Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner

Shiksha- Vidhi

Rudra Narayan · 2011/02

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शिक्षा-विधि
जिसमें
अपर प्राइमरी स्कूल के अनट्रेडों, ट्रेनिंग स्कूल के प्रध्या
पफों, और नार्मल स्कूल के शिक्षाथियों के
लाभार्थ, ६३ इशारे दिये गये हैं।
जिसको
रुद्रनारायण
हेडमास्टर गवर्नमेंट माडल स्कूल फैजाबाद
ने एजूकेशनल गजट की सम्पादकी के
समय में सतह करके
नेशनल प्रेस इलाहाबाद
में मुद्रित फरा
रामनरायन लाल, बुकसेलर
प्रयाग द्वारा प्रकाशित क्यिा।
सन् १६१८०
पमाति १०००
दाम)

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निवेदन
इसके प्रकट करने की मावश्यकता नहीं कि यह इशारे देशी
म्फल के अध्यापकों के लिये कितने लाभकारी होंगे। एजूकेशाला
गजट में जितने प्रसिद्ध प्रसिह इशारे पे है, उन सभों का सग्रह
कर लिया गया है। ट्रेनिङ्ग मास्टरों के विशेष मामह से हमने इसके
प्रकाशित करने का भार लिया है। मत माशा है कि सहदय
पाठकगण इसे अवश्य अपनायेंगे।
धी अयोध्याजी
चैत्र पूणिमा सघत् १९७५ वि०
निवेदक
रुद्रनारायण
हेडमास्टर गवर्नमेंट माडल स्कूल
फैजायाद

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विषय-सूची -- -- F १० M २१-'मा को मात्रा सिखाना । २-दर्जा २ को जबान का सयक (१) ८.३-दजा २ को जबान का सबक (२) ४-पडी कक्षामों को भाषा पटाना ५-समास १६८ को सख्या पर इशारा -१० की सख्या ८-सादा जोड ६-सदा याकी (१) ૨૨ २६ - -- M ३२ , " T TH 1 ४५ ११-माधारण गुणन १२-६ के मयू का प्रभाष १३-सादा भाग १४ालत खाका तखम्याह की सूची १५-सक्षेप माग में पूरी बाकी निकलना (१) . ५३ १७-भाग २८-लम्ये भाग की प्रथम रीति ६-सक्षेप भाग का मन्तिम पाट २०-चारों मिश्र रीतियां २१-मिश्र जोड़ २ पेज , २२-मिश्र व्ययकलन, २, २३-मिश्रगुणन २४-मिध भाग (१) १ २ 1 " " । - - दद १ ६४ " । " .. १०० " १ २६-मिश्र गुणन ( सक्षेप रीति) दूसरा पाठ "तीसरा पाठ ।। २६-तीनों रीतियों की तुलना ३०-दहाई का गुणन (चमत्कार ) ३१-दहाई का भाग ३२--महत्तम समापवर्तक (अपवर्तफ) ३३- समापवर्तक निकलना ३५-लघुतम समापवयं ३६-मिश्रभिन्न ३७-भिन्न गुणन ३५-भिन्न के भाग ३६-सम्यन्ध का पाठ 0--मनुपात ४१-मिती फाटा ४२--ज्योमेटरी का बिन्दु २० ची साध्य -४४--सुकानी प्रश्न (स्थान का निर्णय ) ४५--मक्षास और देशान्तर रेखाएं मादि चारों दिशाएँ । ४६---तसवीर और स्वाका . - 20२ १०४ १०५ १०७ १८ . . - । २ १ wor . 0 १२० - स

पेज
१४७
१५०
४७-नक्शे और पैमाने का ध्यान
४८-नक्शा बनवाना
४६-लार्ड कार्नवालिस
५०--घोडा
५१-भिंडी का पौधा
५२-चने और गेह के पौधे की तुलना
१७४
१८२
५५-कपूर
१८५
१८८
४६ साउन
५७-गन्धक
५६-पडिया
५१-सजीव भोर निर्जीव वस्तु (नयोन रोति) पस्तु निरी
क्षण और प्रति अन्येषण पाठ
६.--सीता
-वार्थी दांत
*२-नोचू
३-शेर का दिल्ली से मुकाविला
१६०
१९६
२६६
२०२

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-मा की मात्रा सिखाना विपय प्रा की मात्रा। कक्षा 'इस्तदाई दर्जा मा। समय २० मिनट के दो तीन पाठ। विद्याथों भक्षर पहिचानते हैं। सामग्री काला तसा, खडिया, झाडन, प्वाइन्टर, अक्षरों के ताश, कागज़ को मात्रा। ' . पूर्व योग्यता 7 - विषय पाठन विधि । प्रस्तावना अक्षरों के ताश विद्याथियों को यांटना, कुछ अक्षरों के ताश उनमें से निकलवाना, तसे पर अक्षर लिख कर नाम पूछो। श्रा की मात्रा के तस पर अौर मा लिख कर विद्यार्थियों से उनका नाम पूछना रूप और आवाज़ और दोनों के रूप और आवाज का मिलान करा पर यह निकलवाना का बोध कि मा की आवाज लम्बी है और इसमें एक खडी लफोर अधिक है मौर यह खडी लकीर अ के दाई मोर है। + प्रपा +N 1 + विषय पाठन विधि + आ की मात्रा दूसरे "तने पर और अक्षर लिखकर इनका नाम पूछना और इनमें म अक्षरो में मिलाना को सडो लफोर मिला कर बताना खा, गा, जा, ला, कि इस लकीर के मिलाने से इनकी आवराज भी लम्बी हो जाती है। एक था एक अक्षर पर माना रागा कर माप पढना और , विद्याथियों से पह- लाना, बार बार पूछ कर और कहला पर याद कराना। नाम बताना यता देना फि मा को खडी लकीर जब दूसरे अक्षरों में लगाते है तो इसको आको मात्रा कहते हैं पाकी मात्रा यह पूछना कि यह राफोर अक्षर के फिस ओर लगती है और इसके लगाने से आवाज में क्या अन्तर हो जाता है? । + " - अभ्यास .. 'तवे पर' अक्षर लिखना मात्रा (१) अक्षरो में लगाना-और पढगना या अक्षरों मात्रा' लगाकर का नकशा सामने लटका कर फाराज के प्रा फी माना एफ एफ उच्चारण पूछना अक्षर के पाम लगा कर पढवाना। " .

( ३ ) विपय पाठन विधि (२) उच्चारण बता पाठक मावान,यतायें और लडके उस अक्षर का ताश निकाल कर रूप बनवाना कर उसमें फागज को मात्रा लगा कर दिया। (३) दो अक्षरो के पाठक एफ शब्द विद्यार्थियों से कहे उसका अर्थ पूछे और उसे शब्द बनवा कर समभावे । इस शब्द के मकर पूछ पढवाना। आरा, पर पाप तने पर लिखे और ताशों और मात्रामों से यही शद धननाये ताला, बाजा, इसी भांति एक एक शब्द का माधा। पढवाना सिखाये। (2) दो अक्षरो के एक पाश्म फहकर विद्यार्थियों से उसका मतलब पूछना फिर एक शब्दो से वाक्य एफ शन्द माप तने पर लिखना और विद्यार्थियों से ताश वा मात्रामों बना कर पढवाना से बनयाना । बाजाला । . M 7 खाना खा । आटा लाया। खाया। चारा,

विपय
f
पाठन निधि
+
--
।
1
(५) नकशो और वापों के नशे में चार पढव
कर शब्दों का अर्थ और याम
पुस्तको में से पढ़-" का मतलब पूछना और शब्दों
द्विले फरना इसी भांति पुस्तक
वाना
से पढवाना।
ब्लैक बोर्ड सूची
अ आ :
ख खा ग गा ज जा
थ धाममा लला
चाचा बाबा नाना दादा
आरा ताला दाना
'चारा छाला खाना
पारा जाला जाना
राजा आटा माथा
बाजा काटा थाना
खाना खा, बाजा लो,
राजा
आटा लाया, चारा खाया, राजा पाया
.
-

. (दर्जा २ को जबान का सबक) (१) विषय रोडर नगर १, भाग २, (पाठ ५)।' - २ (२) कक्षा (३) समय २०मिनट (१) पूर्व योग्यता चौथे पाट तक - (५) अभि- ---सुपठन के नियमानुसार पाठ को पढना- म-मुख्य २-शब्द कार में वृद्धि जिससे कि लडके लिखने में शीघ्र ही उन्नति करें। ३-जानकारी। घ-साधारण-सरणशक्ति भावनाति और बुद्धि का सुधार प्राय t. । T (६) आवश्यकीय सामान-फिताय, कछुवे और खरगोश को तसवीर, तिपाई, बोर्ड, झाडन, प्वाइटर और चाफ । प्रस्तावना-पछुचे और सरगोश, की तसयोरे दर्जे के सामने तिपाई पर लटका दो पूछो यह फिनकी तसवीरें हैं, फिर फहो कि आज हम तुमको इन दोनों को यात चीत सुनाते हैं । मय निम्न लिखित पाठ का सक्षेप कहो और सुनामी । २-एफ फछुवा नदी के किनारे धीरे धोरे जा रहा था, एक सरगोश ने देखा और हंस कर कहने लगा फि मियाँ म यडे भद्दे हो, तुमसे तेज चलाभो नही जाता, मैं मयसे तेज दौड़ सकता हैं। यह सुन फैलुमा योता कि हां भाई सच कहते हो मैं तुम्हारी रायर नही दौड सकता लेकिन इतना सुस्त भी नही हूँ जितना तुम समझते हो। इस पर घरगोश ने कहा कि अच्छा हमारी तुम्हारी दीड हो, फछुधा भी राजी हो गया, और दोनों ने एक पेड तफ की दौड यदी और जानवर मी तमाशा देखने आये। खरगोश ने कछुवे से कहा कि तुम दौडो, मैं तो जरा देर सौता है, फिर झटः तुमको पकड लंगा-अय लड़कों से कहो कि यही हाल तुमको किताव से पढायेंगे। . M 7 विषय विभाग है विषय और शिक्षा प्रणाली प्लैक बोर्ड सूची - . - तेज - सुस्त फटिन वि० देयो प्रोफ गोर्ड सूची शब्दों के शि०प्र० चोर्ड पर लिप कर मुहा- खरगोश हिज्जे रनी के ढङ्ग से उच्चारण ठीक करती। और लडकों को फिताने रन्द रहें जिससे भ ভাবে उनका ध्यान स्थिर रहे । घोर्ड उलट फर उनसे हिज्जे पूछो। पाठकका EिO-पांचा पाठ, कछुमा और नमूना स्वरगोश ! (१) एक दिन एक कछुमा धीरे घोर नदी के किनारे जा रहा था। (२) एक खरगोश उसको देख कर हंसने लगा--और पाने लगा कि जरा शि०प्र०-शिक्षा प्रणाली। f 7 4 .

७ विषय विभाग, विषय और शिक्षा प्रणाली ग्लैक योर्ड सूची रे मुझको देग्यो जितने जानबर जगल में रहते हैं मैं उसमें सबसे तेज हूँ तुम फैसे भट्टे जानवर हो-दोड--तो तुम सफसे नहीं। -- + . (३) कटुमा ने-जवाय दिया कि --यह तो सच है-फि में तुम्हारी तरह-सेज नहीं दौड सकता-मगर--- जैमा तुम समझने हो-वैसा सुस्त भी नही । (४) यह सुन फर-खरगोश कहने । लगा फि अच्छी जरा मेरे साथ दौडी तो-जितनी देर में-तुम गज भर घलोगे उतनी देर में में-कोस, भर निकल जाऊंगा। 7 (r ) कछुवे ने यह गत-मान ली -ौर एफ पेड का निशान-ठहराया- जगल के बहुत से जाननर-फछुवे और खरगोश की दौड-दखने आये।। (६ ) ग्वरगोश ने कछुये से कहा--- कि तुम पहिले चलो-मैं-तो दमे के दम में तुमसे आगे निकल जाऊंगा। यह सुन कर पंछुमा तो चल खडा हो मगर खरगोश सो रहा । F I विषय विभाग विपय और शिक्षा प्रणाली स्लैक वोई सूची - . -शि० प्र०- जैसे कि ऊपर विभाग कर दिये हैं उसी भांति इमारत को पढो और सुपठन के नियमों का ध्यान रयस्वोन लड़कों से कह दो फि यह अपनी किताबों में देखते जायं मोर (विरामों का ध्यान न रपर्ख कोंकि उनको भी ऐसा ही पढना होगा। पाठकके वि०---उपरोक्त! 117 साथ लड़कों का शि० प्र०-पाठफ ऊपर को भांति लड़कों को खड़ा करके पढ़े और सब पटना लडके उसके साथ पढते जायें। विद्यार्थियों वि०-उपरोक्त । प्रत्येक विद्यार्थी का पढना से थोडी थोडी इचारत पढामी और एर्फ की गलती दूसरे से सही परामो जिससे उनमें ध्यान देने की टेर उत्पन्न ।" , . पाठ की वि०-देनो प्लैफ योर्ट। प्याख्या 1 शि० प्र०~~प्रथम फठिन, शन्दों के सरगोश अर्थ योर्ड पर-लिन फर मुहारनी के ससा यडे दा-से याद फराम्रो फिर लयकों-न काा घाला एफ एफ याफा पढयामो और फिताय जानवर।

विषय ब्लैक बोर्ड विमाग विपय और शिक्षा प्रणाली सूची यन्द फरा कर उसका भावार्थ कह लामो उनके अधूरे याशों को पूरा धीरे धीरे फरते जामो होले होल। । कैसे भई- पाठकाफल घिo-उपरोक्ता यहुत सुस्त दुहराना दम के दम शि० प्र०-इम्तिहानी मालात करके पाठ को दुहरामी। - 1 " - - 2 १ 4 इम्तिहानी सवालात का नमूना R०-आज तुमने किस चीज का सवक पढ़ा? उ.--भान हमने कछुव भीर खरगोश की कहानी पड़ी। R०-बताओ एक दिन क्या हुआ? ३०-एक दिन एक का एक नदी व किनारे धीरे २ जा रहा था। म.-पताओ उसकी मुलामत रास्ते में किससे हुई उ.--एक वरगोश उसको मिला ! प्र.--पिर खरगोश ने उससे क्या कहा उ.-खरगा। उसको दसर हॅमन लगाऔर रहने लगा कि मैं जाली जानवरों में सबसे तेज दौड़ सकता हूँ। और क्या कहा 30-तुम बड़े मुस्त हो । दौड़ नहीं सकते। प्रा-भला कछुव ने क्या नवाब दिया? ३०-उसन कहा मैं तुम्हारी तरह तेज नहीं दौड़ सकता। 2 प्र० - * - (१०) . . 1 - प्र.-और क्या कहा ०-जैसा तुम समझते हो पैसा मुन्न भी नहीं । प्र०-मला फिर परगोश न क्या कहा स०-आओ हम तुम दो। प्र.-और क्या कहा "जितनी देर में तुम गज भर चलोग उननी देर म में झोप भर निकल जाऊंगा। :-प्रताओ इस बात को सुन कर कछुन ने क्या पहार xo--कछुव ने यह यात मान ली और कहा कि घलो उस पेड़ तक दौड़गे। तामो यहाँ भोर कौन मौजूद था' 1.--जार के और बहुत से जानवर उनकी दौड़ दालने आए थे। प्र०-फिर परगोश ने क्या का उ०-वरगोश मे कहा तुम पहिले चलो। प्र०-और क्या कहा 80...मैं जरा सी दर में तुम से भागे निकल जाऊँगा। R०-फिर क्या हुआ? उ.-काय। रवाना हो गया मगर परगोश मा रहा। - . - 1 , - न - दर्जा २ जबान का सबक जाडे फी ऋतु १ विपय - - २ कक्षा ३ समय ४ पूर्वयोग्यता दूसरी ३० मिनट गर्मो और यति, का बयान पढ़ चुके हैं। - 1 " ।

-भा म-मुख्य-मुपठन के नियमा नुसार पाट को पढ़ाना शब्द कार में ५ प्रभिप्राय पृद्धिजिससे पिले पालने मोर लिगो में शीघ्र उन्नति पर जातफारी फी उभनि पराना । यसाधारण--म्मरण शक्ति- यमाति मोर उहिया उधार । मावश्यकीय सामान--पिता, परमार, जाट और गों पे मौसिमों के चित्र, नेफ पोरं, भाडा, वाईटर और चाफ । प्रस्तावना-लहकों को मार विषय का सारांश चिसा फरफ शनों में मुनामो न पाठय विषय (१) परमान-पोत गई। जाडा-मा गया। तालाय-सूये जाते हैं। दरिया-उतर गए । नदी-नारे मे रह गए। दिन- घटने जाते हैं। राते-पहती हैं ।घायु-ठंडी होती जाती है। अथ न मेंढक दरपिगे न मच्छर मतायेंगे। (इन दिनों में सरकारी अफसर-दौरा परसे । प्रजा अपनी दशा-मुराती है। साहिब इसपेरटर-भी इन्हीं दिनों मैं दौरा करते है, और गांव के लडो की परीक्षा-रेते हैं । यह मानन्द के मारे फूले नहीं समाते ।

मुम्वों प्लैक बोर्ड विषय और शिक्षा प्रणाली -सूची । । - n फठिन शब्दों । वि०--देखो ब्लैक बोर्ड सूची। স के हिज्जे शि० प्रबोर्ड पर लिख कर टर्रायेंगे- मेंढ और उच्चारण मुहारनी के ढंग से उच्चारण ठोक | क की आवा फरामो ,लडकों को फितायें पद ज ! सरकारी रहे जिनसे उनका ध्यान स्थिर रहे। अफसर-हा: बोर्ड उलट कर उनसे हिले पूछो। किम लोग। मजा- रयत दशा-हालता न्याय-ईसाफ सायि इस पेक्टर=मद- ग्सों के हा किमा परी क्षा-इम्तिहा न मानन्द के मारे फल नहीं ममाते-घडे खुश होते हैं। पाठक. वि०-प्रस्तावना के नीचे को का नमूना इबारत " - 7 ६. म 11 . . - मुखों विपय मोर प्रणाली प्लेकयोर्ड सूची लडकी का । शि०प्र० पाठफ रियमों पर ध्यान रसता हुमा मुनाने और लडफो से कह देफितुमोइसी तरदायिरामों का ध्यान रार पर पढना होगा। वि० उपरोसा रेप पाठक के शि०वि०शिक्षकऊपर फोमोति साथ पढना र पद पर पदे भार सय लडके. उसके साथ साथ पढरी जाय। वि० उपरोक्त लेग। विद्यार्थि शिक्षा प्रणाली प्रत्येक विद्याथों से थोडी थोडी इयारल पदयामो और एक फो गलती दुसरे से ठीक परामो जिस से उनमें ध्यान देने की टेच उत्पन्न हो। वि०-देपो ब्लेक योई सूची। याप्या। शि० प्र०-प्रथम फठिन शब्दों के अथ योर्ड पर लिए पर मुहारनी के ढग से याद परामो फिर लड़कों से पफरयाका पढवामो और पिताय यन्द पराके उसफाभागार्य कहलामो उनमें अधूरेयापनों कोपूराफरसे जामो। वि० उपरोक्त लेए । शि०-पि० परीक्षार्थ प्रश्नों द्वारा पाठ को दुहरामो। इम्तिहानी प्रशों का नमूना - को ,

१
r
(१)मय पानी को नही परमता?
(२)तो प्रय फोनसी ऋतु,
(३) तो मय कौनसी ऋतु है ?...
(४) दिन रात फी यमा दशा है।
(५) प्राज फल वायु केली है,
(६ ) ठढी वायु फा मेंढक और मच्छरों पर क्या असर पडा ?
(७) इन दिनों में कौन लोग दौरा करते हैं और कों।
(८) परीक्षा देने वाले लडफों में से कौन मे लडके सुश
।
.
-

(१) बड़ी कक्षाओ को भापा पढाना (मूने पापाठ) १-निरय लो. मि० रोएर पृष्ठ १४७-४८ शरद पातु का धर्ण । । रामायण) १-या विगन शरद ऋतु भाइ । लम दवा परम सुदाइ। फूरे फांस माल मदिवाई। जपाशी प्रकट युदाई॥ २-~-उदिा अगम्त पय अल मोखा। जिम लोमहि सोम्यै सन्तोपा। मग्निा सर निर्मल जल सोहा। सन्न हदय स गत मद मोहा॥ 3-रस रम मूल मरित सर पानी । ममता त्याग पहिं जिमि हानी ॥ सानि शरद ऋतु जन माये। पाय समय जिमि सुरन सुहाये ।। ४-पङ्कन रेणु 'मोह' अस धरणी । मोति निपुण नृप पी, जस फरणी ।। "जल सकोच विक्ल भय मोना। "विविध कुटुम्यो जिमि धन होता ।। -विन धन निर्मरा सोह अकाशा जिमि हरिजन परिहर सब प्राशा कहुँ महुँ वृष्टिशारदी थोरी । फोउ यक, पाय, भक्ति, जिमि मोरो। 7 । . 1 । -- T - - - - १५ मिनट TE, चले हरपि तज नगर नृप ३३० तापस वणिक भिखारि। जिमि हरि भक्तिहि पार जन ---तहि आश्चमी चारि॥ (२)कक्षा ५ (३) समय (१) पूर्व योग्यता लो० मि० रोडर पृ ०१४६ । विशेष-सुपठन के नियम पूर्वक पाठ को (५)अभिप्राय र वृद्धि साधारण शक्ति भावना शक्ति और उद्वि का सुधार (६) आवश्यकीय सामा पाठक के पास पुस्तक पूरी रामायण तुलसीदास जी के फोटो वाली, लकवोर्ड, झांडन चाक और प्वाइटर कात्रों के पास पुस्तफ फापी, पेन्मिरा- प्रस्तावना- -फाल तुमी फिस ऋतु का वर्णन पढा था' वर्षा ऋतु फा-बरसात के बाद कोन मातु आती है ? जाडा-जाडे को सस्कृत में शरद मृतु कहते हैं । आज हम तुमको शरद ऋतु का हाल पढायेंगे जो महात्मातुलसी दास जी ने रामायण में लिखा है। देखो ? हिन्दी के कनियों में यह सामान्य यात चली आती है कि घह मपने काव्य में सतुओं का वर्णन अवश्य करते हैं इस नियम को तुलसीदास जी ने भी निवाहा है और उन्होंने वन में श्री राम- चन्द्र जी के मुख से लक्ष्मण को सम्बोधन करके ऋतुओं का वर्णन कराया है-यह उस परमर की वार्ताएं हैं जब सीता जी को रावण हर ले गया था और मन में राम लक्ष्मण दोनों भाई इसी। भौति के विविध वार्तालाप से अपना दिल यहलाले थे। ।

अनुमों का वर्णन गुमाई जी ने यहा उत्तम किया है-पदमा- पर नाम के एफ फवि ने भी यह प्रमा सूय लिया है, फिसी दिन तुमको यह भी गयेंगे। 4 गुपिया विषय भोर शिक्षा विधि प्लेष योर्ड सूची कठिा शों के दिले और उधारण m मातिपढा पि०-देखो सीफ यो० सूची। लक्ष्मण शिल-कठिन शदों को यार्ड सन्तोपा पर लिस फर उनका उधारण मुहा है। रनी द्वारा ठोग फरामो। पिताय बन्द । त्याग रहें जिससे लडफों का ध्यान न यटे। खअन योर को लौटा कर हिने पूछी। सुस्त पाठकका 7 वि० उपरोक्त पध। नमूने की वृद्धि शि०-सुपठा के नियमों का | माश्रमी ध्यान रम फर ऊपर लिये हुये पद्य फो पढ़ कर सुनामी लड़कों को ताकीद कर दो कि ये ध्यान दे कर सुन । उनको भी इसी तरह स्पष्टतापूर्वक बिरामी का ध्यान रख फर पदना होगा। वि०-उपरोक पद्य। शिप्रत्येक विद्यार्थी से एक २ चौपाई पढयामो। एक लड़के को . लड़कों का रयां पढना - मा०मा० (१८) " ब्लैक बोर्ड सूची -- सुखियाँ विषय और शिक्षा विधि . गलतियों को दूसरे से ठीफ करामो जिससे उनमें , ध्यान देने फो टेय पैदा हो। + 7 . अर्थ और व्याख्या घोर्ड सूची। IT m रनो द्वारा) यौगिक शब्दों सर्ग) मल रहित साफ ! । शब्दार्थ मदि-पृथ्वी। वि०-देखो ब्लैफ। अगस्त एफ तारे का नाम है जो शरद ऋतुके शि०-फठिन शन्दों प्रारम्भ में निकलता है। का अर्थ योर्ड पर लिख सरिता-नदी।- फर याद करामो (मुहा. ।। निर्मल नि मल (वि के पड करके भी दिसामो जैसे निर्मल, सुस्त । मद-घमण्ड। - रसरंस-धोरे धीरे, भाव वाचक अव्यय। खचन नाम, एक चिडिया का जिसे ममोला 'भी कहते है। (सुअच्छा (उ. H 1 11 " 1 . - 14 सुकृत पसर्ग)। स्त=कामन अच्छे काम (पुण्य )।

