Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
Sutnipatho
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सुत्तनिपातो
राहुलसच्चिानेन
आनन्दकोसल्लानेन
जगदीसकस्सपेन च
सम्पादितो
उत्तमभिक्खुना पकासितो
२४०१ युद्धवच्छरे (1937A C)
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प्राइनिवेदनम पालिवाडमयस्य नागरायरे मुद्रण अत्यपेशितमिति नापिरितचर भारता येतिहासविविदिषणाम् । सम्यापारिभाषयोरतिसामीप्यादपि यत् परस्महर्मभ्य जिनामुभ्य सस्कृतज्ञेभ्य पारिन थराश्यवगाहन दुप्परमिव प्रतिभाति तत रिपि भटादेव । एतदर्थमयमस्मावमभिनव प्रयास । अत्र नूतना अपि पाठभटा निधया इत्यासीटस्माक मनीपा पर कालात्ययभीत्याज्य प्रथमभागे धम्मपदा यत्र न नन् वृतमभूत् । अघोटिप्पणीपु सग्निशिता पाठभदा । प्राय Pali Test Society मुद्रितेभ्यो प्रयेभ्य उद्धता । अथसाहाय्य पिना जस्मत्ममीहित हृदि निगूहितमेव स्यात । तत्र भदन्तेन उत्तमभ्यविरेण साहाय्य प्राय महदुपट्टतमिति निवेदयति- पानिव शुक्ल्यातश्या २४८० बुद्धाब्द राहुल सात्यायन आनद कौसल्यायन जगदीग काश्यपश्च
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सुत्त-सूची १-उरगवग्गो or १-उरग-सुत्त २-धनिय-सुत्त ३-खग्गविसाण-सुत ४-कसिभारद्वाज-सुत्त ५-चुद-सुत्त ६-पराभव-सुत्त ७-यसलन्सुत्त ८-मेत्त-सुत्त ९-हेमवत-सुत्त १०-आळयक-सुत्तं ११-विजय-सुत्ते १२-मुनि-सुतं २-घूळवग्गो १३-रतन-सुत्त १४-आमगध-सुत्त १५-हिरि-सुत्तं १६-महामंगल-सुप्त १७-सूचिलोम-सुर्त १८-पम्मचरिय-सुतं १९ श्राह्मणपम्मिर-गुत्त २०-नापा-सुत २१-किसील-गुतं २२-उछान-गुत्तं पिट्टो पिहो २३-राहुल-सुर्त २४-वगीस-सुत्त १ २५--सम्मापरिन्दाजनिय २ ४ सुत्तं २६-पम्मिक-सुत्त ९ ३-महावग्गो १० १२ १५ १५ १८ १९ २० २७-पच्चज्जा-सुत्त २८-पपान-सुत्त २९-सुभासित-सुत्त ३०-सुन्दरिषभायाव-मुक्त र ३१-माघ-सुतं ३२-समिय-सुत्त ३३-सेल-सुत्त ३४-सल्ल-मुत्त ३५----वासेटर नमुत्त ३६-कोकालय-मुत्त २३ 280RRd. 213332 th २४ २६ ३७ नाम मुक्त ३८-ट्रयतानुरम्भ ४- अश्वग्गो ३९मानन २७ २८ ४०-पास ८r ३४ ८.
११४ ९४ सुत्तनिपाती पिट्टको पिट्ठको ४४--जरा-सुत्त ८८ ५८-पुण्णकमाणवपुच्छा १११ ४५-तिस्समेतेम्य-सुत ८९ ५६–मेत्तगूमाणवपुच्छा ११२ ४६-पसूरन्त ६०-योतक्माणवपुच्छा ४७-मादिय-सुत्त ९१ ६१-उपसीवमाणवपुच्छा ४८-पुराभेद-सुत ९३ ६२-न दमाणवपुच्छा ११५ ४९ लहविवाद-गुत्त ६३-हेमकमाणवपुच्छा ५०-चूळवियूह-सुत्त ६४-तोदेय्पमाणवपुच्छा ११७ ५१-महायियूह-सुत्त ९७ ६५-प्पमाणवपुच्छा ५२-तुवटटप सुत्त ६६----जतुरणिमाणवपुच्छा ११८ ५३-अत्तदण्ड-सुत्त ६७-भद्रावुधमाणवपुच्छा ११६ ५४-सारिपुत्त-सुत्त १०२ ६८-उदयमाणवपुच्छा ५-पारायणवग्गो १०५ ६६-पोसालमाणवपुच्छा १२० ५५-वत्युगाया ७०-मोघराजमाणवपुच्छा १२० ५६- अजितमाणवपुच्छा ११० ७१----पिगियमाणवपुच्छा ५७--तिस्समेत्तैय्यमाणवपुच्छा ११० ७२--पारायणसुत १२२ १२१ नमो नम्म भगवतो अरहनो सम्मासम्बद्धस्स सुत्तनिपातो उरगवग्गो (१-उरग-सुत्त १११) यो' उप्पतित विनति कोध विसन' सप्पविसऽव ओसधेहि । मो भिवतु जहाति ओरपार उरगो जिण्णमिव तच पुराण ॥१॥ यो गगमुदच्छिदा असम भिसपुप्फव्व सगेरह विगम् । सो भिक्षु जहानि ओरपार उरगो जिण्णमिव तच पुराण ॥२।। यो तण्हमुच्छिना असेस सरित मीधमर विसोस यिवा। मो भिक्षु जहाति ओरपार उरगो जिण्णमिव तच पुराण ॥३॥ यो मानमुदब्बधी अमेस नळमेतुऽव सुदुव्बल महोघो। सो भिवतु जहानि ओरपार उरगो जिण्णमिव तच पुराण ।।४।। यो नाशगमा भनेसु सार विचिन पुप्पर्मिय उदुबरेम। सो भिरनु जहाति ओरपार उरगो जिण्णमिव तचं पुराण ॥५॥ यस्मान्तरतो न सन्ति कोपा इति भवाभवत च वीनिवत्तो। सो भिवन जहाति ओरपार उरगो जिण्णमिय तच पुराण ॥६॥ यम्स वितवमा विधू पिता अज्यत्त सुविवाप्पिता अससा। मा निमम्पु जहानि ओरपार उग्गो जिपणमिव तच पुराण ।।। पो नाच्च सारी । पच्चसारी राव अच्च 'गमा इम पपञ्च । सो भिवत् जहाति ओरपार उरगा जिणमिय तप पुराण ॥८॥ या नाच्चसारी न पचमारी राम्वं विनयमिदति शत्या गेर। मा भिर जहाति ओरपार उरगो बिष्णमिव तच पुराण ॥९॥ . विसट IC.विसेमयित्वा .Cयो ये चिसारि *M विदुसिता . শনিবাণা यो नाचनगारी नपामारी गन्न शिजमितीrl मा भिमानहाति आरपार उरगा विनमा पुगण ॥16॥ या मागे 7 पन्नगारी गर विरामि ! मा भिपजगी आरपार उरगो विमपिय त पुगणे या पाचनगारो पगमारा 4 दिनयमितपदामा गा भिराज पारपार उरणो नियमिग नव पुगणे ॥१॥ यो नापमाग पनमारी गई गिर्यानि पासमा मा भिरा जहाति आरपार उग्गा निमिव त पुग यम्मागया 7 गतिषि मृग अकुमा गरा। सा भिक्यु जगति ओगपार उरगा जिप्पमित्र तर पुगण III गरम यजा न मन्निपि ओर आगमनाय पपयाग। मा भिन्तु पहाति आरपार उगो जिग्णमिन त पुराणं ॥५॥ यम्ग वनयजा न सा पनि विनिराधाय वाय पुरणा। मा नियु जहाति आरपारं उग्गा जिग्णमिव सच पुगण ॥१६॥ या नीवरण पहाय पर अनिघा तिणयायो विमरगे। मा भिषापु जहानि ओगपार उरगा जिष्णमिय स पुराण नि ॥१७॥ उरगमुतं निहित। (२-धनिय मुत्त १२) पकमोनोपारा मम्मि(इनिपनिया गापो।)मनुधीरेमहिया समानयासो। हना कुति आदितो गिनि अप चे पथ यसी पवम्स रेय ॥१॥ अवाराधनो विग तखिरोहमस्मि (इति भगवा।) अनुनीर मयिकरत्तिवासो। निपटा फुटि निव्युतो गिनि अथ चे पत्थ यसी पवस्स देर ॥२॥ अधवमक्सा न विज्जर (इति धनिया गोपो)पच्छे रुळहतिण चरन्नि गावा। वुष्टिापि सहय्यु आगतं अथ चे पत्ययसी पवस्म देव ॥३॥ वा हि भिमा मुमखना (इति भगवा।) तिग्णो पार गतो विनय्य गोय। अत्यो भिसिया न दिजति अथ च पत्थयसी पवस्स देव ॥४॥ INM उरगजा CB अनीयो पत्ययसि C पोलो M गच्छ याता पारगता 11 . खिरो .M अभिसि M M धनिय सुत्त १२] [३ गोपी मम अस्सवा अगेला (इति धनियो गोपो।) दीघरत्त सवासिया मनापा। तस्सा न मुणामि मिचि पाप अथ चे पत्थयसी पवस्स देव ॥५॥ चित्त मम अस्मव विमुत्त (इति भगवा।) दीपरत्त परिभावित सुदन्त । पाप पन मे न विज्जति अथ चे पत्थयसी पवस्म देव ।।६।। अतेवतनभतोऽहमस्मि (इति धनियो गापो।) पुत्ता च मे समानिया अरोगा। तेस न सुणामि किंचि पाप अथ चे पथयमी पवस्म देव ।। नाह" भतका स्मि वस्मचि (इति भगवा।) निबिटठेन चरामि सब्बलावे । यत्यो भतिया न विज्जति अथ चे पत्थयमी पवस्म देव ॥८॥ अस्थि वसाअस्थि धेनुपा(इति धनिया गोपा)गोधरणियो पर्वणि योपि अस्थि । उसभोऽपि गव पती च अत्यि अथ च पत्थयमी पवस्स दच ।।९।। नत्यि वसा नत्यि धेनुपा (इति भगवा। ) गोधरणियो पर्वणियोऽपि नत्थि। उसभोपि गवप तीध नत्यि अथ चे पत्थयसी पवस्स देव ॥१०॥ वीला निवाता अमपवेधी(इतिधनिया गोपो।)दामा मुजमया नवा सुसठाना। न हि समिति धेनुपाऽपि छेत्तु अथ चे पत्थयसी पवस्म देव ॥११॥ उसभोरिव छत्व' बधनानि (इति भगवा।) नागो पूतिल्ताव दा' लयित्वा। नाह पुन उपेस्स'३ गभसेय्य, अथ चे पत्थयसो पवस्स दव ॥१२॥ निन्न च थर च पूरयन्तो महामेघो पावस्सि तावदेव । मुत्वा देवस्स वस्मनो इममत्य घनियो अभासथ ॥१३॥ लाभा वत नो अनप्पका ये मय भगवन्त अहसाम । सरण तमुपेम चक्नुम सत्था नो होहि तुव महामुनि ॥१४॥ गोपी च अह च अस्सया ब्रह्मचरिय सुगते चरा मस। जातिमर' णस्स पारगा" दुक्यस्सन्तकरा भवामसे ॥१५॥ नदति पुत्तेहि पुतिमा(इति मारो पापिमा।)गोमि' यो गोहि तथव नन्दति। उपधी हि नरस्म नन्दना न हि सो नति या निरूपाधि ॥१६॥ Mहि. M भगे IM चेमे * भटको M भटिया भटियाऽपि पि ' पयेनियो 1 अति Mति च C विळा खिला 1.M सक्सिस्सत्ति HM छेत्या १C दाळ. M पदालपित्वा 1 उपेम्प ."B घरेमसे इनिऽपि पाठ चिरप्पेति। " जातिजरामरणस्स " गोपियो, B गोमियो IM गू गुप्ता मापनि पुगह TITमा (भिगा। पर गोलि। उसपी हिमाग मापनामा मारिया Tak पनि निना (३-गनिमाण-मुत्त ११३) मन्चगु भूगु गिधाय या अविस्टर' अशामिना। न पुनमिन्टम्ग का सहार्य एका मर गारिमा पो॥ ममगारम भवनि सह पोटात दुरामि हो। आदानय न माना एको घर पम्गविगाणा ॥२॥ मित गृहज्जे मनापमा हानि अब पहि'पदविता। एतं मम मन्थय परमाना रा घर गग्गविगाणपो॥३॥ यगो विगार' या बिसस्तो पुत्तगु दारेमु म मा अपेमा यमा वीग व अमन्यमाना एरा परे मगधगाणापा। भिगो अराम्रि यया अवदो यनिस्टा गति गोरगय। यि नग सरिस पश्वमा एका परे पगयिगाणवणा ॥५॥ जामतना'' हाति गहायम पाम" टाने गमन चारिताप। अनभिज्झित मेरित' पेक्यमानो एको घर मग्गविसाणकपो॥६॥ मिठडा रती होति सहारमन्न पुनमु च पिपुर होति पौ। पियविप्पयोग विजिगुन्यमाना एका चर सम्गविमाणक्प्पो ॥३॥ चातुद्दिमा नपटियो घ होनि सन्तुस्ममानो इतरीतरन। पग्म्मियान मनिता अभी को चर सगाविसाणणारा॥ दम्मगहा पब्वजितापि एके अयो गहट्टा घरमावसन्ता । अप्पोस्मुक्को परपुत्तम हुत्या एको चरे खग्गविसाणपणो ॥९॥ .M पोपित्रो, गापियो २N अहेठय 15 भवति स्नेहो " पटिबधचितो IC अपेवा .C°वलारो ब०-वसाळीरो M धसकलीरो M विज्ञ निद्दे०-मेरित तणा " वासेग्यठाने 10 अनतिच्छित, जनभिच्छित १७ बु०-अच्छभी ११३ ] खग्गविसाण-सुत्त ओरापयित्वा गिहिव्यञ्जनानि ससीन पत्तो यथा कोविद्यारो। छ वान वीरो गिबिधनानि एको चर वग्गविसागरणो॥१०॥ सच लभथ निपत्र सहाय सद्धिचर साधुविहारि धीर । अभिभुय्य स पानि परिस्सयानि चरय्य तेनतमनो सतीमा॥११॥ नाच भथ निपर सहाय सद्धि चर साधुविहारि धीर । राजाश्व रदट विजित पहाय को चरे खग्गविमाणप्पो॥१२॥ अद्धा पसमाम सहायमपद सेटठा समा सवितब्बा सहाया । एत अलद्धा अनवज्जभोजी एस चरे सम्पथिसाणक्प्पो ॥१२॥ दिम्वा सुवण्णम्म पभस्मरानि वम्मारपुत्तेन मुनिहितानि । सघट्टमा नानि दुवे भुजस्मि एको चरे खग्गविसाणक्प्पो॥१४॥ एव दुनियेन' सहा मम स्स वाचाभिलापा जभिसज्जना वा। न भय आनि पक्यमानो एको चरे बग्गविसाणक्प्पा ॥१५।। कामा हि चित्रा मधुरा मनोरमा विरूपरूपन मथन्ति चित्त। जादीनव वामगुणमु दिस्वा एको चरे सग्गविसाणवप्पो॥१६॥ ईनी च गण्डो च उपद्दवो च रोगा च सल्ल च भय च मस्त । एत भय कामगुणसु दिस्वा एको रे पगविगाणवप्पो॥१७॥ मीत च उण्ह च खुद पिपाम वातातपे डससिरिसप च। सवानि पतानि अभिगभवित्वा एको चरे मग्गविसागकप्पो॥१८॥ नागोन यूथानि विवजयित्वा सजानधो पदुमी उडारो। यथाभिरन्त विहरे'. अरन्स एको चरे सग्गविमाणाप्पो।।१९॥ अट्टान त गगणिकारतस्म य फ्स्मये। सामयिक विमुत्ति । आदिन्नरधुरम वा निसम्म एवो चरे मग्गविमाणपप्पो॥२०॥ निद्विविमूकानि।" उपात्तिवत्ता पत्तो नियामं पटिलसमग्गो। उपन्नगागणाऽम्हि पनानय्यो एको चरे सविसाणाणो॥२१॥ निलोपो निाहो निपिपामा निम्मरमो निदनम्मावमाहो। निरामया'। मन्या भवित्या एको चरे सम्गविसागरप्पो ॥२२॥ • राह +11 भिन', सचिन धोरो निदे०-सघट्टपनानि 'नि०-दुतीयेन । एई ..! विहर " अडान (Franke) " समापि, सामापिस ..M नि "निद्दे०-निरामसो '-रि . जि Mति M८ स्मये नि.- " -विमुनि गुनिया साप महाये परिम" माft frनि! गन गगुर पो पर fram२॥ याम rt fit frभानTHI अन्याम या दिनमा यम पर गरिमा पिड रन' मा RT भापाि mrati विभूमाद्वाना"from गगा TET MATrinet गुप्त पर प म धना दियान पामार या धिर पापा मागो om मगो एगो परितमय मोद भणगामामय मिलो। गगो निपा मुशीमा' शो पर मान गगर पिरणा सयाजानि 'IT भरा गांपा। जागीय दर अशिवनमाना एका घर गरिमाणकाoan ओरिसरावगु म प पा लिटिया मागानो। अनवरगुता परिहमाना एका रे गायिगाण.॥ आगरपिया गिहियजनानि गटिनालो" पया पारिमसा) पासाययाया अभिनियमिमा एका पा गणविमागरप्पो॥३०॥ रगमु गेध भार बगा पारामी गपशागरी। धुर धुले अणटिनधित्ता एवा घर यागदिमागर॥११॥ पहाय पचावरणानि चतसा उपशिरम व्यपनुरज सम्य। अनिम्सिना ऐन्वा मिहाम'' एको रे वग्णविमाणाणा विपिट्ठिव थान सुग दुग" च पृथ्बर च गोमागमनमा एखानुपश्य समयं विमुट एको पर गाविसाणवप्पा ॥३॥ आरविरिया परम यात्तिया अगनचित्ता अकुगीनवृत्ति । रहनिक्षमा थामद पपन्नो को चरे वग्गविसाणपणा ॥३॥ - .M खिड्डाति • निद्दे०-पिभूसटाना PR बपयानि च *A यतोधिकानि (MI 37 "note) C गलो, गण्डो गण्ठो 'रि-मुतिमा M पदालयित्वा rsb Nd सदालयित्वा CC जाल भेत्वा, AM जाल भिस्वा जाल व भिरवा १.C सछन्न १ निद्दे०-व्य. "बु०-म०-स्नेह "०-सोमनस्सदोमनस्स *R ०चाखू 1.Mदुख ११] वसिभारद्वाज-सुत्त पटिसल्लान झानमरिचमानो धम्ममु निच्च अनुधम्मचारी। आदीनव मम्मसिना भवेसु एको चरे खग्गविसाणक्प्पो॥३५॥ तण्हापय पथय अप्पमत्तो नरमूगा सुनवा सतीमा। सवातधम्मा नियतो पघानवा एको चर खग्गविसाणवपो॥३६॥ सीहाइव सद्दसु असन्तसनो वातोऽव जालम्हि अमज्जमाना । पदुमऽव तोयन अरिप्पमाना' एको चरे बग्गविसाणक्प्पो ॥३७॥ मीहो यथा दाठवली पसव्ह राजा मिगान अभिभुय्यचारी। मेवेथ पन्तानि सेनासनानि एको चरे खग्गविसाणवप्पो ॥३८।। मेत्त उपेवख वरुण विमुत्ति आरोवमानो मुन्ति च काल । सब्बन लोकेन अविरुज्झमाना एको चरे बग्गपिसाणक्प्पो ॥३९॥ राग च दोस च पहाय माह सनालयित्वा सयाजनानि । असन्तस जीवितसरायम्हि एको घरे खग्गविसाणक्प्पो ॥४०॥ भजन्ति मेवन्ति च वारणत्था निक्कारणा दुल्रभा अज्ज मित्ता । अतट्ठपज्जा' अमुची' मनुस्सा एको चरे खग्गविमाणकप्पो ॥४॥ खग्गविसाणसुतं निहित। ( ४ ---कसिभारद्वाज सुत्त १।४) एव म सुत। एवं समय भगवा मगधसु विहरति दक्षिणागिरि एवनाळाय ब्राह्मणगामे। तन खो पन समयेन वसिभारद्वाजम्म ब्राह्मणम्म पर मत्तानि नगलसतानि पयुत्तानि होन्ति वापबारे। अथ यो भगवा पुत्र निदासत्वा पत्तचीवरमादाय येन कसिभारद्वाजस्स ब्राह्मणस्म कम्मला कर कमि। तेन यो पन समयन रसिभारद्वाजम्म ब्राह्मणस्स परिवमना व अथ खो भगवा यन परिवेसना तेनुपसकमि उपसमित्वा एकमन्न भद्र अद्दमा यो पसिभारद्वाजो ब्राह्मणो भगवन्त पिण्डाय ठिन। निदान एनन्योच-अह वो समण क्सामि च यपामि च कसित्वा च वपिदा पानी स्वापि समण क्मस्मु च वपस्मु च कसित्वा च वपित्वा च मुन्नत अहं पि सो ब्राह्मण क्मामि च वपामि च कसिन्वा च वपित्या घre - IM पदातिर .C, \ अलिप (50 215) सदालयित्वान ॥ त्ता * अत्तत्य० 'नि- [१४ ८] मुर्तापाता नग्रो पन मय परगाम भोता गातमम युग वा नग' वा पारे या पाचन वा बलिवर वा अथ च पन भव गोनमो एव आह अहापि यो ब्राह्मण वनानि च वामिन पगित्वा च पित्या च भुनामानि । अथ यो बसिभारद्वाजो ब्राह्मणो भगवन्न गाथाय अन्यभामि- घस्सा पटिजानासि न च पस्माम त वसि । धसि नो पुन्छिनो ब्रूहि यया जानमु त बसि ॥१॥ मद्धा बीज तपो बुट्ठि पन्ना म युगनगर । हिरि इसा मनो योत सति मे पारपाचन ॥२॥ पायगुत्तो वचागुत्तो आहारे उदरे यतो। सच्च गेमि निदान सोरच्च मे पमोचन ॥३॥ विरिय मे धुरधोरट' योगक्षमाघिवाहन । गच्छति अनियत्तन्त यत्थ गन्त्वा न सोचति ॥४॥ एवमेमा क्सी वट्ठा सा होति अमतप्फ्रा। एत बसि बसिवान सचदुवाषा पमुन्धतीनि ॥५॥ अथ मा कमिभारद्वाजा ब्राह्मणी मतिया वसपानिया पायास वडवेत्वा भगवतो उपनामेसि-भुजतु भव गतिमो पायाम कस्सको भव य हि भव गोतमो अमतपत सि क्सनीति-- गायाभिगीतं मे अभोजनेच्य। सपस्सत ब्राह्मण नस धम्मा। गाथाभिगात पनुदन्ति बुद्धा । धर्म सनि ब्राह्मण वुत्तिरेसा ॥६॥ अशेन च क्वग्नि महेसि । खीणासव कुक्क्षुच्चपरान्त । जन्नन पानन उपट्ठहस्सु । सत्त हि त पुञपक्खस्स होताति ॥७॥ अथ कस्म चाह भो गोतम इम पायास दम्मीति। न खो त ब्राह्मण पस्सामि सबक लोक समारक सब्रह्मा सस्समणब्राह्मणिया पजाय सदेवमनुम्साय यस्स सो पायासो भुत्तो सम्मा परिणाम गच्छय्य अजय तथागतस्म वा तथागतसावक्रम वा तेन हि त्व ब्राह्मण त पायाम उप्पहरिते वा घडटहि अणाण वा उदके ओपितापेहाति। अथ खो कमिभारद्वाजो ब्राह्मणो त पायाम अप्पाणन उदक ओपिलापेमीति । अथ खो सो पायामा उदक पक्वित्ता चिच्चिटायति चिटिचिटायति स धूपायति सम्पधूपायति । सेय्यथापि नाम फालो शिवमसन्तत्तो उन्य पक्वित्ता चिच्चिटायनि चिटिचिटायति सधूपायति सम्पधूपा बु०-धोरेग्य चुद-मुत्त [९ यनि एवमय मा पायामा उदयं पविमत्ता चिन्जिटायति चिटिचिटायति गधूपायति सम्पधूपायति। अथ खो यसिभारद्वाजो ब्राह्मणो सदिग्गा लोमहट्ठनातो यन भगवा तनुपसरमि उपर्मवामित्वा भगवता पादसु सिरमा निपतित्या भगवन्त एतत्वाच-अभिवान्त भो गौतम अभिवत त भा गौतम, सेय्यथापि भो गोतम निग्जित वा उक्तुन्जय्य पटिच्छान वा विवरेय्य मूलहस्मवा मग्ग आचिक्वेय्य जधाार वा तेल्पज्योत घारेय्य चक्रतुमन्ना पानि दक्मित्तीति, एपमेव भोता गोतमन अनेकपरियायन धम्मो पकासितो । एमाह भगवन्त गोतम सरण गच्छामि धम्म च भिवमुसप च। लभय्याह भाता गोजमस्स मन्लिके पबज्न लभैय्य उपसपदति । अलत्थ सो रसिभारद्वाजो ब्राह्मणा भगवतो मन्तिके पबज्ज, जलत्थ उपसपद । अचिस्पसम्पनी यो पनायस्मा भारद्वाजा एवो वपट्ठा अप्पमत्तो आतापी पहितत्तो रिहरन्ना न चिरस्सय यस्मत्थाय कुलपुत्ता सम्मदेव अगाररमा अनगारिय पब्बजन्ति तनुत्तर अह्मचरियपरिमासान निठन धम्मे मय अभिया मच्छिवत्वा उपसपग्ज विहासि, खीणा जानि बुसित ब्रह्मचरिय, रत करणीय नापर इत्थतायाति अमज्जामि। अन्जतरा च खो पनायस्मा भारद्वाजो अरहन अहोमीति पसिभारद्वाजसुत्त निहित। (५---चुन्द-सुत्त १।५ ) पुच्छामि मुनि पहूतपञ्ज (इति चुना यम्मारपुत्तो) बुद्ध धम्मस्गामि बीततण्ह। रिपदुनम' सारथीन पवर । कति रोग समणा तदिप यूहि ॥१॥ चतुरा समणा न पञ्चमत्यि' (चुन्दाति भगवा) ते ते आविरामि सरिखपुट्ठो। मग्गजिनो मागतमको च मग्ग जीवति या च मग दूसी ॥२॥ व मग्गजिन वन्ति बुद्धा (इति चुन्दो यम्मारपुत्तो) मग्गवायी' कथ अतुल्पो होनि। मग जीवति मे यूहि पुट्ठो अथ में आविरोहि मग्गसि ॥३॥ . विपतम *R पञ्चमाऽत्यि R मगारगायी गुप्ता [ ११६ या पि गिग निभिग्नागिता। सम्म गयाना वा मानिने घf1 मार परम परमी योगा जमा विभतिशम्म hr r अनज दुचि भिनमा माग | पा पम्मा गुग मग नागरि मला गामा। आपलानि गवमान! मरिग भिगुनमा गाजवि।। छन गा गुमशान पान मुलगा पण भो। मावाया अमानता पने पनि गर ग म मा । पपविणि यो गा गागा थग्विगाया माना। मच नारिमार्गत शारिरिन हानि रग पसा। जय हि दवा अमापदठ मुर अगुस गम मरम्माnि पुदगुस निद्वित। (६-पगमा मृत्त १५६) राज्य में गुतं । एष गमय भगवा गावस्थिर्य विक नया अनागि जागम। जय मा अम्मतग Pा अभियानाय रशिया अभिशालयमा वरवण जतवन ओभारात्या यन नगरा मनुपगामि। उसमामि भगवन अभियानमा एमा अढाशि। एवमत रिता गा मा “वता भगान गायाय अपमाशि- परामल पुरिम मय पुच्छाम गातम । भगवत पुरमागम्म जि पगभरतो मुख ॥१॥ सुविजानो भवं होति सुविजाना पगभया । धम्मकामा भव होति धम्मस्मा पराभवा ॥२॥ नि हत विजानाम परमो मा पराभवो । दुतिय भगया यूहि किं पराभवतो मुम ।।।। असन्नरस पिया होन्ति सन्न कुरत पिय । असत धम्म रोचति त पराभरना मुख ॥४॥ C जननुगिद्धो R,Cशतो पराभव-सुत्त [ ११ इति हेत विजानाम दुतिया सो पराभवा । ततिय भगवा ब्रूहि पिंपराभवतो मुख ॥५॥ निद्दासीली सभामीली अनुट्ठाता च यो नरो। अल्सो कोषपञ्जाणो त पराभवतो मुख ॥६॥ इनि हत विजानाम ततियो सो पराभवो। चतुत्य भगवा भूहि वि पराभवतो मुस ॥७ यो मातर वा पितर वा जिण्णव गनयोबन पहु' सतो न भरति त पराभवना मुख ॥८॥ इति हत विजानाम चतुत्थो सो पगभवो। पञ्चम भगवा हि किं पराभवतो मुख ॥९॥ यो ब्राह्मण वा समण वा अम्ल वा पि वनिबक । मुसावादन वञ्चति त पराभवता मुख ॥१०॥ इति हेत विजानाम पञ्चमा सा पराभवो । छट्ठम भगवा ब्रूहि किं पराभवतो मुख ॥११॥ पहनवित्तो पुरिसो सहिरज्ञा सभोजनो। एको मुज्जति सादूनि त पराभवतो मुख ॥१२॥ इति त विज्ञानाम छट्ठमो मो पराभवो । सत्तम भगवा ब्रूहि कि पराभवतो मुख ॥१३॥ जातित्थद्धो धनत्थद्धो गोत्तत्यदो च यो नरो। म शाति अतिम ति त पराभवतो मुस ॥१४॥ इति हेत विजानाम सत्तमो सो पराभवो। अट्ठम भगवा हि कि पराभवतो मुख ॥१५॥ इत्यिघुत्तो सुराधुत्ता अक्खधुत्तो च यो नरो। द्ध लद्ध विनासेति त पराभवनो मुख ॥१६॥ इति हन विजानाम अट्ठमो मो पराभवो। नवम भगवा ब्रूहि कि पराभवतो मुख ॥१७॥ सरि दारेहि गन्तुट्टो वसियासु पनिम्मति । निस्सनि परदारेनु त पराभवतो मुम ॥१८॥ इति हेत विजानाम नवमो सो पराभवो। दसम भगवा ग्रूहि वि पराभवतो मुसं ॥१९॥ 1R पहूँ 1 बारेप° C सतुटठो १० भुतिm यो रियो पिग निम मिरता Ira' गरम्ग गायनमा पनि rrfri TIT बना परम पनि पाय गरमा आम मिश्री राम A anfer- मुनि अनत्र fru fPामा मागदगि ॥ ॥ या पम्मा गुमित माग बोबा मया' मामा । अनापति गणमाना माय भिणामाः मना रन परया गुनता हमरो पगमा । मायावा अगम्यता का परिपन पर म मामा ॥ | घ ििाि या पदा गनपा अग्गिाTTI मान्न । मप नताम्मिानिशा इति निगम नग महा। मप दिन जसपरष्ठ गुर अगुसरा गम पर पुदगुप्त निहित। 4 (६-पगगा-मुरा १६ ) ए म मुतं । पंगमय भगा मात्पिप विही जाबने मनाय जारामे। अथ या अन्नग मेवता अभिमानाय रतिया अति गवरण जनवन आभाग वा या भगया ननुगामि। उस अभिवागत्वा परमन्त अट्टामि। एकमन्न उिना मा गा देवता अगमामि- पराभवन्त पुरिस मय पुन्छाम गोतम । भगवन्त पुटठमागम्म नि पराभयतो मुव ॥१॥ .. मुविजाना भय होति मुविजाना पराभवा । धम्मकामो भव होति धम्मरेस्मी पराभवा ।। "नि हत विजानाम परमा मो पराभवा दुनिय भगरा यूहि वि पराभपता मुख ॥३॥ अमन्लस्म पिया होनि सन्न न बुरते पिय । असत धम्म रोचति त पराभवनो मुख ॥४ 45 . .C अननुगिहा R,C सातो.
