Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur
Satyarth Prakash
Front matter
एर मूमना व्या लामीमी त समस्त प्रन्यों का प्राप्ति म्पाम- पैदिक पुस्तकालय, अजमेर ।
॥ प्रोम् । अथ सत्यार्थप्रकाशस्य सूचीपत्रम् ॥ C पिया पृष्टत-पृष्ठम् । विपया पृत'-पृष्टम् भूमिम ४ समुनामः ।। समुनामः ॥ मामनाया समारशिला मामाचरपममीक्षा 10-15 दारा विगमन्य माम ॥ निगर पापुरीचा मगिपापित प्रारमि तिरमिर भनमानिमित माममोरा गुगम्मामुमारपबतम्मन्ग 2- मिपनि .1-1 ३ ममनाम ॥ मापगमा ध्यानविषय.73 पीनापार पामारना पगतिशिलाधर म सागर वर्मा LA CHILD -- 7.. -) هرعدهلرا nanL LU Limile MinmULL هردميره HARMA -16 1-12 पाnि . forari plintherforms ant roaira ...
२ सस्पार्पप्रकाशस्य सूचीपत्रम् ।। पृष्ठव -ठम् विषयाः विषयाः पृष्ठतः ठम् ५ समासः ।। ७ समुन्नासः॥ 1-10विषयः १४१-१७ समासाममविधि 15-1 विक्ने प्रमोक्यधि ६ समुन्नास ॥ चालविलोपासना चिरशाम राजधर्मविषय १०-१५० ईपरस्मास्तित्वम् सम्पपकरबम रासाविसमा रासायानि बीयत स्थानम् ११ 1-110 बोयेस्पोर्मिसनम् १९५-१९१ 11010 ईमस्त मगुचनिबन्यनम् प्रचरणम्पसमनिपेका १-१३ बेचविश्वविचारा 180-10 भाजपूणादिरापुरम पापानि ८ समुल्लास ॥ मम्प्पदिनु भनियोगः 110-11८ | पात्पन्चारिदिता १५-१८ दुरिमायाप्प 11-115 मिपा प्रत्येक मुरम्मवारा 146-100 पराम्परावादिविधिः पौमास्तिसम्मक प्रमाधिपयसिपम् १९५-१२५ निरामयम् 01-101 ११-१२ | मनुष्पयामाविमो। 111-1१५ | मापरिनिर्वः 151 भासमारिपालनाक्य १५-१६ मार्षम्मेगानिमय 1EL-11 पपमित्राासीमा मिर चरस अपनपारत्वम् 150-150 मिपुरमबम्मरण १.-11 ममुस्तासः॥ पापारिपु राममानम् विष्य विमरिया अपरामियरमा |पमारिया धमेबम्परप्रयम् 111- मापियोपण 11-12 १० ममुल्लामा ।। मनमा पारिधि -1 भाषायामापारसिया करिसमरित्यय 18-18 इति पूपाय ॥
मास मबन पो गस्ता, भी भाषा विनरपन्द्र शान ममार उत्तरार्द्धः विपया पृष्टव -पप्रम् शिपया पृष्ठत-एम् ११ ममुनाम ॥ गुस्मादायममीण २०-100 भारपुराराममौका अमुभूमिम शिपषमाग पापावगीयमतमतान्तर मागमममौला २.E-E1 मनमगरमविषय 1-11४ गूादिमामीण २८२-२५ मंत्रादिमिरिनिरामयम् १९६- पौधोरिमापरिमाVI ममामिरापम् २५५-५. पारपश्मिनामी परममा ममीण मम्मागनियमादिम मारपनामोधरमचम म्पसमा नियामी २१४-१५९ माममा merमाममाता पौरपणामीण गावामागील पराम्बममीपत मागमाता १५-... रामप्रसिपम भविपणनावानी मागिपमिस्त 1.-116 मिनरनमयी-100 भरमाग Me- HEENA माता ममामिमौत arr mantra.. rmamtern सभापता itm fwrtime معاصططططططها anADH . ..
४ सत्यार्थप्रकाशस्थ बीपमम् ।। -- अमीरोरनम् विपया पृष्ठवा-पृष्ठम् विपया: पृष्ठता-पृष्ठम् १२ समुस्तासः॥ १३ समुल्लासः ॥ अनुममिम ५१-३३. अमुममिम- । पस्तिस्मयम्मान १५८-५पीपमासमीन चारबालभवसमाता २१५-१५ पचन्मयापुस्तकम् भारपणाविनास्तिकमेवः ३५-३॥ पयमपुस्तकम् समुपहालस्व वितीय बोरसौमसम्माचा 100-100 15-21 सप्तमीस्थाहादी 100-11 मास पुष्पकम १५-११ अस्तिषमाथिसम्पदा ५-10 ऐपूजासस्प पुकाम .२ उक्त पुस्तकम बातोलारिसमा मत्तीरविन इम्मासम्पम् 11-३५ असमते भूमिपरिमारम् ३५ -३५१ माप्रति मीणाम् बौधरमलाल पुष्पवाना मdि इम्बोसायम् ॥u-m पारे प्रयोजनका 11-11 बोहनरचित मुममाथ। ३-१ गवर्मपतसाविसमौला -11ोनप्रमशिवपातम् १५-१ श्रमणमीमाग 01-11 १४ समुल्लास' | क्सापलायसमीण 10-100 अनुभूमिम ११ मवार(.)पाप- पचनमारामास्यसमीषा 1-2 . ममत सम्धीपारिवि समाप्यमम्मन्नविपा ११-१८ इत्युपगढ़ः ॥
भो३म सचिदानन्देसराय नमो मम'
भूमिका
जिम समय मागप्राय 'समाम बाबा परस समप और
रससे पूर्व संसा मापय भने परम-पाठन में संस्कृत होवोमने पर बम्ममूमि
की मापा गुमाती होने माण से मुम्मो इस मापा प्रषि परिधान
पा इससे मापा पार कर गई यौ। प्रब मापा बने भर
शिप्रयास
से गया पति इस प्राय प्रपामा भषसा परमो दूसरी पार
अपचनामी समाप मामेर दुमा सोममा ति पा
मोकि इस भेद मेि बिना मरा की परिपाटी सुपरमारिन की परम्नु पर्न
प्रभेद नही मिा गरा। मदुत विशेष को बिना गया है। दो प्रथम
परने में भी बही पीप विप्रय गोषण मेक सी गई।
प(चरर) समुबास पर्वात र दिमागों मर गया।
इसमें। () समुपास पर और " (चार) रतार ब परन्तु
मारो समुहास भौर परपर स्वसिदान्त किसी भय से अपमही बप
सोपे पर मौपच रिपे॥
१-अपम समुमास में सरकाशगदि नामों की प्याया।
-दिनीय समुमास में सम्तामों की शिक्षा।
३-पतीय समुसास में प्रमचय पटन-पाठन प्पबम्या मम्पामस्प
प्रम्पोचमाम भोर पड़ने पढ़ाने की रीति ।
४-पनुप समुत्रास में विपार मौर गायम का प्यार ।
५-पशम समुमास में पाममाप और मम्यासामम की विधि ।
परे समुनास में राम ।
-समम समुमास में परेश्वर पिण्प।
-परम समुन्नास में गत् की सपछि म्पिति और प्रसप।
t-मपम समुमास में पिपा पपिपा ग्ध और मोरबी प्यादा।
- समुमास में प्रासार प्रमापार घोर मापामन्य पिण्य।
1-पाय ममुमास में भापानीय मतमतान्तर कानपरन मएन
पिप
सस्यामा १२--मादय समुन्नास में पाक बौन भीर वेनमत का पिपप । १३-योपय समुशास में ईसाई मत का पिपय । १४-बी समुहास में मुसलमानों में मत का विषय। और धौदा समुहासों के भम्स में भाम्पों के सम्ातन पदविहित मत की विशपट याम्या सिबी है जिसको मैं मी पपापद मामता। मेमा इम प्रमोबनाये समुल्ल पोखब सत्म मार करना है पोर यो सत्य है उसमे सत्प और बो मिम्म सो मिष्य की विमान परश, सत्य भागमा समम्मी। साप नारीता को सवस्था में प्रसल और ममस्मान में पधमा बिा बाब। किमो पा र रसमे मा हो मम विवमा मोर माबमा सम्प माता है। जो मनुष्य पापाठी वापअपये असत्यमे मी सम्म और पूसरे विरोधी मत पसे । सत्प को भी प्रसव सिम प्र में प्राच होता इसपि पर मतको मम्स बाहो सकता। इसीधि पिान की मी मुम्बामपदेश पावरा सब मनुष्यों सम्म सम्पसन्द कर स्वरूप समर्पितम, परसाद स्वभपमा विवादित समय पर मात्र प्राय और मिथ्या परिवारमोसरा मामन में। मनुपम प्राप्मा सलामप सजानने बारे । वापि अपने प्रयोग की सिदि दुरामा और परिवरिोग से सत्य को बोग प्रसव में मुहै। परन्त इम प्रब में ऐसी बात कही थीऔर पिसीम मम मना किसी भी हामि पर तात्पर्ष। ति जिससे माप्प पाति राशि और उपभर से सत्पासनको मगुण बोग बापम सत्वभप्राय और अपना परित्याग को। बाकि सम्बोपरमिन्द्र भाप मों मी ममुपवाति की पति का परसबही॥ इस समयोगी १ बरसे वा योगये था पाप में मूष एबाब समे बार बनाये पर मैसा पासम होगा सा मरिया बापणा । और जो भई पापान से प्रावधावन मारमा उस पर भाव न रिमापण । बो पर मनुष्यमान विपी होम उप जमग रसको साप पाप समबो पर रसम म संगीत हरोमा । बपि भागमपटमे पिार प्रत्येक मतपत यो सतना सिरा पर्वात् बोबा परमात्र समय समय और को परमो मेशिन समाप्र म प्रति से व जयत् पो हितोपोलिपिनों विशेष से मधिानी में पोप नगर पविष दुमका पनि और मुरा हामिवी। इस रिमे, मोकि प्रमों को मिला मनुनी को बसागर मे दमा रिप समे मे गो कोई सास सस पर प्रामसे स्ाी पोप शिवमने में सपर होम प्रोममा विण भात। परन्तु । भूमिका 'सत्यमेव जयते नानुत सस्पेन पम्पा विततो देवयान" * प्रात सर्वत्र सम्म सजिप और असत्यमा परामर और सत्पदा से पिामार मार्ग विस्तृत होता है। इस त निम्पले भाव से प्रासयोग परोपकार प्रने से गासौप होमम्मी सत्पाभरामने से नहीं हो । बहरदास सिप कि 'यत्वमे बिपमिय परिणाम मृतोपमम्"पा गौता पचन। इसम्म पमिसन पर कियो रिण और धर्ममति के कमरे मम मने मनिपल और पहान् परन सप्य होते हैं। ऐसी बातों को चित्त में पर मैंने इस प्रपोचा। प्रोतापामाप मी प्रथम प्रेमस रेत इस प्रपा सत्परतापवं ग्राम पहम। इसमें पा मिपाप या पवाबो मन मों में सब बात। . २ सय में अविस रोने मे मम स्वाभर प्रो बो। ममतान्ती में मिप्या बातें हैं मसराम किया है। इसमें पा भी प्रमिष मा Rष मतमतान्तरों में गुम पाम पुरी बातों मप्रकाश प्रपिान् पश्चिात् सब सापारब मनुष्यों के सामने सारे निपसे सबसे साका रिचर होम परसा प्रेमी होने पर सल मकस्म हो । पचपि में प्राव देश में उत्पा मा पौर बमता पापि से इस रेण मतमतान्तरों की ही बातों पापा ममदापातथ्य प्रकाश मण मे ही एमरे ऐशस्त्र प्र मोति पागों साथ मी पासा स्वदेश बाग के साथ मनुमोदि के विपप में बता पैसा विवशिषों साप मी पप सप समापन्न पोम्पावकि मैं मी यो किसी एकम पापाली रोवो असे मानमतसति मबहस भोर प्रचार कावे और दूसरे मत को मिला हानि और पम प्रमे में वापर होते है पसे में मी होगा परन्तु पेसो पाने मनुष्यपन से णा । बोधिस पासपर रोम निर्वतों को पुखदेव और मार मी परते है सब मनुष्य परीर पारे पाही कर्म प्रतीवो मयुष समाबपुल नहीं कि परवा । चौर दो पाया होम नियों की पीपी मनुव माता चौर को सारण होम परहामिमात्रभक्षावासमो परामोसमी पहा माई। प्रा प्रतिविष में दिरापन , बारा ममुमास तक टिप्स है। इन समुहासों में पो कि मध्यम प्रति मिनायोडीने से मुबो सपा मम्तम। और बोमन पुराप तत्रापि मम्बोल पाताभ वाम किया सम्म जोपा अमुशास में पापा पाक मठ पापि इस पमप बाम्तता चौर पर चाकोर न से पर संप प्रदीपरपारिम रखना है। यह पाक सरमे गा मास्तिक उसकी रेशम रोमा भारतवोदिजो मिप्या बात परोपी बाप तो संमार मगत से धन .मुबाप पतीय मु.॥ गीता 11.॥
सत्याप्रमा ममता कम मतमता और और बो मः मी ममुहास में सर से रिच पा और काम पियान मौ चोकमत साब मेव मोना नोष भी है। पौरब पी से अंगों में पाक और साब मेहरा और गोपीसी बातों में मेर। इसधिपे वीमि शनी जाती है। पर मेरमा समुहास में वितरिय पोम्बापही सममा। जो इसका मेसोपारा समुशास में दिखाया है। और मत कालिमी बिकी। इनमे से बोहोरोपनावि प्राचीन प्रन्या में राम-समद सस्पसमा में रिवाना में से पहा बियाचौर मिदों मिशिक्षित सितम से- पार मूल सूप - समस्त मधिनस्त और पारिसूत्र । १(म्याप) मासे- पारोमा पुगसूत्र चाच सूत्र । समयमधून ५ मातीस जवाबर्माण .ससकावास समन्वयमपणास्त्र प्रयुत्तोबाईल . विनाम। १२(बारा) अपांग उपमान, रापासूत्र हामि १ बमोपपताल पठीसूत्र • सापतीसूब - मिरिचालचीपू । प्पिासूत्र । पासपसूम "पिपासून १ पुषभूमिपत्र ।। ५ (पषि) करपसन से- मानना . निधानसून ३भपत .म्पमारसूत्र चीर बीसपत्र । (ब)देव से~1 मामियानापत्र . महामिया प्रचनासूत्र । ममममममम । पिपिवित्र १ प्रोपपिपिम्प परमात्र ..(ए) पपपास्त्र -1 बसून . पापा मेवाविमसूत्र • मठिपरिशमा १ महाममात्सवसूत्र - सिमपुर • गोविनच ८ माघमापियूष । नतमबत्र भर , संसारसूत्र पण नालीदा। पोगोरमसूत्र मी प्रामाणिक माने । "पवार से पूर्व पर प्रायों की रोम रनिटि भयो अनचा मला और मरमा मिले पत्रएमाले. समग भारी ही मानते । और इनसे मिली जा प्रत्यक शिषको मैमी जोय मानवे ।मो मत पर रिणेष रिया ११(बारा)पमुगासमीरिये। , भूमिका ५ मिपाका पाणी पुषण रोपा पर हावामा समापी किमो अपना प्राय पसरे मत मारे हाथ में पाहो तो रस भन्म प्रममायापान समे मिप्यारे। सोकि जिसको करें माने को नही इसमे राम न मन से यार नही हो मम्वा । हो, असम माने भी मामी किमी मेनी ने माना हो तब हो पायो सम्मान पात ऐसा में प्राप नहीं है कि मिसको कोई मी या मास मामला हो। इसलिये वो बिम प्रत्यको मानता होना उस पिक बरस माम मा सीसिपे समम्म माता पाच मिटने दी ऐसे भी है स प को मानते हो मी समाज सेवा में माते १. पी रेत से मैन बोय अपने प्रायों को किया रस्त है। और इसरे महत्या को नदेन मुमाले मौरन पाते इमखिये कि उपमै पेसी र समय पान भरी पिया कोई भी इस चैमियों में से नहीं दे सकता ह ात को चोर देना है। समास में साइम मत हिरे बोग अपनिसको परम्प पर्मगुस्वा मानवेनम मि समाचार सौ मयुबास में रेखिने और पा समुहाम में मुमतमानी मत विष निता बोपल पे अपने मत कम मापुस्ता मानत है। इस मी रोष मगर सास में देखिये । पर इसके मागे परिक मत विषय में नि॥ बोम प्रापत वर्ष से पिम मनसा मे देखेमा रसको कप मी पम्पिायरोग निवाबग्रेप में कार रोते- बाबासा योगता भासतिर तापमान मोती पर माप समो पुस मोरेता सरसको प्रथम मिया मालगिदित होता है। 'भाकारमा किसी वि पर की और पापप्रार्थना परस्पर होती। पोम्पता"माती मिनिममे मो हो सो सेवा सीमा। 'मासक्ति जिस पर * साध सिम सम्बाप हो गयी समीप रस परमबोसमा बिना। तात्पर्य मिस शिपच्या रानोचरपरिमारसीप रस बन चोर पुरुमन्य। पत से मदुराम्दी मपुष्प होते कि नामि से विसमपमा मिते विशेष मा पर योग पोफि मामा मेरमन रिसम्पर में पानी मानिये असा मैं पाच दिया। पति अगर को प्रथम पुरी मेन रेशम ममें से बोनद्राण भर दोन माम मा अब मनुष्य प्राति की राति पये प्रचारासा सरोपना योग। इन मोमोरोप मशिन निदेशिक रेनन मण ता सम्पासम्म मनियर सौर सल प्रहण हा पसल स्पा मये पाने में समर्थ होलोंकि एक मनुभाव में पान म -
सत्यामका
विसरि मारे, कमरे में हम सपा मारमा यिानों समय से
पीवी इस प्रस्म को देशम पाया बोग अपना ही रिमपि
वापि धिमार बमा बबलोमा इसम पमिमा सममेरी इमवि में मपणे
परिमोपासमन्ता और अपना प्रमिशन मर सीसामपरता
को रेल विमा मो मम को मसल इसी मा पक्षपाठक
पर पाबाममा मेमा सब माया मुख्य बम्बमम।
पवमा सम्पपोमो प्रविमान पामामा अपनी से
पिल्लव और विरमानी।
इसापको
अममतिविस्तरेस बुदिमदरगिरोमणिपु ।
इति भूमिका
स्मान मापशम्मी पपपुर
माद्रपद एफपच संवत् १
(स्वामी) दयानन्दमरम्बनी
याभाथापचनदन्न मार मास भवन पागा, चयपुर सिटी (रामस्पान) •मो३म् . मवितानन्दरपराय नमो नमः अथ सत्यार्थप्रकाशः प्रथमसमुल्लास भोम् शयौ मित्र श परणः शो ममत्वय्यमा । शन इन्द्रो पास्पतिः शमो विपरमः ॥ नमा प्रभख नमस्ते पाया त्यमेय प्रत्यप प्रयोसि । स्वामेव प्रत्यर्व ग्राम पदिप्पामि स येदिप्यामि सस्य पदिप्यामि । व मामचतु सरकारमयतु भवतु मामपंतु प्रतारम् ॥ मो३म् शान्तिश्शान्तिरशान्तिः॥ १ ॥ मर्प-(भोस) पा मोझर पर परमेयर र सर्वोत्तम माम बाकि बोभीर म् वीर मर मिशन एक (बोम् ) ममुराब इमा, इस एक माम से परमेचरगतमाम भारी।से प्रमर से सिर अनि पार सिर । रमर पिगर्म और तबसादि । मभर से मारिन और पाशादिनामीपार और मकरसन ऐसा होवारिसमाधी में पराम मिा प्रिप्रयास सपनाम पामेला atta प्रम-परमेवर मिा भी पा शि भरिमाम लो हो। प्रभाषा एपिषी परि मूव इन्द्रादि पता और पसाप में गणपति मोचितमी वाम पानही ! उत्तर-2 पर पामामामी। मम-मेलदेवीभावासबामी मे मते दोपही। उचर-भापाय प्रमे में प्रमाण" प्रम-सब प्रसिर और शम भी है, इससे मैं रममाण करवा । उत्तर-चा परमेचा पसिर पर सरेको म मा पुजा माम परमेचारे मौलापही मानने !बर परमेम प्रमसिर चौर रससे इस मोई नहीं हो रससे रकम कोई मोसम इससे पापा र ।
२ सस्पार्यप्रकाश भगमनको वहि अपने इस मो में से पोस मी भरते है बैसे- 'उपस्थित परिस्यम्पानुपस्सित यायत इति बाधिवम्पाय" al किसी।बिये मोरमा मापाप भोगवामित्र और पबो रसोरममाठ मोबनविदा वहां ममममे रसमे परिमार बामन्य परिने स्पोकिया स्पलिट भाम पमीप माप पाई पोपमुपस्मित प्रर्षात् भमस परा की प्रति प्रम मारे। इसखिये सामपुर हरिमान नहीं पसारे पापा मोंकि भार न मिार आदि मामी को प्रसिब प्रमापसिर परमेवर और प्रभावयदि अपमित मात्र परिममा बोसम्म धौर अनुपमित देवारिसर में श्रम मवे। इसमें मी प्रमाया पुटिनहीं। जो पाप ऐसा बियम हो म प रम्रो बाबा बोगम से किसी ने किसी से ना कि 'हे मुलावं सैन्धपमानय मर्मत सम्पप को मा। सब रसको समय अपोत पर विचार मा भारी वकि सम्बर माम पो परासी पोरे और दूसरे बाबा बोली गमन सममोहोबो और मोबातोपोरेभाना अति। और बोमन समय में बार और भोजन-ममम में बोरेको होमस स्वामी ग्स परपोबरमा बिमिर पुनम समय में बाप और मोमममम मोरा प्रयोग पारसमविद नहीं है, ही वो स सममिको बायाची पा ग्मी आता । बोयको समिरा भारत अपने मामिला इससे तू मेरे पास मे पागा इससे ना सिदामा निगो बिसन्म भावमा रति पारसी पर प्रहायचीये । वो ऐसा ही हम भौर भाप सब बोयों को मापारममा मोपीये। प्रय मन्त्राः- १- भो म सम्मधट. में 1.. देवि भीम रेसे में भी पामेमम। प्रोमित्ववपरमपीपमुपाप्तीत । २॥ भोमित्त्वमिस तस्योपप्पाम्यानम् ॥३॥ मम्मामे ।। सदा पात्र मामनम्ति तपासि सर्वाधिपादम्ति । परियाती प्रामपंचम्ति सचे पद समय सीम्पोमित्येतत् ॥ ४॥ भोपविर मी म १९॥ प्रयासिवार सामग्रीपासमपोरपि । माम लनधीगम्य विधा पुराई परम । पतमि यदस्य मनुमापे मशापविम् हम्मे परे मावमपरे अझ शाबत.. मा ..सो १२५ ।।
प्रथमसमुहास सम्झा स विष्णु स खस्स शिषस्सोऽपरस्स परम' सराद । स इन्द्रस्त कामानिस्स चन्द्रमा । ७॥ माप समिफ्न।। इन्द्र मित्र यरुपममिमाधुरयो दिव्यस्स सुपर्यो गुरुत्मान् । एक सदिमा पाषा वंदन्त्यग्नि यम मौतरियानमाहु ॥ ८ ॥ प में। । म ॥ भूरसि भूमिरस्पादिविरसि बिमाया विश्वस्य भुवनस्प धु। प्रविधी यच्छ पृथिवीं दृया पृथिवी मा हिरासी ।। ६ ।। बाम १८॥ इन्द्रो महा रोदसी पप्रथम इन्द्र सूर्यमराचयत् । म्ने विश्वा भुवनानि येमिर इम्ने सानास हम् ॥१०॥ सामाप्रपा ।त्रिक । म प्राथाय नमो यस्य सर्वमिदं वगे। यो मुसा सर्वस्पेरो यस्मिन्स प्रविठितम् ।। ११ ।। प्रयसिमराम ससूम प्रमेयो इन प्रमाया लिखने में समर्प पीलियो ऐसे । प्रमायों में मोहारादि नामों से परमाएमा प्रार होता है पर बिल भाये । तब परमेपर का कोई मौकाम अपर्षक नहीं। मैसे पोक में परिणी मागि के पति पनि नाम होते हैं। इससे पर सिय किकनी गौधिक श्री अर्मिक और हीलामक्किमयों बाकी॥ 'मोद मावि पम साकोस (ना) 'भवतीस्योम् भाषा यमिव पापकलात् बम सम्यो पहत्वात प्राम" करने से (भार) अमराव होने से (म्) और कब से बड़ा होने से (प्रकारका नाम।। (मोमिने )(गो) मिसका नाम है और वो मी मामी होम उसी की रपासमा पानी पोग्बाप को मही॥ (मोमित्येत ) सबबादि पापों में परमेश्वरम अपर मोर निम नाम ( बोम्)कोमा मन सब मौयिक नाम (सबेरा )क्योंकि सब और पमोनुरागरूप सपना बिसथ सम और मान मते पौर मिसकी प्राप्ति की या को सम्म से सम्म नाम 'मोरम्॥ (म्पासिता ) यो सरको गिरा पारा एम से पुम्म सम्म घमाधिसरि मे बाम पोचा रस पाम्पस बावन्न परिवे॥५॥और समय होने से "प्रति जानसम्म होने से 'मनु" सरम पार से 'मसापति" और पामेपर्वान् होने से समापनमूब होने से 'मास चौर मिरम्तर पर होये से पामेल नाम मझ॥९॥ (मास विता ) बाप बनाने से 'प्रझा' सत्र मापये मे "विपण" २ सस्थाकाय । लोको राजाने से रुद्र" ममम और सबसपापों होने म 'शिय" ' सपमनुत मशरति विनश्यति वदत्तरम्। । "प स्वयं रामत स सद"२: पोऽपिरिपकान कापिटा प्रतयकर्ता स कामानिरीश्वर" ॥३(ग) बो सच बार अविनापी (स्वरम्) सर्व मयसप और (अनि ) प्रसव में सबसे भर पीर सभी प्राी इसरिये पामेबरम नाम "कामामि... (एड मि)ो एक पवितीय सल म बस्तु सामादि सप भाम है। 'दयुपु रामेषु पदार्येषु मपो विम्य" "योमनामि पनि पासनानि पूर्यानिकमासिवायस्प ससुपर पांगुरिमासगक्षमाम्" यो मातरिया वायुरिब सयान् स मावरिका' (विन)को महत्पानि रिम पानी में प्यास (पर्य) जिसके म पावन और एम. (परमार ) मिसभामा पर्वात् सस्स मार है (मावरिका) बोके समान समन्वय है इसलिये परमामा "दिव्य' 'सुपर्व" 'गममान" और 'भावरिया नामशेष नामों को बिसी(मिरमि) 'भवम्ति भूतानि यस्पा सा भूमि" मिसमें अब भूत पी होते है इससिपे सर बाम 'भूमि' है।रोप मामा म भागे ... (इन्द्रो मम ) इस मन में 'इन्द्र परमेवानाम परिवा ममावि ॥ (प्राचाय ) भावपय में समयर और इनियोती से परमेधाज्य में परमपद प.. इन्धविम्मागरेपैक को जाम सेन मामी के परमेधार धम्माल मोव और परिवाो मुल्म मर्म से परमेष तासायव निसाव, समपि कपि मुनिका बाल्पों से परमेर म माप देखने में व्यवासा प्राव भरपा पोष। पान “भोप पावोर परमामा बाम है और पनि भारि मामाँ से परमेवार में पत्रकार पर नियम- भरकट। इससे स्थानिया सिति प्रबंध प्रसस स्वापक सावर पति नापि रिमेक विहान पामा से परमेया मरो। और यह ऐसे प्रभवशि- वो बिराचायत विरामो भपिएम ॥१॥३॥।॥ पोषपूर्व माधम रखाभिरमायः ॥ २ ॥ ॥५॥ वेन वा अनन्त ।। ३ ।। मामिमपो पुरा॥४॥ १॥ समया पवादात्मक भाकय सम्भूत । भाकाम्यपस्यु । पामोरनि । मनराप' | अदम्य पृपिली । पूपिम्पा मोषधप । प्रोपधिम्पोभम् । भापत । रेक्स' पुस । सपा पुष्पोऽमरसमए । परी गम पोर ।।। पष प्रयमसमुशास' पचिरोमोपनिषद् मचा है। ऐसे प्रभागों में सिम् पुस २१, मामा पपु पनि अब भूमि मादि नाम घोषित पदामों होते।कि बहा र रापति रिति प्रबय प्रसत्र वा एप प्रारि पिरोपर मी सितेस पो. परमेबर भयपही होता परपति मावि पहारों से प्रपकी और परो मन में उपसि भारि प्यार सौ से पहो मिार भादि मामों से प मा'मा प्रमापन होने सप्तारी पदावों का प्रास होता है। मित art शापि विषयमा परमाप्मा और बहरापाप प्रपा मुमदुम और अल्पवादि पिरोपय रोपौ ९ गोषका प्रारदोता। ऐसा सर्पः ममममा पारिवाकि परमेश्वर सम्म भरय कमी नहीं होता । इसा विराट मादि नाम और धम्मावि पिरोषनी से बात् ग और बीनादि परामराव प्रना रवि परमेम प्रमहीं। भब मिस प्रकार विपारमादि नामों से परमेश्वर का प्राव होवा मकर पीचे शिममारे बायो- प्रय मोहाय-(8) पापक (दौसी) इस बात से लिम् मस्वप करने से मि" म सिब होता है। 'पो विविध नाम पराऽचर भगदापति प्रकारापति स विरद विविध प्रीत को प्रभावत् को प्रारमित मे इससे विषट्' बाम से परमेवर माणोता है। (पम् पति फवोः) (भप मणि बरगम) बात से 'पमिप विडोवाद। गतसपोर्या बाम गमन प्राप्तिमेदि, पूमन नाम सहार" । “योधति अभ्यतेऽगत्यतीति वा सोभ्यममि" बोबामसम्म सर्वत्र वापये प्राप्त होने और पाये बोम्पहै इसमे ग्स परमेवर र बाम 'अप्ति" है। (निय सराय) इस पा से मिल राम सिरता है। विरान्ति प्रविन सरियाकाणादीनि भूतामि पस्मिन् यो पाउकाशादिपु सर्वेषु भूतेषु मधिपः स विश्वभर" | मिसमें प्रास्तादि सब मूत प्रदेशमा बाबो इम्म व्यास दो मवितो इसखिपे ग्स परमेश्वर का पाम 'वि" । इत्यादि मामाभप्राय परमात्र हो।।। 'ज्योति रिफ्प तमो ये रियपमिस्पतरये शतपपेच प्रामणे" 'यो हिरएपाना स्पोदीनां हेमसा गर्म रत्पत्तिमिमित्तमधिकरवं स दिरफ्पगर्म" मिसमें सूमोदि बोक उत्पड हो मिसो माधार रममबो पापि बसम्म पापों का गर्म नाम शत्पत्ति और निसान इससे उस पामेवर काम 'दिरस्यगर्म है। इसमें पार मनाप्रमार:- रियगर्मः समवर्धवाणे भूतस्य भाव पतिरेप मासीत् । स दौपार पृथिवीं पामुतेमा करम देवाय दृषिषो विषेम || बाम 14 ..
सत्पामका (पाचव मारि स्मों में "हिरवार्म" से पामेभर होम प्रोताम (मा तिपावनपोः ) सण से पु" पप सिर होगा।( सिकम्) 'यो पाति घराघरगयरति पसिना पशिष्ठ स वायु" बोचराचर जगत का भरप बीवन और प्राप पर और सम पानी से पाया है इससे ग्स ईपरभ माम 'पायु' ।। ( बि पिता ) इस बार से 'तेजा" पर इससे वविध भने से बस् राम मिलता है। पाप समय और लारि वस्ती होय ने सपासप्से ग्स वर नाम 'तमस् दि नामा गमरमान से मार दी। (इस ऐव) इस भातु से भर पय सिद होगा। 'पई समर्पयाम् पति स सिर" वि विचरचीच बाप और अनन्त ऐव। इससे उस परमामा प्रमाम बर"। (रो भासपा) इस बात से 'प्रविति" और हमसे दित से भारि सम सिर होता है। 'न विपते विनायो पस्प सोऽपमदिति अदितिरेव मादित्य' निसम विनाय मीमो रसोईघर की 'आविस्य" कहा। (भा भवनोपपे) 'प्र" पूर्वक इस बात से "म" और इससे दिवस से प्राप सिर होता है। "य' मारतया परावरस्प माटो प्यवहार सानाति स प्रम प्रब एष प्राप" बो निर्मात हानयुष मन पराउनपर मयामो पपावत् सामना है इससे बरसनाम प्रार" । इमानि मामा मभर स एखीव से एक मात्रा से तीन । पहायात किसे होमम्बबामा मी पोहार से जाने जाते है। बो (ो मित्रा)स मन्त्र में मित्रादि नाममी परमेन है। बाकि पति पागा पासमा रहीमवी। म मोमो गुर कर्म सम्पर और सब साम महारों में पप से अधिक। जसमें मी बो मात्पम्त प्रेसको परमेवर मते रेसिस मेमानो और परोपाप हाँ हो उससे अधिक लाभ हो ससा से पामरसल बाम पा समसामय और मार मनमा गुमे सब किसी पार्थ बाप रे बाबो पहरा सम्म हैरत गुप कर्म समाव मी सच होवे |सविरे मनुष्यों को बोम्म रमेवरही पीलुधि मना और पासमा रस मिकी कमी। i ममा निस, महार नामक पूर्व महाब पिसरेल रामपनि मिटर मनुप पीर बाब माधारण मधुम्मा देनी पामेवरहीम सिरे उसी की सुति शर्मा और रासम्म मोहमसे मिडकी और से म भगको मा पोपइसम्र विशेष विर मुधि और पातमा महिमाबाबा। •पो-रित गप्प । हरिन पर *जरिव 'भप"..
प्रपमसमुहास प्रभ-मिप्रविबामा से सच मौत इन्द्रारियों के मसिद प्रेसले से सलीमप्रापमा परिने । उ०—पहा रमका प्राय मला बोम्ब नहीं बोधियो मनुम्प पिसी मिकीही मदन रात्रु और किमी से सामान भी देखने में आता है। इससे मुम्पा में मापारि प्राय नहीं हो समय मिसा परमेवर सब पर निबित् मित्र न किसी रानु और किसी से गगसीन है इससे मिमी बीम इस प्रमरममा यही से सस्ता । इसपिरे पामामा म पर बा होता है। गौष भर्ष म मिरि सम से मापारि ममुप्पों का प्राय होता है। ( बिमिरा सोने)इस बात से प्रोवारिक 'क" पप होने से मित्र सरसिरोवार। 'मधति सिमति स्निपते पाम मिम जो सबसे स्नेह भो और सबको प्राति कमाने योगी इससे बस परमेवाप्रमाम 'मि"। (समरामाषा) इन प्याओं से रयादि मन् सा होने से "परम सम्प सिर होता है। "प सर्वान् शिरान मुमुत्रम् धर्मास्मनो प्रयोस्वपमा य शिष्टैमुमुधुमिधर्मात्ममिनियते यये यास पवा' परमपरमामयोगी शिान, सकि की ना मोबाचे मुख और भामाची म स्वीकार वा समयमो हि ममा मोर पाल्मानी से पाप किया जाता रघर पण" ।अपळ पक्षणो नाम पर भट" निधि परमेन स से मेन इसीखिये रसम नाम 'परुम। (गतिमापस पातु से प प्रपथ बनने से भी सम्प सिर रोता और अल्प" पपक (मार मामे ) इस भाव से कमिए' प्राय होने मे मा समर सिर होता है। पोनि स्वामिनो म्यायाधीयान मिमीत माम्यान गेति मोऽर्ममा हो म पाप हा मनुनौका माप और पाप तपा पुल कामे गायों को पाप पोर पुरुपयोग पबाबत सामपिमको इसी मे उस परमेबर माम भर्पमा। (इदि परम) इस बात से रन् प्रताप करने से ए' सर मिना होता है। परमवि परमेशप्वाम् भवनि स RT परमेतार" वो अभिप ऐबक इसी प उस परमात्मा काम ' '' (पा समययतु से रति पमन भारतमा मोप पर सुपगम सहस्पति' राप मिय होता है। 'यो पहतामाका शादीमा पति' म्मामी पालयितामहस्पति जोपरी से पीड़ा और मो माध्यापि मम स्वामी म गम पामेबामपाम 'परस्पति". (रिपाठी) इस पातु से "" प्रपप र मिनु" बिन मा। परिम्पाप्पादिम अगदस विभा' सौर प्रारूप मगर मसापक होने से परमामा मनाम 'विष्णु । "पमहान् झम' पराममो पस्य स हराम' पमान्य परम पुका होणे पेपरमामा बनाम राम - सपार्थमा को परमात्मा (मामा) महापरकम (मि) सबभन् मपिरोसी (यम् ) मुनाका (पा) सर्वोच्म, द(पर) मुमसम्प, परबमा मापापीय प (सम्) पुनमचरक पर(पत्रा) को समा ऐवर्षकम् (सारेगाव परिस्पति) सरका भाषा (प) विमान (सिनाको पापक परमेवार या (1) मारामपावभरप ( मनु हो। (कमो समये नमोट)()लाओं से प्रम कम सिद होगा। सरपर रािममान सब से पा प्रनम्सवात परमामा गस प्रमको दम नमस्मर मरे परमेशा ! (मेर मसि)भापती मन्तबोमिम्मले प्रवास (अमेरिनामि) में भाप ही माझा ताकि माप मप बमा म मास दो सबको मिल होमस, ( परिम्पामि ) को भाप में पल्स बवार्थ भाला। ग्सी मैं मरने उपदेश पर भागय मी बरपा (पल्प परिणामि ) पप बोए मन मार और समय तमामा)सो पाप मेरा मिरे (सभा) सो पाप मुमबह सत्तापकीरता कोषिष कविससे भापती माया में मेसी एनिलिरम सिह कमी महो । कि को भाप की भावारी बोससे विलो मर्म है। (भा भामण पाण) गपूसरी पार पाठ अभिनि।से काम शित प्रति पवित्व प्रम गदगद पम दो पारिणय मेयोनी मोबापेम सिरहा। ऐसे होगा पाप मेरी भरतमो प्रचार गर्म मे सुधिषित और प्रथम से प्रया सरास ऐसी म अप पर पीजिये में भापत्रमा अपार माय । (मोर सान्तिा शान्ति पन्त ) इस में तौर पर शामिपसमा प्रयोगविस्तार अर्थात् इस संसार में पत्र-पक 'भाभ्यारिमफ" बोबारमा और पविध राग, मग म मा पादादिसरा माधिमौखिो और सपरि से प्रक्ष वा सोसरा "माधिषिक प्रात् हो अतिकी प्रतिमात पति पणा मा और इन्द्रियाति में होता है। तीन प्रमोसे मालबोमा को र सोमपारपरक माँ में सदा च रविकि आपकी मलावषम सब संसार सपायको प्रवर्मिक प्रसभी को प्रताप रामापरि भाप सर्व पदी पा से सब जीवमें प्रति मिले 4 मिससे समीप धर्म सभाभव और पधर्म को भर परमानको यही और से पन। 'सूर्ण पारमा गतस्तस्युपश्य" इस पर (AM) से बो जगत् पाम बीचव और पम भाव को परिवे? ngn" याची बातम पस प्रमिलो पानि । म सभामा होने और यस समोसे परमेधा का नाम 'सर्प". - प्रथम्ममुहास (भन सावमयमये) इस बात से भामा एम सिदवाद। योस्तति म्पाप्नोवि स भास्मा' बो सब बागापिकात में निम्तर मापकोहा।। "परमासापात्मा घप भारमम्पो बीवेम्प सम्मेम्प परोविसम्मः स परमारमा बोसमीपमापिसे महामोरगावमति तय भास्त से भी प्रति पम और सपनारासमन्तांनी मामाइसईबर मनाम 'परमारमा"t सामग्रमा नाम है। 'यभिपरपु समपु परम' मेटस परमपर" बोचरी प्रांत समयों में समर्म, विसो पुल्प कोई मी न हो रसन नाम 'परमेश्वर है। (इन् भविष पिमर्मविमोचने) समानुओं से 'सपिता राम सिब होता है। अमिपय माणिगर्मविमोचन योत्पादनम् । पसरावर मात् मुनोति सूत वोत्पादयवि स सविता परमेसर बो सब समान की सम्पतिमा इसरिये परमेवाभावाम 'सविता"। (सिमविभिपापामगारपुवितृतिमोहमवत्वयन्तिपनि ) इस पापु से 'देव' सम सिर होता है। (ग) बो पर बपत् को औषा मामे (विधिगोपा)वामिफी मे बिये की इचाक (हार) पारे साधनोपमापनों माता (पुलि) सास्वम सबम प्रसव (राति) माता के मोब (मोर) पाप भावसम्म और दूसरों को पानाहारा (मप) मरेग्मती मनाने हमरा (सप) पपके सवा राति और प्रथम समय (अन्ति) प्रममा बोम्ब और (पति) बस्वास है इसलिये गम परमेवा मनाम है। मा 'यो दीपति क्रीयति स देव" बो पपये लस में मान से भाप प्रेम को प्राय किसी साहब विमा पर सबब स्वभाव से सब बात को बताना सब मामास पापा। विभिपीपते स देव बो सपपीतये मा सम्परेच प्रोव मिस मी बीत सो 'प्पचाारयति स ऐप" बोन्साय और भावावम्म मारोममायने हारा और पोध 'यमरापरजगत्पोत्पति मो सब मायक 'यस्तूयत स देव" बो पब म्युनों को सा बोन्म और मिनापोम्ब हो “पो मोदयवि पप" को स्वयं भावस्वम्म और परोको भावरमाता विसको समेत मोबसे "पो मापति सब" को साइति योगडित भीर रूपा को हर्षित र भौर पुगे मे प्रयोगवा "पलापपविसदेब"बो प्रहर समय सम्म में पप बागवता "प कामपठे काम्पते पास देव" बिसरे सब पस आम और मिस प्राधिको सामना पच णिमते मग 'यो गप्पति गम्पते वा सब"बो पर मसम्म और अपये बोनस रस परमेपरसबाम 'देव। (विमाचारमे ) इस पर "और सिर होता है। यस रुपति सम्पाप्रपाकापयति स परो स्गवीवर" को अपनी प्राप्ति सबसमापदनाम इससे उस परमेवर बाम पर है।
१० सस्याप्रकार ॥ । (प्रथ विस्तारे ) इस पातु से परियो म सिर वा । "य" प्रयत समाविम्वसाति स पृधिषी" को सब मिलव बात् विस्तार भने ant इसमिरे उस परमेश्वरम बाम 'पूपिषी't: (बर मारने ) म पातु मे 'प" शप सिर होता है। मसति मातयति पान संपातयति । सम्यक परमारवादीन तह प्रक्ष मलम् हो दुरीमान और भमण मा परमारों प्रयोग मोगका क्लिोप प्रतापपरपारमा 'ज' पावा। (मर सौ) इस बातु से भाम र सिव शेता है।" सर्यत' सर्व जगत् प्रफाशयति म भाकार" यो सब और पात्म मायकइसलिपे उस परम्ममा प्रमाम 'माकाश"t। (मद मपये)स मे प्रथम सिर होगा। प्रपतति च भूतानि समावन्न तम्पते ॥१॥ प्रहमप्रमामयमानम् । महमपादोहमयावोहमपाद ॥२॥ हैसि स्पषि प्रधा" भत्ता घराघरमसात् । दातरम ।पा।।। पामासमुमित शारीरिक सूत्र।बो सबको मौवर रस या सबसे प्रसव का बोम्म गावर अपत्यप्राय ममे पाना। इस पर 'अम 'भभाव" और मत्ता नम्म है भार बो इनमें तीन बार पाठ ! सो पावरबिसे गूपर राम मि उत्पादोरे रसी में पते मोर माहोगा।से परमेधा बीच में सम या की stu (क्स मियामे ) इस बात से 4g राम सिर मारे। 'पसम्ति भूतानि यभिप्रथमाय सर्वेषु भूतपु वसति स पसुरीर" जिसमें सब बामपति भूत और वो सच में प्राप्त कर रहा है इसलिये सम परमेवानाम 'पसु"। (रिर मा बिमाच) इस से R 0" महोने से '" राम पित है। 'यो रोदयत्पम्पापकारियां मनान् स म" मो महारो कोखाता है इससे पप्त परमेघा बाम 'रद्र"। पम्मानसा म्यापति तदावा परति यज्ञाचा बदति तत् फर्मया करोति पत् कर्मणा परोति समिसम्पयत । या पानावर बिसम्म मम से पान करवा गमको पापोबल मिमो एपी में पोता समर्ममा चिसो कम से पता उसी को पास होता है। इससे ना सिर [मा किमो बार बेता कर्म करवा पाता बब पाकर्म प्रोपोबार रबारस्पी नाम से पुस्लम प्रापाले उप रोवे और इसी प्रमा पर समको सातासधि पामेवा म 'हन्द्र"। ।
प्रयमसमुनास मापो माय इति प्रोका भापो पे मसनद । वापरस्यायनं पूर्व म माययण' स्सव' । ममु म सो ... पर और बायोमाम नारा भवन प्रात् निधसम्म । मिसम्म इसलिये सपबीपी में पापक परमामा मनाम नापपस" है। (चरि माह) इस बात से 'चन्द्र" राग सिर होगा। 'यश्यम्दति धम्मपति पास चन्द्र" यो भावनस्सस्स और सर को पावर देवेवासा, इससिपे भर का नाम 'चन्द्र" है। (मगि पासर्पक) बात से 'मोरख इस सूट से 'मार राम सिर हो।"पो मावि महापठिपा मंगल रो पाप मामलस और सब लोगों मप्रमरप है इसडिपे उस परमेमरममाम 'मंगल"। (समयमये ) इस बात से पुष शम सिर होता है। 'यो दुभ्यत बापयतिमा स दुध"मो लम् बोमलस और सबबी बोष कर कारबाहै इसभिपे रख परमेवर प्रश्रम "दुष"। रपति रामाभरिपा ।। (चिर परिमाये ) इस पातु से 'एक पग सिख मा"' शुपति शोषयति पास शुक" को बसम्म पनि और विस संप से बोर भी पवित्र रोमावा है, इसपिपेग माम 'यह"t. (पर पविमाययो ) प पातु से गर्मम् सम्पर उपपर होने से 'मेमर' पर सिर मा । “य रामेपरवि स नपर" बोसम में साब से मस पार है इससे इस परमेशगमनाम 'मनमर"१॥ (ए भागे ) इस बात से " राग सिद होता है। "पो गति परिस्पति सुशम्, रा.पवि स्पायति पा यदुरीकर" बो एसपलस रिसो सम्म में दूसरा परार्य संमुखमबी बोहराको बोरने और अन्य को सारा इस परमेश्वर वाम 'ग"।। (चित विष रोपापनप ) इस पातु से "न" शम सिरदवा है। ' यसपति चिकिस्सति पा सरेरीबर" बो सब बम्पर नियसमा पप रोगी से तहत और समुभी मुति प्रमप में सब रोगी से सवा सहिरे रस पामाध्मा का नाम केतु" (सरापातिकमपरा) र पातु से ब" गण सिर होता है। 'पपो ये विष्णु + पर मामषमाप पर है। "पो पति विझिरिस्पते या स पर" को सब अपत् के पानी को माता पौर पपिापमपम और मशार परि मुनिपामसपा और दोन इसमे परमाएमा प्रचाम 'प" सकिरनापst|| (रामानको मापाने मे)बा होता पण सिर मा है। "यो नरोति सरोवा' बोबोरों में देने योग्य पायाभपात्य और मए कमरे मामाको इससे रस चिरसवाम 'रोता"t! +रयादि... पतपरको राम 114.1 1 ॥
सस्यार्पप्रक (पप गयो) इमसे 'न्यु" यम सिड रोचा है। "म' समिम् परावरं जगदममाति पम्पुपरश्मिनां सुखाय सहापो या गर्त स पम्पु" विषये अपने में सब पोयोमरीको नियमों से करो और सहोर के समान साबो सौ से अपनी परिषि परम परम मस । बैसे म्यता माापी महासरी दोवा से परमेला मी प्रपिम्मारि पोकी पारष पुम देवे से 'पन्धु मं॥ (पा राण) इस बात से पि" म सिल पारे। 'यपाति सयान् स पिता" जो सपनाक पिता अपने तानों पर समापार होम सति पहवास ही परमेम प्रोगको सति पवा इससे रस नाम "पिठा ॥ प' पितृषां पिता स पितामह" बो विधी मी फ्लिम इससे उस परमे घर का नाम 'पितामह। प पितामाहामा पिता स प्रपिवामद"मो पिताधी पितरोभ पिवाससे परमेश्वरम "प्रपितामह "यो मिमीते मानयति सर्माशीपान् स माता" पूर्णा बममा भपये सन्तागम और पति पपी परमेम मी सम मोषी की मातीतापम परमेश्वर बाम 'माता" (पर गतिमायोः) भारत इस पा से भाग सिद होगा। 'म प्राधार प्रापयति सर्या विचापोधपति समाचार्य पर" मो सम प्राधाम पवमहाप और मज विमी की पातिवोके सबनिसमादाइससे परमेवर मनाम 'प्राधा"॥ (मने) इस से "गुरु" राम मा है। 'यो बान् प्रदान रापास्युपदिशति स गुरु ॥ स पूर्णपामपि गुर कालेमानबन्धेवात मोम म् प्रमाधिन ए २. पापोपण।बो समर्मविप्रपा सा पिपुलही भरपदेश मम शीको भारि में बानि पहु, मादिना बक्षिा और सरियाली सभी पुरमौर सिम मास कमीमही रोवाइसकिनेरस परमेयानमम गुरु"।। ( पतिपयमा बसी मासुभाष ) व पानी से 'पबवा है। पोऽति पपि प्रति सर्वाम् महत्पादीर पदार्यान् प्रधिपति समाधिपा काचिन सपत सोऽ" भो सब मावि प्रमाणात भूप परमाडौको बबालोव मिखाता अरोरसायबारीसम्म चम्म काप्री स्कमा बाम महीण श्यले सनम पाम भयो। (सी) बानो से 'प्रम" म मर रोष है। मोऽमि भगनिर्माणेम पति पईयति स धमा" को सन्दकप मे भाइसब समेतमाम प्रसा॥ 'सस्प पानमनम् प्रम" सिरीयोपनिन। 'सन्तीति सम्तस्तपु सस्म साधु सत्सत्पम् । पखामावि पयामर अपरामझामम् ।
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मयमसमुद्रासः सा सरसती बिस गिविष पिार प्रोत् समर्थ सम्बन्ध प्रयोगमा बाम वषाव हो इससे उस पामेवर मनाम 'सरसाती है। 'सर्वा सहयो बिचम्ते पसिन् स सर्वशक्तिमानीम्पर" को अपने कार्य करने में किसी मम्मी सापाचा महीनता अपनेतीसामर्ष से अपने सब काम पो भइसलिये उस परमामा माम सर्वशक्तिमाम्। (बीन् पपये) इस पातु से वाप' राम सिरोताहै। 'प्रमापरर्य परीक्षवं पाप" पान म्पनों पर समापनमुकि मानो। 'पमपात पहिल्याचरम्पाप" बोत्सवादि समायों की परीक्षा से सत्य २ पिरोया पपाठरवि धर्मस पासपोप पाप' साता है। म्पा कशीसमस्प सम्पायकारीपर" विसनप प्रात् परमावशी धर्म मने होमस्कमावससे ग्रामपबाम म्यायकारी"। (पप दामाविरवरिसादाने) पातु से "प" राम सिर । 'वपत वदाति मानाति गमति रसति हिनस्ति यया सा क्या पाही दपा विपते पस्प स दयाह' परमेम्बर" बो अम्प प राम मयसम विकी को बाप सप पनी सारे और पुणे पायोम्प पर देने बास्से पस्मामा भ पाम 'दया है। 'आपो वो शाम्यामित सा दिवा शीत पा सैप क्या मादेवम्, न पियत त वित्तीयशरमावो पमिस्तपातम्" भो 'सतीयविज्य तीफ्लगवववव ग्राम' दोपहोवा परी से पुरोगपबियप व अपना इससे बोलि समाती से मनुबन ममाताप चूमा ममुप्प होता है, वितीय से मनुब मे मित बातिपणा पाणयारि, साव भात् सरीर में से पांच माफ कब प्रावि मरी का मेसे इसरे स्मातीवर मिठीच भर प अपये प्राप्मा में तरमी से रविव एक परमेमोसे परमात्मा अमाम भावत'। 'गएपन्त पं है गुसा वा पैर्गएपम्ति त गुमा पो गुणम्यो निर्मात स निर्गुण मर मितये सब रब म स रस सो ममापि मारे गुष पति पत्पश्वा रा प और भरिदिन्थेत औपके गुन मसे गोपी इसमें 'प्रशणमस्परामरूपमम्पयम्' मावि विपदा म प्रमाप । यो राम सरी समापि गुप oिहै इससे फामामा म सम्म “निगुण है। “यो गुखेसा पत्त स सगुप" मो समसब सबमुख पविश्वा प्रकम्त पयपि गुपी से पुरसहिये परमेममाम सगुण" । से प्रविधी पानि गुणों से "सगुव" और इमर गुपी से शक्ति होने मे "निगु है। ये गा चौर गौर के गुबग से एक होये 1 परमेय निर और समावि गुहा में पारित होने सपुषामात पेसाई जम्मेप स सत्यापप्रकार और मम्मी गार पापमानमपि पामेममपम "नियकार ॥ (मम्मतिलिप) इस पातु से परिसमापौर लिए उपसर्ग बोम से निरसन प्रम सिब।"भवन म्पक्तिसंप उकाम इन्द्रिय प्राप्तिमेयमापो नि मगभूत समिजन को मचियो भात मोपमा मना और मुवि इन्द्रियाल्लिों के पब से प्रससे ईरानाम 'निरशम"। (मब संस्था इस बात से 'म" मशिख और इसमो ta" मा "पति" प रस से परे" और "परपति मसिब है। ये प्राकस्पादयोगमा मोवास गरमन्ते संध्यापात तेपामीश सामी पति पालको पासमाविमा बम सम बीच मापात पानीमा हामी मा पावन अपाराम पर मनाम 'ग" 'गलपति । पो किमीपे सविस्लर" बो संसार मषिमता इस रस समेन्म प्रमाम "विश्यतर" ॥ 'प' मोडफरियम्यवाारे सलमपेक्षेप विराति सष्टम परमेरो सम पगारों में नाम पर प्यास भापार होने मी किसीमार मारेल बहीमाता इससे परमेयाम हटस् । विषये देव" सपने ही "देवी मरे भी। परमेवारिसीम बामसे-'प्रम षिविरीम्यरमेति जब बरपबिशेषरोप तप न चितिकरण पर 'रेखी" सस समग्रम "देवी'।। (सपी) इस बात से 'कि राम पनन है। य सर्व भगत् का सफ्नोति सकि" को पत्र पाण्याने में समर्थ है, इसलिये पामेवा काम 'शकि". (गिम् सेप्रयम् ) इस पातु स " म सिरोवार।" भीयत मेम्पत सयेश माता पिनियोंमिमि स भीरम्पर" सिम सेक्स मनमा गि गोपीनमम रम परमामा कामाम "श्री | (समायो।) इस पातु मे मी' मदिव। यो मपपति पस्यप वियति भयपर गरबा परेपयोगिमिस पो सस्पत स ममी सर्पमिपेभ्यः" बो भरपराच भत्कने पति जोन पर पाता, असे प्रवेश प्रसिम पोर पर, पुम्म र भूग गिरी पास रक र मच्मि प्रथप सूमोदि Eि बमा, तप समस्या मागोमामा योमा मोरिया मिश्र पिन् पोपियोसपण पर्वाद देखने योग्मी सधे रस पामेन भ माम मामी ॥ (म तो) पा से "मा" रपये मनु और मल होने से "माralम भिरखो। “सरो पिपिन बिपद परम चितो १५ - मयमसमुत्रासः सा सग्म्पती विस विविध विजय प्रात् म मर्ष सम्म प्रयोगमा शाम पप रेप रस पामेवर पनाम 'सरसाती ॥ सर्वा एक्कयो विचम्त पसिन् स सबक्रिमामीपर " बो अपमे अर्पभो में किसी मम्मको साप्ताचाहीमा प्रपती सामन से अपने पत्र म पो पता है इसधि इस परमाणकामाम सर्वशक्तिमान् ।। (बीम प्रापये) इस बात से 'पाप' शम सिरोवर। "प्रमार परीच म्पाय" पापम म्यापसूत्रों पर पालाममुभि मापको। 'पक्षपाव परिस्पायर म्पाय"दो समरि प्रमायों की परीक्षा मे समर सिखो क्या पापातरहित बर्मम अनपीपमा माता है। "म्या का शीतमस्प स म्यायफारीबर" बिसम्पप प्रात् पापावरित धर्म मोहीम समान इसस रसम प्रमाम न्यायकारी"। (एप बामनिरपरिमाराण) इस पातु मे पण" राम सिह रोया है। पपत पवाति नाति गप्पति रमठि हिनस्ति पया सा पपा पही पपा विपत यस्य स पातु परमेम्पर" यो भमन का पा सपासम्म पनियों को मामले का सम्मों की रक्षा करने और पुणे पोप एम वे बागमसे पामामा प्रम 'पपासु"॥ 'पोर्मापो शाम्पामित साहिता शीत पा सेब तपय माविम्, न पिपत्त देत विवीयसरमाको पमिस्तवम् भात् 'समतीयविख्या वीपसगवसल्या मोबाशी से पुरुहोपपरियप हौस अपवा व इससे बो ररित समता से मनुमा समातीप दूसरा मगुण होता है, किन्तीय * मनुब से मिल जातिमा पापयारि, लपत मांत गौर में से चार माह र मावि भाबी का सबसे एमरे कसम्ताव पर निस्ताव भिमा पाने प्रात्मा में तर मानों से रमित एक परमेताइससे परमात्मा नाम मत है। 'गयपाते पे गुण वा पर्गरूपम्ति त गुणा यो गुणेम्पो निर्गत म मिगुण मिर" मित सव रब सम म रमा पापारिक गुप अरिया पत्राता राग और परिवार को गुम उनसे पनी इसमें प्राणमस्पर्शमरूपमम्पपम् । इपि परिपती कम प्रमाची। यो गम सरी म्मादि गुरु रशिपससे पामामा म बाम “निगुग है। 'यो गुस सह पत्तत स सगुप" को सब सम सबमुख पनि अम्त महानि मे पुची सहिचे पामेलममाम सगुण" पैसे प्रथिको पारि गुषों से 'भगुप" और इधर गुणों से रहित होने मे निगुर। वैसे भाव मौर और गुरा पुष होने स पामेम 'मि' पर सवादि गुलामीत होने 'पाप' है । प्रर्वात् पेसा को पिप ।।
सत्यार्थप्रकाश मी पायी है जो स्लम और मिगुगवा से भो। मेवे , गुगोस प्रपरहोमे से या परा विगु और अपने गुणों से पारित होने से सब की बार गुणों से पास होने से गौर विगुमर पारि भएवं गुषो से सरित होने पे माम। ऐसे ही पामेम में मी ममममा चाहिये। "मपातु निपम्सु बीम पस्म सोभ्यमन्तर्यामी' यो सब पायो कर माविम स्मात्मानमा सबमियम नसा इसलिये गत पामेवर माम अन्तर्यामी" है। "यो धर्म राजते स धर्मराज बोधर्म प्रापमान र मर्म में रहिव धर्म होमिने गम परमेममाम धमराव"। (पम् परमे ) इस से 'पम शमसिब होता है। 'प' सर्षाम् माणिनो निपपति स यम बोस प्राधिो मारने कोमा मता और सबसपायों से प्रात्य इसलिये परमामा आमाम 'यम"। (मा समताम) पातु मे "मा' इससे मनुप होने से "मर सिबोगी। मग सबलेव सेवन वा विपते यस्य स भगषाम्' को उमप पच्न से पुकर माने बोबो साबि रस रिम नाम 'भगवाम् || (मन भाये) पातु से 'मा' सम पता है। यो मन्यत स मनु" का मनु बर्मा विमान और भाषचे बोम्बो इमलिये रस ईश्वर (पाबमपालो ) इस मनु से ' पुसमधि। 'य साम्याप्स्या पराम्परे मात् प्रजाति पूरपति पास पुरुप" जो मर जमा में पूर्व हो या तिने गत परमेश्वर पाम "पुरुष ॥ (मन थरबपोपच्चो) मि इस पार से पिER" सम सिर वा है। मो विश्व विमति धरवि पुष्णाति षा म विशम्भरो मगीर" जो सम्म पारव र पोपबमबी इसपिये जम परमेश्वर माम "पियम्भर है। (सन्यने) इस पान से कर सम बारे। "कमयति संम्मति सार पदार्यान् स काम" मग मम पाप और बाबा मेयरवा रस पामेवर बनाम बास"॥ ( शिप रिब) इस पातु से 'गम होता है। शिप्पत स Tोपरि और समय स! इसलिये उस परममा अपाम "शेप'१॥ (अप्पासो) इस पातु म " ग्रम सिरहा। “य सन् धर्मस्मम अपोति सधैर्धर्माम्मभिमप्यत माविपरित स प्राम। जोमसोमसम्म गियासप परमानीको पक्ष वा मत पाप्मात्री मेमस बोम्ब पति से रवि इसरिये उस परमात्मा म बाम "माप्त है।
प्रयमसमुझास (सम्मप) 'गम् पूर्वकप पातु मे 'UR" सम सिम्य है। "यशस्पाय सुम् करोति स पार" वासाय भाव मुखमा भगम्य पसे रस ईभरपनाम 'शकर"है। मा म पूर्वक रे' म से "महादेव शम सिरसा। 'यो माय म स महाम"जो महान् देवोभव प्रति विद्वानमामि भूरि पाती इसरिये रस माध्मा प्रपाम 'भवादय" है॥ (पान्वये वो इस बात मे मिप' राम सिद्ध होता है । “य' पृमति मीयात वात प्रिय" यो सब पर्मामाओं मुमुक्षुओं और शिश मता पर सपने मममा पोग्बो इसपिये रसमा प्रम 'मिय" ॥ (म पचायाम् ) 'स्" इस बात स स्वम्भू राम सिर होता है। 'य' सम्पमपति स सम्पमूरीश्वर" बोयप समाप किसी एमी रपट यही शुभाइमसे उस परमात्मा मनाम 'सपम्मू" ।। (असो) इस बानुस बपि राम मिnt। 'पकौति रापयति सपा पिपा स कपिरीसर' बोक्या सप पिचों पोय पोर पेचा। इसपिये रप परम्पर काम माम "कपि"। (मिनु कम्पाव) इस तु "गि सम्म सिर रो। "मनुख मधिरणनम्' इसस शिशु पातु मामा माता गोमयाबस्वम और अपनसममेदारासहि रस पामेधा प्रनाम “शिप" से सौ बाम परमेशरबिने। परन्तु इन भित्र परमामासम्म काम लकिपरमेधारे प्रमात पुषर्म समाव से समप्रमात बाम मी में से प्रत्येक गुष कर्म भोर समाज एक माम है। इससे वे मेरे लिये बाम समुद्र सामने मिनुष्ट नकि पेडापि गरी में परमामा मत गुपप्र स्वभाव मा किस पायेगापे से पेपरो सम्मान प्रान्त पापा ममम भी सभी को पारो पाव हैजोबारियों पर है। म-से मान पर सोमादि मण और अन्त म माम्बावरण प्रवे। मापसे समीम रिममिा ! २०-ऐसा हममा पोय पी वोकियो प्री मप्प पर पन्त में माप प्रेग्न तो रसके प्रेम प्रादि मय वा अन्त में बोर पोप्य रापमान रोण पहिरे 'भगवाधार शिणामापत् फर्शनातितरति" पति पाप (श ) है। इसममियाय किमोसार पापारिव सव पोखर म्याग्मी प्रसाद सत्र और सा पसर मा महापर माता। प्रप पारम्भ से 4. ममातिरस सम्प्रभात मापारकिदी मार मग भोमार सिममा रसिप महान मामिलाप- सध्यामबाट पापनपानि कर्माविवानि सेषितम्पामि नो विधि। निरोपोगविरुपी हे सतायो। बो “ममा अमिमीप बात पर्ममुखको मामे भने पोती भवर्मनी। इसशिष बो भाषिक प्रीम "श्रीमदेवाय ममा मणियमाभ्यो नमा पापा ममा" ty परसापिसाबा पमा 'मते नमः 'पूपि कमा "पसम्म कमा' भेलायनमा शिणय नमः 'सरस्व पमा प्रयास गम' इम्माधि सपने में भावे है इसको इरिमा खोप से और शामी से पिम्प होने से मिप्यारीसम क्योकि और अपियाँ प्रन्या में भी पैसा माग परब रेखने में होता और भापकों में मोहम्म" श्रम वो रेखने में मारेको- "मय सम्पाउणसमम्" अरेस्पप गप्पोऽधिकायः प्रयुम्पत ।। पावभावमामी प्रपावो धर्ममियासा अधेस्यामवर्षे पझम्पयनामन्तरम् । पर मामला 'प्रधावो धर्म म्पास्यास्यामः अपति धर्मकपनामम धर्ममा विशषसम्पास्यास्याम' क्सिान 'प्रय पोगानुशासमम्" अपेत्ययमभिकायर्या बोल 'भय पिपिपास्पतमित्तिरत्वम्तपुल्पामासारिक विपप- भागानन्तर विविधनुषात्पन्वनिमय प्रपता काम, पासोन्ययाता॥ 'भपातो मस्पिासा" यातुएपसाधनसम्पत्पमस्तप्रक्रियास्पम । पर बात की। "मोमिप्यतातरमुर्गीथमुपासीत बापाचोष पनिपर मो. "भोमिस्पेशवपरमिर सर्व वस्पोपप्पाम्यनम् । पर माया पविपरम्भ गरे । ऐसेच परि मुनिया में "मोम्" और 'अप' म बिसेदी (अग्नि इद मिल पत्रिपमा परिपम्वि.) यम चासोबादि में मिले। मापपयम पमा मरियमहामारी। और बोरिक योग और के पारम्म में महरि मोर चिकने और पाने पर पौराषिक और माँ की मिमा मपमा मौर। पारिजात्रो मेरि' मार भारिमबीपही। इसस्बेि मोर पप' मी प्रभम सिसम्म चहिये। विमानमा यि में भिन्न इप्रोपे मिसिविल गापमा । इति भीमदयानम्बसरमतीसामिले सस्थार्थप्रकाश पुमापापिभूपित परनामपिपप प्रथम समुखास सम्पूषा :
अथ द्वितीयसमुल्लासारम्भ प्रय शिक्षा प्रवश्याम मात्मान् पितृमानापार्यवान् पुरुपा पद ॥ पापप प्रामपचनी । बस्तुका बर तीन रच्म शिषक भर्यात् एक माता दूसरा पिता और तीसरा पाय हो तभी मनुम्प शरणम् गोवा पर पम्प ! सन्तान बस माम्पम् ! चिसो मावा पर पिता पार्मिक छिन् । मिलना मम्ता से सम्मान पे उपरेश और उपचा पता रखना किसी से पही। मेमे माग सम्बों पर प्रेम [ और ] रसम्म रित रमा पाती रम्य पम्प को ही मता इसविले ( मात्रमा ) भात "प्रास्ता धार्मिकी मस्ता विपत यस्प स मादमान्" पम्प माता विगो पापान से मेन अपक्षक ही दिन हो तबतक मुखीमताभ परेवा में। माना और पिता को पति रति किगमापान के पूर्व, मम्म और पमा मारक ब्रम्प मप दुर्गन्ध का बुरिवाराक पदावों को जो भारोम्प बम बुरि पराक्रम और मुर्गमता स सम्पना में प्राप्त मसे मृत दुग्प मिा मनपाव भारि मे पाया पसेपरनिनिससे पार्यारोपों से रहिन शेम अम्युच्म गुपयुचरों। जैसा मागमम जीवि भयोत रोग के पांचवें रिखस से मेम सोपा रिस तक काम देने का समपम दिनों में में प्रथम र दिम वापस कि उनमें पायी भोर मनोरयो को पोरगा। पश्मिों में गर्माण भरा रम और रसोरम दिवस मी राधि पात न समागम काया । पुन अबतक परामपसमय पूच म भाग वमक और पर्ममिति पथात् पर्व तक पुत्र महौ जब बानो योर में प्रारोग्य परस्पर साता किसी प्रकार प्रयासो। स्परक भौर मुत में मारन परिणाम और मनुस्मति में सौ पुसमै ममताभरात मिती सी मा में और ते गमापान के पत्रान् पी को पुत्र पारभासी से मोजमबारम प्रमाणदिने । पात् पाल पर्वतकी पुरुषा मम ममा बुदि, ब स भारोम्म पराक्रम गम्ति भरि गुबारक इम्पोरामसेवन पीमतीकि समता सम्बनम सम्मम हो जासमरातब भ मुग्धपक खसे चपाको रमाय मागोवाम पर मुमम्पियुत प्रादि होम मीर पीपी मान मोगमा पयारोप समकिजिससे पमा भर पी अगर प्रसाभारोम्म भोर पुरा ०प सम्म समय में 'र" होता है उसमें मावि पोचले. "सरमा विदि म गिला सिमरिरे।
सस्यामप्रकाश - होता बाप । पेसा पदार्थ नमकी माला पाजावी बोकि विससे में में गज्म पुष । प्रस्ता काम का दिन तक पिसारे का ची पिशवा सन्द वापी को सचम पदामा कर माम-पाय माता पिता मायें । जो मौखिकी, प्रपीको महोप वा परी में रचम भोपविमो किरि, पाम भाराव महाराहारमोथरत मे मियो पोरा बाप पोपमान मिश्रा को पिलाई। जन्म पमा पल और म्सकी माता को सरे भाव में पास हो भारता संबीय पप भी मर मरेव में प्रमब माम मंपित किया हो। और पानी पण तरी भारियन मित्र मोहीसा ति समर्पयामि प्रसूप कोरसेकर वासी समय बित सेती सबिपे रसूला पाला पिकाले । बि सबके कि पर ग्स भोषि प्रसेप मे निससे जियो । ऐसे भये से सर महीने में [1] एमपि दुमती होती है। समय में पार्माविमा र। हम सोच पुती पोरम सन्ताब पाषा परम मोतो हीरोमा मिससे पच वाव रयम राम पोमु पार्मिकहा। श्री मोवि व शोषण और पुरुष बामस्म्ममे पुमा न्याय दिने ये भी मप सचम हो। बामे माता वा सम विषाविसले सन्धान सभा किसी के पास पायें । अब पोरणे बमे प रस मावा सबक में विमिस र प्रेमाला वापस लेसा पामको बो बिरसन पद पांव और सब पोरममा और सा पालरोगों मोहीको मिलाकर बोबा व मुन मागको मै बोच मा मर गम्मार पुमा स्वर मा मात्र पर सब संविध भसाब मिट गये। बचपोखने और समयको वय मुम्बर ची और पोपोट, मान पिता माम म चिार पाहिमे मापन पसेपमाष चौरम फर नचादि भी विपिसेको ममममपासपोरेस प्रविमान से प्रत्तम मिमित विवि और सम्मा में पिसा मन मवेबर रोष साल मई कोर मी पपा बोलुपता न चरिरें। स्परलेनिन और मई से बोर्ड की बीयता, ममता होती भोर स्त मदुर्ग भी होता से रस सबने। सड़ा मन माप पोर्न मसापचय प्रादि गुणी में प्रति हिम प्रथरामा जब परिपत्र पाहावरेपणामी मरोम पम्बारमा मनरेगाव मागाभाराम मी । ग्पो एसिपको विमा विष्ण बम परमेधा माता पिता प्राचार्य पार पविपि राजा पर शरा भपियो से बाइब प्लीमा प्रेस सूत्र पर पच ।
द्विवीपसमुहास मी पर्व सहित यसमा। जिसमे सम्ताम किसी पूर्व पाने में म मा पर गोपियापर्मविसमातिनाम में ग्मिामेपम म्बार मम मी परेण पर पिससे भूत प्रेत भारि मिम्मा तो पसिसकहो।। गुरो प्रेवस्प छिप्पस्तु पिवमध समाचरन् । प्रेयहाद सम राम राप्रेस गुष्यात । मनु म अर्थ-जब गुरु प्रप्रायान हो सब साकार जिसम नाम स्तो रसार मोडमा शिप्य प्रवद्वार प्रांत मतको रसमेवामा साय र रिन एरोवा।। भोर सब रस र महोपुष तब सम माम मूत तापमान पप्रमुफमामा पुरस पानिय सत्पत्र हातमान में मामला मे स रमा नाम मूगी। ऐसा प्रमा समेत प्राय पर्पत णिों म सिम्ता है। परन्तु जिसमे यश संप संस्थर होता। उसने म्भीर यशस भूत प्रेत याकिमी पनिी भारि म मममम स्पराकोठी ।। एसो जब कोई पापी मरता तब रसम्म सब पाप पुरम य रोम पामा माप से सुभएन प्रम मोपदे भर्य सम्मान्तर पारय मता स इस परिवाणी परमेशा की पम्पा मोई मी नाम साता। समापी योगपणास परविष्य पाने मुनो और विद्या मे रहित होम सपिपाठ बरि शारीरिक चौर रम्मारपति मानस रोगीप पाम मूत मतादि परठे? । उनम चौरपसान पोर पप्परि रति सपा मम से पानी मामूर्व परी, स्पर्णो मपी मार गुह मेप्पी पर मी सिम्सी होम भनेकम्माप प म और रपिा मोत्रम घेरा पाम धादि मिया मात्र पन्धत पपन्त पिठ अपने पब पवारा सम्मान पारिरंगा पार पाम दुसरत मार्गम रेप और पारेपो रमदुसुम पापी स्पाथियों ने प्राप्त सम 'म कि "महम सबरम पर भी मीर पुस्प मे मसले पारो प्या." रोम कि इसके शरीर में पका भूनन भैरण, पौवा पनि र भाग - तुम मम ग्यप मागे तमाम भार प्राब मा मेजये। जामुम मदीदा पइतमी मेर रातो हम मम र परमर से माम विपर। नरम और मो मम्मी पाप कि महारा! पोरममा सम्म यमो पान इस बप्पा मो1ि8 तो रमपम परतीमा पपा मामालनी मामी इनकी रिपा रेग्म में पोर मराममायो' । प मरा प्रेम प्रोमो समाम माव और मैं एक पगरी रम्माR. मन में हम पापी मे म" - रम मी मार मार मोरपो में पाप सप मो पौरिपेइमरपाराम गपसपेशन मेनुमान मात्रा को मियबर मार म मर और रमपम । मैं पेपर पापा कमरमा सत्याप्रकरण भीम मुी पांचो मिपई पीर ।बामकिशोमो मो को सोमपापरत मारनेसने भयो । परन्त बारिमा पोम पोचमा माया मरे तो उसे जमान् देवी और भैरव पर पसा होगा मग बावे पोधि पसलमा पारिश प्रबोम्या : और न किसी समस्त प्रम मोतिर्षियामास पाप बापते। “रे महाराज इसमे ला न भवे किस पर सूपापियाम ।। गो तुम भी साम्तिपत स्था, राम माभो तो इसमे पुम दोष पीतामात पापित होकर मत्थन तो मी प्राम १०-कासि मोतिर्षित् सीप पियो से दो सूरि बोक है। बार और प्रवादि से मिासमोहीम माम् । लामो योकोपिष्ठ हो और सन्तपुरेस। प्रसपा कोप संसार में राम ना मुली दुता हो। वाम - उ० ही सब पाप पुरवी पा प्र--सोसानोविष्णम । उ---पी, गो रसम पा र विक्षित मिसर सबी के पीपीपीएम मम॥ म-पाजोपसम्मपीसो नि! उ०-हो पबम्मपत्री रमनाम ज्ञापायचीये मोकिमा अम्म होगी सभामन पाप भावना होता कि सचम्मपत्र बम पौसमम पुरेस पुराति सम्मपत्र बनाने को प्रतापग्स मासा, यि पुराधिपते है 'मामा ! पाप गुरु माया ममपत्र जोमसोवा बाक्लो मारपीसी सामोसे मप्र विचित्र और निर्धन तो साधारण शेतिम सन्मात्र बना मुनाने का प्रयास रस मोर मोनितीनो सामने प.१ "मम्मपत्र भदावो?" मोतिपो भव"मो. सो सुपरवाइप सम्म म्यव पथ और मिशन भी गव को सिरप्रसास और विन, vि सभ्य में गाम्मा वापस पषमय परेप नोमानी समयमानी हाम्न"। इमरिठे मुमो मिला रियामा म. मोविपानी हार पुर पाप हो। गोपिनी समतोमो समपिरही होगा कम्मोतिरामोसन्य to ममतो गुरु अप्पर पान मजद मामे । बोम से समसभ बनुमोम पोमुख मम्मा पिरि . उम्म भावमभबोर गासागर में राम माविलगी समक 'माय बमबमोरिषौगोमरमपयो म सरसाव भासिनी ममप सपमा शिवीपसमुमास २२ राम भो।ममन्त्रमयप मामो पौर मिस मामयों को भापमानाप वो अनुमामी नवयों विग्न हरग" । अनुमाप यम इपिपे। कि वो मर गापाम तो मंगे हम मा परमेश्वर सर मोदी दमने तो पावसा पाव भिमा और तुमपे मापा रसके कम ऐसे ही पे। और जोगा सबोध करेखो दमा ममा रेता और मामयों सी राहिला तुमार पर कोरिन । पाया त हामी चाहिये कि वो इस अप पार मेरो ता ने विगुदे सये इन पलों से पेमेपेणी । और पर माप तो मौसम बी वाकिसे मोतिषियों पा इसके कर्म और पामेबारे नियम बोरसे सामर्ष किमीमामहीम राव मी में कि परमपये कर्म और परमवार नियम माय तुमाराने सनी ॥ और सामा गुरु पारि भी पुरसदानमा पाप से मनोरम भी पो रचर रेग को मोतिषियों को रिय था। पब सपई सौतपा और मन्च न पाभारि । भी ऐसहीराम ममता कि माइम मना पापम्पबमा रेता मार रस्ता मोर पोर रस म. म. प्रताप स रमको कोई विप्न मही होये । हमनदी यम देना चाहिय किया तुम स्यु परमम मियम और सस मा स्पा मोगर मार इस प्रकार ममे सभी फिसने हो पण मर जाय और तुम्हारस में मी मर सते भोर क्या तुम मरयस मोग! तबरेज भी महीप सम्म और पूर्व साब पेठे कि पो दमदारमत गमगी। इसम इन सब मिप्या पपारों भोप पार्मिक पप के रपयाको मियपरामसरन विप पसमे पारे रम पिार भोपों पशुपमा मा मामात भरपभरम इस मम्मी पोरगीपार स्विमी सोमा रसापर मारष मोहन, ग्वार सोमण मपी मापनी ममी मापामा सममना पारा परि मिया पता प्रसरण पावाममो सम्बो कापी में प्रारंकि सिस स्मन्दार किसी प्रमगाम में पावर पार भोर में भाबम भोर पाप प्रवे में दुपति भी गन्न रवी परिष। सरे। निसार में सुरक्षित राताब रसमे प्परोग्य पति पर पाम्पस मुबकी मष्ठितो हमारपप में पौराविमोपा विषयी मायोमास रिपोभम्पमपी भर्गप गमन स ममाप और पारि म म मसारी पाप पाम रसम गिरा और पूर्व सिम । विस में और मोरता पममा मायापी घोर मिन्ना रोम रोम पग निर निरि, सन्मए पास 4 सम्मारि मुमति राम मामा जो तुम एम्प मुगिपा और रिप गई औरण परम समाप हो पुम प उम्म में नुमको पापमूम्प ममप म्स गतेसम्पास सामग्रामोंभमपोती ૨૪ सत्यार्यप्रकाश एमा नियाद और शरीरमपम नाय भाये । इसी प्रकार पर विरामी मावा मोर पिम में । इसीमिये मामा पिनमा धमा रक्षा में कमात् अम्म सेवक पब मारे से तिा शिकाम और । भारम्म मरि सपने पवानी पपमपन भो पास में प्रयोग गौ पूर्णपिा और पूर्व मिली मी शि और मियाम प्रगामी पहा पो और गलियों मे मोर पूमारि पनवम विपे विध पिणास चिपे गुम मेर। रानी पन्चाम पिार सम्म और मुशिक्षित होत? यो पम में सन्तानी भाषन मी ही प्रवे माहीम राते इसमें सामते पाशिमिर्मन्ति गुरषो न पिपोधिते । सामानामपिसो वोपास्वारनाभपिको गुणा । मा ८. मर्य-यो माता पिता और प्राधर्ष सन्तान और शिम्पा पामते बाबा भने सन्तान पौर सियों ने अपने हाथ से प्रभव पिचर और बो एन्सायों पा हिन्दी समाजमवेअपने सन्तापों और शिणों कोलिपिडामा भामरते। पौकिपा से सन्याम और विन पोमुखासन से गुपच होते है। और मन्टन बिग मी वाम से और भाप से प्रसासरा रहा। परन्तु माता पिता तम भापक गो रेप से ताइन न में कितु सर से मम्मान और मौतर मापन। पीय शिक्षा की मी चोरी बासी बम प्रमाय माकन मिप्याम्पस पुरता मोर मोर भाषि दोरों पोर पर समाचारमने विधायोकि मिस पुल निसले सामने पकपर चोरीपानी मिन्मारवादिकम किया उसकी विरमगाम मनुफामन्त पीवी। अपी पनि प्रविधा मिस्त्र भनेको होती सो अब स्पिीमही। इससे पिसाब जैसी प्रविनामी साथ सीपीभी चाहिपे भाव से किसी किसी पेमा-मेमो पतुम मुझ से अमुक समय में मिप मिबना पाप पर भमुन समय में स्मो में इस मी ही शो मे कहाँ हो सो सोतिरे माय। इसधि सा सत्यमापन और सावित्रमुख पत्र को होगा पीने । किमी अमिमा म बा भी। बस पर समता , अपनोमानित रोगो समाप्रपी ची। " और मरम्मो मो मौतर प्रौर पर और रस सो मे मोहम पर मोर एलेपमि पर मानब ऐम स्वप्रयोगा सिर पर वाय रको मो. विपिसोए रपमा प्रेम मायदा चदि दोष और सबको शान्त पौर मधुर महोबो और पुर कमान मे। जितना बोषमा चाहिने रमले न्यून ० अमित पोथे । बौधे मान्न .. - द्वितीयसमुशास २५ रमके मामले सम्म मा रापम पर प्रथम "ममम्"प्रेम सामने रखमासम पर । समा में समय पर केसी अपनी पोम्पता और पराम रस 1 मिध मिमी से ममे । सम्पप होम गुपोम पर पर दोनों पा रस्त । सबों पप और पुणे मसग अपने माता पिता और पापा मम मम चौर पारि रचम चम पापी से पतिपकचन पाम्पस्माका सुसरितानि तानि त्वयोपाम्यानि नो इतपणि । तधि पस्सी ।भनु इसन यह प्रमिणबकि माता पिता मात्र अपने सन्म और मो असा सम परेरा और पामोकियो २ मार पर्मपुत कम । रमन माप मो भार बोराम रमन माग प्रदिपा मोरया । सम सने रम पम पर मपर।म्सिो पाकर दुराचरी मञ्च पर नियम और जिस मसिपे माथ पिक और भाचर्प पाक्षा रस पो पासमास मात्र पिता धर्म विस अप्प प्राचरण भोक विसर निरा" प्रारम्बारी" भय मम मूह रोमम्प सम्म मारे ग म म पुमा म यिविको प्रेरित मा। मे प्रथम समूहास में परमवाप्रपाप गिरती प्रमा मास रसको रफाममा । शिम पसर प्रारोम्म कि धीर पारसी पर भोजन पर मोर पवार ३ मा प्रभात जितको पुपा दो उपसे अप स्पून मोगममप ममारिसर से भायपात गम्भीर प्रमा कि जगन्नु पनि अन्य पप से दुस्सा और जो हवा म जाने पारस सम्मा। माविकात पाण" पर मनुभाव विज्ञान जमाण्य में प्रतिस्प्रवादि। रपिपूर्व भ्पसत्पाद यत्नपूर्व अ पिपत् । सस्पपता परमार्थ मन' पूर्व समाचरत् ।। मनु अप-रधीमीरे स्थान रेस से बाम जापौर मखम पनिवप्रहरपले मन में विपापमा म्मवम्य पिता पेरी पर वाखान पाठिन। मगोमत सभामम्पसमाय पापा पम्स - माय पोर पिया अपने मन्त्रको पूर्वमा मिमीने रमको दिन शशिभाई पिायों माम विरमान और गाभिन सम मोरेबमुस। पो मात्र निर्मममधर्म गौर प्रिमरपये पभोंबन मब मरिण धर्म सम्मा और समणिपम्पकमना । समसिम area प्रिय लाम रिमार गाव गुलममय य. पति श्रीमपावनसाम्तीमामिात मस्यार्पप्राग मुभागपिभूपिन राशियापिपप रितीय समुद्रासः सम्म ।
अथ तृतीयसमुल्लासारम्म प्रधाऽभ्ययनाम्यापनविधि म्याग्यास्पाम' अब तीसरे समुशाम में पाने पाने प्रकार बिन्ते । सम्तामीको उच्म पिण शिपा गुप पम और स्वम्बम्प भाभूपपों पारण माप माता पिता मापा और मम्बन्धियों समुन्म कर्म है। सोने चांदी माविक मोटी संप प्रावि रणदि से पुछ धामूम्पों भाग्य कमाये से मनुम्मा मामा सुमति कभी नही हो सकता । बौकि चाममा पारस ममे से सहामिमाम विपपासति और चोर पाहिमपतमा पशुपमा सम्मान है। संसार में देखने में आता है कि मामूल्यों के योग मे पारिकों का सम्पु साब से होता. विधाविकासमासो पशीसशिवा, सत्यमता गीतमानमवापारा। संसारसुमदननेम पिता पं भम्पा नरा वितिकर्मपरोपकारा। मिम पुत्तों का मन नियरिबास में तत्पर हवा सुगर सीबसमारपुष, ससभ्यपचापि निपमपासबुक और यो अभिमान परिश्ता से शीत प्रय अमीषतामा समपरेश विवादाल से सप्ताही बर्नारनौर करने से मुक्ति सपिरिव कमी से परापे उपकार करने में रहतमर और मारी पपी। इसरिये पार समीरों मेबरों और बाकियों को मालिाग पाथाखा में मेन । यो अपर पुम्स की दुराचरी हो रमसे रिहा न दिया। फितु जो पूर्व विधपुर पार्मिक ही पाये और शिरा ने योग्य है। बि अपनेम में मौसपोपात और फवाओं मी पपायोग्य पाभर मरे पपोत मान्यता प्रात् अपनी पाम्यामा में मेजर: मिथ पाने प्रस्थान एकान्त देश में हो गये और और परियों में पारणासारो मेस एक दूसरे मेरोमा परि । जोपही मम्पापिय भीम भापक पुस्लप भप अपचाम्पाचौकी पामराम्या ममममी और पुस्मों की पायाखा में पुरुर पिपासा में पांच म और पुलोंकी पाठशाखा में पांची पथकी मी जाने पाय। अपोन् ममोपममचरिको सीप पुलम पनि स एष्तसेवन मारब पियाय परपरवाना मिलमध्यम पौरमा दम मा मेरों महापौर मम्मापकसोग म मानों से पच् जिससे रच्म वि शिका गौर समान गरीर और प्रामा म बनायुको भावन मे मिल बा माई। पास मे एक योग्य पात् पर प्रेसर प्रम च मम्म। प्रब मुल्प - पाम पाव भासन दिवे दवीयसमुन्नास भोपारामामार मणमारी होमेखि सम्बो सरको उपसा होमा पीये। म माता पिता अपने सम्पापों से प्रसन्न अपने माता पिवानों से मिएस और सिौम्पर प्रपाम्पबहार एक एमरे मेरसमिसेमा wिaप्रिय विमा यमने की चिता रमन र ममप भनेको म तब समाप मभ्यापकमिस किसी समर गया राम और प्रासम प्रमाइ. कम्पान्य सम्प्रदाय पफुमापस घरपणम् । मनु .. इसम पमिप्राप पाकिइसमें प्रवियम पर पाविधिपम बारसे कि पांच ममा माय भोगेई भरपे पर और मारियों को पर मेबरस पड़े। पाम्पा में भारत भेट देव पोम मेड परपस्नीय हो। माम बाम पोपरीत पर मैं से और दूसरा प्रम्याय में पापम हो । पिता माता का अभ्यापक अपने सामाभिधाने मारत मापत्री मनापपरेशमाप मनपर- मो३म् भूर्भाव स्वः । वत्सवितुर्वरपय मी देसस्य धीमहि । पिया यो ने प्रचोदयात् ।। पठ भ०१५। म । एएमय में यो म्मम (भोर) रसम वर्ष प्रपमसमुशास में रिपो चामे गमगा। परवी मायातित सरेप से सिप । “भूरिति प्राय" नापति पर बम सभा सम्मारा' मो पब अपत गौरवाभापान प्राप भी दिल भी साम। ग्म सबसपको "भापामेण भवाम।। भुपरिस्प पषमपामपति पो पापा पो सदुपौरित जिसे प्रामेबार वालों से पर बात है इसरिये उप पामभरसभाम "भुषा' है। सरिति म्पाट" "पि मारम्भमा मोति म्पमा जो अपरिप स्मन् म म्यानपाप मारे पनि ग्य परमेवराम " Ankit मारमा ( मन बा .](मा)"पामुमोदुपारपनि म तिम बो पर परेरा (स) रोमति रोपवर यो पर्व मुयो परमेहात और शिपमय परमबी ग्म परममा भयो (प)" मामलमा प्रयोग भीग (मा) “परासमार परसम्म और धमला र समस (1) पी पामा सामेदम चोप (मी) "statr" पापा मिनोग शिरि (0) "म"बो पम्बिा()"era(a) "पुरा रिता भे(रमन) at सपना पुराम पोममा.
सपासका । "पमेनोपभिमन्यनमसममियमुलकारे मा रिबन निर्षिमारे सानामित्रे प्रधान अपपते! पण बाप्पारको अपारे। निम्मर ! बापिए! रे ममापारि ! सभिल तप यहोम्ममुका मोस्य भोप्रति वा पीमार पपीमहि पाहि मामेव पा । मै प्रयोगधामयाह । हे प्यार ! या सपिला रेषा पामेपरो मनमा पिया मोर सयमा पापाप इसका मनु मतो मास्म मतोऽपि पिच माविमापारे । है मनुष्यो। यो सब समपी में समर्ष सम्मिामदाससम्म विस पर, मिलर, मिसमुच्मसम्वामा पासान कल्याणकारने शरा सम्ममरणारि खरीत प्राकार रति सबसपामये पापा सबसपा पिता रमा मारिसे चिपोय अमेवारा प्रमा पेपालमा निर्माता मस्कम और दो प्रतिको धमका रमे पोम्बस परमामा मोटरसपल उसी को हम भारतमें। इस मोबबिकिनापामेपरमारे सौर दुरिमायामि वाम से दुराचर पपर्मपुच मार्म से पथर म मार्य में खा, रस घोषम पूसर किसी अप्पर महावीरें। बॉलिमरपल और न प्रषिको को हमारा पिता रामापात्रा बीय श्रम सब पुसा. इस मा परपीमन्या रपरेत सम्मोपासक कीबो स्माय भाष मर प्राचावाम मावि nिt । म स्थान रिमिस परीकी पनि भाब पारिते। इसमें प्रमाण- प्रदिर्गापति शम्पन्ति मन्द सस्पेन शुम्पति । विपासपोमा भूवारमा मुशिमिम शुम्पति । मधुम पा मस्पति मोक। बस से पार पारवा, समचरण खेमनर और तप भोत समारोममी पापहोचमप भोपमा मानव पिटी से पेमेन पपी कि से रिमिक पनि ठ। इससे स्माप भोजन से पूर्व प्रा। सामनाम इसमें प्रमाब- पोगाउनास्यविध पानदीप्तिराविवेशम्पात योगस २५० पापो सूप।बर मधुन व्यापम मानिस रोचा माममपरिमाप मोर समान हो । अन्य मुधिोया मामाभव माराया। पन्त पापमानानां पातमा दिपया मधल। तपेम्पिाप सम्ठ दोपा प्रापस्य दिप्रहात् । मनु...... मनुस्मति भोगी। से कबि में पाये से मुम्यादि पनुका अमर माहोर पर मनमो मायापि भयो। रोपरम निर्मपरो अस्ते।
पतीपसमुशास २९ प्राणायाम की विधि- मनपर्यनषिधारणा पा माणस्य ॥ बोम समाधिपारे । से मत सेक्सन होम मा बसपा सिमागीले प्राय कोप से गदर परी पपायचि रोक देखे। अब पार दिखना तब मूदियो उपर पाक प्रण पर गवाई। इसी प्रमर प्रहार किया मळा। बब मारो सपोर २ मौतर पाको निमोसे ही मय बाब मितमा गाम और पागे। और मम में (मोरम्) इसमबरमता बाप । इस प्रकार से प्रामा श्रम मन की पवित्रता और मिता होती है। एक " बाप" प्रणा से अधिक रोमा। स भाम्पान्तर' प्रपात मान जिवबा प्रयोमबार स्वमा रोक। हीरा "म्मति बर्याद एकहीवार या कालाहां माय मेरपालिका । चौथा "बापमानापा” भर्पत बाब प्राय मान से पर पियेणे व ग्म मि म निकाय रे हि बाहर से भीटर और बसपार ममीवर पायेगे सब मील से पार की ओर प्रय मालमत्रता साप। ऐसे एक ममि मानतो दोषी की गति सम प्राय पपने प्य में हो से मन और इनिरमी साधीन होवे। बब पुराण बार पुदिनी सूध्मस्म हो जाती पर करिब और सूक्ष्म विप्पो मी यो पाती।इम्से मक शरीर में बादिप्राप्त होकर खिाय पराम मिमिपा सब हामी मोदी का समयमगस्तिमगा। स्वोमासाप्रामयोगाभ्यासको बोरन माम मो मे बोलने चाबी केबोरे से पगोम्पपयार प्रबेस रपट में। सम्योपासन मिसको प्रात मी पते । पध्मबरसी में रपये मूए और मम्मदेश में मो गणमे सिमा कपमा परे म उससे अधिक म्पूष । ससे सम्मका और रिती मिति पोसामीची। पमा “मा अपात् मम्ममा और अयामिका भी केपि भो पर नाहिये। उनसे पावसर होता है। दो प्रारम्ब मौरबम माठन होतो मरे। पुष. सम- शवासम्म मबयामामय उपाय पीर समेवर में राति प्राव भोर सपासपा की रात पिवणारे । परम् मम्मद पर्यात पापमोचा मामा मगे। पा सम्मोपापन एमम्त देय में पुचिच मे भर्य समीपे निपतो नसिक विधिमास्थित। सावित्रीमप्यपीपीत पत्यारण्यं समाहित ॥ मनु बस में प्रभाव पास देश में सम्पयनबारे समीप स्थित सेमिसमता पा सारिणी प्रपात प्यपत्री मन्मा समय महापौर सो पछार प्रपणे चा मान मेमे परपस मम से मपा रम सपासकाम्य " परमेम रिपबिदाममासमरे मिलयपुरमुखसम्बरे पर विजय निर्षियर! रेसपोन्पामिरेपर पप! पत्र बापाक! अपारे! नियम्मर ! सर्वबा!ि रेमपापारिमे। सविरेंस पदोम्मका स्पास्म मोति जान पाम चामति भारि मामेव पारमै प्रपोमामाह। रेमपम् ! या सपिला देवा पामेवरो मायस्मा विवा प्रयोगात् स एकमाई मन पासपाय इसको मन पाखोम्ब भास्य भक्तोऽविम्बित मानिमायामो। मुमो ! को सस समयों में समर्थ सभामामास विभ यर, मिस परनिममुष्मम्ममा पासापर कसा करने सरा सम्ममरबादि बटरहित भाभार रहित सबभासामने बाहा सबका पर्चा पिथा रम्पारक, पादि से विश्वमा पोल्य मान्य सय ऐवर्ष निर्माण रस्सम्म पनि यो प्राप्ति समय भने पोम्बो परमात्मा मनो एबमसम्म सी प्रेम भारतमा इस योजना किप पामेम हमारे पास्मा और पुरितामा प्रान्तमि- सम्म इम को दुराचार अपमपुत मार्य से भेगम सम मा में बसाये पसको बोपर सरे किसी भन्या हम बोगी। स्पोनिमकोई मोल और सकियो हमारा Pिow पवा न्याया पीय और पब मुखमरेनेवाला इस प्रकार पानीमनपरपदेशो सम्बोपासबो माया मग प्रवासम्म पनि मिच। प्रफम स्थान इससि । पिस गराएर मौरमोबारिश। इसमें पाराव- अमिर्गावापि शुष्पम्ति मना सस्पेन शुध्यति । विधावपोा मूतारमा दुशिमिन राध्यति । मा ।।। पा मम्मति मागेको। बम से गौर से पार चार समाचार से मग निरसप अपोट पर प्रसारमा पार्म हो भण्म करमेनामा बाम अपांत क्मेि परमेश्वर व पोंकि से रि पवित्र पित्र दोष है। इससे स्माम मोनयपूर्वमनमा। सरा प्रबावाम उपमै समाब- पोगाहानणमापसिधप पानदीष्ठिरायिकम्मत यो मा १२ पायोम्याप । बब मधुप मममम मवाब मविषय रमोशमा म मरिमअप पौरसत होता है। अन्य मुनिकोवळक रसभामा प्राय बाम पायो। पप्रम्ह पापमानान धातूमा दिपपा मजा तपेन्द्रियाणां परान्त दोपा प्रापम्प मिप्रदात् । मनु । परमम्मविपभोक। मे ममि में अपने से मुक्यार पान समस पाम पर प्रवाएमम मम पारि इन्द्रियों पोरबोरोम निर्मपर पतीपसमुद्रास 7०-चो तुम पम रच भावो कमी पेसा समवे पोलि किसी इम्म काममात्र नहीं होणारेजो दोहोमता से ए ऐ में रिष्ठ पुल कासिम से सुपरमहरा होता से पुचममी। इसने मे मममसो प्रधि में समा मा पा सम होता ए देख में बाम पुर्णध मे मितिम है। प्र.-सा ऐसा दरोगा मा मुमरियत पुष्प चौर मर जाति म में रखने से मुगम्पित गपु होम बारक होगा। उ०—उस मुफ्प पप सामर्म नही राम मा विसरमा मात्र प्रदेशमा के साबि रसम मेहक मि पर मोर पति दीपसम्म रस पपु और पुर्णबमुख पार्यों को नियमित चौर सम्म प्रोगार नियम पवित्र पपुम प्रभा मा देवा। म०–ो ममा पारेदम मसाला प्रोग। w-मनी में पापापानस्सेि होम प्रोवाम चिदिक सेब और मानचि होने से परपुस्खा फस पान और रामी हये। प्राइम होम मोमिन पाप होगा। रo- बॉलिशिप मनुष्य के शरीर से सिवमा दुग पत्र हो । मु पौर बसको विपदम रोगोपचिन निमित्त होने से मना हुन यह पता तबाही पाप ए मनुष्य हो। इसखिये रप पाप मिाया र मुगल पम्पसे अधिक मनु और माया करे। और विधाये पिसाने से ग्पी एक पति को पुष होगा। मिया पुत्र पौर क्षमापारि परार्म एक मनुमा बने इमोम से पानी मनुष्यों म रपमा होगी। पान्तो मनुष्योग परि गम पाटो गमले पर और सम्मान दियो पजेइससे प्रये पराई विद्याप पिला भी पीपे पान पसे हम अधिक प्रमा पठिी बिरे होमवा भासपा स-मारेक मनुष्य सिमी प्रति और एक प्रति प्रतिमा परिमाय। 3.-प्रत्येक ममुपको सोगा । ति मौन पाप माने फूलपाति एकर मातिम परिमाणम्पून से पूर्व पहिये और वो इस अधिक से दोगुन बनाइदिने पार्यमणिोमयि मागासी मारि ग्रामोग पुटाममा मोर माने थे । पटक सम्म भयेपचाराम वक भारत देश रोगों से पति पर मुझे "परित प्य अब भी पमोडा माही होसम । मेरो मर्याद समपर पान मा सम्बोसम्मम ईणप्रसाद प्रार्थमा प्रपना भयमा रेपो पप्रिमो से से ध्यमेप पन्तपौर पिायों मेघपमय परम्पर्क में रख मास और मिनप्रीम होगा।
सत्पामा सपा-धो पीनी गिनीसमाचली। मन्या और अम्बिोज पाय माता दोहोकरे। रात खि सम्बिोसोय हो । म्यूम ने स्पून एक स्याब समय से समापिस्पोर पोगी चोप पामामामध्यमी सम्मोपासबकी पिने सपा पोषमार और स्वास्वमिोजमोका समय है, सिए एक किसी बाप महमर गुमटीकोन ग्सबी ही पारी और मोचे। गुरु परिमाब मे प्रकार बनाने पर्ण व मा बिसयी चौकी हो रहनुपाचे चौसी। राम चमार पाठमा सायरमेमेस्सीको परिमाप से बोबोमो उसमें से मम्म में अमि विपुषा रप पर समिमा भोट एपेक ला परे एक मोतीपत्र फेमस और नया D- इस साभाम्पत्याची पर्वाद पा प्रव और पमा प्रयास और प्रोप बाबमा नपात्र में भूत बोटपा मेरे । यावा बरखने और मोपी मसिमे हम्म बोले बाबा मुगमा रस पीचे प्रकार रेखाभि इन नानीहोमने- मोभूरमपे प्राणाप साहा भुषापपानाम्य साहारादिस्पाय म्या माप स्वाहा ।म तरणिपाणादित्येम्प मापामम्पानेम्य साहा। यदि पणिोरो प्रमाव पाम एक प्यास और को परिकमावि रेयरोग- रिमानि देव सवितरितानि परी सुव । पवन वा मासु ॥ पेशा - इष मात्र और पानी मनसे मिले। "वीर" र "गया मादि पर ग्राम पामेवर प्रर्ष प।"स्परमपम धाम मा रोम पोखीम पोडे विपरीत महीने मेघर सबस सपा पर ममुपोंरेमी परोपमा मम्मचरिये। म-म मेन्यापमाना। -परोपसयो Birg मोर बसोम बसे अदिती दुसौर सुपरिव पु पय बस से पाय और रोया होने से मुका। मति सि विमा अपरेसमीप तोमा ममाधि पहनाभरिमायामाको।
पतीपसमुहास र०-चो तुम परा विष बातो कमी ऐसी बात मते तोकि श्रिी प्रणव मम्म्य नहीं होगा। रेोगोमवहाँ से रिक्त पुसवामिम से पुममध्यपहा दुर्गमममी। इसमे से समम्मो किमि में गा मा पा सम होने साब र देश में बाम दुधी विधि। Ho- पेसा रोगण मी मुपचित पुष्प चौर अतर भाषि म में रखने से भुपम्पित होम मुजभाकरोगा । उ०–स मुफबाप प्राम ममम ममु ने कहा विमान पत्र प्रदेशमा कवि रमम मेरा पति नहीं? मार पप्ति का माम विरम और दुर्गचमुच पदार्थों में विकसित चौरसम्म प्रोणार विमएम पति पुन प्रहमा देती। म०-ठो ममा परहोम मधेसमा प्रयोग है। ..-मन्त्री में सम्मामिट होम मेरे बाम दिया से और मन की प्रापिरोये से कम पुस्तक पस म्स और लामो हो । प्र-वाइम होम मोमिन पाप हवा र०-दो बॉकि जिस मनुष्यो गौर सिमा पुगत सत्पथ हो पौर बसको विमानसरोमोत्पत्ति प्रविमित होने से प्रतिपादुन्न ध्यान रखना हो पाप प मनुम होता है। इसलिये रस पाप मिणापा रखया सुपन्य परमपे अधिक पपु और में अंगमा जीये। और सिपाये पिणाने से उसी एक परिपुष होता हैया भूत मौर मुगन्धादि पदार्थ पर ममुपा रसने मोम से पानी मनुषों का उपम रोग। पातु गो मनुष्योग प्रापि राम राईको गमले पर और समाबर गतिमहोपले इससे पणे पार्ष Raw पिसा मी पीपे पान्नु एम पोम परिकामा गपिठ इसिरोममा मममपकी। प्र-कोक मनुष्य तिमी तिमेचौर एमति सविसमा परिमाव। ममुप को सागरणव और पा र मागे टरि एक पाति म परिमाणम्पन सम्पूर्व परिवे पर जो इससे भपिकतोपुर भन्दा सपिरेमामणिोमणि महार परि मावि गरे मामले मोय पुण्यारोम मते और माने पर इमाम भने प्रचारात सभाप रेरोग से रहित और मुगों से परिचय पत्र मी महोतो मासमारोप त्यो पश्य मम्म्योपासन र की राति मा स्पाममा मन दूसरा ऐप अप्रिोत्र से सभमेव पर्यन्तमा भोर चियों पेचप मा परना में मा मायनर अमिमोराहीमा यौ।
सखापमान पापक्मयासे वर्सवामुपमयनं त्यति । पमन्यो मयस्म । स्पो यस्यैवेति। एमपि गुससम्मन मंजवळमनुपनीवमम्पा. फ्पेविस्पो परमभवनमा परे प्रकार मामय टीमीपद मामय पनि म सक्सि डिप और भाषा वा व एक वायोत माले पर समय और जो असीम यमपणो तो सो मनासहित पोरो सपणाव पापे का परे परन्तु रसभ पबमबमे पा मतपक मानी। पथात् पोचपा असे शासकीय पठणाम में और ममी बाकिनी पाटमा और निमशिन्ति विषमतमानप्रणाम्मने- पनियवादिप गुरो भैदिक मतम् । तदर्भिक पादिक वा मालम्तिक मेष पा । मनु म ।।।। of-पा माये बीमों व पर्यन्त प्रर्वाद १०२ मेरो मोण पाने में कमियोपचास और पामियमस बक्या मान्य और पर्व मिस समबर कवियत्री प्रसारमचे वक्त मम । पुरुषो पाव पास्तस्य यानि चतुर्विशति बसि तत्माव'सवन चतुर्षिास्यसरा गायमी माप मात सवन वस्प बसवोऽध्यायत्त मामा पाप बसप पतेशी सर्व मासपम्ति ॥ १॥ बरेतस्मिन् पयसि किशिपतपेन्स पम्मान पसष र म मान सबम माम्पन्दिनरमपनमनुर्सतनुवति म्यई प्राथाना पसूनां मम्म यपो पिलोमीपेम्पुरीष गत पापगडा र मात ॥ २॥ अप यानि चतुमबारिवामि। तामाप्पन्तिम सपन पतुम स्पारिश्शरसपनिमपएममाप्यदिनरमपन सरस्प या मम्वापसा' मास वाव या पोदीव स रोल्पन्ति ॥ ३॥ स्वस्सिम्वयसि विधिपतपास मयात्माया रखा र म मामबिमरसषम पतीपसवममनुसम्वनुतवि माई प्रासाम्ररुद्वारा मम्पे परो बिलोप्सीपेन्पषत पापगहोमपति ।। ४ ॥ भय याम्पाचवारिधीहिन्दवीपसान माधवारिस रसरा गठी गमतीयसपनं तरस्पाविस्यायन्यायचा प्राण बापाविल्या पतीव सामापरत ॥५॥ तस्मिन् यपसि पिधिपतपास प्र पम्त मामा माविस्या व मदतीपसरममापुरनुसंतनुतेवि माई प्राणनामाविस्यानां मम्प यमा विमोप्सीपम्पुरीष व पायगदो दिप मयति ॥५॥ पकवानोमोमिया (प्रपामामा)परम माय और सरप्रा-भर मम और सम में मिा-को पुस मसासमय रे और भी मौत में पप संचय गोपमा पोत सीप एमषी से संपत और मातमी सन दवीपसमुहास ३३ मापकी कि पतंम्त विधिप भयंत मागरीएम हारिरिण और मुखिया मायने और नियामहे मी सम्परा यो रपये पोर में प्राय पपवान् सोम सब एमपी के पास माये पो हो। इस मयम पर में जो सप्रे पियाम्पास में मरे और पपासा ही उपय किसा बने और मनचारी पेसा विमप रस्ते शिपो में बम परस्य में गोकर मपी म वो मेरा पौर और पाप्मा भारोम्प बाम हरे गुमलों को पसारेपो मेरे पाप हो रे मनुनी! तुम इस मभर से मुखों रिस्तो जो मैं मगर्म म मोपमा सो पम्मत ग्रामम मा तो सिर कि रोगमाहित गुण भीर मापु मी मे. ८ पी। मम्पम प्रसय मह-जो मम ॥ पन्त मनपरी राम दाम्पास प्रवास माय इन्द्रिय प्रान्तम्भव or साम्मा पाएको सब दुर्गाको स्वाये प्रो मेणा प्रबनरमे परे होते है। बो में इसी प्रथम प प्रेस पाप मतेम पा कर मेरे रे धन प्रापयुष यह मबम प्रसर सिरोमा रे प्राचरी होमो तुम इस पर्व को मनो से मैं इस मामपोप म मरे पसरूप होय हैं और ग्मी पप्पुल पाठा मोर रोगरहित वा ा कि पर मापरी मणापम भी बसा म किया मो। उपम प्रयास पर्वम्व प्रवीयरे ममा महामार की अपनी से जो कल पर्पन्त पापा समानुस समय प्रपाते। यो भाचर्यचौर मा पिता अपने पम्बीको समस AR मोर गुरुग्रापरिपत्र पर मोम उपाय करें और सन्म पापी माप भवरित सर्व प्रेस से पापो रमपमान मारमा पदो परपोत तपादुकोबा तुम भी सामो। पारा मयुष इस मन को मम दोम पाप ही प्रवे रे मा भर सर्या से पर्म प्रमोर मोम ते ।। पवमाया शरीरस्य पूरियोवन संपूपताकिभित्पपिाणिमति। भापोम्पपदि । मापक्षापरावीपनम् । माचत्वारिंयक संपूपता। बत फित्पारमाथिति। पथपिए तो पर्षे पुमान् परी पोण । समस्यागतवीपों तो अनीयाको मिपए। पप गारमे पापा-१(R) बोलो २१३ पर्प मापातीपरी (फोरम)ो. तमोरया में पुमाल्य प्रारम्भरा है। (मगरात-पातच पण अमोधी वापपि) सपणो सपना समाatiगया मगर सस्थामा पोपप बिनु स्मरदरिया भिवानी : गम समय मिमीमा राममोमो माया माना। मनापामा मविपम सीप पुल दोषों भो। उ०पी, बो २५ पन्त पुससमे तो ॥(पोप)ले पता दो पुस । सन्त मायरो रेवो मी . बी पुल ५ को साबो पुल पदमार्गको बी. बोपुमतपत पर्वतो मी ११ वो पुम्स मामेवो की तरच मनवम से बाप मेंबापे पुजारो भीमेमावरमा परि पान पर शिवम विद्या पुम्स और चिौकोर बोनिमा भादगी मरण पन्त मानीसम्मले हो तो मोहोर पान पसम पूर्व विवापि और बिपोपी बी पीर पुस। ममा करिम समीकिबोधमोपको पोम इन्द्रियों को अपने प्र पस्पम्पापप्रक्षयने चासत्वं च साम्पायमबचने । वपम साम्पापप्रवचने चबममहापायप्रदपने पायम साम्पापमय पोभम्बयम साप्पापमयपमेगाग्निहोत्रम्ब स्पाप्पापप्रवचमेप। अतिपयम साम्पापप्रबचपेप। मानुष साम्पापप्रपपनेच । समय साध्यापप्रवचनेष । ममासाम्पायप्रयचना प्रबातिम साम्पाय प्रथमने पापहवेचिरीयोपनिपद । (परती भनु कापपन है। पे पर पाबा मिलम(d ) पपई भाभव पर चार पा । (प) पमपामा प्रम नियमों में परेप पाये (प)पती पाव भानुपम करते हुए परिपका को पर और सल (एमा ) इभिगोकोहरे मामलों से रोकने पो गौर पाले शाब (समा ) भव इचिकने पर प्रकार के पोती से प्यावे पाये (अम्बा बास पौरिममिनियमचारिसपो पावे पाच पोर (मिहोत्र) अमिोजमाप पम पम परमाया(भविपया ) अतिरिकाका मेय मोदर पो और पा (मामु ) मावसम्बनी मामाको पोन मोर पावे पामा) पन्ताप और पबमवे एप पाये परदेस (प्राय) पोप को और गरिए पाने का (प्रगतिः ) पर पन्यास और विमान पारसमोर पाते पावे बारें। पमान समेत मत म नियमान् प्यमान पुष । पम्मपतापसो नियमान यवान् मन् । म.... बमार महोते- वस्सिासत्पास्यम्पपर्यापरिप्रपया" । योप भापर । प्रमोद (भा) सत्य (म) पत्र प्रस्न मन दोरमा चोर मम ममा (प्रस) भर्य यापन पेसाम (ग) हवीप समुत्रास - मर्यात सत्पेनिगम संगम (पपरिय) भारत बोलुपता सम्पमिमादित रोन्न। म पांच बौं पवन सपने समिपमोम बम माता- गोषसम्टोपतप साम्यापेश्वरणिधानानि निपमा । पो.पा.१. (पौत्र) मा सामारि से पविता (सम्बोष) सम्प प्रमादोर विराम राम राम्ती कि पुरुष स्तिहो सके रखवासमा हामि प्रम में लपटोकपा (प) मा कासेवर मे मी धर्मपुछ र्मों प्रमथुपम (स्पम्पाय) पापा पामा (भिपिशव) परी मति विशेष मेभामा को अर्पित रखयरे पोर विषम पाते है । पर्मों के शिष्य बरस विवो भवन बकरे इसरोगोमबब मिाम बोस पेपर पोनर नियमो सेवा प्रवाहात को ही पास होता किन्नु भयोगति भात पार में गिरा था। फामारमता न मयस्ता म षदास्पकामता । काम्पोहि पदाधिगमः कमपागध विक। मा म मर्प-सम्पन्न प्रमातुरता और निममता किसी के लिए भी भेट नही, सकियोसमरामदो मशान और पारिवारि रचम में रिमी से पोइसरिये- स्माभ्यापम मतहमिस्त्रषियनेम्पपा सुत । मापन पर ग्रामीय किपट तनु । ममु १।२८ । -(स्पम्पार) सम्म विम्म पाये पसाने (म ) ममय समा पसी भिषम प्राय (रोम) पनि होम पप समप असा प पोर पम विराम (बिपनाम मोपासमा बाम रियप्पर (इम्पय) परफ्यारिमये ( मुना) सन्धनोपछि( महाग) पित पर और अतिथियों के सेवन समाप मोर (म.) पशेमारे सपा शिरि रिहापरि मारेगमपेस परपी पाव और पौर परमेपर महिमापारम्स मापन पर दिया गगता है।इने पायोनिय समय पर ही सम्म इन्द्रियाः पिपरत पिपपप्पपदारिपु । सपम पसमाविष्प्रतिमान् पन्तप पाजिनाम् । मम ।। 4-सेपिर पाधि दीको निषय में राम मन पोप समय में प्रमों में गिरे सिरों में सिर दिन में प्रापरमपरमेकि- (म्पिासं मसंगन रोपमएस्पसरायम् । सधिपम्प सुबम्पप सव पि निपप्यति मा ।।। N-जीपमा इभिवाय धिमयमा और सदभरा मैभवामी सिरिभे. पास्यायप पपायमिपम्मयवसिप। बपिमएमापस्य सिरि गप्पम्ति रिपिन् । पर ।।।
...सि मयुबाया भोर मनपरपापिय हवे? सादासिपापमपान रासारभरभरमाबीच पारन विदितीको बोम्बपिडिपो सब समुनीर भाराभरपगार गरेन पहा मपुर मुखीमपुरको जो धर्मगतिपदेपसरा चौर समदमसऐग सत्यार्थप्रकम् पोदाचो अभिवन्त्रिक पुल पो माम पा नियम और परमप अपेममा सिरिसे शाम महोदावे वदोपफरले पेव स्वाभ्यापे पेप नैस्यिके। मानु रोधोम्सफामाये होमम्प्रेषु यदि मैपि मापन-पापो ममस हि वास्मृतम् । प्रमातुतिनुस पुरापममम्पाययपतम् ॥ २ ॥ मनु १।।।।।। पारे पाप मलोपासनावि परमारपोरेसने और होममम्री MAA अनुरोध (HI) महीलानि म मातlaint से भान स्थल सपा लिये जावे । पच महीने Mu, a feel प्रतिदिन मामा पनि ना दिव कोमय Paner में रिमोपारि सचम में किया पुस्पाम रोक्ष है। सेबोन म सर पाप भोर साल बाबले में भरा होगी म मपे में सदा मनमान और पचे में मने में प्रय समारोह भावामीमरा नियं परोपसेषिम' । मला त परत मायुर्पिधा पयो मवम् म मधु. 11: tum सुण पित् पर परी की पेच प्रम उप पास, Rani wrस पर मरा पाने । भौर गे ऐसा भी मते नमः महिमप भूवामो फार्म भोग्नुपणासनम् । पाप मधुरा सपणा मयाम्या धममिन्ता । पटप पानसे ये सम्पगुप्त व सर्पदा । पप समयानावि पातोपगत फमम् २३॥ मनु भाभारिरहोबा सम्मानार प्रापो निस्पमित विपारिय। प्रताप पारणेदकमानस्य सदा । या । पर यमरमौर पर प्रमावि . 4. मनन योगा संस्कृतारमा दिन गुरोपस M 4 प्रे पार
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२८ समाप्रका मानसी पीर परे शिष और शिवीगे - उपरेशमे किएमा म बोम पोमषम प्रभावित होने पर पर पर्व समस्त विमानों को मार और सिमित बन रेम विषय पर पम्पोमचा प्रभार पेममे भी मत बोर, जमाव कम माग मतममाव से प्रारम्बार पुराण को माको प्रमाद से चम पेव महोत्र प्रभार से करे और पामी मठ बोरेगा और माता पिताप की मेष में प्रमाण मतमासे गिन काममा मेसी प्रकार माष पिया भागार प्रविधिको सेप सरा भिमा को धम्ति धर्मखम सम अपचारिको निगम गम से मित्र मियामामाविकमी म बाबो इमाने सुचरित्र प्रमोद वर्मक कर्म मन मोर बो हममे प्रामपभो मोमवम बोरमारे मन में रम पिार मामा मामीचे प्रमाप पैर पौर निवास कितना से रेस ममदा सेवा योरेना, या से रेगा भप से ऐना और प्रतिभा पे भी ये चाहिये । बब कमी तुम कोरबरपासमा सम में प्पिा मारा संगम समारोह को विचार anी भयोमी गति धर्मसमा सो पोभमोरमा बनबर्गमार्ग में बसेमी पर्ण रही मादेश मात्रा को परेश होरी मिरतोशिश। इसी मभर गया और मपन्न आमचपन सुधारमा पीपे। अकामस्प क्रिया काचिद रयत मेहकाचित् । पपरि कुरुत किक्षित् वामस्य खिम् । मा ।।। मधुबॉमेरिणय प्रमा गरिने विविष्म पुराण में सामोर निमय भोपा मी सबा घसम्म प्रसे पर बिहारो। अमोमणीयाममा विदी। भापार परमो धम भुस्युस मार्ग पर प। सम्मासिम्सदा युवो मिस्पं स्पास्मवान दिया। मायारादिस्यतो विप्रो म परफसमश्नुते । पापारेख तु संयुक सम्पूर्व फसमाग्मत् । २॥ मम 11111 पो हुमो भुमो पामे पासपोर पर पाणुस स्पतियों में प्रतिपादित धर्मप्रशाभवसमा इस बर्माचा मेरा पुगेको धर्माप से पवितरित पम मुखम्मम मममहाँ सन्य भौर को franपर्माना भोजमापूर्वमुप मासा गा-यमम्पत : मूस तुप्रमाभपाद रिज स साधुभिरिका मास्तिको वानिमक । म मोद-वामपस पतीपसमुहास बोये और मामय पास पुस्लीपिसे या पपमाष प्रता ग्स पानिमा बासिको बाटि पति और देश में पाए न देवा पेर स्मृति सदाचार सस्य व नियमास्मनः । एतपतुर्यि प्रार साक्षायमस्प पचमम् । मनु ११॥ के मवि माना होत ममुरमादि सब समोसमास को पमातम पर्याय मेगारा पामेमप्रतिपादित कर्म और अपने प्राामा में प्रिय प्रांत मिसो मामा गहमा समनापब मेचर पर्म के पाप प्रोत् पनी से धर्माधर्म मामिल होता है। दो पापाव रहित स्पच सत्यम प्राप सामसपा परिमागरम भासा रसीप राम धर्म और इसे विपरीत को पारित अम्पायाचब सम का त्याग और प्रसमस प्रारूप की सौको प्रधर्म पते। अर्पकामेपसकानां धर्मपान पिधीयत । धर्म चियासमामानां प्रमा परम भुति । मषु ॥ रो पुष्प (14) पुकारि रस चौर (सम) बीबवादिनी तो बनवान प्रासबो भर्मान कापा. पेर सारा धर्म निभा में सकि भाजधर्म मि बिना पेर मेकरहीय. म मर भाचा भपके शिष्य को उपहेगौर विशेषम माइवर परिपप और राम शुद्रों को मी विच पम्पास माप मा। वीकियो मापनेस रिभ्यासको भौर परिचादि में दो विप धर्म सम्म और पनादि रिमी नहीं हो सन्सी । चौकिमाम्प वोट पाने पपने और परिपारिसे बाविसको प्राप्त होगाचब भारत मसाले । बापिसमाधीय और परिवादि पाबामाता और बगावत परीषक पराठा बोबे से प्रामवादि सबसपारी मेंबर मोर बामियादि पिार होते र माप मी प्रषिक विवाभ्यास और धर्मपप में और परिवार पिायों के सामने प्रावर पम पम मी बीमस और बर पनिपारि प्रतिमा होते है तो सा अपये मन में भावमा प्रवे मारे। इसलिये पण मी अपना प्रयाई वोलविवादिको पदादि समास मपभ्यास प्रषिकप्रपा मे माईक किनारिहर में राम और अप्मी को मिरवारे मी मिस महीपते इसधि विहार में पापाठी भी नहीं से सौर पर पवमा मरि मुशिश हीच में मौ पारम्प मपर्मयुमिमा मपम नहीं था एम्मा इससे सिर पाकि परिवाहिनियम में पाये समय और संबासोवण मारपीर मम्मी मुभिषम में सामने अधिक होते हैं। इसरिपे सब पी। मे पुमरिया बीर माया ममय होनसी। - सध्या प्रकार बोरपाय परोपममा कम पोमोलोग 1-पाच पांच से होती है। एक-बोचरपुष में स्माल और सैन्युमो यार सब मौत उससे पिम ममाम । एम- यो २ महिन्म मे पान र प्रयोग २ पत्रिम माप सप ध्मबी मेमोकिमिला माता पिता के पोप मे पात्र सत्ता मारेमा काम सरिम से विमो से मर्षया प्रमपी मी-प्रात भाव गो धार्मिक पिम् सपथरी विकारितामा परेको बम रेप और मो. मिरमा मौरी-अपये प्राप्मा की पविजामियो अनुमति मा अपन भेसुम मिलन हुन पप्रिय १ समपरेना में भी किसी को ना तोग मौसम और सप होना और पांच- प्रमाय प्रभाव पर अनुमान ग्पमान रूप ऐधि, पर्वापति मम्मान पत्र। इम से प्रारम्बादि में बोनीचे सिमी र बम्पापाय बम और दिनीय मानबमो। इन्द्रियार्यसभिकर्पोत्पम्नयामम्पफमेश्यसम्पमिचारि म्यवसापारमडम्मत्यम् - साप सिस.. बोलप या भोर प्राबसयम प प रस और गन्यमान प्रतिसाद पाहाताश्रमासाम मबमधीर मनमा आम संयोग मेयर शाम प्रापसमजोमसोच पद संधाम मे सपा होता पशब बोमा सिमीती से किया बारे सोपाम रोगकि " पार पान्नुमा सो प्रमों की सेवा मामा महान माना है। किम नपा प्रसम्म पो मतवा और मोसम मेमोरी पासमानिया'मम्पमिचरितमे किमोबेगम सम्झेको देवासप्रमियर बिना पसदिय में ग्स रेसापुरमात्र माम सम्मान से निवासी शाम ममाम समितीमो प्रया मोमगा"मामाबिमा मेस मे पाग मेरेवमादि पोलीस भरनामामामार" रखता कमि हो सकप पसनीति अभपोस्य मममियर और मिनरामी रसीएम इसग भनुमान- मथ नरपद वियित्रमनुमान पपवष्ट्रपवासामाम्पतो एएच। ज्यापामा ।। यो परमभन शिममकाई सम्परा प्रम्प सिौ बाम भर में सा मुम्मो सनबर रस से मापी करेय माया ये मप्रपामा प्रशन होने दे अनुमान प्रते है । से पुरेप ।
चवीपसमुशास' पिता परतादि में एम को रेसप्रति बपत में पुबम्ब रेसले प्रयाम शाम होता है। मनुमान तीन मभरम। एक-" मे अवतों मेरे पा, निदेवले सम्तामोपछि पाने परिपापियों में रेप विष्य रोने अनिमय होता है इष्पादि यो माप को देवमर्षभ शाम होगा 'पत' । सरा-रो प्रोत् मर्म को देखने परप प्रधान हो वैसे मदीमामती रेल पर क्योभोरेस पिता कापीको देवपादिप्रयता को परम और प्राप पुएब - पायरेख मुमदुमाधान होता है इसी को नाम तीसरा- सामावतोप"बो कोई चिौमार्य भरण हो परन्तु किसी प्रमाप्रसापर्म १८ दूसर पाप हो से कोई मी चिन्म से सर एशन को नहीं पा सकता से ही मामी स्वान्सर म बापम पमय कमी नहीं हो सकता । भमुमाब सम्प सप पीकि "मनु भर्थात् प्रत्परस्प पश्चाम्मीपत बापत पन तदनुमानम्" बो प्रयापमान सपा से एम प्रम्मत के विष्य अप अभिशान कमी नहीं हो सकता। तीसप उपमान- प्रसियसाधम्पान्साच्यसाधनमुपमानम् ।। मा यो प्रसिर या सापम्म स साम्य भपात सिरम पोम्प भय से सिदि भो म सापन हा उसको रपमान भते है। उपमीपत पेन दुपम्पनम् स रिसीवेन्सिी समसमा कि विममिको मुलध" पपेश 'मैं रसम कमी नहीं खा उसके स्वामी पेमा किन पारेरचाहमामित्र समेसी पपाय सोतो मम्म अपात बायपार होती. पाप गप्प और एसके पथ्य सारे किम्पपविया किमही बिममा समाना। मम किसी पर में मिस पयो पाप गुस्स ऐप स्पो नियम पिपा किसी प्र बाम गस्पी. पौया शप्पप्रमाण- मातोपण शम ॥म्पाय मा .... गोपाठ पांव खपाल, धर्मामा परोपम्मसि समय भी मिनिर पुल से अपने सामान से मार शिपमे सामो समीपम को पा से प्रेरित उप मनुष्यों पाया पो पर्वात् [गे] सिभि स मे परमेना पपन्त पाय भवाब म म यो पेसे पुरा और पूर्व पाठ परमेवर उपदेश रनो सम्पमापस। - और प्रप पुस मापापमुपपुलर भगा।
सत्यार्थमा पांचयां पेशित-पतुपमैतिभापतिसम्मवामाबमामपपाद । को इतिहाद एयरबस दिमा पोत किमी बीमा याम देवि। क्ख पर्यापति- "मर्यादापयते सा प्रीपति केनपिम्पत 'सरस घमेपु पणि सति कारणे कार्य भवतीविक्रिमाप्रसम्पर्व सम्सुमोपु परिरसति कारणेपकानमवति"tafमावेसिपी से प्राकाराने सेतो और भावो मेसर्व मप हो इससे विमा सेवा सरी पत सिरोवो शिपिया मारा और पिन्य भरवा भी बहीरो पत्र। सस्तों सम्भव- सम्मपति पस्मिम् स सम्मद को को 'मा पिता रिम भन्सायोपचिन्ता किसी के पतक विसावे पणा म्म समापवायमे मामे किसे परमेवारण म्मुपोमीप रे बार कमा पुन पार पुरी माविका प्रमादि सब असम्मासिस परिम्म मेलिमाचौरमा बास पशिममारोपी प्रमाta पाठया प्रमाण- 'नमावि पसिन् साम्मान" से किसी किसी मेमाकि पी पे मापसी ऐममा हामी पपा से प्राप पार प्रमाण । इब कोयम में पतिए और मनुमाव में भापति सम्म और धमाकी परागो र प्रमाण पते। इन पांच ममर परी पलायनमिकर मनुष्कर पायाची धर्मविप प्रधवाद दम्पगुणकर्ममामाम्पषिरोपसमवापार्या पदार्थाना साभधम्म्या स्वमानामि भेयसम् । बर ममुण धर्म पोम्म अनुपम ये से पारित होन"पाप" पर्वाद बो धर्मा पिप गौर जब बीसबर्ग मिरर समय इसी प्रभा से इस एप, पामा विशेष और समय इसका पानसर मेगांव लम्पसाब से निसर" मोजमसरोवा प्रषिम्पाऽपस्तमोवापुराकाएं कालो दिगारमा मन इति द्रम्पाणि ।भा । १. परिणी जम गया, माण मा वि मामा और मय मानो फिया गुणवत्समसायिकारपमिति दम्पमपणम् * सर्प-विमोचि मरबार मामी मम्म सेप्रमाथामी।
वसीपसमुशास प्र " मिस पुपाम विपसे परिमस्वत् मागुपगम्" विसमें मियाप और यस पुपरसम्म है। उनमें से प्रपिगै बजार पु, मन और पे मम मिया भौर गुमाया शमा पर और रिया ये वीर विपरीत गुपपने हैं। (समयापि) "समपातु" शीर्म पस्स वत् समवायि माम्प्रधिस्य कारण समायापि च वस्कारसं प सममापि फारसम्" मते बनायम्बो मिठये के स्पागपुछ कम से प्राप पूर्वपलो रसीको द्रम्म मते है। जिससे मलाना आप पैसा प्रति एसपना बरसको पायम।।। अपरसगन्धरपथपती पुषियी। म स्म पर पन्ध सशसी पिसी । उसमें म रस और सर्व पनि सौर प्रयुके योग है। न्यबस्सिस' पूपिम्पों गग्ध ॥1 मिली में पम्म पुगस्यमादिकापस हो यसमें रस पनि म मापु में स्पर्य और पामय में यम स्वामाविक । रूपरसस्पधपत्य पापो द्रमा स्निग्धा . । मा..म् ॥ म रस और सीम प्रसूत और प्रेमप बामवा: पान में समरस स्मारिक गुण ठप्प रूप सर्ग मि और वायु पोप से॥ भसुधीसा ।। २1 सू । पीर बस में ग्रासपन गुय मी स्मामापिक एये रूपस्पश्यत् । म ३ । २ । ३. जो सभोर स्पर्गमापापा इसमें म्प स्मारिक और स्फबारे बोगस स्परायान् पायु। म स्प गुपच पर पातु इसमें मी सम्पख हौतम र धीर जय बोम से पते॥ प्रकाशमवियम्सम माम् ॥ सारस पम्प पर ससमय में मशिनु मदीय प्रगुप" निमम ममानमिस्पाफास्यमिाम् ..भ रामाराम जिसमें प्रा और सिमानापमानित कार्यान्वयमापुमापाप शम्द स्वरापतामगुष । ॥ पाच पिी पारियों से मममने से यम स गुपये मामि परिभ गुपनि पम मामय गुप अपरस्मियपर पुगपपिर पिसमिति फालविवामि । जिसमें भपा पर पुपपत एम्ण (पिए) पिया (निम्म्) हमादि प्रोपवे समरप्रवे।
सस्यायप्रकार . ॥ निरपेप्यमापापानिस्पेषु मापात्कारणे कावास्येति । है. सभा २ ।। यो विम परायों में बसे और प्रनिर्मों में दो परिपे परब में हो सकी। इस समिति पतस्वदिस्य विषम् । म मा । । पहा से पर पूर पपिय पत्रिम रचर सर नीचे बिसमा म्यार रोची परिवार है प्राविस्पर्सयोगाद मूतपूर्वादु मविपतो भूवाप प्राची । ।। 11 मिस भर ममम पापिनमसंबोय भाम रसको पूर्व दिया माये है। मोर मा मत से इसमे पमिम का। एमिपुर मम पाहिनी मोर पिव और पर मोर रचर रिण मारे पतन दिगम्वयामि म्याथ्यावानि नामा पार । इससे पियरपिता को भाम्मे परिव परिसमीप कवि पमियर पीने परवी और जबरको पेयपी दिया। पापमपमसुखदुख्यानाम्पात्मनो निमिति॥ भासू । मिसमें (क) ब, (पेष) और (मा) पुस्प मुख दुल (बाम) मामय गुपयोगमा (भाव)ोक्ति में इमिग- मासाऽपानमिमपोम्मेपनीवनमतोमतीन्द्रिपान्तपिकाप सुपर पापमयसाभारमनो बिहानि । काम ।। (प्रब) मीम रेषामे किसना (भाम) मार से बसुको माता मा (मिमेर) जमीचे संकप (गम्मे) पांच कर सम्मा (औषय) प्रया पारवरण (मला) मा वियपा भाव (पति) पड पमब प्रणा (इन्दिर) भिवोर पिल्लों में चाय पसे विषमा म प्रारममा (समिर) पुष तुम कर पीला भावि किमी महोबा मुष दुत एकल चोर प्रसव प्रामाणिमयो कर्म मार गुबी। युगपग्णनानुत्पचिमनसो विजम् । म ।।।।। मिस ए.ब में दो पक्षों में मर (भो ) भाबनी रोग रममे मबमठे. पर प म सम मोर माया पर पुषामठे-- परसपाधस्पर्ण सम्पपरिमाणानि पृथत्व संयोमपिमागी पप्वाम्परत्व पुराप' मुबपुर इमप्पो प्रपनाम गुम । सप रस म स प परिमाय प्रवास, पोप विमाय पाल अपर पुरि, मुख दुम इप्पा, रेष प्रथम गुरुप मा मोसम्म पर्मपर्म और म.गुपए है।
४५ पतीफ्समुहास दम्पामम्यगुपवाम् संयोगदिमागेष्वकारस्मानपेस इति गुमनामम् ।। गुण रस पते कोमप्रसव से अन्य गुणप्रपार मे संयोग और विमाय म भाव न हो (प्रबफेट) प्रांत एक दूसरे की परेशन. मोनोपमपिविनिर्माण प्रयोगेवाऽमियमित माफशय एम्प । महामाम्पे प्रत्यार पाकि॥ नियमोती से प्रसि मोरिसे माराम पोम और प्रयोग से प्रक्षित तपपामा मिसन ऐप सम्म प्रयोग से नियम मावोपम गिरा से विध मिति प्रमेक प्रकार प्राप पारेप रस पासिम से विमापा मम मच से विसन प्रपती म पनि बरि मन बिस होती पप्या शिपसे ठोस पाद एम मारी पिरिव होताप परिमाए एक से पाप होगा पप्रपात एक एमरे पाव मिपमा पसंयोग एकसरे से मिले हुप कामे होम्मा दिमाप इससे पा परीय पर शम्से माग मार, जिम्से भनेरेसवाब होतापनि, बाबा नाम पुष पोल ममाम हुम्बापा-पोक-बिरोध (स) पोड प्रामा पुसा (एस)मारीपन (प्रस) पिसा (स) प्रौति मौर जिम्मापन (मर) पूसरे के पोप से प्रहमा कहोगा (धर्म पापामार मौर भीममाधि, (पर्म ) अपापाचरब और पम्मिता मे दिम फोमबता में पोलीस (२७) गु॥ सरपक्षमयोपसम्मकथनं प्रसार गमममिति कर्माणि॥ 'उत्तपय स्पर को धममा पसेपर मोचेको पद्य मा 'मम' महरोष प्रमा 'पसार पसाप गमय' पामा सबा अममा सापिसकर्मचार- एरुद्रप्पमगर संपोषिमागेपनपेदवारसमति कर्मवतमम् । "एकन्द्रप्पमाथय भ्राधारो पस्प तदेवमय न विपत गुणो पस्प पस्मिन पा वगु सपोगपु विभागपु चापहारहित कार कम अपसम्" मा "पत् क्रियते सत्कम सम्पत पम उमरणम् कर्मणो मसब कर्मचसम्" इम्पो मामित गुली से हित संग पोर दिमाग ऐसे में पपेशावित भय से उसमे में पते। रम्पगुणकम वष्य कारणं सामाम्पम् । म भासू 12 जो द्रम गुरु और मनभरनोप मामाम्ब इम्प. पाणा दम्ब कार्प सामाम्यम् । म 11.. २६॥ से नीमनीपमापन स सब में सामा।
ब्रम्पत्वं गुणत्वं पर्मवध सामाम्पानि पिरोपामा प्रमो में अम्पन पुगों में गुपएम कमों में कर्मपपरे पम पामय और जिप मालकिनी में ट्रम्पय सामावर गुणा कर्मच से दम्मामा मिषसी माम जाना। सामान्य विशेष रवि पुरुषपेतम् । म आमा ।। सामान और दुरि अपेक्षा से सिम होते। --मनुन बपिनों में मनुमाव पामान और स्वपनि से फिरोप क्या बोल और पुस्मत इममें लिया गाम मौ बितेप है। माम मनिी में सम्बन सामान्य और सरिनादि से विशेष इसी प्रभार भनो । देवमिति पर कार्पकारपोस समाप । काम मात् पापी पों में मिम मिाण गुर गुखी अवि मलिममा प्राची इमलि पसलहोने मे समय मावा और बोगरा मोम पासर सम्बन्ध रोगीपोप अमन भकिन मम्मी ट्रम्पगुपयो' सनदीपारम्मकत्व साधर्म्यम् । प्रचौर गुपससमान भावीपर्दम माम्म होवामने सापपासे पथिका मात्र पर्म और पयदि सपोपारकर सप्त पसेहोबा में मौसम रहिम प्रादि स्पसण्य समप्रारम्म प्रमियी सायबर और उस साप प्रपियो माल चोर 'अप्पगुपयोषिजातीयारम्मकस्यवेयर्पम्" यदि पाकिलोम और एमिर और प्रभारम्म रेग्सको यमनसे एग्मिी में गाय एका मर गप पम पम से सिर बरका अकोमाता और स्पगुपयुष्य सपियों से मिली। कारणमापास्कार्यभाय । म ।। ।। ।। पापहोवे होमर्म होगी। म कार्यामायास्कारणमाय ॥२ भ ताम् । मरममाव पापप्रममावही होता। कारणाम्मापात्पाभाय । म भरण बरोबे से मम्मी भी होगा। कारणगुणायक कार्यगुणोए । म मा। २.. सेमर में गुबह होम महोते हैं। परिणाम दो प्रमाणा- भए मादिति सस्मिम्पिरापमावाविशपामापाय।। -- प्रा. राम दतीपसमुशास' (मर) सम्म (मह)पा से अपरेश पिता मे चोय चोर महासे पाणि पहा विी से बारे और गौ सेने समिति पतोत्रम्पगुवकमसुसासचा धामा ।स् । यो द्रम्प गुरु और कौ के सत् गम अम्बित रायो भयो सह पप्पम् सदगुस-सत्कर्म" मत् द्रम्म स गुप सत फर्म भात म्मान ममी ममममम सब स्मक रहता है. भाषोऽनुएत्तरप हेनुत्यासामाम्यमेप॥ भ्रामा । । बो सब साप प्रमुल्लमान होने से प्रथम मार है सो मासामान्य माती परम्म मावस द्रमाम॥ मो अमाप पांच प्रभर महोतt- मियागुणम्पपरेशामावारमागसत् ॥२ म हिमा और पुष विरोष मिमिले प्रभाव से पक अपात् पूर्व (भपत) ५ पा सेस क्यारि उत्पतिवर्ष नहीं पे इसम्म माम मामभाव । इसरा-सदसत् ०६ म गोरोन से प रत्पादोबारोपमा मसाभाव पारे। तीसरा-मपासत् ।। कोहरे और पहले से "प्रपौरपोमो गौर' पर बोला गाय या चार प्याब पोपाही पर्वात मोम पापमोर माब में पोनप्रभाव और मात्र में प्य पोरे पोरेम माया मनोम्पामा माता। पोथा-याम्पदमदतस्तदसत् ।। म यो पूतीमा पानी मे मिस ममन्ताभाव पते ।। स- मात मयुप्पमसी पुण" भामराम और सम्मान" समापुबइमादि। पचिपा-नास्ति पटो गाति ममो पटम्प गइससगप्रतिपध। . मामही भान बापत्र सायबरे मामा मत पांचममारम- स्त्रियदोषासम्हातापापापियाम इन्द्रियों और स्मारोपपरिया सपना ना एयाममा म रोपाव विरीत ज्ञानी सो परिणम ॥ मगुर पिपाम ।भारामू १५ ॥ म भार पर्यावरण शनारस पिणमत है धिप्पारिकपरमगरधराया प्यानित्यस्पारनिस्यामा 10 -रिस भरप पप्रच॥ पर पयोम्या .ामा समाधमकाय एतेन निस्पेषु नित्यत्वमुखम् ॥ प बोसम्म पस्मिादि पदार्थ और मम स स प स पुष पत्र मामिल होने से प्रमिव और वो सपने बाराम पणिमारि क्लि प्रमों में परिणीमिली। सदकारपपधिस्पम् । पापा ।.॥ बोनि से मार विमारको गीतमा पिलो पार "किलको प्राय डेसर्वस पुषीमित्वमावे। भस्मेवं कार्य कार संयोगिबिरोधि समयापि घेति लेशिकम् ॥ उसका बागमारोवापि सम्पावि गोभिएकाममचापि परमिोषी पायम कि मर्मत सम्भन में अब हवा. प्रमादि मे प्रान्त परिवाना संपोम' मे सार मायावत्यादि ममिव संबोमी "मानदि पर भर्ष दोप समासेम्प पनि समय मोपास शीहोपडी प्रिोपी धिरे। 'माप्ति' -निफसमर्मसारिस्पमुमयोरेकतरस्प बाम्माप्तिः । निस्तकापुनपमिस्वचा ॥प्रापशक्ति पोग इति पग्रिन' ।। सन्धिमा ६।५ बो बोपों पान सात सिरमो बोनस मिमिा माग ब दोनों प्रकार साबममा विलित पर्मम पामरी मासि प्रोसेम और भग्नि साधर मपण बोपम डमको गित हलि समाचार पर माता में सम्यम विना प्रियोग मोम मे पारसी माम म्पाधि सर्वात पनि म मेरप समय में जमादि पार्ष सम्म र है। मान्यपि म माविन्यपसारमादि में माता धर्म सम्पप्रामामि है। विभाषम्म और गधिमा भापाररूप समन्वय समिति बारेमाचार पतीचा मजेपर और पसाबबच रिवाधिों में सम्मोपमा मही हो पाता। नियम को मा ग्याकमा मेलामो यो साम मोपाव पाय को परीक्षाविद र २ प्रमों में पारी मेकि- मतसममाणाम्या वस्तुसिमि: माय-बसा वि माती पिषी यो निकोप पण और पारिसमाब इममे सवाऽसत्य और पदामिगहो इस विवादमी पाता। म में परे सर पर मे समारो। - पवीमसमुन्नास t अप पठनपाठनषिधि अब पाये पानेमामा सिखो है-प्रथम पापिषिमुनिका गिलामो किसूपस्सी रस ठि प्रात् इस अपर मया स्पाम पर प्रबल प मम्मी से 'प" इसन मोर स्पन सा प्रपरा और प्रम तय भीम की बियाकामी प्रपपाता। इसी प्रथा पोग्ब सब मारो परधरण माता पिता भाच सिपमा । नम्तर म्मामा पर्वात प्रपम प्रयाम्पमा पूर्ण पार से वृश्रािदेषु मि परपास वृद्धि भात् ऐच् वा मारयु"मिसमास "माबऐषभावस्"भोर से मारेचा पूयिसपा घियत" भात मा पे, पो की मिसभा की सीट परा यस्मात्स वपरस्तावपि परस्वपर तमा निससे परे और जाम मी परे दोप पपर पायी इससे न सिर मा यो धान से परत और द से परे पर मोमी पपा पर पाबन पाकिसोर प्मुख कारमा । गरप ( भाम) पहा "भम् पातु से 'पम् प्रपप के परे का मे इसका होनबोपहरोमा पथात् 'मम्प पी जा पूष मारोपर समर मेहरिसंशक भामर रोपमा रातो मार पुमः " को गदो, पम पाप मिस. 'माया' पसा श्यामपा ।। पम्पार" यो अधिपूर्वक " पातु सब में 'प" भर परे "रिम रस माम्" रोमिय 'मम्पाया ॥ माप यहां भीम" पातु मर ज्यान में "पुर शाम • परे प' पर और उसमे प्राप् रोम मि . । पौर खा" पाt "" पान से एम" मय हमरस समस्मान भो' रि पारण हम साम्रा में मिस गप्प तो ताप (B) मनु मे पापे “पार" प्रसव कीचा होमोप""स्न में महमारेय भार परमाब में मार मोम मर" सर मा।। बोसापाये पीप बाग में पेपन म सब बता र पौर मेर अपय समास पर Ranा म पर से "पाप" इस ममा पा प्रथम पमा म भिगोप में 'भन" पमा स मिमे प्रामा परि मोरपान में "" ऐसे में मामाघमा समर में मिग अने मे ममा रण पर ग्मा इसा स्थान में रोम पुका रमारम भोर एयवेपद मापर' एमा बरकरार में (मिमीन प्रेममा पमपिर। सिरमोर्वशीय सभेस पर विप म प्रममा सम्म पाने सागवता है। पवा सो मा पाप्यो पनमा मल और जोमय भी मज समय माया मेरा पण भरमा मेरो ने मायक सस्याबमका पासव मौर मोबो नहीं पाया हमेपादि से स्वास पुषको सो सम्म वहीं किबो हो परोपमाध्यम बोपी होम म्स मा को पासप परमेश्वर में स्थित होके मुखिसी परम्परको मास होते है। इचिपे जोमपापा पाप हो पबशाम सहित चाहिये। इस प्रथम सब वेदों में परमाणे भार को पाक समुत प्राषि प्रापि मुनिश्पीय विवरण रसमे वर्ष निय, सन मेदय, आप चिम्सिा विग्रन चौपण पप्प परोप, रेग मापौर सगुष बापक (चार) वो भी पों पर । सानम्वर भर पर्वत को समम्मी मम मा पो मेर पर मिन रामपसम्मम्मी और दूसरा मगासमयी होता है। रामर्ष में समा सेममा प्रयास दिव्य माया पास मोव रिसको मात्रा पर मोमो किसी पे का समय में भिमा कमी होतो रसमे पप सी और बोमबा परिममेव प्रसार सो सोमबापू सर यो प्रसार दूरों को पाचोरपरा मौके पासण म मा सब मकर सोच ।। इस पविकाको दा २ वर्ष में सौर चार किमिस पपरिया मते रस में स्वर रस्म मियी समप मा प्रम दाम परिव गोय भाविकोपमा सौर्य पान मुल के सामने माप परिणाम पीवर मारपसरवा पारिबोर मा प्रपोग्बो परें पर मारे परम मौर विपसमिरमागियों के परमपम पर्व भाखाप कमी। मजिसमे शिलपिक वेग्मभे पर पुप पिाव मिया- कौत मामाविक पापों मिमोर प्रधिकी पामत पर्यन्त की विषय को पचात् पौसममी बो ऐबोनाफेमसीस दोस में मोतिप्पा मिमापि विसमें पासपचित पर, भूपोस समाप और भूपषिमा इमभेषभन्न पावर कपास परम की इस मा हम्मा भरिको सौः । पानचिठवे म मा सम्मपत्र पति मा मारिरियम बने सम्मको पर भीम पास । पेण या पामे मोर पसाब पशिरिमसे दीप प्रोप मान सम्म मिनिमम मम मम मममम म पर भाबम में सिवनी विमा हप विप पानीमा में रोमी मी मामाण्यम माहीती अप्रिपात प्रवीणपिये साप चाहिये कि पिम् पर पातरित और पांमार बपि मा बाबत गाव मोर विधामा पासासहित रम पमरे पर भासद पूरमीमांसा पर समुनिम्न माय शिर मौतममुनि म सूब पर परस्पायनमुनि भाप्प पतम्मभिमुविधा स्त्र पर दतीयसमुहास पिपमुमित सामसूत्र पर मागुरिमविता माप प्यासमुनिलाम्तमूत्र पर परस्पषममुविझत माम्म मा बौनामुनि माय सिदित पर पारे। इम्पादि सूत्रों को प्रपमा में मी मिन्नचाहिये जैसे पायल, साम चौरमवई नारों पर गश्ती से प्रेतरेप ण्ठपय सम्म और मोपयो मामय शिक्षा म्स म्याप निप, निमा और मोतिपदामा मीमांसारि कागात रपार भापुर धनुल गान्पनि और प्रक्रियेवरों के उपग सब परि मुनि किसे प्रपो में मी गोर विस मीत रों ग्न २ बोर यायोकि बचाव होने से नियत स्त-प्रमाण प्रांत मम प्रमाण देरी सेवामापारि सम प्रम परत प्रमाणपत इमाम प्रमाण पेरापीयर की मिशेष प्य ब्रम्हरिमाम्पममि में देस सोशिये मोर इस प्रब में भी प्रो मितीन अब मो परित्याग बोम्प प परिगवन संप से किया माता मात् यो बारे सिती पाम समय परिपे । मानप मैं मना सारस्वत, चमिम मुग्पोप कौमुदी रोखा मनोरमारि । योग में धमरगरि बमोमय में पचरमादि। शिक्षा में प्रय शिक्षा प्रययामि पाणिनीयंमत पारि । मोतिप् में पानोप मुस्लिामविपादि। मम में पापिममेद, उपसपासम्म मुरंग माष मिासामीपारि मीमांसा में धर्मसिग्नु माथि कोविक में तयारिमाप में गदरायो पारि। योग में हमापिपारि । म सानोमुष्णादि । बान्त में दोपरासिट पपरमादि । रेड में थापर । स्पतियों में मनुस्मृति प्रपिस भोक पौर प्रम पर स्पति परम्यान सर पुराब सब उपपुराय बसाहायन भामरामापण मिमपीमापारि और समाप्रपये सर सोमरिकन मिपा प्रम। प्र-सब प्रमों में ममी सत्य हो ? 3०-पोदा सम्प तो है पर इसके साप गुलमा पसाप मोरे इससे पिषसम्मकाप्रपम् स्याम्पा" से पापुष्म प्राविप मे पुक होने पर गम्य पतासे प प्राप। प्र०-पण थप पुराप इतिहास में नहीं मारत ! 1.-दो मावत परतसमको मानते है मियामो मकोय पल मोर नमिप्पा। 1.-मात्मणानीनिवासान् पुगपानि पत्यागापामारणसीरिति । पर परिवारो परेप पठापति समय पिये ग्गादास, पुराप मा ग्यपा भी मारमा पर माम भीमग्राम माहिम माम पुण्य॥ म.-पायों में सो रोमा सस्याप्रकार 'मम" पात्र अस्थर से थावोमुत्सर्गे" मम मिार्म पपरा से वो भावयन्त पाउने प्रपन होने पर्मात् जो गुनाफा मैसा किम्मोपपर बया हो तो पर भावों से 'म मास होवोससे विशेष प्रोत् मस विषय उसी सब विश्व में से भरान्त पातु को "मारे प्राणप्रबिया से ग्प्सर्गविषय में अपदस्थाकी अधि होवार से अपना पत्र के विषय में समर्प पत्र की प्रवृत्ति नही हवी । से म राबा के राम में मारपिक और भूमिपी की प्रतिरोधी से मावर्मक सम्पषि रान मार्ग की प्रतिमा होती, इसी प्रकार पाचिनि मानिये साल को बीच में अग्रिम समर्थ पार सम्पादों की विम प्रविणविक की। बातुर • पन्त ग्यागियो पाने में सब पुषन्त विषय पर कमर पापुका सरोपरगा सम्म पान पार्षिक भरिन परिप्रभा की समापूक परम्मामी विवाधि पाये। वरचम्म मामान पाये। मी जो बुरिमा पुस्पर्मी बिपी विधारिसे बिल्ल परे पर होगत में प्रद्ययावी और गर्म मे महामाय पर तीन वर्ष में पूर्वलामा होमरिक मोर पौकिन शादी अम्मामर सपा पुमा सम्म सामी कोपमान में पा पा सकते हैं। किन्तु सामा परिभम पाय में दरोगासा श्रम मन्त्र साओं में करना नही पता पौर मिठाग इन पाये जीव मरम्मी रसमा प F प्रमोद सारस्वत चन्द्रिमा मुरी ममोरमनि पाने से पचास में भी पी सम्वा । तोकिया महायप मामासमा से मरम् मिपा पपने प्रया में प्रमाणित पिसा इस प्राय ममुमोमीपत प्रयासमोसन्तामा प्रवासमा महकोपया मपम पर जिस प्राय में समय बोलाये पर बीमार साप मोमो को मरमा पेपो रोपी किमाने सम्मि रचनाको बिसब परिप्रम मे पास बाम म्म समे पहारा बोरम गोमबाम होगा और भार्प प्रोग्राम ऐसा किया । यो स्मना गमत मोतिनोभपाय। म्समारोपासकषि विर पार निकायबाट माही मैं पापा परबार पक्ष । मन्त्र बास्तिक भमरणम भनेको बोरशरमार पिश्यचा मोम निमोरिक परिमोम परिसन मीम रमपोर कवायेमी वयात साध इम चौरमा पापा ममाये में सौपा पम पम्।। बीर मन भारि मस परिस्मस पों में बमबोर। पापात् मनुमति पामीब पापण और महाभारोपपमर्गत शिरमीति भार पप समय निमसे मान रो पौर रमवा • सो पारेवाभावी प्रचोरो।
दतीयसमुनासः सम्पत माह से कोसबरीति से मौत परपेव पार्षकि भन्ना विशेष्य पिपप और मायाको प्रकोप बगावें और विद्यार्थी मोम रास्ते पौराहमको मौतर पारें ।। परनन्तर पूर्वमीमांसा कोपिक नाप योग साम्म मोर पेगाव पात् यहाँ तक बन सकेमा पिनाम्मासहित भषण उत्तम विदामों पर माल्याबुक पा गाी को पा पाय ! पास पाठ के पार सय केन र मभ मुपम मामूल पेमेव सिीय शालोम्प मौर समारमा इन पर उपविपदों को पाने का प्रायों के माम अधिसहित सूत्रों दो वर्ष भीतर पर और पा । पाप का बी के मौसर परों ग्राम जात पेतरेय रासपन साम और पोपण प्रबों रेसदित चालीसा सप पर्थ, सम्बन्प सपा निम्य सहित पाय मोम्मी । इसमें ममार- स्याशुरूप मारहार: किलादृषीत्य वेद न विमानात पोऽयम् । पोऽयम इत्सम्म मद्रमश्नुते नाकमेति शानविधूतपाप्मा || बिर 15॥ या विषय में मन्त्राबो के मेवा भर पम्मान पानही अपना पैसा पर पडी पचे पर और अन्य पथ पाव भाविकामार माता से मारणामा मा रमापा । मोर बोसो पम्य और समापन प्रामवाही सम्पूर्ण मानम प्राप्त होगात पभाव शब ये पापो को हा पवित्र पर्माचरयो ताप से सोनम्र में प्राप्त रोष। उप त्यु परयन ददर्श पाचमुव स्व शृएवम भूषोत्येनाम् । उनो स्वस्मै तन्वा विसने जापेष पत्य उशवी सुवासाः ।। यो पपिपुवत हुए नहीं भुक्ते देखते हुए नहीं देख बोबसे पीपेत अपांव प्रश्मिा पोप इस मिस एपी राम वही बाम सक। किन यो जम भय पर सम्बदमपनने पासपो बिये मिसे अमर बम प्रामुल्य पारपती अपने पति को सामना करती मी अपना पौर और सम्म मत पति पामये नवी से मिण पिान लिये परवे ससमय प्रतीपिानी सब महाँ। शुचो मचर परमे म्पोमन् यस्मिन्देषा भधिषि निपेतुः । यस्तम घेद फिमृपा फरिप्पति य इचदिस्त हुने समासते ॥ .मा १९७ में 14 मिस र दिमाती सा परमेशर में सब पिन और पश्पिी मर्म पर पर पोटरिस कि निगम प्रब को प्रमुप्प वापस सत्यापनका प्रमको बोगी बता पर बम्मेदादि से प्रमुखको सम्म बी. किनु पो ही को पर बमोमा पोपी रोकर ग्य प्रम से बाब परमेसर में स्थित होने मुष्मिी परमानम को मात्र होते है। परिने बोस पायप पत्रमा होप प्रवास परिवार । इस प्रथा सब बड़ों को पाले भाग मात् यो बफ सव मावि पनि अभिषयोत पंचरणमा रसपर्ष दय, सारव मे रेप विडिया नियर पीप, पप्प और ऐश प्रमौर परेप बाम (चर) के मीटर पर। उपमन्तर पर पात यो राजपम्पमा प्रम मन्त्र इसा मे एक विश रामपुष्पसम्मापी मार दूसरा मयसम्बन्धी होता है। परम्प में समा सेना के ममा रविण गायरमूपिम्पास भाव विसको पापपर" प्रते? नो कि तुओं सेगमाई के समय में नया ममी हवी सभे पण मी मोर बोम्मा के पास भार रिकामे करी ममे सब बाब सर मयको प्रसार दुरोको पपापोग्प पराप के पास पर सब प्रभार सोप इस राबविधाबार में सीवन पापार किरियो पापिया भवे उस में सा राप रापियो समय प्राम वाम परिध गुम्म गीत पारिको पत्र सौर्य परम्त मुहमले सामन का पाम परिपरमर्षक सी चौर माररसीता पानि जो १ मा प्रत्यागमन पो पर मारे काय मोर विवासभिरकागियो परमयमा म बाप भी बनें। पर कि जिसमे मिरविण पोपने पार्य गुव बिार रिमा. कौगर प्रमाविष पहायों का निर्माब विमामय परिव्य को बयत माव पांव जो ऐच को बनेपामय को पांव दोस में याविना सूमियतापि निगम पौरपविध क, भूपोल पाच पोर भूपविधी इस बध्यक्त गोमात समारोपण प बामहामार मान। परम जिसने पापा जम्मपर मा धारिलेस रिपाल मलम समय मोबपर मोर पापणा पाने भोर पाय पसे में किनियो म पोप भौय सम्म सिम माप ममत ममम । खियो विष्ण म वि से बांध परमर में सम्दी १वी मरममा बाम मौनी दो एन्टी। पसिया प्रोपनिये पाप पीये कि पिम् पर पास्ववित और पाया मरति भी जो पस पात्र और शिसभामा पपक्षमता वाले एक भासे मीमांसा र रापमुनिमाम्य विक र मौतममुवि मा मत पर मनमुनिल भाल पतविमुमिन एव पर प्यसमुभित भाग पतीयसमुशास' ५३ 1 पिनमुषित समन पर मारिमुमित माम्म म्यासमुसित देशवसूत्र पर सापाबानित माम प्रयप बौपापलमुनिल मान सिरिव पर पाये। इम्परिशों समा में मी गिबन पाईये से सम्म साम पौरपर्व भारों रात से ऐतरेन शतपम सम्म और पोपप गाणे प्राय शिपा प्स म्भव मिग निकम और मोतिपयन मीमांसादि कागा देगरपार भापुर पग गाम्पस और प्रतिसरे परमेरों के पपेर सब पपि मुनि के लिये प्रयइसमें मी शेररिस म्हात हो सपोरस्य पौकिनबन होने से निर्मात सम्मान प्रांत परम मनाप पर से प्रामादि सब काम परवा प्रमार मौन इनाम ममाप देशपावरको बिशेष प्यास मदारिमाप्पमूमि में रेल सोचिये और इस च में मी पागे जिये। पर वो परित्याग पोषम परिमय संप से किया जाता पप पोरमाचे प्राब पितो परम्प समपना भी । म्याप मना सारस्वत, बट्रिम मुम्भोप मुशी ऐमर ममोरमादि । कोरा में ममरकोपदिनोप्राय में तरसामादि । गिता में 'प्रय शिक्षा प्रदायामि पाशिनीय मत पथारमाथि । मोविप् में पोप मुनितामाथि पनि मान्न में मायिनीर, प्रसपानमा पुग माष भिाता मायति । मीमांसा में धर्मसिन्ध वारिणे में सम्मादि । बाप में ग्रामदायी भारि । पोग में समापिदि । सोम सांससमुपदि हात में योगवासिा पसरणी व में पारंपादि । स्मविषा म मनुमतिमपित भोक भौर सम्म सर स्पति समप्रमय सब पुराम पर उपपुराण तुमारासत मायरामायण समिमपीमसार और म मापाप ये सब मोरपित मिया ॥ माम मलों में सभी सम्प पी! उ.-पोरा सप तो है परन्तु इसके साप पता असत्य मोससे 'पिपसमतापपत् स्याम्पा" से पाबुज्म सिमें होने से पार पोर रोता से यम. प्र-पग पार पुराप इविनासको नया मारो। 7.- मावे पर सख को मते मिप्या होगी। प्र-ौर पर पोरन मिया" •-प्रावणानीतिहासान पुगपानिपान गाया नागसीरिति। र एम्मारिकेएलोर प्राणी मामष पिबारे नोविज्ञाप, पुराप प्रप ध भोर मार्गमा पर माम? मनाय सपनाम पुण्यम ।। .-गोमा यो समयमा सस्पाप्रकार ०-यो र ममें समोसो १ पेदारि सम बोंबी और मिमा समोर। दापि समारोलीबार में सब सम मार सेवाबो कोई इम मिथ्या प्रबों से सहप्रारमध हेवो मिया मी सो पये लिपट जापे । इसलिये प्रसत्पमिम सस्य दूरवस्स्यास्पमिति" पम्प से एक प्रायस्थ सब को मी से बोब देवाची परिसमावे॥ प्र०--मारा मत वा। उ०-- अपात् बो र म मपे और पोषणे की शिपा मेरे रस माम पमादाय पोरय मानिसहरममे मम्म है इसलिये इम्परा मत है। ऐसा ही माम समपुषों को दिए को पेजमाप होकर रहना चाहिये। प्र०-सा समासम्म और सो प्रकार सर पिसे मन मास्यों में भी वैसा सी लिय में कामों प्रसिपी:-मीमांसा कर्म मोनिका नाम परम्पर, पोग पुर साप मावि मौर मेगात से परिको मापति माफ्ना बालरोष वहीं? To-मबम तो वि स और पहात खरे का सालों में पी की म्पति पनि यही रिसी और इममें ोिष पोजिमको विरोधिोष भाव नाही। मैं तुमसे मावा किलिप किस सम में होताचा एक विषय में मिथिलो में। प्र०--एक दिल में प्रदे परस्पर विमन हो रस विरोध मी मह भी भी एकही। 10-या बिया एक एकोपको प्रमाण मोति माविका मिड पिफ्प यों जैसा एक वि में अमेरिका अस्वीर एकसरे से मिल मडिपारम सही सरिरिया मित्र मिकामा प्रवातों में प्रतिपादन मोहममे हम मी विरोषपी। वैसे बनेगमायेप्रकर्म समप मिही संयोप स्पिोमारिपुमा, मति और पर भरोसे हो परिमबोर्मभापी सम्पया मीमांसा में समय में पाप पोपिक में पादप मारकी म्यारा माव में पुष्पकमन्य मोम में होम परिगणपभमाना सम और मिमिन्माप रो परमेभरी ग्स मान्यतास्त्र में है इसमे का भी मिोर मी असे मात्र में निपब, मिसा भाव राम और पचप्रमन मिति परम् प्रामसिदाम्प रोमको विधि होचीपापा मम से एक माप की समस्या एक र परपर पेपर सरिये इसमें सभी पिरोपवी, इस Nि म्यागनिमय मेंगे। गोपि पाय पसारिणी सभाकोपर, या प्रसंग मात्र सियाराम रामसब जैसा मपनि पर मोर मागमतिमत्या मैरिणत पीपलपुर और सोपान पुष भीमविप्रा सस्पायप्रकात रोमाना पूर्वमानहोना राय, माता पिता और धिाभप्रेम,मेदारियल प्रथा में पहोम प्रतिमोमय अतिमहारप ममा पाये पाने परीक्षा देने बादेवे में प्रावण परप्रया सर्वोपरि पिय पाम न समयमा प्राय से यह पुषि, परराम भारोम्म राम्प, बनी गरिन माबमा सम्पाप बोर मम्म पाप्रपारिबा मूर्सिएसन पान में प्पर्य मा बोमा मम्ता, पिच्छ भतिषि और प्राचार्य, शिान हममे सम्म मूर्वि मामा सेप ससंग बसमा पाप्रम के धर्म को बोर कपडू विपक कसो मालाभारव पुमाग्री अपोरणी पावित भया कारपारि जी और एम एप मारापर शिष, मक्सी, गणादि के नाम स्मरस से पाप पूर होने का स्पिात पापियों के रपोग से रिय पाये में प्रयास हो। यि पर्म योग पामेन में उपासमा रिमा मिथ्या पुरापमामक मापताविपारिसे मुधिनमापन्न बोम से पनादि में सच होम रिण में प्रीति परमा पर रपर वर्ष पूमते पन इत्यादि मिप्य पणामों में सचर्म और रणशाम से रहित होम रोयी और मूरपे हो। भाममोसंपदापी और स्वार्थी मायब पारिजो दूसरों को विष्ण सत्संग से स्य और अपने बार में मान दम मम पम पर कर देते है और पविबो रजियादिपरमपिा से गायी तो इमाने पाचार से ए और दमारे परमेशवम हमारा अपम्पब मैंगे। इमानि चिों को राय पौर प्रथा दूर मोमपचे सरका और पारियों को बिना प्रबिसे वय मब पब मे बस किया। प्र०-यी और हामी बेरपरमा पेपर वो म नि स्य मे और हम पाने में प्रमाण मीही पैसा पा विध:- स्लीपदी माधीपावामिति भुत ।। स्त्री और जब पापा मुति ।। उ०—सब पी और पुस्तमपोर मनुम्ममात्र पायेनमधिकरी । तुम SU में पो और पा मुठि तुम्ही सोडपका मेलिसी प्रामाविक मन्पनीबही। और सब मनुप्पोले बेगापि यस पाम सुबय अधिकमात्र प्रमाव पारावास मन्माष में दूसरा मन- ययेमा वा फस्याणीमावदानि जनैम्पः । प्रयराजन्याम्पा शुद्राप पार्याय प स्वाय चारमाय॥ परमेबा प्रण कि(प) से मैं (जब ) सब मनुष्यों के सिम (इमाम् ) स (भपायाम् ) माय मर्वात मपार और मुसिमुपदेनदासी (पम् ) भावारि चाँहों की पबीम( मा पदादि) परेश माना। से तुम मोहिमामो॥
सत्यार्थप्रकाश दौरेसा समेकिमीचा पारामा मीने वॉपिपलपति प्रों में प्राय सबनीसोपामिन बिसौली और एनादियाँभनी।। २०-(मानाचाम्पाम् ) बारिखो परमेपर नाकाम मामबपनि (भाव)स (मान) या भोर (स) प्रपये मत्वमा सिमर (भायाव) और भविनापि रिपे मौनों का मत किया। भोप सप ममुमोको पाप और शुभ पर निकाली पतों का प्रार पौर दुरीमती माय मोसम भागन प्रत ।मीचे भर माती माने का परमेवा हममेरी बात प्रमाण माना।ये र मी बोई इसको । माया पास्तिक भाग्य कि 'मास्तिको क्वनिन्दक" मामिला और न माको भमा पनि स्थ परमेवर होममा मग यी चार! पमा पीलियों को पाये मोजामिरेम और बिगबिलिपिनोबो परमेश्वर सिमायापारि पामे मुपाये ममता को दो वरोर में और प्रोन बलियो र से परमात्मा से मिली बस पनि नुन पूर्व और मारि पदार्म सबके बिबाहर भी सबसिरे प्रक्षित किया और बहोमो निरोप दिलासा मिणाप विषको पाने पाने मे मी पापा औिर मोमेशामाया सा पाना है।और को मिली पापेममिप मोग मारी पूर्ण स्थान भौर मितिमा है। देखो पेसामा पारेममाया- सयपर्येय फम्पा युपान पिन्दवे पर्विम् ।। ओ पर मन सेरम से पूर्व वि और मुशिला को गम्म पुपति गुिपी अपने पास बि पनि साथ दिया। (या) अमारी (ब) मम प्रेप सेपेदारिताप्रेस पूर्व uि समसिमे पति के पूर्व साम में भपने सण लिपि (कुमार)बुपास्मयुग पुरको (सिम्वे) हो। इसपियों में मी मार रिण मय जमव ममा चाहिये। प्र.-सा सोचा भी कोको पर। 1.-भाव रेवो पौनमयदि मा- इम मा पमी पोस्॥ भारत को समायोरि गात्री मेन पसी होग कोमति माधव पर संजयाय !
