Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner

Shree Pravachan Sanghra Paramabh

Nandlal · 2011/08

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रोम् ॥ श्रीजिनंद्रायनमः॥अहिंसापमंधिमः॥ ए महा उत्तम पुस्तक गुणोका भटारहे ज्ञानरूपी नेत्रीका दाशारदे प पुस्तक लिखतका मिलना अति कठनथाप कठनताई दूरकी के वारते और स्वधर्मी जनाके हित अर्थ श्रावक नंदलाल ॥ वृजवलम दाराने उपया कर प्ररािध कीगाह अगर कोई लग मान की गलती छपने के समे रहगई हो तो पंउन जनरूपा करके सुधारलऐ ओर जो भन्यजीव इसको पढेगे पहावेगे अर्थ प्रमार्थको समझेंगे सो संसार सागरसे सीघ पारपाय गे और इस पुस्तकको जल सहत मुप पत्तो बांध कर यांचना चाहीए ॥ श्रार दीपकाजलागके वाचनेकी अाग्यानाहाह सुमं भुगात् ॥ दा० श्रावक नंदलाल रजबलभदास ॥ ॥श्रीप्रवचनसंग्रह पुस्तककी अनुक्रमणिका ॥ १ श्रीसागुनमाला सीए १२५ पना १ यी ३४१ श्रीमापाभत्तामर संधए४१ पना१५० थी१५८ २ श्रीदेवाधिदेवरचषा संधेप ८५ पना १ थी १८५ श्रीवालवतीसी संवेप३३ पना१५८धी१६७ २ श्रीदेवरचणा सवेप८४५ पना १ थी १५. प्रथम पार उपा एक पुरतककी कीमत 11) रुपया डाक खरच अलाइदा ॥ यह पुस्तकसन १८६७ के २५ के पेकट मुगव रिगीएरी प्रसिध करताने अपने नामकी सरकारे करयायलई है अब किसी और को उपधानको अगाजत नहीं है । मिती प्रशु दिन १५ समन् १९५३ सन १८१६ त. २९ सितंवर पुग्नक मिलनेका विमाना दुकान रुपाशाह || नंदलाल भाषा १ वजार पदा समर स्पालकोर ग fami -IN... murarumurumurarimumment ॥अथ श्री साधगुनमालाप्रारंभते॥

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यु गुण
माला
डॉ॥श्री वीतरागायनमः॥
अथ साधुगुणलाला लिप्यते। सर्वगुरुवर्ण दोहरा॥
श्री त्रैलोका धीसको बंदो ध्यावो ध्यान । यासेवासाता सुधी पावो नीकोज्ञान ॥३॥
द्वादशस्वरअनुक्रमवर्णनंदोहरा ॥अलपत्रादि इस ईसकी उत्तमऊचोएक। ऐसो
जोडक और नहि अंतनःजगटेक॥२॥ यमकवंधसर्वलघुवर्ण दोहरा॥मुनि मुनि
पति वरनन करन शिव शिव मगशिवकरण । जस जस ससियर दिपतजग जय जय
जिन जन सरण॥३॥ सर्वलघुदो०करत सुजस सरअसुर अहि उड गण नरगहि
सरण। जिहसमरण समकत विमल प्रणमत हरजसचरण॥४॥दोहरा॥ वंदो श्रीसी
मंदरं स्वामीसदाकृपाल । श्रुतिदेवीको बंदकरचो साधुगुणमाल ॥५॥ जिनवर भापत
जनमत जत्नमूलजयवंत। जतीधर्म जगजलतरण जनमजरादुपत ॥६॥ मुनि रिप
तपसी संजमी यती तपो धन संत । श्रमण साधु अणगारगुरु बंदोचितहरपंत ॥७॥

NAA / APP / IABAR ब EER साथीया बंधसर्वलघु॥दोहरा ॥ परम मुकतिपद अरपतप करमुनि उपसम चरत। गहि जिनमतिभवजलतरतउचत्रवि चलपदधरत ॥८॥ दुमल चंद जिनकेधर ध्यान सुजानभए सुपदेपत लोचनको मनको । जिनके सुववैन सुचेन वधे परमान किया प्रभुता जनको जिनके पगलाग सुभागभए वल रूप सपुष्ट करे तनको। तिनसाधुजती रिपकोप्रण मोगुणगायलहोधिपणा धनको चक्रबंध दूमल॥ वंद जिमके तकके दल के महिके अलिके चितके मटिके पहिके मधुके रुत के वनके सरके पिकके मचु के विनके लवके घनके घटके स्वरके सुनके किम के किचुके नतुके लटुके पगके रमके किमके तुटिके कविके मयु के स्तव के कथ के ॥१०॥ अप्टकोणपदाकार द्वमल ॥ छंद ।। LETEER AMATARAATER/#/ अप्टकोणपदाकार दूमल ॥ छंद ॥ गधुगुण ॥ ३ ॥ करुणा कर दीन पद पंकज का AMES नाहि गति रापण हार दयाल प्रभू तुमरे सरणा । सरणा विभो गुण सिंधु गा। वरुणा गर मुनि ध्याय भवां तरणा भव सा हमरा इहि कान ना अपार कहा वर इंद्र करे महिमा बुद को तरुणा। गर चाहित हो तुम करुणा॥११॥ विधु 6 सुन चिप E/EE साधु गुण माता विधारितके जिनसासनके परमानकहे अघमेलनही बरते जितके धनसाधु सुसा धनात्मको प्रणमोमुपदार्यहे नितके ॥ १८॥ इति द्वतीयमहावृत मंत्तगयंद वंद ॥ पापकिबुद्धजगै जिसकेघट लालचसोपरवस्तगहेहे । ज्ञानविवेकदयासमता तपछांडचले चितकोपबहेहै। तूंवरभारलिएजिमडूवतयों भवसागडूवरहेहै। सोअघ त्यागसंतोपगहेहै। रिपसेवकवंदतमोदलहेहै ॥ १९ ॥ धाड विचार कठोर महाठग पापकरी पर अंसगहेहै ॥छेदन भेदन लोकविपे परिलोकयमादिक पीडसहे है। |साधतजे नदित्त पदारथ छार त्रिनादिक वीनलहेहै । सो त्रिपतातम लच्छपती चितपाप अलेप सिदंतकहेहै ॥२०॥ इति तृतीय महावृत ॥ कामवलीसरपंच लिए करमारि किसूरवडे जिनाने । दानवदेवफणी नरपेचर भूचर कीने। नारिकिपायसुसीस छुहावतलाज हरेवलसाहसछीने। सोरिपजीतलिए रिप तापस सेवकवंदत प्रम किभीने ॥२१॥ नाग महा वल मत्त गयंद महा बल केतक चाकर माला केसरि जीतनहारे लापसुयुद्धकरे धरधीरजतोडन कोटमहाग:भारे । लोहिमलेगिर ४ गुणा ठाहिदिपावन औरमहावलप्राक्रमकारे । कामकियुद्धमुहारचले परसारितराजकुसाधु पछारे ॥ २२ ॥ चंचलरूपकियोवनता निधसाजसिंगारसुगंधसुहाई । हासविलास विकारकरे मुपगीत बनाइकितानउठाई । कामभरीनिरलजभईमुनिराज समीपसुका मनाई । मेरअडोलसुसीलविपे थिरजानतहे भगनीअरुमाई ॥ २३ ॥ सीलमहा निध दारदर्भजन देवद्रुमोमन बंछतपूरे । पापमहारजपंकविना सनमेघ वधावन पुन अंकूरे। सकटटालनमोदजगावननाकरमावनदुर्गतचूरे। मोपकरेवहुदोपहरेधनधारन हार मुनीस्वरसूरे ॥ २४॥ इतिचतुर्थमहावृत ।। याजगमै धनहेमनगादि रसायण पोरस पारस पाहन भूमि ग्रहादि पशुगणनंबर भूपणभांजन । श्रायुध वाहनदास चमूवन तादिघणी विधहात परिग्रह संयम ढाहन । सोमुनिराज तजे चित सोसुभ यात्म ज्ञान महा धन चाहन ॥२५॥ लोकविपे वलवंत परिग्रह जीवनको जिस माला कोपनिवारविराजतहै। रिपपंतसपीतिहआदरपावे ॥३३॥ मूरपचित्तमलीनमहा साधुगुणा पशु देपकिसाधुकुदेवनगारी । ताडनतर्जनहाथउठावन निंदनसाथनिरादरभारी। तौमुनिराजकुकोपनत्रावत जानपिमा शिवकाजसवारी । तेमुनिकेपग वंदनको उमगीमनसा भवतारनहारी ॥ ३४॥ कालकुरूप अनारजमानव कोपरूपान कुरूपदिपावे । यक्षपिशाचविताल भयानकक्रूरमहाजव ानडरावे । सिंह यंग गजादियुरेपशु पेदकरैवहुपीडजनाचे । श्रातमअंग अभंगलपे रिपदेह सुश्रापन प्रीतनलावे ॥ ३५॥ अथ मान ॥ मानरिमानवमान वुरोमतिमान गुमानन मानननीको । मानकरीअपमानलहै नविमानलहै वरदेवपुरीको । मानमिटेसनमान वधेपरमानकरो सुभवाकजतीको ।मानवजन्मसमाननही कछुधर्मसुमानकजातभली को ॥ ३६॥ देवसमूहसुसोभत सुंदरइंद्रजहा सिराननिवांव। पंडपतीपगनायक भूपतिभौनपतीपगवंदनावे । जोरकिहाथकरे महिमाजसवैनकहे जयकारबुलावे । मनमानन श्रावतसोनामो रिपराज हावे ॥ ३७ ॥ श्रायनमेसर गावित साथ गुप माला 19॥ याविधमै मनमानन श्रावतसोप्रणमो रिपराज कहावे ॥ ३७ ॥ श्रायनमेसुर भूमिसवार सुगंधपिंडायवनाय नपाडा । साजवजंत्रसुधारकिताल अलापनरागनि रागपारा । सुंदररूपसिंगारसुपातर नाचततानउठेछणकारा।लोचनचित्तअडोल सदारिपजानतहे जगझूठपसारा ॥ ३८॥ ॥ अथ माया॥ वक्रकरे चितमित्रपणे रिपुठागकुरूप सुसापगवावे। निंदमईभ्रमजालग्रही गुणहीनकरे नरकादिरुलावे। सम्यकचंदग्रसेतमसोअहि साममहाविपदभचढावे । सोकपटारिपछारहणेरिपर्जव सूरसुचूरकरावे ॥३९॥ अंतरवाहरसोभतहै रिजसाचविपेरिपसाचहिवोले । साचकरे करतत्तमहारिप साचकिमारगचालअडोले । दंभमहाठगमार लियोजडचेतन भाव विभेदविरोले । सो णमोतिहकालविपे रिपमोपमहापुरकेसुपटोले ॥४०॥अथलोभ लोभकिकारनजालफसे पगमीनमरे कपकुंजररोवे । चोरसहेदुख बंधवधादिकलो भसुमानकिकरहोवे । लोभविनासकरे शिवमारग नीचगतीगति नीचमुटोवे । .

. साधु गुण लोभनिवारसंतोपगहेरिपतांगुण मालसुसेवकपोव॥४१॥ जाननभूमिनिधान महाधग श्रीपसिद्धरसायनबूटी । देखनरिंदविभूतमहा सुखदेवविभूतअनूपअटूटी । चाग हीचितमाहिजगे कछुअंतरतेममतासभछूटी। ग्यानविरागसखाकरसंगरमे रिखली। ॥१२॥ भतणसिरकूटी ॥४२॥इतिचारकपाय ॥अथभावसच्चे ॥ कातकपूर्नममासनिमी थसमेटपरासससीवलभारी। मेघकहीडरजादिविनानभस्वछदिसाविमलातमहारी।. त्योंचितभाव विसुद्धसुसीतल संतमुनीसरहेवृतधारी। वंदतोंकरजोरसदा भवसागर तारनके अधिकारी ॥४३॥ अथकर्ण सचे ॥ सुद्धकियोकरणोत्तमको गमनागन भापण जनमाही। राखननाखनवैठनमै उपदेसविसुभहसभठाही । जोकरतत्तरे रिपउत्तमसोशिवमारगौशवराही । तेमुनिकेपदपंकजको करजोरसदा प्रणमोग चाही ॥१४॥ चंदननीरकपूर कुलपनदाघहरे त्रिफलामलरोगं । वातविकारहरैत्रिगु टात्रयजोगविशुद्धहरैअघसोगं पुष्टकरेघृत खीरमिठासमहावलवंत त्रिभावलभोग। T - माला पोपस्वयंलय बातमकोरससाध त्रियोगचलेंशिवलोगं ॥४९॥ भूपहरिपुराजकरै खितसाधलहे धनधानसवारी । जोत्रयकारज कारकसाथब्रजीरचमूपत दक्षभंडार । साधु गुण त्यांमुनिराज त्रियोगविचक्षणवीरलिये सगसंजमकारी । कर्मखपाय सुराजलो थिरआगम अर्थमहानगधारी ॥४६॥ अथ क्षमागुण ॥ जो शावनीबहुखेदसहे हिमसीतसहे अरुतापसहेहे मारसहै। पर हारसहै अपवित्रपवित्र समस्तगहेहै। त्योमुनिधारक्षमामुक्षमासमन्त्रातमकरसरीझरहेहै । ताहिनमोतिहजोगकरीजिनराज किमारगसूरकहेहें॥४७॥ अथवेरागगुण ॥ कामनभोग विलासविषेलखनारिसुता दिकबंधनत्यागी। जानअनित्यत्रसार अपावनदेहती ममताजिहभागी । राजतजे सभसाजतजे पटखंडविभूततनीचितजागी । तेप्रणमोपरमारथसाधकीजिनसासन माहिविरागी ॥४८॥अथमनसमोधारनगुण ॥ वाजकुरंग पतंगसमीरत देवनते मनवेगगतीहैं । चंचलचौरचहूंदिसभ्रामर्कढीटमहाअतिदुष्टमतीहै। सोसमझायकिया ७ साधु गुण माला ॥१४॥ अपनेवस पापकुवुदकिचालहतीहै । संजमवंत.विराजतहै मनकोसमधारन साधन तोहै ॥४९॥ ताम्रकरेकलधौत रसायणलोहकुपारसहेमवनावे। श्रोपधजोगकलीरज तोतममूढसुधीसंगदक्षकहावे।वैदकरैविपकोवरोपधसाधुअसाधुकुसाधुकराये। त्यो मनदुष्टकुसुष्टकरै रिपतांगुरुकेगुण सेवकगावे॥५०॥अथवचनसमोधारण । मोनरहे नकहै मुपाश्रव संवरकारनबोलनवानी । तोलकिवोलनबोलनहारनजीवदया उप देसकहानी । जैनकिवेनसुनधेरैचितचैनभयोसभहीविधज्ञानी । तेप्रणमोतिहुकाल विपे तिनकीमहिमातिहुलोकवखानी ॥५१॥ अथकायसमोधारण । अंगउपंगसंको चरहे दृढन्त्रासनधारतजेचपलाई । श्रावनजावनकारजमेयतनायुतउत्तमरूपवनाई। कायकलेसकरे तपउत्तममोखमहापुरकेमगजाई । कायसमोधरणे गुणराजततांपगवं दतहाचितलाई ॥५२॥ अथ ज्ञानगुन ॥केतकहे श्रुतिमत्तमई रिपकेतकोषधरीमन ज्ञानी । केतककेवलज्ञानमई प्रभुकेतकत्रंगउपंगवपानी । केतकवादसम्नंगधरीरिप सर्वरिपीश्वरज्ञाननिशानी । तमुनिपगवंदनते उपजेचितमासमतामुखदानी ।। २३॥ IY गा अथदंसनगुन । मददशाधरदसणउत्तमसत्तप्रतीतजिनागममाही। यक्षसुरासुरनाग चलावनतीनचलतहे शिवराही । धीरजमंडपखंडकग्डन पापमुखामतकेगिरढाही। सम्यकवंतमहंतमहामुनि सेवकतारतहे गहिवाही ॥ ५४॥ अथचारित्रगुन । सुद्ध श्रावस्यकातकरे गुरुदेववंदसिद्धतउचारे । ध्यान करतपसाविधसाधनभिक्षग्रहे नि रदीपसभा। सिप्यनपुरानजाच जिनागमदेउपदेसम्पामतिटारे । रात्रि अवस्यकत्रा दिसचारित्रसाधभलीगतिसाधपधार ॥ ५॥ अथनुध्यादिर२परिसहजीतनगन ॥ भूपमहाबलवंतभई नरसिंहकाणीगजरीछनिवाए। दासभएपरछंदनवल हीनभएपर हायविकाए। कालयकालसभक्षकभक्ष मुजातकुजातगिनेनगिनाए । सोमुनिराजलई जिनके तिनकेगुणसेवकभाखस्ताप ॥५७॥ भूखत्रिखागरमीसरदी इमहीबहुभांतकि संकटप.चे । कर्मउदेफलमानतहे समताधरभोगनचित्तनताव। जानतंहेछिनभंगरहेतन साधु गुण माला ताहिविपेममतानहिलावे ।धारतदेहविदेहभएजन तांगुनदेवपतीमुखगावै ॥५८॥ अथमणेती उपसर्गजीतनगुण ॥ चाहतजीवसभीजगजीवन देहसमाननहीकछु प्यारो । संयमवंतमुनीस्वरको उपसर्गभवेतननासनहारो । तोचितवेहमभातमराम अपंडअवधितज्ञानभंडारी।देह अचेतनसोहमतीनहि सत्तचिदानंदरूपहमारी॥५८॥ इतिसप्तविंशतसाधुमूलगुणसमाप्तं ॥ अथ उत्तरगुण ॥ पावसकीयउमासविपे निरदोपसुथानकमाहिवसेरो। नारिकलीवपशूनरहेजहिशुदप्रलेहणजोगचंगेरो।धार तहाउपवासभित्रह पालचारित्रवसेगुरुमेरो भव्यनकोउपदेसकहे सुनमोदलहैनर नारिघनेरो॥५९॥ पाठहिमासबिहारकरेरिखदेसविदेसविपेउपगारी। भूमिकरेत्रिण काठकिऊपर आसनसेनचित्यसवारी। श्रागमसारविचारउचार किभव्यनकीजिन नींदउधारी। काढम्पामतिकूपथकी जिनधर्मनकेतुदिपावनभारी॥६॥पीपममरविते 1 -- 4 साधु गुण माला द्वादसमासविपे तपसाकरज्ञानविरागविपे चितभेवे । संयमसाधुराधि महापदसे। वकको सुपसंपतदेवे ॥ ६१ ॥ साधुगिनेनहिरंकधरापति दीनधनीसभएकसरीसे ज्योवरुपारुतपायसुभायसु अंबुदजंगलमाहिवरीसे । जीवनयासनही जिनकेअरु कालकुत्रासनहीचितदीसे । तेमुनिकेपगवंदनते जनपापपुरातनकेदलपीसे॥६२ ॥ चाहिनहीनिजकीरतकी सनमानसुपूजनादरकेरी निंदनवंदनएकसमोसमता सजनीगुनरूपचंगेरी । लोकविपेनहिमोहधरे परलोकवछतमेटधरी । घट श्रातमराममहारसते मुनिबंदमिटेभवफेरी ॥६३ ॥ घोरमहातपतेउपजे चितोध प्रकाशकितेजदिनेशा। वैक्रयरिबभईसुरसी अरुतेजसवंतमहावललेशा। आपअनु ग्रहसिन्दमई सुपुलाकघणीविधशक्तिप्रवेशा । जोनविकारकरेथिरता गहिसोमुनि बंदतछंदसुरेसा ॥६४ ॥ नत्तमतंगमृपामतिके नरगाजतज्ञानकुवागउजारे । श्रीरि पराजमहावल नाहरगाजसिदंतकुनादउचारे । भागचलमतमंदमहापशु जोरपके " ४!

