Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
Jambudvip Pragyapti Naam Dheyam
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KGiririna
वाचनाचार्यत्रीगमन,
गणिवरगुरुभ्यो नमा
श्रीयुत रावधनपनिसिंह बहादुरस्यागमम पाहणी भाग:
जम्पद्वीपप्रज्ञप्तिनामधेयं
पञ्चमीपाङ्गम् प्रारभ्यते
याराग्यो
जैनप्रमाफर यन्त्रालये
FRArjure
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.. टीका ट्वीप भाग१६॥ प्रथमदार ओमनमः मि ॥ श्रीगृतदेखनमः श्रीडी पितराषिगुरुन्यानमः जपति जिगामिहामः शिवायनरेन्द्रनन्दनीग्रियो अनुपया:मुरेन्त्रगतमायमा मा १ गानुयोगगिताम् वाम् प्रणिधारे महिगणदान् ।प्रयपनकायमनिपान गर्ग श्रीगान्ति मुगान् पजातयुतिगमपाराजिलिनागभाइस्य रमनियरः। मंगवताप मोति जयति ग मत्योऽत्र मलपगिरिः ३ श्रीमरी यिंजयदानमानमानी गिरतधागाधरणाराममयातदीप्तिः। यी दुःपर्म रज गिमात गपामापार प्रयागय हातनूमिगत समिनम् । दीपागरधमय गप परामपा प्रौदीपपन् विगदयम् ग्यपदं स्यभामिः । गौरि गुंगेरिट निदर्शिका पूर्वरित श्रीमरिधीरविजयी विजयाययोऽपपत्मायादरमगोपि गमपागीरगा भवेत् । से श्रीमान चन्द्रास्या गोयाम यांचकोतमा जम्दीपादिप्राप्त टगातानुमारतः । प्रमेपरवगञ्यूपा गाना पति विधीयते RTE ताय दिकटमयाटयोपर्यटनममापसितगारीपद्यनेकदुगादितो देशी काम निर्मापोगतः गजातलाय निहागया गानकगंधयणानां परमपद गाफाइक्षनि, तम परमगुरुपायरयेग मम्यग शानादिरवप्रयगोचरपरमपु मयकारोपागंमीयम् मधे प्रगाधमताजातीयतान जन्यः, तमाप्तोपदेशगूग, प्राप्त परनः केपणानोकायालोकितनोकालोकनिःकारगपरोपकारकम्त्य गभूपणागमालागाडकमा पुरुपाय, तदुपदेशन गगधरम्यविरादिभि रजीपालादिगा परितः, तत्रा निहादग, उपाढागपि अकदेशनपत्र पानि य: UN मेकेकभायायाय नामानि नापारागादीनि प्रतीतानि नेपा मुपायामि फमेगामूनि, साबाराष्ट्राम्यो पपातिक १ मूत्रदाय राजनीय २ स्यागारम्प जीवामिगमः ३ ममयापारमा ५ भगयत्या भूमि: जाताधर्मकाय जम्बुद्वीपमामिः ६ ठपामक गाढा गप्रतिः प्रसार गानादीगां दृप्रियादपर्य नागां पञ्चामागमा गिरयायणिका गम्फागतकल्पिकादिपश्चयग्गाः पीपालानि, तथाहिन সাক্ষ্য দিগন্ধা : অনুশীঘনিজাম রূপবিন্ধা মরগ্যক্ষ বুজিনা ? খিলাল সুশপিন্ধা ?? খায় ? दगा १२ पनि । अनमोपायुक्रगे मामापापांदी कनिदाप्यन्ति प्रगानां च मध्ये इंशागड्गे श्रीगोपाडापार्थिवृते मतः, गेपागि नयागानि श्रीमभयदयमूरिपदि विवृतानि मनित, दृहियादम्न श्रीयोरगियांगात् यमन यहिन पति, न तदियरमा योजना पागानां च मध्ये प्रथम मु पागं श्रीसमयदेवमूभियियत, राजनीयादीनिषद श्रीगणपगिरिपाद विवृतानि, पत्रापागमयी निरयायनिका च श्रीचन्द्र रिभि पियता,तत्र संगीपर भाग ॥टीका मपनदार ॥२॥ Kापादनस्पतिः श्रीगणपगिरिकृताऽ पि तम्मति कालदोषेण स्पछिका, इटन गम्भीरार्थमयाऽतिगरनं तेनानु योगरहितं मुद्रितराजकीयकमनीयको शामिप न त दर्षार्षिमा सापितमिद्धिकं सम्मायत इति, कल्पिनार्थकम्पनफल्पद्रुमायमामायुग धानसमानमम्प्रतिविजयगानगच्छनायकपरमगुरु घोहोरधिजयपुरोधानिदेशेन कोगाध्यताशयां में यगोषो न्मुद्रण मिव मया सदनुयोगः मारन्यते, रूच चतुर्दा, धर्मकथानुयोग उत्तराध्ययनादिकः गणि तानुपोगः भूय दिफः एण्यामुपोगः पूर्याणिसंमत्यादिकच घरयाकर गानुयोगश्च प्राचाराङ्गादिकः प्रस्तुतगाराम्य रुपणात्मकस्वात् तस्याश्व गणितमायला गखितामुपोगेऽ भाषः ॥ मग्येषं चरणकरणामकाधारादिशाताणा मिय नास्य मुक्तता, साक्षात् मोक्षमार्गभूतरत्नत्रयागुपदेशक स्वात, पति छ, मायादुपदेगावाभावे ऽपितदुपकारितया पाया मपि त्रयाणा मनुयोगानांमुक्तपगत्याविरोधात्, यथायोक्त, परणपडियक्ति हेक पाम कहा कालिदिएणमा दीया । दवि पदसण सोही सण मदरस घरां ॥ १ ॥ प्रणाख्या शत्रयायतिदेशोत सम्मत्युक्त ग्रन्ययो दुर्घहपद व्याल्याने सापरिसमाग्नि अश्यास्पाइति सङ्केतोयोध्या, चरणप्रतिपत्ति हेतु धर्मकथाऽनुयोगः काले गणितानुयोगे दीक्षादीनित्रतानि, कोर्षः, शुद्धे गणि तसि प्रशाते कालेगृहोतानि प्रशस्तफलानि स्युः, फालय, ज्योतिधाराधीनः, सच, जम्यूद्वीपादिक्षेत्राधीनव्यवस्य सेनार्य फालापरपर्यायो गणितानु योग इति, दृश्ये द्रव्यानुयोगे गुदर्शनगुदि भपति, कोर्थः, धमांतिकायादिद्रध्याणां द्रव्यानुयोगतः सिद्धौ सत्य तदास्तिको प्रतिपन्ने दर्शनशुटुम्प च रमाणपोगोभवतीति । यद्यपि श्रीमलपगिरिपादानां क परकृताक्षेपपरिहारप्रभविाषचनरचनावातुर्यम्, कप तत्तक्रियाधयन्धुरतायुष्य, क कु गाग्रममा प्रतिभाविभवन, कचने तत्पूर्वपयोत्तरपारचमास्त्रकुशलस्यं, काच तादृक् सम्प्रदायराहित्य, कघ कठोरपन्यग्रथनफर्मगयफर्मयत्वं, कघ मुशला प्रमतित्वमिति महति हेति संहतिय देपि प्रवृत्तिरपि राभगिकी प्रवृत्ति रहो महती धृष्टतावृति, कटरिफठिनःकुण्ठजनहठग्रह इत्युपहामपात्रतामा प्रफलतपापन्द्राकर्षकमृगमानुपायिनः शृगालस्येव ममानौचिती मन्नति, तथापि लोहशालायिकीर्णानां लोहसारकलानां पम्पकारमेपूयोगेश माह तापूयोममाय स्तत्तरपाचोमजीयाभिगमादिमिषु दृष्टानामेष पाण्यालयाना मेक्षा मीलन मनुधिचिन्त्य अन्याख्यानरूप गेवेदं वयाम्याणम् यिनीयतइति, मानीवितीले गोपोति मर्षमुन्यमितिगासप्रस्तावमा || तस्यवानुयोगस्यफलादिहारप्ररूपणतः प्रतिभवति, यता, सम्म फलजोगमंगल समुदापत्या
।
...
iii
খিঃ
“প।
पगहार
ইল। পুলিশি অথবখালি ॥ বা এই সম্মানী সহ বাগ, লালন
wগস খায্য না ঋষঋণাস বুথa । যান্ত্ৰিণা, বাথ। সন্ধবি লাঘরথাগল।
খাদিuাগ সিফিলিসিফাইলস লাগে, লাগে না দ্বিপাখিগাথাগfaখলা
লাল, দুপুঃবিথiথা অবিগ বৰ
ধৰি rষাম, সা,
গালগ :গাসল স্কানিমঃ।
সবuratষণিঘি। গা গালি পাস বিগসি সগিনি ২ - গাধা
পৰি গগ গগগগগগাবাসা প্রাইস। বাদামি, সখি বাঘমালা সময় মানুষ। রানি পর
যাথা পাখি খপ ঋলােবাপিগি, সব ফালগাবি। ঘামাবাশগাসাসিনা সদুঃna
স,পাথাবগাহালি, দাদিমায গাঘিমগাণি:
অগাষ পুস সগসংগবিসা, সন্দীপ
বাথ গুলিবিযুগণসখা, প্রথম সাবমি লাগzuruথাগগগগগুলিস, পরিধি
দ্বিসংসার চালাখুনশীলথযানুযালিন সময়কা সাকিনি, ঘাগ সঃ মাথার স্কাশায়া!
n। পৃথা যাদুজ্জামায়ণগnীযঃ আবগাথাবাসি সবগুলি যুগা ঃ। নিবহিসাবিলায়
গত মাসে অনশষ অবধি বুলালাগালি বাঙ্কহো যদি বিষয় বাশাপাঘিয়
বা । পাপিয়া সাথে নিবিয সহায়গাযা আগে গ্যারাগস অগা শব্দে
বা সখা সান্যাল। অহলথাগান প্রতিদাসিন্যাসিলি ব্যায় বিচাহিদায়াঁসঃ ও শাখায়
imiণসহ কালোথি মারালিগা জাহান্ত হিঃপয়ান গাথা শপ
Di। অংশ থs শিলা স্বশসাশাপাধ্যমগনল সা: স্কার
RRCHESSETTE जंयूटी भागा। शमदार टीका गविशेपेगुयांशावगादयोगपि ततस्तदुपागलादम्यतदातरमघमरइति सम्भाश्यते योगविधाममामाचाणमपि भागयोगा इनाम रमेोपायोगी इनस्यविधिमानत्यादिति तथैद मुपागमपिप्रायःसफलजयूद्वीपति पदार्यानुगासगावात तम्यगम्य गजामदारापरमपदापरलेन येयोनामा प्रतीमाभूदयिनइति तदपोहायमंगलमुपदर्शनीयं यतः यहुविधायसेयाईतेख कयमगलोपानिपेत्तष्ठीमोमुमहानिरि मामलाविति तानि বিখ গাহিয়ান বাহিনী বিনাশিন্নিয়ায়যামান সম্মানকালয় হিমসহ সিল गमगुप्यतिति ॥ तश्यवस्थैर्याय प्रत्यक्ष द्वितीयापिकारादित्राप त्रिभुयनात्मयभननिनमन्मनत्यागमयम, सारगांगमा भगमहार्यारेगिहिलारणयरीत्यादिमिगमनम् श्रीमन्महापीरनामहरमिति तापपगियागिप्पादिपरपरणादापं । pिm वननिर्भरार्थयात प्रथयाजोजपमध्यमत्यं यं पुष्तस्माय पनातिनिगिहानदीपमाभिधानणयपाममा गमावनिवेदमारोTERTAK कन्चात् स्वयमेवमात्मनामनगलंकिंमगलान्तरोपायान अमवस्था गगात मेघा महामसपादिपरिणीतात मंग-मिलियनपने भयपि माधुयत अन्य थोपक्षामन्नमस्कारादेरपिमङ्गलम्यात महिलाक्षेपिकापसतांदधिपूांदीगांद्रशमगलायपिालिकामा पनि यफदर्शनस्पर्शनादीमानिर्मूलफनापातात, पायातम्यफग्नादिगिपित सदापोगाणघinो विमेदापिति दान महापालिने तत्रसमुदापःपामार तागास्म ग्रहणीयपिणहम्मद्रुपोषिव्याक्रिमुकति मापविभागनिरपे तमाम RAMETi Trimum र्थनामतोभवति तत्रय समुदायार्थ परिसमानुपलागादियदययाजामतीशियादिपद गममा मत iratnefiलिगा. पायुध्यते जयामुदर्शनापरनाम्यानादतदेयायामभापीपलतितोदीपोजामिय मिनार्षिाची गाRinxireart क्षणेनामिपिनयम्याग्रन्यपद्धतीसमिनियापम्याः मनागात् मागम्यूकोपनि पानिपनियतिmitrct. ती पपंधराद्यास्त पाशमियायामकागात् माजम्यूमीप सिरिनिमान्यनामपतिपदोनोपपत्याः पिपापानिमा) कलयतमन्दोऽत्रपतीमागन्दापातापित्यभिधेपग चापिकतैयामाममितपपिस्तान धिापनापारियत प्रतिगादायाः ५ त कानtimarile স্কঃ অনুষ । শখি ঃ লাল সন্থাৰ পাপৰি শুই নি, তা চির সাবগ্ন নন! গান যা শর পঞ্চগুণ গাৰ্গশগুপী সা ধাপ বা মাসিমল এগাস, শাল-পা গা গুলমন্ত্র fire ব্যাথা পালা গাঁ পথ্য গুণী প্রথম বার পাশা: বাণিসথাগs wঃ সৰি যায়। যা লা প পা লেখা গালাপি, সাগর সংঘর্থী ধ ন সি বা সাদা * * * হঃ খাদি কাপাথাথিনায়াখা হয়, লাগল গ ন করব বুগিয়া অর্থশ বা পাস সিলিন মাগি পবিখস, এ সময় মাথা ঘামাখি গগগ, গগগবিগ সৃপি পনপল এঘি ফাসিতো । গfeধ সনি আপিল ষ্টি সিসিলি শিয়া বিশ্বকাথা সি গথানঃ গিলবিশাল ঝালক নিবাস "শ পৃথম প্রচলন শুদ্ধাননু নিগাথপঃ গাণিপিকা সিগাষn : যদিশাণ ' লৰ শিখা পাখি শুমাল ব্যানাসি নিয়ে লিগ শিক্ষাব্য পৃথকানথাশিলা। সালাদিমিলিযধঃ সিন খালাসঃ দিনধিত্বগাঁথা: যন্ত্র বানানো+ব্যাসিলিয়া ১সপ সিরিল পু মা ft এগগগগদি যায়, শীধৰণশিক্ষাহিলিযথা সাবান বাসদ সদন হাসন লাস্কা ও গাপ্পিায়ালিং নির্যাস সি গম-পা সুদামর্শ নিন । মিলিসামাপি। গা গয়াসপাখন লাখ বীণnia লাগা মন নি এসলমাঃ শাময় গায় না। গাংখিনি : স wীgষ্ণালি গার্যাবাসন বি সাহিগিয, মা। খি। গান্ধি গাখ, গ ঘ শান্তাধা অপৰা নপনাযাদাস গাখি রূপা গা মন গলগন ॥ दीका पनर ॥४॥ समाजा, नुपपुतोऽनुपपोगोपनितिवचनात् नोमागमततिविपोछ शरीरभम्यारीरतयतिरिखनेदात, तत्र पदुपक्रमशब्दापंजस्य सौर श्रीमविश्नुतलिशिलातलादिगतंतदभूतभावत्वात् गरोदव्योपक्रमो यस्तु यालकेनेदानी मुपकमशम्दापं मयाध्यते अपया अयश्यमाय स्या भोरपते न भाविभावनिमत्वात् भवशरदव्योपक्रमः प्रथरीरभअशरीरश्यतिरित्सविविधः सवितापित्तमित्रभेदात् तत्र सचित्तद्रव्योपक मोहिपरपा पदाऽपादोपाधिभेदभितिविधः पुनरेकैकोद्वि विधः परिफर्मणियस्तु विनाशेष तत्रा यस्थितव्यस्यगुण विशेषापादनं परिफर्म त मिन परिकर्मविपरित्तहिदायोपकमो पचा-मनुष्याणां पर्णस्कन्धमापयादिकरणं सचित्तचतुःष्पदद्रप्पोपक्रमो यथा-हस्त्यादीनांशिक्षाद्यापाद में सरिमापदप्योपशमोपण वृतादेव वायुर्वेदोपदेशाहृद्योदिगुणकरणं चतुविनाशे पुनखिविधोपि सचित्तध्योपजमस्त पामेव मनुष्यादीनां व गादिमिनिाशकर प्रचित्तपोपन भो द्विविधा परिकर्मविषस्तु विनाशेच तत्र-परिकर्मणि यथा-पटारागभणेः धारमत्पटपाकादीना नेमल्यापाद मंच विनाशेरतपातविनाशनं, मित्राप्योपकमोपिद्विविधः परिकर्भणिया विमाशेष सयममाकाशङ्कटका दिभूपितपुरुषादिद्रव्यस्य गुणविशेषक रवं पाविनाविवहितपर्यापोदः तपात्रिकालीपक्रमायपिद्विविधौ परिकर्मणियस्तु विनाशेष तत्रममाफाशंतचामूर्त मित्यंचेति मतस्य परि कहयो विमाशापोवा उपक्रमोपटतततोमः कीरातीत्यादिन्याया दुपधारणसदाश्रितस्ये सुक्षेत्रादे ईलादिभिः परिकर्मगजवन्धनादिभिस्तु घि मागाति एवं कालस्यापि पूर्वान्यापेन उपक्रमासम्भयेपि गंवादिच्छायादिमि यद्ययापरिधान स परिकर्मणि फालोपकमः यच यहनादिया रामष्ट फलदायकतपा परिदमन र पिना कालोपक्रमः, तपाच-लौकिकोयागपि अमुफेन ग्रहेण नक्षत्रेणया प्रत्यमित्यं गब्धताविनाशितः काला ति, भावोपक्रमोरिधा भागमतोमो बागमतच, मागमतोपकमलदार्पस्य आता बोधोपयुक्तउपयोगा भावनिक्षेप इति वचनादिति नोभागमतीहि भाग: HARU, साठी नामातृपरीधामणी वेश्यामात्यानामित संसाराभिर्दिना ऽध्यवसायन परभावोपक्रमणरूपः परधश्रुतादिनिमितमा चापं भावायपारपापा पमेमेराधिकार प्रधानुयोगामतिपादनाधिकार गुरुभावोपक्रमाभिधान मनर्षकमतदंगावा तदसम्यक् तस्या प्यनुयोगाङ्गत्वा । पापकारः गुरुचितायता यसकामं गारंगे महारनेश जामुयसन होरनयंतंतहाकार-मोव सागुरुभाषोपक्रमएव दर्शनीयः गशेषाः निः Xoxoxoxo -C80 AGACYCaxc খ এখীসগ্ধলাদিলি সৰিলসাঘ বা যুবলিগা সখিনালদিঘা থানানি শিকানি বলা যiণয়ঘলাবালি সুম এনাবিলা ধ্বনি দ্বীথ সংযম গাযালাবি স্বীকার্য যযঙ্গ ঘনি জাঙ্গা যতঃ সাহসি সালাহলীঘক্ষীযsীলিবিনি; অথবাগমা বন্ধস যমদ্বিগ ব্যবস্থা যদিসীয়া: যীনুর যনিদিনীবাসিনি লিথিয়ামিবিয়ান সাখাধুলাগঞ্জ বার্থযােদ্ধা সামাঘিয়ােফাঃ আর সুমধতি সাথিয়া, সন্ধিক্ষণ।। বগাষ্ঠীবদ্দন, সাবিত্রী, সাধুসঙ্গ যথাযথঘিাষােদে যামযিসা দী বেশী গুলিপিয়ানমনী ঔষ মানুষে বিপুঘলদহ ময়নাপবিদ্যমাখলেসঘন বৃদযথ বয়ান যাবিথঙ্গঃ বৰিখীয়ভিত্ৰিীসলি, সখি-বমহিষায়মাছুযৗগাবাসীহ্মীলিমঘনাসমুৰ্যোঃ যুদদাগান ধন পা সমসলা যথা গাঙ্গীখালা গাথাসিদ্ধ সমীয়সীজাগিয়াসঘন মাথা সুগন্নি সীথামিবিযাদি সবসমৰিয়াল হসীগীৱি মাথাব্যসাধুখাগি দুবালঘুখীধামুখীলসাধুশ্রীখনি যম মুহামুখ ঘা বা আল মাসুদুখ সিযন সাগ হজসাহিমোগল সমস্যায় জায়গায় বিক্ষা দিন মাথমিষ্ট গন্ধ সহঃ অসমীয় শিক্ষণীযথা সমাজ সুষঙ্কালমাপা সময় বাহীমিক্ষয়ক্ষাঘষিবিদআমি বুঝলাম গাষগাপালগামীয়সীমান্তৰাখি সঙ্গীয় সাবমেঘলয় সীমান্ত ব্যানাঃ সৰি পালা গিণবিঘা, মথ থাখাল কাসলাই লাথি ময়থাসানীমালপয়া যুদ্ধাবস্থা গ্রীবইগৰৱালপৰীঘিনীক্ষিণ গিংসসিরীন লক্ষীলৈযিথা সারযাযামিwিথসােহববেসিবি স্নায়বিবিসির যিদীঘিখি স্কাঙ্কিীহঙ্কাপি সহাসিষ্ট স্বীথি মুকার্যাপদ যিয়া সম্বই পুঘল Wলাল লাগঘিান্তাপসগুলসঃ সমিযানথাস ঘনী মালা -- ১৯ * *
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৬। খ ম হইলাম কালা মাখিয়ানমায় খ "গুয়াযয়িং ফ্যথায়লাখনি ।
* ফেলি; a এলাকালিন্ত লীলায়মসলাহিদাপাশি মানাধিনীষঃ বগঞ্জ
veঞ্জন পালমির smীথাবিলিল পলানগুয়াহহমমসাংঘপসিবাকাখা যায়।
wখ না হয় বিশ্বযলবাসা খাবিলিলাম
যালিমীয়া শিখায় কথায় গাথাবিহিত।
fৰ বিষয়াদি প্রতি গ্রাগসালা আলসায় গালাগুলী গ্রাহীমীযীয
* fro লাইলীলামৃগয়ঘলিবিদ্ধ বিমুখ বন্ধপৰিস্কায়াসিলাস্যময়ীরূপবিন্ধীবান্ধব
কখন
বল? সুস্থতলক্ষা অপিপাসাগংঘ সংস্থাগলষীগন্ধী পাস বয়যায় শযগিলিখা
ও wথ খুশি পয়সায় বিবি গ্রাগললানা আলপন সম্বলগীwদাপঃ গা গগস, সানুষ সন্তু
অ আ ত্ম মানে -য-অধিনায় সাধ
এখানুপৰিসিংগাসিনা সরকাপালগতে
