Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner

Ek Sahityaik Ki Dayari

Madhv,gajanand · 2010/12

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एक साहित्यिककी
डायरी
गजानन माधव मुक्सिपोध
भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन

ज्ञानपीठ लोकोदय प्रन्धमाला प्रन्यांक -१९
सम्पारक एवं नियामक
जामीन मैन
EK SAHITYIK LE DIARY
(Bolomor
GAJAXAN MADHAV
YUKTIBODH
Bherettystorpital
relicotho
Fhstrdition 1904
Pries Rs.50
प्रकाशक
माकोसमापीठ
चाय काय
मीपुर पापोत, साचा.
दुका रोग, पाराक्सी
५ नागोयामा,
प्रथम संस्करण
मूल
सम्मति प्रणालय वाराणसी-५

क्रम
तीसरामय
२ एक ही कवितायत
३ वरपर मया बिम
. हाशिएपर इमाम
५. महोबर एक पातचाप
पक मित्रको पल्लीका मन-कि
• मयको सम्म-काही क
• मयी बाम-गही दो
९ बीरहर
१. बिमिर मार भारतीय
५५

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तीसरा क्षण
बारसे कोई बीस साल पहले की बात है। मेरा एक मित्र केसरमौर
में रोनों संमममम मन माया करते । पहार-पहारा करते मी
मसी पार किया करते। शव मरे-वैसा ही पन्द्रह मपका गाम बा।
शिन्तु यह मुम बहुत ही एस्यपूम माम्म होता । उसका रहस्य बड़ा ही
बगीन पा । सस इस्पसे में भीतर-ही-मौतर मात भाकित रहता।
केराबने हो गबहुत पहले मुझे बताया कि मिसा और
मुपुम्ना किसे कहते है। कुसिनी-मासे मुझे बहार सगता। उसने
टमोगियाकी बहुत-सी बातें बो हो विस्तार साप बनी।
परका सिर पी से बहुत बड़ा था। भागेकी भोर मा मोर
विस्तृत पा। माषा साकारण और पनी-पनी मोहक मीच कामी बा
बहुत महरी माना दो पुतली कांपस मोहए हों। यह भी सगवा
कि रामकी बोर्वे तमपर है। यह भी महसूस होता कि उसकी बालोंक
मीचे कोई इमरी माने मौर बमो हुई है। मालों के बीच नानी गुरुमात
पर पनी-मनी माहोंकी दोनों पट्टियाँ नीचे मुकार मित पानी पी। कमी
भी माईचारा बह इस मिता-पापर महाके पास टया मेता।
मेफिन उमरे रोएँ फिर ऊग माते । पतिक मोरे फीका-पीसा समा
विपिस मार सकताया हुमा पकाइप पा।
संशय ममीले फराबालक पा शिसे पेलतानसे माई माह नहीं
पा। उसका गणित विषय मन्छा पा। इसीमिए पंधर मरे लिए मिरिक
और मंदिर में पम्री हो रमपा।
हमराहम

फिर भी में देमके प्रति विशेप उत्साहित नहीं था। मुझे प्रतीत हमा कि मेरे प्रति मषिक स्नेह रखता है। यह मेरे पिताजीके प्रमेय मित्रका ताका बाइसडिए उसके यहाँ मेरा काफी माना-बाना बा। बस एक ही बात उसमें मोर मुममें समान दी। मह पाही इमार पा। मैं भी घूममेका पौकीन था। हम दोनों सुबह-माम कौर पट्टी विनोमे तो रिनभर सूर मन पापा करते। इसके बागपूर समका सम्पा चेहरा की बार पीता पवा । dि पा मुमसे अधिक समस्प का उसका शेक पारा मरमूर था। वह निस्ममह हट्टाकट्टा बा। फिर भी उसके पहरेकी लला काठी पीमी पती। पीले म हरेपर पनी मौहों के नीचे बहरी-हरी कामी चमक पर पु-नुमा माने और सिरपर मोरे पास और मोज महिमा मगत यो मुझे बहुत हो रहस्य-भरी माझम होती। केशवम माम्-मुठम चल्ता मपी । बह एक स्विर-प्रसास्त पापान-मूतिको भौति मेरे पाप पगा। मुझे सपना हि मूमिक मर्ममें कोई प्राचीन सपनर है। उसके निारेपर अपने पाट मातंककारी देव-मूर्तिमा पौर पस्पपूर्ण मर्भ डापाले पुराने मन्दिर ।। इतिहासने इन सबको वा दिया। मिट्टीकी तहार न पोंपर पर पट्टानोपर माने मनमा । सारा पृस्म मूमिमें गा पपा बस्य हो गया। पौर उस स्थानपर पूर्व विप्दमो नये रिठायती पर हमा रिसे पये । बम बना दियै पसे । चमकार कपा पहने हुई मूरत हामियां पूमने सभी । और ग्रही-गिना पोम पनेरुमा मेरा मित्र पण बिसने पापद पिने सम्मम या उमरे भी पूरे पम्ममें उसी भूमि-बमस्व सहरका बापिमा होगा बहा विपरन किया होगा। ममुप्पा पतिल एक महरा यस्म है - इसका प्रथम मान मुझे पाप मिला - इसलिए माही पिर मरे सामने मुला मुलायम नहीं था। उमरे बीवनमें कोई ऐसी बात नहीं पी मो छिपायी जान पोम्प . एक सारितिकापरी हो। इसके अलावा वह गमा सपमुच बहुत बयान, मौर-गम्भीर, मीपण कटोंको महर ही मामबामा मरमन्त धमाशीम था। किन्तु साप ही यह चिपिस पिर, बचत यात्रा और सहन-स्मेही पा । उसम सबसे मारोप यह पा कि उसमें पाकोषित बास-मुसम गुम-नोप महीं थे। मुझे हमेशा मया कि एसका बिना नवाका ससग है। मम हम हास्थिममें पे देपर मुन्न नियन परम्प-अरेमि के बावा । हम मनहरिकी गुहा मम्मिरलापकी समापि मावि निर्मन फितु पवित्र स्थानाम गाते । ममसनापके पास शिप्रा मरी बहुत गहरी प्रवण मग्पर और स्पाम-नीम पी । उसक किनारे-किनारे हम नये-नये भौगोसिय प्रदेशों मनुमपान करखें। शिप्रारे जिारोंपर गैरप मौर भैरम पाने रितायी। मुगहें और दुपार मपने रस्त समेट मे । सारा बम्प प्रदेश राममें मर मिया। सारी पृप्पी परामें ाि छौ। मैने बायको कभी भी पापाम्पास करते हुए नहीं देखा उसने भी सुबमुष एमो सापना की। फिर भी यह मुमसे योगडी गा रखा। मुपम्ना नाड़ाके फेयीय महत्वकी बात ससने मुझे समझायी। पद्माकी म्पबम्बापर भी रमने पूग प्रकाप गता। मेरे मनरे मरेको उमक प्रशासन रिमिटम नहीं पिया। किन्तु मुम उसके पोपको पा रास्यके ममनेवी रणने मरेरेकी भाति भापित करवी एहती मामा म किमी गुहा मेरेमें चला जा रहा हूँ मार रहीम (किमी स्त्रीकी) पोई ममभेरी पुकार मुझे मुनापी । रहो! मैन माम मनका यह वि रमे का मुमाया। पर मरी तरफ भब पहलेमे भी मपिक भापित हमा। पाठ सहानुभूतिम मरी तरफ पान ला। बीरे-धीरे में समरे मरपन्त निट मा गया। रमको मगह बिना पाम करना भर मेरे लिए असम्भव हो गया पा। गापारण स्पसे मरे मनमें नामी भार-सरने में रमे रह मुमाता-पाहे रे मारमाएँ पो हो चाहे पूरी पाहेब गुमी परत वीमराक्षण ३ कायााहों पाहे हकमे सामा। हम दोषि बीच एक ऐसा विस्वास पो मया था कि तप्या मनावर करना एपाना उससे पपेन करके रिमाण उसपरम गा रेला म केवल मत है, परन् उससे कई मानसिक रहमने उत्पम्न होती है। एक पाव का। अपने समाप या भाव कहते समय में बात उमस्ति हो उठा। मुझे लगता कि मन एक रहस्यमय सोक है। समें पर चरम सीलिया है। सीरिया मीती है। सबस मिचाही सीही पानीमें बी। बहो बबाह काला का है। उस माह पर से स्वयंको ही र सपना है। इस बार का बहमें कोई कम है। यह पायर में ही। भपाह और एण्यम स्याह-अपरे पानीकी सवापर चोरनीका एक चमभार पट्टा फलामा है, जिसमे मेरी बीमा चमक पाई मानों से नीले भूगिया पत्थर मौतरसे पहात हो गठे हो । मरे मन बहलाने पटी हई मनिया ससे मार्पित करती। बीरे धीरे मह मुममें पपारा रिसषसी लेने गया। मैं जर पसे अपने मनकी बात यह मुनाता तो वह मम भर अपनी बनी माँहोगाठी प्रशान्त-स्थिर मासि मेरी तरफ देखता एता। शापारप मा पो कि हमारे समार की मिऐपठाएँ की हमारी वर्षाका विषय बनती। यपि उसकी मान सम्पति बस्य ही बी इमारी पाएं विविध विषयापर होती। मुझे मीठक मार है कि उसने मुझे पहली बार कहा था कि पालीवारणे भापुरमकी प्रवृत्तिपर इसरमसे नीर दिया है कि समान योटिक प्रति सारी गयी है। मसम्म पर गापौषापी प्रवृत्ति प्रस्न पिपष गौर निष्कपकी गौर कियामोंका मनार करती है। यह बात इसमे मुम तब यही बीबर छन् ठीस-तीसका पत्याग्रह बम हो जाना बीर विधान समामि पुसनेकी प्रवृत्ति पोर पा रही थी। तब हम स्थानीय परमीगिएट कहिन प्राट ईमरम पड़ी पे । भी हमन सके पर वर्षीय मापोगरा नाम मुना था। एक साहित्यिकर्म गरी इसकेगा हम शिवो कमियम पार- पिसी दूसरे पहरम । मुह नहीं माम मा किवयने मी बही फलित गाएन किया है। मैन उपर बारेमें बानकारी मेमेकी कोई कोधिध मो नही की थी। सब दो यह कि मेरा उनके प्रति कोई विशेष स्नह नहीं पा मकाई मारपण । ऐं पापागवन् प्रधान्त गम्भीर म्पति मुन पसन महीं। हो म प्रति म मन मम्मान मोर प्रसाके माव पे। मौर, भूमि हमसे बहत पाहता प इमम्मिए मुझे भी उसे पाना पड़ता था। पापा उमे मेरी यह स्पि मासूम पी। मेरित कभी उसने अपने मनका भाव मही रमाया । सम्बरबमा पौर, एक पार, पब हम दानों फोष ईपरम पा रहे थे वह मा रोन पाय पिलाने से पया। यह में ही बात करता या पापा पालिर, यह बात भी क्या करता उसे बात करना माठाही कापा दुम फिनामी सबमे वे नमर मिले थे। मने प्रमाके सत्तर स-+ दिये इसका में रसबभोर होकर न करता जा रहा था। पा पोकर हम रोना मापो मौस दूर एक वातावके किनारे पाठे। यह यम ही पुप पा। मन तारकोएनसिसिसकी बात छोरवी पो। बाम पारा प्रवाह गावमे पर पुछ उकवाने मना कर बा परपर स्टार तामाबमें मारवा । पानीकी सनापर सहरे इनता मौर पर कीमापार। सास पानी मौतर मट गयो दी। सम्म्या वाताव प्रब कर मर पही थी। मार-मारक यामागीय पात्र पानीमें मून हे पे। पौर सम्प्पा हम पोन पौवनमे उग्मत्त हो उठा पा । हम दोनों उठ से मार दूर एक पीपसके के नारे पर हो रहे एकाएक में मनेमे पाँच रटा। पता नहीं पों, में स्पर्य की भारमे मातपित हो उठा। एम पीपल-पके नीचे अपरेमें मने रस एक भोग बोर रिकाम मारे में कहा 'पाम पीन पाम मेरे मीट सायको चाहे को डामा। हम दोनों बीच एक ऐसा बिस्तास हो गया था कि तम्पका मनावर करना साना उससे परहेज करके दिमाग्री समरमें गड नाम पम भरम् उसस का मानसिक समक्ष उत्पन्न होती है। एक बात कह। अपने बयान या भाष करते समय में बहुत पसमित हो गया। मुझे पता कि मन एक इस्ममप डोक । सम्म मेरा है। परम सीहिया है। सीरिया मीती है। सबसे निपी सीपी पानीमें बी गई है। हाँ बबाह काठा । ग्स सबाह बस- से स्वयं को ही रमता है। इस ममाह काले पतम कोई है। यह पायद में ।। भवाह और एकाम स्पाइ-मेरे पानीको सतहपर परिमीका एक नमार पट्टा प्रामाविसमे मेरी ही बापमा ही मानों से नौले मूपिया पत्थर भीवरते गीत हो उठे हो। मेरे मनपसनम टीप्पनियो ते बापित कती। और धीरे यह मुममें पपारा रिपस्सी ने नपा। मैं पब ससे अपने मनी बाते कह मुनाता तो पासम-भर अपनी पनी बौहाँबाही प्रणत-स्थिर मासि मेरी परेवता एता । साधारप बाते जो कि हमारे समाज को निपटाएँ की हमारी वर्षाका विपप बनती। यपि उसकी मान- सम्पत्ति मात्र ही पी हमारी पाए विविध पिपयोपर होती। मुझे ममीवा यार है कि उसने से पहली बार महापाक माचीवार मापुर कमली प्रवृत्तिपर इस मसे पोर दिया है कि समान पौशिक प्रवृत्ति रखा गया है। मममें या गान्धीवारी प्रवृत्ति प्रश्न निसिपल मौर निपपकी कि हिसाचा मनावर करती है। यह बात उसने मुझे सब पी पी या सम्ठीम-श्वासका सत्तामा तत्म हो पुकापा और रिमान नमामि पुसुनेकी प्रवृत्ति पोर पहा यीबी। तब हम स्थानीय प्टरमाथिएट कॉमेगो ट बिरमें पावे पे । मी हमने पसरे पण बर्षीय भायोजनरामाम नुना वा। एक साहिचिम्बापो

इसके बाद हम रिसी कामय पारे-कियो दुसरे शहरमै । मुझे
नहीं मासूम पा किदेशबमे मी पड़ी इमिर पाएन किया है। मने एमके
गारेमें बानकारी मेनेकी कोई फोगिता भी नहीं को पी सषता यह है
छिमेरा रसके प्रति कोई विशेष स्नेह नहीं पा मकाई मार्पण। एमे
पापामवत् प्रयाम्ठ पम्भीर म्पति मुन पसार महो। हो उमः प्रति मेरे
मनमें सम्मान और प्रसिा गार। मार, कि यह मुझे बहुत पाहता पा
इसिए मुझे मी रसे पाना पाता पा। पायद उम मेरी मा स्थिति
मागम भी। मेग्नि मी नमने मपने मनका भाव नहीं परमापा इस
मम्मम्पमें।
मौर, एक बार, पब हम दोनों प्रेषयरम पा ए ये बह मुम
कन्टीनमें चाय पिलान गरा। कबह में ही बात करखा गया था।
मातिर, पर बात भी बया करता - मम पात्र करमा बामही कहा था।
महिमामफीमें सबसे मम्मर मिथे। मेरे प्रमाद नगर मबम
Fिये इसका में रसमोर होकर बमन रखा गया था। बाय
पोपर बनों बापो मोम दूर एक AIRERE किनार ना। बरमा
ही पुरा। मेरे माराएलमिपकी बाठी श्री। स मर्ग
पारा-प्रबार बामे यह कुछ चरतान माता तब बस पपर रखकर
वानाबमें मारता । पानीपी मापा सहा बनतीं और प.
कीबाबारा
सौम पानोके भीतर मटक मपी भी। मम्प्या वामावर्म वा काही
को भो। मान-माम भामाशीप बरा पालीम मुख इथे। बौर में
मम्मामारपीन पौवनमे समत्त हो रहा था।
हम दोनों को परे और दूर एक पापहो सके नीचे का हो ।
एकाएक में मपनमे पक रय। पतामही क्यों सर्व एकजगीर
भारो मारित हो उठा। यम पीपम्भसरे मीचे अपर, मन उम्म
एकबोर मार विहान मारेप का 'पाम रंगोन पाम मेरे बार
ठोपराधम
५

समा गमी । बस गयी है। वह एक बाई रंगीन सक्ति है। मुझे पस मुहमार बाना-पाही मादुई मलिसे - मानी मुमसे मुझे र ममता है। बार सभमुष तब मुझे एक परपी मा गयो !! इतनेम पाम सोबती हो गयी। इस पर स्तूप-मस्तित्व बन गये । पक्षी पुप हो उठे। एनएक सब मोर स्तम्यता म भयो । और फिर इस स्तम्पवाके भीतरसे एक बम्प पीसी ममा जाईपर पड़ ममी । कासबके गुम्बरपर मार साई रे पिडपर सरकली परमी सरपोती सीचमकने लगी। एकाएक मरे कापेपर अपना पिपिडीमा हाम रख चयन मुझसे 'पार है, एक बार तुमने सौदर्यको परिमापा मुमसे पूर्ण वी?" मैने उसकी बात की तरफ पान न तेहए स्त्री-भरी बापाचमें 'जब तुम स्वयं सौम्बय अनुभव कर रहे हो।" मनही पानवा किया बनुमय कर रहा था। मैं गत पहीप सकता है कि किमी मारक मापनीय पक्लिन मुम भीवरसे या मिमा पा। मैं कर समा हीना सकता हूँ किस समय मेरे अन्तरपा मीठर एककोई बार पस्तित्व और पा। मैं ससे मामूस कर पाभा । कई बार इसे महमूस कर पुरा था। किन्तु माती उसने भीवरसे मुझे विमुक ही पा लिया था। 'मै बो स्वयं का यह भस्वयं हो गया था। अपनेमे बहत्तर पिनमन बस्य । एकाएक उस पापाप-मृति मित्रको मीतरी रिक्तवापर मरा प्पान हो मापा । पर मुमसे कितना दर है, हिना भिन्न है गितमा बग है- साहनीय पमे मिल 11 यह मुमते पगिताऊ भाषामे कह हा वा छिमी वस्तु पा स्म या मापसे मनुष्य पर एकागर हो पाता है तब सौम्दय-बाप होता है। सफेट और बाग्मेष्ट बस्तु और उसका दर्शन मो पृषक पए साहिस्पिानीपरी मेर मिटकर पर सम्पेर बॉम्बेस्टसे वारम्य प्राप्त कर सता है तब सौनय भागमा उखुख होती है। मैने उसकी यातको तरफ कोई खान नहीं दिया। सौन्दयकी परि भाषा येरै वा रसम मत है से मेरा मित्र सम | रनकी परिभाषा सही होता गया, पमत हो तो क्या ! इसस पया होता जाता है !! लिम गुगरते गये। एक ही तरफ हम दो मापी भिम्म प्रतिक भिम्न गुम-बम भिन्न विधामाक। एक-दूसरेस रकता रटने बाबा हमरानों मिम पाते। पर्या करन सगत । मेरी पान पतमी-जैसी पम्ती। शव सांकममें सम हुए फिर भी मुझे हए. सीसे तारे-वा प्रतीत होता। कई मकान मबर जाप र भारु : मौरीपाटीकर मे, मेफिन बाबा सौरममें ताकार पटका मामे यह भी तुझा हरा पायी समानेकी पारत मही । पाहा भौतरसे टूरा पारी कप ही महीं सकती। नि इस तामें एक दिन बकस्मात् पापी भी लग गयी। भी का रिन । दृषि समोप पूप मसमा ही था। मैं परमें पेटे-47 पार हो पापा। मैमे साक्तिपर मावे हए भार पर्ने पमस्ते हुए एक बारको दरमे रेसा । पर मन का रिवाएँ सिप हो पी। सोपा सितार रही भाममें फमम मा हा है। आपका पहरा उत्तप्त पा। पेहरपर गुरु मपी बात भी मिमरों में पान मही पापा । पपितासि मुग बनी परमन माी भी कि म काकी तर७ प्यान ६ मई। म पो मापन नगम समर मे पोस्लाम पर करता हो पा पाती होर पनी मौर पनी हार मोर भी कामी और एमी हो गावीरमथिए मैन हो बासना पर म्पिा से गिरसे! तीसरा पिसाब गरन एक मोर पियकर ए नया। ससके पास तर माघे मारेर मा गये । मुझे क्या यह मापम करना चाहता है। उसने बारम्म किया मैने बहुमत सोचा कि स्मेिटिक एक्सपीरि एम्स क्या है। भार मैने इसी सम्मवम कुछ मिला है तुम्हें मुनाने भाया है। भीतर शिसमें मेरी नानी मर पसी । म मुर कषिताएँ सुनानेको स्वाहिश रखता था। वा यह फेसन अपनी मुनाने ठेया। मेरी सारी दुपाहर हरामहोबायेगी।पी। मैमे प्रस्ताव रखा 'भपन उस विषयपर बात ही क्यों न कर में। 'मा किन तुम रिसिपिनसे बात करनी होपी। यह कहकर पर मुसकुरा रिया ॥ पर मुराहट मुझे तुम पयो । जो पया मैं इतना पागल किवात करम, मटर पाता है। इस सालेन बहुत प्यानपूर्वक मेरे स्वभावका पम्पयन रिमा होमा । धापार में हो इसे बहुत पोरकरता यामा। अपने समापके बम्पयन इतने अधिक बार इतने प्रदीप पवसर किसीको देना पापर रचित नहीं था। मैं तो उत्त-परीक्षा बोसला बाणा मौर अपने दिमागकी नोटयम्म मेरी हर सम्सी टीप मेते है। मने विश्वास रिनेकी पबरसस्त मेध और पेश करते हुए कहा 'बात बिल्कुल पसे ही होगी।" पसमे कहा 'मैंने तुमें बताया था कि "निय पौर पर 'स-पर' पौर 'बस्तु पर दोनों का एक हो पाते है तब तारारम्प यत्पन्न होता है। रसक भाषाको गम्भीरता कुछ ऐसी भी पहरा उसने इतना पौरिसस बना रखा था कि मुझे अपनी इसी पब रेली पहो। पपगी बात को म्य है कि मुझे उसकी प्रमाणही अन्ही नहीं कपी । यह तो मै बागवा कि सारे पानका मृत मापार सम्प्रेषट-मिष्ट रिटमणिपको पता है- सपा मोर पस्तु-मपी परिसमाएँ और उन दो पोक परस्पर ये एक सादिपिकी गवरी

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पपपपी पम्पमा मापारपर हो दान बरा होता है। बया यू कहिए
हिमान-मोमामा बड़ी होती है। एपिस्टँपांसारो मवि मान-मीमांसाफी
दुनियाश्पर ही परिकल्पनामाके प्रामारका रपना की गयी है। इस दृष्टिस
रेखा पाये तो मुन्न पापपर हमनेकी बरत नहीं पी। मै रमको
स्थापनाको विवाघ मान सम्वा हास्यास्पद नहीं।
फिर मी में इस पड़ा - इमसिए कि मुम उम पनि उसके समक
विचित्र म्पशिषको समय दिवसायी । वही बाधित गतिहीम हना
पापागास पक्तिस्व !!
उसकी मौहें कुछ याषित हुई। फीका पीला चेहरा किषित
रिस्मपसे मेरी मोर मही ठणी दृष्टि साप्त कगा मार्मो बह मेरे एका
बप्पपन करना चाहता हो।
मन हा माई, मुमे वादाम्प पर तारारिताकी बात ममममें
नहीं बायी । पप तो यह है कि मैं किसी वस्तु, वाकार नहीं हो पाता।
समकारिताकी बाठा में गुरण नहीं करता किन्तु में उमरो एक
माम्यनारेमपम पहन नहीं करना माना।
उसने कहा 'भो ?
मन अपार पिया "एक तो में बग्नु समका टी-टोर मप नहीं
समतवा । हिणी मनमे वाट बस्तुको ही वस्तु ममता गाता है - ऐमा
मेरा यपास है। में कहवा हरि मगरा तत्व मी वस्तु हो सकता है।
मौर मपर यह मान लिपा गाय कि ममका वध भी एक बस्तुगो एमे
पत्त माप तमसारिता या वारम्पका कोई मतलब नहीं हाना पर्गेगि
पर वस्त्र मनदीका एक माम है। हां में हम मनरे वस्व मापट
स्पतारी पसना कर मुगवा सराकारिताको नहीं।
पेरे ससर बोर गमपी हमन-मोमो मतिने उमे पिवास गिरिया
किम रमको बात गानो मिरा बानी कर रहाई परम् ममी बात
नपणनमें महमूम धानेपानी परिपाईका बयान पर पाई।
तोसराभम
९

मातिरकार यह मरा मित्र पा बुद्धिमान् पौर साप वा। सने मेरी मोर देवकर विचित् स्मित किया मोर ममे मगा 'तुम एक- की (मिमतये बोस रहे थे इसलिए ऐसा करते हो। किन्तु सभी लोग मला नाही है। एक पाठक है पाता है। इसलिए तुम भी हो - यह नहीं कि तुम हो इसलिए है मारे सिए नह11 तुम नमक सम्बन्धसे हा । पP वा मोता ताम्म बा दमासे पात पुरु करें तो तुम मारमय नहीं होमा चाहिए । मेर महस निकला 'तो' उसनगारी रस्सा 'वो यह कि मेवरको हैसियतसे सगा पलिया मियोपपके पस्तैसे होते हुए सौदर्य-मीमांसा करोगे या पाठक बना रककी हैसियतसे कानुमबो मामसे हारते हए सौम्पर्षकी म्यास्पा करोगे? इस सपाका बाबरो। में उसकी चपेट मा गया। मैं कह सकता था कि दोनों कमा। किन मम ईमानदारी बरतना ही अपित सम्हा। मैंने कहा 'मैं तो देशको हसियतसे ही सौम्दबकी बाया करना चाहूँगा। इसलिए नहीं कि मैं ससकको कोई बहुत सा स्थान रेमा वापता है पर सबिए कि मैं बही अपन भनुमयकी पट्टानपर बड़ा हमा। उसने मीराको सिकार और फिर दौसा करते हुए बार दिया नाव टोक रिम या मोग मेमा नही है ये मी वा अपने ही मनुमको सभामारपर सो रहगे और उसी बुनियारपर बात करेंगे। सबिए उना बारैम नामी सिकोहनी मरत नहीं सम्हें नीषा देखना तो भार भी प्रमत है। पसनमाना जारी रपया इस बातार बहुत कुछ लिभर कवा है दिमाग किस सिरमे बात गुरु करेंगे। पशि पाठक भोता या कि के सिरेसे बात मुक परमे वा मापकी विचार-पामा एसरे पकी होगी। मरिया मिरसे सोचना मुरकरणे सो गात मतप प्रकारको होगी । साहिस्पिायसी

रोनों सिरेसे मात हामी । सौन्वय-मीमांसाफी ही । किन्तु यात्राकी
मियताकारण ममग-मग रास्तोंका प्रभाव शिपागेका भित बना
रो पात्राापी परस्सर-मिमता मनिबाय स्पस परस्पर-रिएकाही
1- यह सोचना निरामार है। भिन्नता पूरक मा हो सकती है
विरोधी भी।
परि हम यगा-सप्म बात भी करें तो भी बस (एम्फसिस)मी
भिन्नता कारण विषमपण मी भिन्न हा बापगा।
किन्तु सबस महत्त्वपूर्ण बात यह है कि प्रश्न पिस प्रकार उपम्पित
किया जाता है। प्रान तो बापको रिचार-पात्रा होगी। यदि इस विचार
पात्राको रेगिस्तानमें विपरमका पर्याय नहीं बनाना है ता प्रस्नको सही
रंगमे 'प्रस्तुत करना हामा । यदि यह समागमे उपस्पिन पिपा पया ता
मगही सारी यात्रा गहत हो बापगो।
उसने मेरी तरफ पानसे सा। शायद यह पाह देखना चाहता पा
लिम उसकी बात पम्भीरतापूषक सुन पा हूँ या नहीं। थापर उसका
पहरियारा पा कि मैं बरपषिक इम्पस्सिप महा उत्तेजित हो चटनमाल
एक सपम भादमौकी तरह है। किन्तु में पान्त पा। मरे ममी काल
एकही प्रतिम्पिा भी मौर वह यह कि कार यह समझता है कि मैं
ममायाको टीप वरइस प्रस्तुत करना मही पानता। अमनमें उसकी यह
पारपा मुझे बहुत मप्रिय हगो । म रमकी इस पारणाला या पारसे
मानवा पा । वह कई बार उस पुरा भी पुपा। ममममें बह गोशिक
पाय भनेका मुमसे सम्पवर सममता पा। उमरा ठाम उमरे
परमम्प इस पोरे वीवरी दूरी रीफा सतत मान और इस मामक
गारपूर हम मिाा पदम - परस्पर पनिता मोर मा रिपरीत
इस मानापारण मर मनमें जा गिरस एक प्रग मारती हई
गौम और पिपिापन - ल सरबा मेरे बमकरणम वास
घोसराप

