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Dharm Tulnatmak Drasti Me

Dr,radhakrishna · 2010/12

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धर्म तुलनात्मक दृष्टि में

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धर्म
तुलनात्मक
दृष्टि में
डा राधाकृष्णन
राजपाल एण्ड सन्ज, दिल्ली

EAST AND WEST IN RELIGION
कान्तिी मनुवार
प्रमुबारक
पिराब एम० ए०
पोप स्सये
-
मल्य
प्रथम संस्करण
प्रकाराक
एपात एग सम्प, रिती-4
हिन्दी प्रिटिंग प्रेस रिली
CHANHAI TUINATMAK DAN MENS KADHAKRISIWAN :
PHLOSOPHY

अपने सुाद एल.पी.जेन्सको

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क्रम
१
तुममात्मक पम
धर्म में पूर्ण और पश्चिम
प्रमय पार सृष्टि
कप्टसहमदारापान्ति
रवीन्द्रनाथ ठाकुर
मनुगमपिका
ER

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पहला प्यास्याम तुलनात्मक धर्म मैं मन्येर कामेव पोर पाक्सफोर्ड विपरिपास के प्रधिकारियों का प्रत्पमिक पामारी किरहोंने मुझे सम्माश्यान-मामा मे मापन देने का मुपवघर प्राम किया है जिसमे धर्म गर्मम पर तुमनात्मक दृष्टिकोन से विचार पिमा पाएगा। यह रपित ही है कि हम निपप का पप्पयन म महान निचापीठ में च्यिा पाए, यहाँ पर उम्नोसनी पवामी उत्तरार्थ में इसकी मापारणिमा रवी पापी। तुसमात्मक पम विज्ञान की उन्मति तुममात्मा धर्म विमान का विकास मुस्मतमा से कारणों से मा है तिम पोफस्ट (प्राय पर्मच) का प्रसाचन पौर पम्पयन तपा मानषिमाना मिपास। हम दोनोंदहीको प्ररणा देने का मेम प्रोस्सफोर्ड के महान पप्पापकों को है। भारतीय भार्य वर्मा के निर्मोक प्रक्षेपक फेसि मममूनर मे इस विषय पर अपने पास्यानों द्वारा पौर प्राप पर्म-गुस्तकों का पधाम मंगे में प्रसाधन करके तुममारमा पर्म को एर परम गति प्रशन की। मैनममूमर ने परिमान परणिपा इम म्यागानों का भार प्रन पोरे तुलमारमा पम्पयन की एक , या मापान मे पार असेब भीमराये में नाम पम परी ८ परमात्मारामारातामारना गो१ मस्तर, १९९५ो दिए पर।

१.
मर्म सुमनात्मक इष्टि में
भूमिका नाम दिया है। उसके इस महान कार्य को इस काम केसर
एस्टमिन कारपेपर में अपने गुस्त पार पितापूर्म परेपो ाण
विपपप से भारतीय सिपाय पोर बोपर्म तपाईसाधिर्म के मम्म
सम्पादों के पिपय में प्रम्बेपना॑ारा प्रापेमारी का पौराहम
झान कीस पासा का विकास यामि तबकारपेक्टर कामाम
सन्चो मता के साथ स्मरण किया मावा रहेगा।
पॉपसमोर मोर महान दोमर सर एमरेटारमर ने पारिम
मसति पर मामपरिधाम परमपनी माभो प्रिमिटिय पर और
ऐपोपोनॉमी' आप मानविज्ञान के प्टिकोष से धर्म के प्रम्पयन के
लिए मार्प बोल दिया। सर पेम्स कार की र मोहन माँ तमा
'टोटेमिम्म ऐगएकनोमी (मुनहनी गत मनविहार पोर मोत्रेतर
रिवार) सी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण रचनामा धर्म के सनो धार विकास
के पम्पयम के लिए बड़ी मात्रा में अमूम्य सामी प्रस्तुतकर पहारम
पने मानमिवानपिसी पनामों का उस्लेय पला अनारक है
मिनकताप किए गए पसम्म पार पारिम जातियों के विस्तापा और
उनकी प्रमानों के प्रप्यमान है विस चुप्त पाप को समझने के लिए
मनुप्प डारा किए गए प्रारम्भिक अपलों पर भरपूर प्रकार पyrti
पह पानगर पौर भी प्रसमता होती है कि इस विपरिचामय मे
सिम मान विज्ञान के प्रधान प्रारम तर पापरामरया
पा मारकम उसका प्रतिनिषित गाकर मैट पर मोमवापूर्ण कर
तिसिवात मानपरिजन की समति दो पौर इस प्रकार
परोपाप दुननास्पा को प्रोत्माहन दिया। मानवविहान इस बात
को पार करता है किसामाम्प मति प्रपरिणत भोर कम मटिम प्रचस्पामो
से अधिक परिपव प्रौर विकसित सरपों को मोर प्रतिसप में हो
पी।सकी पिम् धर्म मानवीय मंतिम निम्पर।
पोमानारसमतिमा (वय ROTI

तुलनात्मक धर्म सर नियम मार होते है यो प्रम्प सामागिर संस्पार्पो पर मामू हो ।' तुमनात्मक धर्म के प्रप्पयन की प्रति मरिन पब कारणों का बहाये है, उनमें पमीरिया बीमोनिया और मिम रे मन मम्मो की लिपि को टीप ठीक पदमिए पाने का भी उस्लेख किया जा सकता है। इसी प्रकार विदेगों में गए घाई-बर्मप्रचारकों का कार्य भी कम नहीं था। उमनि निम्नवर कवीमों पार पादिम समानों के पार्मिक विस्वासों और पापारों २ सम्बग्प में साबपान और सापिसार रिसरण हमारे सम्मुत प्रस्तुत २ इस अध्ययन पर तपाकषित पाक्षेप पर पर इम तुमनाम पम की बात करते है तो हमारा पभिप्राय मह नहीं होता कि यह कोई एक दिप प्रकार का पर्म है या तो भर्म के ममन्य में विचारपरने की एर विशिष्ट पति पर तुमनारपर पति का उपयोम माम शिपिप पेषों में से परीरशास्त्र पर मनोविज्ञान मापापिमान और विपिमान (कानून) मेंगी सप्ट सफलता के माप रियाया है। और हाल ही में एक सीसी मेपारा तुमनारमा वर्मन पर मिपी पर एक पुस्ता भी सामन पाई है। फिर भी समय-समय पर पम तुमनारमा प्रप्पयन रिय प्रतिकार मुनाई पावे पाई। इसका एक पारण यह है सिम मानिर पप्पयन धर्म सिए एक मंट समझा गावा पारप पह है कि पर्म शानिय रिया से यह भोभा की नानी है कि यह मा पो ममप में पूर्ण मिमितवा पोर मिणताची भावना से बिसार करे। रम मिए कोई भी , trमरगतोचाबी' (11) मा . मरण पी मैन्मों या पिप धर्म तुममारमा इष्टि में एक पर्म उतमा ही पन्या जितना किकोई पाप परन्तु पर्प के सम्बग्य में इस प्रकार की मनासम्म तटस्थता की भावना मनुष्य-जाति महत बोभाप को मनी नहीं मगठी। वह मावावा कि धर्म गरि पमपातपूर्व पौर विधिप्रताबारी हो तो यह धर्म ही नहीं। प्राध्य वर्मपुस्तरों की पश्चिम की पर्मपुस्तकों से तुलना करना उस उरसाह मोर मामी मारना की उपेक्षा करता है जो प्रत्येक पक्ति में अपने धर्म के लिए होती है। इस पाप के उत्तर में पहा गा सकता है सिरप दिमी भी धर्म ही प्रपेक्षा कमी अधिक ऊँचा है और इन मामलो में समाहानिक नरखने का परिणाम मन्तटोमवानाभस्म में ही होगा, मोरगा इस प्रश्यिा में हानेबानी हानि की प्रपमा मपरिमेयम से प्रपिर होगा। साथ ही यह पाहिम परितोयना प्रपने बयाको घोर ठपिर मी तिम पर्म में हमारा पालम्-सोपामा। उसके प्रति हमार मम में एक अनुराग मोर माग दमाह एक और पाप यह है कि तुममा का परमिलान करमा मौर परि कोई धर्म मरे धर्म के समान हो फिर उत्तपता पौर पीवीयताकों का क्या होगा। निस्समह तुमनामक पर्म समानवा परि उसके साथ-साथ विमिम्मतामों के सम्मों पर प्यान तापिरमतु समानतामों कोसीपार परमे का या पर्प नहीं है कि विभिन्मताए मगम्म । परिहम हिती एक बर्म के लिए प्रम्य कर्मों से उत्तप्ट होने कारावा परमाही वाह! तो भी यह पापम पम्प बों के दारों पौर उनकी अन्तर्वस्मों को पाने पार रमा मम्पाकम । फिर, यह हा जाता है कि परि तुमनारमा धर्म हमें यह बताताई जिउबटरपर्मों में भीयात पाई जाती है जो निम्न मोर माविमा पाँ में पाई जाती थी तो पह परिणाम निकामना ठीक होमा कि हमारे मानिक विश्वास में हीन बनानेबाने और पकाने रंग। सबाहरम लिए फोन्टेणाइन का ईसाईपत में दीवित होना निसक मसाप माश्यत की विवाह का मम्मे समबना मि मुनिश्चित नही था। वर तुलनात्मक धर्म मित्र पीर मा के मप्प काफी गागस या क्योकिमिकमा बम प्रौर मिाझ्यन रोतों कमरे में बहुन मिमते गुमने पे।ईमा की भांति मित्र भो पिर प्रौर मनुष्यों के बीच मप्मस्प पा निमकी मुक्ति एक मिशन रा मुनिश्चित हुई थी। मिनपर्म के अनुयापी एक सैनिक विषान म पौर भूमिप्यन नीरन में उननी ही सना मे गिषाम करते प जितना कि ईमाई। टुमियन जिमने इन पार्नो धर्मा की ममानना रा कारण पैनान की करतूतों को बताया पा मित्रर्म मार्यो मी रोटी और पगा के पवित्रीकरण की प्रपा से विशेषरूप मे रिमितहमा पा। इतना ही नहीं अनेक पारिम पर्मों में रेवता की मिशानपुष्प मृत्यु के समागम में विस्वाम प्रबसिन पा पार गा मिमी कीमे परेवता कोई पम् होगा पा र पामु मतों पारा शिष्य परीरका प्रमार मोग गम्मम पौर वास्तविर होता था। या पिकाम किया गाता पा मि उम पा रम पीर नायक पवना उम रेषता गो गाने मे भक्तों में उम पता उपिन पुम पा गाने है।मवरह मिशन पौर प्रमाव मोर की प्रपापों का मो ईमापनका मून प्रापार मूल इस प्रकार के प्राश्मि विश्वासों में माना माना है। पही रेबपासना पहला कामी होगा कि उमम पार महत्त्व प्रश्नों में पापम में पपमा कर देना उचित मही है । पार्मिक विचारों के निहामिा गर्मम पीसोग रन मुस्प के प्रामोषमाग्मक निरिम से वितुम मिल गस्। म प्रमापा पिपड़ी मे गिधी गतियों में भी सिर के प्रति गम्भीर भावनाएं और मम्प माममाए मिनती गो भोनिनी ही विप पोनरी माहों परन्तु फिर भी उनका प्रस्तिष। प्राय । हमें प्रपतारपून स्थानों मे भी प्राप्पास्मिर प्रमाण प्राण हो माता है। नुमनामा पर्म या मानना हमारे सप पौ.पा. पर एप मूम।।मेरे लिए पारसो कम स रम पम पामर पानी पर्म के ममप में उग्मुशरिबारलगमगंगा मोति काममपर, यह समाना - रानो भूतीता।-अनुपार।

१४ अमावस्यक है। इसलिए बोमोन तुमनामक धर्म के अध्ययन के परिपामा सापपुर होते है भी पन्त में इस प्रप्पयन के परिणम के लिए इसका प्राचार मामये पारण यह है कि तुमनात्मक बर्म मर्मविप सप से यह सिसकर देता है हिममे ही बार्मिक रूपों में अनगिनत परिवर्वम पाए माते परतावं धर्म एक मायाम तरह दुनिया में सब पोर हमें कुछ कम या प्रषिक समान रुप मे फैलाहमा विसास मौर कर्मकार का एक ऐसा समूह रिवाई परवाह गोप्रतीयमान मिमिलवामा मार मष्टि (ममम मनग) स्मों के बावजूद कुम मनन्त वलीको टि से एनसरे से मिला प्रतीत होता हा धर्म का निवास मनुष्य के मन में ! यह स्वयं मनुष्य के स्वभारपा एक मग है। बाकी प्रत्यर यस्तु विलीन हो पा सरती है परस्तुस्विर में विश्वास को ससार के सब धर्मोदी परम सीति घेप पाता।भर्म पाहे कितने ही पलों नपरत परस्तु यह तब व बना रहेगा पर तक कि मनुष्य को कुपए है-पाद शक्ति पौर दुनिता का सम्मिमय-बना ऐगा। मामबविमान अध्ययन में प्रकट पर धर्म की प्रारम्भिकतम अभियक्तियों से इस बात की पुष्टि होती है। मानव-याति की सामान्य सापति को मानवीय भारमामों की उस पापमोम नामसा की रिसे कि परमात्मा के पम्तित्व प्रमानस मे प्रयुक्त किया जाता पाहै तुमनारमक धर्म ए निकामे नए परिणामों से पो प्रभावपामीप मे पुष्टि होती है। प्मेटो की पुस्तक 'भोर' में पर ऐवेन्स सम्पापतमे कीट के मीनियार से परमात्मा का अस्तित्व ममानित करने को कहा तब नीमियास + दो युक्तियां प्रस्तुत की थी (विकी मुम्पवस्था और तुमओ पी नियमितता मोर (२) सपा मानी और क्या पर (मसम्म) सर मोर्यो का समानाप से विश्वास बझ माह पहरमसा अमाह इन सब पिपिए पनिस्तियों के पीपे एक ही अभिप्राय एकही प्रयास और एकही भरा विधमान है। हम पमा बग्म मानवीय मन की पवित्र भूमि में होता है और सबको तुममारमक धर्म मीवम एम उसी प्रारमा से प्राप्त होता है। मे विभिन्न प्रमामिया उस माध्यामिक पास्तविकता के साप परीक्षमारमक समजन (तासमेत) है बो कुछ कम मा अधिक सम्तोपबना है। तुलनात्मक धर्म या बताकर कि माननीय पारमा एकही माम्यात्मिक वास्तविकता के प्रति तासापित ती पार किसी न किसी रूप में यह वास्तविकता मानवीय पात्मा पर प्रभाव गमती। विभिन्न पभाको समानतामों का कारण बतमाता है। इस प्रकार तुमनारमधर्म कट्टरता का समर्पन ममे ही न परे पर पाह पपिस्वास (नास्तिकता) को मी प्रथम नहीं देता। ३ इस मध्ययन का महत्व तुननारमक पर्म हमें बताता है मिसब धर्मो का कोई न कोई इतिहास रहा है और उनमें से कोई भी धर्म पन्तिम पा पूर्ष नही है। धर्म एफ गति है एक विकास और सबसने पिकामा में नूतन पुरातन के उपर टिका होता है । प्रत्येक धर्म में पुरातन के प्रवरप पिघमाम इना ही नहीं परि हम पर्म के बर्तमान रूपों में सन्तुष्ट न हों तो हम एक पम्प पपेमात मधेप की पत्याण कर सकये हैं। परि धर्म के म स्वीय इम्या पी पम्तिम पोर मातीत पनिम्पक्तियां हों तो हमें सवा पुस्पा रा त्रियोमो पपीनस्प बनाए रखने तपा प्रम्प भनेक पुराइयों को परमारमा का कार्य स्वीकार करना होगा। परि हम सप्टमापी हों वो हम इस बाव को स्वीपर कर मै सिमित रेवतामों की हम पूजा करते पे में frसी भी प्रकार प्रार्थनहीं। प्रत्येक सोरेगा सफने योम्प प्रपराप पौर करताना प्राऐप परेषतामों में पिया पमा हामादि इन उन रविन ना या रफान मार इन रस पर गाँ (१९३५) पर्म तुसनात्मक दृष्टि में रेषतामों के मतों हारा उनकी पोरमाह पूना में कोई म्पापात नहीं पड़ा। पविहम बालहत्या के सिदान्त के पापार पर-जिसके विषय में सन्देह प्रकट करमा कामी हाम तक भी किसी भी परिव को प्रविसासी या मास्तिक पौपित करने पर्याप्त कारण होता वा-सोचें तो सिरपाक परमात्मा भी बहुत मानवीप महींपा। इसलिए यह अनुभूति बड़ी सावन प्रय है किधर्म की कोई भी भभिम्यक्ति समू और परम मही है।। सकता है कि इस प्रकार के मिसासरा संसार को गुरु का माईमा क मनुमायी म बनाया ना सके परन्तु इसके द्वारा एकही अधिक महत्वपूर हार्य सम्पम्न हो पाताभार यह कार्य हामिद मसरों की प्यास्म करने पर उनमें परस्पर मेम बिठाने का और सय पर्म को उस भय । पान का मोकि वर्तमान प्रभासियों को प्रस रहा है। इसके अतिरिक्त मब तर तुमनारमक पर्म निरन्तर कामग्रीम या। हामारि यह एक मौपिया पौर प्रमानिक रंग से ही कार्य करता रहा है बुरिमान मोप सरा से इस बात को समझते रहे कि भनेक धर्म ऐसे है को अपने विमासों और विभिनाभानावारा गिनका रूप-निरि उनके प्रपन पृषक परिणाहमा पा मनुष्यों के बीगन कोनिमशिर करने का दावा करते रहे हैं। पर रिक मार्य गरिलो पार भारत की पादिम पावियों मिमे तब तुलनाएं प्रारम्म हुई और मापेमिक युगोपा विचार-विमर्प रिया परा। प्राचीन यूनानी सोपों को पपमे पास-पड़ोस में प्रचलित विभिन्न पापा के समय में पर्याप्त रचिनी पीर हिरोगेटस मे मिमवासियों, रानियॊ सौषियावामियों तमा बर्षरता के पीर पर पिचमान पम्प कसीनों रेपिस्मारों पर रिवारों के सम्बरम में हमारे सिप घरपिठयां मिल पोड़ी। गुस्मुक में ईसाइयत पौर परी पर्म एक- दूसरे मुकारने में थे। सिटस प्रौर टायर के मैक्सिमस एअरबानी (म्मोस्टिक) मोगों मोरियन पोर मनीमेश को पम्प समोरा जान पा । प्ररोप पर भी प्रारमों में ईसाइयत को स्माम के सामने मा प्रका किया। समार प्ररपर और प्रत्येक धर्म के धर्मप्रचारक प्रपो-पपने पसे तुमनारमा धर्म तुसनारमक भम के माप्यमार पाइलम रोकेरम दुध मामों में तुमनार पर्म धर्मभाममात्र (प्रपोजोमटिक्स) की एक पाचा पा पार पमम मोग हमारा प्रयोग अपने-अपने पो पक्षपोपम के लिए किया परते हास में नुमनारमक धर्म के प्रम्पयन में गो परिवर्तन मा है उ फलस्वरूप इसके निप्पयन की दिमागी मावना और गामारी की स पता (पावा) नों में समान रूप में परिवर्तन हो गया है। पाप हमारे सामने पाया है, यह प्रमाणपारी चित्र-मार मही पपितु प्रपेशागत मही-सही जानकारी के अपर मापारित तुममार मातम ४ ईसाई-पम प्रचारक मोर भारतीय पम घरापान को मारतीय पर्मों के प्रति भारत में ईमा-पर्मप्रपार की मनात्ति के मारक प्रस्न का हमापारेकर पौर पपिक स्पष्ट किया गा सम्ना है। यह एप बन गुप रसीग से बदलता गया है मिस ग में किप्रिटेन पर भारत के बीच रायमीडियमन्परसते मए है। रोन पौर भारत के बीच राजनीतिक समापों को मोटे तौर पर तीन प्रस्थानों में पमम ममम पहनानासमता है (१)स्टिइनिया पनी (२)गिरिम पानाम्य पौर (३) हिंग राष्ट्रमात । इनमे स परमी पगरपामें मारत पिम मोपप के लिए एरपा। उसके प्रपन पोई पपिपार महीने पौरपान कम्पनी उमप्रति पारगमपारमा भी पार चरमही ममझनी पी फिर गया तो पहनाही पया! ममासमाई-पम प्रपारागबात कोसीपार मारले यस्मिालीप प में भीपाई सपलर नियम (वाय १९), मापस

पर्म तनात्मक दृष्टि में
समात पपया मम्मथान पर है। उनकी दृष्टि में यहां से पानीम धर्म
परम पपहार मोर बुष्टियों का पुर-माम पे गिनका कि उसार महीं हो
सकापाव सोम मविपुमक बा से प्रात्यक्षिक मा पररो पे पार उम्में
मामूमबूत नमूनित करना चाहते थे। मानव-मन की यह स्मामारिक
प्रवृत्ति है कि यह यह सममाना है कि उसका प्रपना देखा तो सारी पृमी
साईबर है और अन्य सब रेवता मनुप्प के हाथों द्वारा बनाए गए मोबा
पी-मात्र है। विप वर का प्रसिस मीत मूर्तिपूजासन की इस भावना
को बड़े प्रोग से प्रकट करता है। उस समय न फेवम ईसाईधर्म में
१ मनमामारिए पनि से सेम
पा ममेशने सबखत
मोकियाका केप में विमिनाते हुए मरने
अपना मुनाती मात्र भीमार पर भो।
प्रकाशन मरियर से
भने खासे परे देश से
हम घरोकिमि
पम यो देश से पुरियों की माला से मुख्य का ।
पशिमामास भोवार
मन-मयमोनको सेवीti
परिमौर सीवर मनाt
मग मुलगा
बन मापूरकर
परमारेगारमा विरेपो
मुसिया
प्रमाण
कारसमस मिमगा।
पया हम लोग, विमा पराभवाभियो पुकार
बोपामको सिरहाई पर पो८
दिर में पायबोगोंको
मदत शिणने से लो।

गुमनारमा पर्म सामान्य प्रमारक प्रपितु उन पौरियस्तर भनेक ईसाई पुरुपों भौर। स्त्रियों का भी यह विश्वास पा मिसाइयत ही एकमात्र सभा घम है और पाप सब पा विमाम मिमा है। इस उप प्रचार में केवल एक पापामस्थ उदारवाशाप्रमारा। १८१८ में भारतीय प्रति के बारनि मायामक पी-पिटिए सरकार ने भारत का फायभार सभाम निया पौर भारतीय बमता के पुष प्रपिका पौर हियों को स्वीकार पिया परन्तु भारत प्रापयमित यग्य बन गया एक साम्प के निमित्त साधन पौर ब्रिटेनहित सोपरि फिर भी यह इसगिया सम्पनी के समय की पपा सुमरीगरपा थी। इसी प्रकार इस दूसरी प्रास्माके ईसाई-पमप्रचारकों ने पाकमधारमक प्रकार की पर्षता को मनुमव कर लिया पौर पर भारतीय धर्मों को अंधविश्वास पापुर पौर विषमता का पर्व मात्र बताकर उनकी उपेक्षा मही करवर प्रपितु पब ये मानवे पकिइम पी में भी पपभाइयो विषमान ।।पोपामि रिकाम पामीस पवारियों से भी अधिक समय तक बना रहा पोर जिसकी पाम्यारिमा रमाउस कोटि तक पाच गई किबह अन्य पर्मों की मठातियों से सफलतापूर मुकारमा कर सकती है उसे परमारनही टामा नासावा पिलसमें कोई ऐमा मूस्य नाही, जिसके कारण मातम रिन तक बना रहा। पम्य पार्मिक प्रवासियों को सप में माना पाने ममा दिन तयारी की परस्यापार साइयत उनमे पिरोमणि पौर उनकी परम परिमति है।महापासी प्रवृत्ति दमियन की भावना की मार दितावी पी पिसे पिपमियों पपया मूर्तिपूजकों में मुक्ति, प्रा कि, पर माननपूष पनि नर त गनी रहे घरपरिसर रिमायेकपा ममी रेनामोसनम बाप। १ तुचना मिरमा समेवरनिग मा पारस मे। साप देदिप बालर पुन: पनियरा (१), पा धर्म तुमनाम टिम गंतान दीकारस्तानी मियाय परिषदिनाई नही पाया था यहाँ पर इसरो मनोवृतिगामी रिसे सेट पति मॉपियन का समर्थन प्राप्त है पौरमो प्रत्येक विधा म मुममाचार (गाँटीम) के लिए तैयारी के पिहों को स्मोकार परते थे । सेट पॉम भूतिपूपों को इस कप में रेलवे पे कि पी पर मारमा की कोर कर ये बिससे पाये उसे कभी पाप। गमकी सब मनुष्यों के लिए माल होने का नाति प्रमामपून मवसरमा का परिणाम नहीं है। यही ममोति चतुर्व 'नुसमापार में अनेक यूनानी पारियों में मध्यम विचारोंम और ईसाई प्रध्यात्मवारियों में विद्यमान है। यह दहा गया है कि पुगने पो म पाईपानेमानी प्रायः मूस्यपान मातु नये धर्मों में मुरक्षित है, क्योंकि मा पूर्ण करने के लिए पापा का विनाश करने के लिए नही। शिरिमियसलेस्ट पॉफरिया (भारत पार्मिक यमेपर) की जयमामा म इमरी बस्पा को स्पष्ट रूप से म्पत करती है।पान्तु म तारी परस्पा मे यह सामाम्यवादी पनि विधमान मापन पार्मिक माना की सोच मिपनि पौरमहा कि यह मानव जाति निए मवि पामरा पाकि पम्प प्रयकर्म की परम सारा होकी मामी है। १९१० में महापुरबार मेपुर पारापराधातु कमी दूसरी बात से ना पिमती पाउस प्राग में मापा विस ठगी उसकी कठोप्ताबित होपी नरम मार मारल मम सम्बापों पीएमईमारमाकीपोपणा की गई और भागको यह बवापा गया कस्बम समानी राष्ट्रों के हिटिय रायगमकाएक सरस्प होगा साप्राम्य के लिए रामा अन्तर्राणीय प्रयोगनोंमिए पर समय भावी पार। मप यह पोपणका प्रम-माहिहगांन कम्पनी रिमों में बा- प्रपमा मरे पर शासन प्रान मही रहा-साकि सामाग्य के दिनों मपा-अपितु सम्म मामासरीका पम था। पर मप ममी मी पार हो । पौर उपमाप सपना के क्षेत्र में नहीं मापा ! पुरमा गर्म लिए एक महान पर्यनारा समय वा रिसमै सिपि एक बार तुमनारमा धर्म बोपैमाने पर रस्तपात का समर्पन करता-सा प्रतीत होता हातभारमम्मानि पोर पारमामोचना की मनोरणा अधिक प्रथम हो गा और इस मये पातावरण मे प्रम्प पर्मों की भावना प्रौर मूल्य को समझने के मिए पपिक प्रकार प्रान किया। हमारे काम का सबसे अधिक प्रमाणोत्सारक तत्व मिया बाया. हपा एकीकरम है । विज्ञान हमें निरन्तर एक-दूसरे माप पनिष्ठ निकटता मे मा हापौर मानव-मातिमो प्रभृतमय नमूनों में बुन रहा है । हम इस प्रा (पूमी) के एक प्रब से दूसरे मुब तकापरचको पामते है और हमारे मंशार के मापन हमारे पूर्वगो की मिविर स पिचित्र पस्पनामों को भी सांप गए है । हम अनुभव परते है कि हमारे मंमार से भिन्न पम्म पसार है पर हमारे निपार और पम ग मिम्न प्रम्प विचारणाराए पौर धर्म भी है। एम्भूमरे से विपम मसतिया पौर पम एक्लूसर के निकट मा पटके पए मिरि या कठिन है हिम उनकी मप्रानता का पार में प्राओं मी मा रगहरन रेमिए प्रिपर्म को सीमिए । भनेक पनाग्गियों तक इसके चामे पत्रिपा मध्यपूर्व पीर मुदूरपूर्व के एक रिघाम भाग को मुम्प पिए रगा है। बीउमर्म तपम पौर मिसर्मपाला प्रवाना) समेत इसके पनुपायो करोड़ों मोम है । अमेर मा पर्मो में हम सुषमने की पेप्टा भी परम्नु पापा भी यहाँ का तहाँ विषमान है । ममक प्राचीन और पामिक पामोवों मे मे मार मा इमरी मृत्यु का प्रमाणपत्र दिया और इमपी परपप्टिमीकर मौर फिर भी यह यही सारी है। एमे म्पति गोजिशिकटि पिमीम कम नही है बो मतिर दृष्टि में मिरे एण मी है जो अपने निर्मों म पौर सामान्य पस्तुमा का महत्व देने में सम्प मोमो मे भिम्न मरी मापी पोर पोमनाप टपरम परित, प्रपन पापरहित हाम सरपा सागर पराएमा धर्म हमारे मन में मरमामा नुमना विमान का हिन्धमारे मरणानसjnt R भी मामीने नियम

રર
गर्म तुलनात्मक दृष्टि में
तानि उत्पन्न नहीं कर सकता और महमारी पूमा को ही पारित कर
समन्ना है।गधारी उमस्या को बनाया है। हम मा वाममा पाहते हैं
किसकी पति के मा परि मानाज मम माफी
पार में अपनी पारीर मना मधुरमुर्म की सी नीति है शेरही मी
पहुंचाती नही। यह प्रारपर्य की बात नहीं किया-सहा हमें ऐसे विचार
पीन मर्मप्रचार दिमाई पावे है परन्तु माय भाषिक नहीं है बो हमें
पताते है कि भविष्य मर्म मा तारा एक सन्तान
माप
में होगा रिममें समई और मिनिमम बारा प्रस्मैक मत को एक नई पार
पोर मया पीन प्राप्त होमा । इस ना मनोवृत्ति के मूल स्वर को 'भार
डारी पम्प द्वारा पल बिया पाता है। पूर्व और परिपन मिति
गर्मा के बाक्तियों को अपने रिम्पर्धनों पार पन्तप्टियों पाधामों में
प्रासंकायों पामोसमामों पौर मायों में साझा कर मेगा रोमा। पर।
भावविपरनीतिकमर की मांति इस भेष में मीनापनी मन
महत्वाकांक्षा पनिक है और मास्तविकता कम । तुमनाम वर्ग नसे
मम्प ना प्रग समापित विवि मा माग गई पर
सतम भासीरीम पादर्स को भाने महाने में हमारी सहायता पर
है। धर्म पर विभिन्न परीक्षण समपाते को एक साल की
पुगनपीम सम्पना को प्रत्याभरने के लिए एक-दूसरे पर प्रभार पर
हा सर एक पर पौर सिपोजर जीवननिमि
एक माफे प्रपल में पुटे हुए है। एक होमस्य की प्राप्ति के लिए का
रगामे साभी पाता है। हमाय मा मुम्मोकि हम भार उन
मनुमारियों के हाप मिताएं पोरसा एवं मुतामिम्पा एक प्रम में
धतियों पर प्राम।।
। 'मैमरेम मिरम्म इमली (सोनोमी भाभा
सिमपनुपात मांग (प्रेम) परकीमा में।
Ammonth-मोAty
सपिबामियामा परे।