सुम्वियां विषय और शिक्षा विधि लेक बोर्ड सूची - पक-फीच। घाला। । -- m h रेणु धूल। सकाच कम होना, कमी । विविध कुटुम्बी- बहे परिहरि छोड कर । पूर्व कालिक क्रिया । । वृष्टि शारदी-शारदी वृष्टि, वह मेंह, जो शरद ऋतु में पड़े, । महावट घणिक यनिक) बनियाँ। जिनः भक्का नमूना वि०-उपरोक्त पद्य और'लैक बोर्ड का (गद्य) पङ्क रेणु न नमूना ।...- धरनी अस सोह जस 'शिविद्यार्थियों से नीति निपुण नृप की फर- पक, एक, चौपाई पढ नो। मोन जल सफोच वामी कठिन शदों का (इमि) विकल भये जिमि 'अर्थ पूछो फिर पद्य का विविध कुटुम्यो,धन होना गद्य फरामों और सरल (अर्थ) कोचड ra+ क पंद्यार्थ .. * चौ०- 1 (०२२" -- सुखियां विषय और शिक्षा विधि ग्लैक घोई सूची, --- - - . -- T - . 5 मानी की। * मामता-फम्म। जिमि-उपमा योधक भव्यय, पूर्ण वाका उपमा । है प्रथम चाका का। समास 'समास का वर्णन नामों में-को-से निभ- कियां छोड देने से अय यह पद स हिन्दी भाषा के व्याफरण में हो गये हैं। । समास का वर्णन यहुत आवश्य- कीय विषय है और यह बहुधा, परिभाषा देखने में आता है कि जर लड़की 'विभक्तयन्त शन्दपद पहलाते से समास और उनका विग्रह | हैं।रामदास शब्द राम और दास दो शब्दों से मिल कर बना है अशुद्धियों करते हैं । इस कारण नीचे उक्त विषय का पुछ वर्णन है। पदच्युत का अर्थ है कि पद किया जावेगा और उनके लिखने सेच्युत यानी अलग होना। श्याम के नमूने दिसाये जायेंगे। फर्ण का अर्थ है कि श्याम है कान जिम घोडे के श्याम कर्ण। रामदास- -गगा-मोहन इ- ऊपर के इस प्रकार के यौगिक त्यादि-नाम हैं और रामदास शब्दों को सामासिफ शब्द कहते नेगा को-मोहन से इन | हैं और जिस वाया में सामा लिपनाया जाता है तो यह और राम का दास इसका अर्थ TH * । । २३ ) -सक शब्द का मर्यसमझा जाता | भागे फो (क) विभक्ति लिप गई उसको विग्रह यारा फाहते हैं। मौरसमास होने पर भव्ययपहिले प्राजाता है इस लिए मनुसार का समास की परिभापा अर्थ देने वाला यथा भव्यय शक्ति जय पद, प्रफट या मा से पहले हो गया इसी तरह निर्भय कद, अपने अपने मितियों का अर्थ है फि भय से रहित । अपना प्रत्ययों को कोड पर नाम-इस समास का मिल जाने। लेकिन उनका अर्थ नाम मव्ययी भाव समास है। , यही बना रहता है तब इस मोति योगिफ । शब्द परिभापा-जय भव्यय सामासिफ पद मोर इस कार्य के साथ और शब्द जुड़ जाते को समास कहते है और जय हैं और बहुधा सामासिफ पद सामासिक पद की विभक्यिों क्रिया विशेषण होते हैं तो इस মত থাকে তাহ্মা অর্থ প্রদ্ধা समास फो अव्ययी भावसमास करते हैं तय इसको विग्रह यात्रा कहते हैं। कहते हैं। २-नीच ताडन का नीचे समास के भेट को ताडन इसमें १-यथाशक्ति, प्रति-दिन, भक्तियश्य भक्ति से घश्य ॥ निर्भय, इत्यादि, साममिफ शब्दों यज्ञस्थान यज्ञ के लिये स्थान में अव्यय के साथ और २ शब्द पदच्युत , पद से घ्युता मिले हुए हैं। मव्यय के आगे विद्याथों विद्या का अर्थी, काई विभक्ति रहती नहीं है यथा पुरुषोत्तम ,, पुरुषों से उत्तम शक्ति का अर्थ है कि शक्ति के अनुसार । यही यथाशक्ति का द्वितीया यानी फर्म कारक विग्रह है यहाँ पर शक्ति शब्द के / फी विभक्ति छिप गई 7 r " - -- 1 1 क । F तृतीया , परिंभापा चतुर्थी , सम्प्रदान पचमी " अपादान" द्विगु समास में पहिला शब्द पष्टी. 4, सम्बन्ध सख्यावाचक है और घह समा सप्तमी अधिकरण हार अर्थ में आता है और इसमें नाम-उपरोक्त सामा दूसरा शब्द प्रधान होता है। सिक पदों के समास को तत्पु ४-माता पिता की सेवा रुप समास कहते हैं। फरो इसमें मातपिता की यह 'सामासिफ पद है इसका अर्थ परिभापा, इसमें पहले है कि माता और पिता की सेवा पद के आगे कर्म मे अधिकरण करो इसी तरह भाइ-बहिन का तफ किसी कारफ को विभक्ति अर्थ है माइ, और यहिना हाथ, फा लोप होता है और दूसरे पांव का अर्थ है हाथ और पांव पद, का अर्थ प्रधान होता है। उपरोक्त शन्दों में ग्रोच की विभक्ति यशम्यान इसमें स्थान शन्द और दोनों शब्दों का क्रिया के और मव्यय फालोप हो जाता है. प्रधान है। '३-तीनों 'भुवन त्रिभुवन, साथ एफ हो अन्वय होता है पांचों रन इफह पञ्चरत इसी और दोनों शब्द प्रधान होते हैं। तरह पोडस दान इत्यादि। 'नाम-इस समास का .."ऊपर सामासिफ शब्दों में प- हिला शब्द सख्यावाचक है | नाम इन्द्र समान हैं। और प्राय "समाहार अर्थ पाया परिभापा-इस समास जाता है। दोनों शब्दों का निया के साथ एक ही अन्वय होता है नाम द्विगु समास है। और योच के और अन्वय का 1 . - - -इस समास का है - - 'नोट-इसमें दो से अधिक और नयनी दो शब्द हैं इत्यादि नील ही कमल ( २५ ) लोप हो जाता है और दोनों। जिसके, सो पीताम्बर । होस शब्द प्रधान होते हैं। भाँति दीर्घबाहु, जितक्रोध, श्याम | फर्ण । अब देखो मृगनयनी में भृग शद भी होते हैं। परन्तु मृगनयनी शब्दसे मर्थऔर ५----कालेघोडे पर चढो ही किसी चीज को है यानी भृग इसमें काला और घोडा एफही की सी मासे जिस स्त्री को हैं चीज है और काले शब्द की उसको मृगनयनी कहेंगे इसी चिमकि लोप होगई है। इसलिये | भाँति जिस आदमी को घडी २ फाले घोडे परं का अर्थ है कि वाहै होंगी उसको दीर्घवाह फाले ही घोडे पर, इसी भांति | फहेंगे। -नीलकमल, परम ही आत्मा-परमात्मा। नाम-इस समास नाम बहुव्रीहि है। नाम-इस समास का नाम कमधारय है। परिभाषा-जहाँ दो परिभापा जहाँ दोनों शब्दों के योग होने से किसी शब्दों का तुल्य अर्थ हो अर्थात् और ही चीज का अथ पाया सामानाधिकार हो और जिसमें | जावे यानी अन्य अर्थ प्रधान हो दोनों शब्द प्रधान हों, पर समास इस समास से सिद्ध हुए शब्द विशेषण विशेष्य अथवा उपमा विशेषण होते हैं परन्तु विशेष्य उपमेय से मिलकर बनाता है । का काम देते हैं। ६-मृग फेसे नयन हैं जिस इस भांति समास के भेद मृगनयनी । पीताम्बर अव्ययीभार, तत्पुरुष, द्विगु, हद का मर्थ है कि पोरे हैं यन कर्मधारय और बहुत्रीहि हुए। का A .

12 । -- । नोचे हर एक समास लिखने ३-पट्रस वोरस-प फा एफ २ . नमूना दिपाया रस द्विगु । जाता है। ४-लडका लडकी) लड़का- लडफा और लडको लड़की द्वन सामासिक , शब्द--विग्रह -छोटी दुकान छोटी वापर सिह रूप समास । ही दुकान-छोटी १. अनुरूप रूप के अनुसार । दुफान अनुरूप अव्ययी भार।। है-कोकिलग्यनी काफिल की सी २-याजुमों के यन्ट = बोली ग्रीहि उन्द, तत्पुरप। बाली - राजू योलने J २ 16 M - ८ की संख्या पर इशारा कक्षा प्रारम्भिक (म)। पिछली जानकारी ७ की संख्या पढ चुके हैं। . 1 २५ मिाटा - . . म समय, पाठ के निमितं, कौडियां, तीलियों, नडिया, झाडन, प्वाइन्टर। पाट फा अभिप्राय। - (१) का पढना लिपना। निरीक्षण सरण, विचार और मान शक्तियों की वृद्धि कर - - है

सुर्खियों
विषय और पाठन प्रणाली
श्यामपट
भूमिका
वि०पिछले पाठ की जांच ।
शि०-(१) कौडियां निकालो
(२) 'श्यामपट पर लिया।
(३) इसको पढो (8) इसकी
शफल फों कर चनाते हैं।
वि० कौडियां और गोलियाँ।
शि०-मैं कोडियाँ दायें हाथ
में और एक कोडी वाये हाथ में।
और नाम।
स
लूगा।
और इसी भांति सब वञ्चों को
दूंगा।
(१) फिर,७- कौडियों में एक
कोडी मिला कर कहूँगा फि मेरे
दायें हाथ में पौडियाँ हुई और
मुहारनी ढग पर याद फ्राऊगा।
२ लिखना
वि० - इकाइयां।
शि०-प्रथम एक आडी लकीर
यायें हाथ की ओर फिर दूसरी पाडी
लफोर दायें हाथ की मोर बनाफर
दोनों को यताऊंगा कि यह न तो
कोडियां हैं न गोलियाँ।
22
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( २८ ) सुर्सियां विषय और पाठन प्रणाली श्यामपट अभ्यास इसफा नाम माठ इकाइयां है। 'वि०-- इकाइयां। शि०-बच्चों से तन्तियों पर लिखवाऊंगा और इस बात का ध्यान रस्खूगा फि वह वर्गों में सरया लिखते हैं। वि० विषय । 17 शि०--शिक्षा विधि। है . A नोट 7 TAH वि० वि० . .,(१) जोड फल (२) अन्तर (२) अन्तर ५५३-८ ४+४-८ ३+५८ २+६ +७-८ .+८८ . शि० (1) बालफेमसे, (२) कौडियों से - +

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विपय विमाग विषय और शिक्षा परिपाटी सूची - । R कौडी ले और "यही सय लडके -- . पढना । फिर फौडियों में एक कोडी मिलाफर फहै कि मेरे दायें हाथ में १० काडियाँ हुई और मुहारनी की रीति पर लडके भी करें कि कौटियों में एक कौडी मिलाने से १० फोडियां हो गई। वि० १०-एक दहाई। 'शि लड़कों से पूछा कि तुम्हारे पास क्या है? (१० कोडियाँ)। अव चतामो कि १० कोडियों को हम, ग्वुला नही रसते फिन्तु उनको एक थैली में बद करते हैं पाठक लडकों को थैली दे और लड़के उसमें ,, अपनी कौडिया - यखें। IN अव प्रत्येक लडका अपनी २ थैली को बायें हाथ में ले ले औरा/ शिक्षक याद' कराये कि मेरे हाथ में एक दहाई 17 । १५ ( ३१ ) विपय विभाग चिपय और शिक्षापरिपाटी सूची लिखना १० - . वि०-रलैकबोर्ड को सूची देखो। शि०--तुम्हार वायें हाथ में क्या है? (एक दहाई) यतामो इसको बायें हाथ की ओर लिखते हैं। पूछो तुम्हारे दायें हाथ में का है? कुछ नही। तो जब कोई इफाई नहीं तो निशान '' बताते हैं ब्लैक बोर्ड पर शुन्य बनामो। वि०-दसं या एफ दहाई। शि०-लडको से स्लेटों पर १० लिमामओ। । परन्तु यह भी ध्यान रस्सो की लडके ब्लैक गई के नमूने की भांति लिखें। वि० बाकी जोड ६+१-१० १२-१० अभ्यास . - I .

( ३२ ) विपय विभाग विपय और शिक्षा परिपाटी, सूची । । 2 A १० 1 ६+४%१० ५+५=१० ४+६=१० ३+७=१० - +६=१० ++1 ( सादा जोर्ड ) - प्रधम पाठ। - 1 १-कक्षा २-समय ३० मिनट। ३-पूर्वयोग्यता १०० तक गिनती जानते हैं। विशेष रीति से,योधा ४-अभिप्राय साधारण उहि मात्मिक । शक्तियों का सुधार। ५-आवश्यकीय वस्तुये कोहिया, थैलिया, स्लेट, पंसिल, योफ पोर्ड, चाफ, झाडन मोर पाइटर। + ( ३३ ) शीर्ष लेख विषय और शिक्षाविधि ब्लैक बोर्ड सूची प्रस्तावना विपय जोड की परिभाषा शिक्षा विधि-फिसी लडके से पूछो फि ३ गोलियां और गोलियां मिल कर कितनी गोलियां हुई । उत्तर पाँच जोड-- दूमरे से पूढो फि ५ पैसे और एक ही प्रकार ३ पैसे मिलकर कितने पैसे हुए?} की चीजों के इस प्रकार कुछेक प्रश्न जबानी पूछ | मिलाने को फर घतामो कि एफसी चीजों के | जोड कहते हैं। जोडने को जोड कहते हैं और परि भाषा निकलना फर ब्लैकबोर्ड पर लिख कर याद कराम्रो। इसके यादकहो फि तुम इकाइयों को तो जोड़ सकते हो परन्तु आज तुमको दहाइयों का जोड सिसारेंगे। वि०२३ फौडियों में ४२ कौड़ियाँ जोडो। पहिले इस उदाहरण को दार्श निफ वस्तुओं द्वारा हल कराम्रो इस ३ प्रकार से कि पाठक अपनी मेज पर दायें हाथ ३ कौडियो और वायें हाथ २ दहाइयां रक्खे। फिर उसके नोचे २ फौडियां और ४ दहाइयां दहाइयों फेनीचे और मा०मा०सि०-३ . M कायदेका ૨ 7 - ४ २ ५ ( ३४ ) शीर्ष लेख्न विषय और शिक्षाविधि ब्लैकबोर्ड र । , रोति कौडियां कौडियों के नीचे यही अमल हर एक लड़का अपनी जगह पर फर। फिर उसके नीचे एक प्वाइटर या फलम रक्खो और उसके नीचे कौडियां और ६ दहाइयां लिखो यही अमल सथ बच्चों से फरामो। जय यह अमल बच्चों को समझ में भली भांति माजाय तय उसको ब्लैक बोर्ड पर हल करो। रोति-- घिo-(लैक गर्ड सूची देखें।) जिनसख्याम शि० -ऊपर लिखे हुए प्राधार को जोडन पर प्रश्नोत्तर द्वारा रीति निकलवानो होता है उनके फिर प्लेक गई पर लिख कर याद ऊपर नीचे इस करायो। है कि इकाइयों के नीचे इका इयां और दहा श्यों के नीचे दहाई रहै। (२) फिर उनके नीचे एक मादी लकीर खींचते N , , प्रकार लिखते - 4 । ३५ ) शोर लेख বির মা রিয়ান্ন্যাসী प्ले मोटे मूची (३)फिर पार को जोड़ कर फाइयों के नीचे लियते है और दहा श्यों को जार 'फर नहायों के नीचे। अभ्यास माम के हैं और २४पेट जामुन प्लेक वार्ड सूची देखो। प्रश्न yि०-११) प्रश्न मारती दो (१) पक याग और लैपपाई पर स्वयं लिपो में ३१ पेड और लडको से प्लेफयोर्ड पर लिपपाम्रो। है तो यता (२) फिर माझा दो फि प्रश्न मो कि उस निकाल लेने के पार पसल और पाग में फुल स्लेट को छोड़ कर तुरंत पडे कितने पेड है? हो जाय। (२) मी । (३) जय लहफे पडे हो जाय तो मोहन को और फिसी एप होशियार लटके से प्रश्न ) २४Jहरमसाद का हल प्लेफ बोर्ड पर फरामो। को मोर ५३)

शोपरेख
विषय और शिक्षा विधि
स्तीक बोई सूची
। (8) फिर सब लडफो की स्लेट नयी खां को
जांच कर ठीक और गलत फा नि
इनाम में दिये
शान बनादो।
तो पतामो कि
कितने रुपये
इनाम में दिये।
t
r
जोडा
(४) सादा बाकी।
प्रथम पाठ।
(१) कक्षा
सेकशन ।
(२) पूर्व 'योग्यता
(३) पाठका 'अभिप्राय 'शिक्षा-घटाने की
रीति का जानना, अभ्यास युद्धि।
(४) समय,
३० मिनट
फोडी, स्लेट, पेन्सल, थैलियों,
4U
है
(५) सामान
।
प्वाइन्टर, धाक, मादन, तप्तास्याह ।

विषय विभाग पाठफा घिपय प्लैक बोर्ड सूची - (१) प्रस्ता! मारम्भिक प्रश्न-तीन कोडियो। पाको-जोर बना मोर चार कारियां मिलकर फ्तिनी की उलटीरोति होती हैं। उत्तर कोडियो । को पहले है। (२) यह फिस रीति से निफला ? उत्तरजाह से। (३) पूछो, सात कौडियों में से तीन कौड़ियां निकाल डाले तो। कितनी कौडियां शेष रहेंगी? उत्तर ४ फोड़ियां। (४) फाा यह भी जोष्ट है। जी नहीं। जोह में तो मिलाना होता है भोर इसमें तो अलग करता है, यह तो जोड की उलटी रीति है। (२) परि विषय, वियोजक, वियोज्य और वियोजक छोटी भाषाएं शेष फल की परिभाषा। (तम्ता | सख्या स्थाह)। कहते हैं। शिक्षाविधि, उदाहरण द्वारा वियोज्य षष्टी मौर मुफराती प्रश्नों से- सख्या कहते हैं। शेष फल- वि० ३३ कौडियों में से १२ वियोजक और काध्यान कौडियां घटामो। वियोज्य के अतर को कहते हैं। - (३) रोति (३८) विषय । विभाग पाठ का विषय ब्लैक बोर्ड सूची । ३०॥ (४) रोति . - । शिक्षा विधि। प्रथम इस प्रश्न का द. दार्थनिक पदार्थों-द्वारा मिह फरामो ३ और फिर तत्तास्याह पर लड़कों फी सहायता से हल फरो।। २ १शेष फल वि०-तरप्ते स्याह के अनुसार (१) वियोज्य शि० उपरोक"उदाहरण द्वारा का ऊपर निफलचाफर श्यामपट पर लिख-लिखते हैं, और कर हदयागम करो। उसके नीचे वियोजका (२) फिर एक पडी लकीर खीचते हैं। (३) उसके नीचे वियोग्य की इकाइयों में से वियोजक को इकाइयां घटा कर लिगते हैं। इसी भांति दहाइयों में से दहाइयों का। . . । न ( ३६ ) विषय विमाग पाठ का विषय ब्लैक बोर्ड सूची 1 एक १) अभ्यास वि-लग्तेम्याह के-मुमाफिक। (१) एक बाग में ६८ पेड थे, शि० (१) इगरती ,प्रश्न दिये प्रांधो के माने जाय, तरतास्याह पर लिख कर से २२ पेड लडों से स्लेट पर लिखवानो। गिर गये तो यतामो अब (२) माशा दो फि सवाल बाग में कितने निकाल लेने के पश्चात पेन्सल स्लेट पेड खडे है ? को छोड कर तुरत खडे हो जाय । (२) मेरे पास (३) जब सब लडके खडे हो ४४३ रुपये थे जाय तो फिसी एफ होशियार लडके परन्तु घोडे के मोल से सवाल का हल तख्तास्याह पर लेने में १३२ फरामो। हानिकल गये (8) फिर सब लडफों की स्लेटें | तो भव मेरे जांच कर सहो, और गलत का पास कितने निशान बना दो। रुपये हैं? नोट-जब पहिला कायदा याद हो जाय और उसकी काफी मश्क भी हो जाय तब दूसरा फायदा पढाना चाहिए। 2 ( ४० ) -- विषय विभाग पाठ का विषय ब्लैक बोर्ड सूची दूसरे पाठ का खाका तख्तास्याह ।' + जय शोध्य की इकाई शोधक रीति को इकाई से छोटी हो। यदि शोध्य नियम निकलवाने के हेतु उदा- की इकाई शोधक को इकाई से छोटी कोडियाँ ६ 'शाध्य ७६ हो, तो शोध्य कौडिया २ शोधक ३५ की इकाई में कौडिया ४ शेष १० इकाइयां और शोधक की दहाइयों में एक दहाई नियम जोहते हैं। फिर प्रथम उपरोक्त उदाहरणों द्वारा निफल- रीति से घटा घाम्रो किशोध्य और शोधक में एक कर क्रिया हो सख्या जोडने से शेष में कुछ करते हैं। अतर नहीं पड़ता। M ~ T 1-1 (४१) विषय विभाग पाठ का विषय ब्लैक बोर्ड सूचि रीति निकलवाने के हेतु उदाहरण नोट-फायदा मिसाल-५४ कौडियों में से २६ फोडियां घटानी। मचल के इशारात के मोताबिक द इ দুয়ান मुदरिस १०+४. शोध्य १+२ शोधक खुद तैयार करें। ६ 11 शेष ૨ . साधारण गुणन '(१) कक्षा अव्वल। है 1 - (२) पूर्व योग्यता २० तक पहाडे जानते हैं। (३) पाठ का,अभिप्राय शिक्षा, गुणा की रोति जानना, अभ्यास, बुध्यात्मक शक्तियों का सुधार। ४५ मिनट। । * (१) समय ( ४२ ) Y विषय विभाग ! पाध्य विषय और शिक्षा प्रणाली लैक बोर्ड सूधी चना । । . (२) प्रस्ता. वि०-पहाड़ों की परीक्षा। शि०-लडकों से कम रहित पहाडे पूछो। (२) चितवन, वि०-देखो तस्तात्याह । शि०-(१) कक्षा के प्रत्येक लगातार जोड़ यालकों में से प्रत्येक को तीन २ गुणा । 5 कौडियां पटगायो। (२) तम्तास्याह (१) ३ फौडिया पर लिखो। (३) मय फौडियों की (२) ३ कैौडिया सख्या पूछो । (४) पूछो यह फिम , (३) ३ कौड़ियाँ रीति से निकाला! (५) श्यामपट ३ कोडिया गुण पर शब्द जोड़ के लिए दो। (8)३ कौडिया (६) पूछो कितनी २ कौडियाँ प्रत्येक गुणफ। यालफ को दी गई है। (७) श्याम (५) ३ कोडियां पट पर लियो। () कितने बाल १८ की गुन। कों को दी गई हैं। (६) कौडियों के (E) ३ कोडियो नीचे बोर्ड पर लिखो। (१०) यालकों १८ कोड़ियां से कहो कि वे तीन का पहाडा छै बार पढ़ें। (१३) छै के नीचे पडी लकीर खीच कर १८ लिखो। ifr() यतायो इस रीति को गुणा कहते हैं। (३) प्रशसा वि०-देखो तन्तास्याह । . -- २ .

