Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
Abhidamtathsangrarho
Front matter
अनुक्रमणिका
पत्रा
१
१
१२
विषय
१. मस्तावना
२. अमिषम्पत्यसंगह
(१) विचमहविभाग
(२) चेनसिरुसंगहविमाग
(३) पविष्णकसंगहविभाग
(1) वीयिसंगहरिभाग
(५) पीपिचमंगहरिमाग
(6) रूपसंगहविभाग
(७) समुपपगाविमाग
(e) पथपसंगहदिमाग
(१) कमानसंगापिपाग
३. सानुकम
४. गापानुम
૨૨
१५
प्रस्तावना सामान्य रीते सालना बौद्धोना वे भाग पडे हे-उतरना बादो अने अक्षिणना पीसो. टिवेट. मंगोलीया. नीन अने नापानना पोलो उपर- यौलो कहेवाय; अने मिलनेन. ममदेश, मियाम अने काम्वोडीयाना सो दक्षिण बांदो कहेवाय. उत्तरना बद्धो पोताने महायानना अने दक्षिणना कीलोने हीनयानना कहे . चौद अंधोमा नापन्मुत्तिः अपना · गोधि प्रण प्रकारमी मनाय रे. ते आ प्रमाणे-श्रावकोधि, ''प्रत्येक बोधि' अने सम्यक्ससोधि.' 'श्रावक एटले तुर पासे धर्म शान्वनार नेओनी नीवन्मुक्नेि प्रावक- बोधि ' कहे रे. प्रत्येक युद्ध' एटले गुरु पामे उपदेश सीधा बिना सम्पनिमी बुद्ध पाय के ने, पण नेनामा वीना लोकोने तारवानु सामर्थ्य गयी होत. ते भरण्य यगेरे कोइ पण कान्त पळमा एकलो रही दिमुक्ति- मुग्न अनुभवे छे. तनी · वोषि ने • प्रत्येक युद्धपाधि ' परे थे. • सभ्य- नमंबुर' पटले गुरु बिना ने मर्द धर्मने गाणे छ, भने पोताना सामग्री बीनानो पण उद्धार परे . आदा मयमलो पणा दे. मां आ पल्पना रटेष्टा स्वयसेन गौतम . महायान पंथना अनुराविभीने पहनगरे गोधि पमदनी नेमने नो • मम्यरमबोधि 'ज नोए. अनेक जन्मामा अमन्य प्राणीओनु हित माधी अनंत काळ पर्स मम्परमंजर पर मोक्ष मेलाको ए नेमनुं ध्येय रे. शान्तिदेवाना रहे से समता पमयमा गमः । तेन या ममित्तानो मानिस मुनमाने सरोगेने प्रामादमागः । नेशननु पाश माशेनारमिोनगि ।' (भा प्रमाणे आम करीने मने ने पुण्य म तेना को मां प्राणीमोना सर्व दुःमनी शान्ति करनार पाउँ ! मां प्राणाभीनो उगर पता तारामा ने प्रमोदमागर उनटे ते सम नी! भिक मासागर !) मा रीने सर्व प्राणीमोनो उचार करीने न आपण मोसमा गर्नु मोहएः अने आपी म पोतानो पंप महापान पंग म उसर देशांना गोली माने छ भने दसिंग देशोना नीलोने तेो हीनयान करणे, कारण के. नेमो फल पोगाना पुरती न दाम मेसे; अहंन पर मोस मेटया नरकन सेमर्नु प्येय होय गे. दक्षिणना बौद्धमाहित्यमा महायान' अने हीनयान' प शब्दों बालकुल मळना नी. पोनाना पंपने तेओ • पेरवाद' (म्पविग्याद) पंप कहे है. सुदना परिनिर्वाण पडी प्रण महिने महामाश्यप, आनंद उपाधि इत्यादि महाम्पविरोए गनगृहां एकटा पर सुदना उपदेशनो मर कयों. मो वाम पड़ी वैशाली नगरीमा • यश' म्पविग्ना प्रयामयी मिन- मंधनी मोटी ममा मळी: भने तेमां धर्मग्रंथोनुं पुन: संशोधन करवामां आन्यु. मार्वभौम अशोकना ममयमा पण मोगालपुत्त निम्म अविरना अन्यक्षपणा नीचे एक मोटी सभा भेगी यह अने तेमा ग्रीनी वार बुदना उपदेशोनुं सशोधन करवामा आन्यु. आ परपरा दक्षिणना बौद्धोमा चालत होपाधी तेओ पोताने म्पविरवादी कहेवडावे छे. दीपवंम अने कथावत्यु- अट्ठकथामा अशोकना ममये बौद्धोना अहार भेद यया एवं वर्णन से.तेमां मेने महामंघिक कहे छे नेन महायान पंथना अनुयायीभो 1. बन्ने श्लोको बोधिचर्यावतारमापी लाधला छे. पहेलो श्रीमा परिच्छेदमा छे, अने नीमो दशमा परिच्छेदमा होवो जोइए. H तो आधुनित. परितो भनुमान करे से, परंतु आ महासंगिनी पानमा मविकार योग पानिमारित्यया मटना मशी, परिवार मा भनुपायाभोने नेम शिपिटर पंप प्रग्य सम मापान पंपना अनुपायाभीने पण. फरक केवळ प पूतो . त्रिपिटकपट पानि भाषामा . ना गुपपिरक, विनयपिटक तथा भानमारक एसय भाग . महापान पंपीभीए आ प्रभोनो तरस्त भापायो भनुपाद की तमा पर्युम पागल की दीj भने पोताने भनाल राने नो अब मारा प्रयन्न पण कोणे. युद्ध भगवान्ना अने तमा प्राचीनतम भनुयायीभोना शुरु भने मरल विनारो पानिभापाना प्रिपिटक पोमा . अने भागना भभ्यामपी महापान पंपना धोनी भायाम पण मुभ पाय प पारतमा विद्वानोनो एकमत से. त्रिपिटक भंपोई सामान्य RRY भापरामु आ पळ नथी. सेने मारे एक मात्र मेन्य गो पर. अहिंआ भमारे अभिधर्म परतीम विकार करमानी अभियपना धम्ममगाण, निनंग, भातुकथा, पुगटपम्मति, कपापन्धु, यमक भने पान मा मात प्रकरणो मे. भा मा पुढे म उपनाना पी.मलाल टोरोनी मान्यता से, भने तेने टेको भापपानी प्रपन्न अभिधम्मभयारे भसादिनी नामनी धम्ममंगणिनी अनुकपाना भारपाकों .यी वागतानो विमार करना अभिधम्मपिटक, मुए भने विनय पत्रिक पीलावा काळे रनायेलो होपो मोरपए स्पष्ट रीते मगाइ माय नेकपावन्य प्रकरण तो मोम्मानित निम्मे अशोक रामाना समयमा रु एषो भकयामा पए रहेग छ; अर्पान् पहेलो चार प्रकरण सेनी परेटा बेटगफ गम भने वरना ये नेनी ती केटाक ममये पाया तो. भाममणि यो माया प्राचीन अंग से सोन में महत्ववालो पण मारण पर्व भरिधामनो पायो मना उपर पाए. पा सर्व पदार्याना भिन्न भिन विमाग करा तेनो अर्थमिद का प्रया करेलो छे. उदाहरण तरीके पटीन नि' ज्यो. मी पटायर्यान कुमला धम्मा', ' अफुसला धम्मा' अने अन्याकता पम्मा एकाका विभाग पाही पछी कुशल धर्म कया, अशल कया अने अव्याहत कय एनो विसारथी विचार कयों छे. आ बारतमा न लगभग ग्रंयनी पोनं भाग रोक्लो छे. बीना विमागोनो अर्थ संक्षेपमा कयों के कारण देखाय छे के-पहेला त्रिकनो अर्थ बराबर समन्या पनी वाकीना विमागोने अर्थ ते प्रमाणे समनयो मुलभ पडशे एको ग्रंथानीनो के ग्रंथकना मोनो- उद्देश हो. अनिन्ध होइ परिणाममा मुग्वकारक ने कुशल, निन्य होइ परिणाममा दुःखकारक ते अकुशल. आ सिवायना बाकी बधा अन्याकृत.'वामी रीत कहीए तो लोममूलक, उपमूलक अने मोहमूलक को अकुशल कहेवाय छे, अने अलोममूलक, अद्वेषमूलक तया अमोहमूलक का कुशल यहेवाय छे. अहिआ अलोम एटले केवळ लोभनो अभाव नथी, पण मनुष्य नातिने उपयोगी थवानी उत्कट इच्छा; अद्वेष एटले प्रेम अने अमोह एटले. सात्तिक ज्ञान एवो अर्थ ममनवो नोहए. अन्याकृत धर्मना रूप अने नाम एवा चे मुख्य भेद छे. रूप एटले वधी नडसृष्टि अने तेमाथी उत्पन्न यएली पाच ज्ञानेन्द्रियो. आ वधाने कुशल के अनुशल कही शकाय नहि. छता आ चार महाभूतो अने तेमाथी उत्पन्न थाली नडष्टि कुशल अकुशलनुं मोटं कारण पद पहे. अन्याकृत नामना (मनना) वे भेट छ, पहेलो विपाक अने बानी क्रिया. विपाकमां नीचेनी बातोनो ममावेश याय छे. चक्षुविज्ञान आदि पंच विज्ञान, आ निशानथी ते राग द्वेष मोह अथवा अराग, अद्वेष, अमोर उपासायद मुभीमो मनोगापार' भने पूर्वनामना कुशाल भकुशल वमने भी माम प प्रनिमन्नि पितान, किया थे प्रमाना एक सर्व साधारण प्राणीओनी क्रिया भने पानी अननी शित. तेमा पालाना पण भेद . . परद्वारावजन', Farmeजन' भने योपन.'प्राणीओनी इन्द्रियो विषयोना सबधमा पायरे में समय प्राणानु नित अमुक एक इन्द्रिय तरफ पळे छे. आ माँ गन , साधी ने ते प्रवृपिने गधे चित्र पांचमांधी को ५ मा ने कियामा सापकी निए भूतकालनी बापती नाम प तेन मनोमागवजन वह अने भेना पडे इन्द्रियो द्वारा महतो स्प पित्त भागळ गम्पिन विषय तरीके स्पष्ट थाय छे तेने दुपन पाहे रे. वागविगत मा बग्न-मनोहारावजन अने पोट्टपन-एकन नागन: किगाओ. ननी शियामा नया मामान्य लोयोना मुशलमा पहुन थोडो परकर युनान्द यमांनो विपार होय. त्यारे क्रिया कोनो विपाक होतो नपी. पाल पमं एटले सामाग्कि माणमोप करेलु सत्कर्म अने • आ मनोव्यापारनी ही क्षण ने गग द्वेष आदिफमां लइ नाय ने गोदपन ' महेवागणे. ३ मुशल अथवा आशल कर्मना विपारने लीधे व्यक्ति-अन्तःकरण मर्गन्मापे पेटा धाय में. गर्भाशयमा प्रवेश करवानी प्रथम क्षणने अने गदिमां उत्पचिनी प्रथा क्षणने • पटिमलि' (प्रतिसन्धि) कहे छे. आ अन्नपारण आगी जींदगीमा सनानरपे कायम रहे छे, अने तेना आधारे गणी ना कुशल, आशल, अने किया कर्मा को रे. आ आरया भामो गानिरपे रहेनार अन्त करणने । भाग ' (भवाग) कहे . अन्त्य मणमा भा अन्न करणने । चुनि' (न्युति-मरण) कहे हे.
क्रिया एटले जीवन्मुक्त अर्हन्तोए करेलुं सत्कर्म. कुशल कर्मोमांथी अकुशल संभवी शके छे परंतु क्रिया कौमां अकुशलनु मिश्रण कदी पण थइ शकतुं नयी. आनो योडोकं बुलासो अस्थाने नहि गणाय. सांसारिक मनुष्य दान दे छे, शीलरक्षण, ध्यान, भावना वगेरे करे छे अने एनो आस्वाद ले छे. तेना परिणामे अभिमान, तृष्णा इत्यादि दुर्गुण उत्पन्न यवानो संभव छे एटले के दान शील वगेरे कुशल कर्मोमांथी अकुशल कर्मी उत्पन्न थइ शके छे. पण अर्हन्तनी स्थिति आवी नथी. ते जोके बीना सामान्य जन प्रमाणे न दान, शील, ध्यान, भावना वगेरे कर्मों आचरे तोपण तेनी सर्व पासनानो क्षय थयो होवाथी तेना अन्तःकरणमा अभिमान वगेरे दुर्गुणोनो आविर्भाव कदी पण थतो नथी. मन्वपापम्स अकरणं कुसलम्स उपमंपदा । मनितपरियोदपनं एतं बुद्धान सासनं ।। आ धम्मपदना श्लोकमां आन अर्थ चोक्वी रीते कहेलो छे. “ लोभ- मूलक, द्वेषमूलक, अने मोहमूलक कोइ पण कर्म करवू नहि. अलोभमूलक, अद्वेषमूलक अने अमोहमूलक सर्व पुण्य कर्मो सारी रीते करवां, अने पोतानुं चिप आ शुभ कर्मोमा पण आसक्त न थवा देता शुद्ध राखq ए मुद्धोनुं शासन ने. युद्ध भगवाने कर्मने म अत्यत प्राधान्य आप्युं छे. तो कहे छे के • कम्मस्सोम्हि कम्मदायादो कम्मयोनि कम्मबन्यु कम्मपटिसरणो, यं कम्मं करिस्सामि कल्याण वा पापकं वा तस्म दायादो मविस्सामी ति पन्बनितेन अभिण्हं पचवेस्वितन्त्र ॥" ( कर्म एन मारुं धन छे, कर्म एन मारो वारसो छ, कर्म एन मारो गन्धु छ, कर्ममापीन मारी उत्पत्ति छे, कर्म एम मारु शरण , ने पुण्य के पाप कर्म हुं करीश तेनो न मने "" [७] पारसो मळशे एम प्रबनिते वारंवार विचार करवो भोइए.) अर्थात् अकुशल कर्मोनो त्याग करी कुशल कर्मों करवाथी म मोक्ष मळे छे. एक प्रसंगे वैशालीमा सिंह सेनापतिए मुद्धने प्रश्न पुछयो के, "भदन्त, घणा लोको आपने अक्रियावादी कहे छे; तेभोना कहेवा प्रमाणे आप खरेतरा अक्रियापादीछो" सुद्धे जवाब आन्यो, 'सिंह! एक रीते मने अक्रियावादी की शमाय. पानी विचारो क्रियामां मुकवा नहि, पापी विचारोनो नाश करयो, पापी विनारोने मनमा आमा पग नहि देवा, पयो हु उपदेश करु छु. आ दृष्टिथी नोइए, तो हुँ अक्रियावादी खरो. पण नो पीनो कोइ मने क्रियावादी कहे तो तेनें कहे पण सोहूं कहेवाय नहि; कारणके पवित्र विचारोने क्रियामा मुत्रा, कुशळ मनोवृषिने महावी, सदिच्छानुसार वर्नन कर एवो हु उपदेश कर यु. आ दृष्टिधी नोइए नो हु क्रियावादी छ. बुद्धना आ कर्मयोगमा भने भगवद्गीताए प्रतिपादित फरेला कर्म- योगमा घणो मोटो फरस है. भगवद्गीतानु एवं काहे छे के मातुर्वर्ण्य ईधेरे उत्प करेल होगाची ने वर्णमा नन्म थयो होय ते वर्णने अनुमरीने कर्म करतुं नोडए: अने ने कर्ममा आमारी गल्या विना वर्तणु नौइए. सत्रियोनो धर्म युद्ध करवानी है; अने गुद भाइभाडु साथै युद्ध करवानो प्रसंग आवे तो पण ते मोक्षमार्ग नऐ एम समनी निरपेक्षपणे युद्ध करयु ते तेनु कर्नयः अने आम करदायी न तेने मुक्ति मले. मौदोने आ वर्णठरवम्या पपद नधी, भीनी कर्तन्यनी कमोटी राग, ट्रेप अने मोहनो त्याग करी निरपेक्षता, प्रेम अने शानपूर्वक, पर्म मनन कर्या कर एमा ७. अर्थात् कोइ पण गातिनी माणमा प्रमाणे को तो ने अईत पर शो. घेदान्तीओने ध्येय नेम निर्गुग परनाम बोसोनुं ध्येय निर्वाण . निर्गणने बोलो शून्य को अने भने वेदान्ती निर्गुण को से. ४ ओ पललोगमारमंग्रह पृ. २७९-८० मग भाति. - -- [८] अर्थ एकम छे; गब्द मात्र नूदा छे. पण, निर्वाण तत्त्वमायी निर्माण ययुं के जगत्माथी निर्वाणतत्त्व नोकळ्य॒ आ वादमा बुद्ध नयी. बुद्ध, को है. 'पुरिमा भिस्मवे ! कोटि न पन्चायति अविन 'भिक्षुओ, अविद्यार्नु मूळ कारण कही शकाय तेग नथी.' मंमार दु. छ अने निर्वाण शान्निदायक छ, अने नेनो मार्ग कटीए नो ते पत्कर्म करयु पन छे. बुद्धनें आटलं न कहें छे. निर्वाणतत्व अन नेना मार्गा विषयमा आमग अने बीना माये ययेन्द्रा वादविवाद महायान ग्रंथोमा पुष्कल छे; तेया ने म्यविरव पथना ग्रंथोमा नयी. अभिधर्मपिटकमा वादविवादात्मक ग्रंथ 'कयावन्यु' न छ. परनु नेमा पण बीना पयो गाथे वादविवाद बहुन थो गे. योद्ध धर्मना प्रमेया विशन ग वनारवा मात्र ग्रंथकारे प्राच यादपद्धतिनो अगीकार कयों ने एट न. मा उपगत योद्धामां मार नादी भिन्न पो हना तेना मनोनु गदन करवानो थोटो घणो प्र. आ ग्रंथमा नगाय छे. बीना या प्रकरणी प्रारभूत पदार्शनी लगाम भने पटाकणची भरेला . शम्ममंगाणे प्रथमा मशल अकुशल आ भेद वर्गन्या ते उपर न्युन, रिभाना अटार विभाग के ते म्मा, आयतन, पातु. आर्णमग. इन्द्रिय प्रतीत्यममुना.. इत्या चानीनी विस्तृत गनी छे. गानुयामा चातु. भागनन , नगेरेनो म- वगोमा केली गेने मंत्रह गाय तेन नर्गन . पुणपतिमा नगत् मटना भित्र भिन्न मभावनी गलिभोन वर्गीकरण करो. गमका प्रभनी नेना उजाडे. पट्टानमा गोरीम प्रगा करीने प्रगयों शट अशा अने अन्यात मारे कवी मय ग मनायो आपात प्रगोगा ने मायानी Inों से मांना प्रधान पानी मंग्रह अनुदामार्ग अभिसमयमा प्रत्गमा की । अनिर्ममा में भी परे पानी मंपा पो भा गन ,
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[१०]
अनुरुद्धेन थेरेन अनुरुद्धयप्तस्सिना ।
तम्बरटे वसन्तेन नगरे रामनामके ।
तत्य संघविसिडेन रजितेन अनाकुलं ।
महाविहारवासिनं वाचना-मन्गनिस्सित ॥
परमत्यं पकामेतुं परमत्यविनिच्छयं ।
पकरणं कतं तेन परमत्यत्यवेदिना ति ॥"
(श्रेष्ठ काचीवरदेशमा कावीरनामना नगरमां, उचमकुळमां मन्म
पामेला अनुरुद्ध' नेवा यशवाळा ते बहुश्रुत ज्ञानी अने परमार्थवस्तु
नाणनारा अनुरुदस्यीयरे ताम्रराष्ट्रमां रान नामना नगरमा विशिष्ट
बौद्ध संघ साये रहेता महाविहारवासी आचार्योनी परिशुद्ध परपरानुं अन.
लंबन करीने परमा प्रकाशित करवाना हेतुथी आ 'परमत्यविनिच्छय'
नामनुं प्रकरण रच्यु.)
सेगी गरीने मदम्मागह ग्रामा आ प्रकरण सो उद्देष
आ प्रमाणे
अनुरुद्धेन थेरेन कधिपुरवरे पर ।
पकरण कतं तेन परमत्थाननिय ॥"
(श्रेष्ठ कामीपुरमा अनुरुदम्पविरे परमन्यविनिच्छग नामर्नु प्रकरण
रच्यु.) उपाना सोकर्मा भने आ लोकमा मह फरक . पहेगमा
गननगरमा रहेती वणने आ प्रकारण र हतुं एयु को छ; अने आमा
कालीपुरमा रन्यु एम कल्यं छे. पहेलामा काँधीवरने राष्ट्र को भने
आमा 'पुर' कहगुंडे.
५ मा कोरो देशभित्र महापरिना निहली आतिमी मा.
कारण मूळ प्रश मारी पाम नपी.
१ मा • अनुद' पृटनी एरा मिशियली,
भी भाडा मा. .
.
भानो करतो धारे गोटाने हारना पण्डितोए अभिधम्मत्पसंगहना अन्तिम प्रकोपमा अवता 'तुमूग्मोम' मामना बेहतर संबंधे को देवाय रे..त्रि स्पधेरे इ.म. १८८८ सालमा पोते प्रस्ट करेला भाषामन्यमंगनी नावनामा ' तुम निराळो करी 'मूलसोम- विहार ' संगीपमा हतो एवु कायु रे. परंतु सेनी विरुद्ध पूरायो सुमंगल नामना आपायें पारमा भैकामा रपेली विधानी नामनी टीकामो मळी आसमां तुभूतमोम नाम विहार' २९ फन्न. पण ते विहार यां लो नी उष नपी. सेटीसाया (लेडीगामना आनार्य) नामना प्रसिद्ध भाधुनिक ममी पंस्तेि परमत्यदीपनी ' नापनी अभिधम्मत्पतगह उपर विस्तृत टीका लवी . आ टीकानो मुख्य हेतु विभावनी टीकाना दोषी मावा ए हो एम देवाइ आवे से, एता कामी माहिती पण तेमा पुष्पाज मळे . परतु लेडीसायाने आधुनिक ऐतिहासिक पद्धतिनी माना न होपाधी तुमगतोम विहार मया तो अने ते कोणे मांध्यो र किने माहोमा भापी से से ऐतिहासिफाष्टिए प्राव लागती नपी. भी कहे के-सुपूलमोमं नि एष नामक विहार ॥ उ हि मिनबाट गाय- महिलापे तुमूलसोमविहारे सम्स पास माम विकिगिन्वा यारियति ।। नहि सत्य पणेन अत्यो अत्ति ॥ मरे मिसाला पामादादयो " ति ॥ एमो किर बिहारो आदितो अभय- गिरिरमो आगमरेमीभताय मोमदेविया कारापितता यावजतना पि सोम- विदेव पनायिय | तुमू सहो पन विपुन्टमाइ परियायो .. सोन विहारो पहिरचेहि महापरिवगेदि मठितो होती नि अतिविय विपुलो मान्तो वियागाति । सन्मा मो विपुलसा महन्तवा विरिषण्णता हुमूलमोमी नि उगन ॥ (तुमूलमोम ए.ले आ नामनो विहार. बुद्दसिाला प्रकरणना मामा कहा से के "मिलट्रीपमा मूलपोम विहारमा रहेता संपर्नु . [१२] भोजन ताडपत्री वेची करवामा आवे छे; कारण त्यां ताइवनी उपयोग नयी; सकळा महेलो वगैरे नळीआधी टांकेला. मा विहार पहेलपहेलो अमयगिरि रानानी सोमदेवी नामनी पटराणीर करायो; अने तेयी आने पण ते एन नामयी प्रसिद्ध छे. तुमूलशर विपुलना गर्यमा छे...... .....ते विहारमा जुदी नदी माइट इमारनो होवायी ते बहु विपुल, महान् , अने विन्तीर्ण छे ने विपुल, महान् भने विस्तीर्ण होवायी देने तुमूलसोन' कहे ) अमयगिरि नामनो राना लंकाद्वीपमा ययानो पहावंशमां क्यांइ पण उडेव मळनी नयी. तो पछी तेनी राणी मेमदेवी अने तेणे बांधला तुमूलसोमविहारनी तो शी बात करवी ! लेडीआचार्य मुद्दमिक्खा टीकानो उल्ले7 का छे, ने कद टीका नेते ममनातुं नयी. सिंहलद्वीपमा • मुमङ्गलम्पसादनी' नामनी ने बुद्दसिक्तानी टीका प्रसिद्ध छे तेमां आ उतारो मळनो नवी; अने ने तेमा होवा, पण कारण लागतुं नथी. कारण ए छे के नेनो का सिंहलद्वीपनो रहेवासी होवायी “सिंहलद्वीपे " लम्बे एम लागतुं नथी. अर्थात् आ टीका कोट ब्रमी आचार्य लखी हशे. ते ब्रह्मीमापामा ज लम्बाइ होय तो तेमा नवाइ नथी. ने आचार्य करेलु · तुमूळसोमविहार 'नुं वर्णन काल्पनिक न हो. लेडी आनायें रोजशब्द उपर बनावटुं पाण्डित्य पण आवान प्रमान थे. आाडो मोटो बिहार नो मिहनीपमा होत तो तेनो महावंशमा के बीना कोई प्रथमा कोदक टकाणे तो उहंव मळत; अने भाने तेना अशेष कोइ पण नन्याय म्बात्रीची मळन. पण सिंहलद्वीपमा लेनो जरा एण पत्तो नी. आ प्रमाणे अनुरुद्धाचार्यनी वापतमा मदनी माहीती अथरी होड केटलेर देकाणे परस्पर विरुद्ध छ; तो पण आ आनार्य काचीपुर (हालतुं कांमीवरं ) शहरमा अपवा नेनी भानुबान हम्पीमनना ११मा मेकाना [१] मन्तमा अवा पारमा काना प्रारंभमा पया हा मोइए एटलुं अनुमान कर सराय . मिपमा प्रख्यात पराक्रममानी कारकीदीनी शरु- भात इ. स. ११९नी साल्मा पर अने ने पछी तेणे १२ वर्ष एकात्री राज्य क. पोनानी कारकीदीमा मोर धर्मनी उमति माटे नेणे अनेक कामो कर्म. तणे पोतानी रामधानी पुरस्थिपुर (मिहलीमा पोलोनरुवा) भी भीक मेगान नामनो मोटो विहार मेधावी तेमा सारिपुत्त नामना महामति माटे निवासस्थान करी भाप्यु, एतु वर्णन महावशमा मळे मा मारिपुत्त म्पविरे अनेक प्रयो सम्यासे. तेमा सिंहलीभाषामा नवेली अभिधम्मल्यमगहनी टीका पण . तेना आधारे मुमंगलम्पविर नामना मना शिष्य निभावनी टीका पालीभाषामा लखी. अर्थात् अनुरूदानार्यनो समय मारिपुत्सम्यविर पहला ओवामा भोग पचाश वर्ष पहेला होपो नोइए हम्पीमनना अर्गाआरमा मानना अन्नमा दक्षिण हिन्दु-यानमा भनीवरनी आनुमान पणा प्रथारो पड़ गया. गंधवंशमा कयं क.. युददतापरियो, आनन्दानरियो, धम्मपालाचरियो, द्वे पुन्माचरिया. महावनिरसुद्धानरियो, बुलवनिरनुदानरियो, दीपंकराचरियो, मुलधम्म- पालापरियो, कम्मपामग्यिो नि इमे दमानरिया नम्बुदपिका हेहा- वुधप्पकारे गन्ये अमु.' भामा • पुब्बावरिया' (पूर्वापार्य) कोण हता ए समनातुं नयी बालीना आमाणे विषे पण अनुरुद्धापार्य प्रमाणे तेमना प्रयो उपरात स्वारे माहीती मळनी नथी. आनु कारण एवं हशे के आ आनयों पड़ी पोडा समये अन्यन्न असहिष्णु शेरधर्मनो प्रनार दक्षिण हिन्दुम्पानमा भयो. मामिलभाषामा हलमाहात्म्य नामर्नु एक पुस्तक छे, अने तेमा इल नामना शेव मन्यामाए बौद्धो अने नैनोनो केवी रीते नाश कर्णो तेन विस्तृत वर्णन . एयु माग सामळवामा आन्युं छे. आवी गतिमा मनीवरनी आन बान भाबेग्ला बौद्धविहारनु नाम पण नधी एमा शं . .
