Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner

Path Ki Vanshi

Sharma,yadwandar · 2010/12

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पथ की वंशी
एक कलाकार के सपर्पमम जीवन पर
याधारित उपयास
पावधेद्र शर्मा 'धन्द्र'
रा ज पा ल ए पड सन्ज, दिलो

मूस्य
प्रपम संस्करण
प्रपामा
दो रुपये पपीस नये पसे
मग,१६११
रापासणार, रिस्ती
हिन्दी प्रिटिंग प्रेस रिली

मैं इतना ही कहूगा याम उपन्यास है। इसमें मैने पापुनिक सभ्य समान मबीन सम्मों मार पासते हए पानाणका एक सीमित मर्यारा में पिसम किया है। इसमें एक ऐसे कनार युवक का कहानी है सो मंगहा है, हीनभावना से पीड़ित है, प्यार से उपेक्षित है। पामपने लिए मुम्पर उपवन का निर्माण करता है पर मह पूगीनापरी मुग ते पन की सास भी नहीं सेने देता। तब उसके जीवन की प्रस्पक मांस रिमी होपाती है। फिर भी पा महान् बनना चाहता है। पपनी हीनता को मह महानता के विराट् में सदा सदा के लिए करना चाहता है। इसके लिए वह अपने परिवार कतम्य पार पपमे पापके प्रति भी उपाधीन हो मावा मिकिन उसके मन की कामना का परमबिन्दु पारश्नति-काम में पुषसागमा सादीचता है मार पंव में रसे 'सोच-सम' का सहारा लेना पावर है अपने पारिवारिक पौर सामारिक दायित्व को सभामना पाता है। यादवेन्द्र शर्मा 'पद्र'

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१
चमः सामने एक कापा पडीपी और कापीके पास एक बात जिसकी
स्याही मूत मापी जैम का दिनों में इसका उपयाय नहीं हुमा है और यह
बस मेन दो घामा के लिए ही रखी हुई है। दो-चार हिन्दी की पुस्तके
पौर दो-बार अंग्रेजी के प्रसिय उपग्यास वेतरणीव पोहए प । भूरे रंग
बनताब पर कहीं नहीं हो स्याही रे मोटे मोटे पम्मे पे को भय मही
गान पर।
मुष रेरा पहुत रिम्मैशर राइनोतिक मेटा फी तए पम्मीर मुद्रा
बनाकर सामने पा कागर पर पाधुनिक प्रयोगशालीपिकारी का नमूना
उसमाचौपक रिया उसने -प्रातिपन फिर उसके होटो
पर मूषी मुस्कान पिर उठी मानो वह मरने पापमेह हा हो 'बह
भीसा पादमी है।
फिर उसने अपने सिर को इसेमी के सहारे टिका दिया पौर मिवने
नगा जीवन-शून्य । पापे उसने मिना नहीं।
पापीर तक रिचारमन यरहा। फिर उसकी काम पाही
। बनाने मगाr
बसौ।
जीवन+पैसा-पानर।
बापत पैसा-सममदारी से गौवन यापन!
गोपन पैसा-विसासमय पोरन !
जीवन-पसाम्पस परम दुरापारलारसता।
पौर फिर उसने रन सरोकारकररावर पसरों में लिया 'इन्दु !

1 इनके साथ उसके मानस पटल पर एक युवती का चित्र रमर पाया यो किसी प्राइभेट स्कूल में प्रप्यापिका पी पीर मो पासम्म उसके पाक- पंम की रिमुभी। उसने सिड़की की राह परत नीभिमा को रेखा पौर फिर मन ही मन कुन गाड़ाता प्रा पनी सारी मेकर उठ पहा हुमा। माम सीमेंट के पर्व पर उसको बैसाखी को 'सद-सद् रसके मन की प्पपा को साकार करती हुई उस मूने कमरे में पूंग ठो। 'मट्द उस भाम्पहीन मनुष्य रे बीवन की पुखपरी पह पनि पी पो उसके पन्तराम की पहर परतों में प्रतिप्पनियों की मांति टकरा-रकराकर उसे पीड़ा पहबा पीपी। बहरपस-सासिएकीका मम मेपरसदाहोगपापभर के मिए बह इतना गम्भीर हो गया कि उसकी मृकुटिया स्पष्ट सनी ईमानपट्टी फिर उसके बारे परम्परा के महरे कासे पारमा गए । उसका मुप पप भर में एकरम पीमागीमा-सा जान पड़ा । उसमे मिडकी भूमते रमूम यो मारक पीमे पको पपने दोनों हाथों में पामा मोर महामाया 'वैमूरमंग। पार नीरो रेस्पों में मबोदित मसकने मनामको वैमूरसंप कर दिया। मनाम में उम सेबा को जिसकामाम निर्वाग'बा एक बहामी की कार पामोपना किसी पर में पपनाम में सिप वीपी। वह प्रामोबना इतनी पमरी पौर पमपातपूर्व पी कि निर्माण पाव हो पात में बहुत सारे स्तर पर स्तर पाया पौर उसने पनाम का एक माहियात पिर बवाते हए तैमूरमप पहरिया । उस समय प्रनाम हंसता हा ताकि रेस्त्री युरि जोगियों की उपस्पिति यह अनुमरमको रिसने मे दुरा माना है मग्नि गार में इस पर उसको ममातक पीड़ा पहुँचाई और मह भर तर रसी पए परेशान है। 'प्रनाम बाबू! न्सिी माडीमा मृदुपर मुनाई पर। मनाम मे ताररा हाय में चाय की प्यासी मिए मोह। पनाम पिम मुस्कान हॉर्स पर नाता हुमा पोमा पनी भानो यहाँ क्यों नहो 'भार प्रापका मूग पन्छा नहीं हम इसलिए मैंने सोचा कि पापमे पाना से देखा न लिएकी का पर्श कितना खराब हो गया है। पौर सचमुष पनाम मे देखा कि मुट्ठी में पर्दे के घोर के पा पाने मे उसम काफी समबरें पाई है। वह पर्वा मीपे कपरेको फूहातासे निचोड़ा हमा- मा बान पड़ता है। उसने बरवा के प्रश्न का कोई उत्तर नहीं दिया। वह बैमानी के सहारे मेर के पाम बिछे पर्मग पर माकर मंठ गया और बायकी भूमिपी मने मगा। पररा उसकी पोर बिना देते हुए उसकी पुस्तकों को उठाकर मसमारी में रपन मपी । एकाएक परदा ने पृया 'पनाम बार, ममुप्प उदास पर्पो हा बाता है? 'बर तुम उदाम हो तब उत्तर मेना पररा में मौन धारण कर लिया और पनाम पतंग पर मेटार मुसित पिसार विमेश बामसाग के जीवन पर प्रापारिख रपम्यास 'लस्ट फोर माइफ' पामे मगा। पुषदेर तक दोनों एक दूसरे में नहीं मामे। फिर परता प्पासा सेकर पसी गई। उसके माते ही मनाम मे करपट देते हुए पहा पचारी। पररा-एक निम्न मप्प वर्ष की कुवारी बंगासिन कन्या कामी म भैम का पर्ष पौर पुध मोती भी। इतने छोटे छोटे पार पीनियों की नप मे परमानाप में भी रम जम्मते ही सोहे के जूते पहना दिए हामानवीड़ी नहरी पौर कामी। शाम यामम बदमों की वह पने मोर पामे पार उसकी कमर के मीरे तर पसे हुए। पानी में पाती पी। उमाश पम्प पर शरीर का फैमाव पूर्ण सुषतीकामा विवाह पाम्प। ७

पनाम के नीचे के दो कमरों के फ्लैट में रह रहवी गो। बाप सरकारी
पाफिस में हरममा तीन पोटी पहिले पार एक पोय पाई।पर-मृहस्भी
का संचालन मारहाण में।
मनाम इस परिपार का एक मिान सरस्स-सा हो पपा। भरपा का
पाप चित्रकारों का सम्मान करता है और उनसे मित्रता बनाए रखने में
पौरम का पनुन करता है। कार में पहनी पिसकारीका पीक रमता
प्रनाम कोपरापाहती पी से मनाम भी जामताबााकमी-कमी
बह परया के बारे में सोचा भी करता था। सोपता-सोपता पानापुर
हो पावावा किया हदय को गिर्दपी मामारा प्रेमी की पार
तोर देना चाहता था।ऐसा रिचार उसके मन में पाया पापा करतापा।
पातो पापपिक विम होता था या पिक प्रसग्न-रोमाटिक मूर में।
मनाम ममी तक पतंम पर से ही सोपाहमा पासपो प्राण पुस्तक
पर जमी हुई थी पिता ने उसके कमरे में पुन मोय किमा। इस पार
परवा ने पाति मिन्टन की साड़ी पहन रखीबी पोर मेहरे पर पासर मम
कर उसने पपने हापों पर मेहरे के रस में काफी फरास निया पा।
मनाम बार!
क्या है? पनाम ने उसकी मोर मिना देय ही कहा।
सिनेमामही पपै?
स्वो?
'मुमे स्विीकाम पही पार पार पाना है।
क्या पापस पाम को पार लिए टाम नहीं समते?
क्यों?

'बहुत मायश्यक है। प्रमी तक मनाम मै परा की मोर नहीं देता था। यह उपेक्षा परदा को पुरी मगहीपी । यह प्यबहार पशिष्टता का मी सूचक है, पैसा परदा में मन ही मन सोपा पार बह कुछ भबप-सी पोती 'फिर मापने चमने की प्रविमा क्यों की पी? 'प्रतिमा को तोड़ा मी पा सकता है। पमिमात ग की समी-सगाई महिमा की प्रदर्शन-मामना लिए पररा पानी पी फि पनाम उसे देते पम भर के लिए वेते पाकिबह मर्ष करे अपने मन को तुष्ट रे,पर प्रनाम द्वारा निरन्तर उपेचा पाकर उसका पहार ताप नठा। यह समिक रोप में मोमी तुम्हारे बमनों का मा मोम? तुम दूसरों की दवा को जनही पमझने सना बम्म पन्या पनाम तुरत पर्सम पर बैठ गया। उसने परराफी पौर देवा । मगर पार हरे। रोगों ने पनिमेप दृष्टि से कुपसण के लिए एक दूसरे को देखा। परवा अपनी पोती का पस्न प्रपनी पंगुली के चारों पोर मिपटाने ममी पौर पनाम के हो पा समतामूप हंसी नाच उठी।पा पोत सर मैं बोमा मुझे मेरे एक मिनरेभर पाना है उसकी पत्नी पस्यस्प है। पररा! यहां नहीं पागा तोर स्विना पुरा मोगा। परवा रे मेत्र भर पाए। मह प्राणों को पोष्ठीई फोमम स्वर में मोमी 'मनाममा पार पने मित्र के पास समयमाए मेकिन इन्दुदीदी यही नहीं। यह म्यु दीदी मुझे पानी नही समती 1 पोरमाहाकी उगम बाहर चली गई। उमरे जाने बाद प्रनाम मारकीस्वाभाविककोदेवारममार हो गया । फिर पहपरा के प्रपिमारपूर्व पाश्यमा सेफर कईबारसोपना पिारसा रहापौर पार में उसने मिण निसामा पिपरा उमे प्रेम करती है पर उसपर प्रपना कप प्रषिकार समस्तीतमा बह उसे ऐसी प्रामा दे सकती है। तभी वह उससे ऐसा हठ कर सकती है। पांच बर युके। मई की चप्पता मौर चयपुरमीटिया किस्म की गर्मी 1 म पाहते हए भी उसने नई पोशाक पहनी। पूर्ण पार पायजामा। पामों में पोपपुरको हस्को पूती। अब में निको मिम कारपोमा स्माम । मैर की रास में से उसने एक बटुमा निकाला। बदुए पारंप काता पा पौर यह किसी पम की भेंट यो पौरमा सेठ मंबर की हवेती का नगमा उसके मस्तिक में घूम गया। उसने तुरन्त अपने कमरेपी विपिमा बन्न कीपर पयासीपमाफ किया और बम पड़ा। पीड़ियों के बीच पररा मिल गई। उसकी पांवों में परमा पौर धिमा यत्त रोनी पी । पनाम ने मर्पमरी दृष्टि से उमे देसा । उसके भागी को सम माती पररामोती 'पापरी विवसता म पानती हू मनाम बापू, मेरिन मरि पाप साप होते तो हमें या पार पाता। मां भी यही चाहती थी। माभव हो सके तो पाने का कप करिएमा हम प्रेम प्रकार में पाहे है हिन्दी फिल्म देपने। प्रनाम धमहे, इसके पहले बह पुन दोसी 'पाप बस में पाएमे पा तमि में। 'नो मिस पाएमा उसी पमा पारंगा। 'रस पब पर पाए, तर रसमें मिया। पररापीरपा मरी दृष्टि पनाम के भूनते हुए पाप पर जम गई। पनाम उस दृष्टिकोनही सह महा। उसके मन में हजारों विमामों की पीड़ा का मपरप हो उटा । उगने पारा में तुरत सोचा कि क्या यह सहमहमा चाहती थी कि पाप समझ है उतापसी में गिर पाएंगे। मार! यापरही है। मरे प्रमस्तनमाट पर खेत कप उमर पाए।

उसका निधना होठ उपरके दोभन दांत मेदा गया। मंगिमा में मठो खा और भयानका प्रतीत हुई। परा सिरता से सहम गई और पुष उसकी पान्तरिक मारना को समझती हुई यह पौधता से पाती गई। उसके पाते ही प्रनाम ने अपने प्रापको संभामा। अपने प्रादेश और रोप पर माफिया।माम से पारा पॉप और बम पड़ा। सामी की 'स-बद से अपने एप पर पा ही हमारे की पोरें-सी प्रतीत हुई। पर से बाहर निकमकर उसने सापारम म्यक्ति की बात से प्रषित ठेगी से पतना पुरुपिया पैसे मह सोच रहा हो किदिएकी में पहो यह जाती-ममूटी परदा नसके बारे में सोच मे किया कितना तेर पस सकता है? हालाकि बस स्टापेन' तक ससने पीपे मुसकर देता भी नहीं फिर भी पहपस्पना में साासी पुस्पों की भांति ऐसा विचार दावा कि बरपा उसे चिड़की की राह देख रही है। इसमिए यह बस में सबसे पहने नपाकर पा। इससे पनाम की पारमा को महा संतोपामा। बस में मोर पी।सीटें बार मरी पी। मपनीसाठी को बगम में खाता हुमा यह एप सीट को पकाकर बाहो गया। पचानक सीट पर हए महापय की दृष्टि मनाम पर पड़ी।वह तुरत उठ खड़ा हुआ । उसने प्रनामको कहा 'बटिए। 'नहीं-नहीं पाप ठिए न? भनाम न न रोका। 'नहीं साहब में ता हो वाऊंगा। पापको तस्तीफ होगी। इसके मुत परमाणाभावपे। पनाम रिचा होकर बैठ गया। उस समय उमका पहरा पिप परि- स्पितिजनित किए गए प्रपरापारारित परोफम्पमिकी मांति पीपा पौर मेरोष मे भर गपापा। - M

૨
प्रसिडनीरोग रेस्त्रां में ममी पूर्व प्राति पौ। सप्माता में दो
इसका कोसाहन पौर सिमरेट के धुएं की भुटन उत्पन्न हो जाती है यह सभी
तक नहीं हुई पी।पा की उपस्पिति सहमता से मिनीपासमती पी। एफ
पोवीन पार मनाम में मन ही मन से मिना भी पार फिर उसने मगर
मे समय पूरा । उत्तर मुनकर उसने मन ही मन साचा प्रमी पमित धर्म
मीयुगम बोलियों की भी नप गाएपी पीर मे एएसे गमकर पातीत
महोकर सकूमा
सबस्तुको पापाना पाहिए।हर पम उसके लिए
मुग-सा बन ममा । उस रसपी प्रदौसायनित प्रादुनता मेषों में घमर
उठी। बहन-बैठा पाय पीने समा।
लुमाई। उसके मुरा पर रस्मास मार रठा । पप पर मुस्कान
तावा हा वह मोसा 'तुमरे की रकरी मैने तुम्हारे पाने की पाण
ही मोहरी पौ।
'मैं बापरेकी पकी पौर तुम्हें एक पुगपदरी मुनाना चाहती हूँ।
मुगोपे योगानुग होमोये।
'पपारी
'बह कहानी पप गई है।
'कौन-सी?
पीका करप बिमाप।
पमाम में प्यार भरी दुटि मे इमुझे मुत पर पंसती रत्तारकी
रेसामों को पातामु को हारिफ प्रमलता है । 'पमयुप' मे पहानी पर
पना उसके गोषन पोबनड़ी सफलता है।
'ऐमे बोलई हो।
लागि गुहे पहानी के दानेपी मिनी घुमी? पग

तुमारी सहेमियों ने उसे पसन किया है?' 'दो-तीन सहेलियां इस बीच प्रा पई पी उम्होंने इसे पूर्व पसन किया। सेमिन मुझे तुमसे मोड़ी-सी सिकायत है। उसके सर में प्रदान मर प्राया। प्रनाम मे भानभूमकर अपनी मुद्रा को गम्भीर बनाने पी बेप्टापी । उसने चाय बनाकर इन्दु के प्राये रख दी। पाय का एंट मेकर इनुप्पामे पर अपनी एप्टि जमाफर मोमी 'मैने अपनी सिमी कहानी परी पर मारपर्य मा तुमने उसे इतना मोबदस रिया ? यस कहानी पर तुम्हारी चित्रकारी का प्रमाण स्पष्टत गोता है। तुम्हारे मित्र रम्त बानपाएंगे कि यह हानी इन्दु को नहीं मनाम पी निमी हुई है पौर फिर ये मुझे पार तुर्म मेकर न माने क्या-क्या सोपेंगे। क्या-नया सोचेंगे। मनाम के मूवे इपय में प्यार का झरना-सा फूट पहा दृष्टि में पहतबागी उतर पाई। 'बस ! उसने रुभिम रोप से बात सत्म करने पीपामारी। दोनों परेर तक पात ऐ से दोनों पत्पर या मिट्टी के बन सिसीने हो सो मनावट के तौर पर मगा दिए गए हों। दोनों ने बाप तक पानी बन्द कर रही थी। प्रधानसम्बोली 'तुमारे मित्र मीम साहब मही पाए ? 'बम पाते ही होंगे। मेरे बहुत पन्चे पारमी है विस्तु गह। हप के परपर पौर पररममीमा हिर ऐसे प्रारमी से मिमने मे क्या साम? 'उमड़ी पहोपो मेटों में पहुंच है। यदि हम रागी करने में मन हा मए, तो तुम्हारा पहमा कहानीमगा पासपमो। तुने मापारेघ में मनाम का हापरबा मिपा कायम सर में पपने पहरे को चमठे ऐसटे में देखतीयोसी 'तुमने मेरे जीवन को बदल रिया। पपा पी क्या बना दिया? मैं प्राय घोषा करती पी कि मैं एक ऐसी स्त्री बनू निकी इस समाज मौर इस समान के बाहर प्रतिप्टिर मामरिकों पौर दुटिनीगियों में सम्माम हो । मोप मुझे प्रारकी दृष्टि से देने पौर प्रब मुझे विश्वास होहा है कि मेरीया प्रमस्य पूरी होगी। पनाम मे दीपाति से उत्तर दिया 'मैं अपनी मोर से तुम सब तरह की मदर दूंगा। "तुम्हाराही यह प्रताप है कि मैं भाव कुमपन गई है। बकीत स्याम पा मए । मनामने उसे देखते ही पठने का प्रयास किया। पपान मे तुरन्त उसके पापे पर हाप रखकर कहा ठिग-4ठिए, तपस्नुफ पीपरत नहीं, पापको उठ्ने में कप्ट होमा। मनाम का मुंह उतर गया । वस्तुत अपने पर प्रमित किए गए पया के माप उसे पो नही लगते थे। दूसरों को या उसके लिए प्रसप हो राती पी। उसने पहरा मौन मारण कर लिया। पमान निष्किार भाव से मुस्कराहा पा। पनाम को पाप पखा का उसपरमोई प्रमार नहीं पड़ा। यह उराके कोपर रोर की पापी रेकर बोमा 'पनाम पापमे परिचय मही करापोपे ? 'पाप है मुजी यहाँ प्राइवेट स्म में टीचर है पौर हिमोसीमको दित तापमरिका भी है। पापने इनकी महानिपो पड़ी होगी। पान मे रिसता से मुसराफर रहा 'बेमे में कहानिया नहीं पाता पाने का मन ही नहीं रहना पुर्मत ही नहीं मिलती निमार मैने हमसी एकहानी 'पर्मपुर में पड़ी।सीमाकाम विमापा प्राचीन मामा को पारी समस्यामों में परित कलानगरिय है। मे मे फनामा एक मुरममूना पानता हूँ। 'क्या पापो मेरीमहाली पनरमाईदुमे प्रपनी मरी हुई पि सनिक उपकर पूछा 'पसव अगी बहुत ! प्रामुनिक द्रौपदी की दया और उसका चित्रण पार मुझे प्ररणा मिमी कि मुझे प्रम हिन्दी की कहानियां और उपन्यास पाने चाहिए। मकिन म पानताई कि यह सोचकर मी मे धनहीं पर पारमा । अपने पे से मुझे फुर्सत नहीं। मै एकपन के मिए मी मुक्त नहीं है। पर मुभी पासों में गर्व चमक उठा। प्रनाम म पर पुप पना उचित महीं समम्म । यासपी मुक्त कंठ से की मई प्रपसास्यु पर प्रभार करती मा पीपी। 'बकीत साहब इनका कमाल तो कहानी को मोह रेने में है। महा भारत की दोपहर पति को सम्पूर्ण मारीख के साय महासमर्पम पिया करती पी पौरनकी द्रौपदी पिवयता और भय से अपने पापको उन पांच मोमुप मेड़ियों को सौंप दिया करती थी। ये मेलिए अपने मागबिमास की पप्ति के सापन के स्प से उस प्रर्ष-पीडित नारी का उपयोग करणे में। यह पौवन की कितनी भयानक ट्रेजरी है। उसने मेरे पर दृष्टि पमाकर का 'पाप तो काफी पीते हे नबकीम साहब कैवत काफी महीं पनाम काफी साप पुष लाने को भी पाहिए । 'बह भी मिमेमा। समी रेस्त्रां में दा एमो डिमन युवतियों में प्रवेश किया। ये गारी पुरमा-पतमी पुरविया प्रमेवी में बोमती सभी एसियों पर मगर फेरती दईएकामेकी मेर पर गारट गई। एदु ने तपाक मे हा 'इम बार म एग्मो इरिया समान पर मिसना पाहतील बीवन पोर मन में दोपपिया है । नियमित प में ईमा प्रमुके घरों में पिरमर प्रपने अपरामों के लिए यमायाचना करना पौर उसी मति मे अपने निजी पपरापों में दिकरला ये रोपिरोपी ।पकीम मार उस महानी ना पाचार होगी मेरो सहेनी-रिजन! ?

'मैने भापको माम में साहित्य के मामले में उतना ही पानकार गितमा एक साधारण पाठक । केवल प्रग्या या पुरा बता सकता। मानं पार्ट में पनाम की पूम है। उसकीयमी की विपिष्टता मार बारिक बमरकारशारा इन्होंने कम से कम कार्यो काम पीठ बिमारिपाठ प्रयोपनादौ-यमावशाली चित्रकारों का। पनाम को नुकेसमम की गई अपनी या प्रासाचिकर मगी। पीस पाहब में काफी का सम्बाइंट मेकर कहा 'पब में मरे की बात पर माना चाहता हूं। मनाम तुमारी या योजना है? 'योगना एक प्रकाधन-संस्था वोपन की। 'यादेकार का बाहै। याम ने स्पष्टता से कहा 'यह म्यापार बिलकुल पाटे का है। भाई पनाम कोई ऐसी पोगना बनामो बिससे मोहा मी सोना हो पाए। 'गोषन में केवल सोना बनान का दृष्टिकोण कहाँ तक ठीक है पाकीम साहब पापकी गरा-सौरपासेही या सहारा मिमेगा पिपेपत भएपी का एक मानी-समह वपवाना चाहता है। मुझ निवास भी है इमकीकहानिर्मा मोप बात पर रेप। पयाम प्रश्नाचा दृष्टि से कभी इन्दु को पार कमी प्रनाम को देखता या। रसको पैनी दृष्टि मोदूसरों के पन्तस् के सत्य को सहरा से पहचान मेवी पी तुरन्त बार गई किमनाम मुसे प्यार करने लगा और यह मुके लिए बड़ी से बड़ी रिक रठा सकता है। 'म बनाम बीत भी साबिसके सभागो तुम रतीनतो मर पाषानते हो महास पनिवासी और सरा भीममा रहने वाला । मुझे कुवनहीं चाहिए, मुझे चाहिए पपना साम! मुझे नाम का सारा पाकाप में भी रीम गाए पो मै वहां पहुंचने को नहीं गया। 'दयाम पी! प्रनाम पनिक पायच में पा मया । उमेदयासका पा १५ प्पबहार परा मी हचिकर नहीं लगा। इनके सामने उसे अपमानित करने का उसका क्या रम्य हो सस्ता है? यह समझ नहीं सका। मनाम मे कहा 'फिर मै कोई माय उपाय दूर मा। मुझे इन्दु मीका कहानी-संग्रह प्रसपाना ही है। पाप नहीं मानते बुद्धिको समुचित विकास पौर प्रोत्साहन म मिलने से या ठित हो जाती है। स्याम मापरवाही से उठ यया पंक्यू पनाम! पौर देमिए इन्दुनी पाप पुरा न माने में सपा प्रपनी विगोरी से निमाम महीं सकता है। प्पया मरी मारमा है परमारमा है । सपा परमात्मा से मी या पयाम इस वयपमा गया से उसने यहाँ पाकर अपना समय ही पराब किया। इन्दु ने पूणा स मुंह विचकाकर कहा 'भापके बहुत मम मित्र है ! मैं कहती है कि ऐसे मिमो से मित्रता रखना क्या रस्री है? पनाम मे करप स्वर में कहा 'पानी का मूस्याकन परीक्षा से ही होता है। लेकिन तुम चिता न करो म सर बैक कर भूगा। सब ठीक कर सूगा । पासो । परियापाहता तो प्रपमा काम बनवा सकता था। इसके बार ये दोनों बाहर निकमे । पनाम कीसानीका लट्पट् उसकोमाहत में पपमा पृपा पस्विरण रपती हुई सबको स्पष्ट मुनाई पा रही थी। ३ स्या के परिषबारे में एक ही पारम्ना पिक उषित होगा कि यह पटी हुई मुनी पर पेचार तामहीं करता था। बम धन-संपह पौर उमकी दृष्टि मतिरिक्त उसके मन में दूसरी बात नहीं पाती थी। तभी की बात भाममात्र पौर मेन-देनका पापार पपिकपमठापा।