मरे मम्मोकी मावना विपम हो पपी पी। मूष सम्म गये पै। मैं परको न वो पुषत स्वीस्त कर समता पान उसे मपनी रिदमासे हटा सकता था। इस प्रकारको मेरी स्थिति दी। फिर भी ऐसी स्थिति बन पाकेसे पसी भापी थी इसलिए मुझे उसकी बात पा गमी पौ। किन्तु इस मम्पस्तता बाराबार मेरा विवोम फूट पड़ता मौर तर पपड़ी बांचा एक पाला रोपनी विद्यापी रेती मोर मुझे सम्प होता किया मेरी तरफ देतार मुगहराता हना कोई परी पोट पर हा है ॥ रस समय उसके विप्य मेरे हरयमे प्रपाका गा पूट पड़ा। किसी-न-किसी ठप मैने अपनेको सामग्राम मोर मानसिक सन्तुलनकी समापिम या मा यह बतानके लिए कि मैं उसकी बातें प्यानपूर्वक मुन हा। मैंने उसके वहाँ मौर मुफ्तियोंक प्रबाद बहर मर धामा ही पेप्सर समझा क्योंकि इस येसे या ममे मेरे माम मौरमको रवाहो समती पी। इस बीच मेरा मन रस्सर मटकमे स्पा। बाहरसे पापर मीर-प्रणात रुप पाया। मैने ऐसे भाव से पति ने जो हिमानमरित पाव-धिवरणी माति प्रान्त निश्वा पम्मीर और मम्म समते है। किन्तु अब मुझे इस वातका माग पन्द्रह होने लया कि बसम्म ऐसे मोनॉका सिर खामी होता है। सनकी बाहरी पति और पम्मीरवा मीता लामीपनको कमेकी खोज है। मुझे ही रेलिमे , I में सी समाधि अपार ससके मम (पार नहीं बेरस मार ) मुन पाई। णि मेरा मन भर गगमाहा। सेमरो कमी कमी हग मारे भीतर पके माय राम प्रकार सके एक गाय मरे पुन माते है। बाहर रसका नार प्रसाद बारी से कोई मार तिक प्रबाह पहा हो। मैं बस एप महतो से पद पाया। एंमा !! सपो में मानेसे हो विरक्त हो गई। क साहिस्पिडी गवरी पौर में परवस्तीकी इस ध्यान-समाधिमें लीन होकर सूप ही से इन हो उठता है। ऐसी जुम्प भवस्थाम मै सहसा उत्तेजित होकर उससे कहता हूँ 'परा पाप से भाऊँ दो मिनिटमें माता है। यह कहकर मै पर मीतर मायब हा मया मोर पन्द्रह-बीस मिनिट बार बाप बायकी देकर वापिस भापा। तब मुझे सहसा मुनापी दिया विभिन्न म्पक्तिमाके लिए सरन प्रश्मिाएं मिन-भिन्न रिमित सुमामें सूजन हिमाएँ मसग सम्म होषी है । मिमित साहित्य-प्रकारों के लिए भी सुमन प्रक्रियाएँ भिन्न-भिन्न होती है। मैने बायकी ट्रे टेबम्पर रस्सी बौर हसपेस गम्भीरतापूर्वक कहा 'मुझे इस बातपर पाचनके लिए भवकास का समय दो। क्या आयात है ? तुम्हारी बात पात महत्वपूम है इससिए ! उसन मपनी रसामनी बाहिर की। मरे विससे एक बयन एट गया। में एटकारा पा गया। में पोर सा पूस भी हमा। उसने मेरी तरफ देखकर सिफ इतना ही कहा 'मैं चाहता है कि साहित्य-सम्बन्धी पारमाएं वास्तविक साहित्यमें विप्मेपनके मापारपर बमापी पाय। जिस प्रकार विज्ञानमे गाशमधे हिमनपर भाया पाता है - यो संपहले उनक विपणनारा उनके सामान्यीकरण बनुमान मौर निप्पप निकासे पाते है - उमौ प्रकार साहित्यमें इसपनसे शिनपर क्यों म माया माय ? पियानका क्षेत्र मेबस हिन्दी साहित्य वरही सीमित क्यों रहे? उपम्यास क्या है, यह पाठ समय हम विपको प्रमुग उपम्याकि उपराम्त ही यह यहा कि पम्पास किसे कहते है और उसका पिस्स क्या है मना रस प्रपान मंग बपा होते है."सी प्रकार साहित्यमें सौम्दर्य किसे कहते है इस प्रश्नके ठहापोहका पेत्र मेवात दिदीकी मारमपरक कविता और हिन्दी साहित्य तक सीमित न रपएँ। वासराम 11

यदि हमने धेश विस्तृत किया था हम पायेंगे कि धौन्दय-सम्मानी हमारी
परिमापा अस्पाताई रोपसे मपमा बम्पादि मौर अतिम्माप्तिकोस
रहित होगी। मुझे गहरा सन्देह है कि मानसको सोमर्म-परिभाषा
(पदि उसे भ्याल्या ई ता ) मम पिता मौर यह भी मारमपरफ
कविता की लिपपवाबार मापारपर बनापी वा रही है। सौम्प-सम्मायी
इस मासामा प्रष्ट मा बरपा रेप मामी नाम्प-रिला रिम्स
है किन्तु ये पाल्याए : इस प्रकारसे कुछ इम टाठो मार पामम
बनायो बावी है मानों में सायमीम सत्यकी सावनिक स्पटनाएँ हो।
इस पोर और पॉस्चरकी रात मही। मह महानिक पद है। अगर
साहित्यिक सौरपसम्माची मीमांसा करती है तो भापको अपनी रि
देवम बारमपरक कविता यह भी मारणसभी कविता - सीमित
बीरला पाहिए। और परि ऐसी ही म्पासा करनी है तो इपौर
मार पास्पर स्मान देना चाहिए। मुम इस पोरसे nिti
पूर्ण बातमीत मेरा स एक मोठाका बा। एम को यह थी कि
मै पनि पारको भूमिका मरान कर उसकी बातों को हिरा उसपर
मस्यामप बई। मुम सारेइ हो रहा पा दिह पमिताल
मसे सोनय-मम्मन्दी भाप ला पाइहा पा । मुझे इस विषयको बागे
बमानबीयाही महा पी। बहरे के सामने क्या बोल बग!
मैंने पाच बरसने लिए ना मार मा पा पा एमा।
सन कोई जवाब नहीं दिया । माया कहता।
हम उम्मेको हुए। से मार पानको। मैंनेमा में धर्म मही
वकपमा रेता।
तरता भाम हो की दी। मेरे पर गामने सर पम्पा फूल
रामा पों-मेि पिम ए पा। बातावरणमें बामकी बम्प गग्य का
रही पी। नाम मफ्ना साबसा प्यार-मरा मौक पसार ही पी।
एक माहवारी

उसने कहा
पीच ही में हमारे विमान महातके भीतर एक ममिर पाता पा।
मात्रो बोड़ी देर ।
मेरे भीतर गावावरमकी मस्ती छाने मगी। पथके रोम पुतष्ति हा
रहे थे। बापा रिमापी मुनहसी पारा-सी बहन कमी। बाहुपाती
मांस-पेशियपि मे माना को मघा बहकर, दौड़कर हममें शराब बन
रहा था। मात्र प्राकृतिक सारीरिफ वामद मुमपर हायो हो रहा था।
एक सम्मत्त पनि एक सहन शक्ति-पेतना मरी मालाको निमस मौर
प्ति पर ही थी।
स्ति मेरा मित्र बेस ही मिषिस शाम्त मौर पापागवत् मंठा पा।
में अपनी पारीरिक शक्तिके मानम्बस ही चमतत पा भोवरस मम्बित
मौर मन्त्र-मुग्प।
उमने पीर-पौर गाव ठास कुछ पदमा पुक किया। ममें समा
बिफनो कोई सिम मेरी तपापर फरी गा रही है। इस बीच उसरे
माद-प्रवाहमें मैने कोई परिचित नाम मुना । मन पोकर पूटा
"हमने कम आय कर मिया कि इस गरमीम विवाह कर मे।"
मने विस्मयसे पूण 'पया दिमम
पेटोमे ।
कौनपेटी
बह कुछ नहीं बोला। किन्तु पीरे-धीरे मनमें एक इमडी मामा
मराराम पारणपरती मयो।
मुन मारपपका इमारा पता भी नहीं लगा पापब एका कर
भी सपना है ! बसम्भवानमा पारेमें मरा मारा नियंपनगरोभग
प्रमहापा • एक ही मरमें! मन् हुमारि गमतो ममा !
मेरा साप चहरा मारपम और भागनको सहमरंप पपा। मन

मगार-मगामें कहा 'वो इसीलिए तापारम्प और बाकाप्पिाकी बात कर पे। यों हसरत? उसनगरसे बवाब दिया वह रस्म मति ही पराभर हो सकता है, धमझे?" उसने गम्भौरवासे कहा । उसके सरमें अतिरिक्त बसपा। किन्तु उसके इस बायका मै बर्ष मही समक्ष सम्म । बसम्म मुझे इवना मानन्द हुमाया कि मैनपरको चिपका किया । उसका हा झाा और वापर परम हो गया था। मासे परम । ऐसी स्थिति में भगा उसके पापका मासे समझ सकता था? समय मुररखा गया। उसे बपनी शिलपीमें विरोप समता दी मिमी। 'मारो-लामो हाथ मत मानो। इस पमानेमे उससे भारमीकी पपा चाठी! समयने हम दोनों सारोपर मूडेपम बीर बनासाकी पाकित पात दी पी । एनिमाकी बाबोसे दूर, भोपनके बारेमें हम दोनों माप- ममा पृप्पोक दोहोरोंपर छौस है ऐ पे। इसके बारसूर बर-जब मैने उससे रुपये मैंगवाये उसने तुरत मेव रिये । पाप ही यह भी मिला कि बम कभी पास हो मै पठते बसम्म मान म्पिा करें। किन्तु नाच बर्ष हुए मैने उसे म कोई पत्र हितान रुपये मंगवाये । न मुझे इसके बारेमें कुछ मालूम हुमा न उमन ही मुझे पुण् मिता। "मानो किसी पाहाव से माफ निकलती हो माफीपी स्टडी हिसकारणी नहरें एक मनुप्माकार पारप कर पी पीठी मापके पास माने या हौवा भाषा सा स्पेसा? मुभवोर मगेमा । पर मुझे यह अपना मिमी किसाब इसी मासे यहाँ मा पाई एक माहिविली राबरी वो मुझे मो असा हो हगा। मुझे सपा Eि एक भाफ मनुषाकार पारम कर मेरे पास-पास बाती चा रही है। मैं मातकित हो उठा । पहले तो में हम उससनम रहा कि उसका स्वागत करने स्टेशन बाऊ या पाकी मनहसिफ्त दूर करने के उपाय बो। किन्तु बयान पत्नीने पर परफा विप प करनेडा मास्मासन दिया तब मुझे पोड़ी-सी राहत मिमी । भमर केयरको मेरे यहाँ मामा ही पा तो तारसे पहले मूषना देनी पी बिमसे में हो सूमियत हो बाठी। मैक्ट-काठमें मेहमान पुम्मन होता है। विपकर यह पिसने मुझे पहले यात मी मुपर, पम्पन्न बौर मुम्पबस्पित स्मितिमें ऐसा हो! । । मेष बहुत बरा गया था। तमाम बाठ सफ़ेर हो गये थे। बहरेपर गहरी छकीरें बन पपी थी। बह पुरम हो गया था। इसके बावजूद उमा स्वाप्प महत भन्छापा। उसका बरा मरा हुदा पा। मुगाओंकी मोम-पेशिया पूर पी । ममता पा लिपिछले छर-मात सामसे बहरा मेटा मारता मा रहा हो। सायद उसने तैरनेकी बो-ग्रासी भारत गत की थी। अपमहीन तो बहू कमी नहीं रहा था। किन्तु फिर भी सब रसमें पामेसे मपिक स्पति पी। उसकी प्रपात-गम्भीरता कम नहीं हुई पो पेफिन बोमता फ्याग पा। उसकी चारोरिक हरूबा रति पुक्त प्रतीत होती। मुझे मया कि उसने अपनी परिस्थितियाँका म्यादा मांगती मार मपिक मारम-विवाससे मुकाबता दिया है। वह का हमता भोपा मिया भी कसवा पा । मुभ छपा उसमा बम्पयन मी रिस्तुत हो गया है । इपर उसने माफो पड़ा है। मा बराबर या मान होता था कि मैं पिy मया हूँ मौरबह मुझम बहा आगे बा जब हम दोनों भोजनमोटे तो बनियामके भीतर के पोरे सुपर रमे हुए परीरको देगार में सप्र ए मया -प्रमन्न नहीं हमा। गोरे तीसरा क्षण २

मशा-माम का
१
'तो इसीलिए वापरम्प भार वाहाखिकी बात
कर ऐपे। क्यों
उसने तहाफसे पवाब रिमा रह ठप्प पक्ति ही सरासर हो
समता समझे ?" उसने पम्मीरतासे पगा। उसके ससरमें प्रतिरिक्त
पापा। किन्तु उसके इस वाक्यका मै पब महीं समा सका । बसम्म
मुझे स्वना मानन्द मा पा कि मैने कसपको विपका जिसका चेहरा
साह मोर धायर गरम हो गया था। जग्गासे गरम । ऐसी स्मिठिम में
भा ससोबास्पा भप से समझ सकता था।
समय मुगावा गया। उसे अपनी गिम्दगीमें विशेप सफलता नहीं
मिनी। 'मागे-सामी हाच मत मानो। इस पमाम उस-से
भारबीकी क्या पाती।
समयने हम पोनर बहार मूसंपन बोर मनापाकी कामिन पाठ
वीपी। दुनियाकी मांसास पर, मोपनडे अवरे, हम दोनों अम्म
माम पीके रोहोरोपर सांस थे।
इसकेबाबमूर पब-जब मैंने उससे सये मॅपवाय उसने
तुरम्त
भेज
रिये । पाप हो यह भी लिखा कि मर कमी परत हो मे रसते बसस्य
मान स्पिा करें। किन्तु पांच वर्ष हुए मने से न कोई पारिता म
रुपय मंगामे । म मुम उसके बारेमें कुछ मालूम हुमा । उसने ही मुझे
पुण् किया।
"मानो किसी तासाबम-से माफ निभाती हो माफको पास्ती
हिमफोरती महरें एक मनुष्मात्रा पारम र सीमा होती गई मापके
पात मान लगती हो तो मापका सा भोपा? मुते तो रमेगा।
मारको?
पर मुझे यह सुषमा मिनी शिपम इसी पास मही पापा
एक मानिचिन्हावरी

वो मुझे भी वैसा ही गा । मुझे लगा कि एक माफ मनुप्पाकार मारण पर मेरे पाम-पास माती पा रही है । मैं पाकित हो उठा। पहले तो मैं इस उतभनम रहा कि उसका स्वागत करने स्टेशन बाई या परको मनहूसिया दूर करने के उपाम तो। किन्तु यमासु पनीने पर परका विप प करनेका भारवासन रिपा तब मुझे थोड़ी-सी राहत मिती। मगर कमबको मेरे यहाँ माना हो पा तो तारसे पहमे सूचना नी पी जिससे हमें बड़ी सहमियत हो पाती। संरट-काठमें मेहमान दुश्मन होता है। विपकर यह बिसने मुझे पहले महुव भग्गे मुपर पम्पम्न और मुम्पपस्थित स्थिति देखा हो! पर बहुत बार गया था। तमाम बास सफ़े हो गये थे। बहरेपर पहरी कारें बन गयी थी। बह गुणा हो पया था। इसके बावजूद उसका स्वाप्प बहुत मन्डा पा। उसका वध मरा हुमा पा । मुगामाकी मांस-पहिया टपो। ममता मा बि पिछले Bx-मात सालसे बह रा पटक मारता मा पहा हो। पापर उसमे तरनकी मम्मी-दासी भारत गल की थी। संपमहीन तो वह कमी नहीं पा पा। किन्तु फिर भी बब उसमें पामेसे मपिक स्फूति पी। उसकी प्रशान्त-गम्भीरता कम नहीं हुई बी टेकिन दोमता रमा पा। उसको पारोरिक हरपल स्पून युत प्रतीत होती। मुझे मपा कि उसने अपनी परिस्थितियों का बयान मांगतो और भपि मारम-विश्वाससे मुकाबला किया है। बा काफी हमठा भी पा फमिपा भी कमठा बा। मुझे मा कि उसका मप्यमान भी विस्तृत हो गया है। इपर उसने पान पड़ा है। मुत बराबर या मान होता मा मि में पिएर गया है और यह ममम बहुर मापे का पया मोगनमोठे वो बनियामके भीतर उसके गोरे सुपर परको शहर में सप्र ए मया प्रमत नाहीमा। गारे तोमरा क्षण

धरोरपर एक न सप्रेम भूरा चेहरा ! ऊपर बहुत खूबसूरत मागम हमा।
निषित पसे हो निम्ताकी रेखाएं उसके चेहरेपर बीकाछी पारी
भीपी । मैकिन गये चिन्ता को भी? या चिन्तन की? इसका निपप
नही कर सका।
मोबनके दोरान उमने एक ही पर बात कही। इस हायमें
कौर कर मेरी तरफ देखते हुए कहा तुममें गौर मुप्समें एक बड़ा मेर
है। रिचार मुझे तेति से किपाबा करते है। रिचारोको तुम
तुरन्त ही सपनाम परिमाकर ने हो। फिर नम्ही सरनाईक
तुम पिप बनाते हो । विचारों की परिणति बिदनामीमें बार सपरनामोंकी
बिमि । रस प्रमर तुममें ये दो परिणतिया । बगर तुम्हारी कविताएँ
विसको उत्तमो हुई मालूम हो तो तुम्हें हवाच मही होना चाहिए में
तुमारी पिवार म्यासे पाता हूँ।
मैने परमते
पूष्म 'मेरी कविताए तुम्हें अभी भमती है?
'उनमें और समीकी समत। किन्तु मै उन नोोप समर्षक
मही ( को समरिनामपर, समावि लिए टेष्ट' (कार-सत्व) की
बहिरते है।
फिर एकसमे समय सम्म रोगों प ऐ। दोपरिक-बिन्दुक
बीचको दूरीमती ही। एक मन बार रोबिक मीषा पाच समान
रूपसे रोम रीपर एक मपरन्तु-यपु बना। सबसे पकाकी
तळ एक सोपी ममु-रेरा निमी। ससी बिन्दुसरे हाकी वर
दूसरी सीपी-सरल मनुरेसा फूट पड़ी। रोना रेखाएं बाये गहने मी और
एसने हम रोमसिविन्दुमागे एक मनु मत माग-रेखानाराबोड़ दिया।
मैने शिशोभानीयक वाहसे कहा 'मेरे मामले महत्वपूर्ण बात
महकता दीन यब होते है। यदि उनमें जग-सी भी मौसी
कारोरा ही दो-चाई महशिष्मासमती कमी हो मा बाम
पामवासी हो-रुतिपर समतुरम्त पनाव होपा ।
.
एक मारियागरी

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बोस्टेसी मनुमबरो म्पत्तिपत पौहासे पृषर होकर बर्बाद नसे तटस्थ होकर मनुमबई मौतरी ही संवेदनामोंभारा उत्समिटमार प्रक्षेपित होमो । बह एक मपर्म पक्तिक होते हुए भी दूसरे वर्ष निवास्त नियमिता होगी। इस फैटैसी मा एक माचारमा गएपकी संपति मा पापी। इस मापारमक गोमके हाप ही पस्तुत पसीका रूप-रंप मिमा। किन्तु यह होते हुए भी यह प्रष्टसी यथार्थमे मोमै पये वास्तविक बनुभनकी प्रतिकृति नहीं हो सकती। वक्तिकसे निवास्तिक होनीयम ही उस छटैसीने कुछ ऐसा नवीन पहण कर लिया बिबिससे पा स्वय भी वास्तविक मनुमबसे स्स्तान बन बैठो। इसी मनुमयको कम्या । और रस कापाका अपना स्वत विकासमान मन्वित है। गबनुभयो प्रसूत है इसलिए वह उससे स्वतन्त। कलाका यह इस मन है। मैन कहना चाप रसबा, किन्तु इस स्टेसीको पान-बब मरने या चित्रित करनेकी प्राध्याके दौरान ही या प्रेमी पिपहार उस प्रहिया प्रवाहम पाने उपती है। उस मारिम प्रपा प्रष्टसौके सारे दुसकर बहने माते है सारा म्पक्तित्व और उसी समस्त रेतना रस सीके बहते पाक साब रहने मती है और सम्व-पट होनेपर बसा पिषित होनेपर दो कति मा पनागर होती है पाति या एपना भलाके दूसरे थपकी सीकी पुत्री है, प्रतिकृति नहीं। इसीलिए मूड प्रस्टैसा ग्सका म्पत्तिल स्वान मिचित्र और पूषा है। माना यह तीसरा पा मन्तिम सम। इन तीन मक दिना कहा मसार है। लदोनों वही विकास-पतिक अपने-अपने बन्य नियम है। मैंने कहना गा िरक्या 'परि तुम्हें इस प्रानका उत्तर पाना है कि सोरर्यमा है अपना सौरप-यतीतिमा है सौमार्यानुभव का मौर यह किस प्रकार वास्तविक मनुभबसे भिन्न है तो तुम्हें पता महीम प्रधान पर मनोविज्ञान ही का मम्पपन करना होता एनका बम्पयन पर मारिमिरी

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इसीलिए टमी गदेबनारमक झान मार हानात्मक संबानाएं रहती है।प्रतिपयरको लगातार महसूस होता गया है कि उस मनुमय समी कमिए महत्वपूर्ण मोर मुम्पमान है। तो मलमा Exकि योक्त और रएमला एक समयरमें मोम होकर एक दूसरे पुती मान- प्रशामरामा समन प्रक्रिया मागे सा रेता है। राम और मामला संवाना परस्पर-विमोम होकर अपनसे परे उरनेको मनिमाको प्रोस्माहित परती रहती है। इस प्रकार एवम प्रविश विशिष्ट समसामान्य माल प्रतिविम्बित होता-मा प्रतीत होता है। दूसरे पाम संदेमा- * स्पिति पहरे रंग पिके स्थितिमु स परित होकर प्राति लिपिक हो रहे है। मेरा एमा यात माफ गुसरे पबमें उपस्थित टिमौकीबाईम संवेदनात्मक शान पोर हामारमक संदेबनान मायी पता है कि सवा पाय करने लिए वापरही "महाँसे कहा तीसरेशमका मारम्भ होता है। माममा रेगिए । म बात पानसे सुनना बर महास एक नये संपएको हामी सुरू होती है। मेखक मोही फौशामें काम करता है मोम हमप और प्रवाहित होने कपटे है। पर करमेक रोरान प्रकट करने प्रकिया फेन्टमी बहसन मयती एमा बर्से होता है? पर तम् पुषी रही। यह मामे नही सका। रमने प्रण पाहिरिपा प्रगड हीरे सम्रा बह मेरी पर हमा। पायो मापे पसार लिए मैम मा गुमिrm होता किटेसीको परवर करनेकी प्रकिया गत से मयै तप मा मिले है। प्रत्व रखे हावार संबोधित करते हमान राणा हिमी मनुमा प्रमून होने हुए भी अनुमा रिमित होती है। इस परीसीमे वस्तुतु एक भावनामा परेप माया एक माdि

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जनक सम्बन्धित बीवनानुभयो र म भाषों मार ससि युक्त होकर इतना मपिक बदस गाता है कि मेला उप्त पूरी कैप्टसीको एक पी ऐनीमें बम पता है । मरा मतमय है मूम फोरेसीका मम मोहिमा हबा एका वा मग फैलकर एक पपिपिटयका म्प पारम करमे सस्ता है। इस पर्सपेक्टिबसे समन्वित मूम मम पम- होमेकी प्रश्मिा बहस जाता है। यह पुराना मम न एकर मर मया बम बाता । उसमें नये मनस्तत्व वा पाते हैं। राम-बम हानी प्रधिमाके दौरान बबा उस ममम योग मीर बतापम है तबतक यह नये तस्य समेटता रहेगा। किन्तु पर वह म जायेगा तब मति बप हो पायपो गय समाप्त हो मायेमा । कविता वहां पूरी हो जाना चाहिए। मनिबह पूरी नहीं हुई वा ममो सासात्कारमें कहीं कुछ कमी रा गयौ विण-जान ठोक महा पा, रेम्पमे पुण्कमचारी मा गयी है- एसा मानना होगा। महा में रक गया। इमस बपिक में भी नहीं सका। रात काफी गयी थी। साकोपर रोधनौके वापर मेरा पर गया था। मूमापन बाब पापा। साहसे पिक पी पी। मन बहक गया था। मेरा मित्र पुपमा । क्यों था? - . विननी ही ऐमी है। कोई विचार किसीके रहनेसे अपने पुरके पारनेरी मन उति नही होता । मेरा मित्र मर मुझसे विश हो गया है। मपन पतको प्रमट न करते हुए मब यह बहुत दूर पहा पया है। उसके साप दिन मग बहुत रिनों गार रसकी चिट्ठी मामी। बिट्टी नहीं पी का पासिस बी।बरु मम्तमें 'मामाको प्रमाम बोको प्यार मारिधिमाका। मैने पिट्टी रहीदी । टेरिट पर यही शिसे किफुरसत मक्स मप्पयन पर सई। शिन्तु मै समप मिसमपर भी उसे पड़ नही पाया। हमें हमा रिमाइगर भी मा पपा। मैंने उसको भी राम गहरिया। एक माहिवाको गवरी 2

ममध्य पन दिनों रम बीमारियॉन का बिस्तर विण रस्य ।
निगमोमें मुप्त उन बावा ताप्लोम ऐनी पो किमिन वार्ताको मेरे
समारके शिष्य पराया समता है। फटता स्वभाव-निय बाकी
अनिबापत तालीम केनकी मौपम प्रक्रियामें मेरी वीपत मी तराष
हो गयो।
फिर एक रातको बप कहें सोयी हईपी मौर परके मारे म रमा
दीया साम्ब रोपमो फैसा पाहब में मगात मनसे चिन्नगाफ मारेमे
साचन कमा। मगर उसास हो उठा । ममा मिरी गिम्दगी असफलता
को गोमे पड़ी हर एक वेवस मात ॥
ऐसे ही पपासो पग-पता में मातरराष्ट्रीय पटना-पाकी
समीरी वक परमया। मसगार-नबीस होनेके मारो में मये विचारोंको
टोप सिया हरता पापगरको तसासम टैविकी बरार सोमी वो रसमें
पाका रिमाइररोनों मि। मित्रकी पारमे विस हमका
'उसकी चिट्ठीमार पा गया। वह चिट्ठी एक टणे दिमाग
की चपन पी। फिर भी मुझे बह गुलाबक इससे वर मासूम हुई। कहना
महोपा कि पानी पुष्ट सध्या कोई पनीस दी। बारीक सुगम मदार,
सुन्दर-स्वच्छ सिमावट और बही-पापया होनहीं-नही बरे-स प्रकार
पामापमान यह चिट्ठी पी या बिट्टीका माप चिट्ठा पा-मही
सन्ता
दिन बीतते गम और अव मेर सामन मर जायका बार पाहमा
न त टाटसे हिना है..
"यह सप है कि मम्मन होमही प्ररित्याभूमि ऐसी बरसने
समती ।यह मावा है?
मरे पयामम सरे रोपारप है। रोगापारम एक दूसरेसे पो
मित्रा पर
किया।
'गणरा तीसरा पग मारामापा महापौर प्रम।
तीसरा मग

याइसि रिसो
साहित्यिक मारमा अमितिका सवारण करने
सपी है।
महसि पार-झाबना पुरु होती है। अपने पनि-अनुपंग हो।
समें चिप और पनि दोनों शामिल है। समाचार अपने हक्के तेल
कग प मारक बमुसार पभिमक्विका रम-स मोर माकार
मार ला पाता है। सलिए इसे अपने इसकी बामपनिषोंकी,
प्रमाको मर्म मानियोते मनबरत तुममा करनी पड़ती है।
इमोसे परिपाम हो । (१) भावनानियोंको उपमा पार
मनिरपरम पेमामेश पमल जिसके फलस्म्प काफी से मास्वल
अपना मोहिक मोर मूग व स्थानमा एक नय सम्पमसे सम्बट मारमें
प्रकार होते है।कविता माराको धमक और फ्राईक लिए अपने पाक
तस्याका अभियान भी कर देते है। इस प्रकार हम देखते है कि पारा
होनेकी प्रक्रियम टसीडी ही काट-ट होने लगती है। (२)
इसके विपरीव दुसरी महत्पूष गात यह है कि ममिष्यक्ति-भावना पौरान
स्वयं मिमपित पीको सम्पम मौर परिपुम करने पमती है। देसी
अपने को प्रकट करनेके लिए समाना पाक पाँगो नाती है। पापा
कबीपित परम्परा है। पगो एम सदर भगाम को पर्ष-स्पन्दन
ईप *सी-नारा गार होकर नयी भारवाएं बहा देता है।
भाव-बाराएं टमीकी समीपवर्ती भार-पाराएँ है। मे स्टिबीके अपत्की
भौर मी विस्तृत कर देती है उसके मौगिक तंगको मार भी कमाती
है। इन मारभारामा बनेको भये पुराने मनुमग अपने पराये बाप सब
प्रवाहित होठे रहते है। फसी पावती बपपता नाबादी
हैचाप ही धमकेद्वारा प्रेएसी एक भया पसपेक्टिव प्राप्त हो बाण
है। इस पर्सपैकिपसे संयुक्त होकर ईसी एक पेगोषमममें माने
स्पतीनी बर पूर्पस्म सार्वनाम हो जाती है।
ऐमा पाँ? भापा सामागि निपिti cारे पाये एकमर
पर सारिरी
।

परम्परा है। य बर्य जीवनानुभवास से हुए है। फेन्टेसी मपन मनुकूल मार्ग स्थित मर्प-सन्दनको उदर करती है। इन समोके धाम मीको रिट करना पाता है इसलिए मीरा मौलिक हेम काफी पर ऐ गावा है। सम्मोक पाटेको मप परम्परा प्रष्टमीके मूल रंगाको cाट देती है उस मागारमें परिवतन कर देती है, उसकी मौरिक पहनता बर्षात पित्त सदम भी सराय देती है। कई कपि पगोपी मम परमगस बामनोकर मापानी सफाई भोर बम निर्वाह के लिए प्रहरीकरण हेतु मातुर भाष-सरोंको हो पाट रेते है। इसके विपरीत फन्टमी-द्वारा रार मगा अप-मनुपंग मोर उनसे मम्बर ति मयी मार माराएं बहा रेत है। ये भाव-पाराएं टैमीके मनुष्य और समीपवर्ती होती है। उन मात्र पारामाम मनेका नये पुराने पनुमा मौर अपम-परापे भाव होनेस ऐसोकी मपमता विस्तार हो माता है माग ही इस विस्तृत का ये मार-पाराए पेप्टेमोपर मौर घटसील माव-पारामापर हिमा-प्रतिक्रिमा करने मगती है। इस झिपा प्रविधिमासे फैप्टसाका क्षेत्र और विस्तृव हो गाता है मनुमयको पसंपेपित प्राप्त दाबाता है। मौके भीतरके मुत गोय मौर विशामें विस्तार पर उमा है। दूसरे पराम, फमाके तापरे आपमें सूबन प्रक्रिया बोरॉम गतिमान Hit सामारो घम-सापना-गारा मये-नये मपरक मिलने गरे है। पुरानी परमो भव मषिक सम्म समृट और साबमीन हो गाती या पारमनीनता भमिपति प्रयनकरोरान प्रमों मप-पम्पनी- परा पैश होती है। अप-पन्दोके पीछे सावनि सामाजिक मनुमोकी परम्परा होता है। इसलिए मप-परम्पराएँ ना मूर मीको काट तो है परापती है पगा देती है, परन् उसके साथ ही ये नया रंग कालो। मप माषा भौर प्रमाहासे उसे सम्मान करती है तो भर्प तारिनार करती है। अमरापन १.