तुमनारमहम इस प्रप्ययनको भावना इस प्रकार तुमनारमक धर्म का गोम्प पर प्रदमित करना महीं 'किकोई एक अपवा अन्य धर्म धार्मिक भावना की सच्चतम पभिम्पक्ति का कारण यह है कि पर मिना नमवे तत्व पाएदिन अन्य धर्मो हे सोपों में भी रिपाई परते हों तब पिसी भी धर्म को परम मा सोन्यता पाना कटिन है। परमवारी दाबेमा बस इस प्रनित विश्वास पर पापारित होता है कि उसके पपने विपिष्ट कहर सिसातामार गावाए मर्षतया प्ररितीय! . परन्तु तुलनारमा बर्म बताता कि यह धारणा गमत है। तुमनात्मक धर्म के मूम मेतामों में रम सत्य को हरपगम कर पाने योग्य हम भी मिमानना पी। जानोग हमारे पम पर विपनाम नहीं करते उसके होठों में निकामी ई प्रार्थनामों को परमारमा रुफरा नहीं देता। मैक्समूलर मे इस गात पर बहुत परराया है। वे कहते है "मरामन है कि संसार के महान पर्मों में से प्रत्येक में एक चोय तर विधमान है । मैं मममता हूं कि उनको पैतान की पारस्वानी मताना किये सब स्विर बनाए हुए सिर की मिरा करना है और मेरा मन है कि ऐसी कोई जमा नहीं है बहा परमात्मा में पिसास सस बीय स्फुरणा के बिना हो पया हो आ मनुष्य में कार्य कर रही बीय प्रारमा का प्रभार । यदि में इससे मिम्न विप्ताम का परि में अपनी गंभीरतम मागृत्ति के सिर पपने-पापको या मानने केमिए विषय कई किसन ईमार्यों की प्रार्पमाए ही ऐमी गिकि परमात्मा समम समताता में प्रपन-पापको ईसाई मही पह ममता। घर पर्म फेवन हफनाने (प्रस्फुट मापन) हमारा प्रपना पम मी उतना ही ऐमा है जितना किमामों पा पर्म । उन मसा पर ममझना हरोमा पौर मुझेाम मानेह नहीं है उनमें चार का भी मुटिया क्यों न हो रमा पर्प मममी बाण्या।"गार तिन कारणेपरमा भी , मारपसेरम पार की प्राइमर' ग. envi पर्म तुममारमा पप्टि में दृष्टिकोन ऐसा ही पा "बह यह स्वीकार करेगा कि यह स्वयं इस विश्वास मे भाग महीन सकता टिम का कोई भी एक साप परम । बहस बात को सप्ट कर देगा कि उसके प्रपन प्रणमन से उसे मनिश्चय हो गया है कि यह पार रसना मामराया कि सामत ही-बिसार (पास्तिता) का एकमात्र रूप मानसिक सक्ति पाएमा पाइन)मही है रिमे किरहिम मे हमारे सम्मुख प्रस्तुत कियाई परि मा भी कि उसे यह प्रतीत नहीं होता कि अब तक प्रभिमेव ईसाईपर्म को मान बीम प्रकृति के प्रावमार पौर सामाम्प मानलीप पनुभव स पमम-बमा रसमे दो तषित सिउरने के लिए पर्याप्त है। इस हम अपने मम। इस प्रकार युमा रमें केवल तभी हम एकदूसरे + विषारों को उमर सररी साम इसे अपने साम्तरिक प्रस्तिताका एक मम ममत में ब क यह केवल एक निप्पाग गौरिक बोरना-माग हेगी। मम हम किसी पम्प पर्म के अनुयायी को समझना चाहते हैं. यो हमें उत्त प्रमाण का पनुमा करना होगा जिसने कि उसे प्रभिमत कर लिया है। इस कामेव और इस पितषचालय रिचार्षी सर्वप्रथम और तबरे बाकर मत्प प्रम्बपक है। काभयकोई पिरगावर नही है। महफिर्म बिपापिकार के मैग्मन के लिए पपपा पिसी एक बामिक विधाय प्रति अनुरूपता माने के लिए नहीं है। इसका मुख पतनता पार ईमानदारी से बातावरण में रहकर सरप की पोर हामा है यहाँ तक कि पर्म इस विषय में भी बिसम मायेस पास गस्ती पाप उठता विभिन्न पम एकही उपमपी बोर में गानेनामे साथियों मे मी प्रमानपी पावामकता हो तो मापा मुझे निश्चित करना ही इस बात का प्रमाण निकम से कम या कातरपधिकतम समजावापोर मरम में परफर किमी पम्प पारर्पकोस्तीफा नहीं करता। याश्मिीप्रचाररमा प्रयोग के लिए नहीं बना पौर मयाही महापासम्तादिमा मारना रमान मेरा कारभर- मेमोरिकसम (१९२६ तुलमारमा २५ शोपिसको की सबसम निगामायाप प्रसंमत है इस मम्तमसमपन मयुर पोसे ऐतिहासिक प्रसंग मी प्रस्तुत किए जा सक है। रिक विचारों में पोपमा की पी “मनुष्य से इन मित्र परम पनि पाकर पुकारते है ऋपि उसके ममेक नाम बताते है (मोकि बना एक है। या फिर 'अपि नोन पपने मयों में उसे अनेक स 'रते है मोवम एक है।" भगवद्गीता के पिता ने गुरु (न) के मुख से महसवाया है 'हे कुम्ती के पुत्र को मोग पम्प रेबलामो की पूजा करते पौर मयापूर्वक उन्हें मेट पहावे है, . मी परतुत मुझे ही मेंट पाते है पपि यह मॅट विधिपूर्वक नहीं होती।" बोट मोमों का पायह भी ऐसी ही पनि पर है। मानवीय सभ्यता कतिहास के इतने प्रारम्भिक काम में पञ्चोकका सिमामेप सचमुष प्यान देने योग्य है । “रामा प्रियी सब सम्भपायों, साबूमों और ग्रहस्यों का पार करते ॥ये पहा राना विनिम पार की पानों हारा उनका सम्मान करते हैं। क्योकि जो पक्ति के मत पपने सम्प्रदाय से पूर्ण मनुराग पारप अन्य सम्प्राओं की निम्मा करते हुए अपने सम्बराय का पार करता है। निमसे उसके मपने सम्प्रराय मौरव बाबा बस्न ऐसे प्रापरणारा स्वयं अपने सम्प्रपाय परपयामात करपा होता है।" मी मार पीरिधारको मेनोगोष (पमास) सिरात का इस रूप में विकास मिमा पा कि यह मनुप्प पीर प्रकृति में पार्मनीम पीय तर्क है । पर्म की सार्वमीमा कास प्रवर्गासी मोगोममो बतापा गया है। सापिके प्रारम्भिक दिनों में इस पारगा में बहुत महत्वपूर्ण प्रमाप गमा। धर्म 'मनुप्पयों की प्रस्प याति में पन्दर स्थापित सोमोम के बीन की रपन अस्टिन रिमार्टर (स्सिी सन् १) मीष्टि में ये मोम को मोनोम के साप नियाम करते ईमाह पहले विचमान ईमाईये हारिस पुस मूमापारबारी (साटमिस्ट) मोर मुकरात मोर हेपानीटप गरी १ राम भोक बिसेपरिनए 'शोष (११).nl धर्म तुमनारमा एप्टि में पानिको को नास्तिर पेरे। हम पहले ही सिर पर हाईसा परमात्मा और सागोस का विसमें पारी मानव-वाति हिस्सा मेठी प्पी है प्रथम पुष पा और को पाप मुसार जीवन यापन करते ईचाई मन ही मनको मासिक यो म माना गाता पास प्रकार मोप नामियों में सुकरात पार हेरामनीटस पे पार सम से प्रम्प मोप भी पे। पस्टिन की दृष्टि में काम नारन की धर्म-मिलान पपरा कानून की सब रक्तियां मोमोस प्राविवि और चिन्तन घे हो निकली मोरा मामरा साब कर सकता था कि किसी भी मनुप्यों ने बोध भी पाते हीक-रीक कही है हम ईसाइयोपी सम्पत्ति है" मानवीय विचार की च मुभम तियो मोपोस में भाग मेनका परिणाम है। सेट पीसो है 'मद समुष मुफे हा सम में प्राती है कि परमारमा म्पभिवों का भार नहीफा पपितु प्रत्येक रा बीबी को उससे हार मिानारी सकाम परवाह स्वीकार्य होता है। प्रपम महान साधिर्म प्रचारक ने बोपना की भी परमात्मा ने अपने पापको किसी भी कात में ऐसा नही रखा कि सतर एनम होता पाई। सब रोमन सामाम्म में अपने प्रसार में परिषर पपिमा रतरी पासीका और पधिगी वपामम्प पिभिन्न पाठि मोमोमो पास-पास मा रखा तब उसने पितरों में परमारमा एकता को नप एक सामापीरूप में पारित किया नोसिमा एपासना-पहियों को परस्पर बारे हुए थी। सीरिया के पूरबिया निमय एन् २९.-11 सौ) ने एक पत्र मिला कि नाम - प्रिपरमन फॉर समापेव' (मुममापार लिए वारी) मा रिसे स्ट एस्टनिन कारपेष्टर साईपन-विहान से निया दुमनात्मकर्म फ बझ्या महान प्रब' पवाया है।' ६.सिी पासपास मंगेर मेसीमठ ने मानस्थान को मिला या "सोज परमारमा ए। परेका मेरमय विमा (५८९ पर तुमनामधर्म २० पौर महोकाई प्रावि सन्नाम नहीं है। यह मानोपरमारमा पार सफा पसिनो पिता है। रम देयीय प्रक्तियों की पो उस परमारमा य बनाए हुए समार में पाप्त है हम अनेक मार्मो से पूरा करते हैं क्योंकि हम सब उस परमारमा के सभे माम मोनही बानते । इस प्रकार होता यह है किनकि हम एक-दूसरे स मिम्म प्रार्थनामो केप में उस रिम्प पस्तित्व . कुपों तक पृपा-पुरा पहुंचीतब हम वस्तुतः सके पुरारी के रूप में रिवाई पड़ता है जिसमें रिये सब पंप मिसार पोपए है।" पापस्टाइन तर मे, गिसे पहर मिरान्तबारीमापत का मुस्प समबा माना जाता है अपनी पम्तिम पुस्तक रिट्रक्टेयन्स (प्रस्पास्याम) में कहा है "पही पस्तु को परासापम महसाती प्राचीन मोमों में रिपमान पी पौरमा में मानव-नाविमाप्रारम्ममा सबसे महरमा के गरीर रूप में प्रवतरित होने कभी भी समाप्त नही हुई । उसके बाद सन्चा पम बोकि पासे से ही विधमान वा ईसाईपर्म पहनाने मपा। समाद् पार, रिसे मैक्समूमर के मतानुमार बह पामा व्यक्ति सममा गा समवामिने मिसंसार पो तुमनारमर पम्पयन का साहपूर्ण पारम्भ रिया पा" नाम की महिमा में अपना रिसाम स्पाग दिया पा पोर यह पोषणा की पो कि "सब परों में और मितापारी रिमारों में पिपरगीन पुस्पा विदमाम और सब राष्ट्रों में अमरपारी पक्तियों मामे मोग पाए गाने मी ममप होमो सानिया मिनती हमिनस नामा (इमाबिमपातों) पौर ईमाई ममित-माहित्य की भाषा स्मरप हो पाती है। प्राचीन पयोमोन पामिय में या एमारे रोम पोर बनारस में रिसर के भान परमारे मिहासन के निरर प्राधा पौर मुनि परने पापतीस्वाति पौर विनय के रहीं गर्मो के माप पहुंचते हैं। तात्विक . सारपेयर कर पा . . पोषराम ममनन (1) अपसरप २५ धर्म तुलनात्मक दृष्टि एपिसे सावरिक मार्मिक दवा में परिवर्तन गाव म माया पपने लिए एमिति कायम स्पनिबाम तताएपरिल परिवर्तन का कारण विसरिस्थिणि पिकभीमर एकता स्थापित कलमामी बस्तुए मिमक्त रमेवानी बस्तुमा की अपेम प्रषिक महान है। मारशक्त रीति से सम्मान किया वाय, वो तुलनात्मकर्म परमात्मा ही सामीमा में मारे गिलार पोर मानमति के प्रति हमारे पाएर माया। पाहमारे पमर गन सहिता की मननिति को मी पोवा जिसमें किसमेत गप्परकी भावना निहित है न गमन परम लेगानी कम्पाको पोकोत्तर उदारता को मामा पनि (बन्न मार और मुस्तान की माला वपन में नीम बस्नुपरिरत्येक सन पार पानासिक मे बाहेमह प्राचीन होगा पानिक इस बात को बोरने का प्रयास करना पाहिए कि उसके प्रबर को भाषमा बी पापिस पास की चोटकपीमिरीति से पुरातत्व बेत्ता प्रापीन काल की वस्तुओं के समय में विलुप्त पत्तीत मुरक्षित प्रयोग सम्पयन किया है. रात रीति से सहारनाकापप्पपन परमे से कोई नाम नहीं है। कारण पनि विभिन्न धर्म मानसीब मन 'ममममूबर ने परमादोरे गाने बस को कि 'समता पारम्भिरसकोदोको सत्ता मारमा की शिनर नाचिरगा। सिपाही सिकिमी रियतिम में मरीमरी समाय पनीमा) गाविसमें नी, अमितु मारमा परेप में मानाबलिप्रेमाससमें भरपामार की सिरोसिस मेसिीको भना पति सम्मको मार्मिक सिनिमय और मसिना को भी संतामनी ममी मरममा सिवयीत - पत्र की मोत Rm TV तुमनारमा धर्म २९ की उम जीवन को पान की मालामानों के प्रतिनिधियोस ममार का मारी। उम माताकोमामों के पो केवन स्वप्न नहीं अपितु मनुष्य वामन डी सरमे पत्रिक पविगाती वास्तविकताएं हैं। तब परिविधि बर्मों में प्रापचर्यजनक समानताएं। दो या तो इस कारण हो सकती। किया मूस मोन एकही पा मा इस तथ्य के कारम कि जब माननीय वि सम्मुख एक मे तस्य उपस्थित हुए, तो उसने सा बमह मिमते उनसे मिष्कर्ष निकाले और एक-सी सहर वृत्तियों से प्ररित होकर मिलती गमती उपाचमा रतिया बना गती। तुलनात्मक पर्म की समस्याएं तुमनामक धमक विषय के अन्तर्गत प्रने सप्टवया पृपक समस्याएं प्राती है। सामान्यतया पर्मों के उद्गर्मों के प्रश्न पर मो सोर दिया जाता है एसका कारण तुलनात्मक बम के माम्म के दिनों में विद्यमान परिस्पि लिया है। पम्प बर्मो का सम्पयन तलमानि ही परप्राचीन पस्तुओं से सम्बन्धित) इतर साप किया पाता है दिल्या र मतकों भी पूरा से प्रारम्भ ए, प्रणा विपत्तिकारी पत्तियों के भय से भार उन्हें दूर रगमे मीरया मे उगम हुए। हम मे काल में पहुच माते नहीं प्रमामोरा स्थान पस्यमा मे सती है। मैं इन सम्पयनों के महत्व कोपम परफे नहीं बताना चाहता परम्नुइम प्रसंग में मेरा ममप मुख्यतया इन प्रानों में नहीं है। फिर रिभिम्न पोरे इतिहास के समय में भी समस्याए । गुप पटुतापूर्ण मिटातों में पामिर करने का यल पिया मया है किगरपुस्त गारमा महरमा पौरमार्पर एक हो है पोर पाहिमपाहम पारोम मोर पार्पर एक ही वस्वरे पालग-अलप म्प। सर बम्स केरमे . । धर्म तुलनात्मक दृष्टि में ऐगेनिम की त्तच्चाकी जैसी किबह देबौतोनिया में पिपमान पी पौर जिसमे उसे पूनान मे सावली प्रवाची स्विीपूर्व मे लिया था तुनना फीरिया में प्रचलित ऐट्टिस की रम्तमा भौर मिल में प्रचलित मोपीरिस की इससे मिमती युनती पुरापापामारे साप की है। बेम्पन ने महकमा फनाई पार प्रसारम चतुराई पर मिष्ट प्रसनाों पारा इसका समर्थन किया कि मूसा सापौर पॉम बेबीमोनिया के प्राचीन महाकाम के पोपनिक नायर गिस्पामेट के स्पाम्तर-मात्र है। रेवाओं की मृत्यु पौर मरे फिर गौषित हो उठने में विस्वास मिस बेबीलोनिया फोनी सिया पौर सीरिया में पाया जाता है और इस समाग्य में बहुत काफी बानकारी 'मोसनबाद के एक किसान ना में घिसका वीर्पक र गाग पॉर (नियमान पर) मिल सकती है। प्रोफेसर किरसाप मक में पास्स प्रतियर एपिसाव' (पान के प्रारम्भिक पर्मपन) के सम्बन्ध में निसी अपनी पुस्तक में प्रारिम ईसाईबम का प्रारम्भिक रोमन सामाम्म के पस्यपूर्ण वर्मा के साप सम्पब स्पष्ट किया है।पुर रुन पोर ईसा से सम्म की कमामों में कुछ ऐमी मारपर्यनगर समानता है जो इस बात का संकेत करती है कि ये एभूसरे से सी गई है। भरपीता पौर सुसमाचारों (गॉस्पेन) की विभागों में पाई पानेवानी समानतामों के कारण बहुत से लोग यह सोचने मये है कि प्ण पोर कारट (ईसा) एक प।बरपर्म और ईसापत इन यो बर्मों के सस्थापक पीपनों उनके मर्मपन्नों पर उनकी मैतिक शिक्षामों की तुनमा निस्सना एक पानवर्षक पम्पयन विचारों की पूर्वर परम्पराका प्रम्पयन तुलनात्मक धर्म की एक मातही सरावा है। पिसी मी एक पबना प्रम्य यसमा का गुस्प कुप मी पो न हो परन पर मनारमा पठविका पयोम मूमभूम और संयम के साप, सहानुभूति और परीने ताव किया जाएगा तो उससे हमे] मिन्न बमो. की समाम पुछामि को पौर उमड़ी मिनी-युभी रमा को उममा में सोनिम दिसम मौसीरिया (१५) पुस्तक फिर तुलनात्मक पर्म सहायता मिलेगी पीर ही मपेगा कि मामबसमा जितना विविषम्प पार प्रदरतापूर्ण है उतना ही एकतापूर्ण भी है। हम किन्ही पो बो को चुनार की सम्भावनाका कारत और मोटे-मोटे अंगों का प्रपमन रसको मारमा मिसिट पाहमुषों से एमगार तपस्माबाद पहिरोन (यज्ञ) माना परि प्रबार इत्यादि को तुमना कर सकते हैं। इस प्रकार की नाप से हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण परिणाम निकास पाना सम्मय हो पाएगा।हम इस बात का निश्चय कर सकते जिकिसी पकानसे तत्व उसके सपने है और कौमसे उसने दूसरों से उपार लिए है और फिनसे पार लिए हैं और उनकी समानवाएं केवम सरी सपना उनकी यो मह वा गई। उनमें परस्पर सहमतिमा या समानवाए तिहासिक सम्पई उत्पन्न हानेपासी प्रेरणामों के फमस्वरूप ह प्रमेवा मा एक ही प्रारक अनुभव र गत उत्पन्न हुई विवार को दिन पस्तिमा म उनका स्प पर है और किन मनुभूतियों को परत परते है ! फिर इसका क्या दारण है कि एक ही माति से समन्य रसनेमामे भोप सांग-ग्रमा पर्मों को मानते ? पमपाय, पम्य लोगों के साप सम्म पार परिवम साम सपप का उन पर क्या अमर पा है। तुमनामक दम न समानान्तरतामों और समानवामा प्रष्पयन बारा समरिष्टकाविस्तृतकरी हामहम पम्प मानलवरपामा पार पमत्तारामपामबिना पख है तो हमें मापने पर्म के प्रति भीती ही विशेष प्रासापना की मनोवृति अपनानो पाहिए। परि हम परिवर्तन के रम पानुपामिक पो पोर उन बोपानों की सोर करें जिनमें पोई एक पन मुगरा है परि हम पिसी मी एकपम माए विराम उसकी पूजा की पतियों पर उसके सिगरातोंरी पृष्ठ- समान माफिरो सम्मेलनले ग्या 48 अनुसार मनुषमा बीमारी समय मनीला पर्म तुममालक एप्टि में भूमि तक पहुंचना बाई तो हमें उन कारणों के समय में मार प्रधिक कटिन प्रश्नों का सामना करना होमा मिन्होंने इन कार्यों को प्रदान च्मिा पौरन सिपासोको गहा। पहमें समस्पापों के तीसरे समूहका से जाते हैं यो मानवविज्ञानीप या ऐतिहासिक समस्यापों पर। नामम ये पार्थनिक समस्या है। यहां हमारे सामने मूस्व पौर प्रश्न उपस्थित होते हैं। तुमनामक पर्म द्वारा एका दिए गए तथ्यों को भड़प पिरिकी वास्तपिच्या प्रकट करने सम्बन्ध में किस सीमा तक स्वीकार किया जा सकता है। यदि हम पूषा पौर रिपात के पन स्पों को म पिन पोकि हमे उन पारिम और एमम्त मा धानारोपवातियों में रिजाई पाठे, बिमके अपने कोई ऐसे धर्मग्रम्प या पति नियम या ऐसे मरण पार प्रामनाएं तक नहीं है, बोरपाडारा परमी पीली को पोपी वाती पोहो तो ऐतिहासिक धर्म केवल प्राप या पाठ ही पारी मामी (समि क) पाठिवा के तीन बरें । पहरी ईमाई मौर स्माम धर्म । हिधर्म का-विमझी गौर, मैन पोर सिन् धर्म मादि भनेक शालाएं। परि परस्पबार शिकाम मार्यवाधियों ने किया। इसके सावि कनफ्यूपियस और नाप्रोत्से के वर्मा को मिना निया पाए, ये ही मानव-जाति के पीरितपम । परि में इसके लिए सक्षम भी होता तो भीष भापप में इन बोके तर विचारों के सम्मन्ब में कर पाना समय नहींपा। मेरा प्रयल पाहाँगापिकवाय मनुष मावि शामिक पनुमा की पूर्व पारणामों के सम्मान में समापनापूर्वक पैसा किट पसिनामाप्यात्मिक वस्तुपो की पाप्मास्मिक पातुमौ पुसमा इ पम पम विचार किया पाए, पैसा कि पपपने एक पारो प्रतिविम्वारमक पों में विपनाम है।'बानिक इनुप्प प म हमारा यह पर्तम्प हिम बहां कहीं भी माल और भाईको पाईपही उसे इस विषय के माप पहचाने और राममें पानम्म महिपाप भी सस्प और विधानसरपरमारमा के प्रभूत । तोब ३ तुमनात्मा धर्म प्रतिपादन को परति एक बात यह है कि तुमनारमक धर्म ने सत्य पार मिप्या धर्मों के बीच समाम्पतया पिए पानेमाने भेटको प्रमाग्य बना लिया है । परसाई बर्मों की रोमम पोनिकों और मिकम मेहारा प्यापकप से 'विमुम मिप्पा' हार की मानेवाली मिन्तागेरा मगने लगती है। सामान्यतया सस्प पीर मिपाका पन्द्रर 'मेरे पौर हरे' साप कम होता है। यह बात यही पौर पेप्टाइम (गैर-यहरी) हिम् पौर म्मेध पूनानी पौर पर (पम्प) ईसाई पौर विपर्मी मुमममान पौर माफिर में एि बानेबामे मेर पर नानू होती है। हमारे प्रयोजन के लिए पारि-विमान प्प है। पपीग्पप (परिष्ट) धर्म पौर शातिक पर्म मप्य पम्प पपि सरप पौर मिप्यारे मम्म पम्प के तुस्य महीं है, फिर भी उसका प्रयोग इस प्रकार पिया गाता है कि जैसे उसमें मह पिएमा पम्य निहित हो । सिरिय पर्ममो एक विलेपापिपारपूर्ण स्थिति प्राप्त है। पिपर गरा रपाटन एक सामोम रेन है। रमपर पिसी एक स्पान- विप का ही दावा नहीं है। मब हम पहनही र सन्ते कि सत्य ने अपना निगास स्पान संसारकसम पिसी एक माय में ही बमा रमा है। पर हम हम बात को अपने पूर्णगों को परेया नहीं अपिप स्पष्टाप मे पनुमर कर पान में समर्म कि परमारमा मे मनुष्यों को अपना नाम एपमरे से मिम्म पने सोय करबापासापर हम इस बात पानही मान मते कियो या परदा मोर मय पोर मचानाममातम में पाया जाता है भारजिन सामी पो उम पर्म मो पपनान मामुपगमर नहीं मिता बनरे भाग्य में प्रनम्न पायगा मिगी है। हमार मुख में ऐमी पार्मिक एम-तत्परतायल परीब मुनाई पड़ेगी। हमारे सम्मुग परमारमा पाक ही पपिक राम पोर मपिर सत्य स्वाप रिचमान है।

१२ धर्म तुमनात्मक दृष्टि में मि तक पहुंचना पाएँ तो हमें उन कारणों के सम्बन्ध में रन मोर पपिक कम्नि प्रलों का सामना करना होगा जिन इन फार्मों को एप प्रदान श्मिा पौर इन विकासों को गड़ा। ये हमें समस्यामों के तीसरे समूहतक मे पाते हैं मो मानरपिशानीय या ऐतिहासिक समस्पापों से पृपक है। मामम ये दार्थनिय समस्याएं है। यहां हमारे सामने मूम्प पीर बन के प्रश्न उपस्पिन होते हैं। तुननामक धर्म चरा एकत्र किए गए वों को भष्ट पपिरि की पास्तविकता प्रकट करने के सम्बन्ध में किस सीमा तक सौहार किमा पा सकता! परि हम पूजा पार विस्वास के उन सों को म मिर्ने बोकि हमें उन प्राविम पौर पुमन्नू या बानायरोण नातियों में दिखाई पड़ते है जिनके अपने कोई ऐसे धर्मवन्ध पा पवित्र नियम या ऐसे मन्त्र पौर प्रार्यमाएं तक नहीं है, यो हर पीड़ीरा प्रपमी पीड़ी को सौंपी पाती पोहो यो ऐतिहासिक धर्म मेमन सात या पाठ ही ए पाते । सामी (मिटिक) मातियों के तीन मनी मी लिाई भार इस्लाम धर्म । हिन्दूधर्म का-रिमकी पौर, वन पौर तिन धर्म मावि भनेक पापाएं -परि परपुरुषवार का विकास पायेगातियों ने किया। इसके सामयीद कनफ्यूशियस पौर नाप्रोस्से के मौ को मिमा निमालाए, तो बस ये ही मानव-मातिनीधित बम है । यदि मैं इसके लिए सचम मी होवा तो भी इस मापन में इन पौके पर विचारों के समय में पर्चा कर पाना सम्भव महीपा। मेरा प्रयत्न यह होगा कि प्रापसार मनुष्य- पातिक पार्मिक अनुमत्र की पूर्व-धारमार्मों के सम्बन्ध में सदावनापूर्वक पैसा कि सेट पॉम मे कहा है प्राम्पारिमा बस्नुर्मों की प्राम्यात्मिक पस्तुपों से तुलना करते हुए उस स्प में विचार या बाए, पैसा कि वामपने एक पारो प्रतिबिम्बारपक म्पो में विधमान ।' पार्मिक मुप्प के रूप में हमारा यह पतप है कि हम जहाँ कही मी मास और प्रधाईमो पाएं 'पही उसे इस विश्वास के गाव पाचपर्ने और उसमें मानन कि जांच मी समापौर शिपिपिरमात्मा से प्रसूत है तुमनात्माप प्रतिपारनको पति एक मात या तुमनारमा पर्म ने सत्य पर मिप्या पोपीर समाम्पतमा किए जानेवाम मर को प्रमान्य बना दिया है। गैर-नाईयो को रोमन मालिकों और ऐग्मिकम मनोहारा म्यापक प स 'पिस्नुस मिप्या' कहकर की गानेवानी मिटायेहग तमने समती है। सामान्यवया सप पौर मिप्पाका अन्तर मेरे और हरे के साप एम्स होता है। यामात पापी और बेनाम (मेर-यहण) हिल पोर मेन्य, पूनानी पौरपर (पसम्प) ईमाई पोर रिधर्मी पुषसमान पर काफिर में पिए पानेपासे भेद पर मागू होती है। हमारे प्रपोगन के मिए यह जि-पिमान पारस (परिप्ट) धर्म पौर प्राधिक पम के मध्य पम्म पर्माप सत्य और मिप्या के मम पम्प गुस्प नहीं है रिमी रसमा प्रमोन इम प्रभार पिया बाताहिमे उसमें यह पिएमा पम्प निहित हो । विपि पर्म को एक बिपापिपारपूर्म स्मिति प्राप्त है। पर आप नपाटन एक सामौम देन है। उसपर पिभी एक स्पाननपरोपका हो रामारी है। पर हम पहनहीं पा ममते मिरप में अपना निमाम स्पान संमारत हिमी एक हाय में ही बना लामब हम इस मामो अपने पूरी प्रोसा नही अधिक स्पष्टप में अनुभव कर पाने में मम पिरमामा ने बगुप्याँरो पाना शाम सपो में भिन्न पोकस में बरपाया तापमम मात को नहीं मान से मियो उपभी पाया पोर मरय मोर मचानामरिमो महापर्व में पामा वातारारमिन मापारो उमप यो प्रपनाम पामुपासर नही मिना सोभाग्य में प्रगनयनामिनी।हमार मुग मे भी धामिर रण-माला पहन पनीर मुनाई पटेगी। हमारे सम्मुग परमारमाना एक पदी पिक राम मोर पिक सरस सम्परिपमाना ३४ भर्म तुमनारमा इपि में समिए धर्मों के सम्मान में प्रश्न मुत्पता या मिप्यात्वकामही पपितु भोपन या मास का है। बिना यह है कि कोई धर्म एक निष्पान सहन मान है अपना एक मोतीनानती वस्तु है। प्रस्पेक मोरित धर्म का प्रपनी मानिक प्रामारिमा सिधम में अपना नाम होगा।हमारे अनेक धार्मिक पिरोपामा बामपठिया पौर पिसावाएं हमारे मितिम को समुश्विना कारण अपनी पापणाको विस्व सहम अपने विचार कोमपने पुग के संकीय विचार से पार उस मेते हैं।हम सबको मेटे का यह रिपेमा- भाव मनी नाति मानम है “ योन एप मापा बानता। हमलव कोई मापा नहीं मानता। पापिने पूधापा बहरिण में क्या बानता है योगतरता हो विषय में जानता है?" को पात पापा मोर विहाय के विषय में पत्र है मह शर्म के विषय में भी सस्म है। इस सर्प पपने धर्म को नहीं समम्म सम्वे कि उसकी मम्प किसी एक या पनेर पो रेसाप तुनमा मरेख में। अन्य पोका बुद्धिमत्तापूर्ण सपा पाररपूर मध्ययन करने से हमें उनकी परपरामों के विषय में पीर हमारी अपनी परम्परा पिप मे एक नया भर भोपन पार स्पोकन प्राप्त होता है। बो भी वस्तु विचारों की समस्परता की रिहायक है यह मास्वाइन देने योष है। तुमनारमक धर्म उन महत्वपूर्ण पपकरणों में से एक चिनगारा मानव-याति के पापा रिमा विकास की ऐबिहासिक पैरा उपमम्मी पापाठी। फिर, भारत का रेटरिटेन रेसार पनिष्ठ सम्मर और पनि इसबगबन को पीतिक उम्मयों की मपक्षा अधिक स्मायी बनाना हो तो भारत के समय में पौर प्रपिक प्रबोपन बहुत पावश्यक है। इस रेम में परिवारको सावमारहान पौरप्रिसिपम मेक्स-कोरस मारपस्ता सामान है।मार हातोम ने अपनी सूरतुष पताह पहने हिपर्ट बर्न में प्रकाशित एक मेव पूर्व पार पश्चिम में पारस्परिक समझौते पर सहानुभूतिपाप भारत पर पासन फरला सीपने के नये १ राप पर।

तुमनारमा बम काम' पर जोर दिया था जिसके बारामह समस्या कानी हर तक इस हो सकती है जिसको हत कर पाना प्रसम्मर गान पाता है योपि हममे से प्रसम्भव-सा बना दिया है। प्रिसिपम बैंगस पूफ्ते है क्या यह समय नहीं पा गया है, जबपि ईसाप मेठानों के लिए इस बात को समझ मैना मामायक है कि रिटिश राग्य के केवल भारत में हो सयमन तीस करोडगर-साई प्रगावन है निमकी पार्मिक स्वतन्त्रता की गारप्टी पम्प करता है और पाकिसके प्रसस्वाप राग्य के मन को धर्म के प्रति अपने कर्तव्यों को उमसी मपेमा सी प्रषिक विस्तृत इप्टिमोप से देखना पड़ता है बो दिवाई के परस्पर विकाररत दलों के विमानों पा वस्तुत ईसाईपम के पान्तरिक मतमेरों से ही सम्बन्ध रखोगामे पिनी मी गिमारों की अपमानही पपिक विस्तृत है। किसी भी पार्मिक अन्तर्राष्ट्रीयता पार के लिए तमनारमा धर्म का पम्पयन पपदिार्य प्राधार है। यह हमें सब धर्मो का एर ऐसा प्रापार प्रदान करता है जिसे परास्त नहीं किया मा सम्वा । पान पर पामिर रिचारपाय पपमे विकास में पस रिशिष्ट सोपाम तक पहुंच पाई। मिमे किनांकानेगाने लोग सफर की बेमा कहते है यह तुमनारमा पम मनिवार्य वस्तु है।

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दूसराभ्याख्यान धर्म में पूर्व और पश्चिम पूर्व मौर पश्चिम के मम्प सम्पक इस विस्तृत विषय की किसी एक पास्पान में पपाषित-सी मीमांसा कर पाना अमम्भव है। यहाँ म मानर-नातिकी रोणित मारापों एपिपाई पौर पूरोपीम के साप सचित पा-पुषा दृष्टिकोपों के समय में युष प्रमुन बातों का रसमस कर ममता । माननीय पाहिक इतिहाम में एशिया पौर परोप परमपभों के प्रतिनिधि एशिया पाप्पारिमा पक्ष का पोर मूरोप मौशिक पक्षका । समय-समय पर पे रोगों पायएं मिमी विसते पोनों को माम हुमा । पहम पहन पारसयमान ने-मिय रेसिया पार भारतमान मे-परिधम के पारागारम और पटो मि पानिहाको प्रभावित किया। परिचमी एपिया पर सिकन्दर हे प्राममन पोर स्मिी मन से पहले की ताम्बियों में सोरिमा पोर मे स्थान में गए गोरपर्म प्रचारकों को ठिीप सम्पई का मूषक सममा पा सम्वाई। प्रयोगले एक पिसाव से हमें पता चलता है किस्सीपूर तीनरी पवाणी के प्रारम्मिा भाप में गम्पिाक में मेम्पती पौर सिगर रिपा में रोमेमोरे यारवारों में बोलपमें प्रपाक मेरे पए माम के पनुपापियो रा स्पेन सपा भूमम्ममापर रे रसिपी घर पर पारमप म मरार सम्मातीमरा प्रयत्न तीन सम्मितनों का प्रभार मान पूनानी पेमन ईसाई भौर प्राथमिक सम्यतामों पर निम व में मेरी मेरमेर १ मा uोरिपागा मोरम्बाम । -