आश्चर्य छे! मारा विचार प्रमाणे तुमूलसोमगिहार पण आन प्रदेशमा हतो; अने ने • नंग' नाना गृहये । अभियग्मत्यमंगद' लालवानी अनुरुद्धाचार्य ने प्रार्थना कोली ते पग नामोल नानिको हतो. आ सर्व आचार्यांना ग्रंथो सिंहलद्वीपमा पहेंची गया होगायी आने हयात छे; नहिं तो तेभोना विहारोनी ने गनि थट ते नेओना ग्रंथोनी पण थान ते कहेवानी जरुर नथी. आ ग्रंथतुं मंशोधन मोटे मागे प्रण नुदा जुदा पुस्तकाने आवारे करेलुं छे. तेगानु पहेलु हेवियन्तुटुवे देवमितन्यविरे युद्ध मंवत् २४३२' अपवा इस्त्रीमन १८८(ना मालमां मिलीलिपिमां कोत्रोमां प्रसिद्ध करेलुं छे. तेना मेदो 'मी' असाथी बनावेला छे. वीनुं विभावनी टीका साथे ब्रमो शफ १२६८नी मामा कविमेहामेमे रगुनमा प्रसिद्ध करेलु पुस्तक छे. आमांना पाठभेद 'म' अक्षायी बनावेला छे. तीनुं पाली टेक्स्ट सोसायटीए १८८४ नी मालमा पोताना जर्नलमा गमनालिपिमा प्रसिद्ध कर्यु छे. आने संशोधन नोके पालिमापाना प्रसिद्ध विद्वान् प्रो. हीस डेवीडसे कयु छे छतां ते वरावर शुद्ध न द वाथी नेना पाठभेद नॉच्या नयी. आरम्पण' शह मिहली आवृतिमां : आटम्बन' रूप अने अमी आवृतिमां ' आलम्बण ' रूपे मळे छे. परतु मूळ · धम्मसगणि ' वगेरे ग्रंथोमां' आरम्मण' शहज आवतो होवाधी अन दरंक जगाए कन प रहे एवा हेतुथी तेन रुपनो स्वीकार कों . • तापन ' शद्र सिंहली आवृत्तिमा • वोत्थपन ' अने अभी आवृतिमा • बोटब्बन ' भने पालिटेक्स्टसोसायटीनी आवृतिमा • वोत्यप्पन' रूपे मळे . आ उपगन मीना नहि नेवा फेरफारो गुदी मुदी आवृत्तिभोमा छ. पातु विभावना टीका अने लेटी आनार्यनी परमत्यदीपनी टीकाना आधारे बर बर विनार करी मे पाट योग्य लाग्या नेन म्बाकाया है. विन्तारना मपी बोरा पाटोनो निर्देश का नथी. पण 1-1 बन्ने पाट नीकारवायी भावन
या पार योग पा. मलमा मुकी कानो पाठ
Feation.
एमापन · भनुमविले. मिरी भने ममी
TRA arre प्रमाणे पारिराम पारपानी पनि
RAN र पिन्नी, पण नो उपयोग क नगार
पानी नानापमा पार कर होगायी मक्षा
HERE REE मोरनी सहभाभोर (मारपत्र ऐबर)
आरिम आय. आधी पाली मयामा पारि काम
HE STमा आधुनि. मारने मां रद देवमित्र यविग्नी
ri nierian आकराची नो निःश करेगी नपी
Fox मट गोमटानी गाधिभोगापारीमानी पी आरडा
'.
If afrailai पेरेनापनी पति अती गुदी .
भारणपनो मार न करता सरीन पारिमाफ पाया
4 धी गमान्दारी मा. अनुषामणिका माम म्हेतु
भार माटे पेरेगाफ पती आपला मुकंग. फोर्म पाया पछी कई
धोका अनुम्यार.टी. मात्र गरे उटी ग देनाया पण
रेप मामा मालय एम धारी मनु दं शुभमर. आप्यु
at पामरन मा अव भुलो सरत न आनी मशे
पनी भाशा
५. गूनगत विद्यापीट म्यापे पुगनत्तमदिर मान
yी नेना गाना गुमगनी मारामा म छनकी योग्य
गणात. पग नेनु मने पर मानी गगन पुरातत्त मंदिरना मन्त्री
श्री. मात्र परीनी गनगनी अनुवाद करवाना याममा
मान महान मा तेम पर अदास्य थात. आ पाद माटे तमना
[१९]
मापारी . पाना मातना पारको तेनो पोरो गणो जयोग सोते
९ हेतुसी प्रस्तावना नागरी सीपीमा नापी.
गुमरात पुरातन मंदिर,
भारतुन वा । मं. १९७९
पमानद फोसम्नी.
अभिधम्मत्थसंगहो २. १. (चित्तसंगहविभागो.) नमो तम्ग भगवती भराहतो सम्मापुदसा । सम्मापुदमनल ससदम्मगणुपर्म । अभिरादिय मासिम्स अभिधम्मत्यसंगई तत्य युसाभिधम्मत्या धनुषा परमत्यतो । पित पेनमिर्फ स्पं निम्यानमिति सन्यया ।। तस्प पिसं वार पनि होति, कामावर, रूपावचरं, मरूपाषपरं, लोपरं पनि । ३. मत्य फतम कामापचर ? सोमनस्ससहगनं दिहिगतसंपयुत्तं असंखारियां, ससंखारिपागे । सोमनस्ससहगत दिहिगतविप. युतं असंसारिफमेर, मसंसारिफमेर । उपेरखासहगर्न दिहिगवसं. पयुष मर्मरसारिफर्म, ससंसारिकमेकं । उपरखासहगत दिद्विगत- विपपु अर्गखारिफमेकं, सखारिफमेकं ति इमानि मह पि लोभ- सहगतानि पिखानि नाम ।। ४. दोमनस्ममहगतं पटियसंपपुचं असंखारिकमेक, ससंखारि- फमेकं वि इमानि दे पि पटियचित्तानि नाम ।। ५. उपरखामदगतं विचिकिच्छागंपयुत्तमेकं, उपेक्सासहगतं उद्धचमपयुत्तमेकं वि इमानि दे पि मोमूहचित्तानि नाम ॥ इपर्व सम्पया पि दादसाकुसलचित्तानि समचानि ॥
૨ वित्तसंगहविभागो अधा होमम्लानि दोसमूलानि च दिया। मोहम्लानि च हे नि हादसासला सियुं ॥ ७. खासागतं चरसरिया। तयासोतरियागं, पारि म्याग, निमाविमा दरखसहगतं कायविमानसासा माटिरऽनविन । गाखामागनं सन्नीरणनित पैति इमानि हर कि मामलसिफपिसानि नाम ॥ ८. रसासागतं चामिया या मोरिमार्ग, पारि मार्ग, निनाविभाष । मुसमाग कापरिम्नान। बरसागा मरटिशननिर्ग। गोपनस्ममहगतं मंत्रीरविन। सामान मीरणनि मिानि मा विगविणानि मार। ৬. হামাগাস বায়ানসি মনীয়ান- पिता गोपनगमगले मिपापित गति इमानि नीगिरी मोरपिाचिनानि नाम ॥ খিী গলা rি গনি । ... गलामालगानि गुमानि माया। कियानिनानिमीणी नि मारग महतुका । ११. नानि गोमनानी गरे। पानामिनानि प्रनाinा। १०.पा पागन अमेगापि, ft. गई। मामनगगहा मार्गात नाशिक, गraft. tima बाप मागित. ITTEE It infrint Arterfi कमालगानि माम । १३, मारामानने मnfrritatifie. म् intrest, Ritifier ३ A पठभो परितोदो मक परयाणाग याणम्पपुर्न अग्रसारिकमेनं, समसारिकमेक। पेरखासदगलं माणरिपपुर अमरसारिफमेक, ससंवारिकमेकं ति मानि अपि सहेफफामावचरविपाविधानि नाम । १४. सोमनसम्ममहगर्न थाणमपयुन अमखारिफर्मर्फ, सखा. रिकमेर। सोमनगमहरात बाणरिपयुषं असंसारिफमेकं, ससं- सगरिफरक । रसासहगर्न भाणमंपयुक्त असंखारिफमेक, ससंसा- रिषउपरखासहगत पाणरिप्पयुत्तं असंखारिफमेकं, ससंखारि- फमे नि इमानि अट्ट पि सोफफामापचरक्रियाचितानि नाम ।। पत्र पम्पया पि पचीसति सहनुकफामाश्चरकुसलविपाक- नियाचिद्यानि ममतानि ॥ १५. वेदनाषाणसंसारभेदन पतृवीसति । सहनुफामावचरपूभ्यपाफक्रिया मता ॥ फामे तेवीस पाकानि पुम्मापुमानि वीसति । एकादस प्रिया पेति चतृपयास सम्पया । १७. विवरविचारपोनिमुखकम्गतासहित पठमझान कुसलचित। विचारपोविगुरफग्गतासहितं दुतियम्मानकुसलचितं । पोतिसुखेक- ग्गतासहितं दतियम्मानकुमलचिचं । मुखेफगतासहित चतत्पशान. छुसलचिर्च । उपपखेकग्गतासहित पचमझानसलचित्रं चैति इमानि पश्च पि रूपावचरकुसलचितानि नाम ॥ १८. विवफविचारपीतिमुरोफग्गतासहितं पठमझानविपाफचित। विचारपीतिमुखकग्गतासहितं दुवियम्झानविपापचिचं । पीविमुखे. फग्गनासहित तिपज्झानविपाकचित्त एखेकग्गतासहित चतुत्यज्मा- नविपाकचितं । उपरोकगनासहितं पञ्चमझानविपाशचि चेति इमानि पश पि रूपायचरविपाकरिणानि नाम ।। १९. विवफविचारपीविमुखपग्गतासहित पठमशान कियाचित्र ।
0.
चित्तसंगहविभागो
विचारपीतिमुखेकग्गतासहितं दुतियज्झानक्रियाचित् । पीतिमुखे-
फगतासहितं ततियम्झानक्रियाचित्त । मुखकम्गतासहितं चतुत्य
ज्झानक्रियाचितं । उपेक्लेकग्गतासहित पञ्चमझानक्रियायिन वेति
इमानि पञ्च पि रूपावरक्रियाविचानि नाम ।
इचे सन्बया ५ पमरस रूपावचरकुसलविपाकक्रियाविधा
नि समतानि ॥
२०. पशधा शानदेन रूपावचरमानसं ।
पुमपाकक्रियामेदा त पञ्चदसधा भये ॥
२१. माफासानचायतनसलचिरी । विमाणचायतनसल.
विगं। माफियापनमलपि । नेपसानासम्मायतनस•
लनित गेनि इमानि रसारि पि अरूपायपरामलपितानि नाम ॥
२२. भाकासाननायमनविपाकगिरी । रिमाणवायतनविपाक.
गिरी माफियापतनापाकविरा । नेयमम्नानागम्भापानी
पारचितं गेनि इमानि गणारिपि भरूपाचरविपाकषितानि माम।।
२३. भाकामानापानक्रियागिन। विभागवायतन क्रियापित।
নিয়মনzিযাগি। নামযশনবািকি
तिमानि पनारि नि अम्पायरक्रियापिगानि नाम ।।
ग गया कि दादग भलायलिमिपापि.
जानि ममानि॥
२४. बालमनणभेदेन गनुपाएपमान ।
यारियाभेदा गुन सागपाति
२०. मोनानिमाविणापिपाणगिर्भ । भनागामिष.
पनि । आमा तिमानि पनारि .
सरितानि नाम।
पठमो परियो २६. सोतापचिफलचितं । सकदागामिफलचितं । मनागामि- फलचित्तं । अरहत्तफलचितं चेति इमानि पत्तारि पि सोडचारि- पाकचित्तानि नाम ॥ श्वं सन्चया पि अलोकुचरकुसलविपापचितानि समचानि ।। २७. पतुमग्गप्पभेदेन पशुपा कुसलं सया । पाकं सस्स फलचा ति अट्टधानुचर्र मतं ।। २८. दादसाकुसलाने फुसलानेकवीसति । छतिसेव विपाकानि प्रिपाचित्तानि वीसति ।। २९. पनुपञ्आसपा फामे रूपे पन्नरसीरये। पित्तानि दादसाएप्पे महयानुचरे सपा । इत्यमेननपतिप्पमेदं पन मानसं । एफवीरासतं वाय विभजन्ति विचक्षणा। ३०. फयं एकूननवृतिविषं पित्तं एफवोससत होति । वितषि- भारपीनिमुखेकगतासहित पठमझानसोवापचिमग्गचित्रं । विचार पीतिमरोफग्गतासहित दुवियम्झानसोतापचिमग्गचिच । पौविमुणे- फग्गवासहितं बतियम्मानसोतापत्तिमग्गचित । मुखकग्गवासहित चतुत्यभानसोदापचिमग्गचित्र । उपक्रोफगतासहितं पश्चमम्झान- सोवापतिपगचित्ते चेति इमानि पर पि सोतापचिपगचितानि नाम ।। सपा सकदागामिमग भनागामिमग मरहसमगपिच पति समबीसति मग्गविधानि वा फलविधानि वि समरपालीस छोरचाविधानि भरन्ती ति ।। २१. भानगयोगभेदेन कत्येक तु पनपा। पुचमानुचरं वि पत्तागोस विष लिप॥ यया प रूपावरं गपसानुपरें दया । पठमादिग्झान भारुप पापि पत्र ।
चेतसिकसंगदविभागो
एकादसापिय तस्मा पटमादिकमीरितं ।
शानमेकैकमन्ते तु तेवासतिवियं भरे ।
सत्तविसवियं पुत्रं द्विपञ्चासविधं तया ।
पाऊमिगाहु वित्तानि एकवीससतं युपा ॥
इनि अभिधमत्यप्तगहे चित्तसंगहविभागो नाम पठमो परिच्छेदो।
३.
(चेतसिकसंगविभागो.)
१. पापादनिरोपा च एकालम्बनवत्युका ।
गेतोयुगा मिपमास पम्मा चेतमिका मता ॥
२. कय ? फम्सो, पेदना, सभा, चेतना, एफग्गना, नीतिति.
दिप,मनगिकारोमि गतिमे गैगिका सम्पचिरामाधारणा नाम।
तिमी, विपारी, अरिपोरखो, पिरिय, पीति, छन्दो पा
froइमे गेमिका पकिरणका नाम ॥ परमो रग तरिका
मात्रगमाना ति पेदितम्या ।
५. गोहो, पहिरिन भनोगण, उदणे, लोमो, दिल, मानो,
दांगी, गा, माणग, बर्ग, पोन, मिदं, शिगिरि पनि
मुरमित गिा महगला नाम ।
.. गटा, मति, दिगि, ओगण, भालोमो, पदोगो, नत्रमा
नता, कारदि, गिलाद, कामना, गिला, काप
ता, पिता, कायाम्मश्रा, पिना, ITEM
मा.
मिना, कामना, मि, If पानी.
मनियमिता मोमनमागरणा नाम ।
दुतियो परिषदो ६. सम्मावाचा, सम्माफम्मन्तो, सम्माभागीयो चेति तिस्सो पिरतिपो नाम । ७. फरणा-मुदिता पन अपमभ्यायो नामा ति सबया पि पनिन्द्रिपेन सदि पञ्चवीसतिमे चेवसिका सोमना तिपेदितम्या। ८. एचावा घ- तेरसअसमाना प पुद्दसासला तया। सोमना पनवीसा ति दिपनास पयुचरे ॥ ९. सं विचावियुचानं यथायोगमिठो परं । चिचुप्पादेसु पकं संपयोगो पचति ।। सत्त सचत्य पुजन्ति पयायोगं पकिष्णका । नुहसासलेस्पच सोमनेस्व सोमना ॥ १०. फपं ? सम्बचिचसापारणा ताप सत घेतसिका सम्म पि एकूनन विचिमुपादेमुलम्मन्नि । ११. पकिष्णमु पन वितको साव द्विपश्वविश्वाणवजिवकामा- वचरविचेमु र एकादसम पठमज्झान चिचेमु चेति पञ्चपञ्यास- विचेमु उपजति ॥ विचारो पन तैमु चेर एकादसमु दुविपज्झान- चिचेस पनि छसहिचिनेमु जापति॥ अघिमोक्खो दिपश्चविण- विचिकिच्छावज्जिवचिचेमु ॥ पिरियं पसद्वारावज्जन-दिपञ्चवि. ध्याण-संपटिच्छन-संतीरणवज्जितचिचेमु ॥ पोति दोमनस्सुपे. पखासहगत-कायविआण-चतुत्यग्झानवग्जिवचिचेच ॥ छन्दो अहे- तुफ मोमहवग्जितचिनेमु लम्भति ॥ १२. वे पन चितुपादा यथाशमं- उसहि पञ्चपास एफादस च सोळस । सचवि पीसति पेव पफिष्णकविवज्जिता ॥
चेतसिकर्मगहविमागो पञ्चपञ्चास छसविसत्तंति विसत्तति । एकपञ्यास चेकूनसत्तति सपकिण्णका १३.. असलेल पन मोहो, अहिरिक, अनौचप्पं, उद्धचं चेति चत्तारोमे चेतसिका सब्बाकुसलसाधारणा.नाम.! सम्वेमु पि. द्वाद: साकुसलेमु लमन्ति॥ लोभी अहम लोमसहगवचिचेस्लेव लन्मति॥ दिट्टि चतुम दिहिगतसंपयुत्तेछ । मानो चतुम दिटिंगतविप्पयु. चेच ॥ दोसो, इस्सा, मच्छरियं, कुचं व दीम पटियचिम् ॥ यीनं, मिद्धं पञ्चमु ससंखारिफचिंत्तनु । विचिकिच्छा विचिकिच्छा. सहगतचित्ते येव लम्मती ति॥ १४. सबापुञ्अनु चत्तारो लोभमृले तयो गता। दोसम्लेम पत्तारो ससंखारे द्वयं तया । विचिकिच्छा विचिकिच्छापिसे चेति चुद्दस । द्वादसाकुससेस्पेव संपयुज्नन्ति पञ्चवा ।। १५. सोमनेट पन सोभनसाधारणा तार एकूनवीसति चेतसिंका सोमु पि एकूनराहिसोमनचित्तेनु संविज्जन्ति ॥ विरतियो पन निस्सो पि लोकुत्तरचित्तेसु सध्यथा पि नियता एकता पलभन्ति । मोफियेमु पन फामावचरकुसलेस्येव कदाचि संदिस्मन्ति विमुं विभु। अप्पमन्नाफे पन हादसा पचमझानाधिनतमहम्मतचिनेस चेर फामायचरकसलेसु च सहेनुफकामाश्चरमियारिनेम चेति अहवीसति- चित्तस्यैव कदापि नाना हुला जापन्ति ।। उपेक्सासहगोमु पनत्य करगामुदिना न सन्नी ति केचि बदन्ति ॥पमा पन दादसा माणसंपतकामारपरचितमु पर सम्वेगु पञ्चनिसमागलोपर- चितमु पैति मचयत्ताळीसवित्त संपपोर्ग गन्छती वि ॥ ११. पानसरीमति पम्मा मापन्चेछनमाहिए। यो मौसचिन अतीसनिय ययं ॥ -- , दुतियो परिपोदा पञ्षा एकागिना सपनमारोगविधेम रि पपुषा घदे सोभनेपेच सामना । १७. इस्सा-मच्दर-प-विरती करणादयो। नाना कदापि मानो घ यीनमिदं नया सह ॥ पपायुगानुसारेन सेसा नियतयोगिनो । गंगई प पररसामि तेम दानि पयारई॥ १८. छचिमानुपरे पम्मा पश्चतिम महगते । अतिसापि ममन्ति फामावचरसोमने ॥ सनबीमत्यपुवन्दि दादमाहेनुफे नि च । ययाभपयोगेन पञ्चधा सत्य संगहो । १९. फयं ! लोकुचरेमु ताव अमु पठमग्मानिपित्तेमु अध्य. समाना तेरस चेतसिफा, अप्पमयावनिता तेवीसति सोमनचेत- सिफा घेति एचिस धम्मा मंगई गच्छन्ति क्षया दुतियम्मानिफ- चिसेगु वितधावन्ना ॥ तनिषदानिशवितेमु विवफविचारव ना ।। पत्यज्ज्ञानिकचिनेनु विवाविचारपीतिवन्जा ॥ पश्चपज्झानिकवि- मु उपेपरखामहगता से एव मंगरहन्नी ति सम्पया पि भट्टा लोकृत्वरचितमु पञ्चमझानवसेन पञ्चधा व संगहो होनी वि ।। २०. छत्तिस पञ्चतिसाय पतिस पपाम्म । तेत्तिस दूपमिघवं पश्चानुपरे ठिता ।। २१. महगतेमु पन सीमु पटममानिफचिमु ठाव अम्भसमाना तेरस पेसिका विरतित्तयवजिता दावीसति सोमनचेतसिका पति पञ्चतिस पम्पा संगई गच्छन्ति ॥ फरणामुदिना पनेत्य पधेकमेव पोजेनम्या ।। सपा दुनिय मानिकचितमु निकलना । समियम्झा- निकवितेमु वितरविचारवजा । चनुन्य झानिकचितेनु विनकवि- पारपीविवजापनमग्झानिकचित्तमपन पन्नरसा अपमध्यायो hi
८
घेतामकमेगायिमागो
पचपन्यास इससितंति निसत्तादि ।
एफपत्र्यास चेकूनसत्तति सपकिरणका ।।
२३..असलेस पन मोहो, अहिरिक, अनोचप्पं, उद्धच में
चत्तारोमे नेवसिफा सब्याकुसलसाधारणा नाम.! सबेम पिदा
साकुसलेमु लमन्ति। लोमो अट्टस लोमसहगतचिचेवेव लन्मति
दिहि चम दिद्विगतसंपयुचेमु । मानो चम दिटिंगतविष्य
चेमु ।। दोसो, इस्सा, मच्छरियं, कुकचं वदीम पटियचित्तम
यीनं, मिद्धं पञ्चसु ससंखारिकचित्तेमु । विचिकिच्छा विचिकिच्च
सहगवविचे येव लम्भवी हि ।।
१४. सन्यापुञ्जेनु चत्तारो लोममूले तयो गता।
दोसमूलेम चत्तारो ससंसारे द्वयं तथा ।
विचिकिच्छा विचिकिच्छाचिचे ति चुद्दस ।
द्वादसासव संपयुमन्तिः पञ्चवा-।।
१५. सोमनेमु पन सोमनसाधारणा वाय एकूनवीसनि वेतसिः
सम्वेमु पि एक्नसहिसोमनचित्तेनु संविज्जन्ति ॥ विरतियो प
तिस्सो पि लोकृत्तरचिनेम सम्बधा पिनियता एकतो व लन्मान
लोकियेमु पन फामावचरकुसलेस्वर कदाचिसंदिस्मन्ति विमुं विध
अपमनायो पन दासमु पञ्चमझानडिनवमहम्मतचिनेन ।
फामावचरकुसलेमुच सहेतुककामाश्चरक्रियाचितेन चेति अधोसहि
चिस्पेव कदाचि नाना हुवा जायन्ति । उपेक्खासहगतमु पने
फरगामुदिता न सन्ती ति केचि वदन्ति । पञ्चा पन द्वादसा
माणसंपयुत्तकामावरचित्तेमु चैत्र सन्चेमु पञ्चतिसमहगवलोइत्तर
चिन्म घेति सचपचाळीसचिचेम्म संपयोग गच्छवी वि ।
१६. एकूनवीसवि पम्पा जायन्तेछनदिमु ।
धयो सो सचिचेस अनीसतियं मयं ।।
दुतियो:परिच्छेदा पया पकामिना गवरपाळीमविधेमु नि। संपयुत्ता पदेयं मोभनेस्पेव सोभना । १७. इस्सा-मच्छर-प-विरती-फरणादयो । नाना कदापि मानो घ पीनमिदं मया सह ।। पपावृतानुमारेन सेसा निपनयोगिनो। संगदं च परपखामि ते दानि यथारई ।। १८. सिमानुचरे पम्मा पश्चनिंग महगने । अतिसापि सम्पन्ति फामावरसोमने ॥ सनदीमत्यपुवमिद दादसाहेनुफे ति च । यपासंभवयोगेन पचया सत्य संगहो । १९. फर्य ? लोकृत्रेम साब अहमु पठमग्मानिकचित्तेमु अध्य- समाना सेरस नेतसिका, अप्पमपारजिता तेवीसति सोभनवेत- सिका पति एतिम धम्मा मंगरं गच्छन्ति ।। मया दुतियम्झानिफ- चितमु वितावना ।। सनियमहानिरूचिनेमु विवफविचारवाना ।। पत्यज्झानिफपित्तेमु विना विचारपीतियना । पचममानिफपि. तेच उपरखामहगता से एव संगरहन्नी ति सम्पया पि अगु लोकृत्तचित्तम पञ्चरुग्शानवसेन पञ्चपा व संगही होती ति ॥ २०. छतिस पश्चतिसाय चतुर्तिस ययाम्म । तेनिस पमिथवं पञ्चपानुत्तरे ठिता ॥ २१. मगानेस पन नीगु पठमझानिफपिचेगु वाव अम्भसमाना तेरम चेतसिका विरतित्तयवजिता दाबीसति सोभनचेतसिका पेनि पञ्चतिस पम्मा मंगई गच्छन्ति ॥ फरणासदिना पनेत्य पधेकमेव योजेनब्बा ॥ नपा दुनिय-झानिकचिनेमु चिनकवना । सनियम्या. निफविनेमु चिन विचारवजा । चनुन्य शानिकचित्तेनु विनफवि. पारपीवियजा ॥पनमम्मानिफचित्तमु पन पनरसम् अप्पमनायो घेततिकसंगतिभागो न लन्मन्ती वि सम्बया पि सचत्रीसविमहगवचित्तेस, पाकमान बसेन पञ्चपा व संगहो होती ति॥ २२. पशनिस चत्तिस तेत्तिस च ययाकर्म । पत्तिस व तिसति पश्चया व महम्मते ।। २३. कामावचरसोभने पन कुसलेमु ताव पठमये अन्यसमाना तेरस चेतमिका, पश्चीसनि सोभनतसिफा चेति असि धम्मा संगई गच्छन्ति ॥ अपमाविरतियो पनेत्य पञ्चपि पचेकमेर पोजेतम्या ॥ नया दुनिययये माणजिता । वतियाये माणमए- युत्ता पीनियनिता। चतुत्ययये भाणपीतियबिताते एस मंगयनि ।। कियाचिरोम पि विरतिवग्जिता तयेर पहम पि दुम धनुषा । संगरन्ति ॥ तया विषामु ग अप्पममारिरविवग्निता वे एर संगहन्नी नि सम्बया पि चीसतिफामावपरसोमनधिमक परोन मादसवाय मंगहो तो नि । २४. महनिस मानिस यं तिसरं घमे । पनिस पनिग दर्य तेत्तिसके क्रिये ॥ मेनिस पाके पगिरा दकतिमा भरे। मोनुभकामाश्यपूनपाकियामने ॥ नग्जिनेय रिती क्रियाय ए मागरे । अनुगर अपमध्या कामगार सं तया ॥ अनुगरे धानसम्मा पमनाप मग्निमें । विती बागपती र परिमा रिमगा। २०. महमला पन मोमम्मेगु नार पर्म भागारिक मामा. माना गण मिता, महमलमारणा बना पालिसा कामविही पदि पानीति पम्मा गनिस २१ दुतियो परिच्छेदो दुतिये असंखारिके लोभमानेन । सतिये येव भीतिपजिता लोभ. दिहीहि सह अट्ठारसा चतुत्ये तपेव लोसमानेन । २६. पञ्चमे पन परिपसम्पपुत्ते अमखारिके दोसो, इस्सा, मच्छ. रियं, कुमुचे चेति पतूहि सदि पीविषन्जिना ते एव वीसति धम्मा संगहन्ति ।। इस्सामच्छरकुमचानि पनेस्य पन्चेकमेच योजेतन्यानि ॥ ससंखारिरुपञ्चके पि तयेव पीनमिदेन बिससेवा योजेनच्या ॥ २७. छन्दपीविवजिता पन अञ्चसमाना एकादस, अकुसलसा- धारणा चचारो पा वि पमरस धम्मा उद्धवसहगते सम्पयुजन्ति । विचिकिच्छासहगतचित्ते च अपिमोक्खविरहिता विचिकिच्छासह- गता तपेव पारस पम्मा समुपलब्भन्ती ति सन्धया पि द्वादसाकु- सलचितुप्पादेश पच्चेक योनियमाना पि गणनवसेन सत्तथा व संगहिवा भवन्तीति ॥ २८. एक्नवीसट्टारस वीसेकवीस वोसति । दावीस पन्नरसेति सधाकुसले ठिसा ।। साधारणा घ घसारो समानाघि दसापरे । चुदसेवे पच्चन्ति सम्घाकृसलयोगिनो ॥ २९. अहेतुकमु पन इसननिचे नाव .सन्दवजिता अभ्यसमाना द्वादस धम्मा संगहें गच्छन्ति । तया वोहपने छन्दपीतिमजिठा। खसंबीरणे छन्द्रविरियवखिता। मनोघानुत्तिकाहेनुकपटिसन्धि. युगले छन्दपीतिविरियजिता । दिपचविश्वाणे पकिरणकवनिता से पेव संगरहन्नी ति सम्बया पि भहारसम् अहेतुकेमु गणनवसेन पतृषा व संगहो होती नि॥ १०. दादसेकादस-दस सत्र सावि चनुम्बिधी । पदारसाहेतुकेन चित्तुप्पादेन संगहो। ।
पमिंगषिमागो अहेतुामु सम्पत्य मन सेपा ययाई । इति वित्यारतो वृत्तो तिमधिगहो । इत्यं चित्तावियुतानं मंपपोर्ग च संगई । सत्ता मेदं यथायोग चित्तेन सममुद्दिसे ।। इति अभिधम्मत्यमंगई नमिकमंगविमागो नाम दुतियो परिच्छेदो॥ (पकिण्णकसंगहविभागो) १. संपयुत्ता यथायोग तेपास सभावतो। चित्तचेसिका धम्मा तेसं दानि यथारहे। वेदनाहेतुती किचद्वारारम्पणवत्युतो। चितुप्पादवसेनेव संगहो नाम नीयते ॥ २. तत्य वेदनासंगहे ताव तिविया वेदना, मुखं, दुक्खं, अदुक्ख- ममुखं चेति । मुखं, दुक्खं, सोमनस्सं, दोमनस्सं, उपेक्खा विव मेदेन पन पञ्चधा होति ॥ ३. वत्य मुखसहगतं कुसलविपाकं कापविनाणमेकमेव । क्या दुक्खसहगतं अकुसलविपाकं कायविआणं ॥ सोमनस्ससहगत- चिचानि पन लोममूलानि चत्तारि। द्वादस कामावचरसोमनानि । मुखसंतोरण-हसनानि च दे ति अट्ठारस कामावचरचित्तानि चैत्र पठम-दुतिय ततिय-चतुत्यज्झानसंखातानि चतुवत्ताळीस महात- लोकचरचिचानि ति दासहिविधानि भवन्ति ॥ दोमनस्ससहगत.
