Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
The Anglo Vernacular Middle Geography Part-iv
Front matter
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The Indian Press Series of New Geographies
THE ANGLO-VERNACULAR
MIDDLE GEOGRAPHY
PART IV
or Class VII of Anglo Vernacular
United Provinces
REVISED EDITIOY
ALLADABAD
THE INDIAN PRESS LT!
1931
Published by
R Mittra
at The Indian Press, Itd
Allalabnu
Printed by
A Bose,
The Indian Press,
Benares Branch
विषय-सूची
-
पृष्ठ
.
१०
विषय
योरप मागरधार गणतनाट
-ও যা প্লায়ি মাণ
पोरप का जलवायु पार पनरपशि
-योरप गनिज पदार्थ, प्यययाय और पापिज्य
-पोरपये राजनैतिक विभाग
Foार और पूर्व के देश
---मध्य योरप के देश
--भूमध्यसागर में देश
१-बलकान मायद्वीप
२-इटली का प्रायद्रोप
३-माइयीरिया प्रायद्वीप
घ--पश्चिमी पौरप के देश
मांस
दरले ड
चमिटिश द्वीपसमूह
--पृथ्वी का धरातल
1-पृथ्वी के धरातल पर जल तथा स्थल का विस्तार
६४
१२
१०३
११४
h
प्रकरण
विपय
२-पृथ्वी के धरातल की बैंचाइयों तद गहराइयो
को नकशे में दिखाने के ढग
३-पृथ्वी के धरातल के भिन्न म सप तथा
८०
२७
योरप काप्रारम्भिक भूगोल
सागर और
पहला प्रकरण
समुद्र-तट
74 शुक हो कि भूगोल ये विशर म पारप (Turope)
र मला महाद्वीप नहीं है परन् र पत पड़ा मायद्वीप है जो
शमा के 4 ममापीर मे परिराम की माला धा है। एशिया
र पोरा गिनने मस्यर का एन या भाग बाणा है
mat रेnि (Turasra) बहन ।। रामय भी जाते हो
• इन यो एप गदादीप मान या कारण है।
दानों में मीच में रोड स्मारक नीमा नहीं है। द्वितीय इनकी
पीमार साये एक ही प्रकार का है। अर्थात् उत्तरी एशिया
'पदा गदान परियम की और योरप हाना मा और इस
एन के पिता की धारना मत पियों है ये एशिया और योरप
म भोर में पता चली गई है। इस श्रेणी के एक
है एशिया म पमिण महासागर ( Paune Occan )
। दूसरी ओर आप म लागि महासागर ( Atlantic
मपम सो
।
है
२
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
जय भौगोलिक विचार से प्रशिया और योरप एक ही महाद्वीप
हैं तो इनका अलग अलग वर्णन करना क्यों श्रावश्यक है। इसके
।
मुख्य कारण ये हैं
-
"
.
(क) योरप की उमति तथा इतिहास शताब्दियो से एशिया से
सनथा भिन्न है
(ख) योरप के बहुत से देश एशिया के ऐसे ही प्रान्तों से
स्टेप के मैदान तथा मरस्थलों के मध्य में स्थित होने से थलग हो
गये हैं।
(ग) व्यापार तथा कला कौशल में योरप दुनिया भर में सबसे
अधिक सजति के शिखर पर है।
यदि तुम इन तीनों बातों पर ध्यान से विचार करो तो तुमको
विदित होगा कि भूगोल के विचार से किसी पृथ्वी के खण्ड को अलग
महाद्वीप मानने के लिए तीसरी यात सबसे अधिक श्रावश्यक है,
क्योंकि देश का व्यापार और वहाँ के निवासियो के उद्यम इस बात
पर निर्भर हैं कि वहीं के समुद्रतट, पहाड, नदियां, गर्मा, सर्दी, तथा
जलवृष्टि का परिमाण केसा है। इससे हमको देखना चाहिए कि
योरप के निवासियों के लिए कला-काशल और व्यापार में उन्नति करने,
के कौन कौन से विशेष कारण है।
(अ) स्थान-दुनिया के स्थल गोलार्द्ध के (Land Hemls :
phere) नको को देखो। योरप इसके केन्द्र पर स्थित है जहाँ
से यह और महाद्वीपों के साथ सुगमता के साथ व्यापार कर
सकता है।
.
-
सागर और समुद्र-तर
(4) जल-पायु-पारप किन प्रयास रेगानों के बीच में है।
गोरप का बादा सा भाग पोदकर शेप मम्पूण महादीप सीसोप्य.
कटिबन्ध (N Temperato Zono) में है इसलिए जल वायु
साधारणत भारोग्यपक है, ग्रार निवासी सम्पूर्ण वर्ष कटिम परि
मम कर सकते है और अपन महाद्वीप के पढ़े पहें मासिक साधा
से पूरा लाम स्टा सकते हैं।
इम महाद्वीप की स्थिति शीमाप्ण-कटिय ध म होने के कारण
पहा न अधिक गर्मी पड़ती है 7 अधिक सदा। पां इतनी अधिक
मही होती कि प्रतिवर्ष या मा जाप या अधिक नमी रहे चार न
इतनी कम होती है कि सूसा पर जाप और अकाल का भय रहे।
(म) समुद्रतट-पेमाल के पिधार से योरप पी पीय रेसा
सब महाद्वीपी फी अपेक्षा पढ़ी है। गुम पद पुके हो कि परछे
समुमतट पढ़े यो लामों में से एक लाभ यह भी है कि यह
समुदी प्यापार को पदो सहापता पहुंचाते है। केवल पूर्व में योरप
फा फुछ भाग समुद्र से दूर है। घन्य सब भाग किसी न किसी
समुद्र के समीप है। इसलिए लोग सामुद्रिक जीवन से भली भांति
परिचित है और समुद्र का पूरा लाभ उठाते है।
इस महाद्वीप में
नदियों और नहरों की अधिरता है इसलिए समुद्र तट
मन्दरगाहों से माल सुगमता से देशों के मध्य भाग सक था जा
सकता है।
(द) खनिज पदार्थ-योरप की उन्नति का एक मुख्य कारण
यहां के सनिज पदार्थ हैं। विशेषकर कोयला और लोहा। ये खनिज
४ योरप का प्रारम्भिक भूगोल 1 पदार्थ संसार के व्यवसाय की जड़ है। योरप में इनका पास ही पास पाया जा एक गुण है। योरप के समुद्रतट-योरप तीन और में मे दो और समुद्र से घिरा है। दक्षिण की और के सागर इसे दक्षिण की ओर धेरे हुए है, और पश्चिमी समुद्रतट का यहुत बडा भाग अटलाटिक महासागर की ओर भुला हुमा है। दक्षिण योर के भीतरी सागरों के नाम तो तुम पढ़ ही चुके हो, क्योंकि वे एशिया के समुद्रतट पर स्थित है। पूर्व में कास्पियन सागर ( Caspian Sea) है। इसका किसी सागर से कोई सम्बन्ध नहीं है। इसी लिए यद्यपि इसमें यूराल (Ural) और घालगा (Volga) नदिर्या गिरती है फिर भी इसमें बहुत कम घ्यापार होता है। बालगा नदी के मुहान पर जो एक बन्दरगाह एस्त्रासान (Astrakhan) स्थित है यह भी जाड़े के दिनों में तीन महने तक हिम मे ढका रहता है। काला सागर (Black Sea) यह बहुत गहरा है, इस कारण इसका पानी सदैव ठडा रहता है। इस पर आंधियों और कुहरों की अधिकता रहती है। इसमें कास्पियन सागर से अधिक व्यापार होता है क्योंकि यह भूमध्यसागर से यासफोरस ( Bosphorus),मारमोरा सागर(Sea of farmora) और डार्डनेल्ज (Dardanelles) के जलसंयोजक द्वारा मिला हुआ है। कीमिया प्रायद्वीप (The Crimean Peninsula) काले सागर को दो भागों में विभाजित करता है। बड़ा भाग काले सागर के नाम से और छोटा भाग एजफ सागर (Sea of Azov) के नाम से प्रसिद्ध १ मागर भार मगर-सर है। इनमें में पूर्वी भाग के पीपे पदाद से है परन्तु राई गदी नही गिरसी। पश्चिमी भाग भपरप भीपा मार धारमा इममें कर पदी पट्टी मदिया गिरणी में से नीपर (Dntencr) और ईन्यूय (Dimube) बहुत प्रसिद है। इसी पार को पदरगाह योडेसा (Olesyr) भार पुस्तुनतुतियां (Constantinople) हैं। इनमें से पहला ता कामा सागर म मा पन्दरगाह है और दूसरा पास्पोरम ये गुहा पर पोपी तुकों की राजधानी है। भूमध्यसागर (Olediterranean Sen) दुनिया म सयमै पार प्रमिद भीतरी सागर है। यह पूर्वी देरो तथा योरप के यीय में व्यापार का प्रत्युत्तम यदा मार्ग है। नशे म देखो कि पोरप के भी दक्षिणी सिगारे पर एशिया की भांति तीन पर यह प्रायद्वीप है। टैली (Italy) के मध्य के प्रायद्वीप पर इसके नीच क द्वीप मिसिली (Sicilr) 7 भूमध्य सागर को दो भागों में बांट दिया है। इन दोनों मागे को मिलाने थाले अलमयोजक के कुल पूर्व की और माल्टा (Afalta) द्वीप है जो अंगरेजों के अधिकार में है। यह म्यान यहुत उपयोगी है क्योंकि जिमाक्टर ये जासयोजक और नहर मेज के ठीक मध्य में है। पालकन प्रायद्वीप के पीच में पा जान से भूमध्यसागर का पूर्वी भाग दो भागों में पैंट गया है। ईजियनसागर (Lgean Sea) इस प्रायद्वीप के पूर्व में है। इसका किनारा पहुत कटा हुमा है और इसमें यूनान द्वीपसमूह (Greeran Archipeligo) के अत्यन्त सुन्दर तथा उपमा द्वीप है। इसके दक्षिण म लम्या र सँकरा ।
६ । . योरप का प्रारम्भिक भूगोल द्वीप फ्रेट (Orete) है। इसकी दूसरी शासा का नाम पडियाटिक सागर (Adriatio Sea) है। इसके समुद्रतट पेसे कटे हुए नहीं है जैसे कि ईजियन सागर के हैं। ये अधिकतर सीधे है। इस सागर के उत्तर में ट्रियस्ट (Trreste) और घेनिस (Venice) के यन्दरगाहों को नकशे मे देखो। ये इस सागर के सिरे पर एक दूसरे के ठीक सामने है। महाद्वीप के भीतर माल ले जाने के लिए दोनों बहुत ही उपयोगी स्थान है । भूमध्यसागर का पश्चिमी भाग पूर्वी भाग के सदृश स्थल को दूर तक फाटता हुया नहीं चला गया है इसलिए इस ओर व्यापार के बहुत सुभीते नहीं है, फिर भी इसमें कई बडे बडे व्यापारिक यन्दरगाह है। जैसे नेपल्स (Naples) इंटैली का प्रसिद्ध बन्दरगाह है। जेनोआ (Genos) इटैली के पश्चिम में ऐसे ही अच्छे स्थान पर है जैसा कि पूर्व में घेनिस है। मार्सेज (Marsealles) दक्षिणी फ्रान्स (France) का बन्दरगाह है। वार्सेलोना (Barcelona) स्पेन (Spain) के पूर्वी समुद्रतट पर सपसे यड़ा बन्दरगाह है। भूमध्यसागर के इस भाग के यडे यडे द्वीपो को भी नकशे में देखो। सारडिनिया द्वीप (Sardina) इटली के और कार्सिका (Corsica) मास के और बलियारिक द्वीपसमूह (Balearno Islands) स्पेन के अधिकार में हैं। जिवाल्टर का जलसंयोजक (Strait of Gibraltar) भूमध्यसागर के पश्चिमी सिरे पर है। यह फेवल ६ मील चौडा है। जिवाटर (Gibraltar) का पहाडी दुर्ग, जो इस मुहाने के उत्तर में प । सागर और समुद्र तट है, अंगरेजों के अधिकार में है। इस स्थान की तुलना अदन से करो जो एशिया के दक्षिण पश्चिम में है। य दोनां दुर्ग उत्तरी अटलांटिक महासागर और हिन्द महासागर के बीच के समुद्री मार्ग की रक्षा करते है। योरप के अटलाटिक महासागर के समुद्रतट उत्तर में इतनी दूर तक जाते हैं जितनी दूर कि एशिया का पूर्वा किनारा कोरिया के उत्तर तक जाता है। एशिया के पूर्वी किनारे के विषय में तुम क्या पढ़ चुके हो ? जापान सागर में व्लाडीवोस्टक (Vladivostock) का बन्दर गाह जाडे में कई सप्ताह तक हिम से ढका रहता है और इससे उत्तर में जो समुद्रतट है वह हिम से सदैव ढके रहने के कारण व्यापार के लिए सर्यया यर्थ है। इसके विपरीत योरप का पश्चिमी किनारा दुनिया में सबसे अधिक उत्तम व्यापार का स्थान है। ना के बदरगाह लगभग सारे वर्प खुले रहते है और उत्तरी महासागर का धन्दरगाह श्राजिल (Archangel) भी गर्मी की ऋतु में ६ महीने तक खुला रहता है। यह बहुत बडा अन्तर गरफस्ट्रीम (Gulf Stream) के कारण है। गल्फस्ट्रीम (अर्थात् खादी की धारा) गम जल की एक वेगवती धारा है। यह मेक्सिको की खाडी से (जो उत्तरी अमेरिका के दक्षिण में है) प्रारम्भ होती है, इसलिए इस धारा का नाम साडी की धारा अर्थात् खाड़ी से सम्बध रखनेवाली धारा रक्खा गया है। मेक्सिको की खाडी से निकलकर कुछ दूर संयुक्त राज्यों के समुद्रतट पर बहती है, फिर यह मार्ग बदलकर अटलाटिक महासागर को पार करके यह धारा . योरप का प्रारम्भिक भुगोल - अत्यन्त आरोग्य- दूसरा भाग ना योरप के उत्तरी पश्चिमी किनारे की ओर बहने लगती है। इसे यहाँ उत्तरी अटलाटिक धारा (North Atlantic Current) कहते है इसके प्रभाव से समुद्र के धरातल पर कुछ दूर तक गम पानी फेल जाता है और वे हवाएँ जो उत्तरी अटलाटिक महासागर से चलती हे गम हो जाती है और पश्चिमी योरप के जलवायु को वर्द्धक कर देती हैं। हम अटलाटिक महासागर के योरपीय तट को तीन भागों में बाँट सकते हैं। एक भाग वह हे जो जिवाल्टर के जल-संयोजक से इंग्लिश चैनल (English Ohannel) तक फेला हुआ है, (Norway) के फियर्ड (Frond) तट के नाम से प्रसिद्ध है। यह उत्तरी सागर से पार्कटिक महासागर तक है। तीसरा भाग इन दोनों भागों से अधिक महत्त्व का है। यह इंग्लिश चैनल से वोथीनिया की साडी तक, जो याल्टिक समुद्र में है, फैला हुधा नकशे में दक्षिणी भाग को देखो। इस भाग म समुद्र-तट सुडाल और सीधे है, इसमें केवल एक साडी है जिसको विस्के की खादी (Bay of Biscay) कहते है। यह खादी यात्रा के लिए बहुत भापतिजनक है। इस समुद्र-तट के बडे पडे बन्दरगाह नकशे में देखो। लिसपन (Lisbon), और श्रोपोर्टो(Oporto) पुर्तगाल में और योग (Bordeaux) प्रास म है। ये सय यन्दरगाह नदियों के मुहानों पर स्थित है। अब नकशे में उत्तरी भाग को देखो। नार्वे (Norway) का समुद्र तट असंख्य संकरी साड़ियों और छोटे छोटे द्वीपा स कटा हुना फैला हुश्रा सागर और समुद्र तट है है। इस समुद्र-तट को एक और समुद्र के धाराप्रवाह ने और दूसरी और नदियों की प्रचण्ड धाराधों ने बहुत काट दिया है। नम चट्टाना को काटकर यहा दिया है और कडी चट्टानों को सदा रहने दिया है। इन पादियो ने इस समुद्र तट के दृश्य को प्रत्यन्त सुन्दर और रमणीय बना दिया है। उत्तरी महासागर की एक घड़ी शाखा, जो के समुद्र-तट के भीतर तक चली गई है, श्वेत सागर (White Sea) के नाम से प्रसिद्ध है। यवाग्रो इसका यह नाम क्यों पड़ा है ? यद्यपि नार्वे का तट बहुत कुछ हट्टा हुधा हे परन्तु फिर भी यह जहाजा के चलने लायक नहीं है क्योंकि इस पर पहुत चट्टाने पड़ती हैं जिनसे सदा यह भय धारा रहता है कि जहाज इनसे टकरा न जाय । इस तट में एक गुण अवश्य है कि यह मछलियों का सुरक्षित घर है। इस लिए सेकडों जहाज इस तट पर मछली पकडने आते हैं। घटलाटिक महासागर के इन उत्तरी और दक्षिणी भागी की अपेक्षा वह भाग जो इनके बीच में है बहुत ही प्रसिद्ध है। यहाँ समुद्र ने स्थल को काटकर षड़ पडे समुद्री मार्ग बना दिये है और इस प्रकार योरप के सबसे अधिक व्यापारिक देशो के किनारों पर समुद्र पहुँच गया है और व्यापार को बहुत दूर तक फैला दिया है। उत्तरी सागर (North Sea) बहुत कम गहरा है। इसका तट प्राय बालूदार है। इसके बहुत से बन्दरगाह थालू से भरे रहते है। परन्तु यह बहुत उत्तर तक जाडे में भी जमने से पचा रहता है। इसके तट पर श्राकर जो बहुत सी नदियाँ समुद्र में गिरती हें चे सर बहुत दूर तक इतनी चौड़ी है कि उनमें समुद्र से जहाज पा सकते हैं। इस कारण इन - योरप का प्रारम्भिक भूगोल - नदियों के द्वारा योरप के अन्दर तक की भी तिजारत जहाजों के ही द्वारा होती है। नकशे मे ब्रिटिश द्वीपसमूह ( British Isles) को हूँ। इस द्वीपसमूह का पूर्वी घडा टापू ग्रेट ब्रिटेन (Great Britaxn) कहलाता है, और पश्चिमी वायलैंड ( Ireland )। इन दोनों के सिवा और बहुत से छोटे छोटे द्वीप हैं। हाद्वीपों के चारों और समुद्र किसी स्थान पर भी ६०० फीट से अधिक गहरा नहीं है। इसलिए मछली मारने के लिए सम्पूर्ण संसार में यह प्रसिद्ध स्थान है। इस प्रकार की स्थिति के कारण इन द्वीपों के किनारों के निवासी समुद्र सम्बन्धी उद्यम से अपना निर्वाह करते हैं। लन्दन (London) मिटिश-द्वीपसमूह का यदा बन्दरगाह है जो योरप के निकट स्थित है। यह दुनिया में सबसे बड़ा नगर और सबसे अधिक व्यापारिक धन्दरगाह है। लिवरपूल (Liverpool) और ग्लासगो (Glasgow) ग्रेट- ब्रिटेन के दूसरी थोर प्रसिद्ध व्यापारिक बन्दर है। इन दोनों का व्यापार अधिकतर अमेरिका से होता है। इंग्लिश चेनल (English Channel) और उत्तरी सागर (North Ser) ब्रिटिश द्वीपसमूह को योरप के स्थल-भाग से अलग करते है और डोवर का जलसयोजक (Strant of Dover) इन दोनों जल के भागों को मिलाता है। यह केवल २१ मील चौडा है। इसलिए तेज चलनेवाली नावे , जो इंग्लिस्तान और फ्रांस के बीच चला करती है, एक घटे में यात्री को इस पार से उस पार तक पहुंचा देती है। बाल्टिक सागर (Baltie Sea) उत्तरी योरप में बहुत बडा भीतरी सागर है। यह उत्तरी सागर में बहुत से जलसंयोनको . 1 सागर और समुद्र तट द्वारा मिला हुआ है। इन जलसंयोजको की चक्करदार यात्रा को कम करने के लिए जटलेड (Jutland) के प्रायद्वीप को, जो उत्तर की ओर स्केंडिनेविया की दो शाखायो म चला गया है, काटकर कील की नहर (Kel Canal) निकाल दी गई है, इसलिए याना करना सुगम हो गया है। देखो इन सागरों के सम्पूर्ण बडे बड बन्दरगाह नदियों के मुहानों पर है। नकशे द्वारा उन नदियों के नाम ज्ञात करो जिन पर लेनि- नमाड (Leningrad) या पेट्रोग्राड (Petrograd), डानजिग (Danaag), हैम्बर्ग (Hamburg), रादर्हाम (Rotterdam), हावर (Havre) प्रसिद्ध बदरगाह है। बाल्टिक सागर और भूमध्यसागर की तुलना (१) ये दोनों भीतरी सागर है पर तु भूमध्यसागर बहुत गहरा है। यह बाल्टिक समुद्र से छ गुना बडा और सौ गुना गहरा है। यह दिपुवत रेखा के निकट है इसलिए जितना जल नदियों द्वारा इसमें गिरता हे उससे अधिक जल भाप बन जाता । (क) इसका जल समुद्र के जल की अपेक्षा अधिक सारा है । (स) एक धारा अटलाटिक महासागर से इसमें प्रत्येक समय थाती रहती है। (२) बाल्टिक सागर कम गहरा है, (क) इसकी साधारण गहराई १० पीट है। (स) यह विषुवत रेखा से दूर है इसलिए इसका जल समुद्र के जल की अपेक्षा क्म सारा है। (ग) इसके जल की एक धारा सदा उत्तरी सागर की ओर बहती रहती है। (३) भूमध्यसागर अपनी स्थिति के कारण दुनिया १२ - योरप का प्रारम्भिक भूगोल का सबसे बड़ा जल मार्ग है, परन्तु वारिटक समुद्र द्वारा केवल स्थानिक व्यापार होता है। हम प्रकार तुम अपने नकशे में योरप के समुद्र-तट के चारों ओर गली फेरकर यह बात देख सकते हो कि महाद्वीप योरप सिवाय पूर्व के अन्य सब ओर समुद्रो से घिरा हुआ है। इस बात का तुम अनुमान कर सकते हो कि चारों शोर समुद्र की अधिकता योरप के जलवायु, व्यवसाय, व्यापार तथा रक्षा पर कितना बड़ा प्रभाव डालती होगी। दूसरी यात जो नक्शे के देखने से विदित होगी वह यह है कि योरप में स्थल के विस्तार के विचार से अन्य सय महावीपों से अधिक लम्बा समुद्र तट है और इसका मुख्य कारण महाद्वीप के अन्दर तक घुसी हुई खाडियों और समुद्र है। तीसरी यात जो तुम्हें नकशे को दसने ही से विदित हो सकती है वह समुद्र-तट के समीप बहुत से द्वीपों की पत्तियां हैं जो समुद्र-तट को खुले समुद्रों की उंची और प्रचह लहरों से सुरक्षित रखती है। प्रश्न -क्या कारण है कि दुरीया का इतना बढा व्यापार योरप के हाथ में है। " २-कल्पना करो कि तुम लन्दन से बम्मई तक समुद्री यात्रा कर रहे हो। अपने मार्ग का वृत्तान्त स्पष्ट रीति से वर्णन करो, और उन अंगरेजी राज्यविभागों का, जिनके पास से होकर तुम निकलते हो, विशेष रीति से वर्णन करो ।
मागर और समुद्र-तट ३. यद्यपि ण्टलांटिक महासागर का योरपी भाग और पैपिपिक महासागर का एशियाई समुद्र-तट एक ही अपाश रेखा पर है तो भी पहला किनारा दूसरे किनारे से अधिक लाभदायक क्या है? ४-वेनिस (Venice), मारमेल्ज (Alarsealles), लन्दन (London) और नहर कील (Kiul Canal) से लोगों को क्या लाभ है? अभ्यास १-योरप के पाके पर एक रेसा ममुद्र-तट के समाना तर ऐसी सींचा जिससे यह विदित हो कि समुद्र मे ४०० मील की दूरी तक कौन कौन से स्थान प्रा जाते है। इसी पाके में पड यडे सागर, जल- संयोजक धार द्वीपों के नाम लिखा पार बड़े पड़े यादरगाह भी दिखामो। उन सागरों में शेड लगा दो जो जाडे में जम जाते है। कोहरा शब्द उन समुद्रों म लिए दो जिनमें अधिक कोहरा पडता है। २-यदि एक जहाज १५ मील प्रति घण्टा की चाल से चले तो यह कितने समय में पोर्ट सईद (Port Sand) से मारटा (Afalta) और माल्टा (ifalta) से जिनाल्टर (Gibraltar) पहुँच जायगा ?
१६ योरप का प्रारम्भिक भूगोल इस मेंदान का पूर्वी भाग ऐसा समतल है कि राइन (Rhine) नदी से लेकर यूगल पहाद तक रेल-द्वारा यात्रा करने में कोई पहाड़ी या सुरा (Tunnel) न मिलेगी। इसका पश्चिमी भाग जो राहन और गारोन (Gauonne) के मध्य में है, कहीं कहीं ऊँचा नीचा है। इसमें छोटी छोटी पहाड़ियाँ भा गई है। परन्तु इस माग में भी रेलों और जहाजी नहरों के बनाने में कोई असुविधा नहीं पड़ी। जुइडर जी का एक धि इस मैदान का उत्तरी भाग, जो पारिटक सागर तथा उत्तरी सागर पर जाकर समाप्त होता है, और दक्षिणी भाग जो कि कास्पियन सागर के पास स्थित है, बहुत नीचा है। हालैंड (Holland) का बहुत सा देश समुद्र के धरातल से नीचा है, इसलिए हालैंडवालों ने समुद्र के जल को रोकने के लिए अत्यन्त दृढ़ बाँध ।
प्राकृतिक भाग (Dyhes) यना रखे है। (पृष्ठ १६ देसो) डप लोगों ने अपनी युद्धि तथा पाहुयल से जुइडर जी (Munder Zee) नामी समुद्री मील के पानी को मशीनों से उलीचकर नई भूमि निकालना शुरू किया है। यह पाशा की जाती है कि अगले चार वर्ष में ये को पूरा कर रेंगे। सुमको नकशा देखने से विदित होगा कि योरप की बहुत सी झीलें याल्टिक समुद्र के किनारो निकट हैं। इनमें दो झोलें लडोगा (Ladoga) और ओनेगा (Onega) बहुत पडी है । ये एक छोटी सी नदी नेया (Neva) के द्वारा फिनलैंड की खाड़ी (Gulf of linland) से मिली हुई है नेवा नदी पर कौन सा नगर बसा है। दो सौ वर्ष हुए रूस के बाहशाह पीटर महान् यह नगर बसाया था। इसी से इस नगर को सेन्टपीटर्सवर्ग कहते थे । श्रय इसे लेनिनग्राड कहते है। उस समय यहीं यदा दलदल था इसलिए नई राजधानी की इमारतो के बनाने में लाखों लट्ठ गाडे गये थे। कास्पियन सागर के उत्तर में सौ मील तक और पश्चिम में कुछ हिस्सा समुद्र की सतह से नीचा है। यह स्टेपी देश कहलाता है। । - । तुम नशे में इस बड़े मेदान की नदियों को देखो तो तुमको दो ढाल दिखाई देंगे। उत्तरी दाल छोटा और दक्षिणी ढाल बड़ा है। इन दोनो ढालों के बीच की सीमा को देखो। यह दक्षिणी पहाड़ा के बराबर बरावर कारपेथियन पहाड (Carpathian Mountains) तक चली गई है । उत्तरी ढाल की बड़ी बड़ी नदियां विस्चुला (Vistuls), पल्प (Elue), राइन (Rhine), सीन (Seine) २
पारप का प्रारम्भिक भूगोल
-
और त्वायर (Lours) हैं। पालगा (Volga) और नीपर
(Dnieper) दक्षिणी गर फी सपसे यदा नदिया है। नकरो में इन
नदियों को देग्यो चौर यता कि इनम मे कौन किम सागर में
गिरती है।
विस्चुला (Vistula) नदी उपजाऊ मंदानी धार घने वनों में
हाकर बहती है। इसमें यड़ा व्यापार होता है। परन्तु जाड की
पातु म यह हिम से ढकी रहती है और इसका मुहाना बंद हो जाता
है। इसी लिए डानजिग (Danaag) ये बन्दरगाह पर यो:
ही महीनों तक व्यापार होता है।
पल्न (Eibe) और राइन (Rhine) नदियां जर्मनी के उन
प्रान्तों में होपर पहती हैं जिनमें बडे बडे कारखाने है। इसलिए
इन दोनों के किनारों पर बहुत से प्रसिद्ध नगर हैं।
इन मदियों में
सैकडो मील तक जहाज या जा सकते है। ये उत्तरी सागर में
गिरती है जो हिम से कभी नहीं ढकता, इसलिए व्यापार में बढ़ी
सुगमता होती है।
ये दोनों जमनी की बहुत ही प्रसिद्ध और लाभ
दायक दिया है। यही कारण है कि जर्मनी की साधारण जनता
राहा नदी को उसी आदर और मान की दृष्टि से देती है जिस
नादर और मान से हिन्दुम्नान के निवासी गला नदी को पूजते है।
हमार्ग (Hamburg) भोर राटरडाम ( Rotterdam) जो
इन नदियों के मुहाने पर स्थित है, प्रसिद्ध वन्दरगाह है।
सीन (Seine) नदी मास की यद्यपि सबसे बड़ी नदी नहीं है,
किन्तु सबसे अधिक काम की है।
यह देश के ऐसे भागों में होकर
प्राकृतिक भाग 18 - यहती है जो व्यापार के पड़े केन्द्र है। इसके किनारे पर पेरिस (Paris) यो हदो, गो फ्रास की राजधानी है और इस देश की रेला तथा नहरों का केन्द्र है। मांस की सम्पूर्ण नदिई एक दूसरे से नहरों द्वारा मिला दी गई है। प्रशंस फी महरे म्यउ भाग में दुनिया के सबसे उत्तम जल-मार्ग है। ल्यायर (Loro) प्रांस की मयसे पड़ी नही है और अत्यन्त उपजाऊ प्रान्तों में होकर बहती है। इसके पीच के येसिन को फ्रास का याग कहते हैं। इसके मुहान पर नान्ट्स (Nantes) का पन्दरगाह है। पालगा (Volgn) योरप में सबसे लम्यी नदी है और इसमें सयसे यह पेसफल का जल पाता है। यह चौरस भूमि पर यहती है इसलिए इसकी धार तेज नहीं है। जाड़े म यह हिम से की रहती है, किन्तु गर्मा में इस पर जहाज चलते है और यह एक पडे ग्यापार का मार्ग पन जाती है। इसका कारण यह है कि रूस के निवासी नावो पर चलना उतना ही उत्तम समझते है जितना कि रेल गाड़ी में। इस नदी के देस्टा पर एस्तासान (Astrakhan) यसा है नीपर (Direper) उन नदियों में सबसे बड़ी है जो रूस के गेहूँ उपनानेवाले प्रान्तों में बहती हैं। धालगा की भाति यह नदी भी जादों में कई सप्ताह तक जमी रहती है। तुमको स्मरण होगा कि इन नदियों के दो बडे काम, खेती और म्यापार में सहायता पहुंचाना है। योरप की नदियों के वर्णन में हमने - २० . योरप का प्रारम्भिक भूगोल केवल व्यापार का लाभ बताया है। इसका कारण, जैसा कि तुम अगले प्रकरण में पढोगे, यह है कि महाद्वीप में जलवृष्टि मली भांति होती है और नदियों से मिचाई करन की आवश्यकता नहीं पड़ती। ३-दक्षिणी पहाड-नकशे में इंटैली (Italy) को हो । जैसे एशिया में हिन्दुस्तान है उसी प्रकार योरप में इटैली है, और जैसे एशिया के सबसे ऊँचे पहाड़ हिन्दुस्तान में है वैसे ही योरप के सबसे ऊँचे पहाड इटेली के उत्तर में धनुप के श्राकार में फैले हुए हे और उत्तर-पूर्व की ठण्डी हवामा तथा दुश्मनों के श्राक्रमों से सुरक्षित किये हैं । इस पहाडी श्रेणी का नाम पारप्स (Alps) है। इसकी श्रेणियां भी हिमालय की श्रेणियों की भांति समानान्तर चली गई है। इस पहादी श्रेणी को हम योरप की रीढ कह सकते है। स्विट्जरलैंड (Switzerland) का देश इन्हीं पहाठियों में है। ये पहाडी श्रेणियाँ दक्षिण, पश्चिम, उत्तर और पूर्व चारों ओर देशो में फैली हुई हैं। अपने नकशे मे पाल्प्स की प्रसिद्ध चोटियाँ मौन्ट ब्लैङ्क (Mount Blanc), घासजेज (Vorges) ब्लैक फारेस्ट (Bluck Forest), जूरा (Aft Jua), मैटर होर्न (Matter horn), तथा पूर्वी शाखायें जो पिन्डस रेंज और दिनारिफ पाल्प्स के नाम से प्रसिद्ध है, देखो। पाल्प्स की श्रेणिया हिमालय की श्रेणियों से महुत छोटी है, किन्तु प्राकृतिक दृश्य में दोनो घराबर है। हिमालय की मांति पाल्प्स प्रदेश भी झीलों का प्रदश (Lahe distinct) कहा जा सकता है।
प्राकृतिक भाग २१ स्विटमरजेंड पार इटली की झीलों में जल विहार का पानन्द कारमीर की झीलों से कम नहीं है। अपन मकरो में इटली की सबसे पदी झील गार्डा (Gurda) दो। स्पिट्गररेंड की सपये पदो माल जिनेया (Genera) है। स्युजन (lauzern), फोमो (Como), मंगी योर (Inggiort) धार फास्टन्स (Constance) का एय भी यहुत मनेाहर है। इस श्रेणी में हिम मे टकी घाटियाँ, हरी भरी पाल्प्स पहाड़ के एक पहादी गाय का दृश्य घाटियां, झरने और पहादी तेज बहनेवाली नदियाँ, सुन्दर झीलें और ग्लेशियर सब मिलते है जो इस देश को बहुत ही रमणीय बनाये टुप हैं। पहाड़ा के नीचे वालों पर प्रदीपदी घास होती है, इसलिए इन २२ योरप का प्रारम्भिक भूगोल ढालो पर चरने के स्थान यहुत है, और कहां कहीं पहाड़ी गांव व हुए है, जिनका दृश्य देखने योग्य है। उँचे स्थाना में घने बन जो सुन्दर रङ्ग विरले फूले के कारण अत्यन्त सुन्दर लगते है। ऊपर चोटियों तक चटियल चट्टानें हैं जो बहुत कम ढालू है पर चढ़ने के लिए योरप के सम्पूर्ण भागों से मनुष्य प्राते है और अपने अपने यल की परीक्षा करते है। प्राकृतिक दृश्य की असीम सुन्दरत सयत - TO SCERMANY TO CERMAN ALISTRI fet vers cullus tunn1 FRANLE in plent nel MILIN VENKE VERINA Ģrunn Mont con Tunnel GENOA IONA Aneans पारप्स पहाड़ के दर से जानेवाली रेलवे लाइनें के कारण क्या प्राश्चर्य है कि लोग स्विट्जरलैंड के पहाड़ी देश को काश्मीर की भाति सबसे रमणीय समझते है। श्रापप्स पहाड़ की प्राकृतिक भाग श्रेणियों ने फ्रास, स्विट्जरलैंड, इटली, जमनी और आस्ट्रिया श्रादि देशों के प्राकृतिक सौन्दर्य को बढ़ा दिया है। इन दशों मे पाल्पस की हिमाच्छादित चाटियो से निकलनेवाली योरप की पांच प्रसिद्ध नदिर्या राइन (Rhine), रोन (Rhone), पो (Po), इन (Inn) और एडिज (Adige) बहती है । इन मदियो की जल- शक्ति ने स्विट्जरलैंड को एक कारोबारी देश बना दिया है, यद्यपि यहाँ कोयला नहीं पाया जाता । योरप ऐसे काम-काजी महाद्वीप में यह श्रावश्यक है कि एक देश दूसरे देश के साथ सुगमता के साथ व्यापार कर सके। पारप्स पहाड़ इस काम में किसी प्रकार की स्कावट नहीं डालते, उलटे सहायता करते है। नकशे में देखो बाल्प्स पहाड में कई दरें है जिनमें होकर वत्तम रेल की सडके बनी हुई हैं। रेलों के लिए पहाड़ काटकर सुरा बनाई गई है। सिम्प्लन (Simplon) नामी एक सुरङ्ग की लम्बाई १२ मील है। मोट सनिस (aIt Cenus) नामी दरें की सुरङ्ग ७६ मील लम्बी है। इससे होकर फ्रास को रेल जाती है। हिन्दुस्तान थाने का यह सबसे सीधा रेल मार्ग है। जिस तरह एशिया में बडे बडे पहाडी की अणियां एक पहाड़ी केन्द्र से बाहर की घोर निकली हुई हैं, ठीक उसी भांति योरप की सम्पूर्ण दक्षिणी पहाडों की श्रेणिया पाल्प्स से निकली हुई ज्ञात होती है। उत्तर की ओर छोटे छोटे पहाड भार पहादियाँ जमनी के दक्षिणी थाधे भाग में फैली हुई है। जमनी की पश्चिमी सीमा वासजेज २५ योरप का प्रारम्भिक भूगोल (Vosges) पहाड है। इसके समीप जूरा पहाड (Jura Mountains) देखो। पाल्प्स का पश्चिमी सिरा लोमगार्डी के मैदान (Plain of Lombardy) का चक्कर लगाकर एपोनाइन्स पहाड (Apennnue Range) से मिल गया है, जो इटली में रीढ़ की हड्डी के समान चला गया है। फ्रास के सेविनीज (Cerennes) पहाड ने पाल्प्स की श्रेणियों को पिरेनीज़ (Pyrennes Afountains) की ऊँची श्रेणी से मिला दिया है। यह वही श्रेणी है जो कास और स्पेन के बीच की प्राकृतिक सीमा बनी हुई है। स्पेन से फ्रास जानेवाली रेलो को इन पहाड़ों का चक्कर लगाकर समुद्र तट से जाना पड़ता है, क्योंकि इनमें कोई दरें नहीं है। पूर्व में हिमालय के सदृश पाल्प्स की श्रेणियां भी दक्षिण की थोर मुड़ जाती हैं और एडियाटिक के श्राधे समुद्रतट पर पहुंचकर फिर पूर्व को मुढ़ जाती है। यहा॑ यह वल्कान की श्रेणी (Balkan Mountains) के नाम से प्रसिद्ध है। यह यक्ष्कान प्रायद्वीप के एक ओर से दूसरी ओर तक चली गई है। इस श्रेणी की एक शासा उत्तर की ओर डैन्यूय तक चली गइ है और इसके धागे बढ़कर कारपेथियन (Carpathian Mountains) की श्रेणी से मिल गई है। एक हजार मील लम्ना पहाट एक धनुप के श्राकार में हगेरी के मैदान (Plain of Hungary) को घेरे हुए है, और वोहीमिया (Platcau of Bohemia) में जर्मनी के दक्षिणी पहाडों से मिल गया है। यह प्राकृतिक माग २५ यूब योरप काफ पर्वत (Caucasus fountains) और शिया कोषक के द्वारा योरप के दक्षिणी पहाड एशिया के दक्षिणी-पश्चिमी पहाड़ों से मिले हुए है। दक्षिणी पहाडी देश की बड़ी पड़ी नदियों-डैन्यूव (Dannbs) और रोन (Rhone) श्रादिको नकशे में देग्यो। यद्यपि डैन्यूप का उद्गम जमनी (Germany) में और मुहाना स्मानिया (Rumama) में है, किन्तु वास्तव में यह प्रास्ट्रिया और हगेरी (Austria. Hungary) की नढी हे। यह इस सारे देश को अपनी यहो घड़ी सहायक नदियों समेत सींचती है सच तो यह है कि है में सबसे अधिक लाभदायक नदी है। इसका धेमिन बहुत उपजाऊ है। यद्यपि लम्बाइ में यागटिसीक्याग की श्राधी है किन्तु इसमें जहाज पहुत दूर तक पाते जाते हैं। यह नदी अपन मध्य भाग में एक संकरे पहाडी दरें के बीच से बड़ी कठनाई के साथ अपना मार्ग पनाती है। इस स्थान को श्रायन गेट (Iron Gate) या लोहे का फाटक कहते हैं क्योंकि इसकी चट्टानें बहुत कड़ी है । चट्टानों को काटकर एक नहर बनाई गई है। इससे इस स्थान की माकृतिक रकापट जाती रही। नकरो में उन बडे बडे नगरो को देखें। जो इस नदी के किनारे पर है, जैसे श्रास्ट्रिया की राजधानी वियना (Vienna), हगेरी की राजधानी बुडापेस्ट (Buda-pest) और सर्विया की राजधानी रेलग्रेड (Belgrade)। मुहाने के निकट इसका कुछ भाग जनवरी और फरवरी के महीनों में हिम से ढक जाता है। श्रब इन एशिया का प्रारम्भिक भूगोल . जितनी योरपीय नदिर्या भू-मध्यसागर में गिरती है उन सबमें बढ़ी रोन (Rhone) है। नकशे में देखने से विदित होगा कि यह एक लम्बी घाटी में यहती है जिसके दोनों ओर पहाद है। यही कारण है कि इसकी धारा यहुत तेज है, और इसमें जहाज चलाना अत्यन्त कठिन है। रोन की घाटी मास का एक उपजाउ तथा कारी- पारी प्रान्त है। ४-दक्षिणी प्रायद्वीपों की पहाडी श्रेणियाँ-नकशे में देखने से तुमको विदित होगा कि ये पहाड़ी श्रेणियाँ दक्षिणी पहाड़ियों से मिली हुई है और इन्हीं की एक भाग है, किन्तु इसको इस कारण से अलग समझते है कि प्रत्येक प्रायद्वीप में इसकी यनावट भित है। अपने नकशे में योरप के दक्षिणी भाग म तीन प्रायद्वीप देखो। पश्चिम में श्राइयेरिया (Iberia), मध्य में इटैली (Italy) और पूर्व में बल्कान (Balkan) प्रायद्वीप है । पहले प्रायद्वीप पर स्पेन और पुर्तगाल देश, मध्य पर इंटैली का देश और पूर्वी प्रायद्वीप पर ग्रीस, अल्बेनिया, यलगेरिया पार तुर्की श्रायाद हैं। श्राइरियन प्रायद्वीप (Iberian Peninsula) एक ऊँचा चौरस पठार है, जिसकी पहाड़ी श्रेणियों पूर्व से पश्चिम की ओर फैली हुई है। इटैली (Italy) में केवल एक पर्वतश्रेणी पपीनाइन्स है जो इसकी सम्पूर्ण लम्बाई में दक्षिण की थोर चली गह श्रेणी के दक्षिणी भाग में ज्वालामुखी पहाड़ है। इनमें से विसूवियस (Visuvius), इटना (Etna in Sicily) और स्टामनोली (Stromboly), जो लिपारी द्वीप पर हैं, यहुत प्रसिद्ध है। स्ट्राम्बोली
प्राकृतिक भाग
૨૦
ज्वालामुखी को भू मध्यसागर का रोशनीघर (Lighthouse) कहते
है। बरकान प्रायद्वीप (Balkan Peninsula) में बहुत से
पहाड़ है, किन्तु सब यिना क्रम के हे, काई किसी ओर गया है और
कोई किसी थोर ।
इनके मध्य में पारडार (Vardar) मारीजा (Marntza)
और मोरावा (Aforava) नदियो की उपजाऊ घाटियां है। हा
प्रायद्वीप में अनुमान से बताया कि प्रत्येक म किस भोर नदियाँ
बहेगी और फिर योरप के नशे में देखकर अपन सत्तर का
प्रमाण दो।
प्रश्न
?