११७] वसल-गुत्त एवज वा द्विज वापि योऽध पाण पिहिसति । यस्म पाणे दया नस्थि त जम्ना वसरो इति ॥२॥ यो हन्ति परिरुपति गामानि निगमानि च । निग्गाहको समझाता त जमा वसलो इति ॥३॥ गामे वा यदि वा रो य परेस ममायित । धेय्या अदिन आदियति तं जन्मा वमलो इति ॥४॥ यो । गणमादाय चुज्जमानो पलायति । न हि ते इणमत्थीति त जमा वसो इति ॥५॥ यो वे विचिक्पवम्यता पथस्मि बजत जन । हन्त्वा विञ्चिवखमादेति त जम्ना वसलो रति ॥६॥ यो अत्तहेतु परहतु धनहेतु च यो नरो। सरिखपुट्ठो मुसा दूति त जमा वसगे इति ॥७॥ यो जातीन सखान वा दारेनु पटिटिस्सति । महसा सपियन वा त जना वसो इनि ॥८॥ यो मातर वा पितर वा जिण्णा गतयोब्बन । पहु सन्तो न भरति त जम्ना वसलो इति ॥९॥ यो मातर वा पितर वा भातर भगिनि समु । हन्ति रोमेति वाचाय ते जजा वरानो इति ॥१०॥ यो अत्थ पुच्छितो सन्तो अनत्यमनुसासति । पटिच्छनेन मन्तेति त जना वमलो इसी ॥११॥ यो क्त्वा पापा कम्म मा म जन्याति इच्छति । यो पटिच्छन्नकम्मन्तो त जना वसलो इति ॥१२॥ यो वे पखुल गन्त्वा भुत्वान सुचिभाजन । आगतं न पटिपूजति त जन्ना वसलो इति ॥१३॥ यो ब्राह्मण वा समण वा अा वाऽपि वनिब्बर । मुमावादेन वञ्चेति त जना बसलो इति ॥१४॥ यो ब्राह्मण वा ममण वा भत्तवाले उपट्टिते । रोमेति बाचा न च रेति त जना वसलो इति ॥१५॥ जसतमोऽध पयूति मोहन पल्गुिण्ठितो' । विञ्चिक्स निजिगिसानो त जम्ना वसा इति ॥१६॥ B असतं २f पळिगुण्ठितो १.] सुत्तपिपातो [ २७ या भत्तान गमुकारा पर ममरजाननि । निहानो मन मानन ने जम्मा गरी इति ॥१७॥ रोममा करिया न पापिच्छो मच्छरी सग। अहिरिजो अनोती त जमा यसरी रि ॥१८॥ पो बुद्ध परिमासनि अथवा तस्स साम । परियाज गहट्ट वा त जन्मा यमग इति ।।१९।। यो व अनरहा सन्तो अरहं पटिजानति । चोरो मब्रह्मा लार एस या वमगधमो। एत खा वसा वुत्ता मया वो य पवासिता ॥२०॥ 7 जच्चा वसगे होति न जच्चा हानि ब्राह्मणो । कम्मुना धमला होति कम्मुना हानि ब्राह्मणा ॥२१॥ तदमिनाऽपि जानाथ यथा मन्ट निदरसन । चण्डारपुत्ता सापाका मातगो इति विस्सुतो ॥२२॥ सो यस परम पत्ता मातडगा य मुदुल्लभ । आगञ्छु तस्मुपट्टान खत्तिया ब्राह्मणा यहूँ ॥२५॥ सो दवयानमारह विरज सो महापय । कामराग विराजत्वा ब्रह्मलोपगा अहु । न न जाति निवारसि ब्रह्मलोकूपपत्तिया ॥२४॥ अज्झायक्कुल जाता' ब्राह्मणा मन्तव धुनो। ते च पापेमु कम्मसु अभिण्हमुपदिस्सर ॥२५॥ निटठव धम्मे गारव्हा सपराय च दुर्गात । न ते जाति निवारेति दुग्गच्चा गरहाय वा ॥२६॥ न जच्चा बसलो होति न जच्चा होति ब्राह्मणो। वम्मुना वसलो होति कम्मुना होति ब्राह्मणा ति ॥२७॥ एव वुत्त अगिकभारद्वाजा ब्राह्मणो भगवन्त एतत्वोच-अभिवसन्त भो गोतम पे० धम्म च भिक्खुमघ ।। उपासक अग्जतग पाणुपत सरण गतऽति। म भव गोतमा धारतु 'B अजामका कुले जाता' इत्यपि पाठ ११९] हेमवत-मुक्त (८- मेत्त-सुत्त १८) करणीयमत्यकुसलेन य त सन्त पद अभिसमेन्च । सक्को उजू च सूजू च सुवचो चस्स मुदु अनतिमानी ॥१॥ सन्तुम्सको च सुमरो च अप्पकिच्चो च सल्लहुकवुत्ति । सन्निद्रियो च निपको च अप्पगन्भा कुलेसु अननुगिद्धो ॥२।। न च खुद्द समाचरे विञ्चि येन वि परे उपवदेय्यु । मुखिनो वा सेमिनो होन्तु सवे सत्ता भवन्तु सुखितत्ता ॥३।। ये केचि पाणभूतत्थि तसा वा थावरा वा अनवसेसा । दीघा वा ये महन्ता वा मज्झिमा रम्मकाऽणुक्थूल ॥४॥ दिट्ठा वा येव' अहिट्ठा ये च दूरे वसन्ति अविदूरे । भूता वा सभवेमी वा सब्ये सत्ता भवन्ति सुखितत्ता ।।५।। न परो पर निकुब्वेथ नातिमाथ कत्थचि न बञ्चि व्यारोमना पटिघमन्ना नाजमजस्स दुक्वमिच्छय्य ॥६॥ माना यथा निय पुत्त आयुसा एक्पुतमनुरक्ये । एवापि सम्बभूतेसु मानस भावये अपरिमाण ॥७॥ मेत्त च सम्बोस्मि मानस भावये अपरिमाण । उन अधो च तिरिय च असबाघ अवर अमपत्त ॥८॥ तिट्ठ चर निसिनो वा सयानो वा यावतस्स विगतमिद्धो। एत सति अधिष्ठेय्य ब्रह्ममेत विहार इधमाहु ।।९।। दिट्टि च अनुपगम्म सोल्वा दस्मनैन सपना । वामेसु विनम्प गंध न हि जातु गम्भमम्प पुनरेतीति ॥१०॥ मेतसुत्त निर्दिठत। (E-हेमवत-सुत्त १९) अज्ज पण्णरमो उपोमपो (इति सातागिरो यस्खो) या रति उपट्टिना। अनोमनाम मयार हन्त पस्साम गोतम ॥१॥ पच्चि मनो सुपणिहितो (इति हेमरतो यक्सो) सम्भूतमु ताग्निो। मच्चि छ अनि8 च सप्पस वमीकता ॥२॥ ॥ येच अदिट्टा "N, V forrige मुननिपातो [ १७ या चत्तान समुवास पर चमगानति। निहाना मन मानन 7 जना वमय इति ॥१७॥ रोसको वदरियो च पापिच्छा मच्छरी सगे। अहिरिका अनोत्तप्पी त जम्शा वसन्ग इति ॥१८॥ या बुद्ध परिभासति अथवा तस्स सावर । परिब्वाज गहट्ठ वा त जम्ना वसलो इति ॥१९॥ या वे अनरहा सन्तो अरहे पटिजाननि । चोरो सब्रह्मा रोष एस पी वसाधमा । एन यो वसला युत्ता मया वो ये पकामिता ॥२०॥ न जच्चा वसलो होति न जच्चा हानि ब्राह्मणा। यम्मुना बसलो होति वम्मुना होति ब्राह्मणा ॥२१॥ तमिनापि जानाथ यथा मत निदस्सनं । चण्डालपुत्तो सापाका मानगो इति विस्मुना ॥२२॥ सो यस परम पत्ता मातहगा य मुदुलाभ। आगञ्छ तम्सुपट्टान खत्तिया ब्राह्मणा बढू ॥२३॥ मो दवयानमारुय्ह विरज मो महापथ । वामराग विराजत्वा ब्रह्मलोकूपगो अहु । न न जाति निवारगि ब्रह्मलगेकूपपत्तिया ॥२४॥ जज्झायक्कुल जाता' ब्राह्मणा मन्तवधुनी । ते च पापमु कम्मेसु अभिण्हमुपदिस्सर ॥२५॥ टिटठव धम्मे गारव्हा सपराय च दुग्र्गात । म त जाति निवारेति दुग्गच्चा गरहाय वा ॥२६॥ न जच्चा बसला होति न जच्चा होति ब्राह्मणा। कम्मुना वसलो होति क्म्मुना होति ब्राहाणोति ॥२७॥ एव वुत्त अग्गिकभारद्वाजो ब्राह्मणा भगवन्न एतदवोच-अभिनन्त भो गोतम पे० धम्म च भिवखुमध च। उपासर म भव गोतमा धारेतु अज्जतग पाणुपत मरण गतानि । 'B 'अन्यायका कुले जाता' इत्यपि पाठ [ १५ ११९ ] हेमवत-सुत्त (८–मेत-सुत्त १८) करणीयमत्थकुसलन य त सन्त पद अभिसमेच्च । सक्को उजू च सूजू च सुवचो चस्स मुदु अननिमानी ॥१॥ सन्तुस्सको च सुभरो च अप्पकिच्चो च सल्लहुकवुत्ति । सन्तिद्रियो च निपको च अप्पगब्भो कुलेसु अननुगिद्धा ॥२॥ न च तुह समाचरे विञ्चि येन विन्नू परे उपरदेय्यु । सुखिनो वा खेमिनो होन्तु सब्बे सत्ता भवन्तु सुखितत्ता ॥२॥ ये केचि पाणभूतत्यि तसा वा थावरा वा अनवसेसा । दीघा वा ये महन्ता वा मज्झिमा रस्सका'णुक्थूला ॥४॥ दिट्ठा वा यव' अद्दिट्ठा ये च दूरे वसन्ति अविदूरे । भूता वा सभवसी वा सब्ब सत्ता भवन्ति सुखितता ॥५॥ न परा पर निकुबेथ नानिमलय कत्थचि न कच्चि ब्यारोसना पटिघमज्ञा नान्नमज्जस्म दुक्खमिच्छय्य ॥६॥ माता यथा निय पुत आयुसा एक्पुत्तमनुरक्खे । एवऽपि सम्बभूतसु मानस भावये अपरिमाण ॥७॥ मेत च सब्बलोकस्मि मानस भावये अपरिमाण । उद्ध अधो च तिरिय च असबाध अवेर असपत्त ॥८॥ निट्ठ पर निसिनो वा सयानो वा यावतस्स विगतमिद्धो। एत सति अघिटठेय्य ब्रह्ममेतं विहार इधमाहु ॥९॥ दिट्टि च अनुपगम्म सीरवा दस्सनेन सपन्नो। कामसु विनय्य' गंध न हि जातु गम्भमय्य पुनरेतीति ॥१०॥ मेत्तसुत्त निटिठत। (६-हेमवत-सुत्त ११) अन्ज पण्णरसो उपामयो (इति सातागिरो यक्सो) दिव्या रत्ति उपट्ठिना। अनामनाम सयार हुन पस्साम गोतम ॥१॥ कच्चि मनो सुपणिहितो (इति हेमवनो यम्यो) सम्ममूतेमु तारितो। पश्यि इ8 अनिट्ठ च सक्णम्म वसीक्ता ।।२।। Mच अदिद्वा N, विनय मुत्ता मो धग मुगलिहिता (it मागिग पर ) गरम तान्तिा। अपो " अनि गररांग भगीरना॥ काम अनि यिति (इतिहमा यो) रम्भि गा। पति आग माहात IT न पिनि न मो अग्नि आदि मागिरो पा) या पाया गया। अपा थारा मा बुना शान 7 रिन्नति॥॥ पनि मुगा राम (निमयता परमा) पनि नगीपालयो। मचिम येमूनिय ना' पनि गर । भामपि ॥ मुगा प सा न भाति (शा सासगिगे यगो) अयान गाणगा। अयो वभूतिय नाह मन्ना अन्य मा भागनि l तिन रमी वामगु (नीमा यारा) पिm आरि। पश्चि मो. अति कति धाम पामा 111 न सो रज्जति कामगु (ति मागिरा यागा) पा लिग अनापिर। सब मोह असिना वृद्धो पम्मगु पापुमा ॥२॥ पनि विगाय मपनो (इति हमवतो मागे) पनि मगुरुमारणो। पचिम्म आसवा पाणा पति मत्यि पुन भदा ।।१०॥ विनाय नेय' संपन्नो (इति मानागिरो यागो) अया गगुरुनाग्यो । सम्बरस आगवा सीणा नत्यि सरग पुनम्भवो ॥११॥ सपन्न मुनिनो चित कम्मना व्यप्पन च । विग्जाचरणसपर्न धम्मतो नं पसरामि ॥११ (अ) ॥ मपान मुनिनो चित कम्मा व्यापयेन च । विजाचरणरापर्भ धम्मतो अनुमो-सि ॥११ (प्रा)। सपन मुनिनो चितं कम्मना ध्यप्पथा च । विनाचरणमान्न हल पम्माम गोतम ॥१२॥ पणिजय विरा धीर यषाहार अला। मुनि बनरिम झायन्त एहि पस्साम गोतम ॥१३॥ मोहं वक्चर नाग कामेमु अनपेरियन । उपमकम्म पुच्छाम मञ्षासा पमोचा ॥१॥ जक्वातार पवत्तार मब्वधम्मान पारगु। बद्ध वेरभमानीतं मय पुच्छाम गोतम ॥१५॥ 1B 'नाखीणय्यप्पयों इत्यपि •R विज्जायमेव ११९] हेमयत-गुत [ १७ विम्मि तो समुप्पनो (इति हेमवतो यासो) विस्मि घुब्बनि मथव । पिस्म लोगो उपादाय विस्मि को निहलनि ।।१६।। छस्मु' रोको समुप्पनो (हमवताति भगवा) छरमु' युबति सथव । छन्नमेव उपादाय उस्मु' रोरो विहानति ॥१७॥ क्तम त उपादान एत्य तोवो विहमति । निय्यान पुन्छिनो ब्रूहि क्थ दुक्या पमुच्चति ॥१८॥ पच कामगुणा लोवे मनोरट्ठा पमोदिता। एत्थ छन्द विराजेत्या एव दुक्सा पमुञ्चति ॥१९॥ एत लोकरस निय्यान अवपात यो यथातथ । एत वो अह्मक्यामि एव दुक्खा पमुच्चति ।।२०।। को गूध तरनि ओघ कोऽध तरति अण्णव । अप्पतिन्ठे अनालम्बे को गभीरे न सीति ।।२१।। सय्यदा सीलसपनो पन्जवा मुसमाहितो। जज्झत्तचिन्ती' सनिमा ओघ तरति दुत्तर ॥२२॥ विरतो कामसजाय सवसयाजनातिगो । नलीभवपरिक्खीणा सो गभीरे न सीदति ॥२३॥ गभीरपन्न निपुणत्थदस्मि, अकिञ्चन वामभवे जमत्त । न पस्सथ सम्बधि विष्पमुत, दिव्ये पथे रममान महेसि ॥२४॥ अनामनाम निपुण थास्सि , पचान्द कामारये अमत । त पस्सथ सम्बविद् सुमध , अरिये पथ वममार' महरि ॥२५॥ मुट्ठि वत नो अज्ज सुप्पभात सुहुट्टित । य अदसाभ सबुद्ध ओषतिण्णमनासव ॥२६॥ इमे दससता यक्या इद्धिमन्तो यमस्मिनो। सब्य त सरण यन्ति त्व नो सत्था जनुत्तरो ॥२७॥ ते मय विचरिस्साम गामा गाम नगा नग। नमरसमा सबुद्ध धम्मस्स च सुधम्मतऽति ॥२८॥ हेमवतसुत्त। - M छसु चष्मन M अज्झतसनी विरत्तो' इत्यपि 'P सातागिरिसुत ति एकच्चेहि बच्चति २ १८] मुनरिपाता [ ११० ( १०--आग्नामुत्त १।१०) एव म सुत। एक समय भगवा आविय विहरनि आवस्म यक्पस्म भवन। अय खो पाठवणे यायो यन भगवा ननुपगामि उपमकमि वा भगवत पनवोच-निवपम समणाति। साधावुमाऽति भगवा निस्पमि। पविस ममणाति। माधावुसा नि भगवा पारिसि! दुनियऽपि यो जावका यामा भगवन्त तत्वाव-निगमम ममणाति। साधावुमो नि भगवा निस्यामि । पबिस समणाति। साधासुमा ति भगवा पाविसि। तयि ति यो आदो यकायो भगवन्त एतत्वोच-निस्सम समणानि । साधावुमा नि भगवा निवपमि । परिस ममणाति । साधावुसोऽति भगवा पाविमि। चनुयाप सा आठवको यवतो भगवन्त एतवाच-नियम समणाति। न म्वाह त आवुमो नियमिस्सामि य ते करणाय त क्रोहीनि। पन्ह त समण पुच्चिस्मामि सच में न व्यार रिस्ससि' चित्त वा ते पिपिस्मामि दृष्य था त पारस्सामि, पासु वा गहत्त्वा पारगगाय खिपिस्मामीति। न ग्वार त आवुमा पस्मामि मन्वा समारत सब्रह्मक सस्ममणब्राह्मणिया पजाय मत्वमनुस्साय या म चित्त वा विपेय्य हत्य था पारेय्य पामु वा गहेत्वा पारगगाय विपेय्य अपि च त्य आवुसो पुच्छ यताक्खमीति। जथ सा जाळवको यक्वा भगवन्त गाथाय ज्यभासि-- सि सूध वित्त पुरिमस्स सेट्ठ । ति मु सुचिण्ण मुखमावहाति । कि मु हवे सादुतर रसान । क्थजीवि जावितमाहु सेट्ठ ॥१॥ मदीध वित्त पुरिसम्म सट्ठ । धम्मो सुचिण्णा मुखमावहाति । मच्च हा सादुनर रमान । पञ्जाजावि जीवितमाहु मे ॥२॥ पथ मु तरती ओघ वय सु तरति अण्णव । क्य मु दुक्ख अच्चति वथ सु परिसुन्यति ॥३॥ मद्धाय तरती' ओघ जपमान जण्णव । पिरियन दुत अच्चति पलाय परिमुज्झति ॥४॥ क्थ सु लभते पन क्य मु विन्न धन । वय सु पित्ति पप्पोति क्य मित्तानि गथति । जस्मा तोका पर लोर क्थ पच्च न सोचति ।। महानो नरहत धम्म निब्वाणपत्तिया। सुम्मूमा लभते पन्न अप्पमत्तो विचक्षणो ॥६॥ बु०-पाकरिस्सास २ तरति यो ११११ ] विजय-मुत्त [ १९ पतिरूपकारी धुरवा उट्ठाता विदते धन । सच्चेन वित्ति पप्पोति दद मित्तानि गति ॥७॥ यस्मते चतुरो धम्मा सहरस घरमसिनो सच्च धम्मो घिति चागो स के पेच्च न सोचति । अम्मा लोरा पर लोग स वै पच्च न सोचति ॥८॥ इब्ध जलऽपि पुच्छस्सु पुथू समणब्राह्मणे। यदि सच्चा दमा चागा खन्या भिव्योष विज्जति ॥९॥ क्य नु दानि पुच्छय्य पुथू समण ब्राह्मणे। सोऽह अन्ज पजानामि या चत्यो सपरायिको ॥१०॥ अत्याय वन मे बुद्धो वासायाळविमागमा । सौह अज्ज पजानामि यत्य दिन महप्पल ॥१२॥ सो अह विचरिम्सामि गामा गाम पुरा पुर। नमस्समानो समुद्ध धम्मस्स च सुधम्मतऽति ।।१२।। एव' वुत्ते आळवको यक्खो भगवन्त एतदवोच-अभिका त भो गोतम पे० भिवाघुसघ च । उपासर म भव गोतमो धारेतु अज्जतग्ग पाणुपेत मरण गतऽति। आळवकसुत्त निटिठत। ( ११---विनय-सुत्त १३११) घर वा यदि वा तिट्ट निसिनो उद था सय । मम्मिजति पसारैति एमा कायस्म इजना ॥१॥ अट्टिनहारमयुत्तो तचमसावलेपनो । छविया यायो पटिच्छन्नो यथा भूत न दिस्मति ॥२॥ अन्तपूरो उदरपूरो यरपळस्स यत्यिनो। हत्यस्स पप्पासरस वपस्स पिहास्स च ॥३॥ सिंघाणिवाय सेकस्स सेस्स च मेस्म च। लोहितस्स लमिकाय पित्तस्स च बसाय च ॥४॥ IR अत्यो . तरित बम-PTS सस्करणयो नाम [ ॥१२ सुतनिपातो भयम्स नयहि सोतेहि अगुचि गपति मचा। अप्रियाग अविवगून रणग लग्णगूथरा ॥९॥ सिंघानिया च तासातो मुमा पमनेरगा। पित्त महा च धमति यायम्हा मररिया ॥६॥ अयाम्म मुसिर मीम मत्य गरम पूरित । सुभतो न ममता गग अपि जाय पुरम।। ।। यटा च गो मता मनि उद्घमातो चिनागा। अपविद्धो सुसार्नाम्म अनपपा होति यानयो ॥८॥ पानि न सुवाना' च मिगाता च वका विमी। वावा गिज्झा च सान्ति य नायत सन्ति पाणिनो' । मुत्यान बुदवचन भिवपु पजाणवा 'ध । सो सो न परिजानानि यथाभूत हि परसनि ॥१०॥ यथा इ तथा एत यया ए तथा इद । अयत्त च वहिद्धा च काये छद विराजय ॥११॥ छटरागविरत्तो मा भिक्षु पञ्जाणवा इध । अझगा अमत सन्ति निब्याण पदमच्चुत ॥१२॥ द्विणदका ऽय असुधि दुग्गधा परिहीरति । मानाकुणपपरिपूरो विस्सान्ता ततो तता ॥१३॥ एतादिसन कायन या मज उण्णमेतवे। पर वा अवजानय्य मिजा तस्सवानि ॥१४॥ विजयमुत्त निटिठत। (१२-मुनि सुत्त १।१२) मचमातो भय जान निकता जायन रजो। अनि नमसथव एत वे मुनिस्सन ॥१॥ यो जात मु िज रोपयय्य जाय तमम्स नानु पवेच्छ । तमाहु एवं मुनिन चरन्त अद्दक्खि' मो रातिपद महसि ॥२॥ M घमति एकदा . माति IC सुवाणा R सुपाणा "B, R,Cपाणयो IM निवाण पदमन्चुत द्विपादकोय *B 'पापविछ दनिक्सुत्त लिपि [ सधवतो M,C अदश्वि + 1 महेसि 1७11 १२१२ ] मुनि-मुत [ २१ मसाय बयूनि पहाय' बीजं, मिनेहमस्म नानुप्पवेच्छ । म के मुनीर जानिग्ययन्तदस्मो तक्म पहाप न उपति भव ॥३॥ अन्याय सब्यानि निवेसनानि, अनिवामय अन्तरऽपि तस । सवै मुनी वीतगधो अगिद्धो, नायूहति पारगतो हि होति ॥४॥ राज्याभिभु भब्यविदु मुमध सब्बम धम्मेसु अनूपलिन । सम्बजह तण्डकवये विमुत्त, त वापि धीरा मुनि वेन्यन्ति ॥५॥ पावल सीलवतूपपन्न, समाहित थानरत सतीम । मगा पमुत्त अखिर अनामव त वापि धीरा मुनि वदयन्ति ॥६॥ एक चरत मुनि अप्पमत्त नितापमसामु नवेधमान । गीहऽव सहसु असन्नमन्त, वातऽव गारम्हि जसज्जमान । पदुमऽव तोयन अलिप्पमान, नैतारमन्नसमनग्लनन्न । न वाऽपि धीरा मुनि वेश्यन्ति यो ओगाहन' थम्भोरियाभिजायति , र्याम्म पर वाचा परियन्न पदन्ति । न वीतराग सुसमाहितिद्रिय त वाऽपि धीरा मुनि घेन्यन्ति ॥८॥ यो वे ठिनतो तगर व उज्जु , जिगुच्छति कम्मेहि पाप हि । वोमसमानो विमम सम च, त वाऽपि धीरा मुनि वग्यन्ति ॥९॥ यो सञ्जतत्तो न क्राति पाप, टहरा च मज्या च मुनी यतत्ता। अरासनेय्या सो न रोसति कचि , त वाऽपि धीरा मुनि वेदयन्ति ॥१०॥ यदग्गतो मज्झता मेरातो वा पिण्ट लभथ परदत्तूपजीवी । नोऽपि निपच्चवाटी त वाऽपि धीरा मुनि वेन्यन्ति ॥११॥ मुनि चरन्त विरत मथुनस्मा, यो योवन न उपानिबनते क्वधि । मदप्पमाला विरत विप्पमुत, न वापि धीरा मुनि वदयन्ति ॥१२॥ अजाय लोक परमत्थ-स्सि , ओघ समुद्द अतितरिय तादि । त छिनाथ असित जनासव , त वाऽपि धीरा मुनि वेदयन्ति ॥१३॥ असमा उभो' दविहारवृत्तिना, गिहि दारपोसी अममो च सुब्बतो। परपाणरोपाय गिही' असतो, निच्च मुनी रवपति पाणिनो' यतो ॥१४॥ नाल थुतु R, B पमाय । समाय YM ओगहणे C गाहणे IM याच P1S पाणिने M मुनि IC धुभो ICसखिल "M गिहि मुनि [११२ २२ । गुप्ता मिमी पपा मगोपो विहगमा, ईमरण नापति जर तुगमन । एवं गिही नारा भिाना, मुगिनो चियिसम्म पारि माय मुनिगुप्त निटिना उरगरग्गा पठमो। यो पनि विमाना। परmनमलो पेनभाना। सानानि चासोनामुन सेवानि गुत्तानि नामो क्षत- 1 गिहि C चुभो . - -चूळवग्गो (१३-स्तन-सुत्त २१) यानीय भूतानि समागतानि , भुम्मानि वा यानि व अन्नळिग्वे । भत्रे व भूता सुमना भवन्तु अया पि सान्च सुणन्तु भामित ॥१॥ तस्मा हि भूता निसामथ सव्वे मत्त वरोय मानुसिया पजाय । दिवा च रत्तो च हरन्लि ये बार , तस्मा हि ने रक्सथ अपमत्ता ॥२॥ य किञ्चि वित्त दूध वाहु र वा , सुग्गमु वा य रतन पणीत। न ना सम अस्थि तथागतन ददापि बुद्ध रतन पणीत । एतेन सच्चेन मुवत्यि होतु ॥३॥ खय विराग अमत पणीत , यज्झगा सस्यमुनी समाहितो । न तेन धम्मेन ममत्थि विन्ति इदपि धम्म रतन पणीत । एतन सच्चन सुवस्थि होतु ॥४॥ य बुद्धमट्टो परिवण्णयी सुचि समाधिमानन्तरिषज्ञमाहु । ममाधिना तेन समो न विज्जति इदऽपि धम्मे रतन पणीत । एतन सच्चेन सुवत्यि होतु ॥५॥ य पुग्गला अट्ठ सत पमत्या । चत्तारि एतानि युगानि हान्ति । ते दक्षिणय्या सुगतस्स सावका , एतेसु दिनानि मप्पयनि । इदपि मधे रतन पणीत , एतन सच्चन सुवत्यि होतु ॥६॥ ये सुप्पयुत्ता मनमा दहन , निकामिनो गोतममासनम्हि । त पत्तिपत्ता अमन विगर , लद्धा मुधा निभुति भुजमाना । इटऽपि सघे रतन पणात , एतन मच्चन सुत्यि होतु यथिन्सीलो पठवि मितो मिया चतुभि वातहि असम्पम्पियो । तयूपम सप्पुरिम वनामि , यो अरियमच्चानि अवच्च पस्सति । इदऽपि सघे रतन पणात एतन मच्चन सुवन्थि होतु ॥८॥ य अरियसच्चानि विभावयन्ति , गभीरसजन सुरमितानि । विञ्चापि ते होन्ति भुमप्पमत्ता, न त भव अट्ठम आयिनि । इदपि सघे रतन पणीते, एनन गच्चन सुवथि होतु ।।९।। २०१] [ २३ -- . । - ४] পি। गहापारगमनसंग म नया धम्मा nि भाग। गणादि fffr लिप गागमा याता यत्पनि। पहनापहि व पिलो र पाभियानि अमवा का। गि रना पणीन, एान गन्ना गुपहा ॥१०॥ रातिमा मम्म पनि पापा पापन पाधा उ घामा । अभन्ना गो तस्म परिमाणाव, अमना द्विाम्म युगा । गिगगन पणी। एतन मान गया बनणगुम्ब यथा परिगताग PिRIT माम पटमगि गिरे। नयूपम पम्मपरं अगपि पियाणगामि परम शिवाय। इ.रि युद्ध रतन पगा एनन सच्चा गुषि हो ॥१२॥ वरो यराहरो अनुत्तरो धम्मवर अगपि । पि युद्ध रता पणा पतन मान गुवत्यि होurati गीण पुराण नथ नत्यि मभयं विरामनि मायति भरिम । याणवीजा अविपिन नियति धीरा गयाध्य पापा। पि मघ रतन पणात, एता रामचन गुत्थि हातु ॥१४॥ यानीप भुतानि समागतानि भुम्मावि वा याशिव अन्तरिटाय। नथागर्न दवमनुस्मपजित वृद्ध नमरगाम गुश्यि हात ॥१५॥ पानीय भूताति समागतानि, भुम्मानि या यानि व अनटिगे। तथागत स्वारगपूजितं, धम्मनमस्गाम सुवन्थि होतु ॥१६॥ यानीध भूतानि समागतानि मुम्मानि वा यानि वअन्तदिन तथागत देवमनुस्रापूजित, मध नमस्साम सुवत्यि होतु ॥१७॥ वरावरमा रतनसुत्त निटिटत। (१४--आमगध-मुत्त २।२) सामानविगूटक' चानकानि' पतप्पल मूरप्प गविष्फः । धम्मन लद्ध मतमस्नमाना', न वामकामा जरिक भणन्ति ॥१॥ यतम्न मानो सुक्त सुनिट्टित परहि दिन पयत पणीत । माठीनमान परिभुजमानो, मो भुजगि' कस्मप जामगध ।।२।। . R दिगुलक २ चीनकानि च सतमसमाना "R C यदहमानो 'R सलमहमाना C R भुजतो " भुजति १२] आमगधन्सुन [ २५ न आमगधो मम वणनीति , इच्वेव त्व भाति ब्रह्मरधु'। मालीनमा परिभुजमानो, सन्तममाहि गुमसतेहि । पुच्छामि त कस्सप एतमत्थ क्थप्पवारा तव जामगधा ॥३॥ पाणानिपातो वध-छन-बधन , थय्य मुसायादा निरनिवन्चनानि च । अज्झनकुत्त* परनारसेवना एसामगयो T हि मसभोजन ॥४॥ य इध कामेगु असन्जता जना , रसेसु गिद्धा असुचीफ मिस्मिता नत्थीव दिट्ठि' विसमा दुरभया एसामगघा न हि मसभोजन ॥५॥ ये टपमा दारणा पिट्ठिमसिका मित्तद्दनो निवारणातिमानिनो । अदानगीला न च देन्ति स्मात एसामगधो न हि मसभोजन ॥६॥ बोधी मदो यम्भो पच्चुट्ठापना च , माया उगूया मस्सममुस्रायो च । नातिमानो च अभि सथवो, एमामगधो न हि ममभोजन ॥७॥ य पापमोग इणघातसूचका , वोहारखूटा इघ पाटिरूपिका । नराधमा येऽध क्रोन्ति विविम एसामगधा न हि मसभोजन ॥८॥ य इथ पाणसु असम्नता जना, परसमादाय विहसमुय्युता । दुस्मीसुद्धा फरुमा जनादरा , एसामगधो न हि मसभोजन ।।९।। एतेमु गिद्धा विरुद्धातिपातिना , निच्चुय्युता पेच्च तम वन्ति य । पतन्ति सत्ता निरय अवसिरा , सामगधा न हि मसभोजन ॥१०॥ न मच्छमसाननासरत्त' ननग्गिय (मुण्डिय जटा) जल खरातिनानि वा। नागिहुत्त स्सुपुसेवना वा य वाऽपि रोने अमरा बहू तपा। मन्ताहुती यसमुतूपसेवना सोपति मच्च अवितिण्णक्ख ॥११॥ सोतेसु गुत्तो विदितिन्द्रियो चरे, धम्मे ठिता अज्जवमद्दव रतो। सगानिगो सब्बदुक्खप्पहीनो, न लिप्पती दिट्ठसुतेसु धीरो ॥१२॥ इच्चतमत्य भगवा पुनप्पुन अक्सासि त वेदयि मन्तपारगू । चित्राहि गायाहि मुनिप्पकासयि, निरामगधो असितो दुरपयो ॥१३॥ RI M 1C महावयूं *C अझन कुना R अज्झनपुज्ज असुचिभायमिस्सिता B नत्यिक दिहि, M नत्यि फुदिट्टि R, I उस्सुया R न मच्छमस ननासकत्त, C न मच्छमस नानासकत्त • अगिहुत्तस्सुपवेसना (') • मन्ताहुति R विजितिन्द्रयो - लिम्पति 4 नं २० ] सुत्तनिपानो [२४ सुत्वान बुद्धसग सुभासित पद, निरामगध सम्बदुक्वणन्न । नीचमना वलि तथागतस्स , तत्थव पबन्जमरोचयित्थामि ॥१॥ आमगधसुत्त निटिठत। (१५-~-हिरि सुर २।३) हिरि तरन्त विजिगुच्छमान सखा मस्मि इति भासमान । महानि कम्मानि अनादिगन्त नमो ममानि तिन विजम्मा ॥१॥ अनवीय पिय वान यो मित्तमु पकु प्रति । जवन्ति भासमान परिजानन्ति पण्डिता ॥२॥ न सो मित्ता यो सता अप्पमत्ता भेदारुती रधमवाऽनुपरसा । यस्मि च मति उरसीव पुत्ता स व मितो यो परहि भो ॥३॥ पामुज्जकरण ठान पससावन सुख । फलानिससो भावेनि वन्तो पोरिस धुर ॥४॥ पविवररा पौत्वा रम उपसमस्स च । निद्दरो हाति निप्पापो धम्मपीतिरस पिवति ।।५।। गिरिसुत्त निटिठत। (१६-महामगल सुत्त २१४) एव में मुत। एक समय भगवा सावत्थिय विहरनि जैतवन अनाथपिण्डिरस्स आरामे । अथ खो अन्तरा देवता अभियन्ताय रतिया अभिक्वन्तवण्णा क्वरक्प्प जतवन जोभामत्वा यन भगवा तेनुपसबमि उपसमित्वा भगवन्त अभिवादेत्वा एवमन्त जट्टासि । एक्मन्त ठिता खो सा दवता भगवन्त गाथाय जयभासि- बहू देदा मनुस्सा च मगलानि अचिन्तयु । आक्खमाना साथान ब्रूहि मगरमुत्तम ॥१॥ M अत्थ वय
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२४] सुत्तनिता [I एमो समणाति। गा समणो समण राणा याव जानामि महिमा सा गमणो, यति वा समणो। अब सा हिलोमा यगे या भगवा तेनुपामि उपमरमित्वा भगवताय उपनामसि अयगा भगवा वाय अनामगि। अप मा चिलरोमो यत्रमा भगवन्न एवार--भायसि म गमणाति । ग्याह त आयुगो भायामि अगि 7 स मरम्सो पापका नि । पञ्द त ममण पुच्छिमामि मच में न व्यापरिस्मसि पित वा त गिपिरसामिय यात पा सामि, पारसु वा गहेत्वा पारगगाय लिपिस्माभीति। लि आयुगो पस्गामि मरेपर्व लाक समारले सग्रहाप सम्रामणशहाणिय जाय स वमनुरसाय यो मलित वा विषम्य हत्य वा फाय्य, मासु वा गहत्या पारगगाय गिम्य । जि प त्व आवुमो पुच्छ यमसीति । अथ यो मचिरोमा याग्यो भगवन्न गायाय अज्यभामि-- रागो च दासा च कुतो निगना । अग्नी रता लामहसा कुताना । कुतो गमद्राय मनोविनाम। कुमारका धंव'मिवारजन्ति ॥१॥ रागो च दोमो च "तो निताना । अरती रती लोमहसो इतोजा । तो समुदाय मनोविता । खुमारा धरमिवोम्सालि ॥२॥ स्तजा अत्तराभूता निग्रोधस्सव सधजा। पुथु विमत्ता कामेसु मारुवा वितता बने ॥३॥ ये न पजानन्ति यतो निदान । त न विनोटेन्ति सुणादि यस । ते दुतर जोधमिम तरन्ति । अतिण्णपुच पुनम्भवायाति ॥४॥ सूचिलोममुर्त निटिठत। ( १८-धम्मचरिय मुत्त २१६) धम्मचरिय ब्रह्मचरिय एतदाहु वमुत्तम । पबजिताऽपि चे होति अगारस्मानगारिस ॥१॥ सा चे मुखरजातिको विहेसाभिरतो मगो । जीवित तस्य पापियो रज बढनि तनो ॥२॥ क्लहाभिरतो भिक्षु मोहधम्मन आवो। अक्सातऽपि न जानानि धम्म बुद्धन देसित ॥३॥ *R धन जगारानगारिय . आवुतो [ २९ २।७1 ब्राह्मणपम्मिव-सुत्त बिहेस भावितत्तान अविज्जाय पुरवसतो मकिरेस न जानाति म निरयगामिन ॥४॥ विनिपात समापनो गम्भा गम्भ तमा तम । स वे तादिसको भिक्खु पेच्च दुक्य निगच्छति ॥५॥ गूथपो यथा अस्स सपुण्णो गणवस्सिको। यो' एवम्पो अस्स दुन्बिसोधो हि सगणो ॥६॥ य एवरुप जानाथ भिक्खवा गहनिस्सित । पापिच्छ पापसरण पापाचारगोचर ||७|| सन्चे समग्गा हुत्वान अभिरिविज्ज याय न । कारण्डव निद्धमथ क्सम्बु अपक्स्सथ ॥८॥ ततो पलापे वाहय अस्ममणे समणमानिने । निमित्वान पापिच्छे पापआचारगोचरे ॥९॥ सुद्धा सुद्धेहि सवास क्प्पयव्हो पतिस्सता । नता समागा निपका दुवस्सन्त परिस्राथानि ॥१०॥ धम्मचरिपसुत्त निटिठत। (१६-ब्राह्मणम्मिक-सुत्त २१७) एक मे सुत । एक समय भगवा सावत्यिय विहरति जतवने अनायपिण्डिवस्म आराम । जथ खो सबहुरा कोसतवा ब्राह्मणमहासाला जिण्णा बुद्धा महलका अद्धगता वयो अनुप्पता या भगवा तनुपसमिसु, उपसवामित्वा भगवता सद्धि सम्मोदिसु सम्मोग्नीय क्थ साराणीय वीतिसारेत्या एक्मन्त निसीदिसु । एकमन्त निसिना सो ते ब्राह्मणमहासाला भगवन्न एतत्वोचु--गदिस्सन्ति नु खो भी गोनम एतरहि ब्राह्मणा पोराणान ब्राह्मणान ब्राह्मणधम्मेऽनि । न खो गाह्मणा सदिस्मन्ति एतरहि ब्राह्मणा पोराणान ब्राह्मणान ब्राह्मणधम्मेऽति। माधु नो भव गोतमो पोराणान ब्राह्मणधम्म भासतु सचे भो गोतमसा जगाति । तेन हि ब्राह्मणा सुणाथ, साधुव मानसिक्रोथ भासिस्मामीति। एव भोति खो ते ब्राह्मणमहासाला भगवतो पच्चस्सोमु । भगवा एतत्वोच- CM यो च . अगणो IN अभिनिम्बग्नियाथ, R अभिनिम्बिग्जयाय, B अभिनियिज्जियाय • अवस्मय 1B धम्मचरियमुत्त ति कपिलसुत्त Tfter | सागा mms परामापाrarurimiti 1 ग डाग 1 frrr गादि माTKE | मग मा मागिन । मागर? म मपनगम प रीता नामामा भाग अपारा भाग न धम्मानित Tोपि दिगि मागु गम्मत। अ gin' गात (काभार) र परिण। पियापरणपरिया अपर Atom 7 प्राता अग्नममम् I for frपस। मपियन यागे सगन्या ममराय ॥७ अम्मन मा गमया सुषमर्राग पनि। भनरा मया धम्म माम्मु गति धाममा ८॥ ब्रह्मचारिप म गीर , अम्बर गड्यं सत् गोरल' अविहिम पनि पारि अरण्य या नेसं पामा आगि बह्मा रिहानामा। म यापि' मथा धर्म गुपिनन्नन रागमा १०॥ तरमवतममिगिना था विग्जातिया। ब्रह्मानरिया भील च यति चापि अवाणयु ॥११॥ तण्डुल मयन वत्थ गणित पयामि। धम्मन समुद्रातत्या' ततो यशरणम् । उद्वितरिम यास्मि नास्मु गावो हनिमु ते ॥१॥ यथा माता पिता भाना अन्न वापि च शातका । गावो नो परमा मित्ता यासु जायन्ति आसपा ॥१३॥ अन्ना रा चता वण्णा मुम्बा तथा । एतमत्ववस भत्वा नास्मु गावो हनिमु ते ॥१४॥ 'M अत्तपत्थमवारयं सी०-अत्तदत्यमकारिस यस्सानि IM सोरज्ज .C म चापि of अढचत्ताळीस MB समापानत्वा २७ ] ब्राह्मणयम्भिव-सुत्त [ ३१ सुग्नुमार, महाकाया वणवन्ता यसस्सिनो। ब्राह्मणा महि धम्महि विच्चाविच्चेसु उस्सुका । याव लोरे अवत्तिसु सुम्वमेधित्यऽय पजा ॥१५॥ तेस आसि विपल्लासो दिस्वान अणुतो अणु। राजिनो च वियाकार नारियो समरवता ॥१६॥ रथ चाजजसयुत्त सुक्त चित्तसिब्बने । निवमने निवेस च विभत्त भागसो मिते ॥१७॥ गोमण्डलपरिब्बूळह नारीवरगणायुत । उळार मानुस भोग अभिज्यायिसु ब्राह्मणा ॥१८॥ ते तत्य मन्ते गयेत्वा ओस्कार तदुपागमु । पहूनधनघनोसि (यजस्सु बहु ते वित्त) यजस्सु बहु ते धन ॥१९॥ ततो च राजा सञ्जत्तो ब्राह्मणेहि रथसभो । अस्समेध पुरिसमध (सम्मापास) 'वाजपेय्य निरग्गळ । एते याग यजित्वान ब्राह्मणान अदा धन ॥२०॥ गावो सयन च वत्य च नारियो' समरक्ता। रथ चाजन्नमयुत्ते मुक्ते चित्तसिब्बने ।।२१।। निवेसनानि रम्मानि सुविभत्तानि भागमो। नानाधनस्स पूरेत्वा ब्राह्मणान अदा धन ॥२२॥ ते च तत्य धन रद्धा सनिधि समरोचयु । तेस इच्छावनिण्णान भिय्यो तण्हा पवडढथ । ते तत्थ मन्त गायत्वा ओसार पुन'मुपागमु ॥२३॥ यथा आपो च पठवी हिरा धनधानिय । एव गावो मनुस्सान परिवारो सो हि पाणिन । यजस्सु बहु त वित्त यजस्सु बहु ते धन ॥२४॥ ततो च राजा सातो ब्राह्मणहि रथेमभा। नक्मतसहस्सियो' गावो अभ्श अघातयि ॥२५॥ न पादा न पिसाणन नास्सु हिंसन्ति वन चि। गावो रिसमाना सारता फुभदूहना । ता विमाणे गहेनान राजा सथन घातयि ॥२६॥ R याचपेग्य .R नारिया घ नका सतसस्सियो, 1 अनेसतराहस्सियो 1C पुनुपागम UR मुर्ता [८ सती च देवा पिपराइ असुररायगा। जम्मा इति पान्य सत्य शितो गर ॥२७॥ नयो रोगा पुरे आगु इच्छा अनगन जरा। पमून च ममारमा अद्वातबुतिमागमु ॥२४॥ गमो अधम्मो दण्डानं ओसन्ता पुगणो बह। अमिनायो हम्ननि धम्मा धमियाजया ॥२०॥ एवमेसो अनुधम्मा पोराणो विश्गरहितो। यत्य एदिमा पस्राति याजक गरहना जनो ॥३०॥ एष धम्मे वियापन विभिन्मा मुद्दवेस्सिका। पुयु विभिना पत्तिया पति भरिया अवमन्नाथ ॥३१॥ पतिया ब्रह्मबघू च ये चम्म गोत्तरश्विता । जातिवाद निरवत्या वामान वममागमुति ॥३२॥ एव दुत्त ते ब्राह्मणमहासाला भगवन्न एतन्वोच-अभिराल भो गोतम पे० धम्मो पकासिता, एत मय भवन्त गोम मरण गच्छाम पम्म न भिक्षुमघ च । उपाम नो भव गातमो धारेतु अज्जतग्म पाणुगेन गरण गो नि । ग्राह्मणम्मिकसुत निहित। ( २०-नावा-सुर २१७) यस्मा नि धम्म पुरिसो विशन्शा, इन्द व न यता पूजयय्य । मो पूजिता तरिम पसन्नचित्ता बनुस्सुनो पातुवराति धम्म ॥१॥ तट्ठि क्त्वान निसम्म धीरा धम्मानुधम्म पटिप जमाना । विश्न विभावी निपुणो च होनि यो तालिम भजति अप्पमता ॥२॥ खुद च वार उपसवमाना जनागतत्य च उसयव च । इथव धम्म अविभावविवा अविरिण्णखो मरण उपेति ॥२॥ यथा नरी आपग आतरित्वा महोदिक सलि- सीधमोत । सा म्हमानो अनुसोतगामी , कि सो परे सक्रति तारयत् ॥४॥ तयय धम्म अविभायित्वा पहुस्सुतान अनिसामयन्त्य । सय अजान अवितिषणक्यो किं मो परे मस्पति निज्यपेतु ।।५।।
१] विमार-मुत्त [३ यथापि नाव टबमारहित्या, पिपन रितन' ममगिभूना । सो ताग्ये तत्य रहऽपि अन , नपयग्नू' कुसलो मुतीमा ॥६॥ विपि यो वेटगु भाविनत्तो बहुस्मुता होति अवधधम्मो। गो यो परे निज्यपय पजान मोतावधानूपनिगुपपन्नो ॥७॥ नस्मा हरे मणुग्मि भनथ संघारिन चेव बहुस्सुन च । अन्याय अथ पटिप जमाना बिन्नातघम्गो मो मुग भथानि ।।८।। नावासुतं निहित (२१ --सिील सुत्त २१६ ) किसीलो कि रामाचारो वानि पम्मानि गृह्य । नरा सम्मा निविष्टस्स उत्तमत्य च पापुण ।।१॥ घद्धापचापी' अनुमुय्यम मिया, बालमजू चम्म गान' म्गताय । पम्मि क्थ रयित पणज्जू, मुणय्य साच्च सुभासितानि ॥२॥ कारेन गच्छ गस्न सराम, थम निरस वा नियातनुत्ति । अत्य धम्म रायम ब्रह्मचरिय, अनुस्सरे चेव समाचरे च ॥३॥ धम्मारामो चम्मरतो धम्मे ठिता धम्मरिनिन्ध्यन्न । नवापरे धम्मसदोसवार तच्छहि नीयथ मुभासितहि ॥४॥ हस्रा जप्प परित्य पदाम, मायाक्त कुहन गिद्धिमान । मारम्भरसस्सवसावमुच्छ हित्वा परे धीनमतो ठिनत्तो ॥५॥ विज्ञानसारानि सुभासितानि मुत च विन्नात समाधिसार । न तम्म पञ्जा च मुत न वड्नति, यो सालमो होनि नरो पमत्तो ।।६।। धम्म च ये अरियपनेटिने रता अनुत्तरा ते वचा मनसा पम्मना TI ने सति-सोरच्च ममाधि-मण्टिना सुतस्म पन्जाय च सारम शगूति ।।७।। विसो सुत्त निद्वित B, I फिपन धम्मसुत, नायागुत्त ति पि ३ • B, Al तपाया M बुद्धापचायी M मतीमा B R ,C गरुनं .