माला शवतेरिपुहारे । वादजईजगदीसकिनंदन. तेरिपजीरपवालहमारे ॥६५॥ आतम साधु गुण रामअनूपप्रमूरत आदिअनादिअनंतविलासी । चेतकअंगभंगचिदानंद रंगनरू पमईगुणरासी । व्यापकग्यायकनित्तविराजित सोथिरध्यानविपेअविनासी । होज नीतिनकीगुणमाल रचीचितलायमुवुदप्रकासी ॥६६॥ जोनगकेगुनदोपलपे नगपारपसाचनसाचनितारे । दक्षसराफलपेकसकंचन बादमिटायकिसुद्धसवारे । ज्यौरजसोचकधूलथकी धन काढलएविधसोरजटारे । त्योजडचेतनभिन्नकरे गुणदो पलपेमुनिनापसंभारे ॥६७ ॥ज्ञानसुनीरभरीसलला सुरधेनप्रमोदसुपरिनिधानी। कर्मजव्याधहरंतसुधा अघमैलहरंतसिवाकरमानी । इंदुसिद्धतकिजोतपिडी श्रुतिदे वसरूपमहासुखदानी । लोकत्रलोकप्रकासमई मुनिराजवपानतहजिनवानी॥६॥ सभितदेवविपेमघवाउड सुंदविपससिमंगलकारी । भूपसमूहविपेवरचक्रपती प्रगटे वर.केशवभारी । नागसमेघदवदो श्रनसरेचमरेंडविथारी । त्योंजिनसासन AMARAR माला संघविप मुनिराजदिपेश्रतिग्यानभंटारी ॥६९॥ धातनमकलधोतवडो रतनाविच भापतहबरहीरा । कंजरमाहिको हरि कोहम केसरिसिंहमहाबलबीरा । फलनमअरु विदवढी नगवलसनिहिदीसतचीरा । त्यांगभसंघविपेअतिचारत धारमनीश्वरसो भतधीरा ॥ ७० ॥ सासनमाहिकरीटमुसहर हेतिलकोपमकेनुअमोले । वारधदीप जहाजमणी मलयागरसेनिजकारजटालं । वेदनिजामर थीभटस जगज्ञानकलातु लियाकरतोले । हंसकपोतभरिडलीवति जेनजतीगुणान्यागमयोले ॥ ७१ ॥ सूर प्रतापससीचितसीतल सिद्धगंभीरसमेरुप्रडोले । कंजपले पसुकुम्मसिद्रय वाक कहे जनमतघाले। वारणधीरभीतमृगाधिप प्रोटविनानमधीगुणटोले । बायका बंधधरासहनसभ जैनजतीगणागमवाले ॥७२॥ आदि अंत एक स्वर ॥ साध नसाधुसदामनकीगति पंचमहातकीविधसाधन । साधनराचितभोगविपे सुपछि तकामकलानहिसाधन । साधनहकरणीहरनी दुपसावरणीवरक्षानिधसाधन । साध माला ॥२॥ नरोतमकेपगकीरज भालंधरोसभकारजसाधनाi७३॥साधनराजकिसाजविपे रतवा साधु गुण निजकोविवहारनसाधन।साधनभूमिकसानकृयाविच पोपपशूक्रयविक्रेनसाधन सा धनदूतकलाकरतत्तमुवादि विवादिविपंधनसाधन । साधनरोतमकेपगकीरजभालध रोसाकारजसाधना॥७॥साधकहे शिवमारगकेजन सारथवाहिमहापयसाधकासा धकथातपसंयमकेरस रीझरहेपरमारथसाधकासाधकहेउपदेसतजोअघहोइपुनीतव नोशिवसाधक । साधकहैजगदीसकिनदन वंदनतेसभकारजसाधक॥७॥साधनजो तकवैदकमेरसमंत्रनयंत्रनतंत्रप्रगासे।वीरवुलावनथंभनमोहन केलकर्तृहलरीतनभासे नाचनगावनतालबजावन पेलसभीतजज्ञानअभ्यासे।तेमुनिराजकिपायधरोसिरयुद्ध जगेत्रघअंधविनासे॥७॥चक्रवंधद्वमलवंदातियकेसुतकेमितकेधनके नरुकेनचुके नउकेछलके । सुरकेनरकेसपकेलजके अटकेनटिकेशिवकैथलके। जिनकेतपकेवलके टाटासेरोटोनिनोतिनकेमरकेसिरकेमणिकझलके७७

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#中州。

Hal साधु गुण माला ॥२२॥ सममे दममे जपमे तपमे बतमे गुणमे इनमे जुरमे । रिसमे मदमे छलमे लवमे अघ मैथुनमे विपमेनरमे। शुपमे दुखमे घरमे वनमे नगमे रजमे सवमेलवमे मनमे वचमेतन में शुभमे प्रगमे रिपमे प्रगमे 式出兵六六心点点六只红衣成功获成杰女兵八八八八戏默默然 MER म जगमे ॥७९॥ R न IF/B] || PAL ॥ एकादिचोदप्रयंत सिपया कथन मत्तगयंद ॥ छंद ॥बातमएफसरूपलि ३ आडादसामनत्राझडफाइक मापमहानगमापितदाना । तनपाना२का पतारस माला ॥२३॥ साधु गुण वापसंभालमहाजमलीनो ॥८०॥ एकहिदिष्ट मुचालचले बाहित्यों मुनिराजसदाइक चाली । खग्गविशानल नागरहे इकसर्वतजीइकमोक्षसभाली। खायकपूरणसविपे गभर्मसभलोकल पगुणमाली। आतनरामलपेनभसे परचेतनवंतअसूनविसाली ८॥ संतकुमारथकीपुरुषासुर नानततेइकरंगविमानी । एकहिदिष्टविमानानुत्तर एका चीलयात्मज्ञानी । सोनभज्ञानकरीमुनिजानत भापतहेइकमातमध्यानी । तेमुनि कोइकवारिदकरसेवनत जनउत्तमथानी ॥ ८२ ॥ अजगमविवरासकही मुनिजी यानीवकिभेदसुनाव । सर्वसनीअरुदेसटतीमुनिदो विधसाधिकरूपवतावे । अंत सममरणाविषभातकुवाल अबालकुरूपदिपावे। तांपगकंजलीजनके हगदोश्रुति पारसनासुाभावे ॥ ८३ ॥ दोविधवधनतोडतह दुहुभांतकुधर्मअनूपधेरैया । दोग निछन गलविवहं भवोगनिऊरधउपनया । लोकविषेपरलोकविप समाविष्टसमेत 5 ।

साधु गुरु ॥२४॥ दुहूंभवया । तेमुनिकेपगदोहमरोसिर दोकरजोरसदाहरपैया ॥ ८४ ॥ वालजुवा वयर विपे उपसर्गनिधासहिचित्तनतावे । सम्यकमिश्रमपालपके तिरयंचमनुक्षसु रेसमझाये । सल्लनदंडनगारवधारत त्रैपदवोधनहेतुसुनावे । तेमुनिकोतिहुवारप्रद क्षण देषणमोसमतासुपनावे ॥ ८५॥ जगजाननिहूभवनेयसतीनहिकालकिवा तयतैया। नीनसुगुप्तधरीतिहुमैचित दंसननानचरित्रसुहैया । त्रयगुणकीजगरीतल पीत्रय लिंगविकारमिटायदिपैया। तेमुनिवंदतमोदलहोत्रय संधविपैगुणग्रामपठैया ॥८६॥ चारकपायकुछाडतहे गतिचारकुछाडपरेचितलाई । चारसुधर्मवपानतहै चतुहीसरणसुपशांतवताई। चारप्रकारकिदेवकरे जसवेदचहूंउपमामुनिपाई । तेत्र णमोचहुभंगप्रकासक मगलचारसदासुपदाई ॥ ८७॥चारप्रकारकिवुद्धजगी घटमो क्षकिकारणचारवपाने । तीरथचारकहशिवसाधक लोकपहूंपुरुपारथजाने । दुर्लभ amrimra जमनामिनारपलाने । शारप्रकारलसे पझपाजगतांगणचारमपी साधु गुप्त: माला मुपगाने ॥ ८८॥ पंचप्रमादितजेमुमतीधर पंचजतिंद्रयप्राक्रमभारे । कामकिवानन पंचलगै जिहपंचमहारतसुदसवारे । भूपणपंचसुज्ञानमई धरपंचमहीगतिमोचित धारे । पंचपदेपरमेष्टदिपावनसोपणमो गुणरासअपारे ॥ ८९॥ आश्वरोककरे शुभसंवर पंचचरित्रकिभेदसुनावे । थावरसूपमवादरजानत पंचविधेजगजीववतावे। पुलअनूपअनुत्तरपंचकुपंच विधेमुपउत्तमपावे । सोसभज्ञानकरीमुनिजानत वंदत दाससदागुणगावे ॥९० ॥ लोकसभीपटदर्वमई लपजीवछकायकिरापणहारे। अंत रकोपटमांतकरेतप वाहरकोपटभांतपसारे । पाठअवस्यकसुदकरे पटरुत्तविपेशिव कारजकारे । तेमुनिकोयसदेवकरे पटरागसरागणिगीतविथारे ॥ ९१ ॥ सूपमसूप मतेपटभांत किदूपमदूषमतेपटआरे । कालकिभेदकहयुत लपलेशछहूंरंगरीतवि थारे। जानहैपटग्रंथनकामति वेदपटंगलपेगुणधारे। तेमुनिकेपगसीसघरे पटपंड पतीगुणग्रामउचारे ॥ ९२ ॥ दूतकृपादिनिधकिएनरकावल सातकुत्राससुनाया।

सातनपालपनिश्चलमातम सातभयानकतेनडराया। तेमुनिकोयसदेवरतीस्वर सात MY ग : सुरारयमंगलगाया । सातन्त्रणीयुतदेवपती तिनकेपगऊपरसीसछुहाया ॥ ९३॥ सातहिराजप्रमान प्रधोजग सातमहीतिनकोरिपवोले । ऊरधलोकसुसातहिराजकु तेपिरखामुनिराजफरोले । प्रोडकसातहिवारअराधक संयमसोशिवहोइअडोले। सातहिवारसदानणमो रिपजोसमझायमिटावनभोले ॥९॥ त्राठनहीनलाठग एमदपाठहिकर्मसुयुद्धमचाया। आठरुगुणसिदनकेवस आगममातगहीसुपंपाया अष्टविभक्तिसिद्धतउचारत अष्टदिसाजनसेवनाया।संपताठकरीगुरुंराजत आठ हिजामगुनीगुणगाणा ॥ ९५ ॥ अष्टमहागुणधारतजेगण पाठनमित्तपछाननभापे अष्टमहापरदसविषे घिरसम्यकप्रष्ठगुनीगुननापे । इंद्रविरांगणअष्टमिली तिनके जसगीतफरेरसपापे । अष्ठसुसिलहेनरसो मुनिराजकुजोउरअंतररापे ॥ ९६ ॥ नापरतारपागंयपदे नावामागेनवमम्पमाजाने.दोनिन- समसाला हेनयतत्तवपाने । नौरसकीजगरीतलपी मुनिटालनदोपनवेजुनिवाने नौग्रहसेवनले मुनिकायसनोविधनाथनवेगुत्तमाने ॥ ९७ ॥ सर्पनमैउतसपनमैनब अंतरसाहार फेरिपहावे । ताहिहणहरिदेवमहाजस राजभीतकरेसुपसोये । तानवकेनवभ्रात महावल संयमसौगनिउरधढो । तेमुनिकीउरगादिनगण देवभलीगुणमालपरोवे ॥ ९८ ॥ त्यागपरिग्रहकोदसधादस धर्मधरेदसनेमवपानी । मानवायुदसादस जानकहेउपदेससुनेदसप्रानी । ज्ञानदसोदिसफेलरह्यो वरसीलसमाधिदसोविधठा नी। जोतिकभीनपतीतिरजंभक सेवनपूजनइंद्रविमानी ॥ ९९ ॥ पापउदेनरकेदस धातुप जीवसहेनहिआशयकांको । पुन्नउदेप्रगटेदसधासुप कल्पतरोवरकोजुगलां को । साधदसांगभलीकरणी शिवपावनवापदऊचसुरांको । फेरदशांगमईनरकोभव प्रोडकसिएकोयसतांको ॥१०० ॥ आगमगइकादसभाखण श्रावककोप्टतमा प्रगटाई । ऊचविमानइकादसही शतजीजनआवतहांजिनपाई । संयमसाधु-अनूप साधु गुण गाला नरोकनहारविनासी । मोहमिटायतथाअंतराय हणेचतुघातककर्मजुत्रासी । कवलदं सननानसदाथिर लोकत्रलोकपदारथभासी । सक्तिसभीजिसमाहिमहापद पूरणन मसुछंदविलासी ॥ ११८ ॥ ओडकदेहउदारककी निहकेसनरोमनहीनपवाढे। तनहीवलपाक्रमकासुप कोगुणकोकरुणारसगाढे। दोपनहीजिहमोपभयोढिगजीवन प्रथमहारसठाढे । तेप्रणमोअरिहंतप्रभूभव सिंघपरेजनकेतककाढे ॥ ११९॥ सर्व मईप्रभुसलपीजिनसर्व सिरोमणिसर्वसुव्यापी। आतमरामअनावउत्तम प्रोडक साधुनगाधप्रतापी। निश्चलचित्तनिबंधनिरामय नाकपतीप्रणमैस्तुतथापी । कर्मनि वारत्रियोगतजे शिवमारगमाहिचलेवलनापी ॥ १२०॥ सर्वमुक्ताक्षर ॥ घणाक्षरी वंद ॥ कनकरजतपनरतनजडतगण सकललपणरजसमसतजनवर । हयगजरथ अटवलगणसहचर सकलतजनगड वरननमयघर । बनवनवमनरमंगसतगतमगर्भ राभयदरनचरगन्नघरजहर । उरगमरनर करनहरपजस जयंजयभणभवजण

माला
वरजसकर ।। १२१ ॥ मनहयवसकरतपनअनलमथ मदगजदलमलकपटसरपहर ।
लव ठगपकरतपटकपटकवत मरकटचपलकरणपणफडकर । रपवलयनलदहनवन
नाघुगुणा
मनमथपरदलदलनअनघभटहलधर । सवलकरमहरचडनयटलगड जयजयभणभ
वजणवरजसकर ॥ १२२॥ करमसवलभड अडनकठनगड लडनफडनपरदलव
लछलकर । सतजनपरमधरमदलवलधर चडनचरनतपभडवरवलधर । लडन
परसपरकरणसवलवलपरदलदलन दरसलपतपवर । परहरकरमपरमपदगडचड
जयजयभणभवजणवरजसकर ॥१२३॥ सकलजगतपर अचलमलवर अगम
अलपपद अटलकथजस । घरजलदहनपवनवनतसमय सकलअटकतज परम
सदनपस । सरपअमरनरकरणहरपजस वचनपरमरसभवजनदसदस । जगतरव
रहरपरमअनघभवभव नलतरवरजसकरहरजस ॥ १२४॥ कलसमालनी छंद ॥
अठदसवरपेचीसठेचेतमासे ससिमृगसितपक्षेपंचमीपापनासे। रचमुनिगुणमालामो

+ दपायाकसूरे । हरजसगुणगायानाथजीनासपूरे ॥ १२५॥ इतिश्रीसाधुगुणमाला हरजसरायकृत संपूर्ण समाप्तं ॥ शुभं भवति ॥ साधु गुण 'माला ॥२४॥ kAXRR" (RX)

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• व्या elbk देवाधिदे परचणा उपदा नधन सिवसा रमातमका भ हिचानमुदा घरभ भव का श्रीवीतरागायनमः ॥ अथ देवाधिदेवरचणा लिष्यते ॥ दोहरा ॥ सकल जगतपति पर मपद पूरण पुरुष पुरा न परम जाति राजत सदा सो चंदो भगवा न॥१॥वंदो श्रीरि पादि जिन वईमान अरिहंत श्री चंद्रान the नदेवथी वारिपेण पर यंत ॥२॥ श्री सीम दर स्वामिथी विहर मान जिन बीस बंदेह रजस भक्ति धरगावे गुण निसदीस ॥३॥ जिन जग ज्ञान प्रका सुपः 122221 रमेष्टमहा दियके हिलेप्रणमा दपंननको जउता ४ मोर सिमरो सकर मिथ्यातिमरमिटाय ।। भवजनकोशिवमगदीयोसोबंदोजिनराय ॥४॥ द्वमल छंदकमलबंधयुग्म ॥ परमेष्टमहापदपंचनकोपहिले प्रणमोपहिऊठसदा। परमारथ

भारतपदा
देवाधि
को जपंधव
१९५७
पदोपहल
भ्रममी
I
तह.
10
Letts
पिचपापनको परमातमको पहिचानमुदा भवसिंघजहाज उतारनको सिमरोमनमोव
रपंचपदा दिक्के सुप
के घरभव्वनको शिव
साधनको सुपदा हि
कदा ॥५॥ रिपरूप
वरं रिपधर्मधरं रिपर
दयुतं रिपभादि जिन
रिसमान पारिपन
परूपरे र्वहरं रिजपंथवह रि-
गदोपहरणं भ्रमभीत
हरं चितशांतकरं दुप
दोपहतं शिवशंकरणं
परम पुरुपारथ मोप
धरं प्रणमोअरिहंत
पदा रमणं ॥६॥.
समुतर्थिकरवर्षणं ॥ दोहरा ॥ श्रारजदेससुधर्मफुलराजवंसविष्यात । नरतन
विषमभसहितमातपितामभजान॥७॥ यजररिपभनाराचतनसमचौरससंठान।
पधर्मधर
चित
Letty

-
देवाधिदे
गरचणा
चक्रवर्तकेतेभएनिधरतणायतसाज ॥१०॥ परमउदारकतनावपेराजतश्रीजिनचंद।
सासोसाससुगंधमयवंदोपरमानंद ॥११॥राजरिद्वसुपभोगतजगहिचारित्रमुनिवेस
करतपसंजमकेवलीदेतधर्मउपदेस॥१२॥मतश्रुतिज्ञानमुअवधधरमनपर्यवरिपरूप ।
कर्मघातकीपयकरीकेवलज्ञानअनूप ॥ १३ ॥ अबढतकचनपअघटछविविपनलगत
सुभदेह । जघिन्नसातकरोड पंचसेधनुगुणगेह ॥ १४ ॥ समोसर्णपदमासणेची
तिसतसयसाथ । वाणीगुणपनतीससोभापततभवननाथ ॥१५॥ मानवसुरतिय
चजियभव्यसुनेचितलाय । निजनिजभापामाहिसभअर्थसमझसुपपाय ।। १६॥ चौ
रासीलपपुवलग । जचिन्नवहत्तरवाससूपमदूपमअंतधरदूपमसूपमवास ॥ १७॥
केजिनपगचक्रीलगैकेहरिबलवंदेह । मंडलीकराजेघणेसभजिनमजसुपलेह ॥१८॥
भर्तईरवर्तदसविपेविजयएकसौसाठ।जिनचक्रीहरिबलजन्ममध्यपंड श्रुतिपाठ॥१९॥