सोधिए बभिम्पति-प्रपलके दौरान करिको भये सामावार होने
मयत है । एक मोर मम सीके मूम-ममकी अमिमाप्तिपर उस धम्पूप
व्यक्तित्वका मीरप हो पाता है तो इमरी बोर इस देमीकरणके
फससम्म उसके म्पनियस्वका विस्तार होने मता है ! उसे मप-नये साता
सार हान समते है। एक साधारकार ईमार-चत्याचा भाम करणा
है। एक साक्षात्कार कविको दूसरे साधाकार तक पहुंचा देता है। इस
प्रकार यह प्रक्रिया चाह रहती।
इस मनोशानिक मखियाके पौठे मापाकी अपार मनपरत सापमा
पति मापा टैलीको काटती-मोटती है और इस प्रतिमा विपरीत
ती मापापो सम्मान पीर समय भी करती है।
कपिकी पारसी भापाको समन बना देती है, उसमें नये मग
मनुन भर देती है पमको नव पि प्रान करती है। इस प्रकार,
करि भापामा निर्मान करता है। को कपि माषामा निर्माण करवाई
विकास करता है पानिस्सह महान् कपि।
'इस प्रकार कसा तीसरे समम मूड बन है-मापा ता नारके
दोष । नानो परसर प्रतिकिया और संपप महुव रमाइप होते!
और उन दोनों को परसते पते है। इन दोनों पोषन हाता पाया
है।माम मात्पन्ठ मापपूर्ण मार सुमनीम है। भाषा एक परम्पयो
समें सीमा को विस्तृत कर देती है किन्तु धाप ही रस
असीम मौन भी मस्पित करती गाती है। साथ ही सी बपने
मृग पो नियहि मिए, सपने मून रमों ममिष्यक्ति के लिए, मापापर
साप मी, इसके बार मुहागम मपी परमत्ता नमी या
समता पी पिम्पत्ति पर देती है। कहा वोसो पप या महरमपूष
"इसीहिए साकारको यह मामूस होता हवामो से
माना पाह पूष म्पसे नहीं कह सपा और पैसा बासमुण्पमपाको
साहिरियोपी

मुमें, से मालूम नहीं पाकिर नायगा!! मरा मह भावना तुम्हें नहीं होती ?' सबके पो मैन पुछ मंश यहाँ प्रस्तुत किये पत्र पाकर मुझे हमा सुब मी । दुध इससिए कि इस बीच में स्वयं बहुत उसस मामा और सुप इसाए कि बने मेरी बास बहुत मागे गहरा दी । मेरा पगम कि केपब इन पाका बर परीक्षम मोर पुन परीपण करता होगा। निस्सन्देह, मेपर एक दिलचस्प मारमी है। किन्तु सबसे बड़ी बात दिबह मेरा मित्र है। निस्सन्देह उमड़े साप कोई नया काम शुरू करना बावश्यक है। मुझे बड़ी मार होगी। समरामम एक लम्बी कविताका अन्त काही मैने एक सम्मी कविता वाम दी। सामन्त मुशिक्षित सा पान पर। उसके बम्पर सिमा मिक सोचता नपा मुझे सपा सिम कवितारो और बहाना होगा कि सपने बाप ही वह बायेगी। मुमे उसकी सम्भावित समाई-पोचाईको रेत भर-सा शन पार भय पसमिए कि वनी प्रदीपता हमारे यहाँ बन्छी नहीं समझी जाती। दूसरे मह कि रसके (मासिक पनाम ) प्रभान को बमुविधा हो जाती है। मपर रिसी पक्तिको पार माप से अपना मावा भी बना है, वह भी काम न पहनेगमोमि उसकी प्रीता ग्यानेगाठी होगी। तब पपा लियाबर? सपा क्षमोकाट-काटरपोटर लिपा बामे पास मोठरो पा मो पुलिपा यो समस्याएँ प्रा नपिपामा विकास- के लिए अबतर भोर मेष प्रकार किया पामे ? मरे पोम मा मेरो परिवार सम्हालोगे ( ममियक्तिक लिए) रिकाता मनसर रिमा बाये ? में पसरी विकास मोर प्रमालाबार के पचम ! बार में महीन भरमै उस परिवार पारमा हूँ। पाया कहिए कियह करिता हारीकर मेरे पीछे पड़ो पी। बोपनीषनोर्मोक पा भात पे-पिवानी मियोले अपरिचितारे मौ। बि मैने एक मही किया। पानमा जिहोगबाट पुरा मान गामेंगे मन गानो रमै उनसे मरं सम्पाप विपा मापे पर मन मे और से पम . सादिभिरारी राषिण मेरा पिण महीं छोड़ रही थी। मपर बह करिता पारवेगपूर्ण होता तो एक बार उसकी नावेधारमा अभिव्यक्ति हो जाने पर मेरो एपी हो गाती। ईपिन मा हो सकना ममम्मच है, क्योकि भागाम रिमी बावको मेहर होता है, यह बात किसी मरी मातसे पूरी होती। इसी बात किसी तीसरी बायसे । मी ठप्पको मै यो कागा ययापके तल परस्सर गुम्फित होते है, माप ही पूरा पपार्प पतिधीस होता है। मभिम्पक्तिका विषय बनकर को पर्व प्रस्तुत होता है वह भी ऐमा हो गतिधीस है और उसके तत्व भी पसार मुभिर है। यही कारण है कि मैं छोटी कविताएँ सिल नहीं पाता मौर यो छोटी होती है ये वस्तुत छोटीन होकर मपूरी होती है। (मै बरनी बार यह पा)। बीर इस प्रकारको न मालूम कितनी ही परिवाएँ मैंने मभूरी सिकार र दी है। उन्हें वरम करनेका का मुन्ने नहीं माडी यही मेरी ट्रेसी है। इससे भी बड़ोदरी यह है कि लोग मुप्त गर सिखनेको कहवे है। पापार मैन एक किताबकी रिम्पू की (एमी ठारसे पवार मानेपर) वो गया यह कि रिम्पो लिए फितार किवा माने लगी। मम मार पो बानते ही है कि सपाईपर (समा मह पिसे मार यकीनन समाई समाते एसी-न-किसी एव तक बन्दिय सगी ही हतो है । इमोमिए रिम्यू परमा मापसे येरुपाला है। मेरे पापीस मपिकायेगा । ( मेरे प्रशाद मित्र मी है - किन मेगा मापा कापशीठ परिसको बस्तु समाते है)- सेसकीय कार्यक पनि सो मनाया इस मास्वामे निमाप्त होती है कि मनुष्यको मपनी माविक मोर माविक रठि हिरही काय करना चाहिए - इसलिए सायबर पार पिया सिबारपाक हमारकी भामरनी नहीं की तो राय! मिलिए मुझे समगह दी मची है कि में सम्पास सि भरमा रसिहर पिया कारोवामा

मेरी मी मेरी टेबहके पास वापर पड़ी हो जाती है, और रात
होकर मुससे कापी है कि तुम पा कर रहे हो ? ममा कविता ! इसपर
पित पये मिखेंगे?
भर में या सोचता कि ममम घसीटते हुए मेरे बाल तो पर हो
हो गये। मेरे जीवनका मह अन्तिम कार्यकाल पास हा, तो मैं क्यों
मपनी कविताका संयोवन-परिमोषन करके उन्हें महाधनमोम्म
मेकिन यह कविता लिहाफ्याच पसारती पापी । मौर मा
सुना कि मुझे बनी ही एक मी पिलोका काम मिमा । मेरी भाषिक
कठिनाई
पुण वो त हो हो बापेमी। पर माता पिठा मी मा रहे है।
परीति मै सामनाक कार्य हाथ में है।
मपि पुरी बात हो या है कि मुझे एक कामटे दूसरे मामार बाने
माफ होते है। यह हाwat कि मुठे उस परिवाको बार-बार
पानेकी उसम बार-बार संपोषन करनेडी इच्छा होती है। पिम भब
यमय नहीं है फिर कभी देगा।
दिन तो मेरी टेबरा के पाप सही हुई है। किसी पमाने पर यह
छोटी पी (मौर में भी छोटा पा) तो बड़ी मापक पी । भार मह मुझे
भपाता प्रतीत होती है। उसको बार मेरे हाय रणा रापिल
भाष मारा मारक और भय -ए-सरहकी भावनाएँ म्याप्त हो
जाती है।
कि इनमें मेरी पर दो रिद्विीपर गाती है बो मेरी टापर पड़ी
एक है पर बोपोडी दूसरी मतममारली।
बोगा मेरे अपने है। बस यही उनका दुर्भाग्य है कि पोंस
ऐंठमा अपो सपणा करता रहें मछे पड़ी पीर समसमा-भायो
पापी महारासमान है। मम रेखाईदि ऐसे पतामर साबारपा
अपनेको गौरिक मार प्रतिभामागे मोर माधुनिक सममते है - पार से
साहिसिपी
.

होते मी है । दूसरे प्रकारके भी कलाकार होते है जिन्हें मपने लोग बो प्पारे होते है उनका यह हिसाब होता है कि अगर कोई कपि उनका रोस्ता पो बह निम्मोहा मारमा कपि तो हो ही मया । विस्तु यदि कोई सेना पदि रिती दूसरी या तोसरी प्रकारकी मगठीम पता, या नहीं भी इजा है मेकिन उनसे वग है, तो यह मारमा बनानेही प्रवृत्ति सबक हा गाती है कि यह यू ही हिसता है का मिनता है टिम मिलता है। इस प्रकारकी महमियॊमें बोपीर पमती है एक सीमित क्षेत्र नही ये पौर परगीय विमापी देती है। उनके ये सब सपने है सगे है। इमलिए ये प्रेठ भी है उत्तम मौ है मन्छे भी है। मरे बदामें एक विधेप प्रकारके होम यदि मपास ऐंठकर उनकी उपेटा पर है तो इमरे विशेष प्रकारके सोम सम्हीम एकर उनमें प्रचलित स्तरोंको सौटी प्रमशार, कीति प्राप्त करने की कोशिश करते है। यह भी सम्भव है मह 'परबाहिरे'को समस्या हो यानी हिंगो अत्यन्त मारमीय हाँ पमही सममा गाम मौर बो परामे मोर परकीय हो रहें मामे बार्पण रिास मोर पसारा मास्सर माना पाये। मेरा पास जिपर होग ऐसे नहीं होते। गहमें में बरमेको निनामा चाहता है। लेकिन यह एकरम सर है कि अपनोंकी उपेक्षाका अपराधी । मैग्नि में उन सपनाँस पाकर कियह कविता मे पिए नहीं गावी श्री। पहही हिम सम प्रव-दिन पिपका मा पा (पॉनि पंगा मसम्मर है) पर मह किपर भी में देखा कि मेरे हापमें काम मा गया है तो पाता कि यह मेरो कविता है और पुछ नहीं। मैने म मागम frने ही महीने मोर पप उन-मौतर पर किया है। मोर उमसे मझे दुध नही मिता-मबम , मप नाम न मोस । पुण् पागत मोम पौमिरामर (ऐरीमिर) सोलो सोना बनानेगी । परसातीपिठाम मान शिमें समाचार काम पर हुए मासे पसे । पुण्दुसरे पके पागत जमीनमें पो गाने को होने और कभी भी न पा सरने में इसने मामूल हे कि सनकी प्रेमियीने समाजमे समानेने उन्हें देवरार दिया। करा पापसा करते और मुझे मव समहमें भाने लगा है कि हो न । मैं भी उसी मेपीम मिमे मानेके योग्य है। गिननी म फिर समभार बमनकी कोपिस करमा मौर यप बिगा। मैंने हम और काम भी पुरु कर रिया है। लेकिन क्या पता कि एकवीर है, जिसका माम पुन मिसका नाम है तो। मे सम मापुभिः नहीं है। फिर भी उनके बर्मका मस्तित्व मार मी विराजमान है। यह मुझे पिताकी भोर ही है पाती है। लेकिन में बन रेताकि मैं कपिता नहीं बल्कि पप लिगा। इससे मुझे मामरती भी हो जायेगी मौर मुख पर भी पोषा। मैन सोचा है कि मैं हर पिठापर एक पहानी हि या या मसम्भव है ? साफ बताए कि मैने पैसा कमी मी करके नही देखा है। फिर मी सोपता किमा पर्यो ? भव नपा बता कि इस तरह मुझे पद रिखमेकी भारत को पर पायेंगी। पिम उससे भी बड़ी बात मह होमी कि भमर पिता नहीं तो कविताकी मात्माको पहामा म्पमें हो क्यों न ही मान्यता प्रान कराना। यह मेरी बमिणापा है। यह सही है कि मेरी कविता 'भानुनिकतावारी है पनमोर है। मेकिन मानिरवादियोंमें भी पुराना हो पा और मामातीही पुरंट को बागा। मेरे-वैसे बहुत-से पुराने नयाँसे गरमीत के मारे अपने पुराने पुर्णको वारकर या दुधकोट पारण कर पे। बायसे को पीस-तीस साल पाम यह हात मीनिमा बाप भी मठ रणार मौर दूसरे तौर-तरीस बपनको पुग-4ना पम्मीर बनाये रखना पाहता था। बार हामत यह कि युग मी बाबाना पाते। और पहचा मूषिको लिए सौ एकी पोपा भी धारण " पर माहित्विावरी करते है। इसका कारण पा। पहसे समाग बौर परिवारपर पुरोका परममा भाग नवयुवा मोर बाहकोंडा गोर है। दो एक सास पहले में पी. ममा हुनामा। वहाँ कर देला नसा है कि एक सनाम पम्प मापार्मिक महानुभाव दुयी है। पृण्मेपर पता पछा कि ये मयी पीड़ा कामामोसे पीड़ित है। बा मैने उनकी कहानी सुनी तो मुझे भी पाई। सकिन सबात यह है कि ममर समान भौर परिवारपर रोग पान नहीं है, वो भाग मुमत स्वयं रोपी अपराधी है। स्वयं में जीपू पये इसलिए मान ला गमे । मेरा अपना रिचार है कि किस प्रष्टाचार, बरसरमादिता और मनापारस भाव हमारा समाजमवित है उसका मूत्रपात्र गुनगान किया। स्थापानता प्राप्तिक सपरान्त भारतम रिस्ती सेकर प्रान्तोम रामपानियों म प्रचार और सबमरवारिता को इस बापी दिपे उनमें दुर्गाका पान का हाथ है। पर हमारे परमपर नये तपोपी भला नही पही वो हसरा मारम मह मही है कि मनास्माता है परन् मह कि हमारे पुरम पदास्पर नहीं रहे। और अगर हमारे पुरक भनाईमावारी है वो मी का मुर्ण नहीं है बर्गेमिनास्पारा नाम मास्वा ही होता है। बमास्पा मास्पाली पुती है। यह है कि बागके पहने र सामन रंप-परमात्मा नाटक खेसा करती थी और मनास्मा मपप्पम सूम बामन काठी पीठो बास रंग-मंचार अनास्था नाटक करती है मार मारमा नपपय ठार पुरवार मूर-संचालन करती है। यह में माननके लिए संपार मही है जिनामक नवयुवरोम का पुजा ऐप ए गया है और बाम मही है। माप है और यह मौवर-ही-मीटर है। मरिन ममपुरका पाता है कि बाय उम मामी कोई कीमत नहीं रह मयी है। इस साल हारिक पत्मे सि कभी पसतीसे ममार भी रहा गाता है उस माग दो पुणा भार मानुष माना जा रहा है। यह माप उमरी निम नाविना प्रश्न की है, मेकिन उसके कारण सामाणिक-परिम्पर । मेकिन अबर सर होई बात सच है तो सबाप यह है कि उसके काम्पमें यह बार सहमती क्यों नही ? प्रश्न स्वाभाविक है। इसका उत्तर इस प्रकारसे रिया चा सकता है। पुनि सत्ताधि कारियन, समार-संवाने वारिक शक्तिसे सम्पन्न वनि, उमारके प्रत्येक स्तरपर प्रकट और वाकर सूक्ष्म मौर स्पूम प्रराचारका रिवान कर रहा है। इस भ्रष्टाचार काम है। कमी पर कामूक पमें भी प्रकट होता है, भी कानूनकी भाइम गैरकानूनी रूपमै । कानून पा नियम पो आर्मिक सक्तिसे सम्पध प्रमावपागे होपोंकी मुनिराके मिए। तो इस प्रकारके वातावरण फिट होने के लिए हमारी समसका मह सकारा होता कि किसी न किसी तरह तानस समर्मावा करके परेको भीडका कहो। रोगो मारसबारी बार पानके सही पानी मरते है, और हम मिलाते है। बो प्रमविपीत महानुभाष भी इसी मरमे मिक्वार। यो म्पत्ति राबो महा पानी भरमेसे मार करता है सोने मारे-मारे फिरते है। बोर माप जानते है कि साति प्राप्त पशोधित प्रपतिमीत महानुमात्र मी ( म सबकी नही । सकता ) उनपर हस पाते है या कमी-कभी तुम्के प्रति दराने मावसे परिपात हो गये। दो एभेगमें बोम्पपित फटे हाट बोर फचर है. उसे माम्यता रेने सिए कोई पार नहीं चाहे पनिा ही मासिक कौन हो। वा ऐसी एपनीय निरपरीणाम बनके लिए अमर हमारे नवयुवक अनुराग प्रयोग करें तो इसमें बारषय नहीं होना चाहिए। ये भी प्पपके किमी राम बनुरासके उपरामसे अपना रिता आपम करने ज्येहए। और सरग राम्पका एक मूड नियम यह है कि यो माना अनुभूत बातर पर परवा गतो। इसलिए हमारे बारे कवि एक साहिचिसोगवरी - और कमाकार, मारे रके उस पास्तपको नहीं मिलते है जिसे ये भोग रहे। क्योंकि ये उस पास्तवको इतना मरिक पानते है कि प्रति-परिषयके कारण भी उस मास्वबसे गभाना मोर ग गना पाइते है। मनुभूत वास्तवमा मार गितमा ममावर है उतना पहले कभी नहीं पा। परमही कि बायका रुपा साहित्य मपपापबादी है मगा पाय- निरोगी है, बलि यह है कि मेपक यमाय नामपर, मनुभूत पपाष (मपनं पौरन वास्तविक यपाय ) से दूर निफसफर किसी बारक पपा कहानियां मोर उपम्याट गनना चाहता है। मैं यह नहीं कहना पाहता कि हमारे मेसो पास प्रतिमा मही है बल्कि यह करना चाहता कि रममें मानवीय मन्तरारमा मानवीय पिता-की हठपण मपानमरातो पोका मही। क्योंकि वह पम्पसे यात्रा समाचार हो गया मौर समधारीका यह हाकगिस दुनिया हम हवे है उससे हम समझौता करें। मार साहित्यकारका मायुष्यभाम क्या है ? निघामम रियो और सी पाच पाहिरिमा प्रयास रिवाह पर साध्यसेट एरिस्ट्रोटिक सिविप महामि पक्किमत सम्पक पेप प्रकापकोंरारा मपनी पुस्तकों का प्रकापन ससारी पुरस्कार, मपना ऐसी ही कोई विप उरमम्मि और पासीसमें परे मास-पास बमरीका या स्स पानेकी पारी हिमो पक्तिमा स्पिाकी माता बफ्नो प्रतिमारा पी या सामें मनुवार किसी पो मारी पेट पहा या सरकारने महा रे विस्मनी मौरी। मब मुझे बताये कि यह मग या तो पयागार प्रस्तुत करेगा भार परावारपवार? स्वामी विवडामाद मारसे कोई भी बरस पहम मह पोपित कर पूरे कि भारत के उपर बम नाविक पसे मना हो गये । करते है "भारतको एमात्र माशा उसको पाता है। उपतर पग और विकासे मृत हो पर्व है।' बमा रम्बार वर्गों महारत रस ममप पा का प्रारहम सिफ सीताराम

यह कहेंगे किस समय भारतक उम्मतरबप हिक रूपसे सूब प्ररस हो
पमे है और वहाँवा विस्तात प्रत है बहन पहले कभी भी नमार है।
मैतिकता स्पानपर गाय सि सौदेबाजी मार अबसरबारिता है। स्वामी
विसकामनन एक बार यह भी कहा था मै एक समारगाती है इसमिए
नहीं कि वह एक समपुप-सम्पम-सम्पून म्पसस्था है कि इसलिए कि
रोटोफे बभावी पेसा मापी राय मेहतर होती है। बम्ब म्पबस्माओं को
परीक्षा की जा चुकी मोर रममै बमार ही समान पाये गय । पर इस
(पवस्था) की भी परोषारकी बाय-अगर मौर किमी बाउरे लिए
नही वाट नवीनता बिए ही नो न सही। प्यान रखिये ये बात
बो स्वामी विवेकानन्दने नही सी एम्प प्रति पहले ही पपी है।
मन स्वामी विषकानारा नाम पणे दिया। इसलिए किया में
इरग होनबा हामार पाण्डी मोर ममेका सम्पास कर पाई।
पिन पर पी में बना देना चाहता हूँ कि माया पर वर्ग यमिक गा
और मषिक प्रतिनामी हो गया है। बहस समय साहित्यम ऐमे विनाका प्रचार
करना चाहता है जिनकाप हमारा साहित्यिक परिस बनुभूत बास्तोंडी
पारिस्ता और मानवीमतापर पररा गबरे मोर बह मनवाकी मार
पम्मतहा। बनवाक विरोषका एक हारमोबिये। हमारी मयी
पारिताम बहुव मार, ऐसे मार-विचार प्रकट किये बाते है पो नितान्त
प्रतिकिया। 'नयी परिता को 'भामा समानही वास है
पन रियों की मेरे पास nिs पर है राहत ही नही बस्कि
प्रतिक्रियावारी है।
भागके मुबकको नाम स्थिति और बत-स्पितिका पमन को इए
एक करितामवर बाट उपत्मे काम करना पड़ा तो सामुहाता
मुझे मार' बन पाना पाया में जुलूस में वामित हो पाईमा किन
'मीर और उतून वो मनुप्पो पतिलके पपिासा बातमसितके
हारका मूग इसलिए मेरो मुषित कही भी नहीं है।
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एक मारिस्विकारी

एक पुराना प्रयोगमारी कवि मौ 'मास पबराता है। मौरक प्रति भयानक प्रतिषिया करते हुए वह उसस पूर हटना चाहता है. 'भीक प्रति पृभा म्पनखा है। निस्सह मे रामों कषि मपनी तरहसे अपनी बात कहते है मेरी तहसे मही किन्तु मार मैने उमरी पूरिक समाधम सिखा है, मकि उनकी विशिष्ट पवितरिविषिष्ट मायके समयम। कोई भी बुरिमान मस्ति यह मानता है कि एक स्थानमें एकत्र मसपरित बनता भी नहीं बोकि यह संमटित है। यहाँ संपटन है बहा एक प्रेरणा मौर एक गद्देश्य भी है। वहाँ एक प्रेरमा मौर उदेश्य है वहाँ एक फीट और मयि चेठमा है। प- विरा पिण्ड इतिहाससे हमें यह मूषित हावा है कि संपरित बनवाने मसाधारण काम किया है। ही यह सही है कि इस संगठित गमवाकी प्रेरमा मोर गेस्यको सफर हो यह निषित करना होमा कि यदि वह प्रेरपा मार रेप नषित है माया मगठित एकत्रोकरण भी सबपा रचित है। मोर यदि र प्रेरमा मौर गएप ग्रन्त है तो यह समरित एकत्रीकरण मी मनुचित है। पितु हमारे कई नये कवियों उस एकत्रीकरणसे ही र पता, मिसे बनताका सामूहिक एप हसरते है। उसे सामूहिकवास पिए है।पयों? इसलिए किपरिचमी विचार या रस सा ही मिला है। उसे सियारा यया है कि सचेत मात्म-निर्मात रिवर परक मेरमा गृप होकर पक्तिमपनको समूहमें बिसीन पर देता है। इसलिए है नाम सचा मदानुमान तुम अपनेको समूहमें विमोन मत करो। दूसरे माम पनता समू-बह मम है, मापार-स्तरह भारी ही भी बन गाडी है। उससा साप मत रो। तुम सचेत ममिव पाना प्राम-पेग हो। उसमें अपने भारको रिटीन मत परो। भरले अन्तिम निमम यह रिपारपारा मायन्त प्रतिध्यिापारी रिहार 1 यह बनके प्रति गापर माषारित है, और बुलिंगीबियों को बनता महग करक रपनका एक पाप है। यह विचारपाप मबाट भारतमे नही पी। वह इस समय उपस्थित है। सब नय कवि बनताको पृपा नहीं करते है। किन पुण् एसेमो इस प्रविम्विासी विचारधाराको अपनाते है। यह बारमारा नयी है। हमारे पिस्वरिपाक पुरुका हासपत सामाग्पयापिॉकी रिवारपारामको हिन्दी प्रशस्ति करते है । प्रचारावरी है। पोरी परिसंवाद बन बापन इत्यादि । भारत सम्बतर मौक पहुसे कमवार छ पश्चिमी सामाग्यमारी विरमारामोंको अपनाकर उनका प्रसार करते है । ग्न विचारपायों मौर रि-विमुमोका प्रचार साहित्यमें भी होता है। यह कि मह विषारपारा मषिक मूएम अधिक मुक्ति-युक्त होर, बाषिरय मोर गदि. का मामा पहनते हए साहिरपम उपस्थित होती है। ऐसी विचारपाएँ बम-मय मोर बम-भापर मावास्ति। भारत सन्चतर बम पश्चिमक सामाग्यवाही की अपवन रामविक मौर सोमालिक मनोतिनोको पात्मसार करते हुए अपन साहविक प्रमाणको विस्तव करमा चाहते है। छाटे मा मझामे मम्म-बमक मदतापाशी मेड पर और भविणके कोमम पम्ही करणारेबाने है। सहीसे सामंजस्य स्थापित करते है और माने पा भनगाम पाहिल्पमें जया पर पोकीमवतन रानमतिक सांसातिक मनोवृत्तियोंकि उमीले प्रभावों और पिसी उनीली दृरियों मोर भाषा- संसारबन बात है। यह एक वास्तविक बीवन-सप्प है। इसघे सकार मही किया गपरता। यहां किरन दरबारे गाकर उनकी रासे सम्र बीवनही मुमा सार-सग्गा प्राप्त कर रन अपनोसे पृपा मोर तिरपार करने समते मिनिमम बनम थे। सन मपनों बीमारी पान रख उनमें पना पिम्स एकापीई प्रतिक्रिया पैरवी है। एन सपनो हरार, ये मान सामियों मा पन्च मताधिकारियों या एमापीरापरा