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॥टोका। मा ..पहार मयरपतितिमिस्कारो नियादीनां तेषांमिथ्याहित्येना प्रधानस्यात्,' सम्पग दृष्टेरप्यनुपयुक्ततयानमरपुर्यतो द्रधनमस्कार राजा देवपाषानमरकरणं तस्यैषा भयादिमादमकादेमरकरणं यलपत्तरपुरुपाक्रान्तस्य धनुरादेननोभायोवा द्रव्यनमस्कारः भायममस्कारोपि भागमती मोबागमतप, तत्रागमततदर्थ जातोपयुक्तो यदातुमनसोपयुक्तो वक्षनेन नमोहंमः इति ब्रुयाणः फायेनतुसंकोचितकरचरणोनमकारंफरोति तदानो भागगतोभायनमस्कारः, अनेनपात्राधिकारः अथ नई जिनः सोपिनामादिभेदै चतुही तेच नामादयोभेदाः । नामगिणा गिणनामा टयणजिला पुष गिणंदपडिमान दवजिणा जिण जीया मायजिणा समयसरत्या १ अनयागाषया प्रयगन्तका अप्रकारान्तरेणापि निक्षेप संभयतिपरंस विस्तारभयात्री पदार्पते । एवमापेपि मूत्रालापके खधिया यथा संभपंनिक्षेपः कार्यइति उक्तः भूत्रालापकनिष्यन्नमिलेपः॥ पदापःपुनरेयं ॥ नमइति निपातिकंपदं दव्य भायमंकोचा, पाहप-नेवारपंपषं दधभावसंकोयणपयत्यो । नमस्करचरणमस्तकमुमणिधानसपो नमस्कारोभत्यियः । केन्य इत्याह-पाः अमरवरयिनिर्मिताशोकायमाप्रतिहार्यशपां पूजा गहतीत्यति सोन्या, पहच-चतुर्थ्य पठी प्राकृत शैली ययात्, परद्रयसंकोचकरगिरः पादादि संकोषः भाषर्मको पगंतु विगुहस्य मनसो ऽहंदादिगुणेषु नियेशा, तत्रचा पतुर्फ दयासंकोचो ममायसंकोचो यमापालकादीनां १ भायमंकोचो न द्रव्य संकोचोपवाऽनुत्तरमुरादीनां द्रष्यकोचो भायसंकोचय यथायांयस्य ३ न द्रव्य संकोची मभायसंकोच इति भाः शून्यः ४ वहन-ततोप भास्योपयो गः भावसंकोच प्रधानध्य संकोचस पत्वारप्रस्तुतनमस्कारभ्य,प्रनेनच मालांतरस्य फलस्यभिचारित्वेनानेकान्तिकस्यादपहायतदन्यवरापतपापश्यंभा पेनाऽमिलपितामाधनममर्थस्वादस्पनोपादेयं परमेखिममरकारला भाषमङ्गलमुपातं स्वपपितपःप्रतिघन्यभायालेषुपदास्पापादान तत् गाता दायस्येय ध्ययहारास्वमिति ज्ञापनार्थ, प्रवध यहुवचनं ध्याप्त्यर्थं तेन समसमिक्षेपगतनिगपरिया अपपदविग्रह मममसपदेमति मग्मती त्य नोकप्रय चालना प्रत्ययस्थाने । मन्वहंतां परममङ्गलस्येननमस्काराभिधानसोप्यादीतदुपादानमुक्तिमिति, भरपं समंगलभूतासात परे पागगन सपनादियाभीष्टफलदाभयनीति ज्ञापनायायोपि नमस्कारस्थादायुपन्यास पति, किंच मरिहमाणमित्यापेकवचनेमापि मार तांगणेमि यहुयधनेन नामत्यापना दृष्यभायाईनो चतुपर्णागपि तुन्य करतया ममरकापत्यापितत्वादेका ततः समतापपारिता पर -- # বাঙ্গা। নুব গ্য মঘলা বিশাল গণাধিত্ব মঘালঃ গিযুমুথবুলগে যাই। ঘাগীঃ প্ৰসংঘৰ সমযময়কা - স্ব, যা মযঘলন যথাযথং অথগিপলি গলাব অধ, যাঘাথাবর-গান- ভিখালাখnষয়ঃ সলাম (দি। বিংধনুয়া অধিযান্য ঘনঘনঃ ৪র্মীয়তা, ক্ষিপ্রগলপ্রায় পঁয়া '। শাপাগান্য সস প্যাথলাদি যথাযথ বিয়াঘাহিবি, যথাযদােন্ত্রী বাদাম খা : ধা। যথাঃ সচ্চিা ফীগায় বস্তিঘী ময়মীয়াং প্রস্থ হােসঃ থিমস্থ ; বিনীতঃ গিথনাযায়। প্রথম প্রতিনিধিত্ব থামাননি গীলিবিযsaবিনিৰীসহাঃ হরি:.:.: সিপি: ফরাসি অব ফথিয়োবি লাঘবঘা জামায়ায়েলিৰি। বৰষ্যালান যেদি, সালথঃ । গান্ধীথাগাসায় যায় মাখিয়ে নিয়ে। হাপায়া থানাঙ্ক:: : পাখিমারা যাণ সংহ্মিমালফোলাল বিদ্যুতাবিথ গানিশাৰী লিথাৰি। সময় স্বামযিথা::: uসাল নাগাল। যথাথ দানশীদারিপিয়ালিসিন্দামাদা থিয় সবধি পথদাতাশা। «া গান •uাগাঘাষণাঘনত্ব যথঃ আবদাবিধাবসি হিল্যাবসালমা জাগো যালপিলিং ::: মূসাথায় বাদিঃ পুর্ণবয়ষণিীমান্ত এলসাঘাষণাঝিমাল্যবিন্যায়নিষ্ঠ দা জিয়ার rি:: :: থাশি, সব ঘিব রূণস্তলিলাক্ষা মাত্র যেসিদ্ধিাবোধনি গন্ধিযুগলস বিশুদান আখিনি যা বা। সনু পাহাৰি স্থিতা যায়নাবাজি ও হিজাবঃ এবাঘাযাদা পিস্যায় যারা হন নি • • সিপাসিয়াধাগফি ফাং ঘ, যথার্থ সংহিজযামিলি পাখবুই শ্বিল, জিপসিয়াবিসান ঈশ সি পাহাদিগদ্বিখনি কিন্তু বালিহাম্বষাদি। মোজিনালিসাগুদাময়ে জামাযথ ব্যবসা :
.. टीका। mritinshriresurvtanttectu. तम पादादि रहितं दृश्यमुच्यत इति । नगु पोकमा मिधिकारी द्रव्य, ततकालभायितांगलामामध्यायिभापतिरोभावानामेकहलाये रणं किमितिन यतीति, उच्यते-अपिटयखभाषंहि दृष्य तोक्षस्वभाव श्यापितस्य क्रमेणै पाविर्भावतिरोभाव मात्रप्रति गमादिद्रप्पेधेकखभा पुफिपिफलादिपर्णपाकिम: मायक्षणियादिति । ननुपरफणविफशादियसपा पूर्भवस्थापरित्यागमोतरायस्याधिष्ठामाद स्यता प्यपकिमिति न भवति, तथ्यते येपांतरापन नदषद् यहुरूपापि द्रष्यमित्यमेय नहिमटोरोपांतराणि फुर्योशोपनिरपोभवति तस्यस्पयमधिका पादिति द्रव्यमेवमधाममिति। एपंडण्यमयमरयमतेश्यवस्थापित भाषनयः माह॥भाषेच्या पर्यायापरमामन्योऽयातरभूतंकिमपिदृश्यं गामित किन्तुमाय व परिदृश्यते त्रिनुयो वस्तु निकुरंयमिति, यतः प्रतिक्षांभषममेवानुभूयते किमुक्तभषति भायस्यैकस्यापति परस्पतुविपत्तिः । भाषापत्तिविप तो स्वपेशे या हेतुः सएपदम्पमितिवाच्य, मरिभाषोघटादिरपणामोभायांतरं मृत्पियहादिकमपेक्षते, किंतुनिरपेक्षमेवोत्पद्यते अपेज्ञाशिविद्यमानस्यै पभवति, परिप पहादिकारणकालेघटादिकार्यमस्ति विद्यमानस्यापेक्षायांसरयिषाणस्यापि तपाभावशात, पदितोरपतिलपणात् प्रागपिघ दादिरन्ति तहिकिरिपमहायपेक्षया तस्य रपतस्पषिद्यमानत्यात्, प्रथोत्पन्नः सघटादि पथात् गरिपरहादिकमपेक्षते एंत तदिदमुहितशिरसोदिग गुद्धिपोलोषनं यदिहिरयतएव कथमपिमिप्योपटादिः किंतपपद्यात् मरिपगहायपेक्षपेति। तपादिमायोपिनिहेतुफएषगुद्गरोमणिपातादि सम्पपेशा एषपदादयो विनाशमाविशन्तोदृश्याते महिदि तुका इति चेन्ने यिनाशहेतोरयोगात्, तथाहि मुद्रादिगा विनाशकाले किंपटादिरेष क्रिपते रकपालादप उत तु छापो ऽभाष इति त्रयोगतिमात्र मतायघटादि स्तम्य स्यहेतुनूतकुलालादिसामग्रीत एवोत्पत्तगापिकपालादयस्तात् करणेपटा देमादयस्यत्व प्रसङ्गातनहायकरणे ऽन्यस्पनियत्तिर्भुक्तिमती एकनिवृत्तौशेषभुयाम्पश्यापिनिवृत्तिप्रसङ्गार गापितुरणपोऽभाषः सरग्रस्येव मीठ परपतस्य गगम्पत्यात् फरणे या पदादेस्तपस्या मसनादन्य करणे ऽन्य नियाप असम्भवादिति विनाशेमुद्रादिकं सहकारिकारमेप गत्तमत्वं घटादिस्तुराणिकरयेमनिहेतुकः स्वयमेवगियाति तस्मासम्मविनाशयोन किंषिरशेगापिदपेत्त्यते अपेक्षणीयाभायाधणं किंपिकस्यतिरकारपंतचापसलिन किंपिवाष्पं किन्तुपूर्वापरीभूताः परापरक्षणापाः पर्यायाएयरात्रीपत्रगामादिमपाधिकारेषा पत्तपतपिशेषाषामकादय गेपमिति । एवमसम्पूर्ण संदीप শাসন ht শিগগায়নি এইসব প্রযুখি বিদাষকাবৃপিকার সাবিনামি বিশ্বাস প্রশ্ন যোৰ্যাপাশিপালদঘসাঘাংঘা জঙ্গি হতে গানস গীত ৭শগগি ল। পগাসাকা হাফ সারি গাধাটা ঘনবসবিস্বশাসি । গাশশশ | যাইবান্ধাযথই বিখ্যমনিদিগাহেদিস ও নি। পানিবনিশন পাখা ?*** মসুন্নাথwঃ মাসাধি যা বসিয়াবিযিথাসাসিং * গালাপিসাম, গালি গান শিলা - ? থিনিঃ সহীঘইলঃ ২ বিমাপাগাসাহিগা বিলাবিনা পারিনি। তাই খানীপা। সি। এগুলি ব্যাগ ও কৃষি সঃ মাখা মাখনাগগ গান roারবিশঙ্কায়াগনসি। সন্ধবিঘাপ্রসাদী শসিন্দাগবিলাস গ গ্যাপলখানাস গfrশ wয়ীগন্ধা গাথাগারবিনোংঘদিদি বন্ধন নবাবিলিগালাবিশিই সালাগল অবপিসি গাদাখালাসাবাথাপিস দিনৰ পাথাখানিনাগশিগণিলীল মচমসিগনুর্বদিল্পি নগাৰ মিলাদ শুন সাসলি সঘাথা সিবি শাদামিনীশান শাখা- আশপ প্রথিবিধানিসিযথা মানা হলনি বিপনী দিঘি লি নিল বিগ প গিন্ধিয়া প্ৰদাশ যাঘা সবায়ালিয়ান পালসবাবিবি গত দশায়া, সপ্তা বাদাম খােচ্ছ সদস্যঃ পুঘসূবাধীরগৰি দুখানুভশ্বাস সথানীয় প্রধানাগানিসা, সব মিলা সিগাগা সােমাগল আহিন্দি গীবাগতিপ্রকায় লক্ষানিংঘবশ সখ ন ল স গুঝিলিগগগঃ সালাগুথিখা সদ যুগান্ধপির যুগ স্কিমিং ল্যাথমিশঃ ওঁ নিগৰ পৰাই। ময়ধপwিণ ঘলিশ খণ। গত শী ৮-১০:
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नदीका पाहियाद्गलमात्रमिक र देगसंपने यहुविध विषादमुसरशारयंदाविषदमाने मस्यन्दैमिथ्यादृष्टिस्यमा प्रतिरकरणाय मर्यनयममूहात्मकः स्थामादमुधारसास्वादरमिकतामनुभपतामयमुहार-सायाहि लोकेयरिकमपि पटपटादिकं यस्तस्तितम् मयंमन्योन्य मापेवनामादिचतुष्टयात्मकं नपु मा केयनामनपंया केषलाकारस्पंया केशलवण्यताग्निष्टंया केयानभायात्मकंधा यता राशस्मिन्नपिराधीपत्यादी इंद्राति नाम । तदाफारस्तु स्थापना उत्त रावन्याकारणापत्यं दिग्परपसम्यतिकुलिगधारणपरमधर्यादिसंपन्नत्यंतु भाष इति । मामादिचतुष्टयमपिप्रतीयते एतदर्यसंवादफा उत्तराध्यय मयूष्यका सोकानपि यया सनिविटेवमर्यापिविषयाशापयस्थितिः मधेदनं चनामादिविकलंगानुभूपसे, समाधि पटोममितिमाता पृथुनुभा दिवाकृतिः मृदयंभयनभायोपटे दृष्टंचतुष्टपं २ तत्रापिनामानाकारमाफारोमाममोथिमा प्रताविनातीविमानोर मुतरायपिस्थिती ३ मयूरांवरमेयह दोनोलादयः स्थिताः । मयप्पन्योन्यमुभि धातभामादयोपटे ५ इति तदेयं एयप्तमामादिधतुष्टयात्मकमेव तेगानभामणापना द्रव्यभावात चारोपिनगमापायथागसमिति प्रकविदयामामधेपो भशितल गुमपिशुनभूतमहिरति भयतमाम यापयाचकभायमन्बन्धेन भायमुन्निहितत्या सानोमस्कारयं श्यापनायास्तुभाषयिप्रकृष्टत्येमतरकथमिति घेदुध्यो तस्यापिजिमयुद्धरुरपादकस्वादिभितुभिः सुतरांभायायामाकार्यस्यामु पपत्रमिति भामुग्धमधामसतीपंकृतदनुज्ञानस्थापनापलापपापपलिताफलय फलपसिमकि स्थायमाद्रोणाचार्यसम्पयिनयोपनतांजगदतियापिनीम मगंतनिर्मापदमिति तयाच प्रतिक्रमणादि यंदमक प्रदानजोहरयादिकं गुमचरणतयाश्यप दिशसि स्थापनामिपंचापलपसि माहोयदस्या पाल अपिचविद्यापितमिगजनपदनमुपानला मरतेराय कुप्यमि चित्रन्याकुभ नो निध्यायन दृसि मिप्यायादं फुर्चत पापिन सृप्य मिकिमपरामाय पुपरभर पापमया तचापदामिमुलाम भावफरणतयाद्रव्यमपि स्वीकुरु ममस्वार्यतया, अश्यया पतनाभादीन दम्पभिनान गमम्धनः द्रापपानभायीराजेति पुथाउपपलध तथाईमारीधर येषयियमातमापतिता, तेनत्य जटिष्टिभमाम भज श्रीजिनामा पदुभानं ततस्त गानिपुतियुक्त शाम निशेपाणां नमस्कार्य समिरपलं प्रभलेन । अथ प्रकृतं प्रस्तुगः उक्तः सूत्रस्पर्शिकमिपुंक्तयमुगमः सदेयंमलमूत्रमधिकृत्य गमा मालाप कगिर गम्पनिकमियुगर सुगममपानुपदर्शिताः एवं प्रतिभूत्रं स्वपममुमरणीयं । प्रयपस्यांगगयो परिमयुधाने या भगवान् गौ दीका अंडीपा पूचना ॥९॥ तमायामी भगवान श्री सम्म हस्योरस्यति पृष्टवान् यथा तस्मै भगवाम् व्यागृणातिस्प तथोपोधातमुपदिदर्शपिगुरिदमाइ ॥ इरिन यस्यास्पाते। ति मागेलोयगालिभिति एवं प्रस्यायम यदा भगवान् विहरतिम तस्मिन्नितिकाले वर्तमानावसर्पिणी चतुरिफविभागगपे उभयत्रापित मिति पापालद्वारे अपघाणमम्यतृतीया प्रापंत्यात्, यदाहुः श्रीहेममूरिपादाः स्पाकृत लक्षणे भातृतीयापिटश्यते यांकालेणं तेणंसमएणं तस्लि गकारले तस्मिनगमोहन्यपः तेणंसमएणं तिसमयो ऽपसरवाची तयाच लोकेवक्तारोगाद्याप्पेतम्य उमयोवर्तते मास्त्यस्यायसरइन्यः तस्मिमिति पति समयभगवान् प्रसुप्तांजम्यूकोप याव्यतामचकथात् तस्मिन् समये मिथिलामामनगरी अभवत्। मन्विदानीमपिसानगरीषर्तते ततः करमुक्तमभयदि रयुज्यते पत्यमाणथारूग्रन्योतविभूतिसमेता तदैवाभवत् । मनु थियक्षित प्रकरणकः प्रफरशविधामकाले एतदपिफयमयपगिति, घेदुश्यते अपंचाय मपिंखीकालोऽस्थान प्रतिक्षणं शुभाभाया हानि मुपग शान्ति, एताप सुप्रतीतं जिगप्रवचन येदिगा मतोऽभयदिन्य ग्यमानं गविरोधभार संतम्या भगवर्णकमार रित्यिमियसमिति प्रदाभयनैः पौरजनेद्यातीयवृद्धिमुपागता यताविति यधनात् सिमितास्यचक्रपरधकादिसमुत्यभयफलोल मालापनिता समृदापगधान्यादि विभूतियुक्ता ततः पदय स्पफार्मधारया वनति प्रस्तिमितसमूहा इत्यादिक औपपातिकोपामिनः गमतीपि तेणं कालेणं तेणं समएणं मिहिलाणामं णयरी होत्या, रिहत्यिमियसमिछा यणन, तीसेणं महिलाए णयरीए । तस्मिन्काले तस्मिसमये मिथिता माग गगरी प्रभवत् प्रातिमितसमता, वर्णकः, सस्था मिथिलापान गयोः ॥ सेयंकालेणं ॥ गंयाक्पाल कारे, ते अयगप्पिणी कालना दुसममुराम नाम घौथा भाराविपार ॥ तेणं समयेणं । याक्याणकारे, जेसमपनविषे भग यंत कथा कहेते समपे ॥ गहिलाया गयरीशोत्या ॥ मिथिला, एनामे-गरी रहां वर्तमानकाले मिथिला नगरीछे तो पिण अतीतका ले नगरीमो जेहवो घर्षक-इतो, तेश्यो वर्तमान काले नहीं अयसमिणोकालमाटेहूयोकहो । रितिथिमिसगिता ॥ प्रातिपहियंत सपकादिभपर रितधमादिकापणावर्णकवेश्यारसूत्र पी जांणयो।तीमेणंमहिलाएणपरीएपहिया ॥ पापालंकारे इमराजापोतेहरागां मिपिता मामागगरीत ॥ मूल "भाषा टीका म - im वियोगादिनि नामिनि यत् मिनिमायानगयां यहिला सरपीय तरापूर्वागतरामपादियभाग irmirmiमाघमारापना समप्रभया सगा कपर लागधादितगयात्यादी सत्रास्मिारपीसत्य दिविभागे माjिrantee नियाशियनन्यभावः अमंगायेय सम्रगंधागदवाईयना प्रतिविम्ये प्रमिदं तम्तदाययभूतंय यताया गर तदाप Tी नासानायननंद्रष्टाय । मनभावतामांनाभापतम तापपिरातीतमिलादिषा कात् परिपियमपंप कारित-प्रोपपाति मोनामिविणापति प्रोग्राजालम मलागुनधारियो धारिणीनामदयो कताभिषेकापरासीत्य: । अभयत्राप्यमय frint मनि सामाणिमा गदिकोशामापानिपयेवादिकीयम्मको प्रपोपामगिद्धोऽभिधातम्यानपात्राना HREETपनि मानोतिमपरिपरिगन्यमाधिपति तारोमामाची मायभूतानामापति स्वामित्व पहिया उत्ररपुररियमे दिमीनाए एत्यर्ण माणिनई णाम पड़ा होत्या यणन, ॥ जिगमगया धारिणी देश वपन नेणं कालेणं तेणं ममाण सामी ममीम?" originnifeप्रमाणिनामा प्रभात या शिलारामा पारितोदेगे धोका, तमिकाले निगमपे शामी गमयतः Marrrr. THE ने महिनामा विभागनिने माने गामको पनि सत्य जगानको विधे नrfareer irritainfarma नाविभागोरगोनेगाने वर व वापया ज्यापूरमीनिया Time Harihe found किसी ने पायोग को आरपी वर्षगजातलोत ने काले कालो far, letra, सपना देनेति, भाममा, मानो नमोगरे श्रीमहावीरधामी गमागमा परिभाविग्गा .. जंदीप प्रथमदार ॥१२॥ भ्यएव तपापिनजानो प्रगतइत्यादीयो भिपयोगप दर्शनादानम्यं मना मिसम्पमा I याशिमामयतमा first aft सयामाकृत गैलीयाणादयपलायति यस्मिवियदृष्टापं पम्मिािणे प्रमशंभार मानपनि पिनिगमान गरि सहवर्तमानकालनिर्देगप्तरकालापेक्षया उपागममहिपापा पानावा पाणातिनुपाणिनि पं. म milk sh तापन्नं विकृत्व सोन्यारान् पादसिमदहिष्करेति भादधिपाइपिहनानासहिए: परितनानी रविनाशित rimixit मन्त्रा यन्दतेवाचासोति ममापतिकापेमामति पम्पिावाचामेमानको निwिiremा नापाम irim म इति गम्यं, सयाने यातिट्टराऽतिथिमी गोपिवपरिहारात या नानिस्तान दमानिन मानि सीनियमित गया लसीकर गुपणापत्यभिमुगः वि पामोललाटाटिनमामिः सानाकि नीतिनियन पित तान्यादेराकृनिगणतयातगापपरमिता पधुपामीरः मेवमानः पwिine nि Mirritafar गुहिं पजागिडईत्ति भनियहुमाषपु तयारिणरोग माग anti tarun Tah. मातृकागपचताना हृदयामिमहिता भगायातापायांना टोला । ममीको fauji भ.. मकTागीयभाय परिधामणमा मत मनाना दोष साई पसिना Tharat पाग समग मी ति कप मंगमायः सदभावना परतोषिले पनि मौतयार Hit परे३२मा यद, गंमः यदिना गमंमिता करोनिक बनी मनारदमा नमant ११५ ची प्रारमि प्रदक्षित चोर को २ करीन पर निको कानमा addi ister : 4402 ॥ প্রশাখাপাসাঁথিয়াঘন। ঘন লোকশাবলিকান দুঃখ লাগে মসিফ সী সঙ্গী গমকালেহ মসলা গদখাবি, মনসা মুয়াশায় পাস অথাখিদিযবিব । মসঙ্কি ল্লা নদ লীগ কাথা পাব গায় প্রতিবিম্ব সায় মা সীমা সমাগল সী সঙ্গম ইয়যায়ী গয়ন্তনাদ লাশটি গথ বলি মাখামাখ্যা বা লা ল্যাম্ব সার বদলগ পার্ক জাকার্থী মলি মহিল পশিা প্রশিখি নাখালী গবাৱিষ সাধায় স্বীকাল গনি। গগ গগগগগগনগৰি প্ৰায়ীখাৱা গন্ধীদলাখ সিমাখা লাগৰি মনবৈনি। সব মহলোহ্মণ খুনি ঝখি খুলি ৬ ফলি বা মন সি পি আগাছানাশপাঘাষ সনৎ ইমন ইত্যাগপথ সংশগন্ধাবীবিধি ঘসা গায় গাঁথা ঘয়ে সালাম্ শাঁস গণিীয় সময় পাষ মাশকা এখনীগন্ধা সীমাহীন বিশ্ব। ননসপত্র সেই সয়া দশ জিগামী মানুষ মাগীবাদী ধাঘন বিহাম্মদঘলসিয়া, মদায় দুই ৭ খাবা ভাগ যায়। পাশাপাম ও সপিল শঙ্কায়সা। পথিমঃ ফযাহ্মাদের ন্যায্য ফিগান্ধারে মগন্য অন্য जाय एवं ययामी कहिणं जते । जंयूदोवेदीये ? १ के महालएणं বন !সান্তই, ৭ষ্টি ছিল বর। মুষ্টি , । থাকা যায় শালগীথি: ( দ্বিপাশা , গীবি, ২জিদামঃ , সাদা, ২ শখ গুণাগী ঘাগ দিয়াৰ লগগুনি শন যুগ লিসান দিব ইল সীসাথষ্ট ও কলাই এর ও সর্শ মজা তা পাস্ সাথী ২ জিডি পর এক ছান মান্ধা গায়েব ই পায় সীসাধীন ও ১ গুণ। জিয়ারী | গাধা। '!