पथ परचत समदमपर Bel . -- देशाधेदे घरचा रमत जिनवर मनइ 12 जिहचक्रोतिहहरिनहीहारीढिगचक्रीनाहि । एकपेतविवहूनहीजिनहरिचक्रधराहि ॥ ॥ २०॥ दर्वभावविधगुणसहितदयाधर्मवितार । वंदोश्रीजिनपर्मगुरुसिमरेभव जलपार ॥२॥ अथ श्रीजिनमनगुण सवैया ३२॥ कमल बंध ॥४॥ परम अनघगति परम धरम रितपरम विमल मतप रम विशद अग परहर भ्रमसभ परस मुकति प सकलजग सजग जिय हित सतसुपचि RABAD तवत करमहरण रत अचल अमरनग अल पअमितनभजितमद मन मथ जिपवर मन रचतसमदम रसमुकतपथ समजग रपसकलजग नियहि रमअनघगति सतनप इमरमत नडग मग Ksheks रमविमः रमविशदभग रमघरमर ---.-- महासमसतहदसमरससलनायकाला सरपपरपनपसरपतापवनयसतगतम देवाधिद घरचा गवरसममतसतचित । प्रगटकरतसभसम श्रुतिअनुक्रमघरमसुविधदसदसतसहित मित । गरजन बनमयपिकधुनरसमयसभसरगुणधरजिणवरवचइत ॥ २॥ कायगु ॥ मनुजमुगतमयमलनलगतजिहमदननिकरजयमणिदुतजिणवर । मनुजअसुर सुरमनवचतनथिरमगननिरपजिहमनन अतुलकर । चिहनरुचरमयवरणसुछविजिह दरसगाप्रवक्षयरुजसुगणघर । रुधरधवलधरजिणवरवपुवरअमितसुवलजिहन मतभगतधर ॥ ३॥ वियोगीगुण ॥.करणकरणवसकरमसवलजितकलमलरजह रकरणपरमसुप । करणचरणविधकटणधरणनितकवणअवरसमकहितनिपुनमुप । अमित अतुलजसवरननसुरपतिपरमभगतउररचणघरमरुप। सकलसकतनिधपरम सगणयुतमनवचतनइमहरणजगतदुप ॥ ४॥ सर्वगाथा ॥२५॥ मत्तगयंदछंद ॥ आतमगुण ॥ जोजनएकमहादिवकेसममोदमहासुरजोगजहाहै । प्रादभएसुभनी दा मा वादि गरना देवासंपसुधाने ॥३४॥ चक्रपतीवरकेशवश्रीवलदेवमहानृपमंडलराया। भक्तिकरी चतुरंगचमूसजनादवजंत्रसमेतसुहाया । श्रीजिनवंदनपुछ्नहेतसमोसरणेपरिवार आया। तीनप्रदक्षणदेचरणीनमिधर्मकथासुननेचितलाया ॥ ३५॥ साधुमहातमसा धविकगणभावकश्रावकणीमुपमिष्टी । भव्यचहूंविधदेवसुरांगणपेचरपेचरणीसमदि प्टी । पुग्नंउदेतिरयंचतयात्रियासोभतधर्मसमागुणग्रष्ठी । श्रीत्रयलोकपतीप्रभुसुंदर सोभतमध्यसुधाघणदृष्टी ॥ ३६ ॥ जीवअजीवकुपुन्नकुपापकुत्राश्रवसंवरकोनिजेरा को । बंधकुमोपकुभापतहेश्रणगारअगारकिधर्मधराको । सर्वहिजीवकिठामगताग तिनायुक्रियाचितभावगिराको।भोगसंयोगवियोगसभीजियकेप्रभुजाणतपर्मपराको ॥ ३७॥ दानमुसीलतपोयुतभावचहूंविधिधर्ममहाफलदाता । मोपकरैसुपस्वर्गभरै नरलोकविवहरिद्धमिलाता । नारा । 77-hinarar गरना मा रिघणेमपभोगतजंगहिसंजमवशा। श्रीजिनसासनमाहिभारिपछाडदिएभवभारक लेशा ॥ ३९ ॥ जासप्रसादभगएरसिमविमान अनुत्तरमाहिविराजे । देवभलन्ग्रहिमि दभागवदभागरिंदमहाविछाजे । देवगुरूपदवसमाणकलोकपतीपदवीगुणसाने चक्रपनीवलकेशवभूपमहाधनरिबलाई जगगाजे ॥ १० ॥ जामप्रसादफणीगजाम गनाहरबानरपोरकहेहे । दादरपचरभव्यघणपिछलेभवजातपठान रहेहे । भक्तिभ पसभभावकरीतपस्वर्गकिभोगविलासलहो । भोगभलेजगलाजनकबहरि नरिंदध नाढगह है ॥ ११ ॥ वेदपुरानपढेरचयजरिमायकिदेवमहापदपाए । बादजगुरुभा नकवीहरवारदमारदकंठकहाए। विप्रपतीपरवर्जकगजतायप्रभूति गहाविसमाए । देपानापलंगचरणीकुछ प्रकरीसममगाए ॥ १२ ॥ वेदपुरानकिधारकहेइत हासकहे गभवेदकजाने । पाठहिनंगनमित्तलपेरचअंगगुणवहभागपछाने । कोशध ।

देवाधिदे । वरचसा रेवहुशब्दकोसाधानयुक्तिकरैबहुछंदवपाने । न्यायकोरघणीविधपंडत श्रीजिनजीत लियचमभाने ॥४३॥ गौतमपंदकसोमलसेसिवरायरिपीशुकदेववपाने । याविध भव्यअनेकतरेभवसिंधजहाजप्रभूपगमाने । आपतरेवहुतारतहैप्रभुश्रीजिनदेवजिनं दसुजाने । सेवकवंदतहेकरजोरकरोमुझपारदयानिधदाने ॥ ४४ ॥ साधविसाधुनि यानकियोजिनवीरछुडायराधिककीने । मेघकुमारगिरंतकियोथिरसारथसाथसंभा लहिलीने । याविधौरघणेजियकोजिनराजसमाधमहासुपदीने । सर्वजिणंदकरेइ महीनितसेवकबंदतप्रेमकिभीने॥४५॥ मानपलोपमसागरकोसुनचित्रसुदंसनकेचि तआयो । श्रीजिनताहिदिपायभवांतरदेवपणोनररूपदिपायो।पापविरागभयोमुनि उत्तमयाविधभव्यत्रनेकतरायो।तोडमहाअघजालदियोसुपदेवसिरोमनाथकहायो ॥४६॥ केशिकुमारकहापरिदेसिकुसंजतरायरिपोवनवासी ॥ सैनककोमुश्रनाथ - - ". देवाधिदे वरचा -11 फासी । श्रीजिन श्रीजिनके मुनिराजकरेउपगारमहासुपरासी ॥४७॥ धर्मकथाप्रति सुंदर श्रीजिनराजकहीसभहीसुपपाया । केनरनारिलियेरिपचारितके अनुटनलईमग आया । पुनउदेतिरयंचतथात्रिय श्रावककेसमदिष्टसुहाया। देवभएजगताप्रतिमोद तसर्वहिभव्वनमीगुणगाया ॥४८॥ भक्तिकरेसुरराजमहापटनाटकगीतवजंत्रवजावे अङ्गतहाससिंगारमहारससोभतहे करुणारसपावे । बीरमहारससाथसजेरससंतस मासरनेढिगआवे । धर्मसमोसरणे अतिमोदमहानिजराजिनराजबताये ॥१९॥ ॥ दोहरा ।। सकलजगत परद्यालप्रभुसकलध्यानभगवंत । बंदोश्रीजिनपर्मगुरुजिह ढिगकरुणासंत ॥ ५० ॥ त्रादिश्रनादीरीतसुरकरेभक्तिउतसाहि । रागद्वेपतेरहितप्र भुसर्वदर्वत्रनचाहि ॥ ५१ ॥ भवजनपावभक्तिफलअघपयसुकृतबंध । इहभवपरभव सुपलहेजगेवोधमिटबंध ॥ ५२ ॥ भक्तिज्ञानविवभांतसुलहैस्वर्गसिवपेत । तिहका रणरचणारचीनिजातमकेहेत ॥ ५३॥ मत्तगयंदछद॥ श्रीजिनदेवमुनीसकिदंस - " परचा "आवतदेवपतीहरिपाई । सुंदरयानविमानविपेचडसाथसभीपरिवारसज्ञाई। तीन प्रदक्षणदेचरणीनमिधर्मकथासुनप्रीतलगाई । फेरनमैकरजोडरचैवरनाटकगीतमहा देवाधिदे चतुराई ॥ ५४॥ सिंहाविलोकनबंद ॥ यमकाअलंकार ॥ सोहेसुरराजराजसं ॥ १२॥ पतयुतयुतदेवीगणदयय। जिनवरपगबंदबंदणाकरकरपेप्याघरसुभभक्तिकरे।दाहण अजकाढकाढनिहतेवरदेवकुमारअनूपधेरै । कुमरीबहूरूपरूपजोवणनिधवामीतेसुर प्रादकरै ॥ ५५ ॥ किलगीसिरमुकटमुकटमालायुतमालगलेमणिमोतनकी । टीकावर भालभालसमणिकीमणिकुंडलछविजोतनकी । बैंसरवरनाकनाकवासीसुरसुरतधार आभागले । भूपणभुजहाथहाथपगअंगुलकटसभयंगउपंगभले ॥५६॥ गंधतव रवरणवरएवरणोकेवर्णयोगपटकंतछवी । लेपणसुभगंधगंधमुपसुंदरसुंदरवपुझपकेतु दबी । घमघमघुमकंतकंतपगधरूनेवरछणछणकारकरै । गुंजत अभिमालमालती AAAXAR देवाधिद वरचा महापालामलपलपलकातककोनुकांवेधनरलोकभई । नरसिंहपूरपूरसंपत्तिमउत्तम झालरभेरतुरी सुरगणउलसतसांतसंभकचितचितमोजिणवरभक्तिफुरी ५८ मनवचत नसुद्धसद्धविबलोचनलोचनरसजससुद्धाहे होवेसुरभक्तिभक्तिप्रतिउरधरधरचरणा सिरमोदलहै । साजवाजंत्रजंत्रवहुविधकेवहुविधगीतसुरागगहे । सातोसुरतालताल काबाजवाजेमादलमोहरहै ॥ ५९॥ गावेगंधर्वसर्वस्वरपूरणपूरणविधगुणग्रामकरे नाचेनटदेवदेवरचणारचरचनाटिकनटरूपधरे। घंटाघणघोरघोरघणघटर वरवटोल कवरढोलरमै छेणेछणकंतकंतधुनछननछिनछिनप्रभुपगदेवनमे॥६०॥वत्तीसोभांत भांतभांतनकेनाटकस्वागअनूपकरे । मावसभरागरागनीसंयुतसंयुतमुरछाग्रामधरै। देपेजिनचित्रचित्रनानाविधनानाविधमुररिदठवे जिनवरसवग्यसर्वदर्शीप्रभुप्रभुस माधिथिरचित्तभवे ॥६॥महिमाइहिदेपदेपबहुतेजनजन्मसफलमनमानरहे धनधन धनदेवदेवललनाधनधनजिनभक्ताप्रेमगहै । जयजयजयकारकारणेशिवपदशिवपद - " र देवापद घरचा थावनहाभणे । हरहरत्रगपुंजपुंजसुकृतगहिगहिजिनधर्मपुनीतवने ॥६२॥ कीरत रचछंदछंदयुतभूपणभूपणसजसुरकंठघरै । केतककरजोरजोरकरचितकोश्रीजिणवर कोध्यानकरै। मुनमनगुणधारधारसंयमतपतपतमेटचितसुदाए । तुरनीरसंसारसा रकेवललहिलाहपदमोपत्रडोलथए ॥ ६३ ॥ जोजनमितपतपेतदिवसमजिहसुभस वदाादकप्रादभए । फुल्लनटेरढेरोपघरजगंधधूपसुपदानथए। पटरुतसुपदेवदेव दुदभिधुनमंदमंदसुभवायचले । प्रभुके उपदेसदेसदेसोकेसुरनरतिर्यंचसुनतमले ॥ ॥६४॥ सिंहासनरत्नरलमयऊपरप्रभुअनूपतनसोभरह्यो । छत्रोतमतीनतीनजग प्रभताचामरशकईशानगह्यो । भामंडलजोतिजोतकीजीतकतरुअसोकयुतरिद्धजहा राजतगुणऊचऊचनभभेदतलयुसहंसयुतकेतुमहा ॥६५॥ मणिमयवहुवर्णवर्णवहु मिथतधर्मचक्रगरजाटकरे । उत्तमजयवंततधुनसुनकरवादीजननितपायपरे। केते Xxxxxx । निराणपराया गयादाटरटमनमाहनपुप्पटष्टदलस्टभला दिसादस उद्योतहोतनिसवासरगमनागमसुरसंघमिली । चिंताभयरोगसोगदुष्ठाअमछलभ्रम इमअघहोरघणे । इहिहोइनकोइदोपतिसमंडलसमोसंरणजिनराजतणं ॥६७॥॥ जिनवरचितशांतशांतदसयतिवरवरमंत्रीकरुणागरजे। सेनापतिवीरवीरद्वादसतपवर समोसागसिंगारसजे । सुरगणवनभक्तिभक्तिजवपविहासमहारसताहिविपे । प्रगटे सररिवरिशमुशिलब्धताहि अद्भुतरसदक्षलिपे॥६८॥ दानवसुरसाथसाथफणगुरुडेसुक सीचानकपोतघणा । गजमगमृगराजराजतेसीतलजिनवरउपउपशांतमना । इमद मवहजातजातजीवनकीरलवेठेनिरवेरभए। अद्भुतरसजानजानजिनदेपनश्रीजिनरा जालपगए॥६९॥वाणीउपदेसदसणाअद्भुतअदभुतरसतिहमाहिथया । इकइकस ब्दार्थअर्थसंप्यानहिश्रुतिदेवीजिहवासलिया। सुनसुनजिनवैनचेनभवजनचितसुधा पानरसचायपिया। जयजयजिनराजराज अविचलजिहजिहागनरचनदेवकिया ७० देयाश्देि वरचणा यातमरिपमोहमोहकीसंततजन्ममर्णदुपहानथया । तिनकोवलपंडपंडचूरणकररु द्रमहारसकाजकिया । तनतेसबदसर्वविठासमसमझताहिचिभछाडतहै । हिंस्या दिकदोपमोपमगघातीताकोभयरसराजतहै ॥ ७१ ॥ पाठोरसरूपरूपअपनसुशां तरसेस्वरपासरमे । साधेसवकाजराजरचणारचपायलागवहुवारनमै । सोहेरस शांतशांतरूपीचितचितजिनवरकेमाहिवसे । जयजयजिनचंदचंदत्रिभुवनकत्रिभुवन फेवलज्ञानलसै ॥ ७२ ।। तुमसमनहीसूरसूररिपमर्दणहरिहरंविधनाहोरघणे । तव गुणगणगणतगणकलिपलेपकथकतसेसगुरुकोनभणे । हैप्रभुजगदीसदीसनिस वदादाभवभव श्रीधरजी । जयजयजिनदेवदेवदेवनकेकरकरुणाकरुणाकरजी ७३॥ भगवनसरवग्यसवदीप्रभुलोकालोकप्रकासमणी । रागादिककर्मभतेरहिते गमत्रगाधिपारमुखी। घनफनयनपातरातफतारेगिणेकोनजगमाहिगुणी । महिमा सरकार- देवाधिदे वरचा मूरततवपदपंकजपर्सणको । श्रावकमुनिछंदचंदसुभधर्मीधर्मसभातवदर्शणको । मेरे मनइछइछपूरोप्रभुप्रभतातवपरलोकभई आपणकरदासदासकोदरसणदेवोमुझमन चाहिथई ॥ ७५ ॥ दोहरा ॥ लघवुद्धीकेतेकहुंतुमगुणअमितअनंत । अंजलभैकेते ग्रहोजलनिधजलदष्टंत ॥ ७६ ॥ तुममातातुमतातगुरुसाधुसर्णकोठाम । दर्शणदे वोनाथजीश्रीसीमंदरस्वामि ॥ ७७ ॥ भवजलशिवपुरअंतरेसंजोगीधरसीम । श्री सीमंदरस्वामीजीजहावसोदसभीम ॥ ७८ ॥ अहिगजकेहरचोरतेशिषजलवनरण रोग । व्यंतरमानवदूरभयसभहीहरदुपसोग ॥ ७९ ॥ निश्चलचितसिद्धांतरसवि नरहिततवसेव । इहिभवपरभवधर्मरुचरहोमुझेसुणदेव ॥ ८०॥ मत्तगयंद छंद ॥ कोउभजेहरिशामविरंचहिइंद्रससीसवितापितरांको । शेसगणेसशिवादुरगाजलपा वकवायुरमाइतराको । जक्षसुरासुरनागघणेजगनायकशक्तिअनेकधराको । सर्वति उत्तमतारकश्रीजिनसेवकसेवनशांतकराको ॥ ८ ॥ दसनवंदनपूजनसेवन श्रीजिन देवमंगलकारी । कीरतगारगम्यानलगापनरूपदिपापनमगुणभारी। जोनरनारिसु रमणादुपदोपहरसुपशोतभंडारी । जैनजवाहरपापतसोजिनपुनरिएचितलापत्र पारी ॥ ८२ ॥ दोहरा ॥ श्रीजिणवरगुणनिधनगमसुरपतिलहेनपार । नमोनमोज गदीसजीभवजलपारउतार ॥ ८३॥ नवरसरंजैतस्तोत्रइहछंदअनूपमनर्थ । पढत सनतिपतिहर्पवितशिवदिवसर्वसमर्थ ॥ ८४॥गीया चंद ॥ कलस ॥ श्रीजननाय कपेमदायकमुक्तिलायकपूजीए । गुणरतनागरज्ञानसागरसेवनागरहूजीए । पण साठसंमतसबठारहिचेततिथप्रतपदभणी । विधदिनकसुरपुरनमतहरजसदेहुप्रभु समतापणी ॥ ८५॥ इति श्रीदेवाधिदेवरचणा संपूर्ण ॥

