Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Ismarno Ke Bicha Nirala
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एक सस्मरणात्मक विवेचन
संस्मरणों के बीच निराला
महाशि निराला के जीवन परिचय कृतित्व यति व एव
मम्मरणा वा मशिन तथा प्रामाणिव मनन ।
शकर सुल्तानपुरो
भारतीय ग्रन्थमाला
प्रयासन एव पुस्तक वित्रता
गूगे नवाब का पाक,
अमीनाबाद
लम्पनऊ
. प्रकाशक
विनोद शर्मा
सचालक,
भारतीय ग्रथमाला
गूगे नवाब का पाक, अमीनावाद
लखनऊ-१
• मूल्य
चार रुपये
. द्वितीय सस्करण
मई १९६८
• मुद्रक
साथी प्रस
लखनऊ
लेखकीय वक्तव्य
मम्मरणा व वीच निराा मनावि पग्नि मूयमान निपाठा वा गौरवपूष्ण
जाबन पातारा सम्मरणात्मर पित्रण है उन व्यक्तिवानिरियर मानर एव
नित्व का विवेचनात्मर और आवाचनात्मक अध्ययन नहा।
मगरविकानगा मामाजिक और दनिर जावन जमादागा या प्ररणा
आचय यदा पद शाम का मान रहा है और यरी वारण शिव जति
বৃপি স অনvিণ ব দু পা সানা না মশলা সী বৰ ৪ মার নন
मनर और प्रदान रती। पारमा उनर व्यक्तिव म प्रभावित न्य विना नना
हैं
उनमा दानप्रियता इगरना और स्वाभिमान र अनर ज्वलन्त घग्नाआy
पित्री मान्यि भग पा. वे घटनायें बानिया का प र जन-माघारपाम
पा-गुना जाता
नर व्यक्ति और पति व मम्बरम अना कविताय मग लग और
Xथ निम गय है और प्रस्तुत पुस्ना भा उमी गमता का एक ब है परन्तु
दरमनिरासा
पाग ढग म प्रग्नुत परन का भावना प्रधान रहा है।
महाप्राण निराला र आन्तरिय जार दनिर जावन तथा उना आम-माग का
गमम्याआ एव परिस्थितिया का मैन विग रूपम ननिन और प्रस्तुन लिया है ताकि
पाटर और प्रिमानिएता का अति निरट मदप और ममय मरें।
मग विश्वास है रिनिगा वा पान और समयन म रचि रागन बार मरम
प्रगाम अब र मावित हा। मैं या दिना शर्मा अध्यन भारताप प्राय माता
सगनऊ या भाग दिन मर ग प्रयाग मा पुगर का परिया। न पर
पनिnा और पुमा का ना आभारा जिग मुम मा गायता मिला है।
गार मुल्लानपुरी
. प्रकाशक
विनोद शर्मा
सचालक भारतीय ग्रथमाला
गूग नवाब का पाक अमीनाबाद
लखनऊ-१
• मूल्य
चार म्पये
. द्वितीय सस्करण
मई १९६८
• मुद्र
साथी प्रम
लखनऊ
लेखकीय वक्तव्य सम्मरणा व वाच निराठा महाकवि पति सूयकान त्रिपाठा वा गौरवपूण जावन यात्रा का मस्मरणात्मक चित्रण है उनर यक्तिव माहित्यिक मानपत्र एवं कृतित्व का विपचनात्मक और आनाचनात्मक अध्ययन नग। मग वि वा यत्तिगत मामाजिर और रनिर जावन जमस्य नागा का प्ररणा आरचय घद्धा व जाग या यान रग है और यहा पारण है कि उनक जटिल कृति व म अनभिन रहन हुय मा जनना उसका मानता और वत्व व मम नत मम्नव और श्रद्धात रती । वाइ मा उनर व्यक्ति व म प्रभावित हुय विना नग रा। उनका दानप्रियता उतारना और स्वाभिमान का अना ज्यान घनाना में हि मारिप भरा पडा के घटनायें कहानिया का स्प लवर जन-साधारण म पा-मुना जाता है। उनक पतिर और कृतिवर मम्बध म अनर वविनायें मग नव ना दजना प्रय निम गय है और प्रस्तुत पुग्ना भा उमा गृपना काम करतु मम निगना वा एक जग ढग ग प्रश्नुत वरन का भावना प्रमान । महाप्राण निगला वा आतरित और दनिक नावन नया नक आत्र- ममम्या व परिस्थिनिया वा मैंन विशप प म पचिन बार प्रस्तुत fat पाठर और हिला प्रमा निराशा वा अधिर निकट म दस आर मम।
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बम सूची
E
-मनगरवि का पाच सुटर रचनायें
२-पारिवारिक परिचय और प्रारम्भिर जावन
•-निगता जा वा विवार
6-घमपत्नी वा मृत्यु
1-मारित्व मवा पो जार
६-पिटीम मृान
७-मतवाना निगा मिसन
-मनवाना न गता निराना नाता
•-निगता रिन दिन विद्वाना ग प्रभावित हुय
१०-आचाय मगवीर प्रमार द्विवटा म भेंट
"-निराला जागा नागग्वि गोय
--निराना मागिय व विभिन्न स्वम्प
, --मार गाम्वृतिय भयिप्य वा प्रताव राजा माहिय
(स)
१४-निराशाजा या निवासस्थान
१५-निगता जा वा रगन-गहन
१६-निराना और उनर मनमान
१७-निगला प्रति प्रयाग व माग्विारा वा उगमानता
१९-अरगजयम्बर गप गएप
- मायामाग
-जयपानिम मामिाग्नि
-प्रतिम या7 म मा अनिधि-गसार न भूर
-अनिम रात्रि
२३-हिमालय धरती पर लट गया
२४-चिर निता म लान
२५-काग मत्य यूटा हाता
२६-गव यात्रा ह-सस्तार
सस्मरण
२७-गाधा जा मटकार
२८-नगम निराना मिसन
२०-4 राष्टपनि हैं तो में माहित्यपति हू
-मन्तान उत्तर
३१-मेरठ कवि-सम्मेलन
V३२-निगना पा वस्त्र दान
३-मरा मा भाव नगे मागगा
३-कावान का सौभाग्य
३५-निंगना पागन अथवा मानव सवा
३६-तिरातरा बजट
७-मचा थद्वाति
८-वता विग गया
९-निराना न दुल्न वा तसा या दुल्हन न निराना का
४०-निराना पराना
61-निराता जा वा दवा
८ –पन मना फिर निराना पडा व पात्र है
४ -जब हम निगना जाम मित
1-मावियन मघ और निगना
५-निगता दूसरा का टिम
४६-निगता-माहिर मम्पूा मूचा
१
संस्मरणों के बीच निराला
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महाकवि की पाँच सुन्दर रचनायें
वर दे।
वरद वीणावादिना वर दे !
प्रिय स्वत्ला रव अमिय मत्र नव
भारत म भर।
बाट अप उर व बन्धन स्तर
बा जननि ज्यानिमय नियर
व तुप भेट तम हर प्रकाश भर
जगमग जग वरद।
नव गति नव य तार छत नव
नवर कर नव जनट मदरव
नव नभवनद विण दवा
नव पर नवम्बर है।
वरद वाणावाग्निावर ।
१ [ सस्मरणा के बीच निराना अभी न गंगा मरा अत । अभा अभा हा ता आया है मेरे वन म मृदुन वमन । जभान नागा मरा अत। हरे हर य पात डानिया पनियां वोमल गात । मैं तो अपना स्वप्न मृदुन पर फगा निद्रित रलिया पर तव प्रत्यूष मनार जगा पुष्प पुष्प में नाम तानसा माच नूगा मै अपन नवजावन का अमृत मज मीच दूगा मै नगर निवा दूगा फिर उनको है मर व जहाँ अनन- अभा न हागा मेरा अत । मर जावन या यह है जब प्रथम चरण रममा मृत्यु है जावन हाजावन । अभा परा जाग मारा यौवन स्वण विगवान पर बना रे यह बानर मन मर अविसमित राग म विकमित गगा वधु वमत अभान गा मरा अत। [१९० ]
मम्मरणों क वाच निगला 1
११
[ मन १९४० म निराना जा ने गाधी जा पर एक यगमयी कविता लिखा था
जिमर कुछ अा यहाँ प्रस्तुत हैं ]
वापू तुम मुर्गी याा यति?
ता क्या भजत गत तुमका
पर गर नत्थू खरे?
मिर व वन वह इयत
मिटानन नम्बर पवि
वापू तुम मुर्गो बात यदि
?
ता क्या अपनारय गत
कुन व पुन वायथ दनिया के
दुनिया के मवम व पुरेप
आगम भेडा वगन भा
बापू तुम मुर्गी बात यति
ता क्या परत राजन टडन
मापाताचारा भा भजत?
भजनाना
तुमका
मैं औ
मेरो प्यारा अल्ला रवयी।
वापू तुम मुर्गी सात नि ?
१२
[ सस्मरणा क बाच निराला
[ नय पत्त १९४६ म प्रकाशित गम पकौटी ]
गम पकोडा-
ए गम परोड़ा।
ताका भनी
नमक मिच की मिना
ए गम पौडी।
मराजाभ जन गई
मिमक्यिा निकन रन
ार का बूट कितनी टपकी
पर नाटता तुय दबा की रक्षा मैंने
जिम न ज्या कौडा।
पहन तून मुयश खीचा
गित कर फिर वप मा काचा
अरा तरे रिय छाग
बम्न का पवार
मैंन घाका चौडा ।
ए गम पकौटा।
मुख का पिन डब जाय
तुमम न महज मन ऊब जाय
वर न जाय मित्रा गांर मन का
गुर जाय न ग राति धन का
धुन न जाय जान पभानन का
मारा जग 7 जाय
गति माधा ग न भर
प्रति जन का टारगर नगर
निराला
पारिवारिक परिचय
और प्रारम्भिक जीवन
निराशा जा व पिता पति गममय त्रिपाठा उनाव जिन व परवाना नामब
गाव व निवामा य किन्नु निधनना जार परिवार का भरण-यापण या समस्या न
उर वगार मना परवा पा । वगान का मरिपाटन नामर ग्विामत म गय
गार व मररर पर 4 मरिपाटन गजा मारव का न पर विप कृपा
या। पति गममाय जा पा गजा मानव जत्यधिक मानन य निमा बम्प
नमा पन्ना व गन बार नर पुत्र मूयतुमार का पालन-यापण गजा माब
बनार गाय मविकाराममान पमआ। रमा माग नार म्वय गजा
माहब न उगया।
निराला का जम
1
यमनरनमार गिन पर परम मा मरम्वता या जम शिवम वा
धम धाम में मनाया जाता म्वन, पामार पावन वमनपचमा का
पनि गमगार विभाग व परम गरम मय कुमार न म लिया।
पनिगममा जारा घर मानत आरमगाम मराजघर अवराम
पा प्रताप वा परमा मा न १ पुषधन भर दिया था ।
वाचमाना निवि विद्या व वा रिया या मरम्वता राजाम
[ मम्मरणा व वाच निराना यमगीत प्रमी भा थे। वड-बट मगाता और गवय्या नाच बरकरान मगीत विद्या का यथष्ट ज्ञान प्राप्त किया। उग निना हारमानियम पर राशन गाना या अभ्यास किया। घार पारेन्ह ठमरा ध्रुपट भजन तथा बगना के भाव गाता का दाजभ्याम ग गया। गात गाविट मम्कृत गायन म नकर-मूर तुनमा मारा आदि व अन गात वा कुगरता पूर्वक गा रते। यहा वारण था कि यमवप्रिय ग गय। निराला को कुछ रोचक प्रवत्तिया निराला जा कुगत तगर भी थे। य बडी कुगतता पूत्रक तराकी की अनेक कनाआ वा प्रदान करते थ । यर वान रा य म साखा थी। य गाना के मन म भा बड पारगत थ । गाला फितना । दूर क्या न न नका निगाना अचा बरता था। य ताग तर परत + खेला म भा कुरान थे । "नक पुत्र का रामाण त्रिपाठा न म्वय अपन व म निपा-निचय ही निगना जा या जावन जनर गुणा का मम वय था। वन ग फ्ला या पथरक वग का सर जब मानावार वा म घमात ता वा मुटर उगना । क्या मजाल विका टप जमान पर गिर जाय । व ममा टर' म म उन हाथ का पर आममान का आर भागत शिवार नय! अपन पर परे गय या प्रगर विय गय 7 वपन या पत्थर का बना दुगता म पार तथ। प्रगम वा पथर निगता का छ भा न पाता बनि उमम वर्ग आन गनाया। निराला जी का विवाह निगात्रा का विचार मन, "" व गभग सम्पन्न हुआ। म ममय उनका अवम्या १५ वप का नगा और उनका पमपना का ग्यार-बारह बरवा।
सम्मरणो २ वाच निराना ] निराठा जा 'वमुर प० रामन्यान निवा ( चापुर ) फतहपुर के निवामा पर व मुखी सम्पन्न और रर्दम आरमा थे । भारी दान दहेज़ देकर रहाने बह धूम धाम पसाय वेटीका ब्याह रिया था और एक वप वाट उमका गौना भी कर पिया था। बुध रिना बा राममहाय जी अपना बहू और निराला का माय कर वगान आय क्ति अब निराला का मन पटाई वीआर म रचन्न गा था। नना क्या ता उगन विमा तरह पाम बर ला मगर दमवा वभा न पाट मा । परीक्षा पत्र और वापी यू हा धाडकर उहाने विद्यार्थी जावन म मयाम ले लिया परन्तु घर में यह बान प्रगट नही की। पराभापत निकनाता सच्चाई पिता मामन आई। व निराना पर बदन बिगट और उनक ठाट-बाट क मार कपट छान निये । उनको धमपत्ना के गह्न भा उतरवा लिय और उह पला मग्ति घर में निकल जान का आटा दिया । उहाँन निराना जा में कहा अब तुम बडे हुप जा कुछ पाना था पर चुद। तुम्हारा वियाह हो गया । तुम्हार प्रति मरे मभा क्त्तय पूण हा गय । अब तुम उपाजन करक अपना तथा अपनी पनी कासव चनामा। पिना द्वारा निपागित भान पर वे पन्नी मन्ति अपनी समुरार डलमऊ चन गय । यहा पर उनका खूब स्वागत हवा । ममुगन वाना न रामार का मातिर म बोई रमा बाका नहा रवनी । निराला जा वा वहाँ विमा प्रकार की चिन्ला नहा करना पड़ा। पमा मन्म में एक राचक और महत्वपूर्ण घटना का वर्णन करना आवश्यक होगा जिगन हम क्या गपूच भारत का हिनी का तना महान कवि रिया। निगता वाहिनी म आना भा एकराचा घटना है । व रान निराठा जान हिला भापा गम्बया विमा प्रसग पर अपना धमपना गमहा- तुम हिला हिलापरला हा टिम क्या है? जब तुम्हें आना हा नहा तब कुछ नहीं है। पनी ने उत्तर लिया। पमानास गत्तम निगता का अपना पगत्रय वीरार करना पड़ा गिन्तु वे पुन बाल-निको हम नहीं आती। पर ता तुम्हाग जवान बनाता है। पनी पुन बासा । बरवाडा बार लन नुलमीत रामायण पी है बम । तुम महा वाना वा क्या जानन ना' [ सस्मरणा याच निराला वास्तव में उस समय तक निराशा जा वा हिटी वा बडा बाना व साहित्य का जानकारा अधिक नहीं थी। धमपरना न ही इहे आनाय महागार प्रसाद निवनी नरिऔध मथितारण गुप्त जाति की रचनायें बताइ और उन परन करिय प्ररित दिया। उग का प्ररणा म दे गा दी गम्पयामता परिणाम विन वर न्टिा साहित्य को पार झर। जाज ग्नि निराला का हिदा या युग प्रवतक मगरवि वर जान का नय उनकी धमपरना कानी प्राप्त है अतएव रिटी जगत उनरा मत्व आभाग रगा। निराना जा अपना धमपत्ना मन्ति लगभग छ माह मसुगन म रह । बाट का जब परित राममाय जा म्वर का नोट ता स्वय आरर अपने पुन जोर पुत्रवध का घर वापस गय। धमपत्नी की मत्यु दा भर म र पनएजा पता हुआ था। "सा भयकर बोमारा न मगरवि का प्ररणादायिना धमपना वा मा मौत को गा- म सुना दिया । उम दनन म हा राताप न हुआ उमन रनक जय कुटम्बजना या भा एमए करव ग्रमित कर लिया। महाववि पर भाषण जाधात - मा । म ममा निराना जा का हा सनान या पुत्र रामकृष्ण तिमका जाय चार कप का था और पुत्रा मराज जिमका उमा थप का था। न दारचा का ता पाान-पापण प नि ननिगर वाना न किया मिनु निराशा जा व मामन उभा अपन भा' के चार व चाल पालन-पाषण या ममम्या था । वह सर मग्पिाटप ग्यिामन म चन गय नार याप्रम प्राप्त कर बग गरा पान- गाग्न ग । निगना जा न ग बाय करना भा जारभ पर चिनिनु निम ग्पिामत का मवार जावन भर र पिता न पूण तरपयता व माय वा धा निगरा गाव मगर क्याशिव स्वतत्र विनागवान म्वाभिमानानि । गजनतिर पत्र म विनम्पा नगा। उनरा पाय वगमपचर मम्मरणा व याच निराना ] अन मग ग्नि उन नौररा पर त्याग पत्र दिया । अपनी जातरिय भावना और हरा अधिन बाय न रप सब । म्वर पिचारा और भावनाआ म विचरण वग्न वागा कवि हत्य वचन कहा बीरार करता है? पना या आपम्मिव' वारणिर मत्यु ने निराना पवि हत्य को गहरा आघात पहचाया उनकी मुरामन भावनायें वेन्ना के गरमागर म डूब गइ और फिर विष पग उनमा मसाव गान्त्यि गजन की जार दुआ जा अतिमात तक उनक माथ रग। पवर बाग यप का जवम्या म पत्ना पा साकर निराना ना जम प्रतिभावान और गुडग नश्यया य लिय दूमग विवा' पर नन क रिय वन्न नागा ना दवाव पा रिन्नु उगन पुन पिवार मूत्र म सना म्वाकार ना किया। जिम पावन प्ररणा या उन अम्मात वा दिया था उमा व वियाग म जनरात ना डूब रन् । निराला-साहित्य सेवा की ओर गन् १०२० म नौरो त्यागन व बार उगा गायि-गगा का दढ़ व्रत लिया और अना मपरों ना मामना परत हुय भा अपन पर पर दृढ रह । प्रारम्भिर पान म ग क्षण म उह पाना प्रसार व मार पवन पर रितु निरामा पभा विननित न नहा दप गय । ना मुस । का मागित्तम पार गिरा पिया गया । आलोचना ने उनका मुनगामायाकनमा और पर या उपाधियाना। नागगार्शियर पिराध राप्रमाव उना माधिस मिनि पर भा पना। निपनासा अभिगारागान चाईविना उत्तिन HTTTT मा गायना यषि उIT IT म पसार म्नर था आर पा गा गह अगर पा पागा प भिया रस्त थ । आनाना का मा. परा न परतिर पा गजा म प्रति गनिगा ।
२० [ सस्मरणा के बीच निराला एक समय एमा भा आया वि विराधिया का उन समभ नन मस्तर होना पग। निराला के कृतित्व का मा यना दन के निय व विवश हो गये । निराना जा हिला के युगा नरकारी कवि रह है। जिगन अपनी प्रतिभा क दल पर निदा-माहित्य म नया माड पा किया है । जादि कवि बाल्माकि से लकर अब तक हमारे देश म बता जटिन नियमा म विवद कविता को मुक्ति दिलाने वाल निरागा क जनुगामिया का मन्या आज हिती समार म थाडी नहा है । उहान अपना यि प्रतिभा और अदम्य सारा के बर पर हम दिखा दिया कि काव्य को टम नूतन टिगा म कितना सम्भावनायें विद्यमान हैं। उनकी काय गला उा विद्रोही स्वभाव का परिचाधिका है। वे सामारित जावन म सामाजिर रूरिया के कट्टर विराधा थे और छटा की गति एव मात्रामा की स्व ददताव स्वनता के प्रमाथ। निराला का हिदी मे साहित्य सृजन पत्ना वा मामित्र प्ररणा न निराना का वगना वा 'यामला धरता स साच कर हिला माहित्य उपवन का प दिन पुष्पित करन का विवा कर लिया । उमा गमय उगन हिला का खडा दाता का अभ्याम करना आरभ किया । आरभ म निद्रा विभक्तिया और निगाटा म उनझन " परतु कुछ ही गमय के अम्बाम और परियम न नका ममम्या न कर। और य परिपक्व मार हिरी म अनवरत शिवनग । पर 'ना अयर माधना का ग पर यानि अपना अनग वाट्यगत विपनामा बरालय अपन गम-एम्न मानिया का पण दर वत माग निकल गय । उम मम वारा मनाया म 'जुग का बला का आरणाय म्यान है। १९१६ म नश अश्विाग प्रातिपा। 7 ग्निान ग्वारनाय टगार और म्यामा विवसनका कवितामा का गवर अनुदा भा दिया था। मन ." मगन बिगतनाना प्यारातिमा था।
२१
सस्मरणा दान निरामा }
मतवाला निराला मिलन
जिन दिना निरासाजा समवय का सम्मान बाप कर रह य उमा मध्य एक
नि उना मम्पर मनवाना सम्पादा या महात्व प्रमात मठ महा।
गर मा अपनी महत्पना और गुणमानता तिय प्रमिद य अताव गाय ही
निगमा प्रामा प्रथम थे म आ गय।
निरानावी तसान नाजामा मद माधारण म प्रमारित करन मम्व मर
जावा बटुन बरामयोग और हाथ रहा है।
मर जान निगता वृतित्व का परवाना । उनका निया को मापनानी और
निराका विराधा मारिया टोरागवा आतावना मा परवान पर उनकी गवद
रचनामा को प्रमान रायमर लिया वा काहाँ विगघिया का नन
मम्नाहाना पडा।
अहो प्रारमाहन स्वरूप निरातारा आजमया प्रतिमा विरमदे माय
प्रस्फुटिन ता चना गरे।
मन..
