Central Library, University Of Rajasthan
Krisha Krat Marattik
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সুফীতাঞ্জঙ্ঠি “মদ্যগী হযেত
৫ জামাইয়েই হয়?
জলিলার মুরঞ্জিত
হাদীক্ষিত
বাহামায়াবী
मोकोमाटतनाटकाविमीयोग्यता
ঔলাদারস্থান
বন্ধুয়ার খুলন্ত
ইআইআঁকালীবন্ধী
त्तमरधर्मसहित जेसें श्रीकृस्म लाहारका
বৃষ্টিতে তাকাবাসা
দয়াৰাষ্টমী ফল
শুন্ধত্বহষী জঘন্য
सर्व
গুলশান হৃষ্ট! মর্থ
আকাক্সঃ ৯ খ্রিমী
जाकालीलाई सो पुरम भार हैरससमुद्रवत हैं
सोनीवाचार्यजीमा हदयविवस्थापन है सो
মাহী বিদ্যালয়
भी शायहै. चारोशितनीकुम्जाकाली
গ্রীষ্মীয় আনুশ
गअपने दृश्य में शरवट सत्रीयाचार्य
महाप्रवनकांवारंवार नमस्कार करतही
नकपत्र श्रीविष्टलनाथजी साश्री आचार्य महा
सुन रदैलीतरजोरसहै तिनके मानक
ईजीआपले तिनके मैवार
स्कार करते हैं जोमोअपरप्रसन्नको
रोजोमनोर्थ है जोप्रेमामतकटीकाकश्य
मेयोग्यता मा कांदद-यापकार मे पलाचशाके
কি বিনৰ গাছবাপ্পা
জুলাংশই
शिवरिताविहाराकाणाजपत्तिविहाराच
सदा प्रियागायीभईःस्फरसुसरीख
इतिप्रथावत्यस्मादिसुभग तिसकर
ण गाया कोयधीश वधीपूर्ण पुरुषोत्तमजे
श्रीकनकेजेधर्म है वैसेंधीचार्यशाम
। केधर्म हैसवमोका हेते है जो जैसेघीकमजो
जिनके श्रीवेगवेग में मचा है से
परमिट है. जैसेअमत्तयरमभिएई
गमेऐसो रसमला जोसमातना होई
शाहकुरजी मापुमन विचारकायेजोयहरस
कोनकोंदानकरौ यारसको पात्रताधिनचा
है तिनकोंकरों यापुकारा पत्ति जोशी
करजीसा विचारकाये तापिफेरविवार
इनोकोन प्रकारदानकोकोनद्वारा दातार से
कहत्त, जवए कोचसमयकाल सेवेधहायत
देवेसोरसदानकायोजाइत्तात्तऐसें श्रीनगर
जीआयुअपने हरयेमे विचार करके शरदका
बकौराहे परमरसस्प है जानिकें आपदी
नमें रात्रिकै समयवासरोवजार मोरोसी
शीठाकुरजीभापासुरायचाई ओपनेश
पनेघरमें विजापूरही तिनके मश
रपया विरहकरकेव्याकुलाई लोके
স্বাবধাদৰহ্মাস্ত্র
सरकाशरसनताही उरिचला कोप
नेपालकमावत्त सोबासरीको शरस
नविउहिचली योयोजाप्रकारविज
अपनेधारकार्य करतती सोसवयो
कहेपहिरे वस्त्र कह केक पहिरे
हेते जोश्रीकृमकोजाप्रेमरसह सोवास
गायक जितनकेश्वगहाराहीय
यभीतरप्रवेशभयोहै तातेशशीकडू
धिनादारहीहै सोवेकजास्वरहे ताबाद
रसवत्तली तवयोगमायाजो है सो
प्रभुजीकादशाहै सोमन विचारखाने
सन्मुखनिजभक्तचला है सोकामा
नकाशेवाकराचाहिये सोकाहत्तेजौभग
वदयकाशेवाझवशक तात्यो शमायात्रि
जक्तनाभरणवलासबउलटर हेन्ते सो
सवम वनायदाये शोरकोईराकोणाजनन
करावीकुत्ता तवृतिनननग्राकृत
कोध्यानकर के विरहकरके अपने शरीरको
त्यागकाय सोसंवतेपहिले श्रीरकुरजाकोश
यकेंप्राप्त जोयापकारगोपाजनकोबलाय
के अपनेशी आगमजोरसहत्तो चिनोपान
भक्तनकोदायो तैसेहोश्रीआचार्यजाम
हाप्रापपरमकृपा करके देवीजीवनके
सारार्थ प्रकट हायकेएथ्वी परिक्रमाला
तबजीवनकोसेसारमोमोहितदेर तापाई
गोकुलश्रीअवार्य महाशापपाषु तकाजीव
नेकाजदारको विचारमन करतात ताही
समयचीरापुरुषोत्तमप्रगट होयके ब्रह्मसेवक
कापशादीये जीजाजीवकोत्तमवयसवधकर
वो तिनकै सक्दोषहरहोयमें शिनको उंगी
कारकरगे तवशाभाचार्यजामहाप्रभुआप?
स जैसेश्रीपूर्णरुषोत्तम भाजगवेगमें
सभस्मोहतो सोविजनतनकहदेमवणनार
द्वारापानकाये तसेही वाचायजामहाभ
केश्रीशंगवखें श्रीरकुराकालीलाह पनो,
कोरस सोदेवीजीवनकोदानमरत है सोज
प्रकारशीकरजी आपणहाराजभक्त नहों
रसयनकरता है तैसे हावी आचार्यजीआयनोम
समर्पणवारा अपने शेतकनारसकोदनका
খ্রীষ্ট হাসি
कनकों तापीयनसेगरमणकाये ना
नाप्रकारकाविहारलीला काय ते सहानीया
बार्यनाअपने देवीजीवनकानामयमर्य
महाशश्सनापानकरिके ता अपनेशेत
कन गनानाप्रकारका लीशाकरता
इत्तकृपानिजदेवीजीतपर श्रीमुख वचनम् ।
गाई बएतानि मुगलगीतकार सवरषावरखा
३१वाप्रकार अपने सेवकनकोसंगकथासयाजो
समत्ततिनकावरसाकरता है और जांजीवकोद्र
वसंधकरावत चिनकालागवत्तशेवायध
रावत जोसपनहाय तिनकेघरखपुशेवा
पधरावच है शोरजिनसशिवा नाही सधसके
त तिनमानीगवतनापजाकशिवाकर
बत शोरजिनके घरखरूपशेवा तथावल
খামছাখালীps
ववस्तुकै भोगकरत सोकर तेजोशावत
नाएकोशसाईनाशापनामाचार्यजामह
प्रभुन कसरूपवर्णनकाये तात्तेजोसामग्य
वैलवकरची कुरजी कोसम पूर्ण करत
सोचीरकुरजीशापशाखारविंदहाराम्भंग
कारकरत है सोमुखारविंदरूपत्ताशीशाचा
मप्रशप तात्यहमोगलीया साय
महाप्रपोगीकार करते है वहाते
स्वसामिग्रीक र बाजाभागधरी
प्रकार सविनतीकरता है जोमहारा
जाना जामस्मभनका कोलि तेंवेगोकार
तनुश्रीदाकुरजी-धापनाशाचायुजककाविन
जीकारकरिसा मियाअगत्तयागकर श्री
आचार्यमायापशुपन शेवकन घरसवोर
विहारकरच औरधारकुरजाजवंदावन
एनाजरत, तवविजमेनेजा है पर
दीजनमेसोअधिकार तिनकताइभी
सिरिस्कावरवाकरतो अभवकरावेत
सोकाहते जोजासमयी कुरजी अपवे
एतारकरत होते भाषकुरजाचरणाचहत्ता
समयके हैं और एकधुनिसनिक पोयमुना
जीको प्रवाहउलटोचलत धारचं जो है सय
जोतिनकरथनाहाचलसकत्त और मनी
नकेयानवासराकेशरस निकटत्त गय
प्रेम में दिवसहोयुकेशीराकुरजाकै सनमुरादे
खरहता है चिनना हारवात धोरगायनकैव
बश सोअपनाहापावचा है और जितनेपेची
है मोमानहायके वासुशकोशरसन्नत है मा
नोचिषकसे लिव शारविमान ऊपर वाग
नापतिसहित हे माहित होयरहे है मगजो
हैसोअपनाचौकाको भूलियत्त शेरविन
भकतो
सकतहै ऐसाधोपुर
ংৈ
जयश्रीटाकरजीवजावत सर्वजाको जसोदा
धिकार तिनकोत से रसकोगनात है,
-सेंधाभाचार्यजामहान आपसममर्पणकोपान
अजीवशरणावच तिनकोत्तत्काल होत
वाहरात अवश्युर स्वीसवनको मानक
रत्त सोजिनके देदय में सोभाव है जेजेलों
अधिकारकजीव है तिनकोतितोलालाकोपा
नकरत्तोकाईने जोवपाव तिन में
बत्तरससमात तातेजोमकारक पाव है नि
लमत्तेसाईरसपान करते है तोशपने प्रति
वोपकरिवैलायमे यतकरत सोनवप्रचि
विवाहस्तकमलमेनाहोदावच है त्तविलकिके
हसत सोधताये हैं सापामाजेसेच
সষ্ট মহাশবৃদষ্ট বী
बालकहें जिनमें मनलागे ओरजाशेवकका
जोभावला जाकोबारारजी में सवभावकारी
नाहै तोकोसत्यहाभाविकासिद्ध होत जेसेंनी
एमाजशादिजोमवा है निमोनानाप्रकारको
हाकमिलकवात नानाप्रमारखेलतहजोभी
वशेविस्वामिकोमि-बया में सिद्धहो ओ
जाकोअधिकारपररसमै त्ताको
न
कारार्थी
on
tohd
म. दावन त्तहानानाप्रकारशार सादिकलीलाहोत
९ र त्यसको अनुभव होय जैसे कभनपख कोसिस
जोशी नाथ जी आप विनाशकार
सकतनाही गुसाधिकार होय त्ताकोटंग
रकोपानसरत जाकोननईश्वरभावमे है
श्रीकुरजाईचार हैं सोटिकोटवन के नाय
कत्तेसई हैं ओरजाकोमनकलौकिकबालीका
साकोलतिक्त्यधिक रवानान
सहा सिद्ध करतहैं त्यतेशी भाचार्यजीमहाप्रभु
আমৎস্যাসাল ও
प्रकारकोदान करत जैसेही गरेनीमापयेत
नादकरके वसहाराजगकासाधिकारखे
ताकोत्ताप्रकारकोरसदानकरत असही
আঁধার্যপ্রযুক্তি
जाजीबनसोचाधु है ताकोत्तेसाईभनु
वकारावतो त्य धर्मश्रीरकुरजी मह
सवधर्मशी आचार्यजामह
विजतनीहरजाकोदेख के मोहित
तेसंहाईहाशवजन ते वरना वह सोश्री आता
र्यजीको देखिकै प्रेमसोमोहितोतह शेरोन
-
भक्तनानाप्रकारकीसामिग्रारपसावलसम
रंगकरवत हैं। सोश्रीरकुरजीपम सहितोगीका
रकर हतिहाथीबाचार्यजामहाप्रभुनकोजो
काभेटकरता शेरऊत्वकेदिनविजनता
यंगकर अपनेत्रीहस्तकमलसपोरई हो
वैभवश्रीशाचार्यजीमारप्रभुनकोप धायको
परमग्रेमसोकर स्नातकरावत होस्श्रीन
कुरजी कोजजभक्त अपने घर परमप्रेमसोप
वित्तहात्तवनाना प्रकारकासानियासस
मर्पणकरचीलापीछे नाना प्रकारकेश्ववस्त्र
पहिरवत् जापाचमुन्धारिशर्तिकार निशा
वरकरत सोधिनपरम्भान्य सौभाग्यकारक
मानतीनावाप्रकारकीरगनकरतहते से हो
वेलवसवयीचार्यज़ा कोयधरवत्वहरकता
মিম্বিয়াইন্নাআহবাঝনা
कारकेशाभूषण्वस्तूहिरावत्तत्तापाचेन्पो
छावरकर कीर्तनीयाकोदतही नानाप्रकार
काफूलनकामालापहिरोवत्त तापाछेतिलक
करिकेमुदायावारकें भारतीकरता दिन
ध्वस्व अपनीजन्सुसुफलकरिके मानत है पर
भप्रेममै विवसोतसोकाहेत्तेजोगकात्री
२' मा चायनी शापमा परममंदर
मेश्रीगो पहननाथको त्रिम मदिनहर
कार में विराजत्तरे और करजी कीनार
प्रकारका पर नजोगरम विपये
मविप्रयागरम
चित्ररूपानोकोभिशय सोय
रमशोभादेतीमानाचमापनके
एमकरुणा
राकर दरवचे तिनसकमाये
चौधोरमोशनारंजामापपरविरको
मोकलेजोक्कममय भीमसाज के
अंगारक मामियानात तश्वीले
प्राधादाजी या सायक्योजो अभंजरमह
छुमो धोखा मानना है नवाचार्यजी नेत्री
रामानशाकरीची साकार कर
शिको सीधा सामानानाये मोगमा
जाते यने पर्यत समिकर श्रीरजक
मनान पुरेसा मतेयापघर मेनका
जीमारित्वरेचक है महापरणदवसाय वापरयर
सपोरख यद यो कयमुना की पथराव
विमेधया समय ववव माह
माहरऽचोरोल
न्याय प्राचार्यसको लायक
होकरीराधुयलवारधिमा मियाले ?
सम
सच तापाछेदुसरे दिनथीहरजीसोपडतेत
बंधीआचार्यज्ञासापुत्रीजाप्यातायाछे नाराका
जीभोजनकायोग्यासरशवकालमावेश
সুদসহাশবিছনাকাঙ্খা
संजीवापानवैलवनकोशिशाकरतही जाया
प्रकारशेषामेसावधानरहियोएसेत्रीमावार्यनी
शापश्रीरकुरजामोशेवाकरत्त । सोदेवीजीवन
केपरमवयस्करिवेकेलीयागोरीप्राचार्य
जीवापत्तोश्रीपुरुषोत्तमहासापुकारप्रथम
सोकोयहसिहोचभयोजोजोजेसैधर्मनीटा
कुरजामे होतेसैसर्वधर्मश्रीआदायजामाने
मेहतातेश्रीकृलहाखरूपहाजानिको नीचांचा
यजामहाप्रभुनकानजनक शबहसरोलीक
कहत्त जो अशोक श्रीभागवतप्रतिपदमणिवर
মুমিনুদিরামঘাষনা
तुनिजदास्यस्यसौभाशयोकोथीवावधामा
वासोही भगवतस्वहाहै सोकाहे जो भी
कुरजी आजैसे वादविखे अपनेस्तमस्वर
एकरके यापिरहेही श्रीपजीविनाकोई पर
महेन्हावाश्रीपूर्ण पुरुषोत्तमकहियरत
होमीभागवतमेस वस्तुकोवान प्रथम
। श्रीनारायत्यय के न्वान वे कमलभ्यो वडावा
पर चयो याचनदादेवरभये बातरूप
चासवेशकैमिस्वारश्चयो योचात्तत्त्व प्रकार
नये एवी जत्व वायु पादक या कास्य सिनने
सरकारिखकास्वोये च वैमनपयोग नि
वेक चोर्य अञ्चय सहनशीलन दैन्य तापाचे
गरपसाच अधिक प्रकरचय सोदैवत्तानसों।
पारासरचसो सर विरोधचन्यायाई जव
असुरनकाजीत होता है वत्सकलदेवताभाजि
कैचपनेअपनेखाधिक पुरवत्तकाकार।
मैन्य यकेंछिपत्त्व सर्वएथ्वी पर बीटाकुर,
ज्येच्यायप्रकट होयके वासरवकेसंधारकरच
-देवत्तानकारचा करते हैं याप्रकारओपञ्चजीको
प्रायहोरा फेर प्रलयतीन प्रकारको है सो हो
त पकवाने श्याच ये साबस सवलय होतो,
खोकारो सिष्टकोकरे एकत्र यासौवर्ष
के होयक त्या पारजवमरत्व व वेपलय होत है
एक महाप्रलयाीपउज्यकरत्त है ताजितने
देवलोकनयलोक शिवलोक जयोऽसहित
बकाप्रत्य होत चवमहाशेषजो हो सोसकर्ष
जीवहत्यमुखतेचविहे साकोपरकरच हे सांची
सलोकभस्म होयजातहासमुद्र सोअपनीम
योपाधोयाप्रकारएथ्वी ऊत्यनिल
सनिकभीतिमोहोतसोसवत्रीभागवत्तमम
गर है सोनसेंधा करमाकेनगनतेशान हायाते
सेशीभागचकेसनेत्यानावकोशान हो सोक
हतेमभागवतमप्रभुनकाशवतारकालाल,
चौवा सम्भोत्तारकावनिह गोरी नागवत
ओरलीपुरुषोत्तमजोश्रीकमा सवाशेवारनके
अवचारहत्तचिवका नानोपकारकालाला होताका
वर्णनह सोनीवाजेसोमाधिकार होयालाको
तेसोईनुभव होईसाकारजाश्रीभागतसुहा
शेषनागजासदाकरत्तो नकादिकसतत हो
শাম্বিৰৰবধংসুখ
भागवत्तवराहत नारदजसतत हो और
श्रीभामवतीरसागरमेश्रीनारायणजीकहत
वहांधीलमासनत गलेश्रीभागवत्याएथ्वी,
परजीवन केजद्वारकेनौकाहोरोजोभागवत्तम
गवत्स्वरूप हाताबाटकाकरवमेश्रीशाचार्य
महप्रभुभश्रीपूपिरुषोतम हौसोकाहे जो
श्रीभागवत सोकोई महापर्वत हसोकाहरोयो
पवत्त में बनकप्रकारघास होया परमेयि
हहोय तेसैधीभागवृत्तरूपनो पूर्वनडे सामने
कराक्षसनीकथासोवाहिक औरणी
हाकुरजीकावाललीलारासादिकलालाई सामी
है सोपर्वतमोजोजाना है ताहकोमणिमिलेक
परासोबोकेका सश्त्रीभागवत्त में पुरुषा
तमकालीलाविरूपणहताको प्रीशावाजाम
हापापमानस सोसापकरियास
वोधनाची ईत्यादि पथप्रकरकायेत्तामनाना
कारकेभाववएतिकियेहो सोअपनेशेवकन
पनकाय है। पोरगाभागवत मे जोमसोई
आभूषणधीशाचायजामहप्रभुनकेशी सगड़ी
गविषेपरमशोभादेत्तयारश्रीभागवतकेसो
हैमानामहाभारको समुशिनमत्त मेध
जलल्याइके सगरीएथाको पोषणकरत्तता में
স্বাস্থ্যবহুদী এষা
गवत्तमेश्रीपुरुषोत्तमजोकोचमत्तताकारएक
रत्त अपनेशेवकनर पर चोर श्रीभागतरूप
लोसारसागरहेत्ताको मापसामर्थ में जेसे होली
सागरकोमाचलपर्वतधरकैदिवा और
राक्षसमिति कामथन कोये होतासमयमंदर
चलपत्तालकोजाय वेलम्पत्ति श्रीकुरजागा
.