: ANANJAMILANTAJANA
HDHINDI
अथ श्रीदनानागापारंगत ॥
Trinivividiyoxi
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"दाहरा ॥ TIT93717Tणनामातमारत देवरचपा ॥ १ ॥ ܐ जोगतेजाय ॥ १॥ देवविमानीजोतकीभवनपतीवनवास। चारजातबहुभेदसोंजिन वरकीयोप्रगास ॥ २ ॥ रागसाथसंजमकीएग्रहीधर्मवतपाय । बालतपस्याकष्टकर अरंअकामनिजराय ॥ ३॥ अंतसमेसुभभावसोंमानवअरुतिरयंच । तजसरीरसु रगतिलहैरमविपेसुपपंच ॥ ४ ॥ दयादानतपभक्तियुतपुन्नतरोवरलाय । सिंचभाव जलफललहैसुरगतिरससुपपाय ॥ ५॥ अथनवनामपुन्नवर्णनं । दोहरा॥ पान पानथानकवसणसैनदानविधपंच । मनवचकायासुभरमणनमणपुननवसंच ॥६॥ सुद्धवीजआछीधरणवीजनकीरुतहोइ।जमैपेतबहुफलकतिमसुकृतिफलजोइ ॥७॥ अणमोदनतेफलवधेनिंदनतेघटजाय।सुभकीकरणमोदणापापनिंदमललाय ॥८॥ ॥अथ पंचिंद्रयसुपकथन ॥ दोहरा ॥ नाटकगीतवजंत्रधुननिजकीरतसुनकान। तिइंद्रयसुपमनमगनपुन्नउदैफलजान ॥ ९॥ सुंदरवपुभूपणवसणरूपबतीसपेल XXXX कनकविविधमणिमयसदनागवंद्रपसुगमेल ॥ १० ॥ गुरामागपतरागपुपरी परतला नगरधूप । हिमहिमाशुलेपनविविधघणयमपरूण ॥ ११ ॥ उनमगरमilarर ससूधापानररात । पुराउदेभोगे अगरभाषेत्रीभगत ॥ १२॥ गुगरापररातिमपि पाकेटदपटसेजगुपोन । गुरसफसेबंद्रयरंभेलोपुनगिनकोन ॥ १३ ॥ गगगुगरा दाप्रमादतावपनाविलासाहलारा । चलनामगदुगणरहितगायासुपरमारा ॥ ११ ॥ जोगिंत्र यमयविपरागुपसरभोगदिषपेत । मुणिriftaशिवाजिनमारास ॥ १५॥ मत्तगयंद छंद ॥ उसमरामसाधरा रागरागगनगिमातगा। मेरा उत्तीमुनिसवफागकाउरामसासुरकल्पगए । मध्यमभेदकारीतपदान निभ माहिथएहै । कटनकामसभापविमरदेवजचिन्नफिवासलाहे ॥ १६॥ करकंट कपंकरजादिफनोपत्रायनशोकनही । पतनपरिषशनरनारफिनोयि लिं यरेय ... 7 दवरचा सरयाविधयाजिनराजकहहि ॥ १७॥ भामभलावरुणादिचहूसुभादव्यसुभानाव मानप्रतापी । रक्षलताकुसमाकरकाननदेवरमैसुभरूपकलापी । सीतलमिष्टसुगंध तनीरभरीकमलायुतकेतकवापी । सैलसरोवरकेतकदेहरयारचणादिवमैविधापी ।। ॥ १८॥ तप्तनसीतलविघ्नकछूतिहवरमाहिविकारनकोई । मारतमंदसुगंधमईजि हरुत्तवसंतसदामुपढोई । धामलगेनगसूरससीकुजसोममईजकवीशनिहाई । पुन्न विपाकरमैदिवमेसुरश्रीजिनभापतनिश्चतसोई ॥ १९ ॥ ऊचविमानदिपैमणिमोतिय वर्णवितानअनूपमुहाई । सब्दमनोहरदुदभिघटणकोवरनाटकगीतरिझाई । गंधज हावरमालप्रसूनसुंगंधतचारसुधूपधुपाई। भोगविलासविपे वविधागतिश्रायुनजानत पुन्नकमाई ॥ २० ॥ थंभघणेनगहाटककेमुकतामणिकंचणगुंथतजाली । क्रांतमणी कविसीसनकीवरकेतुपताकमसाथविसाली । भीतवचित्रसुचित्रमईवलसिंदपुरीनृत कोतिकवाली । ताहिविपविविधासुपभोगनपूरइंद्रयपंचरसाली ॥ २३ ॥ गर्भनसे घ परचा ।४॥ जविपेउपजेतनपूरणएकमहूरतमाही। गंधतस्वासकरीटसुकुंडलहारसुभूणसोभतबा ही। अस्तनरक्तनमासमईतनरोगजरानंगहीनतनाही । फूलकिमालसदाविकसी सुरनाकविपेउलसंतसदाही ॥२२॥जोबनवंतसुभंतसदामनवंछतरूपसुवैक्रियसाजे नींदनहीपलकानलगैनहियालसप्राक्रमवंतसुछाजे । कौलनहारनहीमुपमेलनवास गलैत्रपतेअतिराजे । पुनमहातरुकेफलभोगनलिंगत्रियापुरुपाविववाजे ॥ २३ ॥ भूमहेनचलेनभमेअतिपिप्रगतीमितकौनपछाने । कारजसिद्धकरेमनकेवलोषध रीतिहुकालकिजाने । एकतिकाढनेककरेतनतेवहुभांतकिकौतिकठाने । पुनकिये फलभोगतहेसुरयाविधश्रीजिनराजवपाने ॥२४॥ वीरजरक्तविनारसमैथुनस्वेदनपे दनहीजिनपाया। मैलनहीश्रुतलोचननाकजिभातनकीनहिदीसतछाया । लेपममूत्र -----Mauचउदिव गाभार परगागर बनाना MEIN | जिनपिनरामध्यगादगदगंपरालाकमुनी ।। २६ ॥ गलरारीरमान TIাচগ। সংনগাণিপিংমিশ্মিাণকাজ रेगा। भूलनिसपममपर्मगुरुकोकभाव नपारदिया । चित्तलासकलोलकरेगर गीनमुनाटकाताईयया ॥ २७ ॥ भूमपहारसिपीजलकाननसर्वविषगतिराकनकोई घरजानपनालधरीतिसंप्रगटेमुझेपेसरसोई । जनफिदेहप्रवेराकरेनिरजीवविषेध सनीयसपाई । समानेकालनिपगाकर पुनसरोवरको फलना ॥२८॥ वाहनदेवणा कंगनगायसिंहारंगवायामहिपंगी । मारमरालमणीगरुडामरकणकेपरवानस रंगी । श्रीरघणीविधरूपधरमूरभूपणाखसजीविगी। यानविमानचदेवासोभत भाप लेनपतीसरवंगी ।। २९ ॥ वित्तरभौनपतीसरनोतिककापत हलगहोवनदेवी । तांनिगमागमनठमलोमग प्रयुतलोपलगेरसबनी । श्रादिकिकल्पकिमोदलहेविपमे " ११५: ४fail यामामामाविषमुनिभापतहजिनागमसेवी ॥३०॥ ifitfmaithi/ मकायतंदवी । रूपनिधीरतिकेलविधीगुणधाम Arthun Nirmiगलीयसीमनसोहममेथुन सेवी । कामवली Inm.inhgirineी ॥ ३१ ॥ कामविकारफुरसुरकोजवकोऊरमे 'wwyatriviltit patniगंगकीदरमगणकावरणीसो । वैक्रयकीरचणा Primammimiri । पानिधभोगविलासकरसुरशक्तिलईअपणीकर wivil in II सिमापानगभाउपजेजिहमाही।होतनलंकृतदू Intimalsifracाही । ज्ञानमालाविवसायसभाजिहपुस्तकरत्नविरा Huitmगारमिलगिइनाममुधर्मफहाही ॥ ३३ ॥ राजसभा InInMICRuamsutr पराभी । मायामशाननिशारामाय रेश्वर xit । 3 नमाना ॥ ३२ ॥ गजभिगिनानगलबलत्रातमरक्षापहंदिराधा गेनाणटारमगाटारी । रामयणनिधगखराजगुणचा रामाननपरिचारी। मकिरीनिजनामकिपामसदाहिनकारी ॥३५॥ मालिनरागम्माभियोगी । त्रिगलेइममध्यमकेतिनने गुर मंगकिकरमानी निवासीनहलहामगिलामदिपावनजोगी । दवसभा दिवमानापरवाधिनपानहानी ॥ ३६ ॥ मानवतकर्षभदिजिनारंगध मायामा । मारनागाविषगायगभानुभयानकमाही । धर्ममहा गमनागमनाना कामगार करेसरवाही । औरतहाअटकाउनही मरकामकलोलकरे निवास || 30 | असत्राणीगजवाहनकीरमधुनकीमरपायकजाहे । पंचमगो मा:igणी गुनमोहः । पटपगीतकलार मगरनसानमनाटककेरस it | गाणीमदापनसमजेनगन गिन नागमटोह ॥ ३८ ॥ जसलोकतिउ ग प न +mum दवरचणा रधकसुर ऊरधचालविपेअतिगामी । देवपतालकिवासककीअधुमाहिमहागतिभापत स्वामी । सातत्रणीविचपंचकेसुरऊरकेटपक्षाध्वुजनामी । हेठकिदेवकहेमहिपाध्य जजैनकिवैनमहासुपधामी ॥ ३९ ॥ वितरभौनपतीवहुऊरदजोतिकत्रोधवडीतिर छानी । देवविमानअघोदिसकोबहुऊपरआपनकेतुलगानी । औषजपिन्नवनभवने उतकिटन्ननुतरपंचविमानी । दर्वतिपत्रतिकालतिभावतिभेदत्रसंपकहेजिनवानी। *४० ॥ कल्पदुहूंसुरआदिमहीअगलेविवदूसरतीसरहीइम । सातमाठमहीचहु रतपंचमकल्पपरेचहकेतिम । पष्टमिपटकहेअहिमिदकिसातमतीनपरैतिनकेजिम हेठसभीकछुऊणअनुत्तरचारकिपंचमकेसभीपिम ॥ ११ ॥ वितरजोतिकइंद्रनतेभ वडीथितधारी । तांतिमहाबलप्राक्रमरिदविमानपतीवरइंद्रविचारी। चौस • वरऊरधश्रचुतइंद्रदिपैगुणभारी । सोजिनराजकिपायलगैकरजोरनमेस्तव लेकपती रुजीश्रणानीधिपतीअभिजोगी। अंतर र ठाकरलागी। यारचनासुरकल्पलगेउपरे अलिमिदमहासुपभोगी ॥४३॥ एकसुसब्द देगरपणा ॥ १॥ अनंतसुकर्मकिप्रसंपपावनवितरबंदू । दोधरणादितिहुंअसुरंदचहुंग्रहतोसतपंचरविं द । एकदुनय चनुकल्पटुगेदुगपंचसहसचहुंकल्पिदू । लापदकोदुतहीचतुपंत्रयये त्रिकचोदिवगंतत्रनिंदू ॥ ४ ॥ रतिटनअनंतगुणामुपदेवजधिनतेवित्तरबंदा । तांतिवटाधरनादितिसो असुरंदतिसोगहतोरविचंदा । कल्पटुगेदुगअाठमलोचतुकल्प सुराजकत्रयग्रहिमिंदा। चौविजयादितिसोलवसत्तमगासुपभोगनवेनजनिंदा ॥१५॥ चौसटइंद्रधनुनरकेसुरभीजिनसासनबोधकदया । छप्पनगोकुमरीजिनजन्ममहोस्त वकीकरणीसमसेवा । यापदवीसभपावनहारलहेजियमयअभवनलेवा । भव्यत्र भन्नदुहविधकेसुरभाषतसाधुमहाश्रुतिभया ।। १६ ॥ भन्यजिनागमवाकसुनेचितप्र उठेचरचामनलाने । सम्यकवोधलहेनरहोस्तधारचिंद्रूपकिजोतपिंडावे । स्वर्ग .

विमानविपैसुप जतमानवहोइमहामगधाये। केवलपायभवेशिवपूरणसम्यकवोधन भव्यनपावे ॥४७॥ जीवअभव्यकठोररिदाछलछिद्रम्पामतिअंधगवारी । सम्यक देवरचा चांदनज्ञानमहारविसैलगुफातमीतविकारी । आगमअंगअनिष्टलगैविपरीतविपे चितकीरतधारी । मोपकदाचलहेनरहेजगहैभवसागरकोअधकारी ॥४८॥ भव्य अभव्यसमासमदिष्ठकिसुल्लावोधकिदुल्लभवोधी । अंतभवीविनअंतभवीपरजापर जापतिसीतलक्रोधी।देवअराधिकारविराधिकवरनिवारकनित्तविरोधी।धर्ममतीन घधादुविधेसुधसाधुवपानतेहैअतिसोधी ॥ १९ ॥ ऊरधमद्यपतालविपेतिरछेबहुवा रधदीपनिवासे । विधसोगुणतीनमईसुरतीनहिकालअनंदहुलासे । सम्यकमिश्र मृपात्रिविधेचितभावमईत्रिदशापरगासे । पदभापकत्रैभवनेश्वरवाककहै सुनियोध सम्यकांतसज्ञानधरीजिनमारगरीझरहेहै । साधुसुथान ॥22॥ किरामसंगतितेसमतागाहित्यागमणामतिधर्मगलेहे ॥५१॥ एकसदाथिरचित्त सुशांतिनिछतउत्तमभागरमंते। एकनकेरितचाहिलगीरतिकामकतूहलफासफसते । एकगंभीरप्रलोलविचक्षणएकमहाचपलातिहसंते । वछत्तवंदनपूजनकोइकदेवनहीं सहचाहिधरते ॥ २२ ॥ एकनहीप्रतिसीतलकोमलमिष्टसुगंधमुउजललेशा । एक नदेवनकेसुभपमछवीउरअंतरभावनवेशा । सुंदरतेजसरूपभलीविधकेतनकचित। जताशा । तीनभलीसभभावमईवरणाजिनराजसुधर्मधरेशा ॥ ५३ ॥ एकनदेवनके घटनंतर दुष्ठमतीअधिकारकलेशा। हिंसकभावकठोररिदाछलछिद्रधर्ममईउपदेशा सापरुतप्तमहाकटतीपणपोलहटीफलगेजिमतेशा । नीचकुगंधकुरूपमईअतिकालछ वीदमकालकलेशा ॥ ५४ ॥ एकनदेवनकेदुरबुददशादपदायकनीलम है। एकनके उरदंभदशानघलोभसमेतकपोतयहि । तीनहिनीचकहीवरणादिकतेवरुभावतनी चईहे । मूलमईवरणीप्रशुएकसुएकविपेपटभांतमईहै ॥ ५५ ॥ वर्पहजारकहीदस २॥ आयुजधिन्नयडीतवतेतिससागर ।मध्यविपेवहुभेदअसंपकहैजगदीसंसुज्ञानउजागर देवरपणा त्रायुवडीतिमहीदुतिशक्तिगतीवलप्राक्रमत्रोधगुणागर । वैक्रयवुद्धविचक्षणतासुपत्रा दरारिदलपोमतित्रागर ॥ ५६ ॥ त्रायुवडीगुणतेअधिकेइकएकवडेपंदवीगुरुपाई। अंतमत्रायुलईसुरतेइकनूतनरिदलईअधिकाई । सम्यकधर्मकरीअधिकेपरिलोकल गैजिहधर्मसपाई। सर्वगुणेअधिकसुरउत्तमहैसरवारथसिद्धसहाई ॥५७॥ इंद्रयपंच त्रियोगमईदसप्राणमईत्रयज्ञानत्रिदंसी। चारकपायधरीपटलेसकिएकसंठाणसमोच उरंसी। दूसरकल्पलगेकरसात्ततनूतिनऊपरघाटघटसी। श्रोडकहाथतिघाटअनुत्तर महिजिणंदकिचेननिसंसी ॥ ५८॥ भूपलगैजवदेवनकोतवहीसुभगंधमईरसवाले। उत्तमदर्वकियासनलैकरतृपतिकरैचिंतरूपरसाले। त्रापुजचिन्नकुएकदिनंतरवर्पसह सकिमागरनाले । पकिनंतरभेदघणीविधजेनकिनमहाधमटाले ॥८९ ॥ उत्तम 3 भीसरलये । उत्तमनीचदुविधकहिलेतअहारगणीसुधदेवे । सर्वविकारमिटेसुरनि चलसोप्रभसिदसदाकविसेवे ॥६० ॥ चाहिनहीगमनागमनेकहुलब्धनकोदनन्छ नरना ॥ १३॥ पाई । कामविकारकुनामनहीनिहराइविवाद उपाधनकाई । साथसंयोगवियोगन हीजिहसीतलावसदाहरपाई । पोहलहीरवित्रादिअनुपममध्यरमेनहिमिदगुहाई ॥ ६ ॥ जोअतिततिभाएनहिचाहतभोजनतोविपयादिनचाही । तुष्टमहासुखमेपर मोदलहअाहिमिंदरहेनिजठाही। चाकर ठाकरकोइनहीभयवर्जमुछेदकहे गुणग्राही ।। हादसकल्पकिऊपरराजतयारचणावरणीशिवराही ।। ६२ ॥ पंचअनुत्तरमाहिसदा थिरसम्यकदृष्टमहासपकारी । हेठनचेपुरमाहिदुधामुरसम्यकवंतम्पामतिधारी । जोजिहदृष्टसदाथिरसोहनमिश्रदशातिहनाहिउचारी । यारचनाअहिमिंदपदेजिन राजकहीगणधारविवारी ॥६३ ॥ जोमहिमिंदतणेचितमाहिउठेजवष्णतदुत्तरभा वाजोजिनकेवलिकोघरध्यानरिदेविचप्राणकरेमनलाये । केवलिधाररिदेविचउत्तरदे म देवरचा ॥१४॥ तसुज्ञानकरीसुरपाये । श्रावनजावनरीतनहीनिजठामरहैचितमैगुणगावे ॥६४ ॥ देवविमान अनुत्तरकेचितउत्तमसम्यकत्रोधसुज्ञाने । दर्वअनुत्तरभावअनुत्तरागमवो धन्ननुत्तरध्याने । पुनअनूपसभीसुरऊपरन्नागममैनवजन्मसुथाने । सत्तसुभावदया लरचेशिवसाधिकहैजिनवैनप्रमाने ॥६५॥ सिद्धभएसभअर्थजहासरवारथसिद विमानकहावे । आयुवडीउतकिष्ठतथासुपसर्वसिरोमणिदेवसुभावे । एकलहेभवमा नवकोयहुरिदलहेफुनसंयमपावे । केवलज्ञानलहीशिवपायकिसिद्धभएजगफेरना वे ॥६६॥ पंचमिसंपत्रसंपचहुगुणसंपकहेअहिमिदनवांके । तांतिप्रसंपगुणेकल पेतियसंपगुणीविवकल्पसुरांके । तांतिप्रसंपगुणेभवनेतियसंपगुणीसुअसंपवनाके । वितरनीसुरजोतिकजोतिकनीगुणसंपतिसंपसभाकै ॥६७॥ जानतहैइमकालसमा 864 aaiनिरीघोरी।