। टीका बगार . समिपिनमा पाका भाव जगतीवर्ष वर्षभरावासद्वापदापी आकारमावास्तेषां प्रत्ययतारोऽयर माविर्भाव पनि भाव पालारभाव मापतारा का, कोहा धाकारभाव यवतारोपस्मिम् एतथा अरोगजापूधीपस्यनपं सदसपदाथोद्य पृथः ७ इति इन्द्र तिला मनुऐकले प्रतियचा प्रयासोपाहताफरणा जगा प्रसिद्ध गोत्राभिधानेन तमामंत्र्यनियंपनचतुपयों भगवानाह । गौतमेत्यत्रदीर्घत्वमामंत्रणा मेन गौतम प्रयासबमामा प्रमेनगमपतेव शहितिगाम संख्येयानां जम्मूदीपागाध्ययले दः जग्यूद्वीपोनामद्वीपः कथंभूतश्त्याह सर्य रोपा नामकीडादीनां समुद्रात लवणोदादीमा गर्वामिनासामररयेना भ्यन्तरस सकलतिगलोकगध्ययाती सर्यान्यवर एयसर्यान्यसरकः स्वा पूरपा प्रन्यतामाधानकोमयपि पुरयादीपापेक्षयाति अतः सर्धशदीपादानमित्ति । अनेनजम्यूद्वीपस्यायस्थानमुक्तं ९ तथा सर्थेयी विशेषरोपणन या पुसकोलपुर, तपाहि सर्यलयपादयः समुद्राघातकोषडादयश दीपाजम्यूदीपादारल्यद्विगुण २ विभायामपरिधयः ततः शेप सापेल्या अलपुरिति । दीप पाकृतत्वात, अनेगसामान्यतः प्रमाणमभिहित विशेषतस्यायागादिगतप्रमाण मर्यवत्यति १ अनविशेषतः फिमागारनावपनोपारेणं नंते ! जंबूद्दीवेदीवे, पणत्ते ? गोयमा! श्रयणं जंयुद्दीवे दीये. सध्दीवसमुद्दाणं सवनंतरिए१ सन्खुमाए २ फिमाकारभायालयतारः भदमा, जम्यूछोपोद्वीपः, ३ प्रशत, गौतम, अपम् जम्बूद्वीपोलीपा सर्यवीपसमुदाणाम् सर्यान्यस्तरका, १ सयंतुल्लकः, २ किमापार भावपहोवार भने जमूहोपदीये ॥ स्यूं प्राकारमायें यूं म्यरुपप्रत्यायत्तारमाटभाव म्यूं स्वरूप हे भगवन् जदीपनामे दीपथे एथ्यारिप्रश्नपूशा mmm TAIT जम गौतमस्वामीनेपोकिपेचारप्रश्नों का उत्तरभगवान्दत है ) गीतमजबूदीपनामा दीपछे। सबद्दोयममुद्दा . अनुवाद ॥ भाषा মসাং ‘খলা w সহিহ ম মুঙ্কায়াখাঘিখি মনি দিদি। মেগা যুগঃ সৰিাঘিলা। মাগুগসপি: মনস বনসাবু। ননবিদ্ধীপুণ। সাঃ যপিপনি মূলঘস্থসি, যদি মানুষ যদি সমশিস। অগাবিন্যাস্কাল সথা যায়ক্ষমঘলা থাবায় আঘাঘল বাথখস্য গল্প গল্প পথ কাল গ্রিস।। লঘয়া ক্ষণ গ ঘমেয়াখলী থবক্ষণবিদ্বেপক্ষপ সময়। যসূলঃ কি ঘর্মীসঃ ফসলগ সি ঘাষ, ব্য: বিগ ঘাসখনও মানুষ পাবলী। এনবিলাইহি সালামসজিদবালা প্রাথগিয়া যদি জিদ্দি মাঘবিয়লথ সংঘঁ। অসম সংঘবলায় বালাগ পৃথযলীলতা সাবি, খালাল। সথযাগাসন পিসির গ। দুগ্ধবীসগমসহ এগাদিঘীসমললিস প্লাবিদ, গয়ালালাবাঝাঘালম্বিনালিঃ প্রশ্নঃ সানুষীয়সল মাথা নাজিগদ্বাসী যুদবিহ্মাগম ঘাসসসসবিহ্মাহলি ঘষামনা यहे तंहापूयसंधाणसहिए यह रहचकायााण संठिए यह पुस्करकाणयासंहाण संठिए प? पनिपुण चंदसंहाण संठिए यह एगं जोयणमयसहस्सं शायामयिरकंनेणं হয়। পাপুয়ানসিঃ যুদঃ মুঞ্চলিঙ্কা-খাগদাখনঃ পৃঃ বিহুৰ অগাসদখিল, ও যাসনা আবাহিনী দ্বীপপুলা বানসই। ২ অং সল্লাছুয়ি ॥ যুগাললাহ্মানাঘুষা পাননি। অন্ধকার যুগ শী সাক্ষাদাগন্ধা (গন্ধা প্রতিটি ঘ গণনা) যা হয়ঞ্জাতিক দুঙ্কন্ধের্ষিাঙ্কানাঃীবনীয় বললেন অলিগালগদি বলি বুগাদিনা আলীবর্দ। যা সায়গণ যক্ষ্ম হল লস জামাল ঘাস লাগ লাঘসিস সাবিনষ্ট সাধীসম সশসহীন মানুষ স্বদ গীঘ প্রায় গা লাrিu। | গল । अनुवाद टीका ------- ॥ मा I पनामानिमा सपनामाणन पानपोमालिका दीपरयंप माकत गेलोप्रभवं मायागरकटिफयदसिण्या मानवापुरलगकंध FARMनिष्पापयत् पहावा पटितपावत् घटापारयपष्ट तरणाणया पाषाप्रतिगरवत् सचामृधय मष्टामाकुमार गाणया पाषाण प्रतिगामीजासागरजीहिता नवनिर्ममा सागंतुकमलरहिता तशानिष्पंकाकराइविकलाकमाहितामा सथामिका नि:फवधा मिराय राजापादरीमियम्या . तपासामा शपतः प्रभावती भषयाश्यनारमना माति शोभते प्रफायतेयेति स्वप्रभा तथा रामरीचिका गफिरणायमतोम VARATre तथा प्रसादाय नमःमरतयेहितात कारणात् प्रासादोपा ममःप्रवादकारिणीतिभावः। तथा दर्शनीपादर्शायोग्या या परसमशुप मथहजीयणाई विरफंग वयरि चन्तारि जोयणाई विखंनेणं मूले वित्यिणा मने संखिप्ता उरि तणुया गोपुच्छसंहाणसंठिया सध्ययरामई शूच्छा सराहा लराहा.पहा मठाणारया णिम्मला णिप्पंका णिवांकाच्छा या सप्पना अस्सिरीया सउोया पासादीया दरिसणिजा नयोजनानि विशाभेनवरिपाचारियोजनामियिकाभन भूलेपिस्तोर्या मध्येसंइतिमा उपरितमुका गोपुल संस्थानसंस्थिता सर्ययन भयो मला सखा नममा पृक्ष माया पोरगानिर्मला निपटा निः ककट छाया राममा सश्रीफा सोद्योता प्रासादीया दर्शनीया विस्तार किलो ममजायणा ॥ मध्यनेविचे अर्थापिचे शाठयोजगपिपुली ।। उपरिषत्तारिजो ॥ उपरीश्यारिजोजगापिटुली । मलेवित्यि गया। मूले कोसी पहलपला माट। मलिता विषनेवि संक्षिप्रसारही है। तवरितांधा ।। उपरिपासलीभूलधोत्रीशाभागमाटर गोपुण्डर गोपूट में मस्ताने सस्थित पोकीयोगायनीपूरहो नाकारले ॥ सायरामई । सर्वप्रदेशेयजरवमय छ । प्रवासयहा ॥ प्रामामाकास मोपरेशलानी मलका महानिको ॥ पहा ॥ पृष्पगोवा महा ॥ मृधमांगो कोमलकीधी ॥ योरया । जिरहित ॥ जिग्मलों ॥ मगरहोतबा ॥ cिi अयोप কান্না প্রমানি, না মিয়া প্রতি সহ সঃ প্রদানলা : গবনীয়। যা ম। শpfললিগ শোয়াগ্যসিসব। খধ্য ৪ লাগা। বয়াগে এবি বলসিলগিন্যাসিগিগা থer্য বিশালগাথা খাদ্যগুণ বিদ্ধ অবিশাপ শ্যধাম লস।সাঈদিপাষণ এবষয় নার্স সিরােণ ক্ষিগণশশি বেশি পান যিয় পরিস্থবিষয়গায়কঃপুথিগনী, পান্না iগান শসল সাথি পথযুক্ষিন দাগিগলসানি লাসাবিন্ধানি দাগ মুহিত, যন পদার্থে। পশিগুগঞ্জ সদন বিয়ায় মুশলধন্ধীৰ যত্নহরিপুগবিলাৰি যদশাননাকাসিন্দা সিপাহসালাশবাসী যধিদশ কনসঘাংগুনবিস্কন্ধ মাখা গয়াদি পশু বল গিয়াবাসন পল যিয়ালী, বাসিলামি সংগণিক্ষাবিসাশাল ধ্যা যাননি সিনা। পাবনা । মাথা মুণ্যাণীসগমা দূগাবিদ্যা সিংগানিপথ জন্ম পায়। রাস্তাঘা কয়লাখা। শা এবী বিশপথ গী সমিমি পছু সাফ স ব্যাথায় কান্ধল গান গমুদ বাস; তথাপি শনা সান কলিমা ? शनिम्या पमिया, साणं जगई एगेणं महंतगवरककाए मन ममंता मंपरिस्किप्ता, শ্রমিকা সাবা গা গা রে সালালণ অধ:পণ লাগলাধঃ, খায়। বসন মানা জায়গা । হগিয়িকা বিদ বয়ষা শাখা না। কান না দিয়ে অস্থি গম্বা পুসিম্বিয়া পার্শ গ য গবফসলথ । বাঘা সী অস্কাইসাঃ সানী দাঃীন্যান্সী কী গ যুগ যখবিল, মৃন্ম হিনিগালাপী যা! প যথঙ্ক বাধায় ফল যা, গণমাল পথগ মুহামৃত্ব গ নাই।
... ॥टीका 1 । - Hai ! MARRERYमायोगपत विज्ञान पनुः गतानि सारमना रयमाणः । तथापा पायाफरणारप्रायगि त विगेप पytime दिपोदामोमिनियमभागगतापमा, रिंगुदेवविवार पन्दरगाणानं । सय जगत्युपरिभागयर्णना # সংবা কথাবাসা বিনিময় বাসায় যানবাধয়ী বিথ ঘষাঘবিন্ধা গযংগ্রাম ও NA पताशयरन महान भागरत्यर्थः । म चतुपत्रिगारमा नगरपुपरितमतलस्पमध्ये पनपनुः गलामकाति, मूत्रेएकारान्तता मागधभापालाणा मा. मि मागभागे समिति प्रायत्महतो एका पावर वेदिका देवभोगभूमि HAT,गपाशेपेवतीर्थकरः । सायअयोगमाईयोज पतुः जानिजिमानेन, जगत्या पमा सगाना गतीसमामेवगतोममिका परियोपेण परिरपेण, कोयः, जम्मूहीपापमयेतोयलयाफारेण प्रयस्पित' पारमा पानपरितन तलपतुपोजन विमारात्मक तस्मादिणिदेगोनं योजनायेत्या प्रयाफ्यायान जगतीपरिरय सायानस्या सपीति । सर्यरत रोणं गवरककाए अजोयणं उहुँ उत्तेणं पंचधणुसयाइं विरकंनेणं सधयणामए पच्छे जाव पहिल्ये, तीसेणं जगईए उप्पिं बहुमनदेसनाए एत्यणं महंएगा पउमवरवेइया पणता, शहजोयणं उहूं उच्चत्तेणं पंचधणुसयाई विरकंनेणं जगई समीया परिरकेयेणं सवरयणामयी . मादकः पोजनगमगत्येन पञ्चधनुःशतानिधिफरमेम सधरतमपः भन्यायप्रतिरूपातम्या जगत्या उपरि बहुमध्यदेशभर M. I महत्य का पायरयेदिका प्रता, अईयोजगभूर्व मुश्त्य न पत्रधनुः शतानिषिक्षाभन जगती गमिका परिसपेणा गर्यरवमयी मायभागेनीमर जाए या ॥ पहनीषण उडू उमाण ॥ प्रायोजन गाऊ अर्थवषपणे? ॥ पंचमगुरुपाई घिरभेला पांच सधनूपपीलपणे ॥ सय राम परमपरे ॥ ले जायः ॥ पाच निर्मल यावत् गदेपूर्यलीपरे जाण्युपतीसपछे । तीमेण जगए उप्पिं ॥ जग तीने ऊपर बहुमत दंगभायमापदंशमार्गमस्थामकर ॥ एत्याएं गई एयन्तु सर १ गोदीगक पयागेदिका देवतामा झोपास्यामRATRINEी तीर्थकरे अनुयादा E । ।
เร? লই পাখি মা বা হিলফা ঘামা। পারা সিদ্ধ গুগল। খাবি পা জিপি স্বপনথা সঙ্গঃ সখীগাসাযুসাথিয়া বিয়াদপি গপ গপগ্ৰহৰ পথা। নাগাল প্লাগায়শ্বিন সংস্থান সাগানিস্বার্মাসিস নিস, যা হাগা গান্ধললিঃ এ, বিগণ থমসাৰি য গান শাখায় সিসি ম মাঘে শাখাসিনা পাঠিকা বিকাথায়ীবিরা। বিশা। সাহ ওসি অপঃ পাপিয়া বিপদ সবি সি যায়। সাধগুলা লেখাপ খনি, বিবিধ যায়। সাইয়ি মাসি লালবাসা দাশলাদি যা যপিয়া বা দয়া ঋষ্য সংশয় প্রাণী বাগবি পা স্বাগতিপথ পর্দায় শিক্ষায় বিবিয়ং যথাস্থা জারী থন্ধে বন্ধ সংযোগ করা স্যা নয় বাদই নাম্বগ ঘনঘা শ্রমঘা হয়তাে বান, বনাঃ অয় সাগw n সাবিার্ম সায় চা চাষ গুয়া গীয় কাযযা লাশ সিন্না, পা কাপ” শিক্ষা সাথেসাক্ষা:গরুঘাষাণময়মঃ,যাথায় শাদা ri গা-গালি ঘাথ স. যায় গ্রাম্য বহ শাখা, ৪। শসস নুদ, থাপ থাপগই। গদ্য : গণসান অবিল। গযয় » ৮। মাগা খালাস • সাল নথaীকান। রাগ? যীশ । বয়ঃখগণ ॥ থানাযা নাইকা সাহাপা যা লগামী সেগন » যা ৯ ঘazস্থানীপ্রণাম সলঙ্গ শ প সাগু, গলা গাথিগুদিঘা সিইষ্ট সাপাহাহঃ }সায়নিগ্নসানি ঠান্ধা। ঘাগ যথার্থ সংঘিা বা তার অন্ত বিশর্মী খন্বষম্যময় গ্রাম বাই কানাইঘাষ নায় । বা সালিশ বসবা বিঘিালা যাম বালকা গরম দায়ি সমব্য লিগায় সবাই বাসায় কানায় মালাই লাম পলাশী যযাস যন্ত্র বলা সমৰিন্ধি আলা বসিলেমুয়া হয়খি মালযিযযান্য rং বহুমাখি ধনু বিষণা হাপিসহি আখি মহামায়া বা যবেহায়া এ মালাগা গুল দয়া যাবে ফাহিকায় সব বই যত বলা দুমষিৰীয় সয় সুষমাশা ২পিছনি লীৰষ্ট হযথা সময় নিশিপ্তি অন্থই যায়। সময়। যা নিয়ে প্রতিষ্টা মাসঘা যন্ত্রণায় দঘস্থা অবয়ালথা তা অস্থিরা যখমীর মিলা : বিলিযাযিী বা অবস্থায় ময়মনসিস্থি অস্থলী প্রম যন্ত বালাই দৰাল বা প্রগন্ত হলযাসী দীঘ গাযযান্ত মা খামখান্ত বিঘিষিয়শিয়ায়ী শিক্ষ স্বান্ত বিজয়ী সিল মীযান্সী বিশ্ববিদ্যগী যিলমলিযাগী যিয় হয়শিল্পী যিবিলাসিধান্ত যিশিল্পী গিন্নিাত বিষথিবীর বিনিয়মবি সংৰয়ৰষয় লম্বয় সুপ্রিয় অলিম যি যিনি বলিব বিষয় পৰিয়ালখালী যা বয়লার গা মাই বষিয়াবী হামযা ঘষল বা অসহযাশিষ হয়া যায় বহু। আর যষিদ্ধ হ য মন ও থমথ্যা ২ শীলমা ঘৰয় সমযৰ নিচ্ছি যদুনাম ঈযাহারায় যনহৈ যময় মা যদি চীৰ যেসব মুনমুন মুদয় পুতুল হয়ে থঙ্কয়ার স্বাস্থ যা কথা সুস্থ বিষয় বা যা ষষয়গায় যমুনায় যোগ্য সঞ্চাইলাম যহিকা অস্থায় মায়া দয়া মায়াম যা যয়ন শীয়া যাব যথার্থ ২ লাখ নানা অবম যদু যায় বাস খাই বাহবাগ vদ ফিষা স্যায় সারা বিষয়াবিয় | vিTmথা বাঙ্গলা ব্যথা বা যবন্থি এবং এ বিষযথা मटीका लंबूदीप मधमदार सेतेप? ग्यंयुमा सियसामपा मिमसभाममो परमयाधेश्यायं भन्ने काम पनि हो गोजमा प्रयासमी गइनमयह कयाइनयिाम भु वि भयइप भविगाय धुवा विपणा सामया पराया माया भयदि मातियातिप्रामया समकायाः पायरयेदिकापा: पागधा रमाने माः नेमालामनूमिभागादूचनिः कामंतः प्रदेयाः यमगंदम्यदीपत्यं प्रातला गयमन्यत्रापिष्टया तयारिटरनगपानि प्रतिमानानि मूलपादा था पैदूपरवमयाः मार मुथा कप्पमयानि कलकानि पग्नपरयेदिकांगभूतानि नोमिनारमयः मूत्रपः फलतिकारि पादुभागानीयाः यममया मंधरः गंधिमेलाः फलकागां किमुभयति वगरवापूरिताः फलकानांमधयः मामामग्निमयानिकनेत्रराशि मनुष्यगरी गग्नि तयागानामविग पाः कानयरगंपाटाः मनुष्यगरीरपुग्णामि गंपादनमी युग्मयाची यथा माधुगंभाटाति नानामणिमयानिमायानि हरम्यादीनां पकागि समंबादाररि तरीय तामियकानिचिोभाषे फानिन्मिादाय कानिचियाग्दोषनिवारणार्य यथा राजारादिषु इत्यादिरूपाणि कंपमानापम्यपूर्वक दुरूपाणि नियंते तथा फलके मू नीमपानिमतीत्यपः प्राधारस्ताहिगेपम्तन्मयाः परामादेकदेगाः पयायोपि तदेकदेगभूना गया गापः ज्योतीरनामवंत न्मपायंगाः महान पृष्टयगामध्यपतका TA: । महतांपृश्यंगानामुभपतन्तियंक याप्यगागार्यगाः कथेनुकानि प्रतीतानि अद्वितीयभंगगदाभि तितोपः प्राकृतल्यात जमानामपि कयेनुकानों पृष्टयंगेयंगेसमापकत्र विगेपणेयोजन सामोरगरमय रेरिति गमः पट्टिक यंगानामुपरिकशास्थानीयाः जातरापंमुधर्णयिगेप स्तन्मयः अपघाटिन्य लायादमरेतु कंयोपरिमायगा महाममाण किसिंघानीयाः पत्रग पोऽयपाटिनीना मुपरि घुमन्यानियिमतराधादनदेतप्रश्तरता पिगेपस्थानीयाः गर्यश्वेतरजतमयं पुरखनीना मुपरिकतुझानामघ बाप्पादनं सापनयरयेदिकार ककन रेमना सर्यात्मनाममपेन दामममूहन तथा एकैकेग गयाराजालग गयाळाकृतिरा यिर्गपदाम ममून एकैन किंकिणी जाग्नेग किंकितपः घटिकाः एकैफेग मंदाजालेग किंकिण्यपेक्षया मिचिन्म इत्योपंटाः एकैफेनगुमागारलेन मुलाफलमया दामनमूहग गईनगणि जाने गमियेन दामममूरेम एकैनकनकशालेन कनकम्पोतरूपः पुषण यिगेपत्तन्मयेग दामममून एकैफेम रवशाग्नेन रदमयदामममुनि अग्रण जाता गणयोजन मातानि रवानीति रकमयामिद गरेन मयंरक्षमपपनालग दाम गरेन मर्पतः ममन्तादिति भाग्यन मम्परिशिता, तानिमदाम ॥टीका महीप १८॥ सपालि गजालादीनि जानानिलम्यगानानिधेदितानि । नयाचाह तेर्ण जाणाइयनपुर निर्देशः प्राकृतवान तानि जानानि तपनीयमारक्त arjaमोलायूमगोदामामविमभागेमराधनविशेषो येषांतानिनथा, पार्थतः सामधेन मुवर्णस्य प्रसारणपत्रणमगिडतानि अन्तरा अन्तरालम्मान रेमपत्रकाकतानि तथा नानार पागजातिनेदेनानेकाकाराणां मणीनारवानांचये विचित्र वाहारा बादशसरिफा भईहारानयमरिकारतरुप गोपितः भगुदापोषेपांसानि, तथा ईपन्मनाक अन्योन्य परस्परमसंप्रामानि प्रसंलग्नानि पूर्यापरदक्षिणोत्तरागतेयांतर्मदाय भन्दायमिति मन्दमंदर ज्यमामाति प्यमानानि भशाभीण्यायिदेहिः प्रोक्तमयादेरिन्य विच्छे देहियधनं यथा परतिपपतीत्यत्र । एवमुत्तरत्रापि ईपरकंपनयशादेव प्रकर्षत इतस्ततोगगार पलमेम लम्यमानानि र उदारेण स्फारेणशननेतियोगः । मघरफारशनोमनः प्रतिकूलोपि भवति तताह । मनोशेनमनोनु फग्नेन त गगनोनुकलस्यं लगतीपिण्यादताह । मनोहरेण मनांसिप्रोतृणां हरति प्रात्मयशेनयतीति मनोहरोलिहादेराकति गणलाद HFAL:, तेग सदापिम मोहरायंत रस्याह । फर्ण मनोनिभृत्तिकरण निमित कारणहेतु युमर्यासां विभक्तीनां पायोदर्शनमिति वचनात् हेतीतृतीया, ततोयमर्षः मतिश्रोतृफर पोर्मनमश्चनिय तिफरः मुसोत्पादकस्ततोमगोरस्तेनइत्यंभूतनगदीनतान् प्रत्यासान् प्रदेगान मर्यतः समन्तात् भापूरपन्ति २ गरामन्ययातस्यगा विदंरुपं सत्तर नियागोरया प्रतीष उपशोभमानानि २ तिष्ठति रदस्ति तदुपदर्शयति । तम्या: पटनयरयेदिकायाः तमतमोतहि तषि इति सम्वदेशम्य तत्र तत्र एकदेशे गतायता किमुक्त भयति परदेशेशकस्तत्रात्यपि यियाति पहयोयमघाटा पिकाच्या राघवमर्षामनार मया सहायाघर प्रतिरूपाइत्यादि समाग्यत्, एतेधमपि हरसंघाडादयः संघाटाः पुष्पायकोर्षका शताः । मारपेषामेवइयादीनां पराकादि प्र तिपादमार्गमाह । एषमिति यथाऽमीपहियादीना महानांमपाटाउमा तथापतयोपियोध्योपि मिथुन दानिध याव्यानि तानि धैर्य,तीमेगा पायर| यापे तत्यतत्यदेशेतहि २ यात हयपती गयपन्तीओ इत्यादि नयरमेफस्यांदिगिया प्रणिः मानिरभिधीपते, उपोरपिपायोरे कर निभा घेनपत् प्राणिकपमाघोजी, गतेचयोथोपंक्ति मंघाटा हयादोमा पुरुषाणामुकामांमतमेतेपामियच्यादीनां तीमययुग्मतिपादशाप मिपाई इत्यु तं उतनेय प्रकारेगरपादीनां मिशुमझानि सीपुरुष पुनम पाणियाध्यानि, यथा-सत्यतापदेशेतहिं तदि यसपमितुम्हाद इस्मादि । सोणमित्या ..........