धर्म तुमनात्मक दृष्टि
सीमा तक और पिसम में पड़ा इसका निस्थय कर पाना कठिन है।
मानपका के मनिप्प सम्बाप में सबसे प्रासाममक तप्प मा विर्तमान
कात में संसार मोग एक-यसरे के निकट मा गए हैं। पूर्व पार परिषम
अब बिचारमा बीमन में एक्टरेसे पुष नहीप सकते । प्रबल
रोमो मप्य पो सम्पई सामनिक पौर पत्ताहीन होते पब ये
निरन्तर रसायी बन गए।
पर्म को प्रावश्यकता
भामुनिक संसार में एक्वा • मिए कोई नया मोसतिक भापार
होना चाहिए मास्तविक प्रश्न मामिह प्राधिपौर महापारी
मस्तिफरा बोकि इस समय प्रषिक प्रमुतापूर्ण है, प्रेरित होना माहिए
(मामा पाप्मारिमा ममारा। एक ऐसा बाधिक पगत् वितम मानवता
भारमाभूम्म काममता ममगात पप में प्रारी पाहो मारोप
प्रबल का वित मस्य नहीं है। हमें एक पैसे भाम्पारिमा टिकोन की
पामायातापियरे परमात मणिम पार रानीति का निधन
भावपूर्ण गारन हो अपितु पास्मा की दा पारस्पतापों के लिए भी
स्मा एकिपीमा बास्तविक सम समापो पौर
स्वामों से प्रतना पता नहीं चलता पिठमा चिन्ता प्रात्मक मुस्था पौर
मन मग पवा पातापम यम्मत मन्तर पाए मानो
(पापले सामारि संगठम-पोरस भारमा हरिमान का उपयोग,
भाषिक समाठि, रानीतिक संस्थाएं सारकोमास समरित कर
तमोर एक मुसमोर रिपर एम्यामिक मार पारण
होमम किन्तु पानावर जाणे सपा या पामा पाए।
माननीय परम्प पुननिषि काम पारा पूरा किए जानेमामा

निर्म में पूर्व प्रौर पश्चिम माप विज्ञान के माम की मपेसा कम महत्त्वपूध नहीं है। मानव स्पषित परी, मने पोर पारेमा से बना है। इनमें स प्ररपा को अपने सिए समुचित पोषक वाच पाहिए। पूरीर भोगन पौर म्यामाम द्वारा इस्तू एहवा है मन पिता और पामोनोवारा सहानसा है पौर प्रारमोना पौरमाएिय- VIरा, पर्सन पोर मर्म धारा प्रमुख रही है। परि मानवता को प्रारमा का विकास होना हा वापर केवत उसकी मुमरखर उमा के प्रपोग मारा ही हो सस्ता है। एशियाई और पुरोपीय पारामों ने अपने-अपन रेप से पाश्चमक परिणाम उत्पन्न कर विसाए है एशियाई पारा मे अपनी प्रर्ष पाप्यात्मिक निष्ठा बारा मोर रापीय पारा ने अपनी कठोर गौरिक निप्पयता हाथीवन की बिमाम बारा अपना तन रस प्रदेश के साम के पनुन बनाती पाती है जिसमें होकर यह बहती है। बिचार पौर पीयन क्षेत्र में इन रोमों महावीपों के एमयूसरे से सतग्न पस्तिक का फम माहमा किराना पपनी दुख बास विपताएं पौर विधि-विधान बम पए । परन्तु वस्तु मन प्रौर मारमा की ऐसी कोई भी विपेपवाएं नही गो प्राम्पम्प से किसी एक ही गति को प्रपौती। महान गातियों में पम्तर उतना इस बात कामही होता कि रममें मोई प्रमुक विषपता रिचमान है या नहीं, निवना कि इस बात का होता है कि निमपता तिमी मात्रा में पा स्तिनी सीमा त विधमान है। पश्चिम पस्मार या पसिरान से एपदप प्राय नहीं। पौरन पूर्व ही विमानौर मोहमारना से पीत है। दोनों में परिपाई पर है, तो वह सापेदा है, गमे कि समी ऐहिक भव हुपा करते। पो पापा परि उसमे गुण पट्टर सिदाम्ववार को प्रतीवि हो तो यह कयास प्रतिपानी मुनिया के लिए होमी पारप यह है बिटर मिसम्यादी पौर समीप राष्ट्रगारी भेट इसलिए करते हैं कि विमाउन र हा कि सरय समन्वेपर इममिए विमान करता सिह रस्तुमा म भरतार म।

४ मर्म तुमनारमा इष्टि में भोषित पर्म भर्म के विषय में मारत पूष का प्रतीक है। बोपोनिक दृष्टि से बह मामी (ममिटिम) परिचम और मंगोम-पूर्व के बीच में स्थित है। स्वर्गीय श्री मोविन रिकिसन अपनी पुस्तक 'एस्से मोल द सिविनियेमन्त माफ इंगिया पाना ऐ बापान (भारत दीन मोर मापान की सम्पतामों पर निबम्ब) में लिखा है कि भारत ही एक ऐसा ये है वो पूर्व का प्रतीक है। 1 सामी भावना मपनी मिागापिता पौर सत्ता के प्रेम की दृष्टि से पश्चिम को पत्रिक पास्मीय है। रोम का निपटाव पड़ोसी होने के कारण सामी एशिया में पुर पौर संगटन की भावना विकसित हो गई। मा पूर्व पौर पश्चिम मप्प पम्पा का प्रदेश है। फिर, मारपूर्ण में पौरस्प पस्पमान धन सौन्दर्य पौर यस्मा के प्रेम में पौर मबहारवार की भावना में पपपाता है। पूनान पौर रोम पश्चिम की भावना प्रतीक है। मोर मामे पर तो पीवित बों मे ऐसा कोई भी नहीं निसन्न उपम पश्चिम में हुपा हो। सबके सब मारव रानमा फिलस्तीन में पने पुस । म स प परिचय की मोर ममए । इस प्रकार तिापत एक पूर्वी पम है विपकी कलम मे पाकर पश्चिम में नयापी गई पौर पर इसने ये स्वम्प प्रपना लिए दो पश्चिमी मन को विपेपता । हिनुपर्म पौर मौसमर्म पूर्व में ही है। यहीधर्म पर प्रसारिन (सिकपरियाई) विचारपारा के दिनों में पश्चिमी प्रभाव बहन का पड़ा। ईसा से पूर्व कान में सिमरिया के पहरी बनानी बीवन पौर विचारमा सम्पर्क में पाए। म सम्पई का परिमाम बार्मिक पर्मन की पहपी-सिसवरिपाई विचारपाणपुर्मि हुमा विसका कि पश्चिम महान प्रतिनिधि पातो था। इस्लाम मारीपर्म से निकाला और यह बड़ी सौमा तर पश्चिम में पूनानियों और सेनवामियों का भी है। एगी पार पापी पवादियों मैं पोस्निामी ससक्ति का स्मपयुम पा शिान पोर एनसीयूमानी पम में पूर्व और पश्चिम रबनाए परमो में मुरिक्तिपी और बारावी पोर ठेही पवामियों में हुई महान रिपारस्पाम्ति पुप परगी मन्त्रों के सैटिन मनुवारों के यूरोप पारने के फलस्सस्स हुई पौ। फिर भी यापमं पर इस्माम मुस्सया पौरमय है हिलपम पौर मोदमम को पूर्षो बर्मों का प्रतीक माना पा समताह योकि ये दोनों ही उगम पौर विकास की दृष्टिस पूर्वीय है और माइयत को पश्चिमी पम का प्रतीक समझा पा सकता है। कारण यह है कि यह गीपन का नियम है कि पाय पस्तुपा की मांति पर्म सी.रम् संपटनों की प्रतिको अपना मेवे है पो न पाभवान् करणे है । मा रिट परिसरम चिभामा मठपा परिषम में ईसाइयतमा रिस रूप में विकास हुमा उमम पाया जानेमामा पन्तर धर्म के समय में पूर्वीय पोर परिचमी मनोवृत्तियों पन्तरमा मुम्पप्ट साहराम है। प्राप्यास्मिक जीवन नीरबौद्धिक मियमनिष्ठा भीमा को परिचमी मन बुनियादी पौर नैतिक, प्रत्पसबादी पोर पापारिक पर पूर्वीप मन साम्तरिक मारन मोर मन्तओनारम: शिकार मार पपि ममाहपाई। रॉबर्ट मिरपान विरेस्यमे प्राफ म्यूटी' (सौन्दप पापमपन्य) में पता है रिप्रवीन में पश्चिम माम्पास्मिक मान के लिए पूरकी पोर तारतापा पार पर पूर पश्चिममी मौतिक नियों में पुषिपा-सा है। एमारे पूपर पूरी पोर यात्राकररोप उन पापोंगा मामन्द मेनोमिए नहीं नियमिा पारा मोर पितापम बेग्गा प्राधीनतारे मिन मूर्यास में माता पौर पर मना पूरे नौग रमापस यहाँ पाएये २ पर्म गुममारपक दृष्टि में हाम्म तीमाल करने उमके लासयुमामों मे देती है पश्चिम में दिखसी की रोपनी पौर ये पूजा करने पाते है मानर मेवे है हमारी भी मून रस्तुमा में पोर विज्ञान की करामातों में पोंडि सब पस्तुएं अपने एमय में पए की मारणा पा सकोस पारनाई- एक मिप्पा स्तुति निसारा मनुप्प परमारमा की स्तुति करना चाहता मोरे तौर पर हम कह सकते है कि पूीन विचारपायका प्रमुख तत्व उसका मनुचीम प्रतमाम पर पापक परिचमी मनानियों की पिता यह कि पानी पर प्रसार मषिक सरीसा करती है। बीपिव मुनिविष्ट, पटिस तारिक बस्तु से पृपा मित्र वस्तुएईपास्त्र की प्रवृत्ति यह होती है कि प्रत्येक वस्तु स में पानाम मिया गाए । परन्तु कोई भी वस्तु ऐसी नहीं है को पपमे पस्तित्व के दो मानुषमिक स्पानों में बैंक ही रहती हो। पुधिबहती हई भाराकोसकी मिनासमें मानेमापन करती। सरप एक ऐसी वस्तु है, बिमे चोपन में उतारा जाता है कसमसालिदिर गम नही दिया जाता पोर पिर मौहमें विचार करने सिवरने और अपने विचारों और बारणामों को दूसरो को सममाने लिए कई की मासयकता होती है। यहाँ पूर्व यह विनास किसी भी वास्तविक वार बिस्सप्टप से देवानही पा सकता-मोरगा यहाँ त मानवा है कि पैसे कम में मुबारने तारिक अपरन तक मिनारा गणे इसको पायाचा सब उनको पोट पाचावे (-यहाँ परिचम सप्टवा वादा है पौर एस्प से सहपाता।योवीनुष मत मिया मा सो पार हमारी ताताभिक पावापुरवामा के लिए पदोपी हो या को मनप-ममप १०४५८ मिर से लाभापारी पिपिए गए दिन ४३ धर्म में पूर्व पीर परिषम बास्तविक है मो पभिम्पमतम पिया ना सकता हो पौर निरूपयोप हो या पमास्वविय। यह टीक ही कहा गया है 'पूनानियों में प्रसरता पोर कोपम हा ए भी उनमें पास्तपिपामिक सहयत्ति कम पी। इस दृष्टि से प्रपेसाहत प्रषिक मापहारिक परिचम भोर प्रसात मषिक रहस्य बापी पूर्व परा एक-दूसरे से भिन्न पे हैं।" एहस्यवाद के प्रति प्मेटो की सहानुभूति इस बातमी सूपर हिपहएर सामाम्य सूनानी से कितनापुर इटा पाई। परिचमी पर्मों में परिभापा पौर स्प-निर्णय के मिए अधीरता पाई पाती है। यूनानी मावना परमेश्वरपीपाम्मारिमक मास्वविकता कप में पारपारी परवा एक पम्यक्त गित प्रपा संसार में प्याप्त एक साया सप पमित की पारमा से सन्तुप नहीं होती। उसे अपने देवतापो को मुनि दिश समाप मोर मुनिश्चित पारीरिक गुन प्रदान करने ही हावे ।। उदारमनिए एरोम एम मुभर मस्तिक (समुष) देता है। पूनानी मम मा मनुप्पाबारोपन मुमिदित है।' इसके समाज को 'मुमिरिष्ट करमे काही परिणाम यह मा है कि उसके देवता ने मुनिश्पिव स्पों में मरे मग यो मुपट्य समातियों में बिपाए गए इन पौर स्मृस्प परीरों की मावि है। मारपर्म में ईपपरम्परितत्व पर दिया जानेवासा बहुर गोर यूनानी बौविस्तार से प्राप्त उत्तरापिकार। कोमो बौमि पम चित्रों का प्रमानों के साप पम्पों का भर १ सम्म राजरा भीमस पर निगरपापि प्रया पाएर १९९५ .लि कोरम (Hum पारपरमेषः पनानी चार मोगलना मधुरामा रिना कि समानुपायो । भोर ममे सारे शिम और सम्मान में मनुफ्यारोमामिछमा प्रभागातीऔर सपमुगामामी रिमाप्रम्प ने में बहो मामा-माम (| ४ तारिरिक र (१९५५) (म्मा।

धर्म तुममात्मा दृष्टि में
सिखातों के साथ पपना कर देता है। उसके मिए बाम के पिपय पदा
महीपते। परिवर्तनपीमयिन्तियो और प्रतीक हो बस माग
मा मुखौटे-माग होते हैं। मापदों पर ममता मौर नगरे पर्व को
मही समम माइसका परिणाम होती है-निरसता पौर उसके
साप-साप ममा होता है विधी मिसमास या किसी कर्मको पापार पर
बनाको संमना कोई संपठियप पपवा वर्ष प्रत्येक निस्वासका
मिरी दोसरमो रसके मरमे मत सामिासकारियेबी हो मरिमर
भान कुपने गिलासों के लिए पवण बनवाई तो उत मान कोही कष्ट
उठाना पड़ता है। कोई भी संपठित धर्म (चर्ष) अपनी सीमा के भम्बर,
पमा ठीक कहा पाए तो अपनी सीमापों के बाहर भी निधार-स्वावलम
की अनुमति महासावा ।ह विश्वासों को बमपूर्वक तारने पोर पणि
प्रवास पर अत्याचार करने के लिए सियाम्पत विषय होता है।रिमान
का मुहर नाम किम्ही पार्मिक भुगों के कारण कसंगितहमा तो
उसका कारण माना गरवागार होगापूमानी लोगो का माहट
नही है कि परिहम नियत को किसी पन्य नाम से पुकार, वो हमें अनन्त
परयास करना पड़ेगा।
पूर्व में धर्म प्रारिमा जीवन पनिक है। यह मनुष्य की विस में
पर्म-कान में पेपियमिीर: योरेर
रापोवोसोशल रिपसेकर विरिण
मीरा। शिपमान प्रलमतकि "
साप मापक मोबास तो मेरिलीज
गैर रोग विष में मत किनभनी परिप
माती मौसममी साल
परखापरपसे मिस
तमीपसत्या प्रचातीमोलीमा समानता
राहिम में सेसी सनी निमानी
मुंगररानी

पर्म में पूर्व पार पश्चिम Y विचमान सस्प प्रम और सौम्पर्य की मारमा के साथ एकणा की अनुभूति है। इस प्रकार के एप्टिकोण में बोधि प्रस्थापनामों पर गत पत्रिक बस मही दिया जाता। यह उनको इस रस में स्वीकार करता है कि वास्तविक को मरत पप में प्रस्तुत करने के भपकारे प्रयत्न है। इसका यह विपास किवीय तत्व प्रलप है और उसी पनिम्पति समस्प मों में मभर है। पभिम्पक्ति में भी परेछt मिस करु को भिम्पक्ति नहीं पहुंच सकती हाप्ताकि वह परे पिपमान यस्तु सब प्रमिप्यक्तियों को समाप बनाती है और रहें वत्त पोर महत प्रशन परतो । पराइन पोर रेगिसरे मामों (पीवी) से पतामियों पहन हम एक प्रभावनामा मिमगामी कारि की प्रार्थना मुनते हैं मो परमात्मा को मित्र या रमर के रूप में मपमा मनुप्पी पास में मोपए स्प में अपना पापान की प्रतिमा के पप में प्रतिष्ठिा प्रतीक के स्पर्मेसम्मोषित नहीं करता । "वह रिवाई नहीं पना रमके नवामोईपुगारी पोरमकोविच उसकी पूग मदिरा में नहीं सोचावी उमका निरामस्पात किमीको भात नहीं है। उसके किसी मंदिर में रंग-बिरंगी मूर्तियां नहीं है। ऐसा कोई स्थान नहीं है को उमे मंमान सके । रसका नाम स्वर्ग में भी पमा और उसका सप प्रपात है। इममिए एमकी प्रत्येक मूदिम्पर्म है । उसका पर यह सारा संसार है मनुष्य कहापोहारा निर्मित ईस्पान महीं।" आमिफसी उपनी सरप पाही होती रितनी किरे पोतक होती है। पर्वको गाए प्रमापोहारा नहीं मापा बामाता । किमी पार्मिक रिचार या प्रतीक के टीड मर्प को इयम करने के लिए हमें उम मूस या माम्यता को पोर निकानमा होमा निमे हिपहपमिम्बत करता है और उससम्म करता है। पारमाणिती भीस सापनही पाई भने ही मह स रिखमा ही पाजपा महो। पूर्वीय पर्म कहर सिदाम्तवारी नहीं है और मामाम्पा उनके अनुयायियों में यह बस्तु पाई जाती है जिसे प्राप्पारिमर सिप्टापारमहा सासरता है प्रपामाबमा रमति सिरसार नहीं करने दिमागम महो। म्नतिजारत समपार 0 मा किया है और यह मापा धर्म तुमनारमा पृष्टि में महीं करते हि स्वयं सुपारमिए पनि मी हो तर भी उसका मुपार किया है पाए । न केवल स्वर्ग में पनेक प्रासार है अपितु सन प्रासारोंवा पपने माइम मी प्रमेक है। हिन्पर्म मार दोस्पर्म इस बात पोस्वीकार करते है कि प्रा के प्रत्येक स्म में सत्य का धन पुमच प्राय पिचमान है घिसका एक ष संदिप-सा परिणाम महामाई कि इन धर्मों की परिधि में सब प्रकार की विदेशी पूना-परतिया पोरमन्च रिमास पाए जाते है। पमन-प्रमग बातों पर जोर देने का एक सामाविक परिणाम यापा है कि पूर्व में धर्म पाप्पारिमा परिकार की वस्तु पषिक पौर पारियपूर्ण वित्ता की मस्तु कम है। हम सत्य हो पासोचना पौर बार-बार हारा मही प्रपिनु जीवन को गंभीर बनाने पार चेतना के स्तर को मरतमा सौबते । परमात्मा सर्वोच्च नेपस्प नहीं है पपितु यह सोच अस्तित है जिसे कि पनुभम किया जाना है। यहाँ निष्पिता बामे मों पर पोर रिपा पाता है, पैसे मननासा शान्ति पार पात्पिर बम को पारमबम पौर काम, कापय विम्वा रेमिट संग्राम का परिपामी धर्म पावन की प्रमुख स्तुपा पागम का प्रकार पार पीवन का विधान है। रात का पेड मास्वा पन्सार अपने मित्रों से कहा कता पा 'माकाम में छानाकोपमातार नहीं क्योंकि पानी से गन्दी मक्सिया भी प्राकाप में गसकती।पुस या नाप के बिना मरियों को पारपरबामा मौकोई चमत्कार मही है कि एक मामूना-सा कुत्ता भी ऐसा कर सकता है। पारसी धरपी को सहायता देना एक ऐसा चमत्कार , पिसे परिवारमा.. ओप किया।" पूर्वीय धर्म ऐम पासिक भर्य पार पारिमा विनामका -ममोर मोकिमय से नही, प्रपितु एक ऐसी शक्ति से सुसन रोते मोभीर में पका-मुमकी को मार से मापे मिस पाने के कार कर देती है।

पर्म में पूर्व पार परिषम
द
निवृत्तिमाग बनाम प्रवृत्तिमाग
पूरते वीगन और सत्रिय सेवा परिरम को अपिहपती है। उसकी पुष्टि
में पीय एक ऐसौ वस्तु है, निसार अधिकार किया पानापौर रिसका
मान मिया माना है। बुद्धिमत्ता इस बात में है कि परमोक में किसी
महात प्रप्राप्य असीम सम्वोष की पर्ष
ग्रामसर इस बीमत का
भाषिक से मषिक सापपोग किया गाए मौर हमे सोचम प्रयाग में ममाया
भाए। दीनी पति अपन प्रापको इस रागन में ASESो और पर
गोरीय पनिया मनप के लिए ही पभिप्रेत है ।मपि पाामा की स्वतन
पति पार सम्मिमित समुराय का संगठित संसम्म महान उम्मतिकारी
पालियो । मानववादी दृष्टिकोण से पाया प्टिक मतिर का
रिसस पोर राष्ट्रीय पक्षणा मारर्स माय । वाधार परमपमा प्रति
पन्नता का नाम है। यह एक उपयुक्तता पपरा पासीनता की जनमत
के सम्बम्प में प्रीतिकोनाए रखने माना है। मुनाता मम्पम मान
मंतिक विकासको पूनानियों की देन है। सब माममों में 'पति पाप है
पाहे पिर पामर मसरा पतिपिपरमें होगा सम्मत्ति पाझाम
विषय में हो। तापमान तनी ही पीsutमी पायरता।
तपस्या रखनी होगी दुर्गा सिवनी पिसामिा। पूनामिपों की
दृष्टि में परित्रता दिए।
पूई मधिर्म सामरिक भारत का ममतारपसा यह पाम्पारिक
समता को प्राप्ति मौर मुमत एकत्तिा म्पत्गिव नपाप है
भी विषय पर पापों में एसाद मौर निरममा में पटोर प्रयन
द्वारा मानवी दी। पौरमम मम रोता और उपभोग जीयम्
दीपोतासगरपिस पानेगाने गुरपी पाम्ति परिमापापा
से समापि में मार NिINन नातासम्म म मण
मतमा उस्मास महारपूर्व मार्ग पर पाबरों पर ए

Y पर्म तुममात्मक दृष्टि में म-ठानिया के प्रति पालसमकमी प्रषिक पर्ष लगा पश्चिम में धर्म एक सामाजिक तत्व एक धर्म-मरमा समुदाय कामिपम । पूनानी नविकता मूलत पनमातीय पी। पूनानी योग क्षेत्रात उस मोगों के प्रति वर्तनों को साकार करो पिम साप पिम्ही विधेष सम्बन्यों द्वारा पे होते थे परन्तु सेप मानवजाति के प्रति मनुष्य केप में मनुष्य के प्रति ये बस उन्हीं सामान्य कम्पों को मानते थे, की माता की भावना कारण उनपर मापे गए होते में। परिचम में धर्म सामाकिस्तापितका एकसान है और नई मार्यों के प्रचलन रिष्य एक रामकेम में है। पता सामाणिक रीतिरिवानीपमराता है। उन उत्पों पर पोर रिमा गया है जो सम्हों को परस्पर सगठन में बागवे है। पच्चे मामरिक मन्ये पास्तिर पर जो नियमों का उत्तपन करने है मास्तिक है। स्माषत पम्प एक धर्ममग्म (44) मन बावा है पौर उसके मा भामिक टि से सम्माननीय धम पाते है। इसमिस प्रार पीसियस मनुष्य बिम्हे कि देवता समनमाने नमा। सिपियो ऐपपनस काशीय छम्माम किया गया था और यूनियन पोरी प्रतिमा कोणार्मों के समारोहवर्ष बमूस में निकाला गया पारोमन सम्राटों से उनकी मृत्यु पश्चात् सीपमन्दिर में स्थापित पर रिमा पाता मा। परीक्ष्मीर के महान प्रत्येष्टि भापक में निसे कि पूनानियों में सपोज धर्म की पमिभ्यक्ति माना पा सावायूमानी रेषतामों का कोई उस्मेडही नहीं है। ऐवास के लिए समरमा ऐशीम के लिए मुरकरणा। रीपिडीर पेरमों के विखाए महान पुर में अपने समित को प्रोत्सा हिवरखे हुए पीसियत के मुंह से ये मादकहमपाए । “ऐमास के पुत्रो परितुम पनपतों उत्सान मोमो मत मानो रोकनहीं सकते मी सममनोकि पैमासका पम परास्त हो गया है।" गटर फारमेन कामचनदि बिन यमो का कोई भी प्रनिमत प्राप्त होता उगम में , पारनेल लामा रिविन ( १TE !

पासमान मम में पूर्व और पश्चिम फोई भी इतना अधिक राजनीतिमा जितना कि भूनानी मग जो पूना-पतिमा सामाजिक सभाप को बढ़ाती है उन सबको धम्प मामा मया है। मिबन मे अपनी पुस्तक मान ऐर फोन पॉफर रोमन एम्पापर (रोमन-सामाम्प का हास पौर पराम) में बताया है कि प्रेम के मनिस्ट्रेट "उन सार्वजनिक उस्मों को बढ़ापादेव थे जो मोगों के पन पहन को मानवोचित बनाते थे। भनिप्पपानी मी कप्ता का उपयोग मीति के मुविधामनक सापन हे स्प में परते पे पौर बेइस उपयोपीचारणा है पतम बबन रेस्प में मादर करत ये फिसदमा मेनेमे देवता प्रपत्र मंग के पपपप काम गाम में या प्रमले यग्म में अपाय स्वेह । परम्तु पाँधर्म के दम सामान्य सार्मो मो स्वीकार करते थे मही रन पर मी विकास पा कि पूना की रिमिन परविया समान स्प से एक ही पापित प्रपोगन को पूरा पती हे पोर पारि प्रत्येक देश में उस पापापागापासम्म यो समय और प्रनुभव हारा स्मीनार पिया पा पुका है की बमवायु पोरबहा के निवासियों के लिए सबसे पपिक मनुकूम होता है। पूनानी सहिष्णता राजनीतिक अवसरवारिताका परिनाम है मुरिपारित विश्वास नहीं । पूनानियों का महदेवामा पौर उनकी परनीतिक हि प्रसहिप्ता के बिरर उनसरी मुथा ये। यदि मुकरात पर प्रत्यावार मिया यया तो बह इसमिए हिपहराम्प सिए पतरापा। परिषम में पर्म एक प्रसार के रहस्पनावी राष्ट्रवार माप भुममिन-मा मया है। पूर्वीय धर्मों में पार्वभौमता मा तत्प प्रमुख है। उपनिपकी पहिमा पौरपुरकीकरणापा प्रेम अपनी यापूर्ण बाहों में प्रापी-जगत के निम्न मे निम्न मांगो भी समेट मेवे ।। पूर्णम प्रमों में परमोक्परायणता की भार मुकाम पाक पत्रिम के पो बीपिपला-सोसायता ।। पूर्ण सामस मना और नापों गोतयार पाला है परिसमी माँ तारा से मनुष्य मार पसायोमासमार मर गया। पुचि पर्म ममाग पो बनाए मम समय (११) ११ - पर्म तुलनात्मक दृष्टि में रहने की अपेसा पतिकी प्रास्मा की मुक्ति के लिए प्रापि मुसलमीर है। परिचम पम पम सामायिक मुम्पपस्पा के लिए एक प्रकार प्रतिस-पनवास में गाम मेते हैं ।पुर ईमा पौर मुरम्पर से पूर्व महापुरषों मे संसार को एक मयेचा में प्रपति पिया मोर पान्तरिम परिपतन किये। उमकी देन मनुष्यों के मन के पत्र में पाने-बाने की पर सुनी हई। सीप, कॉमवेत मौर नेपोलियन सांसारिक मनुष्य एम को सामग्री प्राप्त हुई उससे कार्य कोही सन्तुष्ट ऐ पार उसे पहनि सुव्यवस्थित पौर सावीन रूप रिया । उहनि बीवन का कोई नया मार्ग नहीं रिचाया पौर समसेऽसियों पर पीरियों को कोई सान्त्वना भी नहीं मिमी। पौर फिर भी हमारी सामानिए सस्थामा पर उनके कार्प की माप है। पश्चिम में हमे प्रियाधीन गोगों की पपारंपारिता रिता पती-पूर्व में इसे एमागरमी स्पपीमता पौर सुरनमौत पण पाकी रस्सनाष्टिगोचर होती । परिचमी समाति का पार, मो पूनामीन से निपमा.गों को माता-रे लिए.सग प्रशिरिना किसे राम्प में पौर सम्म लिए अपनी सम्पूर्ण पवित्र को अनुभव करने में समर्थ हो । पूर्व में प्रधा पारमी सो समय जाता है। पारे संसार का अपना पर पमनाही) ये दोनों ही प्रकार बहुत पावसा क्योंकि दिसी परास्तापूर्ण समान में प्राप्यारिमा प्रकापमा पनप नरी प्रकती। / तयुक्त पिनेक पायम मानवतावारी भाप सामागिक एवापौर राष्ट्रीय कार्यपालना ये पावन के प्रति पश्चिमी मनोभूपि पिपेपठा सूचक चिह्न है। पश्चिमी सहति के महापपूर्ण काम ~यूमानी कात फोमटेस्टाइन से पहले का रोमन बगत् पुनर्वापरपका कान और हमारा पपना काम--स महान परम्परा सामी यो वर्ष और विमान पर, भौतिक प्राति की पत्तियों और मन-धारीरिक प्रयी रूप में मनुष की अस्तिो पौर सम्भाषमानों के मुम्पपरिपत जान पर, और उस हान सामाजिक कार्ययमता और पस्पानिए पपिकाधिक उपयोग पर धर्म में पूर्व पोर पश्चिम पापारित मिनारा मनुष्य का मा भीषन मषिक सरस पोर मुस पूर्व मन सस्ता है। W ईसा का पम और पश्चिमी ईसाइयत पर्म के प्रति पूर्वीप और पश्चिमी पिकोण पौर मनोवृत्ति का प्रस्तर तब स्पष्ट हो पाता है पर हम ईसा के जीवन भोर मुममाचारों में मिली उसकी गिधामों की माइमीन पमसार के साप तुमना गरते है। यह मन्तर एक प्रकार के पतित पार पट्टर मिसान्तों के एक समूह के मप्प एक पाबम-प्रमाली और एक मिरिया की प्रमामी के मप्पा पम्तर है। मन्तःस्तरमारमा अनुभूति हसियावादीन सहिष्णुता पौर प्रना मम्मरमर सद्गुणों पौरमारंभीमनारी नीति के लिए प्रापहमी निष्प ताओं के कारण ईमा एक पूर्वीप अपि XL मामन पाता है। दूसरी पोर मुनिश्चित विापानी पार तानाशाही कट्टर सिडानों पर लिया गान मासा रस पीर उसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होनेरासी प्रसहिष्मता ममम्पया मोर पवित्रता का राष्ट्रीयवा के साथ गहमामा-ये पश्चिमी पिठ के सबसे महत्वपूर्ण पो। सा का पर्म प्रेम और सहानुभूति का सहिष्णुता पौर प्रम्समुपवा पापर्म का। उसने भोई समस्त स्थापित नहीं पिया पपितु यह कैरम विगत प्रार्थना का उपरे ला रहा। वह नाम-पों मार सम्प्रार्यों के प्रति विमङ्कम उदामीन पा । रखने पहनी पोर गैर-यहूदी में पारोम पासियों और मूमानवामियों में कोई भेइमार नहीं दिया। उसने एक नया पम सिगाने पीपान नही ही प्रपितु फेनम माम्मारिमा जीरन को मम्मीरममाया । रमने पाइसिसाममही र पौर मारिपार परविनास मीही पनि दी। उसने पारियों के पममम्बिरों में शिमा पाई पौर गिला ५२ धर्म तुलनात्मक दृष्टि में । दी। यह उनके कर्मकागेका उस सीमा तक पासम रखा हा पहा तक कि मनुष्यों को प्रान्तरिक प्रकार के प्रति प्रामा नहीं करते। उसने निष्म प्रदर्शन की उक्तियों को रोई महत्व नहीं दिया। ईसातारा उपरिष्ट सरम सत्यों पीर सैम्पबादी वर्ष में जिसका फिगटन सोपामतालीम पा पौर बिसम परस्पता के लिए बाम पर भी मावी मी परस्पर कोई माम्य नहीं है। परम्तुबर ईसाइयत प्रेम पहुंची और उसने सीपरकी परम्परापों को अपना मिया तब परिवर्तन पनिमार्म पा। जब पारी योविपियों पार भरिप्पपाताओं का स्थान पूनानी ठसास्त्रियों और रोम के कानूनबत्तामों मे में मिया तब साधर्म-विज्ञान का पतई संपत पौर कानूम पर प्राधारित हो गया। भावना पारियों पीही दी परन्तु उसके मम मा पम सिधान्त यूनानियों के हो गए और उसका पबतम पार संगठम रोमनों का बन गया।'चिने अपने पीरनारा १ गमरवा बरपात सुम्पसा पाय मो में प्रम(इनमें से पानी परिमारने को प्राधियी। प्रारम्भिकरवान फमात्मा में विस्तार औरतकी मामीसापामोरे गामारीबासे परमाया कीरा की परिमारमे प्रमान नही तिमो मनमा और नकी कीमें विपन्न 1 महमा पNिR ममी और समय सम्म मैरते में पतुनोने म समानाकीपाला पिरो पराष्पीको प्रभारी प्रतिमामालित परेमप्रथान पानाने और मीकम भिाकि परमममा + समस्ती पारपास(१) मम मनिह समाज की दुसरी ममितिबामश्री ममृतिमी, मांत परिक्षामा से मिलने की प्रति सममिको को प्रतानियों में (पदो म) गंगने की प्रधिकोदी भी पायो म मा हिसावदामि संगतिनको मरने जीता मिस मम्मिसपास रिती मी प्रथाला बारसा म्हारे पार बी। म्निीक सपान बालेन नीलिमी मरे मर रोनको साब से मपतिक मतमममा हिमानी AHB संसार की विपिन मौसमरसर में मनुज मिपाकी विविनाप्रतिनिया परहे। (तीय मती माधना को तो बम में पूर्व और पश्चिम इस बात को प्रकट किया और अपनी पिसानों द्वारा इस सम्मानमा को बारा दिया कि मनुष्य विस प्रकार या जीवम सामाम्पतमा बिताते है समसे उम्मवर प्रसार का गोषन पिता पाना मम्मर है। वह धर्म-विमान पौर कर्मकारोबारीस्यिों का विवन नहीं करता अपितु यह पोपमा करता है कि परमात्मा से प्रेम या वास्तविकता की प्राति में मातप्टि पौर मनुप्प के प्रति प्रम या विष के प्रयोग साप एवारमता पम के केमपूव सरप है। पश्चिम में पहुंचने पर मतदप्टि पौर भनिप्परम का स्थान सम्प्रदायों पोरकट्टर मिसान्तो ने मे निमा मोर निपपट पियरप्रेम कास्मान रित्ता की पटिम मामतामों में पीन सिया। वर्ष के सम्मुख प्रश्न या नहीं है कि जिन विचारों का प्रतिनिषिल बह करता है पापारिमक दृष्टि से श्रेष्ठ या मही प्रपितु यह है कि कौन से उपाय है जिनके द्वारा समागमो एका संपरिक ला गा सकता है। रोमन विषापौर संस्पापों का प्रमाव पारियों के संगठन पर पड़ा। ७ प्रवतार पौर बिदबार tमा की दृष्टि में पपिपना मान पा विपय नहीं है पोर न पान ही पपवित्रतापामारप है। रसरी सरम प्रमाप्तित पिमानों को बहुत प्रिय ममती पी । सेप्सस ने मंग्यपूर्णकमहापापिईमाई-समुरायों में प्रवेश परस्परिपान और पवित्र नारन रने प्रपरेसमा अमरममे मा ग्वार ना माने ताप-बर ग्रीक परियार मेशिन र पिसिन पर्व (११) र १५० १५.पार मेगुनमा पिर भरमगम मनी तमोर दिसत और मे सुनमावर मिरगय पूनानी थाम्नामा। रिलो भा : १११ (१८९)1 बम तुसनात्मक दृष्टि में के लिए नियम यह है "कोई पिम्पिषित इममें प्रोस न करे। कोई विमान पक्विनमें न पाए, कोई समझदार परिव इनमें म भार, मोकि इस प्रकार की बाठों को हम गुप समझते हैं पातु बो भी कोई प्रशानी को भी कोई प्राधिमान हो पो भी कोई अपिक्षित हो वो मी निप्पट हो वह यहाँ पाए। उसका यह मानत है। सिकन पूछता है 'एक पानिक पौर एकमाई में एक नाम पिय पोर एकस्पर्म के पिप्प में क्या समामता?"और फिर मी मा निपपरपरा को बनानी समाव केशवमा ठीक प्रतिकूल प्रतीव होती है पर नामियों मारा पपमा नी पई यो मा एक धर्म-जानिक प्रपामी में स्पांतरित होगा। सूनामिों और रोमगासियों की परमरमा में सपि निम की एक शातिकम्पास्माकम्प में बीपसौम का वसीम के साथ समाप पूनानी पन की एक विष्ट समस्यामी और उसके समाधान लिए पोटो पौर परमेमो हम मुमाए रे पसरपार सन्तोपरनक नही। परतार सितम्प में एक इस रिचाई पवादा। इसके अनुसार परमात्मा मामा-पयत् से एक निरकम्मरमामय पृषक हुभा नही पता पितु बह मस्तुत मामता में प्रविष्ट हो बाण और इस प्रकार पन्तवोवला मामसावि के साथ परमात्मा को परवा को संभव बना देवावा में हमें पल और मानमरत का मिलन रियाई पाण। कासातीत पारमा हमिदगम्प संसार में प्ररिप हो पर है। माठीमपर्मसार सूमानी पनि विचा की समस्या का समाधान है बारीपन की समस्या या नहीं। इस नमसारपीमा मेकर प्रबक पान्तिकवाद-विवार हो चुके हम यह नी रेत है कि एकपाठा एउपसाय पन-धन गिरी परत में स्पान्तरित हो गया। मानी भोप निम पिणपिसकीही पूगमही करते थे पपितु रेस्तामा पौर रेमियों के एक पूरे समान पूना र मातरमी मारियान मेरि मसिन पर (५८) १५ ।