वरचपा १५॥ उ वलवंतकिफेरी॥६८॥तारिकुरूपचलेतिहुकारणवैक्रयदेवकरेजवकोई। मैथुनभोगकि भोगनतेअरुठामतिठामचलेजवहोई । देवकरेविजुलीदुतिगर्जतवैक्रयमैथुनमेवलठोई। साधुमहातपकोअपनावलप्राक्रमारददिपावनसोई ॥६९ ॥ आवतहेइतिकल्पलगे जिनराजमहोछविकारणदेवा । बंदनपूजनपूछनकोमुनिकेतपकी महिमालपसेवा । मोहकरीलपसाथपुरातनवेरकरीरिसरूपधरेवा । मैत्रराधनध्यानयानरलोकवि पेसुरप्रादभवेवा ॥ ७० ॥ देवभएततकालचहेनरलोकमित्रावनायनसके। तिलोकपदारथमुर्छतकारणतीनसुनेगुरुके । प्रेमभयोउतलोकविहितहटगयोइतते चितच के । जाववहीकुछकालरहीइमचिंततकालगएबहुतके ॥ ७१ ॥ देवसहमु साथभयोललनाजनमाहिमहारसपाई । मानवलोककिकारजकोचितचाहिमिटीथिर तातिहाई । घोरकुगंधपावनहैनरलोकइसीलपचाहिमिटाई । याविधावतना हिईहासुरकारपतीनसुनोचितलाई ॥ ७२ ॥ जोहुयमुर्छतावनचाहतसोतिहकारण देपरपणा निश्चितप्राये । जासप्रसादलहेसुरसंपतितेगुरुपूजनवंदनघावे । घोरतपीमुनिदुःकर कारकतेमुनिकैगुनन्यायदिपावे । मोहिरह्योजिसमातपितासुतनारिंजनादिकमैहित लाये ॥७३॥ तीरथनाथकिजन्मसमैरिपहोवनमैत्ररकेवलपाए । लोकउद्योतप्रमोदम हासुरसंगमहाससिंगारसुहाए । देवकरसिंहनादकतूंहलहासविलासहुलासवढाए । चेतकरक्षचलेइहिलक्षणचित्रमहारसस्वर्गदिपाए ॥ ७ ॥ त्रासनइंद्रनकेजुचलेतव श्रोधधरीतिहतेइमजाने । तीरथनाथमहोछवहैतिहजायकरोजिनभक्तिसुथाने । श्रा सनछाडनमैविधसोप्रभुसन्मुपहोइवहूसुभध्याने । फेरसिंहासनत्रायसजेनरलोकमि श्रावनवैक्रयठाने । ७५॥ पायकस्वामिवुलायकहैवरघंटणकोघणघोरकरावो । हो यतियारसुरेललिनादिकरिदसमेतप्रभूढिगावो । तीरथनाथमहोछविहेइहिवातसु स्वर्गविपेप्रगटायो । नाथकिसाथचलोधरभक्तिमहानिजरासुभबंधनधावो ॥७६॥ नतिधरीचिर मोदमहोग्यदेपणकारण ॥ .धनपुजनदंसदेपणअद्भुत देवरचा नहीजुतदेवदसोदिसतेसमकालचलेसुभचारण ॥ ७७॥ सर्वसुरिंद्रसमागमदेपणना टकगीतवजंत्रउमाही । अद्भुतवैक्रयरूपकतूहलहासविलासविनोदउछाही । नाथकि साथसुमीतकिनेहतेकेइलपीनिजराचितचाही । इंद्रनकीसिरत्रानधरीइमदेवत्रसंपस मागमठाही ॥ ७८ ॥ केइहसेगुटकेउछलेसिंहनादकरेगरजेघणघोरे । केइभिडेभभ केदवडेवहुवोलकरेउमगेचहुओरे । एकसुएकमिलेमुसकावतहासविलासविपेचितजो रे । याविध श्रीजिनराजमहोछविमाहिरमैसुरन्टंदकरोरे ॥ ७९ ॥ यानिसमातिकिकु क्षवसेप्रभुदेपउठीसुपनेदसचारो । सोमसुलीलतपुजनकेतुपतीउपायसुनायविथा रो । कुंजरगोहरिश्रीअजसूरससीधुजकुंभसरोवरसारो । पीरनिधीमणिरासविमान किमोनसिपाविनधूमउदारो ॥ ८॥ जाजननीजठरेप्रभुन्यावतत्रोधधरीसुरशक्ति लहेहै । भक्तिकरीप्रणमेविगसैविंतरादिकुबेरबुलायकहेहै । भूमिनिधानपुरानमहा धनश्रीजिनमंदरमेलचहेहै । सोतिरजभकुकोकहिकेपितसुदकरैमनमोदलहेहे ।।८१॥ दोहिलकारमनोरथमातकुपूरणहोतप्रमोदधरेही । जोविनदेवनपूरणहोततवेमुरमा देवरचणा यकिसिद्दकरेही । भोजनपानसुगंधभलेकुसमादिप्रभूग्रहमाहिभरेही। रुत्तसभीसम ॥ १८॥ हीसुपदायकगर्भकुपोपणदोपहरेही ॥२॥ आठहिपाठअधोदिसऊरधपूरचदक्ष एपछमउत्तर । मध्यकिचारचहविदिसापतुलप्पनगोकुमरीभवसुत्तर । श्रीजिनजन्म भएधुरत्रावनवंदनमातसमेतसुपुत्तर । भावनरीतसभाकरकारजगावनगीतअनूपन्न नुत्तर ॥ ८३॥ तीरथनाथकिजन्मभएमघवाघरायसुमेरलियावे । सर्वसुरिंद्रमिले तिहमजनत्रादिकरायजिनंददिपावे । सर्वविधैकरवंदनपूजननूतनस्तोत्ररचेगुणगावे फेरघरेपहुचायसचीपतिसर्वसुरिंद्रनदीसरजावे ॥ ८४ ॥ आपनापनवानकीजि किविवकवंदन । पूजनभक्तिधरीरचनाटकगीतसुछंदप्रमादनिकंदन । हो नया ram- . गरचा ।१९॥ नजायसनदन ।।८५ ॥ शाजनराणपसमाजासा17701111 अलेपतथाप्रभुराजतदेवसभेप्रभुसेवकरही । देशविदेसकिदर्वत्रामालक श्रीजिनमं दरमाहिभरेही । तीरथवर्तनकाललपीसुरवोधक आयनमंतपरेही ॥ ८६ ॥ साठहि लापसभेतकरीरसुनेयनकोदिनएकदतारे । सोइकवर्पदियोजिनहीनरभव्यलहेजिह पन्नाउदारे । श्रीमघवादिसुरिंद्र करेतिहकारजकीरतपुनपसारे । चारहिजातिम्सिन्दे वकरेकुलभक्तिविपेमनउछवभारे ॥ ८७ ॥ छाडअगारसजेणगारपदेतवदेवपतीस भआवन । मजनत्रादिसभीविधसोकरभूपणवस्त्रसुगंधलगावन । रत्नमई शिवकासु सिंहासणनाथविटाराकिइंद्रउठावन । छाडपुरीवनमारगमेचलटक्षत्रशोककिहे ठट रावन ॥ ८८॥ तोउतरेशिवकातिप्रभुपटभूपणत्यागकिलोचकरेही । इंद्रगहेकच पीरसमुद्रमिपायतुभक्तिकीरीतधरेही । श्रीजिनधारमहारतसंगमशांतदयारसपूर भरेही । केतकभव्यविरागचढेतिहसाथशिवोतमपंथपरेही ॥ ८९ ॥ मोदतदेवकरें -- प्रभुसेपमुखोजयकारमहारिवहोई । रूपअनुपकुकोइकरेजसत्यागविरागप्रसंगकु दपरगणा कोई । शांतदयालअगाधमतीप्रभुमारगमोपचलावतसोई । देवकरैजसमानवसंघस ॥३॥ : मेतरमैप्रभुसोमनढोई । ९० ॥ सर्वसुरिंदनरिंदजनादिमहामहिमाकरपायलगैहे ॥ इंद्रनदीसरजायकरदिनबाठमहोछवप्रेमपगेहै । फेरसुथानकजायरमेनिजभोगवि लासहुलासजगेहै । जोजिनरायकिसेवकरैजियठागम्पातिनकॉनठगेहै ॥ ९१ ॥ धारतपीप्रभुपारणकेदिनभिक्षलहैनरनारिदतारो । दुदभिनादकरेविवधाजयकार होइतदानउदारो । द्वादसअर्दकरोरसुनैयनकीवरपानभवादल सारो । नीरसुगंधन सूनफलादिकष्टकरैचितभक्तिअपारो ॥ ९२॥ केवलज्ञानप्रकासभयोसभइद्रमहा महिमाहितत्राए । होइंदिनीतलगेचरणीकरजोरटिकेचितभक्तिभराए । चैनपयुपमु धर्मकथासुगदापपाश्रीजिनराजसुनाए । जीवनजीवपदारथनिश्रितलोकालोककि # प्रदसीरवनाटकगीतगयंदे । घाटमदीपनदीस्वरजायमहोछ्यमांप्रमादिनि कंदे । फेरसुन्यानकजायरमेनिजपुनप्रभावरमंतच्छंदे ॥ ९४ ॥ ठामतिठामविहार कोप्रभुतीसुरभक्तिदसीविधधारे । श्रीजिनदोपगधारतिहांतिहहेठजिमीसमदेववि भारे । कंटकहे ठम्प्राणीजुकरेजयकारमहारिवदउचारे । संपनघटनकीघाणघोरबजे नरसिंहसनादतगारे ॥९५॥ तीरथनाथकिकेवलिधारकिदुकरकारकिर्दसणकारण। नंदन पूजन पुउनके हितावनदेवसदोपनिवारण । एकटेबहुसाथलिएकबहूपरवार गाजीउविधारण । जाचनबोधनसाधुसुश्रावकसंयमकोफलरिददिपावण ॥९६॥ कर्म निवारसरीरकुत्यागभएनिरवाणप्रभूशिवमाही । आसनइंद्रनकैजुचलेसभन्त्रावनतो जिनकेहिगताही । चंदनमजनरीतकरावनलेपनवस्त्रउढावनवाही । वर्जतहासविनो दतियोगीनीरझरेइमरूपउलाही ॥ १७॥ तेतनकोशिवकापरचाढकिचंदनकीचित । कापरल्याये । इंद्रकियेनसुअग्निजलावतवायुकुमारसुवायुलगावे । मेघकुमारसुशांत २०५ करेगप विकागयुनेसुभभापे । जपनापनदीसरजायमहोठ्यपूरसंभोघरजावे। ॥९८॥ दोहरा ॥ मानपचैतकभीटीके रेजिणंग । वर्चसुगंधसुधूपदेनमेरमेनि गरंग ॥ ९९ ॥ मालती छंद ॥ सकलदुपपिनासी पारसंसारवासी अचलअज परूपी कर्मवरजीअनूपी ॥१०० ॥ सकलजगतस्वामी सर्वलोकाग्रठामी जयजय जपसिधासेपतेइंद्रबुबा ॥ १०१॥दोहरा ॥ वडेदेवताजगतमे तातैउत्तमइंद । सो जाकीसेवाकर प्रणमोदेवनिणंद ॥१०२॥ इहिविधरचणादेवकीकहीवुदप्रसार । अपपरणोकछुऔरभीसूनोभवकनरनारि ॥ १०३ ॥ भिन्नभिन्नवरननकरोजातजात कोरूप । यतिवादेज्ञानवलश्रीजिनवैनन्ननुप ॥१०१॥ रत्नप्रभाइकपांथडेतेनंतर निवास । देवत्रसंपभवनपती मणिउद्योतपरगास ॥१०५॥ श्रोडकदक्षणसिंध का उत्सवादरीदेव । सादेनपपलनियाधितसाटेचारनिहेव ।। १०६॥ शंकरदद। । दशवर्षगदरानविटाधिनताका दुविधेसंपउच्चार ॥ १०७ ॥ सुरतावतीसतेतीसउत्तमनग्रमहिपीपंच । चतुलोक देवरचणा पालत्रिपर्पदागुंतवलसुकृतसंच । बहुदेवसहंससमानकीयुतदिपतचमरवलिंद । अणकाधिपतियुतसातन्त्रणकाअसुरपतिविवइंद ॥ १०८॥ वरभवनचारअसित्तलापे वस्तनागकुमार । तनवर्णपांडररतनवतसुभवस्वनीलेधार । सिरमुकटफणिवरचिहन मयवरदामभूपणवत । धरणिंद्रभूतानंदविवदिसइंद्रप्रतिसोभंत ॥ १०९ ॥ सुरला पबहत्तरसुभवनेश्वरस्वर्णकुमार । सुंदरसुकंचएकांततनसिरमुकटगरुडाकार । सित चीरभूषणगंधउत्तमचंद्रबेणुदेव । बरवेणुदालीदूसरोजिहकरतसुरवहुसेव ॥ ११०॥ पटसप्तलापसुभवनवासीरक्तवर्णसरीरविपुतकुमारसुवज्जासूरतमुकटनीलेचीर । सर वंगभूपणमालधारीइंद्रश्रीहरकत । उत्तरदिसाहरसिपविराजतपुनफलभोगत १११ वरभवनपटसत्तरसुलापेरमतानशुमार । सुभरक्तिमणिकवितनविराजतवसनीलेधार -- सिरनुकटकलससुलछपीभूपणसुगंधमुमाल । तिहअग्निशिपअरुअनमानवइंद्ररूप रसाल ॥ ११२ ॥ सुररंददीपकुमारतनछविरक्तरत्नसमान ।सुभनीलवर्णसुचीरसुंद देवरचा ॥ २४॥रमुकटसिंहवपान । वरभवनलापछहत्तरेवसरमणचितउलसंत । विवइंद्रपूरणअरुवि शेष्टौनामकथितसिद्धत ॥ ११३॥ इमदेवउदतकुमारपांडुरवर्णतनसुभकत । सिरतु रंगचिहनसुमुकटसुंदरनीलचीरसुहंत । वरभवनसुंदरपटसत्तरलापमाहिनिवास । जलकंतजलप्रभुइंद्रविवसुपभोगपुनप्रगास ॥ ११४ ॥ सुरहेमवर्णसुचीरधवलेमौल गजवरकंत । वासीछहत्तरलापभवनेविपेसुपभोगत। इसभांतदिशाकुमारनिदसासुर पतिगुणटंद । वरअमितगतदक्षणदिशामिनवाहनोत्तरइंद ॥११॥तननीलवर्णसुक्रां तदीपतदेवपवनकुमार । बहुरंगचीरसुगंधभूषणमुकटमकराकार। पटनवतिलापसुभ वनवासीइंद्रदोवलवंत । बेलंवइंद्रतथाप्रजननामकथितसिद्धत ॥ ११६ ॥ वरभव रे उसंतमेघर म र . न.मरविसिनचीरमुगाटेवईमानउचार । सुभना ।

