों पैसे दंगा-औक हैन! रिया-(कर), तक दोनों पस उसके हापम देना भोर तक पूनरास पूना लि ठा को मप्रनमें चो नरद्रपाबू राव पे-पर मां गये। क्यों रे, मात्र एगा कि नही। परेश-(सिर प्रियकर)-मा, दो मे प्यो तम -में पर पाऊँ से मा। वियपा -( साहायमें पैसे देकर ) नारी हायमें पाकर पूछना भूल तो न चापपा। परेए-ना- [परसर दरोरता आपण दिसापिका ठोस एक इसीर से ही ठा है, से ही परेकी मा प्रवेश परती है] परेणी मा-बान पणा परेको करी तमने मेवा निरिम स्तो।

विजया [प्रथम मा एकरम पर मागा मका । मैंने पुषयमाव ही नहीं दिखा। विष्मा-(सर) भो, परेश रोड़ा गया। वो नियम ही विपा गया माशे सेने । मचानक मुमसे दो पैसे पा गया है कि नहीं। परे मा-हेकिन पारो वो यहाँ पातही मिमते यहाँ पो गपा। मिनमा -सा पाने, वहाँ गई गोबिन्द सम्माई र पावर कुछ मादा देवा। परे. मा-बाबो तुमने किसा उठाकर ठीकसे मने सिर माया- उठाभोगी नही। विच्या -इस समय रामे दो परेपली मा । परे मा-एक बात तुमसे पाना चाहती हैं पिरिमा पनी, मगर रके मारे पर नहीं मानी। विवपासा, रामतो काररमा पती परे भा–कामपद काता पा किया दो मम टिक नहीं लगा । होटे ब उस फ्री मांगों नहीं देख सकसे । रेसो त उर-पमा । परोको मासिमा लानशामा पार उसे ममें एनेका अम्बासया । मनवीरे भने उसे स्म दिया कि पहा अम कम है। ससे दिया मास्के साथ में मेहनत करनी होगी। नहीं तो क्या है रिमा बामगा । मा गाहा हुमा, मम्म प्रग; बार अप कैसे पम पायेगा। दिसणा-(प्दष्ठसे) ना उसे पूरा नहीं पमनी परेगी। मेरे बाबूसे में का पूगे। -हमारे या पोय गुमाप्य करते कि- दिखना-इस नत राने दो परेणीमा । मुझे एक बरी रिद्धी मिना है, फिर मुद्गी। मन तुम पाभो । परे मा-मा सानी Aरिरा रानी । [परपी मा बठे बानेर विमाने सिसक पास पार होकर रेना फिर तुरन्त हो तर एक शिन पापड पैरस निमन्ना स्नेि । पारने बामे पास मरमार पुनरा-] कामीपर-विटिमा एनी। परे मा-- - द्वितीय भक ती सिपा-परेशानी मासे ये मैने हमसे मनेोकर हया वारीपर ममें हर काम न करना पोगा । -हेकिन मेरे बापू- बया-उनसे मैंगो, तुम को नहीं है। अमा, मा पायो । सी मोकपो धूपमें से गये है, ठमे- याउन भभी हमे दो कालीपद । पर पहरी विटी समाप्त किये । मैं न उठ ममी। कास्यपदके बानेफर किया ठकर और एक बार खिायी सोग र भारपर मात्रि पर मायकर महबार मीच मिा। । मापसे बान पावा बहुत ही बच दो ही किसी काम मन या पाती।] पा-(मेपम्पसे) माची। विम्या-मौन। मा-(परमानेके पास भाकर) में यदु है। सा मा सवार मामिन ! विवा--नाही यदुपए समय मुझे भवकास नही है। भाप और जीतमम आइएगा। यु-भपण माली! [विक्मा मनवार पर रही थी। दूसरी मोरसे ने पे नही सावधानीस, पने प्रवेश किया। विमाने उठकर का होम मस्पत म्पन स्वरम न किया- विवा-मनदारने सा का परेश ! परेश-(मोतीचे पाले में लिपापे हुए वाली भोर इशारा करके)काशे एक पैसेकेक. गडाके हिसारसे दिपे। दिया-मरे नही-समने नरेन्द्र बापू पारेमें सामामा, सेक्षा पा-(सिर हिमार) नहीं पाता । कुम्भनदारने पेसमें यणा देनेत्री किसीसपने मना कर Rमा है। प्रा क्या है, मानो मारी- मिनपा-त् मरेम अपनी बात सा पान भाया है, सीमन !

बिजया [प्रपम -- - परे-पापा नहीं है-श्रीपखे गये है। गोषित कर मारे, बारती हो मावी प्रसा, बारा मगेरे- विस्था-(सेवरमें ) बा मम्ने परा गया क्या मेरे सामनेसे | (रिखमा शिर पास बार बड़ी हो पाती है।) परेश-(वार्यो ऐनों दोने हापमें ) इमे सदा पा देवा नहीं मानी। मिरा-(बरा देर बाद मा धुमाल) परेण, मेत् ते वापरता से (रकार निलियो पार हाम्ने माती है।) परेस-(कर) सबसा है! विना-(माधुमारे दिना ) , वा सबल है। मुहको परत नी। परेध-से बाद उसने दिने हो नहीं माची-मने बहुत का। रिमा-गाने रे। मैं सफा नहीं हूँ परेप - मायेत् सेवा-बार बा । परेश--सा भोले का है। (रा उप पार) उन भने मनपारधीसे बार पूछा मानी। रिखमा पाने मधाचा फोन रे! क्या पूछ माण। परेध-पू० माप कि नरेन पत्रों ममे ! [मबुमाते ही विमाने देशा, नरेन्द्र मर मीतर प्रवेश कर रहा है। उसके हापमें एक मोका पास है। से नीचे रखार बार ठार नरेन नमस्कार करता है। विषपा-(मित होकर ) पाप मच पूछनेकी बसत नहीं है।पा। परेश-(मुग्न तर) बाने महापारबी उनके पड़ोतरी परमें रहे 1 नक्ष। गोमि हम्मा पापा झ मरेनगाव तर यही बानते हैं। सिपा-(सीस निर) मारए, पेरिए । (परेण्से) मापन परे। कौन ऐसी बड़ी गली-म हो उसे रिकमा बार बान माना। (परेणी समझ में न भाया पण गा1) नरेन्द्र-माप नरेन्द्र अपूर्व बसपाना चाहती है। पापा नहीं।

स]
द्वितीयक
विमा-(पर-उपर करके)ों, से किसी दिन बान एंगी।
नरेन्द्र-सोपी दरभर है।
भिमा-दस्परके भमयसा कोई साफ पारेमें पानना नहीं चावा!
नरेन-कोई सा रता है मामला नहीं पता, इसे छोड़ दीबिए । लेकिन
मापके साप तो उसका समसाम समाप्त हो गया है। मन फिर सो उसका
पतामाही। क्या भापका बचा नहीं जम ! (विसपा सुप राठी)
मगर इस मौत देना उसके बिम्मे निम्ता हो, तो मी पाकिक मैं बान्ता
सके पास ऐसा कुछ नहीं है, पिसे वह भरा हो सके। अब उसी सोच
करना पाते।
निस्पा-सिने मापसे मामक लिए उनका पता ज्या दी।
नरेल-सरे सिवा भौर साकार होता है, पर वो मेरी समझमें नहीं
माता माफो नही पापान मौर भाप मी नको नहीं पाचानी।
स्पिा- मी मुझे पाचनते १ मौर मैं मी में पाबानती है।
नरेन-पा माफको परमानते हैं, यह किन माप उन्हें नहीं
पहचानती।
विषया-कौन प्रखमैं उनको नहीं पायानती।
नरेन-काता है। मान मीगिए, मैं मगर मापसे कई कि मेरा नाम
नरेम है उसे दो माप मान मी ना'नकासगी!
बिना-ना पो में मनमुर ही नही पसगी
मोर मापसे मी सँगी
किया सत्प पात भापको भी बहुत पहले ही मुप्से पर देनी चाहिए थी। (नरे
मका पहरा खर गया भौर पर पर) मपना पौरन मोर परिचम रेकर
मपनी भारेचना मुनना और मामें को हर मुन्ना मा भएको एकही
मत नहीं गन पाय नरेन्द्र पादू! मुझे ये पान पाती है। पिन ना ही
मुझमें मोर माप मचर है कि हम मा एमाधी हैं और भाप लोग हिन्द।
नरेन-(सनिक धुप एकर) मापके साथ भनेक प्रकारकी भावनाओं
बीप मेरी मानी मावना भी मास पी, किन्तु उसमें मरा भी बुरा
ममिमान किन पाभासिरी दिन परिपप देनेका एरा मी मने किया

१२ पिनया [प्रयम हेकिन न पाने करो, पेशा हो नहीं पाना । मगर इससे तो मापकी कोई पनि नहीं हुई। रिक्यानानि तो आदमी पिसनी ही पकी हो सठी नरेन मान् । भौर मगर हुए तो वह हो हो गई। या भाप उसे पूरा करनेश्न कोई उपाय नहीं कर पायेंगे। उसे पाने रीबिए, किन्तु बरि इस समय स्यानी आपके नियक परेमे कोर पाव में पानना चावा - नरेन-नाराब होगा ! मा-ना-ना। [प्रशान्त निर्मक सीसे उसम मुख उम्मको ठा1 विवा-पमाप माँ! नरेन-एक दूसरे गॉवमें मेरी पूरक नातेकी एक दुभा मा मी मोगस ।। उनी पर पावर ठारा। विमा-पितु मापके सरकप पो सामाविक माना है उसे क्या उस मौकेग नहीं बान! नरेन-बानमो मही! रिया-फिर मरेन्द्र -(बरा छोवर) उन रिस रेठरीम है, उसे ठीक परके भीतर नहीं कमा बासमता भौर मरी एणके बारे मनकर उनके सामने भी शायद कुरिन मरे मरनेम र मापत्ति नहीं की। मगर हो, पर और कि भषिक रिन उनके परम गरम स्ने काम नहीशमा समता । (प पुरराकर) भयम, सच माए,पों या फ्ता समा रही मी माप ! बागा या छ भौर ऐना मा निमम है। (विपा पेपर मी पनी समती) पिडाका मौन गम नही पुराना पारा १ फिना सत्य प्रामापसे कि भपने नामस पालिसी मोरके नामसे मेरा F० मी ऐसा नी बिसे देगार में मारने पर रेम। सिर्प पर माइकोकोप (Aleroscope) यामगुपीतमपंच है। इसे कमरे ठियेचा सा, पपद सेकसी र भौर किसी पार पानेमस हुममें । मुभाती मी शास्त बाव खराब है। पाक किसाना-पीनाक-(पिम्पा मज पुमार दूसरी भोर रेली राठी) मा करके मगर समय दीपिए बीघ्र पार किनारो, मैं उसे पस्ने नाम सियनवामिपा । मरिममें रितीप मक ३ - उसे पुरानेत्री प्रापगसे पेय पाया । आप रासबिहारी से कम करेंगी पोपा इस बारेमें मुझपर और रणव नहीं गठेगे। वित्रमा-इस समप ममग सीन बानेको।।मारका भोपन हो गया। नरेन्द्रों, एक बरसे हो ही गया है। कहाच पाने हिरो पना हैन राइमें साचा, एक बार पाप मिकता वाऊँ। इसीसे एभएका पर। विवा-हेकिन मापा मुंह देखा तो मान पाता है कि मापने ममी मोबन नहीं दिया। नरेम-(सकर) गरीब-पुलियोना चेहरा ही ऐसा होता है कि उनमें भोवनी तृप्तिम दिन साबमें नहीं सिम्ना पाहवा । भाप मेगों के साथ मरा मम्वर इसी पगइपर है। रिम्पा-~सो मैं बानवी ! अा आपके इस मारोस्कोपका मस्स किसना है। नरेन्द्र-सरीरनेमें वो मेरे पाच सौस सकि रपए एगे पे टेफिन मा माई सो-रो सो-मी मिठे सो में दे दूंगा । मिस नवा है। विजया- इसमे कमरेंगे। मापकोझ्या मा इसकी पसरत नहीं रही। बिम काम भए मिया था पाको गना। नरेन्द्र काम । काम तो कुछ मी नहीं हुमा । दिगमा-मुझे अपने लिए यह मान खरीदनेत्री हुन दिनोसे rat, किन हो पूरा नहीं कर पाई। भोर खरीदकर ही पा रोगा। ममता छोगार चम्म मार, यहाँ इसे सिलानेपास्य कौ पाऊँगी ! नरेन-में सत्र सिम्बार पाउँगा | देखिएगा ! [रिस्पा सम्मतिली ण न ऐसार मारलोप निमसर पर प्रेम सिपाके उपर रखकर फस ठीक करके प्रेता-] मरेनू-माप इस पेपरपर बैठिए, मैं ममी साखर समवाये देता है। पिन स्पेयोंमे हर मीठम पप (सुदधीन) पनामा परिरप मही प्राप्त हिना, ये पेच मी नही सते किरायेदी पौषरे मीवर चिखना बड़ा विमप दिया है। मा सादर (Surds) यान ही स्पर। बीचमा खिना पहा रिमप इतनेसमें मौल। या देखिए (विषया मागनिरोग परमश सगाकर देखने मदी) यो देख पायोम! ३

विषया
[मपम
विवा- देख पा रही है-पम्म उौ-सा सब एकामा देख
नरेग-मा-ठहरिए-ठारिए मान पाता है-(कम् को कुछ
मुमा यि, माप देसके बाद सिर उठाकर)मा देखिए।बाबोसोयमा
एक-यो मन तो पुपम नहीं है?
किस्सा नहीं। मनीषणे पाते भी भूप माना हो गया है।
नरेन्द्र-गादा मना है। यासे हो सकता है।
विवा-(सिर उठार) मा म से चान सकती है। मुभी देश पोत
क्या नाकि माग रेखी।
नरेन्द्र में सा पही काया। यह पुमा-फिराकर अपनी नवरके
माफिर बिएन इसमें कठिन सा।
[विया मानम माल पार हापसे पैर पुमाने माती है।]
नरेलम्स होकर)मरे भरे, पामा सी-कितना प्रमा
सी-पर क्या पर्वा ११ ठहरिए, मैं और म। (ठीक करके)
मिमा नि देखनेकी पेरावी।]
नरेत-क्यों, मारेकमा !
विषपाना।
मरेन-तोमर देखनेभी पसत मी । मैमे भपने नमें ऐसी मोये
युनिसिसीधी नही रही।
विषया-मेरी दुरि मोगीना माप रिस्पना नहीं मानते।
नरेन-(मदनापळे सरम)माए, भोर मिस र दिप! मापी
इरिए पमुख मोम ना, कि मुझे निश्पप बान परवा भाप
मन नहीं भा रही है। मका हा मोर माप मानमें माँस प्याये, शिर
छपरही।
रिया-पिसने कहा, मैं रत रहो।
मल-मे माता।
विखना-भार हो।

म] मितीय मंक १५ नरेन्द्र--मेरी भूप मममी बात है, पर यह मधीन वो भूल नहीं है, फिर मो नहीं भापको देख पाता। रिमा-माएकी मन सयब है। नरेम्-(विष्मनसे) खराब हैआप बानवी है, ऐसा पार-फुस ( Prafuk रियासी) मारोस्कोप मशीन मही मषिक प्रयोक पास नही-नानी पी मोर इराना स्पर दिखानेवायी। [ना कार एक पर सुर मफ्नी भोलसे देखकर बोचनेप्री मति माता ने ही दोनों मिमपाते है।) विदया-भो । (रापसे सिर सहस्त्पते-सामवे)--न , मिसरा रेनेसे क्या होगा। सींग निभाते है। नरेन्द्र -भगर सींग निम्तो मापदी मिस निकलने पाहिए। विरा-मौर नहीं दोस्पा १ त पुरस्ने टूट माइक्रोस्कोपको मैंने मण नहीं कहा, इसलिए मेरा माथा टींग निकलने बामक है। माह सामा! नरेन (पूती र सिकर)-मापसे र प्रया, पर मीन टी नरी है। मेरे पास कुछ न होनेके परम दी मापने नदोहा में माएको ठगार रूपए मेने बरसा। लेकिन आप घरको देखिएगा। विना-पदको देलार फिर क्या कर संगी। मैं माप पहा पाउँगी! नरेन्द्र-(टीसेसर ) फिर भाफ्ने मौकमा किटेगी! स्पों इतनी रेर घर परेशान किया ! भाव में फसल नहीं पा सत्र। Aबपा-याने ही सो नहींगा किया स्य है। नरेन-(पही बीसकर)ो बार का शुभ किया स्य नहीं है, वोमी मार इसे ट्स को पी। (पने मेरत परके, उठकर सो पोर ) मम पही सही। मैं मोर बाम प्रना नही पाहवा-ना स्या हरिन मी तो भापती तर म नहीं है। भा, भर पाना है। (मीन ससमें रहने माता) मिरा-(गम्भौर भाषमे)-अमी से पाएगा मालो मारन परवाना होग्य। नरेन --ना सीख नहीं है। विषया-सिने का दिनही है।

विजया
[प्रथम
नरेन-किसने मा! भाप मना-मन म सीमा मेरी सी
उड़ा रही है।
विवा-पिन मारने निश्वर होताम बाना होगा । बरा बैठिए, मैं
ममी माटी है।
[विमा उठ पाती है। मरेन माइकोलोसो मममें कर रहे
तिपाईके मीषे रखता है। विमा माप मौवन-सामग्री बाम ग्वी
है। उठके पीछे समीपर पापन सामान किन है।]
मिया-तनी ही देरमै मारने उसे न्द मी कर रिण ! मापका कप
वो कम नहीं है।
नरेन्द्र-( उदास प्ठसे) आप नहीं ठेगी, इसमें ग्रेप माहेजा।
खासी इसोलकरके मरा, इतना री हुआ ! भोर इश नहीं ।
विना-(पी मुम्मा रक्षारा, पर हो सकता है। लेकिन
माफ्ने बो का प्लानि मने लिए-एक ट्यै मन परे मर
देने के मासे । -मम मा सामे बैठिए, मैं पाग बना । (नरेन सामा
बेठारावा ) अपा साहस, न हो मैं ही इसे से संगी, पापो मेटाकर
सेबाना न पोगा। भाप मा साना श्रीगिए ।
नरेन-मापसे दमा करने को मैंने मनुग्रेप नहीं गिरा।
विबरा–लेकिन उस दिन रिमा या, तिदिन मामा हिम सिफारिण
परने मामे थे।
नरेन्द्र पर पूसरे के लिए, अपने सिए नही । पर मम्मात मुझे मही है।
दिया और बाबा हो, न मर आप यह मारोप मेय
नही पा सकेंगे। पर मही रहेगा। मानाने बैठिए ।
मरेन-इसरे माने।
विवा-माने इण् ।
नर-हर शेम) यही में भाले मासे सुनना चाहता है। माप मा
इसे भयन राना बारीमा मौसा परीने भापके पास एक स्वा
पा! माप सो रेसा मुझे मी मात्र ती नातील
बापूच मुहे मी मारके पास ऐन रह गये।

एस] दितीय मंक [सम्मानमा वस हो पाता है। यह मन भुमा लेती है।] विम्या-सीपद, त्लो सो मा कर रहा है। बा, पान 8 भा। (कास्पद पायका सामान रेविटपर रखकर पणा पाता है) अबिए, समान कीविर-अप लाना एरीचिए । ( नरेन गुपचाप गमीर मुलसे साने माना है।) नरेन्द्र-मुनिए । विमा-मनगी फिर । पहले पेग्मर मा थिए । नरेन -बहुत वो ना जुध। विबयाममी तो गुस-सा पका हुआ है। नरेन-इसके लिए मैं या मुलसे मोर न साना बापगा। रिखमा-सो में बानती। भापमें कुछ मी कर ससमेत्री शक्ति नही है।-अच्छा, माइक्रोस्कोप देखना सीमार मुझेमा स्पम होया ! नरेन-(विरमपके साथ) देशना सीलकर स्पा मम दोमा । निषपा-हा पीतो। इस सीखनेका स्पम भगर माप मुझे समाये सके दो में मुर्ण सुयी इसे खरीद गो, फिर पर पारे केसा ही राय भोर रोक्यों न हो। नरेन्द्र भाप न मरीरिए। निक्पा-ममतो महा थिएन । नरेन-रेलिए, मैंने भापो परामोती गहन विलानी पारी थी । साठी मानसि वे नही देत पादे-वैसे उनका मक्षित ही नहीं है। प्रेस इसी पबोरा देताना सका।सपि मौर प्राी विनी भी शक्ति दर में मावाणु प्रपिवी मरमें म्याप्त है उनका या बीवनका इतिहास-- सेमिन माप वो कुछ मुन ही नहीं दी है। बिला-मुनसी नीवेश्या ! नरेन-स्या हुना, बताइए तो! निपा-गा, एक दिनमें कही मुनकर सीपबासा मापने ही स्पा एक दिनमें सीमा सिमा पा! नरेम-महान पर) टेनि माप तो एक मो रसमें मन सी पायेंगी । इको सिवा पासमार सिनाएगा दी मौन !

निया [प्रथम विमा-(शेठ दबार बिर)क्यों, माप सिध्याएँगे। नही होगाम मशीन मेरे सिमा भौर कौन हेमा। नरेन्द्र -आपटेलेकी पारख नही, मोर में मिला मी नहीं पाऊँगा। विवा-सिवाना बना भापको भीब भाप बेच बागे भौर मिसाने को पूतप मावमी आएगा। न हो यो मौर एक प्रम कीजिए । मना, भाप समीर अशी पना है। वही मुझे सिखा दीदिए । रातो मैं सीस मगर नरेन-(उदित रोम) पर मीनरी । बिस बायको स्मोमें ममुप्पो नहाने मानेन मी दोश नहीं एख, ससा सभाप मन नहीं सगा ती दोन मनानेमें स्पा मापा मन मोगा । किसी तय नहीं। विना-खो में दिन नाना मी नहीं तीस मंग। नरेम -ना। भाप वो कुछ मी मन भर नहीं सुनी ! विना-(म माम्मीर्यक ठाय) ऐन F मौ बीस न पानेपर तो सचमुरही मापेपर संग निलंगे। नरेन-(ठहाका मार) नही मापके लिए उरित होगा। पिकपा (मा परम सौ किमत हुए) और मही तो माभापमें सिनामक क्षमता नही, पामो नहीं करते। रेफिन ये नौकर-पारमा कर! मास्टेन क्यों नहीं मम। बरामैठिए, मैं जाटन सममेरे लिए कामा। विमान से उठकर से दबायपरका पाहयता, से दो मामाद मानो मत देकर पर पीछे र गरे । पिना पुत्र रानिहारी भोर मिस्तवारी पानों प्रक्स के पास पकी हुई फरिया चार उनपर बैठ गये । समयके पारेपर से मिनीने साल एकदाप फेर दिया हो, ऐसा बिनी हो पापा।] किना-(अफ्नो मामर) माप माने फासा ! .-(तमी मिके पाप) प्रामग भाप बय पुमा, भाता उस सामनेर रमपमें बैठा था। डेफिन म बावचीतने पर म्मत थी इसलिए नही पुरा-पर पर मादीला !सा पारगरे। विमा-बी भाभाबमें ) एक मारलीप नरे पास है। उसीको बरार पर महासे बहे पाना चाहते है।सा रहे।

मितीय भक
विमस–(गरका) मारलोप ! ठगमेके दिए और मोरे यह बान
स्ता नहीं मिली। (नरेनन धीरे-धीरे पूरे परसे प्रस्थान ।)
राम.-भरे मात यों कहते हो। उसका उद्देश्य क्या है, सो वो हम
जानते नहीं। मपम भी तो हो सकता है। अवश्य मामी को किबोर
हर कुछ मी नहीं मापा सम्वा । हेर मा पारेको हो, उसी में मा
सरत है। दूरबीन होती वो न हो, मी किसी समय दूरको कोई पार पा
स रेसने काम मी आ सकती। (म्म हापमें लिपे काम्मपदका प्रवेश।)
कासमपद, पापा शापर कहीं बैठा या देख पाt-उससे
बाकर कादो पर मधीन हे माय ।
विवा-(रते मरते ) उनसे तो मैं लेनेरेप ।
फ्स -(मिमा मात्र रिसार )देगी। क्यो, उसकी सासरत है?
(विक्या पुप यती है।)
रास.-यह उसके दाममा माती।
विषया-रो कर।
स.-रो तो १ दो सौ रुपए मांगता है ममतसो निहारत-या
सिम्स, अब तुमारे एफ. ए. शासकी केमिष्ट्री (Chemistry-सतन)
में बातो हमने काफी देस्य माम मौर इस्तेमाल किया है-दो सौ रुपए
एक मामोसोपके दाम ! मापो कभी नहीं सुना । प्रायफ्यबा, उससे
चामेक बियप्रभा । यह सब पापाची पा नहीं चलेगी।
विजया-प्रापपर, पामो छम भफ्ना काम ये। चेपाना होगा सो में
माप ही करेंगी।
(सीपलका मचान ।)
स्पिन-(स्लेप करके)मों अपू, तुमने घर अपने अपमानित
माया। टम पापर ममी कुछ रिस्पनेको पी है। (पबिहारी
पुप रखा है) पमने भी मनेक प्रकारले माइनेस्कोर ऐसे हैं, हेकिन
परके भार करनेत्री वात मिस मौनमें नहीं पाई।
विवा-(पिपलकी मोर पूरी चौरसे पीठ करके, एबिसरीसे)-मुझसे
मा पुष्पस बात करनी प्रमबापू।
म.-(भसम मापसे पुषके प्रति कुन प्रयास भरे और मापसे)