'मतवाला न होता, 'निराला' न होता
-ममनवालाममा व मानव मदन निगरामनवारा
म दुगा लिया । या या एग मनवाला निगता का प्रतिमा विराम एव प्रसार का
विस्तृत माग गदहा।
Pा नाम-निगा उगना मतवार व अनुप्राग पर किया गया।
প। গায়ের র মাসি না ঘিন ম এখন সব ম রী সুপি
हुए नारा उन
माया ननाना का रि विरारिया न मा मार दिया
और उम म्यान पाप दादा गा निगमा जागिता निमा परदा यि
ATE frfo माग र अविनर TATITHI गिप वान वार उमा माग
ग अनापन ग | नागामिया १ मा मागम पदच गया
गरिनपा मुनगर और मगरवि ने मुग ग्विनि कपा।
२२ [सम्मरणा के बीच निराला निराला किन किन विद्वानो से प्रभावित हुये 7 मगवि वाद्रनाथ टगार ग व जत्यधिर प्रभावित य आर टगार क सान्त्यि न उन पर मजन का गरग प्रभाव गाता । गमरण परमम्म और म्वामा विवसान या विचारधारा और उनमें उत्कृष्ट जावन दान न निराला या पिर प म जाकृष्ट पिया । व वन मारित्विर हा नग बने र वान नागना और विचार भी यन गय। परित महावार प्रमात नि मतमग म्वम्प उ-मानित्य जगत म निरतर बरन की प्रग्णाय मिनाउा प्रग्ण। म नि मम बय पविसावा मम्पादन भार भा उगया जोर मफत मनाना रूपम१२ वर्षों ना नाय पिया। स्वर्गीय मगठव प्रगाट गरका निगना का निगा बनाना मगम बग प्रय । निगना या प्रतिभाग परिचित गार गन7 - स्न म अपनाया और मनवाता म उन ग्चाय निरनर प्रकाशित गनी ग्ग। जिम काम्वरूप उनका वानि ममम्न म पना गर्न गिराना का अधिकार पनि बसता व वा प्रयाग जमा पावन नगरा ममी “पतात मा । जा वि मगथिया नागर कहा जाता आर माय हा तागजना । उगन पान निवाग क नियम्यान भा असि निमन जोर प्ररणा गया चना-गगा वा नर । दागगज प्रयागदागा मगाण निगता का पावन मुग्गरि न गर्वाधिक प्रभावित किया पर बना अधिगयानि नगा। - - आचाय महावीर प्रमाद द्विवेदी से निराला की भेंट
मम्मरणा व वाच निगता ]
गवा
अचानर टिन निगता म जान 7 विमान दान म्बामा म कु' विवाद ग
गया मार फिर बानिमाना निशान नौरगया।
व रियामत गनारग अपन नवरया
परतुप नापान निगगा मा
विमम नाका मरा। নিৰ
गजाबिर मममा नाममा क्या 17 व पगन्नान नगरनगर।
उ गिना निगताजा पानार मगवार प्रमार द्विवा ममिन व निय
रभागना वानपुर जापा नविना उन िनामावता म उन्या प्राप्त
पर वन निवामनरत ।
निगताका जागिर विमना पर चिकित 17 शिवम जान कर याना पर
“नया नोग गियरिणा-या पापग्तु निगाना ना नाम र गनिगा य ।
व वा जान नकर न य नार जन म पुन नितात व जनगर पर वग
नौरगम्बारगा।
विजा व यन अनुगर पर गन टग ममि गा मागर
रिपा था।
वग पर निगना जान गमा परम. या पामा विवान गाग्निग
মা এr fা।
ग्मय मनिका ननाय प्रगति गताग्य।
नावों मवा मान गयना दिया।
निगला माहित्य के विभिन्न स्वरूप
पवि निराला
निगराम विशाल मिरियमिता
गिग भावामा पापा । नाम विरागा -रि
मरना आदामा प्रभारपा नावादम
मानान
२२
[ सम्मरणा के बीच निराना
निराला किन किन विद्वानो से प्रभावित हुये?
मगवि पाद्रनार टगार म व जयधिक प्रभावित न्य आर टगार क मारित्व
न उन पर सजन का गम प्रभाव गता। गमष्ण परमय और म्वामा विमान
का विचार माग और उनमें उत्कृष्ट जावन टान न निराना का गिप प म जाकर
पिया । ववत मा सिराना वन र वरन तानिन जोर विचारस भा
बन गर ।
पन्नि महावार प्रसाद शिवा के रातमग स्वम्प उट साहित्य जगत म निरतर
वान का प्ररणायें मिता । नाप्ररणा मउगन मम वय पत्रिका का सम्मान
भार भा उगया और गफन मम्मागरूपमाँ ना पाय रिया।
म्वर्गीय मगरव प्रमान मर का निगता का निराना बनान का मग बाय
है। निगता "माय प्रतिभा म परिमित गर उगन रह स्न- म अपनाया और
मतगाना म उन पनराय निस्तर प्रमागित नाली र निगर पाम्वरूप उन।
कानि ममम्न गमनाग।
निगना पा अधिमा वन तत्ताबाट प्रयाग जमा पावन नगरी म श्री
"तात मा। जारि जना मगर्गपया ना ग पहा जाना मार माथा
नागज भा। उन पन निवामक नियम्यान भा जयधिक निमन जार प्ररणा
दापा चना-गगाकार।
गगज प्रयागवाया मगप्राण निगता का पारन मुरगार न सर्वाधिक प्रभावित
किया पर नातिगयानि न -गा।
आवाय महावीर प्रमाद द्विवदी स निगला की भेंट
०३
मम्मरणा व वाच निराला ]
बचानक व दिन निरामा म अपन जाविका रने दान दामा म बुर विवाट हा
गया और फिर स्वाभिमाना निराला न नौरग याग टा।
व रियामत का नाग हा वर अपन गाव चा गर ।
परन्तु या आपात निराला का मागिय मवा म विमुख नग कर मवर । विनरा
आथिक ममपा उना मम क्या 7 रन व पगम्न दात नग नम गय ।
उहा दिना निगना जी याचाय मगवार प्रमात द्विव। म मिलन रिय
कभा-वभा कानपुर जाया करन । रिवाजा ग्न रिना मरम्बना म अवाग प्राप्त
करवा निवाम करत 4 ।
निगता 1 जापित चिमता पर चिनिन र द्विवना जा न कद म्याना पर
उनका नौकरा व निय निवा-यों का परतु निगता ता नाम्भ म ना निगना ।
व वा जान का तयार न हुय और जन म पुन रियामत + अनुगर पर वा
नौरग म्बावार पाता।
द्विवना जा व बग्न अनुरार पर हा डान माग मणिपाटन म जाना म्वाकार
दिया था।
वना पर निराना जा न गमाण परमपम नथा म्वामा विवेकान मारित्य का
गम्भोर अध्ययन पिया।
मम वय मरिर उनका रचनायें प्रकाशित तारा।
जाना वो तर सवय वा मम्पान वाय भा किया ।
निराला माहित्य के विभिन्न स्वरूप
कवि निराला
निराना पाच म पिदाह वा वान प्रतिप्रियाय मिरता 4 प्राम्भ मग
पान्निपारा भावनामा २ पाप य । उनमा म विचारधाग का र माग्यि
मजन पर अत्यन म्पीय प्रभाव पग परत उन वाध्य म मागिय का नालान
२४ [ सस्मरणा के बीच निराला परम्परा सवथा परिवर्तित हा गई । काय को छतबद्धता की जटिन शृखनाआ मे मुक्त गना पड़ा और उटगारा का असीम अभि यजना की पष्ठभूमि मिला । प्रम्यान विरान आचाय नन्दुनारे वाजपेयी ने कना है 'रगम्य की कलात्मर अभियक्ति की जा बहुविधि चेष्टायें आधुनिक टिीम का गई हैं उनम निराला को कृनिया विरुप उल्लेबनाय हैं । कुछ कवियो न तो रम्यपूण कल्पनाय नी की हैं किन्तु निराला काय का माटत ही रहस्यवार है। वाम्नव म जिम प्रचार निराला ने भी अपन जीवन म किसी प्रकार का बघन स्वीकार नहीं किया उसी प्रकार हे अपने का य म भी बयन म्वीकार न था। उनकी पर मुक्ति भावना मागिय म युगा नकारा प्रयोग था जिम नतकालीन माहित्य ममज्ञा न जा भर पर ताडा परन्तु बात का जिम निर्वात साहित्यमयता मिनी और नागा न निराला का पहचाना । म। अर्थो म निराला कवि थ और विद्राही कवि । विना मतिय कि उनका युगातकारा रचनाआ म विवाह का आमत्रण था एमे विवाह का आमत्रण जा काय व कायाप और उत्थान के निय था । परिमन की भूमिका म उन स्पष्ट किया -- मनुष्या की मुक्ति की तर रविना भी मुक्त हाती है मनुप्या का मुक्ति कर्मों के वधन म छकारा पाना है और करिता का मुक्ति छाता के नाम्दम अलग जाना। अपना मुन एट ना व ममम्न जापा का उगन मोढ रक्षा और अन म उनका मात काव्य पानि ममम विपभिया का परने टेकन पर । वा वा अनर कवि न्म धारा म प्रभावित हुय और रहान निराना वा धारा का अनुमरण दिया। उना मुनयता माय्य प्रवान अारिता मनारमता पक्ति गाती भाव-व्यजना व दाना । वम क्षत्र म वजाड है। नकी मोमिता का मबम बग प्रमाण परवि अवनर नरामरतनान भा नगका जा सका। उपयासकार निराला निगना मगवान मश्य पयामशरमा थाम गविनाम शर्मा শমগা ধ ৰাৰ নিয়ৰ } वादा में सामाजिक यथाय का चित्र निराला के गद्य साहित्य म और भा विरान्ता साथ रखा और रावी और भी सजीवता के साथ मिलता। अप्सरा उनका प्रथम उप यास इसके बाद अलका निरुपमा, प्रभावता पाटा को पा- दुल्ली भार काले कारनामे जोर बिलेसुर बरिहा गादि का नाम आता है। इन सभी कृतिया म तलालीन सामाजिर जीवन का अत्य व स्थाथ चित्रण मिनता । यथा इनि हास्य-न्यग्य आ"श और रोमाम बा सफर वणन मिलता है। न रचनाओ मायगत चित्रमयता के दान होते है। पाठर चरिता को अपनी आग मामन चनता पिग्ना अनुभव करता है। जमादारा निमम अयाचागे मे लहने हुय विमाना वे चित्र मामने आ जाते हैं । अपन मताव का रक्षा म हत्या ररने म मान डरने वाला लिया म जो त्यागवारा भावना होती है उम उन खूब पहचाना है और उनका मत हृदय स्पर्णी वणन अपनी रचनामा म किया है । वर वियास पाव चयन चरित्र चित्रण भापा गला समा दष्टिया उनक उप याम अनूठ है। कहानीकार निराला निराता की बहानिया नार लाचिना म हम ममाग + कट यथाथ के दान हान है। बहानिया म चतुरी चमार तिली और मुन की बावा आनि सह इमके प्रया प्रमाण है । और रणाचित्र व रूप म कुल्ली भार और बिल्लसुर बरिहा आत है। उनकी कहानिया प का पपा माहित्य का तत्वानीन रामारिय छाया है पर वतमान ययाथ मभावे प्रभावित है। प्राम्य जीवन चरित्र चित्रण और वाता चरण और परिस्थितिया वा सफ्ट चित्रण उनमा व्याआ में मिलना है। इन कहानिया म पाया आदाचार नहीं है यथाथ जावन वा झारा है। पर प्रकार मनसा ग्राम्य মানিক আল কা গাঙ্গি মা হা সাবমি ধূসুমি স্বী মান । जा सकता है।
[ सस्मरणा के बाच निराना
ऐसा हा सजीवता उनक रेखाचित्रा म भी मिलती है। वे अत्यत सजाव स्वा
भाविक और हृदयस्पर्णी बन पडे है। वातावरण का ऐमा सजीव वणन गला का
एमा अनुपम चनाव और वणन की ऐमी मूम दष्टि नगिता बलुत कम मारित्यकारा
म पाया जाती है।
व्यग्यकार निराला
निराला न मारित्य को मात्र गम्भीर गूड वृतित्व से हा भलकृत नग दिया है
वरन् उनका रचनाआ म हम नभन हुय एव ययाथ तथा हास्योत्पादक यग्य के भी
दान होते हैं।
उनका यर यग्यात्मक पुर उन काय उपयाम और कहानिया म मिलता है
और उना निवघभी यग्य म भनग नग।
कुकुरमुत्ता गम पौडा तथा बगा और नय पत्त भादि रचनायें समा
वन उगारण है।
मन् १९४ मउगन बापू पर निम्नलिखित यग्य पिया-
बापू तुम मुर्गी पाते यदि
ता क्या भजत हात तुमका
एरनगर नत्य सर
मिर बन पर हय हात
हिता व तन मावि
बापू
और दुकुरमुना का ये पनिया मा विम्मन नग का जा माता-
यति मुर्गी मान तुम
--
अब मुन 4 गुनाव
भूत मन जा पाया या रगा आब
मन पूमा मार कानून अपि
गत पर नगरपिकल
२७ सम्मरणा व याच निराला ] यह भ मना कुकुरमुने की गुजाव को नहा वलि निराश्रिता और निधना द्वारा पूजीवाली की की गई है। जमा कि उपर कस जा चुरा है निराला को गए रचनाआ म भा यार का गरा पुर है परन्तु यग्य का यह गहराई विरोपकर अस्पष्ट दष्टिगत हाता है। उगहरण के लिय -म पन्त और पनव' और मामाजिक पराधीनता आदि रचनामा काल मरत है । उनकी कहानिया और उप यामा म भी जहा नहा गापण पूजावान सामाजिर यभिचार और अन्नता पनि प्रान्तिकारी और चुभना हुआ "यम्य दष्टिगत यह यम्य मान यग्य हो नहा वरल एमी हृदयवधर चेतना भी है जा पाठन को निमिता देता है। निराला क “यग्य निरथर और कवल मनारजर नहा रहे जा सकते। हाना - सम्पादक निराला निराला जी न कुछ समय तर समवय और मनवाता जम हिला पत्रा का सम्पारन नाय भी दिया है। मन ३७३८ क बास-पाम लखनऊ के सुधा कार्यालय म बात थ । सम्पादन म मोतिकता उनका प्रमुख उद्दश्य था। उनक सम्मान कार म सुधा का रूप काफी सुधरा ! ए मजग मम्पा म्प म वे अथक परिश्रम करते थे। मावा और मम वय कयना सस्मरण उनके साथ गुम हुए है। उहा दिना निराला र नाम पर क्या नामापत्रिमा भा पहाँ थारम्भ हुई परन्तु अघिय दिना तर वर भी न बर मा। पालम और उच्छ पल यानि का प्रारम्भ मा उमा बाल म हुआ था परनु वा का द सब भा व हा गय। *सस वार ग पिया ना मरता दि निराला न सम्पादन परम्पग वा एक सात नाव रचना।
२८ [ सम्मरणा के बीच निराला निबंधकार एव समीक्षक निराला निराना का कानिया एव निवधा म इतना माम्य है कि उह एक दूसरे म जनग कर पाना कठिन मा । उनका निभय स्वाभिमान जोर माक्त मृजनशक्ति उना निवधा म मिलता। उना निवा की भाषा और विवेचन शिल्प अत्यन प्रभावकारी और प्रवन नगता है । अपन निवधा म उगन वरी निर्भीकतापूण गला म विपया का प्रतिपादन किया। सपान चर और पिमी प्रसार की नाग-लपर करी दिखाना पडती। व कुरान और मपन ममा र भा थ। चार भारताय या र दष्टि एव निमाविम उपनाम आदि रचनाय मा प्रमाण है। बाता मारित्य ममन वार और जग्रजा ममालोचना के वह ब- अध्यता हैं। 'न गया परिणाम वन निगम भी एप गाफ-सुथरा स्वाभिमान भरी मोनिक दति उपस्थित ग्ना चाग्ने थ जिस रिटा व नब क ई परम्परापूजा रूटिवाटी आलाच नग गमरत थ । व बरत तार तार में जानते थ निजग्रजा रामाटिक सविता fम अवनग्नि नगनासरती और न ही बगनासा मयानिन सिटी दाआर म आर वमा ।वाग्गर गमकता है गतिय द रिटाया अपना स्वतन गमा निर्मित करना चाहत थ । अनुवादक निराला अनुवाग व क मगन मयत म वाम्यायन व वाममूत्र का बगना म पागम कृत क्यामत चार नागा म विवान जा क माम्बा टपाम्याना और वरिम यावरा का पार पुनरा का नया गार का भा कुय मर निया का अनुवाति का अतिरिन यान जनय सपा काय भा पिय। 'न अनवागमन मन ग्ननगर का भाग्नाचा थोर दिया माय मित वार नगलि। भाषा का मामा गर्गत पवा और अनवा' या गार गुगम ग गदर बना। अन" दिन मा गमरा और TTM मनायें पन जिनान नामनिमाव यदा और माता रणाव व मुगा प्रतिभा
सस्मरणा याच निराला ]
२९
र धना नाकार य मागिय क जिम भन भा भा पा किया वह उपकृत नौर
बननहा गया।
निराला जी का निवास स्थान
प्रयाग म निराना के निवाम म्यान गा मौ हद भी वो पल भा भवन
निमाण कना का नमूना बना अतियाक्ति हागा ।
उम मान गिम्म है। आग वान निम्म म परत पत्र और पाछ
बाल गिम्म म निगना जा रग्न थ। उनी ममाप काराने उम आग
भाग भोर मी म मा हुआ रमा पर । आगन बग्ता छारा है। राग की
पुताई मिट्टी मा गर । मकान यानि जयधिक पाचनाय है। मगर मावि
न म आर कभी ध्यान ना लिया। गर्मी व दिना म व नीच का काठरी पयाग
मग्न थे । उम वारी म उनका पुग्न तथा बच सामान अन्न-व्यम्न दा में वियर
निरालाजो का रहन-सहन
प्राय निरासाजी घर म स्वय जपन गया म पार नगात थ। खला हई छन
पर नग बग्न कमर पकाय हुय व मजा प्याज आरिवारत । मकान म उनका
रहन-मनन विरागा वा भौति था। जिन रमरम व रहत ५ उमम तान चार
मिट्टा व दान व रत थे । दुधा म आटा दार बावन आति रवा था और
कुछर खाना र गन 41 वग पर एप मामूना मी दावार और माग भा पडा
रता या रिनग भगावि रचनाय बात य । पश्ययिराय जार विभिन्न भायाजा
वा माहिया निशाना टि पिपरा पितानार खापर माती
का पुगना कुना टगा ना या दूसरा नार बान म पुगन जून पर गन 4 ! गामन
मिपाकरा पर या पता था और मा गमापना का