रामभानगीनात्रीनहापापणामदराजतपुन्नारप्रधान ॥५॥ उरमादिनवनीकायमुरथितनुविधाडकहोइ । दक्षणदिशापलडेडकीदेसुन्नउत्तर दोइ । पलपोनरुदेसनपलदेवीमहाथितजान । सभभवनवासीदससहंसजघन्नवर्ष प्रमान ॥ ११८॥ दसजातविंशतइंद्रप्रतिवलमुकटकुंडलहार । सर्वांगभूपणमाल अवरजोतंतज उदार । नितमुदतहासविलासतरूणीसहितचितउलसंत । जिनदेववं दनपूजनेप्रतिभक्तिरुपधरंत ॥ ११९ ॥ मंत्रीसमानीअग्रमाहपीसैनपतियुतसेन । चतुलोकपालत्रिपदायतरक्षसुरसुपदेन । सजचारयानयिमानमणिमयात्रायबंदन देव । जेजिनेश्वरदेवकीजिहकरतसुरवहुसेव ॥ १२० ॥ दोहरा ॥ जातजातदक्ष गायकी उत्तरघटलपचार । संपन्त्रसंपप्रमाणमितजोजनभवनविथार ॥ १२१ ॥ इति भवनपतीसंपूर्णम् ॥ अथ वाणव्यंतरवर्णनं दोहरा ॥ रत्नप्रभामणिकंड भेससाजनत्याग । हेटउपरविचपेविषेवितरसुरवडभाग॥ १२२॥ सवैया छंद। " -- ॥२६॥ चिहनपिशाचकदमरक्षकेरोसूलरक्षकोभूतिधरंत । यक्षणगोधपटरापसनोकिन्नरट क्षत्रशोकसुहंत । चंपककिंपुरुपाकेमुकटेनागमहोरगजातदिपंत । गंधर्वाकेतूंवरतरु देवरचणा, कोवित्तरलक्षणकथतसिदंत ॥ १२३ ॥ यक्षपिशाचभूतगंधर्वाशरपशामतनछविसो हंत । राक्षसकिंपुरुपाधवलाभाकिंनरनीलवर्णडलकंत । व्यंतरभातभातवरणोकेची रसुगंधसुमालधरंत । देसदेसकेसमनोहरहासकतूहलचितहरपंत ॥ १२४ ॥ त्राध पिशाचादिकव्यंतरयहित्राणपाणादिकवसहोर । सोलसजातवतीसइंद्रतिहइनप रिवारएकइकोर । अग्रमहेपीचारचारसहससमानपरपदातीन । सोलसहंससरीर रक्षसुरगणकासैनपतीपरवीन ॥ १२५॥ कालइंद्रदक्षणपिशाचकोमहाकालउत्तर दिसजान । भद्रसुदिसदक्षणसरूपजीप्रतिरूपेंद्रदूसरोमान । पूरनभद्रयपपतिइति दिसमानभद्रदिसउत्रपछान।भीमइंद्रराक्षसकुलभूपणमहाभीमदूजोपहिचान १२६ देवरचषा ॥ २७॥ " " गापरलारामाचरणाचसापापहमुजगमतमधरतागातरताग्ररुगातजसा विवगंधरवेंद्रसुगीतरमंत ॥ १२७॥ सन्नहेकसनमानीदोनोग्रानपानपतिइंद्रदिपंत । पानपतीधातादिसदक्षणउत्तरदिसाविधाताकत । रिपइंद्ररिपपालंदूसरोरिपवादिक पतिकथतिसिद्धत । ईश्वरइंद्रतथैवमहीश्वरभूतवादिकाइंद्रसुहंत ॥ १२८ ॥ कंदकना यमुवच्छइंद्रप्रोग्ररुविशालदुतियोवलवान । महाकंदकामहाहासजिमसुंदरमहासं दरगुणपान । स्वेतेइंद्रअरुमहास्वतेविवकोहिंडकरेइंद्रपहिचान । पतगजातपतिपत गनामकहुपतगरचंदुसरोमान ॥ १२९॥ दोहरा ॥ ओडकसुरकीएकपलदेवीकी पल आध । दससहसवर पायुलघुवितरगतिवचसाध ॥ १३० ॥ भवनपतीवितर कहेचहुलेशामदेव । कृप्पानीलकपोतकीतेजसघरचहुभेव ॥ १३१ ॥ परमाधरमी पंचदसजातअसुरमैक्रूर । दमैनरकमैनारकीरमैरुद्ररसपूर ॥ १३२ ॥ अंबेआबरसे कहेस्यामसंवलेजात । रुद्दविरुदेकालकहुमहाकालविण्यात ॥ १३३ ॥ असिपतेधनु धरकहैवालूकुंभीजान । बैतरणीपरसुरकहेमहांघोपंपहिचान ॥१३४ ॥ दसविध दवरपणा वितरजातमैतिरजभकसुरहोइ । मानेआनकुवेरकोअधिष्ठातालोइ॥ १३५॥ आन ॥ २८ ॥ पानफलफूलकैलैनसैनथ्थेवांधीजवीयुतिरजभकासभवथ्थाधरएव॥१३६॥ वसैसैल विजसाईपरचित्तविचित्तेवास । जमकसमककंचणगिरीसदाप्रमोदहुलास ॥१३७॥ गीतनृतादिकतूंहलेहासविलाससुभाव । सुपीवेषबहुसुपकरैदुपीदुपावनचाव॥३८॥ एकपलोपमथितलगेभोगेभोगसुछंद । निकटपेत्रचौसंधमैफिरैसुपायानंद ॥१३९॥ तिरछेलोक संपपुरवनरूपीविगसंत । देवलोकविंतरतणेभापेश्रीभगवंत ॥१४॥ भवनेवनगतियुगलीयाअंतरदीपापाय । तथाप्रसंन्तीतिरयंचईप्रोडकतिहलगंजाय ॥ ११ ॥ होइनकामीनिर्जराभूपत्रिपादिकपाय। स्नानादिकनहिंविपसुपवितरलघु थितथाय ॥११२ ॥ पर मानवानि पमरेर टा.ग। लीफांसीनिगनविपद देवरचा २९॥ सहसव्यंतरकेसुपाच ॥ १४४ ॥ जेउपसंतकंपायकैलपारभाजाव । अल्पावना दिकंगुणसहितरहेप्रसन्नसदीव॥ १४५॥ मातपिताकेवचनवससेवेअतिपितमाय । आयुवर्पचौदससहंसव्यंतरगतिसुपपाय ॥ १४६॥ छुहरविधवाविहरनीगुरुजनरो कीतीय । सुपसिंगारादिकरहितग्रलपारंभधरीय ॥ ११७ ॥ वृतदधपीरादिकस रसतजीअल्पजिहचाह । व्यंतरनीहोवेसहसचौसठकेथितमाहि ॥ ११८॥ अलपा रंभीरसतजीकंदमूलफलफूल । जलसिवालभक्षीतपीज्ञानरहितमगभूल ॥ १४९ ॥ नानाविधकेकष्टकरलहदेवगतिठाहि। मवनपतीवितरविपेत्रोडकजोतिकमाहि १५० फलकामनिर्जरातणेपंचिंद्रीतिरयंच । भवनपतीवितरतणेभोगसुपविधपंच॥१५॥ हांग्रेसतवितरतणेइंद्रसहितपरिवार । सेबेश्रीजिनदेवकोमनवचतनसुचधार ॥१५२॥ ससिरविग्रहरिपतारकाचरथिरदसविधहोइ । मनुजपेत्रसंक्षातचेरपरेअमितथिरजोइ ॥१५३॥ इकससिरविपरिवारहैग्रहअठासीदेव । रिपत्रठाईतारकाकोडाकोडीएव ॥१५४ ॥ सहसछिहाठनवसयापणहत्तरपरमान इकसौवत्तीगुणसभीचरचंदादिक जान ॥ १५५ ॥ दोचतुवारबियालफुनविवसत्तरचंद्रादि । जंबूपुहकराईलगदीवो देवरचा Hima दहीअनादि ॥ १५६ ॥ इकसुमेरकेपुवदिसदुतियोपछमहोइ । इमदक्षणउत्तरफिरे चरजोतिकगुणदोइ ॥ १५७ ॥ इकगणकेविवभागहैनिश्चिरदिनचररूप । इमविव दिसनिसहीरहेविवदिसदिनरविभूप ॥ १५७॥ इसपेत्रेतेऊचइममहाजोजनेजान। तारेसगसैनवततेनवसयलगपहिचान ॥ १५८ ॥ रविअठसैससियुतिसीरिपताते युतचार । भरनीनीचेसबनतेस्वातीऊपरवार ॥ १५९॥ अभिजितअंतरसबनतेसभते वाहरमूल । मूलाद्रीतेश्रयणगतिदक्षणोत्रविवतूल ॥ १६० ॥ उत्रापाडाअनफेसंधे अभिजितहोइ । राजासर्वनक्षत्रकोबहुफलदायकलोय ॥ १६१ ॥ रिपतेवुद्धचहुजो जनेततितिहुतिहुचार । सितगुरुकुजरानिइमचतुरजोतिकचक्रविथार ।। १६२॥ धार र २ .net." पर । भार र रिक्षगन्दनन र रस तासनसदकरासकपदात्रभागयुततान । नयदसवसायमागार १९ पापा ।। १६४ ॥ रवितेससिकाअंतरोबादसधेसरिताय । सितएकमचोवीसलगढतिया देवरचणा अंतलपाय ॥ १६५ ॥ थित २ द्वादससइमपूर्णमलोपटरास । रवितेससिससिते रवीसमपापंतपरगास ॥ १६६ ॥ कृष्णपक्षतांतेपरेतिथतियवादसअंस । सूरचंद्रइक समेअंतत्रमावसवंस ॥ १६७ ॥ पटपटसकेकर्णश्करवितेससिलगधार । धुर केतुधिरतापरेसातसातवमुबार ॥ १६८ ॥ वचबालवकोखकातितलगरवनजेय । विष्टीचरतातेपरेतीनकर्णथिरएव ॥१६९॥ शकुनचतुष्पदनागकहछप्पनचरथिरचार । साठकथिततीसकेदादस रासमझार ॥ १७० ॥ नवजमहरतकुछ अधिकसातवीस दिनमान । सभनक्षत्रकोफरसससिफिरावउसथान ॥ १७१ ॥ त्रयसेपासठदि नगएछासठवेविरतंत । द्वादसरासीभुक्तरविफिरउसथानवंदत ॥ १७२ ॥ वामाय पारविभडले सोचउरासीयुक्त । इकसौतेरासीदिवसउबायपाइमभुक्त ॥ १७३ ॥ पण सठजंबूदीपमेलवणोदधिमेशेप । इकसौचौरासीसभीसूर्यमंडलदेप ॥१७४ ॥ ससि केपणदसमंडलेपणदीपेदसासंध । अयणफिरेचौदसमदिनलपोविचक्षणचिंध १७५ देवरचा ॥३२॥ दिवसउनाहठमासविवससिरुतकोपरमान । एकाहठरविरुत्तकेपंडतकरेवपाण ॥ ।। १७६ ॥ साठमासरविरासफेवासठससिकोसोइ । रिपसताहठवारगतिदसत्रय' पीयुगहोइ ॥ १७७॥ पंचवर्षयुगकेकचंदचंद अभिवद । चंदफेरअभिवहकोभापे ज्ञानमहद्द ॥ १७८ ॥ रासरासमेरविससीमिलेकवेविवमास । अधकमासतिहवर्षमे विनामिलेपयमास ॥ १७९ ॥ रविनिकटीबुद्धसितसदायागेपीछेनाल । श्रोडकअंत रसकोसत्ताइसपणपाल ॥ १८०॥ पुव्बउदेपश्चमथमेवुद्धसितगुरुकुजमंद । अति चारगतिगुरुसनीवुद्धसितवक्रधरद ॥ १८॥ वक्रमार्गउदयस्तविधवदचौमासेलेप। पीसीसतपणवीसकुजगुरुसत्ताईपेप ॥ १८२॥ पक्षेपटवीसेशनीवक्रमार्गउदयस्त ॥

faimum .... ....rr... -PNPARom १५ ratmyTriniti ira ५१८पनाual वक्रीसत्ताठ । नवमदसमरविकुटलगतिफुनशीघ्री श्रुतिपाठ ॥ १८५॥ कुजगुरुश देवरवा नितेरवियदापंचपटमीरास । तवतेवक्रगतीभएमारगनव मेभास ॥ १८६ ॥ रविस सितनीसदारिपतेचालेसर्स । अत्रमंडलढुवेतमसि उलटेफर्स ॥१८७॥ रवि ससियुततमसितनिकटहोइपपकीसंध । रविकोअंतग्रहणदिनपूनमससिसबंध ॥ १८८॥ सवनक्षत्रभोगेवरसवारहगुरुशनितीस । राहुकेतुअठदसवर्षकुजविववर्ष कहीस ॥ १८९॥ वर्पएककुछघाटवधवुधसितभोगेसर्व । ग्रहरचणाइमजानीएलपो ज्ञानगुणदर्व ॥ १९० ॥ सनिगुरुयुतवीसमवर्ससाठमउसहीरास। सनितमइतरे बारमैनवतवसेउतभास ॥ ५९३ ॥ इतरेगुरुफपीअाठमेउसीरासपटतीस । इकसौ 'अस्सीवसे उसयुतसनिजीवफनीस ॥ १९२ ॥ अहोरात्रिरविउदेतेतीसमहूरतजान। रुद्रसितफुनमियकवायुसूपियवपान ॥१९३॥ अभिचंदेवमहिंदपलब्रह्मसम्बन्मानंद ग iy -- विजयविस्यसेनौकहाश्रीजिनपरमानंद ॥ १९४॥ वीयावच्चेउवसमेईशानेतेटेव। भावअप्यवेसमणकोवर्णवीसमोदेव ॥ १९५॥ सत्तसरंभगंधवेअग्निविसायणलाम। 'देपरचणा में सातवाधवतंदवभूमहरिसभानाम ॥१९६॥ फुनसवठ्ठसिदोकटोरापसअंतमहोइ। यथानामफलतिमतिसोजानलहोसभकोइ ॥ १९७॥ दर्वछाउगुणवीसदसछयचतु| जयढईय दोयमुडसवायकमेदसघडीयालगथीय ॥ १९८॥ पौनेवाराघडीतवत्रा धीचौदसहोइ । पायछायसतरेघडीदिनगतिरहितेजोइ ।। १९९॥ वाहकसोलेसह ससुरहयगयगोहररूप । ससिरविइंद्रविमानकेभूपणवस्त्रअनूप ॥ २०० ॥ अठग्रह केचतुरिक्षकेतारेदाइहजार । चरविमानकेसाथहीसोभतहर्पअपार ॥ २०१ ॥ तारे वाहकशीघ्रगतिरिपतांतेगतिमंद । रिपतग्रहग्रहतेरवीमंदगतीनातिचंद ॥ २०२ ॥ तेरविकीया का अधिकर गारिया ॥२३॥ ---rautNजिसमेटीएस .

m देवरचणा ॥३५॥ N साध ॥ २०५॥ अर्धकविठअकारसभतारेलघुससिध । मध्यारवहुवर्णमयताम सुरयुतरिध ॥ २०६ ॥ लघुविमानतारेतणेवडोचंदगुणटद । मध्यसर्ववहुवर्णमयता मेसुरयुतरित ॥ २०७॥ वपुसुंदरपटभूपणेमालसुगंधसुहाय । तेजसलेसीहेमछवि मुकटनाममेथाय ॥२०८ ॥ अष्टभागपलअल्पथितवडीएकपलसोइ । वर्षसहसअ रुलापयुतसूरचंदकीहोइ ॥२०९॥ श्रावकविरतविराधकीजोतिकसुरलगजाय । तापसतांमेलहैगतिभापेश्रीजिनराय । २१०॥ चउपटराणीचउसहंससुरसमानगुन चार । आत्मरखत्रपर्पदोसातन्त्रणीपरवार ॥२११ ॥ चंदसूरपरिवारयुतायनिवा वेसीस । भक्तिकरैजगदीसकीजयजयजयजगदीस ॥२१२॥ इति जोतिकरचणा संपूर्णम् ॥ दोहरा ॥ कलपोतपतिदेवगणसहितविमानीइंद। दसहीनिजपरिवार युतपूजेत्रायजिनंद ॥ २१३॥ गीयावंद ॥ इसभूमिथीविनसंपजोजनऊचत्रयदस पा उपऊपरिकेतुस्थिभरेपदा । पटहस्तदेहीदेवराजतविषयसुपभोगेसदा ॥ २२३ ॥ दोजलपतेधितसातसागरलगकहीओडकसही। चैराहलक्षणमौलधरसुरपदमगोरेछ पिलही । मुसपर्सइंद्रयकामसुपसुरलोकसंतकुमारहै। तिहइंद्रसंतकुमारसुंदरसंघको हितकारहै ॥ २२४ ॥ कुछअधिकसागरदोइतेथितसातसाधिकलगसही । सुरसीस मुकटेसिंहचिमहिंद्रसुरपुरसुपलही । जिहलगलहैगतिपटसंघयणीइंद्र श्रीमहिंद्रहै सुरपद्मगौरसपसभोगीभक्तिचितसुरिंद्रहै ॥ २२५ ॥ सुभब्रह्मलोकसुखेत्रसभतेअधि कससिपूरणजिसो । खटभूमिकंतविमानलाखसुचारवणत्रिधातिसो। शतंसप्तजोजन ऊचधुजयुतनीलकृष्णविवर्जते । तिहइंद्रश्रीब्रह्मेसराजतधर्मकारजगर्जते ॥ २२६ ॥ जिहलगलहेपरवर्जकीगतितमसकायजहालगे । लोकंतकीसुरजिहरमेलेसापदमति हतालग। जिहकामसुखहरूपमेतनपंचहस्तपदमप्रभा । थितसतसागरतेदशालग गलक्षणमोलभा ॥ २२७ ॥ परपाल्पलंतकभूमिपंचविमानसहंगपचासको। प्रय Amareile ETHI . नर्णनसातरोडासनगरगाराको । सुरतनरागेतियधिनानितिममाला जमा । साटरलछागमगाटदीपतत्र श्रीलतकतमा ॥ २२८ ॥ पितदसउनलयायत सदसलगपंचकररसकपको । जिहलगलगतिकिलविलीसुरलोकलनकभूपको । नि कल्पलगगनियचोदसधारकीणिनवरकही जिहलगर्गमसंघयणपनधरजान 'बागमतलही ॥ २२९ ॥ सुरलोकलतफलंघऊपरिमहाशुक्रचतुरमही । चालीसहं माविमानजोगनपाठरोऊचसही । सिवपीतवर्णसुरिछपूरणारभेसुरचतुकरतन । हय चिथित चौदसउपधलघुवीराप्तदशीमन् ॥ २३० ॥ तिहसप्तमेदिवप्रसुदरमहाशु कमलादुनी । सीगभूखणमाल अवरकामविसेसब्दवती । जिनवचनरागीधर्मभागी भक्तिचितयधावतो । जिनवाणकभलसपसनिजसिरस्तवनरचगुणगावनों । सहिसार मरपुरकल्पत्रष्टम चतुरमहिगयजाणीए । तिहखाटसहसविमानदीपतमहाशुक्रसमा || HIभोगकलोलतावतमकटगजमूरतमई । थितलघुसतारहसागरीओडक

XXXXXX
देपरचा
॥४.॥
अठारहितिहथई ॥ २३२ ॥ जिहकल्पलगगतिलहतिश्यंचदेसविरतीसमगती । जि
हलगगमागमणंत्रियासंघयणचतुजिहलगगती ।सहिसारनामसुरिंद्रउत्तमरिदशक्ति
सुहावनो । जिनराजगणधरसाधुकेपदहरपसीसछुहावनो ॥ २३३ ॥ वरकल्पनव
मसुनामत्रानतसुरमुकटफणलछपी । थितउधतवसदसतेचढतउन्नीसलगतनरछपी
मनभोगरसइकवर्णउज्जलवरविमानसुहावणे । चतुकल्पनवसेजोजनेगुरतनत्रिहस्त
दिपावणे ॥ २३४ ॥ दसमसुप्राणतकलपउत्तमथितजचिन्नउन्नीसके। उतकिष्ठसा
गरवीसगैडेचिहनमुकटसुससिके । विवकल्प चतुपितचतुचिमानशतेंद्रप्राणतनामहै।
जिनराजवंदनपूजनेत्रतिभक्तिगुण अभिरामहै ॥ २३५ ॥ सुरलोकचरणकादसेथित
वीसतेइकोसली। तिहरपभलछणमोलवरलेपाकहेजिनवचभलो । दिवप्रथमदुतिए
प्रतियेचतुरथोत्रचंद्राकारहै तिहतेचतुरंससिपूर्णतेफुननईससियतचारहे ॥२३६॥

-- चपा वरहंडमूरतचिहनमुकटेंमहाजोतिप्रकासनो । चतुपितदुकलपाबमान. सुसासनो ॥ २३७ ॥ उतकिटावकगतिजहालगचारपदवीमोकही । आजीविया आभोगीयागतिहष्ठत्रयतिहलगसही । वैक्रयउत्तरजिहलगकरसेवकपतोपदनिह लगे। मनभोगरसचतुकलपअंतमनामअचुतजिनमगे ॥ २३८ ॥ इहिकल्पवादस भूमबावनवरविमानविराजते । जोजनअसंपप्रमानकेछविसंखकेछविछाजते । कल्पं तभूमिरकल्पनामवडंसकैघरइंद्रको । उतकिष्टथितमुपसोलहेचितधारवचनजिनंद्र कोइ ॥२३९॥ तिहइंद्रवासविमानकेदिसपुव्यसोमसुवर्णको। दक्षणदिसाजनवर्ण पछ मउत्तरेवेसमनको। इसमांतचारविमानमाहीलोकपालसुरिंद्रके । वहुवुदवंतनहंतसुं दरवचनएहजिनंदके ॥ २४० ॥ किलविपीथितत्रेपलनिसागरात्रियोदसधारकसरा। वासीअधोदिसकल्पविवधुरत्रितीएतुरिएघरधुरा ।लंतकअहेमुपदोपकेफलऊचथान कनहिलहे । निंदादिदोपविकारसंयुतसंजमीइहुफलगहै ॥ २४१ ॥ कल्पोचवीइक

1.
लहतिथ्यकरपदलहेंइककेवलं । चक्रेसकेशववलमहीधरसाधुश्रावककेथलं । मिथ्या
तयुतइकभ्रमभवभवइमकहैजिनचंदजी । भवजनसनोइहिदेवरचणाधरोचितानंद
देवरचणा,
जी ॥ २४२ ॥ चौसाठइंद्रपवित्रमनवचतनभक्तिजिनदेवके । उलसंतअंगप्रमोदपूर
॥४२॥ भएप्रभुपगसेवके । श्रोडकलहेनिरवाणपदइहवचणश्रीजिनधारके । निनभक्तिफ
लसुभगतिसुकलधनधानसुखसंसारके ॥२४३ ॥ मत्तगयंद छंद ॥ पंचहिपंचक
हीअसुरदकीपष्टत्रियाधरनादिककेरी । व्यंतरजोतिकइंद्रनकीचतुअग्रहमहेपिसुरिद्ध
चंगेरी । शक्रइशांनकिाठइमेपरवारसमेतजिनदकिचेरी । वदनपूजनप्रेमधरीजिन
चैनसुनधररीझघनेरी ॥ २४४॥ चौसठसाठहजारसमानकहैचमरेंद्रवलिंद्रकिनारे ।
पष्ठसहसयुतेधरणादिकव्यतरजोतिकचारहजारे । चारसीयनसीयवहत्तरसत्तर
साठपंचाससुमारे। चालिसतीससुयीसदसोमघवादिसहससुसोभतसारे ॥२१५॥