( ४३ ) विषय पाट्य निपय मोर शिक्षा प्रणाली ग्लेक यार्ड सूची विभाग (३) जिस (e) परि माराय । शि०--जोडवगुणा की त्रियामों लगातार जोड पर प्रश्न फर के हृदयाङ्गम परो- फी सतेपरीति भोर सह-पठन रीति से याद फरामो को गुणा फहरो हैं। मोर भिन्न परीक्षा करो। वि०---गुण्य-गुणक, गुणनफर सस्याको (देखो तस्ताम्याद)। पार २ जोडसे शि०-प्रश्न माराहदयाङ्गम फरो हैं उसको और सहपठन गति से याद कराके गुण्य कहते हैं भिन्न जांच फरो। वि०-१४, ४॥ (२) जितने धार जोडते हैं उसको गुएफ कहते हैं। इजोडने से जो कुछ माता है उसको गुणन फल कहते हैं। जैसे ३॥ (५) रीति का ध्यान १ जैसे ८॥ शि०--यालयों का ध्यान प्रथम उदाहरण फी मोर खीचो-और सुफराती प्रश्न द्वारा तम्तास्याह लिखित विषय हृदयाङ्गम फराम्रो सौर सहपठन रीति से याद कराके | द०१०४४४-१६ 08-01-28 गु० फ०४४१४५६ w जांच करो।

( ४२ ) विषय विभाग , पाठ्य रिपय और शिक्षा प्रणाली लैफ बोर्ड सूची . . -- (१) प्रस्ता. नि-पहाडों को परीक्षा)" घना शि०-लड़कों से क्रम रहित पहाडे पूछो। (२) चितवन वि०-देपो तख्तास्याह । शि०-(१) कक्षा के प्रत्येक लगातार जोड बालकों में से प्रत्येक को तीन २ गुणा । कौडियां घटवायो। (२) तम्तास्याह । (१) ३ कौडिया पर लियो । (३) सब कौडियों को (२)३ कौडिया सख्या हो । (४) पूछो यह फिस (३) ३ कौडिया रीति से निकाला। (५) श्यामपट ३ कौडिया गुणा पर शन्द जोड के लिख दो। (8)३ काडियां (६) पूछी कितनी २ कौडियां प्रत्येक ६, गुणकः । चालक को दी गई हैं। (७) श्याम. (५) ३ काडियाँ पट पर लिखो। (८) कितने याल १८ को गुन। कों को दी गई हैं। (E) कौड़ियों के (६) ३ कौडिया नीचे वार्ड पर लियो । (१०) बालकों से कहा कि ये तीन फा पहाडा छ चार पढे । (११) छै के नीचे पड़ी लकीर खींच कर १८ लिखो। (१२) यतामो इस रीति को गुणा कहते हैं। (३) प्रशसा वि०-देखो तस्तास्याह । १८ कौडिया - हा V भ ( ४३ ) विषय विभाग पाठय विषय और शिक्षा प्रणाली ग्लैफ योई सूची २)परि मापाय शि०-जोडयगुणाको मियामों लगातार जोड पर प्रश्न फर के दयागम फरो- की सतेपरीति मोर सह-पठारोति से याद फरामो कागुणा फहते हैं। भोर भिन्न २परोक्षा परो। (१) जिस वि०-गुण्य गुणप, गुणनफल सग्न्याको (देखो तरतास्याह)। यार २ जोडले शि०-प्रक्ष द्वारा हृदयाङ्गम फरी है उसको भौर सहपठन गति से याद कराके गुण्य कहते हैं भिन्न जाँच करो। जैसे ३1 (२) जितने यार जोडते हैं उसको (५) रोति वि०-१४४४॥ काश्याना 1 गुणक कहते हैं। ३जोडने से जो कुछ माता है . - उसको गुणन फल कहते हैं। जैसे १८। शि०-यालयों का ध्यान प्रथम उदाहरण की मोर खीचो-मोर सुकराती प्रश्न द्वारा तम्स्तास्याह लिखित विषय हृदयाडम फरामो और सहपठन रीति से याद फराके द०३०४४५-१६ yo88818 =RIYRoson जांच करो।

(५०) मुख्य राशे विषय च शिक्षा विधि । प्लैक बोई सूची - 7 भी यह फल सिद्ध करामो और विद्यार्थियों को रोति की भोर प्रवृत्त करो। T T ६ रीति उपरोक्त उदाहरण द्वारा पालकों से रोति निकलवा फर श्यामपट पर लिख दी। - अभ्यासार्थ बालकों से कुछ प्रश्न अभ्यास प्रश्न के हेतु हल फरामो, जो पालक ठीक न कर सके उन से प्रयीण विद्याथियों द्वारा अथवा भावश्यकतानुसार स्वयं सहायता देकर अशुद्धियां डीफ करो। J H t मन्ति- मोक्षणों 1 पाठ के समाप्त होने पर रीति तथा जिह्वान गणित को रोति से प्रश्न करो। , १ सादा भाग का पहिला पाठ (१) श्यामपट अशुद्ध (२) श्यामपट शुरु . शुमार मुखियों लगातार यांटने के मासान कायदे को भाग कहते हैं। तरीका ता। (१) तमतोल बजरिये मशियाय महसूसा। (२) तमसीलहिसारिया- 4 (१) +HERNMUNDA फौडियां। २)(४ कोडियो। (२) WA MontbAWMX (४) २)(४ जिस सख्या में से चार यार परिभाषा--किसी घटाते हैं उसको भाग्य कहते हैं। सख्या को लगातार घटाने के अधिक से अधिक जितनी पार मासान फायदे घटाते हैं उसे भजनफल या को भाग कहते हैं। लन्धि कहते हैं। (8) मश्क -३ चाह में कायदा ३ का भाग दो। ६ में तीन तीन को के (१) प्रथम माज्य को लिखते धेलियाँ हैं। .. आम तीन लडकों में (२) इसके बाई भोर भाजक बरामर २ बाटो। को लिखते हैं। 11 + M + - (५) भाजफ-भाज्य-भजन । (३) हर भाग के पढाने की मदद से पारिज किस्मत मालूम जिससे बांटा जाता है वह करते हैं। भाजफ कहलाता है। भजन फल की जानकरी। जिस सरया में भाग दिया भाजक भाच्य भजनफल आता,है उसे भाज्य कहते हैं। श (४ जितनी बार कोई भाज्य । बँटती है वह भजनफल फह- लाता है। - T । TM ट नहीं। गलत खाका तख्ता-तफरीफ और तकसीम की तारीफ-सच्चे बसूवी देख सके 'स्याह की सूची और देखसे ही भाग फी परि- (१) तरस्तास्या पर नम्बर भाषा याद करें। शुमार-सुपियाँ और तरीका (३) मश्क की यहाँ जरूरत तालीम के लिखने की जरूरत नहीं है तफरीक और तफलीम की तारीफ बच्चे यपूची देख (२) अचल अमल तफरीफ सफें और देखते ही भाग, की किया गया है। परिभाषा याद करें। । और उसके नीचे भार्गका (४) इमत्लादात को परि- कायदा। इमसे जाहीर है कि भाषामों में भी यही नुस्स? दोनों में कार तालुका अराज यानी तफरीफ की नमसील से करना और फिर भाग फो परि- कुछ फायदा नहीं उठाया गया। भारा तुल्या से निकलया फर (४) पढाबत फायदा दोनों अमल के ऊपर लिखना नहीं शताया रहिम अमल माग निहायत जरूरी, ..ताफि । को इस प्रकार किया फि पदिले, M

१
मकसूम को लिखा फिर उसके।
(६) सवाल करते वक
दोनों जानिर खात मुनहनी भाग के पहाडे पूछना चाहिये
खीचकर अन्चल खारिज किस्मत जैमे २ फितनी बार में शामिल
को दायें तरफ सिख दिया और है या दो यार-में।
याद में मफसूम अलिया को। इन
खतूत के खीचने की जरूरत न
बताये कि यह इस गज से खीचे
जाने हैं कि विपरीत सख्यायें
आपस में मिल न जायें।
नोट-गलत याका नातास्याह के मुफायरे में सही
ग्वाफा दे दिया गया है जिससे मुदरिसों को मालूम होगा कि
किसी सरक के पढाने में फिा २ बातों को श्यामपट पर लिखना
जरूरी है और पौन हिम्पे न लिपना चाहिये।
संक्षेप भाग मे पूरी बाकी निकालना
ब्लैकबोर्ड सूची (प्रथम पाठ)
उदाहरण-(१) २०,किशमिशों को २ लडकों में बांटी।
भाजफ भाग्य
२ २४
लब्धि १२
(२) ३६ नागियों की तीन थरावर वरावर
टेरियां यनाओं।
भाजक मा य
३
लन्धि १२
-
6

- - . है (३), ६२ फलों की ऐसी गडिया धनामो कि प्रत्येक में पांच फलम से मधिक न हो। भाजक, भाज्य ५ लब्धि २-२ शेष नाम-सक्षेप भाग। परिभाषा-भाग की उस रीत को कहते हैं जिसमें भाग की किया करते नहीं,फिन्तु दिल में करते हैं। रीति-(१) भाजक और भाग्य को उसी भांति लिखते हैं जैसे लम्ये भाग में। (२) भाज्य के नीचे एक पडी रेखा खीचते हैं , उसके नीचे लब्धि को लिखते हैं। (३) यदि चाकी रहे तो उसको लब्धि के मागे एक छोटी रेखा खींच कर लिख देते हैं। - T - 1 -- - 4V - दूसरा पाठ उदाहरण-(१) ३६ २० को १२ लडकों में बराबर बांटी। भाजक के स्वट=३,४ -1 । २२)३६३ ४ --- - (२) ४५ धादामों को १५ लडिकियों में बाँटो। . ३, ३ (३) ७२ पैसे यचों में बांटो। ७२ १८९७२(४ ७२ ६ २४ r नियम यदि भाज्यो माजा के खडों से लगातार वाटतो लग्धि में कुछ मतर नहीं पड़ता। , उदाहरण- -४६ कौडियों को १५ लडकों में बरायर बरायर प्रति m N 7 4 माजक पहिला खड ३ लाल थैलियां--१--पहिली १६ ३१-पाफी लाल शैली ३ पीली थैलियां- लाल थैली बाकी। बाकी-एफ लाल थैली+, कौडी-३ कौडियों+१ कौडी-४ काहियाँ। दूसरा खड -- । .

रीति-(१) दुसंगै यात्री को भाजक के पहिले लण्ड मे गुणा
फरते हैं।
(२) गुणन फल में पहिली राफी को मिला देते है
यही असल वाकी होती है।
---
-: (१) भाग
पाठकों के लिये सचनाये-
भाग पढाने में पात्रफ को पडी सावधानी रखनी चाहिए
फोफि यच्चों को इस रीति के विमान में कुछ कठनाइयाँ पड़ती है।
पहिले यह फि इस क्रिया में काय-साधन याई ओर से प्रारम्भ
होता है। अब तक जितनी रीमियां उन्होंने पढी है उनमें किया का
फम दाहिनी ओर से प्रारम्भ होता था। इस पठिनाई को फैडियों
और दहाइकी थैलियों से निश्चय करता.चाहिए ! जैसे हमारे पास
४२ कौडियो अर्थात् ४ दहाइयां यौर २ कोड़ियाँ है और यह तीन
लउफों में बांटना है, सो पहिले एफ एक दहाई पाट दी तो अब एक
दहाई यच रही, पर इसे रोलना चाहिए और इस में इफाई की
दोनों कौडियों को भी मिलाना चाहिए । इस भाति १२ कौडिया
हुई। अब इनका भाग करना सरल है । परन्तु इसके प्रतिकूल
यदि' दाहिनी ओर से चलते तो भाग का कम हो, कठिन क्या
असम्भव हो जाता।
दूसरी कटिनाई यह है कि बच्चों को गुणा के पहाड़े सो सिया
दिये जाते हैं, परन्तु भाग के पहाड़ों कोभभ्यास नहीं कराया जाता
है, प्रत शिक्षक को उचित है कि भाग की पहिली रीति पढाने से ।
पहिले अञ्चों के पहाड़ों में अभ्यस्य कराये।।
1
-

७ - " -] इस में पहाडों को ग्लैफयोर्ड पर २किराती पार४ लिप कर पयों से इस प्रकार केश फिर जाये- (३) अपर से नीचे को। १० (२) फिर नीचे से ऊपर को। (३) और फिर फिमी अन्य फम मे। 3 " २ १२ १८ - २ me नोट-इसी प्रकार ३ से २० नफ के पहाडे (२०५१०) याद फराये जाय। नीसरी पात यह है कि प्राय पाठक रोग लम्यो रीति सिखाने के पहिले हो मतिप्त रीति यता देते हैं। परन्तु ऐसा नहीं करना चाहिए, वरन उत्तम यर है फि लम्बी रोनि में पूरा अभ्यास होने के पश्चात् सप रीति भी प्रमानुसार दो सिखाई जानें। अब हम शिक्षकों के उपफार के लिए भाग फी रोतियां लिख १-लम्बे भाग की प्रथम रीति- एफ ही मख्या को कर धार दूसरो सख्या में से घटाने की ससेपरीति को भाग फहते हैं। भाजफ २॥ Bee rotestant ३ लब्धि या भजनफल । .. x

।
(५८)
- बड़ी संख्या को जिसमें से चार चार घटाते है उसे भाज्य
कहते हैं।
छोटी सख्या को जिसको कई बार घटाते हैं उसे भाजा कहते हैं
मधिक से अधिक जितनी बार घटा सकते हैं उसे लग्धि
कहते हैं।
रीति ।
पहिले भाज्य को लिखते हैं उसके बाई ओर एक टेढी रेखा-
नोंच फर भाजक और दाई ओर भी टेढी रेखा खींचकर उसके
उधर लब्धि को लिखते हैं।
दूसरे भाजफ मोर लधि के गुणनफल को भाज्य के नीचे
लिखकर घटाते हैं।
अभ्यासार्थ प्रश्न-जिनमें भाज्य (पहाडे की मदद से
माजक से पूरा पूरा घट जाता है।
।
।
है
1 ४-२
६-३
८-२
"
.
"
। नोट-जब किया को अन्त करण में रखते हैं मर्यात् लिखते
नहीं, तो इसको सक्षेप माग कहते है।
नियम
भाज्य, माजा को पूर्व नियमानुसार लिखते हैं। परन्तु लन्धि
कोनीचे लिखते हैं।
-

. } , अभ्यासार्थ प्रश्न ऊपर के प्रश्नों को सक्षेप रीति से हल करो भाजक माज्य . ८ ar . ४ लब्धि (२) जय भाग में भाज्य का प्रत्येक मक पूरा पूरा बंट जाय- जैसे ८६४२-३ ह. सै०६० इ०१०सै० द.१० २) ८ ६.४ ३ (४३ २.)...(सैद २) ६०० २) ४० २) २। २) ६६ ५२ (४३२१ जोडने से रीति monal भाज्य के प्रत्येक प्रक को भाजफ से पृथक २ माग दो और सन्धियों को जोड लो। H अभ्यास ८८ को २, ४, ८ से पृथक पृथक भाग दो १६ को ३, ६ से है . " " " , ८६४८-२९इन प्रश्नों को सक्षेप रोति से हल करो। ८४८८-४ - 1 F- . . ও 'সছি (३) भाग्य का प्रत्येक अफे आवश्यक नहीं फि भाजफ से ' पूरा पूरा रंट जाय। भाग्य (अ) एफ अफ की एफ अफ मे जैसे भाजप ) १ शेप (ब) दो अफों को एक अफ से (१) उदाहरण १२-४ . । - (२) उटाहरण ४) १ २ (०३ ૨ इकाइया १ भाज्य - भाजक "द० इ० ५ . दहाइयाँ ३ प १ इकाइयाँ १ x पहिले जानी सुनी चीजों से हल घरानो जैसे कि भूमिका में बयान किया गया है। फिर ब्लैकबोर्ड द्वारा। रीति (१) पहिले भाग्य को-दहाइयों की माज से भाग करते हैं। (२) शेष दहाइयो की इकाइयां बनाकर उनके साथ भांय की इकाइयो जोड फर इन कुरा इकाइयों को भाजक में बांट लेते।। - २ अभ्यासार्थ प्रश्न ५६)-४ लडफों में। ५६४-४ " " AL - ह इन प्रश्नो को सक्षप रीति से हल करो जब कि भाजक मे दो अंक हो; (अ) जेसे (१) ४०, ४३ को १० से भाग देना। रीति -भाज्य के दाहिने ओर का एक प्रक छोड़ देते हैं और जो सस्या रह जाती है यह लधि होती है। जैसे (२) ४०,३३,६०,६३ को २० से भाग दो। रीति-भाग्य के दाहिने ओर फा एफ अफ छोड देते हैं और जो सख्या बच रहती है उसको दो मे भाग दे रेमे हैं जो लग्धि भाता है यह भाग फल और छोडा हुआ अंक शेष पह- लाता है। (ब) जैसे भाजफ ११ जे २० तप हो (प्रथात् जिनके पहाडे लाडके जानते हैं । पहिले ऐसे उदाहरण । जिनमें शेप नरहैं, दसर जिसमें शेष भी रहें। जैसे-६६५५-११ शेप जैसे - ७९१३-१३ ५६२८-१४ ४५६०-१५ १७४-१६ ६८७६-१४ १२८०-१५ । अव भाजफ सा लो जिसका पहाडा लहफों ने नहीं पढ़ा है मौर जिनमें लब्धि का अफ फई मकी के टटोलने के पश्चात निधिन होता है। उदाहरण (१) जव कि परीक्षक अफ लन्धि का मक हो जाय। जैसे- N 4 -- . - ५५७२१२२ भाग्य का प्रफ, माजफ फा परिक्षित भक, लम्धि का मक। २ - . । २ सेफडे दहाई 1 - ७ ह. सै० ६० ३० ह. + १०० १२) ७ 2 मैको . ७ दहाइयाँ १.१ १ इफइयां ७ २ शेष उदाहरण (२) जव कि परीतफ अफ लग्धि का अक नहीं होता।

- 4 - 3 भाज्य भाजक १२८६ ३२ मष भाग्य का बायां प्रकनी है और भाजक का तीन इस लिए १-३-३ परीक्षक ल० का मका परीक्षक ल० ३२) १२८६ (३ ३२४३६६ नही बँटता सो परीक्षक अफ ३ से १ कम लन्धि अर्थात् २ हुमा। भाज्य ६० भजन फल या लब्धि ३२ ह. सै० द इ० भाजक . ८ २ ६ . २८८ २८८ - अभ्यास के प्रश्न ५४७३-२३ ८५४८७.४५ रीति (१) पहिले भाग्य के पायें मफ को भाजक के सायें अडसे (पहाडे द्वारा) भाग देते हैं । इस भांति जो लब्धि का मफ भाता है उसे परीक्षक अफ कहते हैं। 41 7 - . द (२) यदि परीक्षफ अफ और भाजफ का गुणन फल भान्य से घट नही सफता तो परीक्षक सख्या से एक अक न्यून को लब्धि का अक निश्चित करते हैं। (३) इसी प्रकार वरावर क्रिया करते जाते हैं जब तक कि माज्य के सभी अफ निश्शेष नहीं हो जाते। नोट-पाठक को उचित है फि अभ्यास के प्रश्नों को स्फुटिक उदाहरण के रूप में लड़कों को सिखवाए । । संक्षेप भाग का अंतिम पाठ', साधारण अभिप्राय पुद्विसवन्धी शक्तियों का सुधार! समय-२ घटा। मुख्य अभिप्राय-तक्षेप सक्षेप भाग को रीति का ८ 1. ज्ञान। मुखवन्ध विषय और पाठन विधि श्यामपट " -- भूमिका x रोति का १००,१००,१००० आदि के भाग देने की जांच इसमें लडके बिना भाग फी किया किये हो लगि घर शेष यतलो दें। वि०-श्यामपटानुसार। शि० -~EE में,फा जोडो से१ के दाये उतने - शून्य हो • जायेंगे जितने भाजफ में अक है?