" रवपाताया। वा वानापान पला पुगता गू? रगता था जिम
पर मगरवि विधामान प
M
३ [ सस्मरणा क वाच निराला उन काठ का दाा जत्य त नाचनाय है। छत नाच का झुकी हुई है और उसकी करिया जजर ना चुका है। विमा नाय पर नमक बिखरा पडा है ता विमा पर मिचा और विमा पर तन्मुन और मूखा पाटिया। एक आरमारा म दा बतन दिखाई पडत हैं। जनम म म बान पी रखन के काम म और दूमग चूना भिगाने के काम म आता था । क्यानि निगना जी को पत्त याना तम्बाकू के नाथ चून की बडा जस्रत पन्ना था। ऐमा नग अन्न-व्यम्न या मगरवि के रमाई घर का भी थी। समूचा निवास स्थान कलाकार की लापरवाग का म्पप्ट सकेत देता था। कभा कभा जपित यक हान कारण व विमा का बाजार भेजकर जपनी मन पमत मजा मगदा त । जागन्तुक अतिथि का स्वागत वे निरात ग में करने और जपन ही हाया म उमक निय भाजन नयार करत । मेहमान र स्वागत के निय वे दा तरह 7 नय माग तयार परत । अपना दा म विमा का विराव यह स्त्रीयार नगमगता था। किनना तारेर क्या न जाय व वर रत्मानान म विधिवत भाजन तयार करते थे। कभा-बभा का वचन यान उह गाना गाडियाँ र देत य और उह आग जनान म बल परगान नाना पड़ता था। याना धार धार पवना रहना और वे रमा' छाडकर अपन मन्मान अथवा भक्त का सपना "द्यानुसार गान कविता और गान आनिमुनान नगर । मूर आन पर कभा का कविता प्रकाशन क निय भिजवान। नारमा लगभग ६ घण्टा म नयार नाता था। पर व बगे जात्मायना और म्न म मन्मान का भाजन कगत नपचात म्वय भाजन करत। निराला का शारीरिक सौंदय नागा नरम - निगना का पचान ना बग बागान था। उनरा मगन नव ग्मिा 7 नाना नग"। जिममा नव नित नागा क्या व वैरा का जवान और मरिना मना का नाम सार हा प्रम पार पायय म उनिगरता र सस्मरणा के बीच निराला } जाता। उनम विचित्र आपण था अनुपम हत्यस्पर्शी भोदय और मुग्धामयी मात्विाता था। उनके मुसमन पर निन्य तेज विद्यमान था । उनका मामा य जन दुनम लम्बा कर मासल और चौग वक्षस्थल मल्ला जस पुष्ट सध और लम्बी सम्बी नगुनिया स युक्त मासन भजायें उनके गारारिक सौन्य सजीव स्पथे। उन नेन दाधायत गम्भीर तथा कुच रक्तिम आजस्वो नया चितन मे परिपूण था यौवनावस्था म खस गये लम्बनम्बे बान और धनी बनाई दाढा यह सभी कुछ मिनर व अपनी अटपटी वगभूषा और अपटी पाणा के साथ प्रयाग निवासिया निय ही नी वग्न हिलो ममार शिप अविस्मरणीय रहगे। जिमने र बार भी, कुछ क्षणा यि ही निराला व सम्पद का सौभाग्य प्राप्त किया है वह निराला का कभी भूत ना माता। उन मोर यवहार और हत्यस्पी वार्तालाप म नो जादू था वह युगा युगा तर बदनीय रहेगा। निराला और उनके मेहमान निसावरपा महा था। नौ बज प्रात वानर साहियकार निराजो पा पहचा । मन म माय और भय था पिर भा माहस ममद कर उसने द्वार खटखटापा । निराला जा से उसका परिचय मामूनी था और अपन आन का कोई मूचना भा उगन पहन म न दो थी अनाव उमका समाच म्वाभाविक ही था किन्तु प्रयाग म का टरेगा? इस समस्या कारण वह महाकवि द्वार पर आया । उसे मावि का महृदयता और आत्मीयता पर भरोसा था। द्वार खला मगरवि बाहर बाय और आगतुर का विम्नर ऊपर न जान ৰা আশ শিষ্য। সান্তা ন ব শণ কি কি বিষয় হঠাৰ সুখ ल गया। रसन का यह झाडू है म्यान गाफ बरस विनर यहा लगाना। "मना नाम पर विद्यालना।
[ मम्मरणा के बीच निराना आगन्तुक न तर सण उनकी आना का पालन किया। बिस्तर जगा कर खली छत पर आया ता देगा कि निराता जी एक तग्न पर यवे वर प्याज काट रह है। वह आ'चय चक्ति हावर मब कुछ देख रा था। मगववि क घर का दयनाय स्थिति और उनर हुत्य म्पी क्ति व का मात्विर म्बम्प। कुछ दर वाट निराना जा ने उमम कहा मै थक गया हूँ। तुम बाजार जावर लाल टमाटर और हरी मिच ने आआ तुम्गरे निय एक तरकारी और बन जायगा। फिर उगव गथ पर उगन एप टमनी रम दी । वह चारता था कि उहे पमा दन में मना कर है परन्तु वा जानता था कि अपना र म वे किमी प्रकार का विराध ना महते जनाण्व चपचाप वाजार चा गया। उम समय दिन म १० बजे का ममय था। जब वह नौट कर आया ता निराना जी चौर म थे । न तरवारिया और रारिया बना र ५ । उमन कहा कि नाय मैं गरिया बना परतु उगन यह म्दावार ना किया और गाता लडिया पूर पर कर पाना बनाते रह । यगायन पाच मराठा छापराय और उगगज गजन की प्रतिनिपिरामर नयामाग्त्यि बदा भिजवाना। चार-पाच पट वार गभग 6 बज उना भाजन तयार हुना। मव प्रथम उगन अपन ममान का निशाना नात जान पामा वा अनिमार मुपर्जी का ओर मवम वार मम्वय माजन किया। भाजन ग निवत्त गावर उगन जागनु म मान सागर घम आना जान गिजर रागन पर पर वाक गाना उम बना कर - यि नाशि वर राम्ना न भूत। राम रामात प्रा. बाबराव जर दर गोगना गया कि वर तजार कर मतदान आमापनमा नागरिया रकमा । नम ला र में। मन व बार नार मा जारगा। इमर जिदर प्रात "नाग शिवा? मनाव घमन व निय जा ६। वह ना बगवान 'ना' मा सम्मरणा र वाच निगा उसन पहा बरत छी तरह और उनम माथ चल पड़ा। म ममय उनक मिर पर पर पुराना स्ना टाप था निम व गत का आढवा सा" थ । भर पर मना मा त मत था और परा म वाग का वश्न पराना रप वाला जुता था ाि पिता निम्मा नहार था। उमम उनरपरा का बवाया मार नजर आना थी। ग्दिा या युग प्रवनक कवि निगता और दम भेप म' विमान अनुमान लगाया गया कि मर पाम जादप पर न ग वह हाथ म पाना पराता हागा और वामाराको दाम पानी के लिय नरमला र जाना हागा । आग तु+ मारियार "मा चिा विचार मया हुआ था कि चाय वान का *वान आ गई । उहान ना कुह चाय ला और गगा व चाय की भार चा निय। गम्ने म निराला जा मीन गभार चन जा रह थ । अपने आप म डूब जोर खाय य । जब वे गगा व बाध पर पहुंचे ता दिन हात भूय या आर लपत रह गय । सूय वा किरणा के कारण कुहग बम हा रहा था । व गगा उमव करार जोर दम पर मुहरे का चारता मिया य मौत्य या टायर बान-माहारात उन मुर पर है। इतना वा ददय य यत्र न मिन सरना । मुबह ता है ना दिन स्वागबाट का नाम मा बहुत अच्छा हाना है । नाम का दूमर बाध पर भनेंग। रतना कहकर चपगगप। लोग्त समय प्रगतिशत माहिय की बात चला ता व स्वय रहन ग স্যনি वार पर मवम पर मैंन निमामाई नग जानता । क्या लिया जाय दुनिया एमी है जारिना Peveal ttton a ना मानता। मैं घर चार तुम्ह रिमामगा। इस बार व पुन भाय का दुगान पर माय और उगन चाय पापिर दूसरा चार गगा विशारा गाया । मक या घर बाबर व द्वार वामन पर तस्त पर वह गयाथारमनगाला माया गय। उनम बानचात परत परत निराना जा फिर चायवारा आय । ताना न फिर चाय पा! तन मदिराला जा का दूध नवासा वाला आ गया। उमग बातें सरन पार हान अपने महमान म मग जामा एक मर दूध पा यात्रा। वह ग्वाल गाय घरी पार पर परान्त म ग्वाल ने मामान में बग बाबू जानिराला जानिए मगरमा है। नगरविता आगे दूध पान का भी
[ मस्मरणा कवीच निराला
जागन्तुक ने तत्क्षण उनका आना का पालन किया ।
बिम्नर नगा कर खना छत पर आया तो दया नि निराठा जी एक नम्न पर
यक व प्याज काट रह है। वर आ'चय चक्ति हार मब कुछ देख रहा था ।
महाकवि के घर का दयनाय मिति और उनक हाय म्पर्शी पक्ति व का
मात्विक म्वाप।
कुछ दर वाट निराना जा ने उमम का मै थक गया हूँ। तुम बाजार
जावर आलू टमाटर और हरा मिच रे आमा नुम्गरे निय एप तराग और वन
जायगा।
फिर उमक गथ पर गन एक अन्नी रप दी । वर चाता था रि उहे पमा
दन म मना करते परन्तु वा जानता था कि अपनी राम वे किमी प्रार का
विराथ ना मन्त जनाण्व चपचाप बाजार चला गया। उम ममय दिन म १ बजेका
समय था।
जब वह नोट कर जाया ना निराला जा चौर म य त नरवारिया और
रारिया बना र थे । उमन पग नितान्य मैं राठिया बना तू परतु उगने यह
स्वागार नगरिया और गाना नाडिया फूक पक कर पाना बनात रह । यमापन
वाच मराटा पावर जाय और उमम एप गजर का प्रतिनिपि नगर नयामाग्यि
बम्बका भिजवा।।
चार-पाव पर बार गभग 6 बज उनका भाजन तयार हमा। गव प्रथम उगने
अपन मग्मान का विताया नप'चात अपन पनामा या अनिमुमार मुपर्जी का और
मवा वा म म्बय मान किया । भाजन म निवन पर उगन जाग तुर मनमान
माग पम आन वा आगरपिा जोर वागत पर गराएगा नगा उम
बना कर Pिा नापि व गम्ता न भून।
म का गान गार वत्र व गव र रोगनाया रिवर नगार पर
- पन - बार आना माना।गगरिया गया है
सितम ला
एब मैं । मानव बार नार या नागा।
दर प्रार नर का रिवार मराव पमन गरियजा
८ । वह 17 दग। बार 'ना जा'
मर नि
सम्माय वाच निराना] उमन कहा वहुत अछा तरत और उन माय चरस पग। उस समय उनके मिर पर पुराना ऊना टाप था जिम दे गत का आटवर साय । पमर पर मारा मा मत था और परामबाग का बहुत पुराना कपड वाला जला था जिमपा पिछा কিশা না । দাম প ধ া বা মা? বল জা ধা। হিরা युग प्रवतक कवि निगला और टम भप म विमन अनुमा गाया नागा वि इसर पाम जार में पड न हार वह हाथ म खाना पराता गगा और पामारी कोणाम पानी के लिय तरमता रह जाता है। आगन्तुर मारित्यार हमी निता विचार म डूबा हुआ था कि पाम पाल का दवान आ गई । उहाने तो दुल्हर पाय ला और गगा धपा बार घर दिय । गस्ने म निराला जा मौन गभीर चल जा रहे थे । अपने आप म डूब और साय न्य जब गा वाघ पर पहुंचे ता उदिलात सय आर रेपते रह गय । सूप का विरणारे कारण व्हग कम हो रहा था। वे गगा उमर कर और उस पर मुहरे का बारता रमिया र मोय करा देखकर बाल-~गाट या मुहर र है। इतना छा दश्य अपर न मिल सकता । वह ता है की नविन चाहाबाद का "राम भा वरन अच्छा हाता है । म मा दूमर वाय पर चलग । "तना कहकर भागम। सौरत समय प्रगनिया सानिध्य की बात चली ता व स्वय कहन ग प्रगति वा पर मबस पले मने निमा है । म काई नही जानता। क्या किया जाय दुनिया मो है जाविना Revealation a नही मानता । मैं घर पर तुम्ह नियामगा। "मा बाद व पुन चाय का दुशन पर जाय और उगन चाय पारि दूमरा चार गगा किनारा गाया PAT बार घर मार द्वार में सामने पर नत पर बर गरवास दर मा बगाना भगाय आ गप । उनम बारात बरते-करते निरास आ फिर चायवाल र पास आय । ताना ने फिर चाय पा । स्तन म निराला जीवा दूध न वारा वारा आ गया। उमग बाल करन १ वाद उगन अपन महमान म महा आआए मर दूध पात्रा। यह ग्वाते ६ सय घर को आर चा पण रामा म बाल न मरमान म कहा बाबू जो । निराशा जानि मगमा है मा विना म आग दूर पान को मा [ सस्मरणा के बाद निराला सुध नहीं रहती । दूध दे गया वस ही पड़ा रहा । दूसरे दिन मेरे सामने ही फेंका गया । भला ये भी अछा है बाबू साहब कि दूध फेंका जाय ? मैंन बद कर दिया । मुझ ऐमे महात्मा के पम खराब थोड ही करने हैं बाबू ! तुम्ही बताआ । घर आ गया। ग्वाले से एक मेर भस का दूध लेकर कच्चा ही पी गया । वहा आग कहा थी जो गम करता। थाडी देर म निराला जी भी घर आ गय । रसोई ता निराना जी की आज्ञा स मेहमान ने पकाई पर रोटिया स्वय उहान सेंकी। आग फूक्ते फूक्ते तमाम राम उनके बाता म भर गई पर रमकी अहे रच मात्र भी परवाह न थी। दा घण्ट म खाना बनकर तयार हुआ। इसके बाद उहाने सामन के लिय एक अखवार विद्या दिया और फिर उसे माग और राटिया दो। स्वय जमीन पर बठ पर खान जग और बाल वर्षों तक साहित्य साधना म मेरा यह भोजन रहा है। हि जगत का मूप-निराला चूल्ला फूर्व और सूखी वासी राटिया चबाय और पभा-वभा निराहार गगाजत पार हा सताप कर सा जाय-या गप्प और स्वप्न को बातें नहीं वरन मत्य हैं । उनका जावन मजदूर का मा जीवन था । गत म जिम ममय भन्मान बच्चा नाद का करवटें बन रहा था और निराना कबारे म माच रा था नभा चाना निराता वा भयकर तमा न गात वातावरण का निम्न पता भग का। एमा -मा मन्मान न और कभी नहा मुना था। उम मा 4ममा निराना अतिरिक्त और कौन ममयता? फिर यवनी देर ता अर बाहर आने जात रहा एर दिन मग्मान का तवायन कुछ खगव था। निराला ने खाना और चाय बत कर लिया और म्वय दूध नार मरमान व निय रक्वा। फिर उस माय म मकर धूमन निरन । गण व पुन क पार ना धूमन गय फिर लौर पर महमान म पूछा “तुम यर र गग। आगम कग। मैं एक चकार और नगा आऊ । वे पुन चय. नागा मोर कर आता मरमान का पम पर जान सका। मार दूध गरम कि और पाकर अबबार पढ़न मग मगर निराशा जान मस्मरणा व याच निराला } ता दूध भा नहा पिया और शाम त भूषे ही रह । फिर उहान मूग का दाल और एटा बनाने का विचार किया। 1 निराला जी चौर म यकि उमी ममय एक प्रकार महान्य आ गय। वे निराला जा का एक उपयाय छाप रह थे। उपवास का नाम मार कारनामे था और उसम ममाज तथा गजनालि का खावनापन लिगाया गया था। उसकी भापा माला की प्रामा वग्न हुय प्रकार महालय कहन नग निराला जा धारे धारे लिख रहे हैं। मूद म आवर निखत हैं। एक लबक मी द रकवा है लकिन चाज ऐसा है जा वेजाह हागी। इमा समय गम्भार हारर निराता जा न का माहित्य माधना स बनता है। हम वेवर रुपया ता नमाना नहा नै । साहित्य एमा दना है जा जनहित का हा और उसम मुछ जान हा पर लाग ममपत हा नग। महमान न जाननिय विटा मागा ताबाल मच्छा । विस्नर वाघ ला और दखा खिचडा बना है भूमे हो ता वाला। मरमान न वा में खाकर आया हू और फिर बिस्तर बाधन लगा। तभी निराला जान कहा य साबुन ता राव ना और फिर माबुन का आधी बट्टा उन्हाने महमान व मामन रख दी। तमा मग्मान का या आया कि माबुन की आधी बट्टी पड धान म बच गई थी उसमा उहान सोग दिया। उम ममम ममान का ममा म यह बात स्पष्ट रूप स मा गई कि महावलि मा कम्बल लार पाटन सहकार क्या कर दिया था भार भपवर सपना फगवाट हाबादबरसा गपथ। महमान न उनका चरण रजा आगीवाट प्राप्त किया और चना व राम्त म माना गया चका आरहा था। हम निरासा कलाकार चाहे मिर जाय पर निराशा जमा मानव नही मिल सकता निराना वा व्यक्ति व और अमर है। PRIET remart 1- TrE IFE IT वह महमान हिला र प्रधान नम्बरमा पद्मसिंह गमा, राdy F FF
[ सम्मरणा क बाच निराला
निराला के प्रति प्रयाग के लेसको की उदासीनता
जमा कि ऊपर लिया जा चवा प्रमिद नसक था बमला जा का निराता जा
व पाम बई दिना तर रग्न का गौभाग्य प्राप्त हन । लिन प्रयाग म अय
प्रमिट मानि यारा गमिसन व नियमय ता उनम म कइ लागा न मला जाम
निगना जा पा ममाचार पूदा। ना प्रग्न पर कमन जा का अत्यधिक जा चय
और दुपा । रगनभरार अत्य न पाग भरा वाणा म क्ग पाचय है
कि आप पागमा म रन्त - जोर निराना जा का समानार मुझमें पूछत है ।
न्म कट गर और ममन ययन राप्रयाग गानित्यारा पाम कार्ड