पर्म में पूर्व और पश्चिम करते थे। पूनानी-मैटिन मूर्तिपूना में रियस की पसना ग्युपिटर के रूप मैं कीमई,गो सबों और दैबियों का नामा और मेरेषता और रेरिया उमम ही दिम्यता प्राप्त कराया भूमिपुर बहदेववागार और यही एवारपार भापस में मिलकर एक हो गए तब एक पोमिक परमारमा को धारणा विकमिताई मह परमारमा एक समान है। रोमन सम्रा में यो राग्म को मापरिपता और पी मरम्पवा के मम्म भेरमार को समाप्त करमा पाहत पे स्थानीय देवी-देवतापों को सकर रहें मिाई सी में परिवर्तित कर दिया। रोमन सामाग्य पात्याचार के मापतको नष्ट करने में असमर्थ रहा। परन्नु रोम पर ईसाइयत की वियप पासपमा के मुसमाचार की पराजयमा मूगरपा। मापत रममम्पनामा समायोजिमके भीगे रहार यह पनपी । पर पवित्र माना मगर प्रम-मानिक एस्पों का एक प्रकारमा सरोगर-मा बन गया पर यह निझर महीण। ईमाश्मन एक महतिया। पर्म है रोममे प्रापीमार भने पाँ समिपम है। पहदियों, पूनानिणे पौर रोमवामियों ने तपा भूमप्यसागर परमाही में रहनेवासी भातियों ने इसमें पचगन दिया है। सपा परिमाम यामाहे किहमरो पोर म कम्पयस्थित पवार लेनी बहुच पाता के बाद इसमें सबरिया पापमान है। एक समारण तौर पर, परमाल्या के समय में हमनीपारपाए एक प्रममप पिता से सकर एकपटोर मापापीग एक मुप्तपर प्रपसर, एक कटोर पम्मा पार पाप एमपस बनी रहती है।

पर्म तुलनात्मक दृष्टि में द प्रारम्भिक सिाइयत की रगरता और परवता ईसाइयत में उसका प्रभाव पर एक बार पार्मिक भाका हर सितबारी बर्मसार के भाषषपना होताई पनपता पौर प्रसहिपता पनिवार्य हो पाती । अपने प्रारम्भिाप में ईसाइयत उम पश्चिमी विचारों और विमाप्रति पूरीए प्रापपीन पी चिन सम्पर्क में हमारी चौरे मुसमाचार मे लोगोए (पास) सिसाम्त को अपना लिया गया है पोर या स्थिति स्वीकार की गई है कि मोसोम ईसा की पूजा करते है कोमिमा रेषता स्थापित महापरहे। चतुप जीम साकोस तप्प कारण कोरे चनी नहीं हुई कि मोपोस का सिरान्त मनर यूमानी पा पौर रसका सम्बन्ध मूर्तिपूगों से रहा पा। हरणा के सिशाम्त सते संकीर्म यही धर्म पे जानकार महीं रख पाए । पस्टिमार्टर बह रह सकवा या "प्मेटो की पिपाए पचपि सब एप्रिया से सिर की पिधामों वे मिमती पुनवी मही। फिर भी ये ईसा की सिमाओं को निरोगी नहीं है। कारण यह सब सेसन बनके पन्दर रोपे गए पनाम के अन्तर्वासी बीर शामियामों का धमा-मापन कर पाने में समर्प) और फिर भी पानी पानी में सामठ में पारिता की मनोतिपनप पर। स्सिीपूर्ण वीसरी शवाम्बी में सिफारिया में प्रथम टोलेमी हाय पित पिया पवा विधास पुस्तकामम रिते कि तो उत्तराधिकारियों ने सूप बम मियामा प्रतम रस्त्री सन् १८१ मंपिा समारपियोगेरिपके पारेण से नष्ट कर दिया गया पाकिबह समापाठा पाना मुक्ति पूगारका मापापुछ गवानी परसाव पर ईसाइयतनाम के २ पाteejालमा मकस टीम को सेबारा मिन्दरिवार सब मरRH धर्म में पूर्व पार पश्चिम सम्पर्क में पाई, तब भी इमने सी उदार मनोवृत्ति मही दिसाई पैसी कि इसको प्रारम्भिक प्रसस्वापों में पी प्रपितु इसमे इस्लाम से नही उपता मौर धर्मापवासाप पुर पिया। यदि हम यह माम भी में किस्साम एक संम्पपारी संपठन है एक पुरप्रिय बिरादरी जिसमें कि उसके भनु पापियों पर कुरान और रक्षाप्पाम्मा-पोंगराकोर अनुशासन स्थापित झ्यिा पपा है फिर भी हम इस बात से इन्कार नहीं कर सकते कि हमाम् । मावत की साबना पाति और राष्ट्रीयवादी सोतीमो माम माती परएक ऐसा तत्वबो प्रम्प अनेक वर्षों में मही पाया जाता । पार पर ईसाइयत भारत के धर्मों के मुकाबले में बड़ी हुई। यह फिर पनम्म पारमसम्पूर्पता की मनोवृत्ति को प्रपना ही है। पुम्के दिनों में इसमे को पिका प्रहग करने की पक्ति सहिष्णुता तत्व ये रे परम हो एरे है। पर मह सम्नति पौर सतरत्रवाकापर्म नहीं रही। पपिनु एक सगटन का पम बन गई है। वर्ष प्रकाधना का पाहा और बम प्रकारमा ही प्रामानिक नहीं। पैगमरीव तत्व प्रामाणिक है और उसमा मू! में गोपा जाना प्रामाणिक नहीं है। पर हर सिवान्तों को पान विचार की रष्टि से मूत्राय करता है परन्तु वह किसी भी धर्मसिसाम्त या मूत्र के लिए सर्वपा बौद्धिक दृष्टि से पूर्ण होने का सवामही कर सकता। मतीत काषितम किसी भी प्रकार पर्वमाम चिम्तनको पनावरपामही या सकता। ईसा के स्वतन्त्र पार करम पम तपा पर्ष को कट्टर सिदान्तवारी प्रपामी मप्र पम्प रोस्तावस्की की पुस्तक 'रामागोष बग्पु' (र पाल रामारोग) में 'महापम-परीक्षर' मामा पम्याय में प्रकट किया गया है। महापर्व परीभा को पाता है कि में रमोगिए हुए काम पो रमट दिया है रमे सही कर दिया और उमे प्रापिगार के पापार पर नये सिरे से स्पापित किया है। मनुष्यों की पारमाएं विमाम भोंदीवरही पौर स्वतन्त्रता के उस मर्पकर उपहार १ बानितोपों की भोपानीति प्रापन ही मतिमिरवी और पारिजातोपर (१) पा सहन नहीं वर्म तुलनामा यष्टि कर सनी दोगलापायावर्षी मनुष्यों को शाम और पांच परवाम से घर पर रमपर इसा रिवाई है। सनै मपने सरस्मों के मानसिक पास बना लिया है। विसास करना व पौर परिवार करना मरकापापियोगेसिमट गायबनाए गए सरममात्मा का परबिसगारा ईसाइसवरमारा प्राय विसीको मागमा मनाकर दिया गया था और मानमै पर मारप लिए पावे स्टिनियन मार ऐरेम्स में रमन शिवालयों के बद कर दिए जाने पर ऐस्लीयोपिया पर्ममुगे (विहारो) गेमीनिकन पार्मिक म्यापासपो एमिगोषकानीन रोप में सोचता मौर एकम्पवा (सुप्रीमेसी पौर भूमिमी) कानूनो समहती सताम्बी में हए पाकि मुझे पार बप्तिस्मान न करनेवाले मोमो पर किए जानेवाले मस्यामा पर विचार कीजिए। पिपत्र माम मेवोपमा की पी हमे इस बात कोसी वपसमझ मेना चाहिए किमोनियमिडात पशुमार बम एक परमात्मा एकपर्म एक बप्तिस्मा है तमा (पारमामा के पविष्य के बारे में योग करने के बाव में) पीर पापे माना पाप है।" पानिक भी हो सरम के पुनारी होने कारते है बौगिकों की तानापाही निपवा से पूरी तप मुक्त से पाने में असमर्ष हते हैं। महामह स्वीकार कखे हैं कि साधर्म ही एकमात्र धर्म नही है, महागा भी विलास करते है कि यह (मोद ईसायि) परम सरम की परम पमिम्पत्ति है। इसमें हम देखते हैं कि पासव को पहिलो तर हा पाया है। सामान नेपा "सारिने पूर्मपर्म है बहपहप यो परमात्मा मस्तिलका मनुस्व समे या सर्व अपने लिए प्रतिनिषित करता है पापहवर्म है जिसमें गर्म अपने सम्मान में स्वयं अपना सम्म बन गया है। परतु मरिससाकी पिताओं के प्रति सन्चो मिटा रखें तो हमे पता गोपा विपरम सम सब मिनिवसानो पार सम्प्रचारों से सब एतिहासिक प्रकाशमानों और सपापों से परे है। १ साली मिशीनमुपर (१५) m.

धर्म में पूर्व पौर पश्चिम राष्टीयताबारी पक्षपात सा नाहता है किहम मर्म को अपने बीवन का प्रकामा प्रारपिवान बनाए। ससमे पानुप्यनिक कम्पों के स्थान पर एक मैविक प्राव प्रस्तुत किया। एक भग्न भौर पमुतापमुक्ताय पाल बिपिनवपानों की अपेक्षा नहीं प्रपिक महत्वपूम है में बाल विवि-विमान परमात्मा की समाप बनाने मामी पनुभूति के बिना म्पर्ष पार निप्फम बस्तुहं। ईसा ने रम फरीसियों (पालगियों) पी निमामी, मोसम के साम गत सस्ते में समम्मेवा कर मेना पाहते थे। परमात्मा की पुकार पिण पोर माता परली पोर पुष के पापों की मपेक्षा पनि प्रमुख है।हम धर्म को पपने जीवन का रूप पाने माती पस्ति बनाने को तैयार नहीं है। हम इसे पूनानियों की परमी' (इसापन) साथ पहप करते हैं। संत मोग मामाम्मतया पसग प्रकार प्रापी समझ पाते। यो परमात्मा कीपास्तपिपचापो पोगने के लिए ऐकि जगत से दूर भागते है।प्रार्थना मोर भत्तिाबीपन बिताते है। एराति पौर परता रनके अस्तित्व का मू। पश्चिम में भी निमपर ईमा की भावना का पहरा प्रभाव है ने हिलों को पाराधिनावे ! नामों से पार्वाताप करते हैं मार परिमामि हामो मे रोगियों की मेगा पौर परमात्मा के पदों पर परत है एक जनता में पक्षित पाने के लिए प्रपया मामानि सम्मान पाने के लिए सत्गुरू नहीं पर । निा के सिकातों पर प्रावरण ताप होम नारा मानव गति का एक समान एक ऐमा समार विममें हम एमरेका नारगल परते। पर एक मर मे प्रामन पर रट में सानुभूति रखते हैं। इस प्रसारमा सभाष राष्ट्रीय प्रतिनितापों मोर पोपोपिः प्रविपोपितापी से रहित होगा क्योकि यह उन बार यस्तुपोको गलपम महत रेया पिन किएर मनुष्य का नाम पूरे मनुष्य को हानि होता है परनाम मीठियान काम प्रकारका दृष्टिकोप प्रपनाने के लिए मार नहीं है।

धर्म तुमनात्मक परि ईसा में पेतापनी देता है कि परिहम अपनी मारमा को पंपारस संसार को भी प्राप्तकर पविहम अपने पर पिसासों के मुम्ब पर संसार साप समझौता करने तो उसकाको नाम नहीं है।मान्तरिक सालतिर पौर मापारिक मानवारी परम पापक। पाय का पामिर परमात्मा मिस्र सतना नहीं होता कितना कि वह राष्ट्र का पर होता ।सेप्ट योग (पोन पोक पाई) का सष्ट मत पाकिमो कोई मार पर पाश्मन करता परमारमा पर प्राममनपरता। उसने पोपमा कीफिस सदा उत्पपप पर पास एदा परमात्मा के पक्ष में हापौर मांस का रिपेष करना सस्म का पौर परमात्मा का पिरोष करमा है। ईसाइयत का सम्पराष्ट्रीयतावादी धर्म र सापा नया है जिसके अनुसार प्रावक एम अपने आपमें एक गम है एक ऐसा गेल्प जिसके कि सत्वे पोर मैतिच्या माय पीर सम्पना पनिपाय प से पपीम) है। वर्ष पम्प का दास बन गया है। गत महापुर में गम कोकरों को चोर बाली पातिवादी योग प्रशिकत बनी। बाहर सामे नुसमाचारको मागी राष्ट्रीयतावार के साथ मोड़ने कविण्य प्रतिमा मिला पा। एग्लिकन परिटिस सामाम्पमापक साप उसी तरह इमाt मैसेकि इस में पूनानी पगारवाही के साथ आपापा। ईसाइयत के राष्ट्रीय परमा के समाचार विससे निगोहरु स में ईमामी शिक्षामों को निस स्प में किये पश्चिम आप प्रस्तुत की गानोगों में मात्मसात् नही किया है। परिपके अनुपापी पिके सुसमाचार का पम्मीवा मे पाहन परमा चाहते है तोवर्ष सन्चपराधिकारी चिम्मित हो परोहामारि पुषनी पत्तियों से पामोक्तिों की दुषन पोसे बाली चिकिमों में एक समावट के प्रतीक केप में ईशा का सपयोग करने के लिए पूरी तरह सानामिव है। पर्सन ने कहा पा कि प्रत्येक स्टोरक (fvera) टोक होगा। पातु ईसाई-असद में ईसाइयों को सोर पाना कठिन है। मीतो ने पंप कर ए पापा सिंसार में फेरस एकही ईसाईना औरणमाडपरवाकर मर पया।

धर्म में पूर्व और पश्चिम पम मौर पम विज्ञान महा पर्म पी पारा से पीडम ही और बही है. यहां धर्म-विशाम की भारामसेठी उटी दिशा में बही है। पश्चिम के बोरिक पर्म में, जिसमें कानून परस्पा पार परिमापा के प्रति प्रेम पापा मातापण महरम पूर्ण पधारा पौर साप ही एखोप भी है ठीक से ही जैसे कि पूर्ण के पत्तस्फूरमारमा पर्मों में है। इनमें से एक बनसापारम में समझनारी मान पौर प्रमुपासन भरता है दूसरा स्तम्ता मौमिकता पौर साहम प्रदान करता है। भार यदि गुप्फ पातजना पौर मषितारपूप मिमयमा स्थान पारस्परिप भूपकिन मे से तो इन रोगों के मिमन से एक मुर माप्पारिमा एकता का मार्ग विरार हो सकता है। पूर्व में मापारिमा पीरन के प्रति प्रतिरमित माग्न मानिक दया के प्रति तासीनता के रप में प्रकट हमा है, जिनके हाने पर ही पाप्यारिमा सकस को पिसाबित रिया वा मना। पूर्वीय पापारिमाता निप्राश पारियों के अप में योधिपी पार प्रप्टता को माननी. परपर बन की है। मारे पूरामपची परित इस समस्या को विद्वानों की दृष्टि से देसवे प्रतीत होते है ये वो पौर सरयों का सहारा न करमों पीर मूम-गों का सहारा मेते हैं। हमारे भाविकारी मोगों को गिनके मन पहनपरने की पिट हे विमम पनुबर हैं पौरो समान प्रनुभयगे परे । पश्चिम की पटिया मममें परने में पानन पाता है। परिचम कर्म पी उत्तण्वा स सप्प में निहित रिमहा सक्सि प्रपनी मुसित मरीमेपार प्राप्त परमा पाया है। भगवान के माप सामिप्प स्पापित करने के मन में एकान्त मगी हो पाना भारी नही है। धर्म बम बोरन से ठार रटना नहीं है पपित मारना भी है। सभी पूापी मानता की सेवा में है। पर्म केप में पर्म इस विम्मपकारी मिसालमा समर्पन करता हप्रापेर मानगर पारमा का प्रमित मस्य ।। मई मारमाों की समेत धर्म पुमनारमा दृष्टि में समानता का पानन्द पप्प मौर मनुष्य के मध्य प्यमानों को समाप्त कर देता है। सन्ताधर्म माममवातिकी एकता की मम्ता दिशाणमाम्मास्मिक समाग के निर्माण के मिए कार्य करता है। यह राष्ट्रों मा महाद्वीपों की- सीमार्मों में नही मंच सकता, अपितु इसे समूबी मानवजाति को अपनी बोहा में समेट ममा होगा मनुष्य के प्रति इस प्रेम की यह माप है कि हम पन्य पपिपयों के विमानों का पारकर, मह एक ऐसा तत्व, गिसकी दृष्टि से पूर्गीय धर्म परिचम के धर्मो की मपेक्षा अधिक हिट । पा सामाम्प माननीय महोती रिअपने विचारों पर प्रमाणीको अपने सापी मनुष्यो गर मोपा बाए। इस प्रकार की मनोवृत्ति के साथ हम सनीकी एक कृत्सित सहानुभूति यती है। सच्ची सम्मति के प्रति विषेष रुप मे तर पहियह सम्मति मानव-नाति को प्राप्मारिमक मायामों से समर हो तिरस्कार सेवाकर भूषित पस्तुपौर कोई नहीं है।माम उस प्रकार सम्यों के पास मही है, जैसे किम कमी पे । अब हम नामों की पृष्ठभूमि में मिपमान बीवन को देख पाने में समर्थ ।। मा समय निवना हममे से कई पासा पप्ले है ससे पाती पा सकता है पनि निरणाम, मस्पिरें पौर मदिर/वि प्रभावनाबामे हनिराकासाम करक पर पारस्परिक साहचर्य और सेवा भनिए ईवर मुक्ति मोर मनुष्य के प्रति प्रेम ही एकमात्र प्रावस्या पर्व होली, पर समूची मानता प्रो-ही एक माम द्वाराम मही/चिन्तु एकमावनागरानी होगी लास्टरपेटरने अपनी पुस्तक का निर्मास' (मगोत्पान) में एक कपाकिबरपरसत्तम की भूमि से एक बहार में भरकर लाई गई पवित्र मिट्टी पीसा में कम्पो वाटो की सामाम्प मिट्टी से मित्त पर वो उससे एकममा फूम पैगामा भोग्ससे पाने मनुप्य हाय रे मए सब पूनों से मिलवा-उस फूल के पों का मेन विमलप पा पार समवन्तु पहुच सुपर स्प में सम्मिभित पे । क्या यह संगर नहीं कि पामामी दुषों में पूपि और पश्चिमी धर्मो केनिमल से एक अनुपम सौर्य और प्राचुर्य का एक ऐसा ही फूल सिम छ ?

तीपराभ्याम्मान
प्रलय और सृष्टि'
"मौर पृमी रार्णव और पूग्न पी और समुद्र मृड पर परबकार
अपापा पौर पर की पारमा रन के उपर गति कर रही थी।" सृष्टि
की पुस्तक (एमाफ बेनेसिस) कीमत प्रतिम मानोपनाह है पोर
पर पाए पानेगाने दृष्टिको मानिस प्टिकोण से पहुत कही
पानबीन की गई। साई पारी अपने रविवारीय प्रपनों के लिए
निरन्तर बसे सामग्री पाते ये पर यदि विमान मोरामप्प पमने
बामा बार-बार के लिए समाप्त हो पाए, होमनी स्पिनिकास
मोलिए महगाव कटिनाईका समय होमा ।
पिशाम पीर पर्म
पार में सुष्टि की पुस्तर में दिए पए मूपि सिरप का किसी
ऐतिहासिकतमसमें प्रथम प्रारपबरयम में प्रतिपादन करते
नही पायाधम पिशान नहीं है पौर परिपरिणाम रोष में मनपिसार
प्रोमा यो पाने गोगिक परही करता है। नाइट
पुर१५८ में एक लेख में मा पोपमाबोबी कि मनुष्य को प्रपा (पिता
अपौरपरिष पारमा) ४.४ पूर्वमयमय मात्र पूर्वाद में दिया
१ मेयर सोमारामासार।
१ मा

१४
पर्म तुननात्मक दृष्टि में
पारमारिपामा निजामशेष में परिकार प्रमेसरदार
पौर प्रामोपनाको प्रामम्बितकापामारपोकि इस प्रकार पापिपरण
मा संसार के मनमात ते सम्मलित है बोलिपिमान की समस्यामा
संसार के पम्प से समन्वित नहीं है बोडियम का विधारमे।
विसकी शानिकम्मामा-योकि सारे संसार को विनिएक
पस्म बेन रेस में बान देती है विस्म कि पर परमापो पापस
में टकराती और पपमी गति मागे एनसरे को देवी माती :-मन
पापसातील बा किस प्रकार पटित होती! एनहीं बवाती कि
मे भयो पटित होती है। उन नोपों तक में भी बो यह समम पिर
पापे प्रश्न करना पनामक एक ऐसी मनोवृत्ति की अनुमति पारित
होती है, मो अब तक में मनुभम नहीं की। मस्पष्ट रूप से पनुगम
करणे कविता पस्तिल बससे रहा मधिक गहप है रिठमा कि
हमारी इमिनोगपुरिमोशाय हो । विज्ञान की प्रति से हमारी
विस्म की भावना पार प्रपने पास-मास पस्प के प्रति हमारी निरन
धीमता किसी प्रकार पटती नही है। महिम अपने इस प्रमको स्मरण
करें कि कमी हम मा सममो कि हम ही सारे संपार और
परमारमा की सर्वोत्तम कृति में पड़ी सम्मा प्रनुमन होती है, क्योंकि
तो
एक मप्पम कोटि के तारके, पोप्राय पनगिनत वासेही पोटा
हिमपम मस्थायी निवासी पाप है।
पो भोप पर बौ की बार-सम्मापी सनापों से नुपरिपित
मानते किष ऐसी समान परम्पए.पिका इम पाँ।
अपपोप यिा है। परम्पराएं सुपट्म होती और सममें पसकी अपेक्षा
ही प्रषिक वस्तु होती मिनी कि सर से रिवाई परती है।
'माम्मारिमा विषादी बादा होती है पीर पदि हम मारनाम्पपोप
करते है तो पास रत प्रामाणिक महामारष पिको कि
पीता हमारे मूम पाच मम्म बातों के साप-ताप इस गिल की
प्राप्तिका के पौर एक तमनोनीत मारमा पर दमकी निर्मला

प्रभय पोर कृषि के प्रतीक है । मह मिन प्रपने-आपमें ममेप्ट नहीं है पर एक मम्मीर भमाह पस्य है इसकी पाप्या की गानी चाहिए और यह पाप्या केवात एक साँपति और प्रपोगन के म्म में की जा सकती है यमराव इस पमेन में मान ली गई है। ऐरिस्टोडेमौर रिसाउस' (बाम) में पूरा स्ट्रेप्सिीर मुकराठ पूछता है 'बह पाम है पो र्पा भैरना है। वह कौन है को मारमों म गरमता है?" और पनिर राव उत्तर देता है गम्पिस नहीं अपितु बादल।" स्ट्रेमियर पारे "परन्तु रिपस के सिवाय और कौन मापनों को पना पता इसके उत्तर में सुरात महपा है सप भी नहीं यह गे पापुमागस का बार है।" स्ट्रेप्सिपेडोर सोएगावा है "बार ! मुझे मालूम नही पा किरियस मुरता है मार पर उसमा पुष बार उसकी पगावामन कर पाहै पर इस प्रकार महामनुप्य मारपरपनना का मारोप करके अपने पापको घम्तोप मेता है। रिपस के स्थान पर बरको मपरा परमारमा रेसान पर प्रतिको या बीमन एति (एमा मालाम) को रपार हम भी वही बात करो । पाइनिए विमान नाम के इन प्राचीन गो का पिरोपी महाँ है प्रारम्भ में परमारमा' । एक प्रमुग मानिक सर जेम्न पोन्म मे मनाया है जिसमामपारपी को यह विष एर विधाम मन्त्र की अपेक्षा एक महान विचार मपित प्रीत होता है और इसका समिता एक पारीपररी पक्षा एक मतिम मंपिक मासूम होता है । वस्तुओं की पृष्ठयूमि में हमें एक महान मन रिला माता ।। निराकार पोर शून्य 'पौर पप्पो मागगरादित पर गन्य पी पौर ममके भूप पर पार पाया था।" पिपियामि मन में भी उमा गमरेसका प्रयास धर्म तुममात्मक दृष्टि में किमा मयाई-अपने पनि सम् । बिमाम प्रारम्भिकरमाप्रमय की मामी और प्रम्पवस्था की परामम्ता और अनिश्चितता की रमा पी घिससे मन को सम्तोप नहीं होता। यह पोर पन्धकारकीरपाई।वारे भी 'परमात्मा की प्रारमा पानी उमरगति कर रही थी।" एक पौर मंग में कहा गया है कि यह पानी पर भ्यानमम्म'पी।'परमात्मा की पारमा मार पौर सम्प के ऊपर पान करयो मी पौर उसने प्रकास पौरपीपम सत्पन्न किया। पायैठकर प्मान करने का प्रतीक परम्परामवापिसोत्पत्ति सिशाम्त से मिया पगा। पिसमें कि संसार की तुलना एक परे से की गई है पौर परमात्मा को उस परेको सेतीमिडिया माना गया है। उस पसी-सएसपीम पक्ति की प्यानममहोबरम्ने की पपित से ही बीवन पौर प्रकाश रत्पन्न पा है । उपनिषदों में भी हमें संसारसपी पीने पर पए परमारमा का स्पा पमम्ब होता है। इसमा मयस्प है कि हमें ने का पाविक प्रमहीं मना है। पम, सचेत बम को स्वीपनाना छोएपिता और पात्मा का अन्तर्मुच प्रमात ही या 'बना है जिससे साप मामानीमा नात्यात योगा। पर ही मह पति बिसहारा कोई महान सम्भावना पास्तविकमबारष करती है। तपोशप्पत स तपस्वर सर्पमस्बत् । उसने तप किया तप कसे उसने इस सबको उत्पन्न किमा। 'यहाँ तप का प्रभिप्राम है-कठोर चिन्तममा मनन ।' सुम्पपस्थित संसार पूर्णतया पानमग्न होकर ठगे की बुद्धिमतापूर्ण पोर सोरेय गतिविधि की पन है। पृष्टि की पुस्तक (मेनेसिस) के पहले मम्माय में सूजन के एक बार एक मिनाए गए कार्य प्रात्मा की इस पति मेनेसिस' निपान और पारिवानिए पाकिया । तवननि १४ जिननिररमा निक्स या कारमशाममा पELtF-युगा प्रसय पौर सृष्टि ५० के कारण हो हए । यो प्रपने-मापको पूरी तप पनुभव करने के लिए एक के बार एक संसार का नगन परती है। माम्तरिक स्थितियों पर विचार करने केशाराम नन्हें वापस पारन करने देते हैं। हम बीवन को मभिम्पत होने में सहायता देते है । यह परमारमा पतिविधि तय तर भारी पेनी, गबर हि प्रारमा अम्तिम रूप से विजय प्राप्त न कर मेगी। हम सृष्टिमारम्म से मेकर हमारे प्रपमे कामता प्रापे पोर पापे गाते पाए । पाइबिम में कहा गया कि शुक्म शूग्य वा पाप पागहमारे सामने मी है। पेरेमियाह के पलों में पर उपजाऊ स्पान उगाइ पापौर उसके सब पहर टूटे पड़े"ह प्रमय की रणनी(४ २१)। संसार माग भी प्रमय (अम्पपत्पा) की रपा में है। उत्पारन की मात्रा बहुत प्राधिक या पई और हामांकि यह संसार की विशाल बसम्या को पन और स्त्र ने लिए पर्याप्त है फिर भी संसार में प्रत्यापक पिता है। हम प्रपुर सम्पत्ति से मरे संसार में बहुत ही श्यनीय गोषन पिता रहे हैं। यहां एक पोर पुररेभान पर्वमाम मन्दी पौर गावाहुपा पात्रीकरम बेस प्राषित तप्प प्रसपिम्प से राग्यों की परस्परामितता को सिररहही दूसरी पोर हम तटकीपरीवारें पौर पमियों गीपारणीकर रहे हैं पौर राष्ट्रीय प्रतिनितामों को पकाये हैं। पिकिस्सापास्त्र जन्म स्तर की निपुभवा प्राप्त कर भी है और हमारे सिए पपिक सरपतापूर्वक पौर मुम पूर्पकपी पाना सम्भव है और फिर भी हम रबम्ब पोर पारोग्यमुक्त जीवन नहीं पिता पाये। राजनीतिक स्पिति बहुत ही पिरोपकारी है पारण पहा स्त्र राष्ट्रीय रागों का ममार बर्तमान सम्प मानयता दी रपालिए पपुलमही है। समारोनी टही प्राचीन सामों को पुराना मगरतिरकनिया गाता है। हमारी सामागियों को करम पसना-मान बनाया गाहापौर प्रब हम मसापामममहोते। हम बड़ी रमिता पितामों में समारों में मारगति बीमहान उपसम्पिया रिपत्ति और संरट बनमा।। ममे ही पारीरिक