परछपरूपधरमदासलकोंपीठ उपरली
येतवतासागरकमिश्नत्रयोत्सवाम गोरे
हरतनीकसेहीसिंहापानावर सोतार
समुहाताकोग्रामाचार्यजाशपमधनकर
तामेचौरमहजोरवहत्ताभगवत्तलीलारूप
अटत्तताको निकासे सोजहाँसमुद्रमधिकरने
-कासासोसरनोदेवसाचिनकोबारकुरजाने
प्याभोरचन्तदेवत्तानकोपावकरायोको
रज्जोभापदयकमल मेराखेहोबारलाराक
नकोपानकरवायासे हाईश श्रीआचायजा
महप्रज्ञापनीभागवतरुपासमुद्रकोमाय
के पुरुषोत्तमस्वरूपरत्यभिकारो सोशपने शेष
ফবষয়ইযদানি
नकोंकमेवत्ाय होसोकहेते जोजनको परुषार
मकालासाको शापिकारनाहानाकर्मजने
जोतिन कोई दाने हजै सहारामासनकों
वारुपीपाने से इक्षाकर्मनकोसो दुदान
और थालमाजाकीपनगर हसि
श्री आचार्य महाप्रभुसवायत्तारकालाला)
के गमिजो पूर्ण रुपेत्तम हसिनाला
के नानाप्रकारके भाव तिनको
दररहे हैं चरकर बोधगमोदी
[इतमनुष्य
दम
न
वोत्तम जहि शास
लाजिदया
रा
होनापदिदि
हद तोदको
हाले
देसिप
मादक पदरात
क दोशदान नेशन
कोश चाइश
सापत्र
तोमायादार होत
मा
किशोर
धोनीदहोश
पान वनदी
पूर्ण
২
যাব।
दृध
ये
भागवत
परंतु त्ता
दे
4
वेदवशणाईतको प्रथममनकरिकोपी पूर्णपुर
पोरामकीलालारूपजोधलौक्षिकमाभूषण हक
सेयोगसमकविपयोगरसाइत्यादिकजोली
किकशाभूषण तिनकरिकोशीमाचार्यजामह
অম্মধনুমানাধীষ্মতি
रूपाननिकालीगनावकारशहापामा
শ্রীবাহায়দ্বীশ্বৰ
यजाकाबहरनिशिकरत होतिनोयीमा
সাধাকানীয়েও
रामलीलाकैपतिश्रीशाचार्यजामाहासोजब
जयकोदानकरेतवलालाको ज्ञान नाहतोनमा
नातालवहोजोमसोमोडाकुरजीकालीला
काचाहन्नाहोयत्यातमाशाचायनाके चरणकम्
लकोस्मरलकधीरश्रीधाचार्यजीवापसे हैं
मूवित्त होताकोशमहजोमनिकाह योस्वरू
पात्मक है यहजोस्वरूपात्मककिनकोकाहिये।
ताकोशजो सोकसहाजाकीस्वरूपलौकिक
होयाकारमाउहतधामन तथा चित्ताव
नाहाहीसैकस्तथा आचार्यजी के सर पकौनिरी
रखेपदिकनाहाकरसकतनेशिनेतिक
केलनिकर सो चस्वरुपवरखेडा
। है ।योलाही एकरमरहसको विष हालको
॥ यकोदेन रथ्वी में विस्तार होत परतुनीचा
चार्यकोस्वरूपलाएकरसहोरहत है।एक
टी श्रीशाकाजीभापटिकोसंधारकताई
जीभाचार्यशापमपाएकरसाहीत्यसमुर्तिवत
सेनाशाचार्यजीवावलमतौरभकहिये
जससवन के याददायक सर्वप्रालीमा केसी
सकती है सोका हेमे प्रमकोरपाई परमदया
महत्यत्तेवरभपित्त है और प्रालीमावरमा
ए पैतिसक्त पोषकता है भारसवप्राणिमा
मोहदय जाननवार मतेवनभरसोनामश्री
समाजासमोर शोर मी जोरजोर विनय
रमशानुग्रहकारिजहारकाय हो सका।
जायेदमस्त्रीको को अधिकार महाविदक्षा
रिहन्नादायोपत्तेकपावधी भाचार्यजीमापर
मस्यालयी प्रभुजी गाय है जसमा तिन
मौजव परमानना
मान समर्परादेव
केशनकारहारकारचा ताम्मे कार्यकाइसौन
यो है। सोनोमानापजामहप्रापक्षले चाहें
ववभकायत है। भोर चोभाचार्य जी महापाप
दारजा कोहरतारि प्रिय मायन
সুয়েইরিসব্রিাহীম
तपाईंशीहकित्ताहीहीपरमप्रिय हयात्ता
मोपलभमहियत सोनीमकुरजीकोंग्रीयाचा
राजीशाय सैप्रियो जोएकता हे शीकरजी
श्रीभाचार्यजीवानारहिसकतनादीहातातेवन
भएसोनामहोश्वतभकहियेजाजनको
श्रीरकुरजाकोलीला सजिनकोपरमवतन
एसानामपरप्रियहोजातश्रीकुरजीकारासादि
कालीलापरमअन्तमत्तमानागार
सोलो जिनकोपरमवतन होनामपरमनिय
लाहारसजिनकोवित्तमनलयलान होयर
हाजाधिनायकवलहेरहिसकतनहा हो।सोको
हतेनोसरसनगाररसरोजहीशीशाक
रजोरपीस्वामिनाजानाना प्रकारकालालाकरस
हैं श्रीधाचार्यजीको अस्पतवनभोला लेवल
भकहियतहानिजविरवेजोश्रीगोकुलहैमा
गोवईन ।सजिनकोपरमप्रय हासोकाहेत्तेजो
श्रोगकरनीआपकनित्यलीला होतबीगोकुलीमें
वाललीलाप्रगट हैरासादिकलालगोप्युहोसारमा
गोपाई नजोडौनहानिजरंदावनहीच होरासादिक
लालकर है। पोरवाललीलागोप्य है। सोनोगाउँ
दवशी
२. संमोहतासचीवन अमानुलमुत्तिया में
१. पीसोवराया
नहाप से हैं माया बादरपजो
লাল
रस जल अधियारोशर होय
तर
करिये वसगरोधका
अमर्यकोउदयनयटथ्वीको
अमेइर होलसे होमरचनरुपजाको
मध्यायापरवाने पर प्रकारमयर सोकोतीजी
जीचानकोपरमम्मोह उपजायवेक्युसमवेत्र
खिलदार्थविरूपत्यकरके दरामोवेशाकार
शीनत्ती चन्दकरायजधार के जीवन
दहि वह भारशिवादिक के फल का
तानिरूपयकायेर सोमवतन्यास
करवाये त्यसबीचमाया दाद के चरम
होई वेद विरुवाचरण कम्यो सेयर
करजीवायविदारे पासवरथ्यो उपर वायाचा
दवात्प्रवर्तभया या कारकैदेची स्म
या वाइक चमहोय रहे हैं। खाका ते चोदवी
जोवनको सरेराह है। वायत्रीरकुर
जोका होतना याप्रकररमीकुरोगाय
मनविचार ग्रोवाचार्य महाप्रवनकों याज्ञा
दोयेजारमाएथ्वीपर पुगोवामायावादको
खेऽनकरोगब्रह्मवारकोस्या पुनकरोजिदेवीनी
वशिनकोशरणले उनकमनके नानाप्र
कारकेसंदेह होधिनकोइरकोनोरजोदेवा
जीवतिनके नाना प्रकार कैमनोर्थोगीकार
करोगाचवदेवीजीवनकों मेशप्रावि होयात्ताते
एथ्वी परधारोई हकार्य होगात्यारेविना
औरकाहसो सिहशेयगोनाहीत्ताततलीयह
कार्यकरिव सामर्थ होयापकारीगर,
जीश्रीज्ञाचार्यजीको जीवनउपर परमदयालाई
सोकरहते जोश्रीशाचार्यजामायपरमदयाल
होमपनजदेवीजीवहौतिनकोदुरवदक
देखसकतनाहीतातीवाचार्यजीआयए।
वीउपर प्रकटनये सवरथ्वीपरिकामाकेम
सकरिके पधारोतलदेवराजाने माया
वादाकोरुगोहत्तातहविक्षवमार्यकवच
महंचारे कुत्तोताहासमयश्रीशाचार्यजामहा
प्रापपधारोत्तव सगोसभापरिकेतुरती
हाऊसादाभाग मानपुरम ये
ससे पधारा सोनभदेवराजाने श्री
२०) मोबीनतीकोनाजी महाराजा मायामा
३१३ दिने प्रवत्तद्वोयरालाको सपनिमारक
कीय वयोश्याचापश्यनेकवेदपुर
कोदो चोदने मायावाद उनकाय नव्या
अाचार्यजी मानखोखों स्नानकोये
रस पाच कोईकनिमेश्योपरिक्रमा करत श्री
अदायेजोशीपचारे सहायवेकमायादा
दिनित्ययारकरिवकोंगावते तरी प्रत्यायनी
विध्यारेयाचप्रमादलयको चासहीत्ता
शिवकसब वैश्नवस्वकार मानलेत तब भी
भाचार्यजीवादविवार के पचविले वन ग्रेयको
येत्या पीछे नहीं सदवादविधरनायजस्केर
संबनित्ययावत वहायोचार्यजीवापुप
गाववनयेयकामारोपन कप्यो महोसवाद।
अायदर्शन करते वडापावत्ववनग्रंथकों
देख वववादीको निरूपण करके निस्त
रचया सवयोगाचार्य जी महप्रञ्चनकै ईहा
कईचारकरिवोधावीमाही याप्रकारमा
याचारकोखेचन्यो वसवादकोनिरूपए
वयोववचितवनव वकाले तिनसंचन
कतिपुरवयानंदचया चवदेवी जावजे सो
+
गोव्याचार्य जी केशरण नायेको परमसुखपा
येपरमओनदलयोसाकारतेंगो पहिलमा
यावारजोकोईतिमिर सोनसा कोरा
अनमोलमजान महादेवलानेही
सायकरिके श्रीरकरजीकोभानहोत्तोना
हातातेजवश्रीवाचायजीआयपर जवान
सूर्यप्रगानयोतवनयावादरूपजोरोधका
रत्नको नाशभयोचवलवशेषककासद
हरूपजोतिनरस्तोताकोनाशनयोगाते
श्रयकरके एकत्रीरकुरजीकोभजन
বন্যালীটিভৗবয়াদুদ
देह रहे हवाईफलकापारनेही याही
भगवन्दंगीत्तामचनप्रति श्रीभगवान
माह के जो संशयात्मा विनश्यधिजहां
जीवको संशयनयो तिही याजीवकोंकाइफ
लकोसिहनाहीमोजिहाहदायतन्युत्तो
होयावहोसर्वफल का सिद्ध होय चकात्याने
जवसवशेवकनकोसदनिवर्तित्रयो त्तवन
नन्यत्व दिनभई तवेधीवाचार्यजीको भजन
करतलागतापाश्रीभाचार्यजीडापता
कोशिकरकन्नमवरशेवाए
।
G
- चिप्रकारकाय जम में साक्षात्यूरोमो
सन नाना प्रकारकाम्य मियाभाशेमाने
परमादरमन नपरोवात्यको यीशन
पचन हनुदा पकार नगरे शेवकर
स्विरवा जीयाकार पछिमागेदोका
चरएको मोशेगोवईननाथजीकारवा
प्रोग्राम नाम कराताजन्मउत्स
जन्मामीले अल्लदै तिनमवनकों का
भयो।म्मद
जो पहलमत्वकोपका
रोजानतनत जननीचार्यत्रासपा
राये होय वर्ष दिना के नाना प्रम रोक
तेनको प्रारहीये जलेसारतहोय
नसतलोवा राजदर भाभारायजामापनी
गोवईनना पसीधगदत्त मीत्तकालदेंग
पर औरण के नाना प्रकार के वस्त्र और
वर्ष देशभर मरासिद शिक्षिका
नागेगी धरत्वहीबारद
सेव हो रहाता नामशरसगुलालावारी
वासदिचकलोमध चिनतिरेप
म्यादत्त है तो सामन्दकालमयी परमसत
বিমা ইন
रघवत्त
সলংকগুছিদংশংসলী
कोलपतवार होमोसिन केलाभरधावत
होकारशपने शेषकनकोवेलवकोशवाजात
भोससबसिखावतलाशेषासाह धीगो
कुलजा तितकेयजोश्रीराकुरजीतिनकासा
शारीनासारावध होतऐतहार
মাসয়ায় শীবো।
भारमार्गह ज्ञानमागीयोगमाजीकर्ममार्ग उपा
सनामागीतामें साधनन्यारो फुलन्यारे है सोटा
हत्तेजवसाधनकरोचवको ककवफलहाय
जैसेमनमानहानेमनकोसदेहमेटविष
यादकमें मनसायासगरीदाका सिधलक
रनोदी सोकहोतेंजोजहोगदादाशिथिलता
नहोयत्तहोताईजात कोसाधननाहायनिगावे
चापावासारो किकै प्राणीवनाचगवनी
सोजक्सी होयचयकर फलोदेशयोगीन
नजोगसाधत देशात्मा को ध्यावतही अनेकप्रका ।
रसोरखापयेपावने साधन करतगतवकवई
सकारका योगसाहिहोचकिम में नाना प्रकारे
के समयवरना यज्ञादिककर्म जहांय
भरतहोतधनेकपकएकासा
र चाहायो ओषधीप्रगट चाहियो बानेरुद्रव्य
५५ हिये यज्ञदेवत्तानोश्रीभगवान है तिनना
লাইম্মাষঝিল্প
गहै सोन्यारेन्पारधरत हैं।ता मैस्वदेवता
कोमेवसहितबलावत है जोरलेनाहार
चकलेतीकायोकण्यासवनष्टकोयुजोया
सोकोत्तेजो सनष्ट येते जलरोचरायु
जायु शातियोगमार्गकर्ममानवकाहकोसि
इनाही हैउपासनामार्शमेनाना प्रकारको
वत्ता तिनकापासनाजीवकरत होता में
जवकनिरविनतासोउपासनासहहोगात
वक फलेकापाय सोझफललौकिक हैं।
तातें रजोमा हे तिनकोसाधनन्यारो पल
ज्यारो ओरफलहसवलोकिककै सोडलिक
दोषकरिकेकारकोसाहानदेना होताते
আমাখাসমবঙ্খীঠেীর
मनोजोलीला तिनहाकाफलसाग्रीहरकरजी
तिनकापोवा कल नेत्रीरकरमाकाशवा ऐ
सोफ्लरुप परिमागसोयी आचार्यजामा
प्रभुनने प्रगटकाये जाहीमेकदाचितभल
-
..