एक मरीब बनिया परिवार में उसका जन्म हुमा पा। वीव बुद्धि होने केपारम उसका विवाह पमए पर्ष की उम्र में ही हो गया। पत्नी रहेग में तीस हमार रपये मेकर भाई। पाम ने चन पर्यों को बड़ी मुरमा के साप रख दिया और पढ़ाई में तन्मय हो गया। मा की परीक्षा पास करते-करते उसके मां-बाप का हान्त हो गया। प्रैक्टिस प्रारंभ करते ही उसकी बीवी को सय का रोप हो गया। गफ्टरों में से कहा हमे किसी पहाड़ पर मे पाइए। किंतु यास प्रपिक से पर गया और उसने अपनी परली कापही परहनामकरानापुरू किया।कम टैक्स की प्रक्टिस उसकी सूब पमी। बारात-दिन मपने कार्य में मस्त हवा पा।बोबो वोन-तीन पिन कमर पर नहीं पाता था और उसकी पलो मेनों में प्राकुमवा लिए याम की मार पोहतो पठी पी । वाम माता पौर बड़ी स्वाईसे उसके बातों पर हार फेरकर उसकी तबियत के बारे में पूछता । उपचार के बारे में सच्चे झूठे कई प्रश्न करता और फिर महवा 'मैं नवपति हो गया हूँ। उसकी मग मीची रवी पापार में कारती 'माप यह मकान परम तीगिए मही पपा कीजीपी है। नही विचा राजपामी होने के बारचयपुर में मकान की बड़ी रिलत हो गई है। पाया मकान नहीं मिलता फिर भी मै सोर पाहूं। 'नेकिम महा मेरा दम घुटता है। विधा भी प्रार्थो में मौत की पायाएं माप उरखी थी। 'सी बातें करती हो तुम मुझे ऐसा परा भी मही मपठा। में भी पही रहता हूँ। यहां सूरजमीप पौरपरा की बानी बोनों पाती है। और गरमता पाकिब तुम प्रच्छी हो पी हो। एकग्नि विचा मे श्याम से प्रार्थना की 'यह नौकरानी पड़ी पूछा है। कोई दूसरी रहनो। 'दुसरीकहाँ मिलती है। वस्तुत भाव पुष पार ही पी। यह नौकरानी बितनी सस्ती दी उतनी सस्ती मौररानी दूरने पर भी नहीं मिल सकती। फिर भमा श्याम नसे कैसे निकामवा? वह अपनी पत्नी के लिए सी से गो फम साया करता था। पर एक दिन रिपा ने रोप में कहा पब उस निर्दयी में अपनी मा मिमिपाकर कहा 'यह रोम प्रावमो का भय पर ही पता है। पर्व में रुपया परवार परने की या रसरत पिपा पर पहाा इट पर। उसने अपनी ममाकांत पौविहीन प्रांतों मे अपने पति की पोर या फिर मुम यहाँ से बना ही जाना चाहिए । मेरा सप निश्चित है फिर जीवन के प्रति सम्मोहसा! वम पिणा के पहरे पर भयानक सापाए रोम नठी 'तुम मुझे पारकर क्यों नहीं मार देते? तुम मुझे पर्व ही पर्यो तापारहे हो? बापो तुम मुझ पहर माकर दे दो। वाम परपर की मूर्ति की वप मचम पड़ा रहा। "रिवर तुम्हें सदाधि यह सपा कुप काम नहीं पाएगा। पापको इतना पनत्तोमुप और हत्यहीन नहीं होना चाहिए। प्याम ने पुष्टता से रिपाको पोर रेतकर महा 'ममी तुर्म जीवन की गाई का माममही सा यिने महत्व की बीर से में ही बान मरता। फिर यह सरासर मूर्यता है कि हम उस वस्तु कोषाने के लिए अपने पन का अपभ्यप करें जिसका दिमाग मिरिपत है। रिपा पपने पति का उत्तर मुनकर उग्पादित हो रही 'मोह ! पति कोई मेरा कसना निकाल लेता तो मी मुझेलनी पीड़ा मही होती गिनी तुम्हारे इस साम्प मे हर पता नहीं तुम्हें क्या हो गया है। तुम वने मनपर्यों गए हो? यह बिमाम मामारण स्पिति में बोमा 'भुमक्ष नहीं हपा में निमाम टीकहूँ। तुम्हें पैर्य रखना चाहिए पौर मेरी बावको रुपमने का प्रमाम करना चाहिए। भूठ नहीं बोलता। मे पंसा पाने या सर्व महाँहर सकता। 'या में मस्यौ। उसने पूषा। 'नहीं-नहीं। फिर तुम कसया पर मुरेमन्चे हस्पताल में भर्ती करवा देते। मैं तुम्हें विकास विभाती कि मै सन्धी हो पाऊंगी। गक्टर भी ऐसा ही कहता बा। उसने अपने समीप परी पाएको प्रपमा पोनों मुट्टियों में मात्र मिया से पापोवन कोबोड़ना नहीं चाहती है। पैतान की तरह उसकी पतंच के पापे बहसकरमी परवाहमा पास योमा 'सयाबीपन का सत्प, विर सुबह पति है। उसका दुरु- पपोग का पाम बुरा है। मैं तुम्हें मारना नहीं चाहता कि मन तुमपर पैसा पर्ष करना मी पर्व-सा है। हवा म्पयों के इमार के बार मी तुम्हारे स्वासप्प में बरामी अन्तर नहीं पाया। म पाइताकि पर तुम किसी रेवता की मनौठी मानो। गाएक पन रफकर पुन बोना चपा तुम पुष रिम के लिए पीहर मही पा सकती हो। पिहोवा अपने पीहर पनी गई। रमरिन नाम मे मीर बना करवाई। राता हुमा सोच पापा की बारका पापका मी बरिया होता है। पाये से में चीनी का प्रयोग हो बन्द कर पा। पौर उसकी पार्टी में एप्ता मात्र उठी। वह अपनी पत्नी के पलंग पर हाप फेर कर गपड़ा उठा पत्नी ने मुझे बमरान माना माना वो मानती पर मेरे वो टीम सौ सयों की बचत हो पई, परि मे पवनीमानी मौर कठोरपाते नहीं करता पोपपापा मेरा पर पोगारबाती। कभी-कभी भरता भी सामरापक सिख हो पाती है। पौर रसने नौकरानी को पुकारा। नौकरानी हाय बोरकर खड़ी हो मई। राप्रपनी कमर पर मो हापमानिक समस-गहर पोमा 'तुमारी कितने लिको दमना बाकी है।

'माइ की।
'इस बीच तुमने क्या-रसा नुकसान किया
कीम साहब इस मोच मेरे हाथ मे सिर्फ एक कांच का गिलास टूटा।
सिफ एक ही?
'हा साहब
'पाठभाने कम हो गए।
'मैमिन सरकार कारका पिपास पह पाने मे लुमा विकता है।
'मया विस्ता जानती हो ममा गिलास बेकार होता है। उसके
घमने की कोई गारंटी मही। मेरा पह माह का पूपना गिलास मा पौर
परि तू महीं तोड़ती तो मरम्मी नही टूटता।
देमारी मौकरानी चुप हो गई। यान ने अपनी सफापट मों पर
पंनियों को मचाकर हा 'भार से में तुम्हें पट्टी रेता है। पन्द्रह रूपमा
माहगार मुझे बहुत लगता है। मने अपने पदासी की नौकरानी मे बात
जीतकर भी बह पांच स्सों में घर की सफाई और बा ममते को
हमार।
'पाच सर्यों में ही! मौकरामी मे विस्मय मे कहा।
'मेरे म्मान में यह भी पपिक है। एक पादमी के गतम अधिक मही
हो।रो पता भया कि उसका काम समाप्त।
नौकरानी जमती हुई पपने रपये मेकर पमी गई।
परिलों में विधा का भी रेहान्त हो गया । रासने उसके सिए मासू
बहाए मामा भो यह कोई नहीं मान सका । उसने उसके पीछ पाए
नाम भी रिमाए । उपरान-पम भी रिमा मेकिन उस जीवन की गति
में कोई भी परिवर्तन नहीं पाया।
बाद में पाम करम प्रापासर में मिलकर मार रपये

कमाए। मिसाइर उसके पास दीननाबकरीब पये हो गए। उसने अपने म्पत्तिगत नाम के पीपे राप्त का मारी मुक्सान किया । मासेठ पार पाफीचर से मिलकर मार्यो का माममा इनारों में तपसाबा रेखा था। मभिक सपा पाने के बार उसका मन इस पेशे के प्रति स-सा मया। मया इन्कम टैक्स माफीसर यात हर मामले को बिगाड़ने का प्रयास करता था। निदान एमाप्त एक बकीन से एक पन्छा पान हो मया । बह पोरों को प्पया उपारने मया। पचिसोकासात सौ मिसाना पांच-पांच पसमा सैकड़ा पाव नना हगार की पौर पर पांच सौ रुपया रेना महीपा उसका मंचा! पही उसका प्यापार । फिर पीबह नियमित रूप से परेर के लिए कामाकोट पहनकर चारी बाता था। सीमें उसको महान संतोप पौर मुखपा। क्यात को मित्रता प्रनाम घे मी विचितम से हुई। प्रनाम को कुछ स्पों की पारम्यवादी किसीने उसे बताया तो रसके पास गया। पान ने एक प्रपरिचितको निर्भयता से उपार मांगतेचकर उससे प्रभाषित हुमा। उसके व्यवसाय को पूरा। उत्तर पाकर मागोमा 'माप बिहारदं यह भी कमप्तिपम नहीं ! क्या प्राप मुझ रवा सकते है कि पापको सामाना कम कितनी है? 'पही होगी पणा पासपा। सिर्फ पग्रह सोसपा ! पोर पाप मम्मे इतनी बड़ी रकम प्रतियो पार पर्ये मामने पा गए! सका सर प्रात्पर्य में पापापा। एविए, मरोड़ा बहिन निममा का विवाह है मुमयों की सन्त परत है। मै प्रापके पास पड़ी भाषा कर पाया है। प्रनाम नै दीनता - . प्रसपी पगारमी मपरान सामने प्राधीममी। मैं एक मूरपोर मेरा काप एक विपिसा मे मी पपिक पराई। चिकित्सक २२ पान प्रयोगन की पीरकी ही पांच-पायाम करता है पर मुझे अपने 'मुम किम के हर पहम् को देखना होता है। मेरी यह पैमी दृष्टि मनुप्प के पन्समन की प्रत्येक मतिविपि को तुरन्त माप नेती है। 'मुझे मगर गाने प्रापके बारे में बताया था। मापको प्रसा करते पापको हेल्पिक मेघर का बवाते थे। 'मेरी मर्ममा मेरे इश्य में दया समामे में सरंबा प्रसमर्थ ही है। मैं एक मूरपोरई जिसका पर्य सत्य पार दिवर -पैसा । हामाफि में सिर की पूजा करता हूँ। मेरी रसोई में बिमे मैने प्रायम्म मदिर बना दिपाई भगवान शिव का एक छोरा-सा सिंग है।हर रोज सबेरे म उसकी पूरा करता हूं ताकि मेरी मारमा पुर्वम न हो। वह कुछ देर का । उसकी पुष्टि अपने कामे पुराने कोट पर बम पई निमकी गर्दन पर लेस की पिक- माहर पमा पीपी। 'भफिम भरा काम भापको करना ही होगा। मनाम मे अपने पर्यो पर मोर रेकर पहा । फिर यह मसी पटाई को मानी पैमुनी से कुरेदने लगा। 'तीमगार की पमानव रिमारा। टिमकी? 'मगर बापू की। उमामत र म यायारेगा। पभी फप्ट में है। उन्हें पापमे मय है किहीम पर समान पहातो पाप ग्नपर तुरन्त नामिण कर देपे। भाप उमपी सत पून में मिमा रमे। पान पामर रन । उमकी संपमियों जैसी मपाना सामे पनाम का मममीत ररिया। हमावान बामद की भांति दयानको । मने लगा। बाबर रात्रिनरे पास मायों मपये तुम्हें नहीं रेसरले तर में .

तुम्हें पया से गेस सम्मा। 'मेकित सेनोन का पापार नहीं करते। 'तुम मोमे हो पैसे माता की परकमबागियों को नहीं बान।। तुम्हें रुपया नहीं थे। ये तुम्हारोधमानत नहीं है। क्योंकि तुम एस मरीग चित्रकार हो जिसही पाय का कोई भरोसा नहीं। तुम नहाँ बानते विहार रपया देने मामा पादमी पपनी भासामी की प्रोकाव देवता है। मनाम गार, पमिरवी रखने को है ? मीर उसकी पुष्टि भनामारे परम 'कुछ नहीं । भषिक से पषिक म अपने भापको गिरवी रख सकता। हा यदि माप मेरे कुध पिों को रखना चाहे तो यूपी-नुपी रख सकते है। समीनाबी में म्पपा महरा उठी। प्रांगों में करपा बम रठी। 'सतपबाव नहीं बनेपौर में पैसा पिसे मै अपनी मरमा मागवार ऐमे निकाल रहीं दे सकता । उसकी सुरमा का प्रथम होना ही चाहिए। में प्रापके पाप परवाई। 'मह मिनय पर्वही पाएमा। में भर सयों को समानत पाहवा ।सेको साधारण पार्टी का मकान भी गिरवी नहीं रहता क्योंकि एक मकान की कीमत प्राय एक मात्र हो साती है। मेनिकन उसका पचास हजार रूपया भी कोई ने को तैयार नही होता। इसके साथ पनि में उसे पारवेचना चाह मोबह तुरस्त महीं किया। इसलिए में सोना चाहता गरपाहता। सोना एक ऐसीपातु नोकहीं भी तुरम्त विक सम्वीहै। यह एक पण चुप रहा मकिन कसाहारन म्यापारियों से गुम ईमानदार होते है। पत्र में तुम्हें महाम पर ही पयारे सातारपा मकान की कीमत पांच हमार हो। 'भने प्रापसे कहा मेरे पास उपमहाँ है। "फिर मुझे जमा करना में पापकी कोई भी सेवा मही कराईमा । २४ पनाम काहपय पयाम से प्रति भूषा से मरन्ठा। उसे महा तक गुस्सा पाया किमह उसमे मुह पर पूरे पर यह इतना सास नहीं कर सका। टूटा-टा-सा नवा पौर पर पड़ा । पमो वह परमार तक पहुंचा ही नहीं पा कियाम ने उसे फिर पुकारा 'मुनो। मनाम तन-मन से मुभी की महर पांच मई। 'मैं तुम्हें पांच सौ सपा ये समाई किन्तु एक सर्व पर । पनाम सामी को मजबूती से उमस में सवार गम्ची-मस्ती मान पास पाया । उपावती मे बोमा 'मुझे पापको हर ममम धर्व महै। 'तुम्हारे जो भी चित्र विकेंगे रन सबपर कापी राइट मेरा होगा गर्ने मेरेर सङ्घमा । उसका सारा सरा म सूना। 'मुझे मगर है। 'पिरकम पाजामा मकामन बनवाकररमूंगा वस्तमतको अपनी रकम में जाना। हम वह बोस हा पा से कोई उपेक्षा से रात पर दूसरे दिन पमान मे पर सातपर में प्रवेश किया वर पाम एक मापारण पुमनी को पर्व दे हा पा। मामी की 'पद-साद' सुनकर यान मौतर मेपोमा 'मनाम बाद वहीं पर बाइए। पनाम पर टूटी-मी कुर्सी पर बैठ गया । कुर्मी की पीठ से नमी दीर सनी मन्दी पी पिनाम को पना हो उठी। एक पीके में कुप माइए सपा मेहरम कम पर पंभीरताम विचारता रहा रिसमें स्मार्प का मामर महराया पापांपत-हिम प्रारों की रोमतोमपने पर पदेसमा पाना पाागिमगाम जीवन में कोई दोस्त पापौर न कोई पपड़ा। मरमता मे गे पिशवीमहकमी मी पीपनपीकोमान मापनारों या नारी प्रपर परामो मेकर नहीं पतापा। मापा यदि साँपि प्रिय विपप रो मा तो पहपाइमना । यह समयो मेकर पी रिचारा करवा पाकिस प्रकार किसीको सौ रुपया देकर एक बार बभून परत चाहिए-इसमें मह प्रपनी बुद्धिमाकोसत बताया करता बारा से हम्माई की दुरी से अधिक निर्भय पौर परपर से भी अधिक कटोरगा। विमों का गहन पाका मा। पाकर पिया उसे यह पूरा करता ही था। परे पर किसी प्रकार के भाव नाए बिना बह पपने मुमकिनों (नगरों को पा इसी तरह से समापन करता पा) के मकाम करवा मेवा वा उनका सामाम कमे में कर नेता पाया उमें प्रेम भिरया देता था। इस मामले में बह पोड़ा मी पर महापा। 'पनाम ! भीतर से पाम से पुकारा। प्रनाम की साली की 'पए बद' मूंग उठी । मह भाबोरेमित-सा उस कमरे में घुसा गिसमें पटाई गिरी हुईवी। जिसमें एक पतमी-मम्बी मुमती बटीईपी। पनाम पाध्यान रस सुपती की पोर मया बात हंसकर गोमा 'यह पनामिकासी पूब कई मेने पाई।तुमा पारसकी स्थिति एक-सी है। पर अपने मामिक को एक हजार रुपमा रेकर रसपी पुमामी से मुक्त होना चाहती है।चारी घोटी बात की है। पनाम में मन ही मन सोपा उसकी नुमामी से तुम से पारमी की गुमामो बहुत भयनामा भगवान इसकी रक्षा करें। 'तुम चुप क्यों हो। रयान में पूछा। 'मैं सोच रामा फि माप कितने पान है। पापोर से ईसा पादमी मूगी प्रसंसा करने में माहिर होता है। पनामिका तुम बाहर बैठो। इसके बाद सामने महरा मौन धारण कर लिया। यह महरा मौन प्रनाम लिए पसाए हो उठा। श्याम ने पपने काले कोट को जब से कामन निकाते और नाम को हस्ताक्षर करने के लिए कहा। पनाम मे हस्तामर करने के पूर्व श्यात के कामों का समापार। २६ देतारमातमिर स्तमिम मा हुमा।बोमा तीन रपया प्रति संकटाम्पार! रिसी वस्तु के पभाव में यह पुषमी नहीं है ।म यह रूपया पपम प्यार के मोह में रेहाएं। कभी-कभी हम मुदतोर मार मोह में मुष का मिट्टी बना मेते है भान् एक भी सपा वापस नहीं मिलता। भेकिन यह प्यार साहूकारी नहीं है। प्रनाम के स्वर में शिकायत सीबी। 'साहकार को एक तो अपनी पसत का भय सफा बना एता है। दूसरा उसका मेरे पास यमकुछ गिरवी होता ही है। तुम्हारे पास क्या है ? पुष भी महीं । एक मरीब चित्रकार हो न मकान है पोर न सोना । निरे फसीर । बाप भी है वह भी बीमार । पाच-पाच पार पर छह बहिनें तुम स्वयं मंगरे। मी सोचा है तुमने माग गई चित्रकारी दुपम! का राग्र मारतवर्ष पर हो जाए तो तुम्हारा क्या होगा? फिर तुम्हारी कमा भी पश्य होती है। वह मापारण म्पतिकी समझ में नहीं पाती। एकरम निषित एकदम मा । कौन परी गा रमे। मुझे तुमपर प्या पाती है। प्रनाम को अपनी निन्दा मम ममी। कहीं यह उत्तेरित हो गया तो बनाननासापाम बिमा पाएगा । इसमिए उमन तुरन्त हस्तासर किए पौर साखीकोजगन में रबार पत्ती सहा मे निकलना चाहा मेशिन दयान ने उमे रोगदिया 'समा महीं मोये। बहाहर र मया। पनामिना मीवर माईपाल ने उनमे पृपा तुम काम करना चाहती हा पितमीनमवा मोगी। 'रोटी-कादा परतीम टका (ग्पया)। रयान मे प्रनाम में पहा तुम्हें नौकरानी की जगतमा हामी ही। परि मेरी बात मानना चाहते हो तो प्रनामिकाको ग्रामो तुम्हारा गर काम कर देपो रोटी-पापौर बीम पपा मारापोमो - मंजूर है। 'हो मंजूर। फिर मो स्पये। रसने सौ-सौ के पाच बहुत पुराने मोट निकालकर पमाम को पिए । पनाम पामार प्रान परवा पापमा मया । प्रनामिन पयाई दृष्टि से मनाम को रेसती रही । सो मन्तस में इस वक्ष्म के प्रति पवा की दिर फूट पड़ीं। प्रथानक उसके मा से निकल पा चारा कितना सुन्दर है मोर की तरह इस पौष में प्रम मे कसर रस दी। स्याम ने टिम ईसी ईसकर कहा 'मनामिका मारा माम चुमने मिमता-लता-सा है। मुना पह है पनाम का पता। उसने एक कापर मनामिका के हाप में दिया। फिर यहार बह मोमा 'तुम्हें एक हजार पया गया म्यार पर पिया है। इसलिए हर सोरे तुमें मेरा काम मुफ्त में करना होगा। हितम एक गरीर माफी हो इसलिए तुम मुझे म्मान नहीं दे सकोगी मैने उसका भी प्राचार निया है। जैसे ही तुम्हे प्रनाम उमबारे जैसे ही तुम मुझे पन्द्रह सवा पापानाr यार रखना एक सूरसोरमार के मामले में बहुत ही पटिया होता है। पनामिका ने हाप मोड़करमहा मेस्सी मुमेसरा पपने पुराने मानिक से मम बना रहता था यह मनुष्य मेरे तन और मन से देवता का फिर भी में उसे कुछ नहीं पती बी। में रिन भर काम-काप में ममी रहती भी का भाती की। मेकिन महासमी मुझे कामचोरा ये। पनाविका की पात्रों में प्रोम मा गए । उसने अपना मुह मपने हार्यों में दा मिया । पापापाणबत् सानन पामे या कोप-साखा कतावापा परयोमा 'तुम बामो तुम बापो तुम कोईनिता करने की बात नहीं। सब ठीक हो पाएगा। पाहिर तम्हारी सिफारिस सेठामर ने की है। मेरा पैसा मुरमित है और तुम धागार हो पई। बस बस ! अनामिका प्रपनी पालों को पोदता हुई पनी पई। २॥

माम उसकागों को एक भवत्तति पुग्नी मोहे पोधियोरी में रखने नमा पाठिमोरी हरे रंग की थी जिसका रंगमयह-नगह से चतर या पापौर जिसमें मोझेबी महिमा बेबर प्रौर सोने के छोटे-छोटे पासे परेप। स्याम ने एक बार उन सबपर पड़ी पारमीयता से हार फेरा पार विगोरी बन्द करके मिविण दृष्टि से कमरे को देखता हुपा बाहर पसा गया। ४ इसके पापाव प्रनाम का बकीम इयाम पौर धनामिका से सम्बम्प पड़ता ही मया।बरयान उसका समर प्रत्पन्त पमिष्ठ पार निकट नम हो गया तब उसने बाना व्यास प्रत्यन्त कठोर पोर पिन मनुष्य है । इसके एप में प्यार की एक महर मी नहीं है। पैसों के लिए किसीका सिहाग नहीं रखता। मेन-देन के मामत में न कोई उसका मित्र है और न कोई पना। तु पनाम यह भी स्वीकार कर सकता पा किमान उसके प्रति रखना कठोर नहीं है जितना दूसरों के प्रति । हर माह पास पहुंचाने गार वह उसके साप दारता का प्पवहार-बाप करना। यामको प्रनाम रपयों कापदापरापा। उसने सोच मिया पा मिनाम सतह बोल मर उसके रुपये नहीं दे पाएगा। प्रत उसने पनाम के चित्रों की एक प्राननी कामायोजन किया। उपपुर एकामेका हाम उसके लिए माग मिया गया। परसेंनी कारपाटन शिक्षा मत्री में कराया गया। धिमा मत्री म नसकी कमा की मराहना करते हुए पहा 'पनाम पी की कमा में रिचित प्रयोग है। केस रेगामापारा मानव जीवन की प्रभिम्पक्तियह भी प्रभावमामीप में नगनीय है। उन्होंने सिर को अपना प्रोर से एक पिच पांच सौ

सये दिए ।बह चित्र पा महासमर्पण।
गिए जिन पनाम को सय मिने उसी दिन ग्यास पहुंच पया मी
अपने पूरे पांच सौम्पये में लिए । प्रनाम पाहवा पाकियाम भभी सरे
साई सौ सयेने से मेकिन बह एपर राजी मही हमा। पर मनाम:
पपिक पमुष भिमा व पयात विपा मया। बोमा 'समन पर रया कर
का क्या महीमरना। मैने तुमारीजातीतोपचाया पर तुम
पारन विमा पातुर्म को मेरी राम विना मवि देनी माहिए मो।
'पयाम मा! मुझे सयों की मस्त पसरत है। परयो सूपन में
फूट गए है।
'प्रनाम | रुपया एक ऐसी पोप है पिसकी सस्त परत हर समय
हरएकको हती है । मुभी समे की सस्त तुमसे मेकर किसी
भौर को यूंगा।'
पामिर ममाम को सपे देने पो। रमान मे पाहुए कहा न पर
भाकर प्रपना हनोट से पाना। देखो मूमना मा क्योकि ये निवने सूप
मोर होते है पय के बाहर मैम पार कामे होते है। उनकी मानणारी
परभरोसा करने बाबा कमीनाजी पमवावा ही है।
रमासबसे पाने के बार मनाम बहुत सास हो गया। दिन के
बिमाह में उसने अपने कई मित्रों से पोका-मोहरके एक हजार रुपये लिए
पेसमी उसका परमाबाप। सभी को पोरे-गोरे की प्रामा। पुष
पामे को उम्मीद है। इन सब बातों से बाहामा हो गया।
रास्ते में विधातापायामा परिमै पिसारनहीं होता तिमा
पफ होता? ही महीनी मिल पाती हर माह मया मिनती।
मेदिन उस समय मेरा कोई सम्मान नहीं करता। सभी मुझे एक साधारण
पत्ति सममार पेक्षा को इपिसे देखते । प्रार मुझे लोग एक कुराम
प्रपोमवारी प्राथमिस्तम पिसम्माका एसपग्ध पितेरा मानते हैं पौर
.