अटीका ( সাঃ পায়ের শব্দ সন্নিহি, শাহানা । কাশি নালী সমিতি নি অন্যঘরা শসা গ পা বাসাদি মিথ্যা। সু সম্পাঃ খতিয: মাশ’পনাঃ সালাহলদিলানা নিযাম গাদা লা পৃক্ষ: খলসা: সাঃ সঃ গামিকাঃ বিকাশসা সিমুলো পশঃ যথাসশসাসায় যায়। শিখে * পসিবি, পুলিশ: জুগসালিদাসালিসি লিঃ গাংহিলাশি চাষঃ গিযেসলিলা শাপলা সিগা নিগন্নিা; মাপলাখ: সাম্য সালিসিসি: স্যথা, দিঘলিঃ শামসুক্ষ, সগসিপসিসা: সন্ধা: শসা, বানিসিং গামাগা: সুনু। যথিবঙ্গ বলগাথা, পালামানুসী গিগাহ সিম্মঘাদিসা যশসা মালয়ীঘঘামি সংসাসালিলিথাপিস,পিষে লুপিসা লুপ গvাসীরায়াসাঃ সগনিসিপলিসা: নিয়োেগর বিসলিসামাদ মণি, বখানি মমিন প{পশা,সাক্ষি স্বাস্থ্য পুষিপস: সিসিযাদি। মুদি বিডিলিকা। বিবিসি। । গরু বিক্ষ, গবাদি দিবি দীপিলখা বুনিয়াদি মিষিবিঃ লসিযাবি *** পদ। গদি খিসাথি সরকাগ: শসা। মামারা গিয়াসাপ গুলি পাখি মন সাগর দিঘিনি গিগস গাজিপসি শফি মিস লিস যা লি বলি দিল দিল দিল থিফ মসিস মঞ্চ নি, লংগ। মালা পিৎসাথিয়া সাখগাথা পায়দিপানি মাপ, গীবিষযাদি পাণিপস, পলিখাঃশদিন লাগা। পাওমিরপৃপিসিনি লি বুন। iঞ্জীব * পপ গাইন সংল?rশাখাগদিলি, মিনি সাদিয়া সাক্ষাপ?ফিনিসি। *পণ ও ফল দান থাকা *পাম গগ গখ কাল যক্ষা, পীথাগো বঙ্কিায় ------ x तीन निदिका ERO MAnनि पुनम गामान्यतयाहामु पापु सामागी. हीanी पुटीपा मंत fasीHIANANविनानामनुपात्तिानोपान तानामुपरि रति तात्यायः, गूधीमुरेषु पत्र प्रदेगे गूपी पलकमियामध्ये विति MAARTीम ने तमा न भोपन नमोभिः गाशिताफलकादेगाोपचारात् ग गीफलकागि सेषु गू गीगागधनपरिप पगा ए, नागेपुटातायो नपुटाया मारेप, पहा पायाहा धैदिक देशविशेषाः तेषु यमितत्पलानि गर्दभफानि पनीलागिया पटना FAmeीनतानिश नलिनानिमितानिनुदानि चंद्रविकासीमि मुभगामि पटनपिगेपाः सौगन्धिकामि कमाराणि पुंडरीफाणि घेत पानि तामारोबादि तपशवि दलातकलितानि सहसपत्राणि महस्रदलकलितामि एतीचपटाविरोधी पत्र सहपाविशेषात् पृथगुपाती पनि तानि भाये स्यादिविणेपणामि मात, महांति महाममाणामि पार्पिकाणि वर्षाकाले पानीपरतणा यानिकतामियार्षिकामितानि मानिसमानानि तानि. २ बम-तपःप्रवृत हेपायुमा-प्रगतगीवित से एएषणमित्यादि तदेतेमाथैमान्यग-गीतम-एय' मुख्य से पाहिका पावरदिकति तयुतेषु पपोतनपेषु यथोक्तनपानिपटलानि पनयरवेदिकागदस्य प्रवृत्तिनिगिसमिति भाषः । पुत्पप्ति पटन भानादिका पसरवैदिकति । प्रापरमप्रवृत्तिमिमित्तं किं तदित्याह । पनवरयेदिकापा: शाश्यतमामधेयं प्रसमिति, अयमभिमाया प्रस्तुतयुद् RANविषे पत्रपवेदिकति सदस्य निसानिरपेशाऽनादिकालीमारदिः प्रवृत्तिमिमित्तमिति । पटनवरयेइयाणंभग्वेति, पटनायरयेदिकागायती उ HISAVतो प्रत्ययहीनया इत्यनेन प्राकृतम् घेण धीप्रत्ययस्यैकल्पिकरयेम सावंततया सू निर्देशः किमित्याउताऽनिस्यैतिभायः। भगयानाए-गीतम पातमाशाती करिबिया कपंचिदमित्येत्यर्थः । स्याम्दीनिपाता चिदिपेतदर्थयाचीरतदेयसविगेपंजिजागु : पुष्यति । म कणण मित्यादि. मोऽशक्षापः मम मन्त्र के गार्चन फारम भदन्त एपगुच्यते यथा स्याम्पतीस्वादशाश्यतीति।भगवामाह-गीतम शार्थतमागाश्य मोसमावपिनाभाय मुजो दुषतिगपतिनान् तान् पर्यापान विगंपामिलिषा समितिष्पुत्पतेः दध्यमेधार्यताविका पदातिशापा पm नाgi., नयाची दुष्पमान्सिल प्रतिपादको नविशेषनहायी मार्गना तथा प्रथमात्रालित्य प्रतिपादकमयाभिप्राति पावत, गाय নী দুখান্ধিগযপথহানীঘাযা গুগল বান্ধিয়া আল গাদা খা: নাহিনি: শা: গি এখার পিসিঃ বাধ্য কমিিিপ: শ্রাণী সিমা নদী সাগা মনি সি চামিং এনা যায়, মা বযংযতালিয়া, সহমথিসিন্ধি দিযাপাশি সুগায়া মাহী বাসাসমর্থ গীতা, দাখিল ও গতবিঘি কাম বাঘসিন্ধিয়া, আসাবিঘষাঘলা, সবকিপিলা গাথা সানামতি এসবহালদশাহবাধ। গত বুধবাঘসি পাগলিঃ। বাসন্ধিবী গদাইস। সি ম নয় বদিযg ঘকাল। বুদ্ধিনা অপশনিঃথনা। সাধনাগাব্য সাবিনী বিশাখীগণীবিন আদায়ী শিৱস পর কৃষি যথসা, যমী মায তাহম্বিীথিপানিগাথা অলর শিক্ষা শা যালদিমিলি। ধষশবিদায়াঃ খিস্লািন্যাসী সন পক্ষালমনি, মশঃ সানী সান সু পুশাশ। বসুমধােকাপিনারি বরফিফা দিন বুঝি। সংস-বান্ধবীনি জিবগি সিঙ্গালাসিম্বিয়ান সপসিস বিদায়-গয়দ ঋখিী দীহিশা। সাইবা, ঘাসফশিলি ? যা সামাণিগাথা গলিগ্য। বাধাকাস কৰি গৰিমলি ঝিল শহিমদ্বিবাঘা সব পবিত্রীদি মিথলদিয়া ইমাণ থিসামাখিনিৰ সমশিয়ে নিয়ামনি। অধিকাৰি। মনু ননি বিসিসি ৰিস্কাৰাংখাবিকাশ থানায় গত শনিবা সিনাইঘশ্ব আলী আহস, গায়াইব মূল শপিংগো গুলাবিনবিধিঃ পীলেখায় সবিনয়ী দ্বীনবন্ধাত্বেলিগাষবা যা কান্নাঘাইয়া গিয়া, অযথা সারি পাগল সখিময়ালঘেরা থাকায় বিদ্যা মাগীরঘোথিৱীখান পিয়াসিফ ঘাগিতাটি স্বাসঘাযথ গবেষঃ দলীযহলিষযবি। মাদিনি রায় মানুষ প্রতি ধস: মুসলখ ৫ ++.................. ॥ टीका। 71 in farmin नाम कमानीपाना मुगाना नहीनहाल गोयगा पा एगगाइपिं करकेहि घणं सोगन meanirmirmala देशांने शिपिने देपोजने विती विद्यारमा, देगान गाईप गतापापो ऽवगंतया। rurlfuTRANTI जात्या मध्यभाने परधनुगतस्यामा परपरपेदिका सम्यान यहिभांगे गकोयगपंडो ऽपरांतांग, भतीजग भीम-finikकविता तरको क्रिपोतो यो मान लन्यत इति । तया जगती रागएष जगतीसमको जगती तुएपः पेय परिपंत, मम milar प्रथमोपांगगननितापः स्मृतिपथं प्रापपीया । गायकिलेकिलोमागे नीले गीलीभारो हरिण हरिउभारसे सौर नीमा बिजोमासे नितियोभासे कि कितवार मोले मोरदार हरिए हरियस्याए सीए सोमवाए डिषिक्षाहार सिधै तियरधार पाए एमे महामहपिपुरवभूए ने पायवा भूपमतो कंदमती संधांतो तपामंतो मालमतो पयालमंतो पतमतो पुष्फर्मशो पालगंतो धोत्र भोपविजापहालयभावपरितमा एगराधी भागमाहप्यमाहविडिमा अणेगणरधाममुध्यसारियागग्गा यिठल पहरांधी बिपता न Arranापता घोषिपता निमजरठपंडुरपता पयहरिश मिमतपतभारंधयारगंभीरदरिसणिमा तयविणिगयनपतरूपत्तपांनषफोम A त विसना मकुमालपपालसोभिश्वर कुरग्गमिहरा णिवं कुमुमिया लि गठलिमा मिमं लघश्या णियं याया णिचं गुलइया णिचं तीसेणं जगईए उप्पिं याहिं पउमयरयेइयाए एत्यणं महंएगे वणसमे पणते ? देंसू णाई दोजोशणाई विस्कंनेणं जगईसमए परिरके वेण, यणसंडयण यहो । MRI गत्या परिहि पटनावेदिका प्रत्र महानेकोयगामा,देगाने योगने घिफान जगतीसमा परिक्षेपेण बनणगयणेको, मेतशः गोमतीने वापरलेभावासियामे पटायरयेदिका महिलेपार (दिफा घेपा) ॥ एत्या कमीटी चनसंच वृक्षमा कालो Ritatuमा काई पारदोपोजन विभपले । जगानगतीने मगामपाधिपणेथे वह यनउवर्णन सामूत्रकी विभपजाणयो अनुवाद। ।भापा॥
टीका - अंदीप अमदार . गुत्यिया विवंगमनिया विजुलिया मिचं विपमिया विवं पामिया विघ्नं कुमुगिन मनित्र लयइन्न ययय गुणन गोच्चित्र जमवित्र गुति मिणमित्रपणमिन मुविमतपहिमंजरिवमिपपरामु भयरहिसमयणु मतागकोहलकोरगर्मिग कोडगक जोयं जीयगणं दीमुह कथित पिंडल रकग :- नयाप काम मारमं अगमवाणविराम हाय मधुर मरना नामुरम्मामंपिंडि प्रदरिभमरमा भरिपरफरपरिनिसमा लप्पय कुम मथलोषमहुरगुमगुमतगतदेखभागा प्रत्रिंतर युग्मकला बाहिरपना पुष्फेहि फोर्षियतयनपतिवाणीरो या अकंटया माउफनाणागा :- गगुमंडवगमोरिया यिक्तिमुकिरभूयायायिपुरकरिणी दोहोपामुनि यमियरम्न जातपरया पिंटिमनेहारिमंमुगंधिमुहमुरभिमणरंच महया : इधिमुना मुंहाभव केवपला सगरमा गुग्गमिनि अमन्दमालिसा पयिन्या प्रणापागादीपा जाय पदियाइति । अध्याश्या इमायोमः यमि यामानानिपत्राशिफामानिमयति ततस्तद्योगाइमपंहोपि कृतः । नमोपचारमात्रता फरमदति दयपदिश्यते किंतुतथा प्रतिभामनात गया." कृप्नायभामा यायतिभागे कृनामिपत्राणिमन्ति तायति भागे सपनांडो कृप्तोऽयमागते प्रतिभाति द्रष्टुमनातीचन पयति, कृन्नोऽयमामीयस्थम फ। यमाणः । तथा प्रदेगारतरेनोलपत्रयोगाइनडोपिनीलः, गर्यनोलायभामः राया प्रदेशांतरे हरितो इग्लिायमामध, तनीलीमयूर फंठयत् हरितरत: कपिछयत् रिमालाभाप्तिपदा तथा प्रायोदिनकर कराणा मप्रयेगाताण पत्राणि गीतानि भयंति तद्योगात् यनपंडोपिगीता। नपामायुपचान:: मान्यतबार । गीतायभामहति अधो यत्तिप्यंतरदेयदेयोनांतद्योगगीतयाप्तम्पर्णतः गीतीयनपंडो ऽयमागते, तथागते कृप्तनीलहरितयां पय:: मास्मिन् वरुपे सत्ययं मुरफटाः स्निग्धाः भयंते सोसाय सतस्तद्योगाइनपंडोपि हिग्धस्तोत्रयोक्ता । ननदुपधारमाय किंतु प्रतिमामापि, सतः .. निग्यायमागतोग्रायभाय इति । वायमानोवांतोपिरयाच्या मनपरीपिकामु जलापमान सतीनायभाममात्री पदगंने यथास्थित यमनुस्यम्प :: बनितं भवति । किंतु सथा स्यम्पप्रतिपादनेमततः कृणवादीनां तथा स्वरूप प्रतिपादनार्य मनुयाद पुररगरं विगेपणांतरमाष्ट। फिरले प्रत्यादि : यमपंड: कुतात्यारा प्रायः मिमितकारण हेतुपुमर्यामांविभक्तीनां पायोदर्शन मिति यचनात् देनी प्रथमा, ततीयमर्थः यस्मात् कृमायाया .. ॥ मर्यायिर्मयादिनपातरपालिकामा कामः । एतदुल भवति मयांविषयादिनयाता कान आकारलपलपते तयांतायभाममंपादितगत्ताक । - - -- | ॥াঙ্গ ফি পদ্ধৰি শলগু ও মাসালায়মানুযাংত্তোবিত বলি। নীলজ্জায় যাবি মাগী। লম্বৰ মীন সীমায় witteurunংগলফ grথঘদিন যাবৎ এলহাবি করিযিকাহিবিয়ের কাহিনি ॥ না ঘাম মানগিরি সেই প্রধান বাঘাববথসঙ্কসিঞ্জাবঃ এনিথিৱনাযত্ন। ব্যথাযথ arenाति पाटेतु कदा मंजातोऽस्येति कटितः कदातरेयोपवित इत्यर्थः कटितवासीकटय कटितकटः पना निविडा फटितकटस्पेयाधो भू শীঘষপদ্ধবিষয়ে অধ্যায়ঃ ঘাম ললললঃ মনুষ্কোনীমী নছনিয়ে মুখামুনীষী: ara (খীলাম। থিকি। বহু ঘষধীনপথযাঃ ফুলন দুলহীনি বমি বলি মনালি রুহানি ঘৰবানিনি মুশঃ আনিকাহায় লালিসুখাসি সবঘিদিনঃ ফাঃ বঃ পুবালামুযায়ঃ দিক প্লেীঘল যায়। যথাঃ হেঃ ২ t ঘজীবি একিপি খাসিয়াহন (ভিপি) ময়ঃ সন্বিষি মাতুয গুদাবিছিয়ে তারা ক্ষানুমুখী সালাঃ ক খিt:হিমঘনাধীদলগবিল, ধাপ অষি যুবসায়হাযেরাঃ। জিনু ময়রি যানবাবিথ গায়দিলিঃ দর যথা আষায়ানালি বন ঘষেবন্ধঘাতে। ঘনঘাষঃ জন্ধ যথাঃ মাতৃঘাংস লিৰি হদ্ধর্থী মুনি মুহাঃ নাৰিঃ স্বাৰা শি-মিয় এখানে বিশ্বে হিয়াৰীধাৰ নথ, যথা বিধায় এষাঙে মশাখাঃ নমোঃ দুম্বয়ান: নিয়োগেs ঘাষণীদিদি বিলী বিশ্রী শ্রী যাৰ বা প্রত্তিাবিশিষ্টধান প্রতিমা নিয়লি বাদ থানবীহঃ ফাহীবনী সহজ্জোবিশিষৰ সমধিষশবিসমিয়াঃ। মালালার্যায়গায় ময়া বয়াযিবস্থায় খাবােয়ানি যন মালয়ায় ডিনীয় খৰি থিয়া। নয। বিদায় নি সুস্থ থকা সীমাখা মদীঘিথে গলাগঞ্জিরী Tাসি যাৰীদানি থামল আনিকাৰী দীনি প্রত্যাখান কাধীকালি ঘশ্ববি पारविरलपत्राति, अम्बिद्रपवर स्व ৪৫ম গোয়ালাদ।কাকি সখিন দিগবিধিসমানীনি সগীদিম্বিন্ধি বা প্লাসিয়াবিশ্ব সকা সিৰি মীনামি সয়ালি পুশাহ্মশৰি নাথাক্সি বালি বানায়। প্রথম যানিশস্যাদি ব্যবহাখি অাবিষ্ট ।। সানি ব্যালস নি ২ দুগা নদীবি মামৗলিথযাত্মাঘার বি সবা, সবসময়ই ছিল বিদ্যার সমাধান মিল মাস গালৈ ধরা যায় এঘহ্মস গuীয় গণমাঃ শৰীয়া পৰিধাৰানসামঙ্গল wiণী পৰা মিলিমিনথিসিসবনক্ষত্বই ক্ষীমপলাশঃ আহসীয়বান জিতখাথিয়ামঃ पागिशा मुहमा प्रमाण पत्रांकरी गोभितानि पराकुराणि कोपेनानि मागियराणिपति सपा पांकुरमवालयोः कालकताप পাটিস পাথর্শীঘলি। কি দিয়া মাৰি ধন ঘন মু পুস্বাদব, সয়াবিননান্দাহ্মান্ধীজিষে কান্ধলাজে শেখ সিগী ঋষিপ বিশালগ ফা বগঞ্জ ঋণ গাদাসানথামালালা অতিক্ষুণাম লিঃ গিরি শিন গনিদগ্ধ সাহিন থিস যার সখা, সহ সামা সলিলদীয়া সাক্ষাঃ জ্বীয় অব্যয়ঃ বায় # গাপ্পিা, গরিশ অন্ধ কাল গণ্য মাসাঃ তীগীঘি দীজনীৰধাঃ যৰিৱিনাগবিমুখ গীম সখা। পা শখ কান্ধা পাকাঃ পণ দল সধা বরিশীদা স্রাব সালমার গাঃ প্ৰধা ফীলাসিকথা পাপা পা গুগণমালা মসৰি দিনা মাধব যা গাইলবিষণা, মুখ খুইল সং দ্বিগবগত। স, পপ গালগলি গুঝনিয়ান সস, গায়ঃ বই: আ খ এই বুর্মা ববি জাঘিদ্ধপঃখী খাদা শাপলবিকা। লিখা গায়িকা সুশিক্ষিকা সা বা নিস্কি : সহ যিনি বাঃ। সদ্য # পপ সমঘোথঃ নিসাগ। পাখিগানিযবাদ সাল্লাঃ সিসা যদি হৃথি, সাসাধিন অনাহ্মী লিপি ইনগ্রিপিশাবনুলাল পিশাঃ ইখদিনগি যাঁ।।বঘা বিবি আফস পুসি, বিম্বিয়াল্ পাক टीका।। पूषमदार ॥२२॥ प्रज्ञा प्रामा विचितगुरुकैपयहुला इतिपाठातर, तत्र यापाशुभमसलभूनः फतु.५ ला यावाला बाप्यश्चतुरस्राकारास्ताएव वृत्ताः पु परिक्षया दीपिका अनुमारिययः तामुमुनिवेगितानिरम्याणिजालगृहकाणि यत्रतें तथा । अयमर्थः यत्रतेयता आमन्त्राः मूत्रवाप्यादिपुगवाक्षवन्तिगु हाणि व्यंतरमिथुनामा जलफेलिकृते यहनि संतीति, पंडिमनिर्झरिमा पुलसमूहरूपां दूरदेशगामिनींच मुगंधिं सद्गंधिकां शुभमुरभिन्योगंधान्तरेन्यः पकागान्मनोहराया सा तथा तांघ महतामोधनकारेण प्राकृतत्वावाहितीयार्थं तृतीया महती मित्यर्थः । गंधप्रापि यायद्विगंधपुदलैाणेद्रियस्य समिरुपमायते तावती पुदलमंहति रुपधारा दंधमाणिरित्युच्यते तांनिरंतरंमुवंत इत्यर्थः, तथा शुभाः प्रधानाः सेतपोमाः मालवालपाण्योवा के तषो वगाला अनेकरूपायेपान्ते तथा रथाः क्रीडारथादयः यानानि उक्तवत्यमाणातिरिक्तानि शकटादीनि याहनानि युग्यामि गोलविषयमसिद्धा निहितप्रमाणानि चतुरस्रयेदिकायुतानि नरयानानि गियिकाः फूटाकारणाच्छादिताः जपानविशेषाः स्पंदमानिकाः पुरुपप्रमाणजपानविशेपाः भ मेकपारपादीनामघोविस्तीर्ण वारप्रविमोचनं येपुते लथा, पामादीया इत्यादि माग्यत् । अथ वनपंडस्य भूमिभागवर्णनमाह । तस्यणमिति पूर्ववत् य मपंडस्यांत मध्येबहु प्रत्यंतं ममोयहुममः भवासीरमणीयय सतथा भूमिभागः प्रातः । कीदृश इस्याए । से इति तत् सकललोकासिवं यति दृष्टां तोपदर्शने मामेति गिप्पामंत्रणे एइति याक्यालंकारे, प्रालिंगोमुरणी पाद्यविशेष तस्य पुफरचर्मपुटक तरिकलात्यंतसममिति तेनोपमाफियते, इ तिगम्दामपियस्योपमाभूतयराममानिधीतकाः याशब्दाः समुच्चये यायध्यादेन यहुसमत्ववर्णकोमणिलक्षणवर्णकर ग्राम प्रति । सघायं मुहंग तस्सणं वणसंझरस अंतो बहुसमरमणिों नूमिनाए पणते? सेजहाणामए थालिंगपुस्करेडचा जाय तस्य धनगरस्यान्त बहुसमरमणीयो भूमिभागः प्राप्तः. सपपा नामकः मालिशपुफरमिय यावत् ताप्लेषनपंडना मध्याई अत्यतमम रमणीक मनोहर भूभी भाग फलो तीर्थंकरई । सेन्ते दृष्टांत फरी कहै छई जिमकोईफ शासिंगतमादलप्रमुरा पाजो तेहनां चमर्मपुट जेहयोममामणीक को बनायो । पूर्वनीपरक{प्राछा मामासने परेव का नोमणधे यो सनी पसी मांगी कोमल) ॥ मूल॥ 5:2128kotaste-minist सनुवाद भाषा সাপ থাকা শাসন বা ধ্বংসই দুয়া শয়ন বা গুণ থা স্লা হল যা শানু পা গল্প বলা যায় যা যা বাধা বা ঘি বা গীষার্থগহিস সারথযশহিগৰানীদি যায়নি দুদশায় গণঝ শসা মােঃ বদি সুধা গাসলেমা খনিবিদ সখি বৃষ্টি পৰীষ্টি বৃক্ষাবিনি। : : আশানুস *** অবশপশ হল সুশাসখানিবাসী নৃ ইয়াহসমূহবিগাঁদাঃ বদল' গল্পলামাগ::: পিপিপি সিম অনুয়ার। যথা গাড়ীগুলাষীস বিগগিলঃ মাসযাদি, জামে ম গ :: পুলে ধরধি অপসাস্থ্যসীমান্ধবিস্কর্যোম্যবাদ নৃপসিবি, গীঘা সীলগালথাৰি এলিগ্য : সপসি আর গান গণি পায়য়া বাধি ॥ প্রথাবি সশস স্কীলসার গৃষি খাসী। :.. সুধপথ নি মুগল সাঃ দিপ যা যা প্রদ: যা লক্ষণী সঃ কান্তি মন, গন্তবিসর্গ সখয়া দিলু প্রস স্কুল বিহিষাসন্তিপিনি পাা। যথা Sংঘ বন্ধু পয়সি সয়া যাবি য : ৭ গণপিগাগা। দুপঃদ খুন যা ঘাথিঘাধি নাছিমলি পানি দূষিঘাস সাবিনালিপ লাগা রক্ষায় খ. : পাগলিঘাখিস। জনবিসিবি। স্থায়ীদিঘীদা সানি বদ এবীন মৃত্যায় মমিনুঃ ময়: যা লিধাদিসসাসাই আশি সব দুলালিশি মা ঃ সামান্য বিন্ধঃ সঃ জি এম সাল... | जाणायिहपंचयगोहिं मणीहि तणेहिं उबमोजिए तंजहा- किरहेहिं থাসাধিত্বঃ লিপি প্রদান কথাপি। পথ-কর: (নীলাদ্বিধাবিল মন্বিষ্টি) খালাসালগ্রাসে ঘপথ। দীগন্ধান্ধীস্বাঘাসস্থা বহ্মঘান্ধিাবী (সাল্লালাবদাহ। 1 সুপ | ধা + ' प-Napa ॥टीका AMERAACHAreater-n..-..maem. पीला ArAnjanा पापाचन विशेषांहमि गारणारति सतण विशेषी सम्पमणिलक्षणयेदिती लोका Henna maa पर सागरतनानीमा पaaa प्रतीमा तामांभातपाविरिया चित्रमालेखोयेपुते तथा किमुक्तमयति मायादि mehi Maa मोममायामा मायेनेनपातः भरि सत्यादि विशेषण इयं प्रावत, सर्व भूतनानाविधः पंपयामणिभिस्तुणधोपयो भि neeti लोक एवंाति एवनमुना प्रकारेणगोषोपिनीलादिकोषों मणितणविशेषणतया योजनोयो, यथा नीलपणे alimmineni चुना रामपितृडानां गंभः स्पर्गः गनपतव्यः सपा तस्यवनपंडस्प भूमिगागे पुफरिगपः पर्वतका गृहका Ferrar भिलो शिलापा नेता दिप प्रायोपाः । भवंतिहि मूत्रकाराणां गचित्र्यादीदृगामिलापवार्षकानि एवं जाय तहेय सपाईय प मजा का प्रसारक परामियानि प्रतिदेश पाति मावि पदाह कायादेसग्गहरणं कत्यहभणंति निस्वसेसाई उकमकमाई का परनिहतातिपत रनमामिमायामिव्यात जीवाभिगमादि संयोता क्रियान् पाठीलिख्यते तत्यणं सेकिलामणीतलायतसिणं अपमेया यापत्तीतजा हावामए जोमूते दवा मंजपेवा संजखे इवा कसलेषा मासीच्या ममीगुलिपाइया गवलेवा गवलगुलिया या म मारेर मनराली रवा भरपतहार वा फ्लेवा पारिहया परपुरवा गएइया गयकलभेड़वा किलमध्येहवा किलफेसरोहया भागास सिकिहालोए रवा निमारपोरेवा निवजीवे या भवेएपारवे गोलमा-णी गई सम तेणं कलामणी तणाय तो बहतरयाय बगरारेष मस्ताव मखामतराव पक्ष पलता इति, व्याख्या तत्यमित्यादि तत्रतेषां पश्यानांमणीनां तपानांच मध्ये पमिति प्रा एवं यसो गंधो फासी सद्दी । पुस्करिणीतपयगा घरगा मंयगा पुढविसिलाबहगा य णेयका, एवं पर्चा गया व गन्दः पुफरिष्यः पर्वतकाः गृहकालि गाहपका प्रायोगिलापरका च नेतष्याः लवा पाठशाइननभूनिभाणेपूवादीहाप-पर्वतगमयन गायापुश्पृायोसिलापटक एतलोवस्तुमर्यजीपाभिगममूत्रधीजाणयो । ॥ मूल ॥ .txoxcxoxoxoxo. अनुवाद। tr" जंबूझोप भागा२६॥ प्रथमदार ग्यत् यतेमा माय स्तनानिष पहरयेवसिपेस इति वचनं भाषाक्रमा। तमिणमित्यादि मनाए इयतप या वृद प्रारंभ समये जलायेदितश्रा, तरपेव प्रायोऽसिकालिम संभवात, इतिगदपमाभूतया नामपरितमाहियोतका यागदपमानान्तर:- या मनुष्ये, एवं सर्वत्र इति वा सन्दीदरल्यो । अंगमं सीयोरांजग रवयिगेपोया सन्ननंदीपमल्लिकामला नेहायागकटावणोदय मित्यपरेक : दीपगिनापतितं मयी तदेवकालं वायभानमादिषु मामग्री विशेषेपपोलितं मपोगुलिका पोलित बसतगुटिका गवलंगापिंगृहं तदपिकापमा.. परितनत्यग्भागंगा तवैवविशिष्टस्य मालिप्रः मुंभषात, तथा तस्पैषमाहिपाप निशितासारनियंतिना गुदिका गयालगुटिका चमरामतीतः ..." रावलो चमरपति तथा घमरपत्रमार जमरायपत्र पर लय भार सदंतर्गतो विगिष्टश्यामसोपषितः देगः अयूफलंप्रतीतं श्रादारिष्टः कोमल परपुष्टः कोकिला गजोगशकलमव प्रसिद्धी मसर्पः कृष्नयःसपंजातिविशेषः कालकेमरा कृपयनः आकाशपिग्गलं गरदिमेघमुखमाकायरा : - वि कृष्णमतीय प्रतिभातीति तदुपादान कामाशोक कानमभ्योर कानयंधुजीयाः प्रगोकफपयोरयंपुनीयतभेदा: गोफादपोहि पंचयाभयं - - तः शेषपुदामा कामयाहयं एतापायुक्त भगवंत गौतमः पृष्यति । भयेण्यागयेाति भवेत्मयीनां तहानांप कानावः एतदूमो जीमूतादिनम:' मुपाठायास्प मनभूत्रतायेदितप्पा भगवानाह-गीतमनापमः समर्पः नायमः उपपनो पदुतण्यंभूतः कात्रीयोमणीनां तृवानांच किंतुते कान परतवानिमहतो जीमूतादेः सकाशादिस्तरका एव कृानेभयपणेन इंमिततरकाएय तत्र किंचिदकांतमपिपांचिदिष्टतरंभवति ततोऽकांतताप त्यमाह कांततरफा एव अतिस्निग्धमनीहारिकालिमोपचितया जीमूतादः कमनीयतरका एय, अतम्य मनोउत्तरका मनमात्रायते अनुकूलतः" प्रवृति विषयो क्रियते इति मनोमा मनोनुकलाः ततः प्रकर्ष वियशायांतरप् प्रत्ययः तत्र मनाशमपि किंचिन्मध्यम भयति, तवः मोत्कपति::: मार्षमाह । मन प्रापतरका एव दृष्ट्यांमनामि भामु पंति धात्मयतांनयंतीतिमनापाः ततः प्रकर्ष पियक्षायांतरप् प्रत्ययः प्राकृतस्वात् प. मकारेमशामतरा इति भवति । अषयाकोपियदः कायापि प्रसिद्धी भवतीति नानादेशजयिनयानुयहाथं एकाधिका एपेगिन्दा इति। तत्या नीलगा मपोवणाप तेमिदं शपमेपारवे यषणापासे परखते वंहा सेजहाणामर मिंगेइया भिंगपत्ते या पामेइया चामपिया मुगावा मुल जिदार मा नीलोया पोलीभेए इवा मोलीगुलिया था सागाड्या उतए इया यगराईच्या हलपरवमय इया मोरगोया इया पारयणगीया इवा भप मिमी वा पापकुगुमेहवा अंगणके सिपाकुसुम इया णोलुपतया पोलासोए इया सीलकणधीरे इवा खोलयंभुगोवे या भयेण्याचे गोत्रमा पोप ने खोलामको तातो तरयाषेय कंततरयोग्य मणुयणतरयाचेप मणामतरमाचेव वगणणं पणत्तेति पदपोजना माग्यत् भंगः कोदविशेषः परमल मंगपतधैव कीटविशेपमपम शुकः कीर: गुकपिाछ गुफस्यपत्रंसिई पापा पतिविशेषः चापपिछतायपिछ नौलोमसिद्धा नीलीभेदो गोलोरोदर नीलीगुलिका श्यामाकोधान्यविशेषः प्रजापनायांतु सामाइति पाठस्त प्रश्यामाप्रियंगुः उचंचगी दंतरागः यनराजी प्रतीता पोभलभद्र स्तरययममंतय किलमोल भपति सर्वदेवमली गोरगरीरस्वामीभाकारोति नीलमेव पर परिधत्ते मयूरग्रीया पारायतमीषा भतभीकु भुभयाणकुसुमानि यतीतानि अंजनकेशिका पनापतिविशेपा तस्याः कुसुमं नीलोत्पलं कुपल नीलायोकनीलकणधीर मौलयंभुगीया भशीकादिया विगेशः भवे एपारवे रत्यादि प्रापत् व्यास्येयं । तत्यणंगेतेलोहिणगामणी सणाय तेसिणं भयमेपासवे ययणावासे पराणते तंजहा सेजाणामए सस गहिरेवा उहिरोया पहिरोया मणुकसाहिरे वा गहिसरुहिरे या यालिंदगोषएपया संकरभरा या गुंजहरागे वा जायरिंगुलि एवा सिलापमाले या पयालंकुरे इवा लोहियरकमणी श्या लरफारसे या किमिराग कयले इषा पीणपिहरासी या भामुखपशुममें या किमुशका या पालिययेकुगु वा रगुपले प्रथा रत्तासोए इया रत्तकणवीरे या रसबंधुगोपे हया भवे एपारवे गोलमा पोरण सम वं लोहियगागपी तपाय तो रस्सरपाप फंसतरयाधेय मणुरकतरपायेव भणामतरपाय वर्ण पणत्तेलि । मगहरूधिरं मतीतं सरन्यावरणायक पिरंपरा शूर सरपरुधिरं मनुष्यरुधिरंप प्रतीत एतामिहि शेपरुधिरज्यो लोहित वोएकटानि भयंति सेनेपामुपादामं पालेंदगोपना बयोगा तगोषका सहिमा सम्पत् पांघुरो भवति तत्तो यालगणं.गोपका पापट फालभाषी मोरवियपा बालदिवाकरः प्रथममुदनन् । पं. सरितपरको भवतीति यालपदोपादाम संपावरागो वर्षामु संध्यासमयभाषी सा गुंगारक्तिका तापा प्रताप गुंगाराम मुंगा पतिर भवति मलि का प्रमो गाईगहर्ष जारिगुल को या गिलो मवाल प्रशालमागारत विशेषाप्रपालामुरलीपुर री टीका ॥ प्रमा পনি যখনীলসংগীগন্ধমাদন বিধিমালয়েলিগ: শ্যামন্তুি নিয়ন্থিঃ ইলিয়ঙ্কলঃ এর पिट निर ताराशिः अपामुमकिंगुरुकुमपारिजातकुमुमरकोत्यारागोकरक्तकणयोरायगीयाः मतीताः भोगपारये इत्यादि प्रा तत्व शनिवामयी तवाय सिखं अपमेयान साहाया पगाइसे जहा सेजवाणामए पगे या चंपगध्यासी दया पगार था रविवालिभिम वा इनिता गुलिया था इणिपाणिया या पलियालियागुलिपा हवा पिवया विवरंगरागे या घरकणगे इथा परक मनिया वायुरिममया मना मेरपा पगमुमे या कोहियाकुमुमे या कोरंटमबदामे या महागुमे या पोयाहिपा बने या मुमरियागुमनेरवा मुरिरहिया कुमुमे गया बीग कुमुइया पीयालोग या पीतकायोरे या पोप्रयंधुनीये इया भवे एपास प्रभा भोप मनन शनिवारपोवणाय समोहतराव नाय वावं पणातत्यादि पदयोगना प्राग्वत्, पंपका सामान्यतः मुपचय pr: पपरी पुरंपरा का मुवपदः हरिद्राव्यता हरिद्राभेदो हरिद्वादः हरिद्वागुप्लिका हरिद्वामारनियंतितागुटिं मालिका शिक्षोविकारमा uatar हरितालिकाभेदो हरितालिकाद: हरितालिकागुलिका हरितालिकारसनियंतिागुटिका चिकुरो शिविगान विद्यारमयोगनिमिनो बलादीरागः परं प्रधान परकनकं पीतमुवम् मित्यर्थः, परकनकं तप निघः मिकपोयाक्यपहरे गारपुरुषी सामुदेवाय वम वक्त तद्विकिपपीतभेय भवतीति सदुपारा अकीकुमुम लोकतोऽयमे चंपककुमुमं मुषणेचंपककुसुमं कू गरिका में पुरानीपुण कोरिमायराम कोरंटरः पुष्पजातिविशेषः मथ कंटासेलिना संभाते समाला हितागीति कृत्यामा If afrain मालानमुरारिवारिक भरनीति दाम पहरा तडयद सागो तस्याः कुमुगं तश्यहा मुगुम,सपा पोषावकीकुमुमं भुय रविवार की तिथिका नाति विशेषः योन्त्रकोवृत्तविशेषः प्रतीतक्षय कुमम पीनागोमादयोग्यता से पूर्वपत् ॥ सत्य जेते frammarगि अपने पार पाशाने पण हा मेहासामय सके हवा मोरया मोरपूर या कोचाधानी या हारावली या य गावामी रा नाला भोजनमा माणिविरामी का कुंदपुरमामो इवा फगुमरामी इया गुरुनियाडिमा पा पेषु ..--x-----air-......... - ॥टीक्षा +alam marma रखा गईने मगरने का पौरोप या सिंदुवारमाबदामे पता गेलामोए या अपधीरे या मेलयं भारभ गोषमा लोप मन मुशिधामणीतलापरतो पतराव गाय पणणं पाता तारामित्यादिपदयोजनामाग्यर, कोविशेष. muो मालिनी कुपवविशेषः दर्शगंगावलादि दाउदयनरालिगुलाभयंतीत्युपाता। दधिधमोदधिपिंडा पोरगतीत rryrarयमानमतितापानमा सोर कपालिहारावलिहंगावलि दलाकापलमा मफटार्याः सायलिपदोपादा वरिफट्यातिपादनाचं मोनागारिए भावण मतिविम्बिता पापंक्ति शारदिफलाहकः गरकालभायोमेपः मातधीतरप्यपहा मातीग्निसंपतो ऽतिमिर्मती कृती तो भनिनादित सन्मानेमातितजितो हप्यभपः पह, भन्यतु बाचपसे मातेनाग्निरांयोगेन पीतागोधितो सूप्यपदा, गालिपिष्टं गाणिपूर्ण Infor jxदपुयाशिः कुमुदाशिव स्परः पाडोमामवादिफलिका माप क्षचिवेगविशेपेगुफामती अतीय शुक्ला भय त्यतस्तदुपादानं पेगिं जिस पेशं नपूरपि तमध्यतिनीमिंना भाषातिगुळ ति तदुपन्यामः विमपटिशनीकंदः मृणालं पटनतंतुः पागजदंतादिका उत्तामार्थाः नयर सिं दुपारोनिर्मुसोतस्ममापदाम माग्वत् भवे एपारये इत्यादि भावितायें तदेयमुक्त वर्ण स्वरूपं । संमतिगंधस्वरूपप्रतिपादनार्थमाह ॥ तमिरा भंते गणी पापपरिमए गंधे पणते से जहा कोहपुडाल्या तगरपुडाण्या गलापुटाण्या घोसपुडाणया गरुपुडाणया दगणगपुडाणया कुंकुमपुराणया पंदण पुराणमा उमीरपुडापा मगपुडालमा जाईपुष्टापया हियापुडाणवा मल्लिमापुडाणया लाणमल्लियापुहाणयां फेमइहरणथा पाहतपुराणया पानिपापुहालया अगापुराण्या लवंगपुराणम वाशपुष्ठाणया फापूरपुडाण्या अणुयायंमिउद्भिजमापाणया कुष्टिप्रमाणापा रुपिझमाणा पाहिरिशम पाषा परि जमावापवा भंडात भर भाइरिजमाणाणं उगला मणुणा गणहरा पाणमगोनि पफरा सब समंता गंधा शभिणिस्मयंति गधे पपासवे गोत्रमा यो रप समहे सेमिणं भषीणमतवाणपतो इतरराधेय जाप मणीमतररय गंधे पण ॥ तेषां जगतीपटरवरदिफायनर RATE भोपामांचकोशीगंधा भगवानाद गौतम भेगहाणामर इत्यादि।प्राकृतत्वात् मेनिथ पचनाः सेयपानाम गालिया पाकर मिना पतीनि नया की गपदक्ष नपुटा फोटपुटा पा पागना गयंत्रमगुपपा। पर गकम्प पुदल माथी गतागो सी Tr: प्रगति गवयापासवान् तनो यदुवचनं सगरमपि गन्नद्रष्य गलाः मसीताः योगम्घद्रयं पंपकदगगक सुभदनोगोरगम्यता: विकामतिरामानमनिशाकेतकीपाटलानथमालिकानगानगवामका राशि प्रतीतानि नषरमुगीरं वीरूम मान प्रकचित हिरियेरपुवाण: मिनीवर पुरानो पासपुटाना मानममिका सानयोग्योमल्लिकापियेषः एतेषा मनुयाते शाम्रायमपिपक्षितपुरुषाणामनुफूलेषाते वा!: नि नियमानाना मुख्यमानानां निर्मिद्यमानानां नितरामतिगमैन भिद्यमानानां कोटिझमहोचया दति इहपुटैः परिमितानि यानि ": दिगमशागि काम्यपि परिमेय परिमाषोपचारात् कोष्टपुटादीनी रपुष्यते तेषां फुटपमानाना मुद्गलादिपशुधगानानां रुपिनमाणाणया इति ... गरीक्रियमादाना या विशेषगवयं कोहादि शाखामरमेयं तपांमापः कुटन मसांडोफरण मभयात् नतु पूपिशादीनां तपावरकीर्यमाणाना। कारिणि कोष्टादिपटाला कोटादिवाणां वा उशिस्यमानानां तयाविकीर्यमाणाना मितस्ततो विमकोर्षमाणानां परिभुन्यमानानां परिभोगाय": मामान निन् परिमापद्यमावावा इति पाठमात्र परिभाज्यमानानां पायंवर्तियोमना मनाम दीयभामानां सयाभांशत् स्थानादेकर ::: wi मानांगर मंदिपमालामा उदारा: सारास्तेाऽमनोमान्नपिनयंत्यतमाह, मनोधामनोनुकला सवभनोशाय फुप्त. इत्याह, ममोहरा संस्थात्माननीगि मोरा पतलमो मनोमा सदपि मनोहरलाकुत इत्याह माणमनोमितिकरा: मासासघियतःमुशोत्पाद: पमा मना दिनु भयंतत: मामारपेमगंधा मिनिराति जिप्रतामभिगं निरमरंति एवमुक्तगिष्यः पृष्यति भयेदेतद्रूपः भगयामाह-ग..": माय मम मितीमांकाना तातरस्येव पावन्मान प्रापतरायगन्धः माइति ॥ तसिएं भन्ने मणीएं सपाखाणय फेरिसए : एने मेगावामए भारपाया कराया गया एपीए रा मंगलवली पश मिरीममुमनियर षा पालमुमुदपतरामी प्रथा भये ए.. : ने मानो मिग मी तयाप तो नागनेय जाप कामे पत्ते सेषां भदन्त मशीनां गानांप कीदृगा स्पर्ग: HTRA ... गौतम गंभापा रसादिगण अनिवार्ममयं व कप की मरम यूरो वनापतिविशेपः नवनीतं ग्रहणं मामूली .:: कतिपय प्रा बापानि पिकामातानिपानि मुदपत्राति रोपांराणिक विद्यालगुमपपरागिरिशिपाटः भये एया को इत्यादि पूर्ववत .
N 10408CKorcyxxAC-I-23:- ॥ टीका॥ एमा (a 40 RIVERोनपाप पुकारास्पुित िमानिंदापं नंदापं एडपाणं वेश्यावं कपियाणं पालियाणं दिपाई पहिपाणं राभिमा राखिए पहले गोमना गावानए मिविया एका पदमापिसा एका रहाण्यास उत्तरस रानयास सपंटापारा सपाटीपरम सतो বয়ষে খাযীখৰ খাতিষশাবমেক্ষিণ ইন্সবিলিথিৱন্ধবিমল থিয়ালের কালাে सम्बएपनि ताना मारलनुपडत्तरप बुसलमानसाविभुसंपगादिश्वरम गरमययत्तीसतूणपरिमडियास सकंकडावयंमगरस सचायक থাঙ্কোকােপাগোস দুষমা দ্বিধা কংখি দেবি বিভিনবিলাসিদাষ গুলো হয় যা রূবালি, Posw पता अभिविपति भवे एपानवे सिमापो एण्डे समई अवष्याणा, तेपांमणीनां तृणानांच भदन्त पूर्षापरदक्षिणोत्तरागते यात नॉनमिताको मारिताना पिपता कंपिवानां एतदेव पर्यापशद याचष्टे कंपितामामिति तथा पालिवामा मितहासी विनिताना एतदेष पर्या या स्पंदितानानिति तपा पहितानां परस्परं पर्पयुकानां फयं पहिता इत्याह कोमितानां स्वस्थानाचालितानां स्वस्थानाधालनमपिफुत परीस्तिानानुस्यस्पोरिलाना मेरितानां कीदृशः शमा RR भगवानार-गोतम सपथानामका गियिकायावा रपंदमानिकापाया रथस्यया त परिविका पानविशेषतपा परिवादिता कोटाका नया दीर्घा जपान विशेषः पुरुपस्यखममाणायकागदापी स्पंदमामिका शनयोगदः पुरु पोत्पादियोर पुरेमपंटिकादिचलनवरातोपेदिवया रपरणरणः परपेतप्पा नझोडारया तस्साग्रतनविशेषणानामसंभयात्, तरयष फलफयेदि का पाला चाखे पुरुषालपेमाफटिप्रमाणा पसेया तसच रपत्य विशेषणात्यभिपले सत्रएप सध्यमस्य सपंटाकरम उभपपाधायलंपिमहाममा पपंटोपेतस्प पताकाप उलघुषमाप सतोरणारा प्रशतोरणोपेवस्य समंदिपोपाप भादविधतूर्येमिनादोपेताप द्वादशोणिच. संभामुकुं दलालांपिएछ । कंपाला काहलततिमासोशंगोपण्योभयारसमो १ तथा सकिंकिणीकहेगजालपतपरिचितम सहकिंकिणोभिः । मुद्र inपोकानि पानि मजालानि ममपदागपमूराल पतेपुमहिःमदेयेषुपरितिसाव्याप्तः तस्य तथा प्रेमवत हिमवत्पर्वतभा कापक्षिका संचलित मित्यर्थः तपाविध दारू कादं यत्पतरूपा • CORORoko नंदी वापमपमा भाग१६॥ प्रमदा बलभूताय तथा कालायमेन लोहेन मुटु अतिगयेन कृत नमयाइप मित्राणां तरप साकोणागुणव्यांशापेवराः प्रपामामुरगास मुटु भविश्यम सम्यक् प्रयुक्तायोजिवा यस्सिम् सतथा तश्य योहायापान रनिपाता प्राकृतात्यात तया सारपिकरिये कुगला नरामोपा मध्ये प्रतिगयनोकोदवा मारपिस्तनमा सम्यक् परिगृहीतस्य तथा गराषांगतं म त्येक येतानि मागतानि तानि चतानिहात्रिंगमामिच पावाप्रयाः गरगतद्वात्रिंशत्तू पानिमंडितः किमु भयति एयंनाम तानि दाग्रिंशत्याग त मृतानि मानिरथरय भयंता पपैतेधवालविवानि तस्यरणायोपरिपतरपातीयमहमाय भयंतीति, तथा कंकटा कय, प्रयतमः शिरवाणं ताभ्यां मायांत वा तप्प भावापेन ये गरा पानिच कुंतादीनि प्रारणानि पानिपखेटकादीन्या परणानि ते मृत. पूर्णतया योषानां युवं वनिनि HT गुणी मूतोषः सपोपामग्गस्ततः पूर्वपदेन कर्मधारयः तस्य इत्यंभूतस्य राजांगणेया अंतः पुरेया रम्येथा मणिफुष्टिमतले मणियाभूगि पने सभी गाडिकोहि मतलपदेश राजांगणादिप्रदेशयों अभिपति गमागरसेति अभिपदयमानस्य वेगेम गण्यतोयेठदारा मनोजा करांग MAIN गता ममता गया अभिनिरमरंति श्रोतृणामभिमुखं मिरमरंति भये एपामये मिश्राइतिस्पारकपंघिलयदेतद्रूप सोपा मणीनां सृगा GITA HARIHIT नीता नापमा समर्षः पुनरपिगीतमःमाह सेगहाणामय येनालिसारा धोखार उत्तरमंदामुथिनाए अंकेमुपहियाए चंदा miultation रिगाहपाए पसकालसमपंसि मंदमदं पाए वापार चालियाए पष्टियाए फदिपाए सोभिपार उराखान HINAPrhuaint HATIMETHIRTANTRIANTHANIलाभाय भवतीति यतालिकीतस्या येतालिक्यायीणापा उत्तरगंदा HIsaiantam NMHESARHदया उत्तरमंदाभिधया गंधारनराम्तर्गतपा सप्तम्या मूर्छनया मुरिलता सामाः HIMA HAITHHif Hindi oirn neKला लागलोधीपमुगंधारा उतरगंधाराविनयईमापंचमी मुच्छा १ सुदुतरमा . ... । दीका १२९ watima garma garam भिमनिसिपलपोपहायोति वैदूर्यगणिगयानि माटिकपटलगयामिएकाटिफर भिमान यानि AREnमीपदान देगा पाना साला गुग्नेमायतारोजसमधी गगनं मागुगा स्पयतारा चामुरोमोसा wingना नुतोपरेम विषयमनामा तपा माof मुहागि तीर्थागि पागांतास्तथा अप्रयीहायपितस्पपर FAERATोरिमा तनोपमाहारामकोलायोति पत्ताकोषायामांता तथा दोघवषमतामयादीवाइसिगुण मारालपाणयगाए TATA पापतिपापाणुःबोपत्वमभवात् गशेषायां । भानु पूर्याकमेल भोचविसरभावपेण मुघुप्रति गमयोगातोयमा বাম দীপলমন খান সাদমাঃ আলঘুখারীমসলা ব্যাথা মঘা নিসান মহিলারি থাম্বিয়া निengmarवितरपाल हापात्पशलिपसिनोपापियामि, निशामिकंदा: मशालानि पननासानि तथा यहूनामुत्पलकुमुदनलिनमु भादसौगरिकमायोपासप गुलानां विकस्वराणां कोरेिकिंगसिर उपषिता भूता विशेपणस्पयिषपातनिपात: मारुतत्वात पापप समyिपमानानिबमलानि उपलवणमेवत् कुमुदादीनि यामुताः तथा मध्यम स्वरूपतः स्फटिफयत् गुग निर्मलेग मागंतुफमालरहि नमे सनिलेग पूल तथा परिहत्या प्रतिरेरिता प्रतिप्रभूताइत्वः देशोगदोयं पष्ठिहत्यगुटुमायं प्रपश्यंचजाणमाइएंशोतिवचनात् उदाहरणं पात्र पपरि गप रामवलिसमुह मापा हिरोपं महरिताए मणं तुहं विरई इति, चमतो गायकव्यपाः यत्र तापसिहत्यचमन्म PRINपा पा रनिनिघुन मविपरिता इवलतो गमनेन गर्यतो व्याप्त ततःपूर्यपदेन विशेषसमासः एतायाध्यादयः सरासरंपंक्तिपर्ययसा मा प्रत्येकांति एएमतिप्रत्येक नगाभिमुख्यातिपदो मपीसा विषक्षा या:पया मत्येकशदस्य द्विपन मिति पनयरयेदिकायं परिक्षिताःप्रत्येक मरमापरिधिमा अपिता बारमेहका काम यारपादप मागमिष चंद्रहागादि परमामयभिषउदके यासांता तथा अायेकिका यारुण हम नुदस्पेक उदावं यासांता शापेक्षिकाचमिवोदके याांता सापेफिफाः पृतमियोदकं यासांता यायेफिकाः जोदपप इसुरराक्ष्यो द पालांना माविमा जमतरनममा उदकं पामांता ताणगगरगरणोदका सामेकिकाः पदकम स्थायिक AIR पागाईचाइत्यादि मागष संधुदीप - भाग१६॥ मथमदार त् । तामिणं गुष्कार्य गुझियावं यात्री भाव विणतीगं पोपं पोय पाहिगिं पारि गोयामुपदिश्यता पाता लेगिज मिलो पागपरिमार प्रयमेपासये वाया पणते तंगहा वारामपा सेमा रिक्षामया परमाणा येरुनियामा गंमा गुयागप्पगया फलगा यारामया गंधी सीमित्ररकप ईओमूर प्री पाणामणिमया अथलपणा अयनपयाहाम्रो पामाया । इति । अणाया तामांगुष्र्या, सुदिकागो यायद्विग्नपंतीनां प्रत्येक चमणां दिगां ममाहारयनुदिन मिचतुर्दिगि घरवारि एककस्यां दिगि एकेकभायात् त्रिभोपानतिरूपकागि तथा प्रतिविशिष्टं नप पातानि प्रतिएकाणि पाणांमोवामानांशमाहार निमोपानं निमोपामानि च तागि तिग्रपाणिपति विपतममामा विजेपलप्यपरमिपामा मातस्वात तानिमानि पांच रिसोपानमतिहपकाया भपंप शरमाण एतद्रूपो वर्णकनिवेशEATE सप्या पगरयमयानमा भूमेलमिःमामतःदेगा: रिष्ट रवमयानितिमानि विगीपानमूलपादा. वैदूपमपासभाः मुपपर्णमयमयानि फरतकामि त्रिभोपामांगभूनानि यमरगयापूरिताःगंधयः कनकद যাথানাশমাঃ নীৱিকানদানুস ফাসঘখিলোয়াজানীঃ নানাপতিগণ প্রথমবনি প্রার্থনা লঙ্কাননে पालघमरेतुभूताः भवलंयमयाहातो विमिर्गत केचिदपपपाः अपलंयनयहाअपि नानागशिपाया अपलंयागबाहामामुभयोपाययोः अयानधनाप्रप भूताभितया पामाईयायो । त्यादि पदचतुश्यं माग्य तमिणं तिमो पासपधिरुयगारांपुरत पसेपाय तोरणा पता तमिण तोरणा जयमें पालवे यणायामे पण ते धोरण पाशामखिमया गावामणिमएमु भमु उयनियिह मंनियिता विविहमुसंसरोयिया विपिहतारामयो यपिया पहा মিম্বঘেয়েবিছানার্জিতেন্বপেপদসোপসময় বিভিন্ন শায়ন্তনুয়াঘালো সিদ্য বিজ্ঞাপণমনস पशुत्ता वियतीमहरममाणीया दयामाहामकलियाभिसमाखा भिन्निममाणावरकुलो अणलेया मुहफाणायमश्मिरोपच्या पागाईपा ४ पतिपत्रया एपा, मिणमियादि तेषां निधोपानमतिकपकाणां पुरतः प्रत्य के प्रत्ये कंधोरणामि प्रसागि तेषां तोरणाना भयमेतद्रूपो पायामो पर्णकनियंग. मन तथा ते तोरणात्यादि तानि तोरणानि नानामणिमयानि मजयचंद्रशांतादयःविविषमणिमयानि नानामणिमयेप संमेषु उपयिष्टानि मामी पेनस्थितानि तानिध कदाचिवसानि अपया ऽपदपविवामिगंवपेरन् तताह सम्यगनिश्चलतया उपदपरिहारेणध निविष्टानि ततोपिरोपसममाग শ ; ॥टीका fefauা কালিবনিশা শাখানি সামীসীষি খামাখি ধন্যজীবি সলি প্লাবিয়া গল্প মাগি সখা ( সংলই শফিক কফিশালি পাচ্ছে সাফাস্কোলিঘনিক স্বীথি গা ধুকাথা ঘুথা? শ্রাণ সখা * খুলবিয়ায় সে seঘ সা গা ম্যায়ঃ এরশমা এরি। তথ্যঃ aীনা সাবা গলা মিল্লিয়া পি अनागो ये सानिया भोवतया सभापरि पतिका पगारमापा घेदिकपा परिणतानि परिकरितागि संक्ति पाति सिरमणीयानि ता वि oা ধিষিকালিশুধিয়া যাল জ্বী যা নব বর্ষ বি এমশিঅধয় বুলি আরিঘষলাধঃ সঘ সাধ কবিতা নিলীয়ান হৃত্বিানির বিষয়লি ৰীতালি সিপ্ল্যিখ থদি মখ খিলাদি । কালীগ্ধ বলকানগিনী বানীখানি সী বস মানি মঘা মাস্তানি ব্যবস্থাপি বগন্ধানি যাফাদি কথা রি নি কফি থাষাযাযাদি বিহুৰ আপু ম িফযীয বিছানা এই ক্যাথিং যিবিত্ত ও বি থাই গলায় ৪ পাই ও হ্মণ গন্ত ১ হত আগাম চাচা সহ ববি অযে, সব সীমানারীবাহ বা গ ঘদ্বিবা খুনি মহন্তা বা মা নীলা বিষঃ যষি বীয়ায় গুৰি জিভাষা যথাসদ্রয়া দিযন্যমপ্লয় খালি খাসংঘ খামঘো মা শা বা ঘষা সমিঘিয়া বা অন্যান্য বৃষি, বন্যা সায়াখা হয়। ফলে শ্বা পংwঃ প্রশ্ন দেখামখে য ব সতীনিভাৰিহাময়ে:আল মুলা যব বর্ষীয়াহ দাম্প্রং বারি ৪ ক বগী এমব ফীববৈঃ। যখন মা অঞ্জী অসমীজী হয় দীঘা নথ গলগালাপি রাশিয়ান অনস্থায় লিগী বা সৃষি ইয়াৰ সমস্যাৰহ্মা লাকসানিজিনগৰয়হ ঃযাযাদি এ সখিনা সুন । * ww ঝুলাবাসা বা দ্বায়তুল পাস এমঘলা গায় ঘা বাঘা সজ্ঞা সরে যায়। ~~-frana(বাপি গালি গিয়াদি এ প্রশ্নবিল এর গান্ধায় टीका ॥ เศส লিবিদ্বীপ ছিলগৈ থানাঃ বাধিয়াঙ্কা: যদি বারমানি যা খাগলাপি অথ সবগঞ্জঃ কায়সার ममममूर श्रिोपा गर्न पायकाः यायो मसिनरस्त कर यया मुभगइतकाः यया गोगघिसक मश्या पुंडरीका का पहया गतपत्र ram यायामाप्रपाका उत्पलादीनां बाप्या प्राण्यत्, गनेच दातियवादया गयपि गयेरवगया नाप पडिनया प्रति, यायत्करणात या पाडापखा यादि विगपत करवरिया पर्यतकपूर्व पथा तामिर्गगरिकपा वायी जाय पिलतियातत्यतत्य देमे सस्तिहिं पर पाया निपापमया नगांपया दालपापगा दगमंडला दगमंचगा दगगानगा दगपाणाया ममता गुमला अंदोषणा पसंदोलगा गया रमामा साना पहिलवायायातायाधुलिकानां यापीमां यावद्विलपंतीनांमत्र यापत् करणात पुरिगपादिग्रहः पातरालपुर- সস সস সি র ল বগমগন্ধ যাব স্বাবধাঃ যান যখী এস বধ বিবিরাগিৰি চিৰীপ पानि पिपस्या नपन्येन पयंता:, चिनियम पायावतिपाठः तत्र मिपता: महामोग्यत्येगा परिपतापचंताः पत्र व्यंतरदेवदथ्यो भवपारिगोयन वेनिशाण माप: मदा रमी तिभाषा 1 जगतीपयंशाः पर्यसयिशेपाः दारुपर्वतका दाममिमांपिता इय पर्वतकाः दफगठपका: स्कटिफर्मठपका। virya परमाणमा दयामाहा, गलेच दकमंडपशादपः केचित् घरमृता या प्रत्ययः कचित् गुमा लघया क्वचित् गुलगुलगा तिपाठः। नमा अमिला लापताप तथा अंदोषकाः पदपंदोषकार तत्र यत्रागत्य मनुष्या भात्माममान्दोलयंतीति अंदोलका इति लोके प्रसिद्धा, पत्र तुति मायाम मादीमति तपश्यंदोलकाः चांदोलकार पश्पंदोटाकाय सस्मिन् पनपढे तमसार प्रदेश याममंतरदेवदेयोकोडायोग्या यत्र- घामति, वामपना मागतपर्ववाद: कभगा या मरवमया प्राइस्यादि विशेषगात प्राम्यत् । मुग उप्यावयएम गाय प. wim मामलाई काम गामाई मायागया परायामबाई दोहामगार भवामगाई परासणार मगरासा परामवाई भाग भागोववियागया पाया था नाय पहिला इति । प्रत्रयाया । पुरपातपर्यवेषु पायरपश्यदोलकेषु पत्र HITRI पिन पनादिपरिपामनिगागनानि वत्र पेश नागनानामधीमागे माग्यपरिथताः, यया मिंहागनागि सामनानि एवं फ्रॉ- ॥टीफा॥ জানি লাপানি সাখানি শুললানি অযথগনি, সােনালি দিয়ামনি খালালি সাহাবি গলামি যামান wখা, আখানি এ নীলাঃ বমিঃ হে গালি চিন্তাৎসাদি গাদায্যপি ঘরাণাদি ঘনা গান্ধি শ্লান্ত «ি বিজলানি ঘা সীমা নিস্কি বিসসা: লিঙ্কাঃ লালিপিকাঃ বি। প্লগ বক্ষব্যানানা কাহিঙ্গা ঘিী। না। ক জ ল বশব ঘ পথ। ঘনঘ্য চার্ষিী গানে ? শালি যাযষধি কামনুনদীগ যথাস খায়া মাঙ্ক অনু যথা। মানুষ বা যবষযই বমি বই সাবিলা বালিকা কালীঘা সন্তুষ্যবসা - কাল শয়তা প্রষাব ঘসে মীয়ের ব্যাথলা আলমাস কাম বিঘসা শখঘনা গাধা যে লয়া এ প্রায় দ্বিধাবি। মধ্যায়। যেসব অর্থ সমগ মা সব মধ্য অল্প অল্প হয় যদি গাদিসুখি সেদিনিষিদ্ধ সমযানি বৃক্ষাফি সাদি বৃক্ষাবি কালিহি অসংঘদি যিয়ঃ সননি যথাবি কাশি সনাবাশ্বি স্ব সীমনি। ঘসা খণি, সন্তানখাদ্ধাবি য য বায়াসংঘ আঞ্চ বিন্ধা সবির সন্ধ্যায় সানি বিবরি নিধী সনাক্ষত্তি ঘাম স্বচ্ছ কাল কবি সাখন যাবি অঙ্গসংয ঘৰখ যদি অস্থাযি সন্ধান্ধাফি সী- লক্ষাফি সাদ নুমা খেলাপি হাজি আপাদীনিগাথা, গলঙ্কাযি আল বয়া খালানি যুদ্ধায়ি আসামি সাহাসি ঝান্তি, অগহফাবি কঙ্কায়াবিষাদি গন্ধান্তি বিষয়াদি বিষয়াদি যাবি। বায যীলমোলা- কাশি দাঝি। আজোবি মাথােলীঘ বৃক্ষাবি। সখ সুর সুগন্ধা বান্ধিীযথা, ব্যাদি কার্যমুদীবাহু। যা- গাযােধি মা। মা মালিব সার ঘৰ বন্ধু বা সায় বিশ্ববিখ্যায় বযেখাকায় প্রান্বিতায় निगलाच मंरपचमू या ताम परामराम. ताप तायदेगे सरितार पाये जायगा जूरियामंहगा ममियामंहगा मालिया mিmmmmm দিলা ধীণতা লাল মিয়া গান্ধীwগলা পাই হয়ে ১৭ जपूतीप ---- भाग १६ प्रयमद्वार टीका HEESHARE थगा मयरपणामपा जाय विचं फुममिया गायपहिल्या । मायाम्या तम्परपादि पदपोजमा मुगगा । जातिमालती सन्मया गंडपका: जानिम- पहा! , एवं नारत्रापि पदपोजनाका। पूपिका प्रतीता । मासिका यिचकिग्नः । पममानिकापामती स्पृष्टे । एते च तुफप्रपामा पनपनपः, दधिषागुकानाम पनापति पिगेपः मूरिति रपिगएष तंपूनी मागपाती नागो दुगविगेया मण्यानता नागतना पम्प तिपंप तयाविधागागापा T- मृता भालतरपभिधीयते , अतिमुतका पुष्पप्रधान पनापतिः अाफोप्रा पमरपतिविशेषा माग्नुका एकाम्पिकफाला पतयिगेपा माल मंडपका F": कामापका । एतेच कयंभूतापार मवरयणामया इत्यादि प्रापयत्। तेमुणं गाइमंड्यर्गमु जाय मानूया मंडपगेनु याये पुटयोगिनायगा पण सापेगाया मागणमंठिया सापेगडया कोंचामणसंटिसा सापेगहया गमतामण गंठिया सप्पेगाया गयाभणमंदिया अप्पेगाया पणयामणमंटि-: सापेगाया दोहामणगंटिया प्रापगड्या भवागणमंदिया सापेगइया परामण गंठिया अपेगइया मगरामणमंटिपा अप्पेगाया पठगामामंदि" सप्पैगाया मोहागणमंदिया सापेगाया दिमामोयस्यियाममंठिपा अणे पाये परमपयामाथिमिटमंढाणमठिया पणता ? ममणान मो आईणमः अपुरणवणीपरसफा ममक्रमा मारपणामपा प्राध्या नाय पहिल्या । अत्रायास्या । तेषु जातिमंडपकेषु पायत् माग्नुका मंडपकेषु पायरकरणात् । पिका मंहपकादि परिणा, ययः गिलापका प्राप्ताः । तद्यपा-प्रपियांदाथै एक गिलापटका, ईमामनयत् मंस्थितं भायेक्तप्रत्ययविधानात! मंगानं येपनि तपाा एवं चामन मंस्थितादिविशिष्टमपि वाच्यं । अन्येच यायः शिलापटकाः यानिविशिष्टविनानि विगिटनामानिचयराणि प्रधानानि गपनामि लाममामि च तद्वत् मंस्थिता परगयमाममविगिष्टमम्याम मंम्पिताः । क्षषित् मामलमुपदृषिमिटमंठाहणमंटिपा इतिपाठः । तान्येष पक्ष्या गिनापका मामला पय मामला प्रकठिना इरपर्यः अपुष्टा व मुफ्ष्टा प्रतिगम मममा इतिमायः । विगिष्टमम्याम मंस्पिताल ग्रमण ? आयुमन पाईयोपादि गुमिति । अय प्रश्नुतमूत्र मनुप्रियते तयणमिति ॥ त्रयाण दिपु पापनाना रुपगंग्यान मंग्धित पधियी शिलापट मितिपयत । पपया गुणमामले प्राप्रपंतिया अपनी ॥ टीका संदीप मरगा ॥३२॥ मोपलवणात् नितीत्यादिकांगे जोयाभिगमोकोलिखितोस्ति , सिटति हुई स्थानेष यसते , निपोदंति उपयति । नुप्रतित्तिरवर्तनं कुर्व- विधामपायता परापत्य दक्षिण पामावतिष्टते । दक्षिण पार्थतो या परावृत्य वामपाधैमाव तिष्टते इति । रमते रतिमायाति तथा लतंति मग सिस या भवति तथा पति इतिभावः । तपा क्रीडति पपा मुरा मिस्ततोगमम विमोदेग गौतनत्यादिविनोदेन या अवतिष्टते । तथा मो. हंति मैयुग सेवां कुर्वति । इत्येवं पुरापोराणाणं मित्यादि. पुरा पूर्व प्राभये इतिभावः । तामां कर्मणा मितियोगः। अतएष पौराणानां सुचीयांना मुचरितामांह सुधारित जमितं फर्मापिकार्य कारणोपचारात् मुचरित गिति विवक्षितं । ततोयंभापार्थः विशिष्ट तथाविध धर्मानुष्ठान विषया SR. भादकरणशांत्याहि सुपरितानामिति । तथा सुपरा फ्रांतानां भवापि कार्य कारणोपचारात् सुपरा क्रांत जनितानि नपरा क्रांतानि इत्युक्तं भवति । सफल सत्यभेत्री सत्यभा शुभानां शुभकालाना , पह किषिद शुभफल गपि इन्द्रिय मति विपासात् शुभफलमाभासि सत तात्विक शुभफरत प्रतिप. तत्यणं यहये वाणमंतरा देवा देवीय पासयंति सयंति चिठति णिसिप्रति तुशहंति रमं ति ललंति कोलंति मोहंति पुरापोरापाणं सुपरिवंताणं सुनाणं कहाणाणं फार्ण करमाणं वत्र पस्यो पानयान्तरा देवा देव्या अश्रयन्ति शेरते तिन्ति नियोदन्ति तुमचन्ति ( तिग्वतंगमुनीत्यः) বগলা-লনি ক্ষিনি শীলি হামীয়ালা সুগালন্য। হৃদয়বান মামা রূপ सस्था तिहा सम रमणीक भूमी भाग ने विर्षे ॥ पाण वाण यिन्तर देवता अमें देयो पाउ सानपर्छ । १७ मूष । विभा रहता है। पिर. रथे । तु० पासोपालो छे । २० चल माच्छाई पाई। को क्रीडा विगोद कर हे । मोड मैपुन भेया करें । पू. पूर्व भई म. भली पर पाया करमा एहवा । . मुभवाया । का कल्याणकारीक्षा । क कोपा एषा करें, पुष्पकप क मा क ते हो। L haite.
प्रथमदार - - गए फलदायिना, बरवा कल्यागागा गग पगमा न्यrmin. त्पकमनुभयंतो विहरति । मायते तदेवं पत्रवर येदिकाया निम्पित वन पायोan पंप्रनिगमागमा यांगित वमपंह यातयतामभिधिष्णु राए । तीमे जमाए प्रत्यादि । तया जगत्या तपरि पनवर दिखाया अंतर्मधे या प्रदेगः गनगिन् मानेभो पर पंह FIRE ? देगोने योजने विभेन येदिका पर या वेदिका गामगकम्युम्पः परिषेध । समावः । पत्र पर यदिशाया यागन मा. पि, सप्र पटर पर येदिका पतिः प्रदेगात् बनाः पंचधा गतागममेयत्परिपापुमायं तत्र वियमित मनपलादिति । कित्ति जनोपामिगि पदेन पथस्विनपंडयद विपेश यमरांड वकोपाधः । मयर गयिधीनो माग पत्र पमन्य गोपि पनगद नाभिपीगगे उगाना मगर काखाणं फलयिप्तिबिसिसे पचणुनयमाणा विहरति तीसेणं जगईए उप्पि अंना पउमयरयेईयाए एत्यर्ण पुगे महं यणसंडे पणते ? देमूणाई दोजोशणाई विरकं नेणं घेडयासमए परियेणं किरहे जाय तणविहगो अधी, जयद्दीवस्मर्ण फस्या फणवित्तिविशेषम् प्रत्येकमनुभयन्तो विहरन्ति, वस्या जगत्या उपर्यन्तः पनवरयेदिकापाः अत्र यशोमान् यमगत : दगान दंगान में विफभेन, वेदिकाममः, परिपेठ कानो यावत् (अनेनच पहियन राषष्टय दविशेषेण यनरापास्यर्गको याचा) वििरनी नेता जम्पद्वीपय कन्याम कारी फल विपाक पिक वृति विशेष ते प्रते ५० प्रतेक भोगयता यि विचराख तो ते जगतीना पर प. पत्ररारका न माहले पाम एक एक मोटो या वनपंट पर ममूह प. सद्यो ती फरई? दे काकत्रपां दो ये पोत्रम यि पोहुनपणां ये पत्रमा घेदिका सरीयो पर परिधिपणे कि कालोइंगवणं यावत् तृपयिणा गांखया रतण गरी सामुदीपगा द्वारगंख्या को बाजीप. मनु टीका पदार पद मिहीनो ! ) उपलपणत्वादस्य मणिशद विहीमोपि पर पर वैदिकांवरिततया तयाविध याता भावतो गयोमा तामाया पलमेन परम्पर संघाभावात् राष्ट्राभाव: सपथ घायमर्थः जीवाभिगम सूत्र त्योस्तथैव दर्शमादिति । संप्रति जंयूद्वीपस्य द्वारसंख्या प्ररूपणाचे माह । जघुवीयप पमित्यादि पर भू मार निर्षचने उभे अपि भुगमे । मपरं पूर्णतः पादक्षिण्येन विजयादीमिद्वाराणिमामि , द्वारायामेय स्थान विशेष नि- पमगायाह कारण भतरत्यादि । क भदंत । जंयुद्धीपप द्वीपस्प पिजपमिति प्रमिई मामेति प्रातत्यार विभक्ति विपरिणामेन नामा द्वार प्रासं भगषागार । गौतम ! जमूद्वीपे द्वीपे यो मंदर पर्यतो मेरुगिरिः सस्य पुरस्थिति पूर्यस्यां दिशि पंचचत्वारिंशत् योजनसहस्राणिश्यतिम्रज्याति क्रम्म जयदीप द्वीपपौरस्त्य पर्यन्ते लयणभमुद्रपूर्वादस्य पवत्यिमणंति पाक्षात्येमागे शोताया महानद्या परिसः प्रदेश इति गम्यं । एतस्मिन्जयूदी- जादीयरुस कइ दारा पणता? गोयमा घतोरि दौरा पणता ? तंजहा~विजएवै जयंते २ जयंते ३ थपराजिते४ कहिणं भंतेजंबुद्दीवस्स दीवस्स विजएणाम दारे पणते ? गोयमा! जंयुद्दीवे दीवे, मंदरस्स पव्यस्स पुरित्यिमेणं पणयालीसं जोयणसहस्साई भदन्त! द्वीपस्य कति द्वाराणि प्रशानि? गौतम! चस्मारिद्वाराणि प्राप्तामि? यथा-विजयम् जयन्तम् जपनामपराजितम् ४ भदन्त ।। म्यूद्वीपस्य द्वीपस, विजय मामा द्वारम् मम्मम् ? गीतमा जम्बूद्वीपे द्वीपे, मन्दाय पर्यतस्य (मेरुपर्यतस्प) पूर्वस्याम् पश्यत्यारिंगोजमसहस्राषि नामा द्वीपर्ने भगवान् ! फेतलांद्वारकां तीर्थंकर भगवन्तकहबई, गोतम ! १० घ्यारद्वार कहा ? सेवामा विशयद्वार पूर्यदिशि । जप नाद्वार दक्षिणदिसि २ जयंतद्वार पधिमदिमि ३ अपराजितद्वार उत्तरदिसि ५ फ० किहा भगवन् ! जंपुदीपनाभाद्वीपन, विजयमा द्वारको भात कहर, गौतम ! जपूतीपने विषै, मं० मेगपश्यने पु. पूर्षदिशिने मिषाई . ५० पपतालोसार जोपन ५० ज तिवार "मूल।
पदीय टीका गमदार प्रम्य द्वीपण विजयं नाना द्वार प्रsi ? प्रष्टीपोजमापूर्वागत्वेन पायारियोजनामि विष्कमेन विस्तारेण । इद पद्वारविकाममान स्थूलन्यानो- i, मकवानु विभागमाम द्वाणायिकाप्रमत्कफोगदपप्रोपे माईयोमप्रमाणं भवति, राम विषशितमिलि ॥ तायाय पेय पर्यमे गि तागेर पायारीत्यय । पोजमामि प्रोन मितियास्यामा फशंभूत मित्याह । येतं तथर्मोपेतं याहुल्यमा फरनमपस्यात्, घरफनका पिका घरकमका परकमकमयी जूपिका गित पम्य तत् । पप गेपं द्वारपर्णक राजधानीवाणु चातिदेगेनाइ ॥ जायेत्यादि । योयनद्वारम्य धर्मको वनांची जात पडामोति. याद्राजधानी चकच जोयाभिगमोपांगोको निरपरोपी पत्रव्य, सत्र प्रथमं द्वारयाण की पपा- हामिग मम मुलगा मगर विग बालग किंमर कम नरम चमा कुंगा यात पगराप भत्ति चित, रांभुग्गय यर चपा परिगयाभिरामे, विनाहर गमल गुबल ईग्रहमा जंयुट्टीयदीव, पुरत्यिमरते लवणममुहास पुरत्यिमास पहत्यिमेणं साझाए महाण इंए उणिं त्यणं जंयुट्टीयस्म विजए णामं दारं पण ? अरु जोषणाई उहं उच्चत्तेणं चतारि जोय णाई विरकमेणं ताबयंचेय पयेणं सेए वरणगस्यूलियाए जाय दारस्म वणन जाब रायहाणी प्रिय टीपीपपीरस्यनम्नयाममा पूर्वाग्य पाशात्ये मीतामा महागद्यापरिसप्रजम्यूद्वीपसा विजयनानाद्वारं प्रगतम् ष्टीपोजनान्यू मुगावारिपोजगामिविभौम तायदेष प्रयोग येतंबरकमकबूपिकाशम् पावर द्वारस्य यकी, पापा राजधागो(थर्ण कश्यजीवाभिगमोपाडोकोद्रष्टप्पः) द्वीप पूदिगि परिन समुद्रना पुर पूधाईमा पधिमदिशि गोर गीता महागदीगई उपरई ए हा जयूद्वीपनामाद्वी पनि विजयनामंदार मारणं कचो ? अपोजमा च्यारियोजन वि० पोहलपपई तार ताज निया पर प्रथमपों मेर inाणी या प्रधान क गर्गमी भिकार चोर करीने पाया द्वारन्यसन जीयाषिगण गूप्रथी जाणा यायत राजधानी जांणमो ॥ मल ॥ अनु "मापा।