हेपतो. करजीप्रशन ऐप गमनकरे
फलत्वमधेसशयनकासोमारतेजोश्रीन
कुरापपरमदयालजजीवकारचकहंगोश
वाराणावत होकर क्लेमानत होतातसाध
नकारदेखत्तलाहाहानीआमार्यादेकान
तेजोवैभवसामिग्रीगोगधरत हैं।साकोगी
कारकरतोपशनहोयकेशरोगतताते
साधनहेफलरुप हौऔरशीआचार्यजीआप्पु
शिमार्गप्रकारेकायही श्रीगोकुलकेनाथजोपूर्ण
प्ररुषोत्तमतिनकोसवेधसादात्ततत्ता
पाछेनीटाकुरजीकाजोलीलानानाप्रकारका
वाललीला प्रोब्लीलाकुमारलीला राजलीला
इस्पादिकलीलाकेभेनेसिनभावनाना
प्रकार से योगरसविषयोगरसयेदोइरस
कोदानुभवोत्तभोरवैलवजाहेदैवीजाव
हैशिनके नानाप्रकारकेपायकारको श्रीटाकुर
जीकेचरणारविंद प्राप्तहोयातिन मेंजो प्रति
बंधही सोधीप्राचार्यजीवापकरूपय करिकस
शेवक नकाशेवाकरवायके प्रतिवेधहरकी
ये मिरजोआसशजीव तिनकोकामको
धमलामात्सर्यषटउपाधकर भीगा
का
(1
का ऐजीमहाप्रभुनके स्वरूपमानत्तना ही है जाने
। उलटोश्रीआचायजीनहात्म्पदेखि सुनके
मोहको पावत्त साकारतोसंस्मयप्रकार
है परंतुजेचाधरहोतिनों शवदनस
दवरावर है इनकोस्यको जियारोसरत
नाहा तोहाची आचार्यजीमहापापु
कोष्टिर यसमजिनकों प्रकारजगतमैदर्शन
तहै अपनोप्रतापमहात्माजनावत्त परत
शासरीजीवजासोविवेकज्ञानकरिकाध
रहैं जिनकोकवसरतानाहा है। सत्तेवाशा
यत्रा के स्वरूपदेवरा पर रजानहोत्तनहाई
अलोमादा होता साकारतजो वैधासरी
जीवता ऊनको ज्ञान होनाहार पोरने
वैमासोश्रीआचार्यजाकोपूर्णरुषोत्तमही
मावत ऊतकावेसे हीदर्शनप्रभुदेशहरे चोर
श्रीभाचार्यजी शापीठाकुरलोक मरवारविंदर
पजोशनिवारूपशीबाचार्यजीवापर तेसेई
श्रीभाचार्यजीमानकोत्तापात्मकयुधिमा
महतातेयामार्गमी चहालाई दाल होता
ईतापरपजोश्रीरकुरजीको विरहा जोमादों
सवमिलेगो जहांताईएसोत्तापनाहीतही
-
जोशलिमार्गकोफलको पावनही ओरजहां
तापयाकेदयत्रयो तहलोलालासहित भोगत
ननाथजोआपचपनोदर्शवदेशिजदाताह
याको वितरवानयानमेल गया तोश होगाई यही
वको शरीरकोसुखहीचाहत्तम वैलर
मेशिनकोमाप्रशादलनासोश्रीप्रभुजी
काइछिएजानिकलेनीशियनेशरीरकोष
बनाता माननासकार जोशशरभाग
विचारोत्तौविषयाशक्त प्रशाहोय होयोर
महाप्रशाउछिरिजाश्किलेयत्ता नीरकुरजी
कमजन में मनलगेरवपहुंचारकरजाके
मापशादीकारकोपहिरनों सोकोत्तेजोदा
सकायहीधर्म जोऊतमय यसोपनको
विनियोगकरेपशादीहोतेंनिहिकरनासो
करतेजोगएकसमय ग्रीनारदजीवकुम्लोक
मेंश्रीभगवानको दर्शनकश्विको गयासोश्री
तरजीवकुत्तास्तुतिकशा तयधीठाकुरजीत
शनहोयश्रीवादजीसीको नारेबाज
इसरमोमहप्रशाददत्त सोकर जाने
नारदको धीमाप्रशादकोहिनकामाचहीथयो
सोश्रीनाररजालेकैमहाप्रशापको कारकी
4
केवरहीप्रशन्नभयो यो शानदमे देशान
धावरहीतापाश्रीनारदजीचपनेमन
विचारेजीमाप्रशाशकेले केसैले
ईवैलवलोमिलिकेलेतवदयाति
माप्रश्गदकेयावधीमहादेवजी तिनको
मिललीजीये एसोविचारिकीटकरनी
कोऽवत्तकर विकुंठते कैलाश माहोथी
महादेवजीतेतहदाये सोश्रीमदेवजीलाना
रजानेवत्तिही सन्मानकायो पूजोधानारद
जीतमकहतिवाये चीठकुरजीभापप्रशन
यमहामशाददाये लो मेरुक्ष्य में विचारे।
जोमहप्रशासकेले के सेले महाप्रशाद
लवहाय तिनसा मिलतले सारवलव
मते महप्रश्शप्लेके आयेही इत्तनोसनातही
श्रीमहादेवजीकोमहाप्रशादकीमहिमाकोस
विदाई सोमहापुशपकोदेऽवत्तकारकत्तापा
छतोऽवेत्त्यश्रीमदेवजीकरनलागेर
श्रीनारदजीले के शानदसोंगान करनलागे
सोकोई दीवाताई गोपनत्यकरतत्रयों
त्तापाछेशोतहोय परमानंदमें श्रीमहा
देवजी मोरनापारवतजावदेशजवश्रीपार व
तीने श्रीमहादेवजी सोएटोजोमहप्रगद
मेलाका गुलामासोपानद पत्ता
श्रीमहादेवनानेश्रीपारवतीसोंकह॥
“पारवतीमाप्रशदकोहिमांकावाधार
वताजितने सोमहवेमौसामर्थनाहारसे
श्रीमर कामहिमा होसाकार तेजोमहा
प्रशालेत तिनकालादिनन्मकायतरा
यही पत्रीप जीजाभलवे कोसोसवह
रहोत्तोरएसकोयहीधर्म महान
शादहात्तनिर्वाहकभोरशन्यप्रशदीवायत्तो
श्वानोविशसमान सोमारतेंजोतारशहए
वेधीशकुरमालाप कविनादारवायत्तोयोकोद
सपनो उजाया सोकाहेत्तेजोमहप्रश्गस
मानयाजीवकोंडद्वारकोकारननामह
शाकामहिमा विग साधनही यह संसार
समुहकोशाजाराता महाशाकाम
हमाकापारनाहाचोरएकसमयधीशा
সম্মৎ নাই।
नेहा श्रीजगनाथजीकेपीवक्रीयो सोएकप्रह
मरदिनचायोड्यो शासमयएक पंडित भयके
श्रीमती प्राचार्यजाकोरयो सानीया
भार्यजामहापप्रशम्शेयकेंलीयो तादिना
कारशी कुत्ता सानीभाचार्यजीशापन प्रशा
हलकमलमलेकरकों पशा वेदशाला
महिमाकहा है मामलोक श्रीजाचार्यजीमा
अशापकहनलागे सोमप्रदकामहमाक
हत्वक हत्तसगरोदिन बीत्या संगररात्री
तोत्तभई तापाचे प्रातकाललायो रानीम
हाप्रशादमानाचार्यजीआपलीयो कबदहा
यासशरीरसवाधानवी सोराईतेजी।
शीआचार्यजी आपश्रीपरीपुरुषोत्तमहोएका
शीह गरवा यामाप्रसादकोमा
पहरा
काय शोरशरीरके नित्यनैमित्तकैक
महजनाया मोकार जो योगाचार्यजीमा
पजी एकादशीकामयोपानराखोलो एका
दशीका बिराएथ्याऊपरकीकरतानाही
ओर मतप्रशाकामहिमाशेमानरावत
तमसप्रशाकामहरम्परध्यापरणक
कोनकरत्तात्तातैश्रीआचार्यजामहपशुगरने
तवमुक्तिकाविरचिौमुदावित मनो
ज्ञकरयो प्रियेसुमुखिराधिकावलपिया
तिशतयोविदधत्तासमांदोलन
शानंतरश्यामकांचसंपरकेकराशी
भियत्तही लापासवलीकेपाटमैप्रोचेजो
डेलवरीकपुरलायोचित्तौक औरत्तनं
चरनयमोत्तानकारकै रचेस्चनाकायहें
हायसंगधरतमानकोरचेएसेटों
उहाथववेधरनाईहप्रियेसमयारा
धिकावानजोशीकरण तिनकाप्रिया
सोनात्यंत सोभत्तगी कंकएकीपरत्तसा
ध्यक्वहिडोलावत्तखोलातचलायोसायी
सवर्षकएनाके पदाखिलजो
स्पामपाट केपूंदनाशोभितहसपनशान
येमोजाकर भागमोतीके रासोहर
पसंयतमनोयोग्य होय है। र सेदोरहा
यविलंधरतभाईही प्रियमुरवासाची
विकायल जोशीकल
"
पावत्पत्तरोभायमान ।
-
• बजारकै खोलावत ६२० तात्त:पश्चा
। चामाकरसघटित्तोकस्नुपादित कारचल
यो ततःसांगगैरागीभरकत्तमयाचागदवरौं
सवाडीरस्मन्मानसनयनपाशीविवधय
येचेत्तःकाला प्रसन्नमहरनावजमुखि
हार्य तदनंतर केकणके पास
वर्तकासंदरघटियोहाधकामनोहर
तदनंतरजोवहगोरोगाशंगमरक
समलिमय|श्नांगविखेनोवानवंदवि
जावटआपनेटौरवोडविर धरतभई
सायहहै वहअंगनहोया यहांतःकरे
केदार ने कुंपासफांसीधरह येसंबो
नपदा हे कमलमुखाजोखायहकौन
कोचित्तप्रसनाकडेतेवेचकरना
रनकाय हे कमलनुरेवा ६३९ सालदेर
लाषु५शसुविचित्राभणिनिर्मिताने
रवाषितारेजमुदिका प्रियवलभा
R
नंतरहदशमला
खेविखें विचित्रमाणिकरनिर्मितसोनर
केंज्म महीएजाकरोगवश्रीकाजीने
कोशापनमातापितामोंजो फेरैकेमांगायो
मत्तिातइननकराजो हमारनाहामागे
गेत्तमहीपंजाकतकाजीसवेस्वरुप
लेबायानीवाचार्य महानुनकोल्पाय
दीयोतवधीओचार्यजानेयेच पूजामेश श्रीग
शिधारीजाकोसरुपमालिकापनेवरपधरा
ये बापाचारसरु पत्तगोशामहादेवाभ
वानीसयोतिनको श्रीगंगाजीमेपधशयवे
लागतवजोन्यारोस्वरूपसववोले जीमहारा
जहमकौतुमनमानोगौतोहमकोकोनमानो
ग्यालयश्रीचार्यजीनेक योजोमको प्रस्या
वर्विवाहारिकाकर्ममेडलावेगोयायकारकह
केंउनकोजसमे पधरायाधीशरधारीजीके।
स्वरूपोकुत्तोतिनको नाम श्रीगोकुलनाथजी
राव तिनकारोवायुरिमार्गकाशतिसोंक
स्नलागोएसीभातियोगीत्राचार्यजापा
पनोसोमहाल्युजगत में प्रकटकायापछिमा
गजेहोतिनकोंप्रकाशकायोल्यापनेशेषक
301 कोपुरिमार्गको फलाकोदयाश्रीज
चार्यजामहप्रभुमाएलोकिकसर्यरूपान
रहै तेसोईपरमार्गको भलौकिक सयवंत
प्रगटोएथ्वीपर प्रकाशनयोतात
वीजीवहंधीधाचार्यजीकरणशायको
दिमार्गको फलरेतामोपायकें संतोषभयों
याप्रकारत्ती नसोककोशविरूपणभयो
आवचरर्थशोकको शोककरित्याडि
त्यंचेन्ननिगमगतिसापियतिकियामा
सापिस्याद्यदिनहरिमार्गे पश्चियाया
स्यारोपिश्रीनिजपत्तिरनितिनिखि
लैरन्या कोवाविलसत्तिविनावल
वालाको श्रीश्राचार्यजीम
हापू नकोस्वरूपकैयो कारजान्यो
नाईसाकारतेजा सिपडितहानि
समजो वेदशालपुराणातनहंकजानिये
मेचर ओरसेदे निवर्तक जगत में
बडीवाई) बोसोववेत्तपेक्तिगपुर
नसोडीयाचार्यजीकस्वरुपको जानवमेसा
.
Y
4
দqনাইজানালা
ईकोनराशा से एडित अंधकारकेवरहय
रहे हैं सोशीमाचार्यजीमाप्रभुनको स्वरुप
कोयने नाहा अपनोयोगत्तावकराजगमें
माविर के होममेशभिमानरूपीजामद हैं।
तामेमत्तलयुगेश्रीआचार्यजामापुरुषों
त्तम तिनकेस्वरूपको म्यान नाही होतामो
काहतोजो साधनजो है वेदत्ता में कर्मका
.नानाप्रकारवियोवयज्ञादिक तिनके
साधनलगह धोरवेरमेकीस्मरजोई।
निःसाधनहोयके श्रीपूर्णपुरुषोतमकोभन
नकरनो सोयाप्रकारकोसिद्धांत होता
कोज्गानवमेशभिमानकरिके पंडितका
रहाहौशाएसोसिहातजानिवेकोसामर्थ
नाहातारी कलिकेदोषकारकोउनपर
तनकोकोक्रयासिहिदोईगायत्तनाह है
सोकाजोयशाकिनोवत्तद्रव्यंचा।
कियाजाभोशिकायज्ञादिककाजोत्रोसा
मेग्रोसरजवामिले पवियज्ञकर
20
देवत्तानकोधावाहनमंबकरदेवतान
कोमंत्रकारदेवतानकोसलावत होत्यपा
शासन देत नापाहीन्यारेन्गारेभागसर्व
देवतानहानिकारत्तो सोदेवता के कायाम
स्तकहभलपरेतो वहदवता यशकानाशाह
करेनोश्यज्ञकरनदारकोनटकरता
तेयाकालकेरियज्ञमहिनाहाहोतो
औरहोमादिकजाही तामेशनिकोकूदकर
केनानाप्रकारकाहोमकासामिग्री तिन
कोजेसेवेमेकघोर सोसवले वेदशतिसों
छत्तवाहिदेकेशनमशाम चारचक
हेमत्रमैत्तथा होमकक्रियामभलेतासगरो
कायोकरायो थाहायजाया औरफलकोना
शहोय तायाराम हेमकरनवारीखेदपा
बोसोक जोयाकलियुगकोषकश्य।
अग्निहोत्रहसिंहहोयसकतनाही याप्रकार
पंडित्तनानाप्रकारककियामेमनलगाप
शभिमानवसहायाधीसकरजीकेस्वरुपको
मानसकतनासोश्रीत्राचार्यजी।
के स्वरूपकोज्ञानपंडितनकोकोत्तेहाद
सोकाह तेजावी याचार्य महाप्रभुनकेतरू
पक्रोनितवडोयावश्रीयाचापंजाआप
अनुग्रहकरिशंपनोस्वरूपत्तावातव
होजान्योजारानाहात्तीकोटिकोटिसाधनक
रोपरशुश्रीशाचार्यजीकोस्वरूपजान्योनत्रा
यांसोकाहेत्तेजोनीआचार्यजीशापजपए
थ्वीपरिक्रमातीनधारकासवनानाप्रका
रकेपेडिवववज्ञानीमायावादबने
केशाखकेजाननवालोनीयावार्यजाको
मिले कमरेवराजाकीसभामत हांधीधा
चार्यजीवापसोवतिहासवपडितहा
परशुराग्नीवाचार्यजीकेस्वरूपकोज्ञान
पंडितनकोनभयो।पोरसेवशास्त्रज्ञान
नधारोपेडत्तकाशी में मिले तथाश्रीजग
प्रायशयजीमें मिले।आरजहांतहाईमिः
लातिनसवकोंश्रीभाचार्यजी झापनिरुत्त
रकायोपरतताही याचार्यजी के स्वरूप
कोज्ञाननभयो।सोकात जोनीशा
राष्ट्र सारस्वरुपको जाननाइसकत्तरे
हतेजोभीशाचायजापापनेस्वरुपको।
रानभवउनकोनाहाजनावत कोहेजो
তৈয়াৰহবাে
दिकपठे होंयविनायटेईहोऊजोश्रीमहापथ
केशरणावत है तिनको श्रीशाचायजायी
पनामसमर्पणकरवात्ततिनकोतिनकों
अपने स्वरुपकोदर्शनदेतही तिनकोपक्षमा
कोफलजोशीटाकुरजातिनका नाना प्रकार
कीलीलाकोअनुभौवा श्रीपाचार्यजीआय
करावत तातचीत्राचार्यको स्वरूपाश्रीराकु
रजोकोस्वरुपताको बानुभवकथ्यते।
चतुराईतेहातना जवान साधन होय
केंदानराकारके हत्तीपार्थना करकेश
प्राचार्यजी के शरण आवशतवशीआचार्यजी
आपपरमदयालही करुणानिधानसाता
तएपिरषोत्तम साजाजीवकोशनुभवक
रावल ताकोफलसिदहोया तातेपछिमार्गक
लहसोकपासाध्या साधनसाथनाहा
-
झोपत्रीच्या वार्यजीमहाप्रभुयापकैसे नि
দীক্টভেন্টাসলিমঘেী
स्श्रीचाचार्यजीवापहवेरकमहासाकर
त्ता शरमनपूर्वक प्रोगावरतनाथजीका
शेवाह करत त्रिकाल संध्याहंसाधन
हैयज्ञादिकोनयनसवकर होलाको
नभातसोकरचाजोप्रथमीठकुर,
जीकाशवाजोहोतिनसोपचढ़करता है
तिलीगंकुरजीकाशेवाला आवश्यक
रनीतामें आपकाश होपकर्मादिककर
नोसोकाहेलोजोभापहंचायगलमेवा
बत्तारतीय हजारोमर्यादो शखवे केलीये वे
एकेकर्मकर हो योर शोरकुरजीकाशेष
तोमनपूर्वकपरमप्रीतमौकरत चोरापने
रोक्कन कस्याशिवाक रत्तमोत्तमए
पुरुषोत्तनकाशेवांकरोगतातेप्राचार्य
भापत्तोपूर्णरुपोत्तमाशापवेदकामयी
पनराखताशौभोरकोनरावंत्ता शोरकोर
वैष्कर्मकरेन्मार होला केलीये शीशी
.
र भापुएर्सटवोतम.तिनकेमर्याराति
२ वेकेलीयेकरत है धोरमनपर्वकधीगोवा
नायजीक शेवाकरतही प्रतिजपतिरासे
श्रीकृलजिनकदेखिके कोटिकोरकामदेव
कोरिकोटि रत्तिलाकोंपावत गरज
नसा पकाशामवेदादिकनकौशगम्यो
वेदईनेशिनेशिकहि मोबाचार्यजस्केराग
हैशिनोगन करे । मनकरिक गया
उदकोशी-आचार्यजीकेंगपा तिनक
कोईवार नहीं पायो ते दोधीपरी पुरुषोत्तम
जोखनके पासनकोसरूसकोकाईनत
नाहर सोको जोगीराकुरजीहतिन
मतो गानेकणहताकरिसजगत जित
नेकगण एवापरयकर सोरावनीसकरती
मेप्रकटर शोर श्रीराकुराती गणरसमा
बत्तपूर्ण होयरहोसेजोपरेतेपरचार
पुरुषोत्तम हसिनसोविलासयहजीवकला
चाहतीएक श्रीगाचार्यजामहप्रभुनार
एक पाश्रयायोत्तवही सिद्धि यो साका
१
-
हेजोविनावलमजोहै.सोवरनामशेर
होसाका जोशोरहंभाचार्यनामधराये
लीयेतिनसवाचार्य श्रीवाभाचार्यजी
यावेष है खाका तेजो सबभाचार्यकप
शिमायाबाद कोदारमार्गकेप्रकर
करता है। ऐसो प्रसापनपनोएथ्वीइपरथा
वलभाचार्यजी ने प्रकरकायोवासोकार्यकार
सोनहोयारो सोज्वलभाचार्यजीसपके पति
हैचिन चरणारविंद कोधाश्रयंशेऽकमी
एयरुषोत्तमजोर विजपतिनसो विलास
कायोचारचहासो अत्यानकरिम है सो
काहेत्तेजश्रीचाचार्यजीकोशाध्यलोड
श्रीरकुरजीक याप्तहायवेकॉजतन करत
धोरीमकुरजी का प्राकृतिनकोंनाही होत
हैं। काजा श्रीपूर्ण पुरूषोत्तमतोश्रीबाचा
र्यजीमहाप्रभुयायपाक र शनिदेह
शिनमसिहायानोस्कोसिद्धिकवईनं हो
यालोटप्रकार के साधुनकरो पररफलक्षा
प्रापन सोका हेनजोसत्र के प्रति बीए
at पुरुषोरामरूपनोश्रीचाचार्य महाप्रभाईन
केवणारविदानयजाजीवकोंसिहन
भयो हेत्ताकेजितने कामनार्थ सोसवरख ।
स्लीपरत्त हैकरहतंजोजहांपनीएवापुरु
पोतमत्तेवहिर्मुखन्नयो होलौकिकपदा
थालौकिरपार्थ सोकसिइना
रौतह अरजीवरसारसमुदत्ता नारन
प्रकार दुखःहापावत्ती साकाजी
श्रीप्रभुनके चरणारविंदकोशाश्रय उन.