२४] मुननिता [स (२२--उनान-मुत्त २११०) उदृत्य निमीत्य वा अथो मुपिनन वा । आतुगन हि का निद्दा सल्लविद्धान प्पिन ॥१॥ उहथ निसीन्य दलह सिम्पथ सन्निया । मा वा पमत्त विनाय मञ्चुण्णा) अमार्मि प धमानुगे ।।२।। याय दवा मनुस्मा च मिता विट्ठन्ति अस्थिका । तरथत विसतिर वणो व मा उपच्चगा। पणाताना हि मोचन्नि निरयहि समप्पिता ||३|| पमादा रजो पमादो' पमाटानुपतिता रजो। अप्पमात्न विज्ञाय नम्बहे मल्लमतनोति ॥४॥ उद्यानमुत्त निहित (२३---राहुल सुत्त २।११) वचि अभिण्हमवासा नावजानासि पण्डित । उसाधारा मनुस्सान कच्चि अपचितो तया ॥१॥ नाह अभिण्हमवासा अवजानामि पण्डित । उक्काधारी मनुस्सान निच्च अपचिता मया ॥२॥ वत्थुगाथा पचकामगुणे हित्वा पियरूपे मनोरम । सदाय घरा निस्वम्म दुवस्सतररो भव ॥३॥ मित्त भजस्सु र याण पन्त च मयनासन । विवित्त अण्णनिग्घोस मतन्न होहि भोजन ॥४॥ चीवरे पिण्रपान च पच्वय सयनासन । एनेमु, तह माकामि मा लोर पुनगगमि ॥५॥ सवुतो पानिमोवस्मि इन्द्रियमु च पचसु । सनि कायगता त्यत्यु निम्बिटाबहुलो भव ।।६।। C पमादा २ ओ IC पत्य म०-पथ २०१२ ] वगास सुत्त [ ३५ निमित्त परिवज्जेहि सुभ रागूपनहित । अमुभाय चित्त भावहि एकग सुममाहित ॥७॥ अनिमित्त च भावेहि मानानुसयमुज्जह । ततो मानाभिसमया उपसन्ता चरिस्ममीति ॥८॥ इत्थ सुद भगवा आयम्मन्त राहुर इमाहि गाथाहि अभिव्ह ओवरतीति । राहुलसुत्त निद्वित एवं (२५-यगीस-सुत्त २।१२) मे सुत । एक समय भगवा आळविय विहरति अग्गाळन चेतिय। तन पो पन समयन आयस्मतो वगीसस्स उपज्झायो निग्रोधवप्पो नाम थरा अग्गाळवे चेतिये अचिरपरिनिबुतो होति । अथ खो आयम्मता वगीसम्स रहोगतस्म पटिसल्लीनस्स एव चेतमो परिवितकको उदपादि-परिनिब्बुतो न सो में उपज्झाया उदाहु नो परिनि वृतोऽति। अथ यो आयस्मा बगीमो सायण्ड्समय पटिसरलाना बुद्वितो येन भगवा तेनुपमकमि, उपममित्वा भगवन्त अभिवादेत्त्वा एकमन्त निमोनि। एक्मन्त निसिनो खो आयस्मा वगीसो भगवन्त एतदवोच- इध मम्ह भन्ने रहोगतस्स पटिसल्लीनस्स एव चेतमो परिवितको उदपादि-- पनिनिबुतो नु खो मे उपज्झायो, उदाहु नो परिनिबुतो ति । अथ वो आयस्मा वगीसो उठायासना एकस चीवर क्त्वा यन भगवा तेनजिलि पणामत्वा भगवन्त गाथाय अग्यभासि- पुच्छाम' सस्थार अनोमपञ्ज, ट्ठिव धम्मे यो विचिरिच्छान छेत्ता । जग्गाळवे कालमकासि भिक्षु जातो यमस्सा अभिनिन्धुतता ॥१॥ निग्राधक्प्पा ति तस्स नाम, तया क्त भगवा ब्राह्मणस्स । सो त नमस्स अचरि मुत्यपेक्सो , आग्दविरियो धम्मदस्मी ॥२॥ त मावक मान मय-पि मब्बे , अन्नातुमिच्छाम समन्तचक्यु । समवहिना ना सवणाय मोता , तुव नो मत्या त्व अनुत्तरोमि ॥३॥ छिटव नो विचिरिच्छ भूहि मेऽत , परिनिन्बुत बन्य भूरिया। म व ना भास समन्तचक्षु, सफ्लोर दवान सहस्सनेत्तो ॥४॥ १३४३-३५८ थे० गा० १२६३-१२७८ अचरी 1 इत्वा IC Trfm चि गया माग्मगा frame पामा नयन सा • नगा। ना [ग्गिा TT मा AT THP सिन | गमोग नियना - Tafrui TTanit भाग' पराग मा पोर mrati शिग्गिा TITATTE" fram in rrrrr m l Fri for m याग, याग It 7 गनिन । दिग्गरेन गुपित ITTER TIRITTोम ॥ मिरजग पान परमामि पाग। पामारा हि गुथुरगान गंगा नयागानं ॥ मात्रयम्पारण नव समुत्रमग मग ri अपमञ्च पतिमा मुषणामित्रा मा मापी जानमा १०॥ पगेर अरियाम विाि मा मापा जानमनामपिरिय । गारि पपा पम् पम्मनगा भिायामि गु पग ॥१२॥ पन्या बहारग्यि अचारि गपापा पनि म माय निमामि मो अनुगामिया' यया विमुना अहा गुणाम ॥१॥ अर्गात मरूप (HIT भगवा), वहम मान परमानसहित अनारि जातिमरणं अगम , "ध्यमवा" भगवा पामा ॥१३॥ एम मुथा पनीनगमि पचा ने मिमत्तम । जमाप पिर म पुद्र 1 म यश्चगि ब्राह्मणा ॥१॥ यथागती तयानाग अह परम मापता अनि मन्दुनो जाल नन'' मायाविया ॥१५॥ जहमा भगवा आदि उपागनरस लिया। जच्चगा वन क्यायनो मच्च्यघ्य सुन्तरानि ।।१६।। वगोसमुत्त निहित IC घोराव [य PM वीर शानमुपागमम्ह R हसाव 11 सणिक निजि I समुज्जपास । यरोवर +R मुत्तरस बस्स B सुत्तम्स परसा ति या १.R ८ आदु सउपादिससो 11 इच्चयादि।1B तथा सतत 11 अहसा 1* M TF B निप्रोपरप्पसुत्त निपि पहीन . २११३ ] मम्मापरिधाजनिय-सुत्त [३७ ( २५-सम्मापरिमाननिय-सुत्त २११३ ) पुच्छाम मुनि पहूतपन्न , निष्ण पारगत परिनिब्बुत ठिनत्त । निक्सम्म धरा पनुज्ज कामे क्थ (भिस्व) सम्मा सानो परिवजय्य ॥१॥ यस्म मगा समूहता (दनि भगवा) उस्माता सुपिना च लक्षणा च । सा मगलदासविप्पहीनो' सम्मा मा गेरे परिब्बजेय्य ॥२॥ राग विनयेय मानुमेसु दिब्बेमु कामेमु चापि भिक्खु । अतिक्वम्म भव ममेच्च धम्म , सम्मा मोनोक परियजय्य ॥३॥ विपिट्ठि क्त्वा पसुनानि , काध पग्यि जहय्य भिक्षु । अनुरोध विरोध विषहीनो मम्मा मो 7 परिब्बजय्य ॥४॥ हित्वा पिय च अपिय च , अनुपानाय जीिस्मिता कुहिञ्चि । मयोजनियहि विणमुत्तो सम्मा मा लावे परियजय्य ॥२॥ न सो उपधीसु मारमेनि आनानेसु चिनय्य छपराग । मा अनिम्मियो अनन्नय्यो सम्मा मा लो परिवजय्य ॥२॥ वचसा मनसा च कम्मना च जरिरुद्धो सम्मा विदिया धम्म । निवाणपटाभिप थयाना , मम्मा मा लार परिब्बजय्य ॥७॥ यो वन्नति माति न उण्णमेय्य अवट्ठोऽपि न सघियेथ भिक्षु । द्धा परभाजन न मज्ज सम्मा मो गो परिधजय्य ॥८॥ लोभ च भव' च विप्पहाय विरता छ'नव धना' च भिक्खु । सो तिण्णक्यक्थो विसल्ला सम्मा सो लोरे परिबजय्य ॥९॥ मारप्पमत्तनो विनित्वा न च भिक्य हिमय्य पचि लोक । ययातथिय शितित्वा धम्म मम्मा सो तो परिन्बजेय्य ॥१०॥ यसगानुमया न सन्ति केचि, मूला अअमला समूहलाम । मो निरासमो अनासयाना' सम्मा सो लोके परिव्बजेय्य ॥१॥ आसवनीणो पहीनमानो , सञ्च रागपय उपातिवत्तो। दन्तो परिनि चुता ठिनता सम्मा सो लोक परिवजय्य ॥१२॥ सद्धो सुनवा नियामस्ती वग्गगतेमु न वग्गसारि धीरा । सभ दोस विनय्य पटिघ , सम्मा सो राज परियजम्य ॥१३॥ C स मगलदोसविप्पहीनो (भिक्ष) Rस मगल्दोसविपहोना भिक्षु सम्मा २ विपीति क्त्वान TC भय 'R चंदनवध नातोवनवपनतो M किंचि R अनाससानोM निरासो अनासिसानो ८] गुसfrom [. मगुरजिनो विराग्दो' सम्मगु पी पारगू भाषा: गमाराधनामा गामा गो गा परिनाम ॥ आलिगु लागतगु पारि पणा गुसिग्ना। मम्बायाहि Pिणमा गम्मा गा र परिलय अशाय प गमेत पम्म विर नियनमाया। गम्भूगधी परिस्पाना' मम्मा ग ग गरिमाप In अदा नि भगया TT या गोएन गिरि मिा। गमपादनिग वातिाना गम्मा सा - पश्मिामानि ॥13॥ सम्म परिवाननियगुत। निहित (२७-म्मिा-गुप्त २०१७) एव म गुन ।' गमय भगया गायिय विहगीजनन अनामिपितसम्म आगम । जय मा घम्मिरो पाराला गचहि उपामामोहि सदिया गया मनुगामि उगामि वा भगवन्न अभिया वा एमा निमोजिममन्त निमिन्नोमा पम्मिरा उपामरा भगवन गापाय अभामि--- पुच्छामि ते गोतम भूरिपन कपाग गावगा साधु होति । यो वा अगारा अनगाग्मेति अगाषिो का पनुपागामे ॥१॥ तुन हि गाम्म गदयपस्म गति पजानागि परायण च । न चत्यि तुल्यो निपुण यास्मी तुव हि युद्ध पवर यन्ति ॥२॥ सच नुवं जाणमोच्च धम्म पारोमि सत्त अनुपमानो। विग्नच्छदामि' ममन्नचा विरोचमि मिगे सबगेर ॥३॥ आगच्छिा ते मन्तिा नागराजा, एरायणा नाम जिनो ति गुवा। मोपि नया मन्तयित्वा अन्झगमा साधूति सुत्वान पनीनस्पा ॥४॥ राजा-पितं वम्सवमा बदेरा उपनि धम्म परिपुच्छमाना । तस्मापि स्व पुच्छितो मि धीर मो चापि सुत्वान पतीनरूपो ॥५॥ य वचि'म तित्यिया वाट्याला आजाविधा वा यनि वा निगण्ठा । पन्याय त नातितरति सब, ठितो वजन्त पिय मोगामि ॥६॥ . विवटच्छदो ' विषदच्छदोऽसि २R परिवखया 1C आगञ्छि 1B महारामयसुत्तऽतिऽपि २०१४] धम्मिव-गुत्तं [ ३९ ये वेनिश्मे ब्राह्मणा वादमीठा, वुद्धा चापि ब्राह्मणा सन्ति रचि । म तयि अत्यया भवन्ति ये याऽपि चऽज्म वादिनो मनमाना ॥७॥ अय हि धम्मो निपुणो सुसो च', योऽय तया भगवा सुप्पवुत्तो। तमव सबै सुस्सूसमाना, स्व नो वद पुच्छिनो युद्धसेट्ठ ॥८॥ सब्वेऽपिग्मे भिक्खयो सनिसिना उपासका चापि तथव' सोत । सुणन्तु धम्म विम उनानुबुद्ध, सुभासित वासवस्मेव देवा ॥९॥ सुणाथ मे भिवसवा सावयामि' यो घम्म धुत त च घराथ' सब्बे । रियापथ पन्चजितानुलामिक, सवैथ न अत्यत्सा मुतीमा' ॥१०॥ न व विकाले विचरेय्य भिक्खु गाम च पिण्डाय चरय्य काले। अवलाचारि हि सजन्ति सगा, तस्मा विवाले न चरन्ति बुद्धा ॥११॥ रूपा च सद्दा च रसा च गधा , पस्सा च ये समदयन्ति सत्त। एतेसु धम्मेसु विनय्य छन्द , कालेन सा पविस पानरास ॥१२॥ पिण्ड च भिक्षु समयेन रद्धा, एको पटिक्कम्म रहो निमीद । जज्झत्तचिली न मनो वहिदा , निच्छारये सगहिततभावा'" ॥१३॥ मचेपि मो सल्लप सावन , अञ्जन वा वेनचि भिक्खुना वा। धम्म पणीत तमुद्राहरेय्य , न पसुण" नोपि परूपवाद ॥१४॥ वाद हि एके पटिसेनियन्ति न ते पससाम परित्तपन्न। ततो ततो ने पसजन्ति सगा, चित्त हि तत्य गमेन्ति रे ॥१५।। पिण्ड विहार सयनासन च, आप च मघाटिरजपवाहन । सुत्वान धम्म सुगतेन देसित , सखाय मेवे वरपसावको ॥१६॥ तस्मा हि पिण्डे रायनासन च, आप च सघाटिग्जूपवाहन । एतेसु घम्मेसु अनुपरित्तो, भिक्खु यथा पोखरे वारिविन्दु ॥१७॥ गहट्ठवत्त पन वो वदामि , यथा करो सावको साधु हाति ! न हेसो लब्मा सपरिग्गहन , फस्मतु यो केवलो भिखुधम्मो ॥१८॥ पाण न हाने न च घातयय्य न चानुजला हनन परेस । मम्बेसु भूनेसु निधाय दण्ड , य थावरा च तसन्ति रोक ॥१९॥ - 'C, M yatsa R सब्बे चिमे IM तत्थेव .M सावयिस्सामि 1M चरथ . अत्यदस्सो मतिमा B अत्यदरसो मुतीमा .M मोचे B नो वे A सदमयन्ति (?) M पालिसे ..R, B सगहीत. १C पेसुनं [१४ १.] मुमारा TIL अगिय rur fritam TA T मा गतिHिTTot प्रगति परिब नगार राग r for मा umre TRI + Imमर ॥ गभगता या पाया गया Trगा भर नाग। भण जना मर भूपाram | मर्ज प प म गमापरा धम्म म । पाययतिmजा' उम्माraffront मा पनि परान याग यानि मा पमन । नालापान प्रिया उम्मान माना पाण TEान न सानिमाय मुगा न भाग न १ मा गिमा । जाहारिया विरगम्प गया ना न भत्रम्प भारत ॥ ५॥ मा धारेन च गधमापन मा एमाप गपय गया। न हि अगिरमा पोगर्थ युद्धा दुगु पनागिता नना य पपरमपरमागर्थ तुर्गम गार्गम बनाम । पाटिनगरियपत्रस व गगनमागा अगपतं मुगमता ततो पाता उपधुपाोमो अमल पाना घfirmगध । पगमचित्तो अनुमानमानो यथारह मविमजय विला ॥२८॥ धम्मन मातापितरा भरेय्य , पयाजय पगिर गाणिज्ज। 1 गिरी काय अपमलो मयाभ' नाम अनि पेनि ॥२॥ धम्मिामुत्त निहित - चूळाग्गो दुतिया
धम्मिक सुत्त
[१
मारा व गत सा उमान अप राहुली।
सपो मोम्मिश च पुनापर
मुसेनानि स्तानि यूनगो नी ।
C परिग्दाज च ] रतनागपो हिरि च मगल भूचितोमेन।
कपिला ब्राहाणो पिच नाल (१) क्सिोल उट्ठानो। राहुलो पुन क्पा च
परिटवाजनियो तया। धम्मिा च विदुनाहु चूळवाणति चद्दसा ति ।
[ १०] मना ना अदिने परिवगाय नि पक्षी सावरा युगामाना। ने गरय हरत मानुजन्ना मर अभिम परिमजयग्य ॥२०॥ अग्रह्मचरिय पग्विजयम्य अगारकास अग्नि विश्न । जमभुणन्ता पन ब्रह्मास्मि परम्म र नानियामम्य ॥२१॥ गभग्गता या परिसरग।। या यम्म वा। न मुसा भणय्य । ने भाराय भन नानुनन्या मर लभूा परिर जयेम्य ॥२॥ मन च पान न ममानरेग्य भम्म “म राग्य या गटो। न पायथ्य पिचत नानुनच्या', उम्मान त इनिन पिरित्या ॥२ ॥ मटा हि पापानि क्रान्ति नाग कालि शिपि जा पमत्त । गत अपुञ्जायतन विवजय उम्मान माग्न बारवान ॥२॥ पाण तहान न चालिममागिय मुगा 7 भाम 7 च म जपा मिया । ब्रह्मरिया विरमेय्य मयता रत्ति न भजय्य विचारभाजन ॥२५॥ माल न घार न च गधमाचो मच छमाय न' भयय गथत । एत हि जट्ठ गिरमा पोसय युद्धन रक्पन्नगुना पागित ॥२६॥ नता च पास्सुपरस्मुपोमथ चातुसि पचनस च अमि । पानिहारियपरम च पसलमानसो अगुपन सुममनाप ॥२७॥ तती च पातो उपयु थुपाराथा जग्नेन पानन र भिक्खुराध । पगन्नचित्तो अनुमो-माना यथारह मविभजय विा ॥२८॥ धम्मन मातापितरो भरेग्य , पयोजम धम्मिा सो वणिज । एत गिहा बत्तय अप्पमत्ता रायपभ' नाम उपनि येति ॥२९।। धम्मिकसुत्त निहित चूमवग्गो दुतियो नम्स बम्गम्स उद्दान- सन भामगर मगलमुत्तम । मूनिजोभो बम्म वरिया पृन श्रामण मिक। R पिपत पिवत R धारये० "R . C चको WI सयपभा (?) R हिरि० ३.२ ] पधान-सुत्त [ ४३ एग भिक्खु महाराज पण्यम्स पुरवखतो। निमिनो व्यग्युसमोर सीहोव गिरिंग भरे ॥१२॥ सुत्वाा दूतवचन भद्दयानेन सत्तियो। तरमानरूपो निय्यामि यन पण्डवपन्वतो ॥१३॥ स यानभूमि यापि या याना जोर खत्तियो । पत्तिका उपसम्म आसज्ज न उपाविसि ॥१४॥ निमज्ज राजा सम्मोदि क्थ सारणिय ततो। वथ सो वीतिमारेत्वा इममत्थ नभासथ ॥१५॥ युवा च दहरो चासि पठमुप्पत्तिको सुसु। वण्णारोहन सपनो जातिमा विय पत्तियो ॥१६॥ सौभयन्नो अनीकग नागमघपुरस्वती । ददामि भोग भुजस्सु जाति चकावाहि पुच्छिता ॥१७।। उजु जनपतो' रा हिमव तस्स पस्मतो। धनविरियन सपनो कोमरमु निवेतिनो ।।१८।। जानिच्चा' नाम गोत्तन सारिया' नाम जालिया। तम्हा बुरा पब्बजिता (ऽम्हि राज') न काम अभिपत्थय ॥१९॥ कामेस्वातीनव दिस्वा नवम्म ? खेमता । पधानाय गमिस्सामि एत्थ म रज्जति मनोऽति ॥२०॥ पन्यज्जासुत्तं निहित (२८-पधान सुत ३२ ) त म पधानपहितत्त नटि गैरजर पति ॥१॥ विपरसम्म झायन्त योगवनमस्स पत्तिया नमुची' करण वाच भासमानो उपागमि पिसो त्वमसि दुब्धण्णो सतिक मरण तव ॥२॥ सहस्मभागो मरणस्स एक्मो तव जीवित । जीव भो जीविन मय्यो जीव पुग्जानि काहसि ॥३॥ R साराणिय २८ पठमप्पतिया आविच्चो I साक्यिो मास्ति :C जानपदो • 11 नमुचि M [ जीव ३-महायग्गो (२७पन्न मुस ११) पनत्र सिधिग्गामि ममा पनि मरममा। यया यामंगमाना मो पचान गमरोधि ॥१॥ मवापीसा पगमामा जम्मामानी अभारामो ६ पयजा इति निवार x ॥ परजिस्तान पाया पाराम विवअपि । यती मरिन हिरा आनीय परिसोपरि ॥ अगमा राजगह युवा मगपान गिरिम्बन । रिय अभिहारमि आकितारमणो ॥४॥ नमद्दगा घिसिमारा गामा-गि पतिहिए। निम्या ररपणमपन्न ममथ अभागय 1141 दम मान्नो निमामय अभिपी बहा' मुनि । चरणन चेत्र सपनो युगमत्त च पश्यति ॥६॥ ओक्वित्तवत्रघु सनिभा पाय गीचामिन । राजद्ना विधावनु' तुहिं भिक्षु गमिस्सनि 1131 ते पसिना राजदूता पिहिता अनुबधिम् । बुर्हि गमिस्सति भिवपु यस्य वामो भविस्ाी ॥४॥ गाटान रमानी गुत्तद्वारो मुसवुना। विण पत अपूरेमि सपजानो पनिग्गनो॥॥ स पिण्डवार चरित्वा निसम्म नगरा मुनि । पण्डव अभिहारेमि एत्य वामा भविस्सति ॥१॥ निस्वान धामूपगत तनो दूता उपाविम् । एको छ दूतो जागन्त्वा राजिनो परिवपि ॥११॥ PM मवाधाय AI ब्रह्मा 11 राजदूताभिधावतु ४२] २३ ] मुभारित-गत्त सम ना धजिनि दिरवा युत्त मार सवाहन । सुदाम पच्युग्गच्छागि मा म ठाना अचावयि ॥१८॥ यतेन नप्पमति सन का गोयवा । तं ते पाय गच्छामि आम पत्तर अम्मना' ।।१९।। गि मयान मकप्प राति च मुप्पतिट्टित । रट्टा र विपरिम्म मार दिनय पुथ ॥२०॥ त अपमता पहिलता मम सासनवारका । सामस ते गमिम्मन्ति यथ गन्त्या न मोरे ॥२१॥ मत वस्मानि' भगवत अनुवधि पना पर । आतार नापिगच्छिरस गानुदरग रातीमतो ॥२२॥ मटवणव पासाण वायसा अनुपरिपगा' । अपेत्य मुदु विदम अपि अम्मानना सिया ॥२३॥ अलद्धा तथ अस्माट यायमेतो अपक्वमि । कारोव मरमासज्ज" निधिपम गौतम तस्म मोरपरतस्य वीणा वच्छा अभग्मथ ततो मा दुम्मना याया तथरनरधाययानि ॥२५॥ पधानसुत्त निटिट (२६-सुभासित-सुत्त २३ ) व म सुत । एक समय भगा सावस्थिय विहति जतवन ० भगवा एन वोच-चहि भिक्या जगहि ममन्नागना वाचा सुभामिना होति न दुभासिता, अनवज्जा च अननुव जाच विशून । मनमहि चतूहि ? ध भिवखवे भिवतु गुभासित येव भासनि ना दुभासित धम्म येव भासति नो अधम्म पिय यैव भासति नो जप्पिय, सच्च यव भासनि ना लिव । इमेहि गो भिरपर चतूहि अगहि ममनागता वाचा मुभासिता होनि नो दुभासिता अनबज्जा च अननु वजा विशून नि । 1 'R अम्हना 1 सत्तवस्स . अनुपरीयगा C सेलमा 'स. नि. I I-4' 127" गोतमा म०-अनुपयन्ना TITT? परला नसास्थि from | पहा माया irRITTum दुग्गा मग! rurm रामाभो । Pा गारा रण माग मापदग्ग गUि॥ ৭ খালি যা মা 'ি। पमता पारिम याता॥ अगमसार पुस्मा अथा मान ति। यम या पुश्कान मास मण अगिता' पिरिप गगाच मागिता एव म नतिता मिनीषमागि नानमपि मोगानि जयं वा विगोमः। कि म पहिलसम्म माहित नूपगुम्मा || योनि मुम्गमानम्हि ति राम्भ प गुम्मति । मागु गामयानमु भिगा पिन पमी नि । भिग्या गति पन्ना समाधि मम दिन ॥१०॥ नस्स म विहातो पत्तम्मुनपान । बामे नापन चित्त परम सतग्ग' गुमन | वामा ने पठमा मना दुर्तिया अरति उच्चनि । सरिया सपिपामा त चतृया सम्हा पवननि ॥1॥ पञ्चम धामिद्ध ने ट्ठा भीरगच्ची । मत्तमा विचिनिन्छा त मनवा घभो त अद्रमा ॥ ॥ लाभो मिगका गवारो मिच्छाल्डो च या यमा । या चत्तान गमुम्पग पर च अवजाननि ॥१॥ एमा नमुचि त गना कम्माभिपहारिणो । न त जमरा निवाति जैत्वा च भने सुग ॥१५॥ एम मुज्ज परिर घिरत्य ग्ध जीवित । गगाम में मन मय्या य च जार पगजितो ॥१६॥ पगाना एत्य न निस्रान्ति एक ममण नाह्मणा । त म मय न जानन्ति यन गच्छति मुन्ना ॥१७॥ .८ एतदवि M तपो CM किचि If सद्धस्स 'R हारणी जावमनपुग्ध्य ३३४ ] मुलरिवभारद्वाज सुत्त [ ४७ मितितुवामो अहोमि। अय सो मुन्दरिवभारद्वाजस्म ब्राह्मणस्स एतदहोसि- मुण्गपि हि इघेवच्चे ब्राह्मणा भवन्ति यनूनाह उपमवमित्वा जाति पुच्छेय्य ति। जब ग्वा सुन्तरिवभारद्वाजो ब्राह्मणो येन भगवा तनुपसबमि, उपममित्वा भग चन्त एतदवाच-विजच्चो भवति । अथ सो भगवा सुनरिप भारद्वाज ब्राह्मण गाथाहि अज्यभासि- न ब्राह्मणा नोऽम्हि न राजपुत्तो, न वस्सायना उद' कोचि नो म्हि । मात्त परिल्याय पुथुज्जनान, अविचनो मन्न चगमि रोर ॥१॥ सपाटिवासी अगहो' घरामि, निवुतक्सा अभिनिव्युतत्तो। अलिणमाना इप माणदेहि अक्कलम (ब्राह्मण) पुच्छमि गातान्त ॥२॥ पुच्छन्ति वे भो ब्राह्मणा ब्राह्मणहि सह ब्राह्मणो नो भवति । ब्राह्मणो चे त्व यूमि म च यूमि अग्राह्मण । त सार्वित्त पुच्छामि निपद चतुवीसतवर ॥३॥ किनिस्मिता इसया मनुजा सत्तिया ब्राह्मणा, देवतान यजमकप्पयिंसु पुयु इध सके। यन्न्तगू वेदगू यलकाले, यस्माहुतिं लभे तस्मिज्याति भूमि ॥४॥ जद्धा हि तम्म हुतमिज्झे (ति ब्राह्मणो), य नादिस वदगु जहमाम । तुम्हादिसान हि अदस्सनेन अजा जनो भुञ्जति पूरळाग ॥५॥ तस्मातिह त्व ब्राह्मण अत्यन, अथिको उपसम्म पुच्छ । सन्त विघूम अनिघ निरास अप्पेविध अभिवि दे सुमध ।।६।। यज रताह (भो गोतम) यन्न यिटठुकामो। नाह पजानामि अनुसासतु म भव यत्थ हुन इन्झत ब्रूहि मे त ॥७॥ तेन हि त्व ब्राह्मण जान्हस्सु सोत धम्म ते देसिस्सामि-- मा जाति पुच्छ चरण च पुच्छ वट्ठा हर जायनि जातवेदा । नोचा कुलोनो पि मुनी धितीमा आजानियो होति हिरीनिसेधो ॥८॥ सच्चेन दन्तो नमसा उपेनो वेग्लगू वुसितग्रह्मचरियो । फालेन तम्हि हव्य पवेच्छ यो माह्मणो पुज्ञपेक्वो यजय ।।९।। ये कामे हित्वा अगहा' चरन्ति सुमन्नतत्ता तसर व उज्नु । कारन तमु हव्य पवेच्छे , यो ब्राह्मणो पुनपरखो यजेथ ॥१०॥ .नुद *C. R, B अगिहो [ अल्ल्ल 1 R पुच्छि + R अगिहा [ ३८ ४६ ] सुत्तनिपातो मवीच भगवा २६ वत्वा सुगतो जथापर एतत्वाच सत्या- भुभासित उत्तममाहु सन्नो । धम्म भणे नाधम्म त दुतिय । ग्यि भण नाप्पिय त तनिय । सच्च भण नालिक त चतुत्थति ।।१॥ अथ खो जायस्मा वगीसो उठायासना एक्स चीवर क्त्वा यन भगवा मनालिं पणामत्वा भगवन्त एतदवोच-परिभाति म सुगाति । पटिभानु त वगीसाति भगवा जवाच । अथ खो आयस्मा वगोसो भगवन्त सम्मुखा मागप्पाहि गाथाहि अभित्यदि- तमेव भास भामय्य यायत्तान न तापय । परे च न विहिमेय्य सा व वाचा सुभासिता ॥२॥ पियवाचमव भासेय्य या वाचा पटिननिता । य अनानाय पापानि परेम भासते पिय ॥१॥ मच्च व अमता वाचा एम धम्मो सनन्ननो। सच्चे अत्थे च धम्म च आहु सन्तो पनि ट्ठिता ॥४॥ य बुद्धा भागता' वाच सम निब्याणपत्तिया। दुबवरम पाविरियाय मा व वाचानमुत्तमा ति ॥५॥ सुभासितमुत्त निटिठत। ( ३०.-सुन्तरिकभारद्वाज सुत्त ३१४ ) एव म मुर। एक समय भगवा मोग'गु विनरति गुलरिवाय नरिया तीरे । नामो पन रामयन गुनरिवभारद्वाजो बामणा मुरिराय नरिया तारे जग नहन्ति अग्गिहर परिचरति । अय यो मुनरिक भारद्वाजा ग्राह्मणा अग्गि जुहित्या अग्गिहुत्त परिचरित्या दायासना ममना चादिमा अविरोमियो नको "म हयगम भुजय्याति । अद्दसा ग्यो सुनरिकभारद्वाजी बामणो भगवन आर अन्तरिम पापमूर ममीम पारपत निशिन निम्यान वामन धन हन गम गवानीपणन प्रत्यन माग वा यन मगया तनुपमवमि । जय घा भगवा मुरिवभारगमम्म वागणरग परमद्दन माम रिपरि । अय पर मुग्मिनाराजो प्राह्मणों, मुणगे अब भर मुण्डो जय भवानि ता पुन . भासति •B पूरळासमुतं IM हप.