१-योरप का धरातल कितने स्वाभाविक भागों में बांटा जा
सकता है?
-योरप के बडे मैदान और दक्षिणी पहाडा का वर्णन करो।
३-नदियों से क्या लाभ होते है ? एशिया की नदियों की अपेक्षा
योरप की नदिर्या सिंचाई का काम क्यों क्म देती है
४-बडे मैदान की उन बड़ी बड़ी नदियों के नाम बतायो जो
इसको (क) उचर की ओर सींचती हे (ख) दक्षिण की ओर सींचती
हैं। इनमें से किन नदियों के मुहानों पर बन्दरगाह है ?
५-नकशे में है-यूब नदी (Danube) का मार्ग ढूँढ़ो।
वालगा नदी (Volga) से क्यों अधिक लाभदायक समझी जाती है ?
नकशे में देखकर यताओ कि इसके किनारे पर कौन कौन,
यसे है।
यह
Arefinगाय
अभ्याग
mmart पहायों की गिर्या और पड़ी
ri fil यदादी, मैगनी नया ढेरटा के
friginal
ime TITI, &** Hi MIF (Kic! Cinsl) i tot
लन्दन (Irnan) Manly (Inturns) जाता है और
टन गरी गम का सार म है लन्न लौट
प्राता है।
4mm की सहायता म पनामो कि दोनों
माग की लम्बाई में क्या अगा।
तीसरा प्रकरण जलवायु और वनस्पति यद्यपि योरप और एशिया स्थर के एक ही खण्ड हे और इनकी बनावट भी बहुत मिलती जुलती है तो भी इनके जलवायु में बहुत बड़ा अन्तर है जिसके कई कारण प्रथम तो यह कि एशिया उत्तरी ध्रु ववृत्त से विषुवत रेखा तक फैला हुआ है और इसमे सब तरह का जलवायु पाया जाता है। यद्यपि योरप लगभग सम्पूर्ण शीतोष्ण- कटिबन्ध में है तथापि इसके देशो मे कहीं कठिन ठडक और कहीं कठिन गर्मी पड़ती है। इसमें केवल एक अत्यन्त छोटा सकरा भाग उत्तर के उडे प्रदेश में है। इसका कोई भाग दुनिया के गम प्रदेश में नहीं है। एशिया दुनिया में सबसे बड़ा महाद्वीप है। इसके किनारे घहुत कम स्थानो पर कटे हुए है और इसमें बहुत से प्लेटो है, इसलिए इसके अधिकतर भीतरी हिस्सो का जलवायु अत्यन्त ठडा और अत्यन्त गम रहता है। परन्तु योरप एक छोटा सा महाद्वीप है। इसका किनारा बहुत से स्थानों पर कटा हुया है और धरातल की उँचाई एशिया की अपेक्षा बहुत कम है, इसलिए इसका ऐसा भाग, जिसमें कड़ो गर्मी या कड़ी सर्दी पड़ती हो, बहुत छोटा है।
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
अभ्यास
१-योरप के खाके पर पढे वडे पहाड़ों की श्रेणियाँ और बड़ी
बडी नदियाँ दिसायो। इन नदियों के पहाडी, मैदानी तथा डेल्टा के
प्रदेशों को भिन्न भिन्न शेड या रङ्ग से रंग दो।
२-एक जहाज कील की नहर (Kiel Canal) में होकर
लन्दन (London) से डााजिग (Danzag) को जाता है और
उन जलसंयोजकों की राह से जो देनमार्क के उत्तर में है लन्दन नौट
भाता है। अपने नकशे के पैमाने की सहायता से पतायो कि दोनो
मागों की लम्बाई में क्या अन्तर
तीसरा प्रकरण जलवायु और वनस्पति यद्यपि योरप और शिया स्थल के एक ही खण्ड है और इनकी बनावट भी बहुत मिलती जुलती है तो भी इनके जलवायु में बहुत बड़ा अन्तर है जिसके कई कारण है। प्रथम तो यह कि एशिया उत्तरी ध्रुववृत्त से विपुवत रेखा तक फैला हुआ है और इसम सब तरह का जलवायु पाया जाता है। यद्यपि योरप लगभग सम्पूर्ण शीतोष्ण- कटिबन्ध में है तथापि इसके देशों में कहीं पठिन उडक और कहीं कटिन गर्मी पड़ती है। इसमें केवल एक अत्यन्त छोटा सँकरा भाग उत्तर के इहे प्रदेश में है। इसका काई भाग दुनिया के गर्म प्रदेश में नहीं है। एशिया दुनिया में सबसे बड़ा महाद्वीप है। इसके किनारे बहुत कम स्थानों पर कटे हुए है और इसमें बहुत से प्लेटो है, इसलिए इसके अधिकतर भीतरी हिस्सों का जलवायु अत्यन्त उडा और अत्यन्त गम रहता है। परन्तु योरप एक छोटा सा महाद्वीप है। इसका किनारा बहुत से स्थानो पर कटा हुया हे और धरातल की उँचाई एशिया की अपेक्षा बहुत कम है, इसलिए इसका ऐसा भाग, जिसमें कढ़ी गर्मी या कड़ी सर्दी पडती हो, बहुत छोटा है।
योरप का प्रारम्भिक भूगोल उस सीमा के ससिकट जो दोनों महाद्वीपों के यीच में स्थित है जलवायु एक सा है। इम सीमा के निकट एशिया में जो जलवायु के विभाग हैं उनको दुहरायो। वे रेग्गायें निम्नलिग्नित (Isothorms) है (क) हिम रेखा अर्थात् पे जो उत्तरी महासागर के बराबर यरायर चली गई है। इनमें जलवृष्टि कम होती है। (स) मध्य की रेखायें। इनमें जाड की तु में टडक और गर्मी की ऋतु में सामान्य गर्मी रहती है और जलटि पहले भाग की अपेक्षा कुछ अधिक होती है। (ग) भूमध्यसागर के ममुद्रतट के निकट की रेसा। इनमें जलवायु सामान्य रीति से गर्म है और जाडे में जलवृष्टि होती है। यही विमाग फैलते हुए योरप में चले गये है। उत्तरी महासागर का विभाग योरप के केवल उत्तरी पूर्वी कोण मे पेला हुआ है, परन्तु भूमध्य-सागर का विभाग योरप की सम्पूर्ण दक्षिणी सीमा पर फैला हुआ है। योरप के शेप भाग अर्थात् बडा मैदान और उत्तरी और दक्षिणी पहाडों के जलवायु की दशा समझने के लिए उन नियमा पर विचार करो जो हम तुमको पहले पता चुके हैं। (७) उँचाई-बड़े मैदान के उत्तर में स्कैंडिनेविया के पहाड़ इतने ऊँचे नहीं है जितने कि दक्षिणी पहाइ, परन्तु अपने अक्षांश के कारण अत्यन्त रडे रहते हैं। इन पहाडों की केवल चे चोटियाँ हिम से ढकी रहती हैं जो सपसे अधिक उंची हैं क्योंकि योरप के पहाट एशिया के पहाडों से बहुत कम उंचे ह। पाल्प्स १२ योरप में जनवरी तथा जुलाई का तापक्रम ३२ योरप का प्रारम्भिक भूगोल पहाड की सबसे ऊंची चोटी मोन्ट ब्लैंक (Afount Blanc) की उचाई मौन्ट एवरेस्ट (Mount Everest) की आधी ही है, परन्तु यह वर्ष के लगभग प्रत्येक भाग में इस कारण धर्फ से ढकी रहती है कि इसकी स्थिति शीतोष्ण कटियन्ध के उस भाग में है जो पछुवा हवाएँ अटलांटिक महासागर से तरी लाया करती हैं। योरप के पहाड़ों के श्राकार का भी प्रभाव समीपवर्ती मैदानों के जलवायु पर पड़ता है। अपने नक्शे में देखो पाल्प्स पहाड लोम्बार्डी के मैदान को, कारपेथियन पहाड हगेरी के बलेचियन मैदान को और काकेशस पहाड कर नदी के मैदान को उत्तर-पूर्व की उडी हवानों से बचाते है। यदि इसी प्रकार की कोई श्रेणी रूम के मैदान के मध्य में पश्चिम से पूर्व की ओर फैली होती तो काले सागर के उत्तर का मैदान जाडे में इतना ठडा न होने पाता कि भूमि उर्फ से ढक जाय और जाडे में कोई फसल न पनप सके। (२) समुद्र से दूरी-पश्चिम म समुद है इसलिए इस ओर के देशों का जलवायु सामान्य है, परन्तु पूष की पोर जाडों में अधिक जाहा पड़ता है, यहाँ तक कि पूर्वी रूस की ठडक ऐसी ही कठिन होती है जैसी कि पश्चिमी साइबीरिया की। (३) हवाओं की दिशा-हवानो का भी प्रभाव ऐसा ही पड़ता है। यहाँ पर अधिकतर हवायें दक्षिण पश्चिम से आती है। इनको एटलांटिक महासागर के बीच के गर्म पानी पर होरर चलना पड़ता है, इसलिए पश्चिमी देश इन हवाओं से गर्म हो जाते है, परन्तु ये हवाएँ ज्या ज्या पूर्व की ओर चलती है रही होती जाती है। पूर की जलवायु और घनस्पति ओर के मैदान उत्तर पूर्व की भी हवाओं के कारण जाडे में बहुत ठडे और गर्मी में शुष्क या सूपे रहते है। (e) जलवृष्टि-दक्षिणी पश्चिमी हवाये समुद्र से भाप भरी हुई प्राती है, इसलिए पश्चिमी देशा म अच्छी जलवृष्टि हो जाती है। किन्तु जैसे जैसे ये हवाये पूर्व की घोर घलती हैं जलहीन होती जाती हैं, और इस कारण से उधर जलवृष्टि यात कम होती है, परन्तु मैदान का कोई भाग ऐसा नहीं है जिसमे कुछ न कुछ जलवृष्टि न होती हो। इसके दो कारण हे -(1) ये हयाये ऊपर की ओर देश के भीतरी भाग की ओर चलती हैं। इसलिए ये घरापर ठडी होती रहती है और ठंडे वायु का यह गुण है कि इसमें पानी की भाप गम घायु की अपेक्षा पहुत कम रह सकती है। (u) पहाड़ों की ऐसी श्रेणी कोइ भी मार में नहीं मिलती जिससे टकराकर इनकी सम्पूर्ण श्रार्द्रता मार्ग ही में नष्ट हो जाय। इसलिए इस मैदान के प्रत्येक भाग में कुछ न कुछ जरवृष्टि अवश्य होती है। पश्चिमी योरप के गलेड, मास, नेदरलैंड तथा स्पेन श्रादि देशो में पछुआ हवाओं से जलवृष्टि हो जाने के बाद हवा का तापमम कुछ घढ़ जाता है क्योकि इन हवाथो की भाप उडी होकर पानी के रूप में घरस जाती हे और उसकी गर्मी इन देशों के टडे वायुमण्डल को गम कर देती है। इस प्रकार यह पछुवा हवायें एटलाटिक महासागर के उष्ण प्रदेश की तरी तथा गर्मी योरप के उडे देशों में लाया करती है। (१) गल्फ स्ट्रीम (Gulf Stream) इस धारा का प्रभाव योरप के पश्चिमी देशों के जलवायु पर पड़ता ३ इस धारा के
-
-
का
थत्यन्त
३४
योरप का मारम्भिक भूगोल
कारण पश्चिमी योरप का जलवायु सामान्य तपा प्रारोग्यवर्द्धक हो
जाता है, और पश्चिम के समुद्र उत्तरी ध्र व प्रदेश तक जमने से बच
जाते हैं।
इन बातो से सिद्ध है कि जलवायु के विचार से योरप का धड़ा
मैदान दो भागों में बँट सकता है (क) पश्चिमी भाग जिसका जल
वायु सामान्य है और जिसमे जलदृष्टि अधिक होती है। (स) पूर्वी
भाग जहाँ जलवायु ठडा है और जलवृष्टि कम होती है। इस प्रकार
जलवायु
के विचार से योरप के चार यढे विभाग है
(क) उत्तरी पूर्वी भाग-जहाँ जलवायु
रहा है।
(स) पूर्षी भाग-जहाँ का जलवायु ठडा है। जल्वृष्टि साधा-
रण होती है।
(ग) पश्चिमी भाग-जहाँ का जलवायु सामान्य है और इसमें
जलवृष्टि अधिक होती है।
(घ) दक्षिणी या भूमध्यसागर का प्रदेश-जहाँ का जलवायु
गर्म है और जल वृष्टि विशेषकर जाडे में अधिक होती है, परन्तु गर्मी
के दिन सूखे तथा गम बीतते हैं।
वनस्पति 1-पृष्ठ ३५ के दोनो नकशों की तुलना करो और
ध्यान से देखा कि जहाँ जैसा जलवायु है वहीं वैसी उपज होती है।
उत्तरी मैदान के पूर्वी भाग में श्वेत सागर (White Sea) से लेकर
काले सागर और कास्पिया सागर तक ज्यों ज्या दक्षिण की ओर
चलो त्यो त्यों गर्मी तथा प्रकाश घढ़ता जाता है और इसी के अनुसार
Britic CLIMATE
CULTIVATEO LAVD PASTURES
अजवायु और पास्पति
EXTREME
AND LCG3
AA IN V
MED
योरप के जलवायु के विभाग
TVNORA
BELT
Leod
योरपाकी वनस्पति के विभाग
योरप का प्रारम्मिक भूगोल
-
तुम जानते हो
वनस्पति तथा पेड़ पौधे भी पढते जाते है
कि पेड़-पौधों का पढ़ना गर्मी और प्रकाश के अतिरिक्त वर्षा पर भी
निर्भर है। अतएव इस माग के वे मेदा जहाँ वर्षा का अभाव रहता
है, केवल घास के मैदान है।
(१) टुडा (Tundra)-यह योरप के उत्तर पूर्व में है और
एशिया के टुढा की एक शाखा है। यहाँ न कोई पेड़ उग सकता है
धार न जीवित रह सकता है। गर्मी के दिनों में थोडे दिनो तक मोटी
लेपलेंड तथा टु हा प्रदेश में 'रेनडियर' मुख्य धन है।
घास पैदा होती है जिसको घारहसिगे बडी रचि से साते हैं। योरस
के इस भाग को लैपड (Lapland) कहते ई श्रार यहाँ के
जलवायु और वनस्पति निवासी लैप (LApps) कहलाते हैं। ये लोग भी एशिया के दुधा के निवासियों की भांति घर धौर गांय धमाकर नहीं रहते। धारह- सिगों का समूह ही इनसरी सम्पत्ति है। (२) जगली भाग--यह एशिया में पहुरा चौड़ा है। पहुत दिन हुए योरप में भी इनरी कमी न थी। प्राचीन काल में पडे मैदान में दक्षिणी पहाड़ों से लेकर स्कैंडिनेविया सक नगल ही जाल पा परन्तु य यहीं का पात सा भाग गती के योग्य कर दिया गया है। इसलिए योरप में जगली भाग यात संकरा हो गपा है। एशिया की भांति सदा हरे रहनेवाले पेड (evergreen), जैसे सनोपर, चीड (Pine) और फर (Pir) इस प्रान्त के उत्तर में पाये जाते है और ऐसे पेड़ जिनमें जामा म पतझड़ होता है, जैसे यलत (Ork) और धीच (Beerh) दक्षिण में मिलते है। यह प्रान्त एटलाटिक महासागर से यूराल पहाड तक चला गया है। इस भाग मे दुष्टा से तो अधिक गर्मा अवश्य पढ़ती हे परन्तु इतनी नहीं कि गम देशों के पेड़ पौधे यहीं पनप सकें। (३) चराई के मैदान तथा उपजाऊ प्रान्त--यह भाग महाद्वीप में पटलाटिक महासागर से यूराल पहाड़ तक चला गया है। तुम अभी पढ़ चुके हो कि घडे मैदा का जलवायु पश्चिम की योर सामान्य है तथा यहाँ जलगृष्टि भी अधिक होती है, और पूर्व की योर का जलवायु गर्मी में अत्यन्त गर्म तथा जाडे में अत्यन्त टडा रहता है, और जलवृष्टि कम होती है इस कारण से मेदान के भिर भिस भाग में भिन्न मिय प्रकार की खेती होती है। पश्चिम .
मध्य - योरप का प्रारम्भिक भूगोल में गेहूँ (Vheat) तथा जो (Barley) अधिक होता है और पूर्व में श्रोट (Oats) और राई (Rye) उत्पन्न होती है। में चुकन्दर (Sugar-Leet) बहुतायत से योया जाता है इससे शफर बनाई जाती है। यहाँ अंगूर की लताये भी बहुतायत से उत्पन्न होती है। सारे मैदान में चरने के स्थान अधिक है, किन्तु पश्चिम की शोर के चरने के स्थान रूस के चरने के स्थानों की अपेक्षा अधिक अच्छे है। इस भाग में जो जगल पाये जाते है उनके पेद जाटे के श्रारम्भ होने के पहले ही अपने पत्ते गिरा देते हैं इनमें से ओक या धलूत, घीच और ऐश (Ash) मुख्य है। (४) स्टेप के मैदान (Steppes)--ये मेदान रूस के दत्तिण में है, कैस्पियन सागर के निकट ये मदान इसी भांति के है जैसे कि एशिया के स्टेप के है। यहां के निवासी पशुश्री को चराने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान में घूमा करते है। काले सागर के उत्तर में जहाँ जल्वृष्टि भली भांति होती हे लोग खेती कर लेते है। यहाँ भूमि के ऐसे टुकडे हैं जहीं गेहूँ बहुतायत से उत्पन्न होता है, और रूस से सारी दुनिया में भेजा जाता है। यहाँ गेहूं की फसल जाडे के अन्त में योई जाती है जो यहाँ की ग्रीष्म ऋतु (Summer) में बढ़कर पक जाती है। (५) भूमध्यसागर के देश-इस भाग के समुद्र तट के मैदानो और नीची घाटियों में गे?, मका (Maze) और कपास (Cotton) अधिक होती है। गर्मा के दिनों में यहाँ भी फल यात पक्ते है। इस भाग में अंगर होते है और अगरी मदिरा अधिक जलवायु और पास्पति परिमाण में बनाई जाती है। जैतून से तेल निकाला जाता है और शहतूत (Afulberry) के पेड़ों से रेशम के कीड़ों का पालन पोपण होता है। सारे योरप में टैली थोर मांय रेशम के कारखानों के लिए प्रसिद्ध है। इस भाग के पेड़ों में यह गुण होता है कि इनकी जा लम्बी होती है ताकि यहुत गहरा से नमी प्राप्त कर सके और उस परतु मे भी जीवित रह सके जय वर्मा नहीं होती। इनकी पत्तियाँ मोटी होती है जिससे सूर्य की किरणे इनका पानी जल्द नहीं सुसा सकतीं। जीव-जन्तु योरप में जगली जीव-जन्तु यहुत कम पाये जाते है। इसका कारण यह है कि यह इतना घना पसा हुआ है पार खेती का काम इतना होता है कि इनके रहने के लिए बहुत कम स्थान रह गया है। सफेद रील और लोमडियाँ टु ड्रा में रहती है। यो तो पश्चिमी योरप के बहुत से देशों में जङ्गली सुअर घूमा करते है परन्तु रूस, जर्मनी और है यूब नदी के मेदानों में मुअर बहुतायत से पाले जाते है । भेडो के गल्ले स्पेन, पल्कान प्रायद्वीप, फ्रास और जर्मनी के जगली विभाग और रूस के घास के मैदानों में फिरते है और जानी मारियां और ऐसे ही हानि न पहुँचानेवाले जीव-जन्तु पहाडों पर रहते है जहाँ जङ्गल की भी अधिकता है। स्कैंडिनेविया के पहाड़ों पर विचरनेवाली घरियों का ऊन सरसे उत्तम होता है। पालतू जीव जन्तु जैसे गाये और भेड़े अधिक्ता से है। घोड और बैल पोमा ढोने के काम पाते हैं। रूस, जर्मनी और इंगलैंड के मैदाना और पाल्प्स पहाड के ढालों पर लम्बे कद और विना कौहान ।
योरप का प्रारम्मिक भूगोल परन्तु डेन . के जानवर सहसों की संख्या में चरते दिखाई पड़ते है। मार्क, हालेड तथा स्विट्जरलैंड में ये मनुष्य मात्र की उन्नति के लिए विशेष लाभदायक है। निवासी-योरप के सम्पूर्ण निवासी गोरी जाति के हे। गम दक्षिणी भाग के लोगो का रङ्ग टडे उत्तरी भाग की पेक्षा श्यामता लिये हुए है। तुम जानते ही हो कि योरपवाले परिश्रमी, उद्योगी और व्यापार में पड़े ही चतुर होते हैं। समतल और साधारण गर्म मदानों में खेती ही मुख्य उद्यम है परन्तु समुद्र तट पर बहुत से मनुष्य मछली पटने का उद्यम भी करते ह अथवा साने पोदते है, धीर जैसा कि हम धागे देशों के वर्णन में घतायेंगे, सैकड़ों मनुष्य कारखानों में काम करते हैं। यहीं कला-कौशल के काम अधिकतर वह मैदान के पश्चिमी भाग में, जहाँ कोयले और लोहे की साने हैं, होते है। अगले पाठों के पढने से विदित हो जायगा कि योरप के अधिकतर देशों के लोग हिन्दुस्तान के लोगों की भाति अपनी जीविका के लिए सेत की और न देखकर खान और समुद्र की श्रोर देग्नते है, और सचमुच खान और समुद्र योरपीय देशों की क्षति के मुख्य कारण भी है। जन-संख्या का विन्यास-योरपीय देशों में श्रावादी का विन्यास वर्षा पर निर्भर नहीं है जैसा कि तुम हिन्दुस्तान और एशिया में देवते आये हो। योरप में धनी पायादी खाना और फारधानों के पास होती है। समुद्र तट तथा नदियों की घाटियों में भी शाबादी अधिक होती है।
जलपायु और यनस्पति
"
पोरप के घने थापाद देश भलिखित हैं। उनको नकशे में
देना और उनके धन थापाद होन के कारण मालूम करो।
1-पीन और राइन के पोच का समुद्र तट ।
२-राइन नदी के किनारे का देश।
३-एल्य नदी के किनारे का देश, विशेषकर सैक्मानी (Saxony)।
४-पो नदी का मैदाा या उत्तरी इटली।
I
m
EJ
योरप में प्रागादी की सघनता
नम्बरों का विवरण-(१) प्रतिवर्ग मील १०० से कम
२००से २१०
, २५० से ऊपर
"
४२
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
रूस और जमनी की जन-पख्या पृथक् पृथक् ग्रेट ब्रिटेन से अधिक
है। झास, इटैलो, पोलैंड और स्पेन का स्थान इन देशों के बाद
है। इन सात देशों में योरप के तीन चौथाई मनुष्य रहते है । परन्तु
घेलजियम सय देशो से अधिर घा देश है। इसमें प्रति एकड़ भूमि
में एक मनुष्य का श्रीमत है।
लन्दन नगर की जन-संख्या योरप के
बहुत से देशो से अधिक है। उपर बताये हुए देशों के अतिरिक्त स्मा
निया, यूगोस्लेविया (Yugo-Slavia) और जेकोस्लोवेकिया
(Czechoslovakia) ही ऐसे देश है जिनकी जन संख्या लन्दन से
अधिक है।
प्रश्न
१-जलवायु के विचार से योरप को कितने भागों में बाँट सकते
हैं? बतायो प्रत्येक भाग के जलवायु में क्या विशेष बात होती है।
२-ताओ [क] ग्रेट ब्रिटेन (Great Britain), [ख] रूस
(Russia), [ग] इंटैली (Italy) का जलवायु कैसा है।
३-यदि तुम रूस में उत्तरी सागर से लेकर काले सागर तक
यात्रा करो तो तुमको किस प्रकार की वनस्पति मार्ग में मिलेंगी?
४-गेहूं की खेती रूस में गर्मी की ऋतु में और पजाब में जाडे
की ऋतु में क्यों होती है ?
५-एशिया की अपेक्षा योरप में बिना घरवाले लोग क्या
जलवायु और वास्पति ४३ भ्यास मोरप के साके पर जलवायु धार वनस्पति के विभाग दिसायो और वनस्पतियों के विभागों में उन वस्तुओं के नाम लिखो जो वहाँ उगाई जाती है। २-रेनटियर, सफेद रीछ, भेड, गायें और द्वेल मछली, काड मछली और सुअर इन शब्दों को उचित स्थानों पर लिख दो। ३-दूसरे सफे पर दिये हुए साके को देसकर योरप के मुख्य- मुख्य नगरों के तापक्रम तथा जलवृष्टि और उनकी स्थिति के बीच में सम्बन्ध स्थापित करो। .
४२ योरप का प्रारम्भिक भूगोल रूस और जर्मनी की जन-संख्या पृथक् पृथक् ग्रेट ब्रिटेन से अधिक फ्रास, इटैली, पोलंड वार स्पेन का स्थान इन देशों के बाद है। इन सात देशो में योरप के तीन चौथाइ मनुष्य रहते हैं । परन्तु बेलजियम सब देशों से अधिक धना देश है। इसमें प्रति एकड़ भूमि में एक मनुष्य का श्रामत है। लन्दन नगर की जन-संख्या योरप के बहुत से देशों से अधिक है। उपर पताये हुए देशों के अतिरिक्त रुमा निया, यूगोस्लेविया (Yugo Slavia) थोर जेकोस्लोवेकिया (Oreshoslovakia) ही ऐसे देश हैं जिनकी जन-मस्या लन्दन अधिक है। - प्रश्न १-जलवायु के विचार से योरप को कितने भागों में बांट सकते है ? बतानो प्रत्येक भाग के जलवायु में क्या विशेष धात होती है। २-बताओ [क] ग्रेट प्रिटेन (Great Britain), [स] रूस (Russia), [ग] इटली (Italy) का जलवायु कैसा है। ३- यदि तुम रूस में उत्तरी सागर से लेकर काले सागर तक यामा करो तो तुमको किस प्रकार की वनस्पति मार्ग में मिलेंगी? ४-गेहूँ की खेती रूस में गर्मी की ऋतु में और पजाय में जाडे की ऋतु म क्यों होती है? -एशिया की अपेक्षा योरप में बिना घरवाले लोग क्यों
चौथा प्रकरण
योरप के खनिज पदार्थ, व्यवसाय और वाणिज्य
तीन या चार सौ वर्ष पहले योरप के बाहर योरप के उन देशो
के नामों को, जिनके निवासी प्राज-कल लगभग सारे संसार के मालिक
मने हुए है, शायद ही किसी ने सुना होगा। कदाचित् तुम इस बात
के जानने के लिए उत्सुक होगे कि ऐसा भारी श्राश्चर्यजनक परिवर्तन
कैसे हुआ।
इसका उत्तर केवल दो शब्दों में है 'व्यवसाय चौर
वाणिज्य'। इन देशो ने इतनी भारी उन्नति अपने व्यवसाय और
वाणिज्य ही के कारण प्राप्त की है।
तुम योरप के व्यवसाय और वाणिज्य के विषय में विस्तृत वर्णन
इसके देशो और नगर के वर्णन के साथ साथ पढोगे। यहाँ पर हम
इस विषय का सूक्ष्म वर्णन करते है
सनिज पदार्थ-इस देश की व्यवसाय सम्बन्धी उन्नति में कोयले
और लोहे ने बहुत भाग लिया है। ये दोना खनिज पदार्थ यहाँ के
घहुत प्रदेशों में पाये जाते हैं और जहाँ पर ये पाये जाते है वहीं
पर अधिक्ता से निकाले जाते हैं।
स्तान, बेलजियम और जर्मनी हैं। स्पेन और स्वीडन में भी क्या
लोहा निक्लता है परन्तु वह साफ होने
घेलजियम
1
इन प्रदेशो में
मुख्य इंगलि
चाई सबसे अधिक गर्म सबसे उडे जाडे और गर्मी महीने का तापमहीने का ताप के तापक्रम का वर्षा की नाप इचों में मम फ. क्रम फ० श्रन्तर नाम नगर फोट में ३२ १०० २५० ३०० Sm ૨૨ ३० २० ६७ २३ १७०० २८ योरप का प्रारम्भिक भूगोल ६३ १-पश्चिमी योरप के नगर घरजन (Bergen) ) स्टारहात्म (Stockholm) परिस (Paris) लिस्बन (Lisbon) २-पूर्वी योरप के नगर वरलिन (Berlin) म्यूनिक (Munich) लेनिनग्राड (Leningrad) मास्को (Moscow) वियना (Viennn) ३-दतिणी योरप के नगर मारसेली (Alasselles) दीयस्ट (Trreste) मिलन (ifilan) TH (Rome) मेदिड (Madrid) एथेन्स (Athens) ४६ १०० ३० ३८ २५० ४४ २२ ४२ ३२ ३२ ३० २१०० ४० योरप के खनिज पदार्थ ४६ २-योरप के देशो का प्राधिपत्य पूर्ण तया उष्ण कटिबन्ध के देशा (Tropical countiles) पर किन कारणों से स्थापित हो गया है? ३-तुम अपने पास के बाजार में योरपीय देशों में बनी हुई किस किस प्रकार की चीजें देखते हो? ४-'कच्चे माल' से क्या मतलब समझते हो? ऐसे दो कच्चे माल के नाम बतायो जो तुम्हारे देश से योरप जाते हा और फिर अच्छी अच्छी चीजों के रूप में वापस पाते हो। ५-लोहे का सामान, कांच की वस्तुएं, रेशमी, उनी और सूसी कपड़े और दवाये तथा रस योरप से किन देशों से सस्ते दाम पर मंगाये जा सकते है ? अभ्यास (१) अपने समीप के बाजार में जाकर उन चीजों की एक सूची तैयार परो जो योरप के देशों से पाती है और उन्हें निम्नलिखित सुर्खियों में लिखो-(१) लोहे की चीजे तथा कटलरी-(Cutlery), (२) सर (Linen Goods), (३) कांच का सामान (Glass Manufactures), (१) कपडे या टेक्सटाइल (Textiles), (२) रसायन (Chemicals), (६) दवाइयाँ (Drugs) और रग (Dye) - योरप का प्रारम्भिर भूगोल materials) ले जाते हुए श्रार विदेशी का व्यापारी माल उडेलते हुए देसा था। हिन्दुस्तान का ऐमा कोइ बाजार या छोटे से छोटा गाँव न मिलेगा जहाँ योरपीय देशो म धनी हुई कोई न कोई वस्तु मुरयकर कपड़ा, लोहे या कधि की वस्तुएँ, और दियासलाई न प्रयोग की जाती हमारा देश योरपीय देशो के कला कोशल का सबसे पढ़ा याजार तथा वा के निवासियों के लिए अन्न पैदा करनेवाला देश है। हमारे देश के किसान विदेशियों के लिए गेहूँ, चावल, कपास, सन और जूट इत्यादि पैदा करते है और इसके बदले म विदेशो के, विशेषकर योरप के रहनेवाले कारीगरों तथा श्रमजीवियों के पनाये हुए कपड़े, लोहे व कांच के सामान प्राप्त करते है। योहो। तय तो व्यवसाय तथा वाणिज्य ने पूर्व तथा पश्चिम के देशों में एक प्रकार का भातृ-भाव उत्पत कर दिया है और एक दूसरे की सभ्यता को समझने और उससे लाम उठाने का पूरा अवसर प्रदान किया है। आगे के पाठों में हम तुमको योरप के भिल भिन देशों की राज. नैतिक अवस्था, उनकी उपज तथा जलवायु सम्बन्धी दशायें तथा वहीं के लोगों का व्यवसाय यतायेंगे जिससे तुम यह भली भांति समम सकोगे कि योरपीय देश किस प्रकार अपने क्ला-कोशल तथा बुद्धि की सहायता से सहस्रों मील दूर पर रहनेवाले कृपर के खेत की पैदावार अपने प्रयोग के लिए प्राप्त कर लेते है। प्रश १-योरप के देश किन कारण से श्राज-क्ल उन्नति के शिखर पर पहुंच गये है?