बचकोंनाही हो याहातेभगवान ने भगवर
चामेक है जो जनजोजीवरेत्तेवाड
kष के होकोत्तमायाकरता साहको
फुलनारपावरा है चोर उत्मकार्य उनसो होय
नाहीसकतनानाप्रकार के विधपत्त होताते
उनजीवकोरिप्रवरसाधनको सोइलराधा
महीयावत सेंधानमकाजी हेताको
निकासलपाछत्तस है काकोरोलोहा
- थमे छालापरेपरबतसरवस्तुनिक सेनाही
सोकाईते जोसे में जो पाईपुरुषोत्तमत्तेवाहम
योराकोलाफिकवालौकिककति
हुनाहाहैयाहातंधीभागवत्तमें श्रोड्वे
सोचीरकरजी आपको है जोहेउवाजी
वमेरोभजनसमरन करतशाजीवकोचा
छोने सववस्त्रकाप्राप्त होतीयाहीलेपन
शरामेब्राजीनारदजीपतिकर है।जानारर
ईजीवसगरधर्मकॉकरनवार जिनकों
निएकभीरजानहोसोधर्मकोकरके चके
बोरोपली बोरकरजा सर्वधर्मनार
नास गरेअधर्मकोंकारवारोसायोशी
कुरजीकचरवारविकोनहाभाराहीशी
रमीभागवत में राजापरिक्षितप्रतिश्रीशुकदे
वजीक मोहेशमायासंसारमें श्रीषकु
जीकेचपरखिंदकेभजतो दूसरोही
ईसाधनहीं हो जात-धीरकुरजीफेरलार
विदकोंमतहासोधिनाश्रमहायासंसारम
मुदकोरिजारा है। शोरजोजीवशोगकरजीक
चरणारविंदत्तेविमुख होमोरसोईप्रकारसंसा
रखतें धिमुरव है पुरखोटतना हीहोर
गोरगीकचरगरविदको भजनकर
h
.
2.0 अनेकपापीजीनहोलोमोलके योग्पुनही
लासंवत्तरिमय है जामेल गजागागको
गोधरामा प्रहलाद विभाषयावलिया।
देके सोत्रीहरजीकचर एग रविंद केज
नको प्रताप शाहातेएसें शीशाचार्यजीमहम
भूआपत्रीपूर्णपरुषोत्तमजोतिनके चरण
रविंददाश्रयविनावपत्तिजोशीकृल।
तिनकालीलाताको मनभवनाही कसो
हूंपेक्षित है वेदशास्त्रपुराणसवनकैजानत
पररविना श्रीभावानी के चरपरिविचर
एकमलकेचाश्रयविनायहसंसारसमुद्र
कौत्तरिनाहोलकत्तलोललाको धनुभव
उनकोंक होत होया और जीवश्रीनाचार्य जीके
शरणमायर सोनीटर फरमाकालीलाकोश्न
भोपकारक विना महायार्ससारसमुको
तरजाहावयासोक में यह सिंहासन
यो जोकै सोहूंपडितहोय सोपनहोयवेदए
राय शस्त्रसवनकेशकेनिरपराकरिता
रोहोया धारभौतिभातिके वयादिक कमति
नहकीकरता है। यदिनिहोत्र हे सर्व
भोतिकीकीबकरत परतयकालके
लेषकरके संसाराम कोतरिकाहसकत
सोकाईतेजो विद्युमरकर के गभ
मानोहोचाउनको हारनाहा होतह घोर
जोडीवनसाधनकायकदैन्यत्ताकरिके।
श्रीआचार्यजीमहाप्रभुनकेशरणाये है सो
विनाप्रमहीयहसंसार समुद्रकोत्तरिजा
तव और श्रीशाचार्यजीझापजोवरककमी
दिककरत होतोलोगनके दरवायवेकलीयरें
औरवेदक मर्यादा शरिखकेलाय होंगोर
श्रीपाचार्यजीमापजोनकरेत्तोकाईनको
बारंगीनिज पत्तियोटाकुरजी आपुतिनका
शेवा तत्पर रहोजानकॉवेदनेचिनत्तिक
शिकोरगवरवानत है एलोविनाधिपत्ति
केदर्शनकप्राप्रविनाश्रीआचार्यजीमहाप
भुनकेनहायायाप्रकारचारलोककोनिक
पणभयोगवारहपांचोचनोककर
तही ताको निरूपनकर लो.
मायावादिकरीदर्पदलनेना.
इत्तश्रीमद्भागवत्तारव्यदुल
mar
एगवेदोलिभ
राधावतभनामधेय
सदशावीनत्तोसत्पपिया
बाई मायावादरूपीजोकोवियोमत्तईया
सिनरलनहारेरोस्नेत्री आचार्य नीमहल
प्रकरज्ये साकारतेजश्रीभगवानको
ज्ञामहादेवनाकोनराममायावादरच
के उपरप्रकरके मोहउपजावोत्ततश्रीमद
देवजी ने श्रीमुकरजीसधिनतीकरी जो
मेंजीवनकोकोन प्रकारमोहितको और
यह अपराध सोमोकों होय जातजा
कौमाहितकेसेंक से लटो में आपरेचर
रादिकेसनमुखजीवनकोकरू मरोयह
धर्म औरस्मारवरणविदेशिमुखको
नप्रकार करो तरधीठाकुरजीने श्रीमहादे
बजलोंकोजो तमकोयावातमें आपराध
नायगा साकारतेजोमेरीचा है ताते
मायावादपथ्यापरप्रगटकरके मोहमें
अपजावीमहाकलिकालएवाउपरथायों
तातेमायावारहं आवस्यकीयोचाहये जो
यानोशिसोबोट करजीने श्रीमहादेवजीको
जादायोतवत्रीमहादेवजीसंकराचार्यजीको
स्वरूपरिकेंगरभयासावेदविपरीतश
स्ववत्तप्रकरकायापोटेमंवत्तहवात्त
हीप्रकटकायोगिक क्रियाहमहा-हीरूप
অনুজহাদ
कोसीकरणमत्रवाचकायोजामे तरकत्तर
कालदेखके जजीवकामो प्रगाहोत्तमोर
भौतिकैमरजा शाहकजूनाहीयों
वसंहाजपनाही पर सिदोजायांनी
लिसकरिधनककामना होयाचारको
यूरोकरामंत्रको झाधीनकर निध
नसगरोएशिलेतायाभांशसाइनमें
धर्मसाजोगादिसइनमत्रम -
गोरकोपशोजिनितारकेविपरीत
र्थनिरूपणकार दशमीविधाऐकारी
ताकोंकर नलागोसो एकादशीकोफलनाश
भयो साकारहती जावेदक जोशी
मविपाकादशीसी श्रीग
र रविंदवहर्मख हो इजेसेंशमतमय
केपात्रधर तिनमएकदमदरालापर
२८सवमदरासमानताकौशसुश्यानक
रत्तो रिवर मेंतुलशीकामालाकही ।
वैलवटलशोकामालापहार चिनकै
नमुखकालादिकायनासिकत्तौथो
খ্রীষণসহযাক্সোঞ্জ
यह शुलशीकामालाजोपहर तिनको
भगवत्संवधोय ऐसेवेदकयोहा से
शंकाराचार्यलशीकोमालाबजायकोस,
तकामालापहिरावे का निरूपणकाया एं
सोजोरपावलावरमालाजोपहरेदीयताको
पूयपराण मेंयहकडोजो मनुष्यरत्तकको
चित्तासमान में चित्तास्परशहोयत्तोश
चैल स्नानकायेदवायत्तेसेंबरुदानका
मालापहिरेहाय तिनके स्परशत्तेशचेल
बास्नानकरत्तवशाय सोपसीरुपातका
मालावेपत्तेविरुद्धार्थ निरूपणकाये हैं।
ओरसवदेवतानकै ईश्चर एसोजोश्रीभगे।
.
जनजानकोशिवारिकतामादिकभजनकर
चशिनकोंभजनदायकोशिवहाको
त्यधिरनिरूपयकायहरोजोयाभरिसोश
कराचार्यवेयषिसीएलोशनमायादा
केप्रगर होराहीहंकाये जामवेदविप
शेराहोयासंगीरथाकेजेजीवन्तेसवन
एनये शोरवीजावह तिनके संयक
के संदेहलया। श्रीरकरंजीकच्या
यहत्तोमोजूट गया उनमायावादकार के
सवनकादिहिरासंबधीकरचीको
स्याबाईजोमतोमायावाद प्रकट करवेकी
आज्ञाशिवजाको ताजाअसुरजीवकों
'मोहउपजावकेलायो सातोएथ्वी परमाया
बादासोप्रगटभयोहजोमेरोमहात्मज्ञा
नसवजीवलगयेहौलोभमेदै चीनीवन
कोकोनप्रकारकाटोज्ययाभोतसोसपने
मन में विचारेजोमरी लीलाकाअनुभवजी
बकोहीपत्तालोजीयमेरेविकराव
लोलकोशनुभवजीवकोकोनभांति
..
.
छ समविचारेजोलीलाके अनुभवकर यायने
मताएकीभाचार्यजीकासामर्थन
कोएथ्वीर परमगादोपत्तेमायावानिकी
खनकरिके देसाजीवनकोलालाकाभन
भवकरायके मेरे पासावोसोयहका
श्रीभाचार्यजीभापविनाकाइसों कोयनाद
है। पाकाहेत्तेजनालाफेअनुभवकरवायवे
मैएक श्रीशाचार्यजामागृहासमर्थ होतात
गोकुरजाने योगाचार्यजाकोनापमुखि
कायकैकोजो रामएथ्वा उपरयाधारी)
तोमायावादकाबनी कार को देवी
वनको मेरीलीलारस काशभुभवकर वा
इके मेशनिकरले के नावा तव श्री आचार्य
जीभापहंपुरमदयालकरुणनिधिकौंदया
आईदेवीजीवन जोरोवाजावमा
रेहै सामायावादक चमकरके श्रीरकरी
केचरणारविद मेंहदआश्रयना हात
गतातेएसेविचारको श्रीश्राचार्य जाया
पाँथ्वीऊपरप्रकरभये हैं तापाईए
भवी परिक्रमाापकायेगखोसगरेदेवीजीव
मायावादकेसाथ मिलकैसाकिरन
लागेवाधरयासोश्रीवाचार्यजामहाप्रम
प्रापएथ्वीपरिकमाकर कै श्रीगोकुलपधा
शाहीकुशीघटाहो मोरगोविदया
रकेपरराकचौचरो है।तोश्रीचाचार्यजी
आपपोटे कुत्तेतहशिकरकोटलहरताझे
करभगवरुपही बह्मोकरचाकाना
महोत्तहाशाभाचार्यजीजापयोकुत्तेसो
जीवन के उद्दारकीमन में विचार हत्तोजो
जीवतोदोषनिधानाधरशीलकुरजीतो
गुणनिधानहशिन सांसवधजीवकोमेन
भांतीस होयाएसीचिता अपनेमन करत
कुत्तालवश्रावणशलपराएकदशीका
शिधिक धीरकुरजागर यवदास
बधकीयशादीयाजोजीवकोब्रासंबंध
चमकरोगातिनके सकलदोषनिवर्तिको
यगाोयाप्रकारश्रीपूर्ण पुरुषोत्तमनेभा
शोएयरक्तवीभाचार्य जीशापविनाय
। हनोपातसमेंमिश्रीकोभोगधरेतापाचे
रामोदरदासहरसानालों श्रीधाचार्यजीवा
पकजादमलोकसन्योत्तवरमादर
दरसनेकहीजो महाराज श्रीरकुरजीकेवच
नती सुने परंतुसमुकेना हसवनीमचाये
जीभापअपने वैभव केसममध्यवेकेलीये
सिद्धावरहस्य यशापप्रकारकीयो यामी
तसोवय सेवधका-याजाश्रीरकरजा योनी
पाछेत्री शाबार्यनीभापमायावादकोंदखेसो
मायावादकेसोथ्यीउपरयकरभये हैं जैसे
मत्ताधीकाको गिनेनाहोहो तवोत्राचा
येजीमहाप्रभुशापुसिहरू पजोब्रह्मवारप्रक
एक रिकमायावादकोविदारनकायचीमा
वत्तमेंजो बीपलपरुषोत्तमरू पुजोधमत्त सो
जीवनको मस्येत्तरलभरिलोनीभाचार्यत्री
भापोरवोधनीली भादिधप्रकर
करोनीपुरुषोत्तमकीलीलारूपनारास
आपेतदुर्लभ चिनकावरवा अपनेशेव
कअपरकरे सोकाहे जीवानेककाल
।
विवारशामायांचादकरिफेस
মসলায়াখালী
भुभायनशीपूर्णपुरुषोत्तमहालालाहसिन
कावरवाकर सोदेवाजीवन के दौमसदेह
जभोशिमोतिकडते सोरभयोतिपजेशेव
कजनपरमधानेदपायको श्रीभावार्यजाकेश
रखवावर तवत्रीबाचार्यजीमापनामसम
पराकोदानवीजीव कुत्तेपरपावरकरवा
योनापाकोटिकरापलावल्पश्रीरणेपुरुयो
तमादिनीटावन मेरासादिलीलानित्य
करता है। येसरजी श्रीकृष्नतिनकाशेवा
कोउपदेशश्रीशचार्यजीमहानुभापकर
तोर श्रीनचार्यजीमहाप्रशुभपणेव
ईननाथजीकाशवाकरकोजीवनकोव
रावतहयामासिसौशेवाकोसोशवा में
अपरतोदेविवेताश्रीनरायुजीकधरकी
वित बाललीलादेखावसरभीतर
तोनिक्षेवलप्रमभक्तन कशतकाशवाहै।।
ताहातपरिमार्गकहियत्ता पसासवरसन
उत्तमरसरंगाररसयताकालीलाल
मरणारनाही अोर स्वतवाराहकल्पमा
जनकीगीताभगवतगीतातामें उपदेश
दाये हैं तो कल्पेस्मिनसमुत्यर्थम
तोरगीसलपत्तः इतिवाव्यात्तता शेवन
यकमनीयानजनीय एकीकरमा योग्य
हित्तभावहरयमें राख नोयही उपदेशकीया
चार्यजीमहाप्रभुत्रापशेयकनकों करत
तामें प्रथमश्रीगोवईननाथजीकी शेवासे
कहत है जो ऐलें श्रीमजीवीरा
रुषोत्तम है जोसारस्वत्तकलपमें प्राकाकी
ये सोयीपुरुषोत्तम होलिकल्पसारस्वत
प्राप्याब्रिजगोपीभविष्यति इतिचोरकल्प
ईननाथजी सोकैसोहै जोश्रीदक्षिणाइल
कामराबाधा सा में भेगदिखावत है तामे
যা সশন্ত্রী
तापावेजगदिसातरम नेपाल जो
प्रिजननको चरित्र गिदिन
मामेबासमकहाजावनी और दक्षिण
जाडायब्रिजभर्तनोखलावता येत
मयेशिहागावोहम रासादिकलीलाजायला
शिसोकरे हिंगे शेरशनकंजके हाररता
में श्रीआचार्यत्रीमापुसोजतावई यहाजा
तवाईमाईहांगोहंजहाँचाईमेरेदेवीजी
वतिनकोतयोल्मारहारबाजीकारकरनो
है।ताते वेलवकौए साजानीयोजोक्षगएक.
योगोकुलपति श्रीवहननाथ तिनको
সূলনীষী
जेकेदारेशाहीपूरहे हैं। ओरजीवयार
कोभारकोडोलत होधातेएसोभाव विचार
श्रीरकुरजीसाशाहबवलवत्तारभये
ইমিহরাববিঃদনশীথ
सहिचभय हैं। घोर आचार्य हकवाये है पर
उपरिमार्गका रीतिमा कोईजानतनहा कुत्ते
तातेकाहसोहि नारीप्रकटकायोनगयो झो
रकारको पक्षमाको पल नभयो लोका
हेतोजोकोशिशेवाकोप्रकारजान्तनाही.