५० चित्रपा [मबम ह, करनी क्मों नही बेटी । लेकिन क्या प्रमुख मने उम्सेसरीपनेन बादा पर मिपा। अपर प्रदा कर धीहोठो सेना ही होगा । वाम उमर पाहे बोरो, स्मारम ठगाया गाना मा ठगाये बानेसे बचना ही नसी नाव नही विभा, म ही सी पौष है। सबसे मुकरने के लिए पो में तुमसे कामही स्।गा। विमस - लेकिन इसीलिए मा मा ठग ले चापगा ! रात-बान, वह ठग हे बाब । गायके मोसे इससे भपिक या इतके दिवा मोर कुछ मस्या न करो मिस | कार उसे पार भावे समारनारीसे उपर से गाय । चिया-काना होगा, मैं ही उनसे मॅग्गी-भोर पिसी करनेत्री जरूरत नहीं मा बाम् । यस भिमपम, मी काना पेयै। पेना, मारे नौ, दो सौ परीबाप। निवपापात वा रही। मेगा पूर बाना होगा। माफो ताप माझा बात नहीं हो सकती काम बाबू । एस --मकी बात है मे, ही सही । (पाना चाहता है, लेकिन एकाएक मेकर) हो, शायद हमने सुना होगा, तुमारे मन्दिरके भावी मचा माल बापू माग मेरे ही भा गमे -मनिर-मानमें ही हारे। भौर हमारे समायोसा गम-माप मधि, नि सम्मान के साथ हमने एमा, वे सास समेरे भागे। मम दोनों नो निकट परिक्ति पर गग । मन भौर नितने दिन चिमूंगा मेरी । विषया-(मिमनसे) चरी मागे। मो, मने दो मी मी एना। एस -(रिमबसे ) हमने नहीं सुना बेमै ! णे बान पाया है, बस्दीके भरप मूलगमा म । जापन नही दोष है। निया-लेकिन ऐ दिन पुरियों में ये भी बहुत दिन स्त्री स -पात दिन बाकी है, सांसे तो मैंने सोचा मा एम कर्ममें देर मामा मनोमप्रस-मदिरा रखाम्नाके सिए मन-ही-मन रान रस] मितीय मक करही धीहो, अब कस मनुशान ही पानी है। विनी दी हो सकेसम्म स्मत करना ही उमित है। वे स्टेग मी पर आनेको रादा हो गये तब पुश्पर्म पहा राने देने मन नहीं पाए । वाम्मे पेरी या क्या अच्छा नही किया। विषमा-नरेन पाको बही रान दुरबाही का माम् । राम.-ो हो । अना, उसे पुटकर यही का रो कि दो सौ रुपए ही दिये जायेंगे। विस्मस-रूपए पा रिएकी है। एक मादमीत्री सनक पूरी करनेक दिए दो सो स्पर नाम किये वाग १ तुम रसीके लिए रानी हो रहे दो मा -विस किस न रोमो मेमा । उस प्रगकि पास बहुत है-पने रो दो सौ। मे पार पहरो सो रपए । 40 बिमा दयामयी है। दुली गरीला योग्रेस पर सहायता करनेके लिए ममर देना ही पादती वो उसके लिए हमें मना न पाहिए । अब देर न करी भैपा, भैपरा रोता मा रो-पसो। म सवेरे बहुत काम करना है, मन संझट है। पर पटे।-पडा विषयावेट। [रातनिहारी बाते हैं। विवास मी विबारे प्रति मुख स्टस नामकर पिता पीछे पीछपाता है। विम्या-(सपमा ठम्य कर)-प्रतीपर! [ नेपप्पमें 'माता मानी' पर पानीपरका प्रवेश ।] गिरा-कासीद, शायद नरेत ५ पार की बठ हैं। उनमें उपमा (कामीपद सिर रियार बसता है।) नरेन-(प्रवेग करक) या मर्शन में सायरी सिपे सहारें। सपिन मापका भाग लिन म सगाता | भने भधिक बाते मने भी भापको भुनाई भोर वे भी समयमा गर्ने निका मुख देखार भाष आप सवरे स्टस दी। रिखना भी हिरोजी उमाका नरेनन र नग्न बा । बार सो सरे भाम्ने अपने नाम ही का मुना है, इसन पती कि भाप तमामें ये वेग वा सब कर मय हैं, पर तह उनकी अनषिमर पास में में पद पाएंगी।

४९ पिया [fra नरेन-इसकी सा प्रयासमवा! इन न पायो पारमा म रोमेके परपदी उनको मेरे ससर सदेह हुमा है। महीं तो मेरा सम्मान करने में मम सनी किन्तु यत होती पाही रे, मन मैं परम् । विक्या - या परसोस्या मार एक बार मा समगे। नरेन-म या परमों टेकिन उसके लिए तो समय न होमा। मुझे कम बाना होगा। पहोरो तीन दिन ठाकर इसे मेर में पम पाउँगा। माफिर पापर मुभकात न हो सकेगी। [विपाती रोनों मौतोंमें मार मर भाते हैं। पर न सिर उठा समय, नक बेड पाती है। (अरेसर ) माप म श्वना ईसा सकती है मौर भापको दो मामूम-सी बादमें शोर रो माया है। मस्ति मैंने ही एक पर गुस्से माफ्नो 'मोये हुरि' भारि न बम क्या क्या काराम मा। किन्तु ससे तो नापब न हुई मोर मोठोंमें इसने भी मिले मुझे और गुस्ता मागता । मरि पर मुपात न मी हुई, तो मी भाप मुझे हमेण गार भायेंगी । (विक्या मैं फिकर मार पोध्ने पनी है।) मरेन्द्र पासा! भाप बे रो रही है। मा-मा, माप नही लेगी, वोइसके ए कोई गुम्न न पत्रिए । सममें में सरमुब इसे बेपनंगा, माप पिता नरें। [लना कार पर कामको बोरे धीरे मार हान उठाना पाहवा है।] विमा-ना, में नही गर मेरा है । रमबिए । [भमान मोरधन प्रकारच विमा रेविकके उपर रमे मारको लापो कपरमा सार येन पाती है। पुदि होकर नरेद्र बप र लग पर धीरे धीरे पमपाता।] रितीय श्य स्थाम-प्रामी पर [निमरिका पुरुष भोर महिगए सिसाके गाँव पिपुरकी मोर पोरे पोरे पत्यावर चरो । रगर्मपमें समा एक जप प्रवेश नहीं करते। दो पने प्रवेश कर पा रहे बासे । मोर दो-तीन बने प्रवेश परते।]

स] शिवीय मक १पुरुष -रमा बान ही आचाव होंगे, यह सा पाच होगा। २ पुरप-, पका tी। मुना है, वह सदी कहाँमा परे। १ पु.- ममर उनकी उपासना तो मैं मुन पुडा, कसी हदसपाही नहीं इम्ती। इसीसे वायके गोगेश के यहाँ पिठाक भारमै सामग्री उपासना मुझे करनी पड़ी थी। शरीर असुरप पाइसमा वारप गण उसला हुआ पा । मैंने बार-घर मस्तीघर बिमा सपिन रोगोंने नहीं छोड़ा। पित करमानिीिसी अपार करना इस दीन हीनकी उपामना मुनकर उस दिन यहाँ उपरिपव समी सोपी भागोंसे नर-मार मासूमने सगाना पाहिए किमामुओंकी कसी मा गई । औरतोका तो कुछ पाना ही नहीं, मावक भावेसे वे प्रातः मिस हो गई। २ पु.--इसमें क्या सन्दर, आपकी उपासना पो एक सर्गीय बस है। १ पु. - किन्तु सीप रूपमेसे कम खेसामा गुबर हो नहीं सकता। २ पु -सात प्रमात मानु, वात रपए !बनमाय बरे इस्टेटमें सने कुछ साधारण-सा काम करना होगा। मुना है, में सपर सफ्पे बागपरका किराना योगेगाी नहीं। १ पु.-मते मा । तसर पर । ईसर उनका माप करें। २ पु.- मावा मुना है कि नमाम्टी बाकी गर्म सी मुस है, सी ही दयामयी । प्रसस हो गइयो एक रुपए न मिलना भी विचित नहीं है। १ पु.--एक सौ ! ईश्वर उनका पामार करें। सी अच्छी खबर है। बरा हर पसिम्प, सिम उनी प्रावकाची उपासनामें शमिम रोस। (मरपान) [सर, भोप मोर पारवें महिप प्रवेश । सापमें रो मरिमर 1] पु-परम्पार मगर हुमा वा पना पहायक सनमाये अपूर्व कन्या ही माम्पती है। विममनिहारी मति मुपत्र है। मे बसान् सही उधमीमा । उसमें पेय भगा-मति हैती हो भन्ने पर्मम निम्न मौ । उन भपर स्माषा उौम्मान सम्म माबार तो म कुछ मलिन होगी। भागपत बहुत-से शिपिस विराटे पुरोक दिगमा पात या भाद।

विजपा [द्वितीय ४ पु.-पनमा प्रपूजी सम्पत्तिमा बहुन अधिक। ३ पु.-मपिक भरे अयारी भगा। मिल्नी मीरारी, उतनी ही नयरी । मनमाय पद एकमात्र प्रत्याफे दिए गए येमा हो गये हैं। मै को देवा ,पिस पाकेपमें भाकर पा र गुना हो वाबगा। ५ पु.-किन मुनते हैं, या पुस्ता समापी है। २५ -लमापी नही रसमाया है। उत्पथ या आवर करता है। (पाली महिमको रणरेसे दिक्कर ) मेरी मी दारा प्रतिलि मरिय-रिवार- को रसमे बनमामधीमा विवपाके हापस मौ रुपयोती सहायता दी। उम्म सिरोमिए भौर मी जोरपोन वपन दिया है। १ महिमा-गहमे पे सब बातें करने की क्या बात है। ४ पु - तातोशामिका नियामकी ओर उन गोका बल है। -B ! ममी, मुश्वस्त है। ४ पु.- मुनाल ! लप लप, मंगमय उनका मगर परे । (परवान) [छठे मोर नाव म्पत्ति प्रवेश ५५-ना, भरपूर नहीं है इम पेग मा प1ि-ौं, पनमाम पी सारी बामदारको देसने मारने और समारनेच मार सपिहारी पूरे सरीराससीसमर मरी, पासे ही पहप्त्यापरी भा रही है। गनमालीपासे गावचेमंड गर तामे निग्र भागे ही नहीं। पु-सनकीपमा शाप सा रासबिहारी अपूरे गा मा पच रो गया है। पु.-पापोरीया मम्मन प्यारे पिता पर गर । एकाएक ग्नी मृत्यु न बानी पर भाप मारकर पाते। .पु.-साम्पारसा गांवमें होगा। पु -पारो राम्रारी बाबूने छन दिन माप ही पी।फेरत वही नहीं, पाक पर देय और ना वहीं गारमें रंग । हरके भनेक प्रगमनौर भीतर सम म मेचेंगे, यही उमा पिसारामसे म तिने रन या बाते हैं मातम इतनी बड़ी सादिरसे को रेखामुनी मिठीय मैक नही पा सती-ना होनेका र गता है। यह मफ्ने जीवनकाल में ही पा सामवाब मरो सिमा पायेंगे। ७ पु.--बात ही मो विचार |म्पा ऐगा ! ६ पु.-म दो ही शिबिठनी सादी हो सके। मेरी बानो मन्दिरकी प्रवियरेणय साप भाप मेगकि सामने ही प्रत पक्षी हो पायगी । मह से मनका मार है अपिनाच प्रा । पर-यभूके उपर मगवान् भफ्ना शुम हाप -इम यही प्रार्थना करते हैं। पमिए, इस बागके उस मेरपर मनमानी बापूध पर है। ७ पु.-भाप स्पा पहले कमी यहाँ आये थे। ६ पु--(रकर ) पन बफे। समिधारी बाबू मेरे बहुत दिनोंक पुराने मित्र हैं। उन्होंने अपने पत्र बसावा कि नगीन मन्दिरमा मान मदीके पार है-नही बराफ मेगोके ठहरनेकी बगह मी स्वाद गई। चि विजयात्री इफमरे कि भार सवेरे एक छोय-सा अनुष्ठान उनके भने गनेके परमे दी हो बाप और उसके बाद मग मन्दिर भवनमें बा। • पु.--अन्जा प्रस्ताव है। पतिप, धारद हम मेयोको रेर हो गई। (परमान) तृतीय रश्य स्पान-विक्पारे परमें मापेमहास समय-दिन पहा पार [विमा परी नीचेनी पड़ी दामन फूल-पत्तियोंसे बहुत कमाई पई है।पीचो बोरासबिहारी मोर विमसबिहारी यहाँ हेकि कही कोई मुरि तो नहीं ए गद। इसी समप सफ समाग मविपि मेग एक- एकरके प्रवेश करते हैं। 10-(शाय बोर) सागवम् ! स्वागतम् ! भाव पर पर प्स-

बिजपा
ही नरी, इमार हारा गौरमार गोभी परमबसे पम्य हो गया। भाव
मैं पम्पमाप मेग मातनोपर विरापिए।
१पु -हम लोग मी रुटी र पम्प हुए है रासबिहारी । ऐसे
पुण्यममें एमये बार शामिल हो ना पीनच सौमाम्य है।
म.--रामें सो नहीं हुमा!
सा-मा ना कमी नहीं । क्लेश नहीं हुमा।
एम.-होना भी नहीं पाहिए। पहले उनकी सेवा के लिए, उनके
काम के लिए ही माप गोत्र माना हुमा है-मानव-वाटिके पाम सापके
लिए दी तो माव हम सब यहाँ मा हुए है।
१पु.- स्वति भो स्वस्तिमो ति।
m.-खगया नमाम मी कमा लिया और उनके मादी
माद निमाविहारी-पा अनुमान मीन है। मैं को नहीं -
नीमारी इसे माँचोसे रेकार पुन्प-संबवकर, ही मेरी
एकमात्र मना है। बेय पित, बेटी बियपालो शायर ममोकार मही
पपरको बुलाकर मरोल पूक्नीय मतिपि न मा परे ।
किमत-किन उसे बस पाना चाहिए था। (मस्पान
-सुना है दवा बाबू पहसे ही मा गपे है।ौपादो-
रात.---माम्बन्ध मावे दीयाममुरप हो गये थे। पर माम।
)
१ पु-भावाम।
यसको सही करेंगे, मान्य हुमाया प्यहिए, नाम तेहीमा
मा गये-पाए मारए बाबा,माइए । घरीर तोमा मुरगी।
(दवाएका प्रदेश और साथ ममिमारन करना।)
एम -मेय मी घरीर दुई सय बार बरनी सेसन, न
उनसे (उस देनर) बराबर प्रार्थनारकि मार धीम भारोम
बाय एमकर्ममें कोई दिन न हो।
[इसके बाद कुछ देर तक बरे -मन पम्तेमौर प्रीति-समा
होतामर तामनी मपनी बाइपर बेठ पाते है।
-

रस] शिवीय मंक यता-मेरे एस-सद् बनमामी आप स्में हैं। भगवानने उनले मसमयमें ही मपने पास मुम मिा। मगवानकी मालमय इच्छाफे विस्ट मेरी को नामित नहीं है। मपर या मुझे पैसा ना को गमे है, इस मनुमान माप श्रेय मुझे पाइरसे देकार नहीं कर पायेंगे। हम दोनो भमिम- इस मिकी मेंटकी पड़ी प्रतिदिन निष्ट ती पीमा रही है, यह आमास मुझे हर पड़ी मिस गामात उस परमपरपोम पही प्रार्थना कि मेरी मन्तिम पड़ी मोर मी निट पहुँचा दें। [रागविणारी ती भारतीनसे माल पोकर मामलमादितसे हो पाते हैं। उपरिपत भम्म भेग मी देसाही मात्र पारनवे ।। योग और सप पुप रहते हैं। पस.-पनमात्री भाव हम भेगोंके पीच नहीं हैं-पापले गये।किन्तु में माल मरते ही देश पाकिम सामने सो मुल्य है। [समी मौन र ते इसी तमप रिममा मौर विस्मस प्रवेश करते हैं। घिबयाके मुकपर विपार मौर बेदनाके सिह गहरे भोर भने हो मापे है मौर वे स्पा रिस देखे हैं। - यही उनकी एकमात्र या विवना है। यह पिता समी गुमोदी अधिकारिणी-भौर पर मेरा देय मिसगिरी बोकसम-पाम्नमें कठोर मोर मात्र परमेमें निर्भीकी। दोनों गरसे अमदा मिचाई रेनेफर भी एस-, भौर पर एमदिन मी नि मा गारे, सिरिन फिर माप गोंधी परबरबके सम्पावसे इन गणेश सम्मिक्षित नगन चीक्न मन्य होगा। दया-(भए स्वरमें) भो स्वस्ति। एस -ये रिक्सा, मी तुम्हारे मन्दिरके होनेरासे भाचाप मारूपन्द्र में प्रचाम भो।मौर ये सब तुमारे सम्मानित पूजनीय मतिमि ।। रहेण स्वीकार करके राम स्मोके पुण्य कार्यम सम्मिब्धि होने मापे ।।दन सक्लो नमधर करो। [विमा हाप र नमस्मर करती है।पर पास पम् शिवमाके पात बार मरे होते है।

बिजया
प्पा (पिसाप पार) आमा बेये, भामो । मुस देकर
हीबान पाया है, से मेरी मेरी बार दिनकी पानी-पहचानी है।
[रतना मार सींचकर विक्या अपने पास बिठाते हैं। अनेकदोह
रगार मुसमने भो।
रास.--दया, मेरे सहादसे मषिक समीम बनमासीको पाशुम
-एकमात्र म्याच पिवार-भाल देश बानेकी बड़ी साप पी, कम
मरहीमपरापसे या पूरी न हो पाई। (देर नुप एकर एक भनी सॉस
बार) लेकिन मा मुझे हाथ मा गया है इसीसे अपने शरीरको मोर
देशार इसी भागामी भइनसे मधिक विम्य करने पास नहीं होता।
पमा गाने, मैं भी न की पम्पा मालासे पिना देने की पम्म गई।
दयात्र--(पर स्वरमें)-मोम् पति मोम् पान्तिः !
पस --(विमासे) मेय, तुमार पुम पिता और पारी सती धनी
बननी दोनों पहले ही स्वर्ग सिधार के नहीं वो पाप भाव मुझे
प्रमसे म पूस्ती पावी । जाम को येमे पर दो मार दी बगर इन
पूजनीय मविपियानो रती भागमी मगइनके मानेमे री र एक पार इस
परमें परम् मिराम्ने निमंत्रण र।।
विण्या--(ममच ठसे) माबोधी मपुरे एक सारे मीवर ही
क्या-(भागे मोल नहीं पाया)
पर -मोप, कोये, ठीक कहा तुम्ने ।इना मुझे सपाल
तीन मा। मेकिन तुम मेरी मा मी ऐक नहीं, इसे छे मरेटी
मूर मारी। (बिपा मारम्से मरि पोती है) ही होगा।
मेकिन सावने में मोतो मषिक मिस नहीं है। (पाली मार देकर)
मच्या भागामी पसरे महीने में होम मतपम होया । मापौके
निकर मारी या बात पर सी-भैपा पिपिहारी, देर से पी। मग
एन स्पेस परमें पानी पथपा रो-मारए भाप मेग ।
[पियसालो मेरम सभी बाते है। फिरपाय बापू सबमरमें ही मेर
मात1]
सार--(भिभार) मे विवा!

रस्स] मिसीय मक विस्था-(पोपर फिर मानेको समामाकर) माइए । रसास-सस विपापाले पर स्पे। मिस्मस अबू उनके ठारनेत्री मात्वा मनेके बाद अपने रफ्तरमें पठे गये। मुमसे मी साप रम्ने कहा, फिना मेरा पाने की नहीं चाहा। सोरा, इसी मक्सरपर बेमे विषयासे दो-चार पाकर ।(एक फुसपर बैठम) सही क्यों हो मेमे, म मी बैठो। विवा-(सामनेकी कुर्सीपर बैठकर पित काठसे)माप स्पो नहीं गये। भापको पानेमें शेषूप हो पारगी, रिन पर वायग्य । सालो बाप । बरा सी देर रोवानम मेरो ग्रेई सति न होगी । तुमारे साप दो पी बात करनेके गोमतो मैं दवा नहीं उन । मैंने बहुध रेखा-सुना है, किन्तु तुम्हारी पेसी म भरपाम पमके प्रति ऐसी नियामने नहीं देती। भगमनके आशेविसे ठमोगेका पार महत् उदेश्य दिन-दिन भी दिको प्राप्त रो। हेकिन बेटी, तुम्हारा मुस देसम्म मुसे पन पा से हारा मन मुसी नही। करना मिया-आपने सबान किया। रगा - (मुसनम) हल्का भरम माल में पड़ा हो गया। गरेवासे ममुखी होते है ये प्रो मायम हो पाता है। निबमा-लेकिन समी तो नहीं बन पाते सम माम्। रसास-सेतो में नहीं बाना वेठी। लेकिन मुझे तो वही मासूम पर मौर सीसिए में तुमसे मिले बिना नहीं बासन, फिर स्पैर मामा । जिया-अठा ही हिसा पास बांबू । रसास-किन्तु एक माममे मा सापपान कर देगाना बहुत पार मते हैं। मेरा मी बी पाहता कि हमारे पास बैठकर पोती वेरका ६, हेपिन ररता है, वहीं इससे कमीशन ठठो। विसपा-नही नहीं, लीग सो।मार पो एप्ठा हो, पीए न मुनना मुझे ममीमाता है। पान-ऐकिन इससिए छोटो मषिक प्रभर मी न देना बेये। फिर ऐक न पाभोगी। भौर मी एक परम है । मरे एमग्री ई पी, को थोड़ी ही उसमें मर गई भगर पर पीती राती यो कुमारीतीभारमानी होती । तुम्हें बार देखा, तबसे कम उमीन समास मा रहा है।

मिसपा [तवीम विमा-मापके प्रया मोरयेटी मही। दसा-ये भी नहीं है, बेय मी नहीं आया हमी बुद्धिमा सी पति है। एक मानकीको हमने पाला-पोय पा। सभ नाम नदिनी है। प्रतिबमें पुष्टी होने के कारण यह भी मेरे साथ यहाँ माई है। मारप नहीले- (साव दिखला प्रवेध।) मिसाव.-(विसमा प्रति रूप मातसे ) वे पेग पते गये। एमने एक पर सनकी मार दान मे। इसे कमी मारमा प्रवे! पा में किए पर नहीखा। (सालो मति मते मे मषिकठोर भावसे) मापसे मी मैंने उन मेमोरे सास गनेकोमा बा! तो यहाँ नबार यहाँ ठे सपाप पर। ग-(भमतिम माक्से) पिरिमारे सायदो-चार परमेडो-मम सोमब मैं गाता हूँ। विषया-मी। भाप मैठिए । देर हो , माँ भार फिर पा गे। (सिसे) नरे स्वप बामेसे सा उन गोको विशेष सुविधा होगी। विमत --उसी देसमालमत। विपा पाइनन काम नहीं है। उन मेगो तप मात्र बापू मी मेरे प्रतिमा किमस-मही, इन मविपि नहीं करावासा मा पा रटेरो कर्मपाइम मासिक देना होगा। [पाच मुल मोबसे महो उठापर उसने पाव सरमें हीमा-] विभपा-पायाप हमारे मन्दिर माना है। उनके इस सम्मानको मूड चान्य भस्मत छोमती मालमित गम्। पिता-(कर सरमें) उस तम्मानच गोष है तुम्हें माद नदिपना होगा । ऐपिन रमाका भाषा ही नहीं-नम भोर मम मा स्वीपर परीवाभापे। सा--(म्प मापसे पो इम) पेये, मुझसे मपपप उभा में भर्म पाया।

रितीय मंक
विक्पा-नहीं । आप पैठिए, माफको साकर बाना होगा । मौर बेवन दो
नहीं देते, में देती है। मगर भपने साप दो पड़ी पान करनेको मैं दुरा
नहीं समझी वो समझना रोगा कि मापके पर्सम-पाठनमें दुरि नहीं हुए, पिर
सास मानी सम्मश्री पारवा क मा सो न हो।
चम्पी पारणा हम होगोश्री एक नही, मोर मैं तुमसे
पने मार कि तुमारी पारमा गत है।
विवा-तो फिर पर गत बारमा हो मेरे यहाँ पगो विमाम बाबू ।
विपस -दोस्मा तुमारी गत परमा ही सीधर परसेनी होगी।
विमा-सीकर कर सेनेने मैने मानरी; मैंने तो मामा:
पही पाँचगी।
मिसास.-गम बानवी हो, इससे मेरा मपमान होता है।
चिना-(पनिक (समर) सम्मान क्या असे मापकी ही भोर देगा!
एमाल-(मस्त माक्से उठकर को होन) बेरी, मन में बाधा हूँ।
पारने, उन गोगों को कोई भविष्य को नहीं रोगी है।
विक्या-ना, पा न होगा । हमारी पीत बमी स्मात नरी , माप
बेठिए । (क्प पे करमें) अमेपर।
कासीपरने वाले पास सिर निम्रतार का सामागी!
विवा-परेकी मासे पर दो पासमा पही मोक्न करेंगे । मरे
सोनेके कमरेके बरामदेमें उनके लिए यह कर दे।-पसिए रमास बार,
इम बोग उपर बस पेटें।
[वियना मौर उसके पाठ साल बाद धीरे-धीरे पाते हैं। विस्यम
सयमर उस भोर प्रस या भौगोसे देखते रहकर फिर पर देवा है।]
चतुर्य श्य
स्थान-परक एक हिस्सेन पय हुमा परम्मा
[ नरेन्द्रमा प्रवेश । सारी फेशान है। ये वारपर भामें दबाय
और पीजी एस मोर मीरदेव]

पर विजया [पतुर्प नरेद्र-(पर उपर INR) मो-कही परासी मी हवा नही, हा नामनिशान नहीं है। फिर इस क्विातीय पोशाकने से और माकुसर दिया पर कसा नही है।मे, पाम्मपद मा रही- (पीपर प्रवेप) नरेन्द्र प्रपद, सामफ्नी माफिनको का मकर रेहो। पद-समरेनेकी बात नह, मात्री पर ही माही। मोटर पठिए न पादूमा। -ना मेवा, मौतर पुस र पपना दम माना ना पाहब में। महासे काम करके मार्गेमा । परापरेकी गासे टीमेटना होगा। असमपद-पानी, माय की गरमी है, पहा मी मा नही पस्ती) मपा मारिए वो नहीं एक इस बैठने के लिए म, पैठिए । [कामपाने इसी म दी। नरेन्द्र मे बैठकर येपी पैरोक पात रखकर सिर उठाइरसा-] नरेद्र-मरे सामने की परभित्री बरालोकोदो, रग हार मागे, सात के माप । भाटीपर-पार, कोडे महापती 1 इस बचपोकासि नरेन- नरेनीमा मिनीला इसमें सा काम रे। सिसी पनि मा म मासे पम्पाते हो मोर ठे ठोरम कर देते हो। कामेपर-2 नई पही लिपी लोछे नहीं हुम्ही । मानिन को रिनास महा पुनकर से मुख्याने काही है। मरेन्द्र-ऐमी प्रत तो मैंने कभी नहीं मुकरेबरा। (प्रत बाहर पाम बातो देख)बग पर से गमे पे, पर। मपम, मा बामपनी माफिनको तो गए। कार्यपद-अरिए, पर मारी है। [विस्मात्म प्रदेश साप ही नएम पर मकर देखना] रितीय मंक नरेन्द्र-नमस्कार पार-इस समसमाप सौ सुन्दर दिखाई दे रही है। बो मी मित्र बनाना बानता है, उसीको चित्र बनानेनची पाहेगा। बिया-बामो समपद, मेरे पेठने मि मुग से भामो, और अन्के सिप चाप बनाने परो।-पन पता है, ममी मापमे चाय नहीं पी । नरेम-नाममावेसे सवेरे ही पल रिया था। स्टेशनसे सीधे पही आ रहा हूँ। (प्रीपदका प्रस्पान) निबया-भापको क्या मैंने भपनी तसवीर बनानेन साना सेनेके लिए बुटामा पो मापने मुझे इस तरह मपदस्थ किया ! नरेन-भपदस्पा पिया! विम्यानौकर- चाके सामने मा इस तरामा पाता है। भापमें पा सम्म दिपकुछ नहीं है। नरेन्द्र-(मस्मत मुससे दो या ठीक है । बमुर गस्ती हो गई । विक्या-मा कमी पेसा न हो। (पुरी सेकर काम्बवध प्रवेण।) फार्थपरकर भागा विटिश पनौ। धमकी कुछ साने पीब अनेने मीकामा? निम्मा नौ, कारोबार (एपएक विकीपर नम पा पाती है।)- मस्य एकप वो सुनो काम्मपद ! तुमने किससे मुला मालिनी पीपद-( नरेंगी भोर रणरा परक) मापने दी सोय है। [ना काफर पर बारसे एक छोरी शिपाई मकर नरेन्द्र पास रहर पल पाता है।] विगा-(मरेन्द्र से मायके वाप) मापने लोगो से पोग। मरेन्द्र-रेसे सा हापसे लीचर। वियपा-हाय हापसे सवार सोप मिा मौर ये सब मेम पते में शिवापसे नहीं मानती। मापके पसा हो? नरेन्द्र-(पर) मेरी उपसिना पुछ सस्त हैं। बिया-सौ रणकर) मारूत्र मागी मा म रुस्त है। वर-ठी सारसे दिन भी मापा र सना है।