ततियो परिच्छेदो चिचानि पन दे पटिरचित्तानेव ।। सेसानि सम्बानि पि पनप. भास उपेखासहगतविचानेवा ति ॥ ४. मुखं दुक्खं उपक्खा वि विविधा तत्य वेदना । सोमनस्सं दोमनस्समिति भेदेन पनपा ॥ मुखमेकत्य दुक्खं च दोमनस्सं ये टि। दासहिम सोमनस्सं पनपनासकेवरा ॥ ५. हेतुसंगहे हेतवो नाम, लोभी, दोसो, मोहो, अलोभो, अदो- सो, अमोहो चा वि छदा भवन्ति ।। ६. सत्य पश्चद्वारावजन-दिपञ्चविभाण-संपदिच्छन-संतोरण-चो. पन-इसनवसेन अट्ठारस ओतुकचित्तानि नाम ॥ सेसानि सबानि पि एफसति चिचानि सहेतुकानेव ॥ ७. सत्यापि ट्रे मोम्हवित्तानि एकहेनुकानि । सेसानि दस अकु- सलचिचानि च प्राणविप्पयुचानि दाइस कामावघरसोभनानि पैति दावोसति दुहेतुफचित्तानि ॥ दादस माणसंपयुक्तकामाववर- सोमनानि चेव पनतिस महम्गतलोत्तरपितानि चेति सत्तचत्ता- लीस तिहेतुकचिचानी ति ॥ ८. लोभो दोसो च मोहो च हेतू असला तयो । अलोभादोसामोहा च कुसलान्याश्ता क्या । अहेनुकटारसेकहेतुका दे दुवीसति । दुहेतुका मता सत्त्वचाओस विहेतृका ॥ ९. किधसंगहे कियानि नाम परिसंधि-भरंगावचन-दस्सन-सर- न पायन-सायन-फुमन-संपटिच्छन-संतोरण-चोट्टपन-जवन-नदार- म्मण-चुनिबसेन नुदसविधानि भवन्ति ।। पटिमंधि-भदंगावमन- परियाणहानादिवसन पन तेसं दसपा गनदो दितमो ।।
पशिफार्मगनिमागो
१०, तन्य देउवायगनमंतारणानि भट्ट महाविधानि
च, नव रूपापविशाकानि वैवि पड़नवीसति चिचानि परिमेषि.
भवंग-चुनिकिधानि नाम ॥ आवननकिचानि पन है । वश
दस्सन-सवन-यायन-सायन-फुसन-संपटिन्छन किनानि च। वीनि
संतोरगकिचानि ॥ मनोद्वारावन्ननमेव पनद्वारे वोपनकिच सा-
पेति ॥ आवननदयजितानि इसलामाल-फल क्रियाविचानि
पञ्चपञ्चास जवन किमानि ॥ महाविपाकानि व संवारणचर्य वैनि
एकाइस तदारम्मगकिचानि ॥
११. तेमु पन दे उपरखासहगतमंतोरणवित्तानि पटिमरि-मा
ग-धुति-नदारम्मण-संतोरणवमेन परिचानि नाम ॥ महाविशा.
कानि अट्ट परिमंघि-मवंग-चुति-मदारम्मणवसेन पपिचानि ।
महगतविपाकानि नव परिसंधि-मवंग-युनिवसेन तिकिचानि !!
सोमनस्समागतं मंतोरणं संतोरण-नदारम्मणवसेन दुम्चि । तपा
बोपनं च योहानायजनबसेन ॥ संसानि पन मन्नानि पि जान
•मनोराचिक-विग्यविभागानि पयाममाककिचानी ति॥
१२. परिमंपादयो नाम फिचौदन घुधम ।
दमया ठानमैदेन चित्तुप्पादा पकामिना ।।
अहमहि तयाच नवह ययाम ।
एक-दि-ति-य-पशक्विद्वानानि निरिम ।
१३. दारमंग दारानि नाम, पम्पदा, मीनदार, शानदार, नि.
मादार, कायदा, मनांदार पति छनियानि मनि॥
१५. मन्या पासुमंत्र पामुद्रारं । मया मोतादयो मोनहापादीनि ।।
मनीदार पन मांगे नि पनि ।।
१. मन्य पशद्वारावर पारिभारियन-मंत्रीण
दोहाम-कामापन दान [पाय रिपनि
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पकिपणकसंगहरिमागो मुत्तानं च परिसंधिभवंगचुनिसंखातानं छवि पि ययामभत्र दै- सुय्येन भवन्तरे छद्वारगहित पच्चुप्पन्नमती पनचिभूतं वा कम्म कम्मनिमिच-गविनिमित्तसंमत आरम्मणं होति ॥ २२. तेस चतुविनाणादीनि ययाम स्पादिएककारम्मगा- नेव ॥ मनोयाचिकं पन रूपादिपञ्चारम्मणं ॥सेसानि कामावना- विपाकानि हसनचित्रं चेति सत्रया पि कामावचरारम्मणानेर । असलानि चैत्र आणविप्पयुत्तकामाचरनवनानि चेवि लोकतार जितसन्चारम्मणानि || नाणमपयुत्तकामावचरकुमलानि चैत्र पचन झानसंखातं अभिमाकुसलं चेति अहरत्तमन्गफलवन्निवसन्चार म्मणानि आणसंपयुचकामारचरक्रियानि र क्रियाभिआगे- हपनं ति मन्यया पि सवारम्मणानि ॥ आरुप्पेमु दुतियवनुत्यानि परगनारम्मणानि ॥ संसानि महगतचितानि सन्बानि पि पञ तारम्मणानि ॥ लोकुत्तरचित्तानि निन्यानारम्मगानी ति ॥ २३ पञ्चवोस परितम्हि छ चित्तानि महम्गर्ने । एफबीसति कौहारे अह निन्यानगोवरे । पीसानुत्तरमुत्तम्हि अग्गमगफलुम्झिने । पत्र सम्पत्य यति सतया मरय संगो।। २४. परयुसंगई यानि नाम पशु-गोत-पान-निहा काप- गदपवायु पनि थियानि मयन्ति ॥ तानि काम समानि मिसम्मन्नि । पटोंक पन पानादिक्षयं नत्यि ॥ अमरलोपन सप्यानि पिन मंदिनन्नि। २५. नत्य पत्र रिमायायो यपार एकनन पच पमार बन्यूनि निम्मार पनि ॥ पनदारानान गरिनगगाता पन मनांचा पदप निम्मिता यो पानि भयगंगा पन मनोरिष्मागगनुमंमाता च कारण मारि-परिपाप-नाम-
महत्यी परिष्ठेयो
मग-हमन-रूपाचररसेन हदयं निस्सार परचन्ति ।। अक्सेसा
इसलाहसलारियानुत्तरवसेन पन निमाप वा अनिस्साय या॥
भारुपविपाकरसेन दयं अनिस्सायेवा ति॥
२६. एयरधु निम्सिना कामे मत्त रूपे पविया !
तिरत्धु निम्मिनारूपे पान्येकानिस्सिता मता ॥
तेचचाळीस निम्साय देवताळीस जापरे ।
निरमाय च अनिस्साय पाझारुप्पा अनिस्सिता।।
इति अभियम्मत्यसंगहे पकिष्णकमंगहविभागो नाम
सतियो परिच्छेदो।
(वीथिसंगहविभागो)
१. चितुष्पादानमिसे कत्या संगइमुचरं ।
भूमिग्गलमैदेन पुग्धापरनियामितं ।
पपत्तिसंगई नाम पटिमन्धिपचिपं।
पपक्खामि समासेन यथासंभवतो कय ।।
२. छ वत्पूनि, छ दारानि, छ आरम्मणानि, छवियाणानि,
छ वोपियो, छदा विसयपत्रचि चेति घोपिसंगई छ हानि
पंदितम्यानि॥
३. बीपिमुत्तानं पन फम्म-फम्मनिमित्त-गतिनिमित्तवसेन ति-
विधा होनि विसयप्पवति॥
४. सत्य वत्दारारम्मणानि पुने पुत्तनपाने ।
५. परिमाण, मोडवित्रार्ग, पानविध्यार्ण, निम्हारिक
माण, फायविन्मार्ग, मनोविमाणे चेति छ विष्माणानि ।।
बीपि गाविभागो
एपीयियो पन नासुद्वारीपि, सोतमारपीपि, पाना-
বীঘি,
সিজীবি, ফারাবি, মনীৰাখি । "
বন না। পানিসালীঘি, বানিশীথি, থানায়
গীযি, নিয়াদিগীঘি, কালিখি মামি
যদি নীতিমালা না ধান্দানিনিষী খান
এ যান, মল, পরি মনি সী বয়ান
सारे रिभापरिभ शिक्षा गियानि पदिामा।
৫ । গান গাই বলি মাথ
গান ধন পা দিলাগান শবনমা। rি.
লাখ শিলাগীনি fলা বা
লাগা মাটি। দাম বা বগিগা
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चतुत्यो परिच्छेदो म्मणं परिचं नाम ॥ तत्य जवन पि अनुपवित्वा वित्तिक्खतुं वी- दुपनमेव पवति । ततो परं भवंगपातो व होति ॥ याव वोपनु- पादा च पन अपदोन्नातीतकमापाथमागतं निरोगासन्नमारम्मणं अतिपरितं नाम ॥ तत्य भवंगवलननेव होति, नत्यि वीथिचित. पादो॥इचवं चक्सुदारे, तथा सोतद्वारादिसु चेति सन्यया पि पञ्चद्वारे तदारम्मण-जवन-चोपन-मोषवारसंखातानं चतुनं वारानं ययामं आरम्मणभूता विसयप्पपत्ति चतुधा घेदितब्धा ।। १०. वीथिविवानि सतव चित्तपादा चतुद्दस । चनुपास वित्यारा पदारे ययारई ॥ अपमेत्य पञ्चदारे वीथिचित्तप्पवत्तिनयो । ११. मनोद्वारे पन यदि विभूतमारम्मणं आपायमागच्छति, सतो परं भवंगचलन-मनोद्वारावग्जन-जवनावसाने सदारम्मणपाफानि पश्चन्ति । ततो परं भवंगपातो ॥ अविभूते पनारम्मणे नवनाव- साने भवंगपातो व होति । नत्यि वदारम्मणुप्पादो ति ॥ १२. वीयिचित्तानि तीणेव चितुप्पादा दसैरिता । वित्यारेन पनेत्येकचचाळीस विभावये ॥ अयमेत्य परिचनवनवारो। १३. अप्पनाजवनपारे पन विभूताविभूवमेदो नत्यि। तया नदार- म्मणुप्पादो च ॥ सत्य हि माणसंपत्तफामावचरजवनानमहन्न अ- नवरस्मि परिफम्मोपचारानुलोमगोप्रभुनामैन चतुरखर्चे तिक्ख. तमेव वा यपाकम उपग्नित्वा निदानन्तरमेव यथार पनुवं पक्ष वा छब्बीसति महातलोत्तरजवनेस ययाभिनीहाररसेन ये फिश्चि जवने अपनावीथिमोतरवि ॥ ततो पर अपनामबनारसाने भवंगपातो व होति ॥ १४. वत्प सोमनस्ससहगतजवनानन्तरं अपना पि सोपनस्सस.
घोयिसंगहपिमागो लताव पाटिकंसिवन्ना। स्वासहगतजनानन्तरं उससानागा व ॥ सत्यापि कुमलनयनानन्तरं कुमलनानं नेत्र हेटिमं च फलद- यमति। यिानवनाननरं कियानर अरहरफलं पाति।। १५. इनित मुसान्नमा दादमावसका परं। सतिक्रियतो सह छ मंभान्नि उमेरसका। प्रयुग्मनान सेरखान कामानातिनुनो। तिनुकापक्रिपती वीनरागानमापना । अपत्य मनोदार बीपिवियपरनिनयो।। १५. सनया रि पनेय अनि? भारम्मगे भामगिराकानेर पश्यन्मिाण-मंगरिन-मनोरगनदारम्मगानि । गरि कानि ॥ मतिपन गोमनगमागानेर मनीरतदारम्मगानि॥ मवार गोपनम्मगागामिपानरनारमाने मोमनम्ममागा. ने नारमणानि मालि। अंगपामगरक्रियामानारमाने । गंगामागतानि होलि॥ १२. दोमनगगगनानारमाने पन नहारम्पयानि र मी. गानि गाहणतानेर मानि मम्मा गदि मोमनगारि. मरियम दामनग्गगहनानागाने नदारमगर्गयो मषि, भदाय विशि परिशिता परिनारमगपाराम गोपागाणा मोr तिनपनदि मांगोल मारिया मापागाजानारणानं बापागागमा पा. मारम्यगांगु मदाम्म पालो nि १८.नागनारयणान नि। Fratiमानदारयनrn बागनाम्पनिमा II 2.anita पतुत्यो परिष्दो एउवखनुमेव था जवन्ति ॥ मंदप्पनिय पन मरणकालादिसु पश्चवा. रमेव ।। भगवती पन यमकपाटिहारियकालादिसु लहुकम्पपत्तिय चत्वारि पश्च पा पचयेरखणचित्तानि भवन्ती वि पि वदन्ति ॥ आदिकम्मिकस्स पन पठमकप्पनार्य महगतनवनानि अभिजाज- बनानि च सन्या पि एफवारमेव जयन्ति । ततो परं भवंगपातो व ॥ चत्तारो पन मग्गुप्पादा एफपिचक्खणिका । ततो परं वे तीणि फलचित्तानि ययार उप्पज्जन्ति । ततो परं भवंगपातो ॥ निरो- घसमापत्तिकाले द्विक्खत्तुं चढत्यारुप्पनवनं जवति । ततो परं निरोध सति ।। युट्टानकाले च अनागामिफल वा अरहवफलं वा यया- रहमेकवारं उपज्जित्वा निन्दे भवंगपातो व होति ॥ सम्बया पि समापचिवोथियं भवंगसोतो विय वीथिनियमो नत्थी ति फत्वा पहनि पि लभन्ती ति॥ २०. सचरखतुं परित्तानि मग्गाभिमा सकिं मता। अवसेसानि लमन्त्रि जवनानि बहूनि पि ॥ अयमेत्य जवननियमो॥ २१. दुहेतुफानमहेतुफानं च पनेत्य क्रियानवनानि चैव अपना. जवनानि च न लमन्ति ॥ तथा प्राणर्मपयुत्तविपाकानि च मुग- तियं ॥ दुग्गतियं पन आणविप्पपुत्तानि च महाविपाकानि न लभन्ति ॥ २२. तिहेतुकेमु च खीणासवान कुसलाकुसलमवनानि च न लन्भन्ति । तया सेरखपुपुज्जनानं क्रियानवनानि॥ दिहिगतसंपयु- तविचिकिच्छानवनानि च सेक्सानं ॥ अनागामिपुग्गलानं पन पटियनवनानि च न लमन्ति ।। लोकुवरजवनानि व पयारई अरियानमेव समुप्पज्जन्ती वि ॥
२०
पीयिसंगरयिमागो
हगताव पाटिकंखिया। उपरखासहगनबनानन्तरं उपेसामागा
व ॥ सत्यापि कुमलनवनानन्तरं कुसलनानं चेत्र हेमिं च फला
यमप्पेति । क्रियानवनानन्तरं क्रियानवनं अरहत्तफलं चा वि।।
१५. दसि मुखपुञ्जम्हा दादमोपेरखका परं ।
मुसितक्रियतो अट्ट छ संमोन्ति उपेक्सका।
पुयुग्मनान सेक्खान कामपुननिहेतृतो
विहेनुकामक्रियतो वीतरागानमप्पना ।।
अयमेत्य मनोदार वीयिचित्तपत्रचिनयो॥
१६. सन्चया पि पनेन्य अनिट्टे आरम्मगे अमलविकानेर
पश्चविमाण-संपटिच्छन-मंतोरण-नदारम्मशानि । इडे कुमलविना
कानि ॥ अविहे पन सोमनम्ममहगवाने संतोरणवदारम्मगानि ॥
सत्यापि सोमनम्ससहगतक्रिपानानासाने सोमनस्मसहगता-
नेव सदारम्मणानि भवन्नि । उमेरमासहगतक्रियानरनारमाने
उपासासहगतानि दोन्ति ॥
१७. दोमनम्ममाननाबमाने पन तदारम्मगानि परम
गानि प उपायामहगतानेर मानि ॥ तस्मा यदि सोमनस्सादि-
मंपिकाम दोमनम्ममहगतनानारामाने नदारम्मगर्ममो नारिय,
गदा ये किञ्चि परिचितम परिमारम्पगमारग्म उससासागर
मनीरण पश्नति ॥ नमननरिया मांगपातोपोतो ति पनि
भावरिया ॥ नया कापावरनरनारसाने कामावरमदान कापा.
बरसम्मेगा आरम्मभूय तदारम्म सन्नी ति॥
१८. कारे नानमनारम्मगान नियों गति।
रिमोनिमान रहदारम्परिन ।
थपन्य नदारम्मनिपमा ॥
१०. मानेच परिचमानयियापारयानानानि म
यमुत्यो परिष्ठेदो छत्खनुमेव वा जवन्ति ॥ मंदपवत्तिय पन मरणकालादिसु पक्षवा- रमेव ॥ भगवतो पन यमकपाटिहारियकालादि लहुकप्परचिय चत्वारि पञ्च वा पचवेक्षणचित्तानि भवन्ती वि पि बदन्ति । आदिफम्मिकस्स पन पठमकापनार्य महग्यतमवनानि अभिमान- वनानि च सन्चया पि एफबारमेव जवन्ति । ततो परं भवंगपातो व ।। चचारो पन मरगुप्पादा एकचित्तवखणिका । सतो पर दे तीणि फलचितानि यथारहं उप्पज्जन्ति । ततो परं भवंगपातो ॥ निरो- घसमापत्तिकाले दिक्खतुं चतुत्यारुप्पनयनं भवति । ततो पर निरोध फुसति ॥ बुहानकाले च अनागामिफल वा अरहनफलं वा यथा- रहमेकवार उप्पग्मित्वा निरुद्ध भवंगपातो व होति ॥ सम्बया पि समापत्तियोपियं भवंगसोतो विप वीथिनियमो नत्थी ति फत्वा पहनि पि लभन्ती ति॥ २०. सत्तखत्तुं परिचानि मगाभिमा सकि मता। भवसेसानि सम्भन्ति जवनानि बहूनि पि ॥ अयमेत्य जवननियमो॥ २१. दुहेतुफानमहेतुफान व पनेत्य क्रियानवनानि पेव अप्पना- जवनानि च न लाभन्ति ॥ सपा प्राणसंपपुतविपराकानि च मुग- तियं ॥ दुग्गतियं पन माणविप्पयुत्तानि च महाविपाकानि न लन्भन्ति ॥ २२. निहेतुकम च खीणासवानं कुमलाकुसलनवनानि च न लन्मन्ति । तया सेरखपुधुजनानं क्रियानवनानि॥ दिटिगतसंपयु- विचिकिच्छाजवनानि च सेक्खानं ।। भनागामिगलानं पन पटियनवनानि च न लमन्ति ।। लोकुचरनवनानि प यपार अरिपानमेव समुपजन्ती वि ॥
पीयिर्मगधिमागो
हगताव पाटिकंखिनचा पेस्वामहगतनबनानन्न क्यायाममा
ब) सत्यापि कुमलनवनानन्तरं कृमजान मंत्र टिम च फला
यमपेति । क्रियानबनानन्तरं कियाजवनं अरहना चानि ।।
१५. चिम मुखपन्नम्हा द्वादमोक्खका पर।
मुखितक्रियता अहछ मंगोनि यग्यका ॥
युग्ननान सेरखान कायपुन्नतिनुता।
तिनुकामक्रियता वीतरागानमप्पना ।।
अयमेत्य मनाद्वारे वीथिचिनवनिनयो ।
१६. सन्चया पि पनेन्य अनि? प्रारम्मणे यसमलविधाकानेत्र
पञ्चविन्नाण-संपटिच्छन-मनोरण-भदारम्गानि । कमलविना
कानि ।। अति पन सोमनम्ममगताने मंत्रीरणतदारम्मगानि ॥
सत्यापि मोपनम्ममहगतक्रियानवनावमाने मोमनम्ममहगता-
नेव नदारम्पमानि भवन्ति । पेरखासहगतक्रियानवनावमाने च
उपरखासहगतानि होति ।।
१७. दोमनम्ममहगतनानापमाने पन नदारम्मगानि । म
गानि घ उपेस्पामहगतानेच मपन्नि ॥ नम्मा यदि मोमनस्मपरि-
मयिकस्स दोमनम्ममहगल नवनावमाने नदारम्मगमको मलि,
मदा ये किनि परिचितम परिनारम्मगमारम उससामागा-
मनोरण उपनति ॥ नमननग्लिा मवंगपातो व होती ति बदनि
थाचरिया ॥ क्या कामावरजानापसाने कापावचरमनानं कामा.
पररयम्मेसेच आरम्पशभूनेषु नदारम्म छन्तो नि ।।
१८. काय नवनमनारम्मगान निष सति।
रिमरिमाले पतदारम्मगीरिन ।
अपमन्य नदारम्पनियमा
२. भरने च परिचनरनबीपिय कामायनयनानि मन
पथमो परिच्छेदो २३ - ३. तत्य अपापभूमि, फाममुगविभूमि, रूपावचरभूमि, अरू. पावचरभूमि चति चतस्सो भूमियो नाम । ४. सामु निरयो, विरच्छानयोनि, पेचिविसयो, अमुरकायो पति अपायभूमि चयिधा होति ॥ ५. मनुस्सा, चानुम्महारानिका, तारतिसा, यामा, तुसिवा, निम्मानरति, परनिम्मितवसवत्ती चेति काममुगनिभूमि सत्तविधा होवि || सा पनायमेकादसविधा पि कामावचरभूमिचेर संखं - गच्छति ।। , ६. ब्रह्मपारिसज्जा, ग्रामपुरोहिना, महाब्रह्मा चेति पठमझान- भूमि । परित्तामा, अप्पमाणामा, आभस्सरा चेति दुनियज्झानभूमि। परित्तममा, अप्पमाणमभा, सुभकिण्हा चेति तनियज्झानभूमि । वहफला, असअसचा, मुदायासा चेति चतुत्यज्ज्ञानभूमो नि रूपावचरम्मि सोळमविधा होति ॥ अविहा, अनप्पा, मुदस्सा, मुदस्सी, अकनिहा चेति मुद्धावासभूमि पश्चविधा होति ।। ७. आकासानश्चायतनभूमि । विआणश्चायतनभूमि । आकि- वायननभूमि । नेवसध्यानासायननभूमि नेनि अरूपभूमि च- सुबिधा होनि ॥ ८. पुपुज्जना न लन्भन्ति मुद्धाबासेम सवथा । सोतापनाच सफदागामिनो चापि पुग्गला ॥ अरिया नोपलभन्नि असम्भापायभूमिम् । सेसट्टानेमु समन्ति अरियानरिया पि च ॥ इदमेत्य भूमिचतुर्फ ॥ ९. अपायपटिसंधि, काममुगनिपटिसंधि, रूपावचरपटिसंधि, मरूपावचरपटिसंधि चेति चतुविधा पटिसधि नाम । १०. सत्य अनुसळविपाकोपरखासहगतसंतोरण अपापभूमिपं
पोपिमुक्तसंगतिमागो
२३. असेग्वानं चवताळीस सैरखानमुद्दिसे ।
मम्मामासानं पनुपमान संभवरा ॥
अपय पुननदो॥
२४. कानावरभूमियं पनेतानि सनानि वीयिचिचानि रमन
सन्मान । रूपावरभूमि पटियनननदारनगजितानि ।
সানি বনপাকা-মন-রিমাণ
बलभनि । ममन्यापि न पसादरहितान द्वारिक
निपानि न लम्भनेर मन्त्रमयान पन मनपारिनिवासी
नागरि।
२.. अमोति पौपिनिगानि काम रू पपार।
पामहिमगरूकनाम सन्मरे ॥
भपग भूमिरिमागो॥
२३. गोफिनिमपनि पासमा गलरिता पा
पुरमयोगितामा
हरि मिरम्मन्यमंग शोपिगंगारिमागो नाम
पशुग्यो परियो।
(याधिमुनगंग हविभागो)
..बगिनिजागोजागिरीरिन।
पागली नम: ।
१. सम्म नगmieral
पामो परिच्छेदो २. ३. वत्य अपापभूमि, काममुगविभूमि, रूपाचचरभूमि, अरू पापचरभूमि पति पतस्सो भूमियो नाम ।। ४. घास निरयो, तिरछानयोनि, पैचिविसयो, अमुरकायो चति अपापभूमि चमिधा होति ॥ ५. मनुस्सा, पाहम्महारानिका, तातिसा, यामा, नुसिता, निम्मानरति, परनिम्मितरसपत्ती वेति काममुगनिभूमि सत्तविधा होति ।। सा पनायमेकादसविधा पि कामावचरभूमियैव संखं ६. प्रलपारिसना, ग्रामपुरोहिता, महायला चेति पठमझान- भूमि । परिचामा, अप्पमाणामा, माभस्सरा चेति दुतियज्झानभूमि । परित्तममा, अप्पमाणमुभा, मुभकिण्हा चेति तनियज्शानभूमि । • al, असअसचा, मुदावासा चेति चतृत्यज्झानभूमो ति रूपावचरभूमि सोळमविपा होति ॥ अविहा, अनप्पा, मुदस्सा, मुदस्सी, अफनिट्ठा पति मुदावासभूमि पञ्चविधा होति ।। ७. आकासानश्चायतनभूमि । विभागमायतनभूमि । आकि. नि । नेवसध्यानासायवनभूमि चेति अरूपभूमि च. वृविधा होति ॥ ८. पुज्जना न लन्भन्ति सुद्धाबासेमु सबथा। सोतापमाच सफदागामिनो चापि पुग्गला ॥ अरिया नोपलभन्ति असभ्यापायभूमिम् । सेसट्टानेमु लमन्ति अरियानरिया पिच ! मेत्य भूमिचतुर्फ ॥ अपायपटिसंधि, काममुगनिपटिसंघि, रूपावचरपरिमंपि, वचरपटिसंधि चेति चतुविधा परिसंधि नाम । वत्य असलविपाकोपरखासहगवसंतोरणं अपायभूमिपं
२४.