स्तर न था।
रना न नामानता म म जा न अनुमान गाया रि हिना वान अपन
नाग का फिनना जार करते है । या रिता कपका का ठभाग्य नीता था।
गन म'मूग पिया कि गिता जा का वनमान मिति के लिये प्रयाग के य हो
मान्यिवार तिम्मर जा निराला को कर करता नग जानत ।
अपराजेय स्वर दीघ सघप
निगला जो गया नाम जोगा य क्या काम और क्या गद्य म
उया गररा नातागोगा भानिा है। भा गयर में
उघा हाया नगना मरता। वैगन मगात का जानते थ । उनमा गति का
बनन का समर प्रतिभा सम था। ८ पतिया प्रन्यात गायिवार
ना अमलान नाम ग म ग उदन- जिमम 7 मगरवि निगा वा
अगज नाव दागमा।
वाम्नयम निगाज जागर ग्वापार वाम 77 बग निममता व
गय
नव "याय माग गुगन गाम - मायना और
निर मिना निगग 7 मा प्रामविताना यूर ना ।
न म पात्रा गना विना वितिया दुगना और गर्दा म
है। नर नन प्रनि न - मन भावन और अग तु"
सम्मरणा वीच निराला ] रक्या । एकनिष्ठ माधवक रूपम व जीवन भर तपत रह और इमा तपाग्नि 7 निराला का उनक जावन व अतिम बार म विकृत बना लिया । परतु पराजय उहान भास्वाकार नहा का। गने वडा गान के साथ परिस्मिलिया का झेता परतु पगम्न हारर उनम समयाना वरन का वभा तत्सर नहा हुय । नरामपप उनका अतिम पाम तर चना । अपन तद विमा प्रकार का आर्थिव महायता टान और चदा उगा स्वाशर नहीं दिया। जिम गान के साथ जिन्गा भर विपत्तिया मलह सा गान मार मौत का मा वरण दिया। उनकी आतरिक विर बना विकृति जार कुठा का नागा न पागलपन का सना 'दाना परतु किमान वाम्नविक रूप में उनके जापन काल म उनकी मा यता का निप्पाप हृत्य म म्वाकार ना दिया। है हमारे सास्कृतिक भविष्य का प्रतीक निराला साहित्य निर तर पचास वर्षों तक रािला का विराध करन के पश्चात जब पूजीवादी और सामती संस्कृति व ससम्बरतारा न यह समय लिया कि हिदा माहित्य समार म उम दद प्रता माधर का गाधन का मिग पाना सवथा गम्भव है तब वे तन मन स सक मञ्च भत बन गय आर उस मगमानव महाप्राण आदि उपाधिया म विमूपित कर मागिय मटिरमता का भानि प्रतिपित किया और उस नय पाप क प चान कहा यहाावना है -सत्रा पूजा आराधना का अधिकार वेवर हम है । जन-साधारण कनिय निराना की जचना जाराधना वा निषध है परन्तु यर पटारा एक मात्र निरा भून का जायगा क्यारि विशाल जन मम का श्रद्धा और प्रम की अवयना नदवा की बात मारित्य जगत म निराना मघर्पो का जा रामाचगारा और हाय विय क्या कही गर है धन समम्न प्रिमिया और मारिय गविया क नियम को चुनौता है। मावि न अपन एक गात म विराधिया का उदय पर स्वय ही कग है- ६ [ मम्मरणा वाच निराला सापचय निराला के प्रति प्रयाग के लेसको की उदासीनता जमा मि पर निसा जा चरा प्रमिद्ध खक था वमग जा का निराना जा बपाम वर्ष गिना तर रग्न वा सौभाग्य प्राप्त मा। प दिन व प्रयाग म अय प्रमिद्व मानियवारा म मिनन व निये गय ता उनम म कइ नागा न मिल जाम निराना जी का समाचार पूछा। उनक प्रश्न पर कमाना जा का जत्यधिक जापचय दुख हुआ। उगन क्ष र हावर अत्यन पाडा मरा वाणा म वर्ग वि आप इनागवार म रते है और निगला जा का समाचार मुयमे पूछन है । राम बट मत्य जीर ममधर कपन का प्रयाग के माग्यिकारा के पाम का उत्तर न था। उनको नन उतामानता म माना जा न अनुमान लगाया विहिला वाले अपन कलाकारा का कितना नादर करत है । य. दिा व लेखका का दुर्भाग्य को ता था। उगन महसूम पिया कि निराला जो की वतमान स्थिति के लिये प्रयाग के ये ग मारित्यार निम्मदार ९ जा निराला की कट करना नहा जानत । अपराजेय स्वर दीघ सघप निराना जी गटायन जनाखे जौहरा थ क्या काव्य म और क्या गद्य म उगने एक एक गट वा नाला गोहर की भानि जड़ा है। एक भी घर से उधर हटाया न जा सस्ता। वे गला के मगात को जानते थ । उनरा नक्ति को क्तन का अमन प्रतिभा उनम थी। य चट पतिया प्रस्यात साहित्यकार पा अमतलान नागर उम खस उद्धतह जिमम उहाने मगरवि निराला का अपराजय पवाज का सना दाते। वाम्नव म निराना जा जगजय म्वर और वाम्नव म 7 वा निममता में माय ना गया । व यथाथ म ना थ युग न ग प म उ मायता नाना और निरे स्वाभिमाना निगान सभा जात्मदिनान ग यूनग रचा। उनका मारित्य यात्रा अनक वितृष्णाआ विपनिया कुरामा जौर गघर्षों म परिपूत रग है । उनका न यान को प्रवृत्ति न रह मला भावग्रस्त और अम तुप मम्मरणा के पीच निराना ] रक्वा । एकनिष्ठ माधर क प म व जावन भर तपत रह और रसा तपाग्नि । निराला का उनक जावन व अतिम कार म विकृत बना दिया। परतु पराजय उगन भा म्वाकार नगा। - वहा मान र माय परिस्थिनिया का झेता परतु परास्त हावर उनम ममयौना रन का भा तत्पर नहीं हुय ! नरा नाय मघप उनका अतिम ग्वाम नय चना। अपन तद विमा प्रकार का आथिर मगयता गगन और चा उगन स्वापार नहा दिया। जिम गान व माय जिग्गा भर विपत्तिया म र सान मार मौन का भा वगण किया। डाका आरिव विरता दिवनि पार कुठा का नागा न पागपन का मना है दाना परतु किमी न वाम्लपिक म्प म सनक जाग्न कान म उनकी मान्यता का निष्पाप हृदय म स्वावार ना विधा । हमारे सास्कृतिक भविष्य का प्रतीक निराला-साहित्य निर तर पचास वर्षों तक निराला वा विराब करन र पचान जा पूजावाला और मामती सम्मृति १ बम्परारा न यह समय लिया कि मिटा साहित्य समार म य टन मना मायर वा माधन का मिटा पाना सपथा असम्भव है तव व तन मन में उम मच्च भक्त बन गय और उस मगमानव माप्राण आदि पापिया म विभूपिन वर माहिय मनियम पना का भानि प्रतिपित किया और उसय जय घाप पश्चात वहा 'यह मा स्वता है इसका पूजा आराधना का अधिकार क्या हम है। जन-माधारण व निय निराना की जचना जाराधना या निषध है परतु यर सारा र मात्र नया भूत हा का जायगा क्यापि विगान जन-ममूर का श्रद्धा और प्रम का अवगना नव वा वा वान नहा । मानिय गत म निराना मथौ का जा गमाचाारा और हृदय विदारय क्या महा गर्न वर ममम्त प्रिमिया और मानिय मविया व नियम पना चुनौता है। मावि न अपन एक गान म विराधिया या पक्ष्य बरख स्वयं ही करा - ६ [ सम्मरणा क वाच निराला निराला के प्रति प्रयाग के लेसको की उदासीनता जमा लिऊपर निसा जा चका प्रसिद्व नखक श्रा व मग जा का निराना जा कपास वर्ष दिना तर रग्न या सौभाग्य प्राप्त ना। एक दिन व प्रयाग म अय प्रसिद्ध मारित्यवारा म मिलन के लिये गय ता उनम म र नागा न मना जाम निगना जा का समाचार पूछा। उनक प्रश्न पर कमाना जा का जत्यधिक जापचय दुस हजा। उगन क्षय नबर जत्यात पाना मरी वाणा म बग पापचय है कि आप इनागवाट म रटते है और निगा जो वा समाचार मुयम पूछते है। दम बट मय और ममधर कपन रा प्रयाग के माग्यिकारा के पाम का उत्तर न था। उनसरा नम लामा रता म कमाना जा न अनुमान लगाया विहिदा वाने अपन बनावाग का स्तिना जाटर करते है। यर पिता के नवका का दुभाग्य ही ता था। उगन मन्सूग पिया नि निराना जी की वतमान स्थिति निये प्रयाग के य ही मारित्यार जिम्मेदार . जा निराला को कर करना नहीं जानत । अपराजेय स्वर दीघ सघप निराना जी गटायड जनाये जौहग थ क्या वायम और क्या गद्य में उगने एक एक गट का ताला-गौर को भाति जना है। एक गट भी इधर से उघर हटाया नहीं जा सरना । व गन्ना मगीत का जानते 4 । उनका शक्ति को कतने का अटभन प्रतिभा उनम था। य चर पक्तिया प्रख्यात साहित्यकार पा अमतनात नागर 4 उम उस मे उद्धत ह जिमम उहाँने मग वि निराला का अपराजय वाजवा मनादा।। वाम्नव म निगना जा जपगजय म्वर 4 और वास्तव म बडा निममनाक माथ नाना गया। व ययाय म ना य युग न ग प म मा यता नगा और निर म्दाभिमाना निगता विभा आमविनाशन यूर ना रचा। उनका मारित्य यात्रा गना वितृष्णामा विनिया कुराआ जोर गधों म परिका रग है । उनका न यान का प्रवृत्ति न ह मा अभावग्रस्त और अस नुए मस्मरणा के बीच निराला रवा । एकनिष्ठ साधर क प म वे जावन भर तपत रह और टसी नपाग्नि न निराला या उना जावा व अतिम बात म विकृत बना रिया। परतु पराजय उहान कमा स्वागार नहा को । उहान बडा गान माय परिस्थिनिया का झेला परतु परास्त हार उनम गमयोना वरन वा कभी तत्पर ही हुए। उनका दाप मधप उनकी अतिम वाम तर चता। अपन तद विमी प्रकार का आर्थिक मायना खान और चरा उहान स्वापार नहा दिया। जिम गान गाथ जिग्गा भर विपत्तिया मे लड उसापान में मार मौत का भी वरण किया। उनका आचि विना विकृति और कुठा का लागा न पागलपन की सना दे डाला परन्तु रिमो ने वारविक कप मे उनक जीवन काल म उनकी माया का निष्पाप हृदय म स्वावार न दिया। हमारे सास्कृतिक भविष्य का प्रतीक निराला साहित्य निरन्तर पचास वर्षों तब निराला का विरोध परन वे पश्चात जन पूजावादी और सामती मम्मति म अम्बरटारा 1 यह समझ लिया कि हिना माहित्य समार म उस नद प्रती साधर का माधन या मिग पाना मवथा असम्भव है तब ये ना मन म उसन मचे भक्त बन गय और उस महामानव मात्राण आदि उपाधिया म विपिन पर माहित्य मतिर म दवता का भानि प्रतिति किया और उमक य धापन पचान पहा पर हमारा बना है मना पूजा मारावना का अधिकार पर हम है। जन माधारण 4 त्रिय निराला की नचना आराधना का निषेध है परतु यर ** কা যায় না। মূল শ বা সাযা সমাৰি যিশ্য। সব শ ল পরা और प्रम का अवतना उना व वी वान नए । मानिय जगत म निगा र मयों का जा रामाचाारा और हप विशारद था " ग वन गमन प्रिमिया गौर मागिय गविया निये रखना चनोता है। मगरदिन अपन एक गीत म विरापिया बायपरा म्वय :- [ सस्मरणा के बीच निराला समय क्या वे मग भारू मतिन मन निगाचर तज हत रह जा वय जन । घय जीवन कहा मान प्रभातधन । भारू मनिन मन निगाचर तजहत वय जन आदि इन विषणा स महावि ने अपने विराधिया को सम्बाधित कर उनका स्वागत किया है। इहा माहित्यिक ठोटारा न यह नारा लगाया नि निराला-माहित्य का जनता से दूर रक्खा । निराला रहम्यवादा माघर है और भारतीय मस्कृति इम रहस्य की साधना है। पूजीवादा सस्कृति के निय मबम बनी मफरता और माथकता यह है कि मनुष्य स्वाथ युद्ध म विजय प्राप्त करे और उमकी सबस बडी अमफलता और जमाथक्ता यह है कि दुख म हाकर वह अपने स्वाथ का भून जाय । मावि ने इम विषय म स्वय हा अपनी भावनायें यक्त का हैं- क्षाण का न छाना कभा अन मैं लखन सका वे दग विपन्न अपने आसुना अत विम्बित दस है अपने हा मुख चिन । कवि न दूसरा का सम्पत्ति हडप कर जान दागान करने की भावना कभी नहीं रक्या अतएव अपन आसुआ म उसन सदव अपना ही मुख और हृदय झलकते दवा । महाकवि क य उचतम विचार यद्यपि वि पूजावाला वग का भावना पर कुठाराघात करते है परतु मानव समाज के लिय य अमर आदा है। निराना विराधिया न क्वा उनका कातिगरी महत्व हा समझा अतएव जनता म भा 'मा विचारधारा का पनपान फनान का प्रयत्न किया । उहान निराला का विराध करन म का कमर दारान छाडा ताकि साधारण जन वग उनस प्रभावित नहा। उनर विराध म नसतान क पवित्राा म न छाप गय और उह कम्युनिम्म वग गया।
मस्मरणा के पाच निराला ] लेकिन जिस ननिय मया और तत्त्वा व रिय निराना भी रहा था जनता उहा वनिय आज लग रही है । उनका दा भत्ति का आधार व्यक्तिगत सम्पत्ति नहा थी। या कारण कि उनके जनवादी विचार गराब मेहनता जाता की सम्वृति वे अत्यधिक ममीप रहे। प सारी बातें वास्तविक रूप म सिद्ध करती है कि वे हमारे माम्वृतिर भविष्य के अग्रदूत थ। आज जनता अमनी-नाली का भेदभाव समझावर अपने वट अनुभवा की पोटला खालपर एक्ता एव मगठन के मार्गों पर गतिशीर । उसे वाल्मा तुनसी और व्याम में विगमन प म जो कुछ प्राप्त हुआ है उमा में आधार पर वह माम्मृतिक निर्माण का वागद्वार सभालेगी। निराना जी मदव नि म्याच भावना म ऊच-नीच का भेदभाव मिगर सच्चा मानवना का कायम रखन क लिये लडत रह । वतमान पासा वग जा आज मिंगमनाबर है निराना न ममा वास्तविक रूप स्वत बना पूर्व ही समय रिया या अतmद उगने पूजीवादा ननाआ की आगचना करते हुए १०३१ म निषा- अभा तारिद्र भारत ना भा धना है । जना नना नाम का पूर्ण त्याग न कर सब वहा अनुपाया अथवा धन क बड-ब उत्तराधिकारा यम व अधिकार छाड गे। अभी ता मनाम रहार कुटिया का मर गये रेहान दान और देहानिया या उपm दत है-पुन माग पर भ्रमण करा हुय । मह गिलाना नती शिक्षा का हास्य है। उपचार गम्रार मुगा प्रेमच द वा भाति निगला जा भी दूरी और निर्भीक माहित्यवार 4 जिनि अपन विगत भून म भविष्य का दान कर लिया था । नामक वर्ग द्वारा निराला को वास्तविकता का उपना और पूजावाटा रखवा द्वारा निगला समापनाबाबा मठमान पापी रम्य था। निराला वा ममूचा माहित्य माम्रायवाला गापण का निमम आनाचना करना है। उनर अप्सरा एव अल्वा आदि उपयामा में अग्रजा राज प्रति घृणा एव [ मस्मरणा क वाच निराता जनता द्वारा उमके मरिय विगव का पूण जाभाम मिलता है। दिन व दिन जनता का जनवादी म्वर पुष्ट ही नाना गया । उनकी टेवा चतुरा चमार कुरुता भार जाति रचनाआ मगन गन जनता वा मामिन चिनण हुआ | उनका प्रभावती म हम मध्यकालीन समाज के मामती गापण का रूप नबने है। राम की शक्ति पूजा और तुनमादाम का मानन म नयी वार भावना का प्रस्फुटित किया गया है। म्मरणाय मत्य कि निगना निषध में कवि नगरे। उनका वाणा मौन्य एव प्रम वी जन मुनभ कामना प्रकट करता है। यदि वे एम आर विप्नव श गजन करते है ता दूसरा आर जूहा का कना स्वप्निा ममार म भी तरत नाय परत हैं । वे जावन भर उपराजेय कवि र । आज भी उनमा निरन्तर सघष माग्म उत्मान और अमीम गक्ति हमारे निय प्ररणा का मचाधिक प्रभावाना प्रतीक है। एक बार अपना अस्वस्थता का मा म तुनमी जयन्ता के पुनान जवमर पर उहान कहा था मदन गय है। टट टट चक है लग्नि यर नना है और न हि दुम्नान का जनता झवा । गराध है बरहान नै राताई हुई है लेविन उमका सर नना झका। और एमा हा जनता व प्रतिनिधि कवि है निराना। निराला जी सवा साल से बीमार थे सन ६ व अगस्त मगन स निराना जा अस्वस्थ हा गय । उनमा मानमिर दशा अत्यधिक बिगर गर्न था। अपना कादरी वा दरवाजा बर बर व नग्नावस्था म पर स्त थे। ना बातें अग्गा जार वा भत्या गाता था । कुछ गिना तक उनका एमा हा स्थिति र।। दवा आरम्भ हुई ता रनर मानमिन दगा म कुछ सुधार हुआ किन्नु गारापि पाविया व कारण व दान नात घर गय । गकर न बताया कि उनका यामारा अमाध्य और गम्भार गचका है। वाय और जनावर राग म ग्रमित ५। मार गर म मूजन ना गर थाम गग वा कारण यकृत निगर और दृष्य नपाम रक्त मचार ममावर राना था।