देवरचण जरावहामिहोतमुबंधत पुन्नभंडारे ॥ २४६ ॥ साजसजेइकउनपचासविदसदो यसुतालबजावें । सातमुरेतिहुग्रामकरीपटरागसभीपरिवारसुगावें । नाटकमांतवती सरमेवहुभांतमुछंदपरसपावें । भक्तिकरे पुरश्रीजिनकीकरजोरनमेजयकारबुलावें। ॥ २४७॥ दोहरा ॥ दादसकलपातेपरेकलपातीतकहाय । दुकरकरणीअतितपीम हाशाक्रमीयाय ॥ २४८ ॥ नोग्रीवेगअनुत्तरदाविधकहेजिनंद । जतीलिंगविनऔर नहिपावेपदाहिमिंद ॥ २४९ ॥ भद्रसुभद्रमुजातदिवसुमनसुनोथोनाम । पियदंस पसुदंसणीअमनमोघसुभठाम ॥ २५० ॥ सुप्रवुद्रयसोधरोनवग्रीवेगकहंत । पंच विपशुपाधिकसुर जेमनउलसंत ॥ २५९ ॥ नवग्रीवेगेनवमहीदसमिअनुत्तरजान बावनकल्पकल्पदसवासठमहीविमान ॥ २५२ ॥ ऊचेएकसहसमितजोजननवग्री वेक । तामेविचकरतनअमरसजेएकहीएक ॥२५३ ॥ बाईसागरतेचढतएकएकनव माहि । थितजधिनाइनतेअधिकइकइकोडकताहि ॥२५४ ॥ नवग्रीवेगेतीनत्रिकहे देवरना ठमध्यउपरेव । तिहविमानसयतीनयुतश्रष्टादसभणएव ॥ २५५ ॥ इकसौग्यारहि ॥५४॥ सातयुतसौतीजेसयएक । स्वेतरतनमयकेतुयुततामेदेवअनेक ॥ २५६ ॥ जिहलग देवविमानीयासहितलोकंतकदेव । वासुदेवपदलेनकीभापीश्रीजिनएव ॥२५७॥ नियानीसनियानियाअंतअनंतभवीय । पाराधिकद्रवलिंगकीजिहलगदेवसहीय ॥ ॥ २५८ ॥ जिहलगभव्यत्रभव्यसुरसमकितअमिथ्यात । ज्ञानतीन अज्ञानत्रयनव ग्रीवेगकहात ॥ २५९ ॥ इकसमदिष्टीसुद्धचितनिःससेतृतपाल । धर्धराधिकसुररुच रदसणज्ञानरसाल ॥ २६०॥ इकसंसयमिथ्यातयुतसमकितरहिताचार । करकरणी समसाधकीतहाभएअवितार ॥ २६१ ॥ उत्तमदोसंघयणकेनवग्रीवेगवान । तांऊप रसमदिष्टधरत्रमर ननिमान ॥२०२॥ गतिथितकालपानीकहीप्रथममंघपणी राजिनमानमान । सनायासवाहासापातायात ॥ २५० ॥ utu दराशनउपर केतु । दर्वअनुत्तरमणिदिपततामेसुरमुपलेतु ॥ २६५ ॥ इककरतनसि देवरवा वरतनदुतिअतिवलमुपजसशक्ति । सकलअमरसिरमुकटमणिचितजिणवरगणराक्त ॥ २६६ ।। तससन्नीपंचिंदियापुरुलिंगजिहताय । अल्पकर्मउपमुक्तिकदेवअनुत्तर थाय ॥ २६७ ॥ पंचविमानअनुत्तरेपंचविषेउतकिष्ट । पंचमगतिकेपाहुणेपंचपदेचित इष्ट ॥ २६८ ॥ चहुमेलघुइकतीसकीउतकिटीतेतीस । मध्यसर्वतेतीसहीसागरकही मुनीस ॥ २६९ ॥ जितनेसागरायुसुरतापक्षेफुनसास । तितनेवर्षसहंसगतिभूप करेपरगास ॥ २७० ॥ मध्यगिरदवासठखितेतांचहूदिशेत्रिकोण । चौकूणेफुनगिर दइमधुरपितवासठहोण ॥ २७१ ॥ पितपितइकइकघटतइमतअनुत्तरएक । पंक निबंधविमानइमचहुदिसत्रमरत्रनेक ॥२७२ ॥ धुरविचलौनरपेतमितसमदिसउड सुभनाम । अंतमजबूदीपसमसरवार्थसिदठाम ॥ २७३ ॥ पंकतवधीसर्वहीजोजन ' भसंपत्रसंपप्रमान । दिपेसेपपितऊपरेविवधवर्णसंठान ॥२७६.यकीर्णोरस देवरचा ॥१६॥ अगनतमान । तिमहीताके अंतरेजिनवरवचनप्रमान ॥ २७४ ॥.पुष्यकीर्णौरस सयुतसत्तानवेतेईस । सवविमानपितवासठेदेपकहेजगदीस ॥२७६ ॥ सातवीससै धरधराअंतमसैइकोस । भूविमानमिलपिंडसभजोजनसैवत्तीस ॥ २७७॥ आयुवर्प यसतेचढतकोडपुबलगकोइ । पालमहारतदेसस्तसुरविमानपदहोइ ॥२७८ ॥सो ओडकनरदेवके साताठभवपाय । केवलदंसनज्ञानलहिसूधेशिवपुरजाय ॥२७९॥ कल्पातीतसुभक्तिचितप्रभुसेवेनिजटाम । ध्यावेसेवेगुणसमरमोदलहैअभिराम२८०॥ वाराजातकेकल्पलगआयकरेजिनभक्ति । वंदनपुजनथुतकरणकथामुनेचितरक्त२८१ चहुविधसुरतेहोतहैवलचक्रीसर्वज्ञ । सुरविमानजिनराजहरिति करवचतज्ञ ॥२८२॥ तिलिंगातेदेयगतितांतेतीनलिंग । नहिनपुंससुरगतिविपजिनवचणेनहिविंग२८३॥ १५664 गगा ॥ १८॥ निनयमअनकिनिदिमिक्षागार । नि:मलनसकलसनपारकरस सार ॥ २८५ ।। बागमविज्ञानधरलहिममाधिगणगह । आराधिकपदपायकेड चीगतिकोलेह ॥ २८६ ॥ साराधिकहक प्रयासर्वविराधिकहेन । देसत्रराधिविराध कीचहुविधज्ञातावेन ॥ २८७ ।। सहेपरी सक्षमाकरचहुसंवसुपहोइ । तयाग्राहीपर लिंगसवीराधिकसोइ ॥ २८८ ॥ सहचतुविधसंबकत्रोरनकैसहेय। देसविराधि कसोभाजिनवरवचनकहेय ॥२८१ ॥ निजगतिपरमतिसवन के महनकोईसोइ । सर्वविराधिकसोभएटक्षहीनगुणजोइ ॥ २९०॥ ओरसवनकसहितहसंघासहेनय देसाराधिकदवदवारक्षभदतिमतेय ॥ २११ ॥ शसहितअ राधकीदवविमानीहोइ पदवीपंचविपेजतीवीतरागशिवसाइ ॥ २९२ ॥ वालनपीउतकटरसीतपमानीवरीय क्रोधीतपीनिमित्तकीत्रसुरजानमेधीय ॥ २९३ ॥ अरिहंताअरुधर्मकीगुरु ऊपाध्या कीय । निंदाचहुविधसंघकीसुरकिलविपीयाधीय ॥ २९ ॥ विकथाहासकंतूंहलेक " पापा चपलताकाम । इंद्रजालइमदापपरकंदरपीगुरठाम ॥ २९५ ।। मंत्रयंत्रतंत्रौपदीसु परसरिताहेत । इत्यादिकदोपेसहितत्राभियोगीगतिलेन ॥ २९६ ॥ विपक्षणायु बकरीजलम्पगनीइत्यादि । अनाचारसेवीमरवधजन्ममरणादि ॥२९७॥ तपसंज मकरणीफरेविपभोगसुपचाहि । धर्महीनधर्मातरोदुपलहेभवमाहि ॥ २९८॥ कीए नियनितुउफलवहुकरणीकोजाय । रतनननीलकमूढजिमवेचेलघुधनपाय ॥२९९ ।। विपयकप.यविकारवमफोर्डलाजुकोइ।प्राहचितदंडलीएविनानहीअराधिकहोइ ॥ तपसाफरणीयहुरेकामलालसात्रीय।गणकादेवीमाहिगतिवहुसुरभोगकरीय३०१॥ जिहावामनानकीवालगुपालपिडाय। यहुपुतीयाजिमसोभवेकरणीकाफलपाय३०२ पपीत्रायुधपणेमानेवाहनहोइ । कपटेसभानिरादरीलोभरिदलघुढोय ॥३०३॥ मुगविशारभरेहनतपकरणोकमा । भंडदेयमंउपजकेचंधकर्मत्रनाथ ॥ ०१ ॥ MAA uriHinामा । । निमगावराणांचनगाय । भारजानगालपालगेगवलिंगाय ॥ ३०७ सारठा । नाटकगीतरचायणगाणीजिगराजकी। गरभवसमालपायधर्मसहित सपलिलः ॥ ३०८ ।। उत्तमगरवरीय जोगिनधीभक्तिचित । जिनमगरेपीजोर भवसागरमसाधमे ॥ ३०९ ॥ उचनीयवाह निरचाणाकहीएदेवकी । सनोभवकचि तशांतधर्माधमुभपदलहो ॥ ३१ ॥ कचहुँसतोगुणठाणकवहुरजोगुणमेरमै । कयामागुणन्माणकामवहांतके ॥ ३१ ॥ मल ॥ छंद ॥ कयह शियसायकलालफरेकपहुंचतगीतविगोदरहे । फवहूंबहिराजसभाविगसेकवहरिण सारणभूमिहे । प्रासाथसपुरणभक्तिकरीकरजोरसछंदउचारकहै । मिलमित्रहसे हितरीतरमेइसमांतदिवोनिसमादलहे ॥ ३१२ ॥ कितहुँनटहोकरनाचतहे कितहूंव रजंत्रयगायत । फितहहयरुपकरीहिनकेचपलागतिवेगजिवायतहे । गजरूपकरी ' । गरजाटकर सिंहनादकरीहरनावतहै । फणधारपुंफारफरेवरहीवहुभातकिनाचदि पारतहै ॥ ३१३ ॥ कितहूंहसवारवनेपरकेकितह॒विनवाहणधावतहे । कितहूंहथ २वरल पारपनेसुरकंफितहूंहथपारचलापतहै । फितहूंत्रियोरचलेपुरुषाकितहूंरुच सोत्रिय पाप है । कितहूंप्रशनोत्तरवादकहूंसुरपेलसिदंतदिपावतहे ॥ ३१४ ॥ फितहूल लनासुविनीतभईपियकेपगसीसछुहावतहे । कितहूंरिसघारगुमानभरीपियत्रातर हाइमनावतहै । कितहूंलङकेविवपेलतहैहरपेनिरपेमुसकावतहै । इमहूंबहुभांता लोलकरैरचणागुणवंतसुनावतहै ॥ ३१५॥ कितहूंपरपेठलसोनुनिकोधररूपपिशा इराक्तहै । कहकरनोरलगैचरणीविषसोअपराधपिमावतहै। अतिरीझधरीसम सेवरुफीमुनिफेगुणग्रामदिपावतहै । कपहुंधरोधलपेतपसीनिजठाननमैगुणगाव महे ।। ३१६॥ सुररांगमतीरपधानकरिपनाननगेनिरवाणसमे । किनईपिनट ममहासमिनावरदीपनदीवरमाहिर ३)जमिनरानमहोगविमाहिको पतितकापावरवादलनी । नरपासुभगंधमईजलकीफलफूलसुगंधमईदलकी । कल कामोतमणीरजतोतमकीपटभूपणकीमुकताफलको । सुरदुंदभिनादकरहितसोदसहीदि समाहिप्रभासलकी ॥ ३१८ ॥ कितहूंबरोषधगंधमईकरचूरणदेवउडावतहै। कितईयररत्नमईकरचालिपउत्तमधुपधुपावतहै। कितहूंचरगेंदलईविधसोनभमाहि मुलदिपावतहै । कितहूंसुरवणेहितसोजयकारसुसब्दबुलावतहे ॥ ३१९ ॥ इकतीरथनीरसुदूभभरीइकपीरसमुद्रसचावतहे । सललाविमलाजलगंधमईप्रभुम जनहेनन्मनावतहे । वरनौषधमेरुगिरीसिपरोवरचंदनादिमंगावतहै । वहुवर्णसुपु प्पसगंधमध्वननंदनादिकल्पावतहे ॥ ३२० ॥ मरदंगसुझालरभेरतुरीनरसिंहन पंटनसंघणकी। घणघोरमहारपदुदभितीजयकारभईधुनदक्षणकी । रसहाससिंगा रसुधीरसजेरतणारसम्बद्भुतलक्षणकी । प्रतिमोदतदेवमहोत्रविकोप्रशुभक्तिकरीसुभ च

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गाजी ।। २२१ ॥ मदरसमुंद्रामंपरनेटघुमध्यविषमलवानमई । इकजोज
#TTATRNसरीपनामपई जगतीवरपत्रमईगिरदेचतुद्वारचहूदिसक्रांत
मिसेविसंतपराजितनामसदीयलई ॥ ३२२ ॥ इसदीपविपेव
समरिनरवलोजगलापतयो । तिसपुरवपउनमेवियतीसमहाविजयाजिनध
नरोदिनदक्षा उत्तरतोसमई रवत्तासभमाचभयो । सुरस्वामित्रष्णाढिपदी
समुदर्श वामम ॥ ३२३ ॥ इहदीपमपूरणचंदनिसाइनकोलवणोद
परिपा । किनोजनलापविभजलविहेदगनालजिमोदलिया । दससप्तह
सामईनरपवहजारदमोडलिया। मुठियालयोदधिनामदिपेरननाधरमरत
हलिया। ३२१ । लादधिमलियावरधानविपरिधागनिमांदगापो
Hina को

सलदाधायपावयमसावजयचतुसाठकहा । पपरपसागरात धरकीउत्तपतसही। महदीपदुमाईदुसिंधयुतेनरपेतकहाजिनमोपगही । इहतांघ नगरपणा/पादिकचरणासुरजातिकचालयलोकलही ॥ ३२६॥ जिहबादरपावककालसुका लभवेनरउत्पतिकालकरै । मिहतांइ महासत्तधारमनीटतद्वादसावकधर्मधरे । नर कपजिनेश्वरचक्रपतीवलकेशवकेशवजेहहरे । सर्वग्यमुनीजुगलादिविराजितसोनर क्षेत्रमुरिद्धभरे ॥ ३२७ ॥ सभदीपपलेजलराससहीतिहसागरकोइमदीपवले । दुग पादुगणाविसंतारकहाइमहातन्त्रसंपसिद्धतचले । समभूरमणोदधिअंतमकोजिनवैन सुपचमरोगटले । इनमेवहथानकहेसुरके सुपभोगविलासकरे मुफले ॥ ३२८॥ इन दापसंमुद्रसपर्णीतरयचपचिंद्रयसंपविना । कुछदवेनिसानिलपीपिछलीलपज न्मपुगतनधर्मगुना । उधारइकादसावककीतपसाकरपापपपंतधना । गतिष्ठ मकल्पविपतिनकीइहिवैनजिनेश्वरदेवभना ॥ ३२९ ॥ तिरयंचपचिद्रयसन्नप्रसन्न x । ४ देवरचणा' ॥५४॥ काममईनिजराकिफलौ । गतिभौनपतीवनदेवविपतिथओडकभागसंपपलौ। मनवंतपुरातनजातलपीग्रहवालतपंगतिजोतिकलौ । समदिष्ठलईसुभधर्मरुचीधुरक ल्पलगैमुभभावालौ ॥ ३३० ॥ जुगलाथितभागसंपपलोसभछप्पनअंतरदीपन के । गतिभौनवनेपनहेमवएपणइर्णवएपलएकनके । धुरकल्पलगैउपजैतियतंदुतिए लगजावनशेपनके । पिछलेसुभसिंचततेसुरहीनिजायुसमंकहिउछनके ॥ ३३१॥ नगतागतिनारकिवातशिपीविकलिंद्रसमूछममानवमै । जलभूवनवादरमैउपजैनग तागतिसूपमकेभवमै । नरतेनरमैतिरयंचतथाउपजैनश्रसन्नतिर्यचनमै । जुगलूसुर हीसुरनाहितहाउपजैइमफेरननीदिवमै ॥ ३३२॥ गतिसंधिलगैमरणांतसमैनरमैति रयंचविपेसुरको । तिहमिश्रसुभावभवेसुरकोइतनंतमपावनकेधुरको । इकगर्भविपे उपजेर तक्रयत्रोधमहबलहेरेको । तपज्ञानतणाफलहोतइसोदहियनअनंतवली!

wer रनपा पतितपताजलंधावरतारपदवेसताहषासपुरासललायरपामाणसापवफारम पीसुमती । इमारघणीविधदर्वविहितधारकमानवलोकरती ॥ ३३४ ॥ इकहेसु पदायककल्पपतीजुगलाजनकेचितसेवनको । इकहे परमाधरमीयमक्रूररहैनरकेदुरा देवनको । इकलोकफिरेचउसंधविपेजगसारशलीविधलेवनको। इकंऊचपदारथता थरहेरतनादिनिधीसुपयेवनको ॥ ३३५ ॥ इकमंत्रनधीनसुरीसुरहैइकयंत्रनमेइकतं वनमै,। मतिभेदघणेजगमाहिकहैतिनकेहितबंधघणेमनमै । इकवंदनपूजनसेवनते सुखदायककाजविपेघनमै । इमदेवविराजतलोकविपेइकहैरपवालमहाधनमै ३३६॥ इकपेचरपत्रविपेरमतेनरनारिविपेवहुशक्तिधरी । नभचालपतालनवेसविधेजलपाव कवातघानादिकरी । तनरूपवढावनभैपधरीबहुदर्वउपायनगुप्तचरी । इमोरचणी जगरीतविपैवरतेमनमोहनरीतभरी ॥ ३३७ ॥ इकदेवरमैनरकीतरुणीनरसाथरमै इकदेवत्रिया । नरलोकविपेइकमोहधरीइकदूररहेमनदूरकिया । इकमोहकरीनरसै देयरचणा नवनेइकरकरीभयरोगदिया । रचणासुरकीवहुभांतलपीजिनजैनकिवैनपयूपपिया ॥ ३३८ । इकरकरीनरकेधसकेरिपकोदुपदेनडरावनही । पिछलेभवमोहकरीदु पमोचनकारनकोइकजावनही । रिपसारणमंडणकारणकोमिलनेफुनमित्रकिधाव नहीं। सुरऊरधकेजुपतालघसेतिहकेइमऊरधावनहीं ॥ ३३९ ॥ इहिलोकअधी नश्रुतागमहीसुरलोकविपेसुरसाथरहै । तिहदेपवडेश्रुतिधारककोअभिमानगलचित सोगरहै । पछतावतहेचितवंतइसोवलप्राक्रमहोतप्रमादगहै । नहिउद्दमागममा हिकीथोत्रवहोइनिरुदमपदसहै ॥ ३४०॥ कितहूंजिनागमकीचरचाजिनागम सापसुनावनही । कहुवेदपुरानपढेहितसोअपनेअपनेमतभावनही । कहुछंदकला प्रगंटरससुंदरतालसुगीतवतावनही । कहुशब्दमईवरग्रंथपढेवरबोधप्रकासदिपाव ॥ त रापथकीत्रधिकोलपके पतिआरतमाहिपरै । कित 'नि नही ।

पास वरचणा कितईसुरचौरकलाधरफेदवडग्रहरत्नत्रियापरकी । पकरेतहिदेपधनीवलसोबहुत्रा युद्धचोटकरेकरको । तमकायविपेछपजायकवेजहिजोतनदेवमणीधरकी । इकदुष्ठक लाधरदेवघणेपरमानतसीपधराधरकी ॥ ३४३ ॥ रणमाहिसुरासुरझूझतहअहिदेव सुवर्णकुमारमिली । इमहीइतरेरिपसाथभिडेवलप्राक्रमआयुधधारवली । इतनोजु विशपविमाननकोत्रिणकंकरपातचलायफली । वहुहोतमणीमयत्रायुदहीरिपअंगल गैतिहशक्तिदली ॥ ३४४ ॥ सुभसब्दसुगंधसुवर्णमईरसउत्तम साथसपर्सभले। सुप भोगनपंचविविवधामनवेनसरीरविकुसले । वहुवर्पपलोपमसागरकीजिहायुज रादिकरोगटले । इहिपुन्नमहातरुकेफलहसुनयोनरनारिसुजानरले ॥ ३४५॥ सुभ बंधनबंधनदेवतवेजवभक्तिकरैजिनकीमुनिकी । पदवंदनपूजनप्रेमधरीमहिमावरणे तिनकेगुनकी । सुनकेसभधर्मकथारचणारचनाटकगीतमहाधुनकी । सुभकर्मविपे.