मुखयन्ध
विषय और पाठन विधि
श्यामपट
१
इस प्रकार, जो १०० को सख्या
बनी उसे नया भाजक समझो और
इसी. भाज्य को बांटो तो देखो
कि १०० व १०० फौडियों को।
कितनी गठरियां हुई और कितनी ।
कोडियाँ यच गई।
उ०-२३१ गठरियां हुई और २३ ।
। कौडियों बची। इन दोनों के बीच
एक सडी लकीर खीच दो ताकि
बाय लधि और दाये शेष हो जाय ।
इस शेप को रख छोडो, इसके पीछे
घाले शेषों को भी रखते जाना-
गोया इनमें भाग अभी दिया हो
नहीं गया। रही लघि २३१,
में यह विचार फरो फि मुझे Et
पौडियों ही एफ गठरी में ररानी थी,
लेकिन मैं ने १०० फौडियों की एक
गठरी बनाली। इसका फल यह
हुमा कि हर गठरी में १ कोडो
अधिक बंध गई। इसलिए अगर
६ फौडियों ही की एक गठरी
मा०मा०सि०--2

-
मुखबन्ध
विषय और पाउन विधि
श्यामपट.
नाते तो २३१ गठरियां बनने पर
२३१४१-२३१ कोडितां यच जाती
हैं। इन बची २३१ फौडियों को
फिर उसी प्रकार
सो की गठरियां बना लो (फ्योंकि
२३ को दो छोड़ रखने के लिये में
पहिले ही कह चुफा हैं) तो देश
गठरियां हुई और ३१ कोडियां षच
गई। इसमें यों समझो कि असली
भाजक में जिस संख्या को जोडा
था, उससे पहिलो लब्धि २३१ को
गुणा किया और गुणन फल को
पहिले शेष की इकाई के नीचे मे
पाये को लिखते आये तो
| आप १०० का माग भी लग गया।
प्रय शेष ३१ को ना ज्यों का त्यों
रख छोडो, परन्तु दूसरी लन्धि २ में |
विधारो कि पहिले की भांति
२४१-२ फौडियाँ अधिक बध
गई। इसलिए अगर EE कौडियों
ही की गठरियां रक्खी जातो
२ कौडियां यच जावेगी। चूफि इन
7
माप

सुखबन्ध विपय और पाठन विधि - श्यामपट M " " दो कोडियों को गठरियां न रन सकेंगी इसलिए इन्हें भी पहिले शेरों के नीचे रख लोगोया फिर | इस लब्धि को। से गुणा करके पहिले की भांति रख लिया। प्रय 'लकीर के बायें कुछ न रहा और जो गठरियां रह गई यह भी कौडियों को हो गई क्योंकि अधिक कौडिया निकालता गया है। इसलिए एक पाडी लकीर खींचकर गउरियों को। जोड कर, नीचे और कौडियों को जोड फर कौडियों के नीचे पहिले हो की भांति लिस ग तो २३३ । गठरियां हुई और ५६ कौडियों यव गई । जिनकी अय पूरी कोर गठरी नही पन सफती क्योंकि भाजफ T इस लिए २३३ लधि और ४६ फौडियों शेष। रोनि- --भाजक में इतनी इकाइयां yिo-श्यामपटानुसार। शि०- ऊपर के उदाहरण को जोड देते हैं महायता से अनाई जाये। फि१२ दाये उतने शून्य हो का

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मुखवन्ध विषय और पाठन विधि-- श्यामपट, . 1 ५ दर 11 . . . . । . TA लिपते हैं। यह r triamकिया यहाँ तक करते जाते है कि लफोर के बायें कुछ नहीं रह जाता, र लब्धियों और शेषरों को जोड कर एक माडी लकीर के नीचें लिख HTTTT रोति का वि-श्यामपटानुसार। थिला यहाँ भी पहिलेको भांति मागदो। लेकिन 'पहिले उदाहरण दे+२८१०० भाजफ में एक" जोडा था ruri । लधि को हर पार से गुणा भी फिया था, अब की २जोडा है अत एव दो से गुणा भी करेंगे क्योंकि २७५ २२ हर गठरी में से दो दो गठरियों ૨. पचतो जावेगी (शेष पूर्ववत्)। T . - ७२ -- १ , मुभयन्ध, विषय और पाठन विधि श्यामपट -- E है 44 २३६ x 3 - पहिले की भांती मोहने पर 391 ना गरियो भाई और १२२ काडियो। २३३ ३३ पच गई । फि १२२ फोडियों में भी २ गठरी यनेगी, इसलिये पहिले फी F:मोति इसमें भी १०० का भाग दो। या एफओ हाथ लगा है गठ- ! रियों के नीचे लिए दो और याकी । को शेष के घर में लिख दे । लेकिन । "वाडा ग्याल कग कि इस एफ ।' गठरी में भी १.२ की०=२ कौड़ियाँ अधिक है, इसलिए २ को २२ के नीचे लिए दो । अय फिर गठरियों नीर शेषों को जोड फर पहिले की । भौति रग रोता ३७. गठरियों हुई। और २४ काडियां पच गई। प्रय तीसरे उदाहरण में उसी प्रकार भाग लेकर देखो कि शेष EE प्राया जो भाजक के बरारर है। मतपय १ यार और भाग लगेगा । इस लिए लब्धि २३५+1-२३ मोर शेष बुद्ध न रहा। वि-श्यामपटानुसार रीति-अगर शेप में हाथ 1 I PH M -- ६ रीति ।

३
मुखधन्ध
विषय और पाठन यिधि
श्यामपट
.
शिक-ऊपर के उदाहरणों को लगे तो लधि
१ सहायता से रीति निकलयाई जाये। नोचे लिखते
है और इस लब्धि
फोभी पहिले
की भौति उसी
+-
इकाई से गुणा
फरफे गुणनफल
।
को शेष के नीचे
रखते हैं और
जोडते हैं।
अगर शेष
भाजक के बराबर
जावे सो
लब्धि में जोड
देते है और
इस लब्धि को
। भी पहिले की
भांति उसी
इकाई से गुणा
फरके गुणन
फल की शेप के
। नीचे रखते हैं

.
मुखबन्ध
विपय और पाउन विधि
श्यामपट
। और फिर जोर
देते हैं।
६. पर वोटो
-
दोनो क्रियाओ का
। ६५७६ को
सम्मेलन
PEE+१=१००
रीति का ध्यान
वि०-श्यामपटानुसार।
शि०-पहिले ही की भांति ६६
में १ जोड कर १०० यनालो और ६६४
भाग दो तो ६५७ लब्धि हुई और
८६ शेष । लेकिन अगर द हो के २३१७५६ में
१६ का भाग दो
भाग देते और ६५७ ही लब्धि रखते
तो६५७४१५७ और पचते।
अगर भाजफ में २,३ आदिजोडते तो
६५७ और फा दो तीन गुना आदि
घचता। इस ६५७ मौर६६ दोनों शेषों।
को जोड लिया तो ७४६ हुमा इसे
भी पहिले फो भांति बांटा तो ७१
लब्धि हुई और ४६ शेप । इसका
मतलय यों समझो कि लब्धि को।

-
मुपपन्ध
विषय मौरपाटन विधि
श्यामपट
-
। से गुणा करके याफो ८t में जोडते
1 मोर याफी को इफाई के नीजे से
याये को लिखते जाते हैं। इस प्रकार
"माप ही भाप भाग की मिया मी
होती जाती है। इसको शेप में भी
। समेटते और यांटते जाते हैं । फि ७
फो भी यही दशा है प्रतण्य और
४६ को जोड लिया तो ५३ माया २३१७ ५६
६६+-१००
इसमें हाथ लगने का झगडा न रहा।
२३. ७६
अगर शेष भाजफ के यरायर है,
। जैसा फि दूसरे उदाहरण में है तो
एक यार फिर भाग लग जायगा। २३४१ ४
। इसलिए लग्धि में जोड लिया तो
२३४३ लन्धि हुइ और शेष कुछ
नयचा।
.
रीति-वि०-न्यामपटानुसार। ,भाजफ में इतनी
शि०--ऊपर के उदाहरणों की । इकाइयां जोड़ते
सहायता से रीनि यावायो।
हैं कि एक के
दाये उतने ही
शून्य माजाचे
जितने भाजक

.
--
चारो मित्र रीतियां
जाड, गाकी, गुणन और भाग की रोतियों के सिपाने के बाद
मिश्रण को चारों रीतियां बतानी चाहिए।
पहिले लड़कों को भिन्न भिन्न प्रकार के पैमानों, चजनों का
ज्ञान देखकर उनका प्रयोग और उनको आवश्यकता को समझाना
चाहिए।
" फिर नित्य प्रति के व्यवहारिक सिको, वजनों पर वस्तुपाठ
भांति सयक दिये जायें।
*"इनका परम्पर में मुकायला कराना चाहिए और व्यवहारिक
रोति पर उनका निरीक्षण कराया जाय फिर अनुभव द्वारा उसका
निश्चय कराया जाय।
जैसे १६ आने का एक रुपया होता है और पाना रुपये का
मोलहयाँ प्रश है।
एक फीट में १२ इंच होते हैं और एफ ईंच एक फोट का
बारहवां भाग है।
नोट -मर हम निमन्ध के विस्तार भय से मिन रीतियों के
यह अध्ययों को खोजकर उदाहरणों द्वारा सिह किये देते हैं।
पाठक को चाहिए कि उनको ध्यान पूर्वक पढे और उन पर अमल
4.
A
परिवर्तन किमी धन के एक दर्ज की इंफाइयों की दूसरे
दर्जे की इकाइयों में लाने की रीति को परिवर्तन कहते हैं। इसकी
दो दशायें।

1.
-
(२) जिसमें यडे दर्जे के धन के छोटे दजों की इकाइयों में
प्रकट करते हैं।
जैसे ३५J३ को पाइयो पनामो ।
पाई
३७के माने। ३५
र०
मा.
० माने हुए
७५ माने
१२
५७. मानों को १०० पाइयां हुई
६.०३ पाइयों
--
.. शिक्षाविधि-उयस्थानीय धनों की निम्नम्यागीय यनों में परि-
वर्तन करना ऐसा हो है जैसा कि दहाई के थैली के पोल कर इफा
इयों में परिवर्तन करना, यस अतर इतना ही है कि इकाई, दहाई
और सेफडे की थैलियो दस की होती हैं परन्तु मिश्र सप्यायों की
थैलियां अपने हिसारी पैमाने के अनुसार होती हैं । अस्तु , पाउफ
का फर्तव्य है कि यहाँ वा. शिक्षणथैलो ठीक उसी नियमों पर
चलाने जैसा कि उसने दहाई के बयान में घनाया है।
(२) जिसमें छोटे दर्जे को इफाइया पडे दुजों को इकाइयों में
परिवर्तन होती हैं । जैसे पाइयों के आगे यनाना है।'
उदाहरण-एफ लडके को ५१६ पाइयों को एक थैली
इनाम में मिली यतामो, कि वह अपना हिसाय रुपये आने और
पाइयों में किस भांति समझाये।
r

"पाइयाँ २२)५०६ (४३ पाने ४८ . + पाने Rt.)४३(७० ३२ १ आने। अर्थात् उमे ) को पाइयां मिली थी। नोट-जोड और गुणन में परिवर्तन की दूसरी रीति से और व्ययकलन (वाफो) में पहिलो रीति से परन्तु भाग में दोनों रौतियों में काम लिया जाता है। मित्र जोड 'उदाहरण--मोहन को २५|| ६, मोहन को ४५॥ J३ पार और हरी को 6m७ पाई मिली ना बतायो मयको मिला कर क्या दिया गया। अभ्यास पा० कश्या हल १२)१६ मा ", - 7 7 7 A . . A - । F १४ २५ ४५ ६ ३ . १२:: ७ पा 3 १४५ ३८, (~१६ T -

-
६)३(२ रुपया
३२
माने
४y
--
२
-
४० रुपये
परिभापा- एष दो मांति के विभिन्न दर्जे के धनों के
जाने का मिश्रमालन बहन।।
गति-(1) धनों को इस मांति लिखा कि एक दर्जे की सभी
सध्या एक दूसरे के नीचे भाला। मौर सो भौति दूसरे दमें
को दुमरी पति में।
(२) मरफे नीचे एक पडी सफीर स्वीयो।
(३) फिर निम श्रेणी की इकाइयों को जोडो और भाग फल
को उसमे घडी श्रेणी में परिवर्तन परो और जो पूछ रह जाप
उसे उमी स्थान पर रहने दो।
(४) फिर निम्न श्रेणी के परियतन में जो हाथ पाया है उसे
पौर दूसरी श्रेणी को नमाम इकाइयों को जोहो।
(४) निस श्रेणी के अनुसार व्यवहार करते जानो। इसी मानि
सभी श्रोगियों को सम्व्यामों को जोड लो।
अभ्यास
(१) भिन्न २ पैमानों, यजनों और यांटों के प्रश्न दिये जाने
(२) प्रश्न प्रमानुसार कठिन होने जा ।।
-

(३) पहिले जिनमें " परिवर्तन" न हो सके, फिर पक श्रेणं का परिवर्तन, फिर दो का और पश्चात् विभिन्न प्रकार के उदाहरण दिये-जाय। है मित्र व्ययकलन 7 । है ४ ॥ - २ - (१) उदाहरण । मोहन के पास पाई हैं, उसमें से 10 पाई सोहन को दिये तो बतानो अर मोहन के पास क्या रहा। 'हल. २० आ. पा०' सै० द० इ०1। ६ 81 मोहन के पास थे। ५ ६.४ सोहन को दिये। ३ यह ऐसा उदाहरण है जिसमें थेलियों के सोलने की मावश्यकता नही है। +7-(२) उदाहरण । सीताराम के पाम J३ पाई हैं और राधे- कृष्ण के पास ३६ पाई तो यतामो फिमके पास कितने अधिक है। चियोज्य में 50 आ चियाग्य और वियोजक में एक ही समान ३४ जोडने से में कोई . प्रतर

नियम
(१) वियोज्य को वियोजफ के नीचे इस प्रकार लिखते हैं कि
प्रत्येक मश को सरयायें पक पक्ति में ऊपर नीचे हों।
(२) छोटे अश के धन से क्रिया प्रारम फरते हैं। यदि हो सके
तो नीचे के प्रत्येक सप्या को अपने ऊपर की सरया में से
घटामी।
(३) यदि ऊपर को सरया नीचे की सन्या से छोटी हो-
(8) तो उस ऊपर की सस्यामों में उसी अश की उतनी ही
इकाइयाँ बढामो जितनी उससे घडे अश की इफाई के बरा-
वर ही मौर वियोजक के उसी बडे अश में इफाइ बढा कर
घटामो।
अभ्यासार्थ प्रश्न
(१) ८ मन ७ सेर ६ छटॉक में से मन ५ सेर ४ छटाफ
घटामो।
(२) < में से ४६ पाई घटायो ।
(३) २७18 मे से १५) ५ घटाम्रो ।
(४) २६६ में से २३५ घटायो ।
(५) ३५४५ पाई में क्या जोडा जाय कि वह पूरे १००)
हो जाय।
मित्रगुणन
उदाहरण-६JE पाई मन घी यिफता है, तो ४५ मन
घी के दाम बतायो।
मा० मा० सि०-६
.

मिया रोति पा० १५ ८५ ४०५ . ६ (१) गुण्य को ऊपर और गुणक को उसके सबसे छोटे दर्जे के धन के नीचे लिख कर २७६० एफ पडो लफीर ग्नीचते हैं। ३३ (२) पहिरे गुणक को गुण्य २८३४ के सब से छोटे (न्यूनतम) धन उत्तर २८३४ २०४ पाना : पाई | की सख्या से गुणा करते हैं, फिर फ्रमानुसार राशि के ऊपर के धन से जो कुछ हाथ लगता { जाता है, उसको साधारण जोड | के रीत्यानुसार अपर के धन में जोडले जाते हैं। मित्रभाग उदाहरण-८४६ २० ११ आना ७ पाइ को ४४ लडफों में रायर २ बाटो। . क्रिया रीति - माजक भाज्य लन्धि पा० ७(१६ भा* (१) राशि के सय से उस स्थान फेधन को भाजफ से यौटा और सन्धि को दायें,ओर लिख दो। ४४८४६ +

किया
रीति
-
४०६
२०५
(२) यदि कुछ याफी रो
तो उसको उससे छोटे धन में
परिवतित फरी मोर राशि के
उस स्थान के प्रश को जो
पदिरे भाज्य मौजूद हो जाड
लो। अय इस सरया को फिर
भाजक से यांटा और लग्धि
को दाहिने हाय की मोर लिएर
दो।
(३) इसी प्रकार यार
दिया करते जामो, जब तक कि
भाज्य की राशि के मयश
| पूरे न हो जाय।
४४)२१६(४
४३
५०६ पाइया
२४) २३(११
उ. १६०
•३६
४प्रा०११पा०
1
,

मित्र भाग + उदाहरण-DJ पाई को ३ वञ्चों में बाँटी- नाम-मिश्रभाग। मिश्रभाग की परिभापा-एफ धन के चिनिध अंशी को उतने समान भागों में बांटना है जितनी कि भाज की इकाइयाँ हैं। যাই ३) ३ (१ २० ३) ६ (० प्रा० ३) ६ (३ पाई - - 7o मा० हल । E 61 < भाजक भान्य . उदाहरण द्वारा रीति को भ्याग-३६४७ पाई फेो ३१ लड़कों में घरायर पांटो। (१) धन के सब से बडे रु. पाई प्रश को भाजक सेवांटो। ३१) ३६४--१३-७ (११॥ (२) यदि कुछ शेष रह जाय तो उसको उससे डोटे अंश के धन को जोडा फिर भाजक में याँटो। भजन फल को दाहिनी ૨૨ (३) इसी प्रकार उस समय ३६० तक किया करते जामो जय तक १३ फिभाज्य के सभी प्रश निपटने ३१) ३८१ (१२ जाय। ३१ और लिख दो। H .. ३१) ११५ (३ ६३ २२ सूचना- -भारभ में इस विषय पर अधिक ध्यान देना चाहिए कि लडके प्रत्येक प्रश के शेष पर उसका नाम व्यक फिया करें। प्रभ्यास-पाठर पुख्तय से विविध प्रकार के प्रश्नों को हल । -फराना चाहिए। w4 मिश्रगुणन एक गज कपडे के दाम ३ पा है नौ ३ गज के दाम . बनायो। 44 ७ गुग्य n F - ३६ ७ १३ ३६. १३ ३ गुणक ६ गुणन फल परिभाषा-एफ ही जाति के विभिन्न अशों के धन को मार जोडने की सक्षेप रीति को मिश्रगुएन पहते हैं। ८ ।

उदाहरण -पफ मन घी का दाम ३७||} १ पाई हो तो ४८ मन घो के दाम बताओ। साधारण (२) फल ४ आने (३) ३७ कच्चा प्रयोग ग्रा० पा ४५ १ (२) ३८४ २६६ • १४८ ४ १८०० १६) ३८८ आने १७ ] १५००० रीति-(१) गुण्य की ऊपर और उसके सबसे छोटे अश के नीचे गुणफ को लिखकर एक पडी लफीर सींचते हैं। (२) पहिले गुणफ को सबसे छोटे अश से गुणा फरसे फिर समानुसार ऊपर के अर्थों से। (३) जो कुछ हाय लगता है उसको मिश्रधन के रीत्यानुसार ऊपर के मश मे जोउसे जाते हैं। अभ्यासकोर्स की किताय से अभ्यास कराया। यह अभ्यास यहां तक पुष्ट हो जाय कि लडके इस विषय में पो हो जाय। - +- दूसरा पाठ साधारण रोति मिसाने-अंडरीति द्वारा भली भांति अभ्यास कराना चाहिए।

( १७) उदाहरण-एक घोडे का दाम पाई हैं, सो उसी दाम के घोड़ों के मोल लेने में कितना रुपया चाहिए। ८४-३४४५७ प्रा० ३ पा० - ३ २५८ १० ६ पहिले खड का गुणन फल । .१०३४ " दूसरे खडका गुणन फल । ७२४२ १३ तीसरे खड का गुणन फल । रीति-(१) पहाडे की मदद से गुणक के सड बनायो । (२) प्रथम गुण्य को पहिले खड से गुणा करो। (३) गुणन फल को दूसरे खड से गुणा करो। (e) इस प्रकार किया उस समय तक फररो जाओ जब तक कि सब खट निपटन जाय। तीसरा,पाठ उदाहरण-cing) पाई को ६३ से चिन्यस्त क्रिया द्वारा गुणन करो। प्रा. पा० ७ २० ह १० गुना। ॥ ५१३५ ६० गुना।

4
-तीन गुना जोडने से।
१-६३ गुणनफल!
५२६०
+
-
तीनो रीतियो का मुकाबला
(१) साधारण रीति सरल है। सभी प्रश्न इसके द्वारा हल
हो सकते हैं, क्रिया इकहरी होती है, भूल होने का अवसर कम
होता है परन्तु लम्या २ गुणा करना पडता है । इसलिये मालिक
किया का प्रयोग नहीं कर सकते।
(२) खंड रोति का-इसमें लम्बे २ गुणन नहीं करने पडते,
परारो इसमें यह है कि प्रत्येक गुणफ के खड नहीं मिल सकते,
तीसरी रीति से सक्षिप्त है।
(३) इसके टुफडे सरलता से मिल जाते हैं । यह रीति मनेा
रजक है । युढि पर बल पडता है, यद्यपि यह रीति कुछ लम्बी है,
परन्तु अत में इससे हल कराना अधिक लाभदायक है। कुछ प्रश्न
इन तीनों रीतियों से हल फरामो, फिर कोई प्रश्न फिसी रीति से
और कोर फिसी से, जिसमें बच्चे मारने यन्द करके एक ही रीति
पर निर्भर न हो जाय।
.
-
२
दहाई का गुणनफल
कक्षा
४५ मिनट।
साधारण अमिमाय--धुद्धियात्मक शक्तियों का सुधार ।
विशेष अभिप्राय-दहाई के गुणा की रीति को शान !
-

( ८६ ) मुसबन्ध विषय और पाउन । विधि श्यामपट भूमिका - । योध नुसार। पा०२४ के योग उदाहरण आदि के गुणा फी जांच। अगर पफ मादमी को १२ २० २-योग पड को १० प्रा० ८ पाई दे तो २४ जाँच (जैसे ११०। मनुष्यों को क्या मिलेगा। २४-२०१४ (६५) ६० आ. पा. वि०-ग्यामपटा र० प्रा० पा० १२ १० ८४४-५०१० -४ गुना १२ १० ८९२०-३५३ ५४- पण्ड तो करो? २० गुना लडके भिन्न २ खड यता- ३०४-०-०-२४गुना वेगे। पा०-अपने निया काम के दो सड र०या०पा र आ. पा.' २०३४ हे लें। मय १२-१०-८४४=40-१०-८-गुना पूछा जारेफिकिसी मस्या के 8 गुना १६-१०-८४२,०२५३-५-४० वगुना फो जोड २० गुना दें तो योग फल ३०४-०-० उस सख्या का के गुना होगा। उत्तर-२८ गुना। 1 7 १ (१०) मुखवन्ध विषय और पाठन विधि श्यामपट . । - म 3 । - फिर श्यामपटा 1 नुमार गुणन कराके ।। जोडया लिये जाये। अव लड़कों को यह दिपाया जावे कि । २० से जवानी गुणन करना कठिन है और घडी सस्यामों में तो और भी फठिन होगा। इस लिये इन टुकड़ों को । २०४ के बदले दहाई-व ४ इकाई समभा सैक्डा आदि में भी इसी प्रकार स्थानीय हो कराये जायें। श्रर पहिले की भांति ४ से गुणन कराया जाये। मला लहको यताओ तो क्मिसे गुणा करना रह गया? । जाये। . । T (१) मुखपन्ध विषय और पाठन विधि श्यामपट उ०२० से। एक । दहाई में के इकाइयां होती है ? 3०१०।। इसलिये १० मे गुणा करके गुण्य के रोति नीचे लिवा। प्रफ्ट (१) गुण्य को गुणव की इकाई है कि यह गुणनफल से गुणा पर दायें लियो। निफालना है तो इस (२) फिर गुण्य को १० गुना गुणनफल फा 2 करके नीचे लिखो। गुना करना चाहिए? (३) इस १० गुने फेो द० के उ०२गुना। प्रक से गुणा करके इकाई के इसलिये १ दहाई गुणनफल के नीचे लिखो। के गुणनफल का () अय इन गुणनफलों को २ गुना करके इफाई जोड लो। के गुणनफल के नीचे लिगे। पहिले की भौति इन दोनों गुणनफलों सैकडे का उदाहरण को जोड ले। -यदि सैकडा हो १ थान कपडे का दाम २८) सो १ दहाई के १० ६ पाई तो ३५५ थानों गुने का ध्यान दिला का मूल्य बनायो। कर पहिले १ सैफडे I (१९२१) । विषय और पाठन मुखबन्ध विधि ज्यामपट है r " 7 गुणनफल रु०मा० पा. रु० प्रा० पार निकाला जावे फिर ,१८-१२-१२-१२-६ पूर्ववत् क्रिया की -६ गुना जावे । (क्रमश) उदाहरण स्वरूप एक २८७-१५-६४५-६३६-- प्रश्न हल है। -६-५० गुना श्यामपट पर हल फरते समय प्रत्येक २८७E-17--0.३५६३६-- खड फी रीति उसी ---३०० गुन के सम्मुख लिख दी ६६६१-११-०=३५६ गुन जावे जिससे याद नाम दहाई का गुणन। फरने , में सुगमता परि०-दहाई का गुणन मिश्र हो। गुणा की यह रीति है जिसमें परिमापा । वि०-श्यामपटा- गुणक के स्थानीय सडों द्वार नुसार। प०-ऊपर की नियामों का ध्यान दिला. कर. नाम बताया जाये और कुछ सहायता देकर परिभापा भी यनाई - 1 व गुणन करते हैं। - 4 जावे।

( ३ ) , पिपय मोर पाउन मुनयन्ध विधि MAY A अभ्यास .. लिखाये। वि० प्रश्न नुसार। पा०-११) पाटप (३) एक महीने का घेतन ३४ इयारती प्रश्न योल ०६ मा ४ पा० है, सो ३१ पर श्यामपट पर माम का वेतन निकालो। लिले पोर यालपों (०) ४) १३ माना ३ पायो से भी स्लेटों पर ४८ पार सक्षेपत दहाई की रीति । से जोडे। (२) भाशा दे पि (३) '४० .०शि०-~८ जो लडका प्रश २०मति चैत की दर से ९६ निफाल है तो येलों का दाम दहाई को गति अपना मामान छोड मे निकालो। पर पड़ा हो जावे। (३) जरसव लडये राडे हो जायें तो फिसी चतुर लडके से ज्यामपट पर इल परावे। (४)फिर सबस्लेट जांच परशुद्ध और अशुद्धि का चिन्ह धनादे। 67 ---- मुसबन्ध विषय और पाठन विधि 'श्यामपट -- 1. - . २ एक गाडी में मन१६ अच्छा लब्धि की मेर २० नाज लद सकता है दहाई के लिये केवो वतामो 9977 मन २२ सेर गुना लेना होगा? छ० गले के लिये कितनी उ० १० गुना गाडियां चाहिए । अध्यापक को चाहिए कि उपरोक्त रीति से यह फल निफलवाये कि भाजक का १० गुना और फिर इम गुणन फल का १० गुना करना होगा। इसी अपसर पर यह भी समझाया जावे फि लधि में इकाई के सिवाय दो अफ और आये नो भाजफ को दोबार०से लंगा- तार गुणा क्रिया गया। अब भाजक का लगातार दो . - । . T .