मेरी कला को समम्ने बासे मेरा पर सम्मान करो है। मुझे पमों पर मियते।। मेरी बहिन ? विचार पत्रिकी माहि पस-पस में बदल रहे थे। हो उस पी-मिनी भागुफ महिनको रहेब केपमान में कितना सापा- पि पति मिमा है। एक सर्व बी.ए. पास पतई! बोन वा प्रधिक मुन्दर है और न मषिक चतुर! फिर भी उसके लिए मोहगार उपमे स हो मए । बर्ष यहवा ही था पहा है। फिर उसका सम्बग्म उन मम्पवर्य और पूंजीपति वर्ग से दिलोदिन पा रहा था जिससे उसके सर्च में वृद्धि हो रही थी पर प्राय में नहीं। वह पो पोड़ा-बहुत धन और पों से कमाता था उसमें से एक पैसा भी नहीं पमा सम्वादा। उसे दिन प्रतिमि प्रपना रहन-सहन ऊंचा करना पर रहा पा। उसे अपना होटों का बहाना पर पापा। हर तरफ से पर्ष गवाही पवा मोर माय बदम का कोई रिया नहीं बना। निरान यह बहव तेग हो गया । पर प्यास मे उसपर धनिकमी रहम नहीं दिखाया सबबह अपने घर में पाकर टूटा हुमा-सा पर गया। पोड़ी देर के वार मुपाई। इस बीच इन्दु की बान-पहचान पनाम में काफी हा चुकीपी। पनाम उसकी पोर वीरप से परफर्पित बा। बह अपने गौवन की विषमता र प्रमाणों को विस्मृत कसेतुके समक्ष- प्रत्पन्न माम्पपाती और मुसो पिरकार का प्रदर्शन मिा करता पा। इस मिप्या बातों से उसके मन्तम् को मुख मिमता था। पभी पनाम दुचितामों से विखापापा। उसे भग रहा था कि बसे रम मित्रों कोमपातकापा मगा किसको पांच सौ रपये मिमे मे ही दे पपने रसों की मांग कर मैठने पीर ममिमने पर उसे एक परिगवानी मित्र मान' परमहरे मी पोक्पा' पयान से हापहीन पामीरे सुन मास निरगना मी साहब नहीं। कहां स नसे पता भम रपये दिए । बह चित्रपा महासमर्पण! जिस रिल पनाम को समे मिले उसी दिन श्याम पाच पया पौर अपने पूरे पांच सौ रुपये मे लिए । प्रनाम पाहता पा कि दयाप्त प्रमी उससे सौ रुपये से मे मेकिन यह इसपर रानी मही हमारा कब मनाम में पषिक पनुरोध किया तब प्याम बिगड़ गया। मोमा 'समय पर पमा करने का क्या यही बपमा है। मैंने तुम्हारी वाती हुई इसव को बचाया पातु पोरन रिया बा। तुम्हें तो मेरी रकम बिना ममि देनी चाहिए थी। चपान बाबू! मुझे म्पर्यो की सम्त बहरत है। पर यूहन भी फूट पए है। 'मनाम ! रपया एक ऐसी पौर है जिसकी सस्त तर समय रएको पती है । मुझे भी स्पये की सन्त बस्तुमसे मेकर किसी पौर कोसा। प्राबिर पनाम को रुपये देने पो। स्याम ने पाए कहा 'कम पर पाकर अपना हरनोट मे पानाtो भूनमा मत क्योंकि ये जितने भूब बोर होते है ये हत्या के बहुत से प्रौर काने होते हैं। उनकी मिानारी पर भरोसा करने वामा मीनकभी पछताता ही है। रयाम के चमे पाने के बाद प्रनाम बहुत खास हो पया । बहिन के विवाद में उसने अपने मित्रों से थोड़ा-पोड़ाकरके एक हपार रुपये लिए समी उसका पत्ता बीचये। समी को पोडे-मोरे की पापा है। कुम पाने को उम्मीद हैन सब बातों से पहबा म्पप हो गया। रास्ते में वह विधारणामापापा 'यदि मै चित्रकार महीं होता फितमा प्रया होता? कही पण्डो मौकरी मिम बातो हर माह नवा मिलती। लेकिन उस समय मेरा कोई सम्मान नहीं रखा। सभी मुझे एक साधारण म्पति समझकर उपेक्षा की दृष्टि से देखते। पार मुझे मोग एकसम प्रयोगवादी प्राइमिनवम चिराहाका एक प्रामा चितेरा मानते है और मेरी पता को सममने बामे मेरा बहुत सम्मान करते हैं। मुझे पनको पर बिनते हैं। मेरी बहिन? विचार पमपित्र की माति पनपल में वाम ऐसे। हा रस पड़ी-मिशी मापुरुबहिन को रहेन के प्रभाव मे फिटना सापा रण पवि मिमा है। एक समई बी. ए. पास क्सई मोन तो पषिक मुन्दर है परिम ममिक पार ! फिर भी उसके लिए मेरो हजार रुपय बर्ष हो गए। पर्ष गाता ही पा रहा है। फिर उसका सम्बन्ध उम मपवर्म पौर पूजीपति वर्ग से दिनोपिन ग रहा था जिससे उसके सर्ष में भूमि हो रही थी पर प्राय में नहीं। यह को पोड़ा-बहुत ट्यूगम और पत्रों से कमाता पा उसमें से एक पैसा भी नहीं पा सकता था। उसे रिन प्रतिदिन प्रपना रहन-सहन ना करना पड़ हापा। उसे अपना होटों का मर्ष माना पड़ रहा पा। हर तरफ में सर्व बाता ही गया पोर माय के गाने का कोईयरिया नहीं बना। गिरान पर हव dग हो मया । पारपास ने उसपर तनिक भी रहम मही दिखाया तब वह अपने घर में प्राफर टूटा हुमा-सा पड़ गया। पोड़ी देर के पार इन्दु पाई। इस बीच इन्दुमी पान-पहचान पनाम मे काफी हो चुकी पी । पनाम उसरी मोर तीच रूप मे पापित पर। यह अपने जीवन की विषमतामों प्रमानों को विस्मृत करके इन्दु के समय- म भरपन्त माम्ययाती पोर मुसी पिचकारका प्रदर्सन किया करता पा। इस मिप्या पावों म उसमे मम्वम् को मुगमितता पा। पमी पनाम पितामों मे मिराहमा पा । उमे मप पापा किनमे रौ उसके मित्रों का हम बात का पता ममेगा दिउमा पाच सौरपये मिले है मे ही पपने ग्गयों को माम पर पैटमै पीर म मिमने पर उम एक पबिवासी मित्र मानेंगे' पर महापरे भी तो क्या ! पयाम मे हदयहीन पा मारे गम मरवार नियममा भी सहा महीना में उमे पनामा १ पया कि उसे प्राय रपया मिसेमा । 4से या उसके पीछे-पीचे पना पाया? "भूत है मूत्र ! उसमे पृपा से स्याम के नाम पर पूकना पाहा पर इनुके पायमन ने उसे ऐसा नहीं करने दिया। यह हंसना हमा-सा पोगा 'पाप महा पचाना मामा से प्रा? वैरियत को? 'पनवान बन रहे हो? 'पर्यो? 'पांच सीपये क्या पसे ही हराम करना चाहते हो? मोह ! बह मंमीर हो गया यह हो सकता है इन्तुमारे बिना पनाम इन पर्यो का उपपोन नहीं कर पाता। दोमो कहाँ बनोगी ? बोपरी रेस्त्रों में। में प्रभी तैयार होता। पनाम ने झट से कपड़े पहने पौर बस पानीपरी रेस्मी एक सन स्तरका रेस्मा है। पापनाम के पीस रुपये खर्च हो पए। मन से, पाहते हुए भी उसने इतुके समक्ष प्रत्पन्त ररियादिमी का परिचय रिया। रात को यह मौटा। प्रनामिका मोगन बनाकर बैठी हुई पी। समीप पररा पपने पम्वर की बसन का परिचम रेपी थी। पारही पी 'यह प्रनाम बापूको प्रपने प्रेम-बात में फंसा पी है। एक साभारण प्रप्यापिका का परिणता हो सकता है मह तुमसे नहीं छिपा पनामिका वीपी। पनामिका में बराकोसमम्प्रया किसी परमाननमाना ठीक नहीं है। समी मारमी महोते है और सनी पुरे। 'साहन महीं मनोहरीबी मेम पौरय पप्पापिकाएं कमी मौ परिषकी प्रावी नहीं होती। अपने मनाम बागो मोते है बहानकी मोटी-मीठी बातों में मा पए। "तुम पार गबना एकम एक रिन यह पनाम बापू से प्रणम्य मकरेगी। २

सावी की 'पद्मद सुनते ही परदा चुप हो गई। मनामिका में इस
तएका मान बनाया से रह बहुत देर से अपने प्राप, पोई हुई है।
फिवाहों के पास 'पद्म' पाने के सापही परदा उटकर सो गई। पनाम
न सहमता म पूछा 'मरे माते ही वम पो।
'हो मी पुपार ही है।
प्रनाम में कुछ नहीं कहा। वह भीवर पमा प्रामा। पैसालीकापीबार
के सहारे वापरके यह कुर्मी पर बैठ गमा। मुह पर हाप फेरसर उसने
एक महरा निस्वास लिया।
मनामिका ने भाकर पूछा गाना माऊँ ?
'पर्यों?
'मने बाहर साना ता मिया।
'फिर मापने मुझे कहा क्यों नहीं ?
'तुम पर में नहीं थी इसी दीपमुपा मई और में उसके साम पना
पया।
'बाबा रे बाबा इन्दु ने प्रापपर मया भाकररिया है कि पाप उसमे
चारों परमापने समे! उसे तुरस्त परता की बात मारहो पाई।
मनाम में इममा कोई उत्तर नहीं दिया। यह पर्व मरी एप्टि में प्रमा
मिकाको रेमता हा। प्रनापिया पर उस दृष्टि की कोई प्रतिषिया मही
हानिषितार मार से बोनी 'पुराम माने तो मैं पापको एक मात
बहती है।
महो? प्रनाम की दृपि में मुममता पी।
'मापन मे पादी कर लीजिए।
हरप बीमारे समीठारों को मामना रिमा रोमा प्रतीत हमा
पनाममोह पर मनामिका के मुम्पराते हुए होमो देना।

पररांति से बोला 'मे किसावे गिरता मे पास पैसा नहीं। मेरीगोस्वायी पौरपापाय नहीं है। पन्नो, पार सहन नहीं है। अनामिका षधोने के पहले होमनाम रिपोतरा 'पार मुझे पार सौपए मिले सोभा बहिन के पिया काय कर पुकाममा व मित्रों को योगा-धोका देकर वमको पौरप गापर गाव बीच में ही प्रा टपकापौर सधीन करमे गया। पनामिका ऐसा पाहीन प्रारमी मैने कभी भी नही पैसा। मैंने उसे कहाकिम- पामा मेमो परमही पुरे सपने पनि यो समे निए । पर बताया कि मुझे रन मार्यों के सामने कितना पर्मिया होना पड़ेगा। प्रनामिकामेषाम की बात का कोई उत्तर नही पिया पौरमहरमा पाबाते-जाते उसका पहरामार हो गया। इसरे ही दिन सबेरे मनामिका ने मान के पास से प्रमाम कोसी हाय मारोपिए) पनाम कापस बासी के प्रति पठासे पर पाया। उसने एप हमापार पर मनामिका ने मनाररिया। बस इतना ही कहा पाप बाहर रमान बारापर पर इस्तावरकर पाएगा। म पटना से भारतकवान मनाम के प्रति उतना कठोरमही बना गितमा पार्ने प्रतिबनवा पा । पनाम का पोवन पूर्ववत् होपा। मना मिका रसकी एसी पर उसकी पड़ोसिन पार उसकी प्रेमिका । बस येहीबीपनारमिरीमाने परिण! ५ प्रमाव कीमनिमगिर पिसीमानों की बापमान मेती मात्र ही पी। पनाम व मुरम की पोर पड़नेपातीविकाको पोसा वापिमरे में प्रा पाए। प्रमाभिरा गीतकमही भाई पर घरिनों से रसको समीयत

!
कमहीं पी।
पररा ने कियाइ सटमटाए । पनाम में बमन में बैसासी बनाकर द्वार
पोसा। पररा बाप माईपी।
'मन्नो दीदी की माझा है कि पब एक महम पाए तर तक में प्रापको
पायका प्रबन्ध कर दिया।
मनाम ने कोई रत्तर नही पिया। बह पुपचाप अपनी कुर्सी पर बैठकर
पाय पीने समा।
परवा गोमी 'पाप हमारे साप सिनेमा नहीं पए पर दुसाप
पीच में ही पनाम बोला 'बररा में पार इन्दु पिस काम के लिए गए
बह काम नहीं बना तो हम सिनेमा देवने चमे गए।
यह स्वीपमोली 'सच पर्यो नहीं कहते कि मुम जैसी फासो नरकी
के साप पापको सिनेमा देखना पम्यानही नगता।
'यह गाव नहीं है परदा में तुम्हारे सापकई बार सिनेमा देश का है।
"मूठ क्यों मोमवे है ? पाप मेरे साबसिनमा रेसन बने कि म भापको
जबरस्ती में गई?
'तुम सा मी पाहो सोच सकती हो इसकी तुम्हें समापदा
में पिसीके हारमोनही दुखावा। सच काई इन्दु मे मै प्यार करता
मै पाहताहरिबह मुम्मनुप पापित रसको तुम करने में तुम्हारा
पपमान भी हो सकता है पर मुम विश्वास है कि तुम उसका पूरा मही
मनोमी' उमे मेरी मगरी समोपी।
परराको प्रमाम से ऐसे पोंकी प्राण महीपी।पास्य मनाम पर
परमा पपिकार समभनी पी। सोचती थी कि पदियह योर मगाएगी तो
प्रनाम उसके प्यार को स्वीकार कर सकता है। पितु भार प्रधान पनाम
म उमरे पमपापरषिदीपररिया।बहरिस्मित-मी मी-मी
पनाम रोदेयतीची। पनाम प्रपनी दृष्टिोदेलती फिरों पर पाकर
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1
१

बोमा 'परवा मेरे स्नेहको गमठ मत समाना इस मकाम में एक मरीफ व्यक्ति होकर एना चाहता हूँ। तुम्हारे बाबा (पिता) पौरतुमारी मा मुझे अपना बेटा सम है। मैं उनके सिमाप को सोनामही बाहता में उनके दामों पर मापात नहीं पहुंचाना चाहता। परदा प्यानाकर बमीपई। मनाम नापरवाही से मपने पापसे मोमा 'यह कामी माकी प्रपन यापको क्या समझती है ! मुझे पहने ही कुछ पन्वेण पाकिमर मुझे अपने पान में पसाएपी। दिन रंग मौरमम्प उसने रकर मंगड़ाई मी पौर फिर मुसमबाने में चना पपा। पनामिकाथा मईपीबास्टोषबताकर पास बनाने गयी।पार उसने हरे रंग की साड़ी पौर नीवा माग्प पहन रखा था। पर उसका पेहरा महापामा पापा। बार-बार पूछने पर भी ममाम ससे संतोपर उत्तर माही पा रहा पाहि पनाम को यह कहकर टाल देती पी बिह बीमार है उसे पेट की शिकायत है। पनामिका पनाम के लिए सोचने का विषय थी। पहमारी पस्प- ममी-सी उसके सम्मुख सड़ी पी। एक ममता प्रश्न मनाम के मस्तिष्क में पनामिका कोमेकर घुमाकरतापा। मनामिका बीस बर्ष को पार करही भी। उसने उसे कमी प्रेम मौरपरिवारबारे में बातचीत करते महीं देना। बह सात प्रौर मौन यती थी। पर कमी प्रनाम को रात देसवी सवयह उसकी सराखी को दूर करने का प्रपल कळी मी। नाम म पनामिकाको सभी इंसते मुस्करावे देता था। एक बार पनाम ने पनामिका से पूषा पा 'तुम्हारा महरा मौन मेरी बिताका कारण बन पाता है। प्राप मेरी वान कौथिए प्रनाम बाबू कुछ ऐसी सिपी होती ।

बिनके जीवन में पार एकान्त के प्रतिरित कुछ होता ही नहीं। परम सुस
उनके जीवन का प्रतिरूप होता है।
'इन बातों से मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं मिलता। अम्मो! क्या तुम्हारा
निगाह हो गया?
'नहीं।
'फिर तुम विवाह पर्यों नहीं करती?
मनामिका के पेहरे पर वरस भरी इसी विसर गई, 'एस दासी के साप
कौन पिपाह करेगा ? फिर मा के पांचम पर ममा कसैको पनाम बापू
माका कर्मक उसकी सम्तान को भी कमक्ति कर देता है। और फिर में
मा को घोड़कर कही भीवामा महीपाइती। बहपोरामों के मामम में परती
माता है।
पनाम ने ऐसा दिनामिका के पहरे पर प्रसाद की पटाएं उमा
पाई है।
'पाप बार-बार पूण करते हैं मेरे बारे में जानने की इच्छा रखते है
पाहकर भी मैं अपने बारे में पापको नहीं बताना चाहती।
'क्यों?
'भाप निवार है प्रापके बारे में मोम कहते हैं कि प्रापमें मनुष्यवा'
छूट-कूटकर भरी हुई है लेकिन में ऐसा नहीं समझती । में पवना ही पानती
हूँ भिमाकार मी एक साधारण मनुष्य होता है।
'मैफिन तुम्हारी मा नेकौम-सा पाप किया ?
यह मपने पति को धोकार माग गई । म बसेकर, मेरे बाप का
कोई पता नही पौर म ही मेरी मां मुझे यह बवाना पाती है। भाषा
में से पाम पहना पानबह भीमहमद उमरेहरप पर मका-मामगा।
पनाम ने तुरस्त प्रश्न फिया फिर मी तुम पानी मालती मा
करती हो?
१७

'हमा है, बस इसीमिए। इस उत्तर में पनामक मस्तिष्क में पनामिका केमिए पाररको सर्मना करपी।पनामिका के सुन मौरएकामषेप्ट प्यान रखने लगा। - पुसमसामे के विकारपोमे सापही साली की चट-बद' सुनाई पड़ी। अनामिकामे तुरस्त पाप की ट्रे पनाम की मेर पर रत। पनाम में बैठने हीमा 'नब तुम्हारी तबीयत पराब पीतब तुम पहाँ यो माई! देसरठठे मन नहीं सपा। सकिन तमीयत प्रपिक बराब हो गई तब? 'तब अपने पापको ईश्वर के सहारे छोडगी। यह तुरात बात परस- कर योनी पापको श्याम बाबू मे कहनाया है कि प्राप मगर माया बले गाए। 'मै| पों। इकी पुस्तक मंबर पारद्वारा पराप! पान सपेरे के बाप २ पुम प्रपने एक 'मुपविषम' के यहाँ बावे हए मिम गए थे। प्रधानमः- टिमा वाम हुए बोले पैसे से मुझे सबेरे इस बात को करना भून मए थे। 'पण्या कस तो गर्मनि साफ इन्कार कर रिपापा । काहे कि सोना बनाने की योजना बनायो। 'भाप को मेरर मंबर बाबू के यहाँ बमे पाइएमा। में असम्सी। रिपापका काम मन पाएगा। इस प्रपिक में मनही मानती। 'मा विचित्र प्रादमी है। प्रनाम में वीर सपा पार फिर पाय पीने ममाया उमराणपके मन में भी इसरासीप्रति ? एकप्रसपनाम मस्तिपमपाकर मापने समा। बह पाप पीकर तुरन्त एक यह भामे को उत्तर हो परा । पना मिका को उसने पाना नबनान के लिए कह रिया । परमाणु पर १८ पहुंचा तब इनकी मिया मा साना बना दी थी। उसकी सामी की 'मट-पद' सुनकर उसने भीतर से ही इनुको पावार दी।तुमे उसे स्मर पाने कोपामा धीरे धीरे सीरियो पाता हुमा कमरे में पया। उसका सांस पर पपा पा मह पम मे एक कुर्सी पर मैठ गया।दु ने रामके करों पर हाप रखते हुए कहा 'तुम्हें उपर पाने में पड़ा कष्ट होता है ? पनाम मे न्युकी पोर देखा। उसकी मासों में या मंगारे-सीएक ही पी । मह मन ही मन मुस्से में भर उठा पर आर से स्वामाविक स्वर में मोसा नहीं नहीं मुझे परा मी गप्ट नही होता तुम एक गिलास पानी का पिमापोमा उसने पानी इस तर पिया से पह भरयम्त प्यासा है। पानी पीकर उसने एक गहरा सन्म लिया । सांस मेपर बह बोमा 'तुम्हें मृत किसने बरे पाना है? क्या तुम पार ही महीं से सक्ती? 'भाग मैने ण्टी पहत से ही मे रखी है। फिर तुम पार हो पायो हमें मगर बापहो जामा है। तुम्हारी पुस्तक गीप ही प्रापित हो गाएमी ऐसा मेरा स्मात है। एकी पागों में जमा पर मई। वह मौतर के कमरे से कपड़े बदसती गोपी 'कमी-कभी पटनाएं गोटेगी से घटती है जिनपर हम पासानी में निवास भी नहीं कर सकते । कम हम निराश होके पर पार पासा हमारे मम्मप फिर नापी है । वमी हमें न पाहते हुए भी वयोगमो मानना पड़ता है। पनाम ! या हमारे मिमन पोतुम पयोग मानते? 'मानता है। 'तुम्हारा यह कि ऐसार मुझ ऐमा मगा मि तुम्हारे चित्र मनुष्य को पोपहीन बनाते ह । गीपन यो मृत्यु परास्त करदे पर मार पीनहीता भी तुम्हारी मी घमासारगारम बहरिप्रभारयाती हा पपा पा।

? पौर मुझे यह पिन इतना प्रिय सगा कि मैंने उसकी पर्चा पपने का परि चितों में की। उसमें एक विचित्र मार्पमपा पो पारमीको एकमये रंग से प्रभावित करता पा। फिर हमारे मन में रस्सर हमारी मेंटर मगार मित्रता और ! इन्दुहात् चुप हो पई । मनाम प्रममा पास्य मुनने के मिए उत्तजित हो रहा । माशीघ्रता से अपनी सासी पर हाम फेरणापा गोमा 'भौर पयामु 'पौर तुमने मुझे मेनन के क्षेत्र में सहयोम पिया पापम्प में हिम्पी की एक प्राची मेखिका बन पई। हालांकि यह पेठा' गप कम प्राय मासा है किंतु इसमें मनुष्य कोगा सम्मान मिमता है और में उम्माम को सबसे अधिक महत्व देती हूँ। पपमी पाणा पर तुपारापात होते रेव प्रनाम ने बात को पुन रसी तारतम्प पर जाकर कहा 'तुम कहना पपौर पाती थी और हमा पौर। इम्युमाइर मा गई थी। उसने ग्नूम की एक मुबर पौड़ी बिमारी की साड़ी पहन रखी थी। मनाट पर घोटी गोम विलुपौर हसा कमरा। पनाम दान भर के मिए स्तबहो गया। तुमहि देवी करके बोनी 'मै नया करना चाहती थी? प्रनाम बैसाखी को बगल में बाफर उठता हमा बोला 'या तुम्ही बता सकती हो। तुम्हारे पन्तर्मन के भानों को मैरी गिहा बापी का रूप नहीं रेसाठी। साली की 'पद-मद को फिर मुंबई। पनाम पर बिमकुम रोमा टिक मुद्रा में एके समीप वाया। इसने उसका हाथ पकड़ा और मा सर में मोती तुम्हारे कलाकारों का समाप मारत हमारी बड़ी पर्चा करने गया है। ये पतन करने वाले प्रतिम्मियों की पहमारे बारे में पनर्मल पानाप पार मिरामारदिनी प्रेम पाए रहे। मनाम ! ४.

क्या ऐसीपबाम मुना र तुम चिन्तित नहीं होते ? प्रनाम ने कोई उत्तर नहीं दिया। यह इस वर्षा को यहीं पर चरम करना पाहता पा। यह इनु की मां के समक्ष किंचित् भी छिपमा बनने को तैयार नहीं पा । क्योंकि यह पामता पाकिभाषिक रूप से पबमम्बित मनु की मा इम्पु के विवाह में कम इक पार पाडो बहुत है मी दोपह ऐमा पर बाती है मो उमे मौकरी करना न पाए। प्रनाम यह भी ममी माति मानता पा कि उसके पास कोई मसारी मौपरी महीपारमा भी नहीं पाहता पोबर-एक भी हो गया है पौर फिर को स्वतंत्रता प्रार सम्मान इस काम मे है वह किसी भी काम में नहीं। पनाम पर इसुपर से बाहर प्रा नए पे। पनाम बात करने के में पापत उसने टैक्सी सी। टैक्मी में बैठने के साथ ही प्रमाम ने कहा 'अब मतापो तुम उस समय पा कह पी भी? मै कह रही थी कि क्या इन निरापार पत्रिों से तुम परेपान मही होवे' उमने नितान्त सहा भाव से कहा। 'नहीं। 'पाँ? 'पपोंकि इन पापों में सत्य का पापार बोमता है । या तुम मेरे पौर तुम्हारे मम्मों के गोपस कोष मे माहीं मोषली फिहमारे पत्यम्त यहरे सम्पम्प है? 'मम्मरम प्रम माप मही मे सकते।ये गहरी मित्रता की ममा पमन्य मे माठे है। 'सम्पम्प ही माग पनर पहरे प्रेम का प्प से मेवे है। दोपरि सिम्पति मिमने है मित्र यमन इ मित्रता बनी ई मित्रता म काम्प पारण परके विवाह के पवित्र पम्पन मेंप गाती है। 'मि मुझे गावपान हो जाना चाहिए। इसके मुरा पर नवा पी यो पनाम को यात माई। पनाम के मन में पाया कि पार पहनुको अपने प्यार के बारे में स्पष्ट करने पर उसका साहस नही हुमा । प्रेम का सप्ट बहान उसे पूरा पर पौर मूहवामा परिपापा सगा । यह वो एक प्रहमास की पीर । जिसे भाभी गाना बा पौर मुभी वागणी पी। बाएं। टैक्सी मुरबत्ती । इमु मे अपनी मर्दन दूसरी पोर करनी । प्रनाम मी विचारों में सो पमा । भाषधे पांच पर्प पहले यह पोपुर में पा । इसी प्रकार उसका प्रतिमा ने पारमा वा । प्रविमा उसपर पाम रेती भी पौर यह मी प्रतिमा के बिना एक पम भी नहीएसकता पा किंतु प्रतिमा के माता-पिता एक सपोरे साप अपनी बेटी को मापने को तैयार नहीं हए । इस बात का पता बब मनाम के मियों को नया तो उनके मन को थमा माफ उठी पोर उन्होंने विचित्र पाएं पानी । एक मित्र मे तो एक महामी ही बना सही। पनाम काहाप प्रपनी टाप पर पता गया । पर टीम पर हाथ फेरने ममा। मगर बाकी कोठी पाईपी।पती की पार पनाम पीर मुदोनों गरमान को मौतर मूचना पहुंचाने के मिए एक भम्म कोठी । मंगमरमर और सीमेंट की बनी। रायसी सामन्तों पैसे मटौर रोनक। वे दोनों विस्मित दृष्टि से देते है। मंबर याने गाारभाकर स्मित मुझ से रमका सापठ यिा। में उन्हें एक भासोपान कमरे में ले गए गिनको इस एक्टरेखती रही। से उमे ऐपेम्पस्पिद और पापुनिक सामान में सम्मित कमरे प्रपन्त प्रिय हो । मबरबाबू रसकी बात को समम गए । तनिक मुस्कराकर बोते 'इन्दु पी मरा पसम पापा।