.
घोयिमुससंगायिभागो
ओकन्निक्खणे परिसंघि हुला, ततो परं भवंगं, परियोसाने पाने
हुत्या वोच्छिन्नति ।। अयमेकापायपटिसंघि नाम ।
११. कुसलविपाकोपेरखासहगतसंवीरणं पन काममुगतियं मनु
स्सानं चंब जचंधादीनं, मुम्मनिस्सितानं च विनिपातिकामुरान
परिसंधि-भवंग-तिवसेन पपत्तति ॥ महाविपाकानि पन अहस.
न्यपा पि फाममुगतियं पटिसंधि-मयंग-मुतिवसेनेव पवचति ॥
इमा नव काममुगनिपटसंधियो नाम ॥ सा पनायं दसविधा रि
फामाश्चरपरिमंपियेव मखं गछति ।।
१२. तेम चनुन्नं अपायानं, मनुम्सान, विनिपानिकामुरानं प
आयुपमाणगणनाप नियमो नत्यि ॥ पातुम्मदारानिकानं पन देवाने
दिनानि पत्र सम्मसतानि आयुप्पमाणं । मनुस्सगणनाय नयुतिर
स्मसतसहस्मप्पमाणं होति ॥ ननो चनुग्गुणं सावनिमान ॥ ततो
पनुग्गुणं यामानं ॥ ननो मनुग्गुणं तुमितानं ।। सनो चनुग्गुण नि.
म्मानलीनं ।। मतो पण परनिम्मितयसपत्नीने ॥
१३. नरमत नेरुयोग यस्मान कोटियो तया ।
यम्गमतराएम्मानि गहि य यसयषिय॥
१. परमशानविय पठमशानभूमियं पटिपि मांग-मुनि
बगेन परनि । नपा दुनियामानविपाक ततियम्मानविपार प
दतियम्मानभूमिये । गमाशानविपार तनिपरशानभूमि । १.
मानानगिा पनुपरनानभूमिपं ॥ अमन्त्राणान पन रूपमा
पटिमगिरोना ननो पर पति पानशा ग कामेर पर.
मिला निकम्मति ॥ इमा पारमापटिमधिपी नाम ॥
१५. नेग प्रमारिमामान शान काम निपी भागो भा.
पमा । ब्रह्मारीस्लिान हो पानमा एकी कली।
খান পানি। গাদাগাৰ পালানি। মা
पपमो परियो स्सरानं अट कापानि । परिचमुभान सोळस कापानि । मपमाण- माने दधिस कापानि । किरहान पनुसद्वि कप्पानियोफलान, असममचान प प फापसतानि । अविहान कापसहरसानि । अतापान दे कापसहस्सानि । सुदरसानं पचारि कापसासानि । मुदस्सीनं भट्ट कापसहरसानि। अनिद्वानं सोलस कप्पसहस्सानि॥ १६. पठमारुपादिविपाकानि पठमारुप्पादिभूमिस ययाफ पटि- संधि-भग-सुतिरसेन परतन्ति ॥मा पवस्सो भारुप्पपरिसंषियो नाम। १७. तेस पन मामासानज्ञापनपगाने देवानं घीसति कापसा- स्सानि मायुप्पमाणे। विभ्याणगायतनपगानं देवाने पत्ताळीस कप- ससानि । माफियमायतनपगाने देवानं सठि कापसहस्सानि । नेवसम्भानासन्यायसन्पगानं देवानं धनुरासीति कापसास्सानि ॥ १८. परिसंधि भदंगे च या परनमानसे । एफमेन सपेरेफरिस कमातियं ॥ इदमेत्य परिसंधिचतुर्फ ॥ १९. जनफमुपत्यभामुपपीळकमुपयात ति फिपरसेन । गरु- कमासममाचिणे, फटपाकम्म घेति पाकदानपरियारेन । दिपम्प- वेदनीय, उपपजपेदनीय, अपरापरिपपेदनीये, अहोसिकर्म पेति पाककालवरोनेति पसारि फम्मानि नाम ॥ तपा असल, फामा. पारसल, रूपाराले, अल्पापपररसले चेति पाफडानमन। २०. तस्य असले, फापफम्पं, पपीफम्म, मनोफम्र्म पेति कम्प- दारवसेन तिपिर्ध होसि ॥ २१. कर? पाणातिपानो, अदिगादान, कामे मिशपारो पेति फायविवत्तिसंखाते कायदारे पाठपुसितो कायकर्म नाम ।। २२. मसाबादो, पिपुणरापा, फरसवापा, संफापलापो षेति ४ २६ घोपिमुत्तसगापिमागो पचीपिन्मचिमंसा पचीदारे पाहमयुतितो पपीकम्म नाम २३. अभिग्मा, म्यागदो, मिच्छादिहि पैति अत्रारि दिन- चिया पनस्सि पेर पाहमागितो मनोफम्र्म नाम । २४. वे पाणातिपातो, फरसाना, न्यापादो पदोमदेव भापन्नि । कामे पिन्छाचारो, अभिग्ना, मिच्छादिति रोप- मूलेन ॥ सेगानि पपारि पि हीहि मूलहि मानि ॥ पितु रोन पनामा समया निदादसरिष होति ॥ २१. कामावरमलं शि कापदारे परम कापहम्म, पपीहर पर पोकम्य, मनोद्वारे पास मनोसम्म मेशि मारक fift नया दान-मोठ-मापनारसेन ॥ चिनगारमेन पनेो महगि ॥ दान-सीप माला-आपापनमा पनिन-मानुपोरन परमात-पम्पदेगना-हिनियमन frt रोति ॥ ते पनेत बरीमतिषि पिकापारपरकम्मपिता ॥ १. पान न मनोसम्ममेर माना, 7. मान, भानगन पनि ॥ नपा भस्पाम मनोमानाम, मनाने, मारपीन का fatne ... मायानाति मामि पारिश्रमि পশি ম ন ব বা পাাাানি শনি माता २.ममा narrafar Tamil itan मापन imfoll raffirent fire लाने पचमो परिमोदो सोल्स रिपाकानि विपचति ॥ तिहेतुफमोमके दिहेतुकमुह च सलं दिहेतुकै परिधि दत्ला पवचे विहेतुफरहितानि दादस पि रिपाकानि पिचति ॥ दिहेतुफपोपर्क पन कुतलं अहेतुकमेव पटि- संधि देवि, परचे च अहेवफविपाकानेव विपषति ॥ ३०. असंखारं ससंखारविपाकानि न पञ्चति । ससंखारमसंखारविपाकानी ति केचन ।। तेर्स द्वादस पाकानि दसह च ययाम । ययावुत्तानुसारेन ययासंभवमुद्दिसे ॥ ३१. रूपायघरकुसलं पन पठमझानं परिच भावत्वा ब्रह्मपारि- सज्जेमु उप्पजवि । वदेव मभिम भाषेत्वा ब्रह्मपुरोहितेन । पणीर्व मायेत्या महामलेम ।। या दुतिपझानं दतियज्झानं च परिचं मा- पेत्ता परिचामेम् । मनिमम भावत्वा अप्पमाणाम् । पणीत भाषे- ला बाभस्सरेम ॥ धनुत्पन्झानं परिन भावत्वा परिचमुमेनु । मझिम भाषेत्वा अप्पमाणमुभेमु। पणोतं मापेत्या सुमकिण्हेसु ॥ पञ्च. परझानं भाषेत्वा घेइप्फलेसु । ददेव सञ्चाविरागं भाषेत्वा असञ्च- सचेमु ॥ अनागामिनो पन मुद्धापासेसु उपजन्ति । ३२.. अल्पावचरकुसलं. च. ययाम मारेला अस्पेसु उत्प- जन्ती ति॥ २३. इत्यामागत:पुमं ययामिरवलिया । भनेति सदिसं पार्क परिसंधिप्परचियं ।' इदमेत्य कम्मवतकं ॥ ३४. मायुक्खयेन कम्मरखपेन, अभयवखयेन, उपच्छेदकसम्मनाए चेति, चतुपा परशुपत्ति नाम: ३५. तया प मरन्तानं पन मरणकाले पपाई अभिमुखीभूतं पर- न्तरे पटिसचिननकं कम्मरा, कम्मकरणकाले रूपादिकमुपसद्ध २८ योथिमुक्तसंगयिमागो पुन्चमुपकरणभूतं च कम्मनिमित्तं वा, अनन्तरमुपजमानमवे उपर भितम्यं उपभोगभूतं च गतिनिमित्तं वा कम्पबलेन छन्नं द्वारानं अञ्जतरस्मि पच्चुपट्टाति ।। नतो परं तमेव तयोपहित आरम्मर्ण आरम्म विपञ्चमानककम्मानुरूपं परिमुद्धमुपकिलिटुं वा उपलभिव- स्वभवानुरूपं वत्योणतं व चित्तसंतानं अभिष्ई पवत्तति बाहुलेन । वमेव वा पन जनकभूतं कम्ममभिनवकरणवसेन द्वारप्पयत्तं होति ।। ३६. पचासनमरणम्स तस्स वीथिचित्तायसाने भवंगरखये वा चवनवसेन पच्चुप्पन्नभवपरियोसानभूतं चुतिचित्तमुप्पजित्वा निरु. ज्झति ।। तस्मि निरुदावसाने तस्सानन्तरमेव तथाहितं आरम्म• पमारन्म सवत्युकं, अवत्युकमेव वा ययारहं अविनानुसयपरिरिख चेन तहानुसयमूलकेन संखारेन जनीयमानं संपयुतहि परिगहमानं सहनातानमपिट्टानमापेन पुग्वंगमभूतं भवन्तरपटिसंघानवसेन पटि. संघिसंसातं मानसं उत्पन्नमानमेव पविहाति भवन्तरे ॥ ३७. मरणासन्नयीथियं पनेत्य मंदप्पयचानि पञ्चर जवनानि पाटिकखितवानि ।। तस्मा यदा पच्चुप्पन्नारम्मणेसु आपायमागतमु परन्तस्यैव परणं होति, तदा पटिसंघिमवंगानं पि पच्चुप्पनारम्म गवा लमनी ति फत्या कामावरपटिसंधिया छदारगहित कम्म• निमित्त, गनिनिमित्तं च पच्चुप्पन्नमतीतारम्मणं उपलन्मति । कर्म पन अतीवमेव ॥ तं च मनोदारगहितं ॥ तानि पन सन्मानि पि परिचधम्ममतानेवारम्मणानि ॥ १८. रूपायपरपटिमंपिपा पन पश्यत्तिभूत कम्पनिमित्तमेवार म्म होति । तया आपप्पपरिसंधिया च महगतभूत पम्मति भ कम्पनिमिसमेत यथारहं आरम्म होनि ॥ अमावसचान भी. सिनामा पटिमपिमान पनिहाति ॥ नम्मा ने सपरिसंधिका नाम ॥ असा अरूपररिमपिता ॥ रोमा रूपासपरिसपिका ।।
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घोथिमुतसंगद्दयिमागो पुन्नमुपकरणभूतं च फम्मनिमित्तं वा, अनन्तरमुप्पजमानभने उपर भितन्वं उपभोगभूतं च गतिनिमित्तं वा कम्मत्रलेन छन द्वारा अभ्यतरस्मि पच्चुपट्टाति ॥ ततो परं तमेव वयोपट्टिनं आरम्म आरम्भ विपञ्चमानककम्मानुरूपं परिमृद्धमुपकिलिटुं वा उपलभिव स्वभवानुरूपं तत्योणतं व चित्तसंतानं अभिप्हं पवचति याहुल्लेन । तमेव वा पन जनकभूतं कम्ममभिनवकरणवसेन द्वारप्पवचं होति । ३६. पचासन्नमरणस्स तस्स वीथिचित्तावसाने भवंगक्खये व चपनवसेन पच्नुप्पन्नभवपरियोसानभूतं चुनिचित्तमुपजित्वा निक ज्झति ॥ तस्मि निरुद्धावसाने तस्सानन्तरमेव वयागहिवं आरम्म णमारम्भ सवत्युर्क, अवत्युकमेव वा ययारह अविनानुसयपरिक्ति. तेन तहानुसपमूलकेन संखारेन जनीयमानं संपपुहि परिगरहमान सहनावानमथिट्टानमायेन पुग्वंगमभूतं भवन्नरपरिसंघानवसेन पटि. संघिसंखातं मानसं उपनमानमेव पविद्वाति भवन्तरे ॥ ३७. मरणासन्नवीयियं पनेत्य मंदप्पवचानि पर जबनानि पाटिकसितम्बानि ॥ तस्मा यदा पच्चुप्पन्नारम्मणेसु आपापमागतेसु परन्तेस्येव मरणं होति, तदा परिसंधिमवंगानं पि पच्नुपनारम्म गता मम्मती ति कत्या कामावचरपटिसंधिया छदारहित कम्म निमित्तं, गतिनिमित्तं च पच्युप्पन्नमतीतारम्मणं उपलब्मति । कम्म पन मवीवमेव ॥ त प मनोदारगतिं ॥ तानि पन सम्पानि पि परितपम्ममूवानेवारम्मणानि ॥ १८. रूपावपरपरिमषिया पन पञ्पत्तिम्त फम्मनिमित्तमगर म होति ।। नया आएपपटिगंधिया प महगतभूत पश्यतिपूर्व प कम्मनिमिनमेव पयार पारम्म रोति ॥ अगम्यमशान भी. सिनाकमेव परिधिमान पनिहानि ॥ तम्मा ते सारिरिता नाम ॥ अम्मा मतपरिवधिका । रोमा रूपापारिमपिका।
४०.
न्टो परिच्छेदो
१९. आरुप्पचुतिया होन्ति द्विपारुपवजिवा ॥
परमारपसंघी च तया कामतिहेतुका ।।
रूपाववरचुतिया अहेतुरहिता सियुं ।
सन्या कामविहेतुम्हा कामेस्वेव पनेतरा ॥
अयमेत्य विपटिसंधिकमो॥
इश्वेवं गहिवपटिसंधिकानं पन परिसंधिनिरोधानन्तरतो
पभुति तमेवारम्मणमारम वदेव चितं याव चुतिचितुष्पादा असति
वीपिचितुष्पादे भवस्स अंगभावेन भवंगसंवतिसंखातं मानसं अम्बो.
च्छिन्न नदीसोतो विय पचति । परियोसाने च चरनवसेन
चुविचित्र हुसा निरुज्झवि ॥ ततो परं च पटिसंपादयोरयचकमिव
पपाकर्म एवमेव परिवचन्ता पवचन्ति।
४१. पटिसंघिभवंगवीपियो चुवि चेह तया भवन्तरे।
पुन संधि मवंगमिधय परिषचवि पित्तसंतति ।।
पटिसंखाप पनेवमटुवं अधिगन्ता पदमधुतं पुधा।
मुसमुछिमसिनेहबंधना सममेस्सन्ति चिराप मुन्नता ।
इति अभिधम्मत्यसंगहे वीयिमुत्तकसंगहविभागो नास
पञ्चमो परिच्छेदो।
-
(रूपसंगहविभागो)
१. एवारदा विभत्ता हि सपमेदपवचिका।
चित्तवेतसिका पम्मा रूपं दानि पशुपति ।।
२. समुद्देसा विभागा प समुहाना कलापतो।
पदसिम्मको चेवि पत्रमा तत्य संगो।।
उपसंगमवियागो ३. चचारि महास्नानि चतुम्नं च महामूवानं उपादाय। रूपंत दुपियं पेतं रूप एकादसविन संगई गच्छति ।। ४. कथं ? परीधान, आपोषात, तेनोधानु, वायोगानु, भतरूप नाम ॥ चरसु, सोतं, पानं, निव्हा, कायो, पसादरूपं नाम || , सदो, गयो, रसो, आपोषानुवनित भूवत्तपसंखा फोहम्चे, गोचः ररूपं नाम ॥ इत्यत्तं, पुरिसत्तं, मावरूपं नाम । इदयवत्यु हदपल नाम ॥ जोविनिन्द्रियं जीवितरूपं नाम ।। फरळीकारो आहारो माहाररूपं नाम ॥ इति च अट्टारसविध पंतं रूप, समावरूपं, सल- रखणरूपं, निफनरूपं, रूपसं सम्मसनरूपं नि च संगई गच्छति ॥ ५. आरामपानु परिच्छेदरूपं नाम ॥ कापविमति, पची. विमति, विअनिरूपं नाम ॥ रूपस्स लहुना, मुटुता, कम्ममता,. रिमनिय विकाररूपं नाम ॥ रूपस्स उरचयो, संतति, जरता, भनिगता, सरसग नाम ॥ नातिरूपमेर पनेत्य उपरपसंतति- नाल्न पयुपती ति ॥ एकादसरिय पेन रूपं महवोसविविध होति मरूपान॥ मनापमादमिया मारो दयनियपि । मोतिहारम्पति महारसरियसपा परिदी परिधि विकारो सपणे शिष यनिकमा दमा पनि महतीसपि मरे।। अपमेन्य काममो॥ ७. मई सपने म तुरं, मारपर्य, गागर, संसल, होय, कामावर, अनासम्म, ममतापमान परिपरि भाभिारागिदिगंन पग मे गति॥ चं! मादर्भमा पनि मनाम नाम | हत माहिपमादारपणात ofit पप भार ।
पोरिडो M 44 हरपुरूसम्मिपितं मपरिव रिझररूप नाप । एलरमहारर । पगार-मार-मोरित महरिष पिइदिप माम तरपनिन्द्रियरूप । पमा रिमपर्मना दसरि पि कोरिफाप, मनिरूप, सापटिया । इतरं पुसुपरूप, देरू, परिषरूप ॥ कम्पम उपादिग्णरूपं । इसरं मनु. पादिष्ण रूपापाने गनिदम्सनरूपं वरं अनिदस्पनरूपं ॥ पसदिय अमेपासेन, पानादित्य रमवसेना ति परिय विगोपालरूर भगांपरग्गारिकरूप ॥रग्यो, गयो, गो, मामा, भूपचर देवि भरि पि अरिनिम्भोगरूपं । इवर रिनिमांगरूपं ।। पेवपहरीमतिरिय पिप विचयरपणा। भाषिकादिभेदन विभन्नि पपार॥ अपमेय परिमागो।। १०. पम्म, पित्त, उद्ध, मारो पेवि पसारि रूपसमुहानानि नाम। ११. सत्य कामाचरं रूपापचरं पवि पक्षीसविविध पि सुस- सामलकम्ममभिसंख अग्नचिकसंवाने कम्पसमुहानरूपं परिसंधि- सपादाय सणे खगे समुद्वापति ।। १२, अपविपाक-दिपश्चविघ्याणवनितं पनसतविविध पि रिर्व पितममुहानरूप पठममरंगापादाय जायन्तमेव समुहापति ।। तत्य अप्पनाजान इरिपापथै पि सन्नामेति ॥ रोद्वान-कामावचर• भवनाभिध्यापन विभ्यति पि समुदापन्ति ॥ सोमनस्सनवनानि पनेत्य रस इसने पिननेन्ति ।। १३. सीनुहोहममध्याता जोपातु दितिप्पना व उनुसमुहानरूपं मा परिदा पपपार समुदापति ॥ .
सपसंगहविमानो
३. चचारि महाभूतानि चनुन्नं च महाभूतानं उपादापा स्पति
दुवियं पेतं स्वं एकादसविन संगहं गच्छति ॥
४. कयं पठवीधान, आपोधानु, तेनोपानु, वापोषानु, भूवरूप
नाम ॥ चक्सु, सोतं, पानं, निव्हा, कायो, पसादरूपं नाम ॥ रूप,
सद्दो, गयो, रसो, आपोषानुवनित भूवत्यसखान फोद्वर्व, गोक
ररूपं नाम ।। इत्यत्तं, पुरिसत्तं, भावरूपं नाम ॥ इदपवत्यु हदपरूपं
नाम ॥ जीवितिन्द्रियं जीवितसं नाम ॥ कबळीकारो आहारी
आहाररूपं नाम ।। इति च अहारसवित्र पेतं रूपं, सभावरूपं, सल
खणरूपं, निप्फन्नरूपं, रूपरूपं सम्मसनरूपं नि च संगई गच्छति ॥
५. आसामघातु परिच्छेदरूपं नाम ॥ फायविध्यति, बची.
विश्वनि, वित्तिरूपं नाम ॥ रूपस्स लहुला, मुना, कम्ममता,
विप्रसिदय विकाररूपं नाम || रूपस्म उपचपो, संतति, जरता,
भनियता, मासगरू नाम जानिरूपमेव पनेत्य उपचपमतानि.
मान्न पशुपती ति ॥ एकादसविध पेतं रूप अहवोसनिधि होति
मरूपमेन॥
मनापमादमिया मायो दयमियपि ।
मोरितापारम्पहि मद्वारमविध नया ।।
परिन्दीप रिश्वणि विकारो-म्मा लिप
यनिकमा दमा येनि महबोसरिय मरे ।
अयमेन्य पमहमो॥
७. मन ग प प ा, मपयर्य, मामा, गंगत,
कोकि, कामावरं, अनारम्म, अपातमेरा नि एकnि
भानजाहिदिन बहुगा मे गति ॥
८ । पमादर्मणान पनि पानिज भाप ।
पता कर पमादायमा मिमि नाम ।
गो परियो इतरमर पुरुष ॥ पसादरियपिसखातं सचरि पिदाररूपं नाम । इतरपाररूपं ।। पसाद-मार जोखिमेसात अहरिष पिइन्द्रियरूपं माम । तरपनिन्द्रिपरूपं ॥ पसार-रिसयसखातं दादसविध पि मोरिफरूप, सन्तिरूपं, मपरियरूप प। इतरं मुसुपरूपं, दरूप, अपरियरूपं ५॥ कम्पन उपादिण्णरूपं । इतरं अनु. पादिग्णरूपं ॥ रूपापानं सनिदम्सनरूपं । इतरं अनिदस्सनरूपं ॥ परसादिय अमेपलरसेन, पानादिषय संपत्तरसेना वि पञ्चविध पि गोपरगारिकरूप । इतरं भगोचरग्गारिकरूपं ॥ पणो, गंधो, रमो, मोना, मृतवतु पति अवि पि अरिनिन्भोगरूपं । इतर विनिम्मांगरूपं ।। ९. पेवमहरीसविविध पि प विचपखणा। भाषिकादिभेदेन विमन्दि पपारई॥ अयमेत्य परिमागो।। १०. फम्म, चिर्स, तु, मारो ति पचारि रूपसमुहानानि नाम।। ११. तत्य कामावचरं रूपावर ति पनीसविविध पि बुस- कासलकम्ममभिसंख अझविफसंवाने फम्मसमानरूपं पटिसंधि- सपादाप खणे खणे समुहापेति ॥ १२, अपरिपाक-दिपनाविध्याणवजितं पश्चसविविध पि चि विचसमहानरूप पठमभरंगमुपादाप जायन्तमेव समुहाति ॥ तत्प अपनाननं इरियापर्य पि सन्नामेति ॥ चोहान कामाचर- भवनाभिघ्या पन विम्मत्ति पि समुहापेन्ति ॥ सोमनस्सनवनानि पनेत्य तेरस इसन पि जनेन्ति ।। १३. सीतुणोतुसमध्याता नोपानु ठितिपत्ता र उनुसमुहानरूपं भग्म च परदा प पपार समुढापति ।।
ફર
अपसंगाविमागो
१४. ओजासंखातो आहारो आहारसमुहानरूपं बमोहरणका
गनप्पचो व समुहापेति ॥
१५. नत्य हृदप-इन्द्रियरूपानि कम्मनानेव ॥ विध्यत्तिद्वयं वि.
तजमेव । सद्दो चित्तोतुनो ।। लहुवादित्य उचित्ताहारेहि समी-
ति ॥ अविनिम्भोगरूपानि चेव आकासघातु च चहि संभूतानि ।
लक्खणरूपानि न कुनोचि जायन्ति ।
१६. अट्ठारस पन्नरस तेरस द्वादसा विच।
कम्म-चिचोनुकाहारजानि होन्ति ययाम ॥
जायमानादिरूपानं समावचा हि केवलं ।
लक्खणानि न जायन्ति केहिची ति पकासितं ।।
अयमेत्य रूपसमुहाननयो ।
१७. एकुप्पादा एकनिरोधा एकनिस्सया सहवुत्तिनो एकत्रीसति
रूपकलापा नाम ।
१८. तत्य जीवित, अविनिम्मोगरूपं च चक्थना सह पक्खुद
सकं ति पचति । तया सोवादीहि सदि सोवदसकं, धानदसके,
निव्हादसक, फायदसकं, इत्यिभावदसर्क, पुम्भावदसके, वत्युदसके,
चेति ययाम योजेतन्वं ॥ अविनिम्मोगरूपमेव जीवितेन सह जीवि.
सनवक वि पचति । इमे नव कम्मसमुहानफलापा ॥
१९. अविनिम्भोगरूपं पन मुट्ठक ॥ तदेव फायवियनिया
सह कापविश्यत्तिनक्क । वचौविश्अति-सद्देहि च सह बीवित्र
चिदसकं । लहुवादीहि सदि लहुवादेकादसकं । फापवियचिल.
हुवादिहादसकं वचोविश्नचि-सह-बहुतादितेरसक चेति ।
चित्तसमुहानालापा॥
२०. मुकं, सद्दनवक, बहुनादेकादसकं, सहमहुवादिद्वादसके
पेवि पचारो उनुसबहानकछापा ।
१. Ret, कादर निमारमानकापा ।। । गाय एमपन पनि गानकायापा पदिदा दिनार पनपने पि ममपिफोर ॥ २. सामरिपोमाना पपाप मरर पनि पापा एकरोगनि ।। मा परिमाणवरणमा विपररणा । म पलापिपार आकागं पदणानि ॥ अपत्य पहारपांगना॥ २४. पानि पिपनेतानि पानि कामोरे पपारा अन्नानि परिय भन्नि ॥ परिधियं पन रोदनान पर भोपपाति- कान ए परण-गोल-पान निमा-काप-भाष परदसफर्मरखावानि मन रमानि पाइभन्नि उपयगेन । भोपफरमेन पन पररा- गाव-पान-भारदगपानि पदापि पिन सामन्ति ॥ पस्मा में बीन फसापानि दिनमा ।। गम्भमेय्यकमणाने पन काय-भाव- पदमपा पापातानि वीणि दराकानि पाइभवानि ॥ तत्यापि भारदार पटापि पि न लम्मति ।। नतो पर परचिकाले कमेन पपरादगपादीनि ए पाहभरन्ति । २५. पं परिधिमुपादाय फम्मसमुहाना, दुवियचितमुपादाय विचमहाना, रितिकालमुपादाय उनुममुहाना, भोनाफरणमुपा- दाप बापारसमुहाना पेति पमहानरूपफाळापसन्नति कामलोके दीपनारा विप नदीसोतो पिप प पावतायुफमम्बोच्छिन्न पर- पति॥ २६. मरणसाले पन घुतिचित्तोपरि सचरममपित्तस्म ठिविकाल- सपाटाप कम्ममरूपानि न उपन्जन्ति । पुरेवरमुप्पमानि प फम्प- नरूपानि विचिचसमकालमेव परचित्वा निरन्झन्ति ॥ ततो
अपसगाविमागो
१४. मोनासंसानो आहारो आहारसमुहानरूपं अशोहरणका
अनप्पचो व समुहापति ॥
१५. तत्य इदप-इन्द्रियरूपानि कम्मनानेव ॥ वित्तिय वि.
चनमैत्र । सदो चिनोतुनौ । सातादित्तयं उद्वचित्ताहारेदि समो-
वि ॥ अविनिमोगरूपानि चेत्र आकासपातु च चहि संभूतानि ।।
लखगरूपानि न कुवोचि जायन्ति ।।
१६. अहारस पनरस तेरस दादसा विच।
कम्म-चित्तोनुकाहारनानि होन्ति ययाम॥
जायमानादिरूपानं समावचा हि केवलं ।
मसणानि न नापति केहिची नि पासि ।।
अयमेत्य रूपममुहाननयो ।
१७. एम्पादा एकनिरोपा एफनिस्सया सापचिनो एकजीसति
रूपालापा नाय॥
१८. वन्य मोक्ति, भगिनिम्भोगच पाना सा परता
म नि पशुपति । तया सोमादीहि मदि मोतदसर्फ, पानदसा,
निदादम, कापदमः, इस्थिमारदस, पुम्मारदसक, पपदमा
मेति पपाप पोतर्म। भरिनिम्मोगरूपमे मीनिन सामोनि-
ननरनि पशुपति ।। हम ना कम्मममहानमारा ।।
१०. भविनिम्मोगल पन गदा ॥ देर कापरिनिया
मा कापरिमिनावीरित्रमि-गरहिपमा पीरित्र
निदमा । एतादोहि मदि सहनादेशदमा कार्यानिक
हुतादादमा. बोरिवनि-गर-छादितरमा पेस .