उत्तर और पूर्व के देश
सागर की ओर है। इसमें बहुत सी नदियां और झीले है। इनर्म
से बेनर (Vener) और चेटर (Wetter) मील तथा ग्लोमेन
१
+
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नार्वे के एक पियर्ड' का दृश्य
(Glommen), गोटा (Gota) भार डाल (Dal) नद्विर्या नको
में देखो।
पॉचवॉ प्रकरण राजनैतिक विभाग क-उत्तर और पूर्व के देश- (१) स्कैंडिनेविया या नावे (Norway) और स्वीडन (Sweden) स्कैंडिनेविया के पहाड़ योरप के इस उत्तरी मायद्वीप को दो भागो मर्याटते हैं। नार्वे एटलाटिक महासागर की ओर ऊँची भूमि पर यह पहाड़ी देश है। पहाड़ी पर पेटो के वन खडे है। समुद्र- तट के समीप बहुत से छोटे छोटे द्वीप और पहाड़ी कटान है, जो देखने म अत्यन्त सुन्दर मालूम होते है। इन्हें फियर्ड (Frord) कहते हैं। ये मछलियों के रहने और जहाजों के ठहरने के लिए सुरक्षित स्थान हैं।हांडजेम (Trondhyem), घरजेन (Bergen), स्टायेंजर (Stevenger) और क्रिश्चियाना (Christiana) या श्रोसलो (Oslo) ऐसे ही सुन्दर और सुरक्षित पियर्ड स पर स्थित हैं। यहाँ मछली पकढनेवाले सैकड़ों जहाज खड़े रहते हैं। स्वीडन ऐसा पहाडी देश नहीं है जैसा गर्व है। इस देश का मैदान बारिटक- । +
उत्तर और पूर्व के देश
१३
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का गिना जाता है। इसे इंगलैंड को भेज देते है, जहां इससे
फौलाद बनाया जाता है, परन्तु कोयल की कमी के कारण लोहे
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स्वीडन में एक नदी का दृश्य
का माल इस देश में क्म बनता है। तुम
पहले पढ़ चुके
हो कि स्कैंडिनविया के निकट के सागरो में मछलियाँ पपड़ने के
उत्तम स्थान पाये जाते है। इसलिए नार्वे के ये निगासी.
योरप का प्रारम्भिक भूगोल इस मैदान में ज्यों ज्या पश्चिम की ओर चला रयों यो यह मालूम होगा कि तुम एक मीढ़ी के श्राकार के पठार पर चढते जा रहे हो। इम सीढ़ी के धार के सबसे रे भाग में घने जगर सढ़े है। मध्य भाग में सनिज पदार्थ, विशेषकर लोहा पाया जाता है और सबसे नीचेवाले भाग में पेती होती है। जलवायु-इस प्रायद्वीप, के भिन्न भिन भागों की प्राकृतिक बनावट के अनुसार जलवायु में भी भिमता दिखाई पड़ती है। परन्तु चाई और विपुवत रेखा से दूरी प्रत्येक भाग के जलवायु को अधिक उड़ा ना देती है। स्कैंडिनेविया के निवासियों की सम्पत्ति_घन, खाने पार मछलियाँ हैं। यनों में केवल इमारत यनान के लिए लफडी ही नहीं होती, परन् इनकी उपज से कागज़ और दिया. सलाई के कारसाने चलते है। लक्डी को सडा कर और फूट- कर कागज धनाते हैं। दियासलाई म जो नर्म सीधे रेशेवाली लक्दी लगती है, इसकी यहीं के पहाटां पर कमी नहीं है। यह पहाडी लकड़ी नदियों वहाकर समुद्र-तट के कारसा तक लाई जाती है। दियासलाई मनाने के लिए दूसरी श्रावश्यक वस्तु 'फासफोरस' हे जो यहीं के समुद्रों से पकड़ी जानेवाली मछलियों से बहुतायत से प्राप्त होता ह। तुम अपने देश के बाजारा में सबसे अच्छी दियासलाई नार्वे या स्वीडन की देखोगे। कायालयो के इजन नदियों की जलशक्ति से चलाये जाते है। खानों में लोहा और तॉवा अधिक्ता से पाया जाता है। स्वीडन का लोहा उत्तम श्रेणी - उत्तर और ५५ यह माय चार के देश TE नहर पना दी गई है जिससे गोटेनवर्ग से बाल्टिक सागर को पहुँ पने में पदी सुगमता हो गई है। फिस्चयाना (Ohristiant), जिसे अय श्रोसलो (Oslo) कहते है, गार्य पी राजधानी है और प्रायद्वीप के उस फोन में है जा दक्षिण में दो समुद्रतटों के मिलने से यनता है। यहां का बन्दरगाह देखने योग्य है। महीने तक जमा रहता है। (२) डेनमार्क (Denmarl.)या के नियासी स्कैदिनविया के निवासियों से पात मिलते जुलते हैं। या देश नीची भूमि पर है और जटलैंड प्रायद्वीप (Iutland) के उत्तरी थाधे भाग और पास के द्वीपों पर बसा हुआ है, इसलिए घाल्टिक सागर के मुख्य फादर पर इसा अधिकार है। अपने नक्शे में धाल्टिक सागर के पश्चिमी फाटक प्रेटवेल्ट, लिटि- लपेट और साउड दखो। इनमें से अतिम सबसे प्रसिद्ध तथा जहाजों के याने जाने योग्य है। बाल्टिक का सारा यापार इसी से होकर गुज- रता है। इस देश का पश्चिमी.समुद्र तट बालूदार है जिसे तोदकर समुद्र कई धार मुल्क के अन्दर घुस आया है। अब बडे बड़े धि (Dykes) धनाकर समुद्र को रोक दिया गया है। पश्चिम का समुद्र (North Sea) कभी नहीं जमता परन्तु इस ओर कोई धन्दरगाह नहीं है क्योंकि समुद्र तट मालूदार है। इस देश की राजधानी घोपिनहेगिन (Copenhagen) है, जो जीलेंड (Zealand) के पूर्व में स्वीडन के किनारे से केवल कुछ ही मील की दूरी पर एक बडे और सुहावने धन्दरगाह पर स्थित AP ।
L योरप का प्रारम्भिक भूगोल जो समुद्रतट के समीप रहते हैं, मछलियां परहने का ही अद्यम करते है। दाल और पारनी नदियों की घाटी में लोहे और ताये की सानों में सहस्रों मनुष्य काम करके अपनी जीविका कमाते है। खेती इतनी होती है कि निवासियों की थावश्यकता पूरी हो जाती है और खा-पीकर जो थोड़ा सा थनाज घच रहता है वह पाहर चला जाता है। पहाड़ों के ढालो पर भेद यारियों और गाय-बैलों के लिए उत्तम चरो के स्थान है। म्वीडन के मेदानों में श्रोट, राई और जो की खेती होती है। उत्तर पूर्व के कोने के प्रदेश, जिसे लेपलेंड कहते है, के निवासियो का निर्वाह बारहसिगो के मांस पर होता है। स्कैंडिनेविया के नगर प्राय इस प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर कारण यह है कि यहाँ का जलवायु सामान्य है। स्टाकहाल्म (Stockholm) स्वीडन की राजधानी है। यह नगर बारिटक सागर के किनारे पर कई द्वीपों पर यमा है और प्रायद्वीप के ठीक सिरे पर है इसलिए इसकी स्थिति अत्यन्त सुन्दर और बड़े काम की है। यह अन्दरगाह जाडे के तीन महीने तक जमा रहता है। उन दिनों यहाँ का व्यापार उस नहर द्वारा, जो गोटेनबर्ग तक गई है, होता है। गोटेनबर्ग (Gottenburg) की जन-संख्या स्काटहारम की श्राधी यह जटलैंड (Jutland) के उत्तरी सिरे के ठीक सामने है। इसकी स्थिति स्टाकहाल्म से अच्छी है और इसलिए यह यदा अन्दर- । वेनर (Vener) और घेटर (Wetter) मीलों में होकर गाह उत्तर भार पूर्व के देश १० जाते है। (Iceland) है, ये दोनों देनमा के अधिकार म है। इन दोनों को मारी में देगा। पिछला द्वीप विनार में देनमार्फ से दुना है चोर यद्यपि यह उत्तरी घुघत के निस्ट है परतु इतना सर्द नहीं है जैसा कि इसकी स्थिति से प्रस्ट होता है। हमा भीतरी भाग पहाड़ी है। इसमें ज्यालामुपी पहाइ हैं। देपला नामी ज्यालामुनी सबसे प्रसिद्ध है। डेनमार मे यहुधा तूफान थाते रहते है। हाके साथ समुद्र- तर से इतनी अधिक बालू उठकर या जाती है कि गांव के गाँव दव श्रय गायों के पश्चिमी किनारों पर पेड़ों की पक्ति लगाकर घालू का पानमण रोका जाता है। यहा के सूफानो ही के कारण यहाँ के निवासी समुद्र तट के निकट देहात में रहते है और अधिस्तर मछ लियों पर अपना निर्वाह करते है। (३) रुस (Russia)--यह एशिया के रूस राज्य पश्चिमी भाग है, इसलिए इसम भी टु-डा, पन और स्टेप पाये जाते हैं। तुम पहले पढ़ चुके हो कि साइबीरिया म दुनिया के अत्यन्त नड भाग है। रूस का जलवायु भी अत्यन्त उडा जैसे जैसे व से पश्चिम को पाते है वैसे वैसे ण्टलाटिक महासागर के जलवायु का प्रभाव विदित होता जाता है और जलवायु सामान्य होता जाता है। यही कारण है कि स्स के बहुत से भागों में उत्तम येती हाती है जिससे बहुत बड़ी जन संख्या का निर्वाह होता है। फिर रसवाले अत्यन्त परिश्रमी और मितययी ह और जो कुछ वहीं थोड़ी बहुत उपज होती है उसी पर संतोप करते हैं। का - है । यहाँ योरप का प्रारम्भिक भूगोल है। वहाँ की भाषा में इस शहर का नाम ही यह प्रकाशित करता है कि यह बहुत यढा ब्यापारी पर है। इसी कारण देनमाक के निवासियों का छठा भाग कोपिनहेगिन में यसा हुआ है। डेनमार्क का अधिकतर भाग बालूदार अथवा दलदली है। देश की घालूदार भूमि को घसी चतुरता से उपजाउ खेतो में बदला गया है। इसमें शराब बनाने के लिए जो की खेती होती है। यहां की भूमि खेती की अपेक्षा चरागाही के लिए अधिक उपयुक्त का जलवायु भी धरागाहो के लिए अधिक लाभदायक है क्योंकि दक्षिणी पश्चिमी गर्म हवाये रूस की टडी हवाओं या याल्टिक समुद्र के रडे पानी के स्पर्श से कोहिरा पैदा कर देती है। यहाँ के चरा- गाहों में दूध देनेवाले सहस्रो जानवर पाले जाते है। इनके दूध से तरह तरह की चीजे मक्सन तथा सुसाया हुश्रा (Condensed milk) दूध बनाया जाता है जो टीन के डब्यो मे रडी होशियारी से भर कर विदेश को भेजा जाता है। यहाँ २०० से अधिक कारखाने है जिनमें दूध से अन्य प्रकार की चीज बनाई जाती है। यदि इन कारसानो में बने हुए मक्खन या दध के डब्बे जरा भी खराब हो जाय तो ये कम्पनिर्या अपने सर्च से विदेशों से वापस लेने को तैयार रहती है। डेनमार्क से केवल इंगलैंड को प्रतिवर्ष १० लास जानवर, और लगभग इतनी ही भेडे और १५ करोड अडे भेने जाते है। जन, साल हुड्डी तथा सींगो से भी इस देश को बहुत धन प्राप्त होता है। स्काटलैंड के उत्तर में जो फेरो के द्वीपसमूह ( Faroe Islands) है और इसके उत्तर पश्चिम में श्राइसलेड का द्वीप उत्तर और पूर्व के देश उत्तर में घडे साधन है एक है। यह एशियाई टु ड्रा से बहुत मिलता जुलता है। यहाँ के लोग भी जलवायु के क्ट के सहन करनेवाले हो गये है, परन्तु इनके जीवन के निर्वाह के लिए तो श्राजिल (Archangel) का बन्दरगाह जो वर्ष म समुद्री व्यापार के लिए छ माह तक खुला रहता है, दूसरी रेल है जो पेट्रो- प्राइ (लेनिनग्राड) से साइबीरिया को जाती है। जङ्गली विभाग भी एशिया के जङ्गली विभाग के सदृश है, परन्तु यहाँ सड़कों, रेलो और नदियों के कारण माल पाने जान मे सुगमता होती है इसलिए इमारत बनाने के लिए लकडी और वन के जीव- जन्तुओं की खालों का व्यापार बहुत होता है। जिन प्रान्ती म धन काटकर भूमि को खेती के पोग्य वमा लिया है वहीं विलायती राई ( Eve), श्रोट (Oat ), सन ( Flax) और अलसी बोई जाती है। रूसवाले अधिस्तर राई की रोटी और भालू साते है। तुमने रूस के दक्षिण के स्टेप का वर्णन पढा है। कालेसागर के उत्तर में वह प्रान्त है जहाँ गेह बहुत उत्पन्न होता है। यह बहुत घना बसा हुआ है। इसके धागे पूर्व की ओर चराई के स्थान है जहाँ असंख्य भेडे और गाय बैल चरते है। इनकी सार से वह चमडा बनाया जाता है जा दुनिया में प्रसिद्ध है। कैस्पियन सागर के चारो और मरुस्थल फैला हुया है। अब तुम समझ गये होगे कि रूमवालों की सम्पत्ति या तो जगल है या उपजा भूमि । नदियों और निस्ट के सागरों म मछलियाँ पक्दी 5 योरप का प्रारम्भिक भूगोल Hammerst Archange! 31 Yotensk Valka Zeninkrod valagoa kao U Vlad mo Pigt Holcoy Tui Simbral Start Soolehat Tambor Vook "<fones Storahom POLAND Warsaw i'm not G BRMANY kurath av Kharkov wovo CECCHO OVAKDA Togonroe houlor INGARY POMANIA Odeslor Yugo SLAVIA PELAARU BLACK podhropole उत्तर तथा पूर्व के देश (स्कैंडिनेविया तथा रूस) सत्तर और पूर्व के देश शेष बन्दरगाह जा बाल्टिा मागर और काले सागर में स्थित है सब अन्य देशवाला के अधिकार में है। उत्तम बन्दरगाह न होने से रूस के व्यापार को बडी हानि पहुँची है। समुद्र तट को अपने अधिकार में रसने और उन राष्ट्रों से मित्रता का व्यवहार करने की, जो काले सागर के बन्दरगाहो के अधिकारी है, रूस का सदैव श्रावश्यकता रूस के बड़े साम्राज्य में पहले योरप और एशिया का श्राधा देश था परन्तु महायुद्ध म नष्ट हो गया और अब तक इसकी दशा स्थिर है। इसके अधिकाश पर शिल्पकारों की सभाओ का शासन हे और इसको रूसी सोचियट प्रजातन्त्र राज्य कहते हे। पिछले साम्राज्य के रहनेवाले भिन्न भिन्न जाति के थ और इनम कुछ जातियों मे अपन स्वतन्त्र राज्य स्थापित कर लिये है। इन राज्यों में फिनलैंड (Finland), seentforent (Esthonia), selaras (Latvia), और लिथुवानिया (Lithuania) बारिटक सागर से समुद्र तट पर हैं। इनको नकुशे म हूँढो और इनकी राजधानियां क्रम सें हेलसिगफाम, रेवेल ( Revel), रीगा ( Riga) पार विलना (Vilna) देखो। दक्षिण में यूक्रेन ( Ukrane) का बड़ा राज्य कास्पियन सागर से काले सागर तक फैला हुआ है और इसमें श्रधि काश दक्षिण रूम के स्टेप देश का है। काले सागर पर इसका बदर- गाह श्रोडेसा (Odessa) है। काकेशस पहाड के दक्षिण के रहने वाले कुछ लोगों ने भी फूर नदी के बेसिन में जंगेरिया प्रजातन्त्र के नाम से एक राज्य स्थापित कर लिया है। इसी प्रकार पश्चिमी रूस ६० योरप का प्रारम्भिक भूगोल जाती है। गानों की अधिकता है, विशेषकर यूराल पर्यत में, परन्तु बहुत कम पोदी जाती है इसलिए कारपाने उन्नति पर नहीं है। मध्य रस में तुला (Tuls) के पास कोयले और लोहे की यड़ो पढी खान है । इसके समीप लोहे के कारमाने भी है, और मास्को ( Afos cor) रेला का केन्द्र बन गया है। सारकोर ( Kharkor ) और पर्म (Perm) के समीप भी कोयले की खाने है। कैस्पियनसागर के समीप वाकृ (Baku) में मिट्टी के तेल के कुए हैं। कृपक अपने घरों में बैठे बेठे सा और ऊन काता करते है। रूस का भीतरी व्यापार अधिकतर नदियों के द्वारा होता है। रूस में नदियाँ बहुत है और सहस्रों मील लम्बी नहरों के द्वारा एक दूसरे से मिली हुई हैं। बडे यढे नगरो से होकर रेलें जाती है परन्तु अब भी देश का बहुत सा भाग रेल से दूर पड़ता यद्यपि रूम साम्राज्य के प्रत्येक और कोई न कोई समुद्र अवश्य है, परन्तु इसका विस्तार अधिक होने के कारण मध्य भाग समुद्र से बहुत दूर है । जो समुद्र समीप हे वे चारों ओर स्थल भागों से घिरे होने के कारण सुले समुद्रों की भांति विदेशों से व्यापार करने के लिए अधिक काम के नहीं हैं। इनकी स्थिति ऐसे शीत प्रदेश में है कि ये जाडे भर जमे रहते हैं इसी कारण रूस के बन्दरगाह बहुत उपयोगी नहीं है । खुले सागरो के अन्दरगाह जैसे श्वेत सागर का बन्दरगाह श्राजिल (Archangel), प्रास्टिकसागर के बन्दरगाह पेट्रोग्राड या लेनिनग्राड और हेलसिगफार्स, और प्रशान्त महासागर का लाडीघोस्टक (Vladivostock) जाहे में हिम से ढके रहते हैं।
- उत्तर भार पूर्व के देश शेप पन्दरगाइ जापारिटक मागर पार काले सागर में स्थित सय धन्य दशवालों के अधिकार में है। राम घन्टरगाह न होन से इस फे व्यापार को यही हानि पहुँची है। समुद्र-तट यो अपन अधिकार में रगने और उन राष्ट्रों स मिग्रता का म्याहार करने की, जो काले सागर के परमाही के अधिकारी है, रूस पा सदैव प्रापश्यकता । म्स ये पड साम्राज्य म पहले योरप पार शिया का प्राधा देश था परन्तु महायुद्ध म नष्ट हो गया और अब तक इसकी दशा स्थिर है। इसके अधिश पर शिल्पकारों की सभाओ का शासन है और इसको रूसी सोधियट प्रजातन्त्र राज्य कहते हैं। पिछले साम्राज्य के रहनेवाले भित्र भित जाति के थे और इनम कुछ जातियों ने अपने म्वतम राज्य स्थापित कर लिये हैं। इन राज्यों म फिनलैंड (Tinland), इस्थोनिया (Esthonn), लटपिया (Latvia), और लिथुवानिया (Lithuanma) यारिटर सागर में समुद्र तट पर है। इनको नकृशे म दूटो पार इनकी राजधानियां कम से हेलसिगफार्म, रेवेल ( Revel), रीगा (Riga) और विलना (Vilna) देयो। दक्षिण में यूमेन (Ukrane) का बडा राज्य कास्पियन सागर स काले सागर तक फैला हुधा है और इसम श्रधि काश दक्षिण रूस के स्टेप देश का है। काले सागर पर इसका पदर- गाह प्रोडेसा (odessa) है। काकेशस पहाड़ के दक्षिण के रहने वाले कुछ लोगों ने भी पूर नदी के येसिन म जंगेरिया प्रजातन के नाम से एक राज्य स्थापित कर लिया है। इसी प्रकार पश्चिमी रुस योरप का प्रारम्भिक भूगोल के शिवासो पोल्स (Polss) लोगों ने अपने देश पालैंड (Poland) को रूस तथा जर्मनी के राज्य से अलग करके एक स्वतन्त्र प्रजातन्त्र राज्य स्थापित कर लिया है। इसकी राजधानी धारसा (Warsaw) नकशे में देखो। पेट्रोग्राड (Petrograd) पुरानी रूसी राज्य की राजधानी था। यह सुन्दर नगर है। इसको पीटर महान ने मीलो के विभाग के दक्षिण में दलदलवाली भूमि पर यड़े परिश्रम तथा उद्योग से बसाया था, परन्तु इसका स्थान थच्छा नहीं है क्योंकि यह देश के एक कोने में है। इसको अय लेनिनग्राड (Leningrad) कहते हैं। मास्को (Moscow) दूसरी श्रेणी का नगर है। यह प्राज-कल राजधानी है। पेटोग्राड के यमाये जाने से पहले भी यही राजधानी था । यह देश के मध्य में स्थित है इसलिए स्थान के विचार से बहुत ही अच्छा है। यह पडी बडी रेलो का केन्द्र भी है। इसके समीप क्रिमलिन नामी पुराना किला तथा शहर के राजभवन देखने योग्य है। निज़नी नोवगोरोड (Nyni Novgorod) चालगा नदी पर स्थित है। यहां प्रतिवर्ष बहुत बड़ा मेला होता है। रूस का व्यापार वास्तव में मेलों में अधिक होता है। रूस में लगभग २० नगर ऐसे मिलेंगे जिनकी जनसंख्या , लाख से अधिक है, और चार शहर ऐसे हैं जिनकी जन-संख्या ४ लास से अधिक है। इनमें से पेट्रोप्राड या लेनिनग्राड और मास्को का हाल तुमको बताया जा चुका है। वारसा पालैंड की राजधानी तथा रेलो का बहुत बड़ा केन्द्र है। इसके समीप लोहे और कोयले की साने हैं।
उत्तर और पूर्व के देश 1 इसके समीप की विस्चुला नदी में दूर तक जहाज पाते है । चौथा घडा नगर पोडेसा है जो काले सागर पर गेहूँ का बन्दरगाह है और यूमेन (Ukrane) राज्य की राजधानी है। रुमानिया (Rumana)-यह रूस के दक्षिण पश्चिम में स्थित है और मैदान के उस भाग में फैला हुआ है जो नीस्टर (Dnvester) और डैन्यूव (Danube) से उत्तर मे और डैन्यूब के डेल्टा के दक्षिण में काले सागर के किनारे से घिरा हुआ है। यदि इस देश को नकशे में दसो तो तुमको विदित होगा कि इस देश की बहुत थोडी सी सीमा है जो प्राकृतिक नहीं है। गैलीशिया पोर ट्रान्सलवेनिया (Transylvania) जो पहले थास्ट्रिया के साम्राज्य में शामिल थे अब फिर रमानिया म मिला दिये गये क्योंकि यहां के निवासी रुमानियावालों की जाति के थे। अपने नकरी में देखो रमानिया देश का कुछ भाग रूस के मैदान में और कुछ भाग कारपेथियन पहाड़ के समीप के भाग पर श्रावाद है। यद्यपि इस देश का अधिकतर भाग डेन्यूब नदी के उत्तर में है, परन्तु प्राकृतिक अनापट के विचार से इस देश की गणना भी बलकान प्रायद्वीप के देशो में है। परन्तु इस विचार से कि इस देश का अधिकतर भाग पोरप के पूर्वी मैदान पर श्राबाद है, हम इसका वणन पूर्व के अन्य देशों के माथ करते है। इस देश में मालडेविया (faldavia) और बालाचिया (Wallachia) नामी दो मैदान शामिल है। यही कारण है कि यह देश बड़ा उपजाऊ है ।
६४ योरप का प्रारम्भिक भूगोल । इस देश के लगभग सम्पूर्ण निवासी सेती का उद्यम करते है। रूस के निक्ट के स्टेप मेदान के मदृश यहाँ भी गेहूँ अधिक होता है और मका भी गर्मी की ऋतु में अच्छी हो जाती है। मका की खेती ही के सहारे यहाँ पर बहुत से सुअर पाले जाते हैं जिनके बाल और गोश्त से यहाँ के लोगो को बहुत धन प्राप्त होता है। कारपेथियन पधत के ढलुर्वा भाग से लकडी बहुत थाती है और मिट्टी का तेल बहुत निकाला जाता है। कारपेथियन के समीप के उस भाग मे, गेलीशिया (Galicia) कहलाता है, नमक की वढी घढी साने है। यह संसार भर में प्रसिद्ध हे फ्याकि यह ४ हजार फीट की गहराई में ३०० मील लम्बी हे ओर ६०० वर्ष से वोदी जा रही है। का प्रसिद्ध नगर बुखारेस्ट (Bucharest) हे जो राजधानी भी है। यह देश के मध्य में है। इसकी जन-संख्या ३ लास है। जासी (Jassy) मालदेविया प्रान्त की राजधानी पार गैलज (Galata) गल्ले का प्रसिद्ध धन्दरगाह है। इस देश । प्रश्न १-नार्य के देश में यदि तुम यात्रा करो तो तुमको कौन कौन से प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलेंगे ? ठीक ठीक वर्णन करो। २-स्कैंडिनेविया के निवासी अधिक्तर क्या क्या उद्यम करते हैं ? इनमें से कौन से उद्यम वनों पर निर्भर है? ३-दक्षिणी रूस में पश्चिम से पूर्व की और यात्रा करने मे तुमको किस किस प्रकार के उद्यम करनवाले लोग मिलेंगे।
उत्तर और पूर्व के देश
१--सिद्ध करो कि योरपीय रूस और साइबीरिया अपने धरातल,
जलवायु और उपज के विचार से एक दूसरे से बहुत मिलते-जुलते है,
और यूराल पहाड़ जो दोनो के मध्य म स्थित हे वास्तविक सीमा
नहीं है।
२--नीचे के नगरों के प्रसिद्ध होने के कारण तथा उनके स्थान का
वर्णन करो
Ohristiana, Copenhagen, Archangel, Moscow,
Odessa
श्रभ्यास
योरप के उत्तर और पूर्व के जिन देशों का वणन उपर किया गया
है उनकी सीमा तथा बडे घडे नगरों का स्थान साके में दिखायो।
।
ख-मध्य योरप के देश श्रय ये जर्मनी (Germany)-इसको योरप के मध्य का देश कह सकते है। नकुशे में इसकी स्थली सीमा देखो। पूर्व में पोलैंड (Poland), दक्षिण में प्रास्ट्रिया (Austria) और स्विट्जरले ड (Switzerland), पश्चिम में फ्रोम (France), बेलजियम (Belgium) और हाले ट (Holland) और उत्तर में डेनमार्क (Denmark) है। जर्मनी पहले प्रशिया के चली और विशाल राज्य और कई छोटे राज्यों और स्वतन्न नगरों से मिलकर एक साम्राज्य था। सन मिलकर प्रजातन्त्र राज्य बन गये है। उत्तर और दक्षिण की सीमायें स्वाभाविक है, अर्थात् उत्तर में घाल्टिक सागर और उत्तरी सागर है और दक्षिण में पर्यन-श्रेणियाँ है। गत योरपीय महायुद्ध के पहले पासजेज पहाड (Vosges Mountains) जो पाल्पस पहाड़ की उत्तरी शाखा है, जर्मनी और मास के बीच स्वाभाविक सीमा था, परन्तु अब राइन नदी इन दोनों देशों के बीच की प्राकृतिक सीमा का काम देती है। इसकी पूर्वी और पश्चिमी सीमा स्वाभाविक नहीं है इमलिए एक थोर पोले ड और रूस से और दूसरी ओर बेलजियम और हालैंड मे श्राने-जाने में बड़ी सुगमता होती है। ।
मध्य योरप के देश
६०
जर्मनी फा समुद-तट लगभग १,२०० मील लम्या है। इसमें
यहुत से कटान है, परन्तु समुद्र के उपले होने के कारण मच्छे
पन्दरगाह याहुत कम है। याष्टिक सागर के पन्दरगाह भाड़ में
जम जाते हैं और उधर सागर के समुद्र पर बांध (Dyhes)
पनाकर समुद्र को मुल के अन्दर चले था से राकना पड़ता है।
जर्मनी के पडे पर पन्दरगाह नदियों के मुहानों पर है क्योंकि
नदिया चाडो पस्दुधरी भनाती है। हेमवर्ग (Hamburg),
स्टेटीन (Stettin) और ग्रीमेन (Bremen) यहाँ के प्रसिद्ध
व्यापारी बन्दर है। संसार के तीन प्रसिद्ध बन्दरगाह लन्दन,
न्यूपाक और लीवरपूल के पाद हैमवर्ग ही का पापा स्थान
एक महर द्वारा यह पास्टिक सागर से मिला हुआ है।
पल्य नदी में बहुत दूर तर जहाज चले जाते हैं। यहाँ
चारों योर से धानेवाली रेले भी मिटती है। इसलिए
जमनी का आधे से ज्यादा व्यापार इसी बन्दरगाह द्वारा
होता है।
जमनी के समुद्र-तट के छोटे छोटे यन्दरगाहा म डानजिग
(Danaag) और कानिगसवर्ग (Konigsberg) पहुत प्रसिद्ध हैं।
कील (Kiel) एक समुद्री नहर द्वारा उत्तर सागर और पाल्टिा सागर
को मिलाता है। इस नहर के बन जान से जर्मनी के जहाजों को
थव देनमार्क का चक्कर लगार नहीं जाना पडता और उत्तर सागर
पहुंचने में ६०० मील की यात्रा कम हो गई । डानजिग श्रय जर्मनी के
अधिकार में नहीं है।
यह बन्दरगाह पचायत संघ (League of
६८ योरप का प्रारम्भिक भूगोल Nations) के अधिकार म चला गया और पाले ड का प्रसिद्ध इस प्रकार जमनी की स्थल व जल मीमा फ्हों पर व्यापार के लिए लाभदायक कहीं रत्ता के लिए अत्यन्त उपयोगी और कहीं रहा के लिए हानिकारक है। उत्तर पूर्व म पहाडा के न होने से उत्तर पूर्व फी उडी हवाये मुल्क के अन्दर तक चली थाती है और जाडे में पानी बरसानेवाली पछुवा हवाओं को रोक देती है। जर्मनी का धरातल दो प्रकार का है। इसके उत्तर में पड़ा मैदान है और दक्षिण म भूमि उँची है अर्थात् एक बेढगा प्लेटो सा विदित होता है, जिसमें कहीं नहीं पहाडिया उटी हुई है। इस भाग का वह पठार देसो जा 'याइवीरिया' (Biberia) के नाम से प्रसिद्ध है। इसके समीप राइन की मध्य घाटी में घासजेज़ और ब्लैक फारेस्ट पहाद देखो। भूमि की इस दशा से लगभग सम्पूर्ण नदियो के बहने की दिशा ज्ञात हो सकती है। ये नदियाँ दक्षिणी पहाडी से निमलती है और उँची भूमि को काटकर अपन लिए गहरी घाटियाँ बनाती है और फिर मैदान में लगभग एक दूसरे के समानान्तर बहती है और अन्त म बाल्टिक सागर और उत्तर सागर में जाकर गिरती है। नक्शे में यही यडी नदियों-विस्चुला, प्राडर, एल्व और राइन- को देस जागो और इनके मुहाने पर जो बन्दरगाह है उनको भी देखो। इस देश की नदियों में केवल दैन्यूब ही ऐसी नदी हे जिसके ऊपर का भाग उत्तर की थोर नही पहता परन् पूर्व की ओर श्रास्ट्रिया में बहता है। and
माप पारप में देश
उमंनी पा जलपायु भूमि की पनायट अनुगार भाभिरा मागों
मे भिर गार पाह। पापिटर मागरम समीप ये दरदसी ruit
राइन की एक घाटी का दृश्य
.