ताकररकोम्मदनभयो और भय तिन
कोमुक्तिहसिइकोनतहत होजोमलमार्ग
आरकोनजाने रमार्गकारक्षकोओरको
-
काजाने तातेंबीयाचार्यजीवापसमानइस
रोनकोलियान कोई नकाई होवेगो लो।
काहनो श्रीआचार्यमहप्रभापोड्भाव
भीरकुरजी श्रीस्वामिनीनीसों केवहूं से
योगरसममग्न रहतीसाशवारूपनाना
कारकायप्रथमची यशोदाजीकई श्री
राकुरजीवाललीलाकरीसा स्वरूपश्रीनवनी
पियाजी जोन बनात हस्तकमलमेंली
ये श्रीयशोदाजीके आंगन मेंशगनलाला
करतापनापत्तिविवमगिजहितारखे
भमेदेखि पश्विकाधावत सापानि
लकिसत्त है सोवाललीलाकोग्रागयु।
श्रीनवनीत पियाजीकाशेवा में प्रकटदेखिय
है और श्रीयशदाजीके ईहावभय तव
गोचारलीलाकायेमारवनकाचारलालाका
ये हैं सोस्वरूपशीमरानाथजीको जास
मयश्रीमथरानाथजाग्गेपिकनिकलेके श्री
स्वामिनाकेधरपधारे गितहाइधदहीमारत
नकाचोरी करतमें एकांतमश्रिीस्वामि
नीजी चाशतवकोयाज पकरकेपी
नंदरायजीनीयशोदाजीके आशलेकेजाड
गीतयश्रीमथरानाथजीको भुजाचीस्ता
मिनीजीपकरेहटानश्रीमथशनाथजीयों
रोय जागरकरिके श्रीस्वामिनाजीसों
विनतीकायो जोमेउयारोवसहारामकोपा
सहाराखतो मेरे चलहस्तमेसंख होस
तलारे ग्रीवाके आकार होतातें मेधारयकी
यहरचे श्रीदरणहस्तमें युनही सोकमल
वहशयारोमुखार विदा कर्मल वरत।
रिहरलाहकालवर उदारोचरणहीचिन
काकारमधारयंकायोहोऊपरसामधीहत
में गवाहलाकोरमारेकुचकुंकुमकलशका
कारीगरव तथानीइस्तकमलमेंकक
एहैं ताकामाकतकर मेंअपनेशी हस्त
कमलही में शरबत्तहपाशातेमाकोशदिदंड
तवसकलभारामतकोपानकरिछोड
पायेहोसालीलाको भावभीमथुरानाधनी
मेहीकात्यायनीव्रत्तव्याजाजवश्रीगोपि
कानेकायेही शक्यापचार हरनलीला
२०० ये सोस्वरूपश्रीविशशयजीको सोची
॥ स्वामिनाजी के भाव में मन लागौरव
रूप प्रगालाववचार जोश्यामस्वरू
पहोय होसबगोषका श्रीरकुरजी कोजानि
जादिचा श्रीविरलेशरायजीहूंगरर
रूपावखचोरी केकवरुपरजायवेव
है। मापा गोपिनकमन में जोलबारूप
ओत्तरायरयो है सोधीविलेशरायपूरिक
रिक सबकवखहरे यहलीलाग्रीविहलेश
रायनीक पर शवरामपंचाध्याई
मुरलीवुजा युकें प्रथम त्रीब्रिजभलनकों
लायेके पुलिन में घरमें रहे हैं लोस्वरूप श्री
हारकानाथजीको संगोपिकालिन मेजो
वेंचमध्यावीचमै श्रीस्वामिनाजीविरा
जत्तकश्रीरकरीचौरकासखास
सरखवै तहाश्रीगकरजीशचानकपधारे
त्तवसविनको समस्या सोंवरजीपीछेसों
यहरूलसों वेगवाएका ये सोयाप्रकाररसम
पलोला श्रीदारकानाथजीकाईहप्रगट हैं
१
आवश्रीगोकुलनाथजी सोगोई नधारण
काय लवद्रिजभूकनकीरताकायहराव
कवरूवामधील सौश्रीगोवईनकोउठाए है
कह दशिनधी हस्तमौनी गोवईनउठाये हैं.
संयोगोकुलनाथजीको नकरतयेही
भावलीलासहिचस्फुरत प्रवत्री गोकुल
चमाजीकोस्वरूप हसो सादात कोहिम
न्मथ मनमायाजोगा पिकान रासपचाध्या
(में श्रीरकुरजाशंतरध्यानलयोनाया.
बैंगपिन केरुदनकायोत्तमभय है।
सोललितत्रिभंगवरूपपाईमहाराजा
योहावापोडीहस्तसामुरलीबजाय
के सवतिजभानकारसदान करता है तामें
देखावेधसार सोवधर्म पकधानी
चाके ऊपर नागरीधरकें व्रजतन को
समाधानकरत सुहासिक मवस
हौशवश्रीमदनमोहनजावरूपकोभाव
-यह जोनजादिकत्रीत्तरनानाप्रका
रकाविहरलासाकरतोयहाँकोटिकोटि।
CENCE
कामदेवदेखिोलनाकोयावत्तर
हाभांतिभाधिकारसमई लीलाहै। शोरहे
गोदकेश्रीकुरजाहतहाभाविभातिकाला
लासम्भवनोदरिकानाथजीका ग्यदके श्रीध
लकम जी शिनसरजनलीला
यह ौर श्रीमथशनाथजीके गोदके।
भीनम्वरजासोलीलारणावरीकेप्रसं
शकालीलाप्रारकाय जोयाहाभांत्तसो
श्रीनवनीतप्रियाजाकपास श्रीबालकाजी
तथा श्रीमदनमोहनजी है सोभालाला
অবলা বামাঝি
जीत होऊल स्वललीला प्रकरचार
श्रीशाचार्यजामहाप्रभु श्री रसाइजीक।
बसवस्व रुसवसह तनसवनमेशी गोवई
ननाथजोलीलाप्रकट हो सोयातिजोस
वसर पुनकाशेवाहे सामानाचार्यजामहा
प्रभुदायप्रकटकाया जाम परलोलाप्रकट
हैत्तात्तेनीवाचार्यजी भासमानकोभायो
नकोई न कोई छोयो जोयानासो
वशोकको अनिरूपणभयोपवयो-
हंधरेलोकैकोनिरूपणकरत्तीशाक
यधिनखमंडल प्रस्तवाम पीयूषयुग
वरोगहदयःकलितणमिवह दशकव
विधि पुतिरिदिराप्रतिमन्यमाने
असतानपरितोषितस्वदउगत्वमे
वास्तुमाया शवयाश्लोकमा
करुन जाधीशाचार्यजामहाप्रजनके
नरवमानोसामेरेमन में जानाना
प्रकारकत्रज्ञानर पोधकारह ताको
हरिकरनहारो होगीआचार्यजी के नख
चंद्रसोकाहेत्तेजी श्रीभाचार्यजाकेन
खचंद्रमो प्रत्तायोज्यरात्रिको प्रकाश
करोयोपूर्ण मासिके राधिपूणहोघटे
चौरसूर्यकेबाप्रकाशमंद होयजा
एसीलो किचेदमाग है। शास्त्रीभा
चार्यजी के नवचमाकैसे होतदाएकर
जिनको प्रकाशतिनके नरव
परकोटिकमावा शिजरि
है जाहो ताई नाडाकुरजी के चरणारविंद
। केवचंद्रकोपकाशश सोनीयाचार्य
जीकेवरवचेचरणकमलको जोवाली
किकन्धमत्तचिन केहपय खोपरम
निर्मलहनिर्विकारले संसारकेपुरवसुत
तिनकोछकरके जरियेसोका
चेंजो जहीएकचंद्रमा क्षेत्र सहाअधक
रसायसकतनाजीरकरचाकीलाली
को अनुभव होनलागतमालिकेज
धर्मससारकेसरखकाकोकडोदेवलोकईले
कनकेश्ववासादिकन केरुलोक कीसरा
शिवांदिककैलोक कोसखरछक रिकार
देतो याहावेशीभागवाताणाशकदेव
जागराजापरिशित्ततेको होजोजावको
संसारकैसख पानांचाई प्रियलागा
कासरखना होगायोगधोरयाहाचे श्रीभगव
हीसा में गानं प्रति श्रीभगवान करें।
जो अजुनियाजीवजहचाई मेरेचरण
रविदको सुरखको ना जाना चाहता
ईयाजोसंसारके सरपल्लो दुरवरूपही हेजला
ताकोसुखमानिकेलोगकरच धिरज
मेरे चरणारविंद को महामहरयमेधा
व सवलेसारसरखको रकरिक
शेऽत्त सोकोत्तेजो मेरेचरणाविद
পেশীশন্তিী
नानाप्रकारका विषयवासनासोरहो
यजात सोकाहे जो श्रीटाकुरकेवर
पारविंद सेनकोश्रीलक्ष्मीजीप
नष्यन्नेलगायके परमप्रेमसोसेवन
करतभार श्रीरकुरजीकाचरणारविं
दकेसे हाजीरीदारकालीलामशारते
पुररागीहायोलोर हजारएकसोरानी
है।सोसवश्रीरकुरजीकेचराविद परम
प्रमशिवनकरत्तहों और श्रीरकुरजीके
चरणारविंद कैसेवाजिनीवसादिक
शिवादिकामासादिक बडेवमुनिश्वर,
सिहध्यानकरत्तहाँएसोहाजोनीचाचाये
जोकौचरण रविदंतिनकोजोन
..
Toll लगायतुमएकरत हैं एकत्ता
साहशिनका यस्तुतिकीशी जे
भापश्रीमुरपत्करच जोसेंधमोदर
सहरसानेच्योकुभनदास आदिप्रति
सिनेक हृदयकाल में ग्रीआचार्यजी माप
एकत्रम वारनाहार रहतारोलेजो
भगवदाय र सोबारमहर श्रीगोवईन
माधजाकालीलाको सर्वसाधनकरचा है
जोपरमार्गकोफल है तिनकाशनमयक
रत।विनाताईरहोसकतनहा है
বই শহর
मेंगलोजोश्रीगाचार्य जीके शरायके
छत्तकरिनानन्य होयचरणारवि
कोशेवनजोकरेराह निकै हदय में श्री
करजीआयनीलीलाको अनुभवकरायचे
है सोका है जो कैसोईउडानहाय साधु
तौरहरनहास्त्रीप्रथाहाया
सीआचार्यजी के चरणकमलको आश्र
यहोय चिनकास्ततिदेवताकरता सो
श्रीयाचार्यजीमाथी पूर्णरुषो
समनिकेसमान रथ्वीजपुरयालको
निहा होजोनि:साधनजीवनको परम
लापत्रीपूर्ण पुरुषोचमा तिनकालाला को
अनुभवकस्वाऽमोयाप्रकारसोबहसो
कोनिरूपण-यो वाससमश्लोकी.)
निरूपणकालोकशधौधतमसा
वृत्तकालिजमासादितं जगत्तादिष
यसागरे पतित्तमसम्म रतायदा
सुधानिधः समुदितानुकंपाता
दसत्त्युनकरोरणादरमस्तुमेत्त।
स्पद जायाकोयर्थःशवाहका
त है जीवकै सोधधकारवान है। औरत्ता
मसकोधादि ओकलिजाहोमाभार)
संये है सोयाजीवकोनानाप्रकारकाएथ्या
उपर नाचनतावत है यहगत्तमविषया
दिकजोसंसारमे नानाप्रकारकेखो
स्वरूपसमुतिनही मवरद्या ।
र ताको नाममहापतित्तकाहय जाको
१६ हाराहाह ऐसोदुपजीव साऊजोश्री
भाचार्यजीमहाप्रभुनकेशरणिवितो
जाकेर तत्तकाल सकलदोष रिहायजा
माताहकोपयमार्गकोफलो हो
नको श्रीआचार्यजीमाआपदान
रत्तो ऐसेशीभाचार्य जी शापपुरमय
लापतितपावन हद वी जीवन के
अधाराधी जिनको प्रकिय गरजे
लवत्रीचाचाजी के चरएकमलकोवा
सहकारकायनेहायकमलमेराखे।
शिनकोय हकलिकालमहासर्पर है।सा
रेसंसारको ग्रासवास करतह कालके मु
में सवपीजातोलोजोकालहालोको
तेजो वैष्लवश्रीआचार्यजामहाप्रचुरत
रुषोत्तमताके चरणारविनापने हर
कमलेमेरारत है सो प्रसिहश्रीगाईज
कावाती मलिरव्यो है जोवाझवोट
श्रीगंगाजकित्तीरश्रीकरजोरावाकर
-
औरगायनकीशेवाईआदानन्तिलोकरे,
है।गयकोरासरखवावत्तमोधोयोधके
खवायत्त निमतिकई धानोरजगावेग
श्रीपकरजातोपरमसमे याप्रकरणे
मसहिताश्रीराकरजीकाशेवाकरत्तन्तिन
केपासएकपतिबाह्मणायलासा गरे
शतेपत्तिकोजीतकेशाय सोत्तहीवे
लवपासरघोसावधवा सोवैभवचरका
मोगकरकेलायत्ततोलामेब्रह्मणवाल
पीभौरवपंडितबलमधीमकरजीपी
नितीनोजनेनको निर्वाहतयाचे
स्त्तिवलाने एकदिनदेरव्यागया वैभवास
नकेशेगकोचिन्ह देख मेश्रायोगे कालि
याकोयहोषकलंकमाथेगावगातासों
राजायाकोसरादेईगोरापाई पंडित्तता
हागनेयहमनमें विधारे होजो इनके पा
सत्तरहराएसोवह पंडिचनामापनि
चारकगतापाछे प्रातःकालभयो तवेल
बवासाकेदारेउपरवा पंडितबारादे
रह्यो। शोर ब्राह्मणी रसोईकरो और वो
क्वान योगकुर जीकर शवो मंगलाने ले
रकोगर तक करके भोगधर गाय
वाहिरवैनौकुत्तो इतने वेलवासापक
पलकलागीनिदवशभयोला मेवपूआ
यो।मानोकोजाकेमनुष्य आय हौसा
कोले गये है। जापामोकोसरीक्षायेहैं
लोस्वप्न मेंदेखिकेचौकिपरयोगशववहवे
लवद्वान जाग्योत्तापाचे वैभववामा
नेपनीवासीको भाजपैसोस्वप्रादे
ख्या तववाहापानविलवनालासोकर
जोशरारकोभोग्यतो सोसवनिवर्तम
यो धोरमच्यगये होतातेजापशीग
गाजीमेलानकरोराववहवेलवायएके
रमानकायोलापाराजभोगयागरजी
कोधयोमा पासमयभयेतवराजभोग
सराईकेवारत्तीकरधना सरकायापा
बेचारे पाचरपरासीषिकापकी एकवापं
विचकादायशपनेपरूषत्वाकालापाव
वैशवायण बापडत्वाखणदेसोकोजो
चलोमाप्रशारले कुत्तववादित्वाहा
नेवावैभववाहासाको मेतो अवह
स्नानमाहाको मेतोउलारोबार उप
रप्रसकालतवैयोर्ति जोजानत्तमकांग्रह
असाध्यखोटोबायो है सामविचारवाडि
रना होगयो हो साअवताईक भयोना
होसोयाकरिएकहा, तवावैलवताम
एकहीजो हैं, तवमेरागरिवलागी ताने
मयमाको राजाकेमनुष्यभाये सोमोकोलेजा
'यकेसराहायो ववमेनियाचौकिपओ
तापास्नानकारिभोगसरायो चाभी
गत्तोनितिनया ताउमस्तानको
महप्रशाफ्लेऊ चवकशायेत्तिजोह
तो सोवाघेलवबायणकयायनुपड़े ओरक
हेलोत्तमारोधर्म परमतिम जोसात्यत्त
यहनोग्यहत्तो सोस्वप्नहानितिभयो
तववाडित्तवालपनेकडो वेलवाल
सोनौयहधर्मतमहोतेयायो तातेर
महको शेषककरो तुमको नशेषको
यापुकारवाचदावा पंडितवासासों
राजा श्रीगोकुल में श्रीविलनाथजीसी
गाईजा है, तिनकेसमशेवक? इनकाल
यासांसबहोताई हमलोस चववा
दिवालगनेक योजमोकोहशेवककरो
राबवावाला वैभवनेक योजो श्रीगाईजी
केशरजगाव तिनके अनुयसोसवमः
नोर्थसिदकोयणे चावपंडितबाहाएनेस्नान
करके आपनो नेयमकरमहप्रशादली
यो तापावेशागशाईजीपासजायके नाम
समर्पणकग्यो यामेंयहदिवायेजो श्रीयाचा
जीमहप्रकाशजीके चरणारविं
रकोआश्रयजोराखत्त सिनकोंकालादि
कजोमास सोईनकोशक्षामनाहरक
रसकता है सोका जाभगमस्वरूप
जोशमत्त सोअपर पानही करत
सात्तेकालादिकजोरमएजन्मकेदुःखसुख
कोलोगनाहाकरत्त हैं सोकाहोंजो एकस
राहं श्रीटाकुरजीचरणारविंदको प्रयद्या उत्तनाही है चाहातें जिनकोंकालादिकवा धकना होकरत हैं ऐसोयीचाचार्यजीमहा प्रभुनक्रेचरलकले है. याप्रकारपुर तकल प्रेमामत्त सोश्रीशसाईजीआपकृत्ततिनका रीकाभाषा मेंकायो शवयाग्रंथकोकल कज सोएकश्लोककरिश्लोकमया दल्लिविद्यास: श्रीगोपीजनबलभाता कृतार्थ एयहि सोचनीय नकर्मिचित्त॥२॥ याबाये जोएकविश्वासश्रीगोपीजन लमहीकोरखचसोकृतार्थरूपही. सोकातोश्रीगोपीजनकेवनभधीय वईनानाथजी तिनकेत्तरलकमलकों जबहाविधामजीवकानयोत्तवयाकोक सार्थ में सेदेहकहरा है. कृतार्यस्पहार सोअपनेउकीविनातिनकोकरशीना हो सोका हत्तेजी श्रीरकरजीकास्मरणभ जनक रत्तरहनो सोश्रीराकुरजासर्वसा मर्थयत सबकेहदय अंतःकरय
२
जाना ताकीदाकुरजीमों आपन
करवस्तकावांछनानकरनी साकार
जोलोकिकनेकाहर काचा कराकरीये तोव
इचाकरचौर नाहीच सोश्रीरकुरजीतो
परमपाल हैं आपदाकयाकरपरमक
लको हिमें चाविचासकरकों श्रीरकुरंजे
कोस्मरणभजनकरनीसोकोत्तेजो विश्था
सवेलकोयमेंशयनो जहांचाई विद्यास
जीयकोनहाय तहलाईकोईक्रयाकरोपर
तुकलफलकासिडनाहाका जोचात्त
ककोविद्यास एकस्वातिकाजलको ओर
सोमलके आश्रम मेरस्त है पररपावत
नातिनको यह स्वभाव करडेसेंजोज
लयाकोजीवनौताहात्तेजलहेसोमानका
रक्षाकरता तासें अपनोजिवनजनके
श्रीरकुरजाकाशेवाल्मरणा करणे
भलनोनाही ताकीनानाविधासा
विद्यासागरद सो खेलासकेगा
नेकपाकररताकानी वषकेला
सेत्तापाच मITarvatana
होजभरथनीखच उपर सन्देज
केमनुष्य ने अापके दीपक
लमेलगय पत्तयारमा
गई
मेंरक्षाकी नाही योरर्वासाको श्रापत्तरता
कानी, ओनाना प्रकार के विधनश्रीगकरनी
नेरिकाये सोकाते जोपांडवनकोडरवि
शुस है पीठकुरजीचापकैसे रहें तारोडे
योधनकोसर्वसनाशभयो तातेंजाकियाम
विधासनाही सो सवश्रमही जाननी चहा
कहीफलकासिदनाही है धोर विडर
जोकादविधासजाति वर्शकामा
7 जीशारजनाकारोटरवारोगे ओरथीभाग
बत्त श्रीशुकदेवजाने राजा परिविवाहि
को जोरगय राजाकोश्यमेव
संभयोहैं तवसेखपालऊपरव
लमुनीश्वरयालज्ञानसुनिकोस
कोस्मरराडक्यमेकरता
नहीभगवामानामनामे
चायकेंपगधरते सोकरिनोभावुदी
यावत्रता सरखपालकालेवत्तहैं त
वराजारगाने काजो सुरपालका
लत्त तवे औरकहारनने का जोएकन
योकहरहलावत तवराजाजनरथ ।।
सोमोजोदेवतमेत मोटोसाजो है ओ
रशबहात्तपंथहीनाहाआयो औरमा
रगडेचोनीचोनाहा है तोटेटरच
लत्त है सोमोसोतरत नाहा भोरम
श्वकोई ऽस्तनाही जोयाप्रकारसोश
जाजरर्थकद्या तव जनरर्थक
वैरसनिकें पहायर नवराजावाल्यो
जोमेहंउत्तरनाहापायो त्तवनभरथजी
६ मे विचारे जोयह राज्यज्ञानमनिवेकों
रल्यो है जोयाकेतुश्यमें दाआश्रय है,
यहराज्यमी है तातेंयासोबोल्पाचाहिये त
वजनरथम राजाके और कपाकरिके
देखिकेंमंदसरस्पकरके गोले जोतम
करजापञ्चमीको सोतोकाको शरीर
7
स्थलहोयकाकोसत्तमहोय है गोश्रीप्रभु
जोकोशिजौचैतन्य है सोएकरसहजो
हाथी में सोईचीरायत्त घराबर है और
उमनेकधोजोवत्तपथई गाहाचल्या
शिजीवनवृत्तीप्रजाविधीयाहै परंतु
भवहारमानिके वेडिके श्रीप्रभुनकोसम
रगनाहाकरच योरमनेकजोमाम
साधाहै साडेराजाश्रीजीको मार्गहेसो
तोसुघोहा यशविधाके कारकेभल
गयो है सोटेटे मार्ग पर हैं जोयागेरंक
हाकणे ओरजोतुमकहेजामोत्ते नाही
रत्तरहे.सोशीमाटाकेटेल हाट बारमा
टाकेटेलये कहर स्मारक टल जे
सेंकटकारत्तकोनचावत्ताप्रकारगाचेत्ते
सेहोश्रीरकुरजी कायाको गाकारनवावच
৪ ডীদাস্তর তরী
हको रंनाही साईराजाय संसारम
वकोष्ट धारभरत जीवच है.ज
: रपाइरखना नाम कार के पाया है पर
होम देको ज्ञान प्रगरभयो जायजा
रथजान्नेकयो त्वराज्य
मंगको
प्रगटभयो सोपालकालपरत्तेके दशज
उभरथमोके वर एकमलउपरचानती
कराज महाराज मेरो अपराधमाकरे
चमत्तो भगवदायी मेरोमनत्तयारीका
मोमिमेरोदयकेशाननेडी सोय
मनलाग्यो सात मोकशा नमुना मते
श्रीपनी कोपांच तापाछेराजगभर
यजान सुनायो त्यसपनो स्वास
जको सवारनयो त्य में उगाके दुदय आने
औषनुनकमिलनकरचाइनाशेइजदर
विश्वासथयो रही फलकामायनई है यो
१०विधामीशाचार्यजीमा प्रयन
चर एकमत मेहरकोप्रकार होयत्ताकेली
श्रीगनाईजात्रा पर कानप्रेमाम
संप्रेष मानाचार्यजी नापनकी जगने
.
