Hindi Sahataya Samalayan

Shayam Bihari Vinod

PDF Proofread

Front matter

श्यामबिहारी बिनोद
र
এe ফাত্তিা যিঙ্গ হলি !
गङ्गलाचरण ।
बरवाछन्द।
-रो बिल बिनाक्ष श्री मला ईश।
श्यामबिहारी तुम कहँ नादत शोध ॥१॥
নাসিক স্থা।
যিনি জন্তু তাৰ খি ৰা ।
ताहि नायिका भाव कधि कानुदाय ॥२॥
तस्य मेट।
एक नायिका कवि कहने मांति ।
स्वक्षिया दुलिय परिकीया गविता ख्याति ॥३॥
स्वकिया सहा बा ।
मन बच क्रम पति सेवा और न कार कविस...
ताहि समीया बरले सनबराज
तक्य भेद ।
৪ জিবি জি কাৰ অতি ভাল ।
मुग्धा सध्या प्रौढ़ा रति परधान ॥ ५॥
मुग्धा लक्षा।
नई तरुनई आवै जा तिय अङ्ग ।
मुग्धा ताहि बखानहिं कवि रस रक्ष॥६॥

२ श्याम बिहारी बिनोद। तस्य भेद। कषि जन मुग्धाहूं कहँ त्रै बिधि कीन्ह । अज्ञातक अरु ज्ञात नवोढ़ा चीन्ह ॥७॥ অমন ল । निज योबन को आगम जो नहिं जान । अज्ञातक तेहि बरनै कबिकुल भान ॥८॥ ज्ञात लक्षण। निज योबन को आगम जाहि लखाय । ज्ञात योबना ताकह कह कबि राय ॥ नवोढ़ा लक्षण । अति भय अरु लज्जा ते रति नहि चाह । ताहि नवोढा भाऐं सुकवि सराह ॥१०॥ विश्रब्धनवाढ़ा लक्षण । जो पति की कछु धारै हिय परतीत । विश्रब्धनवोढ़ा कह करि प्रोत ॥११॥ मध्या लक्षगा। लाज मनोज बराबर जा तिय देह । कबि बरनै तेहि मध्या सहित सनेह ॥१२॥ प्रौढ़ा लक्षण। पूरन योबनवारी रति परवीन । श्यामबिहारी प्रौढ़ा तेहि कबि कीन ॥१३||

श्याम बिहारी बिनाद ।
३
तस्य भेद।
प्रोढान्तर रति प्रीता एक बखान ।
द्वितिय अनन्दसमोहा कहहिं सुजान १४॥
रतिप्रीता पानन्दसम्बोहा लक्षण ।
लक्ष बिशेषन यामह कबिगन कीन ।
नाम सरिसगुण याकह कहहिं प्रबीन ॥१५॥
धौराभधौरा भेद ।
धीरा और अधीरा धीराधीर ।
मध्या प्रौढ़ा अन्तर कह कवि बीर ॥१६॥
तस्य लक्षण ।
घीरा व्यंग सुनावै अब्यंग अधीर ।
व्यंगाव्यंग सुनावै धीराधीर ॥ १७ ॥
मध्या धौरा लक्षणा ।
बधन चतुरताई युत रिस प्रगटाय ।
मध्याधीरा ताकह कह कबिराय ॥८॥
मध्या अधौरा लक्षण ।
अरु कुबैन कहि अतिरिस प्रगटै जौन ।
मध्यभधीरा सब विधि जानहु तीन
॥१९॥
मध्या धौरा पधौरा लक्षण ।
अति रोदनयुक्त अतिरिस प्रगटै जौन ।
मध्या धीर अधीरा जानहु सौन ॥२॥

OC
श्याम बिहारी बिनाद ।
प्रौढ़ा धीरान्त क्षगा ।
कछुक क्षोप अरू चिन्ता देइ देखाई।
प्रौढा धोरा ताकह कह कबि राई ॥ २१ ॥
प्रोढा अधोका लक्षगा।
सुमन माल ते मारे पिय को जोय ।
प्रौढ़ अधीरा ताकह कह सब कोय ॥२॥
प्रौढ़। धौरा अधौरी लक्षण ।
रति उदास हूँ डर दिखरावै बाम ।
प्रौडा धीर अधीरा ताकर नाम ॥ २३ ।।
जेंटा कनिष्टा नक्षगा ।
जह नायक सों व्याही बाला होय ।
प्यार अधिक क्रम जेष्ट निष्टा साय||४||
पर किया स्क्षगा।
पर पुरुषहिसों प्रीति परिकिया सोय।
उढ़ा और अनूड़ा तामें दोय ॥ २५ ॥
उढ़ा अनूढ़ा लक्षगा ।
निज पति तजि पर चाहै उढ़ा बाम ।
अन ब्याही नर भजै अनूढा नाम ॥ २६ ॥
गुप्ता लक्षगा।
कियो करति औ करिहैं सुरति छपाय ।
ताहि बखान्यों
गुप्ता
कबि
समुदाय ॥२०॥