. मुखरन्ध विषय मोर पाठन विधि श्यामपट maru यार १० गुना करके लिप रो भोर। उमः दाये एक मोटो लकीर वीव कर उसके दायें भाग्य लिग दो मोर सय के दायें उत्तर लिखते जाम्रो। भय देखो भाजफ का १०० गुना। दमी अवसर पर यह भी समझाया जाने कि लधि में इकाई के सिवाय दो प्रफ और पाये। मन्तिम गुणन फल का दो गुना भाज्य में से घटामो और इस दो को दायें भोरलिपार याफी में अन्तिम गुणा पग के ऊपर प्रा० माofi०-७ h- (१८) मुपयध विषय और पाठन विधि श्यामपट . न वाले गुणनफल का भाग दो फोंकि लम्धि दहाई आवेगी इस लिये वाकी असली भाजक के दस गुने की कुछ गुना होवेगी। अब सय किया पहले की तरह करो । अब इफाई का आवेगा । इस लिये वाफी में प्रसल भाजक का भाग दो तो पुछन बचा इस लिये उत्तर २२५ हुभ्रा। AJ 4. रीति वि०-श्यामपटा- रोति-भाग्य और भाज नुसार) शि०-ऊपर के को देख कर यह पता लगता उदाहरण फी सहा किलब्धि में फै प्रक पाचंगे यता से निफल प्रय भाज का दसरसे उतनं पार गुणा फरते है जितने प्रः घामो। --- --- ( Et ) अवन्ध विपय भोर पाठन विधि श्यामपट इफाई के पाद लन्धि में माने याले हैं। पहिले मंतिम गुणन फल का भाग्य में भाग ऐफर लन्धि को दाहिनी ओर लिखते है। फिर शेष को उसगुणनफल से यांटते हैं जो मन्तिम गुणन- फल के ऊपर होता है। इस लब्धि को पहिलो लब्धि के दायें लिखते हैं। यदी क्रिया अन्त । तफ फरसे जाते हैं। नोट-केवल सकेत फर दिये गये हैं। पढानेवालों की स्तार दे देना चाहिए और कई उदाहरणों से ऊपर के स्थानों जाना चाहिए तथा कई स्थान पर शून्य फा पाना भी दिखाया हिए। . . महत्तम समापवर्तक अपवर्तक । निम्न लिखित प्रश्नों द्वारा अपवर्तक का ध्यान दिलायो। (१) ६ को कौन कौन सी सल्याएं पूरी २ यांटती हैं। उ०२,३॥ (२)को कौन उ०२,४। " " ( १०० १०) - , 2 - परिभापा-जब एफ सख्या दूसरी सस्या से ,पूरी बंट जाय तो उनमें से छोटो सख्या को पड़ी संख्या का अपवर्तक फहते हैं, और पडो संख्या को छोटो सख्या का अपवर्त्य । । उदाहरण-६ के अपवर्तफ-२,३ । -२,४॥ 'प्रश्न द्वारा निकलवानो कि यदि फिसी संख्या के अपवर्तक निकालने हो सो चाहिये कि बडी सरया को २,३,५,६ इत्यादि से भाग दो और जिन जिन से वह पूरी बंट 'जाय यही उसके अपवर्तक हैं। और यदि हम को फिसी सप्या के 'अपवर्त्य निकालने हों तो उस सख्या का पहाडा पढ़ते जा इस भांति सब 'गुणनफल' उस संख्या के अपनत्यं होंगे। अभ्यास-२४ के अपवर्तक बताओ उच्चर २१३,४,६,८,१२ । ४८ के अपवर्य निकाला 30 समापवर्तक लडकों से पूछो कि ६.८ के कौन कौन से अपवर्तक हैं। फिर पूछो कि कोई सख्या ऐसी भी है जो दोनों का अपवर्तक है ? उ० २१ पूछा कि कोई ऐसी भी सख्या है जो १५,३०,२५ का अपवर्तक है? उ०५। परिभाषा-ऐसी संख्या को जो दो अथवा अधिक सख्याओं में से प्रत्येक का अपवर्तक' हो उसको समापवर्तक , r - . ' 11 (०१) अभ्यास के भपयतफ २,३,४,६, हैं। और १८ के मपवर्तक २,३,६६, मत १०,१८ के ममापवर्तफ २,३,६ हैं। महत्तमसमापवर्तक उपरोक्त उदाहरणों द्वारा पूछो- २२, १८, के ममापवर्तफ का हैं ? उत्तर २,३,६, इन समापनफों में सय से यही सण्या कौन है ? उ०६, परिभाषा -सय से यडी समापवर्तक सन्या को महत्तम समापवर्तक' पाहते हैं। महत्तमसमापवर्तक निकालना उदाहरण " . २२ (२ (१) वही सस्यों को छोटी (१) ११, २२ का महत्तम मे भाग दो यदि युछ न यचे | समापवर्नक छो० स० यडीस. सो छोटी सख्या इन दोनों ११) मायामों का महत्तम समाप- ११महत्तम समापवर्तक हैं। (२) यदि कुछ शेष रहे तो, (२) १२, ३० फा उसमे छोटो सख्या को बांटा और यदि फिर कुछ बच रहे तो धर्तक होगी। .

( १०२ ) उदाहरण इसी प्रकार किया करते जामो प्रोर जिस सख्या से भाग की झिया पूरी हो जाय यही इन सप्यानों का महत्तम 'समाप घर्तक' है। छो० स०३० स० १२) ३०० २४ १) १२३ १२ t - k ६ महत्तम समापवर्तक है। १८, ३० का १८) ३२ (. १९) १८ (१ . 2) ४३ ७ इसमे क्रिया पूरी । २) हुई प्रत १८,३२ । का समाय वर्तक हर लघुतम समापवर्त्य प्रश्न ६के अपवर्त्य बतायो १२,१८,२४,३०,३६,४२४८ इत्यादि के मपवयं यतामो १६,२४,३२,४०,४८,६४ इत्यादि - -y 'उत्तर- । 10 . अपवर्त्य की परिभापा-जय एफ सख्या दूसरी संख्या से पूरी पूरी यंट जाये तो उस पडी सख्या को छोटी सख्या का अपवर्त्य कहते हैं। अभ्यास-(१) ६ और १२ के अपवर्त्य यतामो? (२) ६ और दोनों के कौन २ से अपवर्त्य हैं। समापवर्त्य की परिभापा-ऐसी सप्या को जो दो सख्याओं में से प्रत्येक का अपवर्त्य हो, समापवर्त्य कहते हैं। अभ्यास -- और १२ का लघुतम समापवर्त्य यतामो? लघुतम समापवयं का ध्यान-६ और ८ के समापरयों में सय से छोटा कौन है ? उत्तर २४ । परिभापा-सब से छोटे समापवर्त्य को लघुतम समाप- वयं करते हैं। अभ्यास -- और १२ का लघुतम समापवर्त्य निकालो? इसी प्रकार २ से अधिक सप्याओं का भी लघुतम समापवर्त्य निकाल सकते हैं, जैसे २,३,६ का लघुतम समापवर्त्य- २ के अपवर्त्य २,४,६,८,१०,१२,१४,१८', इनके समापवर्त्य ३ के अपवर्त्य ३,६५,६,१२,१५,१८,२४,२७ लघुतम समाप- ६ के अपवई ६,१८,१२,२४,३० ३६, रीति-पहिले सप्याओं का अपवर्त्य निफाले, फिर समाप- वर्ल्स, जो सबसे छोटा समापर्त्य हो घही लघुनम समापवर्त्य होगा। फई सख्याओं के लघुतम समापवर्त्य निकालने कोसामान्य रोति उदाहरण द्वारा समझामो । पत्ये ६ ( १०४ ) उदाहरण रीति - - फदि सप्याय com न 141 भाजक (१) सख्यामों को पास २ एक पति में लिखो। १२.१८,२० (२) उनमें ऐसी रुटि सच्या ६,६,१० फा भाग दो जो उनमें से कम से दो सप्यानों को पूरा २ घोट दे। रुदि सरयाये (३) इसी प्रकार फिया फरसे जामो जब तक कि पति में पेसी सख्यायें न रह जायजा परस्पर रुढि हो । (४) इन सय भाजकों और रूदि सस्न्यामों का गुणनफल लघुतम समापवर्त्य होगा मिश्नभिन्न द A , " 27 व यसि , ( १०५ ) चूफि क्षेत्र म य स द से इकाई प्रकट होती जो के क्षेत्र प्रय जो कि कुल क्षेत्र फा भाग मिअभिन्न फी परिभाषा- जिन भिन्नों के हर व अश दोनों या उनमें से कोई एक मिन हो तो ऐसी मिन्नों को मिध मिन्न कहते हैं। २ अश रीति-ऐमी भिन्नों के सक्षेप करने के लिए अश में हर फा भाग देते हैं। नोट :--ध्यान रहे कि ऐसी भिन्नों में मोटी लकीर को भाग- चिन्ह समझना चाहिए और उनको मोटो बनाना चाहिए। 8 अभ्यासार्थप्रश्न- ३ भिन्न गुणन गुणक (३) गुण्य २ ૧૨

--
उपरोक्त प्रश्न का यह अर्थ है फि १ को २ यार जोडो।
1 ष
।
फ
१
१२
३.
६
१२
।
१+
।
+ घज--
१२
२
(जो दो भागों के बराबर है)
x०
२
-
प्रथम रीति-यदि फिसी भिन्न को पूर्णका सप्या से
गुणा करना हो तो उस भिन्न के अंश को उस स्म्या से गुणा फरो
और हर को वहीं रहने दो।
(२) गुण्य गुणक।
Ma
me
अफ कुल भ म का है जो नी भागों के बरायर है।

( १०७ )
=६ भाग जोमस के बराबर है।।।
परन्तु ६ भाग -मम का है
૧૨
प्रथम रोति से
द्वितीय रीति-जय किसी भिन्न को भिन्न से 'गुणा
करना हो तो मश को प्रश से और हर को हर से गुणा करो। अंशों
का गुणन फल उत्तर फा अश और हरों का गुणनफल उत्तर का
हर होगा।
-अभ्यास-(१) ३४३
(ม้าย
७
उदाहरण। भाज्य
४
अथवा
भिन्न के भाग
भाजक
पफ ऐसी चौकार शक यनामो
कि जिसकी लम्बाई का भुज
भाज्य के हर
अश
जिसकी सख्या बडी हो उसी के
अनुसार उतने सम भागों में
विभक्त हो। इसी प्रकारचौडाई
का भुज भाजफ के हर अथवा
अश के अनुसार बरा हो जैसे

(८,१०८, ), 1 प्राकृति इ चूकि, फइदस जिसमें २० खाने हैं और -म व सन जिसमें २१ खाने हैं (प्रत्यक्ष प्रमाण द्वारा)। २० 50 - ४ ४ परन्तु ३२१ य। फ + (गुणन की रोति से) इस लिए यह रीति निर्धारित हुई। (१) भाज्य को उलट दो अर्थात् हर को प्रश और अश को हर मान ले। (२) फिर भाज्य को भाजक के पलटे हुए भिन्न से गुणन करो, (३) गुणनफल भजनफल होगा। अभ्यास-(१)-१२-१४ ३ 1 VA - (२) ६-२४ खाना- -२४ खाना-७ २४ - ~ सम्बन्ध का पाठ विपय . सम्बन्ध ४ कक्षा १०) २० मिनट समय साधारण-शादियों का विशेष, मौर युडिया अभिप्राय स्मक शक्तियों का साधारणत सुधार। विशेष-" सम्बन्ध " के प्रति लडफों की योग्यता यढाना। आवश्यकीय वस्तु-बौद्धियां, गेंदें, प्लैप बोर्ड, भाइन। १ Purwa मुर्वियाँ विषय मोर शिक्षा प्लेफ घोर्ड सूची विधि ध्यान - यि०-लेफयोर्ड जिन सस्याओं सूची देगे। के गेंदे दो मुफायिला । गेंदों से शि०--छे गेंदों का किया गया | तिगुनी दो गेंदों से मुफा यिला करामो। गैदों की तिहाई है। मौर दो गेंदों को गेंद गेंद छ गेंदों के साथ मुफायिला फरा केप्लेक योई पर लिखो। वि०-देखो ब्लैक "सम्बन्ध' जय दो एक ही शि०-लेफचरजातियों द्वारा यतामो फिराशियों का इस २ नाम बोर्ड सूची।

(१२) मुर्गियां विषय और शिक्षा विधि ब्लैक बोर्ड सूची → । धारण १ सामान मियम विषय और शिक्षा ! (१) २ ४= समान निधि-देखो स्लैक (२)१०२०- घोर्ड सूची। विधि-लडकों से | (३) १५२१- ऐसे दो सम्बन्धों को पूंछगा फि | (४)२० २८० जिनके मूल्य समान हों। वि०-देशो ब्लैक अनुपात बोर्ड सूची। (१)२४-१०२० शि०-लैक्चर (२) १५२१-२०२८ द्वारा यताऊंगा। वि०-देपो ब्लैक दोसामानमूल्यीय सम्बन्धों की तुलना को अनुपात कहते हैं । शि०-लडफों से दो चार उदाहरण हल फराकर निकल घाऊँगा। देो ब्लैक बोर्ड २४. सूची- (२) १०२१, २०२८ शि०-लेक्चर द्वारा पताऊंगा। परिभाषा बोर्ड सूची। -- . - लिखना १०.२० - T पदना ( ११३ । --- । + सुम्मियों } घिपय और शिक्षा विधि प्लेक योई सूची m राशियों के वि०-देखो लेक जो सम्यग्ध दो का चार मनुपानफा चोई सूयो। से है, घदी १० को है, २० से। नियम शि०-हा तोन | पदिलो और चायो राशियों को उदाहरण दल परान्तम्य और दूसरी औरतीसरी के नियम फ्लिको मध्यस्थ फहते हैं। पाऊंगा। अन्तरथ का गुणन फल (१)२४२०-४० (२) १५४२-४२० मध्यस्थ का गुणन फल ४४१०-४० ~~२१४२०-४२० अनुपात में प्रतम्य फागुएन फल मध्यस्थ के गुणन फल के समान होता है। विषय मिती काटा ट कास मिडिल समय ४५ मिनट मामा सि- (१४) साधारण अभिप्राय . सुधार। धुहयात्मक शक्तियों का क्रम विषय लैक चोई सूची । 7 - , सूद के स्तम्भ भूमिका वि०-प्रारम्भिक प्रश्न शिक्षाविधि (१),सूद किसे । कहते हैं। (२) सूद के सबध मे दुसरी परिभाषायें पनाह (३) दर, समय और धन मालूम होने से सूद और मूल जानने की राति यतामो? चितावनी वि०- 10--राम ने मोहन से २०० रु० का माल ५ प्रति सेफडे से ३ वर्ष के पश्चात (२००+३०)=3 २३० । देने के फरार पर मोल लिया यदि राम अभी रुपया चुफाना चाहे तो मोहन को २३०) रु में से कितना कम रुपया मिलेगा। शि० वि०---सुफराती प्रश्नों द्वारा-(४) मोहन को माल के वास्तविक मूल से पितना धन दर समय मूलधन सूद कुल + ३ -१२०० ३० २३० दर समय तत्काल मिती मिली मिती काटेके स्तम्भ x x -- (१२५) चिपय ग्लैफ पोर्ड सूची मधिक देना चाहिये - 30- 1।।३०रा (२) इस ३०० का नाम का उ० सूद। (३) महाजन इस सूद को मसल मूल्य में क्यों मिलाता है? उ० देर में पाने के कारण। (४) यदि देर में न दियाजाय सा तय भी अधिक दाम राम को देना होगा? नही फिर सूद फैसे मिलेगा (नो नकद न सेरह उधार)। (५) फिसी धन से यह । अधिक धन अर्थात् सूद कम किया जायगा। उ०-उस धन से जो समय, घ्यतीत होने के पश्चात मिलता, कुल धन २००) दाम+३00/- । सूद २३०) निश्चय है। लेक बोईसूची के अनुसार। शिक्षाविधि--उपरोक्त सुकाती साधारण धन प्रश्नों द्वारा प्रत्येक पारिभाषिफ- [ धन है जो . - ܚ- विषय ब्लैक बोर्ड सूची 1 N " - स्तम्भों के नाम बता फर-परि-के मूल धन और भाषा पूछो फिर साधारण सूद सूद के योग के के स्तम्भों से मुकाविला करो, समान हो। मिती' फाटा वह धन है जो निर्धारित समय के पूर्व ही चुकाने के कारण। - तत्काल वह धन है कम देना पड़े। -1 जो निर्धारित समय के सद से मिल कर प्राप्त धन के घरापर हो जाय। वि० ६२७) का मितीकाटा, ४) प्रति सैकडे से ६ वप में होगा। शि०वि०-इस प्रश्न के १००) का सूद ठोक इस रीति पर हल फरायो। वर्ष के लिए. ४, है। जैसे किसी-सूद व मूल धन मालूम होने से सूद पा जाय जो एक विपदर और नि मन समय के लिए हो। इस बात २५ . T - रोति का 4 - , २४ ६ ६ कुलधा प्राम विपय प्लैफ वोर्ड सूची -- mate ॐ । FA काटा २५ गति -- २५४६४६१० अभ्यास . SA को भली प्रकार से समझामो। कि मिती फाटा कोई पृयक कुछधनका मिती रोति नहीं हैं। हां सूद का एक रूपान्तर अवश्य है। वि०-ग्लैफ बोर्ड सूची के अनुसार सुक्राती प्रश्नों द्वारा । रोति निकलनाफर प्लैक बोर्ड। 1x२०४६x२५ पर लिखो और याद फरामो। २५x. वि०-उदाहरण। 1. =१२० । शि० वि०-(१) ब्लैक बोर्ड १२० मिती काटा पर प्रश्न लिखफर लडकों को है। दिखामो। रीति (२) सवाल हल करने की दर और समय पोछे लड़के अपने स्थान पर । मालूम होने से का खड़े हो जायं। (३) प्रत्येक, छात्र के हल : (१) १ में मिला- किये हुए प्रश्न की जांच करके कर उसे प्रासय्य शुद्ध मौर अशुद्ध का निशानधन यतामो। बनवायो। पो० मिती काटा ३वर्ष के लिए ५ की दर से 'क्या होगा? । खुद निकाल ले। 1 - . 1 T ज्यामेट्री का विन्दु पाठ विषय रेखागणित का विन्दु । कक्षा पञ्चम वर्ग। प्रयोजन मुख्य , परिभाषा का शान । साधारण ज्ञान शक्तियों का सुधारें। पूर्वयोग्यता - भिन्न २ घन्तुओं का विस्तार जानना। सामान २ पिंड की वस्तुए "जैसे गोलियां खरिया-झाडन प्वाइनटर श्यामपट आदि।- समय ३० मिनट।। , ॥ Ci A मुख्यरा विषय सपाठन विधि 'श्यामपट 64 -- प्रस्तावना फिसी वस्तु के विस्तार की परिभाषा और उनके नाम बालकों से ज्ञात करना 11 वि०-श्यामपट देखिये। छ। वि०-नाना प्रकार के विस्तार परिभाषा की गोलियां दिखलाफर और मेज का चिन्तन पर रख कर प्रश्नत्तोर द्वारा यह हदयागम करो कि किसी वस्तु का ( ११६ ) ख्यराश- विषय और सपाठा विधि । श्यामपट re r स्थान विना उसके विस्तार के विचार . किये हुये नियत नहीं हो मफता और भिन्न २ पिण्ड के चिन्ह श्यामपट पर पामो जो यथाशक्ति क्रमानुसार छोटे होते जावें और, प्रश्नोत्तर द्वारा यहदयागम करो कि इन सय चिन्हों में एक बात उभयनिष्ट है। विस्तार धोरे २ क्रम होता गया है परन्तु यह विस्तार कहां तफ, फम हो सकता है? कुछ न रहे अब ऐसे चिन्ह दो। एक चालक से बनमामो जय लड़के धनादें तो चाक को रोज धार से | उसके दो या अधिक भाग फरो और सिह फगे कि इससे भी छोटे चिन्ह हो सकते हैं। इस प्रकार प्रश्नोत्तर द्वारा चिन्तयन दूद फरो मोर नाम यतामो । " वि०--अवलोफिये श्यामपट। शि०--उपरोक्त चिन्तन द्वारा परिभापा- परिभाषा यालफों से निकलवाफर विन्दु यह वस्तु और वाक्म को शुद्ध करके श्यामपटहजिसका कोई पर लिप दो और मनोहर पार्तालाप स्थान नियत हो द्वारा विद्यार्थियों को समझायो कि परन्तु उसमें विन्दु ।