दवीपसमुत्रास मानवासियों में मूल्यम्स पापी मावि बेदादि यात्री को पाले पूर्व पिसी हुई बीपा पतपणाप में सा विचार । ममा बो पुस पिान और स्त्रो प्रक्षिपी सी बिपी मोर पुस अपि हो तो बिल्मपति रेणार पंप्रम पर में मच ये त्रिपुरमाइसस्मेि मोमीन पर दो कम्पानों की पाम्यामा में अम्पापिस लौर होस त रामपर्म म्यपायव्यापि पहाबमा कार्य को पति को भी और सी को पति प्रसन्न एखमा पर पब मम सीमापान रानाइत्वाविप्रम विना विण पणे प्रभर मी मैक दी हो सके। देवो! भाव बसों की सिपो पपुग मपाए पुरविष्य भी अथ मार बानवी वी पोलियो पावती होती तो की प्रापि रयाप भादि पाप पुर में पयोमममी और पुरकर पी । इसलिये मापसी मोर बियो परिव त्याने म्पयापिका पीर पनाको पारि सेसी विया ममय पानी चाहिये । औसे पुमो को मामय, पर्म, पोर पार की रिण म्यूम अभय पापी परिपे से रिलोकोमो मामय पर्म का पति विपरिध तो भाव हो सीखनी चाहिये । गोंकि इनके सीने विध समसम ममिया पति पारिस प्रमुख माय बायोम्प सम्वाबोल्पचि रखम पासन पर और मुहितामा पर मोसा पीसे बसा कामा माग बसविधा से भोपपपत् पा पार बबाबा पौर बसवा बहीं कर पटी विसस भर में राम कमी न मारे और सर बोग पर भापति । गिरि के गये रिका पर सबसमा पार पाव भारिप बवामा समयमा पवितरिय विमा सबमरिसार पमम्मा पमम्मत दावि शारपिया के विध ईघर मौर धर्म मेयमारले मपर्म समीकही । इसलिये दो पम्प मौर कियो भपने सम्बानों को प्रम चम शिक्षा और रिण से परीर और मामा के पूर्व बर बर मिस्से मवाब मान, पित, पवि, सम्म अमुर पग्र मन परोपी शमिश मन्त्रमादिगणबोल पम सेव । नय माप इस रिमा मप रखादी बम प धम्म सबप्रेश पर मोसमोर रायमाग्ने मा निज माम पेते और विकोणमा से परापमापी कोई मो नहीं हो पा । इस कोण की भोर रि प्रोपय स्थिष राय मौर मनमो॥ कम्यान सम्प्रदानच मुमायो च रमपम् । मा •11॥ रायगोसिर म्योर पा र समरमर मरको पिा ममा । गोभी इस भाव को मारे तो पो माय पिय गरा रेन मर्ग राय मागास भाग पनप पाय मिमा मन प्रमि भाव में प्रमा समयमपातपरिधारा परे।।
सस्यामका
सपामेय दानाम्प प्रदान यिशिम्पते ।
पार्ययगोमहीपासस्तिबकाशमसर्पिपाम् । मनु ।।२।।
सार में जितने दाम बर्वाद मा मा यो, प्रथिो पता विष
मुम्भौर पर इन सब पापों से पविष्य सपान प्रतिमेगी। इसरिने
चितमा बम सरतमा प्रपल तम मम पम से विधी समिम किया।
जिस देश में पकायोत्व प्रार्थ सिौर मोठ धर्मममम होताीही
देख सौमारपणाम् होता॥
पापा मम की शिरा पप से मियी दो बामे बौने
समुहास में समापन और ग्रामम में शिक्षा खिसी गावया ।।
प्रति भीमाद्यानम्बसरमतीसामिइस सस्याचप्रकाश ममापाविभूपित
शिक्षाविषये पतीप' समुशास' सम्पूर्ण ॥ ३ ॥
अथ चतुर्थसमुल्लासारम्भः अथ समावर्सन विधारणहाममविधि पस्पाम' - पदामधीस्य वेदो पावेद बापि पथाम्मम् । भविप्लुतमामघों गरस्थामम्माषिशत् । मनु ।।। जब पावत् प्रा में प्राचीनुश्वपम भरेचरों पर वाय परो मा एकर को साफोपर पाविप परम शिष्य में पाप पुरुष पपी ग्राम में प्रवेश मे॥ मती सधर्मेष प्रयापहरं पितु । सम्पिय ठप भासीनमपिस्प्रथम गवा । मा ।।। जो समर्म पात् पचाक्त भार्य और सिप्प का धर्म ग्स पुष रिता बाप मे प्रमाण प्रात विधम्म माग माय माता पारबमाना अपने पक्ष पर से इप माप को पम गोदाम से सकार मे । से पार विणी प्रेमी सामपिळ पोहराम से सार। गुष्यानुमत मात्वा समावृतो यथापिधि । सहेत मिजो मार्या सवर्ण समन्विताम् । मनु ।।.॥ पुरकी पात्रा से सामगुरुकुम से अपुल्मपूर्वक मारे मामय समय भिब अपने पास पर भाजपा से मिया ॥ असपिया पपा मातुरसमोप्रा च पा पितु । सा प्रस्था विभातीनां परकमपि मैपुने । मनु ।। ।। मोना माम पशिबोमबहो और पियौरकी। हो सका रिपमा पठाइसन पा स्पोजमी- परोसप्रिया परिपा प्रस्परिप' : पोपप र १७. पाविमो परोष सपा में मौखि तीसी प्रमा यहीं से किसी मिमी. गुप मुवे और ब्रोतो रसम मप रसी में पम्प रण मे किया परोक समयमा पुरर मिडने में रागारकोती से दो एप प्रयोद बो अपने मोड प मामे विसमापनोरमी म्प मे परमपिरोपपरिपे। विम और एरिणम में गुप-11- (१) पोया पासा मे मिल पाम्पर पाई और प्रेम प्रते एक मोगुष दोर समय पाल्पामा विपरीत प्राभप सौरमो मां बी एक परे रेण्डसम परस्पर रिप होये पप्रेमम्मी महीने मध्य • गुमेप गुप र मएस रोमा।
१० सस्थानका (१) सरा- पाया में प्रबी मिलाये नियम पुरील को एक गोत्र पिता मम्पस में विवाद में कामों में अपर कही दोष से मिहीं होती। (1)वासरा-पेपूप में मिमी पाठयदि प्रोपपिनी योय होने से रचमता होती रो मिड पोज मात पिता से प्रमक पर्समाप मी पुस्यों न पिण्ड रोमा रम है। (0) चौध-से एक देश में रोपी होप परे देश में पा और सब पान परब से रोगपीत होता हैसे ही पूरशस्वीरित (५) पास-किस सम्मबारे में एक पूसरे विमोपे में अब प्रभाव और विशेष रोग मौ सेमवएशनों में नही और स्लों के स्विरमा प्रेम गेरी पम्मी पापाती निमिया मनी (1)ठे-र पर्चमाष और पदार्थों में प्राठि मी र सम्बन्ध होने में पान्ना में हो पाती किस रिमाये में नहीं । परियो- पुषिता बुर्दिता र रिता भवतीति । विक .. समानाम एरिता इस परष सेमरिए देश में होने ऐरिवकारी होम मिसपने में ही ॥ (.) पान-सन्यापित पाखिपोरेमी मम्मी पोधि बारका पिताल में भी इसमोसमागाही होगा। (५) अम्बा-कोई मिल होने से एक एपणेमे अपमे । तिम्रो साप मस और बसपी दरोगों में पैसा होता तो मी पितामसी बाम्पी । एक एसोको फिया परिकहोपी और मिष मी मावासियामलमा तीन मोर पाहोगी मरिमरगी से पिता के पर मोच, माता पी और ममीप रेगमायाममा मचानी। म्यानस्पपि सम्मानि योऽयविषमधाम्पव। मीसम्मम्प पवामि कुलानि परिपश्येत् । मनु ।।।। में किसी प पान प्रब बना हानी पोरे समय भी यरिये परखपेरतेवो मौरियापम्पयम विप्रतिक्षित मोपमो- हीबकिय निप्पुरम निदो रोमयसम् । पप्पामपाम्पपमारिस्थिठिकमामि च ॥ मह ।।.॥ बोपनियादीप प्रपती से रहित परामपर से पिमुख और पर बोम प्राय बमपाल की इमा बसी भाम्माष मिापी रखा और परिपुष्पाम साप पियारोप बाहिरे पोकि । पयप और रोग निष्प अपेपर में मी प्रशिश होगमरिये समोसे और पम्पिीभपापस में स्पिारोगाणी . पतुसमुन्नास मोबस्कपिल कम्यो नाऽधिकाही रोगिणीम् । मालोमिका माविलोमा न पाचाटाध पिङ्गामाम् । मनु १।८॥ म पाने की परिभा पर्वाद पुरस से सम्बो पौदी अधिक पापी बगापुम, रोमावि मत बोमनापी सम्परम पारी और मरे नेत्रगती। बर्डपमनदीनानी माम्स्यपवतमामिकाम् । म पश्यहिप्पनामी म र मीपमनामिकाम् ॥ मा ।।। का पोत पश्चिमी मरया रोदिया, बताई चिनी दि पपत्र मी तुपतिमा गैंडा गुधाबी मा पमेसी पनि नाम पडी गम पमुना पारि नदो बामवासी चौरासी पारि मन्म नामवाली विमा हिमाया, पसी पावि पर बामपाली कोथिमा ममा पानि पी मम्मण्या मागी मुबंग्य प्रादि सर्प मामम्मी माधोदासी मीनारामा पारि प्रेम नाममापी भीमाईवग मिमी भादि भोपय मामपानी कम्पा . पाप विमानमा चहिये पोलिपे काम मिस और कप पापा मारे। मम्यवाही सौम्पम्पनी सवारणगामिनीम् । वनुलोमटेशपरानो माडीमुनहेरियम् । मा ।।। गिपरे साल पू पा लिाग लिसम्म माम मुना प्रद पसोदा मुखमा पारितोस और पिमीप सिमे जो सूक्ष्म मोमय मौर विपुल और जिसके पब मा प्रेम । सो सोने सामरिणाममा चाहिये। म-नियम पमप और प्रभा कोमसा मचा। -सोगाव सौदीपा और पासवर्षस पाणीप पुरुष प्रतिभा सम्म रज्म है। इसमें जो सोग और पोप में विपरमेनामिका प्रमारपीममी वीस तास चावाय पुरम मप्पम यंस पर पी और प्रवास वर्ष पुस्तक विधाना गम । जिस ऐण में इसी प्रचार विधि भाभोर ममर्य पिप्पणम्पप परिकापरेण मुखी भौर मिप में अप विधाप्राय रतिमा और प्रोन्या विवाहवागरेश दुग्ध में पता है। पाकिसय विकास निर मुमर हो सर टीम मुभर और बिगड़ने से विग्यो । म --भएपर्ग भवेद गौरी नयया परोरिसी। दरापरा मरम्पा सत का रजम्पमा ।।। माता पेय पिता ठस्पा म्पेठो भ्राता वय प। अयस्त मरम्पातिरक्षा कार्ग रम्पलाम् .. डपाराणी पौर पौरोध में nिt महिन्य पानीपम योनी मारोहियो र पाऔर उस पम्प सम्पबा सभामो र बिममममममा पसकोण माता पिता और मामई पे धीमा में Patil सत्यार्यप्रकाश उ०प्रमोवाच एकपमा म गौरी विषणेपन्तु रोहिणी। त्रितणा सा मछम्पा पव ऊर्य रखसवा १॥ माता पिता तथा भ्राता मातुनो मगिमी सका। सर्वे मरक पाम्ति रप्ट्या कम्पा रसमाम् ॥ २॥ पासपोनिर्मित पुराणमन है। प्रर्प -विण्ये ममम में परमास पर पथम बारे में समप को पव पामा बम्मे तब एक में पोरी मेरोपी तीसरे में कमा भौरीचे में रमतो गावी॥ रस रस्साको चो रसके माता पिता पाई मामा और परिव पप रकमेप९॥ मोकमावबही। To- ममाम्यही दो मामाची प्रेक प्रमाण पातो माने मी मारमही प्रते। मारपाम्पर और प्रयोगामी प्रमाबपीमते! ro-बी पायाम प्रकासी प्रमादमी माता मोबाप मे भाजीपहीसोम प्रमामी भोकोपही मात्र होम मी पावर भीमाय मोनही मायने ।। प्र---माकपसमय गोरे से माय वही वाकपापम्पबाम समय में है तो यि सता और स समय रिणामोसमामी यी दोग्य -योमा शेक मतमसो मारे मी मर्मभरोकार पी और ममी विधाममा विनाबाकिमोगात पमात् चौबीस व पर्व विधाये से पुस्तक परिपक परीक्षा समागम भाभोर शरीर मी पाहोने से सन्ताय चम- • संत पमब पूष मामुपये पी एस को पापब में मुभिषा बामाधीनी मत मपिते है- गोवावगमम्मा परिणतिम् । पाप पुमान पभी विमा विपणे।।। पाठोपविबजाया दुन्द्रिपा । समरसवाचावी पर्वाधारयेत् ।। मुमत प्रमाण म मो. ब-पोपमेयूब परोपी में पीठम्पूष भाषा पुरानोप मस्पर प्रेसोपा पिम पम निधि प्राप्त होता मोदाममोगप एमपोहोता.. भयो मिस र गौरेयीये वो दुभिव से इस प्रारधीपायमा पीपीपरा - पतुसमुशास से प्रारमें वकीया में मन्समोअति महोगा समोरी रोहियो माम रेवा मी पदुख। दरगौरी ल्यो तिमोतो ग्मन बाम गौरी राम और पौरी महादेवी पौरोहिणी सुरेष पसी पी रसने तुम पौरामिड डोप मातृसमाय माबहे हो। गम्यमात्र में पौत्री मादिक भाषण मते हो तो मिस सिममा सम्मा और धर्मपुर हो सकसमिसे तुमारे पर हममे रो। भोक मिप्यारी दिसा हम प्रमोश" पो भोक पय सिने कैमरे मी पायर मारि के माम से परिपे है। इसचिरे इन सब प्रमाण दोष मोरे प्रमापसे सबम बिसामोरेजो मनु में- बीशि षण्मुदीक्षेत कुमार्यतुमती सती। कप्पे तु कामादेवमादिन्दत सरल पतिम् । मनु ।।। कम्प रमत्ता दुप पी पीर पर्पन्त पति कीबोग से अपने परवाहको प्राय हो। र प्रतिमाय जोरप होतात दोधारा में ५पर रमवहादुए पपात् रिमय बोम्पोम्सेविहीं। काममामरणान्तिप्ठेर गृहे फम्प मस्यपि । न वर्षमा प्रयच्छच गुणहीनाप काहिचित् । मनु.।।। पोपप गर्भ मापपर्यन्त मारे रॉ पातु मम ममात परता तिम गुण म सम्पनों प्रविष्णम्मी पहरोमा पीये। इमसे मिर दृष्य र पोट समप से प्रथम सोनविषारोपोग्ब यही. म-विद्यामप्र मात्र पिता पाम होना चरिये परम बरोधापामा। 7०- परम परकीयधीर विण्डोन रम। दो माता पिता विसमा कमी विचार हो भौगरमा प्रसारिका महोबा भी पौकि एक परे प्रसव से विवाद होने में विशेष गुत कम रोता और सचम रम होते? मरिमसि पोय होगा । बिार में मुल पोरस और म्यमो माय पिल प्रोग्यक्ति मोरममें पासर प्रसव सेतो दी मुत और गिोप में रीमे पता ॥ौर- सम्मु मार्पण मा मर्म माया सपेय प। पनिम्नय कुवे निस्य पत्त्यात भुपम् । मनु ।।। रिसर में पी से पुरुष और पुरसे मी सरा मारपी इस पर पी पीर विषय प्रती और दो रोिपमा एम मोड सिम और सौम्म भरेग्ये मोर बुरि मासे हो पिरमम्पूर की और २५ स्पून भाषण पुररामी मर्मपरम पोव नहीं होगा इस पर्यो में तो पोखमा हो।
२४ सस्पार्यप्रवाह होतापोल परिवार निदा नियस है। इसटि जैमी लोक की राति भाषा में पाम्पस पा पाटी पौवा रम है। भी पुस पिगभगाई तब विषष शोर पापु बरा हरीर परिमारा पापोय होना चाहिये। बतक इनाम मेड यहाँ दो समता किया में सभी सुखपही होता और न पारपासमा में बिका कामे से पुरवा पुका मुपासाः परिवीत भागात्स उ श्रेयोन्मपवि भायमानाः । व धीरासः वय उभयन्ति स्वाप्यो मनसा देवयन्तः ॥ १ ॥ मा धेनवौ धुनयन्तामर्शियी शरदुषो शशया प्रदुग्धाः । नम्पनिम्या पुपतयो भवन्तीमायानामसुरत्वमकम् ॥ २ ॥ . मासूम पूगं शरदः शभमाशा दोपा वस्तारपसा मरयम्वीः । मिनावि भियं परिमा तुननामप्यू नु पानीपमो जगम्पुः ॥३॥ को पुस (परिवीक्षा) म भोर से पशोचीच अपय सेवन से सम्म शिमा और विज से पुर(सुमामा मुम्बा पवारय मा पार पुल(पुण)बबाम हो निधारममम में (प्रायमर ) भवा () पीसरे म म (साबमामा) मिस होम (मान) पविराम योमापुल मापा (पति) होय।। (लामा) भन्ने प्रकार पानबुल । मनमा) विधान से (रेस्पा) विपद में समापुर (पी rgu (बा) विनम् कोप (म) ग्मी पुरुषको लि) समिपी मिश्रर को प्राचारष विच रचम शिक्षा माय बिमा अपा पावला में निमरते थे पीपुल नामा होमपायों में प्रविणो प्राप्त नहीं होते। ॥ भो ( अनुग्धा) सिौपे दुरी मही ग (पेपर) पौधोपमार (अक्षिा) पापावाला से रहित (भा) म प्रण से उत्तम मारी को पर्वमने हारी (भगवा) मा मेरम्प मारी ( पम्बा जम्मा ) मी शिक्षा मी तामे पूर्व (माती) पर्वमान (पुस्तपा) पुसमान पिर्ण (रेवानाम) मन मुनियमों से पूर्व महाया। (पम्प) भावाच ( माप)ले (भमुनतम् ) मझया शिवायुख पणा में एमब मागे पास होतीदवाब पतियों को प्राप्त होणे(प्रा पुरयानाम् ) गर्भ पारमा कमी भूपये मी साम्पावत्या में पुतीमम से भी पान पापहामं हम पोडभौर परडोर मुगम सापाला- मासे शिवा पुस्तममा उसले भपिक मौसमय।
चतुर्पसमुशास' पैसे (मु ) (राममायाः) पमन्य मम मोगरे (सपा) पीचने में समर्थ पूर्ण पुण्यापुड पुरा (पत्रोः) पुण्यस्मानापाको मिय खिों को (मसम्मा) मा रोम पूर्ण वर्ष ग्स अधिक प्रापुको भानन से भोगते पोर पुन पौधवि स संपुष्प सेसी पुरुष समता से (भो ) संवर्चमान (गर) पशुओं मोर (बाबती) परम्प को मात्र माने असो ( उपसा ) मावा पेशामाको (पोप) आणि भौर (बस्ता: ) दिन (वनमाय) गौरों की (मिपम् ) गोगरे (गरिमा) प्रवियप परपमा मौर शोभन को दूर कर देवासे (महम् ) में प पुस (र) अप मा ( भपि ) मिप करके प्राय सेवा वियर और मामा के बम और पुणवस्था को प्राप्त हो विषयका इससे निम मा विम्बहाने से मुखदापक विमा भी होता ।। बम इसी प्रथा सब प्रापि मुपि राम महाराय भावोगमा से विष्य पावर विचार करते थे तबतक इस देश में मा विनोदी पी।पा प्रयन सेविया मन परम्न पसायख्या में परापान पाच मा पिता मापीम विवाहोरे पगा जब से कमया भावण हामि रोटी बनी है। इससे इस दुरामको बोए सबब बोग शोक समर पे स्वम बिया किमा सो बिदा पर्यामुथ्म में और पईमा मी पुगम समाप्रबुमर होगी सीपे । प्र०ा विपकी माय मामलो पिता मारोपमापोवार और बिघ माता पिता प्रम्पकमा मन्वाब कमीप हो गया। २०-गुत से होपो हात ? और रेमो मी मे बामोम्ब उपरिषर में गणपति महावा महामारत में विवामित्र थियब मोर माजी पर प्रायवरोपपेचे पब मी यो रचम विष्य समानयोगी मायबोम्प पोर पोप होता और पानी पापे मी म । म-मयामो र बीपं गरीर दुमा पार कर परेप पोपको सारे -सपीयोपवे सार यौर पहीं होता किता- साप्पायम अपहमिस्पैदियनेम्पपा मुहै। महापोम पोम प्राशीय क्रियते तनु म ।।२।। इसम पूर्वापर यामी परेप पते ।(सम्पायेय) सो पाने (प.) दिममा भावाविप रोम अनुपम पम्प दो को राम, म पम्प लोगाबपरित पहले पपये, (पच) पोर्धमानी ही मादिभनेक विधिपूर्वक (सुधाम से मन्वायम्पति (महाप)ोमा रेसा पिपण परेप और लिपियश, .(रोना) (पिर) सस्थायप्रकाश (पैन) अणिमादि पर शिाम प, समा मनपर परोपकमाथि मन्म और सम्पूर्ण वित्तविणादि पापमोड मेनगर में पनि (स) पर (H) सरोर (प्रायो) प्राय (मि) या तारे। स्याहममेड मेम यहाँ मायमामा नि लोया बोग में पल मानवे ! में प्रवा पा मापत तिर गोप परम से ऐसा ही मावे॥ प्र०-- तुम परम्पराम मीण मोगे? उम्पनी पस्तु म्हारो रोममयप्रेमही मानणमौत। प्रा-मारी रस्मै मौर नारी सूपी सममीसमें प्रमाव! --माही मम्मद किबो तुम पांच सात पारिपापमान को अमावण मास माग्ने को और हम समीपारम्म स प्रायफ्न्त की परम्परा मापतेरेखो विसपियोप पुनपुर और मिसाप पिला दुरा रोगों मेधारेखने में मामि गेप प्रम में पोहो। मनु महाराज ने क्या है- येमास पितरो पावा पन पाता पितामहा। तेन यायारसतां माप तम गम रिप्प । म ... बिस मार्ग से इस पिणा फ्यिमापी मार्च में वाब मी परन्त (पास)बो पर पिता पितामह मार्ग में और यो वि किमाए वो सो मार्ग में बनी सोक गपम धर्मामा पुलो मार्य में पाये से दुल कमी नहीं होता । इमोम माठे से समीर मानव है। और रेगे मो पामेपर पितामोडी मो सान और निमपसमावण कमी होपयो । पानी पर दोनों में मायमा चाहिने बानी। भरप।बो ऐसा . मा रपये मोबिकिपीसिखिो परम पुजवा तोन्म या पिता परिवारस्य प्रमिमान मेरो बारे! जिस पिता पन्थारो उमस पुन मी आपली भागेर सिम पिता समीक्षा रसम पुर मी कुर्मी से१ची किन्तुबो र पुमोरखम कम से मन एवम और ममम मरेप पर प्रमाण है। मेरे रसपा पोप स्वांसममा प्रदे और एब मोरे पोयम मा यो गम्स प्रय पीको मापनेमे पोष मौष अम्मर भन्मभीम मुसामान ऐपपरपमे बीमार पानी मा !हापौभोपे किमये बोर वि इसम्मषेप मामय नही। परमी सिर रोओसामवादि रज्म महोपारि पीर मोमोरया राषम समामा होता रसोबासम पर मोर को सम्मलपोरममामाको प्रेमममियमसरे।
सध्यार्यप्रकाश प्र.-मामोऽस्प मुखमासीद् बाह रोमन्यः कुतः । उस तदस्य यदैश्यः पनघायद्रोऽममापक्ष ।। परमहरा अमापन मन्त्री। इस पर भी प्रापप गले मुख पश्मि याभप सस भोर या पगो से गपचमा इसपिपे मेमे मुखमा परि भर पापारि मुण्हते इसी प्रकार प्राप पत्रिपारि और पत्रिवारि म प्रमाण हो सकी। उ०-इस मन मई को तुम पिया नहीं पीफियहाँ पुरुप प्रपात भिरामर पाप: परममा अनुधि । बमिरापर वो उसके मुतारि पर नहीं हो सकने दो मुखरि प्रत्यारा रोग पुरुष पर्याद पापक रहीं मोर गोयापक महीप सधिमान् स्मत् पवारा पणे प्रवासी नीरी पुरष पापों की नामा म्पस्या महारा पत्र पसमा पपुररित पारि पिपपमा नहीं हो सकता। इसभिब इसमग witो (बाम) पूर्व पापक परमारमा की परि में मम पाण सम में मुम्म सम होप (ब ) पाव (गा) 'पार्व पणा पादुई वीपम्' पपणास 10 बस दो म माम रेप निमम पधिकोसा (मा) समिप (म्स) भीमपोमाम पर जानु गरिस्प मापन समामी यो सब पराधी भोर सपो में सम- परदे पाप प्राप(ब)प पोर (पम्पम् | पो बीचमा पण मूपरि गुप पारोपयोपमा पपप प्रामारि में भी इस मनाप्रपेसाप सिमामे- पस्माइत मुम्यास्तस्माम्मुखता पाएम्यम्त इस्पादि। रिपोरे मुनी इससे मुप मे पाए एसा पर सवार पर्याद या मुष प्रबो में पूर्व नियम सब गुरम सम्रप पुषहरोये म मनुपात में रच्म मानवता पर परमेष भिरामा हरे मुर भाभी वो मुण्डारि मे रपा रोग मसम्मशियमा पुरविण्या! भोर मा मुम्पतिको पावर पारो तो उपाएप प्रापपाप मामीशी भरी। स मुगसमर पोजमा होमोमरममी पासमा मुणतिपमान होना चाहिये। तिरेर है परों क स और एक पोर मरेप्रमाव पामापरे ये पीतामान बरबोर्ग मुम मा भपलिमे सुमार पर सभामपारि मंस हो पात ममी बन परम पण माहब भी गुम पुष्णी मे मरमसम्याए समपनिमारमा पनि मुगारा भार रोमdicatmप्रय सप्त सस्पार्यप्रकाश पेसा होमपा मोमामा:-- खो याममतामेति प्रामणवि प्रवाम् । पभिपाखावमेवस्तु विधानस्यात्तथैव च । म । बो या ना रे मामा परिव और पप समान गुरुर्म सम्मान समारोतो पन प्राम्प विष और पैरव होबान हो म्याच पनि भोर पास में सपा मारो और गमो चम्म मात्र साय हो वो पाप होगप से सनिष पापा मैं गत्पत्र रे पापच परे समान होये से पाप और हामी हो। प्रमोद चोपों में समय दो पुसपोप रसीमय में गिरी बाये। भर्मधर्मपा अपम्पो वर्ष पूर्व पूर्व पर्यमापप गाविपरिपती॥१॥ अधर्मधर्मया पूर्को पोजमय समय वर्षमापयत अविपरिपती॥२॥ पे माफ्तायो अर्प-सांप से निपप मेरम क्यों को प्रात रोखा है और बाग्मी परम पिनबारे कमियोपोर हो । से अपर्माचपसे पूर्व अर्ना गम पंचया मप अपने से थोचे । पापनाको गौरम्माबमें पिमा बा पुरस निस' बोम्प हमसे ही मिला मी मा प्रमोगी। इससे वा बिमा किप प्रभादो से पग पर्व भरपुरकर्म वयाच होम बतायाब रपये पर्वा माप में लिप और पतरो मार भी वनमा गर्व मीटर पर्वात् पर्वमा बहोगी इस ग्रिी पर्व निय भयोग्य मोहमी ।। प्र-कोपिक की पुत्र पो होगा सरे प्रति रोमरो गम मा कर मेरा कौम मे और सभी पापण। एपी मलबाजी। 7.-म्मिी की सपमा रहरम दमन किमको अपये बरोबरी पाला योग्य सो पम्पाप रिमपम पौर बामे मिरमे इसपिरेमममी मामा मोपी।पा गुषको मे पोकीमापासोमा और पुरी पीय सीमिया पीपे और इसी कमरे मद मामय प असा पिपमानिस मरण पोरयाममा पविण गाणी वनपये मोज और पासा मतिमी पभोग रहे बचपी और पुर- अध्यापनमप्यपन पत्र पाउन तपा। दान प्रतिमाभैप प्रामथानामसपत् । १४ मनु । ।
पतुर्पसमुमासः समो रमस्वप' शौच पाम्तिमयमय च । जान पिपानमास्तिस्य प्रझम समापजम् ॥ २॥म मी .॥ मापसे पाम, पममा परमण मामा राम रेना, ना पाकर्म पर "प्रतिमा प्रस्पयर" मा ॥ मत् (प्रतिमाच मारकर्म 11॥ (गमा) मन से दुरे मम पा मी मममी और उसने अपम मम्मी मम रोने दमा (दमा) मोड मोर मारि इन्द्रिों में पापपरपये रोमपर्म में सपाय (पा) पापपरो जितन्द्रिय पर्मानुभवमा (गोर)- मदिर्गामि गुम्पम्ति मन सस्पेन गुम्पति । पिपातपोम्यं भूतात्मा पुरिपनिन गुम्पति । म्मु... पर मे परम सत्यधर से मम रिण पर धर्मानुसब से बीमामा पोर हार से पुरि परिण होती है। मौवर सम्पपरियोर और पार मी एमपरराना भार सम्सासम विसपूर्वक समापौर स्यम से निप परिस(ति) पद विसरा सुति मुग दुस, योगोप्य पुरा पनि पाम मान्नपमान परिमोसपोर- धर्म #Anu (पाग) प्रेममता सिभिमान सरबता सार नम्र वा परोप दोष रेग (साग) परि गाणे पापा पमयेर सामरिस पनि यो रामारो मां बाबा सगोतम बानमा पोर माममा (फिन) भिती पेरमेश पम्त परावरिया मेम सबसे पप्पोम्म परमेय पेरा (मि)म्मीर मुभि प ध नि उसंप मम्ता पिता पा र प्रतिक्रोिम मेपोमोमा निम्मी सपनर्म और गुण मामपरपस मयुगों यार होरेपश्चा- प्रसन्न राव नमिम्पायपनमय प। पियरप्यासहिाधिस्प समासम्म ।।. गोप गो प्रतिलि गुर पायरमापनम् । रानमाधानाराम मभारम्म् । २ ॥ मे प्रयास भी साभमा म NR NRR) बिगत evdoमाम(नागोरस भय भागा() सीप पाच पायर (intumaaukar ...(ममी पापभीरrum रोवा)wwardroincianप() सरोव(H) सम्पापा rndi सत्यार्थप्रकाश ॥ प्रति भरोषा (पुर) पुर में मी निशारे रसके कमी म एम म मापना प्रोत् इस प्रकार से मानिसे Area विस होने चोर) भाप को मापने मे पोको पोरण तो होतो ऐसा भय (बाम) समीपता रमा (मभाव) परपावरहित होने पर माप पायोग पर रेप विधापी मन रमने भी मा रोये मरेगा ये म्याद सपिन और गुबा- पगमा रएस याममिम्पापपनमेप ध। यणिफ्पर्य ऊसीद च पश्यस्प रुपिमेप । मा ।।। (पयरका ) म्पब मारि पानी म पानीमा (राम) यि धर्म भरि भने पाकिसे बनारिस पप ममा (मा) मणिगोपरि जॉप ममा (अपवन ) यदि ण पाम (पिपप) सब प्रमा माम सवा (उसीर) एक सकने में चा पायापार मोरा मस पानी से भपिका और मामा पर्मा एक रूपमा रिमा सेतो सौप में भी यो सब मे अधिक मदेम और रेय (अप) बेतो सपने भयो गुवम॥ मम्- एकमय तु सदस्य प्रभु कर्म समापियत् । पापामय पनि यभूपामनरुपया । मा ।।। या को पोम्पमिलामा प्रमिमाष पारि रोने बोलते भागबपि धौरमों की पापा और उसी से अपना जीवन [निया ] अन्न पहा पर एनम गुप है॥ पे संप से बागुम और कर्म लिये। जिप र पुस में लिप है गुगर्म सर्वम अमिर रेम, सीमास्य रस मे सब मधुप गाविवीध दो। क्योकि राम डाँको भोप जियो हमारे मान्ताव मूरि रोपमुकामेव्ये शो काम और पताम मी र पे किबो हम सब पर मार दिया गये तो यूर होग परेप और मारनामेचमत्व होदेखिये राहणार पिच और गर्म र अधिकार र सेवा पनि एवं फिल्म और पार्मिक होने से सामने पायोन्यमम॥ पहिला सम्म प्रक्रिया से ममी राम्पकी हविशिदीवा।। पराप्रामाविम प्रक्रिया ही होगा पोलिस काम को बाप या सेव भवधिभर इमविला निहित होने से विधानसम्बन्धी मममी ही अमक्या कि सरीराम सबम पा। इसम कम अपये. अपिलर में सभषा रामा चतुर्पसमुशास' ७१ 1 विवाह के लक्षण ॥ प्रासो देवस्तवार्य प्राजपस्यस्तयाऽसुर गान्धर्यों गचसर पेशायमाएमोऽधम । मनु ।।।। सिम प्रम प्रमाता है। एक सरा* ठोठा प्राण पानापम पांच्या प्रामुर मयाब साता रावस भाम्या पंपच ।। इनमें से मिनहाँकी पम्पापारिकपा दोनों पक्षमा से पूर्व दिशा पार्मिक पौर सुधील इम पासा प्रसया से मार होगा प्राप" माता॥ विस्तृत मह परे में बबिन्द करते हुए नाममा पहारपुर साना वय" । म से मोरिया रोषा 'भाप। रोनाम हि मर्म की रिपोषा 'मायपस्य"। और कन्या को सरे किया होगा "मासुर" । मनिपम भनमम मिमी पप से दोनों की चापूर्वक पापा परस्पर संबाम होगा 'गाम्घर्ष ।बमाई करो महामार मां बमपराकम से कन्या पापमय "राषस" । यमन प मारि पीई पापम्पमाम संयोग अन्य पैशाच"। हम सब रिणाम पिसावा व और ममम ममम मा भामुए और पाम्बर्व मिस पप अपम और पैणच महामनी ॥ इसलिये ही विनय रखनची किम्पा मोरयर का विषय एमव में मेव बोबा पहिले पोंकि पुरावस्था में पी पुस्स म एमन्तास पचमक॥ पण मग सपा पर किस समय हो पात् जब एक पर्वका महारेराम और पिय पी होने में परोस रपमा और कुमारों म प्रतिबिम्ब मात् जिसमे सोपेण" मवे। प्रपा प्रतिति रमर के माओं में सम्मारिकों के पास मारों मारों के प्रयापके पास प्रमों में प्रशिति मेरे प्रिय पप मिड सप ग्स इविकास भर्षात् सम्म से दिन पर्यन्त समरिख न पुसमा रमको मम्प्यपक बोग मफ्ध पदोनों गुम कर्म स्वमा सय होस चिसोमाय सिनियरोन बोम्ब मम रस २ पुरुष और पा प्रतिकित और इमिस कला पौराहा में रे पर इसमें । एमसरा प्रमिलाप हो सोहम विपरित मरेगा । स योगों प्रनिश्प परसर किया प्रोग्राम व मोमोसमावर्षय एकही समप में होमोरोमो मापनेसामने नियमन गोगों नहीं तो बारे मा पिटाबा में दिया बोम्म। समय समापचय मात्र पिटा भादि भद्रपुष्पों सामये ग्मदोनों माम्म मत हापमान और बोमगुरु म्पपार सो मी पना मरिब एक दूसरे पब मैं रेम प्रमोटर प्रमे।
सत्यार्थप्रकाश अब दोनों मम प्रेम पाने में पाप से बचाव सम मरम्भ होना चाहिये किनिमसे समय गौर को प्रार fruमपमम्म उपभो भोर का से पहोवा पत्रमा मारे सम्ममम पोरेलों में पुराय । समान पिस लिया मिला होम पर हो रही पौर मप चोभषेक मुफ्यादि म भोर वारि होम तथा भनेक मिान पुल और सिली नाममारोप साकार। पाव विसवितुराम देना पोष समाधी रिव"संस्मनिषिपुल विपि अनुसार सरकर्मप्र मन्म रीवा एकठि मम मे सपने सामने प्राथिम्पयपूर्वक विपरीविष घाम एभव सेवन करें। पुल पांचपन और पीपापाकवीबो बिपि सीधा दोगो करें। मेगा पाप को साकि ग्स परसबो पर अपक्ष होपासपूर्व रकम सम्यम होता पर मांग में भिसमय हो रस समय मी पुस दोनों स्पिर भीर अभिमसामवे पाश्मि हो सामने पेश पर्वाद भूषण शरीर पौर मापस पालि रिपही। पुल अपने बोलायो और बीपीप्रति ममप ममम म्पुबानी।बोनिकोमामबार अपर पाय को पांव में स्थिति पबम्त योगायब पाप करें। पर्मस्थिति रोवेभ परिणाम शुि पी को तो उसी समय हो जाता है परन्तु इसम विजय मायब रहने पर प्रबकोपाम रहा मतमा सीप र साममित्री मम रस्सा भागो मोसमे बवादधि दोषों पीले प्रायः पपपीर नया में नरें। यही विचार गमोपान बिना पर रवा पिता महावे मर मरबहामहोपस्थिति बिनोबार तब से पक पन्ध पी पुरुप समाप्रम कमी होगा कि पेसा होने से सन्सप रम चौर पुवामा सन्तान पीसा ही होता है। बाबा पाटा रोगों में भावी और मोडमरोग हो। परन्तु पर से मायरि मनुजपा मम स्पची। पुलपामिति और पो मर्म रक्षा और मोलप सब पर प्रमिससे पुसमा स्था में मी पाम हो और गर्म में पाक सरीर भनुम मचाल पनि बा परम्मत दोन प महापे में सम्म हो। कोषसाचैबे महापौर पसिमिर पाल महारे से म्पे मोह। मी गर्मी कोरेका मारसमरि और मानामा पत्रों मोवापिस ऐप मे कितपी, गम मम ममापिस पाय और विमान मी सेवय भुमिकमे। • पद गात राम को इसखिये खरे हो मे समप्र म पममरेन परिये पिोषविरमा रचित नहीं।
पतुर्यसमुहास पर्य में दो संस्था एक महीने में एचपन और मा भार्म महाये में पीमन्तोम्पर विधि मे। पप सम्वाप प्रसन्म हो तर सो पर जोर और गुव प्रारमयी पोप गुम्पाक प्रपा गौमामपाक प्रथम हो गया स्ले । रस समय पुति गप्प बायो कि भरत ग्रह हो ग्मी से श्री स्वामी को मो मापमा । तत्पमान बानिय बाधक की बामिया में एक प्रेम से पिपर गुम मममसर परयो रमे ऐसा पो किसिमसे परीर से पिर एक भीम बाने पाये। पबाद उस भाव परकार उसके बार मौतर सुमापारिख पुरिम रोम मे । तपमा सन्धमोब में पिध "वेदोसीति" भर्नाद ठेरा बाम समान वा मोर गाने पे सोने में शाम से बीम पर मोम्" मार पिसम मई मार पुत्र को रप्ती गवान से भयो। पसाव गसी माव देखे बो दूध पीना हो उसकी माता पिता को उसमें माठा रोवोसोभीकी परीष मो रसम प पिचाये । पसात् सरीन कोमी पकमरे में किया पर हो रसम पुगम्भित पीकाम और पापाता किया और उसी में प्रसूता सीता को रो। कारिन पा मावा एष पिसे और बी मी पपने गा में प्रतिभा प्रवेश भर रचम मोबान और पोषिचदिमीरदिन पीपर कि और सन्वायरपोरेसिपे पायी । रसको चार पाच प्रणा माये । पम्तान को परिवाया और पाबन मोने पर रस मावा परपीके त्रिी प्रकार प्रति अपार सो पार मोदी लामो समप्रमय पर पेसापक निपोषित सी मरमबाप काय अमापपर भी पयोग रो। पात् अमानवी संस्कम मरिधि प्रगति पसभामा बाप।बी मरमबाहो म एव होये पात् रसी प्रकार मरे। अनुबाबामिगामी स्यालदारनिख सदा । मनु । मापाप मावि पप हमाभमे बसर । मनु । हो पनाही मी प्रथा और बाप्पमी रोयपासनी माचारीपास. सन्तुरो मार्पपा मतों मम्रो भार्या पेपर। परिसम्नेव ने मिस्र्य पस्पाय नभुपम् ॥१॥ पदि रिमीम रोपेत पुम्पस प्रमादपत् । मप्रमोदाम्पुमः स प्रमन न प्रपत्चत । २॥ मिया रोषमानापा समेछापत नम्। समानार्या सपमपम रापतामपु ...
3 सध्यामका बिना में माया से मचा गोर पति से पो प्रम मात्र प्रवी? ग्यो म मच पौम्म्म धौर ऐन सिसा पाहता पापी म और पत्रिपरि होता।।।।बोपी पति से प्रति चौर पदिने प्रसामी मती दो पति पास रोने से मम सपा की मेवा ॥२॥पिसबो मान्य में परमप्र होखा उसकी भव्य म पर प्रश्न वा मोबावा॥४॥ पितमि दमिता पतिमिवरैस्तपा। पूम्पा भूपयितम्याम पाकस्पायमीप्मुमि १ पत्र प्रस्तु पल्पम्हे रमन्ते तत्र देवठा। पतास्तु न मयन्त सर्पास्तवाऽफा किया' २॥ शोचम्ति समपो पत्र विनश्यत्यायवलुनम् । म शोचन्ति तुपता पर्वत वदि सर्वा ।। सम्माता सम पूज्या भूपणासादमागमै । भूतिकामैनरनिस्य सत्कारपूरसवपु म । ४॥ मा ।। १५-१०।१५ पिठा भाई, पति और प्रेस सप्रे पत्यापूर्वक पूम्बारिसे प्रसार नियो गुत माय मोने में मिल पा में नीम सभर हो रप Awg पुरस होणेरेसबा बरा भायम से या करते है और विटपर में सिमकार यही पापा अब बिना पिन्स होगाती॥२॥विस पाम की योग होणार होकर दुध पाती पर सीमा मा होमावा और सिम पीबोस भायम रमार और प्रपाम से मरोई बीप बस्या पण तिचे ऐवर्ष की समषा मनपा ममुप ने बोग मार और उसके समयों में भूपब मा मोर मापार से चिोप्रविधि समम॥॥ पस पानाव में स्वरी पहिले कि एम म म मर्प सम्बर और दिन रम्य में बम मि व पम् तब माविक मम एक दूसरे पेमें। साभरपा माम्य पाषापुरपा । मुसहवापसरया म्पये कामुकास्तपा । मधु ५॥ ॥ को बोगी कि पतिपय मेमोसमी मेंजरासुसब पराये सम स्मा समपा पर तो और मप में मात गरम प्रमोद पायोलमे मौन पप गीर पविध भौर पर इस मा बपये बोनोमस मगर पम्मा में रोपप अपे ऐ,ओमय हो ग्स पाप पावत् रो पति पारिने मुन रिकामे पार एमासेमणमोम्बामरेर भिमप्रेलिगम।। सिपा रपाम्पयो विपा सत्वं शौर्य समापितम् । बिपिानिपरिस्पानि समाश्यामि सपा । म .॥
पतुर्यसमुशास' उचम बी बाबा पर पिथा सम पविज्ञवामान्य और सामा पापा की मिसविण प्रात् मरीमरी सब देश तथा पब ममुगों से प्रारमे। सस्य भूपात प्रिपं घूयाय मूपात् सत्यममियम् । मिपंप मामूव घूयावेप धर्म सनातन ॥ १॥ म मानमिति घूयात्मप्रमिस्पेष पा वषेत् । शुष्करं विपाई बनर्यात् केनचित्सा । २॥ मनु || सरा प्रिय म दूसरे महिवाल मोगे। प्रमिस सम मात् परेको भवायचे मस्त मो समएम को समाप्रपाकमोवे।।। पए मा भात सबके विवमी पण योग्य र एकर अर्थात् क्लिा अपराध किसी के साथ शिषपस्बिममे ॥३बोदूसर माहितभरक दो पौर बुरा मो माये तापि विमा गरे। पुस्पा पहनो राजन् सक्त प्रियवादिन । प्रमियम व पप्पय बका भोग व दुर्मम । रायपूर्व पिपुर । रेवरा! इस CURE सो को पिरन्तर प्रमा अमि मिप मारने पाले प्रसकोपी परन्तु मुममे में प्रसि विदित हो और प मत्सबारमेय समोरपनमने और अपनेमा पुष मो॥ नोकि पुलों को पोम्प मुखमने पूरे मा पोपमा और प्राय रोप पुबन्ध परोष में दूसरे गुण मरा समा। और दुग में ही विकिपमुच में गुखमय और पास में पोपोस प्रमाबा। बम मप दूसरे से अपने दोपही पता बता मयुष दोषी से एकत्र पुषी नहीं रो माया मीकिसी की मासे- "गुणेषु दोपारोपणमस्या' माद दोपपु गुपारोपणमप्पस्या" “गुणेष गुणरोपर बोपपुवोपारोप ध स्तुति" को पुणे में दोष रोगों में गुप सपनप बिना और गुणों में पुष दोनों में गोपी मसभामा प्राधि पौर्वात् मियामापयाम पिन्त और ससमापन माम खति। पुसिरिफययपाय सम्पामि पहितानि स । निल शानास्पपदेव निगमाय पविकान ।१॥ पया पथा हि पुरुप शार समधिगम्यति । पासपापिन्समावि पिपान पास्प रोचत २॥ मधु ॥ बोनस हरि बम और रित परिहार गए और सामने मिन मुचौर मुख परम में राममो पी पुरस बिसचिरा और पाकिसे मनुम पागेकोमा समय, सरियामा बाधावा प्रीन रही में परिपती पती॥ अपिपर देयप भूतपर प सर्वदा । नपर्म पित्य व पदाधि नापयत् ।। मधु ॥
. . सत्यार्थप्रकाश मम्यापन प्रसपा पिवपक्षमतपेपम् । होमो देवो परिमौतो नपरोऽतिथिमम् ॥ २॥ मम ।।. साम्पायेनार्चपेरपीम होमैदेषाम् यथाविधि । पिन भारीच नुकीतानि बखिकर्मम ॥ ३ मा ।।। दोबा मन में सिमारे मात एक पेारि सामौ म पास पसमा प्रयोपासण पोयम्पस पय रेल्पा शिामों व परिश्ता दिन पुगों का भाव पम्पूमा वि गतिमा दोषों का सा माता करने होते हैं। सायमाय गएपविनों अधिः प्रामाप्रातः सौमनसस्प दावा ॥१॥ प्राप्त प्रातापविर्नो भमिः सौप सायं सौम सस्प दावा ॥ २ ॥ अब थमु -। १५ । म ।।.। समारोपवस संयोग प्रामक सम्प्पामुपासीत । उपमतमस्त पाम्समाविममभिम्पायम् ॥ ३॥ माये (पर्वितमपये)म म तिष्ठति तु प पूर्ण नोपास्त यस्तु परिसमाम् । स पनपदहिकार्य' सर्पसाद शिमकर्मम ॥1 मा ।।। को परमा रोम होठीगाव द्रम सम्म कपुर बारा सुभारी होगी।जो ममि में पास में मयि माता प्रम्प पापा पद की गति बारा पर परि मोर भारोवारक होगी॥२॥पीरिये दिन और रवि सपि में मौत प्लॉप और मस्त समय में परमेना पम्पब और मित्र ममप ममा पीने और बोरेयोनो काम साल पर मातम्मा मेरसमे पसर दोष सब बिगोमा से बाहर विषय मां ग्से खत समय॥ प्र-शिम सम्मनबहीभन! 7--वीप समय में अभिभी होठी और मारपम्पि मी साय पवारोहीच में होती है। दो इसमे व मायाम मम्मामा में तोपरी सन्म्य मारेर मध्यरात्रि में मी बोनसन तोमो मम्म गति में बीमा गोमा सौर पर यमी प्रति बम मी कम्योपासनेनो पेपोमपोतो होती पही पता और सिमी पाप मान्य मैं माय मी बहीलिये दोमो मो में पा र श्रीपोर मा पमुखिो तोपरे मर में यहाँ। धीर मोवीन मर रोवेल मस्मि और समाप भए ? प्रमोशप मे से नहीं। तोपरा दिनुपर" अर्थात् सिम रेमो पिपरियो त माने तो पिर बा माय पि पादिर धामी और परम घोपियों की मेष पतुसमुखास ममी । पितृपदो मेह, एक भार और एप तय। स्यर प्रोत् 'म" मम ममाम है 'भस्सत्य भावि पपा क्रिपया सा भरा भरपा पत् नियते वकासम्" मिप बिमा से समय सिमा मात्र रसको भरा पौर पदासेको पिमा जाप रसन्न बाम पारा और पप्यन्ति वर्षपन्ति पेम पिकून सत्तफ्यम्" लिए धर्म से मुल प्रभाव विमान माय पितादि पिवर प्रसार मा वि रसम माम पब, परन्तु पर बीपिटीविस्ताविकही। अध देवतर्पणम् ॥ भो प्रभावयो दवास्वप्यन्ताम् । म्यादिदेवपत्म्पस्तृप्यन्ताम् । ध्यादिदेव सुवास्थप्पम्ताम् । प्रमादिवेषगणस्वप्यन्ताम् ।।इति देतर्पणम्॥ "विनायसो हिदेवाः सपर माय भवन है।बोधि जी।बो सांगोपा पर ही बाब पो रमन यम प्रम और बो रमसे न्पूष पो रमण मी सम्म रेस भाव धिार।। यो सप्तमी गिरी पीपाती देवी मोर बोल्प पुष और विष्ण तमा सपो पप्प रमले पर अर्वाद सेवस मी सेप मा सम्म पाम पर और तव।। अपर्षितर्पणम् ॥ भो मरीप्यादप अपपस्तुप्यन्ताम् । मरीम्यादपिपल्पस्वप्पम्वाम् । मरीप्पावपिमुतास्तृप्यन्ताम् । मरीच्यादपिगम्यास्तप्यन्ताम् । इति कविर॥ मा प्रपौत्र मरीति पित् शोमा भीर को गोपाठ विपनुको सामाविष्यवान रेवं समस्य पुत्र और सिपा ग्मोपमान र सेपको बम बम और सकार मा परिवर॥ भप पितृतर्पणम् ॥ भों सोमसद' फ्विरस्वप्यन्ताम् । भमिप्याता पितरस्पप्यन्ताम् । परिपद पिवरस्वप्यन्ताम् । सोमपा पितरस्वप्यम्वाम् । इपिर्मुस पितरस्तृप्यन्ताम् । भाज्यपा पितरस्तृप्यन्ताम् । सुनिन पिठर स्वप्यन्ताम् । पम्परिभ्यो नमः पमानास्वर्पयामि । पिमे समा बम' पितरं तर्पयामि।पितामहरय स्मघा मम पितामचर्पयामि प्रपितामहाप सपा नमः प्रपितामा तर्पयामि । मानेसपा ममो मातरं तप्पयामि । पिवमा मधा नमः पितामही तर्पयामि । मपितामी सधा मम प्रपितामह वप्पयामि । सपस्म्यै सपा मम सपनो वप्पयामि । सम्पम्पिम्प सधा मम सम्बन्धिमतर्पयामि । सगोषभ्य सधा समः समोरास्तप्पयामि इति फितर्पयम् । ० तपथ... || सस्पार्चमका पे सोमे भगवीधरे पदार्पविद्यायांप सीवन्ति ते सोमसव" को पामामा पौर पदार्च free में रिपुष हों वे सोमम । 'पैरग्मेविदयुतो विधा गीता त प्रप्रियाता" यो पनि वर्षात् विपादि पदार्थों को परिपाच । 'ये बहिषि उत्तम म्पयहार सीम्ति ते बहिपर" बो रचम विरिपु मगर में सिहपरिपथ ।r'ये सोममेहर्यमोप धीरस वा पाम्ति पिपम्ति या ते सोमपाबो ऐप और महौषधि रस पान नवे से रोगादित पर प्रम ऐरकोपयों को रोपवाकरे मोमपा। येपितुमचमई मुखठे मोम्पम्ति पाते हषिर्मुग"को मारक और संग्राम माबोल मोगल प्रहार हो विमुच। 'म माम्य पातु माप्तुं वा पोम्प रन्ति पा पिबन्ति त भाम्पपा" बो बालोन बस्तु समोर त दुग्धारिस और पाये इमेल पम्पपा । "शोमा कालो विपते येपाम् सुकामिन" विषय पापा कम भने प्रमुखम्म समय होममखिन् । "ये पुणम् पहन्ति निगम्विते यमा म्पायाधीश" बोरों पर और जसपावर महारे पापोरेम । 'प' पाति स पिता"बो सन्तानी मात्र पौर पल पोप पिता। पितु पिता पितामह पिता मास्य पिता प्रपितामrnो पिता प्रपिता म पितामह और बो पितामहमा पिठापमपितामर । या मानपति सा माता को और मम्मी में पानी मलय माता । "या पितुर्माण सा पितामही पितामहम्य माता प्रपितामाही" बो पियको माग होम पितामही और फिमको मारोप प्रपितामही। बपकी मौतपा भगिनी सम्बन्धी और परपात्रता मापन पुस्प राससको मत से गरम पर मुम्मर बाप भारि म मरो सपना बर्गत जिससे मन पारमा सूप्स चौर पर सारे रस से प्रीति पूर्व सी मेवामीप भार और तर्पषम॥ घौथा सरप-बब मोरम पिरोसनो मोबमाको ग्सम मेगामापीर मा पोन मिाज ऐन म मे भमि माप पर रिमिति मगो से प्रति पौम माम में येम्परेयस्य मिरस्य महेनौ विधिपूर्वकम् । भाम्प पुदिपताम्पो प्रात्ययो गोममम्माम् । म गोप पास में मोर पिरोपसमरिण गुपौरेप पी मिमिति म सरिधिपूर्वक होम विस- हाम फरन के मन्य ॥ मों माप पाहा। सोमाप मादा। मनीपोमाम्पा मारा विश्वम्या श्वम्प साहा। धन्यम्वरय साहा। ये सारा। मनुमाप स्वाहा। प्रसपतप सारा सा पायापपिपीम्या सास। सिएहत साहा।
पतुर्पसमुन्नास इस प्रमेक मन्त्री से एकति प्रापिठ अधि में को पना पाखी अपप भूमि में पच रस के पूर्व पिकवि समानुपम पयामम ग मन्यो म माप- मो सानुगायेन्द्राय नमः । सानुगाप पमाय नमः । सानुगाय परु- माय नम' । सानुगाय सोमाय नम । मखुम्यो नम । भाभ्यो नमः । पनसतिभ्यो नमः । मियै मम । मनकाल्यै मम । प्रापतये मम । पातुपये मम । विश्वम्मो देवम्यो मम । विवापरेम्पो मतभ्यो नमः । नकारिम्पो मूवम्यो नम । सस्मिभूतये नमक इन भागों में बो कोई प्रतिषि तो उसने बिमा रेरे ममा प्रधि में पोखरेचे । इसके प्रयान्तर समय पर्षात् राव मात याक ऐरी प्राधिका काममा ममि में बोइसमें प्रमाब- गुमा च पतितानां च अपर्चा पापरोगियाम् । पापसानां एमीणां च रामनिर्मपदमुपि । मा ।।। इस प्रमर "श्यम्पोन्म पतितेम्पोनम' अपग्भ्यो मम पापरोगियो बमः पापसेम्पो नम एमिम्पो लम परम पम मिमी दुम्सी मुषित पाची पपचे और पारिको । पहा ममा करप्रभा पोस् को पापी परम पापररोगी को और अमि पीत की गारिको मात्र देगा पा ममुमति प्रादिकी विपिt. बिनोस प्रपोजल पा कि पाण्यास पुन एव होगा और जोपमत मरायोकीमा होती है सम्म प्रत्युपपरपरेना । अप पांमवीं प्रतिषिसेवा-प्रविपि रसमे मते? किजिसकी विधि निभितरो र्षात प्ररमा पार्मिक, समोपरेशक पवरपणा पापमपे पाया पुगिाव, पामगोपी मसी पास यहां भाव दो रसप्रेमपम पाप भई भोर भाचमनीय दौर मभरमगारेम पत्र प्राप्त पर पाहिम खान पान पारिरचमोत्तम परायों से मेघरामा मोसपको प्रमाने । पाय मममम ममे शामिव प्राविजिनसे पर्म पाम और मोहप्राप्ति होने देने परमभमौर अपना पर पपन भी सो मापदेशानुसार रामे। समय पारे पाप पौर रम्पति मी प्रतिमिन्द मन्मा करके मोम्म पान- पारिनो विषमम्पान् येग्रनधिकान् ण्मन् । देतुफान पम्पत्तोप पाणामपि मागेत् । मनु ।।.. (पाप) प्रति एनिमक चिम्म पाप मने हारा (विपत्प) गोपनिरर्मम मियामापारि पुष, पिया पिप और स्थिर राम नाममा मे मा भारि मदिको मम अपना पर मारे नौ प्रमाम बाहि () पर्वात रममा अभिमानी मा में कही भी मामा बही (रेल)मा म मेरे सध्यामबाट पसमाती पर हम पर व्या मिप्यारमारि यात्रा वर मी अपित है इमारि मपोपा डामेप (मछि) से एक पैर ग्म मानसिपमान रोप्रा मनी बस अपना स्पर्ष पिर मता से पासायली और बाकी पारि ग गप्पा परमिोपी। ऐमाम सम्भर पापीमात्र से मीरममाणीसावन मम्मर मरे से सादिको पाम संसार में प्रवर्मगुरुमाते हैं। आप तो अवधिसम मते गित गप में प्रेमी परिणापी महासम्र में रख है। हम पांच महामीम प्रोमियम से शिव शिप धर्म सभ्यता मारिएम गुखापरिभिदोन प्रयु, सात बार होमपामा सानो पुलमान होगा प्रमोद घर वाम म जाम पाप से भारोम्ब हुरि र परम्म्म मर्म प्रम पर मोचक मनमय सा होगा इसीलिये इसको रेखामकिपा प्णु मावि पयों को यमदेवा। पिता से अब मान पिता और मम्मी मामाधों की प्रेम कमेपासपम बाब पोप । उससे पलासमाविका प्रमा पर पौर प्रयास असम्पमा सुधीरोण | एपरा पता भोत सी ऐसा माता पिच बन पाचर्य वे सन्ताप मोर पिनाको रसमयदेम अतिमिमीणाबोसंमभानेपाम प्रविधि मन्द मी गावि मी पोहोची सब पर ऐसा में मने और ममोपदेव मवेसे पावरमही होती पो पानी को ससम विवाशिवीगार मनुनमा एकही धर्म निपापिय तिषिया समितिमाहीती पमिति शिक्षा नियमावही हो। मिनि मुखमा। माझे मुा पुम्पेत धर्मापों बानुचिम्तयेत् । फापरताप कम्मूनाम् तत्वार्थमेव च ॥ मा ।। पाधि पौधे बर मय पर सो रात से रमे, चाईम गर्म और रोगाप्रविण और परमामा मामी भकर्म का मामयको पाकि- नामर्ममरितो बोके सप फराति गौरिव । एनरावमानस्तु कत्तुभूगानि छम्तति । मनु ।।... म मर्म बिन्त कमी वही होता परन्तु पिस समन पर्म भवारसी समन र मी वही होता परिये प्रभावी होम जब से माम तमपि मिल जामोपचाचरण परमारे सुचने मुखों को मारा जाता है। इससे- अधर्मपते वावडो मदापि पश्पति । तत्त' सपनापति सम्बस्तु विनश्यति । मनु VI... बच जपामा मयुन धर्म में मांग बोर (से सवाल करने ठोर मामा मोर मया से ) मियामा पावरा मात् चतुर्यसमुणास १ समरेगा लोभसराप और रिामप्रतादिमों से परापे पापी देकर सम्म माता पथात् ममावि ऐप से सब पर कर, मूण्य गन पर मात्र प्रतिन को प्रसाद प्रापाप स गानों को मौरीवाल पयत् यौम को बायो मे जा भय मा पुपमा से जो से अचमी परमादोसा सस्यधमार्यसपुशव यारमेस्सदा । शिप्यांम शिप्यास बाग्बाइपरसपत । म याम् मोठ मम धर्म प्रमोद पापावरहित होम पम प्राय मोर असम के परिणाम बाबमबमोच घमावि मा भर्पात धर्म में पते इप समायब स शिना शिक्षा विमा मन शक्षिपुरादिवायाhमातुसातिधिसमित । बामपचातुरेवेर्मातिसम्बम्भिपाग्धये ॥१॥ मावापिवम्या पामीभिभापा पुत्रेण मार्यपा। अरिभा पासपर्गेण पिपा न समाचरेत् । (अलिक)मम ममेहाय (पुरोहित) परा उत्तम परी सिमाक (भचार्य) मिष्य पाहारा (मानुप) मामा (विधि) पर्यात मरसोई माने साये में मिश्रित सपि न हो (संभित ) अपने पाभिव (प) पत्र (R) दुग्ध (भानुर ) पौरित (40) भापुर प्रजाता (जाति) समोन पा स्वास्म ( सम्मापी) असुर भामर (ON) मित्र ।।। (माता ) मात्रा (पिता) पिता (नामी) पीर (वा) माई ( मापी) मी (शिय) पुत्री और [फमेष ] मेक बोली से स्थिर पा विम सर्गजामा बसे। प्रतपास्वनधीपाम प्रतिपादियः। मम्मस्परमप्लवमेप सार मेम मसति मा ।।। एक (भवफा) पर्ण पत्तास्यादि तपादित सरा (अनापामा) सिक पापा तीसरा (मसिदायि) मम्मत पार्थ पूसरों से रामरेखा सेतो पाको समुद्र में जाममाव भाये रसायही इसापर महाबोर नामाको माप घबर- विप्पप्यतपुर विधिनानि भनम् । पातुमषस्पनर्याप परमारतुरेव पाए । बोपए पर रख दी ऐपीपसमाप्रपाप एबम पौरपर परसम्म प्रदो। गोमतोतोन्यो- पया प्पनौपतन निमजस्युरकवरन् । तथा निमनतोधिस्वामी रावतीको म... मेरमोमबारपन र सभी Tukta रोमो कोमी पोत्या.
८२ सस्पार्यप्रकार पासडियों के अषण ॥ धर्मभ्यमी सबा सुधरवाधिको पोकदम्म । ग्राममतिको यो हिस सर्वामिसम्यक है अघोररिनफतिक सार्मसाधमतस्पट। राठो मिथ्याविमीवम वमक्यरो हिसः ॥२॥ मा ।।। (धर्मबी) धर्म र भीम पर धर्म । बाम से बोपी कोमा (घरामा) मत होम से पुक (पति) कप (बोमम्म) सी मगुणो सामने अपनी पर गपो मारा भे (सा) माविस पालक भन्च मे पैपरि रखपा (मोमिसन) सब पचे और रीमे भी मेय रसोरम (मासिक)मा विमोम्मान एवं पीर बारमभ्ये।।। (पोपी) अतिम्सेि पोचे पीरो (विपतिपक सिी देउसम्म पैसा मा पाष बिमारोहो मन मामा प्रावक को मसर (स्थापन ) मा पर्म नियस को पहो पपन्न मोबब पापो में तुर (बस) भपकी बात भी नाम हो परन्तर मी मोरे (मिप्पापियावा)माएपर से सौर संतोष पात्रता दिवसाये रसो (ग) समान मीच समम्मे ऐसे . पायोभमे पायरी होते मस्यिस पशमी।.॥ धर्म शमै सधिनुपाद वल्मीकमिव पुसिका। परसोफ्सपाय सर्पभूवान्पपीरयम् । १० मामुमहि सहायार्थ पिता मासा र विश्व' । म पुत्रदार म पाविर्धमस्मिादि । एप प्रयपट जन्तुरक पप प्रदीपत। पफोनुभुरके मुम्तमक पनप पवम् ॥ ३॥ मनु । एक पापानि फस्त फर्म भुम्हे महामन । मोचारो विप्रमुप्पम्त का दोपप लिप्यत॥४॥मा यो परा ११॥ मृत शरीरमुस्यम्य कायमसम भिती। विमुबाबान्धवा पाम्वि धमस्तमनुगम्पति । ५॥ मा १m. मी और पुत्र पहिले कि पुलिस व पोमबार मात मी यो पत्र पूतो को पाक रेम पायक पर्चा पासम्म मुख पोरे वर्म प्रचाकि परमोड में जमा पिकावरीबी र म पनि पर्म हो माया होवानि पा हो और सम्म पोर मरको माया पर हो धर्म प्रमो मुबार पपर्य मोसम पापको भोगवा मी समय में एक पुसमा पाता र माय भयो म मोपनीसमपर रोमनी मी निधर्म मोहोरो समापी वा ॥ बाभी चतुर्पसमुन्नास किमी म सम्पपी मर सवारस महीने पमान भूमि में बोलन पर रेप विरोध गरे । मेरस साप पारेपा ही होय कि एक धर्म हो असम मामी होगी॥५॥ मारमै सतापार्य निस्पं सशिनुयाप्ने। धर्मेण हिसायेन वमस्तरति दुस्तरम् ॥ ॥ धर्मप्रधान पुरुष वपसा किरिखपम् । परसोई मपस्याय मासन्त शरीरिमम् ॥२॥ मम ।।५।२१।। ग्प से पायोक मात्र परम्म में सुख और सम्म मानिस बसम्पबारेमाप वोकि धर्म होणाप सेसे दुतर एसमको बीब तर समता॥किमो पुस धर्म प्रेमभाव प्रममता विसमभनुपम से कम पाप रहो गय रणको प्रय सम्म और मामय सारद परयो पात पामरमान परमाध्यमको मर्मतीपत्रमास है। इसलि- रबारी मूवम्त पधारेरसंपसन् । भीसो दमदानाम्पा स्पेत्स्वर्ग सपामत १ ॥ वाप्पा निक्ता सबै पारभूबा याम्पिनियता । तास्तु य स्तेनयवा स सस्टेयकपर ॥२॥ भाषायममते पायुराचाराबीप्सिता प्रजा'। भावाफ्यनमसप्पमाचारोहम्स्पहरणम् । ३ ॥ मम ॥१५॥ मा परी प्रेम मा तेन्द्रिप पिक मदुरायो पुम्मा में प्पयारा धर्मामा मन मे बीतने पर पिलादि काम मे पुत्र को प्रार हो । परन्तु पर मी भाव में रजिबिस पपी में सब प्रांत अपार मिति हो भयो हो मम मूर भोर पपी से सब मपम सिरहते हैम्प परी बोचरता मोद मिप्पामापरवा परी मारि पापा ममममा. मध मिप्पामावारिम्म गर्म परमो धर्माचा भात् विधिपता से पूर्व भामु पौर धर्माचर से रममा माल पम को मामा समयो बमोचर में पायों का प्रयास पाचापको मरा किया। उपवारोपुिल्पो बोदे मदवि मिम्बिट। बभागी पस प्याधिवोऽस्पायुरेष प । म.।।.. को पथरी पुरा पंसार में सोमम में मिला प्रास उम्पन्धपी भौर वितरम्परिकहोम मातामुपमी मोयबारा होगी। इसलिये पेय प्रयो- पपत्परपरकम वचपस्मेम पम्पद । पपहारमा सावलसन्त प.
सस्यायप्रकाश R सर्व परक समारमया सुखम् । पठविपासमासेन बर्ष सुमनुब्यो ॥२॥ मा ११ ॥ बो २ पाप कर्म हो रसमा पेसाप मोम बोस्यीय कर्मोन्स रामपहपाप प्रेममेयोकियो। परापास्ता पपत्र हुए और बो र स्वाधीनता पर सब एक पोप पुष और बसपारमा नाहिये॥ पान को एक दूसरे के भावीप ममप मापाता कामा धीरे गम किसी और पुण्य प्रपामेभावामनकर मोदी पुरुष सौर पुल्स पोम परसा निवाब मा पामिया शिप मामा । म भावाश्य पाश्रम की पीर कारगम पुल अपीय पन्य । म म परे से पुक परे को रोकप भव पही मिर बाबा किसर विधाये तब बीमार पुल एस प्प पीवित बुद्ध भाद्बो पर पुस अब एक साथ स्वमिसमपन्त बोसोमादिपक परे पापीन होगा। पएस मसरिख मी बयार करें। इसमें बरबरियार बामियर रेप पारसमरिसमसमे दोष नपरे पति माग पीपी पति सामा। मोमबाटो पुलकीने पास मुविषयी माफिया कोपा अपविध परेत और तुम सो विमान की कर पाबीच रेव पवि मौर पुल की पूबनीष अपात् सणस कामे पोम्म रेपी की है।एमक माय पिव समाव मनाएकीको समय और मापक थप सन्यासमान विनोको प्रम। समयेरे ममासमोर पणपिसे होगी- भासम्मान समाप्रमस्तितिचा धर्ममिस्मता। पमा पन्ति सबै पस्थित रम्पते ॥१॥ निषबत प्रास्तानि मिम्बिवानिमसेवत । मनास्तिक भारपान एतत्पडितपक्षणम् ॥ २॥ सिम विचमावि चिर श्योति पिडाप पार्थ मन्ते र कामात् । मासम्परोपपुर पप, वमा प्रथम पपिस्वस्प ॥३॥ मम्प्राप्यममिवाम्माधि पर कृन्ति पोभितम् । भापासपन मुगन्ति मप पपिरवाराप ॥४॥ मपच्या विषय समान प्रतिमापवान् । माय प्रापस्य पत्ता पपस परिव रम्पते ॥५॥ भुतं प्रानुग पस्प प्राव भुतानुगा। प्रसमिधासमार परिवाश्या प्रमेव सा ॥३॥ पे परमात बोपपर्व विरमगाम भोग बर्षसमुशास' भ-सिने प्रमभन पम्मा पाएम्म प्रयोद दो निकम्मा पारसी मी पुछ दुक पनि बाम समाफमाव मिमा जति में गोक मीप पर्म हो म बिस बिपित हे मिसरे ममको सचम र पप पांत् विपसम्पनी भावना सही परितमादा है। मा पर्मपुर मौक सेवर प्रपर्म गुरु को मसम्म, चा और मम्मचर मिलाममा भारि में मसात प्रदान हो पर परिपबम्पर कन्यकर्मबोम्म विषयको मौ सौम बाब समे, पाव कप पर्यन्त गानी को परे, पुरे और विचारे बोबाने रमको परोपमा में प्रमुक अपये स्वालिये प्रेई कामको बिमा परे प्रति पोरब समय ये दूसरे में सम्मतिम रेपी बम प्रधान पपिस्त रोगा धरिये ॥ो माशिमपम्प की पा कमी म भ प पार्न परपोकामे पापमयमै मर को समास प्रोत् म्पासपोपही विमा परित विसी एपी सब नियमों और प्रमोसामने में अतिविपुष विवि के कामों समय, सामोपचौर स्पतिमा कोपमा प्राचीन दो पस्ति tu॥विसी मामुप समम अनुसार सिएम मय पुदि मनुसार दो बोम्मी मा पात र पार्मिक पुस्पों को माराव ने की पषित बा को प्रम होये ॥६॥वहाँ पेमे पुरुष पाले होते है निय धर्म और तमाम रोम प्रतिदिन प्रायन होता रहा है। पर में प्रमोम्ब मौत मूसा- प्रभुवर समुस्यो परिणम महामना। प्रर्या माऽकर्मण्ण प्रमुख इस्युप्पट पुरै ।। भनाइव' प्रविशति प्रपोपा मापते । भविस्त विश्वसिति मूरता मराधमः ॥ २॥ ये ओडमी महामारत रणेगप रामगार प ॥ पर्प-विसवे कोई णाम र पान मुमा और भतीच पर्म रखिदोम से मनोरम प्रहमा विषार्म से पराण पति को दफा भएमा होम्मी को पुरिमा गोप मा मtuो पिएससे सम्म । विमी पर में गिरी सभासप पर रेम्मा हे विन्ध सम्म में पवमा बसे, विभत मनोप स्तुप मनुष्प में विस मेसी मापौर पर मनुष्यों में पौध मधुण पाठारे या पेये पुरुष प्रमापक परेक, गुरु और माननीय होते प्रविण अधर्म असभ्यता मा मिर पर एप सही सवा॥ भव निर्पियो पापा- मानस्य मदमोहोच पापर्व गोष्ठिरप पा स्वम्धता पाभिमानिय तथाऽस्थगित्पमपम । ५० पे सप्त रोपाः स्यु सदा पिपार्थिन मara ॥ सत्सयमका मुगापिन' कुतो विधा तो विद्यार्थिन मुष्म् । सुनार्थी पा स्पोरिचर्चा विद्यापी या स्पोत्सुखम् ॥ २॥ पे मी रिमाम म प्र-(पावल) पर्वात शरीर और पुरि बाम मा मोह किसी पख में सास पचता और इस पर अब सामन पुमा पाने सामानाचा अमिमायी मामी बोध सहयोप मिसावि में हैबो ऐसे बने जिम्मी बही मादी। पुल मोपये की मोकोकोपियाऔर निज पानेको मुखमाबोधि विषय- मुशामियाको पौर विधी सिम्बो पोगरे॥२॥ पे मे विषय मिपाकमी ही हो सकती और ऐरेको विवाहोती है- सस्पे खाना सतत दाम्दानामूनरक्साम् । प्रलपर्य वहेवाम्न सर्वपापाम्पुपासितम् ॥ १॥ यो सरा समाचर में मच, विनिर और नियम को अपमानित समीप समय म मापन हो इसरिने एम गायक मन्यापक पौर विवापियों में होगा पाये। प्रचारकोप पेसा बस किनविपये किया चोप महादी सम्मानी मनपरी सम्पम् जिभिसा मुवीजवानि एमगुपपुर पर और भाम्मा म पुरबासमम परिणाम पिम् हो पा रन शपये में और रिण पाने में मिलने । चौर पिणी जोर मा स्विमिप नाम्स परमागम मेम विचाणव परिचमी होम रेसा पुरुराय में जिसने पूर्व यि पूर्व पापु परिपर्व पर्म और पुण्यमय पास इम्परि म्याम्प क्यों समापनों में ग्राम में मेग। यो कर्म चाहिये बपि दिवस पर विण मोरेजों में मापा पान म मासा पति के मायामा पण बरोरबा, होपडापावर में बाबा भावा बामासमा प्ररम्भमा पण्पादन चौर ग्वा की गति नरा से भगोमायी पन प्रसाण, यि और धर्म की गति में समय सक पदरी विकराम पन्या स सानाम मा सब प्वी भण सीमा निमसेमा महोने पाये। या पप पेयमों में शामिल मनिपुर पविभम मे गे पेपर नीमे पपी पगारिन मौरवियोम पो पाब ज्यप पिनी में पोपमा मामय पर मासिकम। मोगा परस्पर प्रति सम्मा समयमा मुखप हामि एस्समस एमपौर प्रम म मब पब म मामा गया और पुरुष सिमीप पानं पुस्मसंसा पत्त्या ग्रपिपोष्टनम् । सप्लोम्यारासमारीसम्पमानि पहम ॥
पतुसमुहास ७ - मम, माप प्ररि मादक द्रमा प्रपामा पपुलों प्रभा पहिरिपोप प्रीत पर्व पास प्राधि परब मिस से पिमतीराम और पापे समापप पयसपाम्र का भी दूषित पणे पूर्णव है। बीर पे पुरुषों मारे। पति और पीमा दियोग दो प्रकारको भी पर्याय देणान्तर में जाना और दूसरा सामु मे स्पिोग होगा इन में से प्रथम प्रसपार पहोकर ऐप में पाई जातोश्री को भी साप रचे इसम प्रोब मा किमान समय तक यिोग न गवा चायपे । म-जी पर पुसले पारित होने पोग्प व बही ! -'पुगपत म' प्रपोप एक पमप में नहीं। म०-यसमपान्तर में प्रवेश विवाद होवेचदिन! २०- - सा बदसतयोनि स्याद् गतप्रस्पागवापि वा। पौनर्मवन मर्का सा पुन संस्कारमईवि मनु | वित पीय पुरुष माविम्पपमा कार दुपा रोपौर संयोग मारो भात् अपठमोमिमी और प्रवी पुस्स हो रसम पम्प सीप पुसमाप पुनर्षियरोषा चहिये किनुप्रयम और पाप पखा में पवमोमि सीरवीर पुरसा पुनर्विवाहमा पीपे । म०-पुपस्यिमयप। र -(पीबा) सो पुस्स में प्रेम म्पूम रोपायोंकि बायो पुल को पी और भी पुरष बोरा दूसरे के साप सम्बाम गरे । (परा) बर पीच पुस्प पति मोरे मरने के पास दूमा विणकामा परेप प्रथम डी र पूर्व पति पदाणे भगा देसमा पोर पम्प माँ भरनसे गा मा । (तीसरा) व रे भनसममाम सचिमी कराकर सरे पदार्थ पिक मिपा । (ौपा) पतित पीर बात पर्म मा रोना इमारि रोगोंदियों में पुपरिण का प्रवेक मिशाह कमी न होय चाहिये। मा-बब गरम हो सब हर मो रसमसमा होगापण पर पी पुस ममिचारी म मा गर्भपातकारि पुत पुराम पिसमिपे पुहिरोषा पणा। To-न कि जो भी पुरुष मग म ति रागों को उपद्रम दोपा और बोस की परम्परा रपये दिवे रिसो अपब सति मगम योरोपे उससे कुम योगा पौर मिचर मौन रोग और यो मान रहसतो मिपामो सम्मोत्पति । म०-पुरिया पर यिोग मसा मेरा २०-(परिस) से विण सोममा अपने पिव प्रसपोर प्रति सप्रे पाठ रोगी भोर पिग मे बिष सम्बाप ही राज और समाधमकाय विषय की रसी पिणीव पति परम रहती है। (सरा) रसो पिरिय सोपाले सो निगडित पति रावगी हो। और पिपप गीते बोगियोपुर मचाने प रमा पोत्र होता म समस्कान परी पर सता तिचे पक्षपति के पुत्र र रसीप गोत्र पसा और रसौके पापों के बारमागी होम रसी पर में बसे है। (सरा) पिण्णीत मी पुस्पको परम्पर पेय और पाचन प्रपा प्रावो और मिस्सो पुल मामी सम्मान नही पत्र । (चौवा) निहित मी पुस मसम्मान मरवर्मन्त रावा और शिशु की पुस मसले पात्रता है। (पांच)ग्रिीव की पुरुष अपच में रोमाको सिदिमाने में का किया करते पौर विशुपी मल अपने ममम च्यिा मते ।। प्र०—किया और वियोग के नियम पाच पम् । 70-मबोरा मेर जितने पूर्व मोजौर पर किसिमीको पुस्प एक पति और एक ही सी मिटएम सन्तान उत्पमते है और निमुची पुलोजपा से प्रषिक सन्तानोत्पधिपहीम से बात या मार मारी ही प्रकिया से निपली जीपा पुल मर गया गनी कमियोप होगमा जमरा प्रमही मिति पी पुरुष सपा मा में से किसी पुलापमा यही कि नियमानुपाम समय पानी को पीपये मिले मियोपको तो बरसा फर्म ग्सौरिखसेको पुससम्बन्धएप। और बो पुल भपये सिरे तो भी जमा पर्म बने से सम्मान र म । परन्तु पो बिपुष्पी दो वीण पर्वत बाम पाहम कर विपुल पुल रे देवे । रेसे एक विपन्न पी अपये दिये और रो। मनपा मिमुख पुरसी बिये सन्वाय का पवी और एक पलसीक पुल्स भी दो अपने पिये और रो। अम्पा मिपवर्मोरे लिये पुष उपज मसकता पेस मिशन एव । सम्खयो. पति की पाबम. हुमा त्वमिन्द्र मीद्वः सुपुत्र मुमगो कम्नु । दास्पा पुत्रा नाधेहि पविमेफादश कपि । । ELIM.. (मोदय इम)ी सींचने में समर्थ ऐमसंयुष पुल दिइस विपरित पीपलिपुत्र और सौमाम्यम विपरित पी में रण उपप्रमौर म्पारसी स्योको मानछी तिमी शिव पुराण नियु पुग्नों पर पम्ताम सपत्रमौर और रातिको समय। इस पाप ग्राम्य पिक चौर रणम्यान सी और पुस । सम्माधिकारपत्र में साधिक प्रमेस सवाब मिय विपुरि प्रत्यपुसते भोर तो तपसा मावि पसाब रोपी रोममा गत पुग्ण पाठे है।
चतुर्पसमुनास t म०-पाभियोग प्रयतममिवार समाव रोवती। उ०-से पिया विपरित भ म्ममिथर होता है सेविका नियम समिधर का है। इस मे पर सिर माहिसा विषम पेरिणामे परम्पमिया नहीं पाता तो विषम पूर्वक लिपोप होवे से ममियरममाषण जैसे-दूसरे को कम दूसरे मार साप सामोरपूर्वक रिया होने पर समागम में स्पमित पाप पसमा वीस परमोच वियोग मम्पमियर पाप पसप माममा चहिये। म-हो मैक परन्तुपवा सय कर्म भी। 7०-को बाकि के समापम में किसी मिश्रित पुसई बियम मौरवियोग में विवाह समाव विषम स दूसर को पाकी ने पर साप समागम प्र में विधापूर्वक सम्यमयी होती से हो पियोग ममी म होगी धीमे । माबो ममियरी पुस मौरिण रोमी गर्म से पते" wo-मको मियोप में पाप मासूम पड़ता है। 30-जो वियोगपात में पाप मामोतो रिण में पापसानी मान पापो नियोग रोकने में बाकि समानुस पी सरस्थमारिक महार रामही समय सिग रमपम् पर्वति बोगिता गर्भपातसम्ममपास्य और विश्व यो मोर पलासी पुरुषों • महासाप को पार नहीं गिर ! का पुण्य म सम्मोत्पचिौर सिरकीचाना हो किसी सम्पहार पजातिम्पपार मेरमो से गुष्ठ पुन पुरी पर से होते ते. एपमिया और समर्म रोम्मे भएकही म परकियो शिपिविणमनियोग कीमतोमरी। परन्तु जापसे मी समरिया भने भारत्मर में निरोग पसरपचरसेप पमिया मम्पूर होगा प्रेम राम सन्चार होम मनुषों को परोस अम्मा और परमा पथ पर बाती। मौरचम पार गरि पौर पिस रचम पुत्र समिधाम म म मेरभरपरी पुणे पन्चार और पारिमिर और मे पिपरिये सिंगमनपरिरे। मा-विषम पीपी। २.- विरि मेरो पिरिचिोप Aur रिपा पुमुपति और भी पान बिपी बरी manम होगा ITHIN परो कम रोशरिचय प्रधान 16 सिमरोप ndutो।
सत्यार्थप्रकार बो मम्मणरें तो पाप और अति रमरम्म्याप । महाने में पकमर पापमपे पर्म पे पश्चात् एक पर्यन्त प्रमहरमे। प्र.-वियोग मपपेपर में होना चाहिसे बमबारेमाप मी! 1-अपये पर में अभपने से रचम पर्य। पुस पाम भर्ना पापा पीरप परिव और मामले साथ स्पिा पनि और व्याप साय प्रायोपाय नियोय म सन्तीम पर्म पाकि सर्व सम परचम परमजीपे अपरेसे मीरममही मी पौर पुरुष की परिभ पहाँ प्रयोग है कि धर्म से सर्वात वेदोकरीति से किया वियोग से सन्तामोपतिमा। म-पुसको रिपोप करने की क्या भारताविपसरा उ०-हम रिज माने? यिों में भी प्रौर पुल्प का एक ही कर किया दोबा मारि सायौ में विची दिवार पर बड़ी । मम और मममी कही रिवाने में म्यास और विषम भौमाय जमार पुस्प और अमारीको साप मासीक पुस्प के मिणचे में सम्मान प्रांत अपम । जैसे विपणा सीमाप पुस्प सिम्मी बिमा यता से किया पोरी मे समयम किएप पुस पाप कियको दाममी पोसगी । बस किण किये एप को मारी कला और विषय पीरोई मान पुरुष प मेगा तब पुस्प और पीको वियोगमयेकी पावरपाता होगी। औरही पर्मीकि साब से होमसम्म होगा पीर। म-से किया में बारियाना प्रभाबीसे दियोग में प्रमाण 7०-पमिल में गत ममाय रेखो और पुयोर- हस्विरोपा शपस्वाधिना शामिपित करवा को पतुः । को गोरात्रा विष देवर मर्य न योपो कणसे सुपस्प मा। उदीर्घ नार्यमि नीवसोक गवासुमेवमुप शप पर। इस्तग्रामस्प दिधिषोत्तपेद पत्युमनिस्वमामि सबभूथ ।। . मे १।५ माम... (अपिल) पो पुनो ! अरे (देखो विष) रेखा में विपक और (पोम)सिदिला सीमारे पक्षिसे (माले) समान मार पप्पा सोमपन्यापी (प्ले)बममा सपा प्रती उमरोमा पो पुस (मलिगोय) मा रविकर (भा) में से (मामिपिन)मा पराये में मि (मा)ी भोर (मोना)लिस समरमा परम (मेक गपुण) मा ar स्थाविप्रेष- बिजय पहल परे ससे पारि ! धतुर्पसमहास' इमा किऐय निरोग में पोपुष्प संप ही में है। और विपरित पति के समान विमुक पति को प्रारमा विश्वमा सन्तामोमचिमचे। प्रक-परिसिौभयोगमहो तो विपपरियोपकिमो सम्म "-ममम पान्तरेस तमासा दम मम होमस सय कमाद वितीया पर उम्पत । मिस म रेसको प्रमो कि विश्व प्रदूसरा पति होता पाय माया भया पपये बम अपने से रसमसमा हो जिससे विरोम रोम काम देवा। (मी) विष ! (पूर्व गतामुम्) म मरे हुए पति माया बोर पे) बालों में से (प्रमि गोवरोषम् ) वे पर पति को (पेरि) मस रो और (या) इस पर विमर और नियम गे (रस्समम रिपितो) तुर विषय पुमा पानिमाय मग मिथुन पति सम्पचिपे मियोप होगो ()पा (अभिम) गम्म मासी मिनु (पा) पति पर बोए प्रपणे विनियोग पी तो पप सवा ()देता। ऐसे मिसपमुख (प्रमि सय, नमूम) से और विद्युत पुस्प मी इसी नियम का पालन मे। भदैवान्यपविनी हैधि शिघा पशुम्य सुयाः सुषधी । प्रमावा बीरसकोमा स्पोनेमममि गारपस्यं सपर्य । 10 में 10 (सपनिम्बा) पति और रेमो दुम्ब- समी बी! (१८) इस पानम में (पा) पामोशिये (हिप)मयमा (सम्म ) म ममा पलिम में मरे (मरण) मी सर्व पर चिमुक (मान) म पु पोरिसे सहित (पौरमा ) भागीर मे गमरे (सधम्म) रेखाममा भने पछी (मोप) मोर मुख से गरी प्रति परेज को (पि) (इमए) एस (प्पन) एमाली (अमित) मिर(पपर्व) व बियामा वामनन विधामन मिशा पिन्वत पर एक जो प्रायोमि पी पियो अब तो पति पोगमाई भी रस मिसभा. H०--एक मीप पुरठिये वियोगमा fulta fays विरोमामध। उ.-सोमः प्रथमो विषिद गन्धर्षों विपिद उपरः । सूतीयो अमिष्टे पतिस्तुरीयस्त मनुप्पमा || अपम्प ।
१२ सखाप्रकाप रेसिबो (2) वेग (प्रममा) पदिय नियमित (पशि) ति एकमे (विवि) सोनार सम्म पाम (प्रोमा) मारती पुपएक होये से पोम दोसरा मियोप से (चिदिने) प्राप्त हो प (सपा) पुत्री से मोप भये से पाप जो (येव रचरा)के पनाए पोसरा पनि होला हैप (प्रणित) प्रभुपवापुट होने से प्रक्रिया और बो (a)रे (परीपा) चौथे से म्परा तक सिोप से पति होते है। (मत्सना) मनुष बाम से प्रवे। मा (इमानमिन्द्र ) इस माथे पर पुन पीरिपोयम सस्तीस पुरुप मा मातमिपोगमsat प्र०—पमा राम से एक पुत्र और बाहर पविलोमि। --को पेण अर्थ मोये तो विषय परम्" "वेवर फसाद दिवीपो पर रख्यते" "भोम्नि" और "गबर्यो विविए उत्तर"मारि रममाया से विम्योपा बाकि हमारे अपने पूसरा मी पति माठ बहीरो पम्ता । देवरावा सपिएगवा लिपा सम्पर नियुछया । प्रजप्सिताधिगम्तप्पा सम्मान परिपये।।। ज्यो पपीयसो भार्या पतीपाम्बाप्रमियम् । पवितो मरतो गत्या नियुकाबप्पनापदि । २॥ चौरस मजमेर ३॥ मनु ।।५८,१५ ११५॥ मादि माने मिक(मपिस) पर्वात पति पालका मेसिमकोय का पर्याय माती व भपके परम अतिम पुल रिषीप मियोप होश पहिये । मा बोबा परम्पक पुरूस और विषय पी पन्तायोमरि कीरचा भवी रोमियोम होगस्ति। और मामबापहोवर निनोयो । यो मापवर्षांत सन्धमाकेदो पाक होने में से पापी बोरेम और पार मी से बड़े भाई अमिलोग रोम सम्वोपति रोप पर मी पुजा मिपुत भापम में प्रममम में दो पति से गाय धर्मात एक विलोप म बसरे पुत्र गर्म हरेक स्यिोग की परिरले पश्चात समामा बने। और जो दोसि विपण तो चौमे पर्म का भात पकाति एसपम्पब वो सकते है। सम विपति पियो सीपये विठगि । यो विष्णीत मी पुस मौएम पम प्रति पमापम में नामी और मिगीन होते। प्रभात शिष्य मियाम मन्तारी से पराम् ममता दिने नही प्र.-वियोग मर गये दोहोवा पति भी। 10-बी भी हा- धन्यरिछस्व मुमगे पर्वि मन् ॥ . . .।म 1 2 ।
पतुसमुन्नास १२ बच पति सन्तानोत्पनि म मममी होवे सब पमी जी को पाया कि मुम्पे ! सौमारन की पामोहारी सीत (मत ) मुफमे (पाप) दूसरे पति की (पत्र) पाम सकि अब मुमले सम्मोलपियो सगी । बसीरे से नियोपो सन्तामोल्पनिक । परन्तु रस पिणीव माथप पति को सेप में पर ऐसेही स्त्री भी बच रोगारोपी से पास होम मचायोत्पत्ति में असमर्पोटसमपये पतिप्रेमाचे किस्मी! भाप सन्ताम्योपतिको इना मुप से पोष किमी (सरी विषा सो से मियोपको सम्बोधिनिये । मा कि पाप राजा की सौती और मानी पारि बिमा और जैसा प्यासनी में सिर और पिचिलीमर गाने के पात् शव माहों परितो से वियोग से बम्बिस में मौर मम्मास्मि में और पाम्सी में फिर में उत्पति की इमावि विधाम मी इसव में प्रभाव मोपितो धर्मकार्याचे प्रतीयोऽरो मर' समा। विपार्य पर पोरा कामाय वस्तु परसपर । १॥ पम्म्याएमेऽधिवेचा परामे तु मृतप्रज्ञा । पकावशे नीसननी सपस्त्वमियषादिमी ॥ २ ॥ मड 1111 पिपदिय बोबो वा पति धर्मपर्व परदेश पाहो तो भर पिरोसिये पोहोचा मोर बारिमसिये पादो यो वायर रेपमा दिलोम प्रो सम्वोपरि विपरित पति पाये तब मिल पति रमाये ॥१॥से ही पुखिये मी विषम किया तो माम्मे (NिI से प्राप्त वर्ष नापी को फर्म बर) सन्ताम होम मर बायें हो र, यसो त यही होने मोटोम्पाराव और जो पापिय मोरये पजी होणे असा रस कीबोर दूसरी पी से मियोप प्रो सन्तामोपति परे ॥३॥ से दी मो पुस मामत गुम्बाको पीरिममेमोर एसरे पुम्स से वियोग म सम्वानोत्पति के रमा मिसहित पति एमागी मन्ताप रामावि प्रभाव और पुलियों से मार दिया और नियोग से अपर पति या "भीम" भाव मिति पनि सपा पुमा पुत्र पिचपदामसमी होता से ही पत्र वियोग से सत्ता र पुन मी पतपिन राबभागी होते है। पर इम पर पी और पुस माग रकमा पहिये किवीर्य भौर स प्रमूव भम, कोई इस समय समय परमी मेरमा पर पुरनों सर में बोते १२ महम्मोकिमिमान माखो मूहोम भी अपसवय परिभरिया सम्पादौर होवे। जोकि प्रापरण पर मोम मूलभ ऐसा बर्तमान दो गो पातम मनुभाणार सो रको उपेट में गोतापमार्गमावारिसमस पने महाँ मिरा और "मामा पै सपत पुष" पम्य प्राणी मची।
१४ समाप्रकार भावाप्सम्यसि हरयादधिमापसे । मात्मा पुत्रनामासि स मौष शरदा शुसम् ।। विष : हे मासे उपर से परिसर से समाचार इसलिये मेरा भामुण्से मत ममे किसी।बिससे से । मरम्मा चौर माम्बाम गपच होते सो मेरिड मे बोबार बीच मधेत में बुणग्र मापाप सम॥ प्र-पिथा दोरायकि इसमे की पुलकोप में पर गुस सोच भयो त भोप पता है इसखिये विपके साल रिसर्म मीति हो कमिपब मातिएबाप दोष से। २०- प परिसबमार है मनुनी मानी । यो मपुनी ममियाम विषम हेलो सब ममम के परप्पयमा माहो पाते। को किसी की सेवा मी समोर मिया ममम स रोपी मिर्षक पौर मसानुमान र मर बाई किसी मयप बसे। प्राकमा में कोई किसी सेवा मोगामे और महाब मिसनमपरोपी बिश और पापा होम गाँसमारोबारा सिपी पापी का स्मोपदाबमापी मौको सबौर सीमिी पर्व पर पांच साल पर, इसात दोषी विसावा किया हो रोग म-ब पुगिरहोय पपुल्स को पानी और पकनीमे एक पुरत रहेन त यभक्ती रिवारोगियी ममय पुरुष पौधरोपी और रोगीकी पुषस्यो बाब अप तो पिया। उपम प्रयुचर वियोग मिसव मेंरे। मौन भणी श्री मे पकपमापन मसोममर में पुरुषपदीपरोपी पुरुष - हा सपोलिसी से मिसोममा उपशिरे पुनोत्पति परे परम्भमा गममममियामी में। महातको पातमा बस्तुको पा पाठ भरपय और पिन परममा रेवो प्रयेम किया रोमांद सोच रीति चपसे । पर्यापम म्पपों मे परम्वार मे तब मर से परा परमाधि। पाये मावा पिका, गायया कोमट मिजोर पोस्रो पोमो, रा. पंच मोर पपुगोसे मोति समोरगे बचमी रमसे सरेरा प्रमात् द्रोर दोपत्र बो सुपारचे भाव किया। यहां कम पो कम से अपने मन्वायोपिा मोर मुधिरामय भाने में पारि पानी प्रमाणे म प पिार मुशिलामुखमरें बराक मगरमा मोपममी पापनि किसिमे पति परम्ममा मोगे मोर पसेको म मा मे- ५ - पतुर्थसमुन्नास पतिवोऽपि दिड मेट्रो नप खो चिन्द्रिय । विदुषा बापि गो पम्पा नव दुग्धपती मरी ॥ १॥ मासम्म गमातम्भ संम्पास पहपत्रिकम् । ववपप सुठोत्पत्ति कमी पध वियापित् ॥ २॥ मऐ मृत मनजित की प पवित पती। पास्तापरसु मारीणा पावरम्यो विधीयत ॥ ३ ॥ मोर पाराशरी शोकाको मानिसको माऔर मार्मी ने मौष माना इससे पर पापाव भाप प्रम पूषा प्रक्रिया होगाथप रेवेवासीपन देने वाली गार गोपाको पानीप ती से PAR पारि को पड़ी पाबोर ही होती है और पापात मी रिमारिदिन और या ममुप प्राति पाप और पीमिति पनि परतिपात भएको दाहाल में मिग मी बाहो मौसम मायण भट होने से पासोकपिा माषाव कमी नहीं हो सम्वे ॥1॥ अब प्रभासम्म पर्वात् घोड़े में मार वा मशवम्म प्रेम रोमाधितो रसम सिमुप मे लिपेष कामा मेनिस योगी यो कविपुप मसार कर्म समिरेष माप आपसाता पापि में विधि मा मात्र वा इसमें ऐसे राम सभा युग में होगा सर्वमा पसम्मको सम्पार को पानि पामों में विधाम निपेयममा बिम् । स मांसप विवो मेरा दो निष। रेप में योत्पति प्रमाक में रिatो पर काचो पो भूसवा? :: परि (मो) अर्थात् पति किसी देश रणम्तर को पा पारो पर में भी नियोग व उसी समय विखणीय पति मा बामको पनि ईमेशविपरित पति की मो मामा पात ऐसी मम् पायरी में तो नहीं मिली। मौके पर भापत्यवो रोपी पता रोपबाई गई इत्यादि भापमा पोच से मी अधिसलिये ऐसे भोगों को कमी म मानना चाहिये। ॥ प्र.-सी तुम परामर सुपिलेपण मी नहीं मानस ! २०-बोषिमा प्रापब हो परम्नु पसिर होने बीमार और बातो परम्पर प्राचा मी यहाँसिक प्रापण गरम सम्म ग्यापि र सिम्सार रेपुवार इलादिमा मम्म बित प्रसारमा इसरिम सर्वमान्य नाम से इस प्रम्पों को सब सार मान रेब और हमारी पुरा गरिन भी हो। इमिरे प्रम यापुच प्राव मातरमपित सो कोष मनुस्पति हराम स्पतिमी। पेही मात्रामयों की सस्य समायो। म०-ग्रामम सक्सोयरा बड़ा -माने मरम्मों में सब को पना-
सत्याप्रकाश
पया मदीनस सर्व सागरे पान्ति संस्थितिम् ।
तपाममिक सर्वे गृहस्पे पान्ति संस्थितिम् ॥ १॥ मा .
पथा वायु समाभिस्य पते सर्वग्न्यवा।
वथा शस्सम्पभिस्य वर्तम्ते सर्व भाममा । २.
पमात्मयोऽप्यामियो दामेनाम्नेन चाम्पाम् ।
ग्रास्पेनेव पापम् तस्माजम्पेष्ठाममो गही ।।
स संधार्य प्रपस्मेन सर्गमयपमिम्वा ।
सुर्य चेहेड़वा निस्य पोऽमार्यों तुर्पम्ब्रिम ॥ ....!
से ही और सपा प्रमही पते कसमा
ममम महीने के पास भाव से प्रसन्म विम एते । यि इस
ममम किसी ममम ममगार सिर नही छ । विपसे समापी
पणन और पासी हीरो को पान पीर प्रचार प्रतिदिन पहल
बार इससे पालनमम बर्मात् ममममारी में रबर
अम्बा। इसपियो मोर और संसार मुख भाषा भता होगा
मक्स से शाम म पारण मे। बो एमयम दुदिप अर्थात् मौष और
मिस पुस्लों से मार मेयोन मे पचे प्रथम पाव करे।
पाधि जितसपर UR A ग्ल्स प्राधार हाम।।
एखामम बम्वा दो सन्तानोत्पत्ति न होने से मन पास और
मसाममनो हो सकोसम्म किन्दा ममी
मिली औरो प्रयासपो मनीष। परन्तु मी प्राम
म एकमेच मी और पुसदोषी पात्र प्रसव चि पुसली और
सब प्रभारोमयागोवाइसचिव गृहासमोर मुबारक
सर्प पर
पूवर विण।
पासप से पमान किया और मामले विषय में शिक्षा विपदी।
घलेमा प्रम और चालिस में दिखा पापण।
इति श्रीमहपानसरलतीसामिरुत सस्पाप्रकारे सुमाषाषिभूपिते
समाव विषारगाभमषिपये पतुर्प' समुशास' सम्पूर्ण ॥४॥
अथ पञ्चमसमुल्लासारम्म भप पानप्रस्मसम्पासविधि श्याम प्रमषम्पाभम समाप्य गही मब गृही भूस्था यनी भवानी भूस्वा प्रवजेत् । गत ममुम्मों को गति किमोमम ममम्स रोगास्म होकर नरस्य मोर पापम सम्पनी दरभात प्य मनुम्म से समम प्रविपापी एवं गृहममे स्थित्या पिविषयावको विजः। पये पसेतु निपटो पचापरिषिसन्द्रिय ॥ १॥ परस्पस्तु यदा पश्यानीपतिवमात्मनः । अपस्पस्पेष पापस्य वारपर्प समाप्रयत् ।। संध्यम्प प्राम्यमाहारं सर्व चैष परिप्पयम् । पुमेपु मार्या निधिप्प पर्न गाहसीप पा ! ३ ॥ अमियो समाप गम थापिपरिम्नम् । प्रामावरएप निसस्य निवसनियताम्ब्रिय ४॥ मुम्पपिपिमध्ये शाकम्सफोगमा । पतामेव मायपाभिर्षपविधिपूर्वकम् ॥ ५॥ मनु ।।1-५॥ पर मर पापा पार प्रमश: पापम करि भोर मापनि भौरमप पहाभम में मार विािमा मौर बम्पर इन्द्रियों में बसे पावर पाल्प शिरतय और वचमी दोबाप और बाप मोरो पारो सबमें बारे बसे प्राममाहार और यदि म रमोम पापी पोरीची कोरवप पपरे पापण पपोपामियोर ग्राम से पिस निगम भारत में पसे।बामप्रसरसमा भादि मन पुन्दर राम, मूग ष पादिमे उपमहत्यहाँ मे में पौर सौ में प्रतिपिका और पापी हि॥ साम्पा निस्पयुक्त स्पाहाम्तो मेष समाहिए। दाग निरुपमनादाता सर्पभूवानुकम्पा १. अप्रपा सुबपु प्रमचारी पपाप। परणेप्यममप परमसनिध्वा २ मा II. स्म अर्थात् पाये पपये में बिलयु जिपमा सममित्र निर्णभरमा विपि राम देने में सब पर रपट रिली मिासको संस्थाका सेसमी पमर्म इस मकर सपा समाव।.॥ लिने प्रति पान मे किन सारी (1) प्रमोद अपनी से पाय हो वापि उससे विस्मय सबसे भूमि में प्रोचे अपये प्रमित परीष पषों में ममता मन के मूल में से ॥३॥ तप' भये ५ सुपरसम्स्परपये शाम्ता विद्यांसो मेकपा परम्स' । सूपदारमा पिरम प्रयाम्ति पत्राऽमृत स पुस्पो पप्यपात्मा ॥१॥ मुंर रप म मुक्सासम बोपन्त पिर बोस वा में वप धर्मानुपम और सम की जय करो मिवामम पर इएमा में बसते. या वायरहित पर पुम्स हाधि बाम्मदिव परमात्मा पहा निर्मबहोम प्रथमार से रप परमात्मा को प्रम्स होमन्दित होते॥॥ अम्पादधामि समिघुमय व्रतपढे त्वपि । व्रत महापामीधे त्या दीविता भाम् ॥ १ ॥ पर । परम को शिकि- नि में होम प्रोषित होमस समाव और मामेभोर देसी कमरे ममममम हो । माया प्रकार को सपना पबम बोमामा मरियर से शाम परिवार पा बरसासम्पद चाहो तबली को पुत्रों के पास मेरे शिमाम प्रया।। इति पेवाचामनभित अप सन्पासपिपिः॥ पोपु प शित्वं वतीय मागमायुप' । पमुपायुपो मार्ग स्यका सहार परिषमत् । मनु । इस प्रारम में वायुभवोपरा भाप पर्वात पच परम व पन्त मम होने पापुरे चौरे मा में मंगों को मोह परिणम् मान् पंसी हो गरे। प्र-ममम और पत्यामम मममम मम्मी पाप वासही। 10-बोरी और वही भी होना मारोबर प्रेम हो। To-दो प्रमाकीही बौदिमोवायल में मिमी महापागार समसारणमा पपुसी॥ पारप पिरजचार प्रमामा ग्रहादा प्रापपाइप प्रशन्। ० सयमापd.
पश्चमसमुखास मिस रिष पाप रस दो सौ दिवस पया से सम्बाम पर पेपे । परिये सम्पास म पक्षमा पौर इसमें निमार पांव पसाब मे हम्बाममी से पास प्रापौर वाप पर पाकियो पूर्व विान शिद्रिय पमोग मन्त्र से पीत पोपम भरेका १ पुस दो माम्म ही से संन्यास थे। और हों में मौ "पवप' प्रायस्प विग्नत"स्मादि परों से संन्यास विधाय? परन्तु- माविप्नो पुमरितासातो मासमाहित । नाशाम्तमानसो यापि प्रशामेनमाप्नुपात् । म यही ।। ५। दुराधर से पृपा भी, विसको शान्ति महो मिसम्म मामा पोपी पी और मिसनमबहामास मी मसाब से पाममा प्रेमस महीवा ।। इसरिया- पम्पमाध्यमसी प्राशस्तपद पान भास्मनि । भाममात्मनि मावि नियम्लेचरावणम्त प्रात्मनि ।। सम्बासी दिमम् पी मोर मन को पप से रोक जमान और पास में सपा और समस्यमा परम में बाप और रस रिकाम | समयसम्म मामा में मि। परीक्ष्य छोकाम् कर्ममिवान् प्राममो नियमापायास्स्यस रुधन । सविणमार्य स गुरुमैयामिगदेव समिपाणि मोभि प्रनिष्ठम् ।। मुफ्ड प म हुँ म पर दिन भोगों ने कर्म तप रेखा समय पोत सी मायग्रेस होल्वाकिमहत भात पबिमा परमाम्म त मान् सम्म से मसनहीं होना इसलिये मनपरा में पारिए और पामेश्वर को पाबने असे गुर पास शिान मिलेगो सब मन मिसिर । परन्तु पराइम संग पोरे किडओ.- अविद्यायामम्वर पर्चमाना साधीप परिसम्मम्पमाना' । मपम्पमामा परियम्ति मूहा मम्धनव मोषमाना पयामा अवियापां बलुभा पर्चमाना पपं वार्या रस्पमिणम्पम्ति माता । पत्कर्मिणो न प्रपदपम्ति यगाव वेगातुरा सीपमोबारम्यवन्त ॥ २॥ मुह प यो परिमावर र पपये पौर और शित मामले भीर पविग्रेसहारे भूसे के पाय दुरंगप्रेम से एका पाते।बोगमा प्रषिक मेरमबमोप पारिम मा पेसा मानते शिपमयम मोप रा से मोरित होम पही सब मीर बन्न रचेरे भानुर होसम्म मावमएम में पिरे से मरिक- ८1८1 ४ १०. सत्यार्थप्रकाय पातपिणाममुषिमता सम्पास्योगायतप मुयसवा ! प्रयबोकेषु परान्तका परामृता' परिमुष्पम्ति सरें। मुस प वीष मुमाराम ॥ बोराव मोघ पामेपर मणिपापक मन्त्रों के प्राव और पाचन में बचममा मिश्रित पासपोप से गराउ.मबासी पपस्मेन में मुभिप्रास हो मोप के पात बब मुलि मुख मधि प्रा जाती है तब हो ये सम्म संसार में पाते, मुछिपिया दुसमा आमा बही होता क्योकि- म पै सशरीरस्प सत' प्रियाप्रियपोरपाविरस्पारी वा वसत न मियाप्रिये स्पशव को , । म ॥ बो गरीमा पुसको मासि से प्रा भी वहीं पसन्य और बो रवि जोममा मुक्ति में समाप परमेश्वर के साथ रोम रस्ता सम रसको सांसारिक सुख दुख प्रास नहीं होता । पचिपे- पुरैपणापाम विपणापाम मोसमपाम पुत्थायाप मिपाव परम्ति मात्रा बोकम प्रविध पम पम मोया मान्य पुनरिमामबाप सपासी गोप नि होम व विष मोपले मपयों में पर पवे। प्राम्यपत्पा निरूप्येरि वस्पो सर्ववेदसम् । रत्वा मायक प्रमभेत् ।। महराये ।। प्राध्यपस्पां निप्परि सक्दिसदधिणाम् । मात्मन्पनीम्समारोप्य प्रासन मनजद ग्रहात् ॥ २॥ पो वत्वा सर्पभूतेम्प प्रमत्यमय गमात् । तस्प तमोमपा मोका भवन्ति प्रमादिम । ३ मा ३८।३।। मापति अर्थात् परमेधा की पासि वी पाल पा मारे गसमें मोलीत शिकारियों को दो प्रहमावादि पांच भामियों को प्रय भपान मान ग्यप और प्रभाव इस पांच प्राथों में भारोपब मानिन् माय बर से मिला बासी हो गये। ॥९॥ो पप भूष प्रतिमा को पमपान ऐन वा से वियोमबापी तास प्रारी अर्पत परमेम पित दोन मावि निसानी पोग मामले मम्मी गि समय बाद मुहिमभावानलका बोरस होता प्र-पबामियाभस्वा धर्म? उ.-पर्म तो पापामा मामामय परिताप, राजभरी माझम पक्षम, परोपमा सत्पमावापिसाब सब भाणमिती ममत्रोत् सब मनमात्र भएको पातु मामी प्रविषयक- समाप्रार पचमसमुप्रास रपिपूर्व म्पसत्पाई पत्नपूर्व अ पिबद । सस्पपूर्ता पदार्थ मन पूर्व समाधर ॥ कुपपन्न प्रविकुम्पदाकुर कुरा पद । सरदाराषकीया चन पाषमना पात् ॥ २॥ भम्यास्मरतियसीनो निरपसा निरामिप। भारमनेय सहायेन सुमार्थी विचररिख । ३॥ फ्लप्तयनसश्मधु पामी दरडी कुसुम्मपान् । विपरधिपता निस्य समताम्पपीरयन् ॥ ४ ॥ इम्बिया निराधन रागदपपयेण च । प्रसिपा च भूतानाममृतस्याय कस्पत ।। पूपितोऽपि परस्म पर तमाभम रत' । समः सर्वेषु भूतपु न सिंग धमफाराम् ॥६॥ फर्मतकापस्य पचप्पम्युमसावकम् । ममामप्रासादेव तस्प पारि प्रसीदति ॥ मायापामा प्राक्षरस्य पयोऽपि षिधियत्वा । म्पातिप्रसपेयुका विश्व परमन्ठप' = H अगस्त मापमानाना धातूना हि पथा मझा । वन्द्रियाणा वधम्त दोपा माणस्प निमशात् ॥६॥ माणत्यामवहिदापान धारणामिन कित्यिपम् । प्रत्यावारण ससगार म्यानमानीवरान गुसान् ..." उपायधेपु भूवपु तुपामहसास्मभि । ध्यानपागन संपश्यद गतिमस्पास्वारास्मन प्रसिम्प्रियास रिमेय कमिः । तपसपरखमोप्रेस्साभयम्तीद पदम् ।। १२॥ यदा भाषन भयति सपमाषपु निस्पर। वदा सुष्म्यामाति प्रेत्य पेच शाश्वतम् ॥ १३ ॥ घमिरपि पैपेनिस्यमाभ्रमिभिर्दिः । दशमसमाधम समितम्प' प्रपतव' । पनि एमा दमस्त शौचमिम्दिपनिप्रा। पीर्षिया सस्यमकोधा बराक धमनसणम् ॥५॥ मनम पिधिमा सपास्स्पमा सगागने शनः। सपदषिनिमुका प्रमपण्याविएत १६॥ मनु म । ५२।१..I..-..-८ सवामी मार्ग पर पर रपर रेपमारे पिया परपी रस।पएमा पारस पिणे मिसनर पमही रोग मां मरिचर सलमायने मकान
सस्पार्यप्रकाठ
अपनी उपदेश मारि में कोई सवामी परमेपमे भय मिला
प्रेपो मापी रसिकप पर मारामेति सम सके
मयमा परेवी में और एक मुबमोरिमोद प्रांच और
प्रपत्रिी महोदाममा प्रब से मिग्रम्मी ममोरे।।
अपये मामा और पामाच्मा में मि पेपादित मन मासादि पति
होकर मामा जी सहान पुची होम इस संसार में धर्म पौर किलो
माये में उपदेश दिये मना विचारला ॥३॥
परी मुहको केन प्रयने मुन्ना पा और मम्म
परिपे गिरमे पण प्रो बिपियामा सर्व भूतापीका
बऐम दियो ।
इन्द्रियों को अपमाभव से रोक रापेको पोष सब वी मेरि
म मोपरि सामर्व पापा कमे॥५॥
कोई पर मैं रम पितामपितरे हो भी सिकिसी प्राम में
यता मा पुल पर्वात् बापी पच प्ररितों में पापावालोम स्य
पर्माण और मनीषर्मामा सये में किया और परम्पये मन
मनित बाये किरण कमरम और प्रसा पारि पिसाब
कर्मचभरहीं। सब मपुरि दिनों मसलोपरेश मोर रिष्यदाम से
पति परवा मागम मुल्म है
मकिपपपि बिर्मनीमा पीसो परामपबने से जप
अबोहोमदपि विप रसमले गमले बाम मप प्रपत्र मे
मारपीको स.॥
इसपिरेमा पात महाविम् सोम रवि कियोमर
मसानियों पिक बावाम लिवा लिदो खसे परत वाम
मे तो पूष प्राबापम कमी यो पम्पासोमपामाप ॥७॥
प्रधि में पाये भीर माने से पानी के मरमा बाये
tuमाची निमसे मम प्रापि शनिदोष मम्मीमत होते.॥
इसरिये मममी बोम मिति मागप्रमो से ममा मन्तमप मोर
इन्द्रियों पोष भारयों में पाप मायादार से प्रयोग मात्र प्रभार
गुली मात्र शोक मोर प्ररिपरि बोवोपी गेमस्मी भूत में॥1॥
इसी पानपोप सबो मनोमी भाचागुम्ब से कानो मोम्ब मोरे
बारे परायों में परममा प्रमाधि और अपने मामा पौर अन्तयामी
परमेधातिदेणे॥1॥
सब भूतों में गिर इनिसिप राय यो चौर भानुम
सपथाप इस संसार में मोपपरोपापी सिमचौरमा
सम्मम्पकोईगी ॥१॥
पामसमुशास' बाप्ती सब मायों में प्रति पापों में विसाधारित और सब पर मौतर ममारों में भाव में पवित्र होती मी इसमें और मरब पाले निरन्तर पुचको पास हवा ॥१॥ इससिपे प्रभारी ग्राम प्रमाल और पानिपों को पोम्पोकिप्रपत्र एक पम्प्यु निमिति धर्म प्रवन।।१।। परिवा पाप-(ति) सप भै रममा सा-पमा ) यो कि किया स्तुति मायापमा सक्थिान प्रापि दुम्मो में मी सानाच एमा । वापरा-एम) मन परा धर्म में प्रचार पधर्म से रोक देय पाट पार्म प्रपे कोरम मी मगे। चौपा-(प्रव) रोग अर्थात बिया भास पर पर स्थित मरिमी समरपा पेगिम्द परेय से परपा प्राप कममा चोरी और रामको पोक वा सामोरे। पछि (गौच) रामोर पक्षपात कोरले मातर पोर बम पत्रिका माप भारिसेपहर की पमिता बनी । म निषिय) अपर्मासयोंगे रोकभोंने धर्म ही में समा बबाला। पता-(पौर) मारम्प उरिम्पायक प्रम्प पदार्य दुरोप संप प्रासम प्रमार पारि बोषण पा का सेक्प सपनामसंप पोगाम्पस से खिोपमा धाम्य- (विप) मिली से मेले परमेधन पर्वत पयायाम भीर रस पापोम्म उपमा या (सर) सा मामा में सा मव में जैसा मन में सामयी में मा पाली में पैसा कर्म में बना मिष्य इससे विपरीत परिण है। मा-(सम) जो पारो पारो समय सा ही बोखा मौरसा हो मग मी। तया गोष) यदि दोपौधोरम्पति गुयाय ममा धर्मपा। इस रस सम्पयुछ पापातरमित भापामय पर्म सेवाचा धाममनौर इसी परोपवर्म होम भाप सबा पौर दूसरों को समयमबाण सम्पापियाममिष धर्म है । इसी मर से पोरे सर संगदोनों को बोडोपरि सानो से रिमुभ होकर समामा बम में मस्मित हो सम्पामिलो पमुख्य कर्म गोरकसप प्रामावि मामी को एक प्रथम माम माम रिमय मार्म मयारों म पुन सब संगपोमबार सात बर्ममुचमगारों में गायक ।।१॥ प०-या प्रारमा मापदीप पीरियारिन मी! २०-यही भविमरलॉकिया सरपयों में पूर्व यिार शर्मिक परापमापिय मनुष्य मी मम्पस परिय पर्व पिपपर्म पामेबर को मिद्य और परम्प-न्याय प्राप प्रो में संसारिष गम पो पर परियोममुवि कि माप संपाम पपिरमाबको यहाँ, वामन ममाव मो- एप पोमिरितो धर्मा प्रामणस चतुर्विध । पुरपोऽपपकर प्रख पायमान मिपाधत ॥ मधु ।।.॥
सस्याप्रकार । पममुखी महतो । किशक्तिो! पापम पर्याय पा सम पप्रम और बातमम ममा मानवधर्म पप्रम में पुरमस्वम्म और शरीर कोरे पान मनिस अन्य सामानभने पय सन्चालन है इस पे रथयोंम धर्म मुख से सुनो।ससे पर मिरमा किन्याप्तमा भरिमा मुख्य प्रो असम और सपिचारिकामा नम: म०-समारपसा चा" उ०-सेरीर में थिरकी मामाता से ही मामी में नामामम भारकासार इस विधा में कमी यही म समय और दूसरे आमों में शिव हर सम्म और सफायादि सम्मान होने से प्रवाह गुरुकम मिwat पापम्स कोषनगएपणे भागमा को हैमा मनासी मनोमुख होम उपम म *सा प्रय मम्मी नहीं कर सकता किसी पक्षिय से पाकिम प्रतिबिचमा मत मिलताबा भन्म पामी को ही मिव सगा। परन्तु प्रापर्व से पापी होम बात मे पास शिकार वितको गति र पदमपी मल प्रबल धाम को मामी बहीममता ॥ म.--लाम दमय परोप्रमियाव से मिमी पाकिम अपमिपाच मलों में पानी भये मोर पसन्म यही कोपा हो रणसे सन्तामोसी । बसन्म मुल्मी और पब म्मुमोम्मुन्नी भामराव पापप्प . -प्रथा हिमके भी गुतों के मन्बय पहीं होते पप्पोम पज पारोबाधिप भी रोमियम मे पिम मने पमाण बो हम मो यत्वेकरी पविम सिम्पति कोष दोप" पर किसी की काम-ओसामने मी सर्व मिस होगे इसमें पय रोग मद मो मी नहीं। वो हम हमसे वे किएसम्म से पुष साम्तामोम वापस में विमात्रयम मरें तो एबिसिबी सीवी है पमपोनिष पाप पुत होती है बासी एक मोचमम गपरेत से परस्पर प्रीति परमाया तो बाडी म्याग्रेबापसाची a पमान ममुनों पती श्रेया चौर पब ममुन बसम्ममी मही सम्बनिसको विपातिकमा बहस सगी बोपन्यासियों रमे से पार्मिक मन परे सब बानो सम्बापो पुत्र पुल। सम्बासी बोष मते कि हम मकसम्म नही मास देकर भाग रहमा प्रगिस संसार में मापापको वामपा अपमे मे मम माय माप मामले को रसमे बीमाही परेश प्रयतमी मम्मो पाप पुरप बीचमा सोधिपायोपोरम एप तप, माय प्रमीर पुष मन प्रबर्म है। मिथ्या और गत् ।
- पचमसमुशास १०५ मगार मी सबसित पर्यात् सोमिने इसमें ममा बुद्धिमानौम मोजोस पाप पुरस होता है और इन्द्रियोगधर्मीमा प्रवाहम्पारिम्पागो और वापस लियायसम्पामा माम किसकी बात सधी भोर मिकी में मारे। 1.क्या समर्म मा कम पी ? देखो वैदिकमेषषममि" मयुरी पे गरिक मा भर्मगुरु मन में सम्मासिदैको मा माल मा सिमायबोबन बारम्बादि कर्म बार मध्ये जो मे नही पूर पत्र वा रचम मेमोरने में पति और पापभागी भीगे ! मायामों पर रिते। और सम प्रभुरभर नही मते वो स्यने महापापी होगा वैसे हम देवनाम में मुख नतो मार और परम नागपम्मानी मनोपरण मोरपि पावतारिण मचा वे दो मी समर्प मारम। और वो परिणाम पसार से मापापपी वोमना गरि पित र मास उपाय मिपास मोर पाप मना पापी । मो कप यरोगनिर्म किया जा HRURमा हो प्रोम इसके समापने पानी पारमा बाजीराम पवात रियनिद्रा में सामान पर भाप मौसम सापक मो नमामिल थर पर मुसापुर धौर बीचमी परमी मुख हो। प्रशने मम्मापक सय प्रसव परिसी कहो पनी पौर और मम्मी पिया पर मी परि दोषीमम सम्ममाप कमी नहीं प्रसव और मात्र प्रस्त रोगा। इसपियरमा पर मिथ्या है। Ho-मामी सम्माविषम्मी और प्रिया को हम पारपान सीपमही। To-नी "सम्पद नित्पमास्त पस्मिन् पदा सम्पर न्यम्पम्ति इनानि फमाणि पन समन्याम सस्तोवियत यस्य सम्पासी" र समोसे पर सिमरामा प्रत्यारमा हिममें दो पम्पनी मा इसमें मुभम वर्ग पर मोम पासमा यात्रामा सम्वा । 4 -नामगरण सम्पमापुमा मामीर To-मोपरमाननी को मुरिमन सिनापान और निपपामा सम्पपीवीसी सामीप्रमही पों सपोnिgो पोजिसपोगाय पापम्प गिता भमप पापा सममिग्राममरि मिस बन्डा । पप समिर भाभ frma गामा (भियन्स लि.
२०६ सस्पार्यप्रकाश मा- एकराधि पसेठ प्रामे इत्यादि मयों से संन्यासी को पका एक पनि मात्र एक अपिल मिममममा पहिये । उ०पापा बोरेस में दो मोकिएका र मेस्पद अरपार प्रषिकही हो मस्टार स्थावर मी अमिमाण होता। पाप र मी पदिक होता है परन्तु मो मोर पसार पाने से होता हो तोहे से बच रामपा पार । महापे सर परविधि और पाप जन्मामी कितवे ही नि म । और पारामा पाठ चासो पापी सम्मानियों के बलौकियो बचासी एका भपिक रोगय टो माय पावरा रिण होम अधिकतम पम्य ।। प्र-यतीनां कामन वयाचाम्पूर्व ग्रामवारिपाम् । घोपममम दास नरो नरोत् ।। इमानि पो समिप हो किसिमामेबो पुर्व पाय सो पम्बा भरको मापहोवे ।। र०--पातमी पत्रिमविरोधी सम्प्रदायी सिन्धुपये पौर- वि की कापी लोकपसियों को पत्र मिलेमतो हमारा चरण पपुवा समीचीन हमारी बानि होगी समयमा बाधामोमि और बम मिचारिबार हमारे मापान रहे तो रवे मे पूर्व और मार्षियोंमेदाबारे में बचा पमबीचो पिर और परोपमा बानियों को वे मजदोपही हो सकता। मनु पिविधानि च हामि विपिपपपादयेत् । नाम रखपुम्दारिपब (विविध) पाव वासियों को रे। पौर परोक मी मनीपौविसी सुपर्व देने से काम्म परम मोबातोपदी मोती होरे दिवे को जायण मा परिम्बनी इस पास बोचते रे मूग पोप पेस पतिशमी पर्व पपात्" पर्वात जो पम्पाणिोप में पप वाप बरस बात पमा पिन सोरमपम से रचनासकियो बाप में परेने से पवा बरको सब तो पप पा पाने पीनामदेव सोशाम्य इपभिरे पेमीमपय माबपोम्बोसा वो कि ओ सम्पती बोगम से अधिक मा वो रोगवि से पारित और मोदिक मीदोगाम्मा परम्न जो पिम्प भपुठ म्पपास पतप्रेग्न म मोरममताप मबम साबम में भरा जमलम अप मोगम -परख पुमो पो गेम से होलीममा से मी पीरमम॥ प्र--पोपपरिभारी जामानिमाये तो स्मोपिया पापी मरमें A1 || १०७ पचमसमुझास To-प्रथम तो मोये पितरों का भाषा और विम्य मा मद मरे पे पितरों को पन्य हो भपम्मा और पुरविम होने से मिप्या। और बापावेतो नही तो नाम और बाप पर अपमे प्रप पुसभमुपारवर की पदस्थ मे मावसम्मत और चम्म मेते। जो मन मामा मे हो सकता है। इसरिये परमीस पेयर्थी पुरावा मौत मारियों की मियापी ईपासो मेकको सम्पाप्ती बायकामा मतक भार मात्र हारियो से रिमोम से पावर र माप जायेगा । प्र-बो प्राचार्य से सम्म पेक्षा रस निबहीषय रोपा और प्रम परोमा मी पविभीनी इसलिम प्रहामम पनमत्म होकर बार होशल मी पम्बापडेमा मका।। उ.-या बियोहरम सके, इलिनों को न रोक सके पाएम पाम मरे पर जो रोड सोप नोंद ! जिस पुस्प बिम्ब पौर वारपुष मानेमा विश्वास कमी मही होता और मन बर्ष विरामि इन्वमन्त्री सर्वात मी में पप होता है। से प भोर मोरनी की पावरका रोगी बिहोती मी निरोगी बनी। इण मर बिस पुल पसी को दिया धर्मादि भौर सप संसारमा भवाही प्रपोजन हो विना। 4से पशिरि पुरुष मोरे पापी पनि सिपी पौषिपे पन्बासीमा पविभारियों को गति और यो प्रविमरी संचासमामपा वा पाप मन पौरोंमे मो इपय । ये "मना सी रामा होसे परिवार सम्सी होगी युत पया अपने देश में सचिन A सम्मा पानी और सम्माधी सर पबित होनी॥ विस्य च नपत्य य नेव तुस्प कदाचन । सदेणे पम्पत राम विवार सर्पम पम्पते ॥ १ ॥ पपत्त मौख्तिारकामेडी-मि और राजा की भी स्पष महीरो मोवाधिरामा भपने रासही में माब समा पाता और पिन पण माम और प्रतिपको पम्स दरोगामधिपे मिल पाये मुण्णिा भरे और पाबा होने चारि बिये प्रम मममा रम पवार चिरपई पाम विचार पर और विज्ञान याये पर शिप और दावि पहवामी प्रचार धर्म महापौर रामारोप सामोपरेस और पब को मिनी म पनि साम। परन्त बोर dream मुल धर्म परोपरेगरि यही पति और परम्मामी है। इससे पापियो रसिमियोपरेप पापमापाव सरि समयापी प्रभाव और पोट धर्म परिमा सेमसमर की विाि मोम्बापो से मात्र प्रादुरापी गुसाई बाबी भाभी प्रम्पपालम में निवेगापेये वाशी! "
२०
सस्यामा
ro-कि रकम सम्बायपक मौसमी विमा
माय में मात्र होम मे प्रति अपने पम्माल मचाओं पर मामले
और अपने ही मत मलंगा मते मिन्ध पंचमसन अपये स्वार्थ
बिरे दूसरों को अपने मन में साते है Hषा ममा वो दर हा सके
करने में संसार को पत्र का प्रपोपटको प्रम्स मारे और अपना प्रयोगम
सिव मते। इसलिये इस सम्मासम्मम में भी गिम सक्ने चिन्त
स्वामिमी दो पके!इसमे बसपही। बोस पर्म में हम सब
संसार मे बात बिससे भाप पार पब संसार को इस पो पर्वात् पाय
सम्म म परपोष प्रात् सन्म में प्रोत् सुखम मोप करावे
१मामा बम संपामी और महामा॥
पाप से प्रवासासम की विविधीब इसके साये राबवाधर्म
पिप सियाल्पा ।।
रवि भीमापानन्दसरमतीसामिकत सस्पार्यप्रकार सुमापाषिभूपित
पानमस्पर्सम्यासाममषिपये पंचम समुशास' सम्पूर्व ५ ॥
अथ षष्ठसमुल्लासारम्भ अध राजधर्माम् म्यास्यास्पाम' पप्रधर्मान् पपयामि यथावृत्तो भवन्नृप। संमयम पथा वस्य सिरिय पग्मा पथा। १॥ ग्राम मासन संस्कार धियण यथाविधि । सपस्पास्प ययाम्पा त्सम्यं परिरक्षणम् । २. मनु .11-1॥ मा मयुरी महारारपियों से परिचरीब और चरीभाभी म्पसार पसात रामपमा मंगे किस प्रमा राहत पीने से इस रोपे सम्मक सण से इस पामसिरित होने रसमे परम्भर प्रवे।।किसा पाम पिम् माम्म रोपासा विमा मुशिक्ति होम पडिपो मोम्म है कि इस सर राम कौरपानार मे पवान् ॥ १॥ रसम्म समय- पीणि गनाना विदथै पुरुसि परि पिचानि भूपपः सदोसि ।। पर परेश मारे (राय) राम और मय मिले (बिर) मुखपति और विज्ञावारिभर राबाय सम्पपम्प मपार में (प्रोधि मासि) और पा पात विणासमा पापा रासायमा निस मा (अमर) गुरा प्रभर (विनि) पम प्रयास मगुष्पारिपारि (परिमा) भोर से रिण म पम मुक्षिण चोर परिमे महमें. स मुभा च समिविधु मेना ॥१॥ मम्मे मुमा में पाहि ये प सम्यो ममामदः ॥ २॥ अपर्व मनु •म्मि (ग) रस गधर्मभे ( सय)ी ममा ( ममिनिम) मार माय और ( मेना.)सम्म मिराम पर सभामा और समय र मभामरों को पाकिसम) मा बोम्म मुख ममायर' (म मरा (सभाम् ) मा पर्मपुर मथ प(प) प्रम(10) पोरगे (प्रा) मोब(मम्म) मम्पनर मच 0 मामिम भिवोnanRO मिरे पर यसभा BNARR मा म पोर me यीय परियायतो- सस्मार्यमा राष्ट्रमेव पिश्याम्ति तमावामी विश पातुक । पिसमेव राष्ट्रापार्या फरोति तस्मदाष्ट्रीषियमत्ति न पुर्प पा मम्पत इति ।। सव २ बो प्रम से स्पसमा स्वापाम राम रहेको (राप्रमेव सिपाति) गम में प्रदेश के प्रसार पास किया बिसालिममा बाल्पाब- रम्मच हो (राष्ट्र दिन भानु) मनपाक होवाळ ( फिलमेष रामपाचा करोति ) परामा बामे सरे बाळा (ममा पारित करवा ) , इसलिये किसी एक को राम में स्वपीन नाममा पार से सिरप मांसा स्मी पापा मार बानो ( राष्ट्री पियमधि) लारामा मा कम्मत मता है मर्मात् किमी मे अपये से अधिक न होने देवा भीमा को एनर पम्पाप से एसओजपचा बोजव परा मे इसरिने- इन्द्रौ जपाति न परी मयावा अधिरानो रानसे रामयावै । पत्य जियो पन्यभोपसयौ नमस्यों भया ।। । 14... रेममुप्पो ! बो (1) इस मनुन पमुप म (ला) परम पेच भी वगेरे (स्थति) ( परामपा)ो ग्राओं परामितमो (राम) सभी 4 (पविराजा) पपरि मिराबमा (पी) प्रममाव से (मा) सभापति होने को मम्मत पाप (मा) पसीप गुप कर्म सम्पपुव ( CAL) मापीर (चोपस') समोर माने और गाय ने बोल्प (मा) सर को मारीच (ब) दोग रसी सभापति राप्रम. इम देवाऽप्रसन र सुवर्ष माते पुत्राय महते ज्येष्ठपोप मते मानराग्यायेन्द्रस्येन्द्रिया ॥ ५ ।। म । (या) निमामो प्रशास! तुम (इम) इस ममापुर ( म ब ) पोति रान ( माण ) सबससेहोये (मात अमराम्पाप ) बरे. पिशो म पुखराम पास भी (पत्रिका) परम ऐपुखराम मोर पम पाप मिब (मसपपरसुवणम् ) सम्मति मोमा पापावादित परिण दिवबयु मामिल सभापति राम मांगीण मागो सा भूगोम पारितो। और- भिरा व सन्स्यायुधा पाणुद पीळ उत प्रतिष्फ । पुप्पामस्तु विपी पनीपसी मा मस्यस्य मापिन ॥ परमतिरामपुर (1) गरे (पापुल) मा बारि भरा भी मी भदोष भुगतीमान् परपरापर पठसमुशास भारित गामा (पराठो) पावर प्रो ( प्रविषमे) और रोकने के लिये (पौर) सित और (सिप) (सन्त) (पुष्पकम) मोर नुगारी (तविपी) ममा (पीपी) समीप (मक्ष) रोग कि.मिससे तुम मा सिपी होमो परन्तु ( मा मापस मापिमा ) यो बिपित भचापम्प मम मनी रस रिपब मत, पांच मा मनुप्प पार्मिकते मी तक राम्प गमता वा पौर पर गुराचारी होने सपना मा हो बाम । महाद्विानों को निवासमाऽपिरी पार्मिक थिानों को धर्मसभा पिणी प्रसनीष पार्मिक पुरुषों को राजसमा समसर और गो ग्म में सतम मुखकम समापवुन महान पुरस हो उसको रामसमास पविस्म मान सब प्रथा मे सति।तीनों समानों को सम्मति से सम्मातिरा मिपम और मिपी मापौम सब खोप समिरक मो में सम्मति सदित करने लिये परतन प्रौर पर्मयुज मी में मत मोनियमोप में स्क्तन । पुमा रम सम्पपविगुपसे पोने चारिप- इम्दाऽनिवपमा प्णामम्नेस वरुणस्य ष । चम्बविचे पोव मात्रा मिस्यि शाश्वती ॥१॥ तपस्यादित्यवीप थपूपि प मनासि च । मन भुवि सक्रोति कमिप्यमियीपितुम् ॥ २॥ सोऽप्तिर्मपति पायुभ सोऽर्फ सोम स धर्मराट् । स कपर स परुष स महेन्द्र प्रमामय' । ३॥ मनु • • पसभेव राय इन्च मात् विपत् समाम योम ऐचयन गरे समाव सपप्रपद सिपोरर की पत सामने आए पम पमतरदित ज्वाधीन समान वईनेवासा सूर्प ममान भ्याय पर्म विम प्रमभयक भयभर पर्धा परि मन्पा विशेषकप्रमिले समान दुरों मे भरम प्रोपरा बम्स प्रमोद बांधने सयौको मरे प्रयास पिये भाद्रप पर पुषी मे पापाता पनामा समावीम पूर्व ममे पमा सम्पपति गोरे ॥१॥जो सूर्पना शापी सरकार और भोवर मो को अपये हा से तपादारा शिको पdि मोसयर भी समर्थन ॥ ३॥ और दो अपने मन भनि सूर्य मोम धर्मपराक धनबरकम समाज को एप्पामा रेप अम्बा सभेग होय होये ।।।। मपा रामरा- सराय पुस्रो पा स नवा शासिता स स । पतुणमाभमा य धमस्प प्रविभू स्मृतः ।। दएर शास्ति प्रम सर्या दसर पयामिरपति। र मुलेप मागदिप धम पियु धा ११२ सस्थानबाट समीप सपूत सम्म स्वो रखपति । असमीस्प मपीवस्तु विनाशयति सर्पत ।। तुम्पेयु सयाम मिरम्सर्पसेतष। सर्पमोफमकोपा मण्डस्प विमम्मम् ।। पत्र श्यामो बोशिवायो वसभरवि पापहा । प्रास्तत्र नमुनन्ति मेठा पेस्साघु पश्यति ॥५॥ तस्याहु संपदेतारं राजम सस्पयादिमम् । समीश्य फारिय प्राई धमकामाकोविदम् ॥५॥ d राणा प्रणपन्सम्पा भिवर्गमिवरत। कामारमा विपम' जदो वस्नेत निाम्पते ॥७॥ दरो हि सुमायो दुर्धरमास्वात्ममि । धर्मादिवि इम्ति नपमेष सबान्धवम् ॥८॥ सोऽसहायेन मूरेग शुष्मनास्तशिना । भएपपो म्यापतो मैतुं सळेम विपयेपु॥॥ सुधिना सस्पसम्धेन पावलानुसारिण। प्रणेतुं शक्यते दस सुसहायेब पीता ॥१०॥ बोसो पुल होना चाहती और पत्र शासनाने नोकरमौर पर प्राममी म प्र प्रतिर भयो सामिन २॥ी प्रमाप वासबब सब प्रथम रस्म सोते हुए ममर मनुष्यों में पता है इसीविहुरिमा खोप एसोको कर्ममते॥१॥ बोबस पचे प्रकार निवार से बात सिप तो एसर प्रयो भावन्दितर देखी और बो दिन बिपरेसला बार दो पर मोर से सवा मनाम रे॥ विना पर समय पित और सब मोगा कि मिजो। परापयत् महोवे से सच कोमों का प्रकोप होय॥॥पसमेत पार पुस्तके पापामनारमहारा पर सपा मम मोहमसब भावनियमोठीबो परामपबारेमा पहित पिम् हो यो । यो ग्स बटम पसाच्या सन्मदी विणरेममा परिमात् कर्म म और काम की सिरिपये में पषित राममो प्रेम समसामय पित् पोम पते ॥॥ जो बापच था रामामागीय प्रम भय और प्रम की सिद्धि को पाता है और ना RT में पम्पमा महारा पुन मौनरिमापापीत रामा होता पण से ही मारा मता... बारामा गोमयसको प्रधिार मामा भायमीर कप नपारधर्म मे मित्रमदित राशीम त मरेनी॥८॥ कि जो प्राप्त प्रमों महाप विना मुशिय प्रेकि रिसो में प्रामुक्त मरीयाम्पस से पामेमाने में समर्थकमी नहीं हो सस्ता 1|| पष्ठसमुभास पोरसे पवित्र मामा सत्याचा मोर ममी म सकी पपात मारिणम पासाहारा मा पुनों माम्प मे पुष बुदिम्पोम्पायम्मी एसपने में समर्थ होता है। । इससिपे-- सेवापस्य च यम्य पदण्डनेतृत्वमेय ध। सपनोकाधिपस्य च वेशाप्रपिवति ॥१॥ वापरा या परिपद में भर्म परिकल्पयेत् । म्पपरा पापि पृटस्था तं धर्म न पिचावयम् ॥ २॥ थियो किस्ती नेहको पमपाठक। अपमामिण पूर्ये परिपस्स्पायाधप । ३ ।। अम्बदविपशर्षिय सामपदविशेष च । म्पबरा परिपगोपा धमसंगपनिये ॥ ४ ॥ एकोपि क्ववियम य म्यषस्पद हिमोत्तमः । स विशेष परो धर्मो मायामामुदितोऽयुते ॥५॥ मनवामाममात्रा अतिमापापजीषिनाम् । सासरा समेवा परिपस्य म पिचत ॥३॥ पं पम्ति वमोमूता मूब मममवधिप। उत्पा शतथा भूत्या ववस्वतनुगम्हति ॥७॥ मनु । परवा और पेनापतिपोपर राम्बाधिभर पसरे की पाय परम्पमाधिपा और समा बर्चमा पीप सम्पापियरस चरों पिपरा में सम्पूर्ण देह ग्रामों में प्रविण धर्मामा नियन्त्रिप मुर बोगेापित प्रचलिपे पाद मुलपेपपवि मुलाम्पाधिकारी इचम्पपीय प्रणब पिपमा पेपर पर रियायों में पूर्व पात्रो पनि म्यूब मेम्पूर्व रणधिामा पम्पूरते हो वीर पिायों सपा कैसी परस्म मे स प प्रपात साम्य रस्य कोई मोम मेसम्म चार म्यमयर विपक, मेणाप परिचय पिन पाम से पाना मी पाम पर यम बरसम्म होलिनियम मिामो भूपाने चारित ३ । पौर सिम में जोरपागणामोसम पोटोब समापो कम्मरमपमा मेमारामीरसंपवमेरिया परगोन पसीनीमम सम्मानिसकोमामामारपीक पवामिभागी पी मिजोरमका उपमम्मी मापापी मारित परिवरिया से व सम्ममा समाबग्मसार्दाममुखी मिरा भोपनको ती रिकामसमने पो मनुष्य प्रिय सभी मामय परोकियो माकप पचणा
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सत्याप्रकारे
स्वे म पादे सेमो ममा के पाप पप गा॥.। इसमये या
धर्माद पिपा धर्मपमा और रामसम्मो में मूली कमी मरतीय मित
परा शिव और पार्मिक पुों को स्पधने प्रीत सब बोम पेसो-
विपेम्पापी विर्या वएसमीति पशाम्तीम् ।
मान्धीषिकी पास्मवि पाचरम्माम बोकत ॥१॥
इन्द्रियाबा मये योगं सम्प्रविदिवानिशम् ।
मितेन्द्रिपो दिशाति पर स्थापयितुं प्रम ॥२॥
पण कामसमुत्थानि वपारी झोपमामि च ।
म्यसनानि सुरम्पनि भयरून पिपयेत् ॥ ३॥
कामधेपु प्रसको हिम्पसनेषु महीपति।
पियुम्पर्धधर्माम्प कोष पास्मनैष तु ॥॥
मृगयासो दिवासाम परीवाद मियो मद ।
तोपि पाट्या सकाम्बो को गण
पशु साहस द्रोईईप्यास्पार्यपहम् ।
माग्दएच पारुष्य क्रोधोऽपि गयोएक।।
पोरप्येतयोर्मू में सर्वे कवयो पिए।
तपन अपेकोमं समाक्तातुमी गपो ॥७॥
पानमा सिपमेष मृगया प पयाझमम् ।
पतरूपम विद्यापतुफ काम पले॥८॥
वडस्प पावन पैग पाकुपारप्यायपये।
मोधोऽपि पये बियालपमेतति सदा ॥२॥
सप्तकस्पास्प बगस्प सर्ववानुपनिया।
पूर्व पूर्व गुरुवर विधावपसनमारमवाम् ॥ १० ॥
प्पसमस्प प मुसोय म्पसन कएमुम्पत ।
प्पसम्पयोऽयो प्रति समत्पिप्पसमी सूव ॥ ११ ॥
मनु.५-२५॥
रास र राजसमा सम्पम उपहो सके। बचाना
भोपासन्नमविणायामों से दोनों पिक मन्प्रत बसमीति म्या
विष प्राविध पद परमामा गुबर्म समापस
माविप और दो से सामान प्रारम्म ( मा भोर मन)पावत
पमा पपमपति हो । ।। सब पाप मोर प्रमापति इन्द्रियों को
जाम्चे माल परमपम और अधर्म मे गए।
इसलिसिविक्त समय बोपम्पास मी नवे से किया विनय
कि अपीहन्दिरों (जो मन प्राय मौन र प्रम प)को बिमा पार
मेसोपण में स्थपन भोको समम्मी परीसम्म ।
पोमाभनोभम म एव चौर मेप म मा रमपम मिया
इम मपरिका से बिमसमप्रस म पोष और हार ॥३॥
पष्ठसमुमाख कि जो राम पम से रखा इसे एप पम्पसनों में सवार प्रर्य प्रपोत सम्प पवारि और धर्म से रहित होता और जो ध सम्पप हुए मारपुर मसलों में सवपरीर से भी रहित हो जाता अम स सत्ता से प्रसव गिन रेखो-पम्पा नक्षमा (प्रा) अर्थात् भोपन पक्षमा उम्मदेवमादि दिन में गोगा कामस्य माकी बिमा किया पमा प्पिोमप्रति सा मारक द्रम भात् मप मम भाग पनि पास भारिश सेगम पामा थाना प्राचन्य भाष भामा मुममा और रखा एप पर रबर मते रहमा पे रस कामापा यसको क्रोध से सत्पडपसवा को पिम्पद - पंगुत्थम् अथात् बुगती कामा पिमा पिचरे वरपर से सिमी कमी से पुरा भम प्रमा द्रोहरखना 'प्यो मात पर माईति बम बा आमा प्रसूपा' रोगों म गुम्ब पुयाम दापोफ्ण ममा प्रतिपय प्रमोद पधर्मयुरे श्रमों में बारिप बरना पर बोखा और दिन पपराप मारमा हिरोष पर पंग पे पार पप से रप होतो सर धिार बोगसमय पौरोपनी ममूग बाब ? कि जिससे पे म प मनुप्प को प्राम रस पोमो प्रयाह में पोरे ॥ ॥ काम पसयों में बरे अप एक मपति प्रोत् माध्मक द्रमा का सेवन दूसरा पाणी भारिप गप्प सपा तीसरा रिपोमपि पर गौमा मगदा सेगमा चार मा म्पपौर म्मेपनों में बिमा अपराध गरेमा भमर बन पोचा भीर पवारिका अम्बाप में मना रे तोय प पे गप एप परे इसापकोजो पे. पुर्णय दोगा अमर पोर पोपत्र बोपों में पिये। इनमें से पूर्व पर्यात पप से मातम र चमसे सवाय मानाब से पारे इससे पगमा वेगमा इससे पिम पमम्त मा इससे गुम्प प्रपात पता और इसमे मा मणरि समय मा बम रासस ।इस में पा निम्मोकिदुरममय में मने समाप मचा पोधियो दुराचरी पुरुप हा परिकमियम को भधिक पाप समाचार पति पर्याद अधिक दुख को शाम होगा पापपा पोर को किसी महम में साप मा मी आता तो मी मुखमा होता साप इसलिये रिश और पब माया रवित कम्मी ममपा पोर मापनपति पुराणमो में म मरमसमा स प म पमपुछ गुण धर्म सप्पयों में मदरसम सिम राम्समास और मनी होयेणीयो- मोलान् शाखविर मधमपान फुमोदगतान् । समिषासम्म पापा मार्यात परीमिवान् ।।। अपि परमुरे फर्म तरायण गुप्फरम् । पिरापतोसहापन पिस्नु राम्य महोदयम् ।।
सस्यार्यप्रका वसाय चिम्पपधित्व सामाम्प सम्धिविप्राम् । स्थान समुदयं गुप्ति सम्धमयमानानि च ॥३॥ पा स्व सममियपमुपलभ्य पृया प्रया। समस्तानाश कार्येषु विषम्पादिम्परमम 120 अम्पामपि प्रकुवि सुधीर प्रधानबस्मितान् । सम्पगर्षसमानमारसम्मपरीपिवार । निवत्तास्प मापनिरितिषम्यता नभि । सावतोस्तन्द्रिवान् दमाम प्रफीत विषसमन : ६ तेपाम मियुग्रीत पर बधाम फुयोगवान् । राचीनाकरफर्माते भीरगन्तनिपाने : ७. दूर्व सैप प्रकुति सर्वशासपियरवम् । शनिसाकारपेगा शर्षि वर्ष मोपवम् ॥ ८॥ अनुरक शपिच स्मृतिमान् देशकाबवित् । बपुप्मान्धीवमीर्वाग्मी दूतो यह प्रस्पते ॥ १॥ वरान स्वदेश में पाए. मेगारिया शामगाचे पुरा विमान मन पाव विचर मिन्स और माल मचे मार मुफौषित सात अमर रचम पार्मिक र 'मपिचर' प्रर्धाप मन्त्री मे॥ विशेष सहाब के किन्ध बो रुपमा मामी कोमम ममता हैब पेसा वो महारकर्म से दो सम्मासिन्नेि एक मे राजा मोर करि पर निर्मः स्थमा पर दीप कामसमे सभापति रचित समिति बरामतमी में अब चिार मन्त्रिी पा सम्मान को मिली से (सबि) मिना किसी से (मिरोष (मान) मित समय रेखो पुपथप राम अपने सम्मको लामो इन्ध (बसपणम् ) व अपमा गर भौच परिदोष पर पर्व प्रपा (एसिस) मूब रायपेय कोण मावि की (बसपसमषि) बोदेय माझ ते रस में पाकिस्तारण अपमास्ति प्रमाइब गुलाबस्थिर विमति ॥ पिचर मेमपाल पमपम पमपमा RNA और मिसबसे मनमानुपामसारमबोअपमा और समरिमाको प्रपत्र ।। ॥ मौ परिना रिमा विमिन पारे सम्म प्रये मतिर पुपोषित मन्त्रीमियमे मनो मे मनमा सिब होप ने मनामित पाया और मेरभर मपाव पुत्तों ने प्रशिकी चोए गोलमेचीवापार माग असोत्पर पवित्र मानेरमों में मौत मामबाबीवर पष्ठसमुमास मा म बिपुर म. मासित प्र में सपा भुर पति, समामा से मावा एप भोर मरिमा मोरपी मायने सरा सब पाणे में पियर तो भी 10 ॥पपेमा nfomप्रम में पर मन मोतियुष मिथप परिममा र पुत पमप मे पाठ मोर भूपरेषा पण पर प्रमावासमार पो मुना मयुध निर और साधो पा रामपाल में ॥ प्रियमधियानाबाबा- भम्पस्पे दरार मापता पर पैनपिशी किया। नपतो फापराष्ट्रपपूत सन्धिपिपपपो।।। दूत एप हिमत्त भिमस्थप प संस्तान । दूतम्तस्फूप्स म निपम्त पम पाम पा ।। दुराप्पा ग स तन पररारि पितम् । ठप्प प्रपसम्पतिएपधारमान म पारपत् । धनु महीदुगमागे पारिपा। नार्ग गिरिलुग या समाधिस्प पमापुरम् ।। पत पाधपति प्रापारम्प UrI एन समातिनमा विधीपत ॥५॥ हाम्गादायुधस धमधाम्पम पादनः। भाजप शियिनियमान प॥॥ सम्पमय गुपपारारपद मम्मम्मनः। गु मरंग पम्पिकम् ॥ गमापापात्रा ने मपम्पिाम् । TRA सम्पम्पिमम् ।। पुरात्व is TI पतिमा Rमानितरितानिए HERNMEthat malkinnarrother . ...4 adalitna furneakine Noww.tayaartidos साप Int ..miart.t.tam india ram सस्याप्रकार पंक इमपे पुनर पर पापापक देश में (पम्) भमुनी पुस्ती में परम (महादुर्पम् ) मही से किया इमा (मानुपम् ) बरसे पेशामा ( भात ची पोर व () यो और सपा से (मिरिनुपम् ) मोत पो मोर पहाग पीच में और क्या इसके मन में मार मारे॥॥ और पपरवारी भोर ( प्रकार ) मोलाचे परिममे अप्प और अपनी पसापुपुल्स सौ साप भीर सौप सार साप पुरम सविने पर दुम बनाना शायर्य असाल अब भाप ब पर बो पसाने उपदेश सहारे (सिसि) पर, पात्र मावा प्रसार कोसा (बसेन) मा पठ और बस पारि से सम्मा पर्वात परिपूर्व ॥ ॥ स मम में बV पुपारिक सब प्रमर में रषित सच बों में मुख्यरक, तप मपये बियेपर गिसमें सब रासस म प्रविमोसा बसमये ॥ ॥ कम्पपीत् मे पिस पहा मम मरे पम्पत् सौम्म म गुपगुडभपये व प्रविधि परे ग्राम में सत्पत्र पुनर पायपुत्र अपने पनि प्रकबा जोकि पपने मात विणादि गुण कम समय में हो उस एको जीपाल मिया से मी बसिनोको पम्प अमममी से मीन देखे ॥ ८ ॥ पुररित और पनि सीमा इमोरिमकिन अमिर और पशि मावि सब राबले में किया और अपना कार्य में परो भो पही रामा प्रसन्मोपासनादि कर्मी गोरात रिम राज में माच बना और कोई माम विपान वा सांवत्सरिकमातम राष्ट्रवाहारयनिम् । स्माखामायपरो मोर पात पिवनपु॥ अभ्यतान विविधान् हुयात् वर तब विपति। तस्य सर्वाण्यवतरणयो कार्याति फवाम् ॥ २॥ भाचानां गुस्पुनानिमायां पूरानो भवत् । भूपाणामाया श्रेप निधिबाझो विधीयते।" समोसमाधम राजा त्वास पानपर प्रम। न नियम संप्रामात् मात्र धममनुसरर ..॥ भावपु मियोम्पा निर्मासम्तो महीपित। युष्पमाला पर राषया बर्ग पाम्स्पपरास्मुप्प ५. म माम्पात् म्पमान कीवन स्वावनिम् । न मुख्य मासीम म तपासीति पादिमम् ।। म तुम न विमपाई म मन न निगपुधम् । मायुध्यमान पश्यम् म परम समागतम् ॥७॥ मायुधम्पसमं प्राप्त मा नाविपरिक्षतम् । न मीन न पगान मा धममनुसरन् ।
पष्ठसमुहास पस्तु मीत' परावृत्त समामे हम्पत परैः। मतुप तुपाव किस्सिर्व प्रतिपयत ॥६॥ पचाप मुल फिशिवमुमार्यमुपाश्चिम् । भता सर्पमावते परावृतावस्य तु.१०॥ रयान हस्तिनपा धन धाम्प पशूम् लिया। सर्वप्याणि प्ये पयो यमपति तस्य यत् ॥११॥ रामपुरारमिस्पेपा पैदिकी भुठि। रामा पसषयोधम्मो दावप्पमपूथम्मितम् ॥ १२॥ मधु •151-51 1-1.॥ पाकिम मास पुस्मों सारा मा म पीर बो ममापतिस्म रामा पानि प्राय पुसीब समा बागुल होकर प्रमग्राम पिपमान पग्य रामपभा में विविध समर पप्परों को समाविषयम इनम पोम सित मिस प्रम में रामपुलनियमानुसार पर म पावत् मकर सही, बोषपात दोरमसकार और मोमिय तो उनकी पप्पात पर रिपाकर सराबो राम्यमों को वामगार सप माप को इस पचर हिमेबो कोई पावत् प्रसव से पारि गायो पाप पुकार से प्रादेशमा मकर राय और समा पप्या करें पपा बम मा दिन पाइप विधात् ।। इस पर मरे मे यम विपा को पति होम प्रत्यन्त रति दोवी मरम्मी प्रसा प्रबरप्रये गये रामा को कोई अपने से बोगस और रचम सम्म में भाष मे दो परिपाले मर्मसमरस मासंप्रम में जाने से मी लिएर मसेपर्वाद पसीनाई- पाच मम पुरमे जिसस अधीविजय हो...मामामी में एक एसा को काम मोर सरास बाप जितना अपमा सामर्षो विग पौरपरिपुर करते प्राप्त होमस चिमुक मोबसे। किमी सौतमे पिप ग्ना पाम्ने मे विप गामा रठि पोजिविस प्रभा में और पाम से बिष से माये मान सम्ममि में पोस भस्म बनामे मूनिमा प्रामपुर ममप मे पर रबर पो मसक बाप रेप निमगि पर मुझको ताप 'मेरे पास ऐस को सोते हुए मुबो प्रम दुए, मपाइप. पापुर से रहित पुर प्रादुर्भो प्रेम बसे गनु सामा। धम्पुष प्रथम पौरामा एपहुम्बा पमत पार पहुए पर परम्परा र सो सपुस्तम्भय म हुर.पारा योग को मार भितुसको रम बोम्पमाप में या बोर भारत मापादन पत्रे पौरपा पर ए सप्रे पौरपाnिe नंबर विदुर । रमो पाप प्रामाणि सत्यार्भमकास । इस पर ध्यान मोकिमी पक्षक व और मार तमसोमुगलों पर असमीप बाये। बाबा को अपने पन्त पाये और मिली में भी पामे। उप अपनी पहिष और पासमान सम्मेकमी पिपासबिपीसे मी बरे। पर मचे बम और निमम पुवापुरम गत मोर पसारबोरर पपरे । भर परेसको मेव और विकले मविपत् म यि रोग सम्बो ग्मो मा मापार में लो।। और वो पापन प्रर्वाद मपेमा तुम मनुषों में मना बाप परम समीके अपराधको रस रोम परतीब होथे। और जो ग्पी प्रविससे इस बार और परमोड में अब होने पण या सभे रमन स्थानीयको मान्य हुमा माय बाप रसको ममी मुरमही खा रपत्र पुल सब पाहो बाप और पविभोरप्सनिसने धर्म से पथ पुरविमा हो" इस समय को कती बटोरे कि जो बाद मसि र पमनाये रवबो हापौर, पण पाम्प प्पपपि प और सिनो तवा मात्र मम सब द्रम पार पी, पारिबीचे रोपही रसभ पाप को॥1॥ परन्तु सेना बर मी पगाते पक्षों में से पोबारा माप रामखोर मया मी मेमा मोदरानों को इस पर में जो सब मिपम गोवा दो, सानो भाग थे । और ओबई उर में मर पारो उसी स्त्री भीर सन्यास रसम मपीसी समा सम्म बाकी मापात पावरमे। बबरस पप समोपासको बायोम्म भषिमा बोबे सम्बरि प्रविण किन मौन व्यवसादि श्रीरकरारोपम मादा का संपमम्मीसमे॥९॥ मसम्ध पेष विप्सेत मन रमपमत'। रक्षित पर्यपेमेव पूर्व पापु निविपत् ॥ १॥ असम्पमिपम गम्भ रचयपचया । रक्षित पद परपा पद मानेन निविपत् ॥२॥ प्रमापपेय पवन कषन मापया। घुम्पयारिमयुको प मापाधिस्य पसंपूछ । ३. भास्य पिई परो पिचाम्बिद विपात्परस्प तु । गहत्तम पानि रपरिपरमात्मन: सम्पपिस्वपवन सिंहपप पराममन् । सम्पपापम्पत साप यिनिष्पतत् ।। पर पिम्पमामस्प पऽस्प स्यु परिपरिपनः । सानानपावर सपान सामादिमिरपश्म .. पयोगरवि निर्वाठा कर धाम्मे परपति। वपा रपम्पा राष्ट्रम्पाप परिपश्चिम पष्ठसमुप्रास मोरयायलय पस्करपा । सोऽघिय भश्पत राम्यावीपिताच समाधषः ॥ ८॥ शरीरकपात्यामा सीपन्ते मासिन पणा । तथा यामपि प्रापा सीपम्ते राष्ट्रकचात् ।। यष्ट्रस्प संग्रहे निस्य विधाममिदमाचरेत् । सुर्सणीतराष्ट्रो हि पार्मिक मुम्मेषठ १०॥ सोमपाबा पंचानां मम्मे गुल्ममधिष्ठितम् । तया प्रामन्याय पादाष्ट्रस्प संप्रहम् ॥ ११ ॥ प्रामस्पाधिपति कायप्रामपति तथा । विधतीय शब्दसामपतिमपप १२॥ प्रामे दोपाम्समुत्पत्रान् प्रामिक शमकै लपम् । सेट् प्रामवरणाप दण्यो पिंततीशिवम् । १५. चिरावीशस्तु तत्सर्व वयाय मिव्यत् । सम् प्रामततास सहमपतये सपम् ॥ १५॥ हेपा प्राम्पावि कापि प्रमाणिव हि। पणोऽम्प सथिप मिग्यस्तानि पश्येदवम्वित १५ ॥ मगर मगरे कयास्सपिधिम्तकम् । उप्पै स्थान मोर मचमायामिव प्रहम् ।। स तामनुपरिकामेस्सपामेव सदा मयम् । तपाइ परिणपत्सम्पप्राष्ट्रेप तरै । १७ ॥ गोलरक्षाधिता' परसादापिन' राय। मुख्या मबम्ति प्रापेस टेम्पो रक्षेदिम्म प्रय। १८ ॥ पकापिकेम्पोम्पमष डीयु पापपेतस' । तो सर्पसमावाप पजायात्पपासनम् ॥ पा और एससमा अक्षय की प्राप्ति का प्राशी प्रपन से पता को सिकोबारे और मेरो पिच धर्म प्रच्छर, नियमी परमार्गापदेन हय अपमर्थ मनपा पापम में पाये ।।। इस पर मामा पुम्पर्ष के प्रयोगमको जाने । प्रारम बोरमासन ममी मावि लिम पानको रससे प्राप्त की पति को इपा मिल रेको से मार एम रचित र प्रभाव पासादि समये और बोप पर पूल मात्र म मिस मा.नापि सिौ साप मे मिपाल पर मेसाब से मोर विपति अपनी सामाजि पापमोमिनमाई व अपने प्रिय मिता सब सो मार लामिछाने समय से पप पपने भो १२२ सस्थाका गुपता से शगुने प्रण कि प्रेगुसरो मुगुमा म्यादित होम मममी पाने में पानीमा स्थिर मियाको प्रमादि पर्व औरत की विप्रो बीतयेगिने सिरे समाय पराक्रम में पीता) समान विपन्न पार्षों को पको और समीप में पासपम् गमों से मपोश समाबर मापा और पवार रमो पब से पाने।।५॥ इस पमा विप्रा समापविराम जो परिपाची पर्वा परी गम (साम ) मिया पेच (पाम) ऐम ( मेर) तो प्रेग प्रोपरा मैले भौर जो इससे पा महो प्रति कटिव रससस में से भाग नियमे या विषकों को भग का पानी वा पर्वात सोपा मे एक चोप्रे मार और राम की रणको..बोरा मोर से पश्चिा अपने रामदुधमा एस धौर भपये सरित बीम पूर्व दीप पा मारो बाता॥८॥ मैले प्राधिों प्राय यसरी मित प्रने से रोगो से हो म्यमों को धर्म भरे रामाय पांच सविसरिता होगा। इमाचरे रम्मा और राबसम्म राममसिन हिरे ऐसा मपटक निससे पापा सबो राम रामपावन में सब पर सवार पुसमरामा ।। इसपिये रो टीम पांच और सौ ग्रामों के बीच में एक राम्पमा रपये मिसमें बायोम्म बम भात कामदार पारि पुन्नी रसम पब मरी॥"॥ एकर प्राम प्रमाण पुस पो बन्दी एस प्रमो पर परम, बन्दी बोर मामौके पर तीस सदी सी प्रमोम्परा और नहीं सामोरे अपर पांच पुरुष से पास एक प्रम में सो रही एय प्रमो में एक पाया और दो भयो पर एक बा बागा भौम म पांच बागों पर पराग पौर एयवासीयों पर एक शिक्षा विक्त किया। बादी अपने मनु मावि बर्मयत से रासोतिम म बिना।। १२ । इसी प्रमर प्रभावी चौर मारे पिकामा पनि प्रमी में विपति मोरोप गापो गुस्वा से एप मरे पति को चिरित मापौर पर समाधिपति सी इमाम प्रामस्वामी रामोपान निस प्रति बनाये और पास प्रती पधिपति बास प्रामामाम कोममाधिपति मिति निवेदन से सौ. मो- पति पप सामामिपति पर्वाद हमार सामोरे स्ममी ने सौ । प्रमों वर्षमागको भतिरिम जमाना मोर बोस प्रामपर अधिपति मौसम अमरचीपासय प्रधिपति रह पधिपति और मामामो राजसप्रे प्रतिदिन बर्षमा मात्र में एसममा मामासमा प्रोत् सातमीमाधि मामारसम्म में सब भूगोम समाव जापौर एक मापदामों पर समापति
पठसमुशास
१२३
से मियो एक रायसमा में दूसरा अम्मा पासमोरम बापापी
जाति बपुस्तामों को सपा मम रेल्वे पो. मग में
एक पिया भनी समा म सुन्दर सप और
पिसा दिनमा
या एक पर बच समरिकार किसिम्हावे शिव से सब पर
को परोसम्म विद्या मिामें शिम विषो से राया और प्रय
को पति हो सेमियम भौर विध प्रकाशित किनमें बो भित्र
मने पर सभापति दो गम भावीप सब गुमचा मोत बनेको पोको
एमपुल मौर मिणविरमये सब राम और प्रयासों के सप
दोष और गुरु गुमरीति मे बाना को बिस्त्र अपराध हो रामो र मौर
विमल गुरोरी प्रतिम परा बिना मे॥॥रामा निमको मया की
समषिमा पार्मिक पुपरीक्षित मिशा समान ही उम मापीम
माना र भौर पर परम पचोर पड़ों को भी मोर बसको
एरर्म से पचने लिप रायके मौकरम अनी राप्रपाले विधानों
स्पीयरे बसे इस प्रया कीरा पा करे ।। 1 । यो रामपुर
अम्बाप मेरी प्रतिपादरी गुम बमले पप से पाप रमम
प्रसारण भरे बापोम्म बारेमा पेसे ऐश में रस्ते शिप पुरा
बोरकर जमा परे पोधि परिमारियो उसको रेबारे
अब रामपुस्स भी ऐसे काम में और एएस दिला बाप तो परन्तु
जिसने से रस रामपुरमोम पोमपेम मामांति दो और वे मची मावि बाम
मी ते ग्यापम प भूमि सम्मकी मोर से मासिक मा एक
पर मिला और बोरो रमको मी भावा मिवाने परन्तु पराम
म स्वेदिक उपारीवियोग परन्तु इसके पम्हारी
अपामा बौमी गुरोपमुमार अरब रे । भौर विपक
बता पमर्म तें और रामकी पी बीती हो तो राम प्रगपिहारको
बोर से परामोव पर मिडाप्रे परन्तु जो उसकी सीमा की होगा
पमिले ऐसी बीवियबाप रस्ते॥१॥
पपा फलेन पुस्पत राय कत्ता व कर्ममाम् ।
वधापाप मुपो यत्पपेरसतत करान् ॥ १॥
पथारपाऽपामयम्पाप बायोडोपस्सपद्पया ।
व्यापारम्पो प्रीतम्यो पावागादिर ८॥२॥
मोहिम्पारात्मबो मूल परपा पातिएप्पा ।
ररियन्वयात्मनो मूखमापन म पीरपत् ॥३॥
वीरणधैय युभ स्परकार्य पीय महीपति ।
तीपपद व राम भबति सम्म ॥४॥
एवं सर्प विधापमिति फत्तम्पमारमनः ।
युवाप्रमचय परिरहदिमाम ॥५॥
सत्यार्थप्रकार विकोपरयो पस्स याट्रियम्त दस्युमि प्रया' । सम्पश्यत' समृस्पस्प मृत' सनबीचति ॥३॥ चभिपस्प परो धर्म प्रमनामेव पासनम् । निदिएफवमोका हिराब धर्मेण पुस्यते ।। म.I15-1५11-1. १५-१० से राजा और मौकाको रामपुरुष प्रमावर सुखम्ममा से होरे विचार मो मा सण बसमा म मम मापन मे ।। से गरबा और मेरा बारे २ मोम्य पदार्थ प्रेमाप करते से यमा मम पोम प्रर्षिक प्रगति बोम अपने प्रदूपरीके मुखमूग में सम्मिा प्रोत् पार पापिनको पाकिबो मार और मुरमूब परम प्रयप प्रपये को और सो पौवा हो देख 1 महीपविकार को ऐसा दीव भोर मन मोहोरेप पुर्ण पर ती पौर पर कोमल पाने से राय पति मानीव होगी। इस प्रमर पर रामकन्यकामा इसमें पुल और प्रमापति होम आपली प्रहार पाबम विन्न । विस भूम सरित रेप सम्मा सम्ममपरोय रोती विमापती प्रयपदार्प और मावों को परते वेपनो मा प्रमाणसहित पकी मौता ही और महासस पामेधा है इसविणे रायगे बापाचपा दी परमपर्म । भौग मनुस्पति के समापाव में काय स्त्रिो और वसा पमा नियत मे रसम मोय वर्म से पुछ रोम पुल पाता है इससे विपरीप दुत को माहो॥॥ गत्याप परिचम पामे हतशोध समाहित । हुताम्नि पाँमार्य प्रवियेस्स एर्मा समाम् ॥ १॥ वा स्थित मम सर्मा प्रतिनम्य पिसई पेत् । विसम्प प प्रमा' सी मनपस्सा मम्मिमि ॥२॥ गिरिपृष्ठ सम्परा प्रासाद पायोमत। परपये मिग्रमा या मम्प्रयविभाषित ॥३॥ पस्म मगजानन्ति सम्प्रगम्प प्रपना। सरस प्रषिर्षी भुम्के कोणाहीमोपि पापिय॥४॥ मनु IR-18 बपिणीमार रावसाचौर प्रावधान होम परमेशन ध्यान मित्र, पार्मिक पिानाप्रबलम मोर भोगबमोमीवर पम्प मैंने.पावागमयो प्रसवपरितो रखको मात्र भर सको पोरम मुल्यमानी रेय मनास्था प्रवि ॥१पात उपले पाय सोपा बाग पसिना बग एमाजाप जिसमें एक बामनीको पमन्तबमा पष्ठसमुत्रास विम मावा मोर मी पाप मिथर म गित राबा गड निचरको माप र मिनार यही जान सक्ने प्राव मिसम विषम पम्मीर पर परोपमा सदा पुस मसभनीय मी रामा सा पियो के राममाये में समर्थ होता है इससिपे अपने मब से एक मी काम करे कि तक सभापों की मनुमति महो। ॥ भासन व पार्म सम्धि षिमहमेष छ। कार्य पीय प्रयुग्रीव ध सभपमेष र ॥१॥ सरिंय तु विविध पिपानाच विप्रामव च। उमे पानासमे वेप विविध संभय स्मृत ॥२॥ सम्पनयानकर्मा व पिपरीठस्तव । क्या स्वापतिसंयुल संधियो दिखजण । ३॥ स्वयंकतम कापापमहालेकात एष षा। मित्रस्प पेषापाव दिपियो पिप्रा स्मृव ॥ ४॥ एकाफिनमात्ययि का प्राप्ते परदया। सावस्प प मिण विषिधं यानमुष्पत ॥५॥ पीणस्प व ममयो देषास्पूर्पकतेन पा। मित्रस्प चानुरोपेन विषिष स्मुखमासनम् ॥६॥ पहस्प सामिनाम स्थिति कार्यसिस्य । विविध कति वैध पारस्पगुणपदिमि ॥७॥ अपसंपादनापैप पीयमान स शत्रुमि । सापुपु प्यपश्वा विविध संभप स्मृतः ॥८॥ यदाचगण्यापस्यामाथिपप भुबम्पस्मन्ः। तवाव पारिपका पीयं वा सम्धि समाभयत् ।। ६ ॥ या प्राय मम्र्पत सर्वास्तु महतीशम् । अम्युप्टिल तयारमान तापीत विग्रहम् ॥ १०॥ पदा मम्पत मापन र पुए बस स्वकम् । परस्प विपरीत च तदा पापादिपु प्रति ॥ २१॥ पदा तु स्यात्परिवीणो वाहनेन बोनप। वासीय पपरमेन एम त्पिपपरीम् ॥ १२ ॥ मम्पटारिया पथ सर्पया महत्तरम् । तदा विमा पसा साधयेत्कार्पास्मनः ॥ यहा परमजाना तु गमनीपतमो मवत् । वदा तु संभपत् हि धार्मिक विनं नुपम् ।। १४ ॥ निम प्रतीवों पयागोरिवनस्पष। ग्पस स्पि सर्पपरनर्गु पय १५ ॥
१२॥ सत्यार्थप्रकार पदि वापि संपश्पेडोपं संभपकारितम् । मुमुश्मय तत्रापि निर्विरक समाचरेत् ॥१॥मनु |-m सब राबरियलों को पात सम में रख पोम्मी बो (पासप) विरल (पास) से बाये बिबाण (पबि) म से मेहमोग (वा)पाधों से पलाममा ( )ोप्रारमेय मोस्वविजन मना (संशय) दिशा में दूसरे प्रथा यसमाम बेनामा कर्म पयानोमा विचरम रसमै पुषमा भी जो सपि विप पाम पासव धीमान और प्रमको महोते। मको पचा पाये ॥१॥ (संधि) मेप प्रभा रपचे विपीन में परन्तुबमान मोर भविष्यत् मममम मामा पाप पोपमा समेगमावा (विश्यमसनिसिब रचित समय पुषित समय में हम मा पनि अफ्ष भये पसे के साथ रोष पो प्रकार से मापा चरिपे॥॥(पाय) मध्यात कोई प्रासबो में एसपी पमिरे पास मिबोस की भोर गामा पा दो प्रयासपमा सम्म है॥॥किमी र म से गौवोचव प्रचात निसहाय बाप मित्र रोने से पपये भाव में राप, पदो प्रकारावासदमा सिदिजिये सेवापति और प्रेगोस्मिानमोभित करना पोपप्रता॥.॥ एकत्रिी परिस्थिी बाणान् राबासी महामाशस्वदेश जिससे सहमे पौषित हो पो प्रभापमान वा मावाबर पाकि मामन पुरापे से बोली पाषा प्राव होपी और बात् मे भरणी पदि और विजय भवोपी तब से मेहर गति समय कपीसमे बभपमा सब माया समन्वय समिती और ओ ये से अपने कमी प्रमखमी विमा (पुर) मये।। पर अपने पार्वाद प्रेम की पौर पीयुष माये और - अपने विपरीत विरंच गये तब गा की बोर पुराने रिने पावे ॥1॥ नवमाधार बारहो पा रवीको पारे । प्रमान से पाचवा हुमा अपाय में मोबा मेमापसमा प्रचलिएको मकर की पेषा प्रोपप मे॥॥बर मार भमक व मात्र मान मुम पर होगी मी किसी बार्मिक वाम नामबारे ॥ो मा और अपनी सेवा समिरमे मारने उसकी सेना मग गो से गुपके सम्ण मिला १५॥ सिम बामन मेवे म्म सम्मों में दोपरेचे तो दो मी पोमा पुरोको निम्तोम मे।बो बार्मिकम्मो रस्से मोषमीको मित उसमे सदा मेव मोर बोर हो जाने पर योग मया इति॥ ॥
पष्ठसमुहास । सर्षोपायेस्तया फुयाधीतिर पश्विीपतिः । पथास्याम्पधिका न स्युमित्रावासीयामष ॥१॥ भापति सर्पकार्याशं वदावं व विचारयेत् । प्रतीक्षामा च सर्वेषां गुपदोपौष वस्वत ॥२॥ भापत्या गुणदोपपस्वदावे प्रिनिमय' । भवीत कार्यरोपण शत्रुमि भिभूपत ॥ ३ ॥ पथैनं मामिसंवम्युमित्रोदासीन ज्या सर्व संविदयाप सामासिको याममु..100-14 पीति का मामचना प्रविधीपति एम्प पिस प्रकार इसके मित्र ग्रामीण (मप्र) और गा पपिकही ऐसे सप उपायों से अपना समान में कम और मनियत में बोमषा परिये और मोसम मधुरे का सबसे पता से गुप पोको वियाको पात पोगे निमण और गुमौ कोरियन में पाबो रामा मरिष्यत् पात् मापे करने पर्यो में गुम गौ माता वर्षमान में परन्त भकर्ता भौम जिप कामों में पक समीप मामों से पप्पमत कमी नहीं होता ।।।सब प्रकार से रबपुष्प बिष समापति पया पेठा प्रकाशिए पर राहीनी मित्र गातीय और हमा मेमो भम्पपामा ऐसे मम मम्मीद से वही संप से बप भयोए गतिमी..॥ रुस्वा विधान मूसेनु यात्रिय यथाविधि। सगमास्पद मेष पारान् सम्पम्बिधाप व १॥ सोम्य प्रियि मार्ग परपि प प सकम् । सापगपिकारपन पापावरिपुर एन । २॥ पत्रुसेपिनि मिच गूढ पुरुतरो मपत् । गतमस्यागत चैव सहकपतरो रिपुः ॥३॥ पडम्यूहेम तम्मागे पापातु सरन ।। पपामाराभ्यां वा सध्या पा गरम पा ||४॥ पवम भपमानिततो विस्तारपत् पमम् । पनन व म्यूहन मिपिरोव सदा सपम् ॥ ५॥ सनापवियसाध्यक्षा सपरिषु निभापत् । पतम भयमाप्त प्रार्थों को कस्पपदिगम् ।। गुरूपंप पापपदासान स्तर्मान समन्तत । म्याने युरेप मामभीरुमापिकारिण७॥ सागान् पापपरपार काम पिस्तारपदम् । एम्या पसरा पवन म्यान म्पूध योधपत् ।।
सत्यायप्रकार स्पन्दनाश्पै सम पुम्पेवनूपे नौटिपेस्तपा। गुस्माइट चारिसिधर्मायुमै स्पछे। महर्पयेत् पर्म म्यूम वाम सम्यक् परीक्षपेत् । पेयश्चैव विमनीपादरीन योधयतामपि । १०. उपरण्यारिमासीत राष्ट्र चास्योपपीरयेत् । दूपयेवास्प सतत पवसामोदधनम् ॥ ११ ॥ मिन्याम्प रागानि प्राकारपरिबास्तथा । समयसम्पयेच्च नौ विधासपेसथा । १२ ॥ प्रमापामि प कुर्वीत तेषां धान्पयोदिवान् । फ्लेम पूज्वेन प्रधानपुस्पै सर। १३॥ भादानमनिपकर वा प्रियकारकम् । भमीप्सितापामामा का पुत प्रशस्पते ॥ १५ ॥ मख.151-10141-11-२०॥ बब रबाजों के साथ बुर मे बाचे उप भरणे रान की रस प्रकल और पाया की सब सामी पाविधिकसब पेश पापा समाचारि पूर्व पर सना तो सर्वात पणे बोर समाचरी को रे पो उलो को गुम परमार शामों की मोम पुराये मे बारे॥ीय मगरले मात्र चार एकमा ( भूमि) में दूसरा (पाप मस्लिा) सरा मत मागों को घर बनाम भूमिमा में मची मैं बोमर पास में मानादि बागों से मोर पैर सपना बोये सौर पर अपामारि सामग्री को पार पाप से मसपुर परमाणे बिपी विमिचमे प्रसिरमो मणमाप पारे । को मौसम से मिवाते और अपने पाप मी समर से मिला र गुना से मे मेरो सोचावे बाये में रम पम्तमय में प्रान्त पावसपी रोवोनि मौन अपर मि पुसको मा पमयमा चाहिने । पापों को पुरो पनि मियो और भाप पा समय मामलों को निशानो शिपिठ मोबा हो ही प्रथा सरस पाने, शिकामे ठप ( रमापूर) पर समाव सेना को माणे (प)पा बसपात् पापी समान (बार) मे सुम एक परे के पाले गौर सस्ते हैं और कमोर मच मिशन पर होग? से (मन्न ) से मप्प पानी में पाते से सेना को पगारे (सूचीमा) जैसे पांच सम्ममा सप्प पबार स्व भीम रस सत्र पण होती गिरा से सेनापमा से (बोरम्म) सामाचे मार मार इस मा मेसो पाम बसाये ॥॥ निम ब लिरित हो रीबोर सेमामे माये सब पे पतियों को भारी मोर पस) पर्याद पाकर पाचोर से पानी मेरो मन में सपा मेग्रपति में पष्ठसमुशास' क्याम्पस प्रमोद प्रमाणावे सा और सेपासे प्रायमरवाने बोरीप्रेमी विधाम, मिस मोर से पाणी हो गयी मोर पर पेमाममुख राये परन्तु दुसरी मोर मी पमा प्रसव से पही तो पोहे पर की बात होने पम्मको गुल्म भोट प सम्मान पुरपिच से मुधिषित पार्मिक रिपत हो और पुरम में पर मवादित और वियो मन में किसी प्रकार निभान हो रनको पारों मोर पेनके रमले।।..बो बोरे से पुरुषों से पानी के साथ पुर मय हो तो मिसन मारे और मम परे वो सही मारे जब मा दुर्गम सेमा में प्रविए होम पुरममा हो वो सब (पोम्पूर) अषय (सम्पूर) से पारा पाय रोगो मोर कार मता से पुरमते गई और प्रति भी हो घर से भयेक प्रकार के पूर पर्याव सेवा को पाका बा, मो सामने MAR (पोप)मा मुणगे (ब) र रही हो तो (मर्पम्मा) मर्माद सर्प के समान मोवे । चरा बाय अब तोपो के पास पा सब सो माग पका वापस मुबह की भोर फेर रही तोपों से पपक प्रापि मानों को मारें अमन पर पुराण में ठोपामुख पाम बोड़ों पर सपा मा पोबा भोर मार पौष में मचे सार में एक बार बार सय की सेवा को शिव मिबम पम अपय माबो ममभूमि में पुरमा हो तोप बोरे और परातियों मे और को पा में पुराना हो तो कौन और पोरेप मारियों पर ए मोर मादी में पाप वा स्वापासू वजन और से पुर ।। विस समप पुरवा हो स समप पर गरी सारित प्रारम्ति में बार बन्द ऐसय वर मिससे गौर और पुरम समोसी पास से पचवितो वाम पाय मम पापा और चौरबादि से प्रपत्र सम्पापिय पण मग काभपनी पेना की पेशको रेनो कि मेकाला करती।। मिमी पमप रति समये को श्रेचरों मोर से पर परोकरले और इसके सम्म पौश्चिम महरा मार और इसव पा(भीर) एपित परेड ताप कम मोर और को पोर गरे पनि में रममे (स) मन मेरे मर गीत भरपाव रबी भयो गाव ममय बर्वाद प्रविवारि तिरेर बोषित समय समय पो मागसम्मिी पर्मिक पुस्मनमो और रामसेविस तुमको हस्ती भरे पर्वात मैसी कर्मच रामवाति सम्पुपार प्रम मे प्रयास पावन माया ऐसे परेप और पेसे पुलमो पाप कि बिसने प्राणो पौर म पाप माममा प्रचार पुस्तों के साथ मिपम रथरि रचम पदवी . बसेर पेण मसिम पम पम मी बरोबो रप पदोपहने तो मी रम पमा वायोख रो निमसे पपरमे केसोयरत होम भाषन में ये पोकि प्रRA परम सध्यामकाप पप अपना पति और ऐमा प्रातिप्रापौर विरोष पोप पर पिछमिन और ग्म पाक्सिमयोपिक पदामोरेया रमौर मी उसमे भिगाये भी बसी मोर मामे पर सामने हमपे तुमको पानिय सिा ऐप्स मोमे मितभाप हमारे हमार सम्म प्रविस सदाको हिरस्पभूमिसंप्रास्पा पार्षिपोन पेषत। पपा मि धुर्वरप्या फसमप्यायविषमम् ॥ १॥ धर्मपंप का चतुएप्रतिमेव च । भनुरके सिपरम्म पमित्र प्रस्पत ॥ २॥ माकुमीन शुरै प वर्ष दावारम। त्य प्रतिमा एमागुरि दुपा ॥२॥ मार्पवा पुरुषवाम गोर्य करुणाबविता । स्पोखधर सववमुबासीबायोदप ॥ ४ मा । मित्र बाकि रामा मुई और मूमि की माधि से मानी मनाक से निबर प्रमपुठ मरियर की बातों को सोचने और सिर करने पर पमर्च मिल र मिग्रेमी प्रसो समया ॥॥ धर्म को मारने और मात्र पर्वाद दिने दुप रपमर कोपरा मायरेको प्रसार स्वभाव मातमी मिरम्मी बोटे भी मिरको मास रोकर मस्तिता ॥२॥ पदाइम पोम ले समीपुरिमाल सीम वापर तर नया रिको पानवारे और न पुसको पारो विदो ऐसे को बहुममापा पापाच्या गाभाराव- म मोमित गुपुष बरे मनोमवाब, पुरीर और मममी रोपाल पर्वाद मरीजों में निवर पुपाल बगानीम एवं सर्वमिरपा सरसमा मस्विमि। म्मापास्याप्चस्प मम्मा मोक्तुमच पुरे पिरोत् ॥ मनु । पाँउमालम्ब सनसोपरि ममोपलव ययोजनामा परममिता से रिपाम पा सब पल मौर मणीपाप तिमि मामा भाविका पर्वामाबरकरा पच बोरे सभी पारमादिप्रस्वास भरपक्वाब परतों में पनपा पी मिलपति रेममो सबमें चोरों रो मिसयमवावा मामालाम म म म भोगाये "प्रदर" बोलो प्राषि विधायच में प्रवेश में चार भोरस सुप्तापित परिणामक रोपरिपाक असामान्य पार भादि पर मिद भर रसम मेकि पिपेसा पुची कमर पर राम्बामेति मिा।
पठसमुहास ।। प्रया मेमवेप्रमा- पशायदाम मादयो या पथरिएपयो । धाम्यामामएमो माग पष्ठा दादा पव या मनु .." मापस मामेबशिसोबगेको मुम्ब और संदी साबितया बाम हो उसमें से पास माय सबष प्राविमों में पर मामा का पारा भाग विषाको और प्रो पब वेदो मी म्स प्रभार से मेरे कि चिप्स किसान मावि भये पौने और पब से रहित होम सब पा । बोकि बापमाप भारोम्म अप पाम भारि से सम्पप राये पर रामी राति होगी। मया को अपने सन्ताद सप्त मुख देवे और प्रा अपने पिता सय राजा और परपुरुषों को जाये। पहपाठ ठोकी कि रार्थोरवा किसान भागि परिमम करो और रामा रबमा यो प्रथा महो तो राया किसम्म पीर बाबो हो या किसकी पाये। दोनों अपसम में स्पतन और मिजप मणिमुल काम में परखना है। प्रग की सागरण मम्मतिमि यस रामपुरम एमा की माझ पिता रामपण समयम। पर राजा सीप विकास प्रोत् निसको 'पोलिटि- प्रमोसप से प्रदिपा भब यो पिप देखणेपरों और मनुस्पति कपीति महामारवादि में एक विजन कर और यो प्रयापाब मार पपर मम्मतिमाम पर मम्मामाप भादिकति से काम पाहिपे परन्तु पहा मी संप चिन्ते ।- प्रस्याई देशरम यसरम हेतुमि । प्रणवण्मु म्पर्गेपु निबद्धानि पूषन् पृथक् ।। सेपामापमुणदान निसपोऽसामिषिप' । संभूप प समुत्थानं वचस्यानपकम २ वनस्पैच बापानं संविदमम्पतिमम । मापयिकपयानुरायो विवाद सामिपासपो।। सीमाविवावधमम पारम्प बरवाधिक। स्तय र साहस पंप सीसमाणमव प ४ ॥ स्लीपुंधौ दिमागम दयूतमारप एप। पदाम्पणवशैतानि म्पपहारम्बिवाविस:५॥ एए स्पापु भूयिष्ठ विवाद चरा मणाम् । धर्म शम्मतमाभिस्य कुर्यात्कार्यविनियम् ॥६॥ धर्मा बियस्पधप सभी परोपविष्ठत । एत्य पामम म्ठम्ति पियास्तत्र सभासद समां पाब प्रवएण्य परम्प वासमंसम् । अनुबम्पिमुबम्बापि नरो भवति फिस्विपी। ८ । पम धर्मो प्रधर्मेण सस्य पत्रानुतन घ। रम्पत प्रक्षमाम हतास्तन समासद६ सध्यार्थप्रकाश पदार्प माममा अप्रति मौर रेमा प्रीति समापौर विरको समय पर रवि किया काय मौन रम परास्विमयोचितपदामों मरेगा मगर राम और कमी रसको विपये ही मामी और मामे मामले सामने हममे हम्मे परमित किया ऐस्य मोमेकित पाप हमारे भार इम्प्रति मान्य प्रविध सामे॥100 दिरस्यभूमिसमास्या पार्थिवो मरवते । यथा मि ध्रुष साप्पा रुखमप्यापविषमम् ॥ १॥ भर्मपाप एमतिमय प । अनुरक सिपरम्भ गमि प्रशस्पते ॥२॥ प्राजकुखीन शूर पदावारमेव प । फवा प्रतिमन्तश करमादुर पुधा ॥३॥ मार्पवा पुरषशान शौर्य कम्पपविता । स्पोखबास्य प सततमुसीनगुणोप ॥ ४॥ मनु •--11। मिसावकिराबा मुरव और भूमि की पति से या नही पाता किसे मिमा प्रेमपुष भविष्यत् को पलों को पोषये और पर्व सिर भोपा समर्थ मित्र पक्म दुर्ग मित्र को भी पास हो गया। धर्म को मानने और मन मोत् किएप रपमा को सरा मामबारे प्रसव समान बरामी मिरम्मी बहुकारे मी मित्रो मम्स होम प्रयासित हप्ता ॥५॥ मरा इस सव को मारक कमी विमान, सीप यूरगीर पर रखा किये हुए मेवामय और पैगम् पुसमेटम बनाये रोकियो पेशाबमाणपस पाया । गासीवाप- जिसमें प्रसित गुरमुख पचेरे मनो प्रभाव परवीर और कसबा मी से बयान पर्वाद पर तो बिल्म पुष्पा कोपरासीब पर सर्पमिद पज सहसंमन्य मम्बिमि । प्पापाम्पाप्नुत्प मम्मा भोक्तुमाव पुरै पिरोत् । मा ।।। पूर्ण मानव समच सौचदिपान्योपवयोमपमा सबमभिता में विपार पमा में समा भर चोर बापमाण मित रसको गतिमा सम्पाविमा बर्वाद साबरमा पत्र बोरे हापी मान परिप्रस्थान सौर मममममा वाम पोती भरेर पर पर पीमिपति रेमो शाम को रको विभव पापमय में मम मरममा पमबोधमिरे मन्तापुर' भान् पीपि पिएसमय में प्रमेय मे और मोजब अपरपित प्रदिपपरानमारक रोपरिपाक प्रमाण पान भारि पबित मिरि भयेक रामपुर रचम में पिपरा पुची से इम्मा स (पराधिभियो।
पठसमुहास मनुष्य को बोबी किसमा ममी म भ और बोम्पेत किया हो वो सम हो बोरे बो कोई समा में प्रत्याप होते हुए प्रेम मौन मेमपण सम पारिस पोखे पमहापापी होता है ||॥ विस सम्प में अपर्म से पर्म असम से पम सब समादी बने हुए मारा पता रस समा में सम मतको समामी भादो बम भो मी नहीं जाता ।।।। मामा पर्म मानेगा माय मौत पित किया हुमा गर्म र कीरा करता है इसलिये पर्म भरवम मीरप पर से कि मारा हुमा धर्म कमी हमभेकम्मर मजे।। ॥ यो पब ऐबमों के देने और मुजों मेयो करनेण्या पो रसम बोप प्रमी रसोहि योग पर प्रर्पत न और मौच भावते . इसलिये किसी ममुथ को धर्म प्रबोप रपित इस संसार में एक पर्म ही मुम्बो सो पमाप मी मान सारे और सब पदार्थ पी शरीर के समाप ही बात को प्रास होतेर्पा पप समादा है परन्तु धर्म म संग भी पही एम्मा समभा में पापा ममामि जम्मा अपर्म पर विमापसे गनम से एक मपर्म चो दूसरा साती तामा समासरों और ध पानवमी समा समापछि राम्मा को पास होता १॥५॥ पिस मा में मिला योग्य की दिना खतियोमरालि पसोपोग्पकोण और माबोबा मान्यता राय भीर सब सभापर पाप से रहिवन पवित्र होणते पाप तादीको पाप माष्ठरोगी॥1॥ अब पी से परे परि- माता समेषु परपु काम्या काप साक्षिणः । सर्पधमपियोऽनुमा विपरीवास्तु पयत् ॥ १॥ नीयं साक्ष्य सिप' कमिन्य सरया दिया। पदाम सम्त द्रापामाध्यामासपोनप साहसेपु ष सपु स्वयसमाणेपुष। वाम्पस्योम पारम्ये म परीक्षेत सासिप । २॥ बमुस्व परिणीपास्साधिप मराधिपः । समेत गुणोस्कशन गुणवेप विजोत्तम्पम् ।। समयदर्शनस्सारय भषसम्व सिम्पति । व सस्य मुबम्साझी धमाथाम्पानीपत ॥५॥ सासी रणभुवादम्पतिमुपपार्यसंसदि। प्रबार नरपमम्पति प्रेत्य सर्गापहीपत ॥३॥ समापनप यद् मयुस्वर प्राभ प्पापहारिकम् । भतो पदम्पनिमू मुर्धर्मार्थं वदपायाम् ।। सभाम्त' साक्षिम प्रातानपिप्रस्पपिसथियो। प्राविपाकोऽनुपुशीत विधिनाम साम्त्वपर।।
सस्थार्थप्रक्राम्य धर्म एव वो इम्ति वर्मो रक्षति रचित । समात्यो म हम्सम्यो मा नो प्रमों तोऽवधीत् ॥१०॥ पो हिमगवान् धर्मस्तस्य य कुस्त मतम् । पृषई विपास्वमायम म बोपयेत् । ११. एक एप मायमों निधनेऽप्यनुपाति य । शरीरेण सममाश सम्पचि गपति ॥ १२॥ पादो धर्मस्य करि पाद सामिसमपति । पार सभासद स्वान् पादो रायममृमति ॥ १३ ॥ यम मषस्यमेगास्तु मुच्यम्त व समासः। पमो गणपति फार निम्दा पम मिन्यते ॥ १५ ॥ मा ८।३-८।१२-11॥ समा रम्य पीर रामस्य सब मोग एयर और पापार वर्षों से विमिति ममा निरासर मार्गों में स्थिपुक को पनि प्रतिदिन मियाभरबोमिपम सातनप और बहो की भामकता जाने यो अचमोघम नियम बर्षि कि विपसे राम और ममा कति हो।।। भमरा मार्ग २१ ममें से 1 (बाराम ) किसी में ये देने विपद । २ (मिप) पर मत किसी से किसी के पास पवा भग दो और मापे पर रेवा । ३-(प्रस्वामिशिन) परे पायो मेरे । -(भूपच असल्यानम् ) मिमिमा पिसी पर ममाचाममा । रियाबपर्म)रिस एप परामनरेगा-वस्यैष बादामम् ) वम भात् किसी की 'मौनी' में खेमपम देवा भयप करेगा। --(प्रवि) प्रविधा से पिमा बर्तमा । ---(समषिमानुष) पातमम में माना होगा।- 40 स्वामी और पासवासे मगया। -सौम्म विवर।"-किसी को प्रेरणा ११-मोरपाबी बोडा-ओरी म मारणा । 1-किमी कभम को बसाकार मे भा। 1-किसी की मीच पुरुष समषिका हापा.-11-सौ और पुस धर्म में ममि होगा.-बिमाम अपात् दापनाग में रम्मा। 10-पूर पो बस भोर समान पोनम कप में पर हम्मा । भमरा भर परसा लिम पार पा॥५॥बममरों में पत से स्थिर समेगडे पुस्लामाबको मातमधर्म मालममिमा ममीन रिसीम पम्पास कमी । जिस में प्रथम बाबर होम पमै पलित पोचा रस हाल भान् तौरयत धर्म के मा मनिममा पौर बर्म भ पर नहीं प्रवे पर्वात धर्मी को मान प्रपी को पानी मिमता रम सम्म में खिने प्रमागरमा पप समाब मम गावे ॥.॥ .पी रियर विसहस्पमि पासपो॥ सरा बच पष्टसमुमास भाव दिखी। बो सास दोस्ताविति और मियादी विनित रोखा॥1 । पम पोरने से भी पवित्र होता और समायोजये से धर्म मौससे सब पी में सामियों समदी बोबा पोन्म ॥१॥ पाटमा सानो साथमा और मामा की पति धामा है इसको बारको पुल सब ममुमाग रचम सासरी अपये भान भएपमान मत कर भयोत सम पर बोकिरे भामा मन प्रपी में पिसम और बो इससे विपरीतीप मियामाय ।।.२॥ बिस बोमते इप पुरुष का पिन म पद सौर म चानने हारा मामा मीवर कामे प्राप्त नहीं होता उपमे मिह विधम् चोप किसी कोरम पुस यही माणसे ॥४॥रेमाब राप्रबार पुस । बोतू मै पवार पेसा अपने मामा में वारकर मिया पोरामो मैक पीकिनगे पूपरा तेरेप में मनामीम्म से पामेन पुष्प पाप प्रदेशमा मुवि मिठोरस परमामा से पर पएमाबोवाम बोमाम्मोहानयाम्मघातकाम्पकोधात्तष व । महानाद नाममापाव सादय वितपमुख्यत ॥ १॥ पपामम्पतम स्पाने य' साम्पमतूत परेत् । तस्य वरारविरापास्तु प्रयझ्याम्पनुपूर्व । बोमासामवरस्पस्सु मोहात्पूर्वन्तु साइसम् । भया दो मध्यमो दाम्पो ममात्पूर्व पतुर्गणम् ॥ ३॥ कामारण्य पूर्व क्रोधाच मिगुख परम्। महानाद सत पूपाविश्यामपसमय सु ।।। उपस्थमुदर सिस्तो पादो प पश्चमम् । वपुर्नासाकी व धन देहस्तष प॥५॥ अनुषम्य पशिाप देयकातोप तस्वतः । साराऽपयधो पालोक्य दएर दरम्पपु पासपत् ।। अधर्मदएड बार यगोन कीसिनमयनम् । प्रसश परणापि तस्मात्तत्परिवयित् ॥ ७॥ अदपम्पाम्वएपन् पा एम्पायाप्पदण्डयन् । अपणो मादप्मोवि मर ष गम्हति । पाम्पमपम कुसिम्बएर सदमम्वरम् । पठीय धनदार मु यदस्मत' परम् । मा १-२२-14। बोबोम मोह, मव मित्रता कम मेष प्रशन और परम्पप से पासी रेप पर मिमा समयी माये ॥1॥पमें से किसी स्थान में पाली परपोरे म्मो समाव भयेक विधए दिवासबोयोग से मर्म सामोरे तो उससे 1) (पना परे र भावे) पहरे में मोर म पाखे पससे १०) (वय अपने दो भाने)सरे को १३ सस्यायमका पद प्योरमयोग्य कास्मिन् पति मिय' । व यूत सर्व सस्पेन युप्मा पत्र साक्षिता सस्य साक्ष्य मुषम्साची नोकानामोवि पुप्फवान् । सबानुचमा कीर्ति यागपा प्रायमिता ॥ १०॥ सस्पन पूयत सासी धर्म सस्पेन परते । तस्मात्सस्य हि पफय्यं सत्वपु साथिमि ॥ १९॥ भास्मेष पास्मन साक्षी गतिरस्म्य पान । मावमस्खा समारमा नसां साधिसमुचमम् ॥ १२॥ पम्म विज्ञान हि पदव नमो नामियरत । वस्माप देषा' भेपास मोकाम्य पुरव षिद् । १५॥ एकोऽहममीस्यारमानं यत्व करपाण मम्पसे। निस्य सितस्तापप' पुरपपापेधिता मुनिः । १०॥ मामा ५८.१-०१-E-E1ELEVISI सब पनी में पार्मिक दिए, विषारी सब पर धर्म में सामने पोमणीव मनपरोको भाषणमा में सामीम इससे विपरीतों में कमी मममियों की साकी मी बिनोद शोधा और सपनों सम्पन साती बिये पवार सम्म चोरी म्पमिपर मोर पर मिपावस अपरावास में माती परीम प्रमाणपत्र मी म प्रमोसोषिकाम सब एसवेरेरोगों और सापियों में मे पापकानुसार पापियों में जम गुती पुसमागमस्थ और योगासाकी रचम गुबी पोर महतो शिवोच्म मपीत पनि मार्षिभर पठियोकी मापी अनुसार बामे ॥ परी रोम सिर होता। एक पापा बने और मूसरा भुनने से पा सभा में बोली समापीय भौर पर पोम्प नरमौर को सीमिपो बपायोर मरीय ॥५॥बो राबसम्म सम्मिी रसम पुगे सभा में सारी खरे मोर मुबने से वियर दोप(प्रय प्राक) मा गि पर दुवा मासको माग यमन में सोचे भोर मा मेमो पार॥ सारसमको भावना किमो समावोस मापार सम्मपा रोमे और इससे मिज सिपापे उपनाम पोये रस म्पापापाय प समये ।। ॥ बब भी (पी) और मन (विपी) सामये सारे समीप मासार महिनाको पारित माधीय पौर दलित कोर परिसर स ममासे पर। मालि पोगो ! एमबापामों में जोम गामा हो सोम सापोरोभिगमी इसमें पायो मापी मत्वबोममममम्मर म मन मोर मामले में जामुन मोपा इमाम मरम्म में रम पनि मा हो ricn सपोरोगों में मामा और शिप पष्टसमुहास भरप मिली है। सम योगताप प्रतिधित ग्रौन मिपावादी विमित होता है॥ ॥सम बोरवे मे साक्षी परित होता और सम ही बोलने से धर्म भनाइमसे सपपी में मापिषों को सम होपोमा पोम्ब है॥ मामा का मासी मामा और भाष्मा को पति भामा इपको बामोरे पुत! सब मनुष्यों का उच्म पापी भपये भरमा समपमाप मत कर मत सम मायबोधि मामा मब वो म पिसम और मो इससे विपरीत मिष्यामारय ।। ।। बिस बोरते हुए पुल का सिन् ख पर्षात् गरीर म माबो हारा मा मीना मान बहीवा उपसे सि विद्या डोम किसी को रचम पुक्त नहीं मानते ॥१॥रेमपाप मेरमा मया पुस्प ! बोतु मे प्रवाह ऐसा अपने साध्या में बार मिप्य पोयो मैक पीमितुबो दूसरा सब में मामास्म में परमेश्वर पुल पाप रेखपा मुनि मियरस पामारमा सेयर परा मन बोपार॥1॥ मोमम्मोहाड्याम्मैपाकामाकोशात्तथैव च । प्रधानाद नाबमायाप साक्ष्य षिवपमुम्पत ।। पपामम्पतमे स्पाने प साक्ष्यमन्त षपेत् । वय वपरविरापास्तु प्रवक्ष्याम्पनुपूर्वरा ॥२॥ बोभास्सासवग्यस्तु मोहात्पूर्वन्तु साहसम् । मपाद दो मम्पमो पम्पो मेमात्पूर्व पतुर्गुणम् ॥ ३॥ फामारण्गुर्ष पूर्व क्रोपातु भिगुणं परम् । प्रबामाद में शत पूर्णे पामिश्याम्पसमय तु ॥४॥ उपसमुदर सिझ रस्ती पादौ प पश्चमम् । पघु सापकों व भन देहस्वयेष प। अनुपम्य पशिाप एकालीप तत्पठ। सापऽपराधी पाखोस्य व दयपु पातयेत् ॥३॥ अधर्मवरमन मोक पशोप्न कीमियमम् । प्रसार्पश परप्रापि वमात्तत्परिवर्जयेत् ॥ ७॥ भवयम्पादयस्पन् पम्प पम्पाभैयाप्यवरपन् । भपयो मायनोति नर पैव गम्पति ।। वाम्बरा प्रपम कृपासिम्बयर तदनन्तरम् । पतीपं धमइपरंतु पथदरमत' परम् ॥ ६॥ मा FUF-PMIRR- मोमोम, मोह, मम मिता कम प्रेष प्रश्न और सम्पब से प्राशीम मिया समग बाये। इसमें से किसी स्थान में माली ममोरे हमने पसाब भनेक विष एस दिषा मेयो बोम सम मापीठो रमपे ) (पत्रा से एक माने ) रसना मारने मे साबीरे उससे ) (ोब पो पाने ) रस को सस्यार्यप्रकाश म्स मिमा मापी ग्यसे ।) (समका सो) पसरे, बो पुस मिका से मिया माली समय १०) (सRE सपे) सरे।। पुस काममा से मिष्ण साप देखे गए २५) (पचास ) एसो यो पुस मेष मे सम्म सादी रे उस ) (धाम से चला पाये) पारेको पुस माता ये गो सामोरे रमसे १)(कारो) रस और मो परम्पब से मिबा साली तो उससे 11-) (पाक सपा नौ पाये )पस मे ॥ ॥सो उपस्मेद्रिय गाय सब पप प्रोड बाब अप और पिच स्व जिविब पर सदिया सस्ता है। परन्तु बोरम विच और बिल से गोम से साती ये में पत्राम पर पाने पर विच परत बोसन्त निर्मपदोगे रससे कम और पता हो तो तसे ना तिगुन्य और चौगुना कमी भोसा देस मा अब और पुत्ल हो ससा बफापोखम ही एमालकि इस पल में दो समर्म से समाप अविना माष और मक्सित् मैं और मम्म में होने सीनियर कामेहारा और पलाम में मी दुबमावा इसखिये पवमुखपमा किसी पर जमे ।।..बोरामा पानीको बार परमार्थों ओएसवारीत परारे बोम्ब कोरवा सो सर देश पपीपे रसको रस वोपता दुमा सीमिन्ट को और मोरे को प्राप्त रोसबो भाप मे उसमे भरा रस पौर अपनी पसंम्मान ।। ८॥ मका बाबी समोर मी 'मिन्य' पूमा म रस पोद राम विकासे पेमारा कामना किया तीसरा म्हसे 'भवना' और गौच " पपरामात उसको मारन्य वा चिर रेया॥ पन येन पान स्तमो भूपु पिचेरवे । वरदेव रेवस्प प्रत्यारेणाप पापिय ॥१॥ पिताचार्य' मरम्माता मार्पा पुम पुरोरित। पदरम्पो नामपदोऽस्ति यस म विधति ॥ २॥ कापिर्व भमरम्पो पमाम्प मास्वोस। खा गया भयादरम्प साममिति भारता॥ भशापायन्तु परस्प स्तेये मपति कितिपम् । पोरव तु वैश्पस्प वार्षियत् पचिस्प मायक्स्प बहुपए पूर्व वापि शव मवेद । विगुणा वा परिवोपगुपपिसिस' ।। ऐन्द्र मानममिप्रेप्सुर्यणमाएपमम्पमम् । मोपक्षेत पणमपि राय साहसिमरम् ॥६॥ पापपुणस्कराम्चैव रोनैप परिसन। मारसस्पनर कर्च विस्य पापकतम ।
पठसमुपास साहस पच्मानन्तु पो मपयति पार्थिष। सयिमाय नमस्पाशु विश्पं साधिगधति:। म मिषकारसदामा पिपुसाया धमागमात् । समुस्एजेत् साहसिकासयभूवमपायहान् ॥ ६॥ गुरुवाबासपो या मानवं पा पहुभुतम् । भाववादिममायान्तं न्यायपायिधारयन् ॥ १०॥ नायटापिषध वापरास्नुभयति कपन । प्रकार याऽप्रकार्य थामन्युस्वम्मम्युमप्दति ५ पम्प स्तमपुर नास्ति मान्पनीगान पुण्याम् । म साहसिफरगमो स राज्य रामनामा... मनु ८।१v-11-11-1-1.. भर धिस समरजिसस मम्मों में विमा मनोस यो मनुचौकी गिरिपे राय बमोन परमारे. पारिता माचा मित्र सो पुत्र और पुरिमोमोना स्पर्म में Fon महोत ममप महोदता पर्यत बर राम मायमर रारमारम्मिी पापा ममणि पोलिस रिम प्रपा A साताप माप पर एक पेमा पोरसी मसराप में रायो पाप सोमा छापाप मनुस्मस on प्राप मारोगपहिले मन्त्री भवात् रामपर भारसी पावसौ गुणा चौर ग्याभोम्पापो गुपा दमा भर पर पर्धन सपोरसे पोय समसस गुप र से भरमा जी गरिर प्रगतो सोमवार meोत ममामा भर से मिल पति और ससा मोसम में योगिता मे एम पास Mummit Arालो मारोगा। बोरोम रोम रोमेपर माग गुपो म पा... पप गुपोवासप ९.पो. या रस fruinapret PuTuudurbart. frothvi मो0 मार ramati गागि पुस्तmurena fou an unvertी Tarunni Neute भोग cumपामाRituatru गुफा समे सस्यायनकाय । पमित्रता और पुष्पा पब को मामि से मी राम सब प्रविषों मे हुप देने यो मासिक ममुप्पमपम ऐम पिसे यमौ पोले परेगुरुहोपो पुथरि पावक, पर पिव पारित मौर परे गुज सम्म प्रादिभोट पोहोबो पर्म को भोक धर्म में पर्चमाव पूमे मे विवा प्रकाष मारने वाले को विध विचो मार सबना मर्यात् मारने पाव विचार मारपे।। दुरपुस्पोमारने में इम्ता पाप नही होता मम्मि मारे चो मामि पलिकोपीको प्रेम से मारवा आयोओप सेभेषभ।।। विस रागा राम में मेन परस्त्रीमामी न पुरा समयोगये हारा न पाहपिक या और सपा प्रमोद रानमे भाप मग माये पीपा प्रतीची. भरि प्रयचा मी स्वपातिगुफर्पिता । व प्रमि' बावपेद्राज संस्थान पहुसंस्पिते ॥१॥ पुमार्स पारयत्पापं शयने बस प्रायसे। अभ्यावम्युम फायदि सब पमेत पापक २ वीर्याप्पमि पथारो पाकासपुरो भवत् । मदीतीरपु सदिचास्समुन्द्र मास्ति मपणम् ॥ २॥ भाम्पाहण्यपक्षत कम्तिन्यानानि च। प्रायम्पपौष निपठापाफरफोपमय च। एर्ष समिमायाम म्पपाहाराम्समापपन् । प्यपाल किरिव सर्व ग्रामोति परा गतिम् । मोमी भरमी सति गुरमबारे पति को दरमियरम उसकी गुत की भीर मारे सामने गावी जसे परामरमरम्प-10 रसी पर अपनी की वे पोहगामी पायमममम पापी म मोपग पनि यसपा भागमा पर माजावे पपुर पुख्ती सम्मुखममम॥२॥ म.-गोगामी पाप म्यापी सी पीमभिवाद इसमतो रमको मन परा? 1.-सभापत सो पम्पुमा समीमविकागी॥ मा--रावारिसमसामोपरगे। 1.-पय मील पुरषामा माषणामी मनुमसरसो एका रिपा मोर बराबरकोना ममुप्प परनामा । भौर पसारी प्रभाग समिरी और पनपार्मिसेरारमा चोला माय चमसम्म एमी मरम्मोताराम उपाय भोग मर मम गुण भर में समयमै समय प्रमाण प्रभार सोपारा सर्पद रस भोर माब पम्समुमास' मोटिस होमम एम और धर्मो रसम पोप प्रय उससे मीच पुल दूसरा और रोस । प्र०-परमा पर होम सति पोंकि मपुप्प किमी पाभ समाहाराबविचारण्यासलिये ऐसा परेमा चाहिये। उ-चो इसकोमा पराब राबरीति को नहीं समाते मोकि एक पुरुष को इस प्रभार पाहोने से सब पोप हो काम भने से प्रपप मे और पुरे श्रम को बोपम पम मप्र में स्थित है। पर पोतो वही परमर मी पारस एचके माप में भाषेय को यो सुगम सरिता बाम तो राम गुव वामहोपे वर्ग । म निसने तुम मुम्म एसमते होगामेषों गुणा अधिक होने से मेदों गुबा श्रीमती किया बहुत मनुमा म गे तब बोका र एक मी बना पोपण भमत अस एकको मबम राय चौर दूसरे में परमर को पारमा अधिक एक मम माता तो प्रोक मनुप के भाप में भापपत्र बीस से परा प तो पेस नुपम बोप प समझते ११ से एक को मम और पाप ममुप्पो में प्राण पराभवो ॥ (पा)मर मयुप्प स्पति पर राम पपिकचौर गोमा तप्प या एक मम पर पूर्व भौर मुगम ठा। बोबम्ब मान में समुद्र की पारियो महो मा यो मा म विमा बम्परेपो रहामा मापन और महासमुद्र में विभिनयमपम मही हो पम्वा तु या मनावरे नियम गय भौम यो मौसमी पत्र में पाने दोनों बामपुर सी पाल्पा पान्नु सामान में रखाचरियमोम है कि प्रथम महीपते पेपर और रेग-रेयता पपाम्तरों में मौकामे व्यप अपने प्राय पुस परंतरणाम सम्मिी पनाम गुम्य महोबे रेसम मठिदिन समोसमाधियापी मारियों ने माम और जाप "बाम" बारिकी साने मोरप (गाय) रेखा मेय इस ममा परमपारी पय समम्म पतामाता पा सर पापीको पुरा परममति मोर मुखको प्रयोग प्र०-dea वियपी समाविमणी! T- पायो भूमार में रायोति सी चोर पीएम संपरप मेसोपोर विम मम मतपीरब रिश- मस्परोकर पानाम हेमुभि । मनु ।। यो विषम पग और प्रयो मुममा गैर धर्मपुर सम सर निमामिानो गापा च भारत पर नाम (पलियां कर माता सत्यमय में विदे। मुल्य में भी परिमामय, मान न म मन रम। मम भरपात् र प्रम भासाममिम श्री पणिप्रेम
१४०
सत्याप्रकाश
में किमिसमे जोर और भामा में पूर्व पर पाकिबोला
पाया पर भाव रिण बार बाबा और परमबाटो
एरवी पाप पुस शामी और मायावीच मी
मौरीमा कामपामा यही हो मी सब पापमोरा
पमा विबा विमा कमी भी हो सकी। विध मावोस पपप में
दोपहर बिरोषवाई मपम यामाह बाये। इसलिये पर
शरीर पीर मामा परको पाले रहमा चाहिये। सास और रिस
माकपा पनि मौर मवि सियासहिमा पौरहीं।
पिरोसा परियों को पग मोर साल होबा परिसे। मोबि सब हो
विपासकर तो एसपम होमाबापण और इस पर भी पान रखप
पीपे कि" रामप्र या होमसीहो गसमें म्य
बनी है। इसधि मा भर पपुलों को परिचित किमी माया
ममें किन्तु सपरिव धर्म नाब से नमसबसपाररत बरें।
पाप से पनप र पहामि पि र मबमति
सम्म अश्म पम पमान में और याति परिमापा और महाभारत
यान्तिम र मापद व्यरि पुस्तम सिमतिको
पारवा मारत अपय पर्वमोम की राममें और पप सममें कि
"ष प्रापत प्रम भभूम" पर पउग ( RI)
महम
प्रगति पर्वात पामेधा की ममा मौर परमामा हमारा राम रसारिस
भूबसकोमा सीमेमोरामाविमरीमारे
हाथ से अपने समय की प्राति परे । पब मापे पर भीर र
नियमविजापा।
इति श्रीमहपामन्दसरस्वतीसामित सम्यामकारो समापाविभूपित
पायर्मपिपप पष्ठ समुमास' सम्पूर्ण
अथ सप्तमसमुल्लासारम्म अपेपरवविपर्य म्पाब्यास्पाम' शुचो भयुरै परमें म्योमन्पमिन्दुवा मधि वि निपेदु । यस्तम वेद फिमुचा फरिप्पसि यचद्विस्व हमे समासवे ।। १ ।। न म । में । शिा वास्यमिदर सर्व यत्किन्च अगत्या अर्गत् । वेन स्यान मुजीया मा घुः कस्य स्विद्धनम् ॥ २॥ भा भवं यमुनः पूर्मस्पतिरां धनानि सं जयामि शम्वा । मा पन्चे पिवर न नन्तोष दाशुपे वि मसामि मोजनम् ॥३॥ भामिन्द्रो न पर निम्य म्बन न मुस्यवेऽय वस्य फदा घन । साममिन्मा मुन्धन्तो याचता यमु न मै पुरवः सस्पे रिपायन ॥४॥ मे । १८ ॥ (पणे पहरे ) इस ममा काम प्रभावाश्म की गिता में विचारे पर्वात् जो सब दिम गुपबम समाव विप् और जिसमें मिल पारि मितौरो भाका समापमापक सब सारे परमे उसको यो मणबाग, मास्ते पर रसम पाम बीमास्तिक सम्पमति सरा ससापर में थे? इससिपे सर्वदा रसोको पायम सब मनुण मुखी है। प्र०-मेर में ईर प्राइस पर तुम माबोबो? २०-बही मापते बकिमी हौ में एम पीवी रियसिने भोक पर सिर कि पाटो रिचाई पर। प्र०-सा में मोपकरेता पिते है सम्र स्पा अमिप्राप। २०-या दिगुली से पुख होये भरण मम्सी पिया परम्नु मोदी सरकारपासमीप नहीं माना। रे! इसी मम्मक निमम सब देवता किमती पगमये धौर पास मो मोम्स ईम। पा रग मुपदेपो रेखा मामेभ प्राप।मेत प्रव होने से महरेष इसीलिये किसी समत् की सपनि मिति यस्तो पीस प्रपिता पyिa.' पी में प्राय समाल्य मतपप में प्रवास र प्रयोद पिता . पविश्यवानुष्ठ पर..