'बहुत ! उसने इस तरह कहा से काई दम्बा प्रसीव रस्तु देखकर खुशी में झूमता है। पायू ! प्राप टिए पनाम भी। प्रापको बरे होने में कप्ट होगा। मगर बाद ने स्नमिक्तसर में कहा 'पाइए इन्दु पी मै प्रापको मकान रिताई। इमु मे प्रश्न मरी दृष्टि से प्रनाम की पोर रेखा। मगर बापू पीकते हुए बोसे 'पोह ! प्रनाम जो मेरे मकान को पहले ही देख चुके है। पर्म में पाने-उतरने की तकलीफ इन्हें नहीं देनी चाहिए। पनाम के मन में पाया कि वह इस सेठ के बच्चे के सिर परसावी दे मारे । या देवता बन रहा है ? मंगा हूं तो मा ममी तुमसे पपिप बम सकता है। पृभा से उसका मुम विस्त हो गया मिह महीं होता और मही किमीने उसके चेहरे को देखा। पौर नंबर बाबू बाहर पसे मए । एमबर बाडू ऐवर्ष से बहुत प्रभावित हई। प्रत्येक कमरे की प्रथमा के सार-साप मगर बापू की कहानियों की प्रोसा कर दिया करते थे। पनाम पिबारे में अबरादूपी पर तुको राय पर स्पर मिम गई जिसमे मुको मौरबानुभूति हुई। उमे मगा कि सपा सोपना सही है। पनाम भोर एपान्त में बैठा हुमा मदर बापू पार के प्रति प भो मौन हमार और पापा । उसका मन Uि के पारप बम रहावा। परिमहरको पार नहीं रखा तो इमी समय यहाँ से रटकर पमा जाता। ऐमी पपिटना रसके लिए प्रसाप पौ। तभी रसोपामों में गर्म वेतन्मी इन पार मेबर बार की मुफ्त सम्मिसित हंसी पगी। यह निगम मापरकी भाति रत्तगित हो गया। उसने पाहाफियह एपो गाररहे कि एक अपरिचित सेठ समक्ष प्रपम मेंट में अपने को सिमा बिदा महीं बनाना चाहिए । इससे व्यक्ति को गंभीरता नरम हो पाती है । मेकि ये सब उसके मन के पुमार ने मिन्हें यह अपनी इम्मानुसार पका पापा पप्रत्पापित हसी हंसी के पाप नुपौर मवर बाबू मे कमरे प्रदेस किया। पनाम की मारुति को देखकर पतुर पापारी मगरबा तुरस्त समझ गए कि इसके रिस पर क्या गुगरणी है। क्षमा याचना पर हए गोमे 'कुप समय पषिक मम गया पनाम गौ पापड़ी यह मुार कस में दिलचस्पी सेती। उसने कृत्रिम सहगता मा 'कोई बात नहीं। इनको संखोप तो। मया ।इनको पापका मकान पर प्रापा कि नहीं? मुमपने पदों पर पोर देती हुई योमी 'मुझेर पानी पीर पर्स पातीचाहे मह पपनी हो या पराई। सत्र मगर बाबू के मकान में यह कोरडा होती है। इसपर मगर बाप रहे। मौकर चाय परिपाप तमकर पाया पाउने सबको चाय बनाकर री। बरेर पर्व का मौन पाय मेयरमाने ही मौन मम किया वयाम मे कम पप्रत्यापित प्राप कहानी-संग्रह की बात पसा पी। मनाम मे बीच में ही कहा 'मबरबाद! इनकी कहानिया बड़ी पीत करती है। सर्वन के मामने में इसका हाय प्रोसा है। पैनी कमाए पार मार्मिक परिण-चिमन में ये भगीन पीबीमाकारों के सार सह पता से बैठ सम्ती है। 'मै माधुनिक साहित्य पश्वा राताई। साहित्य की पोर मैरी महरी विमनसी है। मै अमूमन रामस्वामियों से भिन्न हूँ। मेरे पीरन का मूम मेय पैमा मही पानव है। पार्नर मी सोरेस्प । रेस्पहीन पार्नर में मेरा पिस्वास नहीं । म चाहनाई कि एक प्रकाएन-संस्था प्रोस् । 'यह तो बहुत प्रम्छी बात है। छ सया लगा सकताई। पहले मेरा एक पत्र निकासने का विचार पा पब मैने या पिचार पदम दिया है। दयाप्त मे मुम इन्दु बीके बारे में बताया। से स्त्रिया के मामले में वह निरापरा है। प्यार पार रोमाम्स पर पा सर्वपा बेरसी पदासपीत करता है। मेशिन इन्दगी के बारे में उसने गहरी तो नहीं फिर मी तनिक रिसपस्पी दिखाई। इनकी एकहानी की प्रशंसा भी की। तुमे गर्व मे पहा 'उस महानी को मैने बहो महनत से तिहा। ऐसा कहते समय उसकी दृष्टि मनाम पर गम पा। मनाम पूर्वमत मीर मा बम उसके चेहरे पर कोई मये मारनहीं पाए हैं। मगर मा मे बात के सिलसिमे को मोड़ते हुए पहा 'इस रामपानी में से संगों मेराक है । बोबो सेठों को गीहरी करने नाम उनके मेप निगार मायापिका मामे गाते उनकी ट्री प्रसाकर अपने मासिम और निक पत्र माने पासे सपा उन्हें पर्थ में साहित्यकार कहकर पैसा ऍटो रामे । पस्तुत' यहा साहित्यिक व्यापारी बहुन पपिक । पौर तो पौर यह रापानी सापना की कम पर रिसावट कीबो दुकान है। ऐमी स्थिति में मेरे द्वारा प्रकापन-संस्पा का संचामन कुप पक्तियों की दृष्टि में निहित स्वापों का प्रतीक माना जा सकता है किंतु मम ऐमा को स्वार्थ महीं है। में गिर रूप से साहित्य-मेगा परना चाहता हूँ। इसका मतलब है पापबो पैमाने पर यह काप करना चाहते ।। 'नहीं। उसने मन को मारेकरमहा 'मे पिमहासयाराम इमे महीं पोमना पाहवा। में कम पापरी पोर इन्दु जी पी ममी पुम्न छापने कारिपार पता। पापके चित्रों का एक एमबम वपा पापी पिा-ममी पर दिमिन भामोषों मेगों कामपा पापना ४५ चाहता। पनाम ने तुरत कहा 'यह वो पार मचा हेमा।स्थानीय सेवकों तो सेसक की संशा देना ही साहित्य का अपमान है। परमान, यहाँ मेक्षक बिन्तन-मनन के नाम पर पूम्य है । न इन्होंने प्रयाको पा पौर मार्स को। धुप विनाक एमित पौर सा कसाचित् नाम मी मा पानते हपि । भान मनोविज्ञान का यमामा । भनाइन पो बिना को साहित्यकार पीवित रह पता है। और पिकासो पानमाग पोम बोग यामिनीराम पुमा टैमोर मारि चिपकारों के बारे मे यह विस्म मः पामते। भेवर बाद में अपनी सहमति प्रकट की। पतु मे तुरन्त बात के प्रम को पास दिया फिर में समझतीगि मात पाती हो गई। भर में प्रपनो सहेमियों में कहानी-संपह के प्रयास की पोर-चोर से बोपना कर सकती है? बसका इस बार मनाम प्रकाशन की एक सपरेवा बनाने का मायरा करने उठ सामा। बार-बाते मेंबर बाबू मे इमु से पा 'भाप मुझे पेन नम्बर पर कभी भी पारकर सकती है। सापो की 'बर-बर' फिर मुनाई पड़ी। बाहर प्रावे हो मुके हो पर उत्तास विसर पमा । बा पहावीह चिपिया-पी मरसर में बोनी 'मनाम भबर गापू की उम्र मेरे पान में तीस-पेतीस की होगी। हमारे पम्प पारखी। 'पाया। पोटा-सा उत्तर रिया मनाम में। ६ पर पनामिका परि मस्सस्म हो गई थी इसलिए सबेरे की बाग ४५ परवा माया करती पी। पनाम का उसके मायका व्यवहार परा-सा भी मुनर महीं था। हर समय ऐसे मारों का प्रवर्शन किया करता पा से मारदा स पूर, बहादुर मामना पाहता है। यही कारण पाकि पर परवा पर पर की 'कमम' प्रपया साली की पर्वा करती यो पनाम उसके बारे में इस तरह उत्तर दिया करता पा से म पाते जीवन में काई महत्व नहीं रखती है। पर्व ही समय को शराब करती है परन्तु का सबेरे एफपिचित मापनीय घटना पर गई। प्रमी तक मनाम बिस्तर पर सोया दमा पाापरवा मे चाय की प्यासी को मेरपर रपदर से जगाया। पनाम मपनी प्रासाईमाखों से बरपा को देता । हमेघा पी पपेता पारमरा कुछ प्रपिक मची नप ही पी। उसके गालों में उस्मास की परमादमीभाष ही पौ। उसकी पोती म पारको पापासो र रही थीं। उसका परीर उसे इतना कामा पौर मामही ममा सा उसे सरा मगठा पा। भार उस उसमें मी सौनयमी ज्योत्स्ना विकीय होती हुई मगी। उसके बात मुमे और नीचे कमर तक पिराए हुए थे। प्रनाम उन सबको एकटक देखता रहा। उसने खग मा के लिए सोपा पररा इतनी बदमूरत नहीं है मिनी मै समझता हूँ। । पनाम पाय पीता हुमा पामोपी स परदा के बारे में सोचता रहा। मरदा मगमरमर के चुत की मांति निश्चम पीर प्रटस पट्टी पी। बाप समाप्तकर पनाम ने प्याम को मेरपराम रिमापौर प्रपने मापरा गहमामे भी पेप्टा दो तापिपरवा यह समझ जैसे वह उसमें तनिक भी रिमपस्सी नहीं मे हा है। मैग्निपरा पूर्ववत् महा दी। रसपी पासा मै एक रसित मारी की पतप्त पार पौर प्यास थी जो तिमी माप कर रही पौ। एक करप पमहापता पी पिसको भनाम पूरी तप देन भी मही साता पा।

या बात है पर उसने अपने हाय के पापोतन को दबाते हुए सहब स्वर में पूचा 'तुम मुझे इस तह क्यों देख रही हो? 'मै । यह अस्पष्ट रूप से इतना कहकर कुर्सी पर मैट यई से कोई भयभीत प्रामी हो गो टूटकर गिर पड़ाहो। उसकी सांसें और पी पौर उसके सारे पवन में सरपी पी। प्रनाम के मन में को प्रश्न एक्साप उठे पौर बेट मए । उसने अपनी दृष्टिमरी मोर फेर मी पनाम बार। उसने कहा। 'मैं चाहती। उसने की कठिनता से करना प्रारम्म यिा 'मैं पापको चाहती हूँ। में "प्रापको प्पार करती हूं। सना ह कर बह पुप हो गई। हर गम उसके यने में पटक हावा। पनाम मे बीनना चाहा पर मासूम उसका बमा यो कक गया। उसने इतना ही कहा 'पररा! परमारे सम्पूर्ण सम्पप मरी दृष्टि से मनाम की पोर रेसा । यह मेम भरी दृष्टि एक पौरत पाप्यार भरी भयर पनाम के लिए प्रसन्न हो उठी। उसने अपनी प्रमुनियों से देखना शुरू कर दिया । बह पाये पड़ी। उसने अपने कोपठे हाप से प्रनाम शपका स्प पिमा । एक माम्दोसन एक कम्मन उसको रम-रग में रसन्न हो गया । उसे ममा रहमापता सर्व मार गम माहें उसके पन पोर मन में एक ऐसे पापप को मग्म दे दी है बिसे वह सहन मही कर समता । उसने साहस करके बराबहरे को देना । चेहरावाम गया था। उसकी प्रखिों में मालिका प्रोग प्रौर समर्पण का भानोपपीत पार प्रनामहाप स्पन हीयामएरा मै अपना मस्तक उमषी गौर में रप दिया। मेर हिम रटी । उसके हिसने के साथ सानो पिर पड़ी। साती साप प्रनाम के मस्तिष्क में अपनी मातीईटीप पुम मई। उसे लगा कि Ys पह इस उत्तेजना को नहीं समास सकया । उसके हाथ रीमे पर मए। सहसा उस दिन बामो स्मृति उसके मानस-सटम पर पूम मई। वह बस पर पाहा बा पौर परदा पो म्यम्म भरी दृष्टि उसकी टी टीम का उपहास कर रही पी। फिर उसके मन में पृमा की महरे पौड़ पड़ी। उसने बरदा को पपने से पसप माना पाहा । पररा मेत्रों में पाम मरकर कह उठी 'पनाम बार, मै पापसे प्यार करता है प्यार करती मुम मपनी बाहों में भर सीलिए, में काम प्रापको। मा मस्ट स्वर) पनाम विचमित हा मया । तुरस्त अपनी सानीको पकाकर खड़ा हो गया। संममकर बोसा 'धायद तुम भूल गाहो कि में एक अफ भादमी हूँ। तुझे प्रत्पन्त निम्न स्तरको स्त्रियों की हतने पायेस में नही पाना चाहिए पौरन ही तुम्हें इस सण प्रेम का प्रवन परला पाहिए, यह एक मम्हे पराने की मरकी के लिए पोभा नहीं देता। पनाम माही बास्यों को समान पिया से ही पररा ममकर पर होगई। पोर मण पूर्व उसके मुख परोफामा और प्रोग पाया मुप्त हो गया पौरबहनिय स्वर में होगी 'पुम निर्दय हो, पस हीन हो तुम मेरे प्यार को युकरा ऐ हो सिर तुम्हारे प्यार को हम राएगा। "तु म तुर्मे प्यार नहीं करता इस तरह मानुष्ठा में रहना मन्त्रा नाही भुमेसममने की कोशिप परो। परदा कारण हुई दोसी 'मैं तुम्हें समझ गई। तुम्हें एक साधर्म सीको पावत्परता है। लेकिन पहा तुम्हें महीं मिमेपी हम तुम्हें प्यार नही होसी यह एक समर को पपना पति क्यों बनाएमी । यह मरी तरह माती पोर महीमही है। यह मेरी वय पनपा पोरे हो। नामरे से बाहर पमी गई। पनाम रे मन में हाहाकारमा मया । रसन मम मर के लिए विकी पाखरे पर प्रपनी हानियों को टेकार दर तक पैमी सड़क पर अपनी दृष्टि पौड़ाई से मगा कि उसकी टांग प्रावी हो गई है पार पहना की तय वेब पोरगाव र भाप पहाई पार बरा उसे भापते हुए रेबार मन ही मन बन पी है। उत्तरषात् यह रिन भर कही नहीं गया। यह दिन पर बीमार-सा पड़ा पा से रसम शक्ति हो नहीं है। रात्रि की गहरी मिडा ने उसको का स्वस्म किया। उसका पाबेस पौर अपनी बाती रही। बासस्प दृष्टि से कम की घटना पर विचारने ममा । ससे तमा कि बारा में सिर्फ एक कुरुप साकीकामाये पार उत्ते बना है। प्रेम में प्रोत्साहन का प्रमार पाकरमामा से मर गई और उसने रस झमत में उसको मपका तक कह दिया। प्रनाम में एक पातोपा की भाति पपनी पामोचना करके प्रपने पापको भैर्य किया कि इसका सेमी पुरा नहीं मानना पाहिए क्या उसे पता को एक माराम माको सममार खमा परला पाहिए। उसने ऐसा ही किया तपासासी मेकर बह नीचे चाय पीने धमा गया। रास्ते में परदा की मो मिती । उसने सापारमतरीके से कहा 'बररा पापमे मारा है, पनाम बापू ! प्रनाम मे हंसने का प्रयास करते हुए कहा यह पपमी है। कार्मो से निवृत्त होरपरपरकी पोर पम पम । पाय मौसम पमा पानवेरे-मोरे बारम निकल पाए थे जिनमे पास में मुमने दीपप्प। बब बहनुपरपर पीपा तब मुग्मे नहीं मिमी। मुदीमा बताया कि वह मंबर बापू के यहाँ साना साने गई। पनाम का मन राह मे पर मया । रमने गोचा किंवा मे शोपर मे प्रफेनी मबर माग के महा पमी गई? हात रमझे मुंह पर उसकी परमायो नाप रटौं। । ।

की मां ने उसके चेहरे के मार्यों को समझने का प्रयास नहीं किया। यह प्रपने पापस पो ठीक करती माती 'कत इमुकीवर्षमाटो गायर मंदर पार इस उपप्तम्य में उसे अपनी मनपसंद का तोहफा परीरकर मे। पहनके साप पापार मी पाएगी पौर दोपहर तक मौटेगी ! मनाम ने हामोपी से मुस्कराने की पेप्टा की। उसो हुए सर में बोमा 'बह भाए तो उसे सबर कर देना पौर कह देना कि मार रात बह मेरे साप माना जाएगी। बहतकास मौट माया। पर में पुसते ही उसने ऐसा किपरवा ने अपने कमरे के पागे मायने से उसकीसापीमा मीरा चित्र बनाया है। मन में रोप के होते हुए भी उसने उसके प्रति मापरमाही रिमाई। वह बट-सट् करके पर पड़ा। पप्रत्यापित उसने अपने पोिं के नीचे मंगड़ा निसा हमारेमा । उसने अपने एक पाग मे उस सम्मको पुषत रिया । मह पान गया कि यहारात बरदा के प्रतिरिक्त किसी को नही हो सकती। पापम पर कप पोसकर पर गया। तभी गकिए ने पुकारकर एक चिट्ठी । पर की चिट्ठी पी । प्रनाम को परपीषिट्टी पाने का तनिक भी पीक नहीं पहनामता पाति प्रमाणपस्त विममी की एक ही भाषा है।परने-गिने घमा है। एक ही मांग है कि रपया भेगा। एक बार उसने यह चिट्ठी पारी मेकिन फिर रसम पानी मारम्म पी। पोटरी बहिन ने मिना पा–मैया | हम परमप्र मे है। तुम दारी महीनों पर मी सी-पपास पपया नहीं मेरो ? ऐमी मी या पिसारी हई? तुम ही सरकारी नौकरी पो मही कर मते ? परा सोषो में ही हो पाईपोटोबहिन बस सी होन गामी है । मा रात-दिनहमारे पिाह की पिता में सूबर कोटा हो रही है। हमसे उनकी दुसानहीं देखागाती। पौर एक तुम हो कि मोरे वेषकर परदेस में मैठे हो। यह कता-मैना किस परम्परा की पेष्ठ सेगा है? परका एक-एक सरस्म एक-एक पैसे के लिए दरसे पर तुम यहाँ पर शाही पीपन मुगारो यह कहो का इन्साफ है ? ममी तुम्हारा एक मिन पामा पा उसने पोषमारेबारेममा उपसे सभा कि तुम सम्मान पौर निगी मुमके पीछे पपने परिवार पामों का मी बनियान कर सकते हो। इतने प्रमार्यों में भी मौतु, पाणीप लियती है और पेपटीत पहिले प्रमाम ! पैसा म मेगोको मेयोपर प्रपनी कृषमता का धमाधारकार पिमा करो। पहा महिन सरोज पैसा पसासा!! बहराया 'मह पारम समभकिम यहां पर ऐप कर पाई। में हो पाया कि में से पोपा बेटा इसलिए में अपने बीम की पाकोना मौर रेप को घोरकर परिवार की पकी में पिसकरपपमा मस्तित्व मिटा नहीं में ऐसा नहीं कर सकता। मुझे एक महान पिण कार बनना है, पर मे पास बनूंगा। और मह मिन। ममता प्रश्न पनाम के प्रापे नापा। उसने पपा से माविका रिया 'ये मिष का काम करते है । चर्म मेरा मुली पोरम पसम नही। मुरा सरकारी नौकरियों पाकर अपमे को पी है पौर परिवार को मेमा को रकियानूसी निधार माने गरेपी सहानुभूति प्रामर मेd tif,गिरपिटमी फितु में भी अपने मिों में भग्ना नहीं। और उसने पुष परनामों का निम्सेपपकरके माना कि उसने अपने पस्सियत सानो कारण पपने प्रश्या मित्र की हानि पहुंचा है। उसने किसी भी मित्र पर १२ कार्टूम बनाना नहीं छोड़ा। उनके वास्तविक स्पोरिक्त परफे रमने रमकी मनचाही हिम्मीरगाई। फिर वह अपने दोस्तों से प्रम्बाईपी से उम्मीर रस समता है। मोरे से पराकी मा चित्लाई रहर रहे। भारतमभी तक सोहर हरदा। पोरीरमा रठ!चठम! 'बारह ! पनाम का। उसने पत्र को मारकर फर रिया। 'इन्दु की कम वर्षगांठ है। उसने सोचा 'मदर बार उसे मनपसम्मोहन वगे। पौर 1 उसके पास पैसा ही नहीं है। फिर दु उसके बारे में क्या समगी? मेंट के प्रभाव में या उसके प्यार का मतन्त्र मूस्पोपन करनेगी। सोरेगी कि को भेंट मही रे सकता बदषय क्यारेया? या पूरीवादी युग है। पाररान प्रमान पर बम्बयों का पिर इना प्रबम्बित । फिर मनुष्य का पहम् सायनिक स्थानों पर मषिक सम्मान की चाह रपता है। फिर पैसा ? पैमा। पप्रत्याशिव उसके मस्तिक में दयास की पिनौनी पार कठोर मूर्ति माष रटी । एक ऐसे नरपिशाच का सपहीन शिरमेहरानाप ठानिस- पर मानवीय समापीली पाए भी मही पी। कुछ मप तक उस पठोर जून को पानिया देता हादिर पह कपड़े पहनकर यहां से पला। सीढ़ियों पर पररा सम्पन-सी बेटी दी। इस बार उसमे कोई दव नहीं की। यह मे एकमनीय भावनासेरेमनीही। उसने पारि पनाम पर से बाहर निम हा वा उसने अपने भाई धीग का पाबार मगाईकिमीवर पापापो। प्रनाम मे मानिसका घोटा भाई एक साड़ी का बसम मेवाए उमो तपहिलोरेवाताहमा पात पा है। मनाम देगार पोपती हमा हम पहावारिम मन्तम् का रोर प्रारम हो।

उमे बरपा की कुवा पानी नहीं ममी। यह बिमाम पपिष्टमा किन्तु बहकर ही पा सकता है। कुछष्टताएं ऐसी होती है जिनके बारे में पारमी बाह कर मी पुस नहीं कर सकता। वह ताने में मैठा हुमा परराका विश्लेषण करने लगा। पराकी मायु प्रपरिप मौर अपरिपक्षका प्यार या तो सब रुप सहकर पेसता है पौर एकाबिहासा भरा स्वयं से प्रश्न करता यता है कि ऐसा क्यों होता है'मा उसमें असममा का विरोध उत्पन्न हो पाता है पिसारा उसका भूपा का पर्शन कप्ता रहता है बिनुमानगा एक उपहास पपराहसको दुष्टता बनकर पातीt सौ परवाकी रह गई है। बह कामी पौर नही मानी? पनामा साक पर कोहराम मचा । मालूम हुमा कि एक सरयन एक पुकानार मे पता से कह रहे हैं किसे पैसारे पुरफितु काम पार नहीं मान या है। जब सपा सम्बन एक रम्मापी को पप अपने मेघ में बम ही बांधसेवागी मौकरपाही प्रप्टाचार और पनापार की बातें करने लगे। उन्होंने दून के बोए इसान की तरह बर्तमान के सभी मोगको मुटेरा पार ठग कहा पर पुकानदार अपने हठ पर प्रहाही पापौर उस्त सग्यन को पैसे देने पड़े। इस पटना मे मनाम की रिचार पाराभिप कर दिया। उसके सामने इसका उस्तास भएप नाप पय । सर-स्पर्म का संबेदन पर भी प्रनाम पर महका मपुर ममीत उत्पन्न कर हा पा। प्रारहमु मगर गादू के साथ मोमी क्यों चमी प? फिर उसने अपने मन को रास दिया किरबाके सपन पोटागने की सभी हिम्मत नहीं हुई होगी। ससने सोचा होगा किम पसीइति नागर होकर मररमा प्रशासन का कार्य स्थपित न करो। पपे बनिए होत हो ऐम है। चाहे तो बेटा भी नही ती बेटी मी पीन मे।

पयामका मकान पा गयापा,
पिता के समीप पहुंचते ही पनाम को मरे हुए प्रान की बास पाई।
समे नाकमागे समान रेकर दरवारमटामा। प्रनामिपा मेर
होना । म देखते ही उसने विस्मय म पूमा 'तुम यहाँ ? तुम्हारी तार्षि
'हा पर पाम पावडी महीं देते।
'पोह। किवना मीच पापमी है मममान उसे पका रगा।
मनामिका ने मत से समझाया कि पीरे गोस । दमाम बापरेशान
'क्या कर फेहेपाल बाबू ?
'सो रह है।
"उन्हें जगा दो।
रती हो?
'टीपाती हो कार को अपनी पासासी मरला ही पाहिए।
पनागिता! पाय म राम बाबूमो मुम्हारे बारे में पाया। उनका
पहम्पहार समकाई पमम्म मही । तुम दिन-दिन कमजोर होतीमायो
'नदी पापा ऐसा महीपरमा पाहिए 14 मेर लिएरेता समान।
पर यमरापार मदेमकी महनि मांगा नहीं। माहाने म
म पौर रपार पिएनिम्मानी तरारोमा पाप हीमहिए,
मे मारमीसी पागा न मानतो पाकर' श्याम महीन
पोरगर। उमरा भी प्रपना-मराया नही है। बम पया
पाहत है मेरित मरे प्रति पत्यन्त दयाम भार सहस्प है। मैं नहीं भारी

हि पाप पकाकर उनके मन का परम । 'मबि तुमारी नहीं है वो मै कुछ भी नहीं कमा। मनाम 'सद पद करता बमान कमरे की पोर पड़ा।बट-पट् पैसे ही कमर के समीप पापी पे होरयाम रेसर मे पिलाया मोह मनाममा कलाकार पाइए पाइए ! मनाम मे बैठते हुए फोमस स्वर में मा भापको धमाकर वहा कट रिमा। 'माहाँ पनाममा एक सूरतोर के लिए इससे अधिक प्रसम्मवा मार क्या हो पाती है कि कोई उससे मार मामने पाए। पनाम मे समय मेमो से मान की पोर देला। उसने भपने मुन पर परसार की छायाएं बोलाई । रसने स्पमाष यति ए कहा, 'एक पर खही ऐसी पाई। मै प्रापका पि.मा मही पुकासका, इसके लिए पामिन्दा । रसाम ने फरता से मनाम की पोर रेसा। ग्सको रस रोर की यही हाड़ी से उसका पारा पौर मी नमामक नया मापान मार ममे पाप सकी नमानम्ता में गिर गयोमा 'तुम मेरे स्मार कोपामार मी ऐसी गलती क्यों करने मा बावे हो? पाना मया पिया मही पौर फिर मेमे मा पए। पनाम रासाभिमान पाहत हो गया। उसकी इच्छाहाकिमहरठ- करता पाए फितुकम प्रायोजन के स्मरण माग से उसका प्रेम-प्रेम सिविन हो ममा । बरबाद पम्प नोयों को स्थिति में परिमेय सिकार की प्रतिमा के भनुम मैट महो देता है पो दुपससे पार मापन हो पाएपी। उसे प्रविधिमा म्पतियों के समक्षा तुम ऐना पांगा उपावर की नातिनके कहरहों का लिगामा बमना होपा मा उपमें इस अपमान को सहने की शक्ति है। नहीं भहीं | बग्स मर्यात