[प
[ नरेनरसे मना कर उठा है। इसकेपर से नोट निसार
लिफापर रसता एमा करता है-
मरेन्द्र-रे लिए भरने दो तो अपए । दीविए मेरी पा स्यै मधीन ।
(अपरेसर) में माचोरटम, मोर न बामे स्गमा गालियां इन
का रोक लिए मापने मुझे प्रम मेची थी। मथिए मफ्ने स्पप,
दीलिए मेरी पीब।
निबा-ठग गुमानौर बगेप मैंने फिससे पाम मेवा या!
नरेग-बिशप स्पर मेवे ये, उसीने के पहलमा था।
किसा-उस मावमी महसे मौरमा प्रम मेवा था, कुछ पार
नरेन्द्र-ना, मुझे पार नहर होगा माया ममीन जमेको का
थिए । मैं दोपहरकी ऐनसे मिलचे गैर पाउँ । भौर हाँ, में में
ही एक नौरी पा गया है। पल दूर नहीं जाना पड़ा।
[निकमाका चेहरा पमा उठया है।]
विमा-भापके माम अछे हैं। पर क्या नहोंने ही दिये।
नरेन- देविन मरा पर मारपेलोप पानेके सिमरीमिए । मेरे
पास भक्ति समप नहीं है।
पिनमा-हेकिन मा भापके साप यही घरे धी कि भाप इसा करके
सपर
भए पप्पट मशीन भेय देनी होगी।
नरेन्द्र (वित होकर)-ना, ना, यह बात नही है। मगर पर
एस हैन, मोर मापके सिमी मामला नहीं, सीसे मैंने खेचा मार
मेप देने के लिए एबी हो बागी ।
विषा-ना,
मैं रात्री नहीं है। मैंने चार रेला है, उसे मैं ममापात ही
पारगे रपएम बेच सकती है। ये दो परमें यो।
नरेम-(स्वरा शहर उठ बैठता है) मम्म, माप मेच प्रथिए ।
मुझे म पाहिए। मेरो चे रपए दो रन पर ही बार सो रपए मांगवा
है, उससे मैं भी नही पाना पारवा ।
[पाने सिर बार में मुभिसे साधे पाया।]

शिवीय मंक
मरेन्द्र--में नहीं माता मरि पानता कि आप एक णयमा है।
दिनमा-पायमल किन पर मैं मापा पसार, माफर
सर्वस्व मैने सप मिा, नया मापने नहीं समझा था कि मैं
सायक।
नरेन्द्र नही समसा या क्योंकि उत्तम भापम कोरे हाम पावाप्रम
भापके पितानी मौर मेरे बाबूमो, दोनों कर गये थे। हममेंसे कोई उसके लिए
मपाधी नी-अप्ठा, मा पता हूँ।
विषया-पायगे से मापके लिए काम कनाने गया !
नरेन-मैं चाय पीने नहीं माया ।
विया -मगर मिसके लिए माये थे, वह तो सचमुच ही नहीं हो सकता।
चार जोरपएको पीग मापो यो सौ रुपए में कौन देगा! माफ्लोभमा मास
होनी चाहिए।
मरेन्द्र-मुझे मामात्म होनी पाहिए। मोर-माप लोग मादमी ।
विक्या- पापान रमिर । मापरा पिर ठगनेकी प्रेधिध न करिएगा!
नरेन्द्र-ठगना मेरा पेशा नही है।
विना -बोरिया पेशा गरी हाप देखना बानते हैं।
नरेन्द्र-मैं क्या आपके उपहासका पात्र हैं। सपए मापके पार
है-पिस्तु रुपएके पोरसे लिखीम सी बहानेन भरिभर पिसाचे नस
मिस बाता माप पप समझ-यूमकर इसे बात निकाभिएमा ।
[मरेम भनी स्त्रठी उठातर पानेको उक्त होता है।]
निसानी मा रोगा, दिए म । मापके हार्यों पर ही नहीं,
मी मी , पही तो।
मन-(पये फेसार माहसे बैठ पाता है।) BिE-माप
•दोपसपियरके नारगन एक महूरी पात्र, बोकामी था। उसमे एक
भारमीको इस एपर प्रा दिपा पा किनियत समय पर पपा मदान
किया गया हो या प्रपीके शरीरसे सेरमर मांस काट लेगा। मनोबर
मदानने कहा कि नहीं मानते तो मतिर पर रक एकदम मिरे,
मोकि पतं देवा माती, मा पास हुमा। मनुफ्या।

पिजया [वर्ष मम बो माता , नहीप देती है। मापसे में मौत नहीं समय। विचना--पह पाठ पाव रसिएगा। लेकिन का भापहीके परप मुझे देर हो गई, परसे न निकल सकी, तब मापका मी पाना नहीं होगा। मगर माप निमा होशप देखना बानवे है। नरेन-हो, वाम् । सिनहाय देना होण! आप! विवपा--(सहसा मफ्ना हाप भागे पदार) देखिए तो, मुझे पर हैया नहीं। नरेन्द्र--(नाट्री रेकार) त्य ही भाफ्रे दुलार है।मानमा है। विना--- राकको पोन दुसार हो भागा था! सचिन या नहीं है। मैं अपने टि रिच नहीं करती। लेकिन उस परेश गोषरेको वो भाप मानते १-तीन रिनसे उसे सूपामार पाहै। यहाँ कोरे भज गटर नहीं है।-कास्यपर। (कामे पदप प्रमे।।) शिवपा-परेली मासे प्रो, परेको पाँठे भाए । नरेन्द्र-नहीं पहनेत्री परत नहीं । कामीपद, पम्मेवो, परेण वहाँ ख्य रे, ही मुझे पसे। कामपद -- पब्सि। [ नरेनु मोर कालीपनका मत्वान । दूसरी भोरसे नमिनीत प्रवेध । ] नबिनी-(विमासे) नमस्कार 1-मेरा माम नचिन्ह पाप मेरे मम्मा होते। विवपा-मो, माप । ठिए । मरिस्की स्थापनामले रिन भाप मनुस पा, रसासे परिसपरने सिमने मापने कमी नहीं है। उसके पार मना कियापी मामी बीमार र कारब भाप उनके पास पाली गा।- तुन पाया है, से पहले भी भापको ऐना है। मम, भाप सा बेन (धित) में पाती थी। ममिनी-बीहा। सेभिन मुझे दो बार नहीं मा रहा है। विसपा-पार म मानेमें भी कोई भाप रोष महरी है।मैं मरमर पेहाधिर सापरता प। मोसमी पिस्यों में छ होर मैंने मना रहना। अना, मा माप B.Sc (बी. एस-सी ) की पराध है।

स] विवीय मंक नमिनी- अब मुझे याद आ रहा है आप एक बहुत पर्म शानदार गहीमें पैठरमिमें भावी पी। रिमा-नमें पाने का मौर कुन हो है नहीं इसीसे गाड़ीसे ही मेगोत्री नबर मपनी मोर लींचती पी। इसके लिए समा करना उचित है। नमिनीन अहिए । नबर पाने मक माप मी मगर कुन होतो पाना रोमा निमारमें पोरे ही सोयमें ऐसी विशेषता है।-अण रास्टर मुखी कहाँ गये। विजया-रोगीको देखने गये। बस भाते ही होंगे। ऐकिन मापने से पाना किया पहाँ मिस दात ! ( नरेनष प्रमेछ।) नमिनी-मबिए, ये गफ्टर मुली मा गये । (विवासे) हम सोग कर- कसे एकही गाडीमें भाये हैं। स्टेशनपर मार देखा, ग मुसीको है। उस दिन मंदिरमें रेयोपसे उनसे मेरी बान-पाचान हो गी पी। कुन उनका सामान पड़ा ५ गया था, पही ने माये ये । भाग फिर हारका स्टेशनपर अचानक उनसे में हो गई । उनोंमे मी मा किवा बाँठार नर्स सकेंगे, इसी पर पकी गाड़ीसे मैटेंगे, और मुझे मी मात्र ही का अवश्य भेटना चाहिए। विषा-(कर) माप अगों का देवमोगसे परिचय और एक याहीस माना की नहीं हुमा, रैस योपसे एक गाीस सौरना भी होगा! ऐसा देखरयोग तो एक साप संचारमें रेल नर्स पाता। नरेन-इसके मामे। सिपा-(नसिनीसे) इसके मान न माह समझा दो ऐना मित दास। नमिनी--(नरेनस) भाप यहाँघ सब मम पुके ! वियपा--नही, मम पूरी नहीं कर पाये । यहा परस्प सबग पा लिनु उसके बरहे एक ऐगी पा गम हैं। यही प्राप्त हुई कि "मरा इपिर मुरियम । • इस गय प्रापमा परी-विध सा कुछ नए प्पा था कुछ नहीं था, उसी कुछ वापारप पीया पाना।

विजया [मब पालभषिक नरेन्द्र--(विगार) मापन मिसना बो चार मेरा उपहास पर मैथिए, निस सबा परप भी एक दिन ठगा पाता है, पामी बान रसिए । मैं भाफ्को पार ये रपए ही पगासेपिन ना मनात एक दिन मातो समगा । म मरेर होसी । मिस पास, पम्पि, हम भेग पठे। विण्या-परेपनीमारीके परेमें दो मापने साना ही नहीं। नरेन्द्र उसकी दण कुछ विशेष अच्छी नहीं है। ਫਥੇ है। पीठ मोर गले में दर्द है। इस तरफ पेषका पोर है। बान पम्या परेछो भी निकलेगी। विषया(परम) पेचा को निकली। मगेन्द्र-क्यों निकसेगी, पर तानमें बहुत कुछ करना पोमा । मेर, मापार बोहो, ससकी मासे का दीबिप, बरा जापान रो।मैं सना परत पर सेबर पाउँगा–मास मार मिग ठो। उस देख पाउँगा। बिना-(म्याट खरे हुए होसे) नही तो नहीं भारएगा! मुझे मी निमय वा निकलेगी नरेन्द्र बाबू। का राठसे मुझे मी पुचार- मेरे मी घरीरमें मवानमा है। नरेन्द्र -पपा मानक नही है, मपानक है भापके मनका भव । भन्न मगर पोका सा गुमर ही हो माना हो तो उससे कसा वा कुए मेयोने निती है, इसपि गौवो तमी मोगोंधे रु निठगी, ऐसा सोचना मेकनरी विना-हेपिन मयर निकस मा वो मेरा कौन है। मुझे कौन देते हुनेगा। नरेन्द्र-रेलने मुननेराहे बास होम मित वावगे, इसके लिए पिता न दिए । मेकिन ममता,भापतो कुछ न रोगा। शिवपा-न रोपे मारी है। सचमुच ही में गत मनुस्वर ये मी ठोरे उठकर प्रेर पके हारी मुन्ती शाम छहार पर बारा मरेन्द्र-ना, याच माप परी मीन बा मले। सर माप धुपचाप पीप, मैं पापिर माउंगा। विकासपए म मिटनेस मी भागमा

रस]
मितीय भक
नरेन-हाँ न मिानेपर मी आउंगा।
विक्या-भूस दोन बायेंगे।
नरेन- नहीं। मैं मुम्मा मा मनमनी प्रातिन भावमी भस्म ।
किन्तु मापकी बीमारीकी पत निमय ही न भूमंगा।
[कामपर प्रदेश।
कासौपद-माबी, पानी परोसी रखी है।
पिसा-(नसिनीको सिसाहर) इनके लिए मी !
फापद- मावी, रोनो नोक दिए ।
किमया-में चकर देखती इस्पा मा परोठा है। मगर फिर कमी मौका
न मिला तो आव तो पास बैठकर माप दोनों बनोको जिस्म-पिम्प है।
नसिनी-मिस राय, माप पापा सरकार।
-या बानें, भाव मुझे रही मास पा रहा है। बान परता
विमरी बीमारी बहुत मपिक पर पारगी। नरेन्द्र पम्, मार माप ठार
नबारए यहाँ।
नरेन्द्र-मन्त्र में की ही ट्रेनसे गाउँगा। लेकिन भापको मेरी बात
सुननी होगी । भाप हिमान पायी, और ममी बाहर से गीए ।
सिपा-मा, सह में न मानमी। माप भेगोंके जानेकी रेसमास मार
पर गि। उसके बाद पाकर सो रहूँगी ।
[प्रस्थान । साप ही सारदा मी प्रस्थान । ]
ममिनी-सी म्मा दिनी | पर मुखी, मै बागी किन
माप भाव रहबाइए बाए नही।
नगेन्स बेग्म तो है। मामाके परसे पानेके पसे पाम और
एक बार देस पाउँ । बुखार सेव है, रAF० दिन बायेगा ।
नलिनी-कर रेया ! बस दोसी मुस्लिा।
नरन्द्र-मादम तोपही पता है।
नम्निी-बड़ी अम्मी सानमारके पर उसे पिटना विश्वास है।
बान नहीं पता कि यह मापने परपरकार दे सकती है।
नरेद्र-(समर) देय हो गया किरी। पात पहल

बिजया [तु कोपरी मी गपके बारेमें गुरम सोबती है। पर तो गपाही, भाक्षिरी सहारा पा माइसोप वा विश होकर पेचना पर वो उसके भोपाई दाम- दो सौ रुपए देस बिना किसी संकोरके सरीर मिया, सापमें सपरी क्सशिरके तोर पर ठग, हुमायो आदि विशेषच दिये । बाब उसे दीपा दो तो पर पापस करकेयमेना चाहप अनायास कर मिमा बार मौसे मनी भएस और भी दो सौ चाहिए । सो का ममा, या मानना ही होगा। नमिनी-मुझे विश्वास नही होता गाय मुनी-ॉपर प्रसर करु मारी भूत है। नरेन्द्र--भूगना ही कुछ भूक नहीं है मिस नलिनी, सब पसी सरह साफ-स्व। नसिनी-(सिर हिमर) रेफिन ऐसा हो ही नहीं सम्ता मार मुसरी भो नी सी बिनती उससे कर ही नहीं सकती- इस तरह उसी मोर मेरेशही नही सम्ती। नरेन-ऐसा ही एगा। मौतोश्री पार ये माप ही भणी ठरा बानी, दिन में कितना पान पावा माओबहुत ही कठोर --बहुत पीठिन है। [परम प्र] प्रीपद-पसिप । मोबन बार है। माचीम दुष्पपाती। मरेन्द्रमा पठे। [सा प्ररपान ।] [सा भोर सनविहारका प्रवे परत हुए मयेण । ] पत.-इस मन्रिकी स्थापना ए भपरिमम पर मात मिना पक गया था, ना हम समान ही नहीं पाये। उस दिन उमन एवरा मा पेहय रेसम्प, रबर मैने पूण-विमा, पाहुम्म। ऐठा पोररी हो। उसने पा-'पा, माय मैंने मन्याय मिाt- माती पठार मागविनाको भी कुछ मत प्रामने उसने मी मजे का है-मपर इसके लिए मुझेर नही मरतो मुत पह है कि मने पल बापूसा पते पातमा परिवापावर गरमा सम दोरम्परे पहाँ मात्र काम नहीं करेंगे।' इस साप से उत्पनों - रस्स] वितीयक मालोसे मरमर परके माँस मामे गे । मैंने कहा-ग्रो नहीं मैगा, अपराप भगर न ही पड़ा हो, तो मा पमालाप भौसमोसे पुस यया । (मेलि मूंदकर सिमे रान माद) मोर मही मो हुआ दमामा, भासी व्यारवालो समस पार पिस्मसने मुझसे कहा-बापू, उस दिन मने च दी करा या कि पासमानका विच सम्यूम रूमसे मानो प्रेममें मम है। स्नान र करपा और ममतासे मय है। यहाँ हम पैसे कोमोन वे प्रवेश नही कर सकती। सास-सेफिन में प्रवास दिनकी बाका मुझे कुछ मी समाज नहीं हैं। माप मार दीपिएगा विष्णस मासे । एम. - बाबू नहीं । गम् नहीं ! भापरे सिर बर मय बिस्स है- विमविहारी।-मरे कौन है यहाँ कालीपद । [पदा प्रवेश।] रास -सिया पेय मा इस समम मपने पुस्लामपके कमरेमें है। प्रीपद-बी नहीं, या खेनेके कमरेमें लेग है। उने भुखार है। एस.-मुधर दुबार बताया किसने मध्यपद-गार बाबूमे। स.- समय पर कौन कास्पद-नरेन बार आये थे, वही नाही देखकर गोसे-दुसार है। का-उपचाप चार टेट रहो। गत -नरेन ।मा पिस लिए मारा था ! का भाषा पासाटीपद, बिरिमाको बार मार दरो में माता मोर मोरेसने भा रहा। दपाल-मैं मी लिरिमा रानीको परा देखना पारवा हूँ मापद । पुखर मनकरी चिन्ता हुई। अष्टीपरः :-मगर मचाने मुझे मना कर दिया है। दिनानिमा पर न इम्पधे, दर को उनके पाम न चाप । मेरे पाने संमा है, पर पपते। रास.-मारोगी। यह कैसी बात है। टसे दुलार मोहै। रा मार, खरी जिम्मेदारी तो मेरे दी सिरपर है। कोई कहर बाप, मिसको लम दे माये । भाव उम्बा मी पी मल नहीं है, पर या परमी।

६२
विमया
पिन विस्माले कामेसेपमा होता है। पिमस पदी भार पक्रपा
करे। बहरम गाली मेलर हम लोगोंके मरिमन बापूने हम मेये। न हो,
मासे-हमारे प्रेमाकर गायको-बम्पि, पटिप दमाश बा, हम मेग
पठे समान हो।
याम-पराइए नहीं यवभिहारी बायोमारकी पासे रनेकी कोई
पात मही है। मरेम पब मुर देख गताब मगर का पिन्की पाप
होती वो निभय ही आपने सर परमेको कर देता।
रात.-नरेन देश वारपाक्सा पाने!
[ते पवे नेवासे या देते । भीतरकी मोर । पोछे पोछे पात्र
अमौर कीपर मी पाते हैं।
पथम श्य
स्थान-विधवा मनपस
[मस्प निम्मा मिठोनेपर पड़ी। कुछ ही मासे पर पाप-बेटे-
रही और मिशि, सोनों एमरे मे मोर
कोई कुर्वी वामान नहीं है। रोगरे यि मानस सभी सामान पातही एक
होम-सी मेवपर रस्पराभव मावसे पैर रमते हुए नरेन्द्रका प्रवेश। उसके
मुखपर खलठा ससक रही है।
नरेम-मामलाएमभी प्रीपद इसे मना किदुसार एम
गमार पने दीपिए, पोर रिवाम पास नहीं 1-समय मा
सिमत--भाप सपेरे मात्र उनको पेसन मम दिसा गपे ।
विखवा-(भीष सरमें, दोनो राप मार) मैठिए । (नरेनषो उसी
रिमने एक सिरेफर मयपूरन पैठना पन) भाका १ इतनी देर
परर यो भाये? मैं पी रहे भारती पर देकसी पी। (किमसन पाय
प्रेषते मपानको ठठा। विश्वा मरेगका जाप कर भपने एपपर ल

मितीम मेक
मेटी है।) पाक मैं माराम न हो पाउँ, तपक भी न बानका बारा
मीभिए । माप घठे बायेंगे तो शायद मैं नहीं देगी।
[नरेता पनि होकर सिर उठावा और वापसी रोपौड़ी ममानक नेत्रोंसे
उसके मे करा बावे है। प्रमपद एसी बीचमे परेको बरा हटकर भीतर
मकता है।
मिस -(पसे परम उठता है) ए सुमर, ए बानबा, एक की मा!
[प्रपद मपसे दवारि सा होता है।]
रास.-(मम्मीर स्वरमें) उस परफसे एक कुर्सी के मामो कालीपर बानो
बैठनेक मि दो। [नरेन्द्र छ सड़ा हुआ, मोर रासबिहारी धान्य पाठसे
विमनसे - मार भादमौका कमरा हैस तरह hy (तामठे)
मोमे। Tamperin (मस्तिको मनको बोना) करना मत मछे
आदमीको शोमा नहीं देता।
विस--समें भारमी रेम्परब (Temper lors) नीता, वो मौर
भो कसा, माप ही भवाए। एमवारा नौम्य, नाना न सुनना, ऐसे
एक मसम्म मादमीचे भीतर मापा, जो मा महिना सम्मान करना
नावावा।
[विरामी भरकी मा मचानक उपट पाटी। नरेलका हाप छोड़कर
वापर मालकी मोर मरती है।]
रास. में सब समय , सिमस-दस मलेम छमतो डोप माना
मसामाकिनी है, बस्ति गाव से स्वामाविक है-परमी में वास्ता
पिनमको पा सोचना चाहिए कि सारा कर पा पान-सकर
भपराप नहीपते। समी अगर भद्र पुष्पोरीति, नीति भापार-मवार
भानवे तो फिर चिन्म हील्या पौ! इसी सिएषन करके शव मापसे
मनुप्पोपोतो या त्रुटियोता संशोधन कर देना होता है।
विसमस-मा पापू, इस वी Iupertinencs (गमता का
भरप) यी नहीं पाती। इसके सिमा हमारे इस पर नोकर-पान से
हमारीपरमात मी हो गये हैं। इन सब नामपग्रेको
निमापारगा।

विजपा
--
रास•~मका मन बह रम होय है तबसा या रूपाता है,
ठीक नएँ। मोर मासोदी सा दोष है, मैड़ा मादमी फिर
मी रिमाके दुभारी बात सुनकर देना पर हो उठा पा !-परमे से
परमारमी पीतम निष्ठी, सपर पा सामग्य यये ।
नरेन्द्र-ना में मिमी वराम मय नही दिखा गया।
सि.-(३० कर) मत पप दिया गये थे। प्रष्टीपर
पणा गवाह।
नरह-कामदने गाय सुना है।
[मिस्त पागली तर उठकर नरेनी मोर ना पाता है।
रा -मा पारसे दो दिसास ! मह पर मस्तीपर करते, वा क्या
काम्पत्ती बावा रिसास रना रोम् । निश्चय ही नाच प्रना
मि.-तुम समाते नहीं रोका -(वियस बाबा रेना चाव)
रा.-इस मामूच पामारीमें ही होणाव न लेमो विखम, पर
होओ। मंगमय बगदीसर के इम मेगोकी परीषा ने यि ही
मापति विपषि, धमारी बगेर मेव देते है इस बातो मेरी महमें नहीं आता
कि विपत्तिम पाछे ही दम बबान मोम वास मासे क्यो भूब बाते हो।
( Rपर पर) मोर भार पस्तीसे स्नाने बीमारी मदारी
जससे ना किसने ही बोपो रम्विान पार किये हुए पच्छे मरे
विषय रास्टरोने मी मम दो बाता है-पातो ममी पाही और
छको इस माो। (नरेनसे ) तो बार बार मामूबी भाप बनाते हैं।
चिन्तामने कोई कारण नही-पही वो भापकी राय है।
मरेन्द्र-मेरे मम्मनसे क्या माना जाता रे मनिहारी बापू । मेरे उपर तो
भार मरो नही मधे । पहिरोपही ठीगापिसी भाणे पास
रा विषयामर दिवस सराय से दिए ।
AAR-(रि) तुम दियरो गात रोपे, इसमलमास रमन
रा-पा में कोरेखमा पर न होकर और भौर पर भी
तुमपमहक्यतरना-