४१ मम्मरणा । वाच निरागा] मासा बग्न आता था और माम लन म तक ताप नाता था । मुग्विन म कमा घट जाध घण्ट आ ग पाता था । हनिया ता उनका पुराना मज था हो । उम ममय तान-तान नवरा का लाज चल रहा था। टिना उत्तर प्रदा के भूनपूर्व मुन्य मया र मम्भूणान प्रयाग जाय और उगन गिना जा का नया तथा पगमा नियनि निराना जा अपनान ना जाना चारन ता ना गिय निवाम स्थान पर चिनिमा का उचित यवस्था का जाय । मुम्य मना श्रा चद्रभानु गुप्त न भा मवा और मायाग का बचा दिया। नमन म ५० था नागयण चतुला मा आय मार निराला जा ना मवा-यवम्या पादप भान का। राममनार सानिया तथा ग० वमनापति निपाठा भा मगवि पा रखन आय । पामता भावी वमा और श्रा मुमित्रानन पा का दमार निराना जी का प्रम्न म्वर फूटा म रह न रह तुम मनामत रहा जार वरम । हा रिना भारत के गष्ट्रपति डा० राजद्रप्रमान भा प्रयाग आय य य वितु उह मनावि का नायन का जवाण नहा मिन मना । मिनता मा म यस्तता व वारण फिर भारत रा राप्ठपनि प्रगवि का कुटिया म उपयागा नामप्र स्वाना आर मया-मुश्रपा ा गरण निराला जा कुछ कुछ स्वस्थ हा चन विनु बुर स्वस्थ त हा उहान त्वाआ का पयाग बन कर दिया । १४ जुनाट ६१ ग पुन वे नम्बम्य नगन ग । उन परा म मूजन बान नगा। कमलागर जा का फिर चिनाया न जा पग। उलान तुग्न प० श्रानारायण चतुर्वेटा वा म पनि या मूचना और पग कि मुन्धमत्रा में कपर रिमा निपुण वारी हार का चुनावर निराता जा पा रियाना चाग्यि । मुन्य मत्रा ची चद्रभानु गुप्त व आराम नानपुर मगित गजक गटर श्रा न गा' । अगस्न ६१ वा तिराता जा का दखन व निय प्रयाग पगार। उनान निराशा जा मिजा चिपिलर था वृजपितारानान द्वारा स्थिति का जान वागना और निगला जा वाया। प्रयाग व मिविनमजन नया -नव मगयर मा० उम्बा नी उम ममय पगमा frय पम्पिन थ । 7 बजारघात था।
४२ [ सस्मरणा के बाच निराना इन नागा ने निराला जा के खून का नाच का और हृदय का एक्म रे करण कुछ नयी नवाये टने तथा उनके पट म पाना निशानन का राया। उह दवायें दी गया । खून को जाच हुर मगर रात म उनका वचना वट गया और उगन टाकारी तवाय प्रयाग करन म चार वर ग्यिा । कम नागकर जा न उनम दवा लन का बहुतरा जाग्रह किया मगर व विमा भी कीमत पर राजा नहीं हुय और व वाल पहन वाली दवायें ग ग य दवायें नहा जनर हैं। पहले वाती तवा नप्त + रजेक्शन 4 जिमम उन पगाव अधिक मात्रा म हाता था और पट का मूजन कम ना जाता था किन्तु उम र जवान म गुर्ने म सरावी आन का भय था “मनिय कुछ गकारा की गय वर जेवान रन का नग था। लदिन निराला जा का जिद्द थी कि वे वही जान गवायग। इसी उघडबुन म उनका उपचार बट ग गया। उनका बामारी दिन ब दिन बरती चली गई-गत गम्भार और चिताजनब नाता गर्न । वास्तविकता ता य है कि पिछने ११ १२ वर्षों मे महाकवि जब जब बीमार पड मिमा न उनर इलाज और मवा मुनषा के प्रति गम्भीरतापूर्वक रुचि नग दिखाई। उन क्तिन ग निकट परिचित भा म आरम उदासीन नी रह । राज ननिक नागा स ता क्मिा प्रकार का आगा निरथम याग कितु मारित्यित्र वधुझा न भा महाकवि का पता का। कमनागकर जाना परेशाना दिना दिन दर रग थी। एक दिन निराना जान उनम वग- यदि तुम मुब व हार जवान नग नगवाआग ता मर पाम कुछ रुपय हैं मैं स्वय हा व जबान नगवा नगा। मनागकर जा न धय त हुयं क्ग-मैं आपक निय "जयाना का यवस्था कर रहा हूँगाराम बानचानाग, जापागाघ्रगान नगगा। हारगरा रा राय म पुन उह नयन जवान नगन ग मगर पता अपभाना मात्रा कम करता गर था। गरा बा गय म द ना निगना पगाव म विगप विकार न उत्पन्न मम्मा क वाच निराना ] ना जाय तब नब म इन उगन म कार -ज नहा था। * जवान नगन ६ पूर्व उना पताद का जान गा जाता था। म उपचार म उनका पाय पुन घट्न लगा। ता मगन व वाच व वाफा बुद्ध स्वस्थ हा गय। निराला जी की अस्वस्थता के अतिम मामिक दिन अपना खाग मा वाराम मगकवि का जीवन धीर पार बुयनान्मा जा रहा था । व पायगरपात हय वरवर बार जिगा मार मौन मनान गा हर था। वे रिसीमा वामन पर जम्पताल जान का राजा न य जति अम्पतान जाना उन तिय उत्पन आवश्यय या दिनु उनक मच्च मवक और निपा था वमनाकर म उनसराय मामिरपन दवा न जाता था बचार गर म दूब न्य वा उपाय माच रहे थ । निगता जा रगत न्य अपन बिस्तर पर रवट और वान-वमनावर मुप मा जान का वादा ना न गता था। गव ग मुग्ने पिता टा में सा जाऊगा। मगर टना म समय और भा खतरनाक था। वोमनाय हय वमनावर न तुरल कान कार डापरा बुनाया और फिर मरम्वा मम्पाक श्रा श्रीनारायण चतुर्वेदी या पान ग निगला जावा गम्भार स्थिति बना । चतुर्वेता जा उन रिना रगनऊ म य व मनाधिन अयत निकट मित्र और चिनाय । म ममम निगरा जा का हनिया बा बुरा स्थिति म उन याया था। उनर बन हर 3 भाग म नाभि बराव पार पहावी तरह बाहर निाना हुआ था। रात भर हनिया का ना गया म पकड य व द म छरपटान रह । अगह नाय र म यातुन गावर व ग पड । नारायण चतुर्वेग पान TATE का निगरा जा का ततार हा अम्पनात सजान का आग गिया-रितु व अस्पताल जान का बत्तई तयार न थ । उनका - [ मम्मरणा बात्र हिराना my life जनिगम उह अस्पतान 7 जाना मवया जमम्भव था। गवारा न मा उनम जम्पताल चतन का अनुगध किया था वितु उनका एक ग उत्तर था- I want to die in perce I will not go to hospital I will keep my vanity even it the cost of कमनागर न पुन फोन राया और पामता मगठवा वमा नगर प्रमुख ना बा कृष्ण राव या उत्यनाराण निवारा नागर प्रम मनरा बिनाप्रमा जिनाधान और निराना जा गिप्या पा जयगापान मित्र तथा डा०शिवगापान मिन का उनको गम्भीर स्थिति को मूचना दा । मार मुरल भर म मा सपना जोर TT मगविक निवास स्थान का आर दौड पन। नाड ना भान नमा ग गई । म्निया बने ब्ढ कौन ऐमा था जिमन चारे पर विपाट की भरन जिमका जाया म जामून पर रहा ।। वेमभावना पारेथ । उम ममय नागा मा पर गया-गय । यर क्या हुआ जिनाधा न जाता पमनाकर जा म पूछा-आपरा पर कर हा तो मुझ मिना था जिमम जापन लिखा था कि निराला जो जब पत्र स वाफा स्वस्थ हो गये है उन पचार के लिय -म समय पिप हाय की आवश्यकता ना है। आज मामा क्या हा गया? वाम्नव म निराता जा म्यम्य वाचन 4। रनर नगर TT सूजन और पर का गाय ह गया था। व खान पान म मयम रखते थे। क्वर का और दूध गम्तमान करतय । पूर या महान एम हा गुजार मगर कमजार अत्यधिक ना गय थ । दुव उना 4 कारण हनिया एकरम प्रकर -आ और हनिया न हो उर धावा रिया। नामता मावा वमा नावालकृष्ण राव नथा जयगापास जान ग्नम अम्पनार चनन का हजार मिलने का परत मर व्यय र । उगन किमी का अनुराध स्वाकार नगरिया। जब नागाभा साचा थ। य नयाना और ताकार गुम्बा। मा जरावा निगाना निता चितिमा ग बजधिगरातार मा उपस्थित थे।
64 मम्मरणा के बीच निगता ] उन नागा न कम तागर म मा वि निराला जा का गाघ्रातिशीन अम्पताल ल चतिय एक क्षण मा विनम्र भा घानव है। ननिया जापरगान म जितना ना दर हागा उतना हा उपयन बरगी। कमनावर न उह निराना जा को जस्पताल न जान का जिद्द वनाई जार रहा कि परित नी । मन म इस समय यह धारणा बन गई * मि उह यह कष्ट टट्टान हान क कारण ना रहा है क्यारिवार वार व टट्टा नगन का दवा माग रहे थ। जन जाप नक माताप य उह पाई रट्टा नगन का नवा दे द क्याकि उनका रट्टा पेगाव पिटर जटगरह घण्टा म बट है। टट्टा हा मान के निसरह दवा द ना गइ। गकर यह कहार चन गय कि जितना जन्टी हा मह जस्पताल जाय यान। र बाट निराना जा न बग याकुलता म मनाकर म पहा तुमन टट्टा की या मुझ पहा वाना ना ना मग ता कुछ न गा । जाप याग मत्र कर। बमनाकर जो न रुष व म घय लिया । मभा परेशान थनि जाखिर निराला ना वा स्पनानल जान के लिय क्सि तर गजा पिया जाय । दमा वीच डा० मिथा व सार श्री बालकृष्ण राव न जाकर पुन का मैं माय म एम्युनम कार मचर और स्टचरवाहक तथा डाकर भी नाया है। यति जाप महमत हा ता निराता जा का माफिया का जवान कर बगशा का हानन म जम्पताल उठा ल चरें। नार आन वा दवा का बहाना बनाकर उह जान नगा दिया गया। आध घर व अर गावधाना स मारा वायवाहा पर लन का जादा दवर डाक्ट चना गया । निराला जो का नार मान लगा । नाग उनव पूणत सा जान का प्रताक्षा करने नग तानि र अनजान म जस्पताल ल जाया जा मा । - १२ अक्टूबर, ६१ १२ जक्रवर वा निगना जो न नार गुनवा पर अपन मिर का वान घटवा दिया मगर गढी रन ना। वे जपना माग राम म्वय वरन उग।
४६ [ सम्मरणा के बाच निराशा व माजन पमान म बहुन निपुण थ। वामारा क दिना म भा बहुवा रविवार के दिन म्वय की विधिपूर्वक माजन पनात और बन आनट तथा स्न-पूवक जपन प्रिय जना का खितात । स्वय ता सयमित भाजन ही करत य क्यापि स्वस्थ थ । डाकर न उह पूणन जाराम करन का ताकात की या मगर अपनी गच्छा क मामन व किमी का न मानते थे । १ अकबर का बजे म ४ बजे गाम नब गातार चार घण्टे तक वन गोत पकाने म नगे रह । जागन म चरहे के समाप कुर्मी पर वठ हुय व गोत पका र 4 । कम नागकर जा न रह मना कर दिया पर वे न माने। चपचाप अपने काम म लग रहे । कुर्मी म उट ठ कर जब वे चल्ह का नकला ठाव करने लगते तब उनका हनिया पट स नीच को जार वार बार नट आना या । माम पर जान २ बात क्मनावर के बहुत अनुराध करन पर भा के नहा मान और जमकर खाया। यग उनरा अतिम माम भाजन था। रात का दम वजे के कगब उर वचना महमूम ान नगा। क्मनाकर जी ता पहल ना स साक्ति थ । उहान निकट जाकर पूछा-पडित जी क्या बात है ? जाप। क्या तक्ताफ है ? निराना जा न उनका अनुराध न मानकर माम खा लिया था। अतएव अपनी पाडावाबान का प्रयास कर सकाच स बाल कुछ नहा। मैन बाजार स लकर एक सब खा लिया था उसम प्वाग्न था उसा का प्रभाव मालूम पड़ता है लग्नि चिता का वात नहा । तुम जाआ सा जाआ। कमतागकर जा न कर का बुनान का वात का ता उन्हाने मना कर दिया और उह मान +निय भज दिया। गत म गभग १ वजे व भयवर रूप म रान नथा कगग्न नग। वे अमह यत्रणा म एप्पटा रहय। नरानिया एम वगर ग गया था जोर र जापरेशन हा एरमात्र “पचार था। कमनागकर जा न उस्पताल चनन का कहा ता व बिगर गय । अन्त म हतानगर वमनागकर जा गवर का बुगान निकन पड़ । बचार बाग निकाना न पार नि मूमनापार पाना परमन मगा। व जितय विमूर म घर रट । उनका पना न माग जनावर निया का मेगा मस्मरणा के पाच निराशा निराला जी का कुछ आगम मिना और द मा गय । डढ घबार पुरा व जागे और दद चिल्लान नग। ६१ वज प्रान कार यमला जोन मिवित सजन का पान नारा इस गम्भीर स्थिति में मूचित किया पर व य र मि यह मजरी कम है अपने सहायर १० नथाना का भेज हा है। वे हवाई अडर पर प० नहा का स्वागन बरन चन गर । अत्यधिक पेट का विषय है वि मरत हुप महाकवि के प्रति य उदासीनता निया पर मिवित मजन महादय प० जवारतानPER स्वागत म चल गय । क्या अक्ल उन नपानम नाव म्बनम माना जाता। मगर उमरा भी क्या कपूर प्रजातनाम पर गजाय पाधिकारिया के लिय महान नेतालाबा मनामा देना भो ता आवश्या हाता है । कितनी अजाब वान + । पर भार भारत का युग प्रवत्तक यदि मृत्यु के मु म था और दूसरा आर प्रधान मा स्वागत मनाम होगामित 41 का तान घण्टे बाद नथाना आय । निरासाजीका माफिया का जेवान दिया गया और उह वहागा काम सम्पताल न करने की राय हुई। स्ट्रचर चारपाई मनावर ज्यान ग पर किया प्रयत्न किया गया वे पद मोर चारपाइमा पाटी पाड पर जा गय। मारा प्रयत्न विफर गया। फिर निराला जा था मृग शाति म यहा मरना में कहा नहा जा। यह वरवर उगन मा हटा लिया। फिर व सा गप । कमरे कारवाजा ब- वर दिया गया। बाहर काबीनाड वर रहा। नाम का चार बज T० नयाना पुन नसन जाय । गर न उन हनिया पर गए परने हुप रहा आने मुकायम पड़ गई है। परित आ का गरन अछा मालूम पड रहा है। इस ममय पर गतरवार। म म प्रमानना का हर दौड़ गई। मावि मौरक मुह म निर आप य । गमा बाट निमन जा और गाटिय गम्मतन मगमत्र मत्रीमा रामप्रताप त्रिपाठा उनम मिसन याम । निराता जा न उर प्रणाम का उत्तर दबर अपन पाम एटन ना सरन रिया । निमत जान दुरातक्षम पूग ता बार जब ता ठीक हूँ आग बदा वष्ट था।
४८ [ सम्मरणा याच निराला जापरगन हा जान पर व बतर म नमक लिय मुक्त हा जायग इस बात का विश्वास सभा का या जाएव नागा न पुन चचा चनाइ ता निराशा जाम्बरा म बान-जापान । नगै आपरेशन नहा नगा और न मैं जातान जागा । मैं इस पापि म मुक्त ता हाना चान्ना हू फ्नि आपरेशन म नग । अब म नगर वा माना रग। गहा गया हूँ। अतिम काल मे भी अतिथि सत्कार न भूले माफ्यिा करजकान कारण उनका जाखें मत मन पर मनना । उ टन निय वग गया गितु गियचाग्वा वे चारपा पर बर र । मनावर जा न निकट आर बना पनि जा आपन वन म कुछ भा न । माया है । थारा गम दूध ने आऊ नव उगन वगन का आरमारा मे नम्बा गार चनोटा निशाना और निमन जा पाखनी बनाननिय दिया । तम्बार खाकर उगन जपन जापरा चतय अवस्था मनान का प्रयत्न रिया । फिर बाजार मजन उठापर मन माफ पिया । वमगर जा न उह एप प्याना गम दूर तारर रिया । अपन हापा म दूध कर रहान निमन जा जोर दिपाग जा व ग्यि चाय नान या भाग लिया। अपन स्वभावानुमार व अतिथि मकार करना टम समय भा न भून । न ण ग उन नागानिय चाय जागर। व दूध पाचर तामसागर जा न पा परित जा कर भाजन बनान म जापना तान घर जाम किया उम कारण जापमा कप वा। अब आपका अपन स्वास्थ्य के प्रति मावधान ग जाना चागि। निगना नामुम्बगय और बाल पूर मार गष्ट ग य का। व । उनरा अनिम मुगरार था। गत मनवनाका कमर म वम कर वार लिया गया । जर ताव मा नागय ग्ना परदा जान |
मम्मरमा वीच निगा
१४ अक्टूबर, ६१
प्रात कार निराला जी वो भयर खामी यार । उगन बामत हुय क्मITET
जा का पनो का पुकारा दुसार म उह मुहल्ल की अपनडविया की भाति वावा
करते थे । निगला जावा उन पर अमीम नह था। बान्नव म वे दवा स्वप महिमा
हैं जिहान अपन जीवन रा बलुतेरा ममय महारवि को मवा मुश्रवा म गाया ।
निराला जो न देर म बगग्न हुय उनम का जात मुझ पहन हुआ था वहा इन
आज पिर रू हुना ! कर वाला दस मुय फिर पिता लानौर रमाबर म कह
दा वि मर नियमता कम्बर I प्यारा अनारा रम भी इस समय
मुझे पिला दा चाय नहा पिऊगा ।
कामनार का पला म य उना जनिम बात थी म बाट उनकी चेतना
जाता रहा । इसके वार व बग्न युवान पर भा वा नगे !