निनमानमा
... मृदा, महना लादेशमा, गमलाम
तामझानsini ||
चिोदी ३. एच, नागर परिकारमानकला। १६ सय एक पान निगमधानकालापा पहिला fameer पनपि मलपिकर ।। २. रिपोराना पपाय। मरामि पालापा एपीमहि ॥ जापाने परिसदमयपणा रिपरपणा। म फापगमिपा भाकाम पराणानि प॥ भन्यपणापामना। २५. पानि पिपनेनानि स्पानि कापोरे पपार अनुनानि पनि पान्ति ॥ परिमधियं पन मंदमान और भोपपादि- पाने र परशु-गोव-पान-निपा-काप-भार-पत्पुरसफर्मरखातानि गर महानि पाइभर्रान्त रायगेन । भीमफबगेन पन परए- गोर-गान-मारदारयानि पदापि पिन सामन्ति ॥ तस्मा में पगेन लापनि दिनम्पा । गम्भोप्यफसमान पर फाप-भाव- पुदगम पवादानि वीणि दमकानि पानुभवन्ति । नत्यापि भारदम पदापि पिन लभवि ॥ तदोपर पतिकाले कमेन पपरादरकादीनि प पाहमरन्ति ।। २५. पर परिसपिमपादाय प.म्मसमुद्वाना, दुविपचिममुपादाय विषयमुहाना, रितिकालमुपादाय उतुममुहाना, भोनाफरणमुपा- दाप बाहारमसहाना पेनि पमहानरूपफळापसन्नति कामलोके दीपनाला दिप नदीसोती विय च पावतायुफमम्मोरिछर्स पर- पनि। २६. मरणका पन तिपित्तोपरि-सतरणपवित्तस्स ठिविकाल- सुपादाय फम्ममरूपानि न उपजन्ति । पुरेतरमुप्पमानि च फम्म- नरूपानि पुतिचिवसमकालमेव पवचित्वा निरुज्झन्ति ॥ ततो । रुपसंगविभागो . पर चिचनाहारनरूपंप वोच्छिन्नति ॥ ततो पर उनुसमुहानला परंपरा पाव मतम्लेवरसंसावा पबत्तन्ति ।। २७. इच्चे मवसचान पुनदेव भवन्तरे। परिसंधिमुपादाय तयारूपं पचति ।। २८. रूपलो पन धान-निव्हा फाय-मावदमकानि र आहार- नालापानि वन लम्मन्नि || सस्मा तेसं पटिसंधिकाले चार सोत-वत्युवसेन तीणि दमफानि जीवितनव चेति चारो कम्म. समुहानकलापा परचियं विनोनुसमुहाना च सन्मन्नि । सम्म सत्तानं पन चासु-मोग-यत्यु-सदानि पि न सम्मन्नि । तया सनानि पिसिनरूपानि ॥ तस्मा तेर्स पटिसविकास नीति. नाफमेर, परनिर्प च महानि मुसमुहानरूपं अतिरिच्छति ॥ एगी काम-रूपामनिमंसानेगुनी गनेस परिसंधि-परविरसेन दरिया पपरति दिनमा ॥ २९. भजीगनि कामे होनि वीस पिए। गतरामश्रीन पर नत्य शिपि पि॥ गो विकारो भरता परणं योपपत्तियं । नामनि पातेगु न किंविनिमम्मति । अपमेय सपनिमो॥ १. निम्नान गन कोरगा पनुमग्गागंन गरि मम्मालानमारम्पगभूत वानर्ममताप नसाय निगालना निमाने नि पापनि नदेन गमातां पापिय पिगमादिगगनिसान पत्र अनुपादिमनिशाना पेनि परि होति कामारिपा. न । वा मुन्नत, भनिमिर्न, मांगति गरि मान॥ मी. Marathi
१. पानं ममतपनुपर।
मिममिति भागलि पानामा पांगयो।।
निसिपागिर निभानपिपपि ।
परमार्थ एकान परपा र नपागवा ॥
भिभिषामायगई गारिमागो नाम
एवी परिदा।।
(समुथयसंगहविभागो)
१. दारचतिरिका पुसा परपुपम्मा सहपखणा।
दानि पपायोग पररवामि ममुपये ॥
२. अकुमपर्मगहो, मिसफर्मगहो, पोधिपरिखपसंगहो, सम्र
मंगो पेति समुपयमंगहो पन्धिपी पदितम्रो ।।
३. कंप ! अकुमलगंगई वार, पत्तारी भासवा । कामासवो,
भवामयो, दिट्टामयो, पविजामदो ॥
४. चारो ओया । कामोपो, परोपो, दिहोयो, अविनोपो॥
५. पसारो पोगा । कामयोगी, भरयोगो, दिद्विपोगो अवि.
नायोगा।
६. पत्तारो गन्या । अभिशा फायगन्यो, म्यापादो कायगन्यो,
मोपलपरामासो कायगन्यो, इदसपाभिनियेसो कायगन्यो ।
७. पचारो उपादाना । कामुपादान, दिपादान, सीलम्पतु. .
पादान, अत्नवादुपादानं ॥
८.
समुदयसंगतिमागो
छ नीचरणानि । कामच्छन्दनीवरण,न्यापादनीवरलं, पीर
पिदनीवरण, उमडुचनीवरणं, विचिनिन्छानीवर, और
जानीर॥
सत्तानुसया । कारागानुसयो, मारागानुमपो, परित
नुमयो, मानानुभयो, दिवानुमयो, विचिकिरणानुसयो, अस्त्रिा
नुमपो॥
१०. दम मंपोननानि । कारागसंपोननं, परागसंपोजन,
मम्परागर्मयोननं, परिधर्मपोननं, मानर्मयोनने, दिहिसंयोजन,
मीरनतपरायाम पोननं, रितिकियामपोननं, उदगम्पोजन,
अधिनामयोजन, मुसले।
१.. मानि दम मानि । कामरागमंपोननं, माराम
पोननं, परियमंयोननं, मानमंपोजन, विहिर्मपाननं, मोसमा
गमागर्मपोनन, रिविकिछामपोनन, इमामंपोनन, परिक
गंगोन, अग्निामंपोननं मिरम्ने।
१. दम हिलमा । छोमा, दामी, मोही, मानो, ifs, fift.
frwal, पीन, र, अहिरिक, मनोव ॥
१.. मागादिश पनप बाम-माना नाममा आ.
पंता । गीष्टदागमामी, दिगपामिनिांगो, भागदोतिष
या पान दिदिगतमा पनि ।
१४. मागोयान योगा न भयो गन्या पक्षो।
गाहाना मा पनीरमा गि
सानपणानि नापीरनामा
तिरंमा दम मोर नागपागंग।
१०. सिमा मंगई छांसी, दोमो, को होगा,
बमा, प्रो.
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मामी add १९. नि । सिदो, पिरो, पीति, एमगठा, सो. दोपना, सदा॥ १७. पदम मानिस मारिधि सम्मानकापी, गम्पाराषI, परमारती, पारामागीयो, पम्मारापापो, गम्भापति, गम्मा. पाधि दि पिपो, मिजारापायो पिण. सपाधि १८, पोनिधिमानि । पदिप, गोनिन्दिर, पानिन्द्रिप, गिनिपि, साचिदिप, पि, परिगिन्द्रिय, मोरोसिन्दिप, पमिन्द्रिय गरिदिप गिदिप, गोपनरिगन्द्रिय दोपनरिगfort, विदय, गरिदिप, गिरिपिन्दिय, महिन्दिप, समा. पिनिय, पमिनिय, अनभ्नातम्या ঘাঁসি, সলিস্তি, बामातापिन्द्रिय ।। १५. नरनिगाल, विरिपर, सबल, समाश्रित, पभ्यार, हिरिपल, भोपपपर, भरिरिफापन, अनोपप्पपल ॥ २०. पनारी भधिपती । ज्न्दाधिपति, पिरिपाधिपति, पिता- पिपति, पीरंगाधिपति॥ २१. पधारी माहारा । कपरीफारो मारो, फरसो दुवियो, मनोगतना दिया, रिम्याणं पापं ॥ २२. इन्द्रियगु पनेन्य सीतापचिमग्रमाणे भनम्मानम्नस्सामी. विन्दिप । मारहाणं अम्मातापिन्दिप । मझे माणानि मिन्द्रिपानो हि घुपन्ति ॥ नोचिनिन्दियं प रूपापवसेन इरिपोति ॥ २१. पचरिमामु मानगानि, अपिरियम पलानि, महेन यम्गानि म सम्मन्ति। क्या रिधिकिरपाधि एपम्गता. मग्गि- ८. समुचयसंगहविमागो छ नीवरणानि । कामच्छन्दनीवरणं, व्यापादनीवरगं, थीन मिद्धनीवरण, उद्धचकुमुच्चनीवरणं, विचिकिच्छानीवरण, अि ज्जानीवरणं ॥ ९. सत्तानुसया। कामरागानुसयो, भवरागानुसयो, पटिय नुसयो, मानानुसयो, दिहानुसयो, विचिकिच्छानुसपो, अविन नुसयो॥ १०. दस संयोजनानि । कामरागसंयोजनं, रूपरागसंयोजन अरूपरागसंयोजन, पटिपसंयोजन, मानसंयोजन, दिहिमयोग सीलब्बतपरामाससंयोजन, विचिकिच्छासयोजन, उद्धचसंयोग अविज्जासंयोजन, मुत्तन्ते ॥ ११. अपरानि दस सानि । कामरागसंपोजन, भवराग- योजन, पटियसंयोजन, मानसंयोजन, दिहिसंयोजन, सोलम्बन रामाससंयोजन, विचिकिच्छासंयोननं, इस्सासंयोजन, मच्छरिय- संयोजन, अविज्जासंयोजनं अभिधम्मे ।। १२. दस किलेसा । लोभो, दोसो, मोहो, मानो, दिद्धि, विधि किच्छा, यीनं, उद्धचं, अदिरिक, अनीताप ।। १३. आसवादिसु पनेत्य काम-भवनामेन तव्वत्पुका वण्डा अधि- प्पेवा । सीलन्यवपरामासो, इदंसथाभिनियेसो, अपवादो ति खया पवन दिहिगतमेव पचति ॥ १४. आसोया च पोगा च सयो गन्या च वत्युवो। उपादाना दुये युत्ता महनीवरणा सियु ।। छलेवानुसया होन्ति नव संपोजना मता। फिलेसा दस युचोय नवधा पापसंगहो । १५. मिम्सफ संगई छ हेतु । लोमो, दोसो, मोहो । भलोमो, भदोसो, मपोहो॥
मामी परियो
१०
१६. पानि रितसो, रिपारो, पीति, एकगठा, पो.
पमान, दोपनास, पंचा
१७. दाद मागणानि । गम्मानिधि, सम्मानकापी, पम्याराचा,
परमारम्मनो म्यामागीरो, पम्पावापामो, सम्माराति, मम्मा.
पाधि । मिन्मादि पिप्पो, मिजारापामो मिरा.
पाधि
१८, पारीगनिन्द्रिपानि । पररान्द्रिय, सोनिन्द्रिप, पानिन्दिय,
मिलिन्द्रिय, पापिन्द्रिय, पिन्द्रिय, परिमिन्द्रिय, नीचोविन्दिय,
पििन्द्रय, परिन्दिर, हरिन्द्रिप, मोमनस्मिन्द्रियं दोमनस्सि-
दिप, नियन्द्रिय, पदिन्द्रिय, रिरिपिन्द्रिय, सतिन्द्रिप, समा.
पिन्द्रिय, पम्विन्द्रिय, अनभ्यातम्यर. मोनिप, अभिन्दिप,
मध्यावारिन्द्रिय ॥
१०. मा पलानि । राजाप, पिरियपन, सवयल, समाधिषले,
पध्यापन, पिरिपल, भोलापपलं, परिरिकपल, अनोपपपल ।।
२०. पनारो अधिपती । अन्दाधिपति, पिरिपाधिपति, पिसा.
विपति, बीमंगाधिपति॥
२१. पसारो आहारा । कपलीफारो माहारो, फरसो दुतियो,
मनोगतना वतिया, विभ्वाणं पतुत्य ।।
२२. इन्द्रिोश पनेन्य सीतापत्तिमगाण अनभातम्अस्सामी-
हिन्द्रिय । भरापालार्ण अम्मातापिन्द्रिय । मझे छ भाणानि
अग्निन्दियानो वि धुपन्ति ॥ जोविनिन्द्रियं प रूपारूपवसेन
इविध पोति ॥
२१. पञ्चविन्माणेमु मानगानि, भपिरियेमु पलानि, अहेतुकेगु
मर्गगानि न एम्मन्ति । सया पिचिकिरणाचिचे एकम्गता मम्गि-
समुपसंगहविभागो
न्द्रियबलमा न गच्छति । द्वितुक-विहेतुकनवनेपेव पपासका
अधिपठि एकोष लमति॥
२४. छ हेतू पश्च झानंगा मग्गंगा नव पत्युतो।
सोळसिन्दियपम्मा च वलयम्मा नरिवा।।
वतारोपिपती युत्ता तयाहारा ति सत्तथा।
कुसलादिसमाकिरणो वुत्तो मिस्सकसंगहो ।
२५. वोविपक्खियसंगहे चारो सतिपट्ठाना । सायानुपस्सना
सतिषट्टानं, पेदनानुपस्सनामविपट्टानं, चित्चानुपस्सनासविपदान,
धम्पानुपस्सनासनिपट्टानं ॥
२६. चत्तारो सम्पप्पयाना । उत्पन्नानं पापकान धम्मानं पहानाय
वापामो, अनुपनानं पापकानं धम्मानं अनुपादाय वापामो, अनु-
पमान कुप्सलानं धम्मानं उत्पादाय वायामो, उपनानं असलान
पम्मान मियोभावाय यायामो॥
२७. चनारो इद्धिपादा । छन्दिदिपादो, विरिपिदिपादो, चि.
सिद्धिपादो, वीमंसिदिपादो।
२८. पनिन्दियानि । सदिन्द्रियं, विरिमिन्द्रिय, सतिन्द्रिये,
समापिन्द्रिय, पश्यिन्द्रियं ।
२९. पय यलानि । सदापल, पिरिपाल, सतियल, समापिपल,
पच्यावलं ।।
३०. सस भोग्नंगा । मनिसंपोझिंगो, पम्मविचपराकोग्झंगो,
मिरियमपोझिंगा, पीतिमंदोग्मंगो, पम्मदिसंयोझंगो, सपादि.
मंगोइंगो. आम्यामोग्नंगा ।।
१. महमगंगानि । मम्मादिहि, गम्मालो, गामारापा,
मम्माम्मनी, मम्मामानीवी, मामायामो, पम्मामात, माया.
सपारि
११ २६. पर पनपनापनिपानानि पम्मापनि एका व पु. KRIT पापभाना निम्मारापापो॥ दीपिका पारमादिपीरियो । सामादि पापी पापो विनिमय। सम्मान समापो विरगो गानों। परनिरापदन गए नाप गंगहो । १४. परदिप पीपरप्पा रन्दो पपिस पिरतिपय । मताना तिरिय नरह कमी.पापी पर पच पम्या । गदा टानुपपगलगि- पम्मानमेगो परो रिमागो॥ १५. गन्ने मोरं दोनिन या मंकापपीवियो। एटोपि पि यथायोग एनिमुदिप्परचियं ।। २६. सम्पांगरे पशखया । रूपपसन्धी, पदनासन्यो, सध्या. पखयो, परवारपबन्धो, विभागरतन्धो ।। १७. पम्पुपादानरबन्पा । रूपुपादानपसन्यो, पेदनुपादानरख. न्यो, पशुपादानरखन्धी, संखारपादानरखन्धो, विवाणुपादान- पाबन्यो । २८. दादमायतनानि । पवखापतन, सोसायवने, पानायतनं, मिदापन, फापायतनं, मनायवन । रूपायसन, सद्दापतनं, गन्या- यसनं, रसायमन, फोहन्यापतर्न, धम्मायतनं ।। ३९. बट्टारस धातपा। परसुधार, सोमपात, पानपात, भिव्हा. पा, कायघात । रम्पधार, राघात, गन्धधात, रसधान, फौढप- भानु । पपसुविध्याणपान, सोतविभागपात, पान विभ्वाणपातु,
४०
समुच्चयसंगथिमागो
निव्हाविश्वाणयातु, फायविञ्याणयाच मनोगा, पम्पवान, मनो-
विवाणयानु।
४० चत्तारि अरियसचानि । दुक्खं अरियस, दुक्खसमृदयं व
रियस, दुक्खनिरोपं अरियस, दुक्खनिरोधगामिनीपटिपदा
अरियसचं ॥
४१. एत्य पन चैसिक-मुसुमरूप-निब्वानवसेन एकूनमचति
घम्मा घम्मायतनं पम्मघातू विच संत्रं गच्छन्ति ।। मनायव मंड
सत्तविभ्याणपावसेन भिन्नति ॥
४२. रूपं च वेदना सध्या सेसा चेतामिका क्या ।
विआणमिति पञ्चत पचक्खन्या वि भासिता ।।
पञ्चुपादानक्खन्धा वि वया वेभूमका मदा ।
मेदामापेन निन्यान खन्यसंगहनिस्सट ।
द्वारालंबनभेदेन मवन्तायतनानि च ।
द्वारालंबनदुप्पन्नपरियायेन धानुयो ।
४३. दुक्खं तेभ्मकं कई तण्डा समुदयो भये।
निरोपो नाम निधानं पगो लोकृतरो मठो ।
मग्गयुत्ता फला चेव चढसगविनिस्सटा।
इति पणमेदेन पयुचो सन्धमंगहो ।।
इति अमियम्मत्यसंगई समुन्शयमंगविमागो नाम
सत्तपो परिच्छेदो॥
अहमो परियो ११ ८. (पञ्चयसंग्रहविभागो) १. पेस संखधम्मान ये यम्मा पबया यथा। त विभागमिहेदानि परक्खामि यथारई ॥ २. पटिचसमुप्पादनपो, पढाननयो चैति सवपसंगहो दुषियो पेदितम्मो॥ ३. 'वत्य तन्भावमाविभावाकारमत्तोपलक्खितो परिचसमुप्पा. दनयो । पट्टाननयो पन आहच परहितिमारम्भ पवुधति ।। उभय पन वोमिस्सित्वा पपञ्चेन्ति पाचरिया ।। ४. तत्य अविजापचया संखारा । संखारपाया विमाणे । विभाणपथया नामरूप । नामरूपमधया सळापान । सळापनन- पचया फस्सो । फरसपचपा पेदना ! पेदनापचया महा। सहाप- घया उपादानं । उपादानपचया भको । भरपसया जाति । भानि. पचपा जरामरण-सोफारिदेवदुरखदोमनस्मुपायासा संभवन्ति । एवमेतस्स कैरलम्स दुरखरखन्यास समुदयो होती ति ॥ अयमेत्य परिचसमुप्पादनपो॥ तत्य वयो अडा, द्वादसंगांनि, धीमनाकारा, तिसंधि, चतु- संखपा, तोणि पहानि, देमूनानि च पेदितमानि । ६. कय ? अविनासरखारामतीतो, अदा । मातिनसमरण अनागतो भदा । माझे अट्ट पच्युानो भदा ति तयो मदाना ७. अविना, सखारा, विम्त्राणे, नामरूप मगाने, फागो, पेदना, साहा, गदान, भदो, भाति, भरामरणे ति दासंगानि ॥ सोकादिवचने पनेत्य निस्सन्दफनिदस्सने । . ८ पपपर्मगविभाग 4. अविनामसारगहणेन पनेग महगदानमा गाता भवन्ति । तया तादानमागाणेन र रिनारामाटिक रामरणगगहन प विज्माणादिफलपमेव गर्दिनं विकला- अतीते इतको पञ्च पदानि फलाम। इदानि हेनबो पच आयति फलपति ॥ घोसनाकारा, तिसंघि, यनुसंखेपा च मानि || ९. अविनानपादाना च किलेसाई । कम्ममर्मसातो भो. कदेसो संखारा च कम्माई। उपपत्तिभवनखातो मरेकदमो अ. बसेसा च विपाको ति तोणि वानि ॥ अविनावाहायसेन रे मूनि च दिवबानि" १०. समेव च मूलानं निरोपेन निरुज्झति । जरामरणमुच्छाय पीग्निानं अभिहसो । आसवान समुप्पादा अविना च पंवत्तति । वट्टमावन्यमिश्वं तेभूमफमनादिक । पाटचसमुप्पादो वि पहपेसि महामुनि ।। २१. हेतुपचयो, आरम्मणश्चयो, अपिषतिपञ्चयो, अनन्तर- चपो, समनन्नरपञ्चयो, सहजातपचयो, अनमनाचयो, निस्स. यपनयो, उपनिस्सयपचयो, पुरेनातपचयो, पच्छामातपचयो, आ. सेवनपञ्चयो, कम्मपच्चयो, विपापचयो, आहारपद्यपी, इन्द्रिपा चपो, झानपचयो, मग्गपञ्चयो, मपयुत्तपञ्चयो, विप्पयुत्तपञ्चयो, अ. त्यिपचयो, नत्यिपञ्चयो, विगतपचयो, अगितपचयो वि॥ अयमेत्य पट्टाननयो॥ १२. छद्धा नामं तु नामस्स पञ्चधा नामरूपिन । एकपा पुन रूपस्स रूपं नामस्स चेकपा ॥ १सी. पपवति।
अहमो परिच्छेदो पञत्तिनामरूपानि नामस्स दुविधा दर्य । दयस्स नवया चेति छविया पञ्चपा फर्य १३. अनन्तरनिरुदा चित्तवेतासिका धम्मा पचुपनाने चित्त चेतसिकानं धम्मानं अनन्तर-समनन्तर-नत्य-विगतवन, पुरिमानि जवनानि पच्छिमानं जवनान सेवनबसेन, सहजाता चित्तासिका धम्मा अमञ्यं संपयुचरसेनेति च छद्धा नाम नामस्स पचयो होति ॥ २४. हेतुझानंगमगंगानि सहगावानं नामरूनान हेतादिवसेन । सहजाता तना सहनातानं नामरूपानं, नानाक्खणिका वेतना फम्माभिनिवत्तानं नामरूपानं फम्मत्रसेन । विपाकवखन्धा अन- मनं, सहनावानं रूपानं विपाकवसेनेति च पञ्चधा नाम नामरूपानं पच्चयो होति ॥ १५. पच्छानाता चिचवेतसिका धम्मा पुरेनातस्स इमस्स कापस्स पच्छाजावदसेनेति एकया व नाम रूपस्स पचयो होति ॥ १६. छ यत्पनि पवत्तिय सवनं विमाणयातून, पथारम्मणानि घ पञ्चविणवीथिया पुरेजातवसेनेति एकथा व रूपे नामस्स पचयो होति ॥ १७. आरम्मणवसेन उपनिस्सपवसेनेति द्विधा पञ्चचिनाम- रूपानि नामस्सेव पचया होन्ति ॥ तत्य रूपादिवसेन एन्धि होति आरम्मण ॥ १८. उपनिरसयो पन तिविपो होति । आरम्मपनिस्सयो, अनन्तरूपनिस्सयो, पातपनिस्सयो पेवि ॥ १९. तत्य आरम्मणमेव गरुकतं पारम्पपनिस्सयो । अन- स्तरनिरदा चिरतसिका धम्मा अनन्वरूपनिरसया ॥ रागाइयो
পায়নি
पन घम्मा, सद्धादयो च; मुस, दुरसं, पुगलो, मोमनं, उस
सेनासनं च पयारह असनं च बहिदा र कमलादिधम्मानं, कर्म
विपासानं ति च बहुया होनि पापनिस्सयो ।
२०. अविपति-महमात-अजमन-निस्सयाहारिन्द्रिय-वि.
प्पयुत्त-अत्यि-अविगतवसेनेति ययारई नया नामल्लानि नामानं
पञ्चया मवन्ति ।
२१. वन्य गरुकतमारम्मणं यारम्ममाधिपतिवसेन नामान,
सहनाताविति चनुचित्रो पि महमानबसेन सहमावानं नामल्यानं
वि च दुवियो होनि ययिषविपञ्चयो ।
२२. निवेसिका घम्मा यमपञ्च सदनातरूमान , यहा-
भूवा यत्र्यसनं मादारूमानं च, पटिसंविखने वायु-विराको
अञ्चमवं नि च विवियो होति सहनावपञ्चयो ।
२३. चित्तासिका घन्मा अभ्यमञ्य, महामूठा अअमनं,
पटिसंविखगे वायु-विपाका अअमनं विच विवियो होति
अम्ममञ्जपचयो॥
२४. वित्तवासिका पम्मा यत्र्यमभंसहजानरूपानंच, महामृता
अञ्चमनं उपादास्मानं च, छ क्यूनि सत्पन्नं विचागवानून
विच विविधो होवि निस्सयपचयो ।
२५६ कवेळोकारों गाहारो इसस्स कायस्स; अरूपिनो आहारा
सहनावानं नामरूपानं नि च दुवियों होति आहारपञ्चयो ।।
२६: पच पसादा पञ्चग्नं वित्र्याणानं, रूपनीविनिर्दियं उगादि-
रूपानं, अरूपिनो इन्द्रिया सहनावानं नामस्वानं ति च विवियों
होति इन्द्रियपचपो॥
२५. योश्चन्विक्सगे वय विपाशानं, पिचदेसिका पम्पासा
बहुमो परिच्छेरो मातरूपानं सहनाववसेना पच्छाजाता चित्तवेत सिका'यम्मा पुरेना- बस इमस्स''फायास पच्छाजातवसेन । छ वरपूनि पपचियं सननं विआणघातून - पुरेजानवसेनेति च तिविषो होखि विप्पयुचपञ्चयो। २८. सहजासं पुरेजा पच्छाजात ष सन्चया । फवळीकारो आहारो रूपनोवितमिचयं ति ॥ पथविधो होति अत्यिपचयो, अविगतपचयो च ॥ २९. आरम्मपनिस्सय-कम्मत्यिपच्चयेन च स पि पच्चया समोधानं गच्छन्ति ॥ ३०. सहजातरूपं ति पनेत्य सम्बया पि पवते 'चित्तसमुद्वामान, पटिसंघियं फटत्तारूपानं च पसेन दुविधं होती दि पेदिन ॥ ३१. इति तेकालिका घम्मा फालमुचा च संभवा । अज्झचं च पहिदा च मखतासंखता तया ॥. पश्यचिनापरूपानं पसेन तिविधा दिता। पचया नाम पढाने चवीसति सम्बया । ३२. तत्य रूपधम्मा रूपवतन्धो. चित्तवेवसिफसखाता च. चारो अरूपिनो खन्या निजानं चेति.पविध पि अरूप जिप नाम ति च पचति ॥ ततो अवसेसा पञ्षति पन: पापियत्ता पअचि, पञ्ञापनतो पयती तिच दुविधा होति ॥ ३३. फथं ? भूतविपरिणामाकारमुपादाप तथा तथा' पञ्चा भूमिब्बतादिका, संभारसंनिसाकारमुपादाय गहरयसकदादिका, खन्धपश्चकमुपादाय पुरिसपुग्णादिका, चन्दवचनादिफमुपादाप दिसाफालादिका, असंडाफारमुपादाप कूपगुहादिका, सर्वभूतान- मितं भावनाविसेसं घ उपादाय फसिणनिमिचादिका पति एक्सा- दिपभेदा पन परमस्थतो.अपिजमाना पिमित्पन्ापाकारेन चितु. ,
४६
पचपमंगदयिमागो
पादानमारम्मणभूता तं ते उपादाय उपनियाय कारणं कला तया
तथा परिकभियमाना मखायति समायति योहरियति पत्रादि-
यती ति पश्यतीति पचति॥अयं पश्यत्ति पन्मापिपचा पञ्यचि
नाम॥
३४. पञ्ञापनतो पत्ति पन नाम-नामकम्मादिनामेन परिदी.
पिता ॥ सा विचमानपञ्अत्ति, अविजमानपञ्अत्ति, विनमानेन
अविनमानपञ्चत्ति, अविजमानेन विनमानपअत्ति, विनमानेन
विजमानपञत्ति, अविनमानेन अविनमानपअचि चेति छविया
होति ॥
३५. वत्य यदा पन परमत्यतो विजमान रूपवेदनादि एवाय प.