सस्याप्रकार पर मणि बसु, पण चन्द्रमा, मर्म और पासप पनि विषय होने से पे पार पशु । म भान भाव बान समाय मार्म म देववत्त पम्प और प्रिष्मा मा इसजियेमा पर को योग। तब रोहन मायेपर हो। मामा महाना भविम इसपिये। ये सब पापुको पेवे पवे। मिलीम पाम पास है कि पाम ऐच मत।। पा स्यापति समाप पोलिरिससे अधिोपि की एR, पिनों मार और माय मम्मको शिल्पवित्र से प्रचार प्रबन वाटीस सोएको पाप से मामलामी धौर से लाहोरे मे परमामा पीतीstrमरेव पतपोप प्ररा में साहिब। इसी प्रभार पन्या मी शिवोहन यामी को देखने तो बम भोकम माननरूप प्रमवार में मिमी परको.. मनुषको इस संसार में समय में जो मारकर निगम या मी म मम मच से सीपल की भाभा मतम समय भय परामरम्म पर्म से अपने पारमाध्यमादो मोगा. कर सबको ग्रेग मारे मनुयो ! म पर पिण्मात् सब पण र पनि में समान बनाव पर सपनों सिर समेकना और बना मुसीको पर बीच से पिता को पता पुस्मरपुरें। में बचा पाने मोबप्रविमा पासबिमा॥ मैं ममेकर पूर्व सण अप कामी पानको प्राप्त होता और मम्मी पासुकोमस होगामीजम् सपना निर्माता है मगरसतिप्रमेया मुम होगा। बोरो ! प्रातिपय मते हुए एम मोग शिविपन कोसम से मांगो पर तुम मोस मेरा मिनता से प्राप मत मोरे म्युमो में पासमारसमसस मोबसे मधुण ने पन्यतय शालापियन देसा मे पद का मध्य समापौर मुपायत पवा अपये सब सामने मपुत्र प्रकामा प्रभाव और पवित्र में को का रस सर भर्यमे ये भीर पाप मासिमिये तुम बोम मुखको भोग किसी सरेको मेरे मन मो मत मानो और मच गयो। हिरण्यगर्भः समवर्सवाय भूतस्य भावः पतिरफमासीत् । स दापार पृथिवीं पामुतेमा कस्म देवा पिता विधेम ।।
सप्तमसमुन्मास १५३ प्र०- पहबरमञहै। मनुप्पोबो सी पूर्व सम परियो गोकॉम सपति माम प्राधार और यो इस रापप्राण पर रोगा रसमसामी र होगा र पपियो से पुर्पगोड पम्त पी कोपमा पारण प्रहास मुखसम्म परमात्मा सेमे मलि से इम में से तमग मीमो॥1॥ म-प पर पवे हो परन्तु उसकी सिदि किस प्रकारको हो। उ.-मब प्रमादि प्रमाची से। -ईमर में प्रापि प्रमाण कमी महीम मते॥ २०-इन्द्रिपार्यसमिकर्पोम्पन्न वाममय्यपदेश्यमम्पमिचारि म्यवसायारम प्रस्यसम् । म्पाप र नाम् ।। पर गोतम मातिसावरबाब।बो मोर बापु निय माय और मन असम, स्पस स प पुन दुस समासम दिया माम सामन्य होने से शाम सपोवासको प्रमाण परन्तु पमिम हो । भव तिवारमा चहिये कि इन्द्रियों और मन से गुयोम प्रमा यी पुषीसही। पैसे चरों पच भारि इनिपी से पा स स पौर पम्प अभब होने से गुपी गो पधियी ग्पसभामापुमा से प्रसार किस्मता मे इस पर पति में समा दिप परि सामापि गुया प्रमाने परमेर कामी म सपमा मम धौर इन्द्रियों को किसी सिप में गरी प्रावि पुरी पोपमा परिभाबी प्रमे मजिम पब में भारम्म प्रता स समय और प्रेम कामारि ससी इम्ति Rष पर मुरपाठी रेग्मीपय में भरमा मांसा से दो माम प्रो में मन श और मस्य तण अपेभो प्रमे में पम मि श्रम अमोमवारी पीयामा गरम महामिन पाम मा को भोर मे और बाबासमा एरोरे पामामा प्रतिर प्रपे में तत्पर राता! ग्सको रमी समरोमाता है। परमेशप्रबोटो घमुमापरि से पामेवा सम होने में समाहिमरेन भावभनुमान होगी। म०-गप्पापको सिमी र दिरा में २०-सपको पकि दोपहर में दो बाम्बरामी मत्र समिसम्हा सरपणा मा पो चौर प्रमो को सम्मा पम्य रेग मैमिा पम्मा प्रक-परमा रणसु और पायमोब? प्र. मी गुण परम पिरम्परमपराधीपणे होम र माप क्योंकि अब सपने मवेरियोमा पुस- जिम्पून मुपाय! और एप रस प्रोगे भी रिया रसगरेम।
सस्थायप्रकाश उ-बाप और पगबाममात्र हो मेरोपियो मे म्पोबन सिरहामा मेसन प्रयोग कि मनुष अपराम भये से दोनों में प्रम्म करो।पोरबा महादसे पराये एल्को बसपा और वैसा प रा और तुमने नियामक महासक भिमने सा स्विच पुरा में किया हो रग रसवा सा हो सोम चाहिये पीपम म्पा मोरयो अपराधी को समरिषासन को पषम बाण दो बार किए अपराधी को बोरने से मार्ग समामा पुल्प को गुमरेवाल एक बोरसे सा मणी कोकण प्राप्त हवामामि साहो सोमालिस मामे भरापार में मम पाप मने से बचन पद पर गौर रस मासे मार देने मे अन्य साना पारयित होती। प्र-रिम और स्थान पोशमलोप लकिस दोनों भाई एकोहोरो दो सोनाम इमडिये एकसमा सगा तो समाजमा विदित होवाका और पान मनोजन बही॥ -ममेड नाम और हवाम प्रसपाहीहोते। म०- १०-पो पुषा दमको राशन! प्र--संसार में पुम्से सदिये। 30- संसार में वो पापम दोनों समये में भावा है परन्तु गमको विधा विनय पपमा समालो चाप मिलिमये पारी मोबन सिर म भगत मा परा उत्पन भो वासरे। इससे मिा मनोगा कौनसी है? पालमwी पुखमय अधिक और म्यूम मे मधित मालरोगी प्रवणदो भेरीकियो मन में सबसे मुहाने पर पहले मेहमा और बिना मगरला चीन नाममात मारमावि बाम पारग मानी। पोमोर एक प्रयोग गरिमा को प्रप मोर दुन्धी कारखा। मा-पर सामनिराम ! विरामा मो सास तातोपापड मोवा। मानो तो मशार मुख मौवर में पपर सम्मोकिपीमित सानु में पुष मर्मस्पा मी प्रीमियडावोस पुरा और रोग रोपपेरम भाव मादि से सहित तो सम्जा । सस बही विभित शिक्षिामागे प्रमाहो तो उसके मात्र माग पारिवाहमा सानाची दिनोपोय से सपा मेवात रस संधु ममेवा निराम्रा सर पर रोमहिलाको सप्तमसमुन्नास पब मप में कोई पहा ऐसा थे बिबर पे प्या से प्राप हो भार अपना शरीर पमा विपाटो मापी सिरप कि सरीर पर विरामापा । इसलिये परमात्मा कमी और मार बहोमवा किन्तु मिरामा होने सूक्ष्म पापों से स्पूनर पवा देवा।। प्र०-वर पछिमाही? 30-1 परम्नु New तुम समधिमान् राम म मा होमा पीमित सपनिमार गम नही किचर भपये प्रम मोत उत्पचि पालम महब मावि पौर सब बोषों पुरण प्रपमेयमापोय मामले में चित् मी रिमी सहा वहीबन प्रौद अपने भक्त भामर्ष से ही पब आपका भम पूर्वपमेवारी।। प्र-म तो ऐसा मानतेचा सोपसपिर दूसराई नही॥ 1-पापा परामोसम भो कि सब श्यपाय भोरम पो हम तुम मक परमेपर अपये मार अपेकर या सब अधिान, पोरी मिरवि पापम्मै कम भोर तुम्ही मोशे सम्प मेरे मम भर गुरु कम समय मे मियो को मारा प्रमा कि सब का सम्यपरम्मी पपया इसचिरे सतभिमान एमप्रमेहमवेमायोमेक.. प्र०-परमेघर दिया प्रमादि। २०-भवारि अर्थात विमल परिई भरपप सम्मको सभे भारिपत्यादि सब भ प्रथम ममुहास में मणिवपीरिये ।। प्र--परमधान्यापा। २.-सबकी भाई भीर सबसिपे सुपपाता। परजना साप मिवियाप खिपराधीपमहीना। प्र--परमेश्वरीति समोर मामयममा पहिरेपही। उ०-प्रवीचाहिये। म.-सुविधरि भये मे अपना विषम पनि प्रय प्रोपरभ पाप पुराण मोमपति सनोमा 10-बमममममी. ro-ahate में 8 सपणे गुप में से अपने गुरु में समा गयरमा निमारा गमार और मार निम पास में परमर और ग्स सामाना। म.-मताभ.समम्मरोग समापप्रकार स पर्यगाफर्मकायमखममाविरर शुरुमपापविम् । कविमनीपी परिभू' स्वयम्भूयोपावध्यतोन्ि म्यदधाच्छावीम्पा समाम्पः ॥ ४ भ मै ८॥ (स्पर सिप परमाम्मा सप में माफक चौरमरी और भक्त बक्षण बोरा सब पतामी सोपरि निरामय प्रमाण स्पेखिद परमेवर अपनी बीपस्म समातम प्रमादिममा ने अपनी समायण विष्य से पपायों प्रपोप देवनामा मापा मगुरु राति भयो बिस गुप से सहित परमेवा प्राति मपम सगुण (मन) भात पम्मी और पाप सम्म माही मेख निम्म त्रिमही दोवा पानी पनि मम्मपदी आवा मोर कमी प्राचाबपीमत बिसमय अशाप कमी नहीं होता इम्पदि बिस २ राम पापियों से प्रभावम परमेम सति करमाय बिगुग सति । इसपर पामेवा गुपसे गुष कर्म समाप अपने मौका।से परवानगी वो पाप मी पामरी होये और मोमब मांडो समान पामेघर ले गुमन मला अम्बा और पपये चरिब पी पुष्परता रमन पन्ति मा. प्रार्थना:-यो मां देवगणाः पितरमोपासते । वा मामय मेधयाऽने मधाविन कुष्ठ स्वाहा ।। १ ॥र ।। वेनोऽसि वेमो मयि घेदि । पार्दामसि पीयं मयि घेरि । पलमसि पल मनि हि । भोमारस्पाजो मयि धेहि । मन्पुरसि मन्यु मपि हि । सोऽसि सहा मयि धेहि ॥ २॥ यजातो दूरसुदैवि देव व मुप्तस्प तथैवति । दुरङ्गम ग्योविपा ज्योतिरेफ क्न्मे मनः शिवसंशसमस्तु ॥ ३ ॥ पेन फीएयूपसौ मनीपिणौ यो एवन्ति विदथेषु पीयः । पदपूर्व पृषमन्वः प्रनाना वन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।। ४ ॥ यस्मानमुव घेतो पति यग्याविरन्तरसृत प्रजास। पस्मामते पिन फर्म क्रियते वन्मे मनः शिषसश्स्पमस्तु ।।५।। पनेदं मत पुन मम्पिारगीवममतेन सर्वम् । मास्सायत सप्तरीमा न मे मनः शिवसहसमस्तु ॥ ६ ॥ यस्मिन्नचा साम ययाति पस्मिन् प्रतिष्ठिवा रपनामायिधारा । पस्मिधिवर सर्पमा प्रनाना वन्मे मन शिरिसमस्तु ।। ७ ॥ पने सप्तमसमुमास' सुपारयिस्पोनिष यन्मनुभ्याभेनीयतेऽमीधुमिनिष । दुस्प्रतिष्ठ यदजिर जर्षिट सन्मे मन शिवसङ्कल्पमस्तु ।। || पहराम ।।३।।।।। रेमाने प्रयोत मासम्म पामेम पापी मा से विस हरि की उपासना गिल, भानी और पोपी बोप करते हैं ग्सी पुदि से दुरिमार मोपी मान समय में प्राप शिपे।।।। भाप सम्म म मुम में मी प्राय स्पस प्रविष । म भयन्त परणामपुर इसधिये मुफ में मौसमय से पूर्व पराकम परिये । पाप बसन्त पाइसचिपे मुम में मी पक्ष पारसमणिपे माप मार सामर्प बुकमसिने मुमने भी पूर्व सामर्प पारिने। भाप पुरासम और पुरों पर प्रेपो रे मुममे मो पैसा ही कौनिये। प्राप विन्ध पति और सस पपरापिसाब परमेमोमा से मुम्मो मो या हो कीजिये। रेस्पानिये! पापीमा से मेरा मवावे में दूर ता निम्मामुपपुण पवा और हो सोते हुए मेरा मब सपति को प्रोता वा सप्प में र २ बारे समाज म्पपार मता भव प्रमभप्रायल पर मेरा मन शिष्मास प्रांत अपये और दूसरे मधियों के अपम्पम सरस महायो। बिसीमाविमने की इचपुलमी महोये ॥३॥ सर्वसामी विस से मन ममेदार पुन पिन् बोग पर और पुरादि में कर्म मत। यो मई मामपुछ बीच और प्रगामीवर बनेपा हमेशा मम धर्म करने की इपाबुछ रोबर मपर्म को सांग । - गो का भाव भौर दूसरी तिमारा मिग्राममति और यो प्रथमो में मौतर प्रायपुर और प्रमदित है जिसके बिना कोई कप मी में नाम ममता पा मेरा मब एय गुणों की इमामो दुरगुती से पक्का रेस्पोमा मिस से पा पागी बोप इन सब पर मरिप्पा, माप नयमों में अपने दो बार आयमा को परमामा माप मि सब भर मित्र मा मिसम भन न किसी पाचशानेन्द्रिय परि और परमायुधमका रस बोगस पोजिससे गाते। मेरा मन योग सिायमुक्त होम प्रवियदि रोगों से एपदा । परम पित् परमेपर! पार पा से मेरे मन में वरपरेमप्य सा में पता पपेरावेसेजम्मेद, पपणे पामय पर मिल में प्रति मी प्रतिति होता और जिसमें मश सम्मापक प्रशमसापच स्म रिरित होताप मेरा सब भरि प्रमवार म रिमिव मरारा। समिफबार यो मेरा मब रस्सी समान भागों मिसम्या पारपीजे तुल्स मनुष्यों मम दम पर FIRो २० सत्यार्थप्रकम्प एच में प्रतिति विमान और प्रमान्यप समाप मेरा मय सब इन्द्रियों को बरमामय से रोको कर्मपप में परापमा पेमा मा समाधिये ।। अग्ने नये सुपा राये भस्मान् विपानि देव मुनानि विद्वान् । योध्यस्मग्दुराणमेनो भूपिष्ठा से नमज्जति विधेम ।। हे मुकदासा स्मसम्म सो जावयार पराम ! आप हम को मार्ग से सम्पूर्व प्रभावाने मस पाहणे और बो दम में अमि पाषामचम्म मार्ग । पसे प्रपन कौक्ति। इसीलिये हम बोल पातापूर्वक पापी बक्यौ तिर है कि भार हमको पमित। मा नौ महान्तमृत मा नौऽमर्मक मा नउन्तिमच मा नउचिवम् । मा नौ वधीः पिवर मोत मावर मा नः प्रियास्तन्धो भद्र रीरिपः ।। रच! (ों को पाप पुणसम्म सोसाये परे परमेवर) पाप बमर बमेने म धर्म माता पिता और मिव बन्दुमा परी प्रमोबिचे मेरित मनिये पंसे मान समस्थानिय . असतो मा सगमप तमसो मा ज्योतिर्गमय मृत्योर्माम्मच गमाव । तपमा साम्रा परमााम ! भाप हम प्रसए मार्ग पर सम्मा में म किये । परिणामकार को माबिम को सास दिने भौर को मोष प्रामपस प्रमुख को कीजिये । भन् निसरदोष बस पामेधा और अपने मी कमान परमेश पान गती परिपि धिमुख बाप से अनुपबिगा। जो ममुमजिस पक्ष की प्रार्थयाम बग्स मय बिमान प्रय पीने पतसं सौचम इदि माजिव परमेया मरने पाव विमा भपणे सहजर रख दिमामे भाव पपणे पुण्यपात समावी योग्य पेसो प्रारंभी गमवीचारिय और पामा उसमे स्वीपर पखाकिसे- परमेपरापमा गर्मीमा मृम मेंमा मोडी लिपी मेरे पापा हो मा इसारिमारि मोमोसोमियो पा परमबर दोनो समाय मरोमोमेकिसिम्रोम भधिक रसी प्रया सम्म साताम सकि जिसम प्रेम हो रहे मी म्पूम भाग मा सरि। ऐमो मूर्नाकी नमन एसी मीशा अग्न-परमेशा ! पर हमको भी माम पियारे मेर सप्तमसमुहास ४ ममय में मार बाइसे बसपा दौरिये और सती की मी बारिप । इस पण गो पामेपर के भोले भामसी होमपेठ गरेमा पॉडि मो परमेवाको पुम्भ मानी मानी रस मो को तोप पर मुस कमी पाही पापया ।। से- मुधोवेरमीखि निमाविपच्छसर सा || पतु प्र परमेश्वर वा कि मनुष्य सौल पर्व भात् बत गोरे तर कम परमा जाने प्रेइमार पसी भी मारेको महि पांच में तिने मापी प्रमय प्रयापी सर अपने कर्म और पन करते रहते हैं। सपिरिमारिसराम मिली प्रादि सा मते पोर इस प्रादि सराये पर रह स पाप्पात मनुष्यों को मी प्राय करमा बोम्प है। से पास हुए पुरुप मसाल दसरा मी नवा मे धर्म मे पुरवी पुल मसाल पर मोमता! सप्रम मने वाले पुरमका भूतपते है और सम्म प्रापसी महीं, ए मेरमा कामे पोर पडे को रिपसात? म वहीं, इसी प्रकार परमेवर मी सब पर कमरे की माया में सहायक होता रानिमाकन म । जो मर गुरु मौन देसा पारसको गुरु प्रसव रसने पर प्रस मी नही होता पोरका पर मनग्स सीन परिभ्य से गुरु मियो पा. भरतीसरी पासम्मा- समाभिनि—तमनस्प घठसो निशिवस्पारमनि परमुख मपत् । न एफ्पत यणयितुं गिरा तदा स्पयस्तरम् करएन गृह्यतः पर पबिपी। जिस पुष्प समाभियोग से प्रतिपादि मर माम भारमल दान परममा में सिसिये पगारे रसका जो परमम्म पोम पमुखहवामपामा मतमा सकि सपघाममभागमा भपन घमामय म परमता. सामना पक्ष समीपसराय माम मे परमारमा. समापम्म रोम रसम भरपापी सन्तवामी स मे प्रयापन दिये समिम प्रमोवा. मामाचा पर्याव- सपासासत्तास्वयम्घयापरिपा पम्म पाग प म । एपीस पागणाप है। बोरममा सबभयो रमपितामहरिमोम मममी भएप निम्मो मानमरप्पयामि हा समापन निस्विामी दो अभिमाव भीमा पसमियमम॥ गोगसम्बारपायाफपिधानानि निपमा माम् । रोष भीतर सानिमा ति पन Trol मोमबार मन तर - सत्यार्यप्रफा भबमोर सबा पुस्मा किया सम्म मुखी प्रसास और धर्म की समय में अपम मदी, राम शामों को पर पानी कम सामे और 'मोर" इस एक परमात्म्यमाम प्रपर्म विचार र मिटि बप किया अपम भरमा मे परमेम की भावामुश्य समर्पित गरे। हब पाच प्रकारे पिषमी में मिधा पासमानोय पाता इसके प्रबोफ्यावधिमान्मभूमि में देख मे। वर उपासमा नया व एकमन्स भर पेय में माम मामम बम मावापामा वाम विलोम इन्धिी का रोक मनको माथिप बम या शिव्य मन पोर मन में किसी स्थान पर मिल अपने पामा और परमामा मसिना परमामा में मान होखावेसेपमी हो।। पर इस मापनों प्राणी रसत्र माध्मा भौम मताप्राब पवित्र होम सम से वंसी। विवि मा विहार मम मुखिका पांच बाबा माठ प्रा में कमी मामी इस प्राम म्पम मतप समा तिकी माटाबासा॥ पोवार गुपौरे साव पामेवर का सामग्रमी सगुण मौरीप रूप रस पाल स्पोरि गुपयों से प्रमाण भविषम मामा मात्र प्पाप परमेभा में विदो बामा मियोप्रमणमाटो। इसमास यात भातुर पुम सबमिपात समेत बिराच मागता पपे परमेश्वर अमाप मास होने पर वो दुका परमेबा गुप में समान पास गोपध्मा के गुप में सम्मब पति होगम् । इसलिये पामेवा सुति प्रार्थना और समयमा प्रम कमी चाहिये । इसमे इसमय पदोन पर भामा पाइयोग्य [कि समावस होने पर भी म परागा और सबसे परमास । वाम बोस और बो समेहर की स्तुति प्रया धीर सपासमा यही मता और मामून मी वा पोजिस परमारमा समान सब पवार्य जीबी को मुखतिरेल्वेसम गुण मग मामा भर ही मामास्वा और मूम्॥ म०-- पामेभोर मेनारि इद्रिा महीभिभिवास मसी। 30-प्रपाणिपादो अपना प्रहीता पश्पत्पवधु' मरणोत्यका। स पसि विश्य म प तस्मस्ति पत्ता समानुरप्रय पुदय पुराणम् । भेवामा पनि राम पामयाबी पर अपनी किताप से सरकारमा मा पासो पानुसारका मे सपरिक पेगम, एनगोषक मरी परम्स पता थोत्रमही गवापि सा मुक्का • गरमायभूमि रससमा विषय में सभी सप्तमसमुमास - । अन्तमपमही परम्नु सब जपतको गमन और ग्एको भवधिसरिव जानने पय मानी। रसो को समान सब से मेट सब में पूर्ण होने से पुल मत है। पाइन्द्रियों और पातामय होनेयो] अम अपये सामप्प मे मनो॥ प्र०-सभापत से मनुम्प मिक्षिा और मिर्गुपपते । 10-- तस्य कार्य करणं ष वियते न तस्सममाम्पधिकमश्पते । फ्पस्प यतिर्षियिष भूयत सामापिकी पानपतक्रिया छ । खातातर ग्पविराम ८॥ परमामा से मई पर्ष मोर रसको प्रप पात मानतम दूसरा स्पेचित वही । म फोग्स तुम और पपिक । सचम लिया मियम प्रबन्ध शाम प्रान्त बस पोर मनन्त पीपस्माविकात् पार रसमें मुगी पता है। को परमेपर विभिन दोता तो सात की सपाच मिति सायन र सकता। इससिपमु समाविमानेस रस मिमौ ॥ म-सबरशिपामादोगाव मतया विम्यहोतीगी पप्रमत २०-बिखने देव मर में भिमा या प्रति समम सने ही देश प्रख में सिमा रम पिकपूर, पोधिपति है। प्र०—परमेन अपना मत समताही। २०-पामामा परभनी पोंकि सब रमप्रेमवे किजिससे म्योपयों जामा पाप प्रोत् जो पप बिस पर हो रसमे उसी प्रकार समये अाम भन । जब परमेपर प्रयास है तो अपने प्रेममन्ती समयमन ग्रास विमान प्रर्वाद पन्तको पाठ और सान्तम ममम्त यमना मम माग | पर शायमिति नियम सा गुण कर्म सभा होम्स पदार्पोमहीपषम मारबाहीमा मौर पियाम मावा इसमे गाय समान । इसपिके- क्यकर्मविपाकरापेरपरामपः पुल्पषिरोप पद बोगम समा सू ।। जो बरिष्यदिश भाव मापन पर प्रतिबन मिरप्रामा माँ यसमा तिमिब बारी बिष भामा. प्र०-मरासिने। २। ममम प्रमाणामावापतस्सिरि।२ मा र सम्बधामायापानुमानम् ॥ २॥ या प २।९ सप मेस प्रताप सिनि महो दोदा पारिवाणी परि म प्रमोनोवो भनुमारि माप भी पता और पनि सम्मान हो अनुमान भी नही रो प्रहा। पुमा प्रसपानुपाय: महोम राममाय मादि मी हीरपणे । इस भाप भारि मदासी.. .
सस्पार्धप्रकरण उ०पारी सिदि में प्रसव प्रमाणपती मोर मईम बपद म उपादाम प्राव भोर पुल से शिम बर्बाद होने से परमामा पाम पुम और शरीर में शपमप्रमे से मौरी पाम पुस विकि इसी समय में मारे- प्रधामणचियोगाम्चेस्सापति सप्तामायवेत्सर्वभ्यर्पम् ॥ २॥ भुतिरपि मधामकार्यस्वस्प ॥३॥ सा सूप । सू FIT परि पुस्म को प्रभावधि मपाप हो तो पुरुष में महापचिहो बाप भर्वाप से मवि सम से मिपम भस्म में Ragपरमेश्वर मी त्यूष इसखिये परमेपर मपत् परमदान भाव माही किन्तु विमिच प्रावो सब से अमद की पति तो छ पामेचर समप्रेमपुष । पैसा संसार में मी सर्व पोप होपा चाहिने भो नाही ।मसिमे परमेपर अपत् परमादान माय मी किन मिमिच भाव ॥१॥ मोदि उपपिपर भी प्रथम दो को अमात् प रमपम प्राय मवीरे॥से-- अजमेको लोहिवरामकणांबदी प्रम्म सम्मान्य सम्पा पताल परिसर ( जो मम्मररिव सल, रस मोगुबार प्रति सम्माभर मे गत प्रसम्परो पाती मति परिषामिमी होने स भन्दा यो सम्पी है और पुस भपरिवामी होने सपा मम्वर दोन मो सभी मही हो पाप मिलिगामनियमो कोई पिपापर्व को जापाबरीमामामोहोचावरणदीपिसापर्म मही। तथा मौमामा प्रधर्म धर्मों से । पिक चोर भी 'ममा एस पीचरपती महोस प्रमापति धर्म और पतति सस माध्यम जो समाप पर असर पर्मपुछ मर गोरों से भामा समीमांसा करारा|| प्र०-aaर प्रतापही। 10- क मा एकपात् (101५) स पथ्यगापा प्रमकापम" (. मारियो म निवार परमानी सेना 4.--परा पर धमस्प म्मानित भारत। मगुग्थानमधमस्परम्मान गसम्पाम् ।। मी . पीsan tatun sakat पापा गरिमामयी श्रीमान मन aur माधाममा पा-मम्म. admirmand nागप .11 10 सप्तमसमुमास सतां विभूतय" फोपकालिपे मनोमय, मन पब होता है। स्थापि इससे मस नहीं हो सकते। म०-यो ऐसा तो संसार में चौपीस भर प्रताप म इमको प्रचारको मा।। उ०-- रेप मामले सम्मापी बीपीपमये पर अपने प्राप प्रणित सोरेगेममम मसले ऐसौरमप्रामाधिक मते और मानव है। प्र०-जोममतार न देतोमरामादि पास से हो सके। उ०-प्रपम बो मम्माम प्रक्षत पनुको मात्र हो।बोम बन्चर पर बााव किये दिया बगर की उत्पति मिति प्रापमा परे पामने *म और रामपारि एक कोटी मात्र मी पही। पर सर्वपापा दो पेस गधारिमारों में भी परिपूर्ण हो हो बचाई उसी अमर मर्मतका सामना इस प्रयास गुण कम समाच पुल परमाय को एकीच मार लिये बम्ममायगुरुपये प्रये मे भूपन से सम्म ोिष रपमा मिष पठी! और बोस मधोमबार बसम्म पता शो पीसी बोधियो मकान पर भानु मते मिले मम भयेप सामना मायापन्तिी भर्प त्रादि बात को पाये पार और प्रवन भने म मा सेस राम्बादि पर भी योजनावि पी मरममा ने । यो मई म सी में परमेवर को मनिया मेतो म भूतो न भविम्पति सम्स ईमो बहरोमा । और बुद्धि से मी बासम्म सिर भी रोता से कोई भमन्त माय कोमल फर्म में भाषा वा सूर्म में पा विमा सामसमी पचवही सम्ता कि या मम्म प्रेम सबमें की। इस मप बाहर या न मीवर मा सेहो मन्द मनापक परमामा के होने मे रसम मान्न बापामा बिरही ममता बाधक भाषा हो हो समीयाम से । क्या परमेपर गर्म में पापक ही बाबो भी से भया ! और मारपी पालो मीतर मिकमा ! ऐसा करके पितव मेममा मोर मम्ममा निदानी *मिपावरम चौर मान सम्म ! इसचिप परमेवर मसानभाषा सम्म मरम्मी मिर बही समय इसगित "ईमा" भादि पीएम मममर भी पेसा समपनालाकि राप रेप पुप मा मा क, पुम्ब मुख सम्म माय पारि गुरखुराने से ममुपये॥ म. ममपये भोपाल मा प्रतापपी! उसको पाप माने तो रसम पाल पर सब पर ममुच मापापी हो बा । मोदिनमा को मन मसिमे पाप मोमा मोर सरमाचे पैसे राम पराप मा मरेतो. रपा परिक। पाप में स्पोकि पग अपना पपप सम्म र ऐया मोर उममे मो मोमा हो गाय किमय में हम हाच जोरो पारि । सत्यार्यप्रकार पेपर अपने अपरापाचंगे और मो अपराध पी मते मी पण प्रये सेमम पापमये में प्राचो बामे इसभिषे पर मामा पपावर देशाममा प्रयापहीं। प्र वस्त्राप्रपावा। उ० अपपेर्सपो में स्तन और वर मेला में माता है। सत्र कर्ता" या पाविपाप मानव मनोबो स्वाद सापानीपो का ॥ प्र०-- किसकोपते । उ०—जिसके प्राचीन शरीर मह श्रिप और सम्सारबादि । जो स्पतामहो तो उसको पाप पुखमा कमी नाही हो सकता कि को सुबम्मी और सेवा सेबामाको भाबम मेवा मे अपेक पुलों को मारने अपरापी नहीं होने मे परमेम में प्रेरणा और व्यापीमा प्रम सिरह तो बोषको पापमपुरखा । उस स- पापो मेक परमेवर हो । मस्कसर्ग पोव एव पुषी प्राप्ति मी परमेश्वर को हो । से किसी ममुम ने समिप से पिी को मार मया तो पही मनाने पखापमा सादा और दो पर पानी से ही पराधीनजीर पाप पुससमागी नहीं हो सकता । इसच्चेि अपने सामग्री- मुश्म कर्म करमबीच पातु मम पापमोचन में पाम फराचीन दोषम पापम मोपला है। इसरिये कर्म नये में बीच स्वतमा और पाप हुममम मोपवे में पास होता। प्र०-बो परमेपर बीपको क्या और पाममा काबीच कम भी कर सकता इसारो परमेवर रवाही से बाब ममता उ-बार सपा मापदुमा पनि सा ईश्वर और पत्र सपनाम पाय विमिचौर बीच पर वधानिगापोल पामेम बमाने पोस्ट सब बाब प्राचीन है।बोई मब म बस से पाप पुनी-मोधोबर नहीं। से किसी काम पहा बोहा विकावा म्म बोहे किसी भारी ने रिय र भब बोलबम कमाई,म्स किया सिपाही वेतपय पी भिमसे किसी मे मार मारदासेपोमेपथमो समयेने सन पयरे पाये और तम्मर मे पामरान पमनी रेस मत मिस तरण से मारा पी एस पाहै। इसी प्रथम सरोदरपतिको पण परमेवर रममा प्रमोपदी होता कि बालो मुपाने या हो।बो परमेम प्रयो मीच पाप यही मता बन पामेबर पति और पर्मिक होये से किसी बीचको पापमये में वापसी प्रसासरिये बोल अपये ममम मनसे नाव पपरसमा कोमलसेको समेवर मी जपये कामों में तना॥ ।
d सामसमुशास' प्र०-पार मौन साकासम्म गुप पोर सम्या: 30-रोनों शवस्वस है स्वमाष दोमामा पवित्र परिवाणी चौर अमिम्म मारि। परम परमेसर रेवीकी मत्पति सिति प्रम्प सरदो विका में समा गयो पाप पुस्पा पर रेय दि धर्मपुर में है। भोर पान के पन्चायोपचि रनम पावन शिवरविष्यदि म परे कर्म । रंगविस घाम पावाद, प्रबन्ध र मारि गुप मोर जोर- इम्पादेपमपामगदुखणानाम्पामनो मिमिति : म्यापसूम प्रासापाननिमपाम्मपमनागतीन्द्रियाम्वरयिकाए सुपा सरकारपी प्रयसाधारमनो मितानि । किम (इया) पापों की पति ममियाण (प) जाति की परिया म (प्रपा) पुरु (मुख) भावम (ru)पि भम्सम्ता () विस पहिलापन पेनुसार पानुपापिक में (अप)प्रय मे पर भीतर प्रेमा (भपाय ) पप से बाहर निममा (निमेप) चोखामे मौषमा (रम्मप) सप्रे पोजना ( मब ) निसप सप और मरमर मन (पति) रपया (इन्द्रिप) सप इन्द्रियोग ग्राम (अन्तरविर) मिपुमा यापुठो जीपमा गुण परममा समित १ गती पामा की वाहिनी पहिस्सूल पदी मामा में होता मी दये गुप प्रसिह गौर जायरी पार मारे गुरु परीर महीये। जिस होरे जोधऔर होने सरकार पाता। सीप प्रेम कुमारियोग में मनोमा पर होने से होगा और परम्ममाम शिव पुष व प्र-पामेपा निमपरी मत मरिम्प यमाप पैसा विश्पमपा जीव भामग्ण। इस सब स्मन् मही। चौर जब रसरमा पो रेसम्म कमाईधारे मारे मन "ति विस्मरणही रमता उ.-मसमर मग मनमानसमाचार बसे पसभर मौरमा पेप मणिमात्र प्रयोग समारोपाहता नाराय। इमिरे राम सपा एमए परिमार है। भून मारमा परे सानोनिमावीमा हो । सा समे मार मासा ही मर म्यारा एयर है। मोन भुन भन्या, माया मनसे में समय मोर गौरसिया म wituमपी माप होने ५ मेगा सस्याप्रकार 1 समी वाम प्रमादिदोषोंझाव म्स समस्या कशाब समोर एस्पान मिया कमी हो पाइसरिये इसमै दोष ही माता । प्र०-सीप परीर में मिड रिसीम परिया। उस–परिधिर बो दिमु रोगको बाम्त, स्म सुपसि मरव मन्म पोग, दिलीप मा भामाम्मी वहीं हो सका। इसलिये गोपालम प्रसव पर प्रात् सम्म मौर परमेया मवार सुमासूमवर, बार पर्व पर सम्पापक सम्म है। इसलिये बीब पोर पामेवर भम्रण ब्यापक सम्बनी। प्र०—सिम मा में पास होती है सम्मा में पूसरी बलमा पए सकती । इससिपे बीष और म म संबोग सम्बाद रो सकाराण मापक नहीं। २०-पाविषम समान प्रामारावे पाणे मम समसमावि मगी। से बोहा स्पू अनि सम्म होता, इस परब से पोरे में विखए भनि व्यापक होम एक ही रूप में योगी पर से बाब परमेवर से स्पर और परमेबार बीच से एमबे से परमेवर भाभीर बाबमाण है। वैसे पा म्ापमापक सम्मान बाबा मोसे ही सेन्च से पापाप सामी पम रामा प्रसार पिता पुत्र प्रापि मी सपन। म को पू१- प्रणा ग्राम ॥१॥ई प्रभासि २० तत्वमसि ॥२॥ प्रयमारमा॥४॥ दोन महायाम प्रकारे। 7. पेमेरापी पनि मासीकम बाम महापाली समय में ही विच । पर्प-(माय) में (प्रस) पर्वात मम (अस्मि) । या ततस्मोपाधि है, असे 'मया कोम्बि" ममम पुष्पावे। महब बर बने पुसलेम पाम भी इसरिये मत मपुष्प पुण्मती कर पा भी मात्रा को किस पर पमा पुरा बीचको अपम प्र में या विशेष समाज पब पराप्रपा परन्तु सा पायर्म गुरु विराजमा मानही और गौचने समसाम और मुछि म मामा मसम्मान में व है।विरे बीच म प्रमोसम तथा परितोपाधि प्रापमा अपाणी वापसे गौष और सम एक पी। श्रमे किसी मेम किम मोर मा एक मात्र मलिोपीबो बार समाधिस परमेवा म मेमर रोम मिमय वापिस पयोधिपौर ममा एक पोस् भसिोपी एक म्। यो बीर परमेपर गुष कर्म समायो मनुष्य अपने गुरु बर्म, स्वभाव मनपी सामर्म से प्रमाण पवार ।
सप्तमसमुहास प्र०-अपातो मम प्र पैसा मोगे? (वत ) म (4) बार (स) रेबी(ब)() परम (पसि) । 10-1म 'सत्' यम व ते हो। मम। पर प्रति मामेभाले सोम सोम्पेदमप्र मासीदेकमेवादितीय प्रम। इस पूर्वगामवे इस कामोन्म उपविषमपब मी नहीं किया। बोपली होती वो समयमा पास ही नहीं। ऐसा मानवी प्रवेशिकायोल में हो- सरेव सोम्पेदमप्र प्रासीदेकमेवामितीपम् को प्र। पेय पापा मम यहीं। प्र-ठो भाप सचम सेते! २०-सप एपोऽपिमा । ऐतवारम्पमिदय सर्व तत्सस्प समारमा वस्वमसि एक्तयो इतिजादो प्र में." पपरमात्मा म पोम्पीयो मममन्त पुम और इस सबम पौर मीन भाममा है। हो समस्लम और अपना मा पाप । मोठरतो मिपुरा तदात्मवस्तवन्तर्यामी स्वमसि । प पाममा भन्नामी से बुलापही उपनिषदों से परिम पभारमनि विठभारमनोऽन्तरो पमारमान वेद पस्मारमा शरीरम् । मात्मनोऽन्तरो पमपति स व प्रास्म्मम्तर्याम्पमत। पायक प्रबनी। महर्षि पास अपनी पी मोती सेमते को मोपिको पामेवर मामा मत बीच में स्थित चौर जीपमा से यि सिमाबोधमा पहीचाहा कि परमामा मम में प्यापक मिस पामर गोममा पार भोट असे गौर में और सही में पामेर व्यापक बीमामा से मित्र राम और पाप पुणीम मापी होम बाबा ऐन नियम में वापी अषिमापी समय मा अन्तलामी प्राय भर्वाद दे मातर व्यापक रसभेत यम । पपई इमावि पाश्रमम्बा मम पन्बा मपमा'मा पक्ष" पांत प्रमाविषय में बम पोपी से पामेमा मापन किरो मेरे माकपा मम सन्चकी। इसमय यो पासमा दाम्सी गौष मास में एकता मताप्रेमही सा प्र.-प्रमेन प्रारममा मोबनानुमपिश्प मामलाप प्याफरयाणि । वरसपमा तदेवानमापिगत् । गिर माम मु..
सस्थानकात परमेर भबकि में जगत् पौर शरीर को रम पम में मौर बीपम्प सरीर में प्रविए हवामा माम और मकी प्याक पामेबारे रस अपत और सरीर को माम रस में ही प्रतिमा इमापि अधिपात्र पर्व पूसा सेम सगे। २०-बो तुम पर पवार्म और प्रत्यार्थ पाते तो ऐसा प्रवर्प कमीप मते क्योंकि पहा पेम समय एस मरेश भोर मा अमुमत बात पर मस पाल। पामेवा और में प्रदिप बी के साथ अनुपवित्र समाव होमगारा सब नाम म मरि विमो समय। और गरीर में औचको प्रवेश मा पाप और पान अनुमपि दोबो एम पनुपामतेजोमा विपरीत अपेमी पाते। म--"सोऽयं देवबचो प उप्पका काश्यां नमः स भवानी माट्समये मपुपयां एपत" माद बो देवा म सप्पमत में काठी में पेशा वा रसीको यो पमप में मपुरा में देता है। यहां भी देख उपभोको शरीरमा में सोमच बस्ति होता है इस मापापा से चरम परोपदेश मा मामा उपाधि और जीवन पारेरा कास परिया अम्पश्वा अपाधि पोषम बस से एक होम त दोनों में अति होव है। इस मामाया प्रोत्स प्राय मन और बोल देना पा सर्वस्यादि प्रभार सौर प्रापयरिया बीचमबोरसम्मान सम्म पार से मौत सिद्ध होता है। क्या कामकोगे। उ०-प्रथम एमबीपौर पर मिल मायने रोग प्रति। मा-म दोनों को पधियबस्ति रोवे से अमित मापते ॥ सपाधि प्रेमिम मान्ने होपसमिम ! प्रमारे मन में- मीणी व पिरावरितिमेवस्तु तपोयो । प्रविधा तषितोर्योम' परस्माकमन्यवप ।१ कार्योपाधिरय गीप' कारणोपाधिरीश्वर। कार्यकारपवं हित्वा पूयोयोपशिप्पते ॥२॥ पे"चोपवारिक" और खरीरिकमान में मरममन्त्री ब परमात एक बीष दसरा था य चौबपी श्रीर पर मिष मेड पामा प्ररिया प्रवान चौरमप्रविध भौरमा पोप हो भणी माय । पात एकमा प्रमादिभात और पाच पांच प्रारि सास फैसा कि प्रापमाहोरेसनक प्रशामरावा या के पाच । और हम पांच की मारि पिरित वही होती इसरि भागि और सब मेरे पापा हो इसपिये पन्त अर्यात मात समा?"
। सप्तमसमुत्रास उ०-पमारे रोगों मोड़ पर पीकि पिया मोय बिना बाप और मावा बोपोनिमा म तुमारे मन में दिनहीं हो सका। इससे "तपित्तोर्योप"बोपण पाये तुम गवाहमही रहा पाकिया भक्ष्यि माषा बीपर में चरितार्थ होपवा और समय माय भी पिणा पोप पिया महीमा भिईभर में पापिया मोर सम से पुष गिममा । इसधिपे दो ही परामर्षात् प्राय और पविष्य हमारे मत में सिरो मते नासा भापम प्रथम पर्योपाधिमायोपापि से बीब पौरापिरममा सब हो सकता है कि भगत निम र पुर, मुष्पमा पन्धपक प्रण में प्रशाप सिम्बो उसके एक रेशम स्थल और वरिपक प्रचार प्रावि सत्र मागोगे तो सचम पर ही हो सच्चा । प्रम बब पडऐश में भाव मानोगे तो ग परिचित होने से इस पर पाचवा ऐन । धारापमा पारमा महादी पौर म्सि। पेय को बोपता धावणा रस यसमा हावी होता रहे तो किमी रेण सो प्रबादि पर बाबुरामकोगे । और यो माझाम सीमा में सामान को सम्मेण बाबा और मौवर मारो हो जायगे। मोमो किया होगायो समयमा पनि तो बस मा । kो प्रसो मपी बही। तय शाम अमाव सविपरीतकार मी गुण होने से मिले साप विस परोया । पपि पेपारो पमान सम्मो से भनित कमी ममी हो सकता । मौर से पर एक देय में कोनोने से सच से ही एक देश में प्रशन पुस दुसरण में उपसम्मि होने से सब समभारिपनुमय से ही पर्योपाधि पति प्रान्तान भरपाधि योग से मल को बीच मानोगे तो हम पावे 1किमा पापकीय परिभिरबोपोन्मापा भौर स्पाधि परिनिय भर्यात पकरेगी और प्रो मायाब चमितापमा उ०-वावा. प्र०-प्रतन्मययप मामो पता निवारे मिरवा। २०-निराखौ॥ म.- समय जिस देश मोक्ता सम्म मममारित मौन विस रेय को पास दो रस रामपर मम महानी होतारोमा । को पस में शागी चौर भनमा प्रयोग रहेगा। इससे मोष और ममी पपादोया मोर से प्रदेश प्रमाण मामी म प्रस्तामाकोशी पुषी ईन्तुपा पम्त समय पी ए सम्वा । सिमप देख मुनापासरा रेश मोर दूसरा म रिस सम्म प्रमाण मागासरा रेग भौर पर।बोमो समय की दो मचाय पीनामो कि भन्नम्मर भा १ इनसे भी मिल होगम होगा तो पागोसम सपनही होममाओकोकिय पर मार मौरबमा अम्बामपणे समोठा पितामएम सस्यामकार पामेम मा कि में बम धौर शरीर को समय में भारत पौर गावस्मोपोर में महिए होतामा प्रम और ममकीलाई परमेश्वर में ग्स बपत् और गौर भेवान रस में पी प्रतिमा इम्पति अविनों मप्र पूसरा सेम सकोगे? | तुम पर पपर्य और वास्प बायते तो ऐसा प्रवासीय मते लोक पहा पेसा छम एक पेय पोर मरा बकेट प्रर्वाद पा प्रमेण मावा । परमेना वर में पवित्र हुए बीपी के साथ माता समान होणारा सब माम म पारिको रिखको समता है। और शरीर में बीच में प्रतिमा पाप बाप माता मनधि हो रमाबो तुम मनु पमपम बापने वो पैसा पति मोरो। म- 'सोम्म देपरचो प उप्क्षा पास्पो ए सवामी मापसमये मगर्या रश्यते" भो बो देवरच मवे शप्पब में मयी रसी ग्रेप ममप में मथुरा में देता है। पााँ अमीर रणबोष परीस्म में अपरेमा विताइस मायामापा से बामपोष, स मा उपाधि और बाबा परख कर विपश्वा पापियो समाज में से एक होय त बोनों मशित हो । भापमामाचा मोत्कर पर मना और सबोष देना या सशरि सभा भिम और मत्सवारि सम्मा बीच सपोरमकमात्र मापार मे येव सिरोताही वापपये। उ०-मबम तुम जीव पौरपरको मिस मोहोचविल। म-म दोनों पापियनस्पित होने से अधिक माते॥ उस पविलिस मामले पनि म-मारे मत में- जीणोप विधिनिभेदस्तु पोपो'। अविपा पितोर्पोम' परस्माकमम्प्रदर' ।। कार्योपाधिरजीब कारणोपाधिरीम्पर। कार्पकारमय हित्वा पूर्वयोधोम्वशिप्पते ॥ २॥ पेपवारिक" और खममाप्य* मरिमामयन्ती . परतों पर एक बार इसपर तीपण ए चौब गौर और वर ोिष मेर पाँचदा भरिया अक्षाव और क्म प्रतिप्य और तब का पोम इन मी मानते। पान्तु भवारिपात और अन्य पांच अपरि मातमा लिपपमा दोबत प्रवास राखी तक दे पाच । और हम पाच पारिरिरित ही होती इसपि भवति और सरोदे पात् पारो बने। इसलिये मत प्रमोद भार मम्॥
सप्तमसमुझस म०- । मेरे मुरसे पाये और पाचौ बापि मनुष्य की प्राति पप पौर पपी मावि ममेड पप भारि मित्र होने से एण्यनगीवी से परमेपर भयावर भामम पर किया, विन्ति और म्मापता जीव से और बीच के अपमाप मापन मतपम्प सब प्रालि और परिचित पनि एबम से मिाहीये मे बाप और परमेधा एकही पोलिस सम्प मी (पामेपर प्रति सूम और बीष रस्से मरने से) मिली। -प्रयोदमम्वर कुस्ते । प्रयतस्प मपं मवति । द्वितीया भयं मबतिपदा म म ॥ । और बौर में बोला मी भेद रख सभे मब प्राप्त होवोकि दूसोही से मन होता है। -समर्प पाबही किबोपीय परमेपर भविपेच पत्रिी एक ऐसार में परिणिय परमामा प्रेमाने सपा और गुवकर्म समापसे विमोचे पास किसी दूपर म्मुष्प से मेरसम्मे भव प्राप्त रोठा, क्योकि द्वितीय पुरि प्रर्वाद मासे मुष सेकस सम्बाहीमा लिपी मगुण सेकिस्तुप में पहीं समझता मेरा मन्दीकर सम्ममा किसी भी पवि प्रता और सदेचा बाप तो उसको उससे अप होता है। पौर समाप्रमसिरोप होतो एकमातेसा संसार में म १ किवात पाच और नामिा को प्रोत् भविम। विरोष से पुष और निरोष से समाप्त होगा। म०- भोर पाल की सरा एकता प्रफेकता वीरमी दोषी मिकमी होते भी। २०-समी इससे पूर्व र ऐरिया परन्तु पाप मापसमाव से एकस्य होती । समय से पूर्व मनाम होने से और कमी प्रम पने से एक और भाषा बिमु सम्म बस अनन्त रिपोर पूर्वपरिचित पपा भाविकर्म से मेए होगा। मां जैसे एपिादि प्रम पा से मिम्मी गीते वकिपर मोद पाया सूम कभी यही सपा परम्पतिक भाव लम्स से मिड होने से गरम मसापक होने से बीब और पिणे प्राविमा पसे मजप ही रहते भर समसे एक मी ही सेवा पर मिरे में मही मो मोर बोहा मावि पाय पानी में । परम पम पम उम मी मामय मापौर परमारोपय प्रात मक प्रामिण में प्रयोग ब मो मामय में मानवीय प्रथम प्रामा से मित्र महापको और समरे मित्र होने पम्मी एक पेमरिये इसी मम बीप तथा पब मारो परार्थ पामेभर में पाप परमात्मा सेवा में मिड और सममि होये से कम नहीं रोपाबममातियों में पीपये पुरोपमा मलबार समापेमकाय पिणमास मे भाव वादो मी जगदीको पम्मर मा कायम तो पाश प्रापपसिमे पागोपभि मोर माथि पोग से प्रण बाल और ईमा नहीं क्या पक । भिगम समका और प्रयमित प्रमादि भमुल्पा और अपवलसममाम बात ममोहिबीब विदाम्पसमग्रमी वो बाप होने से पा हो बाबमा वो मोपचमुच और मोमेगा । इसपि मागोवा बीचमा कमी भापौर हो । मो-जो 'सदेव सोम्पेलमप्र भासीवेकमेषादिवीयम्' (अन्योन्य ) प्रतिविमा होमी म भव में तो पासे को साठीच विजातीय और स्मात प्रल मेनहोने से पक प्रमोदिता है। अप बीप एपीवो सिरिमेह वी! १०-पस प्रम में पाया मते हो।बिपिन विभब भोलि समो प्रोपावरविरोपण भवतीति' दिषय मेरमाकोचोदो इसम्म और मी म्ममोकि प्रवप्रकम्पकमपि पिरोपर मनवीधित विषय प्राक और तक भी होगा। प्रमको कि पाव विरोपण है। इसमें पापकर्म किमानपद बाद बो भने गाय और वोस मल्ट्रपणा और विशेष परम धर्म पाकिम एक होने पति मासे 'अभिवगरेदिवीपो भनारपो देवदर। मां सेनापामनिवीय गुरवीरो विक्रमसिंह सिसी किसी से मानि इस बार में परिवार पासवान और इस सेवा में श्रीगच भरपार मिसिरसा सिवानवाचले पास इस बण में इस्य पान पोर इस पेवा में मिममिसमान मारपीर पम्पूर्ण तो। म प्रपियो पारिबा पराये पथरि विसरि मौसम विपेप वही हो। भो एमाले सप्त मात्र सात सितम्पून हो। इससे सिर पाकिम सदा एक और गौर तक विस्त व पोको । खसे मिला करो वो सिर भोपय मौसमद्वितीय बितेपद । इससे बीयप मिसौर मर्मम्ममममान और विपेचपीसे समय बे परम्प एल नहीं। इससे सिरि मार ० भिरि विवीपमहरम मन पदो, पोपे और पमम्मे । मसत् चित् भावात और और प्रति मावि पिप से एखामोसीमगारो, 1-रिए गाकर मियो से पता नहीं हो सकी। जैसे विधी मा पसेर और अनि भावि मी और पवने से पता पीती। मैं पर्म भरनाक पात् मिस पर्म ये पाय राख भारिप भारि पुष प्रमिणी भर रख प्राय मारि पौ बारम पारस्पारि पर्म भनिने से पहा हो। मे मधुण और काली पांच । ।
सप्तमसमुहास अब संप से परम पिर रिस्मर मर हिते- यस्मारचौ भपापन् यजुर्पस्मादपापन् । सामानि यस्प लोमा पहिरमो मुवै स्कुम्भ सं श्री फवमः स्त्रिदेव सः ॥ भो में । । .म.॥ मिस परमामा से अपर, पर सामने और प्रभार मथित पावसा व इसम रचर बो सबको सप्पडम पारप कमर भी परमात्मा है। संयम्भूयायातथ्यतोऽर्थान् बघाच्याभूतीम्या समाभ्यः ॥ पटप बोस, समापक एड, मवासन निराकार पामेधरी सपतन श्रीराम महाप्रपाबा बावस् रीतिपूर्वक र RI सपरिपायाम उपरेशम॥ प्र-परमेवा भाप बिरामा मापते हो वा माया ! 7०-मिरात्पर मानवे मा-जब बिरामदोरविधा म परेय मिया मुसलमय स होपम होणकि जोंके ग्वार में पास्वदि स्थान मिम मासमवरप होगधीये। २०-परमेबर सम्मिान और सम्मापको जोड़ों को अपनी पाति से रविवारे परेण करने में भी मुखर में प्रवाही कि मुवकिा सेक्यावर पाय मिड पोलिस पास मारे हिरे मही। क्योंकि मुख जिरेभापार मे बिना ही मम में भयेक पगारीमविया र गोवारपवा वामों मे गुलिप मरेको मुमो का मुख भिम तापरि भागों से। पपरोपियों को पम्तमीम से गोग दिमा।। मिय दूसरी पमरे विचार भये भासपाता है। बस परमेशा विरामा सर्पादोभपनी मति पनि गरेगी साये बोकमा में पतिदेवभिबामण मपम मुख वारयम परोगमुगासचिव घर में बारवी पापा मा-किसनेमामा मादीचममा मिा। -अग्ने पदो पापोपहर सूर्यास्सामवर समें 114 14 मा... अपम सीमा में पामारमा पनि आयु मारिस सपा मगर परिसमा परमसाण मिा। म०-यो प्रभाव पिदधाति पूर्व या पदाच महिपावितसे । भामराम सत्यापप्रकार उ०- मविरकमा रिसोय मी रेसा मोबिगियम सबमिर्गुबा प्रत्तष मविरेक पक्ष और विणकोपबमारहो। प्र-परमेश्वर म्गुण निय! दोषों प्रा. म०--मबा एक पा में दो सगरममा सीप परल में मगुपवा और निर्गुबता दी। २०-- पा समपि गुबी और स्वम शादि पुष मा में मही से सब म इचारि पुष और स्मारिका गुब ही इसलिये 'पद् गुणस्सा बर्तमाम तरसगुसम्" गुणेम्पो पधिर्ण पृथग्भूर्व भिमुसम्म पुगों से परित प गुप और बो पुखी से लिप निर्णय पाता है। अपने स्वाभाविक गुणों से सहित और पूसरे रोपीने गुणों से रहित होने म पम पर मार और बिगुल मी ऐसा पक्षा पाम सिमें भर निर्गुबता र सपना हो ति पर ही में बता और बिना पर रही। मोदी परमेश्वर पपये प्रताप परिषी मे पीव होये में समर स्मादि बापरेपरि पाप पुलों से प्रपा होये विमान है। प्र--संसार में नियम ब और परको मागम है, भाव सब पस्मेपर काम यही मेवा परिचौर बब मारीब मगुष माता। र०पन्या प्रशायी और अभिाषा की। बिनो या पही होती पटसमाव नपा उपांचव। ये पवियुक मण पसासवा दो प्रथिानों पर पमा चाहिये। प्र० पामेवर रापति? उ०-योगी में बहीं। वॉकि हम अपने से मिल सचम पलों में होता पो पामेम को पार्य प्रारम यहीं इससिपे म्ममै रम्प का पम्मय हो । भौर को मोमोरो बस क्षिततेबरम्पक से किसी परमेबोग परी सम्वा इसरिमितीबदी। प्र-4 में मौजही! T-यो पापा ममी मम उम और जिसमे विभोर हो म्स होगी भिमाको पके, जसमे या पदार्थ बग्स उचम और पुल से मच की मिया मीथी। इसधिगमरमाणे सम्मानही मित पर्चात सब प्रम में किया समोर सप ग्रीसममा मात्र पाइप्रति पति मिलोसो पोप पतलाम ।। * इसपिए पर परि कोई पदा म उससे न पिरोष मुबारे प्रवाहो॥
सप्तमसमुत्रास उ०-मी पहीच समो, पोधिदिया मप ममचि मारोप असम से पापी मनुप्प पी देवम मी पिन नही हो और सब रमको ई शिष मिरा अब तो दिन हो और मब पी पिणी पोपियकोई मी बिम् महीं होता। इस प्रकार यो परमामा पारि पार पिनों में विधान पाता और अब म पो सग होम अणि समाते । *से रिपीपकसम्म से पमम्त देण अधिानों पा पानी में रख देखेोपसा संयोमा वाया इसम पापी माप वि।। सतक प्रावि ऐस से शिक्षा नही पायी पासक मिम पूधाम और पूरोप ऐप पारिम मनुष्यों में उप मी लिपी मी और पारेर महम्म प्रापिपुस अमेरिम में वप कमी पचे उपक मीमामा पानी मेनों से मुमत विष्णीष पे पुनः अधिो पाने से चिा हो पपे से ही परमात्मा से परिभादि में विष्य पिाकी माप्ति से चोचर प्रक्ष में पिा हो पापे । स पूषामपि गुरु का नामयम्देवात् । पोप समाविकाचे स् १५॥ अपमान समय में हम बोम प्रयापकों से पा होमिान होते? से पामेवर पीके प्रारम्भ में उप प प्रप्नि पापि पापिलो मगर भाद पापमा पाकिसे बीमाप्ति और प्रसप में शाम रहित होगा। मा पार । महान मस्पेि पावित भागमा पारिये किदिनामित ममितिम निरम्मी नहीं होता। प्र०- खत मात्र में पावित हुए और पनि प्राविधिोग ग्र संभव मात्रको गी बाबते थे शिदोजना से सदा । -परमेश्वर समावा और बरमा बोगी माविकोपबसिर सामने भागोजानामित हो पामेन ससम्म में समाविम हए तप । परमरमा के प्रमौर ममा अर्थ पाये। जब गुताके प्रामा मेगा प्रसपा तब पि मुनिमी के पास और पति मुनियों विम्स व पापे । ग्राम माम मामय भाव प्रामो र रसम्म भावाब प्रपदो सेमण माम मा । चौर- अपपो (मंघरपय ) मबारसम्माद । मिस ।। सिस १ मा परन बिम र चरिकोण और मपम हो रिस पारे रस मात्र सर्प मिमी में प्रकाशित ही मिा और एसरी पाप मी सिमभावपि रम मनमाय पापि माम स्मायाप शिक्षा प्रता ।कोई परिक्ष में मतो सब को भिवानी मागे महाप्रपा म०-दमिप्रकाप्रम! --पर पहपाम और अपर्व मारिवानी मनप्री। •सारा परमो पुलंयासमपा। ।
सस्यायप्रकाश देखो। बरपनि भयो। इस बम सेनापी कार में भी उपदेश मिली। निमम्मारिपियों के प्रमा मैलोमा। 30-अपने मामा में मनि मावि शाप मापित मान्य पिया - अभिवायुरषिभ्यस्तु पर्य प्राय सनातनम् । खुदोर यासियपर्वमुम्पासामसरूपम् । स ।। निस पस्मामा भारि र म्मुषों में रत्पामि व्यविमों माप्तिीमा भरी बमको मायभाये और रस प्रमाधि प्र भरिब और परिव से सम्बर साम मौर अतिकम मि। प्र०-मनी मरमा प्रकास किया मन्चमपी इसमेचा पपाठी होगा 10-2ीचा समारों से अधिक पमियमा इसलिये पवित्र शिव म-किसी सभा में सोमवपक्ष में क्यों किया। 7०-चो किमी रेवमापा में प्रम मा गोर पापाती हो सम्म मोजिविस देव की पपा में मन सपने मुगमा मौरोिगिनीको पिता को पाने समय में होची बसविरे की मैं मम किया को किसी ऐप की भाग भी। और मेरा मध व मामी सका। पसी मममम किया । सेयर की निमावि पी पप रेय और ऐसी सिरे एक्सी भोर पर शिविच प्रभाव से परमेवर विच माना मी एणी होगीशी किचरेशमीकोपा पाने में एप परि अम होने पर पक्षपाती नहीं होता। और सब मायामास्वमी। म.-मबही इसमें प्रमाब। 7०-माम पति समिविद् एवम् सम्म, प्री राहमादि गुरु से बिय पुस्तक मेरो एबम समाते ममुकाम पम पम्प कहीं पर विस में पश्मि पनि ममम्स प्रामों और पणिमालेमगार मे सिरोपमो-। वैशावर मनिर्ममयमा विस पुसक मैं प्रान्तिारित बालमविपाएन होग- पास्मेवारमा मि मी ईबर मापौर गाव नमविपाप मिस में रेप पामेवपेच पुलकोपरेमौर बो दिमाय रिती से मसिमसाम्यब से मिनो ए म मरे। पापा मावि पुल कही। इसी सा माल्यापाइस और भावमय में और जोमसमास ममी ॥ म०-घरको वा होमेमामाप मी दी कि मनुष्य बोपमा मात्र पाने वाम पना पुस्तक भी थपे ।
सप्तमसमुहास २०-मी महीना सकते, पौकि विमा का प्रोमति अहोना मनाम है। सेनाशी मनुम सी देखन मी पास यही हो और यह ग्रहो को शिक्षा मिह पब तो पिन हो पाठे। और अब मी किमी से परे पियाई मी हि वही होता। इस मागो पाममा व भारि पी पपिनों में मारियन पाता और ये पम्प पर तो सब बोग प्रणिती । से किसोरेपासम्म से पमन्त रेय प्रबिधानी पा पशुमाग में रख दो पपा संगीसा ही हो पाया इसम Garl मौष मादित। सतक मार्यावर देश से शिक्षामाही पई बी तक मिम पूषन और प्रोप देण मादिम मपुषणों में समीरिय पारी ही और इसम्म पारिपुस अमेरिस मेंबर तक नहीं गये तब मौ सरवों की पोलो बपो से मूत भात विहीब से पुषा मुविधा पा से मिा हो गये। सेहो पामामा भी की पावि में निय विप्राति से उत्तरोत पार में गिर होते साये ।। स पूर्षेपामपि गुरु कामेनानपग्वेदात् । पास समाधिपाये स् ॥ पे पध्मान समप मम पोय प्रध्यापकों से पर ही गिम् । से परमेधा पर पारम्म में उत्पाएर पनि प्रारि पिया नात् परमेशरा पशि बीच पुति भीर सपा में शाप रहित हो जाते मा पारही होता। उसमा मिसिपि वा निजाम। पारिकिमि मिच मिसिमिरम्मी नही होता। म०-- सहा मध में हित र ति सारिपियोप ग्य संस्त मात्रा को नहीं पाते पे सिमर्थ मासे सपा। 1.-रमेघर में बनाया मोवामा बोगी मानिमा बसिर बापने प्रणापमानामहोपामेमसम्म में समाधि एक परमामा ने भी मानीस जपरे। बम पणे भरमा में बरामदुमा तब पर मुनियोगमय और मषि मुनियों विस प्रम बकापे । रसन बाम प्राण प्रांत प्रयोग गमन माय होने में मामय माम मा । पौर- अपयो (मंचाएप ) मम्मसम्मार । मिस ।। रिप माप एव मिस षिको भोर श्यम पिके पाडे रस मन मी प्रमाणित बी विरा मोर परोपप मी इममिचे प्रमाधि पर मनमा अषि एम स्मायाम बिहा मता राजपरिषों को मम्मो समासको सिमा मनोगत प्र-रमिमग्रम। T- पप्रम मोर म मा परिधान पहनकही। सापटपम संपरा सत्यार्यप्रकार प्रक-मात्रामरायोनामपेयम् । प्रमादि समापनादिमा सूप्रविन वर्ष क्या मोये। उ०-यो सरिता पुस प्रारम्म पापी सम्मति में समान में राम निशा मावा और पाय पुसको प्रारम्म पसभाप में समाप्ति में ही विच और विश्व में- (स्यपि निगमो मवति । इति प्रामपम् । मि मा ।। पम्पोग्राममानि पदनिपपासि मा ।।३।। बा पयिनीय है। इससे मी साकरिव ताकि मामास मौर मामय सम्म है। इसमें दो विरोष रेखमा चोमो मेसो पाई सादिमाप्पमूमि में देख लिये। या भोकमा प्रमापा मिस होने से पपाम.पन म मम मह से पता ऐसा हो पिरमा गया। साकिबो माने तोर पर कमी नहीं ले पो कि प्राय पुसकों में गुव से परि मारि गमारिधिाम सिौर इक्षिाप जिसका को रसम पयत विचमाहा, पहप्राय मी रसम्म । फमा होगा।सी में बिसोमबासरी मिसिर पपवेलियाभपोष हो रस २ सम्म प्रयोग मिा। पिसी विशेष म्ममेवबापाविष म्याम प्रसंग मों में पी। म.-मेरिकी यायो। Toमारापी सच्चईस।। प्र०-याचा मामाती। २०-सत्यम मे साधकाते। मा- संसार में गिर र भवरब भूत विमाको मारते।" 1-निसा रियर करो तो मैक कि शिवमी याच भावापर पारपियों नाम से मधिर और मंजसीख पाया बाम से मसिर । मे चासोको रमेशरम मापते से प्रापही पनि भावों में उस समय मापते पर पानी में माना की कोपर पाम से जिनमें "rala दिपाय पिया और मरवा मसी मही परी। मथि परमेषा परी मुबीर मामाभरिमा गाजर मुमिनी पामेवात पायो इस सिसकी विशेष रेमा पारेरमायमिन A मे।से मध मिस पर सम्वारा पारित थापामामा मे सब मनुधीर मामोतो. पिससे मनुबmmun प्रमगाम सेमरिय शिवम पूर्व प्रेमात पापमपम रिप मुरिमठेप
सधमसमुमास
११७
जिससे
प्र०-
प्र० - किमी प्रधिम!
30-
निक पामेवा निम होने में समभारि पुष भी
मियो निम पापमो गुण कर्म मार निस्स और अभिम द्रम्प
पनि हो
प्र-पार पुस्तक मौ मिन।
30-बी मोंकि पुस्तक तो पो और स्पोमबमारी
रोपकाशितु बो सम्प, भर्प पर सम्मापारमिमी
-वारे उन अपियों मे शाम रिपा होगा पर रस शान से ग्न
पोमा रपमा बिरामे?
ro-भाव क्षेप बिना नहीं होता, मसम्पादि पर और पारिचौर
रामपुराचापि तर कानपूर्वक पारिबमोनिमार करने में सज
पिकिमी सामाकिए कम समयपुर शाम पा सके।
बरकोपसमे पमा पाव निवळ और दम पारि प्रत्यबपि
मुनियों में विमों के साथ चिपे किये। जो परमामा म प्राय
पर तो कोई अप मीन बन्न सके । इसपिये पेर परमे घरोजगी
अनुसार सब पोपोंग्रेस परिये और बोई मिमी से
गमा
च मत है तो पहा र रेषा कि हमारा मवर पर्यात को पहों में
माम रम माते।
भरपये प्रये महि रिप में दिया पर संप मेचा भौम
विषय में सब मिा।
इति भीमापानम्बसरसातीसामिहत सत्यार्पप्रकार सुमागयिभूपित
इपरपक्षिपर सप्तम समुमास सम्पूण 1
अथाष्टमसमुल्लासारम्भ भय पट्युत्पत्तिस्पिविप्रजयविपयान प्यास्यास्याम' इप विष्टिपत प्रामभूष पर्दि या दुधे यदि पा न । यो अस्पाप्यपः परमे म्योमन्स्यो भङ्ग पैदु यदि पा न घेद ॥ १॥ धम भासीचमसा गुलमध्यकेत सलिल सर्षमा इदम् । सुम्पपेनाम्वपिरित यदासीत्तपसस्तन्महिनामायकम् ॥२॥ हिरण्यगर्मः समयसुवा भूतस्य भावः पावरफे भासीत् । स दोधार पूपिवीं चामुवेमा कस्मै देखाप हषिपो विषेम ॥ ३ ॥ । १५... पुरूषणवेदर सर्व यव मृत यो माम्यम् । तुतायतस्वस्पेशानो यद मैनाविराहति ॥ ४॥ म ।। पतो वा इमानि मृतामि जायन्ते येम पतानि जीवन्ति । पत्मयम्स्यमिसंविम्ति विमिासस तर प्रम। ५॥ चियोपनि नाही ।। (भा) मम स या विविध घी माणितीबो परब भीर प्रश्न मता बो इस बात भस्मी विस पफ में पा सब पत्रपति मिति प्राप से मस होता सो परमात्मा है । सपने साब और इसको पीची मत माव।।।पा सब पी परिये पत्यार से भारत राहिम में बाबवेलोप पास परयत् सच जमात भात परमेम पमुच पम्मेवी पाकरित वा पद परमेज प प्रामन भायम सर्वसम वि.. मनोबो पर पानि बसी परायों समाचार भोर को पाबपामा मौर होम रसम एक पवितीय पधि परमामा एम बी पनि पूर्व विधमान और विपके पिता से सूर्य पर्वत को पत्र किन ग्स परमाम्मरोग में प्रेम से मधि किया।रेमापो!बो पर में एवं पुल्स और बोनादिव परब र बीच मम्मी बो पियार बा और बोरसेतिरिौ पुष इस मूत अमिप्यत् और मानस बम्त को पाने पा॥॥ विष पामामा की च से सब प्रपिपरि मृत पप होते। बिससे मोम और विषम मापस होवे रोचकोमेकामो॥
मण्मसमुशास' बमाघस्य पदमौरिक प ।पा।। २। बिससे इस बम प्रसम्म मिति और प्रबल होता है वहाँ म बामये गी। ॥ ४ प्र०-या पामेपर से सामान्य से! 8.--मिमिचमात्य परमामा पेम्पमा परन्तु मम रपाराम माय ति॥ प्र--स्पा ति परमेश्वर में सपा नहीं की। ३०--पही पपादि Fo-प्रवादिमिकोठे मोर किती पहा प्रभादि। -~-म बीच और बात का भाव मे दीप प्रवरि॥ प्र० -इसमें प्रमाण उ०- सुपर्णा सभा सखाया समान धूप परि पस्वमाते । तयोरन्याः पिपज स्मादत्यनभमन्यो भमि चाशीवि ॥१॥ में . शाधवीम्पा समाम्या ।। २ ॥ चप (1) यो मा मौन जीव पोषों (पर्या ) वक्ता मोर पासमापि गुवा से सम्म (प्पुम) पापमापक गाव से संमुख ( साय) परस्पर मिता पुष समान प्रवादिौर (समायम् ) सा हो (य) प्रमादि सब स्प भाप और शवाम्म काठमांद यो स्मूच होम में विशि गोवा पसरा मावि पतीनों गुण कर्म सभाष मी प्रमादि मनीष भार प्रम मोबषीय माम प्रसार में पाप पुलमों में (स्माधि) ब र मोपता और दूसरा परमामा मामाको (प्रयम् ) मोगा एम जो भोर मां मौतर पर का समापना। और बर बरसे बार और दोनों मावि मिसम्म ताजपति(यादी )ोत् भवति मातबर- समय बिवारा परमाष्य ये सब विष्णौ म पौष मा. प्रयमेको बाहिग्या पडी' मा सम्मानो सम्पा। भगो गो अपम्मयोग्नु भास्पेन मुखभोगामजाय। असापतरोपनिषदिम पपमिया अपपपति डोष भोर परमामा दोषी मा पर्वात् बिम बमली सीहोज और नमी बम्म पो बाब मरे स्पद भरी पही। इस पर प्रमोय पर और भय हा भात और गार्म परम्ममा बि मरन म्पस मोपमध्यवर और बीवन पर रिप मेमभा। भागविहिते- • (अनियति) सस्पार्यप्रकारा सावरमस्तमसा साम्यावस्था महति महतेमधन मातोहरराव पातम्मामाण्यमयमिन्द्रिय पधम्मामेभ्य' स्थूलभूतानि पुस्प इति पधार्विशतिर । पापम् | 1॥ (प्रम) र (ख) मन (आमा) बाल अमोल बम तीष पद मिबमबो एक संwat स्माम प्रति है। रक्ष मे मायरि, सामने पारस ससे पाच तम्मान सम्ममूठ और पय इन्द्रिमा तय मामब पाच तमामों से एपिम्मावि पाच मूठ बोबीस पर पीसो पुस मान् बार और परमेबारे। इसमें पति मविपरिबी और माय बाकार स्पा पांच सम्म मूव प्रातिप्राय और इभिवा मब मा भूषों का भारपी।पुरन सिौभमाति उपाहार साप और बसीबसन प्र–सव सोम्यरमप्र प्रासीत् ।। १ ।। असमाविमा पासीत् ॥ २ ॥ तिरीयोपनि सम्बनय बबु प्रारमैमेदमा पासीत् । ३ ।। मा १ मे ।। अझ बा समप्रभासीत् ।। II ।। पनि पोचको परमात् घील स... भपत मामा । और प्रासप वा ।। ।। फमम्। वेचत पाया प्रत्यर्पयति । सोऽकामपत गा मा प्रसपेति । शिरीषोपनि प्रवाशी अनु । बही परमाथ्मा अपनाइया से हो पा॥ सबसविर मनोमानास्ति किसान। पर मी पबिपद् भवर।बोबत पसर विनय सपने दूसरे नाना प्रामो पराकामी पी किस प्राम। मोहन पासपर्व मते बिकिनी अमिपी मा- पषमेव सोम्याग्नेन योधपो मुषमन्त्रिपमिस्सोम्पयन रोमो मूमममियम तेक्सा सोम्प योन सम्बन्धित सामना' सोम्पेभ्य' सी प्रथा सदापवमा सत्मविधा । मातोब परि में तो मास प्रमिला परम मूबभार माना कार्यसबसे मोम मुड और बोम्म कर्म पाप परषो विस मानिसको बार। मौसममम मावि पर पत प्रमूख और लिमि। परमप्प् पी पूर्व मसर बाबा प्रम और मावि मशाब होममाया प्रभाव बना और बो (रंग) परेमा मालिनी मीमा मममी काय बोपा' ऐवजीमामीकि- सस्थिर प्रामानिति शान्त उपासी। सामोर मार-म ।। मोर- मएमसमुशास मेह मानास्ति किंचन पनि म सपोम..॥ से गरीरमा बचतकर के साथ एक प्रमौर मम्यहीये मे निकम्मे होवे से ही प्रायसाप सापक और मानव से पापप्रमेव किसी भाबरे साथ जोरो से प्रोपावे।। पुमो इस भर्म पाहेब मिमी पासमा म बिस बस से जगत की सम्पति सिवि और बाबा जामियो क्यामे और भारय मे यह सब मा निपमा माया साची समोर पुणे में पासप्प बकी । इसबमात्र मतपरस सम्म में ग्रामों ममेव पही किन्तु पृप । स्वस में परमेवर पापार में मि। म-गयारा पिठने हो। र०-धौष एक बिमित सरा उपादान ठोसरा सापारय । मिमिच भाप सोपवे विजिसनमा से भयो सपना सेन बने। पाप सका बयेपही पूसरे को मार बनने। एसरा पाइम कामय उसको पसे। बिस पिना सरपये बही प्रमाता स्म होके बने पार कियो बीटीसरा पावरबमाब उसमे प्रवे। कियो बनाने में सक्षम और साधारण पिमिच हो । विमिच माल को प्रमा। एक- सरिको मप से पाने साये और समाये हा सत्र की प्यास रचनेमा मुल्म मिमिच पाय पामाध्म । दूसरा-पामेबर को घर में से पापाको पेन प्रवियोवर बाबा साप विमितमापौष । उपाहायपास मावि पामाहजिसने सब संसान पाये की ग्राममी पपा दोष से भाप वा पाप बम और बिमा सीमितु सरेपबारे से बमती और निमार से मिली है। श्रीराबिमिट से या भीषम और बिगामी गरे। पामेपर रति पौन थियो में पिरणे पौर जय प्रापे से हो पाते। और अग्नि विदो संबोमबे कि मी बाते। परन्तु इन विषमएल पवना विपामा पामेवा पर जोर प्राचीन है। पवई पस्तु बनाई बाती मिल सापों से प्रमोद साप पग पर एप भोर पाय मार माधम धीर रिणाम और मात साधरय भय से परे पापा मम चिमिच मही पाराम पौर परमारि प्रामाम्ब निमित्र रिण सभामा प्रम पर पप, भर मिमा प्रावि विमित्र सापाव और विमिन भाए भी होते है। इस टीम भरतों बिा मी तु नही मानी चौरविण वा. मा-कोष मान्दो डोम र पामेभा पोको पात् अभिा बिमिोपासाय माबो- पयोगमामिः सुमत गाव मुषो सु । म पग्पविष प्रम। मे ममी पर से परा वहीची अपने ही में प्रेतातु निमा बाधा बाम सपोरसमे देखता से प्रम अपये में सेक्पदमेबाप जपामाबरोबोसम रसी।मो ..
१७२ सस्यायप्रकाश प्रसाचा और श्रममा मसा गुभा मैिं गुम पात् आमदामा होगा सपासमार से सरकारमा बम पपा स्पोकि- भाषरावस्त च यथास्ति परमानऽपि वचपा पौडणारा भो ।। पा मात्योपनिपर पर भरिको को पथम महो अन्त में मरेप बर्नमान में भी नही। किन्तु पनि प्रापि में मानव या अन्त में संसार मरम्म और मम मम रहेगा पोपमान में पब मासा रामा 3०-यो महाले भने भनुसार बम भरपाराम भाव प्रबो वो पपरिवामी परमानपुण सिकारी होला । और उपादान बारव पुष कर्म स्पमान कार्य में मी भाते है- कारपगुप्तपूर्वक कार्पगुसो रए म उमापानमा सय में गुबह प्रम सविनाकबालम पप से बस मोर म्यमानादित प्राव और पत गना एमा प्रम पर और एपमा प्रसस और बण्य परम्पीयो प्राबिरि लादने को विवादि में पारि पुजा में भी हो वो से पविनापरवाना मोनो बाब और पा परमेपर खबरपा प्रविदिमामी बोला परिये । और बोमकरी मा सन्त बिमारे मस सालमही कि पाकिसम्म सरीत तुकाराहाम और बीमा बिमिचमस्थ औरपमा परमामा की भरभुत रच्या प्रममावकि समबन्तुतिरीर से गौर वन्ही विकास कता | वैसे ही मापक या अपये मौतर बाब माति और परमाहात से स्पून बपत् को काममा स्यूधम्मर माप सी में पापको मामूल सामानमन हो रहा है और वो परमात्मा अपांच विम और समभा की कि मैं पकाने बनाम पनिरोप बत सत्पादोवा मी जाणे विचर बाय बाय उपदेश मान में परमेपर प्रसिन और पुष स्पूण परागों से पापमान होता है। प्राय बोगस पामेपर और मुलायो कोको बोकमाने कमी माता । बोरको परिणाममूकबकि घी की विवाद कसार मा मपिर नहीं पा और सीमन्त प्रात् मय प्रारम्म से जमक एमी पर सीबोगी तब तक मी बरकम पूम मासिब तम भासीधर्मता गुप्षम । - म 1 181 में मामीतिर मोमूतममपासमतापम् । अमर्पमविप्रेप माप्तमिव सव मनु पापब म पति पर प्रपन में मम्माम से भात प्रामावि और पापारम्पमा मौसा ही होता है। उस समय की मएमसमुमास १०३ मुसमा बापतो बरे बस में पाये मोर व प्रसिर पिों पे पुख इन्द्रियों से सामने पोग्य पा और यहोया भि बचमा में माम मावा और प्रसिद किस पुरु बाबने के पोम होता और पयावत् रपमम्म। पुमा रम भीमपर माप में मी मात्र बसमा मिच सो प्रामापी योगि लिए प्रमाना ममापों समानता और प्राप्त होता पापम्पमा कमी नहीं हो सकता प्र०-बग बनाने में परमेबर प्रपा प्रपोबर। 10-महींपाने में प्रयोग। प्र०-गो पाता तो पापम में बन रहा और भीषी को भी मुख दुप्रास हो उ०पा पावसी और दखि मोगों की पापुरमपी की पही। और पारी को प्रसप में एक मुखपती बासी मुखर मुगुणा अधिक होता और पुत स पविणामा गौच मुछि सायाम मोपदेशमन्द मौसम होत । ममप में रिकम्मे से मुमि में परेर से पवे और प्रताप के पूर्व सी में नीबों मित्र पाप पुपप कमों प्र पसासरे सस्ता मोम बोर स्पीन भोग ! जो तुम से कि प्राप्त होने में प्रयोगमएम पी मापे रेखा । बोचर में अपनापन भने विज्ञाम बस और लिपा उसम का प्रयोग विध मात की रपति रमेसरा कुम भी ममसाम पौर परम्पमा पाष, बारब रा भारि गुप मी मी साकोसकते? सम्मत् बनाये । रसम्म भवम्त सामर्थ जयत् को सपरिमिति, प्रखर भार सम्म करम हो सस जैसे मेरी ममाविक गुण रेसमा । रेपे परमेवामा स्थानिक गुप सप को पति माय गोगों को प्रसन्न परम परापमाना। ०-और परिव! उ०-चीन शिबीर हेतु निवाब मिमिव मारमाय इम्मातिसम पमा मापसबाम वीर होने से मममी. प्र-जब परमेवर अधिमा पाप धीर नौष भी सप प्रभागा नीम मला तो मच्मिा पाएसमा । -पाधिमा म म मर्ष पूर्व रिख मारे है। परम्प सम्पषिमा माया लियो प्रसम्म पत में मोमसोमई मसम्म पनि पैसा मग विमाप्रपामा वोबिना परप एम ईभर की सत्पधि मोर सर्व गायु में नाम, सरुपी मारपी धपरित धौर कुम्मी पानि से मार महीं। स्पारिक मिरम मोन जैसा पनि रण जर गौतम भोर पिम्पादि सब गोमेसिव गपणे च मी महोम समापौर विषम सत्य और समिरे पर काम सम्म । हरि मगधिमा प्रकारे हिपामामा बिा मिमीभावाने सास व प्रमा 'स सबमिोर रोमानेर उमिन मुबा । बिरामे बावभरपाव भरपबाही कि चिमिमी बापा मावि और परम्पद बयद म पानी बसपबियम बा कि परमेवर से स्पड पर बल -या शिबिडम पम्न पदमबार सलग परपसम्मरमा परन्म कोकि- मोम रिमणि परपसरररोपमा पसरपपास्वमदेव मोएसिस, दीयोकेशियरोमेरमापी मा- सापा पनिपमा बोलिरामर सामोर मयसम्म और यो धामरीयो "-बर मिरामा को पास भात मारतीय चौक प परिमित बिमुख र प्रापर्टी में परिचित परम मेख वोष मा पौवारि । रम गोपरिष भी महीर सावे । मेम और हम सभा पपोत पह, परमात पोर मापने मोबा सूप पारी परमेवर मो र सूक्ष्म पापा HTो परमेश्वर भौतिक रात बम बिसेसम मा भोर मत मारो मरने । सर पर माति से भी पत्र मापदमी को पमप्रमाणामारे। प्रक-मे मनुमरिमा र म मारो यो या नियम हो तो इससे भी निराम से विरारो वो ग्यम बाय बग मी निरामा होम पर। Poमारा म माममा सलिम प्रथा ON ॥ R+पपरिया परमेशा बगीकामय! . मेरे रस से मारे भरोस्रोमोसम सरे५५ र परे।
प्रस्मसमुन्नास मूस मूमामाषायमूच मूखम् l सभ ।सू १०० मूत्र मूग भर्ना प्राण नहीं होखा । इससे प्रमाण पब माग प्राय कि किसी मर्यो प्रारम्म पम पूतीबो कम भाप होने से कमरे बमाये के पूर्व जाम्पस पूत और मधिम पारि पूर्वपमान होने पर मौके पर सचिने परमेपर, माधि पर और पाभरा ताजा अमार होने से इस पर कोरपति होवोम्मेि से एक माद हो यो समय भी हो। प्रम मास्तिका भाइ'-गम्मेवारी भाषो विवश्पति वस्तुधर्मस्वादिमायस्य । १॥ पम प ।। ।। प्रभावारमापोत्पतिर्मानुपम्प प्रातुर्मावात् ॥ २॥ पर कारखं पुरुषकर्माफल्पर्शमात् ॥३॥ भनिमितो मावोत्पत्ति कस्टमवेयपादिदर्शनात् ॥४॥ सर्वमनिस्पमुत्पत्तिपिपराधर्मकत्वात् ॥५ सर्प निस्य पश भूवनिस्यत्वात् ॥१॥ सर्व प्रयग् मापडणपयात् ॥ ७॥ सबममाबो माषप्षितरतरामावसिद । ८॥ पहा नास्तिको ऐसा मते कम ही एक पायाभीपूर्व वा पा पन्त में गुम रोपण क्योकि जो माष पर्वाद मान पारसम्म प्रभाष रोम एम्बो अमाप । २०-गल्प पापण भारत प्रवाश्य और बिन्दु को भी मते ।। गुल्प वापरा। इसम्म में पार्ष भय । जैसे एक मित्र रेखा मुंबापर होने से भूमि पर्वताविबर प्रबदा से नवे और एम्पसमापने पापा एनहीं होता।।। मा मासिक-अम्मा मे मा की उत्पति परम मनाने विमल रपट गीला और बोममे दोर मा म प्रमाण । पपम नहीं रोका था तो प्रभाव में उत्पधि T०-बोरोग भरपमईन वापसम बत्र में रोग वो पशमीदोवा ॥१॥ वीमा मासिक-पालमा पर पुषर्म मोदी सदाहिने सिरेबारे में पाते। हमरि पनुमान म्पि सम्मोम प्रस्रोमाग .पावीर शिम नमस गरेमा चरता। शिम में भरपमहीपापी रेयाप पर मेरमा. उ-गोमप्रसमापौर से तो रियम मेगप्रमों पी रेत दिये जमा मम्ममवाप्प है। - सत्यार्यप्रकाश इसमे ईम सम्पुसमे ही रे सकता किसा कर्म बोरमता है वैसे ही समसा: ।। प्प मासिक-सवानिय विमिव पदावों की गति है।पैसा ना मारिनीतील प्रविन ऐसे में पाये। इसमें विधि होता। किनबरसी मम्म होचा परिर पपई विध विमितहोते। उ०-बिससे पदार्थ समापी ग्राम मिचीमियम पोटे गपापोंहीरो॥॥ पांचयो मास्तिक-मता सब पदार्थ उत्पति और माय ? इसरिने सब पकिन ॥ सोबान प्रवक्ष्यामि पदुई प्रत्यकोटिमि'। म सत्य नगम्मिय्या जीको पोष मापद। पर किसी मन्य प्रकीचोब बाकी पोम पानी माक्षिाको पोति मावि ऐसा मवेकिको प्रयासपसिनी म समय मिपा और बीच से सिपाही। 7०-यो परकी निज लिसो सब विसापही हो सका।। म.--सबनिता मी प्रक्मिी से पनि मामासाप मी पर होता है। सफावत् पम्प होगी ममम मात्र में मिल और पामसूम माबोधिन मा कमी नहीं हो समय । मोदी बग मामे जपत् को गत्पत्ति मामी हो प्रमोसनदोष से पसभाप्रप्तमा कभी मही हो समयमा स्मरम्म सप्पोरिस्त परिपतवो भी पाप सम्ता किन पुषहै। गुपप ब्रम्प नही और पुष इम्म से पूरी रमना । समयाम मिती रमन सम्र मी मिलोमी पीपे भीगो रस मी प्रषित मायो । मे स्थाविवरचे पुरे कमी नाही माता बोगवनोद पर्चमान समय में सम पाबि मा सम्माप सप्रसारिबाब होने पर परमा प्रर्धा रमन साम्म म मामा में रिवारस में रहीं में प्रसादेवा। जैसे मुप्ति होने से पण परा. शामसमर में भी पा पा शिपमान र भोसर में भी भाग प्रमरमान बतातो संस्मरविन स्मोको नामाका मौमसत्म हो। इसलिये पो सभामा और था सस म.--से भारत के पास चौर रोमा गुठि में विस रोग से सामने भी सम्म समापन चाहिये। मर्यात प्यालय ॥
प्रामसमुद्यास २०-पसाम्मी नही मात्र सक्न सकिरण धीर सुपुति में या पापा पप्रधानमा होता है प्राव मही, असे किसी के पौधे मोर गुरु से पा प्रय हो । म अमान नहीं होल बसे हो स्म और साप्ति की पास है। इसरिपे जो संप पाये कि माम मौष और मम्मभाग प्रमादि निम कम पाणिक मताकि पांच भूतों के विम होने से सब स्मन् मिमी २०बापत एस पी, क्योकि निष पदावों प्ररपति और हिमाय प्रभाव में माता सब निम हों तो सब स्यूच म्मत् सपा और पपयदि पयों में पत्र और विनावे रेत १ इमसम्म निम मी मान सत।।।।। सस्ता बाति-पाकि अब पृषकई एक पदार्य नहीं। जिस पाहमरे कि मम दूसरा एक पापको भी होता। 70-पायों में प्रवपदी बर्चमाषमा समरा पामामा और गति पूपा । पदार्य सम्मों में एक.१। मस पाई पाई नहीं हो सम्मा। इसलिये सर पूषा पापही मितु सम्म म परे और पुष । पापों में पाय मी.॥ मामला बास्ति-पता कि सब पापों में स्वरतर ममात्र को सिन होने से सब प्रभावमा पैसे "अनमो गौ। भगोए' पप मोड़ा नहीं पीर पोषा माप वहीं इसलिये सरको प्रमानम्स मावना नीचे । २०-सब पापी में इवोतरामा म पोग हो पात 'गदि मौरकाम्यो भाषम्पो पठत पप" पाच मैं गाय बारे में बोरे मातरममाव कमी नहीं हो सका। जो पापा ममा न हो तो इवोसम्मान मी पिस में माया?॥5॥ समय पस्तिक-भव कि सम्पब सवपत् को परिमोवी से पाली मात्र पाहो सदमे सेमि रात्पर होते है। और पौर पिसी पारे मिस से पास पारि और पायावारिसपत्र होने से समुद्र पुबोय तप और पोंस समुद्रमती ना धीर मी रस मिखाने से रोग पपी मर जग तालमार गुवों मे सपा । इसका बनाव प्रणा कोई भी मही ।। २०-गेसम मे जगन् श्री सत्पति होरेको विमम्मीदव पौर ओरिमाय मी समान से माबो तो उत्पधिक होगी और बोबोबोमा पुपपत् प्रमों में माना तो गपति और रिगण प्यस्य का कहो पम्मी। और यो धिमिरे होने प गपति और माय मोमे तो निमिष रपा और दिमाये माँस पृषक मात्रा परेपणा । यो समारी से रापचिर रिचापोखठो समय दो पति और विय महोन सम्भव सत्यार्ममका हसाबो स्वपन में रखा होय रोवो इस पोज मिल में पारा भूमेव तसं पारि सपाक्यों ही होते है और जिस रेपोम बोरमा वापर स्पच किये हुए बीच मा बा मादिबोबसे प्राप्त ए मौन मि पारि पाते। विधा रस पी। ये बली पून और मीमरस र ऐश से भाम प्रापही मिले। विवामियो मिण्ढ़े।। रसम मी पपपोच मिधाचे से रोग होवो अधिकार भनयम से रोगी होगी से हो कति परमाहीम सब पौर बुदिप पामेबर मिया मिनपा समो प्रसिनिलिये विरोप परापही पा सकते। इसरिये स्मारि परिबी होती । मित पामेपर की रपमा से होती॥ म.-एमपर्चबवा है और पोप किन्तु भवावि मत से प माप पैसा पगा। मी इसी सपधि और म कमी निवात होय ॥ २०--निय तो मी मिा पकिसान पार्य ममी पर ममता । मिन एमियी मारि परापों में संबोम विशेष रचना होती है मारिम्मी दीदो सम्वे और बो संपाप से बनता है पोप पीता पौर गिलोप के अन्त में पीया। बो तुम इसको न मानो हो कमि पापाप और पसार भावि रमेर पत्र पस्म म यो कि इसमें परमार पप मिशही। जो मिगे सम्प प्रम पाप . मी समय हो। मा-पपारि मी मितु बोपोगाभ्यास मे अपिमारि पेन मसोमसमरिगुपुलस शायी होगीको बीच परमेपर पाता। ro-यो प्रथापिका सम् प्रा बहरोडो सापकों से सब गोरे पसे जोपो म मामार गौचनस जप मोर और इभापों के मोबाने बनो। सोमिता गीत गापप दीम मन्य । जर सापकोठे यो सिरमाहो? बीब से मैसा मार सिव हो तो भी ईपर की रोम सब पनि सिदि रिममें समर सिरिसिपल श्रीपार महीनो पाकिसबा परम अवधि सम बरे वो भी परिमित शन और सम्मपशा रोयमन्त शाम सामर्षया कमी दीपावा। रेवो ई भी वोमी भाग्यमान भरिकमको परपरामारोगा से भरि सिर पामेर पेमे से रेप पोर मनी से मुरममित्र मिया इसमे कोई भी बोगी परव पही सजा, गोवशम्मी भी हो गया। प्रकार प्रान्तर में पिसाप पता है आप एसो ? --मी हिमानी पारेरोगी भर होमक्षा--- भएमसमुशास सूर्यापन्द्रमसौं धावा यंपापूर्वमकल्पयत् । दिवं च पृथिवीं चान्तरिमयो स्वः॥ म .ए ॥ में । (पावा) परमेवर में से पूर्व प्रम में सूर्य चन्द्र पिपुष, प्रमिला मन्तरिक मारिया से ही प्रब बवापे और मापे दो से हो बाम । पलिये परमेम मम पिच भूब के होने से सपा एक से दो मा प्रवेशको मसर भर बिसम भाव दिबसम्म होजसी काम में भूपकोदोमोसम में महीं। प्र-पति विपन में बेदियास प्रतिषीपरोिष! -मपिरोपी। म-बो प्रक्रोिध दो- तस्ममा पस्मावात्मम प्राकाय सम्भूत' । माकम्पप्नायु । वापोरमि । अम्नेपप' मदम्प पृथिवी पूपिप्या भोपधप । मोपधि भ्योऽयम् । अपात । रसः पुरुष । सबा एप पुरुपोऽपरसमय । चिसोपषि प्रभाबना ॥ प्रचिरीम उपविप करी। म परमेम भौर प्राति से समय म पो बो मरम्मम सर्वत्र पर हावा रसको इमाम भात म्पासा वापसर में पायी पटिपीवी कि किया पाण्यात मौर परमामा मर सभामा पमा पपु प्प्यु पथात् अधि पनि पसल बर जब पवार एमियो प्रविसे मोपरि बोपपिपी से पहचर्य वीर्य से पुरस भर्मात पर उत्पच होता। पपासाविकम से और बायोम्म में भगवापि, ऐवरण में बारिम से पपीही पुस दीदिएपमार्म भारिसे मीमांध में भक्ति अप म्याप में परमाड पोप में पुस्पार्च पास में पति और भाव में सप परिकी मचि मोबिकिको मम मा। -उपमें सब परेको मम वहीं । मापौगो विपरीत पमपमा कि पामेन निमित पौर प्रति बप का उपापाय परपण माह होगस फात् सम्पादिम भाव पर मामय और प्यु मापही होत र प्रगपारिश होगी।अमदिम से मोर विपुत् मिमी पापी रोम परम से पीवीपर्वात मिस प्राव में हो सका दोषी पापी की सत्पधि रोवो है। इस पर सिम्यमादि ममममममय में विस मी पाने परम परमेपर है। परन्त लिोष रमको पोल सर्व पोलि परमारोवार में पतिरोष रेखो हम यमीमा में पेन कोई मी कसम मपी दोष विविस माने में काम की र पिसमें समन पसे विनम पो होगी सब में पाराम भारव नहोसमी नही कर पा', पोप में विध भय विधामा २४ उ०- सस्यर्षमा अब हो ही न पश्य पसमें "हम मेहममे से महीन मस्या और रात में बवासमा परे तो कोई भी पद सपा होम" इसरिने परिपपरयों से पस्तीबसायों की एकर की एक मात्र में है। इसरिपे रस में रोष कामी पहीं। ये पापुस मिले एक पपरम मिसियों पर परे सा परिपक को पायका याममा ने मिमी है।बसे पांच और पस मारपी किसी बापी म परे बताया । बसेरा मा। रममे से एक मा सरे बेमा सूप पीसरे का सपा रोपे का मा पारेका पौतरा पौर मारा था ये राम#माता पाभर परे। इसी प्रभर भाजप्रकार मकी पर पौर म माम पनों ने पिमवीच प्रब व पामग बुरित संक्षा पौर मायभी । प्रन्य पाम एक पूसरे की निम्म पर हो मम मात्रा मरता है। इस समय हरिमाया पाप मापदे योग्य नहीं। पीकियो मम्मी पौदे मान्य हो दुखको पार्च ! पैसे हो पान मस विम्युब स्पर्षी इलियम पुस्तक माधवपरबारामयपी. प्रबारविचार्य नहीं रोता तो पापमपारयों मही 7०-परे मोजे माइपो! मममी निमम मनों पीले। रेनो पेसा में दो पाये । परपरब सरा पर्व । यो प्रयोग कार्य पी और सि ममबीपभाब भी बरकमबुजा परिपात पही समयता बE रसमे पान बाब मसपाही दोन- निध्यामा सत्तरवस्तमसा साम्पावस्थायाः प्रहसमत्पमान फ्रमसूक्ष्माया प्रथा प्रपम्बममा सस्वपरमाणमा प्रथम संयोगारम्म' संयोगपिरोपावपस्साम्हरस्म स्यूचाकामाप्ति सपिम्पते। मनावि सम्म पच रखम और महावी एमालाप मावि मे पानी परमाराम पन्मान समय बिचायनीज प्रकम बोबो सपोपमबारम्म है मोप विशेषों से अवमान्य मी भला को पूण [] स्व. पते पाते विचारूप पोपी पास होने से धीमी। मबाबो म चोप में मिखने और मिप्रवेशमा पए बो संयोग पारिऔर सोय समन्च पर्व विपिप मोरोपमा ग्मी पाप और दो प्रयोग पागमता र स्पिोमके पवार यापही पापमयाबो गत मरममायमान पर्व चो पापय प्रसाद मौत साम सपान मात्र परेख्ता पमा पुस मदिरा मौर बावा मम्स। म प्राची as पीपक पक और सूर्य कमी हो सकता। बोसिसे उपचापभाव और जो म्पा होताीपा और बोमरण पायहरममता॥
मण्मसमुमास नासतो विषवे मावो मामापो यिते सत उमयोरपि रोज्यसपनयोस्तस्वदशिमि ॥ माता म ।। कभी मम भावमाम मौर म प्रभाव पबमाल मोम इच रामों का विषय बली बोगों के प्राणी प्रम्प पहपाठी भामही मसौम्ममा परिक्षा योग इस बात को सार में समाम साते है क्योकियो मनुष्य पिा सम्संगी होम पानिपर न करता पसा ममसर में पप गता। पम्प पुरुप 6[ो नियमों पिरान्तों में आम है और अपने के लिये परिमम मते बम भोगेको विषमरता से बचा है। इससे बो कोई मरण ये रिवा परि मारे पण मी नहीं आता। बब पहिम सम्प प्रावी व परमामा रन परमसूम परायों को इमामता है। उसमें प्रथम अपस्म में बो परमसम्म माविम परप से प्रसून वारसम बाम मानव और मो उससे अप स्प होगसम माम मामा और भार से मिापार सूपममत मोत्र वा पेश जिन प्राप पांच सम इन्द्रिपा, मस्त पार उपम्प और गुर पाच कर्म इन्द्रियो और बारा मन प स्पूप पर और रप पम्यम्मानों से प्रमेक र पूजामत्माओं को पास होते हुए कम से पार म्यूबमूत रिममे हम पोप मसर दे। सत्पन होवे। मसे मामा परी भोपियां पारि ग्नये मा प्रा से पाप और पोर्न से गरीर दी। परन्तु पारि भीमपुपी नहीवी। किसी पुणे पार पामामा पाप रम जारी रोगपीरमावर मेपुगीमीयत रेखो ! शरीर में किस प्रकार की भावपूर्वक सहिरोकिनिसमे पिस् अपवारणा मानते है। मीवर पोजोब परियापम मांस प्रमेपन मसीमन मोहा गम्त रेमा साब)मा मापस जारपोरम शिरा मूपान मोम प्रचार प्रसपन पतिको भीष मम (रा)शिराम वारका प्रम्पम इथियो मौका नयन और गगन समुपुष्टि मायके मोगमे लिये भाव मिमिमाष सप प्रविमाप्रयास म्पमारि प्रभुत सीविष्ण परमेपर प्रेम प्रसा! इस मिशन माग प्रमर समानु से शिव भूमि, प सभाप पारिबीरों में यति सम्म प प्रसन्म हरित प्रेत पौर हम रिप मममो पुल पर पुप मूनिमा मिर, पर मा राप मिट भम्पति चिरप रस मुमपारि पुठ पत्र पुषसपा मगरिब ममेडगो भपोर मुमी मोनिर्माय पसर प्रसप नियमों में समा पनि परमवामिनामी मोहीमप्रमा सोमा परार्थ मे मनाता प्रभासन समय होता है।एमा पप और सरा रमने सपा सम पयो गरेप भरासा किसी पुर मुरा पापमपाप रमतो विस तुम किप मुबी सिमी परिमाम् मागम में समय सत्यार्यप्रकाश । पाय दो मही पम प्रमा साल में प्रमेहबोनेभीम सा' और बेदान्त में "बवेषमा म बनाये वो कोई मी पापा हो सो इसपिये पीपपरयों से बनी है। खबरपोमबार एक की एकर यास में है। इसपिपे उस में मिोप समीकी। जैसे का पुर मिप पर बम्पर समम मिषियों पर पो मादी परिस की मायामी मिधरो भये पांच भन्ने और एक मम्मी किसी ने पीर परेश सपापा । सबसे शानिय धाम से पकनेमामे दूसरे मा स्प वीसरे पे कम समय चौबे मे कामम, पाचकरा पौरमा वापर सरकाशाता भाभर पाइसी प्रथा भाजपा मार मी पसे और प्राकृत माम परी पिवीत समीम विष्परिपत सस और मापनों माम पाम एक दूसरे में निमा में पर होके सममाका मचा सिपम दुरिमानों के पास मामने पोप नहीं। क्योकियो प्रन्योरे पापो दुखनीय भासे ही पत्र पर विष्णमुल स्पी इत्रिपाराम पुत्तों में जौबामाप्रपामनेपमी. म-बाप भाव विभागीरोषा दोभापमापी र -मो भोगे पालो ! मपनी बुरिम में गौ महीं पाते। सो पार में दो पाय होवे एक पाय दूल्य पर्व। जो पापीप कम हो और जिस समय भी पाप भीक माग पीको समस्या नहीं पमम्ता व सत्र को पचान दीदा- विस्यापा सत्वरसस्तमसां साम्पापस्पापा' प्रयत्पद्याप परमपमा प्रयाप्रयम्बर्तमानानां परम्परामा प्रथम संयोगारम्म' संयोगपिरोपाववस्थाम्हरस्प स्पबाबामाप्ति' पपिरम्पते । भनापि किसम पट बम और मोहाली मे पुकाम की से पानी परमएम पदमाव निमावलीम होबो भलोपमम्म' पोप किषों से प्रसन्न समय को सूम बबवे पो सिमोसी से पास होने से पीमती साबो म संबोप में मिलने और मिष्यवधा पाबो संयोग पारी और बोन मन भाव मिलियन पारोपमा पाप औरो संगोप पावे या और लोगो पमा मा पा पवारमा बोज्पापमपार मर्म - सावन मास और मन मपायाम है परेच्या अन्पा पुमा परिपोर मामा मामाची बोस पोपका दीपक भी पूर्व सूर्य कमी हो समायोजिसमे पर वारेमभाव और दो माहोरेपन और यो कमर मेम बायोपको मस्य।
मएमसमुतास १८१ मासतो विचट मापो मामावो विपत सत। रमयोरपि पोऽम्तस्त्वनयोस्वस्वर्णिमि ॥ मपाताभ कमी असत् क माय बर्षमाम और सत् प्रमाण अपमाष हीरता इन दोनों बिब मार्गी बोगों ने मप परपती यादी मीमामा पश्चिम बोग इस बात पार में से सब मम्। स्पीकिबो ममुम्प पिान सम्मगी म प पिचर महीप्रताप सरा प्रम में पा राता। पाप पुस्प कि[बो ] सप रियों के सिद्धान्तों को बाप और बाबने चिपे परिमम मते बाराम पौरों को मिकता से बयते। इससे को माप यिा भी मामा गम भी नहीं बानध। जब पहिप ममप पाहै पर परमामा म परमएम पदार्थों को इमामता है। उसकी प्रथम प्रारूप में दो परमसूम मासिस भाव से ऊ स्पूप होता है रसम माम मान और यो रामसेस स्पून होतासन पम प्राशर और शाम से मिस पार सम्ममून मोध पप के मित्र प्रण पाच बाब इत्रिपा, भारत पर उपल्प और गुण पांच कर्म इन्द्रियों और पारो मम पूरा सपा होगी और म पसम्मानों से अपेक प्वावलमों को पास होते इस कम से पांच स्वभूत बिरामे म मोग प्रमा । सत्ता होते है। बसे बाबा भर में बोपरिष प्रापि उनसे मा पड से पाप और पो से गौर होगी। परत पारि पी मधुपी नहीं होती। स्पोकि सब मी पुस्पी पर परमामा माम मोबीवी बोगम स्वापिन्वा मधुगी पीती। देखो! यम में किस समपूरक पनि रोकिजिसमे दिल बारेमणा मानते । मावर बायोग वादियों का बम्बम मोस प्रवेपन मीभनौदा पार फेमा पंच (प)मा समापन बाबा पोजन शिरोम बाय बोम बच्चरिचयपत्र की पतीष पूम (रचना)शिराम तारमन प्रब इमियों के मौसमममम बीच व लस मुसि भयो भोगने के विरोपिमाप सर पातपरिणाममा कौरव स्पमारि प्रमुख परिविध पामेन ममता। इस मिथप राय यास पातु से गपिठ ममि, विषयमा मासिक दोनों में प्रति सूक्ष्म रमा पसंपारित भेत पौत म ति मम्मों में पुत्र का पुण मूनिमार मि पर मागाव विठ प्रसारि बिपिप रम अमापारि पुल पा पुम पर म मूगादि पर मनेमकमेकी भूपोए सूर्य समावि मोमिास पाय मालय निममा में समा मादि परमेमोरि कोई भी नहीप्रसन्ता। जब कोई मा परामे रेखा दो दो प्रभर प्रज्ञान गप होता है। एसा पपा मोर पप ग्मम रमा देवम पाये गरेर भयो। मा सिसी पुस्तके पुरा भाप मब में पाप रमतो वरित माप मुर्गम भोर त्रिी रिमा HIR ने पास - भी सत्यार्चमकाय है। इसी प्रकार पापा मम पी में विविधा यामे परमेन मिरपती॥ म०-मन की पी ममम हुई पिली वादि। 7०-क्लिी भादि की चौषि पिम्यानिमिया मकुम की रिलति और पावन पीहोम प्र०-ही प्रावि में एक पके मधुप्प पापिया। उ.-प्रहपाधि विव बौमि भाच परिमें सत्पथ होयेथे मममम पनि बानिमकर रेवान मनुष्या अपपम ये । ततो मनुप्पा अपम्त" का पर(और ग्पले प्राय ) में शि। इस प्रभाव से ही निकि मादि में भोक प्रयोग किमी मणे मान उत्पाए और पशि में रखने से भी विदित हो कि मणब मा पपन्न. प्र-धादिधर मैं ममुख भाविकी पाल्प पुष की अमवा दीयों में! उ०-गुप-योकि पापरता दो बजे पापनिये गुमरे ममुप्प पाम होवे और दो साल में पाता तो मधुवी सी ती इसचिपे पुकमा म पी की। प्र-कमी पाहिमाम्मीशनही। रह से दिवस पर रविन पथदिवाने राव और रात पौषे शिवमाया पता इसी प्रकार पधिपूर्वसन पौर प्रथप पूर्व सी सी पौधे समय और पबमबापे पनि प्रगति मासेजमा प्राव है। इसी परिमन्त कही। किन्तु से रिप बारम्बार भाव में माता है उसी प्रकार पी और प्रया पारित होता वाचोकमे पामामा जीप भारतीय सम्म भरि से बात में म्पति सिति और तमाम प्रयासे भवारिसेपदी प्रहमा हीदीम्मी पापाता कमी भी यता म परसात में पारा और रममा मदीदोग्य ऐसे म्पपारी को प्रणाम साबमाची । मैले परमेशा के मुख कर्म समारनपरि मेहजसके कौरपाधि मिति प्रभवा मी पपादिमी मोगुनम तमाम प्रारम्प पर सही पी सा रस पत्र कमी सभी बारम्म और मदमही। प्र० किगारों को मधुन बम्म किनी में मिरर अम्म निीतीय मप यादि पशु किमीभेरिमा पनकारि सम्म रिच है इससे परमात्मा में पकपात पाता। २०-पाव भीमाा बोकि ख गोनों पीमि प समाबुमार मया से बोकमरिया मम्म देख जो पात भाता।
भएमसमुशास' १८३ प्रमों की प्रापि पी पिस मा में हुई। २०-विवि भात् जिसने विपत प्रो. प्र०-मादि पपि में एकति पीपा ममेकी To-एक ममुख पति की मात 'विसनीमााम्य परमर" या भाग्य(110)महै। गौम नाम मा बिहान, देव और एस अर्थात या मू नाम होने से भार्य और रखरोमाम हुए । ग्य यो ग्वा प्रति (1)प्राप्नों में पूर्वक प्रमा प्रणव पति पत्र और प्रभा मेवाए । हिम पिापीपप्रम प्राय भोर सूचीमामा पर भाई मर्याच मादी माम मा । म भिरे पाये। 10- मार्य भौर पस्सों में भर्वात पिन् बो रेष अधिान हो चमुर रानमें सपा बनाईनमा एमा पिसाब चुत उपद्रव होने वाम पर भार्य गोप सब भूगोजमरचम इस भूमि पर को मम पी पान से दो रेव का माम "व" । प्र --पायातको पानिमाक! उ~-मासमुद्राच वै पूर्वादासमुद्राचु पमिमात् । तपोरेबाम्तरं गिर्पोरावि विदुर्घषा । १. सरसतीस्परयोदेवनपोर्पदम्तरम् । देवनिर्मित दण्मावत प्रयसते ॥ २॥ मनु ।।१।। गचा में हिमाल पिय में शिलार पूर्व और पमिम में समुद्र ।।। सरस्वती पश्रिम में मरी पूर्व मापी यो पाच-पर्व माप पहाग पेनिसपासम्म पूर्ण और ममा पश्चिम मोर होम शिव प्रया में मिसको प्रापुनम और मो रचर पो से मिस पिय पर की भी में मिलीमासको मम परिव और पादौ मीचर और रम्मेवा पर्यन्त विनयापन पावर गहम सब से भाराव थिये का किया पानावरे पोत पिामा बसावा और पापमोमिमस भरे प प्रापोव माया। म-प्रथम इस देश मामला प्रचार इसमें कौर बम ? -इसके पूर्व सरे पनाम कोई मी परतों के पूर्व इस रेत में बस मेमोकि प्राय आप पीकी प्रारि मरमा- पवान् तिम्मा म स्पेयी रेस में कम से थे। प्र-भोपा होम ईराब से मापे इमायबोगी म है। लोई बदमाग मोम बात ये किमिमा और पते थे। पाचोग अपने प्रेरेसा बरेऔर समय म हुभ्य रसम वाम रेसा मस्या में माप । -पबंध समिति पम पार्व सत्यार्थप्रकट विनानीद्यार्यान्ये च दस्पयो पहिमवे रषया शासवान् । तृत शूद्रे उवाय । पर्व । ११ ।। पापित पुरे किमा माम अर्मिक मि माम्स पुस्पो मोर इसे विपरीत बनों अमाम बस्नु भयो म हुए प्रधार्मिक और अधिा है। समाव बिस भय बिगोमबाम पार्ष और हमाम मार्म माद मनापी । बस पेसे वो दूसरे दिनेशियों मोजमपित को दिमा पोय कमी मी मान पने। और रेशर संग्राम में भारतीय माम सवा महया एवष प्रारि हिमाचप पाप में और पसोप मसराम बो पुरावा मा ग्यमें देव प्रात् प्राणों की रस और मार पराकम करने में महापाप में। इससे पहो पिर होतानाम्याने भारचा मान बो रिमाल पूर्व मामय बरिया समान रज रंण में मनुज राते भी अबाम पर सिर होता है। बॉकि बब . हिमाचल प्रदेश प्राप्नों पर पाये चमई मते में सपा रम्म महबा गोप नीरज पारियों में पोसाक । और बोली रम्मनबी से पश्यि में पुरमा रस बाम रेग्मुर संग्राम नहीं किन्तु उसमे रामनाम बम्बमा मौत पवनी प्रामभकिमी सात प्राव में प्राइविएस में ही विच किमावोग सबसे पाये और महापाविनी को साम बन पा विधा इस देश के रामपमा रिसियाकार मानाय सेहो पाते। और-- मोम्माचार्यबाप सदस्पर स्मृता । म , 1. मोपासपर पर मा ।।। बोपना पेट से मिव सुरेश और सचदेव मम्।। इससे मी पापिरो किसान से मिा पूर्ण देश से मम्म पर अपच और पबिमदेशों में राम नाम पतु और मेजय ममुर है। और दविता भाग्यपरिणामों में भारत से मिस मगरेपो मनुष्योगमाम रावस । अब मी देवबो पती जोमा मतम पप्पर वैसा पानी प्रक्रियामा दोस पापा और मामाकी सूप पा यांचे योगाम बाम ग और इस देश मनाम पाता इमरिमाल चामोरनी मनुणाने पार प्रोत् पप हो। और राममाया पोत वाम वाम पो पुसमा होते के समीप बोपी से भरमपिण्ड दुपा पा । बाद इमा सेम औरब पाक सर्व मोड में मानो परम्प और मेरोमा पोला । प्रचार भाव मिल रण में भी एच पी एम पास्माकिम पुष , विएमड, मनु मरोबादि एस गो पर्वमपनि पम्प शुष्क मोपच पाप भएमसमुशास एम और पो सम्मान पाइ मावि रामा को पायोपमपम पमा एप मिनार मायाप पारे। मप प्रभावोस से मन भायों के पायल्प प्रम्पर परसरविरोप से चम्परेगों के सममेकबा होप मा मिनु भाव में मी मायाम प्रथम स्वतन्त्र स्पाम बिर्मन रम्प इस समय महीनो सोयो मी बिदेशियों के पादाभव हो रहा है।मोरे रामा स्क्वना है। यूरिन सब प्रा । तब देशवासियों को प्रमेश माम पाता है। कोई वितबाहीको परम्न सो कती सम्म होतापपरि रचम होता। भवन मतमतान्तरले प्राग्रा पर अपने और पराये म पापम्वयन वा पर माय पिता प्रमान पाम्पाय और एमा विदेशियों का सम्मको पूर्व मुखरापक नहीं है। परन्तु मि र मापा प्रपा । विध प्राय म्मगार का भिोप ममा पनि दुषमी। बिमा इससे परस्पर अपरा उपमर और अभिप्राय सिरोमा परिनामखिये गो माहारिया मैं पल्प राइविस nिt सौ म मायकमन्य मापुस्पोम प्रम। प्र०-बत् को म्पत्ति में कितबा सम्पपीत पा २०-पाय कोष पर और साथ रत्पति और दीपय रोये में हुए हैं। इसम सा व्यापक मी पणा भूमि में विद्यबीरिसे । इमाथि प्रपर पीपबामे पीर बदले मौर पर मीकि घर म एम एमा भर्पा जोमा मोबा इस माम पामाठ सा परमानों ने मिये हुए प्राम पर दो मम पापको स्पून नवीन पटक पनि भर पाक सबा पांच पाकी प्रक्दिो पर्वा तीन पसरस और रमजा होने से परिवी भादि पर पदार्थ हो । प्रभर प्रम से मिनाम भूमोडापि परमारमा के बारे म०-इसम पाव और ममता रोष भन् पाप ध्मयो सर्पयि पर प्रपितामय प्रबोकिरपीन पर तीसरा पीम्मिी पर मही, पौषमता किया पाचर पांच पता एमापसे गईमपणे सये पर रिस्त एम पाकि पिला भारी रोने से मारे। मामय में ही बातो मरिमें किस प्रेप मा। २.-यो क्षेप सप और रेप पीव परोपियरी स्थित माता मधेसमा गावि किमर्प और मासम्म पम मिश्र पर पी और परिसिपाड पसे मुसबमान ताम परम्न मर्प सोमपेपर्प स पर धर्म अप पर बर मनिपा पर भनि गायु पर मोर पापमय में गरी बसे आयपी +बम्मेदाहिमाम भूमिमा बेहोतिषियो।
सस्थामकार कि परमि पर है? वो ममतपे परमेपर सबब बसे ईमा कि र भौति सिमामे प्रसपा और रेव पाव भार मरची म मरोली माप माविण प्रपौर दिमाम पुत्र पम पारि परिसप्पा । परोपमा बाधा परे पहिले पांच पीएम है। टिमबारणको पी। बोत्स्यपबम्म समय में पिसी मन पर पी। तो "पुर मेसी की उप" और ये मम पापे । इन सवा भविप ना कियो “माको रवाहै इस रोपपते। सोसिसी की ये मयारा पविषांपुषम् ऐषा कर के भामा प्रपियो । मरे सो भमिशव को समम ममी मिप्या कापमा मसी । परमा विसथिरे परमेश्वर उत्पति मौन प्रबर से सर्व प्रात् प्रसपीसी उपमेयेम और रसीधाचार प्रषियो- सत्येनोप्तमिता भूमि ॥ में। । राम ॥ पर परामपचय है। (मन) भर्षात् यो प्रेमलायाप्प नियम की बात कही होता उस परमेश्वर ये मूमि पारिम और पप बोस पारप भि उषा दाधार पृथिवीमुव पाम् ॥ मामी भनेर बम-पी (ग्रा) पमोरगर किसी ने माप हिम्म स्पौकिमा ममी बाम । पाम् उस को पा पिरत न पा कि इससे परे भूपोबारव प्रवे का सामर्थ र में कम से भामा ! इसलिये सब हारा पूगोबरचय करने की सूप मम । उसने अपने भाव से प्रवियो को बाब लिम। परम्त सूरमावि पधारय पये पण दिया परमेश्वर मामी नही म-मेले मूगोगमे समेम मे भाव पठारोपण । 7.- प्रबन्त पापत पाम बरे १ भूपोल भी पार समुद्रमामे जबपोरेम्स मुल्ल भी पीसे भवन पामेवा सामने अपर मोड ५. पामात तुरत मी नहीं मम । परमार मोटर - पापक पद विभु प्रथम बाबर (१५) समामामा B प्रश्नाची में व्यापक होम प्रोपावभक है। बोपईसाई मुखमाम पुरविणेकपबाबुमार विभु पोता तो हम प्रा सरिक भारत की रम मसालकिगि प्राप्तिमी पारसी पाईप बोक पर आकर्षक पारितोपुर परमेघरबाबमा अपेक्षा पता रेना रिकामी पन्तसाल! मो प्रवन्त में पान मी मनु मम्मी भी हो सकती वीर मोमान्चो पाराम सीमा पर्वा रिपोपामा भी सराबोडनदीमा भिरेर काम समग्र वि. 1111पारम॥
भण्मसमुद्यास' भरय रोग ये समरि भोर मी प्रबोट जब सब ममुराप मानकर रोयो समरिमयी और एकसरि मिल गया तो म्मी मम्मी है सर मप्पेसो पमति गिमममम को सरगम प्रभारप और माता निग्र परमेपर इसरानी भी नही, इधये वो सब भगद मेरापी- स दाधार पृथिवीं पामवेमाम् • ॥ छ ।।।। पा पर पानी को पिम्मारि माहित बोसोपहर पा सपा सूपौरियसहित बोकौर पराधी प्राबर पारय परमात्मा प्रता बोगम सापकोसा होस बाबा और पारप प्रमेयमा प्र०-प्रभिष्पारि माग पूमतेपलि! 30-पूछे। प्र०--पितोगमी किसू पूमता चार पियो पारी मती । सोमवधिती पूमती सर्प पी पूमधा । इसमें ससम्म मानाचा २०-दोगा पापे सेपोलिया में शिकि- प्राय गौः पृभिरङ्गमीदसदन् मातरै पुर' पितरं च प्रयन्स्यः ।। पतु मम ॥ भाव पा मगोसाय सहित सूर्य, चरी मोर पुमचा का इसलिये भूमि मा प्रती मा कृष्णेन रजसा वर्षमानो निवेशयमस्त मत्यै च । हिरपपपेन सविता रघुना देवो पावि मुवनानि परयन् ।। जो मरिन भर्यात सूर्य गरिसको समयसम्म जोमर रमवाय सम्म सम्भवमान सबमबि मादियों में तम्सीप्रमियरमा भएर पो भय पर सब मूर्तिमा इमों में रिपामा सब मोम माय माय गुव म पापमान पर परिपि में पूमता रामणि मी योको मोमवार को प्राम पर मूर्य प्रमौर सो पर पोकमोमम्म प्रभावो- द्विषि सोमो भघि मिता ॥ मा भानु ।। म सपम्पसम पणित होता है यह मियादिनी मूर्यम्मी ममण्ठि । सिपातमावयव • भरिमें- अन् राधर पिणे मुतार ।। गोभीर पसे विसापक प्रभु भही प्रामा एक माम माम् न मुसमाय" पान १ fridgोपर्व रोम मा.
- सत्यार्थप्रकाश कि पिम्पादिबोकमर नितमा माग पूर्वसामपे प्रमाणे में पिम पर बिना में भर्मा मात्र में हो चा। यो में ! भात गण मन सम्मा मना मम्मरधि पारि मिटने असारमा रेवतान्मों में सामान हो । एमात् सब बाप्पावत में स्पॉइस होल ग्स समन पावर प्रात् 'अमेरि" में मठ होता है और माया में मस्त रोष पायदेख में गव होता है। जब प्रामांव में मन मिप मम्माबि सी उमप पासह म मम रात और मम दिन राज है।बो बोय मते है कि पूर्व मता मौर प्रमिला पहा पूमती मे सब साकिबो ऐसा होता भापत दिन और रात मे प्रति पूर्व साम (प्रमा) पपिषो से पास गुमा वा और कोही कोपर।सेot सामने पाप मे दो पुत देर सपा और ममे में बात पमन का समता से ही प्रमिलामने से पपापोम्ब रिख antपमये पही। मोर को पूर्व सिम मोरेमी नोतिर्षिणापित दी विकिपरि पूर्वमता होता वो पर राशि पब से इस राशि प्रांत साय को प्रसन रोखा । और पुर परा विषा मे मामत में मिक्स स्पम परम्मी पाहीय सन्ता । और मी विधी मती वहीं गित मारे । यी पाती भार यो एप और बोमप माप में सातो गयो मन भविमोबो नाचेपी काही कमी मरेका बबर से प्रपियो जिमि दी और नियों में सपनों को मुक स्पोच पोचे पयों को प्रशिकता और पम्मी प्रयु को पति होती। रोएवं महोते तो रात और ममोपदी पापाता । परिये एक ममि के पास पकन और प्रबेड भूम्मिों मन में एक पूर्व पता है। प्र०—पूर्व और GR क्या मतमोर रकम मधुप्परिसीपी! उ०म्ब मूगोबसोच और इनमें मनुभाषि माथी रवीकि-- परपुदीवध सर्व पसुहिकमतीपय सपासपन्त तपविदय सर्व बाम्पम्त माणसब इति । वाम राम ॥ प्रपिया गए प्रति ण, प्रभा पा चौर एवं इमाम मु सम इसखिये कि में सब पर्व पर मया बस्ती है और बाते । सिमरिये किस पर सौरपरिष इसमाम मुहै। परिवार प्रमाण पत्र और मात्र परम इसी मा महोने में सन्नी और से परमेलाम नापोगमा सोमप्रति शी मचा को स्पसक पाक गुम्ब से। परमेरमई मौसम विषयोजन भी होता बोक्यावये अमल बोकी में मारि परिहो वो सकती हो सकता। इसरिये सर्व मधुमारि पति म०-से इस देश में मनुष्यादि भी मेबसि मममी से हो मालपो में बीपी परिसरात मम्मसमुत्रास । २०-सामाति में मेरे हो सम्मा। मैसे इस देश में पौष एक्सी और पानांवर पूरोप में प्रत्या और पम्म पति ममी बोला। मेष होता है इसी प्रकार होमोअन्तरों में मी मेन हो । पात पिस जाति की मी पीठ मोठी मावि में घी ममको में मोहै। जिस पर प्रदेश में मेनादि अंपग्मी र प्रदेश में गोमतर में मी रमी बातिप्रामीही हो, यौकि- सूर्याचन्द्रमसौ पावा यथापूर्वमकल्सयत् । दिर्वपक्षिवीं पान्तरितमपोस्व ॥ ष में । । । । ।। (पचा) परममा ने जिस प्रकारे सूत्री ममि मन्तरिक और काम चक्टेिप पार्म पूर्व में रचे पे से ही इस मप मर्मात् इससी में समस पोमोमतरी में बनाये गये है। मेर विभिमा यही हो । म.-मिन बी का इस पोज में ममतसही मसलों में भी पायी। उ.-नीम। भैसे एक रामा की सम्पमा भौति सम देशों में समान होती रसा का परमाष्मा रामनार में बेहोसमीति अपये. परिम्प सब राम में पसी। म-बार और मसिम प्रमावि पौरपदापे माही। को काम अधिकार मी इष पर होगा क्योंकि सब लाना 7- रामपौर मम्म सम कब मोठे मापीर प्रय समेत पामेरापीमीष मौरपान पामेवा मम सीमाये बीमाकर्मपहारे पापा और बात पाम बारातो पाप सामर्म मी और प प रस पापीन लोग रो। इसलिये और कर्म भने में सकल परन्तु मोफस मोबने में पर की मासे परमा। सो सर्वधिमा पीपल और पामर पब इस मापे रिय अविध पम्प और मोष मिस बिल माप भार समुशास पूरा पा . ८ ।। रवि भीमायानन्दसरसठीसामिफत सस्थामका उमापाषिभूपिठ एमपुत्पत्तिस्थितिमतपविषयऽएम' समुन्नास' सम्पूर्ण ।। अर्थात् गोष4॥
अथ नवमसमुल्लासारम्म अप विचाऽपिपायाधमोजविपयान् म्याम्पास्याम' विषां पाऽवियां च यस्तदोमयर सह । भविपया मृत्यू तीर्खा विषयाऽमृतमश्नुते ।। पाप । म . यो म्मुम दिया और अविव सक्स को साव हो पाता है परिक पात् कर्माप्रमाणे पातु म विद्या प्रांद का मन मोरोस रोटी। प्रविचममा- भनिस्पाराधियुचानात्मनु रिस्पाधिसुचारमन्याविरविधा। बोप र साबवफ। सू। य पोयम् का नौ। यो पनि संसार और यादि में कि भाए यो भय व्यत् रेखा सुमा बावा पा रोगा सबसे मोग- परमेपो रेकोम पर पा सो विमा पनि भनम मान्य है। पापि भवान् मबमम स्पतिर } और मिप्यमापन चोरी प्रावि अपमित में पवित्र दिसरा मान्न समय स एस पि भारि पीना प्रमामा में अम्मधुरिमा पनि प्रोभा मागापार प्रभावित का भविष्य काम विपरीत पर्वाद पनि में अमिन और मिल में मिस पपशि में पशिौर पषित में पवित्र दुल में एक मुख में मुध भयमा में नमामा परि मामा मामा नाम होगा विष, धर्मात् 'पश्चि पथावत्वपदार्यसम्प यया सा विधा पया तस्वस्वरूप व सानाति भमादम्पस्मिविधियोति पया साऽविधा ।" मिससे पदार्थों का सम्म पोष होवे पबिधीर जिससे सबस्वमयाब परे मन में भम्परिवेप प्रवियमापी। मर्थात् कर्म भर रमप्ता पविया इमिरे किया बाम और बतर किया दिन सामम्मेिष नहीं। इसी से मन में प्राी कि निरम और परमेवर पासमानुपुत्र से पार कोई भी होता । म पवित्र धर्म परिमोपासपोर पजियो से मुक्षि पर मपनि मियाम्पत्यारिम पागबमोहिमपातका कम मिथ्यासव से परमी मनुष पवमान भी में रातमा पर शाम से दित नहीं होता। इसरिये धर्म मममममममममा मौर मिप्यमारवादि भी पोर रेखा ही मुहिम मापन म.-मुछिरिसको प्राय गो होगी। 70--योमपम पम में कामयी।
मषमसमुहास 1 प्र-और मोष समय से होता है पानिमित से! To-मिमिव से बोधि मोलमात्र से होगा दो कप और मुकिको मिरिकमी नहीं होती। म०-निरोधोम धोत्पतिर्न पयोष सायक। म मुमधुर्म थे मुक्त इस्पेपा परमार्थता ॥ पौरपदावरियम. २ को २ पासोक मामलोपभिर परीष मा होने से मना बोरा मोप पत्नम्मी भगाय में प्रापा बबाम ताप मोरय पायक पर्वात पप मापमा मनोमा म घरमे कोइना पावा और कमी इसमे मुक्ति कि जर मार्च में पाया वहीं गुम हो मुहिन्या? २०-बाबीब पेडान्तिोंचकावा पास पही क्योकि बीपप्रलम्स पास होने से भारत में माता सरसाप प्रा होने मममता पापम्प कर्मों ममोपम्म बायर में सता रसो साये समाधान करता दुख से घर ममता मौर मुम्की से गुमर परमायम परमपर कोस होना मुशिप्रेमी मोगता है। म-सम्पर्म और प्रमोबपी वाभियोग को पाप पुरवदित माफी मात्र तोप्याविभरि पमपामा निपी॥ २०-चौर प्रतापरा पा सको गौतोमा प्राशि और मोम नही हैबोवन मावि प्रापी ग्सको समापी को शीत रणम माय पी मोप होता है। प्राय मी बाप को भूत पिपासा फितु प्राय से बीमे पुपा पाती है। वैसे ही मप मौजा ग्सयोको सातु मन से गोक एव पुरा भोग और करो। गरिपाप पोत्रादिशद्रिों से परे समावि विपीभ प्राव मोष मुश दुबी होता हो भन्तामण पात मा परि पिच पर से पार सिप मिशन माप घर भमिमानकोला पर और भाप मामी होता है। उपथर मे मारने या सरकार वारे सबारी होती से प्रेभ्रिय अन्त:मरचौर मासम्म सापा मजदुर मो- को जीब मुगार म भोमी । जीबमोप मापी नही लिपो मोबाको पापो एक महिनीष पामाम्म है। मरेपणाचीयोमो में पिस होता पण सासीमा म-औष मप्रतिविम्ब से सस्ने सो समिमी मानिनी होठो मी माम मामरमपम शिशिर सस्तक साप अम्तमयोपापि । पन्तम्भप मापन - सत्यार्यमबाट । उ०-यह पम्ममको मोति प्रतिबिम्ब सामरा या मोवा से मुखौर पर सम्म यो मौर पर मोजो पम् पोतो मी प्रतिविम्ब पीहो मन । मम सिम सर्वपापक होने से उसम प्रशिक्षित हो यही हो सस्ता ।। म-रेखो मम्मीर सप बष में निराकर भीर मापक मानता भामास परवासी म सच मन्तव में परमामा मामान है। परिये इसको सिम।। 10-पापारिस मिमा ममापी ।कि मामय पर यही तो उसको मार से कोई मी मोम रेख सकता है। म-प्रबो पर बोचा और समापन पोचता भाषण बौवातामा १ म-योगमा ४०-प्रत्य १ एपिवी बह और अमित बने। उपमे बो भीखवा दोस्ती रेप विकलो कि पता ही बोल मोरया पोमाग एमिली से पूर्ण सहमपायु में मोमबती और उसी म प्रतिबिम्पर्पव में रोमामामहमम्मी भी। प्र०-भाग मेयारा र म मेरमामार में होने से दो मास और पन्तम्भब ग्पति के मेहमे ईमर और बीष पाम होता है। पि पारोबा है महाभय होमा। १०-पा मी गात अधिानों है। क्योंकि मामत कमी सिमित मही हो । महार में मी 'पहा बामो मारिमबहार होईपी माकपामत मानो। इसरिपात की। प्र-छ बीच में मची रे और प्रभावीप में की भारि मते से हीवित में तनाव मते हो पर पम् सर्वचापक पामारमा की सत्ता से साल मनि बोदा से यो। भिवे भौर भागत समय निजी बीपको प्रा मायने में ईरोप बहीं पता। र-पर मौतुमा पन्त सम पी, बोधियो समयमा प्रम anी में मनामान होम बालसावि गुण रात में होने होमो मो हिमालय होने से सवयीं होती तो मो प्रभाव और परिणीचमचरित बोगो निभनिम्तो बीच में मी पाप नहीं पर मया । बा पाराबही तो समयमा महीनोमोकि अपये सम्मको भूपाम भन्नाकरभाष भत्ता मा स्म से ही बप वर्ष बीभता को प्रताप बिचमा पाठ प्रकोपता और माता पाहम मोठ भवानी मयमसमास २३ होगवण पौर मिसाप्णा पापा पोमसापी पशि मोर मुग होता रामगा सो प्रधर सब परि पम्हार विगाहा नगे मोर मय मुक्षि मी भर में हुमा मगी। तुम्हारे मे समाए यो साता वो मिसी गीर में पूर्व रेख मुभम महोवा योकि विम प्रणब रेखा मामी रा । इसपिये प्रमोद बोर मा एक कमी पीठा सरा प्रपक.. प्र०— सब भम्पारोपमात्र भयंत प्राम में मनमारक मा सम्परोपमम्मीसमवस्तु मैं सब अपत् और इसम्पयारम प्रसारमये स रिमामुको पाप माना हायर पस्तव में सब प्रमो॥ प्र०-प्रभारीपाभमा कोम। म.-ौप दिसम्रपते। उ -माप्रपारिपत्र सन ! मतभाषाम्पिन दूसरा पापीमा प्र०-तो क्या प्रमहीनेभपये में उपत् की मी मरम्मकी 10ो मणको इसस क्या हम ! प्र-पो मियामसम्म वापि ममपठा। उ०-मी क्योकियो मम अपीस सितबभिवसरम। प्र.- मम पदीस मना करने और मिप्य पोखयेण्यमय कसित और मिप्याथीमा चमगी। 7०-बो इममे दयपति॥ परेसबास्तियो! तुमने समस्या सममम मममस पाममा कामियाजी मरिण । म्यागनुमा दुर्गति भमबही है। किस परिसर मूव देश में विपरमेम मिपम्पास चौर मिपाणी रिसे बिसीरमे कोतमधे रिप बर्मान् रामटे और मेस" इस भनी माय मुगारी परवाह स्प्रेिसर रो परम्मुना रिपरीत कडपो देपोम मिपास और मियानी हम्म पो पोष म। गाम मिम्मी मम्पपड़ी मिप्रमाणे मरम्मानमा सहभापिसम मममम मम्मामी प्रपा और मम्पनीमा ! apोमिम इम रियमोहनप्रतिपय प्रसार मीमियर माम तर म र मम्मे र माक्नामिप्यमका पियामे मग परपि पर मर को मी Ara, ileanम परिपिाएको भस र पत्र पपीयो.
૨૨ सत्यार्यप्रकारा २.--पापबार पीसोक प्रतिविम्म सर सर में हवास मुखौर पर माम मोर पुप मा । बोस पहोतो मी प्रतिषिय ही सम्वा । प्राय विराम पनाकहोने से उसम प्रविधिही नहीं हो सका। मा-खो, मम्मीर रूप में मिला और भापक मामय का मापस पाता है। इसी प्रम सप मान्तरण में ममामा मामास है। इसरिये इसमे बियामास मवे।।। र --का पारिश्रमिप्या प्रथापनाकियामत रही तो उसको मौत सेमे भी स्पोम देख सकता है। म-पओ पर मौमा भौम प्रधान रोपवा? ममामात बाबा तापमही। प्र-सोपचा। 30-प्रमण प्रमिला बम और प्रतिसाचते । उसमें जो भौबता दोस्ती रेप प्रपितामोकि पता हैपी बोरबो भूषण रोज्यौप दियी सेवी गम समु में मतीम दीखती भोर उसी मप्रतिविम्बर में तारे प्राण कमी नही। मा-सेयण मेकास और माम मामार महोते से मार और प्रताप उपाधि मेड सेपर और बार माम होता है। पारिमाहोबा महाकाय होमवा॥ १०-या मी बाल अधिों है। लॉकि पापर कभी विज मित्र नही होता। प्यार में मी पका बानो मारि मपम atोईनी म पोमपात प्रमो। इसलिये पात चैक नही। प्रल-मे समा बीच में मची मरे और मामय पीच में पी माहिमवेसेमिया में सन्नाव मते है तो बार परत सापक पामा सण से साभि से चोदा से सब रोमिते भाप्रत समय निमकी मे बाप को मामले में दोष नही पाता । २०-- मी मा पन्त सम पी, बोकियो समापी म पातमी में मप्रयमाण र पाच होतो समावि पुष रस में हो -हीरो मोकिमानाय होने से समायबोहोती तोमा बाइबर अभियो- परिसरोमो किम्वन्वित पैच में मी पारा ही सब ममता | पारा यही हो पाती बहीबमोकि अपने सम्मको भूबन मन्तम्भव साबचा पा है, स्वस्म से ही महीनो मन्तब बचना प्राप्त सोपता और ममोर यहाँ परवा पापम्यांमार अक्षयो नयमसमुपास १५ मोर में मौलिरा इन्द्रियों के पोसण गाममा मापही ते किन्तु अपने स्वामाकिर गुप पसे यमुनला चापीपा परी भमा पवाीब बच रेखन संग्स , स्वार के अर्थ रमा पम्प शिए प्राय संकाय विस मने समयमा निभय पनि दि स्मरण प्रवि पिच पर भरोभर्थ मानस मफ्नो स्पलिमे बीपमा मुहम सता चौपमा पर हो। जैस गरीर भाभार राप इन्द्रियों मोर और सर्व प्रवास अपनी किस मुचि में पब मालदमाग मेता। म -मनमौर मिनी। उ०—मुखएक प्रकार की शक्ति पात बम परम भय या पति मोह विण मिमा रमाह स्मरथ विमल चा प्रम देष संयोग दिमाग संबोwि- प्रथम सन पर्सम स्थपन च ममाप उमा शल इम २० (चौबीस ) मा : प्रम दुख गोपी । इसम मुधि में भी मानव को पति म भोग मला है। जो मुखि म बीचभमचा तो मुकि असुबकात मोमता ! और बो गौष माह की मुलि पमम्त महम वॉषि मुधिर की बारीकियों परम पालनसम्म सम्मक प्रनन्द परमेश्वर में गोवा में समा । रखो पेस शामिका में- प्रमापं पादरियापम बेहतर . बोबरियासती पिटीयमुलि में जीवन भीर मामाप मन प्रभाव मानवाप्रमात् बीर और मबसप परम्परयो नहीं मानत पम- मा अमिबिर्षिकत्सामननात् । वेदान्तर .."" पोर मिथिबाचा मुच पुप मम समान सुष्म शरीर पद्रिधी पोर पर पारिको मा लिम्माच मा प्राय नहीं । भाएगाबपद्मपविध वापरायणोव ॥ पेशवा ।।। भ्यास मुनि मुस्लिम माव और भमान इन दोनों को माम मपान पर मामध्ययुजीब मुशि में बना पा प्रविशन्न पापापरब तुम अमावादि भभभाष मारते पदा पधावतिष्ठम्त पामानि ममसा सह। पुलिस म पिमएत तामाट परा गतिम् । मोम पर रवि प्रसबयर मग पांच सामन्दिप और प रावी है और रिमविभय स्थिर राम रप पामपति प्रोत् मोषमते. यभारमा अपहपाप्मा यिरा पिमम्युपियाकोपिजिमसा- पिपास सस्पफामा सत्यसस्प सोन्यपम्प स पिरिणसितम्प मर्याप बाबानामोवि सबासकामाम् पस्वमात्मानमनुषिप पिम्पमातीति । ॥
सत्यार्थप्रकार मम मुक्ति पध फा यर्थन करते है। प्र--सटि सिनेम। 'मुशस्ति पुपरमपम्ति जना पा सा मुकिः" सिमर्म र बमा ग्मन पाम मुखिो। Ho--किसमे पर जामा! २०-पिसे रपे की एका सबबीच प्रो। प्र०--किसने भइफमते?" 70-नियम प्या भाते।। म-सिम मा । उसमे म०एम किसको पाठ होते परमावे! To-मुष मास होत और प्रा में हो Ho-मुक्षि और पम्प निपातों होता। 10-परमेश्वरको पाश पासवे पचम भविष्य म संस्कार, हरे सपनों में प्रबम हो और समापन परोपका विष पापात पाप धर्म की रि मने पूर्ण कर परमेम की स्तुति मान और पासम्म प्रमोद पोगापासपो विषय पर पाये और धर्म से पुकामको ति पर पब म सानों ने भोसमे पास पपाव विन्यापधर्मापर हो इसरि पानी से मुधि बने मितीत मात्रा को बारिम से कम दोहा। म -मुचि में सोनामपिम्मान पारे। 7०-विषमान रावा. मा-मामीपमुखबीच एक मित्र पानीमपाची होशप विवा 7०-चो मात्र पूर्व सी में मुचौर प्रवाहव मति मात् ग्यश्री समयमही शिन सम्बनलका जितार म-मुधोपमएबगारोपही! ०-नीरवा. मम्-भि पर पानात मोया है। 10- मालातिरमार मौलिक मारवा 07- गणपर मोच मपति स्परपन वामपति परपन् पधुर्मबति रसपम रसना मपति सिम् प्रा भपति मापामो मनो भवति बोधपम् पुधिर्मपति परिमचम्मपस्मारकर्षावोहारोमबति । वापसभामा...."