प
समापौर
।
पर्व गुमनामक दृष्टि में
भान हो परतु उससे भी एक परिक महरा पर विद्यमान
--मात्मा का एकहीं मएिक रप रोम हमारा संसार एक ऐसी जग
श्री के समान निसने अपन पुराने मस्स तो उतार फेंके, परतवोमवे
'म प्राप्त करने में असमर्थ रही है। इस पम्पत्ता पार गवामा में
सिगर हम पर-पर रहते-मर प्रतीत होठे हमारे नेता सीपको
रानी परमपों से माम उप्रते हैं। पाहे हम मितभी ही पतुराधिप
माएं, पाहे हम पुराने मूत्र को मिसना ही तोड़-मरो पितु उनसे हमें
शिवनको पिर नवा पर्व देने में सहायता नहीं बिक रवी
वष्टा मानव
माघ पूपि पोर मासे व मम्मवस्या और प्रकार से मिस प्रकार
काप पा सकते है। भूत पाठ में पारा पया है कि हमें उस मारना
भागात रमा माहिर, यो प्रभर हेमर पानमन को-सस
नाम की मात्रा मनुष्य को परमापापा TI
प्रजी भाप्रतिमा पर निशातगम मापता मनुष्य मदर
बारह संसार में परमश्मि पोर सोरेस पक्ति है। का
हप काम समर काटना पोर परतर की प्रतीक्षा करना नहीं बचा
मार ने गाउनमे हरेकपार पर ऐस्पियन(रिका
चीन नाम) को रवा पा रहा था "हम कांपते हुए यहाँ परमात्माको
भरता के लिए यो पुकार और अपने पापको क्यों नहीं पुकाणे
नमें किपरमारमा निवास करता है?" परमारमा साप साप मनुष
म भीमप्यतारपा पोरना एक सहसोबारमा पनकी योगमा
। पारमा और समाप्टर मार सुप्टिएकमनीयमा स्विवियोतक
मो प्रविषपातपही। मौरविणसी कोरिरहप्रारमाडीयोहि

प्रमय पौर सृष्टि पर निर्भर है वो उस स्थिति पर घ्यिा कर रही है। परमारमा मनुष्यों की एनपीन मतिनिधि के लिए मामहशीम है। मनुष्यों की यह सुगमपीस गतिमिलि ही वह मस्तु है यो संसार को बदमती है और इतिहास का निर्माण करती है। हमें मगनारमक उत्तरदायित्व के प्रपने हिस्से को पान करना चाहिए। कार प्रियतम तुम पोर में मिसार उसके साथ परमात्र रप सकले !" या परमात्मा के साप एक सुता पद्यन्त्र है जिसके लिए हमारा प्रामान किया गया है। हमारा सुगन करके परमारमा ने हमे कार्य करने के लिए प्रार्मपित किया है। हम सम्मवा को पयोम के भरोसे नही फा सकते । हमें भपने पापको परमात्मा की उस मावना के साथ एकप करना होमा यो समुासर गति कर रही थी हम साये बिर की पारमा में प्रवेश परमाहामा पौर उमरावान बनना होगा। मनन, कप्टसहन और चिन्तन हम सबकी इस बात में मिशिदम पम्पवस्था में एक व्यवस्था स्थापित की पाए, पस्तुओं को नुमभ्यमा पाए। इसके लिए हम मनन करना होगा यो वम मष्ट के लिए क्प्ट पहना नही है। हमें पट-महन कोएप पार्मिक रिपिबना देने की प्रारपस्ता नही है । गत महापुर में सालों सोनों कपट महामने मागप्पक्षिों में अपने प्राप पंगए।इमम भी रही पपिक मोप पपा पोर पीनी के उपमोम से विरत रहे । परन्तु सिम प्रयोग के निप? पपा पह विनाग उरिव पा? या पामेपम सोरेप पा? पाइममे परम पी प्रथा माघी मम्तर्राष्ट्रीय स्पिति उत्पन्न करने में महापाता मिती ? इसे पायक पर पहन फरसे बादामा (पी) बनने की सोग में अपमे मार्ग मैदरगाने पीपाययरता नही है परिचित काप को सरमता के साप पोर पानमपूरकर पाना नम्भर हो तो रमै से किया जाना धर्म तुसनारमक दृष्टि में चाहिए। इतना प्रयम्य है कि हमें सही काम को करने से देनस इसलिए महीं बचना चाहिए कि हम उसे सरलता से प्रौर माराम साप महाकर सरते। मनन का केवल एप के लिए पप्टसहन के साप वपमा नहीं कर पिया जाना चाहिए, यद्यपि जैसा कि हम देखने मनन में प्रसहन का मनम केवन चिन्तन भी मही है यपि चिन्तन यह है । सुगम के हम से पहमेस्सना की शान्ति पानी चाहिए। हमें यह मालूम होना ए कितप्प क्या है पौर इस बात का भी दुप पवार होना चाहिए पाइय होना चाहिए। वितुल प्रारम्भ में प्रच-पा" इसका पर्व होना चाहिए 'वितुल मुक में रिपारा।" सम्म विचार की सम्पत्ति है । सम्पून सृष्टि रिचार का साकारस्प है। पर तापमान परा में एक भबमम्स में बनकर गारमा उससे पहले पाइपहा मन में ठावमहम का एक सण पिषमानमाबानिक माइयो में है 'कारीपर कोई पत्थर उठाकर इससे पहले ही हमारे मन रवापर बना चुके होते है और पहने हमारे मन उम्ह मष्ट कर चुके होते उसके गारही प्राविक शक्तियां उनकी मेहराषों को वीर्म-पी करके पराठी है। कोई भी पपस्था पाने मारमा में एक सपनारेम्प में माती मौर उसके बावहीमा इतिहास में एक रपमम्म तपसप में उपस्थित होती है। सब प्रकार के सूरन के लिए पापारम्पक है कि हम ठीक-ठौक यायलाएं।मो मुशरिया हमारे हम उसकी ममकम-भर नहीं करते मौर म पोमु पुराना है उसकी पुनरावृति ही करते है। जो मुप है हम उसके परे देखते हैं मो पुषहमारे सम्मुल प्रस्तुत पिया पया हम उसके परेसोबते हैं। हमारे बापली में एक प्रवृस्पयवस्था है मोहममें अपने प्रमुख विमान ससीम और पूरी हो चुकी वस्तुओं के प्रति प्रतम्तोप जाती है। मन पिम्हन हमें दूर तक नहीं पासमताधोपनहावरमापन है सब कातों के बुद्धिमान म्पषित तरा एक बात करते थे। पीय मूर्स शिनामितार में बाल पिपान गहुमत सबमानों में सरा एप

A
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प्रमप पोर सृष्टि
ही पप से प्रापरपकते पाए है पनि यो पुमा पुरिमान कहते है
उसका स्टा पौर इसीलिए वास्तेपर का करता पाकिम संसारको
टीक रखना ही मूर्म और निम्ट पोषपाएपे रिवना रि यह सरमा गर
हम इसमें पाए थे। संसार सरस प्रपति जान के कारण उनारप्ट
मही पापा. सिवनामिन के पूर्व नियम के कारण, मिस प्रम
स्वाप सरप का अनुमरप करमा नटन हो जाता है। मानवीय काय
(मामों पोर मारनामोरे)मापार पर पते पनामों और
विचारो मापार पर मही। समाभास शक्ति गरी पित पति
पगा। रिहम पसरप पर भी विरणाम करसता प्रमाया मे भीगाम
पास नाता परस्तु उनम और वा काम पसता नदी प सकता। बोहो
शिक मोग जीन गाव है पाकिसमम प्रगति परा हाती है जिसका
मुपारपों पोर पान्तिमारियों में पर्याप्त मात्रा मे प्रभाव होता है।
"मनन किसी म्पतिारामाने मप प्रन पोर सम्परतारा
मिा बानेशमाfaat | पा ममेलिन। यह पतिवारा
पाने समूचे सरीर, इन्द्रियों पार इपिपामामो मन और पुतिको
उस विचार मोवप्रोत भरदिया गाना है। कोई प्रिया या परीरका
कोई प्रम ऐमा नहीं है जो मन मा पारमा प्रभाव स बाहर हो। मनुष्य
(एक जीममवत्तएफ समन वस्तु परीर मन पौर भारमा जिसके
समय-समय परामगाती हुई कम्पा विपय में गेन पीस मुम्न
पंसियों में इस तारापन है'
उसका निपुर पौर मोमता-मा स्त
उनके कपालों में बोमवा पा प्रौर इतना सप्टाप से तमिटवा
किमहामहागा सातापारिसमा परीर सोपतामा।
मनुप्प मोबस एक बौरिए प्रापी-मा सममनेशी भूम परला
रममा
पूर
होम प्लेग पार

धर्म तुमनारमा दृष्टि में बैक नहीं । ससकी बुधि उसका समर्म अस्तित्व नहीं है। हमें वाप गड़े गए निशरोमो मनुष्य के जीवन की प्रमोभूमि में पहने और उसके समान चेतना भोर प्रमचेतना के समूचे अंध को प्रभावित करने देना पाहिए । सम्म विचार साकोर मनना चाहिए । मनुष्य के समूचे मनोविज्ञान का इस प्रकार परिवर्तन उसके समषे प्रस्तिल का इस प्रकारका सान्त प इस प्रकार की समेकित युरिही सूचनात्मकनकी पस्तु । सूचना मनुष्य काप पपनी विरिष पौर हस्यपूर्ण मारमा परि उसके बास्तपिक) परयों को समझने के लिए किया जा रहा एकान्त प्रपरन है। मानना मोर होना (चित् और सत्) मन पौर हस्य के विसंगारी तत्वों को बम प्रारमा , एकान्त में ही समसर बनाया जा सकता है। संसार में रन मोपों में बोईस्वर में अपनी बुद्धिारा विश्वास करते है मौर धर्मसार (कोर) के प्रथम मनुस्मा को पुराते पोर पन नोपों में योकि प्रपने सम्पूर्ण पस्तित्वारा परमात्मा में सिषास करते है, गत प्रतिर।हम सामान पक्तियों में प्रौर सम्वों में मी ठीक यही मस्तर है। परमात्मा में विस्वास करमा पात टिन काम है। इसको कोई बीर मायक होकर सकता है। किसी पिचार को प्राप्तकर सना मन भी उस प्रबमा प्रपना कोटि को प्राप्त कर मेना नहीं है। सामान्यतया हमारी मासिक पारणाप हमारे पास्तविक जीवन बिमस पृषा होती है। हमारे वास्तविक नाम हमारे सचेत सम्म मही है। इस प्रपत्ल किए बिना पत किसी रपयेषको मुनकर किसीमकाय करके किसी पुस्तकापाहर भानी बन सकठे है। यह एक बहुत ही मधुर स्पण । परन्तु या वनसण ही। हमें निरवर चिन्तन ताप विस्वास को परिपप होने देना चाहिए और उसे अपने उपर प्रधिकार र मेने येमा प्रापय प्रौर मुषि ०३ पाहि पाहुन उपप्राकृतिक प्रश्यिा से मिलती-पुलती एक मनिष्ठ पौर माप करनेवानी प्रश्मिा है पिसाप किसी विचार को पारप करमाना मन स्वयं उस रिचार से पाचन पाता।। फिप्पोमा के प्रति प्रेम हममें से बहुत से लोगों के लिए एक विपास की गई परन्तु सम्वों के लिए ता पाउनके पस्तित का एक पंप होता है। प्रम मम्बम्प में पोषाहा भया , नत सफा पहरामा पासान है. परनु पपने माधिपा से प्रेम करना पौर उसके साप सम्वोपरनक सम्मान बनारना बहुन पटियम के लिए पल्पनाको एक प्रम्पपगीम पाम पीपारयाता होती है पर गिन मोर्गों में पसना नही है , पम्पना प्रान नही पीना सरती। प्रम एक ऐमी रस्समाप्राग पेदना जिसे कितनी अपने प्रारिमा एकान्त में सिमित कलाताई एक एमी चेतना पोसयंगट मह मेती है और दूसरों के कष्ट पो प्रसस मनुभव परली । महिममे हम प्रकार मी बेतनारा प्रभाव है तो हम अस्तुत' मानर पापी नही है । मन्त्रा प्रेम ममूरे पसारसी पपना रेप और मम्पूर्ण मानम नातिको सदेपवणुममझना है। इन प्रभारम प्रेम एक दुखाप्प पादप है। पारण यह है रिदम माने पारमिपों में पोमीर माम मीमा तक प्रमाीपरत दिम म रामवादीच्या पगारा २६।हम गप पापोपी साती मे पानापापी मममीठे किएम उसे उमरगा मेरमा मिठम हिम अपनी मनीषा गरेकी अपना-माप में ही मिटर उरत है। प्रम मार्गप्पणिराप्रपनेपनमा पोर पान प्रमाता का परिपाग। प्राइमर ममुप्पी पार्यो म देखना सो ममृप्प कहप म पनुभव रिना पार दूमर ममुप्प मन के अनुसार समनमा है। म पहा और मापिपी मनगिनत 'पामा म म ग मनाना पार FIR मुनर पुरती यो पागरिक मापनापी मे मरीगानीएसरम गतान पी मुरम्प माप्पाराम म पुरोपिय गणम मिती मोर उनमें प्रेम मानेनपी। पण प प्राप्मारिका पमोगा में पास बर्म तुसनारमा रष्टि में पुपती ने उसे टोमामा "मुझसे नमों पर सदों संधार के कष्टों पौर सृष्टि के प्रयोजन की पर्चा मत करो। मेो उपयुक्त नहीं है। प्रोत्साह स्वाभाविक सुसमर पौर सपनीमन में गिरावास करती है। रफ्त में कोहरपति पौर पिपास है मेरे लिए तो नही मास्तविक है। उस सपाटन उपयुप्तबहीपनिाई से उस स्थिति कायपासा। परन्तु उसने न गिगा कि फिर किधी पथर पर उत्तरे पास अमाप पाएगा। नमेनाम्मे पर्ष बीत गए। पुन मोर मौज में सम्पत्ति और सौन्दर्य मेबीवानी इवानी अपने पतिकपरिपके कारण उन सबको पंवा सीमान्त मे समापन हो गया भौरमासोए मांस का नगार पा, पिसमें मन-बापाप को सा रहे थे और जिम प्रमित मेष रम्ती बी।सेतना ही कापीमहपापा एक परामरठी पिसके लिए पसे महरा दिया गया कि सबकेशावर काट पिए पाए। सरबोगों ने अपमानित और विरसतसे ससे नपरकार से बाहर निकाला और यहां से मंच-भमकायरिया गयावासी स्थान पर रहे बोड़ा रिया। युध वर्ष पहले गाएक मौवन है परपुरसती की परत पर पहनिर्ममता पौर प्रसहायता के सिपाय प न पी। कोई विहि महीं कोई मानेस नहीं महाँ तक कि पूर्व प्रम्बार भी नही गय सिता गरिसीते कुप मेठी मही किसीको पपने पापको मन , कोई प्रम सुमनाम पाहवी विचारी परिषर्या न चाहतीत प्रकार विसपुत रिक्त पारगापेकपाक मौतर तक रेत पीपी। अब से कोपिलम सना। निगमपने पन्तिम सप समापीपी एनम प्रार्यमा पार करदन के बीच तसं उपमुप्ता के साथ पपी मेंट का स्मरमको माया पौरतमीरसने एक हमसे स्पर्म का अनुभव लिया। उसमका कि एक बोरोत्तर कान्ति प्रौर परेसीपमान उपमुप्त उसे सपारसी पागो में एक मामार प्रेम का भाष मारिष पिए प्रति मापाचों में होता है। पशुप्त ने पाविस सीकी पांचों में पिता प्यासता प्रात्मम्मानि पोर वारो गाना का मान

प्रताप पौर मुष्टि
०१
गाया। यहबोनी "पषुप्त या मेरोदेहरममा हुए गनों और रहस्य
पायों में मुनोमिन पी पोर पर यामममम ममान मयुर मी वर
मैं तुमारी प्रतीमा मप ही करनी पीपब म गोप्त पामना को बपा
सन्त्री बी वर तो तुम पाए नहीं प्रा तुम हम बीमन्स पार पमिन मोह
पानि मामपिएका वन रेसिए में पाए हो' उपयुष्ठर
पीर सरन पामों पर हप केरा रसके ममूर्न पस्तित को पाग्दोमित
पर दिया और कहा बाम बो देखता है और मममना है उसी
इपि में तुमने पक्ष भी नहीं पाया है। श्री मन होपो बिधाम करो, मैं
दुसमे प्रेम करवाई। उन मुनापार प्रातामा पाया मातमा मत करो
निर्ग तुम पानही मही हो। तुमारे प्रति मा प्रम पाए प्रापर भाषा
रित प्रमदी प्रणामहीपपिक गहरा है। रमी पतिपमा रही उसके
हॉट सुपौर का सपना पौर समोरगी मारमा जान
बह पुजगोप्या बन पई। यह इस बात का एक पोर निराम है
दिसामाजीरन महमे उन परिपतन से पूरू होता है। किमी कष्ट
में पड़ी पारयाकोबारा कोई महान पाल्मा होती है।
मनुष्य मोसरा प्रेमपूर्ण पना पाहिए भोर गिम्हॉन हमें परिपाई
उमार मीसिय हार पत्यार नहीं करना चाहिए । रहम प्रेमपणे
सब हमें पाकरमे कामपितारी पा भर्मही मानाही
मषित पवित्र माना गया हो। परिहप प्रम पर है तो प्रमपात पाहे
पुद भी सोमको हप्रिपीनारोगा। मोमोपदीयों और प्रमापों
कोस्याग लेगोराशे मोमों मागिनी गाने और प्रारपियो को
पापानिमारते पार उमपी रिसार्यो परमा-मह मिसाt
ममा यस नदी से पार पाएगा पर पोरनार परोसपा पिरा
पोपौर भी पुरातारपामा प्रापरपसने है। अमनो मनुष्य
इसम में गुरम दुरे मापों के माप भी धीरर में पास है। हमारा
पनामार करत मागेहाबानोमारममानिए
पमिनन महान मार विराम है पारामारी रपय सपनारणम्प समम

पर्म तुमनात्मक दृष्टि में करमही वे पपितु स्वाभाविक प्रेरकारम।हमारी मीनतापों मौर उपमों को स्मरण न रपार ये हमें मुक्त भाव से पपना प्रेम प्राम करते है और उसके पाने में कुप मी पाने की प्राण नहीं करते पौरन म वर्गी अपरेने की ही पावापता होगी।कारण पावान का पार पसापानी किया गया एक ही कार्य सार मोरको बागकर रेखाई पोर कोई एक ही पपिम्पूप सारे दम्प के लिए जग्गा कर कारप बन पाता है। यदि कोई सार सवार एपसाप या उनकी पोर पार्पिदनही तो पाहव पात्माएं मनस पौर पर ही बाएं। पर्म की कीमत हममें से परिकोप सोग बम को ऐसे प्रासानी से संभालसेना पाहते हैं जैसे हम ममुररेशिमारे पहोवीपी को उस मेते हैं। हमने पम्पसायपूर्ण योग परनमा पीररया पति मही है। मेरी हम पुस्तकों को एनसे पुस्तः मेर मुपी पाननवासे से पा मेवे है या मा पनेकाने से पापा नेते मी मार हम उपयर पा पुरोहित ये प्राया करो कि उससे हमें परपप या प्रति मप्ताइएक पटाकरधर्म प्राप्त हो पाए। परनुपार्मिक बमन के लिए तो गहन कापी मूस्य पुसला होता है। बरसे माननीय प्रयल प्रारम्भ हुपा है तब से हीणि पोतोको पास्तरिक परेला माम काम नही ।।ऐसी कोई वस्तु महीनी रिसा पारत महान गयुमार पुरमा प्रमाषणा हो । रसरे पाम राम्प पा परमा मौरसोग बामा योग्य सब प्रकार के मुत पसे पाम्प पे । रसे अपने पापोइन मप मुर्गों से पिरत परताका रम मुों को सम्बोरर देना पण हपय की परता के मारपनहीं पापित सस्य के प्रति र परमन मप्रकारापानीपापेगपूर्ण प्रतिपर रिनप पामरामार पपने-मारो प्रमय पीर मुष्टि संसारके सिए एकम बना सका। ईसाइयत बारा मिरभिमानता के मिमित्त प्राप्मारिमा प्पपिन परमारोपित किया गया मानवता रिप्टोमा प्रपोगरण प्रत्येक पपित के सिर केवल हम तप्प के कारण प्रा पका है कि पमा इस संमार में पाम सिया है। बा कोईइम पम्प को मममता है पौर पूरा करता है भले ही रम इसकी कीमत परिमम पप्पसहन पौर अपने मतारापानी पड़ती ही बह मुखी है। ७ मिरी जातिप्रियता की निष्फलता भार हम उच्चतम पबत-विरारों पर या पृषी के मन्तिम छोरों पर भग गाने के लिए दो परियम करने और कम सहने के लिए तैयार है परन्तु उमरिवारों के लिए नहीं गिरें किहम स्वम मनुसरणीय मानते है।हमम # पनेक तोम यह ममभते है कि हम पान्ति के लिए पाय करणे. हासारिपान्ति मी कामना केवल एक पवित्र और मारपी महत्तापापा है एक पुषमा पौर रस विचार बह कामना एक ऐमागमम्त विश्वाम नही विस बनाए रखने केमिएम पपमा रत पौर बीवन देने कानयार सामातिमा पौरप एक ऐमीपस्तु है सिमर लिए हम मानीमा पुकाने पोतंपार है। पपनी समृद्धि प्रति हममें मिनी मषिसम्पनामी भावना सतनी पान्ति पौर पम्परोपीय मनापक मिए नही है। मानपवा के प्रति हमारा प्रेम इतना सीव नही है कि यह रोग के प्रतिहमारी पहरता पर पियप पा सके।हमें पाप पगि मिए, या पर पुपों के लिए जन-समूहोंपाविनाग करते मोई हिचा नहीं होती। यह मोरमा पमना-मात्र रि राप मरलने मुमिशिन पार प्रबुरोपा रिपर मारे मुरमहीं होंगे। यह यह रेत पिममें इस प्रपना मिरमा है। मत महापुर (परम पिचर) में यह ऐना नया पाशिम परवा पर्म तुमनात्मक दृष्टि में साधारप में परिणीबियों को पपैसा दुख पिक संबदनसीमवा पी! या मरपसलिए है क्योंकि हमारा विचारबिसगुन मरी होता है। हम विचार नहीारते क्योकिए ममता है किमही पाहम बहुत महना न पड़े। बहामारी प्रापोषनार्यों और पोरनामों का उलट-पसद कर सकता है। इम फेवात ही रखे है मोफि दूसप पक्ति करता है। भीरका बार इनिधार होता है। मध्यपुर में वर्ष मोगों पर प्रत्यापाररणापा मारकर पत्री पुप्रिय रेशभरत पसे । पुष बोस पापोतनकारी और पुसाहसी नोम पमाचारपमा पौर रेरिया पर नियन्त्रम करने कानून बनाते ६ मोर पनसमुपगप विना विचार किए मपनी मृत्यु की पोर पना पाता है। हमारे संकल्प हमारे मन हमारे अपने नहीं है। हमारी मपेसा पपिक मनमानी एक साल मे हम सबको अपना पुर्या मनाता है। हम पर परियों को पालते हैं, बोहमारे मोस मदर तक पैठी रहती है। स्पात की निाथमता हमारी मूस्यों की भावना को या मेवी है। हम वों को उनके सहोप में देखनहीं पाते । त्रिपको इसमा बास बना दिया जाता पौर से इतने प्रार्प रप में प्रस्तुत किया गाता है कि हम उममे पानन मेने लग पाई हमें उस वस्तुपायुषमान ही न हो बिममे किस पाहावे ।। परिहम इठनी काफीणा नहीं करते कि हम हत्या कर सई तो हमें कायर बाबाता है। जिसे प्रमुपासन करा पाता हमारे सामने महरिकल्प प्रस्तुत परवा दिया तो हम मा पर पाए या फिर हम पाप मार गोपाए माफि मोर्चे पर पाने की लामें इसपात दोन सम्भावना पाप है कि हम मारने पाए। इस कोमिम रथ मेते पीर साहसी होने का प्रेम प्राण र मेरम अपने परमपारी साधुओं की दरपु की कामना करने पीर मगों को माधिप के बिना पन नोगामीझयादरते है मिहे हम मानते तक नहीं पौर जिनके प्रति पमना लिए हमारे पास कोई भी कारणमी होता। पुरमालीन मनुपासन के प्रकरण में दो मनुष्य को विपारको HAmma.m-

प्रसप मोर मपि
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मिमा समिए नहीं किहमें सा विश्वास हो पपाराम ने पीर
कोरियाम पौरपको स्वीकार कर पग्नु इसने मीर
महा है। प्रवामिए कप पढ्ने नारासम पपने
प्रतीयों के मिए, म्यापार सम्पत्ति सामाग्म के लिए पुर करते है न
प्रवोर्जे मिए, यो पुपने पायए है पौर निमाम हो चुके हैं। हममें
नवमा भाइम नही कि इस उन पुराने प्रवीन को पन पियो-पिटी
परम्परामा को उनार कर बीमारे लिए बेरिया मन पर। हम करे
परामिए खारकर नही पाने किमत्ता शिक्षा की प्रकिया गि
पाटामामों की मुराहो नानी है । परम्परा पार पीरपाषाओं के पति
पयोगिमपूर्ण बम नपा सभा के पास प्रभाव पवामियो से स्वतम
प्रभूत्व-मम्मम्म यम्यों पायाम को पार ता पपने रामपति-
निकासीमासे मीपी ममिम्मसिरप में पम्प राग्वीरममको पोर
प्रेरित किमाने ।
पारपर परमार, गापुर में पम्प मामेकामों को मिलते है पुर
को तार-मार उमरा वीरत पार पाएमबतिम ये वस्तुप पर मी
पोम मामबनाने मम्मपमिलो मोर पदों को मारा dि
घोर तमगोपी ममननाराएपौर विजय मोरका मानिस अपर्मों
द्वारा प्रारिप में प्रस्ताव गाती है। परिवार और परम्परादारा
में दूम म पूषा करसमी प्रेरणा री माती। ऐसी पृपा गो पार
मारे गिरोभियों दौर्मों का पानाती। पप्पान मरेप पारों
म पारिमरातीय मसागर उस नीतिगास्म रोभरवाया गयामिम
गमम्य गालि पोहायर पिढपाप हमार री
हो जाता हप उपेनापौर पुएर पार पायेमपूर्व सिया राम के
गुमनी सानिपुर पड़ों में गतिमाने है।

E. धम तुममात्मपि में ५ समूचे मन का परिवसन हमारे अपने सम्बर विषमाम प्रकाश अनुसार बीबम बिताने से इनकार करमा वास्तविक पाप है अपने भासपास के पनसमुषाय विधायक मानुएम पीपन बिताने से इनकार करना पाप हम सपाप से मरते पौरासलिए वास्तविक पाप कठे । मनुष्य का कप्प यह है कि पपने प्रवर विषमान प्रकारको प्रमाण माने पोर परि पावापरताहो (ोहियों का विरोध करे। माफि के लिए पहनी पापम्पमया पाकि मानारी माप विचार किया जाए। पम्ततोगत्मा मनुप्प एक प्रानीपौर साधारणतया मह पर कपुर महीं करेगा पराबिह मैतिक पापारों पर क्षित माता हो सस्प बारी- पा art म संसार को प्रभाव में मिए नुरक्षित नाना प्रपन पर-पार की रक्षा मा पप गाम-बोकारवारलापौर समियों की परिकलताको बनाए रखना इत्यादि । भय और ममिमान, भूमी माया पौर सत्ता कामा नपास्तपिक गरेयों को क्षिापा पाता है। पुरुही मनुष्य के परिवार को कारण मनुषो की दुष्टता पवनी महापी रिवनी कि मनुष्यों की मुर्वता । बाइपरनियों का स्वसित मनमापी गावी पी पोलिहलते या प्रमा की बाली बी कि हम उम्ई पवान पुन से बचाएं। ईसाइयत में विश्वास नकलवाने मोनोका इसलिए पीकेबी बना दिया पावापा क्योकि राहे पनन्त काल कर समयमा सचाने का एकमामबही उपाय प्रतीत होता था। सपा मोपैमाने पर हत्या मामापोवन परगामे मोगों का मभूयमन इममिए पर क्योकिइम महसमा रिता माता फिसाय पीर सावा. श्री एपा परमे का एनाम साप मही है। हमारी मोलम पाखाएं हमारी पयामुता की प्रमिप्यक्तिपा प्रतीत होती है। TREATMustी नियमीमाहीपनारंपरा प्रलय और मुष्टि ८१ भ्रम है कि यह सिर करने का कि हम मही है एकमात्र उपाय यह है कि हम विरोधी पक्ष के पपामम्मप पधि से अधिक माों का ममाप्त कर दें। हमें पुरकी विभीपिरापाको अनुभव सरना चाहिए। हमे समममा पाहिए 'पुर मूमन एक पायनिक वस्तु है मम्मूम माममना सराति पौर मान्यतापों को तिरमि मरे भीरप हमकी गौष उप।। माधुनिर पचार्यों में पर बम गमतीही मही अपितुमपराप है। पर पपोकि नियों पोर राइफलों का स्पाम रामापनिक पदार्टी मे ममिया इममिए दिमाग मायाम हामा परि मनिका वा प्रमनिको मे पुरषां स्त्रियों पौर बनाम पाई भर नही किया जाएगा। मान्तिप्रियता एमी बस्तु नही है जिसे कि राष्ट्रगर (मीग प्रॉफ नेगम्म) मे वरीपर निया ना सके । मानव-जाति की मंतिक नवा पर गिग्य पानी होगी। जनसमूहको प्रत्यापारमा निरोप करम का मामर्म सरलता से प्राण नाही हा भाता।' हमें पाम्तिप्रियता के विचार का प पर विश्वास में पारित करना होमा परि उमा पनुनार जीवन-यापन करममिए साल पर पायेप प्राप्त करना हागा। इमर यो म मारी रम बुद्धिमहीं पपिनुमाए सम्पूर्ण पेलना को इस कार्य म मगाया गाना चाहिए। हम अपने सम्पूर्व पररपोर मन में अपना मनु मंत्रियों और सहमत्तियों में पानी देह पोर इनको प्रमृत्तिपों में पाणि ' भोम्मानित निपन ने सरपी mmf सभा में .. पूरे गारिएर १५ART 1 से मनाया कि विसरम मिमीमा में राय और भारिपुर मही मागा। निम्न के ममापीने 'म् मेलमम पसर मेगन (परम' ५) मे एकमेमपामासमरा विमान मे रसियर रियल 'पुर कोममानने साम मा रिमी में भागामी पुर में प्रवेशम्पा मारामाविरोध। मनोमर गि भर मामले नामिती नियने मी रमा fruitmमरमा पुग गरिन्- पुरार मान सम्मा मन परे। गरपानरममवगामसतमा पर धर्म तुसनारमष्टि में के लिए घर संकाय परमा होगा। सान्तिप्रियता के प्रति केवल गौरिक निष्ठा रन प्रवेतन संबैगों के पिम प्रसहाय पडती है पो हमारी चेतनाको रासत्ता में बने रखते। हमारी पंप-परम्परा से पती मा प्ही मारतों पौर संस्थामा तपा हमारे व्यक्तिगत दृष्टिकोनों प्रौर मापुस्तामों के मध्य मन्पर बहुत बड़ा है। हमारी सवधाएं पता से बरमूस सहसचिों पापिरोप करती और इस प्रकार हमारे सच्चे म्पक्तित्वको प्रष्ट माँ पणी होता है कि हमारी मुशि पुर की पृषारना और मानवता से प्रयेगव एमझती हो परन्तु हमारी मुमति को पुरको स्याम्प सममना होगा और पर भी इस सीमा तक कि हम अपनी प्राठि पर मत्पापार करने के बगाव कष्ट और पकेमापन सहमरकोरपतए। इसका पई करत पपने प्टिकोप को ही रहना नही पपितु अपने ममा- गों का पुनर्गठन करना है। हमें संसार के सम्बरम में मानपिनों पी- मागारों की ष्टि से नही पपितु नर-नारियों की प्रएि से सोचनामु करमा होना । मनेही स मम्म पक्तिमोकीमाबमापों को प्रपाकार र को तैयार न भी हो तो भी हमें पम्प म्पपियों के दृष्टिकोषकोसमझने वस्तुओं को सरे पति की दृष्टि से देखने कोषमा के सम से बचना न चाहिए । पारपरी के एक मारक में एक पात्र पहनाt “परि मुझे मेला एकही माना करनी हो तो पायह होपो प्रमु मुझे समझने के पक्ति प्रान करो।" प्रम्प बाधिर्मों और मम्प मोों को भी मोही। कितने ही पिचो हुए क्यों न हो समान म्प ये पनपने का प्रतिकार पात्रता में समा मी स्पाम है। पापे की भोर मात्रा में हमारे सार्य वीर्पयाधी है वो अपनी परिस्थितियों का रवासम्भा पन्चे मन्य उपयोग कर रहे हैं। हममें से रपे मानवता के स्वासप्प मौर मुपद म्यासपर। इस म्याम महल के समय में जितनाहा पाए, हम पार मा ग्यास इमारे परमाशिम्मदारी गम देता है कि हम पम्प सोनी की पुरानवापों को सहन करार कटिमारों पर पिप पाने और संमार में पास्ति की स्पापना करने में एक्यूमरेमापवा करें।