. पूटीप भाग पचमहार ॥३४॥ जुने व अघी गरम गालणीय, रूपगमहरम कलिए भिसमाणे मिनिसमारो चक्लो प्रणले से मुहकारी मरिसरोपरूये वामन दाररस तस्ति- मोहोर तंजहा बारामया णेमा रिक्षामया पहाणा येरुलिअरुइलसंभे जायसवोवचिय पयर पंचवण मणि रयण कोहिमतले, हंसगनमए लुए गोमेजमए इदकोले लोहियसमा दारपिंडान जोईरसामए उत्तरंगे येरुलिप्रामया कयाहा यइरामपा संधी लोहियासमईओ मुईनो साणामणिमया एमुग्णया यारामया अग्गला अग्गलपासाया रपयामया प्रयतणपेठिया अंकुत्तरपासए निरंतरियघणकयाडे भित्तीमुषेयं भित्तिगुलिमा छप्पणा तिणि होति गोमाणमी तत्तिधान हाणामणिरयणयालख्य गलीलहि असालभंजिभागे, यइरामए फूहे रययामए उरसेरे सातपशिलमए 3- मोर जाणामपिरपणजालपंजरमणियंसगलोहिप्रकापडियंसगरययभोम्मे अंकामपापसा पण्याहाने जोईरसामयायंसा यंसफयेनुपाप रपयाम- उ पहिमा जायस्वमा उहाहणीन वारामई उरि पुंध्यणी सद्यमेर रययामष्ठाणे अंकामयकणगफूटतयखिजथूमिमाए मेए संर तलविमाननिम्मलदधिघणगोसीरफेणारययणिगरप्यगासे तिलगरयणदचंदचित्ते णाणामणिदामालंकिए अंतीयरिंचसाले तवणिज्जयालुपापाय मु. हफासे सस्सिरीमावे पासाईए ॥ ४ ॥ इति ॥ अत्रव्याख्या ॥ इहामिगेत्यादि विशेषणदगमं पटनवरयेदिकागतथापीतोरणाधिकारे यास्या . तामिति ततो ऽयसेयं । यणोदाररस तस्सिमोहोड इति । यो वर्णकमिवेशो द्वारस्य विजपाभिधानस्यापं वत्यमाणो भवति, तमेवार ॥ तंजरत्या- दि ॥ तद्यथा-थयरामयाणेमा इत्यादि । अत्र घ द्वारयर्णमाधिकारे यत्र केयलं विशेषणे, तत्र साक्षात् द्वारस्य विशेषणता, पत्र तु विशेष्यमषितं तत्रत. स्पेति गम्यं तेन तस्य विजपदारस्य यजमया नेमा भूमिभागा दूर्स निःकामंतः प्रदेशा, रिटरवमपानि प्रतिष्ठागामि मूलपादाः, वैदूर्गः धैर्यरत मपाः रुचिराः स्तंभाः यस्य तत्तपा । तपा जातरूपेण मुवर्णनोपषित युं प्रवरपंचवर्णमणिरी कुहिमतलं यभूमितलंपस्य तत्तपातपा तसा विजयद्वारस्य मगरवमय एनुको देहली, गोमेदकरवमय इंद्रकीलो गोपुरफपादयुगसंधिनियंगस्पानं, लोहिताख्यं पनागाल्यं वं तनापी द्वार पिही द्वारणाये, मूत्र खीस्वनिर्देश प्रापरयात् , ज्योतीरममयं उत्तरंग द्वारस्योपरि तिपिस्थित काई धेमो कपाटो, मोहितासम्पो लो- हित हरवास्मिका भूचपा फलकदपर्मबंधविपदनाभायहेतुपादुकास्यानोपात्र समपा। मधपा मधिमला पन्नकान, बिनुन भवति । संमती टीका .. Fr main ani मायः। ना नानापधिमा मागया इनि, ममुद्रा मका पिकागदाखि पानि नानामखिमयानि । पान्य Param नि::. गरण आमाप्रामाता, नमागमा तीताः भागना प्रामादा यत्रागला नियम्पनो मागपी प्रायन पोठिया minutreीवाना नया जंहा बंगलमया सरवायम्म सतपा-निरंतरितपनपाटमिति । मिला तरिका सप्यार Prithrinata Tोकाटी यस - मिनीसशेवभिगोगुलिया बप्पापा तिमि होति इति तम्प द्वारपोमयोः पायो नि Fairf मा गिनिशा पोटगानीगः निमः वद पंचागतः, षट् पंधिप्रमिता भति । अपात्यधिकं गत मित्पी । तया गो PIME TAI IMA: पारिधिना: 'न मग्निरवमयानि व्यानरपाणि पविकपमाधि लीलारिशतगाणिनिकाय तोलाश्चित Tiwar man anः दीदमागः, सनम उरमेषः गियर, केव गिगर मा सौर मादमागस्य सम्बन्धि द्रष्टयं . Terming मा रोम रोशः परिभागः, नानामनिरपप साप पंजामतिमा लोहिया पडियमग रयप भोम्मे rint पितानि शिकाभि, नामोरिनाता लोलितपयाः प्रतियंगाः येषां तानि लोहितासप्रतिषंगकामि, सपा योनिन, प्रामाला मामांतो मार द्विां मणिगनानि लोहिताशमनियंगकानि रगतममामि गानागfretawriterrintHIगवि पम्मित पारे तय, पदानामन्योपनियता प्रायात् । अंकागपा पणा rarmin rasi ramiनि । र तिमिपागे पनि ॥ अंकमयं यास्येमाकरण • hirwarm wiraniort in mar, तोपा तमोगमपी मूपिका लगिगरपापम्प am. ner. TEE Twindian.ta मनोनि भियागे पति । तर अपंगतो भाविस मिति ॥ Weft rinirmirmirmirmaमि पर गंगत गंगोपरितको भागो पर frinetrintimritiirior fartan मामबाग प्रतिमो यतिगरपणा पनि नितिन PROMC पीपर भाग ॥१९॥ मचमद्वार "टीम परवानि विशेषाः रचन्दै वार्धचन्द्राकारा सोपानविशेष चित्रं चित्रकारि तिलकराई चन्द्रचिनं, तथा नानामणयो नानामणिमयानि दामा- नि माला और रुतं मामामणिदामालंकृतं, तथा अन्तहिय सदल सकपदलस्कंधनिमापित, सपनीया स्तपनीयमभ्यो वालुकाः सिकता स्तासां मस्ता प्रस्तारो पत्र तत् तपनीयवालुकाप्रसाट । मुहफासे इत्यादि माग्यत् । विजयस्सणं दाररस उभउ पामि दुहन णिसीहियाए दोदो धन्दरणक- लमा पण? चन्दण कलसा वरकमल पाहाणा मुरभिवरवारिपडिपुणा चन्दणफयचवागा प्राविटुसंठेगुणा पत्रमप्पलपिहाणा सचरय गया मा साला जाय पडिसवा महया महयामहिंदकुंभसमाणा पणता ? ममणामोसो ॥ भव्याख्या विजयस्प द्वारस्योभयोः पार्थ यो रेकै मिषेधिकोभाषेत उत्ति प्राकृतत्वात् इस्वत्ये द्विधातो द्विप्रकारायां नैधियां निधिकोपात्र निपदनस्यानं तत्र प्रत्येकं द्वौद्वी धन्दनाय कलगी लन्दनकलशी मागण्यघटी माप्ती ? तेच चंदनफलया वरफलशं प्रतिधान गाधारी पेप ते तया, सुरभिवरयारिपरिपूर्णः चन्दनकृतपर्धाकाः पन्दन कृतोपरागाः । प्राविदकंठे गुणा इति ॥ भाविद्ध भारोपितः फंठेगुणो रक्तमूत्ररूपो येषांते तथा, फंठे फालयत् सप्तम्या अलुप् तथा पटा मुत्पालंप पपा योगप विधानं येषां ते तया ॥ सरपणामया इत्यादि प्राग्यात् ॥ गहयागया इति । भतिशयेन महांतो मरेन्द्रकुंभसमानाः कुंभानामिन्द्र पंद्रकुंभो राजदंतादिदर्शनादिंद्रशदस्य पूर्वनिपातः, महांधासा चिंद्रकुंभ तस्य सगामा महेन्द्रकुंभसमाना महाशलथममाण , यया महोत्रो राजा तदर्प तस्य गम्यधिनीया पुग्मा अभिषेककलगाः तरसमानाः प्राप्ताः ? हेअगण ! भायुप्मन् । विजपरसणं दाराप उभवेपासिं दुहन सि. सीहियाए दो दो णागदंतगा पणता ? तेणं पागदंतगा मुत्ताजाल तससिन हेमजात गया जाल सिंतिणीपंदाजाल परिक्तिता, भगया N. भिनिषिद्धा तिरिषं मुसंपग्गहिया, अहे पणगद्वयरुया, पणगढ़ संताण संठिया सघषाराममा का जाय पडिसधा महमा महपा गपदंतक्षमागा पणता ? ममणा प्रोमो विजयस्य द्वारस्ये त्यादि पदयोजना म.ग्यात् ॥ दीदी नागदन्तको न फुटको भकुटका वित्यः, प्रजप्ती ? तेच मागदन्त फा गुलाजालामा मतरेषु याम्यूजितानि लयमामामि गजालागि ऐममपदामसमूहा, यानिय गवाराजालानि गवासाकतिरबविशेषा दा मगमता, पानि च किंकिणीघंटाजालामिपंटागमहा सा परिक्षिा सर्वतोव्यात. अभिगुण मुलगा सभ्युद्गता अधिगभागे माना गुग्नता
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240xoRON Mmm impitin AIRTEEN पायो नाना पापा गमोहरनेवणाः पपारकगंधारया या गारम्प प्रगारगया. Hinfee TVायो mal AM नाही यादि पद चतुष्टयं प्राप्यत् , विपरमण दाराम मोपासिं दुलो पिपीहिपाए दो mar HERLY A भावाला तापमानपा जसा पसा जाच पहिलवा, पिपस्पेत्यादि प्रापयत् । दीदी जालकटको गालफाकीर्ण पानी परदेशी प्रा.ग. ते जालबार सपरवमयाः श्रन्या इत्यादि प्रापत् । बिजपरगणं दारम भनी पासिं दुहलो मिसीहियाए सेरो यो पक्षमा सामिपमेमारवे दणावामे पायत । तंगहा गंयूलपामची पंढायो पारामात्री लालाप्रो गाणामणिगया पापासमा विश्वको संकलामो रपपानांशो नमो तारा घंटासो सहमरानो हमरमरालो कोचरमरानो धीहररायो दुंदुभिरसरामो aireenो रिपसायो मंचरतराणो मंजुपोलामो मुसिरामो मुभरपोसाभो भोरालेणं मणुणेशं गणहरणं कणमणनियुएफरेणं सदेवं जाप घि इति पर ममनिका मावा. पंटे प्रसे? तासां प पंदाना मपमेतद्पो पर्णवासा मसः। तद्यथा-जांयूमदगम्यो घंटरः यजमय्यो लान m नानामपिता पंढापाचो पटेफदेशविरोप तपनोपमध्यः शंखला यामुता अवलंयिता तिष्ठति, रजतमप्यो रग्गया प्रतीताः, तारा घंटामो अंग प्रपात हो पायां ता लपा, मेपस्वातिदीप को यामां ता तथा इंपरणेव मधुरः खरो पामान्ता तथा एपं क्रॉपस्यराः सिंहस्पेय म. भूतकापाणे खरो पाता ता लपा, एवं दुंदुभिसराः नंदिद्वादशतूर्यगंधात सदासरो यामां सा तथा नंदियत् पोपी मिनादो यामां ता स्तथा विनानुगदापी स्वरो पामां ता तपा, एवं मनुषोपाः कि यहुमा मुखाः मुस्वरपीपाः अथषा सुष्टु यत् स्वं स्वकीयं अनंतरोक्तं पर्ण मंगपारिकन राजते पति मुसा तपा गोभनो खरपोषी योमा ताः, उरालेण मित्यादि मायर, विजयरपणं दाररम उमनी पासिं दुरो सिसोशिए दो रो पननालायो पाताओ? हाधोपं धनमालाधो पावादुमलकिशतपपल्लवसमाजलानो अध्ययपरिभुजमाणशोभंतमगिरोया को रामारोपापो पर पायापदपोजना माग्वत् वे परमाने प्र? तार पनगालो गामादुगाणां मामालतानांच पे किशनपरुपा . निकाय पालो समानुपानिया या परिभुभनामा भत्या गोभमानाः पदपदपरिभुज्यमानगोमाग अतएष भश्रीका! सता a । শাল पूर्वपदेन विशेषENTEपामाधात्यादिमायत्, विजयाम दारम भई पामि दुर गिरिदिमाग दोदो एकगठगा पाणला नेणं पकंठगा प মেম্বা কাশি বাসা মাল সকাল সা গন্ধ বিহগনি। মুম্ব লা মাসালা, বা.ম পuraী? ঝাণঘাযিঃ সুনীল বলা অসমীী মঝবিধি। অন্ধকাঃ পারি মাসলা মাষবিন্ধগলা যদি দীপ বিয়স। ধনি। স্বাধীন বসবা সন্ধ্যা সারি বিবর্ষ সৰু ।দ্বিগ্ন বন্ধ পরিবর্য আগারস্থগিত থানায়ন্তিকা শাবিস্নাঘষা বা বাসবো আবাদবিজ্ঞপ্তি অনুলিশ বিখ্যবিধিবিনিয়েশিথিল থামবিষয়ক্ষীরাগানিগুলিস্যাবলিকায় মাসাযেৰ্মীলিঙ্গা সিপিণে পিসিদিনার্থীঘনিযেসবঞ্চলিলাদী বিযাধিরাখে ঝানু অভিীরথা বাদই ফ্যাদা সন্ধ্যাথরিন মাসাজ সম্বন্ধীমা সাথি, হলি গালাগঞ্জ গন্তজোয় - গাসলঙ্ক ষাঙ্কা যখঘিী যুগৰমীসই সামাবিন্দময় যাহিম সকা প্লাবিল সুনী দিসিসা পাগলা মপস শীষ বি মায সমকা বিষাস বা বিধৰীলি সন, শ্যথা যদি বই এgয়া লিপ্ত ফি ফসল পাস সং দিলিবিধবদদিগিৰি । বিবি নমস্কার ৪ ঘন্বন্ধীয় নিপালি শেলি সদ্য বিধি নিনিনি বিন্যা পাসাপা প্লাবনী আদাবিথসলিনিষিদ, যথা আলথিয়াইসীদাসৰ প্ৰহ্মলিয়া, গাধা দিলা ফিগাঁঃ নাদিগ সংলীশ্যাষী আঃ ঘসান্ধা সা থিসথানিবগঘনীনাবান্ধবিস্কা স্বামী, সন্ন্যা সন্ত্র বিষয় পা অক্ষা পা সস দিযবসিসসব নিয়োশিনাথগাবিনঃ বলিস নীলখিলগমনীবান্ধায়ালিলি লা। পা গন্ধ থালপালা, অসবর বাসসশ থং লিলি দিদি মিয়ালি বধৰ বা, বয্য লাখানি সাল পি গুলিপি সার ঘনি মাসাধি নলী বিহিষাণাদিদিম আলি ই কসানসেঃ অবিলীঃ ঘষলো, বঘা ধর্ম जयदीप भागात पटीशा॥ एदुग्मीलिता या किल किमपि वस्तु वंशादिममवादनविशेषा हित मत्यतं मयिनष्ट शायमवति, एयं तेपि प्रासादावरांमकाइतिभावः । म पया जालोतरगतरवपंजरे रखसमुदायविशेचे रुग्मीलिता यो मिपितलोचनायेत्यः । मणिकनकस्तूपिकाइति, प्रतीतं विमितानिविकस्वरालिश तपत्राणि पुंडरीकाणि च कमलविशेषा, द्वारादीप्रतित्येम स्थितानि तिलकरवानि भित्यादिषु पंडविशेपाः मईचन्द्राय द्वारादिषु नैचित्रा नाना रूपा भावभूता वा मामामणिमयदामालंकताइतिव्यक्त, अंतहिय यक्ष्मा मसृणाः तपनीयस्प रसुवर्णस्य वालुका स्तामा प्रस्तदः प्रस्तरः प्रांगणेषु येषां तेतपा, शेपंपूर्ववत् ॥ तेसिणं पासायवसिगाणं वल्लोभा पठमलया भत्तिचिता प्रशोकानयाभत्तिचित्ता चम्पकलयो मानचित्ता चूनमयातिपिता पणलया भनिधि वासंतिलया भत्तिचित्ता सधवणिज्यमया जाय पहिरवा तेषां प्राप्तादायतंसझाना मुखोका उपरितमभागाः पदालताभन्विपित्राः अशोकलता भतिपित्राः चंपकलता भत्तिचित्राः चूतलता भतिपित्राः घणलता भक्तिचित्राः वासंतिकलता भत्तिचित्राः भोरममा तपमीपमया प्रया मला जाय पडिदयाइति विशेषणकदम्याग्वत् । तेसिणं पासापयहिंसगावं अंतो गुममरमपिभूमिभागे पण ? मेगहाणामय मालित पुक्सरे हवा जाव मणोहिंठवसोभिए मणीयं वणो गंधोफाम्रो प्रयोति, तेषां मामादायतमशाना मन्तयंममरमपीपी भूमिभागः प्रातः ? सेजहाणामए शालिङ्गपुकारे इवा इत्यादि समभूमिवर्णनंवर्ण पदकसुरभिगन्धगुभस्पर्णवर्णनं च प्राग्वयं सिर्फ बहुगमरमपिता भूमिभागार यहुमनदेसभाए पसेपं पत्तेय सीहासणे पणते ? तेसिकं सीहासणा भयमेपारवे दणायासे पणते? तनहा रपपामपा मोहा मोवडिपा पापा तपणिजमपा पक्कला जाणामणिमयापायगीसगाई जंपूलपामयाई पत्ताई परामपासन्धी पाणामधिमपंच तेषं मीसमक्षा हामिगमनाम पतमलयाभत्तिचित्ता ससारसारोपविधिविरमणिगणपापपीटा घरपगिडममूरगणवतपजुसंतलिशेतरपापुपाभिरामा शारंणगाणवतोप तुलफामा सुविरतपरपसाणा अधिप्रशोमदुगलपपरियपणा उपरितंभुयमंधुता भरमा पापापा ४ पति तिमिमित्यादि नेपा प्रामाराम तंसकाला मंतपंहुममरमणीयामां भूमिभागानां यमपदेगभागे प्रत्येकं सिंहासन प्रस? नेपांच सिंहासनाला नपतषी व पालो पनि धेगा मत ? सद्यपा- रगतमा सिंहरूपमोमितानि सिंहासनानि सौर्णिका नुवनयापादाः, तपनोपनपानि लागि पारामामा ॥टीका। antramममापि पादाना सुनिता माविका शानदारानि गात्रापि संपादोमि यमाया बर retter पर पूर्व लिमिटेशनशियः। तानि न मिनानि वस्तुलनरम करणार irrrrrrrrrविनावि, रा. मरकार प्रमप्रधान विधमपिरनिको पारो गरपागि तानि, तपा- PTETrrenारम्बार पिनारमापिरामा ति सामरमाना गये गपूरकाश rrrrrary form, न काजोन जुगांतानं नागांतान नमाना प्रत्य ramirrortantra मानि तिमिानिगटो पिरमराबोर मानि म पेयो मगरकाको सानि Arariant for on Rural भिदिदनाचाप, मागरममभिर्मपूर नागांतलियोनी permiraterial पनि प्राविति मरियपूशंगवितातो पाशितः पाता । तपा- पागलपुर worrrrrrrrrritinianा निको ,rinar पूरो वनानिनियनोनं गाणं गूल गया TITोलारिता नजिनियरिणति पर नीम iमि ri तत्प्रतिशगं Perernatrin firi तिमी पनि पारिताल int r.mir marrirmeriरि माना कि कितपणे ए ? निगा राय Powermirmiremiser amritmai nिा परि गुनो पूत्ये पतिनिधागा ARITAIN. forngan frrrrrrier: htra Tोग का माला राम जीरो armerma Rof TitanARMAणा इति । गला amare from think torriti iryा गम ने पतग पोनिका गुना प - - ।
2108ORCHOR: सटीका ॥ HICO भन राणा पण मिला मुनादमा म पनिश्चतप्यामिरि महभिर िमुतादाम गयन समन्ता संपरिक्तिला? तेणं दान माविषमानुपपरणमेरिया जाब विनित, तेषां सिंहामगोपरिस्थितामा विजयदूष्याणां प्रत्येकं प्रत्येकं यामध्यदेशभागेअंकुशा संकुशा भा मुकारामावलंबनालयभूतापुoया ? तेषु कामयनुशेष प्रत्येक प्रत्येकं फुग्मायं मगधदेशपसिई कुंभपरिमाणं मुक्तामयं मुक्तादाम प्राप्तं ? पनुसारेशमितादामे पण तिपाठः संभाव्यते कुंभमानंतु सतरत्रधर्मरत्नपरब मुगकस्थितस पक्षिणी गुरुपते रोग धान्यराशि समायाधिकारे वापते. तानिष कुमायाणि मुबादामानि पुग्य प्रापेक मन्येचतुर्भिकुम्माये मुंबादाममि तदोवस्यमाणमाः सर्वतः सर्वामु दिपु सतना गामारपेन संपरिचितानि ? माकुंभियोरित्यत्र भगदः भूत्रे दृश्यमागोपि पत्ता यमाल्यातल्या मास्याताति, दामाश्त्या विराम कनू पवरपेदिकादामपर्ण कपायाख्येयं, प्रतत्राद पुफेनित् तेरिणं पासायहिंसगाणं वरिपं अद्वमंगलगा पणा ॥ सोस्थित मोहालय जाप पता चला तिभूदृश्याने, तथास्थानं च यतापमिति । विजयरपणे दाररस उभनुपासि दुर जिसीहिपाए दोदो तीरथा परपा ? ने तोरपा पापामपिमपा तहेव जाप मंगलगा झया छतार खमा, तसिप तोरणाणं पुरज दोदो सालभंजिषा पगणता? जईप २ तरेष तसिपं तोरपाषं पुरत दोदो पागदंतगा पणता ? तेणं जागदंतगा मुताजा तससिन तहेय, तेमुणं णागदंतरामु घाये फिर तब वापारिपादाम कालाबाजाय निहन्ति, सचेतत् पूर्व प्राग्यो । गवरं गागदंतममूने तपरि मागदंतकानां यतयाः, शभायादिति । सेसिणं तोर- कार्य पुरण दोदो पक्षपाडगा जाय तहसंपाहगा सबरपणामपा पा जाय परिरुया, एवंपंतोषी घोही मिाणगा, तेसिणं तोरणा पुरज दो दो पानसमा जाप मामलपान वि कुमुभिपा नाथ सरपणागपाताय पडिस्याउ । पत्रव्याख्या ॥ तेषां तोरणानां पुरतो ठीही हयसंधाटको दोरी पारी दोरी भरपाटको दीदी किंपुरुषसंपादको द्वीती गहोगसपाटको द्वौती गन्धर्थसहाटको द्वी दो यूपभसाहाटकौ ॥ एतेषकभूतार- स्था । मारपणाममा जापाइत्यादि पावत् , एवंपंक्तिपीपीमिपुनकान्यपि प्रत्येक व्याख्येपानि, सेमिणमित्यादि । तपां तोरणानो पुरतो द्वेद्वे परतते. पावत् परमात् है मागल, देदे अशोकलते देव चंपकलसे. देदे तलते वैदे..पापतोलते फुन्दलते र अतिमुक्तलते. .
अंदीप - भाग प्रपद्वार इतिपरिणा: २ भागवते । यताथ फपंभूना रत्यार । मिाई कुममिपान , रत्यादि यावत् करणात निई भालिया नि लयामा गिरा 7. रयान मिपं गुलापात मिरा गुठियान नि जमनिया मिग अग्निया मि विषमियान नि पणमिपान नि मुविमायडिग मगधीन, नि मुभिय मडलिय लयाय भवाप गुलाप गोपि विपिप पमिप मुपिमा यहि मंगरि विमग घरी, निपी- अस्यध्यारया मागयत । पुनः कथंभूता त्या मारपणामया गाव पहिया ति, प्रथापि यायन करना , मया मादा त्यादि विश रंधक परिपरः, मग मागबग्यमीपा । मिर्ष तौरका पुरन दीदी चंदमकलमा पणता ? के चंदमकलमा वरकमानपदाणा तरेव म.' मया नाम पहिमपा ति, तेषां तोरपानां पुरको द्वन्द्वी चन्दाकानगी मासी ? वर्णक व मानो याताया, तमिण तोरणापं पुरन दोदो-:.. पता: परकमलपकापाव सरपणामया मना जाप पछिसपा, मागय महामहागिहममाणा चम्ममा ? ममणानुमो, तेषां नीरयाना ::. तो दीदी भगारको कालानुकाभरपयांपो प्राप्ती ? तेयामिय चन्दासगागामिव वर्गको , मयरं पर्यते मत्तगयमहामुहागिरममाण:::: मा ? समाजमोतिया, मलो पोगन स्तभ्य महादतिविशाल मग्मुखं तस्याकृतिराफार समिमामा मजमा ? क्षेत्रमा ! !त्रायुना। तोरणा पुग्न दोदो मादंभगा पण? मिअपमेयामये यायाया पणते ? तंजा तथपिनमया एकंदगा यमनियमपा वडा धारा সে লাগষি প্ৰশক্ষা সামগ্রী ব্যায়া সীমন্তিলিকা দাহ্ র গ প্রদাহ সাঃসিদ্ধাষা সামগ্র সন भाणा पणता ? समानुमोरोपां तोरणानां पुरतो द्वीद्वा यादर्शको दापंसी प्रस्तो? तेषां वादगंकामा मयमेतदूमो यमायामा प्रात ? -- .. सपनीमया प्रकंटकाः पीठनिगेपाः पैदूर्यमपाः पागमाः सादगंगडमतियंघप्रदेगा। भादगंगंडानां मुष्टिपायोग्याः प्रदेशादतिमाशा, ६-":" पारगाहात्यर्थः । मामाथिमपा बलका लोनामशंतखादिरूपमयलम्वनं येन संबद प्रादः मुस्थिरो भयन्ति । तपा-अंफरवमयानि मं.":. पत्र प्रतिपिंधमंजूति, तथा पर्षय मय पर भायेत प्रत्ययः भूत्यादिनानिमार्जनमित्यर्थः । अधर्षितस्या मायोऽमयपपितं तेन निमना घतिनिर्मamrut काया मनुमक्षा युक्ता तया पंदर्भहलपडिनिकासा इति । चंद्रमसमदूगाः । मायामाया इति । प्रतिययेन ...