अपमानवनित पीरा को नहीं सह सकता । रसकामहरातमवमा रयाबह
पसी स्थिति में भी नितान्त प्रान्त बैठा रहा ताकि पयास उसके अन्तराम
हाहाकार मोन समझे।
'मैं महल पर्मिन्दा पार वापरा परता है कि मगर बार से सपा
मेकर में पापको दे दूंगा। उसका स्वर गिनती में बाहुमा पापा उसकी
पोगों में करणार रही थी।
'में बाय-कायरा घनहीं मानता। अप को यह है कि मैं तुम्हें रपय
रेसमा
"ऐमा महिए श्याम बार मेरे परमे मा पापा मेरोमा की तबी
पत सराब है पर पर एक पैसा नही है । जरा सोचिए ऐसी स्पिति में प्राप
मेरी मारनहीं करपे तो मेरा क्या होगा।
'होगाचा मो बीमागे में तापनी ऐसी पौर मी प्रमाग में
प्पामे हरय मिए हर उस समी-मंबरी पुमती को देखती रहेंगी को अपने
पम्तम् में मुगर भविष्य की मरमपना पौर माकाशाए लिए मधमनी
हई चनो पागे मे मुरार ही होगी।
'दयाम बाबू! किसी पार पर ममा पिारने में पापको क्या
मिमता है।
'यह मै स्वयं नहीं पामता।
उगने हग मे रतेरित होकर दयाम की पोर रेमा । उमकी दृष्टि में
पृषा
पी। उसकेरीर में जाता मा ईपी।
बमाम अपने पापोरोसिमरकर बोला 'तुम मेरेापन पर पारपर्य
होता होगा। यह स्पामाविर भी है। प्रनाम ! गोमति गौवन के मर्म
मे पलायन करदन पाने स्व को मम्मानित-यतिप्टिम करने पी भूप
मरातुन उमको पीडा देने में ही मझे मानम् पाता है। फिर मेरे
सहयोन पसिमिए रियोको परीबी मोर मयूरीपिपत
-
1

- पाना मी या नहीं। यदि में दूसरों की विवसता या कप्ट से वित होता वो मेरा पापार चौपट हो पाएमा । मैं एक स्पये के बरमे समा रुपया चाहता। 'श्याम बापू ! उसने बड़ी कठिनता से कहा 'बस एपबार मुभमर पौर या कर दीजिए। रमान ने सर में कहा 'बया काम्पापार से कोई सम्पम्प नहीं । परिमसाई निरीह बकरे या मुर्मे को दया की दष्टि से देखे तो उस बेचारे का क्या होगा? या एक प्रमय भारना है जिसका प्रयोग कहानियों के पापमापी सेवक पपने नायकों में करते पाये महन्त पौरठा उस भावना का उन पर प्रदर्शन करते है जिनका राम राम पास महारान के रूप म पाता है। मै इसको अपने एप में भी नहीं रखता। मैं मूवे को बरूरत मन्रो किसीकी इग्मत पाती हुई को बचाने के हेतु, रुपया रेता पौर पावस्यकता पर बेतापौर समय पर अपनी रकम उससे मेकर उसका सोना या मकान वापस कर देताई। 'मेफिन तुम्हारे पास क्या है ? तुमारे है। मोटों की कीमत क्या है ? बागार मे ये मापेराम पर भी नहीं बिकते। ऐसे पादमी पर बार-बार से रियास किया पाशाता है और उसे से करिया जा सकता है। पास मे सामिपूर्णम्पा हिमार महरा मौन पारमकर लिया। उसका पहरा दिसकुस माषाम्प था। पनाम का मुस वाम के उत्तर पीसा प्रतीत होने मना । परिपभी मह पपमा बहरा पाने में देखता तो मिगी में पते पनि पैसा ममता। पाम पर अपने मुटनों को बगाहा पा और ऐसे भागों का प्रवर्मन कर पापा से उसके मन में उसकी इस कापामरी प्रस्पीहतिका कोई प्रभाव नही। प्रनामसापी समानौ। उठने का प्रयास किया। उस सपा कि उममें तनिक मी०क्ति नहीं है। पाने के पूर्व उसने पाम को नमस्कार १८

।
किपा । पास मे इसका उत्तर यो मापरवाही मे दिया।
कमरे के बाहर प्रनामिका सही दी। उसका पर पहरा प्रनाम के
रदास मुल को देखकर पंकामों को रेसापों से भर पाया । वह समम मई
कि क्यान बापू ने प्रनाम राइको मोरा उत्तर दे दिया है।
'पा हुमा! प्रश्नमूचक एप्टि फेंकर मनामिकाम पूरा । क्षप मर
के लिए पनाम का पौर फिर पत्पन्त धीमे से जनत हुए स्वर में पह मोमा
'यह पनको छाती पर रखार जमेगा।
"पापको पर्यो की ऐमोमपा पापम्पमता मा पड़ती?
'घर से चिट्ठी माई पड़ी तमी में है। पाप हो गया पर पना
मिका को उसका मन बड़ा निम्न मगा। पनामिका मे तुरम्त उस सने के
सिए महापौर स्वर्व व्यास कमरे में गई। बयान अपनी विगोरी में में
मोटों को निकासकर गिन रहा था। पापा की पाहट पाकर उसने तुरन्त
नार्गको तिगोरी में रखकर उसे बन्द कर दिया। प्रनामिका को देकार पह
मिसियानी हमी साप बोमा 'तुम
'म पापमे एक बिमतीपरने पाई।
'समझ गया तुम क्या कहना चाहती हो । पहोगी पिपया और
उपारोसेफिन में फिमहाम ऐमा नहीं कर सगा। मैं तुम्हें परमों
पारह रपये कर पनीम का हानोर निवागा। पीस बर्यो ? इसलिए
हिमपासे पामे पार पन्हवर। इनापों का तुम्हें पार नहीं देना
।
1
पनामिका पात प्टि मे रयाम मादातीही।
पास प परेशान-माबोपा 'मैने पहा उम तुमन मुना नहीं?
रपास फिर पुरने गाने सगा।
अनामिरा उसके गमीप बैठ गायोलो 'पनाम बापू को समार
पपपारागिरा।म पापमेहापाती हूँ।

बयाम ने पनामिका को पमित्राय भरी पैनी दृष्टि से देखा। उस दृष्टि में एक निशामा बी पो यह समम्ना पाहवीबी कि इस बार के पीछे कौन सी भावना काम कर पोहै। तुम उनकी सिफारिश क्यों कर रही हो' क्या तुम नहीं मानती कि यह मेरा पहले से ही कवार।। 'मानती हूँ। फिर से कर देना कहा की पुरिमानी है। 'बुटिकी बात में महाँ करती लेकिन नमें सस्त मारत है दमाम बापू पाप ए गरीब ममे ही हमें पर ईमान महीं कह सकते। इनके पास पये भावे ही ये पापका सबसे पहमे पुस्ताकर पि? बार क्या कर सि । ये चित्रकार है। में कमा का उत्थान उमार मौर उसे एक नया मोर देने में लगे हुए है। रेसती नहीं में सनीमड़ी बड़ी फिलासफी पौर नैतिकता की बातें करते है।-धर्म एक कोसत्ता पौर भगवान एक बकवास । समाज में प्रति पानी चाहिए पारमारियों को सर्वत्रता मिलनी चाहिए। मेकिन ये सब बातें उस समय हमाही माती है पर पास में समानही होता है। ऐसा मही प्रनाम का पारा तमता है पपों से बेचारा बीमारीमार। 'ध भी हो पापको । प्रनामिका ने भरपूर स्मो मरी दृष्टि से प्यास को पेमा ।मास कोप-या मया ।सनिक सानो स्वर में बोमा 'नही नही में इमे महाँगा फिर प्रेम मन भक्ति से मास्ता यहाँ तक हो सो कम ही रमना चाहिए। मनामिफा मे पान को हाप मोर पिए। विपमित स्वर में उसने कहा 'इस बार पापो मेराबहमा मानना ही परेना । परि पनाम बापू ने यह कम नहोरी तो मेरे पी। 'पनाम से नमी हमी बों है? । ।

अनामिका गम्भीर स्वर में बोमी 'किसी परिवार में पैसा न होने से म परिवार को मिलामी भर्यकर मेत्रमा उठानी पस्ती है इसका अनुभव मुझे है । ऐसा समय है कि प्रभार मनुष्य को पतन में गमरें। पनामिका मेरयास के पांव पकड़ लिए । पयाम अपने परोिं को पुरा कर बोसा 'मुझे एप्रो मत एपो मत। पनाम को भीतर मेर।' घसम परमात्मनाम पुन पास के कमरे में प्राया।नोट मिग पर उसने राईसीपये पनाम कारदिए प्रार प्रनाम पनामिकामो पन्य पारदेपर सपा रास्ते में पाते हुए यह सोच हा पा 'यह मठोर प्रामी अनामिका की बातमो मानता है? क्या मह मनामिका से प्यार करता है? क्या इवना सायी पौर नोमुप इसान के मन में मानवीय संवेमामा परी महररोगती हैं? या बह किसीसे प्यार कर सकता है? मगमे रिन मम्या समय स्नुके यहां पार्टी मो। मोगल में कुय मेनों को पापम में मिमापर एकपड़ी मेग बनाई पर, निमपर पर पार रिमादीमई। मेहमानों के लिए रसगुस्से परफी पौर समोमेरे साप-साप पायका प्रवामी पिया पया। टीक समय मेहमानों का माममन मुरू हो गया। इसु एक मिस्ट्रेम पी सपिका पी पौर पी मिननमार पुषती । उसके मित्रों की संस्था निपत' पुतियों को प्रपिक पौ। मनाम रे कहने पर मुझे पाहते हुए भी स्पानीय मगरों को गुमर निमाबित नहीं पिया। प्रनामामा पिपराम पा कि हमारगर नहीं है और देवन हमें महाम के पात्र हीना मरने हा उस पार्टी में गर्म मेसको मेटिया-माहिरयारों एवं

मिनिस्टरोंरा संचामित पोरे सम्पादकमाइले बने हुए उपस्मित
हए ।
मार बान की धाम निरासी की। परमसुन मोठी मार दिया
सिक का पहने हुए पे पार पस्पिति से पुत-मकर बातचीत कर
रहे थे। उनके हाव-भाव से ममता पा किदर महिना प्रौर हर पुस्प उबसे
मिमने के लिए पातुर।।मनाम एक मेगके कोने में बैठा मान रहा
पा। नामोन की सारी में सम्धिव एए भवरवार से मिखनी पुम-पुस
करवा कर रही है पौर अपनी सहेनियों से उमको सि तण हस-हसकर
मिसा ही मही सब रसको प्रत्यम्त कष्टपरमय पेरे।
तरमनाम मस्तिक में इसकी पटना साकार होम्स। मास मे
स्पप ग्भार करमर सौपा इन्दु यहाँ पापपने कमरे में बेटी
हुकम की पार्टी मायोजन का हिसाब मया पी पी। पनाम को देखते
ही वह बोली "मैं बड़ी पमिराई कि पहमे तुमसे नहीं मिल पाई। मबर
गार स्पर्य मा गए थे इसमिए उनके साम पाना पड़ा।
कोपासनहीं।
'ठगे तो सही। दुने एसी की पोर संकेत किमा।
'म ने नहीं पाया तुम्हें पपन मंगवाने पाया है।
'क्यों?
'पहले यह बतानो मेगामापूमे न मानोहयरिमा ?
'उम्होंने?
इतकाती राई नहीं बताऊपी तोहफेकी
महमियत मारी जाएगी।
फिर म मी तुर्मगार में ही बवागाहा मेरे पास कार'मही
है इसलिए मेरे साप तुपाये में ही चमना पाया।
'पर रहा।
परास्ते तक?
१२

'यदिणाम को पते तो तुम्हें कोई एतराय होगा? 'नहीं! उसकी प्राकृति एकदम बदल गई पीर यह तुरन्त दरबार की पोरम गया। दु पनाम की नाराजगी भाप गई। उसने तुरन्त बागर रम रोरा पार तुरत थमने का प्रावासन दिया। प्रनाम कुछ नहीं बोमा बहन्दु को बाहती निगाहों देखता रहा। इन्दु मे तुरन्त पर बदम पर यह पनाम के साथ पास पड़ी। गतम्य स्पान पर पहुंचकर प्रनाम मेनु मे कहा 'तुम पपने मनपसंद सोहफा तरोप सकवी हो। मैं भंवर बाबू को मावि तुम्हें सोन का तार मदम नही दे सकता फिर भी तुम्हारी इच्छा को पूर्ण करने की चेष्टा कांगा। बोलो क्या चाहती हो प्रमायापित इन्दु समीर हो गई । सहरमामया पुमावमा गया था। बह एक पोर पनाम को मकर बोली 'तुम बार-बार भंवर बाबू का नाम पर्यो मिया करते हो ? उनके प्रति तुम्हारी गहन पन्नी मही है। उन्हामे हमारा ममा ही किया है। 'मने पर कहा कि उन्होंने हमारा पुरारिमा है ? मेकिम मिमी कला पार को इन पूंजीपतियों का पिएमग बनना भी तोपोमा नहीं देता। यम्- समे प्रपिक महत्व भी ठीक नहीं। 'ऐमी तो कोई बात नहीं है। फिर परमी उनके साप पर्यों गई पी? मानती हो तुम्हारा उनके साप इस तरह पूमना पिस बातावरणमा बम र मरता है? 'मोह ! पब समझी तुम यह पाना चाहते हारि उनके माप घूमने पर माग वप्नदीपान करेंगे तो उहान हमारी पार तुम्हारी मिना पर भी पमपीपरमही उपामा है! पनाम! हमे एनम नही उपमा पारिरहमें "म हरहमापना भी नही पाहिए। हम दोनां पन्ध दामह में पौरन मये मान के साप पमना चाहिए, बीना चाहिए। मी एक एम्भो इंडियन पोरा गोर से बहस करता हमा उनके पास से मुगरा। तु सावधान होती हुई मोमी 'मोहन हम मागावेश में स्थान की मनुकलता को भी भूम ठे। बात का प्रसम परस नपा । पनाम मे तुरन्त पूषा 'तुममें कौन-सी वस्तु पर है।" 'गो तुम्हारी पसन्द यह मेरी पसन्न । 'फिर बमो। उन रोनों में छोटी वापरकी पोर प्रस्थान दिया । के एक पड़ोगामे की दुकान पर पहुंचे पीर पनाम ने एक सौ पनापये में के लिए एप पड़ोसरीरी। इसकेपार रामबाग के एक छोर पर बैठकर प्रेमकामासाप करने नमे । प्रनाम ने माना कि तुमस्तुत उसे ही प्यार करती है। इस दिन उसन एक भारी मासों की उपमा पार पार्ने मुनी । बहसमाइम्साग निमे पुतियो पा ठोसावरा ही प्रेम म्यिा करती पी पपणा या सेषित होकर उसपर पपमा की बगह प्रेम के मात्र प्रकट किया करती पी एक बमाम पुगती स्वामाविक प्रेम का पर्थ पाकर बेचारा पाप-बम्प हो गया। उसे नगा यह पाचन प्रेम एक पिरन्तन पासोक बनकर सेसृति में विसर पाए पौर उसके पीबन में पानन्ध का वर्पण करने और एक से मोठे की पबिर मनुभूति की मर्यनारोबो उसकी नस-नस में समा गाए। सप! जीवन के परम मुन मोर बिनाम भावनामे में मरे भन! पात्मा की प्रमौत कोममतामों को मिए सम! ये थम माम्प हो प्रमर प्रनाम स्मृति-पटम पर रन पोपी चिरम्तमता के लिए सहनों स्पर गूर पड़े। यह टेबन पर इस बप निस्सर पड़ापा मे उममें प्राप ही महो। मपुर स्पमा में यह भूम यया पारिबह ही बैठा है। मकस्मात भवर बापू ने उसके पितारों क सामर में न फें। मिस विचार में पो गए प्रनाम मो? मोह। किसी में नहीं। नाम ने मुस्कराने की चेप्या की। मेरा विचार है कि पार्टी की कार्यवाही पुरकी गाए। का का सिस्टम हातातिपिरपी है परमवार, पत इसमा प्रायोजन रख ही लिया गया है । पब म प्रपना तोहन मॅट बरंगा प्रनाम दा? मगर बाद में हिन्दी का टाइपराइटर सटाकर इम्युगो दिया । इन्दु ने मुस्कराकर उनका पभिवादन किया। मंबर बाबू में भीदको सम्बग्पित कर कहा पर एनके लिए सबसे महत्व को पीर यही है पौर में प्रामा कम्पा कि पाप विपक्ष की एक महान लेनिका बर्ने। तब उन्होंने गर्व में मनाम की पोर मेला। उस पि में एष पूंगीपति का महम्मत होकर मार रहा पा। प्रनाम उसे नहीं यह सका। उस गपभरी दृष्टिम पा उम भवर बार की पोर में चुनौती दे रही थी उम तनिक भाषेम में मररिया। बह तुरन्त अपनी पैसापी पर उठा। इन्दु की पोरा पर अपनी पेर मे पड़ी निकालकर उसने इणुको पो। देकर उसने मेबर बापू की पोर देसा पार फिर युकेम पाहते हुए भी उसने अपने हाप से उस पड़ी। पहना दिया। पर दुर्परमा होम-बम प्रनाम के लिए। पारमात पसरीन प्यास मे प्रवेश किया। तमोहाय में एक पोटी-सी पुस्तिका पी-वार-पर पाने पी। नाम पा-मा रमाए और पपम्पय मारिए।-मैमिन उसने प्योंही प्रनाम को हीरोपीए पड़ी पहनात ऐया का सम्म परी हंसी हंस पगा। पनाम पर पीर पानी-पानी हो मया । यह तुरन्त अपनी पुसौ की पोरगा मरिन सम्वामा में समका पाच पम्प गपापौर वापिर पया।

समीप सरे मंबर बाम पार इन्दु मे उसे सहारा दिया ।दो एम्मो ईरि मन मानियों ने एक मंगी पाइछोड़ारखी भावराए, 'चारा। मंबर माडू मे कहा पर मापको मालूम है छिपाप तेजी से नहीं पात सपाये फिर माप ऐसी गमतीपयों करते है? मनाम ने कोई प्रत्युत्तर महीं दिया। यह मपनी कुर्सी पर भीपी गईन करके बैठ पमा। बोहोपुर पर एक महिना दूसरी महिमा से कह पीपी 'पापमी मुम्बर है पर है मंगा । मेकिन मनाम स्थिर होकर बैठापा। एकसभात महिना ने प्रमेस किया। एप मे उसका पामे महकर सम्मान पिया। यह महिना किसी धमीर की स्त्री पी और अपनी पारव के मन सार यह सबको हेय दृष्टि से देख ही पी से उसकी दृष्टि में यहां की नप स्थिति पत्पन्त साधारण है मौर ये सभी मोप उसकी पेप्टवा से बहुत । मनाम मे साहस करके श्यात की पोर वा। श्याम पपनी पुस्तक इम्र को भेंट करते हुए महापा 'इस पुस्तक का हमें अपने पौरन के मम मुनों को पिर बनाए रखने के लिए महाप गीता की भाति चिन्तन मनन करना चाहिए। मै मममनाई दिइन सब तोहफों में यह वीर पेष्ठ पाकिसमें मातोपान का प्रदर्पन पौरमही निगमताका उप उममे तीबी दृष्टि से पनाम की पोर देहा। उस दृष्टि में प्रता इना महाँ मार ही पी। काटी गई। सभी ने इम्युपित होने की कामना की। उपमगीतमा मायोजन हुमा। हंसी-मगार बाताबरन में दोही मोरम पक्ति सप ऐ थे। एक पान मी पोकभी-कभी प्रामह परईस रिया करता वापौर दूसरा पनाम निमकी एंसी पारी पिता में बिमीन हो पईबी।

न्स पार्टी में पार्पन के केन विमु मे ही तीन बने-समपति माहित्य प्रमी मगरगार पन्दु पौरबह जमींदार की पत्नी पो निरन्तर प्ररपको हेय दृषिसे देख रही थी। ९ बहसम्पूर्ण राधि प्रनाम मे लिाकी की राह गहरे मम्पेरे में बीवन के गई प्रानों को एने में गुजारी। वह निराधा के गहन पावरम में पाया की ज्योति करन करता हुमा सोचने लगा कि उसफी टांग बैक हो सकती है या नहीं। पाम पर यह पार्टी में गिरा पा तर विधन सापों की श्या भरी पनि उसको पोरवठी पी पौर स्त्रियों में उसपर कितना भरा रहम मापा था। क्या एक दिन प्रतिमा की मामी तरह इन्दु की मां भी कह देगी रिमे अपनी बेटी के लिए मंगड़ा पति नही चाहिए ? यदि इयुमी मा गजी भी हो गई तो वह अपनी बेटी के संप रहेगी। उसके जीपम सरापापार मुही है। पु! पपेरे में एकामेहरा पंगारा-सा दीप्त हो गया। इन उस कमी भी इनकार नहीं करेगी। उन दोनों का एक पप है उस पप कमिए प्ररपेर एक दूसरे के लिए सम्मा मापी बन सरेगा। मेकिन उसकी पार बहिन । मूने मूगे मुख पौर मेसी-बसी माप । गरगाहर की माति जिन गरीरहो मए है। उसमीपनि पार्मों की माति रमके मम्मुत गड़ी हो गई। मुमरान का प्रपान कर रही है मैग्नि मुस्कान के पीने पपरों में बहुत दूर था की है। उसके कम इसने दुम हो पार हे दिये हिरमियों पी मोतिसरपट सहनहीं सकती।पिमिर्यो की मामी पास म पोरों का मन भी मही मोह सकती। पुग-पुरा मागीयम | मीरम पार निस्पमा प्रीत कोरे अनुभूति भी नहीं कर मरतीन उम्र में बाहर पुरती पति या प्रेमी की मनोकामना रखती है, तब रमझी बहिर्ने प्रमारों में ।

मपरमार, इन्दु पापकी नहीं हो सकती नहीं हो सस्ती! यह एक सेविका है पिसाप में मानवीयता मषिक है । पो एक कमाकार पर ही मोहित हो सकती है पो उपकार काममा प्रत्युपकार से ही ये सम्दी है। फिर उसे तगा किपर बहुच पक गया है । उसने पम्हाई मी पौर मोरे ही मगर पार से मिलने की सोचकर सोने का प्रयास च्यिा । रसे यह भी मातम मही हमा किकामहरी नींव पाई। अनामिका मे उसे धक पाठबने उठाया । प िममते हुए उसने मना मिका से कहा 'ममें सात बजे मगर बामहापाना पा तुमने मुझे क्यों मही उसया? 'पाप मारी मीर में सोए हुए थे। बहरीनी। उसने पाप रजते हुए कहा ऐसी पहरी नीव गिसमें बरे विचित्र सपने पाते है। माप नींद में कमी हंस पेपे पौर कभी रो ऐ थे। ये सपने मी लिखने विचित्र होते है। मनाम में मनामिना भी बातों पर गप भी मान मही पिया । तुरन्त वैयार होकर भगर मार्केपर को पोर पर पड़ा। १० पर प्रनाम + मंबर मामासम्म में प्रवेश म्यिा पब यहाँ महरा बन्नाटा पा। उस सम्माटे में प्रत्यारारी के मामेरार पूनोंदीतह प्रनाम की साखी पौवट-गट्' गुगदी पी। परदा मे मार पीड़ियों पर मिवा मा भमरे से पो प्यार करेगा वह बहुत एप पाएपा। इसे पार पनाम वामूट पर हो मया पारबह पपती माही से गर्यो तप करतीमा उसी समम में नहीं पाया। यह रास्ते भर इसी कारण उत्तमम में पर ७

यहाँ गहरा सन्नाटा था। मेवर बापू तपाइको गंभीर मुद्रा में देखा
को उसे मकस्मात् उन मुगक पार युवती का सात प्रामया यो एकांत
बार मुक्त महसबाणियां करते है और रिसी बुजुर्ग को माता रेतकर ऐसे
नयाने बन पाते हे मे ये कमी नहर महीं हो सकते ।
भनाम मे पर्भमरी पिउन रोों पररामी मार फिर प्रामवावा स्वर
बोमा माप दोनोंपा गमीरहे?
इन्दु मे फेरस मुस्कराने की पेप्टा की और मगर बाबून पहा 'हम
सोप ऐसे चिपापकी टोग टीक हो सकती है कि नही? क्या मापने कभी
मिसी गटर से सप्ताह मी वी?
पर्यो।
"मै पननता
इसके लिए हमारों पर्यो की समरत है
'ममुप्प पाहे वो रुपयों का प्रबम्प पर सपना है।
'माप पो प्रादमियों की बाते करते हैं। जिनके पुटकी बगावे पपा
पाता है।
समे बात को समाप्त करते हुए कहा 'म्पर्ष की मानों को छोरिए,
पमिए अपनी बात पर पाए।
मंगरगामे तुरन्त महा 'रनी का बहामी-मंपा गोपीकाकरण
रिमाप यार है। पापका एमबम स प्रस में घमा गाएगा। पदणीका
पहना है कि में पापको पाप सौम्पपे पास।
'केवम पार पौ?
'ग्समे पपिक मे महीरे तरवा। हिली में ईमानदारी मे लता मी
कोई महीला है। मुझे माली वह मासूम है कि पापा यह एमाम को
भी छापने गोरीपारमही हपापा।
'फिर पाप पर्यो पाप है ?' उसने मागरगी रे माप पहा । बहम

प्रपमान को नहीं सह सका।
प्दु मे उसे पति कनेहए गदा 'ममाम बात-बात में उत्तेजित होना
प्रया नहीं । यह प्यापार है, इसमें पैर्य पार समझदारीपी परत है।
प्रनाम को यह उपदेप सूदों के मोने पैसासमा । उसने एतु की मोर
पूरा । इन्दु के मों में शिकायत पी। ऐसी शिकायत जिसमें उनका प्यार मी
होता है।
'मैं इसे पापूमा। मेरे सामने तौटाने का प्रस्न ही नहीं है। मुझे पापकी
पौर तुमी को ही पुस्तके छापनी है। में पापकी नई कमा को चमकामा
पाहता।
फिर इन्दुमी मोकह रेपो पह मुझे मंजूर होगा।
'हई म मात! भेबरमा मुस्कराए।
इसी बीच एक मोटी स्त्री ने जिसकी कमरोस की वरह मोम-मटोम
पी द्वारस म्प में प्रवेश किया और उसा समय पहपापस भी पानी पई।
इतुकी मार फट गह। लेकिन भरमायूने महमाई की हसी साप
कहा 'पाप नहीं जानती ये मेरी धर्म-पली है। में प्रमी प्राया।
उनके पाते हो पनाम ने पृषा से मुंह पिचकाकर महा ये इनकी धर्म
पली है या भैस।
इन्यु ने चुप पने का संकेत किया।
भपरमातुरन्त मामएपौर योमे 'एकपमरीकाममा मपापा।
हो फिर मै पापो पाप सीपये (मा पर प्रमी नहीं एक माह बार क्यों
पनाम पा पापको बिमा सपों के कप्ट तो नहीं होगा।
मनाम उप कहता इसके पासे हो इमुमोस पड़ी नहीं बरबाद,
मनाम पाको सपे-मैसों कीया कमी है। इसमें प्रसिरचितार पार
कार्टूनिस्ट है कि यहाँ मा पाएंगे सया बटोर माएं।
पनाम अब क्या कहता! गणित स्वर में बोमा 'माप अपनी मर्जी मे
७२

पिएमा । पिता की कोई बात नहीं।
"फिर यह वप रहा कि मै प्रापका यह एमबम का प्रेस मेरे पाई
और सजावरमा सारा काम प्रापके रिमोहा।
कोई बात नहीं।
इसके बारधाम पीकर रोनौ-नुपौर पनाम-हाँसेरस पड़े।
गमी के पार पहुंचते ही मनाम ने इन्दु से शिकायत मरे सर में कहा 'तुम्हें
उस सेठ के बनेको हाँ में हो नहीं मिसानी चाहिए, तुम उसे मंटना चाहिए
पा पहना के बारे में क्या पानवा है?
'मरबाबू निरे पुसू नहीं है। इससे पपनी प्रसहमति प्रकट करते
हुए कहा 'म्हे साहित्य पार पना का अन्धा मान है। ये मी तुम्हारी तरह
विपी साहित्य का पप्पयन करते हैं।
पनाम बि गया 'तुम मी कमी-कमी हर बाती हो। मैं मंदर पार
को बहुत पहले से मानता हूँ। यस उपन्यासों के नाम मौर रम मेतका
कोही मता सम्ले है। चित्रकारी में उनका मान पूम्प के बराबर है। करा
पितरोबार पित्रकारों का नाम भी नहीं बता सकते है। ये बोसमे युटि
पाती है जिनका पपना कोई ठोस पापारमहीं।
मुने पाई मे पहा हा समता है।
पात दुधरेर मिए एक मा।
रोमों ने प्रसप-मसम रिपपे में बरते हुए एक दूसरे म बिदा मामी।
नुको पपने सूस गामा पा।
रास्ते पर मनाम पही सोपा हा बदल रही है। पर
पाठे-पहुंचते पारिपार फार हो गया।
सीरियों में पररारंटी हई मुम मिप यो पी।साणा की सट्-गर'
मुमार यह पाक पही। पनाम के समागह पकार मही हो गई।
पनाम मे रसके सामने सहर पूपा 'तुम बारमही पामोगी?