Bामापक प्रमाण सम्पन्न पत्तियोंको पूपामर करनेमें एक दुसरेकी और
परमेहगते । मोर इम होके दौरान एक पवित या सत्ता मासपास
पुट या दस बम गाते है। पारित्रिक संकट उत्तम हो जाता है। साहिस्मिक
पाम यह पारिमिक सस्ट एक प्रकारस म्पक्षता
भाषिक सत्रम
महरिविकट दूसरे प्रकार म्पस हाता रामनतिक धरम मह
पारित्रिक ट किमी तीसरे पकारम म्पत हाता है। मूस बात यह है
दियह सपट साम-झामके फसवर मोर उस भान-होमसे प्रेरित
'समासरी' पदा होता है। बता समारपर पनका पम पमा वर
तक यह पारिरिक संकट मविपरो मषिक मगन्तोप और भावस्पा
उत्तम करके महिरिषद मानव-मूस्माको हानिक साप ही साम-कोमसे
मन्ति समजदारीका अपानता रवा पापमा भारमी पागम पसारा
दृम्पा मोर भोपा होता पटा पायपा । फस्त नबर सामाग्य ममवापर
नक दामो-उपदामो-नारा घोपममा बाध बता पायेगा परन् यह कि
उमामियों मोर रासो सपा उपदासों के बारित्रिक मप पठनम उत्पप्न
परिस्थिति भी सामाम्प बनतारे लिए मपिरापिक भयावह और रह
होती जायेगी। पमै भयानक दृयोमा पिस्तार भारतमें भार भी म
तो मने यह सब गया हिमा? इमलिए कि भार निपनका इस
परिस्थितिम भावन-यापन करना पाहा है। मोर पारिरिक मप पान
के मानसिक माटो मोर मातारक म्नानियों मनुमर करमा पाया
है।म परिस्थितिसे बार इस स्थितिको भी मिझार सिप फिहिन्दी
प्रेप मोई पापक मंत्रीवमारी मादामन या हमपस नहीं है यो सम्म
बत बम्प मापा मापी प्राम्ताय है।
ऐमी स्पितिमें तो गब दिबास-समागमें भगावनारी प्रेरक
भारमोसन या एमो समरिम पसिनी एक रेग्मयोत मन सिमें
भरत बमबारी कौशम मौर सास-मामा नमारी सिगित महा
एकाकरिता सम्म
"

मत मपनेरो निधार मनुभा रहा है। परिवारमा
तो सहर मानवीय मामिामाकी पनि सामाधिक गावापरपके ममा
इसकापात्मक रेसविर श्यामा अषिकमिस और मषिकबाम्म--
प्रस्ठ हो बाते है।
हो तो मैने बानी एक परिभ ग्नी पानी पोरा प्रयोम डिमा
है। अम्तर परत यह है किस मामडवारे गामकारप समय भी
यहाँ प्रस्तुत निमै परे है। या परिका कोई निको नहीं किमि
सोयाँसो बाराहामामी भानारी मिठे म पापोई बार जिसमें
पार प्रस्तुत होकर मूत पसे जीयम-पपाय पपस्थित करते है। रविता
एक संपोतो , मप सब मासे अधिक बम है। हालन
मायकवा मार बनकर प्रस्तुत होता है, या निम्न लार या विचार
बार। रविवारे मोठरकी सारी मारपीप्ता बस्तुर मार्गको पटिममता
है। इसी प्रकार पिता भीतरमा कासव भो भाषा विहाय है।
वाहिर ऐसी स्थितिम मह सम्भव नही है कि परिवाने अनेक
सबउ मा भिषामें प्रस्तुत पिया बाये। अपना बना मार मच-विर
पुण् दम दम बापित भौर रीप्तिमान हो किम्बल बायें
गतिमान हो या मोर एक रियर रिणी और प्रवाहित हो सके।
पहा मी नमो बौर से मेने एकामपा मिली। निस्समेह
तसमें पपासा रेसम मामास है, मारपीपकारी कार मरोगिताबह
निमारमात वाममोर उस पारंग सोबते है बिन तारते।
बप बार बनियर सिमाना परत और समाधान पारपर
और रिबन्ता ग्ठम मा रती है। यह मसब एक एठि01-
बह पापा।
एक पतिस कमया है कि एक ऐस मानेमे पहा भाषा
यहाँ पला प्रतिबन्धित उस बहाने मौतर एक पिता-पुराना
हमादिरासरी

- पुराना । बंगका रहस्यमय है। यह मूना है। वहाँ उसे एक माइमी मिला है बो गुप्तचर प्रतीत होता है। एक दुसरा मारमी मिलता है बा विम्मुल पागस है। रविवारे मन्तमें बताया जाता है कि इस बेगमेकी पीदिया जमीनके भीतर-भीतर पडती है की देसोम वा निकली है पंसार मसापावरमें भी दुपचाप पप गयी है और मानव-मस्तको भीतर समान स्थानपर भी। इसमे से सबसे बपना-अपना सामजस्प स्थापित कर किया है। इसी सामगस्य-स्माफ्नाके फवास सब छोग मदरसे टू ये है उनके रिकी कांदा मपी । इसी कारमसे प्रतीत होता है कि यहाँ एक मानर-सत्ता है। मर्थात् एक नकारवार है। संक्षरमै बह गला काम-कोमको बबाहिनी सत्ताका प्रतीक है जिससे सामगस्प मोर सन्तुमन स्पापित करक होगोंने अपन भापको मुखा दिया है। मक भीवर भारमाकी हरपा हो पुको है। मोर इस हत्याकापस सब मोग परिचित होते हुए भी चुप है पोंकि ये उस जंगमको सताये सामंजस्य स्थापित किये गए है। पपर्मे यह पक एफ सिमसिमे सामने माता किन कविता यह सिर्मसता दूर बाता है उसी तरह से समप्नक मीतर स्वप्न बाते हा- उम्ट-पुष्ट हार । कषितामे मैने उस उसट-पुम्टपनका निर्वाह करनेका प्रपस्न किया है। सोचता हूँ कि अपपोप प्रवीप करिताको किती कहानीसरे ₹। सम्भव है कहानी की कोई मासिक पत्रिका मुझे कममे म पना बीस सये दे दे। इससे में बपन मित्रोके सामने यह पिट कर समा कि मे भयोग्य नहीं है और सपे पमा सपता!! मी हिपनेका पाम में पार रिजरेबारपगा। पर्यों की? . सागरपिता मम्म ३

डबरेपर सूरजका बिम्ब
पा रसमे मै सहकपर मिला मुझे लगा कि यह मेर मात करन
मूर नहीं है । राहम मुझे बाहर मानुष नहीं मा भा। उसकी पटकी
पोठ पसीनसे तर-बतर मी बास मस्त-पतये। औरण ऐसा मलिन
मोर पणात पा मानो सो ते पादर समारीचा दी। तात निपम
मिया किबह सरकारी र कोट याद किया परस मा रहा
किया गही महमकारको निसीपी या मोरी साहिरिया या पर
मैविक मेभीका ही एक हिस्सा है कि मुझे धर्म मनाम मूट-फूट रेस
सिवा बाबाना चाहता है क्योकि यह बम बमा होडप, मास्ट
हामही करना चाहता।
पूरा पमानेमें भूसे व्यक्तिको मन रेलसे शिवना पुर पता था
मानिक माम्मे प्रायर उससे भी मषिक पुस ममसे मतिम भार पाए
मयिका एक कप गरम-गरम पाप प्रदान कर हए रोमीटी पा करमसे
सा गाना चाहिए। मेरे इस तक भापार या है कि मारम सम्पा
पम गिमते हा मूग वाताई पसीना माता है कपडाको रस्तिरी
रिया बाती है पिए मास मार-पस्त हो गाते मणिपोको स्याही
नप माती, पाय मोर हो जाती है पसेको पासिरियौके
मारे दिल पर-पक रखा है। मतमा मह किमी-नम मानवापिठ
मुनिमामि पिक-से-अपिक धमकी गुप्म-मृति-दुनियाभे तो मोरही
सीमिा-अपन भाइयोती, मी मौसीम भी हंगर स्थानुभूतियार
पाना मुग्म भौर स्पून मनारफी पात्र ममम्मामी पात्र है। देगी
एक माविताराम

वो यह है कि ऐसी मनुष्प-मूति मपने सर्पको मायाम भी मनावर बौर मसम्मानकी ही पात्र होती है । इस विसनपापी वीर अमर्यामी मनावर मौर षसम्मानकी पूल पारण कर,हश्यमें मासी का.मा पहर रिये हुए पके माम्त मौर अमित पति पर भपने पारसि बाहर दो मीक पूर मपने परकी तरफ पुरव पुराते निकलते है तो उनके मनम मौर हमारे मनमें प्रमचारिखना महान् माघात्मिक मूल्य मरतरित होता है, वह पपनातीत है ! इस विराहेपर खड़े हाकर मुप्त रस म्पषिती परूरत महसूस हुई। यह मेरा परिपिट पा। माखिर पा में इस कानमें भवेता वाहतो बह मुमसे बातचीत तो कर ही सम्ता पा। मुझे समता पा किमबतक में भपनी पकाम पूरी नहीं कर भूगा मुग्गे बैन न मिसेमी। में पान पणा हा पा। सुमर पा। एसे मौकपर ममुप्प स्वभावत' मुरिमाम हो पाता है। उसमें मारम विस्वासको वेगस्विता एती है -बह एण-स्पामी ही गर्मो न हो। यह भायापारी पता है। यह मसीहत है सस्ता है। पर दर-दृष्टा होता है चाह तो परामर हो सकता है चाहे ar पर रोमटि प्रेमी बन सकया है। बाहवाह! मुखस्पन तेरा क्या कहना! बिमा परेको प्राप्ति होती राममि हाती है बहो तू है। पत-भर में संकोषकी गटर-सपा स पया । मैं रीमती (सबमुष) फर पतास को पहने पास बेहतरीन मूट । म गया पायहरके पेपर्ने होमसि मिलने । पाया तो महंगी किस्मकी बारीक कापरते पेपा ये कपो। भारत में मापा बेकार है। अपने ही पग्में घरणार्थी है। सिमामा कुण्या मा मिर्पोरे यहाँ मार, एक मसिस्टेष्ट गपरेसर पर (बह जगह यमी साठी महीं हुई पी घिन मुमा पा कि होनेवाली पो) क लिए पापित कर हा पा। मोर पाही भाप ऐम कपड़े पहन रेठे है मपन पुसे-पुऐनको धारपदी संगना मानते हुए (पोड़ी देरो लिए हो या न महो) अपने को 'नसा मनुभव करते है ! गौरव मौर गरिमा यह संदेना !! तेरा सपेर माम विष नाम सत्य है, तेरा नाम गियरा नाम है सौम्म ! दिन पारके उस पनेबल मुहासो सपने मारमोमोसे सौरमर मुझे माकस्मिक यह भावना हुई कि मैं बसा कि मपनो मसती मेणीफे पापी बाप मर ही में अपने बामारका वितरण और उपभोग कर समा। और इसी बन्द प्रवृत्तिके मनस्ली पलके फरप में माफिससे मारते हुए उस पाकिससे बामबमोटा। किन पोंही में पसक साप बाय पीने समा हम पोमरि बीच एक पीजी पुणीको रेखा रीका माप-रण बनी कोशिश करमे मी। मैंने सवारखाकी परामाप करते हुए उसके लिए एक पाय और मंगवादी! में अपने परीरपर पो हए परम पावार सचेत बा। ये बस्नही है कि जो मुझे उससे दूर ठेवाए। इस संकोचको र सने के लिए मैने हो वारकर रख दिया 1 गरमीक बहाने परके बटम इस प्रकार सोम रि किमगर एसी पहनी हुई बीच-पी फटी बनिपान गोगोंको दिवारक! मैं चाहवाना कियह मेरे ममानी मारेको देखें। लेकिन वापर बह मपनी दुनो में गते ए पो-हारे पंछीकी भांति मी में समाना चाहता पा । पर औटना चाहता था। मै मानेको उससे एक मारा बनुभबनकर और सम्पी माला रापान मे पम्मे पारप उपसे एक मर नौवा भी न भनुमब इसलिए उसमानी सुपका रस पापप-मोहन मिए मैंने उससे पूण ' पक इगिया यिोसे मैने बापकी पहानी मुनी । गत मम्मी को पड़ी भीन्ही बनी। उसम मेरी तर प्यानमै रेवा-यह गाममेरे लिए हमेशायरा मग हो साता है। सपने प्रमुनापण हा 'मी यापतोबस-बार तो भालोपक ५. सारिक है, मास बताइये! मैने विश्वास रिठाया कि उसको कहानी बहुत मागे पी, पोंकि यह सचमुष बहुत मम्मी की । मेकिन उसका भी नहीं भरा। उसने मेरी तरफ ग्रोरसे रेमा । यह एक पतटा-सम्मा बहरापा। पहरवसे रपारा चा माषा-शायर बागे बाम कम होनके कारण ! मुझे ऐसे बहरे पमम् । एसे होगामें भाप र सकते है मौर मापी सुखकोको वे एयाय करने (ममा मने) की ताकत रमते कम-से-कम मेरा ऐमा सयात है। मेरेनारा की मपी प्रशंसाके प्रति उसकी सन्देहकी इरि मुझे बहुत-बहुत मायो । एक सभा देखा गमता है कि वह कहाँ कमशेर है कि उमन ही समासि पी पुपया है कि उसने कहा सीपा पोती पर सही है कि उसन कही उमाबड़ा रिया है कि उसे वस्तुत पहना या पा और कह क्या गया है, कि उसको ममिग्यक्ति कहाँ ठीक मही है। वह इसे बनी बानता है । कोकि यह देखक समेत है। सम्मा पर मपने पुरखा दुस्मन होता है। वह अपनी मारम-शान्तिको मैप करके ही ऐसा बना रह सरता है। इसीलिए मैना अपनी कसोटीपर दूसरों को प्रसंसाको भो कसता है और मातोषनाको मी। वह अपने पुरा सबसे गा माहोषक हवा है। बारा सपा पम-सपर माहौषक यह सब परा गाने | बहस गए प्रभावको टिम रेलता है। मामोषक साहित्पारारोगा ! माना दिनोगापन बहुत बड़ा पम्प है-साहित्य संस्कृति समार विश्व तमा प्रहागरे प्रति । मेलि मुस्लिम यह है किबह विना का रत्तरदापित मिरर से मैठा है अपने को उतना ही महान् मनुमा कता है। मौर सागा रिवनी बड़ी रिम्मेवारी भान सिरपर से मेवा है स्र्पको पसमा मपिक तुच्छ मनुभर करता है। उसे मपनी मसमता बीर माम- तीमारा मागाव पोप होता हताहै। सा परें ? इसलिए बिह मानी अभिपिकी तुमना गौमे पानाम रेवत बस्तु-मापसे ही महीं परता पर मपने सपक सापातकार-सामथ्यकी सुमना रस वस्तु-सापरी सरपर पारि ।

पिसाळासे भरा है। मारम-सत्य भी कह साते है उसे विसको धारणा
के लिए उसे लगता है कि शिवनी पारस्पक मनःपरिव उसमें चाहिए सपना
नहीं है। कमी-कमी पा उसे मामाभास-बहन ही काम पता न
पाता है। अपनी विपा-मस्तुकी विशाम्ता मोर महराईकी तुमनाम पता-
मापनेको डीन को न मनुमा को हिपए पूर्व मानता है कि रक्षा
बो गुण बस्तुत सम्मान किया है उससे भी मना किया जा सकता पा
विषय-वस्तुके प्रति RRENT यह संदनात्मक उत्तरदायित्व पसार
मन प्रतिको किस तरह भग पे रखता है, यह किसी सन्ने मेगास है
बाना पा सप्ताहै।
मैने रस सम्पने गहरे सन्देर मात्रको रेखा मीर बात पलटने
पृष्टि का 'मह पर दिमापी मानी बार रपारा मनो
बज्ञानिकली।
समने मुषप्रारबबावरिया 'मनोमेशानिमहोतीवोपना होती।
मन ही पुस्ते गौर युटदै इनके सिंग मोर मा गिमयो ?"
में उससे मसहमति प्रष्ट करना चाही। मैंने पूछा, 'यो मा माप
पुसको मनोमानिकवाडी पननी मानते है।
प्रगण्या मनहीं समानता उमारे बजाय रिपा, "हर पमान
प्रगॉसी मुशित हो। हर पमान ए पीपादित नहीं सुना है
पहब रिणत पौस भारतीय बनताका मेहावामा हमा
पहवा गया
पिछला कौन-सा पेसा मुग पा जिसमें कुपन पाहो
और फिर और फिरपासा मतलब क्या है ?
मा समसावे एए कहा पुन्हा मापिपत्य हो जब ममलना चाहिए।
पुरमा विषारी भारोता दर करनी पड़ी और निनोमा म हो।
एण्यामपर पर्यापन सालोऐनसिटिक मतमय किया जाये वोनिय
जोरावरीपरी रसा कोई ममाम नहीं है । गुठा पम झारबार
और मापारकर सन्तान है।
.
एक साहिसिनी

यह बताया पेहरा मेरे सामने उठावदार और रभारार हो
गपा मम मम मरिमा प्रतिविमित हो उछ । मुझे सपा-उसका दिमाए
पुर-ब-पुर सोरता है। उस मक्सिमें मेरी चिस्पा पारा गयी ।
में टम रिपारोको मार-पूर्वक सुनने लगा।
उसने मुझे बोरमेका भवसर म देते हुए पहा
में तो सिर्फ मेहनत
पर मारप मेहनतपर उप मेहनवपर पो मपना पेट भी नहीं भर
साम्ती बम मैहनपर बो बहुत उगमन है रस सहन-पोत प्रमपर लिखने-
पाला सम प्रमा सिप करना चाहता है गितका बरसा भी नही
मिलना और शिम मापे-दिन मारमबसिरान और त्यापकी नसीहत दी
बावी। में रस भयानक मधीनका विषण परनेवाली कहानी मही,
परिक उपग्याम सिनेमाता निमम हर पापमी बहनही है पो बह
बस्तुत है या हाना चाहेगा। उगम मशीन रोपनही। मशीन बहाने
पार्मोस गुग्गर अपराध है। इस मधीनकी सोह-नमियाम पो हुए मानपी
परा में मिरमा पाहता है। साहिए भापमा पा सयात है?
मन मिनिट तक से सांस ही नहीं ठी। उसमे भाव-विचारम
औरत मुझे प्रभावित किया पा परल् दिमाऽपर दबाव गात पिापा।
मरे सिरपरपस हो गया था।
मैने पोरे पोरे महा पार पिसम कीगिए, पर लिखिए !
को मदिन माप प हो गये !
मैन कहा 'पुर महीं, मै सोष रहा था कि मिळ बहुत बड़ी पीम
(रिपस ) ग्यमानेरो काम नहीं पता। यह राम्री सिळ रतना
ही मंध पसरापा मापे रिसा मनपर भापपिए पापातमा हो। बड़ी
मारी विगिर पड़ी करमरी पाप छोटी-सौ पुटिपा को की गाय को
मपिरमास होगा।
रसने कहा सही है। मासमाना मिग सपन-न मामने मैले
पर पूरी रिमतिम करना चाहिए पापर यह मेरे जीवन-मरस
पायपनि
९

स अधिक निस्ट होण! मना भिषण मुमधे सब भी पाएमा । भक्तिरे इस एपन बारम-रमाकी हमकी-सी गुंग मुझे सुनामी यो। मैने देवाचे पहा 'इस मात्मावाडी पत मही। एक सर्ग पाटिरा पर्व गाव मारा होता. हेकिन बापड़ी इमेज बहुव ममी है। हम सब मोग ऐसे ही खो। जो अपने भावर रनमा प्रविनिम पारम किये है। पूरा बस्तु-सत्य इस इमेगम मा पमा है। मौलिए गा मात्वपूर्ण है। हमाग परिपम मी सौ बोग महीं हमारी सांस भी तो रखी सोहए वो म माटो माति-बम्प!" एकाएक से मैने इसकी कमर म परी। उसमें भारम- रासी कमीश्री। सब मिड मीमा वानर कोपरय मापा और प्रभावणारी ही महान हर मामूमीको रि-मापूर्ण बनाकर दुनिया मामले पेश करते है यो पर यही और सन्सार मौन ?? पने ममा भाग साता सबसे बड़ा गुस्मम असाप नही स्वयं सही है क्योंकि यह ऐंठसी मही सरगनताको सापकर पमती है। मारहो मानेमें है भाग्य माग रेट । पी। सलिए सत्पाप मुगुन्नु बने पीर बने तमी बह पा सकता है पर समग शिक हसता है।" मह और भी मठिम हो गया। जिसके पारपर मौवरको सुमोमा रगा उगाना काक लिए मैंने उससे कहा “बोरस है बौनियस (मारायली अपनी प्रतिभा है)। पेटेला बाप है। मैं इसे समारा" मेरे श्रीमती परिमटने मुझे कुरा सादिप हो ही नि (किन नरा , सब रह पा?) कोही हम रोमो र बिराए. गहत दोस्व बहर AI मानिरी हाशिएपर कुछ नोट्स बहुत समय तक मे ऊपर लिये बैठा रहा। विमा पार पोपा-योमा सा। समझमें नहीं मापा किया है। पा लिए मौर स्विने पहले पपा सौर। पाइस परिस्थिविपर प्रौर फरमाइये । यह एक अमीर पाप है। ऐसे क्या रिपना है यह मासुम है। लेकिन यह समसे उतरवा नहीं। समरे मासे दुसरवे हए मसि बन्दर दीप पाते है। किन्तु भीतर मानेरा माहम नहीं करते। भीतरवासे उन्हें मगर गुसावे नहीं पायद उग कमरे माना हो तो उसी प्रकार रिचार कमरद ररवास से शोक गाते है अपर क्या है यह बनारसे टटोत पाठे, नि मीवर माना पा तो पता नहीं करते या पवा साहस नहीं देवा ! म भी उम बरियत विषारीरो बन्दर मानाविप मामयप नहीं देता। रितु उन चारोंची मृत रेगार मुझे एक गये मुबारे समानको मार मागपी पब में कांसमा एक मापा। तब एक माा म्पसिसे मै स्नेह हो गया। वह सचमुचसापा या मूठमूठ पा में नहीं रह सकता। किन यह सही है कि मेरे रिमामय एक सयामी मपीसी पुग्प पमी एहवी । मा हाव-माते एक बात पा पैश हुई कि उसने मुम माळी समर्नमें गत दिया। वह पहरिसके परिबरी पर बा ए पपासात सुपरपात दुपवर्गा-भान्दार तौर-तरीके मुझे पमान नहीं पाये। रहावर मरे परिवार प्रश्न है मैंने यह भी नहीं पाहा कि मैं माती पसरपीसो एक मान-पग पा मारा उप पर प्रशन करें। हाशि मीन

पसन्दमीको मेसोटी नहीं मानता । उसे सटी परेनरी मधे न वय
दूसरे पमि परा में अपनी प्रतिक्रियाकि यहोपापर निवास करने
सस म्पनिको पा-बसी सासे ऐते हुए व्यक्तित्वका विरोपप करणे
विश्लेपित भोको पुन एक बार सट्टा कर नई पिर एक नये पटनम
नये पिये सन 1पा शाम्तेकी भांति उस छापामा वारक मारमा प
में बीएरिस बनाकर मममाते हप मारए इपमें उपस्थित करते हुए स्वयं
स्वम और मरकाको हवा बावा। दोपमै बासोचनात्मक भावमाको
प्रधान मान किसी पटाप बोरिधोपर तो होकर पुनियाने मा
स्नेहमीवर पाये पामेमाम मार विश्वासको किसी विपाठ पढाका कप
देकर बीवमाकी परम उपसम्मिको प्राप्त।
पारसेका साल पहले मेरे एक मिषने या प्रपत राया था। बामना
में निपप ही एक मुल्म पुष्टि होती है। और मैं समझता बाट उम्र
मित्रमें की। बुझे हुए पाहामुखियोंगरे पति कार्तिकी पेम्पम है
हुए भने ही अपने दो पम्प मामले में छोटी-सी एक समग चिनगारी नत
मुझे मामामुत से निस्सम्बह पीटीपा से चुनौती भी रेती
हैवी रत मिशने र प्रमेव पिस्तुप पाहामुपोषा एक ऐमा
पिपिस किया कि में हरतमे रापमा ।
मैंने उससे कहा तुमारे भाषेपसे हाता है तुम ने गत
पाहत हो।
रखने कहा कि । यही मेरी मुरिकम है। क मेरा पपार
है कि सो समिठती हर एक पहाडो पार मारसे पहराम
पाग मारिए रनपर पुम मरिकार बनानेगी माना होती है।
मह निरापार है। स म्पति दुख ऐसा चमत्कार ए ऐसा
सम्मोर मोर गुण् नी ममा मन रमके चारों ओर मराठा
है। बस मेगा उनके साप हा पाये और कोई ऐसी
समाहितीसरी

विसंपत बातम की माये मो हमारे सम्म सोस गलती हो। मन करता है कि उनका कोई बड़ा काम कर लिया बामे मपने हापसे उनके निए ? हो माग हो । सेकिन इस भावनाके बराबर मन उमझा होकर नहीं रह सकता। मलिए मापको रिम पतुनिक प्रमारित होते हुए भी उस मस्सिा मोटर एमा कुoहै मिसे माप 'वोट महासाते है। मह सारस्य पौर मोसापम तो ग्नमें है ही नहीं, इसके विपरीत हर इमित काय या पारको पायोपित हराने के लिए भाष-विचारोंका मायानी इनरात वानमा रमरा छ इतमामा माहाकिमगता कि उसके बासपास पातमाम मित्र-माया ममा रहता है या उसको सक्रिप माती सिमा पुण्मही करतो । और बह दमामी काहिकी । एक मिटान्त प्रतिक्रियापारी रामनीतिकी एक मरयम्त कठोर स्वाप को एकशिमागत् भारको -बिसका समय सिठ में से है। मेरे मित्र पेहरेसे पठा पाता था कि यह रस निकी बाव-सो मास्नी बातें मानता है। गहत-से पसे विषिष तप्प रसके पास है कि मामी बानपर भी नहीं मा सकता। मदिन फिर भी उस म्पतिको बह रखना चाहता है कि अपर पर उसकी तारीफ करनेपर तर माय तो एक मर्मी परिरी भांति बह पूरा पति विष प्रस्तुत कर देगा। पर कि सामने बैठे हुए मेरे मित्रमें एक ऐम्बीबोम्म एक महापन है ! रमने प्रिमरो अस्पद हार्दिक हासे पाहा है उसीका परित्याग करनपर बह मायूर हुमा । स एम्पीयनेम्स के शिकार मन काफी माग है। एकहीरविसे दोन पृपा और तीन तह एक साप करते है। उनकी पृगा मार लेह -रोना एक परिप्ठया है। शितु यह पनिप्टमा भी सनी ती रोती है कि एक मरे प्रति पिरामका उपनार मोहनके लिए मार हता है। सममप मेरे मित्र पापमोर पोर हा पहा पा। मुझे या राशिएप मारम

साहस ही नही हवा कि मैं रमा मिरा नाम-पाम पूएँ। र सो परम
पप है। यह नात मार सरवा, मैं नहीं।
पितु खना सीपियको माटोपना करना भारतीय संसार
के बने विपरीत है कि मत पिर। हम अपने मनसरी सलवारो
मोटर माहौर अधिक प्रतिष्पित बनाये रखते है। यह स्विनी बड़ी
मारम बचना है ! समा'मापनासकाई पार नहीं।
किन्तु यह बात पुत्र ही मारपूष है कि मालोचना हमण वटस
मौर मिष नहीं मा करती। वह गापा दृषिको बगाय मात्र एक भाग
पप होती है और दिशामियापर उस भाषायपर बनापटी पनि
पाता। उमरी कीमियापरीनी भयानक हावी है कि हमारी
मूस बदर भी बना ली है कि हम तुर बरनो इस सम्मकी
पिरमे रहते हमारा रेहरा बाल यूबमूरत है। मकर मकि
मेरा प्रयास मिती ममम मामा बालोषना एक मकर गोर।
पह वात विपुत समयमापनाका समाप अमिते मार
परासयमे होता है। मातमवारपर सोगोंकी पाहायम नहीं रिसे
सत्समबीर उसी माफ्नपारी बारी बातोपमा बग्मी मापनासे
प्रेरित रितु इस सिलमि में पर भी कहा कि ती मी
स्विपर एकारप भया पत है। चाहे रे बने माता हो या स्ठिा ।
पहले मनुप ना बना परित है। इस परिसको रसके लिए
बारपकनिमम ब्रा मारह पाहिए।
मैंने समा सामन में बात रती दो र दुनी होकर मेरी एक
रेणा । रमन बताया कि पापार समी नपह। मुर मापन
विटर और प्रेम-प्रसंग-इस सभी अपर सो सम्मान।
इस समस्याको पाप सममिए । म पूरे प्रश्न पी0 एकप
प्रभारी मारमा है। इसे मार हानिक भावमा ममरते ।
समसिम म्पतिमी रिसी युग-पति या सत्तामा पर्पन र पा
परसातवीवासी