प्रमर और सृष्टि
मोग
-
पर भारतीय मिकिपम पृथीपी पम्पाएं। रितुम सई
पुषगम पधि में उत्पन्न हावे है पार कम भावना मे । मापनु पया
होरो पर सोहिमा साठी है। या मरम्प की एक प्रति
पारमाणित और सम्म प्रामानिमानया में काम
मपने मस्तिपारा निघाम नहीं ले पपिनु अपनी मम्पूर्ण मारमा पौर
घरीरारा विनाम पर। इसमे विचार का देवम पिन नही पिया
माता अपितु वा गोबन पोर मरी मम्मीरलय नहीं में से निगमकर
हार पाना है। हिमोप प्रकारणही मान पो पागरिक उपम्पि के
ममारा नहीं मानते। पिपा, निमम हम मिनाले प्रामा
मागमति पौर सहित ५ मोर सी उतरा मगनपीम
जमनाहा तो उनसरी र मीन में गमनी चाहिए। गो मार्ग प्रायो
गमा पौर सुभाष हमारे मामन मारणे रहते है हम उनरो मरने
आर पिसार परम देना होगा उन्हें हमपर मामन करने ला होगा
गार्म पौगो कपान्तरित पोर पुननिमिन करमेनागा हम
माले प्रापराउन ग परा जान रेला पार गाजाने माहोमा उप
कर रहम उनसी मोनी पानी प्रतिमा मगन गार्ग पपिरा
गमरमरमाए बमों के माप मम्मर नहीं होगा परिनत मों
मार मपरं हतारमा उमापाषाम उमर माप मारम
पर ITर मनमरमप्रापमान है। मम मम पार मसर्प
मुम मुरमाना। समग पारसनारा प्रालि
महानगमभार मा पुननिर्माण र माने है।
पर मार मार पोखरामेसनही तु मुरी रहने का भी मन
त प्रार्ममारते रहने कामी पति नीमा नेपा
भी। माम (माधममीन) पसारने मिना है 4 मरना सोमना

धर्म तुमनात्मक दृष्टि में पौर हेरे प्रादेस के लिए नासापित है। प्रादेपरम भी मुनापा सकता है पाकिम अपने पम्विल कीपरी सतह से दुखकी मारकर उसकी पहराइयों में पाये और पौरन की पूर्णता से भिक्षा में। योग की पनि प्रान्ति पारमाण परमम्म्परने को जमी है। पासम महीर ही कहा "यदि मनुप्प बम किसी तय प्रपनी बैठकों में पान्ति सेठे एसई तो संसार में होनेवाने प्रषिकास उपार कमी हो ही नही। पूगा मी एकाम्त प्राप्त करने का एक साधन है। परन्तु भाषाम के दिनो में सात ठमा पकने पना भी बहुत कठिन हो गया। हम एकात्त से बच निकलने के लिए उपाय तोते मे बतमा पार मदिरा-पान करना बिमात पौर पुरापार माना। मोप का प्रम्पास उमप में बैठा कि पावाल भारत पोर सगेप में बगर-से भोग करते है एक प्पामाम केस में पा वामान्म बीवन की प्राध्यामों को सबब बनाने के मापन रेसप में या मूषु पर पिनप पाने के लिए पमनापामत्कारिक पक्तियां प्राप्त करने के लिए करना पपप्ति नहीं है। पोग का गप पारमा का एकीकरण है मिसे :म पाम्तरिम मर्गरम भी पहनाते हैं। इसका गोम प्रारम का समेमन है पनाम का पारमाकरण न मनेक तत्वों का समाबय परमा चिनी मत्ति स्वतन दियों में पर पाने की होती है। यदि नीर परकी म हो तो पमार परिपा मकान नहीं बनाया जा सकता। परिमीच ममतो पौरपापार भूप पहप पोर हो तो उसपर रीमार पार खम्भे तो किए पा माते है।बो का वाटत होती है पनमें से हमें अपनी पेतना के सयुत विचार को पुन नेना चाहिए और अपमे-मापको पूरी तरह नई पति 4मगा देना पाए । प्रत्यक व्यक्ति भीषम + विषय में एक कमाकर है उसे गो सामग्री प्राप्त होती है, उसके पनुसार हपरने पीरमका नमूना समय तयार करता।म उमे बना किसी मम्म पम नही गत समतेइमारे प्रमानिमिया मा 'गामान। 'बसे हम बोगना पौर विविध कला है। पर मनोनिमेपर हमने ८१ - । प्रमप पोर मुषि पता है कि हम अपनी भूमी हुम्मिनिर्यो प्रपनी मनात पापों को मोगनिकासपीर प्रश्न पत्र काम कर ही पुणगसिमों का गान प्रास पर और पपने पापको वास्तविकता की मांगों के पनुमार रात में तर महाममे पपनीपारिक प्रानिमो नाप करने मौर हमारे अपने मा मनामी को रस सम्बो प्रतिको ममिति सापनों मापारिल करने मोहपा होता है। मनुष्य अपन पनििहल मभाष से नहीं पहनान मेता हा मह पूरी तर सर्म नहीं होता। हम में प्रत्येक मनुष्य एक धारावी भाति है गिममें मै तर मग ममीन माही निगमता सता कि तारों माप बिनाम मही न हो। हममें म प्रत्येक निराशर पन्नेपा और ममग्न बारा पाने महो वनार यो भाग निकाममा होमा। मान का रहस्य प्रारम परी मोर पोर सम्पूमना मा पास्तरम है। मोम की पत्नी माम यह हमारे पोजनमो एप मामित्राय सम्पून रस्तुबनना चाहिए और जोषना प्रवत पारमा दाग म्फ हाना पाहिए। पणाट मनोविज्ञान मानोप मन को एक ममता मानना है। पर यह पाया मरारिहर मर्मता एक प्रणामी या ममसरला मी पोंकि यह सम्भव है कि उसके पन्दर पिमरादी नरम पिरोपी मनोरा पीर मानरिमनार । फिर भी ममूनानिए पापाम मान राप्रकरता है पिरिम प्रसार प्रापमा प्रापर पनुमाएर मर्मता पाप है और रिमी मोमा ताराम मनापानिमा पप देना है। यारा परिसर्गेका एम ए प्रपर पतुमर में म मुमाग गए, मो नम्भर सिपनों की मिश्यिाम प्रमग गों म हो पाकि उन दाना को ममाता भिन्न है। मारमा एमपि भगम र निमार निरिपि पिमरा परिमाम पहला है रिपम पमग- प्रमों में एक ही पनुमा पला मरर महीना। मपूर्णता विभिनयों का मंचर पा योग नही पनि एक ममूपी रम्नु सोमानियान मार मार्मरम्ममुहै। इमोगों में पर्म तुलनात्मक दृष्टि में सम्पूर्णता के परक तत्व मपस्थित पौर साहित होते है पौर रमको प्रमुप्राणित करने एक महत्त्व प्रदान करने की प्रापस्पश्ता होती है मानो पापात्मा है पो उम विभिन्न तत्वों को बो अपने पाप, निरक मिलाकर एक सरतोपनकम में उसी प्रकार गम मेवी कि पानस-पनम पनिया मिलकर एक राग बन जाती है। तब बीवन मुनीष पौर प्यमस्थितन माता पर एक स्थिर के चारों पोर प्रयास पपिट के साप पकर काटने समठा है, जिसमें से भय पीर समस्मरता पर होती है। इस परंतुलन बिगा पाने का पर्प सप पौर समस्परता का दूरचाना। पीषम में विफलता के मानसिक और शारीरिक स्वासयभंग सबसे अधिक बारम्बार पटित होनेगाने कारगों में से एक मह रिसे मनोमानिक पन्तान कहते हैं। हमारे समेत कर्डम्म पौर हमारे समान के बीच प्रचेतन में माराईतपाइमा एक रिपरिपवान पता है जो अपने पापको पुष एपित भावनामों स में प्रकट करता है। मानसिक चिनिस्ता को पायाही माहान रेन रसका यह विपर Ir संसार में प्रतिकार पटका मारन इस पतन प्रान में मा सञ्चारमौर उस रप्ट कोइछ पाम को पनुमान पारसे और इसका समाधान कर समाप्त किया जा सकता है। पर व्यक्तिब पित पौर विभिप्त एता है, तब कोई प्रभावी कार्य नहीं हो सकता पौर न पानन्द ही प्राप्त हो सकता है। पापपाता इस बात की है कि हमारे पर एक दृष्टि ऐ हमारे मुप्त विचारों मौर प्रफर इमामों में पनिप्रतम अनुगमता पे। हम अपमे पुप्त मनोदेगा पार पारी म्यामों को प्रामानी से नहा बाम सरठे। यदि हम अपसे प्रमाण-पोरसपा मापोषित रेमिए न करें तो अपने पाप प्रकरवाते।। यह माई चारे तिमाहीटिन यामाहा, फिर भी नियत पा सही है। धर्म रतना प्रामापों पौरपर्मकारों मे नही मिना कि प्रामसम्म की मांग पगियों में ओमपन परिषा नियाले पौरपपने ८७ प्रतम पौर मृष्टि म्पपितरमा निर्माण भरने में हमारी सहायता पसी । तारा हम अपने विचारों को सप्प रते हैं पपने मनोरेमों को पुरक है मौर पारमा बीमापनपने से समस्तुपर्णो दा गामि में पनपने देना (गीता के गमों में कम में परम) ही मोग है। यह मन निधार के हस्तक्षप के बिना प्रारमा विकास है। याचिकाम एक स्वाभाविक पस्तु है हमारी मापारण मविपता पौर फिर मी या मासे पटिन बस्तु है क्योकि हमारी अवमा सरा प्रारमवरण दी सरम उन्नति म हमार फरती पती है और उसे मुपारती रहती । इसलिए इम मेय को प्राप्त करमे सिा परिराम मापना की पावरपरवा होती है। मेटो मे पाहै “मान दर तर प्राप्त नहीं हो सकता नाटक कि मनुष्य अपने-पापरो उसकी प्राप्तिमा दामनबमा मे। हमें रिसी एक रिचार पो पाना हापा उसपर पपने पानको एपारमा होगा अपने मन से प्राय सब वस्तुपर्पोरा देना होगा और मणिधार पोपपमे मन में विरपरमे के लिए अपने मन मापनों का उपयोग करना होगा। हम रमे पागर पर निसे रमे यमनार, रमक चित्र या रेणाभित्र मा मूर्तियां बनाएं, यहाँ तक कि हमारे प्रवेतन में पैठ पाए और हमे प्रमुपामित करने गये। हमारे प्रपनमो निष्टाहो हमे हर मामे मे पातो मी पर हर कि हमारे परम पोर पठन समयमा माय प्राप्त न हो जाए वहाँ पपारामारासपूर्ण प्रस्तित एकही रिपार मे मर उरवा पीर हमारे जीवन को मर्प पोर एक मम्मुमारा होगाती है। अपनी रिपिष्ट परिणम्पकारे प्रति प्रामा कयास मएपी ममममीमागहराईदा पैगामी प्रापना गम्भीर विनन पौरमत्संग राप्रपने गोरगरोम-गर्म स्वापारन में गरम होती है। परमारमा पपने ममगार परवान मेनीनगम्मिय सय वीपममी गति धारापन गामा रमागीपनीमा पर प्रसाप मार मे नही भटाती रहती अपितु पनी रिगा पा रानी बाद परमाम मे जीस-साना एभोगायत मुस्योरे लिए मीठी है।

55 धर्म तुलनात्मकषि में तपोबल जो बात प्यक्ति के पिपप में सरय है, वही ससुराम के विषय में भी सत्य है। सप्तार की बिसपारितामोश रावमाति में विचारों की प्रम्पपस्या का मीनिधास्त्र में प्रमार्यों के गामामे का मूमभूत कारप समूचे मनुष्य के मस्कार की उपेसा करके उसका पीरिक बिपीकरण है। हम सत्प पिम्ही विषिष्ट मसों का उस असीम सरम साप सम्र करने में असमय रहते हैं यो मपि पुदि की मषिों से रिहाई नहीं पाता पर फिर भी मह हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण है कि हम उसके लिए माने पीर मर मिटन मिए तैयार रहते है। यदि हमें एक प्रहीन संसार में पोही नाही मटकने रहना वाहमें पपमे पापानिपोषम परस्पर-पिरोपी मनोगों में मेन कराना होगा। मानवीय व्यवहार के लिए एक मायबोजने में माननीय पन के समर प्रपला लिए एच्या स्वापित करने में पर्थम पौरपर्म सपा विहानों की पपेमा इमारे लिए कही पषिक सहायक है। तई नही अपितु मनम से पाचतानहीं अपितु उपासना से म्पतिक पस्तिल का विस्तार, सम्नयन पार पान्तरण होता है और इस प्रकार ममार का पुननिर्माण होता है । पनि समोर प्रपन सदर रेलसे इ,तिम या मनन राहम अपने प्राम्तरिकसमार को बरसते है। स्थम पपने पांवरिफ पारम में ही प्राप्त किया जाता है या पाया गावा है। हम मनन परत है और निर्माप करते है। हम अनुमानन करते है और मृगम को है। परमारमा म समुद्र पर मनन पिया बापौर पीरन को उत्पम्न किया पा। मनन मगनपीम सर्ग है। पोस।

पौया पाण्यान'
कष्टसहन द्वारा क्रान्ति
१
पर्म प्रौर परलोकपरायमता
यहा एरोकिएनपीसरे पप्पाय केएमीस पच पर विचार करना
पण मरसे रमट-पमट करवा पूमा उत्तर-पमटरता एमा
रमर-पमर पर पूमा पौर या उपक हेमा ही नहीं पर
हिमपा गाए, विसाप कि यातिार पर हम इसे से
ईमा।
यापरमाता रिपरिमय पार निकमलादीमीतिमा प्रचार
मलाहपरमारमा भौरम्पविकौमपनी पामाराविषय
है पोर इसका संचार से समानामपर्म उस स्त्री को
बचा मोहममिए संसार मे परमारवा है, जिससे यह पपने परमारमा
के माष एमन में पसाहस ऐहिस्बीरन संपास रा पारपद
पीपन को पाने का प्रपल करवे एक परिमार
मोर पोर परत ए पदिनी दो पत्नियों के समान है-परिवह एक
रोनाल करता है वो दूसरी पानी मेरी है। परमामा
पोर मसार मम्म एम दुतर संपरेप्रति इन टिकोप के कारण पर्म
पेरिस यह परिपोप मपाने का भापारमिन माता पिर एयर
की भोममिमित मोपमर रिमारामार हमें हम मसार केसों
प्रति सदासीन एप के लिए रिया पाता है। महापाता है कि
परमाणे प्रलमपि न प्राचा

१. पर्न तुलनात्मक दृष्टि में एक सुरिवारमर पाप पिसे समम्म लोगों में गरीबों को ममी में पपिनियों को प्रसार में पापियों को पतित दमा में रखने के लिए और बनसाधारण को पपनी दामा पपा से सन्तुष्ट रखने के लिए प्राविणात पियामार्स पोर पसार प्रमाणपापी गिधारकों में पहरहा है किचनका मुरम वगेश्य पहाधिक है। २ इंगम मोर मास इस दृष्टिकोण समर्पन में कियामि वर्षम में पीवनमा निकर्मणामारी दृष्टिकोप निहित है हबत का प्रमान रिमा पार है। हेयको दृष्टि में तहार परमारमा का सस्प में प्रतिपादन है, पैसा कि मा ससार और मनुष्य की मुष्टि पहमे से अपने पास रप मे रिपमान है।" यह कासगीत पनिवार्यतानीस्मा केप में विचारों का विकास, ऐहिक भानुमषिमया (पारम्पर्म) की दृष्टि से नही । हेगम पानगत बस्तुगों के इतिहाखीय पारपरका मूम कासावीस पिचारों पम्ती विचार में पावापतकी एष्टि मे संहार एक ऐसौ प्रपिया है जिसके प्रमा कीम का प्रारममा प्राप्त करता है । ऐशिक मस्तिल सारिया पूर- पस्तियों मबरन दिए गए हैं। इतिहास परमारमा का बीपन-बरिषद पारमा साधीनता की मोर प्रमाणपतगत यह भतार ममत् मेमस एप माना है। इस धारासिटाम्त मार्ग को एसा प्रतीत होता पिमान परस्पा को अपिता पा है। वास्तमित पौर सुविखनक सी एकस्मता के समय में हेनम रे पसर प इस स्थिति को सप नही करता कारन विमान पाको मुपारपेमारतका पुगिन लिए पर्याप्त प्रेरणा देता प्रवीत नहीं होता।सामाजिक तापमान

प्टमहतधारापानि
निके ममपोपसको मामाघरमममी पोर मनीवित परमर
बारितामा समपक मानत है।
म प्रकार का एप्टिकोग हमारे प्रति न्याय्य नहीं है योरि उममी
दृष्टि में प्रत्यक ममीम बम्पूरप्रया बम्नु गापरम में परा मी एमए
रतो पूननया वास्तविकीर म पूर्णनमा कमगत है गरि पस्तित्व
मान (मा) वारिसा पर्यायवाचक नहीं। इसलिए पहनही मममा
गा माता सिमसारमन पपात् म्पिति का रवि टहराता है।
मपमुष वास्तविक स्पूपक्षमा पारण है गाईनही अपितु यह
पाशिमा पाहिए । म ममय स्पापित म्परस्पा प्रनिममी है। फिर
मी मापनी पामोषना में गुपनाम है। परिमा समौम पम्भिर पाम्म
सिताग्मिी भी ममीम मस्तिममी परियामम पारिश्ता
बीच पर करना सामनहरी या गणरण के लिए गामा प्रमा
नरपोर मामारी पसलमगी। मापमम समिकामा
सम्पत्तिाम मामने पारिवारीही प्रामापा है। अन्ना पस
तारि उमनरेगन रिचारपाटीर उमटाकरकरणरियामा
यममी दृष्टि में पारमा (मिमें समा नतिरला मोर पम मानिन ।
मार्मिक प्रमामीमा निधारक नर है पहा माम्म बाटि म प्रापिक
प्रभारी रिकारी मापनी निधि परनु पपुनरागमनाय
वासी
पालमा परिणाममाप पारिन सम्म हाय है।
हामी पारना में मामा मतियों दारा पापपरमिए पित
मुगए है। निहाम पा निर्माप मनुष्यों ारा विमा गाता है। पर
सम्पत्तिापामों मोरया पारमा रोपामिन मितिमि
का परिणाम नहीं। पारोि निरिण मागों की सोरम मपे मनुष्यों
बामा है। लिहानपीपरिचमान गमिपा माननीय कौर
गरगामनिन गिरना मेरय बीमामाणि उपमगुपनों
बी पनिारमा दीपान मरता है तामा निहाम रेसम एस पावर
मोहाहोता है।महीपर्प में यह पापकार मामा मसिया पिा

पर्म गुममा प्टि में
गया कि पटनाओं को प्रभावित कर पौर रमही रिणामागे भो।
परन्तु मम मम यह कहना बिपिपार भौतिकवल पर पासन करणे
बिपाणिहास के प्रति पषित पन्ना होकार पार समझा
भाषिक पर सारपिएमा एमतत्वों द्वारा पारित नहीं होते।
पर्म और सामाजिकम्ति
परतु सारा धर्म इस कपन में सामाजिक मारमारियों से यहमती
कि पासव पीवन इस पृषीपर ही प्राप्त मिाबामा पर्म की दृष्टि
म
मनुष्य प्रति प्रेम रतनी ही भागारभूत मस्तु मिनी परमात्मा
जो पूमा। हमें अपने विकास के लिए इस भीषन माप्पन से ही ते
सान्तरित करने से विमान बदलकर, श्यल माहोमा सामाणिक
भारपारी कोषमार पौरबार मम्मरोष रोपिरोपी
बिगब-मपरबत्यों मम्म संघर्ष में
सिबोकि सारेपर्म का
चार धारापार कष्ट कोरेलकर रहें सारसे समाप्त
परने का प्रपल किया। सम्मकी उपेक्षा या पायाभरमहीररी
पपितु एक पोशान्तिकारीगीर पर पिस पाने का प्रपान किया।
निाने यह अनुभव किया कि स्पर्म का सामाग्य इस संसारम्पो
विषयापार पान की दृष्टि स संसार की पत्निया
पारमाकी पतियों के मुकाबले में हम्मा मापस्यमकोपि में पारिष
पति परमारनामगर विमरकर ही है। धर्म मंशार की सत्ता
साम्पर पीला पारित कोमा पिटाने के लिए एक मौनीया
ममुप्पका इसरातलिए माहान है किशमियाम पार पपेक्षा।
परमात्मा एमगपालिकामा एम निर्माता

कप्टमारामान्टि
१५
परम्पपमित गुमाइसन हमें बताता है "सार्थों के ऊपर करम रखवे
हए पानाहीमह माप है रितवे होपरपस्तुपारमा पारमा पपनी पूर्णता
को प्राप्त लिए पापे गाती है। परि एकमा मौर परेतात
पभशी म्पराली होनी हो तो पुपनी पापा को ठोरगतमा होपा।
मग मिसिए पीपन और पाप माहाका पोर पोप
भूमि पर पर्ष मोरमार किए गए है जो नटरमा होगा। हम ऐसी
भयो । मोसी समय रीवित बी परस्तु मम निर्जीव हो चुकी
करस पाप्मारिमकान में प्ररितु रानीतिक सामाजिक और पौमिक
अमद में भी पिरेडपारस पायक पारों से काम नही पनेमा इम
मय पारम्पदा एक अन्तिारी परिवर्तन की मामूमस उपम-पुपन
की है। घोपामा भी फर प्राप्त करने के लिए पामारभूमि की भनेर
प्रोमिनि-पोर मौलिgand प्रारमिरहे हम प्राणा
शिकोहन्दिप बही रे सापन शिमक परा प्रमति होगी।
सब दुपार तनमननुष्ट मान्दोत्तरी पिडोही पौरान्तिकारी मोपर
राशिए पर। मोपायरमद बिरस पुरसव हैमरेपानी
मनमुरारते है नमे पर्यवसानों का प्रतिपादन करतेम सबिपाना
भी माय गते । पुहितों के पायों के सि सामाग्म
पासी रोमगा मिरम्पराों रिपोरमपने समय कीमत
'महापारविष्य शिोरपिया सामाविक भाग बोस महाम
मामों को बन पार प्रेरणा देता है पाकिस्साह डार पर नहीं
नाही नहीं पाता सामायिक परिमार्मिक संत
पमर मिसी मारमाएँ पस्वापारमौर पम्पारपोरेगवेही मानी।
मोर निम्होंने नागवा प्रापतरस पर नबसे पहरी पार गती
। कोम्पावहारिकम तामहरामा बिट मागर से परिम्न
समागता पनारामक प्रतीत होता है। इनमे हिमाचरचि
वापानिपानिपताकि पापारको पाप्यापित
परसे पलम रमेना राहिए। प्रामावि सरपचा पार सामागित

पर्म तुमनात्मक पि में
दसता न उगम परम्पर मयत पपित एकदापरेगी.ए पी।पामा
रिमक एम को सपेक्षा करमा पपनी पासप से सामाषिकाय करने
की समया को सीमित कर मेमा संसार का बार-बार वा-प्रण किया
माता है पारस प्रकार मापार-वीरे निरन्तर पूर्णवानिकट पार निकट
तरता पावापब तक मामला निप्ट मपरिणत पौरप्टोर
समता से पिममाने और सामने का कोई पम्प साप नहीं है पर
रिपास करनेवाले सोमी में बह पता होती. मी मिोह करती है।
परमात्मा बारको तोड़नेशा प्रमाम्ति मानरामो और शान्तिकारिपा
का सार देता है। परमारमा रक सास्ति मही नाते अपितु माया
उपस्थित करतेपोकि उन नझनों के सहारे अपनी मात्र पनि
समार रेच मही पाता और इसलिए संसार उनसे ना करता है।
स्या इवमा पर्याप्त होगा कि हम सबमे विनाप करने के लिए
मास हो १ मा विद्रोह के लिए चिहि को प्रोत्साहन दिया पाना चाहिए?
पासान हमारे सामन पाप्यारिमा प्रतिवायो रेगिम मुख-मुनिया पसार
करमेनामे मोमा प्रमेक मस्ते भौर सरत मिशह पाते हैं। समार
मोनाका बिनाएसरमौरभावकसपठा।
हमें मन रिद्रोह के लिए गिरकरलाई पाउसका कोई मौरउन
परम्प होना चाहिए। पति का सपनाको रनवरस्य
विकास का प्रतिम तापसी का पस्त है। वस्तुए वमी स्थिर पर
पातीबर करव शेषम पाए । ममारको उन मोमों को कोरिया
पाना राहिए, जिनकाहिन्याम परिकार।
मसार म्पायत पिनका गया यह उन प्रेषित पार्पमा
इनिपारा, प्यापारठिबारे सोकों का निम्होने इसपर कामाकर
एमा प्रयाप अत्यों की भांति मा पर सीमहीपते।
'प्रप्पीमामा.परिसरीपूर्णताजी"tnसनरम
"या सरपरमात्मा से याप्त है। परिहामाया गो
हसप लिए कार्यहरमा पाहिए, रम परे भिर पो पनुष्य पौर

कप्टमहनाराभाम्ति मनुष्य में समुप पीर समुक्षय में राष्ट्र और राष्ट्र में ठीक समपों की स्थापना फरमा पाहता है। ४ प्रेम मौर कष्टसहन । बिनम नोप पूर्णा के स्वामी बनेंगे। मुप पौर मुनियों में रहनेवामे पोर मन्तुष्ट मोम विना नहीं । मदेवनभोगी पायरी पोर पुरोहित ही विनाम है गो गनमापाप गो टिममे के भय से माप में निराशा हमने माया कि पिम प्रकार मन महापुर में प्रापेष भमविणाम पपित ममग म प्राने गायापी पुर-मम्मापी नीतियों का समर्थन किया पा। पानिपारीतोय बिनमी नास्तिर महार मिनीपईपी विनम भताए गए प उन्हति पुरमा पिरोपलिया पौर मनुष्यों के पुरे मे दुरे दुशोमामना पिया। पुतिमापन हैमिनार पभिमानी पार पापमम् मोमों म.प्रीम मिया गाएगा पौरनों पार नियों कोरिया पाएमा । “म रम *सा टाउमा गोमी पौर से ऊपास मीने गिरा दूगा। साताभिप्रमापी यो रिताम बहस गसने की मायरमा रम नमप भी गा मा पाम काप में मान पा रमके अनुपापी म विषय में विचार-विमर्ष कर रहे थे कि उनमें से कौम मरमे गहा बनेगा। अप भित्रि पर मोसो पाया गहरी पोर गहरी हो ही पी सभी पर पार भनाईपिचारों में पहुए थे। गिरिमी मनुष्य जोमदान बनना है तो उम मगध बनार ममुप एना पाहिए पौर परि म प्रमग बनना हो तो यामका पारमितान में प्रमुपवारा होगा शाहिए । प्राय म मनापौर प्रमुपलागणी सामारिक विकारों में मरेहरा माता पिमी मा पुरुषमा पावस्या गुप महो।हने मारी मुमम युग माना गाता है।मनोगों का मौकी सहायता करने १५ धर्म तुलनात्मक दृष्टि में दायित्व सम्पूर्ण तम्प पीवम भाप्रापारा परन्तु हमें अपने घरों मौर विधालयों में या पकाया मापा है कि प्रधत मोमो को पूर्वमा से सेवा प्राप्त करने का प्रपिकार है। यह विचित्र सिरावही हमारे म्पहार की ठह में पजा है। क्योंकि स्त्रियां गुम होती है पनिए गर्ने पुष्पा कोपासी का कर पमा पाहिए । पिप्रा राष्टों को बिसका पर्व है भाविक दृष्टि से पिब राष्ट्रों को सबसवर भक्तियों का अनुचर बनकर सन्तुष्ट हमा पाहिए । परन्तु धर्म इसे रमटे इस सत्व की घोषणा सा है कि समस्त मोगों को पुरतों का सेवनना चाहिए । मिसे अभिकरिया गया रिती से पमिक मादा पाएगा। परि में अपने सम्मत राष्ट्र होने का भर पो उसके सापकम्प पीर सेवाकामिल भी समापा है। सवार मेम पोर मेगा वापों का है। स्वामी समर।मो कोई सापूर्वक पारमुपारम्प से दूसरों की बहायता करवाई हसबसे महान है। मार्गरक पौर मुसारक सग पर सहन करते हैं। अपने स्वार्म की पपेक्षा किती महत्तर माय में नप पाव पीर ताक मुजमही मोपते बबक कियह सम्म प्राप्त न हो पाए । “सार में तुम मुसीबत छाती परेंगी।" पार्मिक प्टिकोमा मोडप्रिय विस्वास के साथ मेलमही सावा किमानरमीषम कामुम्पमपाजयरानिक मोप इन पानवापी प्टिकोम को अपनाते मी किमान मुरूपया तब उनका पानन्द से मनिमाम माम्माणिक प्रममता से होता है और भौतिक मुष-मुरियामा पारीरिक सम्तुष्टि नहीं होता। मा मानते हैप्टसहन पूर्णता या पापारिमा पानक पहुंचने का मुख साधन है। प्रेम पार मिसान की पस्तिनीस संसार को मोम मर सकतीमो पारो पौर एबह की परियों का निस पनुपात में मनुप्प पाल निर्भर और प्रारमभिमानी बम का बाना है पसी पनुपात में पम् मौर पिरोते गाते है। जिस दौमा सममें प्रेम होता है उसीमा को पूर्ण पारविमुरबन पाते। सो माराRAM

पप्रमहनाराकान्ति
है। यह मानवा पानि प्रेमी मोष सब बातों में अपना सर्वोत्तम
मृट पारप करते है। जो भी कोई वस्तु प्रेम करता है, परप्ट मे
महीप सरणाविना धित माप प्रेम करें समा ही पधिक मापही
पर सरना होगा। प्रेम करने पाप कम पुती होना नहीं अपितुरस निरप्ट
ऐगा।जीवन गिरापानी एक गंगमा है। हममे में मर्गोतम मोग राम
इमरे के सम्मुमदार एक-दूसरे को ममममे में प्रममई एन । पुष्प मोर
यो माता-पिता और सम्मान एक-दूमरे के मम्मुल पारम्परिक निरोष
मे तो हमारे संसार में गोस्वनी गो में बदल रहा है पोन
परामा पा पार पपन सम्मम्प में एपाम पापित गिमकोका
उपाए निम पारा में मासूमड्स परिवाना गया है जिसमे राष
पौर परम्परा में परिषमाठी पामरानी बों मे विनापरीसरह मा
पर गया सन्मानपननिए माता-पिता की पोरमही नारठे और
माता-पिता सेन पौर चिम्नुि रहरहिरहें सम्भीर और नाम
रहना माहित नाहम बस मिलिए मुह पोरन मा किन
परेको सममने नहीं परिहम मरमुर प्रम करते है तो हम इस प्रकार
नहीं बनमारा हम रिरोष परम-अपोपारा किया मरने
१? इस पपनी पारिक परिमारापों पोर पानी पण मानतापों का
बत योग परमन नहीं रहारष
पारम्प
एक नती है। यदि हम अपने रिपी कोहण तोग
पात में ऐलापौर मोदी पर मिमरा, सॉरी रहन पारेका
शिक समतादापायो पाप प्रमाि पारित
प्रतियोमहरमा होता है। मामले की पम्यापमा मन पर
परतुमसे परारा गाण्यो हलाला निरोप मारोगा
परिहम पिरोप पर प्रेरडारा वियप नहीं माने वोएकही र
पता परमात्मालामााह या दोमसालारोमा या पनापन
करता होगा। दोनों हीमों में यह पटनहन से मिल हीस
पारेयों पार मागोवाघों को,पापीन पोरमको चरोंजोगा