( १२० ) विषय और सपाठन विधि:- श्यामपट साधारण प्रकार से जो विन्दु श्याम लम्याइ चौडाइ । पट पर यनाने हैं यह वास्तव में मोटाई न हो रेखागणित 'फा विन्दु नही है घरत और उसके ऐसे विन्द का स्थान प्रकट करती भाग भी न हो है ऐसा विन्दु हाय से बनाना सकें। असम्भव है। मन्ति- माहरणी (१) पिन्दु की परिभाषा लिग (२) रेखागणित के विन्दु'और साधारण विन्दु में कमा अन्तर है? । 1 । AITH १ । M r म है H . रेखागणित प्रथमाध्याय (सुकराती प्रश्नों द्वारा) कक्षा पन्चम। समय दो दिन एफ एक घटेर पूर्व योग्यता घो साध्य तक पढ़ चुके हैं। विशेष--२१ ची साध्य का योध'। अभिप्राय- सामान्य चुन्यात्मक शक्तियों का *सुधार। T T . " ( १२५ ) सामान-ग्लैफ बोर्ड, फापियां, झाडन, चाक प्याइटर, रोटेक्टर (चांदा) परफार और सेंटीमीटर की पटरियां तथा पसल। विश्य और शिक्षा विधि ग्लैक बोर्ड सूची 1 . - - शितफ-प्लैक बोर्ड पर नहकों के सामने शफल खींचकर नता है "यतामो मैने क्या कया?" विद्यार्थी-जमार। अपने पहिले त्रिभुज म यस बनाया है फिर यस भुज के सरों बस से दो सरल रेखायें | 7 बद सद विन्दु द नक है 7 17 नींची हैं। m- शि०- 10-मच्छा तुम भी येठ कर अपनी कापियों पर यही काम करो जैसा फि मैंने ब्लैक बाई पर किया है। जि० सय यनाफर फापी हाथ में लेकर खड़े हो गये। शिo---ठीक अच्छा प्रब।- '(१) सद पर पद का । योग का प्रय और। 17 का p ( १२२ ) F विषय और शिक्षा विधि ब्लैक बोर्ड सूची P- १ r- - - M T । w+r अस के योग से माप फर मुकायला फरो। (२) सदय और बिमस का मुका यला करो। वि०-सब विद्यार्थो येठफर पटरी से भुजामों को माप कर उनका योग फल अपनी कापियों पर लिख रहे हैं। इसी प्रकार प्रोटेक्टर से कोणों को माप फर अपनी शफलों में जाहिर कर रहे हैं। देखो प्लैक बोर्ड सूची शि०-इस पैमायश से तुम hi साधारणत कना फल निकालते हो? विo-महाशय । (१) सद+वद छोटा (१) सद+ यद छोटा है, हे अस+अय से। प्रस+अब से। - . " . -- -- विषय और शिक्षा निधि लेक वार्ड सूची यमम - (२)सदय बहा है (२)मदय यहा हे मस से मे परन्तु परन्तु साधारण प्रतिमा शि०--साधारण प्रतिज्ञा तो यदि पिसी त्रिभुज की कह डाले। फिमी भुज के सिरों में दो वि०-लेक योई सूची के सीधी रेशा खोंची जा और अनुसार कहते हैं। त्रिभुज के भीतर एक विन्दु पर मिले तो यह दोनों सीधी रोगायें शि०-यह सो तुमने माप कर शात फिया था फि-भुज से छोटी होंगी, परन्तु उनसे मिलफर निभुज के शेप दो भुजों संद+बद छोटा हमस+भय यना हुमा कोण यहा होगा, त्रिभुज के इनहीं दो भुजामों से परन्तु अय हम चाहते है कि यने हुए कोण से। यही यात रेणा गणितीयसाधन मेमो सिद्ध करें। विद्यार्थी-चुप। शि०--त्रिभुज फो भुजामों का मुकाबला रेखगणित की फिन साध्यों में पाया है। वि०-- कैवान साध्य २० में। धिo-मन्त्रा' साध्य २० की साधारण प्रतिज्ञा बयान करो ! से। -- -- - ~ ( १२४ ) -- विपय और शिक्षा विधि ब्लैक बोर्ड सूची वि०-त्रिभुज के कोई दो भुज मिलकर । तीसरे से बडे होते -- - ।” , । . m rns प 1. शिल तो फिर इस दावे से इस साध्य में काम लो। विद्यार्थी--गुरुजी | यह तो साध्य '२० जेमा त्रिभुज ही नहीं है। ही 'यदि पद यो सद् बढ कर अपने सामने के भुज मे मिल सावित हो सकता " जाय तो 4 Y - शि० -उचित है, अपनी २ शफलों में यद को म तक बदामो। वि०-अपनी २ कापियों बनावट पर (ब्लैक बोर्ड पर नम्बर ३ को यद को दविन्दु की ओर भांति) शफल टीफ कर रहे हैं। यदा दिया जो प्रम मेम विन्दु ( १२५ ) lmy विषय और शिक्षा विधि प्लेक योई सूची . है. H 4 7 शि०-अच्छा भर फैन पर मिलता है। इस प्रकार तीन से विमुज तैयार होंगे। गरे । त्रिभुज बनते हैं। द्वारा यह किस प्रकार साबित प्रथम प्रास होगा। द्वितीय सयभ। नि--(देग नेफ योई त्रितीय दसम सावित मूची) करना है। पहिला खड (१) अय+स,बडा है शिक उस नये.निभुज के पर्द+सदसे मनाने से का लाम है। शि०-पहिले निभुज न.३ त्रिभुज न०३५ न०० में। फा त्रिभुज नम्बर २ से मुफयला मद+सम यडे है सद से दोनों में यद को मिलामो । वि०-(नेक बोर्ड सूची .मस+मद+वद यडे, हैं दर+दम से। परन्तु मद+ घद-मय मय+मस बडा है बद+दस से। मौर सो प्रकार . चि०-चुप। करो। को देयो) विषय और शिक्षा विधि "लल बोर्ड सूची । . । -- शिल-ठीक। इसी प्रकार विभुज न २ व १ में। त्रिभुज नम्बर २ का त्रिभुज न० अम+अब बडामव १ से मुकाबलाफरो। से इस लिए दोनों ओर मसको वि० --ग्लैफ बोर्ड सूची के मिला देने से अब+ (अम+मस) अनुसार। से यडा है (मय + मस) शिo- ठीक है । अव त्रिभुज इस लिए त्रिभुज न० के नम्बर (३) घ (१) का आपस में भुज अव+अस। मुफावला फरो। वि०-लैक बोर्ड सूची के त्रिभुज नम्बर (३) के भुज अनुसार। यद+द स से बहुत बडे, हुए। पोंकि- शि०-बहुत ठीक है । शफल व दस सेम+मस २० द्वारा यह तो सावित हो बडा है। गया, परन्तु अय दूमरी यात पमा और सावित करनी है? 1 । ८ " . 44 ग दूसरा खण्ड वि०-(प्लैक योर्ड सूची के अनुसार। Aअमका भुज अम विन्दु स तक बढा हुआ है । -- ( १२७ ) विषय और शिक्षा विधि ब्लैक बोर्ड सूची . शि०-तो इस साध्य को भी नैयायिक रीति पर सिद्ध यहि च म स बडा है अपने सामने के अन्त चम -- करो। 1- . T साध्य १६ और इसी प्रकार पहि घदस बडा है अपने सामने के अन्त यमस से। इसलिए अन्तरब मस से घहि य द स बहुत बडा 1 वि०--(प्लेफ बोर्ड सूची के अनुसार)। " हुमा। फोंकि य अ स से । बम स बडा हैं और मिस सम्व द स बडा है। -- शिo-शानाथ बहुत ठीक है, परन्तु तुम्हें तोसाबित करना है कि 2 व अस सेव द स वडा है। 6 - वि०-(प्लैफ बोर्ड सूची के अनुसार) ( १२८ ) विषय और शिक्षा निधि गीफ बोर्ड सूची + - P कल्पित अर्थ:-यदि फिमी त्रिभुज के किसी भुजपी सिरों में दो सीधी रेखा गीची जावे जो त्रिभुज के भीतर एक चिन्दु पर मिले। शि०-प्रमेयोपाध साथ्यों की प्रतिशानों के फोन २ पढे २ रेखा त्रिभुज के शेष दो भुजों फल:-यह दोनों सीधी भाग है- से छोटी होगी । परन्तु (२) वि०--(देपो ब्लैक बोर्ड सूची) उनमे बना हुआ कोण वडा होगा त्रिभुज के उन्ही दो भुजों से बने हुए कोण से। साध्य फल 1 7 - (१) त्रिभुज के अन्दर पिसी एफ विन्दु से यदि तीनों कोणों तफ रेया मिलाई जाये तो उनका योग फल निमुश के तीनों भुजों के योग फल से छोटा होगा। अस+अपडे है सदसे और अत्तय बडे है अद+वद से और सप+स व बडे हैं मद+सद से। ।

। १२६ )
.
(२) (अय+म+स य)
बडे हैं (अद+स ठ+य द) से ।
अब+अस+सय बडे है
मद+सद य द से।
सुक्राती प्रश्न
३
पाठकों के लिये सर से उपकारी ज्ञान यह है कि यह प्रश्नोत्तर
के नियमों को भली प्रकार से जानता हो कोंकि शिक्षा के प्रभाव
इन्ही दो विषयों पर निर्भर हैं। हकीम सुकात जिसकी जीवनी
एजूकेशनल गजट के पिछले किसी अफ में प्रकाशित हो चुकी है
इस विद्या का आचार्य माना जाता है। यह अपने श्रोताओं को
सरल और सुवोध प्रश्नों द्वारा क्रमानुमार अभिप्राय को समझाता
जाता था। इसी कारण ऐसे प्रश्नों का नाम ही सुनाती प्रश्न पड
गया । भूगोल सम्यधी नकशा बनाने के पूर्व लडकों को अक्षांश
और देशान्तर रेखाओं का ज्ञान अवश्य हो जाना चाहिए । इसके
कारण समझाने का जो दग है वही आज इस प्रश्नोत्तर द्वारा
बाया जायगा।
शिक्षक-शि या श
विद्यार्थी-वि या व
.
मा०मा०सि०

( १३० )
विषय और शिक्षण
ब्लैक बोर्ड सूची
त
7
1
r
-
।
भूमिका
शीत कटिबन्ध, विपुचत रेखा
भूमध्य रेखा और ध्रुवों की परि-
भापा पतामो।
चपटे धरातल पर किसी
स्थान का पता
शि -(प्लेक, गोई को
देख कर) वतामो त विन्दु
ग्लैक बोर्ड पर कहाँ है?
वि० यह ब्लैक बोर्ड के
ऊपर की ओर है।
शि. ठीक २ नाप फर
यसाम्रो कि 'यह विन्दु फिस
स्थान पर है।
वि०--(स्केल से नापफर)
महाशय ! यह विन्दु ऊपरी
सिरे से ५ इन्च की दूरी पर है।
शि०-(ऊपरी सिरे केसमा
नार) बिन्दुगेरोगे हुई पक
।
+-

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( १३२ ) -- - विषय और शिक्षण प्लैक बोर्ड सूची - I W . भ - . शि०--हाँ भय प्रश्न फा उत्तर ठीक हुमा भला यह तो यताम्रो की त विन्दु का ठीक ठीक पता कैसे लगा। वि-दो भिन्न कतारों से नापने पर। शि-अच्छा प्रर किसी चपटे धरातल के किसी स्थान का पता कैसे लगा सकते हो? नि०-दो विभिन्न किनारों से उस स्थान की दूरी नाप ती जावेगी। शिo स्कूल के अन्दर मेज कुसी इत्यादि का पता पूछ फर।। गोल स्थान के शिक्षा विधि के कालम में जेसा चर्णित है, ब्लैक बोर्ड पर। किसी धरातल का पता वैसे ही बनालो। गोल धरातल के किसी स्थान का पता शि०--किसी, या गोले के धरातल पर एक विन्दु यना , 1 r m " A

HLA
-an
hd
Hanuman
FEMir fun
कोई गणी
m
परामों म परामत पर
-
Fr-ALIRो
माया गाना पटिन ६.
काफि ममें गोपिमारा
दिमाई भी दी।
पा मिल
मे पोल NIREE पर विपरीत
दिगमों में ममोपाटली
दूर हो पा सीपदी में
फिलारामा परमपिता
एनालगामी।
कि-fil rana
में दादिमी और ३ मेन्टीमीटर
मोरगाव मे ऊपर पो
भोर मेटोमीटर है।
गि.---गोल घराल पर
फिली पान का पता लोफर
मारमहोमपा.
वि.-महारापादो पल्पिन
बिगर मान लिये जाये और
.

( १३४ ) विषय और शिक्षण | स्लैक बोर्ड सूची T A . - में - . . फिनारों में दूरी नापी जाय। धरातल पर 'क्सिी। स्थान का पता- शिo--(नमूना पेश करके) विषुवत रेसा, भूमध्य रेखा के । चिन्ह उस पर कहाँ हैं? वि०---( उंगलियों से इगित फरके) विषुवत रेखा ध्रुवों से 'यराबर दूरी पर पूर्व से पश्चिम । की ओर है और भूमध्य रेखा दक्षिण ध्रुनों में होकर खीची गई है। परन्तु विषवत रेखा - एफ है और भूमध्य रेखा फई हैं। इसमें ग्रीनविच से होकर जाने घाली रेखा प्रथम भूमध्य रेखा है। शि० --एक दूसरे के लिए रीति दिशा में। शि०-गैद के निशान की ! भांति इससे क्या काम में ला । सकसे हो? उत्तर S -- *- - बिगर शिक्षक नेकपोई गगी fr:- मी पप्पी पा किमो मन का गाना है - मक्षाग और देशान्तर मेवाएं- "प्रपा मुमध्यरा पनि और नारी परिभागyिe se! भिर माय उस सत्तर या पूरी में दोभमा के योग में। पीपा है। जो विचारला pिe-fign रंगा में उार या दशियपी मोर क्सिमो नाप जावी. मापी जाती मीर जोरेशाप निक-सर परिभा वो उननी पूरी पर सिंगी दुई मान तो गाउ भक्षा fromयो पहले का नाम , पाले हैं। माश मौर दुमो का नाम देशान्तर रंगा यह ग्राय है स्थान्तर है। प्रत्येप को परि ! जोशि प्रीयिय से होकर जाने भाग का दुई? वाली कपित रेशा के पूर्व यि०-(लेक होईपी और पभिम मोर नापी जाती है। देखो) पोरयों सरा . - विषय और शिक्षण प्लैक बोर्ड सूची " अंश शि०-एफ विन्दु पर ज्यो. देशान्तर रेसाये- मेटरी के विचार से फितने कोण द्रा० रेखा से अपने दूसरे मश के अश होते हैं? तक १८० वि०-महाशय । ३६० और अक्षांश मे शि०-(पृथ्वी का गोला to+६० अंश की दूरी है। दिखा फर ) उसी रीति पर प्रशो का अन्तर - ध्रुवों से ३६० मों के कोण बनाते हुए आपस में मिला दिये विषुवत रेखा पर देशान्तर गये हैं । इस प्रकार 'विपुरत रेखामों के बीच में ६४ मोल रेखा के फितने भाग होंगे। यदि फी दूरी होती है। पृथ्वी का घृतं २५००० मील और अक्ष के प्रति दो अश हो तो प्रत्येक प्रश्न की चौडाई को रेखामों में भी ६६ मील ही विपुक्त रेखा पर पा होगी? का अन्तर होता है। वि०-महाशय ! विपुचत रेखा मी ३६० भागों में विभा- जित हो जायगी और इसके की लम्बाई २५,००० १६६६ मील होगी परन्तु ध्रुषों तक पहुंचते २ यह . " समान भाग , ।

.
विषय और शिक्षण
प्लैक बोर्ड सूची
है
Ah
-
बहुत घट जाती है और अन्त में
वन्दु मात्र रह जाती है।
शि०-इसी प्रकार अक्षांश
में विपुवत रेखा के समानान्तर
यदि रेखाए खोवी जाय तो
कितने प्रश होंगे और उनमें
क्या अन्तर होगा
वि०. --महाशय ६०+
३० मश होंगे। यह वृताकार
विषुवत रेखा के समानान्तर
होंगे परन्तु लगभग दूरी वह
होगी अर्थात् ६३मील।
शि०-विपुवत रेखा से
भूगों तफ १०+१=१८० मश
और देशान्तर में भी १८०
प्रश होंगे।
-
शि०-अक्षांश और देशान्तर रेखामों के लाभ पतामो।
वि०-इससे नफरों पर किसी स्थान का पता बता सको
और इन्ही के द्वारा नशा खींच सकते हैं।

( १४० ) विपय पाठ्य विषय व शिक्षा प्रणाली ग्लेक बोर्ड सूर्च PC । पोंकि सूर्य इसी तरफ निकलता है। वि०-देसो ग्लैक बोर्ड पश्चिम का। ध्यान |सुची। . M य - नाम और U - शि० वि०--किसी विद्याथों से कहो कि जिधर सूर्य इयता है उधर मुह करके खडे हो जाम्रो। यतामो उस तरफ फा नाम पच्छिम है। नाम और परिभाषा बोर्ड परिभाषा पर लिखफर याद करायो । अम्यास निम्न लिपित प्रश्नों द्वारा। -राम! तुम चार कदम पष्चिम की ओर चलो। सोहन' अब राम फिस तरफ चल रहा है ? ३-इसको पम्धिमा पच्छिम पों कहते हैं फोकि की सूरज इसी ओर कोमोर डूयता है। २-सोहन । (१४१ ) विषय पाठय विषय व शिक्षा प्रणालो।। ब्लैक बोर्ड सूची , 3-अच्छा राम! अर तुम -- लौट आयो। 1 - । दक्खिन का ध्यास रेप। सोहन अय राम"फिस हो ओर जा रहा है? .(पूर्य की ओर)। ५-इसको पूर्व क्यों कहते है क्योंकि सूरज इसी प्रोर से निकलता है । वि० देसो श्यामपट फा . शि० निकिसी लडके से) कहो कि पूर्व की तरफ मुह करके पडा हो जाय और अपना दायाँ हाथ निकाले बतायो कि जिधर तुम्हारा दायाँ हाथ है उधर ही दक्खिन है देखो। दायें हाथ की ओर दक्खिन + M - - होता है। । मि मौर। ब्लैक बोर्ड पर नाम और रिमापा । परिभाषा लिखफर याद फरामो। निम्न लिखित प्रक्षों द्वारा। पन्यास

---
विषय । पाश्य विषय व शिक्षा प्रणाली लीक चोर्ट ची
चार
.
.
(३) माधर-तुम
पदम दनियन ओर चलो।
(२) माघर-माघर किम
ओर जाता है।
(दृषियन फी मोर)
३- इसका नाम दपिएन ।
चयों है?
जय कि पूर्व की ओर मुंह
। फरफे खडे होत है तो दायें हाथ ।
दपियन होता है।
४- अच्छा माधव तुम थायें !
हाथ की मोर चलो।
५--यतामो उमर अब यह
फिस मोर जाता है।
"( पूर्व को और
- असा भव, तुम क्षय
हाय फी ओर चलो।
७-यताम्रो (वकर) अय
माधव किस मोर जाता है।
(पच्छिम की मोर) 1
+
---

विषय पाख्य विषय व शिक्षा प्रणाली ब्लैक बोर्ड सूची H उत्तर १ राम | यनामो राम । उत्तर पूर्व की काध्यान तुम किती दिशायें जान , ओर मुंह करके खडे चुके (तीन) पूर्व, पच्छिम, हो तो हमारे पायें दविखन । हाथ उत्तर होता है। वि०-देखो ब्लैकबोर्ड सूची। 'शि० वि०-~-फिसी एक नाम परि- लडके मे पूग्य प्री ओर मुह भाषा करके खड़े होने को कहो कि वह मभ्यास अपना रायां हाथ निकाले । बामो उस तरफ को उत्तर होता है। नाम और परिभाषा म्लैक बोर्ड पर लिन फर याद फरामो।। परीक्षाय-प्रश्नों द्वारा चारों दिशामों का शान करा- प्रश्न इसा तरह के हो जैसे कि नमूना ऊपर दिया गया है। तस्वीर और खाका विषय । कक्षा द्वितीय समय + न ३० मिनट ( १४४ ) । (विशेष । निरीक्षण, स्मरण और भाग्ना 1 पूर्वयोग्यता शफलों और दिशाओं के पाठ पर चुके हैं। शाके का ज्ञान अभिप्रायसाधारण । शक्ति का सुधार आवश्यकीय सामान- अ-लडफों के पास-फापी, पंसिल, पैमाना। व शिक्षक के पास-एफ पुस्तक, और उसकी तसवीर और एफ सन्दूक और उसकी तसवीर। - L , सुर्सियाँ विषय और शिक्षा निधि ब्लैक बोर्ड सूचा भस्तयना । असल चीज और 1 . वि०-मातरा चीज और तसवीर की तुलना' तसवीर। (म) सामानता (ब्लैफ बोर्ड प्र--समानता सूची देखा) तसवीर असल शि०-किताय दिखा कर चीज से मिलती पूगे। यह का वस्तु है ? फिर है, इसलिये तस उसकी तसवीर प्लैफ योई पर | वीर देखकर ममल बनामो और पो यह किस चीज को पहिचान वस्तु की तसवीर है? फिताय | लेते हैं। - - १४ सुनियों विषय मौर शिक्षा निधि प्लेफ बोर्ड सूची । की, फों ( उसमे मिलती (य) अन्तर (१) जुलती है) मसल चीज से वि०--अतर (प्लैय यार्ड तमवीर छोटी सूची देयो) होती है। (२) असल चीज को हर तरफ से शि०-गिरीक्षण और प्रश्नो देख सकते हैं। 'त्तर द्वारा अन्तर निफ्लयामो, और यह भी पूछो फितसमीर में परन्तु तसवीर असल चीज की कौन सी को नहीं जो स्थान दोनों लम्गाइयों फरफ दिखाई नहीं देती? और दोनों चौडा बाफी इयों के भीतर है वि०-फितार के धरातल परिभाग उसको किताय का मीर पाके की परिभाषायें । धरातल कहते हैं शि०-पाठक उसी पितार (धरातल की तस- का साका प्रमानुसार धीरकायाफा है)। बोर्ड पर बनाये और प्रश्न फरता जाय। यह पा है? यर या फिताय की लम्याई को प्रक्ट करती है। यह क्या है ? यह रेखा उसकी दूसरी लम्बाई को मा०मा०सि०-१० , - . L... 1 की तुलना , . सुर्गियो। विषय और शिक्षाविधि प्लैक यार्ड सूची . प्रफट करती है यह पा है? यह रेखा उसफी दूसरी चौडाई को प्रकट करती है तो यह तसवीर फिस ढंग की यनी है। (धरातल को) तसवीर । पि०-देनोग्लैफ बोर्ड सूत्री (३) तसबीर से और खाक असल चीज को। पहिचान सकते है। परन्तु साके से उसे नहीं पदि चान सकते। शिक-निरीक्षण फराके तसवीर से चीजों प्रश्नोत्तर द्वारा मिग २ चीजों। का ठीक सील के जैसे फलम, दायात, स्लेट, डोल नहीं जाना फलमदान के साफ यनवामो जाता है, परन्तु परन्तु हर एप पाके के लडके खाका प्रसलचीज शोडाफरफे पनाते जायें और के पद के बराबर पाठक पूरी निगरानी रवपे। । होता है। (१) असल चीज और तम और में या अन्तर है? (२) इस फितार की तस. योर बनाओ। । + ।

सुखियां विषय और शिक्षा विधि ब्लैफ बोर्ड सूची 4 - (३) असल चीज और खाके में यमा अन्तर है ? - (४) खाका किसे कहते हैं ? (५) पिताय के धरातल से पमा अभिप्राय है? (६) फिताव के खाके और तसवीर में फसा अन्तर है? N . नकशे और पैमाने का ध्यान विषय कक्षा दूसरी समय ४५ मिनट पूर्वयोग्यता फिसी चीज का खाका खीचना जानते हैं। -- - विशेप-नकशे और पैमाने की. परि भापा। अभिप्राय- साधारण-दर्शनेन्द्रिय, মায়াকি, भारनाशक्ति का सुधार और हाथ में आस को ठीक साधना Tre लड़कों के पास कापी, पेंसिल, रखड, सामान स्केल, स्लेट। शिक्षकों के पास फीता, स्केल, ब्लैक इत्यादि। 1 ta t (१४८ ) भूमिका मुख्य यस्तु और उसके चित्र में का अंतर होता है ? मुख्य वस्तु और उसके साके में क्या यात मिलती हैं और स्या नहीं? वाफा फिसे कहते हैं। अपनी स्लेट का खाका कापियों पर यनामो। . विपय और शिक्षा निधि ब्लैक बोर्ड सूची 1 -प्लैक पोई को शल - वि० नकशे का ध्यान और परिभाषा। शिo-मैं पूलगा फि का तुम इस दलैक बोर्ड का गाया अपनी कापियों परसीच सफते हो? लडके कहेंगे नही? फिर कारण पूछ फरके यताऊँगा कि आज हम, तुम को ऐसा ढग यायेगे कि जिस से मुख्य वस्तु के छोटे साके को अपनी २ कॉपी पर बना सको। - - - ..वि०-प्लैक घोर्ड का नफशा । लम्गई ४ फीट ! शि-पहिले लड़कों से स्केल द्वारा घ्लैक बोर्ड की को नशा कहते हैं। मुख्य वस्तु के.छोटे खाके .