मिवीय मंक निबया-(नरेन्द्रकी भोर भमान म्मपित ममें) में या तक बिगौ नरेन्द्र बाबू मापके निट त एंगी। जिले मेग परमम्प गाररसे मेरी विकिस्सा कराना चाहते हैं आप म्पर्म ही मपमान न सहिए। (फिर मर फरार छेटती है।) -(प्पस्त होकर ) बार 1 मि तुमने गुमा मेगा है, उनका अपमान कौन कर सकता है मे ! (सममर बार ) यह बात मी र मिस इस मसफ्त महार लिए हमलो पाधाप होना पाहिए । मैं मानता। समस्त दी मास्वामी निवपाके पेगके गुरुतली प्रपना करके गारी मानसिक परन्या योगनी पगई, हो मी-अपनेको दो स्पिर और शान्त बनाना ही रोम । स्वरी ममा दुर्गा, सारो बिम्मेदारी ये केस मारे ही विरपर है मैया ! मगसमय मगवानकी असे को मारी गोश एक दिन मोहीमफेले पहन करना होगा-पावामा उसी परचाकी सना है। (नरेन स्थाप मठी मोर छोगा उठा टेवा)-नरेन गाबू, मापसे मुझे कुरा पसरी बावे करनी ६, चलिए। [गसरिहारी नरेनचे कार से ही रंगमर सामनेगी मोर आते हैं से 10 मोचमें पर्दा पिरफर रोगीरे सो विसरू देवा है। दोनों मामने सामने कुरिलोपर पेठ पाते हैं। यस.-चार मारमिकि सामने मतो पापू गहुँ मा छ मी को नरेन, सेपिन मया, में यह भूल नहीं सवा किम हमारे उसी बगी बेटे हो। नही तो तुमारे मुसके ऊपर पर मर कि मैं तुमपर महुआ था, तुमबाटेप नहीवार नरेन-बोर पा रही माफ्ने भान कुलकर का बसेरा पानेकी ई पात्र नहीं है। पा-मा, ना, या बात न मो नरेन । ठोर पर मनमें को होगो नुनता है, उसे दो सास्ती, फितु को काता १, उस मा कम रमेश नीठा मेा!-गरीबर-मेरिन म मेवा, रिमस मनी मारपा मकर अपने मनमें पिसी पन डोम न रक्षा स्प्रेग। और मेरा तुमसे एक मनुरोष भी है। इन रोनो माने [पयम माग्यमी येणाबमें होनेफ्स्म है। भगर सचेम ही हो भैया, वे इस प्राममे मो मास बम्मिति होना होय । ना मनसे काम नहीं पसेगा। नरेम-मजा सेमिन- साना । सेकिन वेकिन कुछ नहीं मेरा, में मानहीं मगा। मका, ममीमा में होना हम्पा ! मुविधा उमि- नरेन-दी। एक दिपवती मात्र दूधनमें फिमा एक मामूक-सा भ्रम मिल गया। समपा अपम, मेक है। रमपी मन मा धरा । बार शिखरांगेवो सब रकम नागे नरेन । मरेली। रासा-नोवो वनलार विनी देते हैं। नरेन-पाको कुरा भक्ति दे। ममी को पार सौ रुपये य.-(मेले कपारपर पराम मामसे) पारसी। बारमार लामी नौकरीनरी जुधाई। नरेन्द्र-उत परेश नाम मेरेको तमित मासी है-माप कुछ पता प.-भी एछ देर पाले उन मागेको उनले पाँव मेयरमा नरम्--ौच मा यहाँसे । राम -परतो मनहाँपना भला। नरेद्र-(भमर जप एम) भिक उगम ना सैदनामे पपिए । भाप मेरा भोरसे एक पर लियत पसेविएगा। परिणा- माम मनुम्मा मागेम पक्व साधारण कारपसे है उम्म्मति सदा IRपाक सम्मममें पटरी इस प्रकपर या मविस्तात न करें। रास.-भविषामा करेमा नरेन ! गामा पा एम महबानत। पर होने कारण पर पत मरे नावे नर्स निमावी मार म भने ही मारमी हो, इसपि मसे प्रोनोमो ऐसे मारे प्रेम पित हम्म] द्वितीय भक पांच कीचमें मुझे देख पाते हैं पिन प्रापरनेत्री मात्रा ही मेरे पास नहीं है। बान पाटा है, मगरानने से संकास करके ही रोनों एक दूसरे के लिए बनाम इस प्रप्वीपर मेया । सने में प्रथम करता। भोर सोरवा सार्थकोन मिम्न, सापकी इनका चौवन । नरेन्द्र-सी बंगालमें शायद हनन माह होमा ! यस.- नरेन देशो, उस दिन पुगें माना ऐगा उपस्थित राफर नवदम्पतिको भाशीर्वाद देना होगा । बस्ती करनेकी मेरी रणनी थी। फिन्तु समी बार-बार पल बिन मामा मीवर ही भीतर इस तर मिन्नर एक हो या, कोपाहर मम्मा रसना मपयन है। मैंने भीमा-मम, नही हो। म समीरला ही मेरे भावान्की रजा। इसी देशासमें एक होकर-मिर पे दोनों स्तार-तारमें मौवनी नौस वैरा। मादी । मेरे पम्न रिन तो अप्रे हो माये है, अब तमी इन देखना-उमारे परपोंमें ही समर्पभ परवा।(राप बोर मापसे गाना भोर सिम Bार मगाम करना ) मगर , भव में रात हुईबासीमैपा। माय ही पसा मन मोरना बहुत जरूरी है। न पामो तो साप! नरेन्द्र-ना, मुसे बाना ही होगा । वारेमाठी ही गामसे बाउँमा । रास -मैं ठारमेरे सिए विद मी नहीं कर सम्ठा नरेन । नई नौकरी- नागा करना या नहीं। मालिश नाराब हो सकते हैं। भागका दिन को मारा पेपर पार्षद हुमा । शेकिन सामै पूछ सकता कि फिस सिए माग तुम भाये थे भैया। मरेन-दिन सो सत्य ही भर गता विग्नु सवेर पाभाधा रके भागा पारि पर पए रेकर या माइक्रोस्कोप अफ्ना पेय सेवा में। -सपए रेवर भाबोरे,मातो-फिर से सो नही गम। नरम-सिमाने नहीं दिया । बोरी मधी कीमत पार सो पर है- इससे एक पैसा मोमन रोग। एम -पारसी व हेनरन । रोगे रुपयक दस पार सौ स्पर। कासार या हमें समन श्वनी परत मोर उनक कि कामका नही। नरेन-मैंने सोचा, मेंबर नौ पर ही देन हे पाउँगा। राप्त विजया [पम । एत.-ना, गाबिसी नही हो सकेगा। नासा मपर्म में सा नगा। मेरा मात्र पुश्पोपा ममाप तो मुझक पाया। (पचभर उपवास मोमुख रार) एक मैंने भरपार होकर देसी है।मारे साथ में कामे, पारणे माचरण पापा मुझे दोष नस देस पस्ता किन्तु मौतर ही मौतर विषया मनमें मारे मरन पाने क्यों इसमी सबहकायम तुमारे इस मकान के मामले में ही मैंने नहीं देख पास माइकोलोपके मामलमे भोर मी मभिड स्वदेश । उसे नेमें मुझे स इसीलिए मापछि नही मी निगा विमाके किसी मानसरे, पति पर भी ठसे लगदन लिया या किस ममीन वगरे लिए बाल बालो मारे गाव कमी। मयर पापा माम हुमाल में फ्लोकी बड़ी बहरत है, मेरे कानों में मा मनापी उसे मरने जान दे दी गई है मैने निमारमा प्रेम, म्योपके दाम पारेक, पर तो रिस पागे-~ोमा पारे म प रिमा बामगा। मैंने मन ही मन कहा-बिमा पारेर पारेमाने नमें मुझे पर रे, सचिन में मारे गए मेमें देर नर गारसे तोरे मतो मैने वो गेमपए मेव पेपर मेयरयाकला मुझे करनी होगी। मोन-पान पायापारण दोपए देनीमा स्नाप्रमही बोरने स्मिात मावि में ठग लिए बाया! पस ---(सोसे बीमामा ना ना। लेकिन मा नेपाली मसत ननरेन। भोर ऐन महो, वो माया मग प्रक। बालमनाप।के बहते पार । ना भैसा, पर मैं की किती पानी भरने दूंगा । म रोटी पर देकर अपनी प्रेम बाना। नरेन्द्र-नही राजवणारी, मेरो मोरसे माप उनसे मनुषन प्रथिएमापा मारम रोबर्ग, मनसे प्रविएगा कि मैं पारणे पपपरामरण । मौर किमत बसे पीएमाला मुझे धो- मा सा मुसे मस नहीं थी। लेकिन भा नही-मेरी या समर वो मैं पता। (मरबान)

तृतीय अक
प्रथम श्य
समप-रिपाके बैठने कमरा
[बिया सरप हो गई है, लेकिन परीर बाब स ]
(सीपदान प्रदेश)
करपद-(मामुमोसे विश्व स्तरमै ) मिटिमा रानी, इतने दिन तुमारी
परिमत नराम रोकारप फुरनाम । लेकिन मा काना पड़ रहा
है। प्रेटे बाबूने मुझे मार दे दिया।
पिया-क्यो।
कास्पद-मेरे मानिक स्ये रखे गये, मोने कमी गाम नहीं दी।
मेकिन बेटे मार मुझे रेल नहीं सम-दिनरात गासियों देते हैं। मैंने कोई
कर नहीं किया, जब मी-(भीसू पोछार ) उस दिन को मैंने उनेर
नहीं, यो नरेन पो अमारे कमरे में गुम प्या, इससे
बने मुझे बाब रेरिया है।
विजया-(कठिन सरमें)गामा।
पासीपर-मचारी रमतरमें बैठे कुछ कागपत्र देखो।
विजपा-मा, प्रेई परत नही पार काममा
(कास्पक्षध प्रस्थान ।)
[स्पाम बापू प्रपेश करते है।]
मा-गुमारे पास ही भा रहा बा येये!
विषा-भाइए वाट पा मार ली टो मा भणी है!

विजया [प्रथम दमास~मत्व वो ठीक है। मरेन क्यू मैने चिनी सिती भी मामा पौरे पार बार दवा दे गये है। रेती परमुन मिक्सिा पेय-पोय पटेक मीवर ही बैस पर भाने रोग दूर हो गया है। विवा-दूर सोन रोगामार सका क्या उनपर सामारष पिस्वस। रमार-मास्य पा प्रना न ! मस्तु विसावे गोही नरी सपा मेहममे परीच करके देखा है म, पान पाया है, परमें उनके पैर रहतेही रोगी पया हो बालगा। निवपा-ऐसा ही होगा। सास-एक पातमा पेये, किन म नाम न होने पामोगी।- पासपीसनी सम्र भषिक नहीं मार बिन सब नामी भोर निस रामाने मारी मिमा चिकित्सा करके समय मौर पर नारिये, स्न भपेश पासी अति लिड है, पर में कम सलर कर सकता ।मोर एक माव है येस, मरेन बाद केवल मेरी फनीकी से विकिरतन नही पर मो, मोर भी एक भारमोश्री माया र ममे। (उस भगम एक इमारकर ) मगर देखो, मैं हमें सही नहीं करने दूंगा मौरी एक बार परीक्षा करके देखना ही होगा प्रमभे, याम पोरेया। विमा-हेकिन वो भपरेम रेम फाना है नास गा-ऐमी से देसे मिना प्रेरितपान ( Prescription: मुस)लना। नही, ऐख नहरम मपने बायत्री रेगिना (भयरा) परमही यादब बैक तुमारे अपनेधी राइसे ही पास गरे मी तर ही पर देश गये हैं। मन पसा है, प्रम भबमानस पी, रसीसे- निम्मा 1-परसादी ऐपलमें थे। पासपी भी। पूरस देखने पर परी भ्रम ऐय या कि सात-पापानना ही कठिन मा दिमाम है। रिकपा(जर) मा मापर्ण मनुधि बस्नेम मतिरेको सार-पाच म छोरी सो करवा ।

वतीय भक ७" हेपिन में पह पात विकही दाम नहीं काम । इनामा शिवान् भावमी है। लेकिन पमण्ड एक नहीं गया । बाते बेसे मीठी से ही बन्दोधिसी है। किसी तापाने देने मी नहीं चाहता-मी एम रोजीमोर पुल देर रोए । विवा-केम्पो नही लेते। सार-(पर) यह प्री हो सकता है, उने पिने काम पिटना परिश्रम उमें करना पाता है। वो भी मरीब समहार हमपर फिन्नी दया करते हैं। मेरी श्री बरसे बीमार है, तसे प्रायः निस्य सीमा उसे देखने माते हैं। [विहारीला प्रवेण।] रिस्मस -(विजयासे) कैसी क्सित मार! शिया-मछी है। रिपसा-मली तो सी नहीं देख पाती है। (साम्से) माप यहाँ साकरो बाम-पिरिमाप देसमे भापा । [विमानकी नबर टेषिसपर रखे गुस्सेपर पर बाती है और पा उसे उठा लया है। दिलपसमुस्ता दिखाई दे पा । मिला । (गोरसे देलार) नरेनन नाम दिलानामुद पर साम!-ठेम्नि पायाँ मापारिन घरा । (रपास गए और निम्या दोनों कुछ नहीं बोट) म, तो, कैसे मापा! गम भागासा!! गस्य सोबत नरेन गार है! बान पाया है, इसीस और गायों नहीं लाई बाली गौमांधी या शौचमें ही पड़ी सड़ा करती हैं, उनके पर सदी पाये है। पर वो लैप, पिन अतिमुगा परन्तारने या कागद मध मिस वरसिमामा पत्र मुझे मादम होनी चाहिए। (सासमे) ममी सो माप ला छेवर रोप- पादियोरसे दोन पा रहा या-में पूजा भार कुछ पानते हैं। एकदम माग विती न गये ! काइए, सचानते हैं। साम-माता ७२ चित्रपा [प्रथम 1-मा:-परमात पारसे कहाँ पामा ! बग-बी, यह मेरी भीको देखने भावेल नहीं-भौर पर मा रवास करते हैं- सीसे मैंने उनसे रामायै मिपाके मिए मगर -- बिलाम-सीलिए शसर पर मारवाया है। भाप इनके मुरब्बी पन मेटे हैं।। (पीमर बार) मापसे गरे साना दवाब पूरा करने के लिए कहा मनापा-पा पूरा हो गया। पासपो, दो दिन मौतर की पूरगा। पूण्ा मा पो नहीं। मा-परमें मारी विपरित रही थी--अपने हमसे साना पकाना पवा भा-मकाने मा ही नहीं सका। विमा--(विएप पारे) मा ही ना !- शिर और सा- मुझ राना रिया-निहार लिया ! मैंने वी प्रामे मा पाइन सब प्रोमोस मेरा प्रम नहीं बसमा- मैं नहीं चाहता। निमा--(चौमे पर पठिन परम) माप बानते है, साम्य पाँ कितने मुखमा मापके पाने नहा-मैने पुमपा है। मिर-मारे गिनने मुममा हो परानमेकी मुझे भारत नहीं | मैं काम पारा-मेरा संपामरे पाय है। विजया--विनफ पर विपति, पास काम करने मा मत है। विधत-स पर समी विपरियोहार देते हैं। किन्तु उसे वो मरा काम न पा सकता। मैंने प्रम पर राम कुम्म दिया था, पापों नहीं मा-में इसी परत पाहा। विपिली लार मही बानना पाहता। विजय-पागा, मा भाप पाइए । नमस्कार। [पाल मपान] मारास अ मने भाभीए, भाप साप! विमानाने बीमामामेषमम दिला पा, हुमा को मोरबी पिस्त पापभिसार मी पानना चाइन।

रस] वसीय मंक ७२ विजया-देखिए मिमम मम्, इनिराके तमी मेग मिपामारी नहीं है। समी मिप्या सिसिकी दोराई नहीं देसे-कमसे कम मन्दिरका प्राचार्य नहरी देवा । र, इस परसो मारिए । मैं आपमे पूछती किया आप यह मानते दाकारी सम नारी राहिए, तब मुद मारने ही सो नहीं उसे पर समापने क्यों पार दिन गैरहाबिरी को आपपर सा विपति-माचि मा थी, पराम। मिस-(युमि होकर) मैं भुला सिह र, । मने क्यों रोहाबिरी की। रिबन्यो, म यही बानना पाहती हूँ । महीने-महीने दो से रपए स्ना भाप छेते हैं। पापा के मोही माफ नही रेटी-म करनेके पिही रेती । किमय-में नौकरी में तुमारा भासा । दिखना- काम करनेके लिए जिसे वन दिगा पता हो, उस के मा मौर क्या करत मापके मसस्प भापाला में पुपचार मावी माई लेकिन शितना ही में नाती गई उतना रीमन्पाप उपदक दवा गमा। गाए, नाचे जाइए। मासिक नौपा एम जियाबसे भाप साप मेरा कोई सम्पन्न नहीं रा I AM निपमम मरे भोर मार्य कामातक टसी नियमम काम र सदोमिए, नही तो मैं माप मार दी । मरी पारी में मुख्ने पेटा ननिएगा। विभा (TRY दाने पापकी सनी स्मिते दिनाव) मुमारा स्वना उम्साहन सिपा-माम मरा नहीं, मारमा 1 माह दरसरमें नौकरी रंग भोर मरे से कार कुम रेंग | मुझे 'गुन'मानेका भविकार भारका पिस्ने रेसा मरे नोकरको मर ही परम पार पनेकी-मरे बहिपिको मरीही भान्सामन मम्मानित परती हिम्मत मारौ मास ! विमा-(प्रेगमे पदम पारममा शयर ) मतिपिक पाय पुष्प था यो मरिन उसका एक प मैन नी रिया ! पाप बसमाप, मोटर भी मर सिर की उसने मैने यहाँ रेस पाराको ७४ विजया [प्रपम [पीपरक शम्दसे स्तर माईनिज र नौम दरवापर मार मावर मापने लो। रिम्पान पति हर मष्ठतरको स्वत और साविक मामा- बिना-भाष नही जानते, लेकिन मैं बानती है कि यह मापनदी कितना पासोमा पानि मापने उनके उपर हार उठानेका भति पास नहीं किमा। प उप शिक्षित मापुस्य है। उस दिन उनी में हाप माने- पर मी या पापर एक बीमार मी परमै भयका नर उसे मारके ही बहावे। किस्त मेरा बा उपदेश न किएमालभाना सनकी वापर हाप मगानकीपा भगर भाषी रो दो पारसे ऐप विएगा, सममेसे मिानेका साहस न करिएगा। खैर, बहुत पीसना विमाना हो ममा, मन भौर नहीं 1 नोसे नोकर-पार, परवान कर उपर मा गये :- पए, माय पाइए। (प्रस्थान) [वियस प्रेप मोर दिमासे पति से बाता है। उसकी भाम सास्ती हुई नगर विमा भौर पमी रहती है। इसी समय पख मासे रासबिहारी प्रवेश करते है। रा.-माम साविस माना बीना- विमना अधि। विमामा। शिल्पा-पानवे हमार, बियाने मुमसे 408 में उप महाना पाने वाम पार है। और नौकरोगी र मगर मासिमा मन रममन पर्नेगा, दो पर मुझ हितमिम् कर देगी! राम -सोयो ! एमालपासोमा! हमने उससे क्सा सा था। पिम्पन-पवा मोरमा कारोबार दे दिया था यह हुआ पापण्या राम -कास मा रो। वो हवनी का ससे पाय मोरिया ! मम्म दिन हम नरेना मा भपमान समेटे-बानतेखा, उसके प्रतिनिपामा- विपत परी टो मत रोय है। टस प्राबोर पेपर परब ही पो इतना भापानवे हो बा, रिपातील नौर रोम में उसके मविपिठी नरेन-माननि सारसे पाय- स] वतीय भक म. - ! मोर मा मा उसने । नाः, मैं बिना ही सैंमा भूछ कर ठीक करता म सना ही एकन्न-एक नया रसड़ा खड़ा कर देते हो । क्सिास -सेना काका! इस पाभी कामपाको निकास बाहर न माँग दो सा परमें रगा ! सा नहीं, मना नहीं, एनएफ एक मसम पानपरको है भाकर विषयाके पिगेनेके समर मिठा दिया-मौर यह गुण दमास मी बेसा ही मा हुन । रास.-भरे उनको म कुछ मापा । देखता हमने सब चौपट कर दिया। निममस-पंगा नहीं। एक गैरफे पँगा । नरेन गस्टरको परबत पाते हैं। उसे मैंने उस दिन परसे निभा बाहर किया-मोर या पिकर उसकी दहाी करने भाये-एक प्रेलिपान (मुस्खा) कबर हाबिर हो गए- विवपात्री निकि.सा होगी। पर मीश्री बीमारीन बहाना रके हुदा चार मिना गोता लगा ममा एक पर पारीमें मापा तक नही-Worthlear od fodi (मसार, देव गुण) [रामविहारी कोष मोर प्रेमसे सम्म मासे विकासका मुंह ता रा है।] विपस -विक्माने तो माब तुम्हारातभपमान र गम ! रात --उससे तुम्हारा क्या। मिमता-मेग स्पा। मेरे मुँरके ऊपर बाकी किरपास गपूको रास- विहारीमा नहीं गये, मैंबईमोर मा मी कपास बाम् छ काम करें या न करें, र कुछ नहीं कर सकेगा । यह मुझे ममम करती परती है, मि नियमसे मेरे भौर पर्मसी काम करते ६ उप निबमस प्रम करना होकरो, नहीं पडे पाभो । गत.--उसनेमस रेस पछे पानेको कहा, मेरा वो बी बायोकि समभ गर्दनिया रेकर माहर निकाल हूँ! मिथन-ऐं। राम.- -रमें बोय जोग चाति' कावे सो कुछछ नहीं रहो, भाखिर तो सिमानामावादन!बामा अपाय हा वो मरमसी मी सीवा, अफ्ना मतम-पुप मी स्मश्ता, हिवाहिन्म मी लपाय होग, पिससे सा प्रना चाहिए, इसी कमीच मी मारी। मा बामो क्याहसर विजया [प्रथम 1 मेवोंमें मपना पुछेनी प्रम परखे किये। उठते गम्वे को तोते की तरह पाता सराव फुपम येमसे समर्म एक बार हो पाय, उसके बाद पो पम्य होना ममर से सब नहीं हुभा । उससे मिाने ग्या! पर ठारी राम-गया-मुपतिर हरि रापही पाती, मिनसे सब पर पर कॉपवे पे! त् गवा पाहाप पर उसकी नामे नम गमने-फ श्रीमान मुरमा सब गई इतनी भी बोरारीकी भाशा भौर मरोठा गया, ऐसौ रूपए हर महीने माते थे, सो गये। मा बामी गमा, किसानो गोणे ही मूठ पमो माया रे मेरे पास या माल करके उसके नाम नासि ममे दूर हो 1-मामे वेग मुँर नहीं देगा। [पन्ना पर एलमिारी से पैर मान हुए पासे पठे पट हैं। पीछे पीछे स्मिस भी मिली राबारे धीरे पमपाता है। फिर बार-बारे बिना प्रवेश करती है और टेक्सिपर सिर पर बैठती है। उनमें दमा प्रा माल-पामारठी ये। भोर पर मी मुह से एक पानवीय लिए 1 में तो मा संग मोर पभातापसे मरा पाता। किमया-(सिर उठातर, पनि पोबर) माप पसा पर नही गये। दमास-मुधसे पापा नहीं गपारी। पैर पस्बर पाने पगे काम के उस किनारे एक के ऊपर बैठ गया । बहु-दो वे कानों पर गई। 1- न पाती तो सैफ होता। लेकिन मैंने कुमार ना किया। भापता भपमान प्रमेन कोई अधिकार नहीं था। बया-~ो नही की काम से मना पाहिए था, मैंने नहीं कमा पिर एक nिी हितर उनस धुन मी थी-पान रा मेरा भरा नही। इमसे मा माप्तिसो कोष नहीं बाम ! विण्या-मोन मालित , विमान अपने माफिन का मुझे या माली दबा । प्रश्न मगर यहा किमीका का मेरा भोर तीनही राम पर मप्रनी चाहिए रस-बमें भी नहीं। हमारी मालिसे श्म हो, ये हमखास यही तो हम नमस्ते ।।

स] पठीय मंक विजया-ऐसा समझना गरे। मेरे सिवा इस परमे और कोई मासिक नही है। दया-त होभो मेम, शान्त होओ। पिणस बामें इनारी पोष है किया कुछ भी है मौर मोरे में ही पंचाहो उठते है। लेकिन मनुपमें समी गुम तो नहीं होते, उसमें प्रे-िनोई कमी तो रावी ही है। पहीपर नलिनीसे मेरी सब नहीं मिम्धी । मिम दिन तुम भस्थ होकर एम्यागती, उस दिन नरेनका अपमान करनेत्री मुनकर नलिनी से भागक्यूम से उठी । मेसी-इवा परम शिष्यस बाजा विरे। सामी ईमा भोर विष रिमा-कोप कारके सिए दमा गा! रमा-पाबाने से, नकिनी मनमें या बारवा हो गई है कि तम मन-ही-मन नरेनपर - बारी हो । यही विमस पासा नहीं सकता। विक्या-करणा तो मैंने उनम नही। मेरे किसी भी समस धो सनो प्रति परमानही प्रसर हुई बास ! सास - मैं मी तो पही पता । कावासी या दो विषया समीर रती है। मुझीम पापा मम सारठी है। मिया-बी पाहे तो भाप स्प्रेग मात्र बातम मौन नरेन बाबू नहीं पाते । पति मोन ठो बार-बार को कुछ मुससे पापा, गा मेरी निष्टरवाता ही परिधर भाप 0 सारए, पाचो नही. दया-(सामा माप) ना ना, सही-सब नहीं है, किन हो, मरेन सरं कुछ कुछ ऐनारी बचते हैं। उस दिन वमने सम्मपरक शाप मेरे पर उनप माइकोलोर मेव रिय, वो मरेनने उससे पूज-उनाने सिने रुपये देनेरे पिए प्रा। असीपदने का- स्प-पैसे बात पे उमीने एग्री नहीं, मोदी या। इसपर नरेनमे मा-कोहीपारे प्रत्येकने प्रा- मो 8 बारए । पर बान परवा न देने होंगे। सचमुप हमारो विश्वास नहीं मिया पाता। निथप प्रयपदने महा मुना पा समय है। इससे ऐ नरेन लिमा ठे।

बिनया
से उनसे बारकादेमुझे इसे दान कर देनेनी सात नहीं है,
सहारनेकी मी बसत नहीं है। बा, मेय हे वा।
विषया-या में अमिर मरसे मुन पुकी है।
पळ-लेकिन नलिनीने में रोष था। उसकी धारणा पापी
नरेन्द्रका इसके बिना हो रहा है-यहोररी रिचमाने इसे मेव दिया
है-उपकार करने के लिए भी नहीं भौर मंग-दिप करमेके सिए मी नहीं।
मापने शायद सोपा होमिहापोहाय पासपए न लेबर कमी वारको
किसी दिम स्परकिये बागे। मुझदो ऐसा ही बान पातामोतो
बेमे, सविनहाँ।
विमा-बानती नहीं दयाल बाबू। बीमारीची बातमें माइलोप मेगा
पाटब ठीक पार नहीं माता कि उसमक्पा होया पा।
--मार नमिनी बोर देशप्रतीकही बात है।परोसी--
नरेन्द्र से मसे, मेमनाप, मफ्नो भूम हुए, निस्पै मनुषमा कमी
भमान नहीं कर सकता--एक दिसात बापू कर रितु नरेन मुदलिसी
तर इस पातपर विस्वास नहीं कर सके।बेसे-पी भारमी मेरी परम दुपति के
दिन पर मचीन दो सौ रुपएमें सरीरकर, रो दिन बाद ही मपने मरस इसके
पार सौ रुपए माँगता है. उसके लिए कुछ मी मसम्म नहीं बोआदमी है,
उनदेव रेसर्य, इसीसे हम से निस बोगोटाँसी जानेमें ही उमें
मान मिला।र, बाने से पेस पार्ने गरी । मैं दम रोनों पारा
मेम करवा इससे सेश होता है। (अपप गर) सेपिन नरेनने
मुमारे विस्मन् सम्बेदरसे ममा कर दिया है। या ऐमा मुका
भन्यमनसभौर निरीय भादमी समीने पर मन मिला कि तुम
पानोन मार पत्र से गपा है, तब भी उतने नहीं मुना। तुमारे
कमरेसे पार पकरबा रामविहारी ने उसे महसार नाई कामे पा
पाक पहा भौर विस्त पारेषभरब समझ पानर उतने रन मस
हीमा पर रिसा का इतना ही यह मानही समापार:
समे गरीब पौन पानठी मिसान बने स्मारक रिसे
मे रेलया। ना मम उनको से हुआ। में भी वैफ यही साना
इस महिनी ही मदन हिलती-बालबदन पुरी।

पतीय मक
विवषाः 1-सुन उम।मुनम स्पा करवी नलिनी !
दया-करती कुछ नहीं, के होठ दबाकर ख्वी है-मुमकय
विजया-पर क्या पी गई।
पास-नहीं। भाब पापगी। उसने पाया कि बासे समय एक पर
तुमसे मिकर पायी । मन शायद तीन मदनेगा है, माती ही होगी पा
फिर यमर नरेनके लिए ठारी होगी।
-आप ग्रामसे यह मानेवासे हैं।
दयार-माँ। मेरी बीवे रेसने भागे । सेमिन नरेन मगर समारसे
कभी पम्म गया येये, तो सबसे महकर मुझे ही कठिनाई होगी।
विवपापा कहीं बानेबारे क्या ।
रसाय-हाँ। ममी परसों ही पता पा कि मा गाँरानेकी सन्धी
इम नही है। दक्षिण अफ्रीध (Senth tfnea) में प्रीपर काम
मिल्नेभी सम्माफ्ना है। वहशिसार पाठेही पा रवाना हो पायगा ।
दिवसा ठनी दूर!
रमा-हम मेगोंने मी यही पहाटेकिन यह प्रताकि मरे लिए
पमा दूर और क्या नेरे। मा देश मौर सारेण ! समोरार है।
मुनार चा, सपहीदो है। यहाँ ऐसा मा मात्र पो उसे अपनी
भौर आर किये हे किन यह स्प्रेरनेसे मी से बालोंमें माँस मर
भात है। मम मा पाय पेये, पाहा-सा काम की है, उसे बाहर
पूपर।
विरा-धिन पर पाते समय मौर एक बार मुझसे मिस वीविएगा--
श्रीमपसे बाइएगा।
[ीपरम प्रवेण]
प्रस्टीफ्न--(सामठे ) सार बस भाप मिसना चाहते हैं।
रपाठन गस्टर, इमाय नरन! मुझसे मिना पाता है।
.
पासीर-नापेकी पैठपमे बिठाउँ पा रहे पाने थिए र!