के अतिरिग भन्य सय मागों का जरयायु शुभ है। पश्चिम म
ज्या ज्यों पर की और चलो त्या त्या वर्षी कम होती जाती है। पूर्वी
योरप का प्रारम्भिक भूगोल भागों में उत्तरी पूर्वी उडी हवाओं के प्रा जाने से जाडे में कड़ी सर्दी पड़ती है। दक्षिणी भाग लेंचाई के कारण उतना गर्म नहीं होने पाता जितना कि इसे अपने अक्षाश के अनुसार होना चाहिए। राइन की घाटी काफी गर्म रहती है। यहो की भूमि भी अधिक उपजाऊ है। जाडे में सूर्य की तेज किरणे प्राप्त करन में इस देश को एक असु. विधा और यह है कि यह उत्तर की ओर दालू है। जर्मनी का उत्तरी मैदान अत्यन्त उपजाऊ है। गेहूँ, जौ, पोट, गई और भालू की खेती बहुत होती है। चुकन्दर (Beet) की खेती के लिए यहाँ का जलवायु अत्यन्त उपयोगी है। चुकन्दर से चीनी बनाते हैं। जितना चुन्दर 'पौर शालू जर्मनी में उत्पन्न होता है उतना दुनिया के किसी भाग में नहीं होता। दक्षिण के पहाड़ों पर इधर-उधर जङ्गल है जीं से इमारत के लिए लफड़ी बहुत थाती है। पहादी चरने के स्थानों पर अनगिनत गाय, बैल और भेड पाली जाती है और इसलिए दूध इत्यादि का यड़ा व्यापार होता है। परन्तु जर्मनी ने जो आश्चर्यजनक उन्नति की है वह अधिक्तर खानों के कारण हुई है। कला कौशल में वही देश उनति कर सस्ता है जिसमें लोहे तथा कोयले की साने हो। श्रोडर श्रीर पर नदियों के बेसिन में बहुत सा कोयला मिलता है, और लोहा राइन नदी के कोयले की साना के निकट मिलता है कोयले की खानों के ऊपर बडे घडे नगर घसे हुए है जहाँ कला-कौशल के बडे कार्यालय हे। रहर ( Bhur) की घाटी, सैक्सोनी जमनी में राइन, ।
Berbolto mer Tholy 3 och AMD 2 pzg Ilonos er Burn Haron Brunswik GER MANY Dangekland dhni Drecon Cologna Az Frankfurt roque CZECIDO- Nürnberg glow Slovakia Munkc inno uniek. AUSTRI Budok HUNGARY lawernen Anod मध्य पौरप के देश Sluliga pelo IA hao.o. Debreczen मध्य योरप के देश ba ૭૨ योरप का प्रारम्भिक भूगोल (Saxony) और साइलीशिया (Sileca) में कारखानेवाले नगर इन्हीं कोयले श्रार लोहे की साना ही के पास बनाये गये है। जस्ता, जिससे कलई ननाई जाती है, जितना इस देश में मिलता है उतना योरप के और किसी देश में नहीं मिलता और चाँदी भार सीसा भी अधिक परिमाण में निकाला जाता है। जमनी म स्वाभाविक सम्पत्ति बहुत है और इसके निवासी उससे बहुत लाभ उठाते हैं। जमनी के वज्ञानिको ने जङ्गली लक्दी के उरादे में गारो (Acids) को मिलाकर नीला रग (Indigo) तथा अर बनाये है । यहा की बनी हुई वस्तुएँ दुनिया में प्रसिद्ध है। कला-काशल की ऐसी कौन सी वस्तु हे जिसमें जमनी सबसे अधिक उजति न कर गया हो। लोहे, रुई और उन का माल बहुतायत से बनाया जाता है। ऐसी ही और भी बहुत सी वस्तुएँ है जो यहाँ धनती है जेसे रासायनिक पदार्थ और रग जिनके ये मुग्य शिरपकार है। अपने पास के बाजार में जाकर देखो तो जर्मनी की बनी हुई सक्दा चीजे अन्य देशों की चीजों से मजबूत और सस्ते दाम पर क्तिी पाश्रोगे। इन कारपानों के कारण जमनी का व्यापार अन्य देशो के साथ बहुत अधिकता से होता है, और इसी व्यापार की जति और जन संख्या की अधिकता के कारण जर्मनी ने अपने राज्य को बढ़ाने की चिन्ता की थी। अगस्त सन् १९१४ इ० में अपने समीप के देशों पर इसके आक्रमण करने का अन्य कारणों में से एक कारण यह भी था।
मध्य पारपरे दश जममी म यम म पम ३० नगर मे ईशिपी जन-सया इलाहा पाद में अधिक है। इनमें में गुमको पुष नगरी पे नाम पतास। इन गगरों का नग्गे म दगा। यलिन (Berlin) राजधानी है। यह देश के मध्य महासमिस म्या गत अच्छा है। यहा स रेलचे चारों योर यो फैली हुए है। म्यीक (funich) धार देसडेन (Dresden) दधिणा पहाड़ों मर जानवाली रेल वी सहको पर। म्यूनिज उस पढ़ी लाइT पर इंटेग्नी को गह है और सटे दम लाइन पर है ना ग्रास्ट्रिया का गम है। हम पासपास धोनी के मुन्दर पनन घनते है। जमनी में एस यहुत से नगर है जो अपने वाय्यालयों य लिए प्रमिद ।। राइन नदी पर पसेन (Essen) म लोहे के पर कारगान है। यहा तो बनती है। परय नर्ग पर मेगडेरर्ग (Alagdcburs) म जितनी चीनी यनाइ जाती है उतनी दुनिया के किमी तगर में नहीं बनती। प्रोडर नदी पर प्रेसला (Breslan) लोहे और उनी कपड़ों के कारपाना के लिए प्रसिद्ध है। और यारप के मुख्य स्थान भाग म हेमर्ग पात पहुत यदा बन्दरगाह पार जाप यनान का फन्द्र है। फोलोन (Oologno) पारयारी प्रान्न का केन्द्र है और मुन्र गिरताघर के लिए प्रसिद्ध है। लाइपजिग (Louprig) छापा बल के कारमान के लिए प्रसिद्ध है। सास्ट्रिया-हगेरी का प्राचीन साम्राज्य । गत योरपीय महायुद्ध के पहले के राजनैतिक विभागवाले योरप के नशे का प्राज-बल के राजनैतिक विभागवाले नकुशे से मिलान योरप का प्रारम्भिक भूगोल करो तो तुम यह समझ सकोगे कि इस महायुद्ध ने मध्य योरप के देशों के शासन में कितना घढा परिवर्ती उत्पस कर दिया है। इस महायुद्ध के पहले मध्य योरप की कई जातियाँ प्रास्ट्रिया के शक्तिशाली बादशाह के अधीन थीं। उस समय के श्रास्ट्रिया हगेरी-साम्राज्य के उत्तरी पश्चिमी भाग में जर्मन, उत्तर पूर्व में स्लेव (Slav), दक्षिण पूर्व में मैगयार्स (Magyars) और दक्षिण पश्चिम मे इटैलियन्स (Italians) श्राबाद ये। इनके अतिरिक्त श्रास्ट्रिया और हगेरी क लोगों में प्राधिपत्य के लिए सदैव से इOभाव रहा है । इतनी अधिक जातियों पर एक जाति विशेष का श्राधिपत्य बहुत दिन नहीं चल सस्ता था । महायुद्ध के अन्त में प्रास्ट्रिया हगेरी-साम्राज्य छिन भिल हो गया। इस राज्य के भिन्न भिन्न भाग अलग अलग म्याधीन प्रजातन (Republics) राज्य बन गये। अपने नकशे म प्राचीन ग्रास्ट्रिया हगेरी साम्राज्य के चार नवीन प्रजातत्र राज्य (१) श्रास्ट्रिया, (२) हगेरी, (३)जेकोस्लोवैकिया और (४) पालैंड देसी । इनका चएन हम नीचे पृथक् पृथर देते हैं। पाल्पस पहाड़ के दक्षिण का भाग, जो इटैली से मिला हुआ था, आस्ट्रिया हगेरी-साम्राज्य से अलग करके इटेली को मिला, और ट्रीयस्ट (Thisste) बन्दरगाह पर इटली की संरक्षकता में पचायती शासन स्थापित किया गया ताकि समीप की सब जातिर्यां इस यन्दर को अपने व्यापार के लिए प्रयोग में ला सके। यास्ट्रिया का दूसरा प्रसिद्ध अन्दरगाह फ़्यूम (Fum) यूगोस्लैविया के अधिकार में चला मध्य पोरप के देश गया। श्रय प्रास्ट्रिया के अधिकार में कोई व दरगाह नहीं रह गया। श्रास्ट्रिया (Austria) भाज-कल प्रतात व राज्य है और योरप के छोटे छोटे देशों में गिना जाता है। इसम पाल्प्स प्रदेश का पूर्वी भाग और डेन्यूब की घाटी का वह पंड है जो इस नदी के उत्तर में है। महाद्वीप के मध्य में होन के कारण इस देश के जलवायु पर समुद्र का कोई प्रभाव नहीं है। पहाड़ों के ऊँचे तट वनां से ढके है। ल्हा काटना यहाँ का मुख्य उद्यम है। ये लढे डैन्यूय तथा अन्य नदियों में यहाकर दूसरे स्थानों को पहुँचाये जाते हैं। जहाँ जङ्गल काट डाले गये ह वा भेड़ यारियों और जानवरों के चरने के मैदान घन गये है। सेव नदी के मदान में सुपर बहुतायत से पाले जाते है। नीचे के तटी और घाटियों में दोर पाले जाते हे और अनाज, भालू और अंगूर की खेती होती है। दक्षिण पश्चिम के भागों में रेशम के कीडे भी बहुत ज्यादा पाले जाते है क्योंकि यहां के गम जलवायु में शहतूत और रेड के पेड़ पनप सकते है। इस प्रकार प्रास्ट्रिया का मुख्य धन चरागाहो, जङ्गलों शोर सेतो से प्राप्त होता है। यहाँ लोहे, नमक, कोयले और सीसे की खाने भी है। लेहा और कोयला पास पास नहीं पाये जाते । चियना ( Vienns) श्रास्ट्रिया की राजधानी है। साम्राज्य की राजधानी होने से यह नगर योरप के बहुत बडे और सुन्दर नगरों में गिना जाता है। श्राज कल श्रास्ट्रिया एक बहुत छोटा
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
राज्य रह गया है इससे इस नगर की महिमा घट गई है।
के किनारे होने तथा रेलो का केन्द्र होने के कारण यह नगर
का केन्द्र है।
जेकोस्लोवेकिया (Czechoslovakia) एक प्रजातन्त्र ।
पुराने श्रास्ट्रिया साम्राज्य के उत्तरी सूनो-वाहीमिया (Bohenta
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वियना का फल बाजार
और मोराविया (IMorria)-के मिलने से धना है ।
इसमे चार
श्रोर पहाडे मे घिरा हुमा योहीमिया का नीचा पठार श्रार कार
पेथिपन पहाड की घाटियां और दाल है जो इस पठार के पूर्व में है
मध्य पोरस के देश घोहीमिया के रहनेवाले अपने को जेक (Czechs) कहते हैं और मारा विया के रहनेवाले स्लोवेक (Slovaks) कहलाते हैं । जेक लोग बडे सभ्य और उसतिशील है। सोग और रलो को सान से निरा लना इनका मुरय उद्यम है। पूर्वी भाग में कारपेथियन पहाड़ की श्रेणिया पैली हुई है। इनसे बहुत सी नदियाँ निफ्लकर दक्षिण के उपजाऊ मदान म बहती हुई उ यूब से मिल जाती है। एरन नदी का उपरी श्रद्धभाग तथा उद्गम इसी देश में है। इस देश में गेहूँ, जौ, पोट्स (Oats), भालू , चुकन्दर और हाप (Hops) की अत्यन्त उत्तम फसले होती है। यहाँ एक प्रकार की शराब बहुतायत से बनाई जाती है। इस देश के सनिज पदार्थ भी । बहुत ही लाभदायक हैं। सोने, चांदी, लोहे, कोयले तथा सीमे की बड़ी बड़ी खाने हैं जिनकी उपज विदेशा को भेनी जाती है। इस देश में कांच की बहुत सी चीजे बनाई जाती है। पेन्सिल बनाने के भी बहुत बडे बडे कारसाने है। प्रेग (Prague) नगर म चीनी के वर्तन बनाने का काम होता यह नगर एरन नदी के किनारे वियना और बर्लिन के बीच व्यापारी सड़क पर है इससे बहुत उपयोगी हो गया है। कारपेथियन के प्रान्त म रूसी वजारे रहते है। ग्रन (Broon) इसका मुख्य नगर हे। हगेरी (Hungarv) दक्षिण पश्चिम में पाल्प्स, उत्तर पूर्व मे कारपेथियन पहाड़ और दक्षिण में बलकान प्रायद्वीप से घिरा हुश्रा एक । योरप का प्रारम्भिक भूगोल मैदान है। इसकी नदियां देखो। यह देश चौरम है इससे नदियाँ धीरे धीरे यहती है भार इनमें पाढ श्राती है। डेन्यूब नदी इस देश के मध्य भाग से यहती है। जलवायु गरमी में बहुत ही गरम और जाडे बहुत ही उड़ा रहता है। महीने तक पाला पड़ता है। यह जलवायु गेहूँ की खेती के काम का है और यही हगेरी की मुख्य उपज है। हगेर का गेहूँ योरप भर में सबसे उत्तम होता है। यहीं अगर भी बहुत पैदा होते है जिनसे अगूरी शराब बनाई जाती है। यहाँ तम्गक चुकन्दर पार हाप्स भी पैदा होता है। इस देश में सोने, चाती लोहे, कोयले, नमक और पीपल' (Opal) की बड़ी बड़ी खान हैं। यहाँ के रहनेवाले अपने को मगयार कहते है ये लेग पहले एशिया में रहते थे परन्तु सैकडों वर्ष मे हगेरी में श्राकर बस - इस देश के अधिकार में कोई बन्दरगाह नहीं है। इससे विदेशी व्यापार में इसे दूसरे देशा का मुंह ताकना पड़ता है। इस प्रजातन राज्य की राजधानी वूडापस्ट यह हरे भरे गेहूँ उपजानेवाले मदान के यीच में है। यह नगर दो भागों में टैन्यूय के दोनो किनारा पर घसा है। यहाँ का मुख्य उद्यम घाटा पीसना पार गेहूँ लादना श्राज-कल का हगेरी प्रजातन्त्र राज्य पुराने हगेरी राज्य से बहुत छोटा है। महायुद्ध के पहले इसके अधिकार म फ्यूम (Fume) * यह एक प्रकार का सुन्दर पत्थर है जो सूर्य की रोशनी में रंग बदलता हुधा मालूम पड़ता है।
मध्य योरप के देश का बन्दरगाह इसके अधिकार में था, परन्तु अय इटैली के हाथ पोलैंड यह देश पोल्स (Poles) जाति के लोगों का दश है। किमी समय यह एक म्वत न राज्य या और योरप के बढे पढे देशों में गिना जाता था। सौ वर्ष हुए इसके बली पडोसियो-रूस, श्रास्टिया और जर्मनी-न इसे थापस में बांट लिया और रूस को सधमे बडा अंश मिला। महायुद्ध के पीछे पोलैंड फिर म्वतन्त्र होकर प्रजातन्त्र राज्य बन गया। यह देश अडे मैदान का एक अंश है। दक्षिण में कारपेथियन के ढाल हैं जिनसे विस्चुला नदी निकलकर उत्तर की थोर बहती ह। देश चौरस है और मिट्टी और जलवायु दोनो खेती के लिए उपयोगी हैं। गेहूँ, राइ (Bye), पालू, घोट (Oat) और शक्कर बनाने को चुकन्दर की खेती होती है। कुछ महीनों में धान के पनपन भर को गरमी पडती है। में कोयले, लाहे, सीसे की बडी बड़ी खाने है। मिट्टी के तेल के कुएं भी है। इस प्रजातन राज्य मे वारसा (IVarsaw) और लोज (Lotz) मुख्य नगर है। वारसा विस्चुला के किनारे पोलैंड की राजधानी है और रूस की रेलो का केन्द्र है। लोज एक बडा थापा रिक नगर है। वप इस देश धाल्टिक सागर पर डानजिग का म्वतन्त्र नगर पोलैंड का बन्दरगाह है।
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
स्विट्जरलैंड (Switzerland)-यह छोटा सा पहाड़ी देश
है। इसके पहाड़ों, घाटियो, नदियो, झीलों, हिम से श्राच्छादित
चोटियो और ग्लेशियरी का दृश्य देखने योग्य है। यहाँ योरप के
सम्पूर्ण भागो से और अमेरिका से भी लोग मनार जनार्थ पाते हैं और
अपने छुट्टियों के समय का श्रानन्द उठाते है । यही कारण है कि
यहाँ बहुत से होटल है धार यहुत से लोग यात्रियों की थावश्यकता
पूर्ण करके अपना निर्वाह करते है। इस देश की भाषादी में कई
जाति के लोग शामिल है। एक तिहाई जर्मन लोग ग्रार शेष दा
तिहाई इटली और फ्रास के निवासियों के वश के है।
तुमको नकशे के देसने से विदित होगा कि स्विट्जरले ड
की घाटियो म स राइा और रोन नदियाँ रहती है। राइन
नदी कान्सटेन्स (Lake Constance) झील से और रोन
जिनावा (Genon) झील से होकर बहती है।
राइन उत्तर को
और रोन दक्षिण को जाती है इसलिए प्रक्ट है कि श्राल्प्स
पहाड की पडी श्रेणी ठीक मध्य में है।
इस पहाडी देश में
कई बहुत बढ़ो बडी मोते
जिनमें लोग जल विहार करने
भाते है। सामने के चित्र से यदि तुम कान्सटेन्स झील के
किनारे पाल्प्स का दृश्य तथा जल विहार की नावे देखो तो तुम
यहाँ के प्राकृतिक सौन्दर्य का अनुमान कर सकते हो। देश म
बहुत सी घाटिया है इसलिए इधर उधर बमा हुग्रा
। बस्ती
के इन समूहों को प्रात और केनटन (Cantons) कहते हैं ।
ये सर प्रात एक ही गवर्नमेट के अधिकार में है जिसकी
मध्य योरप के देश राजधानी बर्न (Bern) है। यह देश के लगभग मध्य में स्थित है। स्विट्जरलैंड के समीप कोई समुद्र नहीं है। नक्शे म देखकर उन देशो के नाम बतायो जो इसके चारो ओर स्थित हैं। निवासी इहीं देशों की भाषा बोलते है। जन सख्या के माग की भाषा जमन है। शेप लोग फ्रास तथा इटली की भाषा बोलते है। यह देश पहाडी है इसलिए निवासियों की श्रावश्यक्ता के लिए पर्याप्त अनाज उस्पन नहीं हो सकता, परन्तु लोग पहाड़ो चरागाहों या जानवरों के घरन के स्थानों में पशुओं को पालते हैं और जमा हुश्रा दूध तथा मक्खन का व्यापार करते है। यहाँ के गांव पहाड़ी डालो तथा घाटियों म पावाद है। प्रत्येक गांव में दूध से तरह तरह की चीजे बनाने के कारखान मिले गे। इनमा प्राकृतिक दृश्य घड़ा मनाहर तथा मनोरजक होता है। जापानियों की भाति यहाँ के लोग भी बहुत ही चतुर शिल्पकार है, परन्तु कोयला और लोहा यहां नहीं होता इसलिए यहा बहुत बड़े बड कारखान नहीं है। और जहाँ कहीं क्ली से काम लिया जाता है तो उनका जल शक्ति से चलाते है। इस प्रकार पाल्प्स पहाडा ने स्विटजरलैंड को अपने (१) मनोहर दृश्य, (२) मरनों की मल-शक्ति, (३) चरागाहों तथा (8) जगलों द्वारा जीविका प्रदान की है। जिनेवा (Genera) म घटे, घडियां बहुत सुन्दर बनती हैं । तुमन बहुत सी घड़ियां ऐसी देखी होगी जो यहा के निवासी स्विस
२
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
(Swiss) लोगों की बनाई हुई हैं। इन पर 'स्विस मेड' लिखा
रहता है। जूरिक (Zurich) इस देश का सबसे बड़ा नगर
तीसरा बडा नगर वाले (Bale) हे। यहाँ रेशम का कपडा बहुत
बर्न (Ben) देश के मध्य में होने के कारण
यहाँ की राजधानी है, परन्तु छोटा सा नगर है।
बनाया जाता
प्रश्न
१-जर्मनी की पूर्वा दक्षिणी और पश्चिमी सीमा के देशों के
नाम बतानो और सीमा के विचार से बताओ कि थाना-जाना सुगम
या कठिन।
२-जर्मनी के मुख्य उद्यम बतायो और उद्यमों की उमति के
कारण भी बतायो।
३-राइन नदी का मार्ग नकशे में पताश्रो और उसके किनारे
जो मुख्य नगर बसे है उनके नाम यतानो।
४-म्विट्जरलैंड का दृश्य और यहा के रहनेवालों के उद्यम
यतायो।
५--निम्नलिसित शहरों के प्रसिद्ध होने का कारण बतायो
Danzig Hamburg, Berlin, Prague, Budapest,
and Tricst
1-पुराना भास्ट्रिया हगेरी का साम्राज्य अथ किन किन भागों में
यट गया है। प्रत्येक की शासन प्रणाली, उपज तथा व्यवसाय का सूक्ष्म
वर्णन करो।
मध्य योरप के देश
अभ्यास
खाके पर जमनी, प्रास्ट्रिया हगेरी, जेरोस्लोवेकिया और मुख्य
पहाडो, मदियों और नगरों के नाम लिखो। इन देशों की सीमा
सींच दो।
से ग-भू-मध्यसागर के देश पहले पाठ में यह बताया जा चुका है कि योरपीय देशों की उन्नति का एक मुख्य कारण वहाँ के समुद्र है। कदाचित् संसार में ऐसा कोई दूसरा समुद्र न मिलेगा जिसने अपने समीपवर्ती देशों के जलवायु, उपज, व्यापार, सभ्यता तथा मनुष्यों की उन्नति पर भू-मध्यसागर अधिक प्रभाव डाला हो। अपने नकशे मे योरप के उन तीन प्रायद्वीपों के देशो को देखो पा भू मध्यसागर में रहुत दूर घुसे चले गये है। इनमें से मध्य के प्रायद्वीप में रूम या रोम (Rome), नगर ममुद्र तट से कुछ दूर अन्दर की ओर देखोगे। पूर्व की पोर के प्रायद्वीप का दक्षिणी भाग यूनान देश कहलाता है। भू-मध्यसागर के दक्षिण के देशों में वह हुँदो जहाँ सबसे घडी नदी नील (Nile) का मुहाना है। देश (Buypt) है। यूनान और रोम के निवासियों ने अपने राज्य की नींव इस भाग में उस समय डाली थी जब कि योरप के और देश के इतिहास का प्रारम्भ भी न हुआ था। मिस्र देश की सभ्यता भी जो यूनानियो की सभ्यता से कहीं अधिक प्राचीन है, भूमध्यसागर के तट के समीप नील नदी के मुहाने के श्रासपास उन्नति को प्राप्त हुई थी। इसी लिए A यह FRANCE Berat le ones Oge sa Rardeauzta Boda Pest Hundar RUMANIA Lyops. lon! Venice More Genos Madrid Flores • Bucharest YUGO Belslagde SLAVIA Sofia BULARIS SPAN Baroelons L жfople valentin grind Naples ме d braltar Smyrna Malta .. 17 a น. และ भू मध्यसागर के देश " है ५६ योरप का प्रारम्भिक भूगोल भू-मध्यमागर को यदि योरपी सभ्यता का केन्द्र कह तो चित है। इसमे सन्देह नहीं कि इन दिनों देशों की उन्नति का कारण कुछ तो यह था कि यहाँ का जलवायु सामाय था, परन्तु एक कारण यह भी या कि वर्तमान समय की भांति प्राचीन काल में भी भू-मध्यसागर व्यापार का घडा भारी केन्द्र था। श्राज-पल कला कौशल और व्यापार में भू मध्यमागर के उत्तर की योर के ये देश उसति पर है जहाँ का जलवायु यद्यपि भू-मध्यसागर के किनारे के अन्य देशों की भांति ही रडा परन्तु उनमें पनिज पदार्थों की अधिकता है। इस पाठ में हम तुमको योरप के उन दक्षिणी देशों का वर्णन पता येंगे जो भूमध्यसागर के सर पर है। इसके पढ़ने से तुमको यह यात भली भांति विदित हो जायगी कि भू-मध्यसागर ने किम प्रकार अपने तट के देशों को शुष्क होने से बचा लिया है। और उनके चीच एक सुगम जल-मार्ग का काम दिया है। जिन अक्षाश पर भूमध्यसागर तथा इसके तट के देश स्थित है उन पर जाडे में पछुना (Westerlies) हवायें एटलाटिक महासागर के ऊपर से होकर चलती है। इसलिए बहुत मी तरी अपने साथ लाती है और भू-मध्यसागर के तट के देशों पर धर्षा करती है। गर्मी के दिनों में इस प्रदेश पर उत्तर पूर्व की शुष्क तथा गर्म हवाये चलने लगती है, अतएव गर्मी के दिन सूखे तथा गम बीतते है। इस प्रकार का जलवायु भूमध्यसागर के जलवायु (Mediterranean climate) के नाम से प्रसिद्ध है। इस प्रकार के जलवायु में केवल वही पेड पौधे पनप सकते है जिनकी पत्तियाँ मोटी होती है और जड बहुत भूमध्यसागर के देश गहराई तक फेलकर कुछ तरी प्राप्त कर लेती है और जो ग्रीष्म ऋतु के शुष्क जलवायु में जीवित रह सकते है। १-बलकान मायद्वीप बलकान के राज्य (Ballan States) अपने एरलस मे देखो। बलकान के प्रायद्वीप में ५ राज्य है --योरपी रूम (Tur key), बुलगेरिया ( Bulgarim), जूगो स्लेविया (Jugoslavid), अलवेनिया (Albanis) और यूनान (Greece)। तुम इनके नामों और स्थाना को भली भाति स्मरण कर लो। तुमको श्राश्चर्य होगा कि इतने कम स्थान में इतन अधिक राज्य किस प्रकार स्थापित हो गये। इसके बड़े बड़े कारण ये हैं कि बलकार के प्रायद्वीप में भिन्न भिन्न प्रकार के लोग बसे हुए हैं और यहाँ की भूमि चौरम नहीं है। स्पष्ट है कि भूमि के जिस भाग बहुत से पहाड़ और घाटिया होगी वहीं एक राजधानी से राज्य करना कठिन है, इसलिए धीरे धीरे कई राज्य स्थापित हो गये। मैकडा वर्ष हुए तुर्को ने एशिया में बड़ा साम्राज्य स्थापित करके सम्पूण बलकान प्रायद्वीप अपने राज्य में मिला लिया। लोगों पर उनका अधिकार था वे लोग बराबर स्वतन होने का उद्योग परते रहे। सौ वर्ष हुए यूनान स्वतन्त्र हो गया। और देशों ने यूना7 का अनुकरण किया और पिछली शतान्दी के अन्त में प्रायद्वीप का दो तिहाई भाग तुर्की से अलग हो गया । श्राज +7 योरप म परन्तु जिन योरप का प्रारम्भिक भूगोल तुर्की राज्य की उलगेरिया के दक्षिण और पश्चिम म मारिटमा नदी सक एक चिट सी रह गई है। गत योरपीय महायुद्ध म अलकान प्रायद्वीप के दो मसिद्ध देश वुल गेरिया और तुर्का (Purkey) जमनी की ओर से, और ग्रीस या यूनान (Greece), सरनिया धार रूमानिया इंग्लेंड, फ्रास तथा अन्य मित्रराष्ट्रों घासफोरस जल मार्ग का दृश्य की ओर से लड़े थे। इस महायुद्ध के बाद मित्रराष्ट्रों की ओर से लडने वाले देशा की राजनैतिक सीमा बढ गई और तुर्की, बुल्गेरिया और श्रास्ट्रिया की बड़ी हानि हुई। तुर्की के अधिकार में योरप मे श्रर केरल कुस्तुनतुनिया के समीप का देश तथा यस (Tince) रह गया। घासफोरस और डारडेनलीज के जलमार्गों और उनके समीप के न भूमध्यसागर के देश भागों पर जो पहले तुर्मा के अधिकार में थे, अब पचायती शासन (League of Nations) हे। अब इन जलमार्गों को सब जातियों के जहाज प्रयोग में ला सकते है। इस महायुद्ध में सरविया की सबसे अधिक हानि हुई थी, इस- लिए इसके समीप के पांच छोटे छोटे राज्य जा पहले श्रास्ट्रिया के अधीन थे, इसमें मिला दिये गये, और एद्रियाटिक समुद्र तट पर जूगो स्लेविया (Jugo-slavia) नाम का एक नया प्रजातन्त्र राज्य बना दिया गया। स्मानिया को जिसमा वर्णन हम पूर्वी देशों के साथ कर चुके है, कारपेथियन के उत्तर तथा दक्षिण के देश गेलीशिया और ट्रान्सलवेनिया मिल गये। उत्तर की ओर साराविया (Bessarabia) के भी मिल जाने से रमानिया की सीमा नीस्टर (Dniester) नदी तक पहुंच गई। अपने एटलस के नकशे को थोडा श्रार ध्यान से देसो पार इस प्रायद्वीप की प्राकृतिक दशा पर ध्यान दो। नदिया के मार्गों को दसने स विदित होता है कि पहाडा की दिशाये क्या है । पश्चिम म वे पहाड़ है जा थारप्स पहाड़ से दक्षिण की पोर आये हैं। ये पहाड सम्पूर्ण पश्चिमी समुद्री किनारे पर फैले हुए है और समुद्र के नीचे फैलने ग्रेट के प्रायद्वीप में होरर एशिया कोचक के पहाडों से जा मिले हैं। डैन्य ध के दक्षिण में बलकान पहाड(Balkan fountains) प्रायद्वीप में पश्चिम से पूर्व को फैला हुआ है और दक्षिण की ओर एक और पर्वत जिसे पिडस रेंज कहते , है ईजियन सागर के उत्तरी फैला हुधा हे 1 जूगोस्लेविया और अल्वेनिया और यूनान । दिनारे पर योरप का प्रारम्भिक भूगोल का प्रान्त पहाड़ी है, परन्तु योरपी रूम और वुलगेरिया मैदान म स्थित शपने नशे में बलकान प्रायद्वीप की तीन प्रसिद्ध और उपनाम घाटियाँ देखो। इनम मौरावा (Morawa) उत्तर की ओर, और मारिजा (Mantra) पूर्ष मे और वारदार (Vardar) दक्षिण यहाँ की प्राकृतिक दशा जानने से जलवायु की दशा विदित हा सकती है। तुमको प्रताया जा चुका है कि भूमध्यसागर के विभाग मे पश्चिमी हवाये जलवृष्टि करती हैं। यही कारण है कि भूमध्य सागर के तट के देशों के पश्चिमी पहाड़ों पर जलवृष्टि बहुत होती है नार पूर्वी प्रान्त शुष्क पडे रहते हैं। इन प्राकृतिक दशानी से ही यहां के निवासियों का जीवन और उद्यम का वृत्तान्त ज्ञात हो सकता है। भीतरी देश की घाटियां बहुत उपजाऊ नहीं हैं। पहाडी के बालों पर या तो वन राडे हैं या चरने के स्थान है। जहाँ भेड भोर यकरियो पाली जाती हैं, परन्तु इस प्राय द्वीप का बहुत सा माग उचा अत्यन्त उडा श्रार उमर है। समुद्री किनारो के समीप बनस्पति रहुत होनी हे और फल अधिकता से होते हैं। यूनान और तुर्का की किशमिश, वारदार की गर्म घाटी की तम्याक, बलकान पहाड के दक्षिणी ढाला के गुलाब के फूल, और मारावा की घाटी के बेर (plum) प्रसिद्ध है। प्रायद्वीप में उत्तम पानिज पदार्थ पाये जाते हैं परन्तु खोदे बहुत कम जाते हैं। यही कारण है कि कला-कौशल में लोगों ने उन्नति नहीं की है। साराश यह है कि यहा के निवासी अधिकतर खेती करन
भूमध्यसागर के देश
वाले है जो थोड़ी बहुत खेती कर लेते है, कुछ फल सरपा कर लेते
है और अपने चौपायो को चराते है।
यहाँ का बड़ा नगर कुस्तुनतुनिया (Constantinople)
F
+
HAMAARE
NAME
-
कुस्तुनतुनिया का दृश्य
है जो योरपीय रूम की राजधानी है। इसकी जन संख्या कलकत्ते की
जन-सरया के तुल्य हे। यह नगर उस बडे मार्ग पर स्थित है जो
६२ योरप का प्रारम्भिक भूगोल एशिया और दक्षिणी योरप के बीच स्थित है और इतना प्राचीन है कि लोग इसको २,५०० वर्ष के पूर्व का समझते हैं। एथेन्स (Athens) और कोरिन्थ (Corinth) यूनान के व्यापारिक नगर है। एथेन्स यूनान की राजधानी है। सालोनिका (Salonica) वारदार की घाटी का प्रसिद्ध बन्दरगाह है। यही से मिस को तभ्याम् भेजी जाती है जिससे मित्रनिवासी सिगार बनाते हैं। भीतरी नगरौं में सोफिया (Sofia) जो वुलगेरिया की राजधानी है पार चेलमेर (Belgrade) जो यूगोस्लेविया की राजधानी है, प्रसिद्ध नगर है। इन नगरो को नकृशे में देखो। २-इटैली का मायद्वीप इस देश का ऐसा यह भू-मध्यसागर के विभाग का सबसे अच्छा देश है। इसका जलवायु योरप के सम्पूर्ण देशा से अच्छा है। कोइ भाग नहीं है जो समुद्र से दूर हो। अपने देश के सुन्दर प्राक तिक दृश्यों को देखते देखते इटली के निवासियों को सुन्दर घस्तुओं से प्रेम करना ना गया हे और गर्म जलवायु के प्रभाव से यहां के निवासी स्वाभाविक रीति से प्रसन्नचित्त तथा प्रफुल्लित स्वभाव के होते हैं। वे चित्रकारी और पत्थर के काम में बढे ही चतुर शिल्पकार है। अपने घर और राजनैतिक भवनों को उत्तम चित्रों और मूतियों से सजाते हैं। गाने-बजाने के इतने प्रेमी है कि प्रत्येक मनुष्य गाना यजामा जानता है ।
-- - भूमध्यसागर के देश इटैली का राज्य तीन भागों म विभाजित हो सकता है, प्रथम उत्तरी भाग, दूसरे प्रायद्वीप भार तीसरे द्वीप । उत्तरी भाग में लोमवार्डों का मैदान (Plan of Lombardy) और उन पहाड़ों के किनारे सम्मिलित ह जो इसको उत्तर पूर्व और पश्चिम की ओर से घरे हुए है। ये पहाद पारप्स पर्वत के दक्षिणी ढाल है। इन पहाडों श्रार यहाँ की झीलो और नदियों ने इटैली का भाकृतिक दृश्य स्विट्जरलैंड की भांति रमणीक बना दिया है। जिस प्रकार गङ्गा नदी उत्तरी हिन्दुस्तान के मैदान में पहसी है, उसी प्रकार पो (Po) नदी लोमवार्डी के मैदान में बहती है। यह भी नदी की लाई हुई मिट्टी से बना हुआ है और देश में सबसे अधिक उपजाऊ और यसा हुथा भाग है। उप्य श्रार सामान्य जल वायु की लगभग प्रत्येक भांति की उपज यहाँ होती है जिनमें चावल और मका की खेती बहुत अच्छी होती है। यहाँ के निरासी अधिकतर मका की रोटी साते हैं। मदिरा के लिए अंगूर की बहुत लगाई जाती है और रेशम के कीड़ों के लिए शहतूत के पड बहुत लगाये जाते है। मिलन ( Nilan ) और ब्यू रिन (Turun) में रेशम के पडे बटे कारखाने है। इटैली में जितना रेशम बनाया जाता है उतना योरप के किसी देश में नहीं बनाया जाता। मैदान के बडे बड़े नगरो मे मिलन (Milin), व्यरिन (Turin), घेनिस (Venics) और ट्रीयस (Triest) हैं। मिलन इस मैदान के लगभग मध्य में है। यह एक बहुत बडा रेलवे जक्शन है। यहाँ से बाल्पस पहाड को पार करके प्रास्ट्रिया, स्विटजरलैंड ।
- योरप का मारम्भिर भूगोल जर्मनी और मास को रेले जाती है। इन रेलो के लिए पहाड़ में बड़ी यही सुरगे बना दी गई हैं। इसमें से सिम्सन दरें की १२६ मील लम्बी सुरंग दुनिया की सबसे बड़ी सुरग मिलन के पश्चिम में ट्यू रिन (Purn) नगर है जो इटली की दूसरा कारोबारी नगर तथा फ्रांस को जानेवाली रेल का प्रसिद्ध स्टेशन है। मिलन के रेशम के कारमाने और व्य रिन की शराय य जैतून प्रसिद्ध है। फ्लोरेन्स (Florence) पश्चिमी इटैली का सबसे सुन्दर नगर है। इसे फूलो का शहर कहते हैं। करारा में संग मरमर पत्थर निकलता है जिससे पदो मुन्दर मूर्तियां बनाई जाती हैं। वेनिस एड्रियाटिक सागर के किनारे पर स्थित है। प्राचीन काल में वेनिस बहुत प्रसिद्ध नगर था। यह ७२ द्वीपों पर बसा हुश्रा हे जा पुलो के द्वारा एक दूसरे से मिले नगर में सड़को के बदले नहरें है। इस कारण से वेनिस में कोई गाडी रग्बी नहीं दिखाई देती। लोग नावो में श्राते जाते हैं। ट्रीयस्ट (Trrest) जो पहले श्रास्ट्रिया के अधिकार में था, इटली का अब प्रसिद्ध बन्दरगाह है। विडिसी (Brindisi) यहाँ का दूसरा प्रसिद्ध अन्दरगाह है। हिन्दुम्लान से इंगलैंड तथा योरप के अन्य देशों को जानेवाली डाक इस बन्दर पर जहाजों से उतारकर रेलों द्वारा पहुँचाई जाती है। अपने नकशे में देखो इटली के पूर्वा समुद्र-तट के किनारे किनारे एक रेल उत्तर को गई है। इटैली के प्रायद्वीपी भाग के मध्य मे पहाड़ है और पूर्व तथा पश्चिम में संकरा समुद्री किनारे का मैदान है। एपिनाइन्स पर्वत
-
-
भूमध्यसागर के देश
(4pennine Mountains) जो मध्य में रीढ़ की हड्डी की भांति
पैला हुश्रा है ज्वालामुग्नी पर्पत है। नेपल्स के समीप विसूवियस
(Vesuvius) ज्यालामुखी पर्वत अत्यन्त प्रसिद्ध है। यह अब भी
प्रचलित है। इसके कारण यहीं भूडोल बहुत पाते है। और
प्रायद्वीप को हानि पहुँचाते है ।
यहाँ के लगभग सम्पूण निवासी प्रेती का उद्यम करते हे जो
मेदानों में भाति भाति के पलवाले पेड़ लगाते है और पहाडों पर
गाय, बर पार भेड घराते है। अंगूर और जेतून यही विशेपकर
होते है । इटैली के जतून का तेल दुनिया में प्रसिद्ध है। पश्चिमी
समुद्री किनारे के मैदान म पूर्वी किनारे की अपेक्षा अधिक जलवृष्टि
होती है और इस ओर के बन्दरगाह भी उत्तम है ।
इस शोर के
नगरों को नक्शे में देखो।
रोम (Rome), जो टाइबर नदी के किनारे समुद्र से कुछ दूर
हटकर घसा है, यहाँ की राजधानी है। इटैली के बादशाह व
सबसे बडे पाप यहीं रहते हैं। कोइ दो हजार वर्ष कि यह
नगर रोम के बहुत बड राज्य का केन्द्र था, जिसके महत्व के चिह्न
थब भी कहीं कहीं पाये जाते हैं।
उत्तर की ओर जेनोआ (Genoa) पार दक्षिण की ओर
नेपल्स (Naples) इटली के प्रसिद्ध बन्दरगाह और व्यापारिक
नगर है।
इटैली राज्य के बडे बडे द्वीप सिसिली और वार्डोनिया है ।
सिसिली अत्यन्त सुन्दर और उपजाऊ द्वीप है। भूमध्यसागर के द्वीपों
योरप का प्रारम्भिक भूगोल में ऐसा उपनाऊ तथा पदा कोई द्वीप नहीं है। इसको इन्ली से मेसिना (Strait of fessina) का जडसंयोजक अलग करता है। यहां से कुछ दूर इटना (Etna) प्रसिद्ध ज्वालामुखी पर्वत है जो श्रम भी प्रचलित है। यह द्वीप फलों के लिए यहुरा प्रसिद्ध है। हमरी राजधानी पलेरमा (Palermo) उत्तरी किनारे पर उत्तम यन्दरगाह भी है। यहीं से भौति भाति के फल विशेषकर नारगिया थधिकतर बाहर भेनी जाती हैं। साटनिया (Sardinia) द्वीप को कार्मिका से बोनी फेशियो का जलसयोजक (Strait of Bonilar no) अलग करता है। यह द्वीप पहाड़ी है इसलिए बहुत उपजाऊ नहीं है। इसकी प्रसिद्ध उपज यो तथा समुद्र से प्राप्त होती है। - ३-साइबीरिया मायद्वीप स्पेन (Spain) और पुर्तगाल (Portugal) से श्राइवीरियन प्रायद्वीप बनता है। इन देशों की प्राकृतिक दशाये सबसे भिन्न है। यह प्रायद्वीप लगभग चारे भोर समुद्र से घिरा है, और जिस घोर कि फ्रांस से मिला हुआ है वहाँ पिरेनीज़ पर्वत (Pyrennes Moun' tains) स्थित है। यह स्वाभाविक सीमा इतनी ऊँची तथा कर रीली पथरीली है कि स्पेन और फ्रांस के बीच जा रेल की लाइने धनी है वे इस पहाद के दोनों ओर किनारो पर होकर जाती हैं। यह प्राय द्वीप एक प्लेटो है। इसमें पूर्व से पश्चिम तक पर्वत श्रेणियाँ फैली हुई मूमध्यसागर के देश हैं। अपने नशे में प्रसिद्ध पहाइ सिपर्रा नेवादा, सिपर मैडी, और कट्रेलियन देखो। इनके किनारे किनारे समुद्री मैदान स्थित है। नफश में नदियों के मार्ग देखने से भूमि का माल विदित होगा। पहाडों के मध्य की उपजाउ और गम घाटियों में बहती हुइ पे मदिया पश्चिम की ओर समानान्तर पहकर एटलांटिक महासागर म गिरती wedia पिरेनीज की एक घाटी है। सबसे अधिक लम्बी नदियां ड्योरी (Duoro) और टेगस (Tagus) हैं। नकशे म उन बन्दरगाहों को देखो जो इन नदियों के मुहानों पर स्थित है। पूर्व की और यहनवाली पत्रो (Ebro) नदी है जो पिरनीज पर्वत के दक्षिण मे यहती है। ७ - योरप का प्रारम्भिर भूगोल तुमको भाइयीरियन प्रायद्वीप का श्राकार तथा यनावट भली मद्धि देश नेना चाहिए क्योंकि इसी पर यहाँ का जलवायु, अपज और विदा सियों के उधम सिर । यह प्रायद्वीप समुद्र से घिरा हुथा है इसलिए सम्भव है कि तुम यह विचार करो कि यहाँ जलष्टि भली भाति होती होगी, पार वाला मे किनारे के मैदानी तथा पहाडी ढालों पर जलवृष्टि अधिक होती में परन्तु जय इन पहादा पर गदल यरस चुकते है तो इनमें बन लगभग तनिक भी नहीं बचता इमलिए देश के भीतरी भाग में बहुत क्म जलवृष्टि होती है। यह भाग योरप में सबसे अधिक शुष्क फिर नदियाँ भी सिंचाई के लिए किसी काम की नहीं है, क्योंकि ये पसी गहरी घाटियों में रहती है कि वहाँ से जल का लाना बहुत कठिन है। भीतरी देश में सामान्य घास ही होती है जिसको यहाँ की मैरिना भे तथा यारियां चरती है और जो घासे अधिक कड़ी तथा रेशेदार होती है वे बाहर कागज बनाने के लिए भेजी जाती है, परन्तु दोनों देशों में समुद्री किनारे के प्रान्त उपजाउ हैं। इनमे गेहे पार फल अधिक होते हैं। यहां की नारगियों, नीबू और अगर प्रसिद्ध है स्पेन के पूर्वी समुद्र-तट पर इनके सुन्दर बाग, जो होवाटा कहलाते है. पाये जाते हैं। रेशम के कारसाना के लिए शहतूत के पेड भी लगा जाते है अगूर की मदिरा ग्नाते है और जैतून का तेल निका . ऊपर के वणन से प्रक्ट है कि इस प्रायद्वीप में अधिकतर लोग खेती का उद्यम करते हैं, परन्तु इसमें पाने * भूमध्यसागर के देश कोयला, लोहा, सीसा, पारा और तावा अधिक्ता से पाये जाते हैं। यहां के निवासी श्रालसी है। हिन्दुस्तान के रइस तथा धन पान् मनुष्यों की भांति यहाँ के भी रईस परिश्रम में काम करना अपना अपमान समझते हैं। इसलिए यहां पी ग्याने विदेशियो के हाथ में हैं। इनके खनिज पदार्थ थाहर भेज दिये जाते है, इसलिए देश में क्ला-कौशल के यहुत बड़े बड़े काग्यालय नहीं है। फिर पहादी देश हाने के कारण आने जाने के साधन तथा मार्ग भी कम है। रेले सम्पूर्ण देश में फैली हुई नहीं हैं और न अच्छी पक्की सड़के ही हैं, नदिया पहाड़ी है और इतने वेग से बहती है कि इनमें माल लाना और ले जाना बहुत ही कठिन है, परन्तु स्पेन और पुतगाल के निवासियों ने प्राचीन काल में अपने समीप के समुद्री से पूरा लाभ उठाया था और यहां के प्रसिद्ध तथा वीर मामियों ने अपने जीवन की चिन्ता न करके अनदेसे समुद्रों को पालदार जहाजो पर पार करके नये नये देशों का पता लगाया था। तुमने कोलम्बस, पास्को डि गामा तथा मासिरको पिजारो की वीरतापूर्ण समुद्र यात्राओं का हाल सुना होगा । सालहवीं शताब्दी में 'स्पैनिश श्रामदा' नामी जहाजी येडे ने इंगलैंड पर चढाई करके स्पेन की जलशक्ति का परिचय दिया था। स्पेन और पुर्तगाल के प्रसिद्ध व्यापारी नगर समुद्र सट ही पर स्थित हैं। अपने नकरों में इन देशों के प्रसिद्ध नगर तथा बन्दरगाहो की स्थिति ध्यान से देखे। ।
योरप का प्रारम्भिक भूगोल . यह क्ला स्पेन देश में ७ और पुर्तगाल में २ ऐसे नगर हैं जिनकी जनसंख्या एक लाख से अधिक है। इन नगरो को नकुशे में देखे।। मेडिड (Madrid) स्पेन की राजधानी है जो एक प्लेटो पर स्थित है। यह चूंकि प्रायद्वीप के मध्य में है इसी लिए रेला का केन्द्र है। इस नगर में यही एक बात उत्तम है नहीं तो इसका जलवायु बहुत ही बुरा है। पारसिलोना (Barcelona) क्षेत्रफल में मेड्रिड के तुल्य है। यह भू-मध्यसागर का बन्दरगाह है। कौशल के कारखाना के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध है। यद्यपि यह सानों के केन्द्र में स्थित नहीं है तो भी ऐसे स्थान पर है कि जहाँ सुगमता के साथ अन्य देशों से रुई, ऊन और कले पा सकती है। इसी लिए यहाँ क्लाकोशल का बहुत काम होता है। इसकी जन-संख्या मदास के बराबर है। सिविल (Seville) दक्षिण की ओर फलो के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की नारङ्गियाँ बहुत अच्छी होती हे। ग्रेनाडा दक्षिण के अंडालशिया भान्त का प्रसिद्ध नगर तथा प्राचीन काल में मूर (Moor) लोगों की राजधानी था। मूर लोगों ने स्पेन को जीत लिया था और अपना शासन जमाया था। लिसयन (Lisbon) और पोर्टो (Oporto) पुर्तगाल के दो घढे नगर हैं। दोनों धन्दरगाह इस कारण घहुत प्रसिद्ध है कि नदियों के मुहानों पर स्थित है। लिसयन पुर्तगाल की राजधानी है। जियाल्टर का बंदर अँगरेजी के अधिकार में है। यहाँ एक मजबूत किला है और एक घदी जलसेना 1
भूमध्यसागर के देश
रखती है जो भूमध्यसागर के इस पश्चिमी परयाजे की रस
करती है।
प्रश्न
-भूमध्यसागर के प्रदेश का हाल वर्णन परो धार जो कुछ
तुमको (ब)इमकी ऐतिहासिक पातों, (स) जलपायु, (ग) यनस्पति
का मुख्य वृत्तांत विदित हो यतायो
.