(१४६ ) --- w+ विषय मोर शिक्षा विधि ग्लैफ घोड सूची W 30 लम्बाई नपाऊंगा। फिर उनसे ३६० 1.1 फहगा कि, यदि प्रत्येक पुट के लिये एफ इंच लिया जाये तो लम्याई की रेषा पितोच की होगी उत्तर लेने के याद ४रंच को रेपा योफ योर्ड पर नीचगा और यशों में उनकी कापियों पर पिचयाऊंगा। पि-लेक योर्ड की चौडाई ३ फो। शि--उपरोक्ता वि०-लफ यार्ड की पूरी शकल- शि०--प्रश्नोत्तरद्वारा निफल- पाऊंगा कि दोनों लभ्याइयाँ और दोनों चौडाइयां यराबर हैं। फिर ऊपर की भांति पूरी शपल बननाऊंगा। वि०--स्थल की परिभाषा (देखा प्लेक योर्ड सूची)। शि०-मे पूलूगा फि ब्लैक जिसो हिसाव से किसी बोर्ड का नया फिस हिसायचीज को लम्बाई और चौडाई से खींचा था? एक फुट के सोचते हैं" उसको स्केल या ww . M , , लिये एक इच। पैमाना,पहते हैं।

(५०) 1 लम्याई चौडाई पैमाना वि०-(3) पंच का नक्शा (२) मेज का नया फोट २ फीट रफीट- १५ फीट ३.फोट ३ फोट-१ - २० मिनट शि०-अन्यान्य पैमानों से कई एफनिश वनवाऊंगा। विपय स्कूल के कमरे का नक्शा समय कक्षा द्वितीय पूर्व योग्यता-"तीसग, सयफ ", लडके, पैमाना और दिशामों को जानते हैं। शिक्षप-लेक वार्ड, भाडन, पडिया, पैमाना, फीता। सामान-लहफों के पास एलर, स्लेट, पेंसिल, पटरी और पैमाना । A सुखियाँ विपय प्लैक बोर्ड सूची , . लम्बाई । " (१) फमरे को लम्याई ,१८ फीट- नोट-पहिले स्केल से नप चाऊंगा फिर फोते से और जता ऊंगा कि म्फलके नापने से बहुत समय लगताहै, और वार झुकना पड़ता है, इस लिये इस काम को फीते से करते हैं। * सुनियों ---- विषय प्लेफ योर्ड सुर्च चौडाई - --एक प्लेफ योई को इस प्रकार जमीन पर रपूगा फि उसफो लम्याइ फमरे की लभ्याई के रस रहे फिर पैमाने के अनु सार लम्गाद की रेल लम्बाई की और नीचूगा और दिशा का भी ज्ञान दूंगा, पैमाना फोट-पफ इच। (२) फमरे की चौडार १२ फोट। शि०-उपरोत। (३) पूरी शक्ल पनाना। पैमाना ६ फो- शि०-रेखामों को मिलाकर ल और चौ० पूलूगा। (४) दिशाएँ । शि०-लेर बोर्ड ने तिपाई पर रख कर समझाऊंगा, कि नकशे में ऊपर को उत्तर और नीचे को दक्षिण । पाया जाता है और दाहिने हाथ ! को पूरव और थायें हाय पश्चिम होता है। शि०-निम्नलिपित प्रश्नों द्वारा। (१) कमरे की क्तिनी लम्बाई (१) २ इष लम्बी नापी गई थी ? उत्तर १८ फोट। रेसा ययों थी । १२ अभ्यास (१५२ ) सुर्खियाँ विपय ब्लैक वार्ड सूची, (२) हमने क्सि हिसार से | फीट क्यों नही थी ब्लेफ बोर्ड पर सोचो उ०-६, उत्तर-चूफि पैमाने फो के लिए १ इच । में १ इच=६ फीट (३) चौडाइ हमने कितनी ! के लिये लिया नापी है उत्तर १२ फीट ।' गया है। (४) और ब्लैक बोर्ड में चौडाई की रेखा कितनी लम्बी है। उ०२ इच। - लाई कार्नवालिस, , कक्षा समय शिक्षा सुधार ३ दिन तक एफ २ घटा शिक्षा का पाठ से जानकारी कराता - •युद्धयात्मक शक्ति की उन्नति ।। विपय पाठन विधि .५ (१)-प्रस्तावना - पहले, गवर्न जनरल का नाम पूछ फर यतामो फि दूसरा 1 .

विषय- पाठन विधि +r गवर्नर जनरल कान पालिस (२)-भारम्भ से गर्न हुआ। जनरल होने तक का हाल । . जन्म तिथि-३१-दिसम्बर तिथि यता कर ध्यान सन् १७३८१०। दिलामो कि धर्म के अन्तिम घराना-पिता अमीरों दिवस उत्पन्न हुए थे। - मैंथा। , ३ - शिक्षा-माईन की पाठ -शाला में। 7 वारिन हेस्टिगस की जात पांत से तुलना करामो कि माईन टेम्स नदी के किनारे PAN पर है। यतामो कि यहुधा यहाँ अमीरों के लडके शिक्षा पाते हैं। १६ वर्ष की आयु में सेना ," यतामो कि आपकी रुचि में भूतों हुए और कुछ फाल युद्ध विद्या में स्वभाविक थी तक भिन्न भिन्न शहरों में घूम कर और हर लडाई में आपने बहुत सैनिक परीक्षामों में उत्तीण | म पैदा किये। हुए मौर कई लडाइयों में सम्मि 1 है लित हुए।

( १५४) . विषय पाठन विधि . - अमीरो की मडली निफलवाम्रो फि २४ क्रो अवस्था में अपने पिता में सम्मिलित होना | स्थानापन्न हुए। २३ जून १७६२ ई० को अपने पिता के मर जाने पर हाऊस आफ लार्डस में सम्मि- 7 + लत हुए। . -- विवाह-१४ जुलाई सन् दयाह का सन् यतला १७६८ ई० को मिस जोन्स से | उस समय की अवस्था निक जो कि एक फर्नल की,दुहिता चामो और हिन्दुस्तान के थी विवाह किया और फेवल | विवाह की दुरितियों ११ वर्ष तक ध्याहे रहे। तुलना ध्यान पूर्वक करा दोनों तिथियाँ घता गवर्नर जनरल नियत हाना याना की अवधि निफलवा ६ मई सन् १७६६ ० कोइगलैड और आज कल की अवधि मे चल कर 2 सितम्बर को उसकी तुलना फरामो। कलकत्ता पहुंचे। गवर्नर जन- रल और, कमांडर इचीफ दोनों पदों पर नियत हुए और यह भी स्वत्व प्राप्त हुआ फि) पावश्यक तानुसार अपनी फौमिल फीराय मान वा न माने! . 17 . 14 - . प

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विषय
पाउन विधि
फिलगामो फि यारिन
हेस्टिगस को केवल दीवानी
स्वत्व मिले थे और उसको
पौंसिल से उसके प्रतिकुल
उद्देश्य का वर्णन करके सम
झामी कि इस कारण उसे बडा
फष्ट रहा जिससे वह कोई लाभ
पारी कार्य यथा योग्य न कर
सका। इस कारण लार्ड कार्न
पालिस यहांमाने पर राजीतान
थे परन्तु जय अपनी रचि के मा.
सार दीवानी और फौजी तमाम
अधिकार ले लिए और यह भी
फि मानश्यकतानुसार अपनी
ही राय काम में लायें उस समय
इगलिस्तान से भारत में आने
पर राजी हुए और यहाँ आये।
ग
र घटनायें
(अ) दीवानी की नौकरी निकलवानो कि लार्ड
का सुधार-पम्पनी के नौकरों | क्लाइव और धारिन हेस्टिगस ने ।
का वेतन यहुन थोडा था । इस | भी इसमें उद्योग किया परन्तु

विषय-- पाठन विधि . । लिए उसके नौकर घूस (नज- वियास योग्य मफलता न हुई। राना) और व्यापार से अपनी वारिन इन्टिगस' की सफलता प्रामदनी को पूरा करते थे। इससे न होने का कारण कौंसिल की सरकारी कार्य में हानि होती प्रतिकूलता यो परन्तु लाई यो। लार्ड कार्न यालिस ने फले-फानवालिस ने इस लाभ को' वटर, जज और मजिस्ट्रेटों का दृढता से, प्राप्त किया कोंकि उचित वेतन-- कर दिया -और । फौमिल के उसकी राय का उनको अनुचित रीति से आय मानना पानश्यक था। यढाने का निषेध कर दिया। (a) गतूर को अपने राज एप्णा नदी के किनारे में मिलाया निजाम ने गतूर अग- दक्खिन में शहर गतूर ढुंद रेजों को इस प्रतिज्ञा पर दिया चानो। कि टीपू के प्रतिफुल उमकी सहायता की जाय। (स) यन्दोवस्त इस्तमरारी! यतामो फि पहिले जिमी दार किसानों से जितनी रकम चाहते थे लेने से इन कठिना श्यों के दूर करने के लिए फौंसिल के सभासदों की सलाह मे १८, जून १७८६ ई. को यह प्रयध किया गया। पूछो कि यन्दोवस्त इस्तमरारी फिन २ - - 1. 0 .

विषय पाठन विधि T 1- - L - . + लाभ प्रान्तों में है। (१) कम्पनी की प्राय की भूत और वर्तमान प्रणाली दृढता हो गइ और समय पर | की तुलना फराफर प्रश्नोत्तर वसूल होने में कोई कठिनता | द्वारा निकलवानो और बतायो न रही। कि मालगुजारी नियत हो जाने (२) पिसानों का पैत से बजर पृथवी प्रावाद ओर निर्वल होने से बच गया और कृषि योग्य हो गई । देश आगाद और धनाढय होता गया। "३) मैसूर की दूसरी लडाई सन् १७६० से १७९२ ई० तफ. कारण " मैसूर के बादशाह टीपू ने नकशे में बतायो कि टीपू ने ट्रायनकोर के राजा पर घढाई मलावार पुर्ग और मैसूर के की जो सगरेजों का मित्र था आस पास के प्रतों को जीता उसने अंगरेजों में सहायता था और द्रावार जो उसके मांगी। मगरेजों ने निजाम और राज्य के पास था रेने की इच्छा मरहटों से पूछा कि उनको भी की चूकि टीपू अगरेजों से टोपूको नित नई जीत मे डर था घृणा करता था और उनको इस लिए यह प्रसन्नता से समि । हिन्दुस्तान से निकाल देना लित हो गये। धाहता था इस लिए अग्रेजों ने - 7 . " Y . -- + .

विषय पाटन विधि J गये। . 1 राजा को मदद दी । निफल पामो फि वे लोग टीपू की जीत से डर गये थे। इसलिये अपनी रक्षा के लिए अंग्रेजों से मिल विवरण लाड कान घालिस घतामों कि पहिले गवर्नमेंट १२ दिसम्बर सन् १७८० ईसी मदरास ने ,चढाई को और को मदरास पहुंचे और वहाँ से विश्वास योग्य सफलतान होती सेना इकट्ठी फरके मैसूर गये देख कर लार्ड कार्नवालिस को और ५ मार्च को यगतौर घेर | खय आना पडा । स्थान नफशे लिया । यह शहर २० मार्च को में, दिशाफर, समझाओ कि धाग फरके ले लिया। टीपू निजाम और मरहटे दोनों की श्रीरगापट्टन भाग गया परन्तु सेनामों ने यहुन वेदिली से निजाम की फौज फी घाट में | साथ दिया और सम्पूर्ण कार्य अग्रेजी फौज मागे न बढ सफी ] अग्रेजो हो को अकेले फरना और २० मई को श्रीरगापट्टम पडा। पहुंची परन्तु रसद और लडाई, के सामान की कमी से बगलोर लाटी और लडाद का सामान ठीक, टाक फर के ५ फर्वरी २७६२ इस्वी को अग्रेजी सेना फिर श्री रगा पट पर चडी फिर टी के तम्बू पर धाना मारा - है " 7 .

५ विषय पाठन विधि rane नियम। . राज्य 4 रेजों को दिया। टीपू हार "फर फिले में भाग प्रतिक्षा गतामो भोर नक्शा गया। दिखाकर समझामो कि अंग्रेजो, ४-पतिशा पन, उसके के हिस्से में सलीम मडूरा और मलापार माये। (२) अपना प्राधा अग्रेजों को दिया जो तीनों में बरावर बांटा गया। यनामो फि (२) लडाई का खर्च अग- लडाइयों में अब भी यह होता है कि निजयो पत से लड़ाई का वर्च मिलता है। (३) अपने दो लड़कों को यतामो फि लाई फान- साहय गवर्नर जनरल के सुपुर्द चालिस ने उनके साथ मित्र भार रस्सा स्थान को नकशे में . (४) राज्य हिन्दू राजाको दिखाम्रो और लडाई के कारण यएन फरके समझाओ कि यह रियासत पहले उसने लेकर राजा को गद्दी से उतार दिया था अव अगरजों की कृपा से फिर राज्य हिन्दू राजा को मिल गया। १-फलफत्ते में सदर निजा पायो' इस पचहरी का मत कचहरी स्थापित की। यही काम था जो अब हाइकोर्ट किया। लौटाया गया। अन्य सुधार 4 'विषय पाठन चिधि F. + 11 w h , 7 - (२) फलेपटर और 'जज के करती है फलेक्टर और जेज के कामों को अलग किया। फामों की व्याप्या फरो। (६) पहिले हो पहले फौज दारी के अधिकार अगरेजों के दिये। ६-हिन्दूस्तान से गमन। वताओ कि 'सरजानथोर १७ अगस्त सन् १७६३ ई० कौनसिल सरजनिशोर को चार्ज दिया एफ सभासद थे। परन्तु हिन्दुस्तान से २० अस्टुवर को गये। मत्यु १५ अक्टवर सन् १८०५ ई० को गाजीपुर में मरे और वही स्थान नफशे में दिखामो उनकी समाधि पनी है और बतायो कि आप३० जोलाई सन् १८०५ इ० को गवर्नर जन- रल के पद पर पुन पाये परन्तु रास्तों के दुसो से स्वास्थ को -८, चाल चलन -ईमानदार ऐसा धक्का लगा फि हिन्दुस्तान देश के सच्चे उपफारी, शूरवीर, आफर केरल २१ मास जीवित नियमों के दृढ प्रतिपालक थे। बतामो कि इन गुणों के कारण यह सदा बडी लडाइयों - T । ।

विषय पाठन विधि m F - १ 'पर भेजे जाते थे और अपनी चि के प्रतिकुल होने पर भी देशमेशा के लिए प्रस्तुत रहते थे। यहाँ तक की अतितनचार स्वास्थ्य बिगडने पर भी हिन्दुस्तान चले माये और यहाँ आपकी जान निकल गई। नियमों के कितने बडे प्रति पालक थे कि इग्लिस्तान को महाराना के विश मनुष्यों ने उनको योग्यता से बड़ा पद देकर अनुचित लाभ फभी उठाने नहीं दिया और लडाई में तो आप बेधडफ साम्मलित होते थे। - ८ . २०मिनट नाम मजमून घोडा नाम कक्षा समय पूर्व योग्यता 1 यालकों ने घोडा देता है। (अ) घोडे के सम्बन्ध में जा फारो। (ब) ज्ञानेन्द्रियों पा सुधार। मा० मा० सि०~११ आवश्यकीय सामान धाडा, उसकी तसवीर जीन, लगाम, दहाना, दांत । तमहोद,घोडे को कक्षा के सामने खडा फरफे पूछा कि यह कौन जानवर है फिर कहा कि माज हम घोडे का तुमको घु हाल वालेंगे। इसके पीछे निम्नलिन प्रश्न पूछो। (1) घोडे पर सवार को करते हैं ? (पषोंकि यह जरदो मजिल का पूर्ण कर नियत स्थान पर पहुंचा देता है)। (२) घोडे से और को या फाम लेन हैं (ये बग्घी में जीते 'जाते हैं यारवरदारी के काम में लाते हैं)। (३) घोडा क्या खाता है,(घास और दाना) 3 - शीप लेख श्यामपटका मजमून “पाठन विधि . सूरत और चौपाया है। मनुष्य से मुकाविला कराके । बनावट निकलवामी और चापार्य की पार- "भाषा यायो। किसी लड़के को पदा के खास हिम्से (१) सर लभ्यो- तरा गावदुम सामने खडा मरो और इसका सर थाकी लडकों का दिखाम्रो फिर इनको घोडे के सर की ओर यान दिलायो माये के ऊपरी भाग को दिखाओ और फिर नीचे की ओर मामो इस 'मानि गrम होना निकलवामो। . -- + शीप लेप श्यामपटका मजमून पाठन विधि - पर at 7 + (२) मुह मुला मनुष्य के दांतों से मुकाबिला यम इसमें दो फरामो और घोडे के दातों, जबड़ों फिल्म के दांत । को पोल कर दिसाम्रो दांत और । डाढों को शक श्यामपट पर बनाकर ...अन्तर समझामो। किसी लडके के मुंह में छोटी सी लफडी देकर उससे मुह बन्द करने को कहो यह न कर सकेगा फिर घोडे के मुह दहाना/ लगायो यह मुह बन्द कर देगा। इस तरह निश्लवायो कि घोडे के मुह में दाने और डाढों के बीच दहाना के लिये खाली जगह होतो है। लगाम के इशारे से घोडे का चलना दिखाकर मुह का मुलायम होना निकलेगी। (३) गदन लगे, लडकों से पूछो कि तुम खाना और किंस रह खाने हो ? (हाथों से) नाजुक फमा घोड़े के हाथ है ' जी नही, तो पर बडे याल यह किस तरह जमीन पर से पास होते हैं जिनको युगता है ? इस तरह गर्दन का सम्या प्रयाल कहते होना निश्लवानो, गदन पर के बाल दिखामोरयामो फि इनको प्रयाल पहत हैं इनकी जबर जहन मशीन T- होती है। इस -- -- । शीप लेख A श्यामपट का मजमून 'पाठन विधि -- 17 - पिजीर। 'मुर्दा (१) साल का लड़कों से दयाफत करो मगर घगडा - तैयार न यतामके। सो खुद यतामो और पितामो। (२) वालों का चौर बनाते है मादत और (१) नरवियत मुग्तलिफ इस्तेमालों के तालुक बिराक से आदत निकलवामी और खुराक (२) मालिक लडके गुद जानी है। मुहन्यत रपता है। (३) मसली यादत खुराफा घास था दाना है। सरफ की नई और पास बातों को दिपामो और या फल निकल पामो फि थोडे को बनाफर खुदा ने इनसान पर बडा अहसान किया है। . L... -- मिडी का पौधा- 11 नामवस्तु . • कक्षा .

२० मिनट - भिप्राय समय पूर्वये ग्यता सामान्य तरकारियों से विद्यार्थी गण परिचित है। विशेष-मिन्डो के सम्बन्ध में लड़कों को जो योग्यता है उसका दृढ होना नथा. इस विषय का आवश्यकता 'नुपार योध कराना। साधारण-द्रियों का सुधार, निरीक्षण, और तुलना शक्ति को उन्नति, धारणशक्ति का सुधार, प्रकृति को ध्यान पूर्वक देसने कि टेर उत्पाप करना इस ग्राहक शक्ति का सुधार सामान-घु भिन्डी के पौधे, मटरमौर सेम की पेले, भालू का पौधा, कपास का पौधा मवा भुटा ककडी चाकु । प्रस्तावना-भिन्डी का पौधा दिखाकर नाम पूछो । ३ विषय विभाग विषय और ब्लैक शिक्षाप्रणाली बोर्ड सूची M 7 मामान्य भाकार मिन्डी का पौधा . - निरोक्षण द्वारा निकल कपान के पौधे यामो, यह धयान करो कि दहात से मिलता जुलता है। में किसान लोग बहुधा भिडी को फपास के साथ उसी स्खेत में यो देते हैं। १६ जड मूसला कपास के पौधे की जड से मिलती है और मका के पौधे भाग . होती है।

(१६८ ) -- विषय विभाग विषय और लैक शिक्षाप्रणालो । बोई सूची - . ३ . । २-पेडी, खडी, को जड से नहीं मिलती कोफि सीधी, मजबूत उस वह झफरा होती है। के ऊपर काँटे होते हैं। के पादा से तुलना फरामो, फोकि यह वेलदार होता है, और बांस और लफडी- का सहारा चाहता है। लडको से पेडी के ऊपर हाथ फेरने को कहो या पापही कहेंगे कि यह फांटेदार है। आलू के पौधे से तुलना फराम्रो फि जिसकी एफ २ शाख में कई पत्ते लगते हैं। फूल के पीले रंग की पत्तियाँ प्याले की तरह का दिखाओ जो नीचे, की ओर 'उसके बीच में एक गहरी लाल होती हैं। शिक्षण खडा डउल होता पोटी फफडी और पत्ते के T 1 शकस्त 1 7 Ch A विषय विभाग विषय और ब्लैक पोर्ड सूची शिक्षा प्रणाली + T t तरह यह भी मप्तानी से नही गिर पते (मिन्डी की शफल योर्ड परखींच। भिन्डी लम्योचरी गोल सी कशा हरी पको कुछ पीली सी मिन्दी के अन्दर योज होते है योजों फी पक्तियां पुष्ट और मानुसार हाती हैं। भिन्डी का तर | यदिसमय हो तोभिन्डी की फारी बनाई जाती है। तरकारी बनाने का दंग बताया - व्योहार () पफ पतीली घंघों गर्म फरके उसमें पिसा हुमा धनिया, हल्दी और लालमिर्च उसमें डाल दो जय घी में मसाला भुन जाय तो उसमे भिन्डीके दो या तीन टुकडे करके धोकर डाल दो और नमक अन्दाज से डालकर विपय"विपय और स्लैक निमाग बोर्ड सूची शिक्षामरणाली . - डेफची का मुंह ढक दो ५ या ७ मिनट में तरकारी पक जायगी। तर डेफची उतार कर उसमें पटाई और गरम मसाला डाल दो। सावित मिन्डी पकाने के लिए पहिले भिन्डी को चीरकर उसमें मसाला भरते हैं और उसको तागे से बांध देते हैं और फिर ऊपर लिखो हुई रीति से पकाते हैं। पचने, और गेहूँ के, पौधों का मुकाबिला साधारण अभिप्राय-ज्ञानेन्द्रियों और बुद्धधात्मक शक्तियों का सुधार। ट . -- म - 1 । त मुखियाँ धने का पौधा गेहूँ का पौधा it for । -डील डील: यडा और सीधा छोटा और हुमा। मूसला A झफरा सुनियां घोफा पाया गेहका पौधा - मशाग्वा - -शापा -पत्तियाँ। 1 P A 'याली शाखा रहित, ठोस और यिना पत्ती पोल गिरहदार और की। प्रत्येक गांठ में एक पत्तों से मग दुई। पत्ती होती है। छोटी छोटी और बढी २ सयों संख्या में अधिक में कम, मिरा नोक- लम्बोत्तरी, किनारे । दार.मौर स्वाद नीरस है। दानेदार, स्वाद में कुछ नमकीन और पुछपट्टी होती है। उजले और छोटे बैंगनी रंग के और प्यारे को मा छोटे होते हैं। कृति के होते है। लम्बोतरे छोटे फल लम्बे, मा और एक ओर चिरे कार के धरातल हुए होते हैं। एफ चिकना और मिरे यीज से फई पौदे नोकदार होते हैं। होते हैं। इसके फल अन्दर एक से लेकर कोयाली कहते हैं। नीन 'सफ "दाने, जो एक मोर बडे, गोल और दूसरी और नोकीले होते, -फल - . irri + सुनियां चने कापौधा गेई का पौधा . . ८ हैं, एक दाने से एक ही-पादा निकलना है। इसके फल, को धीमी कहते हैं। ई-योमाई चीज यि (२) बोज के १-योजको बोने पेर फर अथवा लिये अधिक साद । के लिये साद हल से नाली । और , मिट्टी को और मिट्टी का बनाकर, कार, । घारीफ करने की फातिक (सित मावश्यकता करने और कमा ने की मावश्य बर, अक्टूबर) होती है । 1 में,गोते हैं। कता होती है। बहुत ही यारीक नही . , , 1 प्राशा. -योज निकालने । (२) सोचने की | २--विना सिधाई को गति दोनों बहुत ही किये कुछ भी की चैन, वैशाख । मावश्यकना पहती. नहीं (मार्च, अप्रैल) है, (क्योंकि जड रहती (फोकि में फसल तैयार मूसला होती है), होती है।) जड मकरा 1 + सुर्वियां 4 चने का पौधा गेहूँ का पौधा - होने पर फाट फर पलिहान में रखते हैं फिर पोट कर अथवा । दाँय कर साफ करते हैं। उपयोग- १-दोनों के दाने का १-दाल और । १-दलिया बनाकर आटा बनाकर तरकारी की भांति मोटापालेत है रोटियाँ और व्यवहार करते हैं । फिर खाते हैं। खाने की और चीजें और मिठा- इयां बनाते हैं। २-दोनों के आटे ..२-फच्चे दाने २-कच्चे दाने नहीं उबटन खाते हैं। खा सकता बनाते हैं। ३-चापायों को ३-पत्तियों को ३-पत्तियों को खिलात हैं। साग' की भांति साग की भांति खाते हैं। व्यवहार में नहीं ला सकते। -भूनकर चबैना ४-भूसे में ४-भूसे में मिट्टी को माति साते मिट्टी मिलाफर नीप मिला कर दीवाल नहीं समता - ।

( १७४ ) सुर्खियां चने का पौधा गेह का पाया ५-उपाल फर खात हैं। ५- इठल मे | टोकरियां, टोपियां, फागज नही यनत! वगैर पर 1 लीपने हैं। इठल से टोक "रियां, टोपियाँ और कागज नाते हैं। ६–भारतवर्ष में लगमग जगह गेहूँ और चने पैदा होते हैं। T नोट-(१)गेहूँ पाय, संयुक्त देश में यहुनायत से पैदा होता है। (२) पाठ पढ़ाते समय गई और चने के ताजा फलदार पौध 'मौजूद होना चाहिये और पाठक को चाहिये किस्ले बार्ड भामन सामने दोनों चीजा की बड़े आकार पर नकाशा . पनावा जाव। 7 तिवस्तुपाठ । - विषय- "क्षा प्रथम १ समय ३० मिनट -पूर्वयोग्यता - अभिप्राय आम को देखा है और उसके उपयोग से भी परि- चित है। विशेष-माम के प्रति लडकों की योग्यता वढानी। माधारण-ज्ञानेन्द्रियों का विशेष और उद्धयात्मक शक्तियों का साधारण सुधार। -माम और पाडू के फल कुछ जामन व लाची आमके पेड की टहनियों और कुछ गुठलीवाले फल मिल सके। आवश्यकीय वस्तु : । सुम्पियाँ विपय और शिक्षा विधि टलैक बोर्ड सूची भूमिका ५-फलों की टोकरी मागे रखदो और उम्समे से ग्राम के फलों का अलग फगमोगा। २-माम और जान की टह- नियों का अन्तरशिल पानी। ३-पूजओ प्राम, जातुन, माडू) इत्यादि इन सब को कहसे ( १७६ ) सुम्वियां 'विषय और शिक्षाविधि इलेक योर्ड सुची 7 wan - पेड का बयान । । । है ? यदि लड़के न जानते हो तो बताओ कि यह फल ४. है और फलों के नाम पूछों जो लटकों ने और मौसिमी में देखे और खाये हों। वि०-देसो दलैक बोर्ड सूची। शि०-पास ही में जहाँ ग्रामपेड यडा और फैला का पड हो यहाँ जमा हुआ। ले जामो • यही टहानयों । और.माना शक्ति द्वारा काम लो। जापुन का पेड दिसामो और निरीक्षण द्वारा निकलवामो फि पड बडा और फैला हुआ होता है। पत्ते लम्ये अधिक होते है प्रामका पत्ता और चाडे कम, ब्लैक योड पर शफल बनायो घों के फल मुकाविला फरायो। भ - ग " , .