श्याम बिहारी बिनाद। ५ विदग्धा भेद। श्यामबिहादी बरनै द्विविधि बिदग्ध । वचन बिदग्धा औरहु कया विदग्ध स्वा बचन विदग्धा लक्षण । অম্বল বল জৰিকা লী জি কাজ। वचन बिदग्धा ताकह कह कबिराज ॥२॥ कृया विदग्धा लक्षा। कर कयासों सब विधि अपनों काम। कया विदग्धा ताकर कह कवि नाम || लक्षिता ल। पिय सो प्रेम सखिनको जानु लखाय । ताहि लक्षिता भाई कवि समुदाय ॥३१॥ कुलटा ल.॥ पुरुष अनेकन चाहै रति हित जोय । सा नायिका सवानिधि कुलटाहोय ॥३२॥ मुदिता ल० । चितचाही लखि मुदितहोत जो बाम । श्यामबिहारी मुदिता साकर नाम ॥३३॥ अनुमैं ना भेद। तीन भांति अनुसैना कबि गन दी। নাফা ল ন জ লাল ॥৪৪।

ध्याम बिहारी बिनाद ।
प्रथम अनुसैं ना ल.।
बिनसति ठौर सहेट दुखित जो होय ।
प्रथमभाति अनुसैना जालो होय ॥३५॥
द्वितीय अनुसैं ना ल ।
होनहार संकेतहि कह करु ख्याल ।
द्वितिय भांति अनुसैना साई बाल ॥३६॥
तृतीय अनुमैंना ल ।
रमन असन संकेतहि कहँ अनुमान ।
व्यथित सोय अनुसैंमा तीजी जान ||३n
गनिका लक्षण।
नृत्य गीत में चातुर धन सो प्रीत ।
श्यामबिहारी जानो गनिका रीत ॥३॥
अन्य संभोग दुक्लिता लक्षगा ।
पिय सों परतियरति सुनि अति दुख मान ।
अन्य संभोग दुक्खिता ताकह जान ॥९॥
रूपगबिता प्रेमगविता लक्षण ।
रूप प्रेम लहि जो सिय गर्बित होय ।
रूप गर्विता प्रेम गर्विता साय॥४॥
मानिनी लक्षा।
पिय
कुचाल
लखि जो तिय का हिसकाप ।
ताहि मानिनी भाईं कवि करि चोप ॥४॥

श्याम बिहारी बिनोद । ७ प्रोषितपतिका लक्षगा। पिय वियोग दुख ब्याकुल बाला होय । श्यामविहारी प्रोषित पतिजा साय ॥४|| खण्डिता लक्षण। पिय औरहि तिढिग बसि आवैप्रात । ताते व्यंग सुनावै खण्डित बात ॥ ४३ ॥ হ্মা লখিনা না । रिसकरि पियहि खीझावै पुनि पछिताय । कलहन्तरिता ताकह वाह कविराय ॥४॥ बिप्रलआ लक्षण । आय सहेटहि पिय नहिं पावै जोय। याते व्याकुल विन लब्धिका होय ॥४॥ ভৰিল ৰা হা হা। पिय नहिं आया छायो काने धाम । आगम परबै उक्ता ताकर नाम ॥६॥ बासकसज्जा लक्षगा। बात नियम हित साजै अपनो साज । बासकसज्जा ताकह कह कबिराज ||४॥ खाधिन पतिका लक्षण । जाका पति आधीन रहै सब जाम। ন্যানিশা লাল কা কাম লাল ।g