ऽआपेन्ति, वदार्य विनमानपञ्अति ॥ यदा पन परमत्यती अवि-
ज्जमानं भूमिपञ्चवादि एताय पञ्नापैन्ति, वदायं अविजमानपञ्जची
वि पवुचति ॥ उभिन्नं पन वोमिस्सकबसेन सेसा यया छळमिचो,
इत्यिसद्दो, चरखुविआणं, राजपुचो वि च वैदिवया ॥
३६. वचीघोसानुसारेन सोतविनाणवीथिया ।
पवत्तानन्तरुप्पन्नमनोद्वारस्स गोचरा ॥
अत्या यस्सानुसारेन विश्वायन्ति ततो परं ।
सायं पञ्चचि विश्लेय्या लोकसंकेत निम्मिता ॥
इति अभिषम्मत्यसंगहे पच्चयसंगहविभागो नाम
अट्टमो परिच्छेदो॥
सी. ततपरिणामसंनियेसादिक्षाफारमुपादाय।
:-
नयमो परिच्छेदो ४ ( कम्मट्ठानसंगहविभागो) १. सम्पपिस्सनानं भावनानमिडो पर। कम्महान पवस्खामि दुर्विध पि ययाम ।। सत्य सपपसंगई सार, दस कसिगानि । दस अमुभा दस अनुस्मतियो। परसो अपमनायो । एका सा। ए. पदत्यानं । पचारो पारुपा चेति सत्ताविपन समयकम्महानतंगहो। ३. रागपरिता, दोसचरिता, मोहचरिता, सदाचरिता, बुद्धि धरिता, विवकचरिता चेवि छविन चरितसंगहो । ४. परिफम्मभावना, उपचारभावना, अपनाभाश्ना चेति विस्सो भावना ॥ ५. परिकम्पनिमिचं, जग्गहनिमित्तं, पटिमागनिमित्तं चेवि वीणि निमित्तानि च दिवधानि ॥ ६. कय ! पदवीकसिणे, आपकसिणं, नोकसिणे, वायोफ- सिणं, नोलकसिणं, पीठफसिणं, लोहितकसिणं, ओदातकसिणे, आकासकसिण, आलोकमसिण वेति इमानि दस फासणानि नाम ।। ७. अनुमानक, विनीलक, विपुषः, विच्छिदक, विक्खायि- सकं, विविखनक, हतविरिखसक, लोहित, पुलक, अहिक चेति इमे दस अमुभा नाम ॥ ८. बुद्धानुस्सति, पम्मानुस्सति, संघानुस्सति, सीलानुस्सति, चागानुस्सति, देवतानुस्सति, उपसमानुस्सति, मरणानुस्सवि, का. यगवासति, थानापानस्सवि चेति इमा दस अनुरसतियो नाम ।
कम्सहानसंगदिमागो ९. मेत्ता, करुणा, मुदिता, उपेक्खा चेति इमा चतस्सा अप्पम- जायो नाम । ब्रह्मविहारा ति पि बुचन्ति । १०. आहारे पटिकलसचा एका सञ्आ नाम ॥ चतुपानुवव- त्यानं एक वक्त्यानं नाम ।। ११. आकासानश्चायतनादयो चत्तारी आरुप्पा नामा वि सम्बया पि'समयनिइसे चत्ताळीस फम्म हानानि भवन्ति । १२. चरितासु पन दस अमुभा, फायगतासतिसंखाता कोद्वास- भावना रागचरितस्स सपाया। चतस्सो अप्पमआयो, नोलादोनि घ चत्तारिफसिणानि दोसचरितस्स | भानापान मोहचरितस्स, वितकचरितस्ताचायुद्धानुस्सनिादयो छ सद्भाचरितस्स । मरण- उपसम-सना-नवत्यानानि बुद्धिचरितस्स ।। सेसानि-पन, सन्चानि पिफम्मट्ठानानि सन्चेसं पि सपायानि ॥ तत्यापि कसि गेसु.पुपुलं मोहचरितस्स । सुद्दकं वितकचरितस्सेवाति ॥ अयमेत्य सम्पायमेदो। १३. भावनामु पन सन्मत्यापि परिकम्मभावना लन्भव ॥ युद्धा- नुस्सति आदिसु अट्टम, सञ्चा-वस्त्याने चा ति दसमु कम्महा- नेमु उपचारभावना व गंपन्नति । नत्यि अपना ।। सेंसेमुपन सम. विसम्मटानेनु अप्पनामावना पि संपज्मति ।। १४. नत्यापि दस कसिणानि, आनापानं च पञ्चासानिकानि। दस भमुमा, कायगतासति प पठमशानिमा। मेताइयो तयो चतुकम्मानिका ॥ उपेखा पञ्चमझानिकाानिछन्योसति रूपारप. रशानिकानि कम्महानानि । चत्तारो पन आपपा आरमशा- निका ति ॥ अयमेत्य मावनामेदो. १५. निमिनमुःपन रिफम्मतिमि, जग्गानिमित्त सम्ममा पिन्यमा प्ररिपायन सामानोव || दिमागनिपिनाकसिणा- Pी बिदी Prim-ARTNERetu Trय परिमानिमित II IIपिपनागपाधि र परन्ति । ११. परीपाडायदिए नितिन पनाममारपण पहिनिपिपनि परनिभाना माना माप ॥ १७. निलगिन गहनातिरोति, पाराना पार पनोरम मापापभाग, गदा मेर भारम्म उन्म- पित नाममा मापना समाधिपति। १८. नालिग पाय तो पर परिम अगानिपिने परिसम्मममाधिमा भारतमनुमनाम पदानपरिमार्ग परपुषम्म रिरिए पनि रगत पारनामपमारमणे रिते मंनिमित सपिरामि, मदा परिमानिमित पमुपर वि पप्पति ॥ दमो पटाप परिपपिपीना कामापरममापिलाना उपचार- मापना निप्प.पा भाप रोनि॥ ११. समो पर नमेर परिभागनिपिन उपपारमपापिना समा. संवन्नम्म पापपरपटमम्मानमावि ॥ ततों पर समेर पठभमान, भारवन, ममापन, अपिहान, शहान, पपपरपणा पेति माहि पति पतितादि पगीभूत कत्या तिमादिकमोगरिकंग पहानाप, रिसारा दिए गप्परिया पदावो पपार हुतियमानादपो यथा- मनि ॥ २०. इ पटवीशसिणादिए दावीसफम्मटानेश परिभागनिमि. पमुपलभवि ॥भवमेसेम पन अपमन्यासचपम्मरिय पवचन्ति ॥ २१. थापासरमितसिणेगु पन यं किंचि फसिणं जम्पाटेवा एडमाकाम भनन्यसेन परिफम्म परोन्तस्स पढमारुपमप्पैति ।। ७ कम्मट्ठानसंगविमागो तमेव पठमारुपवित्र्याणं अनन्तबसेन परिकम्मं करोन्तस्स दुतिया रुप्पमापति ।। तमेव पठमारुपविञ्वाणामावं पन नत्यि किंची परिकम्मं करोन्तस्स तवियारुप्पमप्पंति ॥ ततियारुप्पं सन्तमे पणीवमेत ति परिकम्मं फरोन्तस्स चनुत्यारुप्पमपति ॥ २२. अवसेसेमु च दसमें कम्मट्ठानेम युद्धगुणादिकमारम्मणं आ- रस्म परिकम्म फत्वा तस्मि निमित्ते साधुकमुग्गहिवे वत्येव परि- फम्म च समाधियति, उपचारी च संपन्नति ॥ २३. अभिआवसेन पवत्तमान पन रूपावचरपञ्चमझानं अमि- ज्यापादकपञ्चमझाना युट्टहित्वा अविद्येय्यादिकमावज्जेत्या परि- फम्म फरोन्तस्स रूपादिमु आरम्मणेमु ययारहमप्पैति ।। २४. अमिन्या च नाम- इदिविघं दिव्यसोतं परचिचविनानना । पुम्पेनिवासानुस्सति दिन्नचक्स् ति पश्चया ॥ अयमेत्य गोचरभेदो ॥ निहितो च समयसम्माननयो । २५. विपस्सनाकम्मट्टाने पन सीलविमुसि, चित्तविमुद्धि, दिहिविमुद्धि, कखावितरणनिमुदि, मम्मामगपाणदस्सनरिसनि पटिपदाषाणदस्सनपिसुदि, याणदस्सननिमुदि पैति सविधन विमुदिसंगहो । २६. अनियटनसणं, दुक्खठपसर्ग, पनतरवगं पेति वीगि टारसगानि ।। २७. मनिषानुपस्सना, दुरसानुपरसाना, मनमानुपस्मना पति निम्मो अनुपम्मना । २८. सम्ममनमार्ग, दपवयमार्ग, मंगवाणं, मपत्राण, मा. दोनवभार्ग, निम्पिदावाण, सविम्यामार्ग, पटिससावा, संभावना मनुलोपका दिन पिनापागानि ॥ १९. Prisमोचनी, मानविय दिपोरो, अगिता रिपोरवी मियो रिसोगरा || स्त्रमानुसम्मना, भनिमि- पाशुपमा पणिनामुपागमा तिमीणि रिसोरखमुसानि मानि १७. ६५! पारियोपारमी, इन्द्रियसंबरमीले, भानीर. पारिदियो, पपयानिमिणगी पति पनुपारिमुभिगोलं सोदि माम॥ ५. पपारगपाधि अपनायपाधि पति दुरिपो पि समापि विगविगुदि नाम ॥ १२. पण-ग-महान पदहानपरोन नामरूपपरिगो दि- हिरिगुदि नाम ।। २३. गर्म च नामरूपानं पपपपरिगहो सावितरणपिसुद्धि नाम ।। १४. सनी परं पन नपापरिग्गदितमु सपथग तैमसंसार मनोवादिमेदाभिमु सन्मादिनयमारम्भ फलापरसेन संखिपित्ता, अनियं सपन, दुवर भपढेन, अनगा भतारक?ना ति भदानर- मेन, सन्त निरमेन, सगरसेन पा पम्मसनमाणेन लाखगषयं स. मगन्तरण, नरपर पपपरसेन खगवसेन च उदयनपत्राणेन उदय- व्यय समनुपस्सनमा प- योभामो पोनि परसद अधिमोपखो प पगहो। एवं बाणापट्टानमुपैयखा प निकान्ति चेति ।।
कम्महानसंगहयिमागो
ओमासादिविपस्सनुपविलेपपरिवंयपरिग्गहवसेन मगामग्गलास
णवत्यानं मग्गागरगाणदस्सनविसुद्धि नाम ॥
३५. व्यापरिवंयविमृत्तस्स पन तस्स उदयन्नयनाणतो पट्टा-
यावानुलोमा विलक्षणं विपस्सनापरंपराप पटिपजन्नस्सन
विपस्सनाप्राणानि पटिपदासाणदम्सनविद्धि नाम ।
३६. तस्से परिपनन्तस्म पन विपस्सना परिपाकमागम्म इदानि
अपना उप्पनिस्सनी ति मगं वोच्छिन्दित्वा उत्पन्नमनोद्वारानन्त
दे तोणि विपस्सनाचित्तानि यं किंचि अनिचादिलक्खणभारम्भ
परिकम्मोपचारानुलोमनानेन पवननि ॥ या सिखापचा, सा सा
नुलोमा संखाररखा, उद्यानगामिनी विपम्सना ति च बुचति ।
वतो परं गोत्रमुचिनं निचानमालंबिला पुपुबनगोचभिमान
अरियगोचमभिसंमोन्नं च पबत्तति ॥ तम्सानन्तरमेव मग्गो दुतरस
सचं परिनानन्नो, समुदयसचं पनपन्नो, निरोपम सचिारो-
नो, मग्गम भावनायसेन अप्पनावीयिमोनरनि ॥ ततो परं में
भोणि फलचित्तानि पनिता मांगपातो व होनि ॥ पुन भांग यो-
छिन्दित्या पावसणवाणानि पचन्ति ।।
मगं फलं च निम्यान पसरसति परितो।
होने फिलेसे सेमे च परागसनि वा न वा।।
एनिमुदिरमेने भावनी पग्यिो।
माणदम्मनरिमुदि नाम मागो पत्रपति ॥
अपमेन्य विमुदिभेदो।
३७. तन्य मनवानुसम्मना मनामिनि सबनी गुज्यतानुर.
मना नाम रिमोरममुर्मति ॥ मनिषामुपस्मना रिपमानित
मी. परिपाय..
नयमो परिषदो मितं मुञ्चन्नी अनिमिचानुपस्सना नाम विमोक्रवमुख होति ।। दुखानुपस्सना तहापणिधि मुश्चन्तो अप्पणिहितानुपस्सना नाम विमाक्खमुखं होति ॥ तस्मा यदि वुहानगामिनी विपस्सना अनचतो विपस्सति, मुन्नतो विमापखो नाम होति मग्गो । यदि अनियतो विपस्सति, अनिमिचो विमोक्खो नाम ! यदि दुक्खतो विपस्सति, अपणिहितो विमोक्खो नामा वि च मग्गो विपस्सना. गमनसेन तोणि नामानि लभाति । तया फलं च मग्गागमनवसेन मग्गोथियं ॥ ३८. फलसमापत्तियोपियं पन ययावृत्तनयेन विपस्सन्तानं यथासक फलमुपजमानं पि विपस्सनागमनवसेनेव सुमतादिविमोक्खो ति घ युबनि । भारम्भगवसेन पन सरसवसेन च नामचर्य सन्चत्य सन्स पि सममेव ॥ अयमेत्य विमोपखमेदो ॥ ३९. एत्य पन सोतापचिमगं भाषा दिद्विविचिकिच्छापहानेन पहीनापायगमनो सचखचरपमो सोतापलो नाम होति ॥ ४०. सफदागामिमग्गं भायेत्वा रागदोसमोहान उनुकरचा सफ- दागामी नाम होति, सकिदेव इम लोकं भागन्तां ।। ४१. मनागामिमर्ग, भावेत्वा कामराग-व्यापादानं अनवसेसप्प- हानेन अनागामो नाम होति, अनागन्ता इत्यचं ॥ ४२. अरहसमग भाषेत्वा अनवसेस किलेसपहानेन भरा नाम होति, खीणासयो लोके अगदक्षिणेग्यो । अयमेत्य पुग्गलमेदो॥ म. भागारवा२म. भनागमवा।
सम्मानमगहषिमागो
४३. फलममातियो पनेत्य सन्ने सि पयागमन
मागारगाव ॥ निरोपमसातत्तियारमन पन अनागानोन
अरानानं पसन्मति॥
४४. तन्य पयायो परमशानादिमागममापि ममा
सा मुम्पनी मैलारपन्ने गल्ल सामिगलो पार
मिन्मानानं गला पर भरोग्यादि पुगि
नानासानागामायाने समापन गरम दिसे मना
नाम पो बोगिमाननि निमितो निरोगमा
नाम हो।
v, Tানাই ধন সনাকামিনী নামিদানি, মা
भारतात परमारगर पालिता मांगी।'
HTTमाण पातति॥
भागमापनि हो । निति निम्मानको
11.
मन मानादयानो।
सिनिागागागपलेन गामने ॥
शशिप पगई महानगरपागो नाम
नामी परियो॥
२५
चारित्तसोमितविसालकुलोदयेन
सद्धाभिहपरिसुदगुणोदयेन।
नम्बन्हयेन पणिधाय परानुकंपं
संपत्यितं पकरण परीिनहितं ते ।।
पुण्येन तेन विपुलेन तुमूलसोमं
धाधिवासमुदितोदितमायुगन्त ।
पावदातगुणसोभिवलज्जिभिक्खू
ममन्तु पुअविभवोदयमंगलाय ।।
॥ इति अनुरुद्धाचरियेन रचित
अभियम्मत्यसंगई नाम पफरणं, निहितं ।।
XUGARCHAND PRA130DAN SETHIL
JAIN LIBRARY.:
BIKANER, RAJPUTANA,
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JUIN stil: BIKANER, RAJPUTANAS सदानुक्कमा [पन्द पडी बने ये दंड (1) पछी आरता आंकडा परिच्छेद- संख्या दर्शाये छे. एकदंद (1) पछी आवता आंकडा पेरेग्राफसंख्या दर्शाये है.] भलोहरणकाल ६॥ १४ ॥ अफनिट५।६।१५॥ अन२।२५। २७॥ अकमल १।६। २८ ॥ २१५ अम्ममा ८१४॥२२॥२५॥ २४॥ ८२५१२७१२८॥३॥७॥ १०।२२।१५॥४॥२२॥ अप्रमभ्नपचय ८।११।२०। ५११९।२०१२४॥६॥११॥ अकुमलकम्म ५॥ २७॥ अन्नसमान २३१८।२१॥ अकुसलपाक११०॥५॥७॥ अकुसलविपाक १.७॥१६॥ अप्रातापिन्द्रिय ७॥१८॥२२॥ भाभिन्द्रिय ७।१८। २२॥ अकुसरसंग ७१२१३॥ आहिक ९॥७॥ अगोचरागादिकरूप ६॥८॥ अतप्प ५।६।१५॥ भागदक्षिणेच्य४१॥ भति। १६॥ अग्गमगफलुग्मित ३१२३॥ अतिपरित ४॥७॥९॥ अग६॥२३॥७॥१५॥१७॥२३॥ अतिमहन्त ।।७ten २४।३n८1५1७॥१४॥ अतीत ८१६.८॥ अंगमाष५1५० भतीतका अंगुष्पत्ति १९॥ अतीतादिभेर९३४॥ अतीतारम्मण ५ ॥१७॥ भयन्त ६।३१॥ मन्नत५५१॥६॥३१॥ मम्मत ६।१३॥८॥१९॥३१॥ अत्तवाद.१३॥ अगाहिक ६.७॥९॥२२॥ अलवायुपादाम 1७॥ अतामिनिक्षेस ११७॥ अतिककर 1. अगात्तिकस्तान ११॥ अत्यहापाकारा३३.
५८ अरियपचय ८॥११॥ २०॥ २८॥ अनागामिफल । १९॥ २९] अनागामिफलचित्त ५। २६ ॥ अदिनादान ५। २१॥ सदुषवममुम्ब ३१२॥ भनागामिमग्ग ११ ॥ ९॥ अदोस २५॥३५॥८॥ भनागामिमग्गयित १॥ २५॥ अदा ८1५॥६॥ अनादिक ८॥१०॥ मदान ९॥ ३४॥ अनारम्मा ६.७॥ अदुध ५।४१. अनिश ९॥ ३४॥३०॥ मनाररूप ६॥८॥ अनियता ६५ मधिहान १९॥ अनिपलयया । २६० अधिद्वेप्यादिक ९/२३१४॥ अनियरिलगा ॥ अधिपति ७१२.२३॥ २४॥ अनिमानुपस्मना ९१२७॥३॥ भधिपतिपय ८१ ११। २०! मनिट ४१ १६॥ भनिदस्मनरूप 100 मधिमोरब २३॥ ११॥२७॥ भनिग्निपार ८. अमिफा ६॥ अमन्त्रालयम्मामीतिद्रिय भनिमित्ता. ९। १८1१२॥ भमत ११३1३०॥ मनिमित्तानुरस्मना ।२९॥ मरत्तपत्रमाग ९६. भनिम्मिता ३।२६. अनलागषय८1११॥१५॥ मनुतर १७१२११॥ मरम्मानिगद ८॥ १३॥ १९॥ बनानामिम्मय ८1१८॥१॥ अनुनामुन ॥२५ बमिया 141 अनुगमनमा १७११114 अनमिन ९४१॥ अनुशारिणETv. भनयमपाशाम ! अनुगामिनिस्वामभानु बमागत ८.६॥ अनुषत्र 11 अनाममा अनुर.. बनुनी II हवामामि ॥१. अनुलोमत्राग /॥
व अनुमय 11a अनुममा ५11. अनुगमन 110 मनोसप २११३000१२॥ भोगप्पपल 01.॥ बापमाप्रा २१७॥१५॥१९॥ २१॥ २१॥ २४॥९॥ २।१२।२०॥ मापमाणगुभR३१॥ भापमाणाम ५१।१५।३१॥ अप्पहातप्प.१.७॥ भपदोगत अयोगि १२६॥५॥४॥ मारित २६॥ अपपायन ५११५॥ अपरा॥ अपरापरियपेदनीय ५१९॥ मपतिदिन ३४॥ पाय ६१२॥९॥३९॥ अपापपरिमधि ५.१०॥ अपापमूमि ५111101 १०।२७॥ अपुष २॥१४॥ अपरिपरूप ६11 अप्पणिहित ६॥२०॥९॥२९॥ अप्पणिहितानुपासना ९॥२९॥ अप्पाजत ३१८॥ अभाव १२१॥ अभिरमा ५.२३/२४॥७॥६॥ अभिमा ३१२२॥ ४॥५॥ २०॥६॥ १२॥९॥२३॥ २५॥ अभिप्रानुसल ३।२२।। अभिम्माजवन। १९॥ अभिम्प्रापादकपञ्चमहान ९॥ २३॥ अभिधम्म ७॥ ११॥ अभिधम्मरथ ॥ अभिधम्मस्पतंगह ११॥ अभिनवकरण ५ ।। अभिनिष्पत्त८1१४॥ अभिनीहार४।१३।। अभिमुग्णीभूत ५॥ ३५॥ अभिसंखत ६॥ ११॥ अमोह ३।५।८1१५॥ भरह । ५२॥ अरहत ४॥१९॥ अरहसफल ११५॥ १९॥ असफलपित्त । २६॥९॥ अप्पमा १३१४११५॥१९॥ अप्पनासयन २१॥६॥१२॥ स४॥ अपनाजषनवार १३॥ अपमाजवनाषसान[१३॥ अपनापत ५॥२६॥ अपनाभावना ९।४॥ अप्पमापीथि ॥१३॥९॥३६॥ अपनाममाधि ।१५।१॥
भरिएपप ८१ २०१२८॥ भनागामिफार अमागामिफलपित्त । २१ अरिमारान ५॥ २१॥ भारसमसुम ३१२ अनागामिमग १०॥ ९ मशेस २॥५॥३॥५॥८॥ भनागामिमगचित । अना८141६॥ समादिक ८1१.॥ भमारम्मणा ॥७॥ मयुर । ४१॥ भमिम । ३४ || मधारमप|८॥ भनियता ॥५॥ भनिचलावण ९) २५॥ अधिप्यानिक |२३|०५॥ भनिचारिला । अभिति... २३ २४॥ शनिमारमा ५/७१ शनिवप८1११। २.। गनिया । भनिनार 10 मारय ।।११।२७॥ भनिन्त्रिपका In भमिका जनामातरमनामीगिनिया भनिमित्त ।१५) १८॥१२॥ भनिमितानुस्मना । बगनबन मनिगा५॥ मना८1११ १९॥ MARATHI 411८1१॥ अनुगमन AIIM मा. अनुशाEिTI अनिमियानपान RATAR Jn अनामनाला.
अप्पमञा २।७।१५।१९।
२१॥ २३॥ २४॥ ९॥
९॥ १२॥ २०॥
अप्पमाणसुभ२१६११५१३१॥
अप्पमाणाम ५।६।१५।३१॥
अप्पहातध्य.६॥ ७॥
अप्पहोगत १९॥
अब्योच्छिन्न ४।२६ ॥५॥४०॥
अनुमय ७९॥१४॥
भनुमयमूलक ५। ३६ ॥
अनुस्सति ॥१८॥१२॥
भनोतप्प २११११३॥७॥१२॥
बनोत्तपयल ७॥१९॥
अग्त ११३॥
मन्तरित ४।२६॥
अपचापम ५॥२५॥
अपर ।।१॥
अपरापरियपेदनीय ५॥ १९॥
अपरिग्गदित ३॥
अपाय ५॥ १२॥९॥३९॥
अपायपटिसंधि ५।९।१०॥
अपापभूमि ५। ३१ ॥८॥
१०॥२७॥
अपुन २॥१५॥
अप्पटिपरूप ६८
अप्पणिदित ६ ॥३०॥९॥ २९॥
अब्याकत ३1८॥
अभाष ९॥ २१॥
भभिनमा ५१२३॥२४॥ ७॥६॥
अभिमा ३॥ २२॥ ४॥ १९॥
२०॥६॥ १२॥ ९॥ २३॥
२४॥
अभिप्राकुसल ३॥ २२॥
अभिमाजषन ४॥ १९॥
अभिमापादकपञ्चमग्मान !
अप्पणिहितानुपस्सना ९॥२९॥
अप्पमा १३१४॥१५॥१९॥
२१॥ ९॥ १३॥ ३६॥
अपनाजषा १२१॥६॥१२॥
१४॥
अप्पनाजधनवार ।।१५॥
अपनापनावसान 11॥
अपनापत ५।२१।।
अपनाभावना १४॥
अपनानीधि १५॥९॥६॥
भप्पनाममाधि ११५॥
अभिधम्म ७॥ ११॥
अभिधम्मत्य १११॥
अभिधम्मस्पतंगह ११॥
अभिनव शरण ५। ३२॥
अभिनिष्पत ८।१४
अभिनीहार ॥१३॥
अभिमुखीभूत ५1५॥
अमिर्मयत ६।११॥
अमोह1५1८1१५॥
अरब ९८४२॥
थाहारष्ट ।।१४।१९॥.
मरातरक्षित ।। २६ ॥९॥
अधिनमान ८।३३।१५ अधिनमागपश्मति ८ ॥३ मरहतफलप्राण ७१ २२।। भरहत्तमग्ग ९।४२॥ भरहतमागवित ११२५॥३०॥ मरहतमागफलानित ३॥२२॥ अविना ८४।६।। भरिय ४१२२॥५॥८॥ अधिनायोग ७॥५॥ अरियगोत ९॥ ३६॥ मयिमानीयरण ७॥८॥ भरियस ७॥४॥ अधिनानुसय ७।९॥ मरूप।१०।२४॥४॥२५॥ अधिनानुसयपरिविगत ५ ६।२७॥ २९॥ ७॥२२॥ मरूपपरिसंधिक ५॥ ३८॥ अयिमासंयोजन ७।१०।२. मम्मभूमि 4100 अयिन्नासय ७11. मकारागर्मयोजन ॥१०॥ अधिनीय ७४. मकरमीत २४॥ अथिमिम्मोगप1८।१५ भरविण ॥ १२॥ बरार १।२॥ अरिमन ।।५।। भाषामा १५/२६॥ अतिरिय ७ । २५० १२॥ अथित. असामायिन ११॥ अगामा क्रियाविन १२३॥ प्रमाणपरिधि || मानामि Pin अमेगारिक।।" बरावणाति १२॥ १५॥ ॥२५॥ भरति८।२५।२१॥ ममत्रमूमि 100 अनीम ॥ ३५॥ ८॥ भगत | MIL अम1ि८1१९. महार". अविमा ८1११ । २.। मामा...."
। मसुर ५। ११ । १२॥ असुरफाय५ ।४॥ असेल ४) २३ ॥ अहिरिक २ । ४ । १३ ॥ ७ । महिरिकपल ७॥ १९॥ अहेतु ५ । ३९॥ अहेतुक १।१०।२।११ । १८।२९ ॥३॥६॥८॥ ४ । २१॥ ५ ॥ २९॥६। ७॥ ७ ॥ २३ ॥ अहेतुकक्रियाचित्त १९॥ अहेतुकषित ।।६॥ अहेनुफपटिमंघियुगल २ ॥२९॥ अहेतुकषिपाक ५॥ २८ ॥ अहोसिकम्म ५ । १९ ॥ आ आकार८1५॥ आकारभेद ६.३०॥ आकास ६॥ २॥ आकामकसिण ९।६॥ आकासधातु ६।५।१५॥ आकासपमितकसिण ९॥२१॥ आकासानधायतनकुसलषित" २१॥ आकासामचायतनक्रियावित ।। माकिर-कुसलपित्त १। २१ ॥ भाकिर-फ्रियाचित्त १।२१। आकि०-भूमि ५ । ७॥ आकिल-विपाकचित्त ।। २२ ॥ आकिवनायतम् पग ५॥ १७ ॥ आगत ४।९॥ आचरिय ८॥३॥ आचिण्ण ५। १९ ॥ आजीष ७।१७।३१।। आजोषपारिसुद्धिसोल ९॥३०॥ आदिकम्मिक ४॥१९॥९॥१६॥ आदीमषत्राण १।२८ ॥ आनापान ९।१२।१४।१५॥ आनापानस्सति ९॥८॥ आपाप ४।८।९।११॥५॥ ३७॥९।१७॥ आपोकमिण ९॥६॥ आपोधातु ६।४॥ आयन्ध ८१०॥ भस्तर ५६।१५॥ ३१॥ आपतन ६॥ ८॥ ७॥ ३८॥ ४१1१२॥ आयति ८1८॥ आयु ८॥ आयुक ६॥२५॥ आयुक्खय ५३४. आयुप्पमाण ५११५/१७॥ आयुप्पमाणगणना ५/१२. आरम्मण १।९।११।२१॥ २२.४।२।१८ ११।११।१७॥१८॥५॥ ३५.१३७५३०.. आकासानञ्चायतनममि ५॥७॥ आकासा-विपाकचित्त ११२२ आकासामचायतमादि ९।११। आकासामधायतमूग ५.१५ भाकिम्मापता 1.