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*. टीय भनगा पणाने मुबानमा फलगा पाये परामया बागदंतगा पगा? गुग्वं पपाया मिलमा पागना ? गर्थ मेदन पूर्व प्राण्यानपूर्व मयरं गमागविभाः पीटिका रति मुन रयपामएमु मिकणमु यध्ये या पापा ? वायडागा नियमिजंगगाडिना जाय मुशिलमुतमिशागणिया मायेनियागा मा जाय पहिल्या पति तेयु Iये नियमो यातारा जलशून्याः करका इन्यपी मातमित्यादि तेच वारकरकार कानमूत्रगिगशिता इति । प्राण्यादन TH AMT: मंना गणिनि गदिमा हातः कानमनमः गयो रिति गम्यते गिरपकेषु गगिता कानगिपगपस्टिता एवं मील माणिना त्याद्यपि गावगीर्य, नवातरका: मान्मना येड्यंमयाजा त्यादि माग्य सेमिर्ष तारणाणं पुरन दीदी चित्तरेप कर पणा OrRT वामय पोरान पायनिगम विमलकरंगे वेनिसमाधिकालिनपालपयोस गागपभाग पगमे मयत ममन्तान गामेड र मार भागी गय त्रिविनारयया येऊनियमापभामिनिमिया याव्या तेषांगतारणानां पुरतो दीदी त्रिी पित्रपती नावी व ofesी प्रती या दृष्टातेन भावयति गजदापामय इत्यादि। सपा माम रामतुरन्तयसिंगा गनुर्पु दतिखोरपूर्वापर- পৃদিীন খান গা যম সাবিনাঘল সামালিনদ লাসাহী ব্য। শিগলিঙ্কায়িত্বশীলঃনি। যা avina हिनावारन: त्रीपया प्रभया हान् प्रत्यामजान प्रदेगाम् मतः मांमु दिए मर्मतता मामयम अपमामयत्ति पत ६५ वर्षमा नयानपनि तापनि प्रभाभति, पणमेवेत्यादि मुगर्म, सेमिषं तोरवा पान दोदी यकंठा पणता ? गाय ममफंदा प. I? मामा भाय परिमापा गोरखामा परलो दीदी पी पटमगायो रयियी मती ? ग्यं गनर किंगरपुिरुषम हीरण TATTI II पर मोवामा नि । म बिमा ग्यगिोश या इत्यादि माग्यम् , तेमिनारणा पुरत दोदो पुष्प rin TM MARATमिलानगगेगी । माया मा जाय पहिल्या रनि । रोपां तोरणानां पुरतो दे। grial HER I यानिशानामाकरणापि ant | गाम मर्यापि मारमा रमप्य मया इत्यादि मा. - ॥दीका 'धमदार ASHREEKSHA.......... ग्यत् . सेमिषं तोरणा पुरळ दोदो पुष्फपडलगाई जावलोमहत्यगपहलगाई भवरयणामयाई भवाई जाय पहिरूया एवं पुप्पादिवंगेरीयत्, पु. प्यादीनामष्टानां पटलकान्यपि द्विद्विसंख्याकानि, याच्यानि तेमिणं तोरणा पुरउ दोदो सीहास पाई। पण? तेमिणं सीधाममा भयमेयाम ये यणावासे पणते ? तच जाव पामादीया ४ इति। तेषा तोरणानां पुरतो देवे मिहासणे मासे ? तेषां च सिंहासमानां वर्षका प्रागुतो मिरवगेपो पतघ्यो याबदामपर्णनं, तेसिणं तोरणाणं पुरन दोदो रुप्यपदासता पणता ? तेयं यत्ता पेरुलिपविणलदंडा जंणयफणिपा वगंधी मुत्ताजालपरि गया असहासपरकंचणसलागा ददरमलय सुगन्धिसो यमुरस्सिीयलशाया मंगलभत्तिपिता चंदागारोवमा इति॥ सत्र व्याख्या ॥ तेषां तोरणामांपुरतो द्वै मप्पसदे रजतमपाटादने व प्रशसे । सामि च यत्राणि वेदूपरवमयविमलदंष्टानि । जांथूमदं मुव तन्मयो कर्णिका येषां तानि जांधूनदकर्णि कानि तथा यजमन्धीगि घरवापूरितदंशलाकासन्धीनि । मुक्ताजालपरिगलागि अष्टौराहसाति भटमाससंख्याकावरकाचायलाका परजापनमयः शलाका येषु तामि घटसहस्रवरकांचनशलाकामि । तपा ददरमल पसुगंधिसयोउप मुरहिसीलवाया इति। ददरवीवराम कुंएकादिभावामु तेन गालिता स्तत्रपकाचा मलपइति भलयोन चावं तत्सम्बन्धिमा सुगन्धपो गन्धयामा सत्सर्वेषु शतप सुरभिः शीतला प टापा येषांतानि तपा मंगलभत्तिचिता मङ्गलानां स्वस्तिकादीनां पटाना भाराविडियाचित्रमालतो येषांतामि तपा चंदागारोपमा ति चन्दाबारपवाति मा उपमा ये पांतानि तथा चन्द्रमालपत् वृतामीति भाषः । सेमिषं तोरणा पुरउ दोदो घागरा पणा ? तान पामरा पदप्यमवाणिपणापा- मशिरयणचियिचितदंडाउ भुनुभरपपदीहयालाउ संगफकुंददगरपभमपमहिषफेणपुंगमणिगामा भयानु गाय पहिलवानु पो तोरपानां रतो द्वद्वे चामरे प्रभो । भूत्रे चामायदस्य तीत्वं प्राकृतस्यात् तानि च चामराणि चंदप्यमवरलिपणापामगिस्यपतरिनाउ इति । पर मभचन्द्रकांतोवज्ज वैदूर्यच प्रतीतं चन्द्रप्रभयअपड्यांणि गेषाणि च नामामगिरवागि राषितानि येषु दोष ते तपा-एवं सानिया नामाका हापेषां चामराणां तानि तया-मूक्ष्मारजतममा दीपांवाला ये तानि तपा-तपा मंचाकुंदरमप्रमगरिसोरविकामा पनि काम- धीतः भारतविशेषः कुंदेति फुदपुष्पं दकरजा उदकका अमृतमपितमापुंना बरोशननवनजलेगा निय विकास प्रभाषांतानि म. भागा९६० प्रयाद्वार ममुगा रिगुलयममुग्णा मागोमिणाममुग्गा अंजणममुग्गा मवरपणागया माया गाय परिरथा नेपां तोरणामा पुरती दीदी मेलममुद्दकी गुगन्धितगा- पारविशेषी प्रमही । एवं कोष्ठादिममुद्रमा प्रपि यायाः नयरं । कोठं गन्धद्रव्यापिरोपः परं तमालपत्रादि चोचं स्यग्नामकंगभद्रण अंगनं मोवीरां- जर्म । मंग्रामिणामा ! कोकमग्ने यो घोर तगर समापे । परिवाने रिंगण मनोमिना अंगणमधुणे पति गिने मयपि ममुगकाः मयां स्मता विमपा प्रत्यादि प्रापयत् । विजय दार वामपंचकनया समयं मिगनपा समपं गमानन्नपाणं अकमयं विगत्रया सम खानपान पर्ष पिठनपाएं प्रामयं मणिनपाणं मामयं मीइनया समयं वमानपागं अगयं मेत्राणं चत्रविमावरगागर एवमेव मायरेणं विजपद्वारे समीयं के शाम भयतिलिममा सध्याच्या सस्मिन् विजयद्वारे अष्टगतं सदाधिक गत पयजानां च फाने समाधिोपेतानां শ্নেগাঁ ॥ বৃদ্ধবিগ্নলিমিলিঅলাসাদবি দুগ্ধ সসস বনয়ে অয় অয় মুখলি। যাঁধা ১ मेन प्रकारण मा पूर्व यम्प येग या अपूर्य भपूर्वच तदपरंच भपूर्यापरं मेन मपूर्यापरेण पूर्यापरममुदायेनेत्यपः, विजयद्वारे संगीत भगीत्यधिक सेतु पानं भपतीत्यारयातं भपा चान्येय तीर्थकति रितियेपा । विजयाभय दाराम पुरज भयभीमा पणना ? मिर्ष भीमार्ण अंतो यमगरमगिरता भूमिभागा पाहा ? माय मीण फामो, तमिमं भीमाणं प्पिं जानोत्रा पमनपा गाव मामलपा भत्तिचिता जाय महतयग्निमया अया नाय पहिल्या समिण भीमाएं यहुमनदेमभाग में पंचमे भीमे सम्म मागग्य यहुमन्नदेमभाए मर गगे भीडामणे पगाते ? मोहामायण विजयदूमे गाय अंकुश गाय दामा मिति अध्यायात विजयभ्य द्वारस्य पुरती भयभीमानि विगिटागि स्थानानि प्रसामि तुपातु विजयस्मणं दाररम गगमेगार पाहाय अवयव भीमा प? in गंम्यागदम्य पुरती थीमापचमेन अभपयाहामतमीलनेमा टादगर्मण्यांकताभीमाना मभारयते तनु मातिगय- जमाप गिति मैप प भीमागां भूमिभाग बोकार पूर्वयद्वक्तायाः तेषां च भीमामा यामध्यदेगमागे परपंच भीमं सम्प यामध्यदेशभागे विजय द्वारापिविजयदेवयोग्य सिंहासन मत । तस्य सिंहामनस्य वर्णनं विजयदृष्यकुंभायमुक्तादामथक नप प्राग्यात् । तरमणं मोहामायाम अबकतरेणं 3.
टीका। का ATTRAM विजयाचा मामाणिमासमीपं फारिगामणगारस्मी पगातस्मयां मीशायणम्म पुरत्यिमेष एत्यगणं बिनाप्रमरिमा परिवाराचारिभणमासमी पणतातगणं मोहागणाग दाहिशपुरसिमेणं गायरा विज्ञाम देवास सरिता पम पम देवमामी भाभामत्वमासमीन पणा? तामण मोहामग्राम दाहिणेशं गत्य गां विजयास देषण मनिमिपाए परितारा दगा देवमारसमीप दसमदाससारमीन पynा ? तम गोहागणाम दाहिमपथिनेणं गत्य विजयास देयम पारिरिपार प. रिमा पारसा देवनारासीय वारस महामसारासीत पणता तामएं भीडामणरम पदस्यिमणं एन्थो विजयस्म देवास माता बिनाहियोणं मा भासमा पणता तमहं मोहागपुरम पुरयिम दाक्षिण पत्यिमेवं उत्तरेणं गत्या विजयस्म देयरम मोलमसायरकरदेवमाहाणी मो. वसभासमारमोन पलतान जहा-पुरथिम पारि साहासीन एवं पउभुषि जाय उत्तरेणं चतारि साहस्म भवरोसेमु भीमेमु पतेयं पापं सोहागपपरिवारं पण । पापाव्या ! तय सीहाममाया घरीरेणंप्ति । अपरोत्तरस्यां चायप्पोले इत्यर्थः । उनी क्षति । उत्तरस्यां दिशि बारपूर्ण जानको सर्वसकालमया तिम दिन मा विजपदेषस्य चाणी भगाने विजयदेवसदृशे आयुर्यु तिविम्यादी भवाः मामानिका सपा लामोति । माकतवादीपावं तीवंच महसायां पत्यारि भद्रामामाणि प्राप्तामि तसच सिंहासमस्य पूर्यम्या मत्र विजयदेयस्य घसमृणा म. । परिषद कताभिषेका देवी महियो रपुच्यते, माप स्वपरिधारभूतानां मर्यामामपि देवीमा मग्रा प्रधाना साध ता महियच अग्रमहिप्प नामा भरितां प्रत्येक मैकमासमख्यदेवोपरियारसहितानां चत्वारि भद्रासनमहस्राणि प्राप्तानि ? तस्य मिहामनस्य दशिरापूर्वस्या मा. प्या विदिशी त्यः, भत्र विजयस्य देषम्य अभ्यंतरिकापाः पर्षदोऽभ्यन्तरपपद्रूपाणा मष्टानां देवसहस्त्रागा योग्यागाम भद्रामनमहस्राणि प्रच- सानि तार मिंहामनम्प दक्षियों दिगि अन्न बिजयदेवम्प भध्यमिफायापर्पदोदशानां देयसहस्त्राणां योग्यामिदग भद्रामनभहस्त्राशि प्राप्तानि । समय दक्षिणापरया दिगि नेत्यां विदिशीत्यर्पः , अत्र विगपदेषम्य यायपपंदोद्वादशानां देववाण योग्पानि द्वादश भद्रासन परसानिमानि । मनु केऽभ्यातरमध्यमवासपका देवाः ये रम्यन्नरपदादिध्यारो भवति उच्यते, अभ्यन्तरपपरका देवा पाडूता . एष MENORRBOH-08QQLORLSHOP .
जयदीप भागREN वामिभोतिक मायोति नत्यनाडूता परमगीरपात, मध्यमपपरकाम्यु, पाडूतापि मनाहूताअघि मामिमोऽनिक मागाति मध्यमप्रनिपति- विपपयात. भाप्रपरका पुग रनाडूत स्वामिनो ऽतिकमायोति नेपागामारसमणगौरवामरस्यात् , अथया गया महोतगमतिया पपां. लोग विजयदेवा कार्य विभाति मा गौरवपासोमाय चात्यंत मभ्यता लोत्यम्पतरिका पम्प पुरोऽभ्यन्तरपदामा पपानांच्य दृढीकृतं पदं गुणदोषकपणता प्रापयति मा गौरवपर्यातोपनापांच मध्यमेमायेऽसीति ममिका पम्पाय पुरु प्रपगपर्षदागह पर्यापोषित द्वितीयपदा. महमपनितं पद मामाप्रयोपः मविद विपमिदं मविधेयवेति प्रापयति गा गौरया पोलीपनाम पाहिवि स्तीति पाठा। तस्य मिहाननम्य परिमेन पधिमायां दिगि सत्र विजयस्य देयप ससामा ममीकाधिपती गस भाममानि मानिसय परिक्षपान्तर मासमा मिंडा भगम्य पूर्वयां दक्षिणमा पविमायां सारस्पां एयं पतम दिय अत्र विजयस्य देवस्य पोषणामा मात्मरदेवमामाशा योग्यानि पोरग मद्रामा- लिप्सानि? तद्यथा -पूर्यस्यां परवारि भद्रामनमानाति एवं चतविदिशु यावदुरमा पत्यारिभद्रासनमालावि मसानीति ? सतापा रयागं पारदृश्यमामजीवाभिगमत्रपटादर्णपाठानुमारिवृत्ती गु तस्स मिहामसम्म भयंता मर्याय दिशु मर्मतता मामात्येने सादि श्याम्यात मस्तित पाठांतरापेस्पेति भभाव्यते, अपोपेषु भौमे पूर्वापरमीलनेमा संख्यामेषु प्रत्येक प्रत्येक मिहामनगपरिवारं मामानिकादिययोग्यभद्रामनापपरि पारमहितं प्रज? विजयाम दाररस या धागार मोलमपिरिरय उयमोमिए, शहा-रयणेविं पाररि २ घेरुलिगविनोस्मिोहिं। गमारेगरि भगने पुलगा भोगंधिया जोरम अंशयि १० अंजणेदि ११ रपएघि १२ जारसहि१३ सालगदि १४ फणि. परि १५ रिमरि १५ पिजपाय द्वारम्य उपरितन प्रकार मरणादिकपः पोटगविधे रये झपशोमित , मद्यपारने १२ या ३ लोनिता. मभाग ५ मगः ६ पुलके मोगन्धिक ज्योतीरमे ए बस १० प्रजा ११ रजने: १२ जाननः १३ मानपुरल र स्फटिक १५ रि- सानिमामान्यतः कविमादीनि मादीमितुरयविशेषोः प्रतीताप, नवरं रमतंप्यं मातरूपं गुथः गतेजपि रखएवेति । विजयामुणं दा- म परि मंगलगा पायता ? नहा माथिपसिरिया जाय दप्पणा महरयणामया या भाव पदिगया । विजयरमपमित्यादि । पिर. SHARE पी wn ament wrothafertial Art Inागी गंपनि। माइत्यादिमायाविजया Marayan Armपमा परिभाविनान दान चि मा महाकविपरमयां mmein ari innaga tant शामिक दृष्टया निमितो नि म पूर्वव्यायपा । पृत्तीत केगापितु HTAR Pin agrics it fix दारे गापमा विगर दारे विमरणाचे मशिकिए गए गहा म पनि रिमा, सनयमामाविषमाम्मी धागमतिमी गपरिवारा ति परिमा xxeio. irani साल मायदेवमासोर विजयामा दाराम विनपाए सायहाए सोधिहूर्ण विजया रायडा. बी PREtोपा पार पदिग्ध मानिस मरितं गहरगत जाणारामणवेचं कारेमाणे पाले महया गोपचायतशीत. womafree.दापाराशेष दिवा भोगभोगाई मुंजमाये विगतम सेव एवं युगर विजपदार विजएदारे पति सप फार्थेन भ- ६१: शिजर शिवपारमिति । भगराना: मोनम ! विजयेद्वारे विजयानाम प्राकाला दप्यमायाद्वा नामगदा परस्य दायणस्य सोपो प्रमाहतोऽादिवासततिपतिमविज्ञप रति नामा देवो महको महती पाति भवनपरिवारादिका पगामी मालिका wrनिक नातीनि रणता पाभावगताच पयामी महानिशा यामागवानं गारी प्राणी पस्य न भायला । तपा मार स्या- । ति भी सरोति । नान्गः रत्यारव्या प्रमिट्वि पंथाभी गोगारयः प्रपा गांगो गाये परमत्यपः ऐश्वर्यfarin रनिसमा . ततां ऐथ यामन याति अंतनपयतया त्यापपति प्ररपति गगाया गांशाणा योगाय ग. शिवरातिपादनमा पोभूनमनियोदयषगा घय ममहामोरया पाल्योपास्थितिमा परिवमति भप तत्र चो मा- Ameri एमपी परिवाराचा प्रत्येक गावपपरिवारमानानां तिनमानरममघापापां पशाम मष्टाद wrnaमानहानीगापमोगरानीपानीकपरात्पनीमारपानीपपोमानापानीमनपा मनाला मोकापित - - - टीका यूही भागार H सीमां थोडगाना मात्मरक्षकमानायां विजयम्प द्वारम्य पिजवाया जान्या अन्येषां च बहूनां विजयरायानीवास्तव्यानां देवानां देवीनां पत्र पिपतः कर्म प्राधिपत्यं रक्षा इत्यामा रमा सामान्यना पारसकेगोयक्रियते तस बार पीरपत्यं पुरम्पपमिः पुरपतिः सम्यकर्म पीरपत्यं मयंपा मग्रे मरस्य मितिभावः । तथापरस्यं मायकत्यमंतरेणापि म्यापकनियुतियाविधगृपतिकमामान्य पुरुषम्येव ततो मापफरवप्रतिपय यंमा मागिन्यंग्य मनास्तीनियामी तद्रायः स्वामित्वं नायकत्वमित्यर्थः । तदपिष नायकरयं पोषकत्वमन्तरेणापि भवति यया अगपाधियरी गम्य ततमाः । भर्नु स्वंयोपका कुनधारणपोषणयोरिति वचमात्, प्रताप महत्तरकत्यं तदपिच मातरकरणं कम्पषिराजायिकरणम्यापि भवति पया कम्पधि द्वणितः ग्य বায়াবি সাল্লা। প্লাঘা গ্র সান্যাথলি গামি। প্লায়া সানি আমদানি: কাশফল নয়নে त्यं यमेन्प्रत्यद्भुत मात्रामाधान्य मित्यर्थः कारया अन्येनियुक्तः पुरुः पालयन् मपमेय गहमरेषेतियोगः त्यति सारपानकमतियद्वानि यदिया मातापि अशातानिमित्यानुवंधीनीतिभा नात्यगोते मादपंतृत्पं गोतंगानं पामिप योदितानि संत्रीतस्ततनयुटितानि तंत्रीयोया तली प्रततान माण कंगिकाशुदितामि गेपनूपाणितमा पथ पममृदंगी मेघसाध्यमिभुजः पदुनापुरुषेण प्रयादित सात एतेषां द्वंद्व मोषां रवानादेन महकारिभू सिंगादिविभवान् दिव्यान अतिप्रधानानिति तपा भीगाहाः भोगागवादयोभोगभोगा: अपवा भोगेम्य श्रीदारिफकायमापेम्पो ऽतिगायिनी भोगभीगा साम् भुंजामो अनुभव न्यिारत्या प्रयत्ययः प्राकृतात्यात् ॥ मगरण पमित्यादि तप्त एतेमार्थनगीतमा एयमुच्यते विजय द्वार विजपद्वारमिता विजपाभिधानं देवावामित्या द्विजयोदेयः ग्वामिरगाम्यासोति या अनादिश्यात प्रत्ययेपिनयमिति भायःदेवस्य दिगपाभिधामताच पोया द्वारा भिपति पद्य देयः सम तत्सामानिकादिभिदयः विजयीपिनप इत्याहूयते सग्वितिप्रतिपादफे कल्पपुसाकेतचाभिधानात अदुतरंधणं गोलमा ? विजपरम दाराम मामय पामधिने पण ? नांगकपारणागि कयादगायि कथारभविणा नाय अवठिग सिच्चे पिजगदारे पापरमपि विजयागाममयसी कारणं गीतम! विजयस्पद्वारम्प विजयमिति मामधेपं गारवतममादिमिदं प्रयतं ? गेयंगम, गतत्मयं जायदृष्टयास्यान गपि गोवाभिगममूत्रमार्गेपुष्टस्या निमित गस्तीति, एतेन विजयद्वारयणंक वक्ता, अयराजधानीयको यथा कहिणं ने ? यिजपरम देवाम वित ।
॥ टीका पूरी यादा Haririk2K12EREDMA पापा सही पyms? गोपमा बियरस दाररस पुरयिमं सिरिअममणिग्ने दीवसमुदै पोईयदता भणमि जंयुहीयेदीये पारसनोपणासाई उगादित, एयणे विजयाग देवास विषयालागं रायहाणी पणता ? इत्यारभ्य विजम् देवे २ इत्यंत शूत्रं यं । मासूत्रमुग गिपंचनमूत्र विजय द्वारस्य पूर्वस्यां दिशि ति गसंपेयाग द्वीपसमुद्रान् व्यतिप्रज्यातिशम्या प्रांतरेयोन्यो जंयूद्वीपो ऽधिकृतद्वीपतुल्याभिधानो उमेम जयूदीपाना मसं ये परवं भूचयति । तस्मिन् द्वादशयोजनमाला एपयपास प्रयासरे विजपस्प देषरस विजयानामराजधानी माता? मयान्येवतीतिरित्यादि तापहाणं यादभिगमनभूत्रे विशयोदेयो २ एति, पत्रच मारण्योपि जीवाभिगमोक्तविजयाराजधानीषण का सागरत्येमायलिसित सद्ग्रंप विसरभयात् सत्यमायमराजधान्यधिकार एवंविधवकप साहाद्विद्यमागत्ये पाण्यायमानस्यायेति । पत्र प्रस्तुतो शेपद्वारायां मुरास पागोकाणां सतपकपमापातिदेय गाइ ! एवं पत्तारि बीत्यादि । एवं विजयद्वारप्रकारेण चत्वार्यपि जंयूद्वीपस्य द्वाराणि सराजधानीकानि भणित स्यामि, मनु विपद्वारस्य वर्णितत्वात् सूत्रे फर्ष चतुदोरविषमको अतिदेशः रागमूत्रि, उच्यरो भतिदेशातिदेगप्रतियोगिगो रत्यन्तुस्पपर्ण कस्य मतिपादनार्थ, ततय यथा विगपद्वारस्य वर्णक सपा धैजयंतजयंतापराजितद्वाराणामपि, यया चानीयां अपाण तपा विजयद्वारस्यापि पपा वित परामधान्या वर्णक सपा जितजयंतापराजिताराजधानीमामपि, यथा र नेपांतिसूशा तपा विगयापाराजधान्या अपोत्ययः सिद्धः । मतिरा पन्याया एगेजिएनिभान त्यादी तपा दर्शमात्, अनिष द्वाराणि पूर्वविक्ता मादशियन नामतोयामि, तपादि-पूर्वस्वां विजयं दक्षिणयां Hin एवं चत्तारि यि दारामरायहाणीया नाणियहा एवं चत्वापि द्वाराणिसराजधानीकानि भणितध्यागि हम च्यारिवारिद्वार राजपामीमति जापमा