उसने कहा
है. इसीम बह म्यस्ति मुझे प्रिय है। किन्तु पो हो उस गुप-शक्तिको में
वगित होते येगा में उस मक्सिको और गा मौर रस म्मतिको
यह समझमें ही नहीं मायेया कि फला-
फ्रने, बोमबतक मेरा मन का
मेरे महा माना मोड़ दिया।
म मानता कि यह एक सम्मेफ्टिर वारमग्रस्त रपया
किन्तु बह पिखना बसूरख है ! मिथके म्यक्तिस्व गुमाकी भपेशा
बि बिना में से ह सकता हूँ? उसमें उन पुर्णोका को पूरा मनोहर
मुगम है। यदि हो हो बवाइम मित्रता मोहित से उसमें
पर महासे पैरा हो ? परि एक दूसरमे पुणोंकी नपेशान रहे तो
मित्रता रह नही सी-और बाहे पो हो। एक विशेष प्रकारके स्नेह
का नाम मित्रता है। वह अपने प्रियो पुरे म्यक्तिसा भासन-पापपर
टिकी गई है। मै रस दोस्तीको पात नहीं कर रहा है रिसे माप ति:
घामाणिक मबमें छते है।
ने कहा, मह सब सही है। भकिन भय तो यह है कि कही
रसा गुमायासमी मारम बपनी पसरपी तो बस यापपर नहीं
मोप रहे। मानव-पबायका मा-बाना बहुत माय मौर सूक्ष्म होता
में उस पपाषा सिफ़ पिग पर छोड़ देना चाहिए। परि
मह निपप हमारे मनाम न निकले तो सुनी होगी बरत नही
भौर सपमुष मनुन निकम वा बात हो गया है। वाह-वाह !
मिले हा 'यह बात हम महीं मानते। पर हमारे हमके सम्बन्प
है तो हम उनके पापारपर इतना तो पहले ही कि तुम्हारी प्रतापात
पसममा मोर का पाठ पसर है मौर हम पाइते है मोपा हमें
मातुममें यह हो ही नहीं। मगर किसी पापे माश्मीके समय में
बारात होती तो बारहम पो।
कहा 'यह तो है। किन्नु मोमिन मापके मरेप। उनमें
दूरीमो बाप बनाये रखते हो। एक मोर स्नेह और इमरी बोर पूरी
हागिएर ए मोम

मी। इस संसटम सब मायामाता हो जाता है। उसने सुस होकर कहा 'ब तुममे माापर हाथ रखा। मियो पनिष्ठ सम्मको बसाया उसमे मो हमन रोकायम करके रखी है तो नही रोके पर वहम सब पाप-पाया इट्टी हो पाती है। कई म ये? विहै। अपर एस न्यक्तिकी हम मानोपना करनी है वो पास उसे अपन पनि विश्वासमे हर फिर उस धीरे धीरे उह मोड़की तरफ बाना चाहिए वहाँ मैं अपने निवासकी बात मंने का ममे कहा ममी माहोवना बाहे बितनी निष्पा मोर येसाय रिवायी २ मारम चाहे शिवनी कठोर और तुरतुरी हो मन्तः उसमें एक बड़ी भाएं भा होती है और यह कि मनुपमें सुधार किया था सस्ता है पहलि मनुष्य अपनी सीमामा और मोरिपोक कार सस्ता है बह कार नठार उस विधाक पर प्रेमका पापी हो सस्ता है जिसे हम साति विज्ञान साहित्य वारपन बमना बप्पारमका मेन कहते है। या प्रमा म्पषित-पिपपर भवा नहीं है किन्तु उसके मुपुष्प मा बापत सामप्पपर पता है कि यदि बह चाहे तो अपने कोपर ही पा सम्सा है। मठकर यह कि इस दुनियायी मसले फारसम्म रखना सारा साहित्य हिसा गपा है। मेरे मित्रम विश्वास भोर संपम दोनों समम्बित भाषसे मरी तरफ देखा और कहा में सब निरीकी बातें है अपनी बहसही। किन्तु उनका मास्व खो बमल तालमें ही है। मौर अमड बामे पानेकी प्रशिलाम बममम कार्मबासकी सारी दुपाया सीमाएं बार कमजोरियां हनी मधिक प्रकट होती किपर्वमें सत्तादी बाबरमपम जिसके प्रतिपायम्मिा मयापति पौवमा uatiपति रस मातोपनापर फिर विकास नही कर पाता। ५ पए साहिरिपणी इस बात को सुनकर हम दोनोंडी हसी मा गयी। बाव बिसस माम है ! मारोपनाका काय बरतु सिमाम्ता प्रकाशके ससामा एक मूएम कौपट भी है। मैंने उससे कहा इसौसिए कहता है कि हम मासोषमा करतेमा गमतिमाके लिए कम से कम पम्चीस-तीस प्रतिशत हापिया पोहरे-मगर हम है के पास हो सकता है सम्मब है 'कचिद वह भी हो इस दौरसे बात करें और मानवसान मोर पपने सकिशानकी सासात् सीमाएँ प्रस्थप म्यानमें रस उठना मार्जिन मपनेको और पूसको प्ररान करें, तो बहुवेरे हत्य-दाह समाप्त हो पायें और हारिक वाचारिक वारान प्रदान मषिक मुपम या सरस हो। कमा में प्रसत पहाई? मैने अपने मिनी मावोंकी तरफ देपा । मुझे भगा कि यह मुमस सहमत है। पए मोम

सडकको लेकर एक बातचीत
दौर मेरपरके पड़ोसमें सेममका ऐसा रिणाम भुग दूध पा
जिसपर हमारों कोए बैठे हो। सुबह बाब मत ही कोषाकी विचित
कांव-कारमानाम समा बाती। पामको पब मासमानकी काली बजाने
गमती वा उनकी पुकारमें एक नाब गरास जी मा बाती मा कि
माके भीतर मा बहुत-कुरुबा है या समिम मस्पर पोषाकर्षण
पम-सरमि बाहर एकदम निकमा चाहता है।
इन रिला मेरी हालत ममम मही है। प्राइनाही में 3
मिन्न बात कहना चाहता है कि मै कौरा नही है।बो कहा गया
मा पामको पर मौटते गात रिमाणको रीवासे टकरारका ग्वा ।
विशाराम एक विचित्र प्रकारको उत्तेजना होती है। इस उत्तेजनाको
यरि पी लिया गाम तो बह रिसको कमी देवी IAn हिरगमनकी
भी बहुवेरी कोपिप की। किन निगा बात इतनी पीमता पूर्वक अपनी
पाया-प्रवासाए निकातित करती बाठी पन्हें गावी गाती है कि
मुभिाषा सामना करना पाई। उस रिमा विकासकी पतिक
पार-साप मारमनपीन मनकी पति बराबर बनाये रखना बहुत कठिन
हो पाता है। यह मानती मापन नही है।
पिन तममें मेरे एक मित्र माही पर्व। गन्होने पो में है
उससे पिग शाला काम किया।
मैने मागकर हा गा मा एमा पाप मा मये
तो है?
पर मातिपररावरी

। समाने जबाब दिया 'मेरी एपना पापिस मा गयी।' मेरे माषपर बह मे। मन चिन्तित होकर पूण ऐसा क्यों? पनि काार सामने रख रिया । सम्पारक महोदयने कुछ पंक्तियाँ निस रकाबारेप दिया था। एषना बहुत मश्ठी पो । ये खुप तारीफ पर पपे थे। उन्होंने हा मांगो पी इसलिए भेग मी पी मरी 1 सम्मारक सम्बन साहित्य-सहा एक नवा भी है। उनकी बाउमें एक बयान है। र पम्भीर म्पत्ति है। कडारा मम समझते हैं। ममयुगमों को प्रोत्साहन देनकी रिस महीं परन् मपी एमरकी मौमिता मोर सूझबूमके कायक होमेक काम मपी प्रवृत्तिमि नप भी बहुत मपिक मते है। उनके विचार मुझे नहीं बनते। किन्तु फिर भो र मेरे लिए बोर मरे मिल लिए माररणीय है । परि पिपारामें मेरा सनसे मतमेव हा पाता तो यह निपनीय बात म होती। यह सामाषिक ही पा । मने विषय पर दिया है। मन जैसे ही मनापायक पसे पुछ पहावा। फितु मरे मित्र बोष माइमी थे। एक भरोसे में यह मार रहा पा किरन्द गट। फिर मिमते रहनेकी रम्ह मारत थी। पहले-पहने मुझे भान हग किये ममा भाये । परापमठ रहेमा । मेकिन सब उमनि बरनी नयी कविताको दुपटना बतायी तो उनपर में पारा सुम्प हमा। यह सही है कि बहुत भम्पा सिपते है। उनके माप मा यह है कि साहिरियक दुनिया राव-नि रहना चाहते हैं। मेरा समार पा सिवाम्ब पा प्रति ऐसी है (मरे नसामसे यो धायद नही मी )कियो परित साहित्यिक निपासे रिवना र ऐगा उसमें ममा साहिरियक बनी मुम्मारना रतनी ही पपारा बा यापेगी। साहित्यके लिए साहिपसे निर्वासन मावस्या है! रसायन साहित्यिक दुनिपाकी सब सार मुझे बमिरे माया करते । उनकी कमी कोही प्रतो-शिवापत है। रनक परिममा प्रति सराहमा सरहार बारबीन

का भाव भी मुहम है क्योंदि में - सामही कर समसामानम
किमीहीनीय और बाबा मुमसे महीं हो पाती।
मेरी माका मा सेते हुबह मेरा यार बोका यहां मारी
सीताजी की।
मरे ममने इस मा कहाँ-? बोटोमोसो बास्त्री कह गयो ।
पमानन पसे बड़ा क्यों क्या बात है?
उसने बम्भीरतापूर्वक बबार रिया नहीं मापने यह बात गहन
पसम्म मामी।
पर मर मिना मिस स!
अपना मात्र मा गमेको मुझे भारत है । यह मरीरिक Bale
सदी को रिपताए। एक भीतरनी भीतर दूसरोरी दूरम
सामना करना । मरी पेण मामिलास मेकर पाना संपवारमा
बने रहना । बोर्मो बातें भी मम्मे । मुम इसपसे गला र ती
बामावित मसग और नि। सब-सी सामाजिक मी
पापाठी किम्मम एक मास्य-विरार मी। संगता
बारी ही मने बातामा बाइसाईकिमी-पापी है। मन सममें
पुणे
-41 प्रपान हो । मस्ती थे। नवा रहे । यह समस्त भीषण
विसमा
मारा पार की गयी मानिसमा पारी मार है। यह
सम्परार रखी है। किन्तु मनासिब छ बाननेतनके
बार भी निर्मपठा मी पाप एती और से दूर करनेकी पापिप मा।
पर बाए पसा पये हो कि अपने रानीप मिरको अपने
सामोहिकरने देता है। मेलि मा रसने मरी गरीमती पटना
नुभसी को मे पाती भाग मी । समा कि मुझे पपालमा श्री
मौर।
पिन परोस्त परमेयेका पापी बासरी पाऊस पत्रा
.
एक मादिगारी

पर गण कि वह उसको एक मूरख किंवदन्ती थी। फिर भी मैं खुद
हो मया। उसे मेरो इतनी फिक्र हो है कि मुझे गम्भीर देखकर बह
हेमामा पारा मुरे दरबारसे बाहर निकाहना पाहता है।
वौर, हिर, मकस्माद मफले मरेपर या गया मेरा दोस्त ।
उसने मुझसे पूछा
मो
पुछ बाम पर पाहै नयी करिताके
सम्भव उसमें भमिचिरा भी एक रोस' है।हैन?
बह पारा सही पह रहा था। पविता पोषके स्टबाम
(या ये रैमासा बाप ता ) मा मासके साप किन्तु साफ-साफ
गहरी गपापी । उस पर पुष वा हपको कही पपी पी। बन्त भो
एक रूप से किया गया था । रोनों स्पक बच्चे थे। किन्तु मप्प स्टैगामें
भापमान पुनगर मारक साप प्राट होता पर कर दिया । लुमे गुरु
पूरा भरे परप पठार-सा यह मंच न देहरु बहुत मजा पा पर
सही भा था।
समागमें पायी मानमानी कुछ बरसरमादी प्रवृत्तियोंपर उसमें गहरी
पोरकी पदो पी।
बस परिता यही कमरोर हो पयो!
मस इमके साब-साप एक तम्प मौर कीरिए । मेरे एक परम प्रिय
मित्रन 'भाररस' में एक मेस हिवते हुए घोषणा की पो किनपी पविता
में हापो माग मावेगात्मक पिप जोश मोर मापसका पिप स्पात
मी है। हो सकता है कि मामुनिकविता गदरी न मालूम हो । किन
पास्तपिपता यही है कि रसम मादेशको स्थान नहीं। बारकी पपिता
बोरिस मार मारमोप है।
"लास्तविरुवाको में स्वीपर कर सरता हूँ। रिन्तु मे में
जापति पर रला पाहवा है। मे माने सामने हुए मित्र
महरात

मौर,सर्य कुण्ण होर बोड़ा 'म पापेभडो काट देने वास मत है! मित्रने कहा बिसार इकहता ममा 'यहाँ माह मावत' मही है, वहाँ पाप या माग छाना विष पल है। पुरानी पिता पही किया करती थी। विस्तु बिलपीमें तो मारेष्ठ , बाग रोग, पिता मोर सोम 1 मे पसे निकाल देनेपासे कौन होते? मै सिफ मुसकरामा। पारमें मैने कहा पई पहली पात मबी कविता माधुनिक मारयोषपर बसती है। स्वीकार । वही यह माग्मता है कि सबका माइनिक भाष-मोष समान है। फितु या पुटमा मूषित करती है कि मानिस भाव-पोषम पहिस्सा मामिझ नही है की भारेप-मूहम है। मार-योग करनेवाती शिया इनी मिन्न भी हो सकती है और होती भिरपि भी मिन-भिन्न हो जाती है। नमी कविता समाधी एक मभिषि मात्र 'यब सा सकती, लेकिन परमेष-प' नही । इमरी बधिारि नयी कवितारा बिम्पास अपना हर मी बापेठ- पमाको पचाकी वेदना सपमें प्रस्तुत करमा पाइती है-इसलिए किगिरीम सी परिस्थितिया । मेरीबासी रसने मोर मोगसे कहना चाहा। उसने रहा "यह मामेश रिममें एक तरण पर करता है एक का.माएट पर रेता है। इसलिए यह पता नहीं। ऐसे मागको निकास को। इसलिए कियह मायेप प्रतीमारमा पसे प्रारमही दिया पपा है। परिसा होता तो ग्रहनीप हो बाता। सम्पायको या कि यह माप व्यक्ति समय है, पति मालीव नहीं । पिन ए ऐसा क्या हमा?" मैने सारे पार रिया इसहिए कि वह पीडितहपते भानही है। इसमें निर्णायक बात बोभिता नहीं भाता है। ( कविताम किसी मारा प्रयोग नहीं पियानमा पा पा कोपा ही अपमापी नहीं मीनी) यह माता सीमाहीमा परी निरी साविकीपरी पुमीन मा परामर्शको सम्ममा काम्प्रेयसेन र रती है। मे बड़ी की प्रान्तीय रापानियां पर रिली-से बा-पिटममें समा ही है। पसेपारों की तरफ विषते गा रहे है। उसको यह बात कुछ तो समठमें मापी मार पुछ महीं। उसने सिफ ममे अपनी बावा स्पष्टीकरण को हए कहा “नयी कविता दो हब नाम पर रहे है। एक से मोबाते-पीते वर्गो मुमिक्षित सोग है। अब पन्दी फुरसत है। इसका सदुपयोग पो करते है। उन्हें महत्वपूर्ण पुतः मुनम है। देरमा-कुपस भी है । इसके बारा उनमें से पतम मानिक दृषि मी है। 'तुम पहरणे यासबके मप-पर परीष झोप हो। तुम्हारी परि सितिय पीयनका माननीय यबाप रमवात है। तुम ए पात्रपक्रम पिस रहे हा हो पो हर हारतमें तुम मानव-सम्मापका साक्षात्कार हनुममें सोमवार सोमपम सपा मेमके प्रति भावर प्रति पापहीना स्वामाविक है। उममें इस बामहको भन्ने नियाइसे नहीं देखा जाता । कुम्हारे अपने धमाधमें तुम प्यायपूर्ण संसोपम चाहते हो। म मिए यह कार्य न मोवन-सम्ममसे रहित है। अपनेलो पीसनेवाती परिस्थितियों मार प्रवृत्तियोंगो सनो मंगे पायनिक रंगमें पेरा मारो। यह पता नहीं है। सारे ऐसा पुतकर पांगे? हरमिट नहीं। रे मूस पीरो है पी सरोवरे मामन गर्ने । किन्तु ये नयी करिता सिपामरे समाप में मीभिरवि पाना है बहकार अरमे निदपि होते हुए भी उसना अपान म प्ररार करते है कि उपतामूमर माबोवनात्मक कम प्रपान भावना सिरप न बन पापे-हमारा हो बनी है। माथिो संसारका है। उन्होंने हो नहीं लिया है। बगर नाही तो इमे नुम भी पूब मा निमार सकते हो। मितु पनकी मा गारगरपान

कुरामवासी उपेगा करना या उसपर अपना सा अधिकार करना
मेरे इस प्रोग-बातों मेरा मित्र प्पानगर मुमता रहा । उसने
सित नाही हा "हा बापने मेरे दिसकी बात कही।
हि और भी भागे मया ।
उसने मुझसे को कहा पह मेरे सिर मन्यन्त महत्वपूर्ण है। उम
पाठको में अपने एडमि रख पा है
"काम्प-तस्प भावना प्रमूठ किन्तु सम पाप-सत्पका भतिक
उत्तररायित्व है। हम से मह काम्प-सत्य पर नहीं टात सरते।
बह मन्य इमार म्पत्तित्तरे कुछ माय करता है।
मने बबार पिा "हो यो गुनार रेखा बबर मोन पहात !
हम परि परीब मम्पमपमें पेश हुए। वो हम उसकी मानस्थितियों को
पर बताने । प्रश्न विपया भी है और रिकोपका की। हममें-
पहरे, मारकी प्रेमोम मिस नपे है। हमारी भावनाएं प्राह नहीं
करते कोई मरी दृष्टि पाट करना पाहवे है।
पह ममरापा और पायर उसको डिकि घायने ऐसे साहि
सिका दृश्य विदो स बात परीर परानेमें वो पैरा एथे
पिस्तुमा बामी बाम-पानी परती परापे होकर सपाली पाकी
उपसरिपोर मास्तविक निपनि रम पम अपने बाप-बाबाकी
पौड़ भरी विष्टिही सपना सके।
परसातवाडी गवरी

एक मित्रकी पत्नीका प्रश्न-चिह्न भयर माप मुझे सब कहनेको मारत यो में मापम पह निराशन करना चाईमा मतियोंसे मेरा सम्पप पाठ ममीब हिस्मका है। इस कारण यह है कि पतित्वका पो पिप मने मपन नई कर रहा है समका सस पिस्ते पगमे कोई समय नहीं है पो मैने पम पसिसे बचनके हिए मपने लिए पार रखा है। मसान हमारे एक रोस्त है। बहुत सापारण प्पति हेपिन बगर बाप उनका विश्पण करते पायें तोपरम मसापारण प्रतीत मा हॉप बाल उनमें भापको रिस बस्ती भो पाती पायो - एक पहरी मेशानिक रिम्पी ! हो सक भारम भी और सही एपके लिए यह पही है कि उनके प्रति लनको मापकी दुहिम कोई नामसे मूगम मनोयनानिक स्वाप मीन हो । नेषित मुभमे तो बोरे माम मनोवैज्ञानिक स्वार्य है। इसलिए में एक गिरनेपप तो ऐमा तैयार करता हूँ रिसा बम्तिम दास रस सपनी बारमाया तमा एसके मममम मानी समाको और मरम्प करना है। मैन नि मित्ररा रिफपिया मुझे माम है कि ममुक समय ममुक मरवरपर, बमु प्रसारसे में मेरे हमारे होंगे - पानी मिसे ब्सिी-भरती गह उसमम गरम । उस मित्र महोरपने मते एक समानेमें की पारी मास की है। मेरे मरवाता रहे है । सम्होंने जो मेरी मारको बह दस्वाममय पी बाप का मैस पी पीपा मेरे कई महान सहायशारे प ही बापी । मुझे हमापता प्रशारणेसीबगो भरें व दो पुछ हाही नहीं एक मित्रकी पानापमापित ५ -- भमुषिपान तो सबाम ही नहीं उठता। लेकिन जब ब (मान मीनिए) मुझेरी गपी सम सहायता के फास मुझपर मषिकार वो स्पा एकाधि फार मापसे च ऐम मुसाब (मेरे लिए ये बारे) हे चिन्हें मममम कामा मेरे लिए गत ही नामुमकिन है। ये कर रहे है कि में साड मर, मके साथ उन परपर रहै। इसका महत्ता यह हमा कि में उनकी मुमाहियो को बस उनके दरबारम स्टा हूँ। र मेरे समय की कोई कीमत नहीं है। कहने को तो ग्मोने यह पर सवा है कि मुझे उनकी बाबीको हाधिक पाना होगा। पहली बात तो यह है कि उनकी बीबी कमी कोई गारिक मनहीं सकती। दस्तारिककी सोची- तापी मुराहट है। बसम्म मेरा पेशा यह होनेवाम है कि मम विर्ष पतिवी पर पत्नी-महोयाकी मो हाय-गापाएँ मुना पाई! इसकी पापाएं एक ऐसा पम-समूह है कि रातमें कर मीरये सठ बरता है। इसका कारण है। यह सम्पति सारी बामि एकरम पापहारिक नि मेरे प्रति जायसवास मषिक मानु है । मे बाया कि उन्हें ऐसा कमवा हैस मियासा बासमा गया हो। उनके मेरे में सीधा-सादा बाट नमा मोगा (मानी रखनीय स्पसे निमुर - मूस बपनको कसे कर)। बस यही मेरी सब बड़ी विशेषता है। अब उन्हें से कई कि मैं उमसे अपने लिए कई तरकीबमें पता कर पाना एक साम बता पाता है! बस्तुच गये भूषा करता है कि प्यारमें एक मारकीया एक मनपोर भारम पर मार | स्पष्ट है कि उनको बीबीको बोगिक मया पारंगा पर रम्हे पते ही मेरे सरपर भी प्रसारिक समार हो जाता है मुमम र मासाची विस्तिको मिकी माने हमती है! मै रन एकाम पूर और मानपुर निबब बामा पाता है। लेकिन पातक में हम परमे है या मसम्भव है। फिर में पह सोचन सपता। किमाथि मुम इतना पाहते हैं वो इसम रमका पारोप है ! भपन हामी माषाएँ म नहीं मुना मौर सेि मुनाम । माह एसीपावणे

मरी मान मर्हत्ति है कि मैं उनको टालना चाहता है और अपने इस
मनोशानिक स्मापसे प्रेरित होकर में नना पिग करने लगता है।
यह गलत है। यह समगव है। या साप है।
फिर भी इस स्वापका एक एसा पहल है रिमकी मुझे रक्षा करनी
है। परि मने उमें मारम-समपपर रिसा तो समय सीमिए कि मेरी
पामय मा मपी। मेरे पास-पाये मेरा स्का पक्तिमत जावन मेरा
एका मिना-साना-पानी में-मै-4 - !!
- पह '4 भाव नीलाम हो पायेगा। मै ना सस्ता मही हूँ।
राम मुमपर सपकार या किया मेरी सारी बिपी वरीषी
वहोर मैतिक समता पारी। और पाये हम मैतिक दृष्टिमे उगने मपने
असारे समप मेरी नियी उपस्थितिके उनके अपने पिकाराबो
निमम प्रयोग करते है वो मैं हैरतमें ए पाता है। उनकी यह अधिकार
भारना मुम भम्पन्त अश्विकपूम मागम होती है। मार सिप उसे ही
सारिएको यहाँ नहीं गया।
ग्नि में सोचा है कि विक दृष्टिमे प्राप्त अपना अभितार
सोने लिए कोई भी पार नहीं होता । तैयार नहीं होता! जागिर
परोपको रचित ठहराने के लिए में भी हो मनुष्य बन जाता है। इसलिए
उसी मनुप्पोषित समयोपिरो म पोम मानकर पएँ। मीर मो
कमोनिय मनुमि हो परती है यह मोरी नही रसिक मनुष्यपी
प्रतिस पुम-पम है!
सहिए सतित्व विश्पका कोई दूसरा स्प होना चाहिए ।
मेप बनुमर यह बताया कि पापारणव पक्तित्वका रितेपण
पले हमर मिपम मानी प्रहवि और समाराही मषिक प्रयोग
मा.(यह सापारिक हो) किन्तु मुनर्नवासी रिसपम्पी
नमो पिक पद पठ पिगी भातिश्पमा
मा पोका प्रय

पगाए जाती है। यह होता है। पाने मी सा मसुमय दिया हामारा मरा माता। गिरनेपर-बपि पिनेयमले मषित यहाँ स्पिक-मा स्वयं महालाब बन जाये गा मय सभामा मोलिए में कावा! किसिmपित और पिके गौच को रिक्ति और रियर मामा-मयाब हो उनकी विधिना मोर शिमिना मेरी जिमातारा विषय होने के कारण मैं साबारपत होका बिम्पर अरिक विरास नही कर पाता। इससे मग तो यह है किसिमेक्ति र वियों रोष मान-सम्मान सम्पयन रिया गाये और न मान-समार हममपिपित और विशया भी बमपन। म मिनार में अपनेको गल ही मृताप पिहिमें पाया है क्योकि किया और (पि मार-मबार मापारपर ही) विश्वयम करता है। सबमें अपनसे मह पूछनारा भान- समय-हिन पानी अपनसे ऊपर उठार निबनपम सम्भव 1 मारता पाय fyr मना है। मनुष्य अपनछे परे मटा है। बाजा भी गया भा है और गमा भी विभत्र प्रसारमे प्राय कोपराप पहिलवरपर सामोर रसर किया मी है ताबहरता भी मालेगा। रितु मा सिपर भी हर मा या प्रमा! म कौन-सी मोरीगीर पर यह फरमाया है मिरा पिम एपरम भरप है ? सदर मुभमे पृटा बापे को या कि मेरे गम ऐसी विमो नोटोरा नमार हैअपने अनुभबसे सामाजिक अमुक नियम यस्मा - रामे और मेकित पो भये हमारी ही माती कमानी पान माता पिने लिपी गोही भरपडी मोटो मही भाम सरोहियोरिनी भी बनुवरसा महिला परे मरने सासिनी - पति-समावसे उत्पन्न बना है। हाँ मरि यह मनुभव सावनिक हो माम हा ता रममें सस्पताको मात्रा बर बाती है। फिर मी मनुमयको अन्तिम सारी नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह काम-मिमित है। माटोगको पहुत दुरा माश्मी कहार ही फांसी की मयो पी। मौर अनेक पहार अपने पमानमें बहुत पुरे पनकर हो मरे । में हम पूरी उमानको पूरी तरह मुममा मही पाता। मह पटिन है और मोलिए मैं अपने पिसो विमेपणको अन्तिम मानसे इनकार करता है। पता नहीं वर्षों मोप स्वयं- विलेपरपर गितमी एक भारपा मार मिध रखते है वह मुझे पो हो भविषपूण मालूम होती है। इसक विपरीत में स्वयं भी वो 'ममानिक पवित-विपेपम किये रखता हूँ ए मुझे समापान मोर सन्ताप नहीं देता। देखिएन । प्पक्तिस्वके न माहम कितने ही पहम है बो मुममे छिपे हुए है से परीके भीतर पंतुरी मपणा प्यार की परतोरे मन्दरकी परतें। मरममा म्पक्तित्वका को समान हमें रिक्षापो देता है, पाक स्पी है हम नही कर सकते। तीसरे, सबसे की बात यह है कि मसिप निर्माणको काय-कारण-परम्परामा यदि सम्पपन कर वो माप लमे रिम्पवितस्व-निर्माणमें तन-मनका रोम बहुत ही कम होता है बोर रसमे कम रोम संचा-पमिका। दोनों रोष निस्ममेह पम होते है पिन होवे है बहुत ही महत्वग-इवन महत्वपूर्ण कि उहकि पारम मनुष्य मनुप्प है। फिर भी माप जिसे पक्तिस्व या परिष पाते यह वेतन कामरे बहुत बाहर की पोर है मानों होरेको पारण यि हर एक पिण। मारम-वापारकार बहन मासान है स्वर्यका परिष मानास्पर भापम्त पनि है। मैं अपना परिष-सासारगार मही परता नि मारा परिव रिसेपप करन यह बाता । और में पर ग्नो मम्म्म म प्रापिग परले माना गहुँ भाभा होता पnि...