रक धर्म गुलनात्मक दृष्टि में नहीं सकते । सरे उमे समझ ही नहीं। वे मानते हैं कि पारेपट मातु हैपौर भावना पटिया पोर पोर परिहम प्रेम कसे वो हमे एप मनको मतापूर्ण सहन करमा होगा। ऐसौ रसामों में मनुष्य को पपने विचारों को पपमे तक ही रखना चाहिए। इसका यह महीकिहम प्रपनी पान्तरित पसरता के सामरकरें। इसके विप इसके पति मौन द्वारा पपमो पताता की रक्षा करता है और पपनी सहित पारा से मुरमित रमता है। पासोमत्ता प्रममतम धक्तिमा भी पनुमन करेंनी फिप्रेम की निकास प्रेम की निरवमताका पोषित राम सप्टसहन करता मुकाबला कर पाना कम्नि है। हमसे कहा पहा है कि हम राई रखने मी पधाई । म पानी पर पान दीलिए पाराप का नाप नही होता वम मेम गादीप माप होता है।" "मिथुप्रो परिमक पौर हमारे म्हारे जोरी पार पसलियोको पारे से बाहर भी नौकरसाव पर प्रेमका ठेगा यह मेरे पापों का पालन नहीं कर पा होगा।" उप- निपा के काम से ही हिम्मेवा बहते पाए कि हमें प्रसहिषु मोनों के मतिमी महिए पौर रिपक सोयों के प्रति भी बा होना चाहिए पौर सांसारिक बम्युमों में मासक्त मोमों के पार हवे ए भी सांसारिक बस्नुभों में प्रमाणात पना पाहिए। सम्मकि इस प्रकार का पारप कियापीत गाविया को, जिनमें रिपोपन सौ प्रबल भावना मरी पसंद ममाए । परन्तु माथि हुए पापों कोभा समठापौर विप्ठों मेको माने जमिनी पारेरी माविमोमीप भीमरोमोस भरियोमर जातीय किमिमा पसि । सारे सरमामलारसरण परिय पर- मीर मोइला और गाय नमो। (M-11 अमरान मिस भरी भनुपर।)

पष्टसनरामन्ति
१
फोहमा करताप पौराम के रममंच परमार श्रेष्ठ
मात पुप महीं है कि मौ पुस्प पीर सनी स्त्रियो पो मुख मुनिपायों का
परिरमाग कर देन है अपूर्ण की नाति पप समरते है और संसारकी
ममिों में प्रभावग्रस्त होकर प्रम रिपेरते हुए बनते हैं और मतो
उमरे मिपम मे बात करते है म उसमे दुध पम्घा मनुभव करते है और
न मही पाहते हैं जिस रात को कई पक्ति गाने ।
५
शिवर प्रम है
.
रि सबका स्नेही मिप है मगरमीता के पमों हमारमा
अनानाम है। परिवाने पारमाभिए पित्र प्राप्त की जा मह पनि मा
सोमाण नहीं अपितु पैर्यपूर्व प्रम पार पटमलता। इस
महान तिरादिपरमपिता को पुषक मिसाप कोई मही गाना
प्रम महमिकेबसपी पनि योनी प्रसरता पितापम
परमामा रे मागभाव से ममम माना निमपी किनिपवा पप
गहन करमपामा प्रम है। परमामा पा रागाही को अपने बीम
मापियामा प्रयोग करता हापौर प्रपना मालूम दुनिया पर सापू करता
हो प्रपितुपामो लामामारम्महमय पिता मोरेवस एमिए प्रम
फरता परमही करता किम पार परल। पौर पर नहीं उतरते।
गिम पर्म के लिए मा में पति परमार प्रामणि उमः मारमून माय
का जान ने अपने पमप में मप्राार प्रातरिया प्रिय बापुपो
म एर-मर म प्याराना चागि मारिपार परमा'मा है।
पोई प्रम रसाए परमारमा म रपम माई पोर परमात्मा को
पानता है। बामति प्रम मीरला या परमात्मामो नही जानता।
पारण रिमारमा प्रेम है। पाय नदी पपितुगाल पर हिगार

धर्म गुमनामक पि मे शिवाय राममनेपालाम ही इस विमा गहनतम तम्य है। प्रेमको धषिक नाममा बामनिय नही है मपितु यह वो बोपन की एक वृत्ति है, पिसका मन, भावना पार सकम्प पर प्रभाव होता है। या प्रथम माम पौर पिरस्मामी होती है। इसमें मेग-पान प्रति पार होता। उसकी निकोटि में विश्वास होता है और उसका अधिकतम मना करने का बल होता है। हम ए नखरेसार महिम पपने-अापको हानि पहुंचाए विना प्रममा नाम पाए बिना अपने पड़ोसी को हानि मा माम नही पहचा सकते। प्रश्न यह नही है कि ऐम मोम है या मही जो प्रेम मोप्प नहीं है अपितु या किस्सा देवापता कर मम पहनही किमोसो से नवमीप्रम विमा पाए, पनि प्रमकाने बाप नमी हो? पहा मी जीवन पर प्रमका पासमोनाहि जीवन प्रदान का एक परियम रप बन गावा है प्रितमे विराम की कोई कामना नहीं एवी । बसका पस्तित प्रवाम से पुक नहीं किया जा सकता पपिपास दष्टि से ला पाए, तोइस प्रदान में पानम्ह पार भी हो सरा। मोम प्राम्यारिमा स्वरा उसके लिए वो कई विधान हो ही नही समता। सामोसम बिनियर पममा पारम्परिकावान-प्राम-नाम हो सकता है पा पार सही कहा बाए, तो रसम यस हिस्मा बेटापागा सकता। पापूर्वतमा निस्वार्थ होता है और या निस्वार्थहए बिना एही साता। पेटे की इस उक्ति में “परिममे मा वो इससे देयको मनाना नहीं | सपूर्वनिमार्षा की बोरिपरमा रिमा पपा बोसने प्रेम का एकबोरस प्रकार काम परनेवामे व्यक्ति को पनौषिक रामर रमली है। बोतली दीवा से प्रेम करताना विष हो पाता।

पवानम्ति
पड़ोसी से प्रेम
पोसी से प्रेम कर जिसका विसर पर्म उपदेपाव-उसके
मतिमोर रसम्मस्तित्व के प्रति म्याप और पादपपने पड़ोसी के प्रेम
करने का पहप नही है कि उसे हमारे मतों का स्वीकार करने के लिए
विध पिया राए पषित यह है कि अपने प्रमाणे को त्याग पौर
दुमरे पति की मां से देने पर सहमरे भनुमर पीर उसके
मन के अनुसार मम। पर हमारा पड़ोसी अपनी प्राठि के समान के
अनुमार कार्य करवर मुह बनाएर यह गाना पडोनी प्रति ऐपनी
पोमी से प्रेम कर लिए हमें इस गरी सम्पतियों के प्रति रसरता
भौर प्रतापीत होमा होना। पर यह मे यह बहा पा "मुझे ऐसा
मगता किवीना सम्पूप महल इस रात में है दिम्पति अपने
भापतो दूसरे नपर पररने होगाप्रम पर ही टिप्पपीकर पापा।
“मदिनारमाने से मेरे माहोप मपant में कभी भी पाम नही
माया पिसम मेरा भाई मनमनमहो।"परिहम बानपान के
मापनों में तरेमार हो तोहमें मावानिक जीवन पौरपर्म के मारतों में
इमामलिना पिकप्पान रखना चाहिए । प्रत्येक व्यक्ति को बता
परपावणम जीवन-यापन करलेमा परिव प्रपितरार है। पागन
चीन हम सब एक ही रंग के वस्त्र पहनते। मोविनियो पनुनार
पो पौर सिनहाने । इम की प्रसार सामानित नियमोपामन
करने और हमारे विचार मी एकसारपीपरपरापोरा पास
एसएपी समाचारपत्रों से पाने । परी पारितों को देखते है
पोरगी सेना को घेतो हम एक-दूसरे पीनी हास्वामना
के भाप नरस करते है बिमारे स्थित मेषित पनाये है। इस
टतावता पुगरीरमण है।
५ भाप-11

धर्म तुसनारमक वृष्टि में यह पेशार होता कि पान के इस युग में भी ऐसे ईमानगर पुम्प प्रौर स्मिा जिनका यह विश्वास है कि ये पार पत मे ही सस्प के मार्ग पर पार को कोई प्यक्ति उमके मत को स्वीकार नहीं करता यह सचमुच क्या का पात्र मानो कोई पमागा पौर पटिया दोटिका मामी हो । यह एक महतारपूर्ण विनम्रता पौर प्राप्यात्मिक यम्मको तिरसत परोसी के लिए परपषिक चिन्ता कप में प्रम होता है।सने प्रेम की यह माप है कि हम अपन पापी मनुष्यो के पृपा म्पतिको स्वीकार कर पोर पान्तरिक पुरता मोर पसा एकता प्राप्त करने में उनी बहायता करें। परिहम पाप्यात्मिक दृष्टि से जीवित हमारी प्रम पोर पा करने की ममता सदा बदीपाएगी । हम दूसरों के प्रतिपान होंगे पीर पपने प्रति कठोर होमे। पाप्यारिम प्रभाव पी विधेषता यही किया पान्तरिमष्टि से कठोर पार पासीगोता और और ममासीम होता है। केवल पाम्पात्मिक माग ही पुची मारमामों का पठार कर सकते है और उई रुपान्तरित कर सकते है। पर हम अपने जीवन पर दृष्टि गनते है जब हम न भोकी पारat परि पाहषय को अनुमा कर पाने के मुअरसर हमारे पास पे तर हमारे मन में पहली पाचाताप ए बिना नहीं पता कि हमने सरप पान का प्रषिक ताप मही उठाया बापासारेमा पषिक निराश पा पोर पर किम इतने मगोपौर हामहीमापौर पुण्ठनिक अधिक कोमत्त मौर तनिक प्रपिक यामु महीनापब हम अपनी विगत स्मृतिया की मार ले ममते है तो हमारे लिए सबसे कष्टदायर विमा उन पास की होती पर हममे अपने पापरो पनी विधिका पोर उदासीन रिसापा परतिषिरा पनि हमारी पार तासमापून पापा से कहीनी बरहमने अपने प्रेमपुष पनोरम को अपने अधिकारों की एक यापूनावमा कारण अपने एप्पन किती मिमा पभिमान के पापातमिमातिपादाररिसीमनवारण प्रपन कप्टसलायमास्ति पामित्वों की पिसी हर मावनाकारण परे हटा दिया पर हमने अपनी पुस्कराहरकोणरिया और पपने हाप को रोक सिया पार पाप मुह मोड़कर दूसरी भोर पम दिए। बीवन गवाए हुए प्रासरों की एक गषमा है। परमारमा हमें मनसर प्रदान करता है परन्तु यह हमारे हाप में है कि हम रम प्रपसरों को पाते हैं या नहीं। "फसला मत पर हमारे सम्मुत रोपी पौर 'पपरापी' पाते हैं तो हमाराभानिसमार मपने नियत प्रमापोरेपनुमार मदा का समपन करता है और पापिया कायरता है। समता पौर सस्मविता के इन प्याथ्यानापो की दृष्टि में जिनमें बुराई को रनिराममे के लिए एक पी ग्रिप विकमिठो मई प्रतीत होवी प्रधाई और बुराई (पुष्प पोर पाप) सप्टाया मीमांकित और निश्चित है। उनके मापाम पौरपाटिया प्राचीन इपियों पौरपारमारों द्वारा पहले से निश्चित कर पी पी है। हमारे सिराम हमें प्राचीन नियमोपा गाल पराया है पोर हमें उमरा पारी बना दिया है। ममी मानि स्थापित गरिता काही प्राग मूसा पालन करना होता है पदि कोई पालन करे तो उम पपनी समानता अपनी ममति तना ही नहीं जीवन सा देकर उमा मूम्प परामा पाता है। परिहम मोरमाचे पो हमें अनुभव होपारितिक महिवार पहिरेपौर प्ररपेट परतु पानिकास स्थान पोर पारपर्गमी पापारभूत पारपार भी विगुरपसना-मार। समार गुप भी पामता मही पपितु मम्मना पर मेवाई मान मेता है । पदीय परम्परा पौर प्रपाऐ पोष प्रसार के पार्यों को रचित परानी पी है। हम विसामोंगोपनाते थे नरबमिरे पे पप पौरपीन में मानम मेले

पर्म तुमनारमक दृष्टि में
ये मोगों से हरा-किरी (पारमहत्पा) परमे की मार को पौर हम
इन सब बातों को सर्वमान्य पयस्वा काग पामतेपरसा प्रकार
कामाचरण सामामिकमत महम होवा पोलया समोर
हम प्यक्तिगत निम्मेवारी मुक्त हो जाते हैं। पारकम पम्प पने लाखों
भापरिकों को सुरके नाम पर मिरिन मात्र से पनि राजन
एक पविराम कर्पोरबन गया है।
परन्तु पिकार में गिरास मानव मामी को पति-पम्प कर रहा
है। हम किसी पम्प पति के निर्णय को पम्तिम मान वेला
भरनी पात्मा होस्वरमता को बोर है। विमुरम भौपचारिक
पार पेनिमिक बीवन मानव प्राणीलिए विमान प्रयोग है हालाकि
हममें से अधिकार तोग इस प्रकार का बीवन बिताते हैं। मानपीप
समापों में विवनी भी प्रगति पर धर्म से बमस्य पानेमाने चन
नोकामो प्रपनी पसना-पति को पार रामने पत्रका
अपनी लामाविक सहानुभूति को TH THने के लिए पार नहीं है।
गिटापरणकी पूजा केजनही सोग कर सकते १पौर सगीय मन पार
हरम की तुलना में ही रखे पसब कर सकी। दो भात्मिक दृष्टि से
मर चुके है। सन्त मोग नियमनिष्ठा के विरोधी रहे। हालांकि
विनोम सत्य नहीघन नियमनिष्ठ होगी मिप बीवन में कोई
ममस्याएं नहीं होती । नियमनिष्ठा मा मानिकपुरला मिा
पापम्पहा.सार मी माप विमा.प्राध्यात्मिक मामलामास्वाम
मारी सती
मरिससम्मको समय दोपप्रपापों का मनुसरममाणे
पाने मोनोकी मिलाकरने में परमति सागपानी पामगे। पोई
पोप परिस्थितियों मनार में मारा अपने पति को ममिप्यत
करने की प्रेरणा के गोमूत होकरल्या पपा एहा है। मगर में
यो अपने शिक्षाकात में ही इसलिए मर गावा पाकिमकी प्रारमा
पस्त होउन धुप गैनी पसीमी चाबियों में मोपपपीमाटी

सप्टसदन नाराभान्ति मारना? जरा मुरहों के प्रपरिषद प्रार्थो को उपेनिनकर देवी है, हम पनि रह सकते किनमें कुछ भी रिप मग नहीं है? संसार में कोई भी बस्तु ऐमी नहीं। गोपूमतमा विस प्रपा पूर्पक्षपा शिरिष हो।'हम सबमें पाहे रेपोटे हो पायो चाहे निम्न हो बारिम सौन्दर के प्रति एक महममृति वरपके प्रति एक तासमा भौर प्रेम को एक प्रमीम माता ६ मारमें रिप बनाती है। भूनों पोरनतामों में भी एक सपना मार्मिक गोवर्य होगा। मौय प्रसाधारण एमापों में पाए जाते हैं। प्रनायके मंबर पाकर एक ऐम संसार में पायम करते! शिव सामागिता का स्पान निरन्तर विपरायमता मेती रहती है, मिममें सरमा पोर नसापकना मसा करके मीर मिन्हें कि कानून पहा पाता है पनी पाती है। हम इस बात को नही रेल पाते कि हमारे समारमी म्पवस्था ही पम्पामाविकोपोर मरहम पपरामों और पपराधियों से मारापाहते , कोम समागम्पपस्मा को मरता पाना पाहिए। मरे पतिरिका मानपीप औरम में रैपयोगरा भी बहुत गाहाप रहना है मौरब केस पापे मोग होवेर नि परमापार सहना पाता है। मप्र पाने पौर मात्रामा में पीपल मार उपकर हम उसपर पौर भी गहरे मामात्र सरगम एफहीना पह कामाला ला मेला मेरा काम है महिमार पुरता बरगा। मारपीय प्रामियो यह गमभना पाहिए किर्य पापी और रोमिएम एक हो उपाय किये प्रेम पार दया करें। संभार ' प्राणी पुर महीनासम प्रमाणे भानी पर हमारा मात्र पारिमामा गोमा पोर मरे में समरें। ranमानी निमगुगन् ।

धर्म तुसमारमष्टि में ८ सुमनशीत कसा पोरगान SHLIL ETA माडी सामना को अमानासका साप कार्यन मोस्तुति करके पिसीको पाप उचा उठाना पोरम मिया र पिसीको मीषा बवाना अपितु उन्हें मानबीम सपना है। माारस कार्य कोरेपन मानबीय मारमा के गुप्त मनोवेगों में पन्तरष्टिय भासर पौर उसकेमणों और महत्वाकामामों को मश्तिकारसम्पन्न करता है। महान AIAI में सापापीकरण पीपमा भागना होती है बिसक निमामो भारतविक मानुनही हो सकाएक मिम इविधास में होकरबीने पौर प्रपनी पस्सना में उसको पनुभर करने पर पलपरता है।पन पर पीवन के मर्म पर परिवार कामे में सपमहापाग है तब बह पारमा बर्ष पौर म्पबा का प्रस्ट पर सवा साता सवारिया पारमा प्रनोमन के कगार पर पिस प्रकार या रोम एती है मोर पोर मावोबपीभूत होकर हो या ना पहने में पसमय रहती है। पापपने पात्रों को उनकी अपनी स्वाभाविक मम में पनपने फलने-फूमने और मुरमाने देता है। मह मानमीम जीवन की विस्तृतवा मोर विविधता का पर्सन कराता है। प्रत्येक स्पषित अपने भ्यरियतामांगर रिमति का एक मिरियम बन पाया । पहस्सर अपने प्यार के सारमास मेड सप पपरे हो ससा पौर स्वयं पपने प्रभुमों में सनरता है। पररपरतीरोधी शक्तियां पपट हो पाती। ऐसा प्रतीत होता किमात्माएं पिकने में मसीहो पौर हम से सहानुरति मनुभम दिए मिमा मही रासाते । संसात के महान कापि भवतिमापन है कि पापि कपि मोन हास्य रसा करपा कोष प्रेम इमानि विभिन्न मारोतले. परतुरे सब मस्तुत एकही

एप्सहनाराकरिव
मासाम्य तत्व करणाही विषिष स्प।'
पम्पनीबरगती पार भेष पामामों के पोरन दी एक पहरी
मनुभूति ही सम्पूर्पा (पोसम्मा) मा मार है। पपमान हमे
बस्नुपानेर तप और गोलपीपालार्षो मे दर में माना है। यह
मनुप्री मानना की एभूमि को इममानो पिर पपने मन के
भरही पदर तिमाएपमान र मानाया प्रस्ट पता है। प्रभार
मात्माएं रनमारी में मोरपना पार पाडापाते। सता
दीपामा ती मानिने पर उसन परार साय नमोर
श्रीनगर में नाटॉम पाना मन है । 'पाममा इम उसना पार
नहीं करता मिलमा सिमेर हामारि रोमारो ममान में मुपर है।
ऐम्मपिपर अपने महान पारिवारिक योगाम सरगम गीपन रे मम्मर
पर पंग गहा हमारी सहानुभूति न मानमा मापा कि
बपाहार पीपा मोरि परापागिरमी सौपिस
पौर पदरगारमय जीबन
सितापग
परले सिमन पर परिवार र मापौर हैमपाको उमा
उत्तपिपार से बसिरल है। उसी माता के पाराम की मारना
उमरे मन पर पाती है। यह मामिपानी पोर पभिमुग होगा
पौर उमे बताना मी प्रारही मरिचारिणी नगी मारि
पो'मा एमीही हिमने ऐमा नागिन होना पापहम नाम्पिनियों
कमर में प्ररिष्ट हमरापला उमे पागपाता और समरी
मनपाप बनना है। उपपदामि ममापी है। या
पुक्तियुग मेरा पाने में असमर्थ और समरे मम्मि म
पिरोपमरपरिमा-मी रखती है। यह गोरम पार मायपर छिपान
परसाई और भोपानि l म म बरसा प्रपिप दुग है
"होला मारहता। मेरोष पर भीपर लगाम पुराला और
१ कप Prernनप :
मानुजनगान् नमसम्म् ।

धर्म गुमपरमष्टिम पीरन पर इस टिप्पणी के साप समाप्त होता है कि यह एक निराककपा है, जिसमें कोमाहत तो गाव है परन्तु निसका पर्व भी नहीं है। पोतो पपनी पली मोमारगमता, मात्महत्या कर मैवाई और सर्व माध र समता यम इसलिए कि एक पातु पत्तनायक पद से उसपर विस्तारबमा मेता है मौर स्वकी दुमताओं के नाम वठाता है। उस रखा पर विचार कीथिए, चिप्समें कि मनुष्य एप ऐसे मनोगों में फस भाते है वो उनकी गतिविधि को बार देते। उनकी प्रतिरोष पौर पिचारकी पक्तिको पौर उनकी पारना पर बो मंगारवाया उसके लिए संपर्प करने की धमकीया को बीनकर देते हैं। अपने मार्ने पर चलते हुए मजन तक पनके विमनाते प्रतीत होते है। ऐसा मपता है किये अपने विमाएकी मोर करिए पाते।इम इन सबको गत परम समनपौर फिर भी उन्हें रात मानते हैं। मकवेष इमनेट पीर पोतो हमे हमारे साप सनी भिन्नता के कारण नहीं अपितु हमारेगाम रामकी समानता कारण प्रभावित करते हैं। उनके कार्यों और उनकी परिस्थितियों के मम्म पूर्ण समस्परता है। गात 'कोहिट सागा' को मीथिए। सोम्य पार रिना वर्ष मो सारी कहानी की वह में पिचमान है, भाग्य के लिए मानव माषियों के संपर्ष को मगमग दवमा ही प्रदरता बिना किस्काइनस का कोई भी पोषात नाटक। पापक पापी मै पौन- पान का नितान्त ममाव हो रहा स्पमान में निहित पिषम (मृषा) परविनय नही पाई पासवी सरसके पाच पपने प्रापको ऐसे म में प्रकट है मामो ये मुन पौरपुर की पपनी पूर्व मिर्धारित समस्वरता में रहे होषित देतोम ही माएका से उमपी भिना कर सकते है। बो पसना पौर माविक उपम से सूप हो। हम पीवन की एकता से प्रभावित होते हैं। अपनी सप पपषित पमिपपियों में माधीपन एकही है। माता महरो पोसिएम पवार का पाएमे मीरापमही , शिम किहम स्वयं अपरापीको मध्य हो । पुरेसे पुरे मपराधी गिन प्रपोमिए रोपी होते तरम पप्टमहनारापास्ति दुर्गमतामोपी युध अधिक पड़ी हुई अभिम्पत्तिा-मात्र है मोहम सबमें विषमान है।बह याद रखना ममाहोपा कि हमें प्रम्य माननीय पारमार्मों देखीवन पर प्याों का ठीक-ठीपत्राममही हम किसी अन्य मामर प्राणीको तब तक टी-सीरमहीं मान सक्ने पब तक किसमहरम के पन्तिम एस्प प्रपट न हा पाए पौर ऐम अनेक रहस्प हो सरत है भोपनम्त काम भी इस्प होगने पे। यदि हम पारमापों को रतनी मरमवा मे मनात रहत मिनी सरता से हम परी को पनामृत कर सम्वो हम कुछ कम पठार हाले । एकप में मुभरात का यह अपम कि सारा पापाचार पत्र्यनिएर होता है सही है। हमम में प्रदेश मस्ति में परमाईली पालामा होती है और पहिम कोई पुर्ण करते है वो बह इसलिए कि हम नमसे पन्दाई होने की प्रागा करते है। सुप्ट भाष रमपनत मन्दारपारण होता है। मापरणारी पारस पधिकाधिक चमकी वस्तु होता राहा है यह मानता है कि प्रातरिम जीरन को प्रसक बाहर स पूरी तए गत साता है। इस टिनोप में प्पपिता मनुमन के भाम्परिक जगत् की पता करी है पो मही कहा गाए यो पारमा काग। हम पपने विषय में गिनना पम पानते हैं। चाहे हम रितने ही ईमानदारों माँ परम्नु पपास पानी या मरों को मममा सरत है। हमारे अपने मभाव भी दुईतवार स्वयं हमने पहन ही सरयतापूर्ण शिपी पौर एम मिप्पा मिमान पौर पिपतास पारलर नमगार इम पतिरिक्तमया हमें मनुषोंगी ममतामों के लिए एप TO FOम नहीं होना चाहिए ? परिहमारेमा पोर पूपयाही पूमता हो पौर हमारी भेट एस मम्तों पर नापों मे रोहमा भरती पायदा विमान ही हिम्मत हार नालाप्रपल करतेपी प्रेरपा तभी मिमनी। पर इस पहरेगोरिनमार सगा महागुरषों में भी हमारी मातिएमवाए की प्रतोमन रे पोर गोधामने भी पप पोर पर धर्म गुमनात्मक पि में की महिमा पाई थी। उनकी धर्म और मप्र में धारयना देते बाये हार पए यहाँ हारपाना कोई नया की बात नहीं है। मनुप मुख पौर इसमें से मुकर प्रपूजा से पूर्णता की भोर माता भोर हममें से गिरे से मिरे मोन भी उसी मिट्टी से बम बिससे कि रिसे अरे सोग बने । महान पारमाों पार भीमत मनुप्मों में एक वास्तविक पात्मीयता पर यही पस्तु है जो मानवीय बीबम के गौरव और मूस्म को बराती है। प्ट मन्बुल का नहीं, अपितु परमार.। यह सब प्रकार : सुरनीस प्रमान का एक मासयक सहायक है। सहन करो में असमर्ष होना भतिक पूर्वक्षता है।हम मका निमन्त्रित करने की भाषामकता मही है परन्तु का सामना कर पाना पक्ति का प्रमाम है। वर्म तपन पोर तपस्या के लिए ही माह महीपते। यदि मर्म हमसे यह कहता है कि हम पावत मूस्या के लिए बीरम की पदी बस्तुपोका परिरयान पर तो गाभिए कि उसका यह पिस्मा किदुर्गाको सोन्यापूर्वक बान-भार दिए पए बनियामों पारा मेक किया जा सम्ता है और सत्य की स्थापना की जा सकती है। यह यह माम मवा है पिएक ऐसी वस्तु रिसता कोई मारनही है और एक रात भामा को नष्णु नप को बोकि हमसे की कापरता है, त्यान देना पाहिए। ९खरा पुर्याम्प नहीं होता । बहुत बार मा विकाध में हमारी सहायता करता है।पकी महपायों में हमे प्रकाम प्राप्त होगाम मता पौर साय मर्मस्पी बों में से गुरसर मुकरते है। परि हम पीमन के भग्नापूर्ण और कटिन सों में से न पुनरें वोगा सम्मन किहम स्टोरबन पाए पोर मभिमान पा सायुम्मायता के निसार बन जाएं। पर हम भाप्प के सम्मुख हार गावे है मोहन हिसारसासमपुर मौन पौर मिनीए होकर अपना सिर मसाना सीवते है। परिवार कोई विपिएस शिमों में ही नहीं पाग पाता।

मप्रमहम यान्ति इसका किस प्रोपर्म (कायत) में मिलता पौर ऐसीरियास्ट्म (पमपुस्तके) में पिकमिव किया पया? 'कुछ तुम्हार सिर परगमा पाताई उम स्वीकार गरो पौरमा तुर्म मपमान सहना पड़े तोरेर उपए महो। बात यह है कि मोन मी परत भाम में होती है और पेप्ट ममुप्पो पी पाम विपत्तियों को मट्टी में होती है। 'मरहम रामे मोगों मपा पात्राम मिमने है पिरोनि रब हो। उन मापो म बिमान मन की नस म्पपामों को महा गोषि परीर दी सलमामानी प्रपनापही प्रषिक गम्भीर होती तब उन प्रति हमारामा में प्रज्ञा का प्रग भी मिमा हाता है क्यापिरिमान मिमी म्प में मध्य के मर्म के निकर परच पके हासे है। हमारी रष्टि म मिन मोमों का गरमे प्रपिक मूल्य दामा * मोपको मिहान मटिमा यो पौर निराणामोंपा माममा पिया है उन लोगों पानही मिनपान एक भी मापी पपा नहीं मही जिन गोगन मसाई मयाना बोट मरी पड़ी। म मना यह पप नहीं पिनुप्प का विनाम लिए कर महना चाहिए। प्रत्येक मनुष्य मामरम्प है किमिम दुम और कार मचा गा मो उसमे रहा पाए । परनु परि पावरपर हो ता मनुष्य को स्पय कए सहकरनी पीपन की पुमानों इमरे ममार्यों भोरपणे कोरहटाने का प्रयत्न परला पाहिए। ६ विगोही प्रारमा परिहम पर ऐमे समारमा निर्मापपरना चाहते है रिममें मिला देनेरासे पौर पार करनेामे मोग रन्कार प्रापियों रेस में एमरे पोपमा ५-११ . .