एमा याम हाता था कि उन गुर्गों न अपना काम करना बंद कर दिया था
यारि चौवाम र म अधिर यतान हो च य उपाय नहानुआ था।
मेप्टार जान म उन गरीर मतान चार मर पानी प्रनिगिन पगार
रूपमति नाया गय प्रिया म गुर्गे पालना नार पहना था कि व टूट गए थे।
"म परम्वरूप यूरिक विष रक्त म पतन गा था ।
समाचार पत्र म नि चरा था निराता मा जीवन गलर म बाहर नितु
पवायदे
पुन गर तर मापन गप थे। उनव म्ननिया और चितसा का पुन
"म चिनि की सुचना ती गई ।
वे अरपित वचनो धारण याम बार-बार उठार या मार कर हाय
देव परमाते और फिर र जात ।
'जब प्यार म अवारका रमरिया जान नगा उबहान उमगथ म
टटारा निमम आभाम हमान उनमा आमा पा“यानि भी पाय बुर चुकी है।
यूरिख विप व्यापन का यह पया माण था ! उह मरणाला पाहा हाथी ।
अपन पत्थर सबहे गनिया पर द बार-बार हाथ परत परतु उना मुख ग अब राह
मान निला या वै मनगालाका अनिमसोमा पर 17उन मत्रा म
[ सस्मरणा वाच निराता आसू थे और न मुख पर हाय और चाख । विष का गरीर म ममट हुय वे किम प्रकार मृत्यु म रह रहे । उनकी क्षण प्रतिक्षण गिरती हई दगा का देवार वमनावर जो न उनम बहा परित जी या की वायु गदा - गई है। यदि आप जाना है ता आपका स्व च हवा म ने चना जाय-हम लोगा का कुछ और मवा तथा उपचार का जवमर हैं। ना अब न जा मक्ते हो । उहान आज्ञा दा । वितु डाक्टर ने निराणा प्रक्ट को अव र अम्पताल ले जाना वजार है। इनकी विरनी का पकान रुर गया है। नड प्रार अनुकून नना है । अत म ग्लूकाज और मगाटन वाटर चटाने का निश्चय हआ 1 वरती हुई बेचैनी के कारण क्षण-क्षण उठन-बरत । ग्लकाज नगान के निय पाच यक्त्यिा न उह परहा दवाया । उस समय का बड़ी दयनाय स्थिति थी । वे यह रह 4 ददू मुझ उठाआ नल मुझ छडाआ। य ही उन अन्तिम Tठ थ । गाने पिय उह जान दबर बहाग किया गया। उनकी चेतना फिर मना के लिय जाता रहा । आक्मीजन भा रिया जाने लगा। उनकी नार म आश्मोजन का ननिया लगा हुई थी और बाग पर ग्नूमाज बूट बूट रिम रटा था । निराला के जीवन की अतिम रात्रि निराला का मृत्यु म बचान का काई उपचार न था। उनरा स्थिति कापून बार हा चाया। सम्बनऊ मकिन कारज डाकर भा जवाब? चरथ । अब मगरविका जान निकट था। उस का भयानक गत्रिम निराना का गय्या ममाप श्री मोनरक्मा ना जयगापानमा परमपर और था वमनार जा गार पाक म हूच उपम्यिन थे । भाग्म का नाति व पूजा की मज पर पह-य थे। उनक अघ गरार का जिताय रमन क निय घट घट पर उह वारामान का जानन गा लिया जाता था। डाक्टर न बताया था लि म जानरा दे होनान गिनाना जावित रस्म जा मान है।
सस्मरणा वाच निराला ]
লামা + স ঙ্গি বা না মাশ উদ্ধৱৰ বা স্বী শ ম ঘশ্বাস পূজ
हा गइ । उहान गाना वर दिया गया और नाम आश्माजन यानी
निवारला गई। मागकर जा ने कहा जब इस लिय वाया का अधिक दुगनि
न का जाप और उनका गाति म सग जान लिया जाय । वह गानिक निय हा
अस्पतालना गर। उनसराय बारा की जाजादा अधिक प्रिय था। एक आजाद
परिट का तर उहें उड जान दा ।
१५ अक्टूबर, ६१
हिमालय धरती पर लेट गया !
ष भूप नय हारता या मोर दूसरा बम्त । स्तिना हायदिनारक और कारुणिक
दप था | पान कार मार बज महारवि वा गरीर ठन गा।
अपन गाना मूल हम गया म उहनि पूना दुइ अतरिया का एक वार पाडा।
उनका अनाम निपट था।
শান না বা দিবস ও তর মুদি শqা বা সই। মুনি যে এ সাল
पर उनका सासर वा गति कुछ ठार गई । वित मुग मल मुदर तथा गात
गगया। प्राय दो घर तक गानभाव मे पर रहे।
"मा मध्य या जयपाल राम का गति पूजा का पार उनक समीप हा वठार
करन लग गाता पार वेपत्र तया शास्त्रानुसार गान स्वणदान आनि जियायें
का जान गा।
ना बजार १५ मिनट पर उन दाना अचम्लु त नब मम बर हुए और फिर
एमपन रियर हा गय। या मनाशर न उनाजानकार माने
हृय मामू कातिम वण पात्रा।
मनार का पानी निगना जा मुख मनमा लार गाजर डाला।
नौ बजार तग मिारा माविमा लिय चिरनिश को गा' म मा
गय। उनपा प्राणातहागरा।
[ सस्मरणा के बीच निराना मगरवि गात मुद्धा म पर हय थ । उनक मुपमिन चहरे का दबकर या विश्वास ना होता था कि जब व हमारे बोच नहा रह । मावि क जम तथा मृत्यु का तिथि और दिन भा साथक थे । विद्या एव बना की अधिष्यत्री देवी मरम्वती की जन्मतिथि वमत पचमा या उमा रिन मावि का जम हुआ था और आज उनकी मृयु का दिन भी रवि (मूय) का दिन रविवार हा था। थाना हा तर म उनकी मृयु का समाचार मारे मुहान नगर और रनिया जाति द्वारा जय नगरा म भा प्रमारित ने नगा। क्षण भर म मारा मुल्ला मगर विक निवास स्थान पर उमर पडा। मारी भोर गोगाकुन और नि गया । वातावरण जत्यधिर निम्मच और निर्जीव था। निराना जा जन क्या सचमुच नग रहे ? हरेक का हरेर म मौन क्ष । प्रन था । नगर म मवन गार छा गया। बाडा ही दर म नय पुरान अनक साहित्यकारा कनावारा प्रतिष्ठित नागरिका और निराना के भक्ता शुभचिनका का भान जमा हान नगी। काश सत्य झूठा होता । १५ अक्टूबर १९६१ को दोपहर की बात है। में अपन कमर म पना -आ य साव रया या कि आज सायात महाकवि का सन चनगा । अब नग टाप मित्रा द माथ । पिछत दिन अखबार म निराना जा का भार अम्वम्यना का ममाचार पग था। एमा स्थिति म भा उनानस वचित " मर नियम राबात था। दारागज नग मगति का निदाम म्यान या भर घर म का तान मार या दूरा पर और मग गत यर किमान का पामारा दवारण म फलाम का पन पात्रामातम दाता है। नाव म्पय का व्यवस्था करन या चिताम था नाति पान पान का रिकता राग निपट जा।
मम्मरणा के बीच निगना ]
अपना ता जर वाला था। माच रहा था मा म मागू। निराला जा का देवन
जान को पार क्टूगा ता व र रेंगा।
बम ममम्या मुनयना नगा ।
बारह बज थ माचा चार बज ता चन दगा । मजार म निचिन हार कुछ
निवन व विचार म बरा हो या मिटर म गुजरते हुय दाग पर म गाउन पाकर
की चाख मुनाद
य नाग ता पार पान खाय रत है। म खान बर वुटयुनाया, किमी नना
मात्य व भाषण का मूचा ना रही नगगा या फिर रिमी फिल्म का विनापन
हो रहा नागा।
तागा घर म दूर था। माप का जावाज़ भाग या जनाव में स्पाट सुन नहा
मका था।
का एक मिनट हुआ हागा दि माना जा नीट कर कमर म आइ आर छूरत हा
वाना र मुना-नाउन पारर या वान रहा था ?
क्या? मैंन जाश्चय और हैगना म पूछा ।
निराता जाका मृत्यु
। मन चार वर पाच हो म वा वान वाटा ठाद म मुना भा है
जापन ? और अगर मचमुच एमा वात है ना गजर लग गया !
अभी अभा ता तागाधर म गया - । मा न अपन स्थान पर पुस्टि का । म
चौबताया मा म पर ना पड़ा। मा न जा क्ग भा उम पर मुय विवाम न
ना था।
तागा सपा दर निरन चुरा था मगर म उस पार भाग ITI निराना जा
गचमुच नगर ग विश्वास करने का जानना चारता था।
जवानर मर ज- बन गयमैं गाया मा मना र गया। उन म्पावर
गार पर भारा भगम नावाज म गावधाना भानि मर गाना म प्रवन
र हा तर प्रत्रा बग्न गा-प या विषय विजाज प्रान कार गभग गाट
गोवा गिटीकमगन पनि निगला जावा म्वगवाय हा गया ना निवान म्यान
आय
मम्मरणा के बीच निराना
दारागज बडा काठी के समीप से उनका जर्थी ३ वजे मायमान उगी आप सब अपित
म जधिक सग्या म महाकदि का गव याना म मम्मिलित हो ।
निराना जा चन गय । म फुरफुमाया उह निम बार जावित जवम्था म दख
भा न सका । एक गम माम मर हाठा स फटी-कुछ पुराना बातें याद आइ और कुर्ने
पर ना बा आमूढनक पर।
आश्वासन और अचेत सा कमरे की आर लौटता हुआ मैं निरीह बात सा बुबुना
उठा काग मत्य झा हाता।
निराला शव यात्रा-दाह
सस्कार
वग भान बात है या रुको। गौन जी ने का।
अतिम गगन ना कर तू । म पिता र पाता।
मारा गता म धाग दूर ना गया। पाया जार कतार को कतार सग था मुल्ले
मैं उन गरीना का जा मगवि की मत्यु का ममाचार मुनार दौर आय थे।
मैं कलामनिर मामन पहुंच गया-मामन चबूतरे पर भार न माड थी। जान
पहचान चरा पर टि गइ -कुछ पर पर साहित्यकार | राब मब गार गार म
डूब हुय । मैं धारे में एक कान स मिमिट वर दरवाज तक पहुचा बग मुकि न स सिर
अरवर बा मग विजों पर मिटाय जा च य ।
मरा कापता दष्टि क्षण भर का उनका मुखाकृति पर पना--भाषण सिहरन हुद
जार मनाच उतर आया।
क्या ना ग ? वार साया ना नाना न पठा यति माटर म जाय गय
नाहम बचाना भा नमाव नगगा।
माटर ना यात्रा पर गगगा। मैं पा सभा वारण राप जायग
परामा परी 77 चना पाय या माग पर ।
मदन घर मग निगमा नगा । नाग जतिम बार ग्नान
ना कर मग ।
सस्मरणा ६ वाच निराला ]] गला र साना आर उदास दुखी दाबा की भीड़ लगा था। उनम अधिकाशत ऐस लाग ही ५ जा माहित्यकार निराला नही वरन महात्मा निराला का मत्यु का दुःखद समाचार सुनकर तोड नाय थे। उनके दीत गेन चेन्रा पर याकुता क लक्षण थे और उनकी आमा म आमू धनता रहे थे। महब पर अपन मित्रा सहित आकर एक ओर चुपचाप खडा हो गया। छोटी छोटी टकडिया म खडे हुये लोग गव-यात्रा के सम्बच म विचार विमा कर र थे। बहुत मारे नय पुराने माहित्यकारा को मैं वहा पहल पाया । महादेवी जी भगवतीचरण वर्मा इनाच द्र जोगी और अमनराय आदि जपन जाप म आश्वस्त पीडित और वित्त य विमूट थ । साहित्यिकारे अावा वहा पर नार के प्रतिष्ठिन नागरिका प्रकाशका कलाकारा हितपिया और दारागज + निवामिया का मना उमड रहा था। यह भी सुना कि कुछ समय पूर्व केंद्राय गह मा लान बहादुर शास्त्री महाकवि का अपनी थद्वाजनि ममपित करने आय य । एक दिन पूर्व जीवित राग ग्रस्त महावि का देखन के लिय जिनके पास अवकाशा न था आज म ममय उह श्रद्धाजतिया रन वे अधिकार में वे हा यस्त सहृदय जन पचित न रह । मैं ऐस नी स्तिने नागा वा नाम गिना सकता हूजा प्रयाग म रहते हुए भी कभी महाववि के द्वार पर नहा जाय लक्नि आज वे अधिराधिक मग्या म वहा दिखाई पर रह थ। लियाई भा क्या न पडत? निराना की गवन्यात्रा म गामिन गवर उह अपनी सगनुभूति और महृदयना का मारिपिकत जानना था । अर्थी बार निगा रही है। वातावरण म मर्वत्र मुगधित और रघपनि राघव राजा राम स्वर गूजने लग। मग वा भार अर्थी आग पोछ चन पडा। श्रा नानद्र जागा अमनराय श्री यातकृष्ण राव और अन्य मानियिर बधुआ ने आग बदार अर्थी मरधा गाया। अर्थी धारे धारे भारा भाइ बाच मान मी ओर चल पड़ा।
[ सस्मरणा व वाच निराना
उनका मुख मण्न्त खुना हआ था। चौ- नार पर तम्बा टोपा सुगाभिन था ।
गने म अनक पुष्प मातायें थो । मिर स पर तक उह फूला में ला रिया गया था।
रघुपति राघव राजा राम पतित पावन साता राम । सका वठ म्वर एकम्प
नोकर वायुमण्टन म पर रहे थे।
सडर के टाना जार स्थित मकाना व चतर दाताने दुसान और छ ज भर
पर थे।
स्त्रिया बानिवायें बद्धाय और बचे सभा महापवि + अतिम टन का उतावन
हा रहे थे।
अर्थी आग वरती रहा । आकाशवाणी क कायकर्ता रिसाड करत रन् । पुष्प और
पुप्प मानायें बरमती रता।
गाव मतप्त भाड धीरे धार मान का आर बट रही थी। लोग क्धा दनक
तिय दौ- रह थ मगर तना भाड म हरेक का या मौभाग्य मिल पाना दुष्कर हा
रग था।
मान घाट पर नौगाय तयार था। कुछ माहित्यकार उन पर मवार हो गये
और दार-पस्कार मिय चिता मजाइ जान गा।
निराना जा मुपुत्र मा रामकृष्ण दार-मस्तार के लिय गव व ममाप गावरान
नियाई पड।
जावयक धामिव त्रियायें ममाप्न हद और मगावि का चिता पर निटा लिया
गया।
हम तुर ग म य हाय विचार दश्य दवत रह ।
चिता म परें उन गानोर मगप्राण वा गरार राख दान नगा।
क्या निरागा जा मचमुच न । रे' ग्य का फरा-पग टिप दूमर म
प्रग्न करग था।
मम्मरणा के बीच निराला ] गाधी जी से टक्कर इतर म मिटा माहित्य सम्मेलन था। सम्मेलन के सभापति महात्मा गापी थे। उहान अपन भाषण म कहा- मैं यह साचा करता हूं कि हमारी राष्ट भाषा म रवानाय जम कवि ने क्या नहीं जम निया यह मुनत हा निराला जी विगत पड और गाधी जा में भिटने को तयार ना गय। वे मगदेव भाई क पास पहुच कर वोने-मैं राजनातिन गाधा मे ना बल्कि हिता मादित्य मम्मेनन कमभापति म मिलना चाहता हूं। महात्व भाई न उनवे रोप का कारण पूछा तो वे पान- मै गाधी जी म पूछूगा कि आपन निराला माहित्य पता है जयदा नही ? वे कहगे नी ता कहूगा वि आप भागे हैं । अगर पा भा ता आप ममय नी । पहले निराला माहित्य का समयने का वागिण कीजिय फिर दिदी पर कुछ कन्यि और अगर उहान कता कि ममया है तो मेरा कहना हापा कि भरा गाधी म मतभत है। निराना जी का ऐमा वातें सुनकर महादेव भाई वटुत चकराय । उहा। निराना जा का गापा जी स मिनाया रितु ममय कमान के कारण उनम बातें नीग सकी। नेहरू और निराला याट हम परित जवाटरतान नटम का भारत का एकमात्र राजनतिक वणधार और नता करते है ता भगरवि निराला का मालित्य का मगनतम तपस्वी और भारत का श्रप्टनम ववि बन्ना अतियुक्ति न हागी। दाना अपन अपन स्थान पर महान गतिया और लोना का जपन अपन क्षत्र बेजाड यागतान है। कई बार य दाना महान गत्तिया आपम म साक्षागार के लिय आनुर हुया ! एवं दूमर म मिलन व निय उत्सुक और प्रयलगार या परतु कथित तर विना न म ५८ [ सस्मरणा व वीच निराला कभी ऐसा गभ अवमर निश्चिततापूर्वक जान नग दिया। भय दम बात का था कि कही य दोनो मगन गतिया एक दूमरे म टकरा न जाय और फिर उनम में किसी एक का पराजित न हाना पन | जनाव नन और निराना मिलन न बसर मत्व टात दिय गय । एक जोर महाकवि के स्वाभिमान ने कभी उह भारत के प्रधान मनी के प्रति उदार नहा हाने दिया ता दूसरा जार भारत के प्रधान मत्री ने मगरविक निय अपने को तरत लौर द्रवीभूत नही बनाया । रितु एक वार मनगरवि का प्रेम “म हा पडा और वे नहरू मिनन का लोभ मवरण न कर सके। हाथ म मिगइ वा दाना जोर चाय का प्याना निय हय व उम विगान भवन के प्रमुख तार पर पहुचे जिमम प्रधान मत्री ने आतिथ्य प्राण क्यिा था । मेट का विषय है यि माकवि की इच्| अपूण रट गई। द्वार रक्षका ने उह न म मिनन नग लिया जिम स्वरूप मिठाई और चाय वर्ग फेंकार वे खिन मन म वापस लौट गय । न्म घटना की सूचना जर प्रधान मना का मिना ता उगने निम्न गाम अपने विचार प्रकट यि पिटना बार दागगज म मैंन वा काटा म मुना मि निराला जी मिाद और चाय नकर मुय म मिलन आय किंतु मिपाहिया म प उनकी ठन गइ और चाय का प्याना तथा मिगत का ताना वहाँ पर कर वे नौट गय । वे राष्ट्रपति, तो मै साहित्यपति हू एक वार वा वात " नि मागवाट म भूतपूर्व राष्ट्रपति का गजे7 प्रमा पधारे। व निगता जा म मिान का मुा 4 अन उगन अपन पा ॥ गरा निराला जा का बुनवाया । न म कायम मनावात्रा का मायनाना। महात्वा जा व माय मगविक निदाम म्यान पर जाय। पा सम्मरणा व वाच निराना ? मनाया जा न निराना जा वा राष्ट्रपति व आगमन का समाचार दिया ता व वार-कहा है ? गवनमण्ट हाउस म ठहर है जार आपस भट करना चाहते हैं। दवा न बताया। निराना जी कुछ माचन ग ता व पुन वाना माटर आई नई है जाप साथ हा चलें ताजच्या हागा। मैं वा क्या करन जाऊ। निराला जावाद उत्तजित हारर पन्न ग वे राष्ट्रपति है ता में मारित्यपनि हू। अगर व १० गजेद्र प्रमात है ता व या भी आ मकन है और आर व राष्टपति की हैमियत मे मुय वा बुना रह है ता मुत्र गष्टपनि म कुछ ना लना नना है । उनका उत्तर मुनगर मर मौन रह गय । मुहतोड उत्तर पर वार महाववि क स्वास्थ्य के मम्बघ म यह मूचना प्रमारित की गई कि उनवाना चिन्ताजना है वे एक प्रकार म विप्ति स ग उर है अतएव मरकार उन उपचार कनिय उचित “यवस्था बग्न का कृपा करे । इम मूचना पर उत्तर प्रदेश क तत्वानान मुख्यमत्रा टाक्टर मम्पूणानद ने कहा नि निराना जा का पागलखान म भजार उनमा उपचार करना चाहिय । मगरवि या मुन्यमत्रा उक्त विचार न गहरी चार पहुचाइ । य इस महन न र म आर उगन मा मुन्नाड उत्तर रिया आगर क ताजमहत का जपक्षा में गगा जा म विश्राम करना अधिर अछा ममयता ह ! मरवार मर स्वास्थ्य का चिता नवर अपन स्वास्थ्य का सुधार। (माप्ताहि भारत २५ जनवरा १९०५) मेरठ कवि सम्मेलन पर यार तुनगा जयन्ना व उपना म आयाजित रवि मम्मा म मरठ वाला न निराला जा का नामावत पिया । निमत्रण-पत्र व उत्तर म निगला जा न निया, ६ [ सस्मरणा के बीच निराना मुय प्रचुर धन प्रदान किया जाय जद में सभास्थत म जाऊ ता मव सर हाकर स्वागत कर और जब म कविना पर ता मभापनि भा ख रह। मन गर्ने ता माय भा हा सक्ता थी कि तु मभापति व बड रहन का गत करिन ना क्यानि मर क एक प्रतिप्टिन तथा मम्भ्रात नागरिक कवि गम्मनन व मभापनि मनानात क्यि जा चुर थ । उममा यह समाधान किया गया कि स्वय निराना जा का कवि मम्मलन का सभापति बना दिया जाय 1 कवि मम्मन जारम्भ हआ निराना जा मभापति बनाय गय और व अध्यक्ष पर म भाषण देन ग। श्राताजा का आर म जावाज जायी बविता पदिय । निराना ना बरावर वारत है। फिर वइ आवाज़ पर माथ आया कविता सुनान्य । निगता जा या दम हल पर गाध आ गया। व मच पर म उठ कर चन प- । वेतन पाव म यकि उह जूता पन्निन का भा यात न रही। जूता हाथ म । नकर चल पड । कागज व दरवाज़ पर पहुचे ता ह कुछ नागा न रावा। व पमान से तर-बतर थ । एक छाग वा हपया यनान तगा। दिमी ने नाथ म जत लकर पाव म पहनाय । मगरवि कुछ नम्र हुय जार पूछा क्या चात? म नाग आपकी कविता मुनना चात मन न पत्र म्वर म रहा। निराना जा पाप प्रमान हा उठ और वान अया कविता ता मुनाऊगा नकिन उम मच पर नग । तुरन हा दूसरा मच तयार किया गया और निराला जा उस पर विराजमान हाकर मम्बर पाठ करन नग। एम विचित्र य हमार महावि । निराला का वस्त्रोदान पर मार दमन पचमा व दिन निगता जागगा म्नान का गय । म्नान वान व पवान वार पर जाप नग्न गर वान भिवारा न ग्नम वस्त्र का निभा मामा जम रम पर म गात हा निशानवार मगरवि मा मामन . - सस्मरणा के बीच निराता] निराला न अपना नया कुता उमर हवाल पर दिया और धाता पह्नन नगे। स्तन म एक बुढिया न आग बटकर धाता माग लो। महारवि न अपनी परवाह न करव मप धाता भी दान कर दी। वग पर उपस्थित लाग आ"चय और श्रद्धा भर नेत्रा म महावि का निहार उठे। अब उन पाम वा कम्बान बचा था और उगन उस भा उठावर एक तीसरे भिखारा का दान करन ने लिय आग वढाया कि एक “यक्ति न उनका हाथ पकड कर राब रिया और नाभा भिखारिया का वहा म भगाया। उन निराना जा का अपने माथ रसवर पर चाया। जनममूट श्रद्धा जार गदगद वण्ठ म मगववि वा दानवीरता या मराहना रा. मेरी मा भीख नहीं मागेगी। एक दिन निराना जा के पास एक भी पमा नहा था किंतु उह पम की बडा जरूरत थी । दापहर व भाजन वाद नग मिर नग पर बदन पर क्वान एक तुगा यर हय व चौरवाजार चा परे। अपन प्रसागर (फ्तिार मन) या पहुच र उहान पारिश्रमिक का माग गी। प्राय मगल्य न उह तीन मौ रुपय दिय । वय हुय दम-नम ना थ- भजान का काम पझटका था जन गा का फेंट म पट कर पात हा अपन निवास म्याना आर चन पड। जब व नापी बाग व निकट पहुच ता एव युढिया टिया टपत हुय मामन पड़ गई। निराला जावा तखत गबह पडी, बा र पमा द द वा भूख जगा है। निराला ना पगार युछ क्षणा तब उस दरत रह । उम युटिया का वटा बना "ह चाटस गया। उगन उम युनिया गपूण तुम्ह एक रपया है दूता पितन निभाय मागागा? ना दिन नग मागूगा वा। बुटिया न उत्तर दिया। तुम्गरा य महान वा मच पिराना होगा निराला जा न पिर पूछा।
[ मम्मरणा वाच निराला
काई पर वार रूपया । बुढिया न बताया।
जौर मात भर का। निराना जा न पिर पूछा।
बुटिया न समया मजार पर रन है जन यमनार वाना-पहन एक दिन का
ता ठाक हा पिर मान भर की पिन करू ।
अछा य बताना कि तुम्ह कितन रुपय मित जाय ता तुम भाव मागना छार
दागा ? निराना जा वा।।
दामौ रुपय मित जाय ता भाव मागता छाकर काइ गजगार कर गा।
वर वाना भाग मागना अछा नग जगता आर वाइ भीख ता भा नग।
उमका वात मुनवर निराना ती ने मार रपय निरान पर उम दते हुय कहा-
यता मान मौ रपय है। माया- वामपरक पर चनाआ। जन भाव मन मागना ।
निराना या मा जोर भाग मागगा? नग जर मरा मा भीमग मागेगा। पर
व आग बट गय ।
हाय म नाटा का गला दवाय वुरिया आ चयक्ति मा उ जात पता रहा।
निगना जा पाता हाथ घर नोट ता किंगा न पूग बन गय थ परित जा।
वितार मग । रपया न गया पा। निगना जा बान रातान मो
रूपय लिय थ मगर राम्त म मरा एक मा मिन गई भाख माग रग था उसाकार
दिया उम जमात था।
इक्केवान का सौभाग्य
र बार निरास जा प्रकाशक यगम पारिश्रमिक परका पर घर
न्य गरागत जाय। रारा जव म पवर पग ना था टानिय बटम पय का
नार परवाना कर चनबन ।
कावान न मिया शिफगर पमा ना नारगन व नियटा है। बनार
तुगन ना मार ब वापग गोरा ना निगा । नारन थ।
व आग बगता निगना जा जात -य निवारपनागदपर आवाज
- मगगन पनता जाय।
मम्मरणा बीच निराना ] जव वर समाप पहुचा तो निराना जा वाल क्या बात है क्या कम है ? अव मैं नही दूगा आज मुश पय की जररत है। नग महाराज जपन स्पयत्र नाजिय। आ चयक्ति वह पुन वाना। ने जाना ल जाआ। निराता जा न का। नहा मगराज सव रम ने तू-मरी आरवन विग जायगी। वह पाता। ना नाक्बत नहा विगडगा भाई ल जाआ । योइ चारा ता कर ना रहे हा । वर आमा म श्रद्धा और जावय गमन रम तवना पुष्प वा सार नम्वना रहा । अपन गौभाग्य पर भगवान का धमाल पर ग्मने मनायविक चरण म्पा रिय । निराला, पागल अथवा मानव सेवी । मई की एक चिनचिताता हुई दापरी थी । दुनियादारी व रिश्ता का बनाय रखन व निय मैं भाजय नागा व साय एप गद यात्रा म मम्मिनित था। भीषण गर्मी म तू व थप गहना हुआ डामन का तपता चिपचिपाता सय पर म गुजरता हमा मैं दारागजाआर बट रग था। रामबाग म्टगन व पहन पुन व समाप पहुचर में अपन कुद माथिया मग्नि एक करजापचय जनव तमागापन नगा। हमन देपा निदा-तीन टुबन रिद्र भियमग पुन नाच कर बह और एक नम्बा-नगा विनासाय मायूस यानी म पानी भर दुप वग वा जमीन पर छिन्वार पर उम गाता यनान हा प्रयत्न कर रग 1 पाना पिन वाट वर उगबाच बस्तर बन प्रमग वाने करन उगा। हम उग भण आ चय पविन रह गय जब हम पात हुआ कि वर गाधू और काद न। मारपि निगा। आज मा मम्निम तर 37 निराना मानव मवा घ अयवा पागन [ मस्मरणा बीच निराशा निराला बजट निगना जी स्पय हाथ म जात हा उम खच कर गनते य जिमम प्राय उह आर्थिक विषमता का मामना करना परता था। उनका यय मभान और यवस्थित करन के विचार म श्रीमता महात्वा वमा न उनका घरेलू बजर वनान की जिम्मदारा अपन पर ल ना। टम बजट म नार म कार खान परनन आनि मभी तरह के खर्च का मूचा तयार का गई। परन्तु यह बजट एक मनाह भी पिर न रह सका। रुपया जाया और बजट की चिता छावर निराना जा न पचाम पिय विमा विद्यार्थी का महायता स्वरूप दे दिय और प रुपय विमा बामार मानित्यवार की मटटक गिय मज दिय । टस प्रकार मारी एरत्रिन पजा वहा सप्ता- म ममाप्त हा गई। सच्ची श्रद्धाजलि निराला जा की महृदयता के जनक मम्मरण का मुन जात है और य सम्मरण भी अत्यन हुन्यपी है। प्रयाग म पस्ति जवाहरलान नवे बग्नापाजार एम.परित या जब निधनमा उम नि गत पाजार व निराता जा का पता चना मिश्रा जार एम पति वा गव निवणा 'मसान घाट पहुचाया गया है। वह तुरत उम जार चर जागा न उह य क र रापन वा चागवादि व पाना मार गचा जागा आर नव-याचा गौर चर हाग । परन्तु व व मानन वान थ वान मब नागा म वश करना निना हम आयें। मुनमान रान म निराना जा व आर यम पग्ति का अघजना चिता पर गनर र कि गव यात्रा कर और चाय । निगरान मनि वाम रहवा और कविता भा निषा।
मम्मरणा याच निराना ]
वह तो कवि हो गया
एक वार निराना और पन्ल जा जादि अपने विमी मित्र के यग चाय पर
निमत्रित किय गये।
उनम मान्त्यि चचा चा रहा थी कि तन म एक नौवर चाय नाश्ता आदि नगर
वा आया।
पत जा न बडी महानुभूनि के माथ मम पूछा
तुम्गरा क्या नाम है भाई ?
मक मरवार । उमन उत्तर दिया।
क्या तुम अवेन हो मक
? उहान फिर पूछा।
नहा मरवार एक मा एक विटिया और दो भाइ भा हैं। उमने बताया।
कमान वाले
तुम
अक्ल ही हो? पत जी न नया प्रश्न किया।
बड़ा भाई मती म हाथ बगता है छाना भाइ न हान के बराबर है।
लागा न समया कि उसका छाटा भाइ आवारा जोर गरारता निरन गया है
तभी मत उगा लिय एमा कह रहा है। पन जा न जिनामा प्रगट या क्या उसक
माथ क्या बात है?
मान मन भाव स उत्तर दिया अर मरवार वह ता कवि ग गया।
यह सुनते हा सब व सव व्हावा मार कर हम पड और निगना जी उचर पर
उसका पाठ ठाक्त हुय बान गावाग बना।
निराला ने दुल्हन को देखा या दुल्हन ने निराला को ?
महाकवि जब वभा रिमा गता या गम्त म गुजरन तगत माडा तागा वा आखें
उन पर जम जाता। ताग आमा म श्रद्धा और नाचय ममटे नव तर उह दखने
रहत जब तक कि वे याखा म जायरन हा जान।
एक दिन रात म गभग मात बज निराला जा दारागज का एक मन परम
गुजर रहे थे कि ममीप ना रिवगा पर अपना नव विवाग्नि पनी व माय वा नुय
युवर न पत्ता का मगरवि कान बराना चाला।
६६ [ सस्मरणा के बाद निराला इम परिव निराना जा के न कर पाता व जाग निकत चवथ जनाव वह वस्त्रा गहना म जनकन मुटकर रिका के पाछे टपन व निय था । रिका वाल ने रिकता जाग बना दिया था। स चारा रचनरा का घार खिा पग्यि म फम गया और वर मान पर गिर पग। नाग यह तमागा दख रह ये मगर नर तर मनाववि फुर्ती म व नौट पर और भान चार कर नव विवाहित तडका का उठान हुप वात- बटा चार ता नग आइ? वर गम म भीग गई । निगना जा ने बहू का ता देखा परतु बह का उत्सुन प्यामा नजरें निराना का तय सवा अथवा नग कग नहीं जा माना । निराली परीक्षा जताव - निराना जा राजावन प्राय ना जार्थिव अभावाम अमित रा है। बहमाग एमा समय जाया जवनि उब पास धन धन पा तगीर। या कारण रग * कि वे टग्लिा और यात्रा व प्रति बर हा विनम्र और नाना रह है। एक बार नाराज प्रमान अवस्था परिन म मिना जाय। उन ग्निाव कुछ पामार थे । जवम्था ा न नका तानवागना मा खबगनियाँ सुन रया था । मगरवि का पराया नन का मगा। व पन्ति जा ग कुण्य पय माग वठ । मगरवि न तुरत सपना चारपाई के गिरगन -गय गन पर जितन पम य उगनिय और उम दम्या जागाजार वगत हय वान "ग ममय ता पुन मार तान रपय है यति तन म वाम चर जाय ता नाजिय । अवम्या जिममजम म - गय। मन म माचन ग-नाग मगरवि । परा। नन का माचा। फिर पग्नि का निर मिसन कर पान नग पनि जा मुम पमा वा पतनगर । फिर माया निगना जान का उगना यर बटन कम। तुम नागपमा पा सरन । और मान । यर कर व घर म रिमा वा जाव'जन ग।
६७
मम्मरणा के बीच निराना ]
।
जब ता अवम्या जा वहन ग घपाय और अपना जेब म मनीग निवान कर
निराना जा का विनात हृय पार नविय पग्नि जा मरे पाम रपय है । म रख
पर निराता जा इतना हा वार ममझ गया
निराला जी की दवा
र वार मगरवि क पराम अपरमग गया था। वखीझ-वाग कर उमे
पुजनाने और कहत जव मिमी दिन दम दाग दगा । विना दाग यर वोमारा दूर न
गी।
पग्नि गिवगापान मिश्रन यह गा पा तावान पति जी रवानाऊ।
इसका क्या दवा है यह ना नागन म ही ठीव गगा। निरागा जी न उत्तर दिया।
अगर बाइ वागता आऊ? मिथन फिर का।
गाम का दवा ना गइ। पान का ग्वा और मल्हम । मम र निराना जा
न पाव मगाया और पीन कारवा व नियका एक आम की खरार। यन
पौवा मान दिन तगा। गाणी का मुर यान वर वर जाधी गोगा पा गय ।
ठा या उन भूवरागार गरार के लिय जाम रवा वा क्या मह व था।
दूसरे दिन उ हान गेप दवा भा पा डाला।
पहले कमला फिर निराला श्रद्धा के पात्र है ।
महाबवि निगता म पूव दारागज प्रयाग व निवामा ना पमनावर जा एव
नो समम्न परिवारजन श्रद्धा तथा वदना व पात्र है जिहए तम्बी अवधि
तर महाविद मम्मर म रन नार उनका गवा मुपा पग्न का मौभाग्य प्राप्त
रिटा मागिय मगार निरपान तर उनका फणा बना रहेगा।
निराला जाब अतिम दिना म उगन जिग निष्ण एव भक्तिभावना महिला
६८ [ मम्मरणा व वाच निराला के वर पुन का अथक परिचम म मवायें का है वह कभा भनाई न जा सकेंगा और उमका तुलना निराना जा व रिसा भा प्रमा रितपा और भक्त मन का जा सकता। कमनागकर जान मावि का निम्दाथ मवाये दा है। उर उनम क्या स्वाथ और लाभ हा हा सरता था ? वे घय है उन परिवार जन पूज्य है कि उन निराला जा जम निरान एव अटपटे तथा ताव मापुरप की मवायें करत न्य ग्यारह-बारह वर्षों को नम्बा जवधि वर ही मयम और निप्य माथ यतीन पर डाला। जिम भी निराना सम्पन म कुछ ममय यतान करन का गभ अवसर मिना नागा व मनीभाति जानना हागा निय स्तिन जमाध्य और अमन्यागा । एम मगपुरुष के मम्पक मदर और समित रह पाना क्तिना दुपर गता है । निग्तर अम्वम्य चितित और पथित रग्नक कारण निराना जा पा स्वभाव बहुत चिडचिडा और नाधा हा गया था। बावा राप म उन मुख म गालिया भा निकल जाता पारितुना कमनार एव उनव परिवार जना न मगरवि का सवा मुथपा म नटि नगगन दा और मदव पक्षा क माय मवायें करते रह । एम मगन यक्तिव और सहृदयता क पात्र था यमनागर जी जौर उनका निराला मवा परिवार बन्नाय है। मगकवि व माय उमा प्रसार उन नाम का या मिलना चाह्यि जिम प्रभार भगवान रामचल व भक्त सवा हनुमान जी का मिना है। जब हम निराला जी से मिले मृत्यु पूब मन वन टा बार मगरवि वन पिय थ । व वार ता उग ममय जबपि मरा उम्रनवर वार वप का था और मैं जारवाना वा विद्यार्थी या। काज म रवि-सम्मान जायापित किया गया था और मा अध्य पता करन व नियमगाव का बनाया गया था । यविना विम्बन का मन मन “मा उम्र म मवार था। छाा माग बचाना यविनायें निखा करता या।