८. विजया [प्रथम - विषया-पसे बारे एि प्रदेगा! मोबा, मेरे इस कमरेमें सनमुमच्या (सिर हिसार प्रमपदका प्रयान ।) पा-माँ गुमनाममा मषम होगा। सिया--मरे परके मधुरे विचार मार मेरे ही उपर रेसाहबापू । माळ-ना ना, पर मैं नहीं करता । किनु विमम्मम् सुन पायेंगे तोक्सा- विमा-मैं समझती है कि उनके मुन पामेकी ही बात है। उससे अपने पागोम्म स्पान के सम्बपी पारमा पकी है। (प्रपरका प्रमेण।) बामपद-गर साहब आये नही, पडे गये। दया-बो गये।यो। पीपर - पूध, मिस पास है। मेमे कहा-नहीं। बे-तो पिर करें बमव नहीं, स परमें ही मेंट होगी। इवना ही कार बरे गये। मा-मामाने दुमका,गा कहा था! प्रीफ्रा क्यों नहीं । बोले, भार भन समग मी १- बनेकी गासे र चाना है। पुरस्त मि भौर समय हुआ से भौर बिसी दिन भाकर मिलगे। दया-(सामापसे)मा पाने । ऐसी ये उसकी प्राति नहीं है। बान पस्ता पमुख ही नहीबादी होगो बामेत्री। विवा-(काठीपरसे) मणमात्मा गाँसे । [चाने लिए मवे ही पद सहसा मत हो उठा। बोप-यो बापू मा हे, मोर प्रेषक छाप भम्प परसे निशा गन। बीमी पाल्से विहारी पत्र प्रपेश।] ग मी दिवसा । माह बाद मौरेस पावे है। बैठो , मैठोठो। [पाठ ने सम्मानपूर्वक प्रगाम बिना विषया । यस बिहारी माखन पास करमेर पिवना मी बैठ गई।] राउ -पा भयही माघे दोनों बनोसे एक ही बाब एकही हवीय मंक WWW ही बगह में गो। भौर मी पासे मा समता पा, पिना विध्यमको एकाएक दीगर्मी बेसा कुछ हो गया। सिरपर मुंहपर पानी पर हमा करनेसे, वा पर मुस्प हुआ तब कही मा सका । उसके मुँइस समा कुछ मुन पारा पाठ मा (दमास प्री पेश कर, पर सपिहारी राय हिमकर उसे रोते ना ना ना, उसके दोपोको पोने घेरा न श्रीनिएग्ण दगास पाए । माप मरीले साप्रति भगषमक पुस्यका भी मसम्मान कर सकता है उसके पम करनेको कुछ नहीं है। आपके सामने हिम्मा देख पही 1-किन इससे सा! पहा योग विपकी त्वम्पनिय और सतके कममप अपनी स्मन मार्च करें, लेकिन इम स्थान नहीं है पर्मने ही हमारे सम्पूर्ण जीवनपर भपिकार नहीं कर लिया है। लेकिन उसने पारण पागा जिसे देखो दमाम बाबू, उस फरमामयकी कमा- उसने पाएम सतीस पामा, को उसकी धर्मसंगिनी है, बिन्ध भामा पुरा नरी है। अग मिमो बेटी, यही वो पाहिए। मही तो मैं तुमसे माय करता! (सममर मार ) मेदिन पर में पिसी तय नहीं समझ पाग कि विमत मुझ से सी. साये, मासेम्पले, सारसे विरत पुस्पा मेय होकर इराना मा धर्मपटु, पका दिखी भोर दुनिनादार कैसे हो उठा ! मगवान्की पर कैसी समीकि सारा रस्म कुछ मी समशनेका उपाप नही । दबास - उनका पुण्योर नही रामविशारी अम्, महसे ही मारी ममाप हो गया है। इस तरम प्रस्थाने ही उनकी खेपर्सम-निनोरेसी विधी पता है, यह नहीं सकता। उनोंने पो हायर रचित ही या। रा.-उक्ति था! भार्म मुझे सचमुरही सोगा मा पाए। मक , शानी , सेफिन मपरवा में बहा है। हमें बावा है किस्मारमें 'मति' किसी पोरी-किसी पक्षी-मपणी नही रोवी। पर मी पानता । पिसास कममप मात्र । प्रम माम में परमपाहै भौर कुछ नहीं रेला । किन्तु इसके पह माने नहीं मानी मानकी में रखा न करनी होगी। मा, ना, में बड़ा भादमी पापेन मी नहीं है, या मोर मी नही है-इसे में 'मम' नहीं का नगा। मम्मा का इसलिए इस मुखले मिप्पा पर दो नियमही सती मारा।

८२ हपाल-एस राममा मका होम्म सी। मुझे मार माना मात्र दुम्म सिमसो पाम निषा भाव तुम्धीश पानेा मोम मास इमार पन्तु मेरे इस समतो ये रे ये पाप पप गा- भासदमे ना सपने मूग पेठा हिमपनी बेदी सम्माने बेठ पदा से गा मुझसे कम उसत्र मा पाइनेी। भाव रखना याद दोमुहे इसी लिए किमने अपना नाम अपने हायसे लिया है। मारी मबई सहारे ही पोती है। सभी धधि, मारी बुद्धिमार पाने के बया, इसमरितामोम | बगदीर! (मारी स्टार) पार पानेग्रो ममी व मपी है। माम विवादप (बाने के लिय उपज होते है।) दपाय में मी पन्ध है। पत-लेकिन म अमी प्रमेो कोही। (मेटकर बैठ से ) मने इस पूरे मामा पापूम एक मनुष में रहना होमा या पी रहो। रिवा-याएमा रा-भा, सपा मोर पलासे या मौतररी-मीटर पाti टेरिनरत पर अपको एक कठिन बनना परेमा । उसके मा मांगते का मूल बाबो, सानो स्य से पूर्व मिनी पाहिए। कमसे कम एक दिन मीमा सासरे मोगे, वही मेरा मनुषहै। विम्सा-सिपमा सामान मारप हो फो। यसना, में मनरेंग- INT मी नही है-4 सुनने चौकात मारे। दिखा-प्रपा (प्रपा प्रय।) पिसा-पिपल पा रहा है।मेय गुणमा (मामप्रमाणात) पर (पूर्व मिसके सर ) बेमे! सुनकर उनसे 1 एस] पवीय मंक a नही गया, ममी होम मेवा ! (बिर साम्से) बैक यही रमा मुझे दयान्नमा दुख हो रहा है, यह सुनते मिरमा तान न कर सकेगी- -इसीसे में माना नहीं पाता पा-न पामे कैसे मवाना मासे निकम पहा-हेरिन में रोसे। मेरी बेटी कामामपी, यहठो संसारके समी भगवान गये। पम्पि यास बापू- सास-पश्मि। (सम्यपदका प्रवेध ।) बामपद-मेरे बापू पर ब गपे, उन गुमने मामी गया है। एस.-भादमो गया है। बाब उसे न मुक्ती, तभी अपम वा पेटी। लेकिन-मो। इस गामे हम एक बस दो काम भूले का रे हैं। याम बापू भार नपे साधा पहम्म दिन है।म प्रेगोभी र दिनोंत्री अस्पना काम भाव एम दिनमें विशेष रूपसे येमधे भागीर रंगे। इस सिप र मम ही हुभा कि हमारे बिना कोही भावमी किमको तुमने बल पना ! मा मी उसी समामा निरेण है। भारए मात्र बान मौर विकास न करिए --पारम भापोषन सम्पूर्ण करते- रिसके मातेकी हम मरमार विषाको भफ्नी सारी स्मारकामना मपंचकर बागे। माश्य, पपिए। [दोनोध मरपान | मिसरा पनेके पाते कि उपरकी विधिमा मोर कापथ-पत्र परेसे उठाकर रख रही पी। इसी समप पदने सिर मौतर कहा- पालीपर-मारी, गार साहब (काकर भास होपाध है।) [मरेमप्र मरे। नरेन--(रमौर भी एक तरफ रलवे रसत) ममत्पर ! पासे ही भोट माय । तेषा, आप मेरी बामिया है उससे, मगर न ममा के पार नापरयो। रिया-बाद नाराबहार में मापन क्या कर ली। --सा बरसाती है, यह खास नहीं है, मस : सा नहीं रखी! हेकिन पर। ऐसा है मेरी पास र प्रमा हुमा है।

[प्रपम N बिजया मिमा-मापकी पासे हुमा, गा मापने से पाना ! मुझे रेशर मा बिसीसे सुनकर। नरेन्द्र-मुनार। सो, मापने का वास असे नहीं सुना कि मेरी माओबाना कनहीं पाता, गत मुखले एक नबर देतार मौर फरार देमेसे मी मारेके मामय काम हो बाबाm- लिम्पा-(सदेती ) इससे सायर बाली भाषा रोग दूर परमेरे किर गासेकोट मासे है! लेकिन उपर नकिनी पेबारीयो माफी राह देखती होगी। नरेन्द्र- यह बात सोपा पानी भी एक बार पहर देश भाना होगा। लेकिन मेरे लिए माप विम्मत अचूके साथ भागार ठी!ीडीडी डी-मा-mm- विजयानी बस्ती मापसे मिलने पर रिवा! नरेन-साहबन्ने । ममी ममी नीचे उनसे मुमसात पीश्री -परमापा मारी मनायो!-मारीममा विम्या-मनार मेरा है, लेकिन माप इदमे मनमोहो उठे। नरेन-(गमार होर) -हो उठा। मिस नहीं भय पागल सम्पूर्ण रूपसे मस्तीभर नहीं रवाल सुनकर पाते पास कुछ भामोद-ठा माम पहा था कि उसके पार पाठवमें मुझे कुलभा । मापली ही रह सिमात बता मिवार में रखना नहीं है।बान पावा, मविप्नमें माप होगोंमें दिन-रात पपगी। रिसा-माप यही पाहते है। नरेन्द्र-(रोतसे प्रेम कर, भक्ति मारसे ) मा ना ना ना, की ही, यह बात न करिए । बमुख ही सुनकर मुझे सारमा। पाठी हिम्नम्र मिवान मन नहीं, मेकिन माप स्पर्म मी मजीहोर मम्मानकी बापगते, माम मारी ममाप| भारी खेसर देखिए, परमपर वादिर बाहिर दोबायो मविप्नमें रेसी प्रमाण हामी। सनम मरे किए माप रोनोरेवाब ऐहो एक मप्रीशिवर पाना परिवहोनेसे- विश्सा यस भाप सुधरे मारे सौ नहीं पाते हैं।

रस] पतीप मक नरेन-(गमीर मुमसे)-भीमे पाप क्यों बार-गर ऐसा समत खी। विभास कीलिए, सरमुर ही बहुत कुल हुआ है। लेकिन तब मैं माप स्ोगों के तम्भमें कुछ नावानवा पा | दुहारकी में एक साधारम-सी बात आपके मुस्से निाम गई पी, उसीसे इमना मा पसेरा उठ लामा । पास हो निवास प्रदूत उस भाव देम्मर में हरि हो गया, उसके बाद बाहर त गाकर रातविकारी बाबूने मुझसे बो कम समभाकर मा, टमका मी इशाय पी ईप्या पौ मोर मिस नमिनीने मी स्पर सहमें उसे विम्यया । बसाइमने मी उसाच समर्मन रिमा । मुनार मैं तोसे मरा बाबा मम प सब भवा मापसे, इसने भोगों के बीच मुन्स से एक नपप्प मादमीमें मिलापूरे हमारने लायक क्या है, या भान तक मैं नहीं सोच पपा । (सपमा मौन राकर) माप छोग पो मावस्यक होनेपर समीोगोंसे पारीत करती है। इसमें उगाने या दोष देस पापा ! सेय, बाल हो, भाप योग मुझे माफ करेंगे, पौर पर मालामें क्या कहते १-ममिममिदन-में मी भाषा वही किये जा | भाप गेम सुनी ते । विवपा-(मजदूसरी मोर फेरकर) अमिनरन मार न करके, उसी मिन माधौरीविएन। नरेन्द्र--सरिन ! लेकिन सब में यहाँ ठार मसा? विम्या-ना, पर न होपा । रासबिहारी को बचन ये पुरे आप। मापको ठहप्ना ही होगा। नरेम-समान तो नहीं दी, लेकिन मान देनेकी ही इज दी है। मपर रहावे माप ही माया । (पिएमा फिर भति पो गमती है) मन्ती मत। मुझे भौर एक के सिए थमा मोपना है। उस दिन एकाएक काम्टीपरके हाप माइकोखोप स्पो मेव दिशा मा। विरा-अपनी पौर भाग्ने माप को पापस ममी पी। मरेन्द्रको बैक है। सचिन दामोन प्रवास नहीं भेमें। सतो- विरा-मुझसे भूत हुई थी। पिन उस मूस या मा मापने मुझे कम नहीं दी। नरेन्द्र-हेग्नि पीपरने पोप्रा- चित्रपा [प्रथम निषा- पारोको, डेफिन मापसे मासे विकास प्रबिपाकि माफको सपहार देनेको समस्कती । मगर समुप हो ऐसी स्पर्श मन की पीठो मापने अपने हायसे सभरपयों नहीं दिया। नौर मेरा भमान यो बिमामापका मैना गावा! [मन्तके म उसने गोमें से मर गये। पर उसन विपीके पास पासी मोर पाहर ताने मो।] नरेन्द्र- उसी समय मेरी समझ मा पपा बालिका प्रमक नहीं पुया। उसके पार पर सोचता या-और बालिए या ईमार धुरी भाषा है। पर फेल अपनी मो में भाप ही नहाँ पती बाटी, पति इसी बीमारी का पूतरेपर मो मम करनेसे पाय नहीं भाती। मार में निमबसे पानी बिगत बर्ष मुझसे पा करमे देसी भूग भौर ना हो तो पिम्त उस दिन नमिनाके मुससे यामिका एम मेरे पनोंमें परफर से लिपपमा t-से किसी भी ठप इसे भूप नहीं पता। बिमा (से ही दूल्य मोर म फेरे हुए) मिर बम गये । नगेन-(कर) र बोशिस करी मुक्तिसे । केही पर पर मनमें माने भाकि नियमांड का पार, नही हो ममरण सासे गर नहीं रखा। मापसे भाव में या उसपर कई दिनको एपे मापा है सपा मेरे मन में बना राया मा भोर मापने परके बोर को करीयादेही पर पार माजी होतो मैंने ममी पाहिपाल मानक समारोपमा प्रय होमे पकादिन-फा माप ही बमबमें पारा 1 मा कर पी, भारए मम पिरममावही! भारतो रेकोरेसिपी रोजीन दिन रखी गहस पैदा गरमागराइदिन एक मका पाम मा मेरे सपर नारा) [स्ना बासर पर रेसने स्नान किया सनमार मरेकेदार पमै गई।] मरेन्द्र (ग्वी मोर विमपोगप देवर)मा पर सामा! मत्यय होनेसीमा मनकारी। (प्रस्पैशन प्रदेश)

पवीय मैक
0
पासीपर-माप पडे न पाइएमा मायने काम मेवा है कि माप वाप
पोकर बारएया।
नरेन-ना ना, में हर मना र रो। मैं वा पार पाँ
पाम पिपंगा।
प्रीपद–लेकिन माषा पुरास होगा।
नरेन-नहीं, पुस न होगा। उनसे बाहर कहो, मात्र मुझे समय नहीं है।
कीपर-पार, रेफिन यह कमी न मानेंगी।
[एक भोरसे मामिपदन प्रस्थान मौर दूसरी मोरसे विमान प्रवेण।
नरन-इस वर एपएक मूत्र पी मो।
सिया-किस वरपछी गई।
नरेद्र -स नायब होना
विषया-ब तो रेती मारली माँसोंकी नबर सुख गई है। ममा,
उस भूतकी पानी भर स्मास मीथिए ।
नरेग-किस मूवकी मानी।
रिम्पानी यो पायत भूत कुछ दिन का भापके पेपर मार बारा
उखर हो गया।
नरेम-(R)-या। हाँ, यह टर गपा।
रिक्सा-चो पाहिए कि पाप स गपे । नहीं वो कौन बाने, मोर
लिने दिन पर आपने इस राहमें पुरोगाला पिता।
कापर-(प्रवेश करने, नरेनकी मोर एणय करके विवयासे) मा वाम
नहीं पिग माची।
विवा-(काटीपरसे)सोनी पिमंगे। बा, पाप पनाकर अनेके
लिए परदे। (पीपरपा प्रत्यान।)
नरेन्द्र महो माफ रिए, आब मैं चार महीं पी मा ।
पिण्यायो नही पियेंगे मार निमर ही पात्र पर माना होगा।
नरेन-(सिर निमार)ना, ना, पाक न होगा । उस दिन उनसे
पादा किया पारिभाव मार उन सेयों पर पाप पि । न पीनेसे वे
पास पुसित होंगे।

[प्रथम विराग कोन एयास मी या मालिनी नरेन्द्र-दोनों ही होगी। जबद मेरे लिए ये स पार किसे प्रोमो। विस्या-सवारीकी सत प्रेसिए, सनि एल्स पानेको मा चाही। माईनीमा नरेम-भोर को जैन, कडबा । (रेनर) नहीं नी-पा परन्त भावमी रेसीप-सादे निरीह । इस विधा टने ठो मैन ममी इसी परमें ऐसा है।नयर नहीं है कि ये व नायब समय। रिमादेन मरेन । मौर को नही १-१ मा नम्निी । यहाँबा-पीहर नेस वही नायब रोगी । पीप, दारा भापतो पर, कहिए, सौगात सत्य। नरेन-नागर रोनमें माप कम नहीं है। मातोपान रेकर मार बरखा-पी मासा तो क्या मारमनदी। शिला गाए, पदी गाए। माफोन रे गा मा मौर मगी। मरेन्द्र, रेर पर है। पेट मेरे लिए दे सात बरेली मामार मा नाम। निम्मा-परम्म पाँगे । स्पा मनी भास बात ये हमापता शियरोगोनिमा साबरीमार नहीनही करमे अपने है। तो मनुरापोभ रमै मलमही रतउपेक्षा करणे रुस । नरेन्द्र पर मापन कि अन्य ममियोम है। भावमीचे भवित मम ग्रेग मापसे पार समरमें भौर सिसा र मोर उपमा परे सोनिमा समान पाती है। मिस्मा-सचिन भाप वो नही रखे। यही देखिए, ममम उपपा करके बहेबारी। मोम-रमेहा रो मही, समगति र पुम इससे या या। और ऐसा हो नही, एकाली माननिीती समानामापी, मी समाधानी होगी।

एस] दवीय मक । विषया-न-सी ठाव! नरेम-पस रामरीकी क्ति है। उनदाहा . ए पास करना बाद मसिसिपमें मती हानेकी है। इसे पो कुछ सापारप सा मान मुझे, उससे उनकी पोड़ी-पान सहायता कर रखा है। -आप क्या उनके प्राइवेट टप ११ वेतन स्पा पाते हैं! नरेन -या पाना आपला अन्याय है। मापछी पाठवीत रंग मुझे मक्सर पान पठारे आप उनपर प्रसन्न नहीं है। मगर पर भापपर कितनी भया रस्तीमामाप नहीं बानी । यहाँ भाने के मासे जितने बरस काम मापने दिम में उन सका गबान में उनके मुझसे मुम्ता राता। मापकी बिकनी गर्ने वा रिमा करती है ! माप दोनों एक ही मासिबमें पहली थीं: भाप बड़ी-सी गाड़ी-बीिपर बेठकर आती थी, सब हाकियों मापने वापसी रहती थी । नबिनी रही थी-आप घे रूपती को बेवा ही आफ- का नम्र माचरण मौर मपुर म्पार पा | मापसे उन परिचम न पा किन्नु समासे मर और अम्प समी सादियाँ मन-म-मन भापत्रे धार करती थी। इसी परराचीन बामे मिलनी गई होती गर्व है। विमा-बाय बायें ही रोजी रात्री ९ो भाप पदावे किम ठप हैं। नरेन-पासा कर! म सा ना मास्टर हूँ। या मेरे उपर में पमानता मारमापी तस बातें ऐसी येदी वी किमान पवार, सीधी बात पना भापन सौसा ही नहीं। मिना-सीखती रेस ! मास्टर का कोई या नहीं। नरेन्द्र-मित्र वही रेदी बात। बियपा-(सीमा वादी) सचिन माप मागेर खाना-पीनान से भान हुमा सही, किन पढ़ाना न होनेसे तो मारी मति होगी। नरेन-पिरही पाता है। (रोप हायमें टेडरको पग भाग पर हारे पास माठिठार) एक पत पाने पी लेकिन र eart सीमाप नापा महोबा। विषय-नापर होमगर रोडगो उसी मापनेसामना [प्रथम १० मारोबारस मारिला, यामी वो भव नहीं होता। र मापनपत्र नरेन्द्र-सिबसी रेदी बालिन मुनिए । यहाँ बसे भाप आई , मापने पावसे कार्य किये हैं। मिटने ही विपरिक मारे गरीब माधामियोप मनपा समान माफ कर दिया है। किसने ही दीन मुली गरीने दान साधर्म-मनिरनी स्थापना की है- विस्वा-यानमिल्ने सुनाया। नमिनीने । मरेला, स्नीक मुंहसे सुना है। विटने ही गरीब पशि एवमुक पा गये, मैं ही क्या पुरुन पाउँगा। मुझे मात्र या माइक्रोसोप उपहार पाहिए, बस वा परतो उसके गम मेवगा। सियाराम देकर उपहार लेनेशी बुर पिस्ने आफ्कोरी। नचिनीमे । नरेन-ना ना, समाने नहीं। मोने सिर्मपामा या किया भापके वो किसी काम मापा नहरी हेपिन पर पावें वो उससे बहुत कुकीसवी भोर या सौमना बारने उनके बहुत काम भावेया। विवा-मर्मत, बरवा पा उनके हापौ। म ५ दो माप उसे बार उन उपहार देगे-होवो भापत्र प्रस्ताव है। नरेन-नाना, पानही है। बात यह हमारे मा पिती काम नहीं भाषा, मोर मन्य समाधी मामि सानेपसा प एक न पहा है। इसे कराया- विषयाबाने मरतन नरेन बगा। मापके पात उपयों की कमी नहीं है। दूधनोपर भौर मी माइक्रोसप मिट सकते है। मोड लेबर ही मगर उपहार देना हो तो ठमें बारसे ही करीब दारिएगा। पर मेरे लिए पसुपर ही मरे पास र नरेन्द्र-मगर- दिशा-भयर-मपरकीयाबरत नहीं। माप बेभर मफ्ना मी समन नाबरमौर मेरा मो मोर मातोश्रम। मर-मर मुरि-विषयाः मोर वा गा) में भारणे सामने मजी सरर मर नहीं पा मोर माप रम- रस] वतीय मंक मिया ठळती है। सकनारेमाप मनमें समस्ती में मपी मरवालो पर आप गोधी पारीहोर पम्ना पाहता सचिन या कमी सप नही है। मापके परम भावे हुए मुझे दिखना सप्रेम होता है, मैं दीवानवा हैं। यहाँ भार वा प्रते सा का पेठवा , मफ्ना संतुलन औक नही रस सम्वा मोर मार सीह उठती है। मेरिन या मेरी मपमनस्क माविका रोष १-मेरा मण मापकी अमर्यादा करना नहीं होता। लेर, मन में फिर माफको सिमामे नहीं भाईगा। नमस्पर। (पोरे पोरे प्ररपान 1) [रोपीस पैर रखते हुए म्पन मायसे एसबिहारी प्रवेश । उनके पीछ दमास साप पोसाके पाममें पूस, पदन, मत भौर एक बड़ी खनेके मोट करे है। दमास अपूरे पाठे पानोर हापमें फूम्मामर इत्यादि यि है। उनके पीछे सिखयाके दफारक सब कमपारी है। बिना कुर्सी छोरकर उठ नही होती है।] -बी विजया, माब नमे सासन पाम रिन, यह क्या में स्मरणी। विजया कुछ देर पाते ही माप प गये है, नहीं चा नहीं पा । -(मुबार ) म भूब जाती हो, लेकिन मैं कैसे मई । नही वो मरा शान-पान नमामी बीते रोज तो भाबरे दिन पास्पा करते, पार भाता है। सम्मा-पार क्यों नहीं माना | आप रिन या मुप्त विशेष करके भाशीर्वाद पत। पता-पनमाजी नहीं , लकिन में । साचा या, या पम्प सपेरे पूरा गर तुम दोनोरे सारम, माय, निर्विप्न बीवनकी मिपा मगन्के भीवरमों में माम्य । निर्गवारोंसे उठ पापा मा पहो । पर प्रपा तो क्स माह मम्मा है। उसे तो मैं सीमा नहीं कर पा रेट । कानमा माय पारा मन भम्पिर है, जो मी मने मासे पा-मार, भागो इस पुष्ष दिन में मर्प न पाने रेसगा। तुम पारी करो। सारी बार मिनी भषिमन मे भार भी वो बड़ा भवियना पेयापासने कहा-मा एमप । दिन गापामैने और देरमा-श्रेण नहीं पाती-ममी प.- विजया [प्रथम समय है। मैं मर र विप्न-पापा नहीं मामा । मायोबनी सपास क्या माता पागोस भारम्रसे केवल ग्रार सगोको ही बामगा राता सचिन पावो मरी विवाद मेरी समय ही मेगा कि यह सके पितम मात्र माचे हारिफ गुमधमना है। खेप योग मेरे पर । मासी बागमें फूस योजनेने पो गापा | मांगणि ताममी इसी रोनम देर नहीं थी। मुकुर-माम्म मेरा नहीं है न सही-पान बापूध भागर ।-वैसे ही सेवा निमत सा नहीं मावा, मेरी यार मामा किपर आये से पह पास उसमें माँ फिर सोचा मा प्रमा कि एम्मा मारे कहीं घबठा है। ऐसा ही होगटी- भम्पपकारण ऐसे ही प्राप्त होता है।-गरीयर ! (पीमर पद) रफ्तरमें भार भागार म्माइलिम कौन कौन हो यों, सब माओ हमारे साप भाबरे दिन ठम गोरे नि मी पिरविनके लिए निगाहे पस्मान की मिशा माग तेना चाहता है। मामी को बेटी, मर पस। [इतना कार परमाप ही मागे दबात है । दिसा उमात मुमसे मानपुरचाप के ताकदीपीमा उसने गईनी । रासबिहारीने रुसलेमामेमे बन्दनका धम्गार पर विशेष रिपे।) -संसारम भानंद मम करी; त्वरण, सम्पचि भोर मासु को समदमें भया मामा, मति भौर रिसास है। भाषणे पुम्प दिनमें तुम्हारे मा बाबूध पदी मारय । [विचारोनो दाग बोरम मापस सणार नमस्पर ली है। अनेक स्मेक हाबमें नये । गाने में बिगारे पर किपर दिसे । ] रान.-देल बेय, गारे दोनों हाप -(इना पाकर निमा हाप सरर उनमें एक एक परफेरोनों को पानाकर ) परिनामे इन पोसी बीमा नही भौम वा नमी । पाहतारी-(एकी सोन मेकर) या मरे मिलने माता दापरे मामूपमरेतो बेटी, बिनम पित गये है। मरते समय टम्होंने कमा पाक मैं एमें कमी मर न करें, परेमा भाग सीरियो एि-(रामबिहारी मांगों पर से भागे के नहीं निवे) रात.- सम] पतीयमंक -- -- पास-(माधीवाद रनेके सिम पात मार मस मावसे) केटी, नहाय पोहरा बन पाता विताई पाता है। दिमत से कुछ समय नहीं है। खिया (सिर दियदर ) नहीं । दरम्स-मुखा होमो, भायुप्मनी होमो, बगदीमरसे में पही माना करता हूँ। [विप्रपा उनके परोके पास पुग्भे टेकार प्रमाम करती है।] दपाय- (ग्रस्त होकर) म स, हो गया ये । मानन्दमप मगवान् नुमको मानन्दमें रहें। -सन्नि मुन्न देखकर वो ठम बहुत ही पी और मुस्त-सी बान पम्ती से। मुम्हे सिमाम करनेकी यरत है। रास -विमामी भारत तोही माम, बद्री पठविबमास) भावन का उस परके घावद मारे मनको ममे मा पाया है, लेकिन इसके बिना भी काम न पन्ना। आब एम दिनमें उन्हें पाद करना मराकम्प था। लर, मा मौर बातें करके मैं तुमी नहीं दूंगा बेर्य, बाभी रिमाम करा।-रसाय, रहो माई, म प्येग परे। (कर्मचारियों भारस करक) म सभी भपरपा पोहो म सोती रह मंगसामना पानिप्पर न होगी: फेस साजरा नहीं, हम गोम्र में स्वा। मग माम मा बने नठे, बटेको छ विभाम रनेका मासर दें। [एक एक करक सा बात ।] [पिपया हापका स्वार सी है भोर अपराप और माकर कुर्तीपर ठार टेपिस्पर सिम टिका देती है। कमर पर परेशका प्रदेश।] पगए-(सममर पुपचाप दिवसातो तारते रहने वार) माय। बिया--(सिम उठान)मरे परे ? परेप-मुमारा पोम्पार होगा मारी। निया-म्पार हाया ! पास मिलन मारे! परप-सभी ग पाव है। ममी ममी 'भाषीर्वाद'+ ए पा बोहम मान देय है। +रिपरी एकरम को परपली मोरसे मार पधोनची स्की