माघ-मुत्त [ ४९ - हुन च मरह हुतमत्यु सच्च य तानिस वदगुन अल्त्य । ब्रह्मा हि सविन्द पदिगण्हातु मे भगवा भुञतु मे भगवा पूरळास ॥२५॥ गाथाभिगीत मे अभोजनस्य मपस्सत ब्राह्मण नस धम्मो । गामाभिगीत पनुदन्नि बुद्धा धम्मे सति ब्राह्मण वुत्तिरेसा ॥२६॥ अग्मन व देवलिन महेस , सीणासव कुकुच्चनूपसन्त । अनेन पानन उपटठहस्सु येत हि त पुज्नपेक्षम्स हाति ॥२७॥ माधाह भगवा तथा विन्न , यो दक्षिण भुजय्य मानिसस्म । य यलकार परियसमानो , पप्पुय्य तव सामन ॥२८॥ सारम्भा यस्स विगता चित्त यस्स अनाविल । विप्पमुत्तो च कामेहि थीन यम्म पनून्ति ॥२९॥ सीमन्तान विनतार जातिमरणकोविद । मुनि मोनेय्यसपन ताश्मि यन्नमागत ॥३०॥ भटि विनयित्वान पजलिका नमम्मथ । पूजध अनपानेन एव इज्यन्ति दक्षिणा ॥३१॥ बुद्धा भव जरहति पूरळास पुनक्वत्तमनुत्तर । आधागो सब्बलोक्स्स , भोतो दिन्न महप्पलऽति ॥३२।। अथ वो सुन्तरिकभारद्वाजो ब्राह्मणो भगवन्त एतत्वोच-अभिक्रन्त भा गोतम अनकपरियायेन धम्मो परासिता । एमाह भवन्त गोतम सरण गच्छामि धम्म च भिक्खु सप च। लभेय्याह भोनो गोतमस्स सन्तिक पब्बज्ज लभय्य उपमपरऽनि । अलत्थ खो सुन्दरिक्भारद्वाजो ब्राह्मणो पे० अरहत अहोसीति । सुदरिकभारद्वाजसुत निटिठत । प० (३१-~-माघ-सुत्त ३।५) एब मे मुत । एक समय भगवा राजगहे विहरति गिझाटे पव्वते नय सा मायो माणको यन भगवा तनुपमकमि। उपमामित्वा भगवना सद्धि सम्मोनि। मम्मोदनीय क्थ साराणाय धीतिमारेत्वा एवमन्न निगोशिएवमल निसीनो सो माषो माणयो भगवन्न एतत्वोच-अह हि भो गोतम दापो दानपनि बञ्ज याचयागो धम्मेन भोग परियसामि धम्मन भोग परियेमिन्वा धम्मग्रहि भोगहि धम्माधिगतहि एक्स्स पि दामि, द्विग्न पि दामि तिण्ण पि दनामि चतुघ्न पि ददामि पचन पिदामि, छन्न पि दनामि, सत्तन पिनदामि, अद्रुघ्न पितामि मवान पि ददामि दस पि ददामि, वीसायापि ददामि तिसाययऽपि दनामि ४ TI पm ram का TITITI Pru" TITril Tमगुरम IN 4Tirtant पmirmire-पाग मो- TI गनिम TTrt or writ Trurt ममा गा विमा ह िITTI नionा या 'TI gramin पनि माया ममाना km गिगा। Timi friyा वा मामा गोri in पायता T | frगो पामामो माग frमाम 14-14गि। भाग पाहा या सपा IT TO॥१६॥ मामा उतार आ घाम पत्यागि राय पिा। गीतामा अगिमप्यारा गय पर *वागता यग्ग गसी ma felm RATE 1 म । गयेगू गयि विष्णमुना Tut yळाग ॥१८॥ सगानिमा पस्मन मन्तिसगा या मागिभगुजमाामगा। टार्ग परिन्गार मुगरापधु नयाग11 अररिकामं ॥१॥ माग निम्मार गिरासी पन्य निमुपागवता । जारम्मणा यरस न राति पनि यागना अरशी पूरर ॥२॥ परापरा यस्म ममम्प धम्मा, विधुश्तिा जयगतान मन्ति । सन्तो उपानमय पिमुमो गयागको अहगी पूराम ॥२१॥ मयाजन जातिगयन्नस्सी यापानि रागपथ अगम । गुदा निद्दोमा विमगे नवाचा' नयात नरहनि पूरळारा ॥२२॥ यो अतना न नानुपस्मति गमारिनो उजुगतो नि । 14 अनजो अति आसो नयागतो जहरनि पूरठाम ॥२३॥ मोहनरा यम्स न गनि चि मञ्चमु धम्ममुच जाणामी। भरीर प अतिम धारनि , पता च राम्बोधिमनुतर गिय । एतावता यमग मुद्धि तथागतो अरहति पूरनाम ॥२४॥ R सो C अकामो , ६०५] माघ-मुत्त [ ५१ य वे न तण्हासु उपानिपन्ना , वितरेय्य ओघ अममा चरन्ति । पारन तमु हव्य पवच्छे , यो ग्राह्मणो पुश्यपेक्सो यजय ॥९॥ पेस' नहा नत्थि कुहिञ्चि गेन , भवाभवाय इघ वा हुर वा। पालेन तेसु स्य पदच्छे , यो ब्राह्मणो पुअपेक्सो यजेथ ॥१०॥ य कामे हित्वा अगहा चरन्ति मुसम्जनत्ता तमरज उग्नु । पारन तमु हव्य पवच्छे , यो ब्राह्मणा पुजापरतो यजय ॥११॥ य वीतरागा सुसमाहितिद्रिया भन्दो व राहगणा पमुत्ता। पालन तेसु हव्य पवेच्छ यो ब्राह्मणो पुत्रपक्वो यजय ॥१२॥ समिनाविनो बीनरागा आपा , यस गति नत्यि इध विप्पहाय । वारेन तेसु य पर्वच्छ , यो ब्राह्मणा पुम्सपेक्खा यजेय ॥१३।। जहेत्वा जानिमरण असस क्यस्य स यमुपातिवना। पारेन तेसु हल्य पवच्छे यो ब्राह्मणो पुन्नपेक्वो यजथ ॥१४॥ य अत्तीपा विचरन्ति लोके , अकिंचा सम्बधि विप्पमुत्ता । वालेन तमु हव्य पवच्छ , या ब्राह्मणो पुपक्खो यजेथ ॥१५॥ य हेल्थ' जानन्ति यथातथा द , अयमन्तिमा नत्यि पुनभवोति । कारन तेसु हव्य पवच्छ , यो ब्राह्मणो पुन्जापेश्वो यजेय ॥१६॥ यो यदगू झानरतो सतीमा , समाधिपत्ता सरण बहुन । मालेन तम्हि हव्य पवेच्छ , यो ब्राह्मणो पुश्नपेक्खो यजथ ॥१७॥ अद्धा अमोपा मम पुच्छना अहु , अक्वासि में भगवा दक्षिणेये। त्व हेत्य जानासि यथातथा इद , तथा हि ते विदिता एस धम्मो ॥१८॥ यो याचयोगो दानपति गाँठो (इति माघो माणवो), पुञ्जत्यिको यजति पुञ्पेक्यो । दद परेस ध अनपान अक्वाहि में भगवा यन्यसपद ॥१९॥ यजस्मु यजमानो (माया ति भगवा), सम्बत्य च विप्पसादेहि चित्त । जारम्मण यजमानस्स यना एत्थ पतिट्ठाय जहानि दोस ॥२०॥ मो' वीतरागो पविनय्य दोस , मत्त चित्त भावय अप्पमाण । रति दिव सतत अप्पमत्तो सम्वा दिमा फरत अप्पमम् ॥२१॥ . 'R येस इत पर-तु, *M सतिमा P यशो R 351 M 331 . यो एल्य • स विनेय्य मग'Tat पmirrrrrrrru mms IE, मिनी मि पागोTriratnaxmi Tre तमा Patri पर Me Inो माया रवान REE भो fair समन भाग fr from माम माfuffrom IT PAHETimirmir अप गो मNI HI भगवी गाधार अगमाग-- पृशाम भा ग (THE TI) , পালাগালি পা । यो मापापा PATT गानो गुrnfurt पुगा । गई परम आगरा पहुत मनमामि गु॥१॥ (या) पामयागो (मापात भा), पुग्नागिमा पनि पुरानो। परमपमत्रानं भारापये गिरा रिमा-|| या पापगो दा गालो ( माणमो) पुगिसो पनि पुस्माना। परगप अभपा अम्गारि में भगवाये || यय अससा विपरनिष असिनापयन्निो पाता। शान मेगु हा पदमले या पाहाणा पुस्गोमा पप ४॥ म सबसयोजारधानिय ला विमुप्ता अप्रिपा निरामा । पान नमु हम्प पन्त , या ब्राहाणो पुश्यपेकपो यजेय ।। ।। 4 सम्ममयोजनषिणमुना ला रिमुषा निया निरासा ! जान तेमु प्रध्य पवेग यो मानणा पुस्मायो यजेय ॥॥ रागं च दोम च पहाय मोर , मीपासया मिताहापरिया । रान तेमु हव्य परेन्द्र यो बाह्मणो पुष्परयो पजथ ॥७॥ ममु न माया वराती न मानो' , ' योत्रलाभा अममा निरासा । पारन तमु य पवेच्छ यो ब्राह्मणो पुनपेक्षा यजय ||८|| 'M यो यते पोणासवा युसितब्रह्मरिया हिताय पादस्याने कालेन सेमु । *Mत पर पद्यान्तर अरभ्यते-- ये वीनलोभा अममा निरासा। खोणासया सितब्रह्मचरिया। कालेन तेसु - ३१६] सभिय-मुत्त [५३ च गणाचरियो च जाता यसस्मो नित्यवरो साघुसम्मतो बहुजनस्स यन्नूनाह समण गोतम उपसमि वा इमे पन्हे पुच्छय्य'ति । अथ खो सभियस्म परिवाज क्स्स एतदहोसि-यऽपि खो ते भोलो समणब्राह्मणा जिण्णा बुद्धा मह लवा अद्धगना वया अनुप्पत्ता थेरा रतन चिरपन्यजिता सघिनो गणिनो गणाचरिया जाता यसस्सिनो तित्यारा माथुसम्मता, बहुजनस्स सेय्यथीद-पुणो कस्मपा पे० निगण्टो नातपुत्तो तऽपि मया पञ्हे पुट्ठा न सपायन्ति जमपायन्ता कोष च दोम च अप्पच्चय च पातुबगलि अपि च मन्नेवेत्थ पटिपुच्छन्ति । कि पन म समणो गोतमो इमे पञ्हे पुटठो व्याकरिस्मति । समणो हि गोलमो दहरा चेव जातिया नवा च पन्यज्जायाति। अथ सो मभियस्स परिबाजक्स्स एतदहोसिसमणो मा दहराति न परिभोत बो। दहगेऽपि चे समणो होति, सो होति महिद्धिको महानुभावो, यनूनाह समण गोनम उपसव मित्ला इम पन्ह पुच्छय्यऽति । अथ खा मभिया परिब्वाजको यन राजगह तेन चाग्नि पक्कामि । अनुपुल्वन चारित चरमानो यन राजगह वेळुवन कर दवनिवापो यन भगवा तेनुपसकमि, उपसमित्वा भगदता सद्धि सम्मादि सम्मोदनीय क्थ सारागीय वीतिमारेत्वा एक्मत निसीदि । इक्मन्त निसिनो खो मभियो परिब्बाजको भग वन गाथाय नमामि--- क्खी वेचिकिच्छी आगम (इति मभिया ।) पन्ह पुच्छितु अभिक्खमानो। तमन्तरो भगवाहि' पुटठो अनुपुब्ब' अनुधम्म व्याक्रोहि मे ॥१॥ दरतो लागतो सि सभिया (ति भगवा) पन्हे पुच्छितु अभिक्खमानो। तमन्नवरो भवामि पुरो', अनुपुब्ब' अनुधम्म व्याकरोमि ते ॥२॥ पुच्छ मम मभिय पह, य विचि मनसिन्धसि । तस्स तस्गव पहिस्स अह अन्न करोमि ताति ॥३॥ अय यो अभियरस परियाजवस्म एत-होसि--अच्छरिय वत भो, जम्भुत चत भो, यावताऽहं अनंसु समणराह्मणमु आवासमत्तापि नासत्य, तं म इन समणन गोतमेन ओकासम्म वनति अत्तमनो पमोरिता उगा पीतिमाम नस्मजातो भगवन्न पम्ह पुच्छि- . 'M भव भयाहि R भवाहि में NI,R पन्हे मे पुटठो अनुपुम्म ROM सेसमन्त करोमि ते 'R पहे पुटठो अनुपुर्व । पञ्हे पुटठो अनुपुर्य मुत्तलिपा को गुमति मुमति यानि बनाना गयति ब्रह्मलो।। अजानना म मुनि श्रूहि परठा , भगया मि गरिय ब्रह्मग्न टिठा। तु हि ना ग्रह्मगमा निमम य उप्पजति ब्रह्मा (जुनामा') ॥२२॥ या यजति निविध यामपर (भाषानि भगवा) जारापय विषणय्य नितार एप यजित्वा सम्मा यानयागो उपजति प्री पूमोनि ॥२३॥ एव वुत्त मापो माणवो भगवन तवयभिवान भी गोलम- पे० अज्जतग्ग पाणुभेत मरण गतति । माघसुत निरिठत। तस्मा (३२---समिय-सुन ३१६) एव में मुन । एक गमय भगवा राजगहे विहरति बेवन बलतकनिवापे। तन सो पन समयन भियस्म परिवाजक्स्स पुराणमा हिताय काय पन्हा उहिट्ठा हान्ति-यात सभिय समणी या ब्राह्मणा वा इमे पन्हें पु-यो ब्यारोति, तस्स सन्ति + ब्रह्मारियं चरेय्यामीति। जथ खा सभियोपरिब्याजको देवताय सन्ति पन्द उग्गहेवा ये न समणबाह्मणा सधिनी गणिनी गमावरिया शाता यसस्सिना तित्यवरा साधुसम्मना बहुजनस्स, सय्यथाद-पूरणा कम्मा मपरि गासालो अजिनो कसकरली', पवुधो' पञ्चायनो मजयो देठ द्विपुता' निगण्ठा नातपुतो ते उपसवामित्वा ते पहै पुच्छति । ते सभियन परिबाजवन पश्हे पुट्ठा न सपायन्नि असपायता बारच दोम च अप्पच्चय च पातुवरोन्नि अपि च सभिय येव परिम्वाजा परिपुच्छन्ति । अथ खो सभियस्स परिवाजक्स्स एपदहोसिय खो ते भोन्तो समणब्रह्मणा सपिना गणिनो गणाचरिया माता यसस्मिनो नित्यारा साधुसम्मता बहुजनस्स सेय्यथाद-प्रणो वस्सपा निगण्ठो नातपुत्तो, ते मया पञ्ह पुट्ठा न सपामन्ति अस्पायन्ता कोप च दोस च अप्पच्चय च पातु रोति, अपि च मन्नवत्य पटिपुछति यनूना हीतायावत्तिवा वामे परिभुल्जय्य ति । अथ यो मभियस्म परिब्याजकस्म एत-होसियऽपि ममणा गानमा सघी घेव गणी प. .: जतिमा M जुतिम CM सबको "M बेगु .C नाथ पुतो 1 नाट" ३.६ ] मभिय-सुत्त सतानि विनेय्य' क्वानि (गभियानि भगवा), हिन्य' मानुमद च ब्रह्मवेत्त। सव्यगत्तमूलबंधना पमुत्ता, सतजिनो नादि पन्चत तथता ॥१५॥ कामानि विचेय्य केवगनि, तिब्ध मानुस न ब्रह्मकोस । (मन्य) काममूल्बधना पमुत्ता, घुमगे तादि पवुच्चते तथता ॥१६॥ तदुभयानि' विधेय्य पण्डरानि, अज्मत्त बहिरा च मुद्धिपना। व मुवा उपातिवत्तो, पन्तिा तादि पवुच्यते तथत्ता ॥१७॥ असन च सत च जत्वा धम्म, अज्ात्त च वहिदा च सब्बठोके । वमनुस्महि पूजितो मो, मग जालमतिच्च सो मुनीति ॥१८॥ अथ सो सभियो परिबाजको प० भगवन्न उत्तर पन्ह पुन्छि- कि पत्तिनमाहु धेदगु (इति मभियो) अनुविदिन कन क्य च विरियवानि। आजानियो किंति नाम होति, पुटटो मे भगवा व्याफ्रोहि ॥१९॥ वेदानि विचय्य घेवलानि (सभिया ति भगया), समणान यानिप्पस्थि ब्राह्मणान । सब्बवदनासु वीतरागो सब्च वेदमतिच्च वेदगू सो ॥२०॥ अनुविच्च पपचनामरप अज्झत्त बनिद्धा च रोगमूल । सब्वरोगमूलवधना पमुत्तो, जनुविनितो ताति पवुच्चत तथत्ता ॥२१॥ विरतो इध सम्बपापहि निरयदुक्वमनिच्च विरियवा सो। सो विरियवा पधानवा धीरो तादि पच्चते तथत्ता ॥२२॥ यस्सऽस्सु लुतानि' वधनानि, अन्यत्त वहिद्धा च सब्वमूर। (सब्ब) मगमूल्बधना पमुत्तो आजानियो तादि पवुच्चते तथत्ताऽति ॥२३।। अय खो सभियो परियाजको पे० भगवन्त उत्तरि पन्ह पुच्छि-- विपत्तिनमाहु सोत्थिय' (इनि सभियो) अरिय कन क्थ च चरणवानि । परिब्बाजको विनि नाम हाति, पुटटो मे भगवा ब्याक्राहि ॥२४॥ सुवा सम्बधम्म अभिजाय लोर (सभियानि भगवा), मावज्जानवग्ज यदस्थि विचि। अभिभु अक्यथि विमुत्त अनीप' सम्बधिमाहु माथि योनि ॥२५॥ 1B वजेग्य' तिपि R कण्हमुक्क P पण्हसुक्क •R अनिघ R सोत्तिय R दिव्य • लुनानि R, दुभयानि R सोत्तिय गा সুগনি fr पत्तिामा भिामा भिना) म ra मा | धमानि पानि म भगवा माrnfrom पत्रन पता भता (गमिपा भगरा) पनि निगागा। वि भय Tfranय पणितया गालामा म भिा ||५|| गव्यस्थ HIT सनामा मगाशन ग निगम अनाविणे ग्मा गग्ग गान गाना गा ॥१॥ परिमप्रियानि भाषितानि न वशिाम सचा निवितरम पर प र नरिभाषित गन्ना पणात विचम्य पनि गमार भय मापाने । विगतरजमना विमुद्ध पर्म जानिरामय समाह बुभति ॥ जय सा ममियो परिव्यागरा नगा नामित अभिागित्वा अनुमारिवा बत्तमनो पमागिता उनगो पाशिमामनगजाना भगन उरि पन्ह पुस्ति- विपत्तिनमा प्राह्मण (इनि मभिया), ममणे पन पय पहात योनि । नागाति पय पवुन्नति पुग में भगवा ध्यारा॥९॥ याहत्वा गब्बपापानि (मभियाति नगवा), विमलोमा धुगमाहिता ठिनता। गसारमनिच्च क्वली मो, असिता तानि पवुच्चने ग" ब्रह्मा ॥१०॥ रामितावि पहाय पण पिरोकत्व इम पर मगा। जानिमरण उपातिवत्तो समणा ताति पत्रुच्चन नथत्ता ॥११॥ निहाय स पापानि अनात्त वहिदा च मरलोरे। वमनुम्मसु कप्पियमु पप्प नति तमाई हात कोऽति ॥१२॥ आग न क्रानि विचि लार सबसयोगे विम ज य यानानि । रायथ न मज्जति विमुत्तो नागो तानि पच्चते' तयत्ताति ॥१३॥ अथ सो सभियो परियाजको प० भगवन्त उत्तरि पह पुन्छि- चमत्तजिन वन्ति बुद्धा (इति सभिया), कुसर कन क्य च परितोति । मुनि नाम क्य पवुच्चति पुनटो मे भगवा व्याकरोहि ॥१४॥ 'R सोरत B 'सूरत' ति पि P निम्बिना १८ नहातको .C स्यज्यते B सो LC निनहाय 'C पच्चति ३७ ] सेल-सुत [ ५७ तुव बुद्धो तुच सत्या तुव माराभिभू' मुनि। तुव अनुसये छन्वा तिण्णो तारसिऽम पज ॥३६॥ उपधी ते समतिक्वन्ता आसवा ते पदारिता। मोहोऽसि अनुपादानो पहीनभयभेरवो ॥३७॥ पुण्डरीक यथा वग्गु तोये न उपलिप्पतिः । एव पुगे च पापे च उभय त्व न लिप्पमि । पाद वीर पमारेहि मभियो वन्दनि सत्युनोऽति ॥३८॥ अप खो सभियो परिधाजको भगवतो पादेसु मिरसा निपतित्वा भगवन्त एतत्वोच----अभियन्त गोतम प० धम्म च भिक्खुमघ च लभय्याह भन्ते भग वतो सन्तिके पब्बज्ज लभय्य उपमपदति। यो खो सभिय अतित्यियपुब्बा इमस्मि धम्मविनये आकसति पयज्ज, आक्खति उपसपद मो चतारो मास परिवसति, चतुन मासान अच्चयेन आरद्धचिता भिक्र पब्वाजन्ति उपसपा-न्ति भिक्चुभावाय । अपि च मेऽत्य' पुग्गलवेमत्तता विदिताऽति। सचे भन्ते अश्मतिथियपुव्वा इमस्मि धम्मविनये आक्खन्ता पब्बज्ज आखिन्ता उपमपद चत्तारो माम परिवसन्ति चतुन मासान अच्चयेन आरद्धचित्ता भिक्खू पब्वाजन्ति उपसपादन्ति भिक्सुभावाय, अह चत्तारि वस्सानि परिवसिस्सामि, चतुन वस्सान अच्चयन आरद्धचित्ता भिक्खू पब्बाजेन्तु उपसपादेन्तु भिक्षुभावायाति । अलत्य मा मभियो परिब्दाजको भगवतो सन्ति पबज्ज अल्त्य उपसपर पं०. अञ्जतरो मो पनायस्मा ममियो अरहत अहोसीति । सभियसुत्त निटिठत। एव मे (३३--सेत सुत्त ३१७) सुत। एक समय भगवा अगत्तरापेसु चारिख चरमानो महता भिक्सु सधन सद्धि अड्ढतळगेहि भिक्युमतहि येन आपण नाम अगुत्तरापान निगमो त वसरि। अस्मोसिम्खो कगियो जटिलो-समणा सलु भा गोतमो मक्यपुता सत्यकुला पब्बजितो अगुत्तरापेसु चारिक घरमानो महता भिक्षुगपा सद्धि अडवतळमेहि भिवखुसतहि आपण अनुप्पत्तो त मा पन भवन्त गोतम एवं I मायाभिभू .C. II उपधि । उपलिम्पति NE लिप्पसि १६ ] मुत्तनिपाना [१६ छ वा आमवानि आल्यानि, विद्वा सो न उपति गभगम्य । म तिविध पनुज्ज पर क्ण नति तमाहु अग्यिो ति ॥२६॥ यो श्ध चरणसु पत्तिपत्तो युमला भव्यता गाजानानि । धम्म । भब्वत्थ न मज्जति विमुता', पदिघा यस्स न रान्ति चरणवा मो ॥२७॥ दुक्खवपवार यथि कम्म उद्ध अधो निरिय धापि मज्य। परिवग्जयित्वा परिशचारी माय मानमथो पि लोभोय। परियन्नमवासि नामरूप, त परि गाजक्माह पत्तिपत्ताति ॥२८॥ अय सो सभियो परिबाजका भगवता भासित अभिनन्नित्वा अनुमादित्वा अत्तमनो पमादितो उग्गो पातिमोमनस्मजाता उट्ठायमाना एरम उनरामग धरित्वा यन भगवा तेनति पणामत्वा भगवन्न सम्मुखा सारुप्पाहि गाथाहि अभियाव- यानि च तीणि यानि च सठि समणपवादसितानि' भूरिपज। सावर सननिस्मितानि ओसरणानि विनय्य जोधत अगा ॥२९|| अन्नगूसि पारगूसि दुक्खस्म अरहासि सम्मासयुद्धा खीणासव त मो। जुतिमा मुनिमा पनपना दुक्पस्सन्तकर अता रपि म ॥३०॥ य मे कवितमन्नासि विचिरिच्छ म अतारेसि नमो ते। मुनि मोनपथम पत्तिपत. अग्विल आनिववधु सोरतोसि ॥३१॥ या में करवा पुरे आसि त में ध्यानामि चकावुमा । अद्धा मुनीसि सबुद्धो नत्यि नीवरणा तव ॥३२॥ उपायासा च ते सच विद्धस्ता विनरीक्ता। सोनिभूतो दमप्पत्तो धिनिमा सच्चनिक्कमा ॥३३॥ तस्न ते नागनागस्स महावीरस्स भासतो। सब दवा नुमोदन्ति उभो नारदपञ्चता ॥३४॥ नमो त पुरिमाजन्न नमा त पुरिमुत्तम । सदेवकस्मि रोवस्मि नत्थि त परिपुग्गरे ॥५५॥ IC दुक्ख 'R, C अजानि 11 विमुत्तचित्तो "B,M परिवाायित्वा Mमानपय विलोभरोध M निस्सितानि IM पञ्चक्खर० C दुग्यस्सन्तर अतारेसि l,C थिचिमिछा . नास्ति भत्तिपत्त ३७ ] मेल-सुतं [ ५० रप्पभेदान इतिहासपचमान पटको वेय्यावरणो लोगायतमहापुरिगरवपणसुअवयो तौणि माणवक्सतानि मन वाचेति। तेन खापन समयन मणियो जटिल सेल ब्राह्मणे अभिप्पसनो होति। अथ यो सेला ब्राह्मणो तीहि माणवरसतेहि परि चुतो जघाविहार अनुचक्ममानो अनुविचरमानो यन कणियस्स जटिलस्स अस्ममो तेनुममि । असा यो सलो ब्राह्मणो कणियस्समिये । जटिले अप्पकच्चे उद्धनानि खणन्ते--पे० अप्पेबच्चे आसनानि पन्नापेन्ले, वणिय पन जटिल साम यव मण्डलमाल पटियादन्त । दिस्यान केणिय जटिल एतत्वोच-विनु भातो कणियस्म आवाहो वा भविस्मनि, विवाहो वा भविसति, महायजो वा पच्चु पट्टितो, राजा वा मागधो रोनियो विपिसारो निमन्तिता स्वातनाय मद्धि बरकार्यताति। न मे मेल आवाहो भविस्सति, नऽपि विवाहो भविम्मति, नऽपि गजा मागधो सेनियो विविसारोशिमन्तितो स्वातनाय मद्धिं परवायेन अपि च पो मे महायजो पच्चुपट्ठिता अत्यि। समणो गोलमो सत्यपुत्तो सक्यकुला पवजितो अगुत्तगपेसु चारिष घरमानो महता भिक्षुगधेन मद्धि अडढतळमेहि भिक्वुसतेहि आपण जनुप्पता। त खो पन भवन्त गोमत प० सुद्धो भगवाति । गा मे निमतिता स्वातनाय सद्धि भिक्युमघाति । बुद्धोऽति खा कणिय वसि । बुद्धोऽति भो सेल यामि । वुद्धोऽति भो केणिय वसि । बुद्धोऽति भो सेल बदामीति । अथ खो सेगस्म ब्राह्मणस्स एतदहोसि-चासोऽपि यो एमो दुल्लभो रोपस्मि यदिद बुद्धोऽति। आगतानि खो पन अस्मान मन्तमु दत्तिममहापुरि म क्षणानि येहि समन्नागतस्म महापुरिसस्स द्वेऽव गतिया भवन्नि अनन्ना। सच अगार अज्झावसति राजा होति चक्रवत्ती धम्भिको धम्मराजा चातुरन्तो विजितायी जनपदत्थावरियप्पत्तो गत्तरतनसमागतो। तस्मिमानि सन रतनानि भवन्ति, सेय्यथी-चबरतन हत्थिरतन, अस्मरनन, मणिरतन, इस्थिरतन, गहपनिरतन, परिणायपरतनमेव सत्तम। परोसहस्म सो पनस्स पुत्ता भवन्ति सूग वीरगम्पा परसनप्पमद्दना । सो इम पठवि सागरपरियन्त अदण्डेन असत्यन धम्मेन अभिविजिय अमावसति । सचे खो पनागारस्मा अनगारिय पञ्बजनि अरह हानि सम्मासबुद्धा लोये विवत्तच्छद्दो। वह पन भो केणिय एतरहि सो भव गोलमो विहरति अरह सम्मासयुद्धोति । एव वुत्ते कणिया जटिलो दक्षिण बाह पागहे या मेल ब्राह्मण एतदवोच- येन सा भो मेर नीग्वनराजीति । अथ खो सेगे ब्राह्मणो तीहि माणवक्सतेहि सद्धि यन भगा तनुपसकमि । अम सा गलो श्राह्मणो ते माणवके आमन्तसि-अप्पसद्दा भोन्नो जागच्छन्तु पद पद निक्रिपन्ना दुरामा हि ते भगवन्तो मोहाय एवचरा, यदा चाह भो समको ' केनियस्य जटिलस्स अस्समे . वियटच्छदो २८] गुनिपा। [ याणा वितिमहा अभुगतो-~-irl मो भगवा धरहे सम्मागयुद्धा विजा गरणगपना मुगनो गाविद मग पुग्गिाग्मगारपि मन्या दर मनुम्मान बद्धो भगा मा इम Pा मावा गमारायं मयार मम्ममणान पत्र रामनुस्म मय अभिन्या मच्छिका पर-नि मो घाम पनि आनिम्याण मावत्याण परियोमानपल्याण मार्य गन्यज्ञामरम्परिपुषा पग्गुि ब्रह्म चरिय पषासति साधु यो पन तयापान अरहनं तम्गनं होतानि । अथ या पाणिया जरिये यन भगवा तेनुपर्मवमि अगामिया भगवना सदि गम्मान, सम्मोग्नार्य र सागणीय वानिगारेत्या एकमले रिमीनि। पमन्नं शिमिन्नं मा पणिय जरिए भगवा धम्मिया कथाम मग्गमि ममागगि समुत्तजमि गह गसि । जथ खोमणिया जरिये भगवना पम्मिया माय सम्मिा गमालपितो समुत्तमितो गपमितो भगवन्त एकापाच-अधिनामतु म भर गानमो स्यातनार भत्त मद्धि निम्युमधनाति। एव वृत्त भगवा यणिय जटि पायात्र-महा गो वणिय भित्रमुगधो अइनळगानि भिगमतानि त्वम सो ब्राह्मणगु अभिष्ण सप्नोति। दुनियापि यो वणियो जनिता भगवन्त एन गोवपिचापि भी गोतम महाभिययुगपो अडढनेटमानि भिस्वमतानि च ग्राहाणगु अभिप्पमा अधिनामतु में भवं गोतमा स्वातनाय भत सद्धि भिक मघनानि । दुनियापि सो भगवा वणियं जटिल एतत्वोच-महा वा वणिय भिानुमपा अन्तवसानि भिक्खुमनानि त्व च यो ब्राह्मणसु अभिपसमाति। तनिय पिया कणिया जग्लिा भगवन्त एन वोच-विचापि भी गोतम महाभिक्सुमधो अन्तमानि भिक्गु सतानि, अह च खो बाह्मणसु अभिष्पमतो अधिवासेवा मे गोनमो स्थान नाय भत्त सद्धि भिवसुमधनाति । अधिवामसि भगवा तुण्हीभानेन। अथ सो पणिया जटिंग भगवतो अधिवासन दिन्विा उडायासना यन मो अस्समो तनुपसकमि । उपमवमित्वा मिताभच्चे शातिमागेहित आमन्तसि---गुणन्तु म भोन्तो मित्तामच्चा ञानिसारोहिता, ममणो म गोतमो निमन्नितो स्वातनाय भत्त सद्धि भिक्म्वुमधन यन म कायवेय्यावटिक वरेय्यायाति । एव भोऽति खो पणियस्स जटिलरा मितामच्चा जातिसालाहिता कणियस्म जटिलम्स परिस्सुत्वा अप्पेबच्चे उद्धनानि खणन्ति अप्पेबच्चे वट्टानि फालनि अप्पक्च्च भागनानि धावन्ति अपेक्च्चे उदक्मणिक पनिट्टापन्ति, अप्पकच्चे आरानानि पळापन्ति पणियो पन जटिलो साम येव मण्डलमाल पटियालति । तन सो पन समयन सेलो ब्राह्मणो आपण पटिवसति तिण्ण वान पारगू सनिघण्टुक्टुभान साक्र .M भवतो १०] गर-गुत्ते सतिया भोजराजानो अनुयुता भवन्ति त । गजाभिराजा मनुजिदो रज्ज पारेहि गोतम ॥६॥ राजा मम्मि सला (ति भगवा) धम्मराजा अनुत्तरो। धम्मेन चा वत्तमि चक्र अप्पतिवत्तिय जा मनुरो पटिनानासि (इति मेरो ब्राह्मणो) धम्मगजा अनुत्तरो। धम्मन चा वत्तमि इति भामि गोतम ॥८॥ पो मेनापति भोतो सावको सत्युद वयो। वो इम अनुक्त्तति धम्मचक्र पव'तित ॥१॥ मया पयत्तित चक्र (सरा ति भगवा) धम्मचक्र अनुतर । सारिपुत्तो अनुवत्तेति अनुजातो तथागत ॥१०॥ अभिनेय्य अभिजात भावतव्य च भावित । पहातब्ब पहीन म तस्मा बुद्धोऽस्मि ग्राम्हण ॥११॥ विनयस्मु मयि कस अधिमुच्चस्मु गाह्मण । दुल्लभ दस्सन होनि मबुद्धाा अभिण्हसो ॥१२॥ यम २" दुल्लमा रोये पातुभावो अभिण्हमा । मोह ब्राह्मण मवुद्धो सरलकत्तो जनुत्तरा ॥१३॥ ब्रह्मभूतो अतितुला मारमनप्पमद्दना । सब्वामित्त वसी क्त्वा मोनामि अकुनाभयो ॥१४॥ इम भोन्तो निसामेथ यथा भामति चवखुमा । सल्लकत्ता महाबोरो सीहोर नदति बन ॥१५॥ ब्रह्मभूत अतितुल मारमेनप्पमद्दन । को दिस्वा नप्पसीटेय्य अपि वाभिजातिको ॥१६॥ यो म इच्छति अवतु यो वा निच्छति गच्छतु । इधाह पबजिस्सामि वरपजस्स सन्तिरे ॥१७॥ एत चे रुच्चति भोतो सम्मासबुद्धसासन । मयऽपि प जिस्साम वरपन्नस्स सन्तिये ॥१८॥ ब्राह्मणा तिसता इमे याचन्ति पजलीकता। ब्रह्मचरिय चरिस्साम भगवा तव सन्तिरे ॥१०॥ स्वावधान ब्रह्मचरिय (मला ति भगवा) सदिट्ठिामकादि । यत्य जमोघा पब्बज्जा जपमत्तस्स सिरवतो ति ॥२०॥ 11 सत्युअवयो थे० गा०-सत्युर वयो . पत्तिय IR मयी 'R,C यो ६० ] [1 गुतापाता मामता गतिमानस्य मा भानो मारनग पथ ना मारियोमाने में भनन्ना नागमति। जय मा गागा यन भाया तनुपरमि। जसमा गित्वा भगयता मद्धि मम्मानि, गम्मान पथ मागगीर पीरिया मत নিষাঙ্গি। যখমণ নিরাশ বংশ ধারণা, মা যায় গালি Tणानि गम्मन्नगि । अहमा गो मग तो भगया मागे भिगमगारिम गणानि यभम्या टपग्या है भाग महापरिगामा पा यिनिरिति नाधिमुन्नति न मागी नियागारित न य गुर पहाजियमाय । पथ गा भगवतो एनहोगि~~मा म अय मा याममा निममहापुग्गिाणा नि यभुय्या याचा तु दीगु मगपुग्मिरमाणगु यानि विशिषित गघिमुच्चति न मामा- तिनागोनि ग्याप्ने पहननिहताय चाति। अथ मो भगवा नयाग इदाभिर्गवार अभिगमासि गया अहम मग ब्राह्मणा भगवतो घामाग्नि वयगुर। जय मा भगवा जिन्ह निभामेना उभी पि वपोतानि अनुमान पटिमगि उभा-पि नामिपमानानि आमसि पटिममि, कपर पि नगदमण्डर जिगप छामि । अथ यो स"स्म ब्राह्मणस्म एतनहासिगमनागना गा गमणा गोतमो इतिगमगपुरिमाणहि परिपुण्णनि नो अपरिपुण्यहि नाच गान जानामि नुमा वा नो वा । गुन पो पन मेन ब्राह्मणान वुमान मर वान आवरिपपारिपान भागमानान-पत भवन्ति अगहन्तो सम्माममुद्धा त मरे व भजमान अत्तान पातुवरोन्तीति यभूनाई समण गातम सम्मुखा सारूपानि गामहि अभित्यवय्य नि । जय सो रोलो गह्मणा भगवन्त सम्ममा सार पाहि गायाहि अभियवि- परिपुण्णकाया मुरषि मुजातो चारतम्भना। मुवणवण्णी सि भगवा सुमुक्कदाठो मि विरियवा ॥१॥ नरस्स हि सुजातस्म य भवन्ति वियजा । मञ्च त तत्र काम्मि महापुरिसलवपणा ॥२॥ पसननत्ता सुमुखा यहा उजु पतापधा। मज्य ममणसघस्म जानिच्चोव विरोचमि ॥३॥ कल्याण-स्मनो भिवु पचासनिभत्तचो। frते समणभावेन एव उत्तमणिना ॥४॥ राजा अरहसि भवितु चक्वत्ती रथसभो। चातुरन्तो विजितावा जम्बुसपस्म' इसरो ||५|| 1 जबुमण्डस्स १८] गलगुत्त [३ (३४-सल्ल-सुत ३१८) अनिमित्तमामात मच्चान इध जीवित । सिर परित च त च दुरवन मत' ॥१॥ न हिमो उपसरमो अस्थि येन जाना न मिय्यर । जरऽपि पत्ला मरण एवधम्मा हि पाणिनो ॥ पानमिव परवान पातो पपतना भय । एक जाताा मच्चान निच्च मरणतो भय ।। यथा पि कुम्भकारस्म क्ता मत्तिवभाजना। सम्ब भेननपरियन्ना एव मच्चान जीवित ॥४॥ दहरा च महन्ता च य बाला ये 1 पडिता । राज्ये मच्चुवस यन्ति सब्वे मच्चपरायणा ॥५॥ तेस मच्नुपरेतान गच्छत परलोक्तो। न पिता तायते पुत जाति वा पन जातवे ॥६॥ पकमत यव जातीन पस्रा लाल्पत पृथु । एउमरी व मच्चान गो धज्यो' विय निय्यति ॥७॥ एवमभाहतो लोगो मच्चुना च जराय च । नस्मा धीरा न सोचन्ति विदित्वा लोकपरियाय ॥८॥ यस्स मग्ग न जानासि आगतस्स गतस्स वा। उभो अन्ते असपस्म निरत्य परिवसि ॥९|| परिदवयमाना वे कचिदत्य' उदबहे । सम्मूळहो हिंसमत्तान कयिरा चैन विचक्षणो ॥१०॥ न हि पणेन' सोक्न सन्ति पप्पोति चेतसो। भिय्यस्मुप्पज्जते दुक्स सरीर उपहजति ॥११॥ क्सिा विवष्णो भवति हिंसमत्तानमत्तना । न तेन पेता पालेन्ति निरत्या परिदेवना ॥१२॥ मोक्मपजह जन्तु भिय्यो दुक्ष निगच्छति । अनुत्थुनन्ता कालपत सोक्स्स वसम वगू ॥१३॥ IM सयुत्त पतनतो P पपततो IM वजो "M विचिदस्य C रुनेन [ ३७ मुत्तनिपातो अरस्थ वा मग ब्राह्मणा सपरिसा भगवता सन्ति पवन अन्त्य उपसपर। अथ यो गणिया जरिलो तस्सा रत्तिया अच्चयन मा जरसम पणीत खानीय भोनाय पटियागपत्वा भगवा बाल आरोनामि-कागभा गोतम, निहित भन ति । जय सा भगवा पुथ्वण्हसमय निवास वा पत्तचावरमादाम मैन केणियरम जस्सि अस्ममा तापमामि । उपमरभित्दा पन्नत्त आसन निसानि सद्धि भिषमपन । अथ यो वणियो जटिला रखपमुख भिक्युसघ पणीतन गाटनीयन भाजनायन स त्या सतप्पेसि सपवारसि । अथ खो वणियो जटिला भगवन्त भुताबि ओनोतपत्तपाणि जन्नतर नौच आसन गहत्वा एक्मन्न निसीनि। एकमत निसिन ग्रो फणिय जटिर भगवा इमाहि गावाति अनुमारि- ग्गिहृत्तमुपा यन्ना साबित्ता छन्दसा मुख । राजा मुय मनुस्सान नटीन सागरो मुख ॥२१॥ नक्सत्तान मुग चन्दो आरिचा तपत मुख । पुन आवमानान सघो वे यजत मुवति ॥२२॥ अथ सा भगवा कणिय जरिर इमानि गाथाहि अनुमारित्वा उट्ठाय आसना पशामि। अथ खो आयस्मा गेलो सपरिसो एका धूपकरटो अप्पमतो जातापी पहिलता बिहरन्तोन चिरस्मेव यस्सत्याय कुलपुत्ता सम्मन्ब अगारम्मा अनगारिय पब्बजन्ति तदनतर ब्रह्मचारियपरियोसान दिटटव धम्म मय अभिन्ना समिछात्वा उपसपज विहासि साणा जाति वुसित ब्रह्मचाग्यि क्त करणीय नापर इत्थ तायानि अभयासि । अन्तरो च खो पनायस्मा सलो सपरिमो अरहत अहोसि । अय यो आयस्मा सला सरिसो यन भगवा तनुपसबमि। उपसमित्वा एक्स चीवर त्वा येन भगवा तेन जर्जाल पणामत्वा भगवन्त गाथाहि जाभासि--- य त सरणमागम्म तो अहमि चक्बुम । सत्तरत्तन भगवा दन्तम्ह तव सासन ॥२३॥ तुव बुद्धो तुव मत्था तुव माराभिम मुनि । तुव अनुसय छ वा तिण्णा तारेसिऽम पज ॥२४॥ उपधि से समतिकाता आमवाते पारिता। मीहोऽसि अनुपातानो पहीनभयभरवो ॥२५॥ भिपया निसना इस तिलि पञीरता। पारे वीर पसारि नागा वन्दन्तु मत्थनोति ॥२६|| सेलसुत निटिठत । RC चक्खमा ३३९ ] वामठ्ठ-सुत्त [ ५ तुटठो' जातियान्न एत्तावना यो ब्राह्मणा होतीति । यामटठो माणवो एव माह-~यताखो भो सीरवा च होनि वामपन्नो' च एताना सो नाह्मणाहानीनि। नव खो अग्वि भारद्वाजो माणवो वामट्ट माणन सन्नापतु न पन जराविग्ध पामेटठो माणवो भारद्वाज माणव मापनु। अथ यो वामटठा माणयो भारद्वाज मागव आमन्तेसि-अयसा भारद्वाज समणा गोतमो सक्यपुत्ता सक्याग पवजितो इच्छानगरे विहरति इच्छानगरवनमण्ड त सा पन मयन्न गोतम एव पत्यागे रितिसट्टो अभुग्गतो पे० युद्धो भगवाति आयाम भा भारद्वाज, येन समणो गोतमो तेनुपम मिस्माम, उपसकमि वा समण गातम एतमत्थ पुच्छिस्माम, यया नो समणो गोतमो व्यावरिस्सति तथा न धारेस्मामाति । एव भोऽति सो भारद्वाजा माणवो वासट्टस्स माणवस्स पच्चस्मासि । जथ सो वामेट्ठभारद्वामा माणवा यन भगवा तेनुपमा मिसु उपसरमित्वा भगवता सद्धि मम्मोनिसु, सम्मोन्नीय पथ माराणीय वातिमारत्वा एकमन्न निसीन्सुि। एक्मन्त निमिन्नो ग्वो वामट्ठो माणवा भगवन्त गाथाय अज्नमामि- अनुन्यातपटिजाता तविज्जा मयमस्मु भा। अह पोतपरमातिस्स तारुक्वस्साय माणवा ॥१॥ तविग्जान यदश्वात तत्र देवरिनोऽस्मसे। पदबस्मा वेय्याररणा जपे आचरियसाटिसा ॥२॥ तस नो जातिवादम्मि विवादो अत्यि गोतम । जातिया ब्राह्मणो होति भारद्वाजोऽति भासति । अहं च कम्मना' नूमि एव जानाहि चक्सुम ॥३॥ त न सक्योम सातु' अजमना मय उभो । भगवन्त पुटुमागम्म सबुद्ध इति विम्सुत ॥४॥ चद यथा खयातीत पच्चपजरिया जना । बदमाना नमस्सन्ति एव लोरस्मि गौतम ॥५॥ चक्षु लोके समुप्पन्न मय पुच्छाम गोतम । जातिया ब्राह्मणो होति उदाहु भवति कम्मना । अजानत नो पयूहि यथा जानमु याह्मण ॥६॥ तेस यो ह व्यक्तिस्स (वामेट्ठा ति भगवा) अनुपुग्ध यथातथ । जानिविभग पाणान अञ्जमशा हि जातिया ॥७॥ १ अनुपकुटठो MC कम्मुना प्यक्खिस्स २८ यत्तसपनो IC मयमस्सुभो B जप्पे A सज्ञापेत् । •C च्याविखस्स, AM अह ५ নিপা [ अन्य पग गमिर मा परमाग र मच्चना बममागम्मपाल गिय पाणिनोमा यन या हिमशान्ति सतानानि अाधा। जागिा विनाभाया पगलाररम परियाय ॥५॥ अगियरममन जी मिग्मा वा पन मा। शामिपा रिना होति जहागिन्य जीवित ॥१६॥ मम्मा अरहता गुत्या विनम्प परिचित । पावरक्त निसान मोभा मया इनि ॥१॥ पथा मरणमारित याग्गिा परिनिमय । रापि धीरा सपना पडितो कुमरगे नरो। विष्णमुप्पतित मार तो धमये ॥१८॥ पग्दिर पजप च दोमाम्म अतनो। अनना गुम्बमेमाना अर, मलमत्तनो ॥१॥ अबूट्हसलो अगिता सन्ति पप्पुथ्य चतमा । मम्बसार अतिान्ती अगोगो होनि निगुतोनी ॥२०॥ सलमुत निटिठत । ( ३५-~वामे सुत्त ३।६ ) एव मे मुन। एक समय भगवा इच्छानग विहरति इच्छानगलवनसरडे । तन वो पन समयन सबहुग अभिजाता अभिजाता बाहाणमामाला इच्छा नगरे परिवन्ति मय्यथाद-चवी ब्राह्मणा तास्वरको ब्राह्मणो पोस्वरसाति ब्राह्मणा जानुम्साणि' ब्राह्मणो तोनभ्यद्राह्मणो, अओ च अभिजाता अभिजाता ब्राह्मणमहासाग। अथ खो वागट्ठभारद्वाजान माणवान जपाविहा र अनुचम्ममानान अनुविचरमानान जयमन्तरा क्या उदपानिय भो ब्राह्मणा होतीति । भारद्वाजो माणवा एवमात्-यता सो उभता सुजाता हानि मातिता च पितितो च समुद्धगहणिवा याव सतमा पिता मयुगा अक्पिनी अनुप २ अब्ब? IR इच्छानक्ले १M C परिनिव्वतो * RM set for ३१९] वामगठ-मुत्त या हि कोचि मनुस्मेमु परपस्मेन' जीवति । एर वामट्ट जानाहि परिसरा' मो श ब्राह्मणो ॥२२॥ यो हि कोचि मनुम्ममु अनि उपजीवति । एव वामट्ठ जानाहि चोरो एमो न ब्राह्मणो ॥२३॥ यो हि कोचि मनुस्ममु इस्मत्य जीवति । एव वामट्ठ जानाहि योधाजोवो न ब्राह्मणो ॥२४॥ यो हि वाचि मनुस्मेसु पाराहिच्चन जीवति । एवं वामेट्ठ जानाहि याजको सो न ब्राह्मणो ॥२५॥ यो हि कोचि मनुस्रोसु गाम रट्ठ च भुञ्जति । एव वामट्ठ जानाहि राजा एसो न ब्राह्मणो ॥२६॥ न चाह ब्राह्मण यूमि योनिज मत्तिमभव । भोनाति नाम सो हानि सचे होति सकिन्चना । चिन अनादान तमह मि ब्राह्मण ॥२७॥ मम्वमयाजन छत्वा यो वन परितस्मति । मगानिग विसयुत्त तमह यूमि ब्राह्मण ॥२८॥ ऐत्वा नधि' वरत्त च सन्दान सहनुवम। उक्वित्तपठिघ बुद्ध तमह मि ब्राह्मण ॥२९॥ अयोस वधयध च अदुट्ठो यो तितिक्यति । मन्तीवर पलानीक तमह ब्रूमि ब्राह्मण ।।३०॥ अकोधन वनवन्त मीरवन्त जनुम्सद । दन अतिममारीर तमह यूमि ब्राह्मण ॥३१॥ वारि पोस्वरपत्तेऽव आरग्गेरिव सासपो । यो न लिप्पति कामेसु तमह ब्रूमि ब्राह्मण ॥३२॥ यो दुवस्स पजानाति इधेव स्वयमत्तनो। पभभार विमयुत्त तमह मि ब्राह्मण ॥३३॥ गभीरपन्ह मधादि मग्गामग्गम्स काविद । उत्तम थ अनुप्पत्त तमह ब्रूमि ब्राह्मण ॥२४॥ अससटठ गटठेहि अनागारहि चूभय । अनोक्मारि' अप्पिच्छ तमह दूमि ब्राह्मण ॥२५॥ IM परपेसेन मनोरचारि २ पेस्मको IC नदि M ।
गुमा frrrrrr TarTRI frimar TETrail नाक TTA Tritfare [ri जागिमरनगरमा गग frm मा [ Mars-must पारनि नाप उरम निदर frग आशिमय लग प्रयासमा प्रति ११॥ नामपि पारिगापो। गि जामि मम मममन्नाराया ॥१॥ मनापासप पायानTTI गि जागिरग मावि यया गु जानीगु नि आमिय। राव नपि मनुग्मगुलिय जातिमा पु॥१४॥ महिगीमे निशिता न मुसा T TIसाय आ•ि भमून या ॥१५॥ न गीगाय न अंग उन nिge। न माणिया मा न साधे न मया ॥१६॥ न हहि न पाहि नागुगहि नमरिया। न जपाहि न ऊमहि न यष्णन गग वा। गि जानिमर्य नव यमा अज्ञामु जानिम् ॥१३॥ पचत्त रामगैग्गु मनम्मरयेन न विग्मति । वातार च मनुम्मसु गमगाय पानानि ॥१८॥ यो दि मोवि मनुग्गमु गारक्य उपजावति । व वागट्ठ जानाहि वस्गा गा न ब्राह्मणा ॥१॥ यो हि पोचि मनुस्मेसु पुथु सिप्पन जीवनि । एव वाम? जानाहि सिप्पिका मा न ब्राह्मणो ॥२०॥ या नि कोचि मनुम्ममु बोहार उपजीपति । ज्य वामट्ठ जानानि वाणिजो सोन गाह्मणो ॥२१॥ Rोदके R पश्खी विजनाथ [ ६९ ३३९] वासेठ-सुत नुनि यो वेति गत्तात उपात्त च सय्यसो। अमत सुगत मुद तमह यूमि ब्राह्मण ॥५०॥ यस्स गति न जानन्ति देवा गधब्बमानुसा। खोणासव अरहत तमह मि ब्राह्मण ॥५॥ यस्स पुर च पच्छा च मन्ये च नत्यि विचन । अकिंचन जनादान तमह भूमि ब्राह्मण ॥५॥ उसम पवर वीर' ममि विजिताविन । अनज नहातर' बुद्ध तमह घूमि ब्राह्मण ॥५३॥ पुब्बे निवाम यो पनि सग्गापाय पसति । अथो जातिपय पतो तमह मि ब्राह्मण ॥५४॥ समजा हसा लोस्मि नामगोत परप्पित । मम्मुच्चा समुदागत तत्य तत्थ पर प्पित ॥५५॥ दीघरत्तमनुसयित निविगतमजानत । बजानन्ता नोपयुन्नि जातिया हाति ब्राह्मणो ॥५६॥ न जच्चा ब्राह्मणा होनि न जच्चा हाति जवाह्मणो । कम्मना' ब्राह्मणो होति यम्मना होति अग्राह्मणो ॥५॥ कस्सको कम्मना हानि सिप्पियो होति कम्मना । वाणिजो कम्मना होति पेस्मिको होति कम्मना ॥५॥ चोरोऽपि कम्मना होति याधाजीवोऽपि कम्मना । याजको यम्मना होति राजा पि होति कम्मना ॥५९॥ एवमेत यथाभूत वम्म पस्सन्ति पण्डिता । पटिच्च समुप्पाददसा' यम्मविपाक्कोविदा ॥६०॥ कम्मना वत्तती लोसा कम्मना वत्तती' पजा। वम्मनिबधना सत्ता स्थास्साणीव यायतो ।।६।। तपेन ब्रह्मचर्येनसयमेन दमन च । एतेन ब्राह्मणो होति एत ब्राह्मणमुत्तम ॥६२॥ तीहि विज्जाहि सपनो मन्ना मीणपुन भवो। एव वामेट्ठ जानाहि ब्रह्मा सकको विजानतऽति ॥६॥ 1M धार 1M सम्मना PM हातक . समा AI पटिच्चसमुप्पादस्स R नो पयुवान्त M चत्तति B 'ब्रह्मान' ति पि 1 ३१ ६८ सुतापा। निधाय ?एर भूनेमु तगगु पावरमु च । यो न हन्ति न पाती मह यूमि ग्रायण ॥३६॥ अविरद्ध विरुद्धेमु जत्तापरसु निन्युन । सालाना ननादान तमहं भूमि ग्रामण ॥३७॥ यस्म रागाच नामो च माना मापोच पानि मामपानि आगग्गा नम यूमि अायण ॥३८॥ अपकरस विशपनि गिर मान उतारये । याय नाभिमज वञ्चि नमह मि ग्राह्मण ॥३९॥ याच टीघ व रग्म वा अणु थूर सुभामुभ । रोक अनिन नायिति तमह ब्रूमि ग्राण ॥४०॥ आसा यस्स न विग्जन्ति अस्मि ला परम्हि च । निरासय' विमयुत्त तमह दूमि ब्राह्मण ॥४१॥ यस्माल्या न विग्जन्ति जज्ञाय अथवथी। अमतोगध अनुप्पत तमह यूमि ब्राह्मण ॥४२॥ योऽध पुज्ज च पाप च उभो सग उपञ्चगा । अमोफ विरज सुद्ध तमह ब्रूमि प्राह्मण ।।४।। चर व विमा मुद्ध विप्पसनमनावित्र। नन्दीभवपरिक्खीण' तमह मि ब्राह्मण ॥४४॥ या इम परिपथ दुग्ग ससार माह्मच्चगा। निष्णो पारगतो' हायीनेजो स्थवथा। अनुपालाय निब्बुतो तमह यूमि ब्राह्मणा ॥ ४५।। योध वाम महत्वान अनागारो परिवन । वामभवपरिक्वाण तमह ब्रूमि ब्राह्मण ॥४६॥ योध तण्ह पहत्वान अनागारो परिधज । तहाभवपरिक्षीण तमह मि ब्राह्मण ॥४७|| हित्वा मानुसा योग दिन याग उपञ्चगा। सब्बयोगविसयुत्त तमट ब्रूमि ब्राह्मण ॥४८।। हित्वा नि च अरति च सीतिभत निस्पधि । सम्म गाभिभु वार तमह मि ब्राह्मण ॥४९|| M ओहितो .M नदीराग *M, P विज्ञापन IM निरासास IN पारगती सेग्यथापि भिक्यु वीसनि अटटा निरया एव एको कुमदो निरयो मेय्यथापि ३३१० ] वासालियनसुत्त [७१ पभिज्जिमु, पुत्र च लोहित च परिमु! जय मा वोवाग्यिा भिवसु ननवा वाचन काल अपासि। कालकना च योवाग्यिो भिक्षु पदुमनिरय उपपज्जि सारिपुत्तमोग्गरलानसु चित्त आपातेत्वा । अथ खो ब्रह्मा सत्पति अभिवन्ताय रतिया अभिवान्तवण्णा क्वर पप्प जनवन ओभासेत्वा यन भगवा तेनुपमकमि उपसमित्वा भगवन्त अभिवादेत्वा एकमन्न अट्टामि। एकमन्न ठिता सो ब्रह्मा सहपति भगवन्त एनत्वोचकोतरा रियो भन्ते भिक्खु कालकतो कालवनो च भन्ते कावाल्यिो भिनखु पदुमनिरय उपपन्नो सारिपुत्तमाग्गलगनेमु चित्त आघातत्वाऽति । इद अवाच ब्रह्मा सम्पति इद पवा भगवन्त अभिवादेवा पदविवण क्त्वा तत्थेव जन्तरधायि । अथ खा भगवा तस्सा रतिया अच्चयन भिक्यू आमन्नमि-इम भिक्ववे रत्ति ब्रह्मा सपति अभियन्ताय रत्तिया पे० आधानत्वाऽति, इद अवोच ब्रह्मा सहपति इद वत्वा म अभिवात्वा पक्सिण क्त्वा यत्थव अन्तरधायी ति। एव वुत्ते अम्जतरो भिक्यु भगवन्त एतदवोर-वीवदीघ नु खो भन्ते पदुमे निरपे आयुष्पमाणति । दीघ सा भिावु पदुमे निरये आयुष्पमाण, त न मुकर सपातु एत्तरानि वस्सानोति वा, एतकानि वस्मसतानीति या एत्तवानि वस्सस नमहस्सानीति वाति। मक्का पन भन्न उपमा' कानुऽति। सक्का भिक्खूनि भगवा अवोच-~-मेय्ययापि भिक्षु वीसतियारिका कामरको निरवाहो सतो पुरिलो यस्समतस्म अच्चया एक एक तिक उद्धरेय्य, विप्पतर खा सो भिक्षु वीमतिखारिको कोमल्को तिरवाहो दमिना उपक्रमेन परिक्वय परियानान गन्छय्य, न त्वव एका जम्बुदो निरयो। मेय्यथा पि भिस्तु चीसति अब्बुदा एव एको निरखुदो निरया, मेय्यथा पि भिक्षु धीमति निरगुता निरया एव एको अवा निरयो मेय्यया पि भिक्खु वीसनि अवत्रा निरया एव एका अहला निरयो मेय्यथापि भिक्ख वीसति महा निरया एव को अटटो निरयो वासति कुमुना निरया एव को मागधियो निरया, सेम्पथापि भिमधु वीमनि सोधिका निग्या एव एको उपमा निरयो, सय्यथा पि भिग्य बोमनि उप्पल का निरया एव एक पुरिया निरया मध्यवापि भिका यीपति पुण्डरिया निरया तो - - . निरया ७. লিrি [08 " स वागभागामा माग भगा अभिगम गातम गर्य नगवान गौतम गमग गार्म य भिागय ध उभामा नो भव गातमा पारेर सवारी गापुर Arj' म नि । बामेन्टमुतं निशि - - (३६--रालिय मुा ३।१०) य म मुममप भगवा गायिय विवन आगाम आगमे। अय यो गायिा भिरय पन नगगननुपगामि अमरमित्या भगवन्न अभिवारवा एप निसी। एकमल मिमिनो गो मारिया भिर भगान्त एत वाचयापिटा भान गाणिसमोग्गा पारिकान इमान वग गतानि। ण्य युर भगवा योगाग्यि मि PAT-माप मामालिय मा हर योगाग्यि पमा f; यि मारिपुदमाग लगनगु चित्त पमरा भारिपुत्तमोगगनाति। दुनिय निगा नया भिक्षु भगवन्त तवा-पिस्चापि मे मन्त भगवा मदापिएपपिरा अय गो पापियाश्व सारिपुनमोगलना, पापिकान बना वम गा दुनियऽपि गो भगवा कोगाग्यि भिग एन गोव-या व याशिय माहव बाारिय पमा हि कोकालिय शारिपुनमोग्ग गामु चितं पमला सारिपुत्तमोग्गलाना ति। तति यऽपि सो कावारियो भिाव भगय। एतत्वोच-विञ्चापि में भत भगवा गदायियो पच्चयिरा अय सो पापिच्छाव गारिपुत्तमोग्ग लाना पापिकान इच्छान वसगानि। ततियापि खो भगवा योगाग्यि भिम् एतदयाच-मा व कोकायि मा हे। कोकालिय पसा हि कोकाग्यि सारिपुत्तमोग्गल्लानेसु चित्त पराग सारिपुत्तमोग्ग लानाति । जथ खा काकालियो भिक्षु उदायासना भगवत अभिवाद वा पक्खिण व वा पवामि। अचिरपकान्तररा च पाटियरस भिपुतो मासपमत्तीहि पिळकाहि सव्वा वाया पुट्ठा अहासि सामपमत्तियो हुत्वा मुग्गमत्तियो नहेतु मुग्गमत्तियो हुत्वा कायमत्तियो अहम क्लायमत्तिया हुत्ता कोलट्ठिमत्तियो अहेग कोलट्टिमत्तियोहत्वा यो मतियो नहेस योरमत्तियो हुवा आमलवमतियो अहेम आमलकत्तिया हुवा बवामा कामत्तियो अहम् ववसलाटुकामत्तियो हुवा विलिमत्तियो अह्सु, विल्लिमत्तियो हुत्वा R मरणागते ३१११ ] नाळव-सुत - 4 अथ लोहमय पन वृम्भि, अग्गिसिम जरित पविसन्ति । पच्चन्ति हि तासु चिररत्त, अग्गिनिसमासु' समुप्पिलवासा ॥१४॥ अथ पुबलोहितमिस्म, तत्थ पि पच्चति वित्रिसकारी । य य' दिसत अधिमेति, तत्य किलिस्सति सफुसमानो ॥१५॥ पुळवावमथ सलिलस्मि, तत्य वि पच्चति किब्धिसकारी। गन्तु न हि तीरमपस्थि, सब्यसमा हि समन्तवपत्ला ॥१६॥ अभिपत्तवन पन तिण्ह, त पविसन्ति समन्छिदगत्ता । जिव्ह वळिसा गहे वा, आरचयारचया' विह्नन्ति ॥१७॥ अथ वतरणि पन दुग्ग, निण्हधार खुरधारमुपति । तत्य मन्दा पपतन्ति, पापरा पापानि परित्वा ॥१८॥ खानन्ति हि तत्थ रुदन्त, मामा मबला काकोलगणा च । सोणा सिगाला परिगिज्झा, कुल्ला वायसा च वितुदन्ति ।।१९।। विच्छा बतायं इघ वुत्ति, य जनो पस्सति किब्बिसारी। तस्मा इध जीवितमेसे, विच्चकरो सिया नरो च मज्जे ॥२०॥ त गणिता विदूहि तिलवाहा, ये पदुमे निरये उपनीता। नहुनानि हि काटियो पञ्च भवति द्वादस कोटिमतानि पुनन्जा ॥२१॥ यावदुक्सा निरया इध वुत्ता, तत्थऽपि ताव चिर वसिन च। नस्मा गुचिपेमलसाधुगुणेसु वाच मन सतत परिरवयति ॥२२॥ कोरालियसुत्त निटिठत। - (३७-नाक-सुत्त ३।११) आनजात निदसगण पतीते', गच्च इन्द मुधिवरान च दः । दुस्स गह्त्वा अतिरिव थोमयन्न, अमितो इसि अद्दम ग्विाविहारे ॥१॥ निस्वान दवे मुदितमने उगे चितिर करित्या इद अवो चासि तत्य । वियसयो अतिरिव कल्यरपो, टस्स गहत्वा भमयय" र पटिन्च ॥२॥ गिनिस्समागु समुम्पिळा ते "\ समुछिनरगत्ता . पोते 111न रमपम R, B रिलिजनि पापानिधत्वा .M जवाघापि B आरज यारजया C.वित्ति * पमुदितमने [ ३१० ७२ ] मुत्तनिपाता पुरिसस्स नि जातस्स कुठारी जायत मुख । याय छिनति अत्तान यागे दुभामित भण ॥१॥ या निग्यि पगसति। तथा निन्दति या पससियो। विचितानि मुबा सो वरिपलिना नन सुप न बितति ।।२।। अप्पमत्ता अम कति। या अपम्पसु धनपराजया मम्मापि सहापि अत्तना । अयमब महत्तरो पति या सुगनमु मन परामय ॥६॥ सत महस्सान निरब्बुगन यतिम' च पञ्च च अचुनानि । य अरियगरही निरयं उपति वाच मन च पणिधाय पापरु ॥४॥ अभुतवानी निग्य उपति या वाऽपि क्त्वा न करामीति चात् । उभोऽपि त पच्च ममा भवन्लि निहीनाम्मा मनुजा परत्य ॥५॥ या अप्पटवस्म नरस्म दुम्मति सुद्धस्म पासस्स अनगणस्स । नमव बार पच्चति पाप मुसुमा रजो पटिवाताव वित्ता ॥६॥ या लोभगुण अनुयुत्ता सा वचमा परिभासति अज्ने। अम्मको कटरियो अवाज मच्छरि पेसुणियस्मि अनुयुत्तो ॥७॥ मुग्वदुग्ग विभूतमनरिय भूनहु पापक दुक्कतवारि । पुरिसन्नकलि जवजात मा बहु भाणिध नरयियोसि ॥८॥ रजमाविरसि अहिताय मन्ते गरहसि विखिमयारि। वहूनि च दुचरितानि चरित्वा गन्टिगिर खो पपत' चिररत ।।९।। न हि नस्सति क्स्सचि कम्म एति ह न लभतेऽव सुवामि । टुम्ब मतो पर अत्तनि पस्सति शिबिसकारी ॥