नयमसमुझास २६५ मोर में मौखिक परम इनिपोके गोषक दीपमा भाप मी रात कि परे स्वाभाविक शब गुव राया मुमवा पवार मात्र पर्य मना चालना देणारे संसा, साए के अर्थ रसमा पम्प चिप प्राय संभप सिम माय मम मियपछिए पनि स्मरण भने सिमे पिच पर पथप्रय भामम्प अपनी स्माफिमे मीणमा मुशि में बता र समात्र शरीर होता है जैस कौर के प्राधार भइन्द्रियों के गोबकरा और तमप्रसाद रेस प्रपनी टिस मुचि में सब पालन मग मेता। प्रसमे सचिर की और कितनी उ०-मुल्य एक मीचि परन्तु पम पम पाव पाया पति, मौल्य निम मिमा रमाए स्माय मिमय इपा मम रेप संयोप विमम्प पोजक, विम्यक माप सन एन स्मरण और पम्ममय तमा सब इस २० (बास ) RD पामय पुष बीपम मुधि में मी माननी प्रतिम मोप पता है। मो मुछिमें बीच पसप हवा तो मुकि पपुर मोमता ! पर मोबीच मात दीका मुधि पमत महास पोधि मुक्षिा की पाकिस्बों से एम पानमसाप सापक मपन्त परमेपर में बीच प्रभावन में रान्त । देवो मेमन्त शारीरिक सूमि- प्रमा पावरिरामेबम बेगन्सर . को परिसीम पिसीप मुहिम बीपक और समाप मन अपमानवामा बोच और मबसब पायरसी बाही मामी- भाव मिनिर्षिकरसामनना हार . मौर मिमि पाच मुख पुस मब के प्रमाण पूष्म गर इन्द्रियों पौर म्प भारिप्रेमी पिया माय माही मादशाइयमपविध बादरापणोम्व' । देशमा ।।। प्स मुनि मुक्ति में मार और प्रभाव इस योगों को मानते १ पान पर पामध्यपुतीब मुलबमा हबी प्रचिता पापापय दुग्ध भनामादि मममात्र मानते पदा पश्चापठिप्ठम्त पानानि मनसा सर। पुदिम म पिबति सामादु परमा गतिम् । . ।110 7 पर सास: गुर मारु पाँच कपि गौर समय रावी ? चौर इरिग विभव बिरामी मधे पामावि प्रभात मोजमते. य मामा अपातपाप्मा पिझो विमायुपियाकोऽपिजिपत्तो- पिपास'सत्यकामासस्यसइरस सोबएप्पस विमियासितप्पसर्ग म माकानामोटि सपा मकामान् पस्वमारमानमनुपिप पिमनातीति पमो में 1 । म । । सस्थामका सपा पर पतन देवन पपा मनसवान् कामान् पश्पन् रमत व एस ग्रामोके पा d दवा प्रारमानमुपासमतस्मापार सर्षे बोका माता सर्येच कामास सपारस मोकानामोति सरिस कामान पस्तमारमानमनुविच विमानातीवियां Eम सा। मापदन् मस्र्य वा पर शरीरमा मृत्युना सदस्याम्मतस्यारीर स्पारमनोऽधिष्ठाममाचो पै सपरीर प्रियाप्रियाम्यां न सशरीरस्म सठ प्रिपाभियोरपहतिरस्स्यशरीर वाव सम्म प्रियानिय स्परात: हामो•म ८ म बो परमम्मा अपवपाप्मा सर पाप मा पत्यु गोर बुध पिपासा से रवि समम्म सत्संग सीबोज और म्सबामने की इका भनी चाहिये। जिस परमाम्म सम्बन्ध मे मुक्त गाव सब बोगों और मा प्रमों को प्रसवाबो परमामा प्रेसम मोपसापन और अपने को परमपाता सो पर मुधि पास बीच पर दिख मेड और पर मन से सामी पे देसता यह होव एमा माय मता।मो में प्रकार मान् पसार परमारमा में सिर दो मोष पुष भोगते । बोर इसी परममा बो कि सम प्रमी मामासी उपासमा मुनिको प्रम परवाचे पिार पोगरते।रममे ग्बको मनोकऔर सबसम मम्स गोमात बोतलमा औपरम प्र होता है। और मुक गोब पूर्व पर कोरम माल्पमच सरीर मे मन में परमे में विचाते है मीकि वो गौर को पाकिसमे परिव महीपते। से इन्द्र से प्रसपति बेमाको पामपवित जनक पुरुष बाप मोर मरबपो है और बिमुख में बनी रोप पर मनु मुबी पोचौमो सरीर इस मरवर रविव बापामा भकिसान है। इसचिरे पाप मुचकर पुस मे सदा प्रहरी पाकि मौरविवारी सासस्कि समिचिोपोरो तरीरिक मुसालमा प्रम में हतारमका सांसारिक दुभ सर्व पीमही होगा कि भाकाम मा. प्र०-गौच मुखिये प्राप्त रोग पुषा माम माम दुल में कमी माते मही कि- न पुनराबत्तवन पुनरापत इति । प्र .. अनापत्ति समयावधि पात् । बारिक पत्र ।।। 1१५॥ पद परवा न मिवर्तम्तयम परम मम । म गी का समापि पो से विक्षित होता है कि मुधियो कमिसमे जित होम पुष समान में भी नहीं माना ॥ उ –पर बात मैक की वॉफिर में इस मनिष किनारे- नयमसमुमास फस्प नून तुमस्पामृताना मनाम थारु दुरस्य नाम । का नौ ममा मदितये पुनीत् पितरं प रशेयै मातरं च ॥१॥ भर्पय प्रयमस्पामताना मनाम चार देषस्य नाम । स नौ मुगा भदितये पुत् पितरं च शर्य मातरं च ॥ २॥ में 11 में 1-२॥ पानीमिव सषम मात्पम्तोम्य ॥ ३ . साम्प ।। सूत्र ५ मम मोम मित्र नाम पणि पाय न माशावि पदापों मन मेंबर्गमा देव मा प्रणलम्मी मम मुभि पुन भुमर पुमा इस संसार में यम्म देखा और माता तय पिता मन मा । उ -म इस सम्भवम्बस्स प्रमादि सदा मुक परमामा नाम पवित्र गावो हमको मुनि में जानम मुममम एभिषो में पु माता पिता - मम्मम्म में अम्म रेल माय मिहानमाया पो परमामा मुकिमा मना सपन स्मी मे इस समय अमुक गोली मी सवा राममन्त विषेर सम्म मुछिसम्मी ही दावा मिरर मुसिरामही हवी ॥॥॥ प्र-हस्यम्तपिमोसोऽपवर्ग । भर म । ५॥ दुसमप्रतिदोपमिप्याधानानामुत्रापाप तदनन्तरापापादपषग' । राम ॥ एवम प्रमात विसावा की मुहिमी पाकिमप मिमा शम परिण मादिराप विष पुरम्पमयों में प्रति सम्म और दुम्बा र यो सनिगहरे समोसा बिसराना रहा। उ.-पाशामक कि पत यम भयम्दामामाम रेम "प्रस्य बमस्यन्त मुख धास्य वचत" पातम्या और मुच इस मनुष्य है। इससस वित होता है कि इसका मत मुनया पुस । इसी प्रमाणो मी भामद शमनना चाहिये ।। म.-- मुषि - मी गार निभाता सोखिम समर - मुहिम राणा २०-- प्रामनामपरान्तबास परामूवान् परिमुष्पम्ति सर्प पा मुसक पमिवरम सामु र मुसि में भावममत- मन • पुब महाभात् मुटिमुरको मंगर माइसकी सदा पाकाम सात पीस मायने भेम्पु पो पाप मुमो भएमा एमे होम पों भक महामामे पार महीनों गए. म पवन परम्पस सखार्यप्रकाश 1 सवा एप पतन देक्न पषुपा मनसवान् कामान् पस्पन रमते । र पते प्रबोके वा पत दवा मारमानमुपासतवमापार सबसोका पाच सर्वेष कामा स सवारस बोकामामोति रिम कामार पस्तमात्माममनुविप विमनातीति । म RIN में सात मपवन मस्य वा इवर शरीरमा मृत्युमा बस्याम्मुवस्यातरीर स्यास्मनोऽभियानमाचो सशरीर पियामियाम्या न पै सपरीरस्म सतः प्रियापियोरपारतिरस्स्पशरीरं वाद सम्म मप्रियामिये सात बानो म गो पामामा अपातपामा सब पाप गए सामु, गोरु जुध पिपासा मे रहित समाम सासंबपी प्रकीबोर और गतीबाबने कोहमा यो चाहिये । मिस परमास मे मुख दोष सब बोकों मोर मा पो में प्रामवीबो परमात्मा से अलमोसाधम भोर अपये को समान वागतासोबर मुकि प्रम्स पर रिपोर पर मन मे भी थे देखता होव एषा स्माय प्रत्यायो ने मामबाण पात् पर्मनीष पामा में स्थिर हो मोर मुख को मोपमोर इसी पामामा मेयो सब असामी उसमें पासमा मुखिको मम मममेक्षिान् बोम करते है । उसमे वो बोकमाम प्रस ते । भात जो २ मास मत दो परम प्रता है। और रे सुख मीब एप पर फोरम मरम्पमपम से मन में परमेपर में wिat बोकिला शरीर पवेशव प्रसारिकामे पित सन्ते । इन से मयपशि 10 पामगिपत पुरन गिर स्यूम शरीर मरबमा और मिरो मुख में कमी होने से पर और मामुको बीचमो पर इस माव और शरीरादिक नीषा निसल्यानइसलिए यह की मुख और दुसरा Bot कि शीररित गौर भासपरक प्रावको मिति सी औरो ररित मुख औररमा प्रम में पहला रमन मांसारिक सुख दुलाल मी नही होता तु सदा समय में गवाहै। म.-सी मुहिमेमस होम पुनः मम्म मायम्मत में कमी आने नही?- कप पुनरापचत न स पुनरापद्यत इति वो म त मनापत्ति गप्पादमावृति पात् । सामारिक सूत्र ।।।।५॥ पद गत्वा न निवत तराम परम मम ।। म पो भो। एम मो मे शिव दाखिोलि निममे निकष हाममा मसार में भी बहीं बता ॥ उ.--पही पोलिमसनमनि बिसा:- ।
नवमसमुन्नास १६७ फस्प नून फेमस्पापांना मनामहे पाठ दुवस्य नाम । को नौ ममा भर्दिवय पुनर्दात् पितरं घ हुये मावर प ॥ १ ॥ अमेय प्रयमस्यामृताना मनामह घारु दुवस्य नाम । स नो मा अदिवये पुनर्दा पिचरै प शेय मातरं च ॥ २॥ । जवानीमिय सया प्रत्पन्तोस सप । 11 सूत्र ५. प्र--म योग मिस नाम पवित्र मा। जैन अगापित परायी मन में बर्चमान सा प्रशसम्म इमका मुभि पुब मुमाम पुनः इस संसा में सम्म देता और माता का पिता नपान माय?.. उ -म इस म्वप्रम्प प्रगति सहा मुक परमात्मा नाम पवित्र गाने बोमको मुषि में भावमा भुपम भितरी में पुन: माय पिता सम्बन्ध में सम्म म माता पिता परन मा पो परमामा मुचिम्पपल्स करता समस्थमी य इस प्रमय सम्ममुठ मारत हो समरा है अत्यन्त पिचर बाब मुखिमम्मी नहीं आता किनुपम और मुसिरामही रावी ॥३॥ प्र०-व्यस्पातयिमोसोऽपषग म्यबर - ।पा।५।। दुसम्मप्रतियोपमिष्याणानामामुरापाप तनम्वयपापादपवग: भा.म.॥ गाचप्रमन्त विदर मामा मुछिपवी बॉकिजप मिप्याकमा परिण पामादि पाप लिय दुरामसमो में प्रति सम्म में दुखाप रचय एवं पूर्व निरहो म मा तारा पिरासी। 10-पास कि भात राम प्रस्तामा प्राम हो । प्रत्यन्त दुखमस्यन्त मुख पास्प पचते" गुण तुमची पान मुबाप माणइस पति माइसप्रेस मुखमा दुस। इसी सपो मी मठ रामनरपे। म-1 मुलि भी ना पिता को मिलने समय तक मुदि में ब २०-- प्रसार पराम्तकान परामवान् परिमुम्पन्ति सयें। मुरारका समेत पापा पनि म मुजीब मुहिम में पारमा मायपुर मदानापन् मुखिरमा है मम मन। इसमय facीम पास मापती पापो से सारा मुक्तिो पण स्मे Gmi पएस मास से या महामो मन रेप पोस सत्यार्थप्रकाश म० होता है। इस परित की रीति से पपासू समम मोतिये । इपा समय मुछि में मुख मोमये म॥ पब मार मम प्रत्यायो अपहो मत कि विससे पुमा बम मरप मेंमीण ।। २०-पापस कमी नहीं मनी लॉबिन वो जीवस सामर्थ सरीराम पाई और पापण परिमित है। पुमा रसभ प्रभात हो सवा? मत प्रावनको मापरेशप्रसीम सामर्म और सावर भावों में नहीं इसधिने प्रयास मुखपी माम सकते । बिषो साभव अमित हैं सनम या निस कमी नहीं हो सका। मौरबो मति में मेमो भी पौर पौष इस संसार में न माने तो संसार भर भात् बीच निरक्षेप हो पाने परिप। प्र-मिल्ने मौष मुन होत रखने भर भने उत्पापो संसार में रब देवा इमरिपे विरोष नहीं होते। १०-या ऐसा होपे तो बीर प्रमिल हो गायोकि बिसी सत्पति होती रमा माप भरप हो नि मारे मतानुसार मुखि का भी विमा मुछि भमिल रोपई और मुधिोखाम में गुब्धा मौर मा हो बाम चौकिदा सम प्रतिक म्ममामी से होने से भी कर पाराम व रहेगा और बम विधा मुबममी कहीरो सकता। म कहोगे मन प जो मधुर मोतोम क्या माये । क्योकि एक स्थान परमपम दोनों में सोमपी।सेको मनुष्य माय मरीश पीता माल असो कसा पुच वही होगा और सब सभररस मोमये प्रो को होता है। और बोचर मत बामे कर्मों का मनन्त फर तो पायाब नानोबाब मोतिमा भार म सके गतमा ग्म पर परम्प अरिमामों असम । मम भाग्य पाचे सिर पर रख मन पर से मार धरने पजेमिन्दा होती है परब बाप मामबाब पर बनत पुजा मार भाषा परोबिचे मंग कही। और बो परमेर नवे बोल पम वो समय पर होते पपुलमालया बोकिया विमा बम धमभेष दो परम्पमै समोर पाप नही म कमी कमी रिया विमो बाता है। सबिनेटीमा किसधि सच हो मे पुषा भाषा ही मा । पोरेप मरम्मा से आम सरासर पहले बीसी म मचा मानवा! ससमे भान होकोमो म सरापर से इम्प्रो भन्दा विहाँ मपौ यही मला परतो भौर में बच दोबा पमा में अब मामा। प्रा-- परमेशर मिस मुख पूर्व मुवी से ही जीप मी मिल मुब और भी पेण तो मी दोष न पाया। मे नमसमुनास उ०--परमेपर अनन्त स्वस मामय गुप कर्म समाव प्रसिमिय पकमा परिण पीर कुत सम्पम में पड़ी AR सकता। गौष मुख होकर मी पब ससस अप और परिमित गुगर्म समापवावा? परमेमाने पाय कमी नहीं होता। Ho-ब एसाता मुधि मी गम्म माग सब इसभिम प्रवास -मुभियम्म मरण सण नही यकिनार (बीप मा) पर रमधि प्रार प्रपन प्रमितमा पमबहोती रतने समय पमेन्ट औरों को मिलेमन में गहना समान होना पयानो पात है? भावात पावेहोस भूल बचे पती पुनः एष पापों प्रो बब मा तप पुद्रभव राम प्रतिण औपताधादिपिये उपाय बना पर मुखिो विपेसीम प्रपा ! पेमा प्रापरतो मी बौन सा रपम्म बिमा बागी पी ही मुफिस बोरम सम्म में बना र तयापि रसापानमा बामपक: प्र०- -मुधिय मापन t! र -समापन तो मपम सिख प्रपद पर विशेष पाप-या मुधियान मुख प्रति दिन सिम्यमापयदि पप कमी समाज मिनबोर पुचमा परे सम्भाषणरि घमाचाय प्रवरप । यो कमे कुसम्मा मुबमा माठ बामग पप्रथम कोष धर्म समर्म स्पोकिदुम पायाचार और मुबक भोपाप मूब कम है। पपुलों के मेक भात माल बर्माधर्म कार्वन विम्म अरब में पारा और पीर मर्मत गौर प.कोयोमण्डिकरें: एक मामब मोवा मेम पन्त समुरल पिवीमप। मा सम्पम्प" विषम प्राप" प्रोत् मोबार में मौत या "पाय" जो मौतर पर माता समान बोवामिन पत्र और मैं रस पता 'साजिससे सपा पाच गाय और बप परम्म रोखा "पर बिमसं सब यार में परा भारि बीचमा पीपरा ममोमब" जिसमें मन साप मारक पार पाधि पास और आपला परिर्म इनिबा।। या “मिनमशिसमें पुरि पिच, भोगमा बेत्र वि और मासिम पे पर सब इमिया नियस बीच सदिममा प्रतारे पाच "नमपाको पिसम प्रीति साता पूर्व प्रामन प्रधिन और पसायम प्रतिपदेपाच कोपभातमी में गौर मय पर उपासना परमप्रति मम्मों को प्रता। तीन प्रम एक "" सरी "esi" और तीसरी मुम' २०० सत्यार्थप्रकाश तोल र एक 'स्पूष को पा सके। सय पांच साल पार सभिष पांच सूणमूत्र और मन मा पुरिइस पचरा सम्मान 'सुमारा" प्राा पासुम शरीर सम्म मरवादि में मोनोपसाब सपासपो मेवी एक मौखिक प्रबोदनो सम्म मनोगों से मना है। दूसरा सामालिना गोर गुप मो। पर दूसरा अभौतिक और मुधि में भी रहता है। इसी से गोर मुखि में सुधको मोबा। वौसा भार मित अति भोत् पापविदा होतीपमाविस्म होने से मना पिस और पप गायों बिकी। पौधा तुरीब सा मा जिसमें समाधि से पामस्वस्म में मन बाप होवे।। इसी समाधि संस्मरसम्म परमपम मुदि में मौ पावत् महायागौ। इस सब मेग पाल्याभो से चार प्रपद पौकिया सबमे चिति । विभत्सों से गौर सदी वोकिया स्वीस व मते कि मिरगा यही गीर सपा मेक सबबसारी , भोजपवार। मोई पेमाल पर चो मोबपी को रसको समोपवानी परितोकि बिमा गीर मे सप सपा गमको मुब व समोय - पाप पुरष नवमी महीं हो सकता । इन सम्मान मे गोब पाप पुरतो मी और मुख पुस मो अब दिवा प्रणे में मम इमिगो और पारमा मनोसामपुरम प्रादों में मेरा पपपपुर का में भगवा? मी परतो प्रवासी समय मौवर से बम, समा निर्मता चौरमों में माश पम्प मापदोती पवामी परम शिपाया काम भउत्सrat हो मुखि भो में पास होगा औरोपिपरामदुल मोगा." मरा मापन राम्" पप गोलि से मत्थमनसा दो उसमें मे सम्पर पर मोम समय लापसमा विलो पिसेरेम परम पापी गुपचतमान मे रामको पाजाममा पापा में पास में समस्या मे उपायामम्ता.. मपानीस मापन सम्पति काममा १. समय मे परमामा पन्नापजामामेरा मायामा प्रबन। इमराम धियम भितीपो याधिपरिरमा मदिरापार ममो में समा म जिम रामभयो पुलाममा पुरय सरिता भरिमा मुति Haus fuutiपन्न rNamefuunil में मापा start 0ो पर - मपमसमुपास सम साप और बोष में पूर्व प्रास पिन् समोपवेध महपिया बचों सािया। पम पमावान किएमाता । येषामिड पर एक 'प्रथम तीसरा माता है। पौष मुमत से दुषा तृतर मे सिखाप पाएमा अस मी प्रथा बी पगता मे बिना मुखिो साथम और मुखिो परे में मोति न राना । पर सापक और पर प्रबुन्य वर्षात प्रपों के पार धर्म प्रचाइसमें मेबो इन चार माधनों से मुकपुष्प होणारी मोरम अधिकारी होती दूपण सम्बन्ध" प्रम में प्रमिस्स मुहि मविपात्र और मावि याच प्रतिपाको बबाबा समबम प्रबिच प्रवा। तीसरा मिली सब बातों प्रतिपाइप षिष मा उसको मसिम्प विच्च बाले पुस का ग्रम शिषपो. चौम प्रपोज' च दु:खों में मिति और परमाननाम्स होकर मुचिमुख का होना पेस भनुबन्ध माते है। तरमन्तर 'भाजप" । एक प्रबोधिन रपरेवरच म मान देकर सुमध पितेष प्राविमा सुनने में सामन्त पान देना चाहिये किपर सब नियमों में सूक्ष्म पियो पर इसरा 'मनम' एपम्त देश में मेमे हुए मणि मध मिस मत में संसद पुषा जग सुपये समन मी बजार प्रोता रति ममें तो पाया और समाचाप सना । तोपरा निरिणामम" जब सुनने और मषन करने से बिस्सा हो बाप पर समामिल होकर सप्तको रेसमा प्रममा जिपमा मुमा था विधा पासा प्रबाही माम बोग से पेमा चौग ' माम" पाद जैसा पप सम्म पुष और स्वमात्र हो पैसा बापावप सब देना सदा मान मर्वाद कोष मनोमा नायक प्रमाण प्रापि माप मोद नारे अम अम्मिमाम सिप चापि रोगों में प्रवाहमा बायोल ग्रोत प्राठि पषिमता विध विषम प्रादि गुबोको बारपा (मा) मुजी मोम मि (सा) कुली बमों पर रप (मुदिता) पुरपामामों सेक्ति दोमा (ग्रा) रामानों में न पौधि और मरमा । भिम प्रति न्यूम पम्पम रोया पन्त मुमुधु माग भरपमिमसे मांवर मब प्रदि पर पास। रे! भर नपसम्म इसी स सबसम्म चौर मापाती किब मन त पर पाबमिटर दिसामुक हामी मधे पण इन्द्रिपा प्रप भाविक सत्ता पूर्व स्मापाचा परमय में प्रस पापों पच्छ पारपा जबर्ताव से पोपकमहोत तो समतोमर भभि मी भी हो सकते सत्यापनका भी ये दो बत् म बिदुल मरिमेटोwitter सन्मभनुमानसीसी बाम पेठे और बोपन्मने मागोपे में परमे पvat हो at this विया पापराविधानि पुल और Ara पुपम पवामता मोर विविध जपो मोदी और र पापापस्मर दुख सुख मे समेवर मी पसमा सण मसम्म हरे में भी परम्पर परी हो सwatta भापरि राम बोले मोबान से माखो भरने पर बोरे और पप पाया किसी भेमा राता चौर पिसी मेम करता। जिसकी को पसको परेपे परो ग्रेसरको मी दुपय पावासमा बही मो रसमे परे सवार किसी से। ३०-परममय निमामि म्पब समाप्रपाप मामी मता सपियर सीप भोर पकायोस्पापविममप से RAgad किन म भाव में सम्म सो मेम्म, ये मोम को समापे से एक्ति दोबाइसी ममा निमा बाबा ऐप भगे पामेधा पाखामकरण पिस्वमाल से पवित्र और मरीजो सम्म समय को मोन्म से मी म्यूम और पारिरित होगा Swarga वि पोरवा रम सम नि प्रविन भोरम ने विमा निमोष प्राविलित बहीखा सविर सम्प बदा मेसिनही मता। Ho-मामा बम ही सेविस सि जितमा रेशमा खप जिमखमा मय। T-ग्य विधामापुसार रोग समय पोका मागम होतो पो भापती॥ म.- पारी मुब मीनार पोप्रोभे जी-मेलिया साहम्मद सिर सम्बम में आपने भो पापा ममपरा में रममा पागार मा मा पर मालोजोम प्रकरणे पुल पर पाक रेमो और परे सिमा प्यमान हो र पार को मामले मे परमार HT Id 10 सपो Anाठी माती समेगा सोपोर मर गया, प्रामा बीमारी नायम रोखा बोन। +- H गरी में जो पता किरिया (सी) की मान्य कोप और भाग मरमसमुन्नास गणमान तो सेम्पो APR में इसका भरमार हो । सी प्रकार बम रामा समर मेमड सिौदे में सोता है तो मी पो बिद्रा यही पती मी मात्र पत्थर और मिकी मेरे बारे सर पर सोयीस महोमिदा माठी पेसे ही संत समो॥ 10-1 समम प्रविष है। या किसी सरकार से कित माया और मस सेकित साहमा बम तो साकार कमी मार मबादी और मार साहभर बन्न पते। बोसमा होता वो पानीमा बोहोर और समयमोनोगा। रेलोपक बाब पिन्, पुस्मामा मामा एम बी के गर्भ में माय और दूसरा महमखि सिधरी गर्भ में प्रवाहै। एक को गर्म से कम पर्षय पुष गौर में सब समय मिला है। एक बरसम्मयीन मुम्बर स्पम्बिकमा प्रावि से स्वाब पुति पेशावाय, दुग्धपानावि पथपोन मगत हो ।सहप पाया पहली तो रस प्य मिमी पारि मिधाम पर मिलने प्रसव रसिये बौन सा विचौम समानी रचम यमों में बाद से भाममोवा, दूसरे सम्म में व स्वर मौवही मिळवा पर पानमा परने में पा, बसेड़ा पापी से पाय बाता है भमन्त पाd स्म से रोखा है। नही जवा इमरिया विष पुस्स पाप सुबह से परमेश्वर पर दोष मत। परा से कि माँ के मुखारमिते 1ो प्रामे माम मौन होगा चाहिये किसे पामेन इस पम्प मिला मौकरियो से मने पीछे मी विटकोण समे मे और मिसको पेसमें मेन देन पुषः सब बीष अधर्मपुत हो समी धर्म वीमें।पाकिर्म मप्रमिये में परे। परमेय *मी पप तापाया तो पापमो में भव प रोम मन में पाप और पायो बामण। इसलिपे पूर्व जन्म के पुरष पाप के अनुसार समावसम्म और माल पूर्वजन्म मोहपार परिपत् सम्म होते॥ म-मधुप्प और मय पचापि सर में पौष एम्मा उ-म एम्से है परन्तु पास पुल पोप मरिन और पवित्र होते. प्र-म्पुण मीच पादि में और पवादिम मायके मीर में नॉर पीपुलचौर पुस्खमीर मचाता भातापही। उ.- पन माध्यतीक बब पापकता पुरुषम्पन होता । मयुप्प सनीष पदमीच गरीर मौरबम प्रषिक समापवर्म म्पूर्ण होता है तब रेव प्रबोम् पिानीमा गमिमता पौर अब पुस पाप राप वास मापारय मदुप्पसम्म सेवा में मी पुल पाप मम ममम मिल होने से मनुस्मारि मबी राम मम्पम विना मगर २०२ सत्यार्यप्रकाश अषिया सिवायगापामिमिण्या पत्र फ्लयारो पावे।। इनमें से प्रषिणा सस्म ममाचे प्रमा मात्र दिने प्राध्या से मियम प्रममा अस्मिता मुख में प्रीति गम्य, दुल मोतिष और सर मापामाजोपाइका सदा रम्ती में पा गरोस्वरों, माही पसुकुम्बास पमिश्रेिय मम्म। इन पांचों को पोपमाप पियान से पुमानको माहोरे मुखिोपामार मोगमा चहिये। प्र०-सी मुधि पाप मामते । सो मन्प मे नही मासा देखो औपी योग मोगिता शिवपुर में बुप सप में समा ईसा पौधा पासमा मिस में विधाये गो मागगरि चारण म भानात मोपमा सो मुसबमाम सा भासमान काममापी मीपुर बस पर पाकिसे पोपाई पोशोक भादि में मारे ग्राम की मात्र पाय पस, काप पारिक माह रोम मानन में एनेको मुछि माते । पौराहियोग (प्रमोक्य) परमोक में निरास (सामुन्न) बोरे म्यई सय माप म । सम्प्प ) मी ग्पासमीप देश में पातिमा बब मापा (णमीण) सबको समान ईधर- समीप एमा (साबुरब) थर से संपुष होना पेम मर की मुधि मानते हैं। ग्रान्ति बोय प्रयम होने का मोष समयते। २०-सी (1) मारा ईमाई () देय और (1) बौना समुहात में मुसलमानों की सपि भारि विपक्ष निरोपमपि । जाबाममापी मापुर में पान मी सपो मप मम्मादि पापीन परम्प मोग परमा माषत पदो सामिष नहीं। सेहो मगच और रियुके मस माति पजे पार्वती र समी के साथ पीयुसम्म भनन मोपा पहा पाम रामों से अधिक इवमा मिकिपा परमे पर पुषगरण सरा रामी । पापको रात मिासस्यो मोम पो रोग मौर दो रोग बारामा प्रभाव होती। और माविम पमा सार किमी गुमी पर प्रभर मुदिपीसो धमकर पता पचारिकों की माला सिरोकि विय मोक त में मरीब एसबिये मापील मुक्षि अमावाम है। मामाला सामस रोमे से सर उपके समीप सिने "मामीप" मुछि स्पा सिर । भानुम' 10 सब प्रभा पाय RR मनुफ्त इसम “मागुम्प"मुस्मिी सिमा प्रपामपिर भी समय सम्म पामग्रमा मम्मम्माये मंगुनसमे मामी मुधिमी स्म सिर। और दो पर प्रशारण मास्तिक मोप मामे से को में समिम परम मुहिमापतोच गदर भाविको मौ मास है। मुम्मा ही कि प्रभा भबन जिये मोप पिपुर - मेष भूप मे पापा भाnि .
नयमसमुहास २०३ मोपविता, गौमे प्राप्तमाष पाठ प्राप्तमात्र मीपुर माग कम, पोटो एक ऐप में भाम शेिष माप मोरे व समायों से पहों तो मुधि समान पाखिने मेसे (बरा) पम्पर मौवर पिकप हो। इसके समाव पम्पब में मे मुधि पौकिन एका होगा कि भीमपान मव बनायब हो। बोनाम पम्मति और मयसपमा। ममप पर बम्म देते हैं। मम्म्म एकीपप्रक। २०-प्रमेक म०-बो प्रकों दो बम और पसुकी पाठीमापायी यो। २०-ौष प्रसार वही इसखिये स्मरब पीराता। और मिस मन से सब भताप मी एक समय मेरो झन मी साता । मया पूर्व बम्म की तो पूर गरे पौमिरे इसी में बम पर्भ में बीच प पौर मा पनामा पाँच वर्ष से संतकबो मम माया बहीं कर पाता ! भगत व स्पा में पुवाम्मकार प्रमा मगोबर मसि पर्याद मा मिना होती है बापत मावि महम म मलों की सन्ता। पर दम से कोई ले कि बारा वर्ष जेल सपा महापरिव एक बजे पर पायो मिका में तुमसे चकिया पहारा मुख बाप बस किस किस प्रमा प्रपा और ममम या विचारा पारा इसी बरीर में ऐसा तो पूर्व समचारे स्मरण मामा मामी और दो प्रभाव नहीं होगा। इसी से बीच मुचीमही तो सब भन्मो दुस्मों से देवरचित दोन मरबातोपूर्व चौरममा भागमा मे दो मी ही गार पता कि बीवनमाल और सम्म भास पाखराब पोपी नहीं। मा-रीब को मात्र ही और बरसको परा देवासो मेरमा सुधार बहीरोपमा सकिन रमोशाकम प्रमुखमम किय पसीपहीमो म पापमों से बर। ---तुम परमाते हो? प्र०-प्रमादि समाचार प्रभाकर र-दो तुम मम मममम, रि, पिण विध मि, मूसा पारि पुर में सम पूर्वजन्म म साथ ही से एक और कपकोई पो ग्राम विराव भाव माराम at और परिवार मो जय सम्बा रपये पिप्प पर सोमस पर गादि रोग होने से भय मी सपना पो कि मुझसे कोई अपम पम जिसमे मुझे पा रोग • भयो 'परम" में २०४ सत्पार्यप्रकाश से ही समय में विमुख हुन पाय तो पानी को संगम म भनुमावलीही बाब खेते ! और बोईसम्मको भागोने परमेम पानी से सकिन्न पाप से एक्षिपादि विमा मिश्रित पुस्खोल पाना मौर सिवा सक्यों पी पीर जन्म पापपुरम मार स मुबो देखे से पामेधा पावारी पचमत् पौ॥ प्र०--कबम्म होवे मे मी पामेला मरी तो want बोपरि रामा बोने सोच से माखी अपने अपन में बोले और पर किसी प्रेता मावा और पिसीमा नसावा। विस्की दो पक्ष रसको प चाहे ये लो ग्रेसा कोई भी एपरा पाव भाषेपमा बहीबो उसमें एक्सरे पडेपाचर किसी। 7०-परमामा विमरिमेन्सर पाहतमा मन्त्राव कमी महीकरण पचिपा मार मौन बाबोभापनिममे पानीमही से माखी बुधि बिना मार्म प्रमान में गाये गये प्रेम्प को भाये, पषोच को बम पोम्ब को बाये पे क्वि होता मी मार दिया भापोममे से पर रोष खगे परमेम ससम्म काम कर भारपोवापि स्वमाष , पवित्र और न्यावकारी है जो उम्मच समाय काम मे वो बयपबायपास से मी म्पून और प्रतिनि हो । म इस बप बिय पोम्बता रम पम किसे प्रविण मोर पुकाम किये रिमा सरेसे पवा विमान प्रतिषित पी दरोगा इसलिये ईबर मम्म पही काय इसी में किसी बीमा म-परमारमा मथम होम विससि बिवश देवा विधान देश और सियाम भया स्वप्रम। उ.-उस विचर जागी कामुपार पोखरा भी जो पम्पयो पोपी पपरापी मायामी म-पोषोय मे पहा ही मुबलीको चिन्ता और बोबो-मिी परमपहिराम में पास सपने भो गोप मपये ससे पाचन मम्मामरी में रणब में यह मामा मोरे रसको साम्य रेपम भवानीपोप पाकियो पुल पापम पएक पानी में भाममा सौर परे पिसे पतिर पर सारे पप्पमार होते हुए बने में समरे पोपन निरमा बाम एम समतेपरी ममती माती से. पारभासाणे साज माय पोरभावाममोम माण मरकरी पा सम्मी हा ग्यर यावेमरिया मोकिमाइमिया (ख) पासमार मरिररोगाप्रम भागारमा पीपा साये स्वप्न और मम सोमवमा सो पासर पार्ने पाते इस मप माम म पो बसे।बोपमा गरम मुरथोर नयमसमुहास २०५ म राम यो सेम्या वसापर में बनायें और रेभार पैसे से । पीमा बन गया सुमर कोमट मिकी में सोता। वो मौण द्विानही भी मार मार पत्पर और मिझो गोपीचे सर पर सोयीसो रोपिा मम्ठी है ऐसे दोस समको। २०-मह समय मशानियों को।स्य थिो सामान बित मार मस और पार से में कितू साभर मग दो मामा कमीमार समपानी और मार साइभर पाप।बो मुबाएत पावर हवा हो भी राम बोद मीर और चमकानी गरेको एक और पिल, पुस्पामा मामाम् राम सपो मर्म में मध्य पौर सय माणि सिगर्म में भागी। एक कोम सेरेम सण मुख और सोभे भव र मन मिखता है। एक समय मुखर सुम्पिन पारि से पथ पुर से भाबरमुरबपाशादि पप्पोम्प पास हो । पप पीना पता दोग्योपाम मिमी पारि मिशाम पो मिता। उस मशिनरसिमा मणी चम भावों में से प्राममहोय, सरे मम्म में मेवा स्मविपेपर मी नहीं मिता बप पीमा पाष पर में प्रपा, पपेक भाविप पीय बाता मामय मा स्वर सेवा ईनहीं पाता, इमरिमागविध पुरप अपने मुबारक हो से परमेवर र रो भाता है। परा से बिना किसे मोरे मुग व मिते 1ो प्रारमहरम मोरोग परिने सकिने समेत समय नियमों चरिuttसे मरे पादमी जिसको देय रमन में और शिपको मेरे पास में मेज रेप पु सर और पपरोसमे धर्म में क्योकि धर्मप्रमियने में । परमेपाहाय वैपी उसकी मापी माप हो पापम्मी ममममम में प्रपरि पो साम। पटिपेर जम्मा पुरष पाप भमुमार मान सम्म भी बचाव व्यायाम मानुसार मित् सम्म है। प्र-मनुमा 4k - पचदि परीर में बौष पम्मा भिगति उ--और wो परन्तु पाप पुस्स पास मरिम पवित्र हो। प्र.-मनुज मनीर परि में और परिम मम नाम पीमपुर सीरम सब पापी Tr-th पाय माता सरासमा सम्पूर होता मधुप मगर पपी मोर पोर xnपमै कि पूरा पिाणी मिरा भर जग पुल पाप गाम तातर मामर ममुपायोग है। इसमें की पुतार म ममम गिारे में मप्र में कारय ममम मार पाणी २०॥ सपायमकाय भाममी पोहोवे। अधिक पापापी मार विधीमा पाप पुसल ये से भाप सर में चार लो प्र मोपल सि मी मम्मस्व मनुनौर में पानी पर निसमा उसी पनाम 'भु' और सौर साब लोप होरेसका 'चम मौरबोक्या सब पमान मात् साहसपा मे बोकि "यमेय वायुना" में निकिकम म प प्रमाण श्रीपत बम नही । इसम विस्यमयसबाद सपा में मिली। पाव चमचमात् समेगापपुस्पुमा सम्म तापा पर बस पल मौरक्षिबारा परेर में री मेरया से प्रति होगा। प्रविम मावीमा गर्म में शिरीर भाव मा पर माता बोकीर भाव से पोम्म करो वो वर पारदम बोन्म कर्म होतो पुल पर में मत मता और नपक धर्म की सिति समय की मगर में पायो रची पास होने से रोता या मोम मरण में पमा रायाम कमापापना पर मेमो मुदिमे माही पन्ना नोकि म मारिमा मेस्सों में मम सम्म और मुधि में मन पन्त सन्म मरवयों से रहित बाम गवारे॥ प्र--मुचि एकम में होती।भकम्मों में! 10-सबसम्मों में वोषि- मिचत दयाम्पिश्यियम्ते सर्वसंगया। चीपते पास्प कर्माविवस्मिन् र परामरेम ॥ अब इस बीरबको समिपम्पी परवावी संब सिहोवे भर गोम्स होते है तमी गप पामामा जो लिभपणे भारमा मोठरी पार पापा उसमें विकासमा प्र-युधिम परमेल में बीष मिस याताया। +--पृन्द पो हो मिड व तो मुठिमपुर भोपे !ी मुदित सामने पर मिलतामा पमुचि तो वही बिपाना चाहिये परमेवा भावाला रचम धर्म पग पोपमा पूर्ण सरसावन मबीयही छिपाम। सप प्रमममा प्रा यो वे निdि गुहापो परमेम्पोमन् । सोऽनु सान् कामान् सा प्रक्षया पिपमिति: चिरी ममममनपी। प्रयु 41॥ भोपाबमा पनी पुदि भामा में स्थित एम व पबन्य कामसम्म परमात्मा को नाराम मापसमय में सिमाहोगे उम विपति" प्रपतरिया पार पर मो में प्राप्त गरे •पाए ।
नवमसमुपास पर्वात मिस २ प्रामम को समय प्रता! म्स १ मापनको प्राप्त पत्र पही मुहिमती प्र०-वैसे हान किन्न सामरिक मुखपी मोम सम्वा को मुतिम विपशरीर मानन्द मोग गोमा ! रु०--इसका समापन पूर्व म पाने पर इतना अधिक सुमो- सांसारिक पुच गत मापार से मोमता से पामेबारे पापार मुवि भाषदको बोसमा मोगा।पयुधबार प्रभाव पकसमें समयूमता र सब से सब पीरेन्ता प्रब मुले मात्र मिता मार मिया मेम से देखता हुमा पर गोफ बोरों में पोत सिमे पे मोकपा और दीदते सम सब में माप सब पानीको बो किग्स मामले प्रमो देखता है। मिना सन अधिक होता है उसमे रतना ही मानम अधिक होता है। मुछि मापा निर्मब होने से पूर्व जामी होम उमने सप समिक्षित परायी प्रमाण मन् होला । पुदिप स्वर मिपपतया में सम्म पुरविणेष मोग भन्म परमवा। मुखमयाम है "स' सुन गप्पति परिमम् स सग" "मतो पिपरीयो एचभोगो नरक इति" जो सांसारिक बापामा वर्म और जो परमेम की प्राप्ति से पानीमा विशेष भी॥ सब मीच समाप से मुख्याति प्राचा और मिोम होन- पर पान्नु बब तक मर्म पीठे और पाप ही कोते पचकारने पुचमिवर दुल असम न होगा कि मिसभ कमाय मोत मूग होतापामाम्मी पाही हवा जैसे- चि मूरे एचो नरपति क्या पापे तीणे पुन मापति । असे बरबाने पापा होणारे पाप पोरने सेना बारेचो ममुरमति में पाप और पुलपत ममा पति-- मानस ममसेवाममुपभुरके एमाऽशुभम् । वाया पापा कर्म कायमेव च कायिकम् ॥ १॥ शरीर कर्मदोपैति सावरत नर' । पापि परिमगा मानसैरम्स्पतिवाम् ॥ २॥ यो या गुणो देहे साकस्पनाठिरिष्यत । सख्या हदगुणम्प परोति परीरिसम् ।। सत्वं पान तमोऽपान रामपो रहस्मृतम् । पता प्याप्तिमपटपां सर्वभूतामित वपु तर पत्नीविसंयुछ फिशिवममनि सयपत् । प्रथाम्वमिम शुखाम सब पधारपद । ५० यतु बसमापुष्ममीविकरमात्मनः । सोऽमवि विद्यास्स्स हारिपरिनाम् ।। पाव मा - ૨૦૧ सस्थाकाय साममा समेह, बब अधिक पम्पमा पचति समज बिमामा पाप पुल्प दत्त राने से मनुष्य शरीर में माता पुलो मा मोगमपि मी मम्मल मनुण गौर में भी अब मिपावर गपी प्रनाम "पणु और मानव संयोग होवेमा 'समसार बौदा तब पमान भान् मानु मेर गोंकि "पमेन वायुना" मेद में विद्य। किनम पाम बम बम्मान भरिक्त बम महा। इसका विशेष सम्म मरम्ममा मुहाल में मिले। पम्प धमाल भर परमेम रसबीच प्रापपुल्यमुपर मोमाज पा, बसपा और बिना परेशर में मेवा से पति होता है। मणि रोम मया दाम मर्म में सिर पर र बाहर माता को पीर परपमरे पोगो और पुमोर पाप गोम्प को पुलोर में प्रवेश मारे और एक गर्म सिति पमर मी पो परीर में पायम रमा माप बेरोवारा सम्म माय मलाल पसारा किया रचम कोपासना सब प्रो मुडिको यही पता वीकि राम प्रमादि भने से मनुषों में सम पम और मुलि म मामा पन्त सम्म मरपालों से सीव भाव म पछ॥ म-मुहिकमाम मोवी मेकामों में। मियते वयन्पिरिषपम्ते सर्वसापा। पीयन्ते चास्म कर्मापिस्मिन् र पराम्परे । मा. जब इस बीपी प्रविय व्ययम्मी पनी सबसव काम प्राय हो है हमारा परमामा बोकिपये मम्मामीवर भरपर व्यापही सम्म निवास मध म-मृति में परमेल में बीप मिला t! 7-4 बरे वाकियो मिरच तो मुशिमा और बोरी ! और मुकिसिमे पानी सब मिनारोगाम मुधितोपा निबारसमसमाचार व पामेम की महापान न सम मोपपम्पास चम्पपासमारपी मुवि भयो। सस्य वाममन प्राद पो वेद निति गुहा परमे प्पोमर । सोऽश्नुते सर्वाम् कामान् सा प्रभवा विपमिति, पति प्रसादही। प्रा ...॥ बोजामा अपलो हरिर मामा में मिल सस साल और प्रसन्न भामरस्लम परमात्मा में वापसीपसमलम्प प्रम में हिने सा विपरि" भनन्तयितु स साप प प्रमो में पास होता है •पोदयो ।।
अपमसमुशास' २०१ बम प्राप्मा और मसपुर प्रधम्य परिव विप में पर रबर गमन मामय में पपे सर समयमा कि रसोगुण प्रसन, सागुप और तमोगुप समाम॥॥ अब मोहपात् पांसारिक पदापों में सम प्रमा और मन हो पब पान और मन में सरिक पये किरपा में भाम, पिता पीवाने के पोधो सब मिमम ममम्मामीचे किस समय मुम में मोक्ष प्रवामा सत्याप तय गोगुष प्रधाम.॥ इम टीमो गुप्र रचम मणम पर मिहामोरष रोगा। म्यो समापसेम || ।। बोलपम्पस भोप, की गरि, परिम्स का इन्द्रियो मिस पर्मच्मिा और प्रथमा मन्aिn होमपी प्रलाप परोपका सप पत्र और तमोगुण भन्नाव होवार भारम्पमें मयि श्ययग प्रणव को पर मिरवर दिलों में मेष में पति होती वर्ग समपाक रमोगुप चापा से मुम में ॥ पर तमोगल सराप और दोनों भाव दयावर मसान्दोग भात सब पापों समूहळा, सामन्त पाप और ना ये प्राण पर भरोमा, सिम्स प्रत पो और मि में दाय मिर :पसिऔर एममता पण सिनो माहोने हमोगुण पिसन कोमm. बनास अपय मानिस मरे म मा मेरो इपाये पर परोस हो तब आयो कि मुफ में प्रार मोगुण ॥ लिए इबोक में सपा पुणा गिनिज विवा होने मैं मी पाय मारपारि दामरगामी दोपचार समा में रजोगुबाu५॥ और मन मपमा अपने को पूरा पार, अपमानसमे पk निम से पा सार धर्मानपीपीए दब समावि मुफ साबमा वमोगुबमाप प्रम गरम मखम्म पार पाएप पर धर्म पेय प्रमाण मोरगेगुवर पो पाषu अपरिगत रोषासोपविणे- रहस्य सास्तिका याम्ति मनुष्यत्वा पम् । सिवाक्सा बित्यमिता विपिभा यति । ..॥
सत्तामकार पच स्पाम्मोहसंयुकाम्पल विषयात्मकम् । अश्वमपि समस्तदुपधारपेत् ॥ ७॥ पपाषामपि वा गुपान्य प फमोदयः । मम्पो मम्मो मपम्पमत प्रवश्याम्परोप ८॥ दाम्पासस्तपोपान चामिन्द्रिपमिप्रा। पक्रिपारमपिन्वा च साविक गामाम् ।। प्रारम्मपिता पर्थमसत्कार्यपरिमा। विपपोपसेवा चाजन पास गुरुतरम् ॥ १०॥ होम' सपो प्रतिको मास्तिपय मिप्रवृत्तिता । पाधिगुण प्रमादम वाम गुरुमसम् । ११० पवर्म वा कुर्दमकरिव समति। कमोय बिग सर्व वामसं गुस्खमम्म् । १२. पेशाभिम्पर्मपा बोदेच्यातिमिपति पुफलाम् । नवगोचस्पसम्पन्चौ वशिय तु गवसम् । १३ ॥ परसबतिवातुं पम सबवि पावरन् । पेन तुम्पति बारमास्प तसत्गुपबलपम् ॥ १४ ॥ तमसो पर कामो रस्सस्त्वरप्यो । सत्वस्य धर्म भैठपमेपो पयोचरम् ॥ १५ ॥ "ाोक।।१५-11-16 प्रोत् मनुष्य इस अपये मम्मम विकासमा जामम रचम समान समय मम और नि परेप मीनिमय बाये कि परजी मर से जिम गुम - पाम माग्यो मग, पाथी से निको पार निभात मुख मोमता है." गोबर शरीर कमी पापीयमन गों को मार पारिरमा रसादि साराम यी मेरे पाप मा से mix एपरिण्य मन जिदरमा मे मरिसर मिता॥ जो गुण हम पर अधिक से बस समय को अपने प्रहमदेखी॥1॥ का प्रमाण सरायरोसर समय राण' मपामा बमे दररोप साबमा पारे वीम प्रावि पुष प्रय संसार में मारोमग.. रमन कि म म माथि भिमा में प्रसन्या मन म्यान्मस एरमात समावि मयमोमुख वय वमोगुपय॥॥
मपमसमास ૨૨૧ यो रज्म रजोगुणी मान्य (गया) गुम (परित पाने R) पप (भमा) धिानों सबक और अप्सरा मा बाम सपणी भी यो तपस्सी पनि सम्पासी एपमा बिमानसामेबारे सोविपी परम मात पेपर मनुषोवी रण प्रथम सत्गुणमेस वाया ।। यो मप्पम समगुरु मुख मर्म मतगीर पर पावित पिन पर विद्युत पानि और प्रविण साता एक ली और ( साथ) मसिरिसिये भबन भने बाम्प अभ्यापक प्रगम पाxt. बारच्म सत्वगुपयुको रचम ममममा सब दोन विपमा सप मरिम्म पियका ममम विविध विमामादि पारी को समप्रमेहम पर्मिक सचम इरिसुच मोर पम्मत जम्म और प्राविविध सिरि का ॥ - बाइभिप बाम विस्य धर्म काम धर्म प्रमेपर प्रपिान् १५ मनुमों में बीच सम्म पुरसम्म सम्म पानी ॥ इस पर मण म समागुणयुत पा से जिस प्रकार सर्व जीवनवा सप्रेसी र प्रम दता। जो मुष्ठीये गुकानाव प्रचार सयों के समादो में ममम मालागी मुक्ति का साभरक- पोगमितपत्तिनिरोध । १॥ पा ।।१॥ तदा प्रसरूपश्वस्थानम् ॥ ॥ पे पोगणपसम्म सूत्र। मनुष्प रमाप समागमुकम्मा स मन मेरोयरममपुट की ममी मनसब सम्पमुकदो पाय ग्सप्रमियम एमप भ प समाप्मा पर चर्मपुत कम इमले मप्रया में रिचयरा रमा विमत पर मोर समापिका रोना ।।1।। जर पिच एयर विमाम सब प्रामसस में सापमापति होती ॥३॥ इपी सान मुलिपि - भप विविधयुष्ास्यम्वनिपुतिरस्परसपुर। पर साम्स(।)मागप्रमिक पर्षात् परसम्पपी पीका माम्भिानिक सर एपिएँ म किन राय, भपिसिना प्रविधि परिणाम, पनिणात मब इमिसको पाना स इस नाम मुदि। माम पर ध र म्यामलमnि fun इति धामपानसरसतासामिएस सस्पषमपाय सुनागविभूपित विपा-पिपासम्ममोएपिम्प नवम्म समग्रम सम्मा।
सत्यार्थप्रकार सापय कमिकीटाम मस्या समकमारा। पापम मृगाव पम्पा तामसी गति ॥२॥ हस्सिनम तुरग्राम पदा मोम्पाम गर्दिता। सिंहा प्यामा पराहाम मम्पमा वामसी गति भारपाय सुपर्णाम पुश्यामेष दाम्मिका। रसिप पिचावाय वामसीपचमा गवि ॥४॥ मना मना मटार पुल्या शमवत्य। पूर्वपानमस्कामसपम्मा गसी गति। राम परियामेष या चैव पुरोदिया। पादपुरमथानाम मभ्पमा पासी गठित गभर्वा गुपका पक्षा विबुधानुययम पे । समाप्सरस' सर्वा राजसीपमा गति वापसा पवयो षिप्रा प प पेमाविका गम। मशवाणि पदेस्याम प्रपमा सात्विकी गति IA फम्यान अपयो देवा पदा म्पोवापि परसप । पितरमेव साध्याम दितीया सास्थिफी गति प्रया किस्सी धर्मों महामप्पकमा । रत्ता सास्तिकीमेठो गतिमार्ममीपिणः ॥१०॥ इन्द्रिपा प्रसंगन धर्मप्यासेबनेन च । पापासपान्ति संसापनषिदांसो नयधम्म' । १९॥ म १५ो. जो मनुष्य साबिक रेव प्रवात पिन, जोरजोगुदी की मनम मरुप भौम जो तमोगुपबुखानेपाच मविप्रेस १॥1॥ यो पसन्त मोगुबी रेस्लम परिमि और माल सप कपस पठ और पगम्मत ?।। यो मन्बम मोगुनी हली प्रोम या संप निम्ति भनय सिंह भ मम भाव समोसम का प्रस होने है।। चारचम क्मोगुती जप (बोकि पिच रम प्रभाव पर ममुषों की ममा मत) मुमर पी पौमिक पुर प्रांत अपये मुत पिए प्रपनी मम्मी रास मोरिसक पिडार सम्प्रमात् भरि ममता और महिम राम रम मापन॥॥ बा अपम रसगुली मा भर्नाद वपण भारि से मामले प SR मावि में पाराले मश भाव भौम प्रदिप प्रो बसपारपासमा राम राना पारि महरामधारी मुसो मच पाने में भासदारसे नम्म मौषमपप्रप्र॥ बामप्यमरमगुपीपलपरा, पशिपायल मोरादिव पक्षिा मगरे,प्रमिया (पपपपुर विममममम पात है।
मषमसमास जो गच्म रजोगुम्पी फर (गाय) गुम (परिक बनने दम) (आमा) पिनों के सपा और प्रसरा प्रमात् रा रचम मक्सी में मम सम्म पाते?... बापस्सी पति संन्यासी पानी पिमनपानेयमे भाविपी और न प्रयावसापक मनुष्य हाती का प्रथम सत्माप कर्मप्रसाना ।।। दो मम्मम सत्यगुरु गुरु मर्म भीष पर्व पदाक्ति पान पर विभुत प्राधि और प्रविध माता रानी और ( साप्न) प्रथसिरिलिपे सेवन करने योग्य प्रापक सम्म पान. बोरम सत्पुटो रत्तम म प्राय सब देवा सर्वच स्सिमन सब परम विलापानम विविध विमानारि पो भनामदार पार्मिक सम्म दुरिपुष और सम्पद अम्म और मतिबपिन सिरिस ॥ मोहबरमय सम्म बिसय पर्म काम भधर्म प्रकार पार १५ मनुष्यों में मार सम्म पुर . दुश्वम्म माम को पात ॥ इस मम स स पर तमागुषपुत का से विस १ प्राम जीव मला रस में उसी र मास प्रस दम्पहै। जो मुख होवो गुवात भाव सब गुयों समानों में बम र मापागी मुहिम सापसमें बॉकि:-- पोगमिसतिमिरोध ॥ १।।। तदादरूपेभ्यस्पामम् ॥ २॥ पा ॥ देपोमग्रास पतपासा । मनुज रजगुण वमानुपपुर पमो समय को सरसगुपपुर मोम मी मसरोकगर सभापकहो पाय ग्सममियम पम प्रात् एक परमामा धर्मपुत्र कम मोबयान में पिका मारमा मिस पपाद सब पर स मनोविमरोमम॥ परित मन और निमार मारोतम्स में या की बिनिती॥२॥ हमादि मान मुलिसि पी- अप पिविधामास्यम्वनिचिरस्यम्ठपुरा पर साम्स() पमा मनामिक पर्पा मम्मपी १ मधिनिरामर पियो मनि म्य, पापिकि जो मभिपी पतिम परिणाम मम दमियों परनामे मारे इस FINTENTIRE मुस्मिर. मोम पर मामल र इति भीमापानमसाल्पमित सत्यप्राय सुनाविभूषित विपा-निपाएम्भमोविएप मवमः समुनाम' सम्पूपात -- अथ दशमसमुल्लासारम्भ मयारामारामापारभरपाम्मश्यविपपान म्यापास्पाम' भब का धर्ममुख समी भाभय मुगीमा, सत्पुरमा मगर सहिष्ण प्राय में रषि प्रावि भान और इनसे विपरीत प्रमाण माता समे मिलते- विवन्नि सपिव समिनिस्पमादपरागिभि । पवयन्पम्पनुशावो पा धमस्तथियामत १॥ फामा मतान प्रयस्वा न वैपास्स्वफामता। काम्पा रियाधिगम' मपोगम पेविक। सरस्पमूग फामो यमा सरस्पसमया। प्रवानि यमधर्माम सर्व सइल्पया स्मृताः ।। प्रकामस्प किया फाधित रश्पते नह रिषित् । पपदि कुस्त किशव तत्तकामस्य धितम् ॥ ॥ पदोऽमिनो धममूर्त स्मृतिशीत च तश्विाम् । भाधारमैप साधूनामात्मनस्तुहिरप प.५॥ सर्यस्तु समवत्येव मिबि पानपतुपा । भुविधामापतो विद्वान सधौ मिपिणेत ये ।। भुतिस्मृत्युदि घममनुविष्ठन् हि मामष । कीतिमवमोति प्रेत्य चानुम मुखम् ॥ ७॥ योऽषमम्पेठ व भूरे हेतुशामाभपाद विकः । स साधुमिहिकार्यों नास्विको मियक ८ पद स्मृति सदाचार सम्पच प्रियमात्मन। पतचतुर्षिय प्राा साचायर्मस्प बक्षवम् प्रकामेप्पसकान्य धर्मपान विधीयत । भौ खिासमानानां ममा परम भुति ॥१०॥ वैदिक कर्मभि पुस्पैनिषेत्रादिजिममाम् । कार्थ' परीरसंस्कार पाचन प्रेक्ष्य पाप। १। व्यात पोरणेबामपस्प विधीयते । यम्पबम्पोर्विरो वैश्पस्य उपधित।१२॥ मधुम सो 1-111111-1. मकुमो को सरा इस बात पान रच्या भी जिसका सेवन रावण रहित शिलोग किसमें जिसमे व अपात मामा से सम्म काममा पोर्म माननीय और कायाप।। मोमिइस मा में मामामा और नियामखोपी बानमोणकर्म ये सब सामन्मही से सिरो॥
दशमसमुहास ૧૩ जा कोह में किम निरिम मीर निम्म्म यहो गई तो पम्मी मों समता स्पोकि सब काम प्रात् पज्ञ सलमापयारि मत पम निपमम्मी बम प्राति सम्पदा सेमत।।। पकियोस पाप ना मा पारिवाये जातो सब कामनाहीस मते हैं लाइमाम हो तो मोहमखामा र माचमा मौनहीं हो सकता ॥ इमविर सम्पूर्व पर मनुस्पति तथा प्रषि प्रपात पर सत्पुप्पोंभ प्रथा रजिसकर्म में अपना प्रामा प्रसार हे प्रमात मग धाम सिम उपको मेमरमा रचियो! नई मिम्मामारण पारा पाशिकी इप्का पता रेसमी रस पात्मा में मग रात रस प्राप उपती इसपिपेपर्मनने पम्प नहीं। ॥ ममुग्न सम्पूर्व स. पर सत्पुरुषों कमा भाच्ण अपने मामा के प्रति प्रय र सिम पान वा सो भुठि प्रमाव से स्त्रमानुस्य धर्म में प्रयो॥॥ योकि जो मनुष्य दाल पम और राकास अपिल समुझ धर्म प्रअनुएम पपइम पास में कार्य और मर के सचम मुखम पास दाता॥.. अति और स्पति भमयाप को मत खसे सब म्याकमा रिपब रणरिये जो कोई मनुष्य और वानुमा मम्मो ममपम्पन कर सोमा मातिएम प्रोकिसाबर मिनाममापी इसथिने स्पति सत्पुरमा मध्यम और अपने प्राप्त कर मे भनिन प्रियाय पे ॥ धर्म • पाप बस यही म धर्म पपित मा.. परम्पा मो मोम और मम अपात निकाय में समा नाही न्य पो पर्म कम होता जा धर्म ग्रे सामने अपामा सिपी पाम प्रसाद मी से मर मनुमों में मिला पुसम्पम्मी समाप पिपर मम्मोनिमार मेगा इस सम्म पर सम्म में प्रतिपदण्मा..॥ समसामापिईमा घर परसात में सम्म र और मुपस्नो सम्पपरियेसमा सम्मि औपी पशिरमा मुम्न रापभने त पुर.भीमर प्रेमा शोभमणमिरम्य रमजाति र रोता समितिमा प्यार पनि में पर यम रम्परिकारमम पुरिम से rit-माम .
अथ दशमसमुल्लासारम्म अथाऽधारामाचारमश्यामश्पपिपमान म्याच्यास्पाम' प्रब वो धर्मपुत कममा भाभव सुशीब सपनाम और सहिमप्र में विभारि माया र इमसे विमीत मनावर मात सको चिते- पिनि सवित समिनिममनपरागिमि । स्वयम्पम्पनुहातो पो धर्मस्तभिवोधत १६ कामात्मता न यस्ता म पहास्स्यकामता। काम्यो हिदाधिगम कमयोगम वैदिक ॥२॥ सरपमूग कामो वै पक्षा सस्पतभपा'। मवानि यमधर्मानसमें सरपया स्मृता ॥२॥ भकामस्प क्रिया काचिद एयत मेह कहिमित् । पपरि फस्त किशत् वचकामस्प एिवम् ॥ ४: पदोऽबिमा धर्ममू स्मृतिशोखे पतविदाम् । माचारमेष साधूनामात्मनस्तुधिरव च । ५. सर्वन्तु समस्येवं मिनिम पानचपा । भुविधामामठो विमान सपर्ने मिविश६. भुतिस्मस्युदित धर्ममनुठिन् हिमानब । एकीतिमयामोति प्रेम पानुत्तम सुलम् ॥ ७॥ पोऽयमम्पेव तमू हेतुशामाभपार दिखा। स साघुमिहिकार्यो नास्तिको व्यमिक कर स्मृति समाचार सस्प च प्रियमारमम । पतषसुपिंधमाद साधायमस्प बक्षणम् । मर्यकामप्पसका धर्मपान विधीयत। धर्म सिमानान् प्रमा परम भुति । १०॥ पैदि ममि' पुरस्पैनिपकारिदिरामनाम् । कार्य शरीरसंस्कार पापन प्रत्य परप। ११॥ क्याम्ट' पोशब प्रामणस्प विधीयत । रायम्पदामोर्शविरा पैश्पस्प मधिक सव १२॥ माघी 1-11011-1. मनुलों मसरा इस पारध्यम रखना चाहिये किमिसन सेल पर रदिन पिसमा मिमें मिस पप अर्थात मा मा से समबन माने पी भर्म मानौष और पाप.. कि इस सर में बसन्त प्रमामा और विषमताापी का शानदार ने सबसमय ही से सिरमt.
शमसमुहास २३ या कह कि मैं मिरिण और मिमममहोगा तो पम्मी मही सम्या पोलिस म प्रात् पक्ष सत्यमारवाडि मत पम मिमममी धम प्रति समापही से ।। पोकियोत पाह मेत्र मन भारिया सरममा होस पते जाइमाम ऐसा भोजोमय और मोपमा मानही समता ॥ इसरि सम्पूर्व का मनुस्मृति मा अपि प्रवीत पत्र सत्पुष्पों भ भार और सिम में अपना प्राध्या प्रसार प्रमात् मप या पथ जिन में समा सक्स मा रसिया! अब कोई मिपामारप भारी भरिको इप्रवासमा रस प्रामा में मन या पथ पमप उत्पनी सपिये पर्म प्रने पम्प नहीं। ५ ॥ ममुग सम्पूर्व गाय, बर सापुरुषों म भाप, अपने मामा परि अथ प्रथम नियम पालन - भूति प्रमाण से समानुपम पम में प्रय॥ कपा मनुष्य दाट थम और साबरम विस्त स्मपुर धर्म प्रपन करताप इस मौक में कोर्सि पोर मर सक्षम भुषा मास पाता है भूति पा र स्पति भमण का मत मम सब कम्प निमय पहिये वो कई मधुपए बदानुस सम्बो अपमान कर उसमे पापा जातिप्रकिनार की मिमा रक्षाही तिकमा इसधिपेपर स्पति सपनों माम और अपन प्रारमा मात्र पनि रिप्रभा धर्म.ब पवार मी स धर्म अस्ति । परम्जाइमो माम मर समात पिमें सा नदी मरमी धर्म प्रमोग। जो धर्म में सनर अप सो मिरेपरी परमम्मान हमी से सब मनुषी मोकिमोड पुलाप कमीप प्रियपणे मम्मोंमरिधी त्यो इस उम्मरम्म में प्रतिभा॥1॥ मोगमा और मर गम में भाग 4. मुरानो गया दिल प्रा समिपमा बामो पर शिजो परमा मुलगा परे पन पुकारमय से मनायबासिया रमतिरप्प सोशम मि मरिसरममा सकिनमेल गप्पा पिसार ग्राम रत 1-प. ॥
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सत्यार्यप्रकास
पाती है की मपरखने स मोसम पान प्रयास नहीं होता और रचिा
मी बाहों में राता..
इन्द्रियार्या विवरण विपर्यप्यपहारिषु।
संयम यसमाविष्ठेविमान् यम्तेप पाजिनाम् ॥ १॥
इन्द्रिपा प्रसङ्गेन दोपमुपस्पसरापम् ।
समिपम्प तु ताम्पेव तत' सिधि निपम्पति ॥ २॥
नसतु काम' कामामामुपमागम शाम्पति ।
विपा कापस्मैव भूय पवामिव । ३ ।
बेदास्पागय पवाय नियममम वासि च ।
न बिमदुए भाषस्य सिरि गम्यन्ति कहिंचित् ।।
पोकस्वेन्द्रियमाम मंयम्प प मनस्तथा ।
सर्पाम् संसाधपेदवाधियवन् पोगवस्वनुम् ॥५॥
भुत्वा सष्टमा बरपदाच भुक्ता प्रात्वा प पो पर।
मापति सापति वा स विजयो स्तिमित्रप' ॥ ६ ॥
माएए स्पषिद घूयान्न पाम्यायन पृप्पट ।
सम्पपिहिमेधावी जापानोक प्रापरत् ॥ ७॥
वित्त कम्पुर्वप' फर्म विद्या भवति पञ्चमी ।
पाखानि माम्पस्मानानि गरीयो पचएचएम् ॥ ८॥
हो भवति पार पिता मपति मदद।
महिपालमिस्या पितस्येव तु माधवम् ।।
नापने पहिले वित्न न बन्युमि' ।
अपपपकिरे धर्म पोऽभूधाम' 8 नो माम् ॥ १० ॥
विम्यानता पैठप सत्रिपातुबीर्यत ।
रपाना शाम्पबनत पदासामेष ममता ॥ ११ ॥
नतम यो भवति येनास्प पक्षित शिय।
यो युवाप्पधीयानस्व देया स्थपिर पिदु ॥ १२॥
पथा काठमयोस्ती पया धर्ममयो मृग।
पम विमोजीणमनयतमाम विभ्रति ।।
अहिंसपेव भूतानां कार्य भेपोम्नुणसनम् ।
पापप मधुरा सपा प्रयोम्या धर्ममिप्यता । १५॥
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मगुणाम पाहो मुनसरी कियो इमिनो विच को सपभमे
दिली में प्रामाती म्मम रोकने में का सपो सरपी रोक
पर न मार्ग में बाबा इस सम्म हाये अपये माम मोबपर्म मार्गस
स्य धर्म मा में सदा पगाप्र॥1॥
दरामसमुशास २६५ क्योकि इन्द्रियों में विपासकि अंर मधर्म में सारे स मनुष्य निशित पास और अब इसको पात र धर्म में सम्वामी प्रमी सिरिने पास होता ॥३॥ मामिल किस अग्नि में इमान पर भी प्रयमे स पता चला सही मोपमाग समम सात कमी नहीं दावा किनु गाय ही पार इसलिपे ममुपम बिस्पासम्मी न हान्न परिपे ॥४॥ जो परिवन्द्रिव पुरस नि रामत। रसोमने सम पर माम म त्यापन पत म मिपम म म पर्मानय सिरि को प्रस हो । किन पेपर शिवन्द्रिय धार्मिक नोसिरत... इसभिये पोचम्द्रिप पोरगानभिप भार मा मनको अपना में प्र पुष्णम बिरयोग म गरीर प्रेरणा प्रताण सभी से सिरम॥५॥ जिश्रिय रसम पवे? किजा मुति पुन र भौर निम्म मुम साक पापा पई प्रमुख चौरसर्य सम्प, मुमर म एस प्रसप और राम रस असा रम माग्न मा सममित मनिस मावनमा दुनित मुगम्प में परिभरि दुप में प्रापि नहीं मा ।।। कमी मिा भम्पब म पाने पो हो कि गोमरस पसमा रखा रसमले, उसो पम्मम दुरिमा सम्पन रजोनिबार और नियमो समसिमी उपयरे .. एक धन ला यमन डीमरी भा परम धर्म और पोथीपारि र मानयन मन पन म रम पमन्यु प्राधिकरण पमा पार्म और कर्म म पवित्र रियररोज अधिकमानीय मोकिमौसमा परन्तु मे रिण जिन रलिप पर गरिय विमभरमा रसमस मी परमानन्द सिर पप्रम प्रस पिन पतीपासमार मनी पिता म. पपिता बनर त सरोग, परित पम स चरम् होने मरमा होता मिनि मामानी विभागमा में विप जिनमें पकिरपा पर पुसमाचार यस परिम, पम भाव म और ममम ममा अधिक मरा" जिपर न होने म पुन नदी क्षेत्र yिो पुष निल पाण समधिम्मोगान॥ समे स्विीपमा मामी म भगदार यपि मम मम्पर बमना | मिरियरियापित मामा होम निमनामक पिणे माप गमरण मप्पा मगर समय र ससम्माण भरिम प्रमय भनीत... 151 .
सत्यार्थप्रकाश मिस स्माल क्स अन पास स्थान सब राब रस्से किपर बोये में चित की दरि और भारोत्यता प्राप्त होम पुष्पा पता च सय रमा बोम्पी कि मितने से मर पुर्णम्प र होलाने । माचार प्रथमो धम' भुस्युक सार्च एप छ । मनु बो सम्मामाफ्यादि माँ मानरमना होम स्पति मैं पापा मा नौ षधीः पितर माव मातरम् || बठ ।।५॥ भाचार्यों प्रमश प्रमचारिणमिच्छते ।। प्रया ।। मै । म्पवयवो भव । पिवदेषो मव । प्राचार्यदेवो भव । अतिथिदेवो भव । जिीवनको माता पिता प्राचार्य और प्रतिमि की सेवामाना देवया पाठी और विसकर्म से पाम् अपमोर्म भनौर हनिमक कोष देना की ममुबका मुन बनाम।। कमी मास्तिक षपद निवासमाती मियादी स्पर्क कसरी यी प्रापि दुरा मनुको प्रसंग न मे पास जो समवादी पाप्मा परोपमप्रिय सम। समय सवा संग पाये ही का माम प्रचार॥ मा-पाव व प्रसियो माला देश से मिलती में जाने से पाचर मा हो बार मही। उ.पाबाट मिनी बौकिजो बाहर भीम की पविता भनी सममात्वारि मामाभवापानीममा माम मौर धर्म मामी महोपण को ad में पाम मी दुराचारमा यही पम और प्राचार भाभापा । जो ऐसा होता तो- मरोरिमने व ब रमपतं तत। क्रमसम म्पतिक्रम्य भारत अपमासदत् । सवणान् विविधान् पश्यमीमासनिपपिवान् ॥ ११ मे पाक मारत शान्ति पर्व मोष धर्म में प्यापक संपद में -प्रचात् एक समय पासी अपने पुत्र एक चौ. शिम सस्ति पानास प्रोत् मिसको इस समय चमेरिन पते रसम मियम मते या सर्व पिच से एक N A प्रामरिया इतनी अधिक ! यी शाम रस पास पपपुर रिया काकि गत १० सामथे। मा की साली पिने भपने पुत्र एक में पाकिम ! न मिपिणापुरी में गम ही प्रभ मा राजा मे प्रप इसम पथप उचा। पियरम मुगम एमचा पगार मे मिषिमापुरी की । सम मा प्रधान दिमापर बम भय में को परासत ? मनमाम inी ग्म रेस मयुब अब भी रन्मुप . - कामसमुहास भपात बम समान भूर मापने के दिन एगो माम इस समन 'पूरम" गलती को सभा में "हरिब बतब उन पेमी को रस्ते प और निमहोप पाणी मी मोम स्यो को देर बान में पाये जान से रिमासम और हिमाचल समिपिमापुरीका भाये। और मोहम्प ल्या भाम पताव में अपनी प्रात् मिस अधिमान मात्र म रस पर मेरो पावास में बाजे महमाया मुभिरिमा में ग्रामक प्रापि को मे भाये । जापानिय गोपाल रिसको 'बार' प्रको रामपुत्री सभा । माद्री पापा की सी "रम मा की कलाकार और मन प्रकिया पार में मिसको अमेरिकन पते है यारा को बाकी रगोपी साप दुमा प। बोदेवरेशान हौपदीपन में म बात होवे तो ये सब पापोंभहो सकती ? मनुत्पत्ति में दो समुद्र में मायावी बौन पर रमा मिथिमी भावांव मे बोपन्म में सम्मेकमब है और अब मामा मुभिण बसूप पा मिना पा उसमें सब भूगीय मार्यों को पुल निर्मायनेसिपे भीम मन सौर मारेषचरों रिणों में गोमे, बो दोप ममतेने तोमी मचाते। सोमनाम माम्बवणय मोगमापन रापौर प्रमबविणे सब भूपोग में मते थे और दो भागमा कम्त और धर्म साहोने की मपि मूनों माममे और शाम पाये से है। जो ममुन्न देशान्तर और पीपल्सर में आये पाये में पकड़ी बरते समयान्तर अनेक रिप मनुमों मममम्म रोनि मौति देखो अपना राम और मापार पाने मे निर्मप यापीर होने वाले और प्रचे मपर पाप हुरी पाती बरने में पाले में वर्ष में होने हैं। मपा जो मामा पोत्पापा भाविसमाम मे प्रारम्रा धर्मशीन महीच किन्तु स्वयम्तर गच्म पुस्तों के साल समागम में और मानत है !!! परेड मूवीजही हो। रोइन कारण तोकियो बोन मासमाय मो. मण्या मते है रमले मी और पीरादि णमो दुर्मम्पादि से इम्ति हमे है इसखिये मो संय पने मे पलों में भी पासम्म नपम साता की परन्तु जब इनमेमपम पोर गुप्पम्पब कामे में कोई भी दीप प पार नहीं कि इस मापनाति रोपों को दोष गुरों को मार में तो ममी सावि मी। नग इनोस पोर लये मी मून न पाप पिat इसी स बसे पुरमी महीप सम्म सकिदुर में साबरमा पर सामर सम्म पानी मेरमा प सम्पास मियाम्पर पी को दोपरि प्रीति पापम्म सम्मपद परब प्रमा रम आय और पामी समय कि हमारे प्राध्मा सब हम अचम्म प्रत मोम मायनर पर होनीपान्तर गने में पमी पोषबी बम समारोपापसम प्रने में सगा। ममा भमर भरिक - २१८ सस्यार्पप्रकपण देवोल पम प्रमिथप और पामरम्मत गन्न माया ममयसीख जिससे कोई गमले मूल निवासमा सके। या किला देशदेशान्म और बीपीपार में रम्प - WAR किसे स्वदेश की राति कमी सटीअब परेश ही में सती गोप पाम करते और पारशी समेत में मपार सम्म ने तो स्यि वणिप और पुस्तके दूसरा ममी मही हो सम्म पम्बरसी बोग पा समकिबो हम रमको पिय पायेगे और ऐस्वर में जाने की प्रदा रेगे वो ये पुरिमा होम स्मारे पास राम मनमो से इमामो प्रविध मार पीमित मारो साकेगी इसधि मोक्न बन्दन में मप सब किये दूसरे रस में बस स।हो इसका प्रभाव चहिपे कि मपास सम्ममापि मूगकर मी म करें। पा सब पुरिमानों ने पा मिच नही मिकियो रामपम्पों में मुरसम्म में भी गम स्सोई ना के अन्य प्राय परापन का at: किन्तु रश्मि बोगों मपुर में एक बाब मरो बारे जीव सपा और दूसरे हत्य सङ्गो मे बोरेपली रप पर नपा परब हो मारते या अपच विसरमा प्राचार मौर पराजित होना इसी म्य से दरबोगों पे मा २ मिोप मद का सब स्वावम्ब मानम् एक राज बिया और पुरुस र चीस एक हाप साप पर है और इस करते है जिस पर मिले तो पममा परन्तु मा होमे सानो सब भाव ऐस मर में चौमबारे सर्वच मारियो माँ मोजम में उस समन को पोने पराये म्म पगामे साकार भारे में प्रपत्र अमर रमा पीपे म वि मुसबमाम प इसाइयों के समान भापाकापारमा ।। म -समी विकी 10-सबरी गोमा भारि में पत्र पर सत प्रौर को पी एप में पाते पनिखरी प्रीत पानी सभी इस काम मात्रामा पारा कि जिसमें वो एष प्रपिक पप रसको यो में स्पण और गरम चिया परा पिक सर्व इसीलिये पम्पम रची ही तो जो प्रतिभामर मे पभामा पराई पचौर पम शुभाई जो पानी पान मामामी सकपीकिब परिकामी पो रात है। प्र०-चपबेहतरस नामक शहर की बनाई काय? 1-पकी पाईपकिय पनि सबल पी पुस्स रिय पाने पाप पर पशुपामर स्ती परभम में दसर हैं. पाच सय रमोल पमपा मा चापकाम मिनाय पारें । मुबो प्रमाण- मापाधिष्ठिता या पदा महादस्यु। भापमा धमासाकपमा गरम...
सामसमुशास: मा मापसम्म मत प्रारों भ में यह पात मूर्ती पुन पापदि सेप में परन्तु र पप भारि मे पवित्र मापार में जब रसों पना व मुखोपडे बना क्योकि रपके मुख से रधिा मौर निम्मा दुमा यस मी पत्र में म पो । पानं दिल और और मतपसमा सान प्रो पकाकर प्री का शिपयारें। पपके साये में पाप पो उसके सपनाममाया हा समतो! ज०-परमात सोररिस्त मोरोफिगिनोंने गुरु मी पुस प, पिणन ग्राम मूबम्पा गन्होंने साना परम्म् मरम बनाया और रमिा डिप बोकि अब यह मार को मुससमम ईसाई प्रतियोगों में से ईव को प्रस्ते पौधत पीएन सि निभाते र सब मसमोसम पो रमी मिना भोये हाली मे बन रख पाते मारा सोम इस रस पीके पापा उसी में राम तेरे पीर रस पछत पम रस रस में रोध मी पर है बी बम्पते है तब पुराने से किसिमें गिरा पूर्ण गोश सी गगी गती मी तो ये उसमे स्पात ष में अपने मोरप्पिा पात्रोस अप समते उसी में नारि र भाव पामते समय भी से हो गया हो म रमत भर पसीना भी पायम सम्मा रातार इस्मादि समूगल में भी ऐसी ही पीया होती। राइम परतताय तो मा सममाडिया, R०- मग नौ रस इत्यादि मर में दोपही मनस उ.-पीया! सम्परजो ऐसा रजसतो क्या अब राम गुरु पक्ष मी बरसी पीमितामामिए या मनमसिन यो राप्रपा समय में दोष यही हो मोर मुमबमान पर पापों से दूसा में नाम तुमसे प्यार तो PICमही गेमो लियम भी दोपहर मुमममम ईसाई भारि म म मरिणी देने में सोचमी ममारि माया पीय सराप पीना पाना परन्नुमसोम एक मारमोन मे में भी पार भी रोया। सन एक मन कवि शाम क मुन दुग पाला व मानव मा पुन मगर परम व मोसमे म मुपार दो सामिपुरी पोती कीमत R BETी विनोद सिगरेपmina पारसीर मामा म मममममम रियम पम्प भयनि तिमधि, मिणमामी साप परिण भनी उम्म? गरम म्यामोमा निम्मरममा भ्य गुम m मामत भने पार मतपय समय भी भूल गासो' मान घर में मा सापपई म सम्वों पर भामरमdesk २१८ सस्पायप्रकम्य पोट धर्ममिप और पासरथम परमप्रा प्राप सोच विसरे कोई हमको मम मिलममा सके। क्या किना देवस्वान और दोपहीपातर में राम्प प मापार किस्मोन की गति कमी हो सकती।बस्वाश ही में स्मेको पोग पार करते और परदेशी देर में मार सबमें तो बिना वाविप और एलो दूसप अभी नहीं हो सकता पापस्सी बोग पर समवे। किमो हम रको विण पायी पौर रेखदेवास में जाने की अनदेखेंगे तो मे पुदिमा रोर स्मारे पास गाव में नम से हममा प्रतिमा पर पाकिम मारो यी सरिये भोजन भाव में सोम सकि दूसरे देश में बा स। हो मा प्रायची किमयमांस भर कदापि भूबकर मौ । करें। पास पुरिमामों ने नियमही किया है किबो रामपुस्पों में पुरसम्स में मी चौरमा बम (सोई माया काह। किनु पनि जोगी बुर में एक पब मरोरी बाते या पीत बामा और मरे हाप से गमो को पो हली स्प पापा पैदा होने मवे गाना अपना विष कात्म भास और पराजित होगा प्रबार। इसी सम्म से इन योगों में पैसा विरोष मोसम स्थानाम भानम्मच सम्म विच और पुष्पा र पल दाम पर बाब पर है और भरते है किस पदार्थ मिले तो पसर परन्तु सा होने पर सानो प्राव देस मा में पास बम सम्मानित सो मोबन में पान को बोने पेपन मम मम पाने मारपूर मो में प्रपा पान करना चाहिये कि मुसम्मान पईसाइयों के प्रमान मापामारा। म सन्नी मिनी क्या? र -सबरी को ख प्रापि म मा पकाने पात और जो भी दूध में परात १मविदो प्रभात रोगी बा मी इन माम मायाम पाखवा पोकि निमम बी प भक्ति पपे उसमे थाने में स्पा मोरगा में चिकना पदार्प अधिक गाने इसीलिये पम्प चापीयो जो पनि कम से पमा पराई पार न पन हुमा म यो पाना मार मान जयरामी सहमही किरियेमी सो गये। म०-वन पपने हाथ से रसोई बापामयाबी २०-प्रहरीमाईमा मोकिमत लि और वसन्स मी पुरुष रिप्प पा राबपायम और पपास ती म्मापार काम में समर और फास्य रसभम पम मा अपत्यानि करें। सुमो प्रमाब- प्रायाधिमिवा पा पदा संसारस्यु मापनन्द पमसूत्र म्यामा पमपमा समूत्र..
1 परामसमुहास म प्रापणम्प मच है। प्राओं के ममें श अमात मूबी पुस पादि सेप में परन्तु रे मोर भावि से पति पायो मम मम (सोई बना तब मुखोपमा योकि यो भुख से पिा मोर निभा हुमायास मी मा में पो। भान दिन पर और पापानमा साम मोकवापनाकर मोमेंशियामास । प्रक-म प प मा पाने में जब दोप पttो रस हलपमनाया से हा सन्द है। र-पास मोवसित ही सोकि विनोंमे गुरु कौमी पृत प पिसम क मा मुबम्पा रनहीने बामो समय माप माता पर रधिावियोकि म यह को मुसलमान ईसाई यदि योग खेतों में से ईव को मळे बीते पीवन रस निमरते है मनमोसो रही कि धोये हाषी म गत मत पापा सोम सरस पी भाषा म्सी में भरा भीर रस पम्त समय स स म रोटी मी पमनानीमी बनाते है तब पुरान सो विसि सब में पिण, मूब मोम बी बी सती ही शो रसोगा। दूष में अपने अधिा पाप यह सब उसी में भूतादि रखते श्रम प्राय पीमते समय मी से हो रधिा स्पों से और पसीन्य भी जार में पच्या सामावि और फस मूबकर में मी ऐसी ही जीवा होती। अब हम परापी सेवाण तो समो समयप्रसाखिया। प्र०—पस मूब यौन रस हरिमा में पापी मानवे 10-पीमा सय किजो ऐसा उच्च तोक्मा पूरब बते। गुरुगन मौसी मादी एप बी परिता सोधिप प मासिन्यु प्यमही राप्रपा बोप्रा में दोपथी तो यको श ससपमान प्रपत्र एपों से मरे स्थान में नाम तुम पर तो बनाम श्री ! गोमो बिपी तो आप में भी दोपको मुसामान इस भाव मप ममपारियों भने मयों को भी मममांसारिका पीय प्रमाण पीय पासा मनु पस में भावों में पड़ मोसम होने में मई मी योग भी बीयता ।। मन पर एक मत पावसाय एक सुखदुध परस्परमा सबब पहिरो गुट मिले। पान्नु र साना पीनही एक होये से मुषार हो हो सपना बिचारी पदोपसे और मदीनही प्रय वर कमाती होती है। विधिपो रे में सोने सब पापम की मसमेह प्रामसमर रिणम पाप पास में प्रस्तामिण सियसधि मिप्यमापारि गाय पारिया प्रथम पारि मर्म समापस में म्यांमार समाजमा विपीन पाता है। ण तुम सा महम्मत की जो पांच मा परि हुई भी मो मो भूरा मा देखो! माम्मात पुर में सब योग मार्ग में सचीवी पर को। Hrent .
२२० सत्यार्थप्रकाश भागों च समानत हो गया सो तो होगन पान्न भय तक मी मारमा परे अपनाने परमगार रापट मी म्प र पानीको सब पुपों से सप्तर में राय म्मे । सो दुरोपण गोधमारे स्क्लेशदिमायक, पाच एमार्य में पार्न योग पब तक मौसम गुप पारे।। पामेर म करे कि यह रोग हम सालों में पाहोपाय। मम्मामास दो मामी-पक धर्मगोच, सरायो । धर्मठास में- प्रमश्यायि विपतीनाममध्यप्रमवापि । मनु ११॥ विमोचन सि रप और गोको मी मनाम पि पति सर्ग से उत्पब एप सा पर मूत्रादि म बाय परिपे ।। धर्मयम्मधुमार्स घ । मा ।। भनेक प्राम, गांग, मांग, प्रथम शरि- दिलुम्पति पद तप्प मदफारी दुप्पते । हाईपरम हो । पुदिना प्रकारे पदा, मन कर कमी और चिकने पर सो दिने दुर्गन्धादि इफ्ति मचे प्रकार न बरे हुए और मन मसम्मतरी किसिमम शरीर मप्मास के परमानों ही परिवीले सिसमें उपमक प्राधिपो की हिंसा अपात् स एक पल के पार से एप की रेस म प रोने पे पौकी में सात पयज सापका सौ मनुषों को पुडपांवर पद्यमों को मार म मारने से किसी गाम मौसम और किसी से दो पर पूर्व पति रिम होये रसम मनमा म्परा र ममेक गाव से पहोगी कोई गम्य समाचार कोमा माये कप येतो रसम मम मम ममा माने एप, प्रम मा परे सम्म भाप ॥१५ (बीस साल पौ सौ सम्म) ममुष्प एक मेंस हो पाते हैं, रसोपा पड़ियां बाप दोष में से दो मर वो भी रको नम से पांच बारियों मम भापको मिग्राम (एक पाव चीस परव प्रात मौ)ममुप्य महोसते है परोपांची जम्मभर में (पोच सारण) मन चाभ्यूम सस्पून सक्षम प्रत ग्स प्रम में मेहमयुगीन पार पो प्रमई गाव मधुपौकमि होतीप और मह मिला (वन मोरर पापा सो) मदुष्प पूस रोते रोगो संख्या मिसाएर पार की एक पौदी में ( प पपर सापक पौ) मनुण एकम पारित होत? भोर पाही पर पीली बार दो सपत मनुलोम पापन रोससे भिव रेप पी पम्मी मम ममने मारिमा से मनुष्यों को पकोबरपा पपिक मनरोटी मम्मको मेस भी रे पान पर सभी में निठने पुसिरिमे भाम हरे रखने प्रय दशमसमुहास रूप से भी इसछे मुल्योपणास प्रार्पो मे गाय को गियर बोकोसम्म धित रोप एमी इसी प्रथम समय ॥ बकरी से १५३ (पीस मा नौ सौ बीस) मामिलामा पासन होता से इसी शो द भेष गरे अदि म यो पाते है.इन पानी को मार बोको सब मनुष्यों की रमा प्रयोगामित। देखो! मातीपरम्पपब महोरक्यक गम मारि पर ही मारे जाते पे धमी प्रापोवप्रभ्य भूगोरगी में बड़े भातम में मनुष्यादि प्रथि पर्वले थे, पोकिएप पी हमादि पहना की पुष्य होने से आप एस पुण्य मस कोवे सबसे विरेती मसनरी इस देश में मारेगी यदि पामों मारने मपानी राशि परे हब से मया प्रायोजक बाली ती की है, स्मोकि- पऐ मूखे नेक फन पुष्पम् ॥ रचय प्र १ ।। बरामीमाट दिपा बोनमा सहो। म०--जो समी पर्षिकहो जायोज्यमावि पथ पाकिस पास पारि परामों को माममा पुष्पा ही महासाम । 10-पारामपुप्पों काम कियो हानिकम यमगुप्पो एमको पास मी छिमरें। म०--शिल्पा बन मांस गते प्रति मांसपारियों को बिना जा भयको मासरी पोतो मी संसार म वि माहीती विम्त रस ममुप्प अस्वमय मांसाहारी होम सिमसाजिनामा चोरी विपासात समर मारि से पानी को पास होम माग माप अमन पीर परिसा पमादि को सम्स पर भोम्मपनि भन्न मन जिन पी मे स्पस्प्प रोगपशपुरि बमपराक्रम हरि भोर माधुरि हा रस वरि गोपूय प्रमूख कम पपी मिति पहा असेम पापोप पामो पपोषित समय पर मितपत्र भोग्न कन्ध सप मभमा तिने पाय पपनी प्रति से बिमा रिरममे सपा त्याग करना पीत ओर जिसके लिये शिविरम पानीमा मामी माली मा- सरसो में अपरोपीयों! --- दोष है कि कपास दूसरे पलमा प्रति श्री मिती समादि सापास प्रये ममुखममी पिर पिप गावाट सर साप माने में माहिर मुम पही इसपिप- मोरिधर कस्पभिरपायापाप पाम्रा । पेयास्पयन पाप छोरिधए पपिए यजेत् । मनु १५॥ इसको मिोप म्याम्म *गोमविपि मो॥
૨૨૦ सस्यायप्रकाश पापोंम समाप्त हो गया सो तो हो गया परन्तु अब तक मौकी रोग पाये मोन गावे पामगार पास कमी ग प भायों मे सब पुओं गुमन पुनसार में सम्मेणा ! रो एप पोपन गोममारे स्कोपिनाक पीच केदुरामार्ग में पाई जोग अब तक मी म एस पड़ा है। परमेवर मेकि पारम्बरोग हम प्रायों में पाहोचाप मन्मामक दो सी-पक धर्मगोच, सरा सामोस । से धर्मामें- अभयापि विजातीनाममेष्यप्रमवापि ॥ मनु ।। दिन प्रति प्रणय पनि पैप और सखों को भी मशीन विप्र मी संसर्य सम्मा हुए णा समूचादि कसबा पहिये ।। पर्यपेम्मधुर्मासं च । म । 11.। से प्रमेक मास मप, गोग, मांग, अप्पम आदि- पुर्वि सुम्पति पद प्य मदकारी दुध्यते माघरम बोरधुरिममा रने से परे मन सेन मीरा मिठने प्रप सो कि दुर्गपारिसे फ्ति प्रचार न बने हुए और मा मत्सहमी म्मेष किजिनका पर ममास के पापों ही में परिवी नो जिसमें रपरक प्रदिपी की रिसा भात् और एक पर सर पेप पी व प रसोभे से पक पाली में सबसे पचास सापा सौ मनुष्यों को मुख पर से परामों को मार न मारने से किसी पास से पास पर और रिसायो सेर पूर्ण प्रति दिन हो रसम्म मना पर प्रोक पाप मे रूप होगी भी प्य अमा और कोई पा माने कष सी. रसन मन्च मम पसर महीने ए. पप समेत पाम जन्म प मे २०५ (पीपीस सरस मौ सौ सार) मनुष्य एकर में हो सक, रसपा बडिपो पाप हो। कर्म दो मर पापै तो भी पण हे, ममम से पांच वरियों के सम्म माप को मिग्राम ME (पा पा चौबीस सार मतमो) मनुष स हो सकते हैं पब से पाच मेस (पांच साब) मन अप म्यूम न्यूम म्पप समस्त सभा में मेरमाण तीब पनपने तो मामा सय मनुष्यों की मि वीप और मा मिचE (तीन सा और पाप भार पौ) मनुष्य दोहोमोसमा मिसाएर पार की एक पौड़ी में ...। (समाव पगच साप का सौ) मनुष्य एकर पमित हो और पौड़ी पर पोपी पर पदो प्रसन्नत मर्यो म पापन होगा। इसमे मित्र र पी समा भर रमने माहिमों से मनुष्यों को सम्मक होवरमा पर एप में भपिक पध्मोदी और से पैर सम्मान से से मासानु परपीपे चिठने दुशिदिमाम हो भने बरामसमुबास ૨૨૨ प्र०-यो पाप पोम सेरेमन होवो अपमे गोम सेवामही माते। और गोबर में बामे सामानों ही होय। - गचके गोबर मेसा दुपच महीं होता जैसा कि मनुष्य के मप स मोमम मिया होने सौजनही माता मम विमता न माग होता हैसा मिशी से मर नसारेसा पूचे गोम सही होता। मिट्टी और गोम स जिस स्थान परेर मरेपरेसने में प्रति सुन्दर होठारे और जो रसोई गमती मोजमादिनने स पी मिशनर उभिभामी निवा रससे माती कीही भारि बहुत सोच ममीन म्यानपने से प्राप्त है जो रसम या अपमादि से सरि प्रविरिन म को पाने तो बालो पाताने समान पम्पान हो जाता है। इसरिये प्रतिदिन गोम मिकी मा से सपा पर रखना। और जो पत्रमा हो वो पर से पोन र स्थाहिये । इपास पूर्वतोपों की मिचि हो जाती है। समिपांजी रसोई रेन में भी कोयला भी राह पीली ही पूरी होग भी परी रम्मा ही सरगोप पर और मस्तियों में तो नाममा पस्न पेस्य पुरा बगवा है कि वो कोई प्रेस मनुष्य समर तो रस बात होणे ममी सम्मप और उस दुगमन के समान होपो स्पान दौरे। मया को कोई हम से पो कि परि मोम से बोन सपने में हो तुम चोप पिमले हो परन्तु मेम को अपने रस्सी मासे मार पीने पर की माति पर पेफ्म करने प्रादि से मिबाबोस मी म माहो माता दोन इसमें ला सा । मम भोम्सममा प्रचार ? 1०-गो फर अपारमयीय सुन्र स्पा माश्म कामा चाहिये पान भावापक पुरपि में तो पोरे प्रादि बानों पर मी खामा पौमा पत्पम्त गति।। प्र--ला अपने ही हत्यमबामा र सरकार मही! .-बो पार्यों में न रीति स भवे तो परम सब प्रापी साब भने में कामी हानिकी, स्मोकियो प्रहबारिमपम की पुरुष रसोई माने और मरेने बच्च मा मात्र प्रादि मोरे में परेर हो पियरिएम गुयों की पनि कमी महीदोस। रेतो ! माता बुधिदिर के समूष पत्र में मुगाम- सबपि महर्षि मारे पे पानी पाभा मे मोजल किमानते थे। जब से ईसाई मुसम्मान भारि मतमतारखे प्रससरभिोप शनी मे ममान फोमारपरि मकाना पम्मा सौम्म किन सो समबन मोगादि में पमा गय । रखो!भए मात्र समरिन पूरोप प्रदिपणे रायोको सभ्य मापारी माडी पोपी पादिरे साल मारमा राम्रा किण परिपपास मत गनि पारि औष पायो साम ते पावरे • भात् सा. प्र- ૨૨૨ सत्यार्थप्रकार न किसी को अपपा भून पदाबदेचौर किसी मोजके पोषण साये म पक्कि मोम में मोर न मोक्न भि पात् हाल मुख धोये जिस भी इपर रपर गाना प्र- गुरोरुहिएमोसनम् इस माम मात्र प्रयोमा ! र०-सन या अयोकि गुरु मोसन किसे पार बोकमान खित सम मोम मा वात् गुरु को प्रम मोक्न म पवार शिवको मोबममा चाहिये। म-यो रधिामात्र पनिषो ममिलों म रचि सय बो । भरभिर दूब और एक प्रास चाने के पात् प्रपत्र भी भावना उनको मौसममा अहिये। 7०-सात मनमानी रभिदोन पातुप गुल्मी भौमिकों भसार प्रण, बा अफ्ती मो के बाहिर भ पूर्ण पाठ मोनोप को नहीं पी सकता इसरिपे रपिानी परन्तु पो रे पिने फमत पप से रसकी मां के स्कम बोनएर पात्र में गोहमा चहिये । मोर अपमा थिा प्रपो को सिमकोटा। देखो। स्वभाव से सिरकि किसी रधिाओं मी म बसे। से अपने मुख जल, पांच रपव और पोन्द्रियों के मामूवि के स्परा में प्रयापी होती से मिसी दूसरे के मन सण में होती है। इससे पा सिर होखा किपा मम परिम्म से विपरीत पीसिविपे मनुष्यमात्र को रचित किसी वरपिा पाए पानसम्पा. म-मया की पुस मी पारा रचिार! उप-दीपोंकि वो मौ शो मस्सा- मित. प्र०-मोरी ! ममुप्पमाहाप को को रसोई साये में बायोग कि राय से बचाया पातमोर सा मांस मार जैसा तिसम्म मार में सा होचोग्य प्रादिके, पुना ममुप्पमा आपकी पकी हुई रसोई खाने मन्य रोप। "-चोपन रम पानी मे पाये से पाय और मातोरे शरीर में गुपचाप गोप रहित रज पौष माया चौसम और चांसपी मीर में मही कि चमचम र दुर्गम परमानों म मा पोवामा प्रसारिश भी इसलिये यदि तम दीप प्रगना मोर चायणादिमीच म्फोमा पारिसमा । माप मेई तुम पोपण कि मा मात्र मार मासा सास बदिय कापा पुममा हो अपनी जीभमो? तोला मात्र पारि मिो के साथ मी स्थीरे समान महो। सब तुममे मणि दोपहराम पाप । म रच्म मात्र मुग से अप माया से गुग मी पण स समताप मादिमी सामोपसा ऐसा मौहोस। • पत् परिर से। । पर्वाद मौवर से उत्तरार्द्ध अनुभूमिका म सिह कि पांच साप के पर्व जमत स मिज दूसरा कोई भी मत न पापोंकि बेहोठ मर विष्णम प्रम्भिो।मों की प्राति होने प्रभाय ममममव पुर भा। इनमें अधिक परिप्याप स्पोस में विस्तृत होमे स ममुपों की बुरि ममपुट होम मिसा मन में सामापासा मत व्याया। ग्न सब मतों में (1) मा प्रपात् पो परविम पुरथी भी मिाली भौम पनी सब मतो मूब प्रम भएको पौवे पूसरा वासरा पाया। अब इन जो की शाखा एक साम मारी। इस सब मतपदियों इनके सौ और माप सप को परस्पर सत्तासमविचार मने में अधिक परिप्रम न हो इसलिये पाय क्यामरा जोर इसमें सस मत म मगन और मसयम पररान वियप सप जाना हो प्रपोजन समम्म गराइस में सी मेरी पुरि तिमी विष्य और मिठना इस जो मतो भूबने सबोध पार समे पर भामा नियरितम सामने रचम समर स्पोकिजिन गुमरा पुममिबन्न सारी पापात पोरम इसको देगर सस्थसम्म मत सब मे परित हो जाय । पत् सब को अफ्मी २ समम पनुसार सम्प मापापमा पर असत्प मत प्रापसार हो। इसमें जो पुरावारि पम्पी म शान्य यावाठर म मव पार्वत रस में पर प स पुजाप इस मुकाम में न जाता है। इस मार्म मे बरि सम्म मायें तो मिाप मोबीकि मेरा हापर्व म्सिीको निमोप मरे में ही मिनु सम्मम्मपनि मरेमाने मोसी प्रथम सप मनुष्यों को पावर बन्न प्रति रति । ममुम चम्म महोमा सायसाय पनि प्राने माने - विकिणपियर शिरोपमा पिये। इसी मतमतान्तर स्थिर सरगन् जो. पशिw.mat भौर रोग रमो पपपच रवि पिम्म अन सम्व है। बताइम मनुष्य जाति में पासा मिप्या मतमाता म पिमा पण उम्ता पापानमा मातीम अप मनुन पणि पिण मारपोपसम्म पनि पासप ममप और भसमयय भय मान्यता हमार पिया पसान हो पर निवपकिन पिनोfruthमरको सिप सरममा रमयीपीमगर पोम में मम स साल मिरप्रय मेला भी चमन हाम। मानिमकी मेंरिग माफिया परमामा पसमा शेरममा सामगोपाममों में प्रतिभा मममिविपिस्तरपपिपधिराशिमन्।ि २२४ सस्याप्रकार झिोप नहीं करते थे कि उस समय सब भूगोड में पदोच एक मत पा सी में सबकी निम पी और एक दूसरे प्रमुख दुगामि पाम प्रापस में भपये समान समय मे मी भूगोल में सुख मा । अब तो पात स मत करोगे मामा कुन पर ोिष या पपी इसम रिमवाना पुरिमानों का काम है परमात्मा सबके मन में सम्मत का ऐसा र समे निम्म मिपा मा यो हो प्रसव को प्राप्त तें इस में सर पिा योग दिवस मा शिष मात्र बोर के मानन को बार। पापोगमा पार अपाम ममाम विक्स में विशा: इसमें प्रत्य प्र पूर्वव इसी एवं समुणसके साप पा से गया । ममुहासों में मिोप न मन इसरिये भी विच्छ कि बबन मनुष सावरिया में अस मी सम्म क बाते तब तक स्पा और सूक्ष्म नों के प्रमिप को महा समय समते । इसपिरे प्रम सब को सन सिम भरपदेश मा अपरमार प्रात् जिसमें समुशायराम दिन * मरम्म सिको। इस परों में से प्रपम पमुशप में सामान मतमतान्तर दूसरे में क्यिों तीसरे में ईसाइपो पौर चौथे में मुसम्मानों के मतमतान्तसम्म मरम्म पिप में मिलने पर पगाव चौपा समुशास मन्त में स्पमत मी विचाया बापा। जो कोई मिठेप म मरम देना इन परोपमुकम्मों में २ । परम्तु सामान्य करणे मीत मुशासौ में मी कुब पोयामा परम मरम्म किया। इस दौर समुहासों को पापकोष स्पाक्पी से जो प्रेम रस प्राध्या में सम्म म प्राय रोम चानम्र होगा और बोहर दुरम्य चौरई से देखे माम रसको इस प्रम अमिमाप पपाव विदित होना पुल अमिन है। इसरिये बो कोई इसको वाम विचाइसम्म प्रमियम न पाम गोता वाचाया। चिली सपाही कमी किसम्मासम्म बिक्पकमले सत्वका प्रयासलाव्याम भने पाम मानन्दित होते ही पुपालक पुष्प पिम् मम मम काम और मोच मप्र को प्रास होम प्रसन्न रहते हैं। पति भीमायानन्दसरसती सामीझते सत्यार्थप्रकाश सुभापाविभूपित मायापम्माचारमझ्याम्मपविषये बरामः समुशास' सम्पूर्व ॥१०॥ . समाप्तोऽयम्पुर्याई ।।
उत्तराई अनुभूमिका बा सिरप कि पांच सायबरों के पूर्व पामत से मित्र दूसरा कोई मी मत पावकिशोच सब बात मिस प्रविम है। पेड़ों की पिरोने माय महामारव पुरा। इसकी प्रति स परियार पार में रिणव होने स मनुष्यों की बुरि प्रमपुख होम रिसके मन में सा भाचा बसा मत पापा । रम सत्र मतों में (.)समस पर्वात् गो पारिम मापी मी निभानी र ती सब मतों - मूग म प पाप दूसरा तीसरा पापा। अब इनकी साथ एक सरस मम नाही। इन सम मतपरियों पर यों चौर भन्न सबको परस्पर सत्सल रिम करने में अधिक परिम्म हो इसलिये पाय पापा । यो इस में सम्पमतम मरण पर प्रसन्न पाम पित. प सब को सही प्रवासन सममा मा। इस में सी मेसी पुदि सिवनी विष्ण मोर निवन्ध इन परों मतों के मग प्रससमे स बोध हुभा र रसको सपके पर निपरित म रन मैंने उच्म समासोंकि शिान गुमा पुनमिपमा सदन पही पापम्त दोरम इसको दयन स सम्सल मत सब को विरिवोसपाय । पथात् सब को अपनी र समम प्रसार सम मत पप और सत्य मठमपामा सम्मा। हममे भगापुराचादि मन्पी म शान्य यानान्तर स मत प्राम्यावरण में मेरे ममप स गुरोप इस समुडम्प में वियपा गावा। इस मे कर्म सहि समयमा तो पिरोप माया कि मेरा हापर्व किसी की निसिप र मी मिनु सापासम समिर भगाने मी। इसी प्रथम सब मनुष्यों को पारधी समस्या पति रति मम्म सम्म मान्न सम्पसम म मिरमाने माने लिकि पाक्सिर झिोपप्रमभान पिये। इसी मतमतान्ता स्विस निरसrat और गरमको पपपत रिस पिम्न मन परे। उप इस मनुष्प पाति में परसर मिप्य मतमतान्तर म विश्राम गम उको पपानमा । परिम समनुपरमियप पिच मोदर सप्लस निरोपप अपार और प्रसव सम भन्न प्रकार पिपरा प्राप्य भी। पानिनस पिोकेमिपीपको मिोपमा मा रम्यकपरिमेम्म पर म्पोसम्म सम सर पारस पिरमाची तापमी एकमत पामा दिइस ममी निगरा सम्मिान पामास ५ मा में प्राचोरमारा मनुमोसमायों में प्रमाणित अममितिविस्तरपपिभिरगिरमरिषु ।
उत्तरार्द्धः अथैकादशसमुल्लासारम्म अपामारीयमतवापरामएसने पिधास्पाम' । प्रब पामयोग कियो प्रामवत्त वा में सामेल है मोमल का परम ज्या मरना विधान मंगे। पर भाजप व पेसा विस सप्त मूगोष में दूसरा कोई रोग हो । इसीलिये इस मूमि माम पुथमि । नोकिनी मुमचारियों को उत्पाती है। इसीधि पी की मादि में माम बोग इसी देश में मात्र से । इमीविष हम मरिक्ति में म भागे । कि पाप काम राम पुरुषों की और पानों से मिा मात्र नाम पर है।तिमे भूपोप में पेश है सब इसी देश की मसा प्रवेश प्राय रखा कि पारसमणि पल्ल मुषा पानीपत तो सही परन्तु मामांत देश ही सब पारसमषिकि मिसो मोहेस्म पछि विदेशी से साथ ही समय प्रांत पाहो पाते है। पतयप्रसस्प सकाशादप्रजमान । संचरित्र शिक्षरम् पूपिम्पो सर्वमावदा । मनु । । पति से पांच सालों से स समय यात पास साम्मौन सी चांद भूगोख में सपरि एकमात्र मलबा भन्न देश में मानसिक पद पोरे । राम्बा कि कौरव पांग पवात पारे समय और सम्मासम में एक भूगोल सब राम रहते थे बोधिवा मनुमति नो पति की प्रावि में पूरी म्सम प्रमाब। इसी मानव ग में रामबाप मास मात दिनों से भूगोश मनुष-पत्रिव बैरव स स म्प आदि सब अपने । पोप विपतियों की शिक्षा और रिमावास र मामा युधिरितीने राबसून पा और ममामात पुरफ्न्तकाराप्रपान सब मनाये सुपो ! बौन प्रमानच अमेरिका पुन, प्रोपरेशम विधवा भात् मासा मसिनारे पर मिसको पूषाय मम और समस उपरि सम राडा राजस्व बज चौर महाभारत पुर में भयानुसार प्राये थे। बराबराया तब राबब भी पाने प्राचीन पा पप रामचन मे मिर होगा तो रस रामचन्द्र पर पाब स पाप सोमा विमीसम्म विग्र मा । सम्पमारमा प्रेम पम पम्त भावी प्रधाचौरमहा पम्मद पापस विरोप से गम मा गये कि इस परमात्मा को मैं प्रमिमानी मन्यानो अधिन् गोयौ भराव पाव दिन ही चमता | ak पसर की समाविक माधि किस पुण्सा प्राय धन प्लासस अधिक रोम र प्राथम पुस्यमस्तिवा (पाप स्पिासधि और प्रमाण 1 समय एकादशसमुशास' बाहै। इसस एप में वि मुशिला पर होम प मोर रामन या सब स कि मास मल, पात्यावस्म में विण और रेलमारि रोप पर बात है और सब पुर विभाग में पुरदिपाया और सना इवना को कि सिम सामान्य प्रमभय पोर में दूसरा महो तब रम पोगों में पापात पमिमान मात्र प्रपामा यौ। मप दोष होमवेत मापस में पिसाप रोम प्रमय रामस अधिक दूसरे दौरे प्रमों में सोई ऐसा समप पुरुष उसहोणार कि रमन पराउपप्रने में समय हाये ये मुसामानों की पाणी सामने शियी गामिसिजीवणे रोम मुमयमानों के सम्म को विप मित्रमरिपा। प्रय फिमतेर्वा परम्य महाधनुधयमयतिन पचिव सुपुनरि पुम्नेयपुमकपनयाश्ययोयमाभ्ययभ्यूमाभ्यपविण्यपिम्दारिसमा म्बरीपनमछुसर्यादिपपास्पनरपपाससनादयः । भय मरचमखमनतयो पश्चन' । म पनि : ।।।। पारि प्रमापों स सिर कि पीस मेन महाममतपयम्त चाती मामीन पग पास में ही हुए ५ । भप इनके मम्मा मम्मम्पारप होने से रामा राम पिगियों - पारामत गरे। 4 पा सुपुम, मूरिन इन्त्रम असाव पोमात्र परम्पप प्रभपति गणपिगु हरिभद्र मम्मरोप मा समावि पपावि मनाप प्रसन मा और भरत साबमोम सप भूमि में सिरसों रखी पान पिस सम्पम्मपरिपती पसमा नाम सा मयुष्पति ममम्मावादि मम्मों में मिया इसको मिया प्रमा भनी भर पापाविपों मम । प्र.-साप्रापा भारि विष्य सिपी मनमी और वोग सकता उस समप में पीरबहो? 3.-पास सोपे समीप लोकि परामविप से इस सप होमसम्म प्र-पय प्रमों मम्यो म सिरोत थे। उ०-मही प सब म निमसे प्रम गौ मे सिरमो मन्त्र पन् दिप मसिर म भर भर को मन्त्र भन् एमम्स बरस प रमनमो धौर रोममित्र प पति सरपोपमनजरमा पर्ने नियमम परमाने एप गभर र सयप।इमभिर मन्त्र मारिस मम समन्ना' भन् मग रिण प्रमपरा मात्रा मयमा रिण से पर की पराय म म शान पोर पातु मिस भये प्रया सम्म पर्व कम्पिमेयर पर 11t.. पारेसम्म गाण मम ग्म में एम पाकिमसिग्न पप्पु म पुर्यामा गमभव व पश्चिम सल्यानकाय स इसी म नाम भाप्रेम। यूसरा इसम विसाय प्रमाणे दो ग्मी पर पास्वाप बोपरे प्रांच से गनु ने शव की मेन पर मामेपारयोगम माममा मामी प्रपती सपा की सार्म सेमापति पयाम में बाबास मनिमय थे। पेन मा योग स दोबारिसमा परेर सम्वेदी वापराप पर्पने पग पर्व मणिपुमसे। ऐसे मामास पर्वा को गह पर बोस स सरे को को बनायासे को एक मोदनाथ प्रर्भात मिसमें नो की बी मरने से मिसरे रेम्पने स सब गा की मग निहाला अपांत् मूर्षित हो बाप । इसी प्रथम सब रासस पाठ और एक तर सपशासे प्रणय किसी भी पास वित् रखा मोनों समय मते थे उसका भी प्रामाम न पायपवापर है। “तोप और बाब" प माम अन्य देशम्पा संपत और प्रामांनी भापा के नौ किन्तु बिसको विरोणो न तोप करते च और भाषा में मी और जिसको बस ते रसको मा मौर मार्मभाषा में भार भव है। गा संशय विष्ण को नही पोरे मम में परम पापिलो भीर मानते हैं। रसभरिमा योग ममाय नहीम सम्त और मितमी विय भूगोश में मौसम भारत पण स मिशनों ग्नस मामी रामसे स्म और रमसे प्रोपरस में उमस समरिम प्राधियों में tu अब तक जितमा प्रथम तल पिसभााव में सतना किसी मन्त्र एप में नहीं। जो बाते है कि ममी में सात नियमपात मचार र तिना सस्त मोपमा समाप पो म्वना काई मी पापा पख भाये मान लियोकि यसिमरा त्रुमो नास्ति तौरपापि दुमापत" प्रपात जिस त में कोई नहीं होता उस ऐरा में पासोमेगा मामले सापूरोप एस में संसलिम प्र म दाने से सम्म योगी और मोसमूगर साप पारासा पत्र पो रस शनिपे घधिक। मनु प्यारत पराकीबोरता मीत म्पून गरबाकि मैंन जर्मनी परिण्टा निसिपम'-पासेसमा विसर्मनी स्त्र में संशयिी प्रपर भी एखम मोस्यूमर मपर कर साहिल भर बाासी का भय रखम मुप पिरित हो कि मोपपर में N भाभार्मावर पोगों प्राईम रुप पाया वामिणसिमक गुरान्ति प्रभम बरव परिणस्थप । रासस रापमा पि (HR) इछ मन अप पारा किया। ता गा सातवापर सूर्य प्रमिा सो मारा इसम परमामा मामी मा पमाभिमभूमिमा मलपाति रममै हम मनमा प्रमिलने स मम पारित कि सर्मनी रण भर मागा सा में मpa freमिन पापिया गग रोमान॥ ।
एकापासमुद्रात २२६ पनि किमिकमी दिया और मन भूगोड में से सब प्रान्त देशीस मधीत पुर। देखो ! कि एक भार" . साप पास मोद मांस व निमसी अपमी 'पपशिष रिमा में विस्त समरिण और मचाममा प्राव केव। म सब मिष्ण सवा माइयो र स पर पामाप्मा को प्रसन्न प्रकिो परमेनसो गावि पालको पूर्व में कामोरो मरणको निप सिग्स प में देवो प्य यायिभार यादमे मी पो पिपिमा पाकि ऐसी ही रिण क्रममा बिसी माय में भी पेक्षा पनिषदों मान्तर में बिखते कि मैंने भी पारिपात सी माया परी पर मममम सन्दरहकर सर मध्य । यसका स्य र मुन निधान हर मुमकोमा सामान्य भारत रेखो भयो मानमभिर में यमरोकिमिसको छोरा मी मही जो भी किसय कम है जिविस में भवता मी मोर पुण्मा रचन्तक होणार की 'अपमापी मसको समर परेको पापया मंगे तो गुरु प्रथा होय पातु पसे मिशिव को मरम्मत में ऐसा पहा वि डि एक भी अपनी सा में मी बाबा कि जब मार्दप्रेमाप माने तो मान हाने में समर। विमाशकाले सिपीठदुधिरच्या पा किसी विमान है। अब बात होने समय मिल पाता तब उमो पुति दोन गममा गमको सूपा समा रम्य मान्न और मय समय रस सूत्री मा। सब मिल राजा महसाबा प्रपि माप पग मागभारत पुर में गुरु म मा गा पीर गुध स मर गम तप विज और सोच घम असा हो गया। प्याप अभिमान पापस में प्रये पो बम मामाको समरमा मच्याही सपत्र भाव देश में समा रम्नाचा पुपादार पान्तर रामस्य ममअब सब बा विदार उप सब लियोन के प्रयिम् होने में दो मा हो भी जो सम्परा म बेबादि ग्रामोस प्रमसहित पाने प्रमथर भाग मी रपया। गरजीरिमप पम्मामांग पर सो पाममात्र मोरिपरि कोम पम्प बाकि सब अपिएप गुगल गप पर, पम भी समर्म बाघ । प्रायों में विकिपषी गोपिनमायबापमा पाहिय। सम्मतिमापो नियमति मागको परेशमले सय कि स्म ही मुमारे पास सिम मामी सपणि तुमान सामुदिम मिगी। मिमग तुम मममी समग दो बार मा में पाग गा। पूष विर में मनाम पाय पर पूनापमा प्रषि मुनियों के प में विन्य प्रारमम भएन मन पिषी मी सम्म, मूब में मोहरामपा।
२३. सत्यार्यप्रकार । अपर्मियों पर प्यो। मन ये पाठ दिनों के पास इन मूत्री मनपा सो! परन्तु मम पिपावि पसान संत मिय से प्रत्मात दिवस म रामले सामने बोगप्प मारी सोनियों में सब मावली बम काममा पायों की बम पड़ी। सबमे प्रपने स्वमनाम मैं पापन स्तोमूत कर और भने पे किप्राषाक्य जताईन । पारम गौत। प्रांत बोलायों के मुख में से वन विताबानो सारा मापन के मुख से निभा । अब परिमादिप प्रोत भर परे मात् माता दिव की मसीह और निको पम्स बम पुकारे ऐसे से मिले भिइम बम प्रब बामपों को दिक्पायदा उपक्व मित्र गया । पर मी न रोगों ने प्रसिद्ध किया कि यो अव पुप्पी में बम पहा! वे सम साम्पो रेसिपे है । अर्थात् बो पुष कर्म स्वमान प्रवास पम्पल्यपी रसको नामसम्म पर रस्सी और पतकम्तममी पाय समानों से मेरे सगे। प्रपना सा मते बसे । पातक किया कि “स्म भूषमारी से मिा रेलोक किसी को नही मिप सदा । इको जमा परिपे कि तुम किस बोक में पथमोमे १ उम्मे मम तो घोर नाक मोगले मि कौर पथदि बनाये । तब तो यो प्रेषित होम-म "साप" हो तो तुममा बारा हो पण नोकि विसी-प्रशद्रोही विनस्पति" किलो प्रापबो से द्रोहमयी रसम बाट होता है।प पता सीकियोमा और परमाप्मा को पाने प्रभामा सब जगत् के उपलक पुस्मों से रेप सेगमप ममप माहोपा परन्तु यो मन नहीं समन्न मध्यम माम और बरमकी सेयरको पोम्प म-यो मन। --एम पोप हो। प्र-पोप रिसको मते -इसी सूचमा पोमम् मापा में दो पर और पिता पम पोप है परन्तु प्रवर पसरे टेम्पम पमा प्रबोगन पापसे को पोपम.. प्र-म तो प्राय और साधु बडिमापियामबार माध्य 10-0 सम्नु सुबो माई। माया प्रमाण मापी होने के और किसी साधुके शिव दाने पर प्रश्य पापु मही से सस्ते मिण मामय और स्मभपने रस्म गुप कर्म, समभाव से होते मोकिपरोपभरी। मुमकिम रोम पोपभपये मो कोम नुम अपये पाप मारे सम्मने मोमे हो हम माम पे स्मिा हम्पी व पौरपान मी में भी सम्हा जो तुम स्पर्म में गा पोतो हममे पर जिये परमे ममा मोमे रतो की सामग्री सम में तुम मिमी रेस मुमम स पाप के प्रो और परपोर्प में गये इन्पा एकापसमुहास २१ “पोशी" मे पर सपा पेय पातर प पोपी ईसा पर मरिफम की मपि सामनेगा हम इस मास की गे पियवा वा- ईसामसीर ! अमुक मनुन ने मे बाम पर सास ससपे स्वर्ग में प्राने विष हमारे पम्स ग्मा म रिचाप स्वर्ग में पाये तब तू पपने पिता के स्पर्म के राम में पीस साफ सयों में बमाबपीच और ममाप्रत पचीस साम में सारी शिमरी और नौम एम पीस साबसों में माना पीनामा बच और पीस पास इसके मित्र मार्ग पामुमादि निवाझव के ने दिया रे। मि रस दुस्सीके नाच पोपटी पदी सही कसरी रसाप में ममप कि 'जवत मरे तपस्सी को पर मैं अपने सिराये जाने चिपे प्रपये पम्प को मस्सन्न धितो प्रेम के लिये शरिरते पाये च तुमे और मामी को ला में मार लिये प्रमाय सच पशुपमे विधागे।" भब रेरिने यो स्वर्ग म पोपीने से बिपा। जबतक पूरोप देश में मूवी मी पापा पोती की बीमा सती की परन्तु अब पिया के होने से पोपली की ही पापागुत नहीं पता किन्तु निर्मचमी पड़ी। सही पारी ऐ में अयो पोपपीने पाही भतार मेकर पीय माई हो भर्पात् राय और प्रम मे नियम पाये पमा भचे पुस्खों प संग होने देना एक दिन पहलने के सिपाप दूसरा सभी काम नहीं कमन्न परत पर बात ध्यान में रखना कि जो समयपि अन्सिस म्ममार मते १ही पोप पाते हैं। जो कोई उममें भी पामिक विज्ञान परोपरीने सम्पब और साबु?।। मग रमी मी मरी ही बागों मजुप्पों को ग्राम पपमा प्रयोगम सिख प्रवाही पोप" समसभा र प्रामसमा साधु माम से मम पुस्मों का सीमर मा पोम्पारेखो ! जो कोई भी रचम प्राइप साधु म होता तो सागि सामवासों के पुमा स्वरसहित म समपान और मुसम्मान ईसाई प्रावि मग से बम प्रापी को परति समयमों में प्रौनिमुटपाथमों में रखवा पेस्म और सम्मा ! सिप्प समय साधुओ। "विपापप्यमृत प्रायम्" (मनु १।१५५)मी ममत प्राप करने के समाच पोपपीता मे गाममे में ये पो पानीमाथि मतों से परामा समो सि में मस्त समाय गुख समम्मा ची। जब पबमान कियान हुए और सपा पार पूल पाम अमिमाप में मार सब बोगी में परसर सम्मतिमो राय पानि मा कि ग्राम्य और साधु बरपास है। रेवो! 'ग्रामणा जम्मम्प "सापुर्म सम्प" म र पप जो कि सब पण और सामुमो-रिएप में ये सो पो व मपने पर सिरे और मो कोरम पुष मन मप्र रम पि मुनियों के माम पर अम प मुगाडे या रन विपित पनि महिला माम पे पपपे पर मे एरा मेमस गरी । पुका परेयचा प्रये बगे प्रान् - । सू • E1 || २२२ सत्यार्यप्रकाश प्स को निम पाकिरन पोपो को मारे पिना सोमा रम्ना या सबा बा पौन्न भारि मी महीमा सकते थे। रामानों को पेसा निबर प्राव कि पोपसहक ममे मात्र प्राय साधु च सोमें गमको कमी एसन रेमा प्रति रम पर मन में मी मा देने की इमरममा बीरे। पर पसी मूसा हुई तब सी पोपों कीभाई मने गमा इस वि मा महामारत पुर से एक समय से प्रात हुए योनि रस समप में प्रपि मुनि मी प तथापि म सम प्रमार, l आपके भजन ग येथे पार होगये। बब सचा उपपेत म हा का भाव में पवित्र परस्पर में मगन बगे कि- उपमेश्योपरप्टस्वात् रिसाद ॥ इतरणाधपरम्पय । साबम भात का राज्म र परेशक होते हैं तब प्रचे मार पर्म अर्थ आम मोर सिर होते है और बच उच्म पाक और मोटा नहीं रहवे तब मयपरम्परा पाती। मिमी बस सत्पुस रप होम मनोमस करते। ठमी प्रपपरम्परामा होम प्राय की परम्परा तो। पुमा पोप बम्प अपने घरों को प्रा मान बगे और मन धपे कि इसी में तुम्हारा मावोग इनके मा में रोममे तब प्रभार मौर विपासति में मिमा होम गरिरे समान से गुरु और सिं । पिता बप पुदि पराम गुरवीरतादि एमगुब सब मा होते बसे । पसात् तो मांस मप सेवब गुठ ममे मग । पमा गन्दी में स एक ममममा सबा पिया। "शिव वान' पार्ष म्पाय" भैग्प बाम" इत्यादि नाम विनमत्र नाम परा उपमै पसी । पिचित पोसाकीत मिली कि- म मंस प मीनं च मुद्रा मैथुममप च । पते पा मकारा स्पुोहराति पुग युग - १ प्रीति में । प्रदचे भैरवीचा सर्व वर्णा दिगठप । नियुत्ते भैरपीपा सपं वर्णा प्रपा प्रथा का सम्म । पीस्या पीत्वा पुन' पीया पावत्पतति भूतम् । पुनरूत्पाप पे पन्या पुनर्जन्म म विपत । ३॥ मामिलना मावपोनि परिस्यम्य विहरत् सर्पयानिपु ।। पायात पुराणानि सामान्पगरिधाइव । पम्य गाम्मपी मुद्रा गुमा कुम भूरिय । ५ शामली पपानपराइम गया पापा की जीया जो सहमित महा मधर्म काम उन्ही काममानियाने मान्न म माम मौन पात् मप्पा गया पी, मीरगी प्राबिपि पासपर मुद्रा और पांच मधुम भन् पुस सब शिव पर पी मर पानी समम ममम- વારે पकाएसमुहास भाई भैरवस्व भैरवी शासपोरस्तु सहम' । णेमो पुस्य पीते इस सपणाप पारेसमागम करने में बाममी पोप पही मान । प्रांद बिन नीच पियों को पना नहीं उनको प्रति पतित मनाने मामा । स मों में मचा पारि विषारे सर्व परिपेप रामको मासियों ने प्रति पवित्र मा पुनो इस मोक सबारा- रममा पुप्पर वीथ चारमी तु लयं कापी धर्मकारी प्रयाग स्पायमकी मधुरा मना । अपोया पुषसी मोहा अपाम तन। परि रस्ता साम्प समागम प्रमे से बाबो पुकार बाम सरपक्षी स समागम में कमी की मात्रा मारी से समाम प्रमे से मानो मायाम पोती की भी मान समागम माने में मारा पाय और रीसाय बीमा भने से मानो प्रपोजा ती मापे । मम वाम धरा वीर्य मासका माम गरि' और 'पुप्प माम माम स्तीमा 'मम्मिम' मनाम पाम जी मोर मभुम म नाम पबमा । इसखिये ऐसे ५ माम मांकि जिसस दूसरा स समफ सके। अपने कौच भागार डाम्मन और गब पारि माम रो। और जो पाममा मत में नहीं रममा 'पा" प्रावि नाम है। और सात कि अब मेस्वीको तब रसमें मावश समय पतनाम सिहजता और जब भैरगीचा में माह सब सब अपने २ सस्प होगा। भावोस में समापो योग भूमि परे पर एक मिनु रितोषकोख बनाभर वाम उस पर मच प्रकारको रसमय कम भएमा मा पाते है "मालाप विमोचमप! मम पारिश स रहिवदो। एक गुम भाव में कि यहाँ सिम्पपममा म को महीनेपाली और पुरुष को कालो पुकबीको कीमएव और मोग पिसी पुल्प को माम पूस्ती । पुका कोई किसी की कीमों मपनी परकी कई किसी को प्रायो माता भगिनी पुगा मावि भाती है पुष पात्र में मत्र मर के मांस और से पारि पाणी में पर स्वयम्स म प्रेमजो कि सप प्रधम्म होता पण मम दोरखा कि मरोमम् भिवाम्" में भैरव व विमम पौवाप , उसी पात्र मब पीच। और अब किसी को कोपपा कोम अपन किमी पुरुष को पामस्थ में सबथर र रसम मम्मी और पुल भ माम मराव पाटी मा रपमा इन्द्रिय की ममती व सीप शिवकामपा यावा पिशाम उसी काम सब योग एक प्या पौव। बिरसी प्रमर म पी पी. समतामय मिीकी पदिन मा मात्र तो निमि साथ इमरो उस समय सम्म मते ।। मी गात अण्णायक मत पास मुभमुध असम मत। किसी भी मर होता । म ग पणि - सत्यापनका प्रयोरी प्रात् सब में सिद्ध गिमा सातापमाई चौल में मौजता है व इमरे सपसे पो सिर की ये बा । कि- हामा पिपति दीधिवस्य मन्दिरे पुप्तो मिशाया गपिकाग्रहेषु । वियते कोपरचक्रवती । बो दौक्ति पात् मार पर में सो गोतम भावे नोंपा में बामे रामे असम म सोचे इम्पादिम पो नि विमो की सममागियों में सर्वोपरि मुल्स मा एमके सम्मन मामा मता है। मनात यो बाममी पो ग्नम मा और जो भयेम और पुरे कर्मों से मेगा बोय बॉकि- पायपदो मवेमीप पापमुक सदा शिप ।बापतकवादी साक ऐसा मन में पते। किमोहोनब शाखमय माग ऐशान गरि पार्यों में चारपाल, जो निम्न होनपुरे काम को सदाशिव गोस समाप्रावि में एक प्रयोग विधी कि एक घर में चारों भोर पर हो । न मय बोतब मरोम थे। इस प्राथप से एक मोतम पौडेस्मे भावप पर बने । सम से पौ वीसरे और तीसर में से पानी भवन में बाये।नाम पीने कितक समीरमान पिची मैं FR परे। दिम नया रखने व उसी प्रकार पाम गिम पो। पुनः तीसरीम इसी प्रकार पारे गिर सेतो रसम्म पुर्यम्म को मात सच तो पो कि पेप्से । ममुप्पो प्र पुनः मनुप्पमम्म होगा होम्मिा कितनाच पोनि में पार पाडपर्फम्त पा रहेन । अमिपोनों में पप मिमी किएक माता को किसी पीको मी न बोपना परिपे प्रांत मेम्परोप मपिनी भारि पो म यो पब के सम मम ममा थी । इम बमम्मपियों में एय मामिण पमित्र ममें से एक मातरी विखा भवी 'मातरमपि प मरम्मत माय मी समागम किन बिना न बोरगामी भोर मी पुस्तके समागम समय में मन्त्र पप १ कि दमको सिरि प्रस होजात । पेसे पापा मम्मूत मधुप्प मी मात न्यून हमे 1112 मनुष्य मामा पापसास की विमा भरपी मय। देखो! ममी मतावास और पुरावे सप सामानमग्रमो के साथ और गो पाली मार्ग की मुद्रा व गुमस की की लो. सारिष इन बोयों ने मिस मना किया। पथात् प बोमी ममत गुतवापता मोबदों के पम पमी मामा की पोपी मोगा बाई, भोव- सौत्रामया सुर्य पिपत् । प्रोशिव भसम्मासम् । परिकीरिसा हिंसा न मपति। म मासमपणे दोगे मन प मेधुने । मसिरपा भूतानां निशुचिस्तु महापा। मनु म ।
एफास्यसमुग्रास २२५ - सौसमसि पक्ष में भप पीब इसम्म भर्प पाकि सौसमयि पत्र में सोमरस भपान सोमवगी रस पिप । प्रोशित प्रपा पक्ष में मांस खामे में पोपमही ऐसी पामरसर की बात सममापियों ने बचाई। उनसे पाना पीये किगो परिकी रिसा विसाव हो तो तुम और सरेशाम को मारोहोमम तो क्या चिन्ता ! मांसमस्याभो मप पीये पाखीयमनपरे प्रावि में रोप नही पाममा कोरापन पौकि निम पिचों पारिस मांस प्राप्त पहीं होता और बिना अपराध पीपा देवा पम भाम नहीं। मप्पाम प्रतो सपना निरोप दीपोंकि अब तकमागियो सिा किसी प्राव में माही सिम किनु सर्वत्र विपेषा और बिना किम मधुन में मी गोषी इस विपि प्रयाबा सोपी। ऐसे २ घन मी पस्तिों के प्रप में सबसे लिने हो बपि मुनियों के माम से प्रन्य पमाना गोमेश भयमेध नाम पर मी माने बगे थे। अपात् इस पयों को मारक होम भने मे पम्मान और पएको स्मोकी प्रधि होती। ऐसी प्रसिरिमिक्षय दो पीलिया प्रामबमयों में प्रथमेप पोमेष भरमेय प्रादि समर समीकर मारी बागोलकियो बाम हो ऐसा भ्रम पोम। प्र०-जम्मेष गोमेव भारिसमोसमय। उ०-समय तो पाकि- राष्ट्रवा अश्वमेधः । शठ अपर हिगी। शठ ।।३।।९. प्रप्तिा प्रश्नमाम्य मध। एपणापये: घोरेगाव प्रति पय सवा मनुष्प मार के होम कामा मोनहो विसमा प्रमाणिपायों में पेसा समय सिमा किन्तु परमीट कममापियों में च । धीर बहस . मी सममापियों में प्रकप किमारतो! रामपाल पर्म से प्रथम पाहम म विपरिसरममा समाव और पति में पी प्रतिमाहोमममा अपमेष पानिपो, भिव भूपिया मादि में परित रपमा गामेप र मनुष्य मरगप सप उसके शरीर चिपका मा मरमपा. प्र.-चामते है कि माह मस बम्प पीर पालाम्मी कप होमममिपयो गीता रते थे परम सीमी। 1- स्पर्म भेसत हो तो ऐसा पठभरेको का मारोम मन में पहुंचा पारित कर दिल मा पिता की भोर पर को मार रोम मम मला यही पते ! पदी में मे बियो। प्र-समय बों के मात्र पान। यो में महान पोमांस! * प्रयात् एम. १ सस्याप्रकार ३०-मत्र किसी को भी पाने से नहीं रोमन क्योकिया कम। परन्तु मम अप ऐसा नहीं है कि परा को मारोहोम करना । जैसे "माये सादा इमादि मन्त्रों मा मि में हवि पाशरिष्मक भूवि रम पार्ने होम मने पे म्यु, पति पास होममा को सुच्माकोसे ।। परन्त इस सम पर्थों को मामही समझते पे स्पोधियो स्मादि दो।" मेवर अपने स्मपर ये पूरा हुन मी माही ते मानते। म इस पोम पेसा प्रपाकर देखा चौर सय मरे म तपय मागी करमेकम एक माया देवादि गोपिना परमार परित गुण है। मुवे कि एक इसी क्स में पोरबपर म राम पा । रासस पोपी पे पापापा । रसको निराकी समान पोरे सास कराने से उसके मरने पर पत् पानया रोम अपने पुत्र को राम रे साधु पोरों की पोर निसपरेप। इसी को साथम पर और मामा मत मी सुधा पापोंने इस मसर पोष बनाये। परमपित स्वर्ग यातिपोम गमिष्यति । सपिता पम्मान मात्र स्थिते। मवानामिासमा भादत्तप्तिकारणम् । गप्पयामिहमदर्मा म्पर्य पापकरुपमम् । बो पय मारमा प्रतिम होमोसे परास्माको भावमा अपने पिता भारि को मारो रूम में वो बा बोमरे एप मनुषों की तृप्ति बिपे भार और पाखी हो मिस मामेबारे मनुज को मप सच सामे पाये बिये पोपमा पनि पत्र मे र तप्प पेपर पर पयो बीत एप परदेश में रहने मामा में परमारों में पर में सोनी की पच्न परोम बोग मर रस चम्म पर बने तो वही पसार बोबीवे पुपए अपना एक पत्र पर पए को रिचा गुमा भी पता तो मोप पास किसी प्रकार की पर क्या । पर पेल पुश्ििसर परवों को माबो पो और रात मच पे बा। सपात्र से सम्म मृमिपति एम मन में एप व पोपटी पानी और साविकको नियर गल्स पामिनी बडेको समयमये जोन में भी चोर मर की पोपीला पासो समुहम्म में दिखगे। पगुतो इस भमत सीमर मिपा परन्त तिने भी यो पम्म यी सौर मिम पि ऐल्को पहावे मौसम साभर यहीं किया। मोर भवनसमपार को पोपडीता को प्रतिमेर पा+ मानम बोकी मी मिन्ना पर पपे रो पम्मपान परमपीवी और प्रमाणपति निर्मों को भी प्रशमिया स्तिमे पुछा दिपारमा जिम्मों पर बनमा एमसच भी चपाई, रियाका राममे पर .-'पर.
- २७ एकादरासमुहास मत म यो वा अपमे मत यो गास्म और साधुओं को प्रतिध और पैरमागियो म प्रपमान और परपाठ से रशमी ने बगे और पाप पुष पारम्म और पमर में मा पप प्रिने पये प्रपमदेव से से महापौर पषम्त मपये दीपमों कीकी महिपा बाम पन मोबगे प्रान् पापानि मूर्तिया की पियों समाहित हुई। परमेवर को मानमा पुष पा पापाचारि मूतिपूस में बगे। ऐसा वीमती बप पपम्त प्रक्ति में बैलों मरान म।प्रपा मेहराब ज्ञान से गुप हो गये थे। इस बात को पनुमाम मे मा पासपम्पतीत हो। ससौ वर्ष पुर कि एक साथ विवरणपत्र प्रसव पर्व प्यारागादि सब शामीको परम सोचने पगे किया। सम प्राधिकरमत भएमा और शेन मासिक मतमसमासी हानि की बात है, इसको किसी पर दयमा पीये। शहा याच तो परोपे परतुन मा मी पुस्तक परे ये और ग्मको पुतिमी गुप्त प्रयी। गन् रिया किएको किस प्रमर एवं मिष मा वि परेरा और भाकाप माने से पे गये। ऐसा स्थिर बनी में पाये। पोरम समप सुषमा रायपबो मिली और अब संक्षा मी पा था परम उपोग प्रमे बगे और राग से मिल मालपास सस पौर मिमी ला को पोहो और न मठ को मानते हो इसहिपे भापको ममता कि 'पियों के परिम्तों के साप मेरा साप म्यासे इस पवित्र पर पोपरे सो जीतने ममत स्पोमा से और पाप मोजीतने पर ममतालीमर कोरिया। पपपि सुषम्य नमत में पतवापि संहत प्रप पाने से उनकी पुदि में अररिया प्रमाण वा। सस उनके मन में प्रामय पण्वा महीबार पी। पकियो पिम्प समास की पौवामो समय चौर पापको बाद शाद।बचकमुपाय राजा को बड़ा पिर पाक मही मिल पा तब कप में ये कि इनमें वसा और भैन सा अस। स याचार्य की परात मुनी और बड़ी समय सम्म यो दिन ग्रामपाका समाममप्रनिवप बमसमे। अंबिपोरे परिकों को परम आम सभा मार। उसमें रपराधर्म अपाम्त मौरवियों प्रविन मत पा। पर्यात परसम्म म पर बदमन भलपवार नियों मपरम और नियम पर अपमे मतम स्थापन चौर र प्रसपान पाया दिनों तक मामिपा कम मत पापा किसीमको प्रमापी करको पही, पापा और और भयादि इम बलों की उपरिचौर गाय कमी मालि। इस दिन शायर्ष म मत पा फिप्रमावि सिर परमामा मान्मापामा और जोर म पनि उस परमवर पपरी माण प सात् पापा पो धारव और मारमा पानी भर पप स्म। परमेहर पस । सत्यार्थप्रकार To-ममा किसी को भी पाने से नहीं रोता कि एक कम है। परन्तु मम मच ऐसा नहीं कि परको माहोम पापा । जैसे "माये खाता इम्पनि मन्त्रो पप भनि में हवि पापारिकमक पुत्परि रचम पपये होम भने से प्यु सी पप र रोका जाम् को मसल रोते है। परन्तु इन सम भी कोपमा परी समम्ते मे वो यो स्परिटे1" र अपने स्मयमदूसरा सभी महाभारते ममम । अब इस पोषों का ऐसा पवाधार रेखा और दूसरा मरे म सपर भागी करने को सेवाम पु महम्ममा भारि ग्रामिन र ममत प्रचमित हो। मुक्त हैं कि एक इसी देश में गोरखपुर रामप्पा । रसो पोपों में पारामा । उसको नियसमाम पोसार कामे मे उससे मरपये पर पसात पाम्बप होम परे पुत्र को पमरे हो पो की पोस मिपये बम । इसी की सम्म भरपाक मौर भाभावक मत मी पुमा पास होने इस प्रकार शोक पाये है। पराधिय मग यातिपोम गमिष्यति । खपिता पळमानन वा फरमायति। मवानामिरममा थार येत्तप्तिकारसम् । गशामिस्तूनां गई पापकल्पनम् । जो पय मारन अनि में होमप्रमे से यमाको सो पम्मान अपने पिता मारि मारणे स्ममयो नी मेजो जो मर पुप मनुषों की पति सि पर और महता वो म कानेपो ममुणकी मग मर रमने पीनपिपे बोधवा म्म पचप पवा को भार, सप्पर से पापा पनि जीते पुए परदेश में परंपो. माग में समारों को घर में रसाई गयी की पर परोस योग मर ग्पले पाम पर रखने सलो नही पत्र जो जीवे पुप र देश प्रपत्र पाल पर पुप को रिण गुभा की पावा वो मम किसी ममापी पप सम्ता उना एस पुधिमिर पयोममायने पो और मन मत बाये मम । जस बदम राम भूमिपवि उपके मन में एसप पोपी पी गरम और किस विपर परम पप्या मियाको सम्मान बनने बसेर में मीचौरममा का पोपसौस पापो समुदाय में लिपगे। पुणे येइम मम सोमर मिया परन्तु विवेकी पस प्रती ala firम पिप बारे थे रनोंने यो म मन पोभर मही किया। रेगी और भभम समबर की पोरमा प्रावि मग पर, मानम की भी निमा मामा उम्र पनपम्म बापरीवी और अमम्मति नियमो मी पण मिा! हा स्विरे जमकर पता पिचारों पर सती पम्मच पीर परिणा पर रमही भय •अर-पा - एकापसमुहास २९ सियाम्ती-मम तुम किस कोमते दो। मबीन-ओपन हो और प्रवीण ॥ सि० ०- दोन मही उपकी नीति मा सस्तो मा--प्रभारोप से सि-अप्पारोप किस प्रेमात म्पासपरोपसमम्मासा 'परोपापणाभ्यां मिस प्राप" पाय उप और रो रसम अम्ल क्लुप्रभारोपणमा ममास अम्मारोप और सिम मिरामप ममा भपण प्राध्य है। इस दोनों समपंच पति मय में पमप ममत् विस्तार करते है। सि.-तुम रजको पतु और सप को बाल मानम इस प्रमगाम में परेमा सर्प स्तु महीनो मोकिरण में नहीं तो देशान्तर में पौर ग्सम संस्मरमा एप में है। शिप सप मी प्रमही हामी यह मै पुरुष सौप में चली परिकाममा सममना । पर स्वप में भी जिम मान ताप रेगन मर और गो संस्मर भारमा में भी है। इसचिव पस्म मी रस्तु में पदरतु भोपको समाम नही ।। म०–जोमी रेखा म मुवा जैसा कि आपमा शिर और पाप रोता. बस की पारा सर पखी मती बोम्मी म हुदा पारखा पता मसम पोम हो सके। सि०पर भी शान्त गुमान परको सिर नहीं पता किसि मुन संस्कार मही होता । संस्मर रिमा समति और पति के बिना साप प्रभा न ता । र पिसी स मुमा कर कि अमुक मशिरा और रम भरवार पनि कामाई में प्रमा राता और प्रेम उस पर सवरेन्स र मुमा रमन स्मर समीमा में ऐयर उप पर सम्परा से प्रचार र पम पम में ही परमाको निम एप मुगामा बम्ब्याप अपने ही में एमासमा मपा शिरभ पाप मा म सानो ख पाराको पता। पर भीत में प्रवस्तु प्रापण मध्य मनिस मागा मिमममेपास मिचो गामा में नियममात्र पर मिrat पातिविपरमयमा सिमग प्रामा में प्राति पर बराबर सिर दना है। इनमा किभी रस्म में समय साविम्मति भरने अभ्यासक एण्यk भी मुठ आठ लन पर मुकर में पनीर सम मामर ममा रमाप नहीं पता कि मंगरस ममा राम मुyि रमाकामा मुवा प्रसन में ग्माबममा स्पा में निफ्मामी रामबसमस्या नहीं भाइममिव गुमाए पम्मम मम समारोपप और गणतो मग गियर मा गम मरसनोमात में पन में तापमान हो।
२२८ सस्याप्रकार रोम पौसा महा। बात दिन तक ग्राचार्य होता रहा। परन्तु मत में पुति और प्रमाप समिप ममत विम्स और गारामत मस्ति गा। तब राम बेमियों के परिम्स और मुपम्य राय ने रस मत में सौपरम मियम मतोपोर रिम। पुषः सामा गुमा दुमा और मुपप गा मे प्रम्प अपने मित्र राममों को मिसन यार्म स यथार्थ कराया। परम्त मैम म पराप समप होमे स परमित होते गये पगार पन: सर्वत्र प्रावि देश में मने म प्रबन्ध सुपापि रागों मे र दिना और रनको रमसिपे साल में नौरान मी रख दिवे : रसी समय से मम मोपवीत होने से और मोम पम्मपन भी पहा । एस व मीठर सर्वत्र पाल देश में मान मिनो मनसा और हो म मान किन्न पातु शरार्म के समय में और किस प्रोत् निकली मूस्पिानियों को निभाती पे ग्राम के समय में सीपी और को पिना से पिता मिलों में भूमि में दोषी किती भाभी ममि में मिलती है। शारामा पूर्व मत मी पोषासा मचविता रसामीप्सन विमा । बममममम किया। रस समन इस देश में बन पाता और देश भक्ति मी पो । निधी मन्दिर परामर्म और सुषम्य रया ने भी उसने पे कि ग्वम पारि की पासा करने की मामी। सहमत का स्थपन हो प्रथम करने म विचार मते ही ये रतने में दोन सर से मामल और मौवर से परम भात् कायमुनि पे शहराम म पर प्रति प्रसा । म दोनों ने अक्सर पाम राम को देसी विनुक विकि रगतीपा मबई । पात् सौर में कोरे असी होमकामाने मौतर यसमा। तब सब निस्सादी होने और यो बिमार होने बाबा पाप मी होने पाल्पा । जो सीने सापारिक पामाथि बमपेमें रकम प्रया शाराम शिप करने सगे। प्रात् को मिल सके विस सम माम् मिया और पौष की एकता कसन को पी रसमा रापानको पनि मोरी संमें मूगोग गज में पोती और रिम में समयमा बम राशिय महन्त पब और बीमा होम ध्यान माने म्मेलोनिगरापर्णपात् ममियों की सौ प्रतिध होने सगी । अब इसमें पिचरमापीने किबो बोल सको एकमा अन् मिय णसाचार्म अपिय मत पतोब प्रम मा पहीं और शो मिलों के बरहिये रस मत प्रस्ताभर चिना हो तो अभी॥ नवीन पेरान्तिलों का मत पेसा है- प्र०-साद स्मन् स्यू में सर्प सोप में दो एमप्सिम में जा पर नमान् पसार झूम है । एक सही प्रवाई॥ उम एकादशसमुनास ૨ सियाम्सी-मम तुम किस को मते हो। मषीन–चोदन हो चौर प्रतीत हाये।। सि०-बो पस्तु की मही उसकी प्रतीति हो सकती है। न०--प्रत्यारोप से। सि०-अध्यारोप किस को हो? -पसारोफ्यमम्पासा 'अम्मारोपापादाम्पो मिपा प्रायो पाथ पर हो उसमें प्रम्प क्नुम प्रारोपप मना मध्मास प्रत्यारोप और रसम मिरामप ममा प्रपपर माता है।हम बोमों से प्रपंच रहित मय में प्रपबस्मक विस्तार करते हैं। सि म रनको तु और सप को भक्त मानकर इस माम में पो हो। या सर्प बस महीषो मो किस्म में नहीं तो देशान्तर में और रसम संस्मामात्र पाप में। शिप सर्प मी तुपही हाही माह में पुरुष सीप मेंदी प्रादि की समस्या समम खेन्छ । और कम में भी मिमम भान रोधी देणम्तर में मोर समरे संस्म प्रामा में भी है। इससिपे पस्न मीमा में प्रस्तुमारोपण के समान पी। म०-बो कमीबा म मुना जैसा कि अपना शिरशी और पाप रोता है की पारा पर पी जाती हो कमी म पाबा सपनो सके। सि-परमी पम्त तुमार पाको शिरमही मता पौकिपिमा देखे मुने संस्कार नहीं होगा। संस्कार बिना स्पति और पति के बिना सापा सुमन नहीं होता । जब किसी से सुध देखा कि अमुक म गिर करा और उसके मामा परि को गाई में प्रम रोते देश और हर कम जर अमर जाते र मुना रसम संस्मर सी के प्रामा में ऐया है। पाचन - पहा से प्रथम एकता अपने मामा में सही पानीको चिनको रेला का मुना होता देखता । अपने ही में रेता मनो अपना गिर सभाप रोठा र मर गाती की पाराको रमताराया भी वस्तु में प्रस्तु के परोपर सण नहीं किस नपणा सिमेवरे पूर्वपभुतप किये दुधों को माध्मा में समिश्राममान पर सिख प्रमय प्रतिषिमा उमायया मिरेख मामा में प्रातिको घर बराबर विप देता है। इतना कि कमी . सम में मारपट मतीति जैसा कि अपन पमापकको गम्भीर म्मी गत मारेखने और मुमने मौत मान में सामसर प्रताप स्मरय महीं पता किजो मैने उस समय रेस मुमा प किसा य म्मान रखा मुबह प प्रा पैसा सान में स्मरणमा स्म में मिपमपूसही वा । देखो ! सम्मापको समस्या मही पाता । इसपिच तुममा अभ्यास प्रार मारोप महार स्म। और जो पेशान्ती पनिण मधात् परम सपरिकमान होने पप्पाद प्रम में सपनो मान में इस ममी की । - सस्यायमका मल-अपिएमबिना प्रांत महता 1 से रम्न महो तो सपनामी मान मही हो सकता । म रम्य में सर्प दाम मय में भी पर मम्पकार और प्रासो मेख में प्रमात् रम् सपने स स स मम होममप से सवा । म उसको रोप भादि से देश विरसीसमरम्म पप मिचो ता से प्रम में जो मात् मे मिप्य प्रतीति पुरोग प्रस, सासभर होने में इस बात की मिति और मम की प्रीति से सती वैसी किसको मिति और एम्स की प्रवीति होती है। सि-मा में प्रात् सम्म मिलेगा। नौवको। सिक 10-जारमा सामा। म-प्रझम से। सि -~प्राशनमा से दुभा और मांगा है। म -प्रमाण पम्प्रदिौरम्प मा। सि -- मैं शाम अक्षण पाए किसी पब म प प्रय न-भिमानको सि.-चित्रामास मामला? म- मामेभावाब भात् अपमे सम्म को सारी सिस भूटने में बिमिला? राघरा मे सि -प्रषिव सर्वमापी सयभगुवोपप्रसनका! म --प्रापमा सि.-पो तुममे मन में बिना एक ममात सपतन मपमही! और समां से माल को प्रसव सम प्रा से मित्र मानो तो एक मिलने में अपने सम्म म भवान हो तो पा प्रशासप । NR में कोरेको पोका चार प्रमों निम्मा म देती है इसी समय मी एक देश में प्रभावी औरत हो तो सबकमी प्रभावी माहोलान । -पासबरपाधिधर्ममा सि -उपविखन और समीप असत ! न-अपिलाल पात् सिमे पानब सम प्रमाला भीमसपने॥ सि -पानमा भय “परयो म्यामात तुप निमसे हो पतिमी सिमे पान सन, असत् महा मस्ते। पर ऐसी पाकिमोने में पाव मिधा हो रम पम पास परोधमा .
एकापसमुहास पर मोची पावर सब पोमोगे कि इसमे हम म सोधन पातरम सम् । ति इसमें दो पातु मिखी है। म-रेखो से पामत म्यमय मेशम चौर मामयोपापि पान् पहा पर पौर मेपोने से मिठीत होवेव में मारायही फेरी मापा प्रविम मी मर और मम्मकायों की उपालिका भनियों ने प्रम। प्रसव पासव में एक पम्मि समान में क्या- भनियको भवन प्रविणे म्प प्रतिरूपो बभूप। एकस्वधा सर्पभूताम्तरास्मा पंप प्रतिरूपो बरिया रोप मे ।। ये पनि पो गोख पोरे बने सब भापतिमा परापी में प्यापक हम तमामराजा और रब प्रम सम्पायक परमम्या प्रान्तममी में मारे मतन्नबासमा परन्तु रपसे अपग है। मि -पा मी तुम्हारा पमा पकि सर, मा मयों और मामत को मिह मानपे होस भरपर्मस जग और और पर पौर माको से भिप माम मोरे 10- प्रति मर में पशिरोम एपने में हराभर रोमासी प्रथा परमात्मा परमौर जीप में मापक होम प्रामापा माझानियों में यमपुकाता है। सब में प्रग और बाबा सस से पापा मे उनमें सूर्यमा प्रतिविम्य दोसला पूर एक पाहोने से परम सम म मातम मन्य और इसी पर प्रस्ताव में प्रा समास त्रिसको चिरामा पापा जबक भय सभी जार। उप पन्त.प्रब माम मावा और ससस पिएस का प्रपोस मपानको मात्र मुपी दुपा, पापी पुस्यमा मम मरब पपने में प्परोपित मास्तिक संसार कम्पनी से बहाँ म । मि ~परत मारा कि पूर्व पापापा जर भी मार दीमिय पर पूर्ण प स मिमी महिरिन पावा। नरनिराम्भर दो तो समविपिम्स या परोय पौर परमेपर विराम पर भामा व्यापक र समय पर पपmuw RE मा से सम्ख और म्यापक सम्पपी मी मम्म पर्व मम्मपम्पतिमा प रपये पप्पम्यपक मिसे प और Tatो एकोहोचपन में व्यसम्ममा सम्मान जोमहा ससा पोरसम्मम्मी पाप में सानिय मम ममी पाममा ils सिमामा पमा सप्तम्भारपोधि पास PADो सम्परीन पर पसभा समय साम्प सस्थापनका हमारी बात को सबान पीजप्रसा! तुमारी और गपकी व माममाप दोष । धनुमा किराय प्राविमो चैपियों मत जान प्रमेहाभिये पामतलास मियो सकिएमा भनुप अपये पर को सिर मशिन पतप स्पी पिम् भामे प्रमा सयप विम मोम मे है। और या इस गानो प्रेमात गारवा की एकदा समत मिया मादि म्पमा सवा मही मान हो सकी म सदी यही हो सम्ती- पौर निवासमा पारिस देतो ऐसा-"मीपो प्रयाभिषमेत नत्पात्" गहम "मिर" में गाय की प्रस्ताविप भनुमान वित किन होन पगार प्रमस प्रमिपात कम समम पुरूष की पाठ पाय पी। वीकि सापर्वमात्र एक दूसरे के साथ एक बीती पम् मे होता है। स ई कि पृथिवी वाऽमियाजावाद बहाने एपिथी जस से पमित्रमा पहन पास भी मही हो समता से निवासी अभी पाप लावियोमर प्रसन्न और भ्रान्तिमायापनि धर्म बीच में सौर सात माता और विमानित पारिफ प्र में गांव से मिमी इससे प्रापौर बीब मिस मिस प्रादि ममि धर्मरसक्या प्रमावि बाप से मिलने से एपिषी और का एक मही। गौर और समय होने से गाल और पाएकनम्मी और मम्मी होंगे। इसमें दो से निभायमाथिको समम बानिय कि मम मितन्न मसिम मा परि चिसो पोमणि बनायो माधुनिकवासी पपस्मोकि पशिश और रामचन्द्र पाप भर मुनकि सब क्वानुमाली र सेसि म बना सके और ममपुषसते. प्र.-सबी मे जो शारीरिक सूत्र मामी मम मी जीव प्रा की एकता पीतीचो- सम्पचाऽऽविर्भाप स्पेन न्मात् ॥१॥ प्राण जैमिनिरपम्पासादिम्प । २॥ चिक्तिम्म्पशेष तदात्मकत्वाविमोडबोमि॥ पवमप्युफन्पासात् पूर्वमावावविरोभ बादरापप ... भव पपबामन्पाधिपति मोत बीच अपने स्वस्म को प्रसन्न होता हैबोकिरसम्म पा शिलबचपने स्वस प्रोवो.. “प्रथमाध्मा अपापाप्मा दि रपम्बाल पति पर चर्चा मेमसम्म बीच सित होता ऐसा मिनि माम मt.ममणोमि भाचा बामपसम्म निरूपपारिवारपोतुस्मयों मात्र लम्स गौष मुहिम मिल मसी बन्दी पोट फासादि ऐप्तिम भो।। लम्स होम में प्रक्रोिष मानले...
एकादशसमुशास २४५ पोगी एमसरित अपने प्रसस्म को प्रम रोम प्रत्य प्रधिपति स रहित प्रति स्क्म पाप अफ्मा और सल्म अधिपविम्म प्रावस्म स मुकि में स्पित पावत उ०-इन सूत्रों समर्थ इस प्रथम भनहीं किन्तु इन पयाम पा है मुमिपे तकनी अपमे स्वीय स्वरूप को प्राप्त सब मनोस रक्षित रोम पशि नही होस तब तक पोग से ऐवर्ष को प्राप्त होम अपन प्रमावामी माम पाठ हो पाम में स्थित नहीं हो सकता है। इसी प्रकार जब पापारि रहिव ऐपपुल पोगी होता मी प्रयके साथ मुखिो भान को भोग सकता है। ऐसा मिति प्रचर्मप्र म प्रविवि पोपों सर पर सम्पमात्र स्वरूप जीव स्मि होगी मी वामका मर्मत मावस्म के साप सम्मम्पको सहोता। पत्र मा साप एप और पिशाम को पार हो जाममुकदोता तर अपने निर्मपर्व सपका प्रास होम मानन्वित होता पेसा भासविना म योगी माम सरसोती तब म परमेश्वर से प्रस रोम मुछि मुख को पो स्पीन सन्त्र गता है। अंसा सर में पक प्रधान दूसरा प्राप्रपान वारसा मुछि में बहो। किन सब मुक बीच एक mat.. मो ऐसा होतो- नेतरोऽनुपपरे । भेदम्पपश्याचा यिशपणमेवग्यपस्याम्यां व भेतरी।। १५ । मसिपस्प तपोर्ग शास्ति: ।।। अन्तस्वरापरणात् ।।. भेदम्पपरेशापाम्प ।। गुर्दा ममियपारमायो सिरानात 0 अनुपपत्तस्तु म शारीर८1।।। मम्तयाम्पधिदेयादिपु क्यमम्पपाणत् : 2015- शारीरमामयऽपि हि भेनिसमधीपत ... माममुनिष्टावरन्दसूपि ।। प्रय-मम सागर परिो महीलांकि इस प्रप प्रत्यय मामय जीप में मानवीय सम्म। इसम और मम मही... "रमे पपाय साध्याममो भयति' प परिण प्रम। और प्रमिलोस सोपभा निग्रहम पिता गोभमा दोन मा मा शम्मतमा समेत राम और पानमसम्म रोया ममितिौर या दाण्डे र मिस्पषीस मना । इमदिर पौर म्यानही... .
२४२ सस्यायप्रफ मर और प्रसरा । परि तुम मम और पीर को पद १ म मायोप को इसमग्र रोरिस किमान्तमस पपा या पामे भमानी और जिस २१ मेपोम पोमोशानी समय मी से पावा प्रममा पीच में यातायात प्रमाणामक पुछ भीर नास परवा पोपमा मानव रहित रेखा सनी मन्तःमय ममको पम में शमी प्रशामी म और मुखमा पापा। मामले का में भामयमभाय सपश्य में होने स सा मयमानी समय सकिरी और मधुरा में मिस मन्तामा प्राजो वस्तु पी रसम स्मरण रसी प्रम्पपम्प से कामी में बड़ा मता बोकि 'मम्यरएमम्पो न स्मरणीति म्यापास्" और देव स्मरण और भी हो । बिस भिामाम ने मथुरा में देय परिप्रमास मी में ही रहन्न यिो मधुराप प्रताप ममती पाल मम मही होता । जो प्रा ही जीवन कही तो जीत सच होका धीरे । परि प्रयास प्रतिमिम पर वो प्रत्पमिश मात् पूर्णप पान म्सिी पी से सगा। जामो कियोसपिने माप रोम वो एक सिमे पान दुत होने से सप को मशाल दुसहो या पीपे और पसे पतों , निम गुर पुर, मुखममा प्रमको ममे भगर, मामी और प्प परि वोपमुक परिवार और भवरामे रासमरिया मा-विराकम म मी मामास होत्यासाचप्रमर में मालाराम भाभास परामनोवा किसी प्राचार गम्मीर परा पीता से ममी सब प्रत्यःमयों में प्रामास पाणी सि -रयास में सही नहीं तो ग्मको प्राव में कोई पीपी देस मा । जो पाप पोसता ही नहीं पच पर बार में से पा? पारा-चिरा सत्पर सपा निराकम नहीं। म-तो भिगोपसर नीया माता, दो भागों में मात्र पोवारीपला पदा। -बपिषी से सपा विधी और निहायो तो मोतीपौवा हो तो पोहोरे । दिने बोराम समान मनपा से मदिर र पसार रोच्या और मिस विसरा और मेरे ममम मी पोता सा मत मे सौ. मला स्मारे रसप्प और परिपात मि। सि-ही तुम्हारी समप मिपा सो स्मने पूर्व विपरिष । मया पा होमोडियम प्रधान किसको होगा। म-मो. ।
एकादशसमुहास २४३ सि प्रसीद म-प सजा और पस! लॉकि साता और प्रसनता पाधि सहित में होती है। सि-पाधि पधीत करो! न सि०-दो प्रमही सब और असामा । तो तुमने सप्प और असत्र सपिच क्यों किया पर बोयो कि पाधि कसित प्रमात् मिपाtam भापक प्रर्वाद कसबा करने का है। सि-मम्प पॉशि बोरसम्म तो जिसने मिथ्या कल्पना की मम्मी हो सकता। जिसकी पमा मिसा हो न-म सत्य और असम को समानत और पपी मे बोषमा मी मिप्यारे सिo-ममम और मायने हो तो सबों नहीं। म०-दो और सब स्मनी में परिपत* और मोमों के साथी अधि सि-अप तुम सम और समाधार हुए तो साहार और चोर के सण तुमी हुए । इससे तुम प्रामाणिक मी नही ये बाँकि प्रामाणिकपोता यो सर्वमा मन मामे समबोरे सनम मम माने समबोये और समाचिन् नम। अब गुम अपनी सो पापही मूह मते हो तो तुम अपये प्राप मियादी हो। न-समान मात्र दो भाम्प और प्रदीपभाषमती रसको मात्र रोपनहीं। सि -माही मानते बोकिदम मायम पेसा रोकियो पर पो और मासी तो इससको पमाकेश विसपी चरम हो । लॉकिजोपही रसम माममाम रो मायाजसम्भवी सामन्या के पुत्र प्रतिबिम्ब भी वही हो सकता। और पा सम्ममा सोम्पमा प्रय पारि कामोन्म भारी रविपदोंनो - मिमते दो। म०पदम पणि, शाम पारि और बिबामस पर्वत जो तुमस अधिक पापिष्ठ रोग सिखी रसको स्पन मोरमको वो शिर मा मौर निभाएम्स माथि प्रतिबी। सि-मयि रोप धिम् । नम मीमपिम्। सि.-अच्छा तो या ग्यास और निमारास परमात्मा सम्म स्थपनमो मसरममते है। मिसन पर सिमोपामारे। ओ रमन और मरी बार प्रकरणीव होती तो तुम रमकी पुलिया कम १२ सस्पार्यप्रकाश स्मारी बात में काम की मसतब तुम्मी और रमकी पण माननीय हो । प्रमुमार सिताच भाविकको मियों के मस्सग प्रोहिये पामत सोमा बिमा हो चकित भयपुसअपये पामे सिर ममि पावध स्पर्षी पिर माने मामा के समय बिम मी प्रमेते । और जो इस गठी मे प्रवाद गौच थर मे एण्या अम मिपा प्रावि प्यार सधनहीं मापते वो रमकी बात सोपी साठी - पौर निवास पास्थिम वो ऐसा-"जीवो ग्यामिक नत्वात्" उन्होंने विमान में और बाकी एकता मउमाब किम होने से पाच प्राप्त अमितीपागुत कम समय पुस्प कीस सारा बात है। कि साधर्ममात्र एक दूसरे साल एसा मी होता धर्म मेवा हो । यदि पृथिवी जबाऽमिमा मात्वाद पोहोने से किसी से प्रमित। जैसा पाप मास मी नहीं हो सकता पैस विजयपत्री अमीसा बॉकिमो मस प्रसस्ता और भास्तिमरि पम्मे जीप में से और सात सवा और पिन्ति- विमर्मस में गौ से मिम। इससे और गोब मिस गरिमन प्रापि भूमि पर्म रस पीजर पम मिमरोगे में मिली और बम एक नहीं। से भाव और समर्म होने बाल और मा एक नमी और मम्मी होंगे। इतने ही मिसावि को समयविकिम पिता पाशिम और सिने पोगमणिपाल पई भाविकान्ती पाबमति विश और राममाया यसम्म । बोकिरे सब पापी पे पेर निमम बना सकते और मम पुष । म०पासपी बेबो गारिक मल बनाये मम मी जीर-को पता रोखती रेखो- सम्पयाऽऽपिर्भाव कम एप्पा । म मामेय मिविरूपम्पासाविम्य ॥२॥ चितितम्म्पयवदात्मकत्वादिस्योडबोमि ॥२॥ पबमप्युपापासात् पूर्वभाषाविरोष बाबरायण ।। भत पदबाबम्याधिपति॥ मान् गौर अपने सम्मको पस होम प्रास होता है जो किसम्म वा बोधिस शबप्रपये परसम्मका प्राव होता... 'प्रपमाघमा अपातपाप्मा दि स्फबास पेन माप्ति पर्वत रोगों मेलम्स मे जाय मित दरोगा ऐसा मिबि मा मत है। औरणोमि भाषण गमष्मजस्वम्म निम्मारिकामों से जमातलम्म सजीव मुलिम रिष्ठ रा. माम्बादी वांट रप पासव पेभयप्रतिम नो से वापस होने में प्रशेिष मा.
एकत्यसमुत्रास पोगी ऐपसहित पप सम्म को प्रप्स होम प्रम्प अधिपति स रहित धर्मात सर्प माप अपना और सम्म अधिपतिस्स पावस म मुक्ति में स्थित । २०-इस सूमो मर्म इस पर नहीं कि दम कमार्थ भर्प पर है सुमिपे ! यस तक गाव अपने स्कोप सम्म को प्रस सब मों से रहित गोम पशि महीन्य ताक पोग में ऐश प्राप्त होम अप मामी को प्रस होके मानद में स्थित नहीं हो समय। इसी प्रकार र पापारि रहित ऐप पुल पोगी होता मी सके सब मुकि प्रावनको भाम सम्वाहै। ऐसा मिनि अचम्मत.. परिणति दोनों पसरपमा सस्म से दो मिाही तमी 'वाम' या मसम्म साप सम्मान को प्रस होवा बबाले साथ पेपर्म और या विकार जीवे ही बीमुख होता है तब अपने निर्मबलस्म को प्राप्त होम प्रामम्भिव होता है पेसामामिगी मत प्रापोगी माम सास होता है तबल्य परमेपन में मस होम मुचिमुखको पाता है।पो स्थान लता राता है। जैसा संसार में एक प्रपाम दूसरा अमान होता मुशि में गीं। किन्तु सब मुख बीच एक स रात है। जो ऐसा पोतो- मेतरोग्नुपपत्ते ।। मेवम्यपणाचा विशपणमेदम्पपस्याम्पा च मेतरी।। ५. प्रस्सियस्पवयोग शास्ति।४।।।। प्रसस्तसापश्यात् ।। मेवम्पपरेशाचाम्प ।।।। गुर्वा प्रविधवारमानो हितदर्शनात् । ७rn अनुपपत्तेस्तु न शारीर ।।। अन्तर्याम्पधिदेमादिषु क्यमम्पपश्यात् ।।३ शारीरमोमपेऽपि हिमेग्नेनमधीयत... भासमुमिनाहान्तमामि ।। मर्य-प्रमस इवर और परिचाभी कि इस मास प्रसव सामयाब में मस्बिमहीप पवा। इस जी मही... "रम ऐपा सायानन्दी मवति' पम्पमिपा प्रत्य। और और पर मिलाकि इन दोनोभम प्रतिपादन किया जो ऐसा महरोत्र हो रसमा शापमतम प्रकारे प्रस गेम गोल पानमसम्म रोवार पाहिरिस्त और सोनेयमे और म मिापक महीसमया। इसमिय और प्रा एकहीं.. व सत्याप्रकार दिम्पो प्रमूर्ग पुल्प स पामाम्यम्सरो प्रम। भमासो पमना' मुमो पचरात्परत पर। मुकम्मेपपिपरि । म राम दिम पर, मूर्णिमामहित सब में पूर्व सर मीतर चिरन्तर मापक माम माग बरोरपारवादि सहित सम्म इमावि परमामा बियर अपर पापरहित प्राति से पो प्रात् सूक्ष्म बीच उससे मी परमेवर पो भो सूक्ष्म है । मावि और गोषों से मप्रमेव प्रतिपाववस्म समों से प्रति और बीयों से मि। इसी मापक बारा पोप और में भयोग प्रतिपादन ये से श्रीव और व्यमिकियोम मित्र पहावापामा मताइस मामी भागी मन खिो और बीच मौतर मापक होने से मापाचापक मि मोकिमाणापक सम्बन्ध मो मेष में संवरित होताtसे परमामा औषस मिलसम्म इश्रिय प्रताप पक्लिी भादि पर पिता , एलपि पियों के भोग न ऐकताच चिालों से भी परमात्मा मित्रो... "गुरु प्रविसे सहलस्प बाके" रवि परिषदों वर्षों से गोल और पामामा मिस है। सा हो स्पषियों में भुत मिलने शिवपाहै।.. शरीर मबारी" पारधारीबी सही कि पुष कर्म स्वभाव गाव में ही ८. (अपिल) पप पिन मग पारि इनिपानि पदामों (अपिभूत ) प्रमिरि मृत ( प्राम) सब गांवों में परमारमा अन्तर्गमीप से सित पनि उसी परमामा परि धर्म सम्म पनियों में पानी. .हरीरधारी बीच प्रसनहीं कि माम से जीवन मेब ससम्म से सिर । इम्माविशारीरिक मौसमी सम्म सही और जीवन मेद सिरोही दन्तियों का काम और सपस्मार मी पपही मला बोकि उपम" बर्षात् परम्म मा और 'स्पस्मार" प्राय माप मी प्रमही में म । अब दूसरी नाही मानते तो पति और प्रल मी कधर्म हो जाये और पछि हिमायत प्रतिपादय पद समयमों में विपनदीम पेमस्तिषों पर परम। बोधि निमिर भरिकामी र सनम्तम विर्भातरि विषयपुरम में विभा मत्पति और मानव वि सम्म किसी प्रकार ही हो सख्या तथा उपहार (प्रा) होने पर मो या भरबारमा और बारबराम रहते । इसरिने उपाध्म और रफ्सयम भी इस कम्तिोंकीमा मम।। देसी सब बहुत सी पार जो याम और मारिसमा मसि। इसके पलान्त पवियों और सराय प्रभावी मोगों पश्य समर भाव में और भारत में पान मगाम भी भामच गागर्म नीममीन सीन नामी में सिमादिस एमा प्रतापी (भा शिसम सब यो मम्म माई गाई मिचमत सपन एकादशसमुशास कोपमा मत परि राप्रबादि शाम और पम्प [ल्पिों में मौसी पिम् । रसने राम्पात् राम सम्म को कोरिय। विस्मारिलो पांचसीपमा राम मोर भा। उसने बोरामा समस और प्रया समादिभइवन्य प्रथम किया कि जिसके राम में बासिवास बनी पाने पहा मी रामभक्तो हुमा । राजा भोज प्रस बो कोई मन भोक बाम माता पा रसको बक्सा पप से और प्रतिधोती की। उस पमा राममों और श्रीमानों मे पाना हो योष रिचा यपि मापन पूर्ण काममानिया के मात्र प्रति सम्मान मवपदी मी हुए मे परन्तु गम बात पर नहीं हु वा महा विक्रमाविस पापा पाता प्रापा । हवा में पम्पत्यादि गुतसी शाई भी सी सममामिमों में पय मावियादि की है। लोगों ने नराचम्म को हिवामयामराया ग्यो भनुपापी पासी मी किमत में प्राच होगा और ममागियों को मी मिखा सा ममार्मी सी यो विषम पर म्स रपार और महान उपासक एए । रोमों खार और मष्म अप्पपिचारय मत। परन्तु मितने अममा बेथिोषी यमदी पिक धिक् कपास मस्मद्रासविहीनम् ॥१॥ ख्वापान कराठश वनपरिमिताम्मस्त शिति पद पर करमर्श करयुगवगतान प्रापयाम्नावशेष । पाहोरिन्दो सामि पूपगिठि गदितमेकमध शिवपाम् बचस्पऽधिप सपति सवईस सपनीमकपठ॥ प्रमादिगुरु प्रकार प्रेक समाये और प्रये A विपास में मध्म और ममें साधम उसमे मि" स्पजेइम्स्पो पपा" असमतुल्प त्पा ममा परिपोच्य में घिर में- कानों में बारामा में मोजमुमो में 1 शिक्षा में पौराप म ८ धावारणमतापात् ममरेच पण ...ऐसा ही पात मी मानते हैं। मात्र पममार्गों और ये सम्मति करके माग विरामस्थापन किया जिसमे सापारी और पिते और उसकी एम कराम मिमीभावनिक मौसम भाई किया प्रमरपनममम ममत'सो भपिनेस सार्थी दोन पश्पति" स्थी बाग अपने स्मार्थसविर में दुर पौधे मी मा मात्र दोष को बही रेत है। उसी पापयदि मूर्षिौर मा शिकी पूस में मार वर्म मर्ष, सम्म माश भारि मिनि मानोम. अब राज मात्र पान् यी गोम अपये मदिरों में मूर्षि स्थापन भने चौर र सबमे प्रामे सने समय तो इस पोपी मौसमदिर मैं अबे पाने मपं और रबर पत्रिम में समा मतों धौर पम मोम भी प्रापाव में पाने मवे सपे । तब पोपों ने पभोक मात्र-
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एकाशसमुशास - । पाप इन पुरसिपोरे पोपों मे पाने धगे । 60 पुराखिों में चरासमोरचममा पारिप नदी का प्रपोजोमी दो भाप मा पीपों ने पही पम्मति की मिली सण प्रपन मौ भतार मदिर मूर्ति और पुल बा । इन चोगों ने मैनियों पास वाली सा पीस पार मभिर और मम्मिा गई और ऋषियों के पारि और रचर पुरावाभिमा पुण्य कमाने बगेर ग्रम मार के सौ वर्ष मात् पवारमत प्राम्म हुमा । एक पाप माम मा में ग्ला मा पा समस पोमा हा रस पवाद सुमियर मी मोका और तीसरा नायर्म परनलोपत्र प्रासम्म दुष्प । वत्पथ पर या प्रमानुस पुग्मने अपना मतमामा शेषों मे सिरपुरावारि शालोम बीमावि बथयों व वियपरापारि पनाम्य । मम अपना नाम इसलिय बही परा किमर नाम से पको टोकाई प्रमम्प मम । इसचिव पसअदिगि मुनियों के बाम पर रायमान। माम मौसम कासव में बीय रनमा परिव था परन से कोई पखि मपये पनाम महाधिरन और प्रमिक पहासमाम समावन एवरेवाला मा। अब हम मापसस गरेसी पुराणों में भी मद। रखो! सीमा में भी मामा कसी पी जो भीपुर की मिनी | सिखी रसी में सपा का बम्प और प्राप्ति मात्र को भी रसी करचा । जब रस की कीमई तब उसन अपवासन पिसा । इससे एप में एक मासा दुधा रममें से पा की रमतिर रसम रखी येमा तू मुम। हिमाम मा किन मरी माता पाती। # नियमाम सम्ता । पसा मुरम ममता प्रपना और बारेका भरम प्ररिप और पिप पिस + सौ मा एसरा पान मस किया। रसम पाम मिला सम्म मी पपा एमास रमन माना हो रपमे मी मरूम मा । पुनः रसो कम तीसर बारे में सपा किया । उसन पाम महाव कयौर 18 भाकियू मुम से लिया मारवाया कि तुमनमियामीभ मना मरी पीप शरीर भरप। मा दोषी मे म्पिमप बाबा कि यह मिलीम पीवीमा रोमी महामे मेरी शान मानी इममिव ममम रिख महानाकि मैं माया सम्मान विवारी रोपौ र स्पडमा हीरों मयि तीनों प्रसा होमियापिटीयों प्रतीयों साथ निपपा । म नियमपिया और परम पम मियामो रति समा चहिय! परि राप मियाम शिर और हम इस प्रपती रममयम मार मापा इन्पनि पोरेल पो समिया र्म साम.
Rus सत्यार्थप्रकार न कोपापी मापा माले काठमातेरपि। इस्तिमा तापमानोऽपि न गम्म मन्दिरम् । परे विमा हो कुल प्रम दो और प्रबत प्रात् स्सम समय मोपलो र भाषा हो जो मी मामी चात् मोच मापा मुझसमोसमी और समाच रस्तो मारने को लोन पौगाता हो और मदिर में जाने से माय पाहो तो मौषमदिर में मर मिल मन्दिर में प्रदेशमा पपये से पारे सामने पान पर समापन। पस अपन भी को उपश्य मानसर्ग। अब बसको प्रभाव बता पा किमार मत में किसी माननीय मौ प्रमाय मत पेकिन। ममरे पोरे कि विमानो। तब मासोष भागवि बन पाने और सुपात में जैसा कि दुपार में देवी पंग विमा रामा मोज - राम में पासीमाम से मामा और शिखराब पिसी बेबनानमाधि पा रसम समाचर रागा भोजका पिवित होने से राम परियों को पारमारि यस दिया और रममा किबोटेम्परिक बनाये तो अपने नाम से मनाये, अषि मुनियों के नाम से नहीं। पाबा राम भोज के बनाने भावना पामल विस में मिथी कि मोडियर रम्प सिं" मा नो सिको मापों में है। जिसको पक्षमा सामौर र गुमाने रामराव बसी में अपनी बस में स्पानियोकिमाया मे था सा पारसौ और गग विमों ने पाच मारौ गोल भात् एष पम्पल भो ममाष भारत बनामा बा । प मारामा सिमापिलो समय में बीस साल मधराग मोड पर किम फ्विाती समय में पीस और मप मेसी भाभी उमर में तीस साप धोमुखम्मामात पुमिब।बो ऐसे ही नया सालो मारामारत म पुस्तक परमय बोध होगाम और पि मुनिकों के माम पुराणादि प्रसव हो पाबीच रोप अमबाव में पाकिमर्मणिाम हो मा होमगे। इससे पिस्त होतीराम भोग सोमपा । इस मोर में निधन परबैकया कोशरीष महधिमो गणति भागमा । पायु ददाति मजन सपुष्का पिना मनुम्मेण असत्यम् । रासमोर र समीप ऐसेर पिसी बोगधे किमिमीने पोरे पापा एक धन पनामापुरुसमाप किसी एक की में नकोत पर एक में सारे सास मेस लाया। ममि और . पारिश में भी समसपा और बम पैसा माना कि पिया मपुप मालेमान से निपय मता प्रौन पुष्पमुदेना। जो पे समी पापा कम को पुरोपियन इसमे पमिमाष में भाये। पोपी अपने मौनियों से रोकने जगे तो मौ मनिरी और मिलीगीय में मौसममा मिली - एकावण्समुशास म.-- ममस मन्न"। पम्मसि ।"पमाव। 'मचार्या पपपतिशयम +" | "भाबतीx भूप" | "पूर्व प्रामा समतपत्भुपत्र । इमादि पर प्रमापों से ऐति मत सिद होते है, पुमा सस्टम मते हो। उ०-नयों से यदि सम्मवाय सिर पही हात लॉकि 'थ" परमेश्वर प्रबारिशु, भीर अनि भादि न पाम है।बो प्रोपका समर्मात् पुगेको स्थाने पो परमात्मा बमबारममा प्राय और समयमि को भाप रेना, 'मम इति अमलाम" (मिर्ष १४.)मो मासी सब संसार म मसम्तमपावरमेशवास परगायको नमस्कार करा धीरे "शिषस्य परमेभरस्पापं भकप' । “विप्शो परमात्मनोप्य भको क्षेप्या"। 'गपपवे. सकामास्वामिनोऽयं सेवको मापपत" । भगषस्मा पारपा प्रत्य मेव मागवत"। "सूर्पस्य घराघरात्मनोग्य सेषक सौर"। ये सब च शिष, विट गपपति सम्माधि परमेपर और भावती सम्ममापदमुक म्याश्रमामहै। इसमें विमा समये पेस्मा मगमा मद्यप, एक रिसोरामा पोले। पहिरिन पुगो पा पापम पे। र गरिने पैर और सर ये क पा की सेवा भाषी बार भी थी। एक दिन पेसा एका भी सारखा गया और दूसरा अपये सम्म पम की सेवा कर रहा था। इसमें में गुस्साये माना तो उस पग पर पूम गुम्दम सेन्च एप पका। रस रस्म का परर मारा । पुष मे मेर! तूने प्यपा किया! या बोला कि मेरे सेम पासपर पर पग कोपागाइये में दूसरा हा बोकिमभार सोपा पा पा पाप। पमा अपये पश्य फा की सभमे मग । रेख वो पग सूम पड़ा। कि गुमी! पामे सेन्च पप में पापा ! पुष मे पच पचात मुषा दिपा । पमा मूलमपोखा रखा। उपसरप म्म यो बम से गुरुस्मि पम में मारा । तो गुरु बलापुमर मर्च सब तो रोनी रस्म मजे परे और गुरु पो परोपे। होपाखाप मच और पोग सनम सप । मोबपे किमानी ! पपा बम - किसी दिमाम् पुस मापसात् गमों ने उपएल किया कि रेखो परोपों पण तुम गुर। म दोषों को पानमे से उसी मे मुख पता और बवे से मौ सौ मुज से एक गुसकीय में मेहाचो मे मीणा, इमो प्रभर पो एक प्रकार मविपनामसारस परमामा के बिखर प्रमेयाम इस मामोम प्रय साप्रपम समुहास में मामरस मधाचमन 3 २५म.. पनु भन्मे । । - प प • ॥ ३३ २५० स्स्स्यायप्रकारा Vधरसी मनमाने ति। कोई ग्राम पो किसी कमर और उस भारत बनानेमा और सी के माता पिता कौन थेरपोप्रो किसी पनाविनोबो संपोमबाप सोचनादि कमी नहीं हो सकती। जो माता पुननि माने में न तो माई ग्रीम मिल में नसी बची बाब निभाती है। सी इस सीमामात में महादेव बिम और पता और तो कीम मिली। इसी प्रकार शिव पुराण में देवी माविको पात पता शिजी ईत् वे सब मसर दास और मास सब सोने साल भर्चात् परम की गोम्मी और एस पारण मने से मुक्ति मानते है तो राख मे बोरमेण गमा भारि पा और पुपची भारिपरब करवाने मीर पर मावि मुसि लोन को और मुभर को पा पारि म्स में बरामीको मुक्तिक्यों नही होती! म -प्राणियोपनिपर में मम बगाले भनिन पिल्लाम और घ्यायुपं समदग्ने " ( कवचम ) इम्यादि देवमानों से मी मम्म भारतका विष्णकार पुरी में बीजमधुमत मे बो बाम पार इसीमिये रमले बार में पुल रिया। एक मी बार पारवतोस पापों से समसप कमर और नरक नरम । उ० प्रमियोपविपद् किमी बोरिन मकुम भवान् राम भारय करमेय ने बनाई पोकि पस्प प्रपमा रा सा भूगोक" परिम ( उसमें ) प्रमो प्रतिदिन सब से बप स्मभूगोल असा सास हो सकते है और जो "म्पायुपं जमदग्ने:०" मारि मन्न, के मध्म परिपुषमय पति पर्व म्मदग्नि" शतपय । परमेभर ! मेर मेश को मोति । म्यानुफ्य) विगुणा पत् तापसी पन्त हेमा में मी पेस धर्म समभकिजिससे पी माधम हो माप नियमीही पूर्णता की पत. किस अनुपात से मौसम सपा सस्तारम परमेश्वर के परम को कई प्रपा ममता ? असा मिस पपीर परमात्मा ने पीसी पर पदो पता मापा मारी। इस सिवा साप मम्म तुमसी मबार पस समय पारिभा में परब ममापसी पन् ममुप प्रम। पल पममा और शव पुत मिया मिोपी मौर मममी दोवाममे जो भी पुईप इस तो भविसमापन ममता।जो मा मम्म भारएसपमा दूत पोषित सिमी मी मत म प धाप माम भाप मोलमों सिप रिप मन्त्री पौर मचर प्रारिमा पनीर कोम्पीयप्पलों मप! मा-ममा Rba मष्ण महीनयानो पता रापीमिोपी होमेम रस भी किया। ०ण्यप...I...
एकावण्समुशास म०-"मम ख मन्न"। सम्मसि । “पमपाप । ममार्ग का पमपतियारण्महे +" | "माती x भूपा" । 'सर्व प्रामा जमवारपत्र । इत्पति र प्रमायों परि मत सिदोते , पुनावी समपते । उ०-दन पबमों से परि सम्पमाप सिब नहीं होने कि छ" परमेवर प्रवादियु, गौर, पमि पारिश्र पाम । यो पोषकता सप्रमा पुगेको स्थाने से परमामा ने ममस्या ममा प्रय और म्याग्नि को अप रमा 'मम इति प्रपनाम (मि ..) ओ मायमरी सब संसार म मापात पाप पखास परमात्माको ममस्मर करना पीने "शिपस्प परमपरस्पापं भछ मैप । “विम्यो परमात्मनोप मको पेप्याय" । 'गणपत सबलगमामिनोऽयं सेवको मासपत" | 'भगषत्या पाएमा प्रपं सेवक मागवत"। "सूर्यस्य पराधरात्मनाम्प सत्र सौर"। समय शिव, विन्ध, पपपति सूम्मावि परमेपर और माती समाप सुनसपी मनाम है । इसमें किया समझे ऐसा मादा मच्पा, स- एक पिसी सोपे। वे प्रतिदिन गुरु पग वापरत । रूपे पारिने पैर और दूसर पे पमै पा की सयमयी बोरी पी। एक रिम ऐसा हुभा कि एक भी पर रखा गप्पा और दूसरा अपमे सम्प पप की सेवा कर रहा था। इतने में गुम्मी करपा तो रम पग पर दूसर गुस्मन प्रसन्प पप पा । उसने रस्म फा पर समाए । पुसमा कि भो !तुमचकिता बोला कि मर सेम पगसर पर पण सीमा पहा । इतने में दूसरा सा जो कि बार हममे मम पा मापा। पमा अपरेसन फम की समभोप । रेखदो पग सूझ पहातोपा कि गुणी! पामे मन पप में पदुमा पुरे सप अचम्म मुमा रिय। मी मूखम मोबाउपचप पर रस कप गरम गुरु समर फा में मारा। वो गुरु पस्कर पुष्स मय सब तो दोनों मेरम पा परे और गुरको को परे पपे। सब ठोपमा भेमा मच और डोग मुकाम माप । मरे किमानी! या कों से किसी दुरिमाम् पुस में साधुको नाममा रब बसों को उपएक मिकिको बोगों पग हमारे गुग। म पोषों की सपा सरसो से मुखपता और गुस्सा समी रसौ एकमे सोनी गुरुको भय में पाया मेमोगी, इसी प्रमर का कमरा परिणामलामन्मस पामा.मा के पिम्प सारि भने आम पनामों का असा कि ग्राम समुहम्स में मप्र समाप्रारम ० पठभ 141 पमु मम । + ब म २५ ।म।। x परंभ ।म् ॥ाम ."