HTancer
श्याम बिहारी बिनोद ।
अभिसारिका लक्षण ।
बोलि पठावै कैतिय अपने जाय ।
अभिसारिका सुताकह कह शबिराय ॥४॥
प्रबत्यत्प्रेयसी लक्षण ।
जान चहत पति यह सुनि ब्याकुल होय ।
प्रबत्स्यत्प्रेयसी ताकह कह सब काय ॥५॥
उत्तमां, मध्यामां, अधमां ल.
अनहित में हित हित हित हित में मान ।
उत्तम मध्यम अधमां क्रम सों जान ॥५॥
रचना समय।
उनइस से उनतालिस अरु बुध बार।
बिरचेउ श्यामबिहारी मति अनुसार ॥२॥
--
पण्डित श्यामबिहारी कृत श्यामबिहारी विनोद
सम्पूर्ण ॥
दोहा-राधा राधारमण पद , को प्रीति युत ध्यान ।
श्यामबिहारी धन्य सो, सदा तालु कल्यान ॥१॥

है श्याम बिहारी बिनाद । पं० श्याम बिहारौ के पूर्व पुरुषों का वर्णन । । दाहा। . पण्डित श्रीधर मिश्र के , उपजे पुत्र अनेक । सकल बानयन में नसे , बचे मलूका एक ॥१॥ तिनको श्रीगुरु की कृपा, पूज्यो सब मन काम । एक पुत्त्र पायो सुमति , श्री परसादी नाम ॥२॥ श्री परसादी मिश्र के , नन्दराम मे बाल तिनके उपजे चारि सुत , जेठे रामदयाल ॥३॥ तिनके बेचन मिश्न भे , पितु सम नीतिनिधान । जनेश्वर तिनके तनय , जगह परम प्रधान ॥४॥ श्री केदार तिनके तनै , कबित मांश चित जासु । श्यामबिहारी मन्दमति, अहै एक सुत तासु ॥५॥ श्यामबिहारी बिनय से। पद। माते बहु नाते हरि तोते ॥ पतित पबित्र करत प्रपू तुम हम पापहि में दिन खोते ॥ दीनदयाल दयासागर हम दीन दुखी अति रोते ॥ सब प्रकार अधिकारी श्यामबिहारी खात क्यों गोते ।।१।। भजु मेरो मन नित ही राम राम ।।

१० श्याम बिहारी बिनाद । अशरन शरन हपन दूषनको सिद्ध करन सब मनको काम॥ श्यामबिहारी भक्त भयहारी अधम उधारी जासु नाम ॥२॥ श्यामबिहारी शतक से । दाहा। वह कबिता क्या चीज है, वह बनिता क्या चीज़ । श्यामबिहारी जो लखे , हियो न उठै पसीज़ ॥१॥ श्यामबिहारी वृत्तान्त से । ब्राह्मण कुल में जन्म है . श्यामबिहारी नाम । हरशंकरी महाल है , औ ग़ाज़ीपुर ग्राम ॥ १ ॥ श्याम बिहारी सिद्धान्त से, सवैया सबै भांति से श्यामबिहारी को मैं अरु श्यामबिहारी सबै हमरो ॥ तेहि ते उन्हई को प्रनाम करौं लखों प्रेम ते सांवरो रूप खरो ॥ सदा श्यामबिहारी जू श्यामबिहारी को नाम उच्चारत मोद भरो। हमें आपने काम ते काम अहै कुल के कुल नाम धरो तो धरो ॥१॥ मस्वर रूप अहै जग ज्यों तब कौन के हेत हिये पछ- ताय हैं। खाय हैं आनँद सों जो मिली अरु जाय, वापै जो नेह लगायहैं ॥ श्यामबिहारी को ध्यान हिये धरि श्यामबिहारीन नेक लजायहैं । ले घिसिरायहैं चाहै सबै चहै चार जना मिल कान्ह उठायहैं ।

श्याम बिहारी बिनोद। ११ भ्यामबिहारीको समस्या पूर्ति से। चिन्ता पिता ते बिशेष बढ़यो तन प्रान को दाहत है सगरो री॥ अन्न मिल ना कबौं भर पेट औ टिक्स में घरबार बिकोरी ॥ श्यामबिहारी हिरायो सबै सुख दुक्खहि को सरिता उमड़ोरी ॥ धन्य है भारत मेरो प्रभू इतने पै आनन्द है खेलत होरी ॥३॥ समेस्या पूर्ति । आनन्द रहैं सदा श्यामबिहारी ॥ मुदरिस रामखेलावन राम रचित । जौ लों रहैं मम मैं शुभचन्द सु जौ लों भस्यो रहै सिन्धु मैं बारी ॥ जो लों रहै अहि के महि शीश स जौ लों रहैं जग माहिं तमारी ॥ रामखेलावन राम को नाम जपै जब लो कटै पातक भारी ॥ श्यामबिहारी कपा ते अनन्दित तौलों रहें सदा श्यामबिहारी ।। ॐ * उक्त समस्याकी पूर्ति जो क्षबिजन करै वह पण्डित श्यामबिहारी के तथा हमारे पास भेज दें-संग्रहकर्ता । ।