विजया
[प्रथम
विमा-बाप रेख।
परेश- उस परपागेकी से। मैं, मा, सन्धी उभा समाने । यो
भाने पैसे से न माची, एक मछी 'पी' मोम गाउँमा । (मिनी पर
नकर पाते ही) या ऐसे, पर रास्टर गम्चा माया! तपाने पुए
टेपानी तरफदा है।
विखना - (सपकर मिाथी पास मार मौर पार देकर ) सने
का म कया है परेश १ के बहुत बढ़िया पनी सरीर एंगी।
परेप-योगी न मानो ? (सफर र माता है।)
(परेपछी मात्र प्रवेण।)
परेशकी मा-भावसा सामो-पियोगी ना विठिया रानी । एकर
पार मी नहीं पा उममे। (यमिके पास मार दोनों को हापमें सकार)
या मा किया। मापदन सा हापसे इने उखाना पाहिए मरिमा रानी!
फिर दम ऐसी मुज्जता हो कि शायद ही कर पी बाभोगी-मिक
नगर पोपी यो मा फिर देगा!-रेको, भपने परेको एक अंगूठी
तुमे ना देनी परेण मनी पर बल रिमोश्री साप है।
बिमा-मोर मागे एकार-मोर
परेकी मा-तुम मेकरसी कर रहीरो श्रीन सा दम पर मम्वी
हो कि मैं पर बिना किसे अग।
विवा-नहीं छोलेगी सोपही तो तुम मेमोरे पाने दिम है।
परेशमी मा-रोहै। इन सत्र कामनयोंमें महीं पायेंगे तो भोर
र पायेंगे, तुम्ही सामो-मम, एक पान पाय और कुछ अनेका
मासान हो, मफ्ने सोमेरे मरेमें पवे, मैं यही रे मामी ।
रिया-पहीरो-मेरे सोने कमरेमें ही पहुँचारो।
परेप मा-पवी बिटिया एनी, महारबसे इण गरम-गरम पूरी
कमानेवी । (परवान।)
[परेप मौर उसके पीछे मरेन, दोनों प्रमेश मते हैं।]
बिया-परह परेण पपया महीनी सीना-ठगाना

दतीय मंक - परेश-ना:- [फल मारते ही मानोंसे बोलको बाता है। नरेन्द्र-मो', इससे उसे इतनी गरब भी मुझे रोष मी मामय नहीं देना पाहता पापी सरीरमेष रुपया पूस दिया गया। लेकिन पो । एकाएक फिर सों मेरी पुकार दुई। विस्पा-(भमर नरेन्द्र के मुखी भोर तालमर) मर वो सूस यार- पारा वर गमासा या पिया ! नरेन-सामापिया नहीं। दवि क पाकर भापा, भीतर पुस्नेको बीसी नही थाहा। बिया-यो। नरेम-माम नहीं सों। पीमें भाया, अब कही, किसी के पास न पाया पर मामाऊँमा ही नहीं। विना-में दुरी पर हो प्रेम करती । मोर माप बहुत महें भादमी १-को नरेन्द्र-किसनेमा हिमाप दुरी है। रिमा-मामे कहा । मेय ही मम्मान किया और मुझो रए देनेरे सिर लिना ये-पिये मनचे पते वा रो-मैंने मम मापा मा विगाहा। [सवेकाते विखणाली मालोंमें भोर मर भावे (मोर उभी ग्रिनेके लिए पालिसीके पार र प्रमाण पड़ी हो पाती है।] नरेमा-से भवरी बात है। मैं भने मेरे मैया गारमें मी मेरा दोष है। (कामपरम प्रवेश1) पासीपर-माची, मापके टोनेके मरेमें जाना पहुँच गया। पिसा-(नरेमसे) पहिए, मात्र खाना परोता रहा है। नरेन-मेरा साना कैसा। में दो मार ही महाँ पानवा पाम बी फिर माया। विवा -~मगर में पानठी यौ । परिए । नरेन्द्र-फिर मेरे पानेकी मरस्पा पारखेनेरे कमरेम मापी

विख्या
[वितीय
हो सकता है?-मारे लिए जाना परोसा गा , मम
फापर, मायके सिए । भाव सारा दिन र ममा, बनाने मही
गया है।
नरेन्द्र-इसे बहन मुझे लाना होमा । पेलिए पा पाप हो या
बना पुम मुझपर न पाए।
रिया-मद, रमपने सामसेवा को पाना नहीं, उसमें पों
एक देवी ! (नरेनसे) परिप, उमरके कमरेमें ।
नरम-पति।छेपिन पर मामा अपाय है।
(वारपान)
द्वितीय श्य
म्थान-रिस्साकसनेमा
पिवमा और नल प्रवेश करते हैं। एक पलके समर कामी
लामे पाने सामग्री की है।
विस्ता-(येसी मोर रारा रके) बेठप, मोगन प्रथिए ।
नरेन-(टते ते ) मापके लानेषी पाये भी नहीं पर न रेप।
सारे दिन मापने 5 साया नहीं।
मामामी, इसलिए परांठे मामे ! मार और भी
मापके सामने एक रेसिपर बैठकर में लगी मम प्रायो।
नरेन्द्र मेरी मी पोम पेश निपाना से मापा समान सीपमा है।
एवरे सिवा मार ऐसे सपन मेवीवो एक समवे! भाप
ऐसीबीग सोपी।
दिमा-एन पाय है, भौर कोई मापसे भी नहीं पाया
नरेन्द्र महो, कोई नी मारमा। मेरी महमे मही
मागीमाप सरसौनी नाराय।
पिसारस्य माइकलबार से मार मुख्य गमे से

पतीपमक में मापसे सन नायब है। मेरा कोष किसी तरह पन्त नहीं होता । भापको देखते ही पा माफोलोप मारमा बाठा है। नरेन्द्र-पक, बिछ। माप तूप बानवी है कि इस माम में मापी ही पीत हुई है। बिमा-मम सरह बानती है कि में नहीं बोली--पूरी बोरसे ठगा गई हालेर, इस छोपिए-माप साने बैठिए । सन बी याही वो चूट ही मो, नौ बसेकी गाड़ी मी मा पम्मी बामे रंगे। नरेन्द्र :-ना ना, पली पाने न दूंगा । ठीक समय पर फा देगा। [ नरेन्द्र मोयन करमे माता है। पामीपद पदो समय ब्तिा है।] कास्पद-माषी, भापमाना- विजया -ना, ममी नहीं। (मीपदान प्रस्थान ।) नरेन्द्र --मापके पर नौकरों के मुका पर 'मा' सम्बोधन मुझे बहुत ही मम मात्रा है। मिक्या-नौकर मेग क्या कुछ मोर मी बावे k! नरेन्द्रनामो नही । मेमव्यानपाना- विपा-माप को निकास पराई पचा किया करते हैं। नरेन्द्र-बो रेलय पाप नहीं ! रिखपाना । मापन श्रम मा मह र करके पनामर है। वामीमें इण्मी पड़ा न पना पाहिए। मरेम-सब तो मरे प्राय ही नरेंगे। इसनेमें ही मेय पेट मर माता है। एनाकोन सापगगन विवा-ना, पर नहीं मर मापा। पति एक मप्रीषिप, पE निम्रा करते-करत ही मन्यमनस होकर खाए । स साये बिना किसी पर पुष्परा न होय । नरेन्द्र-इम्मा सेनेपर मी माप प्रती किमी पेट नहरी मण, साना नमा मिनु पमधे मैं पेप लावा उसे भगर देस माइ होगा। रेलती नरी है, मी मीनान केला जुम्म हो गया है। मरे रेन रोय पनानेवाय मापरस्य पाममा ही पदमाय मोसमी .

विजया हिती मिक गया है। सपेरे भाना बनार न जाने काँप रेवान पता ही नहीं चन्ता । मुझे किसी दिन भेटने में ऐसपातेमौर किसी दिन पार बस पास मीठा हा इमा मात भौर की रोटो सानो पाती है। पति दिन किसी पी पाती है, किसी रिन कौए सिपी मुम्मे पानस मासे । भौर पर उपर बिखरकर प्रेम र बिसे रेसन हो पृपा होती है। महीनेमें मारे दिन वो सपना ही नहीं होता । स्लिा-ऐसेन नामक मोर पामोंगे माप निकम बार सो नहीं काभपने डेरेम छना पवार मी अपर इवना प्र उठाना पण तो शि नौनी पीयों की बाम ! नरेम-एक रिसापसे माफ्ध काना है। एक दिन पाठक मलसे किसीने से सो रपए चुरा लिये । एक दिन माप की कमी एक पत्र नोट बोभाया । सम्पमनल खेको पापगरी विपरा नहीं। (40 मर) मगर पार पाप पर रिनोंसे यावे मानो भरम का सपना सय नीं। वह कमी कमी प्रेरकी भूत भगने पर शीबाने-पीनाममपान पाता। [विमा मिसये पुरवाप इनवी यी है।] मरेमू-मसलम नौजन्य मुझे मजमही माती, भौर मुझसे होती मी नहीं। मेरी पर बस दो म। माप देगा कोई पा मारमा रोनों स्त जानेवारे देवा मोर मैं अपने अममें भय पन्ना मोर कुन पारय । मेकिन पैसे पो मारमी महो। (एमएस tat) में सपाने से परे १-एक पेग में मिला करना नहीं पारवे ! [पा पार पायनिया हो ना पाठी रातीti] नरेन-किन माले पिवमा भमर विराहते तो शाद इसमय मेग का उपभरोसन-4 निमय दो इस असिसे मग रखापरखें। रियाला मारने से पाना! ती माप पारानते या बानटे माी। नरेन-मा। मैंने मी सो कमी मी रेच मोर नोन में पापर मुझे स] पतीय मक कमी नहीं रेप। लेकिन तो मी या मुझे पार करते थे। कितने मुस उपए रेप विष्पमत पिसा सिए मेवा था, बाम्ती भाप । उमौने दी- मपम, हमारे अपके सम्म स्सा परम्मी कुछ मापसे नहीं का गम ! निसा कानातीतो सम्मन है। लेकिन आप ठीक क्या इसारा पर रे या समझे बिना तो मैं बना मही दे सकती। नरेग-(सबमर सोरकर) पामे दोमिए । थप पर मालोचना मिस्कुस विवा-(म्म रोकर) ना, परिए-माफ्को काना ही होगा-में मगी ही। नरेन्द्र-पिन यो मामय सनम हो गपा उसके बारेमें मुनकारी मा होग, ताइए। विषया-ना, पहन एगा, भारको पाना ही होगा। नरेन-(सकर) पाना स निरपंकी नहीं है-कानेमें मुझे न्या मी माती है। पर माल मपने मनमें यह खेल में कौनसे मारने अयमेर (Sentiment-माबुवा) उमार कर- निम्मा-(मपीर माक्से) मैं मा मोर सपामर नहीं कर सकती- मापके पैरों सी समाए । नरेम-साने पीने के बाद? पिसा-मस, बो। नरेम-मपम प्रकरण । हकिन उसक पासे एक बात मापसे पूज्वा । मरे परक परेमें स्पा समुब ही उनोने सिी न मापसे नदीमा ! (विषमा मषितर मीशु या उजवी हो उठती) मम, जापाने में पाप नही में प्रवास में विस्मय गया था, तब भपने पिता मुलसे सुना था कि मापके बापूध ही मुझे मैन । भाव पार-रदिन हुए, एका बापूने मुझे कई योग एकस रिया। मापे दिन मोठेमें मेरा ट्रय मय TO मसमान पर है, उसी में एक मेकी इस सबमें कुछ चिनियों पी। पिटामोर्भ पीर होन परम पावसाने पापा मेरे । हाप दिला पार प, स्नमें दो दियाँ मापके २०० चित्रपा [खीर पिटाके दारी मिली थी। पर मापने इना रोना र मावि दिनों में मेरे बाम्धीमे काम फेनमें पारमा ताना हर दिया बापान पाता है, कोणरा एक चिहीके आरंभमे है। उसके सर नौके हिस्से में एक माह परमापरे तिवीमे उपरेशक मिसे पालना देकर प्रसूनीको मिला मानले दिए भिवा महकरना । नरेन्द्र मेय मौतोयरे में यह ससीको दमें देता है। शिवपा-(सिर उठाकर ) उतक पर! नरेन्द्र उसके बाद मोर भौर सा बचते हैं। न पा पत्र परेन पाटेपमित्य हुमा है। बहुत भए उनका मा विसर पर बदल गया होपोर इसी लिए उन्होंमे को माफ्ठे पानी मापक म समझी हो। मिसपा-(कसेर तक स्पर एकर) परिप, मारपरका दावा करेंगे। (it) नरेन्द्र -(कर) लाया ये माप को ही मारके रूपमें व्य मामामाप महापोठयो। विवा-(यान दयार) निरन मुझे गयो मनायेगे। नरेन-मही वो स्पति कैसे होगा। यामी नोभावमें सापित करना पाहिए पर स्वमुप की मेय। विषा--मोर लिखी माती मसत ना, अपून मारेगरी मेरे रिम्प भारत का मान में माता पेय एंगी। नरेन--(सामा ) पान पसानिमालास रेसे दिना मन बापटरी मिमा छिी में रेया पारी है। किन्तु पहात मार उसमें विरामी मरे में विस्वी पर ममान नागौ। मरेम-मय मण मन्त्र का नायालय या प्रमा। निष्पा-पा मंशा पारको नही रहा, इणा मीठो प्रभाव पारिए- नरेन्डरिन भरमैन रामवर दाम।

तृतीय मक
विषया-यह आएकीफा । किन्तु ऐसी हामसमें मापी दुआरेाके मी
खे। मुझे विवाभिनुरोप करने पर ये दावारने पार होगा।
नरेन्द्र (सिकर ) उन लोगोंके ग्ररेम या विश्वास मुझे मोहै। महाँ
साफ कर पाने मी मार हूँ। (निवपाने इस सीमें साथ नहीं
दिया, पुन रही)मपात में है या न, माप देगी।
विश्पा-अपन अपूनीकी दो को मैं रबम नहीं कर पाऊँगी--
यही मेरा पम है।
नरेन्द्र (आन्तमाक्स) मा पर बा मापने एक मत्कार लिए रे गम है,
कामरे २ सेपर मी मापको सप बानेन्नमम नहीं होगा। इसके लिए वमे
मोयार ही मैं क्या कमा, भाप बाएई भारतीय स्वमन मेरे नसी को
उसमें मार रोग। बाहर पहरी-न-करी बार श्रम किये विना मेरा गुबर नही
होगा। इससे परमी बोम्मास्था हुई है वही दो मामे मोहै। भोर मी
एक बात है। वह बार स्मित प्राधे भाग एसके मिए बिमी तरा
रायन र पापेंगी।
विजया-अफ्नी बीबर लिए किसी दूसरको पये प्रनेम पेश स
भमफे लिए मेरे पान असम् तमन नगरे। मन आरतो मोर पर
काम पर एकले।। परकी पर मारोबार नहीं है, तामा उपिव
मूम्प मुतसे सेलीपिए । सिर परसो नौकरी मी न पानी रोगी और मम्ना काम
मी माप मामे र सकेंगे । माप रामी हो पाइए नरेन गम् ।
[इस मिनपपूर्ण पाठसरने नरेनको मुग्ध किया, पवन मा किया।]
नरेन्द्र-धार गर्ने मुनम राम दाने ही भारतात सकिन यह
न्य नहरी । सा गाने क्यों, मुझ पा पार पाचन परिबारि
अगर परसे में पापर र भाप मनमें भुनी नहीं हो सकी रसौमे नि
मोबाना AIAIर मार का मुझे मेय ना पाहती हैं। भारी
या या मेमेय पार रण। हफिन दो मुझे निम्नी न पाहिए, यह पौष
मन मे परत्र मानन रामे के समा!
विश्पा-आर मानवतासे पुले सिनाव।

[दितीय
नरेन-मनुप्पी से मनुमा पाता है, पर क्या कमी होता है।
कोइसपर मिपातकोय।
विवा-देखिए, आप सोमा देनेकी धन कीमिएगा। मापप्रपा,
ऐसी बात मैंने किसी दिन नही की।
नरेन्द्र-पिन ममी बोकापा कि मैं माइकोलोरर माफ्लो ठग
है गया कानाको बहुत मग सानेगाव मधुर गामबहको।
शिमा-विमा पाठी) सेफिन माटो पर है।
नरेन्द्रकीहा, पोहेही!
चिया-माप गरीष हों यासेमादमी, मुझे इससे क्या! मोमा
पूना महाप पान करनेके लिए ही पा पर आपको मेटा देना
पाती।
नरेन-इसमें मी पोहासा मिया ए मा। और उसे बाने मी
पसी प्रतिज्ञाएँ वोकर गई, लेकिन पिछले दुमके माफि देने में कितन
पीय देनी होगी, यह मानती हैं। माया पर ही वो नहीं है।
दिमामल, मफ्नी सब सम्पधि मौटा लिए ।
नरेन्द्र (कर सिर हिमते एए) बोधे यससे साया करने
गुमसे करो, यहाँ कमियर में न तो मेहमारे मासे राजा
करने सिएपने बमली कोकिन उनके मारे मनुनार
मराबायकोर पप सम्वा, यह मी मावम।बीयर पर भौर
कुल बीच यमीन ही नहीं, उससे काम्पादा-बहुत मति देना पड़ेगा।
विमा-पाने भौर सासमा मापको रिवा है?
नरेन-उनी वाशिी मी मेरे पास। रसमें उन्होंने केवल सतना ही
रोष देत मुझे निरा नहीं या है। यहारको माप देती।
पहनम्ती मनात है। मैं उसी परपर र सवा ऐठी
भव नहीं है। यामधन, मा पर, मान रेमि पुती माईना-पगारी
नारपींग, परके राम-पाठी, ममय-समपारी मय उनके मासिक पर
साका ! पाक्सा माप पनती हैं। पागम हुम, मात्र
अश्मदी का पाना (पिसा पपायमूर्तिी कर

स]
हवीय मंक
१.३
(स्राप मिलाये ये गती है) पों, सा पान पड़ता है। रुकेंगी
कि न हो, एक पर एकान्तम मियम बाइसे इस बारेमें सपा कीकि-
एया।--(चियाके सिर उठाते ही उसके खरे हुए पीछे
दरेपर नपर फाते ही नरेनन माहास पम बात है।)
नरेन्यू-(भपके साथ) माप पागल हो पा रेसा ! मैं सा स्रमुख दी
न सब पायोपर पाय करनेवाय ।। या राग्र करते ही पाउँगा । यो
सेही पा से बार पानाम्सानेमें दस दिया मारा।
विबमा-(गमौर मुझसे) माँ है, ५ बापूचीकी विडिया।
नरेन-सा होगा रेसार।
विम्मा-ना दीबिप, में देगी।
नरेन्द्र-चिहियों हस ठ दिनसे मेरे इस कोशी बेबमें पड़ा है।
रीमिए । लेकिन हपिका न लेना-परफर मैन देना ।
[पेपमे रिद्धिमान पर नियर नरेन विबमाके सामने गरेता है।
देवया कि पपपन सोबर एकके बाद एक दियो उस्टने टम्टो दो
पदिनों स्तमसे निकास सेती।]
बिना -यह तो गपूर्णके हापकी सिसाक्ट!-बापूनी । प्राची ।
[रोनो चिहियाँ मापसे गाकर सम्म होम वी है। नरेन्द्र भोर
रेडियों समगर पुफ्पाप नाम पता है।
तृतीय श्य
स्थान-विम्याके परम स्या हुई गिरा एक हिस्सा
[परका कुछ कुछ रिस्मा सोध सपियोंसे दिखाई देव है। परंण मोचीक
में या-पवना हकर मौषम पाय मा य रहा है। पौडेस स्ने एए
परिसरी पा प्रवेश परते है।)
फ्म -पदमरे मेरे सास-सका रह!
परेश-(ठिठार महारो पटा है)।

[तील विजया राम-रामबारे सुमर उस नरेनको परमें क्यों गुम अया या! परेए-~-माधीने हाल- राम ---मातीने कहा तिनी रातको माध परसे गया-ता। परेछ-मुझे नहीं मासूम को बाद। राम-~-मासूम नहीं रामबारे, बा, हेरी माफीने नरेनसे स्पा स्पा बाकी। परेप-मटो महाहानही गोवामाचामेमा-याठे परेण एकसपमा, इससे शेर-पली मोर पतंग बाबर खरीद म्य। मैं दौड़कर बम गरा। रत-भव मी एप सप सारे नहीं तो पियारेसे कोरे सभागार सेरी पीठ पमान उपस दूंगा। परेश-(स्माता होर) सप प्रताबोवा, मुझे नहीं मामा नये रचनने तुमसे हमाम बसि मरी मासे पार पूर्ण से। राय -सेरीमा। यही साठी वो सारी दुराधिपास मी निकास दूंगा भौर उसे मी पारेरे हायसे मदनिया रिस्पर बके मारकर बाहर पर मा। भौर पर दो सास्य कामेपद , उसे मी निधार भौर परेश-मैं कुछ नहीं बानता सेवा । यस.-बरदार ! ये सब बातें मिमीस न प्रना। मगर मैंन मुना कि ने मपनी माचीसे एक मीरात को पार रस दोनों हाय पाठकीत पत्र परवानसे बलविन्यू माऊँगा । बरदार, को देता। एक भी किसीसे नमानाबा-- [पनविदारी भौर परमन पसे बाते हैं। दूसरी भौरस विबा प्रवेण करती है मौर एयरसे परेको मन पान गुमटी है।] विषया-हारे परेण, बो से पाय यो Raरहने स्पा किया है। • मनमें 'पम्पूर्ण माविष्य एक पोषा माविली पतियों एयरमें भयमेसे पान पैरार देती है। बिन्दिो प्रतिगम मसात

रस]
वतीय मक
परेश-उनोंने पानेको मना र दिया है मारी। पते पे--सबरवाल,
को देखा। मगर एक में बात ने अपनी माचीसे ही रामयदे मुभर, तो
उसे सिपाहीसे बार बापिप्पू मानाया।
[पते पते रो देता है। विवया स्नेहपूर्फ
उसकी पीठपर हाप फेती है।]
विम्या-तुझे कोई र नहीं है परे । त् मेरे पास राना। किनकी मनाम
रेहापगावे।
परेश-(माँ पोग्गर )ो बाबू करते हैं-रामाये मुमर, नरेनको
नमो गुण पाया था, साया साध्या कितनी रात परमें गायिनी
रात गये गा-गो-ममा माची, तुमने पर पाबसे पमा पापा,
मैं मा पार्ने । तुमने उपमा दिया मौर से ही मैं रोर-पतली पतग सरोदने
पण या दोस्ता हुआ-हैन ठीक।
रिया-रों, पण तो मया था।
परेध-फिर ! पे नये परवानगी क्यो । कि मैं सब जानता है।
बरे पाते हैं कि वो पोर तेरी मात्रे पक्के मारकर निख्या दूंगा। मोर
इस पीपरपो-इस मीनियम पारगा।
बिया-त्या परेश । र नहीं। बाबा जुम मय वो चाना नहीं ।
परेश-भन्न मामी मम्मी नहरी पाउँगा। दरबान दुखाने भावेगा यो में
माग पन-मोना
शिवरा-मागार मरे पात भावाना। (परेश बावा)
[पसविहारका प्रवेश]
ग:.-म पहीही बर्य! तपरेती निकापी। मैंने परके भीतर सर
जगारपर देशा, विक्मा रानीप्रीय नहीं।
रिखपा-माप भाग खन स्वरे से मा मय!
पस.-मिपर तरहराके अमाप्रमोला बोला ठहरा री बम एक
सुमिता मार भी उदासो ही नहीं सा । मगर दुगारी में भी ये
मस हो रही है।बान पाता है, मी मप तर मीद नहीं आर!
रिमा-नीर महीभाई।