सत्यार्थप्रकाश - मनमा मि। कोई समपेले कि उस सौ प्रहरीर और रस मोपुर बनाममा और सी के माय पिता प्रेम थे जो मोलमा प्रमाठिोगे स्पोमान्स तुममपि कमी नहीं हो सकी। जो माता के किन मसे में म तो मामीन मिल में सी मची पात मिती: जैसी इस सम्मान में ममा बिह और सारिका प्राय पोलो कोपा विधी। इसी प्रकार पिय पुराण में देवी आदि मे पुरा प्रया बिता प्रभाव सम मादेव पास भौर मपब सब भर।गे खाप प्रात् पाप की गोम्सी और रामभरम भने स मुठि माने तो राय में बोरगामे मन भादि पा और तुमची प्रादि के पार परमेशव मौर पर मादि मुसि कोलोन बर्षे भर मुभा असे प्रभा पारि राम्स में बोरोग मुकिलापही होती। प्र–सामियोपनिप म मम ममम विधाय विलोमप्यमा और पायुपं समवग्न (पारस ) इम्पति पदमत्रों से पी मम्म भारबम विष्णम और पुरयों में पकी प्रति अधुपात से जो पा पसी माम सारा इसीसिपे रमेवारप में पुज विहा एक मोबास पारपतो सब पापों मेसर्वसम पमराम और भरकमसमरो। २० पामिखोपनिषद् श्रिो रथोपिया मनुण प्रबार राजारच मामेब ने बना लकि यस्य प्रपमा रखा सा मुसोक पनि मा । ( रस्में ) प्रवर जो प्रतिदिन एल से पाईखोपयोक सम पा से सच्चे' मोर जो "म्पायुपं अपने " इम्परि मन्त्री मम समिपुपमापके पी नहीं किन्तु 'बर्व मनि" यसपप । परमेवर । मेरा मनोति ( वायुफ्म ) विगुणा भयात् तीबसौ वर्ष पर्वत दौर में मी पेस धर्म काममा किसिमे पी मायब हो गया या किनकी ही मूर्ती त कि प्रोब प्रभुपात में मौत पर हो सम्मास्य समथर परिम्म मे कई मामय र पता है।जैसा सिमीर परमात्मा मे रच रसीस पा सत्पत्र हो सम्मा ही। इसम स्तिमा खान पम गुपसी ममा ममा मारिनेम्स में भावमाप सब पसी पन्त् मनुमनाम। एस ममापी और चपात मिष्यामिषा पर काम की ऐस । बम जो भी गुम इन ती माविषसमापण ममता भास भस्म भाप स पमनावर वो जिप सिपमा मा मत रोग समाज मन भाय मोंस or विप मस्या और मप्पर मादिनीपही तोम्पपीय मबाप! म.-ममा मौर वो अपनी परस्यानापा उ०-यामानामिोपी दोन बिय भी अधिक पुरे। पE111.11 पाम माराहोमरखकरमपुपरमप्रतापरस्पर पार गुरगोभोपवेराहतोमामामामुक्त गामो पप किसापुत्री स्पधारक किमी पनि सारे पुराप पर रोपसम्धिसमास मगुरुकीमय महापौधोपीयोमा २११ एकापसमुशास Ho- 'नमत स मम्स"। "प्यमसि | "समराम । 'पखामा गमपतियारमा " | "भाती x भूमा"। ' प्रामा मावस्वस्थपत्र - इत्यादि पर मार्यो मधीमत सिर होता है जनः २०-नमो १ वि सम्हाल सिर महीं होत, बॉकि परमेपर प्रसादि पपु बल अनि बारिश नाम है। मामला पर्याद पुणे खाने से परमात्मा मे नमस्कार मय प्राय k समाधि प्रा इमा, "नम इति सप्रनाम ( वि.स.) गो मारोप संसार मत प्राय प्रयास परमम्मो नमस्मर भगा कि "विषस्प परमपरस्पा भकशैम"। 'विप्यो परमारमनोभ्य मलो पप । 'गणपत' सनमगरवामिनोऽय सपको याणपत" । "मावस्य पाया अप मेषक भागवत" । "सूर्यस्य पराधरास्मयोऽय ER मोर" सब ख हि विन्द मणपति मुम्मारि परमेपर मी सत्पमारपुष्पी प्रणाम । इसमें विमा सममे ऐसा मामा मच्चय, किमा मामी दोस। प्रतिदिन गुरु के पर पपमा। एक में सदिन पैर और रसर में गाय का कप भनी पीपी। एक रिस म्य गुणा कि एक सा भी नमार ने बसा प्यार हम अपने पाभ पर माम। इतने में गुस्सा थे प्रपा दो सो सम्म गुम्भाई पत्र का पता। उसके प रय फ्य पर पर मारा । गुरु नेपाल सा! बेपत्य किया। सामान कि म पम सर पर सामा! इतने में इसरा सा मो विधाम सोपा था, पर पभी अपने सम्म पाको भने साप । रेप को पत्र सूब गुली ! परम्म पप्प पर मैं क्यापी गुरु ने सात मुन दिया। प भी मूर्गम बोबा म परम सोने समस मुमा गुर। सपायों की सरासरसोई सभी रसोरूमेशा रोगा। मुख रिपबमाबमस्कारमारिणी २१२ समाप्रकार साप्पपरि सम्मापी योग पास्पर एक दूसरे के नाम की बिन्धमा । मन्धमति तनिक मी प्रपनी बुरिको वामही रियर का विध शिव मावि नाम पर प्रीती समिकता समान्पामी माया के अनेक गुणर्म समापन होवे से सौपा।भपाप ऐस मूली पर ईमचकोप न होता होग्य ! अब रेमिणविद प्यों की प्रभुत माया- वाप' पुपर ज्या नाम म्ममा मनस्तपैक च । अमी हि पश संस्कारा परमेकाम्तहेवब। मतप्तन्नम तवामो प्रश्नुत । इति भुते । रामानुगणापरतो. धर्मात (ARP) पदा पौर चिों को अभि में तपा भुखमूब में बारेम पात् दुग्ध पात्र में बुमाते है और कोष को पी मौते है। भव ऐखिने मनो ममुन मास मी स्पार समें पता होय। ऐसे मों से परमेम ास होने की व्या मते है और भर कमिाण मावि से सरीर पाने बीच परमेश्वर को प्राप्त नही होता नोकिय (आमा) भवात् माई चौर से सम्म चपरास पारि चिों के होने से रामपुष्प अम रसमे सब बोग मत से ही सिजन सम्पुर्षी चिरेकम पमराम और उसके गम मरे और मत कि- दोहा-बाना बड़ा बयान का विसाप और माल । पम सरपे कालू कहे मम मामे भूपास। भवान् मा मात्र विस अप और माता पारप ममाना। जिससे कमर और राना मी परता।पुरम् ) सित बस में चित्र निभाना । ( मम्म) मायरस मिसापास पर्वात् पम्स समान्त माम रखपा । (माखा) मा की रखा। और पांच्या ( मन) मे मो नमो माराय॥ पाने साधारण मनुषों के बिच मना बना सोचा-- भीमपारापपपरपरक प्रपये श्रीमते मापपणाप मम ॥२॥ भीमव यमानुभय नमः ।। हत्यवि मन मोर मायावी दिन बन रहै। जिन प मी मन परोस मुबमा शिक्षक! इन पांच कमरों में पारित मुखिो मानते । इन मन्त्रों का प्रय- ममायाको ममलमा मना और में समान मानावबारे सवारकिलो गरम मस होम और आधुम मातम्यप्रेमममम: भवात् गो शोभाक मारवयसको मय बमस्थर हो। पप्रममा च ममम मा सक्ति पांच महमर मानत और अपने पासमराम मेरिगोपेरमनप्रमाय सम इस पर पनौर :- . पकावण्समुहास २५३ पषिध ते विर्वत ग्रमणस्पते प्रमुगोत्राणि पपैपि विवः । अर्वप्ततर्न बदामो प्रश्नुते शृतास वान्तस्सत्समशित ॥ १ ॥ वोपवित्र विस्त दिवस्पदे ॥२॥ म ।।म् ८३14 ।।३॥ प्रपा और पनों पाप माने या प्रमु ! सासामधुन सकिमान् मापने अपमी माप्ति स संसार के सप भयो मतमा रस्सा उस पापम जो पापक पत्रिसम्म रामवर्ष समापप राम दम पाग- मम्स सन्द्रिय सम्ममादि हपम्चा छीत गा अपरिपकमामा अन्तर मुख परसबालसभ मस नहीं होता और ना पूड ठप RA ही इस तपमप्रचारमतपुर समगरसम्मका माप पर प्रसव 1ो प्रमाससम्म पस्मार की मी में विस्तृत परिचरण म तप रो परमात्मा गाने में पोम्प इसे पच विचर करित कि रामामुखीमादि बाग इस मा म यति बाम मिरर करभया श्रीपचिन् यिन। रोमा विपिार पे तो ऐसा सम्भावित भई इस मनमलोमतोकि इस मन में "प्रतमनू" गमबकि प्राप्त करा" पुनः "प्रतमन्नू" पा पर पिसापर्पत समुशाया । इस प्रमाय मा पनि होस तमाम गति पाम सीमा में तो अपन । शरीर को मान में मांग समीर को जमाना मी इस मामर्ष स विस्पोकि इस मना में समापबादि पनि कर्मकान्त पबिपी। व तप' सत्वं तप भुत तपशान तपो दमस्वप' स्वाप्यापस्वप' ।। चिरीबनम इपी पपाधी प्रांत ( त तपा) पमा परमान, मन मानन्ध सब बोमा सत्पमा मनपर्म में बने रम पास इन्द्रिपोका सम्पामलों में सबसे रोमा पर्थात् गरी इन्द्रिय और मन मयभन्मों प्रभावमा बबादि साप विपर्योस पाप पा सानुमार मारण्य भय परि रम पम मा बाम त । भनु म पामकी में उसमा उपमाहीमम्ता ।। नायबाप अपय नेपाल मानी पानु अपनी परम्परा चार मर्म की पार पन नहीं एत कि मम मम मुमपुर गोप"म जिमोहोहो. और मछमार ट्रम्प मे मामा रमपमाया उसमें मिला- विक्रीय शूप विचधार यागी।। इत्यादि माविदों में गि। ममप मामी सूप बन्न सम विद्यमान कार यति में पाया जा समायोस पामा मुममा मा (FESS प्रात्यो निरस्पर पियाप सम सपायों .
सस्याप्रकार पिम सम्पहार विधक माहित पारि ग्रामपि मनमानी एवं पाई रोपी रसभरेय 'मुनियम बोलचस्पस पर्व में सपा एमप। मसममा 'पालमा बोकिपमएसोपडपसिनाम पारे। "पमुपाय" मी मत है । मोफत् 'रामानु' मायास में मपच रोम सरियामा । रसके ममापा मम्म कमान थे। रामाइन पेमका पासमान में पोजमर प्रत्च और पारीरिक सूत्र और पपिपदों की म सार्य की रोमस पिम मनाई और पारा की गवसी निन्दा की। सा पहराया मत है कि मौष प्रात् पौष एक दूसरी पद पनि यहाँ सम्स् म सब मिप्पा मापास्म अमिपस मिल रामानुसार सौर मापाती विमो। पप गायक मत से अतिरिच बीब और भाव तुकाम मानमा प्रधा नहीं और रामामुबक इस त में दो विशिध्वीप और मागसहित परमेश्वर एकोपा वाम माममा और प्रदेव चमन सम्म प्पी और समाधान परनानीको मागम मी तिखक, माका मूर्णिमावि पास मलबा भारि पुरी परिव मावि में। से परिभाषिोषी माताको मतबाही प्र०-भूमि से पनी? विलीन प्र-मैमिली मार। उ०-चपनी मा से। प्र–नी योग करते है कि यन्त मानास्थित मी मूर्षि देख अपने पावसमी एम परिचम दोखी। उ०पाचन और मूर्ति का। य मर्सिसाण गाव भी मासे सम्पा! मूर्षिक्षा के पास मत है मियों थे। इसरिये इनकम सम समुहास में प. प्र०-याच मावि ने मस्त्रिों में वियों प्रभाव नहीं बिकि पियों की पूर्तियों के सप्यसपरिको भूमिका नही। उ-नो बामेको। यो रेमियों के रूप पाते तो ममत में मिड बार । इसधियों की मूर्तियों से निमा बमाई लकि सिोप प्रमा मम मम और इन मिोषमना मुल समय काम ।से कोने मूर्तिको मी मावि मौर सि मनुबो समाप पन्नई ममे मिस पनि पेपणे पारित पीसहित एम भोग विभाति पीयमानी और कोपए। नी बाम गत स च मया पीपाड प्रादि को मही मते । पेसा का सामना ऐसी पारने पप्पथरि साम्पाची पोपोकेमोरिसर से बच सकी बौखा में से और गुव मम्मावि महरिदी बाम से मनमानी अनम्मा गम्भावुक व पाय । पो भौ वर्ष में अमिमा सtada - - - एकागसमुहास बमा बाम 'पुरा" रसमयमा सुम्पने सगे। और प्रि ऐसी रिति माया रचोगे कि पायद की मूर्ति बाम गुम ही पहल पारि में पर पाये गा ममि में पसरी पथा अपये मों में प्रसिद किया कि मुमको राधिको स्म में मध्य, पाती प्रथा प्रस्य सीता राम सपमी मारामय और भैरव पुमान प्रादिप भी कि हम प्रमुख सिमा रम में जो से मा मदिर में सम्पयाम और तोहमारा पुपरी हो तो हम मबोधित मा। बच पम्प और मोमों में पापना की गोमा पुषी तब तो सही मानती। और ग्नस की ऐसीय मूर्णिमा पर तो पोफ्या मोहिममुक पासपसमा सो मर साथ रिखाराम तो मान्य ग्स पूर्व साबबारे पो पर पर। पाहारग्स पोप के पप में मर रकम कि भापर सपा इस पता की कही ही भब भाप से सिर और स्म मदिर बनाये । उसमें इस रयाको व्यापा करमाप हो एसपमा । और हम बा भी इस मापी रहा कम पर्सन मा ममादित पर पाम । इसी समरस एक ने पायरी तो ग्सम पर सच पोप मोगों अपनी गाकिम मा म चिया स्थापन मा-परमेसर निराभर पप्पम में नहीं पाया इसलिय प्रमन भू िहोनी चहिप । मागोमपी बहीम हो मूर्ति सम्वाहा मोर परमेश्वर का स्मरबाते और नाम है। इसमें मप पनि । 7०- परमार पिरामर सम्म परपकी मूर्ति दोपही बम सम्दी और जा मूर्तिक एन मात्र परमात्मा स्मरण हायेतो परमभर. पण पिणी पर भपि मु और मसति पारि मना पा, निमम इयर अमरभुत रस को परसो एकप्रमुख पिकी पहाण पारि परमेर रमित मामनियां किनिष पहा मावि ममात मचिपा पदीयको रकम परमभरमस्मरण हो सकता है जो नुम भन कि मूर्ति पराम से परमेम स्मरणपतुम्हारा र समिती मार पप मूर्ति सामने होगी तो परमेगा स्मरण म प प मनुष एकल पम री गरी पारिभम में प्राग मी हो सम्यकपमा किस समय पा मुधकोई दी र सचिप प भनभ बिगाना पाणी पकार प्रत्यादि मूर्तिपूमममम सिरोव. भवसिपो पाचवारि मूर्तियों को मानम सहा सम्पपक समस्तरामी परी परम्मम्ममा सबब और मामवारपुर परंप सास परमवरमे मारे मरेपोमध गरम कसा मी परमान सपने में प्रभाबकर्मभमा तामात किन मन में उद्यमी मोम सध्या पिसारो में मब बन ममाप बुरा समय ता इस मनमो. रिय र प्रमापि म प्मा और माम स्मरबमात्र से समास नहीं होगा मिली।
सत्यार्थप्रकारा प्रये से मुंह मीम और मीम मममम नहीं होता कि पौम मेयमे हो से मौसमयपन मामा माता प्रय पाम सेना सर्वमा मिथ्याको समा पुरायों में मामस्मरबका पहा महान विर? 10-पामधेने की मारी रीति ग्चम नही । जिस प्रकार म बामस्मान मते होपरीति सोई प्र०-मारी सी रीति र०- प्र०-मया मापामको सोचनामस्मरस की रीति पान! 30-नामस्मरण इस प्रकार प्रभा चाहिए। जैसे 'स्पापमोरम एक मामी इस नाम से इस प्रो कि मेसे पापातरहित होम परममा सबब पावत् पाप मार से रस बरसम्मकार समा कमा प्रमाण कमी मकरबा। इस प्रभार एक नाम से मी मनुकसान हो सकता है। म.म मी बावकि परमेश्वर मिरारो परन्तु रसन हिय विक गोत सूर्प और देवी भावि गरीर पारवर राम सरिता स्नेि। इससे म्सकी मूर्ति बमती है। पामी बात की। उ०- पी। 'प्रज एकपाद" - भकायम्' । हानि शिवपयों से परमेन्म को सम्म भरपार गरिपारवादित पदों में भाठा पुष्टि से भी परमेम बार मी नहीं हो समाथि यो पालामा सापक प्रान्त और सुखदुम पारि गुवादित पर बोरे से वीर्य गमात्रय और गौरममावता बापीको एनवीन हो। और जो भर पण विस मिल एक परमात मी बीमार ग्सम्म प्रचार मना मानो या पुत्र प्रयिमम्मो पौवन भो म-अब परमेश्वर प्रपी तो मूर्ति में भी है। पुमा यो पिसी पहा में मामा पो प्रमाप्रपाकीणी। खो- मकाप्छ पिपत यो पापाले मृगमय मावति विपत पपस्वस्मानायो शिकारपम् ।। परमधाम मा पासवन भूचिम बाल पानी में भिनु परमण को भा में विप्माना भासपाही परमेर सिरrat २.--अर परमपर सम्पपको किसी एक बस्तु में परमार की भारतमा सम्बन ममग्रम मोतीकिसानी रामभस रामसता सा.एचपीसी पकी प्रस्मी मारमा [स्योपा] सिमा पा अपमानामा नुम परमार सभी अपमाम मात्र सूस . yि. मे म ।
पकादशसमुन्नास यापक मामय हो परिम में स पुष्प पत्र वाचामन सिले सामग-1 पोजगपो !य परिसर र पोका पासपमा पाटन बोमव ! तुम ही में सोचोदते ! गिर मापि ममा समर में देय पर पान तो माता स्पोकिरण सप पायों में परमामा म्यापको और मुम म्यापक बीत हो याम कीमोम्पकको मते ते तो पापाव ममी प्राति पर नव पुप्पादि यो पावे हो। और जो पाप कीमते होला म परम्पको मते है एसा भागोमत हो।म प्रप्रसारि “श्मरी पस समस्यौपदी योजन! अब श्रीप '" साईरामी जो मो सणको ठम्मर मर माधान हम परमेश्वर महो गया और नुम पश्चिम में मुण्य मिति पाणब में रा प भारि समाज में मोती उस में प रपिारि और भूमि में मम पारि की मारामा रनको सीमही बनाते ? तुम म प की पवना मी मा मत मता! और मुनकी मामले पत्तों की सराय पुस मी मात्र पापो बी ए मरने की भावना महामत ली मर भाव इससिप तुम्हारी मा सीमहीलोंकि रेस में सी ममम माम मापमा पर है। पशि में प्रति जप में जब सामना कर जब में अग्नि पनि में जय समझना प्रभाकिसमेमा सबमा सम और पास समय पमाना। इसरि गुम पम भार बदाको प्रभाव पता प्र.-मजी र बाममोंस परमही प्रत व हामी और प्रबास मनसर अन्य भार सिग भने सब 10-जा मत पाभपायम मबम रस्सा माता गो भागोमही सती और बिसय भनीही समोर पभोप व प्रमोसनममो भयो पूर्व परमात्मा र भाना और राताराम मनास परमार मानो तो नदी मनाम पर मारपुर र ती मही पूमा पत्तचर समीपमा ममि . मी मार मनमुनामा भार पर पाया म मामामा रस मिरमाही पती मूपिय पाम पासव मिर सम भएर पर भी म.-मास गप्पग्नु मुख nिt विपुग्नु सात। भारमागम्पनु गर्व पर निट मारा। पापीरामप्पन एवं पिt far ॥ रममा - म २५ सस्थार्यप्रकारात र -मरे माइन्दि पोषोती वो अपने मम में खायो । सब मोमस्त प्रमागियों की मेक्सि बों की पोपाचित प्रतियो । पेदाप नहीं। प्र-यन स्म। २०-ौ सय मम । मे प्राध्याम प्रसतिगरि पापायरि पनि रिफ्पा मो में एक माना मी महीसे चाम समर्पयामि पनि बम मी पीं। पर्वात् इतमा मी नहीं कि 'पापापणादि मूर्ति रपपित्वा मन्दिर संसाप्प गम्भादिमिरचयेत् पात् पापा की मूर्ति बमा मदिरों में स्थपन म मा मानिशी ऐमयसमा मौन म.-यो यों में विधि नही हो ससम्म मी नहीं है। और जो नाम तो सो समा पिपेपा" मदिवे ही सेसन हो सन्य। ४०--विपि तो नदी परन्तु परमेवर मन में किसी अन्य पदार्च को परमीय र मानन और सप विप स्मिा। पविधि नहीं होती। अग्धम्तम' प्रविम्ति पेसम्भूतिमुपासवे । सोमप इव प समो परसंभूस्याएं रवा ॥१॥ प म . में म तस्य प्रतिमा अस्ति ॥२॥ पर मम ।। याचा माम्युदित पेन वागम्युचत । तदेव प्रयत्व विवि मेद पविषमुपासवे ॥१ पम्मनसा म मनुत पेन्मार्मनो मतम् । तदेष प्रयत्व पिरि मेरे परिवमुपासत ॥२॥ पपपा न पश्यति पन पदपि पश्यन्ति । तरेप प्रशस्वपिरि मेव परिवमुपासत ॥ ३॥ पम्फोमेण न भयोति म भोषमिररभुतम् । तव मा व वियि र यदिवमुपासत ॥४॥ यत्माये मशपिति पन प्राक प्रमीयते । ठदेष प्रसव यदि मे परिरमुपासत ॥५॥नोमि । जो मति भयम् अनुस्पा प्रमादि प्राठि प्राय की मस्सम में उपासना करते सम्पमा पर्वात् ममम और स्वसामर में इसे और संप्रति जो भरप मे म्पन उप सहिप प्रपियो पारि मूल प्रभाव और सागि अक्सर और मनुष्यारियर की रपासना प्रसस्पन में मग्स ज्यमा समी अधिक पसर मसात् महभिरमर बार बार पर में गिरमसम्य मो.. सब जग में व्यापक रस निग्रभर परमामा की प्रतिमा परिमाप समय मषिमागापपीकी र मन् पप समाविप स्म तिमी । और मिसभाप और 141-Eमप्र । - पकाशसमुशास' २५६ सच से परीकी प्राचि होती है उसी मे प्रग सम और उपासमाम और हो उसमे मिपासमार हो । यो मम से 'पई पो मनम मनही पाया यो मन पामबीसी में प्रताप और म्सी की ग्पासमामा रमसे मिल पीव और प्रतापी रसकी उपसम्म स्थाप मैं मर जो प्रांत से महीं बोल पदय और मिससे पर रेख्ती रसोगे तुमस माम और सी की रपसमा मोर जो रसस मिस सूर्य रिपुत् और प्रतिपादिगा पापी ग्नकी उपासम्म मत म बो प्रोजनही सुना जाता और निमसे मोड सुबवा म्मी को पूम्मा अब और उसी की रासनमा और ससस मिप प्रमादिको ग्यासमा मासेमार में मतमोजो पायो । समापमान नही हा जिससे प्रण गमय को प्राप्त होतासी प्रम को नगर मौर उसी की उपासमा कम। जोप ग्ससे मिप पी सकी उपासना मम इम्पति बारास निपथ १। मिप मम्स और पास ममी होवो। म्म" म कोई भी न से उसको पो पम्य र 1 "wws से रे पुत्र पोरी भी मध मा 1 मे में मत मिणा । दुरी र मत मा । रिदाय मत या। इम्पति प्रम ममौ निपप दासा मनुमोबान में परम परमवर बार में प्रसम निपप किया है। इससिपे पाप्रसाद मएिम ममत लिपि -पूर्षिय में पुल नही हो पाप तो हो। 7०-कर्म राही समर -शिव-सा कमता सर में समभापवारि प्रतिपादितसर मिपि-यो पम्पमा ए मिप्यामापपारि परम मिपिरास शिरसम अनुपम मा पपर्म म्सम जमा अपम रोपिपिरम्भमा अपम और मन पर्म । बारा म.विपिर मचिएणीमों में तुम प्रवे हो तो पापी होगी! यो रिपी। रस समय मस्मिस्य प्रमादि पारेहोरेपा प्रमाबरीति तो पौरप सम्प्र और पुरायो। जब मनुष्यों भसम और सामथ्र्य म्पूष हो गया तो परमेश्वरको ध्यान ममग्री मा परममि म्यामोम सस सभाप प्रज्ञानिपो रेमिय भूमिया कि सौर-मासी दो मन पर पासप । परिसी पोफारममा रानोमायसा इसपिरे मचिम्म पाली एष साप पर पगमप परिजन व परमामा मम्न मरम्। म प्रमरपमा प्रथम स्पून मीर, पोसीप नाम परि मायान् मुक में भी मिणारा मम ममता एपीज्यमा पुमा पुपम मे मीरममा मामि दरियों पर पानी पिसपने पति कायाावी, परिश्पर सम्पएममाप्यो। ३. म०- सत्यार्थप्रकार उ.-नाधित धर्म और परिमाप में प्रभो पुमा उम्मे भोस मी मसिमसा ममम मरा। जो मन से बिस व मम्माय ममा गानो मालिक हो । सुमो- नास्तिफो पदनिम्बका १॥ म .॥ पा पदयामाः स्मृतपो याश्च फाम करण्य' । सपास्ता निष्फमा प्रेस्प तमोनिष्ठ हिमास्मar ॥२॥ उस्पयत प्पयम्स च याम्पतोम्यामि फामिचित् । साम्पयामिकक्पा मिष्फलाम्पनवामि च ।। ३॥ मनु म ममुनी म रिपो देहों की निम्या धर्मात् भपमान प्यम विरुण भतापमास्तिर मायजो प्रबापम सिय पुगे. बमाप सम्पर भेदुखसापर में स्पाय। सब मिस प्रसस सम्पमरम्म इस मोड और परतोष में दुम्मायक पो सपो. विपर प्रसारण हामिहोने ४ यौन पाहोयामम मामय निम श्री मया। इसी प्रमर म्या पभ मिनि मानि परचम मवकिपारिकोम मावा मिल पेशनासदीपथपाप कामा धमायोंग स प म ठिसस रिपर तिये वन्य भौर पुगपरवामित सानो शिरमरिय पुनी हममें दो मयि भी मधमपतमनुपी मशान जाकीस ममीमा सम्पमितु जोमसरामी मा गणराइटिस सामयीको मप ससन बाब अपवार सपही। पपारि मूपियस परमारको ध्यान में भी पा सम्ता विस्य पीत पही भएको निममें पिरभ रम्पार गमापा उस नियमही सभा म्रिसी में मर जापामाधामी म पम परम पिार सागि समीप मोर मापा परमेर मसियम गरम बिजयी पदोनि मूर्णिया मीना autण गुप्त सामणि पानीम मनुनसम्म पागुन र मर गए और गो पसगरमी मानसम्म धर्म भ भय और मोपी अधिोम रिमुभराम मिसायो। ममिएम पनि पाएसम्म ww.is far from वी mang माम मुणिमापन ananthan RTI TAlfontitlta mar नाममा पास राम राम todte.
एकापसमुहास २१. । २०-सामा में मम स्थिरम्मी नहीं हो सकता वॉकिसको मन पर पण मोरपीसकरपथ में ममता पौर इस्म में गौरवता और पिराभर पामार में पारमामर्प मन प्रसन्त रवीठो मौ अन्य मही पण । मिरपन होने चार मी नही रहता किनु रसोरेगुनम स्थमाष मनिपर मायनम में मन होम पर होता है। और जो साभर में सिम होता तो सब जगत् म मन म्मि रोपण कि मम्त में ममुप बी पब मित्र थपि साभर में फैमा रही परन्तु पिसीम मम सिर पहीख सक मिराभर में महाधिमिररुपमे से उसमें मम सिर रोगा। इसरिने पितम पमा प्रयम है। रूप-रसम की स्पमे मदिरों में मपभोपाखि है और उसमें मारवावीसरा-पी पुसौप मदिरों में मेवाहोपेसाबमियर हाई पाचौर रोगदि पर होते है।या-रसी को पर्म म म और मुस्लिम सापम माबले पुस्पादित होम मनुष्यसम्म म पमा। पा-मामा प्रमर की बिमस्वरूप पाम चरि मुठ मूर्तियों के पुग्धरिपोंभ ऐल्पमत पा विममत में पान पस में परमादेश प्रमाण पते है।प-सी मोसे में हम पराव और अपमा चित्रण मानते मम परासप होम पस स्वम्म और पब मन के मोंने स्थान पर भाप परापाष भरिभराप्य र मार समान ग्रहमोपय में बोम अमेरिव दुस्ख पते। माता-बको रिसीमे किम जोमासमा बाम पर फापर पाँवो मेय उस पर प्रेषित रोम मारवा च पायी पाप प्रमहीमो पामेवर सपासका स्पन एप और नाम पर प्रसादि मूर्तिपो भात गुपति परी म सम्मम्त परमेघर नोंद! मामा-भान्त होम ममिर । परेशावर में स्मठे । एस पठे। पर्म मस्या और पामा प्रम मा मोर पारिसे पारित होवे गो से छपवे पर-पुरा पुगरियों को पब देवरस पम को रेस्य परीगमन मप मामार बनी में पप मम्मेि पाच मुलभ मूपमा होम दुपहोता। एण-माव पित परि माबोरोन अपमानम पाणपारिमठिमों म माप मोम होगा। म्पायरी- ग मूर्तियों को कई बार माना पोरनार र राहामात राते हैं। पार्ष-पुपरी पास्त्रियों के मंग और पुगी परपुरणों के संग मा एपित रोम मौ पुरुष पम अनम्र भाप स हो । भाष-स्यमी परकी पसमप्रवर पवान् म होने से परस्पर विनम्व रोममा कागावे १। ए-गम म्यम प्रो परमभामा मा गनिरोगवा पोशिपम गमधर्म प्रमादाय म मा में प्रपप भी। फटाणे-पामता मे मुरिपपुर पुष्पादि पदाव पपु उपगुगपरिपाव परोपा लिप बाप मधे पुपरी टोपबामपप्पो म 1 २१२ सत्मार्थप्रकाठ पुमा म फितने विष तक पुगन्धि प्रमत में मम सुबह की परिव और पूर्व मपन्धि समप तक रसा नाम होता सम पण मन में ही म।। पुष्यदि कोच सब मिप मम म्य दुर्गन्य मारो।। प्प परमामा के फर पर लाने के लिये पुप्परि समन्मल पावर! सोबावा 1-पन्म पर बोएर पुप्प परम परमात प्रापि सब भबस और पति के संयोग होमे से मोरी में राम नवम्य रस्स पुर्णप मामास में सब कि पिता ममुपके मरमौर सों बीच रसमें पावे ग्मी में मरते और साते है। ऐसे। पके मुखिया के माये में दो भाते है। इसरिये प प्रपवादि मम्मि पम मोगों मे मनमो। पौर मिनहोंने पायममप मूचि की मम की और मेरे प्यार पोपों से बचने और लो। म०-किसी प्रमर की मूर्सिएप परमो पदी यही और को अपने भारत में परेष पूणा पदमीच परमय मावीम्सम पी पाक्तवस्य गेबिशिष बिन्त पम्पिम मदेव और सू की मूतिपयम पते पर पासमयीय पही २०-किसी मसर की मूर्सिएप र मध मितु मूर्णिमा को बोचे रंगे रगती का मर्मात् एल्मर अन्य परिपे । प पम्वना पापक्वाप्प पाम बहुत मचा मी परत पियाहौल मूमो पो रचम पर्वको बोगम शिकाम पम विपा। बो भासम्म पनि पानी की मूर्मिला सम्मम मम क्रम्म तो ममी पापमो सवी पावन मोक और पेशामुमोठ देवता और भूपियायो- म्य मो थी पितर मोत म्पतरम् ॥ १. पर 11 में 10 मापापों प्रापय प्रह्मचारिणमिम्मत ।। अपई 14.॥ अतिथिगवान्यगप्पए । ३ अर्व १५। पाम 11 अमत प्रापत मिपमेधासोपव४॥ अपेद में माए में । म्यमय प्रम्प प्रशासि त्यामय प्रस्प प्राव परिप्यामि ॥५॥ चियापदि की। कतम पफोरप इति स प्रम त्यदिग्यायपः॥६॥ पतपय 41 प्रपारम्पम माता भय पितरयो मप भाचार्ययो भप प्रतिषियो भय ॥७॥ ६सिगा .. पिपविभादभिता पतिमिदंपरस्तथा । परया भूपितम्याप बटुफस्याएमीसुभि ॥८॥ मयु ५२॥ .
एकापसमुहास શી पूज्योत्पति ॥ ६॥ ममुमतौ । प्रथम माता मठिमी पूरपाप रेखा मर्मत सम्तामों को हम ममम मे सेवा प्रा माता प्रसप रखा रिस पोट वापस भी नमन। मप फिल्म सम्परे । उसकी मी माता के समाम समममीतीसरा प्राचार्य पो रिण मारपण रसकी तममम मम से सेयममी. बौग प्रविधिको शिशर, पार्मिक पिपरी सबकी रहति परमे पमा मात् में प्रमय पता हुमा सम उपरेड से सब मे मुखी म उसकी पप पानी पीरिये पति और पुरसरिये पपा पूशनारी पे पाच मूस्मिान् देव चिनो पप से मनुष्यको सपत्ति प्रायन सस शिका विण और सपोपदेश की प्राति होती है। ये दो परमेपर को मस होने की मोरिपा है। इसकी सबमरे यो पापाचारि मस्तेि भतीय पामर मरम्पमा प्र०-माता पिन्य पारिकी संप और मूर्मिपा मारतो रोपमा 3०-पाचपादि मम्पिस तो सपा बोपने मोर मावावि मूर्तिमानों की सामने में पाप। रेभनकी पावलिसाचात् माय परि शार मुन्नापकरेलो को पोड प्रोष पापपारिमै शिर मान्य मी ने इसलिए सीमर सिकिलो माव्य पिपरि के सामने मेरेप र एग परेपे दो स्य गंगे भोर मेरे पापे ठो हमारे मुव पहार में सर परेग्म । हम्मे पापचारिकी पतिपय रसके पापे मैच पर पार पण गग अपार म प दियवा भात् 'स्वमा गृहमा भोजन पदार्थ नगरप्रदीप्यामि' सोई मिमी पपसार किया और म दिगम्गो ग्मा माग से सब पचने आप मोप सही पोगा इस उन्सरियों पर्यात पूस माम सार्म. तुओं की। भूगो को पक, मरक पालक पर महिनों का साम्प प्पि पप ताबमाप गुम्प गरम पिचर मिरिनाभीम मार मार मौरमते । पोलाई पार्मिक यग ऐसा तो पायपरियों में पपा सारमे पयो और सपने भारिसमी में नपरेग्मने पायेभय निकर भाप। प्र०-मे पीपारिक प्रपपारिमपिनेसममापति? नरागीरम साम्प भारम्निीप्रति मोकगी। To-मोसमी सपा मगत पर्म पाना में पायम रिया नियतीतिरिकाबारी गायनासिब रिझन रि गम्भिों लोको पाया मा पम पण पौर नोनियामागिने माRifसिम गुपथ समयम समर्शममार एनम विहीगी। नियमाप गुपसम । म मतिराम परयोंही मचा में निम्म सरी मिपु. समिपम्प प प मनु स...
२४ सस्यामबाण उ०- प्र- भावसी पुला दिस मेरो मनुम हुए।मूह होने से सब संसार में मूम्ब रानी मे untiमममी मान्य at: प्र०-सो भयो में चोर" मारणा 'शारभैरव मावि ने को। समार रिचाये। अब मुमबमान रग टोरने ममे रमाने जागा तोप पोपा भाषि मारे उप को। मममे मिला कर सब फैल गेम्पन समाप स्पि। पर पापभमभर वही कितपो ममरे जग येगे ग्राम मावोब कोई गमे तो भामे को मते है। और पकी पाराम मान्मा होष पाप धारीवी की चपी। देखो मणेष म्मेचमेलनमरेले चिरेस में मोर पसीमापा एक पग मेचबिरे वा पापमो मल्मर कहा। ४०- मना सिम कोरपासमाभैरप बारमरप म्यादि भूत प्रेत और पम प्रादि गप [ ] गन्होंने मुम्बमाको प्रेमलापस्यो ! बब महादेव और बिकी पुराणों में या किसके पिपुरासुर यदि यो मारकर पुणे को मान प्रविध तो मुमसमानों को मम्म लोन दिया ! इससे पासिब पोलियो प्रणायाम पते पाते? बब मुखममान मन्दिर मौर मुस्लिों को दोपवे प्रेते एस पी के पास माने तर भारिपों में ग्य पापाय शिप में सपा और पेयमापस अपवर में विश रिप । जब भणी में भाभैरवगरे मारे मत नहीं पते और प्रसार समप में मी मशीपमाण होने पीते दो म्पेको त यो भय। और अपने पगारेमभिरमाय ने रिपीएसब पापमापा. म.- पला में भारमने से पितरी पाप प्रम पार मार के पुल मभाग पिवान में चार पितर प्रपन्य हाय निभपभ पिपाते। पपयामीमत एमा। उ.--सम्पप, जो पापियामेने अपी पम्पोजिम पाटो को फितरो मुखसिगळ समय से ममस पाच त्याममाति पाप में मत। म पाप तीनही पता और पाप निभाता भारसमी भीमना बिना पोषो। पम्मी किसी पूर्व मिकी में गुम मोर उसमें एक ममुभ गरियोग्य ! पणन सो मुन पर रागिणा पिया रियल सीमे स्मरिया सागप्रमा सेको इस ममा ग्योतो मानहा। मेरमपमे पद पाया पर भी मिथ्या बात। प्रा-रो ! की प्रती और प्रमाश भारिरीका बानो माप मानते १ प पाममा हो। 7 -ममी पहीम सोम मा तुस्स पीप रम पमत TV या मkि समीं समा रमही समूपीप सर परममिएसम्पयो में समस्त प्रम।
एकापसमुहास प्र०-मधपाता बने दो परम्मु मधली में महामन्मा। एक प्रोपर मपये समप नाप्रपमा समुद्र में से स्पमेव माणसे पर पपर । स्परा भरने से परोपीये । परे। मौरपाई यो बगायब की परस्पदीन यतो मसीहो पाता और रस प्यप भाप परब पी कोपन पदों हो। इन्द्ररमन पम्प में स्वामी ने मदिर बापावर बरस समय एक पब एक पपप एकमां मर बने भारि धमन्यरों में तुम सम सकोगे। 1०--विसन पर वर्ष पर्यन्त बालाप को प्रयकीपी पमित होकर मधुप में प्राप्या मुयस मिणा । म भ पायो म माय ग्य पापा मक्ता । कितु विचर सविसप पावर पसन मम्मर मारनौम में समय की ममी से समुप में पते । पमुरीमास्मिों सस्मिार मग प्यती उसका मे मुखर योग मनिया प्रवे पर रसोई बनता सबका परमो रसोइपोंपिय पम्प स्मिी पप्प बस। ममि पर चरों मारा और बीच में एक पाभर सेगमा । ग्राणों के मीने पो मिली और गड बम का पूतों पर चबर पम उमसे मोरम रस बरस में उसी समय पर पर बापूला कमुप मोरे बोसनम व मने बानी जो कि समान पुगलिया है। पर आगों पर निभा पार पत्रों मे रिवार निभरिख्यकमरेभो पिरों लिपे रखो। मांस पाग- पो पो भय पर और कोई मासिक भौका देती। बीच मा मन्दिर में प्रदेव पाप रो पुस्तामा पोचपा मममम । पश्यत् यो सप्रेम एप पो ग्पोजर पति और दीप गरम पोर माई मतों को गएर पौर पम्पस पर्मन्स एक पछि म पम एकसरे म भोरम मवर पपचि मतीम्मी पचों पर इस मे पैमठे सव। ममा अग्रचर और गुमे ममुख पा सम ग्राम प्य नम्बर पर प्य प्रम परेपसमा परि गमगीत और रस पपरपुरी में भी म परसा मी पाव । ग्रमी यहि रोग बोहा और समगमपुरी में मी गानो मिति स्म म म यो रोग नही पप्पा और समय में पममानि भरपाकमा सजिमुम्दा भोप्य और सरपरस सण्या। रसोदामों पायापार में पी और माता न्यया भरायव्य हावापामारोती। पर परिमाया । नम भूपी पुन मती रस पपत्र समीर में पान्यामाग्समीर प्रेग्न्य पुष्परम एममा पसब मरीशोप पुभाता है। मरेपो पुल मोहिमम गम पर राम पपन्न कर भरण पर्म । परम्पनी सती रकमेपुभरले पपुमाएकापसी सत्यापेमका अपने दुमाग भोरम प्रापमा पर प्रोष पछि मरे किसी बायब स्थमिम् । भाप के एक पाये स्मारा पर्म रहो" एपर बोप पाएमा प्रथाम भ प परमारसी समय कौम को पत्र मा देखे और परसममोए सालो मनुज रस्सी परम सम्प है। जब बात से योग र वे वप इनामा मन्दिर चिम्म रिम में मौ मम्मेरा राता और पीपक बाप पारे । म मूर्तियों के भगे परेचर पाने में दोनों मोर रसे। परो पगरी मौतर गे रखे। बब एक मोर पसे ने परेंगे बीच र मूर्ति प्रा में पाती। तब सब परो और पपरी पुमस्ते है तुम मरो तुम्हारे पाप राम्मे तब पर दोप। सोम प्रो। वियरे मोरे माण ही परब और मम पदा वूसराच ते १ मा न होता है। बसमाम मोर मस होम पर ला रिसात हो पाते हैं। रमन परिक जिसने बोप अब तक पकने में है। सपाय राग और वो म उपासक प रसने पाचौ स्पपे पप्पम ममिर पवाण पा इसलिये कि भाषाव एमके पोजन भन्नेमा इस रीति सायं परन्तुरे मूर्तका दोपत व मानो तो गनी प्ररोगरों को मामा विनिम गिरिपती मे ममिा बाप । यस परम और साम्स समर पी मरते परन्तु ये तीनों को मपाम ते १ पोरों को कुल देते रंगे । गमे सम्मति सेमी समन भवात् कोपर पपने - समप ये तीनो उपस्थित रहते है। भूमिहाप पोग रस्सी ग्समें एक सोने के सम्पुर में एक स्पगयम रव जिसने प्रतिदिन भोपरबापत बनाते है । ग्स पर राशि की परम्प में सभामा विमलेन सपेर रिमोग्ग । रस पोरनी होनी को पिणाम किजिसस भी मर गले मंगे। मरे वो इस प्रभर और मोजम महाममिय पिमा पनि जापती अपने शरीर परखने पर तो मौका भी प्रय से गये। इसी मही बात पराये पन गरिने पाप पो हुम्म कमदी। प्र.-मो यमेन में सोचने समप पिबा स्वारस्य पदमी पार हो। ३०-पी स्पाँकिग्स ममिर में भी दिम में प्राय पणाला पव रिमामा परी पाय पोरब रन जग में गिरी समान रोपडम प्रतिषिम्म मन्या और अप मी पोरापन पोरदो। शिरम सनमा राता। ऐपी पौगोरियो निपुरिया प्र०--पमेनर का समचन्द्र ने स्पपिन रियलिमा मूर्षिपूरा पारि पातीतापमणमूस्लिपवनमतौर पम्मतिरामाषय में शिन! २०--रामभ. ममप में रस मिमिर म पम टिभी- पभिनय करिय र राम मायब मगिरबा सिमपम पम पारिप समय पीवानी भनुमान मार - एकावासमुमास' साब मापसे मामग्रमार्ग में पिमाम पर पापोप्य भेमाते ये सब पीपजी पाकि- भप पूर्व महादेव प्रसाश्मफरोदिमु । सतुयम्ध पति बिभ्यतम् ।। पस्मोकिए ।पश सगे १२१। गोकर। सौ ! रे क्लिोम से हम पर होम एमवे में चोर इसी व्यन में अनुमास शिपाप और परमेपर की पासप मान भीमवेगपी पो सप विमु (मापक) रोम देव मारव परमारमा रसीमा से हमने सब स्यममी पहो और सपा से हमने बोपम मम माने, ग्स याबको मार सुमोसे परे। इससे सिमाप बापस्मोकि भन्न अमीमही सिधा प्र-फामिपाइन्ट फो । मिसने हुमा पिमापा मम्मको". पशिप में एक परिपत की। मानक एप पिचरती को विषय होती तो पाममा मौसम व्याय 7.--मग ।। पर सब पोपसी है पाकिम मसिम पोग होम । ग्खम दिवश में मिनरले मिची पर पूसा ममम में मग्म दरोग्य । पपुगरी पमप देण्यब मुख में मणी समापहरे पर निम्ममता दोग्य तमी पापय मामी मुग सेजोमा होणावो पर ru मा मोडता होय। सप हिल पर और मुसो साथ पपरोप । जापाव पर मार स्म होम सब मार और मुब पिए पो निमाय रोग्य रस समपात सरीको पारि पापी से रम पम रहित मते रंगे। म.-यो । पारी की मूर्ति परिम से मत : साप । पर सपरती साने में कई मबी मषितुब गोवा मामी म भर दी। उ.-मीप मल मतिभेमे पाच होम और सय रस बगर मभिमुगपरिमो मा मामी ने गप्प माप -ए। मोमयपत्री परिसी ससपर राजा पा और मामात्मर पापा मी मिप्या पन? -- मिस्प. मुरो !ी पर पुषा पायप पगारतोय। ग्मयपपिया महीला "मामामी चममा मागम ममा परिरमम ममिर हा पण और पुपरी मन्ने जो गई भी बाणों और ए मायाम म्यग गई। गे पोर पुपरी एप रस मिस परमिकम मापर मारी में पारो परे पयगे मममने पिर शिविर मा भरपपरियोगमा मगोदर र भरपे। भीम समिर रोग नुम्पर उपचारमा स्पhिutम गाभमपन्चिर मा एयर पोरीगभर जिम में निमानित म.- २१८ सत्याप्रमाण पापी मे का कि ममी तुमारी माईमा नहीं है। एक पाया परवाना । दूसरे थे योगिनी सामने दिखगई इस्पपिएमय में पेय मोपों की और से प्रान र विकास का , ममो सिने हो पाप पुरी और ग्नोरेसे पो गमे । पुमारिप ने पह भी दापयोग बस किसीम उपप्पा यो मन्दिर और मूर्षि मत तोलो। मुससमाधों मेथा कि इन "कुतपरस्त' मालित तसिम्म अर्मात् पुत्रों के मोरपडे ( मूर्णिमा) है।बाप्प मन्दिर हो ! पर कीस स्टी पब पुम्बक पाय प्रसहोने से मवि गिर पपी। पब मति तोगी तब मुभिमय मेष समिमा । फुधरी और पो पर कोडा पो होने सये। मान पतपायो । मार मारे मरवा रिपा । तब पर कोप परमार र पोप और उनको को 'गुणाम' विपरी बना पिमम्म पिसबाण पस परषा मष मुरिम्पपा चौर पन्य बनेको रिपे। पीपार की प्य का सम्पन्पय को मस एप परमेश्वर की मचिबकीबो मोगों बाव टोप अमते और अपनी विमल करते । देखो। मिठी मूर्तिया सनी धाबी की पूजमत तो पी लिपी सोती । पुजारियों ने इन पापों की इतनी मलि की परन्त मनि एक मी रमणों के सिर पर गरेपगी। जो किसी एक पूरबार पुस्प की मूर्ति सय सेपमते तोपर भपने सेन को पपाराति पचता और सराहनों मारय । प्र०-चारिमनी के स्पोक्यो मिसने 'मामा' पास में मन दी और रसम प्रथम शिष्य इम्पपि पात मी उ०-रिमी सहभाबे से रेरिपेमे। मिमी में प्रम मम मा रिस्थ मकिपीण मे मेरा । पर सम्पम खोपों के मारे मनिर मूक्ति प्रमाणे सारी उप मिांगई पीरमनुतप्पर पोगों ने जिठमीवीरत्यको चौर पर गानों को माग परन्तु मनि एक मस्ती कोयंग मोरोक सकी। पा भीरब सय घेई होता तो बडे पुरे हा रेता और ये मान भिते । ममा पातामोकि जिसम्म रामार व रसोरणात पारे । प्रस्यमामुपी वो मारा। सबसपाठी और प्रसार से तो पापा पा सती और ध्यपा बोरवी मुसबमान परणाही रस परा की परताप और पारेको वापसे थे तो मी म्पयन पुष और पोगियर मी पापा को परीक्षा परिका ती पर पांच मातीत मोडल और पामिन से पिसने पपुषम्म बीमा राम बाप रा महापुरुष माय । जब तक मंगान भार व पण मास परमा मारि पर मामन बाम्प पी? 30- पियरामशीपसास मामी निम्मवीर रसम पुयरी पगोलिपिम मीनरास यापीमर मामा गाती भाग एकापसमुद्यास मो से पक मारने से हुमती चौर पोकास्य पी कोच पदी रोष पोन यो। रती के समाम पां मौ स मे कोम्पा में जो अमाप सब मम हो पता । पर यम में आप पये से समस्या मातीइससे पाला पिता विन्य एक मन्दिर कुपा चौर पर पर बनायो पिबार में बसपी होती और दो महोतीष पोप ऽबारियों को चामेमा म मो वहीं । एकप पर रसएमस पप सता है। विपके गाय से पहरे म्ने १ रसको सफल पाना संप मा मामठे है। पोनि कम मात्र पोपची ये मम हरने के लिये समय था और मरे मी रसी मन्मर पोप पौवा रससे मापुस रो तो एक पग पर मर सपोप बार तो मा महापुस्सी गापापा ममपुस तो दो रथम धर्मपुत पुण्य से बी. प्र.-प्रमवसरभ बायब अपवम्म एक मुनीमा भया माय और एक मिची पती चौर गिरवी नहीं पडसर में बो तर प्रमरपन में आप से पनि यो हिमपाप से मार जोड़े मामाको पर्यन रेम से यया पर मी मानने पोम्प दीं। ही उस बाबा बाम मात्र प्रपतसर बरकमी महोग्य वारसम्म बरप्रभा होय । इससे रसम मम पस्तसर धराया। यो ममत होता तो पुराधिपो के मामले सुम्प कोई यो माता मिली की बम्पर ऐसीगी जिससे बमठी रोगी और गिरटीम होगी। हम पसम्दी मे ममय गपोका होगा । परसा में मातरने में पपरीमती रोगी मरम्पप में वर्ष पपा बन्सो बम पम पर किसकनमान भाभ। मसालेबोरे पावित रंगो पहार की प्या में से पोपनीयत गरिवर रमाइरहेगे। म-सार महार की पेली में पान में तो पाप पर पाते। पौर तपबर में रहने से तपस्सी होना । रेसपाय कोसी में गोमुरा उत्तरमयी में गुसपी विपुगी पपपप व होते है।मार और प्रीपरापय में एमा महाये समनुप्प और पा महीने तक रेष्ठा मते है । महारेशम मुता मेर म फापति परम्पर पर समाप में मनु और पा मान्यप में । एकोपय स्पन बाल मन स मुधिोगती है।पहार पर पदरी से स्मा गनमेटोय पसार इस्पारिप मा। २०-पार र सपनों में सोनपुर मार्गमपारम्मीर की पैदा एक परिपुरको मारियों मापा सलो तो "साको पनि एरा ऐणन्दर मतमें सा रसमै पामताप मीही ही पूर पम्य विन्ध भोये अपए बीमा।"पोपन परम .मात् "मनुस्मार।म.
सखायपका पबम्प । अब तो " मिन है। सपोन में बाने रहने से तप हीच मितु तप तो मदे से हवा मोंकि यहां गुत से एमपवार म बोडो से भी रहते है। "हिमषत' प्रमबति गहा प्रामसर से बर पिरयो । मोमुखाभर पोप बाबा से बमोम और भी पहल पोपमा। पारसमणी मावि मान व्यक्यिोंकि प्राणी परन्तु ममबारों रेरित पा मी भिमदारा। रेपग पुराव पोलो की लोगो पर्माना भाला और पा मिशी इससिमे पारेख सके। ऐसे पपोरेगा तोमा औल व्यय और समय रेवे ! एमची तो हीरो मसिल प्रणालीम गुपकी भूपी तो नही पावती परम्त पोपों की एक बीमारी की होगी । सो अभियों की पूनी और प्रतियों की प्रबासी संदिप बबती राती है। सास भी पहा मीतर अम्मा गर्मी वीसमें सपा प्रता । रस पास दूसरे उस में पर अबष बाहो मर्मी पदीयोमपाता है। इससे स्मारक स्वर ममि बात मची है। पस्त हो भी एकमेप पर पर पोप व पोोनों ये मन्दिर बना रुपमा मान्य पुपरी पणे चिम गरेपरों से मास मेन रिफ्यानमा मते है। से परम्पराम में माविष पो गुरु से है। 'पसी के मुत हैं। एकीको पके पीस परापति एक मम्बिर और पामुखी मबियाम म रायपकोई पो मी पोप पीया परातीती १। पातु से तीयोग पूर्व पारे रोने से पसी योग भी मां की भूमि को रमबीच पीर पविती। म -फिप्यार में निम्मेवारी भयो भामुम मसालजिनमेवारी तीय समय में तीन स्म पदबी है और उसके बारे में माली एक भी दी गयी। माम वीरानमा धिर मुख्य सिरि । पाा पमुधो साम में बाब ममे से इस सिदिदी से ही प्रपोचाई परम मसी सरिवर्म मचमी पई। मथुरा पतीपी से अधिक स्पानीमा भय और चाय मामा परे माम्ब से होती है। सूर्य पर में जम्माची मनोभ मेगा दोरीप पे सपा मिया। उ-प्रमा सोमी में तीनों माि पीती है कि पापी परिया और तीन सय में तीन मास होने प्रमाण पुरी पोगों ने भारि पाभूपर पदिरामे की नीऔर मदिया सा गावाती। मैंने अपनी बातों से रेखाममाग में कोई अपित भोक पप सप समय पोपनी अप पर रे मुरमामे म माहाम बापाप पमपमा होगा । म्याय में पारमा यो अव तो खोरम में भाग कोई भी मी दोन स्लिपर को सप ध्यते दुपदरीको प्रयका कोईयां व मरवा चौर रसम पीय मी मामय में आयु पथ मन पम्म मेवा ऐप । तीज भी पाम पोपों से भरा में पय प्रयास भी भी हो सस्या पर पड़ी बसम्म पठकियोध्या नारी पाती हो पधे की मार समर स्पीव एकास्यसमुहास वाम पर स्वर्ग में गाल में दोपही यापी कीपरन्तु पीपी) मुखमपोपों में प्रपोच्या मर्यको म गई। यह पपोत्रा राम म गा भिण है। ऐसे ही मिपरस्प भारि को भी पोपत्रीय बानी। मधुरा दीव योग हे पिरा" दोपही परन्तु उस्म तीम बन्तु बोसोवापारी १ किमिगले मारे बस सस और मम्तारिष में किसी को पुत्र मिपन्य अम्बिी। एकबोबेबी कई सामनने यप अपना पने को बो हम बरते जामो पवमान ! भाग मी और बदर भर पा । समान की पप १ मया । दूसरे बप में मोदी से बिगो मारे शन परप्प मी बाट पर मग्नि परता है। तीसरे मामले पर पास मुभप्रकार पगको रोपी पहमे और से कमीनो पर चपचवे गिरा मार पर और पे तीयों पोप और पोपचीखों पीब है। मनों का भारि मा भने और मन्दरों को कम्प गुप भावि और चोपों की रशिया और अपनों से समय से सेप किप प्रवे और एवान बन पा व था अब मेवावर मी भोर गुरु वीरिकी बीमा प्रवासी।सेकी दीपमाखिमम मेडा गोमंग और सपा में मी पोपों की बन पाती है। मज में मोदी बाकिम की पोखरा समपदो। इनमें जो कोई पार्मिक परोपरी पुस । इस पोपशीचा से प्रमहोबा म०-पा महिमा और वीर्य समस्तम से पते। मेमो सावी 30--तुम सम्पसन किसको मते हो।यो सब से पण मायाको पर सबसे व तो और मामपादि पिमुनिहत पुस्तकों में बम बम की पही। पर मूर्णिजा प्रसाई तीच सापकोइपर २ बममार्गी और भैदियों से पता प्रपम भाग में की थी और ये ही मी भी। जब नियों में पिरनार पापिया शिखर पम्पप और मा पानि वीरय मो मतप इमोमो मे मो बध सिम । बो कोई इमो मरम्म की परीक्षा मनाचौरे पपा की पुरापी से पुरानीमा और सब पर भावि पदे दो मियो अपये सब वीर्य पांचसो प्रमय एक पर ही बने । साल मे परम खपिसी के पास भी निपटाइम्स मा-चो तापम महाण्य प्रपात से "अन्यष एवं पाएं कम्योपेथिमश्यदि इयरी एससी नहीं! उमदी सकियो पापमय तो रखिों को पप गापार, मयों को प्रति मिप माती कोरियों भक मादि रोग र सय पसप महीन। इस्त्रीदने प्रप पुलकिणीमबही पूरा म -गायोति यो धूपापोग्लाग रातपि मुप्यत सवपापम्पो विप्पुमोई स गम्पति ।
२७२ सत्यप्रकारा हरिसरति पापानि हरिरिस्परमपम् ।२॥ मात काले शिव ष्टना निशि पापं विनश्यति । प्राममात मम्मा साया समम्मनाम् ।। इमादि गोड पोपपुराप।बोमो साणे पोत पूर से मी पपार मेटो ग्स प्रप पा रोमपद विमा यो प्रभाव एकमेवाता है। 'हरि इन दो अपरों मम्मोचारण सब पापों मे रमेता है। इसे ही राम अप्य शिर माळी भारि बामों म माहाम्म। ॥ और बो मनुष म्तम्भव में शिव अर्यात विजया रसको मूभिमसे तो पति में किया दुमा मम्मा में एक से वाम ममम सापार में मरने से सात बमों म पाप पर बावामपन महायपोपा सय रोपण। 10-मिप्पा होने में चाया पौकि ग्वार पर राम म माराय शिव प्रौर मगमती मम्मरण से पाप मापनी वा ! बोसे वो एजी करे और पाप मने से मई मौन मे। पारस पोपशीरा में पाप पाम हो । महो क्लिास है कि हम पाप सम्पमध्मरण टीप मंगे तो पापो की मिति हो चफो। इसी विषय पर पाप को इस मोक और परमोकामनाय प्रवेपर मिा पुष्य पाप मोगय हो पाया। म०-सोको सौर्य प्रामस्मरण समीपम्ही ! 7०-सारि सम शाम पाम्प तान्न धार्मिक शिनों भसा परोपमा पमापुमन पोग्गभ्यास मिर निकापर, सत्यापन समम माफ्य सम्प मा मात्र प्राचार्य पतिधि माठा पिध की पेय परमेश्वर की सुति पन्य रासपा शाम्ति स्तिन्द्रिपटा मुणोता धर्मपुत पुस्मा, शम मिजाम पारिएम गुप्तकर्म दुन्यों से नगरपये होने सजा भीर जो पसलसमब टीभीपी हो सो पाक जमा पैससरम्ति सामितीयामि" मनुज जिब मरे दुयी स नरें उमम नाम की। परमख तरानमो नीति उपम मारपेय। मुक पौम प्रारिममाम पौडो समायोकि ग्मो समुद्र पारिको वरत। समानती यासी: म नमस्तीपाय में । जो पापरी एकणपर्णप्रस ] और कणको स्पप पाने से २ मा सती पप समानता सेपी होने है। जो पदादि शाम और पाममापारिप मपदों में या उसका भारि पा रेप और स्मस रिप्ष पेनी सादिनी मात । ग्रममाए इसमतकि- पस्य माम मदपणा मम ।। परमेशरमपम रेमा धन धर्मभुज मोमसम्म परमेपर र परमी रपम सम्मिान प्रापि प्रम परमेश गुपकर्म एकादशमुशास' २७३ सम्पब है। सबसे बड़ा परमेम इग्य परंभर वर मम्मुत, पापपरी मी पम्पपीता दाह सप पर पापी रम्य सचिमा अपने हामी कम कीम्पति स्विति प्रसप मा समय किसी कापही पेश गरिदिप भाव के पापों अबसपारा दिन सब में पाया रोम साप माने सब को भसम प्राय अमारा भाभिमा म मे पपने में पारण पाद पोर्मो से यारो ममपी में समर्पा, सामों मे बाताबर, मधमली नमे सब पर रखा रो, सब प्रभर के मामी को समर्प पिरिम से भाप समर के पानी को गले सप संसार में अपने मामा सुख दुस्प सममे, सबकी m हिायों में पिन हार्म और दाम मने पोका स्पड से दसरा चौर समा कोतारे इस प्रसार परमारधर्मों मप पकन परमार के गुबर्म स्वमा प्रसस भप गुप में सम्पब में मचे पथरी परमेय समसावी. प्र-गुवर्षया गुरुपिप्पुम्देवो महेनर। गुवरेप परे प्रडा तस्मै श्रीगुरवे नमः। इम्मावि गुम्मामय दो सच। गुड का पारे पीन्न सो मार सा रोमी हो तो पप समान पोरा तो नाम्बिसाय मोही हो तो एम ल्म और भी होता समान गुरुको मनाया। पोगुणीही प्रपने दो मी प्रदान करनी तप गुरुपम कोसने में पप में प्रथमेवप्रसाबित ठोकीपमही। उ०-गरपी किए मोगर चौर परम परमेपर के पमर इस ममी नहीं रो सापपुस्माहरम गुणात्य मी एक पी पापी यो माप फ्विा पाचवे और पतिपि हो । गली स्प प्रमो मसे विमहिला पी रेनी शिप्प और गुरुममम है। परमो पुल मोमी कोपी मोदी और अमीरो तो उसको सम्पपोषदेय विधायी सहर शिका से माने तो धर्म प्राय धर्मात् पापप ए सवारण कमी करने में मदोपदी। बो रिपरि सरायों में गुरुवपी [ प माम और ] पटाच्या विकारविम मयोपरेत भने बोकाही कित पारिया से पारिने प्रपनी मेहमीपों से एम यदि से स्पोजगम्मि मते की शिनासरियों परवपय प्रपोजन करते है-- दोहा-गुठोमीचा वासी, दोनों को वाय। भवसागर में पत बैठ पापर की नाप । पर समय बियोगी व मी मौरमा समय बितो बोसीगमपये अपमान भरि बम दोनों समुमि पर मेरळ रे पपरी मील में सम्परे सरम इस मरते हैं। ऐस गुरु पीरोही र परराज पो। रसके पास गया मीन - सत्यार्यप्रकारा भोपालसर में पोम । सौ पोपपीमा परी पुगविनों में सी हम गरिने गानों ने भी बीच मचई है। पापमम स्पी मोमी म है।पो परमा बोपी भाप हुन पाहो मी गम भरमभर भवन पोपवे और एस्माराम पमा वा पुयाग भावि मी इन्ही मोमी की गुरुनो मे बन्द Ho-मशवरापुरपणाम का सस्यवतीमत १० इतिहासपुपसाम्यो फेवार्यमुपयेत् । २ । म्मामारते । पुगसम्पविखानि ।। मनु म ।। १२ । इतिहासपुरण पशमो पदान्य परम •d .. एसमेहनि किंचित्पुरासम्पपीत 0 पुराणविधा के ०।६। सूक्ष्म र अपर पुपर्यायी व्यसनी है। असमान प्रमाचप्रमणमा परिपे । 1 विमस ममाम्परत म्पय पुराणों से होमप्र परे पार मालिस और प्रपरभ भस्म पितृकर्म में पुराव और सिप्रद परिश की कमा मु।। इमिास चौर पुन पामरमा भामेप की समाप्ति में वरिल कोसी पुराव की का पुरपुराण विणारे आमने ही मे स्पषि प्रमाों से पुरायो र प्रभाव और इन ममानी से मलिशा और वाया ममी समाप पनि पुरानी में मूरिस्म और वायी समिमान । जो भमरा पुराबारेको प्रसनी दवे तो उममें इस गपोरेग होते कि गरीरिकसूप पो माम मावि मोड प्रयोरेखने पिरित चकम्पासमीप विचार, समपदी पार्मिक पोगी। मेसी मिप्यमाम्मी मिलने और इससे यह सिसोजिम सम्पी परस्पर विरोधी बोगों पे मागलपरि पलाम मोवीसव प पचाने ज्यसो मग मी पीपौर मणमसिम प्रसास्था मिना म्स सप्त धिाम पम पहा बिमम पिरोपी त्या प्रधिार पामरी मोबास और पुराव शिपमहिमपाम नहीं भि- प्रमाणामीतिशासान् पुपरणामि कस्न गापानाराणसीरिति । परम्प और सोमबम है। ऐठोष यक्षपण सम और मोपय म्यतिमात पुराण पर पाया और परम्मी पापम्पम है।इविवाघ ) गैस समोर पास असणा।। गय) सत्पति भारिप पर्यन । (पर) और सामर्ष म प्र निरुपय भय । (गा) सिमीमपात सम्म प्रसंग पन्य । (रासी) भनुम्मा मनाप प पायमपीच मी ममम मम। इन्हीं सवार ० रावपाप-ut.
। पफाशसमुशास' बाप होता। पितम प्रधान् हामियों की मांसा में मुनय सपमेम के मम्स में भी इन मुनन्य मिष्यी बाकि दो प्पासम्स प्रम्प रनम सुमना सुनयना म्पसजी बम्म के पमात् हो सकता है यहीं । बष म्मासनी भबम्म मी मी मा तव बेदाग परत पात मुमत सुमत थे । इसलिये सब पचार पाय प्रयीदी में पा सब सम्पदा सस्ती है। इन बीम कपोष पित भीमस शिपुराणावि मिमा पस्ति यो में ही र सस्ती। बस बासनी मेपर और पाम बेशय शाप इसपिने गम पम बदबास' हुमा । तोकि म्यष मरे पर पार की मण विज को प्रमा जम्बर रे भारम्भ स पर अपतिरपार पन्तचरों पर पड़े थे और मेष उप मिपि भारि सियों में पाये मी थे दी दो तमाम चम्म म पम "सम्मान' स्य । बो कोई मत कियों में भाप्ती मा इमछे किये पर पत मनी लॉकिम्पसबी पिता पितामह प्रपितामह, परागा शक्ति सिा और मम पारि मी चरों पर पड़े थे। पर पत वामपस। प्र०-पुराणों में सब सो कोई सी भी। उ०-बहुतसी बातें की हैं और कोई पुपारम्प स सभी भौगो सो पारि सम्पायों की पौर दो मही। हम पोपों पुरायम्स परक शिपुर में बों मे शिपको परमभर माम वित मस इस पण और मूर्यादि को सबके रास मापे । प्रेरित पुपर पापि मैं विन्डको फरमाम्मा माषा और शिव भारिको बिरासा बीमागपत में देवी को परमेपरी और शिष बिमारिको रसके बिर बनाये गणपण में गेच सपको रास कमाये। मवा म बात हन सम्दापी पापी की नहीं तो किनकी मनुब.सपने में ऐसी परस्पर विम्य बात मही हाती तो पिम्पप्रये मम्मीदीमा सस्ती। इसमें एक पटक सबी माने तो दूसरी सी और को एसरी प्रसी भाम at Tीसरी मी भोर जा वीसरी सबी माने तो अब सब भी दी। शिवपुराव्यमे गिण मणिपण्यपारितु म रोएसपपडे वीस पस्यप्रणम्य गवय स मूम्रपुरावयचे के मयंम और पयुपुरायमर मी की रपति प्रसय विप्र पुमा एक सजाय माय सिखरमको रमधि पार पबिनो। भेद पाकिमा प्रकारपधि स्थिति हमनेपापम्पप मौरी म्पर तापमरिभप्राय भी हो समयमदी तो प्रयाग सिप भीहीम सम्स और इन सबथोर की पधि मी इसी म र दोपी मिन पप गरि पार्य और परिमिक दाम मारतविकासमोर रधि भी विसायमार समावीमा किसण असम्भबम- गिरगप में गिरने की कि मीमहोपरापर बायप (म)म्पाम रमको म्पभिममा मात्र में प्रभा रा स रथ ७ सपारप मनुष्मा से .
૨૧ सत्यार्थप्रकार - किसमयसम्पबाकीप्रम्पनिम्म देखबर मैं पटकदी। ससे एकापण म्स और एप में से एक पुल्स रपत्र मा । म्सपे म्यासेमा किरे पुत्र सापि स्पटमा ने रसमा कि मैं तेरा पुत्र नदी किन्तु मेरा है। हमें स्थिर हुमा भौर दिपसार पन्त दोषों बम पर मत पे । तर मधदेव में स्थिर किया कि जिसमे मो भी मने रिपे मेवा बरोषों मापस में जा पा रहे है। तब म दोनों के बीच में से मोमय जिम्मा आमा पोर पोर मामय में चा पय रसको पोषों साल। पिपरा कि इसप भादि अम्त म चहिये। यो भावि अन्त मेल सजवावे पपिता और जो पाप पाह ले म भाषेप पुत्र मा । मिर्मम सम्म घर के भीचको साचौर मा समपरीर धारण करके अपर को गा। दोनो मनोका से चले । बिनसाय पर्यन्त दोनों चपते से तो भी ग्सम पन्त न पाप्य । तब माचे से उपर बिना और प्पर से नारेमा पिपरा किबोगसारे बाबा हम तो मुसो पुत्र काय पण । पेस्प सोच रहा था कि उसी समय एक गाव और सीमा पर सस्वर पापा रामसे पाने तुम मम माये? नोंदेमाम समसौ से इस विमाधार से थे भाते है। ये पास इस पिपरोपनही ! गाने मा किमही । ममा मे उनसे भाकिम हमारे साथ हो और ऐसी साली सेना में इस बिज घिर म पूर्व की बारा पसंती दी और भक में बता पा ऐसी सी रेमो तो मैं तुमको मिभये पर मे। गन्होंने मा किएम मो सासरी ही गे । तपम कुपित हराम पोला मो पसीन्दी भोगे तो मैं तुमको पनी मम्म । मे मरे मा किम जैसी तुम भवे दोसी स्त्री रेप। वप वीमा मात्र की भोर पो। विन्न प्रकम ही प्राप्मे में मममी पाँच। निज से पाकिस्पा मेचाप पपी! तप विप योगा मुभमे इस म या मही मिया प्रमाणे मे पापा । वि मे मा काई साली रेमो । पप गौरा मे स्त्री दो। म दोगी शिविर पर थे। उप जिम से यम निमा और पर को गप रिचा विशिससे तर बोला इसलिये तय पृष मुमन मन्परेच्या पर जगत् में भी बाही भोग्य और यो ईनाम्य ग्सम समानाय होम्म । पप को शाप विपाविस मुमतमोडी रसी स विधायमगी। तर मुख की पूजा भाद्रीप मिनु पपीभम चौर प्रम मे शाप नियलिसिसम न मिप्पा पासा इससिपे तो पूम संस्मर में भी नही होगी भार निमें परिना किनिमम सस माहा इस तरी शासगी । पुमा दोनों ने मिकी मुति की। मिस प्रमोम ग्स जिम में एक स्य मूर्ति निमा माई और मा कि तुमने मैन मी भय पिये भय या पार मेलापमा और विष्णुममामि विन सामाग्री मीमा मर्थात् मन्न । .
एकादशसमुशास' २७७ की सब महादेव में अपनी च्य में से एक भस्म प गोमा मिअवर विध विनामो इसमें से सब पी मानो इल्परिमसा कोई इम पुषयों के पन्ने पसे पोपों के मन मस्तिष और पामसभूत भी नहीं थे तो मा विप महावीर जरा कम ति गाय और केतकी मा और मम्मका पोषाचा तुम्परे वाघोबा में से मा गिरे। सदी भागबत में मिकी मामि से समय से प्राण और मम. पाहिये पग पग से स्वयमुन और गागडे से समम्मा रापी मार से पर और मरीचि माहित पुत्र उससे पण मयपति गमको तरा पाकिमान नियाममप में रखने से रिति सेना नु से दास अदिति से प्राविम निया से पड़ी मम सर्प ममा सम्पब मावि और अब मियों से बागी बोरे , या मैस्य अस स और बबूब भारि रानी सरित सपा हो गरे । पहा! मागत से बनाये गये शम्माला भन्म तमन्ने ऐसी मिप्पा बावे दिखने में तनिक भी बस और परम , विपन चम्या कोपा गया। मया मी पुस्माचार्य संयोग से मन तो पाते ही परन्तु पस्मेपर की परिम्म विम पा पक्षी सर्व प्रारिम्मी पाही हो सकते और पपी , सिंह कुच गया और पारिबीके गधन में पित होपे म अमरा मौदा हो साया और सिंग पनि प्रपत्र होम अपने माँ बाप कोनों पाये और माल पार पापची वि भरापार सम्बो सधहै। निबार पोप और पापाचित इस महा प्रसम्मल बीमाको निममे सम्पर को अभी तक ममा रम्य । मबास महा म बातों को अन्ये पोप और मार माता की भी मा परे रो पुस्ते और माक्य बोपाव की बात है कि मनुबपि मन कोई !!! इस भापक्तापि पुराया बनाने परेमाँनी गर्मी में भारोपसम्मत समयमर मोमबकि इन पोपी मे परत तो भावावर रेशम ससपाता। ममतों में विरोध नहीं पा सकता कि सिप किया सीम पौत" जब विपकीनुति भये पगे उप विजुमे परमेश्वर भाबको पास अब शिव गुप गमे जग तव शिष परमात्मा प्रबको किन पम्पब और परमेभर की माप में सब पर सबस। मनुण पायविचौर पराम मगुम्पति की मपति परमेहरम सच्चा । रक्षा ! धिभरव अपनी मापा से पर मारियम में वसीमशी मोभयो मो समयसम्तार T-मां मोम गाविया में जिस गीत रेग्स सबस गगा और दूसरोबोय पनि मय रसग सबथप होम्डी बमव ! मा पोपी 'तुम म्यर और मुणमयी गावोगमी मम्म पपीहा अपक्ष मौकमिसले पाएगो ग्सोको समयमा यो और जिससे सिाप - सस्त्रार्यमका मो उसमे सब से पाँच सयमो । तुमको सास और धर्म से मचा मनोमन उमको वो अपने स्वाही से मम ।। माषा मनुष्य में हो सकती है। जो कि बमोमरीन्हीं को मापाची मत। परमेघर में बरम्पयदि दोप न होने से रसको मानवी ही मसको। बो प्रावि पी में प्राप और एसपी रियों से पथ पती सर्प पारि हुए होते तो अचमा मा से सन्तानको नही होते? पश्मिनो परिये मिल पाये ही मडकी और भनुमापक पोपशी पाही से बोचपन बी- तमात् कास्पप्प इमा' प्रजा शव शतपथ में पविसपा सब धीमबप की । कश्यप' कस्मात् पश्पको भवतीति | विषम परिकता पामेवर मगम रमप इससिपे कि पात् 'पश्यतीति परप' पाप एक पश्पक बो निर्मम होम माप मात् सब गाय और होम समापियों को पाक्न रेता और प्राचन्तयिपया इस मामयण पचम भावि प्रवर प्रान्च और मन्तममादि में भाने से पाप से मवप' का गी। इसम्म भ न अन भाग के बोरे का अपम्पबम्म परिधिदम्पमये में मानिया असे मायोरपुरावमापात्र में देवों के शरीरों केजविकसकेपूक ली पनी उस मरिमपुर को माय । स्कीम के यर से एक पितु भूमि में पपये रस सय स्वयीवरको स सब भार में मीच भर प्यप पिर की मदीप चमनी भारि गपो त मे सिप राब रखनीय से सम मात् भरपाबा वो रेखा और स्वाप सिंह और रसको उपभो पोपी मोमो किसी पर रखनीर पे तो सब जगत् रजनीय श्री मग पाबो मर गायतो पय पी मनुप्पादिप्रया और बमस मगर मण कपा मस्पति बपति पारिसमातेपायही मिति नामम्प कि गार बसपचे पोपपा में महान बसे गये होंगे ।।। ऐखि पाही असम्भव परगपोका भाकीबारी में गाय मिसन और मस्मित। प्रम जिस “भीमागमत मत गसकी मोगा मुनो। ममी का पारावर पेजको भापक्त प्ररपाय रिप- शार्म परमगु में परिभानसमन्वितम् । सरास्वराध ग्रहाण गदित मपा । भाग सक जब भाम्बरबही समतो रसमातम मममम । -समयी! मप परमगुमायो विशाम धीर पौर पर्म प्रम मारमा पसी को मुझस प्रारम। जब मित्रमण पपप में मिल पा मेर-सी प्रमामयण इति । .
एकापसमुशास जान पातो परम प्रपा भाव म पिरोपम रमना मी और गुम मिोपचास राप मी पुमस्स। अब मूब छोर प्रमको तो अब पाकला मही। प्रापीको पर रिपा कि- ममाम् कस्पविकल्पपु न पिमुमति रिपि । । मापस पी और सिम्स प्राव में मी मोर को भी प्रासो पस्य चिसो पुमा दम लय में मोदित सारण किया। इन दोनों में से एकमत सी दूसरी कही । ऐसा होम दोनों यत मा । बरस में FI वेप भोप यो सही है जो समपिर्थ को कुपार में प्रेषता मा! बोकोप तो पदीदी। जब किसप वारपास पे। स्थमी की पाल पारी मानी। महीने सामरिक को रोमतोमा अपरापमा इस पर किया अपयप छापही मी मा समा । बम थाप पगा विराम पिसी में FIR पो इसके माने से पर सिर चकियां मिली गी। मामय तु अधि और बस होगा तो ऐसा हार मदिर और अप किस प्राधार ये! पुमान विश्व मे सनमपिका की पति की कि महाराज! पुपा म उस में म भागे। गन्होंने उपसे मा कि जो प्रेम ७ मायब की महिना तो समम्म और खा मिसाप से मति मातो हो होसर सम्म सो अस होमगा। इसमें स्पिरा चहिये कि समिन भारास और थे। उनकीरता और सहाप प्रथमाएपपनसम्पप्रम पाबो अपने गोभी में बिना अपराप इससे मोजमस्यमी समय जो रस नौकरी की दुरंण सवर पसे। बाराणो गति वा किन विजय म सल्मा और समरिन एकर क्लाकि राधे मावर पाने के मेरों किया और मोमोसोशप [ ] रिन सक पर समरिक प्रणी में यह देना परमयभाष था। पवना मधेर पारासर में है तो ग्स एलनोलियमावे? मकी मिली रंगा हो रखनी मादी। पुमा शिरस्पा और हिरणमप्प उत्पाप । मम 1 दिसम्पापको पया मे माप । समय इस पर पति किमानी प्या. समाम उपसिराने पर सो गया। किन्तु ये बयामसम्म भारतमा रस गिरनारे यी मुसम पर सिध। पग्म हामी की पाई। पा ने दिरस्पाप से मारपणा। इस पापों साकि पश्मिी पाप या सम्पन ! होसम मोकि पौराषिक गोप भूपविष्य - या। मना सब परम शिराये परती भाप किस पर सोचा और बया किस पर पग पर दौड़ पाये ? एक्सिी मे वो म्यागने मुख में रमणी पिन पोगो किस पर महाबो पता परमाने की मामग्री पी किनु मागस्यादि पुषय बनानेचसे पापा की पाती पर बड़े रोग? परन्तु पोपवापिस पर सापदम्प! पहचान इस मा की "पप्पीम सस्याप्रकार गप्पी गावे पोरे गप्पायो" जब मिथ्याचारियों ने बा में दूसम गप्पी होग बारे गप्प मारने में स्वामी ! प्रबाहिरस्मस्लप म्मम मम यो बार पप भवमा पा। ग्सम पिता पसाये में पास्ताखा में मेजयप। उपमन्यापी प्रधा किमी पही में राम १ पिपरेयो। सब ग्स बाप मे मुमा रससे भादूमार याम मान लो भावाने मान्य। सब रसोपपये म्समे बांब पहार गिपास में मच परन्तु म्सने काम शुभा । सग्मने एक पोरेम सम्भा भागी में जाने ग्स बोडख-या तेरा इदेव राम सच हो तो तू इससे पकाये में बनेगा। प्रहार पाने को पथ-मन में यक्ष बने सपा व नही मापन ये रस सम्मे पर भी चोरियों की प्रतिवर्ष । रसको विश्वास सम्मे को बा पमा। पप गया। सममें से सिंह निता और रपये पर पेमयमा । पात् म्हारोगामेरो बाम । प्रकार से मा र मांग। उसने अपने पिया की सावि हामी मामी । मृसिंह मेम दिया बीस पुस्य सर्गति मे गये। अब चो! या मी पूर पोले म मा गपोदर है। किसी मात मुबवे परम पम पर माने तो मचाने लाभ होम महो। म्हारो रसम्म पिय पामे के खि मेडता बाप राम किया प्य! भौरबार पेसा , पासबोध मागी होता पाता । जो बस्ते दुप मम्मे से कोसी नये पी और प्रकार रस्त करने से मनवा इस बात मेबो सबी मावे रस मी सम्मेलनमा रेषचाहिये वो पानको वो व्यापभी मनपाय और भूमिमीनों म गया ! प्रथम तीसरे सम्म में एम म पाने म मनमरिकसपाला ग्सको उम्प नारायण भूप स! मात की रीति से प्रम पसरति का पिरला और शिरसाप चौथी पीकी में होचावीप पौसीमाव की मी नहीं पुमा बीस फुसे परपति को गले मरेश जितमा प्रमा! और भि हिरस्पर विरल व मममष पुगा बियपास पन्तसम्ममारो सिमममम गवासी प्रमाण की बातें समापी पाने पुणे और माम? पित् पही। और मामी- ग्पेन पायुषमम ॥ पम । 1पू भ ३। भोक. अगाम गोकुम प्रति । माल.. । भगोड.. आमचीसो मेवये से बुकेपा के समान पौरने पो बोकोरप पर बावन मेरे और पर मोर पोका में सूर्यास्त समय पर अश्य बोरे महाबत बाबरेको परिम्मा मते रेरोगे। मार्ग भूम ममगत सम्योपोर में बोरे हायपो और अपनी प्राम सोरहा ? प्रसन्मठरीर कोगा और पपुल्स्य पम्प पिचो। मधुरा और गोपीच में रसको मारन मोरगी मे मा रिचा। पेसा रोष वो मधुण और पोज दोनों एम्म इस पोपी पर भी एप गपा होता ।
एकापसमुहास और भयमेव की मारपर्यन सिसी-पसम पर भने म अपने परेमाम 'भागप' मा । मस्टे पाच अपने पुत्र पुमा पौष मैं परापर परे ।परापर र प्रान्तमय भाव कमी अमले में शिप प्रपने पुषको पुभरता है, मुममे मी! ना ऐसा ही माम माम्प तो भागण मी म्परापय मापमान सामे का वो मही पाते ! भी पापाव सही हो तो मी योग परापण मलामीमा ! ऐसा ही मावि शाम 8 पिम मुमेर र परिमाप विष्ण और मिपात राजा वचकी सीकस समन ए, यास होरि पनि प्रपिता है। इमार मिन्ध पता भ गपोषा मागपत में विधी मिसन प पायपर नहीं। और पा माल बामदवस पायी मिस मई जपचने पीवोदित पारे। देखो! उसने मेकअपने बनाये रिमादि मामक में विकिमीममानपुण्ण मैंने मनायो । म वीम परमार पाप । उनमें से एक पत्र वाग्ला। ग्स पत्र में सोमो मायब ना उस भाग्यशमन को मेक कामाचे मिले। जिसको रेखमा दो परिमाद्रि दिम्पने सचिवमा रुपमा किमतऽधुना। स्कन्धाऽपापयानो व पत्रमा समासत । मीममागपत नाम पुरासंचमपरितम् । वियुपा मोवश्वेम श्रीकणस्प यगोम्बिवम् ॥ २॥ इसी प्रमर पापा में मेरे पात् ण्य सचिव दिमादि मे आयोग परित सेमा कि मुम पपवे भीमामा पूर्व मुकाम समय यह सिपे तुम सोप स भोग्य पूर्णफा मो विसरको में भीमप्रगत को काम पप से सम । सो नाचे शिष्य मा सूचीपत्र ग्स पायरे में बाधा। उसमें में रस मापत्र में । झो-वो गये। पर maratीचे सिके भोग सवार मे बनाय - पोधन्तीति मा भीमदागर पुन । पत्र मन्ना गोलकस्प मतस्यानोचर निपु ।। प्रमावतारयोय म्यासस्य पिटिहयात् । मारपस्पाम छिः प्रवीय सम्म प । १२ सुसम द्रौएपमिमबस्ववनात्पाएषा वनम् । भीमस्य खपरप्राप्तिः इम्यस्य मारिफागमः। १३ । मत परीसितो सम्म घृतराष्ट्रस्य निगमः । रुपामयस्यागचा सत पापमहापय । १४॥ इस्यशदमि पावरप्यापापमान म्मुवा । सपरमतिसम्भार्य स्फीव राय दोनप५॥
सस्यायप्रकम्य - इति वैयको पाल्पाको प्रोका प्रोपिज्यादयः । इति प्रपमा कम्पा ।।। इम्पदि पर संधीभ सूचीपत्र इसी प्रमर बोभरेष परिस्त न बाम दिमाग मशिप्रेरिणा। विस्तार ऐना पोय मोकपमा हिमाथि प्राप में देखा। इसी प्रभर भाप पुराणों की मी बीमा समपनी परस्त गोस पीस इबीस एक दूसरे से वाम देखो। मारवयीन इसिसस महाभारत में प्रभुत्तम है। मम पुष कर्म समाप और चरित्र यस पुरस्सी के सण | मिमम मममम सभाभव भीमम्मी ने सम्म से मरबपन्त पुप मम जब मी किमहो ऐसा मही मिय और इस मागत पो भक्ति मम्माने दोप बगा। एष रही मला ब्यादि की चोरी और मय प्रसी से समागम परजिलों में रासमण श्रा भारि मिप्य पोप श्रीमपानी में पाये । इसमे पापा पुम मुम्म बाप मनका भीमबली की गुतमी मिन्ध मते है। जो मान हाय को मोहम्पनीले सय महामानों को ही मिन्ना पालन होती। शिष्य में माराम्पोविधि और विमर्म शमीमही पनि पो बिन्ध दीप किने जिमी भन्मेर में महीपते वे सब मौग पोपी की। प्र०-चारेभसामर्प यही सब स्पति बप स्पति पाने की पुरि माँ ही सब याच अब शाम पामेभ सामर्थ र तब पुराय बनाने नवमी और शो के लिये लोकिइन पामे सुनने म अधिभर यही है। परपात मिथालॉगि सामर्च पावे पाही से होता है और मेर पाने सुबमे म प्रधिकार सबको है। वे! मी भावि भिमां और कालोब में पति या ने मौके समुबि पास पर प्य और बहर मारे मन में पारियो चिहापाने और सुनने की अधिभर मनुष मात्र। पुषा मो ऐसा मिथ्य प्रबमा बोमो को पस प्रयों से विमुख या में अपने प्रपोबय मन्ते मापापी मनोनही ! रेखो! होणसा सायकस्सिने विहान मानों को प्रस विपारे। 'सागरबस "एम मान्न। म देव प्रसपाय .बधिमा रिस पतिः 1" मान। 'पक्षणस्पो x . प्रदुष। हस्पते प्रतिबदयों +॥ पारपति ।। 'यम्मन्पमः . 'राहो वारमित्य A . 4 अपह + पर पर म xम + पढ़ च २३14 से + पर च A पटु में.
एकापसमुनास शयि । "न्य बाधित भाग 0": । पौर "सातये 1. इसमेनुमतिपते। (भाये ) मा पूर्व और भूमि म म ।।। पप पम्प विपकीसप प्रति और पोपा बरमान..॥ प पिार क्या प्रासात या घर और परमेतार.. पाम् मित्र समपरम बियापक मोरे पळही गाने से प्रमगार में परे। प्र--सामसखीपी। - पोपीयोमा मह मिसा सूर्यममा की मिय वापरप्पल चौक्यप्राय कापसम्बन्ध मात्र प्रपमा पनि भस्म प्रतिपको निमित्त होते है परन्तु यो पोपीमा पसेमते "सुनो मापन यी पम्मानो ! सम्मर भर पाम्य पद सूरतिकार में है। मामयीन पा में भाग।। तुम बराणि रोय! पर हर दुराम पररेण में घुसप। परन्तु जो तुम मोर म अप पार, एस करापोमे तो मेरो । इस मे मा धीमे सुमो पोपी। उम्परा भोर भल्य सम्मानीया बस्ती। पोपत्री-राधीन जगास मन्त्राधीनाय पता। मम्मा प्राममाधीमास्तस्माद प्रामसरपतम् । रेखो कैम्प मापी-रेकामों के प्रपौन सब का मन के भापीम सब रेग्य और रे मन परे पपीम। इसलिये पावरव्य मावे हैवकिपीमिरेय मनाबर मे पुा स म मम मि कपने सामागही अधिभरी। बाद में मनायलिद होती तो सम्मो मे मासिकम सार में रहने हो। सत्पगरी-चो बोरे मा, मी प्रेममा तुमने रखामों के अपान मे। ना ही उनमे पुरम प्रममोसा तो उम्परे ऐसा पीर गायों में उप मेद मरम्प । मो तुम्रपान मन्याम्पसे दम चोमोमा समते हो तो खमनों से रोयम पम्पों और सपम पपने पर में भरमपानमसोप्पो मोमो परम गरि परिपार मेरे मार ला पिठौर सिमे तुम और मायामामधहो तिम्प पर रिथमोनियां माने बाम राम र मोर लेस हमने पूर्णनिम्ममप मम्मय सारिणयो। रिसमेत सूर्ण, मोर रसो मे दोसरायों मे मा महापे में पिस परिने की भूमि पाया। जिस पर सीमा पर उसमे पार जिस पर खिसेपर सरपतिसपर मास में मोमबमम - २४ सध्यापका पौर्यमासी की राशि मर मेग्रन में रखें। एक हात पे दूसरे को कहा मे जानो बिमार मौर सौम्पपरि पो हो? और पप तुमारे यसो और हमारी सर पर उसके पास भाग बागीय म मोप उमारे पास पाते जाते है। वो तुम में मनाकिम सम राब मनाम त्यापही बप पो ! बसों में अपने पत में योगी बने हो। पस्तिक पोवा पो थाकी पाक्षम माप और सावित पोपीषा पगपे । पर तमको मान मने मिस पर सीपी प्रमाण मोगे तो पिताtो तुम मोहीम होने से वे प्रवाह मम्मको रेले से ही तो प्य तुमने ही मनोनियम चिपा हो यो सम्पादि में अपने घर में पुरा बम मरो। सच तो पाकिसम्मावि बोराम पिसी मेला भर मुखवये की हापस। जितु बिसने तम मनोपयोगी से कम माँ की मूर्णिमा को पनि प्राथम्प मच मी तुम में ही परि दोहा।। 'ये गास्ति प्रहा"को मारते मम नाम RTI कम्मर भार पमा पंस के मामा और परियों के पास न पच्छे बसविसर भेषवप्पा मम्मरण भी पीय पदम स्मात् पूर्व समयपि मूर्तिमान पर इस पर राम पर पाते हो सर विन्य प्रा किये जाने कमी मही पोपट और बो तार पस में मारे ग्रीमिय यस्विमपि समों से प्रवेश्रिते हो पोपनी-चो ! मोतिप् श्रममा। मामय में रहने पसे पूर्व और पा व अपयोग प्रब परिभवे ।। या प्रमोवीस पोपमा पर महो। यो पम्पन्न परिब, पय प पुपी पुस्ली हाही से होते है. सत्य-चो परम्पयन्म प्रमो गतिविष पीवित मही। जो परिवरिषीप सी और प्रसिमिष्य स्पम्पनिक सवयवान को बोर हो। मधुबोम प्रवियोम प्रमनपरे परियों और कमरे गति से साक्ति होगी कि भयुग समन अमुक अमुक प्रलय में पूर्वपमम्मस रोग से- छादयस्यकामिन्सुर्षिषु भूमिमा । पमिगत गिगोमधि भी और इसी पर एसियावापि में मी मर्याद जब पूर्व ममि के मन में सम्म प्रवीण सूर्य प्राय पोर बर्ष और नपार में भूमि भोप ममप याद कलमा में भाप ममि पर मोर भूमि की बायपत्रमा पर पाती है। पूर्व ममयम होने से असो समुहमा ग्रिी को नहीं पाती मि से प्रमण्मान सूर्यबाप से रादि की भाभी पीसेपि में प्रम। मेधमान जि. प्रय ग प १३पने माँ से होते है योमहो। गुपये मोतिषी कोप भपने परम बाकी प्रतिा मी गतिषियभामा का - एकासमुशास' पुमा मम सोपविषयमपय मासीक पुसोध्योपासवादोवा जो पेसा होगा! इससिपे कर्म की पवि सबी और माँ की गति पुन एम्ब भोग में सरयदी। मयमा मैं और पक्षिी मी प्राध्या में युव ए पर इस सवाल का और माँ के साप सा नही । म चौरममतो भोचदौर और मास मोम्पमे हारा परमामा है। जो तुम मोम सम्पनो हो इसम उतर रेमो किमिस पप मनुपम सम्म दोष निसने तुम मुझुटि मागम सम्मपा समाव हो रसी एमप में भूपोच पर एमे म मन्म होता नहीं ! जोमानी तो फूल और रेमो होगी तो एसी सण भूमोध में सपणी प्रय पी नही वा इन्ध तुम म सकते हो कि पापांच इमार मर मरने कोई मान मा । मावा पसराच मी म। 10-पसी म-नि मरेप बाय की क्या गति होगी। उ0-4से रसोय मनो यमया पग चित मन्त्री सबने मपर गाय पर पताल यौर पर जारको पनाम से है। पाप पुरम के अनुसार मरक सभा में गते । सोसियेशन पुण्य भार, ए गोरामावितरण ही परमितेरे सब मनपामहो सकी। उ०पे सरबत पोपचीमागपोरे। जो अपनीष यायचे १ बम धर्मावि गरिम्पप मते वो बमोजीब पाप में तोमा सममोक मनमा पारिकियो मायधीय ग्नम म्पार और पसमार पमाती मराठो कोख क्यों नही पौर मरमे पानी कोने में बस में समय एक गुपो मीमहीना सम्ठी भर में स्वामी जोमो किसम भी पारपसरता प्रथम पवार मारदा पोपी भिम मा परगे। पास में भी पती तप एम पिरामिणी जीपों पर पुस । स पोधिने पक्प पम गया दोमो मसमारोप जीये या मारम में सभेपमयेकोरप सप भी मार भैमा सब ठोस पण यो मिपिर रम पति पर गिमय म बोपारगापुरम्य बोचने मुर्मपी प्रगत में लिपींस artmमर पर हम अप मसफ्पीकर स। भार नप माल न मोए गीगेश दो मा पमा प्रतिनिधि र उपर स में पारा सिरे पो म मापनोरोगी में भीम 1 सस्पर्वप्रकाश । पनि। तरपी पर मार माँ माती पुमा निमकी परममप! और हाल वो पी बसाय पण रिपा पन पिपुषको मे पमेयरमा एक पाय इस बात में ग्प्युट कि- एक समय। उसकेस में एक पाप पात मची और पीस लेवल पती मी । पूष मत्रपका स्वादिर हो । मी. पोपनीले मुख में मी पामा वा । रमन पुरोहित को ध्यानमा किबी बारसरण पा मरने बगेगा तब इसी एचभ संप मा एप्प | Rों में लोग में समरे पाप प्रमाण सम्प प्रवा। भीम बनो पई भौम से भूमि पर रेसिव मार प्रब बोरमसमप मा पचा। उस समय बाम और सम्बन्धी मी पति गुपये। प पोपी ने पुकारा कि समान ! मन इसके हाव से पो पान । स) सपा विनय पिए मेर मोजा पो समस: पोपनी पोताणायाम प्रकार मरताप इस समन तो समत् पप मे पात्रो यो चूप देवी हो इसी महो सन माम रच्म । ऐसी गौका पाममा चहिये। बाटली-ममे पास तो एक हो । रसोनिा स्मारे सोपी अनि सोगा इसपिपे उसपरण। गो.)समसंप पारेचो और इससों मेसरी पर गोवा। पोपग्री -मीमा तुम अपपे बाप से मी सबसे प्रषिक समाने होला अपवे अपने पायो नमी में इमाम दुध मा पो हो। तुम मचे सुपुराए ! तब तो पोपी मोर समारोपपे कि समय पहिले पोपी ने पाम त्या उस समय मी या मरिय। पपने मित्र हमे उसी पापा रान रस्सी पोपनीमे रियरियल मम मममीन बोचा। म्मम पि मर गया और पोपमी पण परिस पाप चौर दोनेकीपोई को अपने में मौ पाप पोई पर पुमा पार म पानी पक्षक साम्प रमन पमि में जाम मर्म प्राया। पा मी अपर पोपीण बाई, पात रममत्र सपिसीमा धादि में मीसमे संभ। महामनी ने मोदय और मुमो मे मो गुटमा मास में मा भान जब सानिया हो पुती तर यस जिस किसी मप माम मुंप वियर किया। चार दिन प्रत पोपगोस पांच से वो पावर पसोई मम पोपनीने की सम्माीपी। इतने ही में सनी परेग्य रेल पोपनी गोडा माइपे ! पत्रमान रिसे! जा०-तुम मा पुरोहितजी पर भाम्रो । पो.-प्रवास पर प्रा। -हो। पनीसमो पर बामो। पोपी रिपोगो और मोई सामने पर पी. ग-तुम बोको हो। पो-- सन्धित एकारसमुमास' --मो तुममे गम किसविडीयो? पो०-मारे पिता नेताबीनी मरिये। मा०-गया तो तुमने तरको नदी के किनारे पर पपयोंकी पांचई। हम तो गुमा मोने पर रो और एम प्रपपे पर पाप । पये मेरे बारे प्रया में बिसवे पोरे थपेस! पो०-पदी. को इस पर पुल के प्रभाव से पूरी एक बार मागे रखर रियोग स्य-रोहा से मिली र गौर बियर की मोर। पो -अजमाव से पौस मेणबकि गास प्रेसियोजन प्रतिऔर रविपर्ष विण में वापी दी है। स-स्नी रमापभियी परम सम्पन्न पयो असम म माधो किमो पुलको ग्य पपई, प्रमुख के पिता पार स्वार चि बिलायो। पो०-मार शाम मम पुरा मित्र पर पनी पर -इस पसपुराणप्रेम पथमा। पो-से सब माने। - पुस्तक तुम पुनातुमारे बौमि बिनापा बोकिपिलमे पिया अपने पुगेको विनहीं। बस मेरा पिया मेरे पास फिी पीपबार मेरेर ठमी में वरची पाने पिरे प्यप पचम और रन पार म्बर पुषा गार पर में पा पूरी को मैं और मेरे परम्प पिमा मंगे। बायो! एप की मरोयो पप पदाम माती प्रपने परमेश्य। पो-राम राम रेमो तुमारा प्रमाण या-उपयोगी तो टेप दिन पके रिम जिप समरे पापी मर निमारा। दप पोपी पुनरो और पती पसा से अपने पापा बब पेमे ही पानी से पुसतो पोपीय संसार में। बोगम करापाले पिरों सेरय मापपिपी मोसशीराप पारस मेसोरेगुमाइरर मन पसाद पम-मेगावो मराठी समय ममताभ माना होगी। योपणारे पम्पत् पम्प परिपे को पर मन मय हो तो अपनी सौ पचन और शमिको मोहता नहीं और माय। प्रा- मैं इस मौ मही मिमता से राव किया था पापा मिपाइसशिपे मरममपेची। 1.- उम्पो स्पा सही पण रिप्समें धर्मगोप समि पर प्रतिस्पमिम - सत्यार्थप्रकाश मारे मने प्रमाणे सो में मौ मही मिता ऐसे मिस मनरे स्पर्म में पापनीयम स्पोपो पहे. मणौ मला मम । मा-बब मा भने से पमोड और कम नहीं मरम dि बात पर इमपान कोपरण! 1-मारे गमयमा मानो प्रामापीपरन्तु जो मोतीकि- पमेन - | वायुना । सपरामम् । प्रमादि परगनों से मिली कि "म माम मरे। तो पास साब प्रान्चरित में बाबा को समस्या पप सहित फरमामा म--TAR मो मे मोहावावि पाव किसोर देना और नमान उपकरमा ऐसा सिर होता। उपासनास मा समापी लोक सुपात्रों को परोपकारी को फोपमा सोचा चादी पारा मोती माविक र मान, पारि समान र पिकि मानो प्रेमी न देगा शरिने । म.--माज और सुपाचप्रमाणवाद! उ०-कोणी मरी स्पी किसी काम मेष बोम मोह से मुफ पमानिसको परी मिथ्याच्या प्रधि, इसी मामी बोगस हो रसके पाप पाम्म मात्रा समापार मोरा से मामले होगमा सन्तोष दोभा यो बरे रमको मिला मा पर माडी मालपारि देना प्रमोसेप मे और एकमेनो ग्सम याला सर से मात्र मरा ना, मगों मे बाम माना और अपने पास परा हो तो भी मेरे पास अप मी ममीसमा घको असरा असर र स् प्रिय स रिम भाप मांगनेही मेमाच रान मिमनार रिपे पर यह मारि मापक दम सीम पुरमा पराप पासा पुरा समय होम मादी होगा सस माया मिोपचौरस मार्ग में अपने सोमवार से पयेहीको मा अपनी सेवामन प्रपरेश मग मन मोम्प पुरुषों की प्रसपी परिणी मति मिोपी जग पार मो को पुरुष माय पिला, सन्तान एया मया मित्रों में भौतिभाकि सब मसात भी मिल पारि पुरा गरेरा मप पारी पापों के जो मागी सिद्रिय पेशदि विष्य पामे सारेहमे मुणैर सपा परोपमा मिस TENNI, समरिया, पर्म की मार राति मम्मी पाप्मा मन्स निमा विणेकरित व पदो पामी झवी धीम्म एका गुप सम्ममाम मानसपने म्परको विकास स्पोरगा और सणाओं पर पापा सोपा ...
एकापसमुमास पोवा पपा समाधानको अपने प्राप्तुस्प अम्मममी पुरा प शनि पाम समझने यो प्रविरिोग दुरावामिभाव गीत जस्तो मममम अपमान और पिप समान मनमको समम्ने पो सन्तोषी गोई मीति मिठाइये स्तने ही म उस पर पर प्रापकार में मग मी मदन पपईने पर स्वप इरीगममा पांव पर बामा रस मिलारभन्न मुवी पुरुषों के साप मिपा विमों पर करया पुरपामामो मानम और पपिपी समक्षा प्रमात् माइप रसिप सम मानी सम्पनी मममी निष्कपर, ईमो मति गम्भौरागप स्वरुप कर्म में पुट और सर्वमा पराम से रहित, अपने न मम पप में परोपाप्रपे में सम्परेप पराये मुस मिये अपये प्रयों ने मी समर्पितकता दम्पति एमवारमुख मुपासमोठे पास दुभिरि भापमान में प्रा स पस और प्रौपच पप्पमा परिभरी सब पापी मात्र हो । प्र.--राम पितये प्रसार होते। T-तोम मार-मम ममम और नि। रम पम्वा उसमे प्रवीण पोर पात्र में पापम सपरिय धर्म की राशिम परस्पर मम्मी कीपिपिपेशनमारम है कि अपना पराप्य कपभर प्रसर स्थिम्मारिक मार भर मारिमेक ख ममप विरस्पर अपमानपनि कुफा पीस पात्र आप भाप मी मा पाये कि "सभा पार पसरी" स परों - पमन विण गाय, म मामाको पुस्य रम मुगोनेशिप रियमय भापम यो पर्वा वा परीक्षा पूर्वक पिार पांमाभो म सम्पर प सम और गोप परीचामबम परत गिसमें मपनी पसारो उसमे ममम और जो ममाप परीधाररिव मिस एम रिपोच पन्धमन्या. म.-परपि पारेप परमोड में। २०-पत्र. म-समयमा २०-सपी में कोईमपास जाम में अन्य मनीख । ण्य रसभेपर माया पानी के मुवीप्रम सम्पब मारि मेचम ममे मुखमरकामेही परम्पमा सामे पार पुलोत्पर मुणकाजी वयम् मुग्गवारे। मा-गोरेगा पुण्यासिपिरीममयोtal उ.-भी मिमोपी र माय मी है। कोई मनुष ममि मा संपत प्रव, पाको पुण्य मानसपुरा सकिएमा मिपमा पस पालम मरामियाममममन्दिरसमस परम सत्यार्थप्रकारा चो! सिराय में प्रचोरणी सोमन प्रसिम्पुरम में पिजन्म में मोमाजमार पर, पापति , म प, मेनुका एमपी पमहापणीसिरपणात कोका मा मान्स, रिलपात्रों को एण्मी, दुर्म की बौमी सुत्रों की मामी मुक्ति में प्रमी पाकिस्मी ही माग की परमी, गणेशों, मी की पांच पन्निीमार की रिपोथ, प्राणोपी की प्रतिपदाका पिता की समय। पुरापति से दिन उपस प्रमे।और पी लियो मयुप्प बम और विमियों में पान व गापामामी होगा। भय पोप और पोपनीमा पहिले किसी बमोतिन में मोबम - बलियो भोजन पास मिया हो मामी से। व "मिर्षपमित्र धर्ममिन्दु' "त" भरि सोनी कसने है । गनी में एक की ऐसी दुर्दशा की कि एमपी को एण्मीमियईबारी में एमासी सर्वान् मा गोलि पोपोut किचे मरने में मीन सिम होते है। जिसके पश्मणी परम पपमा स्थापन हो औपामाभी मत- एकापामये पापानि सन्ति । शिखरे पाप है। सब एमवीर भर में है। इस पोपड़ी में जा भी ना पाप मानेमपिणा मादिगो सब पर पास एकममता में वापसे तो पासोरिम रिमीनपणीचे। ऐसा हो नही होता किन्तु इस्य पूषा परि दुख दुःख पापसमा है। इसमे भूरे मामा पापी । इसम मममम माया सीमा गुत मो सोहै। उसमें सम- प्रमाहोल में एक या मी। रपमपराप दिया । उस सपा प पिणी पर मिम उसने पति को लिमे पुमा म प पासपी। पमा कमी पमठीत तुमे रुम मा दुर्म में मामयी। पदिमान सहित रिसीमन मणि पी। पाराम समे माती व रमने सब त म सुनाया मा यो में पुम पथरीमा अपमतोधि भी कर्मको समीप मम में चोर भाग। कोई भारी ममे मा को मिमित एकदिन मिमीण मी पुनमगी।मेष से पी दिन रात मुसीको बालोव मे रप दिख एभरणी थी। उसनेमा कि मैंने पमरण धामम वो पोको मामात् उस दिन भूपीए गर्व पी। ऐसे समिपीषों से भा। पहोरमको पयसामोरेशात रससे पापा एप पिमान। रमने पुत्र रेखो! ग्धी समन किमान फरोग मचा पायो पिये पभोस प्रमोसनम तो उसके समय पारम्प 11!परम पम्पोगो यो पापाव सची सेतो हम एक समबीड़ी पाक सर्म में भी होता येणग।
एकापसमुशास' ૨૨ पर एकानी पडे अफ्न्त पाखो। यो एक पारीका सय बालप तो पुमा बाबो मोषी पासपो मेरो और हम मी पाणी मिा भये पौर बो पेसा रोमतो तुम प्रोमों मेइस भो मरमेडल प्रापल्स से पाये। सोबास पवासियो प्रनाम स्म। किसी 'पमा" किसी समया" किसी 'पुमा" किसीम मिया। बात से रवि पाक्ये कामी और पान्छे सिंगो बोप एकाणी कमरे सेहो को और मर मी गो परत पर मामा और पुत्र प्रासमा और म्मेए महीयेयापर मकिसिममप एकपड़ी मार पाये तो मम ममोपाईम्स अपनों को महा पुरसमस होता है। किोप कर पाने में सब विषम सिपी की एमागी रिलसीपुरंग होती है। इस निरंगी प्रसाई बिखते समय मी मन में पाराई,पही वो बिचमाम मक्या पाप महीने में पाकी एमासीक मम्म मिस ना तो मौसमका होता परम्प इस पोप को पा से क्याम! कोई बीमेमो पोफ्नी पर पना मो" माय मर्मती सोक्पिरित्यागी पोप बातों को वो कमी उपपस नपा परिपे परन्तु किसी अन्न मी हो तो जिस दिन भगीर्व रो पुषा परमे सरिन राना (ग) पपीमरामा पाहिले । बो पूल में ही पौर मिया मूब मोक्न मदोबो रोगसम्पर में मोते कुल पारे ।म प्रमाविपो भने विग्ने प्रमाबमे मीम अब गुरु शिप्प मनोपरेत और मतमाम चरिकोसमाम म है। मूरिक सम्मापी योग समरि मनन्त है। परम की पर सामनेर। मौन अपर्वम कीwat। इन में गेपासी ग्राम मिस्तो? बोप रोई। गनी में मरिना पर वीपीममावतो तो प्रथयों में मार पायबर रेवान परपसभनुमान रोया है तब पुरायों को रेषभ मणिम २०-से म पिस की होती पो सम्म भी मि पी। सोणा होरी गोरी पान न मैं बिोध ही हो सकता । सो चितवी समिती सब इम में पाचवारि मसि पिनारी मम्माबी मिस हो खस पथों में मोदी पा र सर पूर्व मिते बपिम प्रथा मोही हो पाती और बो सिम ममे सीमा सिरीमपा। अब पर वो पुण्य की प्रथम किनु सम्मावाडोमो रे पासर पिसम्म प्रमा। दो को तुम पामेभान मानते हो तो "मापन पनि मुनियों के नाम से प्रसिर मोरया मानते हैं। सही मौत पारेख पोपण गौरमा मावि परिचम वीर मुक्तिी मेरो मापन 3 उपाय र रपवर मारिया परिपत्र सध्या प्रतिमे इन प्रत्याशा मायाजोगों से मिली रसम सत्यार्थप्रकाश ममाय और मकासमप्रमावी रो सम्बो तुम अप ग्रामों में मूर्ति भारि मादकीमाना मागे वो अपने पेसा परम कि शासामो में क्योभम मारमा परी अर्थात् अम्मय और याम पाम प्रावरि और अपपादिम माम जपमानावि प्रणालीमागमय भाग बम मिमा मापबादि धर्म सममापयादि अमर्म धादि पिसागा तो तुम रसमे पी रज पोगे जो कि हमने रिय प्रोत् स और प्रसिर गायत्री में पैसा पनि कम नाम प्रापबादि भोर यादम बाम पदावि विचको प्रप शमी में भी मानमा चाहिने पी तो रोममम्ममस्या प्रावि सर मपयो बगे। मया मिमि न्यास मोर पसम्बधि समच पन्त वो सब पाप विद्यमान बीचमी पदि नहीं थी तो तुम म्मी निपप महीमसको और बोसो किसी भी तो मि यथाभी के होने का प्राय: को चैमिमि मीमांसा में सब कभर पतम्पति मुमि मे पोपण्या में सब उपसभामा और पासमुनि ने शारीरिक सूत्रों में पब हमारा मानुस विधी रकम पाषावारिधि पस पावि तीची मनाम निशान मीही विच । सि मासे।बोकही यों में होता तो रिलि कमी नहीं होगये इसरिने एस णमों में भी इन मूर्णिादि प्रमादमी था। सब पण मी? क्योकि इसमें इमरान हो की मौत पर माल्य और संसारी मौके इतिरासारि सिहै, इसधिपे और में कमी नही हो सकते। यो में सोमवा मनुप्पो को विप्र परेप किया। किसी मणमनाम मात्र मी पड़ी। इसपिपे मूर्णिमासम्म । सो मूर्णिम से मौसमम भीम बाराक्य और शिकारि की गही फिदा और पास होता है। सबोई पानो मारामपिराम और समीप सपा स्मिदी पमी और पाती मावि महाराधिना की परन्तबा मम मूर्तिका मम्बिर भारि में रख पुरी भोग गोलाम से मीच मागते १ मांद पो भिती मना कि मामो माय ! मासयो ! पेर पाहम्मो ! दर्शन किये नियामत बीमा में पायो मामाल ! सीवरम परिमयी वाम मामा और परेप पार्वतीयो को दान दिन से पाबमोय करायमोम प्रात् बषपान पसलमान पोपी मित। भाव को पस ममी नहीं है साता भारि मे पपुषी पारि पानी पसेनानी न पीरिये मा मावि मेवो तो रमाकारि को मील अपरें। - परम मन्दिर ने ममि परे। स्मर है और चोर को सपा से रम से पोका मरो () प्रय। देखिये। एक विरों म न किया कि इन गांव भी विनय मा परे । मब हम दो कीरा पके, इसचिपे में बपी। रामसीता और एसमा मौरण्मासम्म पाप परोस भौर मान्न प्रावि म पेत मन में है। मन्दिर में पीसम्मारिऔर पुतीमान्ती समयमदीस तपमा सम्मा एकादरासमुहम्स २६३ सेमा मामी में मी ठाणा सा मौतर काम चौपाप मुना एक में पक्ष विशाल सोते है। बहुत से पुजारी अपने समापन को सम्मो में मनपस्मा से कमरे दिमाप पडे में परम मेसेस कि बामरी भपये पन्चे को गले में स्मती से पुरारियोपो में मी ।। पस कोई मक्षिको टोखाम माती पान पर है कि सीतामयी पापगी और शिपाती को दुरों पे तो यहा ! अब मो मूचि मेगन मयो किये सिम्पो ने सामामर की बनाई स्थपनम पापी चाहिये। मसापच को पीके बिना मग यही बगता । भात पी तो बोड़ा सा प्रमय मेबारेण । इमादि पाते इन पर मार और समरस बरामीमा पन्त में सीवरम्म पपास मौसमम है। यह मेवा या होता है यहाँ होने पर मुहर पर नया बना मा म पर मौत मंगते है । इम्परिणों को प्रपोग पिचर पनि किसिमे यो गोकरी. मचमो वो सीवरम्मति ऐन वणि और मिकरा मनापास पौर मिनरावी तो यससपी अपये मानवीप पुस्पो की निम्मा होती है। भगा जिस समय पौता सम्मको समी और पार्वती से भरा पाक किसी मास में नीम पुजारी भो कि मानो इनकम परमो रस मेर एम परो तो सीपमम्मावि इन मूतने ममे से ऐसा म कमी करते ममो से होको पमा सम्म म प्रहार गमो मिदिमे कमी भोपवे! पलों से सब पापा तो इनके मौके पुनरियों की पावती भूर्षिणिोपिो में प्रसादी विषादी और प्रब मी मिती चा जप वक इस कर्म प्रेम दोगे तब तक मिडेगी। इसमें स्प रिमो भाम्पा की प्रतिदिन महा रामि पापपारि भूमि म परम्पपली कर्मा से रोगोंकि पास भ प्राप? इनही पापापानि रसिया विधासस नवसी सविहई । जो मबोगे तो महिरिन अधिक रोटी गापगी। इनमें पेपममार्गी बरे मारी अपराधी सामतेब सापारप - तुर्गापै नम । म मेरयाय नमः । दीको पामुगापे पिग्थे । इन्पति मन्यो म सग का ते? पर पाले में पिपरे मारी मम्प्रोपगमय- ही भी फ्री। ग्राम में म सम्पति पर धमाओमपूषभिमाएपरिमारिणति मन्या- हो दी। बगलामुन्य फट् साहाण की प्र। मी - ह.पद् साहा समरस सम्प्रबार ममा.. और माय मदर ग्यम पिप गाभण पारि प्रसग मासा मन्य तापभी महोगा कि किन यसब कुपव। पर रिपी प्रेमाये मोगमती बया म्पनेप्से ससमा पमिदीप सत्यार्थप्रकार प शतमा सिमे मारमा परे समय मे है। उसमें पानी बामि, मेरे प्रदेश म।। प्राय हाम, पग में बोले मेरे । सो कार मेष दुर्गा भूमिप में गिरेग्मोसपा पाते हैं। एक बड़ी क्या म मांस विभहोम भने भग? चौर ग्पर त भनि रसको नि परि में मरने भरपार है। जो अपने पुरभावबीच में सो मारमा तो वे परे सिरियो बताया है। भैरयो मूवनाप' इम्पादिमा पारमते. मारय २, रबाठय २, विपय २ चिन्धि २ मिन्धि २, पधीन बापप २ मसप २ त्रोटय २, मारुप २, मम अजून पणीपुर, फट लामरस ATM रमन परब में -- प्रमादि मात्र मप मास्मरि पोते पीते मूवी पोच में सिता रेखा से कमी पो गरिवि किसी मामी को फान मारमा ज्य असम मांसामी।बोभी में बने मय मांसद पौने सो रसको मार होमम। में सेबो भमोरा वारेमा मगुणामी मासा प्रमोसीमा निमममी पारे। एक रोपी मा और दूसरे पाबमापी मी होने है। चोषी मापने एक गुप्त समयममि में एक समाते। यो स्वकी थिो पुस्प बाम पाकी बहिन माय पुनम पारि सब इमो सपोप मिपमिताभ मांस ने मब पीते एक पोको पो र रसके गुप्त इन्द्रिीय सच पुल रहे है और उस नाम दुदिली पाते हैं। एक पुसको हामम्मो गुम इन्द्रिय कीमा सचिोरी मच पीसम्मत्त होते * सब सिखों तीस बिपने गोहीम पकवली मही गौर में समिशन एक पुल समें हल सविसाल में विषमता दिन पाच पुलोंगो रस समय विषम ग्पको जोहो पाती है। प्रापम में समये और बगुवमय नोको प्रावि से मिलता मममी अपये. सोपोर माता र शिव और पुल होता है और मोजमा बी पुस्य समागम पर पाबा सर मिवाम पा पामर सेमों में मुधि प्रान मानते। विधरि मना दिले।। प्र--04 मतमोतो पणे। र-पचे मासेहोवे । 'म प्रेम मा पप सममानी मनोपदेशपति से रन पर दहे? पी 'भो मम शिपाय" इम्पी पधारादि मन्मों पर प्रवे साए मम बसवते महीने और पारावारिधि मसान है। बीरचौर बामेसम्म समावपापा मुख से गम है। उसम्म प्रापमा तातोपसमे मोड पोस मरेच माहोल है। लोबिन मध्मामुर बमे मे मा मागे पेपर मेकी एकापसमुहास पारिप बी बी पौर पर माने से पार्वती पम्स और मोच प्रसन पोधि पाती पिता रम्पति मनिस भागी में यह साके पद पर पकनेशिएपरिण बा। रपी मनुकरपोमेशरम पाच पण मानते है। शिवरात्रि प्रदोष मरते दमावि से मुधि मान्ने सरिने से ममा प्रान्त बमो। इन में क्रोिप माये, माम गिरी पुरी भारत पर्वत और सम्मा वा मममी कहते है। कई पदों पोलों पर मते मर्गत पम और बोगों मतों को मानते खिने प्य भी यते । - मम्त शाका पहिरवा समामध्ये पवा । मानापमय' पौधा विपरम्ति महीतले बानमोल। मौतर शाल मात काममा थार र प्रात् साल मम भारत और म्मा में मवे। किम मेयर [भा ] बिन्द उपासक, पेस मान्य प्रकार के स पारपरोपममार्मी योग थियो मबिमले प्र०-या दो परे। To पर प्रो। देखो स्पों की पांपा अपने को पिपास मानते।। पनी से मायबोकि स्ति। अपने सपरि माबोसमी मही है। प्र –ो सब सही ! सखो! खर में माराम रबारमिन सय विजक और पौर में पौवामी होती है इसपिप हम परिप्या कमाते है । एक प्रपरणको सर किसी ने नहीं मामठे । माय शिपएन भी नहीं पते पौकि हमने पहर में भी विरासमानरम पश्चिमोतीरामासमन्तारादि स्वोधों पार करते है। समयको मापूर्वक प्रय मते है। मांस बहीन मप पाते है, पिन अपेपौ मही। रस निको हरिपति इस पोलीस को भी मानना , चौकिया तो तुम सम को परोपी और बर मलि। जैसा हापी अपचर शिििमत है। तुम जबर में वि परमचिमा से प्राणों में समाविन्तु पग भपिबार में प्रामा बिवली-और भी बह पतय। पेप्पर-म ।। वि --यो पापा से भी यहाँ। हम पम मिमी बनाई प्रचिन्न वर्ग! गो विमा यी जोपा भी ना कि इसको तो मनिम अपने समस्या से भि भी यही हो पाती। यो तुमारे चार में भी हो तो कितने ही प्यों मपुरा मत मर्मात् योमा रहित मोदीखता सिमर में भी भौर पर १ मौत माने और समर मरते मी महोपपत पौदी और मिकिपास में भी और महाशिमम ।
२६३ सस्यायमकम्य । हम पर परिसरमाममममहथापबोरी या मारमा म पम पम प्यारे पास पर प्रसप होता। एक समय रसको सौ में पाक नहीं मिधा किनिसको रे । पाम रोम पिरता 4 | साबण समम्म किम्मा मत दुख पायौ। सेम्बी का सस्म पर ही थी पाएपथ पहिन रप में बैठ के सामने पाये। अब तो परिणाम के पास पया। सेठ से का सबब गौम दोन्ही वो मर गाण। ग्वारते २ मामी सखाये मेरेर बगी। परिसर महापय मैगुची भोगी। महापय यो प्रसहोमग शरीर बना दर्शन रियामा कि मेरा पर प्रिय पक है क्योंकि सब पब मार सूट बोरीप्रपों की पेप मा इसलिपे का पम्म। शिरसने हम प्यों के पास सब गाने पर रि। एक समय परिपको साभर मीन भाव में मिणता में स्पा को से मात्र में सुपारी मरी । परिभा में एक सुपारी तोय भाषामा कर बनिमे से मापा मेरी भापी सुपी बाब में परो और जियो किवा में भापी सुपारी परिपत्रकारिखमा म र सुपारी मेम परिभानेमानी हम अपी नहीं। जो पर। म को तो पापी ची। मिया मे, पो विमा मोषा मामा मानिस पिला। अपने देश में बन्दर पर बहार भाला और सुपी मरने की बारी सम परिकामे मामारी भापी सुपी यो। पम्पिो पो पापी सुपारी देने का। तब परिभाव पारने गम मेरी बहार में भाभी सुपारी भाषा पोट । राजपुपोक गदा फ्या। परिमन ने बमिपे मत शिवमाया कि पापी मुपारी ली रिती । पबियो बहुतसा पब हा परन्नु रसन र भाग पापी मुपारी का प्यारे व कापी। वहाप्यवसा उप। भक्त रस माबोर परिश्मा की मूर्ति मदिरों में रप है। या भवमान में मिली। पुरिमार देब शिप्पथगमरे मेन और मानव तोपी चोरमबासी नहीं। रपि ममतादरी में कई मोगा मया मी Fark पापि रप मत में पप सोच पप्पा ही हो सकता । पब सा प्पियों में समितिमा कमी भाप मो. रामप्रपम्पो पग में पोपीमम पौष मास श्रीमान् दोनों पक्षसी सोच में प्रा लिनु, माथासपी न पी गौर रंगी भय गुस्सा चौर गम्ममारने रोनारमा जापौच में पसार माप भइमानि इमाम काम पिपण । मानदो बारापप में पाया पप्मीभ मिस चौर गोसाई भीष्मी-पप में पानी विरासमानी का भामाठ मसिसी। मौसम प प मोरे सोता था। सोन्म ही मरगया। मरममा जिमममम पर मिनभर गई थी। पामर रसभे पर प्रा। इसने म रितु पूरा भी पहुंच पर। रोमो पिसामवकिपर इम्म स्मी की भयाम पमपोर में २१0 पकारासमुभास' मेगाममे। सिखों पेमा कि हमारे स्वामी की अम्मारास में से आने की। देवो इसके बार में प्रामविक तुम ऐसे मे पाये। बतो पम खपुर रोम परे गपे । बिगुल मुपस उसको इस में मेगये। मारापम ने रसको एप में स्था। देतो गर प्रमात् विपक का अनेस पेमा माल्यो जो अपनी प्रीति और हाप से विचारते १२ बरकमएस में पत्र को इसमें स्पा !! म मक परपरे तिमन रुम में दो सब मुल उपर पररथ भामा मुपभने शरीर पर पेपनपने सभी पापे सिपार जात ? नहींइसस से बातें सब म पर इनमें बहुत से राती मकोकी परमी मगा पूती त जय पास सिरसर मेते। गुसमान मापापस्थित हाते गांजा मांग परसरम पपाते बार मंत्र स् स २ प्रम पिसान कोही पैस मापते परस्मा को पारे पना देते हैं। परमो मरा मोम उनमें दो।कोई विप पावाहोता रसपाने गीत किनुमकि- पठिसम्म सवपि मचय दम्वष्टाफटति फित्तम्यम् । सन्तो भविष्य पामे सत्य सम सकिरिष्य पाये पसे मी मरम्मत घिन्टयर स्पोमा सामों को पार पाम निभाना सम्तो अपनी रामग्राममाम का। जो किसी ने पूर्व प्रक्ति की मूर्षि म रखी होतो नीसा भरमम मरें। उनके पास मोमोजावा ग्न पण पीपरचा प्रवासी पर मोसमाम पो परो। बताती पण मूराम गोपरिपे चौर जमात पय मुतासाई और परी कम पी पीपर भरि पा. एक सातामा म जी परणय नमः" पोसता . मेपर परमाने गय । यो परिष्ठ सा रस पीपम्मानम बोसव एम मोखा भरे ! अगर पोखम भी मरणप मा एस्बामा। रसमे पर पोय मा पुसी पारमाकि यम्मर मर गोपने को ममुर पी पस्य सुगम प रपयोगी सर पर गप चौर पिटव सभाम परमा। गुरुको पसीन्य ut! रख समाप्रपार अब हम दोन प्रम बाम। "पायरेस्पाम प्रापनमारम" भौगोलापबम". परिश्त-मुमोस्पोरिवचन मान प्रति मिा रोमहीमी पाची-1 परधिारमचे गड भार पापा में बोर इम सब गायि मनोमासस्य सम 4-'जो मुमने रिहातो हा परमयों दोपता भरपमधे शाम दोन।
२५ सत्यार्यप्रकाश ० पोवामा गुरु ममता परेश हम यही पुग्वे । पं० सुनो भो मे ! इरि ही नहीं है। परेश पुनमे समम । सिपे विषचाहिये। नायोमर पापो सतोमेरमानेटोगोविपक्षमा महापः । पं०-दो म सन्तों में सेवारते है पर तमाम से पसी की मामले पोवि व समन पिर, धार्मिक पोपरी पुसौ कोम। सा-रेखहम रम्त रिम बंगे रहते मी वापसे गाया मसभा म भण्ठे तीन पोय भाम पाने पाच मोप पत्र की पची को मात्रामा बने मंत्रिमा और अफ्रीम भीम मिया में परावरिन भाम रस्से दुनिया मे मो समझते मीच मनाम सिम मा बने पवमा ऐसी बसी रम्ती को पास में सोये रसको मी नींव कमी भाचे पारि सिमियो और सापक हम में। नित स्मी विमा यो मार मारेबो हम को रिसभंग हम तुमको भाम म गये। 4- सबका प्रसाधु सूर्य और पर्मत सामोरेबही। मुमो “सानोति पराणि धर्मवापिस सापु"बो पर्मत चमकाम से परा परोपकार में प्राच हो । दुर्गच निमम प हो चिर प्रमोपदेव से सबका उपयरमे रसको साइते। पा-सात सायब! सन्तोमा सिसी सन्त मे भरमा मही नही तो देव एकवीमय रसम मागा माम माया 40-प्रभा पाती पानी पये प्रासप पर हम से शुत गुल्म मत हो। धान हो रमन सा है। किसी में मरोगे तो पो आभोगे भोगोमे बेव योगे परेमको भी मार सेम भिस्य भोपे ! पर साधुम पानी। पा-बसे । किस रायमुख रिचय 40-तुमने मी किसी मामा मममही तिनही का पेसे प्रा मूवते. मा-म पापी महमा दमको किसी प्रसो की गई मही। प-विमो मानना हो सकी नाही मी दुदि और अमिमाण सम्पासा गमासमा मोर पपितरको परे । पर मामा यो रोग बरसी पुर्ण समम गवसे पासी "मरपेठ "प सांग प्रोमो रस पानी में पना-अमरसिपा! पता पड़ा। यमहाम-मया मेरे पानुसासराम प.. परे गोलिमिपेतूप पा! गोपिम्मासिपा- 'मयमा मममुकायोगी प्रस एकापसमुमास २९६ तब रामदास बाबा कि महरा 'भापत्य परे। बाल-बम गीता पो।। गम-पिसके पास! ग्राम पाम! हम किसी का गुरुमहीना रम पम परम्मा" में पराय। दमको असर नहा मान । सबम्मिी मम्मी पाती पर परिष्ठ में दबा था गोवा के गले में पता कि स सोपण मम्मर म स माम! एस पाना २ प्रमरा भन्माप गौता गा मारी र एकभी नही किया। मया पेस विध शवों प्रविष्णभरायर बहता पाप पाग बिना नया प्रमार बसमा भन्न सामा भौम पीरमा परिणत आज माया ली तिा रतली गाना बोना सब रिपत्रों में म्पप पमत सिमे मममी पप्पा मम नही पा । पकोई पत्म को भी पिया अप परन्नुम पाखियों सामानों की बाधमाना अम्बि कि शुनपर्व मध मिसाल पम प्राषि मपनी मणी बार भार पण रमा * मम्मी पापा भी दात। रमको विषय ससंप मावि का महसम्म नही जान पर सम्मा। इसमें समाधान मन्त्र मम शिपाय" । रिम्पोम नृसिहाय नमः । धारामयम्प्राप मम" प्रपत्र सातारामाम्पा नमः । पापसी भी गधारमाभ्यां नम ममो भगयठ पासुरवाय" पौर सिरों का 'गाशिम्पाप ममः" । म मनोस मन में पाने मात्र म रिम्प और एमी-शिम किस मम्प पारे-- मा पषिप्सर सयम पपिनर भार पयितर कुमा। शिष सम पायती नंगा पवितर दुभा पा एमबीबो ना मापसपिाराम पय सातपम मनकी मीनो ममी.. मीरज निरास पान (गो.) ज्या प्रत। एक महीम परोपमोती।गामीमी पीममापारिसमा ए प म पायम में रहा। बम हलमा पुरिमामा! प्रत प्रपमा माम पो पूजा में नाम तो भासन मनमोहमसागसी मदमस भी पिक सरोहोर। राजयाब, राप मापन निम प्रमेमरसोबावार नामा सम्मिम्मत मौन मामnt. 1.-परम्पी मोपा' 1 -महो • पी पी गिरा समरस भर पार पप, पस में मी पापा। 10 मिनु म सम्म पा रो मन मसरोमिर, मकिमि २६८ सस्यायप्रकाश बा०-प्रवेतूमारा गुरु बनता है। रा प हम ही सुनो। पं-पुलो मां से ! दुरि होगी। उपरेत पुनरे समाये शिविण चाहिये। बा-बो सपछाम पो सन्तको म मानेवोयमोकिमामी महींपा। 40- हम मन्तों की सयम है परन्तु उम्मे मेदुधी की मी पर पनि सन्त सम्म पिन, शर्मिक परोपमरी पुरुषों मेमवे। सा०-देव हम रात दिन बंगे रस्ते पुषी बने पाच मस सैमों बम से तीन बोय मग पाये गा माम पत्य की पत्नी की मात्रा क्य वे एरिया और अप्रीम मीच क्षिामा पठा में गत दिन म से एमिषाप्रेम महों मम्शे मीच मंगम मिल पा र यस भर पेसी बांसी मती यो पास में सोने सपने मी बार मी न पाये इल्पवि सिरिना और सापम पम में है। पि स्मामी बिन्दा लामा परेबो हममे पिकअप हम तुमको ममम मममे। 4- सर पाय प्रसाधु म और गीतों साधुधीरे यहाँ। सुपो "सानोति पराणि धर्माणि स सापु" को धर्म ग्चम भाम को पर परोपकास में मान हो । दुर्गव जिप्तमेन पिान् समोपदेव मे सबमसम्मको उसको सानुमते -पसवेत सामय बने ! सन्तोम पर पाकिसी प्रन्ट से भरा नहीं बही तो देत एकवीमय रसम मारा कपास अपडेगा। पं०-प्रथा वासी बामो अपरे भासन पर हम स गुत गुओ मनरो। आते हो राम्म साना किसी को ममग दो पको सभोग मोगामे देव मोगे प्रोमो मो मार न मिक्स मोगे। पर साधु कम बाल-बापरे! मिल पास मुखरिखवाया। 40-तुमने कमी किसी महमा मग यही किसी भी दो से या मूग गये। बाम पापी मामा को किसी पसरे में गई पही। 4.--विवो माम्बा दोरमकी ममौ सौ युरिक अमिमाम सापीर पासम पर और पपिस्तरको परे । पर माया भी ग स रठ कवी पप समम गुरुम प्यती "मत " माहप प्रोसे। रम पापी मा-परेरामरसिका। यमाम-मापन 1 मे रेनुसासरनाम पर। भो मोतियासि CI गापिम्दासिया- राममा पभमुख योगी पाम ।
एकादशसमुनास २०१ 5 क्यों चित्र और इसम्म प्रान्त मन भाषा संस्को खाप पकि में समर में मी प प्रभार परम्नु क्षिा पर संसद म मा सम्मान उन प्रमानों का सामन किसिमोन समतभी मुन्न मी मदी था सस्तो काम संमतमी पपित कम गप होगा। भय पहचान भपन मानप्रति पौर अपनी पति की पाकाि कमी न म मम अपनी प्रमिन की दा मबार पो नहाना सी मापा सनतम मत र गौर या मा म कि मैं सस्ती पस। बसपभिमान या मासिधा लिप कुप रंभ मी किया जाय ! मारिष रमा मय में यहाँ तहसों की निता भी सुति मी सकिओसा ममता उमस मी परमपर्ध पमना सम प्रता भर प्रतिभा होती इमौखिर पहिलो पन शिप्मा • मामय भीती रिजापत बार मीर-बिर मा मोमा संकजाजी प्रप्पा ममल सा पास मप मालिकास- या पदत प्रपया मर मारों पर पानि । सम्म[मा] महिमा मनान । मुनमपी पोयो । मानप माझावाती भाप परमभ्यर । मु पो । पण बापान पर मर गये और मावस्ती मारिपनपमा ममता नयमही माम! वरना म रिसभी समस्या पागा परी पड़ी समसमीप रमकी सराभानी है। माम माम सम्म ? रिया पहा महिमा कमी बड़ी सम्व। मामला माम मत ना समय मापदाप परन्त ब गुरु मन सम्म पनि रियता पर दो महीमाप्रपाम गिप्प म बसन्त पसक जिम ममम नामजी पंग में हुए उस समय पंगब मस्त रिस मारिन मुसपमामी म पारित । रम समय मॉन म पामा भगच्य। माममा मामानभ सम्मल पा रन समिप्य ५ वकिपिाना परचममा पीप रमन सिर या पतw मम मममम ममान मानt. हो'भारापमा पर एम भी वही पारमा पो मामा" और अम्मयामीतिर म - मिया मम्मो प्रयास मित्र की माग की सबम दमन म्-णि पतीपि गुन म पारे पापी मार दी माती प० प्रदिरों मोदए और प्रमूभा सोमपमाण मu froभा बारेमा माया मम माधोपमम्मीभी. माग मा पाप मा. मम्मी भी माम परिम मितानिनोपदम मनम गुण गमभागी एमपीप रम पम्मी पचमोमि मोyि inexam at Tम म मराइम fre पो। नीलो पीपी भाभावों २०० सस्याथमकामा 7०- पर पुरस मी मी मात्र सम्वा ग्सका मीर समस। सपा रास्ता सा कार होने दिखाया है। इन मन्त्र सस्पनाम कपीर' भरि - पापम्पादि को पोल पमा गही सकिने प्रयास म्पोति प्रपात रीप भारि म पूषना पापाम्पमूर्ति सम्पूम यहीं। बाकीर समय मुलुप कम पकविमा पीयो सों स उत्पा गुमा ! और अन्त में होगा। पहा को यह बात सुपी अती पी सी होगी किक गुणा मती में रखता था। उसके पहले अक्षक महीं थे। एक समय मोदी मी राशि भी। एक गली में बसा माता मा तो देख्य सड़क किनार में एक होमी में प्रमों बीच में उसी गम्तमपम्मा चामपा। प गएको म्म भेगमा अपपी पी को दिपा उसने पार किया। सबसवमा एमा तब उगाहेक काम पता पा किसी पपिस्त के पास संस्कन परमे चिपे या उससे उस अपमान किया। मा कि-म समई को नहीं पाते। इसी प्रकार परिमों के पास मिा परन्तु किसी ने न पापा । तब मपयंग मापा समय जब दिनाच मोगों को समाने माण। तर म गमता पा मबन माता मा। पिरोप परिम्त राखों की बिमा किमता था। उप मूर्स जोग उस पाब म *स गये । पर मर गया तब पोगों ने रस मिरमा धिप। यो २ समये बाते बी बनाना चा रस रसभ पाते हे। भगको मूग यो राम मुगा पाता समको प्रमात पाम सिसम्म पराया। मन की पति को मुरति माते । उसको रस गम मुबने में बाएमा सो को सन्त और परमेन बाल बा। वहाँ प्रावही पठा। बी के समान दिया और मावि बाकी ठी पाये। ममा विमोचो कि इसमें प्रामा की गति और सम्म काम समता परबास समाव बीमा प्र--पंगच रेत में बामनी ने एक मार्ग पाया पौकिप मूर्ति समपन्न करते मुसबमान होने से बचाने में साधु मी नहीं हुम किन्तु सस्प बये थे। रेखो मनोने पर मन म्पपेश किया। इसी से विदित सम्म किन भाराव प्रच्चा पा : भो सस्पमाम का पुरुप निर्मा मिऔर भकासमूच भयोनि सहम गुरुप्रसाद गप भादि सब झुगावि सभी मी सब नानक होसी भी सब । अपनी पती॥ (भोरम) निसन सम मामय पुरस मा और परहित भावमूर्ति जो पब में और मोमि में नही माता समान सीमअप गुरुकीमा पर पपामारमा मादि में सब स्मों की प्रापि मैं सब समान में मच और हामी । --मानसीम नाराब तो पापा पान्तु विचम मी महावी। हो माग रस स की जो कि मोम्ति बाम । नादि समीर संताप मोदी शनापो नाम हो तो विर्भव शमको निर्मो एकावासमुमास' ३०३ मारे लिए । - 1०-प्रथा तो वदमी यो पमा नाम तो पगो नहीं तो सदा माता पाठे रहोग। इनो मत में पानी प्रबम्म गुजरात में हुआ था। पुपा उपपुर के पास "भामा में रहत तमी म काम करत । ईभा की परिकी विचित बोला कि पम्पूजी मी पुजाण गये। अब मावि शायों की बातें कोपन 'सूराम "मो मुछि मात्र थी। अब सस्मोपदेशक भी हो तर एम २ ही मोसा मते । "रामत्तेही मत समय स बसा। राहोंने सब कि पर्म को बोद- "राम " पुष्ममा प्रपा मावा । गली में शान मान मुलि मानते है। परन्तु जब मूड बम्ती है तब राम नाम" परोरी शामही मिळवा पोंकि खानपान मावि तो पापों में मित। मी मूर्णिमाको पिरते। परम्नु पाप हा मूलि बन सके। खिोंसा में पुत र पाकि रामजी को "रामी ाि सामान्य हो मही मिष सकता । अब थोड़ा सा बिच रामस्नही मत विषय में रिखते- एक रामभव नामक साधु यी निमा मत मुलर शहपुरा त्याब मेपास है। राम " प्रनेहीको परम मन और इसी का मिरान्त मन्त। रन एक प्रश्न कि मिसम सन्तमासगी भादि की पपी १ पसा विजे- उनका वपन-भरम रोग ती मिपा रख्या मिरखान या। उपजम का कागस फख्या कन्या कमतप मा। पानी। अब पुतिमा बोग विश कि राम मन सामगो कि जम्म पिमराज का पपास प्रपा किसे दुप कर्म कमी र सकती मा। रमा ममुखों को पापों में प्रसन्न और मनुप्पसम्म को गाकर पा ।। अब इसमजा मुगुमा रामभव रमपमा- मामा मात्र प्रताप की सुनो सरपस पित बार। रामपग्ण रसमा रटो कम सकस भागई। जिन जिन सुमा मापह सा सब सारया पार । राममरप जो बीस सोही अमरुद्वार। राम विना सब भूठ पतायो । राम मस्त टपा सब कम्म् । नम् पद पर परसम्मा । राम फहे दिन ह मे पाही। तीन मोकम कीरति गारी । राम रटत जग जारसगे। राम नाम बिम पधर तराा। भगति हेनि पोवारी धरती। संघ भोप कुम मद विचार । साता जनम पापमोहरे सताकुहीसे मास । गम राम का राम समादी। एसा पण मोकीरति गा।रिरि म्न को पार न पाये। राम मं मम्त मा प्राय । पाप भापकी बुदि सम मारे।
सपार्यप्रकाश होने माना प्रभा की प्रायों की मिमा मातुस्म बना दिये परम्तमयाबी प्राप परमेम बम के उस पर भोपासवा दोरम इन गिप्प मुमते माने । उसने बहुत प्रिदिया नहीं यो मामी ने ममति लिप बाकी पिसी पी रस करते पाये तो अच्छा था। भब गगासी मते स्म पो निर्मम हम बरे प्राणी तप्प सूक्षासमते कि सपरि दम है। इममें पोलियसिंहनी पूरपार हुए शो मुसलमानों ने उनके पुस्मामों को पात सामरिक या उनसे ना पाते थे परन्तु इमो पास क सामग्री बकी मौत रमा मुसबमानो की अदाको प्रमित हो रही दी। इनोवे एक परमवण्या। प्रसिदि की कि मुम को ६वी बेस बग दिनाक तुम मुसलमानों म पो उमा विजय होगा। गुत स योग उसके साथी हो गमे और रनों स वाममानियों में पारितों में 'पंच संर" थामे से पंचर पात् इन पंचकरपुर उपयोगी थे। एक- मर्मात मिसखने स खाई में ममी और तबकम समय हो दूसरा-ग' गोविर अमर पगड़ी में प्रभावी होप रमते है और भाप में मा मिस पोर शिर पच मोतीसरा-ब' मा गम् • सर एक अपिया कि यो पौरने और मने में प्रभावी गुरु कर प्रकारे मा चौरस मी इसको इसीविष पारवते किसिम सर का मर्मस्थान पचा रहे पर मलबनो। सा- किसिप्स मुभाते है। पांच-म (पिसत म भेन भास होने सवाई में काम भाव । इसीभिम पारीवि गोवियमिदनी पनी एनिमय स स समय शिप की पी पब इस समय में ग्नम रखमा अप रपयोगी नाही. परन्तु अब मो पुर प्रायमसिए बात पम्मी उनको भौमाय मानी भूमि पूज्य तो मही मते किन्तु रसम विशेष प्रस्प को एम प्रताप पर मति महीकिसी न पा सामने पिर मनाय रसको पूजा मा मच मूर्षिता ।। स भूचिमों में अपनी दुमत नमाम जीविम की कीम्स इन योगों में मोदी। स पुसरी पाग ममि रतन भास मायम्मी प्रबको मत मात्र मी पाप का चिरा प्रब बिन बेरममावती ग्वना पार पम्प मापपरमहीपत। हो पामाश मना कि हमने पहान मुपा म रस ! जा मुमने और रनन म भावे ही बुद्धिमान माना कि राम्मामी?" मग मम्मत पदमन में मस्त। परन्तु इस सब भाग्य प्रमाका मन मा परि म इममा मनिप्सपि दुरभिमान में भी (गमरमा की गति महा गुप्त भी पास मपन्तीमम नाम। मा प एकादशसमुशास' ३०३ 7 -प्रम तो ममा बमोपमा बाप तो पामो नहीं दो मरा गाता सावे होता। इनके मत में पानी प्रसम्म गुमरत में प्रामा। पुना गपुर के पास 'मामेर" में रखव मे सीमम ।र की घी की विचित्र साकिबी मी पुखाने बप गये। अपमादि शानों की पाते बोरकर 'काराम १ में दो मुक्ति मानी। सब समोपदेशक नहीं होने म पसेपरेमा । मोरे दिन हुए कि एक रामस्नेही मत सम्परा सपा । ग्नाने सब बेहोस भोष राम । पुष्पमा प्रामस्या है। रक्षा में बाल मात्र मुकि माम। परन्तु मन मुबाती व राम पाम" से रोरी नहीं निका किपाल प्रालिको गाली देनी में मिम। व मी भूम्पिका को गिरते है परन्तु भाप स्में मूर्ति बरो। सिपोसा में बात रहते है कि रामबी को "रमकी के लिए भामात्र ही नहीं मिल सकता । अब यो साथिोप रामस्नही मत विक्र में वियते?- एक रामपब मामक साई गुमाई बिसम मत मुख्य का सारा काय मेया It 4 सम्म १ मवेदो मे परम मा और इसी का बिम्त मानते है। मा एक सब कि जिसमें सान्तदासबी भादि की सी १५सा मिलते है- रमका वसन-भरम रोग सबनी मिठ्या रख्या मिरखन या। तब जमाकागज फल्पा कल्पा कर्म सबमा साखी मच निमाम् गोग रिज कि राम " भने प्रम जो किमान १ सम्मान पापा शासन पकिन दुपर्म कमी कूट सकते १५ मही! पास मयों को पार्यों में माना और मयुप्पसम्म को सरकारमा है। इनका मा मुग गुममा 'रामच" रमा- महमा मात्र प्रताप की मुनी सरपण चित माई। रामपग्य रसमा रटो मम सकस झर यां जिन जिन सुमो पिई सो सप नरपा पार । रामपरपमो पीसया सोहीअमरेशार । राम बिना सब भूठ बतायो । राम भव सूरपा सब का । सम्म् अरु सर ये परकम्मा । राम कहे तिन भै नारी। दीन बोकम फीरनिगाहीं। राम ग्टत अम जार म मागे: राम माम मिस पपर तपाई। भगति इति अौतारी भी। भननीय कुस म विचार सो ता माम माम्पो गरे । संतों के मदीसे नाडी राम राम का राग समाही। पसा पुरानो कीरति गाय रिपरिजन को पार न पाये। राममता का प्रम्त ना आवे । पाप भापकी बुरि सम गा।
सत्यार्थप्रकाश इनका महम-प्रम्म तो राममय भारिप्रम देये विश्व हा किया प्रामीप एक सादा सीमा मनुष्य पा। मपम पम मा पनीता ऐसी गपचाप पो विस्ता। पास इसमें प्रम। कि राम १ मरे में एबाप अफ्ध और दूसरों भवाम्म सोचे है। मम ममप तो गा मा परन्तु सिपदी बोर पर सर्प दोर भौर मपर भी मग मी महीवा । चमेत दिम राम मियामी होमा । से- सम्म भने मे मुख माय नही वा से सम्माधानिकर्म में मिल प्रम मोसमी नहीं होम और बदि राम मा - सुनता तो अम्म मरने से मी मही मुप मोर को मुमता है तो दूसरी पार भी रम्म २ सय । बोगी ने अपना पर भरप और दूसरों का मी बम्म मा अमेखिये एक पाना पड़ा बिपद सो याममा भाइम मुमते और तकियामता पर रामरमही र समवेम्सही। बहाचो पा रही र सन्तों मेबी। बरि पेस १ पसरा म पाते तो पावर देश की दुर्दशा को होती रोप अपने माँ को कर विपरमिता मी पम्मी को परम्मत् म्याम करती है । एमन्त में मी सियों और साधुओं की बीमा होती रही। अब दूसरी इनकी साथ 'भापा" प्राम मरण देश से बाहै। उसका इमिम्स--एक मास मान तिमीमा माकपा । उसके यो नि पी। प मम पात विष का पौवा दोनों के समा रम । पाच पामा समपन्थी। पाद रामदेव "अमरिया। भपको दोषी जिलों के साथ ता था। पसे घूमता र सौष में सोम गुरु रामदाम+ परमसे मिया । उसबे समको “रामदेव प्रपन्यवाप्रपमा मा मात्र । उस प्रमास पे बसपा प्राम में स्ना और इसन इधर मता। पर सासरे में रामचरण रस मी इतिहास एसा मुधी कियपुर का मगिरी पा। उसने वहा' म में एक साधु म य लिया और उसको पुरु किया और गापुर में म सिखी जमाई - द एक पर राम रामेमा । 1 रामाने में मार मोपमासमरामा सारिपात जिन राष" ममारों और सम्प जातिधाम मुमते। - समरियममान है। माम बीमारास में बाम: गुरु परिरमास वे पर गुरका (बाई) गति + ५। गुरु हरिरामाम यो रामसम्म मत मापक (म माम) मति. 1.गुप बी मसर कोम पोम पर R पायानीमभरभरबार (3 हि ग ) + एकादशसमुना २०५ माखे मनुष्यों में पासपर काम गौम बम सातौ मम गा । इम सम में ने के वनों के प्रमाण समाप्रो संग मौषम पर नहीं। माप प्रभाव पर्वत हममें से बनी। प्रब भी पापी से ही मियोंकि महीने मों में होते है और साधुओं की भाग सात है। मेरपर्म स माता पिता संसार के ममार बामपुमसे और बेमा मन्ना बन और राम नाम कम महामन्त्र मानते है और इसी को माम" मे मी मते हैं। राम मने स भवन्त सम्मों के पास नसते। इसके गिय मुसि किसी को नहीं होती। जो बास और प्रभास साप राम मचा बवाय रसको मायाप और सलगुरु को परमेणा में मोबड़ा मामले में उसकी मूर्तिम म्पनरते है। साधुओं के साथ धोख पोत है। अब म बापूर मात्र तो समय और जी के बाद अपने पास रस। रसम बावामन विम मेरे रामदास और दरामवास * पपी पुस्तक को बस अधिक मानते हैं। गमको परिझमा और पर दसन् प्रसाम प्रते हैं और बास समीप ता गुरु को रक्षा प्रसम्म मतमी पुगको रम्म २ एम्मा ही मन्त्रोपस्य मत और नामस्मस्व ही सपा प्रमते पुमा पाने में पाप समाते। उपकी पासी- पपडताई पामे पड़ी भो पूरवसो पाप । गम २ मुमरयां बिना राग्पा रीतो प्राप। पद पुराण पड़े पद गीता रामममा विन रायमरीठा । मेमे . पुस्तक बयाहै पी को पति की सपने में पाप और गुरु और साधु की भव में भर्म स्तमाते हैं प्रम को नहीं मानठे। मो माप रम्मस्नेही मतमो रमने गौर और मर रामस्यीहो तो उसको रसम सकते। परम प्रसार नही मानत नौर रामनदा मन मो असर विस ने किमगति देवि मोतार धियी। प्रति और सन्नी रिय प्रसार को मी मान दम्पनि पावर पस इनमस्तिसा सब बाबरी मस्तिभरकर इसमे ही स इरिमा पदुम्मा मममम. प्र-गोमुधिये गुसानों का मन तो यात प्रमाला पसा ऐप मोगते या ए मौका मिला ऐसा हो सकता। २०ा ऐप पाल्य योगों को सामसही। प्रा--पर.! गुमाइयों के प्रास. बाकि पेपा । ऐर्म इसरों को यामही मिन्य। --- मी इसी प्रमरमपम पर सो ऐधर्व मिसले में क्या समा? इमस भपिकता कम तो अधिक भी हो सका। • पुणम पन मुश्म।
१०६ सत्यार्थप्रकार 70 प्र०बागीमा समस्या पूर्णता पवो सब गोगो को जोमा। गांवोकको चौता नहीं किन्तु गुरुपों की पोशा । मो मोरोक की पौरातो गोबर मी पेसा ही होगा। मत 'लेक ऐसा कि एक वैवी मणमा मम्मक प्रय मिर किमी प्रस्बम माता पिता और बी को बोर कम्ती में बरे उसने संपास से बिपा मोर मा पोखा कि मेरा विथा मही दुधा । रेष्मता से उसके माता पिता मौरी पुप किसी में सन्सी होगा। उसके माता पिता और प्रौपती में पचम सिने उस सस विषय ग्सस मा कि हमारे पुत्र को समाप्ती को किया रेखो ! इसकी पापुस्ती मी है और सीनेमा म पधि प्राप मेरे पति को मेरे सावता मुफको भी संन्यासपीरिये। तब तो उसको पुनारेमा कि तू बड़ा मिनायी है। सन्सको रामभम किसे झूमोबम सम्पास विधा । राममे पुप। मादी भिना। समाप्त बोष रसके साथ हो विपा। देखो इस मत कम पूर्ण ही रास मा । न पा रेस में पो रसको बति में किसी पे न पिपा । तर पा विधाम पूमने पगे। बाबा मोपासी समीप पारस्य"माम मर में सेमते थे। यहाँ कोई पकामे याद में मोर मो भोर र २ भागी बना कर पा गला पा किबोरवे सेमे पह समयमा जो भागी बजाउँमा ठो प्रमी कोई गोब मान समेग। पणवा और रसकी मी मेरो पेन अपना पुत्र पमा विप। पिन यो में मरो। अब पामबहादुमा तब उसके मा अपायर पर प्या। ससी में पारस्य से पुण्यस्य का पाठ भी हानि और श्री गाएक बिस्वामी मभिर मया हो गया। पोम कमी कम पर होने से राती नि बापा और सम्पास रिया। नि मम ही सविधीपर मामलमणी मनप। उसकी को पुष्टी गो। रसने इसममान सम्पास कोष मेरी बाकी सविणारखे। बसाहुणा । सिमे पाप ने सो पापा की भी क्सी पुत्र लाममा रस पीभेमो नीया गया कि जो मम बिन्दुस्थामी । मभिर में परा हुमा पा! किया भने म रमका पोप मिडरिण। प्रिप्राय में किया विश मे पर भारतमाम प्रपया अपर मश प्रथर कीपर पुतियों से प्राय बम और मिथ्या पादों की प्रसिरि मनपा कि प्रौप्य मुम्ने मिस मोर पाकि मे मोमोकामाब' मसंगो में मारे गन प्रल मसि पधिमा मामा म मा । एकादि मनों का प्रमामय की ब मुमा मोरे म गौ ममान (सी) पप गाने और मिप्रशिक्षित मा बन्न सिव और सबमे मो भा रम्य म- भीण पाय मम की कप्याप गोपीमनपसभाप साहा। गानासाम्पम ।
एकादयसमुखास' ५०७ दामों साधारण मन्त्र। परन्तु अर्गमा मन्त्र सम्पप और ममपंप माने- मीफप्प परसं मम सामपरिषस्सरमितफाहयतहप्पवियोग- अभिवतापक्यानम्तविरोमावो भगवत रुप्माय पहेन्द्रियप्राणाम्त' करमासमा वारागारपुषासरित्तपराएपास्मना सा समप्पयामि वासोहरुप्स तवास्मि । इस मन्त्रक ग्रेड के गिप्प ग्रिष्मानों को ममर्पयमा । की रुपणापति" या "#" तम प्रजमा इससे विदित होता है कि पराम मत मी ममानियो म मेर। इसी में पीसा गुसाई बा पुजा पाते है। गोपीषामेति" पप गापिनों ही को प्रिय पे सम्मको मही। दिलोभ मिप पवार प्रात् प्रोमोग में फंसा हो। यमीहप्पणी परे । पण "सामपरिवत्सरेति '–साप बो को पषमा पाकि बनम और रस शिप मसानही पाप्यचलिोग सहमपों से एमा परसों प्रमात् मानों पाम ममतम पापामसम्मा पाम्स पूर्वप्रपती औषमार भयो म पा! 'साप और "पेत' योगी पपापची। इनमें एक पण ममा पिता को मही। 'प्रमन्त" राजापारमा पी पॉकिमी प्रमान्त सम तो मरम पम पम न रखमा चरिपे और मो सास रामभ पार को हो अनम्त रामपार रमना मानी और गो प्रमन्तम्भरा "सिरीति" अर्थात् प्रापपादिव र रसकी मुक्ति के लिये परम भरोल्प मी पाकि अन्तमम्त नहीं होता। भया प्रदिप प्रत्यासमोर रसके धर्म को मान पुत्र मसपम म अपम्प कोनों मना ! योनिम पूर्वप्रम होने समिमी बारि कीमत मत बरसारि मनपान मी नहीं हो सकता कि रेउ अब मशिक्षाप्र पर्वत पमम्।। मम गोश भी पुरी पतु मममूमारि ममी भय प्रपोग! और यो पाप पुलस्म में ते उसका पाप मने उनके प्रमी मी मात् बाम तो यह समर्पण अपच बिब मारी। गोमाम मम मूवि एमी गोपाईमा प्रयोग ही ऐठा! मामा पाप और मप" चा मी हि कि मोसाईटी व करमा पस मत परेमाही । पर सिन्धुपर मौर परम्पे बमादि पारने और सोचभमे मा भये पीपीवारीको पद गाम म पर- भापहस्यामा पन पकायस्पा महाधिय। सापानगवता माई रपरण रम्पत ।। प्रहसम्पाधारमारसपा स्पनीक्यो। सर्वोपमिचिदापा पथमिधा स्मृता । ॥
सस्यामा सामा देशकामोत्या गोकमिळपिण। संयोगमा स्पर्शबामन मम्तम्पा कदाचन । अम्पपा सर्वदोषापमानिवृत्ति पक्षण । असमर्पितवस्तूनां तमसंगमापरत् ॥ निवदिमि समय सर्व कादिति स्थिति। न म देवदेवस्य लामिमुकिसमर्पणम् ॥ ५॥ तमादादी सर्वकार्ये सर्वबस्तुसमपम् । चापहारवषम पाप सकारे॥६॥ नप्रासमिविपापहि मिामार्गपर मतम् । सेत्रकामा पपा बोके प्रभार प्रसिम्यति ॥ ७॥ सपा कार्य समाप्दैव सपा प्रतावत' गंगावे गुम्योपापां गुमीपादिवर्णनम् ।। इमरि भोक गोसाइपों सिवान्तामानिमत्री में मिला यही गोसाइयों के मत का मूब तब। मया इस मोड़ परे कि मोहम्मदेशात एम पांच समय बीते पाम से प्राय मास की मापी रात में मिय बो पोसायचा होता है और उसको अब पायों समर्पण करता। गसके शरीर और बीब सब दोनों की मिपि ती ही बाम मपत्र मार्च को पत्रम अपन मत में पाने मानो गुसा चीनी के सब पाप मित्त हो तो रोग पारिद्रपाधि दुचो व पारित नो! प्रोपोप पचर: एल-मारोप जो बिस्थानिक प्रपात प्रमोपरि से उत्पन्न होने है। मर-किसी एस म में बाना प्रभा पाप किये जाने। तीसरे-गोकों म दिनको मम्मामम भावे और पेरोको मियामापचादि । मे-योमा गो बिपुर स स प्रमात् चोरी गारी माता भगिधि - पुस्बर गुल्मी पारि मे सपोगा। पांच-स्पर्शब बनोगों को मामा हम पांच पापों को गोसाईगोमात मोमीन में बात को प्रम्प को सपोपों में मिसिभिल वहीं खिा गोसाईगोकमत के। इममि बिना समपंच किने पग गे गोसाईगीमो माग । इसलिये इमाम पमी पो या पुत्र और पति परमों में पी समर्पित मते परम् मममम बम पोमो पोसाईसी की नबाम समर्पित बरोब तब म उस स्मी स्पोकोमो नम: इसम गोसार समय पर अपच र पाम भोग में किस्मोमोमा समयमही होसमा।.. इमाम पम सब प्रमों में सब मनुषों समव । म गोसाहनी मे भाति समर्पत भापमात् पसमें सो परिम सम्पूर्व पराध समाजमा - और दूसरे एकापसमुभास ३०६ गासाजी म स मिामा पापमाद्र को भी गोसाइपों मा जी मी म मु म प्राय करें पड़ी गम शिमों मप्यार मसिर .. wो सबस्तुओं मसमर्पद भरे सब बीच में प्रमदिमा रस पथात् अप्त गन्न में प्रम्प र मिसनदास हो वो सही अपने मत में गुम के मन में दो इसपिये अपने मत में गुपों बसन किया पप रखिने गौमाइलो मत सब मतों से अधिक प्रपमा प्रपामा सिर मणमा । ममा म गोसाइपोमकोई पाकिमपण मी तुम नहीं शामतता सिप्प शिप्यानो प्रमसम्पपसमा सकोग। जामो किम हो मममम साप सम्बन्धन समसम्पाता है। मो मुम में में पाच एक भी नहीं। पुमा सा तुम मा भोग विलास पिय प्रय बन पर हो ! ममा गिप्प और रिप्यानों का तुम अपम मा समर्पित मा पर मत हो परन्तु नुम और नुमा वी पा सपा असमर्पित गमयम भएर रा र पमही! और तुम मसमर्पित मनुका भार मानव दो पुम रमस पप ए एम योग प्रपरलोकही इम्पे तुम्का भी रतिप्रिपनी पी या तपा गुना भादि को भाप मत परों - साप समर्पित कमायामा । बीमा नहीं नहीं तो तुम भी प्राची पुसता भारि पापों को समर्पित समाबोर रमो । मा भर मा जाप सो दुमा पान्नुभब तो अपनी मिप्या भागात बराहों मदोगे और मुमा माठ मेरपीक पुपच में भाप अपन मम्मम्मी मम मध्यम धर्म म मम माप बाप को मासमधामम भागा । भोर सिप पपास माय भपन सम्पापका st" मार्ग मत भयान सवे पाये पुरम और सर रियों के मापा मा रिमा मन कोशीमामा परनामा परमापरिसिपी भगनागि रोगस म मरव विनिमगीतमा पर पक्षा ला शिमग मी तिरिमार्म। सरीमा मिटर निम्न सनी और दिराप मला पुल पर पोस्। एमी पोषण इमकी भी रेगर । एमविए परमार्म भी मौसममा मारित मcutमाम मर पुगसमाम है। (सी भर मिथ्य बारियरमा मा मनुष्यों का सबसपा और मापन गाको भीर मामा मामी मा। पाकि मिस गोपा. मात्र मारगर मनिष रमसीमा पुगसम सम्म समय mematwan । पाप पारम्प पुरुष और मर पि। पनीर' मा गतमा 'मामा मिसममापियामा .