। " उपेक्सासहगतर्मतीरण ३।१० ११॥ १७ ॥ ४॥ १७॥ उपेवेकम्गतासहित १।१७। ओभास ९॥३॥ भोमक ५॥२९॥६॥ ओहारिकंग ९॥१९॥ भोळारिकरूप ६॥८॥ खाषितरणधिसुदि उपेक्सिन्द्रिय ७।१८॥ उपजमानभय ५॥३५॥ उपस ७/२६॥८॥३६॥ ९॥३६॥ उत्पा२।१।२७॥४॥८॥ उभयवसय ५।३॥ कटताकम्म ५११९॥ कदेतात.41३०॥ काप ५॥१५॥१७॥ कपटीकार INDI पकगाता १४१७११८१९३०॥ कम्म ३२१॥४120 २१।२०।२१।२८ २५१२७१३५४३ - पचिगवखण ४१८१९॥ पचिसकणिक १९॥ एकमातिय ५११८॥ पारिकथित ३११८॥ पक्रमिथ६१७॥ पकनिमय ६१७॥ पकतेनुका ।।७1८॥ एमालम्पमत २१॥ पापाद६११७॥ पागारनिराध | भो श्रीमतिकमा ५|१.1८१२७॥ कम्मरण ५/४॥ कम्मच/३२॥ कम्मा1८1१५॥ कम्मम्ममा १५॥ कामानिमित श्रीगा८1१५॥ आगा५५ रामपा, काममा ८॥ वि. 1 कम्मसमुहानकलाप६.१८॥२८॥ कम्मसमुहानरूप ६।११।। कम्मानुरूप ५१३२॥ कम्माभिनिध्य ८१४॥ कम्मिक ४।१९॥ करुगा २।७।१५॥ १७॥२॥९॥९॥ कलाप ६१२।१७ २३।२८।९। कामाषपरफम्म ५॥२५॥ कामाषचरकुसल २१९५॥३॥ २२॥५।१९।२५।२८३ कामायचरकुसलचित्त ११२॥ पामायवरचित्त २॥१५॥ कामायघरजवन ३।१५।१७। २२॥४।८।१७११९॥ कामाषचरधम्म ४।१७॥ कामाषघरपरिसंधि ५।३७॥ कामाषचरभूमि ॥२४॥५॥५॥ कामाषचरषिपाक ३ ॥ २२ ॥ कामाषपरसत्त ४।१७॥ कामाषचरसमाधि ९.१८॥ कामाचरमोभन २१२८१२३॥ कदापमंसति ६॥२५॥ कलापहानि ६.२४ ॥ कसिण ९।।६।१२।१४।१५) २०१२१॥ कमिगनिमित्त ८॥३॥ कळेबर ६॥२६॥ काम ११२९॥ ३1२४१२६॥1 ११११८.२५॥५॥२१॥२४॥ ६।२९॥७॥१३॥ फामक्रिया ४।१५॥ कामच्छन्दनीयरण ७॥८॥ कामतिहेतुका९॥ कामपाक २॥२४॥ कामयोग ७॥५॥ कामराग ९।४१॥ कामरागमयोजम ७।१०।१९।। कामाषरारम्मण ३१२२॥ कामासष ७॥३॥ पामुपादान ७१७॥ कामोघ७॥४॥ काय ३१३१३१२४॥४॥ ६५६।१२४१२८101 १५।२५।२७॥ कायकम्म ५।२०।२१।२५॥ दायकम्ममता २१५॥ कायमताप्तति ९१८।१२।१४॥ पायगग्य ७१६. कायदसक ६.१८॥ कायद्वार ३११३.५।२१॥२५॥ कापदारषोपि ४॥६॥ वापधादु ७१३९ कायपस्सटि २14. कायागुञता १५ कामरागानुमय ७॥९॥ फामलोक.३।२४।५।२७।२८॥ ६।२४।२५॥ कामगति ५॥ ११॥२८॥ कामसुगतिपरिगधि ५।९।११॥ फामहगतिमूमि ५॥ कामाषषरा२।११।। ३॥१५॥२२॥४।११।१७१ कायमुटुता २14 कापलाता १५॥ फेवल ८५. फायपि प्रति ५२१.६२) कोहास ९११५॥ कोहासमापना ९।१२। काविआणशय मिया १११६॥२॥२४॥३०॥ २२॥२५॥ ४१५११५२१॥ काविमाणपातु ७॥३१॥ क्रियापित्त १।१०।१९।२८॥ कापरिम्नाणयोंयि ४।६० २॥२३॥ कायानुपस्सनासतिपट्टान ७॥ क्रियामयम ४११ कायायतन ७॥३८॥ किंयामिमायोडपन १२२॥ कापिद्रिय ७।१८॥ कामुकता २.५॥ पण १९५1१०1९॥ कारण ८1३३॥ ८॥२२॥ २३ ॥ २७ ॥९॥ कारणपरियाय |.. ३५१६॥ कार ३१२१.४॥१९॥५॥१४॥ बगत्तप... १।२५।२५।२८॥८॥ बनिक १९॥ नन्य ७1100011 शि.-१२.५।१९।। १२।३३.९/01 गि ७॥१२॥१३॥ वय 1100 किम ८९. बीगामा |RARIA दमक १।२७॥२८॥ २॥१५॥ ग २२.५११॥१९॥३५॥२॥ गण. माम श१७. Affinstitvin माnिce ६७ । गधापठन ७३८॥ । चतु३।१३।१०।२१।२४। गन्धारमण३३ १९॥ ४।५।६।८९॥६॥४॥ गग्य ७६२४॥ २४।२८॥९॥७॥ सम्भसेप्यकसत ६।२४ ।। पश्खुश्सक ६।१८।२४॥ | चक्खुद्वार ३११३॥४९॥ गरत८११९१२१॥ । चपखुदारषीथि ४१६॥ गहितपटिधिक ५११०॥ चक्खुद्वारिकचित्त ३॥ २१॥ गुहा.८॥३३॥ पक्खुधानु ७१३८॥ मेह ८॥३३॥ घखुन्द्रिय ७।१८॥ गोबर ३१२३॥४॥९॥ घक्सुषित्राण १७१८॥३॥ गोपरग्गादिकरूप ६१८॥ १५॥२१॥४।५1८1८134 गोपाभेद ९॥२४॥ घपखुषित्राणधातु ७।३९॥ गोचररूप ६४॥ पखुषिप्राणवीयि ॥६॥ गोत्त ९॥३६॥ गोत्रभु ११३॥९॥३६॥ चतुग्गुण ५॥१२॥ घ पत्थशाम १।१७११८1१५ घान ३११३॥ २४॥ ४॥५॥६॥ ३०॥५॥१॥ ६।४।२४।२८॥ धनुत्पश्शानभूमि ५।६।१४॥ पानदसक ६।१८॥ घरयामानविपाक ५/१४॥ पानद्वार ३११३॥ पतुस्थमानसोतापत्तिमग्गवित्त पानमारपीचि १६॥ पानधातु 1३९॥ पानषिम्याण 11७1८॥४॥ पामषिप्राणधातु.७॥३९॥ घामषिप्राणवीपि १६॥ पानादिसय ६१८॥ पामायतन ७॥३८॥ पामिन्द्रिय ७140 धनुत्पमामिकपित्त २१९२१५ चतुरयारप्प १२१॥ चतुरचारपजथन ५११९॥ बधानुषवस्थान स.. पतुपारिएरिसोल 1.. समागमाण 1.0 अनुमागप्पभेद १२७॥ चलखेप 10 पराध ७५. पापन 1९1१०॥ प सक्वादिसप 10 पक्वायतम ७१८.
परित ९॥ १२॥ चित्तसमुहानकलाप ६।१९ ॥ परितसंगद ९॥३॥ वित्तसमुट्ठानरूप ६ ॥ १२॥ चलन ४।९।११॥ चिनाधिपति ७॥२०॥ चयन ५।१०.३६॥१०॥ चित्तानुपस्मनासतिपट्टान ७२५॥ चयनवाल ५११४॥ पित्तिद्धिपाद ७॥२७॥ पपनमानस ५॥१८॥ चित्तुरमुकमा २॥५॥ धागानुस्सति ९१८॥ चितुष्पाद २२९/३०॥३१॥ धातुम्महाराजिक ५। । १२ ॥ १२॥४९॥१०॥१२॥ चित्त ११११२१२९॥ ३०॥२॥ ५॥२४॥२२॥४०॥८॥३३॥ २७१२९॥३।१।३६ाज चित्तोनुगमुहान ६॥२८॥ ।१०।२१११५११७॥२०॥ चुति ३१९-११।१६॥२९॥५॥ २१॥ २३ ॥४।१।६।८। १।१४।१६।३९/११॥ १०। १२१ १९. ५। गुणिधित ५ ॥३६॥ ॥ ६॥२५॥ ४०॥६।१०।१२।१५। पुतिपटिगधियाम ५। ३९॥ १६।३।६। ३२॥७॥ तमा २१२॥८॥१४॥ २३1३३ ३४॥९॥१७॥ घेतामिय. ११॥२॥१॥३॥ १८।३३१४॥ २०॥६।१।३२१७१४९ पिताम्ममता २५॥ ८३.९/२२-२४॥ पिसमेतमिक ११॥६१८ तायुग२१॥ १३ । १५ ।।५।२-२४ । २७॥३२॥ चित्ता ६.१५॥ किषितपयति ।। २ । चितामा ६॥२१॥२८॥ घर 11001२९॥७॥ विपनदि 140 १३४॥ चितामा २५॥ दाधिपति 1000 निnिR.४।२१ हरिदिपार ॥२७॥ विताना २१५॥ fuefE 13॥९॥ १२६॥ शिविमुदि ११५॥३१॥ Bis८३५॥ विनर्मगति [ ...] पित्तमान ! जगाध ५.१६॥ विमममहान ६२५1८1...
। भरता १५॥२९॥
जरामरण ८11६७११॥
जवन २९-११।१६।१७१२२॥
४१८1९1१।१३।१४।
१६.१८ २२ ॥५॥३७॥६]
१२॥७॥२३॥८॥१३॥
श
पान ११३१॥ २॥ २४ ॥३॥३
२२॥५।१४।३१ ॥
२३1४.
झानंग ११३५ ॥२६॥ ७
१५६२३॥ २४ ॥८॥१४॥
सानपचय ८९॥
मानिक २०१९॥२॥१४॥
प्राण ३१२४॥३॥७॥२२॥
६॥३०॥७॥२२॥९।३४-
माति ८६-८॥
मातिप६५॥
ज्ञापमानादिरूप ६.१५॥
आ६.५॥
जिम्दा २४॥५॥५॥६६॥
४।२४॥२८॥
सिदादपक ६१८॥
हिम्दाबार ३११३॥
जिदाशारघोधि १६॥
लिहाधान ७ ॥३९॥
जियमायतन ७॥३८॥
जिहाधिम्याग ११७८॥४॥
--
प्रागट्स्सनधिमुदि९।२५/३६॥
धाणविपयुक्त १।१२-१४ ॥ ३॥
७॥२२॥४॥२१॥
प्राणपयुत्त १।१२-१४॥२॥
१५॥१७॥२२॥४।१३।
२१॥
जिव्हाधिमाणधामु ७॥३९॥
जिल्हावित्राणापि ४॥६॥
मिम्धिन्द्रिय ७॥१८॥
जोषित २१२॥ ६६141n
८॥२६॥
जोषितनमक 1३८॥६॥१८॥
२८॥
जीवितरूप ६४॥
जीपितिन्द्रय २१२॥६॥४॥
टान १९॥६॥२४॥२८॥
दिति ॥१८॥६॥१३॥८॥३॥
टितिकाल ६॥२५॥२६॥
त
तण्डा ६.३०11७1१३१३॥
८1१७-९॥
तण्दानुसप ५।२६॥
तण्दापणिधि ९१३७॥
हतिय मान १/१७/१८१३०॥
२१२१॥५॥१॥
ततिपम्हामभूमि ५।६।१५।
७॥१८॥२२॥
परित ११२॥ चित्तममुहानकलाप ६ ॥१९॥ धरितसंगह ९॥३॥ वित्तसमुट्ठानरूप ६।१२। घलन ४९।१ घिमाधिपति ७॥२०॥ चपन 11.!३६॥४०॥ चित्तानुपस्मनासतिपटान ७.२२॥ पवनशल ५॥१४॥ चितिदिपाय ॥२७॥ पवनमानस ५॥१८॥ यितुम्नुकमा २॥५॥ पागानुस्मति ९॥८॥ गिगार २२९/३०॥३॥१॥ पानुम्महारानिक ५। । १२ ॥ १२॥४॥१०॥२॥ वित्त ५।१।२।२९॥३०॥२॥ ५॥२५॥२५॥४०॥८॥३३॥ २७॥२९॥३।१।३३ गिगान ६ ॥२८॥ ।१०।११।१२।१७॥२०॥ गुति ३१९-११॥ १६॥२१॥५॥ २१॥ २३ ॥४१॥६॥८॥ गिपित ५।३६१४॥६॥२५॥ गुनिपदिाधिकाम ५॥३॥ ५.३६।३२॥७॥ घेतमा १२॥८॥१४॥ परमिक ॥२॥ २८1111 २०॥३१॥३३॥1॥ विमानना ८.३९/२२-२४) तिमि ॥६१.८ figगा॥ १३।१५।१९।-२-२५ । cafrfan | विना१1८1 एर11101101 EिNTRAN५॥ मित्रा 100 एनानिति २०॥ famar RIV|२६॥ गिर..॥ CE JI. १॥ गिरि 440 निमर्मत ५४ ५.११॥ .
श हान ११३१॥ २॥२४॥ करता ६५॥२९॥ जरामरण ८१1१७॥१०॥ अपन १९-११।६१७॥२२॥ 11९।११।१३।१५। १६.१८ २२१५॥३७॥६॥ २२१७१२३1८1१५॥ सानंग १1३१॥५ । २६ १५॥२३॥२४॥८॥ हानपश्य८1११॥ सानिक २०१९॥९।२८ जाति ८१४१६-८॥ मायमामादिरूप ६.१५॥ प्राप२।२३१२४॥३॥ ६१३॥७॥२२॥९ १६।४५॥ मागदरसमषिमुदि९/२८ माणाषिपात १०१२-१ ७॥२२॥२१॥ माणपयुत्त १।१२-१५ जिल्हा २४॥५॥६॥६॥ ॥२४॥२८॥ तिहारमा ! १८॥ निदावार ३॥१३॥ निदाद्वारपीचि १६॥ जियहाधामु ७ ॥३९॥ जिव्हायतन ७.३८॥ जिन्दाविनाu१८॥४॥ . गिधाषिभ्माणधातु ७१३९ ॥ जिहाविमाणधीयि ४॥६॥ सिद्धिन्द्रिय ७॥१८॥ मीथिन २१२॥६।६।१८॥ ८॥२६॥ शोधितन ५१३८॥६/९८। २८॥ जोषितरूप ६.४॥ जोतितिन्द्रिय २१२६ ॥४॥ ७११८१२२॥ टान १९॥६॥२४१२० दिति ln६/१३॥ दितिकाल ६१२५१२६ । त तण्डा ६.३०॥७॥१३॥ ८१४१७-१ तहानुसप 41३६॥ तपदापणिधि ११३७ ॥ ततिर ज्ञान १११७११८ २॥२१॥4॥ तसियामभूमि ५/६ ततियम्मानसोतापतिमग्गचित्त योनमिनीवरम ७.10 नतियामानिमित्त २११९॥ दमक ६॥२८॥ सतियार ॥२१॥ दस्सन १९१०॥९॥ तरमरसता २५॥ तयागत ६।३२॥ विधामोदनीय॥ तशरम्मग ३१२॥ १।१०॥ विद्वानुसय ९॥ ५१८।९।११।१३।१६-१८॥ दिडासर ७॥३॥ विधि।१।१५। २५ ५।२३।२५५७११२ तारिमा ११८ १७॥३१॥३३॥९॥ नापाक ७११३॥ विधिगत ७१३॥ মাপমামিন্যাস্কামী, दिविगतपिपगुल 10 पित८१३॥ विद्विगतमपयुक्त १३२ सानिम ५/५॥ दिद्विगु सम्म ५ | २५ FATAमयोनि ५/४॥ विहिपोग 140 पितर 1३०॥ विधि:२१ गि १२९॥ दिमियोमा ७11.11. मिपि4100 रिहारान |॥ नि१५॥ रिप-10 Frtyricn/२२॥ यि ५ । १२. चितु.१२५ ...२३|| मन 14/१२॥ पिमान..२४॥ मा... Harfun.in दीपमाMIRI. भूम11३1८1१॥ Tefiitamfarfeter । दुरखानुपस्मना ११२७॥ ३७॥ । प्रारसंगह३।१३॥ दुर्विमान्य ७॥ १८॥ द्वारिक ३111४२११६॥ दुरगति ४११॥ रिपधिप्राण २॥ ११॥३॥ इतिपरित १२६॥ ६।५॥१५॥ इसिपमान १।१७।१८।। बिहेक ५१ ...७.२३॥ ३०.१५॥१॥ घ दिपाहामभूमि JU१४॥ दुतिपरमानषिपाक.६.१५॥ धम्म २११।१६।१८।१९। २१ । १५-२७१२९॥३॥ दुतिपरमानसोतारतिमषित १११९॥२०॥५॥१७॥७॥ इविपरहानिकरित २ । १९। ११२५।२६१३१४१॥ ८।१३।१५।१९।२२- इतियारप्प ९।२१॥ २४॥२७॥३१॥३२॥९॥ इतुक ३१७१८॥५॥२१॥ ४४॥ दूरोप ६।८. धम्मदेसमा ५ ॥ २॥ देव ५। १९११५ ॥१७॥ धम्मधा1३१॥४१॥ देषतानुस्सति । ८॥ धम्मषिषपसपोरग 10 दोममरस २ । ११.३१३- धम्मसवन ५॥२५॥ धम्मानुपस्समासतिपडाम दोममस्मसहगत ११४॥३॥ धम्मानुस्सति ९८॥ दोमनस्सिन्द्रिय ७।१८॥ धम्मायतन ७।३८.४१॥ दोस ५१४॥ १३॥ २६ ॥३॥ धम्मारम्मण३।१९॥ ५1८॥७॥१२॥१५९ घरम्त ५॥ ३७॥ धातु ३१२५ । २६ ॥६॥४॥ दोसमूल १६॥ २॥ १४ ॥ ५॥१३॥ १५॥ ३०॥७॥ ३८1१।४२॥८॥१६॥ देसरित ११ १२ ॥ बार २।११॥३॥१॥१३॥ न ११।१५।५।२०।२९। नय८१२-४॥९॥२५॥३५॥ २८.४५३ .
निम्सट ७/१२॥ निस्सन्दकट निम्मन ८१७ निम्मयपचय |२०1३४॥ नीलमिण ९॥६॥ नीतादि । १२॥ नापरण ७1८1१४॥ नधमत्रानाममायतन ११२१ २३.५७१९४४० नेयमन्त्रानाममायतनूपग* नत्यिपचय ८1११ । १३ ॥ नदीमीत ५॥४०॥६॥२०॥ नानायबाणिक ८॥ १४ ॥ नाम ८1१1 1 1१६/२० । २१।३१।३४१३७॥३८॥ नामरूप८1१11१1१७॥ २२॥ २६॥ ९॥३२॥३३॥ नियन्वन्तत्त ६ । ३ ॥ निष्का ९।१८॥ निष्फमरूप ६॥ ४॥ निध्यान ११॥३॥२०॥६॥ ३०।३१७।११-४३ ॥ ८.३२॥ ९॥३६॥ नियानगोचर ३ | २३ ।। निवानारम्मण ३ ॥ २२ ॥ निटियदानाण ९ । २८ ॥ निमित्त ५। ३२/३७1 ३८॥ ८ । ३३ । ३६॥ ९॥२॥ १५-२० । २२ । ३७ ॥ निम्मानरति ५1५1१२॥ नियतयोगि २ ॥१७॥ नियम १।१८-२०॥५॥१२॥ निरय ५४ निरुद्ध।१९॥५॥३६॥ ८॥ पकपनिम्सय ८1१८॥ १९ ॥ पकासित ६॥१६॥ पकिण्णक२।३।९।१२१२९॥ पग्गद ९| ३४॥ पचय ८1१1१1१११२१- २९।३१ । ३४ पचयद्विनि ८॥३॥ पचयपरिग्गद ९॥३३॥ पञ्चयमंग८॥२॥ पचयनिस्मितमोल ९/३०: पञ्चवेश्वनन्माण ९/३६१४। पञ्चवेश्मा ९११९॥ पञ्चासन्नमरण १३६॥ पच्चुपट्टान ९॥३२॥ पच्चुप्पन्न ५/३६।३७॥८1E पच्छाजात ८१२५/२७/२८4 पच्छाजातपय ८११॥ पञ्चकिच३११ पश्यावन्ध ७॥३६॥ पशद्वार ४।७।९।१०॥ पञ्चद्वाराषइन १.९॥२॥११॥ ३।६।६।२५॥४॥८॥ निरोध२११॥४।९।१९।। २१०॥७॥४०॥४३॥ ८।१०॥ निरोधमञ्च ९१ ३६॥ निरोधसमापन 1 ५। निरोधसमापत्ति ४११९०९।
२४४२११२७१२८1८131 VARIETA 11१७-१1०॥ २०१५/२१५.१४॥ पसमागममीनापतिमादित परिमधिक ४११७॥५॥५०॥ - TARATनिपिन २११९१२१॥ परिमा1१६॥ समता३३॥ मसारमग १२९ पम्मति २०-२२॥५॥२८॥ ८1५-३६.९१९८१२०० मन्मा २११६॥ ७१३४॥ पन्नापस ७११९१२१॥ पप्रिन्द्रिप७॥७1८/२८॥ परिमलसम्मा ९।१०। पटिय ११४ ११३१२६॥३॥ -- एटमगाग ११७११८॥३०॥ ५11९1१९४४॥ पटमगामभूमि ५१६॥१४॥ पटमरमानविपाक ५।१४।। पटममानतोतापनिमग्गचित्त १३०॥ पटममादिपवित२।१९।२१॥ पटयमयंग ११२॥ पठमनग्ग३१२५॥४।२४ ॥ पठमारप ५११६॥९॥२१॥ पठयाकमिग १।६।२०।। पटसीधातु ६॥४॥ पटयोमपा १११६ ॥ पणीत ५॥३२॥ पण्डित ११३६॥ पतानुमोल ५॥२५॥ परिचित ११४३३३ पटिपनयन २२.२४॥ पटियनयानम 01१०1११॥ पटियानुसय ७१९॥ पटिशसार ८१०॥ पटियममुपारनय ८12-3 पटिपदामाणातनविसति । पटियन्धविपदोन ९.१८॥ पदिभागनिमित ९।५।१५। १८-२०॥ पटियाप्राण १/२८॥ पटिमधि २०२९३९-१२॥ १६.२१॥४१॥५॥२॥ ९-११।१५।१६।१८1२७- २९।३३। ३५-४१॥६॥११॥ परशन १॥३२॥ परचिराषिजानन ॥२४॥ परनिम्मितयतबसि ५१५११२॥ परमस्य १९॥६॥३२॥ परियाम्न ४।१३॥९॥२१-२३॥ ९/३६॥ परिकम्मानिमित्त ९।५।१५११६॥ परिकम्मभापना ९।१३१६॥ परिकमसमाधि ९.१८॥ परिषद६।६।२३॥
परिवरूप ६.५. ३१२६ ॥४॥९॥५॥ परित २॥२४॥४101९1१२॥ १९/२७॥३०॥३॥ १७॥१९॥२०॥५॥३१॥३७॥ पाटिकसितम्य ५॥३७॥ परित्तजषनवार ५।१२॥ पारिवारिय ४१९॥ परिप्तासमयोपि ४११९॥ पागातिपात ५१२१४२४॥ परितमुभ ॥६॥१५॥३१॥ पातिमोरमसंपरगोल 100 परिता ॥१५॥१॥ पापक ७।२६॥ परिसारमण ४॥२७॥ पापगह ७॥१४॥ परिदेश ८१४॥ पापाहेतुकमुत्त ॥५॥ परिक ३६॥ पिमुगापा ५/१२॥ परिमाप ९१३॥५॥ पीतकमिण ९॥ परिपाय ५॥१९॥६॥३०॥७॥ पोति १११७११८1.॥१४॥ ११११११११११-१७१२५ परियोगाम 41.10.॥ ७।१५।३३-३॥९१. परिएर ५.३५ पीतियोग 1.॥ ५७.१२.. पीडित ८1.॥ गुग्गल 111५1८11 1211९॥१४॥ १९१३.९RN 114104101141 स्त्र ।।२०।१४। नामिका पानिपंग ॥१॥ पभार.11.1२४॥ रन १५/२0414. Tan | T९११. पति 10 गम 410 गुना १ Topn. ( tt 1: {% if ॥ -- rist.". relat: f 13.