स्वरूपप्रकट हे ऐखोथ श्रीगुसाईजान
गाये हैं वासववाश्रयोऽके एक
श्रीवलनानाशकास्मरएकरके यायेथ
कोपारकरे जो लव मनपूर्वकको तौ
श्रीशाचार्यजीमानकचरणकमल मैदा
ৰিখাৰ গায়েরী
जित्नेकान्याश्रयाय है लोसबभापहीते
মুহিঙ্গা বিদায় স্মরিয়া
तरायहायसोप्रतिवेधसवइशिहायजाईस
वश्रीरकुरजाकालीला जोनानोप्रकारका
वाललोल गोचारलोलासनलीला गोवद्ध
नलीला ब्रजभक्तनकारताकररी सोलीला
एखादिकसानभोवहाय और गोपी
जनवृत्तभयो जोनीपूर्ण पुरुषोत्तमतिन
कचरणारविंदमैपरम्प्रेमजाले श्रीपूर्ण
उरुषाचनकोसोसगरो प्राप्त होई शारदा
वीडररायजाकहा जो में यह स्फुर
कभप्रेमामत्तग्थकाराकाकायो ।
চুক্তিতেফস্বিাম্বিয়া
नकानीरकुरेजाको प्रारप्रियांकीमुदि।
कासोनर फिर राषितगमित्तलाई
हालोक विविधमहामणिनष्ट।
ता कनकमयामुदिकास्तदंगुलीषुाद
शसुनखादित्ताधितिरषासुविरेजरे
एगानातिनाति महाम
मिजटित सुवर्णकोनी हैं मुन्द्रिका तिन
कामेंगलान विखेंओर नरवत्तेउदित
कप्रकटईजादीधितिकोतेक
रएक्रांत्यत्तानखके किरननहीनए हैं.
घोषणाहमुद्रिकान्ताकरिकेंच
भियतुगएणक्षागनयना संबोधः।
नादनमोवाइवत्तविषलते
प्रेमपयूषनीवात्तस्याम्टडकरत
लेकितपकिरहताना गुल्प सरिख
समभिमाइग्रेण्यस्वदला नामोचन्न
स्वरम एय:
कितेषाप्रश्वा
यहीचंदावरकावाहनहोयातको
सटे हर्षकार करता है। यह विषला
विषलताकाकोकमलकेनाल केवल
कोमलानहोत होलाप्रेमरूपीजोशम्मतता
करके पूर्णिमा अथवाचाहा सिनकाको
मलहथेला नहायतो कहा कमलका
दलका
नोपतिरेषकुसुमायुधवागराजपकरहनन
खरामगिकीविभाजकिरियालिरतिय
इविधौजयायकामार्पितासुमुखिशशि
लामुखाया। यहहेसा उनकेह
बनाया यह हेलोकुसुमायुधकोजोक
दर्पधाएराजतवानरोक
मलपुष्पओर यह जवके मणिकांकति
कोशोभानहोयत्तीकहाण्या सरवार
तिर्जातवैकोही सुरवात्तादाशि)
लामुखाशयभागकुंकंदर्पनेवाग केश
जाताहै एक मपादेव
थरगतियं चरतानाधारकस्यकथ
त्रकरस्यादृश्यते सुनोतिनकालाने
शयासखिक्वार्थमंथरु
हलुये गमिओयहरणकमोर हस्ताका
उहाँकैसस्थानापतसंदरहै जो
देखियत्तुहायाकरहेसवाकाहको तिन
रोजंघातामसंशयनहोत्तभयो।
लोकदलाकारविनिर्मतहिडोलास्ते
म्म वैतरणकुसुभाधस्यमन्पत्तस्यानो
इंडयंसरव्यागाअर्थकलेकीडांटीक
भापत्तनकोंऊपरछालनिर्मडोडास
कीनिमित्तलमारहाडोला के दोस्तंभ
है निश्चयो हे सखीयह सा मैं
काकंदपंकामा मेमानहाये
घानहोस।सालोकत्तस्याःसानग्गेवि
मानसायागीदशगमन्परतिग्टहरत
यानुयनतरवा अर्थ ताकामा
सहितजागोविंद बोकलचंद कमनवे
नंदकन्र्मत है हम्मेवयनामेमान
जारतिकंदर्यकावतारतिमंद
दोस्तहोमिदनसप्नएको
कोयराजाज
.
रखनाचेता कोंकहियत्तहलोवि
विधपुरसिंजित मोहितन्त्रदशनायव
वामानां स्फुरदलतकरंजितमंगला
सपिशुशुशुचरण्यं भी
लिभाति पटकैनादेकरिमोहे त्रिदश
नाथवरजाईवधजो ईक्षण में श्रेष्य
शलीकेशंतःकरण और महावरकर
कैरेंगेदोचरगरविंदसारवासा
गुलाहसाटेदिप्यमाने महावर संदरसे
शरताचओरखेदरचरगोविंदरंगेह
स्मित्तलमालवल जित्तरतिपत्रि
तचरण सरसिजप्रपत्तो प्रतिविविता
दायाश्चंदनविहरलयाननरवा. ॥७
श्रीवजनत्माकमंदहास्पकोजोलेशमात्र
शाकरिक अथवामदहोस्पकीलेशशो
भाकरकेलाकोपापत्रयोगलजाहसाद
दर्य सोलज्ञआयकरके प्राचावलाज कर
एकमलकरकेवरकीयोहैं। त्तव
सोकंद केलीलाकोंजोचपनचादलोविई
कासाप्रति विकायुक्तिकै प्रतिविव है।
रखनीय तस्या कृलंडसेगहरे
जनशानाविनंभावयित्वातयोग्यता
कर्वतापादयरमाला
M
7
पजावनेताके पत्राकोन्मत्ताकर
बिहामानहैं नहिनकालादेव
कोभोरबह्मादिकनकहनावगगग
रखकरकेंगेयत्ता चलजोहने
सताकरकैकोनहैजोमा हकोयापनहाय
लोकसवाशाटतोचलंहलेस
केंकिंगपुराद्याभेदकलेसिजिता
वेशमनोज्ञगत्त्यावना वयस्यसहितोत्र
धिपत्ताबजतीपुरोदर्श सरवर,
मनात रत्तस्वामनाया७७im
आवश्रीचंपावलाजाभासंख्यात्तथरवालों
ष्टित होयचलतहैं कैसे हैं जो चलो।
तहरडोकंकरकिकरगरदेटिकाओं
रयसत्ताकार कैवाहायलमधु
रशरायमानजानौमनोज्ञोचापल्प
गत्पित्तताकाएजाकरत याप्रकारकर
कवन विखेंचलतीतवहांलवाले
हितश्रीखिजरानजोंके संतपत्र महसू
दर्शनकोंजारदखापुरीकहत सरदा
গন্তখেউরেরদিষ্ট
कशोरता
पलामचकितनयनदृष्ट्वात्तदाननपका
। नासम्मशकादातंदृष्टिमनागधिमाधव
निजसहचरीशंकालजावधानमपि
সিরিয়ার
त्तचेतसः श्रीचंद्रावलानको
मुखकमल खचकितदृष्टन्त्रकरकेंदें।
रक्तदेखत्तनेत्रकोकथोलो फेरला
वने कौनाका प्रकारसहित नाहा। श्री
कुरकोंडअंतःकरण चित्तसहित सर्वत्र
प्रियाउनेहरलाना है। लोकचंद्र.
दताराहासोनिजलपरिमलानिलात
संगमचोगेषुवंगतः लकव्यधार
१७वनाचंदावलाउनेहरली
नोद हाससहितहासक्तिकही ताते
मुखकमल वेचवित्त है सुगंधपरिमल
वाय तवश्रीरकुरनाकापनेत्री
खेतिनके संगमनाही रोमांचित्त भये
साविकभाविभीवनया है. 2.5ोक
थमस्पाननुसंग मोभवेत्कथंवा सहच
ইউনির্বিন্যস্থ
हापाला॥राजाभा क्योकरके :
शययासासंगमहोया थवाकोंक
रहोसखातानेसेंयाप्रकारविचा
करकेताकोउपायकातिचित्ताक
के उपायजानकर श्रीकुरजागापा
कोंकहत्तत्रयाझोलोप्यो गोर
विकियार्थमविलायछंत्यदत्तचित्तं.
दानं तदिहानयधमचिरामरन्निधो
पिकामाजातस्यशक्तिभि परिमि
भावाच्याति स्वामिना प्रोनालिष्टशिष्टते
मोर वचनास्लेवागमत्सव कार्य
सर्वगोपिकागोरसवैच के अर्थनिश्यक
हिकजाता है मेरेसन्नाधान में गोपिकास
वंदनविदाये जातीमत जावरहोरो
काहाजावयवचनकर केंवाल कलवस्ता
मिनाजाप्रतिकहत गोपापासव होवेग
आये॥शोदात्रकाचिडवाचतान।
किभरेगोपदार कमाकारयलिवोनंदनं
लोगोकुलाधिपाद अर्थतहको ये
पांगमानगोपालप्रत्यवोलानोको
paramsalarsरिकेत्तमरता
* মুখস্বেীকুলখনি
। केटाकाहे कलावतहार २॥ लोकक
थमेवयंकिवादास्य स्वस्पकुलांगना
यातप्रतिष्ठयास्माकंनत्तवयविनाषिका
Pा कहा करकेंया एकारकरिव
हमको चलावच हो कुलांगना कहेसोहम
कहावंदरायकुमारकालौडाहै। गाकरन
शिष्टासहिमको तुमने जोयह विभाषिका
कोलेजौरदिवाबत्तही साहमुटाबारे
उपायेऽरवैवारेनहाँयाबलोकन
बयुवतएवकिंचिच्चैःकुलयोषित्सुखस
हसावदामः वजनाथवचः परं विधेयर
धित्ता किन्तुगछत्तस्वरोह.८४॥ वा
। त्वकोपककहा जोनकळूहमाण
होते कछुड़ेचेकरिकुलवधूवघे साहस
स्रो कथ्यो यवजनाथवचनकाया है
पिकाप्रतिकच गोपारिजाव अपघर
कोला मायानंदशपथोजना
धाज्ञविनावनेास्य टंखात्तविपिनंकु
तस्तदायपरं नस्पात अतवाल
ककह जोरमकानंदरायजीनामोद
अनाथ कुरजतिनक
तिनके वचनविखेमाशाचारपूर्वहि
प्रोउत्तराईनवनवचयहजोरदखा
नकोवाचन हलमारोवनकहां से गा
पायहवनुत्ताहमारोहासोकाहेत्तेजोउ
ईस्वाहों औरहम हवा नाहमारे
हारमा लोकवकमावनवहाविपत्ते
नत्वलौकिकवक्रिमाकिलशरस्पधर्म
लस्पदृशांग्रहाशावरवालक
करत होतसार वचन साटेदेकुटिलहा.
'देवयत्रीय निश्चयालौकिकदेखिय
रहै एसेहमकवहूंटेग्यौ नाही उत्तराईम
केवचनकुटिलता निश्चयकहावचन
शरमेंहोत है कुटिलत्ताधर्महात्यशिन
সবকrি
श्लोन्यायोतिषष्टित कितनवत्या तिवद
याकिम न्यायपायियुमधुनावसमा
अर्थशवरवाइवालकवचन
तुमनेयहकहरहोजाकुटिलताक
शरमेंनहाकरयता कहां तुम
केच
dicti
शु
.
। उमश्रीनंदरायची गोकुल कदाधिपति
केटाकाहे कोलोवतहेगार २॥ लोक के
थमेवयंकिवादास्यस्तस्य कुलांगना
यातप्रतिष्टयास्माकंनत्तवेयचनषिका
कहा करकेंया एकारकरिव
हमको चलावच हो कुलांगना कहेसोहम
कहानंदरायकुमारकालौडा जाकर
शिशसहिमकांशुमने जोयह विभाषिका
को जोडदिखावत्तही साहमुत्रनारे
पायेत्तेऽरवैवारेनहाँया लोकन
वयुवतएव किंचिदुच्चैःकुलयोषित्सुखर
हसावदामः वजनाथवचः परं विधेयर
धित्ता:किन्तुगछत्तस्वरोह.८४॥ व
२. लगोपकैकहता है जोनकळूहमशाण
होते कछुउंचेकर कैलवधूवघे साहस
यो कथ्यो वजनाथवचनकाया है।
पिकाप्रतिकच गोपा मित्र जाव चपनर
कीrani मायानंदशपथोजना
थाज्ञविनावनेतरपाटावातदिपिनंकु
तस्तदायपरंनस्पात अतवाला
कक जोरमकानंदरायजीनामोह
अनाथ कुरजातिनकाशाज्ञादि ।
तिनके वचनविरमतभाशोए पूवेई
मोउत्तराईलवनवचयहजोदखा
तेनकोवाचन हतारोवनकांगते शा
पायहवनुत्ताहमारोह सोकरहत्तेजोउ।
हाईस्वाहारहम हवा नाहमारे
है।रालोदवकमावनेवदाचिदृश्यत्ते
नित्वलौकिकवक्रिमाकिलशस्यधर्म
लस्पदृश्यंग्रह अर्थशवफेरेरवालक
करत तुमारे वचन सोटेदेकुष्टिलहारें
देवियत गायनिश्श्याला किक देखिय
रह एसेहमकवहूंटेरप्यो नाही।उत्तराई-न
किवचनकुटिलता निश्चयकहावचन
में होत कुटिलत्ताधर्मशिनके
त्रन शहराकर कैकेहियते हैं।
सोन्यायोपिपत्ति किंतुभवत्याशिवदन्य
पाकिम न्यायपाठयांमधुनावसमागतः
राश्रर्थशवपूर्वाइवालककेवचनय
तमजोयडकहतहोजाकुटिलताक
शरमें ग्रहांगकायतों कहांतुमन्या
-
* খালেকশ্বখনি
। केटाको कोलोवत्तहार २लाक
थमेवयं किवादास्य स्तस्य कुलांगना
याचप्रतिष्टयास्माकंनत्तवेयधनषिका
mc कहा करकेंया पुकार करिव
हमको चलायतकुलांगना कहे लोहम
कानंदायकुमारकालौडा जाकरमा
शिशसहिमको तुमने जोयह विनीषिका
कोजोरिखावत्तही साहमयुलारे
उपायेऽरवारेनहोयाकन
वयुवतएवर्किचिदुच्चैःकुलयोषित्सुखसो
हसावदामःवजनाथवचः परं विधेयं
धिता:
किगत्तखो वा
लकोपककहा जोनकळूहमाण
होते कछुचेकर कुलवश्वघेसाहस
नों कथ्यालयवजनाथवचनकाया हैयो
पिकाप्रतिकहतगोपा फित्ताव अषधर
कोrmनामायाचनंदशपथोजना
थाज्ञविनावास्याटावातदिपिनंकु
तस्तव्यं परं नस्पाए अतवाल
HOME
अनाथजानीराकुरजातन
तिनके वचनविरव मतभाशरपूर्वईि
उत्तराईमहनवस्नयहजोखा
तेवकोवजनलमारोवनकतेचा
मायहवनताहमारोहतासोकोत्तेजोडा
होईस्खाहीं बारहम हवा नाहमारे
हगरालोकवसमावनेवहाचिदृश्यत्ते
नित्त्वलौकिकावक्रिमादिलशरस्पधर्म
लस्पदृशगंग्रहारथ अव फेरवालक
करत होउमारवचन साटेदेकुटिलही.