१०॥ अयोसकुममाहतहान निधार जयसूरमुपति । जय तत्तनयागुठसन्निभ, भोजनमस्थि तथा पतिस्प ॥११॥ न हि वग्गु बन्ति बन्ना नाभिजवन्ति न ताणमुपनि। अगार सथते मन्ति, अग्गिनिसम जल्तिं पविसन्ति ॥१२॥ जाल्न च ओनहियाना तत्य हान्ति अयामपटेहि । अES व तिमिसमायन्ति त विनत' हि यथा महिवायो ॥१३॥ १M छत्तिसति पच च रब्बुदान PM गच्छसि P पपट पपद' ति पि M हन B ह त अथवा हतं . वित्यत PM पति IM तत्थ - - - ३।११] नाळव-सुत्त [ ०५ सो साक्यिान विपुलं जनत्व' पीति, अन्नपुरमा निग्गमा ब्रह्मचारी । मो भागिनेय्य मयमनुकम्पमानो, समादपसि असमधुरस्स धम्म ॥१७॥ बुद्धोऽनि घोस यद परतो सुणासि , सम्वोधिपत्तो घिनरति' धम्ममग्ग । गत्वान नत्य समय परिपुच्छियाना', चरस्सु तस्मि भगवति ब्रह्मचरिय ॥१८॥ तनानुमिठो हितमनसेन तादिना, अनागत परमपिसुद्धस्सिना। मा नारको उपचितपुजसञ्चयो, जिन पनिवख परिवसि रविसतिद्रियो ।॥१९॥ मुत्वान धोम जिनवरचमवत्तने, गन्त्वान दिस्वा इमिनिसभ पसनो। मोनय्यमटठ मुनिपवर जपुच्छि, समागते असिनव्ह यस्स सासनऽति ॥२०॥ व युगावा निठिना। जञ्जातमत वचन असितस्रा यथातथ । न त गोतम पुच्छाम राधम्मान पारगु ॥२१॥ अनगारियुपेतस्म भित्रयाचरिय जिगिसतो। मुनि पब्रूहि मे पुटटो मोनय्य उतम पद ॥२२॥ मोनम्य ते उपजिस्म (ति भगवा।) दुवार दुरभिमभव । हर ने न पववसामि मथम्भस्मु दरो भव ॥२३॥ ममानभाव' कुब्वेय गामे अट्ठवन्दित । मनोपदाम रक्सेय्य सतो अनुष्णतो चरे ॥२४॥ उच्चावचा निच्छरन्ति दाये अग्गिसिप्यूपमा । नारियो मुनि पराभेति ता सु त मा पगेभय ।।२५॥ विरतो मेथुना धम्मा दिवा वाम परोवरे' । अविरतो जसारत्तो पाणसु तसथावरे ॥२६॥ यया अह तथा एते, यथा एते तथा अह । अतान उपम क्त्वा न नेय्य न घातये ॥२॥ हित्या रच्छ च लोभ च यत्थ सत्तो पृथुज्जनो । चक्खुमा पटिपज्जेय्य तरेय्य नरवं इम ॥२८॥ २ विवरति 'M जनेत्वा। बहि अतेपुरम्हा . परिपुच्छमानो 'BAI समानभाग IM अत्युक्या BM असितारहस्स AM परोपरे ७४ ] गुत्तापाता [ ३३११ यापि आमि अमुरहि सद्भगमो, नयो गुगन असुरा पराजिता । नापि नतारिमो गेमहमनो, किनभुत ताठ माह पमोरिना मेलेन्लि गायति च वायलि च भुजानि पाति च नञ्चयन्ति च । पृच्छामि राह मरमुदवासिन धुनाय म समय विण मारिमा ॥४॥ मा' बाधिसत्ता रतनवरो अतुल्यो मनुरागत हितमुखतार जाता। सल्यान गाम जनपद लुम्बिनय्य, तनमन द्रा अतिरिक्त क्यम्पा ॥९॥ सा गरमतुतमा अग्गपुग्गरो नराममो सञ्चपजान उत्तमौ । बत्तस्सनि चक्र इसिव्य बन नत्र गोही बया मिगाभिभू* ॥ त राद सुत्था तुरित अवमरी सा मुद्धा नम्म त- भवन उपागम । निसज्ज तत्व इद अवोचासि मक्ये, बुद्धि वुमारी अहमपि दटयुवामा ॥७॥ ततो तुमार जरित इस सुवण्ण उगमुम्पे व सुकुस सम्पन्ठ । तहल्लभान सिरिया अनामयष्ण दस्समु' पुत्त अमिन हयस्म सक्या ॥८॥ निस्वा कुमार सिदिमिय पग्जटल तारासभ व नभसिगम विसुद्ध। मुरिय तपन्त मरदरिव अममुत्त आनन्जानो विपुरमलत्थ पानि ।।९।। पाकमाख च सरम्समन छत्त मरू धारय अन्तलिस्पे। मुवण्णदग वोतिपतन्ति चामरा न हिम्मरे चामरछत्तगादा ॥१०॥ निस्वा जटी कण्हसिरिया टसि , सुवष्णनक्व विय पवम्बर । सेत च छत्त परियन्त मुद्धनि उत्पगचित्तो सुमनो पटिग्गह ॥११॥ पटिग्गरत्वा पन सम्यपुदगव जिगिसको' 'क्खणमन्तपारम् । पमनचित्ता गिर अभुदोरपि अनुत्तराय दिपता। उनमो ॥१२॥ अथ त्तनो गमन अनुस्सरन्तो अर यस्पो गल्यति' जस्मुकानि । निस्वान मन्या इमिमवोच न नोचे कुमारे भविस्सति अन्तगयो॥१३॥ निस्वान गत्य इमिभवाच अल्म नाह कुमार जति अस्सरामि । न चापिमस्स भविस्सति जन्तराया न आरकाय धिमनसा भवाथ ॥१४॥ माधिपग्ग फुमिस्सताय कुमार मा धम्मवस परमविसुद्धस्सी । वत्तस्माय पदानातानुक्पा रिचारिकऽस्म भविस्सति ब्रह्मचरिय ।।१५।। मम च जायु न चिर धावसमा अथऽन्तरा म भविस्मनि वागारिया। माह न सुस्म जसमधुरम्स धम्म तन म्ह अटठो ब्यमनगतोजधावी ॥१६॥ M सार- यो २ मिगाभिभू IM दस्सिसु दिराकम्भमुत्त 1 धारयत IM जिगोसको B 'गरपति इति वि Msosit .M गरयति नालकमुत्त निटिठत। पिनो पहिततस्म विहरतो द्विग्न फलान जन्जतर पर पाटिक्स-दिट्ठव धम्मे ३११२] द्वयतापरसना-मुत्त [० पना त सणति य पूर सन्तमेव त । अडढ युभूपमो वाले रहो पूरोन पपिस्तो ॥४३॥ य ममणो वहु भामति उपत अत्यसहित । जान सो धम्म दसनि जान सा वहु भासति ॥४४॥ यो च जान यनतो जान न बहु भामति । म मुनि मोनमरहति स मुति मोन मज्यगा ति ॥ ( ३८-द्वयतानुपस्सना सुत्त ३।१२) एव मे सुत। एक समय भगया गावत्यिय विहरति पुयारामे मिगारमातु- पासाने। तेन सा पन समय। भगवा तदहुपोमथे पण्णग्म पुग्णाय पुण्णमाय रतिया भिक्सुमपपग्वुितो अम्भोकासे निसिलो होति । जय सा भगवा तुष्टीभूत तुण्डीभून भिसघ अनुविलोवेत्वा भिास आमन्तसि--य त भिक्सवे कुसला धम्मा अरिया निय्यानिका सम्बोधगामिनो तेस वो भिवयव कुमलान धम्मान यरियान निय्यानिकान सम्योपगामीन वा उपनिसा रावनायाति, इनि च भिक्खवे पुच्छितारो अस्सु, त एव अस्मु वचनीया-यावदव न्यतान धम्मा यथाभूत प्राणाया'ति । किं च द्वयत वदेथ-द दुख अय दुक्खसमुदयोऽति अय एकानुपस्सना अय दुक्यनिगेधो अय दुक्पनिरोधगामिनी पटिपदाऽति जय दुति मानुपस्सना । एव सम्माद्वयतानुपम्मिनो सो भिवसवे भिक्युनो अप्पमत्तस्स आता अन्ला, सनि वा उपातिमेगे अनागामिताऽति । इत्मवान भगवा, इद वत्वा सुगता अयापर एतदवोच सत्था- ये दुक्ख नप्पजानन्ति जथो दुस्वस्स सभव । यत्य च सम्यसो दुक्ख असेम उपरुज्यति । तच मग न जानन्ति दुक्खूपसमगामिन ।।१।। नोविमुत्तिहीना ते अथो पञ्चाविमुत्तिया । अभव्या ते अतविरियाय ते वे जातिजापगा ॥२॥ Cसयततो Mमत UP योज्यते भगवाति।
or ] गुरालि जना राग अलग अगरका । म | mrr ftifi Rm गरिधारे गिा यात अगिर। अहिगो परम्म आमो मारी 000 म साना पारा यान मार मिया । पापय राम असो अभिमांग ॥३॥ দী বা বিল গম সাগ। पन्हान नामिन 'प्य अभिहार पो २॥ Tी' गाममाम्म पु महमा पर। घागसा विगायन यान पर्ग अन्त्य गरि गाप ना" पुगामिति । उभयोष मासा1ि उपनिवानि ॥ गपतपाणि विनाता जमूगा मगमगा। अम्प दान Are Tr' नापजानिय ॥३॥ उच्चावचा हि परिपा ममी परामि । न पार गुिण' यतिम 'द युग मु॥६॥ यम्ग विसता नन्यि विमानस्म भिगुना । विच्चापिच्चपतरस परिवागम विरजनि ॥३॥ मोनम्य स उपशिस्मं (f भगवा।) पुरधारणमो भव । जिव्हाय ताल आगच्च उतर गयतो सिया ॥३८॥ अधीनीता न मिया न चापि बहु चिलये । निरामगधा जमिनो ब्रह्मचरियपरायणा ॥३०॥ एकासनस्स सिक्वथ समणापासनरास्म च । एमत्त मोनमरात एवो च अभिरमिस्सति ४011 अथ भासिहि दरा निमा । गुवा धारान निग्धारा झायीन वामपागान। ततो हिरिं च सद्ध च भिय्यो कुव्यय मामको ॥४॥ त नदीहि विजानाथ सोभसु पररमु च । सणन्ता यन्ति पुस्सोभा तुहा याति महोदधि ॥४॥ .p दुगुण "B अभिरभिस्ससि 1M मुनि 'R तादो R कामदागीन
अथापर
चन्नापचयाऽति जयमकानुपस्सना। बेदनान स्वैव जमसविरागनिरोधा नस्थि
द्वयतानुपस्सना-सुत
[ ७९
सबसखारसमथा सजाय उपरोधना ।
एव दुक्सक्सयो होति एत अत्वा यथातथ ।।९।।
सम्मनसा वेदगुनो सम्मरञाय पण्डिना ।
अभिभुय्य माग्सयोग नागच्छन्ति पुनभवति ॥१०॥
मिया अम्शेन पि
यथ च सिया । य किञ्चि दुबरा सम्भोति सब्ब
विन्नाणपच्चयानि अयमेकानुपस्सना, विज्लाणस त्येा अससविरागनिरोधा
यि दुक्सस्स सम्भवाति जय दुतियानुपस्सना । एव सम्मा
एनन्वचि सत्या-
य किञ्चि दुक्य सम्भोति सब्ब चिन्माणपञ्चया ।
विज्ञाणस्म निरोधन नथि दुक्खस्स सम्भवो ॥१५॥
एन आरानव जत्वा दुस्ख विजाणपच्चया ।
निजाणूपसमा भिवतु निच्छातो परिनियोति ॥१२॥
सिया अजेन पि
क्थ च सिया । य विञ्चि दुक्ख सम्भोति, सब्ब
म्मिपच्चयानि अयमानुपस्सना फस्मस्म त्वेव जमेमविरागनिरोधा पनि
दुक्सस्स सम्मयोऽति अय दुतियानुपस्सना। एव सम्मा
थापर एतदवार
सत्या-
तस परसपरतान भवसोनानुमारिन ।
कुम्म पटिपनान जारा मयाजनस्पयो ॥१३॥
ये च फम्म परिञाय अन्याय उपसम रता।
नव पम्माभिसमया मिच्छाता परिनिताऽति ॥१४॥
सिया अश्शेन पि
वथ च सिया । य विञ्चि दुक्ख मम्मोति सब्ब
दुवस्स मम्भवाति अय दुतियानुपस्सना ! "व मम्मा
जथापर एतत्वाच
सुरा वा यनि वा दुवख अदुवयमसुख राह ।
अगत च पहिला व य किञ्चि अथि वेदित ।।१५।।
त दुवपति मत्वान मोमधम्म पगेरिन ।
स्मि पुस्स पय पसग एव तथ विरगति ।
बन्नान खया भिायु निच्छातो परिनिवनाति ॥१६॥
८] मुत्तनिपाता [ १२ ये' च दुाम पजाना अपा दुवापस्म मभव । यप च सयमो दुका आग उपगज्ज्ञानि । त च मग्ग पजानन्ति पारूपममगामिन ॥२॥ चतोविमुत्तिमपमा अथा पन्शाविमुत्तिया । भन्या ते जन्तरिरियाम न ते जानिजम्पगारिया मिया अनेन पि परियायन सम्मान्यतानुपम्माति इति चे भिववव पुच्छिनारा अस्मु गियाति रमु वचनीया। वर्ष च मिया। य मिचि दुर्ग मम्भोति सब उपधिपच्चयानि अय एकानुपरसना, उपधीन स्वव असमविराग निरोगा नात्य दुरवस्म राम्भवी ति जय दुतियानुपस्मा । एव मम्मा अथापर एतन्योच मत्था- उप धानिटापभवन्ति दुक्ला । म यचि कस्मि अनवरूपा । या वे विद्वा उपधि करोति । पुनप्पुन दुक्यमुपेति मन्दा । तस्मा पजान उपधि न कविरा । दुक्यस्म जातिप्पभयानुपम्गीति ॥५॥ सिया अन्जनपि परियायन सम्मान्यतानुपरसनाऽति इति र भिक्पवे पुच्छिनारो अम्सु सिया निम्सु वचनीया, पथ च सिया। य किचि दुख सम्भोति सब अविजापच्चयाति अय एवानुपस्सना अरिनाथ त्वेव अमसविरागनिरोधा नधि दुक्खस्स सम्भवाऽनि अय दुतियानुपस्सना। एव सम्मा एतत्वाच सत्था-- जातिमरणससार य वान्ति पुनप्पुन । रत्वभावाथाभाब अविज्जा यव सा गति ॥५॥ अविज्जा हम महामोहोर्याद ससित चिर। विज्जागता च य सत्ता नागच्छन्ति पुन भवानि ॥७॥ मिया जन्जेन पि पे क्य च मिया । य विचि दुक्न मम्भोति सब्व सखारपच्चयाऽति अय एकानपस्सना, मखारान त्वव अससविरा गनिरोधा नत्धि दुवस्स सम्भवोति अय नितियानुपस्सना । एव सम्मा अथापर एतदवोच सत्था- य किञ्चि दुपच मम्भोति सब्ब मपारपच्चया । मन्वारान निराधन नत्यि दुक्यस्म मम्भवोनि ॥८॥ एत जानीनव आत्वा दुवन सखारपच्वया । अथापर 1M7-6-7-7 मान्ति RAM उपधि ३।१२] एतत्वोच सत्था- निरोध अप्पजानना आगन्तारी पुनम्भव ॥३१॥ रास्स समारतस्स सम्समणग्राह्मणिया पजाय सत्वमनुस्साय इद सच्चनि द्वयतानुपस्मना-मुत्त [/१ एत आदीनव अत्वा दुक्त आहारपच्चया । सत्राहार परियाय सम्बाहारममिम्मितो ॥२५।। आरोग्य सम्माय आसवान परिक्सया। सखाय सेवी धम्मटटो मय न उपति वदगुति ॥२॥ सिया अगेन पि पे० वथ च मिया। य विञ्चि दुक्स सम्भोति मन्च इन्जिनपच्चयानि अय एकानुसम्मना, इञ्जितान स्वेय असेगविरागनिया नाथि दुरवस्स सम्भवो नि अय दुतियानुपम्सना । एव मम्मा अथापर य विञ्चि दुश्प सम्भोति स र इञ्जितपच्चया । इञ्जिनान निरोधेन नत्थि दुवपस्स सम्भवा ॥२०॥ एत आदानव अत्या दुक्ख इजितपच्चया । तस्मा एज योसज्ज सखारे उपरुधिय । जनजा अनुपातानो सता भिक्षु परिब्बजति ॥२८॥ सिया अन्न पि पे० क्य च सिया। निस्सितस्स चल्ति होनि अप एवानुपस्मना, अनिस्सिनो 7 चाति अय दुतियानुपस्सना । एव सम्मा अयापर एतदवोच सत्या-- अनिस्सिता न चरति निस्सितो च उपादिय । इयभान्जथाभाव ससार नानिवतति ॥२९॥ एत आदीनव जत्वा निस्मयसु महब्भय । अनिस्मितो अनुपालनो सतो भिक्षु परियजऽति ॥३०॥ प० क्य च सिया । रूपेहि भिस्ववे आरूप्पा मन्नतराऽति अय एवानुपस्सना, पारप्पेहि निराधो सन्ततरोति अय दुत्तियानु अथापर एतदवोन सत्या-- य च रूपूपगा सत्ता य च आगप्पवासिनो' । य च रूपे परिमाय जरूपेमु सुसण्ठिना । निरो य विमुच्चन्ति ते जना मच्चुहायिनोऽति ॥३२॥ ऐ० क्य च सिया। य भिवववे सदेवारम सिया अगेन पि परराना । एवं सम्मा मिया अन्न पि PM आरपट्टायिनो २ असण्ठिता ६ मुनिराला T५ पगिगा fort गर स' माTHE ATगना TIR TR भगशिरा नाय मग Trart frTI मम्मा प्रभाग डाय गयो पुगिा HAI? गगरे । "यभारभ्यायालय मगार राति ॥ 7 आगेनर भत्या पहा सगरम गम्म । पीतो ननाला मतो भिानु पगिरी ॥१४॥ मिया अगेश गर्भ च मिरिया राममोनि राम आगनपञ्चयालयमरगा उपता जगविगारोगा यि दुपरम गमया निरीयानुपग्गा एव गम्मा अपर पोन उपातानपचया भवा मनो दुमा निगरानि । जानग्म मरण होनि का दुगम गम्भयो ॥१॥ तस्मा उपागनारया मम्मरन्याय परिना । जानिमय अभिभ्याय न्नि मनि ॥२०॥ सिया बन्योत वि यर्थ च मिया। यति गम्भोनि राम्र आरामपच्चयाति जय एकानुपरगना आरम्भान यव अगनिगगनिरोपा नाथ दुवस्त्रस्म मभयो ति अथ दुतियानुपस्सना । एवं सम्मा अधारे एनवान मत्था- य किश्चि दुम्ब ममोति सर्व आरम्भपच्चया । आरम्भा निरोधन नथि दुवसस्स सम्भवो ॥२शा गत जानीनव जत्वा दुक्य आरम्भपञ्चया । सव्यारम्भ परिनिस्मज्ज अनारम्भे त्रिमुत्तिनो ॥२२॥ उच्छिन्नभवतण्डम्म सन्तचित्तस्म मिसुनो । वित्तिण्णो जातिममागे नस्थि तस्स पाभवानि ॥२३॥ मिया अच्न दि क्य च सिया। य विश्चि वां सम्भौति, सब आगारपच्चयाऽनि जय एकानुपस्सना जाहागन वेव अमेनि रागनिरोया नस्थि दुवावस्स सम्भवोति जये दुतियानुपस्सना । एवं सम्मा अथापर एतदवाच सथा- यं विञ्चि दुश्व सम्भाति सब्ब आहारपच्चया । आहारान निगेधन नस्थि दुक्खस्म सम्भवा ॥२४॥ प.
4नुपात भवराग परेतहि भवमानानुमारिहि । माग्पप्या पन्नहि। नाय धम्मो मुमम्मुधो२ ॥४१॥ को नु अन्यत्रमरियहि पद मम्बुद्धमरहति । य पद गम्मदस्त्राय परिनिति अनासपाणी ॥४॥ इ-मयोच भगवा । अतमना त भिवायू भगा भामित अभिातु -मस्मि या पन वय्यावरणास्म भश्नमाने सहिमताा भिक्पून आपाय जासहि चित्तानि विमुचिमूनि । द्वयतानुपस्सनामुत निद्वित । तस्मुद्दान-- सच्च उपधि अविग्ज 7 सम्याराविनाणपन्चम । पसरनिया तव्हा उपादानारम्भा आहारा । इजिते पदित ए सच्चदुवग्पेन साळसाति ॥ महाग्गो ततियो। पटनालापान । मम्सुगन- मुनी (नया)। मागर्न न भेजो गg पदम । डोली मार को न १ ० को द्वगतानपम्मा । दासेमानित गुमारि महावग्गोनि वुमनानि ।
[ १२
TO
गुगता
গণ িবলি "; দূs মশামু। গলগার সিম
गानगा ये मिया माग-नाग यानुगामnfini
fr। সামআন স যrি Tষামুণ বয়ার টি - यार
पम्गना। मम्मा
अगर पसाया-
आत्तनि रामाा परम ममा ।
निविट नामग्मि सम्बना मना |
मन पागम्मलिना जग्गया ।
नहि नग्ग मुसा हाति मोमयम्मदार ॥३॥
समागधम्म शिवाण गरिया गा पिए।
न ये मचाभिसगया frTना पििनयुतानि ॥३५॥
गिया अन्जन मि परियायन गम्मादयतानुगति "f I निगम
नितारा परमु मियानिग्गु पचाप । म पगिया। यदि गवारग
प० म वमनुम्गाय इ. मुले नि उपाय समरियानं एन
दुपति ययाभून मम्मापल्याय मुदि-अय पानुपम्मना 4 भिर
गवारम पे.
ग"वमापायदुरमानि उपनियापि तमग्यिार
गन गुमति ययाभून गम्मपन्नाय गुरिद्र-अप पुनियानुपम्मना। पर मम्मा
द्वग्रतापस्गिनो पा मिव भिरा जपमाग आगापिता पहितिम दिन
रतो दिन पगा अश्शार प” पारिवग दिर पम्म मा गया
उपानिमम जनागामिति । इनमवोच भगवा इन यमा गुगता अथापर
एतत्वाच राथा-
रूपा महा रसा गधास्मा धम्मा न बरग।
ट्ठा कता मनापा च यानत्थीनि वुमनि ॥३५॥
गटेवास्स गेम्म त वो सुगमम्मना ।
यथ चेत नियन्नि त म टुग्यमम्मत ॥३॥
मुगानि छि मरियहि सरायस्सुपरोधन ।
पच्चनीर इ. होति मग्लोगन पस्मत ॥३८॥
य परे मुमतो पाहु तरिया आहु दुक्यतो ।
य परे पषता जा तरिया सुपतो विदू ।
परम धम्म दुराजान मम्पमूचनत्य अविदम् ॥३९||
निवुनान नमो होनि अधकारो अपम्मत ।
सत च विकट हाति जागो पस्मत श्व।
सन्निन न विजानति मगा धम्मस्मगोविना ॥४०॥
या अतना सीरवतानि जन्तु अनानु पुट्टो च। परेसा पावा' । अनरियधम्म कुसग तमाहु यो आतुमान सयमेव पावा' सन्ता च भिक्षु अभिनिब्बुतत्तो इतिहमति सीग्सु अपत्थमानो। समरिषधम्म कुसरा वदन्ति, यस्सुस्सदा नथि कुहिचि रोने ॥४॥ दुट्ठ मुत्त [ ८५ काममु गिद्धा पसुता पमूळहा, अवदा निया ते विसम निविट्ठा । दुखूपनीता परिदेवयन्ति, कि सु भविस्साम इतो चुताने ॥३॥ तस्मा हि मिक्खथ इधैव जन्तु, य किन्चि जना विसमऽति लोके । न तस्स हेतु विसम चरेय्य, अप्प हिद' जीवितमाहु धीरा ॥४॥ पस्सामि लोक परिफन्दमान, पज इम तण्हागत' भवेसु । होना नरा मच्चुमुखे रपन्ति, अवीततोहामे' भवाभवेसु ॥५॥ ममायिते पस्मय पन्दमाने, मच्छऽव अप्पोदक सीणसोते । एतऽपि दिस्वा' अममो चरय्य, भवेसु आसत्तिमकुब्बमानो ॥६॥ उभोसु अन्नसु विनय्य छन्द, फ्स्म परिजाय अनानुगिद्धो । पत्त्तगरही तदकुख्यमानो, न लिप्पती दिट्ठ सुतमु धीरो ॥७॥ मन परिजा वितरेय्य ओघ, परिग्गहेसु मुनि नोपलिता। अच्यूटहसन्ग चरमप्पमत्तो, नासिं सती लोकमिम पर चा ति ॥८॥ गृहठकसुत्त निटिठत । - (४१-दुठ्ठठक सुत्त ४।३ ) वनन्ति वा दुट्ठमनापि एक" अथोऽपि वे1 सच्चमना वदति। बाद च जात मुनि ना उपेति, तस्मा मुनि नत्थि खिलो कुहिञ्चि ॥१॥ सक हि निट्ठि क्थमच्चयेय्य, छा!"नुनीतो चिया निविट्ठा । सय समत्तानि पकुब्बमानो, यथा हि जानय्य तथा वरेय्य ॥२॥ ॥३॥ M अप .C.सहगल . परिया UN अपि नास्ति C foscala C,M Fat 11C - परस A1 °वत्था, वित्था सहित, हेत 11, सो PM दिस्वान १०॥ घे C. एते "I दानतीतो IN °फुटठो पाय Y ४-मढकयग्गो (३६-~याम-मृत्त ४) वाम पामयमानम्म गरम मत ममिति। जदा पीसिमना पनि रमा म यन्शिन ॥१ नग चपामयमानम्म' इन्जातरम । समामा परिहायलि मचिसापागा यायाम पग्विजनि गणस्गय पता मिरा । गा इम' रिमति ससना गमतिवमति ॥ मत यि गिर वा गयाम्म माग्मि" । थिया' रघु पृयू वाम या नरा अनुगिरनानि ।। अप नंबरीयनि मानन परिम्मया । ततो न मम वेति व मिममिवो ॥५॥ मम्मा जतु मला सनो वामानि परिय जय । त पहाय तरे ओघ नाव मिश्नि व पारगूनि ॥५॥ काममुत्त निटिटत। (४०--गुहटर सुत्त ॥२) मतो गुहाय बहुनाभिटना, निट्ठ नरा मार्नारम पगा। दूरे विश्का हि तथाविधो सो कामा हिलो न नि मुष्पहाया ॥१॥ इच्छानिना भवसातवद्धा, ते दुप्पमुञ्चा न हि अनमोसा। पच्छा पुरे वापि अपक्प माना इमेव कामे पुरिमे व जप्प ॥२॥ IM गवस्स R, N कामयानस्स Mदासपरिस सिरो N सित्वाऽय *M, N 54 IR अबलाऽव • सिञ्चित्वा M, C अपेख १. पजप्प नास्तिव M [४२ ४१५ परमटटप गुरी गय समागाय वनानि जन्तु, उच्चार गा गागा । विद्वा च वदहि ममेच्च धम्म, 1 उt TriralI || म सवधम्मेमु मिनिमा, में विधि दि म्। था। नमवमिंग पिवट पाल, र गरिमसियाग ॥१॥ में वप्पयन्ति न पुग्यपनि' , Trful ।। बागान र गधित विमग्न, आग या 1 1111 WIN I) 19 मामालिंगा बाबा नग्ग यि, अग्या frary Art न गमगीन ग THI, गा मा up kirt VIm गुदगुर्म निति -- मानिगो [m मिमा माग TITHILI Triनि त जागिम निगा mer-fT' ॥२॥ Srila गानिमाशिमा पम्म fr' मभुगता नामा L Tणु मामु गिन नागिन पम्म ॥६॥ गानगपति, पाEि IT गु । गाय 7 मा पार पाना मगन गणनामा गा"t धिमग श अनूपया वय। अग तनसि पि जयालागिपर मयाfrner दुरटरठरमुत्तं निरिटत । (१२-सुहटा मुत्त ४१४ ) परगामि गुरु परम अरोग नि गगुद्धि नग्ग IIT I एताभिजान" परगनि गा गुलानुपम्मीति" पनि शाम ॥१॥ ट्टिन 7 मुद्धि नरम्म हाति प्रमाणा या मा पनहानि दाम। अम्बामा मुज्यति मापधागो ट्रिी" हि न पाय गया यणा ॥२॥ न ब्राह्मणो अजातो गुद्धिमाह हि गुन गीग्वन मुन वा । पुत्री च पाच अनूपरिता जताही न विध" पुरिम पगय पर मिता''म जानुगा त" 7 तरन्ति गग । त उग्गगर्यान्त निरस्समन्ति" , कपीर गाय पमुप* * गहाय" ॥४॥ पब्यमाना ॥३॥ 'R नी का २१ पुरे० 10 सन्तिमवी कुप्प पटिच्चे सति • निगच्छध्य N निदस्सति CAM तीच "ही "CN अनुपयो अनुपयं १. Fsb सद .Cदिठीन N एवाभि 1. नास्ति "C सोलग्यते १ CA अनु. C अत्तजहो .M, Fsb-न इध 11 सिताय ३॥ न ते UJ निस्सजति निस्सम्मति २४C पमुञ्च प्रमुञ्च UC गहार्य I'M FTE ४१५ परमदटव मुत्त स मामयम्ममुर गिनिभूता, , आरनाथ गथित निसज्ज आम न पुन्यन्ति युरिचि गाव 10 मा समादाय नानि जन्तु, उच्चावा गच्छति मन्जसतो' । तमार्गस्य विस्ट चरन्त, नीष लोम्मि* वियपयय्य ॥६॥ न स्प्पयन्ति न पुरस्वगति , अच्च नमुद्धीति' न ते वदन्ति । मोमालिगा पाहाणा तस्स स्थि, माता व दिस्वा घ' गमुग्गहीत । न गगराणी न पिगम रत्तो, तस्मीध' यि परमुग्गहीतपि हीराति अन्तरो गवमाह, नरमा विवादा अजीनिया व मा तत्थ समुनहाय निहीतरी परी रायग.100 [८७ दिवा च दहि समेच धम्म, न उच्चापन गच्छति भूगिलो ॥५॥ य विञ्चि दिट्ठ मुत मुत था। सुटठयमुत्त निटिठत। (४३----परमळक मुत्त ।।५) परमनि ट्ठिीगु परिचमानो पदार'' तुमजतु । ते वापि गाय दुमा पनि यरिंग नि की IEET | नरमा हिदिन व मुा भुन वा, गीrai भिगा fmar ॥३॥ दिशा लोम्मिन पणयग्य, माणा firTTTTIEI गमो नि अमानमापनम्य ईn 7 Tera fanni 1 || भा पहाय पालियो, गाण ft for marif में वे वियागु मारी flat-|| यन्तनो परमनि मानिमम ढेि गुते गीपा गुतं था।