२-पलान प्रायद्वीप के धरातल का हाल वर्णन करो और
यताया कि इसमें कौन कौन से देश सम्मिलित है।
३-मेडिड (Afadrid), नेपल्स (Naples) धौर कुस्तुनतुनिया
(Constantinople) लगभग पक ही अक्षांश पर स्थित ह । इनके
जलवायु की तुलना करो।
४-पुस्तुनतुनिया (Constantinoplo), पेनिस (Venice),
रोम (Roms), जेनोग्रा (Genoa) औरयारसिलाना (Barcelona)
के प्रसिद्ध होने के कारण बतायो।
५-दक्षिणो योरप के तीनों प्रायद्वीप में से तुम किसमे रहना उत्तम
सममोगे और क्यों ?
६-'भू-मध्यसागर के जलवायु' से क्या मतलब समझते हो?
ऐसा जलवायु योरप के किन किन देशों में पाया जाता है ?
पारप का प्रारम्भिर भूगोल
अम्पास
१-दपिणी योरप के पाफे में सीनों प्रायद्वीपों की सीमाये, पहाद,
नदियाँ और प प नगर बनायो।
.
२-इटली (Italy) का रोग्रफल 1,१०,००० वर्गमील है धार
मा-मण्या ३,६०,००,०००१, म्पेन का पेपर १,९५,००० यामील
है, और जन-मरण्या २,००,००,०००है। दतों देशों की जा सण्या
प्रति वर्गमील, धार यदि सम्भव हो सो इनके अन्तर फा कारण
पसायो।
घ-पश्चिमी योरप के देश
फ्रास (France) एक धनी देश ह। इसकी सम्पत्ति का
बडा भारी कारण प्राकृतिक वस्तुएं है जो इसको भली भाति प्राप्त
नकशे पर भूगोल की इन बातो को ध्यान से देग्यो ।
स्थान-फ्रास में योरप का पश्चिमी भाग और एटलांटिक
महासागर और भूमध्यसागर दाना के किनारे सम्मिलित है।
इंगलेंड की भांति फ्रास के निवासियों ने भी अपन समीप के समुद्रों
से पूरा लाभ उठाया है और एक बहुत बडी जल सेना संगठित
की है। योरप का जो कुछ वर्णन तुम श्रश्च तक पढ़ चुके हो
उसकी सहायता से यह बताओ कि इस देश की स्थिति यहीं के
जलवायु और व्यापार दोनों के लिए क्यों लाभदायक है।
सीमा-
--स्थल की सीमा पर म्वाभाविक रुकावटें है।
नकशे में देखो कि फ्रांस को स्पेन से पिरेनीज पर्वत (Pyrenees),
इटैली और स्विटजरले ड से पाल्प्स पर्वत (Alps) और जर्मनी से
राइन नदी (Rhine) पृथक करती है। केवल उत्तर-पूर्व की ओर
बेलजियम के मार्ग पर कोई रोक नहीं है। बतायो इस स्वाभाविक
रोक के होन का प्रभाव योरप की इस बड़ी लड़ाई के प्रारम्भ मे क्या
हुधा। इसमें सन्देह नहीं कि इस ओर की सीमा व्यापार के लिए
, योरप का प्रारम्भिक भूगोल सदैव लाभदायक रही है परन्तु राजनैतिक विचार से पश्चिमी योरप की शाति में घाधा प्रतीत हुई है। धरातल-फ्रास के उत्तर का प्रान्त उत्तरी योरप के वडे मेदान का एक भाग है। यही कारण है कि मैकडों रेलो, नदियों पार नहरों के द्वारा माल बढो सुगमता से श्रा जा सकता है। नकशे में यहां के मेदानों की सीन (Stene), ल्वायर (Loure) और गारोन (Garonne) नदियों को देयो। ये नदियां एक दूसरे से नहरों के द्वारा मिली हुई हैं। फ्रास की नहरों का यह सम्बन्ध सबसे अच्छा समझा जाता है। केवल दक्षिण पूध मे बडे बडे पहाड़ है जिनम धनों और चरने के स्थानों की अधिकता है। रोन (Rhons) नदी फ्रास के पहाड़ों और पाल्पस के बीच एक संकरी घाटी में बहती है। चूंकि इसकी धारा तीन है इसलिए व्यापार के लिए लाभ दायक नहीं है। अपने नकशे में इस नदी पश्चिम की ओर श्रावनी का पठार और पूर्व की शोर पाल्पस पहाट के उन दरों को देसो जिनसे होकर इंटैली और म्बिट्जरलैंड को सुगम मार्ग बनाये गये है। फ्रांस का धरातल और जलवायु दोनो पेती के लिए उपयोगी है। यही कारण है कि यहां के निवासियों का अधिकतर उद्यम खेती इम अभी यता चुके है कि मास पर दो प्रकार के जलवायु का प्रभाव है। भू-मध्यमागर के विभाग में फल बहुता- यत से उत्पन्न होते है। अगर की मदिरा बनाई जाती है। अंतून मे मारसेली में तेल निकाला जाता है और उससे सावुन
पश्चिमी योरप के देश
TLANTI
Rolle, who
AN
Brussels
Breta
Nantes
Bay of
Biscay
Bandarts
Obong
Marcelles
Madrid
PORTUGA
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Barcelona
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fibroller
पश्चिमी योरप के देश
प मास के उत्तर । चुकन्दर, अलसी तम्बाकू होती है। से शहर योरप का प्रारम्भिक भूगोल यनाया जाता है। हिन्दुस्तान से भी बहुत सा तेलहन मारसेली, को भेजा जाता है। इसलिए वहाँ तेल और माउन के बहुत बड़े कारसाने चलते है। रेशम के कीटो के लिए शहतूत की खेती बहुत होती हे और लियो (Lyons) में इस रेशम के घडे बडे कारखाने हैं । यहाँ का रेशमी माल दुनिया में दूर दूर तक जाता है। और पश्चिम के भाग में जलवृष्टि अधिक होती है। यहाँ की उपज विशेषकर सीन और ल्वायर के मेदानों में गेहूँ, होती है। गैरोन की घाटी में कई प्रकार की रेशेदार फसलें और उत्तरी पूर्वी खानों के पास चुकन्दर श्रीर शराय बनाई जाती है। पश्चिम के उन पहाडी भागों पर जहाँ वर्षा की अधिकता रहती हे, घने जगल पाये जाते है। बहुत साने नहीं है, परन्तु देश के उत्तरी पूर्वी कोण में कोयले की बड़ी बड़ी साने है। ये साने उन्हीं सानों की पक्तियाँ है जिना एक भाग जमनी, बेलजियम, फास और ग्रेटब्रिटेन में फेला हुधा है। तुमको स्मरण रसना चाहिए कि कोयले के इस मैदान में लोहे की खानी के समीप योरप के बड़े पडे कला कौशल के कार्यालय हैं। फ्रास की कोयले की सानो के समीप एक रहा नगर लीले (Lille; है जहां रुई और ऊन का माल यनाया जाता पेरिस (Paris) फ्रांस की राजधानी है। यह सीन नदी के उस स्थान पर स्थित है जिसके सामने नदी के मध्य में एक द्वीप है। सम्भवतः प्रारम्भ में यह नगर इसी द्वीप पर बसा होगा, परन्तु आज क्ल यह नदी के दोनों ओर फैला हुआ है और योरप में सबसे अधिक . मास में पश्चिमी योरप के देश १०७ को देखो। - सुन्दर नगर समझा जाता है। हम बता चुके है कि यह फ्रास की रेलों तथा नहरी का केन्द्र है, इसलिए व्यापार की बड़ी मडी भी है। यही कारण है कि यह योरप का दूसरा सबसे बड़ा नगर है। पेरिस बहुत सी शान-शौकत की चीजो के बनाने का भी केन्द्र है, और समस्त योरप का प्रसिद्ध शिक्षा केन्द्र भो हे। नकशे पर सीन नदी के मुहाने पर हाघर (Havre) के अन्दरगाह व्यापार के विचार से यह धन्दरगाह मारसेली (Afarseille) से दूसरी श्रेणी पर है। इसके समीप का रुधन (Rouen) का बन्दर बडी उन्नति कर रहा हे एक और बड़ा बन्दरगाह गारोन नदी के मुहाने पर घोडौं (Bordeaux) है, जो मासोसी मदिरा के व्यापार का बड़ा भारी स्थान है। इंगलैंड और फ्रास में परस्पर बहुत व्यापार होता है, जो अधिस्तर कैले (Calars) और बोलोन (Boulogne) मे होता ह । इन दोनों नगरों से जहाज प्रति दिन इंगलैंड को प्राते जाते है। दचिणी समुद्र-सट के मदान रीविरा (Riviera) कहलाते है। इन पर बसे हुए छोटे छोटे नगर फ्रास में हवा साने के स्थान माने जाते हैं। यहां की सुन्दर और आरोग्यवर्द्धक धूप सेवन करने के लिए जाडे में योरप के अन्य देशा से भी सहस्रों मनुष्य भाते है भार यहाँ के जलवायु तथा समुद्र तट का प्रानन्द लूटते है। भूमध्यसागर में कार्सिका (Corsica) द्वीप झासवालों के अधिकार म है, परन्तु यह बहुत अधिक पहादी देश है इसलिए अधिक
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
लाभ का नहीं है। यहां के निवासी अधिकतर खेती करते हैं और
मछली पकड़ते हैं।
नेदरलैंड
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बेलजियम (Belgium) यह एक छोटा सा देश फ्रांस और
जर्मनी के बीच में स्थित है। इसी के उत्तर में दूसरा छोटा देश हालेड
है। ये दोनों मिलकर नेदरलेंट कहलाते है।
इन देशों के दक्षिणा
भाग को छोड़कर शेष सम्पूर्ण देश नीचा तथा चारस है। बेलजियम
में किसी क्सिी स्थान पर किनारा इतना नीचा है कि समुद्र के जन
को रोकने के लिए (ध बनाये गये हैं। धरातल चौरस होना
कारण बेलजियम अपनी सीमा के देशो के बीच सदा से एक घडे माग
का काम देता है और योरप के प्रसिद्ध लड़ाई के मैदानों में से
एक है।
देश के दक्षिणी भागो में आर्डेन पहाड (Ardennes
Mountuns) पैला हुआ है। यह एक नीचा पहाड़ी प्लेट
है जिस पर इधर उधर वन सडे है श्रार चौपायो और भेड़ों
रिए चरने के स्थान बने हुए है। इम भाग में कोई बड़ा नग
नहीं है। उत्तर के मैदान का भाग अत्यन्त उपजाऊ है, जिसमे गेहूँ
जौ, चुकन्दर तथा अलसी की सेती बहुत होती है।
परन्तु येलजियम अधिकतर ग्वाना तथा कला कौशल के लिए
प्रसिद्ध है। कोयले और लोहे की खाने अधिक है इसलिए लोड
.
पश्चिमी योरप के देश और कांच का सामान और सूती और उनी माल यहुत यनाया जाता है। यही कारण है कि यह देश योरप में सर देशे से अधिक घना प्रापाद है। लियेज (Inege) और घेण्ट (Ghent) इसक घडे व्यापारिक केन्द्र है। ऐण्टपर्प (Antrerp) स्केस्ट नदी पर एक प्रसिद्ध बन्दरगाह और अपने क्लेि के लिए प्रसिद्ध है। इसे अपने समीप की नहरों और रेलो से व्यापार में यड़ी सहायता मिलती है। ब्रसेल्स (Brussels) बेलजियम की राजधानी है जो देश के मध्य में स्थित है। स्थान के विचार से यह बहुत ही अच्छा हालैंड (Holland) इस देश का धरातल बेलजियम के धरातल से भी अधिक नीचा है, और समुद्र और राइन नदी की पाढ इस देश के बड़े घडे भागों को प्राय नष्ट करती रही है। नकृशे में जुइडर जी (Zunder Zee) सागर को देखो। यह सागर किसी समय में शुष्क था और द्वीपों की पक्ति, जिससे यह घिरा हुआ है, देश का किनारा था। हालैंड निवासियो ने, जिनको डच कहते है, अत्यन्त परिश्रम से नहरें सोदी है और उन दलदलों को जो प्राचीन समय से धीं, शुष्क कर दिया है और समुद्र की बाढ़ पार तूफान से पचने के लिए पुष्ट बधि बना लिये है । समुद्री किनारे के समीप ही राइन नदी का बडा डेल्टा (Rbint Delta) है जो उस नदी की लाइ हुई मिट्टी और दल्दुल से धन गया है। यह हालेंड का मुख्य प्राकृतिक भाग है। डेटा की बड़ी शाखा पर रादरडम (Rotterdam) स्थित है।
योरप का प्रारम्भिक भूगोल लगभग सम्पूर्ण हालैंड देश में खेती का उद्यम होता है। इसका कारण यह कि कारखानों के चलाने के लिए यहाँ साने नहीं है। इमकी भूमि अधिकतर मिट्टी और रेत से धनी हुई है इसलिए उपना नहीं है। परन्तु किसानों के परिश्रम से राई, श्रोट धार अलसी उत्पन्न हा जाती है। बहुत सी भूमि चरने के लिए परती पढ़ी है। दूध देनेवाले जानवर यर्हा के मुख्य धन है। मक्खन, पनीर और अण्डे बहुतायत से बाहर भेजे जाते है । इस देश के पढे लिख मनुष्य खेती का काम करते है और अपनी बुद्धि की सहायता से इस भूमि को भी उपजाऊ बना देते है जिसमे कुछ भी नहीं उत्पन हो सकता। इस देश के प्रत्येक भाग मे ग्वेती का काम सिखाने के स्कूल और कालेज है। इन स्कूलो में वे युवक भी जाडे के तीन महीने भर शिक्षा ग्रहण कर सकते है जो वर्ष के अन्य महीने में अपने खेतों में काम करते रहते है। फसलों की देस रेस समय पर कर सकने तथा अधिक पूँजी लगाकर उपयोगी मशीन को खेती की उन्नति के लिए प्रयोग कर सकने के लिए यहां के किसान श्रापम में मिलकर खती करने की कम्पनियाँ बना लेते है। यह समुद्री नहरों का देश है। ऐसा कोई मेदानी भाग न मिलेगा जिसमे छोटे छोटे जहाजों को मुल्क के अन्दर के नगरो तक लाने के लिए नहरे न बनाई गई हो। इन्हीं नहरो की जल शक्ति से यहां के किसान अपनी मशीने चलाते हैं। हवा की शक्ति से चलनेवाली छोटी छोटी मशीने प्राय प्रत्येक भाग म देखने में आयेंगी। यहां में ।
पश्चिमी पारपदेश
--
,
.
।
।
हारेंड के एक गांव का श्य
योरप का प्रारम्भिक भूगोल गांवों का दृश्य बड़ा मनोहर होता है। पीछे के चित्र में हालेंडर गाँव का दृश्य तथा विड मिल (हया-चाकी) देखो। हालैंड के निवासी बडे व्यापारी और मल्लाह भी है। इन लोगों ने दूर दूर के देशों तथा द्वीपों में उस समय थपना अधिकार जमाया था जब योरए की अन्य जातियां दूर दूर के बीपी तथा देशों का नाम सक न जानन थीं। तुमने इनके उपनिवेशा और राज्यों के विषय में एशिया के भूगोल में पढ़ा था। एशिया के पूर्वा द्वीपसमूह के बहुत से द्वीप भर भी हालेड ही के अधिकार में है। इस देश की समृद्धि का मुरय कारण यहीं के निवासियों की व्यापार-कुशलता तथा कृषि अनुराग है। हग (Haure) इस देश की राजधानी है। महाँ की नहरों का दृश्य अत्यन्त मनाहर है। आमसटरडम (Imsterdams) में हीरा योरप भर में अधिक मिलता है भार इसमें तथा राटडोम (Rotterdam) में जन संख्या अधिक है। श्रामसटरडम के शिरपी हीरा के काटने बाटन म बडे ही निपुण हैं। इस नगर में इस काम के प्रचलित होने का कारण यह है कि दक्षिणा अफ्रीका की बस्ती, जहाँ से हीरे पाते हैं, प्राचीन समय में हालैंड के अधिकार में थी। मश १-फ्रांस (France) की प्रसिद्ध बनिस्पति सम्बन्धी उपज (क) उत्तर में (स) दक्षिण में क्या क्या है ? और इनके कारण से किन किन वस्तुओं के कारखाने प्रचलित है और ये कारखाने कहाँ कहाँ स्थित है।
पश्चिमी योरप के दश
११३
२-हालड (Holland) के धरातल तथा निवासियों के उद्यम का
वृत्तान्त घणन करो। यतायो घरातल की बनावट का प्रभाव यहाँ के
निवासियों के उद्यम पर क्या पडा है?
३-पेलनियम (Belgium) यालो के बह रटे उद्यम क्या है ?
इन उद्यमों के यहां होने के भूगोल सम्बन्धी कारण बतायो।
४-नीचे के नगरों का स्थान पताया घार प्रत्येक पर एक संक्षेप
नोट लिया।
Calais, Lille Brussels, The Hague, Rotterdam
अभ्यास
इस प्रकरण के देशा के नगरा के नाम एक सामा खींचार लियो
पार नीचे लिम्ब शब्दों को उचित स्थान पर लिस दो.
नहरे, कोयले की सानें, शराय, रिविरा (Rivters), रेशम के
कारखाने, कांच का व्यवसाय, मसन, ढलुथा समुद्र तट और योरप का
रण सेय।
.