है इसलिए हि भाका परिण शशी माछि मोट है और मेरा
परिस-विकोपा पण ते है ब भी हो पाया पाहि मेरा
परित गौ मेरी बाबोसे मोट । यता यह कि हम मसाल बाट
अपने मोनोकर पिकार किसीको करन देगा मा पाहवे ।
पर परिष मारमानिमिठ 52 परिस्पिति-नीमिच हलके कारण हम
निपिक महन्म बारम-तत्वकार या परिस्थितिको यह एक ऐसा मई
बिना माय हातोपजनक मार समाधानकारक म्पसे समापी
विरा बाप भी पहले मुर्रा बापो किना- प्रसन
उत्तर समाजामकारी से कहा मिला है। मास्म-मम और परिस्पिष्ठि
रथ एक ही रास्तविकता रोय। मोर इनरोलम ऐसे मारे जात
समय मिना सही-सही पूरा पौरा देना नामुमकिन।
इमथिए पाहिम मनुष्यक बाधिक सामालाकि वियोंकी एक
माठिका तयार करता है। मान रहे किए सिई विम-मालिका और
रसा साय सरसय नार मौषिरय मनुष्यके औरण या मवरम्तय स्थित
कि सभी मनुष्यों मत देते हैं, इसलिए रन बौपिरव
और भरपत्ती अनुमति पावनीन होती है। दिन पान है कि
अनुभूतिका होगा सत्मतको कौना। और हम बाहित्यम एम भने
ही बा रस हमें सत्य की प्रत्यरा एक पश्टिर, एक रिमा प
एक रायमेष्यन एकबापास ही पिपा एक रोपनी ही निसपी-कि
एक रोपनी सारा प्राप सापसे मिल साहित्यमें प्रकापही प्रकाध
है। रितु हने प्रकापम परीको मय है। हम मा साहित्यिक दुनिया
में नही वास्तविक बीरममें एक है। इस यावर्म पते । साहित्यपर
भारतास निरोग रसना मूर्षा।
मतलब यहिपारी सनी की बिपता हम पवित
या परितो साविक पिपर -प्रतिपत पयसा मही न हो।
ही नही रखना पाए। रिमी मनपर पास गनिक दुरि, तरस
एक सादिस्वामी

भार मौ है भीर इसको बनबरत प्रयोम मत्यम्त मापश्यामौर यहाँ छापने मपनेसे परे होकर इस प्रकारका हानिक विरोपण सम्री भी है। और मनुष्प उसे करता भी है। पितु यदि उमकी सीमाएं समाप्त की जाये तो हम मपके पप-नेप मौर म्पमको सनुवासि पर गाते है साथ हो मारमरपा मौकर मेते है। मौर यदि तटस्थ निमा मावसे किया पया पैमानिक विपरोपण मी से सरांग भी प्रकट करता है तो म्पस्तिपर हमारा भधिकार भी बर बाता है। इसीलिए मेरा सुझाव म्पमितत्वका वितपम दो प्रकारसे प्रिया बापे । एक तो या विधुर भारम-हितके भाषसे इमरे सूक्ष्म-मे-सूदम मनोमानिक स्वामोको हटाकर। परिहम वपने जीवनको एक उपग्यास समान में और हमारे पोषनमें मानेवाले लोगोंको सेवा पात्र तो वादा पुषित-युक्त होगा । मौर हमारा पोषन भी मषिक रस-मय हो जायेगा। मेकिन यह सब में पर्यो मिस पाहू? इसलिए कि भागको जिन्दगी पुण्यों है कि उसमें एक दूसरेको हार बहुत पहर उममा बाता है। गिनी निम पवित- विपनमें बसायो बाती है उतना ही पाचावरण बपिन मा हो गाता है। पता है कि मोमौका मिप्मा पिनकी भाव मपो है। यह बोटिक ग्पवहार महकारका एक ना मारी । एमा पगे? मम्ममर्मीय होमाम ठे-ठानेका यह मोसार रोम उम ठसपनेको बताता है जो उनके एपमें पाप्त है। मापसे इस प्रकारले पिरमेपपमें मिनी पनपोर बास्पा प्रकट करते। रतनी हो मनास्था मनुप्पके रिकाममें होती जाती है। मैं मपनी मनास्पा- से गुरू होकर मास्पाम मा पाता हूँ पास्मासे गुम होकर अपन बगान ही या बारवेम मी मात्र-गुर मनास्पामें विलीन होने हगते है। यह मठो पात नहीं है। इसलिए मेंबरने पहानिक परिष- पिएम को केस पाप-बमा कार्यकारो मान्यता पमें ही पहल परनेको वार परतापरा यह गमत है ? एक मित्रतामा प्रश्नच्छि विधाही पया

पदि पह सही तो मैं अपने उपारी मित्र और मकी पलो
मोरयाय प्रति क्यान पग्मुह रहूँ ? पार मे लकी बीवीका मादित
पाया।
निस महिलाको साविक पढ़ानकी यार भावे ही में मपनी ही
पर पारिको भून लाता है कि उनके बारेमे यो मैने राप मा रखी है
बह मित्र नाम-पता सपकारी मान्यता है। मेरी साँस फूलने भगठी
1- मानो मुहे बब विष्ट परिस्थितिका सामना करना पापा ।
माविर में मनुमनीको से मुष्मा ? इनके बिना तो भान असम्म है।
ही भनुभयो हाराही मुझे दुनियाकी पचान हो। हाँ मैं या
मानवा है किस अनुभबसे शान प्राप्त करमा या मशान प्रात करना
मेरी पोम्मवापर, मुमति मास-उलापर ही निर्भर है। जालसे ही
मार सिता भात पहातकी और पापा st: माके शासकी
औरबाना-
एक मोमोज बतुबमें बुमना हुमा । साबिए में नारिक
डाक बम रोएन सब प्यान देना किनारे पर मुट
समलित बार कौन-सा मयाजान पानी शान प्राप्ठ
होपा।
किन मुभ मसाठ m mant माम मौल-सा भास भय
मरा रस्तगार पर पाबीर में यह मान लिए प्रवृत्त कर
पणमसाठक प्रठि सापित ऐना टिपतामही है। इस दुनिया
पा पठा. मुमेनहाम होता-मायो र इम
पानही सारा यह यह कि अपनी बाकी सीमाएं मार रखनी निगम
पाएँ समतो और इसीलिए मापारी महाप्रपा रोकिनु पापही
इस रिवानास पपरित की मारपस्ता भी। बात मालकी
मोर पानेा माममा गोरो नहीं । प्राय मासकी ओर
मानही दानी पिठाएँ पूरठी गी इसकी भदौ रती पमो
निरिट निवेमारहासे झासपी और पाम रममिm
एक मानिसमा

जस भफ्नो ही कीमपर मपने ही बास-मास पूमते रहेंगे। यह मन्ग
नहीं है। इसलिए पापको मातम रनको पारत मही। एक बार
मझातके एक हिस्सेको भाव बना पर पहरका 'मात मी पूछ नया
म्स बारप करेगा। उसको यह नया स पारण करने को उसकी इस
क्रिसमें पापा मतगहो।
पुर मिला पनीका प्रमपि
३

नयेकी जन्म-कुण्डली एक
म एक एमे प्पक्तिको बानता है जिस (समा कीगिए) 4 एक
बमानेमें बहुत बुद्धिमान सममता पा। मुझे रस बहर बाधाएँ दी कि
यह बाये पर एक मेधावी प्रतिमासाठी पुरुष निवपा। होप समझते
किम उम परितको मनुचित मावरे पाई। मुझे पता पारि
पहम्पति इमारी भारतीय परमगाही एक विधित परिपाम है। यह
अपने विचारोको अधिक पम्मीरतापूर्वक मता। उसके लिए धूप
मार
एमा-मे स्वाभाविक प्राविक वये। पायर इससे भी मषिकार
थमह उसके लिए म रिचार पेम बनुभूति। उसमें मानसिक
मूगोसरे पार पट्टान पाइयां मौन मदिया मरने बस और
रेपिस्तान पे। मुमे यह मान होता पहला रिबह पापित मानेको प्रार
करते समय पी रामी इदिय-सिस काम मेते हुए एक भान्तरिक
यात्रा पर पा है। पर मरने विचारों या मावोंको औरत प्रारीमहाँ
लता पा बह र सर्य करता पा ममता पा रामराबार प्रकार,
रंग-पौर मति बठा सम्ता पा मानों उसके सामने प्रष्ट, सावार
और पौवम्त हो। रममा दिमाग मोहेका एक पिया पाया मुनारली
एकपटोमा चिमटी जाबारीकसे पारोबारीसे पड़ी पासको मुस्म
पसे और मातीसे पार सामने रमली है।
नि यह पार पुरानी हा पपी। पर मुझे पता है कि मो युधि
मान हो गया है। मुझे ऐसा ममता कि मेरे दोस्त पुस्मितापमान
रमकी गिनी ही रगरा पी मसि मरिफ-समतुपी हनक ।
एक माहिती

बारह वो गाव पर एकाएक मेरा उससे मुलाकात हुई ता मानद मोर माणवका कोई ठिकाना म रहा। भानन्दसे मी पपारा मारय । मदिमांकी पारामा पीप ना पहारमा गये प कि सम्हाने हमारी रिसाएँ भी बरसी पी। मा फिरस मुलाकात हुई तो स्वमामत हमारा प्पान इन पहाड़ोंकी सम्बाई बौड़ाई बाईनीपाईपर यया । बारह पप गार पब मो हम रो हो मप है तो किस उसके बात मुफेद हो गये थे। मेभिन यह कहना मुश्किल था कि यह मौरपान नहीं है। यों कहिए कि यह भूतपूर्व नौगमान बा। मवरूप यह कि प्रभाव रसके बतमान रंग-स्मका न होकर उस भूतपूर रंगरपका होता था। मुझे यह बसर मा भगवा । बो पाहता कि उसर पारेमें रोमैटिक कापना की जाये। पकिन यह करना मुस्लिम पा नि उसकी हुदरता उसके म्पकी भी या उसके मायेपर पीई रेसामॉकी। कम- स-कम मुझे तो बाकीर मम्मो सगी । सूबसूरत काराण मुम्बर तो होता ही मेकिन परिवा कोरा हुमा और उसमें कोई ममबचन सिते हुए म ऐ वो सौन्दर्य, इस्प ही क्या हा? सौन्दर्य, यस्य म हो वो का एक धूपमूख चौपटा है। पामम पीपलड़ा है। पांदनीमें उसके पत्ते पमचमाते काप रहे। वारली बोर उसमें विनित हुई छापाएँ हमारे मनोहोरको एक मपी विषा हैपी है। मुझे मालूम था कि मेरे मित्र के लिए ऐसे की मोर बेस्ट विग रखनी हो र मिना कि मेरे लिए सामर स्ट बार माइनस पन । लेकिन इसके बावजूर मे दरिया हमारो पहपाती हुई बीमार पापर इसीलिए प्रिय भी दी। परवा मुम इरिपोका भान होता है, तब मुझ मण भी लगता मौर दुरा भी। मया इसलिए किरी हमारी गतिको एक मोती है। गुण समिए हि मिरि बीच दूरी परमती है। हम एक हो भापाका रपयोप ती परते है सेरिन मभिमाष एक होत 5ए भी परप मौर १५ सम्म पुग्छा ग्याप महा मलप हो जाते है। यह दूरीके कारम!! रीपर रियर पामा मामय-समार है। यह एक साहस-रोमान्स है। अब हमें एक-दूसरेको फिरसे होमना-पाना है। एक तरहसे मुझे पूती भी बो कि में उसे कतई भूत पापा और उममे बहुत दूर निकल गया था। घायर यह बागायक मी बार नहीं वा में उससे मान्न हो जाता। मेरी अपनी हिसे यह असापारण और सामाम्य बा। एक बसाधारमता और कुरता भी उसमें थी। मिरयता मी उसमें पी। बामपनी एकधुन अपने एक विचार या एक कापपर सबसे पहले गुरको मार एसके साप मन मोपॉको करबान कर सकता भा। इस मौपण त्यामक कारण उसके अपने बारमीयर्योपा उस विष्ट पुट होता तो वह उसकी धति मी बरदास्त कर देता। उसको शिरपी के इस दुनियादी तप्प मैन हमेशा बर पिपा । पर यह राजनीतिमें पतरा हो मैंने उसके परवाना सामने गरकर यह बाप गाया किया रसका पतायन है अपना उत्तररापित बहन न करतो प्रवृत्ति है। मैने रासस बह भी महा किमह राममैतिक व्यक्ति ही नही। परनीतिक साप पर पर साहित्यमें रखरा र मुझे बडा लगा। लेकिन तर तक उसकी हालत रिपाली दी। पर विशेष मोर मारके विरोपसे पा पार से पाया। लेकिन बहर निही होनके सबरबह महा रहा। मौर तबसे हम एक्सरेसे पुरतर हाते चले गये। मनि मान में यह सोचता सांसारिक मममीवसे पारा बिनम्यक कोई पोरनहीं-बाम औरपर यहाँ यह बिसी मठी मापपूर्ण बात करनेके माममें अपन या अपने-वैसे होम और परापे और बारे माठे हों। बिठनी पाररस्त नसावा होगी उतनी ही ही माई भी होगी बमा उतना ही निम्नतम समझौता होगा। इस मौषण संपनी हस्य भएर यिाम से गरकर म पसिरा निगवण्एंगमा परिधि माप हो गया था। रितु सरसेना एस मारिपिटप बाठ मह भी कि उसकी मार सही थी। इसपिए यह सामान्य वा । दूसरे पदोंम में सामाग्प उसको समप्तता ई मिसमें मपने मीठरके बसामाम्पक उप यादेशका पामन करमेश मनोबस न हो। मैं अपनेको ऐसा की मामी समशता है। में मात्र सामान्य है- मैं नामी-गिरामी हूँ यह बात धमय है। मौर कि यह ग्पति हमेशा मेरे भीतर के सामाम्प को रक्या रेता था इसीलिए अपने मीवरके उस उकसे हुए भसामा यकी पेमनी में एक मोर स्पर्पको हीन बनुभव करता तो दूसरी बैक नहीं मसामाम्प मरी पस्पना और मापनाको सत्तेगित करके मुझे अपनेसे बृहत् मोर पापक बो भी है उसमें वो देता - चाहे वह एस्टीग्रम बननस ही मुार नेम्यूमा हो या कोई एतिहासिक कार हो मबना कोई दानिक मिसान्तमा विमाम सामारिकाय हो। इसलिए में अपन भौर मपने मिन परिपे वसामान्य बहापरिष भौर सामाम्प बायको महा मोति पानता पा। मारिन मेरी मति मोर दृष्टि कुछ मोर पो। बर में कोई काम करता वो रमपिए कि उमसे नोम पप होते है। यह श्रम करता तो सिर्फ समिए कि एक बार कोई काम हायमें मेनेपर उस मरितारो रंगसे भली भौति कर ही गममा पाहिए। मेरी म्पानगारिक सामाग्य बुद्धिपी। उसकी राय-क्ति पास्म प्रकटीकरणको एक निशानमी। इस रोगामें यो पोका मेरा । जिम्माम में सफल हमारह बसफम । प्रतिस्टिस मा भोर यशस्वी में पहलाया। बह मामडीमौरमासादोन प मया । दिन पनी म हामती उस परवाह नहीं थी। इसका मुझे बहउ पुरा ममता क्योकि वस्तुवा मरो पस्थिताको मो बड़ी सत्ताके समतकार नगर पाता। राम पौ बार मेरी शिणगीमें बब बह वापिस मापा वा मते कपा पिह रन राता-पिएको माति है यो सोबत मसागर बार मूषो पाम बार एक बार नगा मेता है, और पुन अपन भाषागमाग मरस सम्म पानी। एक ..

पर निम पाता है। इस मुबर मात्रा के मनुभवकी कीमत में
मानता है मते ही किन्हीं मप्रत्याण्ति संपमि एट-फूटकर बह पूत बनता
हमा सरवी मोम पूरने किसी परे गृपमें वो माये ।
किन्तु भार उसने मुझसे माफि धमकी पूर्व चिन्दबी भूला एक
मापा है। मैं इसके विपारको समम पया। यह विदमोमें छोटी-मोट
सफलताएँ पाहता मा। उसके पास तो मित एक मम्म मसफनता है।
( यह मेरी टिप्पनी रसकी नहीं।) मैने सिफ़ इनाही पगार
दिवा "मकिन नासा की है! टोन मुसता है, न सहीका
मैने उसरा रितमानेकी कोसिस की और मै कर ही पा सकता
पा। मनुष्य के लिए यह स्वाभाविक ही है कि यह घोड़ी बात सांसारिक
सफावाफी या रस्ते। किमी मसापान पमि ही पसने मुझसे
कहा कि यह स्वयं भूममा एक मनमा है। परना बह ऐसा नहीं करता।
ऐपिन मामा पपाना साबर पिपुल्स
यह पाहवी है कि
बह र पर्यो !
बादमीमें एक बार होता है। लेकिन यह बाए बहमासम होकि
लिए मसग-बम है। मालूम हमारी बात कहाँ गुरुह। मेर
परकर उससे बात परतावा पापा। कही ऐकाम हो कि रमे बामे
बनयाने मुसमे कोई पो पहुँचे। वर्गेकि उसने माने विचारनिमिए
पून बहामा विपी वाम की है। सीमिए पारे-धीरे उसकी बात
सुमवा गा पापा। मोर जहाँ मवमेव मारमा होयही में अपनी
मारा मनुसार परिव होने पाय मुसकुराकर बात रखा।
'रिममे बीस पारी सबसे महान पटना
कौन-सी है?
एक मिनिट तक उसने मेरी तरफ देगा और फिर फूटवे ही पहा -
संयुक्त परिवारमा सास!
मन समरी पूण
माहितीपरी

में स्तम्म हो गया।
उसीने में करपेपर हाप रखार बिबिसाते हुए कहा
उम्पका साहित्पसे बहुत बड़ा सम्बग्म है।
पारों मोर चारमीकी रहस्यमय मपुरखा फैमी हुई थी। चारों ओर
टगा एप माहमा बा। मेरी बगीच मनास्पिति हो गयी। मैं अपन
पड़ोतिनुरी दिमियो ने गा मपमे परिचितोंका जीवन समाधमे
मा। एक निश्मित बनो मुधमें फैल गयी। हो यह सही है कि
पिनमी और पमामा बसवावा हावा। किन्तु में परिवतमा परि
पार्मोको देखनेका माती पा परिवतनकी प्रक्रियाको नहीं।
एक बार-बारसकी भावस्पस्वामोरे बमुसार में चिम
पता और पुरष-समासे मगर मानर-पचास्त्र तक सबको मानकारी
रखता है। इस सम्मपौ बहवेरे रिस तप्प मेर रिहो-दिमागके
पिछले पाष्टिमे रखे हुए है। इसलिए मुमसे का िपपापा गाद नही कर
साता। पर मेरे मित्रने एकरम संमुक्त परिवार की बात कही तो मन
पसका इम्तेहान नेमकी शिकरके उससे पूण और नोंमें सबसे
पूत कौन-सी हुई?
एक मिनिट के लिए बह रहा फिर उसने बबार पिया
जाति के पास समार-पारका कोई पापक्रम , होता। साहित्यके पास
सामारिक-मुबारका कोई काम न होना । समन सोचा कि हम समरत
(सामान्य) परके सि मोर एकमाप राममति पा साहिरिपक
मारे परिपे वस्तुस्थितिमें परिवतन पर सरे । फक्त सामाविप
मुपारकापायल बारा प्रमाओंगोपनिया गया
'देवांनी मारी बार पातिवाय पर्यो हुमा
परमैतिक संरपारि भौतर तिस-से पष्ट्रीय संपटनों समर!
"गमारिक पारसा वा मत मारपस प्रमानाको जोर देना
गरम ही साहित्यमें भी पाप
यास
पपई पम्म-मगी। एक

उसकी यह उक्ति मुझे यही हास्यास्पर प्रवीत हुई। इसमें मुझे
मूर्मनाके विशाल दुस्प रिवायी ने स्पे। उसमे मानो पातको रसो
ताम है- ऐसा मुझे मगा ।
एसने मविश्वास मेवाती व देवा। प्रायद यह सही है कि
में से बम माग हा हूँ।
राहम और मामी चारनी पतमें सामने सेमत मारपर बैठे हुए
पुण् कौए बौर परे। साद सिी शिमगाइने यहाँ पट्टा मारा हो।
पुण्कीए ठो पारे मासपास कुछ देर तक माराये और फिर किसी
साहपर जाकर बैठ गये।
हैबिन मेरा मित्र देशमें पा ससने कहा
'समागमें बर्म
भेगिया है। नियम परिवार है। समारकी एक बुनियादी का
परिवार भी है। धमाको माया परियारले मापम मा
होती है। मनुपरे परित्रका विकास परिवारमें होता है। बले पन्ने ।
समें साविक पिया मिली है। मपनी पारी बन्मापां पापा
बहाँसे है। हमारे साहित्य तथा पनातिके पास ऐसो की दृष्टि
मही है यो परिवारको कामूहो
एक मिनिट के लिए यह एप हा और मागे गाण बरा
'पानके बाप #मुफ्त सामन्ती परिवारमा हास हुए। विचारों
मार संस्काराप्रति विमोह भी किमा गया जो सामन्ती परिवारमें पाये
तिवार परामा?माणे बाहर नीति या पाहित्प
महान तेलवे मार पर मार साही सोरटे या करवे को डोषाग
च्या गाठा हा धमाधम पहर मो या पानी बचा बिहकी 10
को मपी कर परम महोबा पिता मोर पानाहरको पात की।
मता पर विपापपूत्र पथापाको चुनौती परमें नहीं भरके बाहर री
गयी। परका लटिना। उसमें मालाबोंकी हमराहट महार
'.
हमादिवि वरी

होती पी बो भने प्रापक न । मौब्एि न काम उस सपयको टात रिपा गरा परन् एक पमोर पका समझौता किया गया। यह हमा! में कहा है यह हमा! मानो इसे 1 मुझे ममा मानो वह मुझे गातो रे हा है। एक ठप्पी लहर मरे पूरे गरीरमें पौड़ मपी । फिर भी पकि मुझे लगा कि उसकी बात सभी मपूरी हो इसलिए मैं चुप पा । वह योहा 'महिए पुरान सामन्ती बरसेप पर मरेम हमारे परिवारोंमें पो हए ! पुराने प्रति मौर मयेके प्रति इस प्रकार एक बहुत मयानक या परमारी दृष्टि मपनायी गयी है। इसीहिए, सिर्फ एक सप्रस्मता है। प्रम है मानिः परतिक मतमान करके मसर खोज निकाम्नेकी म बस्ती तोपत है, न । में मध्यमवर्गीय सिभित परिवारोंकी बात कर पाई। 'यो पुराना है भर बह टोटकर मा मही साता । रेगिन नयेन पुरा स्थान नहीं लिया । पम-मारमा गयी लेकिन मानिक रि मही मागे । पमने हमारे बीपना प्रत्येक पक्षको अनुशासित किया पा। गनिक मानरीय दरानन शानिक मानवीय पिने पमा स्थान नहीं लिया। इसलिए केवल हम पानी मम्त प्रतियो यन्त्रसे पारित हो उ। उस पापक सबतर सर्वतोमुखी मानवीय मनुवासनकी हार्दिक मिरिकरिना हम 'नया-नया' पिसमा तो उठे हेपिन यह 'नपा पाt- इस मही बात सोपों ? मपा बीवन मये मान-माप नपा इनमान परिकापा-सीम मौर नियनर हो गये। बेमौर म्यापक मानसिक सतारे बनुगमनका मा पारण न कर सहे! ये पारण न कर ! पर्म और एमरा स्थानमा सके। - मी सम्म-गुणही। एक .

नयेकी जन्म कुण्डली दो गोव- गाम पर घट पसे पै इसीलिए मामपूरी मालूम हुई। किम पात पूरी की। "मार इस पूरी पाका प्रतीक-सह मित्र मेरे सामन बनी बीय या सकारण रिपारोवेशनासे पाम और सास माप होता है। प गरम रकममकी अमा मुमपर छा गती है । रस मार टीक है - इतनी ठीक हि मुहे तरमीझ रही है। वह कह रहा पाकि पुराना गया मेनि भया ही माया ममफे मामपर बोपु माया र पुराले मासन माग माही कर सका । गौचनमा पापा बनुयात परप पर सपा और नया हो रही पसरे हापौर- रन किसित होगरे । मेरे सामने पेटा हमा मित्र पुप है मौर एटक येणे मोर रेल पहा है। मी साह पा है। एसपी प्रतीत होता है ये रसको मा रिबास नही हो पाया है कि में सभी पाठ समय पाहा मानो में उसकी गावको महामि सतरतमे लगार करता है। मलिए यह करवा पया- ऐसा नही है कि नये सत्यापारिक रिसासन किमामा सके। मा परे भूमही बनेगी। मैमेषम दोरहा" नही ऐसा दो मही। नर्म भी हमारे सामनौर रमको प्रेरणा र सिमो एि बंप को तो ८२ एक मारियानी मित्रने कहा कि सपाठ पुरानी परामराको समाप्त करक मपे मम्मोंकी भयो परम्पप स्थापित करनेका है। पहले हम परम्परा दास ये बाम हमारी हात उससे मी खराब क्योंकि मयो परम्परा अभावमें इन अम्त प्रतिक पास हो गये है। हम मन्त-प्रवृत्तियोंका पाहे जितना मावरम पिया पाये के मात्र प्यक्तिमत है। मोर इस समय वो नये मुस्म बम बौद्धिक स्तरपर है ! बावनका मनुधासन बया कर सकेंगे। परि समारकी संस्कृति मुरत बौशिक संसहति होतो संहानिक वृष्टि समारो प्रधान पर होती तो पापद यह सम्मब भी पारिन्तु ये नय मृप पुण्दी मोकि यन्त प्रभारकी मासियां बन गये है। रहें कोई सामाणिक मान्यता प्राप्त नहीं है। म उस माम्पताके दिए या संपप का बापोरन विमा गरा। मूस्पद पति एक सांसतिक पम्पमें पका है - एक कस्बरम ममम । फलतः कोई टी. एस. इतिपरक पास पाता वो कोई मानस टॉएनबी के समीप तोमरोई और किसी तरफ ! किन्तु समार-माग्य मोई पूम समय बीवन-दृष्टि नहीं मिल पाती से दुपये पौ और दपोंमें मिल पाती थी। तो फिर पीपनके मापक बनवासा सरपकी प्राप्ति से हो। मप्प-युपीन परम्परा ससा मते ही हो मसे ही हम उसे सासवी पर यम , पिस्तु रसका सा ऐसा पाहिप्पपिठमें मानसिक शक्ति का मरमय होनेरी गान न पी। परम्परागत पीस मार शिस्वामे उसे मानसिक मनसिपबा सिपापा। यह मार प्रवृत्तिकी कटपुटती न था। मेरिन पार परिवार में यह परम्पय ना तो है नहीं 1 सिफ रमरे मायेप है। मी गुम होते जा रहे सरिए कि मौनुश पौरारिक सम्ममारा प्रभार पहरेगे पहरा हो पा है फिर भी इना पहप हो ६ मिति नवीन सदमि पुकार जीरनमें समार-माम्य मीन दापनिर मनुशासन प्राप्त रमे। हममे रस सामन्ती राई पे सम्म पुगही दो बीतवे हुए वोर दिया। पा कहिए किया बाप टूरती पपी। परम्पपने हमारे स्मान मोर मोमनसे कर सास्प-सा हाती ठेमारी की पौ। परम्परागत पोरके भारसमे हमारे बारम-तत्त्वको विपग्मित होनेसे सपा लिया पा। हमने पुगने मुस्म तोर दिये। नये उपस्थित नहीं हुए। यो हुए, एर नहीं हो सके। सपाय याम्यता बनकर नसी परम्परा काका पारमने हर बापरपी मम प्रेरमा विवाम्त मौर सौपा नहीं बन सके। ये मस्पष्ट ए गये । उनकी मसता खूबसूरत ही मयी। या मागे पता बया ऐसा क्यों हुवा। ऐसा इसलिए हुमा कि हमने अपन साधार बीवनमें पानी परिवार और समागमें पुराने प्रति बार बार हए मयेके प्रति एक भासरमा बिपनापी । पहा इन रिलो पोई बमकर निमोह नहीं हुमा रपेको सापीन स्थापना कोई बमुरोप मी नही पा । इस के समारणेपासका काम साहित्पने पा विचारपाराने भी नहीं म्यिा | मार्मबार मा राजनीतिने साबगतिक पेत्र माता समाजममेकी बात की। मिपा रापन टिकट मसे ही पमान नहीं बरता बात" और तब मेर मिषने मेरी तरफ देखा कि मैं सपा सोच रहा !! नाम पर मेरी माह मनेकी कोशिस करनेके बाद उसने कहा-बाहर एनीति या साहित्पमें नबीन बीवन 'नये मामल-मूल की बात बसती है समानणारी मकी समान रमाकीबाट पसती है कि बहाँ पार की बात मापी - पाम तौरपर परिवार, मुम्पोंडी स्थापनाकी बात मापी-किब रिचारककनी कार पये। मानो पर समापसे बाहर हो। भार भी हमारे परिवार बमानी पदसर-पनी विचारपारा पर है पापुरमा हिमो सत्तागरले ग! - यह न भूलिए । परिवार पर सामन्ती बाप है परन् यहाँ भी पराबर तीन प्रचि रिपोती। एक बहमनी है बो पैसा नमार मानी है मे सबसे fre भारर ही नहीं दिया जाता वरन् उसडी माम्पा मोर पुमाwिीपरी रिपार मसको रुषि-वाशिमोर काय पान हो सबक सिप मानपके हप पस्तुत हो जाते है - चाहे वे किटन ही अशामिक अनुषित भोर स्वार यून पर्यों न हो। सबसे निषप्तो भेगी उन सोगोंकी है किबो पौडेम साते है। पर कहीं स्त्री निरसर हुई या निधन परिवारम-में बायो हुई पोटोबह और उसकी सी स्पितिके म्यक्ति उस तीसरी श्रेणीमें ही हव है। दूसरी धेपीमें बालक और कमाऊ म्पति रिस्तेदार है पो उमस म कमाते है। परिये प्यारा कमाते है तो ये प्रथम श्रेणी में पा रस भी आर होकर सबके लिए अनिषाय निमम पम पयोमागन हो पाते हैं। बन सब सामारिक सफलता और उससे मिली ह फौति पानाचाही परिवार में जितनी पडती है उतनी बाहर भी नही। मानवतावादी हररम इहाई रते हुए भी परमें गितमा मईमार और म्पतिवार पारंपारिक सता रहती है धमकी कोई हर नहीं। मरा यह कि रसको सामाविक मान मिया गया है। यह प्राति गात है। सामारिक है, इसलिए सही भी है। उसके प्रति विमोह पुत. पोह संस्कार माता और प्रतिष्प्यके प्रति बगावत करारी बार रसे नुएम्त हो पमित माना जाता है। सास-बहू के सपो या पिता-पुत्रके भगो मार प्रेरित है - मह नहीं रहा जा सकता। किन्तु परिवारका नमा बौर पक्ति परिधरा इतिहास शिस विधात परिस्थितिका निर्माग करखे है रण परिस्थितिकी पाच-परण हामा बहुत पारी है। इस परिस्थितिक पारम परिमारका पति दुमके लिए परिरिपविका मंग बम गाता है। म्पति मानवीय मत हरपा पमें प्रस्तुत महाकर गिपति परिस्थितिके एक अंगके काम पर प्रस्तुत होने पता है व परिवार भीतर एक पोर परा होने समठी है। हम उस मक्तिको एक प्रागमप मानर सत्तारे स्पमें स्पोपारकर, उस मपनो परिस्थितिका एक *प मान रमरा गुम-दाप मिषन करने मपते है पति- रिसेपण करम मापामगही।