देखो मे मा को तुम्हारी शिकायत कर दूंगा।
'करीरिए, मैं किसीसे नहीं करती।
परपरा का स्पष्ट रत्तर सुनकर बह पिस्मित एपमा। बाकी
निर्माता उसे मई पाम पड़ी। उसकी पाहों में बिछोड़की बिनयारियां
गत पी पी। पनाम ने उसे परामर्ष ने सर में कहा 'तुम्हें पर अपना
पचपना मोड़ देना चाहिए, पर तुम बड़ी हो गई हो।
'मै अपनी रया के मनुसार पम्मी। मन-दरेको म प समझती हूँ।
'तुमारीमा को युमा?
'बुमा मीजिए।
पनाम 'बन्दी सोचकर मरकी पोरपा। प्रमीपहयो सीरिया
महीपा पाया पाकि पररा मितबिनाकर हंस पड़ी। उसकी हंसी में
वीर म्यम्य पा । पनाम उसे नहीं सह सका । उसने पमटकर देना। साली
का संतुमन बिमर गया। यह गिरता-गिरता बार उसकी सहमी पर
भरोषमाना
समीपररा रुमार बोली 'मधिक शेट तो नहीं पाई मनाम
बार सहारा?
पौर महासती ईरसी पसि मोझरहा गई।
मीवर पाचते-पाचत प्रनाम काइप भर माया पीर उसके मन में
पामा कि बार निर्जनता में पाकर बस गाए, बहो उसपर स्पा करने
मामा मौर पम्प कसने वाला कोई भी न हो।
११
प्रनाम चार दिनकर पिसासनही मिमा पनामिका रमे रसका रामी
के बारे में पार-बार पूपती पी नेषित पनाम 'मन ठीक नहीं रहकर
पामोघ हो पाता था। खासी पौर एकान्त के जीवन में उसका सोपा

कषि फिर से बाग उठा । उसने दो-तीन कविताएं सिसी मिन पीपक या विपिन।पीचर में कमम प्रौर म रावका हदय चारका तीर' 'तारों मरा प्रापत टूटा बाद । उन कवितामों में नसके मन मी हीम मापनाए प्रपोगानी नपे प्रतीकों पर उपमापों के साप प्रकट हुई पी। इन समीर बीच इन्दु की स्मृति उसके मन पर पाठी पी। चार दिन बीत पए। पम्दु उसके यहां नहीं पाई। उसकी बोर-सबर नहीं मी। उसका मन्तर मा मे भर र उसे पर मगर बाबू मिम गरम'बह उमरे साप मोटर में मैर करने बाएगी। वह इस गरीब मखर को क्यों समातेपी? उसमन्दुका एक विचित्र चित्र बना दिया जिसके पानावे पर सिरोही सिपके पीस ऐप। 1 ममेरा हो गया था। पासमान साफ पा इसलिए पूप परी कम हाकर पमहीपी। प्रनामिका ने साना तैयार रतिया पा।बह पाना परोस पर नाई। पमाम मे पहसा कार मिया मिसीहियों पर पिसीके माने मी माट मिमी। प्रनामिका मे देवा दयास बाप। स्पाम पीरे-धीरे सर पड़ा । उसरी टूटी हुई पप्पस पार मसा कामा पोट पोर मनी पैट गो मुटन के मरतीक तनिक पर भी मई पी पह पनु माम भी करने पहीली पीमिया पति तारपति हो सकता है। पास नाम को मुनते ही मनाम पबरा गया। फिर भी उसने उम पपराहट पो महरी पारमीयता में परिवर्तित करत हरा पास का सम्मानित गले में स्थापन पिया। दयास उमडे मनामागको समनाएमा पापा पुप पत्तियों को पानी पौर प्रपन परिवार नामों की बलि देन में ही पानंद पाता। मनामिराको यातपोबात एस्प भरी ममी। यह गिामा भरी ०५ पुष्टि में क्यास की मार देखने मगी। ममाम का और हाप का हाल में भया । ससका न बम-सा गया। 'तुम पौमे पड़ गए ? यो पनाम बा ! कराचित तुम इस अपमान का सहमहीं सकोगे ! तुम्हारा पहम् पौनता भी समसामकिन मै एक सूपसोर है। वपा पार प्रेम से साइयाहीन पौर कठोर । चतुर मी साकेत को पहचानने पामा। ऐये मक्ति को कोई राम ममिनम हा ध्पकर मे पाए वो उसे क्विना बहोमा । कितना गुस्सा पाएमा। पनाम के मन में पीडामों के बादल पा गए।र सम सनपा कि बारम फटकर बरस पड़ेगा पौर उसके अन्तराम को पीडापों सपा भर रेया। उसने परराइट से मनामिका की मोर देता। मनामिका पूर्वपद मिसंप-सी तडीपी।रयाम की पांचों में जाता थी। फिर भी मनाम प्रस्फुट स्वर में बनाने की कोषिष की 'याम बापू, माप पोड़ी देर त हिए, मे पानाबा सेता है। 'तुम्हे मुबमपतीहै? मप भर के लिए पहरी निस्तम्पता था गई। 'मुझे विस्वास नहीं होता कि तु मूब मपठी है. या तुम भूब के पस्तित को स्वीकार करने हो । तुम्हारे लिए सेक्स देवता है। प्रेरणा है। जीवन है। मेफिन तुम उसका नाके माध्यम या उसके माम से प्रारम्प मेना चाहते हो। प्रसामिकाबीच में पपरोप रत्पन्न करना चाहा। पयाम मे पसे रोफरिपा। तुम चुप रहो मनो, मह भोजन के समय गरा भी प्रतिकूल परिस्थिति नही पाहता । मसौम पाति पावा मेकिन इससे पूछो किचिनो पर में रोटीनही मार परेशानिया है रोटी से बाते है। यह कमार पर है मेकिन इसमें एसानियत नहीं। यह मुझे पौर तुम पोसा - 'दयामबाबू देकर रपये मनपा में प्रपन मापको इन्सान नहीं मानता में सूरमार हूँ पर यह इन्सानियत के पुतमे इन्सानियत को दूध पनपाते है ? पायद मै पैतान भी इससे पाई। 1 प्रनाम बीस पड़ा। 'चीयते गर्यो हो ? प्रनो यह मुझसे रपया मावहिन की मूब के माम पर से गया और मरीद माया मपनी प्रमिका के लिए पड़ी। मनामिका स्वम्प-सी रह गई। 'तुमने मुझे दिवस किया तुमने प्रनाम के बहिनों की दुहाई दी। पता नहीं मेरे पैसा परपर दिस इम्सा तुम्हाराहमा क्यों मान बैठा। प्रनो, तुम सब योमती हो बात स्पष्ट करती हो इसलिए मुझे तुम अपने प्रग से डिमा सकती हो । मकिन इस चित्रकार ने मुझे पोसा देकर सूट लिया। 'मैंने पापको मूटा नही हेरनोट मिलकर सपा लिया है। पनाम ने कोपवे स्वर में कहा। 'तुम्हरा नोट का परि रपया भी कोई महीं देगा। तुम्हारे पास मी स्या? तुम साकार हो मुझे पार मौर। 'रेखिए क्याम माबू पापको सम्पदा बाहर नहीं होना चाहिए, म पापरी पाई-पारेपा । पाप दो बार रिन मोर पेय रमिए । दयास मे परस्पर चापौर फिर कहा 'स्त्री पोर पोरन की रीप्ति में पाप होने मासे पादमी फिर नहीं संमसते । तुम्हें परमी बगह उस प्रप्यापिका की चिंता है। फिर भमा तुम मराई या कुकर मोमे? तुम्हें मुशाहिए, उमको रागी करने के लिए तुम अपना पून भी गिरवी रम मस्ते हो।दि! पनाम को पुम्मा मा पया 'प्यासाडू मीमा मे बाहर मनाइए, मेन पहरिया में कम ही पापरे सय पुषगा। तब तो मुझेगही प्रसम्ममा होगी। पिन एर बानरम बरीमा मी मानो मेरे मुमति माग की कोई भी पतुर पाम् पौर पिमित पुगठी तुमसे प्यार मही कर सकती एक नपाको पान-गरमपना पति कीन बनाएमी 'यहा कमा पार कमाकारों पर मिटने वाले हाय नहीं है। प्रनाम को बहुत गुस्सा पाया । उसने बाहा किपर बसानी से प्रयास का सिर फोड़ दे। इस विचार से महकाप मी उठा । उसने गाटे गए कार 'पा प्राप यहा मव पाइएना, में पपने माप प्रापका रपया पहुंचाएंगा। रमात मे पृमकरमा 'मे पास। मे प्रपना रुपया पसूम करना भी मानवा। बयाम घमा नया । पनाम जान को पामी को फेंकते हुए पापनो की तणपिलाया 'पमा मोष कमीना बपतमीरमाने को पार बना गया। पनामिका उसे चित्रमिजित-सी रेवतीपी। 'यह मादमी नही पैतान है। इसकी सारी तव को गुराकर मुटा देनी चाहिए। फिर पिस्माया। पनामिका ने कोई उत्तर नहीं दिया। यह पिमरे हुए साने को एकभित करने मयी महासनी मौत मौरतुनी मी से बह पब रोपने को प्रातुर है। पर पनाम बहुत देर तक बाता या प्रौर अनामिका में कोई मोत्साहन महीं दिया तब मनाम उसपर भस्मा पहा 'म बातवी मों मही पा तुम मुगीहो? भूमे बनने में ही मामलामा । पोरी तूम की पब सूतियों में गोमामी। साफ क्यों नहीं कहीं? रसम पपना सिरप मिया। प्रनामिका ने पानी हाम म मेकर पा इवनी और यही सोष रही पोकि पापने मिम्मा मापन क्यों किया? या प्रापरुष पोरगहाना नहीं बना समतोमा पाप मुझे सन्नी बात नहींगराने पे?"

'मोमोई बहाना नहीं बनाया मने को कहा सपकहा मेरे पर पर अभी एक पैसा भी नहीं है। यहां पिटी भी प्राईपो। फिर मापने अपने परिवार के प्रति यह अम्पाय क्यों किया? 'तम नहीं पामती कि प्यार में प्रावमी को क्या-नमा काना पापाई? पहा प्यार की होड़ ममती है। इस होर में मुझे भी दाम पर तयाना होता है। तुम्हें कैसे पता मगे कि प्यार में प्रावमी कितना मापार मौर विवध होता है। मै एगुको प्यार करता हूँ उस पार्टी में मैपयन देकर उसका पौरमपना अपमान से करवा सच्चापा।माहिर म अपने पापको उसका निकटतम मित्र मानता है। पित्रकार ई! तुम नहीं जानती कि पह सब क्यों होता है। बह उत्तेजित हो गपा था। उसकी पो नम हो गई थी। पनामिका नेगे माह मेकर कहा 'में कमपिनी मो को भूपा पौर नंमा नही पेस सस्वी पाहे मुझे मागीवन पारी एना पो। चाहे मुम जीवन भर प्यार की प्यास मे पापमा परे। १२ पाड़ी ही देर में प्रनाम सरत में प्रपिकल पोर पंभीर हो गया। उसे पुष सोपमा पोरम मोपना रोमों परबसे मगे । उसको दयास के मोर पाने वार मन ही मन एक मुटन और पपमान महमूम हो रहापा। धीरे-धीरे उसे सपा दिउमरे सिर में दर हो रहा है। यह पलंग पर मेट पमा पर पपिक देर हामाही सो सका। दयान मे उमे ममता कहा इम रात में उसपर गहरा पसर पिया पौरबह पिपमित-मा असर यमरकर बटे मेवाहा। प्रनामिकामी गईपी। उस एपात में बह गिगी की राह पनियों 1 ममम सगरमा

हो गया। दो मुखी पोरईसकेए पुगर ऐ थे। उस सम पर के लिए
पम्पना की किरही तपासाममा हा न्यू मुस्कान्मुस्का
कर उससे बातें कर दी है।
'पर मनचापकान पाकरेसा। क्याप्त सब उसके
पन्तस् में पूषा के सागर कोषमए थे। प्रनाम उसको किषित भी
परवाह नहीं करता। यह मामास है। गुरमे साप से पाहसी
है। फोहरपते पाहता। लेकिन यह पार लिपाई
स्या नहीं ? उसने पपने कपड़ों की पोरवा सेवाबाने का विचारकर
रसने पर बसे । मासीमीर से बाहर बम पड़ा। बाड़ी की
बाई मोर एक पाटी बन्द ममी पाठी पी। उस बन पत्तीरेसिपरपरा
एक कामे सुबह से हस-ईसारमा पर ही पी। हमामा मका प्टि
को प्रप्रिय लगने वाला पा। उसके पानी कीशीमा पमरी हुई थी। उसी
एक मोटी मोती पार कुर्ता पहन रखा था। उसके बाम 'पराने भार भने
२ से इमियों होते है।
परवा पर से ही पनाम की दृष्टि पड़ी से ही हसनिक मसर
में मोमी 'यो कप, भार संभाला तुम मुझे मम पाप में मिमना
उसी पना जहाहम कम मिले थे। फिर उसने मार-मा सिकोमाारसकी
परपरस्त में एक दसवा भी।
मनाम में प्रामे पहुए घोषा पाकरठी हे अपनी ममा से। यह
वेशीकरवबहाने मया।
कोरिया मे महारीमा । एपटपाच पोर पर बापा।
पहा सामोसम योषा दिमाम बाडू इस मेहको सभी के सामने
बाप । पर्यो नही यह परमार से रपये मेकर दमाम को पाए।
रिपार मेहे सालमा पार पाडू से भी परिवार की एक

पावस्यकता बताएगा। यह ऐसा सोचकर तनिक पिता मे मुक्त हुमा। रिक्या प्राता हुमा रिहाई पड़ा। उसने अपनी साली को ममामा । रिसमा सय दिया पार उसमें बैठ गया। पर यामपर बापू के घर पर पहुंपा तब मौकर मे उसे बताया कि कार में है। पाप नहीं पर चमे पाएं। या उसी समय रफ्तर पहुंचा। मगर बापू किमी पाम में पस्त पे पत उसे पोड़ी देर प्रतीसा-गृह में प्रतीक्षा करनी पड़ी । मह महा मैठा हुमा प्रमानमामी सम्दावमी पूरमे नगा ताकि मेबर बाबू समे टास नहीं सकें। पाखिर यह समय पा पपा विसकी मनाम को प्रतीक्षा पी। हमेवर बापू की सामने बानी पुर्मी पर बैठ गया । मबर बाबू उसे प्रान भरी प्टि से रेसते हे । गका यह मौन पनाम को पिरमही ममा। 'बात यह है । यह महता-कहना चुप हो पया। 'हा-हो, कहिए, पराइए महीं। पनाम में मया। उसके साम पाहने पर भी मंचर पाडू रसके मन की पबराहट को भाप गए । तब उसका चेहरा पीना-पीता-मा समापौर सौ मागी में परिपरवा पा गई, 'बात यह है कि मेरे घर म पप पाया है मेरी माहिती पादी होने पानी है, मुझे एक हजार पर्यों की 'माप पबराते क्यों है ? इसमें घबराने की बात ही क्या है पापही बहिन मी शादी हो रही है पाप निर्मी होर स्पितिबामाइए, पबराइए नहीं। मंबर गासर में गएप्पन या और वे म तपाहेप मे पनाम एर पनुभवहीन युवक हो। 'पारावा पहाई पर मे चिट्ठी पाई है। सरोग का विवाह है। पांच मोरपे पाप मुझे गरमी के हिसार में मप्रिम दे रहे है पौरपोच मापार ८१

?
देवीथिए।
'मैं पापको पांच सौ इसके अतिरिक्त मी एंगा।
'मैं पापका मतलब नहीं समझा।
'मेरे पास प्रमी वयात बापू पाए पे। मापके हर मोट मेकर का रहे
कम परासत में दावा स्मा।
पनाम का चेहरा सफेर हो गया। उसकी बानी परहोगई। उसका
रक्तभम गया।
मापसे सन्त नारा है। ऐसे प्रेम में सियाम हानि के पार बनी
नहीं मिलेगा। पर मासे रोटी रोटी विस्माते र पौर प्राप यहाँ दोहफे
में समा जाते रहें ऐसी भूठी साम से मया साम
प्रनाम अपराधी की मांति सिर मुकाकर पेठापा।
'मने बयान को पांच सौ सये रे पिए है, पाप इस रसौर पर रस्तखत
करवीमिए । मंबर बाबू मे एक रसीद मिहानी और पनाम ने बिना ये
ही उसपर हस्ताक्षर कर दिए।
'मे पाया। मनाम ने उसे हुए कहा।
'पयों नाव नहीं पिएं।
'नहीं।
'हो सुनिए, पान तुबन महन में पाएमी भाप र प्राइएमा।
'हो हो । कर प्रणाम यहाँ से पत पड़ा।
यहाँ मे सौपा बह गाग के एक मुष के नीचे बैठ मया । पाम तक ठा
हा । युमपम प्रारम्पषित!
माम के समय यह पपने पापको मुनाने के लिए नीरोग प्रा मया बहो
साहिस्पिा कमाकार पार पत्रकार एकत्रित होते है।
सरोखठे ही प्रामुखोप योना 'पार! तुम यो कमाने हो दोस्तों
की विस्मी उड़ाने में तुझे क्या मगा मिलता है?

उसने कोई चत्तर नहीं दिया। यह गुपचाप बैठ गया।
मवरम जो प्रयोगवादी कपिपा गंभीर हार कहने लगा 'यह एमकी
इमेघा की पावरही है। बिन मित्रों का साप करेगा उन्हींको यह अपने
चिोपकार्टूनों का विपर बनाएमा उनी महानवाों को स्वीकार नहीं
परेगा बल्कि उनके मत्पको शितपरके पेग परेगा । ऐमी भी पया
कना है?
पपिमित्र सिपरेट का रस सींचकर बोना भगिन यह तैमूरमंग
हथियार व पामोषों को हमने भूब पटा रहा है।
नबरंम हंधकर बोता 'पूराबादी मनोवृत्ति को समझता है। जिससे
अपनी प्रसंसा करवानी होती है उसको यह पहलेम ही तारीफ करने ममना
है। उसका चित्र बह प्रपनी विषिषममा में नहीं बनाता।
'परा म्यापारी कलाकार है।
पनाम मे पब मौनतोड़ा म पब मी पापकीबात नही समझा । पान
भाप मिस बात पर बाम की लास निकास पहे'
"सीलिए, भापको पैसे कुछ पता नहीं। बमचिमिा पमिनेना
पो मोति गिमित्र योमा 'तुम फिम्म में पाम कर मो।
'पता हो भीमे भाईमकीपायुगी है म पारफम एफ उपम्पाम
मिगही है। पाप उमी उपन्याम के मंगोपन में पम्न है। नबाम गर्दम
हिमाकर बोना यह मेर पर पंनियां भी गवा हा पा। मी 'धोसा'
माहर में प्रदेश पिया। गू के प्रमविधीम मायर । गराबी । मुहम्।
तुपी हममे नाठा मोहने पानी र म संगा माविद पमन नही।
जामते हा बहरा पिमपी रा पममी मा म मरतानाबहरो
हसरीमो माननेपामा हो ।
सप गिममिना करदम पर।
पनाम मो मुम्गा पा गया। यह पानीमागी पर पड़ा हुमा ।
EU

'तुम साहित्यकार नहीं पमी हो तुम्हारे बीचमा भी मुनाह है। अपने पापा पमान रवाना। पह उठणामा। साप पर विचारों में सोया हुमा बह पसा मा हावा । समीप में कौन पाहापौर कोनमापा है, इसका उसे पता ही नहीं था। पास्मात् मिसीने उसकी पीधे मे यहि पड़ी। उसने सकर बा- मनोगमा) एक सेठ का बेटा जिसकी भी कई कहानियां पनाम के पहमेपाहम संघोभित कीपी किन्तु पाराम पामती पहामिपा तितमिया करणारे। 'मुझे छोड़ री में एकात पाहता हूं। पयों? तुम नही पानते कि पान का दिन मेरे लिए विना भयानक है। तूफान पर प्रफान पाऐ है। परेशानी पर परेपानीमा ही है। मेरा मन मेरे समीपरिपितों को सेकर मोम से भर गया है। मै वाहवाह कियही से दूर यावर मितिर पार मामा बन्चन की इस कविता- इस पार मिमे तुम हो ममुहैग्ध पार म पाने क्या होगा? के विपरीत पब में मोरवा ई-मम ममता है-महोदताएं पौर अपमान के अतिरिक्त दुध मी महा। मापौर प्रिय सब बकवास । सब भूठ। मनोग उहडी पोर पोरे-गोरे मुमतामा अपनी मांगों को उठाकर बोमा 'मैं तुम्हें ऐसी ही जमामे बसताई बहाँ मापन बी की कविता साकारगर पाएगी। मेरेग्राममायो। उसने पमों पर गेरकर हा किम तुम गामोमे कहा। उमने बिमस सपहा 'मेरो एक प्रेमिका है उसके पास तुम्हें मे ९४ पासवाई। तुम्हारी प्रमिका? 'बह एक मुन्दर और स्वस्थ युबती है। तुम उससे मिमकर बरे प्रसम्म होमोगे । मह बड़ो थिमिता और समसार है लेकिन है एक बेश्या । यदि यहाँ बह तुम्हें पम्प पति म प्रेम करती हुई मिल पाए तो गुरा म माममा। उनो प्यार का भापार हरय नहीं पैमा है। भावना नहीं व्यापार है। फिर मी पापाने मापको मेरी प्रेमिका समझती है। बोपा बनोगे? पनाम पर गंभीरता मे मनावरे हरे का निरीक्षण करता रहा। ममात्र एक पुस्त मैनिक की मांति मदन पीनों को वानकर सहा हा गया। इस बीच पारमी पाए और पुरर मए । 'कही तुम्हारा इन्तगरतो महीं रही है? परपर रही है पर पार में यहाँ नही गाउमा। पाम में तुम्हारे माप ही पनगा। उसने उदासीनता से कहा। 'मेरोनों एक बार पोप्त के घर में घुसे । पूरा पपेट सानी ने मे गा पा । मनार मे उसका मन मेकर उसका स्वागत किया पार फिर कमर मनोकण प्रभु के चित्र मेपमा याचना की। प्रनाम परनी सारीको मुसी के मापे मिसकाकर बैठ मया। मनार म पोनी को नगर परिषदेते हुए कहा 'ये प्रसिस पित्रकार हा पिण बनाने हा यह तुममे यानि मेरी मायनी (प्रमि)में मिमने पाए हैं। पौर पने तुपारे पारे में सब कुन बमम्मा दिया है। मोती ने एक पयरत मरी दृषि मनाम पर करी। इसके बार मनोन सानी गे हमी- मारता गा। मनाम मासमझ बनेको तए उनकी बातों को मुमताहार पर मनोर मोनीको मेकर मीटर कमरे में बसा मया। पनाम को गोगा की बात मुईसी म पापी । उमका मित्रों सामोरोमा ही मास मा दिउममें पुरुष नहीं है। परों नहीं यह पानी ८१

पसा कर मे । इस प्रेमिका के प्रेम का मापारपप नहीं पैसामा
मही व्यापार है। तब ?
मभोग पीन मुनमुनाहाहा पापह प्रा यया पा।
भनाम के मस पर पसीना देवकर बोला 'तुम पानी-पानी क्यों है
हो?
नहीं हो।
'धुपा हो।
'बात पाकिमे ।
और मनोव ने तुरत नसे पैसाखीपकमाई पर उसकी एक भीम
कर उसे भीताकमरे में दिया।
उस पातीपान कमरे में कामोत्तेजक चित्र स्पेहए थे। पनाम ।
पोनर बना के उन पिलों पर एक एप्टिगती।
'माइए।
बह रमके समीप सनीमे सिर को तए पन मीची पर बैठन
मनोगौष में पपरोष उत्पन्न किया। उसने हित करके।
को मुमाया पौर कामों ही कानों में पर कहा । योनी रमी समर में
कहर मुस्करा मरो।
मोनी में पनामों को पपने हार में में मिपा पोमी 'मा
टॉपसापा
पद परम मे ही ऐमी।।
पिपियो बम पर!
पनाम मे पहा !