३१० समार्पप्रकाप प्रब विधरिये ममा मिस पुस्प दो पीवी । रसम्म पी गया । सती दोन्ना एक पुस और भोगों की एक पौड़े खमी । रसके कम प्पा पारावरीबोलो कि श्रीराम में मन मारी सामोसा को प्रसा मते दो गो रसको सो मिसको स्वामिपानीम। रसमें भी प्रोमो समान साम होगा लोंकि परमी । जैसे पाी मी पुस में कामोर तुल्प प्रपा पुल समीकी अधिक होती है तो योगो में खों नहीं 10 ऐसा तो सब मिलों के माम स्पमिनीशी को प्रसन्त समारोप ममता दोग्य वाकि सपनीमाव पात पुरा होता है। पुना पोयोक मोबाचे मरम्म् मापा होय अपर मे मृत मी पुष्प भादरादि रोगों से पौषित पण पैमा हो माखो में मी होय । कि !ि' बि ऐस गोरोक से मर्मजोर हो रिचरा मवा। देखो सपा मोसाांगी अपने को मोहम्म मानते हैं और पाव किलों के साप पौवार से मादर तथा प्रमेहरि रोगों से पीड़ित रोम महा एक मोग है । भव पीपे मित्र सम गोसाई पीपित होता है वो गोलोक स्मी मौसम रोगों न पारित लोग होगा। और गो महीं है तो समय सम्म गोप्साईगो पौषित वो हो। Ho-मासोक में बोलतार पारबम से रग दोपहोवा पोडो में नहीं चाकि पहा रोग रोपदी नहीं है। 10- 'भोग रोगभवम्' या मोमो पो रोग प्रकरण दर और भीकम्यगानकोष मिलों से सन्तान होते नही और योगा वो भार बोकीमा दोनों । जोमांकि बानिया ही पाकिपा होती है तो मम किया विमा साथ होता होगा ! बौकिया विम भीकपसरा कोई पुस्स मी जो दूसरा तो तुमारी प्रतिधमानि हुई। मोबाहीमावो मी पौरोप प्रम परेण कि मम मिमी और बिना मान होता है। अब परमही में ARAatma अब किसी की पारिमा पब तो मी तुम्हारी प्रतिक्षा गोमोक मैं ए. सौरप पुल ना हो अपनी और मामोमिन्तान होते ही नहीं तो भीष्य में घुसा और पिो में पायापरपोष भाषण : मचा पा गावा! गाना रिलीगाताह की बीवियों की मा। अब मो गासाद बा शिप्प और रिपाचों मम मम समापन अपने अपमा सो भी मेरी सकिदम तापिय समय में भी और पति - समर्पया सता पुमा मन मो इस समय मा सन्ता किमया साध सभी समर्पर प्रपा ममता चौरमोमेंटो पभित्री भाग। भव सा धन उसकी मी ही दौमा मममो बचात् मय के बिना अप मो अव ही हो सम्ता । म योमाया म पभियप पीक समानामा भौर पालम में हम, सिने पाभ मम्मारी गासा मोगमों को अति मग्री और गाईको पराग साप भी सनियम मा एकादशसमुशास' से सस्ता पोषिमाति स परिव गिये और विष्णहीन एस दिन प्रार में गल। और ति! जब कमाई गामाईगी की पपराबनी मातम रसो म पर स पुपचपका की नमी - समाप मैम वामप मोडता र समता । विद्या बोगे तो दब गो मूर्वक हो, मूर्तामा बस मोमम" बोकि मतोमा मौनमो बोरे तो उसकी पाम निकासाब परन्तु स्पिों की भार मा भाग मगाम तामा राहवा और जिसकी भार गासाईसी सेतो गोबोहा माप प्रेम और रसम पति माई, बन्नु मम्वा पिता को सम। यो सब मिला गोसायीक पग पवा? तिम पर गोसाईगी मन मापा हो सकी भाषा पर प रयोग पी और रसा पति पारि अपना पसभाम्प समभन और उस पीस रसम पनि भारि मब मत किन गासादगी की सयमय में और सभी रसा पति मावि मसा की पोती और मियों साम सिरमा पस है। सब माता ५५ प्रम भम्पा उमा ममिरों में और रबर समीप बाहुन महावरे. अब इनकी पिता की प्राण प्रर्थात् इस मभर मगर-बापा र गोसाइजी की गनी की पारी की पीजी मुनिबाजी की बाहरिगी की गलामी की और ममगो को। इन सात ममी म पपा मार मर है। बस भई गोसाईसी सक्स मरने समता है तब उसकी पाती में फ्म पोसाईनी परत और जो प मिमता रस गारंगी गारपसात सवामम ममममय और रिपत्रमुगलमा समान माही महमा मि में गोसाईजी को बुखाम पनी पायाभ पाविपरमार और मई । पारिवान धान् गासाईगी. पौर पर पो माध्यम बन्नामानि एका पात्र में पा पर गाजी मे पो पुन मिव पाय मत पान्नु N पोरन पान मानी । पुष जगप्पमाईजीपालाम्म परिर म सराई पर मार लिम और पनी उसी में पर। प्रिग्स जमा भन्मन रस सहम धरमप ममापा पार पान बाहरी गमागम पाम पमिप ममता की मास में शिसम RRE मुकाम भएपरिममेकरमा यामकी मी मसारीमती भिमभ रपम मारी मो. परनिम्मि मम मनुको समय पर मार CEO सामान ममममम मणिपर्ने +NABही। भिमाप्यामीमा मजेमा पापा पानुम्य गुमनामी बीपी पम रमसतर्ग सिनामें रिपगम भागापाममा किमयाराम भाप में गुममा पर मामले पा" माप पारो भला और मायामा धमा ३१२ सत्यप्रकारा हो । भर्मात होसी ममप पिचमरिमा मा म किनारे पर्सनीष मला भयो गुम स्पान उन पर मारते है और रसविन (ो) सलिये निपिनमसमे मीमत है। म-गुमागी रेटी पाए मी मात शाक और ममी तवा पर मारिको प्रत्यय हाट में मेरा भी मिल अपने और चमों को पचा बोरसे योग बेच्ने गुसाईगी नहीं। उ --यो गुसाईगो ग्यको मासिक ममेरे तोप पौ। गुसाची अपमे नौमों हम बाबमा बादि पौधोयरे में बचाते हैं। से अकर हर भाजार में बेचतो गुस्पईची सर्व बाहर ले तो मौकर जो प्रचारितो रमविनय दोष से चले और प्रो गुसांगीही रसमिन सी पाप मामी होवे । प्रथम तो इस पाप में प्राप खेरि पनी को भी समय और भी। मापारा भादि में गोसाईटी मी बचते है। रसमिस मना मौओंभ श्रम गर्मों सही। रेसे । मंगों ने इस भामोपचकी अधोगतिप्रदो। मामी भारापानमवसा। --- 'यारठी शीतमा बी पारो पाइनबर स गुमाईची कोजगारबादि में विचित्र दीपाको स्मी पापा की मी है। रे!ि एक मायबम्मामक प्रपोमारे समीप एक प्रम प्रमाण भा प्रभारी रोम गुजरात भाम्बिया कपमुबारियों में घिरता का। उसमे रखा किया परामू और मोबा माये सम का अपने मन में शुभ से हो पा मोम मुस सचे। पारसने रो पर शिम पनाये। अमन आपस में सम्मति मस्मि किया कि सायमन भारावय समपर और पा सिह और मों को शुभुग मूर्षि धरम सात् एन मी पता है। परम परिमाण में किसी भी प्रथात् जिसन माम 'बारावर" मात्र अमिपा (हिमाबार) मा उसने शिमों ने भाकिम नज मारावण मनपा यो हो म सामनमानी समपंचम! समये भा पात भको कम्त। मोखा मामी । एकीनी में सामान सिर पर मुार भरवम मौर रात्र सपने पल में मरो पारय किया और एक दूसरा मामी रस पौष माराम गया पर अपन मय में मेम सागमन की मास में सपाय प्रेशप मिश्रम नमुनमुलक मगरे। राराचा मनोभाकि पनाम रम पम त्रि जब मीना और भयपरको ये पाय। जो बात रयता माराय पभो । पर्वा ममहापालिमार पर की परीवर पो' रमझे पप्रासबल मारत और वियत रकम पो पाय मरममा भागीरी में गाया माया मकरम पास भी चौरमा गिराया तो पुजमति पोपोनिमारकमा मरिन। सबभोर गिर ममस्माभ एकादशसमुशास दूसरी पार बसे गर्म और राती समप बीच में पानी कि तुमान पम्प भाप है। पब तुम महाबाहामानो। उसनेमा बारा प्रापी बात । बम गफिन के सर माम में पये सब मामा सधारय सागबम पही पर समितपदा मेमा किसो अब चूसरा सम्म धारण कर पर्दा विराजमानपदादालावर सब में स गया। पीस रम मसकी बा ममी वकिपएक महा भूमिपा प। की अपनी या पमा डी पुमा इपर रपर प्रमता या सपपास मापा बातो को सातु मी यमाता पा । कमी किसी साधुण्ठ की पानी मसकर मूर्षिय मीम खाया और सबसमय पाकिम मे इन्की समाधि दी। ऐसी पूजा में भरियाणा के मारे माझे डोय रस पंर में पैसाले । गम मर गया तब रसायों में बहुत पावसाला । इसमें पात पिस रोग किसी एक सीमा पमा गपा था । म्पपाधीश रसमाकमा म यसमा दिया। बा रससकी माटी गई प प पूर्व भाचर्य म्ाने और इसने भाम। मगों मे 'खा बॉस! रमने कामसमे को मठ मही। पागों मे मा पसी कौनसी बार ! रमन कसाही मारी प्रामपं की बात हम ऐमी कमी नबो देवी । मार्गों मामाला बात उसनेमा कि मेरे सामने सम्प मुंभ मरापम मे।मेरा बा मा म माता पिपन माग पत्रण सा कि मैं मायान् एवम । योगी ने सहमपनपी नहीं होता! पाया मारकी पार हीरो मार कर माता बारमय बोले नाही तो नही । मम स किसी मूचा किभार सपना बाप परम्नु भारावर भमप ममा चाहिये। रपये पा कि मेरी भी भाकर नारापयरिखामा। रमने उसकी बार मममममा किमी ऐसा ही कम नही हो मप और तय उपासल्य । उसने मी समय किन माह तो पाती नहीं इसस्पेि पापना की सब ताप मी पो रमो. समाव पाने, ऋष पाये बसने, सन और मन मा मुम प्रेमी नारायण बच्ची मस्त पुरुसाच मागणे म मुसाहायण और बड़ा साप मच और अपब सम्मान पाम 'मारावया" या किसी मूर्व राग मुषा मम पाप्प । र राय के पास प्पा तबाबपुत समारणे, सचे समसाम। वप रामा कहा कि पहल गरे। राहोंने भाषा मारापपरमभरोमा। राज्य-नमसपो महीदोगा मारापणी बना पाकर बस ममी रामार और पम्पक प्रय सासर बाराबव प्रसादालय। उस समविचा कि बापत गर।। पगामेमा मातिमी मान मिले। म्यातिपीनी रचर रिच या उपम महान पणमी. - 11.-पाभ प्रभातममममा. - यमाहा बाभपरमा। दोमोसोम traordeी 44041454 14414.4com सस्थापना दिवसभरमा मात्र मन मार मारापपर्णन प्रब बाप मप्पा मारा पर पारगी। अपनी पापी में मारमान प्रारमी मुर्त निक निघ। र यी पाए और ग्न साम मम्मा. सौ बार विहा कागोमा एम मापन और ग्पन सम। पापामय भारिपरिपप्रमदी म समी। ण्यचर पानीमा सम दोयम था। ममम सपा परसन न गाकि रम ममदापना पमठ मुगई। हर मRA मानि । मुमपराशर पाम मम पसगास सम्प गयोनि म मात्रामा कम मुनगई। रायना मुषिो मागर' मीनावमयी पदिय । रिमा परीचा मिपमार। माय माय गुरु सपनाम: वापान-वामा म मिा परी मममममम। ग-परीक्षाम्यिभर मी चरिय! बी.-fraम्म श्यामापा म. ग.- पापपपरोलाममा दा-पिनो . माशामकी परिमा ग-गदिमिरना! २०-चोपणे समय नही । गाभरीभरपि सप! वी- और मारपया मोरया मित्रों सम पपनस नियम माना। मन मापी जामतिरोपीमिया स्पानिया-गामा भारी परयो । n Tennial म nage मन राहणे ५मा मागमप मनापास --माबापम TO भरभराप भिRunt Minimuonmmmmshim Twenlournament Brmus मा ne am:
एकापसमुशास गया। जिसमे दीवानगम में मनोपण किया कि पाप मौसम पहिये किमुपमे वापरापब माहीमही पायेगी। बो रेसा पभोगे तो हमारा बड़ा मारा सब योग सीमगे। पासमा प्रमाण प्रा और दीपकजी पे शोम एप में से बात की भाप में समा विष्ण। पर रायमसी मे राबा ने मनीचे मारामार दम्पापही ! पौपानी ये रागाप्रम में सकस मी नही रोवता एषा इस पर्व में सालों मनुमा धेबराव किया। राय मेहकर ये पाकिब मा कममा परिपेचामेमा इमे पारित गरम पीपे बसोंगा पदावर में रखना चाहिये और इस पुरकि बिसनेस समे सिगला है, परे पर पाको दुरंण के सम मारा चाहिये । जब एक और मन मन में बा भने बोका माने गो मागले की पारी की माची पोरग रारे रसपानमा समे। राय पे भाषा दी कि सब परिपा पापो चौर इस पुरसमा मुखम पधे पर का इसम्म मरेको अपर परिब सा मुमा बोनों से एक गव इस पर सवार में को मे पिया तों से समस्या समा। दो ऐसा न होने तो पुमा दूसरे मी ऐसा भमरते मरेंगे। बस ऐप एषा तब भार सम्मान कर एम। सीमा सबमिोपी दूसरों के बम रमे में परेभार है। पसम्पदावों की होगा। पे स्वामी बारापय मत परेपपार परशुराम । तियेही मूगामने पिपे मरते समपम किस पोहे पारे मामममी मुडिकोने दिये पाये। और मिस इस मन्दिर में एक बार प्राय करते है। पर मेरा होता है तब मभिरमौतर पुपरी एक मारे पुष्पग बाम जी । मन्दिर में समय में जाने भत्रि रखने। ये किसी में पारिपसापा दो मम में रिया प्रांत इसी प्रवर एक परिवा दिन में सायपर पिस्न मदो सप पानी है। जिस व्यतिम साधु हो उससे पैसा होम पाते। बापित हो उससे माफ्ति समार जम्पर गिलो र गिलोप बपिने पनिवेश और मावारिस अम मेरो प्रपों पर पुकार (सिस) पौष मसालों मेडो स्क्ये गोपाभ मिमोसा। और यो मही परम्वा । पपरस मियामीमापारि पहिमा है। गोभीपपरापी ती पापोडपमा गुसाईगी बाजी माराम भेर एस। अपरे"मत्स" और पूरे मत पडों मे 'मोसे। पाये सिएप पराया मी चम पार्मिक पिस् पुराहो पा रसम माप पर सम्मानही मते कि मम्प मामी सबने में पाप मिन।पिरिम स्मो पाइपौरों प्रस्पी रमठे परम्म सम स्य पोय होती ऐसी ! इसकी मिरि म्यूम पुर। भीरमाणे की परसौम्मपरि पोया मिरो मने बोलेबर सस्पार्यप्रकाश मरले १ र समको गुमसे में परेम मसिर मते है कि मन मात्र सप्रेस में प्मे । सायमन्त्री मारे गये। हमपे बात मर्ममा मात्र महारासमोर याये लाँकि इस मामा के पहा पये से भी भाग्यमानी मा किनमी पप इनकोसमें गुत प्रापासहित पाते है। इमये अपनी च से पापमयी हो और म्मिान में देखा जप जो मरपे पाये रखने विमान में प्रेम रिपा सर को मेप और पुमो की जो मते गपे। मौर बाईपामार पwat पर रस की पाव्य मही होती व पता है कि सराव कोरम में भाग्य । सुवा किरण रस्त में जो रसके प्रयास भौर मुक्ति हो पया हो तो भी मे में है साकिबो उस रात कोयतो र पहें इसलिये ऐसा काम मते थे । पेसे ही बर गोविण गुसाई मरवारिसमोर "गुसाईगी बीय विचार र पमे" | बो इस एपई स्वमी पराका पर्चा भरपरेत भरे ममी पपकरे। 'भीकम पर मम म मर्च पेस्म करते 10मीसम्म मेरा गरी प्रांत में प्रोमो परमात परत इसम मर्थ मास मेरे परम भे पास अपात्र मेरे प्रभाव से पेम मी हो सकता पेपर बितने मववियहीन होने से अपांग पिसापरय तेरे किराये रियोिं पर पड़ी। प्र -माप मत हो मचा। २.-मे मन मत्स्यसम्ममा मात्र मोकिमी पारित वेरे इनमें मतों से हवम विपकिपमानुसार एक परमपित होने १और माब में फिर पति है। प्रतिमाह में पीसी और मामी स्याहै। एक माण पति से किसी एक माप्मा भाग पूषापा। महारमा-मये पामती च और वन (विस)ो पा! खात्री-इस सपने मे हम मागे और बीयपमी नगर राम स्पमा इसलिये हम मा विवक है। म-को भी स्त्र और चांदा समय में प्यो हो सब मुख सच कर मेमो गोमा बायोम! वामपी पार तर प्रमोये । और बैण मोमपम पम यार अग्य वसा तुम भी सब गौर वाम विषमो। तर मलहो पायो। समिपे पानी पूर्व पणta प्र०-- णित मत यौ। रमा प्रतिक, जैसे शिव पो पाठे राय • पिन्य किसी प्रेमी मार से फिक्ति मिान मे एसे पाने और पि * भावं मौके।।
एकादरासमुद्रास महारेको प्रपपिसीपी मानो। इफमे पिप पही किसिमविस पालाय भएकचिसोने अथवादी में मारे गये में मर रहै। पब पापी मी पाप सरिय पावे ममी म बलम रामहै। ग्रामसमान और प्रार्थनासमाम म०-म्पपसमाव और प्रापसमाच तो प्रचारपमही। २०-अप भयो और पुलसी दुरी। प्र-मयसमाज और मावासम्म सब से प्रभारी नोकि इस पिचम 1-मिषम बीट में प्रोन्दी पौकिकेमियादीम होमों की पम्प समाकर हो सताबोसमासम्मान और प्रयासमानियों में ईसाई मव में मिपमे से पोरे मनुष्यों प्रेम और जब पापाबादि मम्पिम प्रे प्यपा पम्प बाम मोरे फोमा पचाये इम्पनि मची पाते हैं पान इन बोगी में स्वदेशमधि पातम्यून है। ईसानों के प्राचरब बात से दिये है। रामपाप पियादिमिपम मा पर दिये है। -भपने देश की मामा , पूर्वनों की पाई ममी तो रोम्सने माले फेर मर मिम्मा मते है। पम्पनों में इस पर गोली मा भरपेट भते है । प्रावि माविमों मनाम मी पड़ी ते मयुत ऐसा मते है कि बिना परमों के पी में भार पर्वत कोई मौधित बाण। प्राप्मावती पोग सवा से पूर्व पाने है। इसकी राति मी भी । २-रारिका प्रतिशोर रही परत मिदा मने से मी पकड़ी पते । समाज गोरप पुस्तक में सवर्ण सम्मा में पैसा"मसा" मुहम्मद मपम और सभ्य" हि । मिनी ऋषि मापि ममाम मी मी सिस। इससे यमा माता कि इन योगों में निमम मम मिली मी के मवानुमारी मत परे है। ममा पर पायान में रमाए और इसी देव भाजप खापा पिच पर मौते पीते है (निमा) अपने माया पिता पितामहरि मार्ग पोष सो विग्यो मतों पर पपिक मुरणा माम्ममारी और प्रवासमावियोम एण्याविण में रति अपने कोपिान समपिठ पगा। पिण मान पारे परिप्लामिमानो होम परिधि पर मत पाने में प्रात दोन मनुप्यौ मसिर चौर परिभरकाम सोमो प्रस्ता! ४- पबन प्रसारिसमीयोपाने नभन मही रमण नोंद वही समय होय किये पौने और गतिमेह तोप से हम प्रमाण रेण सुपर सफा पान्नु पसी पो म मुपार होमो रसम सिरोया १-प्र-विभव हैच मनुवात - और मनुपात मी गतिमेरो। - २०- समापप्रकार म-और मेवान और और में मकुमार। र०-मनुष्य मा पसी पर बर मनमावि गतिको परमेम। 4से परामों में पी व इति भारिवातिषा में पापा ममापी पहिरोम रस मारि बामतों में मम ममारि तिमेर से मनुष्यों में समय पत्रिम प न मान बातिमेर | पान्ड मनुष्यों में प्रापपादिमे सामानवाठि में ही मितु सामान्य पिरोपमा मावि में मिलते है। से पूर्व मिम पस्या में पिस भावे ही पुष कर्म, समयमय मावनी ममप है। इसमें समुप्पागम रमले गुज कर्म, समाप से पूजनुमान प्राप विप पारिवों की परीकप्पस भनी रम्म और पिामोसम है। भोजममेर मी परत और मनुवार है। सि मांसपी र म भन्न सादिम अपार वेग और ऐय सतु मे से भोजयमेर मनमा । प्र०-खो पुरोपियन योग मुरो को कोर पवन मारते होस में सबसे सस ससस्ते हैं इसीरिये अपनी पानीमा पारे। To-मारी भूखी पौकि मुमबाण समय पहलमा बजे पुनः उपकी रतिलोमडी रोती। जो पूरोपियों में सामान में मियाम मा बाम पर किया मुगिण मन माना जरिम होगा पदमियों का उपदेश हा दोन मित्र जिस किसी प्रखर में भी वे जो पर रेप पर परस्पर विचार और सभा से मिति र परमपमो समति को गति रिपे वन मग पर भाप्रवे है भापम कोपोर मरम मिारते हैं। वो अपने पापो एपे यो मरिस और ममी में पाने लेरे इस रेगी मन को नहीं। मैं समझ ऐमो किबो पलोसमी बिना मान प्रविन भने तन भी पत्र पेयल्प मनुमोम रेखा! 4 मौत पर इस देश में सो प्रोपिनो गए और बार हर मोग मारे कपरे ? असा कि परिखे पण मग सपोगा और तुम में पागल। प्रो इसी है और ये एरिमा मातहै। दुरिमा और जो नियम पराज प्रा। . सारसी प्रमा म t एकापासमुत्रास १५ तातो रसी समय रसम विमाय साप मायादि पम्प ग म प देते है। पापतिमेढ़ मही टोक्यचौर तुम मोरे माहों कोपाम है कि हम में शातिमेर मही। तुम अपनी मूमा समान मी मेरो हो। इसपियो कामनपसोसरियाममा पहिले जिसमे पुया पाप मा परे। ऐशो! और प्रौपप की पमपम्ता रोगी बिये। मौरोग पिये पोरिक मारना और विपरदित प्रपिय रामप्रता। रस रोग कालिये समरिष चौर समोपरेश। मप्रविण से मारोप विखने पो होम धर्म रात पौरता है। किसी को काने पीने में प्रमापर धरेमवे पर पता किधर्ममातोपा। उसकी तन मुमय बरबले पास से बरमाने अपने पास भदेते। अब श्री किमारी रिण स्पर्ष के लिये प्रपत्र पामाथि परमार्थ तो वमी होता है कि बचतमारी पिप्प मे रख मानियों को पाम पखाको मोहिमेते ममा । पर माय पीनभन्दी पोंकि गुम बो अपना मात्रय प्रपा र म स प्रेम र उपाहत रोवे सो तुमने सामोसम पभर पा मो अपम्मी सुब किया सो परम मा अपराध जगम स्पोकि परोपम पमा धर्म र परपति ममा अधर्म पी इसरि पिा पवारोबमार के महाविपो को दुःखसर मे वो बिये मौसम हो ची। सवा मूओं साय कर्मक म चरि मिनिममें रनको और म्पनी रिवर विसतिगोको कर्म भने सपिठ म०ममा पुखक रथीतीश पमपी माप सॉकि मनुष्यों की पुरि बिभात नहीं होती इसस गरे बमामे प्रम सच मात होते है। इसपिने दम पर से सस मरमते और अपनदोष देते। ममेर में माइजिप में और मन किसी में हो रमको at, पास किसीभवदी T+-सित से तुम समान होगया रसीत अपमप्रती मी परत लौकिपब सब मनुष्य प्राविति महीस तो तुम मी मनुपमे से व्यक्तिमाहिये। जब मान्टिसर्षिय में समापिक महोते हो तुम बस मपी रिभम बहीरम । निगुम बस पर भी सपनिमा ममा पीये। गा पेसा विपपुर समान म्सम पाब। मि तुममें म्पयन पुष्ठक बमाप ममाम पिसी मन भी। परेवापती मत्री मम दायोमरजी म गरे" प म सम्ममही किमय मनुण सप्तमी। कमाथि मम स बम भरम साप पारमी रस हो इसनिय मन बाद स्मणस्पर्श मानव पर्यो। ~ सत्यार्यप्रकार परमामला साप हम प्रसशे ममय होना चाहिये। सभ मेरे पापान में बित प्रमे।। पैसा तुममे प्रमय ही माममा चाहिये ना वो पतो भ्रपम्तवो भ्रएसना ।। स स सस मोमे प्रसहोला हैसिसमें प्रथम समी नहीं तो मन समय में गम मी अपनी पौर पर पनिमा मनोसो छत से तुमने प्रारपिनी म सफल यही समपन और नुम पाळत की गतिमप भी नहीं हो सकेमोकि सब पर मिपुरमा हो। तुमने समय कि इस हम मोग अपय और पापा उपमा ममम्मे सोनम सोपे aarमा दोही माता पिता सब संसार के पास प्रवन भरे पणे समय पासप प्रमा तो प्रसम्मत फितु रसम मे अपने सपने मे मी नाम के दो पासबोगों की गति । ममा शारि सम शाली माने अपने बचों को सस्पता और असमता की परीक्षा और भारत की गति मी कभी कर सको हो। मिस देश को रोग हुमी रसी पर उममारे पास नहीं और प्रोपियन पोप तुम्हारी अपेपा मही मते पर साम्पांवम तमको पाप मठियों साग समम् ।। व मी सममान बरामी के माप देगोवि कमरे बगो तो प्रम। यो तम या पो हो कि सत्य परमेर में प्रमशित होवा पुमारियों के सामानो मागप्रमित उप समायो को लागी माय? पहा माकिम बोपदमा पो और पाने की इजा प्रत हो । योन नमको पदोसवार हो सोम्म । सरा मारे पादाय परपके मिरा अाम्द को रमधि और जीप को भी उत्पा माब दो सा इसाई और मुसबमान प्रति मानते है। इसम रचर पपशुपति और गौरपर की पाम्पा में रेन मिसे। भाव • पिना सोना सम्मा प्रसम्म भर म्पा तुममाय व रोग मी बमापसम्म -एक परमी तुम्हारा पर जा पाचाप और मीमा में पापोंकी मिति मम्मत हो । इसी पाप पारेपकि पुरानी गोम वारि बासीबा मी मामा मनपम और सीरिसाई डोग ईसा •ािम मुससमाव पाय तोगा!" भने स पाप सदरममा बिना भोग के मान स स पापो पमपमहान पाप में मासिपुत ही सण में मात्र भोर मयसमा भी पुरापी पी समान है। जो पेय को माना तो रिमा मा पार पुष्प की नितिन ने प्रपोसत चौर पर्म में महापरत रहन से भाग मिना मिति माने तो इधर भम्पापमरी . ८-जो तुम और प्रबम्त रपति मानन हो सोभा भी हो समी नोकि सीम नार गुप समाप मास मी समीम होगा धमरा प्र०-परमार रमसीम मामय भारत. T-माता पामेरमपावमा होस और सम्माति मानवबौरसमी ममम ममम पामेडा र म एकारण्समुमासः और पचप पापा से प्रप बासिने गए आगे ऐसी मावों सधर्म की हामि और पापम्मी को रितीहै। प्र०—म स्मारिक सम मे पेव से भी बड़ा माक्स है ममिति नही पोकियो सम्परिक ज्ञान परमेभावर इम में बोध छोपों को मोसे पर पा समम ममम्म सम्ते । इसलिम हम जोगौम मत गुव प्रया॥ 10-परम्मरी पत रिकी कि जो किसी मदिप्यमा पान हमारपस्यायिकमही होगा। यो स्वभाविक सहर शाम होता? और सपा पर सम्मा रसम रतिमा भी पही म सम्हा क्योंकि गनी ममुमों में मौ स्मारिकामी पो पे चपनी रति महीप धम्त । पौर मिसिनोदी रति कसभरमारतो! तुम हम परसाना में चम्कम और धर्माधर्म कमी कर कही गये थे। उप हम पिानों व परेवमा कम्पाकम्प को समापने भये । इसलिये स्पाविक शाम कोपरि माननगर नही .-ओमाप पोगों में पूर्व मम्म यही माना पसई मुसनमानी मनिप्प होगा। इसम्म मी रम पुनम की परपस समभ ऐन्न । परन्तु इसय समको निर शात अर्थात् मित्तल चर उसमें भी प्रयास से निता और मम् प्रमिस सम्पन्न होता है। क्या पर भी निम्मा मायापम और परमेपर मी निम्म्म मार पने मोठा पर चम्म म मामये समामि और पलाम्पागम मेरल और पिम्स दोष मौसम प्रकि सम्म बहो तो पाप पुरुष समापी पनि सिप कि जिस प्रमर सरको मुख पनि पाम पम्प होवामा समरिना र धारप थ्येि मीता। रमा पूर्वमम्म पाप पुरोके बिना मुक्की दि इस चम्म में लगभग संसम्म • पापपुरयाणा रोपे तो परमेपर पम्पयम और नि मोग झिये प्य समान र्मप्रसार इसखिपे पर मौत पर मग भीमपी बरी॥ -और एकाभिररिम रिप गुपये पर पिामों मीरेस मामना मेरो पामे मारा और जोसमा मम्मी काम महापना 1-पिरमा नोभसम ममप्यमानी। "- मारिभिरमरों का माननमा पारि पौष पुष्पा पागो. 1-ke मापयित आरिपो प्रमादि मानना मरेय असम्भव 11- शिवमपियार ािस मुमपमान पण मण र माग सदा प्रति पर पीला सख्यामा और 'समगों को हम महो दोपपोपवीत पारिसमसामर होगा। 11-और ममा सेरेम पौधे । अत्र में गुरु से मार हो । ग्मको साप्रो पूरोपिपर तोकी ति में स्तर पाम परपात और अवामद विमा वामा । १५-और बोलार समान नमबोगबायोपरि माया, समसिईबीचमम मानना और उत्पम मातम भावमा पर विष्ट। यो रमति तब और बस्तु म यो जीपमा से प्राय और लोग किनामा! जो इन रोगों में मातम म्यमते हो तो को परन्तु परिधि दूसरे किसी ताव को व मानमा पर पापम परमो चाप इसस्पि बो सतिबा चोदो भार्यसमाज"सान मिपम इसके गरानुसार मानवमा सीमर कीखिये यही तो महलमबमोकि हम और पापको पति रचितीस देशो पनमा से प्रपन्न शरीरमा बन मी पास होता है प्रासको गति तब मन पनपे पर बने मिसर प्रीति । इसलिये वैसा पार्मसमास प्रावन देश की विका पावसा सरा पही हो सकता। परि इस समाज यस साता तो गुट मची बावलौकि समाज सौम्य पान समुराव का मी एकही। मा-प्रत सबसवराम मोप्रातरो परन्तु अपर धर्म में सप अपे। परम किसी बा चाहिये। बोरते हो तो साप इसे विशेषता हो। यो तपोतोय पाप म अफ्लिप सोई पुस्तकमा और म। ऐसा अमिममम ममा प्रपत्र मस्त बहीबाकि परमात्मा की सरि में एक मे प्रतिप और म्यूम पुर। सिसीम समरपन मुक्ति पाही। उ.-धर्म सब एक दोवामगोमो पोखे तो एक पर में बिस्तर परिमोमोकिमिम व तो पुरविण एमरा पम यदी से सस्ता चौर गोमो परिमोटो पृथक मोबाप्पा इसधिपे पर्म और प्रपर्म एकहोममेकही। परम पिप कि सब सम्पापों के रपरेनों में ईरान इमामे तो एक सापन पपीये पातु मम मुन्न माम को तो पुलो भित्री की और प्राणी परालकदमपो में सब सम्मान भावे है। यस वकीपमा मोई शिसमुहोम बम सममापी -1- हेमाम! म पत्रकमा गुरुपौर मी धर्म प्रायमियो भीये! पर पो रम पम सिम्री विममें पकाई। पामार्गी-मारा।
एकादशसमुशास ફરી । मिासु-पे मौसी मिन्माये है। पा-सपने और परमम्मी है क्योंकि कोखात् परतरं नहि इस पचन के प्रमाय से स्मार धर्म से पर कोई धर्म नहीं है। मि०-पनवा धर्म। पा~मावती का मावमा मप मासादि पर मनमों का सेवन और सपमा भारि मन्त्रों का मानना इमावि दोन मुक्ति की पामता तो स्मय होगा। जि-प्रथा परन्तु और महम्मामों प मी पान का पाच पात्र । पमा मिसमै मेरी और प्रीति दगी रमशा हो सम्म । पा--पर क्यों प्रति में पाई। वे बोग तुमको बाम पने अब में सापे। किसी पास मच अवे हमारे ही शरबत होगा मही हो पस्ताक्षम । रेड! स्परे मत में मोना और मोर दोनों है। जि-प्रथा रेता पाई। माती पर शव के पास मारे पास दो ऐसा ही उत्तर उसपे रिना । इसपा फिरोप था कि बिना शिष याच ममपरप और शिाप मुकि कभी पही होती। प रसको बोरवीण महान्तीसी के पास पत्र । शि-श्रो महान पर्म क्या है? क्याम्ती-म धर्माधर्म कमी नहीं मानते रम साप मम में भर्माचम मा मापात् सब मिप्मा है और ये सामी एख ठम गुमा ये तो अपने को समान सीपमान मे कोष निममुख होगापा । मित्रो तुमस मिस्समुच हो तो मा मुख कर्म माम में दोनही और और में वो बो हो। --तुमको परीर पोलत है इसी से मात दमको कुछ नहीं पोसता पिमा प्रयो। जि०म देखनेबारे चैन पौर शिममे देख्ने हो। १०-चमेकपा और मम प्रावा. शि-पराम। १०- नहीं अपने प्रायमे देखता है। शि -वाको भपणे काये पर भाप ससस्ता तुम्ही पाता नहीबार पापापने की। उसमापस दिली मनपरे पना। सोने मी साहामा परन्तु इतमा बिष मा कि नियम के बिना सब पर्म सन्माला प्रमादिभर कप यही माम् प्रमादि मन परेसा प्रपिता और पप हेगा। पानामा माहान हिम समस्त्री प्रमात् सब माम अप रम बाठी ने मानत है। मार्म समिा सब मियादी है।
३२४ सस्यायप्रकाश प्रप्टो पर ईसाई पछ। रमन पममामी रे तुम सब सच सा पिये। इमा पिप समाप्त रूप मनुण पापी अपमे सामर्म से पापही पा। दिवा ईस्य पर विश्वास के पवित्र होम मुछिमें पीस सता ! ईस न सब प्रपमित के सिमे अपये प्रम ऐम पा समशित की। तुम हो मा होय निम्मु मुनम मौवषी मार पास गया । रमसे मी ऐसही स्पा सबल हुए । इतना मिष मा सरोकदा रस साम्बर और मानसरोक चिन्म माथे कोई निम्त मही पा समा। ये इस ममापने ही मायन परोगती और अभि पश्चिमाया। विसम्म सम्मप्यार पास पछ। सो संपदामा। इसमा मिरोष मा कि हमाल तिसकसे रेखम कमराव गवा: शिम ने मन में समम्म कि मपार माली पुलिस सिपही चार, सामौर मधुमही गर वो पमान परलों में। फिर प्रामे बातो व मताप्रपपरसबामा। हमारा कबीर सब ई मानक कई बार में पाम को साफम को माया मारिका और भतार पठमा सुवा। साचो समरे परसर पर पूसर विरोप देख मिप विम्य किया कि हमें में गुम मम पोम्प माही क्योंकि एक की मूम में नौन्सिामवे पण गा। वो मार अकया और भाच पारिबपी र पल की माई सो को पुराण करते है से दोप। ऐसा बान- तमिवानाधंस गुरमवामिगम्यत् । समिपाणि भोगिय मामिष्ठम् ॥१॥ समै स विशानुफ्सपाप सम्पन् प्रथान्तविप रामम्बिवाय । यनावर पुस्प वेद सत्य मोवाच ताम्तस्थतो प्रायविधाम् ॥ २॥ मुबाकसम ।। राम सम बिहार समिपनि प्रर्वात् दाब जो परिच्यतोम परमिट प्रमामिा परमात्मा से समपार गुप-पास अपे। इस पतषिों के गाव में गिर जब पारिसम्म पिम् के पास सप रस गावधित मितभिप समीप सरिमामु प्रविष्य परमम्मा • गुगलमा मरपणमा विस ३ सालमपप्राधमासम मार पामामा का नाम सरसी मिता सिपा... बम एम पुरुषास सम पमा कि-महाराज सब सम्पनीमों मा सित समय बोरिया में इसमें सम्मिी पापा सम्पदामोधी दिल्याब समिोपी राना परोस। जिसके मौसी पिम्बामा या एक मित्र सभ मुभी नहीं मम्मा (मपिप र मुम्मे परम कौगि जिम में प्राम। प्राप्त पिसान्- सब मत परिणसम्म विमापी। , पामर और गमी मममममम पपप सर में मापपमा मनाम सिरमा एकापसमुमास' ३२५ पेपियरे अपने ममुमचम्म के पस मे रहित रोम अपपा ममुखमम्म म्पर्भ गमम् ।। रे! मिस त में ये साच एकमत ही पदमा प्रा प्रोम जिसमें परस्पर विशेष परिपत मम पवर्म अप्रामी। जिसकी परीक्षा मे हो। माप्त-साइन २ काही श्रेपण। सब को सम्मावि होजागी । तब प स साधी की मीमीच में वारदोन मोगा कि मुमो सब होगो ! समापषम भममिया में ! सब पसार होम बारे किम्मर मापद में धर्म और मसनमापय में भर्म है। सेहो पिय पामे प्राम काये पूर्व पुपमय में किन ग श्रम सम मगार प्रादि में धर्म और भविष प्राममने चमिच्म कमाये जसा पावस असमयम विमा पाामिनने पारिकों में सब से एक मतहमा कि पिशामिप में धर्म और प्रविधरि पब में अधर्म । तपसामु ने सबसे पाकिम इसी प्रकार सपने एक मत हो सम्म पर्म की गति भी मिन्धमार्ग की ममिलो यही मते हो। सब पोखे जो हम पेसमें तो हममेव का मारमा प्राक्षा में न र बोलिभा दोसप भिजो हम भानम प्रय। सो सब सप सपन। इसलिम मते हो मी प्रपने मनपरत पौर पापमोकि गरी व्ययेशन से दुनिया मीले मन पसी बात । देखो! संसार में सूत्रे सन्ने मनुष्य को कोई नहीं ता और म पाता जोगवादी और पूता प्रापी पदाप पाता है। पिासु-बो तुम पसा पामरा र अम्ब मनुषों में यावर तुमको राजा सयौ नहीं था, मत वाले-म रामभमा अपम्न वा मध रिपी। हमने पा स्वयीशेप नहीं. जिसनम य में प्रश्न मतप मनुष्यों प्रेम गमको पनि रहो परमेपर सामने आ रहा और भरपरकम पामो बारेमा पिपेसामा पराप मनाया नहीं ! मा०-- ऐसा होय बरे वावमा । मरक और परमेम पराजय एFE ऐप पर ता पावन ।। म साता से प्रसारि परावे प्रयास नहीं बेच बिबालों। शि-कोपच पयदि पापरब उसको रस मिबादमलो हो मिबपिॉषि- प्रमोमबति पे पास फ्ठिा भपति मगर मनु म मेभानादित हायपबाबर गासनम बम्पपपिव पौर पर माता मधुरिमा पिपतो नुम्बरी पलों में नहीं सत्य भिनु मामा पाप पपक प्रण सभे गाने में नुमन पस मसारमा परिपे। - २२६ सत्यार्थप्रकारा मत-बब रस्या प्रयासमार मत में तो स्मोर ग वन एमप देसी मामला होगी तब इन बातों में पानसरी समय भने । Pro-यो यो।म्म मार मारते हो तो वियपास कर पाया। बापाविमो सानो तो तमाय और गालाममप हो। मत-वाम परपावलापेम मरबको मुत्रों को को माया से बुधवस्या पर्फत विष पामे में मैं पश्यत् पाने में और उपाय करने में भासम्म परिक्रम में स्मो क्या प्रपोजन ! हमको फेही बाहों में मिल जाते, तेरे रसने क्यों हो। मि-पसम परिवाम तो पुरा देखो 1 समन रोप व सांस मरबाते हो पुदिमानों में मिमित दो दो मिमी पानी समते। मत-मा भाई! टका धमएका कर्म टकाहि परम पदम् । परस गहे टका नास्विटका टकटकायस भानाधका मोका सप्पो सो भगवान् सायम् । अतस्त सर्व इम्ति सप्प रि गुणवत्तमम् ॥२॥ तूबर संसार की बातें नही ज्या देवपिता पर्म भयो विनाम माविमा परमपद मी हा निससमें महीप भर । रममा सचम पानी कला साहिब! मेर पास स्म होता तो इस रच्म पाने में माना कि सबसे सोगामात प्राम मावन माम मा मते सो दो महीना परन्तु सोबगाने और पैसे काम श साख को पी की सच पानामरिपे सवई स्वों की पोज में बपे रहते है क्योकि साम सयों से सिमt. जि- मारी मान की बाधा बादर प्राय तुममे पिता पर पानामा पिपासबबपने परिये किया पाना इसम सत् प्रमाण होता है कि मा समोपदेश में संसार में साम पनि सी ही समोपट महानि होती।मो पम सही सोयगावो बोली मापापविमोचमपालों वही मते हो। मठ-उसमें परिप्रम प्रति और शनि मी दोस्ती परत इस रमी मौसा में हामिम्मी नहीं होती कि सदा पाम हो जाम हवा । देखो! अबपीक मा भवाफत की बांधले हा मूप से सम्मभरम पण हो वाभिमाशमा मि- पोप गतसा भम विसतिये है। मत-धर्म में मौर मुभिर्य मि-ब तुम हो मुक्त नहीं और न मुलिमसम्म म साबन सकते हो मोसमी पानेमक्या मित!
एकापसमुशास मत- इस I में मिपण! मही मिनु मरम पापम् परमात #मिस्वा। जितमा रोग मम है और समवेपसमाप मोगों पर मैं मिया मिला दिया मिड तापभो म बने पास स्थानिमा बरकम्पमा म-म भनाश मोसम मुख मन मिडन । fro-~नुमपारा भजन तो मीसिपे।।सब रभवहीं परे रंग और जिस मांसपिवार पहो पाता यमी मध्य होम पीपपण जाइम परममप ममन मोहाले तो तुम्हारा मामा भी पवित्र होता । माया हम मादरे। fro---मौतरोपमहान -तुमने सामा! मि-तुम्ही पब समपार B . मा-मामामोंमपराधी समान सदापी लखने मिस और रिस्पाने मित्र हावासपातर सम पवित्र और मादा बीमामात्र मत.. जि-जो तुम मीता वो सम्म पदारेभम मी परत इसधिपे मार भी मदत म.मोते परन्तु मम मम। शि०- म म गुरु होस गुमार समो. मस- एक मक्ष भी मही होसमा कि मनुष्यों के गुण में समात्र xिo--से समय में एम्मा से सम्माथी धर्म मप्रय पर मियाभ्यपबार अपर्म मा को पुम्मा भोग और रा wa प्र प्रमामा और प्रमाा मशा। पर मोमा भकिहोने और धर्मी न राम सर में मुन माया और जब भी प्रधिको दुर। म गिर मा पा एम मैं प भी नियम. मत--सामा विद्या प्रत्ययुम व मय था। जि.- पिप पाम भरभरमा विकिराए पमा . भर में माही मिमिको मषिपो बस मनुषी पिपुग मतो में भी मसाल में एमोसा (अधमास) पाप रेमपम गुण स्पमाशिमो. मपभम पाम पप। बसमा कि ममापन! मरे म्मा ग्गा मित्र महीनो मोम्मिो में समा भारोम, इसमें भीमतियों मप्रान बाट म मनमरान पिम्मम.
सस्पार्यप्रकार प्राप्त—पही सब ममुपों प्रपि पिन और सम्पसियों का काम कि सब मनुषों को पम ममस्म और प्रसार मसान पा सुबके सामोमेत से रपार पाँच पदिपे। मचारी प्रतीतो को। १०-- पामम तो ठीक है परन्तु भावयनम मौ पुत्सी पाप। विसमे ही म्पम और म मान्य माम सिमाईवे और अप मस्यपि में से रख पिय पाने मनाम ही मते कि जिस सपी नाम होता है उस स पर्वात व पाने में परिभम असा भी मनी RIमी मी ग जन सास निरपर बोस संन्यसो विमीय एरा मरणो मिवामात्र ते मितेपो भी बेदमार्ग की गति नही ते कमी प्रकल्प में सम्पास मना करते हैं और विषम्पास को बोर के। ऐसणी पौर संन्यासी पर राम परामर पापवारि मूर्तियों पर कम मत मिले विधानस भी मौन हो रहसे पुषमन्त देश में योभपाकर सोते पोपते और मेरसममिय कुछ भने निर्वाह करते अपच और परामरम्प व अपने नाम समस्ते अपय समयमा रम भम महीम से सम्बसी भी जम्बू में मर्प बस करते है और जो सब बम भरित प्रपते है ये॥ प्र०--गिरी पुरी ममती मावि गुस्पई सोग तो अपील मपाणी गापम पर ग्पर मो है ममों मामी को पावन माने है और सर्वत्र पोत मत पण प्रते हैं और इस पते पास भी है इसपियरे पोरे। 1. सब दस भाम पौडे सेसिव कि सम्पम यही की मपास मोरमात से साधु मोसन दिने मनभिती में सतम्मी मी सोकि एक महलमा समय में महतो कि रममै माप होय मी परसा। मब मामय र साह बोमबाप में पुष्प- मारापर्व पनभयं पसि यदि यतत्पुष पराशर प। म्पास शुक गौरपद महाम्तम्। इत्यादि पास ग्मामा पुमपम साया ममस्मर मत? । जाभइ पसगमरममांगना भी भरवा बारम्भ संसार प्ररिपसाने सिप मा सिम मा में प्रतिय रोम माप मिले। मिमेरी मम्मारी सराम भी सम्पास अभिमान मात्र भर पन्दी । सम्माम प्रयास पनि समुहास में पिन भात रस परम्प ममप गरे। नाभी माम पाय मामी मिासी हो हैं। माप भाग माम घाव भाव मत और संगम मनिमार गत और नमी या पन मतमा गाण्या मापन पर मन भरि गम में प्रारी। ।
एकादशसमुशासः मार्ग की सवि और माता मा बसमान में प्रमुच दी होते। ये सभासी बोग ऐसा समम । किमको पापा मपान से ला प्रधान ! म तो महामारी मो सार में माम्।। बपी तभी दो मार्गनिरोधी पममावि समापी गई मुसबमान वैपो भरि पानी पर मी पाये मावे। पर इसम बधाता मी हमी भावगीती! मी सामग्बो मन में पोपमा परि और मर्म भने में पाहोने! कितु अपनी प्रतिम बने पामे समने मन किमी माही समम्त और संस्म को मिला पुरते १। पुन (गोवा) बाक में प्रतिध (स्पिया) पब माने में बस दोन विभोग (पुपमा ) पुत् पिणी पर मोरित होना इन तीन पण्यायों म स्पाग करना किताब एपबा हीदी हो मा पास क्यामो समय है। पात् पापानति ममापदेश से भारत् + पर प्रपे में मानिए प्रा पप सम्पमिती मुल्स ममी। बच प्रपये अभिमा कोको हीमो पुना सन्मापरि गम बनी। श्री वो सरन्य पपर र स्पर्ष में परिममप मम अधिक परिचम परोपभर भने में सम्मासी मी परमी सबममम माति पर. देखो ! उमारे स्वमन मा मत मस्ते बाते? मुसलमान तक जे गरे कि मी उमस भरीर और पूजी मियी बन पाता । को वो तब सम तुम मच हो गयौ पर्ममाम और मणिम्पत् मेगाविधान पीठ प्रामार और प्रप एवल मनुप्पी पनि मही रोती। प्राय पेशादि सपापो म पनामाचार भाममा मात् पसुपर सोपवमा पोषति हावी। सो! पुरुसो पारामे पर्ने प्रमको समुदाय पी। समें साधु पकुमार यदि को सिरिया सागर रामसे पाम पास पी पी एप मारमा पुत्र मागवी और पसी सपको पुत्र म पागोषद वा । र म प. समठीक पालमप। बम बम भकिमुपरी कुपी गपी भR Fमी दिपस पानीमच। बसी र नारेमगी। गाईभरता मग कामापीवी मर जाय। सिने पूर्व मोन एसी मापा र मितिमा मी बोल्प भगमनमाम्स। पेडोप पा सात मिरा व है। सारी बाबा रसम सिम मा मे मिय मार पाम में मासस समीप रायम सिरपात ग्सा स्पR में मरे प्रयन ब सि सिमी मम तुम पर महापामीरचमी! एस्प मुषम पकिपमसम्मा मीर - - सस्यामका साधकमा सिमामा है। मनकी पस्यान है।यो मुख सेकस पहोगब।पापोनियम उसके एक रिपेहम अपने समारोपण देखते मित है। मैंने किसी से मुभा वा कि मामय पर बी मोर प्रायः गास्पब मामा तुम मिदोरममे मी मना रवी और मम की बजगे। इसी प्रमर दिम मर मर में मिठ और हर ग्स सिम की पतसम्म पत्रि को इमे होम मि पर पीते और सो एव। भिमा भरमार प ग्राम में बरसी प्रमोवीन रिक मर मि परों सापक किसी एक पाम बोमकिपमासम्म मिज गये। तुमको मप मधहो तो हो । अब तपार होत नायक रक्से पाते हैं कि तुम य प प चाहते हो। हममेमो। कोई पुत्र की इमामता को पन की कोई रोग पिचार की और कोई नुपात की। रको पापको बाते । सिद पापों सस्ति किमा रोयो भर्पा चिसो समयमारोग्सको पहिलो बोर जिसने जीपादोरसमे सम्मुख बिसमे रोप किपरपीडो रसको पा मोर और कोड बीतने की जो रस पीने से पेट सम्ममेरे बीच में मे।। बप कमत्भर करते। रसी समय पसिर अपनी सि ममा पब स्वरोद्योग हमारे पास पुत्र सेतू पुत्र को हम करणे पाचौर इसी प्रकार पनकीरामने पसे 'पपा सियो रे बो पम की एम मोप्राप। मगरे पास बम मा धरान रोपको पप रम मोतू रोग पाने की एक प्राथमि यहाँ बो सेरा रोग मान । म पिसी के पाम" । पान्तु व राम पित्य रोधी हो तो रसम्म पपक मन को मात्र रोपी हो तो वो बो मा रोमी होतो मनमा बोकी रोगी हो तो अनामिन बोकमा रोगी हो तो परिटियागुडी सासरे। उसने देखपसिम्मीकि पिव रोगी माय देय मानी मौरी पायी। सोचने मोदित होय। मोम से मतेचो न मने भाव गास- समवेमापा । ममे इमारा पा उपमर किया और हमारा मी मा मन्बोल पा बो से मपथमा मिचे निवरे एक रोम वाप। साभक-मुनो प्या ! पे मम्मा ममोगामी है। मां पर दिन यो पोपी। बोसच्या प्रसाद न्य हो यो कप २ मामले इमली कम मन बनवमोबाँकि "सेब से मेण मिती जो किमी पर प्रसा हो तो बानेलासरे। सन्तों की गति परी। परम से पहो पाय सुमन योग्य प्रसंसा प्रवेश को मोर मते । सापक मी यो प्रवाही से वाकि गरम पावरा बाय। म पनमो नमो मित्र मिया रसम सा मते एकादशसमुशास' है। इसी मामर बोर समय के साथ गते है ममपम बम ।। बब मार में कामयी कि अमुर कपड़े भारी सिरमा यो रको पास । बम मेपास मेगा बामपूत मे लोग जनेमकि मार मेरे मम पर भी दो अल्पविराने से पचप होम मौन मधाबर और भावी मत मत सवमो तब तो पररसने स्थापक मी मने बप बाते है जो तुम हमको पुठ एवमोमे तो पो माग और ज्य में बाधारमी होतापापको प्रयप पुवाले म किहमारे मास की पाव पसारो वो हम पर मारें। सपको शकिपा पम! पान ने म्ससे पही। तब रसग्मी प्रमाणपोयस देता। ग्स सिम मे सममो समरिन सच तो सब मेमा माये सुम्यो कि भो। मोदी मि पुर। मिमी, ई पैग भी सपा माफी, कई समसा और कोई पीय खममी मरमा भिबतक मामय परसी ही तब कोरम र किमी दो एक प्रथम गोरी पुप्रोमेस प्राण वाचस्मरेता चौर र पारेर मदेवाकियो सदी मति होगी तो पुत्र रोगप्प । इस गुत जग हो । सिसकी मित् ही परीक्षा सकी। इसखिये भारि लियम पम्प सकप दम्ता मिस कोई सो गाई मन सा गरे, प्रेमी बच सके। नोकि मनुजमविष्य। नि पिका के प्रान ही होगा। बोपारा रम शिष पीसी मनुप पौर खिान होते है। जिनमे सारे पापी महामहोपोस पावे है। इसखिये मनसिपमा किमोबायो म्पी। नपछि पो पय गुपपक सस्प निम्मा सपिरोति । पपा किराती करिफम्ममा मुका परिस्मन्प विमति गुवा। पर किया विमाको निमम गुपदी पारसकी निमा निम्तर मासे पापी मौरी गमुभी शेष गुम्बा भर परिक भीडी ओ पुस पि इनो पर्मिक सापुरमा भी पानी पुस्पपी विभिप मुशोर दम्बापो पो म मोपमा राम इस सम्म चौर पर सम्म म प भाव में है। परपाव निवपीयोगों के मस विषय में संक्षेप मे पिथ। सो मामास्वप पयों इतिहास मिसार इसब समाप्रेम विसमशित यि व्यय प्रय पोसा मागासणेय परत जिसमें भीमर महाराबपिति मम मसराम "क्यामप स इमिास और भीममा मायम स्म" ममप ममपत्र 'पिरि" पर्पत माविमस मरामारवादि में सिमी इससे सामरों मरासिम सत्यार्यप्रकार पर्वमान पिरित होगमा पपिपापिप नियी सम्मिमिरिन्प्रतिमा 'मोसमभ"जो कि पाविमा पीनापमारे से निभाता ( राराश्य इस मया परमपपुर चित्तोरपा में सपपिदिक)ग्समे हमने अनुमान । परि ऐसे होरमारे भाई सम्म पोप इटिस र विष पुसमें खोय। समग पे तो देश नेपा होगाम पनि । उस पर सम्पर मामय अपने मित्र स एक प्राचीन पुस्तकमोकिसक्न सिम 1 (समासोपा अमिष्य ण प रसम परमप्रपये सन् १५ मार्यपी -1 मिष पात् पो पापिल पी में पापा मे विप्रसिसे समय व्यनि- माविदेशीय समयथायमी। इमाम में म्पर्य मोगों मे भीमम्मायने "सर" पर्वत यम्मम्मिदिन भीमम्मापरे 'पुषिरि" से मसागर पराम" कण प्रांत पी भनुम्म ११(एकटी चोरोस) यय व ॥५. मास ।रिन । समय में हुए। बनम मौया- मास दिन - एफ पर्प मास दिन माम्पराम भीमम्महापन युपिनियति भनुमान पोm.. म्स। दिए । ममारिया- भापराय पप मायराम पर्ष मास व पन्य पुधिरि ९ मुभि पय परीक्षित 1.एमय (२८. पियनरमेजर - २२ 1% पक्षम पन्य पर मेयरी निवासम्म पत्रम २७ भीमोर . ३ पा पास १५ पर पयरमम एमपुरमा ११प्रम एमा ॥ गण १ - म CE . - . 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"गु mire . ३ एकापसमुहास 1 मिथ १ म . . भार्ययम् वर्ष मास दिन प्राम्पराम व म्पस दिन मकर २ .पुस्सेपी " 5 प ३१ ११ पौरसेपी ३ ४ अमस्वामी " प्रमीपाव परिस्ि १५श्याम २५ परमसेमी ५ौरसात ३१ १ .मुखपाध्यम ३ बरसमसेन . पमा पारसबसेगमेवारमहा प्रपाब मे मारमय सिमा क्य से १५ मास १ दिवाइम पितार- मार्यपग पर्व मास दिम मार्मराब पष मास दिम पचपीरमहा १ १ विपाव अभिटसिप . १॥ १ माविका . ३ सरल २ . मुषमपति यहमप १५ बीमो । हरियम . .वास ३ १५ बोरसेब() . संपराग पथरिमन " 11 रामपरिमन मपपरेशपयको "पपर मामक राज्य पागले मार प्रयम्पनिमा पापी मास दिन मम पिसार- प्रार्यराग्य पर्ष मास दिन मार्यराब थर्प मास दिन राय मन्पर . माती ५ -यमेव . २० ११ सभासक मापुर परपास १ म १ १ ८ . . - २ . . . १ 5 - य पग यम्पप सामन मापार मे मारमा पम्म पिता १मप रिवाइमन लिवार भी। राग मगर पम्प पर राय शिप्रमादित्य में प्रतिम (ब) में पाई राग मार मार यम विपी मास दिम .। इनम स्थिर दी। यय विम्मारिस भेगसीपालपम्मयर समुद्रप्रय पामो पासमारम रामकिय पोपी र १.१ म्य..। बम विस्तार- मुद्रप्रय - " . ८ . - . समार्यभकाम मापराध वर्ष मास दिन प्रार्यरामा बर्ष मास दिख भवपास २मपास सीपास सधम्मप " महीपण ५ श्रोग्राम ५ मसियाड 15 ५सौस्पात." 11 पाममा . " मरमाम ३ ११पास . ८ गोफिनपारा - शिमपास २५ राय त्रिमपास मे धिम रिण मारामा (मावत पोहराथ) पर सोमपान में गर्व की इस पर्व में महबद्र जिम्माम को मारमा इन्द्रप्रसारान किन पानी । 41 मास । विराममपितार- भापय वर्ष मास दिन मार्यपा वर्ष मास दिव - 1 .पाग १ 1 . . । " . 19 . . • मामचन अमीषा ३ गोकिएन । १ पवीमती. मी पणती मर । इसके पुत्र मी कोई पहीं पा इसलिये सब अमीनों मे बार रिप्रेम पैरागी को गद्दी पर मुसदी राव करने सपे पोको ५ मास दिवसापरिप्रेम कवितार- पार्यगय वर्ष मास दिन । प्राप्यम पर्प मास दिन पपरिमेम पोपासप्रेम .पोषिप्रेम . महावा राब ममाप रामोजोस में अपना मो गये +परमार के राम भाषामन ये मुमो इनमसमपाले अाप राव माने पौडी १५ १६ मा बिबाइम्म विस्तार- मार्माराम वर्ष मास दिन पार्दापय बर्ष मास दिन रायचाचासेमा रिमालपमेष ११ सेष कोष मसेव १५ परालयमेव मपूरम्प 11 पम्मीब १० भीमसेन ११ दमोदरमेव ॥ अनिमा इतिहास में मीमपास मीनियमामग्रीमासम्ममा बिक है। पपमपी योगिनीपोपी+मात- . २ १२ 1 . - -पसमाचा।।
पफादशसमुसास . 1P . ८ 1 राजा रामोहरमन ने अपने ग्मराम को पावन दिवा इसधिपे पगाके रमालीपसिंह ने समा मिनाले रामसप पाईको रसमा में रागा को मारमदीपसिबमार एम्पमोबगे पौधोर पै.मास दिनराइबम विष्पर- मार्पराम यष मास दिम भायेगम व मास दिन रोपसिंह मासिद 2 सिंह गरिदि २ रियसिंह १जीपमहि गगा जीवनात भरणसिरे अपनी सप सेना रघर रिण को भर से परसपर पुप्पीराम राम राम राय मुमम पीरमसिनो परसाई मरे पाये और सपाई में पापयसिंहको मारम हमपभप च्यिा पौरमास दिन हम निवार- मारा पप मास दिन भाग्यराय पप मास दिन पीराज ५रपपाय भमपर परापास दुर्वनाम राजा पायरे पर मुस्ताप शाहीन गोगा मामी से प्रो भाप और पारस्य में सं २ सास में पमम परिण पा एमास मत मिश्रा प प ( मुस्तान पारीन) भने मग्मी मास । रिख । बम विस्तार गुत इविस पुलकों में सिण। इसलिए पो बरी सियइस गौर ममहरिष में मिष्य यषण । पति भीमदयानन्दसरस्पती सामोफत सत्यापणारा सुमापायिमूषित मायीपमपएसमविपप पारण सम्मास' सम्मम. १२ २ ३ . मोपपरामा म मिार मात्र मा मुन्न मात्र पो पाभण और पर पर पन मेन मारम भरप मार मारोन पन्याभप राय पसा तियना) मामा एम, मुगामाया मयसभागार अनुभूमिका (२) बर प्रापारा ममुप्पों में ससम्ममापयत् निबंप मालित मम प्रविण पो मतमतान्तरले प. पी वैन प्राविपिपविमामा प्रपरम मिमिच हुमा क्योंकि यमाय और महाम्रतादि में पियों का नाममात मीही विधा मिली में परमार और मारत में अमित समाचार की माप मे विस्तावित इस पनि किन मत इको पौधे पण लोकसा अपये मत को गुत प्राचीन का योग निattu होता तो पामाम मावि पी में सीमा समाप दोवो इससिपे ममत इस प्रकारे पाप। मेकिवियों पी में मे कमायाप्रेम वास्माका पति प्रत्यये होगे तो रणसे पाना चाहिये कि पम्मानप यदि में हमारे प्रयोग अमच मीलों नही! और तुमारे पन्नों में लोग पियसम्म । पर्सन पुनमा सम्मानी। इससे पहोसियार मत मिसामरि मवों पासा। अब इस पाह(१) समुहास में बोरपियो मत विषय में मिथ यो सो कोनी पो कनिधी इसमें बैनी बोपों को कुरा मानय चरिमे लौकि हो। हमने इको मन विलम विमोपस समायम मिचलमिषयमनिममर्थ। इस वेब सी बप मानोपमोच सो साम्पस मिप में वियर और चमोसमय मिलेगा और बोध मोहोमा । पदरी प्रतिपदी होम प्रीति से पद पर किया पाल समासम्मका निपप भी हो सकता। बब पिरोपों में सR मिसाप ही होता मी अधिानों को मापनमा में परम गुल इस समय पाय। इथिये पनीर मसल मिानपदपसमय मारी मयुमपतिनसल्म मम है। परि पेय महो तो मानों की गति मी महो। पारम मत विषय किसाइको मन मत पाने असं नाम और पोषम बना दोण बोकियोम अपने पुरखो किसी भन्न मन परेमे देखने फामे परिसने को मोबासे।बो परिमम से में मार ोिप पार्मसमार मुम्ब । मन्त्री " मेला म पुमा प्रथम पत्र मम प्रभाममय में अपने और मुन्द में प्रमबरणम" प्रय पने से भी समायोगी को मिला प्रमत रेप साथ। -
एकादरासमुमास
मय पा किन दिामों की पाकिसपने मत पुचा प्रापही रेखा
और दूसरों मे म रिसाय! इसी से विदित हो कि इस मौके पपने
पी को प्रथम दीया पी किमयों में मम्म्म यातो दूसरे मस
पर रेगे वो परम भये और हमारे मन परे से कम दम तो
इस मठ में दारोगी।
प्रस्त
जो दो पाम् पाहत मनुष्य पर गिरको भप रोप तो ही दोसते
सिरोप इतने में प्रयुतराते हैं। पापाप की पतनी लोक
पपम अपने दोप इस नियम पाल् दूसरों के पाले में पर निम।
पप इस बार अमियों के मत माविप सब सम्म सम्मुत पाण्यात
परिचा
किमधिकलेसन पुरिमाये।
अथ द्वादशसमुल्लासारम्भ भय मास्विकमताम्वर्गतखारपाणपोयनमसम्यानमएडनविषयान म्पास्यास्याम कोई एकापटि मामा पुस्प हुमा पा मो देव बर और गावि गम मों को भी नहीं मानता भदेखि उपभ मव- यावनीषं मुख मीषेपास्ति मुस्पोरगोपर। ममीभूवस्प दास्प पुनरागमन कुत। कोई ममुप्पणि प्रपो पनु प्रपोचर नहीं। प्रात् सपने मरम इसचिप जब तक शरीर में बीष णे मुख से ये। बो को कि मारव का होगा जो पर्म में हो तो पुपर्मम्म में मा हुने रसको 'चरकर रचा देता है कि भरे मोखे माई ! जो मोके पत्थर भस्म होता है कि दिसण्य पिपपपा संसार में व मागा इसलिये असेहोस सबम्य में हो पोक में मौविसे चयो पेवर्षको नामो पौर रस इपित मोग मो पो बोक समो परखोर अपमही। ऐशो! मी बस पग्नि पशु, इस बार मृतक परिचम पार गया। इसमें इमले बा से वन्य पोयी से मारक अम्मम्मे पीने से मर (माया) स्पारोवार इसी मर जीव और के साथ उत्पा प्रेम पत्र के पास प्राय प भी पाहो मा सिकिसको पाप पुस्प भयो। सम्पेतम्पविधिएका पप प्रारमा दहातिरिफ प्रारममि प्रम्पसभावात् । इस परीर में पों को संबोम से जीयमा म्प होमम्मी लिन साबलोपासवा? मोकिमर पौहे की मी जीप मा मही होता इम पर प्रसादीको मानसिप पिन प्रमुम्मपनि होते ही कही। इससिपे मुल्स मसले सामने अनुमानादि पर होने म मम पाव गरी करते । मुनर पीले प्राणिमसभामन्द मनपा पुस्पा म. रचर- भिन्दि मन मा मोवी म्मति मी हो पी। जैस पब माता पिस्पोय की ग्लपिहोती हो पात पी में मनुष्पदिनी भाति परमेवाची विनम्मी नहीं हो बस्ती। मरो समान प्वको समति र नियमहीनमा नोबा गहरी । पराईमा प्रधान प्रपा प्रभाव म्मिी माता मी म प्रयोग से नवमी प्रभातम मना • पो भरममामि RI-समयसम्म (पापभमप्र)स .
माणसमुशास' परिपे। बाजीपमा मोर होता है तभी सपकी प्रथा होतीबायर मेर रेवा व पगार जो मनु को सात माहमा समापुच पूरे मान नहीं हो सका। पही व पसारस्पक में - मार मोई प्रपीमि अनुधिचिधमायमात्मति ॥ प्रहालय मते है कि मावि ! म मोहमी भता कि मारमा पविनम्ती जिसके मोम से सरीर मे प्रवाई पर जीप पर से पूषक होता है पर मैं शाम अमीनी एता बोगस प्रमप्राप्मा महो होसियोग विषय और रिसोग बाप मेमोसब को देती। परन्तु अपने को वही इसी प्रमर प्रमाने प्रय अपने ऐत्रिम रहीम सपा । वैध पमी माल पर पथरि पारे पति अपने काम में रखता। यो प्रयोग प्रयोग पम्मी नही होयविन्न प्राचार प्राप परब दिमा करने को विवा प्रवर और कत्तरिया में नहीं समक्स मावि ममा सो समयी। मुनरोपाय अमापन भये दो पुरुष प्रम मामा वो और रसमे दुलमी पपी पुस्सा ही प्राप। बब ऐसा तो की हानि होने दुल मोममा परेग्य । गोमो सारे भौर मुखरपये में पापा परिपे हो मुशि मुखको हामि हामी है इसपिरेप पुसमापहीं। दुखमपुरममा नेपाली पारमा और इस समाग attatuर में हरिमान सुन प्रमाण और पुलाला कि इस पल्पित मुसको कोर पर परित सौ के मुन की एक पूर्वक्ति बहोड अमिहोत्राति सम्पन्न और समसमानुग्न परोक चिपे मोरे सवालोबो पोक भी वो रमकी प्रामामध्यममलकि- अग्निहार्द प्रयो वदासिपर मस्मगुएटनम् । पुरिपोरपडीम्पनो जीपिकवि शास्पति । जम्मम्ममा पापवि" भवकिप्रमियर होयर वावरत और समस्या इरिर पुस्सपेदित पुस्लो मोरिन ममता। श्रिी सपने समर मम प पु म परक पोसिड ए परमेपर पीरममाण होगा मोबइमा नहीं। Tr-दिपमा मुण्माप्र म प मान सिप विणवमत्र पर मनाया है। अधिोपीको में + सरपणा ॥
३४० सत्यार्थप्रकाश गरिबको विमा भरपता सोपा मोम बमk मोष की सिदि होती है उसको नाममम मोर मोज बने में निन्दा मा भूतों मम। बो निवस और ममणाबमा मेकी । पपि सम्मति से सपा प्रम माहोतोगा अमित मारोपनि परक क्यों नही पिपि राय को ऐवकम् चौर मास में प्रम होने से भामा तो ठीक, परन्तु यो प्रायमरी पापी राजा हो रसको यो परमेमवद माने हो दो तमसा में मी मूबी। मरिया होमम्मान मोजतो गयो र मावि और राम में स्पा मेन रहा । किन भनी हो मात्र मिल रही। चारवाक-अधिगम्पो शीत पीवस्पर्शस्वयाऽनित। के चिनि मास्तमावास म्पपस्थिति।।। म स्वर्गों माऽपदों पा मैवारमा पारपीफिक। मेष वर्णाममावीमा झिया दि फसदापिका ॥२॥ पशुम्भमिहत स्वर्ग म्योतिपोमे गमिम्पति । स्वपिता पजमानेम तव माधस्पिते ॥३॥ मृतानामपि सन्तुना माद पेप्तिकारसम् । गणतामिह जन्तूनां म्प पाप्यास्पमम् ।। स्वर्गस्मिता पदा पर्धि गक्युस्तम दानत । मासावस्योपरिस्पामामन कम्मापदीयते । यापनीयरमुकजीवर त्या पूर्व पिवेत् । ममीमत्स्य वेहस्प पुनरागमन का। यदि गम्परं बोई शाप मिमिव । कमानयो म पायाति पापुस्मासमा ७॥ तवम नीयनोपापो प्राविहिवस्विर । मवानां प्रेवकार्यानिमत्वम्पनियो कचित् ॥ ८॥ पपो मेहस्प करो मपम्पूर्वनियापरा। मरीतुर्फरीत्यादि परिवामां मम स्वम् । भास्पात्र हि शिमन्नु पनीमा प्रकीस्विम् । मपटेस्वारस्पर प्रेम प्रायजा प्रकीरितम् ॥१०॥ मासान्चे बारन तमिणापरसमीरितम् । ११ । मक मास पर और और भी जम की परिसर मन माविक पुषस से सम्ममपुर होम सप पराते बात पता भी ।। ॥ पानुपम स पण पेपा मारा। किन परपोक और गोण्मा और मानी शेष इजीपीकमत पठ पोर एकमाई का कोई मर और पपरोल द्वादशसमुहास में पाया और सोनम की बिमामा बोबा में पराको मामि मने पल प्रेमाता होतो पबमान अपने पितादिको मार रोमकाये क्यों नहीं मेहता यो मापबातों पर और वय पक्षियरोवारो परेप में पागणे मार्ग में निर्षि पास और समाविको पो से पाकिसे मतको नाम में पांच किया था पाम में पहुंची तो परदेश में पाने पर्चा सिपे सो सम्बन्धी मी भर में मरे माम से भयो ऐशहर में पल को पानी पनि तो मन में पप्पोकर पर पता॥ बोममेडोक में बल करने में मी दस से जो नीचे देमे समपर सित पुरुस न तो नहीं रोता!.॥इसरियेच ताबारे दब तक मुसबारे को मम पर बही तो भयले भान पप देना नहीं पडेप किस शरीर में जांच में पाप पिक और मिसमपर शिपम्ब रोमोम पुनरागमन पहरोमा पिसिन माये और और देना बोमवे बिस्सुम्मपाच निष्परोकको तापापात निमारेपजियो ऐसा होता तो मनमोहसमोम पुना पर में यों ही भावना ॥.॥ इसलिये पचयों से अपनी बामियम पार किया है। पवा किया करते सब उनकी पोनिको हरे॥॥ोगमा मे भार पूर्व और विणा अन् या तीन मी' मारि पपिनों के कानुन बम। ॥॥ चोरों की तमा पारे। जिको पीयरमा समम पवमान की सीमाना या मेमा मारि विमानों के नियमही सा॥" रोमोसा बन्ध विपरमाप यसमा।। -बिजासन परमेवर निर्माण किम पड़ पर स्वापस में स्वमाय से नियमपूर्वक मिसन म्पस हीरो साये। बोलभाय सहज तो रितीय पूर्व पिली और पनि बोक भाप सभाप लागतम जाते ११॥ ौ मुख मोम और बाकस मोग प्रम। बो जापानदवा तो सुखदुखम भैगो स! इस समय मुख दुबमोचपावती से परमम्म में मौहोता त्या समापद परोपम है कि किच मी रोमियों की विभा देगी ! मी कगा। पय मर. होम मरादि समापी मनीग्री रिचार पतको भार मासोबमसित विवाहादि समग्रमीम होमेम माया पुराथमतपणे समीरिये इस पाहमान भारतीय ॥५॥बोनमम प्रभाव कमी वहीं होता रिष्मान बीबर मात्र पीदो पा मम्म होता है और नदी, और तारे मौर में गता परियोजचाहिम हिानेपाम समोर मोग प्रद शविर पापी राम सो सम्म में नमी मरक मोगते हैं इसमें मारपी॥प्रमीयर और शरीर मेय - समार्यप्रकाय वारे और उसने पूर्वसम्म क्या अम्गारिमामा भी दी पर इसभिषे पुमा जम्स में नहीं प्रास।.॥प्रायोमे में भी जीविमर्प पमा चिनी परनु बोचर होने से पानीप॥॥ मग मी बो चारपक मादि मे बेगरि समयाप रेगे मुमे पोते मों की मिमामी ममते को मार और निवास पुलों मे पाये । सामोर निभाते ही मार पूर्व मिशाचरत् महापारिरीकामा एपीपकी पूजा नों में महीं पर योगीमा प्राभावक और और वियों पर इमाने मूग या दो संदितामों मे मीच मुपपरेख और पश्रिी पिन से पा इसरि मामा परि होमग भी की मिरा मध्ये, पराममानियों की प्रमायाम्म मोबपरिपत मारोमो रेलमारी तिरोधी होम परिप्यम्मी भर समुद्र में जा पिमा ममा बियप भी सिंगम मामाले मम्मे समागम माया मोर समाम की मयसीमा मादि मन सिप अममी मोमों से प्रय ममुप्प मम नहीं है कि हम मापापी ममारियों माराम मेसिन भएर मान्यप व रख ! समय कोरवो इन मावि पोलि पिध विच्छे को मिला करने परस्पर हुए। पिक वो अपनी गुदि मे पम । पचविणे ग्नमें इतनी वियही दीपी मो ससम्म मरिया कम समसमरस समान।। ।ौरबो मास- पमी गनी ममामा सेमरों की बीच इसपिये उक्त सम्ममा गति परतों में ही मांस मसलनही बिस इसलिये परि मिथ्य बातों पाप माने औरविहाँ सोच मे मिला मम्मानी पिदा की मिसम्योगमको बोस । तोपकमिलाने का निरोप मिा मोटरमन विमम्मी मामा म पसरे पुचपरासबिना पाय मान्य होगी इसखिये मनुष्णमान को वापस पा समुचि॥ बो सममापियों मे मिया मोड- अपना मोहानाम से अपना प्रयोग सिरममा भर्ना यह मपाय मांस बो और परी बम प्रापि दुरामों की माचि हो यो को महसम्पा इन बातों प्रेम समोर मान बोम बॉम मित्रा करने सपे और स्सक पकवापिस पानीमापदरी प्रबन् माक्षिक मल था मि। बोचरमादिमा समान चिले तो मोमों को न्म सनसोट मत सेवो शाम पोम मिनाशकाले विपरीत बुदि' मामा ने मम्मच पायौ ममुमती रिहोगी। अब वो समरिम में मेरे सोमिने-परमविपाक्सी तो में एक परन्तु की पचिपात बीवोपरि मोर पसोप्रय पाच मी त मापन। पुर्वम्म मौर परोकपी माय . पसा प्रमावो बिना ममा पनि प्रमादौ मीनही मावता । सात समसच बोखाये में प्रारम मितिबार दादरासमुनास और बैन प्रसारिणों प्रमाण प्रबादि गौर पुनर्मम पाल और मुधि मी मान्धवमा होमयाबीर और मिपा प्र मेर। परन्तु मास्तिकता र इमरी मिना परमोप पापा [ भापकर्म और बागम को पाइमादि बातों में सब एक हो । पापणक मत सोप से पण विण ॥ भय पोमव के विपय में सपेप स लिलवे- फार्मकारणभावाला समाषामा नियामकात् । भधिमामायनियमो दशनाम्तरपणेनात् ॥ भभापमान मां पर्य के वर्णन पाए और माय नम पारिक सामानमा से ऐप में अनुमाव होता समिा पचिपा केसम्म पार पर्व नहीं हो सकते इम्पदिपों से अनुमान मे अधिक मारमपरा से मित्र याचा पदों की बौर पर प्रसर -एक "माममिक मरा योगाचा' वासरा "सौमति और पौध मापिक" ।। "दुरपा मिवचते स 'बोर" को बुरिस सिरो प्रभाव जोरात आपकी बुरि में मात्र उसमे मारे और मोनि में मारे ग्स पी माने । इसमें 1 परिवा माम्ममि सगल्प माना है प्राव जितने पर। ये सब एप मर्ग भारि में भी होते अम्त मैं वही गरे मन में हो त ? ममी प्रवीय समय में पभात् एम्स रोगाय से स्पति के पूर्व परमी वा पसरे पसात् ही रावा और पाम समप में मामय और परामोसन में यस पयाम नही हटा इमविरे एम्प ही एक तत्व॥ एमप पारो पर एन मानवी भाव पर मोटर साल में मासत बारमही अस पान पाप्मा मैं मी मनुण प्रबो किया सीनो मौतर मनमो हो महामन्य पेमा माय। दामा "सौन्ति" जो परम भनुमान मामयी पौकिनारा थापा स्पोरा पी रोता कि एक रेग प्रसर होने स ऐप में अनुमान किया जागी सम ऐसा म॥ पौष मापिका रक्षम मत पहा पहा प्रपती भावरी "मयं मीलो पट" मस्तीति में मीरापुर प्यादि पर प्रवीन इम्तीप पपपि मम भाचपुर एक हपपि गियों बुमिमा पचा प्रभा गायो। म पनि राम में सा पुल पारपांगमय और पिन् मयमारपारि भाभमत है। समय एक पर अपनी बुद्धि मनुस्मर मित चमत। • पति सस्याप्रकाश अब इन दारों में 'मामि सबसि मालवीर पब २ में पुरि परिणाम होने म यो पूर्व में मात बानुपरस्म होम पण में महीं गया इसरिये सबको पयिक मानना गरिये पसे मामय है। गुमरा "पोपमा जो प्राति सो सब कुणी सोकि प्राप्ति में ना मी नही पत्र में प्रप्ति में दूसरी इमा पनी हो रातो र मभर मानवा॥ तासग सौतिक सब पदार्थ अपने पद से रितस गिलों से पर और भोजकों से योग ज्ञात होत्यसबारपण में सरा पते पेयमगी। धौपा बिमारिक खूप ही में एक पहा मानव॥ प्रथम मानमिक सन्मे शुम्प मानतामा रसीप पर माफ्लिम मोरे इन्परिौदों मपुत से क्लिाव परसमा परम्पर भी माम माम् ।। २०-यो सब न हो तो पूनम बामने पचा नही हो सत्य और वो सब पून होये तो एम्पोतून ही मन पर इसचिये गुलाम साव्य पार हो पा मिले और बो पोपाचा पम सम्पन माना यो पर्वत इस मौत होना चाहिये योनि मानतो उसके में पर्वत समान प्रकरणमा सरिसे बाहर पटरी और पवन प्राप्मा में रहता है। सीवामित किसी पदार्थ प्रामी मानता हो पाप सस्प और गम्भन मी भमुमेन रोमा परिये प्रमही जो मारो तो भ प बोग मी पदोबा चाहिये बिनु म मेगा पापा म एक देशी और एक देव अपम सीमितु ममुपाप प बाम । "माम मामेव नहीं कि सपनों में प्री एक उससे प्रासप होने से सबमोजक्या मी प्रमाण होते मात् साकार रोताहै। चौध मारिक पाल परान प्रा माममा कया मोनिशाय और बालवा भी प्रवर तापमपि प्रमसमसिन पारदोती मशाल भाष्मामे होण मेमोक्ति परा और ग्सम गाव परिकहो तो प्रमामिला' प्रात् मने पपती पेमा स्मरणोपरा गहिये पातु संपत अस्मार होब है इसलिये परियार मी मरही। बो सब दुख हो हो और पुत्र भी बहोतो अब पताके बिना एक सिर मी हो सस्य से रात्रि को अपेक्षा रिम और दिन अपेक्षा से पति होगी। इसरिये मम दु:माय भैर पी। बो स्मारही माई तोकेसमा म पो बस पास मोसमात पुल से मिान और पाच विसी में अमिय इसी मर मिमितमामबाणी । एवम विचारही बाद ममवारपासून से मिायो॥
माणसमास सर्पस्य संसारस्प हुत्मत्वं सर्वतीर्थकरसंगवम् ।। निमको गौरवार मात्र मीच मी मानसरे, इससिपे पे दोमा एक मोर प्लोज भामामुल पांच समयमा सभासपों पीमिति ससम्म नियम मा मुछि मा प्रपणे शिपोम पोमा आचरम उपश्य रहे। गुरु बाप ममार अगा। परिजन में पसम्य होये से दुरिकोभमभर मासी समै से प्रपना- म्पपिपानमनामधासंस्कारसंपा। (प्रथम)यो इनिस्पति विषम प्रापिwar"मसम्म (स) प्रामपविजान सचिब पवन्यास समार को "किाममा (a) म्पक पौर यिनस्थापक राम मुख दुख पारि मोतिम मन्या में परचम (ोष ) गौ मापि ममा सम्माप मामी के माम माषय रूम को 'सशस्म्प" (पामा ) बारा यगोपरि मोग और गुण तृपति रपया मद, ममाप अभिमान भर्म भी पमम्म मार प्रस्माकम्प" मानत । स संसार में दुम्सम्म मुख मरसमसाममम्म भनाभो संसार से चरण में अधिक मुधि और मनुमान सपा और मामला बोर माata एना लोकमापामा सत्यापपणनुगः। मिपर्स गाथा लोक उपाययामि किला ॥१॥ गम्मीशानमेवात पनियोमपर धमा। मिया हिराना मियाम्पतदपासा ॥२॥ मर्यानुपान्य रो माययपक्षमानि । परित पूजनीयामि फिमम्येरि पनि पामेन्द्रिपाणि पप तथा कर्मेन्द्रिपापि । ममो पुतिरिति प्रोकं शरणपठन बु॥४॥ माद मो शानी पित, पाममुक का नाम पुर परिवार पराधीसम्मको समयमा जोकि भिवपाषा पउपदेशको गिसम गुम मेरे और पावरपायों सपा सभे माय।।1।। को सम्भार को मस्मि मेरस भी २ गुम भोर मा म मित्र २ गुणों पर ओमम पापपुल पूर्वम पे गमको माय॥१॥ो रणवशीपोमो प्रयास गरिने माखमम्पति पराधों में प्रमाण अपात् पारा मनर या पिप RN RETमचमी पहिरे रीमा मम पस्य पार॥३॥ की रणन एसपी-बार झप इन्द्रिय बन्। भोप बान मर(ब) में , पापित रिसर.
सत्यार्थप्रकार मिर सिमपांच मंत्रिव अर्यात् य, इस्व, पाप गुम और राम पन्द्रिमा और मम, पुनि इम्ही म समर मर्यात् इन्गे भान में प्रा रखा इम्परि और ममत है || रसर-यो सब संस्पर दुबस होता तो किसी बात मावि बहोली चहिये, संसार में गांधी को मचि प्रम दौमती है इसलिये सब संसा हुलस्म नही दो समय जिसमें सुबह दोनों पर बो और मान ऐसा हो सिद्धान्त माने तो बारपारि मग भौर पम्प तप बोपन्पादि सेवन के परम करने में मार होन पुरती माबोर हम सच तो होते है परन्तु इसने बुधो मानते है तो वामन होसमा पहीलोकि बीच मुख बाबमा पहुचपको नित पवार में धर्म चिनियमादि महार व मुखभरकर इसको की चि समलिपी मान समय मिला। वो पांच की। मी पूर्ण अपूर्व लोकिदो ऐस २ कब स्थिर बने तो एक २ बस भेद हो सके। जिन सीपहरों को उपदेशक रोमाच माबोर अपारियो माया कामी भाष पामामा। उसमे नही मायने तो सीधरों में उपदेय जिससे पाना १ बोन कि सपा तो ऐसा मन संमत ही काय अमित मर्मग्री सस्ता प्रवपरमो धनुसार ऐस्य होय तो पाच मी समर्म किया पो पावे पुणे सुभाने की शक्लिा समिनिवासाची यो भी होगाते बचपनी ने वो पेस्य व सपा मि पर पुष्म्मि सक्षिपात रोगपत मणमा समान है। दो शुभस्म हो गत उपदेशो किमान सम्म कमी पहीदो सच्चा से सूक्ष्म अस्वसो होबाला सहिये पमी काम समम्मी।बो मन्नों पार्वन को झेडापखपतमा मोजमसाल माते पण प्रब और पापमा की झालीबी मते बन इन्द्रिप और अन्तरब की ना मी मोलम्बोमन और मिनी मेला मेन रहा को मसेरे पैरवीच सके वोभामुहिमीमा हो पैनी बाते या मुलिमयसमयको महीने अपनी पतिको सति की सिम स्पपप इस विप सभीभमन्या ।। मिनी होगी किवा से विरोध करने पहीमा मिया । सब संसार की हुम्नम्मी ममप को मिका में हाण प्प पी लाइन शानशा सर पदामों से पार मोबो मुकिको बारी हो सो भवामी बाँध मौरीपयो पम्मी पास हो सीपमा होइन पौधा बनभेष मामले में भब भी पुल पाई तो सभामाभन ऐन अपम्न बम समे। अर्थात् एसप। ।
वादयसमुमास विप्रपिताम' प्रम में पर्यो भइसममा ममत विय- पीयानां सुगतो देयो विश्व व पवर्मगुरम् । पार्यसम्पा वस्वषतुएपमिदं कमात् ॥१॥ कुममायतन पेर त समुदयो मक। मार्गमेस्यस्य च पास्पा क्रमेस भूपतामत ॥२॥ दुबससारिणम स्कन्धास्त पक्ष प्रीतिवा। पिवान पदमा संशा संस्कारो रूपमेव ॥३॥ पझेन्द्रियापि शमाचा विपया पक्ष मानसम् । धर्मापतनमेवानि मावणायतनामि तु॥४॥ गगादीनां गयोऽय स्मात्समुवि नांदि। प्रारमात्मीपस्त्रमावास्यः स सारसमुदप पुम ॥५॥ जणिका सर्वसंस्काय इति या पासना सिय। स माग रवि विप स प मोषोऽमिधीयत ॥६॥ प्रत्यवानुमान प प्रमाणदिवयं तपा। पतु प्रसानिका बोबा व्यावा पैमापिकावप ॥७॥ प्रर्या पानाधितो धैमापिघर पहु मम्पत । सौमास्तिन प्रत्यक्षमामोऽ परिमळ । पाकापसरिता पुरिर्पोगवारस्य समता । कपन सविध स्वर मम्पम् मम्पमा पुनः ॥२॥ रागादियानसम्वानयासबाम्बरसम्मवा। चतुर्णामपि बोयाना मुहिरेपा प्रकीचिता.१०॥ रुतिः कमगर सुर्मादाय बीरे हिमोग्नम् संपो रकाम्पर परिभिप बीवभिपुभिः ॥ ११ ॥ औरों ससुगतरेव दुद मापन प्रकार और जगत् परमगुर प्रायपुर पौर मापी स्पा मों की प्रात्य संगारि मसिर पे पर मौरों में मम्वन्न प इस सिको समपर यने सरकार समुरर मात् गति होती है और इसी म्यम्प प्रम • पुनो । २ । संसार में , Trutो पमपममारे रसको गाम्प पत्र माद्रिप ग्मो मारि रिल्ल पर और मारि भन्ममय बर्म प्रभावशारण ..गो ममुपौर में पपापरि समाको रत्पति होतीप ममुष पौरबो म्पमा पमा सम्पौ भौर समायणम्य इमी सेन समुष रोखी। सब स्मिर पिकापापम्प स्थिर हापौष मार्म और पा राम हम घुससमय मोड। ..और बगर और अनुमान रोही पम्पब माघर म्पर इसमें भारम्परिक सौग्रन्तिक पोपाचर और मामिल सत्यार्थप्रफाय में पम्परिक भार में जो भीरमको विमान माण्य सकियो भय मही रेग्मम रोप सिर पुस्प नहीं मान सम्मा और सौपम्तिक मास को प्रसव परार्प मानवापार महोयचा मर सरित बिना पुदि मानबर और मम्ममि पर अपने में परापो को मान्ममा मात्र पापी को नहीं माम्ब और पारि जान के प्रपाको बसको पर से उत्पब दुई मुक्ति परों बीदों की गप्पनिमा मरा, मर मा म पम पूषादय पर्वा एसोसे मांग मध्यनरी रकम पारप पर बीमों लो। 3 -जो पौधो मत रोगी तो रसम गुरु और चार यो नि पपमा होतो भिप पापापी रेस माहोल परिने यो पर होगा तो पा पार्षदीपही रहवा पुमा माय सिम रोजे । यो पिम्पद हो म मापं तो इनम मोष मी पाया। बोहाम से मन हो तो जाम में भी शाम होच परिपेरिम पडपरि किया किस पर प्रता। मानो पार पाजाम मिप्यो हो समाज भामर से सरित पुरिदो तो पप होन्य पहिये जोगा बाल दोहरप में प्रामास्वहोरेपा पदानों को अपनायो मायभान अप पराध किया तो पही समा जोपसयचो मुवितो प्राठि में मी मुधि मानी चाहिये पेस्थ मप्रबन्ध विष्य मे मिहोने पर विरत्मपान । इमावि गर्ने संवा बारमतों की पर्मित मरो।। अब हरिमान विपरणाम सोनाममा रिपोरसा मतावरको गोप मी माते।। पहां से भाग जैनमत का वर्णन है॥ मनपरबानमा पर में विधिलिपी- और डोप समय २ में चीनपन (1) मामय (२)भग (२) बीर, (.) पुस्पा । पर न मानते है और मोम धमसिन अपमातिमा श्रावणातिर पुणवानिमम बीचतिमन और भा पकानों को मारो।। हममें भाको पतिपवनी माचे विन्त स्म हो ममें से "पोखिम"बो विपरिणामीप से परिधामको मास और परमपी पति से समाप सम्वनीपमधिमाल और ममतपत परिवाम और रोल में नाकामा पनि किलोमिता से परिवामी पाच त्या प्रत्यको मिति भाग्य भो। पीया "मामालिया मोकिमो व मी म भापार बिसमें अवमान प्रमेव सिम मावि पि बरे बीच तमा पुपरी कोपान अ पौर मापी । म "पुत्पमाजिक जो भावाम एम मित्र एक रस, पब स्पर्मबलिपपये और - मादयसमुत्रास । गबने स्मात्याय होता है। पांच बोपलिया बो वापस पर्यन में उप्पुन अमान्त पापों से परिणामी होणमा का मोमी और क्म 'मख" पाकियो पूर्ताव पचस्तियों म परम अपरल ममीन प्राचीनता मचिम प्रसिपमानम पांचों से दुखोपमा माना है। समीक-बोरों में चार म प्रतिममप में मान र मायेचे मूह लौकिमण मा बाल और परमार पेमपेप पुराने मी नहीं रो मको बोधि प्रबादि और परपम्म से प्रविनायी पुषमय और पुराम पम पसता और निमी प्रमाणप मी कही कि पर्माधर्म अम नहीं किन्तु एब दोनो बीचत्रिप में भाग लिने मामय परमानुष और मन मानते तो ठीक पधऔर बोलनमोपिक में माये का बोकि विमादि पांच सव भव पण भामा और मम पेन पूषा ९ पदार्प पिशित। एक बार मे तन मान म ईभर मेन मामय पर ही की मिय परापत की बात है॥ प्रबोर और की चोए एसको और माहार मानवे ? सो मही कि सपा इसको प्रनम मापते लॉकिरमपी मापा से पुक अर्यात पसार इस प्रभाव प्रशिरोध किया है। एपमा असर पा महा। पम पम माप से इस मोके असहाय एसप है। वासरा म्य परीकि सबसवमा" भादवाना तो है परन्तु पानही लौकिम रोपों से पुको पपा । भौम मा 'मोऽभा में अपर पा" सर पर अम्पत्र की प्रपेशा अपने में होने से साफा माता पद उसकी दो संभा मान् पर और अपर मोहै। पाच या पार किपको परमप अपोम्ब अर्थात् ग्स में पारम्पी और परफ्न प्रामहै। पम मा मामि बो पानीमम पोम्प मी नही और बोली और मरे बोम्प मी १और सावध मारा कियो भने कोही परनुपमही और पोकेमोन्म मोदी पर ससमा प्राय है। इसी प्रमर- स्पास्ति जीवोऽयं प्रथमो मा।.. स्पामास्ति शीबो दितीयो मा ।२. स्पाइपम्पो बीपस्ववीपोमा स्यास्ति पस्तिस्पा जीपमतुर्थो मा ४॥ स्यावस्ति [ग] अपहम्पोजीय पक्षमा मा ।। स्पापास्त्रि [प] अपमप्यो श्रीय पष्ठो मा ।। स्पास्थि मास्ति प्रणम्पोप इति सप्तमो मार ॥७॥ म-पौर पेस्यमबहाब दो और रे विरोपीबह पायाम और में ममाप म्यमपम प्रायो। सप मापार कि दीपारा - मूस में तीसरे मामध्ये मी 'पापमये बोम्बासial . मनीष में माराव सेबीच मारना और तब त्योबेसेप मा बामी मा (बारित)ी। इसी प्रकार में भी इससे गुप कर्म स्वमवसमाव धर्म और मिसरा मामो मोषों निमम विकोपरा योग " िऔर 'मचित" पर्वात चोरन साममोरे विकी पते...पर मा तपा मारणेबपत् मिस प्रक्रिीमदभवणे. ०पही (१ परन्तप मा मषित प्रतीत होगा। प्रौसममा होतीसरे और पांच में मम ३१० सस्यायप्रकारा में ऐसा प्यम मौहोता है इससे पा दूसरा मा सम्यो। प्रवे पोप नहीं पातीसरा मा बौष शरीर पारवमय। और बर बर से पृथक होगब मासिहरावा ऐसा काम नमा मते हैं। बीवी परन्तुमने बोम्पनीबो देस्यमा पाम भन मते हैं। बौष प्रमच प्रमाद से प्रवे में यहां पर प्रया है ऐसा प्यार सको क्म मामा बरमपमुमान से होगा और भएपपप में होना और एकसय पप में परिणम मे प्राप्त होमन प्रति मास्ति न हो और नयार मोमोबेपसावको भापता इसी प्रकार मिव्यास ससमी और प्रमिला ससम्बी न्य विशेष धर्म और पापों का सम्म होती है। गुग स्कमा पर पानी के सामान और कवियों मनाहार और सममको पात्र माया! समीक्षामा समपक प्रमोन्याय में साथ चरितार्य हो सकता है। इस पर प्रकाप को पोरम प्रशामिनों गये लिए दोनो। म समका और मापार माया से समय में भी मिल किस समय। इसमें गौर और नाम पर मत है। दोघे मिसमाच मी होगा। पब इस मामे पल में रिचय विरचित परे तत्त्वे विस्ताविमम् । उपादेयमुपादेय हेय हे कुठ१॥ हेपनि गागावि तत् कार्यमविधिका ग्पाने पर म्योतिम्पयोगैकात्तमम् । २॥ -- परम बोलिभाम।"
माणसमुत्रात समाद बीब विष इमरा त म को महो मानने कोई मी अनादि सिबर नहीं ऐसा और जैन पोग मानते हैं। इसमें गग सिवासारखी 'इतिहामविमिामा" प्राप में मिलते है कि इन दोपमा एक और दूसरा और ये पर्वावगी यम परा में पममार्गी मध्मासापरी पर बसाय नियों सिपी पर गो महाया और पौतम गयपर? रसम प्रम बौली मे र राप और जो वैदियों में गबर और मिथर इसमें शिम" पाम्पएलम। रम राम शिबम्पनी ने अपने पहिमम तिमिराबाई' पतीसर सपा में मिली कि "स्वामी सागच मे परिसे गिम' को एपस चार बरे बगमा गयो।। मारे भारत में और समय नकर्म प्रमा एमापा। इस पर बोर-चोर भने मे माग प्राण ग्स मत से बो महापौरपा गौतम हामी ममप से पर स्वामी समबहकाविस पार माग्नम्न में साहा और जिसको भोक और सात महाराज माम्म रमसे जैन पर मिमी लग रही मिष्य सबसे । “विन" जिसमे "म" मा गैर राशिम और मियामी पाल्याची पोस्ट में दोनोपन की मिया और गौतम कोदोनों मामले मोबीपवंश इम्मावि रामे और यो में दिम पुरको असर महानी) प्पम में मिल रमले समय में पE म म मामले जोखिममतम मत ओवर मम्मम्पोजन वा इसपहिग्स बमो पेयपानाम से सिमी।" ऐप होममरमेय में मो पिका- सर्वप' सगतो पो धर्मरामस्तगत। समसमठो भगवाम्माखिोकमिचिम ॥1॥ परमियो शयनोऽपपाती विनायक। मुर्दाड मीधन शाम्ता मनिशापममिस्तया ॥२॥ सशफ्पर्मिट मर्प सिययोनिमस। गौतमभापपुष मागनेवीमुतम स॥१॥ प्रमरोड से । मोकामे १५ अब रेमो पर शिम और रसपान पम पमहान्य भमाजिर मी पुर निलो निमये में भूप से अगिार ? पोर अपमानते और न एमो म जम्मा गमत पाम्नु जोम पिसब बामकिपुर' और "रिम तय "और" और " पपपपी मोमोन माग ही पामेनरोगी जो अपने वीरों ओहो ही मुखिम और परमेशन मामले प्रमादि परमेशा महीं। सच पता पईन् पती तो जिपपा प्रति माह पम। भाभिम्फर सरि "महाधिपमा शिय- सस्थामकार समंदो पीतरागादिदोषस्तोत्पम्ति । पपास्सितार्यवादी व देवोऽहम् परमेश्वर ॥१॥ वादिता ने भी विशि- सर्पयो श्पत तापम्मेदामीमस्मदादिमिः । रणेन कोऽस्ति निङ्ग वा योऽनुमापपेत् ॥ २॥ न थागमपिघि कमिभिध्यसशोधक। सपनार्पवादाना तात्पर्यमपि कल्पते ॥३॥ म पान्यार्थप्रयानस्तबस्तित्व विभीयत । म पानुपादित समय पूर्वमम्पैरबोधित ॥ ५ ॥ बो रामारि गोपी से रहित प्रयोग में नाम बबाल पारीमा पवन नदी परमेवर विससि म इस समय परमेय को नहीं देखने इसलिये कोई सह प्रमादि परमेवर प्रसादी गई मला प्रमाब नही तो अनुमान भी नही सवा किराया रिप अनुमान महीपणावर प्रत्पर असमान नहीं तो प्रापम भर्ना विम प्रन्परिश परमात्मा ममोपक सम्माय मी महा हो गया जोमी पम्पय माही तो पर धर्मात् प्रावि किग्रा परति अर्थात् परने पर अपवन और पुरानस मर्कात इतिहास पर्व मी महीमा और प्राप्रपाग प्रभात् गमीहि समास परोष परमात्मा की सिरि परियाब भी दी रो साता पुमा वरपरेप्रमों में सुमे विध अनुया मौसमता इसम प्रपन्न भयंत सरान-बो मन्पति महोबो "मार" माया पि भारि चरम सीमा सिंपाव पायोल समय पोषित माने में स्पष्पर मोदी ममता और शिव परापों सरीर बना है मोमो से सम प्रमा रमरपुरमको बम सम्वेपार रसम बायोमबार भानही मही और गोगामी हो कि होम पसन् दोष दिवास्थ मी नही हो सस्ता किसिमपति से मुखोज मुक्ति रस निमितले परमसममा मुधि भी पमित्त होगा। जो भार और पारपसम्पपरमभी महीनोमन्थनिरस्का एकोण और परिमित गुप में सम्परमा सति में ममा पस्यपी मना इसमिप मुमार बारामारीमा मध्य गुम गो पर ही मामले मना) मग १ मे मस परम समापनीत सच ! • मोनालिब मालिम्मामासः ।। tater' पग दियो परमामा आमी मरीन विमापौर नपारे।
- मादशसमुशास' प्रवादि परमाध्मा कोरेशम पापम मप विध्य र पोयम्पास से पमिपमा परमामा प्रल रेज्य मे विमा पो नियमोबना भी प्राप्ति नही होता से ही पोयाम्पास और विज्ञान के विध पामामा मीही रोग पाता समृमि मावि गुणहोस योग मे भावपी सम्म स पुषिी प्रोवोस इस थी में परमाम्मा औषमा मिशेप वितरण पमा प्रसाद और जो पानभयप्पा समय में मप सन सम्प सपाटीपम्तर्यामी परमाथ्मा मोत से इसमें भी परमामा र होशिनुमा होवे में क्या समझो सपा और ममा उप अनुमाप होने से प्रापम प्रमाण मी मिस अपरि समय पोपक बोवी इजिप सम पमाय मी ईम में बवामी प्रमार्यों में मगर सम समान प्रबार प्रांत पमेयरले गुणों की प्रस्थ बना मी पपा पटामिनो मिस पहा रम गुप, कर्म समान मी १ मी कामे में मी प्रतिकापकहीं से ममुन्नों में करे बिना कोई भी पर्वमा रोग से ही इस महत्मक कचा विमा होन्य सर्वमा प्रम। बब पसाबो ईमोरे में मा को भी अन्य नहीं हो सका। अब परमामा के सपो मनेजरों स मम्मी पथ ग्सम अपर नपा मी सर। इस नीति प्रमाबी मेमस सरसबममा भारिपार अनुचित ॥ म-अनायगममा सर्यप माविमान् । रुधिमेण वसस्यन सर्व प्रतिपाय ।१॥ भय वरमनिय सर्षपोऽन्यः प्रतीयत । प्रकरपव कर्य सिमिरम्पोऽभ्याभयपोसयोः ॥२॥ सपशोतवया याफ्र्य सस्य वन सदस्तिता। कर्य वम सिम्पत् सिपमूबान्तयत॥३॥ पौष में महमा प्रपति भी किसि दुर प्रसार रसम प्रतिपादन विप्र प्रभार सहास और यो परमेशरीप मेश पिरो अपरिपपरिणाम मेसिदि[ और ] परिणम प्रमादिम की सिदिमम्मोग्लामर रोप पाकिस्परेमा परापOR और रमी मरम्म पर रिमोर विरमदा! रस मारा और पमेयर सिरि हिपे ठोपप कोई प्रमाण गरिने जा ऐ मायोपे तो ममक्ल्याप ।। To-नमयोप परमभमोर प.गुरुमे, सभा में प्रगति मास प्रमारिदिप पन में प्राप्रपदाच नदीप साम्मे भाप भरवमयमा मर्म में पाप प्र समीर कारप में भर्गमम्माभिमश और पारस्पात ४ सध्याश्रमका एमममी पिववि एष विम होने से ईबाबात मे में प्रदोष नही ।। और तुम तारों में समेघर माते हो पम्मी पा- सच्या विविध माय पिता के मन यसरीमही होवो वपना- शाम और मुलिको प्रसन्सी संयोग पारित होगा किरिया स्मिोग मोम हो दो बी समय समिने प्रथरि पनि परमाध्मा प्रेमाबो। देखो ! यो विनोद सिर होणे मी शरीर प्रातिसरा को पूर्व से कहो पाम समय सब मिमीब मुसि रण में प्रयोग उसमे का मी भाषही यब बन बाप नमे प्रास होखी म राम हो पब, पेय परिचित समय एक देश में रानेपये की इस माममा विश्व प्रािरिपुतमिलोमलकोई मोबी मान सम्या जो तुम भोकरे वोयर अपने माय पितामों पवन प और राको माता पित्य किन ? नि मरे भी माष पिता किम से हुए । इम्परि प्रवक्तामी मास्तिक मोर मास्तिक कासवाद । इसके भामे मारपूसे भाग मालिक अखि संपा भोलि जिसको यो । श्रषिों मे अपनी सम्मति - पाप मात्र भौर मुर्मा में वरना. मास्तिक-वर कीयामेजबीन नोकपप से। मास्तिक--का सब से होता तो सिसोबमोमो किबीच भारि महामोजिम प्रोबादि सापकोंबीवी । बोभो कि भवि भव भोर समाव से atar प्रनारिज रुप असम्भव होमम्पर मन में मुखिममालाप। जो मोकिमपभ्याम् भारिपाठीवो पिप बसले में निरासबर्ग । परम राम रोये पाप सब बीच भपनी इमा से मापी भोगना सर मारि बारीमा पर अपनी रासदी मनि रावनात्य - माती परमेश्म मुगने पर पाप मोर पुस. सोनभोफ्ते मामायापासवान मोमो परमे। - निकिको मवा होय नाभर भी भागाप पाब पिये से कम पीठ मुधको प्रति मात से तुम मी मागो. मा-मकिपीमितुतिमापोपी और बोहोरामपि पर भी यादो सम्मानम एप्रिम मास thatीम बने हुए मान्न से इस भरोई भी पिार मरी मान सम्मानिमिमता विपीर पालन •भन्मा लि.
34 माणसमुशास' होगपकिचर परमपम बीच मा पथ्य किसी मिमिच सम बम हो तिमी पार हो जापग। अपने वो सभापम्मी मी कोर सकता सोवियम्तमान और प्रान्तमायण इसरिपे इस प्रति स्वसमिकाको प्रममा पोप। देखो! स वर्षमान ममप में गोच पाप पुल मय सुचव मोगा सदर कमी भी होय । जो ईवर जिवायम् महोवा को इस जप को कैसे बना समय! गोको प्रगमात् प्रवादि सान्त माने तो मसमापन समापस नहीं रोगको पमयप सम्बम्प नदीपोत अनिम हावा मो मुक्ति में मिलादीम मारठे हो तो मुटाव शाम पर होगी ! गोमो रोवेवो भन्ता मिमा पसे पाया कि मैं पापयत् गोमात एक रिममे परे पते और कम मीवीर तो मुलियाई किन्तु मम्पमा और कपम म परमपे । ना०-चा व्यापक पही। जो प्यापक हाल तो सब बातम पो ही होती है और प्राण्प पत्रिपपल गाभाविकी रचम मम्मम मिका प्रबन पोपोकि पर मर एण्यामा वो मुयामाई महोमी परिने । पा-म्पप्ण पौर पर एक ही से भिन्नु पण एकरेगी और प्पापक समीणो दस मामय सा में म्पक और भूपोग और अपपरि सम्पन्न एकरण पृथियो भाभण पापी पर और जमा एक ही स सब पापयदि में समन म्यपी और पापयदि ज्यभरा महीस पामेवर तम मद में पौर सब सब नहीं होता पिर अधिात और पौरमा चार अपमा बराबर महा विपरि साप और प्रामभापरिर्म मुखर सम्मको पूजाषिक होने प प्राव पनि भैरव या मोर सम्पर ने वारे माने सव।पों की मान्य जैसी "मुसमुमत में सिमीप रेसपो॥ मा०-गोबर की रवानगीवीता मात्र पिपरिमय काम ! मा०-ऐसी मरिचको सामरिमनदी, गो गोनों बर्म-ससमोरबी मलिनु जारी पतसे पास पोधि परिये स्पट रिसभ म ममम पास कई यी मावि मामा और म प्रायमरमा पर इन प्रमों म्भीर और जोरो परमजीम मौकास इमदिरे भारिणीय पोरों पर प्राचाराधीन पप ग्नम पुर समियरमम।। मा-गर परमात्मा मस्त प्रमादि रिभरम समस्या तो मन् प्रसार मेंमों पा? मनपसमयमा प्रमा साधाय ममुप भी रीमत्परताभिय! - - मन सम्पनर शिपम .
सध्यार्यमका मे विपदि गुणमिल होने से ईसामसीव में मनमोप मी पाय ।। ।।। और तुम तोगको परमेया मानवे रो पा कमी ही सम्य बोकि विन्म माम्म पिता के समय पर ही बहीख तो वसमा शाप और मुकि म पा सकते है। हो संपग अपिल होत लोकि पिन्ध रिपोग के मोय हो हो ममो समय इसरिये पनि परिमा परमामाको मादो देवो! परे विमा हो कोई सिर होतो मी शरीर प्राविरमा को पूर्णता से ही बाब समय मम सिर बोष सुपति पणा में वाप रसभेममा भाव कही गय पर बात को प्रास हामी तपसमा म्पून हो सका है, ऐसे परिचित सामनपरे एक ऐस में रहनेपरेको इमामबा विध भान्विनिपुट पिलों से नई मी यी मान समय। एम मो कि तोमर अपने माय पियों पये किम से पौर मो माय पिला किन से! पिन रहे मी माव पिता एप । इन्परि मनमायभायेगी। मास्तिक और मास्तिक का संपार॥ इपके भागे प्रसार के पूसरे म्ग भास्तिक पस्किल मोक्ष पहा बिबिसीको मिलों में अपनी सम्मति साप माप और मुम्मा मैपपपी। मास्तिक-घर कोचामेमापहीरोख बोकावीपर्म से। मास्तिक-बो सब होगा तो में बिस होगी।बोमो बाल मावि पोवो बिष प्रोद्यदि प्रमों मे बाधर्ममय किलो प! बोदो किमपि भय मौन सम्पब से होते है मानिसहप मसम्मबोर तुम्बरे मन में मुखिपत्रमा हम। जो भोलिमल्यू अप्रति सान्तवो पिच पर प्र म मिच हो गये । पावन समाता न हो वो पाप ने बीच अपनी पा से भी ही भोपा र भारिपारी प्रसर अपनी पारी मापन लिन गम मोप्ने को ही परमेश्वर मुम्पने बोर पर और पुल मोरे भोगोयामारोबार मन मम्मो मोमबे पर। मा० -इन पनि है बॉकिबोर्म मय होय वार्मममा मी मोगय पान इसरिपे मे हम मसी म्पस मुकामे अमिन मा । मेम मी मानो। मा-मसिम्मीकिन समोसनोसोमही? भर बोtो प विप स पूनम्मी पारासा। सा तुम पिम बापा म तीधरौब म बोए मासे हो इस प्रभाभि भी पिार मी माग मा परिनो निमिच मरयमेरो अफिस पराधीन • भात् माय पिया ।।
दादरासमुशास' कपास सूत पा रथ दुपष्ट बोठी पाली प्रादि कसे मी नहीं पाते। पर ऐसा नहीं तो परत दिला पा विविध बत् चौर मामा प्रमर कोरबमा पिसे बन सती बोहर्म से सिर बत् को मानो तो मंसिर उपचारको कोपिना प्रतारिखबामो पर ऐसा सिम पहीम सो पुबा तुम्हारे प्रमापापम्पन व पुतिमान माप समय। ना—चर पिरतीप मोहित ! बो विक तोगा के प्रपत्र में लों पहा । यो मोमिन तो जगत् के बनाने को समर्प नहीं हो सका। माण-पस्मघर में माप मोर कमी नही र समय कि बो सपो म पिसको बोरे और किसको मारमा बस रच्म प ग्रो प्रयास कोई पार्थ नहीं है इसधिपे किसी में मोर मी नीता भाम्प और मोदमहोबा बाव में वार में नहीं। मा-गोचर को बत् सपनों और बीचों को पोप या मानोगे तो अपनी माली हो गया। मा०--महा अमेविष कौमों और प्रकियों को प्रमोमपाता भार्मिकम्पप्राय पिान मा म बी सता प्रपाडी होता है तो परमेपर प्रमन्त सम्ममा ममी चौर पुची मोम्पो तुम अपने और अपने वीरो समान परमेपर को भी अपने प्रभाव से समस्ते हो सो मारी चक्मि की मोगा। यो भरिपरि दोनों कप चाहो तो बेवादि सम्मवाणी प्रमोमो वो प्रम में परेशाते हो। भब जैन बोगमा नेणा मान साइले सूत्रों के अनुसार दिखाते और संपता धर्म से पा सम मकी समाचार रिते- मूम-सामिप्रपाद भसन्त पनूगा संसार पोरकाम्तरे। मगार कम्म गुरु ठिा विधार्ग पसनु भमाशीधरो॥ प्रमयरमा मापसमा पहराकर परसार मामधमक प्रपरे सम्मायरा समय में गौतम और मातरम संपदा इसम मापसे ग्मयोगी पाप कि यह संसार प्रचार पनन्तम कभी इसी म्पटिदुई मिाण होगी प्रयत् किमी पबचा मार नही सोमास्तिक मास्तिक बार में [मूग ! सम्भों कई पही मम्मी बना और मम्मी शहा। स -चो संयोम में सपा होता. पनादि प्रयन्त कमी पहीरो समता और रमति समणिय हुप विप नही रमणा जप में जितने परा ग्मा हाते सब संयोगसम्पति विनापरेने ते पुनः मत् गत्पर और मिनाया पौ मही। इसचिव सुम्म वीरोंगे बोम्ब मात्र जानहोम ही ऐसी मसम्म पपी पितमुमार गुषी नुम गिण मी रो मुम्रीप मुगने परेप पालाम कमी नहीं हो ममता । ममा जो प्रत्यक मधु पादौ मसकी गमति और विनय सस्पार्यप्रकाश मार सपयों सिर एप वीपरों मा-परमाम्मा किसी प्रपा और इस में नहीं पिरता न अपवे भान मेघोषवालोंकि प्रपत्र और दुम्स में मिरमा बो एकमेती रो माया सो सरियो ममही। दो प्रमादि नियमान भत्तस्म परमात्मा का को न माने तो मन्त्र कौन बना सके। बगर भने म बीच में पमर्च और गा में स्क्लबमने प्रमी सम्म की इससे या सिर मकिपामास मान् नेता मोर सरा भावान में से परमात्मा परमाणे पीमा से माता पिताम्म बिमिट परब से भी सत्पति काय मिपम सौ मे कि मा०पर मुसि मुलगे बोर बात की परिभव पारद और प्रसव करने में यों पड़ा। मा -म मरा मुख होने से समाव एकोण में रहमारे कम्पपूर्ण मुसि पुल समातम परमाप्मा कही है। बो पकातस्मस्म गुम में स्मामु फरमामा इस सिमा समन् को बनाता परवा और प्रसव मता हुमा मी प में नहीं पाता सोनिका पौर मोष सापेक्षता मे से मुक्तिको प्रपेशा से पच और कपको पत्र से मुक्ति होती है जो मी मनही पाप मुखममा सी। और भो पमेण बाब हो सौर मुख सब हुमा मते है । पम्त सो सम्मापक बिर बन्धन समिति मुवि में म कि तमाम वार मी नहीं पा इसरिने प परमामा सोध पुछ पता है। मा०-बीच मा म पम हो मोग ससस माय पापे मर में स्पमय मोगता इसम बरमप्रम नही। मा-जैसे बिन्ध मा मासा चोरापि मन को सो प्रयास में भी गाने में बाबा भात मितु पम्मको म्याम्पस पमानम म पमान बोषित पग सवार इसी प्रमर गौच को भी का अमी पावसम्म पेसर पर स्थापोन रस यो कि कोई मी और अपने पुरा का केस महमा कही गाम इसरिये प्रकरण परमामा पापाचोम्म पहिये। मा-च में एक चिरपी मिन खिने मुख और मा०-या परंणा मालभिजो प्रथम महोम बोलो पुमा सय में प्रभाष परे कि सामाकि साल मुकदी बसे गुममा चैरीस सोया परिसर पुनः मुखए मि मी कप में प्रसव मिरपे और जब दो जैग और दो मिनि? पर भी पसा मिदाम माबिम मा भई मारी भिमाद सिरो मा.-नागरिकों को सिमीको महानिर्गम धर्म के विधाको मन जपत में रोजगारपसी पासी ईयन में सिर रिसब रोग पदामिनों पपी सती ।।
मावासमुन्माप्स कपास सूत कपा भारा दुपछ पोती पपड़ी आदि पारे कमी पड़ी पाते। पर ऐसा नहीं तो ईपर लिपप पिपिप बम और माना प्रभार की रपमा पिप से बन सकती ! यो हम्पर्म से समसिम कात्मे मानो तो सपासिर श्परांच बारिकों को चिन्म प्रमादिलामो बब ऐसा सिर माहीम भक्त पुषा तुमारे प्रमाणपत्रको पैन दुरिमान मान सन। मा० पर रित मोहित ? यो ीि तो बात के प्रपाप में वो पायो मोहितो बापाने में समर्थ नहीं हो सम्पा । मा-परमेचर में पाम्प प्रमोद कमी नहीं ट सता पोधियो मलाप सिमे बोरे और किसान प्रारमेन से उत्तम प उसमे भास कोई पदार्थ वही है इसखिये किसी में मोहमी पाही हा भाब और मोरमोमा पास में परम में बहीं। ना-गोईभर को गभर्ना और जीवों के मोंगोमराठा मायोगे ठोसर मपनी दोन मुली हो गया। मा-ममा भने प्रविष मोपता और प्राधियों को भी पराग धार्मिकम्पापाय दान् कमा में माता म पनी होता तो परम्पर अनन्त सामर्थव प्रपरी और दुम्सी पोरगर तुम अपये और अपने वारों के समान परममा प्रेमी अपने प्रशान म समम से सो तुम्हारी प्रविधी पाया है। जो विपरि रोगों से पचहो तो बेदादि सपणामों माम ऐमो में प्रम में परे। गर्भ से हो! अब रोगमा को जैसा मानते हैसा इस मौके पनुसार रिचयात और संपता सकिने पात् सभाको समाहापरिबाते- मूम-सामिप्रणाा प्रयन्त पनूगा संसार पोरकाम्वरे । मोबाए कम्म गुरु यि विषार्ग पसनु ममात्रीपरो॥ प्रमावरम मा समापौण्तक. प्प रपसार माय बामक प्रपके सम्बावामय रण में पौतम और महारपणी इम्म संप स रपयोगी पाल पा मसार प्रमादि प्रमतोम मी इसकी रपति मिनाया दवा प्रयत् बिमा सम्ला समन्दी सोही मासिक मालिक संपर ("मात्मा का कई मही मम्मामा और रम्मी मम होता। म -सोमा म र म पनाति भवन्त कमी नहीं हो सम्ध और समति गम्पिरा प विमाकर्मी र साम्य में शिवम परा पपोतम मरमा रत्पति बिनायोगाने तुम जगत् सत्पप और नियमाती यही । इसलिये मुम्बम वीरों मोही मा बम सभामा मोन्मी भसम्पर पसा सिनमार गुरुम तुम शिजीरो मुमारी या मुरने पमपाकाम मी पई हासमा । ममा जो पानीपत सम्पति और पिण - सत्यार्यप्रकार मा०-परमात्मा पिसी प्रपा और इस में नहीं मिरयम अपने भान बोपोंकि प्रपा और पुत्र में मिमा यो एकमेटी दो सत्रो सकता है सरौ मही। जो मनारि भिषम अपसम्म परमामा को मनाये तो पम्प चैन बन सके। म सपने माप में सम्मक और ना में स्वयम कमी सम्म नहीं इस प सिर ही बम्व को ल्पा और सपा प्रम में राम परमात्मा परमात्र समितीस माता पिताम्म मिमिच मय से मी उत्पत्तिका निकम म्सी में किया। मा:- मुहिम्म सुन का पोष जगत् को मामय बास्थ * मपबममे बसेरे में तो पदा! मा०-धर सदा मुल होने म तुम्मर साधनों 1 सिमर वीपी। समान एनेस में पनहार पापपू मुलि स पुल समातन परमान पर है। मो अमान्तसम्म पुष - सभामुख परमात्मा । यस किसिमा सन् से बनाता परता और प्रसव मन मा मी काम में भी पड़ता किन और मोष सापेक्षता में से मुक्ति को प्रपेभ से कम और कपको अपेक से मुविदो मोमीमही पाप मुक्तक्योम सामा। पौर वो एकमेयो बीवी पर और मुख साप । मत परिणी सभापकर बम वा मैमिति मुखिय में स क तुमार वो मी नहीं पाता इसरिने का परमात्मा सदैव मुखमाता है। मा०-चावों पर ऐसे ही मोग सवत से मांग पीये मर को स्वयमेव मोम पर असम मही मा०-वैसे विध यो मह पम्म चोरपि दुरा मनुण स्वसीय भण्ड में ही पाये जान्न चाहये। िपन की समस्या यकार पमा प्रकाषित राय पसल इसी प्रमर बीच मे भी पर अपनी प्रवास सरासार बालोन समाधि में मी पौष अपये दुरा मोम पोममा भी पहना इसरिने समय परमाध्या पानापाच होमपदये। मा०-बाद में एक बार पीमित मुजीब। मा०- सा नोकियो प्रथम मरोम मुबहो तो पुनम कप में बयान परे लौकि रेखामाकित सरल मुकमही ये महार नाम टोपर परिजम पुमा मुगप निमी में प्यार मिमि और पुत से मtो से व प्रबोने से गाते मिप मितta ममी बामियागे, मा० मा पपा को नहीं मि त्ममि। मा०-पाक्लिा गतिमीला बा मचा तिचा कम में कमियम मर्च मप में होगा। ऐसी मानसी ईमेत में सिर पिरान रोय पोलों में पसी पनी ।
दादासमुहास पास मत पा भारत दुपट पोती पाली भादि कमरे कमी नहीं पारे। बब ऐसा पही तोपर चर्चा के पिया विविध जपत् और नाना प्रापर की रचपा फिरोप से बन मस्ती मोहम्पम से ससिब मान्ने मानो तो स्कासिब परत स्मारिका निवासमरिचमायो सब ऐसा सिर नहीं सकते पुषा तुमारे प्रमारनपन मे और बुद्धिमान मान समा। मा--भ मिल-मोहित ? हो कि वो बस के प्रपत्र में पर्यो पागो मोदिती तो बात् बनाने में समर्प नही हो सण । मा-परमेघर में सम्म मोह कमी नहीं सकता कि वो सन्मानिसको बोले और किसको प्रारम?ईम से रमप उसने भास कोई पहार्य नहीं है इसधि किसी में मोर भी वही होता भाम्ब और मोहमहोपा जौब में वापर में नहीं। ना -जीपर को बगरमा और बायोमो के माधावा मानोगे तोचर पपी माती होकपण। पा-मता अमेविष को प्रा और प्रवियों को समय पर्मिकन्यापीय पिान् कमो में भी सापडी होता है तो परमार पनन्त सामयपहा प्रपत्री और पुत्री योग होगा ? हम अपने और अपने सीका समान परमेश्वर मी अपने प्रधान से समने हो सो तुम्हारी भविष्य की पाला है। बो भपियदि दोषों से टप चाहो तो पानि सवारी अपडेमो दो प्रम में परे। मे। अब वैमोगमा कोण मासा इनके मूत्रों के प्रमुखमा रिचयते और सपना मूबा मि पण्य मम सरकी समाज र रिसाते- मूख-सामिप्राय प्रशान्त नगा संसार मोरकाम्तरे। मोहा सम्म गुमठिन विधान पसनु ममापीपरो॥ प्रकायरम माग रसमा पिहोरातक पसार महा बामक प्रज्प सम्मानमा प्रकरण में गौम्म मौर महापौरभ संभव इसम्म संक्षेप में उपयोगी पार कि पा संसार भवारि अनन्तम कमी इसकी म्पतिम विपास होत अर्थात् किसी सपना अपत् मही मोहपातिक प्रकिया में [बपत् जो कोई भी मम्मी बा और मम्मी हो। स -यो सपोग से सपा होतीपमपि प्रभाव कमी हीरो पाठा और पति तपा जिपणाप पिक बही रस्सा बगल में बितने पर गपोतेरे सब स्पोमय सम्पत्ति निवास पुनः म्पत् सत्पप और विपणला मही । इसलिये मातीरों को सरकार नहीं प यो रसमे समा जान होता तो एसी सम्मा च वा पिते तुमार गुमसे तुम शिम भी हो तुम्हारी पर मुबने बाडे का पान कमी नही हो साता । मग को प्रत्यक्ष पाय दोसी रसको उत्पत्ति और मिय ३१८ सध्यामका नॉमी मावत । पर्मन् इसके साथ प अविनों मे सोम गोवा मी मही पाती पी और परिव इनमें बीको विकसित पसम्मव बने स्वोम माम्बे और मतेखो! इस मी में प्रवियोमबार प्रविधी मी जीव भोर जामचदि मौ बार मानसको श्री मान सम्वा । और मौ देखो! इमकी मिया गत दिन टीमारों में मोम सम्पाशाली और परमेवर मात । रम मिपा प्रोमो :- रमसार माप' (इस को भोप मारते है और बालो मम् 15 अप्रेम वा २. में बनारस जैन म प्रेस में रामसम्म मोरे पचम सिर मिया) पुट में भी इस प्रयासपी अर्थात् समय अपाम सूममी और पप्पत समयों को प्राविमो है। एक बाब सम सरोसी सोगा माविप मा एक "स होय से वास मार्ग म एक रिस' से पन्द्राविमा भास' पोको पोस एक मामले पर मामा अवामपन पाचग बापन प्पर ओपनों एक ही पेसे अपना म एक 'पाल्पोपम' मा पो। असम्पत इस पते पर मेत पीस और म्यही पाय बोरम रसको सखिये मानने शरीर मिप्रशिक्षित प्रों मोरे माना प्राद पर्समाव मनोज सेरापि ममुनापरवागार बान माप सम्म होता है। अब हामिले भासाच भामरे पाखो भेगमा दो इस समय मनुष्य एक पाव होगी पबिपे ममुल पारेख माग पार मेमो मे। 10. प्रात् बास बाब सच समर सोमन होते ऐसे समय में मरमा ममें से मौत अन्तर मा निभायब पारिमा और कमा भी हो पान तो मोबपट तब ममें से एक सोभो म रमी से रोममे ऐसा समाप कि सपा से सती पस सेवा योगा वो भी रखे यस्मा से पौनभने परामा मिचोपचापमा वा होस तपसममें सपा सब एक पल्लोपम बरवा। 4 फलोपम भाजप जाम्याप स्तमा र पल्लोपम पर पोत व एक स्पोपम" मा बोयरपतवार साप्पोपम मानीव एक मसी माहवारीचौरब रमपंची और एक सप्वीर पर भाजधब प्रान्त प्राणवावी व एक "प्रबफ्या" है। अब भवानमामि ।। बोभित पुनम पर पान्तों से भरी बससे पत 'म भागवत पुराण पुरामापीरमा पप नि । पुगो मा पबित किमोमो वियों प्रमाको सन्म मगे पी और एम समे सब मी मात्र सोये - पीलो ! ६१ तब पक पाशसमुहास दायरों में पेसो पवितरिय फको पी से तो इसो मव में सपा शिप ीि परिणाम पायम । प्रो इल्म मात्र मनो जिया माप १ ॥ सेलेबो अबस्थपणे पोत मैपियों के सियत प्रपत्रो किसके तोर प्रति अपमत मे ऐम मार पन्त बोस पी मोम सारसमस पेक्षा राम म प 11 में मिली कि पुमियोपत्र बीच मिही पापाचारि पिया मेरा अपमें रहने पर गायों के म परिमार एक गुरम मसयत ममा पोत स्ताव समोठे। र भामुभाष अर्थात् प्रति प्रधिक २. सहमतaalat। (ख१६)बस्पति देर में यह प्रात बोय हो । धारण सम्पटिमाती बोकि मनुस्मुख और अमाम्तमपणमुकदमको पायपरस्पतिवार भने परि मम पापुम्पन मनम्तमायोचार पान्त महासाननमा समय दिये और एक सरीर में बो थिय पर्वात महभिापानी और उसमें एक बार पताम्सको मतमस्मति परी रसम पाम एक साप पोरम सर्वात प्राधियों का पोजमा भ परन्तु पिचों पोबम । (रस म)शी पवार से पर पोत गरीर होगा। ग्राम मासुमा प्रमिक स अधिकारस सपमहोगी. अब रोइम्पिनये गाय मर्का एक बम गरीर और एक मुबो ऐच मेरा और परिहार पेमाप अधिक से अपिकावापान कोप कम समय पर हो। और मा भापुमान अधिक से अधिक बार महोद्यापही गुत ही सूख पा लोक इतने मेरमा पनि दिव्य और प्रासापास प्रेवकी स्व नियों के शरीर में पायी होगी और महीने देवी भी होगी और पब ऐम बाबो इवी मो मे और देखो ! मन माया पो गई, परी और माती एक पावर परोस्वरले कम भापुमाष अधिक से अधिक महीने की। चोम्पा भरणभीमबलिमोरथमोप बोपाल मौप तक मगर बच गौह और मन्त्री मी वियों के मन में तो ऐसे वीर और मसी मनी पर मैं परंगे और मदीचेगे माप किसी ने संभा +मग्री हमे कमी को भी मिसा मी मोटो ग्यताराम दम्प मम ममी दिसामान एक यह पोजन रमाए । भेटीपोन विसर. (एक मोड़) मगर है मन एकष पूर्व हम पाषु यत्पू बाबा मिलाप नियोंप किमी बरेचप और जुम्पा लीपादिम प्रमान शेप मा प्रेसर र भानुमान औरतो सामनेभ इस्पादि से मेरीरय गौष मानी मोगा ये रे ग और मानते। और ई रिमाम् दी मात्र सम्य । (राम भाप पृ १)रम सम्यामकाण लोग नहीं मानते । प्रात् इस अपर्म प दिनों में शोख पोज दिया मी नहीं पाती पी और प्रब परिव इममें है ही दो विमितिमी पसम्मा बा लोभ मानने और पते खो! इस मी में एप्लिीमा एसिपी मी गार पर और समयदिनी बार मापसोको भी मान सन्या । और मीरेचो! को मिथ्या पर्व मिन दायरों * पोप सम्पशानी और परमेश्वर मामले न मिथ्या होने परे:- रमसार माग' (इस शो मैन बोप मानते और पानी म 10 अप्रेसन २८ में बरस रैन माम मेस में कम हो पाम मसिर पिया) पुट में प्राइस र मासको बर्षात् सम्पमपाम समभरी और पाठ समों को भापति मो है। एक बाब समोसो सोमा भारिप एक 'मा दो से तीस माम पर विक्स' से पन्द्रा रिस्तो भएर 'पर' से दो पक्षों का एक मार से परामहोपों पप"मोन पाचगप्प मच प्रोगस पक" वा। ऐसे मामले भापक पल्पोपम' अब प्रवे।। मम्म्पत इस भवेक एका कोतपरस और म्ची पाप मा चोरम रसको एकिने मन . शरीर विविसिव परमों से मान भर्मात माय मापन से हाधिने मनुचपापाचर समरे ममा पूम होता है। पर हाखिने मनपा सभामये पापो प्रेमानें तो इस समय माण- पकमा रोग ऐसे हगुपिये मयो एक पापक गुख म्ममा प्रभार सोपवे. ... पीस बार पचवरे साम पर मोल भो ऐसे लोगो मा माया मम मौन पन्चरे समाविमबाबर समायोनिमा और मोहरो प्पप वो मौसमम्फत पर नमें से एक रम्मत मनमोम्म मी म्सीम ऐम मममम कि उस पर सपी यम की सेवा की बात ये भी पाय म्मम्मो से वन्तरे पएमा विबारे बापमा संघरोचबम प्रप उप एक पल्पोपम भवरोगा। वोपम पम पाव भनमा । बचपरामात्मने वोपम पाते तब एक प्रमोसम' मा हवाब रसगरम पोम पोम एक सी" भाग पर एक समर्पची पोर पर बसप्पी व पास र सब पुष ' भावाब प्रबन्त माया पौत बताएका परमपम रोग। अब बासिने र बोसित पुस मसान्तो बन्यो पात प्रम' माण। भान्त पुरमा पुमत प्राव में ममते हुए पनि। सो को गति मिचोमो ! पिन कोकोपकर मनोगे वहीं ! और तुम इससे पच मी माष सो - महाकाल . पर द्वादशसमुशास' कमी नहीं हो समय । बोर्ड ने मिस मानोगे तो रमन प्रवाई महरोप भितुपमाषम हो गफार बो रेसपो तो प्रपन्धर्व और भाव पापी होने से भावोऽम्पायन और भामामय दोप प्रामा से अपने धे पर प्रापभय और अन्य पिता पुत्र भाप नहीं होता इसलिये अपस्मक ममप हो मान्य। मोईम बात् मन मारते हो तो ममता कौन है। उ०-सा और परम अरब ई मी पोहो पता पाकिसम तो और भाब होने से ही मनोवाद असम संबोम स्लिोग ही रोता को मपम योग दियोग म भाषी समकता वारप किसी प्रकार मही हो सन्ता । इसकी रिोप मान्य बाट समुशास में पीकी भाग्य में विरेन् । इन जैन बोगों को स्पूल बातमी पमान मानही तो परम पम पवित्र दोष से हो सकता है इसलिये यो चोप सरि मावि मनन्त मानने और अन्नपानी को मी प्रानि मन्त माको प्रतिब प्रविषय में पानी और प्रतिस्था में मौ समन्व पर्यायको मानपवयम प्रम मय में विद्यममीतकमीप सस्टीयोकि निमम प्रवर्गात् माला होता सब सम्मापी प्रसपये होते परि ममन्त को सलाम तो मोदी पसवा किन्तु गापपेक्षा में पतर सकती है। परमेश्वर के सामने नही लॉक पर मन में अपने २ एमपरब सामने प्रविण पावों स मत मामर्ष मानमा का अमिष्य की पी। एक परमार द्रन की सीमा । सम भाव रिम्पगम परवाच स प सकते ही एक मैं आमत गुख और एक गुप प्रदेश में परिमाणम्स प्रमन्त पाया प्रेमी ममन्त भयर मापन मेवात विवि अधिप मन्तो सप राये पर्णभमन्य मोदी। ऐसी ही पम्मी की मियाबियो। अब बात पर भयान हमरो पापा - विश्व में विलोभनिय पेय चेतनामसपो खीवा मावशीचस्वयम्पक । सत्कर्मपुद्गमा पुरप पापं तम पिपर्पयः ।। पनिमामी भापौरपो मनमा" भाग परिम पणमार" में मौरिधीय पौर और नारित गाव जवाद गर्मम गव पुरष और पापकर्मम पुरा पाप । समी-और परामबाप होगाम्नु यो बाम्म पुरणय प्रपपुषपुरम्मी नही हो मत नोकि पप कुलप्रमेम समयम में हब। जिन पर पराम्ब पाप पुल पिठो पौषों से अपदि मागतो मी सन्तु ग्मी मल और मपत्र पाव को मुहिरण में सच मापस लौकियास भौर प्रत्या समय भी मारा मसीम पेम। मी बोम बपत् गौर वर्म और - 1 सस्यायप्रकाय गर्मन गोषों मामल महा पक स्पा मोबन अर्वाद । ग)ों भ और प्रामुम्मम एक प्रेकी art सोने शरीर पर पुण्ये गाणे प्रेमी इनके अपों में स्स में सेरोपे । पा मम म बात नही कविसममापि सम्मथन हो। अप सुनिये भूमि परिमाय को। (सम माग पृ ११५) इसलिये बोर में सपत होप और स्मात समान असताना प्रभाव पार यो साई सामोपम" में पिता समन हो स्ववेदीप सपा समयमा अब इस पृषिषी में पम्पोप प्रथम सब परेपीच में सा प्रमाण एक बाब मोबम प्रर्वात् एक भरण कोश भी और इसपणे पार पमा समर । रमत्र प्रभारोप पोबास मोर्वाद से भरपोता। सबम्योपचारों पोर थे बाकीच्या महापौसम बरसा पोक्न प्रांत पर भाव कोख भ प्रभावी मार सके पीछे पोषित समुद्री रकम पाठ गाव अर्थात् मा भरप कोरम प्रभारी रस पीने पुण्यप प रम प्रभाव सोवा प्रेमी सप भीतर की को। सहापरेमापे में ममुपपरो उपरान्त मत होप समुद्र । सम विषम् पोविजाब रहते हैं। (रस भाग पृ १५) म्योप में पक हिमपात एक पेरणात एक रिप परमार समी -पुनो मा स्मोनियो पानीको बोगो ! मूमोब परिमाय भने में तुम रेपो मागने तो दम र सममायो और जो तुम पूरे हो तो म्से समम मेमो । पत्तास्प पिचर मरेतो तो पी मिब होता है कि नियों के पाचन और शियों से भूख मोर और गपितलिय समीपी फोपी। परे होते तो महासम्म पपोषाको मारते ! भवा से परिधान पुस मागत् को पतन और मार्ने इसमय भवधिपे को बोल अपने पुरत में कोप पत्र मतालों को भी यदि निस्वोम समाविकोपारों पर सिम्बान्तमा । मर्म इसी प्रभारी प्रमिला भी पार इसरियेपो रेखदेव बोसो पो र अब पोलियो मन ममी पनि एकता रोगापि इस गपोमान्पो समापी मान सम्मा पास मप दिलों ने भाव मे पन्धनि माननेबि सा बिपी मान मा निरा भी। जगम भरण अम्पपिलिभिपापामार थपि समयम्प भन्नु न मम मम मो पलिमेमसमम्मे ममी भी लौकिका एक परमातु अब मिम्मी ममामलमा पृषकम और मर अपने पर पचास भी न सो । इसने म माया ममता मोरयाममा वामसम्म । प्रविधी सूरि सम पो. मिराम में एप मनन्त भरि सम फरमामा प्रथम किसमें संचापापमोष पवार पम्भून पम्स बनानि - मादयसमुशास ३६१ मापीरो समना । मोगको मिस मनाये तो उसमभाव बहोगा सोमबम बागा बो ऐप भोगे तो अपना मौर परब प्रादी होने से प्रपोऽम्मच और परमामय दोप पावेन से अपने पे पर पाप बाप और अपम पिण पुत्र प्राप ही होता इसधिप कामको प्रसव हो माया। प्र-कोचर को गाम्भ मानते हो तो चिर पर्णव --भत और प्रारम भाष मीन्दी हो सकता पाकिसम तो और भरोसे मोगा जिसमें संबोग वियोग नही होता को प्रथम पंग विमोम म भर समसामरण किसी प्रकार नहीं हो सका। इसकी चिोप पाल्पा समुशास में सरिकी पाल में विचा। लोगों को स्प बात मी पण शानदी तो परम सूपम परिविष्य भ बोध कैसे हो सास बोर बोग पी पारि सामान्त मानने और बसपापो मी प्रमादि भवन्त माने और प्रविमुख प्रविष्य में पानी और प्रहित में मौसमन्त पाच को माप्रमावरमपम माग में विमलामीमात मी नाही मानवी विशिगन मान प्रवाद मारा होमोसा समापी मन्तबारे होते है बरि मतको प्रसस्य मोतो मी पी साबित गावापेक्षा में पायात सोहै। पमेम पाम नही पाकि परम में अपये एकरभाव सम प्राधिका पनाने मनात सामय माना - भक्ति की है। अब पक परम्पनी सीमा म मनाच दिमागम्प पलायसन्स पे हो एकल में मम्मच गुप और एक गुब परेण में प्रविमस्मस्म अनन्त पलायो भी मात मात्रमा समापन बीयत विचिसो अविस्मयक मन्तवो मम परे पोयमन्त वानी पेसोही बम्बी चौकी मिनाप विकी। मबीबरबान इन दो पहालों-ति में क्यिामनियन ऐसी- घेठनावमयोगीका पापग्रीवस्तबम्पक। सत्कर्मपुतुगमा पुरयं पापं वम विपर्पफ ॥ का निमरमर भवन और नही "पाम' भाप परिम समसार" में भी निवास और पति पान मर्थात् toमम्म पुगव पुरु और प्रपभम पुरण पाप मते। समीर गामातोगी परमाबो पाम पुत्र है परपुरगुडम्मीभीम तक अप एलरममावब मे होयर बितर बह पहा सब प्रप पुल मे रीवा जो जो प्रमादिमा पाठोकी सम्ही मन और मत्सम मे मुखिरमा म सच मान्य मीडिया पर पसरणम समर्प मी भरा भीम पाप। मो चोप बा गोबर और २६० सत्याप्रकार - गर्मब बाबी समाप का एक सरस पोजन प्रात् । मेर) पोंभ और प्रापुमान एक बार वने सरीर और भापुचे गमों को मी इन्ही के प्राथों नेम में मेवा पमम मातही किसिममापि सम्मपन हो सके। भव सुनिये भूमि परिमाणको । (रसार माग पृ १३) इसलिये बोक में न होप और प्रत समय माया जो भाई ममोपम अप में बिता समप हो गये होप सप माया। अब इस पृपिपी में बम्जाप' मम सम दीपोंबीच में समय एक बाब मोबन भात् एक प्रण कोशी और इसी मोरे सम्म समा रक्षा म्मर दो गालबोचन कोश मोर्षात् यो प्राण तक। इप बम्पाप माँ मोर जो 'पावर' मम सीप सिमपारमा पोरन प्रदा भरम कोसम प्रमाब और सिरे पाये समावि समुत्री सम्म प्रा गाव पात् भार अरब भेगम प्रमाण तो सोम पुष्परा प रा प्रमाण सोबा ममी साप माता को कमरे सपने में मनुष्य मम और रस उपराव संम्पर दीप समुत्री रसमें विप् पोनि और रहते है। (CAR मग १५) समग्रीप में एक हिमत पेरणत पक हरि एक रन कदेव समी०-सुमो म् ममोपरिण सामने सोयो । भूपोगले परिमाण ममे में तुम भूलो मूग पे हो तुम ममें समसका और तुम मरे हो वो मम सममरे। पास पिचर भरेगे तो वो निधन होता है कि नियों पाचर्म और शिला में मार लोग और पवितपिम भी पी पी। मे तो माह प्रसम्म पाप मारते ? मगा ऐम पिान पुसमा में मार और बर को म मात्रै इसमें सभी प्रतिये मी बोग अपने पुण्यको जिपित्य मम्मों का भी कि सिको गोप समाधिक वापर सिमा रममें इसी प्रमा भनियल पामो पो इमरिने पही रेकने रेवे ओसयो पोपमा लोमित यो मन उप मी पुन सा होम पदापि इस पोपामार भेसम माहीमा सम्म पापा मपम चैमियों में पारि मानसिपमा परत पर निरा पती जगत् म मय भाविकप पामाच भरि मसाप पण मन में निम्मको पनि समय प भीभी किया एक मम्मच मिमममी are पृषः परम भार पानापमानस । इसलिये मम माम्याक्सन प्रम परमपमपमा समस्पराग पिया भूमारि मागे विरम में रसमा ममा मारि नापामा ममममें महायर मिra मा सात प्रति डावासमुशास पीन्पून T--बोरदोहर परब में विमिच हो पा परबमो तोप पौष उपसम्म लिया पास हुनको रसमे भारी जमे किया पराप्रपेरम परप मिपाको मोम प्रतिमा तो मोमबोर पाप पारे में नही गण और सीमा यहाँ बच मितपय यौइसी प्रमर गाने र पारवाने और उसके कानुपरमारे बचे परमेश्वर को तम म्यो ।। प्र-मर (मा) सम्म स्यावास में एमेकी भारपायही॥ २०-यो ऐम हो जो से मरन करवरी को मा मना बसम्पनीको समयको विस गुव पाप पुरुष पौर मी योगा। पप पुलमयों में प्रशिकत होना चाहिए और बोरेपों को अधिकारो॥ प्र-मिसमयसमा होमोसमयसमय। -बोलको ग्यम मामिलाही माही सरस में विमिचौ मा पता लाने के निमित्रों से मी वा पेशा मागवा गी॥ प्रोमो पिणार्म परिणाम कोमा यही रोग से और ज्यालोमोजिम रहीमही रखा इसी सार बाल और कर्म के बोय मे कर्मधारयाम होय॥ 3-4 पहा मौरमियप वीमरा होगायों मेकी मोसम मिबाबमा तोपरानोमा परिपे वाकिस पानिमसे सही बने और बार मी प्रसव होणे का प्रपणे मेनोप्रास नहीं रोसो इससे यदि दुमा विस्थापित क्षरिमर्मम्ममा यही मती || म-बोर्म से मुक्त होगाईभर मा. उ०-- मारिमाबाबमाम प्येोपरेर मुख मी नहीं हो सकी। प्र०-मममम मारी। २०-बो परिवोम पोम परिपही और बोम की पारि में जबकि होम्म और बोशिप प्रेम गच तो पुर्ण अप पता और मममममम बर्गा वि सम्मनोखीपम्मी पोस्य इसखि भारतमाम में बिगते ही मप tष येस बराममोर भाममे सारे तो मीरममें परिमित अप और पसीम माम ऐप । चापमान भीभी रात मिठन थार्य पाप रखिो मायोमा परो अमिलों में ~ ३१२ सस्पायमकात कम्प सम्पपि माप । पहा मी चैमियों पर मूग पीलाकि पुर जगत् प्रामपंपाप प्रयास मौरीकर्म पापमा पारि से सन। म ऐस्म मापते हो तो कर्म और बसपा मारो ! पाकिबो मन्पदि पापम्मी की रस्म । यो अपरि मधीमा मनोय तो तुमार सब प्रथरि परे बायसोपा और भी को मिल मानोगतार्म और गाय मामिल हब सबको असा प्य पोर बर प्रमादिको किस मामोसे खोमीप मी कित रोप और अब सप मा भने म मुछिने मान्ने हो ये सब मोबा स्टम्पम्स मुवि निमिमा व मिसिन मुखिोपो तो सरापीय सगी और कर्म का प्रमिस सम्बन्ध ऐने मे मामी ममे पुषाका उममे अपनी मुति पर जोरों मुक्ति मिल मापी । मोपली बम सोना। प्र.-मे पाच अविवम राये प प्रप्ति के संयोग होने के बीब एमाही मान्य दो प्रकार मुखि में ममा एभा बीष पुनः सम्म मायम संपर में ही प्रत To-बीब और मसापनि पोबरे घाम पनि इनमा समवाब मममी इससे प्रभारि मसल र मम मन का सम्मान में मरने की शालिममो समान माने तो पपीच पापबन्द हो ये पौर मुतिमे मोमने सभी थम पेग से अपरि मर्मसनमा मुख दोनोवो कुमानित सधि मा एमावन में पोपा वाकिसे पर्मम्म मुशियों से मी करीब र मुख दोन्ध मा होसे ही निम मुलि से मौसम में पोप स्पषों से मिदुमा पदार्थ निममी पी दो समय और बो पा सिलि मुलि मानतो तो मौके मिय ही बस हो । बलों में मेरमा भार बोबे वाली पुबा मग बाप मियष्यपि रेखों सपोचवि यल से बोर को मन मागवारे और बो मन्नान पूर्ण चरित्र मे विडोवो और बम्परेमाची से मोंगल मानते हो तो बीच संसारी और संगरी बीच रोचा भरप माला परेप किसे मिले महिनावारीको निमिचों से मणिमयप मी पापी इसचिबाल बच और गतिमाम से मपनि मानो अपदि भवम्त से ही। पौल मिडकमी नहीं 4 मिनु मरित। 7०-सी भी निर्मदा पो बिमामासी गासे एक पब में पीछे से बोए मैच को सोने पेसास वर्माता पोला म मिमी म पवमी प्रमुख ममीबगेगा। -बीच झोक्तिम होयर बारबी र म माराम ॥
हादसमुहास २०-बोरीहरीर धरण में विमित्रहो वा भाबपो तोपौष युग बम्म जिया व दुसो गाने शायमा पभे तिमन मम्म भरण किया।बो मोम कम प्रवि तो मी पापो भोकलीपर में ही पवबौर सकसी दो यहाँ मा किन्तु अन्य पेयसी प्रभावीप सौर चारबमाने और ग्थे कमांसपर सरेको परमेसा मे दम म्यो प्र-मर (मा) समयमै पोखीसरे में पूसरे में 7०-को ऐय हो हो मरणय प्रवारों में मर कम नम बमम्मी को पुतनबमोबिल पात पाप पुरणप्रये पो मेम्पूष और मारपोसा। पाप पुल भवनों को प्रपिकप होबाची पौर बोरेपयों को प्रकिये। म-सिम्म सब होता हे समोसमय। उसको लम्बोम्मम स्वामियमा नहीं हो पा हो या में विमित्रों से मबया, सोमाने से मिमियों पेय मावशी॥ प्र-पोम मिपर्म परिणाम को प्रसनहीं होता और पीर म्याचोपोमियोपही इसी र बाब और कर्म योग से म पारेषाम होय॥ ---मेडी और प्रमिपद्य दोसरा पता होगा को कमा साप मिजाजता दोहरामो पहिये ताकि पर पराविषम से पुकहाँ होवे और कार भी पता होने से अपने भरपा नहीं हो सकते, इससे पद एमालरिमा रिस्पपित परिमोर्मप्रपामा मन्दी। मनोर्म पुजगोभीमाब। 7- मरिमर से बाब साल कम समेवोपमे बीब एक मापी समे॥ प्र०-ममम परि॥ 7.-को पारितोर्मलपोपवादिही और मोम की मार जब विम्म होनौरो दिलमबम गयो मुभम सन और कम कम पमय पद मिम पापम रोबोपमा मीत्र, इसलिये मात्र में लिपपेरी मानन मैith पण प्रपा भय और पाम पायेगे मी समर्म परिमित म सपोम प्रामप। चासम्म मीश्रीदो माया सर्व बाप रस, म्योपा मारा - सस्याप्रकार पाव चोप परिमाय से दीप प्रमी परिमाय माय ग्रसर चाहिये किलो ऐना हो तो पापोमबार पीली में और कोमोमबीच एकी प्रोसम्म मामी एक मचा की योयोगिताव पापुमा हैबो कि एक माह में मौसम पान्न रसको सक्रिय पर म्य मिहसी और भाषी पारि के साथ संयुछ हो पाती है। स्मो पर पर अपमान प्यो। पचेर मा और बुरे गात अब अन बोप धर्म इस प्रकार मानते हैं। मग-रजीब मषदुई म पियारा मिसमय धम्म । श्पराणं परमतो सुइकभ्य मूड मुसिम्रोसि ।। मकबरान माय पोयतकराया भरे गौर। एकसित प्रीतीसरापम्पम्ति धर्म संस्थरमयी ज्य पय मरवादि दुलोमचो है। इसी सम पुरेव और मुक मा म मत परेको समयावर बाबीवराय एम से मार पुत्र बौतराग रेवों से मित्र प्रत्य हरियर गरि कोष, नको अपये मया योगीष पूपमतीसप माप अप्पे गये है। इस पर मापक और मत मुरेप मास उप मुम को दो अन्य कोष र तप्य कुरान मे सेवन से शव मी मनवमहीरोखा ।। समी०-अब पिायों विचरण पहिले कि निमापुस इस भौ पुस्तक भूम-मरि यो सुगुर पुर धम्म प पंच मकारो। घधार्थ च्यम्मा निरन्तर पसा दिययमि।। प्रक० मा सपही . ।।। गोपरि रेमन मरिमो पोप सय पार्थ रम गरी, पसा यो देवी मरेर योभापमाम परिम्स रेव शान किया गया पोस पर थप मसीत सम्मानिनप एप्पस भौजिनास्ति जो धर्मीबी दुर्गति में पाने पर प्रवियों प्रसारमा र मम पिणी धर्म सबर से रसरमपरा नही और पंच मरिहतारिख परमही मम्मी रमको बममरेज पा पाम प्रात् भा ( मर्यान् रम पम्प सम्बस्व सन और चरित्र पारामधर्म। समी- मनुस्ममात्र पर एपीपरम पमा सम से पशाम, एब के (मा) प्रभा भी पी परे से मरम्प की पापीपषतपणा- मा-माम पसिना परवन पदसिम गुणसि सि मा बासम् । वाइचि समिसि पोय परियो।
मासमुहास मनुष्यबोप मात्र बाम समय सह पर समय र प्रवाहिम विचार प्रसन्ना और पुपादि ग्रन वे गीत तो भी बो तू ऐक्य एक परिहस्त हो हमारे पासबन्ध के गोम्म गुम सुपर्म बमव मम्दा बितिम बात और हमारपी। समी -पपि दमा और समा अको बा । तपपि पपात में सब सेवा भरपा पौरमा मामा होचाती है इस प्रपोषम पाकि किसी बीचको दुस्सपरेना पर बात पण संभव नही हो सकती स्पोकि दुर्गा को पहरेषा मी व्यय में गएमाप।बो एकदुरको परिपा बाप तो सपी ममुप्पयों को दुलास हो इसरिये परपा प्रवपा और मा प्रामा दोमाय । पो की सब प्रापिषों पुतारा और मुख की प्रति म उपाय माय मातीमा हात पाना पुद्र बों को बचाना बारमन्त्री माती किन्तु इस प्रकार की वन वियों को काबमानो मोकिमा बत्ती नहीं। मनुप्रावि र मे किसी मत में चोमो एप परो रसको पापबादि समरमा पर पूसरे मन थियो म माम्म और पेय परमा पानीबो इसकी समीरपाठी तो विमान पा २५० में देो वा वियो। एक 'परमती की ति" प्रोत् सनम पुसकीच कमी रमण । दूसरा "रमो ममस्मर" प्रात् परमा मीन अशी । वीमय "भावाप' मा भन्म मन्पों पाच पोपा पोखमा । चौम संपन' पर्वात् रामसे परम पोखना। पाच्य को पत्र पति रान" म त् इनको भने पाने की मी मरेनी म 'पपपुष्पाणि गाय" मम्प मत की प्रतिमा पूमोबि गन्धपुप्पादि मीरा । पेका पक्षमा प्राय हम कामभरमा को महोप म्मान समी०-अब पुतिमानों को विचरना चाहिये किस सीबोगों की मात्र मत पये मनुप्पो पर कितनी भर पी भरप।बर भाप मल्ल मनों पर हमी भयपाधि रियों मे पाहीन अप संभव मांकि अपमारोहीबीचमा निरोप धर्म नहीं बाब समो मत के मनुष्ण बोरोपमान इसपिये रमकी सेध भाप मस्सों कीमा, नि ग्मरपाचा भैन एरिम मसकता है कि प! - मैं सिप्पी कि मपुपोपमा नमुची बामक मनोन बतियों में अपरोपी प्रमपम मार या पौर डोमक्षा (मावभिच)परेशर हो गये। स्पा पण मीरा चौरमा सम्पराकर्म ही। ब अन्य मत थी पर सप पेने पर्मच-पुरि र दोसको पातु के स्थान पर हिंसा मा ही पाक भव सम्मन्स एदिसाप 'शासन पध्माममममम' में पिट । सम्मान, सम्म दर्शकमा भीरपालिकेचा मारामार्ग. सापनमकीन्पम्प मोगर येमेनिस मसजीपति द्रम्म अमित ३॥ समाचार ग्सी म मे दिन-प्रतिपादित ग्रामपुरवि अमिरिमादिमिय व निममव में प्रतिमो प्रभाव और सबको। रुचिसिनोळ तत्त्वेषु सम्पभवानमुप्यते । बिनोटलों में पानी चहिले पर्याद माना भी ली। पपावस्थितवस्वार्मा संपाहिस्तरेण पा। पो बोपस्वमा सम्पन्बान मनीपिक। विप मा बारिम संपलबो पोष होतो ग्मी सम्मान प्रतिमा पर है।। सर्वथाऽनपपयोगाना स्यात्मपरिणमुम्पते । कीति तदस्सिावि मतभेदेव पचवा . भरिस्मनुतास्वेपनमापरिपहा ॥ समर मे मिन्दबीच मन मनमा माख परिचापि मेन पे पंच प्रभात। (बरिस) किसी मबी मान मराण्य (अव) मिरपदी बोडया वीरप (मन) रोगमा पेय (स) ग्पमानित म सम्मान । और पाच्य (प्राय) समाजमा अम्पप ममा । इसमें गुत सी परें पचास बरिया और बोसो भरि मिनीच का सम्म पची मान पातु मम मन में किया अपि रो से सबकी मी दोज होई प्रम में कि १, मम पिपनि मधर्म संसार में गरम पापी। पदको निमको प्रवरेचने ही पूर्व विवाकिया पर्वती! रमन पुरा भन्न प्रपत्र मरा विसाने मारे अपने ती कति ममा सरकीच मना बोकी अपरिपके पास देवेभसमर्थ होठो मौषमत प्पीन्यपने परम होय! और मन मठ बजेमी ममेड होगा। ऐसे बरसे परे मानों में प्रभार पारि योग्य हम्में बही विदित होता प्रापर्व मापी पे, पूर्व मित्या गरियो पत्ती किताबमवे ऐसी मावों में कोई मामला मोबन मोखारेजो पावो विकासमतापयाम khमत समम्म प्रयाप पिविष मुरेष इमरामोपरि पचपणे मोपोन्पयो गाने पुराप पगारी से पाच भार मानेपरों की बमो- भूड-जिसपर भाया मग रममा रस्सत्तोस सपर। माय मंग पावा मिपमप दुपर मम्मम् । • एनसम्म (ब).
मारण्समुन्नास समार्ग रमाश रियो मे गो विकारात बोवा वायतों की सामान्यपशभत पाप कर समाज्यादिम परमपाकनि सहि विविष प्रामामामा माधीचे॥ समी को अपये होमस से अपलो वसा और भोपापा परम परिसी मिला पापमय की कम स्वी -AR पुणे पिार में। परे मुरली मनोकार मी कावा या मसिना हो सके। इसी प्रकार की इसकी। मूलागुणविम्मा निवनो यसमुत्तमासी वादि मुचपो। स परमपितो पि विग्मपरो विसारोमोए । सेपियर सर्प में मनाने बोनसे दो मवीरे विधवा पार्मिक परिणत होम्सको परेप्यो९ि. समी०-बिरेली की मोपले और प्रात्पर्य फिर से दो दिनों से प्रेम माने, सो वा पति धिरको पिनो मामलों में मापार में परेको को माया इस पनि निको समेत पपपती रस उपायोनिये. भूग-पासप विप पाप धम्मिमपणे तोपि पावरया । बलिम्व मुख्यम्मा घमा फिविपार पण। सीमिर्माद ममतपिरोपीयरबमामलोपना समी-दुरिमा पागनिमी पमापन की चयकिसिम भव ! उसमे किसी प्रयोग हो पाचपापले सिम्परा मव पोमोसमुपगे पो बसम्म रोपमा राखिने परकी मिन्मो और पूर्वनमे सो मूम-नामपि तस्स मुरण निदिया मिम्म पप्पार। सिं अणुसंगार भम्मीपनि होपाप मा।। गोप ने मिस पर्म १५ मयुनीको पानीममेफोसिये भिमा नपर्म मापन धर्ममममा परे। समीपहिरोम किए बिना लो पारिश्रम में उपनेपना मार्य पी बोग पर बिगो मारमे मपया मागविना मोर पसी गाय परमेसन मिसावि प्रयासमोर समाप्रकार ग्पोममे बिम-विपरित प्रपमयर पिसात चम्ििादिमियोमा मत निमम में प्रतिसो सम्मान समय। रुधिमिनोज तत्वपु सम्यममानमुपते । पिपोत काली में पानी पनि माद सभीभी। पधापस्थितवस्यानां संक्षेपादिस्वरेसबा। यो मोषस्वममा सम्पग्मन मनीपि । विम सोपरि मौसम पवन से जो बोध होगी सो सम्म मात्र रिम ॥ सर्पयाऽपपपपोगानां स्यागमारिषमुध्यत । फीचित वसिादि मतभेदेन पञ्चषा .. मासिनतास्तेमप्रयापरिपा॥ भर से विनतीन मामलाप चरित्र है परिणपि मे परमात एक (ata) किसी प्रको माग मारा। पूज्य (सम्प) शिवपाची योग्य । वास्प (मन) चोरी बमय। (स) पनाइपिसमय और (परिब)ी अम्पप मामा । हमे पुत सी पर्ने प्रचार पर्वाद पणिमेचोमामी निरोपमा मापापी मन मत पेसामान मत की किताबारे पिरोने से पप मची ग मी पोमुख रोमी माम Art पाच मिनिमम ममममले पानी। पोस निमियो हो बार्मिक नी? रसमे एपसमाबले महा मायकशिपोमा यो भोप सपने में कवि रमाकी, मय बोलो अपरिगम समापवाब दे सर्व होतो बीमा सयौपाइपमा पेहरम होप और अन्य मामी मोबासेस प्रवेपो मलात और निगम पर मेन्या में ही पता होगा सेवामा मिनी Aबोपन्ना बा तो ऐसी ममी बों में पारा यो दोवा पोलिसाला मनापास मनपारपत्य इपियरिखपुर और इस पर पोटोtuो मन मामी हो मनोपनों की बरो- मूग-मिर प्राममंग गमग रस्मुत्तमेस पेस। भाषा ममे पाता मिलमय पर बम्मम् । • (ब) ।
मावण्समुहास' रभ्य मानने से कोई सानो प्रये सिंह की मांस खोपने में गाम तो परसीको समे को हो र मर्याद असमापिपी मरपमर मा अफाप मारा मन्त्री पर्वाद गमन सहा प्रक्षम ही पन्म । समी०- से और बोग रियर ? को दूसर मत पणे मी स्पिरें नियों को किसी पुरणा हो! पर समय कोई किसी प्रकार म उपभर म मे दो प्युट सामना होम कितना दुख प्रक्षोसा अाप सिमे पोलादी विचरते मूम-बम धम्मो जामा दुरणपएमा उवट । समरिठि सियास सह सा गा स "सम ।। प्रका२। परी सू १५।। कोरबा बिल पाचच्च ग्मय मा सीसिपातिक और मम्म एकनी निवासी परिकल्पा रिम्परिक दुरापोगी म प्रनिशप पर सम्पर पपरिकोप से १ सम्मा। पर मायाम पम्पाय पिरोप प्रमशितोरे पा बड़ा पर्व समी to-मब रखो! प इन बैलों से अधिक प्यो रेप विपुल स्मा कोईरहोसर मत में मीना पानु तिमी इम नियों मेरी किसी में ही पौरपोप मूग इसपिये विषा में पापाचापाको॥ मूस-संगोपि पण मी तेसि धम्माइ ज पापन्ति । मुचूप बोरसग फरन्ति त बोरिप पापा ॥ प्रका मा परी .॥ इस्त्र मुख्य प्रयोजन इम्पीकि मूमन चोर के सेपपसिन- देहादिपरा से मब नहीं है बमत से मिड चोर धर्मों में विर अपये पसरप्रमभव मो॥ समी-कोसा मनुष्प होगी पपा अपनी सारा पूसरों को समता याबाबत सम हो पाती। किब पबचेरमन चौतर अगामा मत मनुण में प्रति प्रधान और संग प्रति होवा परी के साम प्रति विचार वामदारब, जैवमत पापी पेमा पम्पमई मी। मूख-या पसुमरिस बरफा पक रोमम्ति पाप मममीए । पूनम्ति सपि सहावापीपरापस्स | पूर्व सूत्र में दो मिप्याचे प्रात् मनमार्प मित्र सब मिधानी बाप समावी पवाद पर पीस बोम सब पुस्पा इसशिप बोई मियामोधर्म सम्पपदमपो॥
सत्यापैप्रकार पीलीयोमतो वो किसी मदहो गयौ परेको प्रमा हरे दुरामवे॥ मूब-वाहा गुरुम अकस्म सामी न हुप्रनिकस्स पुरिमो। का रिस पयप का सुगुर सावया का इय अकरम ॥ मक मा ।।ौ सू ।। सम्पत्ति विष पचव व मुगु और पैन धर्म मां और ग्यसे भिम अगुए अन्न मागों के उपदेशका प्रचात् हमारे पुस मुव सुधर्म व मोष अगुवकपम॥ समी-पापा मेची मोसमामी से बने धेरॉ मौय और दूसरी मौकोस और किम्मे खाती है इस एसर की नियों को योग अपने मन से मित्र मक्पयों की सेप पमा प्रार्ण प्रर्मात् पाप मियते । मूप-सगो इप मर गुरु भयंता इ मरमाद । वो परिसप्प गरिपु मा गुरुसेवर्य भइम् ॥ से पम सिसोनिसर्प में मचिम मोपापप्रम तिरेको पम्प मागियों में मेए पार्मिक पुस्मों में मोम भरेप । मग रस भी निरोप मिला मन मव पोंकीमो नमव से मिा सच अर्ग सप्प सेमी पुरे। रममावर्गव च संप मारमा परिचे बोल सर्पले संप से एक पर मरण होवार प्राथमा मौसम मसम्म मरण में मगरमा पाता। इससियोमा ! सम्पमानिी सभी के पास भी मत माग पोतिनोतु प्रत्पमानिती की ममी मम तो दुम्स में पोय ॥ समी०-बिन मिसमान प्रो भान्स रेपी किमक, पप पुष्य, मरे मत परेमे मौकी इनवे मन से विपरिमो हम मन्त्र की निम्न और अपनी प्रसार गेटो मार सम और प्रविधीमी परनुपपव रमोदमांनी मांकि जब तक उत्तम पिानी भंगे तब पर इनको पण भार और समपर्म में पक्षि भी होगी, इमरिये मिरा को रमिकमानी विषविल मिष्य पाबोर होत म्यो म प्राय तो रमरिये बड़ेवावकी पाव। मूल-कि मणिमो किरिमी तापापासास घिउ गुठाई। में सिरण मिंग सियति न रपम्मि मुख गई। निमकी सपा की प्राण पादप रम प्रने में प्रविना पुरोषपरे पापमय औरणमाको रस म्पमा मोटो मावण्समुमास इसम्म मुलासोबम पौकिनो बस में सम्म रोम मुखिको चम हो प्राय नहीं परन्तु जैन मिस में बम्मे हुप मिला मन्चमाषी मुचिको मत हो इसमें बाबा इसम बिता पाकिम पोहो मुक्तिको गाने मन्त्र को महीमो औषम्त म प्राय नहीं करते। परामी समी 10-मत में कई एरव मरणामी नहीं होता! [पेमारी मुधि में बाते और अन्य कोई पी! वा परम्म्मचपन की पात मही बिना भोथे मनुष्यों के पेसी त कौन मान सम्मा। मूल-विच्छप राप्मा समच गुणाय फारिणी मणिया । साचियमिम्पत्तपरी सिख समप पसिया पूमा ।। ३। परी म् ॥ एक जिन मूर्तियों की पा सर और इसमें मितामार्गिका की मूर्तिपूजा मयरमोनिय मार्य की माझ प्रापताप तापवामी जो ही पारा पतवामी दी। समी०-पानी ! स्पा मन्या तुमारी मर्षि पापपादिम पराणी की महीसी पारिश्री जैसी तुम्हारी मूर्तिझा मिप्यासी ही मूर्णियपरिकों को मी मिया बो तुम तत्त्वज्ञानी पनते हो और कलाको मायामी पपवे हो इससे रिवी किम्मर मत तली मही भूत-मिव भापाप धम्मो भासा हिमाप फर प्रामुन्ति । श्यमुनि कप त सिम मासार इस धम्म ।। मामा परी । जो जियरेको पाश वा मारि म धर्म म प्राय सब प्रामा अपर्म है। समी०-पाकिसमे बात की गायनमत स भिवाची पुरुप सलपरी पाप्मा ही रस पार्मिक पन कोम मान परिष! हामो नमवस ममुग्यो - मुख, रिम पमरे की महोती और पान की मोकीहाती वो पात र समस्ती की। इसस अपने ही मत प्रत्य परम साइ प्रापि की ऐसी गई कि बाबा मी मने मांग मोगबनी॥ मूम-धम्ममि भारपारविज सिं सुरकार सम्मरताणम् । मध्यप गारिएर रिद्धि समिति पिन्द्रोस । मा इसम मुख्य व्यपवर किमोहरिरादि षों की विभूति पर परमभे रसोनियों रोमांच बड़े स्तर सामान भरमा मममुष मरण सत्य पातास निमम्र पास मंग मेम सम्म मरवल पाया प्रकामा प्रोमा सत्यार्थप्रबाट समी०-ये मनरेन्पों में पिन था, वो प्रपौमी मा दुर्गमी लिपि अनि सपोय तसरे परली परे पहा बिबसे महामहोपो बमम्पणियों की गौचन परन तो गर पातु मो शम्सबरेली और मम्मी बारिमा। मम मममम मते को प्राप।बोकमानको इम पम मियोलोम्बिोगी में एक पुल भौर से ममे मे निमाको पुनारामा और सूर्य प्रतिमा पनि और अपये पचव परिवों श्रेजतिनो और मामी माविमेत एण्य पोलाकि दूसरे उपयों की तो मिला और अपने मन की पवि मा मूबी चोमो सासम्पबावि मत पाप है। तो ये मशीली और अब किसी पास ही है। मूल-साय मंदियास्प माप पास सरसिरकार। भत्तामरकताब बियाई मन्ति दूरेछ । राहीर इम मुल्स प्रयोग गरियो मेल परब यदि बोपों पर पर पपेगापिकमिप्यापी रेवी प्रविष्यमासमक महपाने और उसमेवरीलविदा पर माने। और बीयराम पुल्पों से रहते ॥ समी०-भाव मागितारियों को समय और अपने देवता परम पावकीयार सब नाममानियाकी देवी मारि: निरोष मते मनुबो 'भाररिक शमविपासमोती रात्रि में भोजर मने पार पक पुरस कोपा मारा ग्मी बाब पिया मी सोपसे मेव विमापस मजबसम्म रोक देवी को पिंधरापही मायो । खसार मा. में दो परिक -मस्तरेगी किकों को कम की मूचि होन पास प्रती भी इसमें सील मावे। मूप- सोपि म्पणि समो गायो मम हिंगोषिसि । जा मिपरमा गमो गुणसुनहमप्पर पार ॥ सही 11 जो वमन विरोगी मिप्यासी भात् मिया भमभरे। लोम्मे । गोपन्मे दो लापर्वात् म मामले को अप्पा रोग । समी---रेखा इस बात च धर्म एणे मत या मोरा पीपीपा र समग पपमा पर मोमो और पोंरि म मिा मनीसिहाँ ।। मुष-मुये ममा सपा मुहण गप्पचि मुर मम्ममि । ज पुपमममा सपा ममा गम्पन्ति है पुष्प ॥ मा मारण्समुशास इसम्म मुम्म प्रपोजन परोकियो म स मैं यम्म म मुखिको सप तो सभापही परम्नु म मि म म सम्मे दुम मियाली मनमार्गी मुहिमेमस हो इसमें पड़ा भाभी इस प्रक्षितार्थ पाकिब मत परी मुनि गाते सम्म कोई नही मोपमत पाय पही मते में मरम्म्मामी. समी-पानमत में कई रामरमामी नहीं होता ! [पे] सब हो मुति में सात और मम्मी नहीं ! पा पा राम्मचपन की बात कही। चिम भोरे मनुष्यों के ऐसीपत और मान सकता है। मून-तिन्छप रास पमा समत्त गुणाणकारिणी मसिया। सापियमिग्पपरी मिस समप एसिया पूमा ॥ म मा । परी म् ।। एक जिन मूर्तियों की प्रससर और इसम भिण्मार्गियी की मूर्तिपत्रा प्रस्परागो बिम मार्म की मात्रा पाया पडामामी का मही पापध भवापानी पी. समी-पानी या माया तुमारी मूर्ति पापयादि वापरली को नहीं सीनियरियासी तुम्परा मणिपस मियासी हो मूर्षिय प्रमादिकों की भी मिमा जो तुम तत्वज्ञानी कम हो और मग प्रतच्यजानी बात हो इसरिता कि तुम्हार मठ में तत्पापी मही. मूख-जिन्स पासा प धम्मो मामा रहमास फर प्रहमुति। यमुणि उपप उप जिम प्राणाए यह धम्म । ती म् ।२।। जो निमारकी पारमारि समर्म रसस अब व मामा अपम. समी०- पर सिनेमबाप की बात मानमत म मिाई भी पुर पचरी धम्मा नहीवा रम पार्मिक पब कोम मावा परित। हजो समतसमनुप्मा मुमगि मरे कीमती और मनी मोदी दोपपत एमटी पी। इस अपने ही मत .au पापीको एपीपलिया मी बरे भाग पोगबरा॥ भून-पम्ममि नारपारवितसिं पुरका सम्भवाणम् । भागए सरिर रिशि समिति यि म्यास ॥ पम मुल्म सम्परजोरिहरीरी चिमति परक प्रतुर रमभे पनि रोमारोहोरागस मप मम म मनुज मरपन पाय निp भ म सम्म मापसम्म ।
३७२ सत्यार्यप्रकाश समी विवे! विमों के साथ भादिको मानमासिनो मार पर और बीमा थप तो हम मौतर की मी समर्थ । पिस्ती और उसके पास के पेय और माता श्रेदेव मी भी मने उसके सम्मान इसपिने को हापू की बाती कापस पहले ही इगलब ऐप हममे मिल सब और खिो तो और रापवासपात शिवसेना - साया में पपुवा स्टी मात भी पजको मन तीची गोपी वो पैपिलोमा पुस्मा कोई भी पदोन्न। मूब-जोशे सुबषम्म सो परमप्या सबम्मि भयो। कि कप्पा गुम्म सरिसोइय रवठोकापादि। के मूखोमा जानपम मि और यो जिम्ममापित धर्मापात ध्यापसन प्रपत्र प्रपतीतीपोलोमल मापी समी०-- 401ो बैनी को होम-हरि न होते तो ऐसी समय माम पेठे । मेला विन्य प्रपने दूसरी को मुनिश्री मतो से होय अव मी पोती. मूम- भमुणिम गुप दोपति का भादतिम भा। भावेविदम मप्पासा बिस भमिभाव तुम। विजन कवि मौर निगमत * पापा ममाम मया मिया को रचिती ॥ समो.-मामिमा पनि पहा तो। निमियों को पोषी मी पाठ योर मन मम । मिसन पोपी सी मी बुदिपीमनिला, taौर पदसामों को नुन पिचर सी समन विस्मानाबोर पप। भूम-यण वि मुगुर पिनाम्स सिंग ससा सम्म । मा का दिममपित गनुभावाय मंधत्तम् । जो मामले पनुमोना और जो रिस पत। भएसबगुरुयोको मानमा मर्मत मालमाणितीय माममा । ममी मा जान मन प्रधानियो मे पान फ्ति का सामान अपनी मुठि स्पनर सम्म सम पेस भारो में हमने मार्मा, गुरु मिम्मी पौर परेश भो तुम को दिनमा एकसम ? जानुम इसमे को दुमा इसलिए उनम मन में मार बागव मी.
मावण्समुहासः मक भा मून-विहुभम अर्स मरव बम निम्ति जन अप्पासम् । विरमविन पापा घिदी पिठत्तर्म वायम् । मा मा २ परी ॥ जो पुर्वन्च एसोहा मी पपि, पापारादिम नी सोग परें किम नरक में देखने पर। समी 10-अब कोई चैपियों सणे कि तुम मापारापिलोमत दो। इस मों को पानी कोष रते! और मादोरो ता तुमार परम पापम पोपण मोम बासरे और जो मुमार मने पसब बा पोरो तुम त्य बाबो सीमाग ! ए प्राण सम्पदेश मा सम्मान पियर निष्प सप बिना मन में भाप सोका दिया ।। मूल-तल्या मास प्रहमा फारसरहिया नाण गप्पस । अति गमुच तसिदिरियापम्मिम ॥ २। पही स् १२१ ॥ गोन्मपम स पिणयों के मायने मपमाऽम्म परेको प्रसार भी समय से दो मी व मन मन न माने से कई वामन मिररोखता भी मप मत मला मरे।। समी - तुमार मूबपुरी के माम्सक सिनेमा और रोग होने म्पि मतमे पीपदाम प्रिय जमी इसी पसब की पोरन भपे । महा हो । यो योग अपना प्रभावमा पिसाब रेपो मी मी न मावता एसी मिभ्य सम्मी पापों को में सविक भीमही भावी पगारपत। मूल-चार जिसस्स रिमा मिरर उस्मुर परिसपमो। सागर फाटी फोर्स म भाभी भपरण ॥ मकामा । पत्री म् 10. जाना पम्पमकिशन सापुत्री में पर्म मार और पम्प में मी धर्म तापमनमा पाल कमक में राम मिमी पौष उम्म समी०--पार'पा विष्यमा ! मुमम बही रिचय सम्मा कि इम मिपी प्रभा बरामदभमासिक परमपशरथ सिन्धत मा सम्ममा तुम समय मुमने तो म निदा पर मान मोसमा अमेरोमिमाम पामबाग सिमप्रय ममममोग समाव समरिग. मूम-घर फरण पम्मि साहुखं तर पभाया दूर। भिधम्म सदार पि तिरस पुरा निठपर।
सस्याप्रकार जिस मबुम्म स मैनधर्म बममी अनुभव हो सके तो मी गो और सधरमपकाई नही हम्मी मामात्र ही समय है। समी०-मणा इससे अधिक सूत्रों में अपने मनगर में पाये भरूमा नसी पत रोगी ताकि समय बौर मुधि हो ही सब का भी मौनसा ! मूबकाया दोही दियसो गया मुगुस्स पायमूखम्मि । उस्मुत्त मे स पिसमय पी मोनिमुणेमुहिधम्म ॥ भा राप सू ५८ जो मनुन को मिनाम अर्माद मनों * या पुस्य रमून या भन्न मतमयों कोमी न पहनामावली इममा हो से पुलिस से ब्याहै। समी०--परमी पाच मोमे मयों में सारे विमान रस मोजावा मे पायापर से मी ही रख पर बम मी संचित पापी सम्पी समोरो विचाही समय। जो ऐसी । म मात थिमिमा परिने तो इस अविबम प्रमों को मेवादि शव पुष समान बाम इनके पास प्रदीपोत परन्तु ऐसा बना र प्रबिधानों को भोपाकिम र मेरे परिमाम सोगी मोम तो सम्म मात्र भारिपाबमा तो पति परिमो. मूख-माओमीमहि सुम्पबहार विसोहि वस्त। सम्पा पिसुर बोडी लिए भायण पर पतामो. मन मा । सू ५. बोलिन्पों मेरे सूत्र विसति ति माली मा होम HAR और गुम्बामा से परिप्रमुख होम पुची को मात । समी मत पचे मरने प्रारिम सारे पास । पूचनासा मरन्य प्रापि ही परिधोपुर से मालप्रमापा लिने अपवि नहीं मिखते पूरे मातेररोल पम यों को पास होने चाहिये सोनपेज और हम पिचादि प्रकोप रोमी रोज मुख ममे हुस्न को मस दो तोलापागप सपनमाचार और पसलमाल मचानवादि पापीच प्रतिक पपेपमा पना म पनि म भूध प्यख या माल बर्मा हम सचरि मानने से बोड़ा सा मन और भपिक को प्रायोजन हुन सापम में गन्ने भूग-गरिबा सि बिए माहोमोपापा पपिपरफए भूमो । वामपतो का मसिनोएि प्रामारम् । मक भा । पानी 11.
दादरासमुहास जोरम मरम्पयन् माणही निर्म प्र पर है प्रया गो स्मिधर्म म परमही नवे मन परामपा। समी-पय मूषकी और सनहीं था अब मल में मेपारम्पी और ममत में मापारम्पी कोई मीत्री परिबो परमो कि परमी पर्वात मर्म र भारत में मिनु माविक , इसस पमान सिहती है कि इस सब मा भने में पूर्ण व बोग कड़ी माम हॉपपमी इनकी पत प्रलापोंकि पमन पुल्प सम्माचे साप हेम और गुणों को मिला राम सुम्पिति करते है जोपामिया कि प्राय निरसी परिस्परमप भी सम्पसी पर वापगदि प्रमोशी मारमा जैवमत का। बरखि कि सब गहम्पब म रम और मिनाभते १ मिमा कारण और समाम्म धर्म मातीपाकिम पर सिम्परपसमा मनपरा पर समान दूसरा रिस्पम्म दोपही रंग पतियो बी बोबस म या दोगये। अपमएस महावीर पर्पत २५ तोलाको पपी पी मियाली में पीर अनमय मामनयनेमे समितसर सहुप माय और रमन पर्म भरमौर दिप पणन सममें होमियोप्रतिमा डरा पेय पचिपे बैवी बाप निमा और परमाप स पाक में राम मात्रेण मग ये। इस पर को पासो बमुत मुग-पगो भगुरू पणो पि साप गोपाप्राणि विषाखि। सम्पनियाद परप्परत म पिपम्ति । सा पास गर्म एक मानव प्रात् निमाबिविल ति समोर नियनकी रचा और मूर्षिकीसमन्य धर्म समी-पपरवा खिम्प मसिहा ममियों RR और प्रगती प्रमूग यो समय भार हिम में मूर्हिामाब-- मएकारण पिपासाअनुसरल सापटपपाईम ॥३॥ मा निप पन्नगो || पपरमाणं तु विधि पुग्यम्॥६॥ हस्पति पर R में मामा म प प्र गय मायमरी मय भय ..सामा भमपरिक इमार जि.पो में प्रममा मोडसिपाप शायरि म य रसम सब ठार विमरोम कामपर पाप मापी पचास बसपारो बोम भयम् पर्यत हि मनमाया भर सकतम न्यायम मामामामुdिuriभापतिमी नस में मा. गुल मी र विपत् मन में वियस पर्थन् मोती और RTR म म ५ो.
इज्य सस्पायंमकारा मन्दिर सपने के मिक्म-अपने मदिरों को बनाने मौर मुमने मेरो जाती मन्दिर में इस पमा सम्मो ने मार प्रीति से मन मे "म्मे जिमम्म्य' इमानि मन्त्रों से धमानि स्यय र "चम्म मपुष्पप्पीने एपनि से गरमाविमा । रहसार मास में मूर्णिम समा पबिवा पुगौ को सम्पय प्रवाई मी मरोज सके। ममी-पेपा पथ प्रपोजपित किमान से और पुरियों के पचारि रोक है। र ! में सिमरिया से प्रेम पामको मापोप पाते है। एक किसी मे १ ली मरमा समेत देशम राव पाच रसम्म नाम अमारपब एम पा इमानि सब बा ममी और म मे सपने मोबकि अनेक ली बोग ला मते । रोगी रहते है और पीप मी पर पायपादि मूर्षिक्षा पेन्द्र मिशन और बो पांच 120 मनापास पन मिलने पाँच र शीशासप भूपोपमम्मी ही करते। और सबसलो भोय। और यो मम्पिको समान सेवते हो वो मम सनमान और चरिख लो महो! म भाग में शियोम के गले में मत और उसके मायने समी०-चो ऐस्य हो वो सब नो योग अमर हो जाने चाहिने सा हो इसपे प्य इनकी मरमूमपम की पतदूसरे इसमें सभी मदी। इसमें एक मामे प्रसो खस भाग पृ ५५मा- माधमनभूपनरय वीपासोमवयपस्थ । ग्पपारपरेनेम्वान् मचिरैरप पजमहे ।। बम गाना चार पुप्प प दीप भव प्रतिमहरपयाँ से विपेन्द्र अर्थात वीजीएस। इसी मेम पते पत्रिम अमिलों से जी । (रियर पर) जिन मदिर में मोहमही भवा पौर मसापर पार म्परने मा। (मिर रामे११) मनि प्रग से मुचि होती और मिन मभिर में गले से सम्गुष पाते हैं जो म पानादि में वागीश्पमपाक मे पर्याप । (विपर पा५)नि मन्दिर में सपभरेचदि मे मनितारने से धर्म प सम मोपको सिदि रोगी(सिम्स T1) निस्किा में एस तो सब जान्ट ममी-पच रेवो! हमी परिणाममा पाने में इस प्रकार से प्रपारि पुरे कर्मक्रय मोरम माये भवसागर से पार रक्षा मण माग एकबार में य धर्म भई प्रम मोड शहर मपन्समा को ससमी पाम सुपी मय परानी AA में मासपोपी हो। इसी विषय में जिग्य मिलाने सिममूर्णिम स्परम मिमी भी पानी पर अपने काम गरिमा गो माण्समुमास' - मे(मार पट १९५) शिव पि पदि की मूर्तियों में प्रम कमी व पुरी। प्रात् मारून सापनी। समी०- महाब रियदि की मूर्षिया सकले सापनमो बैंमिपा की मूविपी पासी नहीं। यो में कि हमारी मूर्तिमा त्यागी व और एममुद्रापुटइसपिपे प्रची और शियदि मक्सिी नहीं इसधिप दुरी तो इसे पन्य शामिले कि मारी मूर्तिपो हो बावों सी के मन्दिर में पी और सबननादि पाय पुनः त्यागी सी और सपदि की मूर्तिको यो बिमा बलामी पतीलागी क्यों दी ! और गोव मो वो पा पदार्थ सब मिष होये से पाँव। सब मतों की मूर्तिपूपम्प। H०-मारी मूर्सिपो बसप्पभूम्बादि पारण नहीं करती इसखिपेमपोरे॥ To-मामले सामने की मूर्तियां सपना और राजा पण बोचा। मसे मी मशिप मूर्वि देखने से ममात्पत्ति होती से साधु और पागिना कि मस्तिों को देखने से राम गुरु प्राप्त होते है। २०-ओ पापय मर्सिगारेचने से एम परिणाम मानते हो तो रसो मरम्पति गुब मी तुम्बास में भावगे । जसरि रोगे वो सच मारो सबोगे। दूसरे मोरम विन्रमा सण से ममे से ममय मी पिक दगी और यो रोग म्पप समुल्लास में विस पापवारि मूर्सिएप पने परी बने। इसचिपे देय मिला ये मूर्षिपूग में स्म मेबारा से इको मनो में भी पुलसी प्रसम्मथ पत्रे मिली। पइम मनोरमा माप पर मे- नमो भपिता मोसिवाय नमो भापरियाय नमो ग्पपमापारम नमो पोए समस्पर्स एसो पत्र नमुबारो सम्म पापप्पणासमो मामाघरबसम्मे सिपमपामासम् ॥ ११ इस मामा माहास विशा पपई और सब पियों मप गुरुमन राइसम ऐसा मामापकिन पुराण मायकी मी मा पायम विधा।भाररिक व श- नमुपार भरपराकम् । मन्तापमन्तो परमो मुक्ति अपामधेय परमरमुत्ति। तचाणवचं परम पषिसंसारसचाणदुपाएं | ॥१०॥ खणं अयम्लु मा भत्यि। जीयार मषसापर । पुरावा मुचु । ममुमार सुपोपयम् ॥ ११॥ कप ! प्रणेगसम्भठरस घिमाण। बुदाय साररममाणसासुसाय । कसोप भापापभिपसमासो न सबपत्ता नवकारमन्तो॥१२॥ मोपमा पनि और परममानपम्प बाम्म म परमप्पच या में परमनदुखों मे पौषित प्रगती गीतों को बभर मन्म प्रमा किसी समुद्र पार ग्वारगी मोम हो। यो प मस्पर मनीपोम समान मा इस दोष । मम्मान में से ।
सस्पार्यप्रकाश मन्दिर बनाने के नियम-पपने मदिरों को बनाने और पुमने पर पानी मन्दिर में इस प्रमाव्यमी को मात्र प्राति स प मे को जिनेन्द्रभ्य सम्पनि मन्त्रों से जानादि माना और सबसमपुष्पभूपतीपर सम्पनि से सम्मानिना। रम्पर मायने में मूर्तिपूजन पबिबी कि पुवारी में राजा व प्रमई मी न रोक सके। ममी पावे सब मोषामित कि पुत से न फुयारियों के यमपि रोकते है । साR NA में बिता । मूस्पिस से राम पोम को मापदबाते है। पुलिसी मे १ को प्रभावाला रसमे 1 केला एच पा रस बम हमारपब माया इमावि सब बा और पर मेहमाने को लागि भने मी सोग शाम १ रोमी या बीचे मी सत्य पापबादि मूर्णिपण से भी मिला और जो पांच र भागाने से रान मिले तो पांच सीना सब भूपोसामना भी मेवे ! मोर यामलों मोगोमो मूर्तिया मर मार से मस हो तो शाम मनपर्शन और चरिश तो करते हो । म माम ॥ में विवाकिगोतमले में अपर और उसके स्मार ." समीक-बो पेस्म हो तो सबनी रोग प्रमर हो बामे चारि सो " होते इससे पानीमा मूमन की बात पूम इसमें कम कापी। इन प्रोम भोग रमपर माम प ११ में:- सचम्ममधूफ्नैरप गीपासतनक्यपसी । उपचारपनिम्दान् रुपिरैरप पमहे ।। इम समान पख पुष्प प दीप पौरपतिशोरपणा से मिनेन्द्र बर्ग दोहराया इसी से हम से भूति अमिनों से पर्ग। (विमार ) जिन मन्दिर में मोदी और PR पर ग्वाने अगा। (EिTOसे ११) पणि पा म मुखिोची और मि मनिर में आने से सब पाते है जो मा चारपनि से वीरों श्रमपम से मलयन । (पर १५)निय मदिर मगरमपरिश्रमूर्तिनी परमे से धर्म प मम और मोच की सिदि होती है। (मिर पर)नर्मिती म वो सब जाम् न्य समी--प्रब रे। इसी परिमल प्रसम्मा बा गो इस प्रकार से पापारि पुरर्म म पर्व मोहन भाये मसात से पार रम पा सएम माय मरा समय पम पम मोच में पास हो सब गरजा ये सब ममी सोम भुग र मब पारी में सिर से पास लमहीं होते। इसी दिशा में विप0 मिली निमपिरमपन स्मिारहोंने अपनी र प्रम में शामिनी मारासमुमास' नियकिय दोसरे परक में पप्पा । सिम्यारामिच्यकि भयन्तरि बरकम गया। सिम्सार पा 7 में जो प्यम सी मुण सिनेमाम सपनामा मोठि को परस्परमा पर.1 में चिकितअमुरेष मर्यात प्रिया सुरेख दिशपरेप सप पसुष, पुस्लोषम पमुख सिरपुरमुरेव पुल पुरक पमुरेष रचणमुरेच, समय मुरेव पौरभीयपमुदेवर सब पापा मारायचा पत्रा मपयाँ, पीसों और मिताभ समय में नरक में पमे और नाति पुरेश प्रभाव मनप्रीमतिपमुख, बारातिमुख मोदकतिपय मामिणमुरेष नियम्मपतिणमुष प्रविधमुर प्रयापतिमुरेच रापपरतिग्मुरेष मोर जयसिपमुपये मी सब परक पप और प्रसव में सिक्षा कि परमपस एक मोर पस्त साधर सब मोह। समी०- महा इरिमा पुस पिचार किमो सास ग्राम और वीर शिम गुरु सरपम्पमी पापग्मी पर भादि सब समातरम सस और मुहिरे और मौहप्यारि महापार्मिक माममा सप नरक गप पाणिनी बड़ी रोप्तो प्रयुत विपरमते हो प्राण पुरुष प्रमियमसामय रमन खन्य मी पुरा पनि हवन सा सेतो सीहोम रमा मीर में स्थित हो अपगी कि इस मारी दुरामा मनुषों सा मिपप यो मनच मी परो । परेमा । हा निरी में चमक बम सत्सानि प्रये में भी रोष माही। रिपध्यार श५५ में शिक्षाकरिता चौर भयो भारि को पमा मी पामा सिर महीरा और अपने मिनार पाया मोर मा परि वा मुपित दम पर। समी- विचारमाची किम और बप्पपरि ती पोरम जसपर जामसमिनियों भी इसमें से एक निमा और सरे सुदिप मा मप्रम। मों की मुक्ति का पपन ॥ (रसार ५)मपर भरपीनमी से पर्मो मे एकमणिशा स्परसापुरीमावासीस प्रम दोरण पम्मी और सापपास मोरी माती प्रस्ताव पोप रमम मा nut मा समय समयमाय पर सभी निर्मा पापिपिचारा पिया और रस मिरविसर मिपुर भाम भी मुख पुकार ? पो गम मापक समास आमममापी मान्यवर मे मुखि •रनमा पमरमा मेसी . - ७८ सस्पायप्रकाश और जो इसम प्रमाता से मयते हैं। सोने पृपवरकने पचा सम प्रपा पम्पएक मुहिपाक इस मन्त्र के रिसा रूप भी 11 अनेक मान्न में पर मामा सम्बन्धी मन में को मसPR से व्यरमे पणा दी जब कमर मा मग्री प्रभावका भवसाम से जीव नहीं पर सण । म सूत्र में मारे और बो प्रतिमा मा महामलों में प्याप एक मात्रा मन बोपन सय ही ममा पूर्व माम मयि सब भने प्रत्येप्रपा गमन में प्रमोच प्राव माने में प्राये से मुम्पनी अपर मे मार सप मारमा इस मन्त्र का अपर-(नमो परिहम्पब ) सब तोपरी से ममस्मर । (मो सिमा) नाम के सब सिरी में मत्था । ( को भापरिचय ) र मत के सब प्राचामों में समस्पर । (मो समय) वैवमत के सब रणपों को मारकर। ( नमो खोब समया) मिले ममत के पास दो में मसभेममा पपि मन्त्र में * पर हीरे धपि विचार प्रपों में मासी को समस्कार भी मरमा विचरे इसपिपे पही पर्व है। (सपनि 11)ो मन बी पम परिवार भये प्रो प्रे प्रामोधरे। समी--बो ऐसा हो तो सब कोई पनि प्रो पुरस्म प्रो. या नहीं हो ! ( सार भाग -1 ) पागप में मिलेपन से पर पारोबात है। अपमान पर में विकास मन्दिरों म पौगार विमा इत्यादि मूर्षिश्य विपन में इनम गुत सा सी में मम्म बाबो मनिझमा मृग मारनमवी। पर इन नियों के प्रमों की पांच रेलिमे ( प २२८) एक नमा प्रभाव प्रण मेय से मोग यो पत्त्यमी होम लोके पमा । (निमार )मुनि चरित्र मेनन फर्मान्तरण मोर में विपन माग गरे माप देखोर मया । मौके पुत्र मग मुनि को पाविच म्प रे गा मा रेश्य एमा । ( O R६) मत प्रसाद wिो पार तथा मात्र हो वो भी सन्म orm माया में। समयमा सामा। (मार RE) म साधुलीन हो तो मी मान्न मठ: सपना मेर(सिन) माबग क्मत के मानो को चरिमाशिव प्रधाही वोमी ग्वीचमी परिये । (सार पा.१) पकने में पांच पूर्ण गरम पारिन पर क्मिा वमन और पाप पिप से महीने में पले मिस रोपा।। समी – इस मा भी सम्भों की बौखा। इसे मत में गुतकर्म भने पचा माधु मी पनाति प्रेम्प मिसा में मारासमुन्नासः २८२ मर्प में प्रेषिक पोकीम्स पे माम एमाबपोम से काम मारिक देवामा । भपिशान से मुफो यहाँ पाय पाच पारपरक पद समी-म्परिणिनिमा पसम्मा मिप्या प्रमाणे महापौर को सचम मानना महामहिको मत है। मदिन में रिसीकि सारे। समी-रिपेहले मधुमी मा समानरोगये येण्ड में परन्तु पकाम्प्प और वे गमल होने सेम में रखते होंगे तो भाप और ये! (रस्सर १) बने मे पास अब पनवे प्रारिम पास समी-अपरेखिये इन विमानता मया पे कर्म किये जाई हो ममुणरि मापी बी सी और योग मी पौरिक होम मरगा। (खधार ) पाया पकापास मासीमेपली। समी०- मासी पाप atोपनेबार पार और पापा से पापनिटोमोमी गुथा पुरत मी रोज इस पर पम्पब मी परिय, पकिन्न भन्यो। (परिपा) परिवरिष सा बयान में हा पा और मम से मिक्षा मापी त्या बोली कि वहां पर्म अदा पिका समीको रस मिसाघे साहे पाय पसरसर में तो समी०-इस पोसम पिया मारि पुसब मामेमा । रमन माम पा. में मिली कि एक पाचवको मूलि होने पर भी ईरसपा मारामापस्थित होमपा करो समी०-मोदी! भारस मरे पहा मी प्रम पारि मप होगा हो तुम सम स्मारम भपकी रम या बीमा लोग तो पुलिस पदि सबस्यालों में मार चिते हो। बाइको भावभौगाय- सरसोरणा मैममुगो मुशिमूलक। भोवार पमशीसा निसा जनस्पप ॥१॥ सुधिता पिधिकारस्ता पासिपाबा दिगम्पप। जोगिनो रहे दातुर्वितीया स्युमिप ॥२॥ भुरके मरममनी मोघमति दिगम्पर। प्रादुरपामय मेदो महान् भवेताम्परैः सह ॥३॥ *सावाबामियान्सपो देव भोममे-(सो परप) मारण्य मिपामगोप सिर पर हसिपमा सत्याप्रका समी-विचामा चाहिये कि भम्प मन में एमस भोपर प्रावि पुरया, चौथे भासमान में ईसाई, सात समान में मुमारी मत में मी पण सिरे से ही दिनों को सिरशिय मोमिन । किसिमेनी मोना संचमानमा मात्र पोनिमसे एक नीचे रहते मी पपेशा में मोपनि पर्व है। भावपसी बैनी रोग र मानते है रसीको अमेरिकाको बार है और पानापसी पिसमे पोचमा। रसोमेरिय प्रोम माप शिया व बसपी पमेयोत में होती। मी मुक बाचन में रेलोंकिग्स शिप मिपुर पर निमारमा मुखिम माती होगी और सन इसमें बने मौति रस पर में भौति भी रहती होगी। यहां प्रामप पीति और प्रति सही यौन मने। मुलि तो सी में समय में मनमा माममा मेक और पक्लिों में मुतिमी एकामा अपनी मी मुशिनिस में प्रम से पास होगा भी मुग्रीसम्म कमी मी अन सकते। भब भर बोको सो सम्मा का इन पुनो (AAR ALE. पकोड सर पर भासी से महापौर प्रेसम समय में स्नाया। (बिसार ) एवई राबा महापौर में पयोम प्रमिमाम रिमा र निमोNि...." स्पाम और 16 रेम भावमा । समी०- अब विधाम चहिये किमान और नारियों ने पकिन से कितने ही मोड परिये ॥ ददिवससममिया माला में विचार- और नाबालायाभी। समी-बाबो सम्पुण वैषमत में हो और मानव पानी प्राविमो मोवो समयसमाथि R०-बाल प्रति पये जीव पाये। गले मायने ने अपार सफ्वाचिपे हम लीडोम इस समसामवे। - दिपारोदालोंकि बौनों के मारे। पार पिये होने पर पता ममावि अपिल - पाचे परि मण्पुरतहोप रसभेवनही दियो। (artan) इसी में एक मरमविभाजपा माणे से मना होम योग मरोग हुए। मागणी पाली में मामा मारिमाया। माल है कि मेरा नाम पुनम पांच बचाये सम । इवये इन्त्री अपनी नापीका मावासमुखास १८१ मार्ग में अधिक होने की एप मे मत्म राममान योग से सुरोल पम मार्षिक रेखाएमा अवधिमा से मुफ्नो पां प्राप्य बाल माफक अदि रियो पा. समी०-इमादि विष्णपिम महम्मद मिया बातमपणे महापौर केसम्म मामन्य मममति की बात है। मायरिणाम प्रा में विकिपमा पारे। समी-तिइको साधु भी महापाप समान होने के साधु मेरे परन्तु पालेभाभूप बरे गमल होने सस में तो ध्यप और हुये। (खसार १) पूरये, ये पीसने पत्र पाये मादि में पाप पाय। समी०-अबदेशिने इको पिडाका महामन किये गये मनुप्मावि पासीमेपी सौर नी भोप मी पापित होम (सार 1.)मागचा एक पापाप मामी कोसफ्नो। समी-बो भाषीष पाप मायोमबार पास बामा मानन्दित हो। होमोपों गुणा पुल मी बोध होइस पर मम्मान मी व दिवा पर कितना भार (बहि.) एक दिन सम्बि साइ मूब से पेपर में पा मय और धर्म से मिथा मामी ला पोती किया धर्म हो कि पर्वका सम्म सबम्बि साधु ने सारे घर पर भी मारी। समी०-इस पत्र को सम्म मिया मातुनि पुसन मनेगा। रसार मापा. में सिधक एक पाय की मूर्ति बोपरी गरसभमा मापनेमा उपस्थित होमसा नती है। समी०-मोमाजी भास तुम्हारे पाची पत्र प्रति और मे मन होखो तुम रसम मरवले अपचौ सालों बीमा रोली महोबा धिस प्रारिमलालों में मारे हो! भव इबो प्रोगाव- सरयोहरपा भैसमुमो सुचिमूम। प्रोवाम्बरापमापीमा मिसमा जेनसाधर ॥१॥ हुचिता पिचिकाइस्वा पापिपात्रा दिगम्मत। समशितो गहे दातुर्वितीयाः स्युमिर्पय ॥२॥ मुरले म केया न श्री मोहमति दिगम्पर। माइरेपामय भदो महान् वाम्मद सा॥३॥ मोमपामा बिमाप्ती सोनम-( ब) मी रखना और मितामांगमय कि पाविम ऐप १८२ सत्यार्थप्रका । - वेव साधारण सब समापुत राय, सिौमसाममय सम्म श्रमिकों का रखम्बर (१) निमको पति प्रवे? एरियामा पप बामपन मना णि पास रामा पिपिएम (मोमो प्पा पागने का साधन) मास में रखमा को मिला तो शाब में च मेन्य पे दिगम्म दूसरे प्रमर के मधु होत हैऔर मिला। पारस्प बब मोबन मम्मे पाव भोग्न नि पर्व पसरे मर साधु हो । दिगम्भ स्वाम्गों के साथ इसपो रिमामोप पीभिभपा वहीं और ताम्मम एक पों से मोजो प्राप्त होते ॥३॥मामले साधुओंभ मेद । इसी । लोगों प्रोगहन प्रसिदी और पांचमीसम्म मनाइल्पवि मी ति है। विसार मा में पिक पांच मुहम्मम परिसर किया प्रात् पाच मूग गिर पब रया के मधु मा । (सम्मान । 1८) हलको पौ बाखौ तुलस्ते। समी--प्रमीचे अनगो ! माग पप्प पर्म का प्रिय पार को अपने हाय हाल में ग्राम गुरु मेरा भवन पर विजय परामरस बीच को होय होय ! बीच कोबरच हो महावीरे॥ विसर . सब में स्वेताम्बरों में से हरिण और इनिों में सेवामी ब्यादि की सिम्मेि बोल पम्मति मूर्षि कोही मान्ने पौर पे मोचन पब में बोल सपा मुख पर पो पनि पछे है और ती पदि मौ- पुजवामी मुर पर भी मेरे मन मा-एच पर पड़ी माल बांध चहिये कि "नुभव प्रचार के पत्र में सूष्म तरीर बाब मुबलेपमें रणव से मरते । और रसम प्रप पर पट्टी न बोपने बारे पर रोगी इसपिने दम बोम मुर पर पीपमा मचा सम।। २०-चपत विच प्रमा प्रापि प्रभाव में रीति से भी क्योकि जान प्रम प्रमरमिये मुबकी पा से भी भी मर सके, को तुम मी मा अमर महो। म-पाच तो पी मरण पाबो मुसोय पशु से सो पोम पंचाम्स पीका पांचने को पाप होपानि मुख पर पो बांधना पचा. tu मपी में-सीप्रसंसा मामले पर धम्बर मते पेशा पारे। • सपना पगात होगी।
मादरासमुहास उ०-पामी मारी बात सर्वच प्रसम्मबकि पीता विविध किसी भीष भलिरिख मी निर्वाह नहीं हो सम्ता । बस मुख से तुम्हारे मत में गोषों से पीना पसी है तो बने, मिने बेमे हाम उसने और फेत्रादिपाने में पोपा अमाप पाती होगी, इसरिये तुम मी बारी में पारा पहुंचाये से पानी सकते। प्रबहातक पर सरेकजीवों की ममी पीपे और पाहम नहीं बच सकते हो प्रशकिसन पु भारि पदावों में जीय परे हुए बो हम मुख पर पसम बा तो पात जीव मरें कपण बोधमे से म्पूर्ण मरते है। २०-पा मी तुमार पन पुष्ट्रिगतीपनि मा पिने से बीयों को अधिक तपास मस पर महाब तो रसम मुबम मामाचे पपा और मौव समय में मामिम द्वारा इमाम मिमा उससे उम्पण अधिक होम गायों को विरोप पाषा मामे मवानुपर पच्ची होगी। देखो। सेवाप्रेमी एव परम पदवि पारेपये तो म्समें गणता पिता मारने से पानी नही होती है मुख पर समाधमे से राप्यता अधिक होती और एबा हने से पूर्व अपने मतानुसार पायों को अधिक दुम्बाप हो और बन मुब मार किया ज्यवार व प्रसिम्म बिमानुसइमा रोम का मे मिक्सवमा जलाधिक पा और पाषामा होस । देखो! मन अधिने मुख सेवा और कोनो मे तो मुखमा पाने से म बस और बीम परमादो से अधिक पर म अनि में पायो मुख पर पट्टी बाप पो रोकने से परिम शाप प्रतिशत से विमाप्रमाणे को पविक दुसरेठा। इससे मुख पर पही पापने पर्चा से ही पिये पर बर्मामा है और मुख पर पो बापने परों भबपापोन्मकाल म साब ग्याष मी मही व निमुपसिक मकर भानुप्राधिक बोबारे तुम दोपवणारा मुझ पर पपी बाप से दुर्गच मी अपिटमबीबकिपर मौतर दुभ मा। गौर से मिस यु मिसाईपदुम्म्यपुत मनाई यो परोन पर दो दुर्गम मी अधिक वा बाप जैसा किम मागम' भपिक दुर्ग पमुख चौर गुहा प्रणम्यून पूर्ण होती हो मुडपी कारने यस मुख्यान और प्रम नरपे तप सब भोने से तुम्मरे शरीर से अधिक दुग्ध उत्पा पर सर में गुरु रोगमा बीवों में मिमी पापा पण्ठि हो म्तमा पर हमने अधिकता है। ये मए पारि में अधिक दुर्ग मे B मिः चिम" प्रचारमा प्रारिपात प्रथा रोग उत्पड होम गौ मे दुप एपको और म्यूम गुणध होने परोम मौम्पूष होम औरों में गुस ८२ सस्पार्यप्रकारा तीसरे प्रकार देवा पारव मध समापुरु राय किसी समय सासर मिली के स्वेताम्म(१) निको पनि प्रते। । विमान मन पस बार नमना घिरवास म्प पिलिम(फोप्लोमा या बापने का सापन) गम में समा जो कोई मिलारे तो गाव में पना पे निम्न दूसरे प्रमर के साधु होते. भार मिलाने पमा सस्प ब मोजम पुग्ने पात् मोजनमें। नि स।गिरी असेताम्मा के सब इसप्प ही में विमम्मोमवाप्रपा महीपते और नाम की पों से मोप में प्राव होते || माओ मेरइसे गोगो माग्न का प्रदिपपचिमी बन अप इम्यवि भी दिया है।विसार मा म कि पांच मी पारिताम्हण किया धर्मात् पाच मूग गिर पाबासा मा। (सामान । १८) यहनने पौ बागल थे। to---श्री मयोगो | उमारा पण धर्म मारमा पप म प्रात् चाहे अपने हाथ से सम्म समय में परन्तु विधा प्रसारको दम्वा होम्योरेय होस भावी। पर R• संन् । सार में स्वयम्बरों में से इम्मि और रवीं में से पानी पावित्री निकोलसे मोल पापणी भी को भी मानते और ये मोगन स्पब मेवोर मचा मुख पर पड़ी पांगे म * और स्त्री पनि मी सग पुस्ता बानोमी मुख पर को पायो प्रमुख पर पो ममत पापम्प चाहिये कि "तुम" भान प में सूम सरीर पसे नीष पटेचे मुखपदी गप्पच मरते । और रसम पाप मुख पा पर धमेबारे पर होगी इसलिये हम सोग मु। पर फ्री पोषमा पप्पा समय उ.- पप्प र प्रमा मारि प्रमाण रीति । चोरि गीप आज भमर मुख की कमी नहीं म माने, हम तुम मी वर प्रमा माको हो। म.-जीव तो नहीं मरण परन्तु जो मुखमय मनु म समे पा पौग्स पोगा पांचवे परको पपासपने मुन र पो बोपन अप्पा रमे पपी में-कीमत म्मा मते और वाम्म म पमा प. वर्भाव-मोप .पहान्य रेनषा वात रोगा।
दासमुन्नास 12 १०-एमी तुमारी बात पर्यण प्रसम्म स्पोकि पापा रिसे बिना किसी भी मनिषत् भी विचार नहीं हो सकता। मुखको पपुष नमारे मत में गायों में पारा पाती है तो पाये प्रिये मैन, हाप रस और मेणियाने में पारा प्रभाव पवी रोगी, इसम्मेि हम पो बालों को पाया पचिने पूरी सको। मा-कोयहाँ तक न सके वहाँ बीयों कीरता सनी चाहिये और हम नहीं बच सकतेमा प्रयतमयोंकि सपा भादि पवायों में बीच मागीबोइम मुख पर कपसमाप तो गुव बीप मरें कम बोपन से न्यून मरते 7०-पार भी तमाय पण पुष्यिापीमकिपा अपये से गोपी से अधिक पता है में मर पर मना बाप तो रसम सुख म मुसमाप पा और मौन समप में प्रसिभ धारामा होम का से मिमाता रमसे प्या अधिक रोमन बाया में क्रोिष पौवा उमारे मानुसार पांचती होगी देखो। सरसर पायो मर मि पारे के बा तो समें उपब पि होती जा रखने ग्रामी भी होती से गुर पर कमरा बांधने से ग्यता अधिक होती है और स्मारने से पूर्व से इस अपने मतानुसार बायको प्रषिक दुस्सापक और मुख नमिया पावरा मासिमविदों से मुसामा दोर से निभावमा वापिक पन और पोका माहोय सो से मनुष्ण प्रतिप्रे मुख से इस्प और पी से दो मुखमा पपु फेसवे म बम और ममी म पपुइमा होने पपरिक पर प अधि में पताttam पर पहप पारे रोकने से भिन्न म् प्रविय से भिवानी में अधिक दुख देना। इससे मुखपर पड़ी बपि पा सपही बापने बारे पाप और मुख पर पर पिने से प्रारो म पानोपान प्रपनले पाप ग्वारप मी नही होगा निगमुनायिक प्रो को नुप्रसिपोरा तुमको बार बपनीम्मा मुख पर पी यंपने मे दुर्गच मी अधिक पावलोकि गरीर मौतर दुध मरार से नियतापम्पबुक मारो परोम सर वो दुर्गप मी अधिक पाप मा किम 'साम' भषिक दुर्गमपुर और इस म दुर्गापुरुष को ही मुखी बांधने, बससा मुसमान और मारप्रमे वा बप पोने से तुम्मर गौर सकिएमा रत्पर हम सार में गुरु गोपी को विधी पोरा पण्ठेि हो ना पार गुममे अधिकता से मर यदि में पपिकप हाये में दिए सिमबर्गरंग मावि गुप प्रभर ऐम पोम पोमेga बकरे और म्यूम एश्योरे पग मौम्यूम दोम औषों को गुत म०- सस्याप्रकार दुग्धम्ही पाय इसपे तुम भपिक दुधाने में अधिक मापी मुख पर पीपीवास्ते, पाम, मुस्पाप, अब मोम को करने में तुम से बहुत प्रयो। पैसे मन्मनों के दुर्गन्ध के साम्स से प्रकार रहने पो हुन ? 4 प्रमों की दुर्फ सापस में निर्मपनि पी होवो, सेब, उमा सपियों की भी पुरिही माती । रोगको पिष्टमी स्कासोने से धर्माबुन की भा होती है से ही मुहम्म उमारे संमिवाप्रमो मार पोखराम। - बन ममव में बसाने गुर अमि की मग पार किया। बाहर गोषी को हुआ मही पंच सौ के स्म हमको बार रोका पार गायों को मापाचो।। मुख पौ बारे भारने के बालों को पोमणी पक्षी मे सामने प्रति उसमे ज्यादा हाब देने से मनाया सोशल वरी को परमे पीमा मत पती। २०-पामाही पाप कम वो हो नि* पावरकाम पोम पाशुसास बहो वो प्रति ममता बोइफमे मारेखमा हो वो किसी मूस में दीप पागमा हिसारेचो को प रस समय पापमोर पके ममावि प्रागी यार सुयोम किम नहीं की समाधि से नही बस सत्य न एक बार से अधिक रोमन वो माये मपिक से निकण और मामले से मुकरम परन्तारमा परमपिक महो, इससिमीप का म०-इसमे सबभई सक्योकि किसी माणसे बोय माल परिमोन पतमणी मुबी पन मास सबसे पूर्व मन पर्मन्मसभेकडगे और वा पुरुष - मन मगम रस पर पिरमे मे रचिारोमा व मुख म फ्रोममाफ्ध प्रा। उ०-ससे पर सिम्पपीरसा मुण्णापा मग पो म्पुण से पत प्रवास मुभ पर शाम पम इसचित्रो रिस पाको दूसरा सुन पसलमा सिरजप्रब कई मी मुख पर एक पपनमा मन इससे स्पपिरित होगी पुस मनिवेगावा। पवयम्पदिमामे से तुम्हारे मुभवि मलमे प्रमन्त दुर्मपनि १और बस तुम मिमी के पास प में हमारे पास मेला म तो मिचा दुर्गम के अपत्यप्राव होय ! परि मुख भवन से बात मानाने मादण्समुखार खानाप तो माँ की पोर युके मापे में पत मी आप पर दोनों पमन्त में मवेब मुख पराप प पड़ा इसपिरेमही जमते किका तीसरा को सुनने पण पी। को वो हो मा एक गिरे मधे न्य पोय पर पूर्व मिपन्य परिरे। और रस एकस पर भी नहीं पाय सोधिहम रस्म में और प्यु हमारी पोरम सरकी मोर ज्यो तो सूक्ष्म रोदर रसागरी पर परेप प्रसरण पाच मिगे, रसम्म रोप मिनमा प्रतिवात सकियो मुखकी उम्पवा स बीच मरते पगमे पौरा पहुंची तोरणाप पेप महीने में पूर्ण की महा उप्पसा स पपु बाजी में समर मिा कमी न पा सक, सो रस रपवस मी जौरी मर सको इसिये पा मारा सिन्त स्मोकि जो तमात वीधर भी पूर्व पार होते दो सौ मर्प पवार तो पौवादी पारी सच्ची निकी पति सब भोंके साथ विमान से इसमें पमाया- पञ्चायवागारसुवर्सथिति सम्म अब पनि इन्द्रियो म पाच विषयों के पाप मापदमी पुरप हुनकी प्रामि गाव मे होती? पिरो गामापार सम्पप भबम सर्प सम्बरि भवराप पारों मया या । एम्म बीरीम स, पिप्रम रोप परेमे पर गम्प रियर को रस सनी ने सम्या इसी पर समारों की मी म्पत्य रतो व मनुमपीच सुपुष्टि रण में एबाप रस मुवन यधिसमी ग्रीनफि पर मौवा हो परन्तु सिम समर से पराप साप रस धमक धम्म यस मुदुसम्मति मममय और पपप परमा पाप पकी पमुष पो पुल पर पापको प्रोपरी समरस समाममा मचिदित नहीं मापुभप प्रपा पम्प स्वर गीर परेको मुगल पम्मी की दो सम्म * मूर्षिन की पुस मसमी ते मध्यम प्युमणी बार मी पत्रात मशिने ममुपयुष मीरा मम्मे मिपणे पोषास परीपत सिर मेरो पम्ती जा रमन मुनरपी मभिमपण पहातो तो भनुम्पपीमिपुर मन म०-गौरी समे मुवन्समोरोप। -मुमोको माग पुम मुवि मा एमम मुपदुल प्रापीले मुत्र पसरसिर मामा म सप र भाप रिण मुथ सम्य पापोभापा .