( १७७ ) सुस्तियाँ मल विषय और शिक्षा विधि लंक बोर्ड सूची 1 -- फूल के प्रति भी दो एक पत्तै लम्वे, अधिक, मग्न फरो इसके फल को मौर पर नाडे कम होते हैं। कहते हैं। मौर के गुच्छे के गुच्छे होते फूल छोटा, उजला, परन्तु फूल छोटा और रंग गुच्छे के गुच्छे में सुफेद होता है। लगते हैं। यताम्रो कि यसत के दिनों मे आम पर मौर आता है। थि०---ठलैक बोर्ड सूची- फल देखो।। शि०-प्रत्येक माकार के आम दिखामो पूछो शफल फिस से मिलती है। भांति २ के रगयाले फल शकत अडे से दिखानी शकल तपते पर पनाओ : रग कच्चे का हरा टहनी पर माम लगे हुए दिखामो' पके का पीला, और यह बात भली प्रकार सीन्दुरी, लाल क्दि से समझा दो कि माम के गुच्छे छोटे से छोटा बडे के बराबर और के गुच्छे लगते हैं। से यडा प्राम ।

--- पुर्वियाँ विपय और शिता विधि प्लेक घोड सूची . शि०-पहिले लड़कों को (१) देशी (चूस पर देशी माम खाने को दो उसे वहाँ साने का)। चूस कर पायेंगे । अब कलमी (0) कलमी (तारा दो उसे यह चूम कर नहीं था फर गाने का। सफो। बस इसी म्याल से -दो बड़ी किस्में बनामो फिर हर किस्म के आम भांति भीति के १ . होते हैं। - -- जो किस्में हैं उनका दिपाम्रो। 1 । - नाम बतायो जैसे- सम्बइ, मालदा, सफेदा लगडा। विo-(देपो लैफ थोडी पके फल खाते सूची) । इस्तेमाल ह, रसके पापड यनाते हैं उनको शि०-छो और मोटे मोटे अमावट (आम का इस्तैमाल खुद बतायो। पापड कहते है। .

(११)
मुर्णिया
विपय और शिक्षा विधि
ब्लैक बोर्ड सूची-
Team---
.
(२) फच्चे मामों
फा अमचूर, चटनी,
अचार, मुरबा और
गुडम्या यनाते हैं।
। भून कर पना बनाते
। जिसफा लू के
दिनों में खाना यहा
लाम फारी है।
-यह वया वन्तु है?
२-ग्राम का पेड कैसा
होता है?
३-आम के पत्ते केसे होते
हैं और फ्सि चीज से मिलते
दुहराना
परीताई
प्रश्न
४-इसके फूल को यमा
कहते हैं?
५-मौर पिन दिनों में
माता है?
६-मौर का रग और शहरू
घतामो?
७-माम के फल की शक
कैसी होती है?

(१२) ! मुर्खियाँ विषय और शिक्षा विधि स्लफ बोर्ड सूची कितना होता है? E-फल के हिस्से चतामो? १०-शिलफा कैसा होता है? और यतामो फिस फल छिलके से मिलता है और फिस फल के छिलके से नही ११-देशी आम फा गदा कैसा होता है और कलमी आम N U keep का कैसा T १२-गुठली कैसी होती है और उसके अन्दर का होता है १३- पके फल का इस्तै- माल बतायो और फत्वे फल . , -- पदार्थदर्शक पाठ-रवड : 11 रवड वस्तु क्क्षा समय दोयम ४५ मिनट ( १८३ ) पूर्वयोग्यता रयड के साधारण प्रयोग का ज्ञान है। विशेष-यड के लाभ व प्रयोग मोर गुरु अभिप्राय इत्यादि का ज्ञान देना। साधारण-सान इन्द्रयों का सुधार य स्मरणशक्ति की उन्नति व सुधार। सामान --यद, पेन्सल, कागज, मसी, रयर को उडी चाली लेखनी, दियासलाई, ताडपीन, पानी, गधा, गेंद, मसीवाला रवड, फागज की दपती, फपडा भाग। परतावना-पेन्सल है मनर क्सि वस्तु से बात है? रयड से। लाभ व प्रयोग (१) पंसिल के लिखे हुए मतर सोते हैं। (२) रैरानी की उडी मोर को बनाते हैं। रबर की रगड सपंसिल के प्रतर सो जाते हैं। रबड को राल के साथ मिलाने के पीछे लेखनी की डडी और कधी सहज दी सेयन जाती हैं और मुलायम होती है। जल सकता है। -(३) फिसो स्थान में मशाल फो भांति जलाते हैं। (४) ताडपीन में मिलाफर कपडे पर लगाते हैं तापि पानी कपड़े के मदरन जाये। रबह के भीतर पानी नहीं घुसता और ताडपीन के साथ मिलाने से सहज हो में कपड़े पर लग जाता है। ।

( १८४ । लाभ प्रयोग যুব ३५ मिनट (6) चड को गधफ के गधक के साथ मिलाने से साथ अग पर रख पर मिलाते | चालाक चढ जाती है और फिर हैं फिर गंद और मसी उडाने | उसके रवड से मसी का अक्षर चाला रघड बनाते हैं। | खो जाता है। कपूर वस्तु कपूर कक्षा इसरी समय पूर्वयोग्यता कपूर के साधारण प्रयोग का विशेष-कपूर के गुणों को जानना । अभिप्राय- साधारण-ज्ञानेन्द्रियों का सुधार, निरी- क्षण और भारसूचक शक्तियों की वृद्धि। सामान कर्पर, माम, मोमयत्ती, ऊनी कपडे, शराय, शकर, आग भूमिका कर्पूर को दिखापर उसका नाम पूढुंगा, फिर साधारण रीति के रेक्चर से यशों के चित्त को पाट की ओर आकर्षित कर गा। . जानना। 7 . 3 .

. प्रयोग गुण व स्वभाव m . + १-मन्दिरों में जलाते और जलाने से जल सकता है। पूजा करते समय जलाकर सुगंध युक्त होता है। माती लेते हैं। २--रोशनी के लिए यत्तियां मोम में मिलाने से यत्तियां नाते हैं। बनाने के उपयुक्त हो जाता है। ३-ऊनी कपड़ों में रखते ४--दुर्गन्धित स्थानों के वायु को शुद्ध करते हैं। ५-धार के लिए मरहम बनाते हैं। ६-सरदी और जुकाम के समय इसे खाते हैं। इसको सुगध से कीडे नही लगते हैं। भाप बन कर उसमें मिलजाता है। वायु में रखने m + , कपूर और शराब मिलाने से एक प्रकार का मरहम बन जाती है थोडा सा कपर शवर के साथ मिलाफर खाने से सरदी और जुकाम जाता रहता है। साबुन द्वितीय कक्षा समय एक घटा Ring

(८)
प्रयोगध लाभ
गुण और स्मार्च
-
(५) गिलाम बनाते हैं। (५) गर्मी पाफर न हो
जाता है और सदी पाकर जम
जाता है।
(६) धुएं से कच्चे ग्ग (६) गधक आग पर रखकर
उडाये जाते हैं।
लाल कनेर का फूल यदि उसके
ममीप लाने तो फल का रंग
चेत हो जाता है।
" (७) सियाही के अक्षरों के (७) गधंक के साथ पेड
मिटाने के लिये रवड बनाते हैं। मिलाने से लचक अधिक होती
न
पाने का ढगड का वृक्ष ३० या ४० फीट ऊंचा होता है।
उसफी पेड़ी में चारों और एफ २ फुट पर गहरा गढा कर देते हैं
फिर उनमें एफ २ ऐसा चरनन रखते हैं कि जिसमें उस वृक्ष का
दृध इफट्टा हो जाय फिर सुसा कर स्वच्छ फर रेने हैं। यम' ग्वड
बन जाता है।
म्यान-भारत वर्ष में सिलहट (मासाम) और मलावार
किनारों पर इसका वृक्ष होता है।
वस्तुपाठ-खड़िया
खडिया
विषय
कक्षा
for
!
द्वितीय

( १ )
टमिनट
।
1
का
समय
पूर्वयोग्यता परिया दे साधारण उपयोग को
जानते हैं।
'निशेष-परिया के गुणों का यताना।
अभिप्राय-माधारणा जानेन्द्रियों सुधार,
निरीक्षण और साधारणशनियों को विशेष
उन्नति।
सामान-सरिया, पत्थर फा , शीशा गन्दा,
सिना, चांदी के गहने, घडो के पुज, तेल, खग्यिा की फलमें
लिमीफा तेल और लफडी।
भूमिका--एरिया एक प्रकार की मिट्टी है जो सानि से
किलती है। रियासत ग्वालियर और इदौर में इसकी खों है।
1
उपयोग
1
---
(१) प्लेफ यार्ड और तम्ती (१) इसका निशान जल्द
लिपते हैं।
पटता और मिट जाता है।
(२) मकान में सुफेदी परते (२) इसका रग सुफेद
और मुफेद चूट पर पालिश देता है।
रते हैं।
(३) टे शीशे को जोड़ते हैं। (३) परिया मिट्टी गन्दा
वीरोजे में पकाने से लसवार हो
जाती है।

उपयोग गुण . N - (४) पोटीन यना कर सन्दूक (४) खरिया और अलसी इत्यादि पर नाम लिग्वते हैं। का तेल मिलाने मे एक भांति का सुफेद रीगन (मसाला) बन जाता है। (५) कांच के बर्तन, चाँदी (५) यह भुरभुरी और के गहने और घड़ियों के पुर्जे चिफनी होने के कारण तेल और साफ किये जाते हैं। पानी को मोखती है। (६) चूना यनाते हैं। 1 (६) जरिया को कृफने से इसमें चूने का गुण माजाता है। (७) फल में बनाते हैं। (७) इसमें शोपण शक्तिः होने के कारण इसको प्रत्येक रंग से रंग मकते हैं। सजीव और निर्जीव वस्तु . मन्वेषण और प्रयोग (१) जी के कुछ भुने हुए दाने लगे और कुछ बिना भुने -- (२) मीगी मिट्टी में अथवा । रह के गोचर में दोनों प्रकार के । 1.- -- ( १९१) मन्येपण और प्रयोग फल - ने चिपका दो। (३) दूसरे दिन दोनों प्रकार | भुना हुमा दाना ज्यों का दानों को निकाल कर जांच , त्यों है परन्तु यिना भुना एमा दाना भनुमा गया है। (४) उनसे माफार प्रकार भुना हुम्रा दाना न घटता सम्बन्ध में प्री परी। हैन घटता है बिना भुना हुमा । दाना अपनी मरत बदलता रामो। (५) कुछ सडे हुए, धुने । जाता है। र, पिसे हुए या फटे हुए दाने सरा हुमा, जला हुमा, अथवा अन्य किसी भांति से भी भैखुए फ्लिवाने का रख करो। । विगडे हुए दाने से भग्नुए नहीं १ निपल मफ्ते हैं। (१) गमले के लगे हुए (१) पेड में लगी हुर सी पौधे की दो पत्तियों पत्तियां हरी भरी है और छोटी पत्तिया बढ़ रही है परन्तु तोडी (२) दुसरे तीसरे दिन हुई पत्तियां मूखती जाती है डी हुर पत्तियों का मुफापला, और रग उत्तरता जाता है। तामो। (२) हरी पत्तियां गरू है परन्तु तोडी हुई हलकी होती - मन्येपण और प्रयोग प जाती है। नाडी हुई,गत्ती नहीं यढती रेफिन-पंड में लगी हुई पत्ती पदती रहती है। इस लिये मालूम हुमा कि प्रत्येक पोधे का अग प्रत्यंग पढताराता है। 7 7 गरम 'फरने पर लोहा सूरास के भीतर मे नही निक- लता। (१) लोहे की एफ मामूली (२) लोहे का यजन सदा ली , गोली के बराबर पफ हो रहता है। क जस्ते की चादर में छेद (२) गोली को गरम करके (२) अच्छा दाना यद फर कर उस., सराप में डाल कर यानी हो जाता है और अपुरे तो। निफरता है। (३) लेहे, जी के दाने (३) सरार दाना नमी और और पतों के वजन में अलर मिट्टी वा साद पाकर ही अँखुए और समानता दिखाम्रो। निकालता है। हो। * ।

( १९३) अन्वेषण और प्रयोग + T - + : (8) सूखी पत्ती या लफडी (४) पेडसे लगी हुई पत्तियां पानी में भिगोकर तुलवासो | भी यढतो और भारी होती लोहे को मी-पानी में | जाती है। - फर चजन फरामो। (१) पची या लफडी का वजन तो बढ जाता है और उसके रंग और रेशे में पानी भर जाता है। (२) परन्तु लोहे के भार में कोई अन्तर नही माता। (१) भौजी हुई लकडी और (१) भोगी हुई लफडी में की शापामों का बढना। पानी भर तो अवश्य जाता है परन्तु उससे कोइ नई साख नही निकलती। परन्तु पेड के भीतर के रेशे और घेरे सब बढ जाते हैं मोर उससे नई कोपले भी निकल आती हैं। फल और पौधे खाद्य यस्तु को पचाते हैं, परन्तु सुखी लफडी या लोहे में यह युछ नहीं होता। जो पौधे की जांच। (१) एक अच्छे दाने से पौदा निक्लता है। प्रा०मा०सि०-१३ 1 " सीसा वस्तुपाठ सीसा "कक्षा. पूर्वयोग्यता 'मोसे को जानते हैं। शिक्षा-सोसे के गुणों को जानना । अभिप्राय, अभ्याम-मरण शक्ति और बुढ्यात्मक सामान सीसा, लोहा, ताये के पैमे, पेंसिल, चादर चगैरह ।" ~ 'सुखियां (विपय प्लैक यार्ड सूची -- तजरया एफ सीमे का टुकड़ा और १-सीसा मुला- एफ लोहे का टुकडा लडकों को यम होता है इस दो और फहीं कि इनकी चाह लिए “सीसे की से काटे । चादरें बनती हैं। निरीक्षण घात मे मोसे का टुफडा फट गया परन्तु लोहे का टुकडा नही कटा। सीसा लोहे की अपेक्षा मुलायम होता है। प्रयोग पूछ कर अथवालैक्चर द्वारा :-यतामो कि मुलायम होने के - na फल 1 .

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'सुनियों विषय ! ब्लैक बोर्ड सूची प्रयोग - तजरवा इसी कारण पिघरे "सीसे; को मिट्टी में ढाल पर गोलियाँ और करें याति है। लोहे तथा मीसे के टुफों। से फागज पर मलग, निशान फराम्रो। सीसे से फॉला निशान पंड जाता है परन्तु लोहे से नहीं 1 निरीक्षण पडता। स प्रयोग तजरचा सोसे की रगड से कागज पर काले निशान पड जाते हैं।। इस लिए सीसे की पेन्सिल सीसाभारी होता बनती है। है इस लिए इसके सीसे का एक पैसा-और पेपरवेट बनाये जाते लोहे का एक पैसा और ताव है। का एक पैसा जिनका-पिंड घरापर हो तालो। लोहे और तावे की अपेक्षा सीसा भारी होता है। सोले के पेपरवेट बनायें . T 1 निरीक्षण प्रयोग जाते हैं। -- ( ६ ) सुर्पियो विषय लिफ योर्ड सूची -- --- - सोसे की पा - नशे में स्थानों को दिसभागलपुर हजारी- लामो।। बाग, गढवाल,प्रज - मेद, उदयपुर, भरत पुर और अलपर। , हाथीदात - दफा समय १घटा - पूर्व योग्यता बनावटी हाथी दांत की चीजों का प्रयोग। 7 सामान हाथी दांत की बनी हुई चीजे', नकली हाथी दांत। ५ 1 । अभिप्राय हाथी दांत के गुण और उनके मिलने, का ढंग । 'इनेन्द्रियों को सुधार और युद्धि की वृद्धि । भूमिका. हाथी दांत को धनी हुई चीजे दिखाकर नाम पूखंगा और फिर वक्तृता द्वारा उनके चित्त की वृति पाठ मोर लाऊँगा। -

( २०० )
प्रयोग
4
(२) मनुष्य के लिए बना सफेद और चमकदार होता
घटी (झूठ) दांत मनाते हैं। है। कडा होता है जल सकता
(२) उत्तम फालारग बनाते है । ठोस होता है।
(३) कतजन और कागज
काटने का पत्तर बनाते हैं।
(४) चिडिया बनाते हैं।
(५) खडाऊँ की खूटियां ।
यनाते हैं। चाकू की दस्ते, सदूफ
और कलमदान पर जडाऊ का
काम बनाते हैं।
मिलने का ढग
अ-हाथी के पडे बडे दाँतों से जो बाहर निकलें रहते हैं।
य-दरयायो गाय, दरयायी घोडे और एक प्रकार की हल
मछली के दांत से बाहर निकले रहते हैं । अरूस देश के एंडोज
नामक गिरिटग के ताड के पेडों से, जिसमें मनुष्य के सिर के
घरावर डोडे निकले रहते हैं और प्रत्येक डोडे में दो इत्तक लपी
फई गिरवाँ होती हैं जिन के ऊपर भूरा २ शिलफा और मदर से
सफेद गदा मिलता है।
नोट-दरयायीहाथी दांत में मनुष्य के मूडे दांत और पेड़वारे
से फलमदान और सदूफ वगैरह के काम उत्तम बनाये
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रे
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नींबू
-ससार में नीच फो कान नहीं जागता पर उसकी उपकारिता
से यहुन ही पाप रोग मनगत है। एक बड़ा ही उपफारी
द्रव्य है । मोफ दिनों तक यह मच्छा या यह मयता है ।
(१) यदि जी मे कोर पम्न शुभ्र परना होगो उमे में
उसिन-फर और एफ पहा गीयू उसमें देखें पह यस्त्र हिम में
समान हो जायगा।
(२) यदि तीन में से अधिक रम फो अपेक्षा दो काटने के
पूर्व उसे गर्म कर ले।
(३) स्नान के पूर्व माधे नी का साउन में मिला कर देद मली
जाय तो त्वचा को मौन्दर्य वृद्धि होती है और रूखापन दूर हो
जाता है।
(२) गले के भीतर यदि कोई पार लग जाय तो मधु भार नीयू
फा रस मिलाएर प्रयोग करे इससे पहुत उपकार होता है।
, (५) यदि किसी कपड़े पर मसी यानी (फाला रग) गिर जाय
शो नीयू फा धोडा सा रस उस पर निचोड लवण का चूण भुरभुरा
देवेत यह रंग मिट जायगा।
(६) मेर भर पानी में पर एक टुफडे नीबू के गारफर उसमें
माध सेर पोटाश झाल फर भली भांति मिला देखें । यह रस
बोतल में भर कर रख छोडे प्रयोजन पड़ने पर सूनी घ रेशमी घर
के किसी अश में यदि कोई धय्या पट जाय ना उस स्थाा पर यह
रस लगा देये यस धय्या छूट जाता है।
", (७) नीबू के रस में सय से यहॉ एके गुण यह है कि इसके
द्वारा कालरा (हजे) के चीज नष्ट हो जाते हैं। फालरा के योज इसके
t
है

( २०२ ) द्वारा १७ मिनटों के बीच नष्ट हो जाते हैं। गानों में अथवा उन स्थानों में जहां कि जल के गरम और फिल्टर करने का उपाय नहीं रहता वहाँ नीव का रस निचोड फर' जल विशुद्ध कर लिया जा सकता है । जहाँ मलेरिया और हेजे का प्रकोप होवे यहां इसका प्रयोग करके सुफल प्राप्त किया जा सकता है। (5) नीबू की दो फॉफ कर रो एक 'पर शकर और दूसरे में नमक मिर्च डालकर जरा आग पर सेकला जर पकने लग जाये तो उतार ले। यारी वारी से दानों टुफटों के चूसने से पित्त का प्रकोपजाता रहता हैं और उपकाई मिट जाती है। (E) ऋतु परिवर्तन पर इसमें नीट का अर्फ मिलाकर पीना गुण कारी होता है। 1. > शेर का बिल्ली से मुकाबला समानता ।। if 11' 'यिल्ली । । शेर, " की बाते , ऊपर के जबडे में १६ दाँत | दिल्ली की भांति होते हैं। सामने के दांत, काटने के लिये । इधर उधर कीले चीरने और फाड़ने के लिये और तीन तीन चार चार !' टाढे दोनों ओर । इसी भांति नीचे के जबडे में भी १६ दांत या - । " " २ जिम्या खुरदरी और पोटे- दार खुरदरी और फाँटेदार "यिल्ली की भांति हाया पर दूध मिलाने से मालम 1 ) - • ( ००३ ) समानता की बातें विल्ली शेर हो सकता है।, चाट चाट कर अपने शरीर को साफ-और उजला रखती है और हड्डी से मांस गुरच लेती है। अगले पांव की उंगलियों में रिली की भांति, पांच २ तेज नोकदार और परन्तु पैड पर चढ पिछलों में चार २। नन नही सकता। मुलायम चमडे में बन्द रहते हैं रजिससे कि मुड नाय मौर रोज बने रहें। जर चाहती है उन्हें बाहर निकाल लेती है। नीचे की मोर गद्दियां होती है जिनके कारण चलने में आहट नहीं होती और यह पेड पर विषमता | चढ सकती है। की बात टील डोल में शेर से गहुत नाफ से दुम तक १-डील छोटी होती है। १० से ११ फोट डोल विविध प्रकार। तक लगा और ३ पुतली लम्याफार छिद्रधत फीर उँचा होता ३-माखे जो प्रकाश में सिकुड कर झिरी । है। मटमैला पोले सी हो जाती हैं और रात के रंग का और उस समय फैल फर चौडी हो जाती पर 8- म है

२०४
विसमता,
पिली
और
है और माने प्रापेट को भलो-धारियां होनी है
प्रफार देव सफती है।
शेर की पुतान
मनुष्य की भी
.
} गोल होती
। अपने माटो
मोरेया सध्या
समय जय
मादि पानी पर
मारो हैं या सा
पफड लेता
॥ इति ।

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Shiksha- Vidhi

Author
Rudra Narayan
Title
Shiksha- Vidhi
File name
Shiksha- Vidhi
Text
OCR done
Citation
1960
Published
2011/02
Publisher
Ramnarayan Lal Allahabad
Language
Sanskrit
Pages
192
Library
Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
Classification
Literature
DLI number
548685
Barcode
4990010028729.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
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