५९॥ सुभबंधइमेरचणारचणीजिनजीउनकी ॥ ३४६ ॥.सुरवंधनभावमलीनविपेवहुकर्मभ विक्षतनीचमई । तनचोटलगैजवायुधकीनमरैविनपूरणायुथई । सुरशक्तिनायु देपरगणा वधायनकीगतिजोनछुडावनकीनभई । सभकेसिरऊपरकर्मवलीइहसारमहामुनिरा जदई ॥ ३४७॥ परिलिंगग्रहीकहुण्यायकभावचढेल,केवलज्ञानजहा । इकदेवत हामुनिभेपदएमहमानृतहासकरंततहा । कष्टकरैपनवर्णप्रसूनसुगंधतनीरसुधूप महा । कहुसाधुसुश्रावकदेहतजीसुरभक्तिनृतादिकरंततहा ॥ ३४८॥ सुरथंभनस स्त्रसिपीजलयातपशूनरव्यालमहावलको. । पिणमैतरुवेल उगायकरेफलफूलफलीस घणेदलको । लघुकालविपरचवासपुरीविपनीग्रहवासमहीथलको । बहुकाजकरैनक रैशियकोमुनिराजकरैपदउजलको । ३४९ ॥ जलमाहितरावनपाथरकोगिरपाटउ T -rank- गुगंवायमजनतामकुछ गवी अमिदीनमहीपभएतिनते । लघुविचक्षणराजथएमनंबछतरिन्छकरेछिनते । anemal Tरशक्तियणीजिनराजकहीछदमस्तसुथाकरहेगिनते ॥ ३५१ ॥ पिणमोपहुचावण दूरथकीलघुपेत्रविपेवहुधापसरे । कहुसीसग्रहेनरकोपशुकोंकरचूरणदेसविदेसभरे । तिहफेरचुनेरचसीसधेरैतिहजीवनकोनहिसारपरै । इहप्राक्रमदेवमहावलकोपरिश तिनहीनिजमुक्तिकरे ॥३५२ ॥ दिनकोरजनीनिसवासरहीहिमग्रीपम २ सीतकरे । विनकालविपेवरुपारुत्तहीवरपारुतमविपरीतधरै । विपश्रमृतकंकरकोमणिहीदवपा चककाननरिधभरै । लजकाथलभूमिकेरैजलहीसुरशक्तिघणीमुनिवाकपरै ॥ ३५३॥ उदरोकहुगर्भवटावतहेचहुभांतकरेनतिपिप्रसही । नहिपेदकछुजननीगरभेसुरश क्तिप्रभावअनंदलही । कहनाभथिनाभप्रवेसतहीकहुजोनथकीफुनजोनवही । कहु नाभथिजोनविपेअरुजोनथीनाभविपेसुरशक्तिकही ॥ ३५४ ॥ इकदेवकतूंहलपेलक पशुमानपसीसपटायधरै । तिहदेपहसेफिरठामकुटामसवारधरैमनमोदभरै । इक देवमहापलपिप्रगतीकुउदर्वउउल्लचलंतफिरै । इसदीपतणेगिरदेकितवारवनेसुझपेइ वारणा .: मशक्तिसरे ॥ ३५५ ॥ अतिप्राक्रमवंतसुजानगुणीवहुकारजसाधिकलोकतणे । नहि शक्तिमुनीरतीतिनमैनहि श्रावककीरतदेसभणे। इसकारणसम्यकवंतसभीमुनिको पदउनमऊचगिणे । तिनकेपदपंकजपूजनहीबहुभक्तिकरैजनदासवने ॥ ३५६ ॥ रिपमोहमहायलमाधुहणेनहि शक्तिमुरिंदमहावलकी । मुरतेनभवेमुनिलोकप्रलो कप्रकासकरैदुतिकैवलकी । सभदेवत्रशक्तिकरैकरणीमुनिमोपमहापदउजलकी । इसकारणदेवमहामुनिकोधरभक्तिभविक्षमहाफलको ॥.३५७॥ जिनराजसमोसरणे पकोडजपिरपदेमरसेपकरे । उतकिष्टपदेमभद्रमतत्रसंपमिनेचितमौदभरे । र चित्रायअंग MARAT लरसरबैक्रयकोपहरूपवनेयुत टेवगणे । बहुदरयुतरिद्रपुरविनासथु। सुने । सुरशक्तिघणीनहिमुक्तिमई मुणिमुक्तिकरेतहिदेवथुने ॥ ३५१॥ गुणपूरणसंयम देवरचणा तमुनीसुरतेजउलंघचलेस्ववले । इकमासप्रवर्जतवितरकोउरगादिदुमासउलंघचले ॥ ३१॥ इममासहिमासवधेतवतेअसुरोग्रहताइमइंद्रवले । इककल्पदुगेदुगचौनवतेपनतेमुनि उत्तमसर्वथले ॥ ३६० ॥ इसलोकविपेनरनारिघणेसुरवंदनसेवनमंत्रलिपे । करध्या नरचेविधपूजनकीसुपसंपतिकोवहुकाजविपे । जगकाजकुकाजकहेजिनजीशिवकाज सकाजसिद्धतलिखे । इसकारणदेवनमेमुनिकोहमबंदतहेमुनिकोहरिखे ॥ ३६१ ।। धुरएकमहरतअंतरमाहिनजानअपूरणआदिदशा । उपरंतसपूरणदेहमईदुतियामु खभोगमईसरिसा। जवायुरहीख हीखटमासतवेत्रितियादुखसोकवियोगवसा । इसका रणभाखतहैत्रिदशासुभकर्मकरीसुरलोकधसा ॥ ३६२ ॥ अथनवरसरचणा ॥ दूमल छंद ॥ तनरूपप्रभापटभूखणकीभवनादिवेमुसिंगारकहै । वलपांक्रमवैक देवरचणा ॥२२॥ यकोकरुणारनमेरसवीरस्वरूपलहै । दुखमोचनकोसुखदेवनकोसुरंद्यालभएकरुणा सुगहै । रिसवंतभएभयकेकरणेरणखेत्रविखेरसरुद्ररहै ॥ ३६३ ॥ सुखभोगविलास हुलासविखनृतगीतरसेरसहासभवे । अपवित्रकुगंधकुरूपविखेत्रमनागममाहिगिला नठेवै । लखकालसमापरकेडरतेभयवंतभएरसमीतलवे । रसचित्रजिनंदविभूतलखे रससंतसमोसरणेसुहवे ॥३६४॥दिसदक्षणउत्तरलोकदुधासुरवासदुधातिहइंद्रदुधा कुछवायुवडीवलरिदतथादिसदक्षणतेइतरेविवधा। सभलोकतणेविचमेरुगिरीजगम ध्यदिशातिहतेवसुधा । दिगपालकरीसुरसाथसजेजिनकोजिनवैनपयूपछुधा॥३६५॥ दिसदक्षणलोकपतालविपेचमरिद्रविराजतभौनपती । तिनकैसिरऊपरऊरदलोकसु सक्रमुरिंद्रअनूपमती । इमहीवलइंद्रसउत्तरमैतिहऊपरइंद्रइशानवती ।। इमहोइन । केउनकेउपरेवरइंद्रविमानपतीस ग ॥:३६ ॥ कव 'मघवार ईशानमिलेइ ठाम :

देवरचणा देशामवेतवसंतकुमारकण्यानधरै । बहुप्रावभजिहसाबदएबहुमानलचितवरहर ॥ ३६७ ॥ सरउत्तरवैक्रयरूपकरीउत्तरेइत्तरेइतनावतहै । कवहूंकितकारणतेनिज मूलसरीरलईफुनधावतहे । इकतेगिणसंपनसंपलगेतनधारणशक्तिसुहावतहै । रच णासुरकल्पलगेवरणीउपरेनहिलभ्धफुरावतहे ॥ ३६८॥तनभांगसंपमअंगुलको भवधारणादिसमस्ततणे । उतकिष्टपदेकरसातलगेविचभेदत्रसंपजिणंदमणे। सुरउत्तरवैक्रयरूपलघूमितसंपमभागजचिन्नपणे । उतकिष्टसुजोजनलापलगैइस तरभेदत्रसंपवणे ॥ ३६९ ॥ पटमासरहैजवआयुतवेकुमलावतफूलकिमालगले सुरचीरमलीनलपेअपनेबलहीनहुलासविनोदटले । लपकालसमाअतिभारतहीत्रि यमित्रवियोगदुपादिरले । नहिदेवकोजीवनहोततवेइमभापतहमुनिराजभले ३७०॥ लपकालधेरैसुरारतकोहमरेदिवभोगविलासटरे । इततेचलगर्भविपेपरके घुरवीर जरक्तिहारकरै । वहुमासलगैतमघोरविपेदुरगंधमहादुपगभरै । जिसदेवजिने । श्वरहोवनहैइमसोनहिचिंततशोकधरै ॥ ३७१॥ लखजन्मभविक्षतमानवकोअरुआ रजदेससुधर्मकुले । हरपेसुरसुंदरभावधरैचित्तवेफुनधर्मकरोंसुफले। जलभूवनमैति देवाचणा ॥६॥रयंचविपेसुरझूरणआरतमाहिरले । निजकर्ममहाबलवंतभएइमभापतहैमुनिराज भलै ॥ ३७२ ॥ इकपेत्रसवारणावतहैजिहमाहिभविक्षतमानलिया । अपवित्रप. दारथदूरकरैसुभपुग्गलसिंचतपेत्रकिया। रिपरूपधरीशिवहेतकहूंउपमातपितामण वैनठिया । नुमरोसुतहोवनजोगग्रहेतुमनोअटकावतमोहिहिया ॥ ३७३ ॥ सुरका लकरैंजियाजीवतहीउपजैसुरहोरसुभोगकरे । चवजातत्रियातिहहोरभईमिलभोग करेचितशोकहरे । विरहोउपजंतजचिन्नसमोउतकिष्टपदेपटमासपरे परिवारमिलाप वियोगइमेमुस्कल्पलगेमुनियाकपरे ॥ ३७ ॥ दुहकल्पलगेजलभूवनमैथितसंप मईतिश्पषनरे रकमकल्पलगेनरयो तेरपंचपचिं पदेह रे । उपरेनरजोनधि ..

Pun अपमानकोबारमहाधनधानमता । ग्रह पेत्रपशूबहुदासस पावणुसुंदरभूषणचातु रता । कलऊचसुत्रायत्ररोगपणाइहिपावतहेमुनिजीकथिता ॥ ३७६ ॥ दसजातप तालमीनपतीसगकोरवहत्तरलाखविपे । सुरवितरपोडशजातदुधातिरछेजुत्रसंख परहरिपे । नभचंदरवीग्रहरिप्यउडूदसजातचराचरभेदलिये । बहुऊरदद्वादसकल्प परेनवपंचविधेत्रहिमिंदसुखे ॥ ३७७ ॥ अथसिद्ध अस्तुति ॥ दूमल छंद ॥ सुरलोकसभीजिहहे ठरहेशियस्वछअनुपप्रभाधरणी । तिनकेकछुऊपरसिदप्रभूमहि मातिनकीजिनजीवरणी । नहिजन्मजरानतरोगछुवाभयसोगउपाधयाकरणी परमेश्वरपूरणब्रह्मसदामुनिराजभएतिनकीसरणी ॥ ३७८ ॥ सभजानरहेसभदेख रहेदुरासुसम्वेदसमाधिथई । अविकाराचाहिन्नमरतहेनहिगोतसुभासुजभांतलई नहिबंधनायुननायुभएसाव्यापकत्रातमराममई । वसुकर्महणेगुणअष्टदिपैभव सिंधतरैलहिमोखगई ॥ ३७९ ॥ चिनरूपचिदानंदचैतनहैअविकल्पनिरंजनलोक पती । ध्रुवत्रादिअनंतनादिकहैअविनाशअखंडअनूपगती । सरीरअनिंद्रयप्रा देवरचणा नहीमहिमाश्रुतिवाकविखेवरती । प्रणमोपरमेश्वरसिदसदाचितमोचितमीसमता सुमती ॥ ३८० ॥ जगदीश्वरलोकअधारप्रभूजगमस्तकउत्तमऊचवसे । सभकेसिर ऊपरलोकशिपाजिममंदरऊपरकैतूलसे । सरवग्यलपैनिरपेतिनकोछदमस्तसुध्याव नसांतरसै । प्रथमोपरमातमजोतमइंजिहकैसिमरेअयपुंजनसे ॥३८१॥ कमलबंध दूमलवंदयुग्म अनुरुजनमितंअतुलंअकुलंकयसंस्थतपदं । अजभव्यथिरंभ नकंपतकंछिदं अजयंत्रभयंसुपदं अलपत्रभुजंतुचराचरलंघननूपमसंरमणजयदं प्रणमोत्रमरंसमतेधकंप्रभुसिधपयंसभमंगलदं ॥३८२॥ परमेश्वरहोपरमातमहोप रमोतमहोपरमोचकही। परमामहिमापरमागममै परवीनारदेपरतीतराहो । परवर्ज तहोशिवसासतहो अजरामरहोतवसर्वगहो । मुरनागसमानवभवनमै प्राणुमो शे रतादि वचतन सुकविविवि ति अमितघर सु घुसंवेया॥ ३२॥ LE2E4:ŁJJELLET ELLE:LLÜZLEEL.dj Laudalekica:!!! Latitativirth mit itihitthit til ॥ नियम JBALI रमांची . मन 11 शिवसा 1thi 111 Intitial: Int Inst Inth 12thin ५ मा 11ttitun REIt III ih Jumtart 1 Jilltitl:ali सिंधतरल हिमोखगई ॥ ३७९ ॥ चिनरूपचिदानंदचैतनहैअविकल्पनिरंजनलोक पती । ध्रुवन्नादिननंतअनादिकहैअविनाशप्रखंडअनूपगती । असरीरअनिंद्रयप्रा देवरचणाणनहीमहिमाश्रुतिवाकविखेवरती । प्रणमोपरमेश्वरसिदसदाचितमोचितमीसमता सुमती ॥ ३८० ॥ जगदीश्वरलोकधारप्रभूजगमस्तकउत्तमऊचवसै । सभकेसिर ऊपरलोकशिपाजिममंदरऊपरकेतूलसे । सरवग्यलपैनिरपेतिनकोछदमस्तसुध्याव नसांतरसै । प्रणमोपरमातमजोतमईजिहकैसिमरेअघपुजनसै ॥३८१॥ कमलबंध दूमलवंदयुग्म अनुघरुजअमितंअतुलंन्नकुलंकयसंस्थतपदं । अजव्यथिरंत्र नकंपतकंछिदं अजयंअभयंसुपदं अलपत्रभुजंतुचराचरलंघअनूपमसंरमणंजयदं प्रणमोत्रमरंसभतेअधकंप्रभुसिंधपयंसभमंगलदं ॥३८२॥ परमेश्वरहोपरमातमहोप रमोतमहोपरमोचकही। परमामहिमापरमागममै परवीनारदेपरततितहो । परवर्ज तहोशियस सतो अजरामरहोतवसर्वगहो। स्रनागनुमानयभव्यनमे प्रणमोशि ताधि सागर नरमरपगग नीमनी वान 4 शिवसा मांचक सोनमहो नन । जसपराग mit मरमदान अघगा हरभवज hth ५ सय दाताराराण परण सभायटर गगगग परमप्यम य करणा ॥ ३८॥ म.गल गंधमल ॥ संवेया॥३२॥ गमगार गम ति अमितघर म गालामतमान वचतन सुरुविविवि पिनियराजयकरणगी विरचपदवरसुनराकथनगन परमहरपउरविकसतहग रमातमहो । नवर se .

सिंधतरैलहिमोखगई ॥ ३७९ ॥ चिनरूपचिदानंदचैतनहैअविकल्पनिरंजनलोक पती । ध्रुवत्रादिअनंतअनादिकहैअविनाशअखंडअनूपगती । असरीरअनिंद्रयता देवरचणा नहीमहिमाश्रुतिवाकविखेवरती । प्रणमोपरमेश्वरसिदसदाचितमोचितमीसमता सुमती ॥ ३८० ॥ जगदीश्वरलोकधारप्रभूजगमस्तकउत्तमऊचचसै । सभकेसिर ऊपरलोकशिपाजिममंदरऊपरकेतूलसे । सरवग्यलपैनिरपेतिनकोछदमस्तसुध्याव नसांतरसै । प्रणमोपरमातमजोतमईजिहकैसिमरेअघपुजनसे ॥३८१॥ कमलबंध मलवंदयुग्म अनुघनरुजत्रामितंत्रतुलंअकुलंकयसंस्थतपदं । अजभव्यथिरंभ नकंपतकंछिदं अजयंत्रभयंसुपदं अलपंत्रभुजंतुचराचरलंघअनूपमसंरमणंजयदं प्रणमोअमरंसमतेअधकंप्रभुसिधपयंसभमंगलदं ॥३८२॥ परमेश्वरहोपरमातमहोप रमोतमहोपरमोचकहीं। परमामहिमापरमागममै परवीनारदेपरतीततहो । परवर्ज होशियस सत । अजरामरहोतवसवंगहो । स्रनागमुमानवभपन प्रणामोशि. 'ताधि व्यता ! लमपयन्त्रर अनव यसुशां प्रलपजस देवरचा अमर नरसरपसम कथभन प्रणामो थकन • रवीनरिंद रताततहो नवभ परवः Wble? रमेश्वरहो R शिवसा रमोचकहो रमोतमहो नगण गणधरवर नन । जसघरपस मासत घटसदन अघगण हरभवज Itallti प लतरण तससरण. परण सभभयटरण जयजय परमप्रभ य करण ॥३८४॥ कमल बंधसर्वल घु॥सवैया॥३२॥ सुमनसुपतवर सुम ति अमितधर सु घरसुकतकरसुचमन वचतन सुकविविवि विविधसुजसकरणरति सुविरचपदवरसुजसकयनगन परमहरपउरविकसतहग रमातमहो H अजरा

Shree Pravachan Sanghra Paramabh

Author
Nandlal
Title
Shree Pravachan Sanghra Paramabh
File name
Shree Pravachan Sanghra Paramabh
Text
OCR done
Citation
1913
Published
2011/08
Publisher
Lahor,barati Press
Language
Sanskrit
Pages
118
Library
Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
DLI number
313883
Barcode
99999990311266.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
rgSD7LAaeoW
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