सस्मरणा कवीच निराला ]
६९
नागा का जपना कविता सुनान व निय इतना उत्सुक रहता था कि कवि सम्म नन
व मयाजा जी म ककर अपना भी नाम लिखा दिया था।
निराना जी बहुत बड कवि है वम इतना हा उम ममय जानता था । मुझे उन्ह
तपन की बडी उमुक्ना थी।
कालज का हान टमाटम भरा था। अय निमश्रित कविगण आ च य क्वन
निराना जा का प्रताया था।
लगभग माढ सात बज महाववि पधार।
निराना जा जा गय निराला जाना गय। नागा व हर्षोल्लास और तानिया
की गडगडाट म हार गूज उठा ।
7
म मच पर पीछे का आर बठा हुना पा उचक कर वा । य ही है निराना जा
मरे विस्मय विमुग्ध नत्र उस विशालकाय महामानव का कई क्षणा तक घूर घूर पर
रखते रहे।
लागा न वरी श्रद्वा म जाग वर उनका स्वागत किया और मच पर बिठाना
चाहा ता व मच या मीढिया पर हा बठ गय । बहुत कम गया मगर वा वह वर
रहे। फिर उगन बाडी माचिम नान वा वहा ।
सारा हान उहा बाजार देख रहा था।
बाना माचिम आ गई । उहान साता पर हा पठवर वाडा पाना गुरु कर दिया।
फिर उनको आमा म बवि-मम्मन जारम्भ हुआ।
म छाटा जवय था किंतु निगर और माग्मी बन्न था जतण्व मरा नाम पुवारा
गया ताम भी धघटा मच पर जाकर अपना वविता पन नगा।
व बानी कविता आज तर या 7 मुये
मुझ 1 महाग मिना सिगा भा।
मिता मुसिन जार नको रवाना
मिावना प्रतय म व्यथा ना वगना
थपडा ग लडना रग जिग्गा भा।
७० [ सम्मरणा वाच निराला - मगववि की जि मुथ पर पना व एकाएक मर पर सरव आय । मग पार थपथपाई मुय आगार्वाद दिया । उस क्षण मुम कितना जमाम प्रमनना हुइ उमत्री अनुभूति आज भी माहिय मृजन म उनामान गन पर मुझ मबन प्ररणा दता है जत म निराता जा न भी अपना दई मुटर कवितायें मुनायो । उनका उच्चकाटि का रचनामा म छिप हुय गूट रस्य का ता म नग समय मका था वितु रमका अनुमान अवश्य कर लिया था कि वास्तव म व मगरवि है। गत म म जधिक का ममा हा चा था। सिम्बर या जनवरा का मगना था। भाषण सर्दी पर रग यो । मगर मगरवि का म गात या गाई परवा न थी। उगन क्वन नगा परन रक्या था और उनक गरार पर कार्य वन न था । बम गने तर ने एक कम्बन नपर ग्क्वाया। वरत वग्न जोर जाग्र करन पर भा व कार म जान का तयार नहुय और न माग ययी निया बलि पटत ना अपन शिवाम स्थान का सार चल पड । मैं आचयक्ति पी पर ना नया म पदा ममट उग मगमानव की जार देखना । मर जय वग ना प्रथम दान वा जयगर था उमक वाट फिर कई वप प'चात मुग कुदटावनिय एमा मोगा मिना था। मच ता य है कि प्रयाग म निगता जा क निकर ने यम स्वय उना टन समन्वचित रग मगर नगरा विगप कारण था या सामान भावना नग। सभा निराना जाब बार मचचा चना मर प्रौट मायिन मित्र न वहान जाना भगा दिय जाआग । निगता जा पाला गय हैं। व मिमीना पचानत नग गालिया दन। ना मरह विमा म मिनन नाते। आनि आशियममा वान । मग दाल मम्निान गा बान मनार मका या ताना मार मरा घाटा वृद्धि वना शिवाम्नव मतम् 7 नर पाम तान पगा। माय व आधार पर मन या धारणा ना राम नाम पनना गनिगा जारा मिसन नग लिया। ममा बागान राशि में नागन मम्मरणा व वाच निरा रा ] ७१ करन गया और व निगड गय अथवा कहन नग वि कविता सुनाआ ता में क्या वगा ? उनका नाति र मामन ता मार भय क मेरी जावाज ही न फूटेगी । राम तरह भाच-सकाच नार ता वितर म कइ रप वान गय । मैं निराा जी के दान वा जागा मा पन हत्य में ही दवाय मादित्य मवा को जार गनिगान रहा। १०६० जुलाई महान म नागा क विपरोन अचाना ही मुय मगकवि के मन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन दिना मैंन अपना उपयाम निवकर ममाप्त किया था। पारिमिक को रकम मिल गई था दमनिय निम्बा बाजार मगचित हारर ज्यादा ममय गप गप म गुजरता था। एक दिन मायकात मर परम मित्र और वयावद्ध माहित्यकार पडिन पुरुषात्तम राम गौड वाल पर चला एक दिन निराना जी का टेप जायें । सुना *वि आजकन उनका तषियन कुछ ठाक नग रस्ता । "मारे लिय गम की बात है कि लगवा म रहकर भा निराना नानी खबर न रवय । क्या जापना परिचय निगा जो म है ? मैंने तुर न ग पूछा वे जापका जानत है? पूर्व असा तर । गौर जानना बहर मरे अजात्र मवान पर जाश्चय म म फिर वार मम परिचय म क्या मतलब ? परिचय ा तभा मगन लागा से मिनना चाहियो मैं ता यहा ममयता हूँ । मैन उह अपन तक का सारा वात कह सुनाइ । उहान मरे मार प्रम और मकार वा खन्न क्रिया तत्पश्चात दूमर दिन प्रात पार मारा प्राग्राम महाकवि के यग जान व निय निश्चित ग गया । मवर हम रिणा पर यापर महारवि के निवास स्थान दारागज का जार परप। जिम ममय हम नाग पच निगता जी जपन पक्ष म म अर थ । गम्भार चिन्तन मनान व विधाम कर रहे थे।
७२
[ सम्मरणा क बाच निराला
हमन अभिवादन किया और चरण स्पा करन क यि युव ता व बर म्न म
बाल आजकल क्या लिख रहा काम न जा ?
तुम्हारा ता मुय बग्न भायो।
धर नया कुछ न लिखा पदित जा। मर मित्र ने मथप म इनना कन्वर
मेरा परिचय दिया।
-
असा अच्छा । वे गम्भारतापूवर मुम्बराय और वन नग नया पाना वाफा
तजा म आग बर रग है। फिर मरा पाठ थपथपात हुय वान काई कविना मुनाआ।
म महम कर रट गया। सजन व क्षत्र म मुझ पान वप ग रहे ये परतु मरा
यिझर तनी न खना था कि मैं निराला जम उच्चकाटि रम्यवादी मगरविक
सामन बधडा निस्मकाच भाव में अपना कविता सुना मकू ।
उगेन मरा मकाच भाप लिया अत मृदुन भाव म वान-सुनाआ सुनाआ।
और फिर स्वय ही गुनगुनाने नग ।
मुझ नाम हुना और जम-नम मैंन एक गात सुनाना आरम्भ किया ।
निराना जा बा त मयता म मग गात गुनत रह और अन म ब दुनार म
मरावघा पकड कर वान तुम ता वग्न अदा निवन -क्या नाम बनाया।
मित्र ने उह फिर म मरा नाम बताया मरा माहित्यिर गतिविधिया व बारे में
चचा का
निराना जा था। चविन न्य और मुझ अपना रचनाय रियान तिय प्रात्माहित
किया।
अब मैं उनम सर चवा या अन मन प्रगट का कि मैं जाप माथ अपना
एक चित्र सिंचाना चाना।
व हैगन नासिव माधारण गमवान टार मिया मगर
प्रापर वग।
आपन म्वाइनिना क्मिा दिन -म मा पार जाऊगा। मैं बाना।
'तुम नार कुदमाग' व वर नवम वान चाय मा मित माना।
सस्मरणा व वीच निराला ] नही पडित जा हम नास्ता रके चने है । गौड जी ने श्रद्धा स सिर झुकार पहा, आप परेशान न हा दान करन चना आया था। निराला जो अपन आप म मुस्कराकर रह गय । कुछ देर तक माहित्यिक चचायें चलता रहा फिर हम उनका आशीर्वाद लेकर विदा हुय । हिदी के वे पहले महान माहित्यकार थे जिनम मैंने महृत्यता स्नेह और महानता की य- अविस्मणीय मत देखी। महाकवि निराला और इतना साधारण-मरत जीवन ? मैं रास्ते भर मावता अगली बार फोटोग्राफर साथ लरर उनके साथ तस्वीर खिचाने का वाय प्रम बनाते-बनाते वों बीत गये जोर सोवियत संघ में निराला निराला को कई रचनाना का अनुवाद मा भापा म हुआ है और उह रूसा जनता न मुक्त कण्ट स सराहा है। मावियन निवासी उनी रचनामा में पहन स ही परिचित रह है । उनकी अनूलित कृति म परिमन किय जूही की क्ली और शिवाजी का पन जारि रचनाय मयहित है। मास्को लनिनग्रा और तार तथा प्रामीण क्षनाम भी निराला माहित्य में अनर अनुरागा पाटव है। निराला जा का मत्यु पर उहे श्रद्धाजलि अर्पित करने के लिय भारत स्थित सावियन र मास्कृतिक विभाग द्वारा सभा जयाजित हुई थी जिसम प्रसिद्ध सावियन भारत विद्याविद ई० चव न द रिदा म भापण त हुय निराका साहित्य र रूमी अनुवाद पर प्रवाता था और उनके एक गान का भी दिया था। मभा म जान निराना माशातार मम्मरण भी सुनाय । रामचरित मानम व कसो अनुवारय स्वर्गोय अवातमिलियन के त्रिी प्रमोपुर प्पान बाराग्निकोव अपन भारत प्रवाम बाल मकई बार निराला म मिन । उन निराला का वृतिया का गभार अध्ययन किया था।
७४
[ मम्मरणा बाच निराना
निराला दूसरो की दृष्टि मे
निराना अपना दप्टि म रतन महान थ दिउम माता का जाच-पडतान का
अपना अपमान समयत य । ममाज म या अपमान उह कदम कदम पर मिलता था।
वे दम जपमान को मन्सूम करते । यहां उनकी अमपनना यी नम अपमान का मान
में बरनन का वह काइ प्रयत्न न करते 4 टमके लिय न मुरत 4 न वक्ते थ यगे
उनकी मफ्लता था ।
- हैयालाल मिस प्रमार
निराना अपराजेय थे । जीवन भर तरलर की भीतरी बारी आपटाआ को
घर पर उनरा मिर झराना चाग पर निगता अतिम क्षण ता अपना आन पर अन
र । ऐम हा नरसिंगा की मौत पर म्वय मत्यु ना ग भी आदर स झक जाता है ।
-अमतलाल नागर
पिछन बीम वर्षों म पूरे नय माहित्य का निमाण जिम एक धुरा पर हुआ
है वर
निराता जा का कमर पार पर स्थित था। उन जान ना मगे अपन उपर
सारा युग जान लिया था।
-ठाकुरप्रसाद सिंह
परवाना पावणास्त्र और गास्त्राय मगात ग्नर चिर रचनागान व्यक्तिव
कोतुब मात्र य वस्तुत व मदम पर कवि थ ।
मूर था जब न नियत ना महाना न तिषत और जर तिमन बरन ता एक दिन
म हा दम-म गात निव नारत ।
अजितकुमार
निराना ना अपन जान जा टारगर पाम नग गय । उनका दान बघुता सा
निगारा दुनिया न विप्निता का मना है नाता पर कगर मत्व ताया कि निगता
म्वर पाहत ६ घर पार गरा का जमन पितात हार गय।
-आचाय शिवपूजन सहाय
७५ सस्मरणा के वाच निराला ] निराना ने अपन जावन का अमत जा पहुन पहल हा निचार लिया था गायद आग्विरी वूद तर काय क लिय समाज के लिय । जा गप रह गया था वह विप था जा उहान अपन लिये रस छाडा या नौर जा अनक विकृतिया के रूप म समार के सामने आता रहा। -डा हरिया राय बच्चन उनकी रचनाआ में माता के माथ प्रौढता गभीरता के साथ सरसता भी है। -कति वर्मा जीवन का मल्टि म निराना जी विमा दुलभ माप म ढत माती नगे है जिसे अपनी महपता का साथ देने के लिय म्वण और सौन्य प्रतिष्ठा लिय बलकार का रूप चाहि । वे ता अनगर पारस व भारा पिता मन ह न मुकुट म जडकर काई उसकी गुस्ता मम्गल मयता है और न पट जाण बनाकर कार्य मका भार उठा मरता है वह जहा है वहीं उसका पिग दुलभ है । -महादेवी वर्मा मामाजिक जीवन की रूनिया माहित्यिक क्षत्र वे धन वयक्तिक जीवन की कुठाय "न मयका भजन करन के लिय निराला धम याद्धा की निष्ठा के साथ जुड़ पड । घोर पनवजिया माज म उहान नाचा समया जान वाता जातिया स वरावरा का वर्ताव क्यिा ना बन । गाव का माप्ताहिक हाटा म व गान को दुकाना पर माल-ताल परते हुय नजर जाय। पुत्री विवाह म स्वय पुगन्ति पन । साहित्यिा पत्र म मवम पहना प्रहार वधनमय छ। पर ना हुआ। मयम म गरार या वगन व तिय कमरत की हह कर । उतान शक्ति या माधना म हा अपना मवम्व गा दिया। महाप्राण या जन-अनुमारित उपाधि उानिय यवथा उपयुक्त है। -ओंकारनाय श्रीवास्तव
[ सस्मरणा क बाच निराना
मै राटा हाता ता निराना क वाट काई और मान न टूटता रारिक हाता ता
हिमालय का सबम ऊचा शिखर तन दिना तक विश्व का आंसा म नाझन न रटना ।
-जानकी वल्लम नास्त्री
जब तक हम माहित्यकार का न समय उमका साहित्य नहा समझ मक्ते । निराला
और सघप का चाला-नामन का साथ था और सघप म जावन हा यग्य हा जाता है।
-बेढब बनारसी
उदात्त परिक्रपनाय रे मरन वाना रवि अपन म पूर्व के समग्र मास्कृतिक
रतिहाम का पजाता है । निगता का भूमि म भारताय-मन एतिहासिक
मामामा साम्कृतिक जावन और मास्कृतिक चनना मभा वतमान है।
-मुनाराक्षस
पाउर का भाति हा निराना क प्रादुभान सभा निटा काय के क्षन म एक
तूफान आ गया।
-मगवतगरण उपाध्याय
करता शृगार कविता का बिना
भूपणा क' मुरवि निराला
का ना रग 1 निगरा है।
-गयाप्रसाद शुरल स्नेही
१
जाज का नरमिट निगना गजाना नन चतन हाय
ना करा म्वण माघ पान तुम उग यनावर दूना गाय'
-मचिली गरण गुप्त
जमत पत्र कवि या काय नव जगमा जित
म्बय भाग्ना नत्रा मतग पत्रा मात।
मुमित्रानदन परत
७७
मस्मरणा के बीच निराना ]
वह है कारे कजरारे मेघा का स्वामी।
-१० घमवीर भारती
तुम धरती पर चलत फिरत आसमान हा ।
-रमानाथ अवस्थी
आ तेरी जावित मौतो का जीन का योहार बना दू ।
-~-माखनलाल चतुर्वेदी
तापव और लास्य की ध्वनि म
मुक्त गीत तुमन गाय हैं।
-डा० रामकुमार वर्मा
-नागाजन
हे कवि कुल गुरु ह महिमामय हे सयासी
तुम्हे ममयता है माधारण भारतवासी।
निराला!
जा पसीन अधडा और तूफाना से बना था
जो हर तूफान के ऊपर उपती ध्वजा सा तना था
जा हर तूफान में बाद इस ध्वजा से
झरते थे फूल सुगनू भर फून तितलिया
बच्चा को मुम्वाने विनावा के पन्न
माता अर अनायाम
तुम्हारे
आग पाम बिखरा हुई अन्नत गाथायें।
रचनायें
सुरेन्द्र तिवारी
[मस्मरणा के वाच निराला
काव्य साहित्य
१-अधिवाम
२-जूही की कनी
३-अनामिका
४-परिमन
५-गातिका
६-तुनसीटाम
-कुकुरमुत्ता
८-अणिमा
९-जपरा
१-नय पत्त
११-बना
१२-अचना
१३-जाराधना
१४-गात गज
१५-ववि ॥
कथा साहित्य
१-अप्सरा (उप याम)
२-जनका
-पिता (पगना मना)
1-निरूपमा (पाग)
५-प्रभावना (निगमित्र गयाग)
-बुना भाट (ग्माचित्र)
-चमना (अपग रचना)
८-विमर दाग्गि (ग्मा चित्र)
-मार का दावा (वगना माल)
मस्मरणा व वाच निराना ]
१ -चनुरा चमार (वहानी संग्रह)
११-चोटा की परत (अपरा रचना)
१२-रेवा (वहानी संग्रह)
१३-चार कारनामे (उप याम)
जीवनिया
१-भक्त ध्रव
२-मगराणा
३-भक्त प्रमा
४-भीम
अनूदित रचनायें
१-महाभारत
२-श्री राम कृष्ण वचनामृत
३-रामायण
-भारत म विवानर
1-वरिमचद्र चट्टोपाध्याय
६-गीत गुज
नाटक
१--समाज
२-मानता
४-अनिरुद्ध
1-गजयाग
विविध
-पिता वगना पिता
७८
[ मम्मरणा के बीच निराला
काव्य साहित्य
१-अधिवाम
२-जूहा की की
२-जनामिका
४-परिमन
1-गातिसरा
६-तुनमादाम
-कुकुरमुत्ता
८-अणिमा
९-अपरा
१ -नय पत्त
११-ना
१२-अचना
१३-जाराधना
१४-गात गज
१५-वविना
कथा साहित्य
१-अप्परा (पयाम)
२-जनका
-पिता (गना मग्रा)
-निम्ममा (पाग)
५-प्रभाबना (पनिगमित्र पयाग)
-कुना भार (ग्माचित्र)
-चमना (अपग ग्मना)
८-दिनमा दाग्गि (ग्मा चित्र)
-मार का बावा (वगना मगर)
क
मम्मरणार बार नि1]
१०-चतुरा बनार (7-:-
११-चाग कार (
रस,
१२वा (उगताहर)
जीवनिया
१-मन प्रव
२-मगगन
८-भाप्म
अनूदित रचनायें
१-महाभारत
२-या गम -
-रामायण
-भारत म विज्ञान
1-वक्मिनः गा"
६-गात गज
नाटक
१०ममाज
२-गन्ना
३-कपा
-अनिरुद
५-राजयोग
विविध
१-बिगता पिता
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