विपिया बम्ब हो गई।
पाच ही मिनट के बार प्रनाम पिता प्रा कमर के बाहर निकला।
यह पीडित मनुष्य की तरह पा पर इसकेनों में एक यस्य सातिनिरास
रही थी।
सोनी मे उसका गोर मेहाय पहा लिया।
'पाप सेमरे हे वापया हमा' क्या मयो के वाम-बन्ने नहीं होत
पाप लनी हीनता का अनुभव न। भाप गहन प्रमो पति बन सकते
7
1
पनाम में मोनी का हाप प्यार में पाकर पहा प्रमी मुझे गान
पा सामेरा मेग रिमाग टीमही है। मै जीवन में सफल हो पाउंपा ।
म पुर पप्पूर्णम्प मे पुग्प
पाप परेमार पनाम मनागमोहापा 'मैं एक पण के लिए
मी मी भूमाफि म मयत नही। मरी टोग सोनी के मुन्दर मुप के माग
मुझे भूमती -मी नगी पोर म 'भरपम' हो गया । मुझमगा नि म मेमार
पामबमे पभामा पोरगी प्राणी किन मौनी रूपमीम रमह मे मुझ
पा मिया । म मूग गया कि मै गया है? मुझे यह भी यार नहीं रहा कि
मेमरा।
यह पर्व की बात है। बाकी सबा को हमें परमपी
माह प्रापरली पाहिए।
बनना भाति में पमिमाप कोण्हण महींगरमला। म एम
मापाराती प्रापी । म पोरे मे छोटे पौरबो मेयर पादमी मामा
मम्माम करयाना पाहलाई। पारलाई रिमुभ ममी रेशम की
चिम गे पानी पि मे नही। रिणाम टांग पी बगह मे मुम
पापामानित हा पाला। म संग सासगिक परमान मुम क्यों
सम्मान मे पपिर पहा नामाना।

मनोर ने मनाम के दुधी भाों को स्नेह से मारते हुए कहा 'स टीम को मेकर समी तुम्हारा अपमान कर सकते है परन्तु नहीं। इसने पारयो प्रतिष्ठा पाई है यह तुम्हारेकारमा सुना है कि उसके कहानी मंग्रह के प्रकायन पर यहां की महिला मावि परिप एक समारोहकर ही पिसका सभापतित्व महाक कोई यो सेठ पमहीमाम मामपामा कर रहे है। तुही मेरी भावनामों को का करती है। मैं उसके उपम्पास पर दवनी मानतामा कि यह निश्रय ही एक भेष्ठ गाति होगी। 'तुम से विवाह क्यों नहीं कर मेवे? मै रमे कहना चाहवाई पर मेरी हिम्मत ही नहीं पाती। संभावित उत्तर को कर मेरे मन मे मम-सा नमा पवा है। तुम पोम पाना चाहिए। मा एक महत्वाकासिपी मुबती।बह समाज मैं अपनी बात प्रतिष्ठा चाहती है। जप्त एक भावना में ही तुम दोनों में समानता है। मेरी भी ऐसी ही इदा है मनौर भै हानाहापौर मोकप्रिय पित कार बनना चाहता। जिससे मोम मेरी टाप को मूमकर मेरीतियों पर केन्द्रौमूत हो जाएं। पौरनुस्सम रिमाहीमा प्रकट करे। 'एसा संभव है। पर्योकि तुम एक प्रतिमा सम्पन्न विषारो। रात का महरा पौषस समतापा। सस्ते हुए मनोज ने कहा पर पाएर पाराम करो। अपने मन को हीनता को पगियों में मत बरसने दो।बहुत-से म्पमित भपापहरे होते है। तुम्हारी सह पीणि विविध पर जीवन को पीपायको बनाते है पर सोमोमोतो तुम गहत परहो। हा उसने मुझे सबमुष नपा पानोर दिया है। मै उसका हरम मे पामारी।

१३
तीन दिन पीत गए । प्रनाम गत के मम्नाटेर संगीत को बड़ी पैनी
मे मुन पहा पा।बह दो दिन मे निरापराव मस्तिकात प्रामी गौतए
पीरनपी मापरता पार पर्पता पर विसाप पर हा पारबह पनामिका
पोपहता रहा जीवन पूषा है। इन्दु उसमें मिमने नहीं पासमती तब उसके
पपने प्राम तुम पर्य पार सम्मान तुम्मो विपनामार तुष्य है।
पर यह किमीको नहीं मानेगा इस सम्मानको इम मर्ममको।
यह मारी गली विचित्र है दुनिबार है।
प्रेम परतीपकरती है और उन दोनों का सामगम्य मेर
को एपनी पनी है।
पनाम को एक पत्र मिला पा।दमे काय-म्यस्तता के पारण न
पाने की क्षमा मांगी पीथमासार उमन पनामरी एक दाना मी
दी पी 'बह प्रेम महत्वहीन है या प्रयसि के सम्मान को पटाये। तुम्हारे
पर बाम पर मेरे पौर मेरे वाहफे के बारे में मुनगे तब ये क्या बिगारम?
रेपोग किवह परती न मासा पप-पिमय कर रही है। पौर
तुम मी गे मनुष्य हो । मानवीय और प्रारमीम नाते-रितो को भूमकर
तुम एक मसीपीछे पागल हो रहे हो । प्रेम का ऐमामहमारे परिपारी
में पोमनीम नहीं होता। म नुममे प्रार्थना करता हूँ कि तुम मुम ममम्न
पराप्रपाम परोपे।
बह उमे ममभन का प्रयाग पगा इस विचार मरमर हसाया
पान रिया । रमे यह उम्मीर नही पी किन्द उम एम वरएका सरेश
देनीस म मिमसरग पर हाराही उमरे गहरे ममम परोप
लग्नाप्रमागोमी।
पनाम गमा नही होन देगा।
दर

राव के मते विमिर के साथ पहपके पास जाएगा। ससे सारी
स्पिति के बारे में कहेगा । उसे समएमा भाग के युग में एक प्रेमी फिस
प्रकार ऐसे कार्यों मेष समता है? पाबमारे सम्बन्धों के प्रतीकों के
रूप म ये तोहफे, भेटं मोर पार्टियां बन गई है।
एकतारा टूटकर पिरा।
प्रनाम पोसया कि उसकी सबसे प्यारी भावना पर पापात होममा
है। उसका मुब पीना गममीन मोर उदास हो गया। उसे रह-रहकरण्यास
पर ई पार गुस्सा माता पा। उस कम्मत में इस बात का प्रचार प्रसार
करके क्या पाया? पुष्ट है म कष्ट देने में ही उसको प्रानन्दमाताहै।
इस तरह येचनी पौर मासकामों में राव म्पत्तीत होने मनी। उसने
मास पाहा पर रस रात रसे एक पल के लिए मीर नही पाई रह-रहकर
उसे पास मावा पाकिपा मुके बिना सुन से नही प सकता।
।
१४
सिटिजक कामे नाम पर मोहनूर हीरे के सदृश सूरन म्पी बिपी
बाप्त हुई।
पनाम तुरस्त रमिक कार्यवाही से निवृत्त होकर इन्यु के परकी पोर
पसा । इतने सबेरे-सबेरे प्रनाम को मार पन्दुको पिस्मप हमा । मह उमे
बाप का एक प्पाता देती हुई बोनी तुम्हारी मालों से सपा है कि तुम
रात मर स्रोए मही।
'तुम्हारा मनुमाम ठोकरे।
फिर तुम्काफी पीनी चाहिए।
'नहीं पुम काफी की रस्रव नहीं है। मै बिताम ठीक है। गत
मुम एकपात के बारे म तुमसे पूरमा है।
'कहो।
१

'तुम्हें मुझे ऐसा पत्र नहीं सिखना चाहिए। यह पत्र मेरे हृश्य में कई प्रश्न एक साप उग सकता है। मुझ पीरित कर सकता है मुझे प्पिनु बना सकता है मेरे.माव-यगत में तूफान उठा सकता है। हमु मे यंत्रवत् अपनी दृष्टि माई तुम पायेग मैं मापर कुछ नही कहना चाहिए । हमारे माव-मोक मे भी विप एक मोफ है यह हमारा कम्प-मोक। हम मानवीम मापनार्मों और सड्युर्यों के पुतले बने रहते है परि हम सब तमको पहार में मही पाएंगे तब हमारा हर काप एक भोपाबन पाएगा। 'भरिन मैने अपने काम्प के पिस गुलमही यिा। उम ममय में उत्तमित वर्गों में मेरे चैमा पारमी प्रपना सर्वस्व लुटाकर मी प्रपनी चाहन पासी पो रमपी पमन्दकी पीर मार देगा। यह विमकुम स्वाभाविक है। "मपरवाने बोमहा उसमें ऐसी कोई बात नहीं भमराठी पी। तुममें एक प्रमी को या है। अब तुम्हें यह पता लगा कि भवरबाबू मुझ मेरी मनपसन्द का दोहा येना चाहते है तुमने यात मे पपनी मां-बहिन पी पुहाई देपरम्पये लिए। यह बिसगुन गमत राव है। ममममई पसन । पनाम हतप्रम-मा पोरसों को मुनता रहा। पद पपमी दिमाकर मामी 'मबराबू ने तुम्हारे ईनार याम बापू मे मा मुम दिए है । उहे मी तुम्हारा यह प्परहार बरा पमम्म नही । परिमेरी तमामवास पैदाम होता नोबेरमाम को कपमा भी नही ले । गोने मुझमे पहा पाम कर रहा पाकिमनाम पी मारी समानुपर गाती है। पनाम पर पान मूर्यो मरल है पौर पर rमिनामी मे मरसार हो रहा है। पर तुप्पी नामो हिनदी पा मरम मह मानी है? गोपा हम बात को मुनेपा पर मेरे गोम पग मोरया तुम्हारे पर बाम मुममाएनौकासन पोर विनाम 1 १

राव के मते तिमिर के साम बहन्द के पास भाएपा। उसे सारी
स्थिति के बारे में कहेगा । उसे धमाएगा, भाग के मुम में एक प्रेमी मिस
प्रकार ऐसे कार्यो मे बन सकता है? भागहमारे समापो प्रतीकों के
रूप म मे तोहफे में मोर पाटियो बन गई है।
एक तारा दूरकर गिरा।
पनाम को भगा कि उसकी सबसे पारी मापना पर पाबाट हा गया
है। उसका मुन पीमा पमपीन और उपास हो बमा । उसे रह रहकर माम
पर Wि और गुस्सा पावा पास कपात ने इस बात का प्रचार-प्रसार
करके गया पामा? दुष्टम कष्ट देने में ही उसको पानम माता।
इस वपनी पार पामों में रात म्पतीत ने मपी। उसम
साम पाहा पर उस रात उसे एक पम मिए मीप नहीं पाई। प-पकर
उसे म्माम पावा पाकिबहनुके बिना मुस से नही प सका।
१४
सिपियरेकाले भान पर काहनूर हीर के सदय सूरज स्पी मिमी
दीप्त।
मनाम पुरस्त दैनिक कामबाही मे निवृत्त हार के परकी पोर
पमा । तने मोरे-सबेरे प्रनाम को देखकर तुमो विस्मय हुमा । वह उसे
पाप का एक प्पामा रतीबोमी 'तुम्हारी प्राों से ममता कितुम
रात भरमोए नहीं।
'तुम्हारा मनुमान टीक।
पर तुम काय पीनी चाहिए।
'नही मुभ काफी की बहरलमही है। मे गिनतम कहूँ। वन
मुझे एर गात बारे में तुममे पूरना है।
१.

तुम्हें मुझे ऐसा परमही मिलना चाहिए। यह पत्र मरे हव में प्रश्न एक साप उठा सकता है । मुझे पीड़ित कर सकता है मुझे ईपिना सकता है मेरे पाप-वगत में तुमन नठा सकता है। इन्दु मै यत्रगत् मपनी दृष्टि पुमाई 'तुम्हें पाबे में पापर कुछ मही कहना चाहिए। हमारे भाव-मोक में भी विमेप एकनाक है बहमारा मनम्प-मोक। हम मानवीय भाषमामों और समुपों क पुतम बन रहने है परिहम स्पर्य रनको प्रहार में नहीं जाएंगे तब इमारा हर कार्य एक पोशाबा पाएगा। सकिन मैंने अपने काम के पिम्प गुमनहीं पिया। उस समय के रत्तरित सनों में मेरे जैसा प्रारमी प्रपना सर्वस मुटाकर भी अपना पाहने मामीमो रसको पमन की पीर सारमा । यह बिनाम स्वामाणिक है। भयर बार ने दोपहा उसमें ऐसी कोई बात नही मनाती पी। तुममें एक प्रेमी की ईर्ष्या है। पर तुम यह पता नया जिभेवर बापू मुझ मरी मनपसन्द का तोहफा देना चाहते है तुमने बयान मे अपनी मां-बाहिन की दुहाई रपये मिए । मह मिनाम गमठ बात है। मझे कई पम्प मही। पनाम हवप्रम-मा इदु पोर गों को मुमता एा। यह अपनी पिपुमाकर मोमी 'भेवर बापू ने गुहार हानार स्पास गार मे मेपर मम रेरिग है । गएँ भी तुम्हारा यह भबहार परा पमन्द मही । परि मेरी इयतका सवाम पंगम होता तोरेपाम को एपमा भी नहीले। उम्हनि मुभममा प्यास मह हा पारिपनाम को मारी रमाई के पर गाती है। पनाम के परवाने भूगों मरणोपोर पा पर मियानी मे बरा हो रा है। पर तुम्ही पतापो दिम मारी पर मर मे मा माती है' गराईम बात रो मुनेगा वह मेरे बारे में परा मागा ? तुम्हारे पर माम मुझ मातीकाममा पोर पिताम - ।

। कपतिरिक्त फुप समगे ही नहीं। 'तुम्हारा ऐसा सोचना सर्वपा निरापार है। 'मैं ऐसा कहां सोपती है। ऐसा तो पूसरे सोचते है और में मुमती है। प्रनाम ! उसने एक मिपमकर पसे पीरे-धीरे कहा 'मैंने तुमारे पर सौ रपये मेज दिए है। भविष्य में तुम पाले उनका म्यान रसोये । इन्दु ऐसी माफी मही है जिसके पीघे तुम अपना सर्वस विसर्जन करो। पनाम को यह बात दूटते सम्बयों की पुराणात नमी। 'इम मुझे समझने की कोशिश करो। 'में इसकी प्रारम्पमता मही खममनो। म तुर्म एक पन्धे पापमी पार घट कलाकार के रूप में देखना चाहती हूं। इन्दुमपानर में बात के सिमसिमे को समाप्त कर दिया। प्रनाम रटने मगा। इसमे तुरस्त उसमे कहा 'तुम्हें मेरी बातोकोतम भने का प्रयास करना पाहिए । इन बातों में हमारे सम्बों में अन्तर नहीं पाएमा पीर मुनी परसों मेरा स्वामत होने वाला है । तुम्हें यहां पर पाना है। पर प्रनाम यहाँ से पता तब उसका मन मुन्न हो पया पा। उस मन मैं भमिधित म्पपा छा गईयो उसको उग्मावित-सा पर ममी । महम्पर्ष हो पर-उपर की गमिों में चूमता हा। उसके सारे वस्त्र मीपर मीने हो गए। पमने में उसे तम्सीफ होती थी।मति पार ये पानम्ब-सापा रहा पा कमी-कमी रसे भयंकर पुस्सा मी पाता पाकिरह। पोनिना है इस मंसार में इस संसार में रस मे प्रेम मम मनुष्य को पीने का हक महीं। पापंप मापार मेकिन यह कमाकार का कौन सम्मान करता है? यही मामार को एक मूर्य पार पार पक्ति सममने है जो पाने मात्पपूर्ण पीपन फोकप्तापी सापना में शराब पिया परता। बहसी प्रकार मोठा-विचारता पनोर पर पहुंच गया। मनोर २२

सासापटी मबर' पाहापा। उसकी मैमाचीकी मद मुन
करमा बिना देसे ही बोता 'पापो प्रनाम प्राय येषा से प्रा मए
पनाम मे कोई उत्तर नहीं दिया। वह गम्भीर मुद्रा में 42 गया।
उसका मुह उपरा हुमा वा तपा उसकी मांगों में पपा की चिनगारियो
स्पष्टतपा सपित हो पीपी।
बात क्या है? उसमे पुस्मक बन्द करके कहा।
'इन प्रौरतों के बारे में तुम्हारा या म्यान है ?
प्रम्म ऐमा पालिममोर मारपान हो पया। यह पनाम के पहरे पर
प्रानी दृषि पारपरमोता 'यह मावेही तुमने 'एम काप्रयोग कर लिया।
"मोर पारमी परिगरा मोर गरीष हो' उमगरापरिपार होतो
उस पा करमा पाहिए? बह रतेरित होकर बोला।
“एरम मारहापोरन मा पिस्फोट । पुष, म पग पभी मम्मी
केमा में है। इस बार में पड़ना नहीं चाहता।
'तुम पेमे पास होम दूसरों के दर्द में तुम पों पहोम?
मनोरपी मुगागंभीर हो गई। उसकी वीरमदृष्टि मे प्रनाम की प्राति
परमार मौरपणामममममिपा।बह प्यार सौता 'पौरन सिर्फ
पौल। पहप्पार करती है ममापीठए बह पृणा करती है सिप्प
गतिमा की परामह स्नेहसी है यमोसमी तरा पोर उपेसा परती
तुमारी एपीएबह मेनसमोरह मगदूर पौराद की कमान
पीसह समापहने का तात्पर्य यही है कि पोरण सिर्फ पौरत है।
गमगीगोपी बन्द होने ही पनाम पूया 'पदुमीसह उता'
"पतुम्हे प्यार परती मेरा यह अनुमान गमत निम्ता पदक
मापारीपिपी पुरती है । उमरा माप जीवन में पेप्ट पर पामे पाई।
गोवाी पौरपुर है। यह सामग्री तहमानती पीमितुपमे मार
हान मे उमरीरमा शापितह-दोपर मादे मे पन्देपों में परमरनी

प्रतिरिक्त सममे ही नहीं। 'तुम्हारा ऐसा सोचना सषा निराधार है। 'मैं ऐसा कहा सोपी ऐसा तो इसो सौष मौर में सुनती है। प्रनाम ! उसने एक मिनमकर एप से पोर-पारमा 'मैंने तुम्हारे पर सौ रपये मेन दिए है। भविष्य में तुम पहले उनका प्याम रखोपे । एद ऐसी माको मही । पिसके पीछे तुम मपमा तल विसर्जन करो। भनाम को यह बात टूटते समालों की गुम्पात मी। 'इन्दु मुझे समझने की कोमित करो। 'मे इसकी प्रापश्यता नहीं समझती । म तुम्हें एपमन्ये भारमी मोर श्रेष्ठ कलाकार के रूप में देखना चाहती है। केस वापय में बात के सिलसिले को समाप्त कर दिया। पनाम उठने समा । इन्दु मे तुरन्त उससे पहा तुम्हे मेरी मावा मोसम भने का प्रयास करना चाहिए । इम पावों से हमारे समायों में पन्तरमही पाएना मार मुनो पासों मेरा सापत होने वाला है। तुम्हपर माना। पा ममाम वहा से मना कर उसका मन मुम हो मया बा । उसके मन में मपमिमिव म्पपामामो रसको सम्माश्वि-साकरले गयी।माम्प पर-उपर की गलियों में पूमता रहा । उसके सारे परम भीगकर मीन होपए । पसरे में उसे सामीफ होती थी। मेकिन भान उरो पानमसा पा हा पाामी-कमी ग्वे भकर पुस्सा भी माता पाकिया क्यों मिला समसार में इस संसार में बस से प्रेर मन मनुष्य को पाने का नहीं । पर पेठ साकार । मेकिन यहां कलाकारका कौन सम्मान करता है। यहाँ साकार को एक मर्म प्रौर कार मन्ति समभोई यो मपने महत्पपूर्व पीपनमोस्तादी साबना में सराव किया परता है। गहमी प्रकार सोपता पधारता मनोर पर पर मया । मनाय । १२ मारस का पटगि तपर' पापाबा। उसकी मातीकी पद-गर करपा बिना ही बोसा 'प्रामा मनाम पार येत मे पा गए? पनाम मे कोई उत्तर नहीं दिया। बह गम्भीर मुद्रा में 42 गया। उसका मुह उवराहपा पा सपा उमको प्रायों में प्पपा की चिनमारियो स्पष्नया तसित हो रही थी। 'बात क्या है? उसने पुस्तक बन्द करके कहा। 'इन पौरतों के बारे में तुम्हारा या स्याम है ? प्रश्न ऐसा पानिमनोग सारपान हो गया। यह प्रनाम के चेहरे पर पपनी एप्टिमारगरगोता 'यह पाते ही तुमने एटम का प्रयोग पर लिया। 'पौर प्रारमी परिमगड़ा पार गरीरहो'समगड़ा परिवार रातो उमे पारला पाहिए। बह रत्तेजित हारर गोमा। 'एटम के बार हाशायन का विस्फोट ! पुगर, म सग प्रमी मस्ती के मूड में हूँ।म पार में पड़ना नहीं चाहता। 'तुम पैसे बात हो म दूमरों के दल में तुम क्यों पड़ोगे? मनोजगी महामार हो गई। उसको वीरमरप्टि प्रनाम भी पाति के पसार पौरकामा को समम मिया ।वह प्यार मे गोमा 'पौरल मिर्प परित है। एप्पार करती है समापीतए यह पूषा परती है तिप्प क्षिना की तरह।यह स्नेह रेती पोशमी वह और उरेशा करती है तुम्हारीनुसीह पर मेनकाए मगर पार गरमी मम सीतरह सनराम्हने का तात्पर्य यही है रिपोरत सिर्फ पौरन है। उमस बोलीमार होते ही पत्राम मे पूपा की तरह उसा? 'मुर्गी पार करती है मेरा यह पनुमान ममत निरमा । वह एक मायामी पुरती । रमा मापसीवन में श्रेष्ठ पर पाने मात्र सीमापा पारपरयह पहपाधी वह पानती पीमितुसमे मार्ग राने मे उमगीरपनाए मंचापित हो-होकर पाये मे पम्दै पत्रों में पागमती है। समिए तुम्हें अपना मौव बनाया। लेकिन यह एक मेगड़े को अपना जीवन-धापी नहीं बना सकती। 'या तुमारे मन को मायाप्त रही है। यह तुमसे बातचीत नहीं करती इसमे तुम उसके बारे में ऐसी बात बाते हो। 'मैं बता नहीं है टीक कहता है। पानसमा बरबापू साथ माटर में पूमती है। उसका सम्मान होने पाता है, उसमें पोपा मारमा पाएमे । न मरेगा कि हए तुम हाप पकाकर अपने पास विनती। या नहीं? 'बह मुझे प्यार करती है। यह पाप रसने परमात्मविश्वास से कराय पसरप पर मुक्का-मा ममा। जैसे उसने अपने पापको पार रस्ती यह गिरावास रिनामा ही। १५ सौरपों की पहुंच की चिट्ठी प्राई पी। मा मे पति स्नेहपरिव सम्मों मे उसको मापीप मिती दी। उसकी चिट्ठी में उसकी प्राम्तरिक मामिकता फूट-फूट पा रहो मी। उसने मातृत्व की सोमव दिसाकर सिमा पा 'तुम्हारी पोटी बहिन कई रिमों से बिस्तर पर पड़ी हुई है। उमे रखम निमो. निया हापपाना। यह इतनी दुरंत पोरकुरुप होगई है बसी प्रेत पायाएं। परीर मूतकरमाटा हो गया। उसकी दीप्तिमपी पनि वन महों के रूप मेरा गई है। पनाम! तुम्हारेरा पये मिसने पर मै उम प्रामों काबनाने में ममर्ष हो माहूँ। तुम्हारे साये पार मुझे मपा तुिम्हारा हस्य पत्पन्न निर्मम पार पवित्र है। सब तुम्हारा मुम ममगात पिम पी पवित्रतम नामनाए मगर मेरे सम्मन्ब नाप उम। मुझे तुम इसमे पये हर माह मेसोतो मे में पर्याप्त मममार एक स्वाभिमानिनी का जीवनविता सनी पौर का हारा उत्पन्न मार्मिक मंत्रषामों से पप । 1 सांगी। 'एक बात मने प्रौर गुनी है। यह बात तुम्हें प्रिय मप सकती है पर यह बार में पपिष्यातनामय ममेमी। मित्र का नाम नही पताऊमी मेफिन बह कभी झूठ नहीं बोमवा। उसने सिवा है कि तुमने एक मास्टरमी को पपनी जीपन-सापी के रूप में चुना है।पदाचित तुम्ह इन मास्टरमियो के पोरन परिषमा मान नहीं है । य परिषको प्रष्ट मौर स्वभाग की उन्न पम होती हा पभिनय म कुराम भार प्रकृति कीर होती है। यदि ऐमा न होता तो वह तुम्हारी कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा पामोद प्रमार में तपा मेर-सपाटे में पर्व नहीं परमाती। मरमे कठोर स्वामार मामी पौर निवी मोहमी क्योंकि या तुम्हारे पर की प्यासे परिचित हाकर मी तुम्हें प्रपन अशुभ प्रति उत्तरदायी माने को मही पाती। ऐमी युपती को तुम गृह मामी बनाकर मुख से नहीं एसकोगे। बहू एक मप्रात कम की हानी पाहिए। उसके मुरा पर मरिमामय मुहमारता मोर उममता होनी पाहिए वादि भूरा पीर प्याम में भी उसके होटों पर जीवन मरी गामा मस्पान मापती रहे। मां का यह पत्र उमे उत्तमित करने के लिए पर्याप्त पान्दुबार में मां के योगिधार पे दे गए निम्म पार पोपी प्रतिक माता । उम्दा मप्रात पौरप- -माम-मपुर समावमासी है। उमन साये मुझे बिना ही मेरी मो मो रपये भेरे। यह उमपी भण्णामा प्रमाप है। फिर नमके मस्तिष्क के मप पर एक भासी रितु उदाम पाालिगाड़ी हा गई। रिसरापारादापरमारम पितहा गया पायाक पामामित-ममग्निी-मी उगा सम्मुग सही होरर कह रही पोनि माग उसके सम्मपों पर बम एक सिम रिचार पर निबह पनाम पी कमाई पर ऐगपरही है। पनाम प्रपना मा पोरानाका मृगा मारता है मार पन्दुमिए गुग प्रमापन पति करता है। यह निग्नर

विपिन समाए को प्रपने प्रापको पीड़ित पोर समित कर पापा।
बारबर गए।
पूप प्रषिक देर होकर माहीदी। सहक पर पापियों का माया
पमम मंद पड़ गया था। ये सिरे पार बर्षे उसी रफ्तार से पा-या
रहीदी।
प्रास्मात पराकी मारे उसके कमरे में प्रवेश किया। उसके बारे
परम्पवता ममक रही पो । उसका सर पररामा हपापा। उसने धीरे से
उसके निकट रहा 'मनाम बाद इस बा को मया हो मरा है?
माप ही पब मे सपाइएम?
'पर्यो पाएमा? पाक्ति होकर मनाम ने पूधा।
'हमा मा? एक ना मेगा प्यार कर बैठी। उसके साथ घूमती
फिरती यती है। ममा बताए. या यह सम प्यार करने की है। प्रमी
वायहरन्थी है।
'उसको सममानिए।
'पापममती महीका रात मैंने उसे मस्तीपीटा भी उसे पाम
म मारने की ममकी भी दी पर परिणाम कम नहीं निकला। भान सबेरे
सपेरे पर फिर उस माके में मितने पमी गई।
पनाम परराकीमा की प्राणी निगरीसा समप एडमारी
* मैत्रों में जो पाकुमता पौर पिता मिषमान होगमा ली। रसा
बहरामफेरफेर-सामपा।
मनाम पर एएमहा पाप उसे शाति से समझार, पह मारना
पौरमा म को पौर विपार रेया। नया माप रसको दुरस्त गादीकी
म्परस्सा नहीं करते?
परमाते है? परिवार की रसिता मोर मामको पता
रोनों ही बापत थिए, मा भाएका बहुत पहना मानती है मझे
१५