१८ ] सुत्तनिपाता [१६ यस्सूभपन्ने' पणिधीर नचि भवाभवाय इप वा हुर या । निवसना नस्म' न मत्ति कचि धम्मगु नि छय्य समुग्गहीता ॥६॥ नस्सीय ट्टि व मुते मुने वा पापिता यि जणूऽपि सञ्चा। त ब्राह्मण रिट्ठि माग्यिान', Tीप' लोरग्मिर विरणयय्य 11७॥ न वप्पयन्नि न परेसरोलि, यम्मागितमा न पटिच्छितारा"। न याह्मणो मारना नभ्यो पार गती न पचति ता1ि . परमटर सुत निटिटत । (४४-~जरा-सुत्त टा६) अप्प बन जारिद, ओर वरममताऽपि मिय्यति । यो चऽपि अतिच्च जीवति अथ मो मो जरसा मि मिय्यति ॥१॥ गावन्ति जना ममायिने न हि सन्नि निच्चा पग्गिहा । विताभावमन्नमविट इति निस्वा नागारमावा ॥२॥ मरणनऽपि न पायति य पुरिमा मम पिदति मनि । एवऽपि विनित्वा पण्डिती न ममत्ताय नमथ माममो ॥२॥ सुपिनन यथा पि सगत" पश्चिद्धा पुरिगा न पम्सति । एव पि पियायित ३ जन पत वापरत न पस्सनि ॥४॥ द्विाऽपि सुनापि त जना एम नामित पयुच्चति । नाम एवावसिम्सरि जवसय्य पेतस्स५ जन्नुनी ॥२॥ १८ यस्सुभते २॥ यस्स M अणु II होत 8 M तस्मयिध ME C ब्राह्मणा दिटिठमनादि याना Cकोनाध 1 Fsb-स्मि 101 पुरव " नास्ति १.C, Fsb,-पनिच्छिनामे १३॥ नसो, सो १४C मे ११ तथव N Af न मिति निस्चा, Fsb नहि सन्तानिच्चा HC पहिय्यति १.M ममय, ममाय मय १M, N ९M Tsb पमत्ताय २. नमय २१ भगत जरायित " नाम पवा', एवावस्सयति, एव तावसिस्सति * एतस्स ४१७ ] तिस्समेत्तेय्य-सुत्त [ ८९ साक्परिदेवमच्छर, न जहन्नि गिद्धा ममायिते । तस्मा मुनया परिग्गह हित्वा अरिसु' खमनस्मिना ।।६।। पतिलीनघरस्स' भिकम्युनो, भजभानस्स विवित्तमासन । मामग्गियमाहु तस्म त यो अत्तान भवन न दस्सय ।।७।। मन्चत्य मुनि' जनिस्सितो न पिय कुब्वति नो पि प्पिय । तस्मि परिदवमच्छर पण्णे वारि यथा न गिप्पति ॥८॥ उविदु यथाऽपि पोरवरे, पदुमे वारि यथा न लिप्पति' । एव मुनि नोपरिप्पति यदिद ट्ठि सुत' मुतसु वा ॥९॥ धोना न हि तेन मन्नति, यदिद दिट्ठसुत मुतमु वा । न जगेन' विसुद्धिमिच्छति, न हि सो रज्जति नो विरज्जति ॥१०॥ जरासुत्त निटिठत। (४५---तिस्ममेत्तेग्य-मुत्त ४७ ) मथुनमनुयुत्तस्स (इच्चायम्मा तिस्मो' मत्तय्यो) विघात ब्रूहि मारिस । सुत्वान तव सामन पिवर सिवियम्सामम॥१॥ मथुनमनुयुत्तम्म ( मेत्तय्याति भगवा) मुस्सतवापि गामन । मिच्छा च पटिपज्जति एत तस्मि अनारिय ।। एको पुम्ब चरित्यान मथुन यो निसेवति । यान भन्त य त एसे हीनमा पुयुज्जन ॥५॥ यसो विनि' या पुष हायतेनापि तरस मा । तऽपि निस्वा मिक्पथ मथुन विष्पहाता ॥८॥ मापेनि परेनो गा" वाणो विय झायति । गुवा परेम निम्योग मकु होनि नधाविधा ।। .Mसो • अपरिमु अपरियंगु अमरियिगु पटि विक्तिमानस, C चिरामानस, N दिषितमागन •rsb-मुनी MAN स्पिति • दिदट *M दिदष्ठ M,Tsb-मानेन . तिस्समेतेम्यो 11M, Isb-feifen सामसे **C fra Isb, N fra MC हायने शापि urb यो ] सुतानपाना Nि यानि पुरत परवाना। एग रपमरा महागमा मोगा मार्ग पग्न्तिो नि गमञ्जाना रिंग पिटिनो । अयापि मथुन यता मा परिमिT 1131 एतमागेन गा मु पुन्यापर ग्धे । याग्यि 17 वयिगर निस्य मयन ॥८॥ विपन यर गिाय नरियानमतम । तन मरठा न माय गनिन्निर ॥९॥ रितम्स मनिनो परतो कामगु जापि । आपतिपणम्म वियन्ति गाि पनि ॥१०॥ निस्समतम्यसुत निति । वाम (४६----पमूर सुत्त ४१८) धन गुद्धिति वादियन्नि भासामु धम्मेगु विगुद्धिमार। यनिस्सिना तस्य गुमवाता पस्चरम चगु पृयू निविष्टा ॥१॥ त पालकामा परिम विगह पार दहन्नि" मिथु अन्नमन। वन्ति । अन्नसिता क्योज पमसामा बुगला बनाना ॥२॥ युत्ता क्याप परिगाय मज्य परासमिन्छ विनिपानि तानि । अपातस्मि पन मा होति, नि य सो कुणी र मममी ॥ ॥ यमस्स वादे परिहीनमा अपात्त पहवामसराम"। परित्वति।। सावति हीनपाटो उपचगा मति अनुत्युणाति'" ॥॥ 1 पसज्जाती M यिराय, परियाय IM एकचरिया मुत्तम IM न तेन सेटठी C चित्तस्रा PM गधिता • Fsb C सुद्धि (द्र० 892a ) M वादात <I नोमु १२ 11,N पति .C "M Fsb C पति Crsb काय "Fsb ती TCM Fsb atla ON सुभा ५१M हति मार्गाग्यसुत्त १९] [ ९१ रिवाना गमणगु नासा, एतसु उग्धारि' निघानि हानि । ran निस्वा पिरमे वयोज्ज, 7 राजदत्य पमसभा ॥५॥ परागितो वा पन तन्च होनि, अवमाय वाद परिमाय मज्म । गो हसति उण्णमनिच्च तेन पाणुय्य त मत्थ' यथामना अनु' ॥६॥ या उणति माऽस्स विघातभूमि मातातिान वदन पनेमो । एतपि निम्बा न विवान्येष, न हि तन सुद्धि' वुमा वति ॥७॥ मूरा यथा गजलाटाय पुटठा'', अभिगमति पटिसूरमिन्छ । यनन मा तन पहि' मूर। पुवश्व नत्यि यदिद युधाय ॥४॥ ये लिट्ठिमुग्गरह विवानियन्ति। ४ इन्भव सच्चानि च वादियन्ति । त य वाम्मुन हि ते धाथि वानम्हि जात पटिमनिकत्ता ॥९॥ विनिरत्या पन ये घरनि' रिटनीहि दिद्धि अविरज्यमाना । सुवकि' एभयो' पमूर , यमीथ नथि परमुग्गहीत ॥१०॥ अथ न पवित समागमा मनसा रिट्ठिगतानि चिन्तयन्ता । घोनन युग ममागमा, न नि7 सग्घसि२४ मपयातवे नि॥११॥ पसूरसुत निटिठत । (४७---- -मागन्दिय सुत्त ४१६) निस्वान तह अति ५ ग च नाहासि छन्। जपि मथुनस्मि । विमविद मुतश्रीरापुा पादाऽपि 7 मपुगिनु न च्छ ॥१॥ पादिस चे रता न इच्छसि, नारि रिहि हूहि पथित । निविगत २" सीवतानुजीवितं पवूपपत्तिं च वनसि कादिम ॥२॥ R हूँ M टि C एव + Fsb °सी, 1 हसति " rsb °ती ती च, १- Fsbत अत्यं ॥ तमत्थ . सुद्धि "M पुटठो सास, तस्स १२M पलेति १. सूर, पुर १४M विवादयन्ति 1. °च "M पति १M शिर ५ सभेय २. परम " सवितार नत्थी ** Cafet 11 २. अरति च राग, N जरति च राग अग्यमि, N सक्यति * Fsb fcotº 1. घरस्सु • समुद्द २.Fsb गुप्त • RAITA (Erfrailty m}, भगमन f7 समु! Trt PY RITER #II ft friram पानि frrfr (rls is st 14 ram अपामग्प attam महिमान भाग ( माण पा) माrrinfrinधिमा । दिपा भग्गुशि ", THmarati "fmranRT Tो TATTI तो frrifदयान गुपियान मारमा -1 माrarirfमुद्धिमा। गि अन्य मस्ताना गा ATTh। मन्न। मामु पम्में, हिपाप गरि पिरिमान ना (भाग ft Tr). ममुग? गुपगारगा। योग ना अशुमि गजमा मागि" गमा रिमेरी वाहिना", यो माना। नागु विधा अघिमा, ममो दिगोरिन नगnिel गाणी गागायो frय मुगारिया मा fruiTI यम्मि समं निगम पारि ify गाना वा पग्गिज ॥ आर पराप जनिानमार्ग गाम मा मनि गयी। पामेनि रिता आर. प म गिर जना वयिरा ॥१॥ अहम C, I भग्यत सन्ति (१०919) 11 परिचित "M यिनच्याति C .. •rsb मनी विगुशिम C माहा I P अगुतिया .rsb अजाणा, न 1.M निसन्ज M, Fsb-मामह **N दिटटी "C सम्मा' समोहमा गमा, पमोमागमा "R नादवित " रहामि, दवयामि, दस्मति . विहीतो EM, N वापि .11 अपुरेषयमानो "CN न 331 - यहि विवित्तो विचरेय्य राके, न तानि उग्गग्द बनेय्य नागो। एग्युज पटा' वारिज यया, जरेन पपेन चानूपलित। एव मुनी सन्तिवादो अगिद्धो, कामे चोय च अनूपलित्तो ॥११॥ न वेगू लिट्ठिया न मुतिया, स मानमनि न हि तम्मयो सा। न पम्मना नोऽपि गुतन नेय्या, अनूपनीतो सो निवेसनगु ॥१२॥ सन्नाविरसस्स न सन्ति गया, पन्नाविभुतस्स न सन्ति मोहा । मन च लिट्ट च ये अग्गा त घट्टयन्ता' विचरति लोरे ॥१३॥ मागदियसुत्त निटिटन। (४८-पुराभेद-सुत्त ४।१०) क्यदम्मी क्थमीठो उपसन्ता ति बुच्चति । त मे गोतम पनूहि पुच्छिना उनम नर ॥१॥ पीतताही पुरा भेना (ऽति भगवा) पुवमन्तमनिस्सितो वेमझे नूप मग्वय्यो तस्म नत्यि पुरेक्यत' ॥२॥ अक्योधनो असन्तामी विवत्थी अबुवकुचो । मन्नभाणी अनुदतो म वे वाचायता मुनि ॥३॥ निगसति' अनागते अतीत नागसोचनि। विवेवटम्सी फस्मेमु टिठीमु च न निय्यति ॥6॥ पनि लीनो अपुरो अपिहानु अमरी। जप्पग भो अजेगुच्छो पेसुणय्ये च नो युता ॥५॥ सातियसु अनस्मावी अनिमाने च नो युता । सण्हो च पदिमानवा न सो न विरज्जति ॥६॥ लाभवम्या ० न मिवसति अगम न च १ कुष्पति । पविरुद्धो च तण्गय रम'२ च नानुगिज्झति ॥७॥ उपक्वको सता मतो न गम मचने मम । न विममी न नीचेय्यो तस्म म सन्ति उस्मता ॥८॥ M कण्ड . दिट्टियाको, AM , B दिट्ठियायो घट्टमाना परमाना 11 नुप, न प 1 °च्चो .C,M सति Bsb ती -M पटि लोभ, पप्पा ..,B रसेसु १५R उपेखको ०१ पुरक्वत •M युतो IM चन .] गुतनिधारा भगिता' T धर्म शिगिती। भवाय रिभवाय यग्ग hिil न मि उपगना मा पनाशिन' । गया म्ग Tfrपिसासि गा पितगिा ॥10॥ न सम्म पत्ता पापा' गाजिरि। जत्त' वाhिim'राननम्मि Tी ॥११॥ पन 7 यजु" या या गमाया। 1 परम पुगस्त। सम्मा या गुरजनि ॥१॥ योनगपा जमच्छर। 7 उगगु पण मी। न गमेगु सामगु नि परणिया ॥१३॥ गस्ग गा मा नाच जमता TT मोपनि। मम्मे 7 गीस ये Tो नि गीति ॥ ४ ॥ पुराभवमुत निम्ति ( १९-कलाकार सत्त ११) वृता पहना कर जिला परि गागरा मच्छरा । मानातिमाना भर पगुणा 7 युग पहा ते जन्मिय यूहि ॥१॥ बग सिना परि घमारा राह मनरा च। मानानिमाना म पगुणा व मग्गियत्ता | विचार। विवाजामु उपमुणानि ॥२॥ मिरा मुगाम्मि यतानिगाना य पापि मा विननिर। आसा च पिट्ठा 7 दुतानिताना य मपरायाय रस्म हानि ॥ ॥ चलोनिशानानि पियानि , य वापिसभा विचरन्ति । जामा च निट्ठा र तानिगना य मपरायाय नरम होनि ॥४॥ 111, B निम्तयना IM अतरि, अतरी "M, Fsb-स्यायो M अत्ता अत्य . निरत्य C,B त , N Isb नास्ति १MN वन्जु * जनुपेकायत निनुपेक्खन अनुपविखन ॥ वत्य च,C Mउपपति पुअर १२ 11 पिय्यप्पहूता ४३११ ] रहविराट-गुत [९५ छदोन तम्मि कुतोनितानो, विनिच्छया वाऽपि कुतो पहूता। फोयो मोसमज च क्यथा च, ये या पि धम्मा समणेन वत्ता ।।५।। मान असातति यमाहु गो, सम्पनिस्साय पहाति छन्दा । प मुदिस्या विभव भय च पिपिच्छय पुग्ते जन्तु लोर ।।६।। सोधो मोगवा च वधकथा च एतेऽपि धम्मा द्वयमेव रान्त । क्यपथी शाणपयाय सिक्ये, गत्वा पयुत्ता समणेन धम्मा ॥ सात असात च कुताशिदाना, विस्मि असन्ते न भगति हेत। विभव भव चापि यमतमय, एत म पहि यतोशिदात ॥८॥ पस्मनिटान' सातमसात, फम असतेन भान्ति हेते। विभव भव चापि यमामत्य, एत ते पब्रूमि इतोनिदान ॥९॥ पम्मो नु तोस्मि कुतोनिदाना परिग्गहा चापि युनो पहता । विस्मि असन्त न ममतमथि, विस्मि विभूत न फुसन्ति पस्सा ॥१०॥ नाम च प च पटिज्य फस्सा इच्छानितानानि परिगहानि । इच्छा' न सन्त्यान ममतमत्यि स्प विभूते न पुमन्ति फरसा ॥११॥ पथ समतस्स विभोति रूप, मुग्व दुग्न वाऽपि क्थ विभोति । एत मे ब्रूहि यथा रिभोति, त जानियाम' इति मे मनो नहु ॥१२॥ न सनसन्नी न विसञ्जसन्नी, नापि असन्नी न विभूतसन्नी। एव समेतस्स विभाति रूप, सनानिदाना हि पपञ्चराखा ॥१३॥ य त अपुच्छिम्ह अक्त्तियी ना अञ त पुच्छाम तन्दिघ ब्रूहि । एतायतग्ग ना पदन्ति हेरे, यवखम्स सुनि इध पण्डिनाम । उदाहु अन्न पि यदति एत्ता ॥१४॥ एत्तावतग्ग पि यन्ति हरे, यस्पस्स सुद्धि इध पग्निताम । तेस पुने समय वदनि, जनुपानिमसे कुमग याना ॥१५॥ एते च भवा उपनिस्मिता ति गत्वा मुनी निस्सय सा विमगी। गत्या चिमत्तो न विवात्मनि भनाभवाय न समति धीगेनि ॥१९॥ पलविवादसुत्त निटिठत । N फस्स निदान 'चाऽपि *M जानिस्साग M अतिथि 1-1N, N इच्छायास त्या ' मुनि मरा (५०-पापियर -मुत ॥१०) मागर दारिm, f7 नारा गTI TITfum पगियामा ॥१॥ offinf17 या पापा पाह। गनो या याम मर्म, गगग Ttu पग मनाजान TT Trfriना। माता गुमिसान्गा, मे निgiran" साहिया में पानी , गागमा परी । मोम बाशि परिपतीनाम्मो सिमा साना | नपामा पिडिमि ममाह बाग मिषु अन्यमाने। मर मा निद मरगु गर्न गम्मा दिया पर नि || पमा गन्न मपियनी, तमाः सन्तु मुगा गिरमिटिया सम्मान र गमता TIm RT-रिपयिम पजाना yिani ना त गरि गर्य पुननि मा र ममा TETill पम्मा गन्नानि यानि नाना पायाम मुगल बगा। गन्नाति मुगानि' बी TI उगन तामनुग्गनि | हे गच्चानि नाना अन्य सम्माय निरानि । TT च हिदागू नापयि ॥ गन्न मुमा मियाममा ॥ ढेि गा मोरया मा पाMIT' निरमाय धिमानी। गिन्छये रटना परम्ममा पागे पगे अगानि मा ॥१०॥ यनद वागी पर हानि नानुमान नुमगन नाह। गयमत्तना गा गा वगना, अश्या विमाननि पाया" ॥११॥ अतिमर' ट्ठिया गो गमतो मानन मत्तो परिपुण्णमाना । मयमन साम मामाभिमित्ता, द्विी नितम्ग तथा ममता ॥१२॥ परम्म प हि वरमा मिनीनो तुमीमा होति निभानपाना। अप पे गय पेग होति धाग नि गो समणग पयि ॥१२॥ R वाहमेत N पढ्समानो अतिसार दिट्टिया 'N मको 11 धीवदाना Fsb दिटठी • विषादयति •R सु तानि N एनेमु + N असुरालो N लदेव पावद " मुम्हो ४११३] - महावियूह-सुत [ २७ अञ इतो याभिवदन्ति धम्म, अपरद्धा सुद्धिमकेवलीनो' । एव हि तिच्या पुथुसो वदन्ति, सदिट्टि रागेन हि तेऽभिरत्ता' ॥१४॥ इधव सुद्धि इति वादियन्ति' , ना सु धम्मेसु विसुद्धिमाहु । एवऽपि तिच्या पुथुसो निविट्ठा, सवायने तत्य दळह वदाना ॥१५॥ सकायने चापि दळह वदानो, क्मेत्थ बालोऽति पर दहेय्य । सयमेव सो मेघ' आवहेम्य, पर वद बालमसुद्धधम्म' ॥१६॥ विनिच्छय ठत्वा सय पमाय, उद्ध सो लोकस्मि विवादमेति । हित्वान सब्बानि विनिच्छयानि, न मेधक कुरुते' जतु लोके ति ॥१७॥ चूळवियूहसुत्त* निटिठत । (५१-महावियह-सुत्त ४.१३) ये कचिश्मे दिट्ठिपरिब्बसाना, इदमेव सच्च ति विवादियन्ति । सम्बेऽव ते निन्दमवानयन्ति अथो पसंसपि लभन्ति तत्य ॥१॥ अप्प हि एत न अल समाय, दुवे विवादस्स फलानि ब्रूमि । एव पि दिस्वा न विवादियेय , खेमाभिपस्स अविवादभूमि ॥२॥ पा काचिऽमा सम्मुतियो पुथुज्जा, सब्बाऽव एता न उपेति विद्वा । अनूपयो सो उपय किमेय्य, ट्ठि सुते खन्तिमकुम्बमानो ॥३॥ सीलुत्तमा मयमनाहु सुद्धि, वत समादाय उपद्वितारी । इधेव सिक्खेम अथऽस्स सुद्धि, भवूपनीता कुसला वदाना ॥४॥ स चे चुतो सीलवतातो होति, स• वेधति सम्म विराधयित्वा । स जप्पति पत्ययतीप" सुद्धि, सत्याऽव' हीनो पवस घरम्हा ॥५॥ सीलब्बतं वाऽपि पहाय सम्ब, कम्म च सावज्जनवज्जमेने । सुद्धि असुद्धिति अपत्ययानो, विरतो चरे सन्तिमनुग्गहाय ॥६॥ तपूपनिस्माय जिगुन्छिन वा, अप वापि दिट्ठ ऽव सुत मुर्त वा। उदसरा सुदमनुत्युनन्ति, अवीततोहासे भवाभवेसु ॥७॥ IN सुटिमकेवली ते २N स्यामिरता IN वादयन्ति IN के तत्य IN सयवसो मे घर्ग • R. बालमसुदि पम्म •N म मेयर्ग कुम्वति * 1 चूठम्यहमुत्त एत पि विस्वा न विवाश्यप N सीलवततो १०॥ पवेदति,N पर्दधति IN पजापति परपपतिन्च .. सस्था विहीनो "M तमुपनिस्साप . ७ ९८ ] सुननिपाता पथयमानम्म हि जपितानि, मरेरित चापि परचितगु । चुनूपपाना इध यस्म नयि स पन बघय्य दुहि चि जण |८|| यमाहु धम्म परमानि व तमेव हीनाति पनाहु अन । गच्चा न यादो क्तमो इमेग सन्च व हीम कुसा बदाना ॥९॥ सर हि धम्म परिपुण्णमाहु अन्यस्म धम्म पाहीनमाहु । एवऽपि निगह विवानियन्नि' , सामा सम्मुतिमाहु मञ्च ॥१०॥ परस्म चे वयितेन होनो न वोचि घम्मेगु विगसि अस्स । पुयू हि अास्म वन्ति धम्म निहीनतो सम्हि दह पाना ॥११॥ सद्धम्मपूजा' च पना तपद पया पससन्ति समायनानि । मब्ब पवाटा तथिवा भवय्यु मुद्धि हि तम पञ्चनमेव ॥१२॥ न ब्राह्मणस्म परनय्यमथि, धम्मेमु निच्छय्य समुग्गहीत । तम्मा विवाद उपातिवत्तो न हि मेट्ठ तो पस्मनि धम्ममम ॥१५॥ जानामि पस्मामि तथव एत, लिट्ठिया एक पच्चन्ति सुद्धि । अद्दविन चे कि हि तुमस्स ता अतिमि वा जन्मोन यन्ति सुदि ॥१०॥ परस नरो दसति नामरूप निम्बान वा अस्मनितानिमय । काम बहु पस्स तु अप्पर वा, न हि तेन मुद्धि कुसला वन्ति ।। १५ ।। निविस्सवादी न हि सुद्धिनाया' पापित' रिट्ठि पुरेक्मराना । य निस्सितो सत्य मुभ वदानो सुद्धिवटी तत्थ तथद्दमा सो ॥१६॥ न ब्राह्मणा कणमुपेति सख न हि दिट्ठिमारी नपि जाणवधु । भत्वा च सा सम्मुनियो पुयुज्जा उपकनि उग्गह्णन्तमने ॥१७॥ विसज्ज गथा मुनाप लोक विवादजानेसु न वग्गसारी । सन्तो असन्तमु उपेक्सको सो, अनुग्गहो उग्गहणन्त मन्ने ॥१८॥ पुवासचे हित्वा नव अकुब न छन्दगू नोऽपि निविस्सवादो । स विप्पमत्तो रिट्टिगतहि धीरो न लिप्पनि रोक अनत्तगरही' ॥१९॥ २ HC सधम्मपूजा IN पवेधित वापि २R कुर्हि च IN विवादयति N शायति *M, N सुधिनाया B सुधिनयो 'N पप्पिता दिट्टि N सुद्धिवदो 'उग्गहत्ति मञ्को १° उगतिमने १N लिम्पति १N अनत्यगरही तुपट्टपन्मुत्त स स धम्मेसु विमेनिभूनो, य वि चि दिट्ठ व सुत मुत वा। स पनभारो मुनि विप्पयुत्तो', न वप्पियो नूपरतो न पत्थियोति (भगवाऽति) ॥२०॥ महावियूहसुत्त निटिठत । (५२-तुटक-मृत्त ४.१४) पुच्छामि त आदिच्चब धु विवेक सन्निपद च महेमि। कथ दिस्वा निम्बाति भिक्खु अनुपादियानो लोकस्मि किंचि ॥१॥ मूल पपञ्चसखाया (ति भगवा), मन्ना अस्मीति सब्बमुपर ध" । या काचि तण्हा अज्झत्त । तास विनया सना सतो सिक्व ॥२॥ य किचि धम्ममभिजा अज्झत्त अथ वाऽपि बहिदा। न तेन मान' बुबथ, न हि सा नियुति सत वुता ॥३॥ मय्यो न तेन मओग्य, नीचेय्या अथ वाऽपि सरिक्खो । फुट्ठो' अनेकरूपेहि, नातुमान विक्प्पय ति? ॥४॥ अज्झत्तमव उपसम, नाम्जनो भिक्खु सन्तिमेषम्य । अज्झत उपसन्तस्म, नत्यि अत्त' कुनो निरत्त वा ॥५॥ मग्शे यथा समुद्दस्म, अमि नो जायति टिको हाति। एव ठितो अनज्जस्स, उस्सद भिक्षु न करेय्य हि चि ॥६॥ कित्तयि विवटचक्षु, सस्विधम्म परिस्सयविनय । पटिपद वदेहि भद्द ते, पातिमोक्ष अय वापि समाधि ॥७॥ चक्खूहि नेव लोलस्स गामस्थाय जावरय सोत । रम चानुगिज्झय्य, न च ममामथ किञ्चि ठोरस्मि ॥८॥ फस्सेन यदा पुटुस्स, परिदेव भिक्षु न घरैय्य मुहि चि । भव च नाभिजप्पेम्य भैरवेसु च न सपवेधेय्य ॥९॥ अन्नानमयो पानानं सादनीयानमथापि वस्यान । लद्धा न सनिधि कपिरा न च परित्तमे तानि अभमानो ॥१०॥ IN विपमुत्ता IN पार्म रित्ता २ महापूह IC पुटठी IN महेसी IN अता M N गुल निपाता [ ४१५ शापा न पादलोरम , पिरमे युगुमा मणमाम्य । या भागोगु गमनमु , अपराहगु भिात विहरण्य ॥१॥ गिद्द न यहाआरम्प', जारिय मरम्प आता। तत्रि मार्य हरग मि, मेवा विपत्रह भविभूगं ॥१२॥ आथवा सुरिन पाणं, नो चिन्ह अया पिरतं । पिरतापगभवरण रिरिणं मामरावण ॥१॥ निय पवधव T मम्म पममितो भिार। राम राह मछरिया, कोप पगुनियं 7 पनुदा ॥१॥ गय विसय लिटरम्प , उपसार भितु करम्प मुहिम गामे च नाभिमजय , माम्या जान सम्म ॥१॥ न च यत्यिता सिपा भिरा, न घ याने पयुक्त मामय्य। पागन्मिय 1 मिस्पेग्य वर्ष विग्गाहिाँ न पपपेय ॥१६॥ मोमबजे निम्मेय , मानानो सानि 7 पपिरा । अप जावितेन पञ्याय , गारमान नाग्नशमने ॥१७॥ मुवा गमिगो' बहे याच गमनानं पुयुश्चनान । फरमन ते म पनिवजा, न हि रानो पटिगनिागति' ॥१८॥ एत ध धम्ममज्ञाय विपिन भित्र मा समासिक सन्तानि नि नि मारवा , सागने गोतमरस नष्पमन्जस्य ॥१९॥ अभिभू हि गो अनभिभूतो , गणियम अनीतिहमनरसी' । तस्मा हि तरस भगवतो माराने अप्पमता गा नमस्ममनु मिक्वेऽति (भगवा ति) ॥२०॥ तुवट्टरसुतं निटित। . - (५३---जत्तदण्ड सुत्त ४।१५) अत्तण्डा भय जात जन पम्सय मेधक सर्वग वित्तयिस्मामि यथा सविजित' मया ॥१॥ C कुवाच्च M पयुत्त IN दूसितो पहुवाच IN विपद M बहुल न करेय्य IN पटिसेनि EN MET C मविक्ति N. अद्दसि अत्तपर गुस [ १०१ पदमा पर्ज दिस्था मच्छे अप्पोदो यथा । अामओहि व्यारुद्ध दिस्दा म भयगाविति ॥२॥ समतमसरो' लोरो दिया समा गमेरिता । इच्छ मवनमतनो नाद्दमासि' अनासित ॥३॥ आमाने त्येव घ्यारद्धे दिस्वा मे अति अहु । अयेत्य सल्लमद्दपि दुदर्म हदयनिस्सित ॥४॥ यन सल्ले ओलिण्णो दिसा राधा विधावति । तमेव मल्ल अब्युम्ह न धावति रिसीदति ॥५॥ तत्थ मिक्सानुगीयन्ति (यानि लोके गथितानि) न तेसु पसुतो मिया । निम्धिन सम्बसो यामे सिकरो निधाणमत्तनो ॥६॥ मच्चो सिया अप्पगब्भो अमायो रितपेसुणो । अवोधनो लेभपाप देविच्छ वितरे मुीि ॥७॥ निह तन्दि सह थीन पमादेन न सवरो अतिमान न तिठेय्य निम्नाणमनसा नरो ॥८॥ मोमवग्जे न निय्यथ स्पे स्नेह न कुब्धये । मान च परिजानेय्य साहसा विरतो चरे ॥९॥ पुराण नाभिन दय्य नवे सन्ति न कुब्धये । हीयमाने' न सोचेय्य आवास न सितो सिया ॥१०॥ गेध नूमि महोपो ति आजव' ब्रूमि जप्पन । आरम्मण पक्प्पन वामपंको दुरच्धयो ॥११॥ सच्चा अवोक्कम्म मुनि पले तिट्ठति वाहाणो। मन्त्र सो पटिनिस्मन्न रा वे सन्नो ति दुचनि ॥१२॥ स वे विद्वा स वेन्गु जत्वा धम्म अनिमिरातो। सम्मा सा लोके इरियानो न पिहेतीघ कम्सचि ।।१।। योध कामे अज्चतरि सग लोके दुरच्चय । न सो सोचति नान्यति छिनसोतो अवघनो ॥१४॥ य पुब्बे त विसोसेहि पुच्छा ते माहु विञ्चन । मज्ने व नो गहेस्ससि उपसन्तो परिस्मसि ॥१५॥ N, M समतमसारी IN नादसामि IN मसीदति IN खतिमधये N अवोक्कम IN चे IN हृदय सित IN हिम्यमाने .N आचम १०२] मुननिता मासा मम्मि पम्ग नयि ममायित । अमता घमापति मदन जिपी १६|| परम पि - मति परम वापिसा। ममत्त मा अगयिद यि मनि मारि ॥१॥ अनिवारी सानुषिदो आगो मन्त्रधीममा । नमानिगम पमि पुस्टिना रिमिदन ॥१४॥ आजम्म विजातो त्यि माचि निमगिरी। विरता मो विपारमा गम पररानि गवया ॥१९॥ न मममु न आमेगु 7 उस्मगु वा मुशि। गनो सो योनमच्छरा नादनि 1 निरगतीति (भगवा नि) ॥२॥ अतदत्तं निठिन। (५५---सारिपुत्त-मुत्तं ४।१६) न मे निदो इतो पुन्चे (इच्वायम्मा सारिपुतो) रम्गुतो' उ मस्गनि । एय वागुदगे रापा तुमितो गणिमागतो ॥१॥ सटेवास्ग होरस यथा सिमनि चस्मा । सम्म तम विनोवा एसो चरित रनिमगा ॥२॥ त वुद्ध असित तानि अनुह गणिमागतं । वमिध बज्ञान अयि पञ्ो। आगम ॥३॥ भिवनो विजिगु छनो भजनो रितमासनं । रुपमूलं सुगानं वा पम्यान गुहामु या ॥४॥ उच्चावचसु सयनेसु कीवन्नो' तत्य भेरवा । यहि भिक्षु न बधेम्य नियोगे सपनामने ॥५॥ कति परिस्मया लाने गच्छता अमत निर्म। ये भिवग्नु अभिराभवे पलम्हि रायनामन ॥६॥ क्यास्म व्यप्पथयो अस्मु क्याम्ममु *ध गोचरा । कानि सीर तानस्सु पहितत्तस्म भिवानी ॥७॥ IN N न सुनो IN खीवतो *N अग ४११६ ] मारिपुत्त गुत्त . केमो मिक्व ममादाय एकोदि निपको सतो । कम्मारो रजतम्सेव निउमे मलमत्तनो ॥८॥ विजिगुच्छमानस्म यदिट फासु (सारिपुत्ता ति भगवा ), मया रित्तामन सवतो चे ।। गबोधियामा यथानुधम्म, त ते पवववामि यथा पजान ॥९॥ पश्चन धीरो भयान न भाये, भिक्षु सतो सपरियन्तचारी । डमाधिपानान मिरिसपान', मनुस्मफरमान चतुप्पटान ॥१०॥ पग्धम्मिकान न मतमय्य दिस्थापि तेस बहुभरवानी । अथापरात अभिमगवेय्य, परिस्मयानि कुसलानुसी ॥११॥ आतपस्मन सुदाय फुट्ठो, सीत अच्नुण्ह' अधिवासयय्य । सो तहि फुटा बहुधा अनोतो, विग्यि परपक्म्म दळह क्रेय्य ॥१२॥ थय्य न परेय्य' न मुमा भणय्य , मताय फस्स तसथावरानि । यतारित मनसो विजन्मा हम्म परवाति विनात्यय्य ॥१३॥ कोधातिमानस्स वस न गच्छ , मूलपि तम पलिवन नि? । पथप्पिय वा पन अप्पिय वा, अद्धा भवन्तो अभिराभवेम्य ॥१४॥ पञ्ज पुरस्वत्वा कल्याणपीति विश्वभये तागि परिस्मयानि । अरति सरेथ सयाम्हि पन्ते चतुग सहय परिवधम्मे ॥१५।। कि मु असिस्सामि कुव' वा अमिस्स, दुख वत सेत्थ वज्ज सस्स। एते दिनको परिदेवनय्य, विनयथ रोसो अनिवतसारी ॥१६॥ अन्न च लद्धा बसन च काले, मत्त स१२ जना न्ध तोसनस्थ । मो तेगु गुनो यतचारि गामे रमितो""पि वाच परम न वजा ॥१॥ ओक्षि भवन्तु न च पादगेलो झानानुयुनो बहुमागरस्म । उपेक्समारब्भ समाहितनो तपासय दुपच्चियूपछि ॥१८॥ चुनितो वचीहि सनिमाभिनदे सग्रह्मचारीसु विर पभिन्द । वाच पमुध्ने कुसर नानिदे। जनवादधम्माय न चनयय्य ।।१९।। . IN सरीसपान. •N पुरवियर एकोधि N पञ्चन्न अतुह ५N पराम IN कारे असिस्स *N कुथ या ..N घेत पवाज सेम्प "N सो IN परवारी N कुक्कुच्च धूपछि दे 11. . 932 मि.