किया [स्वीम राम - । रामा-फिरान पानी, टहला गई हो। विवा-श्री नहीं । कही। - तुम मोदी मो, मेकिन मैं कैसे मान गाइन का निमम ही दुश। सापपान राना अपम है, याब रेलो, नहाना-मोना नहीं।-, बरा पर बार उपर पथना पड़ेगा। तुमारे खेनके मरेमें पापो गरेकी तिबोरी है, उसमें सव ममीन-पालरावी ता-पदीके गरपन पर हैं। में एक बार भी ठप पड़कर देखना रोग्य । मना से भोपरी बापू तरफसे भोपाली सीमा पर एक मुकामा पावर होनेवाल। पिका-ये होम मुकदमा मंगे, या यापस कितने करा ! रास –(पप रेकर ) पिसीने कहा नहीं थे, मुझे इमामे हार सर मिस गाती है। ऐसा न होता तो क्या रम्नी पदी मरारीका काम में इतने दिन यस्य पाता। विवा-सिनी मीना बताये मेयर। फन बमीन सम दोगी मेरो मायके म्ममग होमी । विवा-का, वनी-सी । ते में ही है। इसमेरे लिए मुकदमा मी बरत नहीं है। यस - (सोम साप ) म सौ मीक मासे ऐसी बात सुनने माया मैंने नहीं भी मेरी ! बार बिना बापाक भार दो पौषा दोस फिर दो ही मापसे हरापन पाने पड़ेंगे, पर फिटने भा! विषया -स्वमुच तो कुछ ऐसा हो महो रहा है। मैं प्रवील मामूम परपसे मामल्य-मुकदमा मनमोइ बसत नहीं है। रात –(परंवार निरिक्त दुर) ना ना, पा किसी तय नीरो कच्या मारेबापूबा मरे मामा मप सब मेरे परमें प्राव , लिना मापति दो बोपावो पर है, दो भंगु मीन रोग देने मी पोर अपर्म होगा। इन मि मी म भने कारण, मिसे पुपम प्रगपत भनी मा एक बार देखनेणीवरूखबार पर समर पये मेरी,-रेर हानेसे मुम्मान होगा। ।

स] पवीप मक विवा- [-सा नुकसान होगा। रास - -बहुत-सी बाते ।।मानी उनी मा फिनत , क्या क्या ! (मुन्द्रमा प्रवेश) मुनोमबाहरकी पेठकसे पही-साठे ठठा ते पाऊँ मानी ! विसमा (बित होर)कुछ मी नहीं देख पाई मुनीमची । भाव राने विए, सतपरेती में निभय मेव गौ । मुनीम-चो भाशा। (पाखे हुए मुनीमको विवयाने पुकारा।) बिसगा- मुनिए मुनीमनी । सवारीघ वा नया दरबान कासे पाय मा है। मुनीम-समय तीन महीने हुए होंगे। शिल्पा-उसकी अब बसत नहीं है। एक महीनेत्री तनसार मषिक रेर मात्र ही उसे मान दे दीथिए । (बरा रसर ) ना ना, पिली करके कारण नीरमादमी मुझे मस नही पान पस्ता इस दिन यस. -पिना कसूरके किसीपी बीवित पुराना मा मचाये ! मुनीम-दो फिर उसे सा- विवमा मेरा म पो माफ्मे हुन मिया मुनीमजी | भाग 0 मिलाकर दिए । रात--(भपनेको समाचार) मन परा का करके पसे देये। पुराम भगवान एक बार अप वर पदना बहुत है। रिश्मा कयो। पमा-राणे, कारण है। पिन मी बार-बार एक भी मात दोरमेके लिए मर पात प्रसन्मब नहीं दिया। सिबपा-पाव,पावो मापने कदा टेफिन प्ररन एक भी नहीं दिखाया। रास.-बार न हिलानेसे तुम नहरी पाओमी ! (परा फार) के माने पर विमे मुतपर विपास नहीं है। (Aबना पुप रहती है।) [पखवारी मा मस्ने समाउ नही सके। पवार मी ठोसार मेटे-7 १०८ विजया [वीन रास-किस लिए म मेरा इतना पहा मपमान करने साहस भो। किम पि उप मुझपर अपियास करती हो!रा सुन्। विक्या--(पात सरम) मुझस भी तो मार विश्वास नहीं करते। मेरे पैससे मरे ही ऊपर पासून वैनात रमेसे मनम माव सा होगा, पासा भाप समका नहीं पाते। इमाया मपनी सम्पपिक मसती भागात इषिमानेन माम मर में अमौर कमाईमा सम्म, तो मा मा मत्वाभाविक होपा पा परमापका अपमान करना । [पसपिहारी मारेमें मा गपे । एचएका मोग न सके। उनकी इवनी बड़ी फको बा एक मेकरी पम पम पा संगम उनके पास विमागमें भागाही न पा । भोर पावो बहसपने में भी नहीं सेब ने पेश किया निसकोच र उनके रपर पापात पायी। कुछ देर तलमाहिम विमापी तर कप में रहे। फिर इन प्रातिके मेगोन बो मन्दिम अम रोवा, ही तम्ममसे निMR प्रयोगमै भये।] राज नमानी इम्बत सानेके लिए ही यह काम करना पा! मका त म पर करना प? ! एक ऐसे बदनसीब, बिससे पान हैन पापान, रावसे पम गुमम, सानेके कमरेम मापी-भाषी पता सा-उवा प्रमेन मतमासा मैं समझ नहीं पाता इससे तुममा मास मही मादम होवी, डिन हम भेगोंकी तो परमारकही मर रिन्पना कठिन रहा है। सपामें किसीरे गमने सिर उठानका उपाय नहीं रहा । (उमर निसिसि माने इस मा प्रभाव दिपासा मा पारेसम) मैं पूछारपात सा भी है। पारोको पेश करना मेरा काम नरी [विसपा सुन रहती है। 13.-(समीनपर ही ठोकार) मा पुर गनेस काम नहीं रहेगा। या खान बा गुस्सा देना होगा। निगावात पार सिनी मौन हो, ही नम्र में क्या उचर रे सध्या राज -सा महामार मारेना पाती।

म]
वतीय भक
रिक्या-मैं ठहा देना कुछ नहीं बाहती प्रमा। सिर्फ पा पाना
चावी किया स्पसर है। साप ही साप पा मी भारने ठाना
पाही किसे मार माप ही मानते हैं कि यह छ ।
H.-मैं मुद मानता हूँ कि परछt?
मिसपा -बीहा, बानते हैं। लेकिन भाप गुरुपन है। मापसे इसपर
परत या पाद-विसाय परमेोपी नहीं चाहता । पुग्ने मागबात देखना ममी
राने दीपिए, मामले मुकदमेकी बम्त समरेंगी सो मारो दुध मेशी ।
[लिक्या पडदेती है। रासबिहारी माटेमें हुव बने को पते हैं।]

चतुर्थ भक
प्रथम दृश्य
स्थान-विपाके परसे मिले हुए बापत्र पूण्य और ।
[पोड़ी दूर पर मसती नदी कुण्स मिल पा रही है।
रिसा और माईतिहासापासून प्रवेश।]
गार-माको दवा पिराधेिय। मुना, इसी रफ मारो।
गा, पर बनेके पाठेर रेसमाधाबर में होगा ।
सिवमा सो दयाया।
एमाल-भारतब है। माप दिनके पर ही पूर्णिमा होगी। मन भौर के
दिन प म पेये, उम्मको विमान सब रयोग, बवाय गमी
रिनाम पूरी कर लेनी होगी। मगर पबिहारी बिम्मेदारी मरे उपर
सनर निमिन्द हो गये।
रिस्पा--मापने विम्मेदारी सीमों!
पारो भाननी विम्मेरारी-सा नहीं !
विमा-हो फिर हिम्मत मोकारो।
मा-पिचत नहीं पाता | बातमीमुमसे माल पर
प्राकिबो बानी थिम्मेदारी तो मैन पाने क्यों काम करनेता
उसामपनेमें नहाँ । मन इससे दूर हीराना चाहता है।
निम्मा-मोकामा
गाड-मह म और समझमें नहीं मावा। वानवा मने त
विवाह सम्मति से, भपने हापसे खायर पर RE--भागामी
पूर्णिम मार होगा-तो मी पैस इसमें रस नहीं पा । उस दिन
मरे मम्मानस नागा र मने मिस पूजा पो तिरस्कार किया,
पा प्रमुन हो चुप मानेग्रल पा, उपमुष ही कठोर था। दो मी
न पाने मो मुझे पान पाकिमले भैल केस मेप भम्मान दी

चतुर्य मक
मही है, मौर भी मुला हुआ है, ये पड़ी परेकी तरा सरावा
है। (कुछ देर मौन रहकर) पापात पर मैं तुम्हारे पास हमेशा
नही माघ फिन्त मेरे मात दो हैं। तुमारे पहरेफर यह निम्टवा मिलन
समीप सिकही पा सूमोदयी स्पष्ठी को देख पाती है। मेव्यै, नम
नहीं मानती, कितने दिन एकान्तमें तम्हारा पा और खरा हुमा पहरा मेरी
मॉनोकि मागे पूमा किया। मेरे दो मीतर म्मा से उमा पही है-
विमा-नही पात्र बाबू, पा सब कुछ नहीं है।
सास-बोला या मेरे मनकी बीवे!
विरा--(मथिन सी तिम) मग तोही।
साम-ऐसा ही हो बेटी-मेरी भूकही हो। बान पावा इस समय
मेमपने पिताजी श्री मार मा रही है, उनके एि मन न पाने वापर
रही-पही पातन श्चिमा।
[विषया सिर हिमकर उनके सपना मन करती है।
दगा-(श्री साँस छोएर) इस एम दिनमें भयर या पाक्ति होते !
विना-किस सिए मुझे लोग रेपे, पर दो मापने पठाना नही
सात-भरेरा, पाबे मिस्कुल ही गला । विवाह निम्नपत्र
माने होंगे, वम्हारे पुरुपयोंको मारके समय दुस्मना रोमा, मेगाँ
मम्मेसी म्परया करनी होगी-नसे मपर उनके नाम और पते मासूम
होते-
विरा-बान पदव, निमत्रमपर मेरे ही नामसे पाप पायेंगे !
दवा नही बेरी, तुमारे नामस क्यों करेंगे यसबिहारी बाबू पर मौर
न्या पोतो ममिमारक, इसिए उनी नामसे निमंत्रणपत्र पाना सप
हमा है।
रिश्मा-तप सा पौने एम्मिा है।
स- नोने ही दो हिसार।
रिक्सा-पो पिर पामबहो म परे । मेरा फ्यानही हैं।

विजया
[मपम
रया (विभपके साथ)पा तुम्हारा सामान है। मानेसे
हमग प्रम करनेवा पोर मोर स्वार कासि पायेंगे।
विवमा महा माझमा, उस दिन नरेन्द्र प्रेमा मापने फुग पुरानी
चिकियोम एकदिमा या !
बार-बातो या बेटी । म्स दिन एमएफ मैने देना, सरायके
मीवर एक निशिगोता पाहै। उनके पिताम नाम देसार मेमे उन्हीं
हाप दे दिया। मो रामैन मपम नहीं किया।
निबना-नारी पार पाइ, इसे पूरा कौन कर सकता है। उनके पिताजी
बिहिया उनेरेरी, यहोकरी किया। उन रिमिको मा मापने
पहा पार
दयारा -(मिमनसे) मैंने ना ना पाई चिहिमों मम में पर सम्वा हूँ !
दिया-उलोमे उन चिहियों के सम्मपम मा मापसे नहीं मा।
रखाप-एफ एम भी नही लेकिन अगर कुछ बामनो कप्त हो, ठो
मैं उनसे पूछार का ही मजा तात्।
सिपा-सही से कागावो मा इस तरफ माते नहीं।
दमा-माते को नहीं। मेरे पर रोज ही माते हैं।
मियवा-हर रोग ! मापी भी की बीमारी पा फिर गमों, यह
पास वो मापने एक दिन मी नहीं थी।
इमाम-(सकर) नही बेय, या बोगस नगी है। इसीसे नही
पमा । नरेमी पिफिसा मौर भावान्की रमान पर फ। (हाय
बोरकर मातानो प्रचाम पर है।)
पिसा-पामठी, वो मी न ऐबक्सों भाना पश्च।
मार-मायापक न होने पर मै मभूमि ममता सा ताबमे दूर
तीसरे सिमा उन मासोई कापसा नहीं है। कोई
विशेप कर पा मित्र नहीं । इसे सम्पामध्यप नहीं मिटा ठे
है। मेरी श्री तो में मपमे परेके ही समान स्नेह करती है। नेहमोर
पार करने हापक होमका है। ऐसे निर्मक, समावसे ऐसे मछे भावमी
मन कम दोरत है या नम्निी इकबादी ए. पास करके

चतुर्य मंक
गारी पड़े। इस बारेम वा नसिनीको कितना सलाहित करते है शिक्नो
बापता देते हैं, इसकी कोर नहीं। उनकी सहायताले नसिनीने इवने ही
रिनमें अनेक पुसके पर समाप्त कर दी है। बिसने पदनेका दोनों को
विषया--क। छेकिन पाप सा मौरस सो नहीं करते।
दयामाहेका देहबेरी।
दिया-मुझे स्पा पान पाता है, बानते दिमाग काम् ।
रपा-मा बान पस्या है मेरी।
किना-मुझे पान पाया है कि नमिनाके सम्मपम उनी अपने मनम
मार स्पा करके करना चाहिए ।
याम-का-पानी हो। यह पत से मेरे मी मनमें भारी,
सकिन उसका समप ममी पीव नहीं गया । स दोनों बोका परिचय भोर
भी इछ पनिर पत्र व न हो, तब का कुछ न पाना ही उचित है!
विमा-बिन्तु मम्निीके सिए वो यह पतिका भरण हो सका है। हमें
माना मन स्थिर करने में शायद समय पगेया- फिन्त इस बीच में नग्निीकी
खास -सप बात है। दिन मैंने अपनी सीसे वहाँ तक सुना,
खस- ना ना, नरेनपर हमें बहुत विसास है । मैं तो मा सोच
ही नहीं समय नरेनके दारा सिसीकी कौमति बनीमा पर
भूबर मी विपके पाप भम्पार कर सकते है। ठेकिन पाल्पा पोती
पामें दम परसे पर दूर निकम माई ॥ोमा पाइन्नी दूर भा गई, वो
पसे न बेय, मना पापर मी एक पर देश भामो । मारे बानसे नस्त्रिी-
प्रेमामोतो पर मुधी होगी।
विरा-बसिरिन ते छप्पा हो बासी !
दयाममा हो बामे दो। म उसमस्या बगा। इसके सिमा
ताममें कनामिहोती।
(तसा प्रत्पान।)
www

विजया
[हिती
द्वितीय दृश्य
स्पात-पाय के परफे नीचे रामदा।
नसिनी और नरेन
(मेक्सिके दोनों मोर दोनों के हैं। सामने जुम्मे कई पोषी,
समा, पम्म भारि पदने किसनेका स्त्र सामान रखा है।]
नमिनी-बमुच ही मित राप किग्रा माप उपरिक्त नहीं रहेंगे।
दी दिन तो रा प है। फिर पसबिहारीबापूने मापसे मनुरोष भी किया है।
नरेन-ओने मनुरोग मन्स बिना है, पर बिना विनर, मोने
ते एक पर मी नहीं मा।
1-पाकाती तो भाप रे!
नरेन-नी। मैं ठार नहीं समय-समय मुझे पतीसे पस्दी ना
नौमीपर पाना होगा।
नसिनी-किन मेरे रिणाम खमें मी मरोगे।
नरेन-ग्ग। निमयपत्र मिमग्राइगा। भयर मतमा म हुआ तो
मारले विवाह भवासही उपस्थित होगा।
नपिनी-पान देते है।
नरेन-, बयन देवा। भमर विवना स्वय मनुरोष की शागर
रटी ठरा उन मी पवन देवा । ममा होमे पर मी।
नविनी-ऐखिर गटर मुसी, इस विवाहमें पिम्पालो मुल नहीं है,
भानर नीसमें मुझे पोरवर दो। कारण सोने भाफ्ले
भनुरोप नही सिा।
नरम-हफिन म्होंने भाप हीदी सम्मतिरीहै।
नमनी-सम्मति पानसे री, सागर ग्रम्प होगा पिन इससे
सम्मतिमी मी मरे मामा ऐसतीप-सारे भादमी मने तिला
मयारा भी नही रख पाते पर उनके मन में संध्य परकर पारे
किषिमा रिसेपाटीमा भारमी पासि बार नहीं है। ममी काही
समासे परोसनसिनी, मारी पारी जरा मार मरे उस भा

पसुर्य मक - सा, टेफिन मुझे अपने मनसे उत्स्पा नहीं मिम्ता | केरळ यही मम हावा 18ोई गति काम करने वा हा। मितना ही नबयालो देखता उतना ही चान पाता कि दिन-रिन सूलती पा रही है, पहरफर साही रोखी चाही। मैं स्पों यहाँ भागा! मान्दिरी दिनमि मगर पाप माउँगा तो मरनेके बार मपानको पार क्या बबाव गा! नरेन्द्र-रेलिए मिसराम, या सम नहीं है। मिस्रा अमी-ममी -ीमारीसे उठी है-ममी का पूर्ण रूपसे मच्छी नहीं हुई हैं। नपिनी नौसे दिन दिन कती बापी है। तूम ! गर मुसी, मेरे मामा यो सामनेका रेस पावे, किन माप या मी नहीं देख पाते। भाप उनसे मी अपित भये हैं। उस दिनकी बात बाद के देखिए । प्रेम होने पर मी साकी मिमात मासे, पारे बिना कोप होने पर मी, माहि नोरके सम्पपकी बात किसी तय नहीं करती थी। नरेन्द्रको भावमी रपए मांसारमै ब कुछ कर सकते है मिस दास । उनकी पानपर गाम नही पी। नसिनी-मह काना माफ्का मारी अन्याय है गर मुमीमा भी पहलेसे में सोचानवी-दम एक ही कालिबमें पदवी पी । ऐन दिन मैंने उनमें कमी ऐमर्पका गर्व नहरी प्रमा। उनमें कितनी रया है- पर किमना दान पुन भनुमान करती है, पप सा भूल गये । अपरिचित रोतर मी बर माग्ने बार कहा, वे होने तुरत पूर्णमाको 'पूना करनेी अनुमति दे दी। किमत वा और यसबिहारी बाबू यस प्रेषित करके मी उसपा नही कर सके। माय, सामुहि भौर न्याय-अन्यापन बोप विशेष सहग होनेपर री ऐमा हो सकता है, बमिरार करके तो देखिए । मेरे मामा तो मरी है, लेकिन मे उनपर मिनी भरा रही है। इसमें स्पा ममी- गैलापमा बाहिर होता है गर मुसी। नगम्मू-(३० सोचकर) बेहोर। मपर मावम गया कि मिसोने मोहन नही दिया दो से किसी वरा भूम्प न पाने देयो। पारसि दरा हो, उसे भाप सिणगी । भौर सिमने-पिपनेमें मार-पानी यो पुछ पूज्जे ही नहीं।

विशमा [शिप मसिनो- सिमामा सम्पपिके पास होगा। नरेन्द्र-और इस सी सिमकिसी अमन मोर असीम है। मा मान मे पारसे उनके मनमें पारिश नहीं थी, मेना पर पाक किमत अगाईब्बीसे~-- नसिनी-मामात हम समी पानगर मुसी। नरेन - हो, मग बानते हैं। उस दिन उनको बरा परेशानी में गने पिही पनमा की उस सिमका उसेस करके मैने का मा कि मेरे गीत मारे कितना कम किया हो, दिन आपके पानी या पर मुझे ही बता रे गये थे मो मो मापने ग्रीन सिमा। मुमार विमा हरा अर गमा।पोमा त मगर सब मैं मापा पर मैय एंगी। इस मैने का~मावदो मैंने सच ही कहो, किन मार वापस कर मेर पर गंगा । भरमें पास- उपर गया होगमा सिबार और इथे मेरा गली । इ मरेश को शमा, परी मम । नोंमे तिमिर m~वान होमा-भाप लेना ही पोपा बीके भारेपी उपेक्षा में प्राय बानेस भी नहीं कर । पर नसीपरके मुनासिराम बोहो पथिए । मैले मा-मिया में नहीगा। मोती-गो में माप पूररे नाटेके भारत्मीयों कर दूंगी। सामोरे गये है, पर में अनेगी नहीं-किसी तरह नहीं- महा मेगा पाना मरे मिरपर पुरिबार हाय । मैंने करा- ममता रक्षा करने के लिए सारा देना हीमा, पाती है।सा पर परमी-पाप, या अमरारी, रामदासी ममन्यपारी, सप्तर-पग येविस कुर्ती, मल सनः मालिकको मरे हायमें बैप देना होगा। दीबिएगा परेमगी। नमिनी-(सिमानाप) बनमाय अपूर्व ऐसी को रिलीमा! मम्योपसे तो किसी मापन पर मरीमा। गरेम-(डर) पा उमामोधी बात पिसे । मैं पागल लिपिीची पात को तो समुपदीस मामून मनमानी Riti (मेस बर) उन ऐम्में की राय मावर एक वियोग मेरे पिता नाम देकर पास पाइने पर मुझे

पतुर्प मक
दे रगा। मैंने पढ़ा तो देखा, उसमें या ममेकी पात सिकी है। मारतो
सनदी कि मनमासी पाए मेरे पिता के सचे मित्र पे। सोने ही मुझे
पर मिलने के लिए मियत मेरा मा ।
नसिनी-इसके बाद ।
नरेन--बिसाने का विदेस पिताजीकी शिी। मेरे बमें ही चिकितावी ।
निग्रमर सामन गाय दी 10 सोसार भून कगामी तय मोबने समी यह
विदाएपएक चिप उठी या मरे पिताजी की मिलाइसके
बाद रोनो चिनियाँ मापसे स्मगार पल मारते ही एकदम पत्थर से गर ।
नमिनी-इसके बार।
नरेन्द्र -उनीमा मति देनार मैं र गला। एपरम पुप और निमा हो
मई ! एचएल देव, दबी मांस उनकी प्रतीकी फसिमों का फूल
उनी । पिन और बैठनेन साहस नरीमा, पुपकेसे चम भापा।
नलिनी-पुरकम पर्स मारे ! फिर उनके पास नही गये।
नरेन्द्र-ना, उपर गया ही नहीं।
नसिनी-नेरेसने भापका बी नहीं पाया।
नरेन्द्र-(सफर) या बानर मापको क्या मिलम !
नसिनी-नहीं पहनाय | भारो दाना ही पोया।
नरेन्द्र के मापहीसे में मार सम्मन क्लन रीलिए कि
कमी से नहीं करिएगा।
नम्निी-बरन मैं नही सी गे मी माफल श्री बास्वरिनरी ?
नरेन-बान-तदिन पी बी पाता है।
नटिनी-(पार रेलर मोहमससे)मामे-मारप, माइए ।
नमस्कार मची।
(विपा और दयामा प्रवेध।)
विवा-(नरेन्द्रकी मार पीठ परकर नमिनासे ) नमसार । मैं भी
किनी पर पवा माने तो भाप एक न मी नही परे।
नम्निी-पापनेने सोचती, मगर भरत मोमें-
सिया--परला पाममा शपद हम लोगों वहाँ नही।

विजया
[शिवीम
नलिनी-सोमही। दिन मामीची बीमारीसे-
पियमा--
विजनी मिती ।यों न।
नरेन्द्र-(सामने माता सिते हुए महसे) मोर मैं को गा मौका
खो वापर पापानी नहीं पाई।
RRI---पान पानेसे हीसा पासमा सव। (नबिनीसे) परिम
मित दास, अमर पर मामीगोसे परामिण भाई। परिस।
[ नरेम सम परियात मी न परो नम्तिीको एक से ठेगार
पायी है।
नचिनी-(पाते बावे) गटर मुसी, चार मिना पिये भाप भी माम न
बारएमा । हमें औरनेमें रे न होगी।
:-मैना, तुम मी वर पसो न । वहीं पास पीना।
[नानी मौर मिया पीवी71]
नरेन्द्र---उपर पानेस रहो पपग्मे साल पम्। किरण बनेकी गाती
कान पाऊँगा।
पालम वास माय नमकी देनसे पापा करते हो-मार इसमीपाद
पची सोकर रोना, पाप नहीं खनेके लिए का।
नरेन्द्र-नही पास बदू भाव पार गने दीदिए । (पर्म देसार)
पा देखिए, पौर स गर है। मा मुक्त करने मलाय नहीं है। मैं
बाता। मामीरी पुस्लिम।
पाल-पोरस दामाद नरेन।
नरेन्द्रमा समोर एक दिन मर मे समक्षा मा ।
(मरवान)
[ मौतर नलिनी और मिसिनेमे मनाई वाम
पारही परमार पूर्षि मी साप प्रवेश करती [1]
पाकी मी-(सासे) नरेख कहाँ गा! या सो मही देख पाल!
सभी ममी पा गरा । मोग-म-मारपती ट्रेन से

एस] चतुर्थ मंक रसायमी-पासी बात है। चार नहीं पी, साना नहीं था- ऐसा तोपर कमी नहीं करता। [समी पुप रहते हैं । विषया दूसरी तरफ मलि फरे नही रहती है।] यादी बी-(पतिसे) तुम्ने बाने को दिया। पापों नहीं हाकि इसे मुममा पुल रोगा। गा-मैंने कहा पानि पिर मीमापार नहीं सका। गाची स्त्री-यो निपनी पारी प्रम होगा। करकमी नही सम्वा । कैसा मम मा मे।सा निन्, बेता ही पुधिमान् । मुझे तो उसमे मरनेसे क्या दिया। रोज तीसरे पर नमिनी मोर बा पेठे बैठे पड़ते सिते और में माइसे देखती रेसरसा मचा मावा, मसे सा में। भावान् स्तन माम करें। विजया--सम्मा हो गई, मा मैं बाउँगी मामीची। रसाली मी-पार सिनो तरिक्त सराप हो, मारे पाहमें में बस ही उपस्थित रहूँगी। नरेन्द्र काता कि मुझे बहुत पन्ना फिरना न पाहिए । सो पाबारे बोले, मैं नहीं मनगग। इन गारोगी सभी बातोको माना बाप तो पीना दूभर हो पाप | भाचीर करती । सुख होमो समे उमर हो। बिस्पस बापू मैंने माँचोसे नहीं देखा, लेकिन इन (पासवान)के मरसे मना है कि सासाम(कर) पर पान दोन पेमे, भाप ही अपने नाम किया है- रिमा-इसमें चुनाल परमेन क्या है मामीमा । सिमोड सम्पमें समी पुष एकसे है।ई मुसका ना बातचीती मनामें कुछ बोधिवार भौर कोई मही है, इतना ही है। प्रमोगन रोमेपर से मीठी पर देते र भोर श्रम निम्स बाने पर उपमूर्वि पारप पर तेते हैं। इसमें मध्य मा दुरा ना मम्मीगी । हम गोंध हालका बीन मत मन्तक कुममें की करता है। नलिनी-बाबात माफको ममनी पाहिए मिल राप। विपा-इस समय में बात नहींगी, लेकिन भग्ना पाह होनेपर एफ दिन पाद पीपिएगा कि पाने व ही पाया। सेर, मब देर शेरहो, में पीकि- ।