मर्म तुमनाला ष्टि में करमेयाने माों के ममें रूपान्तरित हो जाएं मौरस प्रारमपने- प्रापको मिप्पाल शेप और पपराब मुहारमोरमें प्रेम का प्रयास करना पाए। थाप गर्म-विसापी (मास्तिर) स मह पाणी पाती है विरपुरातन भौर पीर्ष के निमगिरकर और उसे पातो- कित करने के मिए कष्ट को स्वीकार करे। यतये मोग जोमात्मा की मनुमर पाता शीत है दूसरों के गोप को खाने के लिए गार हो सकते हाबो राष्ट्र हो गया अपने सिर मे सवाईमा सम्मा मेवा है। कष्ट का परम महान मोप करते है। पसामु प्रारमा मन ही यह पीर से दुमो पीपल की कठिनाइयों का सामना करने में मार पनपानिय पाने में पागल पनुन करती है। जीवन का रहस्य सुचनात्मक प्रतिशत है।ॉस का सारमूग गिधार हो (जो पारियों और यूनानियों के लिए इतना उपहासमा विषय बना पापा) को हम सच्चा प्रेम करता है, उसे हमारे लिए कस्ट बहन करमा होपा और यहां तक कि मरमा की होपा । यह सब जीवित नो का पारभूत सप। पाप पर कष्टसहन और मृत्यु विजय हम सा परसीमन के समान गौतमपुरमामयाग्स कोठरी में जिसमे मुकरात महमान पिसावा ही रिवाई नहीं पाती मषितु प्राय ममेक महात स्थानों पर भी दिखाई पाठीममा गोरप सहन करवान रूप में प्रेममर और मोप में रिम्प है। मनुषों के लिए पासानावित हाकिम मुरको निसने सबसे अधिक मूमपान माननीय समायो को हितविमिरेरीपी पौरसाको शिसने रिपसान पिया मोर अपने प्राव पारिए, देवता मान सिया कारण यह समालेमगीय परमात्मा के पास सार को मार पिया मोरिन । तर बसे पुत्रर- करते।किये जाम है मोकाट सहते हैं। प सहमा पापारिक पीपा का सारयामास्वरिष्ताका महास 1यह पो सबको मिलाकर एक करता है। इस बात का चोठा मुर्गा अपनी समान्य सिम की परियों में ही पूर्ण प्रेम मौर परसहनी - सप्टसहमारामाम्ति पक्लिारा मुनिश्चित स्म से पारित होगाती है।मोनोग ईसापाय मनुमरण करते हैं उमें पान के पास प्रेम हो पौर मुत-रिवार) पपैमा पपसहा को पपिए पसरला पाहिए। उन्हे प्रेम का वरदान पाने के लिए प्रार्यमा परणी चाहिए मिसका पर्व है-उदारता पौर रमा धर्म हमें बताता है कि प्रामम पुननिर्माममिए पापम्प मृगन गीत का चावल के पाप सयोग से प्राप्त होती है। बन्युत्त और मेराको भावना पाम्याग्मिक मोतों से उत्पन्न होती है। परोपमारमा उन पारापना का स्थान नहीं मे सरसा जिसस हि बह रत्न होता है। एक प्रम में हम मह मरते है कि परमात्मा गाकि इस सारे समारत बनाई पोर बोस सिरदीपनारे पापविन मोतिष पाप पररिया रहा है मिमं से मेि अपने पापको मूषक कामापीर में की मुष्ट करता है। स्वयं हममें प्रत्येक के अम्बर पप सहन कर रहा है।पर पारमा गोषिसमर भौतिक तत्व में राशीहुए मुणदो गाएपी जब सम्भावित विर-मारमा पा लिएर की पारमा भयेकपपरी पास्तपिफ पेवनापन गाएगी एपोमम (सारा मुख्य गिप्पा में परमात्मा 'सप बनाएगा जब एमाण में सीमित परमारमा नरें परसादी परमात्मा न पाएमा तरलपपमानापम्त हो पाएगा मवीप में मार कष्ट सहनेवासे शिोरियों का मिमात्र राम लणतियों को चुनौती देनेशामागापौर रन रिमप्र प्रनिरोप भरमगामा पायोसरप पोमोनिमार मानवता को देय से मारपोर प्रेम बम प्रयोग मे मार रहे हैं। पुरकों की पपिर-पिनों के प्रति पाम बेवन पाने के लिए परमा पुष्पत पा प्रपना ताल बनेगाने रामों के प्रति परिवारमा पोर उमरा मनोगों के प्रति रोम पहात करते। पौर मून गाते हैं मोर हिरोमियो पाम पर्याप्त मातिर निमरे भानुभारमा सरने है. मशारम भोप रिम्य पाएम नगि हिरोपीररमा पाहिए, यो एकमनिवारपसा,पिपुर मीन धर्म तुलनात्मक रप्टिमें मिर्वोपत्र प्राप्ति के निमित्त गौशानियों का प्रमापरप करते हुए, विषम शापों को परास्त कर मार मिपा के स्थान पर सत्य को स्थापित ए पुरकरते है। सब धर्म एकतर से भले ही विभिन्न भाषामों में भोपना कि हमें एक पानम्वपूर्ण पैर के लिए यहां नहा मेगा मया और यहा तक कि यह एक ऐसी माषा मी नही है जिसमें कि ममुप्प समाते पौर मिषता काम पाकर सदा पाने का सके भपितु यह तो एक निम्मे कि हमें मईया मोर स्मार्य की भक्तियों के सिर महमा है। हमे पते सनिक बननासिरप के सैनिकको प्रेम को अपना पत्र HIEL पौर विरुप में तब तक नमक-पुनत करने परे है पर तक कि पृषी पर परमारमा का पग्म स्थापित न हो पाए।

पांचवा ग्यास्पान
रवीन्द्रनाथ ठाकुर
गवरी पहल में पायावन समिति की उमापालिए पामार प्रमित करना
पाहनाई निमफ फमसाप मुझे इस ममाह की भग्नापों म माग मन पौर
भारम सम्ममनमा समामिल करने मा पवसर मिना । मुमाम बात
फा मेर है कि मेरे स्पान पर कोई प्राय पपिक मसम पार ऐमा पनि
मही है याकवि की पगमानपनामा म मुपरिपिन हा पर मैं महासपि
के मासपूप पास के प्रति पोर देग या मारे समार पर उमा पहरे
प्रमाग के प्रति अपनी पसमि प्रत परमे के "म मुममसर के लिए
पता भी है।
माहिरप को महता
महान साहित्य की यह एक निरामी पान पिहरागामों पर रायों
को परेशानी पपिक पिरस्पायी होता है। विराम रम माननीय
भावनाबी मनिका भानामा रायपों प्रपा वामिक विरामों की
पतामहीं पविकोपराममा बनी रहती है। एमरा रानीतिक
उपत् पर मर पुपाई परनु होमर का पीत पार भी बोषित है। रोम
पारमय गुणहा गा है परनुपरिन का पाप्प पार मी साप है।
, गिर सच मे रहरमा मयुरो ससम्माविमनसरी
समर में दुप हमेशन में रि गम बात मान ।

पर्य तुलनात्मक दृष्टि में कामिराससण पार भी हमें एक समीर पानी की पुकार की मांति मानवीय सम्बन्धों में कामाकी पानी एक तीन भावना रापित कर देते। पर्यादा उमिनी विसका किस प्रकार पा पारगम उसकी रपमापी में ही स्मृति पैप पपई है। मप्पकात के महान परि पाती सामन्त विस्मृत हो । परन्तु राते का गीत प्राय भी पसन्द किमा पाताहै पौर एनिवाब का मुर एक्सपियरकारपर स्मरन पिया जाता रहेपा पर हक प्रिप्रेमी मापा पीमित है। मग हमारे रामा पोर नता विस्मृत हो रहार ठप भी रगोग हम अपने मपात पौर काम्म बारा मुग्म करो ऐप कारण यह है कि भले ही भारतीय है फिर भी उनकी पनापों का मूल्य किती पातीय भषमा राष्ट्रीय रिपताओं में नही अपितु साईमौमवाचन दतों में निहित है पो सारे संधार को समान रूप से प्रभावित करने है। पहोंने जीवन के माधर्म में और सम्पबारे उलप में पति की है। २ प्रम्यारमपरस्त इस परिवर्तन काम में प्रमेट मम मारवाया के लिए पीत्रमापकी बामो एक मामासन और प्रेरणा रही है। पर हम विपन प्रासापो के भार से रखे हुए है पौर विशाम तवा संपन्न कोपिनों से समाज से यो हमारे मन पराप्रापार पोररियान सोहहै हमार इपमा पापा पार हमारे मन में सरसाद पपाते मारे। बता मने है हमारे सिराय-विपत हो गए। परनुमोचे नही भी है और सरसग कामस्य सम्पत्ति मौरसता माहे महीपाला माना चाहिए। सम्मा की सीएसौटी प्राम्मारिया पारस परिणामअशि Tarfaral और कार्य मेरा पानी माविमाए । । ।

रवीनमाप ठार
रमय जीवन नहीं । महलपून मस्तुएं पंसिर मस्तुएंगे रिहान पौर
मनटन भी पहुंच मे परे हैं।
रीस्वार ने प्रपौवन और सामागि म्पमस्या देमाप मे
माम्मास्मिक मूल्यों की मर्योपपता पर पो पायपिट बम दिया है यह
भारतीय विचार र परम्परा के प्रमुफ्त है। उनमें इमे
भारत की पावन मापी नुमाईती है नो पुरानी होन पर भी गई है।
भाप क रसारमाय और इतिहास की उपम-पुरतमात्र भारत
ने अपनी मूम पारमा को भगीय बनाए रखा है। समुप्प मी मारमा को प्रम
गे उममा भौतिक पारीर मा युरि मही एपम पिया गाना चाहिए। गि
मन और पपरकी प्रपंधा अधिकारी भी पोईलामासनिक
पारमा, ना समस्त पिर सत्य पार गुमर मार पर है। रसो
अपना मध्य बनारपनमा मोर उमे एक समोर विद्यमानता रमामा पम
साप्रपोग्न है पपने-मापसेपरिणवा प्रेम और पक्तिशारा उम पारपाके
पम्प प्रशिक्षित करना नीविशाल पामय पर प्रापका रस
भारत माता के ममूमे में सना हमारे मुरवितर्प समापी निप्पनिहै।
मनुप्पोमकेशन तकनीरी लता प्राप्त पानी है भपितु मारमा पी
मानना भी प्राणपती।
जगएम पनि म मेरनिए नियमन मार पानी पापन पहरे
सरीरमा तारों गोरेसने तोहमारे मन म मरो मामामा
पर माराधार एमसीमारिपामगीतनारेमम्मा पून्पतामा मार
पौर नफी विमारासम्मुग शिताव मानारामार रातमा
दाहायपोभारमा मातीशप सोरमारे मजूम
ममि रोएर पसरा-सा मगता है। हमारे गुग्न ति पौर पिवार
दपमोयम्पपा पोरोन प्रोरेमवीराम सारपसार
गुन १ मा माननीय मारमा के ममा मातकभी ऐमीही
मिना एक ऐमा ही रामगेच अमुमा हाता। पथन और पर्ने

धर्म तुलनात्मक टि- है।मार मौगिक प्रपति पौर शानिक सलाति के गाराम बोइतन- पस्थिरता समर्प और प्रस्तम्भस्तवा पिसाई परतीमातीकारपनि हमने पीवन रस पान की उपेक्षा करती है। पीन पवामियों से भी मषिक समम म गानिक माविकारों और गोगों ने अधिकाधिक समृति उत्पन्न की है। मान सममग समासहोरी ममतस्मामी और प्मेप पौर महामारियों सी बीवन की चप पटनाओं पर नियंत्रण कर लिया मरा है। पर सामरिक सा विषम में विस्वास पौर मुगा की मापना पसार मनी पर हम मोर सम्मेपम की मामना जिसके कारपवानिक और तकनीकी क्षेत्रों में मुम्पन विनय प्राप्त हईपी भीमन की प्रपेशात पाय पस्तुपों की पोर पी।सीम धारा पस्प पोर काम्पोषित सौमर्य मावा राठोवा और पायनिकताका निशान और गो म्यबसायों का एक प्रमुख मया संसार उठ सामा गिसमे प्रेम चौबर्ष और प्रान की रसम्यगत्माको गित कर दिया वो कि पारमा के विकास के लिए बहुत ही पारम्पकपी । माधुनिक मन को सन्हार पार मायबारमाही पिप सपने मरे । सायेदवारियो पोर प्रजामवारियों को इस विषय में समय परते है कि विदव के पीछे काई भक्ति विधमान है या नही) और उन पाप्मामिक पास्तिबीच पो यह करो कि सबसे महत्वपूर्ण बास्तमिता गिर पीये समान है पम ऐ संघर्ष में रबीम्नाव सिधमे मोर्चा साम। मुकरात से मिलने के लिए गए एक भारतीय पानिको सम्मान में एक पानी प्रसिराहपोटोमागोफन को मिनीमही पपितु परि स्टमनीरकी बोस्विी पुष तौदरी सताम्दी में हुया पायरया चिमुरपत ने उस भारतीय मतिधि को बापाविना (मुराव का) काम सोगों के नीपन समय में पांच-पावास कामाचौरमार इस भारतीय ने मुसार हा किलो मस्तिषीय पातुनो को नहीं सापता परमानवीय मस्तुओं को भी माई समयसपता । सम्पूर्व पश्चिमी परम्मपदी प्टि में मनप मुमा एक बारिक पापीरो तसिंपत रवीनापार रंग से सोच सकता है और उपयोमितापारी सितालों मनुमार काय कर सकता है। पूर्व में बौसिक योग्यता की अपेक्षा माम्मारिमक मान पोर सहानुभूति का महत्व पथिर माना गया है। गोहगारों सोग बामते है उनमें से कोई एक सोच पाता है मोवारों भोप सोचते हैं रम मे पापद काईक परसता पौर सममता है। मनुप्य भी रिपतLउसपी पद समझने की क्षमता ही है। मौठिक उन्नति पौर मोडिक पता से हमें सम्तोप मही हो सकता। परि हमारे पास लूप बड़ी देती हो पौर मुमार परिबान हो पौर प्रत्येक पक्ति के पास पपना बिमान मार रेग्यिो हो यदि सब रागों का सम्मान होबाए यदि पामगरों को पकारी-वेतन और पेराम मिमने मये पौर प्ररपेर पस्ति न मम्मी मायु तर पीवित रहने मगे आप भी अपूप महत्ता कोसा और मनुप्ण मामसा रहमी ही। मनुप्प बम रोरी पा परम वित्ता से पीमित मही एता । सम्भर है कि हम ससार को पानिकतम पौर पपिरतम एसवायुपत मंझानिक पति से पुनपठित पर में पीर इम एक बिगाम मनसायमासाना र मिसम कि माननीय परमामुमोदी सब विविध गतिविधियां इस प्रकार मुम्पबस्थित हो रिसमें सहलाने में कमरों में मामलामी रमोईपर पी मौचरानियों पौर परे नाम पार मौकर मागों से रोकर सबगे उपरमी मशिस में सौम्य-यो म गंगारपरतीई मुम्भर स्त्रियों तक प्रत्यक बर्ष प्रपना पाम यपोषित पनि से परहा हो पर यह भी सम्मा फिहम मानव-समाजमा चींटी-रम में पारित करने में मपम होगाएं फिर भी मतप्त माम साए परम सायों के लिए प्यास ऐंनीही। सम ना शिव-पस्पा में भी बन्न मते पौर रोते रापे स्त्रियां प्रेम करती पौर पर सहनी रहण पुष्प पुर पोर सपप रहे ऐगे। मनुष्य की मम्मी मानता नमसी गिर मठासारम-नमो प्रमाण ममारों में परपष्ट पासपोरेसा पर-सपर मररो रहने में। मनुष्य एक ऐसा प्रामी, मिरी पुरी धर्म सनात्मक दृष्टि में बहा गपक पोर प्राकृतिक बाजाम बहाँ इस पर भारमा काबीर पीईबो उसे प्राकृतिक प्राणी होने मात्र से प्रसन्तुष्ट बनाए रखतामह पन्ने प्रमों में सीमान्त रेप का एकमाती है, जिसके मसार परमपिता पाए और पारिमा नामसाए, दोनों है और एक ऐसा पीमन को पूर्णतया पाशविक इन्धानों को पूर्ण करने में रखो उसे धारित नहीं दे सकता। पपने काम और परिममकिपीवन में, पब माह सेव बोता है बापिसी राम्म का शासन करता है, पर मह सम्पत्ति एवाई और सत्ता प्राप्त करने की पेप्टा करता है, मनुप्प भपने पास्तविक रूप में नहीं होता। इस प्रकार की भतिविधियों में बस्तुए प्रधान होती है। पनोपान पौर परिवार के पोषण में उसका मापसमय पौर पस्ति मय पाती है। पात भार माय बस्तुमों के लिए कोई प्रसर हो नहीं मिलता । और फिर भी पसी पटमाए बस्ति होती है जो गम्भीर चिों की सधान्ति को निशुम्भ कर रेती। ऐसी घटनाएं, जिनके कारण पस्म की भावना पौर अनिश्चितता की अनुभूति फिर पा धमकती है। पर मनुप्प मृत्यु के कारण पोर में होता है अपना निराण के कष्ट में होता है पर कोई विस्त व्यक्ति विश्वासपात करणारे पक्षमा प्रेम की निष्ठा मम हो जाती है पर बीबम येस्मा पार निरर्थक हो पाता है सब मनुष्य अपनी हि भाका की पोर मा मानने के लिए माल है कि क्या प्रभारपूर्ष मेषों के पौधे को उत्तर नेपाली शक्ति भी पिचमानी पानगी महान्त पुष्पम् प्रापि एयवसमस परस्ताद उस समयमह पपमी पेसमा एकाम्त मै पखा पौर तीनवा के राम्प में भगवान के समई में प्राचारसम्पर प्रामोह मौर प्रेम के पगम होता है जिसमें मौम सिबाप पर कोई भापा नहीं है।यापानबकापमा है जो अपने आपको पपषितों में प्राट परता पारस्पम् प्रमुख परमिभाति। माननीय अनुभूति र काम्प, जीयनपी मास्वरिषतार, जो इसके पारम्पर-भाष से पकई एपात मे ही कामबहाती पाहम पारमा बीमनाप ठाकुर १२१ । मे दूर हट पास वहम उस एकमात्र वास्तविकता से दूरट पाते है यो इमारी पहुंच के प्रमार है। मनुष्य अपने मर्म और अपने प्रेम में ही प्रपन मास्तपिकप में होता है। ये पतॊ विनात वैयक्तिक पौर निष्ठ मिशिष्ट पोर परित्र पनि हमारा समान इस पाम्तरिक परमस्पस पर भी पारमम करने का प्रपल करे तो बीवन का सारा मूस्य पार पास्त रिकता पाती रहेगी। मनुप्प अपनी सम्पत्ति में पम्प मोर्मों को साभार पना सरता है परन्तु अपनी पारमा में नहीं। मान हम इतने बयि हो गए कि इस प्रारमा की निधिको पहचान तक महीं सकते। अपने समेत जीवन की सह-पूप पोर कोमाहन में हम सपने मस्तित्व के कम मुनाई परनवाले तत्वों की पोर प्यान नहीं रहे। पास्मिर पुनः मिसपकारी मनोषण मन्डष्टि की मन परे यस्तुर है जो हमारे सम्मुग उस रहस्य को प्रकट करती है जोकि हम मय है पौर इनके बारादम मस्तुपों के मर्म को हत्यमम करते है। फेबम माम्त ममगामे व्यक्तिही जीवन के पारिमक पर्वको समझ गम्ते है। भाप्यारिसर सस्य नियमो पर है-पपने प्रतिमानारी। हमें प्रशाम को पार पाने रेना चाहिए, रिममे परमात्मा के स्पामा को मापोक्तिपर मके। हमारोपपटोध्यिा पार पवित्राएं रे रोरो हमें मस्य मे दूर रखती है। हम उन वस्तुपा साप वा पिक परिचित यो हमारे पास है और उनके माप कम गोहिम सप है।म अपने मग्न एषाम्न में प्राने हो मम्मुग पोम पो हाने स गर ।हम प्रपन मामे मापा मोरों पौर मारक मोरा उत्तवना या पारा गिनीमागिय करले। हमें अपने पापो काप परले पारित गौरमा विराम करन पोर पपमे पारा परी, मन पौर बुद्धि गात पोगों म पापम मिश्राम मैने के लिए मयस्न परला नपा पाने मारी पारमा पादेयते । पौरक्षा में प्रारिमा पामि भाजा पाती है। पम्मगीनता मा पारिपार पाप्यापि जीवन का गुग पापार ।

१२२ धर्म तुलनामा यष्टि में पाइम बहिर्मुख पौषम विवाद और अपनी प्रान्तरिक मारा पोकीवाहनही मते ममम पावन पर्प प्रषापारमा पस्यों को नहीं समझले। बो तोप परी सतह पर जीते है, सम्हे समाबत ही पारिमा जीवन में कोई पता नहीं होती। समझते है कि परिपम को धानिस में स्वीकार पर में तो धर्म के प्रति उनका सम्म पूराहो पाता। इस प्रकार की पारिमा पराषितता मने पार्मिकपीवन में साप जिसका मून पापार पूर्ण ईमानराये मेत नहीं पाती। स्वतन निधार से सम्म गोचम किसी मापारिमा प्रापीको धानिधनही सक्ता। प्रामारिमा निममा प्रभाव ही हमें इस बात के लिए प्रेरित करताt किहम मार्मिक सत्य सम्मान में उन बातों को स्वीकार कर में बोइसरे मोम हमें बताते हैं। परन्तु पर एक बार मस्ति पारिमा सतलता के सार परम का मनुसरण करवाई और सपने पपरहीएनबना मेवा है पर उसमे पनी काफी पक्ति पार स्थिरता मा पाती कि पोष पसपर बीते उसका यह मुकाममा कर सके। पर प्रतिकूल परिस्थितियों में पड़ पाने पर भी अपनी शान्ति और पिता को बनाए रखने में आम होता है। माननीय प्रमल का प्रन्तिम नाम प्रारमा की परम प्रणावता है पौर पहचम उसके लिए ही सम्म पिसे सुमनटीम मात्मा में गहरी पता हो पौर इस प्रकार भो सबा मामसायों से मुक्त हो । स्वभाष पुराम पाची धर्म का पाहे धर्म-विलासप में पाई कसको प मैं उसके लिए समप कोई धर्म नहीं होता। ३ जीवन के लिए माह परतु पारिमा बम में पने सहप नहीं किम इस संसारपी पास्तपिणापा के प्रवासीन हो पाएं। भारतीय षिकारक भनेरवार रवीनमाप कर १२३ इस सामाम्प प्रमोशन के मिसार होवे ऐ । कि पारमा ही पसनी बस्तु है और पीबन एक निरर्पक प्रम है और मनुप्य के बाएगीपण पोर समार में मुमार के लिए किए गए सरप्रपल मूता-माणगापा उस निम्साह मानी मनुप्य के पार्ण की प्रशसा की जाती रही है मोइस समारी सारी गतिषिमि का परित्याग कर देता है। इसका परिणाम यह हुपा है कि भारत ऐसे मृतर पक्तियों की ससतिका रसमंच बन गया है पोरस पुप्पी पर पमते है, जिसपर मूळ का निवास है। जो कोई अपने पापको संसार की पतिविधियों से पृथक मानवाई पार पोरस सार के लों के प्रति पसमेहन मामि है यह सन्ना भानो नहीं हो सकता। पुष्प में धर्म पा भाषण कर पाना अमबर है। मापारिमा पनुष्टि मामाप्यतया माम-प मम नगन में परमाईरेमिए एक मई पवित्र केस में प्रकट होती है।माप्पा रिमः मनुष्य इस समार की वास्तविकतामों से मह महीं मोर मेवा भपिनु हम संसार में अधिक प्रन्यो सामग्री और पाम्मारिमक परिस्थितियो उत्पम करने के एकमात्र उदेस्स से काय परता है। पारण यह है कि पाप्यात्मिक गोपन प्रारतिक जीवन में ही बग्म मेता है । करिहाने के कारण पीन्द्र मापने दृष्य बत् मा उपयोग प्रदृश्य पयत् की पाया दिपाल के लिए सापन के रूप में लिया है। ऐहिजम पोचायत के प्रकार से पामोषित करना । पर उनकी पारमा इस मौतिक मन में नपरप करती है तो यापारएनम गाता है। पह समारपोईवाम या नहीं है और न इमली पदाई प्रमही है। पारमणिकाम कामए मुपरमर पार मांगलिए माम है। यह महान परम्परा है जो उपनिपापियों पौरमीतारपपिता से बनी मा रही है। जीवन में पानन्द मनुमरले है। कारण यह है कि स्पर्य परमारमा मष्टि कारपम सौपर पिया है ताहम इस संमार के बम्पम पोपों सकारम? परिहमें यह देह सो गरम पसरला दिमा पानोरम मिए में पियापन करने की पारपरता नहीं है। मानवीय सम्मलयामारपर बोरम रे मुसगोता परमात्मा पारा १२४ मर्म तुमनारमा पूष्टि में में कोई सुस्तान मही, पपितुपा सबके मनदर रमा हमापौर सबसे भरमापूमा पो मी सन्मस्य है उन सबमें हम उसकी ही पूजा करो। भोर पर भी हमारा प्रेम सन्ना होता वहम नसीसे प्रम करपे होते है । उस स्त्री में बो भनी हम उस परमात्मा को पनुभय करते स पुरप में जो सना है हम सच परमात्मा को पान पाते हैं। रबीममाप ठाकुर ने 'मनुप्रापर्म विपर पर (१९५१ मे) दिए गए हिम्पर्ट म्यास्थानों में कहा पाकिहमें अपने हवा में मममान की सपस्मिति कोयनुमय करना चाहिए। मिष के महान पुम्स संसार बों के प्रति परमधीन रहो इप इस संसार में पार करते है।बर एर मैमो का प्रचार करता है और नाही सके प्रति लामा नपस बैठी हो उसका पर्व ही लिहम पूसरे मोगों को केवल प्रेमारासमम सकते है। बीवन काएक मुई समझना पौर ससार को एक प्रम मानकर पतना विनाम पता है। अपने नाटक ग्यासी' में रवीगनाप ने यह रिक्षाया है कि माति किस प्रकार सम्मासी से परता देती है, जिसने माननीय म्यामों और प्रेम जालना को काटकर प्रति परमिनम पाने पीपेप्टा की पी। उसने अपन-पापको संभार से पद पर मसार का सही मान पाने का सल किया था। एक मोटी-मीमादी उसे गम्यमनस्कता केमेष से वापस जीवन मंच पर बीच नाती।कोई भी पस्या कभी इतनी महाम नही हो सकती कि मासमा रमन कर सके । सन्मासी के पातरिश्वम एमा-मुह सरितापनि सम्मुर टूट गए और कोमाइनपूर्म भीषन में बसेर जोन मने को विवश कर रिपा । चन्पासी ने माना कि "महान पर प्रमार, प्रसीम पीसीमामों के प्रवर पौर प्रामाकी पास भूचि प्रेम अपनर प्राप्त होती है। हमें सर्प को पुप्पी पर वीम माना होगा, पारवता को एक शाप देना होगा और परमारमा रोष संसार में ही प्राप्त कर मामी सोपा होरेहए मोदी पर पो पुलदस्तों में सने होते और को देखने में सुनरमप है

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सीमाप ठाकुर
१२
परन्तु पीप ही मुरम्य गावे हैं क्योंकि उर्म मिट्टी में पोपम नहीं मिल रह
होकर मर भरि दमन होन कसिए मनुष्य को जोमा मे पोपा
प्राप्त गरम को उपत जना शहिए। वपस्पा पाह पक्कि विमाम
मिएतनी मावस्या पर्यो म हो किन्तु उसमाविम नस पीपन में
मस्वीकार करने में सापामा न पिया जाना चादिए, जिसकेर
विकास में सहायता मिमी।सन्त मोप पनी सोमोसापरेटर मोगः
करने मेयरमीले पोर म बाप्प ममेरों की मुर्गए पर होको
एतराररते है।
यह सोचमा मुपवा है कि परमारमा इमारे गुणों और कणसे
हमारी बदनामों और उपनामों से प्रसन्न होता है पोर उम मोमो म प्रम
करताबो मगने पापको पपिक से प्रति एले है। मापन एर
मानसरान है और जो भोप इममे प्रेम मी करते थे उसे पाल मास्य
माही । बो मोग अपनी पारमामों को रारा र गमने है पोर उम
पातिका नाय । वन्हें माने इम पाम मिएम मम मनाप
ठाकुर का समर्थन प्राप्त नहीं हो सरता।
जीवनमा स्वीकार करने के लिए मनुष्य को मिमी मठ में प्रा
परमे मा संग्पासी बनने की पापरता नही। मम में पनेर
मोम पाम प्रारको पनी पौर रिपेषों मे पा कर पी गोरन को
पम्नीरररपारा मम विवादसम्यापारी
पीवी सीमित है। हम जीवन को
पभियान पम समममा पाहिए परमो मम्भारदापोडोपरी
नापनपन का पसर देना चाहिए।
पम हमस पाने मोमिन में बात करणारे मा रिदिप 19
सरि भी मी सम्मी पापार पर पौरपर मानीया
पौरमा मी प्रमापारी पेष-युग प्रेम की पारार मौरममा
सम पागरको प्रपाय ही नुम गाने है। ममालपोई भी पनाम
पारपान समार-प्पामा मे पापही मुम्प होगी गगन

गर्म दुबमात्मा दृष्टि में
पर पौरपूसरे युग पापि पर विषपान होती है। हम
कास
पासेन में भक्ति पर हमारे देश में मौ एक कान्ति हो पी।
हमारे महा भी निमोटिम (मो भागमा काटने की मशीन) पौर
हमारे अपने सम्म (पिकार) ६. मपि इवना परम है कि हमारे महई
मोनोम हिकारते है मरने के बाद भी अपना सिर अपने कोपर
लिए मते फिरते है।हम मोप करत पती-पोसवे भूव बन पाहमाप
निप्पय पीतिमा परिमाराई प्रभावकारप, बि कि हम प्रसाधनों
पौर बेप्टापों पाने की कोपिक हमारेबीवन गौरवी की
बानों की विडियों में कर रची गई यसपारिणी भूचियों की बार
रिमा।
हमारे पानवम मावेश हमारा पोपीमई भाविक या
रिए बाते साप उस सपनीय बरियता पोर प्रमान पर और पाम
पीरिए, जिसमें अनेक मस्ति बीवन-रन पर समरि परवदन
पीन समारोह पोग्लै प्रकामिण पिया पिam पिणानी
पाती और एमके मम्मे मीरत रिल संपर्प मी ! पोर छ प्रकार
माना की टीम परिरणको मतियों का मामो उमप को मारे
बाठे हैं। पर मारमहा पुरज विचार उनके प्रविबहुप्स मम्तियों में से
पुरणे सो पा की पोरस है और सिमरेट पौने भपते है।
रवीन्द्रनारकी सहानुभूति रम प्रचसित दृष्टिकोष मार नहीं कि
समार-मेगा राम एक नम्मों कासाप बन पाने में है जो पूमपानको
बमकरना पाहतेया सन्तति-निरोमका प्रचार
कसमार से
अपमान र मोपों की सहायता पूर्ण समानता के पार पाने में की
परिम्स में रखीय वन से गुमाकर मोर मा मिरमात
कि हर मनुष्य को अपने गले मपना जीवन-यापन करना चाहिए।
रेसमा प्रत्यापार के विरस पास ये मतिपथारी नपं में
म्परित समक। समूहका पायापारमतिको पन वागो

पोगनारायपुर
प्पत्ति स्थापित म्पपापा के पियवाहोता है समाप्प में मासियो
पौर निरा पापाचार पोर पोर एकाकीपन रहता है। बीगुनारा
पौरमपोराचि । मनुष्य के प्रयत्न की परमता पामानों में पूर्व हुए
जीरम की दुता मारियों के जीवन के पामार पौर एमालीपन के
रवीन नाम से परामरवित प्रेक्षक कम ही मिलगे। इस पोत समुदाय के
सम्मुरा उन प्रमागिनत उदाहरमो का रास्नेपरमा मनापक निरं
किम सामाम्य गार्यों में पम्वनिहित मेरमा पनात दिया है।
जितने भी मानसोप ममप उनमें सबम पवित्र प्रेम है और
हमारे पाप हे पोध क्यों न हवे ऐ हो परतु हमारा म्पहार
पनदिक है पारि यह कदम एक ही मिल कम्पत्रियो मे भारमममम
पौरमारमनिराम की भारत की प्रोता है। साहमागे
मारियो कपन रासी पौर अनुशासनहीन पुरषों विलीमा मात्र वममा
भावी मुंगी तर मारी धागरिक परस्या पितली देगी।
मा की किसी का उसमे पागम सवीत पर पुष्प मी मानिना
एलाई पुर्पोदारा किए मानवाने पापापार के लिए किसान दोषा
पहाना है। गोमस्तु पुरप के लिए पम है दोस्ती के लिए भी धर्म है।
पाएमाप को भाव है कि हममें से ऐसे पनसमोन है जो ऐसे निदान
सेमापारी मोउचित-अनुपित मारिदिप बिना पपनी वाममामों
तापनगर में स्थिों मारपीग करते हैं। रेमरा रियों में
पास है।
पर पारमा का पमिर प्रामारिया हिसामपा उपर।
परीरपोपपरा परीर पिसी मंगो पदमा इपित समभना पपर्म
है।शरीरमोतुम्ध मौर भगोमन गमगाराहारकरला मी नाही
पप मामासाdie पानाम गिरी पानि। यहगत
विमाइपौर विवाहसमग्न रोनों ही मावों में मार है। गोमोहमी
रोरिने बरप्रम नही पलो,देशन मिनिए पिसमा
पतित पप्प समारपमा परीर मौरतो.पामा मादी

१२८ धर्म दुनमारमा दृष्टि में निस रपयोग कर पी होती है गितमा शिवह पति को अपना परिकार पाने का हठ करता है। प्रेम माम्पारिमा मौर विपूर्ण होता है। सामानामा पौर मुधि विपुर...मूनों मोर महिनामा विपम नही। प्रेम मिना पिमाहित बीवन पासा पगारी कराने पैसा पार्मिक परिवों मपया सामारिक निमों के प्रति माशापामन मास्म मितवा का एसठीक से ही जैसे किअपमे मानवम मस्तित पाशापामन के लिए स्मिा मा पा कर्म मौसम का अनिवार्य मादेष होता।निस प्रकार सम्पर्म समस्सरता से उच्चतर सत्य तुस्पति की मपेक्षा पषिक उपर उसी प्रकार प्रेम विमान की अपेमा रबर है। मानिको मादि प्रत्यक वस्तु को पुरकर देता है। एपीवनावनाल 'सती में उमा उस पुरप को मपीकार करने में इम्कार करदेवी, जिसे प्यार नहीं करती मे ही माससका पति पापौर मने ही उपकी पोर से मोमो में उस एप भी बचन क्यों दिए । परमानीबानी को जिसके साथ उसका विभिपूर्वक विचार मामा फोर पसदेती है और एक पब मावि से विवाह कर मेती है. ओपह माहार सपाईस्वी मन मपमा परीरमी समर्पित किया गया प्रेम ने उसे मुझे दिया था। पा सकी माता कहती है “अपने प्राविण हापों से मुझे मत ए वोगा रत्तर देती है मैं उतनी ही पवित्र जिवनी जितुम हो। एसकी बानी पोर पोरमपूर्ण मुरा ने रसका पिता माव प्रभावित होता है पोरगरा मेपारीमन्त्री र पाप प्राचा। मनुष्य-निमिव निपान वय मारमा.पो मापात पाप की पट्टान पर मारों की हाकीमाठि पिरामाये हैं। हमारे पारण कारों और पाकिभिमापों ने इस बात को अनुभव नहीं किया कि हमारी मारियों में भी पारमा है। उसमें धोएर पाने की मालपा मोर कोई ऐसा साती पाहती। बो र सनों पर कामनामों में हिरवा बगाए पौर पर कोई प्राय पोर सी एक-दूसरे कोमाम मपनी प्रति या पर वा सम्पत्ति समर्पित करते है. परितु अपनी दुर्गमगाएं, मपनी

रोममाष ठाकुर
१२१
प्रसहायता प्रपन हप की पारायपत्ताएं भी समर्पित है दोरे एक
एसे प्रदेश म प्रमरा कर पाते । रिसका निर्माण मानवीय हायों के प्रम
पारा मही हा पपितु सनम हरयों के प्रेम बारा हुमा है। उनमा मिमन
अनुमोदित ममे ही न हो किन्तु पति पाय होता है।
४
निकप
रसीमनायो सब समायों में तीन विधपनाएं रपट रिपाई परती है
(१) प्राध्यामिक मूल्यों की प्रतिम पा पान्तरित मानस पौर
प्रतिकिभीवन सारमारामाप्त की जानी है (२)त निपेप
अपना पायी पता मोर जीवन के परिज प्रपना सम्पूर्ण विकास की
शापमा पार (३) मरके प्रति यहाँ प्रतिमो और पतियों
प्रति भी मुनिश्चित सहानुभूति । रह पार गएत सम्तोप होगा कि एक
भारतीय नागोवा के इन पास्तविक मूल्यों पर ऐसे समय मरिया
१ तिमो सारी पुण्मी वस्तुएं दूर-पूरकर आमाण हो पी और
हवामपस्तुएं मामने मापी है।
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Dharm Tulnatmak Drasti Me

Author
Dr,radhakrishna
Title
Dharm Tulnatmak Drasti Me
File name
Dharm Tulnatmak Drasti Me
Text
OCR done
Citation
1963
Published
2010/12
Publisher
Delhi,rajpal And Sanj
Language
Sanskrit
Pages
132
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
Literature
DLI number
514743
Barcode
4990010022430.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
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