-
-
च-ब्रिटिश-द्वीपसमूह
पिछले पाठों में हम योरप के मुरय देशों का वर्णन करते बारे
श्रय हन योरप के पश्चिमी साम्राज्य ब्रिटिश-द्वीपसमूह का धन
करेंगे। यह उन वडे राज्यों का केन्द्र है जिनके अन्तर्गत हमारा देश
हिन्दुस्तान है।
इसी द्वीपसमूह को नक्शे में ध्यान से देखो। इसमें दो या
और कुछ छोटे छोटे द्वीपसमूह सम्मिलित है। इसमें सबसे बड़ा द्वीप
ग्रेट ब्रिटेन (Great Britin) है जो पूर्व में स्थित है। इस हार
में तीन देश सम्मिलित है। दक्षिण में इंगलैंड (England) जिममें
पश्चिम की भोर वेल्स (ITales) सम्मिलित है, उत्तर में स्काटला
(Scotland) और पश्चिम में आयरलैंड (Ireland) हे ।
येल्स और स्काटले ट मे मिलकर एक राज्य बना है जिसको
राज्य (United Kingdom) कहते है। इसके
राजराजे पर पञ्चम जार्ज है।
इस द्वीपसमूह के निवासियों को ब्रिटिश
कहते हैं। थायरलैंड (Ireland) को ब्रिटिश साम्राज्य के अन्य
उपनिवेशों (कनाडा और प्रास्टोलिया) की आँति घरेलू स्वराज्य मिल
गया है। अब यह द्वीप महाराज पञ्चम जाज की छत्रछाया में पारित
मीट (Free Statc) के नाम से प्रसिद्ध है।
M
ब्रिटिश द्वीपसमूह ११५ ब्रिटिश जाति इतनी बड़ी व्यापार कुशल किस प्रकार हो गई यह चात नकरी के देसने से भली भांति समझ में आ सकती है। (१) ग्रेट ब्रिटेन के चारों और समुद्र स्थित है। इसलिए यह म्वाभाविक पात है कि यहां के लोग अच्छे मल्लाह है थोर बहुत पहले से समुद्री यात्रा करते आये है। ब्रिटिश का समुद्री व्यापार दुनिया के सय देशो से घढा चढा है। यही कारण है कि इनकी समुद्री सेना आज दुनिया में सबसे अधिक घडी पोर शक्तिमान् हे और इनके समुद्री व्यापार की रक्षा भली भांति कर सस्ती है (२) बहुत से अच्छे व दरगाह है जहा व्या र का काम सुगमता से हो सकता है क्योंकि ये नदियों के चौड़े मुहाना पर, जिनमें ज्वार के समय अधिक पानी भर जाता है, बने हैं। उथले समुद्र और नदियों के मुख चौडे होने के कारण यहा के ब दरगाहों में बहुत ऊँचे ज्वार (Tides) पाते है । दक्षिण के बदरा पर ४ बार ज्वार पाते है । (३) ग्रेट ब्रिटेन द्वीपसमूह शीतोष्ण कटिबन्ध में स्थित है। इस लिए जलवायु परिश्रम करने के लिए अत्यन्त उपयोगी है। (४) ये द्वीपसमूह योरप के अन्य देशो की अपेक्षा अमेरिका से अधिक समीप है धार इनके पूर्व तथा दक्षिण पूर्व म योरप के अन्य व्यापारी देश है। यही कारण ह कि एटलाटिक महासागर से जितना व्यापार का मार जाता है उतना दुनिया में किसी और महासागर से होकर नहीं जाता। (५) इंगलैंड के अधीन बडे बडे विस्तृत उपनिवेश तथा राज्य हैं जिनसे यह पूर्ण अधिकार से व्यापार कर सकता है।
योरप का प्रारम्भिक भूगोल (६) इस देश के समीपवर्ती समुद्र एक गर्म जलधारा कारण नाई में भी नहीं जमते। गर्म जलधारा समीप के समुद्रों हा के जल का नहीं किन्तु ममीप के वायु-भइल को भी कुछ गर्म । - में सागर और समुद्री किनारा-ग्रेट ब्रिटी के सशिक्ट समुद्र घटुत कम गहरा हे अर्थात किसी स्थान पर गहराई ६०० फीट स अधिक नहीं है निससे यह विचार ठीक विदित होता है कि द्वीपसमूह किसी समय में मुख्य योरप से मिले रहे होगे। नकमा देसने से तुमको ज्ञात हा जायगा कि स्कोडिनविया के पहाड़ हुए स्काटलैंड में 'श्रा गये है श्रार उत्तरी योरप का मैदान बढ़ता हुश्रा इंगलैंड में चला गया है। इंगलेट के समुट-तट से कुछ दूर चलने पर समुद्र की गहराई चढ़ जाती है जिससे विदित होता है कि पह देश एक ऐसे उंचे पठार पर श्रावाद है जो अय समुद्र इबा हुश्रा है और उस पर ६०० फीट गहरा पानी भरा है। इसमें एक था लाभ यह है कि इंगलैंड के समीपवर्ती समुद्री में सूर्य की किरणे अधिक गहराई तक पहुँचती है और सेवार उत्पन्न कर देती है जिसको मछलियां साती हैं। इस कारण इंगलैंड समुद्र मलिया के घर था गये है। इन समुद्रों से पकड़ी हुई मलियो से इस देश को प्रतियप १५ करोड़ से अधिक रपया मिलता है। नकशे में उन सागरों के नाम देग्यो जो ग्रेट ब्रिटेन के किनारे पर स्थित है। उत्तरी सागर (North Sea) और इंगलिश चैनल - मिटिश द्वीपसमूह ११७ । . (Lnglish Chtnnel) जिनको डोघर काजलसयोजक (Start of Dorer) मिलाता है, ग्रेट ब्रिटेन को मुण्य योरप से पृथक करत हैं। आयरिश सागर (Irish Ser) धार सेंट जार्ज चैनल (St Gcorgo's Channel) ग्रेट ब्रिटेन को प्रापरलैंड में अन्नग करते है। नकशे से तुमको विदित हो जायगा कि पश्चिम की ओर एटलांटिक 1 महासागर के किनारे पूर्व की ओर के समुद्री किनारों से अधिर क्टे . हुहै। पश्चिमी किनारे नार्य के समुद्री किनारे से बहुत मिलते- - जुलते हैं। ये कटान देश के भीतर यहुत दूर तक घुम गये है, इस कारण देश का प्रत्येक भाग समुद्र के समीप हो गया है। ग्रेट ब्रिटेन के समुद्री किनारो में जो पढी यही यालिया है ये इस प्रकार स्थित है कि एक पूर्व में है तो दूसरी पश्चिम में ठीर उसके सम्मुस स्थित है। में इस प्रकार की साड़ियों के जोड़े को एक नहर मिलाती है, परन्तु यह देश पहाडी है इसी लिए समुदी नहरा । द्वारा प्रत्येक भाग में बहुत व्यापार नहीं होता। स्काटलैंड के दक्षिण म भी दो कटान एक दूसरे के सम्मुग्य स्थित है। इनम से पक जो पूर्व की ओर है फ्लाइड (Olydo) नदी के मुहाने से और दूसरा को पश्चिम की ओर है वह फोर्थ (Fonth) नदी के मुहान से घना है। ये दानों थत्यन्त लाभदायक है, क्योंकि ये ऐसे नीचे प्रान्त में बहती है जहाँ कोयले की बहुमूल्य खानें है, और लोहे के बडे बडे कारसाने हे। साइड नदी पर ग्लेसगो (Glasgon) और पोर्थ पर लीथ (Lenth) घड़े कामकाज के बन्दरगाह है। ग्लेसगी स्काटले ड का योरप का प्रारम्भिक भूगोल सबसे बड़ा नगर है। यहां लोहे धार रई के बडे बडे कारखाने हैं, और जहाज बनते हैं। लोथ स्काटले ड की राजधानी एडिनबरा (Edinburgh) का बन्दरगाह है। इंगलैंड में भी इन पड़ी साड़ियों के दो जोदे हे। नकशे में उत्तरी जोडे को उसके बन्दरगाह सहित देखो। इंगले ड के सूती प्रान्त का बन्दर लिवरपूल {Liste Pool), मरसी (Mersey) Tदी के मुहाने पर स्थित है। यहाँ कई मील तक डाक (Docks) ने है जिनमें बड़े से बड़े जहाज सुरक्षित रह सकते है। यह अधिकतर अमेरिका से व्यापार करता है। जहाना के श्राने-जाने के लिए लिवरपूल से मैनचेस्टर (Manchester ) तक एक नहर बनी हुई है जिसके किनारे १८ मील लम्बे पक्के प्लैटफाम या घाट धने हुए है । इन पर बहुत से जहाज विदेशों से लाइ हुई हई उतारते और यहां का बना हुश्रा कपडा लादकर जाते है । उत्तर की भोर हम्बर (Tumber) नदी के मुहाने पर हल (Hull) स्थित है। यही यास्टिक सागर के समीप के देशों की उपज भाती है। (Newcastle) इस श्रोर का दूसरा समुदी फाटक है और कोयला भेजने का सबसे बड़ा बन्दर है पादियों के दक्षिण की भोर का जोदा सेवन (Severn) नदी और टेम्स (Themes) नदी के चौडे मुहाना से बना है। संश्न नटी पर फारडिफ (Cardiff) का बन्दरगाह है भार टेम्स नदी पर लन्दन (London) स्थित है। यह ग्रेट बिटा की राजधानी और दुनिया में सबसे पटा नगर और सन्दरगाह है। प्लाईमाउथ (Plymouth) और साध्य हैम्पटन (Southampton) दक्षिण mu- Maugine निटिश द्वीपसमूह Fr . . लिवरपूल का धन्दर का दृश्य इस धन्दर म ज्वार की प्रत्येक दशा म बडे बडे जहाज लोहे के फाटकों (Tock gatus) के द्वारा पा सकते हैं।
१२० योरप का प्रारम्भिक भूगोल के फाटक है। इसके समीप पूर्वा समुद्र के ज्वार की लहर पश्चिमी उपसागर के ज्वार की लहर से दो घट याद ग्राती है। इस कारण माग्य हैम्पटन में दिन में चार बार चार पाते हैं और बडे बडे बहार श्रदर डाक में प्रा जाते है। इस देश के श्रय बन्दरगाहों को भी एक लाभ यह प्राप्त है। इनमे ज्वार (Tides) के समय यहुत सा पानी भर जाता है और मा बडे जहाज इन लहरो के साथ उन यन्दरों तक पहुँच जाते हैं जिनमें अधिक पानी नहीं रहता। यड यड फाटकों द्वारा पानी रोक दिश जाता है जिससे ज्यार के वापस जान पर भी जहाज बन्दर पर न्य रह सके। के सम्मुख श्रायरलैंड के बडे बडे अन्दरगाह उस किनारे पर स्थित है - ग्रेट ब्रिटेन के समीप है, जैसे डबलिन (Dublin) जो श्रापरतेंड राज्य (Irish Free State) की राजधानी है, लिवरपूल के सम्म स्थित है और वेलफास्ट (Belfast), जहाँ जहाज धनते हैं, ग्लास । इससे स्पष्ट प्रकट होता है कि श्रायरले ड का व्यापार पधिकतर ग्रेट ब्रिटेन से होता है। धरातल-नम्शे मे हल (Hull) र बिस्टल (Bristol) को देखा। इन दोना नगरों में से एक सीधी रेसा गिलेंड में होती हुई पूर्वी समुद्री किनारे तक पींची। इस रेया से ग्रेट ब्रिटेन के दो भाग हो जाएंगे। ये दोनों भाग एक दूसरे से सर्वथा भिन्न है। इस रेखा के उत्तर पश्चिम में पहा है, दक्षिण पूर्व की और की भूमि चौरस है। स्काटलैंड, येरस और उगलेंट का श्राधा भाग पहाडी है। स्काटलैंड निटिश द्वीपसमूह १२१ के पहाड (Highlands of Scotland) जो देश के उत्तर में स्थित है , हिन्दुस्तान के पहाड़ो स बहुत नीचे है। इनके दक्षिण में चिवियट हिल (Cheriot Hills) है। यहां के निवासी अधिकतर चौपाये पालते है । वेल्स के पहाड (IVelsh Mountains) भी इसी प्रकार के है। परन्तु घाटियर्या चौडी तथा बहुत उपजाऊ है । यहाँ खेती होती हे और नगर और गाँव भी अधिक बसे हुए हैं। इंगलैंड का सबसे बड़ा पहाड़ उत्तर की और पिनाइन पहाड (Pennine Chun) है, जो रीढ़ की हड्डी की भांति स्थित है। यह बहुत ऊँचा नहीं है। अस्तु यह पूर्व तथा पश्चिम में बहनेवाली ननिया के येमिन को अलग करता है। अपने नकरो में उन नदियों को दो जो इस श्रेणी के पूर्व तथा पश्चिम की ढालों से निकलकर समुद्र में चौडे मुहाने बनाती है। देवो इस देश की नदियाँ पहाडी भागों पर बहती है। इसलिए तुम्हारे देश की मैदानी नदियों की भांति ये बहुत सी मिट्टी अपने साथ नहीं रहा यही कारण है कि इनके मुहानों पर कोई बड़े डेल्टे नहीं नजर पाते और ये जहाज चलाने के लिए खुली रहती है। इनके चैाडे मुहाने पर समुद्र की ऊंची-ऊंची लहरे, जि ह ज्यार कहते है, पाती रहती है और वह मिट्टी भी यहा ले जाती है जो सघ नदियां अपने साथ बहा लाती है । इस पहाड के पश्चिम में झीलों का प्रान्त (Lahe District) है जा अत्यन्त मनाहर है। यहीं मनोरञ्जनाथ प्राय लोग जाते है । यदि तुम इंगलैंड के गांवों की सेर करने जानो तो रेलो के पास च उचे टीले लाती। तथा ।
मध्य के मैदान
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
देखोगे। कहीं कही तो उंची उंची पहाड़ियों के टीक नीचे अपना
सेत है।
शायरले ड का धरातल ग्रेट निटन के धरातल से मर्पया मित
है। अपने नकशे में दोवो हमके मन में एक मैदान है और ममुरी
किनारे के रायर बरार नीरे पहा स्थित है।
का कुछ भाग दलदलो है। इन दलदली को 'नाग' (Dog) महते
है। यह खेती के योग्य नहीं है। यहीं थायरले ड की मयमे'
बडी नदी शेनन (Shannon) रहती है जो पश्चिमी किनारे पर
समुद्र में गिरती है।
जलवायु-जो कुछ तुमन श्रन तर पड़ा है उसमे ग्रेट मिटेन के
जलवायु का अनुमान कर सस्त हो।
यहाँ के जलवायु के भाई धार
सामान्य होने का कारण प्रथम पटलाटिक का गरम जल है, फिर
गर्म दक्षिण पश्चिमी हवाये और फिर देश के सम्पूर्ण भागों का
समुद्र
के निकट का होना है। चूंकि यहाँ अधिकतर हनाये
पश्चिम से थाती है इमरिए एटलाटिक महासागर से प्रार्द्रता
लाती है। इसलिए प्रायरले ड में ग्रेट ब्रिटेन की अपेक्षा तथा ग्रेट ब्रिटेन
के पश्चिमी भाग में पूर्वी भाग की अपेक्षा अधिक जल्वृष्टि होती
है। जाड़े की प्रतु में अधिकतर हिम पढ़ती हे पार तालाचा
तथा झीलों का जल ऊपर से जम जाता है,
के धन्दरगाह लोगो के साधारण कामकाज के लिए खुले
रहते हैं। इनमें हिम नही जमती और न यहाँ कठिन शीत ही
पडती है।
परन्तु निटिश
ग्रिटिश द्वीपसन
१२३
प्रेट प्रिटेन भार धायरलेंड से भिर भिर भागो के जलवायु पी
विभिरता पर अशा का अधिर प्रभार ही क्योंकि इस देश की
मयमे घड़ी लम्बाइ उत्तर से दक्षिण की भार ३० अ० से ० तक
लगभग ६०० मील है। इस देश के पहाड भी बहुत 37 मी।।
यहाँ की मममे भी घाटी मेन पिस (Ben Veris) ४३ हजार
पीट से कम उंची है। यदि इस देश के भिल भि भागों का जलवायु
भिन्न प्रकार का है तो इसका मुख्य कारण, पा की विभिनता तथा
हवानों का राप है।
चूंकि इस देश पर यत्नवाली वाय प्राय पश्चिम के समुद्र पर
हार थाती है और पहाड़ों की श्रेणियाँ पश्चिम ही की पोर उत्तर से
दक्षिण को फैली हुई है, इसलिए पश्चिमी भागा पर अधिक या हाती
है। पूर्व की योर के मैदानों पर इतनी या नहीं होती कि भूमि पर
अच्छी ती हो सके।
वर्षा का प्रभाव जलवायु पर यह हाता है कि पश्चिमी समुद्र-तट
के भागों म सम जलवायु रहता है, परन्तु पूर के भाग बहुत टडे हो
जाते ह।
जर उत्तर पूर्व की टडी श्राधिया या जाती ह तो सर्दा और
भी अधिक बढ़ जाती है।
इस देश के समीप के समुद्री के गमे जल
का भी प्रभाव यहाँ के जलवायु पर पड़ता है । ग्लासगो (Glasgon)
और मास्को लगभग एक ही प्रज्ञाश पर है, परन्तु ग्लासगो मास्को की
अपेक्षा जाड म कुछ गम पार गर्मा मे कुछ ठडा रहता है।
मे वसंत ऋतु तथा शरद् ऋतु (Autumn) धीरे धीरे श्राती है, परन्तु
मास्को मे फार ऋतु परिवतन होता है।
-
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ग्लासगा
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Under 500
40 kw
1040
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28 under
THE BRITISN ISLES RELIEF
THE BRITISH ISLES ANNUAL RAINFALL
मिरिश द्वीपसमूह
है
जाडे की ऋतु इंगलेंट के प्रत्येक भाग में लम्बी होती है और
गर्मी की ऋतु छोटी तथा हलकी होती है। जाड़े में दोपहर पो सूरय
लाभग १५३° का काण वनाता है, अथात् अाकाश में उस ग्धा पर
दिपाई पड़ता है जिस स्थान में तुम्हारे देश में - पजे दिन को दिसाई
पड़ता । गर्मी की दोपहरी म भी सूय्य कभी सर पर धमक्ता हुथा
नहीं मालूम पड़ता परन्तु दिन 1 घटे सर का होता है। टीम
हमी तरह जाड की रात 1 घंटे तक की होती है। गर्मा में सूर्य के
दब जाने के याद रथजे तक इतना प्रकाश रहता है कि तुम पढ़ सकते
हा, परन्तु जाउ म ४ बजे शाम हो जाती है। जाष्ट्र में प्राय एक दो
हफ्ते मैदान पर थर्प जम जाती है। नदियाँ थार झीलें
उपर उपर जम जाती है, पहाडो पर तो साल भर यर्फ जमी
रहती है। तुम्हारे देश की तरह यहाँ वर्षा की कोई सास पातु नहीं
होती। यहाँ वर्ष के प्रत्येर महीने में कुछ न कुछ पानी
• करता है। मार्च और अप्रैल में एक ही दिन धन
चपा, सूय्य की तेज किरणे देखी जा सकती है।
कभी कभी पानी की जगह पर धर्फ परसती है
घड नगरा की सड़को पर कभी कभी पीट मोटी
'म जाती है। स्कूल के लड़के, कामकाजी
सय पशे के मनुष्य छुट्टियों में
। श्रानन्ट समझते है। ऐसे
। उद्यमो का अनुमान
के लिए अत्यन्त
Н He ghlinsunt
retos
cols
Under so soolugog Over son
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26 unde
Or
THE 6TITISH ISLES RELICE
THE BRITISH ISLES ANNUAL RANTALL
ब्रिटिश द्वीपसमूह
१२५
जाइ की ऋतु इंगलैंड के प्रत्येक भाग में लम्बी होती ह भार
गर्मी की ऋतु छोटी तथा हलकी होती है। जाडे म दोपहर को सूरम
लगभग १५३° का कोण बनाता है, अर्थात् प्रामाश में उस स्थान पर
दिसाइ पडता है जिस स्थान में तुम्हारे देश में ८ बजे दिन को दिखाई
पड़ता है। गर्मी की दापहरी म भी सूय्य कभी सर पर चमक्ता हुश्रा
नहीं मालूम पडता परन्तु दिन ८ घटे तक का हाता है। ठीक
इसी तरह जाडे की रात 15 घंटे तक की हाती है।
गर्मी में सुथ्य के
इय जान के बाद ८ बजे तक इतना प्रकाश रहता है कि तुम पढ सस्ते
हो, परन्तु जाई म ४ बजे शाम हो जाती है। जाटे में प्राय एक दो
हफ्ते मेदानो पर बर्फ जम जाती है। नदियाँ पोर झीलें
उपर ऊपर जम जाती है, पहाडा पर तो साल भर बर्फ जमी
रहती है। तुम्हारे देश की तरह यहीं वर्षा की कोई सास तु नहीं
होती। यहाँ वर्ष के प्रत्येक महीने में कुछ न कुछ पानी
बरसा करता है। मार्च और अप्रैर मे एर ही दिन घने
बादल, वर्षा, सूर्य की तेज किरणे देसी जा सकती है।
जाडे में कभी कभी पानी की पर घर्फ घरमती है
बडे बडे नगरों की सड़को पर कभी कभी पीट मोटी
तह
बर्फ की जम जाती है। स्कूलो के लड़के, कामकाजी
थादमी, काक लगभग सष पेशे के मनुष्य छुट्टियों म
धर्फ पर फिसलना एर प्रकार का प्रानन्द समझते है। ऐसे
जलवायु में रहनेवाले मनुष्यों के स्वभाव तथा उद्यमो का अनुमान
करना हिन्दुस्तान ऐसे गर्म देश में रहनेवालों के लिए अत्यन्त
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जगह
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ग्रिटिश ईपमम्रह कठिन है। प्रायो हम तुम्ह इस देश के उद्यम विस्तारपूर यताये । निवासियों के उधम-(१)पेती-उपर ये जलवायु के वर्णन और धरातल की यशावट को पड़पर तुम यता सकते हो कि किन भागों में खेती का उधम परनेवाले लोग रहते होंगे। पहाड़ों पर धार जिा प्रान्तों में जलवृष्टि अधिक होती है, उत्तम चरने के ग्यान है और जिन भागों में धूप अधिक पडती है और जो स्थान निवाइ पर स्थिन हैं यहां तो बहुत होती है। ऐसा कोई भाग न मिलेगा जहाँ अच्छी घरागाह न हो। पछुआ हवाओं से पर्ष भर चपा होते रहने के कारण इस द्वीप का लगभग प्रत्येक भाग हरा भरा रहता है। इसी कारण इस द्वीप को 'हरे हीरे का देश' (Emerald Isles) कहते हैं। श्रायरले ड का लगभग प्रत्येक भाग सेतिहर प्रदेश है। यहाँ गेहूँ तथा अन्य अनाज और पाल पोर अलसी की पहुस उपज होती है। चरन के स्थानों में, जो प्राय पश्चिमी पहाड़ी भागों पर अधिकता से है, लोग चौपाये तया भेड पालते हैं। उत्तर और पश्चिम की धार भेट ब्रिटेन के पहाड़ो पर भी रोग अधिस्तर परवाह है, परन्तु दक्षिण पूर्व की भोर के मैदान और नदियों की घाटियों में गेह , जो और पोट धोया जाता है । देश की अावश्यक्ता के लिए पर्याप्त अनाज उत्पन्न नहीं होता। इसी लिए बहुत सा थनाज बाहर से मँगाया जाता है। यहाँ के चतुर तथा पढे लिखे क्सिान वैज्ञानिक ढङ्ग से साद डालकर यहाँ के सेतो से बहुत फसले पैदा करते हैं। इस देश की एक एकड़ भूमि पर जितना गेहूँ
१३९
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घिटिश दीपसमूह पी कोयले की साने
१२३ ब्रिटिश द्वीपसमूह पैदा किया जाता है उतना कनाडा या हिन्दुस्तान में भी नहीं पैदा होता। यदि इस देश में अच्छे खेती की कमी न होती और वर्षा मैदाना पर भी काफी होती तो यहां के किसान संसार के सब सेतिहर प्रदेशों से अधिक श्रल पेदा कर सकते थे । (२) मछली पकडना- चूंकि ग्रेट ब्रिटेन के सन्निकट के द्वीप कम गहरे है और जल भी उडा है इसलिए यह सागर दुनिया में मछली पकड़ने के बड स्थानो में समझे जाते है। उत्तर सागर के मध्य भाग मे, जिसे डागरक कहते है, यह काम सबसे अधिक होता है। यहाँ सहस्रा नावे मछली पकड़ने में लगी हुई दिखाई देती हैं। निम्जवी (Grimsby) इंग्लैंड के पूर्वी किनारे पर मछलियों के व्यापार का बड़ा भारी स्थान है। यहाँ के निवा- सियों को मछलियों से प्रतिवर्ष १५ करोड रपये की आमदनी होती है। (३) सान सोदना-ग्रेट ब्रिटेन के मुख्य सनिज पदार्थ कोयला और लोहा है। नक्शे में कोयले की साना के क्षेत्र- पल को ध्यानपूर्वक देखो। यह मैदान मेट ब्रिटेन में इस रेसा के पश्चिम और उत्तर और स्थित है जो तुमने मैदाना को पहाड से अलग करने के लिए खींची थी। किसी किमी स्थान में कोयले की सानो के समीप ही उत्तम लोहे की खाने भी हैं। इनसे लोहा बहुत निकाला जाता है। परन्तु पाने इतनी अधिक प्रसिद्ध नहीं सच तो यह है कि कला-कौशल के विचार से पान दुनिया में इग्लैंड की जो प्रतिष्ठा है यह सारी प्रतिष्ठा इस कोयले और लोहे के पृष्ठ १२८ ३ योरप का प्रारम्भिक भूगोल सहारे और यहाँ के निवासियों की बुद्धि और परिश्रम के कारण ही प्राप्त हुए है। भाग्यवश यहाँ की लोहे की साना के समीप चूना भी पाया जाता है जो लोहे को साफ करने में बड़ी सहायता करता । बहुत मा कोयला बाहर भी भेजा जाता है। इंग्लेड के उत्तर पूर्व में न्यूकेसिल (Newcastle) और दक्षिणी संस में कारडिफ (Cardifi) कोयले के प्रसिद्ध धन्दर- । गाह है। (४) कला कौशल-तुम पढ सुके कि ग्रेट ब्रिटेन क्ला कौशल के विचार से दुनिया में उत्तम श्रेणी का देश है। यहाँ इतने प्रकार की शिल्प कलाये होती है कि तुम प्रसिद्ध शिल्प कलाओं के नाम स्मरण कर सकते हो। ये कारमाने अधिक्तर कोयले की साना के समीप है और यही लगभग सम्पूर्ण प्रसिद्ध नगर स्थित है (क) लोहे का माल-ग्ले उ के मध्य में कोयले की खाना के मैदान को “काला देश" (Black Country) कहते है । यदि तुम कभी इस प्रान्त में यात्रा करो तो तुम्हें बहुत सी ऊँची चिमनिया और लोहे की भट्टियों में से धुएँ के यादल निकलते हुए दिखाई देगे। यह वह प्रान्त है जहाँ लोहे का माल धिकना से बनाया जाता है। वरमिघम (Bumingham) इस माल के बनाये जाने का केन्द्र है और इसके ससिक्ट कई नगरी में यह काम होता है । पर- मिधम नगर के कारमाना में मुई से लेकर बड़ी से बड़ी मशीने , मोटर पार पन्दू तथा तोपे तक डाली जाती है। ग्लैसगो (Glasgor)
ग्रिटिश द्वीपसमूह
म
'काले देश" का एक दृश्य
योरप का प्रारम्मिर भूगोल में, जो रोटले ड में है, लोहा म्वच्छ किया जाता है। शेफील्ड (Sheffield), जो यार्कशायर की कोयले की साना के समीप है. पोलाद के काम के लिए मसिद्ध है। यहाँ की 'फटलरी' या चाक , केची, चेन, कोल व पिन इत्यादि प्रसिद्ध है। (ब) रई का माल यह लपेशायर की कोयले की सानो के निकट पाया जाता है। तुम पहले पढ चुके हो कि लिवरपूल और मेनचस्टर रई के यद धन्दरगाह है। यही कारण है कि यहीं रई के घद पडे फारगाने हैं। यहाँ कारखानों के प्रचलित होने का एक और कारण यह भी है कि यहां के भाई जलवायु के कारण रई का महीन सूत कातने में टूटता नहीं। यहीं फपडे के कारमानों को एक चौर सुविधा यह है कि मैनचेस्टर के समीपवर्ता देश में ये लोग अधिक संख्या में बस गये ह जो कई पीढ़ियों से सूत कातो व धुनन का काम करते पाये है । लकेशायर में यो तो कई घडे यढे नगर रई के कार ग्याने के लिए प्रसिद्ध है परन्तु इनमे मैनचेस्टर (Manchester) सबसे अधिक प्रसिद्ध है। (ग) ऊनी माल-यह पीनाइन की श्रेणी के पूर्व में यार्कशायर की कोयले की खानो के उपर बनाया जाता है। पहले पहल उनी माल के कार्यालय यहाँ इस कारण से प्रचलित हुए कि लोग मैदान के उत्तरी कोण में भेड़े पाला करते थे, परन्तु आज कल बहुत सा उन भास्ट्रेलिया और दपिण अमेरिका से लिवरपूल और हल के बन्दरगाहों है। लीड्ज (Leeds) और डफोर्ड (Bradfond) इस माल के बडे व्यापारिक स्थान है। में भाता ब्रिटिश द्वीपसमूह (घ) सन का माल-यह कोटलैंड में फोथ की कायले की खानों के समीप, जहाँ थास्टिक सागर के मार्ग द्वारा पहुत सा सन शाता हे, बनाया जाता है। यहाँ कलकत्ते से पाये हुए जूट की वस्तुएँ भी यनाई जाती है । डडी (Dundre) म इसके घडे बडे कार्यालय है। श्रायरलैंड के उत्तर म जो अलसी चोइ जाती है उससे यहां के बहुत से कारखानों में 'लिनन' क्पदा बनाया जाता है। इन कारखाना के लिए इंगलेंड और स्काटलैंड से कोयला जाता है। वेलफास्ट (Belfast) में इसका कारखाना दुनिया में प्रसिद्ध है। पायग्लेंड के उत्तर का प्रान्त जो अल्स्टर (Ulster) कहलाता हे 'लिनेन' क कारसाने के लिए प्रसिद्ध है। (ट) जहाज पनाना-ब्रिटिश द्वीपसमूह में जहाा पहुत बनते है। जो जहाज निटिश के बन्दरगाहो में बनते है वे दुनिया में सबसे अच्छे समझे जाते हैं। फाइड नदी पर ग्लेसगो (Glasgow) में, राइन नदी पर न्यूकेसिल (Newcastle) में, टेम्ज नदी पर लन्दन (London) में, मरसी नदी पर लिवरपूल (Liverpool) में और प्रायरलैंड के बेलफास्ट (Belfast) में जहाज बान के बडे बडे कारखान हा . (च) इन द्वीपों की कई और वस्तुएँ भी प्रसिद्ध हैं जैसे भांति भांति की कलें, रेशमी माल, मिट्टी के बर्तन, चमडा, फागज इत्यादि। श्रावादी तथा घडे नगर--पिछली कक्षाओं में जहाँ कहीं हमने थापादी का वणन किया है वही यह पताते थाये है कि लोग योरप का प्रारम्भिक भूगोल । उन्हीं भागी म रहना अधिक पसेर करते हैं (१) जहाँ जलवायु अच्छा होता है, (२) श्राने जान क सुगम मार्ग होते हैं, (३) वेती का सुभीता देता है, (५) कला कौशल के लिए खेती तथा खाने से कच्चा माल कम सर्च में सरलता से प्राप्त हो जाता है। तुम पपन देश हिन्दुस्तान में धनी अायादी उन भागों में पायोगे जर्ग सती का सुभीता है। तुमने अपने देश के उन भागों में भी धनी भावादी तथा घडे यडे नगर देख ये जी कोयले थोर लोहे की रवाने है। इंग्लैंड के मनुष्यों के व्यवसाय के वर्णन से तुम्हें यह विदित हा गया होगा कि इस देश के अधिकतर निवासी हमारे देश के निवासिया की भांति भएनी जीविका निर्वाह के लिए खेती की उपज पर नहीं निर्भर रहते, किन्तु सानों से निकाले हुए कच्चे माल तथा विदेशों स लाये हुए कच्चे माल को अपनी बुद्धि से सुन्दर प्रस्तुओं के रूप में बदलकर अपनी जीविका कमाते हैं। यही कारण है कि इस देश म धनी श्राबादी सानां में अभी हम तुमको बता चुके ह कि इन खानों के पास ब्रिटिश-द्वीपों के न घडे कारोबारी नगर यस गये है। इस देश के मैदानों पर भी तुम अपने देश की भाति गांव की संख्या अधिक न पायोगे। ब्रिटिश द्वीपों के प्राकृतिक नकशे तथा वर्षा के विन्यासवाले नक्शे का मिलान करो तो तुम इसका कारण सरलता में समझ जायोगे। देखो इन द्वीपों के पश्चिमी भाग पहाटी है। इन भागी म उप- जाउ मिट्टी के खेत नहीं है, पर तु इस ओर पलुया हवायें बहुत ज्यादा पानी बरसाती है। पूर की अोर समतल मैदान पास यही बहुत मिरिश द्वीपसमूह खेत यन सकते है, परन्तु इस और वर्षा यहुत कम होती है। इसलिए पती बहुत कम हो सकती है। मती ये कम होन का एक चोर कारण भी है जिसको मुम जाणतामूलक लकीरोपाल नकश (Isothermal map) को देग्यवर मालूम कर सकते हो। घिटिश द्वीपों में वर्ष के बहुत कम महीनों में पमलों के पका यी पाप्त गर्मी पड़ती है। की पातु यहुत कड़ी और बहुन लम्बी होती है और प्राकाश प्राय प्रत्येक महीने में विशेषकर जाडे में यादलों से घिरा रहता है। ऐसी दशा में खेती पटुत कम हो सकती है। सुम जाते हो कि छोटे छोटे गांव सेतो ही के पास होते है। विटिश द्वीपों की शायादी के नफरो की उसके प्राकृतिक नक्शे तया सनिज पदार्थवाले नक्शे से सुलना करो तो तुम्हें विदित होगा कि- (1) जा भाग पहाड़ी है ये बिररे पापाद है। (२) जिन भागो में कोयले और लोहे की सार्ने है वे घने श्रापाद है। (३) समुद्र सर पर सुरक्षित कटाना (Inlets) या गहरी इस्ट- अरी (Estuarnes) के समीप बड बडे बन्दरगाह तथा धन श्रागद नगर हैं। (४) पूर्व के मैदाना में भी छोटे छोटे गाव बहुत कम है भार ये माग भी बिररे यानाद है । उपरोक्त बातो के कारण निर्णय करो और खनिज पदार्थों तथा श्रयादी के विन्यास के बीच में सम्बन्ध मताभो। --- योरप का प्रारम्भिक भूगोल कारणों के चयन में तुम ग्रेट ब्रिटेन भार प्रायरलैंड के कई यडे रहे नगरों के नाम पढ़ चुके हो। इनके अतिरिक और भी बहुत इन मरके नाम स्मरण रसना तुम्हारे लिए यहुत कठिन है। इस देश में १०० से अधिक ऐसे नगर है जिनकी जनसंख्या प्राधे लाख से भी अधिक है। हिन्दुस्तान में भी ऐसे नगर ८० के नगर - । लगभग ह। ग्रिटिश द्वीपों के बई नगरों में कुछ (१) राजधानियाँ (Oap1- tils), (२) बढे यन्दरगाह, (३) व्यापारी नगर तथा (8) कुछ शिक्षा के केन्द्र प्रथना ऐतिहासिक स्थान है। प्रथम श्रेणी के नगर लन्दन (London), एडिनयरा (Dain burgh), उधलिन (Dubin) है। इन नगरों में प्रसिद्ध विश्व विद्यालय (Universities) भी हैं। प्राक्सफर्ड (Oxford) बार कम्ग्रिज (Cambridge) भी अपने विश्वविद्यालया के लिए प्रसिद्ध । इन नगरों में ५०० वर्ष के पुराने कालेज (Colleges) है। इस देश के अन्दरगाहों तथा व्यापारी और कारोयारी नगरों का वर्णन तुम पहले ही पा चुके हो। लन्दन दुनिया में सबसे बडा नगर है और ग्रिटिश-राज्य की राजधानी है। यह और नगरों की भांति कोयले की सानी के कारण नहीं, यरन इस कारण से प्रसिद्ध है कि यह नगर सदी के मुहाने पर बसा है जो मुख्य योरप स सयसे अधिक निस्ट है, अतएव सहस्रों वर्ष से यह योरप से व्यापार कर रहा है। लन्दन की जन संख्या प्राज कल १० लाख है और सन्निकट के भागों को मिलाकर ७३ लाख है, ।
मिशिपसमा पनि मार देगा ये गप पाट नगर थारो पा यम्पा म गार गुना सका है। सपा में बहुत ग मानाराम के पायांलग, मानों के पड़े पर गोदाम पार पार की कोठिया है। यह दुनिया क दाम-पाग र र मिटिश-भाग्य का मुख्य स्पान है। पदि तुमा पापा पम्पई देपा है गो गुम हम पात का अनुमान कर मोहोवि लपन रिम प्रसार का शहर होगा। यह सारी दुनिया का शहर है, पारि भूमण्डल पा पमा यो दश न मिलेगा नहों के मनुष्य इस नगर म न दगे जा सके । लन्दा नगर की पिशात सदरे, सारे किनारं पकी हुई मुममित दूकान तथा पर या महत, सदरों पर मोटरों भार 'मामनी पम' पी पतियां सन्दाकी सगृति तथा उसति यताती है। इसने पर शहर में ०३ साप की जनगण्या के रहन के लिए भूमि पर्याप्त नहीं है। पफ माग मे दूसरे भाग को जाना मरल काम नहीं है। मोटर या रेल द्वारा ही लोग एक पार से दूसरी थोर के मुष्ठा को पाते जाते है। सड़कों पर इतनी भीड़ रहती है कि इनके हिसारे किनारे रेग्ये लाहो नहीं पनाई जा सकती। इसलिए सुरगे (Tunnels) पनाकर मदको और मकानों की कौन कहे टेम्स नदी के नीचे से रेलवे लाइने पनाई गई है। ये रेले बिजली की शनि से चलती है ताकि कोयले के धुर्य से मुरगों की हया गदी न हो। इनके स्टेशनों तक पहुँचने के लिए लिफ्ट (Lift) लगे हुए है निन पर धैठकर सुम कई फीट गहरी सुरग में उतरकर इन रेलों पर १३८ योरप का प्रारम्भिक भूगोल शहर के एक भाग में दूसरे भाग तक यात्रा कर सक्ते हो। इन रेलों को 'ह पेनी टय ग' (Tuo Penny Tube) कहते है क्योकि एक ग्टेशन स दूसरे स्टेशन तक जाने या थाने का किराया दो पेनी है । ऐसी गाड़ियाँ स्टेशनों पर प्रत्येक पांच मिनट के बाद मिल सकती है। हम असा चुके हैं कि मिटिश द्वीपों पर पछुपा हवायें चला करती है। खन्दन ऐसे कारोबारी नगर में यह अत्यन्त सावश्यक है कि कारमानों का प्रान्त शहर के पश्चिम की ओर न बनाया जाय ताकि उनकी चिमरिया से निकला हुश्रा धुर्था पछुना हवानों के साथ पूर्व के भाग में था मके। श्रतण्य लन्दन नगर का कारोगारी या कार खानवाला भाग पूरे, उत्तर और दक्षिण की ओर है। इसे ईस्ट एट' (East-End) कहते है। यहाँ कारखानों में काम करनेवाले श्रम- जीवियो के रहने के स्थान, कारखाने, छोटे छोटे होटेल तथा वाइस्कोप और थियेटर हाल है जिनमें यहाँ के मजदूर भी शाम को अपने श्रामोद प्रमोद के लिए जाते है। धनपतियों तथा कुरों के महल तथा अखिों को चकाचौध कर देनेपाली सुन्दर दूकाने , सरकारी दफर, राजभवन, पार्लियामेंट का भवन और सुन्दर बाग या पार्क (East) पश्चिमी भाग में हैं। इसे (Test-End) 'वेस्ट एउ' कहते है। इस ओर के मध्य भाग की विशाल सड़के ऐसफाल्ट (Asphalt), जो पत्थर की भांति झदा तार- कोल है, की बनाई जाती है, ताकि मोटरों तथा गादियों के चलने से धूल न उडे।
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ग्रिटिश द्वीपसमूह
९३६
उपर के वर्णन से यह न समझ लेना चाहिए कि लन्दा
के पूर्वी भाग की ओर कोई सौन्दर्य नहीं है। टेम्म (Thumes)
नदी के तट का दृश्य अत्यन्त मनाहर तथा सुहावना है।
नदी के किनारे डाफ (Docks) हैं। इनम ज्वार के साथ
rape
PAN
Aama
D
gawyenar
लन्दन का पुल
दिन में दो पार बढे पडे जहाज शहर के अन्दर तक चले था
सक्ते हैं। यहुत बडे बडे जहाज 'डाक' के बाहर नदी के घोडे
मुख पर छोटे छोटे जहानों पर माल उतारा करते ह। यदि तुम टेम्स
नदी के मुख से लन्दन नगर की ओर जहाज पर बैरकर याना करो
तो तुमको पहले टावर मिज (Toner Budgo) मिलेगा, जो समय
१४०
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
समय पर उठा दिया जाता है यार जहाजों को इस पुल के दूसरी ओर
जाने में तनिक भी असुविधा नहीं होती। इसके आगे रन्दन का यडा
पुल (Irondon Bridge) मिलता है। इसको पार करके जहान
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*Remediention.
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पार्लियामेंट भवन
दूसरी ओर नहीं जा सकते। नदी के तट पर पार्लियामेंट-भवन का
दृश्य यडा मनोहर जान पड़ता है।
यदि तुम इग्ले ड क नकशे में उन रेलवे लाइन को देखा जो देश
के लगभग प्रयेक भाग से श्राकर लन्दन नगर में मिलती है तो तुम
समझ सकोगे कि इंग्लैंड की इतनी अधिक जनता क्यों लन्दन ही में
रहना पसन्द करती है। यद्यपि लन्दन कोयले की किसी खान के
पिरिश
समीर नहीं घमा हुमा कर भी रेग्म नदी पार गत पर
पन्दन पार AIIM मा पम पहाय या
संगर का मैया नगर गया है।
-गामा मिटिश द्वीपसमूह को प्रेम की समाधी साधन
मा बिरrinार में इस पी है।
२-मेरे प्रिय ARE Aधारण एम परो।
३-मिटिका-दासम्म निगामी किन किन पम्पों के पारपार
माले
हुइनमें कौन स पापले की ना समी?
v-यसायी मार (Manchester) में मूसी माल चार
मीड़ा (Leade) में माल क्यों पनाया जाता है ?
-नीचे गर्ग की पिनका कारण पताचा
fonton Hul GIRLok linergioal Ind Mubilan
६.--Cutlera, Linen Asphalt, Lift, Tho Penny
Tube Textilts, Bo,६, I mernld Isles में क्या मतलब
-
अभ्यास
१.प्रिटिश द्वीपसमूह के पाये पर (क) पहाट, (स) पर प
कारपाना के नगर और मदरगाहों के नाम लिखा !