विस्वास है कि पापग्मे समागे पौर यह प्रापमा मना मान सेमी। प्रग्या में पमी उनॉन इस बात को किमीको म कहने के लिए कहा था। मेदिन में विधायी पापको कहना ही परा। मान-मर्याशका प्रश्न यो टहरा। यह पनाम का उत्तर मुने बिना ही चमी पा। । १६ पापोमन में जमे ही पुस्तक प्रनाम के हाप में पाई मे ही उमका मुह उतर गया। ऐम प्रापात की रमे स्वप्म में भी स्पना नहीं थी। उसकी पेवना विमुम्भ हो उठी पार उसने तीवी पौर पुमा मरी दृष्टि मे दम्ब को पसा गा मैट बिममताम मे गिप्टाचारपूर्ण रंग से मुस्कराकर मातम्माप कर रही पो। प्रपाम पतिषि पोई मिनिस्टर ये रे प्रभी तक नही पाए पे। सभापति पपड़ी पहने हुए रो-बार पक्षियों में पापार की बातचीत पर ऐप । उपस्पिति बार-बार को प्रोर ऐयकर उसकी कहानियो की प्रसंसा कर पी पौ। 'मे रस सापप्तिमा यहा एम पिन्या! यह विपारफर पनाम को मारमा दुत मे भर पाईरसी पनि पिम्मय भोदुगमे चमक रटी। पनाम मन्द को साहित्यिक प्रवृत्ति को बम पौर प्रोरमान दिया। अपन सिम बनाकर ग्मने इन्दु की पहानियों को पूरा-पूरा बारा लिया। उन्हें प्रामागित कराया। उनका पारिपमिक रिमाया। पपन पामा पामियों मपहफर सससी पहानियों की पहनमह पकिरा मका फा रसने उमे इस मपमान के माप दिया। उसकी इदा हुई कि महरा उमने टूटे ग्नि मे एस्सार पुम्मा को फिर गापा प्रौर ममपपरामाप पा--पारपीयपी मेयरमाम गीको गो माहिरप के प्रमी पोर पोर है।

पौर राप्रमाम ने बहुत दिन पहमे उमे पृष्ण पा र रमने कितने पाररपूम पर में कहा था कि मामपनी पहली इति से ही प्यार के साप मेंट करगी। फिर हनने ऐमा मोतिा? उसके सामने ऐसी मन पूरीमा प्रा गई? तभी एक सरयन मे कहा मिनिस्टर साहस पा गए है। भौर में मष मर के सिए का फोतास नक्षपोबार में पहरी घोधि में बलगमा। सभापति पौर प्रपान पतिमि अपने मासन करतम पनि बीच पाप पिए । मागत मधिषी विद्यादेवी के मापन के बाप मानीय साहित्यकारों के भापण हए । प्रपने भाषण में पनाम मे मुकीमत मसा की।हालांकि पार मामु मे सम्म नारासपा मेकिन यह इतुकी सार्वजनिक पातो पना करना नही चाहता था ऐसा परम से उसे गरमा किस उमसे सरा लिए गिमा साती है। उसने अत्यन्त बिन मम्मों में इसकी प्रशंसा करते हप हा श्रीमती होमवती देवी उपा मिमा बिममा नपरा चम रिप धौनरिश्मा तपा मालती पामगर पापमापे (वह गम भर का पौर उसने मन ही मन उसे मेरी प्रिम पहा) में मपनी समस्त मेमनी धाराजी साहित्य समन करना प्रारंभ पिपा है उसमें मारी-मनोभूमि की यमाई अनुमति चित्रण हुपा है। उनकी कता नारी-जीवन का एक परता पदम् मिण हुए। मैसी की पुष्टि से में समा मेनिकायों में मप्रनी मानता है। मैं गुमकामना करतार किमी भांति निरस्पर साहित्य रचना करती ईगी। मिनिस्टर में माहित्य पर एक प्राम भापमो रिमा । रमने पन्त में ना होगहा परन्तु पी पमी सोममान मनि माहित्य-मन में ये पोप्रीपेटता प्राप्त करेंगी ऐमी पाया है। तामिया। प्रापोरन ममास होने के बार मगर बाद में मुमे 'पासाविक ममम - के मंत्री माहा मोबन करने को पाने के मिए कहा। प्रनाम एक कोने में ना हा साहिरिपक मित्रों की मियां सुन रहा था। एक तग परिकह पापा 'बारेमवर्गपरे तीन कविता-सह निगमे पर उसके लिए पोई भी पापोरन मही हमा। एक प्पापारी ने मही इंसी हंसते हुए पहा 'इन्दु जी के पुत्र पनाम भी नेइतनी स्याति पनित करनी है पर उनके सम्मान में पायोजन तो क्या मापारम गोप्टी भी मही हुई। ईमी। प्रनाम के मन में विममिसाहट । मगर बाद पनाम को उस मोर मे सम्मिमियम करने के प्रयल में । उनसरी रिचारपारा एक प्रतिशती की होकर भी काफी मयत थी पत रगोने कमी भी इम्युरे समय पपनी गंभीरता का नही तोरा । प्राय ये मुके रामप अपनी मोटी-मी पाली की प्रम मा ही करते रहते प । उन्हें बम एक ही रात का च मा कि उनकी पत्नी साहित्य-रपि की नहीं है। तुकी सहेलियो उमे पेरेहुई थी। मपर गाय बार-बार पापह पर गरेप पर एम्बु उनके पापड़ पर वियप प्यान नहीं रही पी। यम बह हरपार तमाही कहनी पी। में पमती पौरपापस मानवीव में मन हा गावी पीरम भरनी प्रामा मुनन में प्रत्यन्त प्रानन्द पा रहा पा। उसके पहरे पर गर्व की पति पार पीपी। मन्त में मवर बारको प्रपना स्वर परसना पड़ा। प्रमुगुने पानी मोमिों मे विरा मांगी। उमे दम मस्तता में पनाम तापाम तरी पाया | पनाम उसी कोने में पापा हमके पासह सरी प्रतीता पर पापा पार पन ही मनपा प्रर्गमा मे तुम उनसम्म पियापित गरे में एक मनोमानिकपीवरह पिपन पर पापा। बहुपमी । रमने पनाम यो महीं देगा। पनाम पूमा म परारपर अमर मह बंगड़ा नहीं होता तो इतु उसकी उपेमा नहीं करती। हामांकि उसकी पन्त प्रतिया मार-बार इसीपरपोर दे रही थी कि इन्दुमीर उसके बीच के अंदर का कारण उसकी टूटी टौम नहीं पैसा है किन्तु मा प्रपने पापको टौम का पास्ता देकर ही सन्तोप कर रहा था। रात को पब यह पर पापा तब अनामिका पपने पर पानी पी। इस एकान्त में कद स्मृतियां उसे पौर सताने नीं। पर पाकर बह विना मोबन किए ही सो गया। । ૨૨ विममा का उपन्यास निकम मया। उसने पर पाकर पनाम को एक प्रति मेंट की साथ ही अपनी सम्मति निबनेमा अनुरोप किया। विममा ने इस बीच प्रकाशित पनाम के एक श की बड़ी तारीफ की बिसमें एक साकी मनतिक सम्बग्बों परपीनुराई से प्रकास गना गमा बा।बह नामिका अपने मुह बोमे भाई से प्रमकणीपी उसका उसके साथ प्रतिक सम्पन्न पाकिस्तु विवाह के बाद बोदक यह समय इस 'माईसम्मक पौधे ममता पापौर मेवानेबड़े रसारमकब से इन दोनों परियों का चित्रग कियापास मेह साप प्रमामके तीन-चार पिष भीमो उसकी चैमी के श्रेष्ठ ममूने पे विममाको मंगरबा ने यह भी बताया पा किसकी नायिका प्रनाम के एक मित्र की बहिन ईपिसके यहाँ प्रनाम प्राम मायाबाया करता था। यह मित्र मुझे मिनापा पौर उसने प्रकट करत हुए मुझसे पहाया कि यह अनुमान सर्वथा निरापार है, गमत है।तो मी वर्षन के सकियों से उसकी बहिन काही अनुमान लगाया गाएमा इसका परिपाम उसके दाम्पत्य जीवन के लिए ममेकर भी हो सकता है। प्रनाम का यह समार पा। इसे मह करापि महाँ घोर सकता। किन्तु विममा ने उसकी बड़ी प्रसंसा की। प्रदी सम्मति की अपेमा में यह पायस्पक मी मा। १२९

।
पर पिममा पासासन भैकर पी गई पबह पिमनाका उपम्पास मेकर
इनुपरपमा।
पर में नहीं दी। उसकी मां ने बड़ी स्माई से प्रनाम से बातचीत
की। उसे के बारे में कुछ भी नहीं बताया। हरएक प्रश्न का उत्तरसने
गोममोमरंग से रिया। पनाम को यह बहुत पुरानमा। यह उसी समय
यहाँ से भोट माया।
मनामिका में उसे पोस्टकार देते हुए कहा 'पनाम बापू
1 पापपर
पयों नहीं गमे गावे
मह मुस्से में विफर पा । उसने कार्य फापर उत्तेमिव स्वर में कांपते
हुए कहा "माह में पाए ये पर कामे पौर मुनो मनामिका मपितुझे काम
करना है तो एक नौकरानी को तय करो। मेरे पश्विपत जीवन में हस्त
मेप करने का नुकोई मधिकारमही।
पह पसप पर पाकर एक मासिक पत्र के पृष्ठ उमटने तया। माना
मिका साना मेकर मा गई यह चुपचाप बाना चाने नपा। पनामिका में
पति पर मे पूषा 'पाप दुरा नमाने तो पापको एक बात का।
नहीं। उसने इठा उत्तर रेकर पनामिकाकी प्रोवों की पोर रहा।
उसमें कौतुम्पूर्ण मान गये। उसकी भी निवासामी। स्वर में मोमा
'पा पाना चाहती हो।
'भारतुश्माम बापू के पास माई पी।
क्यों?
बात विनम मई थी।
मेने।
'उसे परकीयो पारख पाई।
'रसका ऐसा विपास है कि पाप्य वायू उससे विवाहकर मेरे।
बह इस प्रपाम में हमे यो मोम पसे कम स्तर का मसपासलिए यह

अपना जीवन-स्तर चाकरने के पादर में है। व्याप्त बामे सात सौ देकर
एपमार काहनोट सिमाया है। उसके बाने के बाद मारी सर में
बोमे 'मना पफी बोव को पना पाहता पारयेही ही करके हंसने मगे।
पनाम गम्मीर हो गया।
पारमहबान-मकर नीरोरगया।पहा उसकी मि-मरमी न उसकी
बहुत दुरी पत बनाई। रमनि पह भी बताया कि इतुके सम्पारम्ल में एक
मासिक पाकीमोरना बन गई।परंग ने यह भी बताया कि उसके पास
कविता पिए पत्र पीपा पुषहै।
'सेहते है मकी सेग। विजय मोला 'प्रसिदिौर मम्मी और
पटर उसके पास पापी है।
'यत को नीरो पाती।
तैमूर को भपिट मत सताभो। एक तो बेचारे के हाप मै प्रमिका
निस पी और भापको मक सूम रहा है।
'यपि यह मना नहीं होता तो इसे मही घोड़ती।
में नहीं मानता। मररम मे पौष में हो रहा 'यह गर्वक महता तो
मुनिश्चय ही इसकी पी।
प्रबाम मनिकनहीं मुनसका बामपनी साली रवाकर बाहर निकल
मया। पीप से पसने पास एक हंसी तुमी।
૨૨
एक ससार बार यह सपेरे-सबेरे साचो मेकर पामर पायेगानी
सड़क पर घूम या पापह सप्ताहमरसे पर से बाहर नहीं निकसा पा।
इस बीच मेबर बाबू ने उसे गुमाया पामेकिन उसने रस पठित पारमा से
बात कला भी कि नहीं समा मह पर पर बैठा पा मपने पापको
ससार से पूमा करके। इस पाक पर घाचोरों की पहच-पास में यह

पप विममा प्रारवासन मेकर पती गई तरह विमला का उपम्पास मेकर इनुपरपसा। इन्दु पर में नहीं पी। एसको मा में पड़ी माईसे मनाम से पावधीत की। उसे तुपारे में कुछ भी नहीं बवाग।एक प्रकारचसने मोनमोनम से दिया। प्रनायको यह बहुत पुरा समा। वह उसी समय पाहा से नोट पाया। अनामिका ने उसे पोस्टका गए कहा 'मनाम बापू पाप पर बयों नहीं बनेगावे? बह मुस्से में विसर पड़ा। उसने कार्य पाकर सत्तचिव स्वर में कांपते हुए कहा 'मोड में वाए ये परमाने भार सुनो मनानिका परितु काम परमारो एक मौकरानी की वय करो। मेरे पश्चिमव जीवन में इस्त मेप करने का तुमें कोई पधिकारनहीं। यह पहंग पर पाकर एक मासिक पत्र के पृष्ठ समटने मगा। मना मिका सामाकरपाई परपुपचाप माना जाने भगा। मनामिका में संकित स्वर में पृषा 'पाप पुरा न माने तो पापको एकमाई। 'मही। उसने हम उत्तर ऐकर प्रनामिका की भावों की पोर रेखा। उसमें कौतुकपूर्ण भाषरीदे। उसकी भी निझामाबगी। स्वर मधोना 'क्या करना चाहती हो। 'मार गुप्याम बापू पास पाई मी। शत रिमन मईयो। 'रखे करीयों परत पाई। 'उसका ऐसा विश्वास है कि रापाङ्गप्प बाबू उससे विवाह करो। यह इस मपान में है कि में यो मोर रकम स्वर काम सममे धनिए पा अपना चीवन-स्सर ऊँचा करने के बार में है ! यामपा ने सात सौ देकर एकगार का हेग्नोट मिचाया है। उसके पाने के बाद मारी स्वर में बोने 'नमा पमीचा को ना चाहता है पौरही हो करईसमे मये। पनाम गम्भीर हो गया। पाययह बानपूमार नीरोर गया। यहां नसकी मित्र-मंटनी म उसकी गत पुरी मत बनाई। महान यह भी बताया कि इनु सम्पारस्व में एक मासिक पर की योजना बन गई है। नगरंग ने यह भी बताया कि उसके पास पगिता के लिए पत्र भी प्रापुका है। "पसे पहले की देरी। बिबप मोमा 'प्रमिति मोर मामी दी साकर उसके पास पा रही है। 'गतको मीच तो माती है? 'तैमूर को प्रषिक मत सखामो। एक दो बारे के हाप से प्रेमिका निकम ही है और प्रापको मराफ सूम पारे। 'यदि यह यदा नहीं होता तो इन्दु से महाबोली। 'मैं नहीं मानता । मबरंप मे बीच में होगा पामरीब न होता तो इन्यु निवषय ही इसकी पी। मनाम अधिक नहीं सुन सका । पहम्पनी सासी दवाकर बाहर मिक्स गया। पीधे से रहने या एक ईसी सुनी। ૨૩ एक सप्ताह पार या समेरे-सबेरे बैसाखी नेर प्रामेर पानेपानी सड़क पर पूम रहा था। वह सप्ताह मर से घर से बाहर नहीं निकला था। इस बीच मगर बापू ने उसे मुधापा पा मैत्रिण उसने उस पवित पारमी से मात करना भी ठीक नहीं सममा यहार पर मेटा पा अपने प्रापको संसार से पृपा करसे। इस सब पर हनाको की पहम-पान में ग अपने अस्तित्व को पा सममार विचारों में मौन होकर पा रहा था। साडी की 'उद-बट् पापियों काध्यान उसकी पोर पापित करहीपी। यह सोषणापा महप्पारमा निर्दयी है और यह युम गाठोर है। पर प्रापोहाय को सोमवासेनही मोही निर्माता से प्रसारित होता है पर मारी-हरम निस्वापोंकेताप मीनही पिपलवारा उसे सम्म परिप्रम के उस पनौतिप्रामम्ब के पास का मान ही नहीं रहा। यह पूगी और मग्न के मम्म एक पोय पस्तु-सा रोल पाईपौर मुस्प उससे बसा मापा मे आसाममा । मै पर भी किसी पुर्वसनीम प्रेरमामयीमूत होकर काधूिमने की प्याएं करता रहाका मुझे तिर मन्तिक बेदनाएं की है और में उसके पास से अपनी मालाकी शान्तिको बोग रहा है। मैंने इसके लिए विपीको पिता नहीं की। पर-बाहर समी को भुमा ठा। सभी को निराध किया पौरन दिए और मत में मुझे रसका प्रबार सर्प भी नहीं मिया मोह ! मै कितना पामबई। भोर रसनेस बाप को मुह कंपा करमाको सौप रिपा इससे उसके मन को गास मिता। पसते-पाटेवा प्रत्यन्त पया। उसके पाप से पवायदेमे मये। पोपे से उसकी सारी कमर मीन मई को। अप्रत्यापित उमेगबरप मिस पया। मंग से उसे पूरकर मोमा 'मया मनाम भाप अपनी ता को हने पाए हैं। पर यहां से भाषा कोस दूर रापाहप्प पार के पास टीर मुमपरगाही है। पावना काका पायेगया। मनाम सम भर के लिए लगमा से परमानापमा नहीं ना। राबाहम बा रसपर सम्म छोरी पौरन पामे सामगि करेगी। पापहीं पर याविषार-विमर्म करने गया। ११२ पपानक इसमम पाने की भावना दुर्वमनीय रूप से उसमें वापत पौरामायेप में बस्सी-बस्ती करम उठातामा प्रापे का पसा । वह बार-बार यही सोच रहा था कि वह उस स्थिति में किसी भी पपमान को बस्ति नहीं करेगा। यहाट का प्रमाण पत्पर से देगी पर यह यहाँ बाएगा प्रपस्य। मापिर यह नसी जगह पहुंचा बहा रामाकम्प पोर इम्यु। रापा रुप्म मेटा हुमा वा मौर इन्दु रोमांटिक रंग में किसी नामिका की तरह मुस्करा रही पी। पनाम से जानकर सबर माही देखा। मह जस्वी से करम उठाता हमा बड़ा सासी की भावार इन्दु के कानों में पड़ी। उसने भूमकर पैसा मौर पुवारा 'प्रमाम प्रनाम। प्रमाम को मगा कि उसकी साखी पौर पनि जमीन से चिपक गए है। पापाइकर भी पागे नहीं बढ़ सका। रामारुम्म ने पुकारा 'माइए भनाम बी पाए, ऐसी भी क्या मारा बगी है। मनाम विसकुम पर मया। उसके साथी पासे हार और एक टीम में प्रत्यन्त पीड़ा हो रही थी। उसने साची को उठाना चाहा पर मह नहीं उठी। उसे प्रतीताया कि बस पब मह गिर जाएगा और उसे अपने प्रति नी के सामने सग्मित होना पड़ेगा। फिर मीबहसास करके पर मुड़ा। पमा। परीर की नस-मस फट पीपी। दूसरी टीम भी टूटकर गिर बाना पाहणी पी।साची पामे हाथ की होनी की चमड़ी दिम मा पो । सारी पीमाएं उसकी प्राओं से मांक रही थी। पापीरे-धीरे प्रामे बड़ा। उसके समीप पहुंचते-पहुंचते प्रनाम मिर कर पा गया। मप भर के लिए उसे होए मही पाया। तुने मोटर में पड़ी मारी' से पानी निकाबकर उसके मुह परसिका। पनाम को हो। ।

पा पया । अपनी प्रस्पष्ट पेतना में उसने रापाप्मको याकहते हुए सुना, 'तुमने ऐसे रोमी और दुर्वन से प्रेम करके मना नहीं किया। इसके पाप पीबन गुपरला मी बहुत कठिन होता। इन्यु ने कुपनत्तर नहीं दिया। मनाम में बैठने का प्रयास किया। माठ भी गया। पमाम ने सहा हुमूति मरेपर में कहा 'भापको पास नहीं माना गाना चाहिए, जान-मा- कर अपनी पारमा को कष्ट देना सर्वमा मनुचित है। कही टोय पार बराब हो गई? पनाम मे कोई उत्तर नहीं दिया। उसने बनती ई दृष्टि से पदुको देखा। उसमें मनाम पभिषप्त पीपन को करना मुलग रही थी । म्यु उस एप्टिको सहनहीं सकी। बामपनी दृष्टि ही पौर भटकाने लगी। स्पिति व विषिष हो ही पी पर कोई नही बोला। पाप मौन पामा 'मन्चा पमिए, पाप भी पाइए प्रनाम भी प्रापको रास्ते में पोरणा पनाम मे अस्वीकार कर दिया। परम्पौर रापाप्म पने पए व पनाम की माओं में पासू मा मए । पाकर पटे यहाँ पर पड़ा पा मिर्गीय पौर निषेप्ट । दोपहर को पर पाया । मौका पार पाया था। उसने तुरन्त गुमाया पा।बापीमार थी। बरषा की मी मुंह पमा-म्बाकर रो रही पी। प्रनामिका मे बताया किबरसा के पति ने बरपा को भोर से पीटा है। उसकी चमड़ी में तक निधाम चमक है। किंतु बरपा इसे स्वीकार नहीं कर रही है। उसका पति पसे यहां हमेशा के लिए पोड़ गया। परपरा प्रमी पुन पाने का छकर रही है। मरहठ कर पी है कि यहां उसका पति रहेगा पापही । रहनी चाहे एस में चाहे सुख में। प्रनाम ने परषा को बसाया। उसकी राई सि का निवता भाग मूग गया था। उसके हापों परबमे नीले दाग साफ वीस ये पे। उसका मुह उरास पौरपानमयी। या बात है परदा? मा रोक्यों रही है? फुपनहीं पनाम बाबू! मह कम्पित-युक्षित सर में बोमी 'मा मो है. इसमिए उसका रोना कारनहीन नहीं होता।बह पति के प्रसाद को पर सममाती है। मैंने उससे का रिया प्रपराप मेराबा। मैने उसके दोचाय केप्पाते तोड़ दिए, फिर मह मुझ क्यों नहीं पीटेगा। मां कहती है उस एष्ट पाप नपा नेकिन प्रेम में क्या कभी ऐसा हुमा है? मैं उसके बिना नहीं रह सकती। एक पस भी नहीं एसाठी। परदा की पाहों से गंगा-यमुमा मह उठीं। उसके बाने के बाप मनाम के मस्तिष्क में सरोगका बेहरा नाचने भगा। उसे लगा कि कहीं सरोग भी इस पप का अनुसरण करने। उसने द्वार को उठाया। चार में सरोष की प्राकृति देखी। उसे मां की बीमारी का निवास मही इमा पसे लगा कि होम हो सरोग किसी नाके से प्यार करठी है और पानिमोहिनी मन पई है। पनाम पी मानों के समक्ष परा का पेहरा उसके प्रोसू पौर उसके सरीर पर चमकते राग माच उठे। पा प्रत्यन्त संतप्त हो उठा कहीं सरोग के साप ऐसा मातो? अप्रत्याष्ठित इन्दु उसके मस्तिष्क में धूम मई । मब वह उसके पबहार को सानहीं सकेगा। यह न सम्म बानों को भी नहीं सह सकेगा जो उसे पब सुनने है। बामा बदनसीब है। दुर्भाग्य उसके बीवन का सापी है। एक विरक्ति भरी मुस्कान उसके प्रमरों पर दौड़पा। वह प्यार के मिए वाप

सचिम उसे प्यार नही मिसा । पहरापामा पापौर मा ।
कि मुम मानर बबम मए है परमारमी मही पारमी की पूची
पाती है। उसके युग नहीं उसकी दोनतरची पाती है।
पाया हो उठा। उसके तमाम मूबी-साधी सरोग की माधि
पी। उसे बीमार बाप की पी सुनाईपड़ी। मां का घों से भरा
रिपरीर विना । बहकांप रहा उसनमा नबगबिम्मेवारमा
बम बहा
कारबकापर्प में पाहावाबामके पास पमा।
से हर सये उभार लिए गम मे इंसकर कहा अब तुम पस्केकमा
रमने होतो मेरे पवे भामरे के पनुवार माग देना पन्ना मै भूब
तण पुम्हारे पास मा पईमा ।
प्रनाम निरतर हा
'तुमारीदुधीन ही महारानी बनेमी समाप्यमहारारको हाय
माही! एकमेडीन ईसी ईगा।
प्रनाम मे कोई उत्तर नहीं दिया।
अंबारी पन्नो का हिसाप कर रेना उसे मेरा म्याग देना है।
मना मत । याम फिर एक निरर्पक ईसी ईसा ।
हैलोर पर रस्त्रयास करके नाम पर पाया पौरपमामिकाकोड़ा
- उसका सामान बाप रे बह पर था हातिमा फर्जीपर से
ससा मे पाए पोर पवावरह पपना रुपमा मना करने।
'पपनी मां को इस प्रभामा प्रसारमा । मौकमी-कमीमापको
पए दिए थे इसठे पापको हाशि भट यांचा होनाई प्रनामिका
नमसर मेमहा। उसकी परिभर पाई।
'नहीं मनो मनुष्य को प्रापी निम्मेवारियों से महीं भागना चाहिए।
(पलायन पस्तुव एक पन। मैंने जिले पाहा, यह मुक महीं मिला।

'भार । 'वामी मुझे महीं मिमी मै उसके योग्य नही है। मंगहा हूं। मोह। स मंगरेपन को मनाने के लिए मैने सबको मुमा दिया मेकिन यह सत्य बर्मम रूप से प्रकट हमा। प्रमो! तुमने मुम्मरबो महसान किए, कमी पिता कालंगा। मन्नो की प्रार्य मीम गई। प्रनाम चमने ममा ।बरमा माई परवा की जगह उसे सरोग का मुस रिया । उसकी पत्रिों में प्रासू मा मए । यह बस्ती-अस्सी नीचे उतर गया। परदा उसकी सासी की सदसद सूनी हो। उसके एक घंटा मार सुमनाम पर पाई। यह अत्यन्त उद्विग्न मार चिम्तायस्त पी। उसने पाते ही बरवा से पूछा 'मनाम माम् कहाँ है? 'पले गए। बरामेघोटा-सा उत्तर रिया। 'कहाँ ? 'पपने गर । उनकी मां बीमार है। 'पदमौटेंगे? 'पायव कमी नहीं। बरेली थे। इम्पीरे-धीरे घर से बाहर निकमी। पाप रामाश्म ने उसका सर्वस्व सूट स्पष्ट कह दिया पाकि उसकी मो एक मास्टरनी को पपने पर की या नहीं बना सकती। उसे भी उसके चरित्र पर पूर्ण विश्वास नहीं है। उसके पहले प्रनाम और मंबर बाबू | उसने इस बात पर जोर दिया कि इमुको पिरोप मी नही करना पाहिए। वह उसे सब मया । उसे सम्पारिका बनाएगा उसके उपन्यास पापेगा पैसा देमा। वय वह स्वमी विकृति मौन हंसा हंसा कि इन्दुपी प्रोिं में पारमा पए । रसे नया कि वह सोसापटी प्रावमी को प्राइमी नहीं समझती।

उसने नाम को छोड़कर रापारुमको चाहा प
क्यों चाहेगा? उसे उससे सम्बर मुरती मिस सन्दी
बमने की प्रचनामयी होड़पर के बाहर यानम्मी
हुई सगा पर इस नए मैठ गई से कोई टूटा हुपा
उसकी प्राण प्रापे पनाम की महिमी एक
पाता पुगका प्यासा और दुखी।
स-मट्पट् की यही चिरपरिचित पनि।।
चसने पावरेस में चाहा कि यह गड़कर उस
की पाहनों में प्रात्मसात करने। इस पवित्र रिचार
में मया पोप भर पया पार उसकाय नमे पातोक से
नमा उसके पत्र की मंत्री बबनी है और प्रत्येक
निरोप फूल की वह महापा।
१५०

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Path Ki Vanshi

Author
Sharma,yadwandar
Title
Path Ki Vanshi
File name
Path Ki Vanshi
Text
OCR done
Citation
1959
Published
2010/12
Publisher
Delhi,rajpal And Sanj
Language
Sanskrit
Pages
117
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
Literature
DLI number
514841
Barcode
4990010022518.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
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