पुण्॥५५॥ योग७1०1 पोधिपधिगए 1२|२५॥ व्यापा९५१२३१२४॥७॥६॥ रिमिन्द्रिय ९८॥ पुरेसार १५१२७॥२८॥ परेशानपपप ८१११११६ 1000 पुरस॥ रसिरिसप ५१ फ एमसवाषा५/२२॥ २४॥ पत्र १३९७ ॥३11०।२२। २३४१९०६।३॥७॥ ५३९।३७१४५ फटदित ११३०॥४१९६९। पलतप१११४॥ फलपक्षक ८10 फटसमापति ९१३८1५३ ॥ फस्स २॥२॥७॥२१॥८॥ पुस १९१०॥ पोहच ३११९०६॥ फोहपधातु ७॥३९॥ गोहम्पायतन ७॥३८॥ पोटुप्पारम्मण ३११९॥ प बाट ७॥१९॥२३॥ २४॥२९॥ दहिदा ६।२२॥ परपित्तदसण [८॥ पादिर ६.७1८॥ पापादनीषरण ७1८॥ पारिमन्न ५१६१५३१॥ मा रोहित ५।६।१५॥ ३१ ॥ ग्रामवहार १९॥ भ भगवा ।।१९। भैगप्राण ॥२८॥ मपप्राण ९।२८॥ मप ११३४॥ यष५1३1३६/५०1४१॥ ७॥१३॥८॥४१७-९॥ भषंग ३१९-११॥२४११६ ॥ २१॥ १1८1९1१।१३११७॥ ५1१०।११।१५११६१८ ३७१४१॥६॥१२॥३६॥ भगवयप।३६॥ भगमन 1९1११॥ भगतरित १२६॥ मचंगपात 1८1९1१1१1 १७११९२१३६।१५॥ अपंगसंतति॥४०॥ भगतोत ४1८1१९॥ भरतर ५१३५१३६॥६२७ भषयोग ७५. मपरागसपोशन ७.११॥ चरागानुसय ७१९॥ भवासा1३. पाहुमति ५१२१-२३॥ पुरगुण ९।२२॥ पुरानुस्सति ९/११२१॥ बुद्धिचरित १३।१२० मन्तिम १२४॥५॥३॥ मारा.८१२४. मायामा ६.२८॥ मापना ५॥ २२॥२६॥८॥३३॥ ९५११२-१1१६-१८ मारात ६॥२३॥ मनाडेर १२३॥ मन २१२४॥३॥१३॥१५॥२१॥ मा. भिापोभार १२३॥ मममिकार २१२॥ मामनिमि॥ मगाया ७.३८॥१॥ भाIN८1८1५॥ मनिधि | १८ भूमा मनु।११।११. भूमि ॥११२५१२५ ॥५११. मनोम | २० २३११५। 11011१५।१५।२। मामार III orn. म मा..॥३२ ।। समाजामावि मनापाITA.. U समाचा"।.01. मनावात. मामाग... माcिurmurga मामपन८५॥ Arrantitat.. मनामा # Hariraff:
मिस्सकसंगा'।२।१५. २४॥ रानुमति ११८॥ रासपीचि ५.३७ ॥ मुधिसम्पताप्राण १। २८॥ रघुपति ५।२। ३४. मुदिता २११५॥ २१॥९॥९॥ रगत २११५१२८१२१॥२२॥ मृदुता ६।५॥ ३।३।७। १७ । २२ । मुसाबाद ५॥२॥ २३ ॥५॥१३॥५11 म्ल ५।२४ ॥८1५1९1१०॥ मता ९।१।१४ दागमपम ४।१९॥ 1 मोघधार ४१९॥ हम्मतविपा।११। दगतममापति ॥ ५४॥ मोमूद ११५॥२॥११॥१७॥ मोह २४.१३॥३॥५॥८॥ गदारम्मण ३१२२॥ ७॥१२॥१५॥९॥४०॥ मोहपरित ९।३१२ ॥ सायद ५।६।१५।१॥ मोहभूल १।६॥ दाभूत ६ ॥३॥८॥२२-२४॥ हामुनि ८।१०॥ ययासंभय २।१८॥ दाधिपाक३।१०। २५ ॥ पमापाटिहारिय ४ । १९॥ ५।२१।५।११।२८॥ याम ५।५।१२।। पावतायुक्त ४ । २६ ॥ नि २।४।१३। ७॥२५॥ योग २॥१८॥७॥५॥१५॥ ७१ १२ ॥ पोजमा ६।२५॥ मम ११२९॥५॥१८॥३६॥ योनि ५॥४॥ जनमंयोजन ७।१०।११॥ निानुमय ७॥ रथ ८॥३॥ नछाचार५।२१॥ रपथक ५.४.॥ मछादिहि५ । २३१२५ ॥ रस ३११९.६101८॥९॥ ३२॥ मरछायायाय७॥ ७॥ रसधातु ७॥ ३९॥ पच्छाकाप ७।१७॥ रमायतन 1८॥ अछाममाधि ७१ १७॥ रसारम्मण३।१९॥ ERE२।।१३।१७॥२६॥ राग ८।१९॥१०॥ रेसि६।३१॥
रागवरित ९।३।१२। ५।१९।२५/३१॥ ३९ ॥ राजपुत्त ८।३५। ६।११ ॥ ९॥ १४॥ १९॥ रूप १।१।२९॥३॥ १०॥ १९-२२ । २६॥४।८। रूपाश्चरपटिसंधि५।९।१४। २५ ॥५॥१४॥३५॥६॥ १।३-८ । १३ । १४ १२३- रूपायचरमि ४।२॥५३॥ २६॥ २८॥३२॥७॥२२॥ ४२ ॥ ८॥ १२॥ ११-२७॥ रूपि ६ । २९ ॥ २०-२२ । २४।२५।२७ रूपुपादानश्वन्ध ७॥३७॥ ३० । ३१॥ ३५॥ ९ ॥२३॥ ३२॥ ३३॥ लक्षण ६।६। १६ । २३ ॥ रूपकलाप ६।१७॥ ७.१०९।२६।३२॥ ३६॥ रूपक्खन्ध ७।३६॥८॥३२॥ लखणत्तय ९॥३४॥ रूपजीयित ८।२८ । टक्सगरूप६।५।१५। रूपजीवितिन्द्रिय ८॥२६॥ लपरय४।८॥ रूपधम्म ४1८॥८॥३२॥ लहुकम्पत्ति ४ । १९० रूपधातु ७।३९॥ । लहुता ६.५1१1१९-२१॥ रूपपरिसंधिक ५॥३८॥ । लोक ३. २४ ॥ ५॥ २७ ॥ रूपपरंपरा ६॥ २६ ॥ २८ ॥६।२४।२२१२a सपम्पति ६ । २८ । २१॥ ८। ३६ ॥११४०० रूपरागसंयोजन ७॥१०॥ टोकिय २॥ १५॥ ६ ॥७॥ टोकुत्तर १।२।२५।३००२। कपढोक ३१२४३ ५। २७ । २५॥१९॥३।३।७।१४ २८.६॥ २८॥ २२ ॥ ४११५.१।३.. रूपषिमाग ६।९। ७१३२ । ३० रूपसमुहान ६।१०॥ लोहतरमपन ४ । २२ रूपसमुहामनय ६ ॥१६॥ टोत्तरविपाकथित । २६. कपसमुहम ६६० सोम २१४११३१२९१३।। पायतन ६.८७:३८॥ ५1८1७1१२॥ १५॥ सपारम्मण ३।१९.४ दा होममूल १४१०२.४141 बाथर।२०१७-२०। २४ होमसागत 11 -
लोहितक११७॥
होदितशसिण ९।६॥
पोकम्म ५१२०॥ २२॥ २५॥
वोघोस ८ ॥३६॥
एवोद्वार ५१२२ । २५॥
पघोयिप्रति५ । २२ ॥ ६ ॥
३१११११९१२१॥७॥१६॥
९॥१९॥
विचिकिरछा५॥२४॥११॥
१३॥ २७॥४॥२२॥ ७॥१२॥
२३॥९॥३९॥
विचिकिच्छामीचरण ७1८॥
विधिषिछानुसय ७॥९॥
विचिकिष्छामंयोजन ७।१०।
पिरिछाक १७॥
विमानपअनि८३1३५॥
पिप्रति ५२५-२५ ॥ १।।
पट्ट ७॥१३॥८1५1१1१०॥
पण ६.८॥
पायु १९ २४.२६ ॥ ४॥२॥
४३६४१२८॥७॥१५॥
।१६।२२-२४ । २७ ॥
परदसक ६।१८॥ २४ ॥
परशुधम्म ७।१९।१८॥
परपुरूप ६.८॥
वरघुलगह३॥ २४ ॥
परस्थान |२|१०॥१२॥१३॥
पापा ५१२२।२५।७११७)
विप्रतिरूप ६.५॥
विम्याण २।११।२१।३।३।
६।९।१७।२२१२५
२१५/३.८॥ ७११।
२३१३९.५२८111
८.११।२१। २७११६
बिजमाणषवाप1n
विप्राणायतम ९९२३ ।
पान६.११॥
पायाम ७१७१२६१-३॥
पापीकसिण ॥
पापापातु॥
विकार २९॥
विकाररूप
विषपापित ९१७॥
विपित्तक 101
विगतपचर ८११११११.
विमाणधातु३२५७.
स।२४॥
पिम्भाशुपादामरा 12॥
पिता।७।१८..
वितरित
दिपार...
तिमिपाहिवार
रिचार ॥१७॥१८॥३१॥
८० 'चिसिरमोगप ६१८॥ विसयप्पयति३१९॥ यिनीटक ९॥७॥ विमुद्धि ९.२५।३०-३३॥३५॥ पिपलासनिमित्त ९.३७ ॥ विपस्सना ९/११२८१३४-३८n वितेतक २/२४॥ विपस्सनाकम्महाम९/२०१५ योतराग १५॥ विपस्सरत ९।३८१४४ ॥ थीयि ४ १२१६।९।१०।१५। विपाक १1१८॥२८॥२॥२३॥ १९॥५॥३७॥४१॥८॥ ३1३1१०1११1१७१२२ ॥ १६।३६ ॥ ९॥३६॥ २५॥४॥१६॥२१॥५॥१०॥ घोधिचित्त ९.१०११३३१॥ ११।१५।२६१२८-३०॥६॥ २॥२२॥५॥१॥३६॥४ १२॥८1१९।२२।२३।२७३ पोयिमुत्त १1३॥ पिपावबन्ध ८1१५॥ ; पीयिमुनमंगद ५॥२॥ विपाकपमय ८१११॥ यीमंताधिपति ७१२०॥ विपाकर ८1९॥ विपुश्यक ९॥७॥ योमंसिद्विपाद ७॥२७॥ विप्पयुतपश्चय ८॥११२०१२७॥ वीमताकार८140 यिभाग ४॥२२॥१२॥९॥ बुहान ४।१९।९।३७१४५॥ ८.१॥ युत्त ७११।१४॥ यिमूग ४१७१११।१३।१८॥ पैदना १ । १५ ॥२१२॥३॥ विमान ९।२८॥ २॥४॥७॥१२॥८1१७ यिमोरममुन २१२९॥ ३७॥ विरति २।६।१२।१७।२३। येदनादग्ध ७१३६॥ २४॥ । येदनानुपस्सनामतिपट्टान । विरतिर २।२१.७॥३३॥ दनुपादानवग्ध ७१३७॥ विरिय २।३।११।२९॥७ten पेप्यायप५/२१ यिरियाल॥१९॥२९॥ यहफट ५॥६॥१५॥३१॥ पिरियनशेग्मंग ७.३०॥ योहपन ॥२९॥३१६१९-२१॥ विरियाधिपति ७/२०॥ १२/१७१२२:४८॥९॥ पिरिचिदिपार७१२७॥ ६।१२॥ विरिदिन्द्रिय ७११८॥२८॥ योमिम्मक८॥३५॥ पोहार३।२३॥ .
.
.
संकेत ८1१६॥
।
सतियल१९१२१॥
सउपादितनिष्शनपानुपा३०॥
सतिसंयोग
मंयोजन ११०१११११४॥
सत्त (साय).४|१७/१८०५)
सदा ॥२४॥
१४॥६॥२४॥
सकट ८131
सप्तपश्यत्ति 1.0
सकारागामि ५। ८॥११॥
सतपणतुरामा९.३९॥
सादागामिकल १२६॥
सदिस 41३३॥
'सकदागामिमग ११२५ १३०॥
सहा१९॥२०॥६॥१५॥
१९RO1R२१२८-१९॥
संफाप ७११७१३११३-३१॥
सापातु 1३९॥
सानव ६॥२०॥
सिखत ६७॥८॥१॥३१॥
सयतन..७1.३८॥
संक्षा १२५
सहारम्मण ३११९॥
"संसार ५१३१३६॥ ८॥४॥
पिद्रम्म ११॥
•३-१४९11४४॥ सदा २141018011
खारक्साभ७११६॥
संबारपादासन्ध७.३७ ॥
सदायरित.९३१RA
मसारपेक्षा ११२८॥३६॥
सदाबल ७११९२९॥
मंखए८1५॥
सदिन्द्रिप७१1३८॥
संगद २१९७-१९॥२९॥३९ सनिरस्समाप्र ६ ८.॥
११॥६॥२-४७11 संतति 10084014॥९॥
१४११५१२४१.२५३"
३४/४५०
संधान ६१५॥
•९१२॥
संथानुस्सति॥
सतिरूप 10
सम्मा ९२७१४॥९॥२॥
संतीरण ११७1८४२१११३
६.९-११॥ १५॥२५॥
२०११२॥१३॥
८॥१६॥१७॥५॥१०॥११॥
"समाविराग 41३१॥
संधि५/११४१॥
सध्यपष.६.७०९११५.
सम्पादानवसम्ध ७॥३७॥
सति॥4॥७११७.३१॥३३॥
सम्पटियरूपic
सपायस१९॥
सतिम्ब्रिय ७१२८१२८॥
सम्वचितताधारण २१२॥
सतिपद्वान ७॥२५॥३२॥
८० विनिम्मोगरूप ६१८॥ | बिसयमयति २०३९॥ यिनीलक १७॥ विमुदि.२३1३०-३३३३५) विग्लासनिमिच ९.३७ ॥ विपस्सना ९1१।२८।३१-३८५ विसमक२४॥ विपस्सनाकम्महान ९/२०१४ वीतराग १११ विपस्नग्न ९६३८1११ ॥ योयि ४६९।१०।१५। विरा१८१२८॥२॥२३॥ ३२३।१०१११॥१७॥२२॥ १६।३६.९॥३३ २.६।१६।२१॥५॥१०॥ योपिपित ४.९.१०1१1१६ ११।१४।१६।२८-३०॥६॥ २४१२५३५1१1३३१४७. વરા૮િ૨ાજરરૂ કરી योपिमुता30 पिपाश्वमय 12. पौयिमुभमंगर ५२ पिपायर८13.5 यीमेनाधिपति 1200 यिपार ८१९. विपुष १७॥ पोमसिदिपार.२३॥ विन्ययुसपचया१1२०१२७१, धीमताधार८1८. विभाग१२५.१२।९. खुटान ४१२९.९१३७१५॥ युत ७111१४॥ विपून ४१७:११.१३॥१९॥ पंदना १४१५७१२७३.११ विनो1200 २४७१४२१८14141 पिनारमनुग १।२१.१३७३ बिसि २०६।१२।१०।२३॥ देशनाया1३६॥ थैदमानुरागमनागरिन । पिरनिर २१२१.311 पानश्या .. विवि.३१११ पप्यार५1200 विरिया11२१, यहा४५1६11५1१। विरियत" मन १२.३11-1 दिग्विाधिol.1 विविस्पिार.. चितिविदिर 1९८1८1 बनिन्म८1१५॥ : भार...
सउपादिसेसनिशनधानु ६३०॥ सैयोजन ७१११११११॥ सेसेज ६.२४॥ सर८1३३॥ सारागामि ५1८1९1१०॥ सामामिफष्ट १०२६॥ *सारागामिमग ११२२१३०॥ १४.॥ 'संकप ७१९७।३१।१३-२५५ संदेत८1१६॥ २८१ सतियल७११९१२९॥ सतिसपोरग ७।३०॥ सत्त (सत्य). 1१७११८॥५॥ १४॥६॥२४॥ सतपम्नत्ति, १२॥ सतपणतुपरमा ११.३९॥ • सदिस. ५१३३॥ स३.११.२०॥६॥५॥१५॥ १९ROHR२॥२८॥२९॥ सापातु ७३९॥ साहमवक।२०।। मारपतन.७१३८॥ सहारमण३११९॥ विद्रम्म.. सदा २१५.७१२४॥ मेवारपOING३७॥|| समाहित ९३.१R मंजारपेक्षा ९१२८१३६॥ समापल1१९२९॥ सद्धिरिय७१८॥२८॥ संगह २१ १७.१९॥२९॥३९. सनिस्सनहरा १॥६॥२-४॥७॥२॥ संतति५10018401 १४॥१५॥२५॥२५॥१॥ ३४१५५ संतान ११॥ संपानुस्सतिसा सतिरूप 10 सम्मा ९१९७५.९१२) संतोरण ११७१८०२।११३ १०॥१२॥१३॥ सम्यापखप1३६॥ ८५११७॥५1१०1११॥ सम्माविराग ५१३१॥ संधि५११ सम्भुपादामक्तम्ब ७॥३७॥ सम्पपप ११७०९.. सहि14॥७/१७११११३॥ सप्परिपक्षा सिसिद्रिय1१८.२८ सातापस११. सतिपटान ७॥५॥१९॥ सम्पवितसारण २१२। संसार ६१७०८1१1३१॥ संवाद।२५॥ "संसार ५१३१३६॥erul •३-९९१४॥४४॥ सारस ७.३६॥ खेप८1५॥ .
संफम्पलाप ५१२२॥ संयोग्झंग ७॥३०॥ समय ४।१७।२३ ॥८१३॥ संमारमंनियेसाकार ८॥३३॥ सम्मप्पधान ७॥२६॥३२॥ सम्मसनमाण ९/२८॥३४॥ सम्मसनरूप६10 सम्माआजीय २१६.७॥१७॥ सम्माकम्मन्त २१६॥७१९७१ सम्यसंगह ७१२१४३॥ समाय ३।१६।३०॥ समायत ६॥१६॥ समायरूप६॥४॥ समय ९।२।२।१२॥ समयकम्महान ९/२१२४॥ समनन्तरपञ्चय ८1११॥ १३ ॥ समाधि ७॥३१॥३३॥ ३४ ॥९॥ १५॥२८॥१९॥३१॥ समाधिन्द्रिय ७॥१८॥२८॥ समाधियड ७॥१९॥२९॥ समाधिसंयोग्झंग ७।३०॥ समापनन ९॥ १९॥४३॥ समापत्ति ४।१९।९।३८1 ४३५० समास ४ ॥१॥ समुग्गादित ९/१७॥ समुषय ७॥१॥ समुच्चयसंगद ७३२॥ समुहान ६१२११०-१२ । १६ । १८-२३१२५/२६२८ । ८१३०० समुदय ७1०1४३८॥ समुदयमय ९१३६० समुहेस ६॥२॥६॥ समुप्पाद८1१॥ समाधान८/२९. मंपरिएन ११७॥८॥२॥११॥ ३१.१९६१२५॥ ४॥८॥१६॥ मैपयुतपय ८1११॥१३॥ रयोग ९५/३.॥ सम्मादिहि ७॥१७॥३१॥३३॥ सम्मावाचा२१६॥ ७॥१७१३॥ सम्माथायाम॥१७॥३१॥३२॥ सम्मासंकल्प ७११७॥३१॥ सम्मासति ७।१७११।३. सम्मासमाधि ७११७॥३१॥ सम्मानयुद्ध १११ सरप्त ९॥३८॥ सलवखणरूप६॥४॥ सयन १०॥ ससंवार २११४॥ सतवारिक 111१२-१४४ २॥१३॥२६॥ सामात ५१६॥८॥१॥२६॥ २६।२८॥ मदमातपय ८११/२०१२॥ प्सदमातार८1२२॥ २४॥२७॥ महमानाधिपति ८॥२१॥ सहेतुक १९९५-१९१२११५॥
उप-10101 गुरम्ति ५१॥ T In एमा गावाग ५111. पुरन ५1५. हामा ११॥ सदनपरामाग ७1८॥१३॥ लिपपरामारसंयोजन एमा ५/६५1१. गैरव १५/२१॥२३॥ समागम ८॥१९॥ क८1100 गत ११३।१५। २१॥२४॥ 111८1९/१९. ४.६.१२४॥२॥२८ ९।२४॥ सोनदा ६.१८॥ सोमबार ११५१९. सारसीपि. सोमधातु ॥३८॥ गोविन्माण १७1८॥३॥ मानुपादान 11 विगुदि ११२३ लानुगति in १११७॥१८॥१०॥२॥ २९.१२.५० १५॥ ८११९०।२४ तणामीण २२९ .१७॥ खासदगत १८॥ अषितविपा ॥१५॥ सिन्द्रिय ७॥१८॥ सोतषिमागधातु ७॥१९॥ सोतपिप्राणधीचि १६५८ मुगुमरूप ॥२०॥८॥ गुगति २१५३१५१९॥ मोनापतिमाल ११२६॥ सीतापतिमाग १.२५/३. २२॥१३॥ सोतापन ५1८॥९॥३९॥ मानायतम ७॥३८॥ सातिम्द्रिप ७११८॥ सोभन १।११॥२॥१५॥१६॥ ११॥ २८॥ मुम्मा ३०९।२९॥३७॥ सुम्मतानुपस्मना १९९१३७ मुत्तात ७११. सोमनसाधारण 14.
सोमनस्स ३१२११४५..। सोमनस्मसहगत १1३1८1९1 १२१४।३।११। सोमनस्मपरिसंधिक' ।।१७॥ सोमनस्सिन्द्रिय ७११८॥ ह इतपिक्सित्तक ९१७॥ हृदय ३१२४१२५॥ ६६८।११ हृदयप ६१ ६दययल्यु.४० हमग २॥२९॥३३॥६॥२३॥ २५॥ ४ ॥२४॥ ६ ॥१२॥ हमिनुप्पादचित्त ११९ हानि ६।२४॥ हिरि २॥५॥ दिरियल ७॥१९॥ हीन ९।३६॥ देहिम १४।२४॥५॥३९॥ हेतु ३।११५1८1७११२१२. ८1८1१४॥ देनुपचय ८1१११॥
गाथानुकमो पकूमधीसवारस २॥२८॥ तिप्त ससित २। २४॥ एकूनधीसति धम्मा २१५॥ या लोभमूलानि १६॥ पत्तायता विभता हि'६।१॥ पोमति कोमेसु २९. ओ सहि तथा प३॥ १२ ॥ मोभासो पीति पस्स४ि॥ परस पतरस ६॥१६॥ ते तमो पञ्च'८1८॥ था यस्सानुसारेन 41३६॥ कम्मरित्तोनुकाहार०.६.२३॥ उत्तरे झानधम्मा २ ॥२४॥ कलापान परिच्छेद.६१२३ रंगा नोपलम्मति ५।८॥ कामे जनसमार. ४1100 कामे तेषीस पाशनि १११६.. नोति बीपिपित्तानि ४।२९॥ नेवणानं पतुषता०४॥२३॥ संसार ससंपार०५॥३०॥ चतुप प्रासधा कामे १।२९॥ देतुफद्वारसेक०३८॥ चतुमग्णप्पमेदेन १॥२७॥ हेनुफेम'सपथ २।३०.॥ पत्तारोधिपती वुत्ता ७ ॥२५॥ पितुप्पादानमिव 123 आ जयपचुतिया होम्ति ५।३९॥ लम्यनप्पभेदेन । २४ ॥ छतिसति तथा तोणि॥१८॥ सिवान समुप्पादा ८1१०॥ इतिप्त पतिताप २१२.. सिषीपापयोगाप1१५॥ एतिसानुत्तरे धम्मा २११८॥ ज्दामाम दुनामस्स८१२. येवमधीस०६॥९॥ एग्दो पितमुपेक्या १७॥ विषे मतसतान1 २७॥ छबिमुद्रिकमेवे ।। ति षित तसिफ६।१२॥ उपर) निस्सिता कामे ॥२९॥ तितेकालिका धम्मा८1१. छसहि पमपम्पास २११२. उपमेयूमनयुतिः.१।२९॥ ए हेतू पश सानंगा ।२४।' वित्तावियुताने २१३० स्य महग्गत पुम्भ ५.३. उष्टेवानुसया गित ७१४॥ इशिविध दिवसोते ९।२४ ॥ जायमानादिरूपान" ११९ इस्सा-मरोर-पुषकुफ २।१४ पवारिकषितामि॥१८॥ ज्ञानमयोगभेदेन ११ पकासषिध तस्मा१1१॥ एकप्पार निरोधा 100 तत्य दुताभिधम्माता:
८४.
सोमनस्स ३।२।१।१४ हृदययत्यु ६॥
१७॥६॥१२॥७॥१६ हमन २१२९:३१३॥६॥२२॥
सोमनस्ससहमतः१1३1८1९1
२५॥४॥२९॥६॥१२॥-
१२.१४ ॥३॥१३हसिनुप्पादचित्त ११९..
१४॥ १६॥
हानि ६॥२४॥
सोमनस्सपरिसंधिक ४११७॥'
हिरि २॥५॥
सोमनस्सिन्द्रिय ७११८॥
हिरियट ७॥१९॥
हीन ९॥३६॥
ह
हेछिम ४११४ । २५॥५॥३९॥
हतपिक्खित्तक ९॥७॥ हेतु३।१।१1८॥७॥१५॥२॥
हदय ३१२८१२५ ॥ ६६ासारा ८1८1१४॥
हृदयसप ६
हेतुपचय ८॥२१॥१४॥
गाथानुकमो पकूमषीसहारस २ ॥२८॥ मतिस सतिस ११२४३ एकूनधीसहि धम्मा २११६॥ मधा लोभमूलानि ॥ पतायता षिमता दि.६११॥ अधोसति कामेसु.६॥२९॥ ओ असहि तपा १३॥१२॥ भोभासो पीति पस्स1ि॥ महारत परस.१६ अतोते तयो प८1८3' कम्मचित्तीतुकाहार०.६॥ २३॥ भरया यस्सानुमारेन ८१३६ ॥ अनुसरे शानधम्मा २ ॥ २४॥ कलापान परिच्छे१०६।२३॥ अरिया मोपलमति ५८ कामे जवनससार० ४॥१८॥ अतीनियोधिचित्तानि ॥२५॥ फामे सेषीस पाकानि ११. असेषमान पतुषता०४१२ असंसार ससंचार.५/३०॥ धनुपम्पासधा कामे १२९॥ महेनुकारलेक०३1८॥ धनुमगप्पभेदेन ॥२७॥ अनुसु सम्परथ २३०.1 धत्तारोधिपती षुता ७॥२४॥ आ पिनुपादानमिष । आयपघुतिया दोन्ति ५१९॥ आलम्यमपभेदेन १।२४॥ छतिसति तथा तोणि॥१८॥ मासवाम समुपादा८11०॥ छतिस पतिताय २॥२०॥ भासपीपाच योगाच७110 छसिलानुहरे धम्मा २११८॥ उद्धा नाम तुनामस्म ८1१२॥ मेषमधीस०६१९॥ छग्दो पितमुपेक्खा प७१२३॥ येये मतमताने'६।२७॥ इपिशिफमेने ९१३६ रति चित चेसिक १२. छपर निस्सिता कामे ३२९॥ इति कालिका धम्मा ८१॥ रासहि पथपभ्यास २११२॥ रायपुमनति०.१।२९३ इत्य विहाधिपुताने २॥ ३ छ हेतू पशमानंगा १२५ हरयं महागतं पुनः५३३nt एषानुसपा होम्ति ७.१५.. रनिधिध दिग्यसोते ९.२४ रस्सा-मरोर-कृषक २॥१७॥ भायमानादिरूपा पारिषितानि 1१८ मानंगयोगभेदेना द एकादसविध तस्मा11 पकुप्पावनिरोधी व 1200 हत्यावहाभिषामा तेचताळीस निस्पाय ३१२६ ॥ तेतिस पाके यतिम २१२४॥ तेरसम्मममाना घ .1८॥ तेसमेय च मूलानं ८ ॥१०॥ तेसै यितायियुत्तानं २॥९॥ तेसंवादस पाकानि ५। ३०॥ द दुक्खं तेम्मक पद ७ । ४३ ॥ प्रतिस सुपपुजम्दा ४॥ १५॥ द्वादसाकुसलानेयं १ । २८॥ हादसेकादस दस २॥ ३०॥ मारालंयनभेदेन ७॥ ४२ ॥ दासत्ततिविधा युत्ता ७॥१॥ न नयसतं चैकवीस ५ । १३ ॥ न विचन्तस्य पिरती २/२४ ॥ प पञ्चतिस चतुत्तिस २॥२२॥ पञ्चधा शानभेदेन १।२० पञ्चपञ्चास छसहि २११२॥ पञ्चयीस परितम्हि ३।२३॥ पञ्चुपादानयसन्धा ति ७1४२॥ पश्यत्ति नामरूपानं ८ ॥३७॥ पम्पत्ति भामरूपानि ८१२॥ पना पकाप्सिता सत्त० २११६॥ पनेमम व ५॥४१॥ । नाम ३।१२॥ ५.४१॥ पटिसधि भयंग य५११८॥ पदमचुतमञ्चन्त ६ ॥१॥ परिरछेदी पविश्यत्ति ६६. पत्तिसँगई माम ४५॥ पापाहेतुकमुत्तानि ११११ पुयुचना न लमन्ति५14 पुथुचनान सेक्सान ॥१५॥ म मायैतम्यं पनिधेयं ९॥ ४६॥ मूनप्पसादविसया ॥६॥ म मग्गयुत्ता फला चेय ७१४५ माग फलं च निप्यान ९/१६॥ य यया च पायचरं ११॥ यया युसानुसारेन २ ॥ १७ ॥ येस मेखतधम्मानं ८॥ ₹ रूपायपरचुतिया ५ ॥ ३९ ॥ रूपं च घेदना सध्या ७१४२॥ लोमो दोसो च मोहो प३1८॥ व यचीघोसानुसारेन ८॥३६॥ थिचिकिपछापिचिकि०२॥१४॥ चीपिचिप्क्षयने ५॥१॥ वीयिचित्तानि तीणेष ।।१२॥ पीयिचितानि सत्तेष ४।१०॥ यीसानुत्तरमुखम्मि ३ | २३ ॥ येदनामाणसंसार० १।१५॥ पेदनादेतुतो किष।१॥ AA संकप्पपस्सदिच पोतुपेक्षा सत्तश्यतुं परितानि ४॥२०॥ सत्तसिसविध पुभ्यं ॥३१॥ सत्तषोसत्यपुस्म्हि २११८॥ सत्त सम्परय पुनम्ति २॥९॥ सत्ताकुसलपाकानि ११०॥ सहो विकारो जरता ६॥२९॥ सम्बापुम्प्रेस बचारो २११४॥ सम्ये लोकुष्ठरे होम्ति ७॥३५॥ समयविपस्सनाने २०१॥ समुहेसा विभागा प६२॥ संपयुत्ता ययायोगै ३॥१॥ सम्मासति समाधीति ७१३३ सम्मासंयुद्धमतुलं ११॥ सहजात पुरेजात ८॥२८॥ साधारणा व पत्तारो २१२८॥ सुखमेकरय दुर्य च ३१॥ सुसं दुक्ष उपेवणाति ३१॥
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