२-इंग्लेंड का क्षेत्रफल ११,००० वर्गमील है धार जन संख्या
स्काटलैंड का पेपर ३०,००० वर्गमील है और जन-संख्या
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
इर दानों देशों गरी जन संख्या का श्रीसत प्रति वर्गमील निकालो
ग्रार अन्तर का कारण बतायो।
३-British Isles का एक नकशा साँची और उसमें निम्न
तिसित काय की साग और उनके समीप के मुख्य कारोबारी नगर
दिसायो-
कोयले की खान
मुख्य नगर
1 Olyde Basın Conl I held
Glaugos
2
Northumberlind und Duru in Conl
Field
Newcastle
Yorl shire Coul I'ield
Sheflicij
Lincushure
Manchester
5
Binch Conntiy
Birmingham
Sonth Tales Conl Field
Gardır
3
b
न
छठा प्रकरण पृथ्वी का धरातल पिछली कक्षा में एशिया के धरातल, पहाड, मैदान तथा नदी की घाटियो का वर्णन करते समय हमन तुमको बतलाया था कि पृथ्वी के धरातल का यह रूप कई प्राकृतिक शक्तियों द्वारा किये हुए परिवर्तना के कारण हुआ है। हमको चाहिए कि पृथ्वी के धरातल के विषय में पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने के लिए यह जान लें कि पृथ्वी की यतमान दशा अभी तक एशिया और योरप के जा भाकृतिक नक्शे (Bathy Orographical Map) तुम देसते आये उनमें इन महाद्वीपो के वर्तमान रूप को कई प्रकार के रगो भार शेड (Shade) स दिखाया गया है। यदि तुम पृथ्वी के धरातल की वर्तमान दशा का पूरा ज्ञान प्राप्त करना चाहते हो तो निम्न लिखित बातो को भली भांति समझने का प्रयत्न करो १-पृथ्वी के धरातल पर जल तथा स्थल का विस्तार । २-पृथ्वी के धरातल की उचाइयों तथा गहराइयों को नकशे में दिखाने के ढङ्ग। ३--पृथ्वी के धरातल के भिन्न भिन्न रूप तथा चट्टानें ।
१४४
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
४-पृथ्वी के घरातलमा घिसना तथा उसके प्राकृतिक कारण।
2-पृथ्वी के धरातल का वर्तमान रूप ।
१-पृथ्वी के धरातल पर जल तथा स्थल
का विचार
पृथ्वी के गोले को यदि सुम साधारण दृष्टि से भी देखो तो तुमको
विदित हो जायगा कि इसमें स्थल की अपेक्षा बल का भाग अधिक
या यो कहो कि जलभाग स्थल से ढाई गुना अधिक है।
इसके ऊपर के परत का याहरी परातल पहुत कम धौरस है।
स्थल में कहीं मैदान है कहीं प्लेटो, और कहीं पहाड़ियाँ
जल में भी इसी प्रकार समुद्र के तल पर यही
दशा दिखाई देती है। इसम बहुत ऊँचे पहाडों की ३ चोटियाँ
है जो पानी के धरातल के ऊपर, द्वीपो के श्राकार में दिखाई
हे कहीं पहाड़।
देती है।
२--पृथ्वी के धरातल की उँचाइयों तथा गहराइयो
को नको में दिखाने के ढग
भिर भिन्न उचाइयों के प्रकट करने के लिए नकशे रंगे भी जाते
हैं। इनमें एक रग से मैदान और दूसरे रग से पहाइ दिखाये जाते
है। नीले हलके रंगों से समुद्र की भिन्न भिन्न गहराइयां दिखाई
जाती हैं, परन्तु भूमि की उँचाई तथा निचाई नापने की रीति तुमको
अवश्य जान लेनी चाहिए।
-
पृथ्वी का धरातल जब हम कहते है कि हिमालय की चोटी मीट एवरेस्ट २६,००० फोट (अर्थात् ५६ मील) उची है तो इससे हमारा क्या अभिप्राय है? हमारा यह अभिमाय है कि हिमालय की सबसे ऊंची चाटी समुद्र के धरातल से २९,००० पोर उंची है। समुद्र का जल क्टोरे के जल के सदृश सदा सम धरातल पर रहता है, इसलिए पृथ्वी की सम्पूर्ण वैचाइयां तथा गहराइयां इसी धरातल से नापी जाती है। पाश्री श्रय उत्तरी हिन्दुस्तान के बड़े मैदान पर विचार करे । यह बिलकुल चौरस नहीं है, क्योकि यदि यह बिलकुल चौरस होता तो इस पर नदिया कैसे यह सकती। जल सदा नीचे की ओर बहता है। यदि हम गगा नदी के मुहाने से ऊपर की ओर चले तो हम देखते है कि कलकत्ता समुद्र के धरातल से २० पोट उँचा है, इलाहाबाद ३०० पीट, “श्रागरा ५५० पीट, रुड़की १०० पीट की बैंचाई पर है, तो भी यह सब नगर मैदान में गिने जाते है। इसी मकार यदि सिध नदी की घाटी को देसे तो विदित होता है कि करांची समुद्र के धरातल ३० फीट, मुल्तान ४०० पीट, लाहोर ७०० पोट और पेशावर १,१०० पोट ऊँचा है। संख्याओं के स्मरण रखने की आवश्यकता नहीं है, किन्तु इस बात के स्मरण रसने की आवश्यकता है कि उँचाइया क्सि रीति से नापी जाती है, और यह कि केवल पहाड ही नहीं वरन् मैदान मी ढालू होते हैं। ये ढाल नक्शे पर नदियों के मार से विदित हो तुमको इन . सकते है।
पौरप का प्रारम्भिक भूगोल इन वैचाइयों तथा गहराइयों को यदि तुम नम्शे पर दिमाना चाहो तो कई प्रकार से दिया मस्ते हो। अभी हम पता चुके है कि पातिक नामों पर चाइयो को भिम भिक्ष रगों की सहायता में दिसाते हैं। हिन्दुस्तान के प्राकृतिक चित्र में देयो सिध और गगा के मदा का वह उँचा भाग, जो सिंध नदी के सिा को यमुना तथा गगा के रेसिन से अलग करता है, उन रहों से भिन्न है जो नदियों के दनुये मैदानों को सूचित करने के लिए प्रयोग किये गये हैं। हिमालय पहाड़ के ढालों तथा तराइ के भागों को भिन्न भिन्न रसों से केवल इसलिए दिखाया गया है कि इनकी उंचाइयाँ उत्तर की ओर धोड़ो घोसी दूर पर पढ़ती जाती है। एशिया या योरप के प्राकृतिक नक्शों में भी भित्र भिम उचाइयों को भित्र भिस प्रकार के रङ्गो से दिखाया गया है। इन लकीरों को नकशे पर उचाइ दिखाने के और भी कई उग है। हिन्दुस्तान के दक्षिणी प्रायद्वीप का जो चित्र अगले पृष्ठ में दिया हुश्रा है उसमें इस प्रायद्वीप के भिन्न भिन्न भागों की उँचाइ भिन्न भिन्न प्रकार के रङ्गों से न दिसावर लकीरो द्वारा दिखाई गई है। 'काहर लाइन' (Contours) कहते हैं। पूर्वी तथा पश्चिमी समुद्र तट से देश के मध्य भाग की ओर जाने में कहीं १०० मील तक और यही २०० से लेकर ३०० मील तक ऐसे समतल मैदान मिलते है जो समुद्र की सतह के धरायर है। इन मैदानों की उस सीमा पर जहाँ ये समुद्र के धरातल से ऊँचा होना प्रारम्भ हो जाते है एक लकीर सीन दी गई है। यह लकीर वह 'काटूर' है जो समुद्रतट के यरानरवाली
पृथ्वी का धरातल
भूमि को पताती है। इन मदानो को तुमो पूर्ण तथा पश्चिमी
समुद्र-तट के मैदाना के नाम से पाचवीं राम पड़ा था।
पूर्व से कुछ दूर देश के भीतर की भोर चलन में ६०० सीट चे
मैदान मिल जाते है। इनकी सोमा दिसा के लिए इस क्शेि
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काटूर (Contours)
म एक 'कांदर लाइन' खींच दी गई है। इतने ऊँचे मैदान
तुम इस नकशे में पश्चिमी घाट और पश्चिमी समुद्र तट के मैदान,
योरप का प्रारम्भिक भूगोल तथा गोदावरी, हणा और कारी यादि नदियों के मैदान पर दक्षिणी पठार के मध्य में भी देस सकते हो। इन मैदानो के बाद म एक ऐसे पठार पर चढ जाते हैं जो समुद्र के तल से १,२०० फीट ऊँचा है। इस पठार को छोडकर जव दक्षिण की नदियाँ सैन ना पर उतरती ह तो बहुत ऊँचे झरनों या प्रपातो के रूप में पहन लगती है। इन प्रपातो की उँचाई को देखकर तुम इस बात का अनुमान कर सकते हो कि दक्षिण का पठार अपो समीपवर्ती मैदाना से कितना ऊंचा है। इस पठार की सीमा दिसाने के लिए इस नक्शे में उस 'कार' को देखो जिसके समीप १,२०० का अरु लिखा है। इस कार' से घिरा हुया क्षेत्रफल बहुत - चढ़ा है। । श्रय इस पठार की पश्चिमी सीमा पर उत्तर से दक्षिण की ओर फैली हुई उन लकीरों से घिरे हुप संकरे क्षेत्रफलों को देखो जिनके समीप ३,००० का अक लिसा हुना है। ये लकीरे यह सूचित करती है कि इस पठार की पश्चिमी सीमा पर ३,००० फीट ऊंचे पहाडे की एक श्रेणी उत्तर से दक्षिण की ओर फैली हुई है। इस श्रेणी को तुम पश्चिमी घाट के नाम से जानते हो। इस उंचाई की एक श्रेणी के कई भागों को पूर्वी समुद्र-तट के मैदान की पश्चिमी सीमा पर भी दिपाया गया है। पश्चिमी श्रेणी के मध्य तथा दक्षिणी भाग में उन छोटी छोटी लकीरो स घिरे हुए क्षेत्रफलों को देसो जिनके मध्य में ६,००० पीट का अंक लिसा है। ये इस श्रेणी की वे चोटियां जो समुद्रतल से पृथ्वी का धरातल ६,००० पोट या इससे भी अधिक उंची है। क्या तुम इनके पान पता सकते हो? इस प्रकार इन काटर खाइनो की सहायता से दक्षिणी पगर की भित्र भित्र उँचाइयों को दिगाया गया है। यदि तुम इन लकीरों के समीप लिसे प्रयों को ध्यान से देखा तो तुम दक्षिणी पठार के ढाल का ग्न्य समझ सकते हो और यह भी बता सकते हो कि यहाँ की नदियाँ किस प्रकार पहती होगी। इस नऊशे को देखकर तुम यह भी यता सस्ते हा कि दक्षिणी पठार की कोई भी पड़ी नदी पश्चिमी समुद्र तट पर मुहाता न पनाती होगी। दपिणी पठार की 'कांटूर लाइनों'वाले नकशे में एक ऐसी लकीर गीच दो जो सप कांटूर लाइनों को काटती हुई जाय । जिन विदुओं पर यह लकीर इन कार लाइनों को काटती हे उन बिन्दुओं से खड़ी रेखाये कागज की सीमा तक इस प्रकार साँचो कि ये लकीरे उन समानान्तर रेग्मायो तक जायें जो १०० फीट, ६०० फीट, १,२०० फोट, ३,००० पीट, और ६,००० फीट की ऊँचाइयों को दिखाने के लिए एक दूसरे के समानान्तर खींची गई हैं। जिन बिन्दुओं पर इन चिन्दुओं से खिंचे हुए लम्ब (Perpen. diculars) समानान्तर रेखायों को काटें उन सबको मिला दोनो एक ऐसा गड या सेक्शन' घन जायगा जो पश्चिमी घाट की भिन्न भिल चाइयों को बताएगा। अच्छा हो यदि तुम नीलगिरि पर्वत की भित भिन्न उचाइयों को एक बाहर नक्शे म दिखाथो और तब उनसे उपर लिये हुए दंग पर 'सेक्शन' या खंड के रूप में दिखा दो।
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पारप का प्रारम्भिक भूगोल
तुम्हारे गुरती तुर्ग हिन्दुस्तान के अन्य भागा तथा योरप, लका
हीप, सिमिली दाए प्रादि के 'कहर' नक्शे दिखायेंगे। इन नक्शा
जहाँ तुम पार पहुत पास पास दिसाई पठ ,वहीं की भूमि
को बहुत लुगा समझो गौर जहा दूर दूर हो वहाँ हलका डाल
समझा।
उस गार के किशों का प्रयोग तुम स्यूल के बाहर भी कर सकते
। यदि तुम्ह किसी अनजाने भाग का काटूर नकशा मिल जाय तो
उसे दसार तुम मोटर या पाइसिकिल की चाल धीमी या तेज
कर सस्ते हो क्योंकि उस नकरो को देसार तुम तुरन्त समझ
लोगे कि कितनी दूर तक भूमि ढालु है अथवा उंची और कहीं पर
ढाल एका-एक बहुत ज्यादा हो गया है और कहीं पर सिल
.
सिलेवार ।
हशूर (Hachuring)
नकरो पर भूमि की उंचाई दिसाने का एक दूसरा डग यह
हा सक्ता है कि तुम कादर लाइने न खींचकर उनके मध्य के
भाग में रकीरो द्वारा 'शेड' दे दो। जहीं अधिक उचाई दिखाना
हो वहीं धनी लकीरों का शेड दे दो और जहाँ समतल मदान
दिसाना हो यहाँ बिररी लकीरों का रोड दे दो।
उंचाई दिखाने को 'हशूर' करना (IInchuring) कहते है ।
के चित्र में लका दीप की भिन्न भिन्न उँचाइयों को 'इशूर' द्वारा
दिखाया गया है। इसे देखकर यताश्री लका के मैदान कहां हैं?
इस ढग से
सामने
पृथ्वी का धरातल
थोर सबसे उँची भूमि मेदानो से कितनी ऊँची हे ? नदिया किस
ओर को यहती होगी? गर्मी में हवा साने के स्थान किस भाग में
मिले गे?
over60000
10006000
Below oooh
7000
GOOc
5000
HACHURING
THE CLOSER THE HACM 17
TME HIGHER THE PLACE
4000
3000
2000
loodi
CONTOUR
लका द्वीप के हशूर
योरप का भारम्भिक भूगोल ३-पृथ्वी के धरातल के भिन्न भिन्न रूप तथा चेट्टाने पाश्रो अथ हम तुम्हें यह बताये कि पृथ्वी का धशतल क्रिस प्रकार की चट्टानी में बना है और यह अपने धर्तमान रूप में से हो गया । यदि तुम किमी गहरी खान के भीतर जाथो, तो तुमको विदित होगा कि इसके तल म धरातल की अपेक्षा अधिक गर्मी है। दुनिया म सबसे अधिक गहरी खान जो अब तक खोदी गई है पृथ्वी के धरा तल से एक मील से अधि: गहरी नहीं है। इस प्रकार गर्मी का अनु मान करके यह विचार किया गया है कि पृथ्वी की ४० या १० मील की गहराई पर इतनी अधिक गर्मी है कि ठोस से ठोस पदार्थ भी, जो अब तक ज्ञात हुए है, पिघलकर ठीक उसी प्रकार द्रव हो मस्ते ह जिस प्रकार कि लोहा भट्टी में डालने से द्रव रूप में हो जाता है। इससे हमको क्या फल मिलना चाहिए ? जिन लोगों ने इस बात पर विचार किया है वे कहते हैं कि लाखों करोडों वर्ष हुए यह पृथ्वी टीक वसी ही थी जैसा सूर्य है। धीरे धीरे जैसे यह उडी होती गई बाहर का परत ठोस होता गया परन्तु भीतर की गर्मी बनी ही रही, जैसा कि श्रव भी है। इस रीति से जो ठोस चहाने चनी उनको अग्नि- सम्बन्धो चट्टान (Igneous Rocks) कहते है। ऐसी चट्टाने उत्तरी हिन्दुस्तान के मैदाना में नहीं है। इसका कारण हम तुमको अभी पतायेगे। ही, दक्षिणी पठार में ऐसी चहान बहुन पाई जाती है ।
पृथ्वी का धरातल एक प्रकार की चहाने और होती है। पहले प्रकार की चहान को इमो अग्नि सम्बन्धी चहान बताया था। इसको हम जल सम्बन्धी चट्टान (Aqueous Rocks) कागे। इसम सदैव परत के उपर परत होते हैं, जो प्राय चौरस होते है, किन्तु यही कही मुके हुए भी पाये जाते हैं, क्योंकि जब पृथ्वी सिडती है, तो उसके परसो म भी मिक्डन ३१ हो जाती है और इस प्रकार वे परत रेडे हो जाते है। श्रय चहान के किसी टुकडे को तुम हथाडे से तोडकर शीघ्र ही पता सकते हा कि वह इन दोनों प्रकार की घहानी म से किस प्रकार का है। यदि यह जल-सम्बन्धी चट्टान का टुकड़ा है तो टूटकर इसके चौरस धरातल दिखाई देंगे, परन्तु यदि अग्नि सम्बन्धी चद्वान का टुकडा है तो उसके टुकड़ों के श्राकार भिन्न भिन्न प्रकार होंगे। ४---पृथ्वी के धरातल का घिसना तथा उसके प्राकृतिक कारण जब कोई पदार्थ ठडा होता है तो वह सिकुडता है। इससे जय पृथ्वी नडी हुई तो यह भी मिकुट गई। एक सेब को तवे पर स्पकर भूने तो तुम देखोगे कि जर तक यह गम रहता है तष तक गोल तथा चिकना बना रहता है, और ज्यों ज्यो यह उडा होता है त्यो स्यों सिकुड़ने लगता है, और उसके छिलके में सिकुडन पड जाती है, और वह चौरस नहीं रह जाता। पृथ्वी की भी यही दशा हो गई। इसका धरातल अप चौरस नहीं है। इसम गहरे गहरे गड हो
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
ये है जिम्म समुद्र का पानी भर गया है। पृथ्वी का धरातल कहीं
कहीं अथिर उठकर दक्षिण के टेविलउड (Deccan) के सदृश या
कि सिकुड़मर हिमालय के सदृश चे पहाड़ों की श्रेणियों के श्राकार
मा हो गई।
बहुत दिन हुए पृथ्वी का पपला केवल अग्नि सम्बन्धी चहान से
ती पाहुया था । धीरे धीरे इसमे भी परिवर्तन
हुधा
श्रीर श्रग्नि-
यह
क्या तुमने कभी
सम्बन्धी चट्टान, मिट्टी, रेत और ठोस चट्टान के रूप में बदल गड । यह
परिवर्तन कैसे हुआ ?
(क) इस परिवर्तन का एक कारण ऋतुएँ है
किसी पुरानी इमारत की ईटों या पाथरो को लाना लगकर गिरते देखा
है ? तुओं के कारण यह गलते रहते है। गर्मा, जादा या बरसात
घड़ी बड़ी इमारतो को भी तोड़ डालते है। इसी तरह घड़ी घड़ी चट्टानों
को भी ऋतुओं ने तोड फोड़कर पीस दिया है।
पध्वी का धरातल (स) दूसरा कारण यु है। यह रेत और मिहीन 10 कणा को उदार एफ म्यार से दूसरे स्थान को ले जाती है। यदि सुम मिमी रेतीले मरम्पर में जार देवो तो सुमको एमी रेत के यह बढे धुम दिसादगे जो यायु द्वारा पफनित की हुई पातू मे पने है। (ग) तीसरा कारण जल है। नमो धेरा होगा कि नदी का जल पटधा गॅदला होता है। मिट्टी और रेत के कण इसके साथ यहा करते जय नदी पार पर होती है तो इसका जल किनारों तक भर जाता है, और जय नदी घटती है या उसकी चाल धीमी हो जाती है तब परत सी मिही उसके स्निारों पर जमी हुई दिसाई देती है। भार, जैसा कि तुम पढ़ चुके हो, गगा तथा और और नदियों के डेटे या गये है और अब भी बन रहे है। ये परिवतन समुद्र के कारण से भी हाते है। यह स्थल के कुछ स्थान को काटता और कुछ को यनाता रहता है। (घ) चौथा कारण पाला है। पानी जमकर मन जाता है तब यह पल जाता है । वृष्टि के पीछे चट्टानों की दरारी में जल भर जाता हे पार जर पह पानी जम जाता है तो कभी कभी फैलने में इतना अधिक पल होता है कि चहाना के कुछ भाग चूर चूर हो जाते है, और इनके छोटे छोटे टुकडे वायु तथा जर म यह जाते है। (घ) पौधे और वृक्ष भी एक कारण है। इनकी जडे चट्टानों की दरारों में घुस जाती हैं और धीरे धीरे उनको तोड़ती रहती है, यहाँ तक कि ये टूट फूटकर मिट्टी हो जाती है। जय हिम
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
परिवान के सय कारणों में जल सयम बढ़ा है। तुम पढ़ चुके
हो कि नदी समुद्र के निकट अपने मुहाग को मिट्टी मे भर देती है।
इसलिए अब तुम भली भांति समझ सकते हो कि ममुद्रों तथा झीलों
के तल-भाग से धीरे धीरे ऊपर हो उठते रहते है । उत्तरी हिन्दुम्मान
का सम्पूर्ण रडा मैदान इस प्रकार इस मिट्टी से यनाया है जो पहाड़ा
पर से इसम लाई गई।
पर तुम सुगमता से समझ सकते हो कि जो मिही इस
मकार समुद्र के नलों में बैठती रहती है, उसके परत थे परत धन
गये, और जैसे ये परत मोटे होते गये और इनके उपर पायोम
बढ़ता गया तैमे नीचे के भाग दयकर पाथर के रूप में होते गये। इस
प्रकार घालू के परत दयार पलुधा पत्थर ( Sandstone) धने,
और चूने या सरिया के परत दयकर ककड यन गये। अन्य चट्टाने
भी इसी प्रकार ग्न गई ।
जिन परिवतनों का हम उपर वर्णन कर पाये है ये श्रय भी
घरायर होते रहते है। तुम उनका निरीक्षण वायु के चलने
किसी गदली
नदी को देखकर कर सकते हो।
परन्तु पा पृथ्वी थय भी सिकुड़ती जा रही है, और क्या
इसके धरातल के श्राकार में अब भी परिवर्तन हो रहा है ?
हाँ, श्रम भी यह सर हो रहा है, परन्तु यह इतने धीरे धीरे
होता है कि तुम देख नहीं सकते ।
उसकी गति इतनी अधिक हो जाती है कि तुम उसको जान
सकते हो।
धधधा
परन्तु किसी
समय
कहीं
पृथ्वी का धरातल
५-पृथ्वा के धरातल का वर्तमान रूप (Land forms)
पीछे बताई हुई बातो को
जान लेने के बाद तुम पृथ्वी क
धरातल के वतमान रूप को भली
र्भाति समझ सकते हो। महाद्वीप
एशिया और योरप के नक्शो को
तुम भली भांति देख चुके हो।
इन महाद्वीपों में तुमने कहीं
घहुत ऊची पहाड़ियाँ तथा पहाड,
कहीं
पठार,
समतल
मैदान और कहीं मैदानों पार
पठारों के मध्य में गहरी घाटियो
में बहती हुई नदियाँ देखी है।
वहीं भूमि के धंस जान ऐसे
बड बडे गढे हो गये हे कि उनमें
पानी भर गया हे और मनुष्य के
हटाये नहीं हटता। दुनिया के
प्रय महाद्वीपों म भी तुम इसी
प्रकार की उंची नीधी भूमि
देखोगे। यहीं कड़ी चट्टाने , कहीं
मर्म परतदार मिट्टी के मैदान
दिखाई देंगे। हम तुम्हें पता चुके है कि पृथ्वी के धरातल का
-अग्नि सम्बन्धी चहान-B, C-जल सम्बन्धी। चट्टान
A
योरप का प्रारम्भिक भूगोल वर्तमान रूप गुमाएक ऐसा नहीं धन गया किन्तु सहस्रों तथा लासो वर्षों में, जल, अनि, सूर्य की गर्मा, तथा वानों ने पृथ्वी को इस रूप म लान में विचित्र काम किया है। कहीं पानी ने नर्म मिट्टी को बहाकर गहरी घाटिया बना दी है पार उन क्ढी घटानो को जिनको नहीं बहा सकाची उंची पहाडियों तथा पर्वतश्रेणियों के रूप में छोड़ दिया है। कही कहीं समुद्र के जल ने समुद्र तट की भूमि के अन्दर तक काटकर अपा अधिकार जमा लिया है। नार्य के फियर्ड (Prords), सथा योरप के अन्दर घुस जानेवाले समुद्र ( Landlocked ) इसके उदाहरण है। ज्वालामुखी पहाड़ों के उद्गारो का भी पृथ्वी के धरातल को ऊंचा नीचा बनाने में बहुत बडा भाग है पृथ्वी के भीतर की चहाना और खनिज पदार्थों आदि को पृथ्वी के भीतर की गर्मी ने केवल पिघला ही नहीं डाला किन्तु उन्हें बाहर निकालकर ऊँचे ऊँचे पर्वतो के रूप में एकत्रित कर दिया है। इस प्रकार चपा, हवा, तुपार और भूगर्भ की उष्णता ने पृथ्वी के धरातल पर भतिभाति के परिवर्तन उत्पन करके इसको इसका वर्तमान रूप प्रदान किया है। मश्न १-समुद्र के धरातल से क्या अभिप्राय है ? "नीताल की झील का धरातल ६,३१० फीट उंचा है" इस वाक्य की व्याख्या करो। २-पृथ्वी के धरातल के चौरस न होने के क्या कारण है ? ३-बताश्री चट्टाने कितने प्रकार की होती हैं
पृप्पी का धरातल
४-गृथ्वी के धरातल पर (क) ऋतु (म) जल से पिम
प्रकार परिवर्तन हुश्रा करते है ?
-डेटा पैसे बन जाते है ?
अभ्यास
1-पत्थर के कई टुङ्गों का निरीक्षण करके यह पताश्रो कि
इनमें से प्रत्येक किस प्रकार की चट्टाा का पत्थर है।
२~अपने घर के निस्ट किसी पुराने घर का जाकर देखो और
मालूम करो कि उसकी इंटों या परथरों पर ऋतु का क्या प्रभाव पड़ा है।
३-अपने समीप की किसी नदी का निरीक्षण करो और
थतायो कि
(1) उसके बहाव की दिशा रिधर है ?
(२) इसका कौनसा दार्या किनारा है और कौन सा घायों ?
(३) इसका जल स्वच्छ है अथवा मैला?
(४) यदि मैला है तो इसमें क्या क्या मिला हुधा
१
सातवॉ प्रकरण वायुमण्डल अभी तक जिन भागोलिक दशाओं का हम वर्णन करते आये है उनमें 'जलवायु' की विभिन्नता के कारण होनेवाले परिवर्तना तथा उनके प्रभाव की और अधिक जोर दिया गया है। यदि तुम जलवायु सम्बन्धी विशेप बातो को समझना चाहो तो तुम्हे 'वायुमण्डल' के विषय में अधिक ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। वायु किस उँचाई तक पाया जाता है पिछली कक्षा में वायुमण्डल से सम्बन्ध ररानेवाली मुख्य मुख्य बातों को बताते समय हमने तुम्हें बताया था कि हमारी पृथ्वी के सब ओर बहुत दूर तक वायु का समुद्र है जिसे वायुमण्डल (Atmosphere) कहते है। वैज्ञानिकों ने बहुत उचाई तक गुब्बारों (Ballons) और हवाई जहाजो पर उड़कर यह पता लगाया है कि अनुमान से २०० मील की उंचाई तक कुछ न कुछ हवा पाई जाती है, परन्तु ४६ मील तर ऐसी हवा है जिसके परिवर्तनों का मनुष्य केवल विश्व सनीय अनुमान कर सकता है, क्योंकि केवल इस उँचाई तक का वायुमण्डल विशप ज्ञान प्राप्त कर सरना मनुष्य के लिए संभव है। इस कारण धागे पलकर हम तुमको यताधंगे। कदाचित् यह जानकर कि हवा में भी अ य तत्ची (Matters) की भांति पतन (Veight) होता है, तुम्हें अचम्भा न होगा, क्योंकि तुम प्रति दिन देखते हो कि तुम्हारा फुटबाल हवा भरे जाने पर इतना कदा हो जाता है कि यदि तुम उस पर खडे हो जाथो तो यह तुम्हारे वजन को सँभाल सकता है। जिन वस्तुओं में वजन होता है वे दूसरी वस्तुओं के वजन को सँभाल सकती है और अपने जीचे की चीजों पर अपने वजन का प्रभाव भी डाल सकती है। तुम पह प्रति दिन देखते हो कि जर हवा चलती है तय बहुत ही वजनी चीजों को हिला नती है और कभी कभी पेड़ों को भी उसाडकर फेंक देती है। यदि हवा में वजन न होता तो वह कदापि ऐसा न कर सकती। तुम यह भी जानते हो कि अधिक वजन की चीज नीचे को दबाती है और हलकी चीज उसके ऊपर रहती है। जिन विद्वानों ने हवा की उँचाई का पता लगाया है उन्होंने यह भी भली भांति अनुभव किया है कि हवा की तहें भूमि के समीप अधिक धनी या मोटी है क्योंकि इस पर ऊपर की हवा का दबाव है, और ज्या ज्या हम ऊपर जाये त्यो त्यों हवा की पतली तह मिलती जाती है। १८ हजार पीट या ३३ मील की उँचाई के नीचे सारे वायुमण्डल की श्राधी हवा है और दस मील की उँचाई के नीचे कुल वायुमण्डल का भाग श्रा जाता है।
योरप का प्रारम्भिक भूगोल वायु में कौन कौन सी वस्तुएँ मिश्रित हैं ? इस प्रश्न के ठीक ठीक उत्तर जान लेने से तुम हमा के गुण भली भाति जान सकते हो। वैज्ञानिको ने पूरे प्रमाण के साथ यह प्रमाणित पर दिया है कि वायु में कई प्रकार की गैस (Gas), पानी की भाप, धूल कदण तथा उष्णता या गर्मा सम्मिलित रहती है। हवा में तीन वोधाइ नाइट्रोजेन (Nitrogen) श्रार एक चौथाई में अधिकतर शाक्सीजा (Oxygen) तथा कारपन डाइअक्साइड (Oarbon dioxide) (जैसे धुर्वा), जल की भाप तथा अन्य गैसे मिली हुई है । नारसीजेन के सहारे सारे प्राणि मान जीवित रहते है तथा अग्नि जलती है । नाइट्रोजेन गेस पाक्सीजेन की शक्ति को दवाये रखती है, ताकि यह प्राणघातक न हो जाय। इन गैसो की उपयोगिता घताना इस पाठ का अभिप्राय नहीं ह। भूगोल से सम्बन्ध रखनेवाली हवा में मिली हुई वस्तुएँ भूल के कण, पानी की भाप और उष्णता हैं। थानो हम तुमको हवा में इन तीनो वस्तुओं के होने के प्रमाण, फल तथा इनकी उपयोगिता बताच ताकि तुम इनके भौगोलिक महत्त्व को भली भाति समझ सको। हवा में गर्मी उपस्थित है। इसे तुम प्रति दिन अनुभव भी करते हो। जय गर्मी की मात्रा अधिक या बहुत ही कम हा जाती ह तय तुम्हें कठिनाई प्रतीत होने लगती है। सूर्य से प्राप्त हुई गर्मा का अनुभव हम हवा के ही द्वारा करते हैं। उष्णता का ही प्रभाव है कि हवा जल को भाप के रूप में धारण हवा में उपस्थित वायुमण्डल करनी रहती है। जल का भाप का रूप धारण कर लेना एवापरशन (Evaporation) कहलाता है । हवा में जल धारण करने की शक्ति घटती तथा बढ़ती रहती है। हवा जल को भाप के रूप में एक परिमित सीमा ही तक धारण कर सकती है। जब हवा अपनी पूर्ण शक्ति भर जल धारण कर चुकती हैं तो हम इसको 'पूर्ण जलयुक्त' या 'सचूरेटेड' (Saturated) हवा कहते ह । हवा जितनी ही अधिक गम होगी उतना ही अधिक जल भाप के रूप में धारण कर सकती है अर्थात् जल का भाप के रूप में परिणत होकर हवा में मिलना हया की सप्णता ('Tempe lature) पर निर्भर रहता है। इसके विपरीत हवा की गर्मी ज्या ज्यों कम हाती जाती है त्यो त्यो इसमे पानी को भाप बनाने की शक्ति भी कम हाती जाती है। जब हवा की गर्मी घटते घटते इस माना को पहुँच जाती है कि हवा पानी को भाप के रूप मे धारण ही नहीं कर सकती तब भाप फिर छोटे छोटे जल बिदुओ के रूप में परिणत होन लगती है। इसे भाप का जमना या 'कण्डेनमेशन' (Condensation) कहते है। अभी हम बता चुके हैं कि हवा में धूल कण सदव तथा सरन उपस्थित रहते है। यह जानकर कि यह धूल कण यादलों के बनने में सहायता देते है, तुम्हे अचम्भा होगा, परन्तु तुम जानते हो कि ये कण हवा की अपेक्षा जल्द गम तथा ठण्डे हो जाते हैं। इसलिए इनके स्पश स पानी की माप ज्याही उण्डो होती है स्वाही छोटे छोटे जर कणों के रूप में धूल कणा को लपेटकर दवा में उपती फिरती . कहते है योरप का प्रारम्भिक भूगोल है । जब ये जर कण पूल-कणों से मिलकर हमें काले रूप में श्राकाश पर रउते नार भाते है तो हम इनको वादल (Olouds) कहते है। जय यही बादल पृथ्वी के समीप बनते हैं तय इनको कोहिरा (Tog) इया में यादल के रूप में उदोवाले जल-कण जय अधिक संख्या म एक दूसरे से मिल जाते है और इतने पडे हो जाते है कि हवा उनको नहीं संभाल सक्नी तो ये से यई निन्दुश्री के रूप में पृथ्वी हे धरातल पर परमने लगते है। इसे मेह पढना कहते हैं। तुम अपन सूबे के मेदागों में प्रति वर्ष देसते हो कि गर्मी के शान्त में वर्षा होत ही हवा की गर्मी कम हो जाती है। जिस दिन बदली रहती है उस दिन सूर्य की किरणे अधिक तीन होते हुए भी अधिक दुखदायी नहीं प्रतीत होती। बादल उस गर्मा को भी पृथ्वी के समीप ही के वायुमण्डल में यनाये रखते हे जो पृथ्वी से पृथक होकर हवा म प्रति दिन सम्मिलित होती रहती है। इसके विपरीत तुम देखते हो कि जिस रात को श्राकाश निर्मल रहता है उस दिन रात कुछ श्वधिक ठण्डी रहती है। इससे तुम समझ सकते हो कि हवा में गर्मी तथा जल की उपस्थिति दुनिया के जल• चायु को कितना अधिक प्रभावित करती रहती है। वर्षा की नाप गर्म हवायें समुद्र के जल को भाप के रूप में उड़ा लाती हे और ऊँचे पहाड़ों से टकराकर या ठण्डी हवाओं के स्पश से इतनी टण्डी
पायुमरमा
हो जाती है कि पेमाप को नही तारण कर पर। पाद से
दायर यरसने लगा। पका पल भूमि पर नदी नालों क द्वारा
ममुद्र में फिर पहुँच जाता है। गदि यो वा मप गज्ञ ममतल भूमि
परसा होगा रहे तो कहीं कहीं भूमि पर थन गहरा सा पानी
मर जाय।
यदि तुम यह मालूम करना चाहो कि तुम्हारे नगर में किसी
बाप दिन कितनी हुई तो तुम इमको महग ही म जान सस्ते
काटीन या कांच का एक गोला धार ऊषा पन पनामो जिसकी
गोलाई पद में लेकर मुंह सक सप जगह समान हो। इसके
मुग्य पर पक गोर कीप लगा दो। इस पतन की उँचाई की और
पदे से मुंह तक इंचों के चिद लगा दे।। यह विस न पना सको तो
एक फुट का स्केल ले लो। इस तरह के पतन तुम यागार से भी
गरी सरते हो। इसे "रेन गेज" (Rain Ghuge) कहने हैं।
जय वर्षा होना प्रारम्भ हो तर इस पर्सन को युले माकाश के नीचे
रप दो। जितना पानी कीप के द्वारा वर्तन में इकट्ठा हो असे धर्मा
समाप्त होते ही या एक पार यतन के भर जाने पर स्केल से नाप लो।
इस यर्तन के भीतर इकट्ठा हुए पानी की गहराई इचों में मालूम
करो। जितने इंघ गहरा पानी इस यतन में भर जाय उतन
ही इंध अपने नगर की वर्षा की नाप समझो। यदि तुम्हारे नगर
या समके समीप की भूमि समतल होती तो उस पर इतने ही
ईय गहरा पानी भर जाना जिना कि 'रेन गेज' के अन्दर भर
गया है।
१६६ योरप का पारम्भिक भूगोल प्ररि दिन की वर्षा की नाप को जोइते जायो तो महीने के अन्त का योग तुम्हारे नगर की मामिक वर्मा की नाप बतायेगा। इसी प्रकार व १२ महाना की वपा का योग वार्षिक वर्षा की पाप यतायेगा। थारह महीनों की वर्षा की नाप को जोडकर १२ से भाग दे दो तो मासिक मध्यम वर्षा की नाप विदित हो जायगी। इसी प्रकार कह वर्षों की चपा नाप को जोड़कर वर्षों की संख्या से मार दे दो तो वर्ष यी मध्यम धपा की नाप निकल पायेगी। प्रति दिन या प्रति मास की वर्षा नाप 'ग्राफ पेपर' (Squared paper) पर एक टेढी लकीर के रूप में जिसे तुम अपने नगर की चर्पा का ग्राफ कह सकते हो दिसाइ जा सकती है। यदि कई नगगे की मासिक वा नाप को 'ग्राफ' के रूप में एक ही कागज पर दिसाटो तो तुम उन नगरी की वर्षा की तुलना बडी सरलता से कर साते हो। हिन्दुस्तान या योरप के वर्षा के विन्यास ( Distribution) सूचक नकों को देखकर उन स्थानों की वर्षा नाप देखो जहाँ इतना पानी यरसता हो कि यदि वहाँ की भूमि समतल होती तो मनुष्य के क्द से अधिक गहरा पानी भर जाता। कुछ ऐसे स्थान भी मालूम क्रो जहाँ घुटनों तक पानी भर जाय यदि उनकी भूमि मिलकुल समतल कर दी जाय। इसी प्रकार अपने देश के मुरय मुख्य नगर कलकत्ता चीरापू जी, लाहोर, बम्बह, नागपुर, मद्रास और इलाहाबाद श्रादि की मासिक वर्षा नाप किसी दैनिक पत्र से देखकर उसे ग्राफ के रूप में दिखायो और यह मालूम करो कि इनमें से कौन कौन से नगर १६७ . वायुमण्डल (1) शुल्क प्रदेश, (२) घोर घृष्टिपाल प्रदेश, (३) अथवा साधारण वृष्टिवाले प्रदेश पर स्थित है। अगले पाठ में हवायो का हाल और हिन्दुस्तान पर यहनेवाली मानसून हवाओं का वर्णन पढ़कर तुम्हे इसका कारण विदित हो जायगा । गर्मी की नाप दुनिया के विद्वान् वैनानिको ने गर्मा की मात्रा को नापन का एक बहुत उपयोगी यन्त्र बनाया है। इसे थर्मामीटर (Thel mometer) कहते है। एक थर्मामीटर लेकर देखो। यह एक कांध की पतली नली है जिसके उपर का मुंह बन्द होता है। नीचे काँच की एक पोली गोली होती है जिसमें पारा (Afercury) भरा होता है। इस नली के अन्दर एक सा चौडा पक सूराम होता है जिसमे नीचे की गोली या 'बरब' (Bulb) में भरा हुआ पारा गर्मी पाकर नली के पेटे मे दौड सके। इस नली के अदर तनिक भी हवा नहीं है। धमामीर बाते समय इस हवा को पारे में अपने फैलाव से निकाल दिया था। कदाचित् तुम इस बात के जानने के लिए इच्छुक होगे कि इसमें पारा क्यों भरा जाता है और यह किस प्रकार अपने फैलाव से गर्मी को नापने म सहायता देता है तुम जानते हो कि जब टडी वस्तुयें गर्म की जाती है तो वे बढती या लम्बी हो जाती है और जन गर्म वस्तुयों को उडा किया जाता है तो घे सिकुडती या छोटी हो जाती है। दुनिया के जितन पदार्थ ठोस योरप का प्रारम्भिक भूगोल (Solids), द्रव (Liquids) तथा वायु (Gases) के रूप में पाये जाने है, गर्मी पाकर बढ़ते और पुन सर्दा पाकर फिर कुछ सिकुड़ जाते है । पारे (Mercury) में यह एक विशेष गुण होता है कि वह गर्मा या सर्दी के प्रभाव से सिलसिलेवार अढता या घटता है। प्रार प्रत्येक भांति के जलवायु में इसके बढने या घटने का ढग एक सा ही रहता है। यही कारण है कि यह चमकीली धातु, जो कि सदैव पानी की ति दय रूप (Lagud) में रहती है, थर्मामीटर में प्रयोग की जाती है। किसी किसी धर्मामीटर में पालकोहल (Alcohol) या एक प्रकार की शराम भी प्रयोग में लाई जाती है परन्तु श्रय इसका प्रयोग घटता जा रहा है। धर्मामीटर पर तुम कुछ अझ (Figures) तथा चिह्न देखते हो। ये चिह्न यह सूचित करने के लिए यनाये जाते है कि पारा कितनी उचाई तक पल्ट के ऊपर पढ़ सकता है। इन चिह्नों को डिग्री (Degrees) कहते हैं । इन चिह्नों को गिनने के लिए प्रक लिख दिये गये है। श्रय यह विचार करो कि ये चिद किस प्रकार लगाये गये होंगे। हम तुम्हें यता चुके ह कि पारा तनिक सी भी गर्मी पाकर फैलता है। यदि तुम थर्मामीटर की बल्य को जिसमें पारा भरा रहता है हाय से कुछ देर पकडे रहो या उस पर कुछ देर सि लो तो तुम्हारे हाथ या सास की गर्मी से थरय का पारा ली की और कुछ न कुछ बढता दिखाई पडेगा। यदि तुम परध को गर्म पानी में रस दो तव भी पारा पढ़ता हुआ नजर यायेगा और यदि डे पानी में रख ।
यायुमण्डल
हो तो घटसा हुमा दिपाइ देगा। 3 पाणी, पर्प या सी हवा
और भी पारा मिपुता या नीर्थ की मार गिरता दिसाइ
पारा
दगा।
यदि तुम थर्मामीटर की 'परय' को प्रेमी धर्फ म जो पिपला
रही हो या गेमेंटटे पानी में जो जमने ही पो हो, रस दो तो
पारा उस दर्जे तक गिर जायगा निम दर्ज को पानी जमन फा चिट
या 'मोजिग प्वाईर' ( Freoung Point ) कहते है।
यनि पदम को मुम पानी में रम दा और इसे धीरे धीरे यहाँ
सक गर्म करो कि यह पोलने लगे, तो पारा बहुत उँचाई तक गली में
चढ़ जायगा। यहाँ दूमरा चिह्न बना दिया जाता है। इसे पानी
जवलने का चिह्न या 'वायलिग वाईट' (Botling Point)
इन दोनों चिह्नों के बीच की दूरी को कुछ चिहा
द्वारा विभाजित कर लिया जाता है और उस पर अक लिव दिये
जाते है।
कहते है।
आगे के चिन्न में तीन थर्मामीटर दिखाये गये है। इनके 'फ्रीजिग
प्वाइर' और 'ज्वायलिग प्वाइंट पर भिन्न भिम अंक लिखे हैं और
हाके बीच की दूरी पर जो चिह्न बन है उनकी संख्या भी भिन्न
एक थर्मामीटर पर सबसे नीचेवाले चिह्न पर.. और सबसे
उपरवाले चिल्ल पर ८०° लिया है। दूसरे में इन दोनेा चिन्हों पर प्रम
मे.. तथा १००० और तीसरे धर्मामीटर पर ३२° तथा २१२०
लिसा है। पहले प्रकार का यर्मामीटर बहुत कम प्रयोग किया जाता
योरप का मारम्भिक भूगोल
है। दसरे प्रकार का थर्मामीटर, साधारण गर्मी तथा बुखार की मात्रा
TIपने में प्रयोग किया जाता है। इसे 'सेन्टीमेड' (Contigrade)
100-
212
Boling Panld walest
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160
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CENTIGRADL, FAHRENHEIT
RCAUMUR
यर्मामीटर कहते है। तीसरे प्रकार का थर्मामीटर 'फारनहाइट'
(Tahrenheat) थर्मामीटर कहलाता है। यह थर्मामीटर भौगोलिक
वायुमण्इल
नश वैज्ञानिक बातों में हवा की गर्मा नापने में प्रयोग किया
जाता है।
जर हम गर्मी नापते है तो यह नहीं कहते कि हवा में
१०°फया १११°५० की गरमी है, बल्कि यह कहते है कि
हया का तापक्रम (Tempornture) ६०० फ० या ११५०
फ०हे।
मिल जाता
यदि हम दिन में उस समय हवा की गा नापे जब सबसे
ज्यादा गर्मी पडती हो, अर्थात् २ बजे दिन को तो उस समय की
गर्मा की नाप को परम तापक्रम (Alaximum Temp)
और सबसे ठंडे समय की गर्मी की नाप को अल्पतम
तापक्रम (Afinimum Temp) कहते हैं। यदि इन दोनों
तापक्रमों को जोड़कर अाधा कर दे तो दिन का 'मध्यम तापक्रम'
। याद रखो कि हवा या किसी अन्य वस्तु का
तापक्रम (Temperature) सदेव हि (Shade) में लिया
जाता है। तुमन श्रखबारों में बडे बटे नगरों के तापक्रम के
पहले 'शेड टेम्परेचर' (Shade Temperature) लिया
देखा होगा। किसी अंगरेजी दैनिक पत्र से देखकर अपने सूर्य
के सबसे प्रसिद्ध नगर तथा रिसी पहाही नगर के थल्पतम तथा
परम तापमम को दसकर उन स्थानों का मध्यम तापक्रम मालूम
परो। वर्ष के भिन्न भिन्न महीनों का नापक्रम मालूम करके
अगल चक्र की भांति अपनी कापीनुक पर लिखो और मध्यम तापक्रम
निकाला।
योरप का प्रारम्भिक भूगोल
है। दूसरे प्रकार का धर्मामीटर, साधारण गर्मी तथा बुसार की मात्रा
नापने में प्रयोग किया जाता है। इसे 'सेन्टीग्रेड' (Contigrade)
100---
23
Bo
Poling Paniowalen
90
78
20
.