सत्यार्थप्रकार और भटते है। उसने दुल विदित मारी होता इसी प्रत प्रतिपूर्षित मे मुखपॉम पास होने लॉफिया मासि होने सतपय कोई भी। प्र-यो ! मिचोवि वर्मात् मितवे संग प्रत र भनी माने इम बोग नहीं बने लॉकि नियोति में गुत और बम्पर में प्रान्त करो, ओम साने या दो रन श्रीयों को मारने और पीका पहुंचाने में हम दोन पापी हो गये। उ०-या महसी पी अपिण्य की वी वाकि हरित शासबारे में बाप मरमा सो पास पहुंचमी लॉन मानते ! भास तुमको पौषा महोती प्रासदी पीती है और को बीती वो हमसे विषयमो म कमी म समाज गहमभे रिख सको। म मही तो भबुमार उपमान और समप्रमाव मी कमी नदी पर सवा पिका इम पर उतरे भामे। बाइस मममी गमीकि सामा मम्पमा महासपति प्रो. महाग में पीपीन मुष दुलपति मावमा उम्मार वीरों की मौ मूग विरित होती मिमाँ तुमने एसी बुद्धि और रिव्यविम पोग मिा। भगा जब मम प्रती र रायो भवन्त र सबब कम मत हम ऐमते तो म्स गरे प्रवासातली मही। इस पर तुमारी पवबगो भूध की। प्र०-रेखो ! म मोग मिना गप्प सम्म पानी पीते रोपमा मते दो पदम उप्प पामी पौवको तुम मोप भी पिपयो॥ 7 -पर भी तुमारी भ्रममावगरवीकि जब तुम पानी गप्पकते हो व पामीर मप मरता और राम पर भी पर स्पमा ममी मीच प्रतुल होवे सयको तम मोसमी म -वेगा" पावे से इसमें तुम यो पापी हो र यो ममम पसरप्पा बोशिबा मम पानी पिगे तर गर म यसचिव गप्पा राममा सारे जीव पर रिस गवय । उसमय पायों को मुण दुम्सयत पर रोति से ही सम्म पुषा इसमें पाप सिसोही बम्प || प्र.- समाति से रमता पानापार चौवन निमअमे। 7.--होमिता गवे पर सम मुपयुरप्पा समान मानते रोता सरप्पमतमारे मबनुसार मानव पधिपीपा पाम विम्मे और मोगर ससमय इसको गम अधिक पापी प्रोगे बनता प्र-नम भएमास सम्म सनही मवेसिपल प्य मनोभासतमधिपदम को पार महो।। मुम रम जम बसेनी ना पाप इसरिये रप पर मामी म स rive me भावण्समुमाया किसी एक परमप्रेममनेको मते दो पको सिमवे पोय पर हम इप प्रम में पकिपमा माया लिमपरको माप इसलिये मोक गाम अपने भ में रय सम्मरको बसले पाप मामी मम मोरोस्प प्रषिकमर और पति के स्पो मी मरममा रसाईटी और पगरि में अधिक पापी मम्मामी होने दो। लिपय म समयमुन मिमित और राम गप्प मापी धीर म्य पासपोयम से दम दो मुल्म पाप के मामी हो और दो माप परेड माम ऐसी पर भी पापी है। मास्को कि तुम पी प्रविष्य में से दो की पिरीयों पर पानी भोर मात्र मत बी डी मिला, अपभर मना सामोपा पपी। बो मारे तीसरी ममत प्रण रोख पो पी में शमी पो भरियोस सम्म और इम्प प्रशासन परवाने किमा! और सूर्य को भी रत्पा मालभिइन में कारोष बीर मारे मनुस्मर मरते ही रंग। पब ने रिमाप और तुम विषको समान से समोर एवम सूम पाप और मेव को बालोन मिा! और पूपाँचममा सनि निमाम प्राधिों पक्ष की प्राप्ति मनापि पायों में रहने को कही होती पा सजाय पराप्रपा मी दुस्समबरोबरोकियो सम्परे मवानुसार सब मनुष्य चोर अडाका की भी समो विवामा पाप का हो भार ! इसलिये पुणे मे पथ पर देने औरों पापमान में और इस विपीठ में पासमाम्सपर्म समी। स्तिका मोग दुमत भवे न मयारों में म बोल्ने पास भाने और यो को पसमा पार गर्म करते हैं, वो मिचरण में पि गोषोपी मठे। और मुखमापने भाविमला। मग तुम मामी म हो तब मा मरगत रिक्स भूपे पाने में परोपा अपने भाम पोसारे और पीपा में प्रक्ष केसरीको दुहर और पाप्मामा भात् प्राप्मा दुलन मारोप सकता। पापी पोरे रमपर गये और मषों ने मनोपमे में अपनी बगलामही बिप हमारे समग पतों को सामहीम पत्र को सम्परे पर भी सस माहीम पन्ने । समाचारमा पसमापौर उम्सरे मध्ययभार पौष मोदी हेम्प इसपिये तुम इस पर है मुसाबलों ने इस पर ध्यपुत समयमा किन पर मापुरे मामपरीर प्र प्रमन्तमूर्षिय गायधन कमीपी पचपन्ना मरलि भौर भी पीसो भयमाप बिते । जीपे मारपमा प्यम में रम कि भपने बाप मोवीय - रोबोपन्ना मीसित पोहोम . 1 सत्यार्थप्रकाश REER माप 11-14 में विस-१) सपमान कार (पसिौ ) बमुसम्म और का (चौता पत्र) की मातु। () अपि ५ (मप्तौ पचम) पमुस् परिमारहरीर और.. (माज पा) पूर्व की प्रामु। (३) समाबम. (पर सौ) तुप परिमाण सरीर मौर। (मा पा) 'पूर्वर्षभ। (२) मिनाक १५ (पो] दोष सौ) सुभम और (पचास मात्र)सकी मातु । (२) सुमविवार (चौमसी) पर परिमाचप्रमौर पर , (चरीस बाब) की पातु। (१) पम " (स सौ चडीस) प्लम सरीर और। (तीस पा) की मम्। (ऐसी) पनुप् सशरीर पर (बीस मा) को भापु । (८) मम म (मेयो) प् परिमारमौर और। (एस) की पातु । (.) सुधिधिमाका (सौ) सप् म योर और २ ' ईम पातु । (.) यौलमा । (काने) सायर और (एक पा) पूर्व को शत्रु। (1) प्रेमासय ८ (बस्यो) धनु म पर और म (बौरासी पाब) की प्रामु । (१)पून स्पमी स. (सत) धनुप शरीर और .. (पनबार) की प्रामु । () दिमकमा म (स) सुम्मा गरमौर (ब)ों की । (1) प्रवास ५ (पास) सुप्पयोर पोर । (वास पा)लों की प्रा। ()मनाय २२ (पंचवीस) पर्षों पर और . (पत बाब) भानु । (१) मन्तिमाय मर (पास) पों पO १५ (तीय) बमुभमार और ५ (पपये साप)को (16) अमरथम (घ) पोंगर पौत का (ौपसी स्पष) की भाषु । (11) मालाप र ५ (पीस) वो भ सौर और ५५ (पान साग)बी की मायु। (.) मुनिमरत म २ (बीस) साँसपर और । (पाल साप)ों की भाषु । (२)मि पवम" (चौर) पुणेपर मोर , (एम पर) को पपु । (२१) मिया , (स) मुसऔर भौर । (सपा)ीमा । () पार्वगामी) सम्म पर और (सौ)को प्रादु। (२) महावीर स्थमा (मत) सारभरीर और पाचर दी। सीमानामधान बने भाला और गुस। इही अनी मोम परममा चरेस मोरम गरे । स बुमिमा साप नियस दिने गौर और पप भानु नमुन मन्यमी दावशसमुहस्य पामय इस भूगोप में वही भोरे मनुष्य काम सकते है। इन्ही वियों प्पोरेमो पुराधियों ने एक गाव एस साम मोर पक या मायुका रिस सो मी सम्मत भी हो सम्ब सच्ची" पब और मो मो सामान्य पुरा भागस्तु ने प्रम की पम पर विध अंगुली पर पाली (!)। सम्यम -मार ने माई में यूपी में पाई पसरे योफ्नाय मम पला (1) समाम पु-माचार प्रेस अभय पिरो पारे पूष AA र म सपने गय (1) समाप्त पृ- माता के पास बार पाई और पाक (1)। मपम्पम पर कोरे से पाच मेगावा (1)॥ स्थर मग मम पु-मेगावो और पाया कि सार माग 'पुर -नियों के एक समसार साधु ने मोपित होम गप- साक्ष पार पकणा में भाग बम पी और (4) महावीर द्वारा तिमिनमारमा पृ-पकी भाशा भाव माती पारिये। बिमार म्य १५-एकमेवा लाभासी में सों की सगा रसमा मोसे की जीप उस पर मचे मार पचप परन्तु मुई का मैं गाये ग पाई और सरमौकीमा बिन्ती दी (111) पिट १ ९सी प्रेम सपा के साथ एक मुनि वर्ष व मोगनियर पद पोशाम सावियेगा और का मेला मी गप पाहतो पुरे सपति को दिका मा । एक मिकथा बो गले में परिणीप्ती पर मित्यदेवी पी पिकामा पृष्२२-मसार पुण्य की मात्रा की पास पोर मन में काले मि गुरुओरोकने माछा पिय वाचायल उप और पोपीय सरोकने में में न्यूनता होने से धर्म पनि समी-अब रेबिये इक्की मिमा पाठे! एक मनुष्य प्रमाण अब दिया ने गुरी पर कमी पा सवा और पिता के समर मंग से पावेसे परिणामी एन सी और परोपमगोपीयेपेपर! मधये से परिमाना किसी से बाही रेशा सिलान इनमा सी बात पो, सोमवेपणा सर्प तो स्र्य में पपा पौर महमा श्रीम पादिवोसो परकमेपये, पालिसी मिया याच मारा और कमाई चा रसके क्स बसपार गये। मा पो से पात्र में कमी प्रधामन्य बोगरम मसपी बरते और सरसमा एन म मधमाल मोमे। मिस पाने मग पप रसमे पा और सम्म मोब! जब मालीसा में मौम्मा प्राप्मा प्रतिमा को भय ममता मरे परम पमपमेवोपमा प्रतिमे। प्रद्यकी घरभरीर और (पोस 1 सख्याप्रकरण र माग ! १५-१.क में मियो-(.) अपमा (पास) सुरसम्मा और (चौरासी मात्र) प्रमु । (.) नियमान ५ (सौ पचास) पर परिमादम पर और। (पार पाथ) पूर्वी भातु। (३) समक्लाम (पार सौ)प्पु परिमान शरीर और । बार) 'पूर्व वर्ष की भाइ । (0) अमियमय म ५ (मातोर सौ) (पचाप पार)को पाई। () मुमतिपय (ढीपतौ) पप् परिमाचौर भौर । (पीस पार) वर्षको पाधु। (.) पान " ( सौ पीस) प्लाभरान मौर। (पीस पास) पूर्व की पतु । (.) पाप (रोसी)नुपम या पौर पाब) वर्ष की भामु । (८) चन्द्रप्रम १ (मेसी) सप् परिमारमौर और । (इस ) वर्षों की प्रातु । (३) मुधिभिषापा (पौ) मुम् अपर मोर . में पाए। (१) श्रौतसम्म । (फो) नुम मम और (एक बार) पूर्व की प्राथ। (1) मेघालय र (अस्सी) अनुपम गरीर भार । (बौरासी मात्र) पर्व में भानु । (1) सपूम स्पमी. (सम) पनुप्च गरीर मौर .. (पमबार) वर्ष की भानु । (१)पिमनपान पर (सम) पनुपम रीर और (पा मात्र)पो की भाधु । (1) नवनाथ म ५ (पचास) परमार मार। (वीस बस)ों की। (R) भर्मनाथ भ (सायीस) भो म गरीर पर । (एस पा)नों की प्रामु । (५)शान्तिपाप म. (पीस) पो प्रहरीर और (पक बाव) वर्ष की भाषु। ( १५ (पैतीप) परमपर भर (स्वर समप) की पात्र। (1) अमरसर (स) पोमवार और र सरप)लोको माल । (१) मागाय ५ (पोष) सपो म सौर और (पचपच पाल) की माधु। (१) मुनिमातम १ (पास) पोप और (बम भरम) की । (२१) मित्र" (चौर) पुणेम सरी पार । पाप)को पाए। () रेमिप म । (स) मा सर और। (एक सातामा । (१) पापबम(मौ) बाम पर और ()को भानु। (४) मास मौज-(सात) परमपर पौर. पाचर पपी की। नगर वो माये गये माप और पुरानी प्रपोस मान समार। इसमें विमान विकिन बार भी इव भानु मगुण मोना कभी (चौपसी दादरासमुदाय हमपम्प परम। व परिणामों प य कि समगार में एक पूर्ण ak एकत्रसेपम वीरव सादि तो पी पिरिपा दोपदी में मन्द्र पूर्वस, सकि पिशायरो भोप स्पादि से मी गौ मान्ने है पोपीमा भूगो दो ससि दो रवि पती परिपाप सठिसंपा। मई पपाहिणवा माणुसखिसे परिप्रति । मम ... मनुमोमेंद्रमा और सूर्म मेदि योद्रमा और रो सूर्य की कि (प्रेयी). समोर प्रात् परबास मेरे पास सेवा से सूर्य की पविले मातरे एक पर इसी सभा द्रमा की पचिपावर मुम्बकी पति सौरावि सभापति एक भद्रपति में पद्रमा और एक स्पलिमें परे चारों परिमाप महारत में पिया मती मनुष्य में परिभमप महो। पर्याद जिस समप गम्पोर मास एक पूर्वरपिपरिण में चिरण, पप समय सूरमरिण में पिसी हो पायसमा एकपरिणा मेरो तीसरसोधि । पुष्प प्रमा सबमियम १५ सूर्प परिप रिण और सूर्य गर रिण में अपने र म मरोगों रिण सर्व निखापे को तो सूर्य भौर एसेम में न्द्रमा कीराची रिणों की पलिया मिच्योग द्रमा मनुनाक में हैं। इसी प्रभर मावास नापीकी मी पचिपाएर सो स्याती। सनी-अपलोम्स गोड में औरत्रमानिनों म परवा मे मा रोवले होते और यति मायात मारे गम समय में ! ऐगी भर में भूपोड बपोषर समय परेसनपी। एक मूर्यप भूपोडोसा भरमा डीप्रमण्यो इस बारे मप्पा की स्वपमनी! पदो पूपितर पर पूर्व पृथिवीणों पर मे ये एक मारिऔर जो मुमभिरिमारा पूर्व सामने ऐसी विससम्म रभ राव भीमों, सगळी समपदक ग्सी मठ में दस तरह समवेनिस माघरमा। समवसरण सरिपासपनो फुस विरपसर्स। सत्पपमससाए पपपमुपासपिराए । ममय रामबम् m. मारपीत परिक्ष में मारेमा मुरण्ठ पाम पर पम्पमा परदेशापे।
सत्यार्थप्रकाश भाषा मापनी पहिये परन्तु न मा पिसे । इसरिपे एस मेन मम पव सिरोपी। ग्रेनषा चरेग्समरा सिपाही समोघे मी सासों की मौत सुरंगमरम पर पप सुरंभ दिमा और पासो मन स्विप ताप सही वो पाम किसी से किसी पपा म मौन बोना चाहिये पोसमीदोबारमा महोपनिति भय पिस प्रमरोस्यो। अब स्त्री । मसम्म मानी हो नि वो मिला पोचे पोषों के साथ गुत म पर उपस्पेि प्रषिक दी सिने प्रभाव पोपासी इस दिनों की पदोन रोष व मिन् बाब मप रेसियो- दो ससि दो रषि परमे । पुगुणार्या मिधाप ईस मे। बारस ससि पारस पनि । वप्पमि शमि विरससि रवियो। प्रभव मानवी सूत्र यो सम्पापा पोवन प्रपा (पर) को मरिची मम पर परिवा होप प्राय। इसमें दो और पो सूप और येतो पर समुद्र में उससे एएचे मांद मा और सूर्प भ्य पाती बसमापनमा बौर पर है। पौरमा सिधभोप होते। नो पाव दो बाप और पर आप समन मिनाथ बनमा और भी पूर्व प्रपोधि समुद्रइसी मस्त माल समुद्र में पूर्ण मानीस मे विणुधर वो पसौ पम्पोस होम पारोपण (लय सहा. (चार) और भाप के पोरो: इसी रीति भिRM ( पम्सी मानीय )" सूर्य पुष्करशीप में पमी पापे मप्पा गपापी पातु मनुण पीपा गुर से खून में द्रोपो पिपये मई पुण्याप में गत और सूर्ण मिरच एक्सौपचापको गुपये २ रनमै सम्पदोपदोपद्रमा सूर्य पर मम्प समुत्र और पप । पत्रकार और न्यास भयोरपि । मिगो से . पापूर्म पुन्म समुद्र में पेसाग भौजिमभद्रगपातममममेको 'मलबा" में समा "चोदासमराफ या ममे और "पति" म्प "सपदि प्रमुख सियतमयों में इसी मा समी०- मुकिने बयाणे पो! इस एक मूमोर में एक Hat (स्पो बारवे ) और (मे समा पर सूर्य देवी गोप मानते हैं। योगाभका मामकिरमध्यपुपाली सून सिराम्यपि मोवि के मान से मैक । भूगोड मोड पिरत बोली मापर में होने दोममा मन्मे में लगी मोम • प्रांत मर्म।
दादासमुनयः भागमा। इस प्रधिानों पा गई कि अमहोप में एक सूर्ण पकान से माम नहीं चब लॉकि इन्ती पड़ी प्रविषिों मे तीस पदी में पासपोजिपिलीयो मोम सूर्मादि से मी पो माठे, पही इसकी बड़ी मूबी॥ दो ससि दो रवि पती पतरियाच ठिसंचाया। मर पयारिठा माणुसबिठे परिप्रति । प्रारबमा 'समर ... मनुलो मद्रमा और सूर्य की पतिको संम्प मोद्रमा और रो सूर्पको चि (पी)। एक साल पोस मा पर पाच पेठरेमाने परते। जैसे सूर्पी पठिाने एक पविद्रकी इसी पर चन्द्रमा की पंलि अतिरे रपे की पति इसी गठि सेयरपति व पर भद्रपति में १६ भद्रमा और एक र सूर्पपलि में सूर्पने पातो पति बप के मेसी मषिमा मती मनुप्पपेत्र में परिममय मती । पर्याप् विस समय जाप के मेरा एक सूरपिपरिण में पिप्प, गम समर सर्प रमविण में भिव्य सोपसमा एकपरिण मरोबसे पावकीमासमोरपि । पुष्पाईस मममम मियाम ११ सूप परिप रिण और ६ सूर्य रचर रिण में अपने मभित और सपा इन दोनों रिण सब सूर्य मिपायेगा वो सूर्य पोर पोकीम में जमा की दोनों दिगमोंगी पदिया मिईयर को पत्रमा मनुप्पोक में यह पते है। इसी प्रपर मामा के पास पारिश्रमी पचिपत प्री यमगी। समी-अपरेकोभ्यास भूगोड में सूर्य और परमम्पनियों परस्मे भय जोतो मेमोरी समर राशि में मौत के मारे जैसी गोप रमते होंगे। ऐसी ममम्मय फट में भूपोहपोखरेप प्याने पोसमय नहीं। एक बइप भूपेण सय पचपके भूगोल मे प्रभावी इसोर मापे प्रयम्पनी धरणो पृपिकीम मे भर भूपं पपिलोमा भोर मे ये एक परिसमोर यसरे और मुमेह स्पिनिमावर सरायपी, या मूब यम ऐसी हिमपागम राईपामा मोदी इन बाठों को योग बब बक ग्यो मत मैं रोपवाया या सन्ति समार में रंग। समवयरस सरियासम्बसोंग फुस निरपसस । सत्पपासमार खपमुपासपिराए । सम्पम् प. पपरित परिव से मेरी मायमुरफ्त मम्मोदर परोसपने मामनरेगापेि. मप्रपा १९२ सस्थायंप्रकस्या समीक-जैगी ग.(बा) पन माग में से पामे नियम मासिनि विमान की मासे उपर बोडेर म सिण्डिाम पिन प्रायन को शिरपुर से मम स प्रमोद विरो मषनष सब और पूर्व प्रकिया पप्त ग्स बफ में और अपने भामरेख में सर्वज्ञ रहते है। जिसमा प्रवेश होगीप बिमुपारी, कोलम पीपकबाकी कमी नहीं हो सब बॉकिमिसनमामा परेको ही बना पागम, मु, मामी प्रसनी होगसम्पापी मग पैसा कमी पी हो सकता बोनिया वीर्य बालम मल प्रसाराम मित पेसापक सम्मोही रोसने किबो परमात्मा मानन्त मलापक, म पनि भरने बैनी बोल मादीनिमियम सहारि गुजबातम्यते। गप्ममरति पमिपाका विकोप्सत हम्मेव। मुभियम दुसावि अन्तमुह । गुलमर्सब भागवसू ॥ २४१ ।। at मपुप्प हो । ९ पर्मज दूसरे को गर्म मिया मा पए । ममें गर्म मपुष मसका तीन पल्पोपमा बाममा और सीप समी०-~-ममा तीय परलोपमा बल और टीम कोरबा माय इस सोच में बात को समा सीमि तीन पल्लोपम की माल *सा कि पिमा म बर्षि दोहोरको सन्तान मी तीन श्रेणगीर बोहोचे पीने से मुम्ब से नर में दो और साच्या से गहर में दोन पर ममुप मियम जो ऐसा तो मिला एक माह में म्युज रिमोहनेमात मी वालों मेशों म पहिये तो सब भूगोप में एक बार मौसम पो॥ पापा जसरकयोपरा । विरकमा सिबिपिफमिहविमझा। वदुपरि गजोपर्वत जगतो तद सिराठि ॥ २४ ॥ जो सबिसिनि विमान कोबर से मर ५ मोकन सिरविवार मया और वेपन और पोबपर १५ (पैतालीस ) बायोजन प्रमाण प सब परचा भाग मुम्बमम स्परिक समान निर्म सिरक्षिा की सिरमि रसोई यत् “ममा पेम पाम १ एपिमिठपा पिमान हैबोगन प्रयोग मी पापामा मसी मुठ मनवीय सिमयिका मो मन मा में मार पोरन पूरे परिण और ग्परिण मेंमी. माती पत्र मास पतमी समापौर मात्र मोमिशिय में स्पपमा उस गिध मे भर (एक) पोगन भोवरे सोमवीपापियों में मिति।। समीर सिमभी शिजमिन मुक्ति सम्मान ससिरि भमा पसमा (Nata) योन रिमोद पाँ मास्यसमुता ऐसी अप्पा और विर्मश हो सपपि उसमें रामेयो मुख बीब एक ममरर बोंकिग्स शिक्षा से पार निभाने में मुछि मुख पूर गाते लेंगे और यो मौतर रहने को तो मनु मी ममता होगा पार कपमान पदिामों को साये चिपे ममगावी। वितियारि दिस सरी । पार समोपपति कोसव कोर्स सोयपसास पणिदिय । उहे सुग्दन्सि विसंतु॥ प्रभव मा । संपासू..॥ सामाम्पपनस एपेन्द्रिय परीर । माय पोगरे यारणा महा सबन्ध और दो नियमो शाहिम शर पोजन समय और पुरिन्द्रिय ममरारि शरीर कोश और पनिष एक साम पोगन माद - सामय ग्रौर परे समय समी०- १ मम भोग के प्रमाय पो गीरथी तो भूगोम वो भोरे ममुन पोत् सैकगों मनुष्यों भूप्रेम म्स मागान किसी को पाने कीम्पा मारे प्रिये मिला ये गनेरिया मोर मार्म पॉ. बोमाने शिपमहतो अपने स में रस में पान र सामोश यसर बसेको निपसोई एक बियप (पीस) सायम कोशीये एस एम लाने में लोभसप पब क पप तो भी पर म सके। इसनेमार सापकोय की पट बम्पने लिप मा में पौर बोस जम्मा सपोप भीतर मय भी नहीभमन्या इसलिए ऐसी प मिथ्य भ्य प्रवीtu ते पक्षा पर मिस सिखाप पाति सम्पपि । वाणिय मसंह। सुपमे सम्म पप्पा। पिपुषप्रा समासामयम् ॥ पूड एक गुरुयोम मरण बस और रखप परिय अण, गुम्मार बाम प्रवरा सब मिरवीना अचम्म बम पुण्य पहावे और अधिकाधिक (३३ ...." )ीस पाभो "सात पत्र पसा या एसौपा गामको पेषीय पर समर पी पचास मानोपी गोशाम गौमसार सो सार इसने माया सच था और बसौभी इसवी परका समोगर पात्पेरम में समय रोम बायरे पर मौ सम्माभव समाज एकमाम व प्रसन्न पराममा असन्पस मम प्रेमापा रम सीमा निम्म्ममियप पुषी और एमिरे पर सो स्मा गायि मोर पसरविग्रम मोदी बतायादीत ॥
समार्थप्रकार समी or-बोलिन। इसी पिक्ती हि एक ख प्रमावबोम दिने समिपम्मी किसी प्रगती में पाए और मासे स्पात मन प्रसन इसे पामो सिर होवाच पप किये गये। पम पेन हो सके तब मन से मि, मचाया पम्मी मम्मो सकती कि एक रोम के समय हो । अपूदीपपमा गुबमोयाबरपापिरमो । खपणापासेसा । खया मागुगुणाय । प्रश्रय मा पुड समा म् । प्रभम बमाम म पोवन प्रममाव और पोयरे और पी सम्यादि भव सा मत हाप या प्रमाण पेपरेशम एक पिली में भापदि और मत समुद्र में किस त प्रामे ।। समी-मब सम्पाप पेमरा दीप होवाच पोवन, वीसप पर प्यब प्रेम बौध बोगन पांच मोबाड पोजन बम बीमा बोगन और सावमा सरबत मोगन और म्वने प्रमाणप उनमे अधिक समय के प्रमाण से इस पत्रा साच परिषि पो भूगर में न समा सकते है। इस पावर मि कुरामा बसी सासा । पम्वेवम्तमरपा विज्य। दोदो महानर । पनुक्स सासा उपत्य । म्भपरम भाबपुरेज समा स् ॥ असोज में (ौयमी) समय हो। समी--मधमा पुरोग दे रसने बारेमा पमिय परियो में हममे बम्प मीनभाई। यामुचपरतारइगग सिंहासमार मापुर्ण । पर सबिठाम नियासप विसि भपश्यि मखसोई॥ ममबरमन मा .जि समा शिवालिप एपिप और रवा रिण में एक रसासन याय परिये, न विद्यमों के मम पिय स्थि में प्रतिपय माग र रिल में प्रसिरिता निगम सिंासदासी॥ समी०-ऐति! पम्मोस' पण मे देसी मुति की सिरि मिमिन पर पाक सूम पीमेमोन - मपी . रामपुर भीर पावसमुशासः में में से एक धमकी परीक्षामने काप परब था मिरवले हो इस बारे में मेष समायोपपत मी व समय पि, परिमानारे सामने पुतरिय मामी योकि विमान सम्पूर्व पाप मे विमान योग अप होते है। इस प्रो ईमानों के मत विश्व में विसबास्य ।। इति श्रीमहपानन्दसरसतीस्वामिनिमिते सत्यार्यारो समापापिमूपिते मास्विकमवासगंठधारपाकमोयजैनमवबएसममपरनरिपये शाक्या समुन्नास सम्पूर्ण ॥ १२ ॥ मोद पटेरा .
समार्थप्रकार समी०- 10-अपरे!ि इमली गिल्ती राति एक समारोम किने समिरम्मी किसी की गिलो में मा स! और मात्र अपात मन मे अन्य सामने इससे पामी बिकिन साप किसे मे।बाम पो सो हम मनमे से मच पप्पी सम्मल हो सकती एक गुम मममममस। अखीपपमा गुबमोपावरक वाहविरामी। अबसाईमासा । पखपा माणूसगुणाय । प्रकाप म्याग समा सू ५. प्रपम सम्द्वीप बात पोवन म प्राय और पोवार यकी सम्पारि सात सपा स प बम्जाप प्रमाणापे। इस एक प्रक्लिी में बीमावि और स्पत सम्मकि विभा॥ समी-मब समर दूसप होपदो बाध पोबम, पीसय वरपर जन, चौप्य पार गर मोन, पाषा मोबागड योग, पमबत्तीस ध्या पोम और सानो पोजन और ग्वने प्रमाण मो प्रषिक समुह प्रमाप में इस पत्रा साप परिधि गरे भूमोड में बन पा सकते है। मामिप्यारे। अदला पुषसी सासा। पोषसमरम्पर विम्य। दोदो महानांना अनुक्स सरसा उपचे। मसपास भागसमा सू १५॥ मोर (सी) पारे। समी--मन मोर पुतबम्प ऐयरस बम पकमिय पशि में इसको बाब मीराई। पामुपय म्वार गग सिंगासपार मणप्प । पर मुबिवासु नियासक, दिसि भवनिममनोई॥ प्रापरणमय रामपुर समा समिविप परिष और मरिण में परिवामन म्य परिस, ममिवामी रेप पिच विधा में विप्रा मा मरिण म पधिरचनाब समयों पाती समी० तिरेको डोरों के सम्मोसयदि मने निभाये, प्पी भूमिका सिणिता! ऐसी महसी पा समाजमा मिस पाच पाय भौर सूमबापापा मम्मरपमन्य पति मोटरसम्म, ये ढीग पहें प्रपोपको सिम्परामर १ सम्म। इसी मेम इरिमा सोम पुलमा अब मे। गोपापा-मामिप्यो हमको सम्माने पर जिग्ने शबऐयाश भर मा बीरसोइमिगे को
अनुभूमिका
पूमा मम होतो मी म भोपा व दिवार पराब है। परि मी
पलियारा सामाणिरिपे पर महिमा वो ममय मिल होगा।
अब मैं इस मुशास में ईसाईमत दिपक बोड़ा सा मिखम सब
सम्मुमापितमय विधरिये किस्म ।
मसामविखेम पिषतस्वरेषु।
अनुमूमिका (३) बोपमहब मयागामी सोपी मिलो नारी भारि मी सात दो।बोका (व्य) पास में दो मव पिन में नियमनमो भबिपि भावमा बसोमव ईमा समादो और पौधापि गौर नगीव भाव सेवा शमसे पहरितकमी पर समम जोकिने । मनोनित वियोमोसमय मसिमे भर गतीदि सब मामले पारसी पर अपने धर्म समभाव समतेम इस पुलको मापाता रोकियो म मन पादरी १ । मम माणी मापन र सुमसे पावर में सब को मोती की इस ॥ (a) माय में पर्व तिसमको दि और प्रमा पापहोरि कि किसी को सबसविरोपण मित्र पोरबा। इस अभियान रखने समय कि पा माराम मच मी ॥ सपनी मनोनय किव मधुममात्र काय तुममा l भनि पप गागा मोर पक्षी मविपीनियरको मम दोन सब म पो बसेका मनोमन सियापयिनी कोरिमन पोष मौर - कल सिम और पतामर और सम्ममनिल्यापागम्बरोपोगा। सम्पनी कि सब मलिक पुसदेख पमयम सम्मति वा प्रसम्मति मिहीं वो मुगलौकिसे पाने से रिप रोमसिनो पेपमन होखापरबोधपूर्णप्रेमी प्रमाण पापि पापो समयसम्म पापमोरे ऐन, ग्रभपये पौर व पाने गुगोल भरते है। मधुममध्य भएन नि भरेच मनरव दिन प्रपथ परिव पास है। परि एक मत सो मत परियों में पाई और मामले सो अपाय पंचा कारोवापिझवी लिपी प्रमामले में मिले इसरियर में प्रचरित पब माम पिप बोरियो। मेयमावwatोपरे,जो १ मा पनि सब में पर, पालिका में रोष पाया अपोषासमुशास सम में बन भी हो सकती और पापा में गको सहयोग विवो इसस्पेि पा पुस्तक मातही सध्यापम में प्रामा स्या परा। समी०-बसर पनियमात्मा परेप परेगी। ९०-भिमा च और नाक परत मिमी पुसबारे परत पौध पासमा पारि पात्रों में घिोपमोराब। समी०-को नियमो रसमे किसमे रेया और पहनकर परम्प मी पोहोच्य भवा कामपामा भर पडलथा मनमाया इस पो सिरोगकममात्र मी अम्मा नियोग प्रपा अपने सभाध्यापक रमेय पर पल्प रोपा हो ऐसा तो समुहम्मीग्री हो सन्ता लिनु भीमा कोरा, पारय प्राव और पारेको प्रेममा पाप कमी पहर सय लागि रिस पालम परेपो रस गुण में समान भी पसी होने को ऐसीपवरपरोसायोजिमयपक, प्रताप समापुर सवितावास लि पर पुद, मुममा, भानि, प्रयापरिसरों में भारी मानो स्मो मायापोप, +--पारगमानिमिया रोपे और जिपा पया। और ईबिपोषक मा. समीपर की पास भनियो ने पुष बीपी पोप पत्र भी पूर्व पाप और प्रिय हमारी मारी बातों ही समय यमरोणपनी ग्रिी पती पुष सम्वा पवमने निगरप्रेशम्मी पकिरनिगा भएपरिये पायमा जोसमा होवा कोरेर ममा बों मबाबोथी समय पानोपमहानरपे तुम्बरी गाड मोड और ममें भाभाईमपी. -रममा कि पाक्यिोंकेमण में भाम और अमिलों को प्राषिों में विमापसेपनिमामान्य और पापा प्रषियों को समयमा पारिवारिपारि पेय होगा और मिअभय वर्गमा पौर विशाल परा रिष पार्व समीर भाभा परमोचर की मुबी और दो अब मध्ययोब दो लाखममम मापन में मामय पप पाया ममत प्रापबायबोपमा मायो पम्प खरे सत्य या निसरीरमधमई अथ त्रयोदशसमुल्लासारम्भः प्रय कमीनमतविपप समीधिप्पामा अब इस मापे ईसानों के मन मिक्स में मिले जिसमे सब विविध पेपर इलम मत मिष भोर इसकी पापा एक मापद! मपम माइग्बो टीमेव सिधपथ- १-पारम्म में ये प्रामण और पृपियो को सबौर पृपियो दोष और सूपी पी और मदिराव र अधिपाय पचौर समयमा बारे अपर पेशवपापमानव 1-५॥ समीचक -परम्म जिसको करते हो। ईसाई-परिमोत्पधि । समी०-पपीपी मपम दुई इससे पूर्व कमी नहीं हुई थी! to-मपी पते पापपीग पाये। समी-पही बाब तो इस पुस्तक पर निवास को किया कि जिसने सन्तामविसर नही हो या और इसी भरोहोमो में गोचर इस समोसे मोर मत मला सो! सवपिाल समस को स्वीमरला ही कब हम ईनकी धीमी से वो मोपलो होमे भामा सिमे मारो। -पोर और सर -पोर को म्पति किस मा निरपिम पम और अन्तिम परम्परामाचे एकसारा मामयी वा पाप पोख और समय मापदादोजी पावोग बामगार और और भोपते कि तपाई त यहाँ पता इसरिये मी बाइकमा पुल महाचर व गम शाम को देख बीएचपग्य। -चौरपा रोग समी०-तोपाईम की कई विषा बेटौष पी ऐसा किया -राप्रपोलिचीनीची की मामी पौ। समी-रामसिमलेरिया मग मीची बीपी पी सपिरे बरसमम सौरपदोबलौकिप, रस -पान मालि समी- हो पारी स भयोबस्समुहास समी०- बसने प्राब मै गोपाल म्समें बम थप मनपीबारता पाकिसको पुमा पा से विमपा पोप ! पोरन से प्रारम को पूती से या वो कर मसस मी पुण्य और पोतो इबर भी पीते माहोप ! सोमपों में सारे सम होपासनसमा मिबो मित्र को प्रारम के सम में भी या मो एक तो परम और था एक में हुए और मेtो प्रारम : पाय माम, माप विष पुषा, सूप पारि रोम में भावे निपार भो सन्ता! इसभि सौमेव की और वही विदित होती और पापुचा मी सही है। 1-और परमेवर पादम तोर में मध और पोक्या वम समय उसकी पसदियों में से एक पक्षी विभती और उसमे सन्ति - मांस मारिल और पामेन का ये भापम की रम पम्मी से एक परी मई और म्मे पापमप्रसापापात्रा ममी०-कोईम में प्राइम ग्रे पूती से लापतो उसकी बीवी सेवामी पापा और बो ममी पो से क्या हो म पो ऐन्नों नहीं खाना और जैसे बर से निमरे से परी माम एमा काम मी रोमा चाहिये और उसमे परस्पर प्रेम मी।सबारेमाप पुस प्रम कमेको पुरुष भी मी मेम मे। देखो पियार बोगो ! बाकी सो पाक्वि भात मिस?" शिस्तीबो भारम में एक पायी मिसमपरी को तो एक मनुलाकी एक पसीम जान्नी दोवी और और में एक पसी बीणीपेनकि पर पो भी है। नियमाप्री से समाप्त भया रस मममी से पी अधरपी बाइसिये पाहायचकिम परिषि से निम्न --अब स भूमि पर एक पर बिल परका बाप पा और उसमे सीमेमा पनि मास पर एक मेहमापा और पीने सर्प था कि हम तो इससी पान पापम्प पेहमको सही पोच में कमाल मम ममममममा बोलिभरपायो। जब मासेमाशिम मिस मोमेकिमाता है कि दिस दिन सम सपोरदारी परिगी और कम मोदी की परिण में प्रमान ऐयोपे। और मीरेचर में मुस्पा मोर पी में अन्दर और पुदि म. बोनो में से रिण और भय और अपने पतिकोनी दिए और सपने सप पास दोषों की भावना पार या मोहिम रहोंने अम्बौर के पदों से मिग स्पिनर पपवेरिने योग्य अपाय सर परबर बारेमा ऐकिवोर पर किया पप •परम्पर ४०० सध्यार्थप्रकार है। सूर्य उत्पापी माया तो पुषा दिन और रात मा हो गई, ऐसी मसम्म मा पोको पायदों में मौ०॥ -रानाम भापम में अपने सम्स में अपने समाष पमा । पर ये प्राइम ने अपने रूम में समय दिया इस रसेम केलास में म्मा किया रम्ने मेंबर और मी स्ना और घर में परंभापौर रिच। पर्याय २५-१८ समी-परिभाषम प्रेम से अपने स्सस्स में मायनो मम स्वरूप पति अस्सस्म पापनमा प्रावि पापपुछ रस पण भरम नों की चाबोबी दुध सोसम में भी पप और पापम मे बला कियोमा ने अपने सपही को पति बाबा चिपा पुम - अफिस यादी और प्राइम स्मामा से ब्धि। -मही याचा समी०- महीमा से बनाई। २०-फ्नो माह पाद समय से। समी–बा अधम भवाविपीन ! समी-अब प्रगति समाप मन पुच्च भि अपर से भावना मागो। --पीन्यपी की। समी०-कोनोमी को पत्यार और समर्थ अमीप पुष । बोनीचर मिस मप पावरको गुष हैतो गुप से मम्मीभीब सब सेम पनि म स्स से - भी सभ्य और मोईन से मग बाप होय तो पण पुष कर्म, समायोटा । सके गुप में सम्पर समय होने से पीमियम लम से भी बम विभाग प्रात् पामान आदिमाम बसे मासे पाकिजा की परिमारियों में निरी मापसो, निपपेन में बवो भारम भमौकर मसम्म पार और पारसमस सारीय रंगमसम्मको यो । समिया प्रारम भर पण पप को भा दम । सय पपप ऐला भी.. १- पोज ममि में पूरे भारम को माना और अपने पतुर्गा मानसपासमार भारम पाच प्रमाण भनेका ये भाव में पूर्व की भोर एकपदी बगई और रस भरम में रिष गले पप था राम राम र सीमन्म में बौन प्र.परमार मोरेशरमपेद ममि मा.-।।
म्से भरम हो मारी स अमोपासमुशास ४०१ समी०- 10--मने पल में पापी मान रहमें भारम रस म ईपी पनि उसको पुना पानिमय पोप और बरन भादम को पूती पे पाप धो ईमग मलाप भी तुप और बोले ईयर मी पूरी से सब इस बानों में या ये पास इभ खोपसम्म पमिबो मा पो चिर शाम सम में नहीं जा ओ एक तो प्रारम और ईबर स पौर बो एक से बेपारमा माग सम्म माप इचि, पण सूप पारि पोषम में प्रापे रिपबर पाँम हो सकता! इसमिलेगौरव की कमी पिरिव होती और या पुला मी मात्र बी॥५ -और रमेपासाने अपम मे तो बार में पता और प सोमा चरम की पतियों में से एक पसी विमती और रमी सन्ति मांस पारिता और परमेवर चामे प्रारम की रस पसवी से एक थरी मां और के पप बापा। पर्व ममी०-कोई ने प्राइम को पुषी से पाप को उसकी पीर को एकी सेलो महीपा और दो बारीकी से क्यो म पानी मी माना और से पर सेमिनारे से श्रम तथा पाम मी दोनचाहिये और उसमें परस्पर मेम मौकी सप पुस एम से पुर साप मी भी मेम मे। वो बिर बोगो ! kी पानिध्य प्रांत "स्मिा" wिatो प्रारम को एक पत्री मिरमपरी क्या वो सब मनुष्का एक पसीमास्तबमार भर और में एक की होनी चारि साकिया एक पानी से भी डt है। जिस ममी से परमाा म्स सामग्री से पी अरबी मा सबभाइसक्षिपेपणामपत्रिम बीपिम्प से विमो .-मबम भूमिकेवर एक पप विप परमेवर रे क्या रामने सीमेमा पविण पर पीप पर एकमेव पप। और बी ने प्रभाकिस्म को सभी को ते । परम्प पेपरमो पड़ी बीच में कि बम सेकस मरममा पाकिमरगयो। उप पप्पलीमेम मोपे। सकिनकिनिस दिन तुम समभोपे तय भरायगी और राम मरे हो की परित्र में भोपान बमोमे। पौर परेच पकाया में पुस्म और पी में पुमा पौर पद १२.में मोनो रोमेनिश परयय बोर अपने पतिमी रिप और रनवे पप हा रोगों मे भाव पर भौर समग किस्म को रोवे भन्सार पो मिणसिप और अपये पिणे मोर पपप र परमेव सानेपालियो दूबे पकिय पाप 1 सध्यामा दूसरे और एकप पा से प्रति क्वि होगा तू अपने पोप पर अपये पौष मरमपमेणबौर में तुम और सीमें मे पंग और उसकेस में और सम्प्प मने सिर में मोप और तू रसको पसीन। और रोजीमेस कि मैं सो पौन *- पामार मार बसम्मा । रूपाना सेक्सी और मौका पति पर ऐगी और मम मममुबभेगम || र सो पदमी से पाये को अपनी पीय मापार विध पेड़ से मैंने तुमे परेको सो पा तूनेच्योपभरब ममि मे सिपे स्वपित , अपवे बील मरत छ पौवामपसमा श्रीऔर मेवि सम्पयी कार कम्प पठभपय॥ व रामचित्रामा 1-1-14|| समी० -चोखोबा दोष तो इस सर्वात वाली माता मोर को पक्षमा माग अपपरप मापी। मोनिकोप समेटारमा बोपन्ना पूर्व सम्म नहीं मानता तो बिच भक्ष पापीतापधर और प्रो बोपपपीमितु ममुणवतोकियो म्मुमोठा तो ममुणको मापनरोप समता पर बो पाप ममीर सरेकोसमें पहले उसको विप्रम चरित सोपा वाप सादी और पप हमे ग्स कीनी पमय भिमरा और चरमपम और सबसे फा इसमे मै तुम मा गयो पर भाषावा भार अमर भये पापा तो रसमापने से लोगो और जो यो पोखर मम और प्रमोमासरायोकि रमप्र मनुष्यों शावर भाकये पत्राव और सभाकदी, बबईमासेपोटोसार कीपिपिस सिपीजो भपये निकीता भाप की और तुमय पर बो एरिये माना तो सब में भाप म मामय और परमाई मौसमपरक और पलुमिया रोकने में म्ही पाय वाम रमसीर मोबामनिय ! सो पों में समुप्प परी होगी वोपयोगी भोई सो से परामगएपी, मी लामहोप और जो इसी में परिगपदिय पप्प से है पुष पम भापरी मी पुष और मापन होगा यदि । वापिसबोण और मोगमय। मारेको मिसागवारप और गरम पापापि ममी मती बारिप म सम्बपि प्रथम श्री परिसरमौर पर शक पाव अप च मयुगी में भने मे रवि मा वो जो रस में माप अप पाषा में विध पानी नदी पार गोपपत्र हो तो पास प्राइम पप भी पाप सिदभी दबोमईप मा ममुना मरम अपोषणसमुमास ४०३ से मन्वन होय पर भयभीता। ममा पम्प पुस्तक और एसा भर कभी पुरिमा सम्मान पोनहोस. -और परमेर म मेमा किरको भाइम वापर मैं हम में से एक को न्यईमा भार अब ऐसाप सोचे किम अन्य हाथ पो और पान के पेड़ में से भी मेम सारे और अमर पर सो रसने प्राइम से मिश्रस दिवा और पानी पी की पूर्व और मोबीन मते हुए कहा गेच पोर पुमते मे सिने दुप मरामे निमसे बापम पहले मार्ग की पीसी पर्वमा १२ । २०॥ समी०-भारको पेसी रमा पीर मम यो दुरिम में हमारे इस मा ? पावावरी बावई। पपन होया पही! किया के कुल कमाई नही हो सकता परन्तु इस पेडसोसिद सम्मान पईमपी बा मिनु मनुष्य दिशेप मा परमय में भी बर को पत भावीचा मणके मुत्सदोमिती भावा। मारको भाइमरान मावो में महिला दुभी मा और भि प्रममा प्रायने में विना की और मपम सब रसको पड़ी में राम वन रक्षकी भविष्यत् कम शासी पकिइसमें पुमा निममय पम्य इसलिये इसारामम बीमा और मो माग म पहिरा च प भी मनु म म पर दी ।।८॥ और स्तिने दिनों के पाप को एक किमान भूमि पों में से पायर लिये भैरवाया। और भावीच मी अपनी मगर में स पीसी और मोती। मेरमा और परमेवरीम भीर रसको मार स्मिा परम्नु मानस ग्स मप गरम किया इसपिरेसान प्रविपित दुमा और अपना मुरमापा । वब परमेपर ने भाग समापियो मुरार रोप मुरमोसनादी पा 1-1। समी-परियर मारपसारी महो वो मेपकी मरमौर हावीपमसन्मर और भइम प्रसपसी मरमतिरस्पर सोमवार और पसा पगहरा अपने और परी पत्यु अमरप भी मदुमा मौरीम प्रपस में मनुष्प भाग एकसो सबसे ईमानी ( भग १ स्मीर में भाषा यामा रसमय मामलों परिवारोबार जिपपारा मनुष्योपदणको पो 1- परमबर माम मा किव्य माई हार और गया में ही मामय स्पमैं पपवे भाई मरणपण। पर उसनेमा माभियोग याममा ममि में मुझे पुस्मयपौर भय यूपी सप्पपिवौ पर्व 1-1॥ - भाम्रो मुमा ४०d सस्पापमकाय समी-पपईमा मिन्य पोसार भएन मी अमाप और गाम राम भूमि में कमी किसी में पुपर मारे सबसे प्रधिारों और सदिय पुस्तक पर भौर मिशन माप हो ॥ "-और मसिधाको उत्पचिके पौधेशीम श्रीवर्ष मोर मम साबसायावो पसभा १७॥ समी--मामानीमाबर मजुमा ठो लूक सभा पोमा इम्म यो सोच भिराभर मम्मी को इस बग माता बामपायो॥॥ १-और रास रचा ग्लाईन पुगे रेसम की प्रक्रिया कोरेगा कि ये सुनरी और उनमें से मिलने का मने पस मौर बस दिनों में प्रचो पर रामाये और उसके पीछे मोचर पुत्र मात्रम की प्रक्रिया से मिले हो म पाम्पाप मो या पो पामे से ममी पे। और न मे वेभ किभरम को दुस्ख पुप्पी पर पुल दुई और पन्ने मब की ता और मान्य प्रतिदिन करी होती है। पर पदमी को पृषी पर सपा मवे परमेन पावण पर से प्रति शोकमा । परमेवर येमा परमी को बिसे मैने उत्पन्च किया मामी से पठन में मर गया पर मय पक्षियों को पुपी पर काम कि समावेसे में पायपदो पर्व मा समी--सालों से पीपे किन मी सास गप प्रा और मम्मी किमय यो पावनी बेरिया के साथ किया रोने से पर इस समय दुभा और बो सबसे ममत्र हो और प्रत्येक एए, च ऐसी परिर पुरी यो एस्तोकिनु पा सिमरोमकिप पानी मला एक पमा पाहावी योजना हो व भक्ति की मार सोमबार वापर पीकी पी व मापे म्मुवा पेय नही समय पर और पहला पति शोदि होग, मूब से मममोपाचे मध्यप करमा धादि माग में सामान पूर्व पिर मोशी मी भी मानी तो शान्ति और शिान से प्रति सोमणि से पुषको सका था। महा पय पी मादुरो पो पनि याचा मोय नो पेसा बिपी यो रोग एक्षिणेपर और नया मा पुजा पम्वा से होत परमेवर भाप त एक मवि से रहित "भविषाकर सम" रम पनि पाईप माक्ते पर मौ माटो पपये माण सम्मको समय ५-उस नाव सम्बई वीनसो हाल और चौपाई पचत नाप और चई वसापकोहो । तपार में सपौर मे भी पी और की विपी मे सबौर परे मारों में से पांच्या पोको अपने धपोदण्समुशासः ४०५ माय मात्र में बानिस किन साय नौवे पर और भारी हो। की में से रस मालिक और दोर 0 में से रसो भाति और पृषी। हर एक परमों में से मांति २ हा एक में परो। तुम पास पायें, जिसस जाते हैं। भारत मपये मिपे खाने को सप स्पममी अपने पास एमा प्रथमार और रसके मिले मागम हम । सो घर सारी मात्रा समाव नाम किया। पर्व | 16-१५॥ समी-माई मी पिान ऐसी विण से किस प्रसम्म पके कोई मान सम्बायोकि इसनी पीसीबी बार में दामी सपी मी माविम्ही मनु मोर उनके खाने पीने की चीजें । सब अम्ब (परिव) मी समा सो पाइसरिये ममुमत पुस्तकीस्सिवे पड गिरधार मानी पा ॥ ५॥ 11-और ना ने परमेशनखिपे एक ही पम्या पौर सार पवित्र परा और परएक पवित्र विरों में मिले और हामी मर रसपेसीमा और परमेबर ने मुपप स्पीर परमेश्वर ने अपने मन में भाकियामी सिनेमे भिती मे निम्मी पापपरगा । इस पाप कि मादमी मनको मापन्न रसी पपद से पुरा और विस रीति स मैंने खालीलपारियों मे माघि भीम मार॥दो पर्वमा २-२१॥ समी-पान, रोम ममे मेवो सिरोहियेगवे देते से एम में गा मा परमेशपक मी किनिसस मुणध सूथ। पपईसाइमन मनुमत् मही! किमी पाप देखो और कमी पपा कमी प्रताप प्रो रिमाप और मिमी एप प्रपम सब मार झा चौर पर पाकिस्मीन माम!!! या सर परीकी सीमा नहीं और मस्सिी पिम् और पिारी मी पर भोर प्रक्रिया पर होती है| --और ईर मे मा म पोर रसरों में भी रिप पर र मार पपीता माग्नु मुम्मा मान लिया। मेरे से ममी समाय स्परीत पुरेसे प्रम मोम रस भीष मर्प म्स मग ममत मत पापा पाथ 11-11 समी-पाएको अपभरममरों को मामम ममे सपाय एमपीथमपोरोम दिता एमएसएमएस मापापी यहीसी सभा गगन मि.मिर सब अपी पुजन् एमा पाप मलम शम्माईन् मम मन और मा मगुणीमा मौ पोयमापरिईसोम मिलने से पतuk॥ पारे।
४०१ सस्पापमकार (-पौर सी एमियो पर एकही मोबी और एकही माप पीमि गोवा किया हम पुकमार और एक गुम्मा शिक्षा परी तय की ने अपन लिने बम्प और प्रपन्ध माम महो कि इन स्परी पुषिषी पर विच मित्रो गाये । तब भा रस मर और रस गुम्मर गिसे माम सपना मा रेखम को ख्य ॥ परमेसर मे करे रे गोम एक और बसपाही बोसो भव ऐसा समझो बेसिस पर मन मगामा रससे मनामनामाची हम मनरें और का रम मम गाना जिससे कि कसरपोती ममम ।। वा परमेश्वर पो से भारी पुषिय पर विच मित्र किया और उस सम. बनाने से प्रखप ये॥ो पापा 1|-८॥ समी - सरी पुपिय पर एक पाप और मोबी रोगी रस सम्मप पर मानों पर प्रताप मनसाय होण फावा किमा मालपा ईस्मारक ईस सबको माग या) सब मायपि ससने सबा अपयर किमान्यपारीतमपम से भी धुप ममपी?" और इससे प भी विदित हो कि इसम ईमस्या पार पारि पर रातापा और बालों की सति मोहीयवपापयि पक अमिशन के बरको पात और पईमोक्ष पुसकरहोसmat॥५॥ 1.- मने अपनी सो सरी सेभारे में नरेने मैं सुन्दर पीसनेमागवि मिश्री तु मंगे कि का मसको पाई और मुझे मार गे मामेवाती यात्मीयो कि में उसी दिन बिससे से भर मेश भयोष और मेव प्रबरे से बापयेतो पर्व १२"-1|| समी-अब देखिये ! अनिसान बना देयम इस्प और मुसबम्मना- कायम ग्स में मिम्प्रभापपावि, भगा कि पेट पाम्रो सपिपमपापप्रमोसे मिल सके। 15-और बामियाम मे पाचौर ने पौधे व्यक्त की पादिमी में मेरे मिपम ने माये तुम मेय विषम गे मुम से और एम से और म पा से मिले हम मागोमे सो पाकिम में से एक पुस मतमा किया। और तुम अपने शरीरासीको और मरमौर हमारे मन में थम मलिया कम्पनी पौरिया में कमा रिब के पुष्प अमन निशान योग में रखा होगकिसी पररेण से हो तो नहोसे मोर रिपथको कम उत्पा मारो और मम्मे मोम विधवा हो मन उसमा बाष और मेरा दिम मारे मास में मिलमपि । मौ यो मालामाल विपकी बीमाबापत मामबी अपमे गोप मेष कि गमले मेघ नियम होगा। प्रा ।
अपोदासमुखासा ४०७ समी- -अब रेलिगे ईनकी मम्मम पास की योगबला मण ईमप्रेशरदोता तो रस रमदे मे भाविधी में मातामही और बो पर मनापामा ख मा अपरम मा किया स्पम पतिकोमो रस पर ममाम से तो एक कही भीमो और बोदौसी जगने से मत सादुक होये और पा पुग्ध पावन मुपाया में नये स्मारि पदों के रिपे इसममा हरा और अब चियोग इस पाशा को पो बीते। पाशा पारिप इस कावेसेस की गवाही बो मामा का एक दिन भी मन भी १ मिथ्या इसमाच रिचर सांसमी नहीं ये 10 "बईभ विहार से बात म पुष तो मर गयो पर्वमा १५॥ समी०-ससे पसिर रोवाकिर मनप पावन भादो उपर से नीचे और माचे से अपर पाय पब पाएनवासी पुरुष ति होवा १ –पिचर रमे मममी में R विना और गरिन पम ममप में अपपेकपर नवा || और रसमे अपनी प्राम्मई और क्य रेबल व मनुण उसके पास है और गरेर बस पर रमको मेला और मिस पप की। गौर AT मेरे स्पनी परि मरे पत्र प्रापली पी में अनुमा प्रचार में पापको बिनती रब कि अपने रास प्राप्त न गाइये । इपा रोग तो गोदावर पा पान और पपपे नए पोहो भीर पेड़ से निपम कीमियम एकरो पाचौ अपम विचे रसके पीछे भाप गरिने बाप अपशिसे अपने पास पास मासे । पोथेगिमा सूने मामाकर पौर मियाम त में सरा पास रावी मे गया और रमेमाणीम और वीच भएप चोट पिसान से गूध और ग्राम पम और अपियाम मुसीबोरामा और एकमा प्रेममारास पेरिपा और उसने मी रम सिरमो में किया और उसमे मस्सा और एप मानो पनपा प्यप और सनोभापे पर भाप ग्मो पास दोबारा और उन्होंने हायर वो पूर्व पा समी-अब रेलिमे ! मन बोमनिमम ममम प्रये म्स सपासप बजेमादि यो बोसोको सिको मामी और मास माने में मारपेयपि सिक माय मम्मी हो सन्च और ईबरमाब दो मधुप्प व पाने और पे। इससे पिरित होता पानी मनुष्यों में एक मएम्पीभी, गमबो प्रधान ममुप मा रम पम पास में रा ऐम इन्दी बातोपनिमा होम इसके से मिलमही मात्र माने और पेमेमा एम।।१०।। १-EL Vos सस्थायमा १४-ौर परमेवाने ममियाम मेमा जिपर लोगो मुस्म्या कि जो मे रिण समुर परक परमा। ता परमेवारिसे अव मसापीठ पर्व 15 | भा -1.2 समी -अब ऐक्सेि ! किल्प ईणार्पोरेम की सीमा किओस परिबारे समान गिग और धाममाण!!!.. ११- पामेन समरमरा पर पाबा चौर मा परमेम की भोर से स्पाला और रन पगरी को और स्परे मन और माता के मार रियसियों को और ये अप भूमि पर गवा प रणय दिपा : गप पर्व ।। समी०- -- मी बीमा पासो र रेलिपे किमिसमे पसक पति पर मी भरपबई। बाये पर ही अपयपी पे जो सन्को भूमि उपयोग माप! पापम्पाव वप और किम तिनम ईबर ऐयापम मेरो रसकोम..। २५-पामो हम अपपे स्वि में पास रस पिणा और हम उसके साथ रामन शिम अपये पिख्य मे सब। हम रोये रस यत अपये पिन को रस पिखापा और परिखौती गई और अपने पिता के साप पर सिमा मि म्म ध्यान रात मी पाच रस पिउँन सके रापममा सो सूख भरोनी पहिलो पपये पिता से पमिपी तो सप पापा समी -रेखिये ! पिय पुषी मी मिस मम्मामले में असमरने से पा सके ऐसे पुर मप मे मेयर भरि पसे । रामको एप म रूप पायर। इसरिसे समबोगों को मप पाने का माम मोपरेषा परिपे । २५ २.-और अपने समान समेम में समा मेर किपर अपने मल्लसमान परमेमसरा चि में विप। मोर मा पर्मिया हुई। तो म्प तय समी०-ब विचारिपे सर मेर म गमन्ती में पमम * या त्या निध परमेसर और साले तीसप को मत्यपर म भरपौवय! ऐया दिव रोगकिरा परमेम कीमा से पर्मस्ती !!... १५-वर परिणाम बोबडेमरोटी और एक पमड में पा सिप पौरासिक पास स्पिाग्रे मी रस पीपोरसे गिध मिया रसगरेको एक म्पको सो परिच ॥ ौर पम्मो प्रमुखमणि रो।। बम रम पमयम अप॥ी. प्प पाया समी--प्र!ि पोंमोसा प्रियम वो माप सश्व मोहानिस विमापी और चिा पराचिरा और चयोपण्समुशासा ४. म पुष्पपरभ, मेसी मामुत बातोप ऐसा मा होम्य किसा को समय रोमा किराको प्रेयी मनापमा श्रम पुनकको पातमी दो सही ाि स्पभारत मधुप पकन पुस्तक में मोपी सी पास गम के समय माt९. २५-ौर इन पदों के पौधे को जमा किमये अश्यिाम को पात पौर रसे मारे प्रमिाम! अपने को अपपेइमा एमाल बिसे तूप्पर मासे से होम की मेरे विचार अपपेपर इसाक प्रेम रस पी में भरिकों पर पथ। और प्रमिााम ने भी के समय को यात भविपेष मापा । सब परमेपर पूतन में परमो पुमरा अभियाम प्रिपा रामबर पर मनमा सम्म मत मन में पता है कि ईभर प्रय। वौ रत्प पर्व १२ । समी-प्रच सायकि पास भईभर प्रपाबन्दी और प्रमियम भी एक मोला मनुप्प पा भी तो ऐसी पधलॉमवार बासमनिस होव हो रणभी मस्ति भरा मी पापे यण । इसम मिश्रित यो किमिपामा संहदी। ५-सा पाप हमारी समाधिन में उनके एक में अपने स्वाको परिव निमम भाप अपने पापा की सत्प प . समी-मरो पाने से संसार की दो पनि बनियर बर्गम्यमनमा ता. मो! बिससे मावि हो उसमे जवामामधीमान कहीं और म्ममा *सा कि उसने मुगा रेल्व इसरिने मारमा प्रकारे॥ २०- स्वकप पीति मोरो वा अपने घर में न्यौपी रखा और ग्मठे मीली हो मिस पपमा से मोति बीप मिला गप्प अप दुर्गन्धमा मिको सलामोवि मोर वा मावि मते हो वो रममे एपिसी में ला पास्त सेक्सविकिसी कोई सकियो भूमि में पहलवान पुन र प्रपत्र कमी भी दम्य ग्मा मुख पर और गरीर पर पूर्व पत्थर, टपमा मनमा भयो म म र मेरो प्रतिमा भीर और सम्ममा प्सस गुव दुर्गम्पोम मिली विमाप्रे किमाम ग्रम्परापोत्पति भवीएमा एक मसिम पे कम एप सन्नी और बोली भूमि चरिये इसी साल सील प सम प्रमों मनुनी सिमे चिमी मृमि मसावी आपसमगौच और समेसम कीरावीह इसलिये सबस पुरा पायी। उसमा पासा पुरा गम में समय सकिरसमे परम्नु ग्मी समप और प्रायने परम् पण मम पर मेरदय पदम वा दुवामामय उसमय एक पापा पुण्या में काम कि उसने मामाघरी पण पोरन चय सणापि मो रमामय भौर मग मात्र दुष्पमा पना सत्यार्थप्रफाय सभ प्रनुपमर होम्म भोर या उसापाईप समाचम फिरसो सब पर प्रहहोम यु मै म अयपे ॥ म-माने में भी होगी। यो प्रविधि जमा हो भोपासा बास पाइने भाति से पाव कम रोग और जो विधिपूर्वक साल में बिस्तर मुरे टीम साप परी सातीय धप चोली, पार पम्पी वसे में पीय भाव मा रखर साकोरम र पराम बी ग्समें एक मर में रची भर मन्त्री माय भर केयर या स्पून सम्पूर्ण भाष मन भावन अधिकई मितपणे, पर कारण पदि और पाय मादिको परिपाली में बमा म्स पर मुरो एक पुगे पोर पर बेशी मुप से एकता तभीकी पाति देन पणाला ने इस प्रभार सपा कप मा दुर्गम्प मरो किन्तु इसीम माम मन्येषि परमप पुरस्मेष पर मर रो परिव हो तो बीस सेर से कम पी पिच में मगोचरेप भीख मांगने पति पाक ने अन्य राम प मिबने समास दो पन्त रसी पर राम और मोक्तादि किसी ममम मिय सत्यापि पाये भादि से भरामी भी मतका सम्म रत्तम बाँकि एक पिया मर भूमि में अक्य एका मागको पर पास भमि मी पाने के सम्पब अधिकमी ठिी और कम रेखो से मप मीही इस गममा भारिप निपिर..॥ १८-परमेय मेरे त्यमी अभियानमा जिसने मेरे स्थमा को अपनी और अपनी सचाई निमेषा मार्ग में परमेम में मेरे समी म्पानों पकी भोर मेरी गुमाई भिती रप ५। पा समी-पप निराम होम पर भीर और से भारम्य भिारी भने खोय गुण प्रात् भगेसन मार्य वियते । उपभर पे मी किप तो भारा मार्ग पोपही दिखाकर और मनुष्यों से पापापीमख इससियेरे पते पर बर पुस्तकी मोदी होसदी चिपापी मनुमा॥२८॥ १४-समय पे मामसमभरम परिमेय व और बार और परविड और मियम और मिसमान पर दूमा और मास । र और कैम्प हवा नस मोर निमः म पूर्व २५मा५-१५॥ समी-पातमा अभिदाम से उसने पासि दासी प्रमा 1- पिता की विमानस्परित मोबस परंगी और न अपये पिता के पास बेमापो जिसमेपल और अपने मरने से पाये तो पापाप दे ॥ और पिक मे अपये में से अपने मेटे एसौम प्रचा परिपपरिया मोरी मेममा रसपा और सिप परबपेय उपस अपये पिसे बाग किम मापन पीय पौ अपविण्समुहास पो भने समान मन पिरमप्रिये और मेरे और मास में मे मानिस भाप माप मुफे प्रताप रे । ही गत पर्याय ।१२-११॥ समी---किने ! एस स सोबार मे पश्यत् सिख पौर पाना बनाना प्राधान नहीं है। पौर फेस ईमली के माम दुरपुमा म मा मेगा में पा गया. ॥ 11-ौर पम मिान को तपस्म और उस पापर जिस रसने अपच रसीव कितावासभा का किया और उस परमपमा । और इस स्पाम ममाम स्वमा रौर पर मामा मैने मा बारिमा सामसम्म तो सप २८1.16--14।१५। समी-प्रचलित परिपीप्रम पदी ने पाप और पुराने और इसको मुसम्माष बा परमुकास" पापही पावर पर और रसी पत्था मात्र में इन गया! या सो!! यममा इमाम ! महापाता तुम्ही 100 २- पर भर मे रासिको स्मापकिय और ईम मे उसकी मुनी और रको भावोग मौरप गर्मियोगई और प्यमी और गोपी किम मम मिया रबिई। टी रम पर्व ।पा २१-५. समी--- इमापी !सा गा पटरीकोट नोबा कोषस यस पभोपप जिस पोखी पसबापमान ११॥ ५-पामा मध्यरामी मानने स्पा में सभे भानचौर म्समा किस भ प मया दुप मतपकि अपम वि. म पनि भिमापीने मिडिये मारी पुण्यातत्प " समी०-माम मग बिखरी मनुषोभत्सपाया पर्ने दिपाल मान मिया, अप पि भाण, गला भरि पास में मिल पर ये प. बॉकिपर किसी में स्मारत में मी भी मिल पा भी विदित मा किये जासी सम्म पापयामि भूमिरमान खपायाभर मी र म म्यनन्तरम्पी होमपुरानस १६ ॥ 11-AR पपने मन मा पप तसा निमाम्बमारियाणमनी रत्प ज ममी.-परम्परा मनुज हाये में ममी मरिधी राव चमीर। स पेन माग यो मोमाई भीम गेम की डायरममन्य प्रवास .. .
सत्यार्यप्रकार १५-ौर पर प्रहा राप्पा और पहा पीपी एक सप मापुर प्रवाहा। और जब उसने ऐसा किया उस पर माम! मा तोरसको बाम माता मा तब पासबोध की बात उठसा मापुरम मेंबई । पपया कि मुमेबाने देवकिपीसी और बोला मैं तुमे बाने मरेप बब मुमे प्राणीप बरे व उसमे रमे माय नाम पर और मोग किपमा । सब म्समा किस नाम भाग में पमासमा परन्तु इमराने बॉकितने सारे और ममुप्पामाप एषा की पई मापुर नि पौर गाय ॥ तब यमन मे पपके रसव पास सिमपन्य नाम बताइपे पीर पोसा कि मप प्रमवी प्राचीर रस सपा प्रताप दिला।। और बस उस स्थन म बाम पम्पब स्प योकि मेरे बाप्रमाणेच और मेरा प्राय पी। और पाप नएस से पर बचा तो की माति रस पर पड़ी और अपनी बाब समय बा। इससिपे इसयस रस रपए बोबा पई पी बी नही स्व रोकियो पमबाप की बस मेमो पर गई पी मुख्य का ॥ तौ प प २५ मा २४-१५. समी-अप ईगाहों मईबा ममी मी तो सर और सबस पर पुन ऐबकी काकी ममा पम्मी ईबर हो सकता। चोर रेखा । बाया कि एक बा नाम पर दो एसरा पपमा भाम ही बचाने और पिर में उसकी मादीको सातो वो और बीया पपा पास्तु दो पर दम तो atष की बापी को प्रची मी मता और पेसेवर की महिमा जिपमान बामा या तो भम्प मच मी पडावे हाँपे । जब जो सारेच और मापुर किया पात विग्रहरीर हो सकती। पर . १९-और पाबा पीर परमेश्वर की पी में पुरमा सो पामेपर के रस मार गया। तब पराये मोम्पब मा कि अपने पई औपी पम जा पा म्स पाहम अपने मामा और पोयम पास मेरा न होण और यो मा किस पभपने भनी पक्षी पाय पप तो पोर्म को भूमि पर पिरा पिच ॥ मोर समय अर्म परमपर की पी में पुराइरिये उसये म्से मी मार पडा। सप 1८।भा समी -अब पौरिये ! पम्बुकाम किचरो अब गम पाव निरोपमा तो रोतों मार पा र रमेहुरि र तीन भदौ और वियोग मी प्रथम चमच पा पा निमय कि मिमीसबरयों बबटीपी॥ तौरत पापा की पुस्तक ३- मूमा मात्र भर अपये मानों में से एक मानी रेकिमिभी मार || उम्म परम्पर पीरियकिई पपोदशसमुहास: माहीं तब समे रस मिमी मरपा और कार में से रिमा दिप बब पसरे दिन पर गया तो जोमानी भापत्र में मार है तब सो रस प्रशीकोमा हितू अपये पानीको माता|य समने मा कि पिसने तो इम पर प्रमा नापी माना जाएगावी कनिसरीति से ने मित्री को मार हा मुये मी मार पाये तब मूसा मा और माग मिसानो वा पापा ११-१॥ समी to-देखिने। यो पापभमुख wिwो मत प्राचार्य सय किमिसम्म पति कोषादि गुगों से पुछ ममुप्पामा प्रमे बाबा और औरत सबस मे पचा प्रयत कर बात में विपाता तो मम बोरबा मी प्रभाव होगा ऐसे को मौ बोईम मिपा पाम्भ बना ग्सने पारा पारि मत पापा ममी मूस्प होसमा हुमा । इससिपे सानो मूब पुमा हुप सब मूसा से यदि पेशजी भवत्य में विपक्ष में नहीं इमादि ॥ ३०॥ १८--ौर फरम मेमा ममो। और पक गौ पोषो और रपे रस पोर में ये काम में बोर के परी चौधौर की दोनों भोर और में से कोई विशाल बोअपये RR से पार माये। नाशिपमेयर मित्र मारने के लिये भरपार पापा और बसपा पर की पैच पर और हम दोनों भोर पोहोर सब परमे पर बार से बात बा और माधक तुमारों में बायेगा कि मारे ॥ सौ पा ५ १२ । उसमापी समी ~मला पाजो रोग यमन भने यो समान बम सम कमी हो पाता है। बब बोहम बाप रेसमी इसरातभर पाने भावमा म्यापासम्म इति पये ममुपले सण। इससे परिव वापि किमी मी नमकी मिली। १५-और पो हुआ कि पाने में पापी गत मित्र देश में परे परिडोमिनपरि से जो अपने सिमासम पर ग्याबा रस सो परिबरी माया में पा पशुपके पति समेत मत मि परमियम म्मर और उसके सब से या मित्री रहे और मिप्र में शिक्षा या स्पोकिई र म हा निसमें एक मग, तीमा पभा १५-1 समी०---बार प्रणा भाभी या समान निपी हम स्यानोभमेबारे पो पर पापक भी मिल पफ्यम मार दिसे और ममी पप बगा और मिड में गा बियप होता रहा वो मौला सानो तिरिय मापाई। ऐप मम ईमप्रतोय किनुमिमीणपापमपमीमने मपी।पमा पनि पिता मासाहारिम' कुवो वपा' गाईपाषामाबर मासदारपणे मा भने प्रम: ।
सस्यामकम्म . . -परमेतार हमारे लिये पुर रेप । इस्पयवान सकिने भाग में । परन्तुए प्रफ्नो साम्प और समुद्र सपासप सा और रससे दो मागम और इसापेक्ष सम्वाब सब बातों पर से सूची भूमि में होम बागेतो पा प १४-100 समी -पानी भाग तो मा मेरो पौधे गरिपे समान इसमामेष जसके पाले २ मेगा मा पा बन जाने का सम्मान पामही तो मारपीच में से परी पोर के रेगापिपासपक माप विससे मस चमार सरपकम होता और माय मावि रमाने समर पाता । परन्तुला किया राम पासवरब गनेमोतिहा। इम्पनि पात सी मूस्य * मात्र सम्पाबीचा प्यार की। पान्तु पारितामा पैसा सिनो मारी सोप- भार ऐसी हो गसमपा पुस्तक। ऐसी पुस्तक और पेस्पचा दम रोगों से एएसमी प्रा. 01-चौकि में परमेयम य ईम अमित धिमान है। पिता के अपपपपपस मरे पुत्रों को जो मेरा स्तेमकी तीसरी पी पीसी मालाई चा प २ मा । समी-मा पसि रमन किबो पिता बफ्यम से पर पीपी राप्रपा ममममममम पिचके पिता रेपचेमन्वय नही रोबो ऐमी तोली पोलीस से ये मेयी और बो पानी पीसी से प्रात्ये पुरोगा रामको परामरे सनम ! विन्ध प्रपात स्मिी को एसय अम्बापती बात है। ५-विमाम दिन उसे पकि रने बि एम्सवर बाय पौतू परिष्म और स्वादिष पामेमा मेनपरिभ्यम है। परमेशर बिबाम शिव प्रताप दी। बा प . 16-10 समी-पप मिथर पदी पनि मौखि प्रपति और पप पामेनकारिखकबा परिम किया कि बिमसेससा दिन मोगमा पौरबो रमिपा को अगवाव दिया तो सोमबार पनि पारिलों में का वि ! अर्थात् गप दिय रोग ऐप मम पिा म मौनी मलामो सवा! भय रक्ति में पप गुष और सोमप्पर पति बेन्म दोष किया पाकि मिसमे एक को प्रतिमा सदिचा और प्रमों में ऐसे ही अपरिचि! ॥-अपये पौसी पर सी मत। अपये पीसी की बीर म्सास म्प ग्रमी और म्स पैड और रस गरे और किसी पप्तुमको से पसीधा मादौ प प . मा समी०-या। मौसम गोप परदेवियों मार पर ऐसे मवे। नियमो पासपर पर भूख मास सो म मतपसिनु और पाश्व की पतपेण ही मनोमन लोप । परिमेय ।
पोदासमुशास' ४१५ हम सब मनुष मात्रको पौत्री मो सिथप मनुष्यों के मन कोय मी मोर पासोपडे किसिमे पपासा गि। इसरिये पेय स्ाी ममुना कोरम नही। ४- प्रबमा में सदर एकमे मे और एक पी को दो पुस्प - मेयुको प्रय में मारा। परनये रिपो बा पुल सपुतही होमपने सिपे जोती रायो । ती ती ।।भा 10-11 समी-पानी मूसा पाना और तुमाप पर मानो मी, बस पर पा प्राति की मारने से मौ प्रापे और इस सा मिभित होय किस्म विषपी या मोहिजो विश्वास होता तो प्रतवानि पर पुस म समगमन की बाओंभ अपये सिरे [यो ] मपपता र रसको ऐसी विधीव विपीपम की भाशा या देता ५-माई किसी मनुषमार और प मर जाप यनिक्षय पात किया समोर प मनुप्प पत में म मा परन कर मे रसरे भाव में सीप रिसात मैं तुझे मागये भाषा दूग्ण । तो बा ५ ममी-जोमममम सीता मूसा एक बारमी को मार परम भाग पाया रसम्म पारा मोबा। गामा पाम भूसा अमार निमित्त सीपा था तो ईभर पण्प्रती एमा क्योकि उस साम रामा सम्बनाम दिया 100 1-और पुण्यबिदामी परमेधा बिपे गाया। और मूमा पापा हमले पत्रों में और पापा बाई केही पर शिष मोर मूम्य मे रख दोहोरो पामों पर सिमा कि पापा रस मिपम मी जिस परमार ने ब पता तुम्मारे साथ किया। और परमार नेम्पा स मा दिप पर मुझ प्रसभा पर पारा और तुमे पत्य की परियो और मम्या और या दो मैंने दिलीप ५।-1511.. समी.-भर रेलिगे। रेमप याबामाको यही और पसमम पोमबबिएसब पौरपदी पर माह विपासायन पमा । स ईसपनों मरा मीरेही परविन मरब रमले महमा मित्र की स्पही मौ! और न मिनीबानीपुरीमतें पास में भी मी सत्मस मोमो पण पम्पमा मो! परन्नु हो में सी बातों म भीमाचौर पभी विश्व किमानौ मांस एक पक्षी ममुग्णय पारस खासदएकपदी बननी भाजपला म त पहिले नाम परिबि लव और एसी सविस्मय भी बनाया.
सस्थार्यमका -पौर बोरा फितू मेरा म ही रेष साध बाकि समे देखते कोई मनुपपरिपेय और परमेम पेमा कि देश एक पल मेरे पास और तू उस गले पर मारा और पोगा कि मेरा दिमय भाग मिमोसा तो मैं तुमे पहारहार में स्पा और बाबा निम्तमे अपने हाय से पप्पा । और प्रपन्य बाब म्म मूंग मोर त मेरा पौषा रेखा पान्तु मेरा रुम रिव्यांबरेय ।ौ प प ५। पा २ -१५ । समी-प्रब देवि ! इसारामा चरमस ममुष्मात् शरिपाती और सूसासमा पर अप स्पम पम पम यो पाचारका रूपम रेप को पाप से म्सकोप विषा मोनोपा । जब सा मे अपने एम से मूसाकोपा होगा तब परमो हाल पास रहने म रेस होय ... मय स्पषस्था की पुस्तक तो०।। गम-पौर परमेयर ने मूसा मे बुखापा और मरीतम् में से पा स्वम रसेमा हिमपएखोपतान में से बोर और रामपरिको तम में से परमेबारे लिए मेरबारे तो तुम मेरे में से प्रात् गच बैग और भेडमी में से अपनी मैर बाया तो भाकी पुस्तक प समी०-परिचारिणे । सानो परमेश्वर पचपेर मावि की मैं नेपबाबो कि अपये बिने पबिपनमापे विपे सफदेश वापस पण भावि पामों के बोहमाल भूध प्यासा पपी ! इसी से परिसर और मोति में मिमी पी बा समय किन्तु माती प्रपत्री मनुगोपा. ४६-और पैर मे पापा भो महान पाबकोहको नियमाचार बोपदमा जो भार बो मरम्मको सम्र पर सिर परग्स में मिराब की बार मिलने और मेरमा और सोये पामक बी पर पाप रस्ते और ग्स फनी । और 4 पास रसम्मको और सिर और सिपा को ग्न समरियों पर दो पक्षमी की प्रा पर विधि से भरे । निमसे बहिवाम की मग्होने बो माग से परमेपारो मुम्बकिने मेरनिय पचासम्ममको पुस्तक प समी--क्ति विचार किलको परमेमो माये इसके मन मारे पौरप मापने और गेहू को घरों और पिस प्रपि में प्रेम कर मुगन्ध मम ममममम्मी वाद! सोनेपापा और पनी ममुपके सा बीमारी पर हो सकता ५ मि परमता सूण पेपर मोच पदिप प्रमिक लिया पासबोगोरेपप समान पप मेमोकपपये प्रपोभरपबोसो प्रयोदयसमुत्रास किपर अपने अपने विविधपोर एकपरिया परमेवारि मारे। और वयि गिर पर अपधाव रस्ते और बदिपाको पामेपर मामो रवि मम पापा ।।३-1. समी०-- प्रब देखिये पापोमाने पमित ! स्व चपर्भ पाप भवि सम पयों को इनाम और परमेवा मपरे पन्नईसाई बोम कि ऐसी बातों मनभानेदार को मौवर मनमा अपमा मुछि मावि की प्राण ॥ -सपकोई प्रमा पापमपमा मिसमोरया मात्र भली मोरिये बारे। और उसे पामेधा मागे बरिया पाप की मेरी हो मैप । मा २२-२४ । समी०-मानी ! बपिपि एसीप अन्ना पर्वात् मापापीय पपा सम्पति पारि पाप मने म दो सगे। पाप तो पयो पर और मबियपासे में गप दिरा कम पारिने प्राय मे । वमी को सर्व योमा चिसो पाप प्राय मेले में हरित नहीं होवे । पुमो सिरोपी ! इस पक्षी मतका मुसम्म पर्ममप ममतोलामा भो बिबिससे मुमारामबाब". १५-और मदिरसे भेदबाने की पनी पापपने किये सभामा चिये दो पिटिना और माता गोममेशा के लिपे क्यार और सत्र DOr म ग प्रम मराज मजे पाम्नु पर। रसोमिए प्प मापति और उस सिनेमा किया गया पर पदिग्स पिपिना और पोट होम पोमो वो सामान पिसाव करण्ये हिस्सा पप की मेटबिरे बायेग्स पर पसे। और पपमा किया गया तो मैं पापा .-11-1.. समी---प्रब मुनि! सालों में पप समय कोरबमा भीरण मौर म रखिक वा पापीमप्रति सच सागर इस भर को पत्र' किश्मिने बड़ा मो और मम्मी पाप पाव पर पिसाम (भारे) विषम विमा । परभुत बात तो पाकि कपास बरर गाइन मरोय" पेदाप मत पर्यन वाम परिमम भनमा परे। इन सबो र सरिन हब! किमि में जर एप थप सात पाय बम मोर मन में ना सिर मिाचा सपी माझमी प रमोन रसीमम सीमा भविधा पपी पुडियोस ना मात्र सही मानसिप प प पर प्रमादि मंगशिप पर मौरभता। रमठ सरळ प्रम थिय मा थे। सम्ममपिचर किमाना बदाम में पसरा भी समीम रथ भाव और "म" पिपरमप्यार और मौमसम्पपक साम, मरम्प दिरामा साध्मिा पर मारपरी पति रम गुपयुवा!
सस्यार्पप्रकार एल्म। एकबापत इस्पागोमागम में मोमवकिमिमा पि पाप स प्रप [ मी र व्यप स्पॉषि एकता प्रप पि और जोबा को रिसको और म्न अवम - मांस अप भोर पाप मी पर गप । भना मोव पर अपना मोदय म पपूत रे साता मन मी ईसाइयों में रामही पाती। पालम भरे इन गभरपश्यसि भनेर पीर सब सब प्रपोम एप सपरिव दोसि स पार प्रया पर प्रारम्बोमा १५-सो रसी बसिब में अब रखी पास्क की समी सिने ग्स साप और सम्मत भोजन भैरा कमर में पई सो पीर सामोपदी में समय पर सो रसी पारीहम्पी दीप . F-14 समी०-म गठे थे दिवाली के मारे और मदिरी पुमारियों की पोपी पिति पानी पर मोर मा पुमरियों को पापीमा रसस माम्गुणा समीपकि पम दाम और मामले पर प्रेम पापों मे भूब मोर माईली और अब मी मात्र मा ! मन में मनुज एक बार मापने और दूसरमाको रसम मांस मिलाये ऐशम्मीदो सन्ठान सब मनुष और प्रय, मी पारि पषबीच पुन्। परमेपर ऐसा धम कमी पप सता । इसी पप पास ईमत पर इसमें हिमबिग और इसके मायने पोधमा कमी नही हो सकते एसी सब पापम्पमा परि पुस्पा मे मोमो ति. गिमवी की १४-मो पपी मे परमेम पूछने पपने आप में समाए मार्ग में पारेच बगी मार्ग मप्रक्षण में चिई म मार्च में भिमे के लिए स्याम के पपीबाग से मापन परमेपर मे पपी ममुरोध और उसनेमाम सकिने माला किनारे किसूने मुझे बताया मारावी पिप २२५२८॥ समी०-सम तो खेतबातो मेरे और प्रामाणि प्रारी परिप अप मयों को मारा परसपूत नहीं है, पप्प पासप परमवर पौर रसके कपमा परोसा को भीर में पोते परोपी मला अब भूपाए में से को! पमिमी पपाप प्पे पच ईगों पे मरो गमे ! प्रवप मा गो! दित बनी दवा कि पचय प्रकुमार तो पेगा ताकि यो प्रबपी। बाद तोवर मोदी पौर परोको पनि मनमाचे गोरेगाव- समुपए की दूसरी पुस्तक॥ २१-और म्सी पत पेसाप कि परमेपा मगरम पम पावर मे पाप किया और मेरे प्रेस सम्म से मकि पामेन मामयी मे पुस्तक॥
प्रयोगसमुशास'
८-"
म
नियम शिव पक्ष परम पो इसपर सन्म मिम
से मिमम मामा मरे का भाव के दियो म में मन भिमा पास में
पौर र म भिडियो समुपच की दूसरी पु प . ५-६
समी० -~-प्रब अम सारण किसानों पर मनुषन् मेवारी
हीरे और पाप स्पीकिये गुरु परिप्रम यिमर स्पर मेल किरा
तो पर पास पर बम्पर दो ग्समें राम को ईपयों को एमा
और ऐसे प्रतिक मानो में बस वहीं भावी! सपा विधाय
होगपे मर
मिबिये या पुस्पनमा उभिव:
राजामौकी पुस्तक॥
२५-और बाबुरामा मार मा यमके पास पांच
मास पाता विधि में पापण्याप एक सबक मामा म बानिय न्य
मप्रपाप प्रमापा पम्समम में भाग और रसमे समेवर ममिर और राजा
अमन और मम्ममसरे और स एकोमा रियर
कारियों की समा मे बोगस मित्र पोपमा साब की पम्सचम
की भीती मरी प्राप्त गरियो रा प २५ ।
समी०-या विमा गार पापों के बर मे हो भपये पराम
पिसे पार मानिस समयषा पा उसमें पाराम रण होम पानमसार
अपनवेमा भेमा मारिका और ग प ग ती की प्रेम
अमीन भएको प्रपम तो इसम बानो माया मारता था और
मीठा पा पाग्नु पब अपच पर बा तुमय बजाये उपचपली
माया। और माने उस पर माप गप। ऐस प्रमच परमे मी
अमन पाप मोर बर मयकम मीन बनेमा म पयामरिया पठ
भी वो मोनशिबातें प्रपम रिवी सो समयकीय
मिजाकियों मारने में सुरबीर बन्ध था प्रब पुरषीय सामने
उपप हो या पोपहारेकर ये अपनी मिला और भाविया
दी। ऐसे समय इस पुस्तक में मौमाश्मिा ut..
अव का इस माग ।
फामक समाचार की पहिली पुस्तक
१-मो समेत मेर बिर ने इपरापर पसी मेली भीर इस्यपस में
पर सामपुर मिर प्रबर मा
समी -अब रेवि! इसमाधिपामोबास
इसपरबत सपरिऔर पत दिन शिमो पब में बता
मा प्रबमा भेभित होममरी म सक्षम मनुषों में मर था
जो पापिसोपरि मे पिच मस-
पण सुपा रुस्तुमघणपणे।
अम्पपस्विपित्तस्प प्रसाऽपि मपहर ॥१॥
४२० सस्याप्रकाय से मनुप्प पप में प्रसव पब में असम होगीमा पर मैं प्रमा मासा होये रसही पाय मी भयापक वीसी पोखा इंस्थागरी।। एप की पुस्तक॥ २८-और पाहिम पैरम हुषा कि परमेपासे पाये ईघर पुणे एर और वाम मोरम मन्त्र में परमेधा भाग भावनामा। और परमेश्वर ने खान मा जितमा से माता वाब मे तर परमेवरमा शिविली पर मच चौर र स्पा से मिते जय अम। ता परमेहर में शिया पाकिम मरे राम ऐपूब को पांच किमा समाय पिनी में कोई नाप सिह और तय समई से गम और पार से माग गया १ौर पर अपनी मांगे पर एप्पी और दो मुम्से प्रमाण माग पर को रमाया वायर के पामेममा मिचिये भम कबो मनुज मसोमपने बसिरप । मम्त पर अपमा म बस और म्ममा मांस की तरपनिसमा मे मे सामने पेम्म । दर परमेश्वरान से मा किवठेर हामी सबसे बच । तर तान परमेश्वर योसा गा और पपूरे सिर से तबरे पोरेगा से माप मा पेपू प ।मा समी०-भब पनि सानों पर सपामय किन रसले सामने गम मतों को दुसरेवा वाम गर नभपये मनसे बच सकता है और सखों में भो रसम प्यमयसम्पर। एक मिने पनी मममीवर राम और गानों मम मी साबो जो नो पेब की परीक्षा ताव पेलो ! म । स्पस्य की पुस्तक॥ ११- मेरे अन्त महानि और शाब बात ऐसीधौर मैंने हरि और रापन और ममय भनेको मन सापय मवे अब विपकिमी मम पसरलोकि अधिकार में पागल और बोसम में बम्वा सोनम पाata.पामा ५-१८॥ समी०-- चिोहन और भय पालामको रो माये १और हरिरिपोर समान्य विकाधानों पावर राखिने परमार कीया योग्य मिशी पिार की मी बाईनीtu. बापोम्पा तोल सा दिल में विच को प्रापे कामचरिचित पानि पर दिन में विध पक्ष । किविसमे सोय पात जमावत मानापम पम दौर जसको पोमोलोसी frodमियामी अपोरसमुशास ४२१ मत्तीरधित बीम॥ -पौoमीरमपम इस ठि से दुमा उसकी मात्रा मरिषम की पूमड मंगनी रंगी पर मोमा होने से परितोपर रेत पो कि पणि मामा से पर्मती । यो अमेवा एक दूस मे स्था में उसे पकन रे मारे पास सन्तान पूसातू अपनी पी मरिफ्म को पो गाने से मत मवकिबो गर्म रहा सा पनि प्राप्मा से है॥ पापा १।१० समी-इन बाठों को कोई पित् महीं मान सकता कि दो प्रमपारि प्रमाप और पत्रिम पे बिम। इन पो को मामय मूर्त ममुप्प पारियों प्रश्रमी सम्म विमों भी। भमा यो पामेवर प्रमिपमम्सको कोई दोर सो परमेपर भी निगम में रषय पर सो रसकी स्वामे मापे और पमी सर्वच और विनम। रेपेको बिस। अमरिमोगर्म पास कई ऐसे मसको बिपने धर्म प्रमा र पोर पोर शामरे कि पमेयरधने मुम्मो स्म में परिणापा पर्भ परमाम्मा की ओर से साप सम्म मपस रथ सादी सूब से ती प्रगती होगा मी पुराणों में अपम्मच मिला। पेसोरीको भन्ने पार पाडोप मागम प्रमगाम में पिरते है। पासी बात सामी किसी पुस भाव समागम होने से गर्मी मरियम होगी सिमे परिसी पर ने पेनी प्रसम्मत्र पर माली रोमी इसमें गर्म बिरको मोर ॥१॥ ."- मामा पीयो बाप में से गया कि शिवान में सभी परीक्षा मेगावापीस दिन भर चास राठ रपथम मरे पौधे मबाण परा प्रमेहमे ने मा कि सोनगम पुगी तो मरे कि पापा रोरिला बस ॥१ पर्याय समी०- सा सिख पकिसी प्रम सच कही सकियो सबा बरसकी सोचा गरम मस्पोमाय लगाम पव्य मपा किसी प म भागमाचीस स्वीस रिस भाभी समे इससे पामी सिमा मिमां भव्य पर। उप रम ब्यमात मांद सिरि पो गीता के सामने परपर रोशिपा नोकपप गरम पाप मण सो राव! चौर सिरान्ठ पाक यो परमार ने पनामा सभे राय मी काही मा सम्बो पर श्रीसंत विषमको सस्य महीम समापिस और रसके सब प्रम विप सुपर १५-सवे समय मा मा पाप गया। मैं तुमको मन मधुर मनाम्यातुरात गोंग पोर रस पापो सिपेर प.भा. समी-रिवबहसी पाप भवान् मो सास्त में रामापी में रियल(पन्धान रोग भपन माय पियकी पप और मानसिप ४२२ सस्याबाट उसकी म्मर बोसो) ईसा व पपने माता पिता की प्रेशकी और पूरे में मी माता पिता की सपोसाये । इसी पाप निकाला गया और ममी चिटिव मा किसिम ने मधुर्षों सामेसिपे एक मव भापकिसान में मम समान ममुमो को स्म में साम अपना प्रमोबन साईं। बस ईसा ही ऐश था वो मायामा पारीरोग अपये सब में मपुणों से कम सोया भीकि से सीर और गुव मकिपा को नगर में पिनेपर की प्रविम और बौशिम अपडी होती ऐसे होचो बातों को अपने मन में सो रसकी भधिक प्रविध और बौमित्रोची। इसी मेरे मोग निदाने औरणा र पाबमुनाम पिपर मोचे ममुनाको अपने पास मसाले उपमे मा बाप अम्ब पारि से पूषा करते है इससे सचिन पायों को गति कि स्वयं इनके ममवार से पचम भाव अपने मोथे भादों के पाने में पर।५। 1- पाठ सारे गाव रेल में मी पम्ममों में अपरेख करण्य शुभम और राम म सुसमाचार प्रचार मनाची सोयों में दर परोप और राषिोमा म मिा किया। एक रोगियों को बोप प्रमर रोगों और पोकामों से एली पे प्रौन भूवमों और मोमो भार मदमियों को उसके पाप मासे और म्सने पाकिम म प । समी--से भागमा पोपला मिपये मना पुरधरण भावाच भोग और मम्म अमरेने से पूर्वाभिमारोहमाय चारो पोरबीचव मी सबीच इस सप मोरे म्मुनी मम में सारिने पहै। बो ईसाई बोग इसकी भी मानते है तो पो के देवी मोपी मेम को नही मालकि मेरी सtu. 1-पालो मब में दम कर्म सफल गनीमी। कि मैं तुम पे च भवकि मामय पर मिली सपना जी माला से एक मात्र प्रपण एक मिनु मिल पाएमा रोया। इसखिये इस प्रतियोगी पानामा में से एक कोप मामाकोसे ही मिलने पस्यो रात में सबसेबोनमा मसी पापा 1-11-14॥ समी-जोमा एक दो पचमी पक परिये इसरिये तिने बोबसब सो बारेंगे तो स्कन में राम्पस प्रषिमा निसरोपा । मर्थात् परस्पर साई मिमप मम यमगत्या रोगी मौसम बोकारेरोगच तो कही बोकिमिमाथी पोपे मे मी नहीबकि दोन पौर अभिमान एम बी भितुम मम में दोनोन उसमे मीना दोष इसलिये पर अब रही। बस मामय मियो स स व परस्या भौ म यम्मी। ऐसी दिन मात्पा पपोदयसमुसास જય प मनुष्यों की होतीचमकी नहीं और या एक प्रयोमम और भर मात्र ािकियो इप पाशमी मन मानेग मर्ग में सबसे छोटा गिम्म सपग्म 11.॥ ११-मारी रिम मर की रोटी माय इम।। अपने लिये प्रथिवी सपन असम मतमोम समी -इसस विदित हो कि जिस समय स अ पम्म दुपारी उस समप भोग थमी और दरिद्र में सपा ईसा मी सावधि मा। इमाम दो दिन भर की रोटी की प्रसिखिये इमर की माम मा और सिww। सप ऐसा है तो इसाइ माप सप सार या पर। मो पीने किसान से मिस ममम सब राम पुस्प मोदीन होगा । १-पर पो मुसरे प्रभु २ मणी। राम्प में प्रय नहीभग॥ म प समी०-अब रिपरिप पारी शिप साहेब और न मोम को बरमा मलम समोसा समय तो ईसा को प्रभु मर्माल पर कमी म मेसिनको माग ता पाप से कमी नहीं बच सकेंगे। 4.-रस दिन में पुरे मुभ मंगे में रबमे सोमण मैंने तुममे मीपी । म मदार मुम्मे भो । म पाय २१-१३॥ ममी०-देखिये ईसा सपी मनुष्यों प्रेविस माये में पापाय बममा पायथ पर मोचे भनुन्नों का प्रबोमन रेने की बाद11.॥ १८-4 रेनो एक हो पा रस प्रथाम समाप्रभु !जो भाप परेंता मुफे परम सकने पोय मेहाप पा रम मा में दो गावगपरोग और साकोर नाम्न शराय। म २-३ ॥ ममी०- सवा भारे मनुषी पसाब पोंकि अब इसमई मा ननि मरिम्मतियों में सम्प मानवोयम्यप पची एप भारिपात जो पुरा और परत ० में भयाकी मरीपमा मेनिया पाति पुराएमा मानबर और मस्पिी ग्रिम पिप भी एमपर्प ने गौवभरिय पात् समममम एमाणे मिहिपनि मी रसम गीचा भ पार निभा मा मर गा मोब थिय। मप परिने ममुख सरिता भेमा म भस्म एप पुमा पर और मनुष्य में निरा रिस पर . मापरत। पमा ४२२ सत्यार्यप्रकाश मी रमाने मो) ईसा ने अपने माता पिता की सेवा की और हमारे में मी माता पित्यकामयापुरापे । इसी अपराध मे सिमरस और पमी गिरिव पलिस ने मोंगने रिपे एक मत पापी विभाग में मनी समाय मनुषों मेस्मत में साम प्रपा प्रपोजल साग हमारेमा पाबे मारमा पारो मोम अपने मन में मयुनीसा सोपा प्रविधि से की और पाठ मरिमों मे गाव में मानेपर की प्रठिया और बोस्थि मन्त्री होती होबो मानों अपने मन में सारे रसको अधिक सविध और बीमिमी। इसी। सोप मिनाये रेप और गो पाम सुन्न रन पियरे मोरे म्मुमों अपने बार में रप मा पप सम पनि से प्रषर भरेवे सापिा यों को रति सम प्रमय मे परम प्रमा मोडे मदीपचने में पर.. १- पीय सारे गावी एस में वर्ष सम्ममा में उपदेय. हुभा और राम्भ मुम्माम प्रचार प्राय पोरोमो में हर एक और राशिमा प्रत्ययुगरा किय। सरोपियों को हो। पभर - रोपा और पौरामों में भी पे पर मूवमो और स्मोपले प्रदकिमी उसके पास गये और म्समे पा लियाम प समी०-~से मम्म पोपमा क्मिण्ये, मना पुरामय प्राणी और भन्म की पात्र मे भूती विमा रोगी माप सब तोपानीको मठ मो सोहोरे इस अप मो मम्मों में में के लिये पे पाहै। गेस्पा मोग इसकी पो म मा । माती मोपी का मही म्पम किये पर्व . साय.. १४-पानको मर में दीमक स्वर्ग भयम्स नीं। Miमि में प्रथम मामय कर लिया जो पथमाय पप एक दिनु विध प्य हुए नहीं। इसधिपे इन पनि मोटी मामी में एक पोप में और भोगी। सिमारेरालय में सबसे बोयपारपर मची प । -11-14॥ समी-~गे स्मारकासमी १ बाप भी हम नमस्र्म म म सोने में समधिमा मि पर्वान् परस्पर पो भिषाप पोर पा पा पौर मोम मेपम मोवायेगम मेनि भी दामिरमिस एमर्थन भिगमन। ममता भी दीप मेहमों। गरें व नात्या मी म सधरेसी ी प्रयोदशसमुशास 1-पाय मे अपने शिष्यों को अपने पास पुरानो मार मूतों पर अधिभर रिपबिग विमरें और हर एक रोग भौर पर प्यापि पा। बोरनार तो तुम नहीं हो मन मुम्हारे पिता भ प्राप्मा तुममें बोगयो । मत समये कि मैं पृवियों पर मियाप अपने में नहीं परन्तु समचारबमे पापा 12 ममुषों को रस पिण से और ये मे रसकी मामे और पतोह रस सास म आमा भय भाषा है। मामले पर ही सोम रसको हो। म प ।पा 11-1. समीप शिव मिनमें से एक (स) पोम सायका माय और मम्प पर प्रब २ भ्याय, महाप पर विधी विभूतोम माप मिमयमा पिम्प प्रौपमिपण पाधियों सपा सरिकम से प्रसम्म सखिये ऐसी २ बातों समापन प्रशारियों मप्रमगरिबीब चोरमारा पीईम बोरमारा तो बीच पभम मोर सममियाम्पपप पर मुपपदुबईभर ही भावा सपा मी एक मिथ्या पती और जैस्म स्पिष्ट पार पाने को मनापी भावमा माया में पायापासी पुरी बात टमा स सब मनोभेम्बरमा और ईसाइयों में इसीको गुरुमन्त्र महिला दोन बाकि एक दूसरीरस्य श्री भणी मानता वोपरी मी मान्ने ग! रईसा ही ममम हम किम योगी वापरबोगों को पनामा गाभा पुरप प्रभम पहा ।।1।। ..-वर पोतु मे रममा तुम प्रस सियो रालोमे मा सप्त और पाटी मपनि हब रस भोगी भूमि पर मेन की भारी र माने व साव रोकियों और ममियोधपत्र माग दोषा और अपर जिनो हिप और शिनीमारिध सा पास पर और गो गो र सो समयमे मर रमये शिमा बा सो समाचौर पररपा पतपुर पे11 म १६ मा समो.-प्रब तिने या भारत सिमों मोर गाती भी समाव पपप हीम रामरों में सम्मारिकामा पपई परि ईसा में एसी सिदिमा रोती का अप भूध दुष्प गुपर . परेको सोमवार अपये लिपे मिही प्री पर पत्थर पारि योपसमय रोरिपा लोप पारेर गाउँ पापन पनि मापुरपी ऐसी पर मो मारे मनुनी प्रेम, भी॥ 1-और सरपरस्मनुभो रसम भनुमा सप्प | मी -समांनुसार जणि गत वा ईम्परोय प्रपा पर मम्प और पसगासमय रोगपरिभा ४२४ सस्याका ने पानी मुरे मिपाचे गायों की प्रापिरोपियों मे बिया, गोमये और पीरों मे प्राव और मम शिव शमादिमा मे मिना लाम।। बोरख मिनातोपको पत मिणा वो ही बोसो की पतको मिमा और अपनी पहौ को मसी मोवो ग यो नी । इसलिये सिनों की पावर और सामं के समालो ॥५॥ ५- मूलप्रल ममुष मस्थान में से किस रचले पामिरेदी पानी प्रतिमा पेरिस मार्ग से कोई नहीं जा सकता था और देखो गरोने चिसापारेर पुर। अपने हमसे ना मम ला भाप समन के प्रमोदम पीपा नेपामामो भूतों में म्ससे मिती पर मा पो पाप हमने मिसकते है वो समरामुम में पैने पोलिये मसने रममा बामो और ये निकायों मुग में पैरे और रेचो सूज कम साप धस माथे पर से प्मुद्र में पल पल और पानी में री मरा॥ म प ८। मा २५-111५॥ समी०-भवा महासनिक निरोप सप ही बौकि मम ममुप्प परस्पान कमी ही मिस ममता किसी पर बाबा म संपामतेपेसब पवें प्रभावी बोपो कीबोकि मसपी ऐसी भावों पर पिस ले और मसूची मेहम्बापूमरों की पनि म म पाप साध्य होम और म बोगस को अपगम्य और पवित्र रोपा मारते हो म माता मे पतितलीबम सम! और सूभरपर्ण की हावि भारी क्या मुधिषित इस प्रण बोग इस पपोती मी मामते हमे ! परि मावो भ्रम में परे॥ • -खो योग एक परपी ने गोमोसे पर सपा ने पास बाये चीर मीटरसम रिपसरेको रस पानी में मारे पुत्री मन्स र पाप मा थियो। मैं बर्मियों को नहीं पात पापियों को पाताप के लिये पुजामे चायाम रा १३॥ समी०-बामी पसी प्रसम्मबीसी पूर्व मिस भरी और यो प्रपनमा मोसमी पामे मोजे को मोम रेमना है। दूसरे पिसे मा भाग प्रम प्रदेशमण सर को भी प्रास हो सम्वा मी किसी म मिा पुमा पाप किसी प्रसादी गप मित जो मादी मोपयाही मन्पप बी मरेपकिय पाप पुल समेको महशेष अपर पधारा सोनों ही बायपोर मर मर वो प प्रायमरी बोसा रखो धर्म हो परमपमा सब पम्प कई और धर्मामाचरिये इस भारि कीम भारत मोदी र म पारिमिक पाप सिस दीर समय.
घपोदरासमुन्नास ४२७ सिर वापौर प्रमोसमान होने पप पिरित किसा की पतरिम और परिम्म से बातमी मिपी और पमो उसके मन में पोप मेरी तो पापक समाब मान ममी पडी, मांच मौष मान मे से पापों की परिम्साहनी वो एसी पुलि, निश्मिा मा लौ मावे ? और पामी सिनामा बाईसा भाप रिखमयमविपरोचतो भयको पपये भम्परेशनोमवा! पोंकि मोसा होगीक दूसरे में मौ अपये सध्या मामा भाtu.॥ .4--2म मे सचममा पयों को समान में प्रदेश मन्त्र पनि होगा। भी मैं तुमसेमा बिबाल में पनप प्रय भयेमुई जे में बमा सा| म प ।। समी०-ससे पासिनिय पगिया धमाकम् पास रसकी प्रविषयी माँगे इसपिपेय पिा एम परन्त बात सही योकि पानी और रियों में प्रपरे ? बो को पत्र प्रमको पमा भोर कुरा प्रामपुरा पानी और इससे पमी सिम मेवार रियम किसी एक देश में मानता मा सांत्र मही, आप मातोरीबी जो सभ पन सत्रमा मम प्रदेश मेवाण पापण म अपियकी पातर इसमे मी प्रामानिमितने सई पनी ये सबारी में मानी। खि सब मे में जायगे। भवा दमिक सा विचार सामग्री कमो कि स्विनी साममी पपास होची म्वनी परिद्र के पास नहीं बरि मायबाप मिसेजमाप में मतो दरिद्र पौष पति मै पोभीर मामायाम गति को सकते हैं।.॥ .m-य परमसे कम उम से सर पवार बिना पी में मनुगमपुत्र भरने ऐप सिंहसर बेटेगा सब तम मीमो मरे पोहे विपण शिसवी पर दबाव या मोसमारो। निस किसी मरे माम विभाइपाँचपनी माजपितापपी परम भूमि मेबार सो गुबा पाक्षम और भीम प्रश्मिरीहोम म प 1.भा २-३६॥ समी-अबदेखिने ईसारे भावर को सोता किम्मे पत्र मे मो पाई पोयोमरियाग और रियो । सो योम से अपने गुरोपण मापसे पापी भी इसके पास हितब पर श्री इस पप से प्रापही किया गप्प किया सब गुल्पा मार और प्रम्प मोमपये। भयुमात्र होब इसीबिरे इस योग पीप गत पानमधी मोरे से भरे को मार रिण दो गो मी पापा प्रत परिपतीमोर देते हैं। पेय कोई प्रमाणावर इस साल कि एक क्षीको भारि में मरा चोर पुकम्पमत ४२६ संस्थामा .भा किसामने मोबसमा सिमे पाये और मामले बोम्म मा पही किये जावे।पमा कम स्पीकि सबभौम पापाचोम्प देने हो मम्प पीर परिण होती.॥ .१-प्रस्थिती और सोडे मोगो! मैं तुमस मामय।। बपि तुमचेक पर पलत नियस हो वो तुम इस पा से जो भोग कि पाया पक्षान पाय पाया और मो मम तुम अप्यान नही होपरम प समी-अपनो ईसाई ग उपपेण भवे मिते कि भाभो हमार मत में पाप मा भामा मुधि पात्रो" यदि म सब मिया नावरे पोकि बोईस्त्र में अप सारे विधस यमाने और पवित्र करने काम होगा तो भपन विषों के अमानों की बिम्प किसी परिक्ष कौन साका tसासाथ मते वेप सी मेम विवासी और भगवान म मतोम मरे पर बने प्रोस समय किसी को पवित्र महीन पग बरेच गईमा विचास से रहिये और नमी बागोय पुस्प स इमाम प्राय नहीं हो पता किबो मनिवासी अपमिमा प्रपों मनुस्मीसोयीस पर ािस मा मात्र कायाकार मनुष्यों ममममी भोर इसी से पा मानिस किमोसम सचीवो सो देश में एक पागमे समान विमान पाच ईमान नही बोआई थे कि हम में पोपा विस । दोपपये कामानिध्यप ५५ पहारको मार्ग में पेस्य व परि समय मालपोपी विधायी कि एक सपा मारा सोहो समझो एक पीया मी विनास ईमार पर्वाद भर्म प्रस्थानों में दीविकोपा अभिमान मारि दोषी नाम पर मौ दीकियो ऐप हो हो म मधे मी सूपलो मेमा मामी पापी माली बिपपी और प्रान्तों में बोए सवा किय रोग बोपेश मा दो मी कभी वाकिबो ऐम होवो शिनो को पसा नाममा सपिने असम्भव पात सम्पथ की भवामय सम्म प्रखरी मय बोझ मी ईस में पिणाची तो ऐसी पर पीएम पली मरेन । वारि ( मिसयप ऐरो पातोपि मास) निस रेप में माना तो उस रेस में पास भी सबसपा और भनिन्य वाममयमरी बपिनो स्वपि भी होगा पैक पास भरमाकोमा गयो पस्ती 2-4 मुबायो तुम म सिमी भोर को पमानमहोयमो तातो राम में प्रवेश प्रो कमा म ५ 1514 समी०- अब अपनी इमाम मममम मार्ममभरब और म प्रिmममा किसी पाप पुस्खमी महसता या जयोपणसमुन्नास ४२ ८ -प्रमय और पृक्तिी समाये परन्तु मेये पाँच्यो न पी॥ १ म प २० मा २१ । समी-पमा पत प्रविण र मर्मयकी। मना मात्रय शिवम मा मापस मामय प्रतिसम्म होने से क्षेत्र से होकळा माही तो इसम रिमा म र समय! और अपने मुख से अपनी गाई मय प्रणे मनुमानम पपी॥८ 11-सब पानसे दो बाई पोमेमा रेपित योगो! मेरे पास से रस प्रयन्त प्राप्ता में मानो यो सत्यम और उसके दूतों को पार की पा ॥ समी-पाप कियो बही पापा को बातो अपने शिष्यो रामे का और बो दसोरमको प्रमात बाग में गिमा परन्त बन पाय होम येण तो प्रबन्त माग मा पहिला देगी। जो वान और उसके पूर्वो को परम पत्पा मो श्वनी भाकको मायाममा पाती! और एक वाम पर मप से मध्य तो परताकि रसीम पूर्व कर पापी होपय और वा उसमे प्रपम ही पम मबादी में म सब समयमार सम पुषा रसकीचा बा ! मिठने ईस्य भीगीस दिन पुग्ध पिपा इस्य मी उसम्म सबर समोचन प्य होम इमा। इसखिये सिमर म बा और व बार बार पर हो समय ८-सपरा थिप्यों में से एक बार इसरिपोठी पम पक सिम्म प्रभावमा पाप गपा और मागो में पातुको माप बोमोहाप फमा तो पाप होम मुमेन्या सोने से तीस रपे बने की सम्प। ५-१६॥ समी०-अपरेखिये ! ईस्म की भरमामात और ईमस्ता पहा हर गई बोकियो रसम प्रधान शिप पपा मी उसके स्वात् मग - पवित्रामा म दुमा वो पौरोपमो पोरे परिपमा नामसार और रविवासी योग रस भरोसे में किसने म्पपे आते। बाकिनिसने स्पचात् सम्बन्प में सिप्प ममपण म दिपा पमरे पोचे किमी म माय पर २ सपEt. 1- पाते पे तब बया पे रोशी गेले पम्पमा सिप भी रस मोड़ •विप्पों को दिण और भाभो अमोग मेरा भर रसने स्टोर मेयर मान्य पीर रब से काम इस पोमो लाँकि यार मेरा बो भर्पा को मिपम भरा म प २५ मा २५-१८॥ ममी--मचा पापसी पव काई मी सन प्रेग्य। सिप प्रधिार पसी मनुशियों सभी को मपये माप और पीने की चीजों बोहमी का पता मोर इसी पक्ष ने परम्ममा बोम प्रमुमोबन सत्यार्यप्रकार की राशि मरा, एक हो मदिसे मत तक भाग्यही में पा रहा कि सम्पप होम और दूसरे प्रग्सौ ममम मार होगा पलिया पम्पब और बो मरक में ग्राम सो मनम् असतक या भोये और स्वर्ग में पापाप मार्ग भोगेप परमापा मम्पा मोहिमतपणे मापन और मोमा पम्तया होय चाहिये और तुस्प पाप प पुल्प रो बाभिमाग्री से सम्मा इसधिमे बातम्म पधिक म्यूब सुखदुस अनेक स्र्य और सारी समी सुख दुख पहा सकते। सो इस्पारे पुस्तक में माध्यबस्वा पही इससिपे पर पुस्तक प्रसइम परम पेय कमी बीमो माया पापोप की किमापि मिमी पपप सी. महोसते मितु एक बी ए मा और एक ही पप होपो अनुम्बकि मुसपमा बेबो एक को.२ किला परिस्त में मिपती सिख सोही से चिपा रोग ।।..॥ .-मोर को सब कार को प्रियता पा सरग्स भूखबागी और मार्ग में एक बार भ पुरेश पप्स पाम प्राय परन्त इस में और कम पापा का परचौर ग्सकोमा तुम में भिकमी पाण्यपे इस पर गहरप पेपरन्त सूचगया। म प समो०-सप पाररी बोग ईईमते हिपमा शान्त प्रमादित और वापि दोपहित प पर इस बात पर से शम्स मेवा लिईसा प्रोमो और सापादित और गधी माणपत्र कम्पपुज पाण। मवानोबा पर्व सम्मला अपराध करसमे नाप रिणा और पबमा रस गप से तो मोय कि पेपी मोवियप सूख गया हो तो कोई भी॥ ..-सदियों से पीछे सान्त पूर्व रिपोचपए और पर अपनी मोतिम देवबारे समय से पिस पाये और मामयी मेयाम्पि बापी। म प समी----बागी ईस्वरों को किन किन मिर पाप मलाच और पाचही मेधावीबो सिम पानीबो मौखि पोपी मी विष्य पश्ता तो प्रवास पेष किपे को भर भूपोडीलम पर इस विदित होगा। किमि गाम में सपा पा सण मन पौर बाबच भाप मोरोपमा पलिमें मी इसपोरेशम साहो का भोप । किवी परत आपकी भी निजी और बात सौरी पावोगासी माष । यसमा प्रोपण गम्मुि पय ठा तो मम मिय मोरपती । अब माविमाप फमा मोमबहार के पेच और ए. पपोर मन मेरो सग मल पम्प की बोर भी मते मही इमैं पूषन॥॥॥
રા १॥ प्रपोपणसमुवास 5-भय और पुलिस वायमे पान्नु मेसी प मी न संगी। मप ४ामा २५॥ समी०- मी बाट प्रविण और मूवो मया मामय नियम कोपा व भामरा प्रतिसम्म होने से कामे पोजा नही तो इसम हिवम और देर और अपने मुखप अपनी माईमा प्रचे ममुखीमपम पहीं ॥ ८ ॥ १-उमदरपसे बोबई मेगापित पोगो। मेरे पास मेग्म मान्स भाग में बायोमोरोवार और उसके दूतों के विप समार की गई है। म समी०--मा पाकिबी जी पावकी पासबो अपने विण रमको कर्म और बो मेग्मको भवम्त भाग में पिराध परन्तु अब माय दोनोग्य तो अमान्य प्राप परक हिस्व मामी! वो शवान और उसके ही कोपर पता तो इसमी नपरोपी मनी परती ! और एक वान पर मप प ठोमरोमालिक सीमठ दोन मामी होप पर भर रसको प्रपम पम पमनीपर मेम सम प्रम मार सम्म पुरस्की विरता बिसने ईसा मेमोपीस दिख कुलदिपा ईसा मी रसम मम मम तो थम मेय होय वर्ष मा । समिपे ईसा मिमय और पाम सग ईयर से प्रबE0 ८१-- गर मियों में से एक बार इस भरिपोती श्रम एक गिप्प माम पर के पास गया और माबो मैं पीए को भाप बोगी माप पामार वो भाप गौम मुमेचा रंग गन्होंने उसे पास पये देने को सराप्य ।। म पा 11-14 समी०-अब रेलिमे ! ईसा की सबभामाठ और चरता यहाँ गई बोकियो रसम प्रधान पिपा मी सो पापात् मंग पवित्रामा म उमा तो पौरों मेगा मरे पार परिमाणमा ! और रस विमासी पोग रसके मोम में ठिये ध्याये अत है कि जिसके पापात् सम्बन्प में विप्र उपवाय विसावा मरे पापे किसी भस्पाय न्याम सप... ८५-बबवेभते पे समय नरमी बम्पपा रिमा uk सदोष के गिप्पा मारण और मासेमो बानो काममा है और इसनेम्येय मे बयार सम्म पीर रसनेमा तुम (म्म पीपो बोकि यह मेरा बोपर्भात मपे नियम म म प ५ मा २१-१८॥ समी---भसा पर एसी बात भई मी सम्म प्रेम! यि पश्चिात् यदी मनुन शिणोपवे चाहको पपये माप और परिवारों मेरपीममा मोर इसी पव मे प्रारमो ईपईचोप प्रमुमोरय सत्यार्थप्रकाश मपात भने पीने की चाह में पके मांस और बोह की मान्यम पाणे पाप किमी दुरीपत, मिनीचे अपने गुरु मांसदोहको मी ने पीने की मान्य सेनबोमानो और सेबोर सो।।। -बीर या पिता और बम दोपोगों पुत्रों में अपने समाप और कमाने और पुरा ग्राम होवे सपा व रम्ने समस्या किमेव मन पहाति ग्रपकि मैं मामे पई और पोड़ा थपे कोपर पर गिरा और मान्की हे मेरे पिथा ! बो दोसतो परम्परा मे पास से ग्राम म प प ३-.. समी०-देखो! बोपमा म्मुन म होता पर प्य और मिलगी और पिन होता तो ऐसी चोप मेयरमवा इम स्पर विदित हो हिमपंचय माय गम हो मे समूह पक्षी किन भय भूत मरिणत प्रमेय और पप सम्म तो है। इससे सममा भीमा सवारण सूमा पञ्च पणिम् मा मचिारक पोपी बहि॥ ॥ ८२-बोम्मा ही पाकिस्तरी गार को बारह विर्षों में पा मा पांच और लोगों के प्रथम प्रब और मधीमों की चोर सप और पारिवासिये रस समयीय पमपमेधारे मेम्पपय विध पा बिसो में ग्सको पमो और बसन्त पौय पासा पोय भवाम और म्सको पूमा । तब महीने पोय पर सपा र फलाम भाव विण दोष को माप। मन्स में रोमो सासी पाले बोये इसमे ष्य कि मैं चरमबिर माग्से तीन दिन में भि सन्मान मसापक माहो पाया मेमाप परमपी देख पे मोगरे सिम पप साती। परन्तु पीय उप रस इस पर महायज मे समय में मेवार की यिा देवा हम से काममम कि गी। पीय रसमे पोपा होमकुम तक मानायक मे अपपे क्या मा पो म पुम अब हमें स्परिनाम और सपा मनोग्य रेखो तुमपे प्रमी उसके मुख से पर में किया है। मामा विया महो व मन रमरिण पपप को। पन्तोष ग्स मा पर धूम और रसे से मारे, पौरो वे बोरे म्पर के मारेगा! ममे भविस्तायो बोप विमने मे मारा। पितरस पार गये में मया भौर पर पासी रस पाप भाडे पोपीदमी पाय मोसी साप ग्मने सारे सामने मुममा में मही सवय तुमचा मी । बापभार गो में मप्य तो सरी सो मे ग्रेवमो पोग पापे पाप मी पाएपमा। ग्सवे हिमा पनि मुख्य किग्स मनुण में नहीं मावा पापिहार देने और प्रिय थमेशम कि मैं ग्स माण प्रेमीयता म प ७-११-....
प्रयोदशसमुमास समी०-बरेलवीमि कि विक्षन इतना मी समर्थ प्रप्रतापपी प्प कि अपने परिपस का सके और वे परेप्रम मीसोंग बाने तो मी अपने गुरु बोम से न पभाते न मुमते म मिप्यामापय मते , मी मिया मते और ईसा मौका मामाती पी था जैसा औरत में विचकित दर पर प्रमों को मुत से मारने को न भाये ये का ईसर दो सवये म्होंने ही प्रेमाचा र विषा । पपि या मौत भधम्म समापि रंग में इणमा मामध्ये जमा और ग्राम स्तिमा साब रमले नाम पर स्पिनों ने बा त्यहै। मया ऐसी दुरंया से मरपे से माप स्वयं एसपसमाधिना अपप किसी प्रमर से प्रयोदय ता प्रमा या पान्नु पनि बिध नियमापति हो।पसा पा मोमता हैसि॥ म में प्रमो भपपे पिता से मिती मी मा और प मेरे पास सपूतों को पर पेगों के पविक पांच पेपर १. म प २५। समी-यममा मी या अपनी और अपने पिता की बाई मी प्रय मा परमी नहीं कर सकता । रेसो पमर्पकी बात पर महापाक में पाकिबोस मे मिस मापी मार रे होईण पुप माप मी ईसा मया प किया कि वो सच पा सपा प्रवरप सवा तो मी मम्मोदा । ऐसी पात मी पपये प्रमाको प प्रा सिपी पौर बिनाने इस पर मनरोप पत्र मारा सभे मी रचित नयपाकिब अम्मरमपरापही भासा म्स रिम्स में रहने कमा परमा मी यो पापी ये बकी नौ में स्पसमा परिव सम्मान प्याम बनता और समसाल ऐसी एपी बच्चो को लिये रमम प्रम पा परन्तु मी रिय धम्माम्म और मापोसता भाभा मा-पाय मम्मा भामेमामा और मम्पा मे रम पमाणात पहरियो म पत्र, पौधरोमा अपही तोपते। अब ममान प्पस प्रोम बोगा उस पर दोपपते थे दर रसमेत रही रिपब पिचत सभास्य की सुमता कि पोम रे सिमी aat। परन्तु रस एक ममी म्सको रमन रिप्य पो प्रयागत मा किया। पिरात ये रममा दो में बीगु में बो सौरपापन! पो वे रम्समा पप पर गाया बरे और पोरोमो मार पर पाबे यो मे सीप रिष । समय पोशीपोपमम्पा मन में प्रयोपरी पाय रस प्राप्त भोगी और ग्मी रमनपस म्या ७ गावाप्प पहिराप और अमन Pोगि पर रत्या पर पोताले एप पर बापौर र मो पुल पम रमेमा पिपरिया म्पमबार रहोंने रस पर पूनमौर परमेस सिर पर माय बरे रमले सत्यार्थप्रकास यामवर मासेमाप उमर रतीब पराि उसे कर पर पाने गये। बथे एक स्मथ पर मो गए गमाग अर्थात् बोलीम मग मी म मोरे सिर में पिच मिमा म्स पीपे को दिया । परन्तु उसमे गौचने पीना म हा तब उन्होंने रस भरा पर माया और सोने रसत्र दोष गिरे उपर मापा तो मह एक वाहिनी भोर और दूसरा बाई मोर उसके सपनों पर पाये गये। बो बोम पर मे भावे बावे वेगमा अपमे शिर दिया और पाम रमको निन्दा की। रे मदिर के मारे अपने पचायो त म पुत्री दो प्रम पर ग्वा भा। इसी वि से प्राप्पागों मे मी ममापकों और प्रधानोंगियों मामा सये और पाया प्रपन को पचपही सणाीबोप इमामेव मरागतोय पर पब सर पारे और हम उसम विपास करेंगे। पर मरास मता। पवि ईसर उसको चाप है तो उसको भर मचाने लोकि उसनेमा में भरपुर। दो या रमले हेग मासे इसी रीति से उसकी निन्दाकोदोमर से वीसी पर सारे देश में प्रापमा होमता तीसरे प्रारमियपीटने गरे सम्म भर म 'पी पीपामा सत्यना" प्रा . मेरे बारे मे ये क्यों मुपाया है। मोजोग को मामें से विमीप सुमो माप परिनामे पता। ममें से एक ने तुरत और इसके सि में मिमोप और पा र म्ले पारिपाठ मे भिको समये पुपर प्रब त्याप्य म ५-११-२०11. समी०-सा पीचरे साम राम दुने पुरा म किया परन्त पीय ममी पोप र मन कोई पुत्र पण म्सिी पौषि मासिौभाप रोये तो किसी प्रमुर स्माण सम्पनी भावि मी होणे और जब मनाने का भाव प सब रसर स्वचा और पकी कि यो पार कर्म प्रथम किये हुए सव होत हो अब मी म पर से रन म सबको अपमे शिण बमा बेब और जो पांगमपुराण वाम मी सोच बोम विनवणी होय तो सिम निच मिचे प मेसोपो कोषधाप परियो सब होव और गो पाम्पती होगको पुमर पप सो पाता। इस पर अमन चहिये किये किसयौ होराईभ परन्तु मन्च में म सर और को आप * इसम्म पामो सिर मा कि पौरा प रस समन को मबुल्लों में भषामा नपाध्यम्प्रती मप्र पुत्र और विदा सकियो ऐसा दोष हो ऐसा पहली मोम्बो... -पौर रेप का माशेप मा कि परमेम म त म्यभार भR पा से पत्थर सामरस पर साप पहा मही ममने पानी म्म। पर महिला को प्रदेश सती दी, तो प भयोदयसमुखास पीए सनसे मामिपा मा मापसे गौर समाने मिस उसके पबि पम के समको मगाम सिमा । तब पीठ पेशा मठमो बारे मा मारणों से मरो हिमपातबा और यहां से मुमे रेखपे । पारद शिम माणस पच पर गमे मो पीने साप मा और गाने म्से ऐनसको स्वाम मि पर किसानों को संदेह । पौर मे रसके प्रस प्य रमस मा भ में और एमिली प समस्त अधिभर मुम्मे रिण गला और दो में बग. भस सब दिन तुमार संप। म प २८ मा ।। A समी-पापत मी म्ममम पाप नही लॉगि पहिम्म और मिष्यमिता बम पर क पाप्त दूतों सदामा मन जहाँ दो भेजमा म्यास रतनमा रमा वासीमारी सोसरी समान इमा पनप विच ! पारसी परस स्माको पपा मोरबी भ्याल्पाकिम स्पिो ने मामा पापाम बिमा तोकापी गरीर पा! मर जामीन दिन सा पो न गमा! पौर अपने मुख स सबस अधिकारी बमना करम कीमत। सिलीम मिराय और रमस साप मनी प्रसम्म पोंकि बो ये बात सच हो भास मी कोरली मी दो ग्य! और ग्मी गौर स l मोती महोते। पा मचौरचित सोमबपि दुम अब मानषित जी विषय भिप्या. माकरषिवनी॥ -ताबाई दी। माई प प ३॥ समी०- असम में पूषा वाई पा इस्पे इसा मी बाईचा विवये सर्प सपनाममम मत पा पमा पाम्बर बना र ईश्वर भयो पर गया और यमो भागों में सिप सभी को पगरी साईभर समय समप्रमtact लूकनित गीत ॥ १ -बीय मासेमामुळे रसम पोपबीकम दी एक प्रवाहमा प समी-ग हो पा परितोष रंग प्रवो पापों में परिणमा पिक और पुदीमापारि ॥ 11- मरोष पास मग रामप्रति मानभित मताविप रपको बस दिन स एप परवा पा इसलिये विरो सिमपुरुषी मते मुबी बी रसन कप भाम् कर्म देखने उसकी पण , उसने रमत यो पा राण उसने ग्स र रिय।। 151मा 6-1॥
सत्यार्थप्रकाश समी० -पात मचीपति में नहीं है इसलिये पे ही किए ये सोफिया एसे होने चरित और दो रंग और माती तो (रोको) रजदेव और कम्पमात मी रियता इससे विदित होता है कि ईसा में रिऔर माम्मममी कमी॥ पोहमरचित सुसमाचार ॥ ११-पादि में पाप और पलसंगपौर बल्ल मप पपरि मरमा बा । सब पिले पाए स्वा पम और पो स्वा पारेसमी रस किम ही मागत्य । गमावला और गोलम मामाचरबिपना पा॥ समी०-भादि में पब पिन्य यही हो सकता और बो मन पर पचपो परम पर्वमा और पचन चा मी यही दो समन्वय किचर रिमर संपतो पूर्व पम पवापसी समय चारा घी कभी यहाँहो सकती तरसम्म परब बनो और बचन बिमा मी चुपचाप रहम का परम सद्योजान किसमें बायपास स्म से जीम प्रमादि मायोमे बो प्रतितो पापम मनो में आपका समय और वा बीयन मोहीम रजिषमा हैपचारिपनही ।। 11-और विचारों के समय में बवान शिमोन के पुत्र निषा इसपरियोती के मन में रमे पायवेभ मत परम । बो प समी-पप सच यही मोकिमानों से पोम्म कि सबसमय तो वाम को वन बोमो वाव पर पपीतो मनुन मी पाप भाप मा सम्पुमा निमत्य काम ! और परिवानप्रबन्ध और मामले का परमेवर पोहोस्वाम अभिवापस प्राईवर मरा परमेमने परग्समा भय पेपे प्रम मोरोस सपो हो कि ईसापामा पुणा भौरई म भव्य महालेप या हो तो पिर पर पुल मर्म सईया और न ईसचर म यो समय 1.-सम्पय मम मारो वर पर मिस मो और सुपर मियम भो । मा पिकपा में पल स्थान नही हो में प्रम पब मे हमार स्मियाममे गयी और मो में सोनमहिने पर परमो भिअतुभपये यहाँ गय किया Tart तुम भी यो गौर ये सभा में ही म्पर्म और सल और बोमरिय और हाय पिल पातमी पब्लिो मुम मुझे गालो मा पिक से भी सन्ते ॥वा. ५।
प्रयोदशसमुशास. समी०--प्रब पिये सावन रथ पोपारा एकमतीयो एसा मपंच प रा हा उसके मन में न पता ! इसा ये अपने पिय सेमरिया और गम ईसापपला परापान होबेस पर होना बौकिम किसी की सिरिय महो मुनता स्पस्य पहिले का मीएम को श्री उमा हराम ! ऐस भान भादि प्रबोम्म रख और अपने मुखप प्राप मार्ग सम्म और पाचन पसार पसब पभर पमी त्यससात सम्म भी नही होती ||१४ १५ में उमस सषमता सामुम पर विचार को श्रम में भाईरह भी रंग और बस मे प्रम मा ।।। १२॥ ममी० --- रश्मिा माई बाप इस्म पर पा निभास रखते हैं मो मुरे शियाने प्री ममता बमसम्म ! गौरबो बियस म मी भामर्ष प्रम भीमसाठ सा मे मी पाप सम भी मि पसा भिमत सामान्य परिसर सोमवार वितुम मी भय मम माप तो भी इस समय इसाइ था एक मीपही समय तो किसको दिये की मथर मईबरमा प्रमुरे वियाने भारि समकता मात्र मेरे। ॥१॥ १-मो भव सापधर ॥५ ३॥ समी -सब पक राइसाइयों नटीन पना सप निया - इसी प्रभा व रिसर में प्रत्य मी॥ पारमाधिन याफ्प। म पार की भभुव ग मुमे।- .-और अपने सिर पर पाने मुष्प दिले इपऔर त अपिरीपक सिममन मप जमते जोवर पाठों भामा। और सिंहासम माम समुद्री और सिंहासन पासास पर प्रपोजो भाग पीप समोरो : सनी-बार लिये एक माह सोंपा और मम म भी हो समान प्राप्ति है और मोने म मुमति पाएर पारबमय और भोपाल मे भरोग ममम्मातिब पौभग मात्र मम्य पास्पिारिपरप fontrol 1-4 मे मिहासन पर बम्परामा में पुस्तक रय मा भीम म परमपि मोर मान हा म मा पर मगार और रसको पालामा भैरसर्ग पिटरी पर गिरी पुलामानय मला सत्यार्थप्रकार ब्यथा और में पल रोमे स्पध्रपे कि पुसत बासन पार पारे प्रणय रसे बोपोनही मिया ।। वो म पर्व। समीए-मब देनेच्या स्वयं में मिासों और मागोमा और पुलामों मे विसाव्य विसोबोरो परिभ करमपमा ला और पमित्री पर रो पहों मिण बाहन परोषा और फराद एक प्रतीप नेपालपदी ईस बने पसारे, प्रबोधन पाकिसम्म निपा सम गौत, रेसो ! सही पर सब मामल मुभये पते । मन्तु ये बात पर कपबमाल||1|| 1-और मने पी को भी देशो सिसमोर मा म्पधियों में पीच में भी प्रचीनो के बीच में पमेययब मियाभा मारे। मिस स्व मीम और सात वो सारी पियो में मेरे एनके सातों भामा।।मो पसा ।। समी-प्रबोधिने ! इसमोइन रस ममोन्पार रस का बीच में सब और जर पण बसा मी पौर कोई नही पापी भरभुज पात हुई तो ईसबो मेध और गम बाम मोबा और पप में बोल साप और पापयाणा और ताईचारे भामा सा पींग पोर ने गन पो !! ऐसी बातों में माइपों में तो मान सिषा भया का वो दुरि पते ।।।। -चोर बर रखने पुष्वक चितम चरों माथी और मों प्राचीन मेम्मा पिर पो मौसम पास पौष पी पीरप से मरे इप सोचे पिच को पति बोगों को पना बो : प । मा। समी०-मानमर्ग मेंबर दिया पोप पार्मि पारि पलिस की मॉमे ! और पा मोरोपईसाई का परस्त्री (मर्णिमा ) अपनते है और हम सब रुपमती मनपा -ौर म मेापों में से एक माना गोपीको मामिलों में म परे से मेष शिमको पम मुसीमा और रेख और मैंने पीक चार देशो पर पोड़ा और ग्स पर रस पास पाप और उस समरिच पला और पब मया इम और उपप्रमेमे निम्मा र सरोकार मोसासरा मोपाजोपर पनि रम्भे पर रिपा गध पिणी पर से मेरा ग्मा और पाने तीसरी पारसपा प्रणा बोदा और रमन बोली पाप नाशी और रेखा पर पौसा स्प बाजो म्प पर पैम रमन माम पर मादिको म प रामा १-८॥ समी--अब मिलेगा पुरायों समी प्रमिक मिला बोलाजिम्पी! भमा पुरानो कोमीवर भड़ा समोम सके हॉप !
प्रयोदयसमुशास' पसममान चिन्न इसको भी पल मा रममे अविध मिनी उत्यो पाको... , और देबो गम से पुमर पे किस्मी पवित्र और सरप सयों न म्मान नहीं रखी और प्रमिला - पिसिषों प हमारे बाप पण्यपी पवार और परएको उपमा दिला मध और रम्स मा गना किमो नमार पोस मी और तुम माइ जो तुमी मा पनि सन पर दबरों और पापी विभाम मोबा: । - समी०-कोई इसा हम और सुपु राम ऐसा नमक माने के लिये रामाश्रम या रेडमार्ग स्वीमर माप रसक माप हाने में न भी देर में सम्मी । ईसाइयों से अन्य पदिय वाईपर की करी भारत पद। परम्प प्रम मोदी हाय मागीय निम्मे और समी रतामर सगे और इनम ईमपा मी माथी बाकि इनक भास भइसकनु से पमय मेरे ममता गौर रंगोरे स्मामा मर पार सम पिपामते णम्तिममी की और ना शान्ति ही यो दुसया पारावर दोग्य 11-धौर जैम दीवार सरिए पर पर गुमर कस सः को गूपर भरते सभामणवार प्रपिटी पर पर पो और यमा पत्र पाईम सपय यो प्रसग गया ।। बाम ५ मा १३-१४॥ समी-प्रब इलिये पोहम भक्मिाध मे जब विधीमी वान्सी प्रमाबराया पाई, मग बर मा भूपाय पक पविती पर समिम सन्तु और मारि मसग सम्र पर उभर तो भाग गये पर और पण या समाम समस्या पामय समर पापी जिससे इसरिय पान भारि सबसपी मनुष्ण -मने रमन मन्प मुनी इसपर सवाना समस्त मम पालन्यास समय पर पाप दो मई, मिस मेंस पर माय पर पापा म १ .४-५ ॥ ममी-पा शेयर में इममियोपइमाण जातियों स्थमा समस्या मान म्याग्गोपचिनीप्रसारथी पौर तपसारमा रमपम नियम भी नहीं मा इम्म प २५और पाप मादि मनुखों पर पाप सम्म सपीमियाभल्प॥1॥ -इस पर मामन भाम और माममा में सिग्स सभा ममी-महानुपरवी मते पपप मम गरी मनुजमुतसी बहोर पालेभर में मत्र भी भी ४५- सत्याप्रकार १ परिसम्वी यव में पग माम माये। म रस मात्र मी गपती हमी और यो रास दिन माता दौमा तो विसिप प्रति एमी होप्प ॥११॥ - एम ए अकेही विधामा मिस पपस सोने में परामी पी और रसको मत परिण पर पूपमा पनि दोषी की सपनामा देसापूसा में सेवा पेचा गया चीन दूत के प पानी के समाको शा मम्मे परिवा पा मग और सग और गन और पिछरितो र मुखएप ।।दा म प ८ मा - समी--अब रेशियल व देवी पूप पौष पैरवरही के शाम होते हैं वा पापिमा मन्दिर व इसानों सोमा म पाम अधिक 1.-परिपत ने तुरी की और बोडू मे मिले हुए मासे और भाप हुए और परिणी पर भरे पे धर पिची को पति गई ।। नो म पदमा समी--परे ईसाइयों के मस्मिाधाइबर पर रहीमशम और प्रसार की चौतारीमान् ॥ १८-पौर पति ये नुयो मे मैंने एक गरे मे रेखा मर्मस एपिली पर गिम्य पुष्य था भर सकी इन्त्री रसभे पोगह और ग्मने मायामासोमा पर सबकी भयो उप को पाएमा प रस Iप में समीना धिषी पर मिसाई और म प्रपिटीऑको भपिया हवा तसा म्न अपिभर दिया गया और मापागम्य शिरम मनुषों को दिन मात्र पर चर की पापही पांच मासनादीगापामप समी-मारी मपम मुगम पर ग्नी यो पर और ग्सी स्मा में मग तो भी गिन । मापसप चिनी भी श्वाप लिये जन प्रीमी पर पांच भी बतीगी बिपों भत स्टोरमा मात्र मनुप्पीभेरा : ईसा पर प्राथ पकजा तुम इस रोग तो तुमको चिनी मॉगी एपी वा रियाय र सस्तीमा में पपा की समस्यो 1- पुरानो म्योंकी संप्प समारपी।पा। सी.--मास याबाई यममा मात गांचा मारा और at arwa! राम दुर्गन्य भी वर्ग में सिप हम! मानस्थ, सपा और समसिम सर यामीन विवामि मागमा इसाइति पर ममी सचिमा बाप मबार पप्पा.॥
पपोदासमुन्मास 11-और मैपे सरे पयामी एव प्रेस ग्रेनो मेमो भोरे पा और इसके गिर पर मेव पपु था और उस मुरसूम की पई और उसके पांच मामलों ऐसे थे | उसने अपण पाशिन्य पाच समय पर और बीपी प्रविधी पा रस्ता ॥ बो ध प । समी० -~प्रय रेलिपे हन तो की कथा बो पुरायों पम्प कोम्पों सेमीमम॥1 111-~और सगी समाम एक न मुदिना गया मारमा पनि गईम मभिर और सी और रसम के मम्भ कर हारों को मप ।। पो 11 प्र प ममी-पहो तो या परन्तु इस्पोमा मैं मी ममिर समापे और नापे बाते हैं। प्रकार म्ममा सोही पसचिपे पो प्रमुमोजल में पिरोयाल मास रोहको माक्ना मरे पते पाते है और गिमा में भी पारिस भाभर बपना भारि मी पुपरस्ती॥ ११२-और स्का में इस मन्दिर बोला गय और रस निगम म मक रस ममिर में रिमा दिवा ॥पा : प "मा १६॥ समी to-में जो ममित सोर म्मप बाद रावा होगा कमी। बोचा सण होगा परमेपर ममी कोई मन्दिर से सीबोहोच परमात्र समापी उसनमामो ममि मा होसम्या साम बो परमेवर भाभरपती रमन वर्ष में चाहे ममि में और जैसी बोला र २ . पादती सी ही हों • वर्ग में भी और मिपम म सहमी कमी । ईसाई डोग से रंगे रसत बानेवा प्रपोजन सिर का ग तो पार किये सब वे मनुषी को समाये की.२॥ 1-और एक कदा पामर्ष स्का में R रिसा अपांत पुरको भो सूर्म परिने और चोद रम पी पी मो रसले गिर प पाय बम मारपीरप गर्मस्वी होशिशावावकि प्रदीपोरा म बगी। और वा जमने को पारिव। और दूसा भय वर्ग में दिखाई रिवा और रेखा एका बाप ममम मिस सात र और एरा सगर और उसके पिरो र सात गरम और रीपन प्रमण परीकी एमिाइ सोपविली पर भगवा पापा -अब देखिये हम्मे पोरे पोरे । इन लो में मारिणीपी निती सम्म दुख नहीं भुखा म मिम सब भा रस बमगर अम्बिी बनी पी पिने घरों की एक विहाई स्विी पा गया। मा पत्रिी को फोन पर बार मी बार इस एविया पर एक भी नहीं समा पानि ही अनुमान ममा चाहिये कि मानिस मिलेपर पर गिरमे और मिस प्राप्त की एवीसी - सत्यार्यप्रकार श्री बिमले सब कारों की निर्म मफेर म ममि पर गिय पीपल मी सौम में राय होया ॥1॥ --प्रोत स्वर्ग में पुरमा मौरपेड और ग्यो त अम्गम से बने और अनार और रस त मरे ।। वो म प समी-बो को साहा केला में गाता होम प मी माई में एम्ब पापा कोप्प, रेसे स्म की यहाँ से प्रति को नामबोर पासो पान्ति मा मौन अप मच रहेमसागबोम्म 1100 -और पता अबगर मिल गपा । हो पप्रचीन सौप भो शिपास और वाय पायोमो सारे संपार प्रमामापरा है।मोम प समी-पापाय सर्ग में बय पोगों को भी मममा भा! और इसने बम्म पर पानी में पिप अपच मारतों व पहा! उसको प्रमियी पर क्यों दियबो सब संसार भरमारेबमा ऐनमीतो ताप भरमा पानपरि ठाम स्वं ममा तो टेवा मिस भरमय भमो और यो रसको मरमाबमा परमेवारी तो बाईवरही ही मा। परिव को पानी किसानों सहचर मी शिवान मे परम्प वीडियो वाब से बरी हो या रसे अपरापरते समय हीराला रिया ! जप में नाव प्रसिप राम रस सामोसमात माईसाइयों केरल नहीं इसलिये ईसाइनीस या प्य नहीं सकता दम्प इसर सिर एम किया इस समन समाविभरी इस माचार भारि मणमा पर। सा भी ईसा मसी, पुमान पेस्य मि मण बो रिकमा को कोष सोपरिपत माइनों ममत सागर...॥ 11-बाप प्रपिता और समुद्र निवासियो i ताप तुम प्रस ग्यो प्रप १।य.." समी०प बराक मौर स्मोसिौ ममुन्धति प्रपिरोस रक्षक और स्मी बहीबरि भूमि का पानको यो मार सभामरेख्य गव और शवाय पारिवतोभी उसमे नही पिरत तापकपुरमा था और एक समय दुरसा पर हो राम॥ ".-और पगबीय मास मों पुरभवम विपरम्स रिया और उसन Eि निमा भने प्रपा मासा किम्मो बाम की भर रस की और वर्ष में मम्मी की निम्मे और ग्राम परर पप कि पवित्र गोगों प पुरम और ग्स पर बम और परपक का और मप और एक पर समेधिकार रिण ममा म प ५। ममी०-ममा सो विहीरे मोमो को परे वाम और पप प्रयोगसमुहास प्रतिको मेरे और पकिन ममों मेपुर मायेम पोमोर समायकमही १ मा प्रम वा मासपी हो सस्ता - 12-और मैने पीर देशो मेमा सिपोल पर परमार इसके संग एक माचीस साल बम बिनके माथे पर रसम बाम पौर उस पिचममाम विधीपो म पाय समी प्रब रेलिमे यहाँ चामपप सवा पानी उसी सिबोम पहार पर रसम पाच मी यता मा पमन्तु एक बाबाजीस पास ममुम्मों की गम्बप्प बॉम की ? पकवाय बाबीस सदी के पक्षी हुए। रोष रोबोईसानों के सिर पर न मोहर गीप सप भाक में प्रमे सालों चाहिने किसिलोच पर्वत पर गईसा मम्म पप और उसकी सेना ही जो दोनोपमेन रोकभी तो मिप्या परिमी से बहा ध्यम वोमासे पाना बोमोसो से वो न्य पकिनी दी मेबार अप अपर पोचे गम मापा सपमेबदिपवासामवा १ मिनाप्पपीय समाव एमा और पकान होतो बीन सभ्मा बिकान पूर्व एक । मूगोश में एक महिने सकिएको तीन प्रदेश प्रमों मम्माम भने और पा पुगपत् गुमने में समर्प भी नही हो सकते 116 "-मामा मासे किये अपय परिझम रिमामय पन्त सभर मग तेtपो प ११।मा १५ समी०- ऐति सानो भई तो पतारसके कर्म उमर गे पोत् कर्मानुसार या सबको दिन बामे पार पायोग मते सिम पामे कोरेगा और मा मी किये जायेंगे, पारिमा विकि मम ईमाम पुकात में दोनों दो महोती सक्त इसमें से एक पा अम्ल होप। हम परे पापों का ममोपईसाईजोम । और रसेवा ग्रेप मे सर में मया। और उस माको रोम माया पिप और रसम में से दो की भयाम मोह एम्पो प्रेस कय निमाको म समी०--प्रब देखि इमो गार यो मे मी बाही! सदा सदा पाठे यमा गत पुति हो जब हम और बो रसले परमपम्पम काप मन प्रमित पप चिसो सभ और मौकोसल विरगमा प्रसम्मलाकि अधिर समयमा बम बाता मा राप बागवा! इसचिव ऐसी पठे मिती १९ m-मौर सो म ती सम्म मदिरामा पायो ॥
सत्यार्यप्रकाश - ममीको ईसममा हो तो सामियों समयसम! वॉपिप सब भब्यता होता इससे सर्वमा बही मिष वकि इनमबर सच साकि ममुन्ना भान पायका मम Rawatमबि मई और इसी समय में पूर्ण की ही सम्मक बा बिषी।। म मम भामही मार सकथ। मो तक सिइस ममय में सपा ऐसी भरी १२२--ौर पर ये रोमो को मार गिमा है। जैसा धर्म रमने दिवस रसको मर देयो। रसो कमों के अनुसार पूजा र देरेमो ।। बो न प 15। मा५-५॥ समी -देखो मायाम र सम्पपीकिम्प रसी को किसने माप माप कर्म किय रसको पैसा और स्वाही स, रससे अधिक म्यूब देना मना है। बो अम्पानी की रपासन्ध बस्तेमबापरीन.१२॥ १॥-बकि मेम्मेमकिपा मा पाँची और उसकी बीवे अपने को देवघर किना॥पो प्रप राय समी -अब मुक्मेि ईमों में मिया मोबदलौकि सभ सिर बनेपा किया। पम्प चाहिये कि ग्गो पर बम गचारि और ये और आपके पार कितपऔर बीमार हाने से पर पुदि परम भाग्यपि मी म्यूब होने से अब तक ईसा में पथरीर पग किया रोमांकि समोगसम्म पनि प्रभाव हो पब तक मानावेम्पो पिस में बोल पा और शमे कमायो में . १४-और उसने मनार में प्रषात् प्राम साप में दो रिपया और म्य पाम फेम्से सातों बाप रथ। और उसने प्रभामा में सपा और परम उस भाप दी मिससे परखा साप सबो मियामोगी कोम भरमा यो प्र प समी०-यो म प्र ठाण मे पमा और पम तक मकिपा भिकीय स्वभिम मममा। ऐसे मेतो पानीस म हो रतमा पा मार दिया पोपमा दो महीं। परन्तु पचम महोबा सानो म प्रममावसम्म में इस मौ मही र योनी रामपणे सब में गये मग्णन रच। स किमी पूर्व किमी मोपे मम्मों में भाकियो तुमको रेवामन पास किसी एमन देश में समगुण नभुर पपामा रस्सा। पदी में नाममा बिपि गौच मोसमनीषम और मिसपमतमा मात्र हो यो म माया पाया हो गया। मोव मत पती ATो इम्परा मनाय म माप पवार मगमय बप सामने आया सारखा बोपण्समुशास और ममा किमीच दोबरिया में सिपमा समायो। धबाराय सबमे एक किया। मी गोवा मालिकासपिये इनकी मात्रा में किसी को बसमा चहिये ॥१५॥ २५-विसले सम्मुख से परिलो और प्रामण मग गपे और बो सिपे समय मिची। और मैं स्प बोरे स्पो सब पत्रों को कर के भामे बारेख और पुगोचे गये और दूसरा पुस्का पर्वात् पौषमम पुस्तक बोजा पर और पुस्तकों में शिक्षा हुई पदों से मनमें प्रविधर मरे को प्रसार मा गला ॥ पो म प २ ।मा समी-पपरेखो गाव की बात मध विषी और मामय से भग सभी किस पर मरेंगे। बिनक सामने में मोर रसम सिसम और मरा! और मुरे पामेवर के सामने सो भिगो हो पामेन मी मरवा दोमा सिवाकी पारी और मव के समय मम समारोबोकि पुस्तक वायुसार होता! और सब मीयो भार विध प रस गुमाती । ऐसी २ मतों से प्राबर माईम और पर का भार ईसाई मादि मत पापपरिया १२५ । १५५-मम से एक मेरे पास बापा और मेरे सा [पत करके बोग कि मा मैं पीरमे माल मेम्बे को जी को हमे विसरमा ॥ यो म पस।भा ॥ समी०--म्या ईय मे हमें में दुपहिय अर्थात् बी पनी पाई, मोग प्रवाहोग बोरस पान्य होगे सो मी लिलो मिती रोगी और मारेपो रे मोर दुत भीष होमने से रोगोपि होम मध्ये मी रोपे ऐसे सपही बोधवचा। १२.-और उसमे उस बसमापन कि सपने मामा कोश हैरसमै बम्बई और चौपाई और एक समान है। भोर रसने उसी माय मणले प्रात् पूत पप में पारा एसीपीस रामको। और उसकी मौत की बनाई पूर्वमन्त पौ मर्मत सोने सपा को निर्मश च समान पा और कार की मौत की एक भारत पार से स्पई पी। पीसी के मम्त की वी सरी बीबमयिकी वीमयी थी मरकामे पानी मामेक की पमा माथिली सरी पाठमपि भारी पपेज भी पुरी रखीसविरे म्यारो मन्ती बाप मर्येन भौर पर परक पप मोती थे एकर मोदी से एकपकपमा पा और सपा पारसमस पेस फिर्म पानी।बो म समी-पुरा के भन! पर ईसाई मत और सम्म सवइने योगा में समा गे कि रसम म्बुप्पाप पपमपी और रलिया। और माग गरल रयों का यो मानौ और स साये मेरे पति का मास १ मम्मों म सस्यार्यप्रकारा ममीको इसाइयों मईमा मा हो वो सामियम ! तोकिए सबसपना होता इसे सपा नही मिल बकि हमनईम सच की बोकि मनुन भए पईमा प्रत्य मम म समय। मई और इसी समय में दुर्गा की बनी र असम्भव गात विकी। रखने मम ई मही माम सम्ब। मो तक बिस इस मप्र में सर्वप ऐसी मा म १२॥ १९५-और ईम मे रोजमों को स्मादपि। मातम रसने रिसा रसको मर रेखो। उस मोके प्रमुधा म्प र रेमो।। बो प १८मा २~-॥ समी को मना सापा मम मन्पपलौकिमान रसी में मिलने सप मिता में किप उसको पैस्य और सपा की भाषा गपसे पविकप रेया मनाला भो प्रनायकमी की रपासन्य मते मारपरी क्यों माँ! २२॥ १९५-बोंकि मेम्ने अविवाघा पहुंची और उसकी बीमे अपने को पर पि॥बो म समी-प्रब मुपिये। ईसाइयों में पिया मो हो । बाकि ईयम विरचिरी किया। पचहिये किरपके ममुर सास वाचारि गये और बाके से तिने ए और बीमार होने से पर पुरि परम भापु मावि मोम्ब होने से अब तक ईसा में हो यार मग विमा हपकिमान पामलोम भवरच हा अब तक ईसानों ने सो नियसमें भोक पर मो तक पोलेमपि प १९४-और म्सने बम्पर को प्रर्वात प्राचीन माप को गोरिवार और वामो सामना बांध । और उसने प्रयास में मा और बदमले रस कप पो बिम्ने र अबी साप उपयोतिषीचोमोमेप मामाथे।बो म प . समी-रेखो मा मोवावगे था और साल तक कम पिया भि मीरा पनि म मामाक्य ! पेराको तो भलागण मोरवा पा मारे सिपोरा होनही। परन्तु पावन मोना सानों मप्रममा में यमीही यामागे अपने ग्या में प्यने म उपायौ। *से किसी ने फिदी मोज ममुबाप भाकियो नुमन देवा सर्गम र त्रिी पमन्त में का एक मनुषभुत पयम एस। कोममा मामा भात मीचयो जब मेमतोच और नि सबममी मोर पा मोम मात्राम पप्रपा रोगमा । सो इस मत पगकियो हमारा माग म माश्म पापमपमयामी परमसामये माप तब सरेको - अनुभूमिका (४) बो पर पानी समुहास प्रसबमानों के मरियम में विवाद सो मा मिसाप से अन्न पके मत से नहीं पौषि मुसबमान FIR परापासपपि फिर होमे भरब किसी सम भार दिन महिनावापि मान पर सब ऐकमाल । यो अपम पी माय मर उस पर मौषधिमा बे में भर्ष सिसौरस म पानी भयर और पार्ममापातर यो पभाव पर्षी चामों से पर सपा विधगपरे। परि मेकि मा भर्म समीठो रसको रतिक माली समाजमा म परिये परम मे पाय इस विषय पौकिपभख मानी की रवि और सवासन पिकविणे मोलियों सयोबा राम देले इससे मनुष्यों को परसा परावे असमय मिले और एक दूसरे के होमम र गुणेममय में सो मन मय पर मह पर समूह ग मायने प्रयोग बोमबाई पो भगाई और मो इरानीपो मोति हो। कोसी पर पा सके और 4 मास को रोक और सत्मा- सलरिफ्प प्रगित को पर भी विपकी इपाप माने माने किसी पर बसपी सिपगा। पहीसम्मों की रीतिप्रियेपासे पापी रोप चौर गुपौरे गुरु मानब गुदा में प्राण और पोपोप त्य और एशियों मम दुपमा न्यून मापाकि पापाव सस्य भम और महो। अब तो पाकिइस अपिमित पापाचन में पानि माम पेय RTE पर पन्यो रणव समुप से की। इसमें शामिल - हिण योग्य मोग विदित बगेपमा यो भिटो मात्र या स्पोकिमा बस दुराम भोप, पwि मर निरोग पारिसे किया नविनमाने पति एक दूसरे की पनि पाम बाम पापना हमारा मुल्यमाप का समुभव में मुसलमागे ममापिएक सब समलों के सामने र प्राविचरम पर गिर परियारिणे । भन्समविपिस्सरस वृश्मिरपु॥ इस्पनुमिका बाद में-
सत्याप्रमाण
।
परमसा की मौणी । ममा पम्पो चौड़ाई वो रस मगर सिप्प सो
सम्सी परम पई सो सावसो भेगलामोसमी पा सपथ
मिमा मोपमपन्य की और इसनेमाती शो मे पाये ! इस
पेय सिखने पर पड़े में स, पगास पुगबममी पाप
११-ौरभ अपवित्र बस्तु अषम फिनिवर्म भने हाप पर
पर सम्बायरममे म्मिौरीति से प्रथय मनायो म प. मा..
समी०-या एसौ पचासमा गोबिपी बोप भी
स्था में इस पाने सय सम्मे। पाक महीपति पेसाणे
पापण पणे मिम्मा पीभमन्याय स्वर्ग में प्रवेग कमी मार सम
बम और ईसा मी सर्व में कम्प्यो कि ममता पारी वर्गो मास
हीरो सातो मा समेत प्रपियों के प्रप मार स पुरानसर्ग
मसीहो सस्ता १२८।।
१५-और अब मेरे भारमण र बामौर मेले मसिन
समें होगा और उसने राम रस प्य अंग। और मरेगे ।
रसमाम इसके माथे पर हम और यो पवन और समापी
प्रया सून की मोवि मा मनाम्न मही कि समेभर मग रममावि सेवा में
सासर्वदागे । मो म प ३।भा ।३.५॥
समी०- रेसिपे या ईसाइप मापस ! पर और स्म सिंहासन
स निरासा ! और गरे राम रामले सामने बरेच मंगे।
पातोश्री ! तुमारे देश म मुसाफ्यिम व गाय प प्रोमों
माय भवन स्व पणे मानी। माम मी मापन
सानिया बोय महाभ रती एकर में राप मसोपा
कुमलों परोष गोमुख पचीपम सब मरम्मी श्री
हो सकता ।। १२॥
॥ --में पावर और मय प्रतिया मेरे सानी मिससे हर एक
प्रेस सभा मामा सामान्य ॥ो । परामा १
समी०-चपदी पत। किमोहम्मा प्रते। वो भी की जमा
मी ही रोची और बो कम्पोती है यो गौर की बाते मम। परिक
किमा मामी इंजीव में मिला तो सपा विमा भर्वाद 'पपरोमा"
यो मौसम भाग्य बोरो। अपमापिकी पाइप
में जामा बस्नान।पो मोजाय पिमान में पारा
मुबारिमाप इन्ने होरिमान बोम बहुत समयमा गोपाली
माझे पोप सब सामागसंपल मीनबी पता
महोबार पुस्तक मी मन्नान वही हो समा मिनुलोमाके
सीमा में ग्रहीत रोज दोtu॥
विभीमायामपसरस्वतीस्वामिविमिवेसस्पार्यकारी समापाविभूपित
जमीलमविपप अपोवरा समुस्वास सम्पूर्ण ॥१३॥
चतुरंगसमुहास प्रमो' पर्यात को मान और कैमोन मार्ने मदिर, ऐस्य नों मवा इसरिये अयम पाहत नदी बौना ॥३॥ ३-मासिक दिन मात्र तुम्ही को हम महिमवे। और तुम ही से सार पाठे। रिय इमो सौपा यस्य में । सि । सू 14-1 समी०-जपा तुरा निममप मी मब किसी एक दिन पर प्रय है। हो अपर रिट दोखी! मी की महिमा और उसी मे समाप चमचोक परन्तु मला पुरी क्सममी समाप पप और सूपा मार्म एक मुम्रपमानासमीप सो ममी ! मम्मर्ग को मुसलमान प्रारमते १ सय समय पुर्ण भोर मतो नही पाते ! परि भाई सपकी एक बोधि मुससमानों ही में सिरोष बरस और को दूसरों की मचा नहीं मानते तो पपपाती है।. .-रिव्य मोगा म यस्य शिविर परिणामत की और उनका मापं मन रिव्य कि निमजे म्ममइने गाय पर्थात् पालम्प पीजी और य गुमणो म मा मरिच ॥ म ।मि ।। ।। मा.॥ समीक-या मुसलमान योग सम्म और पाप पुलमही मानने मोमिनी पर विषम पर्वात जप परम भने और त्रिी पर प्रोसे उप पाती रोगपगप कि विन्ध पा पुल मुजदुसरेन्यामा प्रसार कीपर दिया भर किसी पर पा और सिमी पापरप्रिया मी सम्भार वापरप परमम्प्रे महार सम्म प्र म पूर्व संक्ति पुल पाप ही महीनो रिसी पर गौर म्सिी परम्परा हीरो सम्य । और इस मूरत की रिपन भपामा मासा सारेब मे मनुहारे मुखपभमा किसा इस मगरसपा 'मोपatो निक पारि भाभी मुराद पायेमेसेपालि बिय अपरान इस मरामे पर सो जम्मा दुगए और गोबते मोको ऐसागे मम स्पषो म पाणप। इस ऐसा ममा परिकगिस पुस्खा में परपाव को पार्ने पाई सय पुनाराम महारो सभ्य सा भारी परवाने परम्परों को इसम पाप मुण्म अब मर। रोपी भनिदोबाइससे TV में पाप्रत पायी चौरस समम नेगील मग गप मयुभो परमाणीकरणापों पिसाय सरा म्पपरिसर पपरों रेखिएक परिप्रमाविक मारमा मेरोभमभय पिप्रबबरणी॥ २ समितिम समरम्मी पापों से मार्म fromiti सामान पम्प () मा पाने और उस मोहमये और शाम रमति पर मामला मोमोपेडीरे यी पमित सरल अथ चतुर्दशसमुल्लासारम्मः अय यवनमतषिषप ममीक्षिप्यामहे इस भाग मुसममानो क मविपप में लिखेंग ॥ -पारम्म स्पप बाम प्रसानेपा एमट मनिप सिनपासूरत ॥ समोर-मुसलमाय ग पेसा पविमानसासमापन इसपचन से विरित रोयल इन्सबमानेपासपबॉकिजोपरमेन अगम्य होतो "भारम्भ गाम्पम माम"ऐसा समय किन 'भारम्भ पछे परेच ममुना ऐया मध । परि मधुनों शिका मा किम पेय होतो मी पाकि इसमे प्रपमधाम्म मीसा बाम से दोन ग्सम पम भी पूस्थि दो गया। जो पापा और एक अपायको समने अपनी पति में मधुनों के मुख्य पान दिनों से मार पर पीपा रियम मरण मांस खाने की मामलोपाप माही मनपापी और पामेन का ए बी १? और प मी मप पाकि 'पामेवानाम जमको प्रभाम्मी पा सकी। इस पर में गोमालाचेरी यो मिणापचारिमपर्म ममी पारम्म पामेवा कम्पम किमा परेको पाई पारि मुसबम्पन प्रापि के प्रोमो में मी मिमिया' इस परम में पोपी इसम सोच पायाला मरम्म भी परमेम पम पर मसनमा मते र मुसम्मानों "" पहमीप रोय पति सभाप पयों पर पौ! और को समाबग बमबाजा इस पण सोनमी समाप इसम प्रमो बामामादि १-सब पति परमेवारी परमादिपर वार प्रचारको प्यारे सब संसारमा भाग नाह।। में । सि सामाठिया समी०-दोभाव मा संपर पासव अपार धमार सब पमा और एम मवा होख को पान मसाले और परमार को मी असलमानों ने सबसे मावोबारमनदेय मोसमा म पग बोल्प पापिनों पर मीमामा परेको समे शिये कि भविसको PM Fast A PROHI प. hitr दिप यदि यमुहम्माता- समाचार र मापुनही बमम्ममा महाभापा बम्मनो सप्प भएपीपति Raipu मनमा म प्रमाण पत्र हा बसित में यतिरीबागबर मन में मौरिम सम्नु पाथव सरससमय मौकपरसिया बालकिरा और रस.साक पर करनापुमा म समयमुन पाहाम्भीरमौर मही समयाईपममम मममसर प्रारूपता गुमा २/HIरणाममसपुमकmputसामुम्पनी भरिभरी गई minsmमोमपोरापोभारमामारपीस चतुदरासमुखास पो और भी सीमित भावि स्मोकिमही पर प्रिय मोग नही सका। जब पाणिं या रता साप मी प्रमा अपन में निमकिपीरिया सांग पारव में पोसा मूम मधुमपप रोमा || १३|| -सरिस मोकि अपनाई गौर किसी पर भास्करण सिम्परिराखीमा की मामी म रसत बदबा दिपा गावप पोरन ! परंगे ॥म । सि ।। म सपा न्य पच्मान दियों में पाईपने में समशिन ल्य बिसिरिय मानी जाती वा भिसाम्पम गयीय सिन सुरा माय बापम सब हो मम्मी पपा बहिरव अस्माकमपों मी ! परि पसार तो बरा -मने सामनिवार मानिने दिव।। हमने उनको भार मत कारागामा ।। वाकमा दिगो रमा सामने और पीछ और शिका मामला ।। में ।। सि सी-मून्पो रियाय तो अपन भा निराकर मरदो नाका सामना भव मीता गोभय हो माम स्परी पाम बम भी पपिानोपमम पिन मूम्प भेखिोपीतो पुमा भानप्रपामा ! मुग भूम पर थोराने निमित नराममा मा मग मापामो सममप मिपाच पपप मि। रासी . सिम्मा च मनुए Ter नुरा नमगाम मुमतिमा मसी निर्णय गुम मम॥11मिापि त्य मुरीमुरारिवामित रियाय न्य mpat vakal INor Liam PRIMAR . H + अथ चतुर्दशसमुल्लासारम्भः अप पषनमतविषय ममीक्षिप्पामहे इस प्राग मुसलमानों के मठविपप में लिखेंग ॥ 1-प्रारम्म पम प्रयासमा कामेवा मह मनि सिपाया ॥ समी०-मुपसमाम मोप पेसा सवे किवायसनमान पिन विविव वकिपनबनेमा कोईरसासकियो परमेन अपना रोख हो 'भारम्म अप पाम भत्ता पेसा समय जि 'मरम्म पसे परेश मनुष्यों ऐप भला । बपि मनुष्याने शिक्षामा किम ऐसयो दो मीही मोकि इसपे पपम प्रारम्भ मी रूप यम से रोम सन बाम मी एपित हो गया । गोपमा औरत्प महापौवोसने अपनी ही मैं मनुष्यों के मुख मान पारिताको मार राम्स पोरा रिचम मायमसमे वाली प्रायो अनफ्यपी और मेरे अपने अपनी ? और ५ मी मग बाकि 'परमेन बाम र प्रपोमाता प्रसारमा रोपौ भनी । इसप में पोषमायोरी थरी मिधमाश्यामि अधर्मममी पारम्म परमेम के नाम पर किया इसी को कसाई भी मुनाब पर पानि गोमो में भी विस्मिारन को परोहा सत्र मावोवा पानी पारम्म मी परमेशा पम पमुसम्मान करते और मुसपमानों का प्पा मी पेप्सनि रसभरपग्म पता परमयो! औरो मुखमाब बोग इसमपर्व पीपमये तो इस परमप्रभोपनी पुसलमान योग इसन बारमते वो सूपा जनामादि।।। -पार पति परमेवर के पत्ते गो पारित अर्थात् पाल भये मामरामा माया मारे में सूपायिामा समी.-सोमालमा सातपायम भसप पर सब मा गरम भाव मात्र मा और पानसेमी मसम्मानाब से माबममम देव । सामने सपनो कप पापिलों पर मीणा और वो मेसिमियो ।स खासमुशासः राममो" सो वामान भी कामो मार्ने प्रति, ऐसलो मखमरिये सब सात मीयता ॥ 1-मासिक मिसाइपोको हम महिनामी म माप पारिच इमो सौपा यस्ता में समी-निमलपीमा रिमी सम्वा प्रण सरभो बिदस बरसी की महिमपसाप यो र परस्पाम भी साल परमेषा मार्ग एक परमानों को भी सुषे मा भाभी सय मते ! मोमोसकोपी मया समिसालों में चिपकको गुमरों में मामही मायेगा. -स्पिकिन सर पर मयि मोनोग्राय प की भी RAJोबमरिच || में 1121 ॥ म्मी-कमाल मायाको winkaपापमोमि पर भी SUTR कमियालय भवान antdम्मिी पर सो परमपीमग मी भोकायाम मन मसोd anमी मरम्मी सव मान्य होणे एमाला सबसे गरमौर sidhaNTRA VARपार maratो कि मानस Paintainm बाडने पो होसार Fat I TERI ब्रमका परिस Patna सामग्रीसम्म htra कम पान भुम्म माम माप Antamins पासपोरस भोग ranी मी मा समापी निकाय HniiictARAN Healiniमरम्प सत्यार्थप्रकार ॥ पोप अपये मासिक की शिरा और बेहोरम्य पारे । मित्र यो अकिर पी सन पापडराना न राम्प समानीपईमान व पायमे ।। पवार पेरमो रियों मनों पर मोदर प्रदी और उनकी प्रांतों पर पर। और रोप बहा महामसि ।। सूत । समी 10-पभपनेशी मुब अपनी विवाद को मा प्रण बाकी पम्म की पत मी जर परहेजमार अर्थात धार्मिक योग दो स्ता सो मार्म में है और जो मुझे मार्ग पर नको पाध्यम मार्ग हो ही रिसमा माता नि पिस प्रम मया! या पाप पुस्प और पुम्पा निस्प अपने नजाने भनेको देखाएको देख वो सब कोनी दी येत्य! और मुसपमान योग परिम्म लामो पर बो गागर जीव पारि पर मिसास मध्य पोलीवो मुसबमान इस्लीम पापि पर ईमान या अराम पर य लो नहीबाने और बो पाते है तो पुरानभरोध किसरिए । गोभकिपन में अधिक पातो पाया किसान में बिना मा मूब गला दोग्य ! और बोन्ही मूग वो भागमभाग विपनोबनी। और हम देखते है वो पाप और मान की या न मिक्सी रंगीनही तो सर मिल्दी । पदी पुवैमा किन्यो म मात्रा ममत पर निवास रखप पारिसे माल पर ची साई और मुसलमान हीरा मेसिधा परग्नमें मी पापी नहीला जो रंग भर मुसम्मान पापी है पीएमय पाय और एसे बर्मामा मी पो तो भाप और भारी पतपही! और लामो चोप मुसपमामी मठ कोम मा मही को पफिर मन्प पर पती मिरी दी।बो परमेवर दी बेरो पावलमय और मनों पर मोहरा और सोयेथे प्रपर तो नाम मममी दोपबारी, पोषवादीभिख म मुखदुखाप पाप पुल दारो समय पुनः रक्को पाप पखालक उमाने पाप प पुल स्नाय से दो किना॥२॥ -मरिता में रोगोभत्ताह मे राम रोगनारिप में । सि । - समी -ममा विद्यापयश ररभ रोप माप बचबाई ग्य विचाबका दुबमा होम्म ! क्या पताच काम बिम ममम ही। किसी मब पर मोहर सपना किसीम रोम माया पास्यम परमी सम्वा क्योकि रोपभबबामा अपने प्रपा से॥॥ •-मिस तम्हारे पले प्रश्मिी विजोग और प्रपमान बस में क्याला ॥ म ।सि।सू रामा पव में पा राव 'पुरबान है परन्तु मप में हो गये मैं रुपन पावसनिये ऐसा ही मिला। .