H
साते है इस लिसे कि रस म्पतिको हमारी समक्षसे भी करना चाहिए
मह उसने नहीं किया
परिमारमें पुराने सामन्ती संस्कार विचारो ममावा मौनता मक्ति
पादी पनवारी पुराहक वातावरणके मस्तिावके कारण परम एम
पुरने या बाबान पप इतने विवाह और बसंस्म किया हमा"
पपिचके मुत विकास और भारमोभतिका मापन होगो बगाव गा
परिवार एक कोठा हो बाताब माप ये क्या कहिएगा ||
भाप कह कि सब परिवार ऐसे नहीं है। मैं मानता है। मेक्नि
सामन्ती रिचारपारा मस्तके बार मी विचारपारा बह तेजस्विता
बाया ही नहीं है को बीचमके समी पोको मारने मामिक मनुशासनमें रखे।
मम यह, ऐनी विचारपाराको विकसित करनेकी सोविकार
लिए संपप करनेकी कोशिश ही नहीं की गयी है। मसबमें मये मौर
पुराने प्रति पुरा सरकार प्रपनाया गया है। इस मुनिकास
दोन मारमारके कारण ही साहित्यमें भी ममेको साकार की कोई
समाध नहीं है। 'नयानया नया-मृत्य मनीम मामय में नामबीन
होप है । मसमर्म रस नको अपनी एसके सर डोर रिया पा
है।समिए 'नया विमुख प्रवृत्ति मृतक है।
हो सकता है मेरे करनेमे तिरंगमा हो । फितु लम्पय माभर
दीन नयो सिर्प मिासको पोगा। ममी कविता नपे विरामी
करता है।
मेरे पित्रमे परे दाम पोो। मिमिक्षारो पामि कहा-धमा
कएला मा तमा करना मेरे दोस्त निमा बानिक नागोषही
काफी है ? सामन्ती रिचार-पारासान मैने के लिए क्या हप रम भाष
गोषको मूल्प-दोष पर पसे एक सपना पीठे-
ऐसा रगनी नवी सामायिक परम्परा बनकर बक्ति और समारो
औरत समी पासीको मामित कर सके! प्यान रप्रिए परिवह
पर सारी

बाबुनिक मार-पोष चा रठाया या सफा मौर उसके सारा पस्तियत मोर सायनिक कर्मानुशासन न हो सका दो गया होमा ? पपन का पग्गिय हो पायेगा । मूर्वि-मयको स्व-मूर्तिका सिर काट बिना बायमा मोर उसकी छाती फोह दी जायेगी। भावीप बोरमकी भोतरी पतिका मापक साहित्पमें प्रतिबिम्ब हो या म हो उसमे वनारा हो या न हो यह गति मापसे कन्नी काटकर निका पापी । साहित्यमें सरप मपूरा ह पायेगा क्याफि पर पौवनमें अमूप पदा समिए मेरे खयालम भागकी सबसे बड़ो माषमता- पुरानो प्रति मार नपके प्रति मक्सरवादी दृष्टि बरम की बाये। मोर 'नया क्या है सावन मोर म्म क्या है, यह निर्धारित किया मामे । अब यह महिया पीपन, परमे और परिवारमें गुम होगी तभी वह साहिएममें भी पुक होगी । बीवन-मूस्य मौर कमरमक माहिरिपक मूम्पमें मायनिक बमार है. यह म भूमना पाहिए। में विकसित करके एि यस खाइप ही नहीं स्सए दृष्टि, स्पट करप मौर सा विचार-पाराके लिए पेपिस पारम्पक है। मैंने बते हुए कहा कि मनमें ही सत्तर छिरा पाई मौर ऐसे मोसोम है गोवियोह मी करते है शिया मार कर रहे है। मने एक मास मी, उमांस जेडी मोर सरितिक मसे कहा- मोर तुम्हारी सापे बावमा साहित्यसे पया सम्बाप है ? मैने भूममेकी कोधिर को। उसने कहा - साहित्यकी गतिविपिको देसिए दो पता पमेगा । एक पोगह पर बाहएका साहित्य है । रसम पूव मान-सम्ममा विपकी मुंगााप ही कहा है ? माप तो भाव प्रकट करते है? मान-सम्माम मही! मने कहा- यह यतिधयोति है। उसने पसटकर मार दिया - नहीं नहीं मार पहार पहै। बसम्म जाने से

उसम मुमसे पूण - परिवारले मौवर परिक्कमकी प्रश्मिा हो यो
उसने पूछ
कहा
उसने कहा
बहती हो रही है। नये विचार नपे भाव।
पा कौन-से? और फिर यह सूर ही पावा यया-
पया उन भादों और विचाराक लिए कोई विशेप सेपप बह पाया
उस वर्षको कोई सामायिक मान्यता मिली है? क्या उस संपके पीछे
काळासाठी या वह सिफ एक म्पतिवारी शिह है या बहन
विस्फोट । परिवार मौतर बो कुछ पत रहा-या या प्रवाह-पतित
पैसा नहीं है?
इस सम्पूष प्रभाव हमारे साहित्यपर है।
परिवारमें हमारे सामने मानवीय मारर्प और मानवीय मूस्य होवे ।
पाहाता पाहिए। उनके लिए संपप पिया पातामपया उनका संपठन
किया जाता है । परि परिवारमें ही यह प्रक्रिया पते वो गोवम सोरेस्यता
होगी। जो परिवार मूल्य हॉगि बीवन में हम ही और साहित्यमें
भी रखरमा पनही कि साहिल्पमें बार उनकी परवापरत
पायेगी किन्तु उमा त हे परहेंगे ! शिवमीके यो रप है, बो या
है, वो ऐटीट्सएर हैरे साहित्य मबस्य प्राय हाये
व प्रश्न और एकाको माप अत्तरके सिंहासनपर नहीं बन सकते।
हमारा परिवार परिधान व्यक्तिकारी मापारपर बना है, यदिवस
यहाँ बह ही प्रभान है, वा उसमें मुक्त सामन्ती परिवारसे मी यारा
दुपापा ऐपी तरह सित प्रश्न ही प्रश्न ऐने पत्तर दी।
में यहाँ पतसे समाता करना चाहता था। उसकी बात
हा मुझे पित प्रतीत हुई।
निर भी मने से णेते हुए कहा- मेम्नि साहित्यपर उसका क्या
परसारिपिकली परी

प्रना है, यह मै मभीत नहीं समझ सका।
रहन कहा- विचारपाराकाम होना, या मविसबास मौर ममताको
हो रिचारपारा मानना, प्रस्नका ही उत्तरका स्पान रेकर हाप मार
आ- हमारी मीनतम साहिरिमक प्रवृत्तिका एक सक्षम है। इससे क्या
भूषित होता है?
मने कहा- ऐमा । उसने कहा - बौर नहीं तो क्या ? बाम-काहर
मानसिक प्रतिक्रिया एक विचारफा स्प पारण कर सेवी है।
किन्तु मनकी हर हफ्त या प्रतिक्रिया विचार नहीं होती। प्रश्नमें
ही परि तर समापा इमा दीखता है तो वह कबत प्रकृति ही का दूसरा
नाम है। नहीं तो प्रस्न ही मम्म-मम्मा उत्तर को हो ? वतरके
सिंहासनपर पंकाको ठानेका मतमय अपनी समस्याम पास ही का
मारीकरण करमा समस्या को एनेका हात्तीकरण करना । मास्तविक
रतर शोर म पानेको स्थितिका यह मारकरण मनुषित है।
मैने छह वीर होकर मार दिया - किंतु पो सत्तर सामने
पारे । समुठ मनुचित, वणित मौर मम्मानहारिक हो तो?
रेसम पगार दिया -पो पोषको महत्व हो । किन उसरके
सिपमनपर बदि काको महायोगे ( यह कहने की बातें है बास्तविक
बोगन को ऐसा नहीं करता ) तो आपकी को बिभाप्रस्त मनस्थिति है
समें कम रहनेका माप पर भाम रहे। परि माप विचार कर
१वो रिचारक बभूव मनुशासन के नियर्मि रहो और धोपड़ी उप
परतिक-सि माप सानिक करते है - मनुसार महो।
पर पता बता मया- ममको उम्र प्रतिक्रिया हो भानरम
निगराठी है। रिचारको पसनेकी कोई मॉम्पेस्टिव कसोटी
नहीं है। सोये ही क्यों ? यारत भी क्या है? हम मारम-बाप
रिसा भी हलो प्रति विद्रोही है तो हमारी दुति विश्वास पाहतो,
भैरव तिरवास कर महाँ सती । इसलिए वह विश्वास या पदा
बासी रमनानी दा

करेगा भी तो ऐसेमें रिसे माप किसी सोटोपर कसा मही पा
सकता वही इसके लिए सुविमानमक है। मुपिया मारो बीवनका
प्रपान नियम है। नैतिक मौर मनैतिक रचित मौर भनुषित संपत
और बसनतका निपम करनेकी वा बापने पति के परे किसी
शानिक पति या तुमको मही सौपी बरम् अपनी मन्तररमाणे
मानी मीतरी प्रवृत्तिको यो मापको अपनी है।
बाप यह माने ते है कि मम्तपरमासे निकला हा बोष भाव मा
निर्णय रचित होना ही चाहिए, मत होना ही चाहिए !
लेकिन अपर मेरी मा बापकी या रनकी भतपस्मा गेटी और
तुम होतो? संतुषित और हिम्नी हो तो प्रतिभाशाली पुस्पकी
मामा मामय हीन भी हो पाती है। इस बातयामा निको ए
पोषनबन मा निमय हमेण मौषित्व पापना करेमे ही यह बायपक
पसने कहा-बम्तएरमा मासा म्ह प्रवृत्तिमूक और मटत किसी
भी प्रकार विराट और भयाका विरोधी है। काम के लिए भरे ही हम
"शिप-म्याच'की बात करें या 'मानवता' या दायित्व की बातकर-ये
सर पात मम ।। सका कोई माार नहीं है अममा सरे पमि
निसको को समझ में बाये वही उसकी 'समान में मापा है सपिए पर
सचिव मी ! प्रामके मदर ही बो कोप ग्तर देते है २ सयरको
सपनो रमणापर निभर रखते है। इसमें कोई घोप-दुटि या बजानिक
मापह नहीं है। यरिया होता वो पोषका हानिक मारणबार भी
साहित्यमें होता। यह भी बन्छा ही था।
किन क्या रस्तुत यह भी है ?
मेरा गान है कि मेरा रोस्त बिलात बहा गया है। मेफिन पामी
सो मिह पहा माहोकर मी रम मापवान् नही री
पाठी । मैने अपने मन मोबी समोर रिपार मारके सामने
१.
एक सातवारी

वि।सोप एकांगी और धनुषित भी हो सकठे है। पायय हो भी।
मेनिया नमको एक बार बप कर समा समरी नहीं है?
पदिनी मस्त फैली हुई है। मौर मेरा मित्र एक बौविक मृत बाबासे
मेरे पी पी रहा। पापा पाई अपने सयामि
.
बाम-गरमोर
.

वीरकर पहरसे पप दूर पाम त में और मरे मित्र पी पीरकर भोपाल- पनिारस छोटे-से पसरेपर बैठे हुए है। पता नहीं गर्यो किन-किमी ममिका पायावरण मुझे बहुत ममा भगता है। धाप कह कि मेय पर भीमरमें कोई विमास नहीं। फिर भी म्हिी-किनी बागवरपॉर्म इमेपारे लिए सीन हो पानेका मी करता है।ोटा-सा मन्दिर है। चारों पारिंगात टगर गौर काहेर बार पम्पा पेकये हुए है वो बंगणे मागम होते है, पीकि कोई न वाँकी रेखभास नहीं करता। एनिन पुष्प-पावन पावावरमा मिस पामरे रेग भौम ममे है। ममी बोलापन है । णाय पह-भात बने गोपाभा बामपन गुरु हो। 'धाम दुपारको 'सा कर रातमें मीन हो जाती है और रात भी पुरा में परिणत हो पाती है। यह पाबहा भाया है, पर पख्ता ! प्रमको प्रगति नही हो। बीराने पसना कहकर मरीफ इस वारेसा मानो पर कार मन्यात पम्भार तरप कह रहा हो। उसी बामें कोई वम्त (IN)ो पा र हा मुझे यह मारपी पन लिए उसकी बात मुझे एकरम निस्सार माम नहीं हो सकती। मैने पातु यापी मनोति सरे जसम्पनर सने सोयनका, टोही कोपियापिन प्रपल करार भी मनाया। इसके सम्मका अभिपाप हो साही गुम्पब है, यह मैंने महसूस किया और भीवरही मीवर त सारिलिमोती

पातको कोशिश करने लगा कि में उसे मूल न समा५ ।
पीरमर कहा गया - रसको प्रमति महीं कहवे। मेरे पाहमे बह
ममे रमताकर एबमामी दी मौर ममे सटाकरण मांगा।
उसने पर पोरे-गोरे कहना गुरुम्मिा मानो रसकी मांस सवा
पपी हो मोर को प्रयासम पोको पोरकर बार बना पा हो। मापन
बनी कहा पा कि हमारे काम्प साहित्य या माम माफका कॅमेष्ट
(जीवन तत्व) पर कम है।"मेण विचार है कि मारकी ग्राम
सिट पहनही हरि साहित्पमें कब कम है, बान पह है कि मोपनमें
बाब पिक है। यह पावन गो मिपा या मोगा पाता है, उसमें एने
पवित्र है-नगर रेकर पाम तक मनपर उन लोंका इतना मरिक
घरमामा प्रहार होता रहता है कि उत्तेजित हा-हाकर मस्तिष्कको रंग
मविप्पो ठन्तु मान मायमके लिए उन होंगे यम देते है भूत
पानेसो पोसिश करते है और मन मान-मकर माने का निर्माण
पर लेता है।"
मुन्ने एवमम हो पाना पारिए पा। किन्तु में मार हरि होकर
मरी सरफरतने हया। मैंने समीकी बातरी निवारकर रसना पाहा।
ने
"पायर माप यह पहना बाहरे दिमाग समेत संवेदन
मारापी समापा यह नहीं है बाल यह किया बहुप अधिक है
और यह मुबह मेकर शाम तक लगातार एट्या दोवा रहा है कि
परपरा र मिति (ग्न पर्योरा यापार मकान-सरपन)
मही पातारा मार पहपहना बाहो?"
देयर मार (हो एपरख सही)। पीरमण पाहिल
हर बार खिा और मापे गोरी भयोमा रूपातार एपरित
होी गनेजान इस तरौरा सना बोम होता है और सिरने या मन
पसे सना रप बाप दिया है कि भनेर पनामा नमूर्मि रगती

1 पुनरचना हो नहीं पाती। इसके फलस्वरूप ये तस्व पर नहीं माने पर पाना बहे गाते । मया या कह मागिए कि मेवामपने हरम-मन को बपित करने के लिए मपने मनमें किसी धूम्पत्तका निर्माण करता है और यह सब भी उसमें गो बाता है। मैं या समतता हूँ कि साको मार इस स्थिति परको मापस्यकता। पीरकरने यह मापात पापा मुझोपर किया पा बरवा सकी म्पत्तिय वपनी कोई विशेष पार्व भूमि हो सकती है। में यह पारना पाहम कमा किमातिर रसके मनमें पाई। पौरफर एक मप्लोमेरफा मारमी है। हाई स्कूहका मामू येवर । तपारण परिस्थिति है। पहन-सिनेन धौक है। काफी बुमरम है। उसने मम्मी-सम्मी पापाएँ भी की है। प्रारमी रिनपस्प है। सबसे पहा मुष यह है कि यह मेरा रोस्त है। मुझे मा कि उसकी बाव, एछ पार है। इसीलिए बात बाते हुए हकिम इन पौरम-तोमै भनेक नमूोम पुनर्रचना क्यों नहीं कर पाता। वह उनकी उपेपा पर्यो करता है? मेरे उपाससे बहमपने भोता मनके बस्तु-तत्तसि भाव हा है अपना उसमें इतनी प्रतिमा नीपिसबको पवित स्पसे प्रस्तुत कर सके। पौरपरमा मौर मेरी तरेखते हुए कहा 'साबबादमान तुर सरते है। लेकिन यह निस्सन्देह है कि महप-मसग बस यहग बाग बनार बहुत से सोम प्रतिमाराममार किसी परसाहा अमाप पखामही परा-नया। वीरपरने मुझे एक मरमें मन्नमय कर दिया और में सोचने सपा कि भागिर इन समात्याराभासपा है और उसका मुमो को सम्पप है उसससम्म पपा है। मगिरक पतरेपर पामो मो हमें मामपासपूतों मोर पत्तियोंपी मुगरबा पी पी! बभी पतके माठ भी नहीं बरे। मने उससे का माबिरबर एक माविमोरारी म मेरस पर बोर मह स्त्रियां परम् साकिया वीर नवयुवक मम्बिरमें बारे पर हो से मर्मान्तराजमें स्थित देवतापर फूल फेंकते मार हाप मोड़कर प मालूम क्या-क्या पुरापुराते हुए मन-मर प्रापना-मान हो पाते । सहरकी पारासेपूर यह मन्दिर रातके साढ़े नौ बजे तक इसी तरह व्यस्त रहता। पापारमत मन्दिर बानेवाली इन मवयुवतियों मौर नबम्बकोंकी इस प्रापनोग्मुख भावनापर में इंसा करता । लेकिन पता नहीं पयों माम मैने मम्प नहीं सा । मैं चुप रहा। इन पुष-पुवतियों को रेशम बाने क्यों मैने भरे हुए मलेसे वीरफरसे सिइतना ही पहा "परिस्पितिसे सामनस्पके लिए यह मो मागोवन प है उसमें तिनो मनोवैज्ञानिक पति पर हो बाटो है। पच्चीस साल तक यौचन, बर म्पतिकी मानसिक शक्ति निर्माणधीय प्रयमि ठानी पाहिए यह कैस येहा पुग्म मप हो जावो है। पोरकर पुर मपनम ग-यूषा-सा सग हा पा। उसने कहा प्रलेसकके स्वभावम बहन-सा भावार रहता है या महिए मावराबादी गिरती है। हम यह करेंगे पह हवा नहीं करेंगे। हिन्तु समान मा समय मेयरको पा पम्पको ऐसा विसरता कर है? समतिकी तिमरिसी माळमें पुसकर मार तक जानेके लिए सिफ एक ही जीना है, यह भी पारर । उसपर बहुत मोड़ है। सी नाठे है। एक कहता है, में पसरे माप पहा एंपा उसके साप नहीं। किन परिस्थितिने उसको पासिस दिया ही कही है। यह परिस्पठिसे बबरदस्ती यह विकल्प मेमा पाहता है। इसका परिपाम यह होता है कि ममठेस करती हई मोहोमाचे बह पुरा माता है या इस इमारतके बाहर उसको एएम nam याना परवा है या परय दिपा पाठामार साधारमा एसे बोप मपनी बयगासे गिरे हुए होते हैं। पम-प्रेमीसे गिरे हाकी समावि इमपा सरार रहती है मने रहा हो पपने बर्मनी माइते सार मारनाएँ हाँ बायो? बार उसने कहा पाकर मौ नम्हें अपनी बम-प्रेमासे गिरे हुए ही हमा पाता है। कि यह पनकी सीसे मारकर गिरे हुए है इसलिए या बम-प्रेमी पनका तिरस्कार करती है। मनुष्यपर म्याय-निर्मम नेका रसका मामण म्पबहार पसी वर्मका होता है। मेरी हालत देखोन! मेरी प्रेरवानी फटीई इसलिए वे मुझपर रमा करते है, कि में अयोग्य निकहा कि मनुत्तरदायी है। मनुत्तररामी कौन माह ! मेरे माते-रिस्तेदार सब रती भी है। इससे पा शिरसार, मालोचनाका विषय तो बनना हो पाता है। वीरकरमे दुस-भरी हमी हसते हुए कहा प्रपरम उप्रतिम पीमार पाने के लिए कम करनमती धाया में भी सफल से राषता हूँ। मेकिन ऐसी सफलता सिपामग्री रिसे प्राप्त करके लिए बारमीको मारम-गौरव पोमा पो बतुरवा नामपर गरमायो करना पो पानवा नामपर विकमुत एकरम सदर मुटी युधामनी बातें करती पा। पित पत्तियों माप सप-मर टोडरेट (महन) नहीं कर सकते रमोबाला हरस्य बनना पो यो मोप या सररहते है अपनी पगोपापा पराठे हा परमें होते है और किसने बारम निवासमे बात करते ! मानो उहाँ राप है। बामपिया पायर पुराना हा या मेरिज रहीममा इन दिनों अत्यम्त परिफर होकर मारोहै। दीपकररावा मया पर बनाइए, हम सर्वोपर गया-नया नहीं पुररती। रिस नगसे हम दिन बह पप हमें फो कपडा भी सन्ना नहीं पनेरेसा वह हमारे पोछे पहा एका बताइए, उसे कैसे सातार! रमा मानी पूर्ति के लिए (गती पाती रेकर बोरकरने पहा था, मै यहाँ म पानाका उपपौर र पाD हम अपनी ऐनी-सी प!ि बौ परा बसाई मन र सिरा-सोसाटी वाली तोह गरीबो-गरीब परिस्थितिका नाममा करना पड़ा।सैर!" पर सारिपरी मैने कहा "बताइए, बताइए ! दौरफरने बजार पिया गिन साफियाँको मामूसी पोट्रेटपग्गिा बस-स महीं पाता "वैर छोड़िए यह किस्सा! पर हम उस सोसाइटी मा पापित सम्मेछन करने पता मै एक मिनिसरको युगमा साया। पाइप हमार बोब तिन मुम ! मेरे पिताजीको मया मेरा भका मा टीक राम्पर पापा है। मगरी मापसे क्या कर मिनिस्टरक गमेपर मेरे एक परिचित बैठे हुए थे। वह एक मेगका मका वा । मिनिस्टरको पीठ फिरते ही फुमसे कहता क्या है 'हमार पितारीका प्लेटफार्म रिएम बी ही बनता उनको टिम नही मिल पाता मीलिए ये बायकम भूधन-माम्बोसनमें काम कर ऐ है। मैंने अपनी समितिले बार्षिकोत्सबकी मन्तिम सभाका उम्हें मम्मन बना दिया मोह। मेरे होपोंको क्या सुपी हुई ! जबतक में निकम्मा ही नहीं भयोम्प पा! लेकिन मेरी पहुँच रनतक रेस मेरी रयत कितनी बा । पर भब विराम सम्भव है कि उनके परिये मर बहुत-से काम निष्ठ गायें। मेकि डोम-फितन बदमाछ कितने गप ! 'तुम अपने मुवे भटक गये हो। उसन कहा "विसम्म नहीं"हमारा परमपनी भौतिक सांसा रिक रतिक लिए दम्द-फर करवा रहे या सर्व मपनी विद्या प्रगतिक निए पह कोपिण परे। अगर उसमे पाइसी बात कर दूसरी बात को वो रामके पीछ पुत्त सम पाते है - मूखके बपनीयताके मपमानक बमारे रोग महातक कि मृत्युर। मवि पूसरी बार पार पहली बात पी रमा मूस मम पित हो मारा गया सममिए । मसिन नों गर्ने एक साप करना चाही तो बह इन रोपाहॉपर एप माप मारी मही कर मरता उसकी स्पिति म यह उपहामारपर होगापणी पर बा पहले पररा रमाए भी बन बापेमा। ऐम उदाहरण में सभी अभी देशाता है। कहा तो नाम है। बोसो म' मैने पौरपरसे कहा पौरत ७ मैंने वीरकरसे कहा मेरा तो मिर दुख पाई। ताकसे बबार मिला 'तप्यासे सपों पी पुराते हो? उस वक बाटोचक तुमबमाको महते है कि तुम माम्सपयोर हो।बो मिसते हो समका टीक-टीक बब समझमें नहीं बाता । या प्रमाँ हो फा हो । मसम- में तुम्हारी दुनिया ही माग है। तुमारे सिस्ट्सि ( मषित ) ही मन है। तुम्हारा वातावरण ही बहप है। तुम्हारी प्रेरणा ही भिम है। भमा उनके लिए बरा क्यों होयौ ? पर उन्हें समझमें सेबा सक्ती है? परों बह गम मुमर पया समेमी ! मैने वीरकरका शेटकर या किम तुम्हारी इस बातसे इस उम्पका क्या सम्बन्म कि हमारी नीके सेमबके पास साहिरबसे सम्बन्धित संबरनारमक बीवन-सरप बहुत अधिक है, जितु या उन्हें मार पाउन कर देता है। मौर बह त्रिम म्पसे मनमें एक गम्प बना मता है। 'पतो उटो तुम देवर हो"पर पहो और हो पयो गरी पर बहती हुई नो-मपी महामि पा रहा है पानी बाबा पमा नाता है यह बा कर रखा है। लेकिन पानी बाहर मिर निमतकर पलका मील-विस्तार-दृश्य नहीं देय पावा! इन तस्वॉकी भनेक नमूना पुनर्रचना करमरे मिए, बहुत गहरी विम्वन-शक्ति चाहिए। म उसकी परमत ही नहीं है। मोर पुरसत परिहै भी तो एक पाटी-पी। में पुरहा। माकपा किया काफी हर तक सही काहापा। भव मोही देसिए न ! सिम भर में गिस दुनियाम प्रवेश करता हूँ पसे परि रेगा मामे तोपर सन-पाका दी एकप है! बह एक विधाठ उपम्याम है। यह एक सिकपा है। उसमें कितने ही मनोहर भोर मुमार मयंकर मालिशपूप एप्प है। मबर में मनी तात्काशित पोल-गापारे प्रॉप रहार हि वो भी बहुगुण हो सकता है। पिन सपा में एसा परता!? महीं। वास्तविक जीवन सोये समप साक्विामेरी ९८ संविधनारमा मनुमा फरमा मौर साथ ही ठीक उसी अनुभबके पम्पना-चित्र प्रभाषित करना -ये नानों काय एकदम एक-साप नहीं हो सकत । उसके लिए मुझे पर पाकर मपमे में विस्म होना परेमा । इसीलिए मैन पियरी (मिसान्त्र ) बनाकर रखी है पाहे वह किसीको पमम् हो या न हो किन मेलामक तो या सप्पोका मगर-पाठप (ममियत ) हो गातारा नहीं है। मन यही बात अपने पारे मित्र वीरफरका वतापी । रसमा विपिन मन पमन्द मापा इसलिए मैं उमे यही है रहा है। उसन रताया कि मनुमब-संबरन भौर अनुभव प्रभपण दोनों साप साप नहीं पस्ते, यह एकरम मही है । किन्तु जिस म्पतिमा मन मूलत मिटर (मननपीक) मौर कापना-अपन है बह टेविलपर सिबते कर कपमा ग्राण होता है पदमात नहीं । उसको मर्मनशीस काप्पना प्रगवना पस्नुन दिन-भर पछी परती है। मच तो यह है कि यह नमके भीवनरा पषम है। जीवनका पर्म होव हुए भी वह उस पमा पायोम्प पग्न मी करता पामत करनेडी कोधिश भी नहीं करता। सराहमके AR, उसे किसी विषयपर गम्पादकीय गिना है। तुम परार हो । मगारलीप सिपते 15 एकदम उम व्यक्ति प्यान पावा है इस बात पर, सिनामुण् सिपापाना है उसमें कई जगह सम्पनी सब दूर है। सनी कसानाम एक मेकाम होता है (एक चित्र उभरता ६) एक पति भावना एक शिमगोप पपने जीवनमा प्य रीयठा परिणिनी मुसापि नी रहा है। वह ५ केवल एक पूर निर्माण रपाई करता ना रहा है।ग एक सम पममरिग एरिस्म है।' वीरमरमे मुझे चुनौती देते हुए कहा पपा तुमम म बम परमपिटरी पौरन-दाप प्रस्तुत रिस ?" रमने मागे कहा 'मरों मही पिनुमने माने बमा पारन वर्षों मा दिया? मीरार, पानी पसें पार उत्तेगित हो उदा । बा मबहा रहा - पा गरर रहा था। उसने मुझपर पर इस प्रकार माझम थ्यिा दो मेरा हतयुति ही बाना स्वाभाविक था । मै कुर हो ग्य। जब एसने मेरी म रेजीमोर तमतमाया पहरा देखा तो बहस पटा । मोर बोमा पह मेरे प्रानका पवाय महीहमा । 'बन पसमष्टिी इस शमसे तुम्हें वापत्ति है यह ठीक है। हमारी मापत्ति सापार है। तुम बम्ले बारमौ हो इसीलिए मरे दोस्त हो। मामो, चाय पी मो। मैन कहा 'मुझे पाय-बाय नहीं पानी । तुम निकम्मे मावमी हो। रसम मुझे पाम्त करते हुए कहा कि "विषपता-यूषक ही क्यों न सही तुम सम पमनस्टिी न सही पत स्टंगा रबमा ही पाता है ! माको मी एपमा पाता है। तुम्हारी मुरि एक पप्प-वस्तु है - एक 'मोरिटी है। तुम दुशि मेषते हो मैं भी पैसा ही करता है। यह मै बानता कि बौवन प्रमान है। गौवन महा तो मला सी साहित्य सा | मेकिम सानो तो किशिम बनुमन-संपरनमें तुम मपातार फोन हवे हो पति इस संबदमको तुम प्रकर करोग, तुम न बतानोगे वो पिसहो बपा पीकिबह बताये ! अपने बनुमोका तुम सिगनिपिग्स (महत्व) पापाना । सामारिक रिले तुम्हारा समान नहीं इसलिए तुम अपरेको हेग वा मटा मत ममनो। तुम मात्र एक मनपीक माममहा। अपन का जाम-जनयामे यमाहाटा समसार इस माम्यममे गित मत करो। मपर्ने ही ईमानरार अनुभव-मनोका तपा मपन गायन स्वाती भावॉको प्रापर पमपेक्टिव ( सही परिप्रेक्ष्य ) में पहचानो। वीरकरणी मातार इतनी मनी-बनी हो ही पौ कि मुझे मना कि पर पिसी भावनाम बहहा। मुम एकरम, बामे या उत्तेजना हुई। मने रमापूब रमा पौ पोरसे हिला दिया। उसन मन्त्र ल मनुभव-मंबानांतो समोर मा उनसे सम्मानित बीवन प्रमंग और मानव-दाप समेटकर रखना रहें मोटामें च मेनागरीमही है? स्पषी बाम्तरिक पते सम्पन्न करमेरा यह पर सातिवारी