१२ श्याम बिहारी बिनाद । ... ... ... श्यामबिहारीसरोज के सहायक । निम्नलिखिव महाशयों ने श्यामबिहारी सरोज हेत पण्डित श्यामबिहारी को ग्रंथ सहायता दियाहै जिसे हम प्रकाश करते हैं बाकी दूसरे ग्रंथ में देखियेगा ॥ = আনি অামা জাল २ ग्रंथ २ पं० अस्विकाप्रसाद मिश्र गाजीपुर २ ग्रंथ ३ बाबू उदितनारायनलाल वकील ग़ाज़ीपुर २ ग्रंथ ४ बाबू गुलाबराव बून्दी १ ग्रंथ ও অক্ষু হাসাবাদ গৰ १ ग्रंथ ६ बाबू गौरीशङ्करभट्ट सम्पादक महभास्कर कानपुर १ ग्रंथ ७ पंडिता चन्द्रकला बाई सून्दी ८ महाराज कुमार श्रीलाल ज्वालाप्रतापसिंह सिहरौली ५ ग्रंथ पं ज्वालाप्रसाद मिश्र मुरादाबाद ३ ग्रंथ २० पं० नकछेदी तिवारी डोनराव ११ बाबू बद्रीनारायण उपाध्या सम्पादक भानन्दकादम्बिनी निर्जापुर १२ गोल बावनाचार्य मिर्जापुर १३ पं० बिहारीलाल चौबे पटना ७ ग्रंथ १४ पं० मङ्गलदीन उपाध्या राजापुर बांदा १५ बा मोहनीलाल गुप्त काशी ... ... ... ... ... ३ ग्रंथ ... ३ ग्रंथ श्याम बिहारी बिनाद । १३ १६ पं० राधाबलम जी डोमरांव १७ बाबू शंकरदयाल भट्ट कानपुर १८ बाबू शिवप्रसाद जी दरभङ्गा १८ पं० सीताराम चुनार २० पं० सीताराम उपाध्या जौनपुर ४ ग्रंथ १ ग्रंथ २ ग्रंथ ११ ग्रंथ ६ ग्रंथ श्यामबिहारी सरोजकी पदय सूचना । श्री पण्डिता चन्द्रकला बाई बूंदी निवासिन कृत। दाहा। गाजीपुर में मिश्र हैं श्यामबिहारी लाल । ते हजार कबिजनन के खोजत चरित रशाल ॥१॥ तिनके जीवन चरित अरु रचना ग्रंथ प्रमान । पिता सहित कवि नाम पुनि जन्म समय परिमान ॥२॥ चौपाई। एकसहम कबिजनके सारा आवहिंगे ढिग चरित उदारा॥ तिनकी कवितालखि हितसाना। रचिहैं एकग्रंथ मतिमाना। * कानपुर बासी श्रीयुत बाबू गौरीशंकर भट्ट सम्पा- दक भहभास्कर के एक लेख का अनुबाद ॥

श्याम बिहारी बिनाद ।
ताते निजनिज ग्रंथबनाये। लिखितहोय अथवा छपवाये॥
पठवहुपंडितपास रशाला। रहिहहिंकीरतिअचल बिशाला।।
ग्रंथ न भेजसकहु जो कोई । भेजहु निजकबिता रस माई ॥
लिखीजाय सों ग्रंथमझारा । जिहिलखि हर्षित हुँ जनसारा
भाये पूरन होत हजारा । कछु कमहै अबलों निर्धारा !
शीघ्रलिखे ई हैं मनभावा । कियेबिलम्ब रहै पछितावा ॥
दाहा।
चन्द्रकला की आहि यह रंचना बिनय उदार ।
श्यामविहारी धन्य हैं पचत सुपर उपकार ॥शा
रामखेलावनराम मुर्रिस
म्यूनौसिपन्त फौ स्कूल
मियापुरा गाजीपुर

Shayam Bihari Vinod

Title
Shayam Bihari Vinod
File name
Shayam Bihari Vinod
Text
OCR done
Language
Sanskrit
Pages
14
Library
Hindi Sahataya Samalayan
Classification
Literature
DLI number
486472
Barcode
5990010113748.00
Scanning centre
IIIT, Allahabad
VMLT id
vdPnVY0GT43
Download PDF

Shayam Bihari Vinod