देखियत यिनिमयअलौकिकदेखिय
रह एसेहमकवहूंटेरप्यौ नाह।उत्तराईन
केवचनकुटिलत्यनिश्चयकहावचन
शष्ट में होता है कुटिलत्ताधमशिनके
नेत्रनमशहासकारकै कहियत है।।
श्तो न्यायोपिपत्तिा किंभवत्यानिविदग्ध
याकिम न्यायपारयिमधनात्यसामागतः
अर्थशवप्वाइवालककवचनय
मनोयहकहरहा जोकुटिलता कहीं
शरमेंग्रहाकायतो कहांतुमन्यायी
di दा R ककहा कंचजोकष्टमेखलासध नपर्वतके शिवरत्ते सोउपरोदौर- उत्तरेचपलञ्चल होतान्याचोर उत्तराय लाउरके निकट शेडजावशीकमचंद्रसे भाव यह मनोवचाशोच रलोचानात्तोर्पलेशंसुविचित्रवेषी- स्मित्तश्रियानंगविमोहनंसादपर्शगो र अन्यायपरावनकोलमवावशायहर तावहिलंवप्रसहिरमंदीवर कोचाकलापकलसंजितमजगत्या गोव ईनाट्रिशिरशश्चपलोतरीय श्वेदाल निकटमाग्रम जानार्थाय हलवानगोपवालको निजात येत्तहांचाई विलवश्रीराकरजी ने मध সুখ बत्तजगहोयवल्लवनशचे काकारारकरी अव्यक्तमधुरंश करत्त संदरगतिचाल करकी श्रीगोवर उपरावसाहत याप्रकरणाचा पेंद्रकुमारमा रात वचनत्तागोताना মমুখ।
- रोगत्तौरानीकुरजकेकटदमें
कहिलेको सामथ्येनाहकहाजो
किनेत्रचर प्रतिभागवतएकको
कासौदर्यत्ता एकलेशमात्रहमतकों
औरवचनकोंगोचर है एतादृशनी
रिजाकोश्रीचंदावले नवजराजजाके
हमारिकोंअपने निकटहदिखता
जालोजवदनसुधानिधिसुखमाज
अधिनिमगहशंकर गागनाशकई
ह यत्सहैव सहसामनोप्यासार
जोश्रीरकुरजोको मुखकैसा है सुधा
निधिचंदमाहाडोरशोनाकोत्तो सामुद्र
हैं। नाविक रंगाशीश्रीचंवलाजा
नेत्रहडिवतन्नतिकासवेकीयाम
येनोहानकसलकत्तानाहा हजारो
टिकासाथ एकायकमनपूर्व योहा
लोकनापांशविमोचुंगारंगैस्सन्मनो
মাখmযুবরাষাঘষ্টি
जोतिला
तिलसकोंजोना
.
स्मित्तश्रयानं गविमोहनं साददर्शो
अन्यायपावन कोलमअवशयहाद
का तावहिलंवप्रसहिरमंदमचत्र
कोचाकल्प पकलखंजितमगत्या गोव
ईनाट्रिशिरशश्च पलानरीय शेशवली
निकटमाग्रमदं जानताअीय
हसवानगोपचालकहनतरही
येतहीलाई विलेवश्रीरकुरजा ने पायो
नगयो बत्तजोहोयविलवनखेशाच
ककहा कंचाजाकष्टिमेखलाली
काकोरटकरकेंजायतमधुर
करतासुपरतिचाल करकोश्रीगोवई
नपर्वतके शिरवर ते खोऊपरत्तेदौरक
उत्तरेपलचंचल होताया और उत्तराय
उपरावस्वसहित याप्रकरणीचंपाव
लाजर के निकट खजानाशीकलचं सो
भावताय । यो मनोवोशाच
रलोचानात्तसादीलेशंसुविचित्रवेषा
पेंडकुमारमाराnce मिनओर
ना
है कोसामथ्य नाही काजो
বসসাসফশ্বয়ষ্ট
दिर्यत्ता एकलेशमात्रहमतकों
चनकोंगोचर है। एतादृशनीदी
फोश्रीचंदावलज्वराजजाक
कोअपने निकटहीदरवत्ता
लोवदनसुधानिधिसुखमाज
मगहशंकुरंगारगानाशकई
त्सव सहसामनोप्यासा
पश्रीरकुरजाको मुखकेसोहै मेधा
संघमाहाकारानाकोत्तासमुद्र
विश्वंकुरेशातोश्रीचंवलजाक
रिडवत्तविकासकांसाम
हानिक ससकचनाही ही जाते
साथ एकायकमनव योहारका
अपंश विमोशंगस्नरंगस्न्मदा
अणधे पातितधास्वाश
शनायनीकर
.
भ
LA
DE
उचेको लिवोत्ताकोनेकशसंरस्या
तरंगलहरताकर तनमनारपो
दृष्टिएतानोअगाधमेवे कहतेशेवदा
বিষেদুষ্ণীষ্মকালি
लवादधिकलशिकामूहि संस्थापितांद
मागवागमनमथवा कंचकामंचल
वा देहेवास्वरहमुत्तसरखारपेमेषा
गगता घोषाधामम पित्तदाना
दन्मोहितैवाहिश हसरखार
वा वास मेंमोकोवाका नाही को
ঘকলাগায়
रेमाथेका नाही
अथवामार्ग
का अधिनाया है अथवा चलवेकाही
शुद्धनाही अथवाचकालाचल
काहसुधिना ही है साथमाशापनादही
हकानाथवा यह घर
अथवा सरता
नकयेथकास्पो होकदोहोकामाहीही
यहाजोटगता श्राचावलताको
कहालौकदतो घोषाधशाम जो
R
राइकातासमयनजानतम
हैं।मोहितहोयेगई। शोतो
नक्लेरिवत्तत्तरंगरूपीगपातेर्विततर
मत्राजालैर्विशालैर्वचनैःसत्तस्यास्वसे
वेदेसरव्य करोडदार तदनं
रिश्रीरकुरज्जनशानुग्रहकाना ईशाके
पांग विलास के उच्चत्तरंगाधना
चरंगकारकैत्रीचावलोन काहेस
श्रीरकुरजानेवडेवचनकारकै
उनोउरिनावतभाए हैं। लोग
मालदाश्तमेयदासीत्तचात्त्यधैर्या
दिकमत्रयुक्तिनवा गोविदयदन
तापानुभावमात्रावित्तिमन्ये.
त्तवत्रीचंदावलाजाके प्राणप्रेतमजाश्री
कुरजीविखेजोकळू हात्तभयोचातुर्य
थैर्यादिकक हन ही सर्वथानरहे। यह
गोकरकेचारर्यधर्यादिक होतभयो है
पानीटाकुरजाके चरणारविंदके प्रामपके
सवमात्रकेचतन्नयोहा।
स्मरातनत्तरलांचलोचनेति
र उचकोचलियोसाकेजअनेकवसरत्या
> तरंगलहरताकर कानमनशोर पोक
दृष्टिएलानोअगाधमेवे कहते शेववा
हिराश्वेकोंअशकलोम्मि
लंबादधिकाशिकीमहि संस्थापित्तांव
रोमावागमनमथवा का मंचलें
वा दिवास्वम्हमुमुत्तसरवारपमेषार
गगता घोषाधाश्यात्मम पित्तदामा
दन्मोहितवादशी आहेसरवाशर
वा वास मेंमोकोवपाकाहानाही को
ঘকলস্বৰ
रेमाथेका नाही अथवामार्गपड़े
का शधिनाही अथवाचलवेका
शुद्धनाहानाथवाकंचकारधानांचल
काहसुधिना ही है अथवाभापनादेही
हकाथवाटाघरका अथवा सरन
नयेथकास्पो होकटोटाकामाहीही
यहएजाम्टगता श्राचावलजलाकों
कहालौकढ़नौगोपाल
1
,
11
करजीसाहको तासमय नजानुभ
बह मोहितहोयगईशानोत्तो
नुकूलरिवत्तत्तरगैरपोगपातेर्विततैरि
शत्रजालैशालैर्वचनैःसत्तस्यास्वसं
देसरयकरोडदार
माग तदने
रिश्रीरकुरजनिग्रहकानाइत्ताके
पांगकेविलासचेत्तरंगाबानक
चरंगकरिश्रीचावलोनकाहेस
प्रभातकुरजानेवडेवचनकरकोचा
उनोउदारजनावचए हैं। मोवा
मालदाश्रेष्टतमेयदासीरचार्यधैर्या
देकमत्रयुक्तिनवा स्वगोविष्यात
तापानुभावमात्रेवित्तिमन्ये
तवत्रीचंदावलाजा प्राणप्रेयसम्म
पकुरजीविखेंजोक हात्तन्नयोचार्य
धेयर्यादिक हत सर्वथानहरा
जोकरकेचातुर्यधयोदिकटोन
सोनी कुरजाके चरणारविदा
साभव मात्रकेतन्यो
एनदरंहासरुचास्वगत्याकिवत्तिोन
बहुना सखियेशलैवै: संमोद्यतारसि
कत्तनिधिराहनाथ: श्रीरा
कुरजाजो सोगर्वयक्तभानवकरके
आरचलनेत्र केशवलोकनकरके
आस्तिहलंयुक्त सचिकण रगचित्रे
वोकरके दरहायकत्ता है संदरप्रव
रहास्पसुंदर है अपनाचालककैपधा
है सखाताकर के मैश्ववत्तहीवर
“कहाकिमहसखानापनाजोयेश
लता सौंदर्यशाते मेहितकरकै पधारे
हैं।ओररसिककेनिधिएसेजोनजनाथ
श्रीकमचंसोकत हैं। याना प्रबोधि
तेवगोविंदवचनसापिसंदेश गुरंददो
सरया प्रत्युत्तरमनकाम गर्थज्यश्रीगो
विसोयानातिनकैवचनशकै
बोधरकाना लंदशनकोगनविउदारदा
স্বরলিয়ার
सधियोनीजकोचाकला
है
আবু লাভ গম বশ
ও স্বাক্ত
त्व जोगत्तम गोराधिक्रयकेपानन्ध
रायेको जाता है। कहाकी मेखलाया
शाभूषएकोशवकारिक हमको
पिनविभवटिवावत्तहोरालयद
धात्तेमण्यागतिरपिकिनावलाकों
सुभगापश्यत्पमिशिवजापानिकति
चिस्मयंस्परला आहेसभगतुं
दर
सम्यगवलोकित्तागति रियंवदायाम
बामनौष्टिक भागनिजागतिंपनदेर्श
अहोकुलवधजननिकटमादयन्ति
नयाभवारजगतिलक्ष्यते विपिनगोच
ऐत्यु टशनार्थप्रावधाकुराकह
जोयत्वमारीचालहमनाकीप्रकारला
"देवायोरलेले वेहमारे निकटवायके
नरवार दर्शनदेवबाहर कुलवधूमैं
দাবিদ
अलवितहोकर विपिनोच
। कहवनविपकर यहउइटमा
॥ तापांकुतोनातिस्त्वत्स हायवतोममा स्व
सहायीकरोत्येिषमामेवाहविषयेय :००
अर्थ शीररजाकहत जोतापाश
वह मागकोहको रसमहोहमारोसहार
होत्तमहासहायकाउरेशकरोगेहम
तोवोही बार्य है। यहसविपरीत
यो रोग सरपा गोकुलमेरे
हवनदायोत्तडर्मराज्य मार्गना
शेषयोशनाधर्षः अवधी
वलाजकहत जोहसरवाहोंगागोकु
लविरजाघौओरएसवश्रीरकुरक्षावि
खेएतादशरतीतसवश्रीनंदरायजाया
गेंकहत है। डोत्नुहारेधर्मराज्यमार्गवि
वेंकवह हमारोश्रवाधिषनाहीत्रयोहै
अथऋतिविवएकहत बेदमेएसोक
बाहनाहीसन्योजोकुलांगनाधिखें सत्ता
शटराईकालाकिंध्या नैवस्व
टहंगकरोषिचालय अहमारसंम्पंगणे
प्पारमपियानंतान
S
nकुरजीभापकर यह जानकार
मिलकरके अपनेधरजायवेको चित्र
ईकरकेकहतहोपजोहैलो गोपाही
ध्यापर्यत्तनम के मैपनेधरजानन
इंगग॥२॥मलोनवान्पुरुषवषयक
मुगोपिकात्वं बदल्य होतदपिसावध
विलमंगलं स्वात्मनिगई
वनकुमारलोकोतराविनाशिनवचार
विजितवादिजात्युत्तर
विदुत्वमपित्तेक
श्लोक
विश्वासमुत्पादयितुंखियोस्मान ज्ञात्वाव
देत्येवमयरगती विनवमहाचम्यूवि
शिष्ठ स्वासोभवत्यानवताश्रमेयादे
अर्धनिजनकहत जोकहात्तम
रेयापकारार्थकरके श्रीकुरजात्र
। पावनको प्रकारकहत्तहादाय
कसरयाप्रत्यककहत है जोहमारवचन
विनाही संवोधनायोभारस्वाहा
सोई
मेदव
पकहता विशेष साश्वासश्रमकी
कैतमको होता हैहाकिमधिक
कुला गनास्वंग
शक्ता पर मिहकिकुनिंदराजसुतेर
अनुविन कहा अवतमः
मकोबईत अधिककहोलोको कुले
गनावकरको एशाशउझारेवचनस
अशक हाय हमकहांकरेजोशीनंद
रायन केवटाहो या कोकुलेश
हंगतुनदरसकुलवियरावने
शामलगही मामक
वोधन गोकुलेशतमजोहोमारा
कोपरजानकोंयोनाहादेतही
कुरजापकहर जोनीपाव
नयनानकोंहमारोशनल
तमिदननु
स
लगत्यहाकुन्ताचरणाशर सकर
पश्चिातहदास्माकं मायाहतो
हिलेहम कहना होसुन्यौनिश्चयाक
मानलगे सोकहोमपावनखिवैधथ
माथेधिरेखशथवाहविले अथवा
घिरवेशोत्तोहकोहोरोलाकों
लेनाधिकंचुक्याय होपांचरस्तवात
मिनितिवदन्वार:करणस्पराइट।
अवशीकरजाआपकजाकिंधु
केशंचलकरजोगुहारे उरस्थल
वेखोरगप्पचुकिकार श्रीनंदरायरले
बिराहताकेभागे सोउइट उद्भवहोयहा
যষ্টিময়ছৈন
दिक जाके आगस्पर्शकरताय,
श्लोककथंकुलवधजनस्टशसिह मर्म
स्पलेंननातिनवलंघसेसकलसेतवाणु
तितासराजदललोचनेसत्तात मिथ मे
कोयना स्पृशामिसवितकोवसनमा
रुसंधत्तराईनिजनकर
कैकहतगजातमकाँकरके कलवर
जिनकममेस्थल विस्पर्श करत
रबहालिवकरये में
रावधानकरझापवालेज्मे हे कमलयदी
चलोचनामेहं निरंतर याप्रकरहीयाहार
लमेंगालीनकोस्पर्शकरत सर
येनसारेवलकामपाकवतघाही
लोरवचनोक्लोहिगणितमुत्तकरोषिक
करावाहितासत्तात्वचनसहकीमत
रणं भवत्यवार अवविजाकर
हत जोतुझारेवचनउक्निक होता
करिकेंदिगए मैकत्ता शवमारकुरी
शापकहत्त जोत्तमारवचनकादोड्या
मर्थ्य कायोत्तेजवहमारेओरतमारवचन
दोउसाथकायेहैं। गारआयुनकरन कहो
ऋयाकहियेनाववाधक वक्रोतिर Rol
ना वाक्चात्तरीधुशएंगानामस्वानंद
टपस्तनअतिदुलालित्तंपरमिहदानंद
धिशुक्रत्तनैवगरण लोकवचनचाश
धुराताकहा जा करतो हमजाजोत्तम
केपी अपवार
GAALANA
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। गोएयरवनदस्तस्वरूपमिपहनाम
याज्ञातमतमगर जववालक याप
कारकागतश्रीराकुरजीआपकहत्तर
जोहेवलभांगने रमतोश्रीलंदावनविर
वेचिवेजाब हों औरपासयमुनाजलाह
देवलागस्थिति अथवात्मासाको
कहतही हेवल भोगने जोयाकरकैखे
करके कहत है। जोयह हायहायहर
एसोउत्तम मारस्वरुपावलोहमनज
न्या भागाव्याजापरंसंदरिंगोरस्यत
तोस्त्वमुल्पंकिमयाहवरक उत्स्थले
स्थापनयस्यलक्ष्यमान्यसोनवतन्म
वर५आई माकुरजाभापकहत
जासंदरीयहरो गोरसकोमिषमात्रका
यो है सोत्तोको यो थाकोमोल्यकाको
कहयावसको मोलकामोलकायो है।
मउरस्थलविवेस्थापनकरकैदराके
कैलकेतहोयोमेसोअन्यपरुषहाय
कोनाहादिरखाव नो माईकोदरखनोर
लोकसत्ताकाननमागामापर
लेदागविग्राम की प्रमुखताव येन्या
पत्ता
नगनोजात्तुर
अप्रपस्यामा अवजनत
हत्तोहमतो निरत्तीरंदावन वर्षे
तह पर दूधकोदाननहीकधा
कवहसन्याहनाही हाताने कोकर
हमतमकोंदेगेनदेगा साल अय
यदद्यावधिचौररियानदेनमद्याहमश
तिस्तत्वादानराहाण्या मिसरीमहाला
पुरा विश्रमतत्त्वयैवाला समय
श्रीठाकुरजीकहत्तनोधये यहवा
नजातोपनासान चौरीकरीनिकीक
दीनेनटाना है प्रथमविशप्रयत्नातक
अव पहिलेचोकाय
अवदान मलेगोहिकमललोचनायक
रेही पासलाई
गमावा
हरप्रवाचिहान्यपिरत न यन्त्र
हननानिहाय
विट प्रवचन मार्ग
सत्ततंयंपाकाननमागछामा पर
2. गोश्यपवनदस्तस्वरूपमित्याहनो
याज्ञानमुत्तमंजिववालक यापू
कारको तश्रीहाकुरजीआपकहत्त
जाहेवलेभांगने तुमतोश्रीलंदावनावर
वेचिवेजान हों और पासयमुनाजलद
छेउबागस्थिति अथवामएसीको
कहतही हेवनभोगने जोयाकरखे
करके कहत है। जो यह हाय हाय हा
एसोउन्नमवारस्वरूपशवलोहमनन
न्या गालाव्याजःपरंसंदरिंगारस्यक
शोस्त्वमुल्पंकिमयाहवस्त उत्स्थले
स्थाप्पनयस्यलक्ष्यमन्सोनसन्मा
वाराणशीकुरजाभापकहत
जोसुंदरी यहलो गोरसकोमिषमात्रका
यो हो सोत्तोकायोयाकोभोल्यकाकरे
कझ्यावस्तुको मोलकामोलकायो है
मउरस्शुलदिखेस्थापनकरकेशक
कैलकेतही सोमेशअन्यपरुषहायत
कांनाहीदिखाव नो मोहकोदरखनोर
4
नानाजातऋतिमपित्त कुत्तोवयं
प्रपस्यामा अवजनत
हिरोहमनिरत्तरीलंदावन वर्षे
गतह परराहधरको दोननहीकधा
किवहसन्या इनाही तो कोकर
इमतमकोंदेगेनदेगैरमोद ये
पदद्यावधिचौररिस्पानदेशमद्याहमशे
वस्तादानरहीष्याभिसरोरुहादा
पुरा विश्रमतत्वयैवारमार्थ
श्रीठाकुरजीकहतजोमधये यहसंवो
चन जातोलोमानचौरीकालिकरके
दाननदोनो है प्रथमसेविशप्रयततक
सोअव पहिले चोराकमाई हलो
सवदान मैले गहिकमललोचनापह
लेदाणविश्रामकैरिकोसुसताव येत्या
रेहापासलाउंगारो लागताना
हरप्रवर खरचिहान्पयिवाने नदृश्यन्ने
हत्तरनिहायछत्ततरगतिश्रीगो
विंद प्रियवचनमा कापसमयं ५
नाज्ञापयसतिगोरताविधी २८ जाने
एनेमेंएकलाखावालकनायकैरिको भी
कुरजासांकहोजो गायनोइरग र
रकेचिन्हईवन विखेंनाही देखियतु।।
होतेंडूरमाईतहा।इहणी गाविदजोशी
चंद्रप्रियवचनकमुनि शव गोप
कजनाये गायन कारताकधिधिगापार
काशाज्ञा दत्तभये है ?