"
की एक रोका है -जन ऐमी बाठ नहीं है
बोरासोनि पवामय प्रवादनायुक्त पात्राने मग मुगक देवार
बौरहाको नहीं की। मेरी गमा बसता-फिरता मापारण वीरकर उग
भोयम्पति । मह कोई और रिममें मानव-रिमाम-न्य देवनका
असूनपूर सामप्प है। यह एक महापुरुष है को विसमन दलका है।
बमे दो गया। हम धीरे-धीरे बम-ममग मम मग । मैं
मममें पुराने नगा - मत्रमुच साहित्य सम्बन्धित मोबननाम्य बातही
मपि । मावार होनास रिषित मनुभव-मसरोक परम माप म
महो तो भी प्राम-कदम मिी-न-किमी एक-नना बाह नित
हीमही अनुभव-प्रमपम भी पता रहता है, मरम मक माग
परना-पराम्पर। म तम्ममे से इनकार किया राय पपरि वन
र ने पीरपणे यह बात प्रस्तुत नहीं की थी। मामी कम्पना-
पपर ल मनुमवन्यपक मही-सही कहा कि प्रस्नुन मानक
एि, न वन मामिर मनन और रकम-संयमी मारपरना
६ परम् मा बहुव-एक पाने विष्टिी भाष पाता है। म
पहिबभाबमें मपन ही मनुमयाक टीप-टीक, मागी म बार मी
पाने और इसलिए कर विशिष्ट बनुनयों पा बनुमामाnि
एरवीहर बम्प महत्वपूम बनुमा गमा पो म । पपा मार
मरी मरे पासम पद सम्म है। म मा मोगा पर
nt बिल पर हमारा माहियिक विराम शिम दिशा मामा
भारिप या नहीं हो पाता । हम जो मनुमक माहिरिपा प्ररोगार
लिए प्रवृत्तिषम न केले है उनसी हमें बामे माल पर गाती । उमर
For-परा मम्माम हो गाने पारण हम बम वर्ग हो प्रार करने
पाहै। पर बनुमर भानो गा वोरा सपा प्रभावशासियो
बार ममरेपर पोपो' भोपानी उनकी हमारे
नारानिमित माहिय पपी माप । इमरान मिलाकर परिणाम पर
पररर

होता है हम मी रामद कि हमारे द्वारा निर्मित साहित्य सपार
तो बारीकी दीलिए हमारे म्यस्तित्वका भी सन्मा प्रतिमिपित करण
है पा मही। पवि का चाहित्पछे कोई हमारे मस्तित्वका अनुमान
करम ठेली बह पोवा मागायना। हमने संसारख पा प्रतिपय
एक पास बमका की साहिरिपा सि साहिरिया पार पा
समको मभिम्पतिकी यान्त्रिक उत्तमना बना रती है। यह मार
रित है?
में लय गत सा गुनहगार है मेटिन मुझे अपनेपर रिवान
मपमा विस्थामामारा सिफ़ सथिए है कि बोरकर मैस मेरे सहपर ई को
मुमने हर उधिन बाट छाठीपर पार, फरसा मे। ही यह पाव
बराय है कि यो बाउ होपी बह यदि होता है अपने मते
होहोमी।
पर साविकीरापरा

विशिष्ट आर अद्वितीय
मैने अपने मित्रको वरफ सम्भित दृष्टिमे देवा । मोर ना उम
गोपीम पामा तो मम पकाने या पापा
मरे इस प्रश्नको मुनकर मेरा मित्र मी मानी मूछनामे नाम सग
मौर बोल पड़ा
1
"तुम कोई महरी बात कहने या हे।
मने उमकी गरिममें कोई बंग्य भाव नहीं पापा। में पात्रिक उपमे
पहले
कहाँ साई महरीबाट ।
मित्र मेरी तरफ एली होकर देखन सगा। साउथा कि यह सकता
पर है सकिन कि मैने उमदी खूब सातिर-वारा की महिए पर
परमरी पावोंको मह मेका पम पालन कर पाई। यह मी पाहिर
पाकिमुमार एक नया पर पपा है - तपामांना परम गोमा और र
नगा । किन किना बहा हो मया है ता रमा मना हो गया न
रिफा पापे । सच तो यह है कि ये भपनमे बिमा पूरा गम नगमा मग
पिग पापा मार एक पग बह माया पा - साहित्यकार रमे परम
पनपते है -गर मेरी मौसम गपी पी में स्वम्भिव हा गपापा।
पुरपापी मनके गार हम चिन्दमौली निरपवार गारमे बहन
करएप। शीनिक बोपनका काम बही पार, बही मामगंगतो
पार्ने मिनमा और एए पर-सपी गप सारिता और 'मनोहर
सानियो पानी और 'मानोस । गरम । हमारी रिपो पुग्म ।
विगी पिस्पी ग्राम पिस्पीम सिपापा भी गुम्म ।
विभिभीर नाप
1.1

हम सभी तब पो सिक्ने पेन कि मपनसे बके लिए मेर
मोर मापप लियो यो सही माम्मे रेडियोमेडागास्ट होते थे। इस
हम पातूम तिनों ही हो मेने विमान बना दिया है।
किन्तु मै काम-मी गहरी' बाप का मादा पा भूत नया । यह
तो पुरा हमा। सी मुरिकामे ता एक मोठा फैसा था। मामला
मोठा मिलते ही है ! सबको अपनी-अपनी मुनानेकी पड़ी है। सच तो
पर इस पार बार म मरे मित्र पुरसत ऐनी र मुझे।
म मुझे हमेशा पुरमत रहा करती है। पुरसत निकातना भी एक
फसा है। ग है गो फरसत नहीं निकाल पावे । पुरसतारे बिना
साहित्पपिन्छन नही हो माता फरमत के बिना किनमें मपने नहीं देते
गा सकते । फरमत के बिना बडी-सही बारी-बारीक महान-महान्
बातेगी मुमती।
इन पर मिण मुरमत पाहिए और उसमें पागोरसा चाहिए।
वो में कला मारे गत पर पाबा ससम्बाप में पीस
निल मा मिस पुरा सही मार्गापा भी हुई है। पपरवा प्रसा
नही है या में पुष नहीं है। उसी गापारपर मैं हमेशा सोपता पणा है
कि में मुनिमा किन्तु यह कहते नही बनता पयादि में मन-ही-मा
पर महमून करता एवामिगर में मूर्प पहीं हूँ हो माला र
मा ऐमीही निमी भीमा एक मिति पती हूँ।
मौर मोवो कोई बात सोपसोष मै मपी पिता या रस
पुरा नाम प्रयोपारी कवितार मा गाता हूँ।
हमा पर foपे हमारे स्पिटी परंपरा रिमी रमानने ।
सिमा रिमाप पे। शाम हरा सासाने विम्यूपिार मे मार
मेसोहा पप । पृरान पाप और गर्ग?!
मा दुर्मागरमे मम ए बारमपीमनिला। एक
भदाय र बामी पा शिमरा मेहराबोड़ा पीना और
सातिविम्मी

दुस्सा पा 1 भर पनी मार पुगार गों। परीके बीच एक गदा पा
निगरप नमकी दा दरियां दो बाती पो। मामूली सास बेदरकी
इसमत नहीं हो सष्ठी पी। इतन सका मोर पने पे उमके पाग।
समम टीम बात बरी मागी पी। एक तो यह कि उमरे करपे
मुमो ने मगर एक परपर पार कर पप हो जाये (मा रिबह
सप्टर करवा भा) मोबह मरे पैरको उमसे स्पेर-मा सेवा पा हाबोंकी
मिलकर गम्हें पापा सा-सा संतापा मार दोनों पोंको पास-पास
कारी (बनगनी ) काचिन करता था। तर एमा लगा पा मानो
परेपरीरको बीचम-से मोड़ देगा।
उनसी दूसरी विशेषता यह थी कि बागपूर अपने उमेरो बह
परा-वरामी बातपर पता था। मामाको पा उपाक हो पाठा
पनि सम्म मासे और सात मानक पन गावाने परिपन
में कहाँ वो भी मिस्तु किमी येतोय स्थानपर मारी बेटी हुई है। उसके
रिम रहो तो भी कुछ ऐमा सार यो मनुपित मोर मनावापक रूपसे
कौमम सपा मुमार है।
उममी तीसरी विशेषता यह है मिह अपने आपको गाती रता था।
र महो कि यह मरके सामने एमा महीं करता था। पुष लोम पे.
और ये काही पे - पिम्हें यह अपना दोस्त अमामवा पा उनके सामन
म माने परको दुरीपरी भागे बताता था मोर नि हरा करता था।
यो मन उसरा शितमा रिमा।
बहमपी करिता मी सिता था। बार उग मेपर बह मरे पारा
समर पता माता पाIT मा पस्तित्व पिषित पा पोर वह
पास पोना नही पा (बह यस्ती सता पाता पा। पमो मबमे बड़ी
पापो उपमाहट) लक्षिा मेरी रममे रामही र सकसी पी।
मरिम समोगर गाना पा मिमा पर पारण पर पाकि
रमा मसारम रे मोलर पा मार मुन पा की किम
ििगर और मरतीय

,
हम सभी गब पोसिये-
बौर भापम सियते ये जो उन्हीकेमा
ए न मानम शिलमा ही को मने.
पिस्तु में कौन-सी मही
तामा मुस्किममे तो
मोहा मिलने पहाँ है? सबको
पह है कि इस मामले पर मेरे ।
से मुझे हमेशा फरमत हा
कहा है। गधे को पुरमठ
माहिप पिम्तन नहीं हो ममता
मा पाठे। पुरमको बिमा अग
पान मा मूलती।
समबरे लिए पुरसव पाहिए
दोमपाबारे पाव कर
निबम्प भी मिल पहूँ। परकी
नही ही में मून मही। उसी
विमान किन्तु यह पर
पर मामूमरता पाहू
हूँ। ऐमीही म्मिी प्रेमीका एक
मौर मी ठणको पोई पाठ 8
गुगने माम प्रयागणारी कवितारमा
हा यह कि हमारे हि
तिरा रिमापर्म थे। दाम साता
मोतीहानप । पूपन पुरष और
सन दुर्भाग्यम उमा एक
तमामबीर मामी
१.?

दुस्ता पा। म पनी मौर मुऐगार पाँ। दड्डीके बीच एक गड्डा पा
मि कारन नसकी सो सदियां हो जाती थी। मामूमी प्रसे पहरणी
समत ना हो सकती थी। इसम सस और बमे प उसके बाछ ।
उममें तीन बातें बड़ी मारेकी थी। एकता यह कि उसके परमे
फुले ये 1 बार एक परपर पोर देकर साहा पाये (वैमा कि वह
मकसर करणापा) तो वह दूसरे पैरो उमसे छपेट-माता पा हापोंको
निकर उन्हें पामि सासा ता पा मोर दोनों मम्मोंको पास-पास
हासी (बनमानी ) कोशिश करता था। तब ऐमा मगता पा माना
पर पूरे परीरको बीधर्म-से मोड़ देगा।
उमड़ी इमरी रिपता मह पी कि बागपूर मफ्न ॐ करके यह
पय-रामी वापर पता बार देखनबासीको पहसयाह हो मावा
प्रकिइस माम्ने करबाके और सलमानोंक पम यंगमनासे पड़पन
में नहीं सो मी चिन्तु किमी क्षेत्रीय स्पानपर, नारी बैठी हुई है। उसके
रिम पावो भी पूछ एमा बारमा बर्पित मौर बनावपक काम
पोमन वा कुमार है।
समी वीसरी विपता यह है कि वह भपन बापको गासी देता था।
ह सही है कि वह सबके सामन ऐसा नहीं करवा पा। पुण् मोप पे
पौर ने दाये-मिगहें हमपमा दोस्त समता पा चमक सामने
समाने परफी पुरी-पूरी बातें बताता था और रित हमका करता पा।
दो मन समकाशित पर्यों किया!
पहनमी सरिता भी मिल पा | भार उमें मेकर पा मरे पास
परमरपना माता बाकि उसका परिवरण रिपि पा पार पह
मठा पोठा मा पा (बद सीरता याना था। उमड़ी मब हो
पर पो - मनाइर) मला मरी उससे राशनहीं पर मोची।
मेरिन में उसको मा माता पा मिमा एक पारप यह पारि
मामा मामा १२औरसर पा और में मापा पीएम
रिमितभार मनिष

किन्तु कर कहानी' मतमाको नय यकी पुग्यसे मसग सिाबाये। गया में इस मम मूठ बाम पाई॥ मौर मेरा पो अपमा यह नपास है हिबह मेरा बर्डमा दोसमपर 'नयी कविता मियता पावो कही करता था। सी करिता पसनत मिच्युएमनकी यक्तिक प्रमंप प्राप्त पौर प्रसंग-पस्त मनोरपाकी करिता है। मफिन कि बसे पतिक प्रमग बनेकाको सस्ते, और होते है ( मरे ही कुछ हाय उन्ह छिपा गायें ) तो उनको एक सामाजिक मब मोर माय तो प्राप्त हो ही जाता है। कमि उस प्रमंग स्पितिमेपर एकर उसके भीतरसे मवेदनात्मक प्रतिक्रियाएँ करता है। विरमात्मक प्रतिमिसाएँ वा किसी भी प्रसंग-स्थितिका सम्पून वस्तु-सस्प मही हो जाती। कलाकार परि सचमुच जीवनका पारा मार म्यापक शाम रमता है तो र प्रपनपति पर ममुप्पकी मेवेदनात्मक प्रतिक्रिमार्मोतो ही महत्व नहीं देना परल रस स्थितिमे सम्बन्ध रखनेवाले बोयम्सु-सस्प है उनको बलामेराम वरोरर वर्षात् व्यक्ति स्वभावकी शिपताओं वास्तविकतापी पेचौरविपा और माता बसते माय इन सबके रिसाह-मपर इन नपर बाय प्यान कर, इम प्रमंप-स्पितिक वस्तु-सत्यके हारे ताने बान (कमारमा प्रमावधानी म्पसे भोर ममे नही ) प्रस्तुत करेगा। मौर इस प्रारम्पपिठ-ममस्यामा मानव-ममस्या बमाकर एक पापपवर पारसभूमिमें उमे गस्थित करणा | नारमा पाहिए। गिए मैन सी मातीमाको पिलायो मेरित ध्यान रसिय कि में ममीसा होना भी गा कर मम्वा (खा ही है। बापिर कौन नहीं करता हैमब एनमरेले समीरा)। हो तो मरो गातार मारपे हि मपी भवानी में माधुनिक मानव (इमरामतर पाहे कोबीमिए प्रमविशारी मर्य मत मीषिण)पीको पकमारियालीवरी

रिविध मनोरणा है वसका नगर माप उसके सारे सदसि पाटकर,
सनो सारा सामाभिम-पारिवारिक यादि सम्बम्पास कारगर उस
मनोसाको मामा अपरम उरकाहर-पिबित करेंगे तो ममोरपाक नाम
पर (हानीम) एक भुप समा जापा। कहानीम बपर सिफ भीतरी
पप हो बार सिट बहो बह रहे और उसीडी इतमी प्रपानवा हा कि
बस्तु-सरपोरे संघटनात्मक चिोंका प्राय कोप हो गाम वा बाप बही
ममती करपे कि पो ( मेरे पास ) नयी कवितामे को। करिताकी
कथा पपाको मासे मपिक भमूख तो पैसे ही होती है इसलिए सम्भवत
मममें बात यप नी जाती है। किन्तु पहानी ' यानी में यह पाहता
कि साहिपमें मानसको पून मूर्ति (बह फिर जैसी भी हा ) स्मापित
को नापे । उनी हम मपमो ममा रसम रेस सफेंगे । मयर 'नयी कहानी
(या कोई भी हानी ) वा नहीं करती तो मेरे बवामम या पित
भहीं है। दो सिप एक पुतरेकी मोर मापका प्यार सिफाहूँ।
बामाप मार गय होंगे हिम किस कार यह पाहता किमूरत
माको भनार मे गये उस पौठे बोरे पहरे मौर *रे पामेली
पूरी सिपी ( साहित्पमें ) तसबीर बार पपीहा गाये एसी समीर
जिसमें अपनी भी तक हमें मिसे
स्यादि में सबई (मार में सब पहनपर मामा )कि मुझे
बराबर यह ममा है मगठा पाई कि रखने मी पासा
रम हादसमें कोई भी कर सरता पा । म होता तो में भी करता ।
" पर यक किरण मुस-याति-नापकी हमसे उसने रिपहनही
प्पिा मोर ग प्रकार उपम असरदाराने तपाररमिय । सेरित
वा ऐसी गौतम ठो बरीमपन पितासी पाला रोग अपने
पारिसपर गालिब पता है और पति पेसा होने भा पैसा है पोषि
मुमीता और गुपहारीमा रास्ता भी की है।
का बतानीग एमे हावे ही मिपामपानीभित
विशिरभार प्रतिाप

-
करनके मुम्पासे र लगता है। और कुछ ऐसे होते है गिह मुस्योको
सीसमा नहीं पाता। माप हो पाप मा पाते।
हर मामा वपन-मपन रंगके कामयाब मोग तयार करता है।
बहादुरीक समानमें तलवारबाजी माममें हम सरीपे भारमियात
पी। बार एम मोम मपनी पसत कर मरमें पूरे हुए है बार
पमानेमें पसकोप नाकामयाब होमोसिस ही रिमा है।
वो ऐसे में गो माकामयान माम है उमदे मार मल्प-बाग है।
बोई पति कमाकारक पमको निबाहता है तो कोई परनीतिक पता
बारा मगदूत है। मसतम ये सब पाटा इपिषिम्युबम्स हैम्प
अम्त व्यक्ति है।
हो यह सही है किसिौका बफय रितापी रेता मौर किसीका
नहीं। मे ऊपरी तौरपर सहित सब। यह सा है या पुरा में
मी मानना।
कपा में नाम ? मान कौगिए पी ' यो उपम्यागरार कवि
पहानीकार नपा समोराक और मम्पारक रहे मापे है,वाम्मवार
मारमी हवेतीपम्पनी र बीवन-यात्रा करके उत्तमोत्तम रस्म
हिमी गहित्यको मते ! (बाप समश नपे हॉगि मरा या पिस
तर है) हिमी काम्पमें माधुनिस्वाबार एक सिर मोम होते।
गम्मत म्पति-परता ( यह पति रामवण पुसकी भाषा)
एक मुग्दर सहरम भी महाते।
और मारिए। उत्तर प्रदेदे एक तीय स्थानमें एनेबारे एक पारे
मिररिभूति है । प्रगतमपी करिता शिरोमणि है। जिस
एमाग्मपता रमना करते हैं। गुमर मिस्तु गोपन वि प्रस्तुत करते है।
मान मीपिए मियामनार मानीले तो उनकी प्रतिमा
मारक की भावना साकामा अपा एमे हो किमी भाबमें परस
शादी।
माहिम्पिाकीती

एक हमारे मित्र बहुत दिमाग रामपानीम दो है। याम्दी है।
पदवा घेष मौर बफम्प उनी बिगेपमा है। फिर भी गम्हें मन्डी तरह
जामनगामाको मासूम है कि कितने प्यारे है।
मान सीमिए कि मी बालादार बादमी हारे तो म मारमे
कि उनकी कठा कोष मोर अफम्पका रण निरामा हाता। में मान
मेवा उमा मह समान है। किन उम सभाषका रंग सर
मला मा होता।
पन्तगामे कर अपना योग हरियाना परितावरी देव हानिए
वो पामे दिपिकतर मेनु नितान्त पतिर स्तरपर परम्प भावना
है (मोही उनमें से कुछ भमरी माप हो) भिमका कारण सम्भवत
यह है कि विवाहहीम है - या जिनकी औरत मर गयो है
पार मही।
मधपमें (हा मधाचा प्रयोप मुझे नहर परना चाहिए, जोकि
मारलप में कोई बात नह ममता ) इन महाराँके जीवनमें रिम
पारिवारिक मुग कहा जाता है यह महीं है। पारमॉकी तरफ मत गाये।
बामपनी-अपनी पारणा और कम्पमा विषय है। समार गमिछ
अपन पिए रह रहे है (पया यह मतियासि मरणार तो
ही मान) गरे पापमि मा मापुनिक माना पारिवारिक पनि
नही होगा। (मने रिबोम्यूशनरी बात पर दो है। रोरिन उममे मोर
माना है पालिमा गर मिहार मने पोरंगे ) मोर को पारिवारिक
धति है उनमें नही मी भाडुनिकतामे गमो या एमा
-
मेरिन ऐमा परोसा है? मरे प्रयान्मे इमरामा या
पिरामपमोचीको पापागाममें भरती परामा पाना। मैग्गा
पर मापनारिवारमा पाया है। सूममे मास्टर माायको पगाल रेली
पानी दिपणे माती रिमी पारपाल सन मही मा मामी। मरों
तिमिर और क्लिीप
A

- सायिक विवाह सम्पत्यम पहले ही सोचकर रखना पड़ता है। कमाई बहानेकी गिध करमी पाती है। इसके पहम्मता मेनेके दिए निरप हाना पाहै। इसलिए उनमें दया ममता करवा पारसस्य काम- पोप पिता मात्र होते है और इसके गमारा नई हर समपर समान मम होते बास्वविक समान पस समारबोसमाहित है विविध मायामि स्पा और काप-चोक है। यह गर्ने गरसे पम दुकानदार मोर पोस्टमास्टरो रुपम मकान-मामिको समें निरन्तर मेंट रखा पता है। यह सबके लिए प्रत्पमा पनुमा मौर बास शिक मरनारमा प्रतिष्मिामा लिपप है। उनके लिए यह बय परिर या परिधि नही है पर एक ऐसा पोवा-मामता बस्तु-सत्य है निषा अपहप रे । बगर सब मिलकर उसकी परिस्थितिमा एनसे मिमकर मिली तीसरी परिस्थिति और सब परम्पर प्रिया प्रविधिमा करो। यह उसे अपने प्यावहारिक बीबममें मातम हो बाणा है। सपा उममे मिए मार-मारा नाम नहीं रह समूर्व कल्पना भी मही पार पसरे लिए पेपन और प्रोपिष्ट पाकी म्पसमा भी बड़ी करता नलिए समार उसके लिए पीपल और सदनमीत रस्त है। उस भागो गिनाम रमा मुगय ही तम्मा म पसर पोंकी fo, उनका सिर उनकी मौत अपने मार सपने परिवारको मस्सिप-रसार गुर भी उगे समारही मर्मक योगों मार मापामा- आए हाफ्ता मिता। ममाही के इस प्रापा पोप कारप इसे मनठाको ढोर पहरा और भीद एनका साहस नहीं हप्तान बाल- पापोंगो पर इमामों और करो गोमा एमा पार जमरा बने पुरामही भगवा । उसे बज करता है पौरियेसारी रस मे ही उगी पर मुग और 5 मम्मई पौर पण पार मार भम्पाप मार और समाज मुभ और अमाप पखा पर और मीरा भार पारम राई बानर पर ही एक सारिपालीगी

मनुप्पी बर्थम महकारिता काफी हद तक पिस गाती है।
किन्तु इमार निकाय कपि 'मरिधीय है। सप इस मश्तिीपता
की रमा करता है। यों कपिए कि इस मस्विीयता कारम हीरे कपि है।
मैं यह नहीं कहा कि पडितायता उमझा रोप है। में यह कहना
पाहवादि बरतीयताकी वा परिमापा इन पियाने अपमे
लिए प्रोटकर रखी है यह सबर है। अपमे मसम संबेदन-पीठ प्रतिमा
पामियको परिवायता कहते है । मौर में यह कहा कि समापर
विवाह न होमसे उनके मुकोमम तम्तुमाना विस्तार नहीं हवाई मार है
मुहीमम तस्तु समानकी विभिन्न स्वामीसे समारके मिलि पशि पनिष्ठ
अपसगुनही पामे है। इसलिए हमारका बास्तविक प्रस्पर परमात्मा
दोष समारंभातर स्पषित-मानवता जो उसकी विभिन संस्थामोक
भीतरस ही किसी न किसी मामा सात हन्दी है
-का हामि परिसर
उम्हें नहीं है इसलिए मुमव-रसर भी नहीं बीमत मत्यन्त सारभूत
मुसोमम मनुसबा रे बस गये है। इनके लिए समारत बास्मप्रमेय
है।विकार, भीमार है की वापर करती हुई मौत।
और समर सकारारमनुभव भी है तो यह कैसा है । मोगे,
सभा, महफिल प्रकारा पा संपाम मानिलरातिक पार्टी
सरकार और उसके कर्मचारी-सेही मोदारा समारम्पत हावा
है उनके सापन ) म स्पति हारिक मारम-सम्बाय स्मापिठ हो यो
मे हो । मपिएस मपिक स समागमें उनके परिमित सोम है
यो म मामी भी है। पसिरि मुष और दुगोंदा उनै गोप होता
है। इसलिए प समागम पस्सिा ही है।
एम मेप पोरनहानी भी मित्र है और पानाम परिवार
पर भी विषम रोता है। परिवारमाणिम भी एसा माम सित और
निपता कि समता रम पारिवारिस पामि रस पनी भूत
असप भापारमाता है। इसन पिया यो पो पामर तिरिम
तिगा और प्रतिवीप

हाता है। ठो महोरप बाप बान बायम किवास्तविक अस्तित्व संपर्पम उत्पन्न निघेप सबभ-युक्त विपोप दिगोम्मुव तथा विशेष भार-हि-सम्पम को मनामाव है सम्हें पलाम्पक मिम्पति प्राप्त करने को बधिकार नीमोर यहि मान भी किया बाये कि अधिकार tasम मा कह पे दिपा भमिम्पक्ति यो मापने ऐमे भाव-समुरायोको प्ररान कीबहकमान्मक मही मोर परिकही यह सचमुच कसारमक है यह सिरहाही मया दो हम यह कह रंगे रियाठि बापुनिक भार-मोबके मन्तमव मा माती। शिस्मा परम । समा गय ! एक विशेष प्रकारक भाष-समुरायोफोही माम्यताप्राप्त है,बायोको नही। पयाहीसमा सब सापकर मैंने अपन मिकी तरफ देवा तापाता गया है कि कुर्मी पाती मूनी एकरम सूमी ! मुझपर पो पानी पर पयाम मातम पर बहकर बहा पपा था।

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Ek Sahityaik Ki Dayari

Author
Madhv,gajanand
Title
Ek Sahityaik Ki Dayari
File name
Ek Sahityaik Ki Dayari
Text
OCR done
Citation
1964
Published
2010/12
Publisher
Bharatiy Gyanpith Prakashan
Language
Sanskrit
Pages
124
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
History
DLI number
514845
Barcode
4990010022522.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
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