चित्रपा [प्रितीच पम्नमें-- माबी- दबात (मध मारसे) मेरी एकपटेन में। विवणा-(सर) अपय काँ है पात्रपा, नाहर सिर, माधम बाँदनी प्रास्म मेल कामेंगे, भाप पिशाम प्रथिए । मम, ममत्था । (प्रस्थान) दमासी भी(पविसे) माने या का, इस मना ! पा-मा! बनानी भीम गौरमा मन नहीं है!स आरे, उसको बार- पीतमे से एक मई सुर बार बनी यो का मी। रिमाको पहले ममे कमी नहीं पेला लेकिन माय उसम में ऐसार धन पसा, से उसे मार पर रौब देने महापा। मैंने पूजा--पर पसंद वो माया या पोम-इसमें पसर-नासरको पवमा है मामीबी, नियोजनबीन मेक इन्वमें ही पाता है। यह स्वाभानन्दका मासो भी काफसर है। सतके मा नहीं पाप नहीं हैमर रेसर बड़ी ममम ही है। बिना समाए माम नरना। में सारा सामो। पविभातीही माहित। मी-पार रसी, नो अस मी मोर एका मानिती। अम मत मारो माया हो-उस परसे, खके पर मुन्नसे सव-पीते से। उसम माप, प्रमुख रेना या तुम कम नहीं। इराणचे-समझे बिना सीसा मामठोगे। --तो तुमी स्वामी, मैं सा*। पा-मी- प्यारमें तुम मात्रा कम मरी। मैं प्रवी बांगे एक दिन में माना होगा। द--(पिति मुझसे) किन विवयाने ते संत विहमें मपनी समविद निहारी वारे सामने अपने दाबसे अगर वन पे।

एस] पतुर्य मक १२१ - -रये, इससे सा होता है। उसके हापने सस्त किये है, न्च बने नहीं किये । उसने बीमने की है, किन्तु उसके एम्ने सम्मति नहीं दी। गा मुन और हाप ही क्या बड़ा दरो पापगा मामाची, और उसके दरवी पास्तविक भसम्मति दर पारगौ । सामने मासे माना नहिनी। मिनी-मैं पानठी भाष बाते समय नरेन बाम पहरा देतान मी साइम समझ नहीं पाये। या मोर साम्मी भी-(एक साप ) नरेन। हमारा नरेन ! नषिी-हा, ग्री। समर्ममत्र! एकदम मोमब। नासिनी-(सकर) भसमय नहीं है मामासी, सस्प है। (ोर देकर) किन विवसाने बो सब करा- नसिनीमा का। रायमामपर और नरेनपर बरा नगर रखनेके लिए। मा, नोनको मारे घरे भने मना मात्र स्पा करके बता देना चाहिए। नामिनी-(म् ए.) मे ठी, नरेन अम् मेरे से माईके समान सभी-कैसे मारकी बात है। हम हमारे सस 'प्योतिष' मसा व गये। उसके विभक्तसे गैटनेमें वो मा कुछ देर नहीं है। -मोविय हमारापही मोतिय । रगासी मी-नारों, हमारा यही पोसिय । (सर) इस भो माद मीरेचर मुझे जरा पीकन विना पड़ा। एमाल-मभी नरेन्द्र फेरेपर पाया। पानी श्री-पनी पसयों। प्पा-यो । पूण्वी हो-को-अपना कम मैंने मैक कर सिपा मसे मब मुझे गौरिया नहीं होगा। नामिनी-मान मनुम्म दो मामाची, मिनु कमसेसन सिमिम पर मलेकिन भार स्वप्रे नही-मोरे माना।

- १२२ विजया [स्तीम - सापही होप येये।मैं सपेरी मादीसे ही पमपम्। नम्निी-मैं मारी बाप मरगी मामानी। मम मम उमर मारे मोबना समय सुभा। रपाक-पये (सका प्रस्थान ।) तृतीय श्प स्पान-~-चिका पर, पुकासम । शिवबा पर मिली। (परेशकी मत्ल प्रवेध।) परमा- मने इस साना मही, भार स्वरे-मेरेशमै नलिरिया रानी। [विसमा सिर उठा और फिर सिनेमाती।] परी माला-पोर लिमिली। उठो-मे, गटर पा मारे। [पर मिल पाती है। परेप नरेमा पाभाडर पम पाता है। मरेल मीवर मुसते एक इसी सारा समय, बत समय है। मोर मौसम गंग भोर मपातिक महो।) नरेख-कम मुले पासान को नहीं पाई जाए। भारसे हमेशा सिप अपरिपानही पद धारावा! मामा-मारमा भोर पहरा देठासा! रिक्तदोबाराम महीने मेरे से भा गपे । पान पारी बारामीरा नगर भरेम-स्टेनल पात्र पी भाना। तो उठते ही काम सापा नहीं मना, नीद नही मानाबमर को एक ही मनको मस्ती पीर वाद हो गया भर मुख्यमन होगी । विषय-4 मिना माय हो उस पासे भाग गये । रेपर और कर मी इए म लाया और ताके सठपर मानासाना TV मी, इनी राह दम पते भायेर निन्मे र बाय, गरी पेश हो घर ममेरा भाप सना में शाम्तिसे न पाने ।

स्म] चतुर्थ भक नरेन-माप मी ममुठ मनुप्प है । पराये परमें पापानना नहीं चाहती और मपमे परमें इतना अधिक पापानती कि एक माम- स्यता है।कसका प्रण रेसम मैने सोचा कि सपर देनेसे भाप मेंट ही नारेगी, इसीसे स्निा सार दिये परेरे साप मामलापको अचानक मा पारे। उपदान माश्य , दर में माना। किन्तु माकर ठगाया नहीं। (पिएका उपचाप नरेन्द्रकी मोर लाती यवो है)स गासि गैरकर पेमा, रमिकमाशिपसे फेमस ( समुद्रीतार)मारा कि मुझे नौकरी मिल गई चार दिन पार कराधासे दक्षिम मानिकाने बाब बामगा। भाप अगर नमा पाटा ने फिर कमी मेंटीन होती। भापके गुम विवाह निमंत्रपत्र मी मिस्म है। एमप ऐक घनेन सौभाम्प न होगा। किन्तु भफ्ना मायर, मपनी भाभिम गुम-प्रमना मापने पहले ही बनाये बाता है। मेरी बावर माप भविमान न करे, पही मापसे प्रार्थना है। निसमाहरोध नौतरी मेहर मित्र मामिला परे पाहएगा । लेफिन । नरेन्द्र-(तर) माँ बसि मधिक सेवन मिलेगा, इसथिए । फिर मेरे दिएका कारचा नाही दक्षिण मानिन विमा-मोर स्पा ! जो वो मेकी जिन सा मसिनी यी होगा। भगर राणी मी रो तो इनी बम्ही से पाइएमा मरी समझमें नहीं माता । सनम तापता प्रक मासा १ भौर हनी र बानेके लिए हो या से रागीरोग। नरेन्द्र-ठहरिए, ठहरिए । भभी तक विलास सब रात कोबर पर माही नदी गई, नि- पिधरानपिन साना पर किमी न होने पायेगा। माप साग समयेगो सा बास्स विछोना समझते हैं कि हमारी इमोगा न हो, रस्मीसेपर भपमे पोछ गाड़ी में ग्रालिएगा और हमें मापा तापमाना हीरोया। यह मिी तरह न होग। टनर पी हुए बिना आप किसी तरह श्वनी नागे। नरेन्ट्र-(ए देर टारियपपिकी हर सम्म सार) मामस्य सा विजया (पीय है, महे स्मशार भीएन पर पास इस नई नोमी मात्र रास भासे पते की यह मी पौड ठठे थे और इसी दाई भापति राई पी, जिसे मैं समझ ही न पाया। इसने भारमिमिसेस नपिनी मतान्तर पर ही मन मेरा पाना पा न जाना सो निर्भर करता मोर को समा रंगी- पाकमा पोम पना बरहा है। पारसी सोलर सोकहिए। रिया--(नम्मरबीरे धीरे ) उनसे माफ्ने मा विवारच प्रस्ताव नही किया। नरेख मैने । ना, किसी दिन नहीं । विमा-न मिला हो, ठो मी साना न पाहिए मा । मापके मना मात्र की मिससे कि नहीं है। नरेन-(शारे छप) में यही प्रेम या विमा भनिए किसाप परिव दुमा । सप उनके पराठी कमी आ नरीम दोनों बन पान किमामलमन है। स्मिा-मसमय क्यों। नरेन-इसे गो।एक परम वो वाक में !ि और हम दोनोवाति मी एक नहीं है। विषयाबाद भार मान है। नरेल-माना। सिम्पा-भाप शिव र पौषको मनसे मान । मरम्-मफरोशीत मने नहीं कहा-पाति मानवाहीमा। मिनमा~मपम, पूज्य बासिनी मात्र बने रथिए । पिस यहाँबाद एक भीम्या जाहरा मारे अरब से रिसार नही हो पा--पर मारपना पाठमि भाप भाले दिए मापने ती दिने पारर R वामा भाप समक्षहमारे सिर की मन समायरी इमारी निमारे मोम नहीं है। मालो मा भमरलि पिए भौर मगर मापन गौ सय मत to gस्से ही भाग्ने परमात मो

रस]
चतुर्य अंक
१२५
नौवारी(प्रते-करते विमान माँसोंमें और मर मापे भोर इतीको
पिने लिए उसने महदेर मिया ।)
नरेन्द्र-(पबमर एण्य वाम सर ) भाप सा पर बोस
पी,गावो मेरा मन नही है।
शिमा-निमम नही माफमा मत है।
नरेन-मरी परीक्षा करती तो आप मास ते पाया कि यह मेय
२ सय मत नहा। एसके सिवा नपिनीके मामछेको लेकर पो माप
पिस पा रही है। मैं बानता कि उनका मन मो मानमोर मा
भी नियम ही समझ पाएँगी में पपिपीके पूसरे प्रेको क्यों माय पापा
है। मेरे बामे भए माप कार चिन्ता न करें-उदिम न हो।
शिमा-बेघर । नमिनोन मम न होने पर मीमा भाप समझते कि
पौ बाकी मुसी हो वहाँ भाप पा सकते है।
नरेन्द्र-ना, नहीं पाया। आपकी नापामें भी मेरा कहीं पाना नहीं
गया। दिन माप वोसमी पावे पानती है। मेरे बापनकी साप मी
भासे छिपी नहीं है। पिरेम प्रगद किसी दिन यह साप पूरी पी दो
सकती है नि इस देशमें इतने में निकम्मे दीन दखिम राना न राना
पार है। मुझे रोकिएगा नहीं।
विवमा-माप रीनरखि वो नहीं है। मापके हैरत
पमेय से समवे।
नरेन्द्र -इफा मते ही भवास भैया नहीं सपा विम्य भापने को देना
पमापा मुझे बाद मौर हमेण मार रेग्म । मगर रेसिप, सेनेका भी
एमधिकार रहना पदिए र भषिकार मुझे नरी है।
शिवपा--(म मरे ममासा समाते, उमित स्वरमें।)
सोनी, मयस्स है। पर सम्पति मेरीनरी, मापूर्वाध। मोर ना
माप पानत है। नहीं तो इसमें मी भाप नो संलपर पाने पर
बानपा नही महो। मेकिन मैं होती तो इतना काम नप

१२८
पिडया
[रुवापस
रिया- मुझे बनाये पिनाकी बाइएमा तो नहीं।
नरेतुना पनेरे पासे उमसे करवाया।
विषया-भूतो न बााएगा!
नरेम-(सर) बलमा -पहिए याममा, मग बातें।
बनाये। मममी, पाता है।
[एक भोरसे दबा मोर नरेन और दूसरी मोरसे लिक्या बात है।

पश्चम अक
प्रथम श्य
स्थाम-क्यारे बैठनेता कमरा।
[ परेश प्रवेश करता है। पोषी पालकी सादी भौर हीरा कुर्वा पाने
है। गसमें पुनी हुए पादर पड़ी है, लेकिन पैर नंगे है।]
परेछ-मानी, दीन-चार ब गये, लेकिन पानी तो सबक नहीं पाई।
मेरी मा या प्रती है बानती हो मात्री मती है, से रसाछ बापू सठिया
ममे है-यौवा देकर भूक गये।
किया-से, बान पाय, बड़ी भूल गौ परे ।
परेश -हासी भूसी है।
विवा-मम्हारा नहीं।
परेश-नही। ति समेरे भय सी सेपा भाई पी। मि माने हा
म्पावे ना मी देर में मिलेगा, और माता से। इसीसे-रेलो माली,
पाना-सा लाया।
[श्वना पार उसने हापसे परिमाण दिसा रिला । फिर पूछ-]
परेश-मो भूल नहीं पी मापी!
किपा-(परा तिम) मुझको मापी भूल स्मी करे।
(परेसकी माला प्रवेश)
परेणी मासूम क्यो न मोगी बिटिया रानी ! समापन पर ग
गपादन या रासा, पाओ को दो मही गा! मादमी
मेगार पटा गया।
विश्याकीमारमी मेग्नेय बर मही परेशानी मा। भगर
सबमुरी भूपये रोपि तो गुर समित होंगे।
परेणी माग्नि न्योता बानेत्री भायमें अमाप पोएम पर

विजया - वसावे वास्ते परेशान हो गया। मन सवा, हर महीने किनारे पर देस मालाकि पानमा रही है या नहीं। परेप, एक दम मोर बार देखा (परेशाant) हेपिस सबमुब भी समय रेसम मुझे मारब हो रहा है। उठनी से दो मास्टर बनने पर मर गरे भौर पिर परेक बरसे का वेसीहात्मस्टेन मिर हाबिर ! पूने या परेगी मा, धमारी मागीदामने -सपर अपने कमरेमें दी है। हेपिन इसनी लोमोसना मापने । यो बरेममा, सोसारको मेरे पाँधमप मोबन रना-म, परोण, प्रवीन मोर मेरी मै मिक्या। में निर्मगन ने मामा । मे पूज-निर्मम पापी मामाया चेहे- उसो रसिया रानी। पिसामने नहीं मादम परेप मा। मुमतेचे मारा रोमहरको मरे म अमले पम्मा रोम 2। पामार भेग ,गा परमपान सोधिन ना कुछ साना-पीना नहीक- पारने सरसाम दारोगी, दोबार होगा। दोपा, मदिर होतो, परमा रोपा। लेकिन बोबानीपिस होगा में निमंत्रण सीपरी मरती परेशमी मा। (यधिारी प्रक्य) यत्ता-परसा। ममी बामनहरी यई मेयर गरे। परेप मा-पाय मेवोपा पादोंमे, गेममी कही। पता-उनके समी काम ऐसे होते है। पानीमवर उनको मी मिले पीतो मेर पाच सरसो नहाँ मेत्री में पान विश्मरदेवा। रोमको जिमना या, गे सामरसारमारमा। सीमिए विमल मिसा भाग है। गा महर मी पाच और गड परे ।- सम्मा (पोहए परेप प्रवे) परेप- पमा ने माना। [विहारको रेखते ही पावित हो रहा है।]

स्म]
पथममेक
राव-भाव सारे१ मा रही है। तेरे लिए तो मये है। रेजना
परेण, रखना न पना किसी गेममें गहराना परे । (विपाठे) वामो
देये, मर र नको-दिल मिट नहीं एयवा है।बार पानी मेव
देना। मुझे म गाना होगा। बिना मपे पो प्राण गे नहीं, हर ना होपा,
बुरा मानेन । पावोगामी मम्वा मरो दिन बाद मेरे परमें मी उत्सम
है-काम मारो मारे हम सेमेकी फुर्सत नहीं है मुझे । ठेफिन मेरी पव
फोन सुनता है।राविधारी बापू, एक पर परमे परक्रब रासनी ही होगी।'
माएक गपे किना नवा नहीं। मपर काना, स्त हो गई तो सिममा
पण । पाभो मेमे, दम मेम। मैं पान तब तक मिमीकाममा रिस्पारे।
मामग...भारमी सबेरेसे शाम मुटे पवे है। मानसा है, एक
मास, कामको स्पोरामो मेहमान मा ये महनाम
बारीमें कही को पता है।
[ना पाकर बसे पाते हैं। उनके पर मोर का भी प्ररपान ।]
-
द्वितीय श्य
स्थाम-सपर बाहरी पेठक।
[तप व्यकी मांगसिक उबाबर है। बहुत से मामाबा। समय
बारामा है। उसके बीच में पानी कहारो हुमा मुन पसी । सबमर पर
विमा प्रवेश करती है। उनके पीछे परेश प्रीपद मौर परेशीमा।
रसात दूत मोरस हुए भावे ।।]
सास-(स गम्मतते)मामे, मेरी म मा मा।
विषपा-स्तेि पुर मुसमे) मारसी म्पारमा मीनापारी मेयनेमें
स्वनी परररी-मन मूखों मर रो। वही शापर मात्र दोगम
निमत्री।
दपाल-भारतमको मोक्न नहीं करना बेयाम पोशावोगा
मशवाय माहा मात्र तो माननी हो पोगी। नरेन खेमसके
मारे निर्णय पा-यो रे परे, तसा पाता।

विजया [हिवीय - . [एक मामी मस्त मावसे माता है। उसके हापमें नर मौर सोहाना भाचे बगैरल एक प्राथमें पी।] मामी--(पसे) दान सामग्री भोर सोसगी सब पो मा । मैने सबाने पिपलपा पर भौर वारे पाननेता मगेरह सब सामान का।नाहीसे रंगने और मुलाने लिए! सास-बामदेरो। दिने पर। संप्याके बाद ही महै। प्रसार मत्र मषिक देर नही है। (विमासे) माम मो, मन-मुहवे मिस गया। न मिन्ना मी भाव मिया करना होता, या किसी तर नहीं तमसा | मपराये मम्मानीपासे ठीक ठाक मिठ ममा । एसीसे मनारंगी ईनर कापे किमावता माव से पार निचपाए ही पत्रामें सिता गया था।-भाव तुममा माये। रिवा-आप मेयम्मा। रमन-बसे ते मात्र इमारा परमानरम मायोधन , महोत्तरी म है। विमा-(पाप कमसे) माप सा मेरा मार बि-रीतिसे करेंगे। हिन्दूरियामा बिमार मही है या किन्तु तापमहायिक मनाद मनुप्पको एब मरना देवाशिम वीसरे पारमर सोच-सोपार मी में इस अपमानको समाधान नहीं सीबसमा सेभिन नमिनाने दममरमें मुझे समारियाबप संशर मिय दिया । बोली-उनके पिता बिमोहरमें उन्देरे म उसीके हममें नामिए । नहीं तो का भमर मपात्रो रान करोगे, तो तुम भीग पोर मर्मरे मामी दोमोग। भोर भिमनन मिलना होखे सपा पार नहीं मारके मंत्र संपतमें हो पा भाषामे, न मोम स्पारण मधवापरा या मरिसे मायर्य, इसे इस माव्य-नागा नरी । स्नी की परिस समस्या से एपरम हो गई मिला। मननी-मन -मगगन् ! हमसे तो पुछम मही है। इन मार मेबारे ति मासे पो न बम, मारे निप्र मपराय नहोउँप, मा मैं निमस पानवा। पर मापुरष-निपानिमा विममुरम्पत है।

R
पशम मक
खास--(थकमर धुप गार) तुम नही मानवी पेये कि नरेन में
दिवना पारता है। वोमी यह ऐसा मानत तुमारे सिरपर कामोश
सरकार में मी प्राम रनेको राजी न होता । मादिसे मन्त्र उसके
सामोपर गौर करेलोन दिलवा।
[विरमा उपपाप सिर मप्र घिर माबसे सही राती है। नमिनी रोवी
हुई मार पाय फारती है।
नसिनो-पार, मुझे ममी का सार ही नहीं मिली कामकी मौहमें एक
मामी टुमा । पर पहले मई, हमको उबामेन मार मार मेरे असर
पापोपी।
[वना पाकर पह पियानो मीचन मीवर धर्म वाती है। साथमें परेश,
परेशमा भौर पीपद बाते हैं। नेपणमें सक्षम उठता है। मान
पीन प्रदेश।
म.-म समुपरिपत है। भाप वेग ममुमति दीपिए, मर्म
मामहें।
सोम–(पक साप) म सम्पूण भावारमसे सम्मति देते हैं मचा-
बी, मी एमर्म मारम भीषिए ।
म.-चो आय। (परमान)
[ गरे किमान पतिहर नाना ताग भनेर कार्मासे मावे गावे देश
पस्तेमौर मौतर कसर सुनाई देता है।
वपास-मेर भी मनमें संघव भाषापा। पर बड़ी बात पर विजयाने
उनलमी मर ी-रन रिमा हैनटिनीन रा-पापी व
नहीं मामाची खियाके भन्वामीमे उन हामीध माप नहीं दिया।
मम मा उठवमो को नॉपर उनकी पानी सीमाविकोही
मात्त रोमे १ मुनकर भवाइ होम में टस भोर ताम्ने म्मा मा रमे
समी-नम रस निसानो बारमाही पा सत नहीं बन बाद में
मी सोम साये सबके उपर लान देते हैं, वे ऐमा सत्तारण नहीं
क-सस भापरके मने प्यार करने वारण ऐना परदे। माप
समय पर मरी पालवे, इन मास महाशपरे बापरे सस

बिजया [विवीप कुम्पुरोहित थे। फिर बहुत दिनो पार माय उसी रात्री पारे विवाह पुरोरिकता प्रम परने के लिए मैं नेपा गाना मेरे लिए सही जाना पाता है। सरके माधौरिस या मा समानमय हो, निशिको-पही भाप गोरे निकट मेरी प्रपना। सरोग-म भापीदिर पर मोर मान पस्मार हो। रया-कलारान करने के बारसे नापी एक गुमा- एक मापुरुष-कौन-कौन प्रिय पेयाली विका एमाल-ौकरी। सेशक साप मनमें गरबा भावा भाव भी मनमान्य बाबू बावित होते ! मफ्नी एमात्र या विषयाको मरेनानायके पापम खेल्ने रिही नोंमे मरन्द्रले पराया जिम्मा मौर मारमी बनाया पा । दयामय माचीगारसे यह सवा मनुम ना । नमाम बापू या सिकार म्म्म बनाये हुए नरेनहायमें ही हम नया मेपर। बनमाम्य बापून ममिणपा भाव पूर्ण। नग-मभिमाधीबार देते । [मवापुरसे सपनि मोर समय हुन पाग। पाल-(मति मगर) में मी मानते मापना पER हम मोबी एम जपते। परपर-मनमारप्रेमी भावार देते बाबू ना था, यबिदामरेनिमन्केबपत्रमार होगा हम ठहरे प्रवामन । गुनकर मपसे मरेबापावा पानी - एमाल-( भाषसे हाप उठातर) मा ना ना। ऐट मतपीए मसारी । प्रार्थना परखा। उनम मी मठ हो। --मसाला होगा। गोमें पो। मेरे वमो- सा-ना ना ना ऐसी पान न करना चाहिए-नसनी पाहिए- सितारे मसिए । रमामय मगवान समान मम करे। पर-किन्तु माहादिष:- [बीरममोर पारसे रामा म प्रपेयजटिपिार रठ सो होवे है।] जग-मारए, भारए, मारए, पपारिए यतविहारीमान् । हम समी मापरे एमालय प्रा।

पधम मंक १२५ (RAM नबरसे दमासी मोर देखकर) भाव मामय क्य, वामोतो महाविपर केके स्तम, प्रारम भरने मातर एलप एद ममी ममी मुना-वारा ये कुछ दुरी नहीं दी-रेफिन या परेकी देवा ।बरामन वो पास-(मप भौर मिनपके पप)मार स्विमात्रामा माई। रासायम किसने दी, पराम। (पावसाने नहीं माई करमामाग्री- रात.-समामी ! पात्र कौन है । मीणा का ही नरेन। गा-जम वो-माप ये पानते है कि मनमा पाकी रिकाम्सकी यही पत- -पनवा मों नहीं। स्नमाचीकी समीम म्पारमा मन्तको हिरीतिसे ही किया गया। इमार-माप पानवेलममें समी विकार-मनुसन एक है। प -हासा मामी भूब गई कि उसके प्रपको मनाने गोबसे निमलबार हिरा था। [इत समप र मतापुरसे एलपनि भोर व्य-चरान कामय मुना देनेभान।] सास-एमय निर्षित स्मात हो गया। मामनमें प्रेर पनि न रत र मामाद रो भाई, बर-भू रोनों मुख्य हो, गर्मामा हो मोर पिरती । - मुसे कार में पारसस्ते ये दगा। तब पर एस पावर नबरनी होती । इस मुझे तसे भरिक पारे। [रासबिहारी माने रहते हैं। इनमें नमिनी हीसे हार मातीहै। नमिनी-(मपरनेके गुरम) गर। माप मा म्मारके परसे मर मीठ किय विवाहीपते पैगे! नशेगा। भाप ला-पीपर सब बरसे सगे राबपिारी मनमा। पिऊन परसे निमम रेडर मन मारने पर मुख्यपा। पता-पाम, याम मौन है। सास-मेये मानधी नछिनी ।

१२१ पिनया [पिताप पन-ठमश्र। (प्रस्थान) दमाश-(राथमिारीकी भोर नगर किसे पुर.) एबमें सी ममा पाई। भगवान उनके प्रेम करें। गुसी महान, सिप, हमा पर मम्मागकिमाने पामी परस्पा बरा देते। मापने दिन की मी कोई मपराय न होने पाये। पूर्ण मागी-प्रबारविक माधोबिसे भी किती महकी पुष्टि नही दबा बापू-समी मास्था ठीक है। (पान) रखत-(एसे परमपूजो रिचार) नमिनी इन मेको मौका बान-पानको देना होगा बेमे । बामो, मपनी मामीसे पार करो। नबिनी-पाटीमामाची । सा-मैं मी पन्नामे | (रोनका प्रत्पान) [लमा भिगमरमर खासी पर मोर गम्, दोनों पावे ।। नरेन्द्र-(Aमासे) गमार रोजर मा सोर रही हो, सम्मो तो मामा विना-(सहर) देवी मारी दुर्गतिनी बार । मामाकोलमेप मेरकर मुझे ठप ने ये, उसका फल मा हुमा किमको मेरे । भार पर उसका मापमित मना पा! नरेन-(मी मामार) उसनबापा मारा। मिला-हा। मगर जामा मलिन है। नरेन्द्र-मिलने से।पिन रेसो, बारामात कि मार्ग प्रार न करना । नहीं तो निरा मम स मनसे प्रहारे हाथ मार मेरकोप बेपने रोमागे । (दोनो ईसी) नानी-(प्रमेध करसे) मामो माई मिसेत मुली मोर मारए ग. मुस । ममाथी मार लोगोन मेन परोसे लपेपेठी-अमर पाये मसामो, इतने बोरी सार मोरोही पौ। विश्या-(प) मापानमन्त्री तथा न0- (पा पिस्ता है।) Poon समा

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Sarat-sahitya Vijaya (natak) 39

Author
Rupnarayan Pande
Title
Sarat-sahitya Vijaya (natak) 39
File name
Sarat-sahitya Vijaya (natak) 39
Text
OCR done
Citation
1948
Published
2010/12
Publisher
Bumbai,hindi Granth Ratnakar P.ltd.
Language
Sanskrit
Pages
148
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
Literature
DLI number
514735
Barcode
4990010022423.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
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