लगो पेषुस्वेदशमासादप्रिय अतिप्रमुख
ताप्रोच प्रेमातिशयनिर्भया:eme
येजावगोपसवानवश्रीरकुरजापिक
খৎনদুঃখলষ্ট
वशपत्तप्रसन्नहर्षसयत हायकै को।।
रप्रेममंतशयरोयकै निर्भय होकर
कहतार
निपातमहोवयमे
लवजयोपनिविनिचारजना विधि
विजनेप्रमपारधनंवरसाधुजन स्वयं
परं॥२०॥आवकहानयजो हेवन
पनितंबना होयहोशाचर्य है जोसम
तहोगविपरीतनमारोस्वरूपनि
-
र हाजंगलबारएपौगोपान कामधनक
वहायोर कहताहता से एमाधुजनमेगा
अहोयाप्रकारसोनिजगना-nbur
महाविपरीतनवत्तानोधनिमगा
धापालईतवादानाaang
सवाम्माकं पायाकार्यापार
बहत होनोहे संकिमान यूनानmin
बनवियगत समयोपयोगधर्मशः
धमेनारीहीन बनसन नामुद्र
तो जामागंदानननगमको
हा
वय हमिद
१. माज्ञापयस निगोरखपविधी र
एलेमेंएकसारखाबालकनेवायकरको श्री
कुरजासकटोजो गायतोइरग र
रकेचिन्हं वन विखेंनाही देवियतु।
होतेंदूरपईत इहणी गविदेजोगाई
लचंद्रप्रियवचनकमुनि शवगोप
कानाये गायन करताकधिधिगापर
काशाज्ञा दत्तभये है ?
in मनोहर
लगोपेषुवेशमासादतिपय अतिप्रमुह
जाप्रोच प्रेमातिशयनिर्भया:R0
येजावगोपसवानवश्रीराकुरजागा पिकान
कोशानेशत्यत्तयहरवाछित्तजानकांत
वरतप्रसन्नहर्षयत होयकैको ओ
रप्रेम शतिशयरोग नियोकार के
कहता है।
विपातमहोवयमेवनि
लवजमापनितंधिनिचारजना विपिने
विजनेप्रमवरधनं वरसाधुजनःस्वयमेव
परं॥२०॥अर्थशव कहानयजो हेनुजगो
पनितंबना होयहडोझाचर्य हैजोतमकह
नहोगविपरीत मारोस्वरुपनि ओर
সেই
अहोरमा
KAL
धारत
तिवास्त्र
हत्त।
महादेवि
मारोधन
कएकत्र
कारपुटे
મારું
अकेले
गनहे सोय
माउला
दखाया
गोर
सोयरूपाने
श्रीराकुर
नाउमापन
महाचा
देवालयेही
लोक
नापति
माधुकशेषिको
सम्मानित
मुरवे २३
अदविजनलंगाय
काकहत हैं. जोयाप्रकारकुलस्त्रीलिखें।
कोतवन मेमारीत करतही या प्रकार
आकार्यकर के गोपाखकमलविसंहार
करकै धाकुरजागडस्थलचिरनरक
सवारत है " अंगत्वादान
लगसौरभेनतोवूलरेखित्तकयालय
नचाये मोदी सामनरवकित्तवता
चयतातिरह मुरारकथंगमिष्य
श्रीरकुरजाप्रविश्रीविजनलकहते
हैं जोवार मुखकमलविलक्षण
इतअसाधारपरिमलकरके मेरो अंश
सावधिलवासारचसुगंधसांभया है यो
रतलारेतारलकेपाकरेवाने दोनो
गालअद्यते धोरमौदर्यकोहदानवकको
अंकितवनस्पलताईयो शोर पर
सके अपनेघरकोजागीकह
कथंहाराणाकर्थमुवलया
नविरलगाविलवाकेनासाधिकला
काकुत्रकमभूर प्रयत्ययाहं निजय
भई
जनानखरनसंकिमारल्या होत्या
रजनशीजीवनविधिः २५
जवहमारभरतारहमकोएलजी उमा
मोत्तानके हारटूटेकही और उल्लारीच
बलरन्यारीत्यारोटीलोक्या काहनयोहे
रनित्यता सवारे आवते अजयो
चकहाँलयों कहोरहे होते त्याधि
लशहाहातभईहै हमारे प्रियजीन
रियाप्रकारपूछे जौहमकों वहममा
निसरजन सास ससर देवर जेट देपत्त
वहीचकत्तरहेंगेहेमकहाकहेंगेजी
चनकोविधि २५ सपस्त्रात्मायन
मन्यायपरंन गोपालानां मरधीनमे
"वकिप्रियस रिस्तोतानाति: २६
अवधीनकुरजीमापकहत जो
स्वानजायन पुरायमाधान देगापि
कान स्वतद्धारोनही मकानोडर
पातही हाप्रियसखाको सम माया
धातही २६
लवमिहकिंचिकृश्चिट्ठया
1
गोकुलमविनंग
वकमनन्पशरगविशेपत्तागोणः कि
मुरव २३ अवविजनहिगार
काकहत हैं. जोयाप्रकारकुलवानिरखें।
कोतवनमान करतही या प्रकार
आभार्यकार के गोपीमुखकमल गिरखेंहार
करकैवारकुरना गंडस्थलचिरनर
करता है अंगत्वादानना
लगलौरभेनताठूलरे वित्तकालय
नचाये सौदर्यसामनरतकित्तवता
चयतानिजंग्रह मुरारकथंगमिष्ये ।
श्रीरकुरजाप्रतिश्रीविजनलकहते
हैं जोतदार मुखकमलने विलक्षण श्री
हुत असाधारपरिमलकरके मेरोअंग
सुरवलितपसारनसुगंधसोभयो हैं जो
वहारेतारलकेपाक रेवाने दोनो
गाल अद्यते धोरमोदयकाहदानवकको
अंकितवनस्पललाई नयाहै भोरपूर
ইবনুমা
२४.
कथंहाराणकथंमुवलया
नाधिरलगाविलवः कैनासाधिकलश
काकुत्रकमभूरप्रियेथंएवोहंनिजय
शनाखरभसंकिमारपामिलाप
जनयशीजीवनविधिः ३५
अवहमारे भरतारसमकोपली उसा
मोत्तानले हारटेकहो औरतलारीच
उलान्यारोत्यारोटीलोक्यो का यो
रिनित्यसबारे आयते योग
बकहानयों कहारह हे सहसागरधि
लर्शकहाहातभईहै हमारे प्रयान
याप्रकारपूछे जौहमकों तहमन्या
अमरजन सास ससुर देवर जेट्टैक्स
वहीचकत्तरदगेहेमकहाकोगे
चनकोविधि २५ सपनाशापन
मन्यायपरंन गोपाकानां मरधानमे
विकिप्रियस रिपोकतानीतिः
मानके जीवन परायभाधान देवपि
अवधीतकरजीमापक जो
कानपत्यागेन नडर
पनन हो हप्रियग्नसाको कामना
साकविका
वामनन्याधिशेपत्तागोमः
नवनिनिधि
पानको
॥२ बाधाकाधवश्रीनिजांगना गोपीसद
हत जो गोकुलपूर्णसमारोहैं और
संपूर्णनिश्चलरकोलारोभान पर
है किंतुहमसेंथोरोमतिकोड के
यहीहमको भय है ॥२॥ नातवशीकप्र
ष्यवाणागोविंदमानसमानासकोत्यु
राया प्रेमराजरायतः॥रसायकि यह
दरानकावाएा सोश्रीगोविदमन
वसकरवको प्रविएनईह महावाना
देतेनिकलनेनसा परनरवार टूमधन
प्रेमत्तेपूपहायकजराभयोनिकलनसभाको
যাকনুইসাফারি
कानान्यः पतिकचिनियमवलव
सेनाथायाधीरकुरज्जाकत
जोहेप्रियगोपिकान तमछलकर कैक्यों
करत हो अपानोभावप्रकटौनाहाक
तही अन्धकोहानाहासनगोलाहलय
कांधावलेवन करत होनथालाबक
হারিখ হিনদুধ
पाहवतनपारयेविपुललारमामाशिम
चटनविनिहितारामयाकरशी
वनरपरमही ओरहनाधत मोम.
प्पयालयमारुत्तोवहतिसपिया
थत्तरायाधिवत्रीदाकुरजी शाप
नहेंजोहे कृशांगीवीकोपासुझा
माथेपर हे जो पारनाही पावत नेकदै
विकोईसामर्थ नाही हैं औरत
एमथे परधरके फिरताही यामाथे
भारउतारकतामात्र सत्ताव होली
गंधपवनवहत सोतदारेश्रर्था।
सकुसुमसकुमारांगनीमत्युदारतरे
नाकर सिवरवासोप्पेत्तदयंनसहामहे
लिमिहत्तदस्माकंहस्तेकुरुवावस्तवा
यनरषयोनीरनाथवनस्पति संदरः
श्या कोर्थशवविजनशिकहता हैं जो
कुसुमसुकुमारगे फूलजैसाखकुमार
अंगहे उबारोकोशिमानदार बतायो ।
तुमने तोरेजरपल हिरवेजोशष्टवस्त्र
जापानावर यह एक और सरोविजा
सबसदर सपनोनयनमछकेरम्बार
दोनोव ५
निसंदर
रमारामार मात्र
A
.
२ आमाकोषवश्रीनिजांगना गोपासरत
रत है जो गोकुलधर्णसमारोहै शोरगे
संपूर्णनिश्शेरलारोभानपशर
हैं किंतु हमसे थोरोमतिकोजक
यहीहमके भय है ।रासातवशीकरीत
हेयवाणागोविंदमानसमानासकोत्यु
रायांप्रेमराजरायतःलायकि यह
दशनकावागा सोश्रीगोविदकमन
वसकरवको प्रविष्नई मेहावाना
देतेनिकलनेनसा परनरवार हमधा
प्रेमपूर्ण हायकजराजयोनिकलनसमों को
साजकिएनषेभावप्रकटीकरोषिकिन्न
बनान्यः श्रगति कश्चिनियमवलव
खनाथ॥सायाकोधाराकुरजीकात्त
जोहे प्रियगोपिकान तमलकर कैकयों
करत हो अपानोभावप्रकटकोनाहाक
सही शेन्धकोहानांहासनेगोलाहलय
कांधवलवन करत होनथासाला के
शालिदधिभाजतंशिरसितमनागष्टम
पहंवत्तनपारयेविपुललारमानाशिम
सनिधि
पयंभलयमारुतोवहतिसोपिया
थेत्तायाअवधीनकुरजीमा
त हैं जोहे कृशांगीदधीकोपाराहा
नाथेपरहै जोपारनाहीपावत नेकदै
विकाईसामर्थनाहा हैं औरहत
एमपरधरके फिरताही याते माथे
भारउत्तारकैक्षणमात्रमुखता से
गंधपवनवहते हैं सोतदारेशर्थ ।।
कुसुमकुमारांगश्रीमत्टार
नाकर सिवरवासोप्पेत्तयंन महा
लिमिहतदस्माकंहस्तेकुरुवार
नयनरषयोनीरनाथत्वमसाही
'1३॥याकोर्थशवविजनकिकर
शुभमदीयमाविजेशत्वदीयोनारी
नकस्पत्तदेकर्थत्वन्नियोगा।
वालोय त्रीशकुरजीआपकहते हैं
हेसरोजानामध्धकोनाजनउत्ता
ओरवेगहमारोदानदेडलव्रिजनी
नउत्तरदत्तहीएतरयाप्रकारक्योंगई
किसकों देव कौनुहमारी उतरायह
कियोगातकहत्त है। लोकधित्व
शिरस्थंकलशकरेगास्थितेप्रियेकर
परोवरामिभिस्तंभवत्येतदितिवधा
गन्यद्यात्तयाजनमेवमध्यो ।
कोतदनंतर श्रीनकुरजासापने वन
नक्कनमाथेडपरउपरने पर कलश
कास्थितिही या श्रीसजानेापनए
यजन्नतनकै माथेउपत्धांजोयहाँ
कलशफुरत्तोहमकौनकआगे के हैं।
याप्रकारकहत्तएथ्वीउपराकभाजन
कौगरावत्तभये सोएचाडपरक
लोक नदादावल्पा निजनुजपटेच
प्रियतमंनिग्रोवपोनिनशविरको
गफमशक्लीयत्वभिमुरव
शुभता
सर
ती मित्रानतरनिलम्पैकागल
नामधिकत्तानाधेररसारमायाकोत्त
चंदावलाजाने श्रीहस्तकारक
पुनेपालमप्रानण्यकोपकारक नजर
स्कारकहतभई कुंजतउमंगें
মাযহ্মণডেনিবে
सखी चीजोठमारेश्रीमुरव केला
रोजावकोशक्तनाहाजायनसकोंग]
जाधधररलकापानकश्तकाअधी
रजातीतरह अधिकारनीयारसका
महत्तातगई। लोकमयाधत्तेयं कम
लातिवितियाधत्तोहवपचमवासमुन्न
येनागरकोविरोधोविनान्नवत्पेसडकल
नायो मायाकीनीयाकुरजीकाहन
जोरकमलनयनोहमतमकोंधारनको
यही किंचा तुम हमकोधारनकायहाँस
बहानागरकोविरोधहीविनातारी
पानावर र नाचा था
भवनमध्यस्यावादिनोरयायत
सक्योविलिनासनाला
M
सरवाहा
प्रथशाकुरजीयालय
कोंकहता है जो महोहमरोवार
केवाचमध्यस्थह रायोको गहमारे
रेकर हम दोहवादा है जोगमाइतीच
नौको सो कमलनिक मालमेकोएर
तंतनोवायत्तराय नाही ३६
विलालवतिसरायवदंगसंगानि
ध्यासुभगः त्वंस्कुरुभनोनरंजनम
धेर्थे पशताया ३७
नाप्रतिकात जोहेसरवा खिन्न
होथे वासुभश सुंदरतोनाग्यमानाः
रेअंगके संगकाअभिलाषा विरखें हे
भगतासांतुमयाकोमनरायोजन
কই ফন্বিন্তী
को १७ वत्संगागमनपरी
सहितकसमेतहाविरासानः अन्यामपि
निजसदृशीकत्वांछस्पयेतित १८
अपनाचावलाजयसवाप्रति
हाहै हेप्रिय सरवातरेगावकी
मेंयहप्रगनियोहै यहफलपायो ।
कहंगापखाकर वे कॉकहारमा
अपने जैसाकै लाचार
प
तदामुदातिजा
सहारं नवप्राण्यपराईहदी
अवशोदाकुर
। सानो स्पर्शकरवकों
पसासाह
V
मामानदमास्टसोतितरमार
प्रियंसाहतं करपलदि
पलेप्पस्टशन नानाल
तरीयवशादधामियप्रेयस्क
अथाविधेनवचनेनासे
v
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