70
SO
60
30
40
140
30
20
10
10
32
o Melting Point ofice
CONTIGRADE FAHRENHEIT
REAUMUR
थर्मामीटर कहते है। तीसरे प्रकार का थर्मामीटर
(Fahrenhert) धमामीटर कहलाता है। यह थर्मामीटर
वायुमण्डल इसी प्रकार अपने सूये तथा देश के मुख्य मुख्य नगरों के किसी विशेष मास का औसत तापक्रम कई वर्षा जोडो, और वर्षों की संख्या से भाग दे दो तो उस विशेष मास का सत मध्यम मासिक तापक्रम विदित हो जायगा । श्रय तुम हिन्दुस्तान के मुख्य मुख्य नगरों के श्रीसत मध्यम मासिक टेम्परेचर मालूम करके एक नकशे पर उहे ठीक स्थानों पर लिख दो और उन अकों को जो समान हो मिलाती हुई एक लकीर खींचा। इस लकीर को ऐसोधर्म (Isotherm) कहते है। अन्य समान श्रङ्का को मिलाती हुइ अन्य ऐसोधर्म अपने नक्शे खींचा, इनके खींचने में इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि एक 'साधर्म' दूसरी ऐसाथम को न काट सके । हिन्दुस्तान या योरप या अन्य किसी देश के ऐसाधर्म सूचक नको को ध्यान से दवा तो विदित होगा कि ये रेखाये प्रधाश रेसायों (Latitudes) की भांति एक दूसरे कम समानान्तर है और न प्रत्येक भाग में पश्चिम से पूर्व ही की और है। इसका क्या कारण है। तुम जानते हा कि अक्षाश रेसाये केवल सूय्य की किरणों की गर्मी तथा उनके पृथ्वी के धरातल पर गिरन के स्थानों को सूचित करती है। अधाश रेखामों स तुम यह पता नहीं लगा सकते कि उस स्थल या जल भाग का तापक्रम, जिस पर ये किरणे पड़ती है, क्या रहता है। तुम जानते हो कि यदि एक स्थर भाग और कोई जल माग एक ही मीध पर और एक ही श्रधाश पर हो और उन पर सूर्य की एक सीनिणे पड़ती हो तो वे दोनों गर्मी म न तो समान गर्म और न जाडे में समान योरप का प्रारम्भिर भूगोल ४९ रहेंगे, क्याकि जाट दी थपेक्षा स्थल भाग गीत और थोड़ी ही गर्मी से अधिक गर्म हो जाते और जाम शीघ ठदे हो जाते है। निा दशा का भागोलिक वर्णी अभी तक हम करते आये हैं उनम तुमने बहुत से भाग पस देसे थे जा गर्मा के दिना म वसी अपांग पर स्थित समुद्रास अधिक गर्म और जादे म अधिक र रसते है। ऐसी दशा म अक्षांश रेवानों द्वारा दुनिया के मिग मित भागों का टीक टोक जलवायु नाना असम्भव है। यदि तुम किसी स्थान या देश के विषय में यह जानना चाहते हो कि वह जाडे में कितना ४ा और गर्मा में कितना गर्म रहता है तो तुम्हें उम स्थान या देश क पमोधर्म' सूचक नकशे को ध्यान से देग्यना चाहिए। क्योंकि 'ऐसाथम' उ7 स्थान का ठीक तापमम बताती है जिनसे होकर यह सींची जाती है। घायु की गर्मी सर्दा की नाप तथा उसे नकशे पर दिखाने की रीति जान लो से तुम यह समझ गये होगे कि 'मोधर्म' दुनिया के किसी भाग का जलवायु समझने में कितनी सहायता कर सकती है। श्रन अपने देश हिन्दुस्तान तथा योरप और मिटिश द्वीपा के गर्मा और जाडे के ऐसाधर्म-सूचक नकशा को देखकर यह मालूम करो कि - (१) किस भाग में जा की ऋतु क्तिनी टडी और गर्मी की ऋतु कितनी गर्म होती है? (२) कान कौन से भाग भिन्न भिन्न थज्ञाशों पर होते भी एक से गम या सद अथवा कौन कौन से भाग एक ही अक्षाश पर होते हुए भी समान गर्म या ठडे नही रहते ? --
घायुमण्डल
(३) देश के किम छोर से रिस ओर को चलन में धोबी घोड़ी
दूर पर या अधिक दूर पर तापक्रम घटता या पठता जाता है ?
(४) किन भागो में वर्ष भर धप जमी रहती है, किन भागो म
केवल जाम और किन भागों में कभी नहीं?
(२) स्नि भागो के गर्मी तपा जाई तापक्रम में अधिक अथवा
पहुत ही कम अन्तर रहता है ?
यदि तुम हिन्दुस्तान, योरप अथवा मिटिश द्वीप या अन्य किसी
देश के तारक्रम-सूचक रेमाये या ोमाथम' वाले नकगे को देसर
अपर लिये हुए प्रश्नों के टीर टीक रसर मालूम कर सस्ते हो तो हम
कह सकते हे कि तुम 'ऐसाथम'-सूचर नकशों (Isothermal
maps) की सहायता स जलवायु का समझना सीख गये।
मश्न
-
-'वायुमण्डल' से क्या श्रथ समझते हो ?
२--(अ) वायुमण्डल म कौन कौन सी वस्तुएं मिली रहती है ?
(प) ये वस्तुएँ हमारे लिए क्योंकर उपयोगी ह ?
३-वायुमण्डल में वायु किस टंचाई तक पाई जाती है? क्या
सब बैंचाइयों पर एक सी धनी हवा है?
४-Evaporation थोर Condensation से क्या मतलब
समझते हो? प्रत्येक की उपमा देकर समझायो।
५-योस, कोहिरा भार बादल कैसे बनते हैं। इनमें क्या
अन्तर है?
योरप का प्रारम्भिक भूगोल ६.पा किस प्रकार नापी जाती है? इसे किस यन्य स नापते है? ७-~-हवा की गर्मी से नापी जाती है? इवा की गर्मी की नाप को नक्शो पर किस प्रकार दिपाया जाता है ? -सोधर्म' किसे कहते है? किसी देश के 'पैसोयम' सूचक नयों की सहायता से तुम वहीं का जलवायु किस प्रकार जान मस्ते हो? ६----हिन्दुस्तान के जुलाई तथा जनवरी मास के ऐसोधर्म-सूचक नकों को देखकर हिन्दुस्तान क जलवायु का सूक्ष्म वर्णन करे।। १०-अल्पतम, परम तथा अौसत तापक्रम से क्या मतलय समझते हो? इनको से मालूम करोगे? श्रभ्यास, मासिक वर्षों का औसत इचों में नामनगर ज.फ०मा०० म. जू० जुगलसिला. न.दि. हांगकाग १ १४-२२ १४/११ ६ ६ ४ ११-१३-१३/१०- क्लकत्ता ०४/१०/०३/२३ ३६ ५.४/०६/०५ 8 . . ऊपर लिसे हुए वर्षा के श्रमों को ग्राफ के रूप में दिग्वायो और यतायो इन तीनो नगरों में कोन सा (1) सबसे अधिक गम (२) सबसे अधिक रडा है, और कब । क्या तुम अनुमान से पता सकत हो कि इन स्थानों में कौन सी हवाये चलती होंगी ?
वायुमण्डल
२-निम्नलिमित नगराईमासिर सापममका प्राय के रूप में दिखाया।
(सापक्रम पानहाइट डिनो म)
नाम नगर ज०५० मा० ४० म० ज० ज०म०सि० थ.
घ.न. दि.
यम्यह०४ ७१.६ २८५'८1/2011
--
J
-
कलकत्ता ६५.७०
७६५'४८५८२ २८०
-
लाहौर ५४१६/६६१ ८ ११८६८८ ८५७०
-
इन नगरो के तापमम का मा म देयकर यतामा
(1) फौन सा नगर यव पहुत गम या पात टडा रहता है ?
(२) प्रत्येक मगर में गर्मा चार जाडे की ऋतु कय होती है और
कौन सी हवाये चलती हागी ?
(२) प्रत्येक नगर के गर्भाधार जाड के तापक्रम का श्रन्तर निकालो।
पाठवॉ प्रकरण वायुमण्डल (क्रमशः) हवायें पिछले पाठ में वायुमण्डल में मिनी हुइ मुग्य मुख्य वनुनी के वर्णन के माय हमने यह भी बताया था कि यायु गर्मी धारण कर मरना है और गर्मा की मrn घरने या याने ये पायु पी जल धारणा शक्ति भी घटती या बढ़ती रहती है। इस पाठ में हम वायु में उपस्थित गर्भा के एक विचित्र प्रभाव का वर्णन करेंगे जिसमे तुम्हे यह विदित हो जायगा कि वायु किस प्रकार गर्मा तथा जल को पृथ्वी के भिस मित भागा पर यौटता है। तुम पढ चुके हो कि हमारी पृथ्वी के उपर के वायुमण्डल में सब उँचाइयों पर हवा एक सी धनी नहीं है धौर पृथ्वी के समीप की हवा बहुत ज्यादा घनी है अर्थात इसमा 'प्रेशर' (Pressure) ज़्यादा है। सूर्य की किरण द्वारा प्राप्त तथा पृथ्वी से निकली हुई गर्मी, जो सदैव घायु को गम करती रहती है, वायु की पल धारण शनि की अपेक्षा उसके घनरव या 'प्रेशर' (Pressure) पर कुछ कम प्रभार नहीं डालती। चाहे जितनी धनी या 'हाई प्रेशर' (High Pressure) .
इया १७० की हया क्यो न दा, गम हो ही पतनी या 'कम प्रेशर' (IFir Pressure) की हो जाती है। तुम या ये दयार या 'प्रशर' का भी सापमम की भांति पय पत्र में, जिस घेरोमीटर (Barome tor) यहते हैं, नाप मत हा। अगली कशाम हम तुम्हाया पे घाय या प्रेशर के मापन की विधि यतायेंगे। पृथ्वी फ धरातल पर भुन प्रदेश ( Polar Region) के मिराय भय सय भागों में प्या की गर्मा के पढ़न या घटन ये प्रमानुसार उसका घनरर या दपाय (Pressure) घटता या पाता रहता है। अभी हम पता चुके है कि पृथ्वी के मय भागा पर एक सी गर्मी हा पदती, इसलिए मय जगह वायु या घनग्य या दवाव 'ग्रेशर' एक सा नहीं रहता। यदि हम तुम्हें यह यता है कि हया मर्दध 'हाइ प्रेशर' (Iligh Prossure) से 'लो प्रेशर' (Low Pressure) की ओर चलती है, तो तुम यह शीघ्र समझ जायोगे कि हवा में गति पा चाल उत्पन्न करनघाली शक्ति गर्मी है जिस पर हया के 'प्रेशर' का घटना और पढ़ना निर्भर रहता है। जर वायु म गति (चाल) स्पन्न हो जाती है तब हम इसे हवा या 'विन्ड' (IVind) कहते है। यदि भिन्न भिन्न स्थाने या भित्र भिन्न उचाइपों की हवा का 'प्रेशर' सदैव समान बना रहे तो कोई हया न चले और हवा की गर्मी तथा जल का बांटना पद हो जाय । शो हो । तब तो दुनिया के जलगायु, उपज तथा मनुष्यों की उन्नति में बडा भारी परिवर्तन हो जाय ।
१८० योरप का प्रारम्भिक भूगोल वायुमण्डल की हवा सदव घनी या पतली होती रहती है इसलिए इसका वजन मन्त्र घटता बढ़ता रहता है। इसका फल यह होता है कि हवा कभी भी शान्त नहीं रहती। यह सदव या तो ऊपर उठती रहती है या अपर से नीचे की ओर अथवा इधर-उधर दौडती रहती है। N P 61011 Low Pressure 30 ONL INESTERLYRINIST High Pressure Belt of Calmis /ولاد / تر V Doldrums E. Low Pressure 2103 L \\ RAM wings High Pressure Belt ol Calms STERLYN Low Pressure 05I SP यदि हम मारे भूमण्डल की सैर करें तो हमको विदित होगा कि मिन भिन्न भागों पर भिन्न भिन्न समय और भिन्न भिस दिशाओं की अोर से भिस भिन्न घाल (Speed) से हयायें चला करती है । इसलिए हयात्रा के नाम उनके चलने के (1)स्थान या प्रदेश, (२) दिशा, (३) तथा (५) घाल (Speed) के अनुसार रख लिये गये है।
हवाये भूमण्डल पर चलनेवाली हवाओं के चलने का कारण तथा रप या दिशा का ठीक अनुमान वायुमण्डल की हवा के दयाव या 'प्रेशर' और मिन भिन्न 'प्रेशर' की पेटियों को समझने से किया जा सकता है। मामने के नकरी को ध्यान से देखो। इसमे हवा की पांच पेटियाँ (Belts of Clms) दिसाइ गई है। विषुवत रेखा (Equator) और ध्रुवों (Poles) के समीप की पेटियों का 'प्रेशर' (Pressnre) कम (Lor) है और क्रेया (Tropic of Cancer) और मकर रेग्या (Tropic of Capricorn) के पास की पेटियो का 'प्रेशर' अधिक (High) है। विषुवत रेखा के समीप की पेटी (Calms) को डोलड़म (Dol drums) कहते है । प्राचीन काल के मझिी (Sarlors) इस पेटी की हवानों को उनके ऊँचे तापक्रम, विकट प्राधियों तथा घोर वृष्टि के कारण बहुत डरते थे। ३८° उत्तर तथा ३०° दक्षिण अक्षाश के समीप की हवा की पेटियो (Belts of Calms) तथा पनुमा हवायो को मामी (Sailors) 'हास लेटीन्यूड' (Horse Latitude) कहते है । हवा की ये पेटियां सूरय के साथ साथ उत्तर या दक्षिण की और घटती बदती रहती है । जब सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध पर रेखा के ठीक ऊपर चम- क्ता हुया दिग्वाइ पड़ता है तब गर्मी की अधिकता के कारण इस ओर के मध्य भाग का वायुमण्डल रहुत ही पतला (Low Pressure) हो जाता है पार करेसा तथा विषुवत रेसा की पेटी उत्तर की ओर बढ़ जाती है। इसी प्रकार जव सूय्य दक्षिण की ओर मुका हुश्रा (दक्षिणायन) ।
१८२ योरप का प्रारम्भिव भूगोल दिपाई पटता है तब ये सब पटिया ददिरा ही श्रोर पड़ जाती है। सूर्य के उत्तर या दक्षिण की पोर बढ़ो से स्थल मागों की हया के धनस्य (Pressunt'म या भारी परिवर्तनहा जाता है। दिन धार रात में भी 'पा के प्रेशर' म परिश्ता होते रहते हैं, क्योकि पृथ्वी के आमा व साथ साध इसके उपर या यायुमण्डर भी घूमता जाता है यार म स गम या टडा हाता रहता है और स्थल तथा जल भाग सपा उपर की हवा को डा या गरम करके 'प्रेशर' में परिवर्तन पैदा परत रहते है। इसलिए वायुमण्डल की हया के 'प्रेशर' मे स्थायी परिवतन होने के कारण चलनेवाली ट्रेड' हयाओं के वर्ग के पहले हया के 'प्रेशर' में निर परिपतन के कारण उरपसा होनेवाली हवानों का वर्णन पा प्रत्यन्त पारश्यक है। स्थल तथा जल की हवायें हम बता चुके है कि भूमि के समीप की हया गर्म होकर फैलती है और हलकी होकर उपर उठती है। ममीप के उद्धे प्रदेशों से धनी तथा वजनी हया (Aur of ligh Pressure) इस गर्म हवा का स्थान ग्रहण करन के लिए दाद पड़ती है। हिन्दुस्तान ऐस गम दशी के समुद्र तट के समीप इस प्रकार की स्थानिक हवाये चलती हुई मालूम होती है । प्रात काल से सूर्य अपनी तेज किरणों द्वारा स्थल तथा जल के धरातर को गर्म करने लगता है, परन्तु स्थल माग जल भाग की अपेक्षा शीन गर्म हो जाता है और इसके ऊपर की ह्या समुद्र के उपर की हवा की अपेक्षा शीघ्र गम हवाये हो जाती है। दोपहर होते होते प अधिक गम हार उपर उटन लगती है और इनक स्थान पर समुद्र में उपर शी हाकी अपेक्षा कम गम राया धर्मा या 'हा प्रेशर' की हवाये चला रगती है। इह सामुद्रिक हराये ( Sea Breezes) कहते है । रात म स्थल तथा जल के भाग उराडे भी होत है। परन्तु स्थर- भाग जल भागों की अपेक्षा शीघ्र टण्डे भी हो जाते हैं। इसलिए स्थान भागों के उपर की हवा भी शीघ ठण्डी हो जाती है। इसका फ्ल यह होता है कि स्थल के उपर की हवाओं का घनस्य या 'प्रेशर' समुद्र के उपर की हवाओं के प्रेशर' से रात में अधिक जा जाता है और शाम होते ही स्थल की और स जल की थोर उडी टही हवाये चलन लगती है। इहे स्थली हवायें (Land Breezes) कहते है। जिस दिन बदली रहती है उस दिन स्थल तथा जल की ओर स चलनेवाली हवाओं का चलना उतना साफ नहीं मालूम होता जितना किसी खुले दिन प्रतीत .
१८४ योरप का प्रारम्भिक भूगोल होता है। इसका कारण यह है कि यादल स्थल तथा जल के भागों को भिन्न भिन्न दर्जे के तापक्रम तक गम होने से रचाते है । यदि तुम हिन्दुस्तान के समुद्र तट की सेर करने जाथो तो देखोगे कि ये हवाये प्रत्यक्ष मालूम होती है। इनके चलने का समय इतना ठीक । रहता है कि समुद्र तट के मलिहारे स्थली हवाओं के चलते ही शाम को समुद्र में अपनी नावे ले जाते और प्रात काल या ६ बजे तक सामुहिक हवाना (Ser Breezes) के साथ वापस थाते है। ट्रेड या सनातन हवायें ( Trude Winds ) जिम प्रकार समुद्र तट के समीप हवा के 'प्रेशर' के दैनिक परि- वर्तन के कारण स्थल तथा समुद्र की पार से हवाये चलती है इसी मकार भूमण्डल के अपर पीपा देशा' म स्थापी परिय17 के शारण दुनिया की 'हाई र पानी परियां स 'ला प्रश' पाली पटिपे। पी पार पाय परा पोया की पटिपीपाले घिन को देगा सधिदित होगा दिप पार मकर रया के समीप दी परियों में विपुम रेगा की पेटी की मार मर्दप पवाय पल रहती है। हरपासनातन पाय (Trade yands) कहत है। रेयानों के पलोग या दिशा को मौर के निशानों से दिमाया गया है। ये हपापे कम या मार रेम्पा से यिपुगत रेग्या को पार र सीधी र पश्चिम की पोर मुभी हुई पलती है इस लिप बारी गोलाई में या उत्तर पूर्व (North-East) और दपिणी गोलाई म दक्षिण पूर (South Fast) की भोर से चलती है, इसी कारण हे सारी पूर्वी ? (NP Trade) थोर दक्षिण पूर्णा हेड (SE Tratle) हया कहते है। सोचकर पतामो कि इनका रम पश्चिम की ओर क्यों हो जाता । तुम जानते हा कि हमारी पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की घोर पड़ी तेजी से घूमती है और इसके घूमने की चाल विषुवत रेखा के समीप मबसे अधिक तथा उत्तरी और दक्षिणी ध्रुयो की भोर घटती जाती है। इसका पल यह होता है कि पृथ्वी के धरातल के उपर दूसरी चलने वाली वस्तु अर्थात् हवाये हम पृथ्वी की गति के विरुद्ध पूर्व से पश्चिम यी ओर मुक्ती मालूम पड़ती है। इसका मुख्य कारण यह है कि निस घूमती हुई पृथ्वी पर पे हम इन हयानों की गति का अनुभव करते है उस पृथ्वी की तेज चाल का हमें तनिक भी अनुभव नहीं
*
777
رہی۔
PREVAILING WINDS IN JULY
१८७ दयाये हाता | मि. पररय नामी वैचारिक पी सथा हवा की गति का इस विचित्र प्रभार का पहले पहल पता लगाया था, इमलिप वाया र इस मगर उत्तरी गोलार्य में अपनी दाहिनी पौर और दक्षिणी गालाई म अपनी याद (Left) ओर म जाने के नियम का 'फेरल्स ला' (Terrels Lrnाते है। देड हवा सपण कटियध (Torrid mont) के प्राय प्रत्येक माग में सदैव पर ही पार चला करती है, इसलिए प्राचीन काल म पानदार जहाजों को इनये रप के अनुार चलाने में बडा सुभीता रहता था, यरापि हा हवानों का नाम "ट हया" ब्यापार के सुभीते के विचार म नहीं रखा गया था, तथापि व्यापार के अध में ये गये साधर प्रतीत होती है। ट्रेड इवानों के चलन के क्षेत्र म सूय्य के उत्तर या दक्षिण की थोर हट जान का यदा प्रभाव पड़ता है। जय सूय्य उत्तरी गालाई पर सीधी किरण फेंकता हुआ दिखाई पड़ता है तो शीतोष्ण कटिषध की हानी का भी 'प्रेशर' या धनग्य घट जाता है और हट हवाएँ अधिन उत्तर की थहाश (Higher Latitudes) से चलने लगती है। यही दशा दक्षिणी गोलार्द्ध में भी उन दिना हो जाती है जब सूय्य मकर रेखा पर सीधा चमाता है। सामयिक हवायें (Periodical Winds) प्रासाश में सूर्य की स्थिति बदलती हुई प्रतीत होने का दूसरा प्रभाव यह पडता ( कि मूमण्डल पर विही किन्हीं प्रदेशों में भूमि योरप का प्रारम्भिक भूगोल की बनावट तथा पहाडो की सजावट के कारण ग्रीष्म ऋतु में हवा इतनी अधिक गर्म हो जाती है कि उसका 'प्रेशर बहुत ही हलका हो जाता है। और समीप के समुद्रों के ऊपर की हवा विषुवत रेसा के समीप के प्रदेश में होती हुई भी न तो इतनी गर्म होने पाती है थार न उसका 'प्रेशर' ही इतना घटने पाता है। यदि कम प्रेशर (Lon Pressure areas) वाली हवाओं के स्थल भाग के उत्तर की ओर कोई इतने ऊँचे पहाड होते हैं जो उत्तर की अवाश (High Latitudes) की ओर से श्रानेवाली 'हाई प्रशर की हवाओं को रोक लेते है वनसे 'कम प्रेशर' वाली दक्षिणी समुद्रों की हवा उन गर्म और हलकी हवाओवाले म्पल भागा की और टे' हयाओं के साधारण स्म के विरुद्ध चलने लगती है इस प्रकार की हवायें किसी सास ऋतु में चलती है इसलिए इन्हें मैसिमी हवायें या 'मानसून' (Monsoon) कहते हैं। मानसून हवार्य स्थली तथा समुद्री हवाओं (Land and Sea Breezes) से मिलती-जुलती हैं। अन्तर केवल इतना है कि यह दैनिक तापक्रम तथा 'प्रेशर के परिवर्तन के अनुसार न चलकर तुओ के तापमम तथा 'प्रेशर' के परिवतन के अनुसार चलती है। और समुद्री तथा स्थल-भाग की हवायें दनिक तापक्रम व प्रशर' के परिवतन के कारण चरतो हैं । तुमने हिन्दुस्तान का भूगोल पढ़ते समय इन मानसून हवानो के विषय म पढ़ा था। यहीं ये हवाये जून के मध्य में हिन्द महासागर के उपर होती हुई विपुक्त रेगा प्रदेश से उत्तर प.की पोर शीतोपण ।
पाये
परिपE (Temperate mont) में रियत मिधार गगा क मैदा मी
पार जा रगती।इमदान की हया का 'सर' प्रोम में
गों की wirrartaग सपा कहीं पा पलुष्ट भूमि पर 3 साप
समान के मारण पहम ही पमहा जाता है। इसलिए ये हवा
लहार पर को दान गई। उसर की घोर से धानवाली
हर मेशर' की मी याया से हिमालय पहाट की ऊंचा मोगिया
राक देसी, मलि हि महागागर की हयापे ा स्थान ग्रहण
करन पी दोष पदी है। हमी प्रकार की मासिमी हयाये
दपिषी गालाई के भास्टेलिया महाद्वीप के उत्तरी भागों पर
उन दिनों हिन्द सागरी पोरम प्रर्धात् रिपुयत रेगा की ओर स
मरर रेषा की भोर पलन लगती है, गप सूथप मकर रेगा पर
सीधा धमान लगता है। उसरी अमरिका का भूगोल पढ़ते समप
सुम भागोगे कि मी प्रकार की मासिमी या गर्मा की तुम
मेक्सिको की यादो से प्रधान कं रेरा की मार से उत्तरी
अक्षांशों की भार मिसौरी मिसीसिपी नदी के बेसिन पर चलने
रगती है।
इस प्रकार की सामयिर दवाये गम समुद्रा की और स
घाती है, इसलिए अपन साथ यहुत मा जल भाप के रूप में लाती
है, और जय उंच पहाड मे टकराकर रदी हो जाती है तब खूप
पानी परसाती है। यही कारण है कि मौमिमी हवाओं के
पहुत से प्रान्त सेती के लिए भरपन्त उपयोगी और धनधाय
.
योरप पा प्रारम्भिक भूगोल पलुमा हवायें इनका रोपटी (Variable Westerlic9) हम पहल यह यता चुके हैं कि विपुवत रेया के समीप की पेटी की गम तथा हलकी हवा सदेव ऊपर उठा करती है। यह हवा कहीं घनी जाती है। ये गर्म तथा हलकी हवाये अपरिमित उँचाई तक उपर ही चली जाती किन्तु कुछ देंचाई पर पहुँचकर सर्दी पार इTET 'प्रेशर' फिर बढ़ने लगता है और ये ट्रेड हवाओं के ऊपर ही उपर उत्तरी नया दक्षिणीवा की थोर घलने लगती है। देड विण्ड्स' (Anti Trade Winds) कहते है क्योंकि ये ट्रेड हवा के विपरीत चलती है। कुछ दूर ऊपर के वायुमडल में चलते चलते ये हवाये इतनी उडी हो जाती है कि इनका 'मशर' नीचे की हवानी से घट जाता हे गार कक और मकर रेवा की 'हाई प्रेशर' की पेटिया के समीप पहुँचकर नीच उतरन लगती है। इस समय इनमें तनिक भी भाप नहीं होती इसलिए जिन प्रदेशों के पास ये हवाय नीचे उतरती है उनमें वर्षा नहीं होती और वे शुष्क प्रदेश प्राय रेगिस्तान या मरस्थल हो जाते है । यदि तुम दुनिया के नकशे पर देखो तो दुनिया के बडे बडे रेगिम्तान इन्हीं पेटियों के समीपवाले भाग में पाये । भाते हैं। कशोर मकर रेखा की पेटियों की 'हाइ प्रेशर' की हया के माथ मिलकर प्रण्टी टेड हवाये उत्तरी तथा दक्षिणी धवा की ओर
(
Top
27,
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PREVAILING WINDS IN JANUARY
Bells of Colmoond Voriable Winds
१६४ . योरप का प्रारम्भिक भूगोल सहायक और कहीं घडी हानिकारक प्रतीत होती है। कहीं कहीं समुद्रों में हवाशी के रस के अनुसार जल-मार्ग निश्चित किये जाते है। रेगिस्तान में कहीं नहीं हवाये इतनी अधिक चालू तथा धूल उड़ाती है कि वायुमडल धूल-कणों से परिपूर्ण हो जाता है और ।। मार्ग चलना कठिन हो जाता है। कहीं कहीं हवाओं के कारण वी होती है तो कहीं कहाँ हवाये पेड-पौधो की नस रस का पानी सुखा देती है। शीतोष्ण कटिबन्ध के देशों में भी कभी पलुभा हवायें तथा प्रचण्ड धिर्या इतनी अधिक सर्दी उत्पन्न कर देती है कि जाडे के दिना में पानी घरफ बनकर घरसता हे। जाडे के दिनों में इंगलेण्ड के बहुत से नगरो में लोग अपने मकाना में थर्मामीटर लटका देते है जिसे देसकर वे मालूम कर सके कि हवा कितनी गर्म या मर्द है। जिस दिन प्रात काल लोगो को विदित होता है कि थर्मामीटर वायु का तापक्रम ५०° फ० या उससे भी कम बताता है तो ये समझ लेते है कि वह दिन बहुत उण्डा रहेगा और जिस दिन तापक्रम ७०° फ० हो गया उस दिन को वे पहुत सुहावना ५ भला समझते हैं। गर्मी के दिनों में हवायों का तापक्रम ७.० से लेकर ° तक रहता है। जाई में ध्रुव प्रदेशों में हवानों का तापक्रम पानी जमने के तापक्रम (Freeang Point) से बहुत कम रहता है। महीना दवाये धर्फ की वर्षा करती रहती है। जमीन पर घर्फ जमी रहती है और कोई पेड-पौधा तक नहीं उग 1 सक्ता।