चतुर्दासमुनाः समी०-मय भाममान किसी की हो सकी है। यह भविष्य की भावी श्यामपसमा मामय इसी की पत। परि किसी मर की एमिग्रेमासमाप मान्ने हो की at.॥ -मोहम ग्स मय से सम्म में दो पो हमने अपने साम्बर २ र रखरी ठो रस सौ प्रव मामा और भरने सासी जोपी को पुरा प्रसाद सिप तुम सम्बे हो बाम । और कमीजोहो ग्स भाप से मा किनिसमापन मणी और प्रशिपले पत्र मारपिये || मसि ।।२।भा ॥१॥ समी to-भय पर मेहमान किसके सारा कोई मरता ! पकमर मारणा समर में मौसची जी में बिना नुस्त मनाम नहीबन्य सिपमापनसीबोजन की प्रामा इस प्राय से प मम धरिये। इसम्म मीथमा उस पोस। सहराब में सिर किरक्षित। प्रो पापा तयार किन गमे १ वो पुषी में रिवीकोपों के लिये पोर मरका! पाश्री किसकी सभी मामी गाव १ प्रपये का सदानों स्मामी और मा मत पानों मरम्पमी होते है इसलिये इस साल मगका प्रमी किन मा धार्मिक मुछ और बो प्रपोस मों में दुख पाये ।। -ौर भनम म परेप रेग्न बोगोंकि ईम्पन पाए और काम लिप अप पकिरन पर गिरी हिना बस खगे। भार रममें से मेदोरेमोन गावगे ताग किपको पातु मोरम परिय इस रिपे पर ये फोर सनके दिवे पति पारिता सरस पीने to में ।सि ।। ।।५।। समी--प्रणा पर अपन मभीरत संस्पर सवसी राम राम किगो पदार्थ प्रसार में ही मुसलमानों में है और इसप मिलापुरममते मरत चौरमा गई रसीममा मन्दी पितु महोलिसिपी यी पौरमा पीविषा प्रामापिका समय पती कामत मारपी विधरिपोरिसस साबो राम पापा सोपी ! और सामान समय प्रवीगी तो मेकाहिए मुसबपनामस्मे गाविसे गुसाइर्ग- पवार और मदिरा साग रोमालिया स्तिोम मानपुo wil भनी वापर में स्लिोभमान पिक और गम पर राम मम भी पूरी न पुल पर बोलविवादियों भराये पहिरत मापन सब और पुगेको बोरिया रिम्प नाम समयमा समीरापरबत एसीप भिषा सप -साम भयर माम सियार मिशीतों के सामनापास इम साहो मुझे माम मामा परम ! म पम पर सत्याप्रकार उसमे जरियेतो पापे करियों मेमा किप मैने तुमसेमामापकि बिप में पिता और प्रासमान बिपी वस्तुओं और प्रदिपकों को यमब।मासि । ।५. समी०-मध पर रिस्तो मे बोयरेथ अपनी पाप रप पराभ काम पावो एक एम्म की पवरे, इसमे कोई धिार दी माप सम्वा और पेय मिम्बकता।न्य ऐसी थवा सोमपी सिपा समायो! पिनी बोर्गों में कोई कैसा ही पावसा मेवे पर समस्या में पी ११-ब हमने फरिश्तों मेमा किया थाम को पन्त् मोरेज सभी पर किया परन्तु वान ये मान्य और अमिमा जिप वोकियो मी एक फिर पाम सिासू ।। भा॥ समी०- स्पसक मही पांच सूत भरिन्नत् और पमान में पोपामाही मनम, जो अबष्य से ये सवाल को पैनहोली किया और मा में सपी सकि न मम हो माग और हा ग्सम इन मी नमसम! और रेसिपे एक वन पकिर मे तापमी बमारिच तो मुसम्पनीमा मिन बी प्रतिरोप मुसामानों का और मुसबमा की लाती है। मीरा मी सिौरोग बारेख किसी ने गुमणाम देखा जाप वाम से साखी हेगी और दाम में सालकि विम मावन म रखा और कोई भी समय 1 ५-इमामा जोगामी मोहय मात्र स्थान में गायोसभो सन्तु मत समीप यमो रम सकि पापी हो गयी। पार रमणिय और सोपविभावन बोरिम्य वाम सकिम्वरो तुम्परे म मे ससर मा भिन्न प्रविधी र एक समनाम ॥ पारम भपन मासिकसप सौरभ थियो पर ध्यप ॥ मै ।मि।। १।पा १.॥ समी--अब देखिये रुप की भरपाय प्रमी तो सर्प में परम पायी मरिच और पुमा बोसो र म मा किनियो का मणिपत् पता यन्त्र हो सोमवार पम्पो यार सालेम असममी दोष पर और पाकिमोशिये पर मियापपर बियप एसिया रे पिये तोताराम! इदिने ऐसी मी और मोक्पो पुजा में सप्ताहै। पाइम एप सामिमी पा सोस परे। पौराश्विी पर माम मोर ध्यये सि ममा परे। स्पपरिया पर परमामय पर ! सरल बम सोनुरूप अश्यप गरम पवा निरासमें बारिश होय १बिना परम स्थान महायर यो नो इमोसम में भी मामी !
चतुदण्समुहास: और मिठो या और मीमाही महिने मादिगा कि मही के शरीर बिना इन्द्रिप मोग नहीं हो सम्य। बस पार्मिक र सो समु मी परत दोमा पीपे परिमाणु होतोय पोय मो मत! और पापुदी दोष तो सम सम्म मी नहीं बच जन्मोतो एप्पु प्रस्प हो। यदि पेसा अपन में मिकिपीविषा साब गरिरत में राती सा मम रोजायगमा बाकि समय मी यापु पदमा अब ऐसा है तो पहिरव में गरेपोंभ भी मधु ममप होगा ॥१२॥ ॥-सरिन यो किनभई मीब किसी पी 8 मासा म सत्वगम म रस सिरिश स्पोमर की मामी रससे वागा मिपा माया और न समाप पगेम । सि समी० --स्वा वर्षमाम रिमों में न ! यईमरे में सप विप ची। सब सिकारियम मामी बापी तो मि पाम्बा की पीप सिका निय स्था रेपा पगात ताप सच हो सभी ! मला बीरत पोहो असहालक दोङ्गयों नहीं ! पनि ए तो हा पपाशी ॥१५॥ 11-नमो मुसा में किया और माजिरिये । म मम मा मुम मिमिव हो जाभो ॥पक मन दिला जामो अमने और पीछ रमको और पिता ईमानदारों को॥ में 5॥ समी०-मो मूसा को मिसायरी दो पन प्रोन्य निर्मक और उसको पति पर बाबा और माप में मोरिया पर पाप मारणे पाप भी कि जो पसा सो भव मी हवा जो अब बही पहिल पाम पास स्पर्षी पाग प्रामामी परिधानों के स्पमने दिया बन सातास समन भी मिाहोप्य पकिरा और रसा सब मी सम्मान पुनः इस समय बुश भागतिलोम्बी रेय भर महीम सम्वेजो मूत पिसावको मीठो पुमः गाव मधला भासपा ! नोरिया मगाई दुपईभमन से भरपर र एक स्पm पुना मि. पुस्तक प्रदेस पुमान रोप हाम्रा मुस्मयी प्राति को दीपा उन भूम मय प्योरा मिम्मित पर बाबामा र भष खेपिरेमापा तो रपममत्य मिथ्या ध य पर लिा। गो एसो प्रखर हिस में पाप पबतुरा भौबा पुस्तक तुरा प्रबन्धको सम्बो... १५-सपर मुरा मुरी प्रविणता और गुम अपनी मिणानिया बिण्यकितुम मममम ।मि।म् ।मा समी०-न्य मुभिमुनिमाया पावो भवनों को नियायोग्य मपम की कमरों में परे मा भाममानुपाइयो । . 7- सध्यायप्रकार . घर की मिणामिला। मियी नादि निक्लिो भीरबा सार में जो विविध र विष प्रयाबती मितानियां 11- सौष भाववादित पर्यात ममें पस मनामे में सि ।। मू ।। मा समी०-- मी जमवत पाप भने म सामन पाहीरवाइसरिये व मानक वीस भोर मोहमा पसा भए भावी और पिार हो गये। आमत को सम्मान दम तो मनुष्णी - पाप पुण बराबर होगा रचित यो कर्म प्रमत नही है रम पम प्रमात सही सम्परे ! और पी पुप सतपास सारस भादो बारेम इसके पूर्व मानिसमा म पारा और मामत के पास मी निम्मा पेया? माह सबमें समान हैवाकि परमेशपम सर वाम तेरे और पिने बिसरे पाप पुल गयो रसम सवारे सरिये अपम पाव सौदी. ..-- हम तुम से प्रतिक्षा भाई राम का अपने पाप और पिसी पासमोसे, सिना सिमरिया एम पे इस मही eartो । रिमर बोग हो कि भपरे वापस भे मार पन्त रो पर फिरको भाप में से बम निमम देवो ॥ म ।।सि समी०--मण प्रतिमा मामी और पीपों को पत पा परम्समा मे! बब पामबन on तो पेसोमा संसरी मनुन समाचल प्रया मधमा कोनसो मी बावरे कि पतन बोनाप अपने मापनों को निनबन्ध बाद पूरे मस पोंभोगा और से लिख पामिला मन और पक्षणव को पतला पामेमा प्रम दोनोवायचकि प्रपिता मिनी पिरोत पुसबमानों असा भी ईसाइयों में गुस्सी सपमा सन्चरे और अपन स्थान नहीं कर सम्मा बोकि इसमें से योगासी पोंगे जोपर । सि 1ोमनिये पामराले निगोपाकी मोमवेसी रक्स पपमा बम बियप सस्कोवामदाबाद।। म ।ए ।भा २६॥ ममीमा पेली बातमी पर घोर से हो पाती गिरेप किया पनिको सामवादीचमी । रदिपी और पापा मापस दिवे बिना ये सप खेपा रोपाचा सार बसि बापेवा बिम माप इस भाषा मेरे भी भा पोसार पसरेम मी मोम यमुरंशसमुद्यास किये बामे यो मौ प्रमाणहाप। दो पापों से इस दिये गये पनों में प्रवासम पमामामा परेता रमा पाप बेअप हो एप पपमप। इसस प मेख मिन्सपही। और बस्तव में पांमामा मुख और पर्मिपान री के अनुसार सदैव होय चाहिये। 1॥ 16--मिशय हममे मसमयियरी और रसके पीछे हम पाम्बर में पाने और मरिचम के पुत्र ईस्य र मामिले प्रपात देवीपति और समर्प रिप रसक साप मुसो बमार पास रस बनु सहित सम्पर माप कि जिस गुम्सरा श्रीपाब मी मि तुमपे अभिमाप किया एक मत में अमाप और पुकका मार मस्त हो ॥ में । समी०-भाव में है कि मूस्य पिता की ये उसका माममा मुसलमानों ने प्रारबका और जो र रम पुस्तक में पाप मी मुसम मापों क मत में प्रागिर भौर 'माथि भपात तोगवि की बाते सब मनपा १ मामेमारे मनुको सामने सिपे सह साडी पोंकि मम्मि और म मि सब पहें ही होतीबा उस समम "मौगित" पे तो इस समय को नहीं जो इस ममप हो तो उस समय मा म ब इसमें ममी सोनी ॥४॥ २ -और इसस पहिले अफिी पाAN पते प मा परिमा बाब र पासपभाषा मर महिरप परिसरों पर बाम ।सि। सभा समी०-मास तुम अप मत पदों को प्रशिरमा गुमम भकिर नदीम और रामक मत के इवर की पोर से विकार भि मान समीर और स्याबा विद्या मरेठो सब मम्मों में म पना गगी और मा सबमिो सब में पुष्पा रे सब पापी मूर्तता EL ॥ म 15 २१-मानव समेणा ईमामलों को ॥ ममा फरिस्ता पायरी शिवाइस और मापार मनोज र मी पन अफिरों भरा है।। । सि म् २ मा समी०- मुहमान करते है किसका बारीकी पिगौर और शरीमा मोसमा शरमी सा" बदमो कपोनियमाप्रशत्रु पीस पम्य ॥१. २५- और मामा माग्ने । हम माग मुमारे पाप और अधिक माईमपी में ।। सिम् । • मास मत पमरको बोराइम मस पप राणा ॥
५४४ सत्यार्थप्रकाश ममी०-मया पामरपदेस व पापीकपने भाभी बोकियर प्रपमा होमेममम मम्मों में मिताब पों से कई . मोदी ताइचिपे ऐप भनेमा सदा मार मारपबमाधा पुस्तकम्दी हो सकता पौकि बाबरी मप कमी नदीमा पौर पाप मा करने में प्रन्यानो माया ॥१२॥ २५-यब भूसा मे प्रो त्रैमधिसे पानी मां हमनेमा कि प्रपन्ध प्रसा (स) पत्थर पर मार रस में से बाराम यह मिम।। सि ।। रामा। समी-अब देखिये इस प्रसम्म पोंगल दूसरा रेग्म ! पत्मा की चिया में रंग मारमे स माता मनमों का विभाषामा प्रसम्म से रस फपर को मौवर सपोसा कर रसम पामी भर बार किस करने से सम्म मनपा मनीं । २४. २४-प्रसार मास रख बिसको पाणी सापना अपनी म।सि।सू सभा १ ॥ समी०-बाबो मुल पार का प्रोपोन्म हो ममी बाल पपता और ग्स पर मामता है।बो पेसा वो सामा गरिमा प्योंकि शिमला मौन सा और दुरे कर्म कौम कोरेण पाकि भएकी प्रसव पर विरोध परी इस सबको माला होमोप्पेशासंग होप्य ७॥ १५-ऐसा हो कि अधिरापना तुमको माप में लोकि मम ईमानों के बहुत से पोसत में समी०-वाब पेचिने तुरा हो रणमे चिकितुमारे अनि बामियप पही। पेसी पासाकी नही हो सपती॥१५॥ १५-म विपर मुरमो पर ही हर मान । म सि । म समी०-जोपाल सीता मुसलमान लिया और मानों को बोहमोकियोकी भोर मामा मनोज मी दुरम कि पो बिषर की बोर मुच मो मा एक सी और दूसरी सीहोगी। भर पा पारस मुबह सपबोर होहीमही साता क्योकिएकमुखएक मोरय समोर बॉम सम्पसिये पर संवा बी. २ –मो भासमान और भूमिमगत्पनी प्रापिम्प भी यही कि सभेमप पावा किनु समबकिब पप्त होगी।मे।सि ।।स् ।मा....
चतुरशसमुभास समी०- माने दुराम पकिसता म किसने सपा और सिमे सुपापा और बस गया किस भायम बनायाब बारिश है किसी के पूर्व सिबाय समोर मी इससी बलम भी तो या संसार मामला पिन्य पाच मी मर्म नहीं आता वो इतना पना गत राम मिया माश! मम पापमो पूर्वपछी-मही २ सपा की इपा ॥ रत्तरपडीमा तम्मी इस एक मातीको ग मी बम सम्सी पोपते हो किराको पा से पा सबकास का गया ! पूषा किमान इसरिपे जाप सामता है। उचर--सयटिमा भस्वा प्रह। पूर्व०--बोणे मोम सके। उत्तर-सा सुरा या मी ग सकता है! अपन माप मर सवामू रोगी और प्रशानी मी का सम्मा। पूय०-सामी नहीं समझा। उत्तर--इसपिर परमधरमपमे और दूसरों गुबम, समाच माविर अभी मी म सा और संसार में किसी पराममने बनाने में पीस पहा प्यम प्रारक to - मापन समार सरी पा बनन पी मिही तीसरा रसम मापन जिसमा मयप्प बीमार मिरम्मपनप पड़ा और समय पर परेमा, मिही और साथम राय दोभा के बनने से पूर्व भात् म भरय प्रति और यो गुज कर्म, समात्र अपरि। इसरिपे नाम की बात सय २-रमन मोमीनेसिव मरेको पनि स्माम मुखरखपटा बनाया गुम बमारिवामपनपभोम सि।म् । ममी-पप्रपेड परिस पवित्र स्पन उपभोगमारा मोरपणे मागाये औपप्रमपम्यानपी सकीय पविध पमी से परित काम मिदीपप्पा परिप इस परिधान बन्यबस्माबदहा होय ॥२०॥ ५६-ऐकौम मनुष्योगमाहीममममम पर सिनेमामी सामूर्य बना और हिम दुनिया में ग्रामपमा औिर किमान मामी 1.मि 11मूस" समी-- मम्मकिपामधे भी मायब माहीम परा पम्म निमम स्वीपी धर्माम्म भाप मलिना पोम्स भोर मात्र हो सकती समाधमका दिनापमापशेमे केही पमम पिप तो पम्पब एभा । हाँगा करे कि गोभमामा होहारदीवालि होता है मपी महा॥२६॥ 1 --रिम्प हम र मुख प्रापमान में निवास प्रमाल हम तुझे रस सिरेंगे कि पान मसग बस अपना मुख मरियमराम की घोर पर नमी तुम अपन मुख रसको मारमा सि । समी०-या पर बोरी पुपरस्ती!ीना॥ पूनम मुसबमाम सत्य पुत्परत पारे किन अधिक प्रमात् मों को सोनापार मोकिम लिमोहरा नहीं समाते । उत्तर--जिमको तुम इस्पात समपन हो मी व मूची में था पा समय किनु के सामने परमेपर महिमवेरितों के सोपणारे हो तो उस मरिसर हिरो प्रेमातोपा पूर्व-पो ! मार को किसी पर मुख ने कार में हम है और इनमे स मन्त्री निरपरस्त स्मादी । और हम सोमियोकि बमको सास रम पम भाव ॥ उत्तर -जैसे तमाम विपे में दुग्मोस होसिये पुरायमपास है। तुम अपनोहरामम्माम समम दासे पुराबी पुपयाकोसा के प्रचार प्यापीअपच समझते।म में और इसमें पुलरती मिम्मान नहीं है मनु म बरे नुपरस्त और बोरा कि बार कोई मपुल अपने कम में से प्रमिलाई विडी को निकायले सपे तर वा सोपा में पनि दोबार से ही मुहम्मद पटेखने का कुत् को मुसबमामों के मन से जिवा पाया जो कि पाप मा मस्बिोसम असामानों के मन में गिर गयोप्य माबोरी सुपरसोबो दम बोपरिक तुम मोम मादिकोशाधो तो कुत्परती भारिपालों से पच पच प्रथमपी, हम बक्क मपनी नदीपातीको बविमारो उनसरे कोरे पुत्परती परम पनि मिचाये और अपने पुत्परस्ती प्रको प्रतिभा परिये ॥३॥ यो बाप मार्ग में ममे वे बोलिये पमतमा किसफिगोषित।।म।सि राम् रामा समी - मला पिर मार्य में मारे मरने की बाजार नामहीपते होकिपबाव अपये मसस सिमसिमपोम को बोपरी अपय विमोय मा बामगे सम्मारकमाने से ऐसा पास होय पसन् विपद मे इम्पनि स्पचीस निपतितीत पर ॥ि॥ १-ौर पर कि मार दुसरे कायौ। दिन पीचे मन चोगिनो गुम्बामा | सपियरसनीपुर्व चतुपासमुहास पौर निता की नारे और पाकिम मोप्रशह पर या महीपते ।। में ।सि । सबा १८-१९॥ समी०- पोरस नेपथ माता प्रापियों पुरवामानों पर अपय मुससमायों पर बात और प्रब पर पपहीना पा सामोप वर दोन्ही हो सका। और पक्षपाती नहीं है जो ममुग्न भी धर्म प्रेम रस पर रह और यो अपर्म का रस पर बसाहा होय तो मि पौर में मुगमा साग और न मागमा भाषामा । और यो मन को एप मानेगा मनुम्ममा पापग्म का सत्पादोनों पिसाप मविपत् बात नहीं बना पा पाकिस्ता बा पर परी- पिये गया तो मी नहीं बम सम्म स्पोकि परीक्षा सम्म भामममममस औषणे अथवा मोसमेकर समता र वाम सबसपा ताबको पिसने पापवा! या हावाम भाप पाता है तो मात्र मी भापम भाप पासव रोच में मम्मा सम और पो साहीन अवाम का पमबाटोरा तास ममीन मरम्प, पेसो पठभकी ही सती और मोबास्ता पम्पतम्य परिष्यस भ्रान्त हावा. ५-उम फर प्रबार मापौर गोस्त सूभर महराम और माम बिमा जिस पर पुष्पा बाद में ।सि ।।सू . ।य... समी०-पहा विचरन्य दिये कि मोजमाप मध्प माप किसी - ममी बामही इनमे जामा मोतिपापि मम्पक मेंमा पड़ी और कमर समिपम दिया तो क्या ममुणमास परस्ति। सयत भी सस्तो कि परमेवर पम पर गनु परिमात चम्पाम्या नवी? इससभा बाम मश्तिहो गt इस रिमा बसम्म चपराप मुसयमानों सब मामय सावा रिमाप प पर स्पा महामन पुरस्ट ही मानतात सपाधिक रपमा स न गवारिक मारने का विषयमा गाबादप मामराजगत् सानिमारियकर पाप से सभी माता है। एमी पाँपुरा और बुरा पुलामी भी सम्मी ॥ ५ ॥ १४-पल कुमार सिहसास की दकिमानासपमा मपनी बीदियोस गुमार पाप तुम मासिए पहा मनापाक भुमसोममा मिस कमपि भारमा किनम मे बस रमस मिया भीरमा महामनुमा विरित र भयात् सम्बन व्यमा पामा सकिर नुमार सिपम म मुर बम रस्त मरिय निक।सि राम् रामा मी-पापविभिन्न मुसम्मनों पमत पचास किसी-रिसी पौषिमाप्परिट्रालयक 15.1 सत्यायप्रकाराम मी परमवीरसकी विधि पसारविधि सकि मात्रा में पत्र भाभमेनोपमुसम्म प्रसाध्यन्य समय और मस्पर दिन में मनमा है रसम अबममा हकमा भपको बाध उसने इस मुसलमान बायों में इस प्रकार मम मिपा परन्नुम में मौसमागम बम पाएकबावरा मेगममा किम स्लिीम भी समम मम हो भिमा भो और रात में मेने म प्रायो। भवापत स्यामा। दिनमा तपते पर महिम से विपरीत कि हिम मैंग कामा एमय॥॥ १५-पार मार्ग में पोरम सजो तुम मे मते ॥ मार मला दम रमा पामो समग पुरा पो तक सब मे बो कि असमय मौन रोये बीम पहा॥ रमी मिती निमारती मी तुम पर मानी तुम रमो सपमो में ।। मि । 14-11-11-11.|| समी०--जो प्राव में ऐसी बात न होगी तो मुम्समान माप इतन्य का अपराप जो कि अन्य मत पायों पर किया और पिय अपराधियों मारमा सब पर पा पाप है। जो मुसबमान मवमवन सम्म राम को मापते पांव जम मे स्वपमे मुस्खमान पीय प्रम माम् । मान् जो हमारे रोग न मानेर उसने हम समगे मो मते मागे मगार पर पते . पापी मन प्राति से मा होम्पे और मम मम मन मत पदों पर प्रतिमेव । पोरीनगरमा चिया अपराप मारा चोर मारियम मीशा या प्रम्पपी पतप मानी हमको गमिरेला हम मी म्सको पाएमा पटबईचर की और बबरमपिाल मै भीरमाईमरोज पुनकी हो सन्दीदवोगावर्षी शानरहित म्युबनी।। १५-पार पाने को मित्र नहीं रखवा ॥ बोगो! गेईमान बामे हो इसबाम में प्रदेशको।।मे।।सि । म समी०-या समाप्रोको सामिाही म्ममय होलापापही मुसम्मा पास करने में मेरा नवा और मामा मुसबमानों से मिया दोमव! मुसम्मानों के मन में मिले से होगा रानी। सो मुसहमानों होम परपाती है सबसेयरपर पड़ी इको विविध हवामान बात और ब इसम मामा मो सच्चा ॥३॥ २. निसको यो प्रमात रिकाम।सि ।। समी०-ला विमा पाप पुल ऐसे ही जियो नि भनाई या प्रकरणाम होणताकि बस स होय रसवीएम पर चातुर्मासमुशासा इस धर्म में विमुप होम मुससमाव योग परेचर मते और इस भयनोट पर विधासन पमम्मा मौ ॥३॥ १८-ममते तुम्स ससय को प्रो अपवित्री पद यो बनु समप में रनो समीप मत गमो बर तक किये पवित्र मामा रमो पस उस स्थान से समोसा ने माशा दो तुम्मरी बीविया तुम्बारे पिपतिपास समो विस तरह पाहो अपने त में तुमी मा बाब (ममा म) पप में पी पकायम । सि समी-अपारसस्वा पप सामन्य वियागमपी बार परन्तु मराषिों को केवी तुलनिय प्रौर म मिस बरस पहा मा पर मनुषों में विपपी प्रम पर है। जो उन पेमा थपप पर माते पण तो सब सपोरमे थपर सोम। इसस वा एप प्राक होम ॥१८॥ 11- म मनुष्य को प्रशार को ग्वार एवं प्रमा रस प्रहार हिगुम सो रसोय ॥म सि । ।भा ॥ समी०-भरा रामच(ग्पर) ने माया प्रयोरम निसने स्वर संपरभवापर मनुष्य एका खापि नही । पेसा वा रिन्प समयसम्या या सम प्रमान खामी नागपायाप गया मागवि म मम्म हापे से परे में स गमागमा रणर पने पम्प ! मोर पपरो रेप स्वीमा प्रत्यय पर साइमोभम। निमम तो रिपरिपोप सर्व प्रपिक मेपर और भाप स्पून होने पाँमा पावर नदी ॥३॥ . -म में सब ईमानब गप मोर मां भफिर दुमा पहार पाय - प जो चाता मार मा । म । सि ॥ " समी०-रूप खिनी पपई परीकीपास मपर्म भयचरे कोप समाजा एसो पततापपुरात बही र भरे मनुनी मार्म नहीं कियानिमा मामाई आरम्प पित हरामा किपरपय मग म पारा मोर कमि भर्मि पित प्राnि .इसी प्रपतमान में हमारी में रिपोकिएक मनुज मुहम्मा पार पासमय रसवेपरम्पमारमुपयों मामा माने रचयिनुम बाहित में सो निये ग्मनभाना चार उमामलम । मुरम्मा ममग्सप्रेमात पेसा। राम भएपमारमण॥
सत्याप्रकार -चो रुप मापमान और पिषी पर सब रसीके सि पो उसकी करसी मे पासमान और प्रमियी में समा सिपी ।सि ।। समी०को मात्मण भमि में पार्षमय जीसिपे परमामा उमा बिपने खिसे पहीं किया पर्यभम रसमे सिमी पर्व की मापी जस रसीसी ५ एमेखोबो एपी होली परिवही माता मंदिर तो म्मापकरे ॥ ४५-प्रशासन को पूर्व से बावीसन पत्रिम रेमेषा बस में मगिर रेशन दुमा प्प मिजप मना पापियों को मार्म नदी रिखमाब। मासि । .भा २१८॥ समी-रेमिपा परिप की पत! साप बसे पमिम भीर, पमिम से कमी भाव्य तापवो अपनी परिधि में मया या इससे मिति मन्यायी विपन के कामे पगोड और न भूगोश विष्य ती की। जो परियों को मानही गय को पुरमाध्मामी चिपे मी मुम्समायों को मापनावही लोकि धर्माध्मा तो पर्म मार्ग मी हो मा हो गर्म से भरे हुए ममुम्मों को तय होगी कम्पन ममता की पकी भूष. ५-माभागयौ रे रमको पात पहिचान सभिर पसर पर रम में से एक र उमा परे भिरमको इसे रे पास से पाये। मसि ।।सूमा ॥ समी -योगी गुम्समा समय मायमची समान सय माया ऐसी हो जो ऐसा काम रिमा लोप पेये ज्यको विकास ऐन र पि पीर मू पोपमो इम्मेवाबाई मारे पुणे रो रो पोनी ॥ 1- बीवि देव में समी-बिसरे गएपौति देता है वो सिमेन्द्रीं जी मे ममावि देवा रोप्प मा व चरख्य नही। किन्तुको पाप पोरबको पोतिष मोहोर और मात्र हो पता भासपी॥॥ -मविणेण माग निलोणेरवण बाकि एप पर सवत्सम ।मि। स समीप मापौष पर बम्ब रथ प्रपोल पर मा परम पसलमही है। परिसि सिमेणब प्रपात पुल्यमान्यता कोजीर मे प्रपपुलर भी गमभ माधितो बाल मेलमुख मोहोचरपरिपे ये रेपपति की चतुरंगसमुशास के किसी भूल किसी को मारा पताकी उसमसमापी पपही वासेमीही ॥५॥ - इसमे पपा और ज्या परमपरों में प्रारकि मशार की भोर बहिनिममें महापाती। रन्दी में मत रायपी पर बौक्लिो महारको समय से प्रारम देखने या साप मदों में सि । ३ मा ॥ समी०-ममा पा स्वर्गीय भवन इसमे ईभर पावस। कोई मी रिमान ऐसी बातें जिसमें से उसने परमेश्वर प्रकिया पुरवा मान सम्योपा पक्षपात पो मजो मोरिपा बरिस्त में सदा पतो" होमम पार पापीपी सत्पाई पनि पहा सम्म पम को पर भरोमामत की रात से परिवादियों को पाविलासोरमले सचिनो प्रेमी म सा सिपा! और मामा की रात में सबसमा रोग्य इस नियम कोपो वोहार परिबी बमोबमामठकमा नियम वीबो मोलिपे पुस मातो पाहा से धीरत में बामेयने मुसलमानों उस बीक्मिा से रेप और से दीरिती रिस्त में सपने पक्षी ज्वाईस पुनी प्रेयाममा रहण नही पपा मधिसे मुसलमानों मता मम्मी, समी॥५॥ -निगम प्रशार की भोर से रोम इसबाम है| म । स ।। 1८॥ समी - प्रसाद मुसबमानमा मौरीप्रयो। त्यगामी पारोप मत पासीनी सी उन भाम बाप्य तो पही णि मिमी पपस्वी भवन्यच.|| re-और पारिवा गम गेम रस माषा और मनाप किम गारमे । मुल समापिका जिसमे पर देष जिसमे पाता । तिने पर प्रतिष्प रप जिसणे या पाठिा समय में प्रत्येक पर परोसा है। पर प्रेरित मनिस में पीपल पक्षको मोरित गति में निमपसमें अमन्स भए देखा। मुसहमानों प्रविधि अमिनमा मिष मुसलमानों को मारा भस पारी पोर से पीसो तुम पासोमारता पर प्रोमा भार मान तुम पर गुमर अपमा माप पपाम॥माम ।। ४-५.५ समी-प्रेम्मा परमरियमम्पि या मोरोपमा मागिपरन्पोप सम्पिम मा परम भी प्रभासदायमा मावास्ति मनक पेचौविभीनसम्म विपरम्पत्य पण, ॥ सार संस्पायप्रकार 1-योसभासम्पब और पिपी पर सर रसोशिये चरे पनी सीमेमासमान और एपिसमा मिपम सि ।। सूतभा २२५. समी०-- पामत भूमि में पीये पब गाय के लिये परमामा उपसमिपये सिपही लोकिए पूर्वमम । उसमे किसी परा की अपेक्षा नौ जब सीतोप पश्मीर को पोती हवा पसही माता क्योकि ईयर पोम्परकर..॥ ५-प्राधा सूर्यको पूर्व से गाय सतू पमिम से पेमा बस जो अकिरान यानि र पापियों में माप पीरिखपाय । में । सिासू १ १२८॥ समी---रेखिने पर पविष्य की पत! सूर्ण म से प्रसिम और न पमिम मम्मी माता पायी प्रपनी परिधि में एम एबी इसमे मिति गया था कि ज्यान मोड र म स्पोर यि भावी पारिलोको मार्ग बही पतमान पुरयामों के लिये मी मुण्णमामोरेना मे ममतावा नहीं कि पोम्मा तो मै मार्च में ही हो । मार्ग शोधर्म से पुए मामों में बताता है सो मन तापी मूब १५-यावरों से सनी मत परिचम भिरपहार पर राम में से एक मारेभिरममे मुतो रे पास से पाये। म ।। भिसामा १ ॥ समी-योगी असामानों का भागमती के समान र राय देसी ही बातों हा कालानिमा पोप पेप सपा विपविमरमि और मूबोग मेमे इससे उसकी बाये परे रसले परसे परेमी ॥५॥ --विसको बौति ऐन है। म । सि समी- सिम सपोति देता विसो नही पायौ उसको बतिदेवा होणापत बरा पी। किन्तुको पापमोलसमे बौतिभपस प्रणामाईचा और या हो सकता पचपदी॥॥ -कनिमोणेपरस्प परियोणेएम काम पाय परपस में पि ।। ।। ८॥ समी०-मापौम पर समाप्रय पोप पासमा मा Two लपमही! बसिरमियरता पापी. एस्पन्न नाम वो बोलो पप पुस्तक परिरेम ग्मने मा एकिन वो गाव दुलाब भी होचमपहिये मे पेयाविकी चतुर्दशसमुखास ४५१ जसमे मिली किसी को मापनकी उमममममी पपी रोचकोमीकी ॥१॥ १- इसमे प्रची और वा परागरोतर पर पर परिसिव माणसी में सरकार पीमिया प्रय से भामरेखा सायदों में सिासू राणा समी-मला पावसा पावन ! इसमे इस भाव! बर्षे मी रिमा एसी वा पिसम से उस परमेश्वर विमा पुसक मान सतमा परपस को मारो भारिपा परित मे भापती" पोम पोका यी गप! परि मोम्म पामको Rो पम्त की रात परिवादियों कोषानिगमोमो सपिरोपोंगरिया और मामवीर में सम ममासम्प इस मिया होता! परिबी जम्मा तो मत लिनोर matkो म चिपे पुस मोवो या पदिश्व में पाप मुम्समायों रवीमियर और बीविना धीरव में सपने पसी मलाई से पुलोमेसोमा पसेपोला मी कथामा पिपे अनमो असापासममी ॥ १ ॥ --निमारकी पोर से दीप इसथाम है मामा समी-यमा मुसलमानों को पौरों प्रमही वारी परीष मय माहौसीमास समर माय भी जिसी पक्षपातीपापी. 1-प्रसारको प्ररिया मक्य मोम सम्माता और भापनि यगे ॥मा प्रमुख माnिt Pvण खबिसको वाताt सिमे ar ao बनिसको से मप्रति वारेसने दोसप में रेमोक पर हो । पनि मिराठ में पेपण चार पटकको गनित मे पकमि र मिस पी भात या स्व। मामला को मिकिकरो मे मित्रमा सिपल सुमारे बाप सायको प्रम भी प्रोम या पार ये मेरा मारप तुमने पर मार प्रप पेय RRANI सिसम् TH समीरकोप कमी भाजपा का समारोपमा भिा सणवा सामग्री रियासम्म रिमा पसाबो मी पापपरी ऐपयनित १७ जाति जोपमा भने ४६२ सत्यायमका प्रमेयम्मी मदद पानी हो सटी। अब रेसिपे पापाचवा कियो मुपम्मानों मशहर में नहीं रम्भे भफिर सपना उसमें दो से मी मित्रजन रखने और मुसबमाबों में तो सभी मित्रता रखने के लिये पदस सम्पमचरता से पहित मदेखी। इससे पाप पपमा पौर मुमपमान पोम मन पपात अविष्णले मरे हुए है इसधि मुसलमान बोग मन्पेरे में है और रेमि मुरम्मर माइव में दोषण किबो तुम मेय पर मोगे तो मातमारा परमय पर दो तुम पपपास पप मोगे उसकी पमा माप इससे विरोध कि महम्मद साहेब म भन्नाभर र यी पोखिये अपने मसब सिर मसिए मुझम्मर साहेब ने जयप बनाया पबमया ऐसा गिरिव होगी। १८ ॥ 1-जिस समयमा फरिश्तों मे लिपे मर्मम तुमने मारे पसन्द किया और पनि पिग पर बम की सियो में पि सभा ५॥ समी०-मया अब भनमा एप के फरिये और हरा किसी से बसे भोपही माने तो प्रथम मे थपे रंगेबोमो कि पीने माल पुरुषमा ये सब नही तोफत मिष्यमित विस समय ईसा और ससम्मानोभमत साना उस समय देशों में मम्मी और निदान माम पविक ये इसीरिपे ऐसे विपक्सि मत पगमे । जामिन पनि इसीरिपेयी पर सवान्बिो २ ऐसे पोस मामी ने बारिकी सोपी। ५ -समतादोक्स दोव्या॥ भफिरों बोरिय इस रोज दिला, र पुत्र मन प्रणा ॥ ।।मि। . समी०-ब असममान बोम मासिकप मी नाही मानते तो सरा किसनेमा और सोमवे सेमेष होमवा। इसका रस मुपवान स्मत कम में मौनी रेसो पोफिलिप पाव भाव मोही से मना दिला मायामामो अपने माँ बाप सिमा मेयमार रोप ऐसी लबो पोज देख प्रमोद रम्म मापन पोन्मीमा होसम्बनिनु च्म मधुण मोरेमा प्रम नहीं करता । १-पतमो वा गुरुब रोपा कि महर इमो वीष मार परिश्तों के साथ काम सि ।। ३।१२।। समी-गो मुससमालों तार TAR फरिलो सान देय पातो अब सुतवमानों की मादी गुरुपी पाहोई और होती वीरेन्दो साल मी देवा । इसलिये परमतमोम रेमू साने नि मस प्रमालकी॥१॥ १५-और भत्रिों पर स्माम॥ पाद माय ग्च्म सप पाचौरमाणा॥दो म महार मागे में मरे बनो प मरमानो
चतुर्दसमुखास'
पहारकीरा पास भनी । म सि ।।। मा ।
१५1१५॥
समी०-अपरेखिने मुसलमानों की मूब कि वो अपने मत मिल
मके मारने के लिये जा माया माय समेवर मोजाना इसी
पात मान पनि मुसहमानों प्रभास्पा सोभि मुसपमानों
म पालों बाते और जरा मी मुसबमानमा मोह से पंसा दुष्प
रोख पातीमा ऐम्म पापाती है तो पर्मामा पुसौ म पासमीप कमी
मी साठा ॥१५॥
२३-और पारदमको परोपर दो मता परन्तु अपने साम्सी मे
मिसकोणे पस प्रहार और उसके सूत्र के साप ईम्ब बामो।।
"
मिस । प्रा
समी०- मुखमाम बोस सिपायजा किसी साप ईमान भी
बा पौर
भिसादी मानते है वो मान्म सोलोईमान
में साप परीक भिमा महा मे साम्म साप ईमाम पान्य विम
सौ से सम्बर मी गरोगमा पुनः डायरीमा मेक इमा पनि
इसमप्र पर समयबाप कि माम्मर मोरो शाम्बर होने पर किसान पाय
परिये वो पप्रमोवाकि मुहम्मर मरेको हो प्य भागलप्स
पनि उप रस साम्म कि विमा आफ्ना अमीर बीम सम्मान
मम मममय ॥१५॥
-पेमापो ! पोप मो परपर पामे को और पर्व में बने
हो मारो कि तुम समय पामो ॥में ।।सि
मा.
समी०-पानमा और साम्बा दोमों पपाईगार बेगो पपई
की पाबा रेतापविमा करवा दोताप माममाडा से
मो मेम्परा पास है। मपर्मपुत चरिलेस
यो प्रथम पावोसमा र नयबर और जो हिवार पर जो
११-पेमारीमो मार चौर र रमणाम माम्म्म
पील में पय जिनमें नारे पती और की पहा प्रभो॥दो
पारी और रसरसूल की माम मामाचौर सकीना पारो
पाप पौष गोपी यम में पवाण गराए पर रामबाप भये
यथा दुलोम सिम
समी-माही मोहम्मर पारेर समाप्रपच रोमविधी
पौर र माल ही में शिव और रेखो तुरा पा सदर पर
मानिस करिस्त में रसूबामनिया सिसी एम्स में
मी मुसलमानों मसलन बनी पो मारो मन बी पी १ पर्ने
भोज पुनक में नहीं ले सती ॥ १५ ॥
४५४ समामकाप ११-ौर एकासगुबराबर मी मशार भम्याच पदीय बो माई बोकेरसमपर्मग्प रस ॥ में मिशस् ॥ण समी-जो एक सरेत मी जरा नाम ही मानो पुरुषको दिएष गया और मुसम्मानों का परपात क्यों प्रवपक्ष में पिगुप का स्पून मोरे हो राप्रपापी दो गाव ॥ १५ ॥ २.-भाव मे पास मे बाहर निभाते है तो रे मनेसियन (विपरीत) सो म रमको स्वार सिता है। प्राशर सकी कमाई का भरे रामे रब्य दिनाचा दम थाहत हो कि पाय गुमा किये इरोमा पर मामोस सिको मार गुमराह रे रसको स्यापि मार्म पापा में समि। मा ।। ८८ ॥ समी०-मोपमा मामिल होता चमात्य बाबी यो संश बीसवीवो सिखने माय मम और बो मुस्खमान यम समये पमये से पुरानो मन पोषों को गुमपा मारे तोमा और प्लान में ला मेहसार इतन्य मेवर सक्ने काम सोय वाव कि मुसपमानों को भी बोममयी कीtो इस पवित्राको योगदान बम दिना ॥२०॥ और अपने सामों at न पा हो और या पाचो मारयो । मुसलमान को सुपरमार मलय मोबसीबोको प्रचार मारपोमा एक पान मुसमभार माबोगन्य है और लप्पा मोगा को मोमो ग्स औम से होने और मलपे को पार गरेको दुरमा की प्रेम सेऔर बोई मुसबमान में बाल मा अप सवमा रोगप में येग रस पर ममामष और मातम मिसभा १-१॥ समी-अब देखि म पसप्रवी बावको मुम्बमान मागेदो प्रभो मरग्रहो और मुसलमानो र मान्य। भूपतृसहमानी को मारने में पति और को मारने से पहिरत मिडेगा से परेशाने समें पचा परिचे पेपर का ऐ सम्म पेपर पे। मस्यिय हामिममममीनही पैसों मनदोषान्मोर पेसे प्रामादिक मतों मिमानों पम पम मोज सब प्रों को मामय साप पॉगि उममें सम भीममात्र मी यहाँको मुसबमान मारे उसमे डन मिसे परिपूसरे मत परेम। किससासन से मारे तो वर्ग मिले। भवमोहन दोनो मतों में से किसमे मा मिस पोdि फे एक मारिप मोवोरम मठ स्वाभा मे पोच सब मधुनों लिमसमें मर्म मार्म भाव में प्रमों के मार्च में चाय रोके मार्य से माम पपwिोम || ।
चतुण्समुशास ४१५ २५-ौर शिष मसोने से पाप मिसने रस्म निरोप लिया और मुसबमानों से विम पर किया भवम सको पोजन में मेगे॥में। पिशाभा । समी०-अप देखिने सप और रसूख की परुपात की माँ मुरम्मर सब भारि सामने पे किबो हवा के माम ऐसी एम म बिपि तो अपना मपनमा और पार्षद मियी भावमा भाग बरोप इपी से निरिव होगा कि आपमे मतमममने में पीये और मात्र प्रयोगमा भिमरने में इस रे मन्यत पेइनकीमत अमाप पात पिानों के सामने मी महीरो साता॥५॥ -प्रहार फरिस्तो विवों रमूग और मामा के साथ प्रमे भिलप गुमानिस बोका ईमान का पिन अफ्रिा पनि ईमान बापे पुमा निगो मौरस में प्रधिको प्रयास मी मा म मापौरप मार्गरिखममम ।सि । ।भा 11-12 समी०- अब भी तुरा पायीक र सवाया सागरीक पते साना और उसके साप व गरी मी माने जामा पा परस्पर विस बात पण तीन बार मा पम्पत् सारा पानी प्रवा! और पीन पर असमरे पर सम्वा रियाय वौषी पर भाप नही दिखवाय, गरि घर पर भी सब होप में दो महुवीपासपे॥ ॥ 1-किसान पारपुर बागों और भपिरों जमा कममा बोजन में । बिय पुरेखोग पोध वेभा और रनोप घोच्च ऐच॥रे ईम्पपरो! मुभवमानों को पोष दिनरी मित्र मतमो में सि।सूमा।।100॥ समी०-मुसबमायो रेरित और अम्मलों के रोजन में प्योभ स्प प्रमाण पानीमाबोपुर पोगों पोते में भस्म और मकबोध देखी पेय माहम से भाप रहे कि यो पोषात रमसे जाम मर बोरसे मेडकि- (पारशी शीतला देवी मायबरयानः) सेमे मिटमा विना निमम उर धोया रिसले , रामक खोप घोणेगावोगावामुपपमापो रस मित्र और मुपामा भिडाण अपम्मिा गसिहोमwimm ११- पोपो ! भिवगरे अस ताप सरापोर पैगम्म अपम म गम म ईमान मामा ॥ महामार पराम मा। . -1.1 ॥ समी-स्पन धान्ना पर ईमान पाप विशो ईमान में भाग रामक प्रात् पापमहा! ममा एक मापक पोभी दो रमपाल पारापम मोबी
सस्पापप्रकार
समयाभी सदिशी सिने भी एनेता इसे विदित हो किन
एकप ममानापी पितों ने पाया है ॥ ११ ॥
१५-म पर राम विमा पप सुपर बोए पूम म मास विसर
प्रहार किया और पसर पाये गला रे, बीमारे सर पे गिर से
सींग मारे और परीभाषामा ॥ में सि ।स् ।
समी०-या इवने दोपमा राम प्रसाव से पट ज्या विर्य बीप
कोपी पनि मुसममा प्रेमाची! इस परोप मधुप्पो की कापी
मकीही इसे इसम प्रमाद भी नही ॥३॥
1-ौर पधारने प्रचारपार यो ममप में तुम्मरी पुरवं एमय
और में परिवों में मेवग।। मे।सि पासू मा १॥
समी-पापी ! मुसबमार्मो सास में नमी व पिरोपनी
हा रोग हो बिरोष होब वो पर पो मापा ! और रमोलों पमवा
किमारी ईमाम मे स्वर्ग में मेयर पारित होणारा
माम माम्मर योग ने प्रपन्न मतपय पा॥७॥
१५-रिममे चाबीमा करवा विपको परेशयो।
सकिसी को मौ । विपाप धर्म रिचा । म ।मि ॥ ५।
भा 151 ॥
समी०-tubae जिसको चाय पापी पायी मुसपमानों म
सा मी तिाव भभम पवाबो पेय हो नि पहिस्स पोर पोजन में
पसले सोकिया पाप पुरुष भये पा एषा बोर पापाप रे मी पेप
नापति पीब राती और किसी मारवी उसकी मला राई
मेन्मपति से दोवीप पर बह ॥ १॥
-शा मानो मामी और भाग माबो रसूखी।म।
सि.। ५।
समी०-२दिने वा पर उमरीक होने की रिहा
"गायीक मागमम॥६॥
-प्रमाने मार पिबोहोउम और नियमात
उपवासाप । मसि
समी-किस एप पापोभनमा मप यो प्रपोकोमने।
पाय परपमा कामे की बात जिस पुना में दो पर और
किया पिरमा किनु पापमं मममी पप समरिये
सिमी भौर बाद के लिये पुराप पाचपमा रचित
मम्मा पचपनप रेपो भी वो मी हीरो सम्या॥
-और रस मनुष्य मापापी कारोबोभमा राम र
गौरमा किमा । परन्तुपा रस प्रारम्भीकी
वैमामाम्॥4॥
1 १-१८॥ चतुरंगसमुहास समी०-नस पव से मिररोपी कि मुहम्मा सोनमले थे कि मेरे पास उसकी भोर से भाप व्यवौ वष किसी दूसरे के मी मुहम्मर देन पास पाच मी कि मेरे पास मी पाप ग्नी मुम्मो मी पाम्म मायो इसको त्यो और अपनी प्रविमनाने के लिये मुसम्मन सा रेप पाच किमा होगप ॥१८॥ -ल हमने तुममे सत्पत्र दिया भिमरौ प्रवें नई, भि हमने फरिश्ता भाभि परम सिया मो, पास मोब सिनामा पातु शाप सिमा भणयों में से नामा। मामा म मे पानी मिसिने पेश किसिमना म पिमा म मैं उससे अपये मुमने भाप मे मौत रस मि से स्पड किपा मापस उसमें से स्तर परमे पोम्पनी कितसमें पमिमाथामा सरिक कचरेकिकराम से ग्यास नियम दर दिवे गलों मे॥ भास इसकी काम कि तूने मुफो गुमग विमा अमल में उसके लिये at सीने मार्ग परगा।। और माप तुमको पनयर कमवतार पाने ॥मा दुर्दशा सापा भारतबो कोई इसमें से वेरा पाम तुम सब से दरोगा ने महम ॥ । सि ८। । व्य समी०-अपरेम पुजा वानरे भरे एक फारिस्ता सा किसी से भी सपा और सपा सके मामा पमित्र मोजमसम नि पेसे मी कोको पासो बम र ममेयखा पम्पमेवाडोर रिप। सुराकी पाबकी भूपाप पो सब पामने पायौरा वामको पमने बसा होने से परिवार मी शान समापशवब मसामयीकाले मुमे गुमन लिया इससे जला में पवित्र मोदी पर्दसती चल सब पापों पचाने पा समभाव साधा। ऐसा डा मुसाम्पको महोसता पन्न पिानी सामग्री और परिवों से मधुण पाप भये से पापारी मत्सव मादित मुडमायो । सीने मिरपाल इसमाम महार पसरग्रीमाये॥ -- विश्व तुमा मासिक भारी मिलने पापमानों और पुस्तिो मे कारिन में मप किया शिव्या पमाणे पर। दोमय से अपने माविक को पुमरो।।मसि । .. २४-१५॥ समी-मा बोका दिप में आपको भावे (य) पर्ना स्मर चाय म मिासम पर भापम पग पसचिमार और म्पकमी हो पाइसब होने पर मी पी मा सम्वा मम्म चया पिर बोपुपये से मुफ्ती सप पर्व मनापास्त इसमे अपन बानी से सम्म बहिबा दिलों में अय् क्यचा मदिन मय पर प्रथम किय यो पर भी गया सम्म भर मा यो समय पर .
सत्यार्थप्रकार सम्वामी परिणी शिभी एमेवी इम पिरत बोशिम परम बनाया पी पिचों में पापा ।।१॥ १५म पराराम सिा गा साबो स्पा मोस मिस पर प्रहार किया और साबो पहा , ही मारे सम से मिरजे पींग मारे और परमअचमा । म तसिस।भा. समी-पावणे हीपाएम पापपुर से पा पनि दबाब मेयी चार मुसबमानों में बवाय ! इस बाप मधुनों मको पर की गहरी इससे इसम प्रमाण मी पाही ॥॥॥ "-पौर भयाको प्रचारया रो मन में तुमारी पुरादरसरम और धर्म परिवों में मेनप्प ॥ में 21 सि ।। ५ ।मा समी-पानी। मुमबमानों बारे में समीप स्विप ही सोमो विरोध हो रभार यो मागया और सनी पामता बिमारी पुपमा मस्र्य में मेवप्प ! विपित होखरेसा नाम से हम्मर साहेब ये अपना मन सापा॥.॥ १५-निसको चाहमा मता मिसमे चोदुखदेव ॥ जस किसी को भी वरिल पर्ने विच॥ में । सि ।। ।। भय 151. ॥ समी-प्रताप निको पारवा पापी मय को ही मुमयमानौ म भामा वाम काम भयो ऐसी हो भि पति और योगाम ज्या गोवाकिय पाप पुल मगच मा बील पापीन, सी न्य पेनापठि भाचीला कमी और किसी ने मारठी र मबई पुणे मेधपधिोवीप पायो । २॥ १५-भार मान्ने प्रहरी पौर भाशा मागे रसूचकी। म सि. ५ समीति पाप नसक होने की शिपमें 'मावा॥५॥ ५-पबारेमाप विप बोहो मारो को निमम माना अपरगण में सि .।।मा ५॥ समी०-कि प्रमोभमा मानो पापी प्रेमाचार बापौ। पपपमा बाने की गाव शिव पुरसत में रोपाईम मौर भिमा पिसा कि प्रपर्णको मापमा पाप पुराने पिने मिासमा और सपाइयो चिये पुष्प फ्याचारसमर्मती सम्तमा पचचरमण रहेको या तो मौश्मनी हो समय । ५-पार समाप प्रेमपिक पापी वीबो पारपराध पी और मीकि मेरी भोर होकी परम्नुपी र पारदी की पई पर जोमय लिममा स्वाम्म जिसे भारी। सि.। ।भ्य ॥
॥ पारणसमुन्नास समी०-कीपर में सिधो कि योग अपने मानिसको पुमर चोरी २ धौर पर म मरण प्रभाभीप भैग सी पर सो! और सौपा गया एक दूसरी बास निरोप भी म पाव समर पावले समान हासोपरि कोई पाव भ्रम पनि मिस जाप रसभे माम मे दो परिम्य ही। .१॥ ..-४ मते तुममेट से मरे पछे भवार पौर रसूमके और सोमशा से मसि ।।सू । मा समी०-सेलर मचा महमें मारे और रातम पाम्बर पौर ईमावर मी बनें, पर मोमाज की म्पती और महारभम पतपाठे पौर यमति र मम मी प्रवे सार 'रम मा दारा" मवे मस्प मौनी ।सपोरसम मत पम्पपम इसमे प्रषिकमा पुगई सरोमी. -और मटे या पकिरी की मैं तुमम साप रंगप सप माप परिस्तों के पौष भामेयमे ॥ ममप में प्रतिरोपियों में मब पाय पस परोपर पलों के परो रम में से प्रत्येक प्रेरी ( सम्पि) पर ॥ में। मि ।। दास समी-पापासा जरा धौर से पाम्बा रपादाम से मुसब मानौ मत विप्रतिरोधी गम्परेचर वन पाशा से समय गांग मारो पोय पोयोनीको भरने भसाप पर सम्मठि से ऐसा उप मान्य पम्मी पर बनेगमपमही परि रामसेवा ऐस्य सुशाम सर पर हम रमसर 1..।। .:-शा मुससम्पनोस्पायोमे ! गाईमाबमा हो पुमाय मामो पस्ने मार और यम रम्य ॥ गोमो इम्पम पाने होमती मोबगरमर चौर मरीमो अम्मका अपनी मेरमभप्रया पसर और मगर भगा मम पर पोम है।मासि ।।म् काम समी०-त्पभमा मुसलमानो कपण्यो एमामा धर्म भन्यो । यो सब मी माथ गुपम्पि पुमर व मुष मम्यारपितापी सम्पप रमू समय गन पुरीप पीर परम्प प्राय पोरोम विमा भने प्रमको पाप मन मा मिस पोख पार महोममा भागमभन भर मम भागमा परी का प्रपों से गिरे माम उपमपम मि मोपी पपपप राम बासी पdिill.॥ ..- सापक पबिपरिरी मरामा मुरगारो पपुम सध्यार्थप्रकार मामलेदो भरमममम मणौप विम्मा सैर सपा और पेग प्रय निय. ..-मस मिो पृपियो पा भाषा करते । म समी-पप तो भयो। परन्तु इससे विपरीत दूसरे सपनों में रिमन्य पौर फिरों को मारप भी दिखामोप्लासर विमपी इस पर विदित हो कि बब मुहम्मद सारेच मिस एप मे व नावे पम्पाप रचरोम और सबवे रंगे तब माता मधोम (सी से पा सस्पर पितरोने दोमो सास ही ॥1॥ ..स एकही पर अपम्प असा पर रिना और पप्रमार था प्रमा।।4। सि ।। ...॥ समी--अब इससे मिलने से रित होगी कि ऐसी मूली बात पौर माम्मर साब भी मानते थे जो ऐसी टोली पिर पड़ी ये बाकि से पांच से देखने को और पब मे पुरचे को अपम कोई भी कम समय इसी पारद्रयर की बावे ॥१॥ •सहममे उस पर मेहर समय भेयपी पिच पर मैत्र रोह ॥ बस से हमने बरपशिप और ग्राहकोरिया परिवा में और हमने पपी इमामे परिपाप से पार रबर मिणा । मिस पर मम बिगिसम है और रसम परम भी मृम में । लि सू.।।५।11-14॥ समी -अब किसे मई प्रखरतो किसी ने नपरे कि हम तुम परमों को मारने के लिये मेपि । पेसी प भी पती, मया ऐसा पर पाती कि एक अविशप और दूसरे को पा रखार्मी स्तों भी को परे मतों को किसिम रमाजी मबुम हो मम पतवारे और अपने मे पच उसमे परे म पण मत वो समय कि किसी मत में मममुन्न पुरे और मरे नहीं हो सकपास मिती माय मा- मूमनमोस्त रमपीन बोलि रामप मम दोपप। पा मम मन मार पाक बिसो समय औरबोलपत्र माग भतो पता चोविसापामस्य मेरो ॥५॥ .1-मसमे सम्पबच बिया उसके मालिये पपलकी और एमे परमाड किमा मिर पसा मूसा पोय ।। मिर.u॥ समी--बोरे में परेशानी से पता और कसे मम्मरख भिख मारा इस एमप ऐश पामर सिी मेलो परी रिपसारमा दिसा होने से पाप मापदे मोमबह 10.॥ ..-भार अपने परिकमेपोषण और सगे मन में हम बीमा मामा पुगने और वामप्रेमाला ..।। ।
पतुरंगसमुशासः समी०-भीमपम में विचार किलो मापा से अपने मानिसको पुपर गोरमी २ पारे । ईभर म अाप , परभीप भैम सी पर महो! और और मोमोशे एक दूसरी पिोप मणीप पर प्रमच पावसमाप होतीपदि कोई त मम से पिम विष्य वाप उसमे मावोवो कविता नहीं। .१॥ 1- मते ? तुमने अपने प्रमा और रसूब और मोमासे ||में । सि ।।स् । मा समी०-चोर मच गई मा मोर का तप शाम्पा और ईम्पबार मी में पापोभाव की पावर और मकामगावे और सभरि हरे मम मी मते या और 'रथम मय हमारा मन मीही। मोपस मरमत अमर इससे प्रपिक कोई यो दूसरी होगी ।..॥ ..और पारेर पकिरी की। मैं तुममे सहाप एप्स साप माग फरिस्तों के पीछे पास ॥ अमाप में पिरों के रिकों में मन पदप बस मारो पर गांगों के मारो ग्व में से प्रमेक पोरी ( सम्पि) पाn में । सि ।। माय .I७॥ समी-पानीबासाहरा और से सम्म रहीम को मुमक मानी मन मे मित्र फिरों को बाबो और ह भाषा रे मम पर्दन मारो और एप परेपोषाको भने मसहाय और सम्मठि से ऐया उन रेशमेश्यसमा सब पब मानतो मीण भनी परिकामहो तो ऐसा जमा रम ए हम उससे दूर 41..॥ ---प्रामुमबमाणपोगो ! जो ईमान था से प्रभामा laR मोपचे प्रवाह र प रसूप ॥ ऐ गोगो को मापामे हो मीमो मा की रसूलो मत गेरीमो अमानत अपनी ॥ और मन काखा महार और प्रकार मा मम ममे पाप १॥मासिस् । समी०- भार ससम्मानों पापातीको पेसा अधर्म प्रवाहीमो म मब सीमा भौ।त्य उरा विन्ध पुस्मो कभी मुम सम्खा पिर पसरे स्पप रसूबने सरोकमा पात पुरी व नहीशरमनपा प्रशान्य मानो रोप्रगापि रसूख और पपपे प्रमाय चोरी कोषमा मात्र समीरी बियामा ऐप पर अधिा और भर्मियोको समयमा पो मन मय पार गो मम भनेपो मोरारीबी भोर अधर्मी हॉपी। इससे पाध्यम समय शुभा ही किसी भी पासपमाप हाय दी ये ऐसी पपस्य पर्व पिचित मी हाती 11 --और पको रसले पहा बिरोफिलय प्रमोद म पहिरो पौर राजे दोष दमाम बसे मशारभार सो सम परिमेश्य मुम 11 - अध्याप्रकार पे किसी गल से निकाल पसे पार पारिस्य रसम और पले रसूचके।। सि । मा ३५-11 समी-ऐसे अम्बान सेगमेशा पय मुम्बमानों से मिल मन्तिमा दूसरा कोपा अब रेडिमे मनाए मार और रसूबोपचे मा पार पपपन्न उमेरो प्रश्रम नहीं है। हर मा में समरिपोसार बन्द बाबो प्रमी और ऐसे हो र पक्षपाती बममा मपनी लाई में म्यवा। बोमकी कि पेस पुतला ऐसा स्पा और ऐसा साम्बर संसार में ऐसी रणपि औरणम्तिमा मान्यों को बारेमेसिपे से प्रापा ! बो पेसे २ मामा में प्रचपित परो तो सब न मानन में बन्ध रहा ॥ ॥ ८ -और मीरेचे पर फिर फरिस मरते मुख मोपोर पारें सनकी और पोचो महापपरामरको पास से को मात्रा और हमने पायोन की प्रेम प्रेमो शिवा ॥ौर परी को पो मोबोममम समे। म । सि ।। ५ । - . समी-नॉनिमयमा स्स मेम भावि और सारे मित्र की पुरंगममी फरिहासो गये। और अपये सेलो ग्रहमा कोसा मारबपक्षपाती हो तो भावना भी देखने विससे ऐसा मही दोष इसधिपे गा मत माको पोषही। अब देखिये पसी करी ज्यालोम प्रसको पमित मस्बोंबिवेहुलाकर्म मो। पेटी पर किया की वहीं हो सकती। फिर मिले। किता चाह मौर परी ऐपौषतों से मुमसम्पयों से स्पा और पारि सएप र सो ॥८ ८-ऐपमा विकासषभर मोमिलाने मुसलमानों मेव्य पर पि॥रेची सराय प्रांत कमरे मुसलमानों को कपा मपाई, बोम में से। पारमा सन्तोष बस्ने बरे हो पपस में रोपी काममो समय से किसी मबार पति परमो पाम सेपमा भये पणा पाह।मे।स मा-१९।५. समी०-मसा एमसी मार पिण और पर्म कीबो बाप पामे और यो पालाप मी रसौभ पर यम पांच पर गे प्रय में गम्तिमा भरपाई मे माये और नाम के पानी मेधावले पौर पिसाराम माया पाविपरपस जप वो पति किसी मो मारमा गोमादी होती पसोपों पे माग रयानम्मी की समय पर--सप ये वापरले मापसापरम पुस्प बाऐ पोगो ! पो ईमान बारे दो मत पमो पो अपने मे पर भार अपपेमे मित्र को चतुरंगसमुहास - पोखराको सामान॥ निम्बरी गारमेस्सी अपनी मर स्व अपने और पर मुसनमामों और ग्वार बल्म नही रेय उममे उसने और माप विप रमों मे भौर पपी सामकिशन माम प्रश्न पारे रसके कमर और पबाई भोग्न बोगी से बोईम्बद्री बातेमासि, स् ि। भ्य १२-१५ । २५-१०।२६॥ समी -मषा बो बरिस्ठपयों के समीप प्रधान पर हो समापन मोमो सकता है। दो सपाक नही दो वर्ण और मापात मही हो सम्ब। और अपने मो, अप माई और मिा प्रयोग मन्बान की बात है। जो पुरा पोण में नमामा परन्तु उनकी व्य समानी पीये ।बो पाप मुसबमानों पर पा सन्तोपी और सबके सावपिपेपरम स्तर का पोय हो प्रम ऐसा क्यों नहीं ! मार को प्रभम अफिरोप देख और पुनः रस म्पर माता पाठो भय मापदा! बानिय बसईईमाम सुश भी बन्न मन्या ! ऐसा को हमारी मो से सपा निवासियों क लि. || Ex-और इम पर देखने पसे। पर उम्मे पाकि पुंचने तुमने प्रखर प्रमान अपने पास से च हमने सपा से॥ में सि ।। साधा १२॥ समी-प्प मुसम्मान होईन की पुचिप म गये है कि अपरे एप या मुसलमानों के पाप से मान्य किसी मत पर्चा पमा देयोलमरे यो मनुष्य ईको पनि मुसम्मानों में पापी भी मिपाएपरि ऐयो पोप पारी मगर समाको सीमामा रोती है। मानको परिमार मुमबमानी मो इस नियामक मत मा॥ 1-पतिबाह मे ईमान पत्रों में चौर ईमामपरिकों से पीर पतीमीचे रस मार सदेव हमेपली पाच रस और म पशि पर स्तिो भयो और ममता मा की मार सौर पर किया सुपर पानमा बस यामपसे या किया प्रामाने रममा पि, । ६.11.1॥ समी०-पराबामपी पुस्सों अपने भवधि बोम रेगी पोधियो ऐसा माम मरेते तो कोई मुहम्मद सारेगार में सता मोम मत पणे मी किया है। मनुष्य मंगको पप में मा पिहोवे। परन्त बाको किसी से माममा जिपीप अपमन्यौहारो॥॥ घर-परन्नु रसूख और बो पोप कि साब मा मात्र अरेगिसर किप मन पपपप अपये ज्यान अपनी और नदी गोमा सिर मनाई है।और मोहाली मनाये सर रिसों समोरही गाणे॥ । राधा स" समायबाट समी-पच ऐरिये मतमममुकीचकोमोजो मरम्मर सारेषापमान बाये और मोदी गरेपुरला परत पायव पौर प्रविय से भोई नहीं! सारे मोगर होगामी से रामन अपयष पाप पये में कोई मोदी फितुहीम अपराध है कि राम पिचरीको माईदिरों पर मोहर शाम रोग स्पितिमा बा भन्नाव है॥५॥ ८५- मार रम बात कि पकिराये पर्चात् पारी और न म को माप उसके बाद गुन में लिय महार मोर ! अपवमानों से चमकी और माजरकोभर किए गोपहिरवाये बीच मार्य प्रभास मारपेचौर मा बागेम।सि ।। ८.- समी०-पानीका मुहम्मद पोच! मारने दो गोटिये गुसएनीकी मानी मनी कि साम मध्य और रो पक्कि पापही पत तो गुस्थानों की पायी । पापये प्रची सौरासीम कि मुसबमानों के पप सबसती प्रसादकम समन और बाकी को माप कम रम निरंची मनुनौपचे और पब से मुससमायों मा पाप पो रैम और अपनी माई में पासपरिमारपामि में कृषित होय ॥५॥ -ऐचोमो! बो ईमान बारेको सम होगा कि पास हमारे जमिनो मोर परिने कि पाच मारे पपीते करे सामों में परेबान पर दो पानिपी तोमगारो और "विध पमते ॥ १॥सि ।। म् ।।१२।७॥ समी० देखिने मी एक दिपासात में सा मुसलमानों को सिबमिरे पड़ोसी हो पा किमानौबसर पार कमी सर्व बात। ऐसी र मुसबमानों से बात पर सौम्य ऐच से। अब तो समसमान समयमा पानीको बोरो मुख बचारे॥ ८-पिन सकादिर न्याय मा बिसवे पैदा किया भासमायो पौर प्रपिवी प्रेरक विधिमार पनामा पर्यावरील काय भिम कौम सि111म् । ।३॥ समी-पासमान मामय एक मौर विवापबा मान सामान्य विको से विश्व पतिपयकता पराविव को भी बता का। परमेधा मारिन कपन पर सोमो 'हो मरे परम और गय" समाप में ऐसा विधिक विषम्मी कमीप पसे इस पारिक समारोपम्पपका वो बसर मत माता चरमर भम की मी प्रती तोम्पप सा मनुपरे पानी ।
॥ बतुरंशसमुशासा लौकिको सीमारवा पर भगा ! इसमे विदित हो कि समबनेपाहेपी गोपी दे पपुलक समामा होमा ॥८॥ 1-शिषा और एप पछे मुसबमानों में सि स्मा २०॥ समी-पापा मुसलमानों मण्यम यही पौर पक्षपाती है। मुखमानों हो पापा भन्न मनुष्यों पर नही, परि मुसबमाष इम्पबरों को भोजो रम पिपे सिता को भारतब हो पी और मुसलमानों पामिनी मे उपोय ही प्रब को पाप हो म्पहै॥1॥ ।-फरी परे तुम से और तुम में से प्रचार मों में दो प्रमान रम बाभोम्मे तुम पारे साम ।सि ।। ।भा समी०-सी की पाषा भी तो पर्व होगी और बो मत पौर म्पबता दलासुपूर्व रबी और अपने निपम बो कि माप न पी गम तोपबीमा सम्प 1-और मागला ऐ पब्लिी अपय पानी निगम और से प्रासमान पसर और पानी सूख गया ।। और पे म पनिणयो रमी पारी पने हमारे बस बोष पो उसने गौच एपिथी महादतीने में पि "स्मा 10 समी–वामपन की पोसिबी और मामा कमी भएम ते पायाखाली मी है तो भी होम ! हामी, बोरे, परे परिमी हो और राम मी पेपेच विचमा म मची भीमा मनी पर चमन मोहै। गोपनी tो क्यासी पल पा राम में मी ॥७॥ ११-और सब गयो गैर रस बर क किसमान और पविली ॥ ौर बोल मुपगी एस बीच के सा रहने बता पसमाम और पश्लिी।म।सि पाए राय १८-१॥ समी०-बोगसमोर बहिरत में मात्र प्रमात् परबग बाप पिन पासमार और पूपिया सिभि रहेमी और पप और परिवार परेकी असमान विती एक प्रषिक सरा संप पहिरव पोस में पीपेसामान परिपायों महोबोमर प पिायों ही ॥१॥ 1-पार माये अपये पम्य कि पेपप ! मेरे मै पात्समें ऐप मासि १२ १३।१३भ्य.. || समी०-नन प्रभाव में पिता पुरम संपाप विस्य भी मौ? इरिने पुरवावमापा भी किसी मनुनये मम्मा भइमिाल दिख रिच॥un सार्थकाम्य समी०-अब देखिसे मनासिव किती मो मुसम्मा मसाप ईमानदारी और मोनही बारे!प परमात पापस और परिण सेसीई मही! बसाये मोबर ही सम्पदरी तो बम प्रपपप पाप प्रने में कोई मौदी मिताहीम अपरामवाकि उस विनी मचाईदिरों पर मोहर बरोक रिपकिराया सामन्च M॥२॥ ८५-मात्र पो से पद कि पतिभेतू रखने पर्वात गरी और एर मत गने सप ग्स म एस में विश्व प्राधा मोग मुमसमानी से धो सकी और माप समोर किपरमवदिस्तीपमे पैच मार्म प्रयाबस मारेपे और ममपी । म २ मि"।।। समी०- पानी बर मुहम्मरपो! अपने तो योकुरिने गुसमानी की मामी कमी किम्मर मरम्प और सपने पनि प्रम पदोबत हो गुमनापासानी । मापने प्रची सौगारी सम्पई कि मुसलमानों के आप मे मनसायप्रस मेन्यबम प्रमा और सबसपी को मरप मम पिरंगी ममुन्नों में स्वर्ण रेवे से रप और पाप से मुसलमायाम पाप धो रेम और अपनी हवाई में पाप हुरिमा पार्मिकी में भूषित हो पा | EN -ऐ बोगो! बो ईमाव बामे हो यो म मोपों से कि पास तुमारे किरापोर परिये कि पाच तुमारे सवाल नहीं देने पर माम पर एक पर पदो पर धिरेन्द्र तोपा मते और पणिपा पमनाम सि ।। ।। १७ ॥ समी--दिपेने मी पर स्थितपय की बावे तरा मुसबमानी को सिखायी डिपो परोसी या किसीनोमोबर असर पाय की मईयपत। पेसोपवे मुसबमामों से गुत पन पर इसी अपर मेव से । पप तो मुण्यमान समम अपमोड इयानों पर जो गुण मम्मा...॥ ८म-निष परमरिमर तुमाप मगर जिसने पैरा पिप प्रसमा और स्विीप्रेरकवि प्रिनार पकना पर मोटर भिम की। ३। सिम् । ।मा ३॥ समी-ससमा मामा और विधामी रसभरमण पिनि पतिपय परिकी अमाप । स्प परमेम्प्रमने पारिन हम्मा पाया" मम B और सपमान में एमा निधिपरिचमीदीप सजे इम पारिम समासपम्पपशवबमा समयमा और मा मम की सीमा होमपा ममुक समान A चतुरंगसममासः अप्रमा मा दो। इससिपे ऐसौ पवईया पुसकीया सकती।1. सफर में रम्ने मौका पौष उसके ममपी मे पम् पिर पो पस्त रस सिन्धमाए या पर मेरे इस परब कि गुमन दिना ने मुफो ममल पौषटरा में परखे गोपीच प्रति और एमयाममा मासि ।सू पापा २५-90 समी०-पोसा मे अपनी सभाम सारव में पी वोपम सरा आप और वो पासपो सिमा प्रवत् ममस्मादि ममि में पथा जारी किया रवान को गुममग्रमा राहीयो पताम अमीठान बदा भाई गुरु मो भी पकिम डग प्रमेयमेको खन मापोठो खाने मी धापमा पार पासप वाम नेता जिपमय मि मी उसने सहमती भार और मारदा मम॥15॥ 11-और मिजम मेज हमने बीच हर रम्मत के पास ॥ पप गावे? बम रसको पमते? हम उसको होस पती ।। मासि ।। सू मासा ॥ समी०-यो ममी र पाम्बर मे ये सब मोम गोपाभरी सब पर फिर वो मामे साबर म मान नही पण उम्परे पापापाय परपस की प्रवो सब ऐप में साम्पा मेरे पापोवास मेवाइसिये मात मागमे दोष कही। बचप पावर और पवा कि प्रषिकी होसपासमा कही मुव साठी सरा भस्म पॉम पर समेगा ! मार सिप तामा नहीं मानते हो मुगा किसने ! और दो नसा गा सप विप की प १ पेसी नगी पनपनोप मात्र १॥॥॥ -और मिस्त मोपले भाार रिपो परिवारसमे और पचे गोमोबाँ॥ सम भारी ममम मेरे हमने शाम्बर।। 4. सि. एच.1॥ समी--प्रमा परिसक्य मप्प ! परपोता मी ममुम • चलिसात मही मिगत और परिवानिपत सो सम पपरप। खापेम पाच ममप ममी की बात को किस पंसार में ऐसा रेलवे में भावको स्म होपो मम पापा मारा।। ॥ 11-बगलिमार राती भार पर रियों और मो मो और पाच सौ और वे मामले पर पास मोगराम मिपी और पवन सियामे ॥में । मि ।। 'CI11॥ 1 ।
MP सत्यापेमकाय 1-पामामोविसिषे पापिमा भासमार पिय सम्मे रेखते रो तुम रसोनिमय पर अमावास्याम्मिा सूरब और दमे और पोमियो विमा प्रपिटी। ग्वारा प्रापमान में प्रायो बम बहे बाये माम माम प्रपामार योग्य मोसम या मित परे और पद्य मासि ॥ ।म् समी-मुसामावोबा पदायि अभी वही अम्मा यो हो गुस्त होने से प्राधमान सम्म बसाने की धमनी मी बहिषय बदिसा मस एकमात्र में यारोप परिमार और सम्पपकारी हो सका । और बोहरा परिव पाय वो मामा से पानी वराव पुका पालनपिसा कि प्रश्मिीर पानी पर नाग। इससे भाग अपनापना मेकको विष्य को मीही मन्या पा। और पो पिप अपरेममा बस देख वो पापाठी अम्बरी भिर मह|| ११- विमल प्रथा गुमराह है जिसमे पाय और मार्ग रिक्षा अपनी उस मनुष्पमकरण। सि। है समी~ र गुमराह कर होला और शाम मला भेष पखान इसरों गुमपा प्रांत पो से बुरा भावाने सामीसाम करने से बुरा शवमहापौर बाथमे पाप से रोजी लगी होना चाहिये।।।३॥ 1-सी पर सवरात्मने इस मामरी में गो पर परमार मनाप्रपाले इस किमाई मे पास रिपबध सिप मामी पर ये माम पांच और सर हमारे समय मेन्य । म ।। सिपा ३.. समी-अब पर की मारम्भरा पिसा पर राण" पातोप पण होने पेनीयाँ हो ममता कि महिमने एमपन्यपक माम मंगा लिपोपममी और रस्मोकी प्रासमा रसी को होता है जो ममुनमा एकोण से धीर दिसाम रेप रेप मी मममममरममाही वारिस पनि रोवाकिसिमी मप मममस्या ज्य ५.-और विपलमेव सिपरेमिष भादमी अमर मन्त्राव और पाप रम पम सिय १३ समीण सूर्य समिर क्लिीची भिती ! किसी भी निता वर्ग मरिष त हो । मोर मा मधुण मिप ममप और प्रामवीटो सेमियबीमिमलमा पार समयमोमोग्ब में पुरपम्मा भी बया में पुस्पा और चतुर्मासमुन्नास अपाम सा र दिप पेसो पात खत पुसको १८- सह मैं उसमे और कबीर रस मममी बस पिस पो पो रस मिमा भने मा पर मेरे इस भरण कि गुमराह किय ने मुमम प्रमप बागव एग्म में पनीर पिया और गुमपालपमें ससि ।। ५५-६० समी०- बोका भयो सरम समय में भी होगामी सरा हमा और जोपामण वो सिमा भपा ममलमयपि मति पाने में अपना परीको सिखम मे गुमयाममेपणा पाहीज पवान ममी विषपा माई गुरुयों नहीं कि तुम योग मनेबारे में वाम म्यमते हो तो सपने मी प्रवामपपमा परि मा वाम मा कि मैं एमप मिमी मधेसमा किया और मारपो ममय ॥15॥ 11-RARE मेरे मने पांच रम्मत सम्म । परगावे? हम सभेमतेम रसको परोसती॥मसि ।। - समी- समो पर पाम्बर मेोवो सब पानोपालरको पर पर पाकिर ना! मा म साम्मर म मात्र ही सियर उमारे पासा पास की पा सरदेश में भाग मेरेगे भावांव में कीवसा मेगा इसलिए पास मापने दोन महो। अपराध पावर और पाकिभिती होयप सभी मही मुन सम्वी तरा भाम्म पम पम सम्प और सिपा सुप्रीमो मानते हो मुपमिने ! और रोमसा 1 सप प्रविष को पीपीगों प्रेमयम मोम मान येते॥॥ -चौर मिपती पोपहार परिमा परिरस और पचे खाप परें। प्रम पशा की भमर मोहमने शाम्बर।। मासि. राध-10॥ समी-प्राम पान्य प्राप! परवाना मिमी मनुष्य में परिलनियती मिगत और परिषा नियती।इमन पपरपावरम भाव मे मम . जो भी लिगम प्रसार में ऐसा रणने में भागलिगेश्य पोम्यम सबसपा मगर पास। ॥ महिमा प्रणार रेगर रिश बापौर मला या परों की ओर से पाम और पान यगारा गोगप्रेम मिया और मार लिये ॥ मासुरामा 1 BILU सस्मार्थप्रकार समीपसमोर मपीवो रिचरे सिप अपाय मारे गाविसको पपीन प्रदिपामा सिमामा अपरा और मि निम्ने स्विन्ध रिल हो रसको रिमा गएका म्पूवाधिक या मना रही स्वसनाव से पाप किये ही नही पितुरामा पनि नाममा प्रयोगमा । म मान मिपणी इसम साप से मिखन्न गति और बोका दिला रवा वो मा किस बात काकी ती मोरोपमा कीबतीतोपप समायो।ऐस पापामार ममम्मी पी से सवालिदियोको पता है। १-और मिला इमने बोजपले प्रकिनारे पहा मान । और हर पारमी को आप रिला स्मये ग्मने समयमामा रसम बीच मांग पसकी निमे हम पने रसो दिनमामत के एक पिसाब रेप रसगा। और गुव मारे हमरवण से पाये ।म ।। सासू 1.।भा CII-. समी०- परि अधिरोकियोमान पाम्बा और मामले स्पा पाने अपमान और कमान भारिमा और सही कि रोशन हो तो प्यास मे पल्पात की मापौकिम्पनी मापने पाये सब पचे और मप मामने पसे सब पुरे कमी हो सकते है। एसी बसम्पन at किनेकी पन में पुस्तक हम वो किसी एक को भी पाईन मी । परि इसम प्रपोजर को अपरेपोनि मनाविधा सीपाद पर मोर रब्य पार पापोपमा मान्य माना। नामवी व किताव भिडेपसातो भए किताबमा। स्या समापही पमान रिस रहा। पहाँ परिचर चाहिये कि बोईसम्मदी तो बना कर्मदीदो पो पिन करच त्य पिता और बो नियमित हो रख पर मान बिना बॉलिपि मचेहरे कोरे रोएबमुखमा रिचा कोमोलिकाको माया तो मी र म मिा भाप रस को मते दिया रे मोम से Posपप्रम्परिक रेप और उसी समय सीमिव्यय पम्प पौधरोपा मुधोसासी गौमा समायी बारित पपपप मारा तोमनापी पप को प्राप्रमोदामी पागोसम्य... 11-और रिा स्मने परमेयी प्रमाय || मोर पाम सिमामे पम पोलिस दल दुखानी हम सब पगों व पेयपधारोम पोरै रिना गमबन्धमा रसम बीच पहराम महे॥ में । सि १५॥ 1.1.1. समी पानी पिम्मी सुधको थाम विणीवमे मे एकमबी भी सराय में प्रमानजय सोनाम है। पर वो एममस्म रिप तो परम सादर करावा चतुर्दशसमुनासः मप। ऐसे में उन पप रमपममी पत। बम्पामय में पर्णा पक्षप में पाप प्रोपने के सिपे भाम्म और ग्बो परय मानवों को सपा पुगप ये बसक प्रकार न होप तबतक सब दोगमा मेवार पर सबको दुखापकम्पप न मिना पाप । इसलिये पास पाच मप मापापारा म ममम । पप तो पोपाई सम्पप साम्पापापी मेसिक पगत वर्ष सोपोर और स्पाभर एम परों तब तक उसमे पापप्रविध मममी गहिये सापामा पूज तो पयस वर्ष स दौयानुपर्दया और एक पार होपमा पण पेस्य म्पपमपम बहीरो सम्य म्पप तो देव और मनुस्पति को जिसमें पप मात्र मी निबम्ब नहीं हाय और अपपे २ कर्मपुष्पर पपरपा प्रविध सदा पावे एते, सय पाम्बरों में गोल्प रखने से घर की गव्य को पनि है पय पेसा पुस्तकात और ऐख पुकम परेगमपणाम कमी हो सच्चरेमीही ॥1॥ -चपसे रीवा रमेण गोपीनारे मो मेम्परें दिमा पाप पाये बौर पर काम सोने से और पोशात परिमे परित पाहो की और अफ की सेसम्मेि रिसेपुर पाच रसके कमर उन्होंने भी पुल और प्रपोपहित बाम रमने की में । मि ।। 1पा ॥ समी०-वामी पर। न्यायपजिसमें पा गाने कमरे मी वकिले पालम।। म कई इरिमा पहा विचरतो पो से या मुम्हमारे रिस्त में प्रषिकमी वही सिपाप धपान पीककर्म रमपन्तम और सबसे अमाम्त और जो मीम सि समे वो पारिवमपि समान प्रतीत होवीस सरा मुख भोगी तो रममे पुरोऽपस हो या इसरि महाप पर्यम्स मुनि पुल भोग पूनम पाचही सम सित..॥ १-ौर पर NिTB मारा हममे रमको पब मन्पाप किन गामे और हमने रमले मारने की प्रतिया मापनकी॥ म । सि । म 15मा २४॥ समी०-भपा प्रप परती म पापी मोहरो सम्तो ! कोरी पब्धिा भोपशमी रम किया गम भापार देखा ना दिया परिपेयी सरव्य पसल रमपाव मी मरा..॥ 1-और पो माम मा पप रमाईमान गरे गा मेरम परिपम समस्या में परम ॥ पहा कपिम्म मूल पप सभेख पा रसम मेगामा बने परम बनिय पर मारा सिर भये पर गौर पिस॥ में । विरासू 1 । 111॥
सत्यार्थप्रकार सिमी०-मणमा मेसिपीसममा ग्यपि मामानामे मा सेपमम गरेमप्रीपेच पम्मी का मत पीरो सम्तो । अब मागे को भविष्य की पत देखिये कि इस विष सम्पपग सून एक मौत में यदि प प्रा लि प्रवमय मिलाई भासून तो पपियों से पाव नामपदीप मोर व मप्र मग समेगा । इससे पा विदित मापन के मायने म्योग पोप की पिणवहीं पी होती हो पेसी वियरिस पत यो रिस देख! और इस पुस्तकमावले पो प्रेमी रियामो होतो तो ऐसी मिय बातों से पुक पुस्खको क्यों मासे । अपरेबिसयमचाच भापही मिली मायामा बापापीय और पत्र मात्र प्रस्मिी में फम्पर मी कर रेखा है। परिख की पत से मिली इस पेसो पुल पसी बोना मान्य चित्पनी॥ ..-परमो बीच विारे मर्षमय सोचोगों अपमे से ममयम पदा पसे इस पो बम मेम मोम अपनी प्राव झारिरप बस सूरत पानी पसे रो मादमी पुरी॥ सोयो मिल में गाय पभावीपमालो हुसेबोरेतपणेजाणार ।। हमे यसिप इसके वही कि में पेश इम मानिसमेकि रेवा में तुमसोमम पवित्र मासे होय बार मेरे प्रपम पीबाग सपाप मुमो पारसीमही में रामम भरे पडी । गप पर्मित हो पाप रसके और अपनी पाप र मभन राप्रपा मार में में। सि ॥१५- १॥ समी -पतिमा विचार करिते समय की मोरसे माप पदार्थ नही हो पल्से मस परमपम सिमर्पम परीके बम होगा सीपम यमदीदी की सम्म परिने उसको पक्ती मियाम्पब से रिपो मन्द मी असावा की मितीको सिमषित बही समय..॥ १-यमही रेखा नेपाल मे हमने वालों पर फिरों पाण्ठेरकोपभोममें छिपा || समी०-बसता दोनों पारिसे मेज्या तोपपये पशेमापोरनी हो सकता और रबरपदो पम्य परियो को परिपाले मन से होता है। इसमा उभे होगा चरिये सचम्बापो रसम प्रयोगस प्रारी मोये पार से पार पोरने प्रयासो अम्पानीमा अबाबरीही प्रती मावा.॥ 11-और विषयमा प्रदेशवाईयने रप मानतोयामेर ईमा पानपचि मार्म अप में पिसू ।। पा ९॥
. चतुर्दशसमुन्नास' समी०- योगा पार पमा ममेकी भव मास में पास में पापीभमेयोपोनि पापियों को इससे प्रापमपासपुरबा सवय है इस पर पुस्तक और इसम मानेयमा प्रदिपों में पाप माने में सण अप्रमेय इस पर पुस्तक समेत और इसमें प्राण परमेवर मी मी सम्य॥१॥ !! -और किसे हमने पीच पृपिता नेपाल एसा न हो कि पिच गये। मैं .सि. २७ मा 114 समी-परियम अपनानपारा पिवीसममा पनि समय तो बरपात मीही सब कि पारेपरने स मिनी नहीं हिचती। म ईकिजा पारदी परख ना दिख जाती इसने भने पर मी भूम्म मतों मिठी." 11-और शिक्षारोहमने उस औरत को मोर को रस पपने पुसमीकीस शिप स्मवीर रसम पपनी में। लि. पा..॥ समी०-ऐपी परवीण बाबुरा प्रवाह में जाकी पर सम्म ममुप्प की भी नही होती कि मनुष्यों में ऐसी बातों पर प्रदामही ये परमेपर मरे बाप मचा दो समय ऐसी पठों पइगम भूचि हामी परिपप्पी पात होती तो पति सा होती ती ॥ ११- मीरेच तूने कि प्रशासिराम जो बीच सम्पनी मोर पिता सूर्य और परे और पापा और मम ।। परिमापे पगार समान माने और माती पर परिपप मम पार रसोगमा ।और परिव र म मरोपचे चिनिनेवणे और बेगमपरों॥ विचहिये कि मैप भपके और ही मैं म अपनी और चरों मानसिदामहो किम्पम आमरपा॥ मासि 1.। ४ामा 1८।२५।५।५।३॥ समी०-भरा जागसममेवर प्रेमी ही सम्म रसी मनिलामम सम्पपा पुम्मका होम्मी हीरो समा निश्मिी भन्न समयमा प्रयापा! पाा पप्या सर्व गौ सारे मातीपन और रणमीमा परिने समिर र परिस्त पा पयोपिकमा रोग पाय । पौर या परमार पारेको पारसी पर में राम मोहम्य पियुत्तरस्तीमान चौर र त्यस्तों पपरगतमा भरपेड का सपरिम्मा मनको परे पगमा माप विषयोपर गए माना पसे भैरव दुर्गा • मारा और महापुरती माय पप गुण पारित मरिसर मस्निगला रस गुण और मुपएम्पन को मुमण मोर गपी मनी बसे पुत्परतो.॥
समार्यप्रकारक ५-मिनिमम तुम दिम पमत के ग्यरे गामोपे ॥मा सिस् २४ाम समीपमत समुप में पेनिसीब अपायो पानी में रपे तो सो दुर्गन्धम शरीर में राम पुलामा मी मोप काँगे मामा मायबी और दुर्गव अधिक होमरोमोत्पधिमा और मुसबमाण पपम्पगी ॥५॥ 10-स रिष को पपही रेगे मर र अब गली और दाम राम और पाव रामरे स्पब रस किरते। मारी भासमानों भौर पृथियो पर रप्त कि मानिन बक कोशेष रसगौर हो और बीच पोपहार गर्योरपदीड मानिपौषमयरोपन किया समय पीपक गए मुबारिक वन व पूर्व की भोर हैन पमिम में समीप बग्सम ऐयम हो गोबो म पे मर रोगवी मार्ग विस्ती मारपूर अपने विस चारजम । सि । सू ।। समी-जाप पप प्रापिबा होने से गपही भी दी रेसमी पाप पछिम निसरोवे से मिन्प। यस भाग मिठो पनि प्यन्त । पेसा पान्तर मन्गीय या किसी पाभर में समय॥10॥ १५-पौर प्रवाह पे सत्पामिना र सामने पायो सेवस प्रोग में किबोरपवार पर पपये और बो में पाशा पापन मे मामी रसूप रसके काम पक्षा प्रबरमलाकी रसूबरसकी। और मझ पाखनमो रसूप को व्यकिवा किये गयो।। में सि १८॥ समी-एनसी फियसको विनि बाममों यर में पर जरोखठोर भाका प्रमी से सपा विम्यामा भरिम की पवार शाम्पर की मात्रा प्रामबा वा त्यो उामपरीषदोपमा पसी पनि पेस्बोपों वाराणायक मन में विच और महो -ौर सिरिज कि प्रभावम्य प्रासमान साग पर और म्हारे मे शरिरावर मतमा मालमसिरोंमधीर पायाभरमम भारमा भौर पर पप र यो रमको मप्यारी है। और बोमईयाम और प्रणयस विष माता प्रसाद मासि ५ समी-पानमा पर पड़ी पीकि मामला माएप्प । परि भाभग कोई महिंम्पर पर वो माया हसम्मानों समपन बोलियम पार पमा मचने पर पीडित बतुर्वासमुखास t पार्मिक मिनोग इसी माब। एमी मचा बाकियो पाप और पुरषभरण ममा रोबाप ! स्पातिक और गरी सीपत बो पच्यरोगा।बोबोपा भोगे पाप से भौर म मिले तो कोई भी पाप पर सेबसारिये ये सब प विप से विम्म || -दीकी हमले के मूम में पाकिसे पो को मेरे प्रेमिकल तुम पौकिने अमोस मेरे योग मिोन ने बीच मागे धमा प्रपरे । परम पुज्य किबिसवे पैसा किमा मुम्मे पस पी मार्ग रिक wat ||ौर पमोजिमुमो पिता समापौर व पुस्स किया रस्ता मकिपमा को पाठे मेरे अपराध मेप दिन समय ॥ मरासि ।। २१ मा १२ । १५ । ८.11 ॥ समीर ने मूस्म को भोर हो मेरो पुरा नाम, ईस और मुझम्मा मारेर भोर विषम यों मेयी ! स्पोकि परमेर की पत सप एक्सी और मूत्र होती है। और उसके पाले मन त पुती म मेन्य परिशी पुस्तकमे अपूर्व पबुक मान्य समय पदिये तीन पुसक सन्चे। खोपम्पन मम रोय। चौपदो कि परस्पर प्राचा पिरोपरमार सपा सास होय नही रोसम्म । पदिसामर्षा बीच पेन किये। वो मर भी मये अपाच रनल मा प्रभाव मी होण! यो परमेवर हो मम्पादिम्पपियों को विनय पिटायी वो किसी को रोग होम मनमरने और सक्ने म मोन ऐप चाहिने । परापत एक रज्म और दूसर को निकासा कि गय मोर ग अनि मोबम मिदोगा पीचे । बप पस्मेबाविने पिये और पण कमाने प्रधठो रोपही भरोषा परिये परन्तु मुम्समा भाविको भी रोम होते है. परिमारोप माम पाराम भने पहारेगे मुसयमानी शरम में रोपपपपपरिस। परि रहवाहोपा नहीं है। परि साचो मुस्लमानों गरीर में रोम पो रहे परिपी म्मरम और दो ग्धी समे पाप पुरप बगव रोगा। परिसम्म सम्मान कर्मामुपर मम्मी पो मममी अपराप । पदिप पाप मा मौरभ सामन को रात में मोगा पाप पारे भय होम प्राप्मुख होमा परि मा पही भय्यतो पानको पास्मोपचनही पती॥10॥ 1-पानमारमा मानिमा मारी सोपनियापी बोरे दूसरी॥मा पाको परम पानी पानी परमार है। मि।। ५। ११४-१५॥ समी-भसा इस शव को कोई मपम सम्पक पारी निको भोग गायी किगिनों ने इस कामो मान शिण गौरीकी मिणवीरेममायोमपात पही। वरिपबिवषयाव रोती तो देवी मप मम बहोती || - सध्यार्थप्रकार -पेसा पाठ पाकिनिष में प्रभाषि और मह मध्य प्रपन्य बस पर विरेबरसने दिखत्म नमामोबिया सोपी॥ मुम्प मच गमिपमही पवे समीप मेर माम्बर ॥ प्रणाही माप परम्पमासिक मर्यबरेमा पाकिमल पायाभोसर मरे और परे मामो मेरे पाप मुसपमान होन ॥ में सि मा.11.1२५". समी-और भी देखिये अपने मुख माप पनप का माल बनता है अपये से अपनी मरम्प बरा ओ पुस ममी मम यही हो लाभ मोमो पता है मौजा ग्रियराम रिस गती मनुषी को मम पाप पसल इन वन म । ऐसी बात पुस में भीगी हो सकती । परिपपर्श प्रात् पर्ने प्रासमाव समाविकोप एकोणी होने से बर ही रो सका है। परि साम्पा ममा पुरा गेवरा और मम्मद सादे पे अपनी सखिये पुस्लो भारि मुहम्मद स्परेच प्रमेय को मारे इससे मण्यो पमहान पुरस और पोपर मिची मरा है। ॥ -मौर देनेय पणों में मात्र प्रामको बमे एप मार से परेव्यते। मानिय सवे पदों की भरीमा पर विजिसने मिया तथा मिसप म प्रभारी उस समते ॥ में मि. ।सू .| ESH समी- पापमान पासमा माय बचपों देश में हवा होगमनापी और बाकीदारीख बाली पाये और बरसने से ही दिय होती है। जिस एकमो मीसकर पान पानामरस स्पिससे अधिक भावपाली पपगी।।११।। १५०- मुा मारा जमको भूण सभी की मातु पी।मा र मेरे निब मना किया अपनी भसमा मुम्भ बस पम्म प्रदिप उस में मिल पमा मने पाया गया है|और माषिक रा बाण और परमवमै । सि. । म साभा 11-11१८॥ समी-बमोनि मुसनमान और पानी काम और कि पूषा पर मन की हत्या किमाने और सम्म परे पोमो पापमहाँबामपनी पसेय पापा पचि मान्य समये अपनी इसी पे एक प्रयास कर कोरिया और मेरे सामा। परि पारेर ज्य बस और पपरी होने से माहो ॥ ११- मी मने मधुमको साप मोबा) भाममा औरोमासानपोषों पहिरोहममेरेगावमेकि पतुस्पसमुशासः 442 महीप रे सप उस शाम यस मतमा मात्र सम दोनों समे॥ और भारत मेन्य मरे ना कोई श्रम रस किस हापौर रनले RK परनु पयसम्ममै सि २ । 11.112॥ समी०-मार पिता की सेवप्रय अपापो साप पर मसिमे वो रममा म मामय पर मौ है। परन्तु परि माय रित्र मियाम्पवारिमने की प्राधा मोक्पा माप ऐमा धरिये ! इसगिने पा प्रापी प्रदी और प्राधी है।वाना मारि पाम्मोही उप संसार में मेयो पम्प गीतों और मेम्य है।पर सब को यो भवावरतो सभी पानी पही| और ममम मनुषों की भारीभामु होती पी प्रवलाही होती इसरिपे वा पत परी॥१॥ १५-प्रणा परिवी पर प्रखरपति निसरी पर भगा रस बरसी में पोर आमोगे ॥ भोर विस रिन को प्रोत् को होगी म्पमत निरामय होंगे पापी । बस गो गोगा कि ईमानणगये और काम किये प्रचेबस ये बाप पनि बिसे गायो ।। और मो मेज म एक बार स देव रस मेतो को पसीई । इस प्रमर मोदर पोशामर रिली उन मागी किमाही पाबते ।।मासि २ । ।पा "-11 समी०- परोपर मपति सामीपर की तो उत्पति की भावि और दूसरी परत में निम्मा देय राया। हा! भर पाल्पा सागर उत्पत्ति पम्पत् रसभ साम निष्मा और परमपगा परिब भोहिम पापी मानिरायो प्रपदीय . परन्तु इस प्रोजन गोभी मीकि मुसबमा सिया सब पापी समपम निरायसि समवियर में स्थानों में पारितों ये पौरीमती प्रपोजनी । परि पौष में लापौर जगम परिराना मुसहमानों पर हो इस संसार मुस्त पुमा और यो मासी मुमार मोग अपय तराशे माणी और मुम्भर परिममम मम होप्य । परिसिीमेममा मिना पता पारी मी हातोगी और बारित सवारीमापौभा में मीसमन्त्र सय परिपेयरोमा बरिस्त मैं गएरा अपपी। मासिस्नो ती पा भी मुसी मोर रिप्प झा मो. अनुभवी र रिमामास तिसमे अपनी विमान यमनमोस्य मारप अपय भमर सरप्रधान सौरियों पर मोटर सम्म पाप माना जा रम पम भागी पीये समोस। सपना सम्पपाय म मरे सर पर गुरोपाहार॥ गीमा सिमपाको। स्पा किस भासमानों भेनि मुख मर्मत सम्म म रस और मर नियो- + सस्थार्थमका पण ऐसा महोकिदिख सालों वही बनेपा कि भाम मवेत भावाबीच रिमौर प्रणा माग किरिब पौष । प्पा ही किरिल पतीबीच सय मिणामता प्रहार किरिया तुमको निवारिता प्रफ्पी ॥में मि समी-पानी पाहिष्मठपती विकिमिस में सर्वण प8 किस भयको रत्पधि और इसमें मे सम्पये की संभ और पक्षियों को मिर ने सिपे पाद रम्प ! घोड़ी सी बिम पण मी ऐप खमी भी भय और मानम प्रो सिमवरेचो दिनमा रम्ती और पाहा दिसपी रसमे एक मो में प्रवेश माधविधतापने अधिानों की बावरे इस्नेि परमपम विज में पुजा माही हो सकती। पा विष्वपिस पवनही किनौम मधुप और पियवादि मे पती पाकीबपि मोर पत्रों की पोल बम मा में सपा तो हानिनोपहीइसलिये का पुमा मसित और ईपासबन्धमा महो पगरे॥१५॥ १५-परवर भवरेसम की मासमान से 4 पब्लिम यापकी बीच एक दिन की प्रषि रसमे सब का A पिते हो तुम परे सोयाब भीर मामा र परिष पहरि पुराभिमा ग्मने और इनपीच उसकेसम्पनी से - मेग मन्मे रिस्ता मौत पो विषय मिा पनारे स्पब तुमारे । और बोचाते म मलम गाव मे शिषा मी पाभि हमास मेरी पोर मे कि समय माप में रोगसमे गिनास और भापम्मिनासे एक मसि ।। १।५-५॥ समी-अप - सिमपप कि मुम्बमानहा मनुषप्त पोती नाबियोगकोपका पेट प्रभावमा और स्तरमा ना पही हो सकता । परिचय फरिने से मेजयतो मी प्राप पोशान होगा। पाप भासमान पर पी और सीपती श्रेपोमपारे। बी फरिरले रिखत भई मामय निमबरें परमी मुडोरपाय तो समपना माबम हो सध्या मालूम तो उसमे हो कि जो सवा साल दो सो तो सोही होता तो फरिवों मेब साईबोमॉकीप्रमर पोस देनेभयभम पा! और पकार में तब भाषेबारे मामले में कमान् मी दी। बरि मौसम फमियीबारत फरिचेच मारने पबामस्म पर एपरिर निको अमरपन मेमावर शरीक दुमा । एक रिस्य एक समय में दोगा माविबौगों मे विषादी सध्या और रवि अपकिने अपनी मर्जी से होगा में मारे गोरखा देश समाना रेयोपरा पापी मानापमा पार्शन है। ऐसी पवण्समुशास' या जिप पुस्तक में होमपपिान और कपास और दो मा म्पबहार १पम मौसमी बी समता IR १२४-मम्मिी पपाय देय म्ापना तुमका को मागो तुम एल्युप बरसे।गोलियोनी कीमो को परे नुम में से विव प्रया पिप गाय यने र प्रगाव पीर । प्रम मारो साप। में। सि ।। ५। प्रा । । ममी०-पमुसम्मन स्पाप ने इसखिये सिसिप रोम किमाई में रम मागे माता बिहवे मरने पे मौ मरे एभर्य में मारप बन बरे ! पीर परिन्तिा सम भाव तो स्वशाम्बर सारेच निमोम गोपीवियों पर महाप हो और माम्बर साहेब पर प्रापमा पब्सि ११.-चार पाकी को चोरी अप- भाभ पासन मा मभर और सूप की सिपर इसके पी। स सब प्रदा भीरबादित रससे मरिच इममे तुझसे उसमे ताकि होये सफर ईम्स परों - संगी बीच पोलिस मे प्रम मा रमस परित और यामाही असर बची मी वाचली मुरम्मर थप पिसी मास और रबर की पी मानसी को मिला मिहगाम अपनी पहली बनिसको नाम र मोर अग्रत भी जिस परेपी पाप परम ए पोयो ! सोमाब बाहो मत प्रयोभी में पारम में। सि २१। सू ।। भमपमपा सनी-- बरेलम्माप किया पर में समान र और पुल से मिलोमविच थरघुगरण में पीपक पारम्प मी पखोप । हसी पपपप - मुसलमान पनि सवामी रिसीव । मोर रसब एक पवित्र पायमित्र २ मिस बदि एकीनोमोमाजा प्रपन मामा बोराभि तिवा एक सबी धीर दूसरो सो! एकरा परावर समपरी भीमापा मान भरा और सम्म सानो जिस भभ मतामाम मपन्य मतासिर भगा पसी सीप भए रवा। इसस का भी सिर म कि मुहम्मा सारख रेविषयीय परिसदा (पीपीएस पीपी पपीते? मत नि सी भयमा प्र मुरामा पानी प्य पोर पार माय । मनुषों में गाया भीमपमीभाभी पोरन म सियो को किमीप्रेसियमडिपोम में भी मदमहीरोय' पीरा मिी माaar (सपा)यमिमा सिरसीमा निमिपीपीम में सत्यार्थप्रकाश समये से पाम्बर सोबापरे मन से लोन बोहोऐसी बाया से मी पुरी बास में मिला हप कमी यही सन्ता। लामो पयोपी मौकी में मस होम विमामा परे हो भी सके। और पमा प्रधर्मी माती किसी गे मिस जी चाहे बोपदेष प्रौर मुहम्मद साल की यो मदि फार अपपरी मी हो तो कमी - पोर ! बैंस पाम्मर के पौ में मात्र मभिचर पीसे प्रशन में वो पाम्बर समेष भी किसी पर में प्रदेश की। प्याबपी पिस किसी में था निरवर प्रदेश में और मारपीच मी ! मया - ऐसा पप अन्यो कि वो इस भाव में बात और मुहम्मद साप पाम्बर गौर करामात ईबा परमेधा मात्र पोमो साधर्व की बात है कि ऐसे मुतिम धर्मक्ति मावों मेयुकासमा मदनिकी प्रापि ममुनाने मान बिचा!... १२-मही मोच पर तुमारे पाकि दो भेपी मिला को पाक्लिी सगको पौड रस मी निम्प पी समीप भामरे पर पाप । निप यो पोग किसी माह में पोर रसूब उसमे सात कीर रसम बारे मनोग किस मुसामानों को पौर मुसम मान औरतों को रिप एमके पुराभिर महीने बस मिशन म्ममा मनाचे पोयम भयो म और ला पप बात मारे गो पारे था पोसाँ भासए माय पे व हमारे रेग्मी yिष अजय और पामेकीबायतमाम । सि २१। मू ५। भा "" समी०-शामसुम अपनी समस्यप रिचा रस। को दुसरेने मनिष मला वो को पसन्त पूसरे पुस में प्रमे मीना पोल मोतीरोजाय स्पिीचरे से बार भी दुखी हो सब पर एबीवोमरीमरी हो सकता । माह और रसूप को प्रविषम पापी सिर होता कि मार और रमूग विस चाँ। म सराव देना चरिपे। म मुमतमा पर सुपखमा भिसरण पुरावा इससे मान्य मनी को पदला मौसम राबो ऐपनमा कोरमकी पर बातमी परम मच पोखरा और सोनिया प्रसार मरस पर गुबारे में। सपा महागा पाये पाय मारे का पसमिती ही मुमममानों पर ई सारे मुपामागे पप पुरोगीपणा मला सामाजिो परमन मारे पेपरों पर हटा रेसिपे सवा मप विषय मी पण मावसिपुरन मोर मय प्रधर्म मेमीमहे भयक भी मुसनमान बोपों मैस पर मयामोग ऐसा ही मामे 4 रजा stoजिविषा मला पण समाज पण पतुर्दशसमुहास: 1१५-और मामय पुस्तक मेयरमों को सम्पती गारों कोक्स बकते है सामुद की बस पारित किया हमने सपर पिया + पौदे पषु रसको कपी प्रमाक्रमों में मेक्सिामा।जिसमे रायपीच सम्पराग अपनी ही माती हमभे पाच रसमस और नमी माती बीच सोमादगी । म । सि २१। स् ११ सपा ॥२॥ समी० पाकिशासको हुदा की। मेक्ता सुक्याम्मत निता पारी को और उदा गमों को निशाख भिता है। पर पा समाधी कमी नहीं हो सकती कि नमाम भिन्म पसा होता पव। बोपर मेवे विभा पासपी हो सकते और वो माटोमसा नहीं पहन | निसरीप परिभम पिपली और मोर पण मी ए बिमा कमी भी बच्चो एसबी समाम मन्यि रोग के ही पता तो वो बात सिमों में विश्वमोगरण की पोरंण साती रोगी ! इसखिपे मुसनमायों सपना बहिस्त में भी सुनावकमा भी हो समय । ५ -समी ग्राम सकी। विश्व तू मेरे एनी परे। सपा माग सोधेरणयमविष पाम है म सपि २३ । । समीक-अब रेबिये पा नाम सामनमाया वाप इसकी पौगन्याय! परिबी सामेवा हो तो (पासा) पीर मोहित की पापा मारे को मापने परे सोपे मार्ग मकि सीध मार्ग वही होय सिमें पल मामय सम्म बोबम्म समय परिव पापपर्म प्रभावमा पानीचौर इसम विपरीव ममाग मा सो प अपन में मुबमानों में और पहले तप में पेय स्वमा परि सब पर प्रबह मान सम्म पापो को सम्मे परिक रिया र एमगुरपुललोन चोइससिपे पैसा कमी अपने श्रीभपामा स्वाती सीमापात मौरे 1-और इम पागा पौच सुरस मात्मा पो में से माखिमपने को रखेंगे। और पथदी मे पांच बजे मात्र मल्ल कमाव। सिप इसकेमही रिमा ग्मकी अपने पार किसी मापक मष पजे सकिहोगा कम मता ॥में । सि ५ ।म् ।। १।५ समी०- पुनिये मपये गाते! पण मी पापही रेस उप्र सिप रस समय और प्रसि भास ने मुमा । और पर गपा! परिसपीपा पर भी और बाकी दोपतयेमियम जापानी पी मर जापानमा रिण पम ॥um. १२-पिापम्प रसमा पिामा सपर ब. सपेर मय ले सो पसे पाये पी॥ समीप समोसी पारापमये .
सस्यार्पनकाय एवरेस पाम्बर यसो भन्म से प्रयोगगे। ऐसी बाया से भी तुरी बात में निन्दा पाप कमी नहीं सकता। जो पण मी मी कमी से प्रसव र विश्रामण भोगो मी बाबी| और पाहा भयमी पीलिमबी तो मिसाथ पोखरे और साम्मा पोरी मोप पनि पाम्बर पपयनी मोहो तो दी बोष से पाम्बर बरों में सब बमिधर पी वोपमा मौसी के प्रण करें। यानी विस सिौर में पिण्याप्रमोर मावील मोद! मा बाल ऐसा एवम प्रत्यारे जियो इस राम और मुहम्मद साहब पाम्बर और मात्र को पमेयर मान पके बड़े प्राय की बात है कि ऐसे पुतिन धर्मविन माता पुन इस मत को धममियसी भापि ममुन्नों ने मार बिना 11.1 १-यही भोग्न पर तमाचल रमूब भो पारिला ग्स में पौड़े सभी मिल पोप भार या पाप लियो योग दिवस मन और रसूब रसोमेशा कोरेग्मको पात में मोरोप विच मुसबमानो और मुसा मान औरतों में कि इसमेहुरा किनारे नाये बस मिल मच गहोंने बोदवान भयो र म प्र पाप किस मारे हो पायेब पोस ये बसून माप बामा। पेज इमारे रेखमली yिष माल और पाव से की सभा में सि ५। स् । भा समी-नापस अपनी माईको धर्मपाल रिमा पारे! दुखने म विच अन्य दो प्रकारे पर परेको हुनाले मरम्पको भी रोम्या पोरा पोताच रोगायोग से पर भी दुलो पापी मवि ऐसारेचोच रोमहोय पार और रासप्रविष भये से पानी मिसाल महार और रम बिसभे पास अब समेत परिपे । असा मुसलमानों भौर मुण्ामानों की नौकरेन पर वो इसे भाव ममुप्पा पेपर मोम बोसमामे तो मी पप भी पसाव है।पर मचने या पोरीसे विषो सम्मा में और गुट बोरगे। मनोगमा पसे बर्षे मारे पहिचसो मुखमाषा परको भान यो अपरमानी को पापच हुरीपरोपोगाम्या पाम पाम्माविमो परममा मे मो अपने पूजा मेव जयेम मान्म मा विका है। परमी पापा ममभिन्न मोर मा ममममयी इस मा भी मुखपमान बोना में मातम पायोग ऐसा ही मामे में ही मते । म मेरा मनुन पराममान यौ।१८ प्रमोसमापसीपपी. घरासमुमास १५-पापपुपीक मेण्याचों को बसम्मवारपरकों मोगर मुर्रा की मीवित किया हमने सावरत पूपिदी सरकारी प्रमों में सिमा मिस ग्यार मराप सामग्रीमती रमवीर रसमेहस्व और महीवावी पर रसोरि २५। सू ५। पा समी पापनियताको मेनतामुकामा रमत मित्र को प्रे र हा रस भुषो को निमाता भिता है। पप्प woमोना समो कि म भ काम तर यस्य पराग यति समापी सकते और ये काममाया। शिखर परिम्म किसान मौए मियामी श्री गच्या या ९सम्म म पागदावोगे प्रव क्लिपwat Anter वो रोगी । इसलिये मुसलमानों पपारित मी मुशायर सही समय... -माम पौ। RANो पसेरे। स पर माग मार परे पित्यम् ५.पि ॥ १५॥ - में समीक-शि ५ मा राप्रपा रोवा कोप इको सेमारीसमय होता हो (MR) मीवावर मात्र निमाको यो पीचे मेसोपोर मिस मामय पर बोलना मरमय समयमे प्रसव सम्पति और इससे निरोपमा मनमा एपम में मुहमानों में और मपणे हा मा सम्पादन सम्म मार हो पिच पर गुबारतो इसपिणे सामोअपये भीमो माया मारे। -म या पीर मापस पापप्रमों में Seक्स और गवाही मे मा बसन्त - मिपा सोमालिया रमपसमय मिा मनमा बस यो| पाय. मनी दुनिया समसभामा मिस पर नियमित Modaमयोपोमिटर 1-पोमा तिपय पारेर मय ArAdi मार पाया गरजे ससायंप्रकार पाधि सुन्दर प्राधों बपि । मामों कि प्रदिपावे एए ॥ वापस म नहीं मरेंगे। और अमाप पर मिल पायरों से प॥बकि मुकिदी मिरे रसको मोर बोगी रसके को चमे ॥ पातु एक जुनिचा पौध रहने पर में है। फिर माप इमने औरों को॥ मासि २५ । सू ३.।मा 12-11-11८11-1. समी० लवी पाटो मुम्बमात्र योग पाचपुरा परन्तु इमले में तो परिका की नदिन पती- इसमा मालिनी तो बिपी मर मय परबासमा परन्तु परंपरा रम में की t! मारे पिताबही किसीम तिमिर नहीं पाया ! और बोरोग भी हो! बधि मीर पो गे मे प्रपल मरेंगे और बो सरीर परेमा तो ममाविका दीपसको। बिर नमर्ग में बाप ॥ परिपन में साम्म मान्ने हो तो गा गास में मिल उससे उसकी पवियों के समामम रोयो पाकिस पतकोमामाने रोपही यो मान्छे हो तो ऐसे फम्म माना और जो ऐसे और ऐसों के महिमा कोदा मुसि देख दोबसमा लोकपिात्र मामी मने पल भर परत से पूमो मारने पास्न कमी वही पठा। पेसा हा मुमतामों होनेपर में रह प्रमादा ॥ ५-विरमा मे हो पर रामक प्रखे म॥ वकि अरबीच सोमपाये और इसके मेवे और पाये कोपन ॥ और समीप होमी मोबाचे रक्षतिमा पी और दूसरों से समापु भिमा फरिश्तों में सबसे। परन्तु बिमाषा अमिमान किया और प प्रक्रीि से ॥ ऐ तान मिस पातु मे रोम तुप पाकिमिमा पतस विपना मै मात्र दोसव परेला अमिमान किया लेने पपिसार पों मे ॥मान में प्रचाारसमान गत्पत्र मिया से मुख्य भाग से रसको महो मे ॥मा बस विकसन प्रासमायों में मे स किया गया। विच पर पाबत है मेसी रिपाकमाऐ माविक मेरोष रेमरियतसम्मिपि मुमाहिम शिवोपरि गला माउस रिम समन शावतकामानिस कसम विवि प्रमन गुमाइमाम राम महम में राम २३ । सू . -11-0१॥ समी०- परि पाकिमान में आप मारे हरे ममबार बित भीमपरा र सराय सबने बलियो सेगेय स पर पोखरामबापमा प्रबल माती थिोमपात में मरहेगा। पप पापीतममा यो रसमै बने पाये मरा समय तक पिमा लिगानि मेवे और सीमेपर्व ही मिमे इसोपा मिर ऐयविनिम एमप मुससमानाम मारण्य म्म समय भई देश विशेष पाप न यसरि मुहम्मद रिष से बचारियम मुन्याम मागे चतुरासमुन्नास में अपने मन में स्य विपा और गोपि पो निरन्तर मुखमा शिषी मोमी भारापन परिस्त मेरो ममी परिपाई वो मामी और गोभी की रहने पौरोपामत पूजामती पी निम्मी पपरी उमा ममापी पी! अब देखिने उमन जिसम्म म अब सब फरियों में माप पर पारम समोर मालम मिश्र वाम प माना। सपा मे तिन से शामा कि मैंने उसको अपने रोगों पायात अभिमान मनम। इससे सिर होगा कि अपन मसुरा रोम गधा मनुम्मथ, इससियामापक सचिम्मन् मी हीरा सम्प पर वन मे सममाकिम भरम चम इस पर उप ये गुस्सायों किया व समान ही में सभी मित्रो में मही। वोभमेतरा अपर प्रयम तारिण! मा परमेपर अपने में सब सी में से प्रसमस विमा सt! और पशि सब परमेश्वर की इसस शिरित था कि अपन भउरा बदिख मजिम्मेदार था। खावे उसमे काम शि विष्ण और रविण । भोर ताम बसा कि मामिल! अम्मको यामत तक पोररे। सबने सुणमा कम्पमत दिन कोड रिप । अब वाम क्य बाबा भयक भर मेगामाप और गदर मचम्म। उप वरा मे मा किनिटकोपसमय में सो रोग में अगरम और तुमचे भी। अब समजायो ! विधरिये हिवारको पभो पा राम पगममा परिवरा ने पमप्यतो पनि माय मया परि बन सपना पाय मी स्प बतायी मठ महापौर नियम इस शवाय प्यासी को उन म सग पोर रिप इस चिरव महिप मी खरमरीक पधर्ममा में म । बदिमचारीमा रहेको ग्स अम्बाप भइप मी पपा नही । । 1-मारपमा मणी पाप पर लिभरपीमा भने पहा रपट धीर एपिसी पारी मूगी में उसकी रिपमवार पम्पम बरादुर हाप राम 00 और बजारमा प्रतिी साथ मपण माविकपपने और नागपत्र और पाप नाग भामरी भोर मचहोंगे और मरासिया अमा । म रासि २.३० घास।...॥ समी--दिसमप्र पापा मेरामा प्रवी हो यो संपार भपती म्पपी और महानोकिएका पर पौरमा भने से परिकाब मप और प्रास पल बर्मामा पापण बरी मम्मी अपराध सिगरेटा अपयशप प म पायर। पाम पनि समय और तमोरमा गtik गरियो। मम्मी पार गरे भारत भ्रममा पभम और पम्मा पीपमा परमोमणमा भबौदा सस्पार्यमका का मनुसार मय होम्य । कर्म पूषापर बच मान सम्मों हो सकते। दो भिमा ममा हिरों पर वापा सम्पमा चोर गिहामा ताम से पसाय पोय परंपरा मनात है..॥ पर-ग्वारय विमानमार प्राविद अनोयोकी भोर थे। ज्मा भयना प्रपीभस्वीपरमपण पोशा॥मासि..। समोपप इसलिये है कि मोरे खोप पाम्पम से इस पुस्तक कोम्पब मेरे किशिममें पोपासा समदोष परमार और पसम की प्रसासरे व मिरम्म बिगा। इसध्येि अप और माप और इसको मारमेय पार नामारे और अपभने काले बाकि पाप मसम्म मन्य मत्वात अपने मितु इसीये मुखबमा डोप पाप और पास भने में मम ॥५॥ -मनित किया उसमे भाव भासमाष बोरदो दिन और पपरिपा दमने बीच रसम सिम पहाड कि जम बागे रसके पास स्पदी रेपे पर रोमन रमले और भोज मोमो रनो, मोम है और गेम अपने रेलों मोहमने उपर हमारेगे कि तुपाचा मी पगार ने जिनमे बुबाप रामे॥ मगरल विवान मा मौसे॥4॥सि ।।स् ।।पा ॥२-२३५॥ समी-पाजी पर मुसबमामो ! तुम्बारा हरा निसने हम सपनिमार मान्ने होतो पणव भापमानों को दो दिन में मा समायोजन सचिमा समाज में पपप सकता है। मा अब पर और मरेको ग ने मान्यता है साथी मेरे सगे। परिपती शिवा सो रपये प्रथम बार अपम्प पर निबम बिसरया मिय! पाइम्से मी नम मिमा बोकर बालों पर सीपीय पत्र बीयप २ मरे से पाने बये कितवे हमारे पर स्पसी योंगी। चमका बोरेगा कि रिच मय का मापत कमी हो सकती है। मेवानाम मुख मने रेया बी वो मन्यापाबो पन्यो रस पुदीराम प्रधम्मव । इपी प्रकार कीपनी मिष्य पसपपियों को विद्यापीको प्रपम मापदीयमाप मी मारो सम्पपी! बदिदी हो पाटो मुफ्लो पदों मममतामयको यसमाबीच स मुसलमानोर में केंगे। और हरा मे लिया प्रारदो रस बरसनाव को किया ऐसी बाळ मध में पाय॥३॥ -पचे रसके इमिपमासमायोकी और फिली कीबोवन भात मिसले पर काम गलामता बोम पस्वभौर वारे मिस मोमेचा मोर देखोसियो पो।। मिधरेवारे रस्म बेटियां धनखरे मिसभेचाय ।
चतुर्दशसमुखासः और परेशसिभित्री मममी को किवाय मरस अशा सबबी में प्रबोमय पाये परे से प मेरे करिने सम्म मात्रा में । मि २५ । ३।य समी-के पास मिलों समस्पर मप ममा पौबिसब मिने बारेमोरने हो! परमन की बात है। बिमोचावबारे उसको पिन्य पुस्प मे ऐका रेखा और वापी पेमा हो पमा पापकती है। मन देखिने अपनप परेकी ना कि नियस सोम मी मोहित होछे पनि यो प्रयास भवरे वो सरे पा से भी समय यही परिवही समसा तो सम्पति मच्चायो पा पाई। ममा मनोमेसो बिसयो रिपोप देख पात सरपे मची मुपर पति किमत क्या रिली होतील मगर और मी पुस्तकमाम विनय या नहीं रेखा ! किसी मममी पा बोध बाल देख पात्य साबितरक र सामने भो भीमसमा परग्सने पीमापारामा बस अमावारिस्ते बोगरा से बात प्रवेमारसम्बर मो ऐसी पदो फरिर और पाम ब अपय मानती! चरिको को सधपको परेवावमय भय मलमप यय विवा और बो पेस्तो वो पानी किनुको पण मण दमा इससिपमपमतमी मी सवय ३ १५८और जब भला ईसा थप पम्पब में सि २५ । ममी--दिसा मी मामा मामोतो रपणे उपर से निम जयप तातो पापा और मम विम मन्त्रीमा है इसलिये मस्तिा गायकी -पगो रसभेबसपहीये ग्मने बची पीरमर इसी मभर रंगे और पागे उनको पाप पोरियों प्रपा प्राय दिन में स २५ । म् ।। स नो माघ मसीसी" में शिल्प किमाम्मर स्पो गो परी मौरी प्रापत भुगो । एक पापा मोम पर मासिका मोर दोनों पादौ च में मज बचने पर मापे का अधिमार योग इस वि किप पारेपा परेको मोर बस प्रत्यको सी। सबो मे वो मौकी मममी मामा मनिषारि सम में प्रतिपादिम परमामा पौरमा मानो पारे बोर व अपचना! सो प्राव परिपार गरे रथम पठ पाकिससे।
४९० सस्पार्यप्रकाप समानुम्पर रम होय । कर्म पूर्वापर बर मालम्मोहो सके। तोरमा वा रियों पर वाया पाम और गिजामा सिप बामा बीप रप बस बात ॥ १५-तारम नियमबार पारित गनने योर से समारम्भमा पोचलोभरममेवय वोकाममासि मा २-३ ॥ समो०-पायत समिबि मोरे भाहमाम से इस पुखक को मापदे किमिसमै बोपासा समोर ममम मा मौन बस मी प्राप्त साब मिरमणिपाता है। इसधि जाप और भामरा और इसमे मावनेपा पाप बाप्पारे और पाप प्रोमाने प॥ कि पाप पमा काम्प प्रसान्त अपर्म है मितु इसीसे मुसलमाव पोप पाप और पर मने में समवे॥५॥ ५१- निक्त किया रसात भासमाष बीच यो रियो और गरपिाहमीच साम रसमा पाठक कि बायोग्य प्राप्त यही पेपर पर काब रमले और पांच सौ और कमरे रमके, म कम और पास मरे अपने पासपी हमले पर हमारे पकि पुवापार हमको पहामिएमे राप र तु॥पन मिलाये बा मरीमे।। म ससि ।। ।। 11-11॥ समी-पानी या समवमानो ! माप साबिसमे तुम सचिमान् माले दो दोरम्प यसमालों को दो दिन में कमा स! बरुवा बोस अधिमा पबमान में पोप सा है। मबार पांचौर बमोचन पायी थी मेरे सगे। परि मी विचार तो उसपे माम बातों माने और अपना सोपा निषम बिमल किया परम्से मी बार मिष्य पतपाल बौधी पर सादी न सब बीच अपये २ मरे से सोपे हमारे पर सती मोदीमा भोपानि रिचाई मेस्पा मधपापत समीदो समन्दीरे ! में किसपने पुत्रम सब मैंने थोपरि पुत्रोन्यायो बायो उसके पुत्र ही होय म्भव है। इसी प्रमर की परमी मिमा स्वी रिमा विश्व यो प्रथम मापदौन्लों! म भार मी मुपो हो पहा! पति की मगर वो पल पलो समयमा मौर नामवी पवस मनको मिस मुसबमानसमें रपि मौर विधवापरावी परसाई त्यागपत्र योग किया ऐसीरत समय में यो| ॥ 1-पले शमोरिय समावों की और पश्चिी की जो पोमन मिमोपचेचा कब सत्तामा मोजम पागौर देव निम्मे धोनी और देव रिसको चोथे। मिधा धारेगमेरे और रेखिो मख मिचोमाय ।
चतुर्वण्समुखास और पीरभित्री मदमी को कि बात परम भार फरबी में पर पाय पसेप मेरे फरिश्ते पैगम बाने पपा में। सि २१ । मू । समी-पके पास स्विमस्या भा मा पाकि सब सिमे रेख बोक्मे होते होगे! बामामन की बात । विस्को गरे उसको पिट पुल ऐप यो और पब पनि पैसा तो पहा अपरम प्रब रबिम जयब बनाने पचेको चराई कि बिस बीमय भी मोहित हो रस परिबा गणवा सपा मय वो दूसरे राप्रेमी उत्पडम मलयापही पदियही प्रसन्न को सरि मण पहा परक । मया मनुष्यों में तो सिने पो देखिो पण पल परन्तु मुरगे मनी पूमर भावि गित स्यबेरिनी ही पख और भी पुस समागम विमा यो यही रेवा! किसीभमनी इका मोम समतो देश हय सामली कि उसके सामने कोपाठ दोहीम ! परन्तु रस पहिमाल परापत सारिखे चोग से गठ मते प्राय सम्बर को पेपी सफारिसे और पामर प्रपन्य मवमते ऑगे। परिभईकर परा सच सापक वो परये से पाच प्रमय सकल म मैग्य पनि यो एसा पापही किन पवार मलहम इसमये पायव भरता कमी नहीं हो सका १५८-और सब प्रप ईसा साप प्रमाव नामे । लि २५ । समी०-कीय मी मेगा सामोरो रपोरा से न अपना मेल बनाया और अपन मिली इसलिये महसनही॥१८॥ ११-पको रसमे बस रसाये म्स दोषों और रोज इसी ममा रंगे परम्परागे रपको पाव मोरिषी प्रणी मात्र परिवार मासि २५ । स् । भा ० इस भारत के माल तासीरहुमिमी' में बिक माम्मर मरे होप में और बुरा प्रथा मुनी । एक पाला अभिमा पूज्य रस मातिनी भ और दोनों पाया पौष में सन व पपने बाप मार्ग उरिमा योग इसपत में निचरें कि आप मरेभार पर प्रमेयपीपी मागावे यो मिहीपुरंग मसी।मतग गनिमावि परणयों में प्रतिपादित पर पाम्पमा और मां मनाक पारे चोर भया! सखे कि भाव - परिपार बाग. रक्ष्म पत पाते भिमसे।
४६२ सस्पार्थप्रफाय समी --पाला बा सारभरी होम प्रवियों ने पाय और सौम्पनी मुसबमामों मराही पेम वो रसके रासस मुम्बमात्र प्रभाव निर्मगौ को पर्मस तो इसमें क्या प्रवरप संसपी मनुष्यों के समान दिपा भी पता नो कि मुसलमानोज पुरोहित " -बस सब तुम मिखा ग्न मोमो स विधि इस पम मारो कप रमको वहां तक कि बरसे रमको मतको सम्प। पौरपत बत्विको बहुपनि यो अलि में सीरी से जिससे विभय दिया उसने मारा हम सो सन एण समाब देनेयमा गमकी । मार्गक ग्स बस्ति की प्रतिमा पर मालम्पर दोच रसो मा किन विमरे पानी को और मारें। दूध को लमही बाग मा इमाम और मार। शराब की महा देने की बाते पौनेपनी और शहर साफ किसे पोल और पास्ते मोबीर रस मेवेकप्रभा में राम माविक बो॥ में । सि १ .सभा समी०- साये परमान र मुमणमाम वर मभये सब को दुखदेने पर प्रस्ता मसबष सापपोचहानमा होमिनीसा ही पूसा सर मत पण मुसबमानी पर मेनो मुसलमानों को मा हो पुल सा कि प्रम को देते हो वा नहो ! मारा गया पामती कि दिनों मुरम्मर मरेको निभा दिया सबको साये माप । ममा विस पर पानी दूप मम और वारीमा पसंसार से अधिक हो समय १ौर म को मारें कमी से सन्दीपकिय बोरे समय में किया पचास पुदिमागमा मत मे बही माषd " 1-किमि बागी प्रक्रिया अपेमारमारा पसल माने जान माहोगे मग इस साल पानी और पोय व परिमोबा और गई भार बसेपोई और। स्पर सोने को ले कुने पनि कमेपम्मर मा भामने साममे ॥ और निम्मर रोबोमा रानेबाब प्रावधोपी और भामरगा और प्यों माप पा से । बही मावा खोगे उसमे और मिस पोप मेम्स रिसम मे किमान और पेशा पागल परिणाम श्रिम में पिसन्द पो रहे और। प्रची बाब भयो । मानिन मोहिनी विपये एमों । और किरो। मिव रमले राता पिता पक भरभरपामा यस पियम ग्पो Fमाती || सपरितो बराम बाप मिला कर मायचे हो रसम फेमस माम सवा में साव हिमपे वारी॥ म.सि । १।१-40-11-२.।12-101 २ चतुदरासमुहास ४६३ समी-पप रेसिपे आप बनायो मौसा मे मा प्रतिी तो रिपती रवी उस समय भी दिखती रहेगी। इस प्रसिद होगी किमामलामे पणा किसी ने खिा अठा । मग पहा या पोस्ट गरे पनि मुमुग होणेगे तो मी स्म गरीरमौरंग तो मि माम दूसरा सम्मली पदों ? कामी यो चरा गौरभारी महोवा तो गमले गादिनी मोर और बाई भोर मोसने पर मां पर मोमेवारी मेरो या मुमार भी हो रहसे होंगे और समर मग जो म्म रात्रि में पाये मी पदी हो। त्यसदिन बगान निकम्मे सित में ही रहते पमपम मिया मतपरि गयो उसको पा पचन होने से रोगी होमप्र मर मी बस्ते गा और बो प्रम बिना पर रोपे तो से मेहनत मजदूरी पो मोtीयो परिश्रम करके निडरते रोगमि से पारित में रिशेप ! का भी नहीं परिकामा मा रातो रगो मी पप मी रस्ते रेप और सासू सुर मी त ग सपना बया मारी शहर बसता होगा भि मरम्परिमार रोज मी पान स होवे हो। पोजिमेर सबमे गिडयों में पामी पाचंग पार पायों में मम पिको समय सिर पूछेप और कपिल पाटेमा । बगे मेध यो और बमबरों तथा परियों माम मौलाये तो अमेड मभरोस पी चनदा पो हमे स्पा होगी और पार माधो सिन है और साल की शुभ मी हौ । पापा ममा इमपहिरन की wid परबरेयस मी बाम दोस्त और दो मा मांस पीय गम्मच होते पहिये माही सिर और टी मी या प्रश्न यो परिपे नहीं तो पेसे नरोपों सिर में गर्मी का प्रमत होगा। प्रपत्र मात मी तुषों से सोने के लिए बिौने बोपरि बसा अमारियों धीरत में सत्ता परवतमी तो मार पाया प्रेमी उत्पाबरगी। मग ममारियों से वो रिण ये पहा - रम्मेश्पर हम गरम साप ना रिब पर स सदा रहोपोगने में मी किन्दी मारिनी के विधा मस्चिालावे भी उनी सम्मेश्मरों के साप मारिन् कि पापम । इसमय रुप मी शिसोपा में बड़ी मप परि बराबर माय मी सुपगिक पिता पतियों में पारे पहिल में रात कमारी पुमा तोकि विप से पुसमा पाप पहिये। या तो मुसपमारी पीलीप मोर मोमिनार भात् बोरों प्रेम पर भाये ताम्य भी राहत सबकी भी सपने दोग पौर पर्म प्रमीला स्थति में गेसमभव्यय प्रा मममम तरी मनही बति मुराहो मम पर मेग भी शपथग नीरा समा॥1॥ 1-नि प्राय मि रोम पोमो किबीच मार्म ग्स में मिस् ।
सत्यार्यप्रकास - समी०-पागेको एसोपाळीम परेशम विम पर एक प्रसिपी मे सब साग बमपरस्पर भरिपन और मजहब म झपनमा मोसमा परेकोमा पुदिमा वर माथी माम प्रच्छे । यो यति में झिोप यावे हो सब दुबारावा है। 11- भयो। बोहराम मगर उसका किया किमा साने से सियेणारे तु ममता गोपियों अपनी की और मारमा प्रोवाय पपा मोर मासिक समजो बसमझे कोबरे हो पा कि उसको तुमसे अपनी मुसखमान और ईमाव पनि बौदिपा मारेप करने पशिमा ठाया भये पक्षियो मतिम पापिषो रोसा रखने परिणी, पुरण रेली और किस देवाईम •| सि २८ मा ।।५।। ममी-मान भरेखमा परि किन मामा मुम्मा सरेको जसमावरी और पारी प्रबन्म भनेपा एम मय !! प्रथम बापत पर माम्पिपिकि मुहम्मद साहेबको बारम निच या समकी में मामिला पीरब एक पौने में देर शगी तो दूसरी पत्र प्रवासमा रोमन मुबयेपी मुहम्मद सारेच सोमवापये कम ब पाप । परी बाकि मी बोरियों में से एक को बरी पी उसके हा विगतोपापी अपने बारे पोई मी। मुम्मा स्पान में एक जौरी पात् पाप्तीको मुहान पब्धि किया जब पानी मे इसकी प्रमर मिशीतो प्रमा। तर मुहम्मद स्पोज ने सौपन्न व्याकि में ऐसा बनाया। चौर बीमे मीप चिकितम किसी से बापत मत पप। पौषी सामकिपाकिमपी। शिमला लो बीपी सेकसम्मा। इस पर पासपत हरामे म्ती 'विपन्चको हमने मेरे पर रख दिया समेत राम यो बुरिमा गोप वियरें कि भाभी भी किसी परमपिमम्प पता पिवर मुहम्मद समेतो पाप पा में मगादीबकि जो प्रकविको रोपईमा माय पासोमो और वो एक मात्र पक्षपाव से अफमाय और एसी म माया पाठी होम मर्मी ची गा! और दो पर पी दिनों मी मनामहोमोदिनों के भाव में उम्कोपमा मष और पर्ममा से ये। किसीमाभि- कामातुरापाभ मनमा । बाममी मनुष। रक्षको अपने से मन पप ही होती और इसका पा मी मरम्मर माहेब की बिना मौर शाम्बर भगो प्रमाण माने में मानो परपस्यो। पब बुनिमार बग विद्या किमान पिारस माविमो प्रधिा मम्मसिन्धुममपचासादिवो पाय और एम्मी पपस मे प्राव रोख मुम्मा मान सम्मको बोली भासो रोमी प स रामेबरसत रसारका सिमेवमयरोप पतुर्दसमुखासा कि परमार मेपी और मुहम्मद सारे तुझे बोरो रनमे रमम साम से पनी स्मिा दे किमो पुरुष सेमिया हो। सि मयुज किसी उदिप पिया सम्मान किया पुसमी पापये प्रनाम सिरिऐसीपों से गेकसि किला कोई नहीवथ। देश मा रेशन पपये प्रवास सिमोनेसियाकीवर्ष से मुरम्मर स्पषमताको बोगसी मामय सब परिमान बही मप कि बरा क्यामरा माना मुहम्मर भरे किये क्लिा सामे या माई मरा 1५।। न! माहाभ प्रशिरी और गुस मों से और सन्नी म पर सेम •। सि २८ । स् ११ ॥ समी०-खि मुसममा समाबीमा अन्य मत पी से धरने “नि पाम्बर और मुस्पमा प्रेसवोसखिये मुसलमान बाग पदम भये में मयते।। परमामा मुपवमानों पर धीमे मिस मेसाय उपाय मन्धको सममिव्य स ।। 10 ५- समय भासमाष बसपस रिबमुख होना और फरिरहे रोग पर विमारी गम और म्पये तक मानिने पर अपने रस विभाजन ॥ रस दिवसामने बामे चामोम ममपिपारागीकोई वसी सो विधा पमा कर्मपत्र अपय पौध दिने शाम अपने . मममम मो पोर्मपत्र मेयर जो कोरिच मना कर्मपत्र पाच वर्षे सराव अपने से बस मा म रि गपा होता मैं पण अपय में सि २६ ।सू ॥१५-2014 समी०-पावा किमासको और मानकी पत। मामय भी मी सस्ता स्व गरम समान गारजापरि पर बसका पासमान मतो पाप विष मि। पान म जरा पारीरभरी होने में का मनिष म रम सकिसठ पर बैम्म । भर पारी मे गणमा मिय मूर्णिमा कमी पी दो सप्ता। और सामने प पौर मी भाग मान्य सिमा दोश्रो सम्यो । पच्मिाता पोशी होने से सब यषिमा दोसम्म पोम सपनीयों परमामी महीगाम मध्य बारेभावकीकि पुरुप मामा पाप में पत्र मा गपषमा कति में भेजा भौर प्राप्रमाबों- पई व में पारप पर में भेजपत्र बचपन मा भगा सम्पयर पामो सामापि नही सब सौपा सम्पर 181-पीकर और सरसामना होम गौचरम विक परिम्पच रमन पचपत ॥ पनि में है २ पास .
। सत्यार्थप्रकरण पोलो एप मामो किसानों के स्पनो की मोरोक्कोम सिस ३. समी०-रि पास हजार रियम पीमायोपचमबार की रात्रि लोकही। परि गली की राशि नहीं है तो म्तबा मा रिस कमी मही हो समयप पच्स सराफर और कर्मपा पखेको बैठे अपच मारते होगे ! परि ऐहै तो पब रोपी दरोम पुमा मरो बागे। यमों से मिमामाकीमारी की भोर बौरेंगा पास सम्मान मरों में लोन पर और समविचरी मे बो कि पुरसमा प पापाप्मा व समन ममी को कमरों में औरमुकाम और प्राय सारा को मारी बरगी और मातम परिखे किम्मे । पचास्य मम मते गे! अपये १ स्पनों में बैठे इबर पर मवे सोते माचवमा रेप पेव भाराम महो। ऐसा सम्मेर पिसी में महोण, पेसो पों में सिप पनि रामप मानेगा! --विखन ला किया तुमने सर से पन्दी का तुमने स त्या किया मामात भासमानों पर गौर सिमा चारको उपक ममता और किम मपीपक ॥ में सि । 10-11 समी परिबाना ने सपनिमोमिल प्रमर कमी पाही पनि परिव में पायाम यसको। बो पायो पम्पमाल मा हो गण है। भासमान को समर बम सम्" बॉपि बिरामर और लिस पर परिसरी चौब माम मामय बने होघे मी रमन भामत बाम रखनमनपरि पासमारी कोपातो ग्ब सब पीर में चार सूर्य कमी दीपप।बोबीच में सच पान तो एक पर और एक मारे फमा प्रथित समे से कम सत्र में मम्ममा पमा चहिये ऐसा ही दोबा सिमे पापा सपा मिया11.1 11 - मरियममा बस मव पुत्रो स्पब मामा किसी कोम -11..ामा १८ समी०- परिपात है तो मुराधमानयोग वाइमा शिक्षा मुहम्मपरममा" इस मामे में सारे पापी माम्मद साहेब या पुस्माते पर मय से मिचौरबो हिमपी मते तो इस मन की बात को समतेर मरिराको मुसबमाम ममत्परत उपमे पुादी की पोटोमी पूर्ति मेममम मान से पुत्परता मातोबोमवाब! 15|| १४च्या किप सा सूर्य और चाँद । म बतुरंशसमुहास समी०-मवा धर्म बरनी हो सक1रेशिने गासिनी समय है! और पूर्व ही दम भने में या प्रयोग मन समय में इमबम में क्या पुचि है। ऐसी र अमम्मच पाठे समेमास कमी हो सकती विच प्रधिावा पाप किसी मिमी नहीं होती ॥m. और मिंगे पर मोबासारापोबर मारने बचमार ममता मोती बियप। और पाम्पचे गांगे नवादी और पिया मोरप नको पराध पवित्र ।। म समी-पोडी मातीपर्पसबारे मिहिने हो र माप समान मा सप पौवन गमका मन्दीर सब्स रपम्प रेविहार मा परार्म पर साब दुश्मन करते समयूरो मान मनम से मोर बरिस्त में स्मो सपथमाव होने से स्पमी को भावान और सेवाको परिप्रम होने स दुसन्या पक्षपात को। पर समाहीमच पिलाया वाप मी मम स्वस्त मरण निमुरा की मारपीपी मौर यही बदिस्त में की पुस म समाम 4k मर्मपित और परम्पये मी ? पापी ग्रील तो मम विषपान मा पर्ष दुमा पर जाने तोरेगारमा माने और स्मिानी पदिश्त में ली सम्मे। परि बम्मे वो रम विध ईमाम बामे औरता की भक्ति कम म परिरह मुन्त मिल गप किनी दिरों ईमान यो और किमी प्रेमिम धर्म मुम मिल पास इसस सामान्यप नसा 111१ ॥ पर दिन मानुसार और प्यारेमा ए सिरित पोरोपमोर फीले मप यापम में मि .FI समीरमानुसार परिण सव्य वा सा पहिरत में सबसे फरिले और माती सारा पप ग्रेग कमेनुसार सपरिपे बस्विमिवाप्पा मम सब रिमे पे मन बामग माम पो पर परिर भौगा सब फीरतों बारे। सा रास तपयमा करिखों में प्रतिरोभले पचाय कोणीय पम्न मे सप जी सरिलाये और खतरस समयमा परि म्पमत बस अपनी सब परम एण्यमो बिनमा सिम मोसम इसमप्रम उut १११ बिय गो। पौराकि बर पारे । और समारणा अब ।। और समसमाना रबरी गरे । 4.सि.।मू ।। 1-1. समी--परसोतमागिर मार बस्य सोमा भीर बर मयतमा सम्म भरा ग्राम पर समाप्रकार समस पप पा समय किसी रिमी समी! सोही समय और भावीपरवावहै. १५-और बबी भापमा बा| और बरे म परें। गरम चौरे य॥रच विध मम्मई ।। म सि. ।सू व १-१॥ समी०-यावी अपनपने फिग्यसकर मामा कोम मा सम्म ! और बो भा सम्म ! और एलोपय समायो पार पण ! और मात्रा सन्यसब यस महकों सम्॥१५॥ १५-सममममात्र पुणे पडोकी ॥ किनुमा भामरे बसा ॥ बाप बोह माशा (पा)|म • सि ।।. ८०१५॥ समी०-स बराबरे पापा में भूपोर ममेव स भी नही पा पानी तो भाभय सिमाम पुर्षों बातोपता ! परि मेपनि राजिनामयो भन्न पुरयाही सिरिने पूर्व ही। मिस बरे बापमान के पास है। पिपाराम राम कियोमा मोरिय और पुधिसेनिस पियधिक माहोग १५५-किन मम मम १ एक मम ॥ बार में भी मर मता एक मम॥ -सि ।५ मा ११-१॥ समी --मममममें सारा भी है। और क्यामेरी मनपर चोरी और कब मोम मे चोर पो मामी मरीमे तोप म मातमीचरिये करणे सोपी साबरी! जयमवाक्य ॥ १५॥ १५५-और पाय मानिस तेरा और फपिओपछि बाप ॥ और मावा या रस रिप गरम .सि ।। ८१५ समी-मोदी फोरममा सेनाना अपनी सपको ऐन पति पाप यिनसे होइन होलापमान को सामा समम कि जिसमे ग्मगांवोपासने! बदि इतमा बोयो प्रसन्नी उसमें से समापी ॥१९॥ १५.सभाप पर सबके साम्पर मे रखा मोबी सुप मे और पानी पिसावा उसकोमुमपान रसको बस पाव पर उसपर मरी पडीमा बसो में समी०-या मौनी पारिपती भी हो मिसिसीचौर दिया प्रमअपय विषम रम पमरोरोपमा पापरिपथ टो समे पर किया निम्मतको प म पौर पणसममास get उस रात मदोष र समम्म बापाए। इसी समाज सपा भनुम्मन हो किपरब रेय में बनी सिपप इसी पथरी कम होती है। इससे शिकपिी प्रब देशो मे अपन पापा.. २८-पोबोमोमा मल बसोये रसभेदम सामयी माये ॥ प मापा किसी पौर अपराधी । म बुलायम फरिख पारे। 4 .सि ।।९ मा 1-1611 समी पनीच पासियामम पसारने से मौनाच मबा माय मोमो मो और अपापी हो सासभप जीप माप भनी सकिसे मय वरस्पा को हुण्य मेरे 1-निय सापमये मान को नापौर सावाये सन्पोमा॥रता फरिख और पकिसम्म पीच गमले साप पाश म्पति अपने पसे र आम ॥ में समी०-परि एकही रात में अब बरा हो प भागात अर्वान् रस समर और तापमापाव समोरो परेपी और रात्रि भोसमें स्व पर हम लिख भाये पर बाचेका मापी होता और पहा बिकरित और पमित्रामा पहुगम से प्रमापरिपे मारे। इससे सामाकिला मनुष्य एक देखा है। प्रदेशका रिसे और सम्म दीपकमा अब एक पपिपमा पनि पा! भबन बापामा पनिममा ना! पायो जातात अर्भात पित्य पुत्र भर पवित्रामा खाप के मानने से कोय मी सगा। पविमो किम इन तीनों ने बाबही मामले ऐसा मोदो परन्तु का विममा एमावोवा फरिले भौर पम्मा को पविश्यमा सम्प भी पी पदि पक्मिमा तो एक अनाम पनिसमा लास और को बानिमल रात दिन मन भारि सम समे भामरेजीमाम यहीं। 11. पर इस मसिमे मिथो पुरिमामी सामु स्थपित मा पिया। मुम्मे को दो मा विष मित् गोमा और निप्प हो सकती है। माता सा दोष प्रारमिना इसरिये कि सायाचे में पापमपमा सम्म मन ममा बोमम पापाय साम मारि नियम असावे से ये मुमो प्रम से मन भी मारा और पाप पाना प्रौर पुदिमापी को माइसके म इस पब षिष्य ममम्पप और ममुप मामाको प० मान प्रतिमा परम्पद्रव मच ममुषों में दिखा पाल एति मरेपालि पर पुनपरोपमोनम सबो मपर से पामम्मा पब मनुषी पर सब प्रीति, ससर मैप सत्यार्थप्रकाप अभय कोस्य समय किसी बा विमी पपी। हदी ही समय और पसीपली बात है॥११७. १५३-ौर पर किमासम्मप्र बारे। और अब बरे मम पामें। प्रोपों रेप। और जब दिम कर ग्मा या।। म .। सि ।सू ८२। समी०-पनी परपम्पबरे झिपासम्म ! प्रापत दोन सगरमौर परोसे पा सभ्य ! और रा प समारो और पसेपरें यमी से बच सके सब बास बसों मन्त॥1॥ १५४-ममबाप्तम्मन पुगे पडोकी ॥ शिनुमान गहा ।। बीच दो माह (रम)॥म •मि ३ ०८।।१२१॥ समी०-समाम बनाने में भूमोर गोप न मी नहीं पा पापी तो आमभिमान पुर्षों बायोपख ! परि मेधादि राशियों को हुई मयी तो भन्न पुसी नही ! इसरि पुर्व नहीं। गि सब वो बोकप पावसा पास हैदिपमान म्मम किनारोगा भी लिया और पुखिसे विम परिव अधिकमराहोमा।।1।। १५५-फिर मममते है एक मम ॥ और मैं मी मम मा एक मम ॥म सि । ELI 12-1॥ समी०-मममममम मममी है।और चाची मनपर बोनी और मारायचोर मरे पापमी ने मम बोरी मेवोपम चारमी मे चार में बारे में पापानी प्रयोगबाप ॥ १५ ॥ १५-और मापा मासिक पौर फरिश्ते पतियां ॥और सपा बनेय म्स दिन होगा।मैं सि ।। मा १५॥ समी--मोदी से कोपारसी सेबना अपनी सेना ने पनि बोच मिाहोलस्टायपोगा साया समम कि जिसमे ग्मांचोपरेको भी इस पोय तो संजी उसमें से समा सगे ! ॥१५॥ १५.-यतमा पाप ग्वाम्बा सहारनामो समीप को मेजर पायी पिय रसकेको ।। म समाप रसको पम पांच प्रो ग्यो म मरी मी पर रो रो मे॥म . .सि समीया मी मम्मी पर बाबमा पर।भी हो चिसविरे रस्ती और खिा मामल्या विषम सोमपामरी रोमा यथा यदि सब को पर पिरिमामत की पत में बन र घासमुहास - मरातबहोगमा समम्म जापेप। इसी मो मेड पम्प at परब देश में पीलिपप एमरी सरोम रोपी है। सिरोकिसिी भाव रेयो मे रान बगी.. जो ममप ममम ममी मोम सापपो मो॥ परिसरमौर अपराधी । म बुखायचे करित रोगा। में म । । ।मा ८ समीपाच पासिमम पसारने मी मान्य। मा पाप मामी समर और अपराधी हो सोसिअप जीव मामा सोचो समय से अपने रायपुरय मो.५८ १५-पिताय ममे भाममेरोष पवार। मोर बर मये एन्पीमा रहर रिश्ते और पवित्रामा पाच रसाबप पास म्परिक परेपो र माम समी-परि एक रात में न रखप होगा पापत प्रपात रस पर खरी मौर पारे र रापबाव सोनीपो और परिपाइसमें समय भारे पर गोभमानही माम र पालिक रिर भी पवित्रामा समय dear प्रोसिये जाम पर मा किरा मनमय एक- रेलयात और माग्न तीन माप पिपरिया अपमानाय प्रतिमासा पोखगोमव भात् पिता पुत्र का पवित्रमा वाम र माये कायापी पाकिम इन तीनों में जा न्यो मानते ऐसा माहो मग तो तारिले और पामा रिमामय पीरेभो ! पी पwिat तो एसयम परिसम्पनर और मेची बाम ब दिन और अपन भारिप में सामने पायजमीभमबही... समरिवारिमानों धम्मुख स्थापित मत mataमु पो ता पनि पान माल पर headोमबाग पाडामा लिएर कि सम्म परममावासमै गाय पित ARASHTRA मुम्मा भीमा शिरो और पुदिनी मे म्पियामा भविष्य प्रमया मन एRow मामा म मनुष्यों में दिल परम taimऔर पुमार साय यो परप्पा NEPORaje, भारत मेर समाप्रकार समस्थ मा समय किसी पर विभागी एगी! पाकी दो समय और सतीपाती। ११३-और मम किथाममावरम ॥ ौर व बरे मम ॥ और जब पीर बापौर में शिक्षा प्रम्मा • सि । ६५थ 1-४ ॥ समी-पनी अपन गायवेपसे फिपासमार पामत लोन पापा और खरों को कैसे पा सा और पोय पोयो पार गरेमा मौरम् वा मुरें। निशा सग समपात में स14॥ ११४ नाममासमाष पुर्ण बयो की ।। बिरामी बहा ।। पाच मोर माका (i) ॥ में -सि ३० ॥१॥१२॥ समी -स अब समायबारे में मोरोग कम भी नहीं पा मानही तो नामराहिले सम्पन सौ बालों वा । परि मेपनि राधियों को दुम तो अन्य मोंदी इससिपे कुर्व मी? किन सब बरे को पालापान सारे पास है। परिवारसम्म किनारेवोपा मोरिय और किसे पिम भरिपरिकभरा होगा। १५५-मिन मयते । एक मन और में भी मर पवार पा मम।मे।सि।। ८१५-10॥ समी०-ममम ममपम पहरा मी म्मए और लाचारी भजपोरीचौर समयब होय मोर पसे अपनी पर मैं दोपचारमीसी कि उसके साथी बारापानी पदमामेप ।। १५॥ १५५-और पबममा मासिक पेरा और फरिखे पछि पापो और बारा सोम प दिन दरोगाम .सि ।। ६२१५ समी०-कोपी से कोरपावली मनामा मलनी सेवामा कि बाप से होमस रास्पदमन मे मामा समय कि गिसमे रमा पोपा मेमने बाद इवमा छोयो भनी मम ममा समे 11|| १५ -बरपायबस्ने रयो पैसम्म सुमेरचशे मी तुम पर पानी पिसाप म्मको सम्मान रसको बमबारे साम मरी पसौम्पर बरसे मे॥में . .1सि समी-लानुरामाती परमपिम्पि मादी हो मिसिरे स्वीजर रिया एमबस्नविषम करम पर मरीरायती पण पिरियन बना लिपपमा पठ में मार और
चतुर्दशसमुन्नास
इस्ले मिया रम्या दिम्पनि पत्ते) इत्यादि में दो किरण में शिव से-
इसमें (प्रस्माता चौर इले) भावी और (मिश्च पापा रिम्पनि पत्ते) पा
संकट परमिटी सब देखने में भाने से किसी का चौर मारपी
पोप में मनाई ।। पदिइसमम देय माता पात्रिम मयुर और
मारपरीति से विसर पर परिवार बन्न सी पावसी रपनिपर
मवमवारपणे पसपाविप रेबमासी । जैसी कि मापनिप, सिवापसी
रामयसी पोप्रयतापनी पत सो पारे।
प्र०-धाम करिसी में ऐसा नीमा अब तुम हम हमारी
पको मा
--उन्मरे मानने पर मारने से मारी बात सही हो सकती।
जिस प्रमर प्रेमने इसमें प्रयुक्त मा उसी समर मे बर दम अपवित
पोपट पप गाय से मीन Eिपुस्तक प्रेमा भापत
दिखायो चार अर्बपति भी परोपको सम्माय मी.
प्रोमाय ममा प्रचार किनिसमें सब प्रमाम मुखर
मन्त में मुशि होती है।
-ऐसे ही अपने मस पपपपीकिश्मा मचा
यी सर बुरे । रिमा (मारे मतसरे मन में मुखि मा सम्ती । पर
म नम्मरी पत को सगी मागणीम वो को मानते है कि प्रम-
मारब परिव्य, रप पारिराम गुप सप मतों में भावकी परविणार
बीप, मिप्यममारिसर मतों में पुर। परि तुमको सत्पमत प्रय
पादोहोरिमतको प्राण भो।
इस भाग समन्तभ्यामन्तम्प का प्रकाश संपसमिया अपगा।।
रवि धीमापानम्सरसठीस्पामिनिर्मित सत्यार्यप्राय सुमापापिभूपित
पबममतषिपय पतु समुनास सम्पूर्ण ॥१४॥
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समम्तम्पामाम्पमकारा मपेष या मरणमस्तु युगान्तरे वा, भ्याम्यात्पप' विधामम्ति परम भीय १० मतम॥ मयान सोमाद धर्म स्पजेलीपितस्पापि हेतो । भर्मो नित्य सुपने त्वनिस्ये, मीवो मित्पो हेतुरस्पस्वमित्य ॥२॥ मसमाते । एक एप सामों निधनप्पनुपाति । शरीरेस सम मा सर्पमम्परि गम्पति ।।३॥ मनु । सत्पमय ज्यात मानत सस्येन फम्या विवतो देवयानः । पेमाकमन्स्पपयो यसकामा यव तत्सत्पस्य परम विधानम् ॥ ४॥ मी सत्पात्परो धर्मा मानुतात्पातक परम् । महिसस्यात्परं वान तस्मात् सस्पै समायरत् ॥ ५॥रम एनी बायोकेमा प्रमिण के अनुसार सब से निब रमा प्रेम । अब मैं बिमार पानी में पैसा २ माक्सासनम कप में पोमा किनिमम पिछेष म्यान इस प्रस्व में अपने प्रमय मै म निगो इसमें से- 1-पम वर्ग किमिस परमापरि माम! जो सचिनाबापि गयी विपके गुर स्वभाष पतिसमनिरामा सम्पपल मामा, मत सचिमार, पपातु म्यापको सब परिमन्तो पो पो, पर बोले मोमुसार मम वापसेमापाव पावि कायमुखी रसी को परमेय मामता है। -परों भो" (विध धर्मपुचईभरीव परिता मामाग) मे रिमोम्स का प्राव मारतात प्रमाण निको प्रमाण होगे म यो माप प्रब की अपेषा भी। भासम्म पमहीप प्रपये सम्म मेला प्रामक और पिसारिने भी प्रमण हो । यो चरीगो र चाँडो के पास NR मा पर 11. (म्पायसौ पचास) मागचमोकियोमास प्रापी मास्को बयो ? सो परता ममाय पो मोरे सरोगेस प्रमाव प्रबो इनमें कम सिमममम मममाषमा। २-या पपवादित म्यपचाप ससम्पपचारि पुण्यशायरी से प्ररिता है ग्स "प" और दो पति ममप मम्मामापारि विपशाप मिमी सप्रे "मपम माना। -गाइका सुपपुष और सामादि गुपपुर मिली सपी और माता ।। - सम्म भार वर्म मि माप म्पप और समान अमित पर्यात् से प्रारमय मूर्तिमा दमकमी मित्र यस ॥मोम् ।। स्वमन्तव्यामन्तव्यप्रकाशः of पाए साम सार्वजनिक पमै जिसमे सपा से मायते पापे मारे और मामे भी इमोशिये रमले मसिम को विसमलिापो कोई बहोस । पनि पपिप्पुल बन ममय किसी मत परेममाये हुए जब बिस्लो मापय योग मारे ग्पन सामो भी दुरिमान् श्रीमते मिन मिलो पाक्ष भाद सलमाषी, सम्पदा परी पोपभरप पावत पिा मापी मनो मन्तब और बिसकोपी माक्प प्रमन्तब होने से समारोप नहीं होता। अपनी देवादि सपा और ममम मिनिमुवि पन्नों के मारे पनि माविको कि मैं मी मानव स ममा मापनों सामने प्राधित रवा है। मैं अपना मन्वन ग्गी में समाईकियो वौष अब में सक्ने पसा बये मोह। मेवईवान प्रक्या मममसर गये खमा मी अमिप पीमितुको पम ने मामा मान्य को पारसको बोषणा और ममप मुम्भे समीपर में पामत मय वो पानी में परिव मलों में से किसी एक मतमाही रोच किन्न हो। पारपाचवों में प्रवर्मपुत च मम तौर जो मेनु बापमाप मी मता मच पावलांकि ऐसा सम्म मानव बहिः । मन रमीको पथक मनाव होन्ट भावों और शनिवाम को पमधे मम्मी पाप मी १ मे और बाना बिसेमी सव इवषादीकी अपने को सामनमामाची पोचेमा मालिस और सचिन की गति मिमानव और प्रधर्मी मोती महापाया पुर मौ दो सवामि समपालवि और पश्चिाभवम्ब कि मेची पो मोसोको प्रसारिका पर पनि और मालिस गति से इस मममयो उसको चिठमाडी पसलहोचो मार भी मोबा पाइप माग परम्म धर्म मे मीप होने में श्रीमान् ममयमा मतस्विी पनि मोसम विपकसम-नि- नियम्मीलिनिपुषा पदि बा सुषत सभी समाविणत गम्मा वा पपेएम् ।
समस्तम्मामातम्यप्रकारा ५०१ अपेष या मरममन्तु युगान्तर षा, म्वापात्पय प्रविधक्षम्ति पर धीराम ॥ म बतु कम्मान मपाम जोमाद, ब स्पोजीवितस्यापि हो । छों मित्य सुबमे त्वमित्ये, जीरो नित्यो हेनुएस्पत्पमित्य' ॥२॥ मममरते ।। एक एष पुरयमों निधनप्यनुपाति प'। पीरण सम मा सर्वसम्परि गम्हति ॥३॥ मनु । सस्पमेष म्यत मान सस्पेन फ्पा विवतो वयान । पेनालसत्पपपो मात कामा पत्र वत्सस्पस्प परम निधनम् ॥ ४॥ माहि सत्पात्परो भमों नानुतात्पावक परम् । मी सत्यात्परमानं सस्मात् सत्य समाचरेत् ॥ ५॥ म । इन्ही मारामों मोकी अमित प्रमुख सच मे नि रम्य कोबी में मिन र पानी में पैसा माम्य अपर परेप से पोमवाई किमिकमकिप माल इस प्रप में अपने । ममय में कर मिपी इसमे पो- -पम कति मा परम्मपदमपम शो सचिवमावि आयल निसले गुब मैं ससमाव पविज्ञ निरामर सम्पपक, मम्मा नन्द सलिमा, पाहामी सब सीभी, पर्चा, सामोसR RA से साला पादिमुल सी मेवा माता -री पो (रि मर्ममुक ईमादीत पहिला मनामम) विमोम्स या प्रमाण मापात प्रमाबमोलि निव प्रमाबोवे सीप प्रमकी पेशा ही कमीप अपने स्वस से पता भयक और परिमादिमी अपने सभी परो पवाभा पा र उपर (पम्पसौ पचास ) सीको यो बिम्पसम्म पारि मालिक नये सप? उसने परता प्रमाण भर्वाद देरी घनश्यप समाज और बो में - मिस पर बम समाजमा १- पति पाय सापारिजावणीमसिन है रसम “मे और दो पापापदिय प्रत्याभय मिपम्पमचारि नानावितीरममे पर्म" ममता॥ यो इप्पो सुका पौरमापरि गुबगुबत्या nिt सौभ प्रार' माया ॥ -वर लस और पर्म मे मि और सप पर सममित्र पर्वत समाप्रममितमी...
सत्यार्थप्रकाए बोए और मम्मी एक मानबहोप इसी प्रथा परमेया और बीचको पण नापक म्पास्त्र उपासक और पिय पुत्र मावि सम्मपमुख माय॥ 1-प्रमादि पहातोबा । एक चा, पिवीर बीब, तीसरा प्राति पांव बलमपावनी को मिस मी मते बोकिल पर मोगुब कर्म, स्वपच मी निस - 'प्रपा प्रभारि" को संबोग से प्राण गुग में सपा होते " मिलोप के पात् यहीं रहते परन्तु सिमे प्रम प्रचोय होय । समय रनमें प्रवाहित और रस पुनापि मोप होपातमा विलोम भी इस वानों को पण से भवाति मालवाई। 't" मोमबो पर प्रमों मशन पुजिकमेव होम मधस्स बमय॥ धरिम प्रयोग होमिनिम्मे परिनिमिच गुण स्वमा म समाप होय । किसी ने किसी से पास किस विमति है। उसनेमा रेलिमे । कोही पीयेन समय में उपाय पी करने में और बागमों का पाय मोम परम्म मावि मी ।। 'सरिस। इसमतो प्राचारलंकि पी रचा रेकर और पाप में भर पाप बपाचोब मोजाति सम्म बमोम सामर्थ बोने से पीस को है। "-"मान्य सनिमित्त प्रान् अनिम विमिच से है।यो । पाप कर्म पर मिलोपासप वाचारि सब सामने पो इसखिये प 'क' Aबिसवादी और मोपन्य पारे। मति' मा भएको मेरूम पम्परिक सम्पपईचर और उसी सरि में स्पेन विममा विपक्ष समन फस्त मुखिये समारो मोम पुमा संस्था में मान्य। -"मुधि भाषम रोपापन्य मर्मा पोयाम्पस धर्मापाम मनसे रिपठि पक्ष पिायों म संम पविय मुविचार और पुत्व भावित "-" भलिबो भी दो से मस किया सबबीर को प्रम सिरोवरे मनईमते॥ १५-प्रम" पीचर्म भर बसेस पिचर। १६-'याप्रम" गुग माँ की मोम पेमक्या ॥ 1-"राब पी को एम गुरु बर्म समार से सामान पावर पधर्म की पेब स्थलों में पिता परे पर राम पुत्र मात्र रनको सानि पर मुख्यमले में पाकियो।
समन्दम्पमिन्सम्यमका २ 15-"प्रमा" सभेमोहिमो पवित्र गुप, कर्म स्वमा भरण भोपात परिचयप धर्म के सेवन से यम और प्रत्यको सपति पाहतो समग्रोह रवि राय पाय पुत्रस्त पारे। 11-बो पशा दिपार असम को पोष सम म प्राय को माप भरिलों को यरे और पपपरियों को मारे अपने प्राथमा समाम सब गरे सो मरसको में मौसैफ मानवा -ऐष दामों को और अधिानों में 'ममुर" पापियों को प्रयास भवाचरिकों को पिपर मारता ॥ ११-हीं मिली माग पिता भाचर्म प्रतिषि मामी राय और बर्मामा , पवित्रा जी और सोबत पति म सभा ममा पिएम" भावी? इस विठि मषश्य । इन मूर्तियों को प्रम और इवर पास्यादि गगमस्यिों को सबा अपम समझता।। २५-विता' विप्र निष्ण सम्पवा पाथाय विवन्द्रिमादि की पावी ये और भविष्यति रोष से रसको शिमते है। २५-"पुराव" बोमादिपबामे परेवापिसार पुस्तक म्नी में प्रयच वास कापगाय और नारायणी नाम से माना अब मामत्यति 1- सिपे दुम्मसागर से पार रखा किमो समापप, विप्प पसंप पारि मोमासम्बस, पुरुयम विपारम्पति गम कर्म हैदी को वीर्य प्रम दम बास्मादिदो॥ २५- 'पुष्पर्य साम्स से मा" इसखिये कि विससे सचिव प्राम्म भगवे विमो सुपर से पर अपठे पौर जिसके दिगामे से सब विणते ? इसी प्रीपेच पुण्यसा॥ २१-"मनुम'को प्रब से पप्पोम्प स्मम मम दुध, पवि, धाम में पन्ध मेह, मन्वय बना कुरा सम २.-स' समवे। किविससे शरीर मन और प्रामा ग्राम रोपेपविभरि रमणासन्त मोपास है, इसमे बच समता है और रम पमा मन लिपलमीमा चरिने । १८-सभे का? किशिपमै खिामों म सन्नर स्थापन पित पात् रसायन बोल पदार्प विप उससे उपयोग और पिणी एम गुपोशाम परियोगदि लि पमरि, ब, प्रौषधि की पत्रिव पो पर गीतों में मुख पहुंचना है, तो ग्चम समझता है। १४- "" और "मनुषों में मतम में ~"व" ऐश इस भूमि ममम इसरियो कि म यदि की पाने खोप विस्म, पान इसको अवधि रज में रिम्पमा सत्यार्थप्रकार पनि पिस पत्रिम में प्रा पूर्व में प्रपत्र नदी हैलपरों के पीच में मिला रेगौग्यो 'मानव प्रवे और बो ल स य ? उनले मोवामी 11- स्पो सपियमा भमन्या समाण मार और मियाममप या भावा॥ 11- शिम उसमे मवेशियो सविता र विवरण भोपोन्म भध्मा दिप्यमवरको इचापौर मात्पर्ष प्रविप्रया। 1- गुरु माता पिता और बो समयमा भो साप मी गुता ॥ १०-“पुरोपित' मे पम्मान प्रतिवमी सम्परेच होये । १५-- स्पामा' बो पेम परदेशी पा १५- विधायर' बो पारबपरिणाम भी प्रमाया से सम्माविमलेनमा प्रसपत्र परिवार मार पी शिशाचर मोरो पावापामावा. 1-पानी भर 'प्रभावों में मी मानत 1:- watो पाम बर्मामा सब सुख मिस करता हैपीको 'मम' मा. १५- परी" पाच मर को इसमें से कम बोमसो गुग कर्म स्मार और रविबापूजी मसावि प्रममाव सौसरी घरिमामयी पालमपार और पानी अपने मामा परिचिइपोच पलामो से मसल पनि सलमप्र पसलम परिलाप करना चाहिये। "पोपमा बिससे सब मनुषों के पास मेन और पुराने समय में पपेपरमा। .:-" "परसन बार अपने नामों में स्मन और मा मोमो में परमाला ये पान होनापर्व सम्पमा भारि मम 1- सम पुलिस मोप पर मममी की प्रतिमा। 1- बोल पिष मोपचार सामग्रीमति रोष। 1-"म" को बार बारमना मोई, पर और मन मेन पाया प्रकार माat| 1--गरीरसंबोग श्रम सम्म' और योगगनुभव। 1- यो निस्मक प्रसिरि अपनी इम्बो पश्चिम्पाव समाप"विमाभाव।।
सामन्तव्यम्मम्मम्पप्रकाश You - मिमोप' विपापात् पति के मरवाने प्रति किलोप में पका पापी भिर रोगी में भी अपना मैं पुस अपने से अचम पसी पुरुष के समन्तानोत्पचिमना ।। re--"क्षति' गुपकीन प्रक्य और ज्ञान होमा इसमसमाति पवि ati -'म अपने सामग्पयत पर सम्मेप से पो विधान पारि श्यात हम विपे ईसा से बचना मना और इस पर विरमिमान भाविदोबी॥ २ उपासमा भाले गुग में मार पति से अपने मन्य भको सनसभपने कोम्पप्प बानबर से समीप हम और हमारे समीप स्प निश्प बापम्मास सात् मना रपासमा भी इसम्म र सरगति धादि। • 'सगुणविशुपति प्रामोपासा' बो २ गुण परमेर में? रस पुरबो मी नम क मानम सामन्य "सगुपनिगुपति' एम गुषों परीक्षा प्रोर दोप माय शिये परमामा पाप पाप भापकिय प्रार्थना और सब गुणों में सरित सब दोपा से रहित परमसो मायाम अपये प्रत्यारस और रसकी मात्रा अपमा "भापनिगु बोप्रसन्न होती है। वे संप म स्वसिवन्त विचमा रिजाइनको वियप नाम इसी समाजमा प्रयतमा बारिमायभूमिम पनि प्रबो में मी विलो। प्रात् बो २ गत सब सामये मापान सिको मानता प्रात् पसल बोपमा सब माम मचा और मिप बोरा पुरा है ऐप नियों को मोरवा चौर बो मन्मन् परस्पर बिमा गरे । रमो में प्रसव को प्रताकि इन मत अपने मता प्रचार कर मनुनी पण परस्पर एनुल दिये है। इस बात को सर्वसत्तम प्रथा ५ मा एमप में सा सस्म में समीविरमा सर मुखबाम पचमे लिये मना म्पस पोर अभियो। साति- मान समाप्मा मा म्यान और प्रासदी में महामविसे पा सिराय पर भूप में काम होगा जिससे सोग माग से पम्मा श्रम मार मिनिसबा राम और प्राथम्मित हो रे, पड़ी मप मुस्स - . मममतिविस्तरण युरिमाप्यपुर मोम शो मित्रः शं परुणः । शो मवत्तीमा ।। शुभ नो पास्पतिः । शो पिप्पुरुरुममः ॥ नमो ग्रनये । नमस्त
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पेविट पुस्तकालय छे पुस्तकों की सूची पप पावसनियरय पागरी परिसम्पमिमा मृत १२ मा संक्षा - पापी मूब सायी पण परिय पर५. प्राश्रिमिधारय होम पन्न समहम्मामाचप्रमाण भामरी ५ . - २ २ . . . सिपिसापा .. पापपिपि कोरसहिता सवित सरोप मंच सूची सस्ति ०२२अपने साहिल पगित मंत्र सूची समित प्रयासहित पवित रिया (पेठा tow) १५ बरसा पत्रित माणमायो समागम गुरम " माय सामवर संहिता मरिस प्रमित पोहों की अनुमरिम " पोय भावार-1 पम्दापोपरि माध्य पिपमठपराव २१ मिसर्मचिमि बनममा साधारण गोमरों की बरममा वरिपा पमितीपर Life of Swami Dreythand निए रिप Sura natu (Esolyb) by llar Bilas sorda la 1300 Dagaland Courwowora पापा tion solund (English) auperior P. 1000 फ्णिय १५] Dorantique yaar Rs 100 मारा सय का मूल्प सभागमा । पंदमाप्प, वार ६ भन्यपुम्नो पत्रिय सूपिम मिप या पत्र लिमित्र । प्रप पका-पदिक पुस्तकालय असमर । ४ २