1 १०४ ] मुतनिपातो [४१६ अयापर पञ्च रजानि रे, येसं तीसमा विनयाय सिबसे । स्पेसु सद्देसु वयो ररोसु गन्धेसु फस्मेसु सहेप राग ॥२०॥ एलेसु धम्मेसु विनम्य छन्द, भिक्खु सतीमा मुविमुत्तचित्तो । कान सो सम्मा धम्म परिवीमसमानो, एपोनिभूतो विहने सम सोऽति (भगवाऽति) ॥२१॥ सारिपुत्तमुत्तं निहित । अट्टकागो चतुत्यो सामुदा-- काम गृह' टठा च मुद्ध'ठ परमा मरा। मत्तग्यो च प्रसूरोप मागद पुराभेन । बमा र त्यूहानि पुनरेव तुमक। घात पदण्ड र मुक्त थेरपञ्न मोनस । नानि एनानि सुलानि सम्बानढक्वणिकानि ।
५-पारायणयग्गो (५५-यन्युगाथा ११) पोसलानं पुरा रम्मा अगमा दविखणापर्य। आदिञ्चल पत्ययानो ब्राह्मणो मतपारग ॥१॥ मो अस्मस्म विसपे अळवस्स' ममामने। यसी गोधावरी कूले उठेन च फ्लेन च ||२|| सस्व उपनिस्साय गामो च विपुलो अह । ततो जातेन आयो महाया अवप्पयि ॥३॥ महाया यजित्वान पुन पाविसि अस्सम । मस्मि परिपविठ्ठम्हि अञो आगञ्छि' ग्राह्मणो॥6॥ उग्घट्टपादो तसितो पकदन्ती रजस्सिरो। सो च न उपसम्म सतानि पञ्च याचति ॥५॥ तमेन यावरी दिस्वा आमनेन निमन्तपि । सुखं च कुसर पुच्छि इद वचनमब्रवि' ॥६॥ य खा" मम देय्यधम्म सब्ब विस्सज्जित मया । अनुजानाहि मे ग्रहो नत्यि पञ्च सतानि मे ॥७॥ सचे मे याचमानस्स भव नानूपद स्सति । सत्तम दिवमै तुम्ह मुद्धा फल्तु सत्तथा ॥८ अभिसखरित्वा' कुहको भैरव सो अपित्तयि' । तस्स त वचन सुत्वा वावरी दुक्खितो अहु* ॥९॥ उस्मुस्सति अनाहारो सोक्सल्लममप्पितो। अयोऽपि एव चित्तस्स झाने न रमती मनो ॥१०॥ 'M मूळक्स्स, मळहाक्स्स PM आगच्छि 'C अयुवि चे मम M °दिस्सति, "देस्सति PM सखारेत्वा "M . M पक्त्तियि CM अहू ५।१] मुननिगला [ ५१ उपम्न विपत पिसा वना 'अपाामिनी । “गर उपगाम्म इन पचनमश्या ॥११॥ नमो मुद्ध' पनानाति हर! मा धनपिरो । मुभी मपात या शाण सम्ग 7 विग्जति ॥१२॥ भानी' पनि जाति म अक्साहि पुभिना । मुड़ गुनाधिपान च त गुणाम दया तय ॥१३॥ अन जागामि भाग मरपन विति। मद्ध मुलारिपाती च जिनान हन गर्ने ॥१॥ अय को चर्गह जानाति आस्म पुरविमा मा मुसा पनि च त वे अपमाहि दवत ॥१५॥ पुग गीगाहा निवाना रोयको । अपच्चो आसारागस्म सक्युपुत्ती पभारो ॥१६॥ गा हि ब्राह्मण गवुलो राधम्मान पार । सयाभिन्नारग्णत्ता सम्पपम्मेमु पश्युमा । मबधम्म स्वय" पत्तो विमुत्तो उपधिसंपये ॥१७॥ युद्धो गो भगवा लोर पम्म दगनि।' पागा । त व गत्वान पुच्छस्मु गो ते त व्यापरिस्गतिः ॥१८॥ समुद्धोति वचो गुना उग्गा बावरी नहु । सोम्म ननुवो नागि पीनि 7 विपुल एभि ॥१९॥ सो बावरी अत्तमनो उद्दगो त दवत पुच्छति व जातो। वनम्हि गाम निगमम्हि वा पुन पनमम्हि वा जनप लाक्नाथा । पथ गन्वा नमस्मेमु मयुद्ध दि पदुत्तम ॥२॥ सावत्यिय याम मन्दिरे दिनो पहूतपनो घरभूरिमेधमा । मो सवयपुत्तो पिघुरो अनामदो मुद्धाधिपातस्म विंदू नरासभा ॥२१॥ . शुद्ध • एम M भरयामिनी PM मुदाधिपाते Mभोनि M मुण अह एत मुद्धाधिपाते C जनान ..M हन्त्य, हेन्त्य ५ पयदि १. मुद्धातिपात " सम्बकम्मक्खय उपविक्खये "M देसेसि AC ते १M नमस्सेम २.M द्वि .MR M मुनि " हस्तलेस-वो 1-AI व्याकरिस्मति ५१] पत्युगाया ततो आमन्तयी। सिम्म ब्राह्मणे मन्तपारगे । एय माणप' अविास्स मुणोथ पचन मम ॥२२॥ यस्समा दुल्लमा लोक पातुभावो अभिण्हसो । स्वज्ज' रोपम्हि उप्पत्रा समुद्धा इति विस्मुतो । सिप्प गत्वान सावत्यिं पस्सव्हो टिपदुत्तम ॥२३॥ वय चरहि जानेमु दिस्या बुद्धो नि याह्मण । अजानत ना पहि पथा जानेमु त मय ॥२४॥ आगनाति हि मन्तेसु महापुरिसरक्यणा । ति'मा च व्याख्याता' समत्ता अनुपुब्बमो ॥२५॥ परमेत होत गनसु महापुरिसरवपणा । द्वेश्व' तस्स गनियो तनिया हि न विज्जति ॥२६॥ मचे अगार अज्या वसति विजय्य पठवि इम । अदण्डन असन्थन धम्मामनुसासति ॥२७॥ सच च सो पब्बजति अगारा अनगारिय । विवत्त च्छदा सबुद्धो अरहा भवति अनुत्तरो ॥२८॥ जानि गोत्त च लपक्षण मन्ने सिस्म पुनापर । मुद्ध मुद्धाधिपात च मनसा यव पुच्छय ॥२९।। अनावरण स्मागी यदि बुद्धो भविस्सति । मनसा पुच्छिने पन्ह वाचाय विस्सजस्मति१० ॥३०॥ बावरिस्स वा मुत्वा सिस्सा सोळस ब्राह्मणा । अजितो तिस्समत्तय्यो पुण्णको अथ मेतगू ॥३१॥ धातको उपसीवो च नदो च अथ हमको। तारय्यप्पा' दुभयो जानुक्ण्णी च पण्तिो ॥३२॥ भद्रावुधा'' उन्या च पोमालो चापि ब्राह्मणो । मोधराजा च मेघावी पिगियो च महा इसि ॥३॥ पच्चेषगणिनो सब्वे सब्बलोरम्स विस्सुता । भायी झानरता धीरा पुब्बवासनवासिता ॥३४ ॥ . VM स्वास्न पि M एस माणव IM मस्स सो द्वत्तिसानि • Fsb fautetar •M द्वर्य Fsb दुवे य CM, rsb आवसति । विवट छदो, C विवत्तच्छद्दी १०॥ विसजिस्सति, पिस्सडिजस्सति [ कप्प . १.C भद्रायुधो सुनिपाती १०८] पावरि अभिवादेवा वत्वाचन पदपिवणं । जटाजिनधरा राम्चे परसामु उत्तरामुसा ॥३५॥ अक्स्स पतिद्वान पुरिम' माहिस्सति तदा । उज्जनि चापि गोनद्ध। वेदिस वनमय ॥३६॥ काधि चापि साकेत सावत्यि च पुरुत्तम । सेत य कपिल व यु कुसिनार च मदिर ॥३७॥ पाव भोगनगर वैमालि मागध पुर । पासाणक चैनिय च रमणीय मनोरम ॥३८॥ तसिता वुटर मात महागमन' वाणिजो। छाय धम्माभिततो व तुरिता पमतमारह ॥३९॥ भगवा च तम्हि समये भिरघुमघपुरवतो । भिना धम्म देसेति सारोन नदनी वने ॥४०॥ अजिनो अदस सबुद्ध वी तग्मीऽव भानुमं । चन्त यया पन्नरमे पारिपुरि उपागत ||१|| अथऽस्स गत्त दिस्वान परिपूर च व्यजन । एक्मन्त ठितो हट्ठो मनोपन्हे अपुच्छय ॥२॥ आदिस्स जम्मन यूहि गात यूहि सलकरण । मन्तेसु पारमि ब्रूहि कति वाचेनि ब्राह्मणो ॥४३।। वीस वस्ससत आयु सो च गोतेन बावरि । तोण "स्स लावणा गते तिण्ण वेदान पारम् ॥४॥ लक्षणे इतिहास च सनिघण्डुसवेटु"भ । पञ्च सतानि वाचति सध' म्मे पारमिं गतो ॥४५॥ रावणान पविचय बावरिस्स नरुतम । तहच्छितो पासैहि मा नो कलायित अहू ॥४६॥ . मूस . गोदद्ध .C २M पुरि माहिस्सति *M कपिल 1M मोदक,C व •N महासाल "मायह, मारहु B माहिं १.M पनि 4 अद्द जितरस, सारसि Trenckner A पोरसि प्रष्टय Morris JPTS 1893P 73 11C पग्गरसे "हस्त लेखे परि, परिपूर (10176) 11 परिपुग्ण च ध्यञ्जन, परिपूर वियजन " जप्पन स "M केभ . सद्धम्मे M तकछिन । खच्छिद PM तीणि १] परगापा मुम मिझाप पार्शी उपगसा भगतरे। पोमोहित पापा एनाहि मागय ॥७॥ पुन्छ रिदिन अगुपनो मुन्या पहे बियापने । विनिम्ननि जनो गना जागे काजलि ॥४८॥ दयो ववहा पाइदो वापि गुजपनि। मनगा पुछिने पन्हे यमेत पटिभामनि ॥४॥ मुद' मुदापिपात च पावरी परिपुन्छनि । रा प्यारोहि भगया व यिाप नो इरा ॥५०॥ अपिज्जा मुखानि जानाहि' विग्जा मुदाधिराशिनी । सदागतिसमाधीहि छन् विरियेन सयुता ॥५१॥ ततो येटेन महता समित्या माणवो । एक्रा अजिन क्त्वा पादेगु सिरसा पति ॥५२॥ पावरी पाह्मणो भोतो सह सिस्गहि मारिस । उदग्गचित्तो सुमनो पादे वी चाग्युम ॥५३॥ मुग्मितो यावरी होतु सह सिस्सेहि ब्राह्मणो । त्य चापि सुखिता होहि गिर जीवाहि माणय ॥५४॥ पावरिस्रा प तुम्ह या राब्बेरा सन्चगसय । पताववासा पुच्छहो य निश्चि मनसिच्च्य ॥५५॥ संयुद्धेन पतोवासो रिसीदित्वान पञ्जलि । अजितो पठम पञ्ह तत्य पुन्छि तथागत ॥५६॥ यस्थगाया। निद्विता। C°ली M त छ, तं, Fsb-कच्चि (६० 800) IC 9, Fsb, Ma BC चाऽपि C ती मुखा •M विजानाहि C सत्यम्हित्वान, ०-सर्यभत्वान M, Fsb चक्रवुमा •M वापि सु० वि० (सिंहल)-1957 वायरि यस च तुम्ह वा १C, ली C. MUM कया निहिता, 'कर्ष निट्टितं ११.] गुगनिया (५६-अमितमापपुवा श२ (१)) मागु frgin (चारमा अत्रिया) मनरगु गापामा। किम्माभिन यूमि गुमग मा भये ॥१॥ अविनाप विशो लोगो (अधिशानिया) पिमा नपान ! जणाभि पन यूमि दुrt अग मी ॥ ॥ থলি শলা গানা ( প্রসঙ্গী } মান রি নিলে। मोगान गार भूमिका मा शियिार ॥ भारि मानि माग्मि (भजितामिया) मति नग निवारो। मापन गवर यूमि पन्यास पिपिम्पर Int पना पब मी7 (नापामा अहिता) नाम र मारिन । "न' में गुरमा पनि पाथ परमात ॥५॥ मा पन्त अछि जनित यामि त । यय नाम पाप नगग पनि । पियाणम्ग निराधान ॥६॥ ये मग तथम्माम य न ममा पृथ ध । तम मे निगा रिय पुठो पनि गारिम It वाममु नाभिगिनाम्य मासानायिग गिया । बुमा मध्यधम्मान गो भित्र परिवानि ॥८॥ अजितमाणयपुरा निरिटता। - (५७~तिम्समत्तय्यमाणवपुन्या ५।४ (२)) पोध सतुमितो लो (दच्चायस्मा तिम्मो मत्तयो) पस नो मन्ति जिता । को उमन्तामभिनाय मज्झ मन्ना 1 पिपनि । क खूमि महापुरिमो ति को इध मिनिमच्चो गा ॥१॥ C निस्साभिसेचन २f C विविच्छा, वेषच्छा पिवियर M सति "Mga Na "N B सम्बातयामासे तेग्यो Fsb उभत्त 1.M लिम्पति PM मझगा IM M य च Fsb मतेन चैव, N चापि ॥ तिस्समे ११M सिप्पनि सिम्मिनि ५] पुण्णवमागवपुच्छा [ १११ कामेसु ब्रह्मचरियया (मेत्तेय्याति भगवा) वीततण्हो सदा सतो। मम्माय निब्युनो भिवायु तस्म नो सन्ति इजिता ॥२॥ मो उभन्तमभिमाय मरले मन्ता न टिप्पति । रा ब्रूमि महापुरिसोति सो इध सिब्बनिमच्चगाऽति ॥३॥ तिस्समेतेय्यमाणवपुच्छा निष्ठिता। (५८--पुराणामाण्वपुच्छा ५१४ (४)) अनज' मूलतस्सावि (इच्चायम्मा पुण्णका) अत्थि पन्हेन' आगम। विनिस्सिता इसयो' मनुजा सत्तिया ब्राह्मणा' दवतान यामक पपिसु पुथू इध लाव। पुच्छामि त भगवा ब्रहि मे त ॥१॥ ये रचि मे इसयो मनुजा (पुण्णकाति भगवा) वत्तिया ब्राह्मणा दवतान यजमवायसु पुथू इध लोगे। आमिसमाना पुग्णय इत्यभाव' जर सिता यजमकप्पयिंसु ॥२॥ 'यं वेचिऽमे इसयो मनुजा (इच्नायस्मा पुण्णको) खतिया पेइघ लो। सु ते भगवा यापथ" अप्पमत्ता अतारु जाति च जर च मारिस । पुच्छामि त भगवा यूहि मे त ॥३॥ आसिंसन्ति थोमयन्नि अभिजप्पन्ति । जुहन्ति (पुण्णकाति भगवा) कामाभिजप्पन्ति पटिच्च लगभ। ते याज योगा भवरागरत्ता मातरिमु जातिजरति यूमि ॥१॥ वच्चि'. - IM अनज - पहेन मागम 1M आगमि, आगमि adds च "Fsb [इसयो मनुजा] [पुर इध लोके] IFsb अप्पिसु • इस्थत नास्ति १० किचि, किन्चि, कञ्चि Hrsb [यज्ञपये] कि तु 1058d "M अतरु "rsb [अभिजापति C जहति see (N देन्ति) 1.C लोभ but see N " या but sec N and B १२] गुमित [४ रोनिग्गुि मात्र पोपा (एम्पापरा पुरतो), पाहिभागिप पर प मास्मि । अप को पर सरग ला, मारिनाशिक र प मागि । पुरवामिन भगा हि ग म || गोम्मि परोगरामी (पुमानि माया), यरिंग त्रिनिषि पुहिलिगो। मतो विमो रिपो निगमा आरिगा पारितरं नि मोहि ॥६॥ पुण्यामागपुरा निरिना। (१६ गत्तगूमागवडा १४ (४)) पुगामि त माया यूहि मे(भ्यायरमा मेसगू), मध्नामि से येद नावितते। पुतो न दुगा मादागा ग य मगि सामि मनमा || दुवमस्रा ' में पमये अपुरापि, (मेतनि भगवा)। हेत पयागामि यया पजा। उाधीनिया पभान TT 4 लोरिम अनेरमा २६ यो व अविधा उधि दरोति पाणुन दुरगोति भयो । तस्मा हि जान अधि न पिरा, दुरगरम जातिप्पमया परमी ॥३॥ यस मन्छिम अश्तिया नो अनतर पुच्छामि दिप यूहि । क्यं न धीरा वितरन्ति ओप जातिजा सोपरिव* प। तं मे मुनी' साधु वियाफ्रोहि तयाहि से विदितो एस धम्मो ॥४॥ कित्तपिरसामि ते पम्म (मतगृति मगया) द्वि" पम्मे अनीतिहे। ये विदित्वा सतो परं तरे लोरे विराति ॥५॥ . याच 'C पहि. A1 पस्मो हि .C यस जितं । यस्महित य सदा गता (10 दुक्खा [4] स [H] वागता) .Mचे BM पजान CM नास्ति ..N,M पुच्छाम *M परिदेव "C_f मुनि १८ यया स्साम OM addst IM परोपरादि IN समुपागता Crsb-दुस्खा 1M, Fsb-लोरम UM कित्तय १६] धोतपमाणयपुन्छा [११३ ते पाह अभिनवामि महगी' धाममुत्तमं । पं विनिरवा सतो परं तर साा विससि ॥६॥ पिचि गपजामामि (मतगूति भगवा), उद्ध अधो तिरियं घा"पि मग्ने । एनेसु नदिच रिवेमन प, पान विज्ञाण भवे तिट्ठ ॥७॥ एक यिहागे मतो अप्पमत्तो, भिषय पर हित्वा ममापितानि । जारिजरं मोवपरित प इपेय विद्वा पजरेय्य दुाम्य ॥८॥ एताभिनन्गमि वचो महेसिनो, मु'वितिन गोतमऽनू पधीन । अद्धा हि भगवा पहासि दुख सथा हि ते विदितो एस धम्मो ॥९॥ ते पापि नून पनहेम्य दुवम्य, ये व मुग' अद्वित ओवदेश्य । ततं नमस्मा मि समेच्च नाग, अप्पच म भगया। अद्वित ओवरय्य ॥१०॥ यं ब्राह्मण वदगु आभिजम्ञा। अविञ्चन यामभवे असत्त । अदा हि सो ओपमिम अतारि तिष्णो चपार अखिला अखो ॥११॥ विद्वा च मो'" वेदगू' नरो इध, भवाभवे सगमिम विसज्जा। सो वीततण्हो अनिघो निरासो, अतारि सा जातिजरऽति घूमाति ॥१२॥ मेत्तगूमाणवपुच्छा मिट्टिता । (६०-धोतामाण्वपुच्छा ५।६ (५)) पुच्छामि ते भगवा यूहि मे त (इच्चायस्मा धोनका), वाचाभिग्वामि महेसि तुम्ह । तव सुत्वान निग्घोस सिक्ख निब्बाणमत्तनो ॥१॥ तेन हातप्प क्रोहि (धोतकानि भगवा) इधेव निपको सतो । इतो सुत्वान निग्धोस मिक्व निब्याणमत्तनो ॥२॥ • Fsb गौतम नूपधीक ५.M अत्यित, जट्टिक 1C .सि नय किञ्चि [ सजानासि #M धाऽपि M निद •C सुकित्तिक 4 CM पजहेय्य Fsb मुनी ११....M नमस्सामनुसमच्च " Fsb [भगवा] cf 1045 1079 UC आभिजा M, B, N अभिजना, Fsb अभिनय C आतारि, Nf अतरि C., M व "M यो .cग ११४ ] मुत्तरितो [ परमामहं देवमनुस्मयर, अरिश्चन ब्राह्मण इरियमान । त तं नमस्गामि ममन्ता', पमुञ्च म ग रथयाहि ॥३॥ नाह गमिस्सा मि पमोयाय, पथ घातक पचि लोग। धम्म प गर्ग लामा, एवं गुव जोपमिम तरमि ॥४॥ अनुसारा 'टे परुणायमानो, विश्वधम्म यमह विजन। यथाह आसागार अनापज्जमानो इधेव मता अमिता चरेय्य ।।५।। वित्तयिामि त मान्न (धोतकाति भगा) हि धम्म अनीतिह पर विश्विा मतो चर तरे सार विमत्तिा ||lt तं चाह अभिवन्नामि महेसि मन्निमुत्तमं । 4 विदिवा मतो चर तर लारे विमति || य किञ्चि गंपनानासि (धोतवाति भगया), उद्धं अधा तिरिय चापि म थे! एम वित्त्विागिोऽति लाने, भवाभवाय भाजाशि तऽति ।।८।। धोतक्माणयपुच्छा निरिटता। . (६१-उपसीवमाणवपुच्छा ५१७ (६)) एको अ- सक महल्लमोघ (इच्चायस्मा उपमीवो), अनिस्सितो नो विसहामि तारितु । आरम्मण ग्रूहि समन्तचक्षु य निस्सितो ओघमिम तरेय्य" ॥१॥ आक्विज पेक्वमानो सतीमा (उपमोवानि भगवा) नत्थीनि निस्साय तरस्सु ओघ । काम पहाय विरतो क्याहि, तहस्सय रत्तमहाभिपस्स ॥२॥ FC ब्रह्म .C पखं • नोह । सहिस्सामि, N समीहामि .. M वयी "More °पन्न, for°पम CCI प्य Miss Adda स० ११C वापि M एते विदित्वान "N तरेय्य "R B नतमहाभिपस्स, C नतमहाभि तपस्स AM N (म)-रत्तमहाभिपस्स, (VI यस्स) B (M )-तण्हक्खय रत्तमह विपस्स •M अव्या',M B tC C, Fsb- ११C याद दमाणवपुष्य गरम पाममुया यारागो (इलायम्भा उपगीया) भाषिगरिंगतो प्रिय'मा । गम्नायिमोपरगे विमुतार हिन मत्य अनामागी' ॥३॥ मन्यगु' पामसु पो चीनगगा (उसमीयाति भगवा), आमिमा निरिराला दियमा गायिमान परम विमुत्तो, मिठेय्य यो तत्य अनानुयायी ॥४॥ ति?' चे गो नत्थ अनानुयायो, पूर्णऽपि धम्माT* समन्तवपत् । तत्यव सो गीति गिपा विमुमो भवेय पिन्नाण तथाविधस्स ॥५॥ अच्छी १ यथा वातवगेन रित्तो (उपसीवाशि भगवा), अत्यपालतिन उपति मा। एक मुनी नामकामा विमुत्तो", अस्थ पलति न उपनि मस ॥६॥ अस्पं गता मो उन्या सा नथि उदाहु वे सस्सनिया अगगो । त मे मुशि माधु थियागेरि, तथा हि ते विदितो एस धम्मो 100 अत्य गतस्स पमाण'"मत्यि (उपसीपाति भगवा) येन न वग्नु त तस्स नथि। सध्वसु धम्मेसु ममूहतसु समूहता वाप' थाऽपि मधेऽति ॥८॥ उपसीयमाणधपुछा निश्ठिता। (६२-जन्मापुच्छा ८ (७)) मन्ति लोके मुनया (इच्चायस्मा नन्दो) जना वन्ति त यिद वथ सु। जाणूपपन्न नो" मुनि वन्ति उदाहु वे२३ जीवितेनूपपर ॥१५॥ न दिट्टिया न सुतिया न आणेन", मुनीष न द कुसा वदन्ति । विमेनिक या अनिपा निरासा चरन्ति ये ते मुनयोऽति यूमि ॥२॥ CM हित्वा अर्ज पिमुखे, विमोक्खे IMN oऽधिमुतो -"f तिटठेप्य सो °धायि, यायि, तयि .. नास्ति गाया • तिठेग्य - नास्ति । यस्सति, B पूगानि वस्सान "MN घरेय १५ अच्चि ११M,N खिता १C फलेनि "घिमुतो १५ मेति " यज । मघा, प्रत्या MAdds ति (छद कमेणा) १६ करिसद, यदिय २॥ मनि नो [ Adds सीलब्बतेनापि २४ बनि ५.C. सु वदति गुद्धि गुप्तनिपाता [ ५९ ये समिम ममAI (स्नायरमा गा), हि गोपि वलि गुद्धि। गीति यानि गुद्धि थारन TFT गुदि । पनिगु ते भगा नत्य या परन्ना आर गाति पर मारिम। पुष्टामि त भगवा हि म ॥३॥ य नरिम गमण पाह्मणान (TMIT भगा) गुनावि सुधि। मोर मारि पनि मुद्धि मन पनि सुद्धि । निम्नापि त य या घरन्ति', नाग्गुि जागिर तिमि ॥४॥ यचिम रामण ब्राह्मणागे (इन्चापस्मा नला), गुतेनापि वदन्नि मुदि। सीबतेनारि पनि सुस्,ि भनवापा मुदि। म' मुनि भूमि पण, जप का परहि देवमनुस्गलारे । अनारि जाति 7 जर १ मारिग पुच्छामि से मंगवा हि म त ॥५॥ यह रान्य समण श्राह्मणास (TAIT भगया) जानिजरा नियुतानि यूमि । येगीध द्वि मुा मुत वा, सायन याति पहाय गये। अनेरापि पाय रार, तह परिम्नाय नारावास । त के परा गोपनिण्णाति धूमि ॥६॥ एनामिन दामि यथा महेगिनो सुरितिां गोमपधीर । ये सीप टिटज पे० [ro82] अहऽपि ते आपतिण्णानि यूमाति ॥७॥ मयमाणवपुच्छा निटिठता। नारास। (६३-हेमामाणपुच्छा १६ (८)) ये में पुव्य वियापसु (इन्चायस्मा हमको) हुर गोतमसागना।२ इञ्चामि इति भविस्सति । सम्ब त इतिहीनिह । सच त तक्वथडढन ॥१॥ . समणा० •rsb-दिटठेन N दिटुसुतेनाऽपि (f 1080 5 दिटठव) : सुद्धि 'Fsb [भगया] R यता * तचे तेच C,M समणा० Fsb- जाती 1.S यपिच, यऽमिय १.C .ये १२८ "न, Fsb (हुर गोतमसासन) . बदत्ति ५१११ ] पणमाणयपुन्छा [ ११७ नाह तत्थ अभिरमि' त्व च मे धम्ममवयाहि सोहानिग्यातन' मुनि । य विदित्वा सतो चरं तरे लोरे विसत्तिव ॥२॥ इध दिट्ठमुतमुनविनासुपियम्पेसु हमर । छन्दराग विनोदन शिवाणपदगच्चुत ॥३॥ एतदम्जाय ये सना* दिट्ट धम्माभिनिबुता । उपसन्ना च ते सदा तिण्णा रोवे सितिक ॥४॥ हेमकमाणयपुच्छा निटिठता। (६४-तोदेय्यमाणवपुच्छा ५॥१० (६)) यस्मि कामा न वसति' (इच्चायम्मा तारेय्यो) तण्हा यस्म न विज्नति । कथक्था च यो तिण्णो विमोक्पो तस्म कीदिमो ||१|| र्याम्म कामा न पसन्ति (तोटेय्याति भगवा) तण्डा यस्म न विज्जति । स्थस्था च यो निष्णो विमोक्वो तम्म नापरो ॥२॥ निरासयो' मा उद आमसानो पञ्ज्ञाणवा सो उपप्पी। मुनि अह समय यथा विजन, त मे वियाचिव रामन्तचक्रमु ।।३।। निरासयो मान मो जामसाना, पाणथा सोन 7 पनवप्पी । एवऽपि नोटेय्य मुनि विजान अकिचा कामभई असतऽति ॥४॥ तोदेग्यमाणयपुच्छा निविता । (६५-प्पमाणवपुच्छा ५१११ (१०)) मन्झ सरस्मितिद्वत (इच्चायस्मा कप्पो) ओ' जाते मह भय । जरामच्चुपरेतान दीप पहि मारिग । व च मे दीपमम्याहि यथपिद नापर मिया ॥१॥ Mss मि rsb (नाह तत्य अभिरमि) ₹C तशय नि०, M निपातनं IC दिद्वमुत मुन वि०, A1 दिटठ शुग मुत वि, rsb- मत (विज्ञानेसु) सिता IN (सदा-सम्पदा)C से दसा, Ni" सता सवन्ति M Fsb-निराससो, (cf 169c) N निरासतो (1091) • आममानो स्मि 1011 ओपनाते . स २३C 1 सिम rsb-पया पिदे सिंहहन्त १८] मुसनिपाता मान गर्राम निट्ट (मणागि नगग) आपे जान महाभप । जरामच्नुपरता दार्ग पयूमि पण ॥२॥ स्चिन यारानं एत दीप जनापरं । निगाणं ति में यूमि जरामारिका ॥३॥ एताशाय 4 राता धिम्मानिनिम्यता । न ते मारवगानुगा न ग मारग परी ॥४॥ पप्पमापयपुण्या निम्टिता। . (६६-पिणमाणपुन्धा २०१२ (११)) सुन्दानम्ह वीरमराममामि' (इच्चायस्मा जपण्णी"), आधानिर्ग पुरमताममागर्म । सन्ति प* यूहि सहाज त यथातच्छे भगवा धूहि मे ते ॥१॥ भगरा हि बामे अभिभुय्य इरिपनि, आमिच्योर पवि तजि तेजमा । परित्तपआग मे भूरिपश्य, आचित्रम घम्मे यमहे विनम्शे। जातिजराय' इध विणहानं ॥२॥ सामेमु विनय गर्घ (जतुषणीति भगवा) नार्म द" मेमतो। उगीतं निरत्त वा मा ते विग्जित्य पिञ्चनं ॥३॥ य पुग्वे त विमानसहि पच्छा ते माहु विञ्चन । मम चे नो गहेम्ममि उपसन्ता परिस्ससि ॥४॥ सनो नामापस्मि बीनगघस्स ब्राह्मण । आमवाऽस्म" 1 विजन्ति येहिं मच्चुवम वजेऽति ||५|| नतुर णयपुछा निग्टिता। C येत 'C पण्डगू, 1 पठगू N (C, A1 ) पट्टा IC Nोर अगामकामि CM पण Fsb-पाती M सहज° C तेऽपि Fsb (आदिच्चो तेजसा ) •rsb-जालो १°C विशेष, Fsb (ध्यात्या) 'नेम्य "Af घई "M विजि ,C विज [ विसा " आसवस्स ५।१४ ] उदयमाणवपुच्छा [ ११६ , , (६७----मद्रायुधमाणवपुच्छा ५॥१३ (१२)) ओर्क'जह तहच्छिदै अनेज (इच्चायस्मा भद्रावुधो), नदिजह। ओघनिष्ण विमुत्त । प्पंजह अभियाचे सुमेध, सुत्वान नागस्म अपनमिस्सन्ति' इतो ॥१॥ नाना जना जनपरेहि संगता, तव वीर' वाक्य अभिवसमाना । तेस तुव साघु वियाकराहि, तथा हि ते विदितो एस धम्मो ॥२॥ आदानतह विनयथ सब्ब (भद्रावुधाति भगवा ), उद अधो तिरिय चापि मज्झे। यय हि लोकस्मि' उपादियन्ति तोव मारो मवेति जन्तु ॥३॥ तस्मा पजान न उपादियेय , भिक्खु सतो किञ्चन सबलोके । जादानसत्ते इनि पेक्खमानो, पज इम मच्चुधेय्ये विसत्तति ||४|| भद्रायुधमाणवपुच्छा निटिठता । (६८---उदयमाणवपुच्छा ॥१४ (१३)) झायिं विरजमासीन (इच्चायस्मा उदयो) पतकिच्चं अनासर्व । पारगु सब्बधम्मान अस्थि पञ्हेन आगम । अजा विमोरख पनूहि अविज्जाय पभेदन ॥१॥ पहान कामच्छ दान'. (उदयाति भगवा) दोमनस्सान चूभये । थीनस्म च.५ पनूदन १२ कुतकुच्चान निवारण ॥२॥ उपेक्वा यसतिससुद्ध धम्मतरपुरेजर्व । अजाविमोए पमि अविज्जाय पभेदन ॥३॥ कि सु सयोजनो लोको कि सु तस्स विचारण" रिम्सास्स विप्पहानेन निबाण इति बुञ्चति ॥४॥ M ओघ° २८ कण्ह° "M अपलामिस्सन्नि "M "CM asfo 1 °धेय्य M लाविमुश्ख, अ "" कामचन्दान M नास्ति M, Fsb-पनुरनं " उपेक्षा • नदिज्जह, जापान M °स्मि 'C, "M कि सुताना सार तहाधिपन मनुन पेसामाना (पिपियानि भगना), सन्नाप जात जरमा परेते। तस्मा तुन पिगिया अप्पमत्ता, जहागु मण्डं असममायानि ॥४॥ विपियगाणवपुच्या निमिता। (७२-~-पारायणहत्त ५।१८) इग्मयाच भागा मगधेमु रिहातो पामारे चेशिये, परिमारव सोमन ब्राह्मणान अपिट्टा पुट्ठो' पुद्वारे पन्हे ध्यानामि । परमकरस चार" पन्हम्म अथ अन्याय धम्म' अम्नाय धम्मानुधम्म परिपज्नग्य गच्छम्येष जरामरणस्म पार । पारगमनीया इम धम्माति तस्मा इमरग धम्मपरियामरम पारायण स्वंद अपिवान। अजिता तिस्समत्तप्पो पुण्णवरे अथ मत्तगृ । धातरा उपसीवो घनता प अथ हेभयो ॥१॥ तोपरप्पा दुभया जातुरपणी च पण्डितो। भदायुधो उत्यो च पासाग चारि ग्राह्मणो । मोधराजा च मधावी पिगिया च मग इमि ॥२॥ एत बुद्ध उपागञ्छ' मपनचरण म । पुच्छता निपुण पन्ने बुद्धमट्ठ उपागमु ॥३॥ तेस बुद्धो प्यावामि' पन्हे पुरो यथातथ । पन्हान वेय्यावरणन नारोसि प्राह्मणे मुनि ॥४॥ त तामिता अपग्मुमता बुझेनानिचव धना । ब्रह्मचरियमचम्भुि परपन्नस सन्तिरे ॥५॥ एक्मरस पन्हम यथा बुद्धन देमित । तया या पटिपज्जेय्य गच्छे पार अपारतो ॥६॥ अपारा पार गच्छय्य भावेन्ता मम्गमुत्तम । मग्गो सो. पागमनाय तस्मा पारायण इनि ॥७॥ १C Fsh-चारक . नास्थि ३M पह व्याकासि 1 नास्ति . नास्ति गच्छु .1 व्या Fsb-वियाकाnि Fsb- वेश्याकरणे 1 चा १०C Isb (सो) 'C पारगम' ५१८] पागगणत [ १२३ पारायणमनुगाविस (इच्वायस्मा पिगियो ) यपा' अगि सा अपपामि' विमलो भूरिमेधसो । निामो निधनो गायो' स्सि हतु मुसा' भणे ॥८॥ पहीनमलमोहरा गानमरुपमहापिनो । हन्दाहं वित्तयिम्गामि गिरं यण्णूपमाहितं ॥९॥ समोनुदो बुद्धी समन्ताम्बु, लोग्न्तगू रायभवानियत्तो । अनासयो राब्वदुषपप्पहीनो, म व्हयो ब्रह्म' उपासितो मे ॥१०॥ दिना यथा कुपनक' पहाय , यहाफर काननं आवरोय्य । एवजह अप्पस्ने पहाय , महादधि सरिवऽज्यपतो ॥११॥ य ऽमे पुढे पियासु हुरं गोतमसासना 'इच्चासि, इति भविस्सति' । सच त इतिहीनिह सथ्य त सक्क्यश्वन ॥१२॥ एको' तमनुदासी'नो जातिमा' सा पभकरो। गोतमो भूरिपनाणो गोतमो भूरिमेयसो ॥१३॥ यो मे धम्ममदेसेसि। सन्दिट्ठिवमकालिक । तण्हक्खयमनीतिक यस्म नत्थि उपमा पवचि ॥१४॥ कि नु" तम्हा विप्पवसऽसि मुहुत्तमपि पिगिय" । गोतमा भूरिपञ्जाणा' गोतमा भूरिमेधसा ॥१५॥ यो ते धम्ममदेससि सनिट्टिवमकालिक। तण्हवखपमनीतिक यस्स नत्यि उपमा क्वचि ॥१६॥ नाह तम्हा विप्पवसामि मुहत्तमपि ब्राह्मण । गोनमा भूरिपाणा गोनमा भूरिमेधया ॥१७॥ यो में घम्ममदेसेसि सदिट्ठियमकालिए । तण्हक्खयमनातिकं यस्स नत्यि उपमा पवचि ॥१८॥ परसामि न मनसा चपचुनाव रत्तिदिव ब्राह्मण अप्पमत्तो। नमस्समानो विवसमि रति,तेनेव ममामि अविप्पवारा१५ ॥१९॥ M तथा २ पयादक्खि तयाक्खाप्ति Tsb-(यया अक्लासि) B निकामो निवखामो 1 निप्पुनो, निघूनो M, N भागो .C, नास्ति .C,Mrsb ब्रह्म M °दसे हतो रिवापतो .C एसो HC नुदोसीनो २ जुतिमा uc पम्म देसेसि १५ न C यस्सी, M वसति यो .. णो C, M सो PM च येनेय PM वासि UC पूजये, . मुननिता [१८ समान गाती पगा। गनी न, IT' में मातमागनहमा । यय शिवी रिपम्गो, ग तन र तामि ॥२०॥ जिष्णम्म म दुरधाम, ताप नायो न पनि सर। माण' वामिनि, मादिम वागता पुस २१॥ पर गयानो परिपमा क्षयं उसमय। अप गागि गद्ध आमिर ॥२२॥ यया अरवामितमता भद्राधा आदिमागमा य । एवमय' त्वेष पमुगु राम गगिम्मगि यिम पम्यार' • ॥२३॥ एस मिथ्या पसामि गुवान मुनिनो यो । वित्तच्छदा' गबुझा असिा पटिभापा ॥ अधिरेव अभिग्जाम स देशि परावर । पञ्हानन्नारा सत्या पक्षाने पटिजा ॥२२॥ असंहीर राउप्प यस्म यि उपमा क्वचि । भदा गमिस्सामिम मध्य वया, एवं में पारेडि" अधिमुत्तरित ॥२६॥ पारायणवणो निटिठतो। निटिटतो सुतनिपातो अटठमाणयारपरिमाणाय पालिया। . . 1C पापेत्त, नामे IT Fsb-नामेन्ति B मरेति, पलेति CM यताय "Fsb-(सयानो) I उपल्लाव, C उप्पलवि तथा Fsb-मास्ति तिण एवं त्व * पमुच्वस्सु,C Fsb- पमुश्चयस्सु +Fsb-(स्व) 1M मञ्चुपय्यास पार .. विवट्ट "C, AM °भाणा १C परिजानक 1. M Fsb-पधारेहि नास्ति-म, C धारेहि मास्ति-म .C Fsb-वित्तचित्त
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